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KAUSHAMBI (27 Dec JNN): रोड एक्सीडेंट के शिकार हुए पत्रकार अमरेश मिश्र के परिजनों को सांत्वना देने मंत्री शिवपाल यादव शनिवार की शाम उनके घर पहुंचे। श्रद्धांजलि देने के बाद परिजनों को ढांढस बंधाया कि क्षेत्र का विकास उनके नाम पर कराया जाएगा। इसके बाद प्रतापगढ़ के डीएम व एसपी को निर्देश देते हुए कहाकि घटना की निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। इस मामले में तनिक भी ढिलाई नहीं होनी चाहिए। काबीना मंत्री शिवपाल यादव शनिवार की शाम करीब चार बजे हेलीकाप्टर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए। काबीना मंत्री शिवपाल यादव करीब चार बजे पत्रकार अमरेश मिश्र के घर दारानगर पहुंचे। उनके चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दिवंगत पत्रकार के पिता अवधनारायण मिश्र व भाई शैलेश मिश्र और बृजेश मिश्र से मिले। घटना के बारे में जानकारी ली। बृजेश मिश्र ने बताया कि अमरेश की मौत हादसे में होने की जानकारी उन्हें दी गई। मौका-ए-वारदात की स्थिति से उन्हें किसी साजिश की आशंका है। इस पर मंत्री ने प्रतापगढ़ के डीएम अमित त्रिपाठी और एसपी बलकरन सिंह को निर्देश दिया कि वह घटना की निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। इसके बाद कौशांबी के डीएम राजमणि यादव और एसपी रतनकांत पांडेय को निर्देश दिया कि वह क्षेत्र का खासकर दारानगर का विकास कराएं। यही पत्रकार को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर विधायक वाचस्पति, जिलाध्यक्ष अशोक यादव, कैलाश केशरवानी, अश्वनी सिंह, कासिम हुसैन, जैनुल आब्दीन, जयकरन सिंह, दयाशंकर सिंह, रमेश यादव, प्रबल प्रताप सिंह, गुड्डू सिंह, रमेश यादव, सुबेदार सिंह, अशर्फीलाल शास्त्री, अशोक , महेंद्र शुक्ला आदि लोग रहे। राज्य सभा सांसद प्रमोद तिवारी शनिवार की सुबह दारानगर पहुंचे। दिवंगत पत्रकार अमरेश मिश्र को श्रद्धांजलि दी और गमजदा परिजनों को सांत्वना दिया। इस मौके पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि पत्रकार अमरेश ने प्रतापगढ़ में कम समय में अपनी लेखनी की वजह से पहचान बनाई थी। बेबाक लेखन के लिए वह जाने जाते थे। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए उन्हें सदियों जाना जाएगा।
KAUSHAMBI : रोड एक्सीडेंट के शिकार हुए पत्रकार अमरेश मिश्र के परिजनों को सांत्वना देने मंत्री शिवपाल यादव शनिवार की शाम उनके घर पहुंचे। श्रद्धांजलि देने के बाद परिजनों को ढांढस बंधाया कि क्षेत्र का विकास उनके नाम पर कराया जाएगा। इसके बाद प्रतापगढ़ के डीएम व एसपी को निर्देश देते हुए कहाकि घटना की निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। इस मामले में तनिक भी ढिलाई नहीं होनी चाहिए। काबीना मंत्री शिवपाल यादव शनिवार की शाम करीब चार बजे हेलीकाप्टर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए। काबीना मंत्री शिवपाल यादव करीब चार बजे पत्रकार अमरेश मिश्र के घर दारानगर पहुंचे। उनके चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दिवंगत पत्रकार के पिता अवधनारायण मिश्र व भाई शैलेश मिश्र और बृजेश मिश्र से मिले। घटना के बारे में जानकारी ली। बृजेश मिश्र ने बताया कि अमरेश की मौत हादसे में होने की जानकारी उन्हें दी गई। मौका-ए-वारदात की स्थिति से उन्हें किसी साजिश की आशंका है। इस पर मंत्री ने प्रतापगढ़ के डीएम अमित त्रिपाठी और एसपी बलकरन सिंह को निर्देश दिया कि वह घटना की निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। इसके बाद कौशांबी के डीएम राजमणि यादव और एसपी रतनकांत पांडेय को निर्देश दिया कि वह क्षेत्र का खासकर दारानगर का विकास कराएं। यही पत्रकार को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर विधायक वाचस्पति, जिलाध्यक्ष अशोक यादव, कैलाश केशरवानी, अश्वनी सिंह, कासिम हुसैन, जैनुल आब्दीन, जयकरन सिंह, दयाशंकर सिंह, रमेश यादव, प्रबल प्रताप सिंह, गुड्डू सिंह, रमेश यादव, सुबेदार सिंह, अशर्फीलाल शास्त्री, अशोक , महेंद्र शुक्ला आदि लोग रहे। राज्य सभा सांसद प्रमोद तिवारी शनिवार की सुबह दारानगर पहुंचे। दिवंगत पत्रकार अमरेश मिश्र को श्रद्धांजलि दी और गमजदा परिजनों को सांत्वना दिया। इस मौके पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि पत्रकार अमरेश ने प्रतापगढ़ में कम समय में अपनी लेखनी की वजह से पहचान बनाई थी। बेबाक लेखन के लिए वह जाने जाते थे। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए उन्हें सदियों जाना जाएगा।
नये साहित्य का सौदम शास्त्र प्रगतिशील काव्य की दृष्टि के विरोध म, अथवा उसकी प्रतिकूल स्थिति म नयी काव्य प्रवत्ति म प्रक्ट स्व के महत्व को स्थापित करने के लिए रचना स्वामता को उठावर उभारदार बनाने के लिए जिससे कि अन्य जना का ध्यान उसकी स्वात्मकता पर खींचे रचना के विश्लेषण की ओर प्रगति हुई। वितु जाग चलकर ज्याही प्रगतिशील पटन और प्रवतिक्षीण होनर निराहित हान लगी रचना प्रक्रिया व वास्तविक विश्लेषण से विमुक्त होने लगी। यह विभुक्ता लाभार नही हानिसरह । उसका कारण है। रचना प्रतिया पर प्रकाश पडत ही हमार सामन कई समस्याएँ और बताय खड़े हो जाते हैं। कोई ववि अच्छा या बुरा नहीं होता यह पविया जकवि ही हो गवताह अर्थात् उसम चतना या जडता हो सकती है । एक विवस्वरूप और प्रवृत्ति स पूण जो चतना है वह दवि की चेतना इस बात को हम यो कहगे । बवि को मनोवज्ञानिव स्थिति और स्तर, जो उसकवाय प्रवदहोगह वसाह ? किस प्रकार वाह प्रभावगील काव्य मतेपन पर पाया कहिए कि सतही प्रगतिशीन काव्य पर विचार करत समय इस मनोवतातिय स्तर और स्थिति को देखा गया। आज भी रचना प्रया पर विचार करत समय हम न कविता र साहीपन परया या परिए किस नई बविता पर प्रकाश डालकर इस बात पर सोचना होगा कि क्या किया जाय निगम नई कविता जीवन व सुविस्तृत क्षत्र व विविध रंगा र दीपिक हारर एक जोर वत्रिका प्रतिनिधित्व पर सब सा दूसरी जार माता पर जोर भर रंग उमम थिन गर्ने । दूगरम प्रश्न यह है कि जो है उसका जनम मानकर उसका जाधुनिर वर चाहिए इसकी भावना का तिरस्कृत करें उस मम न मान दूर्ग गया हम नई कवि श्वस मानमिति थप विश्रण प्रतिाि-जोर उम बमा मनावानविनहीं? अथवा वहा प्रतिव्य) और व्यतित्वमा समिति अथवा रिंग र उस गनिनिहाना पा
नये साहित्य का सौदम शास्त्र प्रगतिशील काव्य की दृष्टि के विरोध म, अथवा उसकी प्रतिकूल स्थिति म नयी काव्य प्रवत्ति म प्रक्ट स्व के महत्व को स्थापित करने के लिए रचना स्वामता को उठावर उभारदार बनाने के लिए जिससे कि अन्य जना का ध्यान उसकी स्वात्मकता पर खींचे रचना के विश्लेषण की ओर प्रगति हुई। वितु जाग चलकर ज्याही प्रगतिशील पटन और प्रवतिक्षीण होनर निराहित हान लगी रचना प्रक्रिया व वास्तविक विश्लेषण से विमुक्त होने लगी। यह विभुक्ता लाभार नही हानिसरह । उसका कारण है। रचना प्रतिया पर प्रकाश पडत ही हमार सामन कई समस्याएँ और बताय खड़े हो जाते हैं। कोई ववि अच्छा या बुरा नहीं होता यह पविया जकवि ही हो गवताह अर्थात् उसम चतना या जडता हो सकती है । एक विवस्वरूप और प्रवृत्ति स पूण जो चतना है वह दवि की चेतना इस बात को हम यो कहगे । बवि को मनोवज्ञानिव स्थिति और स्तर, जो उसकवाय प्रवदहोगह वसाह ? किस प्रकार वाह प्रभावगील काव्य मतेपन पर पाया कहिए कि सतही प्रगतिशीन काव्य पर विचार करत समय इस मनोवतातिय स्तर और स्थिति को देखा गया। आज भी रचना प्रया पर विचार करत समय हम न कविता र साहीपन परया या परिए किस नई बविता पर प्रकाश डालकर इस बात पर सोचना होगा कि क्या किया जाय निगम नई कविता जीवन व सुविस्तृत क्षत्र व विविध रंगा र दीपिक हारर एक जोर वत्रिका प्रतिनिधित्व पर सब सा दूसरी जार माता पर जोर भर रंग उमम थिन गर्ने । दूगरम प्रश्न यह है कि जो है उसका जनम मानकर उसका जाधुनिर वर चाहिए इसकी भावना का तिरस्कृत करें उस मम न मान दूर्ग गया हम नई कवि श्वस मानमिति थप विश्रण प्रतिाि-जोर उम बमा मनावानविनहीं? अथवा वहा प्रतिव्य) और व्यतित्वमा समिति अथवा रिंग र उस गनिनिहाना पा
एक समय था जब लोग सिर्फ सिनेमा घरों में ही बड़े पर्दो पर चलते फिरते देखा करते थे. इसके बाद यह जादू दूरदर्शन के जरिए लोगों के घरो तक पहुंच गया. लोगो की हैसियत का पता उसके घरों के छत पर लगे 'एंटेना' से चलने लगा. शाम के वक्त 'एंटेना' की दिशा बदलना और चिल्लाकर पूछना 'आया' इस बात का संकेत होता था कि फलाने घर में टेलिविजन पर तस्वीर साफ नहीं आ रही है. ये बातें पुरानी जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों के जहन में आज भी ताजा हैं. देश में T.V का आना जितनी बड़ी खबर थी उतनी ही बड़ी खबर थी उसका रंगीन हो जाना. 25 अप्रैल 1982 ही वह दिन था जब दूरदर्शन श्वेत श्याम(ब्लैक एंड वाइट) से रंगीन हो गया. आइए जाने 25 अप्रैल को भारत और विश्व में क्या क्या महत्वपूर्ण घटनाएं घटी. यानी 25 अप्रैल को क्या क्या खास घटनाएं हुईं थीं जो इतिहास के पन्नो में हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो गई. आज के दिन किन किन महापुरुषों का जन्म हुआ था. आज के दिन किन महत्वपूर्ण वयक्तियों की मृत्यु हुई. और आज का दिन क्यों है खास. 25 अप्रैल का इतिहास (25 अप्रैल की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाये) - 1809- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और पंजाब के सिख शासक रणजीत सिंह के बीच अमृतसर संधि पर हस्ताक्षर किए गए. - 1867- जापान की राजधानी टोक्यो में विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई. - 1901 - ऑटोमोबाइल लाइसेंस प्लेटों की आवश्यकता के लिए न्यूयॉर्क पहला यू.एस. राज्य बन गया था. - 1905-दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को मताधिकार मिला। - 1915 - प्रथम विश्व युद्धः गैलीपोली की लड़ाई शुरू होती हैः ब्रिटिश, फ्रेंच, भारतीय, न्यूफाउंडलैंड, ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड सैनिकों द्वारा तुर्की गैलीपोली प्रायद्वीप पर आक्रमण, अंजाक कोव और केप हेलस में लैंडिंग के साथ शुरू किया. - 1938 - यू.एस. सुप्रीम कोर्ट ने एरी रेल रोड कंपनी वी. टॉमपकिन्स में अपनी राय प्रदान की थी. - 1940 - मेर्की, फरो आइलैंड्स का झंडा ब्रिटिश कब्जा सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था. - 1944 - यूनाइटेड नेग्रो कॉलेज फंड के स्थापना हुई थी. - 1945 - अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनः संयुक्त राष्ट्र के लिए स्थापित वार्ता सैन फ्रांसिस्को में शुरू हुई थी. - 1953 - फ्रांसिस क्रिक और जेम्स वाटसन ने आणविक संरचना का न्यूक्लिक एसिडः डी स्ट्रक्चर फॉर डीऑक्सीरिबोज न्यूक्लिक एसिड प्रकाशित किया था. - 1954 - बेल व्यावहारिक सौर सेल सार्वजनिक रूप से बेल टेलीफोन प्रयोगशालाओं द्वारा प्रदर्शित किया गया था. - 1957- सोडियम परमाणु रिएक्टर पहली बार संचालित किया गया। - 1960 - संयुक्त राज्य अमेरिका नेवी पनडुब्बी यूएसएस ट्राइटन ने दुनिया के पहले डूबे हुए सर्कविगेशन को पूरा किया था. - 1961 - रॉबर्ट नोयस को एक एकीकृत सर्किट के लिए पेटेंट दिया गया था. - 1981 - जापान के त्सुरुगा में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मरम्मत के दौरान 100 से अधिक श्रमिक विकिरण के संपर्क में आ गए थे. - 1982 - इजरायल ने शिविर डेविड समझौते के अनुसार सिनाई प्रायद्वीप से अपनी वापसी पूरी की थी. - 1983 - पायोनियर ने 10 प्लूटो की कक्षा से परे यात्रा की थी. - 1986 - मस्वाती III को स्वाजीलैंड के राजा का ताज पहनाया गया था. - 1982-दिल्ली में टेलिविजन पर पहली बार रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई। - 1983-जर्मनी की पत्रिका 'स्टर्न' ने हिटलर की उस विवादास्पद डायरी को छापना शुरू किया, जिसे उन्होंने कथित रूप से दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कलमबद्ध किया था। डायरी की प्रामाणिकता पर कई सवाल उठाए गए। - 1988 - इज़राइल में, जॉन डेमजजुक को द्वितीय विश्व युद्ध में किए गए युद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. - 1989: इथियोपिया में दिमागी बुखार से 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत। यह बीमारी सूडान तक फैली और वहां भी कम से कम 400 लोगों की मौत। - 2005 - 1937 में आक्रमणकारी इतालवी सेना द्वारा चुराए जाने के बाद एक्सम के ओबिलिस्क का अंतिम टुकड़ा इथियोपिया लौटा दिया गया था. - 2005 - बुल्गारिया और रोमानिया यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए प्रवेश समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे. - 2015 - नेपाल पर आये 7.8 तीव्रता वाले भूकंप में लगभग 9,100 लोग मारे गए थे. - 2015 - पुलिस हिरासत में फ्रेडी ग्रे की मौत के बाद बाल्टीमोर, मैरीलैंड में दंगे हो गए थे. 25 April को जन्मे प्रसिद्द व्यक्ति (25 April Famous People Birth) - 1977 - दक्षिण अफ्रीका के टेनिस खिलाड़ी जैफ कोएत्ज़ी का जन्म हुआ था. 25 April को हुए प्रसिद्द व्यक्तियों के निधन (Famous Persons Death on 25 April) - 2001 - जर्मनी में लॉज़िटिंग में ऑडी आर 8 का परीक्षण करते समय मिशेल अल्बोरेटो की मौत हो गई थी.
एक समय था जब लोग सिर्फ सिनेमा घरों में ही बड़े पर्दो पर चलते फिरते देखा करते थे. इसके बाद यह जादू दूरदर्शन के जरिए लोगों के घरो तक पहुंच गया. लोगो की हैसियत का पता उसके घरों के छत पर लगे 'एंटेना' से चलने लगा. शाम के वक्त 'एंटेना' की दिशा बदलना और चिल्लाकर पूछना 'आया' इस बात का संकेत होता था कि फलाने घर में टेलिविजन पर तस्वीर साफ नहीं आ रही है. ये बातें पुरानी जरूर हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों के जहन में आज भी ताजा हैं. देश में T.V का आना जितनी बड़ी खबर थी उतनी ही बड़ी खबर थी उसका रंगीन हो जाना. पच्चीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बयासी ही वह दिन था जब दूरदर्शन श्वेत श्याम से रंगीन हो गया. आइए जाने पच्चीस अप्रैल को भारत और विश्व में क्या क्या महत्वपूर्ण घटनाएं घटी. यानी पच्चीस अप्रैल को क्या क्या खास घटनाएं हुईं थीं जो इतिहास के पन्नो में हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो गई. आज के दिन किन किन महापुरुषों का जन्म हुआ था. आज के दिन किन महत्वपूर्ण वयक्तियों की मृत्यु हुई. और आज का दिन क्यों है खास. पच्चीस अप्रैल का इतिहास - एक हज़ार आठ सौ नौ- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और पंजाब के सिख शासक रणजीत सिंह के बीच अमृतसर संधि पर हस्ताक्षर किए गए. - एक हज़ार आठ सौ सरसठ- जापान की राजधानी टोक्यो में विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई. - एक हज़ार नौ सौ एक - ऑटोमोबाइल लाइसेंस प्लेटों की आवश्यकता के लिए न्यूयॉर्क पहला यू.एस. राज्य बन गया था. - एक हज़ार नौ सौ पाँच-दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को मताधिकार मिला। - एक हज़ार नौ सौ पंद्रह - प्रथम विश्व युद्धः गैलीपोली की लड़ाई शुरू होती हैः ब्रिटिश, फ्रेंच, भारतीय, न्यूफाउंडलैंड, ऑस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड सैनिकों द्वारा तुर्की गैलीपोली प्रायद्वीप पर आक्रमण, अंजाक कोव और केप हेलस में लैंडिंग के साथ शुरू किया. - एक हज़ार नौ सौ अड़तीस - यू.एस. सुप्रीम कोर्ट ने एरी रेल रोड कंपनी वी. टॉमपकिन्स में अपनी राय प्रदान की थी. - एक हज़ार नौ सौ चालीस - मेर्की, फरो आइलैंड्स का झंडा ब्रिटिश कब्जा सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था. - एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस - यूनाइटेड नेग्रो कॉलेज फंड के स्थापना हुई थी. - एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस - अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनः संयुक्त राष्ट्र के लिए स्थापित वार्ता सैन फ्रांसिस्को में शुरू हुई थी. - एक हज़ार नौ सौ तिरेपन - फ्रांसिस क्रिक और जेम्स वाटसन ने आणविक संरचना का न्यूक्लिक एसिडः डी स्ट्रक्चर फॉर डीऑक्सीरिबोज न्यूक्लिक एसिड प्रकाशित किया था. - एक हज़ार नौ सौ चौवन - बेल व्यावहारिक सौर सेल सार्वजनिक रूप से बेल टेलीफोन प्रयोगशालाओं द्वारा प्रदर्शित किया गया था. - एक हज़ार नौ सौ सत्तावन- सोडियम परमाणु रिएक्टर पहली बार संचालित किया गया। - एक हज़ार नौ सौ साठ - संयुक्त राज्य अमेरिका नेवी पनडुब्बी यूएसएस ट्राइटन ने दुनिया के पहले डूबे हुए सर्कविगेशन को पूरा किया था. - एक हज़ार नौ सौ इकसठ - रॉबर्ट नोयस को एक एकीकृत सर्किट के लिए पेटेंट दिया गया था. - एक हज़ार नौ सौ इक्यासी - जापान के त्सुरुगा में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मरम्मत के दौरान एक सौ से अधिक श्रमिक विकिरण के संपर्क में आ गए थे. - एक हज़ार नौ सौ बयासी - इजरायल ने शिविर डेविड समझौते के अनुसार सिनाई प्रायद्वीप से अपनी वापसी पूरी की थी. - एक हज़ार नौ सौ तिरासी - पायोनियर ने दस प्लूटो की कक्षा से परे यात्रा की थी. - एक हज़ार नौ सौ छियासी - मस्वाती III को स्वाजीलैंड के राजा का ताज पहनाया गया था. - एक हज़ार नौ सौ बयासी-दिल्ली में टेलिविजन पर पहली बार रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई। - एक हज़ार नौ सौ तिरासी-जर्मनी की पत्रिका 'स्टर्न' ने हिटलर की उस विवादास्पद डायरी को छापना शुरू किया, जिसे उन्होंने कथित रूप से दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कलमबद्ध किया था। डायरी की प्रामाणिकता पर कई सवाल उठाए गए। - एक हज़ार नौ सौ अठासी - इज़राइल में, जॉन डेमजजुक को द्वितीय विश्व युद्ध में किए गए युद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. - एक हज़ार नौ सौ नवासी: इथियोपिया में दिमागी बुखार से बीस हजार से ज्यादा लोगों की मौत। यह बीमारी सूडान तक फैली और वहां भी कम से कम चार सौ लोगों की मौत। - दो हज़ार पाँच - एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में आक्रमणकारी इतालवी सेना द्वारा चुराए जाने के बाद एक्सम के ओबिलिस्क का अंतिम टुकड़ा इथियोपिया लौटा दिया गया था. - दो हज़ार पाँच - बुल्गारिया और रोमानिया यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए प्रवेश समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे. - दो हज़ार पंद्रह - नेपाल पर आये सात.आठ तीव्रता वाले भूकंप में लगभग नौ,एक सौ लोग मारे गए थे. - दो हज़ार पंद्रह - पुलिस हिरासत में फ्रेडी ग्रे की मौत के बाद बाल्टीमोर, मैरीलैंड में दंगे हो गए थे. पच्चीस अप्रैलil को जन्मे प्रसिद्द व्यक्ति - एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर - दक्षिण अफ्रीका के टेनिस खिलाड़ी जैफ कोएत्ज़ी का जन्म हुआ था. पच्चीस अप्रैलil को हुए प्रसिद्द व्यक्तियों के निधन - दो हज़ार एक - जर्मनी में लॉज़िटिंग में ऑडी आर आठ का परीक्षण करते समय मिशेल अल्बोरेटो की मौत हो गई थी.
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा, आषाढ़ी, हरिशयनी एकादशी और देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। चातुर्मास भी इसी दिन से शुरू होता है। गणेश जी और श्री हरि सहित अन्य देवी-देवताओं की साधना करने वाले संन्यासियों को शास्त्रों का निर्देश है कि चातुर्मास के चार महीनों- आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक वे समाज को पुरुषार्थ चतुष्टय (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष) का ज्ञान प्रदान करें। प्राचीन काल से चल रही परंपरा का अनुकरण हमारे साधु-संत आज भी करते हैं। कलियुग में नाम चर्चा और नित्य नाम स्मरण सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने के साथ-साथ मोक्षदायक फल प्रदान करता है। इस एकादशी से ही जीवन के शुभ कर्म- यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षा-ग्रहण, यज्ञ, गृहप्रवेश आदि सभी स्थगित हो जाते हैं। देखा जाए तो इन चार महीनों में होने वाली बरसात के कारण शरीर कमजोर हो जाता है। मौसम को ध्यान में रख कर शरीर को अध्यात्म द्वारा संभालें, ऐसा निर्देश नारायण करते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि को शंखासुर दैत्य मारा गया था। तब नारायण ने चार मास तक क्षीर सागर में शयन किया। आज हरिशयनी एकादशी एवं चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। हरिशयनी एकादशी का व्रत महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करने वाला, सब पापों को हरने वाला है। चातुर्मास में भगवान विष्णु के सामने खड़े होकर पुरुष सूक्त का पाठ करने से बुद्धिशक्ति बढ़ती है। 15 जुलाई (आज से) से 10 नवम्बर तक चातुर्मास है। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन उपवास करके मनुष्य भक्तिपूर्वक चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ करे। एक हजार अश्वमेध यज्ञ करके मनुष्य जिस फल को पाता है, वही चातुर्मास्य व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त कर लेता है। इन चार महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग, पत्तल पर भोजन, उपवास, मौन, जप, ध्यान, स्नान, दान, पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं। व्रतों में सबसे उत्तम व्रत है - ब्रह्मचर्य का पालन। ब्रह्मचर्य तपस्या का सार है और महान फल देने वाला है। ब्रह्मचर्य से बढ़कर धर्म का उत्तम साधन दूसरा नहीं है। विशेषतः चतुर्मास में यह व्रत संसार में अधिक गुणकारक है। मनुष्य सदा प्रिय वस्तु की इच्छा करता है। जो चतुर्मास में अपने प्रिय भोगों का श्रद्धा एवं प्रयत्नपूर्वक त्याग करता है, उसकी त्यागी हुई वे वस्तुएँ उसे अक्षय रूप में प्राप्त होती हैं। चतुर्मास में गुड़ का त्याग करने से मनुष्य को मधुरता की प्राप्ति होती है। ताम्बूल का त्याग करने से मनुष्य भोग-सामग्री से सम्पन्न होता है और उसका कंठ सुरीला होता है। दही छोड़ने वाले मनुष्य को गोलोक मिलता है। नमक छोड़ने वाले के सभी पूर्तकर्म (परोपकार एवं धर्म सम्बन्धी कार्य) सफल होते हैं। जो मौनव्रत धारण करता है उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करता। चतुर्मास में काले एवं नीले रंग के वस्त्र त्याग देने चाहिए। नीले वस्त्र को देखने से जो दोष लगता है उसकी शुद्धि भगवान सूर्यनारायण के दर्शन से होती है। कुसुम्भ (लाल) रंग व केसर का भी त्याग कर देना चाहिए। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि के योगनिद्रा में प्रवृत्त हो जाने पर मनुष्य चार मास अर्थात् कार्तिक की पूर्णिमा तक भूमि पर शयन करे। ऐसा करने वाला मनुष्य बहुत से धन से युक्त होता और विमान प्राप्त करता है, बिना माँगे स्वतः प्राप्त हुए अन्न का भोजन करने से बावली और कुआँ बनवाने का फल प्राप्त होता है। जो भगवान जनार्दन के शयन करने पर शहद का सेवन करता है, उसे महान पाप लगता है। चतुर्मास में अनार, नींबू, नारियल तथा मिर्च, उड़द और चने का भी त्याग करे। जो प्राणियों की हिंसा त्याग कर द्रोह छोड़ देता है, वह भी पूर्वोक्त पुण्य का भागी होता है। चातुर्मास्य में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करे। परनिंदा को सुनने वाला भी पापी होता है। परनिंदा महापापं परनिंदा महाभयं। परनिंदा महद् दुःखं न तस्याः पातकं परम्। । 'परनिंदा महान पाप है, परनिंदा महान भय है, परनिंदा महान दुःख है और पर निंदा से बढ़कर दूसरा कोई पातक नहीं है। ' (स्कन्दपुराण)
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा, आषाढ़ी, हरिशयनी एकादशी और देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। चातुर्मास भी इसी दिन से शुरू होता है। गणेश जी और श्री हरि सहित अन्य देवी-देवताओं की साधना करने वाले संन्यासियों को शास्त्रों का निर्देश है कि चातुर्मास के चार महीनों- आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक वे समाज को पुरुषार्थ चतुष्टय का ज्ञान प्रदान करें। प्राचीन काल से चल रही परंपरा का अनुकरण हमारे साधु-संत आज भी करते हैं। कलियुग में नाम चर्चा और नित्य नाम स्मरण सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने के साथ-साथ मोक्षदायक फल प्रदान करता है। इस एकादशी से ही जीवन के शुभ कर्म- यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षा-ग्रहण, यज्ञ, गृहप्रवेश आदि सभी स्थगित हो जाते हैं। देखा जाए तो इन चार महीनों में होने वाली बरसात के कारण शरीर कमजोर हो जाता है। मौसम को ध्यान में रख कर शरीर को अध्यात्म द्वारा संभालें, ऐसा निर्देश नारायण करते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि को शंखासुर दैत्य मारा गया था। तब नारायण ने चार मास तक क्षीर सागर में शयन किया। आज हरिशयनी एकादशी एवं चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। हरिशयनी एकादशी का व्रत महान पुण्यमय, स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करने वाला, सब पापों को हरने वाला है। चातुर्मास में भगवान विष्णु के सामने खड़े होकर पुरुष सूक्त का पाठ करने से बुद्धिशक्ति बढ़ती है। पंद्रह जुलाई से दस नवम्बर तक चातुर्मास है। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन उपवास करके मनुष्य भक्तिपूर्वक चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ करे। एक हजार अश्वमेध यज्ञ करके मनुष्य जिस फल को पाता है, वही चातुर्मास्य व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त कर लेता है। इन चार महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग, पत्तल पर भोजन, उपवास, मौन, जप, ध्यान, स्नान, दान, पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं। व्रतों में सबसे उत्तम व्रत है - ब्रह्मचर्य का पालन। ब्रह्मचर्य तपस्या का सार है और महान फल देने वाला है। ब्रह्मचर्य से बढ़कर धर्म का उत्तम साधन दूसरा नहीं है। विशेषतः चतुर्मास में यह व्रत संसार में अधिक गुणकारक है। मनुष्य सदा प्रिय वस्तु की इच्छा करता है। जो चतुर्मास में अपने प्रिय भोगों का श्रद्धा एवं प्रयत्नपूर्वक त्याग करता है, उसकी त्यागी हुई वे वस्तुएँ उसे अक्षय रूप में प्राप्त होती हैं। चतुर्मास में गुड़ का त्याग करने से मनुष्य को मधुरता की प्राप्ति होती है। ताम्बूल का त्याग करने से मनुष्य भोग-सामग्री से सम्पन्न होता है और उसका कंठ सुरीला होता है। दही छोड़ने वाले मनुष्य को गोलोक मिलता है। नमक छोड़ने वाले के सभी पूर्तकर्म सफल होते हैं। जो मौनव्रत धारण करता है उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करता। चतुर्मास में काले एवं नीले रंग के वस्त्र त्याग देने चाहिए। नीले वस्त्र को देखने से जो दोष लगता है उसकी शुद्धि भगवान सूर्यनारायण के दर्शन से होती है। कुसुम्भ रंग व केसर का भी त्याग कर देना चाहिए। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि के योगनिद्रा में प्रवृत्त हो जाने पर मनुष्य चार मास अर्थात् कार्तिक की पूर्णिमा तक भूमि पर शयन करे। ऐसा करने वाला मनुष्य बहुत से धन से युक्त होता और विमान प्राप्त करता है, बिना माँगे स्वतः प्राप्त हुए अन्न का भोजन करने से बावली और कुआँ बनवाने का फल प्राप्त होता है। जो भगवान जनार्दन के शयन करने पर शहद का सेवन करता है, उसे महान पाप लगता है। चतुर्मास में अनार, नींबू, नारियल तथा मिर्च, उड़द और चने का भी त्याग करे। जो प्राणियों की हिंसा त्याग कर द्रोह छोड़ देता है, वह भी पूर्वोक्त पुण्य का भागी होता है। चातुर्मास्य में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करे। परनिंदा को सुनने वाला भी पापी होता है। परनिंदा महापापं परनिंदा महाभयं। परनिंदा महद् दुःखं न तस्याः पातकं परम्। । 'परनिंदा महान पाप है, परनिंदा महान भय है, परनिंदा महान दुःख है और पर निंदा से बढ़कर दूसरा कोई पातक नहीं है। '
कलाहस्ती (आंध्र प्रदेश) । फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी ने अपनी बड़ी बेटी जाह्न्वी कपूर के लिए श्री कलाहस्ती मंदिर में विशेष पूजा की। मंदिर के एक सूत्र ने बताया कि श्रीदेवी ने यहां जाह्न्वी के लिए 'सप दोष' पूजा करवाई। माना जाता है कि 'सर्प दोष' व्यक्ति के स्वास्थ्य और समृद्धि को प्रभावित करता है। सूत्र ने बताया, "श्रीदेवी और जाह्न्वी दोनों पूजा में उपस्थित थे। पूजा 45 मिनट तक चली। हर साल हजारों की संख्या में लोग पूजा करने कलाहस्ती मंदिर आते हैं।" श्रीदेवी अपनी अगली तमिल फिल्म 'पुलि' के लिए पिछले सप्ताह कलाहस्ती मंदिर से कुछ ही दूरी पर शूटिंग कर रही थीं। शूटिंग से फारिग होते ही उन्होंने बेटी के साथ पूजा के लिए मंदिर जाने का फैसला किया। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
कलाहस्ती । फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी ने अपनी बड़ी बेटी जाह्न्वी कपूर के लिए श्री कलाहस्ती मंदिर में विशेष पूजा की। मंदिर के एक सूत्र ने बताया कि श्रीदेवी ने यहां जाह्न्वी के लिए 'सप दोष' पूजा करवाई। माना जाता है कि 'सर्प दोष' व्यक्ति के स्वास्थ्य और समृद्धि को प्रभावित करता है। सूत्र ने बताया, "श्रीदेवी और जाह्न्वी दोनों पूजा में उपस्थित थे। पूजा पैंतालीस मिनट तक चली। हर साल हजारों की संख्या में लोग पूजा करने कलाहस्ती मंदिर आते हैं।" श्रीदेवी अपनी अगली तमिल फिल्म 'पुलि' के लिए पिछले सप्ताह कलाहस्ती मंदिर से कुछ ही दूरी पर शूटिंग कर रही थीं। शूटिंग से फारिग होते ही उन्होंने बेटी के साथ पूजा के लिए मंदिर जाने का फैसला किया। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा इन दिनों अपनी वेब सीरीज 'कैट' को लेकर सुर्खियों में हैं। इस सीरीज के जरिए रणदीप ने डिजिटल डेब्यू किया है। कैट पहली पंजाबी वेब सीरीज है जिसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया है। रणदीप हुड्डा की इस वेब सीरीज को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी बीच वेब सीरीज कैट से खुश होकर रणदीप के बेस्ट फ्रेंड पंजाबी सिंगर मीका सिंह ने उन्हें बेहद खास तोहफा दिया है। मीका सिंह ने रणदीप हुड्डा को बुलेट बाइट गिफ्ट की है। तस्वीरों में मीका अपने दोस्त को फौजी कलर की बुलेट बाइक तोहफे में देते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं मीका सिंह ने वेब सीरीज कैट की सफलता के लिए अपनी ओर से एक खास पार्टी भी रखी। बता दें कि वेब सीरीज 9 दिसंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। इस सीरीज में रणदीप हुड्डा के साथ सुरेंद्र विक्की, हसलीन कौर और दक्ष अजीत सिंह मुख्य भूमिका में हैं। यह एक राजनीतिक क्राइम थ्रिलर है, जिसमें रणदीप हुड्डा ने पुलिस के जासूस की भूमिका अदा की है।
बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा इन दिनों अपनी वेब सीरीज 'कैट' को लेकर सुर्खियों में हैं। इस सीरीज के जरिए रणदीप ने डिजिटल डेब्यू किया है। कैट पहली पंजाबी वेब सीरीज है जिसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया है। रणदीप हुड्डा की इस वेब सीरीज को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी बीच वेब सीरीज कैट से खुश होकर रणदीप के बेस्ट फ्रेंड पंजाबी सिंगर मीका सिंह ने उन्हें बेहद खास तोहफा दिया है। मीका सिंह ने रणदीप हुड्डा को बुलेट बाइट गिफ्ट की है। तस्वीरों में मीका अपने दोस्त को फौजी कलर की बुलेट बाइक तोहफे में देते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं मीका सिंह ने वेब सीरीज कैट की सफलता के लिए अपनी ओर से एक खास पार्टी भी रखी। बता दें कि वेब सीरीज नौ दिसंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। इस सीरीज में रणदीप हुड्डा के साथ सुरेंद्र विक्की, हसलीन कौर और दक्ष अजीत सिंह मुख्य भूमिका में हैं। यह एक राजनीतिक क्राइम थ्रिलर है, जिसमें रणदीप हुड्डा ने पुलिस के जासूस की भूमिका अदा की है।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में थाने में खड़ी पुलिसकर्मियों की बाइक और कार में आग लगा दी गई थी। अब इसको लेकर पुलिस महकमे में ही विवाद हो गया है। हेडकांस्टेबल ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उन्हें SDOP चंचल तिवारी ने छोड़ दिया। इसके बाद हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी का दर्द छलक उठा। उन्होंने रोते हुए कहा कि मैडम उनसे ज्यादा पैसे मैं दूंगा, उन्हें मत छोड़िए। इसके बाद SP टीआर कोशिमा ने हेड कांस्टेबल को लाइन अटैच कर दिया है। वहीं, मामले की जांच एडिशनल SP को सौंप दी है। लखनपुर थाना क्षेत्र के कुन्नी चौकी में 3 दिन पहले वहां खड़े पुलिसकर्मियों के वाहनों में किसी ने आग लगा दी थी। इस मामले में हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी ने नामजद शिकायत की थी। वहीं, अगले दिन 5 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। उन्हें पकड़ कर चौकी लाया गया, लेकिन पूछताछ के बाद SDOP चंचल तिवारी ने सभी को छोड़ दिया था। उन्होंने बताया था कि आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिसके कारण उन्हें गांव के गणमान्य लोगों के सामने जाने दिया गया है। इस पूरे मामले के बाद अब हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी का करीब 7. 30 मिनट का वीडियो वायरल है। इसमें मनीष बता रहे हैं कि घटनास्थल से एक चप्पल मिली थी। जांच के लिए डॉग स्क्वॉयड आया और आरोपी के घर तक गया। उन्होंने कहा कि कुत्ते और उसके ट्रेनर को तो मैंने नहीं सिखाया था। डॉग स्क्वॉयड वहां तक गया था। कहा कि अवैध निर्माण के दौरान कार्रवाई करने पर आरोपियों ने उनसे बदला लिया है। उनकी गाड़ी को जानकर जलाया गया। पूरा वीडियो आरोपियों को छोड़ देने के बाद अगले दिन का ही लग रहा है। इसे बनाने वाला उनसे सवाल भी पूछ रहा है। इस पर हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी कह रह रहे हैं कि मैडम ने उचित कार्रवाई नहीं की है। किसी दुष्कर्म के आरोपी को मैडम कैसे पकड़ लेती हैं। वहां तो कोई गवाह भी नहीं होता। फिर इनको क्यों छोड़ दिया। साथ ही कह रहे हैं कि सरकारी नौकरी वाला हूं, उनसे ज्यादा पैसे दे दूंगा। गाड़ी के लिए एक-एक रुपए इकठ्ठा किया था। आपको मेरी बद्दुआ लगेगी, पाप लगेगा। लखनपुर थाना क्षेत्र के कुन्नी पुलिस चौकी में पदस्थ पुलिसकर्मियों की कार और बाइक खड़ी थी। इसी दौरान 21 मई की देर रात करीब 12 से 1 के बीच किसी ने केरोसिन से भीगा बोरा उसके ऊपर डालकर आग लगा दी। गाड़ियों के टायर फटने की आवाज आई तो पुलिसकर्मी बाहर आए। वहां कोई नहीं था। आग लगी देख उन्होंने बुझाने का प्रयास किया, पर सफलता नहीं मिली। जब तक उस पर काबू किया जाता दोनों वाहन जलकर राख हो चुके थे। जांच के लिए 3 सदस्य टीम बनाई गई है। इसमें TI SI और ASI शामिल हैं। डॉग स्क्वायड की जांच के दौरान कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। घटना के दिन 5 संदेहियों में से दो अपनी पत्नियों के साथ विवाह कार्यक्रम में थे। आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। कानून भी कहता है कि चार दोषी भले छूट जाएं, एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। हेड कांस्टेबल ने जो आरोप लगाए हैं वह गंभीर हैं। मामले की जांच एडिशनल SP सुनील शर्मा को सौंप दी गई है। वहीं पुलिस कांस्टेबल को जांच होने तक लाइन अटैच कर दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में थाने में खड़ी पुलिसकर्मियों की बाइक और कार में आग लगा दी गई थी। अब इसको लेकर पुलिस महकमे में ही विवाद हो गया है। हेडकांस्टेबल ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उन्हें SDOP चंचल तिवारी ने छोड़ दिया। इसके बाद हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी का दर्द छलक उठा। उन्होंने रोते हुए कहा कि मैडम उनसे ज्यादा पैसे मैं दूंगा, उन्हें मत छोड़िए। इसके बाद SP टीआर कोशिमा ने हेड कांस्टेबल को लाइन अटैच कर दिया है। वहीं, मामले की जांच एडिशनल SP को सौंप दी है। लखनपुर थाना क्षेत्र के कुन्नी चौकी में तीन दिन पहले वहां खड़े पुलिसकर्मियों के वाहनों में किसी ने आग लगा दी थी। इस मामले में हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी ने नामजद शिकायत की थी। वहीं, अगले दिन पाँच आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। उन्हें पकड़ कर चौकी लाया गया, लेकिन पूछताछ के बाद SDOP चंचल तिवारी ने सभी को छोड़ दिया था। उन्होंने बताया था कि आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिसके कारण उन्हें गांव के गणमान्य लोगों के सामने जाने दिया गया है। इस पूरे मामले के बाद अब हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी का करीब सात. तीस मिनट का वीडियो वायरल है। इसमें मनीष बता रहे हैं कि घटनास्थल से एक चप्पल मिली थी। जांच के लिए डॉग स्क्वॉयड आया और आरोपी के घर तक गया। उन्होंने कहा कि कुत्ते और उसके ट्रेनर को तो मैंने नहीं सिखाया था। डॉग स्क्वॉयड वहां तक गया था। कहा कि अवैध निर्माण के दौरान कार्रवाई करने पर आरोपियों ने उनसे बदला लिया है। उनकी गाड़ी को जानकर जलाया गया। पूरा वीडियो आरोपियों को छोड़ देने के बाद अगले दिन का ही लग रहा है। इसे बनाने वाला उनसे सवाल भी पूछ रहा है। इस पर हेड कांस्टेबल मनीष तिवारी कह रह रहे हैं कि मैडम ने उचित कार्रवाई नहीं की है। किसी दुष्कर्म के आरोपी को मैडम कैसे पकड़ लेती हैं। वहां तो कोई गवाह भी नहीं होता। फिर इनको क्यों छोड़ दिया। साथ ही कह रहे हैं कि सरकारी नौकरी वाला हूं, उनसे ज्यादा पैसे दे दूंगा। गाड़ी के लिए एक-एक रुपए इकठ्ठा किया था। आपको मेरी बद्दुआ लगेगी, पाप लगेगा। लखनपुर थाना क्षेत्र के कुन्नी पुलिस चौकी में पदस्थ पुलिसकर्मियों की कार और बाइक खड़ी थी। इसी दौरान इक्कीस मई की देर रात करीब बारह से एक के बीच किसी ने केरोसिन से भीगा बोरा उसके ऊपर डालकर आग लगा दी। गाड़ियों के टायर फटने की आवाज आई तो पुलिसकर्मी बाहर आए। वहां कोई नहीं था। आग लगी देख उन्होंने बुझाने का प्रयास किया, पर सफलता नहीं मिली। जब तक उस पर काबू किया जाता दोनों वाहन जलकर राख हो चुके थे। जांच के लिए तीन सदस्य टीम बनाई गई है। इसमें TI SI और ASI शामिल हैं। डॉग स्क्वायड की जांच के दौरान कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। घटना के दिन पाँच संदेहियों में से दो अपनी पत्नियों के साथ विवाह कार्यक्रम में थे। आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। कानून भी कहता है कि चार दोषी भले छूट जाएं, एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। हेड कांस्टेबल ने जो आरोप लगाए हैं वह गंभीर हैं। मामले की जांच एडिशनल SP सुनील शर्मा को सौंप दी गई है। वहीं पुलिस कांस्टेबल को जांच होने तक लाइन अटैच कर दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुंबईः मायानगरी मुंबई के अंधेरी में एक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दो मरीजों के शव कई घंटों तक ऐसे ही पड़े रहे, कोई इनकी सुध लेने नहीं आया। सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि वार्ड में अन्य मरीज भी थे और एक शव तो लगभग 20 घंटे से वार्ड में ही पड़ा था। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारी संक्रमित हो जाने के भय से शवों को छूने से डर रहे थे। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आखिरकार गुरुवार को चार बजे के लगभग दोनों शव उनके परिजनों के हवाले कर दिए। घटना डॉ. आरएन कूपर म्यूनिसिपल जनरल अस्पताल की है। सूत्रों ने बताया है कि इनमें से एक शव लगभग 20 घंटे से अस्पताल में था तो दूसरा लगभग 10 घंटे से, इस दौरान इन शवों के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। अस्पताल प्रशासन ने दावा कि यह कि यह देर इस कारण हुई क्योंकि दोनों शव कोरोना संदिग्ध मरीजों के थे और अस्पताल के कर्मी संक्रमण फैलने के भय से उन्हें हाथ नहीं लगाना चाहते थे। अस्पताल के डीन डॉ. पिनाकिन गुज्जर ने बताया कि, कोरोना मरीजों के शवों को सही तरीके से लपेटना होता है, जिसे एक अकेला शख्स नहीं कर सकता। उन्होंने साफ़ किया कि अस्पताल में सुरक्षा उपकरणों या शवों को लपेटने के सामान की कमी नहीं है। आपको बता दें कि मुंबई में अभी तक कोरोना संक्रमण के 4,232 मामले आ चुके हैं। वहीं, इस जानलेवा वायरस के कारण मुंबई में अब तक 168 लोगों की जान जा चुकी है।
मुंबईः मायानगरी मुंबई के अंधेरी में एक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दो मरीजों के शव कई घंटों तक ऐसे ही पड़े रहे, कोई इनकी सुध लेने नहीं आया। सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि वार्ड में अन्य मरीज भी थे और एक शव तो लगभग बीस घंटाटे से वार्ड में ही पड़ा था। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के कर्मचारी संक्रमित हो जाने के भय से शवों को छूने से डर रहे थे। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आखिरकार गुरुवार को चार बजे के लगभग दोनों शव उनके परिजनों के हवाले कर दिए। घटना डॉ. आरएन कूपर म्यूनिसिपल जनरल अस्पताल की है। सूत्रों ने बताया है कि इनमें से एक शव लगभग बीस घंटाटे से अस्पताल में था तो दूसरा लगभग दस घंटाटे से, इस दौरान इन शवों के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। अस्पताल प्रशासन ने दावा कि यह कि यह देर इस कारण हुई क्योंकि दोनों शव कोरोना संदिग्ध मरीजों के थे और अस्पताल के कर्मी संक्रमण फैलने के भय से उन्हें हाथ नहीं लगाना चाहते थे। अस्पताल के डीन डॉ. पिनाकिन गुज्जर ने बताया कि, कोरोना मरीजों के शवों को सही तरीके से लपेटना होता है, जिसे एक अकेला शख्स नहीं कर सकता। उन्होंने साफ़ किया कि अस्पताल में सुरक्षा उपकरणों या शवों को लपेटने के सामान की कमी नहीं है। आपको बता दें कि मुंबई में अभी तक कोरोना संक्रमण के चार,दो सौ बत्तीस मामले आ चुके हैं। वहीं, इस जानलेवा वायरस के कारण मुंबई में अब तक एक सौ अड़सठ लोगों की जान जा चुकी है।
जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर (Jabalpur) में रोशनी के महापर्व दीपावली के पहले बिजली विभाग के कर्मचारियों ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कई सालों तक सरकार की सेवा करने के बाद भी बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। चुनाव के पहले सरकार ने इनके नियमितीकरण से लेकर संविलियन का वादा किया था बावजूद इसके न तो सरकार अपने वादे को पूरा कर पा रही है और न ही इनकी मांगों पर गौर किया जा रहा है। बता दें कि प्रदेश सरकार और बिजली कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुक्रवार को तीखे तेवर दिखाए। सैकड़ों की तादाद में एकजुट हुए कर्मचारियों और अधिकारियों ने बिजली मुख्यालय के सामने उग्र प्रदर्शन करते हुए सरकार और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की बिजली महकमे में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है यही वजह है कि चुनाव के पहले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और आउटसोर्स कर्मचारियों का संविलियन करने की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक उनकी मांगों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार पर शोषण का आरोप लगाते हुए बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि अगर जल्द से जल्द उनकी मांगों पर गौर कर उन्हें उनका हक नहीं दिया गया तो वे अपने आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। रोशनी के महापर्व दीपावली के पहले बिजली विभाग के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों और अधिकारियों के उग्र तेवरों ने बिजली कंपनियों के अधिकारियों को भी परेशानी में डाल दिया है। दरअसल दीपावली के मौके पर बिजली की सबसे ज्यादा मांग होती है और इस दौरान बिजली कर्मचारियों की नाराजगी त्योहार का रंग फीका कर सकती है।
जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर में रोशनी के महापर्व दीपावली के पहले बिजली विभाग के कर्मचारियों ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कई सालों तक सरकार की सेवा करने के बाद भी बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। चुनाव के पहले सरकार ने इनके नियमितीकरण से लेकर संविलियन का वादा किया था बावजूद इसके न तो सरकार अपने वादे को पूरा कर पा रही है और न ही इनकी मांगों पर गौर किया जा रहा है। बता दें कि प्रदेश सरकार और बिजली कंपनियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुक्रवार को तीखे तेवर दिखाए। सैकड़ों की तादाद में एकजुट हुए कर्मचारियों और अधिकारियों ने बिजली मुख्यालय के सामने उग्र प्रदर्शन करते हुए सरकार और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की बिजली महकमे में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है यही वजह है कि चुनाव के पहले संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और आउटसोर्स कर्मचारियों का संविलियन करने की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक उनकी मांगों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार पर शोषण का आरोप लगाते हुए बिजली महकमे के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि अगर जल्द से जल्द उनकी मांगों पर गौर कर उन्हें उनका हक नहीं दिया गया तो वे अपने आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। रोशनी के महापर्व दीपावली के पहले बिजली विभाग के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों और अधिकारियों के उग्र तेवरों ने बिजली कंपनियों के अधिकारियों को भी परेशानी में डाल दिया है। दरअसल दीपावली के मौके पर बिजली की सबसे ज्यादा मांग होती है और इस दौरान बिजली कर्मचारियों की नाराजगी त्योहार का रंग फीका कर सकती है।
बाहरी दिल्ली के बवाना इलाके एक मामूली सी बात बढ़कर बतंगड़ बन गई और रोडरेज की वारदात सामने आई. एक शख्स ने दो सगे भाइयों को गोली मार दी, जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. स्कोडा सवार वो शख्स तो वहां से फरार होने में कामयाब रहा जिसने दोनों को गोली मारी थी, लेकिन मौत के बाद गांव के अस्पताल के बाहर लोगों ने जमकर हंगामा किया. बताया जा रहा है कि आरोपी गांव का ही एक बदमाश है. नाराज लोगों ने ना सिर्फ दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की बल्कि सड़क भी जाम कर दी. वारदात शुक्रवार की सुबह सुल्तानपुर डबास इलाके में हुई. गुस्साये लोगों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से ही वो स्कोडा वाला बड़ी आसानी से दोनों भाइयों को गोली मारकर वहां से भाग खड़ा हुआ और पुलिस ने हरकत करने में ढिलाई दिखाई. बताया यही जा रहा है कि DL1CP1772 नंबर की एक स्कोडा कार जिस रास्ते से निकल रही थी, वहीं एक टेम्पो ट्रैवलर चलाने वाले ड्राइवर ने अपना टेम्पो बीच सड़क पर खड़ा कर दिया था. तभी स्कोडा वाले ने उससे पास मांगा. बताया जा रहा है कि इसी बात पर दोनों के बीच बहस हुई और स्कोडा वाले ने गन निकालकर उसे गोली मार दी. शोर सुनकर जैसे ही ड्राइवर का भाई वहां पहुंचा तो उसे भी गोली मार कर स्कोडा सवार वहां से फरार हो गया. इस वारदात के बाद से ही इलाके के लोग हंगामा पर उतारू हैं और पुलिस की ईंट से ईंट बजाने पर आमादा हैं. आरोप यही है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से ही इस वारदात के बाद आरोपी भागने में कामयाब हो गया. इस वारदात ने उन लोगों के दिलों में डर जरूर पैदा कर दिया है जो सड़कों पर निकलते हैं क्योंकि पता नहीं किस मोड़ पर किसके गुस्से की इंतेहा हो जाए.
बाहरी दिल्ली के बवाना इलाके एक मामूली सी बात बढ़कर बतंगड़ बन गई और रोडरेज की वारदात सामने आई. एक शख्स ने दो सगे भाइयों को गोली मार दी, जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. स्कोडा सवार वो शख्स तो वहां से फरार होने में कामयाब रहा जिसने दोनों को गोली मारी थी, लेकिन मौत के बाद गांव के अस्पताल के बाहर लोगों ने जमकर हंगामा किया. बताया जा रहा है कि आरोपी गांव का ही एक बदमाश है. नाराज लोगों ने ना सिर्फ दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की बल्कि सड़क भी जाम कर दी. वारदात शुक्रवार की सुबह सुल्तानपुर डबास इलाके में हुई. गुस्साये लोगों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से ही वो स्कोडा वाला बड़ी आसानी से दोनों भाइयों को गोली मारकर वहां से भाग खड़ा हुआ और पुलिस ने हरकत करने में ढिलाई दिखाई. बताया यही जा रहा है कि DLएकCPएक हज़ार सात सौ बहत्तर नंबर की एक स्कोडा कार जिस रास्ते से निकल रही थी, वहीं एक टेम्पो ट्रैवलर चलाने वाले ड्राइवर ने अपना टेम्पो बीच सड़क पर खड़ा कर दिया था. तभी स्कोडा वाले ने उससे पास मांगा. बताया जा रहा है कि इसी बात पर दोनों के बीच बहस हुई और स्कोडा वाले ने गन निकालकर उसे गोली मार दी. शोर सुनकर जैसे ही ड्राइवर का भाई वहां पहुंचा तो उसे भी गोली मार कर स्कोडा सवार वहां से फरार हो गया. इस वारदात के बाद से ही इलाके के लोग हंगामा पर उतारू हैं और पुलिस की ईंट से ईंट बजाने पर आमादा हैं. आरोप यही है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से ही इस वारदात के बाद आरोपी भागने में कामयाब हो गया. इस वारदात ने उन लोगों के दिलों में डर जरूर पैदा कर दिया है जो सड़कों पर निकलते हैं क्योंकि पता नहीं किस मोड़ पर किसके गुस्से की इंतेहा हो जाए.
भदोही जनपद में कहीं बिजली कटौती की समस्या तो कहीं ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति ही ध्वस्त होने से नाराज लोग लगातार शिकायत करने के बावजूद विभाग मौन धारण किए हुए है। शहर तो शहर ग्रामीण क्षेत्रों में भी चरमराई विद्युत आपूर्ति से बदहाल हो चुके ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। गोपीगंज विद्युत उपकेंद्र पर कौलापुर ग्राम सभा में ट्रांसफार्मर के कई दिनों से खराब पड़े होने से बिजली संकट को झेल रहे ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोग ट्रांसफार्मर बदलने की मांग कई दिनों से कर रहे थे। उपरोक्त ग्रामीणों को विद्युतकर्मी रोज रोज दिलासा दे वापस भेज देते थे। वहीं विकास खंड डीघ के कौलापुर गांव मे पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पास लगा ट्रांसफार्मर हफ्तों से खराब हुआ पड़ा था जिस पर ग्रामीणों ने दूसरे ट्रांसफार्मर से कनेक्शन जोड़ लिया था। दूसरे ट्रांसफार्मर के जोड़े जाने से पूरे गांव बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। लेकिन व्यवस्था को ठीक करने की बजाय जब इसकी जानकारी बिजली विभाग के कर्मचारियों को लगी तो उनको गांव की रोशनी बर्दास्त नही हुई और बिजली आपूर्ति को तत्काल बंद कर दिया। बिजली संकट से परेशान गांव के लोग दूसरे ट्रांसफार्मर से बिजली का उपयोग कर रहे थे। उक्त ट्रांसफार्मर पहले भी खराब हुआ था बाद में बदले एक सप्ताह में फिर जल गया तो मजबूरी में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर स्थानीय विभागीय लोगों को देने पर दूसरे ट्रांसफार्मर से कनेक्ट कर चालू कराया लेकिन इस बाबत बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा ट्रांसफार्मर को सोमवार को सुबह बंद करा दिया गया कहा गया कि ट्रांसफार्मर से बिजली का उपयोग नहीं होगा जिससे नाराज ग्रामीणों ने पावर हाउस में पहुंचकर बिजली विभाग के खिलाफ खूब नारेबाजी करते हुए अति शीघ्र ट्रांसफार्मर को चालू कराने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में लवकुश प्रजापति, कुन्नाराम, कैलाश प्रजापति, विकास प्रजापति, रोहित शर्मा, मनोज कुमार, टिंकू प्रजापति, रामकुमार, रमेश प्रजापति, दया शंकर प्रजापति सहित आदि लोग शामिल रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भदोही जनपद में कहीं बिजली कटौती की समस्या तो कहीं ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति ही ध्वस्त होने से नाराज लोग लगातार शिकायत करने के बावजूद विभाग मौन धारण किए हुए है। शहर तो शहर ग्रामीण क्षेत्रों में भी चरमराई विद्युत आपूर्ति से बदहाल हो चुके ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। गोपीगंज विद्युत उपकेंद्र पर कौलापुर ग्राम सभा में ट्रांसफार्मर के कई दिनों से खराब पड़े होने से बिजली संकट को झेल रहे ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोग ट्रांसफार्मर बदलने की मांग कई दिनों से कर रहे थे। उपरोक्त ग्रामीणों को विद्युतकर्मी रोज रोज दिलासा दे वापस भेज देते थे। वहीं विकास खंड डीघ के कौलापुर गांव मे पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पास लगा ट्रांसफार्मर हफ्तों से खराब हुआ पड़ा था जिस पर ग्रामीणों ने दूसरे ट्रांसफार्मर से कनेक्शन जोड़ लिया था। दूसरे ट्रांसफार्मर के जोड़े जाने से पूरे गांव बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। लेकिन व्यवस्था को ठीक करने की बजाय जब इसकी जानकारी बिजली विभाग के कर्मचारियों को लगी तो उनको गांव की रोशनी बर्दास्त नही हुई और बिजली आपूर्ति को तत्काल बंद कर दिया। बिजली संकट से परेशान गांव के लोग दूसरे ट्रांसफार्मर से बिजली का उपयोग कर रहे थे। उक्त ट्रांसफार्मर पहले भी खराब हुआ था बाद में बदले एक सप्ताह में फिर जल गया तो मजबूरी में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर स्थानीय विभागीय लोगों को देने पर दूसरे ट्रांसफार्मर से कनेक्ट कर चालू कराया लेकिन इस बाबत बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा ट्रांसफार्मर को सोमवार को सुबह बंद करा दिया गया कहा गया कि ट्रांसफार्मर से बिजली का उपयोग नहीं होगा जिससे नाराज ग्रामीणों ने पावर हाउस में पहुंचकर बिजली विभाग के खिलाफ खूब नारेबाजी करते हुए अति शीघ्र ट्रांसफार्मर को चालू कराने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में लवकुश प्रजापति, कुन्नाराम, कैलाश प्रजापति, विकास प्रजापति, रोहित शर्मा, मनोज कुमार, टिंकू प्रजापति, रामकुमार, रमेश प्रजापति, दया शंकर प्रजापति सहित आदि लोग शामिल रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आमिर खान (Aamir Khan) का एक इंटरव्यू (Fake Interview) जहां वह अपनी पत्नियों और बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं, हाल ही में इंटरनेट पर खूब वायरल (Viral Video) हो रहा था। यह देख कर जनता ने निंदा की और कुछ ही समय में, यह बयान चर्चा का विषय बन गया। लेकिन तथ्यों की जांच में, इस वायरल इंटरव्यू को फर्जी पाया गया है। यह इंटरव्यू पूरी तरह से निराधार है और एक अविश्वसनीय वेबसाइट (Fake Website) ने इसे जारी किया है। साक्षात्कार में आमिर खान के हवाले से कहा गया है, "मैंने बहुत स्पष्ट कर दिया था कि मेरे बच्चे हमेशा केवल इस्लामिक धर्म का पालन करेंगे।" हाल ही में, एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने इस संचलन को धीमा करते हुए दावा किया कि यह एक नकली वीडियो है जिसे अभिनेता के बारे में नकारात्मकता और झूठ फैलाने के लिए बनाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आमिर ने 2012 में इसी फर्जी वीडियो के बारे में उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी की थी और बाद में वह पकड़ा गया था। यूजर ने यहां तक कहा कि आमिर खान ने कभी भी ऐसा इंटरव्यू नहीं दिया है। यहां तक कि 2016 में इंडिया टीवी पर प्रसारित हुए 'आप की अदालत' के दौरान भी, आमिर ने इस इंटरव्यू का उल्लेख किया था और कहा था कि किसी ने उनके नाम पर इंटरव्यू किया था जबकि उन्होंने उस प्रभाव के बारे में कभी कुछ नहीं कहा है। निश्चित रूप से, नकली समाचार द्वारा लोगों की भावना को ठेस पहुंचाने वाले और बिना किसी कारण के लोगों को टारगेट बनाने वाले, अपनी सीमा नहीं जानते है।
आमिर खान का एक इंटरव्यू जहां वह अपनी पत्नियों और बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं, हाल ही में इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा था। यह देख कर जनता ने निंदा की और कुछ ही समय में, यह बयान चर्चा का विषय बन गया। लेकिन तथ्यों की जांच में, इस वायरल इंटरव्यू को फर्जी पाया गया है। यह इंटरव्यू पूरी तरह से निराधार है और एक अविश्वसनीय वेबसाइट ने इसे जारी किया है। साक्षात्कार में आमिर खान के हवाले से कहा गया है, "मैंने बहुत स्पष्ट कर दिया था कि मेरे बच्चे हमेशा केवल इस्लामिक धर्म का पालन करेंगे।" हाल ही में, एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने इस संचलन को धीमा करते हुए दावा किया कि यह एक नकली वीडियो है जिसे अभिनेता के बारे में नकारात्मकता और झूठ फैलाने के लिए बनाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आमिर ने दो हज़ार बारह में इसी फर्जी वीडियो के बारे में उस व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी की थी और बाद में वह पकड़ा गया था। यूजर ने यहां तक कहा कि आमिर खान ने कभी भी ऐसा इंटरव्यू नहीं दिया है। यहां तक कि दो हज़ार सोलह में इंडिया टीवी पर प्रसारित हुए 'आप की अदालत' के दौरान भी, आमिर ने इस इंटरव्यू का उल्लेख किया था और कहा था कि किसी ने उनके नाम पर इंटरव्यू किया था जबकि उन्होंने उस प्रभाव के बारे में कभी कुछ नहीं कहा है। निश्चित रूप से, नकली समाचार द्वारा लोगों की भावना को ठेस पहुंचाने वाले और बिना किसी कारण के लोगों को टारगेट बनाने वाले, अपनी सीमा नहीं जानते है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। लोहे का 'कड़ा' (O-ring): कनाडा के इंजिनियरों का परिचय व गौरव-चिह्न सन् 1904 में निर्मित एक इंजन की डिजाइन १२ जून १९९८ को अंतरिक्ष स्टेशन "'मीर"' अभियान्त्रिकी (Engineering) वह विज्ञान तथा व्यवसाय है जो मानव की विविध जरूरतों की पूर्ति करने में आने वाली समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। इसके लिये वह गणितीय, भौतिक व प्राकृतिक विज्ञानों के ज्ञानराशि का उपयोग करती है। इंजीनियरी भौतिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती है; औद्योगिक प्रक्रमों का विकास एवं नियंत्रण करती है। इसके लिये वह तकनीकी मानकों का प्रयोग करते हुए विधियाँ, डिजाइन और विनिर्देश (specifications) प्रदान करती है। . दक्षता (Efficiency) का सामान्य अर्थ यह है कि किसी कार्य या उद्देश्य को पूरा करने में लगाया गया समय या श्रम या ऊर्जा कितनी अच्छी तरह काम में आती है। 'दक्षता' का विभिन्न क्षेत्रों एवं विषयों में उपयोग किया जाता है और विभिन्न सन्दर्भों में इसके अर्थ में भी काफी भिन्नता पायी जाती है। दक्षता एक मापने योग्य राशि है। ऊर्जा के रूपान्तरण की स्थिति में आउटपुट ऊर्जा और इनपुट उर्जा के अनुपात को दक्षता कहते हैं।;उदाहरण कोई ट्रांसफॉर्मर १००० किलोवाट विद्युत ऊर्जा लेकर अपने आउटपुट में जुड़े लोड को ९८० किलोवाट विद्युत ऊर्जा देता है, तो इसकी दक्षता श्रेणीःऊर्जा श्रेणीःअर्थशास्त्र श्रेणीःऊष्मा अंतरण श्रेणीःविचार की गुणवत्ताएँ. अभियान्त्रिकी और दक्षता आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। अभियान्त्रिकी 38 संबंध है और दक्षता 4 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (38 + 4)। यह लेख अभियान्त्रिकी और दक्षता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। लोहे का 'कड़ा' : कनाडा के इंजिनियरों का परिचय व गौरव-चिह्न सन् एक हज़ार नौ सौ चार में निर्मित एक इंजन की डिजाइन बारह जून एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे को अंतरिक्ष स्टेशन "'मीर"' अभियान्त्रिकी वह विज्ञान तथा व्यवसाय है जो मानव की विविध जरूरतों की पूर्ति करने में आने वाली समस्याओं का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। इसके लिये वह गणितीय, भौतिक व प्राकृतिक विज्ञानों के ज्ञानराशि का उपयोग करती है। इंजीनियरी भौतिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती है; औद्योगिक प्रक्रमों का विकास एवं नियंत्रण करती है। इसके लिये वह तकनीकी मानकों का प्रयोग करते हुए विधियाँ, डिजाइन और विनिर्देश प्रदान करती है। . दक्षता का सामान्य अर्थ यह है कि किसी कार्य या उद्देश्य को पूरा करने में लगाया गया समय या श्रम या ऊर्जा कितनी अच्छी तरह काम में आती है। 'दक्षता' का विभिन्न क्षेत्रों एवं विषयों में उपयोग किया जाता है और विभिन्न सन्दर्भों में इसके अर्थ में भी काफी भिन्नता पायी जाती है। दक्षता एक मापने योग्य राशि है। ऊर्जा के रूपान्तरण की स्थिति में आउटपुट ऊर्जा और इनपुट उर्जा के अनुपात को दक्षता कहते हैं।;उदाहरण कोई ट्रांसफॉर्मर एक हज़ार किलोग्रामवाट विद्युत ऊर्जा लेकर अपने आउटपुट में जुड़े लोड को नौ सौ अस्सी किलोग्रामवाट विद्युत ऊर्जा देता है, तो इसकी दक्षता श्रेणीःऊर्जा श्रेणीःअर्थशास्त्र श्रेणीःऊष्मा अंतरण श्रेणीःविचार की गुणवत्ताएँ. अभियान्त्रिकी और दक्षता आम में शून्य बातें हैं । अभियान्त्रिकी अड़तीस संबंध है और दक्षता चार है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख अभियान्त्रिकी और दक्षता के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादि मारे गए जबकि सेना का मेजर घायल हो गया। श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया जबकि सेना का मेजर घायल हो गया। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलवामा जिले के काकापोर क्षेत्र में राष्ट्रीय राइफल्स सहित सुरक्षाबलों द्वारा शुरू किए गए संयुक्त अभियान में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया। उन्होंने बताया, "ये तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा संगठन थे। इनके पास से तीन हथियार भी बरामद किए गए हैं। " पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ में सेना का मेजर घायल हो गया। क्षेत्र में आतंकवादियों के मौजूद होने की खुफिया जानकारी के बाद बुधवार शाम को सुरक्षाबलों ने काकापोरा के न्यू कॉलोनी क्षेत्र को चारो ओर से घेर लिया, जिसके बाद आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी। पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, "तलाशी अभियान जारी है, जबकि गोलीबारी बंद हो गई है। "
जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादि मारे गए जबकि सेना का मेजर घायल हो गया। श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया जबकि सेना का मेजर घायल हो गया। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलवामा जिले के काकापोर क्षेत्र में राष्ट्रीय राइफल्स सहित सुरक्षाबलों द्वारा शुरू किए गए संयुक्त अभियान में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया। उन्होंने बताया, "ये तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा संगठन थे। इनके पास से तीन हथियार भी बरामद किए गए हैं। " पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ में सेना का मेजर घायल हो गया। क्षेत्र में आतंकवादियों के मौजूद होने की खुफिया जानकारी के बाद बुधवार शाम को सुरक्षाबलों ने काकापोरा के न्यू कॉलोनी क्षेत्र को चारो ओर से घेर लिया, जिसके बाद आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी। पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, "तलाशी अभियान जारी है, जबकि गोलीबारी बंद हो गई है। "
राज्यसभा सांसद मनोज झा एवं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल. नई दिल्ली. आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के राज्यसभा में दिए गए एक वक्तव्य पर आपत्ति जताते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ को पत्र लिखा है. राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल की तरफ से दिए गए वक्तव्य को लेकर लिखे पत्र में मनोज झा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल माफी की मांग की है. उन्होंने सभापति से आग्रह किया है कि उस पार्टिकुलर शब्द को सदन की कार्यवाही से हटा लिया जाए. बता दें कि मंगलवार को राज्यसभा में अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं व कॉरपोरेट सेक्टर को लेकर एक चर्चा के दौरान राज्यसभा सांसद मनोज झा अपना वक्तव्य दे रहे थे. उन्होंने शायरी, मालिक तेरी रजा रहे या तू ही तू रहे, बाकी न मैं रहूं न मेरी आरजू रहे... कहते हुए अपना वक्तव्य शुरू किया. इसके बाद व कुछ मिनट आगे बोलते रहे, लेकिन इसी दौरान पीयूष गोयल ने व्यवधान डालते हुए बिहार को लेकर टिप्पणी की थी. पीयूष गोयल ने कहा था कि- 'इनका बस चले, तो देश को बिहार ही बना दें. इस बात पर मनोज झा ने सभापति की ओर मुखातिब होते हुए कहा था कि- यह बिहार के अपमान का प्रश्न है. इसके बाद फिर पीयूष गोयल ने कुछ कहा, तो मनोज झा ने कहा, पीयूष जी, मैं हाथ जोड़ता हूं कि आप मुझ पर टिप्पणी कर लें, लेकिन मेरे राज्य बिहार पर टिप्पणी न करें. इसके बाद पीयूष गोयल ने फिर टोकाटोकी नहीं की. इस वीडियो में 1. 55 मिनट के आस पास देखा जा सकता है कि मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही में एक दूसरे पर टीका टिप्पणी की जा रही है. हालांकि, इसके बाद मनोज झा लगातार बोलते रहे और उन्होंने 'डबल इंजन' शब्द को लेकर भी काफी सियासी हमले किए. इसके बाद मामला मंगलवार को ही समाप्त हो गया था, लेकिन, अब एक बार फिर मनोज झा ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ से इस पर कार्यवाही की मांग कर डाली है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर ये मुद्दा आनेवाले समय में क्या मोड़ लेता है? .
राज्यसभा सांसद मनोज झा एवं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल. नई दिल्ली. आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के राज्यसभा में दिए गए एक वक्तव्य पर आपत्ति जताते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ को पत्र लिखा है. राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल की तरफ से दिए गए वक्तव्य को लेकर लिखे पत्र में मनोज झा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल माफी की मांग की है. उन्होंने सभापति से आग्रह किया है कि उस पार्टिकुलर शब्द को सदन की कार्यवाही से हटा लिया जाए. बता दें कि मंगलवार को राज्यसभा में अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं व कॉरपोरेट सेक्टर को लेकर एक चर्चा के दौरान राज्यसभा सांसद मनोज झा अपना वक्तव्य दे रहे थे. उन्होंने शायरी, मालिक तेरी रजा रहे या तू ही तू रहे, बाकी न मैं रहूं न मेरी आरजू रहे... कहते हुए अपना वक्तव्य शुरू किया. इसके बाद व कुछ मिनट आगे बोलते रहे, लेकिन इसी दौरान पीयूष गोयल ने व्यवधान डालते हुए बिहार को लेकर टिप्पणी की थी. पीयूष गोयल ने कहा था कि- 'इनका बस चले, तो देश को बिहार ही बना दें. इस बात पर मनोज झा ने सभापति की ओर मुखातिब होते हुए कहा था कि- यह बिहार के अपमान का प्रश्न है. इसके बाद फिर पीयूष गोयल ने कुछ कहा, तो मनोज झा ने कहा, पीयूष जी, मैं हाथ जोड़ता हूं कि आप मुझ पर टिप्पणी कर लें, लेकिन मेरे राज्य बिहार पर टिप्पणी न करें. इसके बाद पीयूष गोयल ने फिर टोकाटोकी नहीं की. इस वीडियो में एक. पचपन मिनट के आस पास देखा जा सकता है कि मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही में एक दूसरे पर टीका टिप्पणी की जा रही है. हालांकि, इसके बाद मनोज झा लगातार बोलते रहे और उन्होंने 'डबल इंजन' शब्द को लेकर भी काफी सियासी हमले किए. इसके बाद मामला मंगलवार को ही समाप्त हो गया था, लेकिन, अब एक बार फिर मनोज झा ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए राज्यसभा के चेयरमैन जगदीप धनखड़ से इस पर कार्यवाही की मांग कर डाली है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर ये मुद्दा आनेवाले समय में क्या मोड़ लेता है? .
