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PM in Gorakhpur: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 जुलाई को अपने यूपी दौरे के दौरान गोरखपुर में गीता प्रेस के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। गीता प्रेस अपने 100 साल पूरे कर चुका है। इस मौके पर गीता प्रेस गोरखपुर की तरफ से शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। स्टोरी में आगे पढ़ेंः - गीता प्रेस की स्थापना कब हुई' जब समापन कार्यक्रम में पीएम मोदी पहुंचे, तो वहां उनका मंत्रोच्चार से स्वागत किया गया। लोगों ने पीएम मोदी पर फूल बरसाए। इस समारोह में पीएम मोदी ने नेपाली भाषा में अनुवादित सचित्र शिव पुराण और शिव महापुराण का अनावरण किया। इस मौके पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों का पीएम अभिवादन स्वीकार किया। वहीं इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के अलावा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल और गोरखपुर सांसद रवि किशन भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा, "गीता प्रेस विश्व का ऐसा इकलौता प्रिंटिंग प्रेस है जो एक संस्था नहीं है बल्कि एक जीवन आस्था है। जहां गीता है, वहां साक्षात कृष्ण हैं। जहां कृष्ण हैं वहां करुणा, कर्म, ज्ञान और विज्ञान का शोध भी है।" पीएम मोदी ने कहा कि एक समय गांधी जी भी गीता प्रेस के लिए कल्याण पत्रिका के जरिए लिखा करते थे। मुझे खुशी है कि गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार मिला है। यह देश का सम्मान है, गीता प्रेस के योगदान का सम्मान है। 100 सालों में गीता प्रेस द्वारा करोड़ों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह पुस्तकें लागत से भी कम मूल्यों में लोगों के घरों में पहुंचाई जाती हैं। इससे लोगों के आध्यात्मिक, बौद्धिक ज्ञान का सृजन हुआ है। गीता प्रेस को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर स्टेशनों पर गीता प्रेस का स्टॉल देखने को मिलता है। गीता प्रेस अलग-अलग भाषाओं में भारत के मूलचिंतन को जन-जन तक पहुंचाता है। गीता प्रेस की 100 साल की यात्रा ऐसे समय में पूरी हुई है, जब देश अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह संयोग ऐसे नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि 100 साल पहले का ऐसा समय जब सदियों की गुलामी ने भारत की चेतना को धूमिल कर दिया था। विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया। अंग्रेजों के समय में गुरुकुल की परंपरा नष्ट कर दी गई। ऐसे में समय में हमारे पूज्य ग्रंध गायब होने लगे थे। लोगों की पहुंच से दूर हो चुके थे। उन्होंने कहा कि आप कल्पना कीजिए गीता-रामायण के बिना हमारा समाज कैसे आगे बढ़ा होगा। लेकिन हमारा इतिहास रहा है कि हम मुश्किल समय से बाहर निकले हैं। ऐसे में 1923 में जब गीता प्रेस ने काम करना शुरू किया। तब गीता प्रेस ने हमारे धर्म ग्रंध को घर-घर पहुंचाने का काम किया। जिससे नई पीढ़ियां ग्रंथों से जुड़ने लगीं। इस मौके पर सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने विकास की नई यात्रा के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर नई पहचान को देखा है। गीता प्रेस अपने 100 वर्ष की शानदार यात्रा पर बढ़ा है। गीता प्रेस भारत की मूल आत्मा का जागृत