चर्चा में क्यों? 7 नवंबर, 2021 को बिहार के नालंदा ज़िले के राजगीर में अवस्थित नालंदा विश्वविद्यालय में 6वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के द्वारा किया गया। - 7 से 9 नवंबर, 2021 तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय में नालंदा विश्वविद्यालय एवं इंडिया फाउंडेशन के द्वारा किया जा रहा है। - इस सम्मेलन की थीम है- 'कोविड संक्रमण के बाद विश्वव्यवस्था के निर्माण में धर्म-धम्म परंपराएँ'। - इस सम्मेलन का उद्देश्य उभरती हुई नई विश्वव्यवस्था के लिये एक दार्शनिक ढाँचे के निर्माण पर विचार करने हेतु धर्म-धम्म परंपराओं के धार्मिक, राजनीतिक और विचारशील नेताओं को एक साथ लाना है। - उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'शेयर एंड केयर' भारतीय दर्शन का मूल तत्त्व है तथा भारत विजेता बनने को नहीं, बल्कि ज्ञान बाँटने को लेकर विश्व गुरु बना था, जिसमें प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। - विदित हो कि प्रथम अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का आयोजन 22-23 सितंबर, 2012 को साँची विश्वविद्यालय (मध्य प्रदेश) में किया गया था। वहीं 5वें सम्मेलन का आयोजन 27-28 जुलाई, 2019 को राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में किया गया था। - विदित हो कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त के द्वारा की गई थी, जिसका बख्तियार खिलज़ी नामक आक्रमणकारी द्वारा विध्वंस करा दिया गया था। वर्तमान में नालंदा ज़िले में इसका भग्नावशेष स्थित है।
चर्चा में क्यों? सात नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को बिहार के नालंदा ज़िले के राजगीर में अवस्थित नालंदा विश्वविद्यालय में छःवें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के द्वारा किया गया। - सात से नौ नवंबर, दो हज़ार इक्कीस तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय में नालंदा विश्वविद्यालय एवं इंडिया फाउंडेशन के द्वारा किया जा रहा है। - इस सम्मेलन की थीम है- 'कोविड संक्रमण के बाद विश्वव्यवस्था के निर्माण में धर्म-धम्म परंपराएँ'। - इस सम्मेलन का उद्देश्य उभरती हुई नई विश्वव्यवस्था के लिये एक दार्शनिक ढाँचे के निर्माण पर विचार करने हेतु धर्म-धम्म परंपराओं के धार्मिक, राजनीतिक और विचारशील नेताओं को एक साथ लाना है। - उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'शेयर एंड केयर' भारतीय दर्शन का मूल तत्त्व है तथा भारत विजेता बनने को नहीं, बल्कि ज्ञान बाँटने को लेकर विश्व गुरु बना था, जिसमें प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। - विदित हो कि प्रथम अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का आयोजन बाईस-तेईस सितंबर, दो हज़ार बारह को साँची विश्वविद्यालय में किया गया था। वहीं पाँचवें सम्मेलन का आयोजन सत्ताईस-अट्ठाईस जुलाई, दो हज़ार उन्नीस को राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में किया गया था। - विदित हो कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त के द्वारा की गई थी, जिसका बख्तियार खिलज़ी नामक आक्रमणकारी द्वारा विध्वंस करा दिया गया था। वर्तमान में नालंदा ज़िले में इसका भग्नावशेष स्थित है।
वाइपर जहरीले सांप हैं, का प्रतिनिधित्व करते हैंएक स्वतंत्र परिवार वे अंटार्कटिका, मेडागास्कर, हवाई, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर लगभग पूरी पृथ्वी में निवास करते हैं। इसलिए, पाठकों को यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि एक वाइपर एक व्यक्ति को कैसे और कहाँ काट सकता है। जहरीली उभयचरों और प्राथमिक चिकित्सा के नियमों के संपर्क पर भी चर्चा की जाएगी, क्योंकि ऐसी जानकारी प्रकृति में जाने वालों के लिए अच्छी मदद हो सकती है। स्थापित राय के विपरीत, वाइपर आक्रामक नहीं होते हैं और किसी व्यक्ति पर हमला करने का सपना नहीं देखते हैं। इसके विपरीत, जब उसे मिलते हैं, तो सांप को जितना संभव हो उतना दूर क्रॉल करना होगा। लेकिन इन सरीसृपों की आदत में छिपाने के लिएशिकार के लिए प्रतीक्षा करने वाले, हॉलोज़, घास या मुकाबले के तहत, अकसर यह इस तथ्य की ओर जाता है कि लापरवाह लोग जो जंगल में खुद को खोजते हैं, एक साँप को परेशान या डरा देते हैं, इसे खुद को बचाने के लिए मजबूर करते हैं इसलिए दम पर लोगों की संख्या बढ़ती है, और, संयोगवश, आंकड़ों के मुताबिक, 70% मामलों में अपराधी खुद शिकार होता है। किसी व्यक्ति के लिए सांप की काट के परिणाम हो सकते हैंअलग है, जबकि घातक परिणाम काफी कम दर्ज हैं। विषाक्तता में अक्सर एक आसान रूप होता है - रोग खुद को काटने की जगह पर एक छोटे से दर्दनाक सूजन के रूप में प्रकट होता है, जो कुछ समय बाद ही अपने आप से गुजरता है लेकिन, दुर्भाग्य से, समय-समय पर विषाक्तता के कारण गंभीर समस्याएं हैं। यह सब उस पर निर्भर करता है, जहां, किसका, और जब सांप काट लिया गया था। हम इसे और अधिक विस्तार से बताएंगे। एक सांप क्या दिखता है? सांप आम तौर पर जंगलों में रहता है। , 75 सेमी तक होती है एक नीले-भूरे रंग या काले रंग है। पीठ पर विपरीत वक्र पट्टी के साथ, भूरे-भूरे रंग की एक प्रकाश - और के अपने निकटतम रिश्तेदार, फ्लैट क्षेत्रों में रहने वाले, झाड़ियों या मिट्टी gullies के साथ ऊंचा हो गया शुष्क ढलानों पर - मैदान योजक। इस परिवार का एक अन्य प्रतिनिधि, वैसे, लाल किताब - एडर Nikolsky - बिल्कुल काला। यह वन-मैदान सांप के अंतर्गत आता है। जैसा कि आप देख सकते हैं, प्रत्येक प्राकृतिक क्षेत्र का अपना हैजहरीला निवासी। और, वैसे, वे सभी विशेष बड़प्पन में भिन्न नहीं होते हैं और यात्री को अपनी उपस्थिति के बारे में चेतावनी नहीं देते हैं, इसके विपरीत, उदाहरण के लिए, सुंदर और बहुत खतरनाक अफ्रीकी शोर वाइपर से। एक काटने, जिसके परिणाम की भविष्यवाणी करना मुश्किल नहीं है, इसे केवल जोर से हिसिंग और शरीर की दुर्जेय सूजन के बाद से प्राप्त किया जा सकता है। और हमारे "हमवतन", भयभीत हैं और फैसला किया है कि खतरे के पास है, अनावश्यक आवाज़ों के बिना, तुरंत हमला कर रहे हैं। वसंत या शरद ऋतु की शुरुआत में प्रकृति पर जाएं, याद रखें कि वर्ष के इस समय में, वाइपर अपने सर्दियों के स्थान के करीब रहते हैं। आमतौर पर, यह हैः - Glade, - बिजली लाइनों, - वन किनारों, - निर्माण अपशिष्ट के साथ उद्यान भूखंड, - भूमि सर्वेक्षण डंप। गर्मियों में, सांप कहीं भी हो सकते हैं, हालांकि दिन के दौरान।उन सभी को सबसे ज्यादा पसंद है, जहां आप सूरज में डुबकी लगा सकते हैं (वाइपर बहुत थर्मोफिलिक हैं): पत्थरों की सतह, एक खड्ड की दक्षिणी ढलान या सूरज की धार। वैसे, इसी कारण से वे रात में आपके अलाव तक को रेंग सकते हैं। और ताकि बाद में इस पर विचार नहीं करना पड़ेवाइपर के काटने के प्रभाव, पर्यटक को तुरंत सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिएः सड़क पर घने तलवों के साथ उच्च जूते पहनें, उनमें जींस की पतलून डालें (इन पतलून का कपड़ा काफी घना है, इसलिए केवल इस वर्दी पर यात्रा पर जाना उचित है) अपने हाथों से, पत्तियों और सूखी शाखाओं के ढेर को धक्का देना, मिंक, खोखले, या रास्ते से पत्थर फेंकना। रात में, अपने पैरों के नीचे एक टॉर्च चमकना सुनिश्चित करें। और सुबह रुकने पर जागते हुए, तम्बू के बाहर बने सभी बैग और जूतों को ध्यान से देखें। एक वाइपर के काटने का प्रभाव इसके विष की संरचना पर निर्भर करता है। खतरनाक जहर वाइपर क्या है? तथ्य यह है कि अधिकांश भाग के लिए यह हीमो-और साइटोटोक्सिक है। यही है, इसकी कार्रवाई के परिणामस्वरूप, रक्त कोशिकाओं या ऊतकों में एक गहरा संरचनात्मक और कार्यात्मक परिवर्तन होता है, जो उनकी मृत्यु का कारण बनता है। ऐसा प्रभाव जहर में निहित तथाकथित नेक्रोटाइजिंग एंजाइमों की भारी मात्रा के कारण होता है। लेकिन वाइपर विष में कोई न्यूरोटॉक्सिन नहीं हैं,जिसके कारण तंत्रिका तंत्र पर इसका प्रभाव नहीं देखा जाता है। हाँ, और अपने समकक्षों - एपीएस या रक्त लोमड़ियों की तुलना में बहुत कम मात्रा में एक वाइपर के जहर का उत्पादन करता है। हालांकि, ऐसे व्यक्ति के लिए जो सांप के काटने का सामना कर चुका है, इसके परिणाम अभी भी काफी दुखद हो सकते हैं, खासकर अगर उसे पहले से ही कार्डियोवास्कुलर सिस्टम की समस्या थी या गलत तरीके से प्राथमिक चिकित्सा दी गई थी। इस तथ्य के बावजूद कि वीआईपी काटने निश्चित हैंबहुत बार, मौत हमेशा होने वाली घटना से दूर होती है - संभावना 1% से कम है (अन्य चीजों के अलावा, जो मधुमक्खियों, ततैया या सींगों द्वारा डंक मारते थे, कई और मर गए)। फिर भी, इसमें थोड़ा सुखद है। लेकिन काटने के परिणाम क्या होंगे यह कुछ कारकों पर निर्भर करता हैः - सांप का आकार। यह स्थापित किया जाता है कि सांप जितना बड़ा होता है, उसके पास उतनी ही जहरीली ग्रंथियां होती हैं, और स्वाभाविक रूप से, जहर बड़े मात्रा में जारी होता है। - पीड़ित का वजन और ऊंचाई। सांप द्वारा काटे गए जीव जितना बड़ा होगा, उतना कम जहर होगा। तो, एक कुत्ते या बच्चे पर एक वाइपर के काटने का प्रभाव एक वयस्क की तुलना में बहुत अधिक गंभीर होगा। रहस्य इस तथ्य में निहित है कि सांप का जहर तेजी से और पूरी तरह से पीड़ित के शरीर में एक छोटी मात्रा और द्रव्यमान के साथ अवशोषित होता है। - जगह काटो। ऐसा माना जाता है कि किसी व्यक्ति के पैर या किसी जानवर के पंजे की तुलना में गर्दन, कंधे और छाती में काटने से ज्यादा खतरनाक है। - पीड़ित का स्वास्थ्य। हृदय रोग की उपस्थिति में, सदमे के विकास का खतरा होता है, जिससे घबराहट और तालमेल से ट्रिगर किया जा सकता है, जल्दी से शरीर के माध्यम से जहर फैल सकता है। काटने की गंभीरता में निर्णायक भूमिकाअडर साधारण ने जो जहर आवंटित किया है उसकी मात्रा निभाता है। और यह सीधे उभयचर की शिकार की आदतों पर निर्भर करता है। वाइपर केवल जीवित रहते हैं, मध्यम आकार के शिकारः चूहे, छिपकली, और कभी-कभी मोल्स। वह तेजी से, एक घात से करता है, जिसके बाद वह जहर की कार्रवाई का इंतजार करता है। वैसे, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि साँप सावधानी से इसका उपयोग करता है, जब भी संभव हो, कुछ को आरक्षित रखने की कोशिश करता है, इसलिए कुछ मामलों में इसका काटने मनुष्यों के लिए पूरी तरह से हानिरहित हो जाता है (चिकित्सा में इसे "सूखा" कहा जाता है)। लेकिन, चूंकि घाव में प्रवेश करने वाले जहर की मात्रा निर्धारित करना मुश्किल है, इसलिए किसी भी मामले में घायल को तत्काल सहायता दी जानी चाहिए। एक वाइपर काटने की तरह क्या दिखता है? यह जानना महत्वपूर्ण है कि सबसे जहरीला विष विष हैयह वसंत में होता है, जिसका अर्थ है कि वर्ष के इस समय में एक व्यक्ति को पैदल यात्रा करते समय विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। इसके अलावा, वाइपर काटने के ज्ञान और मुख्य परिणामों के साथ हस्तक्षेप नहीं करता है। - काटने की साइट बहुत दर्द करती है। - प्रभावित अंग जल्दी सूज जाता है और काले धब्बों के साथ बैंगनी-नीला हो जाता है। - ठंड लगना, मतली, चक्कर आना हो सकता है। - कुछ मामलों में, तापमान में वृद्धि होती है। - ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। - असामयिक देखभाल के मामले में, काटने के क्षेत्र में ऊतक परिगलन विकसित होता है। गंभीर मामलों में, एक वाइपर के काटने के प्रभाव हो सकते हैंरोगी की उत्तेजना की एक छोटी अवधि को व्यक्त करें, जो जल्दी से उनींदापन और उदासीनता से बदल दिया जाता है। पीड़ित को मुंह में सूखे और कड़वे स्वाद की शिकायत होती है, नाड़ी काफ़ी तेज़ होती है, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना। विशेष रूप से गंभीर मामलों में, पतन विकसित हो सकता है। गुर्दे और यकृत के कार्य परेशान होते हैं, और फेफड़ों में ठहराव के कारण होने वाली नम किरणें सुनाई देती हैं। थोड़ा याद करते हैं और याद करते हैंकैसे व्यवहार करें, अगर टहलने के बाद, आप अचानक रक्तवाहक के शरीर पर पाए जाते हैं - एक टिक। क्यों? और फिर, कि किसी तरह से घायल कीट और वाइपर के शिकार की क्रियाएं समान होनी चाहिए। आश्चर्य? व्यर्थ में। तो, टिक काटने के बाद (मनुष्यों में) क्या परिणाम हो सकते हैं, हम चर्चा नहीं करेंगे - यह एक अन्य लेख का विषय है। स्मरण करो कि पहले क्या करना है। यह सही है, आपको जल्द से जल्द और सही तरीके से परजीवी का पता लगाने की आवश्यकता है (इसे हटा दें)। ऐसा ही तब किया जाना चाहिए जब एक सांप काटता है - समय और सक्षम रूप से सहायता प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है। पीड़ित को लेटाओ ताकि सिर शरीर के स्तर से नीचे हो - इससे मस्तिष्क परिसंचरण के उल्लंघन की संभावना कम हो जाएगी। अंग से सभी गहने निकालें (यह बहुत ऊपर सूज सकता है)। पक्षों से काटने को काटें, इस प्रकार घाव को खोलना, और अपने मुंह से 15 मिनट के लिए जहर में चूसना, इसे बाहर थूकना (सहायक व्यक्ति के लिए यह खतरनाक नहीं है)। शराब या आयोडीन के साथ घाव कीटाणुरहित करें। एक पट्टी या पट्टी के साथ प्रभावित अंग को स्थिर करें। रोगी को पर्याप्त मात्रा में पेय (लेकिन कॉफी नहीं) दें। उसे जल्द से जल्द सुविधा में ले जाएं। हर समय एक वाइपर के काटने के बाद परिणामउन्होंने लोगों को इतना डरा दिया कि मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए वे कई पूरी तरह से बेकार प्रक्रियाओं के साथ आए जो न केवल रोगी की स्थिति को कम करने में असमर्थ हैं, बल्कि नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए, याद रखें कि आपको सांप के काटने से नहीं करना चाहिए। - किसी भी तरह से एक हार्नेस लागू न करें! यह बेकार है, और इसके अलावा, जहर पहले से ही शरीर के ऊतकों पर विनाशकारी रूप से कार्य करता है, और अगर हम इस प्लाइट को जोड़ते हैं जो रक्त परिसंचरण में हस्तक्षेप करता है, तो कुछ ही मिनटों में उनकी मृत्यु हो सकती है। और हार्नेस को हटाने के बाद इस के परिणामस्वरूप गठित अपघटन उत्पादों, मौजूदा विषाक्तता को बढ़ा देगा। - काटने की जगह को सावधानी न करें! आप मौजूदा घाव में एक जलन जोड़ देंगे, और यह बिल्कुल अर्थहीन है। - घाव न काटें - यह बेकार है, लेकिन संक्रमण से नींद नहीं आती है। - रोगी को शराब न दें - यह पूरे शरीर में जहर को तेजी से फैलाने में मदद करेगा। - पृथ्वी के साथ घाव को छिड़कें नहीं, इसके लिए वेब या घास न लगाएं - टेटनस को छोड़कर, आपको ऐसी प्रक्रियाओं से कुछ भी नहीं मिलेगा।
वाइपर जहरीले सांप हैं, का प्रतिनिधित्व करते हैंएक स्वतंत्र परिवार वे अंटार्कटिका, मेडागास्कर, हवाई, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर लगभग पूरी पृथ्वी में निवास करते हैं। इसलिए, पाठकों को यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि एक वाइपर एक व्यक्ति को कैसे और कहाँ काट सकता है। जहरीली उभयचरों और प्राथमिक चिकित्सा के नियमों के संपर्क पर भी चर्चा की जाएगी, क्योंकि ऐसी जानकारी प्रकृति में जाने वालों के लिए अच्छी मदद हो सकती है। स्थापित राय के विपरीत, वाइपर आक्रामक नहीं होते हैं और किसी व्यक्ति पर हमला करने का सपना नहीं देखते हैं। इसके विपरीत, जब उसे मिलते हैं, तो सांप को जितना संभव हो उतना दूर क्रॉल करना होगा। लेकिन इन सरीसृपों की आदत में छिपाने के लिएशिकार के लिए प्रतीक्षा करने वाले, हॉलोज़, घास या मुकाबले के तहत, अकसर यह इस तथ्य की ओर जाता है कि लापरवाह लोग जो जंगल में खुद को खोजते हैं, एक साँप को परेशान या डरा देते हैं, इसे खुद को बचाने के लिए मजबूर करते हैं इसलिए दम पर लोगों की संख्या बढ़ती है, और, संयोगवश, आंकड़ों के मुताबिक, सत्तर% मामलों में अपराधी खुद शिकार होता है। किसी व्यक्ति के लिए सांप की काट के परिणाम हो सकते हैंअलग है, जबकि घातक परिणाम काफी कम दर्ज हैं। विषाक्तता में अक्सर एक आसान रूप होता है - रोग खुद को काटने की जगह पर एक छोटे से दर्दनाक सूजन के रूप में प्रकट होता है, जो कुछ समय बाद ही अपने आप से गुजरता है लेकिन, दुर्भाग्य से, समय-समय पर विषाक्तता के कारण गंभीर समस्याएं हैं। यह सब उस पर निर्भर करता है, जहां, किसका, और जब सांप काट लिया गया था। हम इसे और अधिक विस्तार से बताएंगे। एक सांप क्या दिखता है? सांप आम तौर पर जंगलों में रहता है। , पचहत्तर सेमी तक होती है एक नीले-भूरे रंग या काले रंग है। पीठ पर विपरीत वक्र पट्टी के साथ, भूरे-भूरे रंग की एक प्रकाश - और के अपने निकटतम रिश्तेदार, फ्लैट क्षेत्रों में रहने वाले, झाड़ियों या मिट्टी gullies के साथ ऊंचा हो गया शुष्क ढलानों पर - मैदान योजक। इस परिवार का एक अन्य प्रतिनिधि, वैसे, लाल किताब - एडर Nikolsky - बिल्कुल काला। यह वन-मैदान सांप के अंतर्गत आता है। जैसा कि आप देख सकते हैं, प्रत्येक प्राकृतिक क्षेत्र का अपना हैजहरीला निवासी। और, वैसे, वे सभी विशेष बड़प्पन में भिन्न नहीं होते हैं और यात्री को अपनी उपस्थिति के बारे में चेतावनी नहीं देते हैं, इसके विपरीत, उदाहरण के लिए, सुंदर और बहुत खतरनाक अफ्रीकी शोर वाइपर से। एक काटने, जिसके परिणाम की भविष्यवाणी करना मुश्किल नहीं है, इसे केवल जोर से हिसिंग और शरीर की दुर्जेय सूजन के बाद से प्राप्त किया जा सकता है। और हमारे "हमवतन", भयभीत हैं और फैसला किया है कि खतरे के पास है, अनावश्यक आवाज़ों के बिना, तुरंत हमला कर रहे हैं। वसंत या शरद ऋतु की शुरुआत में प्रकृति पर जाएं, याद रखें कि वर्ष के इस समय में, वाइपर अपने सर्दियों के स्थान के करीब रहते हैं। आमतौर पर, यह हैः - Glade, - बिजली लाइनों, - वन किनारों, - निर्माण अपशिष्ट के साथ उद्यान भूखंड, - भूमि सर्वेक्षण डंप। गर्मियों में, सांप कहीं भी हो सकते हैं, हालांकि दिन के दौरान।उन सभी को सबसे ज्यादा पसंद है, जहां आप सूरज में डुबकी लगा सकते हैं : पत्थरों की सतह, एक खड्ड की दक्षिणी ढलान या सूरज की धार। वैसे, इसी कारण से वे रात में आपके अलाव तक को रेंग सकते हैं। और ताकि बाद में इस पर विचार नहीं करना पड़ेवाइपर के काटने के प्रभाव, पर्यटक को तुरंत सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिएः सड़क पर घने तलवों के साथ उच्च जूते पहनें, उनमें जींस की पतलून डालें अपने हाथों से, पत्तियों और सूखी शाखाओं के ढेर को धक्का देना, मिंक, खोखले, या रास्ते से पत्थर फेंकना। रात में, अपने पैरों के नीचे एक टॉर्च चमकना सुनिश्चित करें। और सुबह रुकने पर जागते हुए, तम्बू के बाहर बने सभी बैग और जूतों को ध्यान से देखें। एक वाइपर के काटने का प्रभाव इसके विष की संरचना पर निर्भर करता है। खतरनाक जहर वाइपर क्या है? तथ्य यह है कि अधिकांश भाग के लिए यह हीमो-और साइटोटोक्सिक है। यही है, इसकी कार्रवाई के परिणामस्वरूप, रक्त कोशिकाओं या ऊतकों में एक गहरा संरचनात्मक और कार्यात्मक परिवर्तन होता है, जो उनकी मृत्यु का कारण बनता है। ऐसा प्रभाव जहर में निहित तथाकथित नेक्रोटाइजिंग एंजाइमों की भारी मात्रा के कारण होता है। लेकिन वाइपर विष में कोई न्यूरोटॉक्सिन नहीं हैं,जिसके कारण तंत्रिका तंत्र पर इसका प्रभाव नहीं देखा जाता है। हाँ, और अपने समकक्षों - एपीएस या रक्त लोमड़ियों की तुलना में बहुत कम मात्रा में एक वाइपर के जहर का उत्पादन करता है। हालांकि, ऐसे व्यक्ति के लिए जो सांप के काटने का सामना कर चुका है, इसके परिणाम अभी भी काफी दुखद हो सकते हैं, खासकर अगर उसे पहले से ही कार्डियोवास्कुलर सिस्टम की समस्या थी या गलत तरीके से प्राथमिक चिकित्सा दी गई थी। इस तथ्य के बावजूद कि वीआईपी काटने निश्चित हैंबहुत बार, मौत हमेशा होने वाली घटना से दूर होती है - संभावना एक% से कम है । फिर भी, इसमें थोड़ा सुखद है। लेकिन काटने के परिणाम क्या होंगे यह कुछ कारकों पर निर्भर करता हैः - सांप का आकार। यह स्थापित किया जाता है कि सांप जितना बड़ा होता है, उसके पास उतनी ही जहरीली ग्रंथियां होती हैं, और स्वाभाविक रूप से, जहर बड़े मात्रा में जारी होता है। - पीड़ित का वजन और ऊंचाई। सांप द्वारा काटे गए जीव जितना बड़ा होगा, उतना कम जहर होगा। तो, एक कुत्ते या बच्चे पर एक वाइपर के काटने का प्रभाव एक वयस्क की तुलना में बहुत अधिक गंभीर होगा। रहस्य इस तथ्य में निहित है कि सांप का जहर तेजी से और पूरी तरह से पीड़ित के शरीर में एक छोटी मात्रा और द्रव्यमान के साथ अवशोषित होता है। - जगह काटो। ऐसा माना जाता है कि किसी व्यक्ति के पैर या किसी जानवर के पंजे की तुलना में गर्दन, कंधे और छाती में काटने से ज्यादा खतरनाक है। - पीड़ित का स्वास्थ्य। हृदय रोग की उपस्थिति में, सदमे के विकास का खतरा होता है, जिससे घबराहट और तालमेल से ट्रिगर किया जा सकता है, जल्दी से शरीर के माध्यम से जहर फैल सकता है। काटने की गंभीरता में निर्णायक भूमिकाअडर साधारण ने जो जहर आवंटित किया है उसकी मात्रा निभाता है। और यह सीधे उभयचर की शिकार की आदतों पर निर्भर करता है। वाइपर केवल जीवित रहते हैं, मध्यम आकार के शिकारः चूहे, छिपकली, और कभी-कभी मोल्स। वह तेजी से, एक घात से करता है, जिसके बाद वह जहर की कार्रवाई का इंतजार करता है। वैसे, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि साँप सावधानी से इसका उपयोग करता है, जब भी संभव हो, कुछ को आरक्षित रखने की कोशिश करता है, इसलिए कुछ मामलों में इसका काटने मनुष्यों के लिए पूरी तरह से हानिरहित हो जाता है । लेकिन, चूंकि घाव में प्रवेश करने वाले जहर की मात्रा निर्धारित करना मुश्किल है, इसलिए किसी भी मामले में घायल को तत्काल सहायता दी जानी चाहिए। एक वाइपर काटने की तरह क्या दिखता है? यह जानना महत्वपूर्ण है कि सबसे जहरीला विष विष हैयह वसंत में होता है, जिसका अर्थ है कि वर्ष के इस समय में एक व्यक्ति को पैदल यात्रा करते समय विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। इसके अलावा, वाइपर काटने के ज्ञान और मुख्य परिणामों के साथ हस्तक्षेप नहीं करता है। - काटने की साइट बहुत दर्द करती है। - प्रभावित अंग जल्दी सूज जाता है और काले धब्बों के साथ बैंगनी-नीला हो जाता है। - ठंड लगना, मतली, चक्कर आना हो सकता है। - कुछ मामलों में, तापमान में वृद्धि होती है। - ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। - असामयिक देखभाल के मामले में, काटने के क्षेत्र में ऊतक परिगलन विकसित होता है। गंभीर मामलों में, एक वाइपर के काटने के प्रभाव हो सकते हैंरोगी की उत्तेजना की एक छोटी अवधि को व्यक्त करें, जो जल्दी से उनींदापन और उदासीनता से बदल दिया जाता है। पीड़ित को मुंह में सूखे और कड़वे स्वाद की शिकायत होती है, नाड़ी काफ़ी तेज़ होती है, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना। विशेष रूप से गंभीर मामलों में, पतन विकसित हो सकता है। गुर्दे और यकृत के कार्य परेशान होते हैं, और फेफड़ों में ठहराव के कारण होने वाली नम किरणें सुनाई देती हैं। थोड़ा याद करते हैं और याद करते हैंकैसे व्यवहार करें, अगर टहलने के बाद, आप अचानक रक्तवाहक के शरीर पर पाए जाते हैं - एक टिक। क्यों? और फिर, कि किसी तरह से घायल कीट और वाइपर के शिकार की क्रियाएं समान होनी चाहिए। आश्चर्य? व्यर्थ में। तो, टिक काटने के बाद क्या परिणाम हो सकते हैं, हम चर्चा नहीं करेंगे - यह एक अन्य लेख का विषय है। स्मरण करो कि पहले क्या करना है। यह सही है, आपको जल्द से जल्द और सही तरीके से परजीवी का पता लगाने की आवश्यकता है । ऐसा ही तब किया जाना चाहिए जब एक सांप काटता है - समय और सक्षम रूप से सहायता प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है। पीड़ित को लेटाओ ताकि सिर शरीर के स्तर से नीचे हो - इससे मस्तिष्क परिसंचरण के उल्लंघन की संभावना कम हो जाएगी। अंग से सभी गहने निकालें । पक्षों से काटने को काटें, इस प्रकार घाव को खोलना, और अपने मुंह से पंद्रह मिनट के लिए जहर में चूसना, इसे बाहर थूकना । शराब या आयोडीन के साथ घाव कीटाणुरहित करें। एक पट्टी या पट्टी के साथ प्रभावित अंग को स्थिर करें। रोगी को पर्याप्त मात्रा में पेय दें। उसे जल्द से जल्द सुविधा में ले जाएं। हर समय एक वाइपर के काटने के बाद परिणामउन्होंने लोगों को इतना डरा दिया कि मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए वे कई पूरी तरह से बेकार प्रक्रियाओं के साथ आए जो न केवल रोगी की स्थिति को कम करने में असमर्थ हैं, बल्कि नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए, याद रखें कि आपको सांप के काटने से नहीं करना चाहिए। - किसी भी तरह से एक हार्नेस लागू न करें! यह बेकार है, और इसके अलावा, जहर पहले से ही शरीर के ऊतकों पर विनाशकारी रूप से कार्य करता है, और अगर हम इस प्लाइट को जोड़ते हैं जो रक्त परिसंचरण में हस्तक्षेप करता है, तो कुछ ही मिनटों में उनकी मृत्यु हो सकती है। और हार्नेस को हटाने के बाद इस के परिणामस्वरूप गठित अपघटन उत्पादों, मौजूदा विषाक्तता को बढ़ा देगा। - काटने की जगह को सावधानी न करें! आप मौजूदा घाव में एक जलन जोड़ देंगे, और यह बिल्कुल अर्थहीन है। - घाव न काटें - यह बेकार है, लेकिन संक्रमण से नींद नहीं आती है। - रोगी को शराब न दें - यह पूरे शरीर में जहर को तेजी से फैलाने में मदद करेगा। - पृथ्वी के साथ घाव को छिड़कें नहीं, इसके लिए वेब या घास न लगाएं - टेटनस को छोड़कर, आपको ऐसी प्रक्रियाओं से कुछ भी नहीं मिलेगा।
यह एक परिस्थिति होती है जिसमें कोई व्यक्ति या संगठन एक से अधिक हितों या गोल को हासिल करने में लिप्त हो जिनमें आपसी टकराव हो. इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों के दिल और दिमाग में आईपीएल 2020 का मुकाबला छाया हुआ है। हालांकि इस लीग में क्रिकेट फैंस को तब बड़ा झटका लगा था, बीते मंगलवार आईपीएल 2019 का मैच राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच में खेला गया। इस मैच में राजस्थान को पंजाब ने हरा दिया।
यह एक परिस्थिति होती है जिसमें कोई व्यक्ति या संगठन एक से अधिक हितों या गोल को हासिल करने में लिप्त हो जिनमें आपसी टकराव हो. इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों के दिल और दिमाग में आईपीएल दो हज़ार बीस का मुकाबला छाया हुआ है। हालांकि इस लीग में क्रिकेट फैंस को तब बड़ा झटका लगा था, बीते मंगलवार आईपीएल दो हज़ार उन्नीस का मैच राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच में खेला गया। इस मैच में राजस्थान को पंजाब ने हरा दिया।
पिछले सप्ताह कथित लूट मामले में उत्तराखंड कांग्रेस महासचिव अनुपम शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। एक अधिकारी ने सोमवार को यहां यह जानकारी दी। शर्मा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य भी हैं। उन्हें तीन पुलिसकर्मियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने चुनाव के उद्देश्य से कथित तौर पर साजिश रची और एक करोड़ रुपये से भरा बैग लूट लिया था। सिंह ने बताया कि शर्मा को राज्य के अन्य पार्टी पदों से भी हटा दिया जाएगा। शर्मा राज्य कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी हैं। हालांकि, सिंह ने कार्रवाई के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई। शर्मा, सब इंस्पेक्टर दिनेश नेगी, कांस्टेबल मनोज अधिकारी और पुलिस ड्राइवर हिमांशु उपाध्याय को 16 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 'ब्लैक बैग' लेकर जा रहे प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार से 4 अप्रैल को कथित रूप से पैसे लूटने सहित विभिन्न आरोपों में जेल भेजा गया है। पंवार ने शुरुआत में जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों से कहा था कि यह पैसा उत्तराखंड में 11 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए है। शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सभी तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की संभावना है क्योंकि मामला विभाग के लिए शर्म की बात है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने इस घटना को लेकर कांग्रेस की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया है।
पिछले सप्ताह कथित लूट मामले में उत्तराखंड कांग्रेस महासचिव अनुपम शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। एक अधिकारी ने सोमवार को यहां यह जानकारी दी। शर्मा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी हैं। उन्हें तीन पुलिसकर्मियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने चुनाव के उद्देश्य से कथित तौर पर साजिश रची और एक करोड़ रुपये से भरा बैग लूट लिया था। सिंह ने बताया कि शर्मा को राज्य के अन्य पार्टी पदों से भी हटा दिया जाएगा। शर्मा राज्य कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी हैं। हालांकि, सिंह ने कार्रवाई के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई। शर्मा, सब इंस्पेक्टर दिनेश नेगी, कांस्टेबल मनोज अधिकारी और पुलिस ड्राइवर हिमांशु उपाध्याय को सोलह अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 'ब्लैक बैग' लेकर जा रहे प्रॉपर्टी डीलर अनुरोध पंवार से चार अप्रैल को कथित रूप से पैसे लूटने सहित विभिन्न आरोपों में जेल भेजा गया है। पंवार ने शुरुआत में जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों से कहा था कि यह पैसा उत्तराखंड में ग्यारह अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए है। शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सभी तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की संभावना है क्योंकि मामला विभाग के लिए शर्म की बात है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने इस घटना को लेकर कांग्रेस की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ये भी नहीं पता है कि पूजा में कैसे बैठते हैं। योगी ने कहा कि एक बार उन्हें काशी के पंडित ने टोकते हुए कहा था कि ठीक से बैठिये ये पूजा है कोई नमाज नहीं। सीएम योगी का ये बयान उस वक्त आया है जब राहुल गांधी गुजरात दौरों पर जमकर मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे हैं। गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव पर योगी आदित्य नाथ ने कहा कि हम अपने लक्ष्य से ज्यादा सीटें जीतेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों को लेकर योगी ने कहा कि निकाय चुनाव में हमारी जीत पक्की है और हम विजय हासिल कर राज्य का विकास करेंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लिये बिना उन पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि हमारे विरोधी दल तो चुनाव से पहले ही हार मान चुके हैं इसीलिए जनसभाएं छोड़कर घर में बैठ ट्वीट कर रहे हैं। आपको बता दें कि पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा सीट और मध्यप्रदेश के चित्रकूट लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई है। बीजेपी राहुल गांधी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छेड़ रही। इसी क्रम में राहुल के मंदिर में दर्शन करने को लेकर योगी आदित्य नाथ ने भी उनकी चुटकी ली है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ये भी नहीं पता है कि पूजा में कैसे बैठते हैं। योगी ने कहा कि एक बार उन्हें काशी के पंडित ने टोकते हुए कहा था कि ठीक से बैठिये ये पूजा है कोई नमाज नहीं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ये भी नहीं पता है कि पूजा में कैसे बैठते हैं। योगी ने कहा कि एक बार उन्हें काशी के पंडित ने टोकते हुए कहा था कि ठीक से बैठिये ये पूजा है कोई नमाज नहीं। सीएम योगी का ये बयान उस वक्त आया है जब राहुल गांधी गुजरात दौरों पर जमकर मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे हैं। गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव पर योगी आदित्य नाथ ने कहा कि हम अपने लक्ष्य से ज्यादा सीटें जीतेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों को लेकर योगी ने कहा कि निकाय चुनाव में हमारी जीत पक्की है और हम विजय हासिल कर राज्य का विकास करेंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लिये बिना उन पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि हमारे विरोधी दल तो चुनाव से पहले ही हार मान चुके हैं इसीलिए जनसभाएं छोड़कर घर में बैठ ट्वीट कर रहे हैं। आपको बता दें कि पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा सीट और मध्यप्रदेश के चित्रकूट लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई है। बीजेपी राहुल गांधी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छेड़ रही। इसी क्रम में राहुल के मंदिर में दर्शन करने को लेकर योगी आदित्य नाथ ने भी उनकी चुटकी ली है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ये भी नहीं पता है कि पूजा में कैसे बैठते हैं। योगी ने कहा कि एक बार उन्हें काशी के पंडित ने टोकते हुए कहा था कि ठीक से बैठिये ये पूजा है कोई नमाज नहीं।
नई दिल्ली। देश में लगातार पत्रकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद अब एक और पत्रकार की उनकी मां समेत हत्या कर दी गई है। पंजाब के मोहाली में वरिष्ठ पत्रकार के. जे. सिंह और उनकी मां गुरुचरन कौर की हत्या कर दी गई है। पुलिस को दोनों के शव मोहाली स्थित उनके आवासा फेज-3, बी-2 से मिले हैं इसके बाद से ही पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। बताते चलें कि वरिष्ठ पत्रकार के. जे. सिंह अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में पूर्व समाचार संपादक थे। उनकी उम्र लगभग 60 वर्ष थी और उनकी मां की उम्र 92 वर्ष थी। मोहाली के डीएसपी आलम विजय सिंह का कहना है कि दोनों की हत्या किसी धार दार हथियार से की गई है हालाकि पुलिस ने अभी हत्या को लेकर आशंका ही जाहिर की है। उन्होंने आगे बताया कि उन लोगों की गर्दन पर चोट के निशान भी पाए गए हैं। पत्रकार के. जे. सिंह और उनकी माता की हत्या पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने ट्वीट कर दुख प्रकट किया है। इसके साथ ही साथ उन्होंने पुलिस से अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने की अपील भी की है। गौरतलब है कि हाल ही में बेंगलुरू में कन्नड़ भाषा की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके साथ ही साथ त्रिपुरा में भी रिपोर्टिंग के दौरान शांतनु भौमिक का अपहरण कर लिया गया था जिसके बाद उनकी भी निर्मम हत्या कर दी गई थी।
नई दिल्ली। देश में लगातार पत्रकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद अब एक और पत्रकार की उनकी मां समेत हत्या कर दी गई है। पंजाब के मोहाली में वरिष्ठ पत्रकार के. जे. सिंह और उनकी मां गुरुचरन कौर की हत्या कर दी गई है। पुलिस को दोनों के शव मोहाली स्थित उनके आवासा फेज-तीन, बी-दो से मिले हैं इसके बाद से ही पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। बताते चलें कि वरिष्ठ पत्रकार के. जे. सिंह अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में पूर्व समाचार संपादक थे। उनकी उम्र लगभग साठ वर्ष थी और उनकी मां की उम्र बानवे वर्ष थी। मोहाली के डीएसपी आलम विजय सिंह का कहना है कि दोनों की हत्या किसी धार दार हथियार से की गई है हालाकि पुलिस ने अभी हत्या को लेकर आशंका ही जाहिर की है। उन्होंने आगे बताया कि उन लोगों की गर्दन पर चोट के निशान भी पाए गए हैं। पत्रकार के. जे. सिंह और उनकी माता की हत्या पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने ट्वीट कर दुख प्रकट किया है। इसके साथ ही साथ उन्होंने पुलिस से अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने की अपील भी की है। गौरतलब है कि हाल ही में बेंगलुरू में कन्नड़ भाषा की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके साथ ही साथ त्रिपुरा में भी रिपोर्टिंग के दौरान शांतनु भौमिक का अपहरण कर लिया गया था जिसके बाद उनकी भी निर्मम हत्या कर दी गई थी।
उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद प्रमुख रूप से शहर की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले विभिन्न उद्योगों पर निर्भर करता है. इसलिए, बहुत कुशल कर्मचारी, रोजगार के लिए इस शहर में जाएं. चाहे आप वेतनभोगी हों या स्व-व्यवसायी हों, बजाज फिनसर्व गाज़ियाबाद में विशेष लाभों के साथ प्रॉपर्टी पर उच्च मूल्य वाले लोन लेकर आता है. हमारी किसी भी 3 ब्रांच में जाएं या तेज़ अप्रूवल का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन का विकल्प चुनें. गाज़ियाबाद में लोन लेने में रुचि रखने वाले एप्लीकेंट बजाज फिनसर्व प्रॉपर्टी पर लोन की विशेषताओं के बारे में जानने के लिए अधिक पढ़ सकते हैं. अपने मौजूदा प्रॉपर्टी पर लोन को बजाज फिनसर्व में ट्रांसफर करें और बेहतर ब्याज़ दरों का लाभ उठाने के लिए रु. 1 करोड़ तक के टॉप-अप लोन का लाभ उठाएं*. पुनर्भुगतान अवधि 15 वर्ष तक की होती है, जिससे आपको बिना किसी दबाव के अपने ईएमआई भुगतान को प्री प्लान करने और शिड्यूल करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है. पात्रता के आधार पर रु. 10.50 करोड़* या उससे अधिक के प्रॉपर्टी पर लोन का उपयोग करके बिना किसी प्रतिबंध के अपनी बड़ी आर्थिक जरूरतों को पूरा करें. बाहरी बेंचमार्क से जुड़े बजाज फिनसर्व होम लोन का विकल्प चुनकर, एप्लीकेंट अनुकूल मार्केट स्थितियों के साथ कम ईएमआई का लाभ उठा सकते हैं. बजाज फिनसर्व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने सभी लोन विकास और ईएमआई शिड्यूल चेक करें. प्रॉपर्टी पर बजाज फिनसर्व ऑनलाइन लोन अप्लाई करके और आसान अप्रूवल प्राप्त करके भारत में कहीं से भी प्रॉपर्टी पर लोन के लिए एप्लीकेशन का सही अनुभव लें. बजाज फिनसर्व आपको लोन को फोरक्लोज़ करने या बिना किसी अतिरिक्त लागत या प्री-पेमेंट दंड के पार्ट-प्री-पेमेंट करने की अनुमति देता है - अधिकतम बचत का तरीका बनाता है. ऊपरी गंगा क्षेत्र में स्थित गाज़ियाबाद को हिंडन नदी द्वारा दो प्रमुख भागों में बांटा जाता है. शहर की अर्थव्यवस्था अपने विभिन्न उद्योगों द्वारा चलाई जाती है, जहां इस्पात का क्षेत्र प्रमुख है. वर्तमान में, गाज़ियाबाद में 500 से अधिक स्टील संगठन हैं. शहर में एक समृद्ध मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी है जो गैर-कृषि कार्यों में अपनी 53% जनसंख्या को रोज़गार देता है. इनमें डेयरी प्रोडक्ट, कपड़े, औद्योगिक मशीनरी, तंबाकू उत्पादन, पॉटरी, सिरेमिक्स आदि शामिल हैं. बजाज फिनसर्व आपकी आवश्यकताओं को पूरा करने या किसी आर्थिक संकट को मैनेज करने के लिए, गाज़ियाबाद में रु.10.50 करोड़ तक के प्रॉपर्टी पर लोन ऑफर करता है*. वेतनभोगी व्यक्ति अपनी पात्रता के आधार पर रु. 1 करोड़ तक लोन ले सकते हैं. लोन एप्लीकेशन को प्रोसेस करने में हमें केवल 4 दिन* तक का समय लगता है. अपनी फाइनेंशियल क्षमता के अनुसार उपयुक्त पुनर्भुगतान शिड्यूल चुनें. हमारे कस्टमर पोर्टल - मेरे अकाउंट के माध्यम से लोन की पूरी जानकारी पाएं. अप्रूवल की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रॉपर्टी पर लोन के लिए इन पात्रता मानदंडों को पूरा करें. Minimum age: 25 years* (18 years for non-financial property owners) Maximum age: 85 years* (including non-financial property owners) मौजूदा क़र्ज़ हटाकर और अपने फाइनेंशियल दायित्वों को कम करके अपनी पात्रता को बेहतर बनाएं. बजाज फिनसर्व पात्र उधारकर्ताओं को कम कठोर नियम और शर्तें प्रदान करता है. हमारे साथ, गाज़ियाबाद में प्रॉपर्टी पर लोन पर पर्सनलाइज़्ड विशेषताओं और लाभों का लाभ उठाएं. प्रॉपर्टी पर लोन की ब्याज़ दरों के अलावा प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के बारे में जानें. अप्लाई करने से पहले सूचित निर्णय लें. नहीं. चाहें आप रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी लोन में से कोई भी लोन लें, आपको प्रॉपर्टी पर लोन के लिए गारंटर लाना अनिवार्य नहीं है. छोटी ईएमआई के लिए लंबी पुनर्भुगतान अवधि चुनें. आप फ्लेक्सी लोन सुविधा का लाभ उठाकर अपनी मासिक किश्तों को भी कम कर सकते हैं. यहां, केवल उपयोग की गई राशि पर ब्याज़ दर लगाई जाती है. वेतनभोगी एप्लिकेंट रु. 1 करोड़ तक का लोन ले सकते हैं जबकि स्व-व्यवसायी एप्लिकेंट रु. 10.50 करोड़ तक का लोन ले सकते हैं*. हालांकि, अंतिम राशि कई पात्रता मानदंडों और प्रॉपर्टी वैल्यू पर निर्भर करती है. सिबिल स्कोर लोन मंजूर करने का एक महत्वपूर्ण मानदंड है. सुनिश्चित करें कि पात्रता प्राप्त करने के लिए कम से कम 750 का स्कोर हो.
उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद प्रमुख रूप से शहर की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले विभिन्न उद्योगों पर निर्भर करता है. इसलिए, बहुत कुशल कर्मचारी, रोजगार के लिए इस शहर में जाएं. चाहे आप वेतनभोगी हों या स्व-व्यवसायी हों, बजाज फिनसर्व गाज़ियाबाद में विशेष लाभों के साथ प्रॉपर्टी पर उच्च मूल्य वाले लोन लेकर आता है. हमारी किसी भी तीन ब्रांच में जाएं या तेज़ अप्रूवल का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन का विकल्प चुनें. गाज़ियाबाद में लोन लेने में रुचि रखने वाले एप्लीकेंट बजाज फिनसर्व प्रॉपर्टी पर लोन की विशेषताओं के बारे में जानने के लिए अधिक पढ़ सकते हैं. अपने मौजूदा प्रॉपर्टी पर लोन को बजाज फिनसर्व में ट्रांसफर करें और बेहतर ब्याज़ दरों का लाभ उठाने के लिए रु. एक करोड़ तक के टॉप-अप लोन का लाभ उठाएं*. पुनर्भुगतान अवधि पंद्रह वर्ष तक की होती है, जिससे आपको बिना किसी दबाव के अपने ईएमआई भुगतान को प्री प्लान करने और शिड्यूल करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है. पात्रता के आधार पर रु. दस.पचास करोड़* या उससे अधिक के प्रॉपर्टी पर लोन का उपयोग करके बिना किसी प्रतिबंध के अपनी बड़ी आर्थिक जरूरतों को पूरा करें. बाहरी बेंचमार्क से जुड़े बजाज फिनसर्व होम लोन का विकल्प चुनकर, एप्लीकेंट अनुकूल मार्केट स्थितियों के साथ कम ईएमआई का लाभ उठा सकते हैं. बजाज फिनसर्व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने सभी लोन विकास और ईएमआई शिड्यूल चेक करें. प्रॉपर्टी पर बजाज फिनसर्व ऑनलाइन लोन अप्लाई करके और आसान अप्रूवल प्राप्त करके भारत में कहीं से भी प्रॉपर्टी पर लोन के लिए एप्लीकेशन का सही अनुभव लें. बजाज फिनसर्व आपको लोन को फोरक्लोज़ करने या बिना किसी अतिरिक्त लागत या प्री-पेमेंट दंड के पार्ट-प्री-पेमेंट करने की अनुमति देता है - अधिकतम बचत का तरीका बनाता है. ऊपरी गंगा क्षेत्र में स्थित गाज़ियाबाद को हिंडन नदी द्वारा दो प्रमुख भागों में बांटा जाता है. शहर की अर्थव्यवस्था अपने विभिन्न उद्योगों द्वारा चलाई जाती है, जहां इस्पात का क्षेत्र प्रमुख है. वर्तमान में, गाज़ियाबाद में पाँच सौ से अधिक स्टील संगठन हैं. शहर में एक समृद्ध मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी है जो गैर-कृषि कार्यों में अपनी तिरेपन% जनसंख्या को रोज़गार देता है. इनमें डेयरी प्रोडक्ट, कपड़े, औद्योगिक मशीनरी, तंबाकू उत्पादन, पॉटरी, सिरेमिक्स आदि शामिल हैं. बजाज फिनसर्व आपकी आवश्यकताओं को पूरा करने या किसी आर्थिक संकट को मैनेज करने के लिए, गाज़ियाबाद में रु.दस.पचास करोड़ तक के प्रॉपर्टी पर लोन ऑफर करता है*. वेतनभोगी व्यक्ति अपनी पात्रता के आधार पर रु. एक करोड़ तक लोन ले सकते हैं. लोन एप्लीकेशन को प्रोसेस करने में हमें केवल चार दिन* तक का समय लगता है. अपनी फाइनेंशियल क्षमता के अनुसार उपयुक्त पुनर्भुगतान शिड्यूल चुनें. हमारे कस्टमर पोर्टल - मेरे अकाउंट के माध्यम से लोन की पूरी जानकारी पाएं. अप्रूवल की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रॉपर्टी पर लोन के लिए इन पात्रता मानदंडों को पूरा करें. Minimum age: पच्चीस years* Maximum age: पचासी years* मौजूदा क़र्ज़ हटाकर और अपने फाइनेंशियल दायित्वों को कम करके अपनी पात्रता को बेहतर बनाएं. बजाज फिनसर्व पात्र उधारकर्ताओं को कम कठोर नियम और शर्तें प्रदान करता है. हमारे साथ, गाज़ियाबाद में प्रॉपर्टी पर लोन पर पर्सनलाइज़्ड विशेषताओं और लाभों का लाभ उठाएं. प्रॉपर्टी पर लोन की ब्याज़ दरों के अलावा प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के बारे में जानें. अप्लाई करने से पहले सूचित निर्णय लें. नहीं. चाहें आप रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी लोन में से कोई भी लोन लें, आपको प्रॉपर्टी पर लोन के लिए गारंटर लाना अनिवार्य नहीं है. छोटी ईएमआई के लिए लंबी पुनर्भुगतान अवधि चुनें. आप फ्लेक्सी लोन सुविधा का लाभ उठाकर अपनी मासिक किश्तों को भी कम कर सकते हैं. यहां, केवल उपयोग की गई राशि पर ब्याज़ दर लगाई जाती है. वेतनभोगी एप्लिकेंट रु. एक करोड़ तक का लोन ले सकते हैं जबकि स्व-व्यवसायी एप्लिकेंट रु. दस.पचास करोड़ तक का लोन ले सकते हैं*. हालांकि, अंतिम राशि कई पात्रता मानदंडों और प्रॉपर्टी वैल्यू पर निर्भर करती है. सिबिल स्कोर लोन मंजूर करने का एक महत्वपूर्ण मानदंड है. सुनिश्चित करें कि पात्रता प्राप्त करने के लिए कम से कम सात सौ पचास का स्कोर हो.
ज्ञानवापी परिसर में स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण की याचिका पर जिला जज की अदालत में बुधवार को हिंदू पक्ष की बहस पूरी हो गई। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख गुरुवार की तय की है। वाराणसीः उत्तर प्रदेश में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर बुधवार 13 जुलाई को जिला अदालत के जज एके विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई की गई। बुधवार को कोर्ट में हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं। अदालत में हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि 1991 का वरशिप एक्ट किसी भी तरीके से इस मामले में लागू नहीं होता है। जिस जमीन पर मुस्लिम पक्ष दावा कर रहा है वो जमीन आदि विश्वेश्वर महादेव की है। उस पर जबरजस्ती नमाज पढ़ी जा रही है। हालांकि कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख रखी है। बुधवार को हुई इस मामले में करीब ढाई घंटे तक कोर्ट की बहस हुई। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में राइट टू वॉरशिप ऐक्ट पर पुराने केस का हवाला दिया। 16वीं शताब्दी का इतिहास बताया, 8 मंडपों का जिक्र किया। साथ ही काशी का इतिहास, वैभव काशी का हवाला दिया गया। हरिशंकर ने सर्वे के दौरान शंख, गदा, चक्र, त्रिशूल, कमल, सूर्य के प्रमाण को लेकर कहा कि यह साबित करते हैं कि यह मंदिर ही है। आगे कहते है कि पश्चिम में ध्वंस आराध्य स्थल में हिंदू प्रतीकों की बहुल्यता यह साबित करती है कि यही आदि विश्वेश्वर हैं। इस दौरान कोर्ट में वकील कमिश्नर रह चुके विशाल सिंह भी उपस्थित रहे। बता दें कि इससे पहले मंगलवार को मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों को पूरा कर लिया था। इसके बाद हिंदू पक्ष ने दलीलें रखी थी। लेकिन सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने नई याचिका दाखिल की है। जिसमें हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन को हटाने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि विष्णु जैन वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों से केस लड़ रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष की तरफ से लगाई गई याचिका पर हिंदू पक्ष के वकील जैन ने कहा कि तकनीकी के आधार पर की याचिका खारिज हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार को रिप्रेजेंट करते हैं। लेकिन यहां हिंदू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया है कि यूपी सरकार की तरफ से उन्होंने वकालतनामा दाखिल नहीं किया है। आगे कहते है कि ऐसे में इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार सिर्फ एक फॉर्मल पार्टी ही है।
ज्ञानवापी परिसर में स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण की याचिका पर जिला जज की अदालत में बुधवार को हिंदू पक्ष की बहस पूरी हो गई। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख गुरुवार की तय की है। वाराणसीः उत्तर प्रदेश में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर बुधवार तेरह जुलाई को जिला अदालत के जज एके विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई की गई। बुधवार को कोर्ट में हिंदू पक्ष ने अपनी दलीलें रखीं। अदालत में हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे का वरशिप एक्ट किसी भी तरीके से इस मामले में लागू नहीं होता है। जिस जमीन पर मुस्लिम पक्ष दावा कर रहा है वो जमीन आदि विश्वेश्वर महादेव की है। उस पर जबरजस्ती नमाज पढ़ी जा रही है। हालांकि कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख रखी है। बुधवार को हुई इस मामले में करीब ढाई घंटे तक कोर्ट की बहस हुई। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में राइट टू वॉरशिप ऐक्ट पर पुराने केस का हवाला दिया। सोलहवीं शताब्दी का इतिहास बताया, आठ मंडपों का जिक्र किया। साथ ही काशी का इतिहास, वैभव काशी का हवाला दिया गया। हरिशंकर ने सर्वे के दौरान शंख, गदा, चक्र, त्रिशूल, कमल, सूर्य के प्रमाण को लेकर कहा कि यह साबित करते हैं कि यह मंदिर ही है। आगे कहते है कि पश्चिम में ध्वंस आराध्य स्थल में हिंदू प्रतीकों की बहुल्यता यह साबित करती है कि यही आदि विश्वेश्वर हैं। इस दौरान कोर्ट में वकील कमिश्नर रह चुके विशाल सिंह भी उपस्थित रहे। बता दें कि इससे पहले मंगलवार को मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों को पूरा कर लिया था। इसके बाद हिंदू पक्ष ने दलीलें रखी थी। लेकिन सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने नई याचिका दाखिल की है। जिसमें हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन को हटाने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि विष्णु जैन वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों से केस लड़ रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष की तरफ से लगाई गई याचिका पर हिंदू पक्ष के वकील जैन ने कहा कि तकनीकी के आधार पर की याचिका खारिज हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार को रिप्रेजेंट करते हैं। लेकिन यहां हिंदू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया है कि यूपी सरकार की तरफ से उन्होंने वकालतनामा दाखिल नहीं किया है। आगे कहते है कि ऐसे में इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार सिर्फ एक फॉर्मल पार्टी ही है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
"हम्म्म्म.....सारे आदमियो को तैयार करो हम अभी उसके मेंशन के लिए निकल रहे है।" माज़ ने जॉन से कहा तो वोह वहां से चला गया। "माहेरा मैं चाहता हु की तुम मॉम के साथ उनके कमरे में रो क्योंकि किसी को भी इस रूम के बारे में पता नही है और जल्दी ही अन्नू और सोफिया भी वहां आ जाएंगी और कुछ भी हो जाये तुम किसी को भी उस रूम से बाहर मत आने देना।" माज़ ने उसका चेहरा अपने हाथों में ले कर कहा। "मैं उसे खुद मारना चाहती हु माज़।" माहेरा उसकी बात सुनकर अपना सिर हिलाते हुए बोली। "तुम फिक्र मत करो उसे इतनी आसान मौत नही मिलेगी।" माज़ उसका सिर चूम कर बोला तो माहेरा ने उसे देख कर अपने हाथ से उसका चेहरा पकड़ कर नीचे झुकाया और उसके माथे पर किस करके धीरी आवाज़ में बोली। "अपना खयाल रखना, मैं तुम्हे खोना नही चाहती। तुम मेरे लिए बहोत कीमती हो।" "तुम फिक्र मत करो अगर मैं अपना ख्याल नही रखूंगा तो मेरे बीस बच्चे कहा से होंगे।" माज़ ने अपनी मुस्कुराहट छुपाते हुए कहा। जबकि उसकी बात सुनकर माहेरा की आंखे हैरानी से फैल गयी। "बीस बच्चे!!!!! तुमने क्या मुझे खरगोश समझ रखा है जो मैं इतने बच्चे पैदा करूँगी।" माहेरा ने उसे घूरते हुए कहा। "नही मुझे तो बीस ही चाहिए कुछ तुम्हारी तरह शैतान सी और कुछ मेरी तरह प्यारे से।" माज़ मुस्कुराते हुए बोला। "तुम्हे जाना था ना तो तुम बकवास क्यों कर रहे हो!" माहेरा ने दोनो हाथ कमर पर रखते हुए उसे घूर कर देखते हुए कहा। "मैं जा रहा तुम बैठ कर इस बारे में सोचती रहो।" माज़ ने उसके गालो पर किस करके हस्ते हुए कहा और कमरे से निकल गया। माहेरा भी मुस्कुराते हुए अलीज़ा के कमरे में चली गयी। सोफिया रामिश के साथ दी फ्लेवर केफे में बैठी हुई बाते कर रही थी। उस केफे में आज ज़्यादा रश नही था। उनके दो तीन आदमियो के इलावा रॉय का एक आदमी कोने की टेबल पर बैठा सोफिया ओर नज़र रख रहा था। रामिश ने आंखों के इशारे से प्लान शुरू करने के लिए कहा और फिर अपना फोन उठा कर कॉल करने के लिए चला गया। सोफिया ने काँपते हाथो से अपने बैग से ज़हर निकाल कर रामिश की कॉफी में डाल दिया। रामिश वापस आया और मुस्कुराते हुए सोफिया से बात करते हुए कॉफी पीने लगा। थोड़ी देर बाद उसे अपनी सांसे अटकती हुई महसूस होने लगी और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। सोफिया डरते हुए उठ कर उसके पास चली गयी। कोने में बैठे उस आदमी ने रॉय किया और बोला। "बॉस सोफिया ने रामिश को ज़हर दे दिया है।" रॉय ने सोफिया को मारने के लिए कहा और फ़ोन रख दिया। उसने अपनी गन निकाल कर रामिश के पास घबराई हुई खड़ी सोफिया पर निशाना लिया इससे पहले वोह ट्रिगर दबाता जैक्सन ने उसके सिर पर गोली मार कर उसका काम तमाम कर दिया। सोफिया ने तब तक जहेर का एंटीडोट रामिश को दे दिया था। वोह पहेले रॉय का दिया हुआ ज़हर रामिश के लाये हुए जाहेर से बदल चुकी थी। वोह एक माइज़ेज़ ज़हर था जिसके असर से मुंह से झाग तो फौरन निकल आता है लेकिन वोह धीरे धीरे बॉडी पर असर करता है। ज़हर लेते ही सोफिया ने उस आदमी से चुप कर रामिश को एंटीडोट दे दिया था। वोह अब बिल्कुल ठीक था। उसने अपने आदमियो से इलाका क्लियर करने के लिए कहा और जैक्सन के साथ सोफिया को मेंशन भेज कर वहां से माज़ की बताई हुई जगह पर चला गया। रॉय जीत के नशे में चूर क्लब में अपनी जीत का जश्न मना रहा था। उसे बिल्कुल भी खबर नही थी मौत उसकी तरफ बढ़ रही है। माज़ ने अपने आदमियो के साथ पिछले दरवाजे से हमला किया था जबकि सलमान और रामिश ने अगले हिस्से से उस पर हमला किया था। प्लान के मुताबिक वोह धीरे धीरे रॉय के आदमियो को मारते हुए अंदर जा रहे थे। मेंशन के अंदर जा कर उनकी लड़ाई रॉय के आदमियो से शुरू हो गयी थी। माज़ उन सबको मरते हुए क्लब वाले हिस्से में पहोंचा वहां दरवाज़े पर दो आदमी खड़े थे। माज़ ने अपनी साइलेंसर लगी गन से एक ही बार मे उन दोनों को मार दिया और वोह दोनो अगले ही पल ज़मीन पर गिर गए। क्लब के अंदर रॉय के बहोत से आदमी मौजूद थे। माज़ उन सबको मरते हुए आ रहा था तभी एक गोली उसके बाज़ू को छू कर गुज़री। माज़ ने गोली चलाने वाले को देखा फिर अपने सामने बशे में धुत रॉय को देखा जो उस पर गोली चलाने वाला था। माज़ जल्दी से साइड में हुआ और अपने सामने वाले आदमी पर गोली चला कर रॉय के पैर में गोली मार दी। रॉय के राइट हैंड ने उसे गोली लगते ही कवर किया और माज़ पर गोली चलाने ही वाला था तभी पीछे से रामिश ने उस पर गोली चला दी और वोह कुछ ही पल में ज़मीन पर ढेर हो गया। माज़ ने रॉय को देखा जिसका रंग सफेद पड़ चुका था। उन लोगों ने उसके पूरे मेंशन पर कब्ज़ा कर लिया था और उसकी गन भी खाली थी। माज़ ने आगे बढ़ कर टेबल से शराब की बोतल उठायी और उसके सामने खड़ा हो कर बोला। "मैं तुम्हे इतनी आसान मौत नही दूंगा येह मेरी शान के खिलाफ है।" माज़ ने बोलते ही बोतल उसके सिर पर दे मारी और वोह वही बेहोश हो गया। माज़ ने रामिश को इशारा किया तो उसने रॉय को बंधा और अपनी गाड़ी में डाल कर वहां से मेंशन के लिए निकल गया। सलमान ने भी जॉन के साथ मिल कर मेंशन में छोड़े छोटे बम फिट किये और माज़ को ले कर वहां से निकल गया। थोड़ी देर बाद वहां बोम ब्लास्ट हुआ और मेंशन मिट्ठी में मिल गया। माज़ ने अपने बाज़ू को ज़ोर से पकड़ा हुआ था जबकि सलमान उसे ले कर स्टेला के प्राइवेट क्लेनिक जा रहा था। वोह अपनी पट्टी करवा कर वापस मेंशन जा रहा था। रामिश ने पहेले ही रॉय को ले जा कर मेंशन में बंद कर दिया था और उसके पैर की गोली निकलवा दी थी ताकि ज़्यादा खून बहने की वजह से वोह मरना जाए क्योंकि अभी उसे टॉर्चर करना बाकी था। माज़ और सलमान सब से पहेले बेसमेंट में गए और फिर अपने खून से भरे कपड़े बदल कर हॉल में गए जहां सब उन दोनों का ही इंतेज़ार कर रहे थे। माहेरा का दिल जो बेचैन था अब माज़ को देख कर शांत हो गया था। माज़ ने रामिश ने इशारे में रॉय के बारे में पूछा जिसके जवाब में उसने अपना सिर हिला दिया। वोह खामोशी से आ कर माहेरा के पास वाली जगह पर ढेर हो गया। शेर खान अलीज़ा के साथ बैठे थे और रामिश सोफिया के साथ और अन्नू भी सोफिया के साथ बैठी हुई उसके पास सलमान बैठा था। "डैड अब सब कुछ ठीक चल रहा है तो आप मेरी शादी के बारे में क्यों नही सोचते??" अचानक से सलमान बोला तो सबका ध्यान उसकी तरफ चला गया। "सलमान अभी तो तुम छोटे हो अभी तुम्हारे खेलने के दिन है और तुम्हे शर्म नही आती अपनी शादी की बात खुद करते हो।" माज़ उसको तंग करते हुए बोला। "भाई येह मेरे अपने बच्चो के साथ खेलने के दिन है। आपको तो मेरा ज़रा भी ख्याल नही है। खुद तो अपने मज़े से शादी करली है।" सलमान उसकी बात सुनकर चिढ़ कर बोला। "हम्म्म्म.......सही कह रहे हो हम तुझे अब जल्दी से चाचू बनाने की तैयारी करते है। तब तुम्हे बच्चे खेलने को मिल जाएंगे।" माज़ ने हस्ते हुए माहेरा को देखा जो उसे ही घूर कर देख रही थी और शर्म से उसका चेहरा भी लाल हो गया था। "उफ़्फ़फ़!!!!!! भाई आप तो रहने दे। मॉम डैड आप दोनों कुछ अपने इस मासूम बेटे के बारे में भी सोचे।" वोह माज़ की बात पर चिढ़ते हुए मासूम सी शक्ल बना कर शेर खान से बोला। सब उन दोनों की नोक झोंक पर मुस्कुरा रहे थे। "माज़ मेरे बेटे को तंग मत करो। सलमान हम जल्द ही तुम्हरी शादी कर लेंगे पहेले लड़की से यो पूछ लो वोह तैयार है क्या?" अलीज़ा ने मुस्कुराते हुए सलमान से कहा। अलीज़ा की बाते सुनकर सलमान की आंखे चमक गयी। "मॉम मुझे ना शर्म आती है। मेरी जगह ना आप पूछ ली जिये।" वोह झूठ मुठ का शर्माते हुए बोला तो रामिश ने अपने पास पड़ा पिल्लों उठा कर खींच कर उसकी तरफ फेंका। "अभी तो तुम्हे पूछते हुए शर्म आ रही है तो शादी के वक़्त तो तुम शर्म से मुंह छुपाते हुए घूमोगे।" रामिश ने उसे झूठा शर्माते देख चिढ़ कर कहा। "भाई आप मुझे तंग कर रहे है।" सलमान आंखे झपकाता हुआ मासूम सी शक्ल बना कर बोला तो सब हसने लगे। "इन सबको छोड़ो सलमान मैं तुम्हारी शादी अगले हफ्ते ही कर दूंगी मगर मेरी एक शर्त है??" माहेरा ने हसने के बाद सीरियस होते हुए कहा। "भाभी जो भी शर्त है मैं मानने के लिए तैयार हूं बस आप सबको मेरी शादी के लिए मना ले।" सलमान भागते हुए आ कर उसके कदमो में बैठते हुए बोला। "मैं चाहती हु तुम अपनी शादी पर मेरे भइयो को इटली बुलाओ।" माहेरा ने कहा तो माज़ ने उसकी तरफ देखा। अगर वोह येह बात माज़ से करती तो वोह कभी उसे मना नही करता मगर वोह सलमान से अब इस लिए कह रही थी क्योंकि वोह उसकी मुश्किल बढ़ाना नही चाहती थी।
"हम्म्म्म.....सारे आदमियो को तैयार करो हम अभी उसके मेंशन के लिए निकल रहे है।" माज़ ने जॉन से कहा तो वोह वहां से चला गया। "माहेरा मैं चाहता हु की तुम मॉम के साथ उनके कमरे में रो क्योंकि किसी को भी इस रूम के बारे में पता नही है और जल्दी ही अन्नू और सोफिया भी वहां आ जाएंगी और कुछ भी हो जाये तुम किसी को भी उस रूम से बाहर मत आने देना।" माज़ ने उसका चेहरा अपने हाथों में ले कर कहा। "मैं उसे खुद मारना चाहती हु माज़।" माहेरा उसकी बात सुनकर अपना सिर हिलाते हुए बोली। "तुम फिक्र मत करो उसे इतनी आसान मौत नही मिलेगी।" माज़ उसका सिर चूम कर बोला तो माहेरा ने उसे देख कर अपने हाथ से उसका चेहरा पकड़ कर नीचे झुकाया और उसके माथे पर किस करके धीरी आवाज़ में बोली। "अपना खयाल रखना, मैं तुम्हे खोना नही चाहती। तुम मेरे लिए बहोत कीमती हो।" "तुम फिक्र मत करो अगर मैं अपना ख्याल नही रखूंगा तो मेरे बीस बच्चे कहा से होंगे।" माज़ ने अपनी मुस्कुराहट छुपाते हुए कहा। जबकि उसकी बात सुनकर माहेरा की आंखे हैरानी से फैल गयी। "बीस बच्चे!!!!! तुमने क्या मुझे खरगोश समझ रखा है जो मैं इतने बच्चे पैदा करूँगी।" माहेरा ने उसे घूरते हुए कहा। "नही मुझे तो बीस ही चाहिए कुछ तुम्हारी तरह शैतान सी और कुछ मेरी तरह प्यारे से।" माज़ मुस्कुराते हुए बोला। "तुम्हे जाना था ना तो तुम बकवास क्यों कर रहे हो!" माहेरा ने दोनो हाथ कमर पर रखते हुए उसे घूर कर देखते हुए कहा। "मैं जा रहा तुम बैठ कर इस बारे में सोचती रहो।" माज़ ने उसके गालो पर किस करके हस्ते हुए कहा और कमरे से निकल गया। माहेरा भी मुस्कुराते हुए अलीज़ा के कमरे में चली गयी। सोफिया रामिश के साथ दी फ्लेवर केफे में बैठी हुई बाते कर रही थी। उस केफे में आज ज़्यादा रश नही था। उनके दो तीन आदमियो के इलावा रॉय का एक आदमी कोने की टेबल पर बैठा सोफिया ओर नज़र रख रहा था। रामिश ने आंखों के इशारे से प्लान शुरू करने के लिए कहा और फिर अपना फोन उठा कर कॉल करने के लिए चला गया। सोफिया ने काँपते हाथो से अपने बैग से ज़हर निकाल कर रामिश की कॉफी में डाल दिया। रामिश वापस आया और मुस्कुराते हुए सोफिया से बात करते हुए कॉफी पीने लगा। थोड़ी देर बाद उसे अपनी सांसे अटकती हुई महसूस होने लगी और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। सोफिया डरते हुए उठ कर उसके पास चली गयी। कोने में बैठे उस आदमी ने रॉय किया और बोला। "बॉस सोफिया ने रामिश को ज़हर दे दिया है।" रॉय ने सोफिया को मारने के लिए कहा और फ़ोन रख दिया। उसने अपनी गन निकाल कर रामिश के पास घबराई हुई खड़ी सोफिया पर निशाना लिया इससे पहले वोह ट्रिगर दबाता जैक्सन ने उसके सिर पर गोली मार कर उसका काम तमाम कर दिया। सोफिया ने तब तक जहेर का एंटीडोट रामिश को दे दिया था। वोह पहेले रॉय का दिया हुआ ज़हर रामिश के लाये हुए जाहेर से बदल चुकी थी। वोह एक माइज़ेज़ ज़हर था जिसके असर से मुंह से झाग तो फौरन निकल आता है लेकिन वोह धीरे धीरे बॉडी पर असर करता है। ज़हर लेते ही सोफिया ने उस आदमी से चुप कर रामिश को एंटीडोट दे दिया था। वोह अब बिल्कुल ठीक था। उसने अपने आदमियो से इलाका क्लियर करने के लिए कहा और जैक्सन के साथ सोफिया को मेंशन भेज कर वहां से माज़ की बताई हुई जगह पर चला गया। रॉय जीत के नशे में चूर क्लब में अपनी जीत का जश्न मना रहा था। उसे बिल्कुल भी खबर नही थी मौत उसकी तरफ बढ़ रही है। माज़ ने अपने आदमियो के साथ पिछले दरवाजे से हमला किया था जबकि सलमान और रामिश ने अगले हिस्से से उस पर हमला किया था। प्लान के मुताबिक वोह धीरे धीरे रॉय के आदमियो को मारते हुए अंदर जा रहे थे। मेंशन के अंदर जा कर उनकी लड़ाई रॉय के आदमियो से शुरू हो गयी थी। माज़ उन सबको मरते हुए क्लब वाले हिस्से में पहोंचा वहां दरवाज़े पर दो आदमी खड़े थे। माज़ ने अपनी साइलेंसर लगी गन से एक ही बार मे उन दोनों को मार दिया और वोह दोनो अगले ही पल ज़मीन पर गिर गए। क्लब के अंदर रॉय के बहोत से आदमी मौजूद थे। माज़ उन सबको मरते हुए आ रहा था तभी एक गोली उसके बाज़ू को छू कर गुज़री। माज़ ने गोली चलाने वाले को देखा फिर अपने सामने बशे में धुत रॉय को देखा जो उस पर गोली चलाने वाला था। माज़ जल्दी से साइड में हुआ और अपने सामने वाले आदमी पर गोली चला कर रॉय के पैर में गोली मार दी। रॉय के राइट हैंड ने उसे गोली लगते ही कवर किया और माज़ पर गोली चलाने ही वाला था तभी पीछे से रामिश ने उस पर गोली चला दी और वोह कुछ ही पल में ज़मीन पर ढेर हो गया। माज़ ने रॉय को देखा जिसका रंग सफेद पड़ चुका था। उन लोगों ने उसके पूरे मेंशन पर कब्ज़ा कर लिया था और उसकी गन भी खाली थी। माज़ ने आगे बढ़ कर टेबल से शराब की बोतल उठायी और उसके सामने खड़ा हो कर बोला। "मैं तुम्हे इतनी आसान मौत नही दूंगा येह मेरी शान के खिलाफ है।" माज़ ने बोलते ही बोतल उसके सिर पर दे मारी और वोह वही बेहोश हो गया। माज़ ने रामिश को इशारा किया तो उसने रॉय को बंधा और अपनी गाड़ी में डाल कर वहां से मेंशन के लिए निकल गया। सलमान ने भी जॉन के साथ मिल कर मेंशन में छोड़े छोटे बम फिट किये और माज़ को ले कर वहां से निकल गया। थोड़ी देर बाद वहां बोम ब्लास्ट हुआ और मेंशन मिट्ठी में मिल गया। माज़ ने अपने बाज़ू को ज़ोर से पकड़ा हुआ था जबकि सलमान उसे ले कर स्टेला के प्राइवेट क्लेनिक जा रहा था। वोह अपनी पट्टी करवा कर वापस मेंशन जा रहा था। रामिश ने पहेले ही रॉय को ले जा कर मेंशन में बंद कर दिया था और उसके पैर की गोली निकलवा दी थी ताकि ज़्यादा खून बहने की वजह से वोह मरना जाए क्योंकि अभी उसे टॉर्चर करना बाकी था। माज़ और सलमान सब से पहेले बेसमेंट में गए और फिर अपने खून से भरे कपड़े बदल कर हॉल में गए जहां सब उन दोनों का ही इंतेज़ार कर रहे थे। माहेरा का दिल जो बेचैन था अब माज़ को देख कर शांत हो गया था। माज़ ने रामिश ने इशारे में रॉय के बारे में पूछा जिसके जवाब में उसने अपना सिर हिला दिया। वोह खामोशी से आ कर माहेरा के पास वाली जगह पर ढेर हो गया। शेर खान अलीज़ा के साथ बैठे थे और रामिश सोफिया के साथ और अन्नू भी सोफिया के साथ बैठी हुई उसके पास सलमान बैठा था। "डैड अब सब कुछ ठीक चल रहा है तो आप मेरी शादी के बारे में क्यों नही सोचते??" अचानक से सलमान बोला तो सबका ध्यान उसकी तरफ चला गया। "सलमान अभी तो तुम छोटे हो अभी तुम्हारे खेलने के दिन है और तुम्हे शर्म नही आती अपनी शादी की बात खुद करते हो।" माज़ उसको तंग करते हुए बोला। "भाई येह मेरे अपने बच्चो के साथ खेलने के दिन है। आपको तो मेरा ज़रा भी ख्याल नही है। खुद तो अपने मज़े से शादी करली है।" सलमान उसकी बात सुनकर चिढ़ कर बोला। "हम्म्म्म.......सही कह रहे हो हम तुझे अब जल्दी से चाचू बनाने की तैयारी करते है। तब तुम्हे बच्चे खेलने को मिल जाएंगे।" माज़ ने हस्ते हुए माहेरा को देखा जो उसे ही घूर कर देख रही थी और शर्म से उसका चेहरा भी लाल हो गया था। "उफ़्फ़फ़!!!!!! भाई आप तो रहने दे। मॉम डैड आप दोनों कुछ अपने इस मासूम बेटे के बारे में भी सोचे।" वोह माज़ की बात पर चिढ़ते हुए मासूम सी शक्ल बना कर शेर खान से बोला। सब उन दोनों की नोक झोंक पर मुस्कुरा रहे थे। "माज़ मेरे बेटे को तंग मत करो। सलमान हम जल्द ही तुम्हरी शादी कर लेंगे पहेले लड़की से यो पूछ लो वोह तैयार है क्या?" अलीज़ा ने मुस्कुराते हुए सलमान से कहा। अलीज़ा की बाते सुनकर सलमान की आंखे चमक गयी। "मॉम मुझे ना शर्म आती है। मेरी जगह ना आप पूछ ली जिये।" वोह झूठ मुठ का शर्माते हुए बोला तो रामिश ने अपने पास पड़ा पिल्लों उठा कर खींच कर उसकी तरफ फेंका। "अभी तो तुम्हे पूछते हुए शर्म आ रही है तो शादी के वक़्त तो तुम शर्म से मुंह छुपाते हुए घूमोगे।" रामिश ने उसे झूठा शर्माते देख चिढ़ कर कहा। "भाई आप मुझे तंग कर रहे है।" सलमान आंखे झपकाता हुआ मासूम सी शक्ल बना कर बोला तो सब हसने लगे। "इन सबको छोड़ो सलमान मैं तुम्हारी शादी अगले हफ्ते ही कर दूंगी मगर मेरी एक शर्त है??" माहेरा ने हसने के बाद सीरियस होते हुए कहा। "भाभी जो भी शर्त है मैं मानने के लिए तैयार हूं बस आप सबको मेरी शादी के लिए मना ले।" सलमान भागते हुए आ कर उसके कदमो में बैठते हुए बोला। "मैं चाहती हु तुम अपनी शादी पर मेरे भइयो को इटली बुलाओ।" माहेरा ने कहा तो माज़ ने उसकी तरफ देखा। अगर वोह येह बात माज़ से करती तो वोह कभी उसे मना नही करता मगर वोह सलमान से अब इस लिए कह रही थी क्योंकि वोह उसकी मुश्किल बढ़ाना नही चाहती थी।
चैंपियंस ट्रॉफी में खेली गई दो हाफसेंचुरीज की मदद से इंडियन कैप्टन विराट कोहली साउथ अफ्रीकी कप्तान एबी डिविलियर्स को पछाड़कर आईसीसी वनडे रैंकिंग में फिर से पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। टूर्नामेंट से पहले वह डिविलियर्स से 22 और आस्टेलिया के वार्नर से 19 प्वॉइंट्स पीछे थे। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी में अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत इंडियन ओपनर शिखर धवन ने एक बार फिर टॉप-10 में वापसी की है। वह पांच पायदान चढ़कर 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं। रोहित शर्मा और फॉर्मर कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी एक-एक पायदान खिसककर 13वें और 14वें स्थान पर हैं, जबकि युवराज सिंह छह पायदान चढ़कर 88वें स्थान पर हैं। आस्टेलिया के जोश हेजलवुड करियर में पहली बार गेंदबाजों की रैंकिंग में टॉप पर हैं। भुवनेश्वर कुमार 13 पायदान चढ़कर 23वें स्थान पर पहुंच गए। उमेश यादव दो पायदान चढ़कर 41वें स्थान पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह 43वें स्थान पर हैं। स्पिनर्स में आर अश्विन दो पायदान खिसककर 20वें और रवींद्र जडेजा तीन पायदान नीचे 29वें स्थान पर आ गए हैं। आलराउंडर्स की रैकिंग्स में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं।
चैंपियंस ट्रॉफी में खेली गई दो हाफसेंचुरीज की मदद से इंडियन कैप्टन विराट कोहली साउथ अफ्रीकी कप्तान एबी डिविलियर्स को पछाड़कर आईसीसी वनडे रैंकिंग में फिर से पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। टूर्नामेंट से पहले वह डिविलियर्स से बाईस और आस्टेलिया के वार्नर से उन्नीस प्वॉइंट्स पीछे थे। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी में अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत इंडियन ओपनर शिखर धवन ने एक बार फिर टॉप-दस में वापसी की है। वह पांच पायदान चढ़कर दसवें स्थान पर पहुंच गए हैं। रोहित शर्मा और फॉर्मर कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी एक-एक पायदान खिसककर तेरहवें और चौदहवें स्थान पर हैं, जबकि युवराज सिंह छह पायदान चढ़कर अठासीवें स्थान पर हैं। आस्टेलिया के जोश हेजलवुड करियर में पहली बार गेंदबाजों की रैंकिंग में टॉप पर हैं। भुवनेश्वर कुमार तेरह पायदान चढ़कर तेईसवें स्थान पर पहुंच गए। उमेश यादव दो पायदान चढ़कर इकतालीसवें स्थान पर हैं, जबकि जसप्रीत बुमराह तैंतालीसवें स्थान पर हैं। स्पिनर्स में आर अश्विन दो पायदान खिसककर बीसवें और रवींद्र जडेजा तीन पायदान नीचे उनतीसवें स्थान पर आ गए हैं। आलराउंडर्स की रैकिंग्स में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन पहले स्थान पर हैं।
कश्मीर में सदियों से रहनेवाले हिन्दू कश्मीरी पंडित कहलाते है। कश्मीरी पंडित घाटी के मूल निवासी है।इनकी सभ्यता 5000 साल पुरानी है।कश्मीरी पंडित घाटी के हिन्दू अल्पसंखक है।इनकी कुल आबादी करीब 4 लाख थी।इनकी ज़िन्दगी अमन,चैन के साथ गुज़र रही थी लेकिन साल 1989 से ये महौल बिगड़ने लगा।सितम्बर 14, 1989 बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य और जाने माने वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल तप्लू का JKLF ने क़त्ल कर दिया ! उसके बाद जस्टिस नील कान्त गंजू को गोली मार दी गई ! एक के बाद एक अनेक कश्मीरी हिन्दू नेताओ की हत्या कर दी गयी ! उसके बाद 300 से ज्यादा हिन्दू महिलाओ और पुरुषो की नृशंस हत्या की गयी ! श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करने वाली एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गयी ! यह खूनी खेल लगातार चलता रहा और हैरत की बात यह है कि तत्कालीन राज्य एवं केंद्र सरकारों ने इस गंभीर विषय पर कुछ नहीं किया ! फिर जनवरी 4, 1990 आफताब, एक स्थानीय उर्दू अखबार ने हिज्ब -उल -मुजाहिदीन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की - "सभी हिन्दू अपना सामान पैक करें और कश्मीर छोड़ कर चले जाएँ ! " एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा ने भी इस निष्कासन आदेश को दोहराया ! मस्जिदों में भारत और हिन्दू विरोधी भाषण दिए जाने लगे ! सभी कश्मीरी हिन्दू/मुस्लिमो को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाये ! सिनेमा और विडियो पार्लर वगैरह बंद कर दिए गए ! लोगो को मजबूर किया गया कि वो अपनी घड़ी पाकिस्तान के समय के अनुसार कर लें !
कश्मीर में सदियों से रहनेवाले हिन्दू कश्मीरी पंडित कहलाते है। कश्मीरी पंडित घाटी के मूल निवासी है।इनकी सभ्यता पाँच हज़ार साल पुरानी है।कश्मीरी पंडित घाटी के हिन्दू अल्पसंखक है।इनकी कुल आबादी करीब चार लाख थी।इनकी ज़िन्दगी अमन,चैन के साथ गुज़र रही थी लेकिन साल एक हज़ार नौ सौ नवासी से ये महौल बिगड़ने लगा।सितम्बर चौदह, एक हज़ार नौ सौ नवासी बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य और जाने माने वकील कश्मीरी पंडित तिलक लाल तप्लू का JKLF ने क़त्ल कर दिया ! उसके बाद जस्टिस नील कान्त गंजू को गोली मार दी गई ! एक के बाद एक अनेक कश्मीरी हिन्दू नेताओ की हत्या कर दी गयी ! उसके बाद तीन सौ से ज्यादा हिन्दू महिलाओ और पुरुषो की नृशंस हत्या की गयी ! श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करने वाली एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गयी ! यह खूनी खेल लगातार चलता रहा और हैरत की बात यह है कि तत्कालीन राज्य एवं केंद्र सरकारों ने इस गंभीर विषय पर कुछ नहीं किया ! फिर जनवरी चार, एक हज़ार नौ सौ नब्बे आफताब, एक स्थानीय उर्दू अखबार ने हिज्ब -उल -मुजाहिदीन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की - "सभी हिन्दू अपना सामान पैक करें और कश्मीर छोड़ कर चले जाएँ ! " एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा ने भी इस निष्कासन आदेश को दोहराया ! मस्जिदों में भारत और हिन्दू विरोधी भाषण दिए जाने लगे ! सभी कश्मीरी हिन्दू/मुस्लिमो को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाये ! सिनेमा और विडियो पार्लर वगैरह बंद कर दिए गए ! लोगो को मजबूर किया गया कि वो अपनी घड़ी पाकिस्तान के समय के अनुसार कर लें !
अंगूठी अंगूठी एक गहना है और उंगली में पहना जा सकता है।यह मुख्यता अनामिका में पहनी जाती है। अंगूठी पुरुषों और महिलाओं, दोनों द्वारा पहने जाते हैं। अंगूठी धातु, प्लास्टिक, लकड़ी, हड्डी, कांच, रत्न और अन्य सामग्री का बनाई जा सकती है। . 1 संबंधः प्लास्टिक। विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक से निर्मित घरेलू वस्तुएँ प्लास्टिक (Plastic), शंश्लेषित अथवा अर्धशंश्लेषित कार्बनिक ठोस पदार्थों के एक बड़े समूह का सामान्य नाम है। इससे बहुत सारे औद्योगिक उत्पाद निर्मित होते हैं। प्लास्टिक प्रायः उच्च अणुभार वाले बहुलक होते हैं जिनमें मूल्य कम करने या अधिक कार्यक्षम बनाने के लिये कुछ अन्य पदार्थ भी मिश्रित किये जा सकते है। प्लास्टिक पदार्थ और प्लास्टिक (पदार्थों के एक गुण) अलग-अलग हैं। एक गुण के रूप में प्लास्टिक उन पदार्थों की विशेषता का द्योतक है जो अधिक खींचने या तानने (विकृति पैदा करने) से स्थायी रूप से अपना रूप बदल देते हैं और अपने मूल स्वरूप में नहीं लौट पाते। .
अंगूठी अंगूठी एक गहना है और उंगली में पहना जा सकता है।यह मुख्यता अनामिका में पहनी जाती है। अंगूठी पुरुषों और महिलाओं, दोनों द्वारा पहने जाते हैं। अंगूठी धातु, प्लास्टिक, लकड़ी, हड्डी, कांच, रत्न और अन्य सामग्री का बनाई जा सकती है। . एक संबंधः प्लास्टिक। विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक से निर्मित घरेलू वस्तुएँ प्लास्टिक , शंश्लेषित अथवा अर्धशंश्लेषित कार्बनिक ठोस पदार्थों के एक बड़े समूह का सामान्य नाम है। इससे बहुत सारे औद्योगिक उत्पाद निर्मित होते हैं। प्लास्टिक प्रायः उच्च अणुभार वाले बहुलक होते हैं जिनमें मूल्य कम करने या अधिक कार्यक्षम बनाने के लिये कुछ अन्य पदार्थ भी मिश्रित किये जा सकते है। प्लास्टिक पदार्थ और प्लास्टिक अलग-अलग हैं। एक गुण के रूप में प्लास्टिक उन पदार्थों की विशेषता का द्योतक है जो अधिक खींचने या तानने से स्थायी रूप से अपना रूप बदल देते हैं और अपने मूल स्वरूप में नहीं लौट पाते। .
Alia Bhatt Bold Photos In Saree आलिया भट्ट फिल्म एक्ट्रेस है। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट की 4 फोटोज शेयर की है। इसमें उन्हें क्यूट पोज देते हुए देखा जा सकता है। वह काफी कूल लग रही है। नई दिल्ली, जेएनएन। Alia Bhatt Bold Photos In Saree: फिल्म एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने इंस्टाग्राम पर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट की 4 तस्वीरें शेयर की है। इसमें उन्हें साड़ी पहनकर बोल्ड अंदाज में पोज देते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने ब्रॉलेट पहन रखी है और हैवी ज्वैलरीज भी पहन रखी है। आलिया भट्ट की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही है। उन्होंने मेकअप भी कर रखा है। उन्होंने अपने बाल बांध रखे हैं। आलिया भट्ट ने तस्वीरों में कई लोगों को टैग कर क्रेडिट भी दिया है। आलिया भट्ट की फोटोज इंस्टाग्राम पर वायरल हो गई है। इसे 10 मिनट में 1 लाख 30 हजार से ज्यादा लाइक्स मिले हैं। वहीं, फोटोज पर 13 सौ के लगभग कमेंट किए गए हैं। मृणाल ठाकुर में पॉपिंग आइज की इमोजी शेयर की है। वहीं, कई फैंस ने लिखा है, 'कितनी सोनी है ये। ' एक ने लिखा है, आलिया से मिलने का सपना सच हो जाए। सो ब्यूटीफुल। ' एक ने लिखा है, 'आलिया गॉर्जियस है। ' एक ने लिखा है, 'आलिया भट्ट किस-किस की क्रश है। एक ने लिखा है, 'आलिया भट्ट काफी खूबसूरत लग रही है। ' आलिया भट्ट फिल्म एक्ट्रेस है। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर काफी पसंद की गई है। उन्होंने हाल ही में एक तस्वीर शेयर की थी। इसमें उन्हें रणबीर कपूर के साथ लंदन में वेकेशन मनाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने रणबीर कपूर से शादी कर ली है। उनसे उन्हें एक बेटी भी है। दोनों की जोड़ी फैंस को भी काफी पसंद आती है। दोनों अक्सर एक-दूसरे के साथ देखें जाते है। हाल ही में आलिया भट्ट फिल्म ब्रह्मास्त्र में भी उनके साथ नजर आई थी। यह फिल्म तीन भागों में बन रही है। इसके चलते इसके दो और भाग अभी रिलीज होने वाले हैं। आलिया भट्ट की सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा फैन फॉलोइंग है। उनके इंस्टाग्राम पर 7 करोड़ 65 लाख फॉलोअर्स है। वह अक्सर अपने फैंस से बातचीत भी करती हैं। इसे लेकर उनके काफी उत्साहित रहते हैं। वह अपने फैंस से बातचीत भी करती है।
Alia Bhatt Bold Photos In Saree आलिया भट्ट फिल्म एक्ट्रेस है। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट की चार फोटोज शेयर की है। इसमें उन्हें क्यूट पोज देते हुए देखा जा सकता है। वह काफी कूल लग रही है। नई दिल्ली, जेएनएन। Alia Bhatt Bold Photos In Saree: फिल्म एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने इंस्टाग्राम पर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट की चार तस्वीरें शेयर की है। इसमें उन्हें साड़ी पहनकर बोल्ड अंदाज में पोज देते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने ब्रॉलेट पहन रखी है और हैवी ज्वैलरीज भी पहन रखी है। आलिया भट्ट की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही है। उन्होंने मेकअप भी कर रखा है। उन्होंने अपने बाल बांध रखे हैं। आलिया भट्ट ने तस्वीरों में कई लोगों को टैग कर क्रेडिट भी दिया है। आलिया भट्ट की फोटोज इंस्टाग्राम पर वायरल हो गई है। इसे दस मिनट में एक लाख तीस हजार से ज्यादा लाइक्स मिले हैं। वहीं, फोटोज पर तेरह सौ के लगभग कमेंट किए गए हैं। मृणाल ठाकुर में पॉपिंग आइज की इमोजी शेयर की है। वहीं, कई फैंस ने लिखा है, 'कितनी सोनी है ये। ' एक ने लिखा है, आलिया से मिलने का सपना सच हो जाए। सो ब्यूटीफुल। ' एक ने लिखा है, 'आलिया गॉर्जियस है। ' एक ने लिखा है, 'आलिया भट्ट किस-किस की क्रश है। एक ने लिखा है, 'आलिया भट्ट काफी खूबसूरत लग रही है। ' आलिया भट्ट फिल्म एक्ट्रेस है। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर काफी पसंद की गई है। उन्होंने हाल ही में एक तस्वीर शेयर की थी। इसमें उन्हें रणबीर कपूर के साथ लंदन में वेकेशन मनाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने रणबीर कपूर से शादी कर ली है। उनसे उन्हें एक बेटी भी है। दोनों की जोड़ी फैंस को भी काफी पसंद आती है। दोनों अक्सर एक-दूसरे के साथ देखें जाते है। हाल ही में आलिया भट्ट फिल्म ब्रह्मास्त्र में भी उनके साथ नजर आई थी। यह फिल्म तीन भागों में बन रही है। इसके चलते इसके दो और भाग अभी रिलीज होने वाले हैं। आलिया भट्ट की सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा फैन फॉलोइंग है। उनके इंस्टाग्राम पर सात करोड़ पैंसठ लाख फॉलोअर्स है। वह अक्सर अपने फैंस से बातचीत भी करती हैं। इसे लेकर उनके काफी उत्साहित रहते हैं। वह अपने फैंस से बातचीत भी करती है।
डेटींग और चैटिंग के जमाने में प्यार जताने का यह तरीका बहुत खूबसूरत है। दरअसल ट्रेन में एक प्यारे कपल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को बड़े ही प्यार खाना खिला रहे हैं। किसी की देखभाल और परवाह करना प्यार जताने का सबसे बढ़िया तरीका हो सकता है। जब कभी भी हम बीमार होते हैं और कोई हमारी परवाह करता है तो यह एहसास हमें अच्छा लगता है। अपने पार्टनर की देखभाल करना या प्यार जताना उतना ही सरल हो सकता है जितना उसकी तारीफ करना। प्यार जताने के कई तरीके हैं, आप चाहे बोलकर जताएं या परवाह करके। आप अपने पार्टनर को हाथ से कुछ खिलाते हो, तो यह भी आपके प्यार जताने का तरीका है। ट्रेन में दो कपल के बीच प्यार का यह खूबसूरत वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। ट्रेन में एक बुजुर्ग पति अपनी बीमार पत्नी को बेहद प्यार से खाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं। बुजुर्ग पति द्वारा खाना खिलाने का यह वीडियो गायक और इंडियन आइडल 5 के उपविजेता राकेश मैनी ने इंस्टाग्राम पर 12 अप्रैल पोस्ट किया है। इस वायरल क्लिप को नेटिज़न्स द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। यूजर्स के दिल को छूने वाली इस वीडियो में एक बुजुर्ग पति अपनी बीमार पत्नी को ट्रेन के सफर के दौरान बड़े ही प्यार से खाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं। ट्रेन में दोनों कपल आमने सामने बैठे हुए हैं। वह अपनी पत्नी को धीरे-धीरे खाना खिला रहे हैं और उनके खाना चबाने के खत्म होने का इंतजार करते हैं। खाना खिलाने के बाद पति अपनी पत्नी के मुंह को भी पोंछते हैं। बाद में बुजुर्ग पति अपनी पत्नी के साथ वॉशरूम भी जाते हैं और सोने के लिए बिस्तर भी तैयार कर बड़े प्यार से सुलाते हैं। अभी तक इस वीडियो को 8. 3 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स ने कैप्शन लिखा है और कहा है कि 'किसी को अपना बनाना हुनर ही सही, लेकिन किसी का बन के रहना कमाल है! ! '। पोस्ट होते ही इस वीडियो ने यूजर्स का ध्यान खींच लिया है। लोगों ने वीडियो को लेकर अपनी प्यारी प्रतिक्रियाएं शेयर की है। वीडियो देखने के बाद एक यूजर्स ने कमेंट किया है और कहा है कि इनको देख कर प्यार पर भरोसा आंख बंद कर हो जाता है, पर आजकल कहां ऐसा प्यार रहा। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है कि मेरे मम्मी पापा भी ऐसे ही थे। पापा मम्मी की दवाई से लेकर खाना कब खाया तक का ध्यान रखते थे। उन्हें बिछड़े हुए आठ साल होने वाले हैं, ऐसा कोई पल नहीं जब मम्मी पापा के लिए रोती न हो. . . भगवान सबकी जोड़ी बनाए रखे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर आपकी क्या राय है आप हमारे साथ कॉमेंट कर शेयर कर सकते हैं। हमें उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा, इसे आप अपने फैम्ली और फ्रेंड्स के साथ शेयर करें। ऐसे ही इंटरेस्टिंग आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
डेटींग और चैटिंग के जमाने में प्यार जताने का यह तरीका बहुत खूबसूरत है। दरअसल ट्रेन में एक प्यारे कपल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को बड़े ही प्यार खाना खिला रहे हैं। किसी की देखभाल और परवाह करना प्यार जताने का सबसे बढ़िया तरीका हो सकता है। जब कभी भी हम बीमार होते हैं और कोई हमारी परवाह करता है तो यह एहसास हमें अच्छा लगता है। अपने पार्टनर की देखभाल करना या प्यार जताना उतना ही सरल हो सकता है जितना उसकी तारीफ करना। प्यार जताने के कई तरीके हैं, आप चाहे बोलकर जताएं या परवाह करके। आप अपने पार्टनर को हाथ से कुछ खिलाते हो, तो यह भी आपके प्यार जताने का तरीका है। ट्रेन में दो कपल के बीच प्यार का यह खूबसूरत वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। ट्रेन में एक बुजुर्ग पति अपनी बीमार पत्नी को बेहद प्यार से खाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं। बुजुर्ग पति द्वारा खाना खिलाने का यह वीडियो गायक और इंडियन आइडल पाँच के उपविजेता राकेश मैनी ने इंस्टाग्राम पर बारह अप्रैल पोस्ट किया है। इस वायरल क्लिप को नेटिज़न्स द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। यूजर्स के दिल को छूने वाली इस वीडियो में एक बुजुर्ग पति अपनी बीमार पत्नी को ट्रेन के सफर के दौरान बड़े ही प्यार से खाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं। ट्रेन में दोनों कपल आमने सामने बैठे हुए हैं। वह अपनी पत्नी को धीरे-धीरे खाना खिला रहे हैं और उनके खाना चबाने के खत्म होने का इंतजार करते हैं। खाना खिलाने के बाद पति अपनी पत्नी के मुंह को भी पोंछते हैं। बाद में बुजुर्ग पति अपनी पत्नी के साथ वॉशरूम भी जाते हैं और सोने के लिए बिस्तर भी तैयार कर बड़े प्यार से सुलाते हैं। अभी तक इस वीडियो को आठ. तीन मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स ने कैप्शन लिखा है और कहा है कि 'किसी को अपना बनाना हुनर ही सही, लेकिन किसी का बन के रहना कमाल है! ! '। पोस्ट होते ही इस वीडियो ने यूजर्स का ध्यान खींच लिया है। लोगों ने वीडियो को लेकर अपनी प्यारी प्रतिक्रियाएं शेयर की है। वीडियो देखने के बाद एक यूजर्स ने कमेंट किया है और कहा है कि इनको देख कर प्यार पर भरोसा आंख बंद कर हो जाता है, पर आजकल कहां ऐसा प्यार रहा। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है कि मेरे मम्मी पापा भी ऐसे ही थे। पापा मम्मी की दवाई से लेकर खाना कब खाया तक का ध्यान रखते थे। उन्हें बिछड़े हुए आठ साल होने वाले हैं, ऐसा कोई पल नहीं जब मम्मी पापा के लिए रोती न हो. . . भगवान सबकी जोड़ी बनाए रखे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर आपकी क्या राय है आप हमारे साथ कॉमेंट कर शेयर कर सकते हैं। हमें उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा, इसे आप अपने फैम्ली और फ्रेंड्स के साथ शेयर करें। ऐसे ही इंटरेस्टिंग आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
बॉलीवुड के बहुत ही बेहतरीन एक्टर अमिताभ बच्चन की नयी फिल्म झुण्ड आने वाली है। आप सभी को बता दें कि इस फिल्म को लेकर काफी समय से विवाद हो रहा है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक हटाने से बीते बुधवार को साफ़ मना कर दिया। जी दरअसल तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी गई है। उच्च न्यायालय ने कॉपीराइट विवाद को लेकर इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई थी लेकिन अब उस अपील को खारिज कर दिया गया है। जी दरअसल यह फिल्म गैर सरकारी संगठन स्लम सॉकर के संस्थापक विजय बर्से के जीवन पर आधारित है और इसे अमेजन प्राइम के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसी महीने प्रदर्शित किया जाना था। वहीं इससे पहले, फिल्म मई में रिलीज होने वाली थी लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से यह रिलीज नहीं हो सकी थी। हैदराबाद में स्थित लघु फिल्म निर्माता नंदी चिन्नी कुमार ने फिल्म निर्माताओं पर कॉपीराइट के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। वहीं दूसरे पक्ष ने इस बात से साफ़ इनकार किया है। जब इस मामले की सुनवाई हुई तो पीठ ने टिप्पणी की और कहा कि यह एक दिलचस्प मामला है और वह निर्देश देगी कि इसकी सुनवाई छह महीने के अंदर पूरी की जाए। उसके बाद फिल्म निर्माता की तरफ से पेश वकील ने कहा कि, 'छह महीने में यह फिल्म बेकार हो जाएगी और वे इस व्यक्ति को पैसा देने के लिए तैयार हैं। ' इसके अलावा उन्होंने कहा कि 'संबंधित पक्षों के बीच 1। 3 करोड़ रुपये की धनराशि पर सहमति हुई थी। ' इसी के साथ कुमार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस नरसिम्हा ने कहा कि, 'निचली अदालत में लंबित इस मामले का छह महीने के भीतर निस्तारण करने का न्यायालय निर्देश दे सकता है। '
बॉलीवुड के बहुत ही बेहतरीन एक्टर अमिताभ बच्चन की नयी फिल्म झुण्ड आने वाली है। आप सभी को बता दें कि इस फिल्म को लेकर काफी समय से विवाद हो रहा है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक हटाने से बीते बुधवार को साफ़ मना कर दिया। जी दरअसल तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी गई है। उच्च न्यायालय ने कॉपीराइट विवाद को लेकर इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई थी लेकिन अब उस अपील को खारिज कर दिया गया है। जी दरअसल यह फिल्म गैर सरकारी संगठन स्लम सॉकर के संस्थापक विजय बर्से के जीवन पर आधारित है और इसे अमेजन प्राइम के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसी महीने प्रदर्शित किया जाना था। वहीं इससे पहले, फिल्म मई में रिलीज होने वाली थी लेकिन कोविड-उन्नीस महामारी की वजह से यह रिलीज नहीं हो सकी थी। हैदराबाद में स्थित लघु फिल्म निर्माता नंदी चिन्नी कुमार ने फिल्म निर्माताओं पर कॉपीराइट के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। वहीं दूसरे पक्ष ने इस बात से साफ़ इनकार किया है। जब इस मामले की सुनवाई हुई तो पीठ ने टिप्पणी की और कहा कि यह एक दिलचस्प मामला है और वह निर्देश देगी कि इसकी सुनवाई छह महीने के अंदर पूरी की जाए। उसके बाद फिल्म निर्माता की तरफ से पेश वकील ने कहा कि, 'छह महीने में यह फिल्म बेकार हो जाएगी और वे इस व्यक्ति को पैसा देने के लिए तैयार हैं। ' इसके अलावा उन्होंने कहा कि 'संबंधित पक्षों के बीच एक। तीन करोड़ रुपये की धनराशि पर सहमति हुई थी। ' इसी के साथ कुमार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस नरसिम्हा ने कहा कि, 'निचली अदालत में लंबित इस मामले का छह महीने के भीतर निस्तारण करने का न्यायालय निर्देश दे सकता है। '
कृपया 1 अप्रैल 2014 को घोषित प्रथम द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 2014-15 के पैरा 18 का संदर्भ लें जिसमें बैंकों को प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रति अपने एक्सपोजरों का सक्रिय रूप से प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु छोटे व्यवसायों और न्यून आयवाले परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं पर गठित समिति (अध्यक्षः डॉ नचिकेत मोर) की सिफारिशों के अनुसार कतिपय अतिरिक्त प्रकटीकरण आवश्यकताएं निर्धारित करने का प्रस्ताव किया गया था। 2. इस संबंध में बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे वित्तीय वर्ष 2014-15 से आगे अनुबंध में दिए गए फार्मेट के अनुसार वित्तीय विवरणों के '"लेखे पर टिप्पणियों" में क्षेत्रवार अग्रिमो को प्रकट करें। उक्त निर्धारित फार्मेट अनुबंध में दिए गए हैं । (राशि करोड़ रुपये में) (राशि करोड़ रुपये में) * अग्रिमों की गणना "विवेक सम्मत मानदंडों को पुख्ता बनाना - आस्ति वर्गीकरण और एक्सपोज़र सीमा" पर 11 जून 2001 के हमारे परिपत्र ग्राआऋवि.आरआरबी.बीसी.सं.97/ 03.05.34/ 2000-01 में निर्धारित प्रकार से की जानी चाहिए । (राशि करोड़ रुपये में) ** एक्सपोज़र की गणना "विवेक सम्मत मानदंडों को पुख्ता बनाना - आस्ति वर्गीकरण और एक्सपोज़र सीमा" पर 11 जून 2001 के हमारे परिपत्र ग्राआऋवि.आरआरबी.बीसी.सं.97/03.05.34/2000-01 में निर्धारित ऋण और निवेश एक्सपोज़र के आधार पर की जानी चाहिए । (राशि करोड़ रुपये में) (राशि करोड़ रुपये में) उप जोड (ए) उप-जोड़ (बी) जोड़ (ए+बी) संबंधित वर्ष के पहली अप्रैल को सकल अनर्जक आस्तियां (आरंभिक शेष) वर्ष के दौरान वृद्धि (नयी अनर्जक आस्तियां) उप-जोड़ (ए) घटाएं : (ii) वसूली (जिन खातों का श्रेणी उन्नयन हुआ है उनसे वसूली को छोड़कर) उप-जोड़ (बी) अगले वर्ष के 31 मार्च को सकल अनर्जक आस्तियां (इति शेष) (ए - बी)
कृपया एक अप्रैल दो हज़ार चौदह को घोषित प्रथम द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य दो हज़ार चौदह-पंद्रह के पैरा अट्ठारह का संदर्भ लें जिसमें बैंकों को प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रति अपने एक्सपोजरों का सक्रिय रूप से प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु छोटे व्यवसायों और न्यून आयवाले परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं पर गठित समिति की सिफारिशों के अनुसार कतिपय अतिरिक्त प्रकटीकरण आवश्यकताएं निर्धारित करने का प्रस्ताव किया गया था। दो. इस संबंध में बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे वित्तीय वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह से आगे अनुबंध में दिए गए फार्मेट के अनुसार वित्तीय विवरणों के '"लेखे पर टिप्पणियों" में क्षेत्रवार अग्रिमो को प्रकट करें। उक्त निर्धारित फार्मेट अनुबंध में दिए गए हैं । * अग्रिमों की गणना "विवेक सम्मत मानदंडों को पुख्ता बनाना - आस्ति वर्गीकरण और एक्सपोज़र सीमा" पर ग्यारह जून दो हज़ार एक के हमारे परिपत्र ग्राआऋवि.आरआरबी.बीसी.सं.सत्तानवे/ तीन.पाँच.चौंतीस/ दो हज़ार-एक में निर्धारित प्रकार से की जानी चाहिए । ** एक्सपोज़र की गणना "विवेक सम्मत मानदंडों को पुख्ता बनाना - आस्ति वर्गीकरण और एक्सपोज़र सीमा" पर ग्यारह जून दो हज़ार एक के हमारे परिपत्र ग्राआऋवि.आरआरबी.बीसी.सं.सत्तानवे/तीन.पाँच.चौंतीस/दो हज़ार-एक में निर्धारित ऋण और निवेश एक्सपोज़र के आधार पर की जानी चाहिए । उप जोड उप-जोड़ जोड़ संबंधित वर्ष के पहली अप्रैल को सकल अनर्जक आस्तियां वर्ष के दौरान वृद्धि उप-जोड़ घटाएं : वसूली उप-जोड़ अगले वर्ष के इकतीस मार्च को सकल अनर्जक आस्तियां
अमेरिकी वायु सेना ने अपने रेमोटर कार्यक्रम के लिए रणनीतिक बमवर्षक बी -52 एच स्ट्रैटोफोर्ट्रेस के लिए नए इंजनों के एक आपूर्तिकर्ता का चयन करने का इरादा किया है। फ्लाइटग्लोड रिपोर्ट के अनुसार, नए इंजनों के लिए जल्द ही घोषणा की जाएगी। आपूर्ति निविदा के विजेता को मई 2021 की तुलना में बाद में निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए, जिसके बाद यह बमवर्षकों पर स्थापना के लिए 608 नए इंजनों की खरीद करने की योजना है और एक अज्ञात संख्या है। अनुबंध के समापन के बाद सभी इंजनों को 17 साल के भीतर वितरित किया जाना चाहिए। बी -52 एन के पुनर्वितरण को अमेरिकी रणनीतिकारों के जीवन को कम से कम 2050 तक विस्तारित करना चाहिए। जैसा कि पहले बताया गया है, अमेरिकी वायु सेना, रेमोटराइजेशन के लिए दो विकल्पों पर विचार कर रही है - पहला, जो अन्य (प्रत्यक्ष प्रतिस्थापन) के साथ स्थायी इंजन के प्रतिस्थापन के लिए और दूसरा, 8 से 4 तक की कमी के साथ बिजली संयंत्रों के प्रतिस्थापन के लिए प्रदान करता है। जैसा कि कहा गया है, वर्तमान में बी -52 एच पर स्थापित TF33 इंजन बनाए रखने के लिए बहुत महंगा है, और उनके पास उच्च ईंधन खपत भी है। सितंबर 2019 में, यूएसए ने एफ 130 टर्बोफैन इंजन के संस्करण का परीक्षण किया। ब्रिटिश कंपनी रोल्स-रॉयस के अमेरिकी डिवीजन के डेवलपर्स के बयान के अनुसार, इंजन का उद्देश्य बी -52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस रणनीतिक हमलावरों पर स्थापना का है। एफ 130 इंजन, या इसके संस्करण, को गल्फस्ट्रीम जी 725 बिजनेस जेट पर इस्तेमाल किए गए बीआर 650 पावरप्लांट के आधार पर विकसित किया गया है। ईंधन की कम खपत के साथ, यह 75,6 किलोन्यूटन तक जोर विकसित करने में सक्षम है, जो TF33 B-52 इंजन के जोर से मेल खाती है। बी-52 स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस एक बहुक्रियाशील, भारी, अल्ट्रा-लंबी दूरी का अंतरमहाद्वीपीय रणनीतिक बमवर्षक-वाहक है जो 1955 से अमेरिकी वायु सेना के साथ सेवा में है। इसे 50 के दशक में विकसित किया गया था, लेकिन यह अभी भी अमेरिकी सेना का मुख्य लंबी दूरी का बमवर्षक विमान है। अमेरिका के पास फिलहाल इस प्रकार के 76 विमान हैं, जिनकी औसत आयु 50-55 वर्ष है।
अमेरिकी वायु सेना ने अपने रेमोटर कार्यक्रम के लिए रणनीतिक बमवर्षक बी -बावन एच स्ट्रैटोफोर्ट्रेस के लिए नए इंजनों के एक आपूर्तिकर्ता का चयन करने का इरादा किया है। फ्लाइटग्लोड रिपोर्ट के अनुसार, नए इंजनों के लिए जल्द ही घोषणा की जाएगी। आपूर्ति निविदा के विजेता को मई दो हज़ार इक्कीस की तुलना में बाद में निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए, जिसके बाद यह बमवर्षकों पर स्थापना के लिए छः सौ आठ नए इंजनों की खरीद करने की योजना है और एक अज्ञात संख्या है। अनुबंध के समापन के बाद सभी इंजनों को सत्रह साल के भीतर वितरित किया जाना चाहिए। बी -बावन एन के पुनर्वितरण को अमेरिकी रणनीतिकारों के जीवन को कम से कम दो हज़ार पचास तक विस्तारित करना चाहिए। जैसा कि पहले बताया गया है, अमेरिकी वायु सेना, रेमोटराइजेशन के लिए दो विकल्पों पर विचार कर रही है - पहला, जो अन्य के साथ स्थायी इंजन के प्रतिस्थापन के लिए और दूसरा, आठ से चार तक की कमी के साथ बिजली संयंत्रों के प्रतिस्थापन के लिए प्रदान करता है। जैसा कि कहा गया है, वर्तमान में बी -बावन एच पर स्थापित TFतैंतीस इंजन बनाए रखने के लिए बहुत महंगा है, और उनके पास उच्च ईंधन खपत भी है। सितंबर दो हज़ार उन्नीस में, यूएसए ने एफ एक सौ तीस टर्बोफैन इंजन के संस्करण का परीक्षण किया। ब्रिटिश कंपनी रोल्स-रॉयस के अमेरिकी डिवीजन के डेवलपर्स के बयान के अनुसार, इंजन का उद्देश्य बी -बावन स्ट्रैटोफोर्ट्रेस रणनीतिक हमलावरों पर स्थापना का है। एफ एक सौ तीस इंजन, या इसके संस्करण, को गल्फस्ट्रीम जी सात सौ पच्चीस बिजनेस जेट पर इस्तेमाल किए गए बीआर छः सौ पचास पावरप्लांट के आधार पर विकसित किया गया है। ईंधन की कम खपत के साथ, यह पचहत्तर,छः किलोग्रामन्यूटन तक जोर विकसित करने में सक्षम है, जो TFतैंतीस B-बावन इंजन के जोर से मेल खाती है। बी-बावन स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस एक बहुक्रियाशील, भारी, अल्ट्रा-लंबी दूरी का अंतरमहाद्वीपीय रणनीतिक बमवर्षक-वाहक है जो एक हज़ार नौ सौ पचपन से अमेरिकी वायु सेना के साथ सेवा में है। इसे पचास के दशक में विकसित किया गया था, लेकिन यह अभी भी अमेरिकी सेना का मुख्य लंबी दूरी का बमवर्षक विमान है। अमेरिका के पास फिलहाल इस प्रकार के छिहत्तर विमान हैं, जिनकी औसत आयु पचास-पचपन वर्ष है।
महराजगंजः जिले में शुक्रवार को बाल संरक्षण विभाग और श्रम विभाग ने होटलों, दुकानों समेत कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन उ. प्र. लखनऊ द्वारा चलाये जा रहे बालश्रम उन्मूलन अभियान के तहत शुक्रवार को महराजगंज पुलिस की एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग की टीम ने जिले में छापेमारी की। एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग, श्रम विभाग व बाल संरक्षण अधिकारी थाना एएचटीयू की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न प्रतिष्ठान/दुकानों पर होटल ढाबे, प्रमुख बाजार, चौराहे, तिराहे इत्यादि पर छापेमारी की। इस दौरान कई होटल व्यवसायी, दुकानदारों ने अपनी दुकान बंद कर भाग गये। इसके अंतर्गत भिन्न-भिन्न दुकानों के सेवायोजकों को बाल श्रम अधिनियम के बारे बताया गया एवं बालश्रम रोकथाम से संबंधित पंपलेटों को मार्केट, चौराहों, होटल, ढाबा, भीड़भाड़ जगहों पर चस्पा किए गए। वहीं रनियां थाना क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन चेकिंग की गई तथा यह भी निर्देशित किया गया। जिसमे कहा गया कि अगर बालश्रम में लिप्त बालक प्रतिष्ठानों में पाये गये तो मालिकों के विरुद्ध श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा बड़ी कार्यवाही की जाएगी।
महराजगंजः जिले में शुक्रवार को बाल संरक्षण विभाग और श्रम विभाग ने होटलों, दुकानों समेत कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन उ. प्र. लखनऊ द्वारा चलाये जा रहे बालश्रम उन्मूलन अभियान के तहत शुक्रवार को महराजगंज पुलिस की एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग की टीम ने जिले में छापेमारी की। एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग, श्रम विभाग व बाल संरक्षण अधिकारी थाना एएचटीयू की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न प्रतिष्ठान/दुकानों पर होटल ढाबे, प्रमुख बाजार, चौराहे, तिराहे इत्यादि पर छापेमारी की। इस दौरान कई होटल व्यवसायी, दुकानदारों ने अपनी दुकान बंद कर भाग गये। इसके अंतर्गत भिन्न-भिन्न दुकानों के सेवायोजकों को बाल श्रम अधिनियम के बारे बताया गया एवं बालश्रम रोकथाम से संबंधित पंपलेटों को मार्केट, चौराहों, होटल, ढाबा, भीड़भाड़ जगहों पर चस्पा किए गए। वहीं रनियां थाना क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन चेकिंग की गई तथा यह भी निर्देशित किया गया। जिसमे कहा गया कि अगर बालश्रम में लिप्त बालक प्रतिष्ठानों में पाये गये तो मालिकों के विरुद्ध श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा बड़ी कार्यवाही की जाएगी।
रविवार रात को हमीरपुर पुलिस ने अलग-अलग जगह 460 ग्राम चरस सहित दो युवक गिरफ्तार किए हैं। गिरफ्तार युवकों में से दीपक कुमार गांव तांदी जिला कुल्लू से 397 ग्राम चरस बरामद की और व्राजीव कुमार गांव रोपड़ी जिला हमीरपुर से 47. 14 ग्राम चरस बरामद की है। पुलिस u/s 20-61-85 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार युवकों से पूछताछ कर रही है। बता दें कि जैसे ही हमीरपुर पुलिस को नशा तस्करों के साथ काम करने वालों की सुचना मिलती है, वह उसका पीछा करते हुए उस व्यक्ति तक पहुंचने में कामयाबी तो हासिल कर लेती है पर अब तक ये पता नहीं लगा सके है की इसके पीछे किस मुख्य तस्कर का हाथ है।
रविवार रात को हमीरपुर पुलिस ने अलग-अलग जगह चार सौ साठ ग्राम चरस सहित दो युवक गिरफ्तार किए हैं। गिरफ्तार युवकों में से दीपक कुमार गांव तांदी जिला कुल्लू से तीन सौ सत्तानवे ग्राम चरस बरामद की और व्राजीव कुमार गांव रोपड़ी जिला हमीरपुर से सैंतालीस. चौदह ग्राम चरस बरामद की है। पुलिस u/s बीस इकसठ पचासी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार युवकों से पूछताछ कर रही है। बता दें कि जैसे ही हमीरपुर पुलिस को नशा तस्करों के साथ काम करने वालों की सुचना मिलती है, वह उसका पीछा करते हुए उस व्यक्ति तक पहुंचने में कामयाबी तो हासिल कर लेती है पर अब तक ये पता नहीं लगा सके है की इसके पीछे किस मुख्य तस्कर का हाथ है।
- 'अगर मैं मारता तो वो बचती नहीं', ऐश्वर्या के मारपीट के आरोपों का सलमान खान ने यूं दिया था जवाब, खुद बताया था सचBollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार मई 1, 2023 07:04 PM ISTसलमान खान अपनी फिल्मों से ज्यादा अपनी लव लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. अपने फिल्मी करियर में सलमान का नाम कई हीरोइनों से जुड़ा. खासकर ऐश्वर्या राय संग उनका रिश्ता सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहा. ऐश्वर्या और सलमान की प्रेम कहानी के किस्से आज भी मशहूर हैं. - 1994 में मिस वर्ल्ड बनने के बाद ब्यूटी कॉन्टेस्ट से 'बिकिनी राउंड' हटाना चाहती थीं ऐश्वर्या राय, कहा था- भारतीय होने की वजह से. . . Bollywood । Written by: शिखा यादव ।मंगलवार फ़रवरी 28, 2023 06:47 PM ISTऐश्वर्या राय को आज कौन नहीं जानता. ऐश्वर्या राय ने 1994 में विस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम करने के बाद बॉलीवुड में एंट्री की थी. ऐश्वर्या राय की खूबसूरती आज भी बेमिसाल है. - मॉडलिंग के दिनों में इतनी मासूम दिखती थीं ऐश्वर्या राय, एक्ट्रेस का रैंप वॉक Video देख आप भी हो जाएंगे दीवानेBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।मंगलवार फ़रवरी 21, 2023 09:58 AM ISTइन दिनों ऐश्वर्या राय का एक थ्रोबैक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उनका यह वीडियो मॉडलिंग के दिनों का है. जिसमें वह रैंप वॉक करती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो में ऐश्वर्या राय अलग-अलग ड्रेस में रैप वॉक करती हुई नजर आ रही हैं. - 1994 में मिस वर्ल्ड बनीं ऐश्वर्या राय तब दिखती थीं ऐसीं, 29 साल पुराना Video वायरल, मासूमियत पर फिदा हुए फैन्सBollywood । Edited by: शिखा यादव ।शुक्रवार फ़रवरी 3, 2023 01:50 PM ISTऐश्वर्या राय ने अपनी काबिलियत के दम पर ये खिताब अपने नाम किया था. जब ऐश्वर्या ने विश्व सुंदरी ताज पहना उस वक्त उनकी उम्र महज 21 साल थी. - जब ऐश्वर्या ने शर्माते हुए गाया 'मेरी सांसों में बसा है तेरा ही एक नाम', थ्रोबैक वीडियो देख लोग बोले- ऐसे ही नहीं है पूरी दुनिया इनकी दीवानीBollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।सोमवार जनवरी 30, 2023 11:04 AM ISTआज हम आपको ऐश्वर्या का एक ऐसा टैलेंट दिखाने जा रहे हैं जैसे आज भी कई लोग अनजान हैं. आपको बता दें कि ऐश्वर्या एक बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ-साथ एक लाजवाब सिंगर भी हैं. - Anant Ambani Radhika Merchant engagement: ऐश्वर्या राय के साथ सूट पहनकर पहुंची आराध्या बच्चन, नजाकत देख थम गई लोगों की निगाहेंBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार जनवरी 20, 2023 02:28 PM ISTआम तौर पर आराध्या फ्रॉक स्कर्ट में नजर आती हैं, लेकिन यहां वह सूट पहनी नजर आईं. मां बेटी ने सबका ध्यान अपने लुक से खींच लिया. - आराध्या बच्चन ने मम्मी ऐश्वर्या राय के साथ कुछ इस अंदाज में किया नए साल का स्वागत, क्यूट तस्वीरें देख कर आपको भी आ जाएगा प्यारBollywood । Edited by: प्रियंका तिवारी ।मंगलवार जनवरी 3, 2023 01:25 PM ISTआराध्या बच्चन बेहतरीन डांसर भी हैं, वह खूबसूरत क्लासिकल डांस करती हैं, इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है. वहीं एक बार आराध्या की शुद्ध हिंदी में कविता बोलते एक वीडियो काफी वायरल हुआ था. - ऐश्वर्या राय की बेटी आराध्या बच्चन हाइट में हो गई हैं मम्मी के बराबर, रितेश देशमुख के बेटे रियान के बर्थडे में लुक ने खींचा फैंस का ध्यानBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।गुरुवार दिसम्बर 8, 2022 11:52 AM ISTआराध्या बच्चन बड़ी होकर बेहद प्यारी दिखने लगी हैं. वह लुक में अपनी मम्मी की तरह ही प्यारी हैं. हाल ही में उन्होंने अपना 11वां जन्मदिन मनाया है. हाइट में वह अपनी मम्मी के लगभग बराबर हो गई हैं. वह लोकप्रिय स्टारकिड हैं. आए दिन वह मीडिया की सुर्खियों में रहती हैं. - 11 साल की हुईं ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की लाडली आराध्या, मम्मी -पापा ने दी पार्टी, दादी जया बच्चन और गेस्ट के साथ यूं काटी केकBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार नवम्बर 25, 2022 09:13 AM ISTऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन ने 20 अप्रैल, 2007 को अमिताभ बच्चन के बंगले- प्रतीक्षा में शादी की थी. उन्होंने 16 नवंबर 2011 को अपनी बेटी आराध्या का स्वागत किया. - Bollywood । Written by: शिखा यादव ।बुधवार नवम्बर 16, 2022 05:19 PM ISTAaradhya Bachchan: ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन आज 11 साल की हो गई हैं. आराध्या का जन्म 16 नवंबर 2011 को हुआ था.
- 'अगर मैं मारता तो वो बचती नहीं', ऐश्वर्या के मारपीट के आरोपों का सलमान खान ने यूं दिया था जवाब, खुद बताया था सचBollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार मई एक, दो हज़ार तेईस सात:चार PM ISTसलमान खान अपनी फिल्मों से ज्यादा अपनी लव लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. अपने फिल्मी करियर में सलमान का नाम कई हीरोइनों से जुड़ा. खासकर ऐश्वर्या राय संग उनका रिश्ता सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहा. ऐश्वर्या और सलमान की प्रेम कहानी के किस्से आज भी मशहूर हैं. - एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में मिस वर्ल्ड बनने के बाद ब्यूटी कॉन्टेस्ट से 'बिकिनी राउंड' हटाना चाहती थीं ऐश्वर्या राय, कहा था- भारतीय होने की वजह से. . . Bollywood । Written by: शिखा यादव ।मंगलवार फ़रवरी अट्ठाईस, दो हज़ार तेईस छः:सैंतालीस PM ISTऐश्वर्या राय को आज कौन नहीं जानता. ऐश्वर्या राय ने एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में विस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम करने के बाद बॉलीवुड में एंट्री की थी. ऐश्वर्या राय की खूबसूरती आज भी बेमिसाल है. - मॉडलिंग के दिनों में इतनी मासूम दिखती थीं ऐश्वर्या राय, एक्ट्रेस का रैंप वॉक Video देख आप भी हो जाएंगे दीवानेBollywood । Written by: आनंद कश्यप ।मंगलवार फ़रवरी इक्कीस, दो हज़ार तेईस नौ:अट्ठावन AM ISTइन दिनों ऐश्वर्या राय का एक थ्रोबैक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उनका यह वीडियो मॉडलिंग के दिनों का है. जिसमें वह रैंप वॉक करती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो में ऐश्वर्या राय अलग-अलग ड्रेस में रैप वॉक करती हुई नजर आ रही हैं. - एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में मिस वर्ल्ड बनीं ऐश्वर्या राय तब दिखती थीं ऐसीं, उनतीस साल पुराना Video वायरल, मासूमियत पर फिदा हुए फैन्सBollywood । Edited by: शिखा यादव ।शुक्रवार फ़रवरी तीन, दो हज़ार तेईस एक:पचास PM ISTऐश्वर्या राय ने अपनी काबिलियत के दम पर ये खिताब अपने नाम किया था. जब ऐश्वर्या ने विश्व सुंदरी ताज पहना उस वक्त उनकी उम्र महज इक्कीस साल थी. - जब ऐश्वर्या ने शर्माते हुए गाया 'मेरी सांसों में बसा है तेरा ही एक नाम', थ्रोबैक वीडियो देख लोग बोले- ऐसे ही नहीं है पूरी दुनिया इनकी दीवानीBollywood । Edited by: नरेंद्र सैनी ।सोमवार जनवरी तीस, दो हज़ार तेईस ग्यारह:चार AM ISTआज हम आपको ऐश्वर्या का एक ऐसा टैलेंट दिखाने जा रहे हैं जैसे आज भी कई लोग अनजान हैं. आपको बता दें कि ऐश्वर्या एक बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ-साथ एक लाजवाब सिंगर भी हैं. - Anant Ambani Radhika Merchant engagement: ऐश्वर्या राय के साथ सूट पहनकर पहुंची आराध्या बच्चन, नजाकत देख थम गई लोगों की निगाहेंBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार जनवरी बीस, दो हज़ार तेईस दो:अट्ठाईस PM ISTआम तौर पर आराध्या फ्रॉक स्कर्ट में नजर आती हैं, लेकिन यहां वह सूट पहनी नजर आईं. मां बेटी ने सबका ध्यान अपने लुक से खींच लिया. - आराध्या बच्चन ने मम्मी ऐश्वर्या राय के साथ कुछ इस अंदाज में किया नए साल का स्वागत, क्यूट तस्वीरें देख कर आपको भी आ जाएगा प्यारBollywood । Edited by: प्रियंका तिवारी ।मंगलवार जनवरी तीन, दो हज़ार तेईस एक:पच्चीस PM ISTआराध्या बच्चन बेहतरीन डांसर भी हैं, वह खूबसूरत क्लासिकल डांस करती हैं, इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है. वहीं एक बार आराध्या की शुद्ध हिंदी में कविता बोलते एक वीडियो काफी वायरल हुआ था. - ऐश्वर्या राय की बेटी आराध्या बच्चन हाइट में हो गई हैं मम्मी के बराबर, रितेश देशमुख के बेटे रियान के बर्थडे में लुक ने खींचा फैंस का ध्यानBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।गुरुवार दिसम्बर आठ, दो हज़ार बाईस ग्यारह:बावन AM ISTआराध्या बच्चन बड़ी होकर बेहद प्यारी दिखने लगी हैं. वह लुक में अपनी मम्मी की तरह ही प्यारी हैं. हाल ही में उन्होंने अपना ग्यारहवां जन्मदिन मनाया है. हाइट में वह अपनी मम्मी के लगभग बराबर हो गई हैं. वह लोकप्रिय स्टारकिड हैं. आए दिन वह मीडिया की सुर्खियों में रहती हैं. - ग्यारह साल की हुईं ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की लाडली आराध्या, मम्मी -पापा ने दी पार्टी, दादी जया बच्चन और गेस्ट के साथ यूं काटी केकBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार नवम्बर पच्चीस, दो हज़ार बाईस नौ:तेरह AM ISTऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन ने बीस अप्रैल, दो हज़ार सात को अमिताभ बच्चन के बंगले- प्रतीक्षा में शादी की थी. उन्होंने सोलह नवंबर दो हज़ार ग्यारह को अपनी बेटी आराध्या का स्वागत किया. - Bollywood । Written by: शिखा यादव ।बुधवार नवम्बर सोलह, दो हज़ार बाईस पाँच:उन्नीस PM ISTAaradhya Bachchan: ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन आज ग्यारह साल की हो गई हैं. आराध्या का जन्म सोलह नवंबर दो हज़ार ग्यारह को हुआ था.
हलचल और भीड़भाड़ वाले बाजार लाजपत नगर को 1947 में हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए हिंदू और सिख शरणार्थियों के लिए दक्षिण दिल्ली बसाया गया था। पंजाबियत के अलावा दोनों देशों के बीच कई सांस्कृतिक और सामाजिक सामनताएं मौजूद हैं, साथ में कुछ कड़वे मतभेद भी। लाजपत नगर में है इंदरदीप चावला के कपड़ों की दुकान, द कॉटन लॉन। ये दुकान वैसे तो बाज़ार की आम दुकानों की तरह ही लगती है लेकिन इसकी अपनी एक ख़ासियत है। यहां सिर्फ़ पाकिस्तानी कपड़े और डिज़ाइन ही मिलते हैं। लेकिन दोनों देशों के बीच कारोबार करना हमेशा आसान नहीं होता है। वीज़ा सहजता से नहीं मिलते। प्रावधानों में भी बदलाव होते रहते हैं। जब कभी दोनों मुल्कों के बीच तनाव पैदा होता है, उसका असर कारोबार पर ही पड़ता है। दोनों देशों का आपसी कारोबार 2. 6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और ये लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इसके दूसरी ओर भारत और चीन ने 2015 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंध सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे ही यह परिभाषित होता है कि भारत और पाकिस्तान एक दूसरे को किस तरह से देखते हैं। 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले का आरोप जब पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों पर लगा तभी से दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों ख़राब होने लगे। हालांकि भारत के पास नवाज़ शरीफ़ के समय से जुड़ी अच्छी यादें हैं। उन्होंने 1999 में भारत के साथ एक बेहद अहम समझौता किया लेकिन उसके बाद ही दोनों देशों के बीच सीमा पर युद्ध छिड़ गया और उसके बाद सेना के तख्तापलट ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन विश्लेषक अब भी नवाज़ शरीफ़ को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। ज़्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि यह सब काफी कुछ इस बात पर निर्भर होगा कि नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान सेना के बीच आपसी रिश्ते कैसे रहते हैं। एक चिंता की बात ये भी है कि इस बार उन्होंने कट्टरपंथी इस्लामी समूहों से समझौते किए हैं। इन सबके बावजूद कुछ लोग उन्हें मौका दिए जाने के पक्ष में हैं। नवाज़ शरीफ़ की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी उन्हें बधाई दी है। इतना ही नहीं शरीफ़ के कार्यभार संभालने से पहले मनमोहन सिंह ने उनके पास विशेष प्रतिनिधि को भी भेजा है। 'अनुभव आएगा काम' यहां तक कि मुख्य विपक्षी दल और हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी भी नवाज़ शरीफ़ को उम्मीद से देख रही है। यही वजह है कि भारत को शरीफ़ के काम काज संभालने का इंतज़ार है। अपने दुकान पर इंदरदीप चावला को भी बेसब्री से इसका इंतज़ार है।
हलचल और भीड़भाड़ वाले बाजार लाजपत नगर को एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए हिंदू और सिख शरणार्थियों के लिए दक्षिण दिल्ली बसाया गया था। पंजाबियत के अलावा दोनों देशों के बीच कई सांस्कृतिक और सामाजिक सामनताएं मौजूद हैं, साथ में कुछ कड़वे मतभेद भी। लाजपत नगर में है इंदरदीप चावला के कपड़ों की दुकान, द कॉटन लॉन। ये दुकान वैसे तो बाज़ार की आम दुकानों की तरह ही लगती है लेकिन इसकी अपनी एक ख़ासियत है। यहां सिर्फ़ पाकिस्तानी कपड़े और डिज़ाइन ही मिलते हैं। लेकिन दोनों देशों के बीच कारोबार करना हमेशा आसान नहीं होता है। वीज़ा सहजता से नहीं मिलते। प्रावधानों में भी बदलाव होते रहते हैं। जब कभी दोनों मुल्कों के बीच तनाव पैदा होता है, उसका असर कारोबार पर ही पड़ता है। दोनों देशों का आपसी कारोबार दो. छः अरब डॉलर तक पहुंच गया है और ये लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इसके दूसरी ओर भारत और चीन ने दो हज़ार पंद्रह तक द्विपक्षीय कारोबार को एक सौ अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंध सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे ही यह परिभाषित होता है कि भारत और पाकिस्तान एक दूसरे को किस तरह से देखते हैं। दो हज़ार आठ में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले का आरोप जब पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों पर लगा तभी से दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों ख़राब होने लगे। हालांकि भारत के पास नवाज़ शरीफ़ के समय से जुड़ी अच्छी यादें हैं। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में भारत के साथ एक बेहद अहम समझौता किया लेकिन उसके बाद ही दोनों देशों के बीच सीमा पर युद्ध छिड़ गया और उसके बाद सेना के तख्तापलट ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन विश्लेषक अब भी नवाज़ शरीफ़ को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। ज़्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि यह सब काफी कुछ इस बात पर निर्भर होगा कि नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान सेना के बीच आपसी रिश्ते कैसे रहते हैं। एक चिंता की बात ये भी है कि इस बार उन्होंने कट्टरपंथी इस्लामी समूहों से समझौते किए हैं। इन सबके बावजूद कुछ लोग उन्हें मौका दिए जाने के पक्ष में हैं। नवाज़ शरीफ़ की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी उन्हें बधाई दी है। इतना ही नहीं शरीफ़ के कार्यभार संभालने से पहले मनमोहन सिंह ने उनके पास विशेष प्रतिनिधि को भी भेजा है। 'अनुभव आएगा काम' यहां तक कि मुख्य विपक्षी दल और हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी भी नवाज़ शरीफ़ को उम्मीद से देख रही है। यही वजह है कि भारत को शरीफ़ के काम काज संभालने का इंतज़ार है। अपने दुकान पर इंदरदीप चावला को भी बेसब्री से इसका इंतज़ार है।
वर्षावास का आनन्द ले लिया * श्री फकोरचन्द मेहता आज से २० वर्ष पूर्व प्राचार्य श्री नानालाल जी महाराज अमरावर्त ( महाराष्ट्र) का वर्षावास करके खानदेश की ओर पधार रहे थे । उनकी सेवा में मैं अकोला पहुचा । उनसे विनम्र निवेदन किया कि कृपया भुसावल पधारें । महाराज जी ने फरमाया कि मैं उस तरफ आ रहा । आपकी विनत मेरी झोली में है । फिर फतेहपुर होते हुए जामनेर पधारे तब वहां के श्री राज मलजी सा. ललवानी का फोन आया कि आचार्य श्री संत मण्डली सहित जामने पधारे हैं, आप जावें । इस तरह भुसावल के कुछ श्रावकों को लेकर मैं जामनेर पहुचा । हो चातुर्मास पर भुसावल पधारने बाबत विनती की । जवाब में उन्होंने स्वीकृि फरमाई । यह वार्ता भुसावल के कुछ विशिष्ट श्रावकों के हृदय में अच्छी न लगी क्योंकि वे श्रमरण संघ में नहीं हैं । यह क्षेत्र श्रमरण संघ का मानने वा है. इस वास्ते भुसावल के कुछ लोग प्राचार्य जी की सेवा में जामनेर पहुचे । उन कहने लगे कि आप भुसावल नहीं पधारना । यह श्रमण संघ का क्षेत्र है । आच श्री ने फरमाया कि मैंने मेहताजी की विनंती स्वीकार करली है । मैं भुसाव आऊंगा और होली चातुर्मास का प्रतिक्रमण करूंगा । यह बात सुनकर गए हु श्रावकों के मन में खलबली मच गई । आचार्य श्री ने अपने निर्णयानुसार भुसावल की ओर विहार किया मेरे विद्यालय के २५०० / ३००० बच्चों को लेकर मैं आचार्य श्री की अगवानी में भुसावल शहर के बाहर पहुचा । उस दिन मुस्लिम लोगों का त्यौहार भी था । उसी रोड से वें लोग भी हजारों की तादाद में निकलते रहे थे । इस तरह आचार्य श्री का भव्य स्वागत भुसावल में दिखाई दिया। वहां से शहर में होते हुए आचार्य श्री संत मण्डली सहित हिन्दी विद्यालय के प्रांगण में पधारे । उनका ८ दिवसीय कार्यक्रम तय किया जिसमें वहां के नगर निगम हाल व अन्य विद्यालयों में प्रवचन रखे गये । हजारों की तादाद में जनमेदिनी उनके व्याख्यान में आती रही । यह सब चर्चा भुसावल के श्रावकों के और उनका भी आना शुरू हो गया । आचार्य श्री फरमाने लगे कि 'मेहता ! तुमने तो वर्षावास का आनन्द ले लिया ।' महाराज श्री बिराजे तब तक उनके धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाएं बाहर गांव से सैकड़ों की तादाद में प्राते रहे । मुझे भी इन सबकी सेवाओं का लाभ मिला । तब से अभी तक आचार्य श्री के नजर में भुसावल का वह होली चातुर्मास अमिट छाप लिया हुआ है । इन्दौर - १ - पारस, ६ भंडारी मार्ग, न्यू पलासिया, प्रभावशाली व्यक्तित्व * श्री रतनलाल सी. वाफना परम श्रद्धय प्राचार्य श्री नानालाल जी म. सा. ने महती कृपा कर सं. २०४६ का चातुर्मास यहां किया ! चातुर्मास के प्रवेश पर आचार्य श्री का सर्वप्रथम प्रभाव हम पर यह पड़ा कि प्रवेश पर किसी मुहूर्त का विचार न करते हुए नवकार मंत्र के उच्चारण के साथ प्रवेश किया। प्रवेश के मुहूर्त की जब हमने चर्चा की तो आचार्य श्री ने स्पष्ट कहा कि मैं मुहूर्त में विश्वास नहीं करता । चातुर्मास प्रवेश पर आचार्य श्री ने जो उद्गार फरमाए, मेरे मनमस्तिष्क में तरोताजा हैं - "यह जल का गांव है । जहां जल है वहां क्या कमी रहती है ? जहां प्राणीमात्र के लिए जरूरी है वहां समृद्धि का कारणभूत होता है, " सच मानिए जब से इन प्राचार्यों की कृपा-दृष्टि जलगांव पर हुई, जलगांव की समृद्धि में उतरोत्तर वृद्धि हुई । यह सब गुरु कृपा का ही चमत्कार समझता हूं । पहले ऐसा सुनने में आया था कि आचार्य श्री व उनके संत गुरु कर बहुत चलाते हैं, पर चार मास में किसी संत के मुंह गुरु आम्नाय का चक्कर सामने नहीं आया । पूरा चातुर्मास धर्मध्यान के साथ सानन्द वीता । श्रावक व्यवस्था में आचार्य श्री ने किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं किया । जब कभी व्यवस्था के बारे में पूछा जाता, यही जवाब मिलताआपकी व्यवस्था आप जानो । हमें डर था कि आचार्य श्री लाउडस्पीकर वापरने की मान्यता वाले नहीं होने से व्याख्यान का मजा नहीं आयेगा पर आचार्य श्री की ओजस्वी वाणी से संवत्सरी महापर्व के दिन भी इस कमी का अहसास नहीं हुआ । पूरे चातुर्मास आपको समता विभूति के रूप में देखा । समय की पाबन्दी, क्रिया में निष्ठा व प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले आचार्य श्री वस्तुतः दर्शनमूर्ति हैं । भौतिकवाद के इस युग में जहां तक मुझे ख्याल है प्राचार्य श्री के आचार्य काल में सबसे ज्यादा संत-सतियों की वृद्धि हो रही है । सामूहिक दीक्षाएं स्खल प्रमाण है । आचार्य श्री दीर्घायु प्राप्त करें व अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व में समाज का मार्गदर्शन करते रहें, ऐसी नम्र कामना के साथ वन्दन करता हूँ । -"नयनतारा" सुभाष चौक जलव ४२५००१ अन्तरावलोकन का राजपथ : समीक्षरण ध्यान ॐ श्री मगनलाल मेहता प्परम श्रद्धेय आचार्य श्री नानेश की मानव समाज को आज जो सबसे बड़ी देन है वह है 'समीक्षर' और 'समता' की विचारधारा । समता प्रतिफल है और समीक्षरण वह राजपथ है जिसके द्वारा उसे प्राप्त किया जा सकता है । आचार्य श्री का अद्भुत व्यक्तित्व, उनकी अनुपम शांत मुखमुद्रा और एक क्रांतिमय आभामंडल इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने इन सिद्धान्तों को केवल उपदेशित ही नहीं किया है वरन् जीवन में आत्मसात् भी किया है । हम जब भी उनके सामने होते हैं ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक शान्त अमृतमय सुधारस हमारे में प्रविष्ट हो रहा है और हमें भी पवित्र कर रहा है । उनके सामने से हटने की इच्छा ही नहीं होती । यही कारण है कि आज वे हजारों लाखों लोगों के श्रद्धा के केन्द्र बने हुए हैं और लोग केवल उनकी एक पावन झलक के लिये तरसते हैं । उनका सान्निध्य प्राप्त कर उपदेशों के हृदयंगम करने वाले तो निश्चय ही सौभाग्यशाली हैं । समीक्षरण का सीधा-सा अर्थ है स्वयं का आत्म निरीक्षण अन्तरावलोकन और उसके द्वारा समता भाव की प्राप्ति । आज हमारे देखने का दृष्टिकोण ही हुआ है । हम लोग सदैव बाहर दूसरे की ओर देखते हैं लेकिन स्वयं नहीं देखते । दूसरे के पास क्या है और क्या कह रहा है इसे भी मैं अपने दृष्टिकोण से देखता हूं । लेकिन मैं स्वयं क्या हूं और क्या करता हूं इसे देखने का मैंने कभी प्रयास नहीं किया । जिस व्यक्ति को मैं अपना समझ रहा हूं, वह मुझे प्रिय है लेकिन वही व्यक्ति यदि किसी दूसरे का हो जाता है तो मुझे अप्रिय हो जाता है । जो सम्पत्ति मेरी है वह मुझ प्रिय है लेकिन वही सम्पत्ति यदि दूसरे के पास होती है तो मुझे द्वेष हो जाता है । इस तरह जीवन की प्रत्येक घटनाओं के और व्यवहारों के देखने के मेरे दृष्टिकोण भिन्न-२ होते हैं। इन्हीं कारणों से हमारे भीतर कषायों की उत्पत्ति होती है और हम राग और द्वेष की भयंकर अग्नि में अपने आपको जलाते हुए दुःख, क्लेश और संतापों को आमंत्रित करते रहते हैं । समीक्षण विचारधारा सबसे पहले हमारे दृष्टिकोण को बदलने पर जोर देती है । हम वाहर की ओर देखना बन्द करें स्वयम् की ओर देखने का प्रयास करें । मैं कौन हूं ? क्या हूं ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ? मैं क्या कर रहा हूं ? और क्या मुझे करना चाहिये ? यद्यपि भीतर की ओर दृष्टि मोड़ना कोई सरल कार्य नहीं है क्योंकि हमारा मन एक बेलगाम घोड़े की तरह प्रतिक्षरण वाहर की ओर भागने का अभ्यस्त है । अतः साधना के मार्ग पर अग्रसर हुए व्यक्ति के लिये सबसे पहले इस मन को एकाग्र करना अत्यन्त आवश्यक है । मुझे वह क्षण आज भी अच्छी तरह याद है जब रतलाम चातुर्मास के पूर्व आचार्य भगवन ने मेरे तथा हमारे कुछ साथियों पर अत्यन्त अनुकृपा कर साधना का वह मार्ग हमें बताया और उस पर चलने के लिये हमें प्रेरित किया । मन की एकाग्रता के लिये द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की शुद्धि के साथ श्वास और प्राणायाम के प्रयोग बहुत ही लाभकारी होते हैं । स्वतः श्वास पर मन को केन्द्रित करना, पूरक, रेचक और कुंभक की क्रिया, अरहम् अथवा किसी भी शुद्ध स्वरूप या ध्वनि पर मन को केन्द्रित करना, भ्रामरिक गुजार, शरीर में स्थित विभिन्न शक्ति केन्द्रों पर मन ही एकाग्र करना आदि अनेक ऐसे प्रयोग हैं जो मन को एकाग्र करने में सहायक होते हैं । यद्यपि इसके लिये भी सतत प्रयास और प्रतिदिन के अभ्यास की आवश्यकता होती है । है मन की एकाग्रता साधने के बाद हमें हमारे बाहरी नेत्रों को वन्द कर भीतर की ओर देखना होता है । हमारे भीतर कितना गहन अन्धकार र कषायों की गन्दगी भरी पड़ी है, यह हमें स्पष्ट दृष्टिगोचर होने लगेगा । में चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति मेरी प्रज्ञा का पालन करे, मेरी इच्छा के अनुसार चले और मेरी स्वार्थ पूर्ति में किसी प्रहार की वाघा न बने । इन्हीं असंभव में पेशाओं के कारण मैं स्वयं का कितना बड़ा ग्रहित कर लेता हूं । मानसिक तनाव, बुद्धिविनाश, हेमरेज, हार्ट अटेक आदि अनेक बीमारियों को में अनायास ही आमंत्रित कर लेता हूँ । अहंकार का भूत दूसरों को तुच्छ समझने के लिये मुझे सदैव प्रेरित करता रहता है । जरासा सुख, जरासी सम्पत्ति, जरासा अधिकार, थोड़ा-सा ज्ञान, थोड़ा-सा तप मुझे आसमान पर विठा देता है । अपने इसी अहंकार के नशे में मैं वड़ - छोटे, मान-सन्मान के सव रिश्ते भूल जाता हूं । स्वार्थ पूर्ति और लोभ की भावनाओं के वशीभूत होकर में कितने छल, कपट, झूठ, चोरी, हिंसा, व्यभिचार और यहां तक की हत्या जैसे भयंकर दुष्कृत्य भी करने को तत्पर हो जाता हूं । स्वार्थ की पूर्ति के अवसर पर मुझे भाई-बहन, पिता-पुत्र, प्रिय गुरुजन, बड़े-छोटे किसी का कोई भान नहीं रहता है । मैं ग्रन्था हो जाता हूँ" । "मैं" और "मेरा" शब्द मेरे राग की उत्पत्ति के कारण है और "तू" और "तेरा" मेरे भीतर द्वेष की वृत्ति को जागृत करते हैं । समीक्षण साधना अन्तरावलोकन का राजपथ हमें बताता है कि एस भौतिक संसार में कुछ भी मेरा नहीं है । परिवार और भौतिक वस्तु में तो ठीक यह शरीर भी मेरा नहीं है । प्रत्येक व्यक्ति खाली हाथ आता है तीर खाली हाथ ही चला जाता है। केवल अपने सुकृत्य और ज्ञान प्रत्येक आत्मा के
वर्षावास का आनन्द ले लिया * श्री फकोरचन्द मेहता आज से बीस वर्ष पूर्व प्राचार्य श्री नानालाल जी महाराज अमरावर्त का वर्षावास करके खानदेश की ओर पधार रहे थे । उनकी सेवा में मैं अकोला पहुचा । उनसे विनम्र निवेदन किया कि कृपया भुसावल पधारें । महाराज जी ने फरमाया कि मैं उस तरफ आ रहा । आपकी विनत मेरी झोली में है । फिर फतेहपुर होते हुए जामनेर पधारे तब वहां के श्री राज मलजी सा. ललवानी का फोन आया कि आचार्य श्री संत मण्डली सहित जामने पधारे हैं, आप जावें । इस तरह भुसावल के कुछ श्रावकों को लेकर मैं जामनेर पहुचा । हो चातुर्मास पर भुसावल पधारने बाबत विनती की । जवाब में उन्होंने स्वीकृि फरमाई । यह वार्ता भुसावल के कुछ विशिष्ट श्रावकों के हृदय में अच्छी न लगी क्योंकि वे श्रमरण संघ में नहीं हैं । यह क्षेत्र श्रमरण संघ का मानने वा है. इस वास्ते भुसावल के कुछ लोग प्राचार्य जी की सेवा में जामनेर पहुचे । उन कहने लगे कि आप भुसावल नहीं पधारना । यह श्रमण संघ का क्षेत्र है । आच श्री ने फरमाया कि मैंने मेहताजी की विनंती स्वीकार करली है । मैं भुसाव आऊंगा और होली चातुर्मास का प्रतिक्रमण करूंगा । यह बात सुनकर गए हु श्रावकों के मन में खलबली मच गई । आचार्य श्री ने अपने निर्णयानुसार भुसावल की ओर विहार किया मेरे विद्यालय के दो हज़ार पाँच सौ / तीन हज़ार बच्चों को लेकर मैं आचार्य श्री की अगवानी में भुसावल शहर के बाहर पहुचा । उस दिन मुस्लिम लोगों का त्यौहार भी था । उसी रोड से वें लोग भी हजारों की तादाद में निकलते रहे थे । इस तरह आचार्य श्री का भव्य स्वागत भुसावल में दिखाई दिया। वहां से शहर में होते हुए आचार्य श्री संत मण्डली सहित हिन्दी विद्यालय के प्रांगण में पधारे । उनका आठ दिवसीय कार्यक्रम तय किया जिसमें वहां के नगर निगम हाल व अन्य विद्यालयों में प्रवचन रखे गये । हजारों की तादाद में जनमेदिनी उनके व्याख्यान में आती रही । यह सब चर्चा भुसावल के श्रावकों के और उनका भी आना शुरू हो गया । आचार्य श्री फरमाने लगे कि 'मेहता ! तुमने तो वर्षावास का आनन्द ले लिया ।' महाराज श्री बिराजे तब तक उनके धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाएं बाहर गांव से सैकड़ों की तादाद में प्राते रहे । मुझे भी इन सबकी सेवाओं का लाभ मिला । तब से अभी तक आचार्य श्री के नजर में भुसावल का वह होली चातुर्मास अमिट छाप लिया हुआ है । इन्दौर - एक - पारस, छः भंडारी मार्ग, न्यू पलासिया, प्रभावशाली व्यक्तित्व * श्री रतनलाल सी. वाफना परम श्रद्धय प्राचार्य श्री नानालाल जी म. सा. ने महती कृपा कर सं. दो हज़ार छियालीस का चातुर्मास यहां किया ! चातुर्मास के प्रवेश पर आचार्य श्री का सर्वप्रथम प्रभाव हम पर यह पड़ा कि प्रवेश पर किसी मुहूर्त का विचार न करते हुए नवकार मंत्र के उच्चारण के साथ प्रवेश किया। प्रवेश के मुहूर्त की जब हमने चर्चा की तो आचार्य श्री ने स्पष्ट कहा कि मैं मुहूर्त में विश्वास नहीं करता । चातुर्मास प्रवेश पर आचार्य श्री ने जो उद्गार फरमाए, मेरे मनमस्तिष्क में तरोताजा हैं - "यह जल का गांव है । जहां जल है वहां क्या कमी रहती है ? जहां प्राणीमात्र के लिए जरूरी है वहां समृद्धि का कारणभूत होता है, " सच मानिए जब से इन प्राचार्यों की कृपा-दृष्टि जलगांव पर हुई, जलगांव की समृद्धि में उतरोत्तर वृद्धि हुई । यह सब गुरु कृपा का ही चमत्कार समझता हूं । पहले ऐसा सुनने में आया था कि आचार्य श्री व उनके संत गुरु कर बहुत चलाते हैं, पर चार मास में किसी संत के मुंह गुरु आम्नाय का चक्कर सामने नहीं आया । पूरा चातुर्मास धर्मध्यान के साथ सानन्द वीता । श्रावक व्यवस्था में आचार्य श्री ने किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं किया । जब कभी व्यवस्था के बारे में पूछा जाता, यही जवाब मिलताआपकी व्यवस्था आप जानो । हमें डर था कि आचार्य श्री लाउडस्पीकर वापरने की मान्यता वाले नहीं होने से व्याख्यान का मजा नहीं आयेगा पर आचार्य श्री की ओजस्वी वाणी से संवत्सरी महापर्व के दिन भी इस कमी का अहसास नहीं हुआ । पूरे चातुर्मास आपको समता विभूति के रूप में देखा । समय की पाबन्दी, क्रिया में निष्ठा व प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले आचार्य श्री वस्तुतः दर्शनमूर्ति हैं । भौतिकवाद के इस युग में जहां तक मुझे ख्याल है प्राचार्य श्री के आचार्य काल में सबसे ज्यादा संत-सतियों की वृद्धि हो रही है । सामूहिक दीक्षाएं स्खल प्रमाण है । आचार्य श्री दीर्घायु प्राप्त करें व अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व में समाज का मार्गदर्शन करते रहें, ऐसी नम्र कामना के साथ वन्दन करता हूँ । -"नयनतारा" सुभाष चौक जलव चार लाख पच्चीस हज़ार एक अन्तरावलोकन का राजपथ : समीक्षरण ध्यान ॐ श्री मगनलाल मेहता प्परम श्रद्धेय आचार्य श्री नानेश की मानव समाज को आज जो सबसे बड़ी देन है वह है 'समीक्षर' और 'समता' की विचारधारा । समता प्रतिफल है और समीक्षरण वह राजपथ है जिसके द्वारा उसे प्राप्त किया जा सकता है । आचार्य श्री का अद्भुत व्यक्तित्व, उनकी अनुपम शांत मुखमुद्रा और एक क्रांतिमय आभामंडल इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने इन सिद्धान्तों को केवल उपदेशित ही नहीं किया है वरन् जीवन में आत्मसात् भी किया है । हम जब भी उनके सामने होते हैं ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक शान्त अमृतमय सुधारस हमारे में प्रविष्ट हो रहा है और हमें भी पवित्र कर रहा है । उनके सामने से हटने की इच्छा ही नहीं होती । यही कारण है कि आज वे हजारों लाखों लोगों के श्रद्धा के केन्द्र बने हुए हैं और लोग केवल उनकी एक पावन झलक के लिये तरसते हैं । उनका सान्निध्य प्राप्त कर उपदेशों के हृदयंगम करने वाले तो निश्चय ही सौभाग्यशाली हैं । समीक्षरण का सीधा-सा अर्थ है स्वयं का आत्म निरीक्षण अन्तरावलोकन और उसके द्वारा समता भाव की प्राप्ति । आज हमारे देखने का दृष्टिकोण ही हुआ है । हम लोग सदैव बाहर दूसरे की ओर देखते हैं लेकिन स्वयं नहीं देखते । दूसरे के पास क्या है और क्या कह रहा है इसे भी मैं अपने दृष्टिकोण से देखता हूं । लेकिन मैं स्वयं क्या हूं और क्या करता हूं इसे देखने का मैंने कभी प्रयास नहीं किया । जिस व्यक्ति को मैं अपना समझ रहा हूं, वह मुझे प्रिय है लेकिन वही व्यक्ति यदि किसी दूसरे का हो जाता है तो मुझे अप्रिय हो जाता है । जो सम्पत्ति मेरी है वह मुझ प्रिय है लेकिन वही सम्पत्ति यदि दूसरे के पास होती है तो मुझे द्वेष हो जाता है । इस तरह जीवन की प्रत्येक घटनाओं के और व्यवहारों के देखने के मेरे दृष्टिकोण भिन्न-दो होते हैं। इन्हीं कारणों से हमारे भीतर कषायों की उत्पत्ति होती है और हम राग और द्वेष की भयंकर अग्नि में अपने आपको जलाते हुए दुःख, क्लेश और संतापों को आमंत्रित करते रहते हैं । समीक्षण विचारधारा सबसे पहले हमारे दृष्टिकोण को बदलने पर जोर देती है । हम वाहर की ओर देखना बन्द करें स्वयम् की ओर देखने का प्रयास करें । मैं कौन हूं ? क्या हूं ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ? मैं क्या कर रहा हूं ? और क्या मुझे करना चाहिये ? यद्यपि भीतर की ओर दृष्टि मोड़ना कोई सरल कार्य नहीं है क्योंकि हमारा मन एक बेलगाम घोड़े की तरह प्रतिक्षरण वाहर की ओर भागने का अभ्यस्त है । अतः साधना के मार्ग पर अग्रसर हुए व्यक्ति के लिये सबसे पहले इस मन को एकाग्र करना अत्यन्त आवश्यक है । मुझे वह क्षण आज भी अच्छी तरह याद है जब रतलाम चातुर्मास के पूर्व आचार्य भगवन ने मेरे तथा हमारे कुछ साथियों पर अत्यन्त अनुकृपा कर साधना का वह मार्ग हमें बताया और उस पर चलने के लिये हमें प्रेरित किया । मन की एकाग्रता के लिये द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की शुद्धि के साथ श्वास और प्राणायाम के प्रयोग बहुत ही लाभकारी होते हैं । स्वतः श्वास पर मन को केन्द्रित करना, पूरक, रेचक और कुंभक की क्रिया, अरहम् अथवा किसी भी शुद्ध स्वरूप या ध्वनि पर मन को केन्द्रित करना, भ्रामरिक गुजार, शरीर में स्थित विभिन्न शक्ति केन्द्रों पर मन ही एकाग्र करना आदि अनेक ऐसे प्रयोग हैं जो मन को एकाग्र करने में सहायक होते हैं । यद्यपि इसके लिये भी सतत प्रयास और प्रतिदिन के अभ्यास की आवश्यकता होती है । है मन की एकाग्रता साधने के बाद हमें हमारे बाहरी नेत्रों को वन्द कर भीतर की ओर देखना होता है । हमारे भीतर कितना गहन अन्धकार र कषायों की गन्दगी भरी पड़ी है, यह हमें स्पष्ट दृष्टिगोचर होने लगेगा । में चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति मेरी प्रज्ञा का पालन करे, मेरी इच्छा के अनुसार चले और मेरी स्वार्थ पूर्ति में किसी प्रहार की वाघा न बने । इन्हीं असंभव में पेशाओं के कारण मैं स्वयं का कितना बड़ा ग्रहित कर लेता हूं । मानसिक तनाव, बुद्धिविनाश, हेमरेज, हार्ट अटेक आदि अनेक बीमारियों को में अनायास ही आमंत्रित कर लेता हूँ । अहंकार का भूत दूसरों को तुच्छ समझने के लिये मुझे सदैव प्रेरित करता रहता है । जरासा सुख, जरासी सम्पत्ति, जरासा अधिकार, थोड़ा-सा ज्ञान, थोड़ा-सा तप मुझे आसमान पर विठा देता है । अपने इसी अहंकार के नशे में मैं वड़ - छोटे, मान-सन्मान के सव रिश्ते भूल जाता हूं । स्वार्थ पूर्ति और लोभ की भावनाओं के वशीभूत होकर में कितने छल, कपट, झूठ, चोरी, हिंसा, व्यभिचार और यहां तक की हत्या जैसे भयंकर दुष्कृत्य भी करने को तत्पर हो जाता हूं । स्वार्थ की पूर्ति के अवसर पर मुझे भाई-बहन, पिता-पुत्र, प्रिय गुरुजन, बड़े-छोटे किसी का कोई भान नहीं रहता है । मैं ग्रन्था हो जाता हूँ" । "मैं" और "मेरा" शब्द मेरे राग की उत्पत्ति के कारण है और "तू" और "तेरा" मेरे भीतर द्वेष की वृत्ति को जागृत करते हैं । समीक्षण साधना अन्तरावलोकन का राजपथ हमें बताता है कि एस भौतिक संसार में कुछ भी मेरा नहीं है । परिवार और भौतिक वस्तु में तो ठीक यह शरीर भी मेरा नहीं है । प्रत्येक व्यक्ति खाली हाथ आता है तीर खाली हाथ ही चला जाता है। केवल अपने सुकृत्य और ज्ञान प्रत्येक आत्मा के
दो करोड़ नब्बे लाख बहत्तर हज़ार बीस संध्या एक हज़ार नौ सौ बजे मुख्य समाचार एक केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को स्वीकृति प्रदान की दो हजार पैंतीस तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर पचास प्रतिशत तक पहुंचाना लक्ष्य राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या दस हजार के करीब पहुंची लगभग चार हजार मरीज उपचार के बाद हुए स्वस्थ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोरोना जांच का दायरा बढ़ाने पर दिया जोर कहा वैश्विक महामारी से निपटने के लिए किया जायेगा स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार चतरा जिले में पूर्व नक्सली कमांडर सहित चार अपराधकर्मी गिरफ्तार सिमडेगा में भी कुख्यात अपराधी पुलिस गिरफ्त में दो तीन चार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 को स्वीकृति प्रदान कर दी इसमें जो बड़े सुधार किए गए हैं उनमें वर्ष दो हज़ार पैंतीस तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर को पचास प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाना और विद्यार्थियों को अलगअलग स्तर पर शिक्षा छोड़ने या प्रवेश लेने की सुविधा प्रदान करना भी शामिल है नई शिक्षा नीति में किए गए अन्य प्रमुख सुधारों में शिक्षा संस्थाओं को अकादमिक प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और सभी प्रकार की उच्च शिक्षा के लिए एक ही विनियामक बनाना भी शामिल है इसके अलावा तरह तरह के निरीक्षण के स्थान पर स्वीकृति लेने के लिए स्वघोषणा पर आधारित पारदर्शी प्रणाली कायम करने की बात भी नई शिक्षा नीति में कही गई है राज्य में कोरोना संक्रमण का प्रसार लगातार बढ़ रहा है पिछले चौबीस घंटे में सात सौ इक्कानवे नये मामले सामने आये हैं इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या नौ हजार छह सौ अड़सठ हो गई है इनमें तीन हजार नौ सौ चौरासी मरीज उपचार के बाद स्वस्थ भी हुए हैं राज्य में फिलहाल पांच हजार पांच सौ नब्बे सक्रिय केस हैं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक महामारी कोरोना से राज्य में अब तक चौरानवे लोगों की मौत हुई है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में कोरोना जांच का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है पलामू जिले में स्थित पीएमसीएच में डायग्नोस्टिक लैब का ऑनलाईन उद्घाटन करते हुए श्री सोरेन ने कहा कि कोरोना संक्रमण के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने शुरूआती दिनों से ही तेज गति से काम करती रही है उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है रामगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में श्री आलम ने कहा कि मनरेगा कर्मियों की उचित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जायेगा जैसा की आपको मालूम है कि राज्य के मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं सिमडेगा जिले में चैंबर ऑफ कॉमर्स के आह्वान पर दुकानदारों ने सेल्फ लॉकडाउन आज से शुरू कर दिया है देश में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ लोगों की संख्या दस लाख तक पहुंच गई है इसके साथ ही स्वस्थ होने की दर अब चौंसठ दशमलव पांचएक प्रतिशत हो गयी है कोरोना से मृत्यु दर भी घटकर दो दशमलव दोतीन प्रतिशत रह गई है केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पिछले चौबिस घंटे में पैंतीस हजार दो सौ छियासी मरीज ठीक हुए हैं अब तक कुल नौ लाख अठासी हजार उनतीस रोगी स्वस्थ हो चुके हैं अधिकारी ने बताया कि पिछले चौबिस घंटे में देश में कुल अड़तालीस हजार पाँच सौ तेरह लोग संक्रमित हुए इसके साथ ही संक्रमितों की कुल संख्या पंद्रह लाख इकतीस हजार छः सौ उनहत्तर हो गई है इनमें से पांच लाख नौ हजार चार सौ सैंतालीस का इलाज चल रहा है एक दिन में सात सौ अड़सठ लोगों की मृत्यु के साथ कोविड19 से मृतकों की संख्या चौंतीस हजार एक सौ तिरानवे हो गई है इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषदआईसीएमआर ने कहा कि पिछले चौबिस घंटों के दौरान विभिन्न प्रयोगशालाओं में चार लाख आठ हजार आठ सौ पचपन कोविड19 नमूनों की जांच की गई अब तक देशभर में एक करोड सतहत्तर लाख तैंतालीस हजार सात सौ चालीस नमूनों की जांच की जा चुकी है फिलहाल देश में एक हजार तीन सौ सोलह जांच केन्द्र हैं जिसमें नौ सौ छह सरकारी और चार सौ दस निजी क्षेत्र के जांच केन्द्र शामिल हैं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि वे नोवल कोरोना वायरस से अपने को सुरक्षित रखने के लिए सभी बुनियादी एहतियाती उपायों का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखें आकाशवाणी का समाचार सेवा प्रभाग आज अपने फोन इन कार्यक्रम में कोविड19 पर विशेष परिचर्चा प्रसारित करेगा यह कार्यक्रम रात नौ बजकर तीस मिनट से एफएम गोल्ड और अतिरिक्त मीटरों पर सुना जा सकता है सफदरजंग अस्पताल में श्वसन रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ नितेश चर्चा में भाग लेंगे श्रोता स्टूडियो में हमारे टोलफ्री नम्बर एक आठ शून्य शून्य एक एक पाँच सात छः सात पर फोन करके विशेषज्ञ से सवाल पूछ सकते हैं श्रोता शून्य एक एक दो तीन तीन एक चार चार चार चार पर भी सवाल पूछ सकते हैं चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस ने तीन लुटेरों को गिरफ्तार किया है इनके पास से हथियार सहित कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की गई हैं गिरफ्तार अपराधियों में नक्सलियों का एक पूर्व एरिया कमांडर भी शामिल है पुलिस ने एक अन्य कार्रवाई में एक अफीम तस्कर को भी गिरफ्तार किया है उसके पास से एक सौ पन्द्रह किलो अफीम डोडा का चूर्ण बरामद किया गया है उधर सिमडेगा जिले में भी पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को हथियार के साथ गिरफ्तार किया है इस अपराधी के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में ग्यारह संगीन मामले दर्ज हैं हजारीबाग में भी पुलिस ने कुख्यात अमन श्रीवास्तव गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है पुलिस को लंबे समय से इस अपराधी की तलाश थी रफाल लडाकू विमान की पहली खेप बाद अम्बाला पहुंच गई है रफाल के इस खेप में तीन सिंगल सीटर और दो दोसीटर विमान हैं इन्हें हरियाणा के अम्बाला स्थित एयरबेस में भारतीय वायुसेना मे शामिल किया जायेगा फ्रांस की कंपनी दस्सों द्वारा निर्मित इन लडाकू विमानों को सोमवार को दक्षिणी फ्रांस के बॉर्डे स्थित मेरीनियाख हवाईअड्डे से रवाना किया गया था वर्ष दो हज़ार सोलह में भारत और फ्रांस के बीच हुए सौदे के तहत भारत ने फ्रांस से उनसठ हजार करोड रूपये में छत्तीस विमानों की खरीद की थी फ्रांस में भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा है कि दस विमानों की डिलीवरी तय समय के भीतर पूरी कर ली गई है इनमें से पांच विमान प्रशिक्षण मिशन पर फ्रांस में ही रहेंगे अगले वर्ष के अंत तक सभी छत्तीस विमान भारत को सौंप दिये जायेंगे एशियाई विकास बैंक ने अपने एशिया प्रशान्त आपदा मोचन कोष से भारत को तीस लाख अमरीकी डॉलर के अनुदान की मंजूरी दी है इससे देश में कोविड महामारी से निपटने के तात्कालिक उपायों में मदद मिलेगी इस वर्ष अट्ठाईस अप्रैल को बैंक ने भारत को कोविड महामारी का मुकाबला करने के लिए पंद्रह अरब अमरीकी डॉलर की मदद की घोषणा की थी झारखण्ड कैडेर आईपीएस अधिकारी श्री आलोक का कल रात निधन हो गया वे कैंसर से पीड़ित थे आज राजधानी रांची के डोरण्डा स्थित जैप वन के ग्राउंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी आलोक सयुक्त बिहार के के दौरान वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में बतौर डीएसपी बहाल हुए थे झारखण्ड बनने के बाद वे झारखण्ड कैडर में आये और एक मार्च दो हज़ार सोलह को उन्हें आईपीएस रैंक में प्रोन्नती मिली थी आज अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए दुनिया भर में हर साल उनतीस जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने संदेश में कहा है कि देश में बाघों की संख्या में वृद्धि में वन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उन्होंने कहा कि ताजा गणना के अनुसार देश में बाघों की संख्या दो हजार नौ सौ सरसठ​ है देश में चार वर्षों में इनकी संख्या सात सौ इकतालीस बढी है पर्यावरण मंत्री ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में जब बाघ परियोजना शुरू की गई थी उस समय देश में सिर्फ नौ बाघ अभयारण्य थे जिनकी संख्या बढ़कर अब पचास हो गई है पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है इस वर्ष का लाइफ टाइम उत्कृष्टता पुरस्कार प्रोफेसर अशोक साहनी को भूगर्भ विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान विशाखापत्तनम के डॉ वी वी एस सरमा और ध्रुवीय तथा समुद्री अनुसंधान केन्द्र गोवा के डॉ रविचन्द्रन को ध्रुवीय और समुद्र अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी का राष्ट्रीय पुरस्कार डॉ एस सुरेश बाबू को प्रदान किया गया है स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर धनबाद जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई बैठक में कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे को देखते हुए एहितियाती उपायों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने का निर्णय किया गया पंजाब नैशनल बैंक के बोकारो मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों में एक कैंसर पीड़ित युवा की मदद कर एक अनुकरणीय पहल की है उपायुक्त की पहल पर बैंक अधिकारियों ने पीड़ित युवा के ईलाज के लिए एक लाख रूपये का अर्थिक सहयोग दिया है भारत रत्न जे आर डी टाटा की आज एक सौ सोलहवीं जयंती जमशेदपुर में सादगीपूर्वक मनाई गई इस दौरान टाटा स्टील की अनुषंगिक इकाई जेमीपॉल की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया रांची के उपायुक्त ने डॉक्टर्स जुनियर इंजिनियर प्रखण्ड पशुपालन पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मियों सहित सोलह कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है समाप्त
दो करोड़ नब्बे लाख बहत्तर हज़ार बीस संध्या एक हज़ार नौ सौ बजे मुख्य समाचार एक केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को स्वीकृति प्रदान की दो हजार पैंतीस तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर पचास प्रतिशत तक पहुंचाना लक्ष्य राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या दस हजार के करीब पहुंची लगभग चार हजार मरीज उपचार के बाद हुए स्वस्थ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोरोना जांच का दायरा बढ़ाने पर दिया जोर कहा वैश्विक महामारी से निपटने के लिए किया जायेगा स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार चतरा जिले में पूर्व नक्सली कमांडर सहित चार अपराधकर्मी गिरफ्तार सिमडेगा में भी कुख्यात अपराधी पुलिस गिरफ्त में दो तीन चार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीतिदो हज़ार बीस को स्वीकृति प्रदान कर दी इसमें जो बड़े सुधार किए गए हैं उनमें वर्ष दो हज़ार पैंतीस तक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर को पचास प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाना और विद्यार्थियों को अलगअलग स्तर पर शिक्षा छोड़ने या प्रवेश लेने की सुविधा प्रदान करना भी शामिल है नई शिक्षा नीति में किए गए अन्य प्रमुख सुधारों में शिक्षा संस्थाओं को अकादमिक प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और सभी प्रकार की उच्च शिक्षा के लिए एक ही विनियामक बनाना भी शामिल है इसके अलावा तरह तरह के निरीक्षण के स्थान पर स्वीकृति लेने के लिए स्वघोषणा पर आधारित पारदर्शी प्रणाली कायम करने की बात भी नई शिक्षा नीति में कही गई है राज्य में कोरोना संक्रमण का प्रसार लगातार बढ़ रहा है पिछले चौबीस घंटे में सात सौ इक्कानवे नये मामले सामने आये हैं इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या नौ हजार छह सौ अड़सठ हो गई है इनमें तीन हजार नौ सौ चौरासी मरीज उपचार के बाद स्वस्थ भी हुए हैं राज्य में फिलहाल पांच हजार पांच सौ नब्बे सक्रिय केस हैं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक महामारी कोरोना से राज्य में अब तक चौरानवे लोगों की मौत हुई है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में कोरोना जांच का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है पलामू जिले में स्थित पीएमसीएच में डायग्नोस्टिक लैब का ऑनलाईन उद्घाटन करते हुए श्री सोरेन ने कहा कि कोरोना संक्रमण के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने शुरूआती दिनों से ही तेज गति से काम करती रही है उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है रामगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में श्री आलम ने कहा कि मनरेगा कर्मियों की उचित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जायेगा जैसा की आपको मालूम है कि राज्य के मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं सिमडेगा जिले में चैंबर ऑफ कॉमर्स के आह्वान पर दुकानदारों ने सेल्फ लॉकडाउन आज से शुरू कर दिया है देश में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ लोगों की संख्या दस लाख तक पहुंच गई है इसके साथ ही स्वस्थ होने की दर अब चौंसठ दशमलव पांचएक प्रतिशत हो गयी है कोरोना से मृत्यु दर भी घटकर दो दशमलव दोतीन प्रतिशत रह गई है केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पिछले चौबिस घंटे में पैंतीस हजार दो सौ छियासी मरीज ठीक हुए हैं अब तक कुल नौ लाख अठासी हजार उनतीस रोगी स्वस्थ हो चुके हैं अधिकारी ने बताया कि पिछले चौबिस घंटे में देश में कुल अड़तालीस हजार पाँच सौ तेरह लोग संक्रमित हुए इसके साथ ही संक्रमितों की कुल संख्या पंद्रह लाख इकतीस हजार छः सौ उनहत्तर हो गई है इनमें से पांच लाख नौ हजार चार सौ सैंतालीस का इलाज चल रहा है एक दिन में सात सौ अड़सठ लोगों की मृत्यु के साथ कोविडउन्नीस से मृतकों की संख्या चौंतीस हजार एक सौ तिरानवे हो गई है इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषदआईसीएमआर ने कहा कि पिछले चौबिस घंटों के दौरान विभिन्न प्रयोगशालाओं में चार लाख आठ हजार आठ सौ पचपन कोविडउन्नीस नमूनों की जांच की गई अब तक देशभर में एक करोड सतहत्तर लाख तैंतालीस हजार सात सौ चालीस नमूनों की जांच की जा चुकी है फिलहाल देश में एक हजार तीन सौ सोलह जांच केन्द्र हैं जिसमें नौ सौ छह सरकारी और चार सौ दस निजी क्षेत्र के जांच केन्द्र शामिल हैं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि वे नोवल कोरोना वायरस से अपने को सुरक्षित रखने के लिए सभी बुनियादी एहतियाती उपायों का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखें आकाशवाणी का समाचार सेवा प्रभाग आज अपने फोन इन कार्यक्रम में कोविडउन्नीस पर विशेष परिचर्चा प्रसारित करेगा यह कार्यक्रम रात नौ बजकर तीस मिनट से एफएम गोल्ड और अतिरिक्त मीटरों पर सुना जा सकता है सफदरजंग अस्पताल में श्वसन रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ नितेश चर्चा में भाग लेंगे श्रोता स्टूडियो में हमारे टोलफ्री नम्बर एक आठ शून्य शून्य एक एक पाँच सात छः सात पर फोन करके विशेषज्ञ से सवाल पूछ सकते हैं श्रोता शून्य एक एक दो तीन तीन एक चार चार चार चार पर भी सवाल पूछ सकते हैं चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस ने तीन लुटेरों को गिरफ्तार किया है इनके पास से हथियार सहित कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की गई हैं गिरफ्तार अपराधियों में नक्सलियों का एक पूर्व एरिया कमांडर भी शामिल है पुलिस ने एक अन्य कार्रवाई में एक अफीम तस्कर को भी गिरफ्तार किया है उसके पास से एक सौ पन्द्रह किलो अफीम डोडा का चूर्ण बरामद किया गया है उधर सिमडेगा जिले में भी पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को हथियार के साथ गिरफ्तार किया है इस अपराधी के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में ग्यारह संगीन मामले दर्ज हैं हजारीबाग में भी पुलिस ने कुख्यात अमन श्रीवास्तव गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है पुलिस को लंबे समय से इस अपराधी की तलाश थी रफाल लडाकू विमान की पहली खेप बाद अम्बाला पहुंच गई है रफाल के इस खेप में तीन सिंगल सीटर और दो दोसीटर विमान हैं इन्हें हरियाणा के अम्बाला स्थित एयरबेस में भारतीय वायुसेना मे शामिल किया जायेगा फ्रांस की कंपनी दस्सों द्वारा निर्मित इन लडाकू विमानों को सोमवार को दक्षिणी फ्रांस के बॉर्डे स्थित मेरीनियाख हवाईअड्डे से रवाना किया गया था वर्ष दो हज़ार सोलह में भारत और फ्रांस के बीच हुए सौदे के तहत भारत ने फ्रांस से उनसठ हजार करोड रूपये में छत्तीस विमानों की खरीद की थी फ्रांस में भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा है कि दस विमानों की डिलीवरी तय समय के भीतर पूरी कर ली गई है इनमें से पांच विमान प्रशिक्षण मिशन पर फ्रांस में ही रहेंगे अगले वर्ष के अंत तक सभी छत्तीस विमान भारत को सौंप दिये जायेंगे एशियाई विकास बैंक ने अपने एशिया प्रशान्त आपदा मोचन कोष से भारत को तीस लाख अमरीकी डॉलर के अनुदान की मंजूरी दी है इससे देश में कोविड महामारी से निपटने के तात्कालिक उपायों में मदद मिलेगी इस वर्ष अट्ठाईस अप्रैल को बैंक ने भारत को कोविड महामारी का मुकाबला करने के लिए पंद्रह अरब अमरीकी डॉलर की मदद की घोषणा की थी झारखण्ड कैडेर आईपीएस अधिकारी श्री आलोक का कल रात निधन हो गया वे कैंसर से पीड़ित थे आज राजधानी रांची के डोरण्डा स्थित जैप वन के ग्राउंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी आलोक सयुक्त बिहार के के दौरान वर्ष एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में बतौर डीएसपी बहाल हुए थे झारखण्ड बनने के बाद वे झारखण्ड कैडर में आये और एक मार्च दो हज़ार सोलह को उन्हें आईपीएस रैंक में प्रोन्नती मिली थी आज अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए दुनिया भर में हर साल उनतीस जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने संदेश में कहा है कि देश में बाघों की संख्या में वृद्धि में वन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उन्होंने कहा कि ताजा गणना के अनुसार देश में बाघों की संख्या दो हजार नौ सौ सरसठ​ है देश में चार वर्षों में इनकी संख्या सात सौ इकतालीस बढी है पर्यावरण मंत्री ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में जब बाघ परियोजना शुरू की गई थी उस समय देश में सिर्फ नौ बाघ अभयारण्य थे जिनकी संख्या बढ़कर अब पचास हो गई है पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है इस वर्ष का लाइफ टाइम उत्कृष्टता पुरस्कार प्रोफेसर अशोक साहनी को भूगर्भ विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान विशाखापत्तनम के डॉ वी वी एस सरमा और ध्रुवीय तथा समुद्री अनुसंधान केन्द्र गोवा के डॉ रविचन्द्रन को ध्रुवीय और समुद्र अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है वायुमंडलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी का राष्ट्रीय पुरस्कार डॉ एस सुरेश बाबू को प्रदान किया गया है स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर धनबाद जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई बैठक में कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे को देखते हुए एहितियाती उपायों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने का निर्णय किया गया पंजाब नैशनल बैंक के बोकारो मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों में एक कैंसर पीड़ित युवा की मदद कर एक अनुकरणीय पहल की है उपायुक्त की पहल पर बैंक अधिकारियों ने पीड़ित युवा के ईलाज के लिए एक लाख रूपये का अर्थिक सहयोग दिया है भारत रत्न जे आर डी टाटा की आज एक सौ सोलहवीं जयंती जमशेदपुर में सादगीपूर्वक मनाई गई इस दौरान टाटा स्टील की अनुषंगिक इकाई जेमीपॉल की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया रांची के उपायुक्त ने डॉक्टर्स जुनियर इंजिनियर प्रखण्ड पशुपालन पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मियों सहित सोलह कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है समाप्त
हैदराबाद, पांच मई (भाषा) जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले सेना के तकनीशियन पाब्बल्ला अनिल का पार्थिव शरीर शुक्रवार को यहां लाए जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। हैदराबाद, पांच मई (भाषा) जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले सेना के तकनीशियन पाब्बल्ला अनिल का पार्थिव शरीर शुक्रवार को यहां लाए जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। एक रक्षा विज्ञप्ति के अनुसार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग हेडक्वार्टर तेलंगाना और आंध्र उप क्षेत्र के मेजर जनरल राकेश मनोचा ने यहां वायु सेना स्टेशन हकीमपेट में अनिल को पुष्पांजलि अर्पित की। तेलंगाना के रहने वाले बहादुर जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। विज्ञप्ति में बताया गया है कि अनिल के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से राजन्ना सिरसिल्ला जिले के उनके पैतृक मल्कापुर गांव ले जाया गया है और वहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि सेना का एक हेलीकॉप्टर किसी तकनीकी खामी के चलते जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बृहस्पतिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके कारण इसमें सवार तकनीशियन अनिल की मौत हो गई और दो पायलट घायल हो गए। यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
हैदराबाद, पांच मई जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले सेना के तकनीशियन पाब्बल्ला अनिल का पार्थिव शरीर शुक्रवार को यहां लाए जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। हैदराबाद, पांच मई जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले सेना के तकनीशियन पाब्बल्ला अनिल का पार्थिव शरीर शुक्रवार को यहां लाए जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। एक रक्षा विज्ञप्ति के अनुसार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग हेडक्वार्टर तेलंगाना और आंध्र उप क्षेत्र के मेजर जनरल राकेश मनोचा ने यहां वायु सेना स्टेशन हकीमपेट में अनिल को पुष्पांजलि अर्पित की। तेलंगाना के रहने वाले बहादुर जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। विज्ञप्ति में बताया गया है कि अनिल के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से राजन्ना सिरसिल्ला जिले के उनके पैतृक मल्कापुर गांव ले जाया गया है और वहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि सेना का एक हेलीकॉप्टर किसी तकनीकी खामी के चलते जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बृहस्पतिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके कारण इसमें सवार तकनीशियन अनिल की मौत हो गई और दो पायलट घायल हो गए। यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दशकों से चली आ रही रेल बजट की परंपरा को भी साल 2016 में बदलने का काम किया. 2016 से पहले तक रेल बजट को आम बजट से कुछ दिन पहले अलग से पेश किया जाता था, लेकिन 2016 में इसे बदलते हुए तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रेल बजट को आम बजट के साथ मिलाकर पेश किया. बजट इतिहास की परंपराओं को देखें तो वर्ष 1947 से देश का आम बजट संसद में पेश करने हेतु एक लाल रंग के ब्रीफकेस में लाया जाता था. केंद्र सरकार ने साल 2019 में इस परंपरा में भी बदलाव किया. उसके बाद से लाल ब्रीफकेस के बजाय बजट लाल कपड़े में लपेटकर बही-खाते के रूप में लाया जाने लगा. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बदलाव पर कहा था कि देश का बजट दरअसल देश का बही-खाता होता है, इसलिए उन्होंने बजट के स्वरूप में बदलाव किया है. वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते देश में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत तेजी के साथ बढ़ा. इसके साथ ही बजट भी इससे अछूता नहीं रहा. इस क्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार बजट 2021-22 को संसद में एक टैबलेट के जरिए पेश किया. इस प्रकार बजट टैब ने पारंपरिक बही खाते की जगह ले ली. हालांकि यह टैबलेट बही खाते के समान लाल रंग के कपड़े में ही नजर आया. इसके ऊपर भारत सरकार का चिह्न लगा था. पहली बार 2021 में डिजिटल बजट पेश किया गया था. इससे पहले बजट की छपाई होती थी. एक अभूतपूर्व पहल के तहत, केंद्रीय बजट 2021-22 को पेपरलेस रूप में वितरित किया गया. केंद्र सरकार द्वारा इस तरह का कदम पहली बार उठाया गया. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद सदस्यों और आम लोगों को आसानी से और तेजी से बजट से संबंधित अपडेट मिल सके, इसके लिए "यूनियन बजट मोबाइल एप" लॉन्च किया. यह भी केंद्र सरकार द्वारा बजट परंपराओं में किया गया एक बड़ा बदलाव था. मोबाइल एप के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण (आमतौर पर इसे बजट के रूप में जाना जाता है), अनुदान की मांग (डीजी), वित्त विधेयक इत्यादि दस्तावेज उपलब्ध होंगे जो कि संविधान के अनुसार तय किए गए हैं. बता दें एप में डाउनलोडिंग, प्रिंटिंग, सर्च, जूम इन और आउट, बाई डायरेक्शनल स्क्रॉलिंग, कंटेंट और एक्सटर्नल लिंक की तालिका आदि के साथ उपयोगकर्ताओं के अनुकूल इंटरफेस उपलब्ध हैं. एप अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है. साथ ही यह एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है. एप को केंद्रीय बजट के वेब पोर्टल www. indiabudget. gov. in से भी डाउनलोड किया जा सकता है. इस एप को आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित किया गया है. इस बार बजट की तैयारी से पहले आयोजित किया जाने वाला हलवा समारोह भी नहीं हुआ. दरअसल, हलवा समारोह का काफी पुराना इतिहास रहा है. इस समारोह के साथ ही बजट की छपाई का कार्य शुरू होता था. नॉर्थ ब्लॉक में हर साल बजट से पहले होने वाले इस समारोह में वित्त मंत्री समेत मंत्रालय के अधिकारी हिस्सा लेते थे. इस बार कोरोना महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए हलवा सेरेमनी का आयोजन नहीं किया गया.
पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दशकों से चली आ रही रेल बजट की परंपरा को भी साल दो हज़ार सोलह में बदलने का काम किया. दो हज़ार सोलह से पहले तक रेल बजट को आम बजट से कुछ दिन पहले अलग से पेश किया जाता था, लेकिन दो हज़ार सोलह में इसे बदलते हुए तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रेल बजट को आम बजट के साथ मिलाकर पेश किया. बजट इतिहास की परंपराओं को देखें तो वर्ष एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से देश का आम बजट संसद में पेश करने हेतु एक लाल रंग के ब्रीफकेस में लाया जाता था. केंद्र सरकार ने साल दो हज़ार उन्नीस में इस परंपरा में भी बदलाव किया. उसके बाद से लाल ब्रीफकेस के बजाय बजट लाल कपड़े में लपेटकर बही-खाते के रूप में लाया जाने लगा. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बदलाव पर कहा था कि देश का बजट दरअसल देश का बही-खाता होता है, इसलिए उन्होंने बजट के स्वरूप में बदलाव किया है. वैश्विक महामारी कोविड-उन्नीस के चलते देश में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत तेजी के साथ बढ़ा. इसके साथ ही बजट भी इससे अछूता नहीं रहा. इस क्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार बजट दो हज़ार इक्कीस-बाईस को संसद में एक टैबलेट के जरिए पेश किया. इस प्रकार बजट टैब ने पारंपरिक बही खाते की जगह ले ली. हालांकि यह टैबलेट बही खाते के समान लाल रंग के कपड़े में ही नजर आया. इसके ऊपर भारत सरकार का चिह्न लगा था. पहली बार दो हज़ार इक्कीस में डिजिटल बजट पेश किया गया था. इससे पहले बजट की छपाई होती थी. एक अभूतपूर्व पहल के तहत, केंद्रीय बजट दो हज़ार इक्कीस-बाईस को पेपरलेस रूप में वितरित किया गया. केंद्र सरकार द्वारा इस तरह का कदम पहली बार उठाया गया. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद सदस्यों और आम लोगों को आसानी से और तेजी से बजट से संबंधित अपडेट मिल सके, इसके लिए "यूनियन बजट मोबाइल एप" लॉन्च किया. यह भी केंद्र सरकार द्वारा बजट परंपराओं में किया गया एक बड़ा बदलाव था. मोबाइल एप के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण , अनुदान की मांग , वित्त विधेयक इत्यादि दस्तावेज उपलब्ध होंगे जो कि संविधान के अनुसार तय किए गए हैं. बता दें एप में डाउनलोडिंग, प्रिंटिंग, सर्च, जूम इन और आउट, बाई डायरेक्शनल स्क्रॉलिंग, कंटेंट और एक्सटर्नल लिंक की तालिका आदि के साथ उपयोगकर्ताओं के अनुकूल इंटरफेस उपलब्ध हैं. एप अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है. साथ ही यह एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है. एप को केंद्रीय बजट के वेब पोर्टल www. indiabudget. gov. in से भी डाउनलोड किया जा सकता है. इस एप को आर्थिक मामलों के विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित किया गया है. इस बार बजट की तैयारी से पहले आयोजित किया जाने वाला हलवा समारोह भी नहीं हुआ. दरअसल, हलवा समारोह का काफी पुराना इतिहास रहा है. इस समारोह के साथ ही बजट की छपाई का कार्य शुरू होता था. नॉर्थ ब्लॉक में हर साल बजट से पहले होने वाले इस समारोह में वित्त मंत्री समेत मंत्रालय के अधिकारी हिस्सा लेते थे. इस बार कोरोना महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए हलवा सेरेमनी का आयोजन नहीं किया गया.
टीवी सीरियल 'अनुपमा' में आए दिन नए-नए ट्वीस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये शो दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। अनुज और अनुपमा की जोड़ी फैन्स को खूब पसंद आ रही है। वहीं अब सीरियल की कहानी में अनुपमा और अनुज की लव स्टोरी भी आगे बढ़ती हुई नजर आने वाली हैं। शो में अनुपमा जल्द ही अनुज को अपने दिल की बात जाहिर करने वाली हैं। वहीं वैलेंटाइन-डे के मौके पर शो का अगला एपिसोड खास होने अला है। 'अनुपमा' में जल्द ही अनुज का 26 साल पुराना ख्वाब पूरा होने वाला है। इस वैलेंटाइन-डे पर अनुपमा अब अनुज से अपने दिल की बात कहने वाली है। इस दौरान अनुज और अनुपमा को रोमांस करते हुए देखा जाएगा। इसी एपिसोड का एक प्रोमो वीडियो अनुपमा का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया है। रुपाली गांगुली द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर में देखा जा सकता है कि अनुज और अनुपमा एक-दूसरे के करीब आते नजर आ रहे हैं। वैलेंटाइन-डे के इस खास दिन पर अनुपमा और अनुज रोमांस करेंगे, ये एपिसोड 16 फरवरी को प्रसारित होने वाला है। दोनों का ये रोमांटिक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में अनुपमा बेहद ही खूबसूरत लग रही है और अनुज की नजरें उसपर से हट नहीं रही हैं। वीडियो में फैन्स को अनुपमा और अनुज का ये अंदाज बेहद पसंद आ रहा है। वहीं अनुपमा को देख फैन्स को अंजली और अनुज को देख राहुल की याद आ रही है। अनुपमा और अनुज के इस रोमांटिक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है। फैन्स काफी समय से अनुज और अनुपमा के मिलन का इंतजार कर रहे थे। रुपाली गांगुली ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है 'फरवरी फैब है अनुपमा की जिंदगी का पहला वैलेंटाइन-डे स्पेशल तो होगा ही, जानना चाहते हैं कि आप लोग क्या चाहते हैं कि हो! और आप लोगों को क्या लगता है कि अनुपमा और अनुज का वेलेंटाइन डे कैसा होगा। आगे रोमांचक सप्ताह'। वहीं इस वीडियो पर उनके फैन्स जमकर कमेंट कर उनकी तारीफ कर रहे हैं। उनके एक फैन ने लिखा है 'सुपर डुपर एक्ससाइटेड. . 16 फरवरी तक इंतजार नहीं कर सकते', दूसरे ने लिखा है 'अनुपमा और अनुज का वैलेंटाइ-डे बहुत-बहुत स्पेशल और यादगार होगा'।
टीवी सीरियल 'अनुपमा' में आए दिन नए-नए ट्वीस्ट देखने को मिल रहे हैं। ये शो दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। अनुज और अनुपमा की जोड़ी फैन्स को खूब पसंद आ रही है। वहीं अब सीरियल की कहानी में अनुपमा और अनुज की लव स्टोरी भी आगे बढ़ती हुई नजर आने वाली हैं। शो में अनुपमा जल्द ही अनुज को अपने दिल की बात जाहिर करने वाली हैं। वहीं वैलेंटाइन-डे के मौके पर शो का अगला एपिसोड खास होने अला है। 'अनुपमा' में जल्द ही अनुज का छब्बीस साल पुराना ख्वाब पूरा होने वाला है। इस वैलेंटाइन-डे पर अनुपमा अब अनुज से अपने दिल की बात कहने वाली है। इस दौरान अनुज और अनुपमा को रोमांस करते हुए देखा जाएगा। इसी एपिसोड का एक प्रोमो वीडियो अनुपमा का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया है। रुपाली गांगुली द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर में देखा जा सकता है कि अनुज और अनुपमा एक-दूसरे के करीब आते नजर आ रहे हैं। वैलेंटाइन-डे के इस खास दिन पर अनुपमा और अनुज रोमांस करेंगे, ये एपिसोड सोलह फरवरी को प्रसारित होने वाला है। दोनों का ये रोमांटिक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में अनुपमा बेहद ही खूबसूरत लग रही है और अनुज की नजरें उसपर से हट नहीं रही हैं। वीडियो में फैन्स को अनुपमा और अनुज का ये अंदाज बेहद पसंद आ रहा है। वहीं अनुपमा को देख फैन्स को अंजली और अनुज को देख राहुल की याद आ रही है। अनुपमा और अनुज के इस रोमांटिक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है। फैन्स काफी समय से अनुज और अनुपमा के मिलन का इंतजार कर रहे थे। रुपाली गांगुली ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है 'फरवरी फैब है अनुपमा की जिंदगी का पहला वैलेंटाइन-डे स्पेशल तो होगा ही, जानना चाहते हैं कि आप लोग क्या चाहते हैं कि हो! और आप लोगों को क्या लगता है कि अनुपमा और अनुज का वेलेंटाइन डे कैसा होगा। आगे रोमांचक सप्ताह'। वहीं इस वीडियो पर उनके फैन्स जमकर कमेंट कर उनकी तारीफ कर रहे हैं। उनके एक फैन ने लिखा है 'सुपर डुपर एक्ससाइटेड. . सोलह फरवरी तक इंतजार नहीं कर सकते', दूसरे ने लिखा है 'अनुपमा और अनुज का वैलेंटाइ-डे बहुत-बहुत स्पेशल और यादगार होगा'।
भगवतीचरण वर्मा रचयिता व्यक्तित्व की प्राथमिकताएँ ७ द्वारा आजीविका की समस्या हल होने के कारण इन्होंने इधर-उधर छिट-पुट काम किये । भगवतीबाबू बम्बई में प्रेस का काम जमाना चाहते थे उसी समय देश के आजाद होने पर लखनऊ से एसोशिएटेड जनर्ल्स के तत्वावधान में हिन्दी के 'नवजीवन' नामक दैनिक - पत्र का सम्पादन कार्य वर्माजी को सौपा गया और इस प्रकार वे बम्बई छोड़कर लखनऊ आ गये। इस नियुक्ति के पीछे इनके चचेरे भाई श्री ओंकारनाथ वर्मा और श्री ज्ञानस्वरूप भटनागर का हाथ था जो इसी संस्था में काम करते थे। उस समय एसोशिएटेड जनर्ल्स के सर्वेसर्वा श्री फीरोज गाधी थे और दिल्ली में श्री रफी अहम्मद किदवई इसके प्रमुख थे। एसोशिएटेड जनर्ल्स का सूत्रपात पडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था और इस संगठन से निकलने वाले पत्र मुख्यत' काग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) की नीतियों के पोषक थे। उस समय उत्तर प्रदेश की कांग्रेस दो खेमों में बढ़ी थी जिनमें एक का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री गोविन्द बल्लभ पत कर रहे थे और दूसरे का दिल्ली से श्री रफी अहमद किदवई - इन दोनों नेताओं में अदरुनी मतभेद थे परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पत द्वारा संचालित नीतियों को नवजीवन का समर्थन प्राप्त हुआ जो रफी अहमद के विपरीत सिद्ध हुआ। इसी कारण एक वर्ष के अन्दर ही उन्होनें नवजीवन के सम्पादक पद से इस्तीफा दे दिया - ऐसा लगता है उनकी घुमक्कड़ी और साहसी प्रवृत्ति जीवन में आये प्रत्येक मोड़ पर ठहरकर निरीक्षण करती थी उसके बाद वहाँ बसेरा करने का निश्चय करती थी। अपनी रुचि के प्रतिकूल काम इन्होंने कभी नहीं किया। इस समय तक वर्माजी उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हो चुके थे -- इसबात का अनुभव करते हुए वर्माजी लिखते हैं-- "सन् १९४८ में 'नवजीवन के प्रधान सम्पादक की हैसियत से मैं बम्बई से अपने प्रदेश की राजधानी लखनऊ दापस लौटा और तब मैंने देखा कि हिन्दी साहित्य का संसार यह भूल चुका है कि मैं कवि हूँ। केवल उपन्यासकार के रूप में लोग मुझे जानते हैं। "" नवजीवन से इस्तीफा दे देने पर इनके सामने पुन बम्बई जाने की मजबूरी पैदा हो गयी। गोविन्द बल्लभ पत को इस स्थिति का आभास था। उन दिनों जमींदारी उन्मूलन के सम्बन्ध में भारी प्रचार कार्य हो रहा था। जमींदारी उन्मूलन विधेयक के लिए एक प्रचार इकाई मुख्यमंत्री कार्यालय में ही खुल गयी थी। पंतजी ने वर्माजी को आठ सौ रूपये महीने पर छ माह के लिये इस प्रचार इकाई का प्रचार मंत्री नियुक्त कर दिया। ब्रिटिश शासन के अतिम चरण में रेडियों में भाषा-नीति को लेकर कुछ कदम उठाये गये। आल इण्डियारेडियों का नाम 'आकाशवाणी कर दिया गया यह परिवर्तन नाम भर का न था, उन दिनों पंडित अमरनाथ झा साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष थे, श्री रंगनाथ दिवाकर प्रथम सूचनामंत्री थे- झा और दिवाकरजी ने मिलकर तय किया कि हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार को रेडिया में सलाहकार के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिये। इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी बने - सुमित्रानन्दन पत । इलाहाबाद में पंतजी की हिन्दी सलाहकार के रूप में नियुक्ति हुई । सन् १६५० में वर्माजी का पाचवा उपन्यास 'आखिरी दाव' छपा। आकाशवाणी में भगवतीबाबू १६५७ तक रहे। सात वर्ष तक रेडियो से सम्बद्ध रहने के कारण उन्हें कई साहित्यिक प्रतिभाओं और मित्रों का सान्निध्य मिला। १६५३ से १६५५ तक सूचना और प्रसारण विभाग में डा० केसर के मंत्रित्वकाल में आकाशवाणी, दिल्ली में वे सुगम संगीत के प्रोड्यूसर की हैसियत से कार्य करते रहे। दिल्ली में वर्माजी को पुराने मित्र बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' का सान्निध्य भी प्राप्त होता रहा। मैथिलीशरण गुप्त और श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' भी राज्यसभा के सदस्य के रूप में दिल्ली में ही थे। १६५५ में वर्माजी साहित्य के प्रोड्यूसर की हैसियत से लखनऊ वापस आ गये। रेडियो की नौकरी साहित्य-सृजन में बाधक बन रही थी और पुस्तकों की रायल्टी अब ठीक-ठाक मिलने लगी थी। अतः वर्माजी ने १६५७ में आकाशवाणी से त्याग-पत्र दे दिया। लखनऊ रेडियो स्टेशन वर्मा (एक स्वर ) कुसुम याने ५०३
भगवतीचरण वर्मा रचयिता व्यक्तित्व की प्राथमिकताएँ सात द्वारा आजीविका की समस्या हल होने के कारण इन्होंने इधर-उधर छिट-पुट काम किये । भगवतीबाबू बम्बई में प्रेस का काम जमाना चाहते थे उसी समय देश के आजाद होने पर लखनऊ से एसोशिएटेड जनर्ल्स के तत्वावधान में हिन्दी के 'नवजीवन' नामक दैनिक - पत्र का सम्पादन कार्य वर्माजी को सौपा गया और इस प्रकार वे बम्बई छोड़कर लखनऊ आ गये। इस नियुक्ति के पीछे इनके चचेरे भाई श्री ओंकारनाथ वर्मा और श्री ज्ञानस्वरूप भटनागर का हाथ था जो इसी संस्था में काम करते थे। उस समय एसोशिएटेड जनर्ल्स के सर्वेसर्वा श्री फीरोज गाधी थे और दिल्ली में श्री रफी अहम्मद किदवई इसके प्रमुख थे। एसोशिएटेड जनर्ल्स का सूत्रपात पडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था और इस संगठन से निकलने वाले पत्र मुख्यत' काग्रेस की नीतियों के पोषक थे। उस समय उत्तर प्रदेश की कांग्रेस दो खेमों में बढ़ी थी जिनमें एक का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री गोविन्द बल्लभ पत कर रहे थे और दूसरे का दिल्ली से श्री रफी अहमद किदवई - इन दोनों नेताओं में अदरुनी मतभेद थे परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में पत द्वारा संचालित नीतियों को नवजीवन का समर्थन प्राप्त हुआ जो रफी अहमद के विपरीत सिद्ध हुआ। इसी कारण एक वर्ष के अन्दर ही उन्होनें नवजीवन के सम्पादक पद से इस्तीफा दे दिया - ऐसा लगता है उनकी घुमक्कड़ी और साहसी प्रवृत्ति जीवन में आये प्रत्येक मोड़ पर ठहरकर निरीक्षण करती थी उसके बाद वहाँ बसेरा करने का निश्चय करती थी। अपनी रुचि के प्रतिकूल काम इन्होंने कभी नहीं किया। इस समय तक वर्माजी उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हो चुके थे -- इसबात का अनुभव करते हुए वर्माजी लिखते हैं-- "सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में 'नवजीवन के प्रधान सम्पादक की हैसियत से मैं बम्बई से अपने प्रदेश की राजधानी लखनऊ दापस लौटा और तब मैंने देखा कि हिन्दी साहित्य का संसार यह भूल चुका है कि मैं कवि हूँ। केवल उपन्यासकार के रूप में लोग मुझे जानते हैं। "" नवजीवन से इस्तीफा दे देने पर इनके सामने पुन बम्बई जाने की मजबूरी पैदा हो गयी। गोविन्द बल्लभ पत को इस स्थिति का आभास था। उन दिनों जमींदारी उन्मूलन के सम्बन्ध में भारी प्रचार कार्य हो रहा था। जमींदारी उन्मूलन विधेयक के लिए एक प्रचार इकाई मुख्यमंत्री कार्यालय में ही खुल गयी थी। पंतजी ने वर्माजी को आठ सौ रूपये महीने पर छ माह के लिये इस प्रचार इकाई का प्रचार मंत्री नियुक्त कर दिया। ब्रिटिश शासन के अतिम चरण में रेडियों में भाषा-नीति को लेकर कुछ कदम उठाये गये। आल इण्डियारेडियों का नाम 'आकाशवाणी कर दिया गया यह परिवर्तन नाम भर का न था, उन दिनों पंडित अमरनाथ झा साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष थे, श्री रंगनाथ दिवाकर प्रथम सूचनामंत्री थे- झा और दिवाकरजी ने मिलकर तय किया कि हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार को रेडिया में सलाहकार के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिये। इस श्रृंखला की प्रथम कड़ी बने - सुमित्रानन्दन पत । इलाहाबाद में पंतजी की हिन्दी सलाहकार के रूप में नियुक्ति हुई । सन् एक हज़ार छः सौ पचास में वर्माजी का पाचवा उपन्यास 'आखिरी दाव' छपा। आकाशवाणी में भगवतीबाबू एक हज़ार छः सौ सत्तावन तक रहे। सात वर्ष तक रेडियो से सम्बद्ध रहने के कारण उन्हें कई साहित्यिक प्रतिभाओं और मित्रों का सान्निध्य मिला। एक हज़ार छः सौ तिरेपन से एक हज़ार छः सौ पचपन तक सूचना और प्रसारण विभाग में डाशून्य केसर के मंत्रित्वकाल में आकाशवाणी, दिल्ली में वे सुगम संगीत के प्रोड्यूसर की हैसियत से कार्य करते रहे। दिल्ली में वर्माजी को पुराने मित्र बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' का सान्निध्य भी प्राप्त होता रहा। मैथिलीशरण गुप्त और श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' भी राज्यसभा के सदस्य के रूप में दिल्ली में ही थे। एक हज़ार छः सौ पचपन में वर्माजी साहित्य के प्रोड्यूसर की हैसियत से लखनऊ वापस आ गये। रेडियो की नौकरी साहित्य-सृजन में बाधक बन रही थी और पुस्तकों की रायल्टी अब ठीक-ठाक मिलने लगी थी। अतः वर्माजी ने एक हज़ार छः सौ सत्तावन में आकाशवाणी से त्याग-पत्र दे दिया। लखनऊ रेडियो स्टेशन वर्मा कुसुम याने पाँच सौ तीन
दरअसल इस पोस्टर में ये चारों एकसाथ खड़े नजर आ रहे हैं और उनके चारों ओर दिख रहा एक स्पर्म। पोस्टर देखकर लग रहा है कि ट्रेलर बेहद एंटरटेनिंग साबित होगा। इस नए पोस्टर में एक तरफ जहां करीना अक्षय को गले लगा रही हैं वहीं कियारा दिलजीत को। इससे पहले वाले पोस्टर में करीना और कियारा बेबी बम्प के साथ नजर आ रही थीं और जहां दिलजीत करीना की साइड खड़े थे वहीं अक्षय कियारा की तरफ। साफ है कि फिल्म में कुछ न कुछ ऐसा कन्फ्यूज़न है, जिसमें दर्शक उलझने के लिए तैयार रहें। यह फिल्म अगले महीने क्रिसमस के मौके पर 27 दिसम्बर को रिलीज़ होने जा रही है। धर्मा प्रॉडक्शन की इस फिल्म को राज मेहता निर्देशित कर रहे हैं।
दरअसल इस पोस्टर में ये चारों एकसाथ खड़े नजर आ रहे हैं और उनके चारों ओर दिख रहा एक स्पर्म। पोस्टर देखकर लग रहा है कि ट्रेलर बेहद एंटरटेनिंग साबित होगा। इस नए पोस्टर में एक तरफ जहां करीना अक्षय को गले लगा रही हैं वहीं कियारा दिलजीत को। इससे पहले वाले पोस्टर में करीना और कियारा बेबी बम्प के साथ नजर आ रही थीं और जहां दिलजीत करीना की साइड खड़े थे वहीं अक्षय कियारा की तरफ। साफ है कि फिल्म में कुछ न कुछ ऐसा कन्फ्यूज़न है, जिसमें दर्शक उलझने के लिए तैयार रहें। यह फिल्म अगले महीने क्रिसमस के मौके पर सत्ताईस दिसम्बर को रिलीज़ होने जा रही है। धर्मा प्रॉडक्शन की इस फिल्म को राज मेहता निर्देशित कर रहे हैं।
Braun Strowman: WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन (Braun Strowman) ने हाल ही में कंपनी में वापसी की है। उनकी वापसी के बाद से फैंस काफी ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं। हालांकि, उनके रिटर्न पर रेसलिंग दिग्गज जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स (Jake 'The Snake' Roberts) ने मिक्स्ड रिएक्शन दिए हैं। उनका मानना है कि WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन को अपने कैरेक्टर में बदलाव नहीं करना चाहिए। उनकी इस सलाह पर जरूर गौर किया जा सकता है। बता दें कि WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन को 2021 में रिलीज कर दिया था। उनके रिलीज होने के बाद फैंस काफी ज्यादा हैरान थे। हालांकि, उन्होंने एक बार फिर से WWE में वापसी कर ली है। अपने रिटर्न के बाद से ही वो कई टैग टीमों को निशाना बना चुके हैं। उन्होंने अल्फा अकेडमी के चैड गेबल और ओटिस को भी निशाना बनाया था। हाल ही में जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स ने DDP Snake Pit शो पर इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में उन्होंने ब्रॉन स्ट्रोमैन के रिटर्न को लेकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रॉन स्ट्रोमैन का फ्रेंडली कैरेक्टर पसंद नहीं आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि WWE में वापस आने के बाद उन्हें और ज्यादा खतरनाक दिखाई देना था। ब्रॉन स्ट्रोमैन को लेकर बात करते हुए जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स ने कहा, "ब्रॉन स्ट्रोमैन, आप मेरी बात को सुनों, आपको कोई भी फ्रेंडली कैरेक्टर में नहीं देखना चाहता है, जिसमें आप हंसते हुए दिखाई दे रहे हो। आप ऐसे नहीं हो। आपसे पहले भी कई स्टार्स ने यही गलती की है। जब उन्हें बेबीफेस टर्न दे दिया जाता है तो वो अपने कैरेक्टर को पूरी तरह से बदल देते हैं। नहीं! इस दौरान सिर्फ आपका विरोधी बदला है। आप अभी भी बीस्ट हो। वो बीस्ट, जिसे फैंस पसंद करते हैं। वो अब आपको उन स्टार्स के खिलाफ देखना चाहते हैं, जिन्हें वो पसंद नहीं करते हैं। " ब्रॉन स्ट्रोमैन की वापसी के बाद फैंस काफी ज्यादा खुश हैं। फैंस को उम्मीद है कि WWE एक बार फिर से उन्हें पुश देगा। हालांकि, कई फैंस और दिग्गज भी उनकी बुकिंग को लेकर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में ये देखना दिलचस्प रहेगा कि WWE आने वाले समय में उन्हें किस तरह से बुक करता है। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
Braun Strowman: WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन ने हाल ही में कंपनी में वापसी की है। उनकी वापसी के बाद से फैंस काफी ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं। हालांकि, उनके रिटर्न पर रेसलिंग दिग्गज जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स ने मिक्स्ड रिएक्शन दिए हैं। उनका मानना है कि WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन को अपने कैरेक्टर में बदलाव नहीं करना चाहिए। उनकी इस सलाह पर जरूर गौर किया जा सकता है। बता दें कि WWE सुपरस्टार ब्रॉन स्ट्रोमैन को दो हज़ार इक्कीस में रिलीज कर दिया था। उनके रिलीज होने के बाद फैंस काफी ज्यादा हैरान थे। हालांकि, उन्होंने एक बार फिर से WWE में वापसी कर ली है। अपने रिटर्न के बाद से ही वो कई टैग टीमों को निशाना बना चुके हैं। उन्होंने अल्फा अकेडमी के चैड गेबल और ओटिस को भी निशाना बनाया था। हाल ही में जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स ने DDP Snake Pit शो पर इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में उन्होंने ब्रॉन स्ट्रोमैन के रिटर्न को लेकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रॉन स्ट्रोमैन का फ्रेंडली कैरेक्टर पसंद नहीं आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि WWE में वापस आने के बाद उन्हें और ज्यादा खतरनाक दिखाई देना था। ब्रॉन स्ट्रोमैन को लेकर बात करते हुए जेक 'द स्नेक' रॉबर्ट्स ने कहा, "ब्रॉन स्ट्रोमैन, आप मेरी बात को सुनों, आपको कोई भी फ्रेंडली कैरेक्टर में नहीं देखना चाहता है, जिसमें आप हंसते हुए दिखाई दे रहे हो। आप ऐसे नहीं हो। आपसे पहले भी कई स्टार्स ने यही गलती की है। जब उन्हें बेबीफेस टर्न दे दिया जाता है तो वो अपने कैरेक्टर को पूरी तरह से बदल देते हैं। नहीं! इस दौरान सिर्फ आपका विरोधी बदला है। आप अभी भी बीस्ट हो। वो बीस्ट, जिसे फैंस पसंद करते हैं। वो अब आपको उन स्टार्स के खिलाफ देखना चाहते हैं, जिन्हें वो पसंद नहीं करते हैं। " ब्रॉन स्ट्रोमैन की वापसी के बाद फैंस काफी ज्यादा खुश हैं। फैंस को उम्मीद है कि WWE एक बार फिर से उन्हें पुश देगा। हालांकि, कई फैंस और दिग्गज भी उनकी बुकिंग को लेकर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में ये देखना दिलचस्प रहेगा कि WWE आने वाले समय में उन्हें किस तरह से बुक करता है। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
अधिकारियाें की बैठक लेते विधायक प्रमाेद विज और डीसी धर्मेंद्र सिंह। लघु सचिवालय में मंगलवार काे शहरी विधायक प्रमोद विज और डीसी धर्मेंद्र सिंह ने विभिन्न अधिकारियों के साथ शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और व्यवस्था को लेकर बैठक की। उन्हाेंने कहा कि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए शीघ्र ही सर्वे करवाया जाएगा और विकल्प के तौर पर संभावित रूट बनवाए जाएंगे। अवैध वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए ठोस इंतजाम भी किए जाएंगे। विज ने कहा कि पानीपत में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण लोगों के दैनिक जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो पानीपत में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं बचेगी। यह एक ऐसा मुद्दा है जो शहर के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा हुआ है। शहर में जाम से मुक्ति के लिए संभावित रूटों का चयन करना होगा साथ ही साथ रेडलाइट, संजय चौक और सेक्टर-25 के पास सड़क को पैदल पार करने के लिए लोगों की जो भीड़ होती है। जिससे जाम होता है। उसके बारे में भी जल्द से जल्द सोचना होगा। इस मौके पर एसडीएम स्वप्रील पाटिल, सीटीएम अनुपमा मलिक, सचिव आरटीए अमरिन्द्र सिंह व अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विज ने कहा कि शहर में आई हुई पिंक बसें भी महिलाओं के लिए अभी 5 रूटों पर चलाई जाएं। जिनमें टोल से लेकर आईटीआई तक, असंध रोड इत्यादि रखे जाएं। इन बसों पर हरियाणा रोडवेज के साथ-साथ केवल महिलाओं के लिए ही, भी लिखा जाए। - सनौली रोड़ पर मासाखोरों के लिए नगर निगम की ओर से जगह चिह्नित कर दी जाए ताकि वे वहां बैठ सकें। - करनाल की तर्ज पर सेक्टरों में अलग-अलग मंडियां भी बनाई जाए ताकि लोगों को सब्जी खरीदने के लिए बाहर न जाना पड़े। - जाटल रोड़ पर रेहड़ी वालों की संख्या ज्यादा है। इसलिए उन सभी को जाटल रोड पुल के नीचे खड़ा किया जाए और उन्हें स्थाई तौर पर जगह मिल जाए। - डीसी ने रोडवेज के टीएम से कहा कि सभी बसें बस स्टैंड के अंदर ही सवारी उतारें। - विभिन्न राज्यों से पानीपत से होकर गुजरने वाली बसों के लिए सिविल अस्पताल के सामने कट में से पुल के अंदर से ही गुजारा जाएगा ताकि ये जीटी रोड पर न आए। - इसी तरह दिल्ली जाने वाली बसों के लिए भी व्यवस्था की जाए। - शहर में अवैध वाहनों की भरमार है इसलिए इसका विशेष अभियान चलाकर चालान काटे जाएं। - पैट्रोल की 15 साल से ज्यादा और डीजल की 10 साल से ज्यादा की गाड़ियों को जपत किया जाए। उन्होंने कहा कि एलएनटी यह सुनिश्चित करें कि जीटी रोड के दोनों ओर सर्विस लेन ठीक करने की उनकी जिम्मेदारी तय की गई थी। - पुलिस की ट्रैफिक टीम को क्रेन और ट्रैक्टर उपलब्ध करवाए जाएंगे ताकि अवैध पार्किंग और अनावश्यक रूप से सड़क के किनारे खड़े वाहनों को उठाया जा सके। - सनौली रोड, असंध रोड और मॉडल टाउन में जो अस्पताल अपनी गाड़ियों को अस्पताल परिसर में बनी पार्किंग में खड़ी नहीं करवाते या जिनके पास अपनी वाहन पार्किंग व्यवस्था नहीं है। उन सभी अस्पतालों को नोटिस जारी किया जाए और वाहनों के चालान काटे जाएं।
अधिकारियाें की बैठक लेते विधायक प्रमाेद विज और डीसी धर्मेंद्र सिंह। लघु सचिवालय में मंगलवार काे शहरी विधायक प्रमोद विज और डीसी धर्मेंद्र सिंह ने विभिन्न अधिकारियों के साथ शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और व्यवस्था को लेकर बैठक की। उन्हाेंने कहा कि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए शीघ्र ही सर्वे करवाया जाएगा और विकल्प के तौर पर संभावित रूट बनवाए जाएंगे। अवैध वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए ठोस इंतजाम भी किए जाएंगे। विज ने कहा कि पानीपत में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण लोगों के दैनिक जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो पानीपत में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं बचेगी। यह एक ऐसा मुद्दा है जो शहर के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा हुआ है। शहर में जाम से मुक्ति के लिए संभावित रूटों का चयन करना होगा साथ ही साथ रेडलाइट, संजय चौक और सेक्टर-पच्चीस के पास सड़क को पैदल पार करने के लिए लोगों की जो भीड़ होती है। जिससे जाम होता है। उसके बारे में भी जल्द से जल्द सोचना होगा। इस मौके पर एसडीएम स्वप्रील पाटिल, सीटीएम अनुपमा मलिक, सचिव आरटीए अमरिन्द्र सिंह व अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विज ने कहा कि शहर में आई हुई पिंक बसें भी महिलाओं के लिए अभी पाँच रूटों पर चलाई जाएं। जिनमें टोल से लेकर आईटीआई तक, असंध रोड इत्यादि रखे जाएं। इन बसों पर हरियाणा रोडवेज के साथ-साथ केवल महिलाओं के लिए ही, भी लिखा जाए। - सनौली रोड़ पर मासाखोरों के लिए नगर निगम की ओर से जगह चिह्नित कर दी जाए ताकि वे वहां बैठ सकें। - करनाल की तर्ज पर सेक्टरों में अलग-अलग मंडियां भी बनाई जाए ताकि लोगों को सब्जी खरीदने के लिए बाहर न जाना पड़े। - जाटल रोड़ पर रेहड़ी वालों की संख्या ज्यादा है। इसलिए उन सभी को जाटल रोड पुल के नीचे खड़ा किया जाए और उन्हें स्थाई तौर पर जगह मिल जाए। - डीसी ने रोडवेज के टीएम से कहा कि सभी बसें बस स्टैंड के अंदर ही सवारी उतारें। - विभिन्न राज्यों से पानीपत से होकर गुजरने वाली बसों के लिए सिविल अस्पताल के सामने कट में से पुल के अंदर से ही गुजारा जाएगा ताकि ये जीटी रोड पर न आए। - इसी तरह दिल्ली जाने वाली बसों के लिए भी व्यवस्था की जाए। - शहर में अवैध वाहनों की भरमार है इसलिए इसका विशेष अभियान चलाकर चालान काटे जाएं। - पैट्रोल की पंद्रह साल से ज्यादा और डीजल की दस साल से ज्यादा की गाड़ियों को जपत किया जाए। उन्होंने कहा कि एलएनटी यह सुनिश्चित करें कि जीटी रोड के दोनों ओर सर्विस लेन ठीक करने की उनकी जिम्मेदारी तय की गई थी। - पुलिस की ट्रैफिक टीम को क्रेन और ट्रैक्टर उपलब्ध करवाए जाएंगे ताकि अवैध पार्किंग और अनावश्यक रूप से सड़क के किनारे खड़े वाहनों को उठाया जा सके। - सनौली रोड, असंध रोड और मॉडल टाउन में जो अस्पताल अपनी गाड़ियों को अस्पताल परिसर में बनी पार्किंग में खड़ी नहीं करवाते या जिनके पास अपनी वाहन पार्किंग व्यवस्था नहीं है। उन सभी अस्पतालों को नोटिस जारी किया जाए और वाहनों के चालान काटे जाएं।
बॉलीवुड सिंगर विशाल ददलानी (Vishal Dadlani) इन दिनों सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल जज कर रहे हैं। इस दौरान उनकी जजींग उनको इतनी भारी पड़ी गई कि उन्हें सरे आम माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने बीते एपिसोड में सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के बारे में गलत जानकारी दे दी, जिसके बाद वो सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो गए। बॉलीवुड सिंगर मोनाली ठाकुर ने अपनी सुरीली आवाज से सबको दीवाना बनाया है। मोनाली ने अचानक अपनी शादी का खुलासा कर सबकों चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि साल 2017 में ही उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड माइक रिचर से शादी कर ली थी। कोरोना से उबरने के बाद बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर अपने घर लखनऊ में रह रही हैं। कोरोना के चलते उनको अस्पताल में रहना पड़ा, उसके बाद वो लखनऊ में अपने बच्चों से दूर रह रही हैं।
बॉलीवुड सिंगर विशाल ददलानी इन दिनों सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल जज कर रहे हैं। इस दौरान उनकी जजींग उनको इतनी भारी पड़ी गई कि उन्हें सरे आम माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने बीते एपिसोड में सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर के बारे में गलत जानकारी दे दी, जिसके बाद वो सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो गए। बॉलीवुड सिंगर मोनाली ठाकुर ने अपनी सुरीली आवाज से सबको दीवाना बनाया है। मोनाली ने अचानक अपनी शादी का खुलासा कर सबकों चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि साल दो हज़ार सत्रह में ही उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड माइक रिचर से शादी कर ली थी। कोरोना से उबरने के बाद बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर अपने घर लखनऊ में रह रही हैं। कोरोना के चलते उनको अस्पताल में रहना पड़ा, उसके बाद वो लखनऊ में अपने बच्चों से दूर रह रही हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को कहा कि बिहार के लोग नीतीश और लालू प्रसाद के 'जंगलराज' के समाप्त होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राजधानी पटना में राजनीतिक विरोधियों की दिनदहाड़े हत्या की जा रही है। शहनवाज ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अपने सहयोगी अविनाश कुमार की हत्या को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बिहार में जंगलराज है। दिन के उजाले में राजनीतिक विरोधियों की हत्या की जा रही है। ऐसे में नीतीश कुमार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं। बिहार के लोग इस 'जंगलराज' की समाप्ति का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। " उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि क्या यही सुशासन है कि दिनदहाड़े राजनीतिक विरोधियों की हत्या की जा रही है। बिहार में अब सुशासन समाप्त हो चुका है। शहनवाज ने कहा कि भाजपा नेता की हत्या को लेकर पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने सरकार से 48 घंटे के अंदर अपराधियों को गिरफ्तार किए जाने की मांग की। पटना के सलीमपुर अहरा क्षेत्र में सुबह पटना भाजपा मंडल इकाई के महामंत्री अविनाश की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को कहा कि बिहार के लोग नीतीश और लालू प्रसाद के 'जंगलराज' के समाप्त होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राजधानी पटना में राजनीतिक विरोधियों की दिनदहाड़े हत्या की जा रही है। शहनवाज ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अपने सहयोगी अविनाश कुमार की हत्या को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बिहार में जंगलराज है। दिन के उजाले में राजनीतिक विरोधियों की हत्या की जा रही है। ऐसे में नीतीश कुमार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं। बिहार के लोग इस 'जंगलराज' की समाप्ति का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। " उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि क्या यही सुशासन है कि दिनदहाड़े राजनीतिक विरोधियों की हत्या की जा रही है। बिहार में अब सुशासन समाप्त हो चुका है। शहनवाज ने कहा कि भाजपा नेता की हत्या को लेकर पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने सरकार से अड़तालीस घंटाटे के अंदर अपराधियों को गिरफ्तार किए जाने की मांग की। पटना के सलीमपुर अहरा क्षेत्र में सुबह पटना भाजपा मंडल इकाई के महामंत्री अविनाश की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
सलमान खान की फिल्मों में भरपूर एक्शन देखने मिलता है. सलमान हर फिल्म में नए स्टाइल का एक्शन करते हैं. इस बार भी उनकी फ़िल्म 'जय हो' में वो एक नए रूप में एक्शन लेकर आ रहे हैं. 'जय हो' के एक्शन में खास बात यह है कि फ़िल्म में सलमान ने बंदूक का इस्तेमाल न के बराबर किया है. फिल्म में जो भी एक्शन किया है वो ज्यादातर हाथ से ही किया है, मतलब हैंड टू हैंड फाईट. ये फिल्म सलमान की पिछली फिल्मों से काफी अलग है. वे अकसर अपनी एक्शन फिल्मों में बन्दूक चलाते नजर आये हैं, फिर चाहे वो दबंग 1 और 2 हो या एक था टाइगर. 'जय हो' में उन्होंने हथियार का काफी कम इस्तेमाल किया है. जय हो में सलमान एक ऐसा किरदार निभा रहे हैं जो कानून में भरोसा रखता है. उसे अपने हाथों में नहीं लेना चाहता है. इस वजह से सलमान बहुत ही कम बार फिल्म में बन्दूक या कोई भी हथियार का प्रयोग करते नजर आने वाले हैं.
सलमान खान की फिल्मों में भरपूर एक्शन देखने मिलता है. सलमान हर फिल्म में नए स्टाइल का एक्शन करते हैं. इस बार भी उनकी फ़िल्म 'जय हो' में वो एक नए रूप में एक्शन लेकर आ रहे हैं. 'जय हो' के एक्शन में खास बात यह है कि फ़िल्म में सलमान ने बंदूक का इस्तेमाल न के बराबर किया है. फिल्म में जो भी एक्शन किया है वो ज्यादातर हाथ से ही किया है, मतलब हैंड टू हैंड फाईट. ये फिल्म सलमान की पिछली फिल्मों से काफी अलग है. वे अकसर अपनी एक्शन फिल्मों में बन्दूक चलाते नजर आये हैं, फिर चाहे वो दबंग एक और दो हो या एक था टाइगर. 'जय हो' में उन्होंने हथियार का काफी कम इस्तेमाल किया है. जय हो में सलमान एक ऐसा किरदार निभा रहे हैं जो कानून में भरोसा रखता है. उसे अपने हाथों में नहीं लेना चाहता है. इस वजह से सलमान बहुत ही कम बार फिल्म में बन्दूक या कोई भी हथियार का प्रयोग करते नजर आने वाले हैं.
जापान की रहने वाली एक महिला ने अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाई है और उससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि उसने बहुत कम उम्र से ही ये सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था और अब तक करीब 57 लाख रुपये कर खर्च कर चुकी है. खूबसूरत दिखना आखिर कौन नहीं चाहता है. हर किसी की ये तमन्ना होती है कि वो दुनिया में सबसे अलग और सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं. अलग-अलग प्रकार के क्रीम लगाते हैं, फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके अंदर खूबसूरत दिखने की एक सनक होती है और उस सनक में वो कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. लोग प्लास्टिक सर्जरी की मदद से अपना रूप-रंग सबकुछ बदल देते हैं. आजकल ऐसी ही एक महिला की चर्चा दुनियाभर में हो रही है, जिसने खूबसूरत दिखने के लिए जो किया, उसे करने से पहले कोई भी इंसान 10 बार सोचे. दरअसल, जापान की रहने वाली एक महिला ने अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाई है और उससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि उसने बहुत कम उम्र से ही ये सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था, जिस उम्र में बच्चों को कुछ खास समझ नहीं आता कि उन्हें खूबसूरत दिखने के लिए क्या करना चाहिए. ऑडिटीसेंट्रल नामक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला 10-11 साल की उम्र से ही अपने चेहरे की सर्जरी करवा रही है और अब तक वो इसपर करीब 57 लाख रुपये कर खर्च कर चुकी है. हाल ही में उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर अपना एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि प्लास्टिक सर्जरी से उसने अपने चेहरे को क्यूट और खूबसूरत बनाया है और बहुत कम उम्र से ही उसने सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था. फिर क्या, लोगों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने महिला को ट्रोल करना शुरू कर दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला जब तीसरी क्लास में पढ़ रही थी, तब वह अपनी आंखों के बगल में टेप लगा लेती थी, ताकि उसकी आंखें सही लगें. फिर एक दिन उसकी मां ने उससे बताया कि आंखों को हमेशा के लिए सही करने के लिए सर्जरी करवानी पड़ेगी. फिर क्या, वह सर्जरी के लिए जिद पर अड़ गई. पांचवीं क्लास तक आते-आते आखिरकार उसके माता-पिता ने उसके आंखों की सर्जरी करवा दी. इसके बाद तो उसे सर्जरी की लत ही लग गई. अब तक उसने इतनी सर्जरी करवा ली है कि उसका चेहरा ही पूरी तरह से बदल गया है.
जापान की रहने वाली एक महिला ने अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाई है और उससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि उसने बहुत कम उम्र से ही ये सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था और अब तक करीब सत्तावन लाख रुपये कर खर्च कर चुकी है. खूबसूरत दिखना आखिर कौन नहीं चाहता है. हर किसी की ये तमन्ना होती है कि वो दुनिया में सबसे अलग और सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं. अलग-अलग प्रकार के क्रीम लगाते हैं, फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके अंदर खूबसूरत दिखने की एक सनक होती है और उस सनक में वो कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. लोग प्लास्टिक सर्जरी की मदद से अपना रूप-रंग सबकुछ बदल देते हैं. आजकल ऐसी ही एक महिला की चर्चा दुनियाभर में हो रही है, जिसने खूबसूरत दिखने के लिए जो किया, उसे करने से पहले कोई भी इंसान दस बार सोचे. दरअसल, जापान की रहने वाली एक महिला ने अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवाई है और उससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि उसने बहुत कम उम्र से ही ये सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था, जिस उम्र में बच्चों को कुछ खास समझ नहीं आता कि उन्हें खूबसूरत दिखने के लिए क्या करना चाहिए. ऑडिटीसेंट्रल नामक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला दस-ग्यारह साल की उम्र से ही अपने चेहरे की सर्जरी करवा रही है और अब तक वो इसपर करीब सत्तावन लाख रुपये कर खर्च कर चुकी है. हाल ही में उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर अपना एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि प्लास्टिक सर्जरी से उसने अपने चेहरे को क्यूट और खूबसूरत बनाया है और बहुत कम उम्र से ही उसने सर्जरी करवाना शुरू कर दिया था. फिर क्या, लोगों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने महिला को ट्रोल करना शुरू कर दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला जब तीसरी क्लास में पढ़ रही थी, तब वह अपनी आंखों के बगल में टेप लगा लेती थी, ताकि उसकी आंखें सही लगें. फिर एक दिन उसकी मां ने उससे बताया कि आंखों को हमेशा के लिए सही करने के लिए सर्जरी करवानी पड़ेगी. फिर क्या, वह सर्जरी के लिए जिद पर अड़ गई. पांचवीं क्लास तक आते-आते आखिरकार उसके माता-पिता ने उसके आंखों की सर्जरी करवा दी. इसके बाद तो उसे सर्जरी की लत ही लग गई. अब तक उसने इतनी सर्जरी करवा ली है कि उसका चेहरा ही पूरी तरह से बदल गया है.