करता है। केंद्र द्वारा गीता प्रेस को सम्मान दिए जाने पर सीएम योगी ने कहा कि यह भारत की धरोधर का सम्मान हुआ है। CM योगी ने कहा कि गीता प्रेस ने अपनी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। जिस शानदार तरीके से गीता प्रेस ने अपने 100 साल पूरे किए, आगे भी वह उसी तरह से बढ़ता रहे। मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं। यूपी सीएम ने कहा कि योग भारत की अति प्राचीन विधा रही है, लेकिन पहली बार योग को वैश्विक मान्यता मिली है। 21 जून की तिथि को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता देकर माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रस्ताव को वैश्विक मान्यता दी गयी है। गौरतलब है कि हाल ही में गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 देने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार की घोषणा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में किया गया है। गीता प्रेस के 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 1923 में इसकी स्थापना की गई थी और 2023 में 100 वर्ष पूरे होने पर गांधी शांति पुरस्कार 2021 सर्वसम्मति के साथ गीता प्रेस को दिया गया है।
PM in Gorakhpur: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात जुलाई को अपने यूपी दौरे के दौरान गोरखपुर में गीता प्रेस के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। गीता प्रेस अपने एक सौ साल पूरे कर चुका है। इस मौके पर गीता प्रेस गोरखपुर की तरफ से शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। स्टोरी में आगे पढ़ेंः - गीता प्रेस की स्थापना कब हुई' जब समापन कार्यक्रम में पीएम मोदी पहुंचे, तो वहां उनका मंत्रोच्चार से स्वागत किया गया। लोगों ने पीएम मोदी पर फूल बरसाए। इस समारोह में पीएम मोदी ने नेपाली भाषा में अनुवादित सचित्र शिव पुराण और शिव महापुराण का अनावरण किया। इस मौके पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों का पीएम अभिवादन स्वीकार किया। वहीं इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के अलावा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल और गोरखपुर सांसद रवि किशन भी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने कहा, "गीता प्रेस विश्व का ऐसा इकलौता प्रिंटिंग प्रेस है जो एक संस्था नहीं है बल्कि एक जीवन आस्था है। जहां गीता है, वहां साक्षात कृष्ण हैं। जहां कृष्ण हैं वहां करुणा, कर्म, ज्ञान और विज्ञान का शोध भी है।" पीएम मोदी ने कहा कि एक समय गांधी जी भी गीता प्रेस के लिए कल्याण पत्रिका के जरिए लिखा करते थे। मुझे खुशी है कि गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार मिला है। यह देश का सम्मान है, गीता प्रेस के योगदान का सम्मान है। एक सौ सालों में गीता प्रेस द्वारा करोड़ों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह पुस्तकें लागत से भी कम मूल्यों में लोगों के घरों में पहुंचाई जाती हैं। इससे लोगों के आध्यात्मिक, बौद्धिक ज्ञान का सृजन हुआ है। गीता प्रेस को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर स्टेशनों पर गीता प्रेस का स्टॉल देखने को मिलता है। गीता प्रेस अलग-अलग भाषाओं में भारत के मूलचिंतन को जन-जन तक पहुंचाता है। गीता प्रेस की एक सौ साल की यात्रा ऐसे समय में पूरी हुई है, जब देश अपनी आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगांठ मना रहा है। यह संयोग ऐसे नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि एक सौ साल पहले का ऐसा समय जब सदियों की गुलामी ने भारत की चेतना को धूमिल कर दिया था। विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया। अंग्रेजों के समय में गुरुकुल की परंपरा नष्ट कर दी गई। ऐसे में समय में हमारे पूज्य ग्रंध गायब होने लगे थे। लोगों की पहुंच से दूर हो चुके थे। उन्होंने कहा कि आप कल्पना कीजिए गीता-रामायण के बिना हमारा समाज कैसे आगे बढ़ा होगा। लेकिन हमारा इतिहास रहा है कि हम मुश्किल समय से बाहर निकले हैं। ऐसे में एक हज़ार नौ सौ तेईस में जब गीता प्रेस ने काम करना शुरू किया। तब गीता प्रेस ने हमारे धर्म ग्रंध को घर-घर पहुंचाने का काम किया। जिससे नई पीढ़ियां ग्रंथों से जुड़ने लगीं। इस मौके पर सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने विकास की नई यात्रा के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर नई पहचान को देखा है। गीता प्रेस अपने एक सौ वर्ष की शानदार यात्रा पर बढ़ा है। गीता प्रेस भारत की मूल आत्मा का जागृत करता है। केंद्र द्वारा गीता प्रेस को सम्मान दिए जाने पर सीएम योगी ने कहा कि यह भारत की धरोधर का सम्मान हुआ है। CM योगी ने कहा कि गीता प्रेस ने अपनी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। जिस शानदार तरीके से गीता प्रेस ने अपने एक सौ साल पूरे किए, आगे भी वह उसी तरह से बढ़ता रहे। मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं। यूपी सीएम ने कहा कि योग भारत की अति प्राचीन विधा रही है, लेकिन पहली बार योग को वैश्विक मान्यता मिली है। इक्कीस जून की तिथि को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता देकर माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रस्ताव को वैश्विक मान्यता दी गयी है। गौरतलब है कि हाल ही में गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दो हज़ार इक्कीस देने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार की घोषणा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में किया गया है। गीता प्रेस के एक सौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। एक हज़ार नौ सौ तेईस में इसकी स्थापना की गई थी और दो हज़ार तेईस में एक सौ वर्ष पूरे होने पर गांधी शांति पुरस्कार दो हज़ार इक्कीस सर्वसम्मति के साथ गीता प्रेस को दिया गया है।
"एक सशर्त दुश्मन के हवाई हमलों ने ट्रांस-बाइकाल क्षेत्र में तैनात एक्सएनयूएमएक्स हवाई जहाज और वायु इकाइयों के हेलीकॉप्टरों की तुलना में अधिक नकल की। "सशर्त शत्रु" की भूमिका में Su-10 फाइटर जेट, Su-30 अटैक एयरक्राफ्ट, Mi-25, Mi-24 हेलीकॉप्टर हेलीकॉप्टर के अनुभवी चालक दल थे। इसके अलावा, मिसाइल लॉन्च किए गए। कुल मिलाकर, एक्सएनयूएमएक्स से अधिक विभिन्न एयरोडायनामिक लक्ष्य, दुश्मन की क्रूज मिसाइलों और दुश्मन के विमानों की नकल करते हुए नष्ट कर दिए गए, "रिलीज ने कहा। इसके अलावा, क्रास्नोडार टेरिटरी हेलिकॉप्टर पर आकाश में Mi-28H "नाइट हंटर" ने दुश्मन की गणना करने के लिए प्रशिक्षण शुरू किया। "युद्धाभ्यास में शामिल हुए 10 पर हमला करने वाले हेलीकॉप्टर Mi-28H" नाइट हंटर . . . -WUO सेवा। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चालक दल को "गुप्त आवाजाही के लिए कार्रवाइयों को अंजाम देना होगा और सशर्त दुश्मन की हवाई रक्षा संपत्तियों को दरकिनार कर इलाके की विशेषताओं को ध्यान में रखना होगा। "