सुल्तानपुर की 188 विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी विनोद सिंह ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसा। उन्होंने जनसंपर्क के दौरान कहा कि पिछले 5 सालों में योगी ने विकास कार्यो में जो लकीर खींची है उसने प्रदेश की तस्वीर व तकदीर दोनों बदलीं है। अब उत्तर प्रदेश बीमारु राज्य नहीं देश की नम्बर दो अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है। विनोद सिंह ने जनसंपर्क के दौरान लोगो को आश्वस्त किया कि मैं एक बेटे के रुप में क्षेत्र की सेवा व विकास करुंगा। प्रदेश देश-दुनिया में दंगा के लिए नहीं विकास के लिए जाना जाता है। अब कावड़ यात्रा धूमधाम से निकाली जाती है। पूर्व मंत्री ने आगे कहा आपका कीमती एक वोट तय करेगा कि प्रदेश में दंगा होगा या कानून का डंका बजेगा यह आपको तय करना है। उन्होंने कहा भाजपा ने पीड़ित शोषित वंचित सभी के विकास के लिए काम किया है। पूर्व मंत्री ने कहा कोरोना कॉल में 2 साल से गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि धनी व संपन्न देश भी अपने नागरिकों के लिए जो नहीं कर पाए वह भारत ने और उत्तर प्रदेश ने करके दिखाया है। विनोद सिंह ने धनपतगंज क्षेत्र के कलखुरा, नकहा,प्रतापपुर, माधवपुर, गौराबरन, टीकर, कोरों, सरैया भरथीपुर, पिपरी साईंनाथपुर धनजई, पकड़ी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में जनसभा को संबोधित किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सुल्तानपुर की एक सौ अठासी विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी विनोद सिंह ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसा। उन्होंने जनसंपर्क के दौरान कहा कि पिछले पाँच सालों में योगी ने विकास कार्यो में जो लकीर खींची है उसने प्रदेश की तस्वीर व तकदीर दोनों बदलीं है। अब उत्तर प्रदेश बीमारु राज्य नहीं देश की नम्बर दो अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है। विनोद सिंह ने जनसंपर्क के दौरान लोगो को आश्वस्त किया कि मैं एक बेटे के रुप में क्षेत्र की सेवा व विकास करुंगा। प्रदेश देश-दुनिया में दंगा के लिए नहीं विकास के लिए जाना जाता है। अब कावड़ यात्रा धूमधाम से निकाली जाती है। पूर्व मंत्री ने आगे कहा आपका कीमती एक वोट तय करेगा कि प्रदेश में दंगा होगा या कानून का डंका बजेगा यह आपको तय करना है। उन्होंने कहा भाजपा ने पीड़ित शोषित वंचित सभी के विकास के लिए काम किया है। पूर्व मंत्री ने कहा कोरोना कॉल में दो साल से गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि धनी व संपन्न देश भी अपने नागरिकों के लिए जो नहीं कर पाए वह भारत ने और उत्तर प्रदेश ने करके दिखाया है। विनोद सिंह ने धनपतगंज क्षेत्र के कलखुरा, नकहा,प्रतापपुर, माधवपुर, गौराबरन, टीकर, कोरों, सरैया भरथीपुर, पिपरी साईंनाथपुर धनजई, पकड़ी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में जनसभा को संबोधित किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पुत्र गर्भ में आया तबसे हो प्रतिदिन खराब स्वप्न, अनेकं विष खराब विचार वगैरह होनेके कारण उसने जाना कि, यह गर्भमें आया तयसे ही ऐसा दुःखदायी मालूम देता है तब फिर जब इसका जन्म होगा तय न जाने हमें कितने बड़े दुःख सहन करने पडेंगे? इसलिए इसका जन्मते ही त्याग करना योग्य है। यह विचार किये बाद जब उसका जन्म हुवा तब मृत्युयोग होनेसे विशेष शंका होने के कारण उस जातमात्र चालकको ले कर शेंठने मलहण नामक नदीके किनारे आ कर एक सूखे हुए पत्तों वाले वृक्षके नीचे रख कर शेठ वापिस जाने लगा। उस वक्त कुछ हंस कर बालक बोला कि तुम्हारे पास मेरे एक लाख सौनये-सुबर्ण मुद्रार निकलते हैं सो मुझे दे दो ! अन्यथा तुम्हें अवश्य ही कुछ अनर्थ होगा। यह वचन सुन कर शेठ उसे वापिस घर ले आया और उसका जन्मोत्सत्र, छटी जागरण, नामस्थापना, अन्नप्राशन, वगैरहके महोत्सव करते एक लाख सुवर्ण मुद्रायें शेठने उसके लिये खर्च कीं। इससे वह अपना कर्ज अदा कर चलता बना। फिर दूसरा पुत्र भी इसी प्रकार पैदा हुवा और वह उसका तीन लाख कर्ज अदा कर चला गया। इसके बाद शुभ शकुनादि सूचित एक तीसरा पुत्र गर्भमें आया। तब यह जरूर ही भाग्यशाली निकलेगा शेठने यह निर्धारित किया था तथापि दो पुत्रोंके सम्बन्ध में बने हुए घनावसे डर कर जब वह तीसरे पुत्रका परित्याग करने आया तब वह पुत्र बोला 'मुझ पर तुम्हारा उन्नीस लाख लोनैयोंका कर्ज है। उसे अदा करनेके लिये मैंने तुम्हारे घर 'अवतार लिया है। वह फर्ज दिए विना मैं तुम्हारे घरसे नहीं जा सकता। यह सुन कर शेठने विचार किया कि इसकी जितनी कमाई होगी सो सब धार्मिक कार्योंमें खर्च डालूंगा। यह विचार कर उसे वापिस घर पर 'ला पाल पोश कर बड़ा किया और वह जावड़ साहके नामसे प्रसिद्ध हो वह ऐसा भाग्यशाली निकला कि जिसने श्री शत्रुंजय तीर्थका विक्रमादित्य संवत् १०८ में बड़ा उद्धार किया था। उसका वृत्तान्त अप्रसिद्ध होनेसे ग्रन्थान्तरं से यहां पर कुछ संक्षिप्त में लिखा जाता है. सोरठ देशमें कम्बिलपुर नगरमें भावंड शेठ एक घड़ा व्यापारी व्यापार करता था। उसे सुशीला पतिव्रता भाविला नामकी स्त्री. थी। उन दोनोंफो प्रेमपूर्वक सांसारिक सुख भोगते हुए कितने एक समय याद दैवयोग चपल स्वभावा लक्ष्मी उनके घरसे निकल गई, अर्थात वे निर्धन होगये। तथापि वह अपनी अल्प पू जीके अनुसार प्रमाणिकता से व्यापार वगैरह करके अपनी आजीविका चलाता है । यद्यपि वह निर्धन है और थोड़ी आयसे अपना भरणपोषण करता है तथापि धार्मिक कार्योमे परिणामकी अतिवृद्धि होने से दोनों वक्तके प्रतिक्रमण, त्रिकाल जिनपूजन, गुरुवन्दन, यथाशक्ति तपश्चर्या, और सुपात्र दानादिमें प्रवृत्ति करते हुए अपने समयको सफलता से व्यतीत करता है। ऐसा करते हुए एक समय उसके घर गोचरी फिरते हुए दो मुनि था निकले। भाविला शेठानी मुनिमहाराजों को अतिभक्ति पूर्वक नमन वन्दन कर आहारादिक बोरा कंर बोली-महाराज ! हमारे भाग्यका उदय, कब होगा ? तब उनमेसे एक ज्ञानी मुनि वोला "हे कल्याणी । आज तुम्हारी दूकान पर कोई एक उत्तम जातिवाली घोड़ी वेबनेको आयगा; ज्यों बने त्यों उसे खरीद लेना। उसे जो किशोर-चछेरा होगा उससे तुम्हारा भाग्योदय होगा। फिर तुम्हें जो पुत्र होगा वह पेसा भाग्यशाली होगा कि जो शत्रु जय तीर्थपर तीर्थोद्धार करेगा। यद्यपि मुनियोंको निमित्त बतलानेकी तीर्थंकर की आज्ञा नहीं है तथापि तुम्हारे पुत्रसे जैन शासनकी बड़ी उन्नति होनेवाली है, इसी कारण तुम्हारे पास इतना निमित्त प्रकाशित किया है। यों कहकर मुनि चल पड़े तब भाविळाने अति प्रसन्नता से उन्हें अभिवन्दन किया। अव भाविला शेठानी अपने पतिकी दूकान पर जा बैठी। इतनेहीमें वहां पर कोई एक घोड़ी बेचनेवाला आया, उसे देख भाविलाने अपने पतिके पास सुनिराजकी कही हुई सर्व हकीकत कह सुनाई, इससे भावड़ शेठने कुछ धन नगद दे कर और कुछ उधार रख कर घोड़ीवाले को ज्यों त्यों समझाकर उससे घोड़ी खरीद ली। उस साक्षात् कामधेनु के समान घोड़ीको लाकर अपने घर बांधी और उसकी अच्छी तरह सार संभाल करने लगा। कितने एक दिनों बाद उस घोड़ीने सर्वांग लक्षण युक्त सूर्यदेवके घोड़े के समान एक किशोर-बछेरेको जन्म दिया। उसकी भी बड़ी हिफाजतसे सार सम्भाल करते हुए जब वह तीन सालका हुवा तब उसे बड़ा तेजस्वी देखकर तपन नामक राजा शेठको तीन लाख द्रव्य देकर खरीद ले गया। भावडशेड उन तीन लाख में से अन्य भी कितनी एक घोड़ियां खरीद उन्हें पालने लगा जिससे एक सरीखे रंग और रूप आकार वाले इक्कीस किशोर पैदा हुए। भावड़ शेठने वे सम उज्जैनी नगरमें जाकर विक्रमार्क नामक बड़े राजाको भेट किये। उन्हें देख राजा बड़ा ही प्रसन्न हुवा और कहने लगा कि इन अमूल्य घोड़ोंका मूल्य मैं तुझे कुछ यथार्थ नहीं दे सकता, तथापि तु जो मु' इसे मांगेगा सो तुझे देनेके लिए तैयार हूं, इसलिए जो तेरे ध्यानमें आवे सो मांग ले। उसने मधुमती (महुवा ) का राज्य मांगा, इससे विक्रमार्कने प्रसन्न होकर अन्य भी बारह गांव सहित उसे मधुमतीका राज्य दिया। अब भावड़ विकमार्क से मिली हुई अधिक ऋद्धि, छत्र, चामर, ध्वजा, पताका, निशान, डंकर, सहित बड़े आडम्बरसे ध्वजा वगैरहले सजाई हुई मधुमती नगरीमें आकर अपनी आज्ञा प्रवर्त्ता कर राज्य करने लगा। भावड़ आडम्बर सहित जिस दिन उस नगरमें आया उसी दिन उसकी स्त्री भाविलाने पूर्व दिशा में से उदय पाते हुए सूर्यके समान तेजस्त्री एक पुत्ररत्न को जन्म दिया। उस बालकका जन्म हुवा तब दशों दिशायें भी प्रसन्न दिखाववाली दीखने लंग, पवन भी सुखकारी चलने लगा, सारे देशमें हरेक प्रकारसे सुख शान्ति फैल गई और चराचर प्राणी भी सब प्रसन्न हो गये। अब भावड़ने बड़े आडम्बरसे उस पुत्रका जन्ममहोत्सव किया और उसका 'जावड़' नाम रखा । बड़ी हिफाजन के साथ लालन-पालन होते हुए नन्दन वनमें कल्पवृक्ष के अंकुरके समान माता पितांके मनोरथोंके साथ जावड़ वृद्धिको प्राप्त हुवा। भावड़ने एक समय किसी ज्योतिषी को पूछकर अच्छी रसाल और श्रेष्ठ उदय करानेवाली जमीन पर अपने नामसे एक नगर बसाया। उसके वीचमें इस प्रचलित चौबीसी में आसन्न उपकारी होनेसे पोषधशाला सहित श्रीमहावीर स्वामीको मन्दिर बनवाया। जावड़ जब पांच सालका हुवा तबसे वह विद्याभ्यास करने लगा। वह निर्मल बुद्धि होनेसे थोड़े ही दिनोंमें सर्व शास्त्रोंका पारगामी हुवा और सब समयमें अत्यन्त कुशलता पूर्वक साक्षात् कामदेवके रूप समान रूपवान और तेजस्वी आफारवान होता हुवा यौवनावस्था के सम्मुख आया । भावड़ राजाने अनेक कन्यायें मिलने पर भी जावड़ के योग्य कन्या तलाश करनेके लिए अपने सालेको भेजा। वह कम्पिलपुर तरफ चल पड़ा; श्राद्धविधि प्रकरणो की तलहटी के पास बेटी नामक गांव में आकर रातको रहा। वहां पर एक द्वार नामक व्यापारी रहता था, उसकी पुत्री नाम और गुणसे भी 'सुशीला' थी। सरस्वती के घरदान को पाई हुई साक्षात् सरस्वतीके समान वह कन्या कितनी एक दूसरी कन्याओं के साथ अपने पिताके गृहांगण के आगे खेलती थी। उसे लक्षण सहित देख अजायव हो जावडके मामाने विचार किया कि आकाश में जैसे अगणित ताराओं के बीच चन्द्रकला फलक उठती है वैसी ही सुलक्षणों और कान्ति सहित सचमुच ही यह कन्या जावड़के योग्य है। परन्तु यह किसकी है, किस जातिकी है, क्या नाम है, यह सब किसीको पूछकर वह उस कन्याके घाप सूरसे मिला । और उसने वहुमान पूर्वक जावड़के लिए उस कन्याकी याचना को। यह सुन कन्याके पिताने जावड़को अत्यन्त ऋद्धिवान जानकर कुछ उत्तर देने की सूझ न पड़नेसे नीची गर्दन कर ली, इतने मे ही वहांपर खड़ी हुई वह कन्या कुछ मुस्करा कर अपने पितासे कहने लगी कि, जो कोई पुरुपरत्न मेरे पूछे हुए चार प्रश्नोंका उत्तर देगा मैं उसके साथ सादी कराऊंगी; अन्यथा तपश्वर्या ग्रहण करूंगी, परन्तु अन्यके साथ सादी नहीं करूंगी। यह वचन सुनकर प्रसन्न हुवा ताबड़ का मामा शूर नामक व्यापारीके सारे कुटुस्वी सहित अपने साथ लेकर मधुमति नगरी में आया और भाण्डका' कह कर उन्हें अच्छे स्थानमें ठहराकर उनकी खातिर तबज्ज्ञ की । अन्तमें उन्हें जावड़के साथ मिलाप करानेका वायदा कर सर्वाङ्ग और सर्व अवयघोंसे सुशोभित करके सुशीलाको साथ ले जावड़के पास आया। बहुतले पुरुषोंके बीचमें बैठे हुये जावड़को देखकर तत्काल ही उस मुग्धा सुशीलाकी आँखे ठरने लगीं। फिर मन्द हास्य पूर्वक मानो मुखसे फूल भडते हों इस प्रकार वह कन्या उसके पास आकर बोलने लगी कि हे विचक्षण सुमति ! १ धर्म, २ अर्थ, ३ काम और ४ मोक्ष, इन चार पुरुपायका अभिप्राय आप समझते हैं। यदि आप जानते हों तो इनका यथार्थ स्वरूप निवेदन करें । सर्व शास्त्र पारगामी जावड़ बोला हे सुभ्र ! यदि तुम्हें इन चार पुरुषार्थोके लक्षण ही समझने हैं तो फिर मैं कहता हूं उस पर ध्यान देकर सुनिये । तत्त्वरत्न त्रयाधार । सर्वभूत हित प्रदः ॥ चारित्र लक्षणो धर्मा कस्य शर्मकरो नहि ॥ १ ॥ हिंसाचौय परद्रोह मोहक्लेशविवर्जितः । सप्त क्षेत्रोपयोगीस्या दथो नर्थविनाशकः ॥ २ ॥ जातिस्वभाव गुणभृ लूलुलान्यकरणः क्षणं । धर्मार्थावाधककामो । दंपत्योर्भाववन्धनं ॥ ३ ॥ कपायदोपापगत साम्यवान् जितमानसः । शुक्लध्यानमयस्वात्मांत्यक्षोमोतइतिरितः ॥ ४॥ १ धर्म - रत्नत्रयीका आधार भूत, तमाम प्राणियोंको सुखकारक ऐसा बारित्र धर्म किसे नहीं सुखकारक होता १२ अर्थ - हिंसा चोरी, परद्रोह, मोह, क्लेश, इन सबको बर्ज कर उपार्जन किया हुवा, सात क्षेत्रमें खर्च किया जाता हुवा जी द्रव्य है क्या वह अनर्थका विनाश नहीं करता ? अर्थात् ऐसे द्रव्यसे अनर्थ नहीं होता । ३ काम-सांसारिक सुख भोगनेके अनुकसको उलंघन न करके धर्म और अर्थको वाधा न करते हुए समान जाति स्वभाव और गुणवाले स्त्री पुरुषोंका जो मिलाप है उसे काम कहते हैं। ४ मोक्ष-कषायदोपका त्यागी शांतिवान जिसने मनको जीता है ऐसा शुक्लध्यानमय, जो अपनी आत्मा है वह अन्त्यक्ष याने मोक्ष गिना जाता है।. अपने पूछे हुए चार प्रश्नोंके यथार्थ उत्तर सुन कर सुशीला ने सरस्वती की दी हुई प्रतिज्ञा पूरी होनेसे प्रसन्न होकर जावडके गलेमें वरमाला आरोपण की। फिर दोनोंके मातापिताने बड़े प्रसन्न होकर और आडम्बर से उनका विवाह समारम्भ किया। लग्न हुये बाद अब वे नव म स देह छायाके सशन दोनों जने परस्पर प्रेमपूर्वक आसक हो देवलोकके समान मनोवांछित यथेच्छ सांसारिक सुख भोगने लगे। जावडके पुण्य बलसे राज्य के शत्रु भी उसकी आज्ञा मानने लगे और उसमें इतना अधिक आश्चर्यकारक देखाव मालूम होने लगा जहां २ पर जावढका पद संचार होता वहांकी जमीन मानो अत्यन्त प्रसन्न ही न हुई हो ! ऐसे वह नये नये प्रकारके अधिक खादिष्ट और रसाल रसोंको पैदा करने लगी। एक समय जाबड़ घोड़े पर सवार हो फिरनेके लिए निकला हुवा था उस वक्त किसी पर्वत परसे गुरुने बतलाये हुये लक्षणवाली 'चित्रावेल' उसके हाथ आई। उसे लाकर अपने मंडारमें रखने से उसके भंडारकी लक्ष्मी अधिकतर वृद्धिंगत हुई। कितनेक साल बीतने पर जब भावड. राजा स्वर्गवास हुये तब जावड गजा बना। रामके समान राज्यनीति चलानेसे उसका राज्य सचमुच ही एक धर्मराज्य गिना जाने लगा। फिर दुषमफालके प्रभावसे कितनाक समय व्यतीत हुए बाद जैसे समुद्र की लहरें पृथिवीको वेष्टित करें वैसे मुगल लोगोंने आकर पृथिवीको वेष्ठित कर लिया, जिससे सोरठ कच्छ लाट आदिक देशोंमें म्लेच्छ लोगोंके राज्य होगये । परन्तु उन बहुतसे देशोंको संभालनेके कार्यके लिये कितने एक अधिकारियों की योजना की गई। उस समय सब अधिकारियों से अधिक कलाकौशल और सब देशोंकी भाषामें निपुण होनेसे सत्र अधिकारियों का आधिपत्य जाबडको मिला। इससे उसने सबके अधिकार पर आधिपत्य भोगते हुए सब अधिकारियोंसे अधिक धन उपार्जन किया। जैसे आर्य देशमें उत्तम लोग एकत्र बसते हैं वैसे ही जावडने अपनी जातिवाले लोगोंको मधुमतिमें बसा कर वहां श्री महावीर स्वामीका मन्दिर बनवाया।. एक समय आर्य अनार्य देशमें विचरते हुए वहां पर कितने एक मुनि आ पधारे। जावड उन्हें अभिवन्दन करने और धर्मोपदेश सुनने आया । धर्मदेशना देते हुए गुरु महाराजने श्री शत्रुंजयका वर्णन करते हुये कहा कि पंचम आरमें तीर्थका उद्धार जावडशाह करेगा यह नवन सुन कर प्रसन्न हो नमस्कार कर जावड पूछने लगा, तीर्थंका उद्धार करनेवाला कौनसा जावड समझना चाहिये। गुरुने ज्ञानके उपयोगसे विचार कर कहा - "तीर्योद्धारक जावडशाह तू ही है" परन्तु इस समय कालके महिमासे शत्रुंजय तीर्थ के अधिष्ठायक देव हिंसक मध मांसके भक्षक होगये हैं। उन दुष्ट देवोंने शत्रुंजयतीर्थके आस पास प्रवास योजन प्रमाण क्षेत्र उध्वंस (ऊजड ) कर डाला है। यदि यात्रा के लिये कोई उसकी इदके अन्दर आवे तो उसे कपर्दिक यक्ष मिथ्यात्वी होनेसे मार डालता है। इससे श्री युगादि देव अपूज्य होगये हैं। इसलिए हे भाग्यशाली ! तीर्थोद्धार करनेका यह बहुत अच्छा प्रसंग आया हुवा है। प्रथमसे. श्री महावीर स्वामीने यह कहा हुआ है कि जावडशाह तीर्थका उद्धार करेगा अतः यह कार्य तेरैले ही निर्विघ्नतया सिद्ध हो सकेगा। अब तू श्री चक्केश्वरी देवीका आराधन करके उसके पाससे श्री बाहूबलीने भरवाये हुए श्री ऋषभदेव स्वामीके, विम्बको मांग ले जिससे तेरा यह कार्य सिद्ध हो सकेगा। यह सुनकर हर्षावेशसे रोमांचित हो जावडने गुरु महाराजको नमस्कार कर अपने घर जाकर देवपूजा की और बलिदान देकर शुद्ध देवताओं को शान्ति करके श्री चक्रेश्वरी देवीका ध्यान करके तप किया। जव एक महीनेके उपवास होगये तब श्री चक श्वरी देवी तुष्टमान हो कहने लगी कि हे वत्स ! तू तक्षशिला नगरी में जा, वहां पर नगरके मालिक जगन्मल्ल राजाकी आशासे धर्मचक्रं आगेले तुझे वह बिम्व मिलेगा 1 प्रथमके तीर्थकरोंने भी तुझे ही इस उद्धारका कर्ता बतलाया है। मैं तुझे सहाय करूंगी तु यह कार्य सुखसे कर, तू बड़ा भाग्यशाली होनेसे तेरेसे यह कार्य निर्विघ्नता पूर्वक बन सकेगा। अमृतके समान उसके वचन सुनकर अति प्रसन हो जावड तक्षशिलामें गया और वहाँके जगन्मल्ल राजाको, बहुतसा द्रव्य देकर संतोषित कर उसकी आज्ञासे धर्मचक्रके आगे आकर तीन प्रदक्षिणा पूर्वक पूंजाकर ध्यान घरके सन्मुख खड़। रहा, तब बाहुबली की भरवाई हुई श्री ऋषभदेव, पुण्डरीक स्वामीकी मूर्ति सहित साक्षात् अपने पुण्य की मूर्तिके समान वे मूर्तियां प्रगट हुई । फिर पंचामृत स्नान महोत्सवादि करके उन मूर्तियोंको नगरमें लाया। फिर वहांके राजाकी सहायसे वहां रहे हुए अपने गोत्रीय लोगोंको अगवा बना करके उन मूर्तियोंको साथ ले प्रतिदिन एकासंन करते हुए श्री शत्रुंजय तीर्थ तरफ आया। रास्ते में मिथ्यात्वी देवता द्वारा किये हुए भूमि कंप, महा धात, निर्धात, अग्निके दाह वगैरह अनेक उपसर्ग हुये तथापि उसके भाग्योदय के वलसे सर्व प्रकारके भयको उलंघन कर अन्त में वह अपनी मधुमति नगरीमें आया। उस समय जावड़ शाइने अठारह जहाज मालके भर कर चीन, महावीन, और भोट देशोंमे भेजे हुए थे, वे विपरीत वायुके प्रयोगसे या देव- योगसे उस दिशामें न जाकर सुवर्ण दीपमे जा पहुंचे। वहां पर घुल्हेमें सुलगाई हुई अग्निसे जमीनमेंकी रेती तप जानेके कारणं सुवर्ण रूप हो जानेसे दूसरा माल खरीदना चन्द रस् कर वहांसे वे रेती ( तेजम तूरी ) के जहाज भरके पीछे लौट आये। उसी मार्गसे वे भाग्य योगसे मधुमति नगरीमें आ पहुंचे। उसी समय वज्रखामी भी मधुमतिके उद्यानमें आ विराजे थे। एक आदमीने आकर जावड शाहको गुरु महाराज के आगमन की बधाई दी। ठीक उसी समय एक दूसरे आदमीने आकर बारह सालके बाद अबस्मात पीछे आये हुए अठारह जहाजोकी खबर दी। ये दोनों समाचार एक ही समय मिलनेसे जावड शाह बड़ी प्रसन्न हुचा, परन्तु विचार करने लगा कि पहले ब्रहाज देखने जाऊ या गुरु महाराजको बन्दन करने, अन्तमें उसने निश्चय किया कि इस लोक और पर लोकमें हितदायक गुरु महाराजको प्रथम वन्दन करना चाहिए। इससे ऋद्धि सिद्धि सहित बड़े आडम्बरसे समहोत्सव गुरु श्री धन्ज्रस्वामीको चन्दन करने गया । उस वक सुवर्ण, कमल पर बैठे हुए जंगम तीर्थरूप श्री वज्रस्वामीको देखकर प्रमुदित हो चन्दन प्रदक्षिणा करके जब वह धर्म श्रवणकी मनीषासे गुरु देवके सन्मुख बैठता हैं उस वक्त अपने शरीरकी कान्तीसे वहांके सारे आकाश मंडल को भी दैदीप्य करने वाला एक देवता आकाश मार्गसे उतर कर गुरुको सविनय बन्दन कर कहने लगा कि, महाराज ! मैं पूर्व भषमें तीर्थ मानपुर नगर के राजा शुकर्मका कपर्दी नामक पुत्र था, मैं मद्यपायी हुवा था। एक समय दयाके समुद्र आप वहां पधारे थे तब आपने मुझे उपदेश देते हुए पंच पर्वणी महात्म्य, शत्रु जय महात्म्य, और प्रत्याख्यानके फल बतला कर प्रतिबोध दें मद्यमांस के परित्याग की प्रतिष्ठा कराई थी। मैंने वह प्रत्याख्यान कितने एक वर्षोतक पालन भी किये थे, परन्तु एक समय उष्ण कालके २३४ दिनोंमें जब मैं स्त्रीके साथ चन्द्रशालामें बैठा था तब मोहमें मग्न होनेसे प्रत्याख्यानकी विस्मृति हो जानेसें मैंने दारू पिया। परन्तु छतपर बैठ कर दारू पीनेके बर्तन में दारु निकाले बाद उसमें ऊपर आकाशसे उड़ी जाती हुई चीलके मुखमें रहे हुए ओधे मस्तक वाले सपके मुखसे गरल - विष पड़ा। सोमालूम न होनेसे मैंने दारू पीलिया। उससे विष घूर्मित होगया, परन्तु उसी वक्त प्रत्याख्यान भूल जानेकी याद आनेसे उस विषय में पश्चात्ताप किया और शत्रुंजय तथा पंच परमेष्ठीका ध्यान कर मृत्यु पा में एक लाख यक्षोंका अधि पति कपद नामक यक्ष हुवा हूं। स्वासिन् आपने मुझे नरक रूप कूपमें पड़ते हुएको बचाया है। आपने मुझ पर बड़ा उपकार किया है इसलिये मैं आपका सदैव सेवक रहूंगा। मेरे लायक जो कुछ काम काज हो सो फरमाना। यों कह कर हाथी पर वढ़ा हुवा अनेक यक्षोंके परिवार सहित सर्वाङ्ग भूषण धर, पास, अंकुश, विजोरा, रुद्राक्षणी माला एवं चार हाथों में चार वस्तुयें धारण करने वाला सुवर्ण वर्ण वाला वह कपर्दि नामक यक्ष श्री षज्रस्वामीके पास आ बैठा। तब श्रुतज्ञानके धारक श्री वज्र स्वामी भी जावड़ शेटके पास श्री शत्रुंजयका सविस्तर महिमा व्याख्यान रूपले सुनाते हुए कह गये। और फिर कहने लगे कि, है महा भाग्यशाली जावड ! तु श्री शत्रुंजय तीर्थकी यात्रा और तीर्थका उद्धार निःशंक होकर कर । यदि इस कार्य में कुछ विघ्न होगा तो ये सब यक्ष और मैं स्वयं भी सहायकारी हूं। गुरु देवके बचन सुनकर जावड बड़ा प्रसन्न हुवा और उन्हें बन्दता करके वहांसे उठकर अपने अठारह जहाज देखने चला गया। तमाम जहाजोंमें से वेजम तूरी ( सुवर्ण रेति ) उतरवा ली और उससे सुवर्ण बनाकर बखारों में भर दिया। तद्नंतर महोत्सव पूर्वक, शुभ मुहूर्तमें सर्व प्रकारकी तैयारियां करके श्री शत्रु जय तीर्थ की यात्रार्थ प्रस्थानं किया। तब पहले ही दिन तीर्थ के पूर्व अधिष्ठायक देवता जो दुष्ट बन गये थे उन्होंने जावड शाह और उनकी स्त्रीके शरीर में ज्वर उत्पन्न किया। परन्तु श्री षज्ञ स्वामीकी दृष्टि मात्रके प्रभावले उस ज्यरका उपद्रव दूर हो गया। जब उन दुष्ट देवताओने दूसरी दफा उपद्रव किया तब एक लाख यक्षोंके परिवार सहित आफर कप यक्षने विघ्न निवारण किया। दुष्ट देवताओंने फिर वृष्टिका उपद्रव किया। वह वज्रस्वामीने वायुके प्रयोगसे और महा वायुका पर्वत द्वारा, पर्वतका वल द्वारा हाथीका सिंहसे, सिंहका अष्टापदसे, अग्निका जलसे, जलका अग्निसे, और सर्पका गरुढसे निवारण किया। एवं मार्गमें जो २ उपद्रव होते गये सो सब श्री वन स्वामी और कपड़ों यक्ष द्वास दूर किये गये । इस प्रकार विघ्न समूह निधारण करते हुए अनुकमसे आदिपुर नगरमें ( सिद्धाचलसे पश्चिम दिशामें आदिपर नामक जो इस वक्त गांव है यहां ) आ पहुंचे। उस वक्त वे दुष्ट देवता प्रचंड वायु, द्वारा चलायमान हुए वृक्षके समान पर्वतको कंपाने लगे, तब वज्र स्वामीने शांतिक कृत्य करके तीर्थ जल पुष्प अक्षत द्वारा मन्त्रोपचार से पर्वतको स्थिर किया। तदनन्तर वज्र स्वामीनें बतलाये हुए मार्गसे भगवानकी प्रतिमा को आगे करके पीछे अनुक्रमसे गुरु महाराज़ और सकल संघ, पर्वत पर चढ़ा । उस रास्ते में भी कहीं कहीं के अधम देवता शाकिनी, भूत, वैताल एवं राक्षस इत्यादिक उपद्रव करने लगे, परन्तु वज्र स्वामी और पपदोंके निवारण करनेसे अन्त में निर्विघ्नता पूर्वक वे मुख्य रूंक पर पहुंच गये, वहां देखते हैं तो मांस, हड्डियां, चमड़ा, कलेवर, फेस, खुर, नल, सींग, वगैरह दुर्गमीय वस्तुमसे पर्वतको भरा देख तमाम यात्रिक लोग खेद खिन्न होगये। कपर्दिक यक्षने अपने सेवक यक्षोंसे वह सब कुछ दूर करा कर पवित्र जल मंगाकर उस सारे पहाड़को धुलवा डाला, तथा मूलनायक वगैरहके जो मन्दिर टूट फूट गये थे, खंडित होगये थे उन्हें देख कर जावडको वड़ा दुःख हुवा। रात्रिके समय सकल संघके सो जाने बाद वे दुष्ट देवता एक बड़े रथमें लायी हुई भगवान श्री ऋषभदेवकी प्रतिमाको पर्वतसे नीचे उतार लेगये। प्रभातमे जब मंगल बाजे बजते हुए जावड जागृत होकर दर्शन करने गया तव वहां प्रतिमाको न देख कर अति दुःखित होने लगा फिर वज्र स्वामी और कपर्दी यक्ष दोनों जनें अपनी दिव्य शक्तिसे प्रतिमाको पुनः मुख्य टूक पर लाये। इसी प्रकार दूसरी रानको भो उन दुष्ट देवताओं ने प्रतिमाको नीचे उतार लिया। मगर फिर भी वह ऊपर ले आये। इस प्रकार इक्कीस रोज तक प्रनिमाजी का नीचे ऊपर भावागमन होता रहा। तथापि जय वे दुट देवता बिलकुल शान्त न हुए तव श्रीवज्रस्वामी ने कपर्दी यक्ष और जावड़ संघपति को बुला कर कहा कि हे कपर्दो ! आज रातको तू अपने सब यक्षोंके परिवार सहित शूद्र देवताओं रूप तृणोंको जलानेमें एक अग्नि समान वन कर सारे आकाश मंडलको आच्छादित कर सावधान हो कर रहना। मेरे मंत्रकी शकिसे तेरा शरीर वज्रके समान अभेद्य हो जानेसे तुझे कुछ भी कोई उपद्रव न कर सकेगा। हे जावड़ ! तुम अपनी स्त्री सहित स्नान करके पंच नमस्कार गिन कर श्रीऋषभदेव का स्मरण करके प्रतिमाजी को स्थिर करनेके लिए रथके पहियों के बीच दोनों जने दोनों तरफ शयन करो। जिससे वे दुष्ट तुम्हें उलंघन करनेमें समर्थ न होंगे। और मैं सकल संघ सहित सारी रात कार्योत्सर्ग ध्यानमें रहूंगा। गुरुदेव के यह वचन सुन कर नमस्कार कर सब जने * अपने २ कृत्यमें लग गये। समय आने पर वन्नवामी भी निश्चल ध्यानमें तत्पर हो कायोत्सर्ग में खड़े रहे। फिर वे दुष्ट देवता फु'फाटे भारते हुए अन्दर आनेके लिए बड़ा उद्यम करने लगे, परन्तु उनके पुण्य, ध्यान, घलसे किसी जगहसे भी वे अन्दर प्रवेश न कर सके। ऐसे करते हुए जय प्रातःकाल हुची तब गुरुदेवने संकल संघ सहित कायोत्सर्ग पूर्ण किया। प्रतिमा जैसे रक्खो थी वैसे ही स्थिर रही देख प्रमोदसे रोमांचित हो सकल मंगल वाद्य यजते हुए धवल मंगल गाते हुए महोत्सव पूर्वक प्रतिमाजी को मूठ नायकके मन्दिर के सामने लाये । बज्रस्वामी जावड़ संघपति और उसकी स्त्री सुशीला तथा संघकी रक्षा करनेके लिए रक्खे हुए महाधर पदवीको धारण करने वाले चार पुरुष पुराने मन्दिरमे प्रवेश कर प्रयत्नसे उसकी प्रमार्जना करने लगे। गुरु महाराज ध्यान करके दुष्ट देवनाका उपद्रव निवारण करनेके लिए चारों तरफ अक्षत प्रक्षेपादिक शांतिक करने लगे, तब शूद्र देवताओं के समुदाय सहित पहलेका कपर्दिक क्रोधायमान हो पुरानी प्रतिमा को म आश्रय करके रहा! ( पुरानी प्रतिमा को न उठाने देनेका ही उसका मतलव था), परन्तु नई प्रतिमा स्थापत करनेके लिए जब संघपति वहां पर आया तव वज्रस्वामीके मंत्रसे स्तंभित हुवा दुष्ट देवता उन्हें पराभव करने में समर्थ न हो सका तब एक बड़े घोर शब्दसे आराठी करने लगा ( चिल्लाहट करने लगा ) इसकी आराठीका इतना शब्द पसरा कि ज्योतिष चक्र तक भयंकरता होते हुए बड़े २ पर्वत, समुद्र और सारी पृथ्वी भी कांपने लग गई। हाथी घोड़ा, व्याघ्र, सिंहादिक भी मूर्च्छा पा गए। पर्वतके शिखर टूट कर गिरने लगे; शत्रु जय पर्वतके भी फट जानेले दक्षिण और उत्तर दो विभाग हो गये। जावड़ संघपति, खुशीला और पन्ज्रस्वामी इन
पुत्र गर्भ में आया तबसे हो प्रतिदिन खराब स्वप्न, अनेकं विष खराब विचार वगैरह होनेके कारण उसने जाना कि, यह गर्भमें आया तयसे ही ऐसा दुःखदायी मालूम देता है तब फिर जब इसका जन्म होगा तय न जाने हमें कितने बड़े दुःख सहन करने पडेंगे? इसलिए इसका जन्मते ही त्याग करना योग्य है। यह विचार किये बाद जब उसका जन्म हुवा तब मृत्युयोग होनेसे विशेष शंका होने के कारण उस जातमात्र चालकको ले कर शेंठने मलहण नामक नदीके किनारे आ कर एक सूखे हुए पत्तों वाले वृक्षके नीचे रख कर शेठ वापिस जाने लगा। उस वक्त कुछ हंस कर बालक बोला कि तुम्हारे पास मेरे एक लाख सौनये-सुबर्ण मुद्रार निकलते हैं सो मुझे दे दो ! अन्यथा तुम्हें अवश्य ही कुछ अनर्थ होगा। यह वचन सुन कर शेठ उसे वापिस घर ले आया और उसका जन्मोत्सत्र, छटी जागरण, नामस्थापना, अन्नप्राशन, वगैरहके महोत्सव करते एक लाख सुवर्ण मुद्रायें शेठने उसके लिये खर्च कीं। इससे वह अपना कर्ज अदा कर चलता बना। फिर दूसरा पुत्र भी इसी प्रकार पैदा हुवा और वह उसका तीन लाख कर्ज अदा कर चला गया। इसके बाद शुभ शकुनादि सूचित एक तीसरा पुत्र गर्भमें आया। तब यह जरूर ही भाग्यशाली निकलेगा शेठने यह निर्धारित किया था तथापि दो पुत्रोंके सम्बन्ध में बने हुए घनावसे डर कर जब वह तीसरे पुत्रका परित्याग करने आया तब वह पुत्र बोला 'मुझ पर तुम्हारा उन्नीस लाख लोनैयोंका कर्ज है। उसे अदा करनेके लिये मैंने तुम्हारे घर 'अवतार लिया है। वह फर्ज दिए विना मैं तुम्हारे घरसे नहीं जा सकता। यह सुन कर शेठने विचार किया कि इसकी जितनी कमाई होगी सो सब धार्मिक कार्योंमें खर्च डालूंगा। यह विचार कर उसे वापिस घर पर 'ला पाल पोश कर बड़ा किया और वह जावड़ साहके नामसे प्रसिद्ध हो वह ऐसा भाग्यशाली निकला कि जिसने श्री शत्रुंजय तीर्थका विक्रमादित्य संवत् एक सौ आठ में बड़ा उद्धार किया था। उसका वृत्तान्त अप्रसिद्ध होनेसे ग्रन्थान्तरं से यहां पर कुछ संक्षिप्त में लिखा जाता है. सोरठ देशमें कम्बिलपुर नगरमें भावंड शेठ एक घड़ा व्यापारी व्यापार करता था। उसे सुशीला पतिव्रता भाविला नामकी स्त्री. थी। उन दोनोंफो प्रेमपूर्वक सांसारिक सुख भोगते हुए कितने एक समय याद दैवयोग चपल स्वभावा लक्ष्मी उनके घरसे निकल गई, अर्थात वे निर्धन होगये। तथापि वह अपनी अल्प पू जीके अनुसार प्रमाणिकता से व्यापार वगैरह करके अपनी आजीविका चलाता है । यद्यपि वह निर्धन है और थोड़ी आयसे अपना भरणपोषण करता है तथापि धार्मिक कार्योमे परिणामकी अतिवृद्धि होने से दोनों वक्तके प्रतिक्रमण, त्रिकाल जिनपूजन, गुरुवन्दन, यथाशक्ति तपश्चर्या, और सुपात्र दानादिमें प्रवृत्ति करते हुए अपने समयको सफलता से व्यतीत करता है। ऐसा करते हुए एक समय उसके घर गोचरी फिरते हुए दो मुनि था निकले। भाविला शेठानी मुनिमहाराजों को अतिभक्ति पूर्वक नमन वन्दन कर आहारादिक बोरा कंर बोली-महाराज ! हमारे भाग्यका उदय, कब होगा ? तब उनमेसे एक ज्ञानी मुनि वोला "हे कल्याणी । आज तुम्हारी दूकान पर कोई एक उत्तम जातिवाली घोड़ी वेबनेको आयगा; ज्यों बने त्यों उसे खरीद लेना। उसे जो किशोर-चछेरा होगा उससे तुम्हारा भाग्योदय होगा। फिर तुम्हें जो पुत्र होगा वह पेसा भाग्यशाली होगा कि जो शत्रु जय तीर्थपर तीर्थोद्धार करेगा। यद्यपि मुनियोंको निमित्त बतलानेकी तीर्थंकर की आज्ञा नहीं है तथापि तुम्हारे पुत्रसे जैन शासनकी बड़ी उन्नति होनेवाली है, इसी कारण तुम्हारे पास इतना निमित्त प्रकाशित किया है। यों कहकर मुनि चल पड़े तब भाविळाने अति प्रसन्नता से उन्हें अभिवन्दन किया। अव भाविला शेठानी अपने पतिकी दूकान पर जा बैठी। इतनेहीमें वहां पर कोई एक घोड़ी बेचनेवाला आया, उसे देख भाविलाने अपने पतिके पास सुनिराजकी कही हुई सर्व हकीकत कह सुनाई, इससे भावड़ शेठने कुछ धन नगद दे कर और कुछ उधार रख कर घोड़ीवाले को ज्यों त्यों समझाकर उससे घोड़ी खरीद ली। उस साक्षात् कामधेनु के समान घोड़ीको लाकर अपने घर बांधी और उसकी अच्छी तरह सार संभाल करने लगा। कितने एक दिनों बाद उस घोड़ीने सर्वांग लक्षण युक्त सूर्यदेवके घोड़े के समान एक किशोर-बछेरेको जन्म दिया। उसकी भी बड़ी हिफाजतसे सार सम्भाल करते हुए जब वह तीन सालका हुवा तब उसे बड़ा तेजस्वी देखकर तपन नामक राजा शेठको तीन लाख द्रव्य देकर खरीद ले गया। भावडशेड उन तीन लाख में से अन्य भी कितनी एक घोड़ियां खरीद उन्हें पालने लगा जिससे एक सरीखे रंग और रूप आकार वाले इक्कीस किशोर पैदा हुए। भावड़ शेठने वे सम उज्जैनी नगरमें जाकर विक्रमार्क नामक बड़े राजाको भेट किये। उन्हें देख राजा बड़ा ही प्रसन्न हुवा और कहने लगा कि इन अमूल्य घोड़ोंका मूल्य मैं तुझे कुछ यथार्थ नहीं दे सकता, तथापि तु जो मु' इसे मांगेगा सो तुझे देनेके लिए तैयार हूं, इसलिए जो तेरे ध्यानमें आवे सो मांग ले। उसने मधुमती का राज्य मांगा, इससे विक्रमार्कने प्रसन्न होकर अन्य भी बारह गांव सहित उसे मधुमतीका राज्य दिया। अब भावड़ विकमार्क से मिली हुई अधिक ऋद्धि, छत्र, चामर, ध्वजा, पताका, निशान, डंकर, सहित बड़े आडम्बरसे ध्वजा वगैरहले सजाई हुई मधुमती नगरीमें आकर अपनी आज्ञा प्रवर्त्ता कर राज्य करने लगा। भावड़ आडम्बर सहित जिस दिन उस नगरमें आया उसी दिन उसकी स्त्री भाविलाने पूर्व दिशा में से उदय पाते हुए सूर्यके समान तेजस्त्री एक पुत्ररत्न को जन्म दिया। उस बालकका जन्म हुवा तब दशों दिशायें भी प्रसन्न दिखाववाली दीखने लंग, पवन भी सुखकारी चलने लगा, सारे देशमें हरेक प्रकारसे सुख शान्ति फैल गई और चराचर प्राणी भी सब प्रसन्न हो गये। अब भावड़ने बड़े आडम्बरसे उस पुत्रका जन्ममहोत्सव किया और उसका 'जावड़' नाम रखा । बड़ी हिफाजन के साथ लालन-पालन होते हुए नन्दन वनमें कल्पवृक्ष के अंकुरके समान माता पितांके मनोरथोंके साथ जावड़ वृद्धिको प्राप्त हुवा। भावड़ने एक समय किसी ज्योतिषी को पूछकर अच्छी रसाल और श्रेष्ठ उदय करानेवाली जमीन पर अपने नामसे एक नगर बसाया। उसके वीचमें इस प्रचलित चौबीसी में आसन्न उपकारी होनेसे पोषधशाला सहित श्रीमहावीर स्वामीको मन्दिर बनवाया। जावड़ जब पांच सालका हुवा तबसे वह विद्याभ्यास करने लगा। वह निर्मल बुद्धि होनेसे थोड़े ही दिनोंमें सर्व शास्त्रोंका पारगामी हुवा और सब समयमें अत्यन्त कुशलता पूर्वक साक्षात् कामदेवके रूप समान रूपवान और तेजस्वी आफारवान होता हुवा यौवनावस्था के सम्मुख आया । भावड़ राजाने अनेक कन्यायें मिलने पर भी जावड़ के योग्य कन्या तलाश करनेके लिए अपने सालेको भेजा। वह कम्पिलपुर तरफ चल पड़ा; श्राद्धविधि प्रकरणो की तलहटी के पास बेटी नामक गांव में आकर रातको रहा। वहां पर एक द्वार नामक व्यापारी रहता था, उसकी पुत्री नाम और गुणसे भी 'सुशीला' थी। सरस्वती के घरदान को पाई हुई साक्षात् सरस्वतीके समान वह कन्या कितनी एक दूसरी कन्याओं के साथ अपने पिताके गृहांगण के आगे खेलती थी। उसे लक्षण सहित देख अजायव हो जावडके मामाने विचार किया कि आकाश में जैसे अगणित ताराओं के बीच चन्द्रकला फलक उठती है वैसी ही सुलक्षणों और कान्ति सहित सचमुच ही यह कन्या जावड़के योग्य है। परन्तु यह किसकी है, किस जातिकी है, क्या नाम है, यह सब किसीको पूछकर वह उस कन्याके घाप सूरसे मिला । और उसने वहुमान पूर्वक जावड़के लिए उस कन्याकी याचना को। यह सुन कन्याके पिताने जावड़को अत्यन्त ऋद्धिवान जानकर कुछ उत्तर देने की सूझ न पड़नेसे नीची गर्दन कर ली, इतने मे ही वहांपर खड़ी हुई वह कन्या कुछ मुस्करा कर अपने पितासे कहने लगी कि, जो कोई पुरुपरत्न मेरे पूछे हुए चार प्रश्नोंका उत्तर देगा मैं उसके साथ सादी कराऊंगी; अन्यथा तपश्वर्या ग्रहण करूंगी, परन्तु अन्यके साथ सादी नहीं करूंगी। यह वचन सुनकर प्रसन्न हुवा ताबड़ का मामा शूर नामक व्यापारीके सारे कुटुस्वी सहित अपने साथ लेकर मधुमति नगरी में आया और भाण्डका' कह कर उन्हें अच्छे स्थानमें ठहराकर उनकी खातिर तबज्ज्ञ की । अन्तमें उन्हें जावड़के साथ मिलाप करानेका वायदा कर सर्वाङ्ग और सर्व अवयघोंसे सुशोभित करके सुशीलाको साथ ले जावड़के पास आया। बहुतले पुरुषोंके बीचमें बैठे हुये जावड़को देखकर तत्काल ही उस मुग्धा सुशीलाकी आँखे ठरने लगीं। फिर मन्द हास्य पूर्वक मानो मुखसे फूल भडते हों इस प्रकार वह कन्या उसके पास आकर बोलने लगी कि हे विचक्षण सुमति ! एक धर्म, दो अर्थ, तीन काम और चार मोक्ष, इन चार पुरुपायका अभिप्राय आप समझते हैं। यदि आप जानते हों तो इनका यथार्थ स्वरूप निवेदन करें । सर्व शास्त्र पारगामी जावड़ बोला हे सुभ्र ! यदि तुम्हें इन चार पुरुषार्थोके लक्षण ही समझने हैं तो फिर मैं कहता हूं उस पर ध्यान देकर सुनिये । तत्त्वरत्न त्रयाधार । सर्वभूत हित प्रदः ॥ चारित्र लक्षणो धर्मा कस्य शर्मकरो नहि ॥ एक ॥ हिंसाचौय परद्रोह मोहक्लेशविवर्जितः । सप्त क्षेत्रोपयोगीस्या दथो नर्थविनाशकः ॥ दो ॥ जातिस्वभाव गुणभृ लूलुलान्यकरणः क्षणं । धर्मार्थावाधककामो । दंपत्योर्भाववन्धनं ॥ तीन ॥ कपायदोपापगत साम्यवान् जितमानसः । शुक्लध्यानमयस्वात्मांत्यक्षोमोतइतिरितः ॥ चार॥ एक धर्म - रत्नत्रयीका आधार भूत, तमाम प्राणियोंको सुखकारक ऐसा बारित्र धर्म किसे नहीं सुखकारक होता बारह अर्थ - हिंसा चोरी, परद्रोह, मोह, क्लेश, इन सबको बर्ज कर उपार्जन किया हुवा, सात क्षेत्रमें खर्च किया जाता हुवा जी द्रव्य है क्या वह अनर्थका विनाश नहीं करता ? अर्थात् ऐसे द्रव्यसे अनर्थ नहीं होता । तीन काम-सांसारिक सुख भोगनेके अनुकसको उलंघन न करके धर्म और अर्थको वाधा न करते हुए समान जाति स्वभाव और गुणवाले स्त्री पुरुषोंका जो मिलाप है उसे काम कहते हैं। चार मोक्ष-कषायदोपका त्यागी शांतिवान जिसने मनको जीता है ऐसा शुक्लध्यानमय, जो अपनी आत्मा है वह अन्त्यक्ष याने मोक्ष गिना जाता है।. अपने पूछे हुए चार प्रश्नोंके यथार्थ उत्तर सुन कर सुशीला ने सरस्वती की दी हुई प्रतिज्ञा पूरी होनेसे प्रसन्न होकर जावडके गलेमें वरमाला आरोपण की। फिर दोनोंके मातापिताने बड़े प्रसन्न होकर और आडम्बर से उनका विवाह समारम्भ किया। लग्न हुये बाद अब वे नव म स देह छायाके सशन दोनों जने परस्पर प्रेमपूर्वक आसक हो देवलोकके समान मनोवांछित यथेच्छ सांसारिक सुख भोगने लगे। जावडके पुण्य बलसे राज्य के शत्रु भी उसकी आज्ञा मानने लगे और उसमें इतना अधिक आश्चर्यकारक देखाव मालूम होने लगा जहां दो पर जावढका पद संचार होता वहांकी जमीन मानो अत्यन्त प्रसन्न ही न हुई हो ! ऐसे वह नये नये प्रकारके अधिक खादिष्ट और रसाल रसोंको पैदा करने लगी। एक समय जाबड़ घोड़े पर सवार हो फिरनेके लिए निकला हुवा था उस वक्त किसी पर्वत परसे गुरुने बतलाये हुये लक्षणवाली 'चित्रावेल' उसके हाथ आई। उसे लाकर अपने मंडारमें रखने से उसके भंडारकी लक्ष्मी अधिकतर वृद्धिंगत हुई। कितनेक साल बीतने पर जब भावड. राजा स्वर्गवास हुये तब जावड गजा बना। रामके समान राज्यनीति चलानेसे उसका राज्य सचमुच ही एक धर्मराज्य गिना जाने लगा। फिर दुषमफालके प्रभावसे कितनाक समय व्यतीत हुए बाद जैसे समुद्र की लहरें पृथिवीको वेष्टित करें वैसे मुगल लोगोंने आकर पृथिवीको वेष्ठित कर लिया, जिससे सोरठ कच्छ लाट आदिक देशोंमें म्लेच्छ लोगोंके राज्य होगये । परन्तु उन बहुतसे देशोंको संभालनेके कार्यके लिये कितने एक अधिकारियों की योजना की गई। उस समय सब अधिकारियों से अधिक कलाकौशल और सब देशोंकी भाषामें निपुण होनेसे सत्र अधिकारियों का आधिपत्य जाबडको मिला। इससे उसने सबके अधिकार पर आधिपत्य भोगते हुए सब अधिकारियोंसे अधिक धन उपार्जन किया। जैसे आर्य देशमें उत्तम लोग एकत्र बसते हैं वैसे ही जावडने अपनी जातिवाले लोगोंको मधुमतिमें बसा कर वहां श्री महावीर स्वामीका मन्दिर बनवाया।. एक समय आर्य अनार्य देशमें विचरते हुए वहां पर कितने एक मुनि आ पधारे। जावड उन्हें अभिवन्दन करने और धर्मोपदेश सुनने आया । धर्मदेशना देते हुए गुरु महाराजने श्री शत्रुंजयका वर्णन करते हुये कहा कि पंचम आरमें तीर्थका उद्धार जावडशाह करेगा यह नवन सुन कर प्रसन्न हो नमस्कार कर जावड पूछने लगा, तीर्थंका उद्धार करनेवाला कौनसा जावड समझना चाहिये। गुरुने ज्ञानके उपयोगसे विचार कर कहा - "तीर्योद्धारक जावडशाह तू ही है" परन्तु इस समय कालके महिमासे शत्रुंजय तीर्थ के अधिष्ठायक देव हिंसक मध मांसके भक्षक होगये हैं। उन दुष्ट देवोंने शत्रुंजयतीर्थके आस पास प्रवास योजन प्रमाण क्षेत्र उध्वंस कर डाला है। यदि यात्रा के लिये कोई उसकी इदके अन्दर आवे तो उसे कपर्दिक यक्ष मिथ्यात्वी होनेसे मार डालता है। इससे श्री युगादि देव अपूज्य होगये हैं। इसलिए हे भाग्यशाली ! तीर्थोद्धार करनेका यह बहुत अच्छा प्रसंग आया हुवा है। प्रथमसे. श्री महावीर स्वामीने यह कहा हुआ है कि जावडशाह तीर्थका उद्धार करेगा अतः यह कार्य तेरैले ही निर्विघ्नतया सिद्ध हो सकेगा। अब तू श्री चक्केश्वरी देवीका आराधन करके उसके पाससे श्री बाहूबलीने भरवाये हुए श्री ऋषभदेव स्वामीके, विम्बको मांग ले जिससे तेरा यह कार्य सिद्ध हो सकेगा। यह सुनकर हर्षावेशसे रोमांचित हो जावडने गुरु महाराजको नमस्कार कर अपने घर जाकर देवपूजा की और बलिदान देकर शुद्ध देवताओं को शान्ति करके श्री चक्रेश्वरी देवीका ध्यान करके तप किया। जव एक महीनेके उपवास होगये तब श्री चक श्वरी देवी तुष्टमान हो कहने लगी कि हे वत्स ! तू तक्षशिला नगरी में जा, वहां पर नगरके मालिक जगन्मल्ल राजाकी आशासे धर्मचक्रं आगेले तुझे वह बिम्व मिलेगा एक प्रथमके तीर्थकरोंने भी तुझे ही इस उद्धारका कर्ता बतलाया है। मैं तुझे सहाय करूंगी तु यह कार्य सुखसे कर, तू बड़ा भाग्यशाली होनेसे तेरेसे यह कार्य निर्विघ्नता पूर्वक बन सकेगा। अमृतके समान उसके वचन सुनकर अति प्रसन हो जावड तक्षशिलामें गया और वहाँके जगन्मल्ल राजाको, बहुतसा द्रव्य देकर संतोषित कर उसकी आज्ञासे धर्मचक्रके आगे आकर तीन प्रदक्षिणा पूर्वक पूंजाकर ध्यान घरके सन्मुख खड़। रहा, तब बाहुबली की भरवाई हुई श्री ऋषभदेव, पुण्डरीक स्वामीकी मूर्ति सहित साक्षात् अपने पुण्य की मूर्तिके समान वे मूर्तियां प्रगट हुई । फिर पंचामृत स्नान महोत्सवादि करके उन मूर्तियोंको नगरमें लाया। फिर वहांके राजाकी सहायसे वहां रहे हुए अपने गोत्रीय लोगोंको अगवा बना करके उन मूर्तियोंको साथ ले प्रतिदिन एकासंन करते हुए श्री शत्रुंजय तीर्थ तरफ आया। रास्ते में मिथ्यात्वी देवता द्वारा किये हुए भूमि कंप, महा धात, निर्धात, अग्निके दाह वगैरह अनेक उपसर्ग हुये तथापि उसके भाग्योदय के वलसे सर्व प्रकारके भयको उलंघन कर अन्त में वह अपनी मधुमति नगरीमें आया। उस समय जावड़ शाइने अठारह जहाज मालके भर कर चीन, महावीन, और भोट देशोंमे भेजे हुए थे, वे विपरीत वायुके प्रयोगसे या देव- योगसे उस दिशामें न जाकर सुवर्ण दीपमे जा पहुंचे। वहां पर घुल्हेमें सुलगाई हुई अग्निसे जमीनमेंकी रेती तप जानेके कारणं सुवर्ण रूप हो जानेसे दूसरा माल खरीदना चन्द रस् कर वहांसे वे रेती के जहाज भरके पीछे लौट आये। उसी मार्गसे वे भाग्य योगसे मधुमति नगरीमें आ पहुंचे। उसी समय वज्रखामी भी मधुमतिके उद्यानमें आ विराजे थे। एक आदमीने आकर जावड शाहको गुरु महाराज के आगमन की बधाई दी। ठीक उसी समय एक दूसरे आदमीने आकर बारह सालके बाद अबस्मात पीछे आये हुए अठारह जहाजोकी खबर दी। ये दोनों समाचार एक ही समय मिलनेसे जावड शाह बड़ी प्रसन्न हुचा, परन्तु विचार करने लगा कि पहले ब्रहाज देखने जाऊ या गुरु महाराजको बन्दन करने, अन्तमें उसने निश्चय किया कि इस लोक और पर लोकमें हितदायक गुरु महाराजको प्रथम वन्दन करना चाहिए। इससे ऋद्धि सिद्धि सहित बड़े आडम्बरसे समहोत्सव गुरु श्री धन्ज्रस्वामीको चन्दन करने गया । उस वक सुवर्ण, कमल पर बैठे हुए जंगम तीर्थरूप श्री वज्रस्वामीको देखकर प्रमुदित हो चन्दन प्रदक्षिणा करके जब वह धर्म श्रवणकी मनीषासे गुरु देवके सन्मुख बैठता हैं उस वक्त अपने शरीरकी कान्तीसे वहांके सारे आकाश मंडल को भी दैदीप्य करने वाला एक देवता आकाश मार्गसे उतर कर गुरुको सविनय बन्दन कर कहने लगा कि, महाराज ! मैं पूर्व भषमें तीर्थ मानपुर नगर के राजा शुकर्मका कपर्दी नामक पुत्र था, मैं मद्यपायी हुवा था। एक समय दयाके समुद्र आप वहां पधारे थे तब आपने मुझे उपदेश देते हुए पंच पर्वणी महात्म्य, शत्रु जय महात्म्य, और प्रत्याख्यानके फल बतला कर प्रतिबोध दें मद्यमांस के परित्याग की प्रतिष्ठा कराई थी। मैंने वह प्रत्याख्यान कितने एक वर्षोतक पालन भी किये थे, परन्तु एक समय उष्ण कालके दो सौ चौंतीस दिनोंमें जब मैं स्त्रीके साथ चन्द्रशालामें बैठा था तब मोहमें मग्न होनेसे प्रत्याख्यानकी विस्मृति हो जानेसें मैंने दारू पिया। परन्तु छतपर बैठ कर दारू पीनेके बर्तन में दारु निकाले बाद उसमें ऊपर आकाशसे उड़ी जाती हुई चीलके मुखमें रहे हुए ओधे मस्तक वाले सपके मुखसे गरल - विष पड़ा। सोमालूम न होनेसे मैंने दारू पीलिया। उससे विष घूर्मित होगया, परन्तु उसी वक्त प्रत्याख्यान भूल जानेकी याद आनेसे उस विषय में पश्चात्ताप किया और शत्रुंजय तथा पंच परमेष्ठीका ध्यान कर मृत्यु पा में एक लाख यक्षोंका अधि पति कपद नामक यक्ष हुवा हूं। स्वासिन् आपने मुझे नरक रूप कूपमें पड़ते हुएको बचाया है। आपने मुझ पर बड़ा उपकार किया है इसलिये मैं आपका सदैव सेवक रहूंगा। मेरे लायक जो कुछ काम काज हो सो फरमाना। यों कह कर हाथी पर वढ़ा हुवा अनेक यक्षोंके परिवार सहित सर्वाङ्ग भूषण धर, पास, अंकुश, विजोरा, रुद्राक्षणी माला एवं चार हाथों में चार वस्तुयें धारण करने वाला सुवर्ण वर्ण वाला वह कपर्दि नामक यक्ष श्री षज्रस्वामीके पास आ बैठा। तब श्रुतज्ञानके धारक श्री वज्र स्वामी भी जावड़ शेटके पास श्री शत्रुंजयका सविस्तर महिमा व्याख्यान रूपले सुनाते हुए कह गये। और फिर कहने लगे कि, है महा भाग्यशाली जावड ! तु श्री शत्रुंजय तीर्थकी यात्रा और तीर्थका उद्धार निःशंक होकर कर । यदि इस कार्य में कुछ विघ्न होगा तो ये सब यक्ष और मैं स्वयं भी सहायकारी हूं। गुरु देवके बचन सुनकर जावड बड़ा प्रसन्न हुवा और उन्हें बन्दता करके वहांसे उठकर अपने अठारह जहाज देखने चला गया। तमाम जहाजोंमें से वेजम तूरी उतरवा ली और उससे सुवर्ण बनाकर बखारों में भर दिया। तद्नंतर महोत्सव पूर्वक, शुभ मुहूर्तमें सर्व प्रकारकी तैयारियां करके श्री शत्रु जय तीर्थ की यात्रार्थ प्रस्थानं किया। तब पहले ही दिन तीर्थ के पूर्व अधिष्ठायक देवता जो दुष्ट बन गये थे उन्होंने जावड शाह और उनकी स्त्रीके शरीर में ज्वर उत्पन्न किया। परन्तु श्री षज्ञ स्वामीकी दृष्टि मात्रके प्रभावले उस ज्यरका उपद्रव दूर हो गया। जब उन दुष्ट देवताओने दूसरी दफा उपद्रव किया तब एक लाख यक्षोंके परिवार सहित आफर कप यक्षने विघ्न निवारण किया। दुष्ट देवताओंने फिर वृष्टिका उपद्रव किया। वह वज्रस्वामीने वायुके प्रयोगसे और महा वायुका पर्वत द्वारा, पर्वतका वल द्वारा हाथीका सिंहसे, सिंहका अष्टापदसे, अग्निका जलसे, जलका अग्निसे, और सर्पका गरुढसे निवारण किया। एवं मार्गमें जो दो उपद्रव होते गये सो सब श्री वन स्वामी और कपड़ों यक्ष द्वास दूर किये गये । इस प्रकार विघ्न समूह निधारण करते हुए अनुकमसे आदिपुर नगरमें आ पहुंचे। उस वक्त वे दुष्ट देवता प्रचंड वायु, द्वारा चलायमान हुए वृक्षके समान पर्वतको कंपाने लगे, तब वज्र स्वामीने शांतिक कृत्य करके तीर्थ जल पुष्प अक्षत द्वारा मन्त्रोपचार से पर्वतको स्थिर किया। तदनन्तर वज्र स्वामीनें बतलाये हुए मार्गसे भगवानकी प्रतिमा को आगे करके पीछे अनुक्रमसे गुरु महाराज़ और सकल संघ, पर्वत पर चढ़ा । उस रास्ते में भी कहीं कहीं के अधम देवता शाकिनी, भूत, वैताल एवं राक्षस इत्यादिक उपद्रव करने लगे, परन्तु वज्र स्वामी और पपदोंके निवारण करनेसे अन्त में निर्विघ्नता पूर्वक वे मुख्य रूंक पर पहुंच गये, वहां देखते हैं तो मांस, हड्डियां, चमड़ा, कलेवर, फेस, खुर, नल, सींग, वगैरह दुर्गमीय वस्तुमसे पर्वतको भरा देख तमाम यात्रिक लोग खेद खिन्न होगये। कपर्दिक यक्षने अपने सेवक यक्षोंसे वह सब कुछ दूर करा कर पवित्र जल मंगाकर उस सारे पहाड़को धुलवा डाला, तथा मूलनायक वगैरहके जो मन्दिर टूट फूट गये थे, खंडित होगये थे उन्हें देख कर जावडको वड़ा दुःख हुवा। रात्रिके समय सकल संघके सो जाने बाद वे दुष्ट देवता एक बड़े रथमें लायी हुई भगवान श्री ऋषभदेवकी प्रतिमाको पर्वतसे नीचे उतार लेगये। प्रभातमे जब मंगल बाजे बजते हुए जावड जागृत होकर दर्शन करने गया तव वहां प्रतिमाको न देख कर अति दुःखित होने लगा फिर वज्र स्वामी और कपर्दी यक्ष दोनों जनें अपनी दिव्य शक्तिसे प्रतिमाको पुनः मुख्य टूक पर लाये। इसी प्रकार दूसरी रानको भो उन दुष्ट देवताओं ने प्रतिमाको नीचे उतार लिया। मगर फिर भी वह ऊपर ले आये। इस प्रकार इक्कीस रोज तक प्रनिमाजी का नीचे ऊपर भावागमन होता रहा। तथापि जय वे दुट देवता बिलकुल शान्त न हुए तव श्रीवज्रस्वामी ने कपर्दी यक्ष और जावड़ संघपति को बुला कर कहा कि हे कपर्दो ! आज रातको तू अपने सब यक्षोंके परिवार सहित शूद्र देवताओं रूप तृणोंको जलानेमें एक अग्नि समान वन कर सारे आकाश मंडलको आच्छादित कर सावधान हो कर रहना। मेरे मंत्रकी शकिसे तेरा शरीर वज्रके समान अभेद्य हो जानेसे तुझे कुछ भी कोई उपद्रव न कर सकेगा। हे जावड़ ! तुम अपनी स्त्री सहित स्नान करके पंच नमस्कार गिन कर श्रीऋषभदेव का स्मरण करके प्रतिमाजी को स्थिर करनेके लिए रथके पहियों के बीच दोनों जने दोनों तरफ शयन करो। जिससे वे दुष्ट तुम्हें उलंघन करनेमें समर्थ न होंगे। और मैं सकल संघ सहित सारी रात कार्योत्सर्ग ध्यानमें रहूंगा। गुरुदेव के यह वचन सुन कर नमस्कार कर सब जने * अपने दो कृत्यमें लग गये। समय आने पर वन्नवामी भी निश्चल ध्यानमें तत्पर हो कायोत्सर्ग में खड़े रहे। फिर वे दुष्ट देवता फु'फाटे भारते हुए अन्दर आनेके लिए बड़ा उद्यम करने लगे, परन्तु उनके पुण्य, ध्यान, घलसे किसी जगहसे भी वे अन्दर प्रवेश न कर सके। ऐसे करते हुए जय प्रातःकाल हुची तब गुरुदेवने संकल संघ सहित कायोत्सर्ग पूर्ण किया। प्रतिमा जैसे रक्खो थी वैसे ही स्थिर रही देख प्रमोदसे रोमांचित हो सकल मंगल वाद्य यजते हुए धवल मंगल गाते हुए महोत्सव पूर्वक प्रतिमाजी को मूठ नायकके मन्दिर के सामने लाये । बज्रस्वामी जावड़ संघपति और उसकी स्त्री सुशीला तथा संघकी रक्षा करनेके लिए रक्खे हुए महाधर पदवीको धारण करने वाले चार पुरुष पुराने मन्दिरमे प्रवेश कर प्रयत्नसे उसकी प्रमार्जना करने लगे। गुरु महाराज ध्यान करके दुष्ट देवनाका उपद्रव निवारण करनेके लिए चारों तरफ अक्षत प्रक्षेपादिक शांतिक करने लगे, तब शूद्र देवताओं के समुदाय सहित पहलेका कपर्दिक क्रोधायमान हो पुरानी प्रतिमा को म आश्रय करके रहा! , परन्तु नई प्रतिमा स्थापत करनेके लिए जब संघपति वहां पर आया तव वज्रस्वामीके मंत्रसे स्तंभित हुवा दुष्ट देवता उन्हें पराभव करने में समर्थ न हो सका तब एक बड़े घोर शब्दसे आराठी करने लगा इसकी आराठीका इतना शब्द पसरा कि ज्योतिष चक्र तक भयंकरता होते हुए बड़े दो पर्वत, समुद्र और सारी पृथ्वी भी कांपने लग गई। हाथी घोड़ा, व्याघ्र, सिंहादिक भी मूर्च्छा पा गए। पर्वतके शिखर टूट कर गिरने लगे; शत्रु जय पर्वतके भी फट जानेले दक्षिण और उत्तर दो विभाग हो गये। जावड़ संघपति, खुशीला और पन्ज्रस्वामी इन
Jamshedpur : मानगो में एक युवती से मोबाइल छिनतई कर भाग रहे बदमाश को वहां के लोगों ने खदेड़कर धर दबोचा और उसकी पिटाई करने के बाद मानगो पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया. घटना मानगो गुरुद्वारा रोड की रहने वाले संतोषी पाल के साथ घटी थी. घटना के समय वह मानगो मुंशी मुहल्ला मनान गली से रात के 8. 30 बजे गुजर रही थी. तभी एक बदमाश पीछे से आया था और मोबाइल छिनतई कर भाग रहा था. घटना की जानकारी मिलते ही मानगो पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गयी थी. इस दौरान आरोपी को पुलिस ने मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान उसने खुद को मानगो थाना क्षेत्र के आजादबस्ती रोड नंबर एक का रहने वाला मो. सरफराज अली उर्फ मो. अमन बताया. घटना के संबंध में मानगो पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मोबाइल छिनतई करने का एक मामला दर्ज करके शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. आरोपी के बारे में मानगो पुलिस का कहना है कि वह पहली बार 21 दिसंबर 2017 को चोरी के एक मामले में मागो थाने से ही जेल गया था. इसी तरह से 12 अगस्त 2018 को भी चोरी के मामले में जेल गया था. उलीडीह थाने से वह 16 गस्त 2019 को चोरी के मामले में जेल गया था. इस बार पुलिस ने उसे चौथी बार मोबाइल छिनतई के मामले में जेल भेजा है.
Jamshedpur : मानगो में एक युवती से मोबाइल छिनतई कर भाग रहे बदमाश को वहां के लोगों ने खदेड़कर धर दबोचा और उसकी पिटाई करने के बाद मानगो पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया. घटना मानगो गुरुद्वारा रोड की रहने वाले संतोषी पाल के साथ घटी थी. घटना के समय वह मानगो मुंशी मुहल्ला मनान गली से रात के आठ. तीस बजे गुजर रही थी. तभी एक बदमाश पीछे से आया था और मोबाइल छिनतई कर भाग रहा था. घटना की जानकारी मिलते ही मानगो पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गयी थी. इस दौरान आरोपी को पुलिस ने मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान उसने खुद को मानगो थाना क्षेत्र के आजादबस्ती रोड नंबर एक का रहने वाला मो. सरफराज अली उर्फ मो. अमन बताया. घटना के संबंध में मानगो पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मोबाइल छिनतई करने का एक मामला दर्ज करके शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. आरोपी के बारे में मानगो पुलिस का कहना है कि वह पहली बार इक्कीस दिसंबर दो हज़ार सत्रह को चोरी के एक मामले में मागो थाने से ही जेल गया था. इसी तरह से बारह अगस्त दो हज़ार अट्ठारह को भी चोरी के मामले में जेल गया था. उलीडीह थाने से वह सोलह गस्त दो हज़ार उन्नीस को चोरी के मामले में जेल गया था. इस बार पुलिस ने उसे चौथी बार मोबाइल छिनतई के मामले में जेल भेजा है.
PATNA: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से यह मांग की है कि वे अपने कैबिनेट और अपने आस-पास के पदाधिकारियों का ब्लड टेस्ट करवाएं। जिससे यह पता चल जाएगा कि कितने लोग शराब पीते हैं। विजय सिन्हा ने कहा कि नीतीश कुमार शराबबंदी के नाम पर पूरे बिहार के नायक नहीं बन सकते। छपरा शराबकांड की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। इस पर नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ऐसा कर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जहरीली शराब पीने से 80 लोगों की मौतें हुई है। उनके परिजनों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। पहले सरकार उनके आश्रितों को मुआवजा दें। मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करें। क्योंकि ऐसा नहीं किया गया है जिससे पूरा देश मर्माहत है। इन तमाम विषयों को लेकर बुधवार को विधानसभा परिसर में विधानमंडल दल के लोग धरना पर बैठेंगे। सारे विधायक और विधान पार्षद कल विधानसभा परिसर में मौजूद रहेंगे। नीतीश कुमार ने भाजपा को नहीं पूरे बिहार को बर्बाद करने का संकल्प लिया है जिसे हम रोकने का काम करेंगे। विजय सिन्हा ने कहा कि विधानसभा के अंदर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत शुरू किया गया। कल राष्ट्रगीत क्यों नहीं हुआ? हमलोगों ने मिलकर आपत्ति दर्ज कराया है। जिसकी भी गलती हुई उस पर कार्रवाई की जाए। राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान का अपमान कतई स्वीकार नहीं होगा। सत्ता के लिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाले लोग मां भारती को कतई स्वीकार नहीं है। इस मानसिकता का हम घोर विरोध करेंगे। हमलोग तो हर कार्यक्रम में जहां जाते हैं प्रयास रहता है कि राष्ट्रगान से कार्यक्रम शुरू हो और राष्ट्रगीत से इसका समापन हो। हर संवैधानिक पद पर बैठे लोग इसके माध्यम से हमारे युवा पीढी के मन के अंदर एक राष्ट्रबोध की प्रेरणा प्रदान करे। इसे लेकर हम कल विधानसभा परिसर में विरोध करेंगे। धरना का कार्यक्रम विधानमंडल की ओर से किया जाएगा। 11 से 1 बजे तक हमलोग वहां बैठेंगे। शीतकालीन सत्र के समापन कल हुआ बड़ा ही काला दिवस के रूप में कल का दिन माना जाएगा। विधायिका को कमजोर करने का मुख्यमंत्री की जो प्रवृति है पूरे पांच दिन के शीतकालीन सत्र में दिखाई पड़ा। नेता प्रतिपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गयी। विधायकों को अपमानित करने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। विधानसभा के आसन को सत्ता में बैठे लोग प्रभावित कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष सरकार के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे थे। इससे आसन की गरिमा घटी है। आसन पर विश्वास बरकरार रखना और मर्यादा का पालन करना आसन पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी है। विजय सिन्हा ने कहा कि आसन पर बैठे लोग पार्टी से ऊपर होते है सरकार से हटकर पक्ष प्रतिपक्ष दोनों का संरक्षक होते है लेकिन पांच दिनों के विधानसभा सत्र में इसकी कमी दिखाई दी। पूरे सत्र में प्रतिपक्ष का एक भी ध्यानाकर्षण नहीं लेना कार्यस्थगन को सुना नहीं गया हंगामा के बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक नहीं बुलायी गयी। मुख्य सचेतक का कार्यालय सत्ताधारी दल के एक सचेतक को दे किया। हमेशा नेता प्रतिपक्ष के सामने मुख्य सचेतक होता है। यह बहुत ही गलत वातावरण बनाया गया। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के लिए कई कमरों को तोड़कर मॉर्डन कार्यालय बनाया। परंपरा और नियम को तोड़कर हमारे उपमुख्यमंत्री जिस कार्यालय में बैठते थे उसे बाथरुम बना दिया। नीतीश जी ने कुर्सी के लिए कई समझौते किये। कुर्सी के लिए नियम से हटकर क्या क्या समझौता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सिर्फ कहलाने के लिए नीतीश कुमार है लेकिन सत्ता पर कमान उपमुख्यमंत्री का है। बार बार उत्तराधिकारी उन्हें घोषित किया जा रहा है। विधानसभा की गरिमा को गिराने का काम कर रहे हैं। विधानसभा पर किसी सीएम डिप्टी सीएम का अधिकार नहीं होता है। किसी सरकार और दल का विधानसभा नहीं होता है। पक्ष और प्रतिपक्ष के संरक्षक अध्यक्ष होते हैं। दोनों कामान बराबर है लोकतंत्र के दोों आंखें है। अध्यक्ष ने आसन का नया इतिहास बनाया है। नियम संविधान और मर्यादा का पालन कौन लोग कर रहे हैं यह सभी ने देखा।
PATNA: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से यह मांग की है कि वे अपने कैबिनेट और अपने आस-पास के पदाधिकारियों का ब्लड टेस्ट करवाएं। जिससे यह पता चल जाएगा कि कितने लोग शराब पीते हैं। विजय सिन्हा ने कहा कि नीतीश कुमार शराबबंदी के नाम पर पूरे बिहार के नायक नहीं बन सकते। छपरा शराबकांड की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। इस पर नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ऐसा कर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जहरीली शराब पीने से अस्सी लोगों की मौतें हुई है। उनके परिजनों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। पहले सरकार उनके आश्रितों को मुआवजा दें। मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करें। क्योंकि ऐसा नहीं किया गया है जिससे पूरा देश मर्माहत है। इन तमाम विषयों को लेकर बुधवार को विधानसभा परिसर में विधानमंडल दल के लोग धरना पर बैठेंगे। सारे विधायक और विधान पार्षद कल विधानसभा परिसर में मौजूद रहेंगे। नीतीश कुमार ने भाजपा को नहीं पूरे बिहार को बर्बाद करने का संकल्प लिया है जिसे हम रोकने का काम करेंगे। विजय सिन्हा ने कहा कि विधानसभा के अंदर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत शुरू किया गया। कल राष्ट्रगीत क्यों नहीं हुआ? हमलोगों ने मिलकर आपत्ति दर्ज कराया है। जिसकी भी गलती हुई उस पर कार्रवाई की जाए। राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान का अपमान कतई स्वीकार नहीं होगा। सत्ता के लिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाले लोग मां भारती को कतई स्वीकार नहीं है। इस मानसिकता का हम घोर विरोध करेंगे। हमलोग तो हर कार्यक्रम में जहां जाते हैं प्रयास रहता है कि राष्ट्रगान से कार्यक्रम शुरू हो और राष्ट्रगीत से इसका समापन हो। हर संवैधानिक पद पर बैठे लोग इसके माध्यम से हमारे युवा पीढी के मन के अंदर एक राष्ट्रबोध की प्रेरणा प्रदान करे। इसे लेकर हम कल विधानसभा परिसर में विरोध करेंगे। धरना का कार्यक्रम विधानमंडल की ओर से किया जाएगा। ग्यारह से एक बजे तक हमलोग वहां बैठेंगे। शीतकालीन सत्र के समापन कल हुआ बड़ा ही काला दिवस के रूप में कल का दिन माना जाएगा। विधायिका को कमजोर करने का मुख्यमंत्री की जो प्रवृति है पूरे पांच दिन के शीतकालीन सत्र में दिखाई पड़ा। नेता प्रतिपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गयी। विधायकों को अपमानित करने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। विधानसभा के आसन को सत्ता में बैठे लोग प्रभावित कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष सरकार के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे थे। इससे आसन की गरिमा घटी है। आसन पर विश्वास बरकरार रखना और मर्यादा का पालन करना आसन पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी है। विजय सिन्हा ने कहा कि आसन पर बैठे लोग पार्टी से ऊपर होते है सरकार से हटकर पक्ष प्रतिपक्ष दोनों का संरक्षक होते है लेकिन पांच दिनों के विधानसभा सत्र में इसकी कमी दिखाई दी। पूरे सत्र में प्रतिपक्ष का एक भी ध्यानाकर्षण नहीं लेना कार्यस्थगन को सुना नहीं गया हंगामा के बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक नहीं बुलायी गयी। मुख्य सचेतक का कार्यालय सत्ताधारी दल के एक सचेतक को दे किया। हमेशा नेता प्रतिपक्ष के सामने मुख्य सचेतक होता है। यह बहुत ही गलत वातावरण बनाया गया। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के लिए कई कमरों को तोड़कर मॉर्डन कार्यालय बनाया। परंपरा और नियम को तोड़कर हमारे उपमुख्यमंत्री जिस कार्यालय में बैठते थे उसे बाथरुम बना दिया। नीतीश जी ने कुर्सी के लिए कई समझौते किये। कुर्सी के लिए नियम से हटकर क्या क्या समझौता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सिर्फ कहलाने के लिए नीतीश कुमार है लेकिन सत्ता पर कमान उपमुख्यमंत्री का है। बार बार उत्तराधिकारी उन्हें घोषित किया जा रहा है। विधानसभा की गरिमा को गिराने का काम कर रहे हैं। विधानसभा पर किसी सीएम डिप्टी सीएम का अधिकार नहीं होता है। किसी सरकार और दल का विधानसभा नहीं होता है। पक्ष और प्रतिपक्ष के संरक्षक अध्यक्ष होते हैं। दोनों कामान बराबर है लोकतंत्र के दोों आंखें है। अध्यक्ष ने आसन का नया इतिहास बनाया है। नियम संविधान और मर्यादा का पालन कौन लोग कर रहे हैं यह सभी ने देखा।
मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट टीम का फील्डिंग स्तर अव्वल दर्जे का देखने को मिलता है. बात चाहे कैच पकड़ने की हो या गेंद को विकेट पर थ्रो करने की टीम इंडिया की बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ साथ फील्डिंग का भी कोई जवाब नहीं है. टीम इंडिया में रविंद्र जडेजा, विराट कोहली, मनीष पांडेय और श्रेयस अय्यर जैसे फील्डर मौजूद हैं. पहले के समय में सुरेश रैना, युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे दिग्गज अपनी फील्डिंग से टीम को मजबूती प्रदान करते थे. हाल में ही टीम इंडिया के स्टाइलिश खिलाड़ियों में से एक सुरेश रैना ने स्पोर्ट स्क्रीन को दिए अपने एक बयान में टीम इंडिया के बेस्ट फील्डर के नाम का खुलासा किया. रैना ने अनुसार अजिंक्य रहाणे टीम इंडिया के सबसे बेहतरीन कैच पकड़ने वाले फील्डर हैं. रैना ने कहा, आप सभी को बताते चले कि भारतीय टेस्ट टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने 65 टेस्ट मैचों में 81, 90 एकदिवसीय मुकाबलों में 48 और 20 टी20I मैचों में 16 कैच लपके है.
मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट टीम का फील्डिंग स्तर अव्वल दर्जे का देखने को मिलता है. बात चाहे कैच पकड़ने की हो या गेंद को विकेट पर थ्रो करने की टीम इंडिया की बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ साथ फील्डिंग का भी कोई जवाब नहीं है. टीम इंडिया में रविंद्र जडेजा, विराट कोहली, मनीष पांडेय और श्रेयस अय्यर जैसे फील्डर मौजूद हैं. पहले के समय में सुरेश रैना, युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे दिग्गज अपनी फील्डिंग से टीम को मजबूती प्रदान करते थे. हाल में ही टीम इंडिया के स्टाइलिश खिलाड़ियों में से एक सुरेश रैना ने स्पोर्ट स्क्रीन को दिए अपने एक बयान में टीम इंडिया के बेस्ट फील्डर के नाम का खुलासा किया. रैना ने अनुसार अजिंक्य रहाणे टीम इंडिया के सबसे बेहतरीन कैच पकड़ने वाले फील्डर हैं. रैना ने कहा, आप सभी को बताते चले कि भारतीय टेस्ट टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने पैंसठ टेस्ट मैचों में इक्यासी, नब्बे एकदिवसीय मुकाबलों में अड़तालीस और बीस टीबीसI मैचों में सोलह कैच लपके है.
बगीचे को सजाने के तरीके पर विचार -अनगिनत। उनमें से कुछ व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, लगभग किसी भी प्रकार के बगीचे के लिए उपयुक्त, अन्य विशिष्ट हैं, केवल सामंजस्यपूर्ण रूप से आसन्न हैं, उदाहरण के लिए, यूक्रेनी टाइन, या ओरिएंटल एंटोरेज की शैली में एक बुनाई के साथ। लेकिन वास्तव में क्या लगता है कि आप अपने सिर और हाथों से काम करना चाहते हैं, इसके लिए विचारों की बहुतायत क्या है। उनके लेखकों ने उदारतापूर्वक इंटरनेट पर आविष्कार किया, हालांकि कुछ विचार पेटेंट लेने के लिए उपयुक्त हैं। यदि आप न केवल माली हैं, बल्कि माली भी हैंसाजिश सरल है, लेकिन इसे साधारण लकड़ी के संकेतों से स्वाद के साथ सजाया जाएगा, जिस पर लगाए गए सब्जियों और फलों के नाम काटा या जला दिया जाता है। यहां, जैसा कि वे कहते हैं, सुखद के साथ सुखद को जोड़ती हैः एक नज़र यह याद रखने के लिए पर्याप्त है कि इस बिस्तर पर वास्तव में क्या बढ़ता है। और यदि आप अपनी फसल की रक्षा के लिए रंगीन डरावना डालते हैं तो यह आमतौर पर बहुत खूबसूरत होगा। आप बगीचे के फर्नीचर को छूट नहीं दे सकते। और बगीचे स्थिर और अस्थायी दोनों को सजा सकता है। स्थिर फर्नीचर, ज़ाहिर है, सभी मौसम की अनियमितताओं से संरक्षित किया जाना चाहिए, जबकि एक अस्थायी के लिए मुख्य बात हल्कापन, कॉम्पैक्टनेस और परिवहन क्षमता है। उसके द्वारा सुसज्जित आरामदायक कोने बगीचे में अग्रिम में योजना बनाई जा सकती है, और आप अपनी पसंद के किसी भी स्थान पर सुधार कर सकते हैं। अगला विचार उन लोगों के लिए है जो सोचते हैंमजेदार आंकड़ों के साथ बगीचे को सजाने। खासकर जो बिक्री पर नहीं हैं। पहले तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं। फिर एक उपयुक्त सामग्री से बने एक मूर्ति के लिए एक फ्रेम का निर्माण करें - लाठी और तार के टुकड़ों से रेत और पुराने पैन से भरे प्लास्टिक की बोतलों तक। फिर फ़्रेम को फोम के साथ लेपित किया जाता है, जो तुरंत जमे हुए होने तक, वांछित आकार दिया जाता है। अंत में, पेंट और अपनी कल्पना।
बगीचे को सजाने के तरीके पर विचार -अनगिनत। उनमें से कुछ व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, लगभग किसी भी प्रकार के बगीचे के लिए उपयुक्त, अन्य विशिष्ट हैं, केवल सामंजस्यपूर्ण रूप से आसन्न हैं, उदाहरण के लिए, यूक्रेनी टाइन, या ओरिएंटल एंटोरेज की शैली में एक बुनाई के साथ। लेकिन वास्तव में क्या लगता है कि आप अपने सिर और हाथों से काम करना चाहते हैं, इसके लिए विचारों की बहुतायत क्या है। उनके लेखकों ने उदारतापूर्वक इंटरनेट पर आविष्कार किया, हालांकि कुछ विचार पेटेंट लेने के लिए उपयुक्त हैं। यदि आप न केवल माली हैं, बल्कि माली भी हैंसाजिश सरल है, लेकिन इसे साधारण लकड़ी के संकेतों से स्वाद के साथ सजाया जाएगा, जिस पर लगाए गए सब्जियों और फलों के नाम काटा या जला दिया जाता है। यहां, जैसा कि वे कहते हैं, सुखद के साथ सुखद को जोड़ती हैः एक नज़र यह याद रखने के लिए पर्याप्त है कि इस बिस्तर पर वास्तव में क्या बढ़ता है। और यदि आप अपनी फसल की रक्षा के लिए रंगीन डरावना डालते हैं तो यह आमतौर पर बहुत खूबसूरत होगा। आप बगीचे के फर्नीचर को छूट नहीं दे सकते। और बगीचे स्थिर और अस्थायी दोनों को सजा सकता है। स्थिर फर्नीचर, ज़ाहिर है, सभी मौसम की अनियमितताओं से संरक्षित किया जाना चाहिए, जबकि एक अस्थायी के लिए मुख्य बात हल्कापन, कॉम्पैक्टनेस और परिवहन क्षमता है। उसके द्वारा सुसज्जित आरामदायक कोने बगीचे में अग्रिम में योजना बनाई जा सकती है, और आप अपनी पसंद के किसी भी स्थान पर सुधार कर सकते हैं। अगला विचार उन लोगों के लिए है जो सोचते हैंमजेदार आंकड़ों के साथ बगीचे को सजाने। खासकर जो बिक्री पर नहीं हैं। पहले तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं। फिर एक उपयुक्त सामग्री से बने एक मूर्ति के लिए एक फ्रेम का निर्माण करें - लाठी और तार के टुकड़ों से रेत और पुराने पैन से भरे प्लास्टिक की बोतलों तक। फिर फ़्रेम को फोम के साथ लेपित किया जाता है, जो तुरंत जमे हुए होने तक, वांछित आकार दिया जाता है। अंत में, पेंट और अपनी कल्पना।
संसार में ये तीन चीजें सत्कर्मियों को ही मिल पाती हैं - ऐसा पुत्र ज़ो अपने सदाचार से पिता को प्रसन्न रखे, ऐसी पत्नी जो अपने पति का सदैव हित चाहे तथा ऐसा मित्र जो दुख-सुख में समान भाव रखे ।।६८।। एको देवः केशवो वा शिवो वा एकं मित्रं भूपतिर्वा यतिर्वा । एको वासः पत्तने वा वने वा एका नारी सुन्दरी वा दरी वा ॥६६॥ देवता एक ही ( होना चाहिए, अर्थात् पूजना चाहिए ) केशव या शङ्कर जी, मित्र एक ही (होना चाहिए ) राजा या तपस्वी, निवास एक ही होना नगर या वन तथा स्त्री एक ही ( ग्रहण करना चाहिए ) रूपवती नारी या गुफा ॥६६॥ नम्रत्वेनोन्नमन्तः पर गुणकथनंः स्वान्गुणान्ख्यापयन्तः । स्वार्थान्सम्पादयन्तो विततप्रियतरारम्भयत्नाः परार्थे ॥ क्षान्त्यं त्राक्षेप रूक्षाक्षरमुखरमुखान्दुर्जनान्दूषयन्तः सन्तः साश्चर्यचर्या जगति बहुमताः कस्यनाभ्यर्चनीयाः ॥ ७० ॥ ऐसे विस्मयकारी आचरण करने वाले अत्यन्त सम्माननीयजन किसकी श्रद्धा के पात्र न होंगे जो नम्रता के कारण ऊंचे उठते हैं; दूसरों का गुणगान करके ही अपने गुणों की ख्याति करते हैं, निरन्तर अच्छी तरह दूसरों के लिए प्रयास करके ही अपने कार्य सिद्ध करते हैं और रूखे वचन बोलने वाले दुष्टों के मुख को अपनी क्षमा से ही मलिन कर देते हैं ॥ ७० ॥
संसार में ये तीन चीजें सत्कर्मियों को ही मिल पाती हैं - ऐसा पुत्र ज़ो अपने सदाचार से पिता को प्रसन्न रखे, ऐसी पत्नी जो अपने पति का सदैव हित चाहे तथा ऐसा मित्र जो दुख-सुख में समान भाव रखे ।।अड़सठ।। एको देवः केशवो वा शिवो वा एकं मित्रं भूपतिर्वा यतिर्वा । एको वासः पत्तने वा वने वा एका नारी सुन्दरी वा दरी वा ॥छयासठ॥ देवता एक ही केशव या शङ्कर जी, मित्र एक ही राजा या तपस्वी, निवास एक ही होना नगर या वन तथा स्त्री एक ही रूपवती नारी या गुफा ॥छयासठ॥ नम्रत्वेनोन्नमन्तः पर गुणकथनंः स्वान्गुणान्ख्यापयन्तः । स्वार्थान्सम्पादयन्तो विततप्रियतरारम्भयत्नाः परार्थे ॥ क्षान्त्यं त्राक्षेप रूक्षाक्षरमुखरमुखान्दुर्जनान्दूषयन्तः सन्तः साश्चर्यचर्या जगति बहुमताः कस्यनाभ्यर्चनीयाः ॥ सत्तर ॥ ऐसे विस्मयकारी आचरण करने वाले अत्यन्त सम्माननीयजन किसकी श्रद्धा के पात्र न होंगे जो नम्रता के कारण ऊंचे उठते हैं; दूसरों का गुणगान करके ही अपने गुणों की ख्याति करते हैं, निरन्तर अच्छी तरह दूसरों के लिए प्रयास करके ही अपने कार्य सिद्ध करते हैं और रूखे वचन बोलने वाले दुष्टों के मुख को अपनी क्षमा से ही मलिन कर देते हैं ॥ सत्तर ॥
किसी भी तरह के चुनाव कुछ नियमों में बंधकर लड़े जाते हैं। कहने वाले कहते हैं कि अगर नियम के भीतर रहते हुए चुनाव लड़ा जाए तो चुनाव का असल मकसद पूरा होता है। हमारा लोकतंत्र मजबूत होता है। चुनाव के बहुत सारे नियम हैं, जिसमें सबसे अहम है मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी आदर्श आचार संहिता। ये क्या है, क्यों है, आइए हम समझने की कोशिश करते हैं। मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क्या है? मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट एक तरह का ऐसा दस्तावेज है, जिसपर सभी राजनीतिक दलों की सहमति होती है। सामान्य भाषा में समझें तो पॉलिटिकल पार्टी अपने बरताव पर खुद ही नियंत्रण करने की प्रतिबद्धता जाहिर करती है। समय-समय खुद ही इसमें सुधार करते रहते हैं। भारत की पोलिटिकल पार्टी द्वारा जनतंत्र बचाये रखने के लिए किया गया यह सबसे बड़ा योगदान है। इस योगदान की अहमियत को समझने के लिए जरा इसे ऐसे सोचिये कि तब क्या होता, जब सरकार की कुर्सी संभालने वाली पार्टी चुनाव के दौरान ही सारी योजनाओं को घोषित करने लगती।और यह कहती कि सबका जन धन अकाउंट खुलेगा और आकउंट में पैसे भेजे जायेंगे। तब क्या होता? इन्हीं हथकंडो से बचने के लिए मॉडल कॉड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। यानी राजनीतिक दल चुनावों के दौरान इस तरह से बरताव करें कि लेवल प्लेइंग फील्ड बना रहे। यही मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क गहरा अर्थ होता है कि सभी राजनीतिक दल रचनात्मक तरीके से चुनाव प्रचार करे लेकिन ऐसे बर्ताव न करें और न ही ऐसा हथकंडा अपनाएं जिससे एक बराबर जमीन पर चुनाव लड़ने की सम्भावना ही खत्म हो जाए। इस समय सरकार के अधिकार सीमित हो जाते हैं और नौकरशाहों का प्रशासन सक्रिय हो जाता है। यानी जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी बनकर प्रशासन को नियंत्रित करने की भूमिका में आ जाता है और सरकार की सारी भूमिकाएं शांत हो जाती है। लोगों को यह लगता है कि मॉडल कॉड ऑफ़ कंडक्ट केवल कैंडिडेट और पोलिटिकल पार्टी पर लागू होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। लोकसभा चुनावों के दौरान सभी तरह की संस्थाएं, कमेटी, केंद्र सरकार के पैसे पर पूरी या आधी तरह से चल रहे किसी भी तरह के कमीशन या कॉर्पोरेशन पर लागू होता है। यानी जल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन या किसी भी तरह के डेवलपमेंट ऑथोरिटी पर लागू होता है। केवल यहीं तक नहीं पोलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थकों पर भी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। कहने का मतलब यह है कि ऐसा नहीं हो सकता कि नेता जी पैदल-पैदल चलें और पीछे से उनके समर्थक वोट बटोरने के लिए पैसा बांटते चलें। यानी न ही किसी तरह के ओर्गनइजेशन और न ही किसी तरह के समर्थक ऐसा काम कर सकते हैं, जिससे चुनावों के दौरान बराबरी के अधिकार यानी लेवल प्लेइंग फील्ड को किसी तरह का नुकसान पहुंचे। मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट उस दिन से लागू हो जाता है, जिस दिन चुनावों की तारीख़ों की घोषणा हो जाती है। अगर आम चुनाव यानी लोकसभा चुनाव हैं तो पूरे भारत में कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है और अगर राज्य का चुनाव है तो पूरे राज्य में कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। इस दैरान राजनीतिक दल या कैंडिडेट क्या कर सकते हैं और क्या नहीं? 1.इस दौरान जनता को प्रभावित करने वाली कोई नई नीति या योजना नहीं लागू की जा सकती है। लेकिन बहुत अधिक जरूरी हो तो ऐसा कुछ चुनाव आयोग की इजाजत के बाद ही किया जा सकता है। जैसे कोई आपदा यानी भयंकर बाढ़ या और कोई मुश्किल हो गई हो तो पैसे की मदद तभी की जाएगी जब चुनाव आयोग इजाजत देगा। 2. जाति और समुदाय के भावनाओं को आधार बनाकर कोई भी अपील नहीं की जा सकती है। 3. ऐसी कोई बयानबाजी नहीं की जायेगी जिसका जुड़ाव पब्लिक लाइफ से न हो। यानी प्राइवेट लाइफ से जुडी बातें कहना भी एक तरह से मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन करना है। 4.किसी भी तरह के धार्मिक स्थल यानी मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का इस्तेमाल पोलिटिकल पार्टी द्वारा नहीं किया जाएगा। यानी ऐसा नहीं हो सकता है इन धार्मिक स्थलों पर जमा होने वाली भीड़ के सामने जाकर चुनाव प्रचार किया जाए। 5.चुनाव में पारदर्शिता बनी रहे इसलिए पोलिटिकल पार्टी और इनके दफ्तरों को संभालने वाले लोगों को बड़े अमाउंट वाले नकदी लेन-देन करने की इजाजत नहीं होती है। केवल 20 हज़ार से कम राशि का ही नकदी में लेन-देन किया जा सकता है। लेकिन ऐसा होता है क्या? हमने तो पैसों से भरी गाड़ियों के जरिये चुनावों में पैसा पानी की तरह बहते देखा है। 6.चुनाव के दौरान शराब बांटने की इजाजत नहीं होती। लेकिन भारत का शायद ही ऐसा कोई चुनाव हो जो बिना शराब बांटे पूरा होता हो। चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर पकड़ी जाने वाली शराब इसका सुबूत है। 7. लाउडस्पीकर लगाकर चुनाव प्रचार करने की इजाज़त इलाके से जुड़े इस काम के लिए निर्धारित सरकारी अफसर से लेनी पड़ती है। और लाउडस्पीकर लगाकर चुनाव प्रचार करने की इजाज़त अब केवल सुबह छह बजे से लेकर रात दस बजे तक होती है। 8.इसकी भी इजाज़त नहीं होती कि किसी पार्टी की सभा चल रही हो और दूसरी पार्टी उसे अपनी सभा बनाकर भाषण करने लग जाए। या किसी दीवार पर किसी पार्टी या कैंडिडेट का पोस्टर या झंडा लगा हो, उसे फाड़कर अपना पोस्टर या झंडा लगा दिया जाए। आचार संहिता के तहत क्या-क्या किया जा सकता है? 1.लेवल प्लेइंग फिल्ड बना रहे, इसलिए जरूरी है कि मैदान और हैलीपेड बिना किसी पक्षपात के सबको मिल सके। ऐसा न हो कि कोई एक राज्य सरकार विपक्षी दलों अपने यहां घुसने से ही मना कर दे। 2.जमकर चुनाव प्रचार किया जा सकता है लेकिन पार्टी की नीतियों, कामों और उसके पिछले कामों पर। न कि चुनावी प्रचार में यह कहा जाए कि हमने पाकिस्तान में घुसकर 400 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 3.चुनाव प्रचार के दौरान ऐसा न हो कि किसी का जीना ही हराम कर दिया जाए। यानी ऐसा न हो कि किसी सोसाइटी में बिना किसी अथॉरिटी के इजाजत के लाउडस्पीकर लगाकर बोलना शुरू कर दिया जाए। इसलिए लोकल पुलिस के इजाजत के बिना न भाषण देने की जगह तय की जा सकती है और न ही किसी जगह पर लाउडस्पीकर लगाकर भाषण दिया जा सकता है। 4.कैम्पेन पीरियड के खत्म होने पर वोटर, कैंडिडेट और चुनाव एजेंट के अलावा अन्य बाहरी लोगों को वह चुनावी क्षेत्र छोड़ना होता है। यानी अगर आप किसी संसदीय या विधानसभा क्षेत्र के वोटर या प्रत्याशी या उसके एजेंट नहीं है तो आपत्ति होने पर आप पर कार्रवाई भी की जा सकती है। विज्ञापनों या एडवर्टिजमेंट या इश्तिहारों के बारें में मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क्या कहता है? यहीं पर भयंकर पैसा बहाया जाता है। सरकारी विज्ञापन इस मकसद से जारी किये जाने चाहिए कि जनता को सरकार की पॉलिसी,प्रोग्राम और कामों का पता चले। और उसे यह बात समझ में आये कि वह सरकारी पहलों का फायदा कैसे उठाएगी। लेकिन होता बिल्कुल उल्टा है। जनता का पैसा यानी सरकारी पैसे पर सत्ता सँभालने वाली पार्टी अपनी जमकर मार्केटिंग करती है। कभी-कभार तो अख़बार के आधे से अधिक पन्ने सरकार का भोंपू बनने में बर्बाद किये जाते हैं। दीवारों पर कैंडिटेट के फोटो के साथ लगे होर्डिंग पर'ईमानदार और कर्मठ प्रत्याशी' का चलताऊ लाइन लगाकर करोड़ों खर्च किया जाता है। इलेक्शन कमीशन का इस पर सख्त दिशानिर्देश हैं कि सरकारी पैसे से अपना विज्ञापन करना कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन है। इस बार लोकसभा चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने चुनावी पोस्टरों में सेना के सियासी इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन लगता है कि सांसद रामचरण बोहरा जी को अपना काम गिनाने को कुछ मिल नहीं रहा है तो सेना के शौर्य को ही भुनाने में जुट गए हैं। जयपुर शहर के हर गली नुक्कड़ पर सेना और लड़ाकू जहाजों के साथ खुद का और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगा दी। हालांकि सवाल किए जाने पर सांसद सफाई देते रहे। रामचरण बोहरा ने कहा कि ये पोस्टर उन्होंने चुनाव के लिए नहीं लगाया है। चुनाव आयोग का निर्देश है तो हटा लेंगे। क्या सोशल मीडिया आचार संहिता में शामिल है? इलेक्शन कमीशन ने राजनीतिक दलों और कैंडिडेट द्वारा इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लिखे कंटेंट को भी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट में शामिल कर लिया है। कैंडिडेट को सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म यानी फेसबुक, ट्विटर, जीमेल का अकाउंट इलेक्शन कमीशन को देना होगा। साथ में सोशल मीडिया पर किये जाने वाले विज्ञापन के खर्चे जो चुनाव आयोग में जमा करना होगा। अभी हाल में चुनाव आयोग ने आदेश दिया कि सत्ताधारी दाल के लोग अपने सोशल मीडिया के पोस्ट से विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीर हटा लें। शराब की बिक्री पर आचार संहिता क्या कहती है ? भारत के चुनावों में पैसा और शारब पानी की तरह बहाया जाता है। भारत की गरीबी को मदहोश करके लूटने का यह सबसे आजमाया हुआ नुस्खा है। इलेक्शन कमीशन यह नियम जारी करता है कि चुनाव घोषणा के दिन से चुनाव खत्म होने तक जिला प्रशासन का एक्साइज डिपार्टमेंट जिले की हर शराब की दुकान निगरानी रखेगा। यह रिकॉर्ड हासिल करेगा कि किसी शराब की दुकान पर शराब की कितना स्टॉक है और दिन भर में वह कितने की बिक्री करता है। चुनाव में कम्पैन का दौर खत्म होने के बाद यानी वोटिंग के दिन से 48 घण्टे पहले जिले की सारे शराब के दुकान बंद रहेंगी। इनमें से किसी भी नियम का पालन न होना कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन है। आचार संहिता उल्लंघन होने पर क्या होता है? - नफरत भरा भाषण देना या चुनाव प्रचार करना जिससे जाति, धर्मों और समुदायों के बीच दरार पैदा हो। - पैसा और शराब बांटना ताकि वोट हासिल किया जा सके। - किसी को धमकाना ताकि वह किसी के लिए वोट दे सके। - वोटिंग के दिन से 48 घण्टे पहले तक चुनाव प्रचार किया जा सकता है। इसके बाद का चुनाव प्रचार दंड देने कैटेगरी में शामिल होता है। इन सारी बातों को अपनी दिमाग के किसी कोने में रख लीजिये। अबकी बार तो इलेक्शन कमीशन ने यहां तक कह दिया है कि आप मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट के उललंघन से जुड़े किसी मामलें पर वीडियों बनाकर भेजेंगे तो उसपर कार्रवाई होगी। हर राज्य में इन मामलों की छानबीन करने के लिए एक स्क्रीनंग कमिटी होती है। इस स्क्रीनिंग कमेटी से मामला पास होने के बाद इलेक्शन कमीशन के पहुँचता है। और इलेक्शन कमीशन इस पर अपना फैसला सुनाता है। प्रक्रिया थोड़ी सी ढीली है। लेकिन अगर मामलों की बाढ़ आए तो इलेक्शन कमीशन की मजबूरी होगी कि वह मजबूत और सॉलिड प्रक्रिया बनाए। आप केवल एक नागरिक की भूमिका निभाइये इसी से लोकतंत्र मजबूत होगा। इसी के लिए चुनाव आयोग ने एक समाधान पोर्टल बनाया है, जिसपर आप अपनी शिकायतें, सूचना और सलाह भेज सकते हैं। इसके अलावा cVIGIL app पर आप चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होने पर भी वीडियो या तस्वीर भेज सकते हैं। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया गया है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
किसी भी तरह के चुनाव कुछ नियमों में बंधकर लड़े जाते हैं। कहने वाले कहते हैं कि अगर नियम के भीतर रहते हुए चुनाव लड़ा जाए तो चुनाव का असल मकसद पूरा होता है। हमारा लोकतंत्र मजबूत होता है। चुनाव के बहुत सारे नियम हैं, जिसमें सबसे अहम है मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी आदर्श आचार संहिता। ये क्या है, क्यों है, आइए हम समझने की कोशिश करते हैं। मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क्या है? मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट एक तरह का ऐसा दस्तावेज है, जिसपर सभी राजनीतिक दलों की सहमति होती है। सामान्य भाषा में समझें तो पॉलिटिकल पार्टी अपने बरताव पर खुद ही नियंत्रण करने की प्रतिबद्धता जाहिर करती है। समय-समय खुद ही इसमें सुधार करते रहते हैं। भारत की पोलिटिकल पार्टी द्वारा जनतंत्र बचाये रखने के लिए किया गया यह सबसे बड़ा योगदान है। इस योगदान की अहमियत को समझने के लिए जरा इसे ऐसे सोचिये कि तब क्या होता, जब सरकार की कुर्सी संभालने वाली पार्टी चुनाव के दौरान ही सारी योजनाओं को घोषित करने लगती।और यह कहती कि सबका जन धन अकाउंट खुलेगा और आकउंट में पैसे भेजे जायेंगे। तब क्या होता? इन्हीं हथकंडो से बचने के लिए मॉडल कॉड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। यानी राजनीतिक दल चुनावों के दौरान इस तरह से बरताव करें कि लेवल प्लेइंग फील्ड बना रहे। यही मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क गहरा अर्थ होता है कि सभी राजनीतिक दल रचनात्मक तरीके से चुनाव प्रचार करे लेकिन ऐसे बर्ताव न करें और न ही ऐसा हथकंडा अपनाएं जिससे एक बराबर जमीन पर चुनाव लड़ने की सम्भावना ही खत्म हो जाए। इस समय सरकार के अधिकार सीमित हो जाते हैं और नौकरशाहों का प्रशासन सक्रिय हो जाता है। यानी जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी बनकर प्रशासन को नियंत्रित करने की भूमिका में आ जाता है और सरकार की सारी भूमिकाएं शांत हो जाती है। लोगों को यह लगता है कि मॉडल कॉड ऑफ़ कंडक्ट केवल कैंडिडेट और पोलिटिकल पार्टी पर लागू होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। लोकसभा चुनावों के दौरान सभी तरह की संस्थाएं, कमेटी, केंद्र सरकार के पैसे पर पूरी या आधी तरह से चल रहे किसी भी तरह के कमीशन या कॉर्पोरेशन पर लागू होता है। यानी जल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन या किसी भी तरह के डेवलपमेंट ऑथोरिटी पर लागू होता है। केवल यहीं तक नहीं पोलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थकों पर भी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। कहने का मतलब यह है कि ऐसा नहीं हो सकता कि नेता जी पैदल-पैदल चलें और पीछे से उनके समर्थक वोट बटोरने के लिए पैसा बांटते चलें। यानी न ही किसी तरह के ओर्गनइजेशन और न ही किसी तरह के समर्थक ऐसा काम कर सकते हैं, जिससे चुनावों के दौरान बराबरी के अधिकार यानी लेवल प्लेइंग फील्ड को किसी तरह का नुकसान पहुंचे। मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट उस दिन से लागू हो जाता है, जिस दिन चुनावों की तारीख़ों की घोषणा हो जाती है। अगर आम चुनाव यानी लोकसभा चुनाव हैं तो पूरे भारत में कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है और अगर राज्य का चुनाव है तो पूरे राज्य में कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होता है। इस दैरान राजनीतिक दल या कैंडिडेट क्या कर सकते हैं और क्या नहीं? एक.इस दौरान जनता को प्रभावित करने वाली कोई नई नीति या योजना नहीं लागू की जा सकती है। लेकिन बहुत अधिक जरूरी हो तो ऐसा कुछ चुनाव आयोग की इजाजत के बाद ही किया जा सकता है। जैसे कोई आपदा यानी भयंकर बाढ़ या और कोई मुश्किल हो गई हो तो पैसे की मदद तभी की जाएगी जब चुनाव आयोग इजाजत देगा। दो. जाति और समुदाय के भावनाओं को आधार बनाकर कोई भी अपील नहीं की जा सकती है। तीन. ऐसी कोई बयानबाजी नहीं की जायेगी जिसका जुड़ाव पब्लिक लाइफ से न हो। यानी प्राइवेट लाइफ से जुडी बातें कहना भी एक तरह से मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन करना है। चार.किसी भी तरह के धार्मिक स्थल यानी मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का इस्तेमाल पोलिटिकल पार्टी द्वारा नहीं किया जाएगा। यानी ऐसा नहीं हो सकता है इन धार्मिक स्थलों पर जमा होने वाली भीड़ के सामने जाकर चुनाव प्रचार किया जाए। पाँच.चुनाव में पारदर्शिता बनी रहे इसलिए पोलिटिकल पार्टी और इनके दफ्तरों को संभालने वाले लोगों को बड़े अमाउंट वाले नकदी लेन-देन करने की इजाजत नहीं होती है। केवल बीस हज़ार से कम राशि का ही नकदी में लेन-देन किया जा सकता है। लेकिन ऐसा होता है क्या? हमने तो पैसों से भरी गाड़ियों के जरिये चुनावों में पैसा पानी की तरह बहते देखा है। छः.चुनाव के दौरान शराब बांटने की इजाजत नहीं होती। लेकिन भारत का शायद ही ऐसा कोई चुनाव हो जो बिना शराब बांटे पूरा होता हो। चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर पकड़ी जाने वाली शराब इसका सुबूत है। सात. लाउडस्पीकर लगाकर चुनाव प्रचार करने की इजाज़त इलाके से जुड़े इस काम के लिए निर्धारित सरकारी अफसर से लेनी पड़ती है। और लाउडस्पीकर लगाकर चुनाव प्रचार करने की इजाज़त अब केवल सुबह छह बजे से लेकर रात दस बजे तक होती है। आठ.इसकी भी इजाज़त नहीं होती कि किसी पार्टी की सभा चल रही हो और दूसरी पार्टी उसे अपनी सभा बनाकर भाषण करने लग जाए। या किसी दीवार पर किसी पार्टी या कैंडिडेट का पोस्टर या झंडा लगा हो, उसे फाड़कर अपना पोस्टर या झंडा लगा दिया जाए। आचार संहिता के तहत क्या-क्या किया जा सकता है? एक.लेवल प्लेइंग फिल्ड बना रहे, इसलिए जरूरी है कि मैदान और हैलीपेड बिना किसी पक्षपात के सबको मिल सके। ऐसा न हो कि कोई एक राज्य सरकार विपक्षी दलों अपने यहां घुसने से ही मना कर दे। दो.जमकर चुनाव प्रचार किया जा सकता है लेकिन पार्टी की नीतियों, कामों और उसके पिछले कामों पर। न कि चुनावी प्रचार में यह कहा जाए कि हमने पाकिस्तान में घुसकर चार सौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। तीन.चुनाव प्रचार के दौरान ऐसा न हो कि किसी का जीना ही हराम कर दिया जाए। यानी ऐसा न हो कि किसी सोसाइटी में बिना किसी अथॉरिटी के इजाजत के लाउडस्पीकर लगाकर बोलना शुरू कर दिया जाए। इसलिए लोकल पुलिस के इजाजत के बिना न भाषण देने की जगह तय की जा सकती है और न ही किसी जगह पर लाउडस्पीकर लगाकर भाषण दिया जा सकता है। चार.कैम्पेन पीरियड के खत्म होने पर वोटर, कैंडिडेट और चुनाव एजेंट के अलावा अन्य बाहरी लोगों को वह चुनावी क्षेत्र छोड़ना होता है। यानी अगर आप किसी संसदीय या विधानसभा क्षेत्र के वोटर या प्रत्याशी या उसके एजेंट नहीं है तो आपत्ति होने पर आप पर कार्रवाई भी की जा सकती है। विज्ञापनों या एडवर्टिजमेंट या इश्तिहारों के बारें में मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट क्या कहता है? यहीं पर भयंकर पैसा बहाया जाता है। सरकारी विज्ञापन इस मकसद से जारी किये जाने चाहिए कि जनता को सरकार की पॉलिसी,प्रोग्राम और कामों का पता चले। और उसे यह बात समझ में आये कि वह सरकारी पहलों का फायदा कैसे उठाएगी। लेकिन होता बिल्कुल उल्टा है। जनता का पैसा यानी सरकारी पैसे पर सत्ता सँभालने वाली पार्टी अपनी जमकर मार्केटिंग करती है। कभी-कभार तो अख़बार के आधे से अधिक पन्ने सरकार का भोंपू बनने में बर्बाद किये जाते हैं। दीवारों पर कैंडिटेट के फोटो के साथ लगे होर्डिंग पर'ईमानदार और कर्मठ प्रत्याशी' का चलताऊ लाइन लगाकर करोड़ों खर्च किया जाता है। इलेक्शन कमीशन का इस पर सख्त दिशानिर्देश हैं कि सरकारी पैसे से अपना विज्ञापन करना कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन है। इस बार लोकसभा चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने चुनावी पोस्टरों में सेना के सियासी इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन लगता है कि सांसद रामचरण बोहरा जी को अपना काम गिनाने को कुछ मिल नहीं रहा है तो सेना के शौर्य को ही भुनाने में जुट गए हैं। जयपुर शहर के हर गली नुक्कड़ पर सेना और लड़ाकू जहाजों के साथ खुद का और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगा दी। हालांकि सवाल किए जाने पर सांसद सफाई देते रहे। रामचरण बोहरा ने कहा कि ये पोस्टर उन्होंने चुनाव के लिए नहीं लगाया है। चुनाव आयोग का निर्देश है तो हटा लेंगे। क्या सोशल मीडिया आचार संहिता में शामिल है? इलेक्शन कमीशन ने राजनीतिक दलों और कैंडिडेट द्वारा इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लिखे कंटेंट को भी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट में शामिल कर लिया है। कैंडिडेट को सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म यानी फेसबुक, ट्विटर, जीमेल का अकाउंट इलेक्शन कमीशन को देना होगा। साथ में सोशल मीडिया पर किये जाने वाले विज्ञापन के खर्चे जो चुनाव आयोग में जमा करना होगा। अभी हाल में चुनाव आयोग ने आदेश दिया कि सत्ताधारी दाल के लोग अपने सोशल मीडिया के पोस्ट से विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीर हटा लें। शराब की बिक्री पर आचार संहिता क्या कहती है ? भारत के चुनावों में पैसा और शारब पानी की तरह बहाया जाता है। भारत की गरीबी को मदहोश करके लूटने का यह सबसे आजमाया हुआ नुस्खा है। इलेक्शन कमीशन यह नियम जारी करता है कि चुनाव घोषणा के दिन से चुनाव खत्म होने तक जिला प्रशासन का एक्साइज डिपार्टमेंट जिले की हर शराब की दुकान निगरानी रखेगा। यह रिकॉर्ड हासिल करेगा कि किसी शराब की दुकान पर शराब की कितना स्टॉक है और दिन भर में वह कितने की बिक्री करता है। चुनाव में कम्पैन का दौर खत्म होने के बाद यानी वोटिंग के दिन से अड़तालीस घण्टे पहले जिले की सारे शराब के दुकान बंद रहेंगी। इनमें से किसी भी नियम का पालन न होना कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन है। आचार संहिता उल्लंघन होने पर क्या होता है? - नफरत भरा भाषण देना या चुनाव प्रचार करना जिससे जाति, धर्मों और समुदायों के बीच दरार पैदा हो। - पैसा और शराब बांटना ताकि वोट हासिल किया जा सके। - किसी को धमकाना ताकि वह किसी के लिए वोट दे सके। - वोटिंग के दिन से अड़तालीस घण्टे पहले तक चुनाव प्रचार किया जा सकता है। इसके बाद का चुनाव प्रचार दंड देने कैटेगरी में शामिल होता है। इन सारी बातों को अपनी दिमाग के किसी कोने में रख लीजिये। अबकी बार तो इलेक्शन कमीशन ने यहां तक कह दिया है कि आप मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट के उललंघन से जुड़े किसी मामलें पर वीडियों बनाकर भेजेंगे तो उसपर कार्रवाई होगी। हर राज्य में इन मामलों की छानबीन करने के लिए एक स्क्रीनंग कमिटी होती है। इस स्क्रीनिंग कमेटी से मामला पास होने के बाद इलेक्शन कमीशन के पहुँचता है। और इलेक्शन कमीशन इस पर अपना फैसला सुनाता है। प्रक्रिया थोड़ी सी ढीली है। लेकिन अगर मामलों की बाढ़ आए तो इलेक्शन कमीशन की मजबूरी होगी कि वह मजबूत और सॉलिड प्रक्रिया बनाए। आप केवल एक नागरिक की भूमिका निभाइये इसी से लोकतंत्र मजबूत होगा। इसी के लिए चुनाव आयोग ने एक समाधान पोर्टल बनाया है, जिसपर आप अपनी शिकायतें, सूचना और सलाह भेज सकते हैं। इसके अलावा cVIGIL app पर आप चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होने पर भी वीडियो या तस्वीर भेज सकते हैं। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर एक हज़ार नौ सौ पचास जारी किया गया है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
नई दिल्लीः भारतीय खाने में लौंग की खास जगह है। खाने में स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ इसमें औषधीय गुण मौजूद है। इसका उपयोग तेल व एंटीसेप्टिक के रुप में किया जाता है। लौंग सर्दी-जुखाम वाली आम बीमारियों के साथ गंभीर बीमारियों को भी सही कर देती है। जानिए इस छोटी आकार की लौंग किन रोगों से निजात दिला सकती है। लौंग में होने वाला एक खास तरह का स्वाद इसमें होने वाला तत्व युजेनॉल की वजह से होता है। जिसके कारण इसमें खास तरह की गंध होती है। हालांकि लौंग हर मौसम में हर उम्र के व्यक्तियों के लिए लाभदायक है पर सर्दी के मौसम में इसकी खास उपयोगिता है।
नई दिल्लीः भारतीय खाने में लौंग की खास जगह है। खाने में स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ इसमें औषधीय गुण मौजूद है। इसका उपयोग तेल व एंटीसेप्टिक के रुप में किया जाता है। लौंग सर्दी-जुखाम वाली आम बीमारियों के साथ गंभीर बीमारियों को भी सही कर देती है। जानिए इस छोटी आकार की लौंग किन रोगों से निजात दिला सकती है। लौंग में होने वाला एक खास तरह का स्वाद इसमें होने वाला तत्व युजेनॉल की वजह से होता है। जिसके कारण इसमें खास तरह की गंध होती है। हालांकि लौंग हर मौसम में हर उम्र के व्यक्तियों के लिए लाभदायक है पर सर्दी के मौसम में इसकी खास उपयोगिता है।
भारत और साउथ अफ्रीका (India vs South Africa) के बीच बॉक्सिंग डे टेस्ट के तीसरे दिन का अपने तय समय पर शुरू हो गया। स्पोर्ट्स डेस्कः भारत और साउथ अफ्रीका (India vs South Africa) के बीच बॉक्सिंग डे टेस्ट के तीसरे दिन का अपने तय समय पर शुरू हो गया। इससे पूर्व मैच के दूसरे दिन लगातार हुई बारिश के कारण एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी थी। इसके बाद अंपायर्स ने चर्चा कर दूसरे दिन का खेल रद्द कर दिया था। तीसरे दिन आसमान साफ है और धूप भी खिली हुई है। दूसरे दिन के ओवरों के नुकसान के कारण बाकी बचे दिनों के लिए 98 ओवर निर्धारित किए गए हैं। तीसरे दिन के खेल की शुरुआत भारत के लिए कुछ खास नहीं रही। भारतीय ओपनर केएल राहुल दिन के चौथे ओवर की अंतिम गेंद पर कगिसो रबाडा के शिकार बन गए। राहुल अपने पहले दिन के स्कोर में केवल एक रन जोड़ सके और 123 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने इस पारी में 260 गेंदों का सामना करते हुए इस पारी में 16 चौके और 1 छक्का जमाया। अजिंक्या रहाणे (48 रन) भी अपने खाते में केवल 8 रन जोड़कर चलते बने। राहुल के आउट होने के बाद भारत का स्कोर 5 विकेट पर 291 रन हो गया। मैच के पहले दिन का खेल खत्म होने पर भारतीय टीम ने 90 ओवरों में तीन विकेट खोकर 272 रन बनाए थे। ओपनर केएल राहुल 122 रन बनाकर नाबाद थे। वहीं अजिंक्य रहाणे 40 रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। पहला दिन पूरी तरह से भारतीय बल्लेबाजों के नाम रहा था। साउथ अफ्रीका की ओर से लुंगी एनगिडी ने 17 ओवरों में 45 रन देकर तीनों महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए थे। भारतीय ओपनर केएल राहुल का यह शतक कई लिहाज से खास रहा। उनके द्वारा अब तक जमाए गए 7 शतकों में से 6 विदेश सरजमीं पर बने हैं। साउथ अफ्रीका का खिलाफ यह उनका पहला शतक है। साउथ अफ्रीका में शतक जमाने वाले वे केवल दूसरे भारतीय सलामी बल्लेबाज हैं। उनसे पहले वसीम जाफर ने बतौर ओपनर साउथ अफ्रीका में शतक जमाया था। इस साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ये उनका तीसरा शतक है। सेना देशों में केएल राहल का ये चौथा शतक है। सेना (SENA) देशों से मतलब है साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया। कप्तान विराट कोहली एक बार फिर अच्छी शुरुआत के बाद अपनी पारी को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। वे 94 गेंदों में 35 रन बनाकर लुंगी एनगिडी का शिकार बने। इस पारी में उन्होंने 37. 23 की औसत से बल्लेबाजी की। इस पारी में उन्होंने 4 चौके जमाए। विराट इस पारी में अच्छी लय में नजर आ रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यशाली रहे कि उसे बड़ी पारी में नहीं बदल सके। विराट 59 पारियों से शतक नहीं लगा सके हैं। यह भी पढ़ेंः
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच बॉक्सिंग डे टेस्ट के तीसरे दिन का अपने तय समय पर शुरू हो गया। स्पोर्ट्स डेस्कः भारत और साउथ अफ्रीका के बीच बॉक्सिंग डे टेस्ट के तीसरे दिन का अपने तय समय पर शुरू हो गया। इससे पूर्व मैच के दूसरे दिन लगातार हुई बारिश के कारण एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी थी। इसके बाद अंपायर्स ने चर्चा कर दूसरे दिन का खेल रद्द कर दिया था। तीसरे दिन आसमान साफ है और धूप भी खिली हुई है। दूसरे दिन के ओवरों के नुकसान के कारण बाकी बचे दिनों के लिए अट्ठानवे ओवर निर्धारित किए गए हैं। तीसरे दिन के खेल की शुरुआत भारत के लिए कुछ खास नहीं रही। भारतीय ओपनर केएल राहुल दिन के चौथे ओवर की अंतिम गेंद पर कगिसो रबाडा के शिकार बन गए। राहुल अपने पहले दिन के स्कोर में केवल एक रन जोड़ सके और एक सौ तेईस रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने इस पारी में दो सौ साठ गेंदों का सामना करते हुए इस पारी में सोलह चौके और एक छक्का जमाया। अजिंक्या रहाणे भी अपने खाते में केवल आठ रन जोड़कर चलते बने। राहुल के आउट होने के बाद भारत का स्कोर पाँच विकेट पर दो सौ इक्यानवे रन हो गया। मैच के पहले दिन का खेल खत्म होने पर भारतीय टीम ने नब्बे ओवरों में तीन विकेट खोकर दो सौ बहत्तर रन बनाए थे। ओपनर केएल राहुल एक सौ बाईस रन बनाकर नाबाद थे। वहीं अजिंक्य रहाणे चालीस रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। पहला दिन पूरी तरह से भारतीय बल्लेबाजों के नाम रहा था। साउथ अफ्रीका की ओर से लुंगी एनगिडी ने सत्रह ओवरों में पैंतालीस रन देकर तीनों महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए थे। भारतीय ओपनर केएल राहुल का यह शतक कई लिहाज से खास रहा। उनके द्वारा अब तक जमाए गए सात शतकों में से छः विदेश सरजमीं पर बने हैं। साउथ अफ्रीका का खिलाफ यह उनका पहला शतक है। साउथ अफ्रीका में शतक जमाने वाले वे केवल दूसरे भारतीय सलामी बल्लेबाज हैं। उनसे पहले वसीम जाफर ने बतौर ओपनर साउथ अफ्रीका में शतक जमाया था। इस साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ये उनका तीसरा शतक है। सेना देशों में केएल राहल का ये चौथा शतक है। सेना देशों से मतलब है साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया। कप्तान विराट कोहली एक बार फिर अच्छी शुरुआत के बाद अपनी पारी को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। वे चौरानवे गेंदों में पैंतीस रन बनाकर लुंगी एनगिडी का शिकार बने। इस पारी में उन्होंने सैंतीस. तेईस की औसत से बल्लेबाजी की। इस पारी में उन्होंने चार चौके जमाए। विराट इस पारी में अच्छी लय में नजर आ रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यशाली रहे कि उसे बड़ी पारी में नहीं बदल सके। विराट उनसठ पारियों से शतक नहीं लगा सके हैं। यह भी पढ़ेंः
पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पाकिस्तान से एक तीतर लाए थे, जो उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को तोहफे में दिया था। पक्षी प्रेमियों ने सिद्धू की इस हरकत पर नाराजगी जताई है और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी है। जानकारी के मुताबिक, सिद्ध के पाकिस्तान के दौरे से सीएम अमरिंदर सिंह नाराज थे। ऐसे में उन्होंने पाकिस्तान से लौटने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें तोहफे में पाकिस्तानी तीतर दिया। इस मामले में लुधियाना के एक पक्षी प्रेमी ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो में सिद्धू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। संरक्षित पक्षी को सीमा लाने के लिए क्लियरेंस कैसे मिला? बताया जा रहा है कि करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास के दौरान सिद्ध को यह काला तीतर पाकिस्तान के एक पत्रकार ने तोहफे में दिया था। हालांकि, सिद्धू का यह दौरा काफी विवादों में रहा। वे सीएम अमरिंदर के रजामंदी न होने के बावजूद पाकिस्तान गए थे। साथ ही, हैदराबाद में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धू ने कहा था कि मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं। हालांकि, पार्टी के आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सिद्धू ने अपना बयान बदल लिया था।
पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पाकिस्तान से एक तीतर लाए थे, जो उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को तोहफे में दिया था। पक्षी प्रेमियों ने सिद्धू की इस हरकत पर नाराजगी जताई है और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी है। जानकारी के मुताबिक, सिद्ध के पाकिस्तान के दौरे से सीएम अमरिंदर सिंह नाराज थे। ऐसे में उन्होंने पाकिस्तान से लौटने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें तोहफे में पाकिस्तानी तीतर दिया। इस मामले में लुधियाना के एक पक्षी प्रेमी ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो में सिद्धू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। संरक्षित पक्षी को सीमा लाने के लिए क्लियरेंस कैसे मिला? बताया जा रहा है कि करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास के दौरान सिद्ध को यह काला तीतर पाकिस्तान के एक पत्रकार ने तोहफे में दिया था। हालांकि, सिद्धू का यह दौरा काफी विवादों में रहा। वे सीएम अमरिंदर के रजामंदी न होने के बावजूद पाकिस्तान गए थे। साथ ही, हैदराबाद में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धू ने कहा था कि मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं। हालांकि, पार्टी के आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सिद्धू ने अपना बयान बदल लिया था।
सिकरारा जौनपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के सिकरारा बाजार में किराए के मकान में रह रहे एक अध्यापक के घर में घुसकर चोरों ने 20 हजार नगदी सहित तीन मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। पूछने पर अध्यापक राजीव तिवारी ने बताया कि मेरा घर ग्राम सभा भीलमपुर में है मैं सिकररा बाजार के पास किराए का रूम लेकर परिवार सहित रहता हूं और चौराहे के पास बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का कार्य करता हूं। गुरूवार की रात जब सुबह सो कर उठा तो देखा मेरा मोबाइल मेरे भाई का मोबाइल मेरे पत्नी का मोबाइल सब गायब था। जब जेबा देखा तो उसमें से बीस हजार रूपया भी गायब था जिसकी लिखित सूचना थाने पर दे दी गई है। बताते चलें कि सिकरारा क्षेत्र में दिन प्रतिदिन चोरियों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन सिकरारा पुलिस एक भी चोरी का पर्दाफाश नहीं कर पा रही है जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
सिकरारा जौनपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के सिकरारा बाजार में किराए के मकान में रह रहे एक अध्यापक के घर में घुसकर चोरों ने बीस हजार नगदी सहित तीन मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। पूछने पर अध्यापक राजीव तिवारी ने बताया कि मेरा घर ग्राम सभा भीलमपुर में है मैं सिकररा बाजार के पास किराए का रूम लेकर परिवार सहित रहता हूं और चौराहे के पास बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का कार्य करता हूं। गुरूवार की रात जब सुबह सो कर उठा तो देखा मेरा मोबाइल मेरे भाई का मोबाइल मेरे पत्नी का मोबाइल सब गायब था। जब जेबा देखा तो उसमें से बीस हजार रूपया भी गायब था जिसकी लिखित सूचना थाने पर दे दी गई है। बताते चलें कि सिकरारा क्षेत्र में दिन प्रतिदिन चोरियों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन सिकरारा पुलिस एक भी चोरी का पर्दाफाश नहीं कर पा रही है जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
हमीरपुर - राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के प्रबंधन एवं मानविकी विभाग (डीओएमएच) के तत्त्वावधान में तीन दिन के केस-लेखन का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 41 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसमें संस्थान के छात्र, शिक्षकगण, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, पीजी महाविद्यालय आईआईटी रुड़की के शिक्षकगण और इंडस्ट्री के गणमान्य लोग उपस्थित हुए। कार्यशाला का शुभारंभ डा. संतोष रागनेकर, विशाल बत्रा (आईसीआईसीआई बैंक) और संस्थान निदेशक प्रो. विनोद कपूर ने किया। विशाल बत्रा ने आईसीआईसीआई बैंक की कार्यशैली और उसकी सफलता की कहानी प्रतिभागियों से साझा की। उन्होंने ब्रांडिंग, लीडरशिप और टीम बिल्डिंग जैसे प्रबंधन के कांसेप्ट पर प्रकाश डाला। संतोष रागनेकर (भूतपूर्व विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रबंधन विभाग आईआईटी रुड़की) ने केस-लेखन की क्रिया और विधि पर प्रतिभागियों से ज्ञान साझा किया। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए एक विचार-विमर्श सेशन भी रखा और उनका मार्गदर्शन किया। छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान और अनुभव देने के लिए एसीसी लिमिटेड बरमाणा में इंडस्ट्रियल विजिट की व्यवस्था भी की गई थी। छात्रों को वहां चल रहे प्रबंधन कार्यों को देखना और समझना था और उस पर केस-लेखन करना था। इस कार्यशाला के को-आर्डिनेटर प्रो. पीसी रीहाल, विभागाध्यक्ष डा. योगेश गुप्ता और लेक्चरर डा. विकास ठाकुर ने भी अपना ज्ञान और अनुभव साझा किया। प्रबंधन में केस-लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के इस कदम की सभी प्रतिभागियों ने खूब सराहना की। कार्यशाला का समापन प्रो. ललित अवस्थी निदेशक भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जालंधर के सहयोग से हुआ।
हमीरपुर - राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के प्रबंधन एवं मानविकी विभाग के तत्त्वावधान में तीन दिन के केस-लेखन का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में इकतालीस प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इसमें संस्थान के छात्र, शिक्षकगण, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, पीजी महाविद्यालय आईआईटी रुड़की के शिक्षकगण और इंडस्ट्री के गणमान्य लोग उपस्थित हुए। कार्यशाला का शुभारंभ डा. संतोष रागनेकर, विशाल बत्रा और संस्थान निदेशक प्रो. विनोद कपूर ने किया। विशाल बत्रा ने आईसीआईसीआई बैंक की कार्यशैली और उसकी सफलता की कहानी प्रतिभागियों से साझा की। उन्होंने ब्रांडिंग, लीडरशिप और टीम बिल्डिंग जैसे प्रबंधन के कांसेप्ट पर प्रकाश डाला। संतोष रागनेकर ने केस-लेखन की क्रिया और विधि पर प्रतिभागियों से ज्ञान साझा किया। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए एक विचार-विमर्श सेशन भी रखा और उनका मार्गदर्शन किया। छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान और अनुभव देने के लिए एसीसी लिमिटेड बरमाणा में इंडस्ट्रियल विजिट की व्यवस्था भी की गई थी। छात्रों को वहां चल रहे प्रबंधन कार्यों को देखना और समझना था और उस पर केस-लेखन करना था। इस कार्यशाला के को-आर्डिनेटर प्रो. पीसी रीहाल, विभागाध्यक्ष डा. योगेश गुप्ता और लेक्चरर डा. विकास ठाकुर ने भी अपना ज्ञान और अनुभव साझा किया। प्रबंधन में केस-लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के इस कदम की सभी प्रतिभागियों ने खूब सराहना की। कार्यशाला का समापन प्रो. ललित अवस्थी निदेशक भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जालंधर के सहयोग से हुआ।
अिसतरह के विचारोंका तूफान सके दिमाग ता रहा और वह अपने घरकी ओर बढ़ती गई । जीवनको खत्म कर देनेका खयाल क-क क़दमपर दृढ़ होने लगा । आखिर ने निश्चय कर लिया । रास्तेमे पास ही असे कुआँ दिखायी दिया। स कूदकर अपने दु.खका अन्त करनेके अिरादेसे बच्चोको क र छोड़कर वह घर चली, लेकिन कदम कूद न सकी । कुकी जगतपर जाते ही खयाल आया, "मेरा तो छुटकारा होगा, मगर मेरे अिन मासूम बच्चोंका क्या होगा ? हे कौन संभालेगा ? अन्हे कौन प्यार करेंगा ? तो ॠन्हें भी अपने साथ ही क्यो न ले चलूँ ? जो मेरा होगा, सो अिनका भी होगा।' यह विचार आते ही कुप्रेकी जगतसे वह लौट आयी । वच्चे पास ही थे । के पास गनी, नुनको गोदमें लिया, प्यार किया और अपनी ओढ़नीसे दोनों बच्चोंको अपनी पीठपर बाँधकर वह कुप्रेमे कूद पड़ी। असने अपनी दृष्टि से निर्वाणका रास्ता ढूढा; लेकिन श्रीश्वरकी अिच्छासे वह जीवित रही । कुमें कूदते ही की ओढ़नी छूट गयी और दोनों बच्चे डूब गये । डाही बहुत दुखी हुश्री और घड़ा गयी । ने चिल्लाना गुरू किया, "कोश्री मेरे बच्चोको निकालो ! " असकी आँखोके सामने ही असके बच्चे मर जायँ, यह वह किस तरह देख सकती थी ? चिल्लाहट सुनकर पासके खेतसे लोग दौड़कर आये। किसी तरह डाहीको जीवित, लेकिन मूच्छित अवस्थामे वाहर निकाला । लेकिन बच्चे मरे हुने निकले । अिस करुण घटनाके वाद क़ानूनकी खानापूरी हुश्री और वह जेलमे आयी । मुझे यकीन था कि कोमी भी न्यायाधीश बच्चोकी करुण भौतको जानवूझकर किया हुआ खून नही मानेगा और आत्महत्याकी कोशिगके लिने भी डाहीकी तरफ बहुत कठोर दृष्टिसे नही देखेगा । आम तौरपर लोगोमे का विचार प्रचलित है कि जाने या अनजाने अपने हाथोसे या कार्यसे किसीकी मौत हो जाय तो वह खूनका ही मामला गिना जाता है और खूनका वदला फॉसी है । मैने डाहीको सलाह दी कि अिस मामलेमे तेरे बचावके लिये खास कुछ भी करने की जरूरत नही है । तेरे पतिको भी पैसे वरवाद करक वकील करनेकी दरकार नहीं है । तुझे तो अदालनके सामने अपनी सच्ची कहानी गुरूसे अन्ततक कह देनी चाहिये और अपना दु ख अदालतके सामने प्रकट करना चाहिये । देखना सिर्फ यही है कि तेरा पति अपनी माँके प्रभावमे आकर या लोकपवादके झूठे डरके कारण अपनी मॉके वारेमे सच्ची बात छिपाये नही । सव वात साफ-साफ अदालतमे कह दे । यह सलाह सुनकर जेलकी वहनोंने मुझसे पूछा- "क्यों दादासाहव, यह सव हाल वह कह दे तो दो बच्चोकी मौतके होते हु भी से फाँसीकी सजा नही होगी ? और सजा कितनी होगी ?" मैने कहा, "फॉसी क्यो होगी ? अपने बच्चोकी हत्या करनेका किसी माँका कभी अिरादा हो सकता है ? डाहीको कड़ी नजा देना तो जलेपर नमक छिड़कने जैसा होगा । यह कौन कह सकता है कि सजा कितनी होगी ? वह तो न्यायाधीगपर निर्भर है। लेकिन मेरा खयाल है कि कम से कम छह महीनेकी और ज्यादा से ज्यादा अंक सालकी । "
अिसतरह के विचारोंका तूफान सके दिमाग ता रहा और वह अपने घरकी ओर बढ़ती गई । जीवनको खत्म कर देनेका खयाल क-क क़दमपर दृढ़ होने लगा । आखिर ने निश्चय कर लिया । रास्तेमे पास ही असे कुआँ दिखायी दिया। स कूदकर अपने दु.खका अन्त करनेके अिरादेसे बच्चोको क र छोड़कर वह घर चली, लेकिन कदम कूद न सकी । कुकी जगतपर जाते ही खयाल आया, "मेरा तो छुटकारा होगा, मगर मेरे अिन मासूम बच्चोंका क्या होगा ? हे कौन संभालेगा ? अन्हे कौन प्यार करेंगा ? तो ॠन्हें भी अपने साथ ही क्यो न ले चलूँ ? जो मेरा होगा, सो अिनका भी होगा।' यह विचार आते ही कुप्रेकी जगतसे वह लौट आयी । वच्चे पास ही थे । के पास गनी, नुनको गोदमें लिया, प्यार किया और अपनी ओढ़नीसे दोनों बच्चोंको अपनी पीठपर बाँधकर वह कुप्रेमे कूद पड़ी। असने अपनी दृष्टि से निर्वाणका रास्ता ढूढा; लेकिन श्रीश्वरकी अिच्छासे वह जीवित रही । कुमें कूदते ही की ओढ़नी छूट गयी और दोनों बच्चे डूब गये । डाही बहुत दुखी हुश्री और घड़ा गयी । ने चिल्लाना गुरू किया, "कोश्री मेरे बच्चोको निकालो ! " असकी आँखोके सामने ही असके बच्चे मर जायँ, यह वह किस तरह देख सकती थी ? चिल्लाहट सुनकर पासके खेतसे लोग दौड़कर आये। किसी तरह डाहीको जीवित, लेकिन मूच्छित अवस्थामे वाहर निकाला । लेकिन बच्चे मरे हुने निकले । अिस करुण घटनाके वाद क़ानूनकी खानापूरी हुश्री और वह जेलमे आयी । मुझे यकीन था कि कोमी भी न्यायाधीश बच्चोकी करुण भौतको जानवूझकर किया हुआ खून नही मानेगा और आत्महत्याकी कोशिगके लिने भी डाहीकी तरफ बहुत कठोर दृष्टिसे नही देखेगा । आम तौरपर लोगोमे का विचार प्रचलित है कि जाने या अनजाने अपने हाथोसे या कार्यसे किसीकी मौत हो जाय तो वह खूनका ही मामला गिना जाता है और खूनका वदला फॉसी है । मैने डाहीको सलाह दी कि अिस मामलेमे तेरे बचावके लिये खास कुछ भी करने की जरूरत नही है । तेरे पतिको भी पैसे वरवाद करक वकील करनेकी दरकार नहीं है । तुझे तो अदालनके सामने अपनी सच्ची कहानी गुरूसे अन्ततक कह देनी चाहिये और अपना दु ख अदालतके सामने प्रकट करना चाहिये । देखना सिर्फ यही है कि तेरा पति अपनी माँके प्रभावमे आकर या लोकपवादके झूठे डरके कारण अपनी मॉके वारेमे सच्ची बात छिपाये नही । सव वात साफ-साफ अदालतमे कह दे । यह सलाह सुनकर जेलकी वहनोंने मुझसे पूछा- "क्यों दादासाहव, यह सव हाल वह कह दे तो दो बच्चोकी मौतके होते हु भी से फाँसीकी सजा नही होगी ? और सजा कितनी होगी ?" मैने कहा, "फॉसी क्यो होगी ? अपने बच्चोकी हत्या करनेका किसी माँका कभी अिरादा हो सकता है ? डाहीको कड़ी नजा देना तो जलेपर नमक छिड़कने जैसा होगा । यह कौन कह सकता है कि सजा कितनी होगी ? वह तो न्यायाधीगपर निर्भर है। लेकिन मेरा खयाल है कि कम से कम छह महीनेकी और ज्यादा से ज्यादा अंक सालकी । "
अधिकांश अन्य सब्जियों की तरह, एक लंबा समयस्ट्रिंग बीन उचित पाक ध्यान के बिना था। अक्सर यह उद्यान और पार्कों में दृश्यों के रूप में उपयोग किया जाता था हमें श्रेय देना चाहिएः सब्जी के फूल वास्तव में सुंदर हैं हालांकि बहुत बाद में इसे खाना पकाने में इस्तेमाल करना शुरू किया गया था। आज तक, यह साबित हुआ है कि यह सब्जी कितनी उपयोगी है उपयोग के समय के दौरान, व्यंजनों का एक बहुत अधिक जमा हुआ हैः यह सेम के साथ सर्दियों के लिए कच्चे, तला हुआ, बादाम, पकाया जाता है। इस सब्जी में बहुत बड़ी मात्रा हैउपयोगी तत्वों और पदार्थ उनमें से कुछ व्यक्ति बस के बदले बदले जा सकते हैं सल्फर, मैग्नीशियम, क्रोमियम, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की सामग्री भी उन लोगों की मेज पर उत्पाद अपरिहार्य बनाता है जो अपने स्वास्थ्य में सुधार करना चाहते हैं और कई बीमारियों के उपचार का समर्थन करते हैं। इसलिए, गृहिणियों सर्दियों के लिए हरी बीन्स का स्थान बनाने की कोशिश करते हैं, ताकि पूरे वर्ष अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। तो, फली में सेम का क्या उपयोग है? यदि आपके शरीर में अधिक लवण हैं, तो स्ट्रिंग बीन्स का सेवन न करें। और इससे संबंधित एक और महत्वपूर्ण नियमउत्पाद खाना बनानाः बीन्स को लंबे समय तक गर्मी का इलाज करने की आवश्यकता होती है। सभी जहरीला फज़ीन की सामग्री के कारण, जो लंबे उपचार के बाद ही नष्ट हो जाता है। स्ट्रिंग सेम का चयन करना, आपको इसकी लोच और रंग पर ध्यान देना होगा। फली को प्राथमिकता दें, जहां मटर बहुत तंग हैं। खोल ढीले या झुर्रीदार नहीं होना चाहिए। गुणवत्ता सेम का रंग उज्ज्वल हरा है जमे हुए उत्पाद चुनने पर यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैः बहुत ही गहरा रंग उत्पाद के दोबारा ठंड और कम गुणवत्ता के बारे में बताता है। हरी बीन्स के नाजुक स्वाद का आनंद लेने के लिएऔर अन्य व्यंजनों को खाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, आप सर्दी के लिए हरी बीन्स के खाली स्थान बना सकते हैं, जहां अन्य सब्जियों को बाहर रखा जाएगा। सबसे लोकप्रिय संरक्षण और संगमरमर हैं। सर्दी के लिए नमकीन बनाना सेम के लिए नुस्खा समान हैकैनिंग के साथ कुछ मसालेदार जड़ी बूटियों के उपयोग में अंतरः बे पत्तियों, लौंग, मिर्च और दालचीनी। बीन्स 5 मिनट के लिए उबला हुआ है, फिर हम इसे डिब्बे में डालते हैं, यह काफी तंग है। पहले से, तल पर मसाले और पसंदीदा मसालों डाल दिया नारियल के लिए नुस्खा इस प्रकार हैः एक लीटर पानी में 50 ग्राम नमक और 15 मिलीलीटर का 80% सिरका लिया जाता है। सामग्री मिश्रित और एक फोड़ा करने के लिए लाया जाता है। इस समाधान के साथ, डिब्बे में रखे गए बीन्स डाल दिए जाते हैं। उबलते पानी में 5 मिनट के लिए बैंकों को बंध्यापन के लिए रखा जाना चाहिए। यह व्यंजन दो को गठबंधन करने का एक शानदार अवसर हैइतना उपयोगी सब्जी अधिक संतृप्त और सुगंधित करने के लिए - उपयोगी टमाटर और प्याज भी। यदि विशेष रूप से सब्जी काटा जाता है तो डिश विशेष रूप से खूबसूरत होगा हालांकि स्वाद नहीं बदलेगा, यदि सब्जियां पास्ता की तरह दिखेंगी (इसके लिए एक हेलिकॉप्टर या ब्लेंडर का उपयोग करें)। तो, चलो सर्दी "सेम के साथ बैंगन" के लिए एक पोषण बिलेट के लिए नुस्खा शुरू करें। सेम के हर 200 ग्राम के लिए गाजर और बैंगन में से एक टुकड़ा, दो प्याज और टमाटर तीन लेने के लिए आवश्यक है। प्रत्येक जार के निचले भाग में बे पत्ती डाल दी जाती है और इसे गर्म मसालेदार सब्जियों और स्पिन के साथ भरें। यदि आप मैश किए हुए आलू की बहुत सी स्थिरता चाहते हैं तो इसे ब्लेंडर में डालने से पहले पीस लें। सेम के साथ सर्दियों के लिए इस फसल का आकर्षण है,कि यह एक साइड डिश के रूप में या एक स्वतंत्र डिश के रूप में गरम और ठंडा का सेवन किया जा सकता है कई लोग इन सब्जियों को मांस के साथ मिश्रण करते हैं, और एक स्वादिष्ट, असामान्य स्टू मिलता है। सर्दी के लिए स्ट्रिंग बीन से तैयार करने के लिए हम अभी भी तैयार करने के तरीके का विश्लेषण करेंगे। टमाटर की चटनी में उत्पाद के व्यंजनों को एक विशेष स्वाद और लचीलापन से अलग किया जाता है। सेम के अतिरिक्त तैयार करने के लिए, आपको इसकी आवश्यकता होगीटमाटर - 700 ग्राम, प्याज और गाजर - 200 ग्राम, अजमोद रूट, नमक, चीनी, छह प्रतिशत सिरका, लहसुन, जड़ी बूटी, मसाले (लॉरेल, काली मिर्च, मटर और सुगंधित)। टमाटर की चटनी में सब्जियों के साथ सेम से सर्दियों के लिए फसल की तैयारी करने से पहले, यह आवश्यक है कि 5 मिनट के लिए उबाल लें और फली फली हो, इस समय वनस्पति तेल में अन्य सब्जियों (जड़, प्याज, गाजर) में भूनें। टमाटर के साथ, हम त्वचा को हटा देते हैं और इसे आसानी से पीसते हैं (एक भट्टी, ब्लेंडर या हेलिकॉप्टर का उपयोग करके) हम एक सॉस पैन में टमाटर का पेस्ट डालते हैं, 15 मिनट के लिए उबाल लें, जड़ें, गाजर, सेम और अन्य सामग्री जोड़ें। समय के बाद, हम बार्बे के जारों पर सलाद फैल गए। साथ शराब से सर्दियों के लिए कटाई का एक अन्य संस्करणसब्जियां - लीको इस मामले में, बल्गेरियाई पकवान को एक नए तरीके से थोड़े से निष्पादित किया जाएगा, सामान्य रूप से नहीं। खाना पकाने के लिए, आपको जरूरी हैः दो किलोग्राम स्ट्रिंग सेम प्रति किलोग्राम गाजर, मिर्च मिर्च और प्याज। आपको नमक, चीनी, सिरका (6%) और टमाटर सॉस की आवश्यकता है (आप इसे पिछले नुस्खा की तरह तैयार कर सकते हैं)। तो, सेम तैयार हैं, छोटे में कटौतीस्लाइस, 5 मिनट के लिए उबाल लें। इस समय, अन्य सब्जियों को काट लें जैसे-जैसे बीन्स संसाधित होते हैं, हम सभी सामग्री को एक साथ और स्टू (सिरका को उबलने के बाद ही डाला जाना चाहिए) को मिलाते हैं। एक और दो या तीन मिनट के लिए उबालने के बाद, बाँझ के डिब्बे और रोल पर फैल गया। सर्दी के लिए असाधारण कटाई का एक और विकल्प -सेम और गोभी के साथ सलाद समुद्री खाने वाली सब्जियां निम्नानुसार होनी चाहिएः 5 मिनट के लिए गोभी और बीन फली से अलग-अलग फफूंदी। इसके बाद, कसकर जार में फैलता है, हरी मटर की फली जोड़ें। मसालों को फैलानाः प्रत्येक जार में कार्नेशन, साग और कड़वा काली मिर्च का फुलाना, नमक जोड़ें, थोड़ा सा साइट्रिक एसिड जोड़ें। आप सर्दियों के लिए सेम से मल्टीकोमोनेंट स्टॉक के वेरिएंट का उपयोग कर सकते हैं - व्यंजनों के विभिन्न हैं एक उदाहरण के रूप में, हम सब्जी स्टू लाएंगे। खाना पकाने के लिए आपको एक किलोग्राम की आवश्यकता हैस्ट्रिंग बीन्स, प्याज, बेल मिर्च, ज़िचरी रंगीन और सफेद गोभी के एक कांस्य के लिए, सागः अजमोद, डिल, अजवाइन टमाटर पेस्ट, सिरका, वनस्पति तेल, जमीन का काली मिर्च और नमक भी आवश्यक हैं। सब्जियों की तैयारीः blanshiruem सेम और फूलगोभी पुष्पक 5 मिनट, बस जला हुआ गोभी, कटा हुआ बैंगन नमक के साथ peppered और आधे घंटे के लिए छोड़ देते हैं, तो धोने, टमाटर पीस लें। बैंगन, तोरी और प्याज अलग से भून। इसके अलावा, सभी सामग्री एक तामचीनी पैन में मिलाया जाता है (काली मिर्च, सिरका, नमक और जड़ी बूटियों के बारे में भूल नहीं)।
अधिकांश अन्य सब्जियों की तरह, एक लंबा समयस्ट्रिंग बीन उचित पाक ध्यान के बिना था। अक्सर यह उद्यान और पार्कों में दृश्यों के रूप में उपयोग किया जाता था हमें श्रेय देना चाहिएः सब्जी के फूल वास्तव में सुंदर हैं हालांकि बहुत बाद में इसे खाना पकाने में इस्तेमाल करना शुरू किया गया था। आज तक, यह साबित हुआ है कि यह सब्जी कितनी उपयोगी है उपयोग के समय के दौरान, व्यंजनों का एक बहुत अधिक जमा हुआ हैः यह सेम के साथ सर्दियों के लिए कच्चे, तला हुआ, बादाम, पकाया जाता है। इस सब्जी में बहुत बड़ी मात्रा हैउपयोगी तत्वों और पदार्थ उनमें से कुछ व्यक्ति बस के बदले बदले जा सकते हैं सल्फर, मैग्नीशियम, क्रोमियम, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की सामग्री भी उन लोगों की मेज पर उत्पाद अपरिहार्य बनाता है जो अपने स्वास्थ्य में सुधार करना चाहते हैं और कई बीमारियों के उपचार का समर्थन करते हैं। इसलिए, गृहिणियों सर्दियों के लिए हरी बीन्स का स्थान बनाने की कोशिश करते हैं, ताकि पूरे वर्ष अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। तो, फली में सेम का क्या उपयोग है? यदि आपके शरीर में अधिक लवण हैं, तो स्ट्रिंग बीन्स का सेवन न करें। और इससे संबंधित एक और महत्वपूर्ण नियमउत्पाद खाना बनानाः बीन्स को लंबे समय तक गर्मी का इलाज करने की आवश्यकता होती है। सभी जहरीला फज़ीन की सामग्री के कारण, जो लंबे उपचार के बाद ही नष्ट हो जाता है। स्ट्रिंग सेम का चयन करना, आपको इसकी लोच और रंग पर ध्यान देना होगा। फली को प्राथमिकता दें, जहां मटर बहुत तंग हैं। खोल ढीले या झुर्रीदार नहीं होना चाहिए। गुणवत्ता सेम का रंग उज्ज्वल हरा है जमे हुए उत्पाद चुनने पर यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैः बहुत ही गहरा रंग उत्पाद के दोबारा ठंड और कम गुणवत्ता के बारे में बताता है। हरी बीन्स के नाजुक स्वाद का आनंद लेने के लिएऔर अन्य व्यंजनों को खाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, आप सर्दी के लिए हरी बीन्स के खाली स्थान बना सकते हैं, जहां अन्य सब्जियों को बाहर रखा जाएगा। सबसे लोकप्रिय संरक्षण और संगमरमर हैं। सर्दी के लिए नमकीन बनाना सेम के लिए नुस्खा समान हैकैनिंग के साथ कुछ मसालेदार जड़ी बूटियों के उपयोग में अंतरः बे पत्तियों, लौंग, मिर्च और दालचीनी। बीन्स पाँच मिनट के लिए उबला हुआ है, फिर हम इसे डिब्बे में डालते हैं, यह काफी तंग है। पहले से, तल पर मसाले और पसंदीदा मसालों डाल दिया नारियल के लिए नुस्खा इस प्रकार हैः एक लीटर पानी में पचास ग्राम नमक और पंद्रह मिलीलीटर का अस्सी% सिरका लिया जाता है। सामग्री मिश्रित और एक फोड़ा करने के लिए लाया जाता है। इस समाधान के साथ, डिब्बे में रखे गए बीन्स डाल दिए जाते हैं। उबलते पानी में पाँच मिनट के लिए बैंकों को बंध्यापन के लिए रखा जाना चाहिए। यह व्यंजन दो को गठबंधन करने का एक शानदार अवसर हैइतना उपयोगी सब्जी अधिक संतृप्त और सुगंधित करने के लिए - उपयोगी टमाटर और प्याज भी। यदि विशेष रूप से सब्जी काटा जाता है तो डिश विशेष रूप से खूबसूरत होगा हालांकि स्वाद नहीं बदलेगा, यदि सब्जियां पास्ता की तरह दिखेंगी । तो, चलो सर्दी "सेम के साथ बैंगन" के लिए एक पोषण बिलेट के लिए नुस्खा शुरू करें। सेम के हर दो सौ ग्राम के लिए गाजर और बैंगन में से एक टुकड़ा, दो प्याज और टमाटर तीन लेने के लिए आवश्यक है। प्रत्येक जार के निचले भाग में बे पत्ती डाल दी जाती है और इसे गर्म मसालेदार सब्जियों और स्पिन के साथ भरें। यदि आप मैश किए हुए आलू की बहुत सी स्थिरता चाहते हैं तो इसे ब्लेंडर में डालने से पहले पीस लें। सेम के साथ सर्दियों के लिए इस फसल का आकर्षण है,कि यह एक साइड डिश के रूप में या एक स्वतंत्र डिश के रूप में गरम और ठंडा का सेवन किया जा सकता है कई लोग इन सब्जियों को मांस के साथ मिश्रण करते हैं, और एक स्वादिष्ट, असामान्य स्टू मिलता है। सर्दी के लिए स्ट्रिंग बीन से तैयार करने के लिए हम अभी भी तैयार करने के तरीके का विश्लेषण करेंगे। टमाटर की चटनी में उत्पाद के व्यंजनों को एक विशेष स्वाद और लचीलापन से अलग किया जाता है। सेम के अतिरिक्त तैयार करने के लिए, आपको इसकी आवश्यकता होगीटमाटर - सात सौ ग्राम, प्याज और गाजर - दो सौ ग्राम, अजमोद रूट, नमक, चीनी, छह प्रतिशत सिरका, लहसुन, जड़ी बूटी, मसाले । टमाटर की चटनी में सब्जियों के साथ सेम से सर्दियों के लिए फसल की तैयारी करने से पहले, यह आवश्यक है कि पाँच मिनट के लिए उबाल लें और फली फली हो, इस समय वनस्पति तेल में अन्य सब्जियों में भूनें। टमाटर के साथ, हम त्वचा को हटा देते हैं और इसे आसानी से पीसते हैं हम एक सॉस पैन में टमाटर का पेस्ट डालते हैं, पंद्रह मिनट के लिए उबाल लें, जड़ें, गाजर, सेम और अन्य सामग्री जोड़ें। समय के बाद, हम बार्बे के जारों पर सलाद फैल गए। साथ शराब से सर्दियों के लिए कटाई का एक अन्य संस्करणसब्जियां - लीको इस मामले में, बल्गेरियाई पकवान को एक नए तरीके से थोड़े से निष्पादित किया जाएगा, सामान्य रूप से नहीं। खाना पकाने के लिए, आपको जरूरी हैः दो किलोग्राम स्ट्रिंग सेम प्रति किलोग्राम गाजर, मिर्च मिर्च और प्याज। आपको नमक, चीनी, सिरका और टमाटर सॉस की आवश्यकता है । तो, सेम तैयार हैं, छोटे में कटौतीस्लाइस, पाँच मिनट के लिए उबाल लें। इस समय, अन्य सब्जियों को काट लें जैसे-जैसे बीन्स संसाधित होते हैं, हम सभी सामग्री को एक साथ और स्टू को मिलाते हैं। एक और दो या तीन मिनट के लिए उबालने के बाद, बाँझ के डिब्बे और रोल पर फैल गया। सर्दी के लिए असाधारण कटाई का एक और विकल्प -सेम और गोभी के साथ सलाद समुद्री खाने वाली सब्जियां निम्नानुसार होनी चाहिएः पाँच मिनट के लिए गोभी और बीन फली से अलग-अलग फफूंदी। इसके बाद, कसकर जार में फैलता है, हरी मटर की फली जोड़ें। मसालों को फैलानाः प्रत्येक जार में कार्नेशन, साग और कड़वा काली मिर्च का फुलाना, नमक जोड़ें, थोड़ा सा साइट्रिक एसिड जोड़ें। आप सर्दियों के लिए सेम से मल्टीकोमोनेंट स्टॉक के वेरिएंट का उपयोग कर सकते हैं - व्यंजनों के विभिन्न हैं एक उदाहरण के रूप में, हम सब्जी स्टू लाएंगे। खाना पकाने के लिए आपको एक किलोग्राम की आवश्यकता हैस्ट्रिंग बीन्स, प्याज, बेल मिर्च, ज़िचरी रंगीन और सफेद गोभी के एक कांस्य के लिए, सागः अजमोद, डिल, अजवाइन टमाटर पेस्ट, सिरका, वनस्पति तेल, जमीन का काली मिर्च और नमक भी आवश्यक हैं। सब्जियों की तैयारीः blanshiruem सेम और फूलगोभी पुष्पक पाँच मिनट, बस जला हुआ गोभी, कटा हुआ बैंगन नमक के साथ peppered और आधे घंटे के लिए छोड़ देते हैं, तो धोने, टमाटर पीस लें। बैंगन, तोरी और प्याज अलग से भून। इसके अलावा, सभी सामग्री एक तामचीनी पैन में मिलाया जाता है ।
Kidnapping girl (Photo Credit: फाइल फोटो) नई दिल्लीः मथुरा वृंदावन से दो साल की मासूम बच्ची को अगवा किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. बच्ची के अगवा होने के बाद पुलिस के हाथ पैर फूल गए हैं. सीओ ने चुप्पी साध ली है. पुलिस ने कई लोगों को उठाया भी है, लेकिन बच्ची का कहीं भी पता नहीं चल सका है. इधर, बच्ची के अगवा होने से मां सुनीता और पिता काशीराम का रो-रोकर बुरा हाल है. पुलिस ने पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है. मूलरूप से लखीमपुर खीरी निवासी काशीराम करीब 10 दिन पूर्व ही अपनी पत्नी सुनीता, 6 वर्षीय पुत्र एवं 2 वर्षीय व 4 माह की पुत्रियों को लेकर वृंदावन आया था. ये लोग परिक्रमा मार्ग स्थित सोहम आश्रम के निकट रेलवे क्रासिंग के समीप सड़क किनारे रेलवे कर्मियों के लिए बनाई गई एक कोठरी में रह रहे थे. पिता कबाड़ और प्लास्टिक एकत्रित कर परिवार को पाल रहा है. पीड़िता सुनीता ने बताया कि शुक्रवार रात को वे, उसके पति और बच्चे कोठरी के बाहर सो रहे थे. रात करीब 2 बजे पति की नींद टूटी तो बच्ची नहीं थी. पति ने पत्नी को जगाकर बच्ची के बारे में पूछा, लेकिन बच्ची को वहां न पाकर दोनों के होश उड़ गए. आसपास तलाश करने के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला. इस दौरान एक साधु ने उन्हें बताया कि रात्रि को करीब 1:30 बजे एक व्यक्ति उनकी बच्ची को रेलवे क्रॉसिंग से सौ फुटा की ओर ले जाता दिखा था. सुबह सूचना लगते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और बच्ची की तलाशी शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका. कोतवाली प्रभारी सूरज प्रकाश शर्मा के अनुसार अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर बच्ची की तलाश की जा रही है. कुछ सुराग हाथ लगे हैं. इधर, पुलिस ने कई लोगों को पूछताछ के लिए उठाकर बच्ची के बारे में जानकारी एकत्रित की है.
Kidnapping girl नई दिल्लीः मथुरा वृंदावन से दो साल की मासूम बच्ची को अगवा किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. बच्ची के अगवा होने के बाद पुलिस के हाथ पैर फूल गए हैं. सीओ ने चुप्पी साध ली है. पुलिस ने कई लोगों को उठाया भी है, लेकिन बच्ची का कहीं भी पता नहीं चल सका है. इधर, बच्ची के अगवा होने से मां सुनीता और पिता काशीराम का रो-रोकर बुरा हाल है. पुलिस ने पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है. मूलरूप से लखीमपुर खीरी निवासी काशीराम करीब दस दिन पूर्व ही अपनी पत्नी सुनीता, छः वर्षीय पुत्र एवं दो वर्षीय व चार माह की पुत्रियों को लेकर वृंदावन आया था. ये लोग परिक्रमा मार्ग स्थित सोहम आश्रम के निकट रेलवे क्रासिंग के समीप सड़क किनारे रेलवे कर्मियों के लिए बनाई गई एक कोठरी में रह रहे थे. पिता कबाड़ और प्लास्टिक एकत्रित कर परिवार को पाल रहा है. पीड़िता सुनीता ने बताया कि शुक्रवार रात को वे, उसके पति और बच्चे कोठरी के बाहर सो रहे थे. रात करीब दो बजे पति की नींद टूटी तो बच्ची नहीं थी. पति ने पत्नी को जगाकर बच्ची के बारे में पूछा, लेकिन बच्ची को वहां न पाकर दोनों के होश उड़ गए. आसपास तलाश करने के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला. इस दौरान एक साधु ने उन्हें बताया कि रात्रि को करीब एक:तीस बजे एक व्यक्ति उनकी बच्ची को रेलवे क्रॉसिंग से सौ फुटा की ओर ले जाता दिखा था. सुबह सूचना लगते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और बच्ची की तलाशी शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका. कोतवाली प्रभारी सूरज प्रकाश शर्मा के अनुसार अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर बच्ची की तलाश की जा रही है. कुछ सुराग हाथ लगे हैं. इधर, पुलिस ने कई लोगों को पूछताछ के लिए उठाकर बच्ची के बारे में जानकारी एकत्रित की है.
रांचीः RJD के प्रदेश कार्यालय (State Office) में सोमवार को झारखंड प्रभारी (Jharkhand In Charge) और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव (Jaiprakash Narayan Yadav) ने कहा कि अगले वर्ष होने वाले चुनाव में झारखंड सहित देश भर से भाजपा का सफाया हो जायेगा। देश भर में महागठबंधन की अगुवाई में BJP भगाओ, देश बचाओ के अभियान को साकार किया जायेगा। यादव सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस (Press Conference) में बोल रहे थे। जयप्रकाश ने कहा कि झारखंड में भी RJD के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की विचारधारा को स्थापित करना है। झारखंड में नयी कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। पूर्व में सदस्यता अभियान (Membership Drive) चलाया गया था, जिसमें चार लाख सदस्य बनाए गये। अब नयी कार्यकारिणी से उम्मीद है कि वे दूसरे चरण के सदस्यता अभियान को और प्रभावी तरीके से चलाएंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के उप CM तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) का कोडरमा में कार्यक्रम होना निश्चित हुआ है। पूर्व की तरह झारखंड में अपना समय देंगे और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संगठन को धारदार और मजबूत करेंगे।
रांचीः RJD के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को झारखंड प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा कि अगले वर्ष होने वाले चुनाव में झारखंड सहित देश भर से भाजपा का सफाया हो जायेगा। देश भर में महागठबंधन की अगुवाई में BJP भगाओ, देश बचाओ के अभियान को साकार किया जायेगा। यादव सोमवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। जयप्रकाश ने कहा कि झारखंड में भी RJD के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की विचारधारा को स्थापित करना है। झारखंड में नयी कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। पूर्व में सदस्यता अभियान चलाया गया था, जिसमें चार लाख सदस्य बनाए गये। अब नयी कार्यकारिणी से उम्मीद है कि वे दूसरे चरण के सदस्यता अभियान को और प्रभावी तरीके से चलाएंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के उप CM तेजस्वी यादव का कोडरमा में कार्यक्रम होना निश्चित हुआ है। पूर्व की तरह झारखंड में अपना समय देंगे और राष्ट्रीय जनता दल के संगठन को धारदार और मजबूत करेंगे।
निश्चित रूप से हर आदमी जीवन में कम से कम एक बारअल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक्स का सामना करना पड़ा। महिलाओं को अक्सर पैल्विक अंगों की जांच के लिए विशेषज्ञों का दौरा करना पड़ता है। पुरुष प्रतिनिधियों को उसी क्षेत्र के अल्ट्रासाउंड स्कैन की आवश्यकता हो सकती है। यह ध्यान देने योग्य है कि डॉक्टर दो तरीकों से एक परीक्षा आयोजित कर सकते हैंः पेट की दीवार के माध्यम से या गुदा का उपयोग करके। यह लेख दूसरी विधि पर चर्चा करेगा। आप प्रोस्टेट TRUS नामक अध्ययन के बारे में सब कुछ सीखेंगेः तैयारी, जैसा कि वे करते हैं, लागत। साथ ही, पाठक को निरीक्षण प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इस प्रक्रिया को कैसे करें नीचे वर्णित किया जाएगा। एक शुरुआत के लिए यह कहने लायक है कि यह किस तरह का हेरफेर है। प्रोस्टेट और वीर्य नलिकाओं के क्षेत्र की जांच करने वाले ट्रांसपेरेंट अल्ट्रासाउंड की मदद से। यह प्रक्रिया ग्रंथि के आकार को सटीक रूप से निर्धारित करना और उसके उपांगों का निरीक्षण करना संभव बनाती है। पैथोलॉजिकल संरचनाओं की उपस्थिति में, यह विधि आपको ज्ञात क्षेत्रों को सटीक रूप से मापने और उनकी प्रकृति का पता लगाने की अनुमति देती है। बेशक, यह सर्वेक्षण केवल पुरुषों द्वारा पारित किया जा सकता है। इस मामले में निरीक्षण के कई कारण हैं। ऐसी नियुक्तियों के लिए सबसे आम कारण निम्नलिखित हैंः - स्तंभन दोष या शीघ्र स्खलन; - अज्ञात मूल के दीर्घकालिक बांझपन; - अंडकोष और लिंग में दर्द; - खराब शुक्राणु परिणाम; - 45 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष। इसके अलावा, सर्वेक्षण एक स्वैच्छिक इच्छा के साथ आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, बहुत कम ही पुरुष प्रतिनिधि इस तरह के निदान से गुजरने का फैसला करते हैं। इस सर्वेक्षण की दो विधियाँ हैं। आप एक सरकारी एजेंसी से एक रेफरल प्राप्त कर सकते हैं। इस मामले में, प्रक्रिया आपके लिए बिल्कुल मुफ्त होगी (यदि आपके पास कुछ दस्तावेज हैं)। हालांकि, कभी-कभी ऐसे अल्ट्रासाउंड निदान के लिए एक कतार होती है। इस मामले में, आपको एक निर्दिष्ट समय इंतजार करना होगा या परीक्षा का एक वैकल्पिक तरीका चुनना होगा। आप भुगतान में एक सर्वेक्षण भी कर सकते हैंक्लिनिक। यह ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश रोगी इस पद्धति का चयन करते हैं। इस मामले में, प्रोस्टेट ग्रंथि TRUS (प्रक्रिया का विवरण) आपको चयनित क्लिनिक के विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समझाया जाएगा। वे आपको बताएंगे कि हेरफेर के लिए कैसे तैयार किया जाए, और इसकी लागत को आवाज दें। मूल्य सीमा 1000 से 3000 रूबल की सीमा में हो सकती है। यह सब अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ की योग्यता, डिवाइस के मॉडल और उस क्षेत्र पर निर्भर करता है जिसमें आप रहते हैं। प्रोजेट ट्रस कैसे करते हैं? प्रक्रिया 20 मिनट से अधिक नहीं रहती है। नवीनतम उपकरणों के साथ एक योग्य विशेषज्ञ को जांच के लिए केवल पांच मिनट की आवश्यकता होगी। तो, प्रोस्टेट TRUS, यह परीक्षा कैसे होती है? शुरू करने के लिए, रोगी को सेलुलर बंद करने के लिए कहा जाता हैटेलीफोन और अन्य उपकरण जो हस्तक्षेप कर सकते हैं। पैंट की जेब में शामिल डिवाइस को रखना सख्त मना है। यह परिस्थिति निदान में बहुत बाधा डाल सकती है और अध्ययन के गलत परिणाम दे सकती है। रोगी को कपड़े उतारने चाहिएशरीर (पैंट और अंडरवियर)। उसके बाद, आदमी को उसके बाईं ओर बैठने और पेट क्षेत्र में अपने पैरों को कसने के लिए कहा जाता है। प्रोस्टेट टीआरयूएस के लिए यह स्थिति सबसे अच्छी है। वे इसे कैसे करते हैं, सेंसर कैसे डाला जाता है? शुरुआत के लिए, डॉक्टर को लंबे समय तक पहनना चाहिएअल्ट्रासोनिक सेंसर सुरक्षात्मक फिल्म। ज्यादातर, इसके लिए एक विशेष कंडोम का उपयोग किया जाता है। उसके बाद, जेल लागू किया जाता है, जो आपको अधिक सटीक चित्र प्राप्त करने और डिवाइस की शुरूआत की सुविधा देता है। रोगी के लिए अल्ट्रासोनिक सेंसर बहुत धीरे और यथासंभव आरामदायक डाला जाता है। पैठ की गहराई लगभग पांच सेंटीमीटर है। यह इस क्षेत्र में है कि पुरुष प्रोस्टेट ग्रंथि स्थित है। तो, कैसे प्रोस्टेट TRUS करते हैं, अब आप जानते हैं। हालांकि, प्रक्रिया से पहले अनिवार्य प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। निदान का परिणाम पहले से ही प्राप्त किया जा सकता हैनिरीक्षण के कुछ मिनट बाद। आमतौर पर डॉक्टर एक निष्कर्ष और सिफारिशों के साथ एक फॉर्म (अल्ट्रासाउंड प्रोटोकॉल) जारी करता है। यदि आवश्यक हो, तो परिणाम की जांच की गई अंग की कुछ तस्वीरें संलग्न हैं। वे डॉक्टर को अधिक सटीक निदान करने और सही उपचार निर्धारित करने में मदद करेंगे। याद रखें कि प्रोस्टेट टीआरयूएस का परिणाम कभी भी अंतिम निदान नहीं है। अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक्स विशेषज्ञ केवल एक विशेष विकृति विज्ञान की उपस्थिति मान सकते हैं। अंतिम निदान एंड्रोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है। प्रोस्टेट के TRUS और अल्ट्रासाउंड कैसे करें (आवश्यक)तैयारी), आपको उस डॉक्टर को बताना होगा जो इस प्रक्रिया को निर्धारित करता है। इस घटना में कि आप एक निजी क्लिनिक में जाते हैं, तो आपको एक विशेष रूप दिया जाएगा, जिसमें प्रक्रिया की प्रक्रिया और उसको तैयार करने के तरीकों का विवरण है। कई बहुत महत्वपूर्ण बारीकियों पर विचार किया जाना चाहिए। आइए उन्हें विस्तार से समझने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया से पहले हर आदमीपरीक्षणों की एक श्रृंखला को पास करना चाहिए। कुछ मामलों में, यह परिणामों के आधार पर है कि यह निदान सौंपा गया है। इस तरह के जोड़तोड़ से पहले अनिवार्य अनुसंधान एक पूर्ण रक्त गणना है। हेपेटाइटिस, सिफलिस, एड्स और एचआईवी जैसी बीमारियों की अनुपस्थिति को निर्धारित करना भी आवश्यक है। उन्हें गुदा के माध्यम से संपर्क द्वारा प्रेषित किया जा सकता है। कभी-कभी एक चिकित्सक एक शुक्राणु परीक्षण की सिफारिश कर सकता है। इस मामले में, विश्लेषण का परिणाम इस अल्ट्रासाउंड निदान की नियुक्ति का कारण हो सकता है। इससे पहले कि वे प्रोस्टेट TRUS करें(ऊपर प्रस्तुत प्रक्रिया का विवरण), एक सफाई एनीमा को पूरा करना सुनिश्चित करें। इस विधि का एक विकल्प हेरफेर से पहले कई दिनों के लिए रेचक गोलियां हो सकता है। प्रक्रिया से दो घंटे पहले एनीमा नहीं किया जाना चाहिए। अन्यथा आप बहुत ही अजीब स्थिति में आ सकते हैं। यदि आप प्रोस्टेट TRUS को असाइन किए गए हैं,निदान कैसे करना है, आपको पहले से पता होना चाहिए। आपको पूर्ण मूत्राशय के साथ निरीक्षण में आने की आवश्यकता है। ऐसा करने के लिए, प्रक्रिया से पहले कुछ गिलास पानी पिएं। यह हेरफेर से पहले आधे घंटे से पहले नहीं किया जाना चाहिए। पूर्ण मूत्राशय के लिए धन्यवाद, सेमिनल नलिकाएं सीधे हो जाती हैं, डॉक्टर आपको असुविधा के बिना इस क्षेत्र की अधिकतम जांच कर सकते हैं। निदान के कुछ दिन पहले आवश्यक हैअपने आहार की समीक्षा करें। गैस बनाने वाले व्यंजन और उत्पादों को छोड़ना आवश्यक हैः फलियां, मिठाई, पेस्ट्री और चीनी युक्त पेय। अधिक शुद्ध पानी पीने की कोशिश करें और दूध और मादक पेय पीने से बचना चाहिए। तो, प्रोस्टेट ट्रसस आप कैसे करते हैंपहले से ही ज्ञात है। प्रक्रिया से पहले गुदा के क्षेत्र को अच्छी तरह से धोना सुनिश्चित करें। खासकर यदि आपने हाल ही में आंतों को खाली कर दिया है। इस प्रक्रिया के लिए नियमित बेबी सोप का उपयोग करें। यदि आप प्रोस्टेट परीक्षा के लिए निर्धारित हैंग्रंथियों, इस हेरफेर से डरो मत। भुगतान किए गए क्लिनिक में एक परीक्षा आयोजित करते समय, आप निदान का एक वैकल्पिक तरीका चुन सकते हैं। इस मामले में, डॉक्टर पेट की दीवार के माध्यम से ब्याज के अंग की जांच करेगा। हालांकि, इस तथ्य के लिए तैयार रहें कि परिणाम एक सटीक परीक्षा के रूप में नहीं हो सकता है।
निश्चित रूप से हर आदमी जीवन में कम से कम एक बारअल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक्स का सामना करना पड़ा। महिलाओं को अक्सर पैल्विक अंगों की जांच के लिए विशेषज्ञों का दौरा करना पड़ता है। पुरुष प्रतिनिधियों को उसी क्षेत्र के अल्ट्रासाउंड स्कैन की आवश्यकता हो सकती है। यह ध्यान देने योग्य है कि डॉक्टर दो तरीकों से एक परीक्षा आयोजित कर सकते हैंः पेट की दीवार के माध्यम से या गुदा का उपयोग करके। यह लेख दूसरी विधि पर चर्चा करेगा। आप प्रोस्टेट TRUS नामक अध्ययन के बारे में सब कुछ सीखेंगेः तैयारी, जैसा कि वे करते हैं, लागत। साथ ही, पाठक को निरीक्षण प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इस प्रक्रिया को कैसे करें नीचे वर्णित किया जाएगा। एक शुरुआत के लिए यह कहने लायक है कि यह किस तरह का हेरफेर है। प्रोस्टेट और वीर्य नलिकाओं के क्षेत्र की जांच करने वाले ट्रांसपेरेंट अल्ट्रासाउंड की मदद से। यह प्रक्रिया ग्रंथि के आकार को सटीक रूप से निर्धारित करना और उसके उपांगों का निरीक्षण करना संभव बनाती है। पैथोलॉजिकल संरचनाओं की उपस्थिति में, यह विधि आपको ज्ञात क्षेत्रों को सटीक रूप से मापने और उनकी प्रकृति का पता लगाने की अनुमति देती है। बेशक, यह सर्वेक्षण केवल पुरुषों द्वारा पारित किया जा सकता है। इस मामले में निरीक्षण के कई कारण हैं। ऐसी नियुक्तियों के लिए सबसे आम कारण निम्नलिखित हैंः - स्तंभन दोष या शीघ्र स्खलन; - अज्ञात मूल के दीर्घकालिक बांझपन; - अंडकोष और लिंग में दर्द; - खराब शुक्राणु परिणाम; - पैंतालीस वर्ष से अधिक आयु के पुरुष। इसके अलावा, सर्वेक्षण एक स्वैच्छिक इच्छा के साथ आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, बहुत कम ही पुरुष प्रतिनिधि इस तरह के निदान से गुजरने का फैसला करते हैं। इस सर्वेक्षण की दो विधियाँ हैं। आप एक सरकारी एजेंसी से एक रेफरल प्राप्त कर सकते हैं। इस मामले में, प्रक्रिया आपके लिए बिल्कुल मुफ्त होगी । हालांकि, कभी-कभी ऐसे अल्ट्रासाउंड निदान के लिए एक कतार होती है। इस मामले में, आपको एक निर्दिष्ट समय इंतजार करना होगा या परीक्षा का एक वैकल्पिक तरीका चुनना होगा। आप भुगतान में एक सर्वेक्षण भी कर सकते हैंक्लिनिक। यह ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश रोगी इस पद्धति का चयन करते हैं। इस मामले में, प्रोस्टेट ग्रंथि TRUS आपको चयनित क्लिनिक के विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समझाया जाएगा। वे आपको बताएंगे कि हेरफेर के लिए कैसे तैयार किया जाए, और इसकी लागत को आवाज दें। मूल्य सीमा एक हज़ार से तीन हज़ार रूबल की सीमा में हो सकती है। यह सब अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ की योग्यता, डिवाइस के मॉडल और उस क्षेत्र पर निर्भर करता है जिसमें आप रहते हैं। प्रोजेट ट्रस कैसे करते हैं? प्रक्रिया बीस मिनट से अधिक नहीं रहती है। नवीनतम उपकरणों के साथ एक योग्य विशेषज्ञ को जांच के लिए केवल पांच मिनट की आवश्यकता होगी। तो, प्रोस्टेट TRUS, यह परीक्षा कैसे होती है? शुरू करने के लिए, रोगी को सेलुलर बंद करने के लिए कहा जाता हैटेलीफोन और अन्य उपकरण जो हस्तक्षेप कर सकते हैं। पैंट की जेब में शामिल डिवाइस को रखना सख्त मना है। यह परिस्थिति निदान में बहुत बाधा डाल सकती है और अध्ययन के गलत परिणाम दे सकती है। रोगी को कपड़े उतारने चाहिएशरीर । उसके बाद, आदमी को उसके बाईं ओर बैठने और पेट क्षेत्र में अपने पैरों को कसने के लिए कहा जाता है। प्रोस्टेट टीआरयूएस के लिए यह स्थिति सबसे अच्छी है। वे इसे कैसे करते हैं, सेंसर कैसे डाला जाता है? शुरुआत के लिए, डॉक्टर को लंबे समय तक पहनना चाहिएअल्ट्रासोनिक सेंसर सुरक्षात्मक फिल्म। ज्यादातर, इसके लिए एक विशेष कंडोम का उपयोग किया जाता है। उसके बाद, जेल लागू किया जाता है, जो आपको अधिक सटीक चित्र प्राप्त करने और डिवाइस की शुरूआत की सुविधा देता है। रोगी के लिए अल्ट्रासोनिक सेंसर बहुत धीरे और यथासंभव आरामदायक डाला जाता है। पैठ की गहराई लगभग पांच सेंटीमीटर है। यह इस क्षेत्र में है कि पुरुष प्रोस्टेट ग्रंथि स्थित है। तो, कैसे प्रोस्टेट TRUS करते हैं, अब आप जानते हैं। हालांकि, प्रक्रिया से पहले अनिवार्य प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। निदान का परिणाम पहले से ही प्राप्त किया जा सकता हैनिरीक्षण के कुछ मिनट बाद। आमतौर पर डॉक्टर एक निष्कर्ष और सिफारिशों के साथ एक फॉर्म जारी करता है। यदि आवश्यक हो, तो परिणाम की जांच की गई अंग की कुछ तस्वीरें संलग्न हैं। वे डॉक्टर को अधिक सटीक निदान करने और सही उपचार निर्धारित करने में मदद करेंगे। याद रखें कि प्रोस्टेट टीआरयूएस का परिणाम कभी भी अंतिम निदान नहीं है। अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक्स विशेषज्ञ केवल एक विशेष विकृति विज्ञान की उपस्थिति मान सकते हैं। अंतिम निदान एंड्रोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है। प्रोस्टेट के TRUS और अल्ट्रासाउंड कैसे करें तैयारी), आपको उस डॉक्टर को बताना होगा जो इस प्रक्रिया को निर्धारित करता है। इस घटना में कि आप एक निजी क्लिनिक में जाते हैं, तो आपको एक विशेष रूप दिया जाएगा, जिसमें प्रक्रिया की प्रक्रिया और उसको तैयार करने के तरीकों का विवरण है। कई बहुत महत्वपूर्ण बारीकियों पर विचार किया जाना चाहिए। आइए उन्हें विस्तार से समझने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया से पहले हर आदमीपरीक्षणों की एक श्रृंखला को पास करना चाहिए। कुछ मामलों में, यह परिणामों के आधार पर है कि यह निदान सौंपा गया है। इस तरह के जोड़तोड़ से पहले अनिवार्य अनुसंधान एक पूर्ण रक्त गणना है। हेपेटाइटिस, सिफलिस, एड्स और एचआईवी जैसी बीमारियों की अनुपस्थिति को निर्धारित करना भी आवश्यक है। उन्हें गुदा के माध्यम से संपर्क द्वारा प्रेषित किया जा सकता है। कभी-कभी एक चिकित्सक एक शुक्राणु परीक्षण की सिफारिश कर सकता है। इस मामले में, विश्लेषण का परिणाम इस अल्ट्रासाउंड निदान की नियुक्ति का कारण हो सकता है। इससे पहले कि वे प्रोस्टेट TRUS करें, एक सफाई एनीमा को पूरा करना सुनिश्चित करें। इस विधि का एक विकल्प हेरफेर से पहले कई दिनों के लिए रेचक गोलियां हो सकता है। प्रक्रिया से दो घंटे पहले एनीमा नहीं किया जाना चाहिए। अन्यथा आप बहुत ही अजीब स्थिति में आ सकते हैं। यदि आप प्रोस्टेट TRUS को असाइन किए गए हैं,निदान कैसे करना है, आपको पहले से पता होना चाहिए। आपको पूर्ण मूत्राशय के साथ निरीक्षण में आने की आवश्यकता है। ऐसा करने के लिए, प्रक्रिया से पहले कुछ गिलास पानी पिएं। यह हेरफेर से पहले आधे घंटे से पहले नहीं किया जाना चाहिए। पूर्ण मूत्राशय के लिए धन्यवाद, सेमिनल नलिकाएं सीधे हो जाती हैं, डॉक्टर आपको असुविधा के बिना इस क्षेत्र की अधिकतम जांच कर सकते हैं। निदान के कुछ दिन पहले आवश्यक हैअपने आहार की समीक्षा करें। गैस बनाने वाले व्यंजन और उत्पादों को छोड़ना आवश्यक हैः फलियां, मिठाई, पेस्ट्री और चीनी युक्त पेय। अधिक शुद्ध पानी पीने की कोशिश करें और दूध और मादक पेय पीने से बचना चाहिए। तो, प्रोस्टेट ट्रसस आप कैसे करते हैंपहले से ही ज्ञात है। प्रक्रिया से पहले गुदा के क्षेत्र को अच्छी तरह से धोना सुनिश्चित करें। खासकर यदि आपने हाल ही में आंतों को खाली कर दिया है। इस प्रक्रिया के लिए नियमित बेबी सोप का उपयोग करें। यदि आप प्रोस्टेट परीक्षा के लिए निर्धारित हैंग्रंथियों, इस हेरफेर से डरो मत। भुगतान किए गए क्लिनिक में एक परीक्षा आयोजित करते समय, आप निदान का एक वैकल्पिक तरीका चुन सकते हैं। इस मामले में, डॉक्टर पेट की दीवार के माध्यम से ब्याज के अंग की जांच करेगा। हालांकि, इस तथ्य के लिए तैयार रहें कि परिणाम एक सटीक परीक्षा के रूप में नहीं हो सकता है।
कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा के प्रभारी विवेक बंसल को हटा दिया। विवेक बंसल की जगह शक्ति सिंह गोहिल को हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके पास दिल्ली का भी अतिरिक्त प्रभार रहेगा। साथ ही कुमारी सैलजा का कद भी पार्टी ने बढ़ा दिया गया है। उसे छत्तीसगढ़ का इंचार्ज लगाया गया है। साथ ही उन्हें जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। सैलजा ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ मतभेद होने के चलते 27 अप्रैल 2022 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। विवेक बंसल को हरियाणा के प्रभारी पद से हटाए जाने का मुख्य कारण हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन की हार है। क्योंकि चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई थी। इसके बाद विवेक बंसल और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ भी रिश्ते मधुर नहीं रहे। हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर 3 उम्मीदवार थे। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पंवार की जीत तय थी। परंतु निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा और कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के बीच मुकाबला था। कुलदीप बिश्नोई ने निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में क्रॉस वोटिंग कर दी। जबकि एक कांग्रेसी विधायक का वोट रद हो गया। जिससे कि अजय माकन हार गए। किरण चौधरी पर भी क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे। परंतु उन्होंने इसका खुलकर जवाब दिया और विरोधियों द्वारा फैलाया षडयंत्र बताया। कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल आज तक इस बात का खुलासा नहीं कर सके कि यह दूसरा वोट किस बागी विधायक का है। हालांकि विवेक बंसल अपनी रिपोर्ट हाईकमान को दे चुके हैं। परंतु हाईकमान ने भी उस रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया। जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और अजय माकन विवेक बंसल की कार्यप्रणाली से नाराज चल रहे थे। अजय माकन राज्यसभा चुनाव को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। अजय माकन दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। विवेक बंसल की अध्यक्षता में कांग्रेस लगातार दो चुनाव हार गई। पहला उप चुनाव ऐलनाबाद में कांग्रेस उम्मीदवार पवन बैनीवाल की जमानत जब्त हो गई। इसके बाद नवंबर 2022 में आदमपुर उपचुनाव में भी कांग्रेस की हार हुई। आदमपुर उपचुनाव में विवेक बंसल प्रचार करने भी नहीं आए थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है, हुड्डा के साथ विवेक बंसल से रिश्ते बेहतर नहीं थे। आदमपुर उपचुनाव में हार के बाद उनका जाना लगभग तय था। हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बावजूद कुमारी सैलजा का राज्यसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था। परंतु पार्टी हाईकमान ने उन्हें नहीं उतारा। उन्हें कांग्रेस की स्टीयरिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया। परंतु हाईकमान ने अब कुमारी सैलजा को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर उन्हें महत्वपूर्ण पद देकर उनका कद बड़ा दिया। साथ ही उन्हें जनरल सेक्रेटरी भी नियुक्त कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा के प्रभारी विवेक बंसल को हटा दिया। विवेक बंसल की जगह शक्ति सिंह गोहिल को हरियाणा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके पास दिल्ली का भी अतिरिक्त प्रभार रहेगा। साथ ही कुमारी सैलजा का कद भी पार्टी ने बढ़ा दिया गया है। उसे छत्तीसगढ़ का इंचार्ज लगाया गया है। साथ ही उन्हें जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। सैलजा ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ मतभेद होने के चलते सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार बाईस को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। विवेक बंसल को हरियाणा के प्रभारी पद से हटाए जाने का मुख्य कारण हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन की हार है। क्योंकि चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई थी। इसके बाद विवेक बंसल और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ भी रिश्ते मधुर नहीं रहे। हरियाणा राज्यसभा की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार थे। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पंवार की जीत तय थी। परंतु निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा और कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के बीच मुकाबला था। कुलदीप बिश्नोई ने निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में क्रॉस वोटिंग कर दी। जबकि एक कांग्रेसी विधायक का वोट रद हो गया। जिससे कि अजय माकन हार गए। किरण चौधरी पर भी क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे। परंतु उन्होंने इसका खुलकर जवाब दिया और विरोधियों द्वारा फैलाया षडयंत्र बताया। कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल आज तक इस बात का खुलासा नहीं कर सके कि यह दूसरा वोट किस बागी विधायक का है। हालांकि विवेक बंसल अपनी रिपोर्ट हाईकमान को दे चुके हैं। परंतु हाईकमान ने भी उस रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया। जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और अजय माकन विवेक बंसल की कार्यप्रणाली से नाराज चल रहे थे। अजय माकन राज्यसभा चुनाव को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। अजय माकन दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। विवेक बंसल की अध्यक्षता में कांग्रेस लगातार दो चुनाव हार गई। पहला उप चुनाव ऐलनाबाद में कांग्रेस उम्मीदवार पवन बैनीवाल की जमानत जब्त हो गई। इसके बाद नवंबर दो हज़ार बाईस में आदमपुर उपचुनाव में भी कांग्रेस की हार हुई। आदमपुर उपचुनाव में विवेक बंसल प्रचार करने भी नहीं आए थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है, हुड्डा के साथ विवेक बंसल से रिश्ते बेहतर नहीं थे। आदमपुर उपचुनाव में हार के बाद उनका जाना लगभग तय था। हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बावजूद कुमारी सैलजा का राज्यसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था। परंतु पार्टी हाईकमान ने उन्हें नहीं उतारा। उन्हें कांग्रेस की स्टीयरिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया। परंतु हाईकमान ने अब कुमारी सैलजा को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर उन्हें महत्वपूर्ण पद देकर उनका कद बड़ा दिया। साथ ही उन्हें जनरल सेक्रेटरी भी नियुक्त कर दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उत्तर प्रदेश के बस्ती में रुधौली थाना क्षेत्र के अपहरण मामले में 7वीं के छात्र अखंड कसौधन को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। अपहरणकर्ताओं ने रुदौली कस्बे से उठाकर छात्र को गोरखपुर में एक कमरे में बंद किया था और 50 लाख की फिरौती की मांग कर रहे थे। अब जाकर पुलिस को 7 दिन बाद सफलता मिली है। इस बच्चे को बरामद करने वाली पुलिस टीम का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। इस समारोह के दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
उत्तर प्रदेश के बस्ती में रुधौली थाना क्षेत्र के अपहरण मामले में सातवीं के छात्र अखंड कसौधन को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। अपहरणकर्ताओं ने रुदौली कस्बे से उठाकर छात्र को गोरखपुर में एक कमरे में बंद किया था और पचास लाख की फिरौती की मांग कर रहे थे। अब जाकर पुलिस को सात दिन बाद सफलता मिली है। इस बच्चे को बरामद करने वाली पुलिस टीम का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। इस समारोह के दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
नई दिल्लीः जद-यू प्रमुख नीतीश कुमार के बिहार में भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ने के हफ्तों बाद, मणिपुर के छह जनता दल (यूनाइटेड) के विधायकों में से पांच शुक्रवार को राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. इसके साथ ही 2014 से भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी पार्टियों को छोड़ने वाले विधानसभा सदस्यों और सांसदों की संख्या 211 तक पहुंच गई है. भाजपा में शामिल होने वाले पांच विधायक खुमुक्कम जॉयकिशन (थांगमेईबंद निर्वाचन क्षेत्र), न्गुरसंगलुर सनाटे (टिपईमुख), मोहम्मद अचब उद्दीन (जिरीबाम), पूर्व पुलिस महानिदेशक से राजनेता बने एलएम खौटे और थंगजाम अरुणकुमार (वांगखेई) हैं. जद (यू) के एकमात्र विधायक जिन्होंने भाजपा में शामिल नहीं होने का फैसला किया, वह लिलोंग से विधायक रहे मोहम्मद नासिर हैं. मणिपुर में जद-यू के पांच विधायकों (साथ ही अगस्त में अरुणाचल में एक और) का भाजपा में शामिल होने का सीधा संबंध, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पिछले महीने बिहार में डंपिंग से है. भाजपा ने इस साल की शुरुआत में हुए चुनावों में मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटें जीती थीं और उसे विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) का भी समर्थन प्राप्त है. दलबदल ने मणिपुर विधानसभा में जद (यू) के प्रतिनिधित्व को कम कर दिया है. भाजपा दलबदलुओं के लिए सबसे अधिक डिमांड में रहने वाली पार्टी बन चुकी है और यह घटनाक्रम उसका एक और प्रमाण है. नई दिल्ली स्थित राजनीतिक और चुनावी सुधार गैर-लाभकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2014 से लेकर- जब भाजपा पहली बार केंद्र में सत्ता में आई थी- 2022 तक 211 विधायक और सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. वहीं दूसरी ओर, इस दौरान सिर्फ 60 राजनेताओं - विधायक और सांसद दोनों- ने भाजपा छोड़ी. विपक्षी दल भाजपा पर अपने 'संसाधनों'- प्रलोभनों - के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं. हाल ही में पार्टी में हुए दलबदल को लेकर जद-यू के प्रवक्ता परिमल कुमार ने दिप्रिंट से दावा करते हुए कहा कि भाजपा ने इन सदस्यों को जद-यू से दूर करने के लिए 'अपने संसाधनों का इस्तेमाल' किया है. कुमार ने कहा, और इसी वजह से जद (यू) ने भाजपा से नाता तोड़ा है. उधर भाजपा जद (यू) सहित विपक्षी दलों पर अपने नेताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाती रही है. भाजपा प्रवक्ता गुरुप्रकाश पासवान ने दिप्रिंट को बताया, 'कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहेगा जो एक परिवार या एक व्यक्ति पर केंद्रित हो. हिमंत बिस्वा सरमा और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता भाजपा में आए क्योंकि वे फंसे हुए थे. वे उन पार्टियों में क्लास्ट्रोफोबिक महसूस करते थे. उन्होंने कहा, 'जद (यू) अपनी स्थापना के बाद से एक व्यक्ति की पार्टी रही है. कोई भी व्यक्ति जो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहता है, वह सिर्फ उसी पार्टी का हिस्सा बनना चाहेगा जहां उनका सम्मान किया जाता हो. ' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर जद (यू) के पास अनैच्छिक दलबदल का कोई सबूत है, तो उन्हें अदालत में चुनौती देनी चाहिए. एडीआर रिपोर्टों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कांग्रेस से सबसे ज्यादा विधायक और सांसद पार्टी छोड़ कर गए हैं- 2014 से 2021 तक 177 और इस साल के पांच राज्यों गोवा, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले 20 विधायकों को खोया है. इनमें से 84 नेताओं ने भाजपा का हाथ थामा है- 2021 तक 76 और इस साल विधानसभा चुनावों के आसपास आठ नेता कांग्रेस को छोड़ भाजपा के साथ हो लिए. अन्य दलों में, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से भाजपा में जाने वाले विधायकों की संख्या 21 है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से 17 और समाजवादी पार्टी (सपा) से नौ विधायक भाजपा के खेमे में चले गए. रिपोर्ट से पता चलता है कि 2014 और 2021 के बीच, जद-यू से भाजपा में दलबदल करने वालों की संख्या कम थी. इस दौरान पूर्व के सिर्फ दो विधायकों ने ही अपना पाला बदला था. तेलुगू देशम पार्टी- जो 2018 में अलग होने तक भाजपा की सहयोगी थी- ने दलबदल में अपने कुल 26 विधायकों को खोया है. ये सभी दलबदल चुनाव पूर्व और चुनाव दोनों के बाद के थे. आंकड़ों से पता चलता है कि 2017 और 2022 के बीच दलबदल करने वाले कुल 85 विधायकों ने इस साल के विधानसभा चुनाव में दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. आंकड़े यह भी बताते हैं कि दलबदल सिर्फ चुनावों के आसपास ही नहीं हुआ है. उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों ने 2020 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार को गिराकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया था. विद्रोह का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया, जो राज्यसभा सदस्य और फिर नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने. कर्नाटक में 2019 में, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के तत्कालीन सत्तारूढ़ गठबंधन के 16 विधायक एच. डी. कुमारस्वामी के साथ मिलकर राज्य सरकार को गिराने के लिए भाजपा में शामिल हो गए थे. 16 में से 13 बागी नेता 2020 के उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे. दूसरी ओर, रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि पिछले 10 सालों में कांग्रेस को छोड़कर जानेवाले उम्मीदवारों की संख्या 806 रही और इसमें से 33 प्रतिशत दलबदलुओं ने चुनाव जीता. इनमें से अधिकांश दलबदलुओं को भाजपा ने मैदान में उतारा था. इसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या (130) थी, उसके बाद कर्नाटक (81) का स्थान था. विपक्षी दलों का दावा है कि भाजपा दलबदल को अंजाम देने के लिए प्रलोभन और धमकियों का इस्तेमाल कर रही है. कांग्रेस का दावा है कि भाजपा विधायकों को धमकाने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा, सवाल यह नहीं है कि विधायक और सांसद कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल को क्यों छोड़ रहे हैं, बल्कि सवाल ये है कि ऐसा करने के लिए वे किस तरह के दबाव का सामना करते हैं. सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ के एक रिसर्च प्रोग्राम 'लोकनिति' के सह-निदेशक और प्रोफेसर व राजनीतिक विश्लेषक संजय सिंह ने कहा कि एक उज्ज्वल राजनीतिक करियर के लिए विधायकों का सत्तारूढ़ दल में शामिल होना असामान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि जो विधायक अपनी पार्टी छोड़ते हैं, वे जीत के पक्ष में रहना चाहते हैं. 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नई दिल्लीः जद-यू प्रमुख नीतीश कुमार के बिहार में भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ने के हफ्तों बाद, मणिपुर के छह जनता दल के विधायकों में से पांच शुक्रवार को राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. इसके साथ ही दो हज़ार चौदह से भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी पार्टियों को छोड़ने वाले विधानसभा सदस्यों और सांसदों की संख्या दो सौ ग्यारह तक पहुंच गई है. भाजपा में शामिल होने वाले पांच विधायक खुमुक्कम जॉयकिशन , न्गुरसंगलुर सनाटे , मोहम्मद अचब उद्दीन , पूर्व पुलिस महानिदेशक से राजनेता बने एलएम खौटे और थंगजाम अरुणकुमार हैं. जद के एकमात्र विधायक जिन्होंने भाजपा में शामिल नहीं होने का फैसला किया, वह लिलोंग से विधायक रहे मोहम्मद नासिर हैं. मणिपुर में जद-यू के पांच विधायकों का भाजपा में शामिल होने का सीधा संबंध, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पिछले महीने बिहार में डंपिंग से है. भाजपा ने इस साल की शुरुआत में हुए चुनावों में मणिपुर की साठ सदस्यीय विधानसभा में बत्तीस सीटें जीती थीं और उसे विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी का भी समर्थन प्राप्त है. दलबदल ने मणिपुर विधानसभा में जद के प्रतिनिधित्व को कम कर दिया है. भाजपा दलबदलुओं के लिए सबसे अधिक डिमांड में रहने वाली पार्टी बन चुकी है और यह घटनाक्रम उसका एक और प्रमाण है. नई दिल्ली स्थित राजनीतिक और चुनावी सुधार गैर-लाभकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि दो हज़ार चौदह से लेकर- जब भाजपा पहली बार केंद्र में सत्ता में आई थी- दो हज़ार बाईस तक दो सौ ग्यारह विधायक और सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. वहीं दूसरी ओर, इस दौरान सिर्फ साठ राजनेताओं - विधायक और सांसद दोनों- ने भाजपा छोड़ी. विपक्षी दल भाजपा पर अपने 'संसाधनों'- प्रलोभनों - के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं. हाल ही में पार्टी में हुए दलबदल को लेकर जद-यू के प्रवक्ता परिमल कुमार ने दिप्रिंट से दावा करते हुए कहा कि भाजपा ने इन सदस्यों को जद-यू से दूर करने के लिए 'अपने संसाधनों का इस्तेमाल' किया है. कुमार ने कहा, और इसी वजह से जद ने भाजपा से नाता तोड़ा है. उधर भाजपा जद सहित विपक्षी दलों पर अपने नेताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाती रही है. भाजपा प्रवक्ता गुरुप्रकाश पासवान ने दिप्रिंट को बताया, 'कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति ऐसी पार्टी में नहीं रहना चाहेगा जो एक परिवार या एक व्यक्ति पर केंद्रित हो. हिमंत बिस्वा सरमा और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता भाजपा में आए क्योंकि वे फंसे हुए थे. वे उन पार्टियों में क्लास्ट्रोफोबिक महसूस करते थे. उन्होंने कहा, 'जद अपनी स्थापना के बाद से एक व्यक्ति की पार्टी रही है. कोई भी व्यक्ति जो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहता है, वह सिर्फ उसी पार्टी का हिस्सा बनना चाहेगा जहां उनका सम्मान किया जाता हो. ' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर जद के पास अनैच्छिक दलबदल का कोई सबूत है, तो उन्हें अदालत में चुनौती देनी चाहिए. एडीआर रिपोर्टों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कांग्रेस से सबसे ज्यादा विधायक और सांसद पार्टी छोड़ कर गए हैं- दो हज़ार चौदह से दो हज़ार इक्कीस तक एक सौ सतहत्तर और इस साल के पांच राज्यों गोवा, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले बीस विधायकों को खोया है. इनमें से चौरासी नेताओं ने भाजपा का हाथ थामा है- दो हज़ार इक्कीस तक छिहत्तर और इस साल विधानसभा चुनावों के आसपास आठ नेता कांग्रेस को छोड़ भाजपा के साथ हो लिए. अन्य दलों में, बहुजन समाज पार्टी से भाजपा में जाने वाले विधायकों की संख्या इक्कीस है. तृणमूल कांग्रेस से सत्रह और समाजवादी पार्टी से नौ विधायक भाजपा के खेमे में चले गए. रिपोर्ट से पता चलता है कि दो हज़ार चौदह और दो हज़ार इक्कीस के बीच, जद-यू से भाजपा में दलबदल करने वालों की संख्या कम थी. इस दौरान पूर्व के सिर्फ दो विधायकों ने ही अपना पाला बदला था. तेलुगू देशम पार्टी- जो दो हज़ार अट्ठारह में अलग होने तक भाजपा की सहयोगी थी- ने दलबदल में अपने कुल छब्बीस विधायकों को खोया है. ये सभी दलबदल चुनाव पूर्व और चुनाव दोनों के बाद के थे. आंकड़ों से पता चलता है कि दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार बाईस के बीच दलबदल करने वाले कुल पचासी विधायकों ने इस साल के विधानसभा चुनाव में दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. आंकड़े यह भी बताते हैं कि दलबदल सिर्फ चुनावों के आसपास ही नहीं हुआ है. उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने वाले बाईस विधायकों ने दो हज़ार बीस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार को गिराकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया था. विद्रोह का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया, जो राज्यसभा सदस्य और फिर नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने. कर्नाटक में दो हज़ार उन्नीस में, कांग्रेस और जनता दल के तत्कालीन सत्तारूढ़ गठबंधन के सोलह विधायक एच. डी. कुमारस्वामी के साथ मिलकर राज्य सरकार को गिराने के लिए भाजपा में शामिल हो गए थे. सोलह में से तेरह बागी नेता दो हज़ार बीस के उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे. दूसरी ओर, रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि पिछले दस सालों में कांग्रेस को छोड़कर जानेवाले उम्मीदवारों की संख्या आठ सौ छः रही और इसमें से तैंतीस प्रतिशत दलबदलुओं ने चुनाव जीता. इनमें से अधिकांश दलबदलुओं को भाजपा ने मैदान में उतारा था. इसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या थी, उसके बाद कर्नाटक का स्थान था. विपक्षी दलों का दावा है कि भाजपा दलबदल को अंजाम देने के लिए प्रलोभन और धमकियों का इस्तेमाल कर रही है. कांग्रेस का दावा है कि भाजपा विधायकों को धमकाने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने कहा, सवाल यह नहीं है कि विधायक और सांसद कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल को क्यों छोड़ रहे हैं, बल्कि सवाल ये है कि ऐसा करने के लिए वे किस तरह के दबाव का सामना करते हैं. सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ के एक रिसर्च प्रोग्राम 'लोकनिति' के सह-निदेशक और प्रोफेसर व राजनीतिक विश्लेषक संजय सिंह ने कहा कि एक उज्ज्वल राजनीतिक करियर के लिए विधायकों का सत्तारूढ़ दल में शामिल होना असामान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि जो विधायक अपनी पार्टी छोड़ते हैं, वे जीत के पक्ष में रहना चाहते हैं.
पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि पर आपको किस मुहूर्त में काम करना रहेगा शुभ और किस दिशा में जाने से मिलेगी मनचाही सफलता, विस्तार से जानने के लिए जरूर पढ़ें 08 जून 2023 का पंचांग. Aaj ka Panchang 08 June 2023: हिंदू धर्म में पंचांग एक ऐसा माध्यम है, जिसकी मदद से प्रत्येक दिन का शुभ-अशुभ समय और दिशा आदि के बारे में आसानी से जाना जा सकता है। पांच अंगों से मिलकर बने पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की पंचमी यानि 08 जून 2023, गुरुवार को किस समय काम करेगा आपका गुडलक और कौन सी दिशा रहेगी शुभ, आइए इसे विस्तार से जानते हैं. गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशा शूल रहेगा .(यात्रा वर्जित रहती है) यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो थोड़ा जीरा खाकर चौघड़िया मूहर्त में यात्रा प्रारंभ करें. (देश की राजधानी दिल्ली के समय अनुसार) ।दिन (Day) ।मास (Month) ।पक्ष (Paksha) ।तिथि (Tithi) ।आषाढ़ माह की पंचमी शाम 7 बजे तक, इसके उपरान्त षष्ठी. ।नक्षत्र (Nakshatra) ।योग (Yoga) ।एन्द्र योग शाम 6.58 बजे तक, इसके उपरान्त वैधृति योग. ।सूर्योदय (Sunrise) ।प्रातः 5.21 बजे से. ।सूर्यास्त (Sunset) ।सूर्यास्तः शाम 7.17 बजे. ।चंद्रमा (Moon) ।मकर राशि. ।राहु काल (Rahu Kaal Ka Samay) ।दोपहर 2.04 बजे से दोपहर 3.48 बजे तक. ।सुबह 10 बजे से दोपहर 3.34 बजे तक. ।अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurt) ।सुबह 11.52 बजे से दोपहर 12.47 बजे तक. ।दिशाशूल (Disha Shool) ।पंचक (Pnachak) ये भी पढेंःअंगूठे की बनावट से खुल जाते हैं इंसान के सारे छिपे हुए राज, जानें कैसे?
पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि पर आपको किस मुहूर्त में काम करना रहेगा शुभ और किस दिशा में जाने से मिलेगी मनचाही सफलता, विस्तार से जानने के लिए जरूर पढ़ें आठ जून दो हज़ार तेईस का पंचांग. Aaj ka Panchang आठ जूनe दो हज़ार तेईस: हिंदू धर्म में पंचांग एक ऐसा माध्यम है, जिसकी मदद से प्रत्येक दिन का शुभ-अशुभ समय और दिशा आदि के बारे में आसानी से जाना जा सकता है। पांच अंगों से मिलकर बने पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की पंचमी यानि आठ जून दो हज़ार तेईस, गुरुवार को किस समय काम करेगा आपका गुडलक और कौन सी दिशा रहेगी शुभ, आइए इसे विस्तार से जानते हैं. गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशा शूल रहेगा . यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो थोड़ा जीरा खाकर चौघड़िया मूहर्त में यात्रा प्रारंभ करें. ।दिन ।मास ।पक्ष ।तिथि ।आषाढ़ माह की पंचमी शाम सात बजे तक, इसके उपरान्त षष्ठी. ।नक्षत्र ।योग ।एन्द्र योग शाम छः.अट्ठावन बजे तक, इसके उपरान्त वैधृति योग. ।सूर्योदय ।प्रातः पाँच.इक्कीस बजे से. ।सूर्यास्त ।सूर्यास्तः शाम सात.सत्रह बजे. ।चंद्रमा ।मकर राशि. ।राहु काल ।दोपहर दो.चार बजे से दोपहर तीन.अड़तालीस बजे तक. ।सुबह दस बजे से दोपहर तीन.चौंतीस बजे तक. ।अभिजीत मुहूर्त ।सुबह ग्यारह.बावन बजे से दोपहर बारह.सैंतालीस बजे तक. ।दिशाशूल ।पंचक ये भी पढेंःअंगूठे की बनावट से खुल जाते हैं इंसान के सारे छिपे हुए राज, जानें कैसे?
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के तीन युवकों द्वारा एक महिला के साथ सामूहिक कथित तौर पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। देवरियाः उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के तीन युवकों द्वारा एक महिला के साथ सामूहिक कथित तौर पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। पुलिस के मुताबिक रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ इस संबंध में एक मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्राधिकारी (नगर) यश त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को बताया कि रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के एक गांव रहने वाली चालीस वर्षीय महिला ने पुलिस को तहरीर देकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला का आरोप है कि तीनों व्यक्ति बीते 26 मई को उसे जबरन कोतवाली थाना अंतर्गत एक निजी स्कूल पर ले गए और वहां बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने बताया कि छानबीन के बाद पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ बुधवार को सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करके आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रकरण में पुलिस विधिक कार्रवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के तीन युवकों द्वारा एक महिला के साथ सामूहिक कथित तौर पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। देवरियाः उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के तीन युवकों द्वारा एक महिला के साथ सामूहिक कथित तौर पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। पुलिस के मुताबिक रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ इस संबंध में एक मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्राधिकारी यश त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को बताया कि रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के एक गांव रहने वाली चालीस वर्षीय महिला ने पुलिस को तहरीर देकर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला का आरोप है कि तीनों व्यक्ति बीते छब्बीस मई को उसे जबरन कोतवाली थाना अंतर्गत एक निजी स्कूल पर ले गए और वहां बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने बताया कि छानबीन के बाद पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ बुधवार को सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करके आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रकरण में पुलिस विधिक कार्रवाई कर रही है।
गौतम वृद्ध और उनके उपदेश प्रतीक रूपो को अपने में सम्मिलित कर सकती है। जो लोग इस व्यापक उदार दृष्टिकोण के लिए अभी तैयार नहीं है उनके लिए वह हीनयान सम्प्रदाय का उपयोग करती है। ज्ञानियों को सत्य का दर्शन कराने के अनेक मार्ग है । अन्तर्गढ- सत्ता की विविध अभिव्यक्तियो के रूप में अनेक प्रतीको को सहन और स्वीकार करने की क्षमता ने महायान धर्म को यह शक्ति दी है कि वह अपने आपको नवीन परिस्थितियों के अनुकूल बना सके । उसका अध्यात्म-गास्त्र और धर्म हिन्दू धर्म के सवल प्रभाव में विकसित हुआ है। हिन्दू धर्म की देव-सृष्टि से अनेक देवो श्रौर देवियो को स्वीकार कर लिया गया है। महायान में निर्वाण का वर्णन ऐसा किया गया है कि वह पहले से ही सम्पन्न सत्य तथ्य है । उसका निर्माण नहीं होता। जैसे ही हमारा ज्ञान नष्ट होता है निर्वाण हमें मिल जाता है। निर्वाण का अर्जन या सर्जन नहीं होता। निर्वाण न मुक्तानुवन्धी है और न उसका विनाश हो सकता है। समस्त प्रयोग-सिद्ध विभेदो और पदार्थों से वह ऊपर है । ज्ञान और प्रेम उसमें एकाकार है। जिन लोगो में बोधिचित्त सजग हो जाता है वे भूतसमुदाय की रक्षा के लिए अपने आपको बलिदान कर देते है । यह सामारिक जीवन निर्वाण की सत्ता से हमे दूर नहीं ले जाता । उपपन्नता भी अस्तित्व ही है । यद्यपि यह जीवन प्रसत् है फिर भी अर्थ - हीन नहीं है । विमलकीर्ति-सूत्र का कथन है ---"जैसे कमल पुष्प सूखी धरती पर नहीं उत्पन्न होता वल्कि जलमय अन्व कीचड से उत्पन्न होता है, उसी प्रकार बोधिचित्त या ज्ञानमय हृदय की उत्पत्ति होती है। कामना और पाप के पक से ही बुद्धत्व के वीज प्रकुरित और विकसित होते है। जब हम इस वृद्ध- प्रकृति, बोधिचित्त का विकास कर लेते हैं जो बुद्ध को तात्विक प्रकृति है, तब हम समस्त बुद्धो के साथ एक हो जाते है, तव हमें प्रज्ञा अथवा आध्यात्मिक ज्ञान दीप्ति और करुणा अथवा निस्वार्थ परहितरति प्राप्त हो जाती है । महायान बौद्ध धर्म ने लोगो को न केवल बुद्धो के स्वर्ग का आह्वान दिया बल्कि धरती पर एक व्यवस्थित और स्वस्थ जीवन की भी प्रेरणा दी। उसका उद्देश्य था सभी मनुष्यो को सुखी बनाना । ससार में जीवन को प्रेरणा धर्म-भावना से मिलनी चाहिए। जैसे अर्हत का आदर्श हटा कर उसका स्थान बोधिसत्व के प्रदर्श ने ले लिया, ठीक उसी प्रकार तापस के आदर्श का स्थान गृहस्थ के आदर्श ने ले लिया । कामना यह थी कि ससार में रहा जाय पर ससार का बन कर नही। महन्तो की परम्परा चलती रही पर देव-विभूति- सम्पन्न सामान्य व्यक्ति को भी गौरव-पद दिया गया । संस्कृत ग्रन्थ विमलकीर्तिनिर्देश' में वर्णित विमलकीर्ति का चरित्र बताता है कि कैसे हम लोगो में घुल-मिल सकते है, घरो में रह सकते हैं सामान्य लोगो और पापियो के मित्र बन सकते है और फिर भी साधु बने रह सकते है । विमलकीति बैशाली में रहते थे पर 'केवल जीवो की रक्षा के आवश्यक उपाय के निमित्त अत्यन्त सम्पन्न, सर्वदा दीनो की चिन्ता करने वाले आत्मानुशासन में विशुद्ध, समस्त धार्मिक उपदेशो का पालन करने वाले, शान्ति के अभ्यास से समस्त क्रोध दूर करते हुए, उद्यम के अभ्यास से समस्त आलस्य दूर करते हुए, एकाग्र चिन्तन से समस्त क्षोभ मिटाते हुए, ज्ञान की पूर्णता से समस्त प्रज्ञान दूर करते हुए, यद्यपि वह सामान्य गृहस्थ मात्र थे फिर भी शुद्ध विहारिक अनुशासन मूल संस्कृत ग्रन्थ खो गया है पर उसके चीनी रूपान्तर का अंग्रेजी अनुवाद प्रोफेसर इदुमो ने किया है --Eastern Buddhist III, ( १६३८-३६) का पालन करते थे, यद्यपि उनके एक पत्नी थी और बच्चे थे फिर भी वह शुद्ध धर्माचरण का पालन करते थे, यद्यपि वह परिवार से घिरे थे, फिर भी वह सासारिक जीवन से अपने को बिलकुल अलग रखते थे, यद्यपि हीरक जटित सासारिक आभूषणो का प्रयोग करते थे फिर भी वह आध्यात्मिक विभा से विभासित थे, यद्यपि खाते-पीते थे फिर भी चिन्तन के श्राह्लाद से प्रानन्द पाते थे, यद्यपि द्यूतशालाम्रो मे जाते थे फिर भी जुग्रारी लोगो को सत्-पथ का प्रदर्शन करते थे, यद्यपि किम्बदन्तियो और पाखण्ड-पन्थो के ससर्ग में आते थे फिर भी अपनी सत्य - श्रद्धा पर कभी नने देते थे, यद्यपि सासारिक विद्या का उन्हें गम्भीर ज्ञान या फिर भी बुद्ध द्वारा उपदिष्ट प्राध्यात्मिक तथ्यों में ही उन्हें सर्वदा आनन्द मिलता था, यद्यपि सभी प्रकार की वृत्तियों या व्यवसायो से वह लाभ उठाते थे फिर भी उनमें निमग्न हो जाने से बहुत दूर रहते थे, सर्वदा विद्यालय में प्रवेश करने पर युवको और ज्ञानियों को उपदेश देते थे, व्यभिचार के अड्डो या वेश्यालयों में प्रवेश करने पर सब को कामूकता की बुराइयाँ स्पष्ट करते थे, मद्य-विक्रेता की दुकान पर पहुँचने पर सबको उच्चतर पदार्थों की खोज के लिए प्रेरित करते थे, धनिको के बीच सद्धर्म का उपदेश देते थे, क्षत्रियो को शान्ति सिखाते थे, ब्राह्मणों के बीच पहुँचने पर उनका दर्प दूर करते थे, महामत्रियो को न्याय का उपदेश देते थे, राजकुमारों को निष्ठा कम कीजिये और पितृ-भक्ति का उपदेश देते थे, राजदरवार की महिलाओ को ईमानदारी का उपदेश देते थे, जनता मे सद्गुणो की कामना और रक्षा का उपदेश देते थे ।" अपने अद्वैत अध्यात्म शास्त्र और आस्तिक-धर्म से समन्वित, महायान शाखा के अनेक सिद्धान्त और उनके विस्तृत प्रयोग भगवद्गीता के उपदेशो से मिलते जुलते, उनके
गौतम वृद्ध और उनके उपदेश प्रतीक रूपो को अपने में सम्मिलित कर सकती है। जो लोग इस व्यापक उदार दृष्टिकोण के लिए अभी तैयार नहीं है उनके लिए वह हीनयान सम्प्रदाय का उपयोग करती है। ज्ञानियों को सत्य का दर्शन कराने के अनेक मार्ग है । अन्तर्गढ- सत्ता की विविध अभिव्यक्तियो के रूप में अनेक प्रतीको को सहन और स्वीकार करने की क्षमता ने महायान धर्म को यह शक्ति दी है कि वह अपने आपको नवीन परिस्थितियों के अनुकूल बना सके । उसका अध्यात्म-गास्त्र और धर्म हिन्दू धर्म के सवल प्रभाव में विकसित हुआ है। हिन्दू धर्म की देव-सृष्टि से अनेक देवो श्रौर देवियो को स्वीकार कर लिया गया है। महायान में निर्वाण का वर्णन ऐसा किया गया है कि वह पहले से ही सम्पन्न सत्य तथ्य है । उसका निर्माण नहीं होता। जैसे ही हमारा ज्ञान नष्ट होता है निर्वाण हमें मिल जाता है। निर्वाण का अर्जन या सर्जन नहीं होता। निर्वाण न मुक्तानुवन्धी है और न उसका विनाश हो सकता है। समस्त प्रयोग-सिद्ध विभेदो और पदार्थों से वह ऊपर है । ज्ञान और प्रेम उसमें एकाकार है। जिन लोगो में बोधिचित्त सजग हो जाता है वे भूतसमुदाय की रक्षा के लिए अपने आपको बलिदान कर देते है । यह सामारिक जीवन निर्वाण की सत्ता से हमे दूर नहीं ले जाता । उपपन्नता भी अस्तित्व ही है । यद्यपि यह जीवन प्रसत् है फिर भी अर्थ - हीन नहीं है । विमलकीर्ति-सूत्र का कथन है ---"जैसे कमल पुष्प सूखी धरती पर नहीं उत्पन्न होता वल्कि जलमय अन्व कीचड से उत्पन्न होता है, उसी प्रकार बोधिचित्त या ज्ञानमय हृदय की उत्पत्ति होती है। कामना और पाप के पक से ही बुद्धत्व के वीज प्रकुरित और विकसित होते है। जब हम इस वृद्ध- प्रकृति, बोधिचित्त का विकास कर लेते हैं जो बुद्ध को तात्विक प्रकृति है, तब हम समस्त बुद्धो के साथ एक हो जाते है, तव हमें प्रज्ञा अथवा आध्यात्मिक ज्ञान दीप्ति और करुणा अथवा निस्वार्थ परहितरति प्राप्त हो जाती है । महायान बौद्ध धर्म ने लोगो को न केवल बुद्धो के स्वर्ग का आह्वान दिया बल्कि धरती पर एक व्यवस्थित और स्वस्थ जीवन की भी प्रेरणा दी। उसका उद्देश्य था सभी मनुष्यो को सुखी बनाना । ससार में जीवन को प्रेरणा धर्म-भावना से मिलनी चाहिए। जैसे अर्हत का आदर्श हटा कर उसका स्थान बोधिसत्व के प्रदर्श ने ले लिया, ठीक उसी प्रकार तापस के आदर्श का स्थान गृहस्थ के आदर्श ने ले लिया । कामना यह थी कि ससार में रहा जाय पर ससार का बन कर नही। महन्तो की परम्परा चलती रही पर देव-विभूति- सम्पन्न सामान्य व्यक्ति को भी गौरव-पद दिया गया । संस्कृत ग्रन्थ विमलकीर्तिनिर्देश' में वर्णित विमलकीर्ति का चरित्र बताता है कि कैसे हम लोगो में घुल-मिल सकते है, घरो में रह सकते हैं सामान्य लोगो और पापियो के मित्र बन सकते है और फिर भी साधु बने रह सकते है । विमलकीति बैशाली में रहते थे पर 'केवल जीवो की रक्षा के आवश्यक उपाय के निमित्त अत्यन्त सम्पन्न, सर्वदा दीनो की चिन्ता करने वाले आत्मानुशासन में विशुद्ध, समस्त धार्मिक उपदेशो का पालन करने वाले, शान्ति के अभ्यास से समस्त क्रोध दूर करते हुए, उद्यम के अभ्यास से समस्त आलस्य दूर करते हुए, एकाग्र चिन्तन से समस्त क्षोभ मिटाते हुए, ज्ञान की पूर्णता से समस्त प्रज्ञान दूर करते हुए, यद्यपि वह सामान्य गृहस्थ मात्र थे फिर भी शुद्ध विहारिक अनुशासन मूल संस्कृत ग्रन्थ खो गया है पर उसके चीनी रूपान्तर का अंग्रेजी अनुवाद प्रोफेसर इदुमो ने किया है --Eastern Buddhist III, का पालन करते थे, यद्यपि उनके एक पत्नी थी और बच्चे थे फिर भी वह शुद्ध धर्माचरण का पालन करते थे, यद्यपि वह परिवार से घिरे थे, फिर भी वह सासारिक जीवन से अपने को बिलकुल अलग रखते थे, यद्यपि हीरक जटित सासारिक आभूषणो का प्रयोग करते थे फिर भी वह आध्यात्मिक विभा से विभासित थे, यद्यपि खाते-पीते थे फिर भी चिन्तन के श्राह्लाद से प्रानन्द पाते थे, यद्यपि द्यूतशालाम्रो मे जाते थे फिर भी जुग्रारी लोगो को सत्-पथ का प्रदर्शन करते थे, यद्यपि किम्बदन्तियो और पाखण्ड-पन्थो के ससर्ग में आते थे फिर भी अपनी सत्य - श्रद्धा पर कभी नने देते थे, यद्यपि सासारिक विद्या का उन्हें गम्भीर ज्ञान या फिर भी बुद्ध द्वारा उपदिष्ट प्राध्यात्मिक तथ्यों में ही उन्हें सर्वदा आनन्द मिलता था, यद्यपि सभी प्रकार की वृत्तियों या व्यवसायो से वह लाभ उठाते थे फिर भी उनमें निमग्न हो जाने से बहुत दूर रहते थे, सर्वदा विद्यालय में प्रवेश करने पर युवको और ज्ञानियों को उपदेश देते थे, व्यभिचार के अड्डो या वेश्यालयों में प्रवेश करने पर सब को कामूकता की बुराइयाँ स्पष्ट करते थे, मद्य-विक्रेता की दुकान पर पहुँचने पर सबको उच्चतर पदार्थों की खोज के लिए प्रेरित करते थे, धनिको के बीच सद्धर्म का उपदेश देते थे, क्षत्रियो को शान्ति सिखाते थे, ब्राह्मणों के बीच पहुँचने पर उनका दर्प दूर करते थे, महामत्रियो को न्याय का उपदेश देते थे, राजकुमारों को निष्ठा कम कीजिये और पितृ-भक्ति का उपदेश देते थे, राजदरवार की महिलाओ को ईमानदारी का उपदेश देते थे, जनता मे सद्गुणो की कामना और रक्षा का उपदेश देते थे ।" अपने अद्वैत अध्यात्म शास्त्र और आस्तिक-धर्म से समन्वित, महायान शाखा के अनेक सिद्धान्त और उनके विस्तृत प्रयोग भगवद्गीता के उपदेशो से मिलते जुलते, उनके
शिवपुरी। स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर लिटिल ऐंजिल विद्यालय में गायत्री मंत्रों के साथ दीप यज्ञ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर केएल राय, कार्यक्रम अध्यक्षता महिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष पूनम कुलश्रेष्ठ ने की वहीं कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि डॉ. एके मिश्रा मंचासीन थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्व प्रथम स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्प माला एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात गायत्री मंत्रों का उच्चाचरण करते हुए दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मु य अतिथि केएल राय ने छात्र एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के बताए मार्ग पर चलें और उन्होंने छुआछुत जैसी कुरूतियों को दूर कर आगे बढने का प्रयास करें। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीे महिला शहर अध्यक्ष श्रीमती पूनम कुलश्रेष्ठ ने कहानियों के माध्यम से विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकाश डाला साथ ही विवेकानंद जी के बताए मार्ग पर चलने का छात्रों से आह्वान किया। वहीं विशिष्ठ अतिथि डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रूको की पंक्ति को दोहराते हुए स्वामी जी को याद किया। मंच का संचालन कु. प्रीति ओझा ने किया वहीं कार्यक्रम के अंत में विद्यालय संचालक रवि कुलश्रेष्ठ ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रीमती ममता शर्मा, उर्मिला सिंह, कृष्णा झा, ललिता झा, फराह खांन, प्रीतिक्षा कौशल, अनिल जारौलिया, आनंद जाटव उपस्थित थे।
शिवपुरी। स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर लिटिल ऐंजिल विद्यालय में गायत्री मंत्रों के साथ दीप यज्ञ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर केएल राय, कार्यक्रम अध्यक्षता महिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष पूनम कुलश्रेष्ठ ने की वहीं कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि डॉ. एके मिश्रा मंचासीन थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्व प्रथम स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्प माला एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात गायत्री मंत्रों का उच्चाचरण करते हुए दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मु य अतिथि केएल राय ने छात्र एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के बताए मार्ग पर चलें और उन्होंने छुआछुत जैसी कुरूतियों को दूर कर आगे बढने का प्रयास करें। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीे महिला शहर अध्यक्ष श्रीमती पूनम कुलश्रेष्ठ ने कहानियों के माध्यम से विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकाश डाला साथ ही विवेकानंद जी के बताए मार्ग पर चलने का छात्रों से आह्वान किया। वहीं विशिष्ठ अतिथि डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रूको की पंक्ति को दोहराते हुए स्वामी जी को याद किया। मंच का संचालन कु. प्रीति ओझा ने किया वहीं कार्यक्रम के अंत में विद्यालय संचालक रवि कुलश्रेष्ठ ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रीमती ममता शर्मा, उर्मिला सिंह, कृष्णा झा, ललिता झा, फराह खांन, प्रीतिक्षा कौशल, अनिल जारौलिया, आनंद जाटव उपस्थित थे।
PM Kisan Yojana : अगर आप पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं और आपकी किस्त रुक गई है तो आप आधार की मदद से इस तरह से नाम बदल सकते हैं. ये आसान स्टेप फॉलों करें. PM Kisan Yojana : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की अब तक 13 किस्तें किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है. अब लाभार्थियों को 14वीं किस्त का इंतजार है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 जुलाई को पीएम किसान योजना की 14वीं किस्त पात्र किसानों के खाते में भेज दी जाएगी. ऐसे में अगर आपका नाम आधार में गड़बड़ हो गया है और आपकी किस्त रुक गई है तो इसे जल्दी ही ठीक कर लें. बस कुछ आसान तरीके अपना कर आधार से नाम सही कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं आधार से नाम कैसे बदल सकते हैं? यदि आपकी भी पीएम किसान योजना की किस्त रुक गई है तो आप इस योजना के तहत ऐसे नाम बदल सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ आसान स्टेप फॉलो करने होंगे. सबसे पहले DBT एग्रीकल्चर वेबसाइट ने नाम एडिट करने के बारे में बताया है कि किस तरह आप अपना नाम एडिट कर सकते हैं. बता दें इस योजना की अभी 13वीं दी गई है. इस योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपये दिए जाते हैं. सबसे पहले पीएम किसान योजना के पोर्टल पर जाएं और वहां पर आपको Change Beneficiary Name वाले ऑप्शन पर जाना होगा. इसमें आपको आधार नंबर और अन्य जानकारी देनी होगी. इसके बाद आधार डेटाबेस में सेव हो जाएगा और आपसे नाम बदलने को कहेगा. यदि आधार डेटाबेस में सेव नहीं हो पा रहा है तो आपको जिला कार्यालय में संपर्क करना होगा. इसके बाद आपको अगले स्टेप में रजिस्ट्रेशन नंबर, किसान का नाम, मोबाइल नंबर, उपजिला, गांव और आधार नंबर दिखाई देगा. अब आपको केवाईसी अपडेट करना होगा. इसमें आप आधार के अनुसार अपना नाम, जन्म तिथि और अन्य जानकारी अपडेट कर दें. इसके बाद आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी और इसमें आधार सीडिंग की जाएगी. अगर इसमें आपका आधार लिंक नहीं है तो उसे लिंक कराने का निर्देश दिया जाएगा.
PM Kisan Yojana : अगर आप पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं और आपकी किस्त रुक गई है तो आप आधार की मदद से इस तरह से नाम बदल सकते हैं. ये आसान स्टेप फॉलों करें. PM Kisan Yojana : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अब तक तेरह किस्तें किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है. अब लाभार्थियों को चौदहवीं किस्त का इंतजार है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अट्ठाईस जुलाई को पीएम किसान योजना की चौदहवीं किस्त पात्र किसानों के खाते में भेज दी जाएगी. ऐसे में अगर आपका नाम आधार में गड़बड़ हो गया है और आपकी किस्त रुक गई है तो इसे जल्दी ही ठीक कर लें. बस कुछ आसान तरीके अपना कर आधार से नाम सही कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं आधार से नाम कैसे बदल सकते हैं? यदि आपकी भी पीएम किसान योजना की किस्त रुक गई है तो आप इस योजना के तहत ऐसे नाम बदल सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ आसान स्टेप फॉलो करने होंगे. सबसे पहले DBT एग्रीकल्चर वेबसाइट ने नाम एडिट करने के बारे में बताया है कि किस तरह आप अपना नाम एडिट कर सकते हैं. बता दें इस योजना की अभी तेरहवीं दी गई है. इस योजना के तहत सालाना छः हजार रुपये दिए जाते हैं. सबसे पहले पीएम किसान योजना के पोर्टल पर जाएं और वहां पर आपको Change Beneficiary Name वाले ऑप्शन पर जाना होगा. इसमें आपको आधार नंबर और अन्य जानकारी देनी होगी. इसके बाद आधार डेटाबेस में सेव हो जाएगा और आपसे नाम बदलने को कहेगा. यदि आधार डेटाबेस में सेव नहीं हो पा रहा है तो आपको जिला कार्यालय में संपर्क करना होगा. इसके बाद आपको अगले स्टेप में रजिस्ट्रेशन नंबर, किसान का नाम, मोबाइल नंबर, उपजिला, गांव और आधार नंबर दिखाई देगा. अब आपको केवाईसी अपडेट करना होगा. इसमें आप आधार के अनुसार अपना नाम, जन्म तिथि और अन्य जानकारी अपडेट कर दें. इसके बाद आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी और इसमें आधार सीडिंग की जाएगी. अगर इसमें आपका आधार लिंक नहीं है तो उसे लिंक कराने का निर्देश दिया जाएगा.
की शब्दावली द्वारा उसकी परिभाषा निर्मित करने का प्रयास भी हुआ । साधारणतः कुछ अन्य लेखकों ने हास्य का अध्ययन सामाजिक क्षेत्र में ही सोमित रखा और हास्य की प्रायोगिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुये यह सिद्धान्तरूप में निश्चित करना चाहा कि हास्य समाज एवं व्यक्ति का सफल नियंत्रणकर्त्ता है और साहित्य में उसका प्रयोग भी इसी दृष्टिकोण से होना चाहिये; और जो सिद्धान्त हास्य की सामाजिक उपयोगिता का लेखा न रख पायेंगे एकांगी होंगे । हास्य की आत्मा को उपयोगिता तथा प्रायोगिकता के बंधन में डालने वाले विचारकों ने कढ़ा/चत हास्य के उन अवसरों पर किंचित मात्र भी दृष्टिपात नहीं किया जहाँ उपयोगिता के दर्शन किसी भी रूप में नहीं होते । हास्य की ऐतिहासिक गाथा के अन्तर्गत हम देख चुके है कि हास्य का कोई प्रायोगिक रूप उस प्राचीन काल में न था। यही नहीं, वाल-जीवन के हास्य मे भी हमें प्रायोगिकता के दर्शन नहीं होंगे। विदूषक की उलझी हुई वेष-भूषा तथा उनका निरर्थक वार्तालाप चालकों को सतत आनन्ददायक रहा और वे हास्य प्रदर्शित करते रहे हैं । इसका सहज कारण यह हो सकता है कि बालक में प्रस्तुत सहज हास्य की मात्रा में एकाएक वृद्धि हो जाती और वह खिलखिलाहट अथवा अट्टहास का रूप ले लेता है । हो सकता है कि कुछ खींचतान के पश्चात् हसें तर्करूप में, इन हास्यास्पद दृश्यों अथवा कायों में होनता अथवा अधोगति की भावना का भी आभास मिल जाय । परन्तु वस्तुतः जब ऐसे दृश्य अथवा कार्य हमारे सम्मुख प्रस्तुत होते हैं तो हमारी नैसर्गिक गांभीर्य की भावना सहमी हुई चुपचाप खड़ी रहती है; हम अपने को नियंत्रित रखते हैं : हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर एक प्रकार का अप्रत्याशित निग्रह विद्यमान रहता है । हास्यप्रद अथवा हास्यास्पद कार्य अथवा विवरण हमारे निग्रह को हटा देता है, हम कुछ क्षणों के लिये वह नियंत्रण तोड़ देते है; और स्वतंत्र होते ही हास्य की आभा फूट पढ़ती है । प्रायः मानसिक गांभीर्य अथवा नियन्त्रित भावों के स्वातंत्र्य द्वारा भी हास्य प्रस्फुटित होगा । जैसा कि हम पिछले पृष्ठों में उदाहरण द्वारा स्पष्ट कर चुके है कि जब किसी गंभीर अवसर पर कोई ऐसी घटना घट जाती है जो हमारा ध्यान एकाएक बटा कर उस गंभीर स्तर से गिरा देती है और उस गंभीर वातावरण में एक विचित्र लहर दौड जाती है तो हमारा नियंत्रित गांभीर्य एकाएक मुक्ति प्राप्त कर लेता है और उसी क्षण हम हास्य प्रदर्शित करने लगते हैं। जिस प्रकार ज्वर से पीड़ित व्यक्ति, बर्फ की टोपी सिर पर ही आँखें खोल देता है अथवा गंभीर भाषण सुनते हये कोई व्यक्ति.
की शब्दावली द्वारा उसकी परिभाषा निर्मित करने का प्रयास भी हुआ । साधारणतः कुछ अन्य लेखकों ने हास्य का अध्ययन सामाजिक क्षेत्र में ही सोमित रखा और हास्य की प्रायोगिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुये यह सिद्धान्तरूप में निश्चित करना चाहा कि हास्य समाज एवं व्यक्ति का सफल नियंत्रणकर्त्ता है और साहित्य में उसका प्रयोग भी इसी दृष्टिकोण से होना चाहिये; और जो सिद्धान्त हास्य की सामाजिक उपयोगिता का लेखा न रख पायेंगे एकांगी होंगे । हास्य की आत्मा को उपयोगिता तथा प्रायोगिकता के बंधन में डालने वाले विचारकों ने कढ़ा/चत हास्य के उन अवसरों पर किंचित मात्र भी दृष्टिपात नहीं किया जहाँ उपयोगिता के दर्शन किसी भी रूप में नहीं होते । हास्य की ऐतिहासिक गाथा के अन्तर्गत हम देख चुके है कि हास्य का कोई प्रायोगिक रूप उस प्राचीन काल में न था। यही नहीं, वाल-जीवन के हास्य मे भी हमें प्रायोगिकता के दर्शन नहीं होंगे। विदूषक की उलझी हुई वेष-भूषा तथा उनका निरर्थक वार्तालाप चालकों को सतत आनन्ददायक रहा और वे हास्य प्रदर्शित करते रहे हैं । इसका सहज कारण यह हो सकता है कि बालक में प्रस्तुत सहज हास्य की मात्रा में एकाएक वृद्धि हो जाती और वह खिलखिलाहट अथवा अट्टहास का रूप ले लेता है । हो सकता है कि कुछ खींचतान के पश्चात् हसें तर्करूप में, इन हास्यास्पद दृश्यों अथवा कायों में होनता अथवा अधोगति की भावना का भी आभास मिल जाय । परन्तु वस्तुतः जब ऐसे दृश्य अथवा कार्य हमारे सम्मुख प्रस्तुत होते हैं तो हमारी नैसर्गिक गांभीर्य की भावना सहमी हुई चुपचाप खड़ी रहती है; हम अपने को नियंत्रित रखते हैं : हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर एक प्रकार का अप्रत्याशित निग्रह विद्यमान रहता है । हास्यप्रद अथवा हास्यास्पद कार्य अथवा विवरण हमारे निग्रह को हटा देता है, हम कुछ क्षणों के लिये वह नियंत्रण तोड़ देते है; और स्वतंत्र होते ही हास्य की आभा फूट पढ़ती है । प्रायः मानसिक गांभीर्य अथवा नियन्त्रित भावों के स्वातंत्र्य द्वारा भी हास्य प्रस्फुटित होगा । जैसा कि हम पिछले पृष्ठों में उदाहरण द्वारा स्पष्ट कर चुके है कि जब किसी गंभीर अवसर पर कोई ऐसी घटना घट जाती है जो हमारा ध्यान एकाएक बटा कर उस गंभीर स्तर से गिरा देती है और उस गंभीर वातावरण में एक विचित्र लहर दौड जाती है तो हमारा नियंत्रित गांभीर्य एकाएक मुक्ति प्राप्त कर लेता है और उसी क्षण हम हास्य प्रदर्शित करने लगते हैं। जिस प्रकार ज्वर से पीड़ित व्यक्ति, बर्फ की टोपी सिर पर ही आँखें खोल देता है अथवा गंभीर भाषण सुनते हये कोई व्यक्ति.
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अनुसार देहली गेट थाना क्षेत्र की जली कोठी स्थित तीन मस्जिदों में महाराष्ट्र के मालेगांव से 11 लोगों की जमात आई थी। 29 मार्च को यह जमात बुलंदशहर चली गई थी। बुलंदशहर पुलिस ने इन जमातियों की मेडिकल जांच कराई थी, जिनमें दो जमातियों की कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। महाराष्ट्र के इन जमातियों से पूछताछ के बाद जली कोठी में जांच पड़ताल की गई तो कई लोग यहां संदिग्ध पाए जाने पर खलबली मच गई। इसके बाद पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम शनिवार को जली कोठी क्षेत्र को सील करने गई थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने टीम पर हमला बोल दिया, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा घायल हो गए। सूचना पर डीएम और एसएसपी भारी पुलिस बल लेकर पहुंचे और हालात काबू करते हुए पूरा इलाका सील करा दिया। मौके से दरी वाली मस्जिद जली कोठी के मुतवल्ली हाजी इरफान समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया गया कि शुक्रवार देर रात पुलिस- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जली कोठी से तीन लोगों को कोरोना संदिग्ध मानकर मेडिकल जांच के लिए भिजवाया था। जहां इन तीनों लोगों को कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हो गई।
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अनुसार देहली गेट थाना क्षेत्र की जली कोठी स्थित तीन मस्जिदों में महाराष्ट्र के मालेगांव से ग्यारह लोगों की जमात आई थी। उनतीस मार्च को यह जमात बुलंदशहर चली गई थी। बुलंदशहर पुलिस ने इन जमातियों की मेडिकल जांच कराई थी, जिनमें दो जमातियों की कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। महाराष्ट्र के इन जमातियों से पूछताछ के बाद जली कोठी में जांच पड़ताल की गई तो कई लोग यहां संदिग्ध पाए जाने पर खलबली मच गई। इसके बाद पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम शनिवार को जली कोठी क्षेत्र को सील करने गई थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने टीम पर हमला बोल दिया, जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा घायल हो गए। सूचना पर डीएम और एसएसपी भारी पुलिस बल लेकर पहुंचे और हालात काबू करते हुए पूरा इलाका सील करा दिया। मौके से दरी वाली मस्जिद जली कोठी के मुतवल्ली हाजी इरफान समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया गया कि शुक्रवार देर रात पुलिस- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जली कोठी से तीन लोगों को कोरोना संदिग्ध मानकर मेडिकल जांच के लिए भिजवाया था। जहां इन तीनों लोगों को कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हो गई।
श्रीलंका वर्तमान दौर में सबसे खराब राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जिसको लेकर उसकी आवाम में खलबली मची है। जनता बागी हो गई है और उसके तेवर देख राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अंडरग्राउंड हो गए हैं। पड़ोसी मुल्क में विद्रोह इस कदर भड़का है कि राजनेता भागे-भागे फिर रहे हैं। राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री निवास पर प्रदर्शनकारी कब्जा जमा कर बैठ गए हैं। सड़कों पर संग्राम छिड़ा है। प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। कभी श्रीलंका के हीरो और टर्मिनेटर कहे जाने वाले गोटाबाया वर्तमान तारीख में सबसे बड़े विलेन बन गए हैं। वहीं बीते दिनों श्रीलंका के आम लोगों के साथ प्रदर्शन में श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर्स भी देश के लोगों के साथ खड़े दिखाई दिए। श्रीलंका संकट पर देश के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सनथ जयसूर्या ने कहा कि संकट के शुरूआत से ही भारत ने श्रीलंका को मदद और सहायता पहुंचाई है इसलिए हम भारत के शुक्रगुजार हैं। इस संकट में भारत ने एक बड़ा किरदार निभाया है। मुझे लगता है कि श्रीलंका में जो हो रहा है वह सारे देश इसको बहुत नज़दीक से देख रहे हैं। बता दें कि पूर्व श्रीलंकाई कप्तान सनथ जयासूर्या प्रदर्शनकारियों के सपोर्ट में सड़क पर भी नजर आए थे। कोलंबो में राष्ट्रपति भवन के पास जमा प्रदर्शनकारियों की भीड़ में सनथ जयसूर्या भी पहुंच गए थे। जयसूर्या ने इसे लेकर कुछ फोटो भी शेयर किए। वहीं पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने प्रदर्शन कर रहे लोगों का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, 'यह हमारे भविष्य के लिए है। संगकारा के टीममेट महेला जयवर्धने ने भी उनके इस ट्वीट को रीट्वीट किया।
श्रीलंका वर्तमान दौर में सबसे खराब राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जिसको लेकर उसकी आवाम में खलबली मची है। जनता बागी हो गई है और उसके तेवर देख राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अंडरग्राउंड हो गए हैं। पड़ोसी मुल्क में विद्रोह इस कदर भड़का है कि राजनेता भागे-भागे फिर रहे हैं। राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री निवास पर प्रदर्शनकारी कब्जा जमा कर बैठ गए हैं। सड़कों पर संग्राम छिड़ा है। प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। कभी श्रीलंका के हीरो और टर्मिनेटर कहे जाने वाले गोटाबाया वर्तमान तारीख में सबसे बड़े विलेन बन गए हैं। वहीं बीते दिनों श्रीलंका के आम लोगों के साथ प्रदर्शन में श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर्स भी देश के लोगों के साथ खड़े दिखाई दिए। श्रीलंका संकट पर देश के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सनथ जयसूर्या ने कहा कि संकट के शुरूआत से ही भारत ने श्रीलंका को मदद और सहायता पहुंचाई है इसलिए हम भारत के शुक्रगुजार हैं। इस संकट में भारत ने एक बड़ा किरदार निभाया है। मुझे लगता है कि श्रीलंका में जो हो रहा है वह सारे देश इसको बहुत नज़दीक से देख रहे हैं। बता दें कि पूर्व श्रीलंकाई कप्तान सनथ जयासूर्या प्रदर्शनकारियों के सपोर्ट में सड़क पर भी नजर आए थे। कोलंबो में राष्ट्रपति भवन के पास जमा प्रदर्शनकारियों की भीड़ में सनथ जयसूर्या भी पहुंच गए थे। जयसूर्या ने इसे लेकर कुछ फोटो भी शेयर किए। वहीं पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने प्रदर्शन कर रहे लोगों का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, 'यह हमारे भविष्य के लिए है। संगकारा के टीममेट महेला जयवर्धने ने भी उनके इस ट्वीट को रीट्वीट किया।
भी पूज्यश्री की याद तक भी भूल जाओगे। थोड़ी देर के लिए यह हम मान भी लें, कि जिन्होंने पूज्यश्री को देखा है, जिनको परिचय है वे कदाचित् न भी भूलें तो भी उनकी भावी संतान को तो नाम भी सुनना एक तरह से कठिन हो जायेगा ऐसी अवस्था में हम और आपका कर्त्तव्य है कि हम स्वर्गीय श्री श्री 1008 श्री पूज्यश्री श्रीलालजी महाराज का सच्चा स्मारक बनाने को हर प्रान्त, देश, शहर और गांव में 'श्रीलालजी फण्ड' की स्थापना करके स्मारक के लिए चंदा करें । जैन-धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो कृतघ्नता के दोष से बचा हुआ है इसलिये आईये, भ्रातृगण ! हम अपने माननीय, पूज्यनीय जैन धर्म के अनन्य भक्त, निःस्वार्थ-प्रेमी, पूज्य श्री श्रीलालजी महाराज के स्मारक रूप में कोई संस्था बनाकर अपने कर्तव्य का पालन करें। यों तो जैन समाज में आजकल छोटीमोटी कितनी ही संस्थायें हैं लेकिन हमारी राय में इस पवित्र आत्मा की एक ऐसी आदर्श संस्था होनी चाहिये जैसे वे आदर्श पूज्य, मुनि, आचार्य प्रभावशाली और जैन धर्म के स्तम्भ थे । आपका जन्म सं. 1926 में ग्राम टोंक ( राजपूताना) में हुआ था । आपके पिताश्री का नाम चुन्नीलालजी ओसवाल था । वे बड़े ही धर्मात्मा थे। आपने सं. 1945 माघ सुदी 5 को दीक्षा ली थी । पश्चात सं. 1957 में आपको पूज्यपदवी की प्राप्ति हुई। तब से आप अहर्निश धर्म चर्चा में ही अपना समय बिताने लगे व सदा अपने जीवन को धार्मिक जीवन बनाने में ही लगे रहते थे । ऐसे महात्मा के असमय में उठ जाने से जैन धर्म को बड़ी हानि पहुंची है तथा शीघ्र ही इसकी पूर्ति होना भी असंभव है। इस समय में उनके शोक-प्रकाश में सभी जगह सभायें हो रही है। इसी वैशाख महीने में हमने आपकी अजमेर में खूब सेवा की तब आपकी बातों से मालूम हुआ कि जैन पथ प्रदर्शक पर आपकी विशेष कृपा थी । आप इस पत्र को जैन जाति को उठाने वाला समझते थे। इनके शोक में प्रदर्शक का कार्यालय बराबर तीन दिन तक बंद रहा। कार्यालय ने इस शोक संवाद को हर एक के कानों तक पहुंचाया। हमने अपने भाइयों से आशा की थी कि ज्योंही वे इस शोक समाचार को सुनेंगे अपने-अपने वहां शोक सभाएं करेंगे तथा एक बड़ी भारी सभा संगठित करके वे 'श्रीलाल जैन फण्ड' की स्थापना करेंगे।' मुम्बई समाचार में से (लेखक - श्रीयुत् चुन्नीलाल नागजी बोरा, राजकोट) 'साम्प्रत समय में अशांति, अज्ञान और जीवन कलह का तीक्ष्ण साम्राज्य जगत में सब तरफ फैला हुआ है। ऐसे समय में पूज्य महाराज श्री रण मां एक वेट समान' थे और संसार के विविध तापों से तप्त जीवों को सिर्फ यह एक ही दिल की शांति और विश्वास मिलने का पवित्र स्थान था वह भी जैन कौम के हीन भाग्य से नष्ट हो गया और जैन धर्म तथा कौम को बड़ा भारी धक्का लगा तथा उनकी यह कमी बहुत समय तक पूर्ण होना कठिन है। हिन्द के भिन्न-भिन्न भाग-पंजाब, राजपूताना, मारवाड़, मेवाड़ मालवां, कच्छ काठियावाड़, गुजरात, दक्षिण आदि के निवासी हजारों और लाखों जैनी पूज्य महाराज श्री पर अत्यंन्त पूज्यमाव रखते थे और तरणतारण रूप जहाज के समान वीतरागी साधु के नमूने के तुल्य समझते थे। चौथे आरे की प्रसादी के समान श्री महावीर स्वामी विचरते थे। उस खुदाई समय के प्रसाद स्वरूप में पूज्य आचार्य श्री की गिनती होने से उनके अंतिम मुखमंडल के दर्शनार्थ एवं महाप्रभावशाली विव्यवाणी और जगत् में सर्वत्र सुख और शांति फैलाने वाले पवित्र सोधामृत के पान करने के के लिये प्रतिवर्ष चातुमांस में हिन्द के मान भागों में से हजारों जैन भाई एकत्रित हो इस दुःखद काल
भी पूज्यश्री की याद तक भी भूल जाओगे। थोड़ी देर के लिए यह हम मान भी लें, कि जिन्होंने पूज्यश्री को देखा है, जिनको परिचय है वे कदाचित् न भी भूलें तो भी उनकी भावी संतान को तो नाम भी सुनना एक तरह से कठिन हो जायेगा ऐसी अवस्था में हम और आपका कर्त्तव्य है कि हम स्वर्गीय श्री श्री एक हज़ार आठ श्री पूज्यश्री श्रीलालजी महाराज का सच्चा स्मारक बनाने को हर प्रान्त, देश, शहर और गांव में 'श्रीलालजी फण्ड' की स्थापना करके स्मारक के लिए चंदा करें । जैन-धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो कृतघ्नता के दोष से बचा हुआ है इसलिये आईये, भ्रातृगण ! हम अपने माननीय, पूज्यनीय जैन धर्म के अनन्य भक्त, निःस्वार्थ-प्रेमी, पूज्य श्री श्रीलालजी महाराज के स्मारक रूप में कोई संस्था बनाकर अपने कर्तव्य का पालन करें। यों तो जैन समाज में आजकल छोटीमोटी कितनी ही संस्थायें हैं लेकिन हमारी राय में इस पवित्र आत्मा की एक ऐसी आदर्श संस्था होनी चाहिये जैसे वे आदर्श पूज्य, मुनि, आचार्य प्रभावशाली और जैन धर्म के स्तम्भ थे । आपका जन्म सं. एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में ग्राम टोंक में हुआ था । आपके पिताश्री का नाम चुन्नीलालजी ओसवाल था । वे बड़े ही धर्मात्मा थे। आपने सं. एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस माघ सुदी पाँच को दीक्षा ली थी । पश्चात सं. एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में आपको पूज्यपदवी की प्राप्ति हुई। तब से आप अहर्निश धर्म चर्चा में ही अपना समय बिताने लगे व सदा अपने जीवन को धार्मिक जीवन बनाने में ही लगे रहते थे । ऐसे महात्मा के असमय में उठ जाने से जैन धर्म को बड़ी हानि पहुंची है तथा शीघ्र ही इसकी पूर्ति होना भी असंभव है। इस समय में उनके शोक-प्रकाश में सभी जगह सभायें हो रही है। इसी वैशाख महीने में हमने आपकी अजमेर में खूब सेवा की तब आपकी बातों से मालूम हुआ कि जैन पथ प्रदर्शक पर आपकी विशेष कृपा थी । आप इस पत्र को जैन जाति को उठाने वाला समझते थे। इनके शोक में प्रदर्शक का कार्यालय बराबर तीन दिन तक बंद रहा। कार्यालय ने इस शोक संवाद को हर एक के कानों तक पहुंचाया। हमने अपने भाइयों से आशा की थी कि ज्योंही वे इस शोक समाचार को सुनेंगे अपने-अपने वहां शोक सभाएं करेंगे तथा एक बड़ी भारी सभा संगठित करके वे 'श्रीलाल जैन फण्ड' की स्थापना करेंगे।' मुम्बई समाचार में से 'साम्प्रत समय में अशांति, अज्ञान और जीवन कलह का तीक्ष्ण साम्राज्य जगत में सब तरफ फैला हुआ है। ऐसे समय में पूज्य महाराज श्री रण मां एक वेट समान' थे और संसार के विविध तापों से तप्त जीवों को सिर्फ यह एक ही दिल की शांति और विश्वास मिलने का पवित्र स्थान था वह भी जैन कौम के हीन भाग्य से नष्ट हो गया और जैन धर्म तथा कौम को बड़ा भारी धक्का लगा तथा उनकी यह कमी बहुत समय तक पूर्ण होना कठिन है। हिन्द के भिन्न-भिन्न भाग-पंजाब, राजपूताना, मारवाड़, मेवाड़ मालवां, कच्छ काठियावाड़, गुजरात, दक्षिण आदि के निवासी हजारों और लाखों जैनी पूज्य महाराज श्री पर अत्यंन्त पूज्यमाव रखते थे और तरणतारण रूप जहाज के समान वीतरागी साधु के नमूने के तुल्य समझते थे। चौथे आरे की प्रसादी के समान श्री महावीर स्वामी विचरते थे। उस खुदाई समय के प्रसाद स्वरूप में पूज्य आचार्य श्री की गिनती होने से उनके अंतिम मुखमंडल के दर्शनार्थ एवं महाप्रभावशाली विव्यवाणी और जगत् में सर्वत्र सुख और शांति फैलाने वाले पवित्र सोधामृत के पान करने के के लिये प्रतिवर्ष चातुमांस में हिन्द के मान भागों में से हजारों जैन भाई एकत्रित हो इस दुःखद काल
मुंबईः रिलायंस जियो ने मंगलवार को जम्मू और कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर में अपनी True 5जी सेवाओं की शुरुआत की घोषणा की है। कंपनी के एक बयान के मुताबिक, लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने जम्मू के राजभवन में Jio True 5G सेवाओं की शुरुआत की। उल्लेखनीय है कि, जम्मू में आज से हाई-स्पीड इंटरनेट, लो-लेटेंसी, स्टैंडअलोन True 5जी सेवाओं के तकनीकी लाभ इन शहरों के लोगों और व्यवसायों को उपलब्ध कराए जाएंगे। बयान के अनुसार, लॉन्च इवेंट में Jio True 5G के परिवर्तनकारी लाभ और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और भारत के लिए महत्वपूर्ण अन्य प्रमुख क्षेत्रों में इस इमर्सिव तकनीक के अनुप्रयोग का प्रदर्शन किया गया। इन क्षेत्रों में पीढ़ीगत उन्नति की एक झलक क्रांतिकारी एआर-वीआर डिवाइस जियो ग्लास के माध्यम से प्रदर्शित की गई।
मुंबईः रिलायंस जियो ने मंगलवार को जम्मू और कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर में अपनी True पाँचजी सेवाओं की शुरुआत की घोषणा की है। कंपनी के एक बयान के मुताबिक, लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने जम्मू के राजभवन में Jio True पाँचG सेवाओं की शुरुआत की। उल्लेखनीय है कि, जम्मू में आज से हाई-स्पीड इंटरनेट, लो-लेटेंसी, स्टैंडअलोन True पाँचजी सेवाओं के तकनीकी लाभ इन शहरों के लोगों और व्यवसायों को उपलब्ध कराए जाएंगे। बयान के अनुसार, लॉन्च इवेंट में Jio True पाँचG के परिवर्तनकारी लाभ और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और भारत के लिए महत्वपूर्ण अन्य प्रमुख क्षेत्रों में इस इमर्सिव तकनीक के अनुप्रयोग का प्रदर्शन किया गया। इन क्षेत्रों में पीढ़ीगत उन्नति की एक झलक क्रांतिकारी एआर-वीआर डिवाइस जियो ग्लास के माध्यम से प्रदर्शित की गई।
बिलासपुर. ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट में गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए सीबीएसई अब अधिक सख्ती बरतने जा रहा है। 25 जुलाई को आयोजित एआईपीएमटी के लिए सीबीएसई ने ड्रेस कोड लागू कर दिया है, अब परीक्षार्थियों को खुली चप्पल व बिना बटन वाली कमीज पहनकर परीक्षा देनी होगी। वहीं परीक्षार्थियों के चश्मा, बेल्ट, कंगन, झुमका, नोज रिंग, अंगूठी सहित कई तरह की श्रंगार सामग्रियों से सजधजकर परीक्षा देने पर बैन लगा दिया गया है। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट कड़ी निगरानी के बीच कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को सीबीएसई ने 25 जुलाई को आयोजित एआईपीएमटी के परीक्षार्थियों के लिए गाइडलाइन जारी किया है। इस बार सीबीएसई ने एआईपीएमटी में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए ड्रेसकोड लागू कर दिया है, जिसके अनुसार स्टूडेंट्स जूते पहनकर परीक्षा नहीं दे सकेंगे, परीक्षार्थी को खुली चप्पल पहनकर आने निर्देशित किया गया है। इसी तरह कपड़े में हल्की आधी आस्तीऩ, आधी बाजू का कमीज व कुर्ता जिस पर बड़े बटन, जड़ाउ पिन या कोई बैज, फूल इत्यादि न लगा हो यानी साधारण टी-शर्ट पहनकर आने कहा गया है। इसी तरह से सलवार/पतलून इत्यादि पहनने निर्देशित किया गया है। ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट 3 मई को आयोजित की गई गया था, लेकिन बाद में नकल प्रकरण सामने आने पर कोर्ट ने इसे दूसरी बार आयोजित कराने के आदेश दिए थे। अब यह परीक्षा 25 जुलाई को हो रही है, जिसके लिए सीबीएसई ने नए सिरे से गाइड लाइन जारी किया है।
बिलासपुर. ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट में गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए सीबीएसई अब अधिक सख्ती बरतने जा रहा है। पच्चीस जुलाई को आयोजित एआईपीएमटी के लिए सीबीएसई ने ड्रेस कोड लागू कर दिया है, अब परीक्षार्थियों को खुली चप्पल व बिना बटन वाली कमीज पहनकर परीक्षा देनी होगी। वहीं परीक्षार्थियों के चश्मा, बेल्ट, कंगन, झुमका, नोज रिंग, अंगूठी सहित कई तरह की श्रंगार सामग्रियों से सजधजकर परीक्षा देने पर बैन लगा दिया गया है। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट कड़ी निगरानी के बीच कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को सीबीएसई ने पच्चीस जुलाई को आयोजित एआईपीएमटी के परीक्षार्थियों के लिए गाइडलाइन जारी किया है। इस बार सीबीएसई ने एआईपीएमटी में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए ड्रेसकोड लागू कर दिया है, जिसके अनुसार स्टूडेंट्स जूते पहनकर परीक्षा नहीं दे सकेंगे, परीक्षार्थी को खुली चप्पल पहनकर आने निर्देशित किया गया है। इसी तरह कपड़े में हल्की आधी आस्तीऩ, आधी बाजू का कमीज व कुर्ता जिस पर बड़े बटन, जड़ाउ पिन या कोई बैज, फूल इत्यादि न लगा हो यानी साधारण टी-शर्ट पहनकर आने कहा गया है। इसी तरह से सलवार/पतलून इत्यादि पहनने निर्देशित किया गया है। ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट तीन मई को आयोजित की गई गया था, लेकिन बाद में नकल प्रकरण सामने आने पर कोर्ट ने इसे दूसरी बार आयोजित कराने के आदेश दिए थे। अब यह परीक्षा पच्चीस जुलाई को हो रही है, जिसके लिए सीबीएसई ने नए सिरे से गाइड लाइन जारी किया है।
इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त विश्वविध्यालय से 12वीं,BAMS, BHMS, M. E/M. Tech,डिप्लोमा प्राप्त होना ज़रूरी है. इस पोस्ट के लिए आयु सीमा मापदंडो के अनुसार रखी गई हैं. साक्षात्कार. इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी दस्तावेजो के साथ 23 मार्च 2019 से पहले www. nrhmorissa. gov. in/Rayagada/इस वेबसाइट व office of the CDM&PHO, CDMPHOs Office, DHH campus, At-Rayagada, Dist, Pin-765001इस पते पर आवेदन कर सकते हैं.
इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त विश्वविध्यालय से बारहवीं,BAMS, BHMS, M. E/M. Tech,डिप्लोमा प्राप्त होना ज़रूरी है. इस पोस्ट के लिए आयु सीमा मापदंडो के अनुसार रखी गई हैं. साक्षात्कार. इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी दस्तावेजो के साथ तेईस मार्च दो हज़ार उन्नीस से पहले www. nrhmorissa. gov. in/Rayagada/इस वेबसाइट व office of the CDM&PHO, CDMPHOs Office, DHH campus, At-Rayagada, Dist, Pin-सात लाख पैंसठ हज़ार एकइस पते पर आवेदन कर सकते हैं.
लंग्स यानी कि फेफड़े हमारे शरीर का अभिन्न अंग हैं, फेफड़ों का काम बहुत जरूरी है क्योंकि ये शुद्ध ऑक्सीजन हमारे शरीर को पहुंचाता है और कार्बनडाई-ऑक्साइड को हमारे शरीर से बाहर निकालता है। कोरोना वायरस का असर सीधे हमारे लंग्स पर हो रहा है जिससे हमारे लंग्स कमजोर हो रहे हैं। आज हम आपको बताएंगे कि अगर कोरोना वायरस या अन्य वजहों से आपके लंग्स इंफेक्टेड हैं तो आप ऐसी क्या चीजें हैं जो ना खाएं-पीएं जिससे कि आपके फेफड़े जल्दी से रिकवर हो जाए और दोबारा ठीक से काम करने लगे। फेफड़ों पर ज्यादातर तीन तरह के संक्रमण होते हैं। एक बैक्टीरियल दूसरा वायरल और तीसरा पैरासिटिक। फेफड़ों में इंफेक्शन होने पर फेफड़ों में पानी भर जाता है। फेफड़े जब संक्रमित हो जाते हैं तो सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। फेफड़ों के इंफेक्शन का पता करने के लिए ब्लड की जांच से लेकर, सीने का एक्सरे, चेस्ट का सीटी-स्कैन, बलगम की जांच आदि की जाती है। क्या CT-Scan कराने से होता है कैंसर? जानिए कोविड होने पर कब कराएं सीटी-स्कैन और क्या है सीटी वैल्यू? क्या CT-Scan कराने से होता है कैंसर? जानिए कोविड होने पर कब कराएं सीटी-स्कैन और क्या है सीटी वैल्यू? अगर आपके फेफड़ों में इंफेक्शन है और आप इससे उबरने की कोशिश कर रहे हैं तो शराब, सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू आदि को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके अलावा आपको भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से भी बचना चाहिए। कोशिश करें कि प्रदूषित इलाके में ना रहें, अगर बाहर निकलें तो नाक और मुंह पर कपड़ा बांध कर निकलें। इसके अलावा रोगियों से दूरी बनाकर रखें। क्योंकि जब किसी को फेफड़ों का इंफेक्शन होता है तो उसे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान घर का बना खाना ही खाएं, बाहर का खाना बिल्कुल ना खाएं। इसके अलावा घर के खाने में हल्दी, सोंठ, अदरख, काली मिर्च और लहसुन का इस्तेमाल करें। योग करने से आप लंग्स के इंफेक्शन को कम कर सकते हैं। गहरी सांस लें, अनुलोम विलोम करें इससे आपके लंग्स मजबूत होंगे। अगर आपको लंबे समय से खांसी है और सांस लेने में तकलीफ है। इसके अलावा आपको सीढ़ी चढ़ने पर या पैदल चलने पर सांस फूलने लगती है, तो आपको लंग्स इंफेक्शन हो सकता है। समय पर जांच करवा लें और जल्द से जल्द अपना इलाज शुरू करें। कोविड 19 का वायरस भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए समय पर पहचान करके इलाज शुरू कर दें।
लंग्स यानी कि फेफड़े हमारे शरीर का अभिन्न अंग हैं, फेफड़ों का काम बहुत जरूरी है क्योंकि ये शुद्ध ऑक्सीजन हमारे शरीर को पहुंचाता है और कार्बनडाई-ऑक्साइड को हमारे शरीर से बाहर निकालता है। कोरोना वायरस का असर सीधे हमारे लंग्स पर हो रहा है जिससे हमारे लंग्स कमजोर हो रहे हैं। आज हम आपको बताएंगे कि अगर कोरोना वायरस या अन्य वजहों से आपके लंग्स इंफेक्टेड हैं तो आप ऐसी क्या चीजें हैं जो ना खाएं-पीएं जिससे कि आपके फेफड़े जल्दी से रिकवर हो जाए और दोबारा ठीक से काम करने लगे। फेफड़ों पर ज्यादातर तीन तरह के संक्रमण होते हैं। एक बैक्टीरियल दूसरा वायरल और तीसरा पैरासिटिक। फेफड़ों में इंफेक्शन होने पर फेफड़ों में पानी भर जाता है। फेफड़े जब संक्रमित हो जाते हैं तो सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। फेफड़ों के इंफेक्शन का पता करने के लिए ब्लड की जांच से लेकर, सीने का एक्सरे, चेस्ट का सीटी-स्कैन, बलगम की जांच आदि की जाती है। क्या CT-Scan कराने से होता है कैंसर? जानिए कोविड होने पर कब कराएं सीटी-स्कैन और क्या है सीटी वैल्यू? क्या CT-Scan कराने से होता है कैंसर? जानिए कोविड होने पर कब कराएं सीटी-स्कैन और क्या है सीटी वैल्यू? अगर आपके फेफड़ों में इंफेक्शन है और आप इससे उबरने की कोशिश कर रहे हैं तो शराब, सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू आदि को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके अलावा आपको भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से भी बचना चाहिए। कोशिश करें कि प्रदूषित इलाके में ना रहें, अगर बाहर निकलें तो नाक और मुंह पर कपड़ा बांध कर निकलें। इसके अलावा रोगियों से दूरी बनाकर रखें। क्योंकि जब किसी को फेफड़ों का इंफेक्शन होता है तो उसे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान घर का बना खाना ही खाएं, बाहर का खाना बिल्कुल ना खाएं। इसके अलावा घर के खाने में हल्दी, सोंठ, अदरख, काली मिर्च और लहसुन का इस्तेमाल करें। योग करने से आप लंग्स के इंफेक्शन को कम कर सकते हैं। गहरी सांस लें, अनुलोम विलोम करें इससे आपके लंग्स मजबूत होंगे। अगर आपको लंबे समय से खांसी है और सांस लेने में तकलीफ है। इसके अलावा आपको सीढ़ी चढ़ने पर या पैदल चलने पर सांस फूलने लगती है, तो आपको लंग्स इंफेक्शन हो सकता है। समय पर जांच करवा लें और जल्द से जल्द अपना इलाज शुरू करें। कोविड उन्नीस का वायरस भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए समय पर पहचान करके इलाज शुरू कर दें।
मुंबईः नवी मुंबई के वाशी इलाके में मौजूद सेंट लॉरेंस हाई स्कूल के छात्रों को स्कूल प्रशासन ने रिइंस्टेट कर लिया है। स्कूल ने यह कदम महाराष्ट्र नव निर्माण सेना की यूथ विंग द्वारा किये गए प्रोटेस्ट के बाद उठाया गया है। दरअसल स्कूल प्रशासन ने छात्रों को यह कहते हुए 12 जून को रेस्टीकेट कर दिया था कि वह धार्मिक नारे लगा रहे थे। बच्चों के रेस्टीकेशन की शिकायत अभिभावकों ने मनसे विद्यार्थी सेना से की थी। जिसे बाद बाद स्कूल के बाहर मनसे स्टूडेंट विंग द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। स्कूल प्रशासन ने दसवीं के छह विद्यार्थियों को रेस्टीकेट किया था। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने मनसे विद्यार्थी सेना को स्कूल के अंदर दाखिल होने से रोक दिया था। इस बीच लोकल बीजेपी के पदाधिकारी विजय वालुंज और कुछ हिंदू संगठनों ने स्कूल में जाकर प्रबंधन से बातचीत की और छात्रों के निष्कासन का फैसला वापस लेने के लिए कहा। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस सायरा केनेडी ने बताया कि दसवीं क्लास के यह स्टूडेंट सीढ़ियों में पर शोर मचा रहे थे और हंगामा कर रहे थे। यह सब कुछ उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर निरिक्षण के दौरान देखा था। केनेडी ने बताया कि स्कूल ने फैसला वापस ले लिया है और तीन बच्चों ने तो स्कूल अटेंड करना भी शुरू कर दिया है। वहीं नवी मुंबई में एमएनएस के सचिव सचिन कदम ने कहा कि इन छात्रों को सिर्फ इसलिए रेस्टीकेट कर दिया गया था क्योंकि वह जय श्रीराम का नारा लगा रहे थे। हालांकि, स्कूल की हेड मिस्ट्रेस सायरा केनेडी ने एमएनएस के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टूडेंट स्कूल के समय के शोर मचा रहे थे इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई थी। वाशी पुलिस स्टेशन एक सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शशिकांत चांदेकर ने कहा कि सीसीटीवी से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिलता है कि छात्र कोई धार्मिक नारा लगा रहे थे। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस ने कहा कि बच्चों की पढाई पर इसका कोई असर नहीं होगा।
मुंबईः नवी मुंबई के वाशी इलाके में मौजूद सेंट लॉरेंस हाई स्कूल के छात्रों को स्कूल प्रशासन ने रिइंस्टेट कर लिया है। स्कूल ने यह कदम महाराष्ट्र नव निर्माण सेना की यूथ विंग द्वारा किये गए प्रोटेस्ट के बाद उठाया गया है। दरअसल स्कूल प्रशासन ने छात्रों को यह कहते हुए बारह जून को रेस्टीकेट कर दिया था कि वह धार्मिक नारे लगा रहे थे। बच्चों के रेस्टीकेशन की शिकायत अभिभावकों ने मनसे विद्यार्थी सेना से की थी। जिसे बाद बाद स्कूल के बाहर मनसे स्टूडेंट विंग द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। स्कूल प्रशासन ने दसवीं के छह विद्यार्थियों को रेस्टीकेट किया था। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने मनसे विद्यार्थी सेना को स्कूल के अंदर दाखिल होने से रोक दिया था। इस बीच लोकल बीजेपी के पदाधिकारी विजय वालुंज और कुछ हिंदू संगठनों ने स्कूल में जाकर प्रबंधन से बातचीत की और छात्रों के निष्कासन का फैसला वापस लेने के लिए कहा। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस सायरा केनेडी ने बताया कि दसवीं क्लास के यह स्टूडेंट सीढ़ियों में पर शोर मचा रहे थे और हंगामा कर रहे थे। यह सब कुछ उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर निरिक्षण के दौरान देखा था। केनेडी ने बताया कि स्कूल ने फैसला वापस ले लिया है और तीन बच्चों ने तो स्कूल अटेंड करना भी शुरू कर दिया है। वहीं नवी मुंबई में एमएनएस के सचिव सचिन कदम ने कहा कि इन छात्रों को सिर्फ इसलिए रेस्टीकेट कर दिया गया था क्योंकि वह जय श्रीराम का नारा लगा रहे थे। हालांकि, स्कूल की हेड मिस्ट्रेस सायरा केनेडी ने एमएनएस के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टूडेंट स्कूल के समय के शोर मचा रहे थे इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई थी। वाशी पुलिस स्टेशन एक सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शशिकांत चांदेकर ने कहा कि सीसीटीवी से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिलता है कि छात्र कोई धार्मिक नारा लगा रहे थे। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस ने कहा कि बच्चों की पढाई पर इसका कोई असर नहीं होगा।
वायु प्रदूषण के घातक प्रभावों से कैसे रहें सुरक्षित! चावल के पानी से आपकी ये सारी स्किन प्रॉब्लम हो जाएंगी दूर. . रीठा के चमत्कारी लाभ जानकर हैरान हो जाएगे आप! एक गिलास गर्म पानी की कीमत तुम क्या जानो! कैसे रखें गर्मियों में एक्वेरियम को ठंडा?
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69 हजार शिक्षक भर्ती में सृजित पद 434 में से 352 अध्यापकों की तैनाती जिले में हुई थी। इन अध्यापकों में अभी तक मात्र 79 को वेतन नसीब हुआ है। 273 शिक्षकों को वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। शिक्षकों ने पांच महीने से वेतन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझने की बात कही है। जिले में 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत पांच दिसंबर 2020 को सृजित पदों 434 के सापेक्ष 352 पद पर अध्यापकों की तैनाती हुई थी। इन अध्यापकों में 79 शिक्षकों को सत्यापन कार्य पूरा होने पर वेतन दिया जा रहा है। अन्य 273 अध्यापकों को अभी तक वेतन नसीब नहीं हुआ है। वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक पंकज पांडेय, जीवन ज्योति यादव, रजत श्रीवास्तव, कामेश्वर नाथ मिश्रा, तेजपुंज त्रिपाठी व रवि सिंह आदि शिक्षकों ने आपबीती बताते हुए दिसंबर 2019 से अब तक वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुंचने की बात कही है। शिक्षक पंकज पांडेय एवं जीवन ज्योति यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि पांच महीने से वेतन न मिलने से आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है। उधार सामान देने को भी दुकान तैयार नहीं हैं। कई शिक्षक भवन का किराया न देने के कारण मकान मालिक से आए दिन दो-चार होने की बात कह रहे हैं। यहां तक कि स्कूल आने-जाने का किराया तक नहीं बचा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने बेसिक शिक्षाधिकारी डा. रामचंद्र एवं वित्त लेखाधिकारी प्रदीप कुमार से मांग की है कि तत्काल वेतन उपलब्ध कराएं, ताकि आर्थिक तंगी से निजात मिल सके। इन शिक्षकों का आरोप है कि सत्यापन होने के बाद भी अभी तक वेतन नहीं मिला है। इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के बेस्ट पटल सहायक मनोज सिंह एवं सहायक लेखा शादाब खान ने संयुक्त रूप से बताया कि जिले में 352 अध्यापकों की तैनाती 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत हुई है। इसमें प्रथम चरण में 81 अध्यापकों मे से 79 शिक्षकों का सत्यापन कार्य पूरा होने पर वेतन दिया जा चुका है। अन्य 273 अध्यापकों में से 124 अध्यापक का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। जिन्हें एक सप्ताह के भीतर वेतन निर्गत कर दिया जाएगा। 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत 352 अध्यापकों में से 79 को वेतन निर्गत किया जा चुका है। शेष अध्यापकों का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। इन्हें एक सप्ताह के भीतर वेतन निर्गत कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त बचे अध्यापकों का सत्यापन कार्य कराया जा रहा है। अभिलेखों का सत्यापन कार्य पूरा होते ही वेतन निर्गत कर दिया जाएगा।
उनहत्तर हजार शिक्षक भर्ती में सृजित पद चार सौ चौंतीस में से तीन सौ बावन अध्यापकों की तैनाती जिले में हुई थी। इन अध्यापकों में अभी तक मात्र उन्यासी को वेतन नसीब हुआ है। दो सौ तिहत्तर शिक्षकों को वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। शिक्षकों ने पांच महीने से वेतन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझने की बात कही है। जिले में उनहत्तर हजार शिक्षक भर्ती के तहत पांच दिसंबर दो हज़ार बीस को सृजित पदों चार सौ चौंतीस के सापेक्ष तीन सौ बावन पद पर अध्यापकों की तैनाती हुई थी। इन अध्यापकों में उन्यासी शिक्षकों को सत्यापन कार्य पूरा होने पर वेतन दिया जा रहा है। अन्य दो सौ तिहत्तर अध्यापकों को अभी तक वेतन नसीब नहीं हुआ है। वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक पंकज पांडेय, जीवन ज्योति यादव, रजत श्रीवास्तव, कामेश्वर नाथ मिश्रा, तेजपुंज त्रिपाठी व रवि सिंह आदि शिक्षकों ने आपबीती बताते हुए दिसंबर दो हज़ार उन्नीस से अब तक वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुंचने की बात कही है। शिक्षक पंकज पांडेय एवं जीवन ज्योति यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि पांच महीने से वेतन न मिलने से आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई है। उधार सामान देने को भी दुकान तैयार नहीं हैं। कई शिक्षक भवन का किराया न देने के कारण मकान मालिक से आए दिन दो-चार होने की बात कह रहे हैं। यहां तक कि स्कूल आने-जाने का किराया तक नहीं बचा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने बेसिक शिक्षाधिकारी डा. रामचंद्र एवं वित्त लेखाधिकारी प्रदीप कुमार से मांग की है कि तत्काल वेतन उपलब्ध कराएं, ताकि आर्थिक तंगी से निजात मिल सके। इन शिक्षकों का आरोप है कि सत्यापन होने के बाद भी अभी तक वेतन नहीं मिला है। इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के बेस्ट पटल सहायक मनोज सिंह एवं सहायक लेखा शादाब खान ने संयुक्त रूप से बताया कि जिले में तीन सौ बावन अध्यापकों की तैनाती उनहत्तर हजार शिक्षक भर्ती के तहत हुई है। इसमें प्रथम चरण में इक्यासी अध्यापकों मे से उन्यासी शिक्षकों का सत्यापन कार्य पूरा होने पर वेतन दिया जा चुका है। अन्य दो सौ तिहत्तर अध्यापकों में से एक सौ चौबीस अध्यापक का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। जिन्हें एक सप्ताह के भीतर वेतन निर्गत कर दिया जाएगा। उनहत्तर हजार शिक्षक भर्ती के तहत तीन सौ बावन अध्यापकों में से उन्यासी को वेतन निर्गत किया जा चुका है। शेष अध्यापकों का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। इन्हें एक सप्ताह के भीतर वेतन निर्गत कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त बचे अध्यापकों का सत्यापन कार्य कराया जा रहा है। अभिलेखों का सत्यापन कार्य पूरा होते ही वेतन निर्गत कर दिया जाएगा।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 20 साल पहले आज ही के दिन हुए सीरियल ब्लास्ट ने इस शहर को गहरा जख्म दिया था। 12 मार्च, 1993 के बम धमाकों को एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन उसके जख्म आज भी हरे हैं। लगातार हुए 12 बम धमाकों ने इस शहर की रफ्तार रोक दी। इन धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 713 लोग जख्मी हुए थे। मुंबई पुलिस ने धमाकों के उस भयावह दिन का आगे बढ़कर सामना किया। अफसोस यह है कि धमाकों का मास्टर माइंड माना जाने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम आज भी आतंक की सरपरस्ती में महफूज है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद इब्राहिम ने आतंकियों को मुंबई में हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए थे। जबकि इस वारदात को सोने के स्मगलर टाइगर मेमन ने अंजाम दिया था। मुंबई पुलिस के लिए इन धमाकों की जांच एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन जांच एजेंसियों के साथ मिलकर पुलिस ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाया। शुरुआत में पुलिस को मुंबई में इतनी बड़ी मात्रा में गोला बारूद पहुंचने का कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन विस्फोटकों से भरे एक स्कूटर ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचाया। पुलिस को जब इस स्कूटर की जानकारी मिली, तो सबसे पहले उसने विस्फोटकों को निष्क्रिय कराया। इसके बाद पुलिस को टाइगर मेमन के घर से एक चाभी मिली, जो इसी स्कूटर की थी और पुलिस के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। यहां से जांच आगे बढ़ती चली गई। पुलिस के हाथ सुराग लगते ही बड़ी संख्या में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो गई। इस दौरान एक चौंकाने वाला नाम सामने आया। पुलिस को जांच में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के घर से एक एके-47 बंदूक मिली। पुलिस ने संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में 4 नवंबर 1993 को शुरू हुआ मुकदमा करीब 14 साल तक चला। मुकदमे में 100 आरोपियों को सजा हुई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इन बम धमाकों में करीब 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग जख्मी हुए थे। पिछले 20 सालों में मुंबई में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन मुंबईवासी आज भी उन बम धमाकों को याद कर दहल जाते हैं। शायद इसलिए, क्योंकि इन धमाकों का मुख्य सरगना अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बीस साल पहले आज ही के दिन हुए सीरियल ब्लास्ट ने इस शहर को गहरा जख्म दिया था। बारह मार्च, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बम धमाकों को एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन उसके जख्म आज भी हरे हैं। लगातार हुए बारह बम धमाकों ने इस शहर की रफ्तार रोक दी। इन धमाकों में दो सौ सत्तावन लोग मारे गए थे और सात सौ तेरह लोग जख्मी हुए थे। मुंबई पुलिस ने धमाकों के उस भयावह दिन का आगे बढ़कर सामना किया। अफसोस यह है कि धमाकों का मास्टर माइंड माना जाने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम आज भी आतंक की सरपरस्ती में महफूज है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद इब्राहिम ने आतंकियों को मुंबई में हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए थे। जबकि इस वारदात को सोने के स्मगलर टाइगर मेमन ने अंजाम दिया था। मुंबई पुलिस के लिए इन धमाकों की जांच एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन जांच एजेंसियों के साथ मिलकर पुलिस ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाया। शुरुआत में पुलिस को मुंबई में इतनी बड़ी मात्रा में गोला बारूद पहुंचने का कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन विस्फोटकों से भरे एक स्कूटर ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचाया। पुलिस को जब इस स्कूटर की जानकारी मिली, तो सबसे पहले उसने विस्फोटकों को निष्क्रिय कराया। इसके बाद पुलिस को टाइगर मेमन के घर से एक चाभी मिली, जो इसी स्कूटर की थी और पुलिस के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। यहां से जांच आगे बढ़ती चली गई। पुलिस के हाथ सुराग लगते ही बड़ी संख्या में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो गई। इस दौरान एक चौंकाने वाला नाम सामने आया। पुलिस को जांच में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के घर से एक एके-सैंतालीस बंदूक मिली। पुलिस ने संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में चार नवंबर एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को शुरू हुआ मुकदमा करीब चौदह साल तक चला। मुकदमे में एक सौ आरोपियों को सजा हुई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इन बम धमाकों में करीब दो सौ सत्तावन लोग मारे गए थे, जबकि सात सौ तेरह लोग जख्मी हुए थे। पिछले बीस सालों में मुंबई में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन मुंबईवासी आज भी उन बम धमाकों को याद कर दहल जाते हैं। शायद इसलिए, क्योंकि इन धमाकों का मुख्य सरगना अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
इन्होंने संवत् १८४७ में राधाशतक नामक एक मनोहर ग्रन्थ बनाया । शिवसिंह जी ने लिखा है कि ये महाशय व्रजवासी थे । जान पड़ता है कि ये माथुर घावे थे। इनकी भाषा मज भाषा है और इनके छन्द बहुत मधुर और सरल हैं, जो प्रायः घनाक्षरी होते हैं। हम इनकी गणना पद्माकर कवि की श्रेणे में करते हैं। बेठी रंग भरी है रँगीली रंग राम्रटी में कहाँ लो सराहां सुन्दराई सिरताज को । चाँदनी की, चम्पक की, मैनका तिलोत्तमा की, रम्भा रमा रति की निकाई कौन काज को मोतिन के हार गरे, मोतिन सों माँग भरे, मातिन ते येनी गुड़ी हठी सुख साज की । चाल गजराज मृगराज कैसो लंक द्विजराजसो बदन रानी राज प्रजराज की ॥ ऋपेि सुवेद बसु शशि सहित निरमल मधु को पाय । माधव तृतिया भृगु निरसि रच्यो ग्रन्थ सुखदाय ।। ( ६८३ ) थान कवि । यान कवि ने संवत् १८४८ में दलेलप्रकाश नामक ग्रन्थ चनाया। इन्होंने अपना वर्णन अच्छा कर दिया हैःवासी घैसवारे को बिलासी सेरे डौंडिया को गिरिजा गिरीश को बिरद करें गान हो । थान ] पोना महासिंह को परोता लाल राय जू को सुन तो निहाल को भजत भगवान है। ।। नाती तो धरमदास जू को कवि चन्दन को भैनो शिष्य सेवक कहाऊँ कवि थान है। । साहेब मेहेरबान दानि श्री दलेल जू को ग्रन्थ बरनन करौं विविध विधान हैं। ॥ समत अठारह से जहाँ अड़तालीस विचार । शुक्ल पक्ष दशमी मुतिथि माघ मास गुरुवार ॥ दानि दलेलप्रकास यह तब लीन्हों अवतार । सुद मंगल कल्यानमय रच्यो ग्रन्थ सुखसार ।। इससे विदित होता है कि थानराम के प्रपितामह लालराय, पितामह महासिंह, पिता निहाल राय, मातामह धरमदास, मामा चन्दन कवि, और गुरु सेवक थे । ये महाशय डौंडिया खेरे में रहते थे । यह ग्राम वैसवारा जिला रायबरेली में एक प्रसिद्ध स्थान है। यह राना वेनीमाधव का वासस्थान था । धान कवि ने अपना कुल नहीं लिखा और न इनके फुल का हाल शिवसिंहसरोज से विदित होता है, क्योंकि इस ग्रन्थ में थान कवि का नामही नहीं लिखा है। शिवसिंह जी ने थान के मामा चन्दन को भार लिखा है। इससे विदित होता है कि ये भी भाट थे। थानराम के जन्म-भरण आदि का संवत् ज्ञात नहीं है । थानराम ने दलेलसिंह गौर के नाम पर अपना ग्रन्थ बनाया । दलेलांसह के पिता जयरसिंह, पितामह महासिंह और
इन्होंने संवत् एक हज़ार आठ सौ सैंतालीस में राधाशतक नामक एक मनोहर ग्रन्थ बनाया । शिवसिंह जी ने लिखा है कि ये महाशय व्रजवासी थे । जान पड़ता है कि ये माथुर घावे थे। इनकी भाषा मज भाषा है और इनके छन्द बहुत मधुर और सरल हैं, जो प्रायः घनाक्षरी होते हैं। हम इनकी गणना पद्माकर कवि की श्रेणे में करते हैं। बेठी रंग भरी है रँगीली रंग राम्रटी में कहाँ लो सराहां सुन्दराई सिरताज को । चाँदनी की, चम्पक की, मैनका तिलोत्तमा की, रम्भा रमा रति की निकाई कौन काज को मोतिन के हार गरे, मोतिन सों माँग भरे, मातिन ते येनी गुड़ी हठी सुख साज की । चाल गजराज मृगराज कैसो लंक द्विजराजसो बदन रानी राज प्रजराज की ॥ ऋपेि सुवेद बसु शशि सहित निरमल मधु को पाय । माधव तृतिया भृगु निरसि रच्यो ग्रन्थ सुखदाय ।। थान कवि । यान कवि ने संवत् एक हज़ार आठ सौ अड़तालीस में दलेलप्रकाश नामक ग्रन्थ चनाया। इन्होंने अपना वर्णन अच्छा कर दिया हैःवासी घैसवारे को बिलासी सेरे डौंडिया को गिरिजा गिरीश को बिरद करें गान हो । थान ] पोना महासिंह को परोता लाल राय जू को सुन तो निहाल को भजत भगवान है। ।। नाती तो धरमदास जू को कवि चन्दन को भैनो शिष्य सेवक कहाऊँ कवि थान है। । साहेब मेहेरबान दानि श्री दलेल जू को ग्रन्थ बरनन करौं विविध विधान हैं। ॥ समत अठारह से जहाँ अड़तालीस विचार । शुक्ल पक्ष दशमी मुतिथि माघ मास गुरुवार ॥ दानि दलेलप्रकास यह तब लीन्हों अवतार । सुद मंगल कल्यानमय रच्यो ग्रन्थ सुखसार ।। इससे विदित होता है कि थानराम के प्रपितामह लालराय, पितामह महासिंह, पिता निहाल राय, मातामह धरमदास, मामा चन्दन कवि, और गुरु सेवक थे । ये महाशय डौंडिया खेरे में रहते थे । यह ग्राम वैसवारा जिला रायबरेली में एक प्रसिद्ध स्थान है। यह राना वेनीमाधव का वासस्थान था । धान कवि ने अपना कुल नहीं लिखा और न इनके फुल का हाल शिवसिंहसरोज से विदित होता है, क्योंकि इस ग्रन्थ में थान कवि का नामही नहीं लिखा है। शिवसिंह जी ने थान के मामा चन्दन को भार लिखा है। इससे विदित होता है कि ये भी भाट थे। थानराम के जन्म-भरण आदि का संवत् ज्ञात नहीं है । थानराम ने दलेलसिंह गौर के नाम पर अपना ग्रन्थ बनाया । दलेलांसह के पिता जयरसिंह, पितामह महासिंह और
The fact that the pain and anger of the child is ignored and ones own ego to make the child learn is so massive that compassion has totally gone out of the window. This is shocking and saddening to another dimension. A child can never learn if intimidated. This is hurtful. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक 2-3 साल की बच्ची का वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में एक मां अपनी बच्ची को डांटते हुए पढ़ाने की कोशिश कर रही थी और बच्ची उसे प्यार से पढ़ाने को बोलती दिखाई दे रही थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये बच्ची बॉलीवुड सिंगर तोशी और शारिब साबरी की भांजी है और इस बच्ची का नाम हया है. ये बात खुद हया के मामा शारिब साबरी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर दी है. शारिब-साबरी ने इस वीडियो को वायरल होता देख एक वीडियो जारी करते हुए लोगों से गुजारिश की है कि ये मेरी भांजी है और यह सिर्फ 3 साल की है. उसका कुछ दिनों से पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और इसी बात पर उसकी मां या यूं कहें हमारी बहन उसे डांट रही थी. साथ ही मेरी बहन ये वीडियो बनाकर अपने पति और बच्ची के पिता को दिखाना चाहती थी कि बच्ची कितनी जिद्दी हो गई है. लेकिन किसी कारण से ये वीडियो फैमिली वॉट्सएप ग्रुप से लीक हो गई और वायरल हो गई. शारिब ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर हया के कई वीडियो अपलोड किए हुए हैं. इन वीडियो में हया कहीं नमाज पढ़ रही हैं तो कहीं मामा के साथ मस्ती कर रही हैं. ये वीडियो शारिब ने 2016 में अपलोड किए थे. देखिए, आपके चहेते सुपरस्टार पहले कैसे थे और अब कैसे लगने लगे हैं?
The fact that the pain and anger of the child is ignored and ones own ego to make the child learn is so massive that compassion has totally gone out of the window. This is shocking and saddening to another dimension. A child can never learn if intimidated. This is hurtful. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक दो-तीन साल की बच्ची का वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो में एक मां अपनी बच्ची को डांटते हुए पढ़ाने की कोशिश कर रही थी और बच्ची उसे प्यार से पढ़ाने को बोलती दिखाई दे रही थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये बच्ची बॉलीवुड सिंगर तोशी और शारिब साबरी की भांजी है और इस बच्ची का नाम हया है. ये बात खुद हया के मामा शारिब साबरी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर दी है. शारिब-साबरी ने इस वीडियो को वायरल होता देख एक वीडियो जारी करते हुए लोगों से गुजारिश की है कि ये मेरी भांजी है और यह सिर्फ तीन साल की है. उसका कुछ दिनों से पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और इसी बात पर उसकी मां या यूं कहें हमारी बहन उसे डांट रही थी. साथ ही मेरी बहन ये वीडियो बनाकर अपने पति और बच्ची के पिता को दिखाना चाहती थी कि बच्ची कितनी जिद्दी हो गई है. लेकिन किसी कारण से ये वीडियो फैमिली वॉट्सएप ग्रुप से लीक हो गई और वायरल हो गई. शारिब ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर हया के कई वीडियो अपलोड किए हुए हैं. इन वीडियो में हया कहीं नमाज पढ़ रही हैं तो कहीं मामा के साथ मस्ती कर रही हैं. ये वीडियो शारिब ने दो हज़ार सोलह में अपलोड किए थे. देखिए, आपके चहेते सुपरस्टार पहले कैसे थे और अब कैसे लगने लगे हैं?
Nano EV: दुनिया की सबसे छोटी और सस्ती इलेक्ट्रिक कार, फुल चार्ज में कर सकते हैं 305 किमी तक का सफर! नई दिल्ली। कार खरीदने का सपना कौन नहीं देखता, लेकिन तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई ने आम आदमी को फोर व्हीलर से दूर ही कर दिया है। अगर आप चार पहिया वाहन बचत करके खरीदा भी चाहते हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम को देखकर एक बार खरीदने से पहले सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, अब आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं। दरअसल, चीन की ऑटो कंपनी वूलिंग होंगगुआंग ने दुनिया की सबसे छोटी और बहुत ही सस्ती इलेक्ट्रिक कार को अपने घरेलू बाजर में उतारा है। इस कार को टाटा की 'नैनो कार' की तरह 'Nano EV' के नाम से लॉन्च किया गया है। कार की कीमत 20 हजार युआन यानी अगर इसे भारतीय रूपयों में देखें तो करीब दो लाख 30 हजार रूपये तय की गई है। आपको बता दें कि कंपनी ने सबसे पहले इस कार का अनावरण 2021 तियानजिन इंटरनेशनल ऑटो एक्सपो में किया था। Wuling कंपनी पिछले साल ही बाजार में आई है और आते ही इसने मार्केट में धूम मचा दी है। भारत में जिस तरह से 'ओला इलेक्ट्रिक' दोपहिया वाहनों के लिए देखी जा रही है, उसी तरह चीन में भी यह चार पहिया वाहनों के लिए देखी जा रही है। कार में फीचर्स की बात करें तो Wuling Nano EV में EBD, ABS ब्रेक के साथ स्पीड अलर्ट सिस्टम और इलेक्ट्रिक पार्किंग ब्रेक दिया गया है। साथ ही इसमें रिवर्सिंग कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, कीलेस एंट्री सिस्टम, इलईडी हेडलाइट्स, 7 इंच की डिजिटल स्क्रीन और टीलेमौटिक्स सिस्मटम जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इस छोटी कार में सिर्फ दो सीटें दी गई हैं। वहीं लंबाई की बात करें को कार की लंबाई 2,497 मिमी है, जबकि 1,526 चौड़ाई मिमी और ऊंचाई 1,616 मिमी है। इसके अलावा कार में 1,600 मिमी का व्हीलबेस भी दिया है। Nano EV में 33 पीएस इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया गया है, जो 85 एनएम का मैक्सीमम टॉर्क जेनरेट करती हैं। इसकी टॉप स्पीड 100 kmph है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में फुल चार्ज को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल रहता है, तो बतादें कि Wuling Nano EV कंपनी ने IP67 लिथियम-आयन बैटरी यूज की है जो कि 28kWh की है। कंपनी का दावा है कि ये छोटी कार एक बार चार्ज करने पर 305 किमी तक चल सकती है। वहीं ये 220 वोल्ट के घरेलू सॉकेट से 13.5 घंटे में पूरी चार्ज होती है, जबकि 6.6KW AC चार्जर से चार्ज होने में इसे 4.5 घंटे का वक्त लगता है।
Nano EV: दुनिया की सबसे छोटी और सस्ती इलेक्ट्रिक कार, फुल चार्ज में कर सकते हैं तीन सौ पाँच किमी तक का सफर! नई दिल्ली। कार खरीदने का सपना कौन नहीं देखता, लेकिन तेल की बढ़ती कीमत और महंगाई ने आम आदमी को फोर व्हीलर से दूर ही कर दिया है। अगर आप चार पहिया वाहन बचत करके खरीदा भी चाहते हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम को देखकर एक बार खरीदने से पहले सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, अब आप अपने सपने को साकार कर सकते हैं। दरअसल, चीन की ऑटो कंपनी वूलिंग होंगगुआंग ने दुनिया की सबसे छोटी और बहुत ही सस्ती इलेक्ट्रिक कार को अपने घरेलू बाजर में उतारा है। इस कार को टाटा की 'नैनो कार' की तरह 'Nano EV' के नाम से लॉन्च किया गया है। कार की कीमत बीस हजार युआन यानी अगर इसे भारतीय रूपयों में देखें तो करीब दो लाख तीस हजार रूपये तय की गई है। आपको बता दें कि कंपनी ने सबसे पहले इस कार का अनावरण दो हज़ार इक्कीस तियानजिन इंटरनेशनल ऑटो एक्सपो में किया था। Wuling कंपनी पिछले साल ही बाजार में आई है और आते ही इसने मार्केट में धूम मचा दी है। भारत में जिस तरह से 'ओला इलेक्ट्रिक' दोपहिया वाहनों के लिए देखी जा रही है, उसी तरह चीन में भी यह चार पहिया वाहनों के लिए देखी जा रही है। कार में फीचर्स की बात करें तो Wuling Nano EV में EBD, ABS ब्रेक के साथ स्पीड अलर्ट सिस्टम और इलेक्ट्रिक पार्किंग ब्रेक दिया गया है। साथ ही इसमें रिवर्सिंग कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, कीलेस एंट्री सिस्टम, इलईडी हेडलाइट्स, सात इंच की डिजिटल स्क्रीन और टीलेमौटिक्स सिस्मटम जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इस छोटी कार में सिर्फ दो सीटें दी गई हैं। वहीं लंबाई की बात करें को कार की लंबाई दो,चार सौ सत्तानवे मिमी है, जबकि एक,पाँच सौ छब्बीस चौड़ाई मिमी और ऊंचाई एक,छः सौ सोलह मिमी है। इसके अलावा कार में एक,छः सौ मिमी का व्हीलबेस भी दिया है। Nano EV में तैंतीस पीएस इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया गया है, जो पचासी एनएम का मैक्सीमम टॉर्क जेनरेट करती हैं। इसकी टॉप स्पीड एक सौ kmph है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में फुल चार्ज को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल रहता है, तो बतादें कि Wuling Nano EV कंपनी ने IPसरसठ लिथियम-आयन बैटरी यूज की है जो कि अट्ठाईस किलोवाट-घंटा की है। कंपनी का दावा है कि ये छोटी कार एक बार चार्ज करने पर तीन सौ पाँच किमी तक चल सकती है। वहीं ये दो सौ बीस वोल्ट के घरेलू सॉकेट से तेरह दशमलव पाँच घंटाटे में पूरी चार्ज होती है, जबकि छः.छःKW AC चार्जर से चार्ज होने में इसे चार दशमलव पाँच घंटाटे का वक्त लगता है।
चन्ना मेरेया एक्ट्रेस तस्वीर में सूट पहने बेहद दिलकश पोज देती नजर आ रही हैं। नियति के सादगी भरा अंदाज पर से फैंस का नजरें हटा पाना मुश्किल हैं। तस्वीर में डीवा ग्रीन कलर के फ्लोरल प्रिंटेड सूट और पिंक पजामें में कयामत ढहाती नजर आ रही है। डीवा की खूबसूरती में उनका आकर्षक ड्रेसिंग सेंस चार चांद लगाने का काम करता हैं। टीवी स्टार अपनी इन तस्वीरों में बेहद ग्लैमरस और गॉर्जियस लग रही हैं। नियति आए दिन अपनी स्टनिंग अदाओं से लोगों के दिलों की हैकिंग करने का काम करती हैं। फैंस कमेंट्स में डीवा को प्रिटी बता रहे हैं।
चन्ना मेरेया एक्ट्रेस तस्वीर में सूट पहने बेहद दिलकश पोज देती नजर आ रही हैं। नियति के सादगी भरा अंदाज पर से फैंस का नजरें हटा पाना मुश्किल हैं। तस्वीर में डीवा ग्रीन कलर के फ्लोरल प्रिंटेड सूट और पिंक पजामें में कयामत ढहाती नजर आ रही है। डीवा की खूबसूरती में उनका आकर्षक ड्रेसिंग सेंस चार चांद लगाने का काम करता हैं। टीवी स्टार अपनी इन तस्वीरों में बेहद ग्लैमरस और गॉर्जियस लग रही हैं। नियति आए दिन अपनी स्टनिंग अदाओं से लोगों के दिलों की हैकिंग करने का काम करती हैं। फैंस कमेंट्स में डीवा को प्रिटी बता रहे हैं।
नई दिल्लीः भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों को देखते हुए एशिया कप और वनडे वर्ल्ड कप पर गतिरोध जारी है। जहां भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान जाने को राजी नहीं है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान क्रिकेट के शीर्ष अधिकारी कह चुके हैं कि यदि भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान की यात्रा नहीं करता तो वे वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारत नहीं जाएंगे। हालांकि पिछले दिनों खबर आई थी कि एशिया कप में भारत के मैचों के लिए एक रास्ता निकाला गया है। इसके तहत टीम इंडिया पाकिस्तान के बाहर अपने मुकाबले खेल सकती है। अब वनडे वर्ल्ड कप को लेकर भी इसी तरह की चर्चा की गई है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में अपने 2023 एकदिवसीय विश्व कप मैच खेल सकता है। भारत टूर्नामेंट का मेजबान है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों को देखते हुए इस बात पर पिछले सप्ताह आईसीसी की बैठकों में चर्चा की गई थी, जिसमें हाइब्रिड एशिया कप मॉडल को समाधान के रूप में देखा गया था। ईएसपीएनक्रिकइंफो की खबर के मुताबिक, यह विचार दुबई में आयोजित बोर्ड की बैठकों के दौरान सामने आया, जहां एशिया कप में भारत और विश्व कप में पाकिस्तान की उपस्थिति दोनों एजेंडे के पॉइंट थे। कहा जा रहा है कि इसके केवल एक विकल्प के रूप में बात की गई है। इस मामले पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पीसीबी का कहना है कि एशिया कप में भारत के नहीं खेलने से आईसीसी की चैंपियंस ट्रॉफी पर संभावित असर पड़ सकता है। इसे फरवरी 2025 में पाकिस्तान में आयोजित किया जाएगा। ये भी कहा गया है कि एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) एक ऐसे हाइब्रिड मॉडल पर विचार करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है जो टूर्नामेंट को पाकिस्तान में आयोजित करने की अनुमति देगा, लेकिन भारत के मैचों को तटस्थ स्थान पर खेला जाना है जिसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। विकल्पों के रूप में संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, श्रीलंका या इंग्लैंड भी शामिल हैं। वनडे वर्ल्ड कप 5 अक्टूबर से भारत में दस स्थानों पर खेला जाना निर्धारित है। वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भागीदारी के लिए बांग्लादेश का भारत से पास होना एक वजह है।
नई दिल्लीः भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों को देखते हुए एशिया कप और वनडे वर्ल्ड कप पर गतिरोध जारी है। जहां भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान जाने को राजी नहीं है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान क्रिकेट के शीर्ष अधिकारी कह चुके हैं कि यदि भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान की यात्रा नहीं करता तो वे वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारत नहीं जाएंगे। हालांकि पिछले दिनों खबर आई थी कि एशिया कप में भारत के मैचों के लिए एक रास्ता निकाला गया है। इसके तहत टीम इंडिया पाकिस्तान के बाहर अपने मुकाबले खेल सकती है। अब वनडे वर्ल्ड कप को लेकर भी इसी तरह की चर्चा की गई है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में अपने दो हज़ार तेईस एकदिवसीय विश्व कप मैच खेल सकता है। भारत टूर्नामेंट का मेजबान है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों को देखते हुए इस बात पर पिछले सप्ताह आईसीसी की बैठकों में चर्चा की गई थी, जिसमें हाइब्रिड एशिया कप मॉडल को समाधान के रूप में देखा गया था। ईएसपीएनक्रिकइंफो की खबर के मुताबिक, यह विचार दुबई में आयोजित बोर्ड की बैठकों के दौरान सामने आया, जहां एशिया कप में भारत और विश्व कप में पाकिस्तान की उपस्थिति दोनों एजेंडे के पॉइंट थे। कहा जा रहा है कि इसके केवल एक विकल्प के रूप में बात की गई है। इस मामले पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पीसीबी का कहना है कि एशिया कप में भारत के नहीं खेलने से आईसीसी की चैंपियंस ट्रॉफी पर संभावित असर पड़ सकता है। इसे फरवरी दो हज़ार पच्चीस में पाकिस्तान में आयोजित किया जाएगा। ये भी कहा गया है कि एशियाई क्रिकेट परिषद एक ऐसे हाइब्रिड मॉडल पर विचार करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है जो टूर्नामेंट को पाकिस्तान में आयोजित करने की अनुमति देगा, लेकिन भारत के मैचों को तटस्थ स्थान पर खेला जाना है जिसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। विकल्पों के रूप में संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, श्रीलंका या इंग्लैंड भी शामिल हैं। वनडे वर्ल्ड कप पाँच अक्टूबर से भारत में दस स्थानों पर खेला जाना निर्धारित है। वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भागीदारी के लिए बांग्लादेश का भारत से पास होना एक वजह है।
न्यूयॉर्क (भाषा)। भारतीय आईटी पेशेवर और उसके छह साल के बेटे की न्यूजर्सी में हुई हत्या के पीछे के इरादे का अभी तक पता नहीं चला है। शशिकला नारा (38 वर्षीय) और उनके बेटे अनीष नारा की हत्या उनके माप्ले शेड के फॉक्स मेडो अपार्टमेंट आवास में कल कर दी गयी थी। गुरवार की शाम जब शशिकला के पति हनुमंत राव काम से वापस घर आए तो उन्हें अपनी पत्नी और बेटे का शव घर में मिला। उन्होंने इसके बाद पुलिस को बुलाया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और हत्या के मामले के तहत इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच से यह पता चला है कि दोनों ही पीडितों को कई बार चाकू मारा गया था। बर्लिंगटन काउंटी प्रोसिक्यिूटर कार्यालय की ओर से पीटीआई को दिए गए बयान के मुताबिक कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इसे घृणा अपराध मानने से इंकार किया है। बयान में कहा गया है, "कुछ मीडिया रिपोर्ट के उलट अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि पीडित के भारतीय मूल के होने की वजह से यह घृणा अपराध हो।" इस हत्या ने माप्ले शेड कम्यूनिटी को दहशत में डाल दिया है। कम्यूनिटी के लोगों ने इस हत्या पर चिंता और दुख व्यक्त किया है।
न्यूयॉर्क । भारतीय आईटी पेशेवर और उसके छह साल के बेटे की न्यूजर्सी में हुई हत्या के पीछे के इरादे का अभी तक पता नहीं चला है। शशिकला नारा और उनके बेटे अनीष नारा की हत्या उनके माप्ले शेड के फॉक्स मेडो अपार्टमेंट आवास में कल कर दी गयी थी। गुरवार की शाम जब शशिकला के पति हनुमंत राव काम से वापस घर आए तो उन्हें अपनी पत्नी और बेटे का शव घर में मिला। उन्होंने इसके बाद पुलिस को बुलाया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और हत्या के मामले के तहत इसकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच से यह पता चला है कि दोनों ही पीडितों को कई बार चाकू मारा गया था। बर्लिंगटन काउंटी प्रोसिक्यिूटर कार्यालय की ओर से पीटीआई को दिए गए बयान के मुताबिक कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इसे घृणा अपराध मानने से इंकार किया है। बयान में कहा गया है, "कुछ मीडिया रिपोर्ट के उलट अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि पीडित के भारतीय मूल के होने की वजह से यह घृणा अपराध हो।" इस हत्या ने माप्ले शेड कम्यूनिटी को दहशत में डाल दिया है। कम्यूनिटी के लोगों ने इस हत्या पर चिंता और दुख व्यक्त किया है।
Posted On: शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने 13 जुलाई को चैम्बर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्रीज के मुख्यालय में विद्यांजलि के लिए पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। विद्यांजलि शिक्षा मंत्रालय का एक स्कूल स्वयंसेवक प्रबंधन कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश भर में समुदाय और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को बेहतर बनाना है। यह पहल उद्योग समेत जीवन के सभी क्षेत्रों के स्वयंसेवकों को जोड़ने को काम करती है। पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाकर, यह साझेदारी एक सशक्त तालमेल बनाना चाहती है जो विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्कूलों के लिए सीएसआर के तहत उद्योगों के प्रयासों की मदद से शिक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डाले। यह समझौता ज्ञापन विद्यांजलि कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स के बीच सहयोग की एक रूपरेखा को रेखांकित करता है। इसमें विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्कूलों के लिए सीएसआर के तहत उद्योग जगत के प्रयासों को बढ़ावा देना; सरकारी स्कूलों को सहायता देने के लिए उद्योग जगत के लिए संयुक्त रूप से संवेदीकरण सत्र आयोजित करना; सरकारी स्कूलों को कॉरपोरेट द्वारा दी जाने वाली सहायता को प्रेरणास्त्रोत के रूप में प्रदर्शित करना; विद्यांजलि के माध्यम से सरकारी स्कूलों को उल्लेखनीय कॉरपोरेट सहायता की स्वीकृति के लिए एक मंच बनाना और उद्यमिता को बढ़ावा देने व रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना, शामिल है। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार सुश्री ए श्रीजा ने कहा कि यह पहली बार है कि कोई उद्योग निकाय विद्यांजलि में सरकारी स्कूलों की मदद के लिए कॉरपोरेट्स द्वारा किए जा रहे कार्यों को समेकित करने का कार्य कर रहा है। हमें उम्मीद है कि यह समझौता ज्ञापन और शिक्षा जगत के बीच उल्लेखनीय साझेदारी के प्रेरणास्त्रोत को रेखांकित करेगा। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग विद्यांजलि के लिए पीएचडीसीसीआई के साथ काम करने के लिए उत्सुक है। पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव श्री सौरभ सान्याल ने चैम्बर की ओर से एमओयू पर हस्ताक्षर किए और इस साझेदारी के बारे में उत्साह व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पीएचडीसीसीआई की 118 वर्षों की विरासत और इसका उद्योग का मजबूत नेटवर्क जो लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र की सेवा कर रहा है, विद्यांजलि के उद्देश्य के लिए मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हम सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के साथ काम करने को उत्सुक हैं। शिक्षा मंत्रालय और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स को विश्वास है कि विद्यांजलि के तहत यह सहयोगात्मक प्रयास परिवर्तनकारी परिणाम देगा, जिससे देश के शैक्षिक परिदृश्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अपनी शक्तियों और संसाधनों में सामंजस्य बिठाकर दोनों संस्थाओं का लक्ष्य छात्रों को सशक्त बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
Posted On: शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तेरह जुलाई को चैम्बर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्रीज के मुख्यालय में विद्यांजलि के लिए पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। विद्यांजलि शिक्षा मंत्रालय का एक स्कूल स्वयंसेवक प्रबंधन कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश भर में समुदाय और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को बेहतर बनाना है। यह पहल उद्योग समेत जीवन के सभी क्षेत्रों के स्वयंसेवकों को जोड़ने को काम करती है। पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाकर, यह साझेदारी एक सशक्त तालमेल बनाना चाहती है जो विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्कूलों के लिए सीएसआर के तहत उद्योगों के प्रयासों की मदद से शिक्षा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डाले। यह समझौता ज्ञापन विद्यांजलि कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स के बीच सहयोग की एक रूपरेखा को रेखांकित करता है। इसमें विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्कूलों के लिए सीएसआर के तहत उद्योग जगत के प्रयासों को बढ़ावा देना; सरकारी स्कूलों को सहायता देने के लिए उद्योग जगत के लिए संयुक्त रूप से संवेदीकरण सत्र आयोजित करना; सरकारी स्कूलों को कॉरपोरेट द्वारा दी जाने वाली सहायता को प्रेरणास्त्रोत के रूप में प्रदर्शित करना; विद्यांजलि के माध्यम से सरकारी स्कूलों को उल्लेखनीय कॉरपोरेट सहायता की स्वीकृति के लिए एक मंच बनाना और उद्यमिता को बढ़ावा देने व रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना, शामिल है। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार सुश्री ए श्रीजा ने कहा कि यह पहली बार है कि कोई उद्योग निकाय विद्यांजलि में सरकारी स्कूलों की मदद के लिए कॉरपोरेट्स द्वारा किए जा रहे कार्यों को समेकित करने का कार्य कर रहा है। हमें उम्मीद है कि यह समझौता ज्ञापन और शिक्षा जगत के बीच उल्लेखनीय साझेदारी के प्रेरणास्त्रोत को रेखांकित करेगा। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग विद्यांजलि के लिए पीएचडीसीसीआई के साथ काम करने के लिए उत्सुक है। पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव श्री सौरभ सान्याल ने चैम्बर की ओर से एमओयू पर हस्ताक्षर किए और इस साझेदारी के बारे में उत्साह व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पीएचडीसीसीआई की एक सौ अट्ठारह वर्षों की विरासत और इसका उद्योग का मजबूत नेटवर्क जो लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र की सेवा कर रहा है, विद्यांजलि के उद्देश्य के लिए मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हम सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के साथ काम करने को उत्सुक हैं। शिक्षा मंत्रालय और पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स को विश्वास है कि विद्यांजलि के तहत यह सहयोगात्मक प्रयास परिवर्तनकारी परिणाम देगा, जिससे देश के शैक्षिक परिदृश्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अपनी शक्तियों और संसाधनों में सामंजस्य बिठाकर दोनों संस्थाओं का लक्ष्य छात्रों को सशक्त बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों के साथ असंवेदनशीलता के साथ पेश आ रही है तथा उन्हें घर भेजने के लिए बसों का इंतजाम करने के कांग्रेस के प्रयास का सहयोग नहीं कर रही है और पीडितों के घाव पर मरहम लगाने की बजाय नमक छिड़क रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला तथा पार्टी नेता राजीव शुक्ला ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली होती है तो उत्तर प्रदेश सरकार हजारों बसें लोगों को रैली में लाने के लिए लगा देती है लेकिन जब राज्य के थके हारे, भूखे प्यासे और बेरोजगारी से पीडित होकर पैदल अपने घर जाने को मजबूर मजदूरों काे उनके घर पहुंचाने की बात आती है तो यही सरकार हाथ खडा कर देती है और यदि कांग्रेस इस काम में आगे आती है तो उसे भी यह काम नहीं करने दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार को गरीब मजदूरों की व्यथा नजर नहीं आ रही है और मजदूरों के साथ अन्याय हो रहा है। मोदी ने चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाउन की घोषणा कर देते हैं और इसका खामियाजा देश के प्रवासी मजदूरों को भुगतना पड रहा है। करीब दो महीने से असहनीय पीडा का सामाना कर रहे ये मजदूर जब मजबूर होकर अपने घर जाने के लिए रास्ते में हैं तो उनकी सुध नहीं ली जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि योगी सरकार ने मजदूरों को बेसहरा छोड़ दिया है इसलिए कांग्रेस उनकी सेवा के लिए आगे आयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा नर सेवा ही नारायण सेवा की बात करते रहे हैं लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि उन्हें पैदल चल रहे मजदूरों, महिलाओं और बच्चों की पीड़ा, व्यथा और बेहाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को नजर नहीं आती है। प्रवक्ता ने कहा कि मजदूरों की यह व्यथा असहनीय थी इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आह्वान पर प्रवासी श्रमिकों का रेल किराया वहन करने के लिए पार्टी आगे आई। पार्टी की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एवं कांग्रेस ने मजदूरों के लिए 1000 बसों का इंतजाम किया लेकिन उत्तर प्रदेश शासन ने इसके लिए इजाजत नहीं दी और कई शर्ते लगा दी जिसके कारण मजदूरों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों के साथ असंवेदनशीलता के साथ पेश आ रही है तथा उन्हें घर भेजने के लिए बसों का इंतजाम करने के कांग्रेस के प्रयास का सहयोग नहीं कर रही है और पीडितों के घाव पर मरहम लगाने की बजाय नमक छिड़क रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला तथा पार्टी नेता राजीव शुक्ला ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली होती है तो उत्तर प्रदेश सरकार हजारों बसें लोगों को रैली में लाने के लिए लगा देती है लेकिन जब राज्य के थके हारे, भूखे प्यासे और बेरोजगारी से पीडित होकर पैदल अपने घर जाने को मजबूर मजदूरों काे उनके घर पहुंचाने की बात आती है तो यही सरकार हाथ खडा कर देती है और यदि कांग्रेस इस काम में आगे आती है तो उसे भी यह काम नहीं करने दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार को गरीब मजदूरों की व्यथा नजर नहीं आ रही है और मजदूरों के साथ अन्याय हो रहा है। मोदी ने चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाउन की घोषणा कर देते हैं और इसका खामियाजा देश के प्रवासी मजदूरों को भुगतना पड रहा है। करीब दो महीने से असहनीय पीडा का सामाना कर रहे ये मजदूर जब मजबूर होकर अपने घर जाने के लिए रास्ते में हैं तो उनकी सुध नहीं ली जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि योगी सरकार ने मजदूरों को बेसहरा छोड़ दिया है इसलिए कांग्रेस उनकी सेवा के लिए आगे आयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा नर सेवा ही नारायण सेवा की बात करते रहे हैं लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि उन्हें पैदल चल रहे मजदूरों, महिलाओं और बच्चों की पीड़ा, व्यथा और बेहाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को नजर नहीं आती है। प्रवक्ता ने कहा कि मजदूरों की यह व्यथा असहनीय थी इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आह्वान पर प्रवासी श्रमिकों का रेल किराया वहन करने के लिए पार्टी आगे आई। पार्टी की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एवं कांग्रेस ने मजदूरों के लिए एक हज़ार बसों का इंतजाम किया लेकिन उत्तर प्रदेश शासन ने इसके लिए इजाजत नहीं दी और कई शर्ते लगा दी जिसके कारण मजदूरों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
सीएम योगी ने वाराणसी में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को पूरी तरह से डिजिटल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सीएम योगी ने कहा है कि परीक्षा विभाग के सत्यापन कार्य, परीक्षा परिणाम, संबद्धता एवं लेखा विभाग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। वाराणसीः सीएम योगी ने वाराणसी में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को पूरी तरह से डिजिटल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सीएम योगी ने कहा है कि परीक्षा विभाग के सत्यापन कार्य, परीक्षा परिणाम, संबद्धता एवं लेखा विभाग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। वहीं आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सीएम ने कहा कि पूरा ब्योरा जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराएं। आपको बता दें कि बुधवार को राजधानी लखनऊ में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति हरेराम त्रिपाठी ने सीएम योगी से मुलाकात की थी। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान कुलपति ने कहा कि सीएम ने आश्वासन दिया है कि सरस्वती भवन में रखी पांडुलिपियों के संरक्षण एवं प्रकाशन के लिए शासन की ओर से जल्द ही धन आवंटित किया जाएगा। सीएम योगी ने 1975 से अभी तक छात्रवृत्ति नहीं बढ़ने पर भी संज्ञान लिया और उसे जल्द से जल्द बढ़ाने की बात की। इसके साथ ही सीएम ने विश्वविद्यालय की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संपूर्ण ब्यौरे को मद अनुसार (वेतन मद शैक्षिक/गैर शैक्षिक, छात्रवृत्ति एवं अन्य) तैयार कर जल्द से जल्द शासन को भेजने का निर्देश दिया है। कुलपति त्रिपाठी ने बताया कि सीएम योगी ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों के अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य को UGC के नियमानुसार कराने के साथ ही प्रत्येक दो महीने में शैक्षिक गतिविधियों एवं विश्वविद्यालय की अन्य सकारात्मक गतिविधियों की आख्या प्रस्तुत करते रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रवेश संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की। कुलपति त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों में आंतरिक रूप से स्थानांतरण पद्धति का प्रयोग कर संपूर्ण कार्यों में पारदर्शिता अपनाने पर बल दिया जा रहा है। सीएम ने विश्वविद्यालय के अध्यापकों, महाविद्यालय के अध्यापकों एवं माध्यमिक संस्कृत परिषद में अध्यापकों के नियुक्तियों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है।
सीएम योगी ने वाराणसी में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को पूरी तरह से डिजिटल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सीएम योगी ने कहा है कि परीक्षा विभाग के सत्यापन कार्य, परीक्षा परिणाम, संबद्धता एवं लेखा विभाग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। वाराणसीः सीएम योगी ने वाराणसी में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को पूरी तरह से डिजिटल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सीएम योगी ने कहा है कि परीक्षा विभाग के सत्यापन कार्य, परीक्षा परिणाम, संबद्धता एवं लेखा विभाग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। वहीं आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सीएम ने कहा कि पूरा ब्योरा जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराएं। आपको बता दें कि बुधवार को राजधानी लखनऊ में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति हरेराम त्रिपाठी ने सीएम योगी से मुलाकात की थी। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान कुलपति ने कहा कि सीएम ने आश्वासन दिया है कि सरस्वती भवन में रखी पांडुलिपियों के संरक्षण एवं प्रकाशन के लिए शासन की ओर से जल्द ही धन आवंटित किया जाएगा। सीएम योगी ने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर से अभी तक छात्रवृत्ति नहीं बढ़ने पर भी संज्ञान लिया और उसे जल्द से जल्द बढ़ाने की बात की। इसके साथ ही सीएम ने विश्वविद्यालय की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संपूर्ण ब्यौरे को मद अनुसार तैयार कर जल्द से जल्द शासन को भेजने का निर्देश दिया है। कुलपति त्रिपाठी ने बताया कि सीएम योगी ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों के अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य को UGC के नियमानुसार कराने के साथ ही प्रत्येक दो महीने में शैक्षिक गतिविधियों एवं विश्वविद्यालय की अन्य सकारात्मक गतिविधियों की आख्या प्रस्तुत करते रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रवेश संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की। कुलपति त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों में आंतरिक रूप से स्थानांतरण पद्धति का प्रयोग कर संपूर्ण कार्यों में पारदर्शिता अपनाने पर बल दिया जा रहा है। सीएम ने विश्वविद्यालय के अध्यापकों, महाविद्यालय के अध्यापकों एवं माध्यमिक संस्कृत परिषद में अध्यापकों के नियुक्तियों में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है।
इस रोग को होती है । इसे मानस रोग के अन्तर्गत मन को कुटिलता और दुष्टता से अभिहित किया गया है। इसकी यह निदान है और इसकी उपयुक्त औषधि श्री राम का मयम गुण के समान त्राण है। जिस लोण से ऐसा मानस का रोगो शरणापन्न होने के बाद अपने मन को कुटिलता और दुष्टता रूपी रोग से मुळे हो जाता है। इसमें राम का मय सन्त का उपदेश और श्री रामको शरणागति परम औषधि है । इन्द्रकुमार जयंत जी कुटिल रंग का रोगो था और इस वीषधि से रोग से मुक्त हुआ । गोस्वामो जो कहते हैं कि यदि मन की कुटिलता दुष्टता रूपी कुष्टरोग से मुक्त करना चाहते हो तौसन्त उपदेश एवं प्रभु कोशरणागति की और उन्मुख ह्रीं । अहंकार :अत्यन्त दुःख देनेवाला अहंकार की तुलना हमरुवा रोग से की गयी है । इसका निदान और मौषधि वस्तु में अभिमान रखनेवाला राज्य आदिका लामो एवं उसमें बभिमान करने वाला सदैव वहंकार से जीनेवाला प्राणीजी मिया मिमानी है जिसके कोन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रिय में डमरुवा रोग हो गया है अर्थात पंगु शति हीन है एैसा प्राणी जिसके बन्दर कैकूल संकल्प मात्र है मिथ्या हंकार द्रव्य के न पाने के बाद मी उत्पन्न होता है जी अपने हृदय में रिस से भरा हुआ है जिसका बाइय रंक ह और अन्तरंग अहंकार के कारण राजमाव युक्त है। ऐसा प्राणी अहंकार से ग्रसित होता है, कुछ भी कर सकने मैं जो समर्थ नहीं है, पर वहंकारी है उसे मरुवा रोग का रोगी समझना चाहिए । यह रोग विशेष विषयी जीवों में पाया जाता है । राजा मानुप्रताप के द्वारा पराजित राज्य विहीन राजा अपने प्राण रार्थ बन प्रान्त में अपने वास्तविक रूप को छिपाकर तापस वैष में रहता था लेकिन राज्यामिमान इसमें बना हुवा था यह बहकार मोह का भाई है । इस अत्यन्त दुःखद अहंकार रोग को औषधि इस को संकल्प को पूर्णता से ही उपलव्य होती है । इसमें क्मट नीति विशेष रूप से प्रमाकित होती है । इसका अपना संकल्प जिसकी अन्तर में रखकर जिस अभिमान रोग से ग्रसित होता है । उसका यह अत्यन्त दुःखद रोग को पूर्णता हो इसका जीवन है । यह राज्या भिमानो जिस राज्य से पदच्युत हो गया है उसको प्राप्ति इसकी जोवन औषधि है । यह रोग विशेष लौकिक ऐश्वर्य सम्पन्न, राजा, घनाइय सम्पन्न लोगों को होता है जिसे रोग कहते हैं। इससे पाने का एक मात्र उपाय है मुर्ख अहंकार का पैठ भर जाना । तृप्तता हो इसका सयम हैवीर संयम के द्वारा इस रोग से मुद्धि प्राप्त करना है । मदमान :मानमद को चाहने वाला दम्मो और कमटो होता है । यह जिसे मानस रोग मैं दम्म कपट के रूप में कहा गया है सदैव मवमान से युक्त होता है । यहरोग रामचरितमानस के अन्तर्गत कालनेमि को हुआ था । यह कालनैमि मार्ग में मिले हुए हनुमानकी अपने दम बल और कपट बल से हनुमान जी को अपना शिष्य बनाना चाहा इस रोग में जीव अपना मान चाहता है । और उसे अपने किये हुए कार्य मैमद होता है। कालनेमि ने हनुमानकी पानी के मागने के पश्खाद पानी के लिये सरीवर दिखा दिया था। पर इसमें गुरु बनने कॉमद इतना था कि बिना हनुमान के इच्छा प्रक्ट किये हो गुरु मंत्र देने कीबात कहो और कहा कि मैदीक्षा दूंगा जिससे तुम्हें ज्ञान प्राप्त होगा । इस रोग का रोगी न देखने के बाद मी देखने का इसे मद होता है जैसा कि इसमें न देखने केबाद मो देखने का मद हुआ । इसने हनुमानसे कहा था कि में देख रहा हूं होत महा रन रावन रामहिं और यह नहीं कहा कि मैं मैंने सुना है। कालनेमि ने स्पष्ट उत्तर दिया हहा लगे मैं देखा माई । इसका निदान गौस्वामी जी लिखते हैं कि श्री हनुमान जी जिस समय सरोवर में प्रवेश किये अपनी जल पिपासा शान्त करने के लिये उस समय सयोग से तालाब बन्दर रहनेवाली शापित मकड़ी जन गन्धर्वा के रूप में प्रकट हुई मैं जाकर यह बाणो किया कि जिसके द्वारा प्रेरितहकर आप आस ही वह मुनि नहीं बल्कि निश्विर है, यह मेरी नाणों सत्य है । मुनिके वेश में कालनेमि निश्चिर और उसने मुनिके वैश मैं हनुमान की जल के लिये बताया । व्यक्ति का निदान गौस्वामो जो ताते है कि हनुमान जी ने उससे कहा कि पहले तुम गुरुदक्षिणा ले ली गर्थात तुम्हारे लिये जी उपयुक्त वौषधि है पहले उसे हम दें ऐसे रोगी को औषधि जो निश्वर है दम्भी है, कपटी है, मद और मान जिसमें भरा हुआ है वहहनुमान के द्वारा मार दिया जाता है । हनुमान एक प्रकार की औषधि है जी लोगों में रहने वाले मान, मद से उत्पन्न हुआ है जो दम्म और कमटके द्वारा वाहता है जिसे यह रोग अर्थात ज्ञान नैत्र शून्य विकारी नेत्र वाला है इसे निश्विर की हनुमान जी के एक औषधि बताते हैं जो देते हैं वह दण्ड है। श्री हनुमान जी ने वैसा ही किया और उस निश्विर की जिसके प्राण अशुद्ध थे । रामरूपी महामंत्र के द्वारा किया। राम राम करि कासि प्राना । तृष्णा :यह तम गुण रजी गुण सम्पन्न ताड़का जिसका उदर बड़ा ही विशाल एवं व्यापक है जो यज्ञ बादि पुनीत कर्मों की शोषण करनेवाली एवं पूजा चर्वण करनेवाली है। यह सब रावण का परिवार है जिसका वर्णन किया जा चुका है । बनाथ कृषि महर्षि मुनि, अपने की वाक्रान्त समझते हैं क्योंकि जो विशाल उदर वाली वृष्णा हवह इन लोगोंकी बहुत सताती है बार वही निश्विरी ताड़का है और जब तक तृष्णाताड़का का बच नहीं हो पाता तब तक यै अनाथ मुनि सनाथ नहीं हो सकी । यह ष्णा रोग समस्त रोगों के अन्तर्गत बड़ा मयंकर है क्योंकि यह सरमों का ही पान करता है । १- रामचरितमानस : लंकाकाण्ड : १० सं० ५७, चां० सं०६ ।
इस रोग को होती है । इसे मानस रोग के अन्तर्गत मन को कुटिलता और दुष्टता से अभिहित किया गया है। इसकी यह निदान है और इसकी उपयुक्त औषधि श्री राम का मयम गुण के समान त्राण है। जिस लोण से ऐसा मानस का रोगो शरणापन्न होने के बाद अपने मन को कुटिलता और दुष्टता रूपी रोग से मुळे हो जाता है। इसमें राम का मय सन्त का उपदेश और श्री रामको शरणागति परम औषधि है । इन्द्रकुमार जयंत जी कुटिल रंग का रोगो था और इस वीषधि से रोग से मुक्त हुआ । गोस्वामो जो कहते हैं कि यदि मन की कुटिलता दुष्टता रूपी कुष्टरोग से मुक्त करना चाहते हो तौसन्त उपदेश एवं प्रभु कोशरणागति की और उन्मुख ह्रीं । अहंकार :अत्यन्त दुःख देनेवाला अहंकार की तुलना हमरुवा रोग से की गयी है । इसका निदान और मौषधि वस्तु में अभिमान रखनेवाला राज्य आदिका लामो एवं उसमें बभिमान करने वाला सदैव वहंकार से जीनेवाला प्राणीजी मिया मिमानी है जिसके कोन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रिय में डमरुवा रोग हो गया है अर्थात पंगु शति हीन है एैसा प्राणी जिसके बन्दर कैकूल संकल्प मात्र है मिथ्या हंकार द्रव्य के न पाने के बाद मी उत्पन्न होता है जी अपने हृदय में रिस से भरा हुआ है जिसका बाइय रंक ह और अन्तरंग अहंकार के कारण राजमाव युक्त है। ऐसा प्राणी अहंकार से ग्रसित होता है, कुछ भी कर सकने मैं जो समर्थ नहीं है, पर वहंकारी है उसे मरुवा रोग का रोगी समझना चाहिए । यह रोग विशेष विषयी जीवों में पाया जाता है । राजा मानुप्रताप के द्वारा पराजित राज्य विहीन राजा अपने प्राण रार्थ बन प्रान्त में अपने वास्तविक रूप को छिपाकर तापस वैष में रहता था लेकिन राज्यामिमान इसमें बना हुवा था यह बहकार मोह का भाई है । इस अत्यन्त दुःखद अहंकार रोग को औषधि इस को संकल्प को पूर्णता से ही उपलव्य होती है । इसमें क्मट नीति विशेष रूप से प्रमाकित होती है । इसका अपना संकल्प जिसकी अन्तर में रखकर जिस अभिमान रोग से ग्रसित होता है । उसका यह अत्यन्त दुःखद रोग को पूर्णता हो इसका जीवन है । यह राज्या भिमानो जिस राज्य से पदच्युत हो गया है उसको प्राप्ति इसकी जोवन औषधि है । यह रोग विशेष लौकिक ऐश्वर्य सम्पन्न, राजा, घनाइय सम्पन्न लोगों को होता है जिसे रोग कहते हैं। इससे पाने का एक मात्र उपाय है मुर्ख अहंकार का पैठ भर जाना । तृप्तता हो इसका सयम हैवीर संयम के द्वारा इस रोग से मुद्धि प्राप्त करना है । मदमान :मानमद को चाहने वाला दम्मो और कमटो होता है । यह जिसे मानस रोग मैं दम्म कपट के रूप में कहा गया है सदैव मवमान से युक्त होता है । यहरोग रामचरितमानस के अन्तर्गत कालनेमि को हुआ था । यह कालनैमि मार्ग में मिले हुए हनुमानकी अपने दम बल और कपट बल से हनुमान जी को अपना शिष्य बनाना चाहा इस रोग में जीव अपना मान चाहता है । और उसे अपने किये हुए कार्य मैमद होता है। कालनेमि ने हनुमानकी पानी के मागने के पश्खाद पानी के लिये सरीवर दिखा दिया था। पर इसमें गुरु बनने कॉमद इतना था कि बिना हनुमान के इच्छा प्रक्ट किये हो गुरु मंत्र देने कीबात कहो और कहा कि मैदीक्षा दूंगा जिससे तुम्हें ज्ञान प्राप्त होगा । इस रोग का रोगी न देखने के बाद मी देखने का इसे मद होता है जैसा कि इसमें न देखने केबाद मो देखने का मद हुआ । इसने हनुमानसे कहा था कि में देख रहा हूं होत महा रन रावन रामहिं और यह नहीं कहा कि मैं मैंने सुना है। कालनेमि ने स्पष्ट उत्तर दिया हहा लगे मैं देखा माई । इसका निदान गौस्वामी जी लिखते हैं कि श्री हनुमान जी जिस समय सरोवर में प्रवेश किये अपनी जल पिपासा शान्त करने के लिये उस समय सयोग से तालाब बन्दर रहनेवाली शापित मकड़ी जन गन्धर्वा के रूप में प्रकट हुई मैं जाकर यह बाणो किया कि जिसके द्वारा प्रेरितहकर आप आस ही वह मुनि नहीं बल्कि निश्विर है, यह मेरी नाणों सत्य है । मुनिके वेश में कालनेमि निश्चिर और उसने मुनिके वैश मैं हनुमान की जल के लिये बताया । व्यक्ति का निदान गौस्वामो जो ताते है कि हनुमान जी ने उससे कहा कि पहले तुम गुरुदक्षिणा ले ली गर्थात तुम्हारे लिये जी उपयुक्त वौषधि है पहले उसे हम दें ऐसे रोगी को औषधि जो निश्वर है दम्भी है, कपटी है, मद और मान जिसमें भरा हुआ है वहहनुमान के द्वारा मार दिया जाता है । हनुमान एक प्रकार की औषधि है जी लोगों में रहने वाले मान, मद से उत्पन्न हुआ है जो दम्म और कमटके द्वारा वाहता है जिसे यह रोग अर्थात ज्ञान नैत्र शून्य विकारी नेत्र वाला है इसे निश्विर की हनुमान जी के एक औषधि बताते हैं जो देते हैं वह दण्ड है। श्री हनुमान जी ने वैसा ही किया और उस निश्विर की जिसके प्राण अशुद्ध थे । रामरूपी महामंत्र के द्वारा किया। राम राम करि कासि प्राना । तृष्णा :यह तम गुण रजी गुण सम्पन्न ताड़का जिसका उदर बड़ा ही विशाल एवं व्यापक है जो यज्ञ बादि पुनीत कर्मों की शोषण करनेवाली एवं पूजा चर्वण करनेवाली है। यह सब रावण का परिवार है जिसका वर्णन किया जा चुका है । बनाथ कृषि महर्षि मुनि, अपने की वाक्रान्त समझते हैं क्योंकि जो विशाल उदर वाली वृष्णा हवह इन लोगोंकी बहुत सताती है बार वही निश्विरी ताड़का है और जब तक तृष्णाताड़का का बच नहीं हो पाता तब तक यै अनाथ मुनि सनाथ नहीं हो सकी । यह ष्णा रोग समस्त रोगों के अन्तर्गत बड़ा मयंकर है क्योंकि यह सरमों का ही पान करता है । एक- रामचरितमानस : लंकाकाण्ड : दस संशून्य सत्तावन, चांशून्य संछः ।
Bihar: बिहार में महागठबंधन आज सड़क पर उतर गई है। महंगाई और बेरोजगारी को लेकर महागठबंधन के नेताओं ने प्रतिरोध मार्च निकाला। रविवार को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में यह मार्च राबड़ी देवी के आवास से निकला। Bihar: बिहार में महागठबंधन आज सड़क पर उतर गई है। महंगाई और बेरोजगारी को लेकर महागठबंधन के नेताओं ने प्रतिरोध मार्च निकाला। रविवार को तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के नेतृत्व में यह मार्च राबड़ी देवी के आवास से निकला। इसके बाद सगुना मोड़ होते हुए डाक बंगला चौराहा और गांधी मैदान के पास जेपी प्रतिमा के पास पहुंची। प्रतिरोध मार्च को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Former Chief Minister Rabri Devi) ने अपने आवास से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक बेरोजगारी रथ को भी रवाना किया गया। इस रथ पर तेजस्वी और तेजप्रताप यादव सवार थे। इसके अलावा विपक्ष के कई नेता बैलगाड़ी और टमटम पर सवार होकर विरोध करते दिखे। पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, मधुबनी, दरभंगा, छपरा, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल समेत कई इलाकों में प्रतिरोध मार्च निकाला गया। छपरा में पेट्रोल की बढ़ती कीमत को लेकर लोगों ने बैलगाड़ी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रतिरोध मार्च का असर देखा गया राष्ट्रीय जनता दल, वामदल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के कई नेता प्रतिरोध मार्च के समर्थन में दिखे और केंद्र सरकार (Central Government) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि प्रतिरोध मार्च की तैयारी पिछले 1 सप्ताह से चल रही थी। पटना में जगह-जगह हार्डिंग और पोस्टर लगाए गए थे। खासतौर पर महंगाई बेरोजगारी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोला रविवार का दिन इसलिए चुना गया ताकि आम लोगों को किसी भी तरह का परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। हालांकि पटना में विपक्ष के प्रतिरोध मार्च का असर दिखा सगुना मोड़ से इनकम टैक्स चौराहा तक जाम की स्थिति उत्पन्न हुई। प्रतिरोध मार्च के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे जन सरोकार के मुद्दे पर ना ही गंभीर है और ना ही विमर्श करना चाहती है। देश में स्थिति अत्यंत ही भयावह हो चुकी है। महंगाई अन कंट्रोल हो चुकी है। लोकतंत्र के प्रति अत्यंत चिंतनीय विषय है। इसके विरोध में विपक्ष एक मंच पर आकर प्रतिरोध मार्च निकाल रहा है जनता महंगाई से त्रस्त हो चुकी है।
Bihar: बिहार में महागठबंधन आज सड़क पर उतर गई है। महंगाई और बेरोजगारी को लेकर महागठबंधन के नेताओं ने प्रतिरोध मार्च निकाला। रविवार को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में यह मार्च राबड़ी देवी के आवास से निकला। Bihar: बिहार में महागठबंधन आज सड़क पर उतर गई है। महंगाई और बेरोजगारी को लेकर महागठबंधन के नेताओं ने प्रतिरोध मार्च निकाला। रविवार को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में यह मार्च राबड़ी देवी के आवास से निकला। इसके बाद सगुना मोड़ होते हुए डाक बंगला चौराहा और गांधी मैदान के पास जेपी प्रतिमा के पास पहुंची। प्रतिरोध मार्च को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने आवास से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक बेरोजगारी रथ को भी रवाना किया गया। इस रथ पर तेजस्वी और तेजप्रताप यादव सवार थे। इसके अलावा विपक्ष के कई नेता बैलगाड़ी और टमटम पर सवार होकर विरोध करते दिखे। पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, मधुबनी, दरभंगा, छपरा, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल समेत कई इलाकों में प्रतिरोध मार्च निकाला गया। छपरा में पेट्रोल की बढ़ती कीमत को लेकर लोगों ने बैलगाड़ी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रतिरोध मार्च का असर देखा गया राष्ट्रीय जनता दल, वामदल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के कई नेता प्रतिरोध मार्च के समर्थन में दिखे और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि प्रतिरोध मार्च की तैयारी पिछले एक सप्ताह से चल रही थी। पटना में जगह-जगह हार्डिंग और पोस्टर लगाए गए थे। खासतौर पर महंगाई बेरोजगारी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोला रविवार का दिन इसलिए चुना गया ताकि आम लोगों को किसी भी तरह का परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। हालांकि पटना में विपक्ष के प्रतिरोध मार्च का असर दिखा सगुना मोड़ से इनकम टैक्स चौराहा तक जाम की स्थिति उत्पन्न हुई। प्रतिरोध मार्च के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे जन सरोकार के मुद्दे पर ना ही गंभीर है और ना ही विमर्श करना चाहती है। देश में स्थिति अत्यंत ही भयावह हो चुकी है। महंगाई अन कंट्रोल हो चुकी है। लोकतंत्र के प्रति अत्यंत चिंतनीय विषय है। इसके विरोध में विपक्ष एक मंच पर आकर प्रतिरोध मार्च निकाल रहा है जनता महंगाई से त्रस्त हो चुकी है।
शनिवार, 25 जुलाई को नाग पंचमी है। हर साल सिर्फ इसी दिन उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के शिखर पर मौजूद नागचंद्रेश्वर भगवान के पट आम भक्तों के लिए खोले जाते हैं। लेकिन, इस साल कोरोना वायरस की वजह से श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिर समिति की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर भक्तों के लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन के पंचांग निर्माता और शास्त्रों के जानकार ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शंकर व्यास ने बताया कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व है। हजारों साल पुराने शास्त्रों में भी महाकालेश्वर का जिक्र है। लेकिन, महाकाल मंदिर की वर्तमान इमारत का इतिहास 250-300 साल पुराना है। मुगलों के समय में प्राचीन महाकाल मंदिर ध्वस्त हो गया था। इसके बाद मराठा राजाओं ने उज्जैन पर राज किया। राणोजी सिंधिया ने अपने शासनकाल में महाकाल मंदिर का निर्माण फिर से करवाया था। मंदिर निर्माण के बाद समय-समय पर अलग-अलग राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। जब मंदिर का पुनर्निमाण हुआ, तब नागचंद्रश्वेर की मूर्ति को मंदिर के ऊपरी तल पर एक दीवार में लगा दिया गया था। संभवतः ये मूर्ति मुगलों द्वारा ध्वस्त किए गए मंदिर के अवशेषों में से मिली थी। पं. व्यास के अनुसार, नागदेव की पूजा सिर्फ नागपंचमी पर ही करने का विशेष महत्व है। इसीलिए महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर भगवान के पट नागपंचमी पर ही खोले जाते हैं। मंदिर में नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। ये 11वीं शताब्दी की बताई जाती है। इस प्रतिमा में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती विराजित हैं। महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर ये प्रतिमा स्थित है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश करते ही दीवार पर भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा दिखाई देती है। महाकाल मंदिर के प्रशासक सुजान रावत ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते नागपंचमी पर आम श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन नहीं कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की वेबसाइट www. mahakaleshwar. nic. in और सोशल मीडिया पर ऑन लाइन दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा सिर्फ मध्य प्रदेश के भक्तों को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्री-बुकिंग के आधार पर ही कराए जाएंगे। महामारी के चलते अन्य प्रदेश के लोगों को मंदिर में दर्शन करने की अनुमति नहीं मिल सकेगी। महाकालेश्वर दर्शन के लिए मोबाइल में प्ले स्टोर से महाकालेश्वर मंदिर के लाइव दर्शन ऐप को डाउनलोड करना होगा। इस ऐप से दर्शन के लिए बुकिंग की जा सकती है। अपनी इच्छा के अनुसार तारीख और दर्शन का समय चुन सकते हैं। ऐप पर श्रद्धालु द्वारा सभी जानकारियां देने के बाद एसएमएस से परमिशन मिलेगी। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 18002331008 पर भी दर्शन के लिए बुकिंग कराई जा सकती है। 65 और इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, 10 साल से छोटे बच्चे व गर्भवती महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर में सेनेटाइजेशन, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सभी भक्तों को करना होगा। महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। ये द्वादश ज्योतिर्लिंगों के क्रम में तीसरा है। मान्यता है कि दक्षिणमुखी होने की वजह से महाकाल के दर्शन से असमय मृत्यु के भय और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। सिर्फ इसी मंदिर में रोज सुबह भस्म आरती की जाती है। प्राचीन समय में महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र को महाकाल वन के नाम से जाना जाता था। स्कंद पुराण के अवंती खंड, शिवमहापुराण, मत्स्य पुराण आदि ग्रंथों में महाकाल वन का उल्लेख है। यहां शिवजी यानी महाकाल का ज्योति स्वरूप विराजमान है। इसीलिए इसे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। नागपंचमी पर जीवित सांप की पूजा करने और दूध पिलाने से बचना चाहिए। सांप मांसाहारी जीव है, इसके लिए दूध विष की तरह होता है। नागपंचमी पर नागदेवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करनी चाहिए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शनिवार, पच्चीस जुलाई को नाग पंचमी है। हर साल सिर्फ इसी दिन उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के शिखर पर मौजूद नागचंद्रेश्वर भगवान के पट आम भक्तों के लिए खोले जाते हैं। लेकिन, इस साल कोरोना वायरस की वजह से श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिर समिति की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर भक्तों के लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन के पंचांग निर्माता और शास्त्रों के जानकार ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शंकर व्यास ने बताया कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व है। हजारों साल पुराने शास्त्रों में भी महाकालेश्वर का जिक्र है। लेकिन, महाकाल मंदिर की वर्तमान इमारत का इतिहास दो सौ पचास-तीन सौ साल पुराना है। मुगलों के समय में प्राचीन महाकाल मंदिर ध्वस्त हो गया था। इसके बाद मराठा राजाओं ने उज्जैन पर राज किया। राणोजी सिंधिया ने अपने शासनकाल में महाकाल मंदिर का निर्माण फिर से करवाया था। मंदिर निर्माण के बाद समय-समय पर अलग-अलग राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। जब मंदिर का पुनर्निमाण हुआ, तब नागचंद्रश्वेर की मूर्ति को मंदिर के ऊपरी तल पर एक दीवार में लगा दिया गया था। संभवतः ये मूर्ति मुगलों द्वारा ध्वस्त किए गए मंदिर के अवशेषों में से मिली थी। पं. व्यास के अनुसार, नागदेव की पूजा सिर्फ नागपंचमी पर ही करने का विशेष महत्व है। इसीलिए महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर भगवान के पट नागपंचमी पर ही खोले जाते हैं। मंदिर में नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। ये ग्यारहवीं शताब्दी की बताई जाती है। इस प्रतिमा में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती विराजित हैं। महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर ये प्रतिमा स्थित है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश करते ही दीवार पर भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा दिखाई देती है। महाकाल मंदिर के प्रशासक सुजान रावत ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते नागपंचमी पर आम श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन नहीं कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की वेबसाइट www. mahakaleshwar. nic. in और सोशल मीडिया पर ऑन लाइन दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा सिर्फ मध्य प्रदेश के भक्तों को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्री-बुकिंग के आधार पर ही कराए जाएंगे। महामारी के चलते अन्य प्रदेश के लोगों को मंदिर में दर्शन करने की अनुमति नहीं मिल सकेगी। महाकालेश्वर दर्शन के लिए मोबाइल में प्ले स्टोर से महाकालेश्वर मंदिर के लाइव दर्शन ऐप को डाउनलोड करना होगा। इस ऐप से दर्शन के लिए बुकिंग की जा सकती है। अपनी इच्छा के अनुसार तारीख और दर्शन का समय चुन सकते हैं। ऐप पर श्रद्धालु द्वारा सभी जानकारियां देने के बाद एसएमएस से परमिशन मिलेगी। इसके अलावा टोल फ्री नंबर एक आठ शून्य शून्य दो तीन तीन एक शून्य शून्य आठ पर भी दर्शन के लिए बुकिंग कराई जा सकती है। पैंसठ और इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, दस साल से छोटे बच्चे व गर्भवती महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर में सेनेटाइजेशन, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सभी भक्तों को करना होगा। महाकालेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। ये द्वादश ज्योतिर्लिंगों के क्रम में तीसरा है। मान्यता है कि दक्षिणमुखी होने की वजह से महाकाल के दर्शन से असमय मृत्यु के भय और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। सिर्फ इसी मंदिर में रोज सुबह भस्म आरती की जाती है। प्राचीन समय में महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र को महाकाल वन के नाम से जाना जाता था। स्कंद पुराण के अवंती खंड, शिवमहापुराण, मत्स्य पुराण आदि ग्रंथों में महाकाल वन का उल्लेख है। यहां शिवजी यानी महाकाल का ज्योति स्वरूप विराजमान है। इसीलिए इसे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। नागपंचमी पर जीवित सांप की पूजा करने और दूध पिलाने से बचना चाहिए। सांप मांसाहारी जीव है, इसके लिए दूध विष की तरह होता है। नागपंचमी पर नागदेवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करनी चाहिए। This website follows the DNPA Code of Ethics.