"एक सशर्त दुश्मन के हवाई हमलों ने ट्रांस-बाइकाल क्षेत्र में तैनात एक्सएनयूएमएक्स हवाई जहाज और वायु इकाइयों के हेलीकॉप्टरों की तुलना में अधिक नकल की। "सशर्त शत्रु" की भूमिका में Su-दस फाइटर जेट, Su-तीस अटैक एयरक्राफ्ट, Mi-पच्चीस, Mi-चौबीस हेलीकॉप्टर हेलीकॉप्टर के अनुभवी चालक दल थे। इसके अलावा, मिसाइल लॉन्च किए गए। कुल मिलाकर, एक्सएनयूएमएक्स से अधिक विभिन्न एयरोडायनामिक लक्ष्य, दुश्मन की क्रूज मिसाइलों और दुश्मन के विमानों की नकल करते हुए नष्ट कर दिए गए, "रिलीज ने कहा। इसके अलावा, क्रास्नोडार टेरिटरी हेलिकॉप्टर पर आकाश में Mi-अट्ठाईसH "नाइट हंटर" ने दुश्मन की गणना करने के लिए प्रशिक्षण शुरू किया। "युद्धाभ्यास में शामिल हुए दस पर हमला करने वाले हेलीकॉप्टर Mi-अट्ठाईसH" नाइट हंटर . . . -WUO सेवा। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चालक दल को "गुप्त आवाजाही के लिए कार्रवाइयों को अंजाम देना होगा और सशर्त दुश्मन की हवाई रक्षा संपत्तियों को दरकिनार कर इलाके की विशेषताओं को ध्यान में रखना होगा। "
Delhi Auto Fare: दिल्ली सरकार ने बुधवार को शहर में ऑटो का किराया बढ़ाने की घोषणा की। इस फैसले को बढ़ती महंगाई के बीच ऑटो और टैक्सी मालिकों को बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, ऑटो का मीटर अब 25 रुपये की जगह 30 रुपये और उसके बाद प्रति किलोमीटर किराया 9. 5 रुपये की जगह 11 रुपये होगा। यात्रियों को अब नॉन एसी टैक्सी के लिए 40 रुपये के न्यूनतम किराए के बाद 17 रुपये प्रति किमी का भुगतान करना होगा। पहले यह शुल्क 14 रुपये प्रति किमी था। एसी टैक्सी का किराया 16 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। ये भी पढ़ेंः
Delhi Auto Fare: दिल्ली सरकार ने बुधवार को शहर में ऑटो का किराया बढ़ाने की घोषणा की। इस फैसले को बढ़ती महंगाई के बीच ऑटो और टैक्सी मालिकों को बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, ऑटो का मीटर अब पच्चीस रुपयापये की जगह तीस रुपयापये और उसके बाद प्रति किलोमीटर किराया नौ. पाँच रुपयापये की जगह ग्यारह रुपयापये होगा। यात्रियों को अब नॉन एसी टैक्सी के लिए चालीस रुपयापये के न्यूनतम किराए के बाद सत्रह रुपयापये प्रति किमी का भुगतान करना होगा। पहले यह शुल्क चौदह रुपयापये प्रति किमी था। एसी टैक्सी का किराया सोलह रुपयापये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर बीस रुपयापये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। ये भी पढ़ेंः
करण देओल के संगीत फंक्शन का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक्टर मीडिया से पूछते नजर आ रहें हैं कि क्या उन्होंने कुछ खाया-पिया है या नहीं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
करण देओल के संगीत फंक्शन का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक्टर मीडिया से पूछते नजर आ रहें हैं कि क्या उन्होंने कुछ खाया-पिया है या नहीं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
के कारण ही वे पिछले लगभग पच्चीस से तीस वर्षो से पंजाब आर्य प्रतिनिधि सभा के वास्तविक संचालक और सूत्रधार रहे हैं। पिछले कुछ वर्षो से तो उनकी पंजाब प्रतिनिधि सभा मे जो स्थिति थी उसे देखते हुए बिना किसी प्रतिवाद के भय से कहा जा सकता है कि पंडित जी और प्रतिनिधि सभा परस्पर पर्यायवाची हो गए थे । खेद है कि 2 अप्रैल, 1949 को अचानक हृदय की गति रुक जाने से आपका दिल्ली में देहांत हो गया। प्रो. बालकृष्ण एम.ए. प्रो. बालकृष्ण ने एम.ए. की परीक्षा में सफलता प्राप्त करते ही गुरुकुल की सेवा का प्रण ले लिया था। वह पजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की एम.ए. परीक्षा में आदर सहित उत्तीर्ण हुए थे। उनका परिवार आर्यसमाजी था। उनके अपने विचार भी वैदिक थे } । गुरुकुल में आकर दो-तीन वर्ष तक अर्थशास्त्र के उपाध्याय का कार्य करने के अनंतर ही उन्हें कुछ समय के लिए मुख्याधिष्ठाता और आचार्य के सम्मिलित पद पर आरूढ़ होने का अवसर मिल गया। क्या उपाध्याय की हैसियत से और क्या मुख्याधिष्ठाता या आचार्य की हैसियत से प्रो. बालकृष्ण जी ने जो भी कार्य किए, उनसे उनकी चमकदार योग्यता और कार्य कुशलता झलकती थी । लगभग दो-तीन वर्षो तक वे गुरुकुल में कार्य करके उनकी विद्या प्राप्ति की लालसा उन्हें इंग्लैंड खींच ले गई, जहाँ से वह पी-एच. डी. की डिग्री प्राप्त करके भारत लौटे और जीवन के शेष भाग में कोल्हापुर के राजाराम कॉलिज के प्रिंसिपल रहे । वह हिंदी और अंग्रेजी के अच्छे वक्ता और लेखक थे। उन्होने धार्मिक, आर्थिक और ऐतिहासिक विषयों पर कई उत्तमोत्तम ग्रंथ लिखे है। मध्ययुग के गुरुकुल सेवकों में उनका विशेष स्थान है। प्रो. सेवाराम फेरवानी प्रो. सेवाराम फेरवानी एम.ए.ई. उन व्यक्तियों में से थे जिन्हें असाधारण प्रतिभाशाली अथवा जीनियस नाम से निर्दिष्ट किया जा सकता है। वह लगभग दस वर्ष तक गुरुकुल कांगड़ी में अंग्रेजी के उपाध्याय रहे, परंतु केवल पढ़ाने का कार्य तो उनके लिए सर्वथा गौण था। उनके अंदर जीवन को प्रेरणा देने की अद्भुत शक्ति थी। उनमे से आशा और उत्साह के फव्वारे-से फूटते रहते थे। विद्यार्थी उनसे पढ़ने में अपूर्व आनंद का अनुभव करते थे। वे आश्रम और विद्यालय में आकर्षण का केंद्र बने रहते थे। विद्वान् तो थे ही, विद्या के प्रचारक भी थे। विद्या प्रचार का उन्हें पादरियों और भिक्षुओं जैसा उत्साह था। जिस दिन वह गुरुकुल की सेवा को छोड़ कर बंबई विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालय निरीक्षक वनकर गए उस दिन यहाँ के छात्रों और अध्यापकों पर मातम-सा छा गया था। हरेक ने यही कहा कि "काश कि प्रो. सेवाराम जी गुरुकुल में ही रह सकते ।" कुलपुत्र सुनें ! / 105 सरदार रघुवरदयाल सरदार साहब पुराने आर्यसमाजी एवं स्वामी जी के भक्त थे। आप आचार्य रामदेव जी के समय में गुरुकुल में आए और पाँच वर्ष तक यहाँ पर मुख्याधिष्ठाता का कार्य करते थे। आप रियासत ढर्रे के ऑफीसर थे, पर शीघ्र ही गुरुकुल के रग के में रंग गए। हिंदी लिखने-पढ़ने का अभ्यास भी कम ही था । उसको भी आपने कुछ दिनों में ही प्रयत्न से सिद्ध कर लिया। जब तक गुरुकुल में रहे उसी लगन और उसी शान से काम करते रहे। पेंशन काफी मिलती थी, अतः गुरुकुल से तो से कुछ लेते ही न थे, बल्कि उत्सव पर कुछ दे ही दिया करते। आचार्य रामदेव जी की बिदाई के साथ आप भी बिदा हो गए । यहाँ से जाकर अपने जन्मस्थान कसवा गंगोह में आपने धर्मार्थ औषधालय खोल दिया। जब तक जिए नगरी की सेवाएँ करते ही रहे । लाला नंदलाल जी लाला नंदलाल जी पंजाब के प्रसिद्ध आर्यसमाजी थे और उस प्रात के प्रसिद्ध इंजीनियर सर गंगाराम जी के यहाँ कार्य करते थे। जब इजीनियर साहब इस सदी के प्रारंभिक वर्षों में पटियाला गए तो लाला जी यहाॅ भी उनके दफ्तर के मुखिया रहे। पटियाला रियासत ने आर्यसमाजियों पर जो आफत ढाई थी उसमे लाला नदलाल जी रियासत से निर्वासित किए गए। तब महात्मा मुशीराम जी उनको गुरुकुल में ले आए और गुरुकुल का समस्त प्रबंध उन्हें सौंप दिया। लाला जी पॉच-छः साल यहाँ रहे। कुछ समय तक तो अवैतनिक ही थे और कुछ काल तक सभा के आग्रह पर साधारण निर्वाहार्थ लिया। इस आदमी ने यहाॅ वे काम किए कि आज तक उनकी दंत-कथाएँ सुनी जाती हैं। अत में सर गंगाराम जी उन्हें ले गए और अपनी ठेके की भूमियों में मिंटगुमरी जिले में प्रबंधक बना दिया। पुराने गुरुकुल प्रेमियों का कहना है आज गुरुकुल का कार्यालय लगभग सवा दो सौ छपे हुए फार्मों पर कार्य कर रहा है जो कुछ भी सौदर्य इसमें है उसका समस्त श्रेय श्री नंदलाल जी को ही है। भारत सरकार द्वारा निश्चित और अनुभूत फार्मो को गुरुकुल के साँचे में ढाल देना आपके ही दिमाग का कार्य था। आज लाला जी की बुद्धि ही गुरुकुल कार्यालय में कार्य करती हुई दिखाई दे रही है । श्री देवराज जी सेठी सहायक मुख्याधिष्ठाता के तौर गुरुकुल मे दो महानुभावों ने विशेष नाम पाया है । एक लाला नंदलाल और दूसरे प्रो. देवराज सेठी । आप लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर में एम.ए. में पढ़ रहे थे कि महात्मा गांधी जी ने असहयोग का आंदोलन शुरू किया। सेठी जी में देशभक्ति की भावना थी, 106 / कुलपुत्र सुनें ।
के कारण ही वे पिछले लगभग पच्चीस से तीस वर्षो से पंजाब आर्य प्रतिनिधि सभा के वास्तविक संचालक और सूत्रधार रहे हैं। पिछले कुछ वर्षो से तो उनकी पंजाब प्रतिनिधि सभा मे जो स्थिति थी उसे देखते हुए बिना किसी प्रतिवाद के भय से कहा जा सकता है कि पंडित जी और प्रतिनिधि सभा परस्पर पर्यायवाची हो गए थे । खेद है कि दो अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ उनचास को अचानक हृदय की गति रुक जाने से आपका दिल्ली में देहांत हो गया। प्रो. बालकृष्ण एम.ए. प्रो. बालकृष्ण ने एम.ए. की परीक्षा में सफलता प्राप्त करते ही गुरुकुल की सेवा का प्रण ले लिया था। वह पजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की एम.ए. परीक्षा में आदर सहित उत्तीर्ण हुए थे। उनका परिवार आर्यसमाजी था। उनके अपने विचार भी वैदिक थे } । गुरुकुल में आकर दो-तीन वर्ष तक अर्थशास्त्र के उपाध्याय का कार्य करने के अनंतर ही उन्हें कुछ समय के लिए मुख्याधिष्ठाता और आचार्य के सम्मिलित पद पर आरूढ़ होने का अवसर मिल गया। क्या उपाध्याय की हैसियत से और क्या मुख्याधिष्ठाता या आचार्य की हैसियत से प्रो. बालकृष्ण जी ने जो भी कार्य किए, उनसे उनकी चमकदार योग्यता और कार्य कुशलता झलकती थी । लगभग दो-तीन वर्षो तक वे गुरुकुल में कार्य करके उनकी विद्या प्राप्ति की लालसा उन्हें इंग्लैंड खींच ले गई, जहाँ से वह पी-एच. डी. की डिग्री प्राप्त करके भारत लौटे और जीवन के शेष भाग में कोल्हापुर के राजाराम कॉलिज के प्रिंसिपल रहे । वह हिंदी और अंग्रेजी के अच्छे वक्ता और लेखक थे। उन्होने धार्मिक, आर्थिक और ऐतिहासिक विषयों पर कई उत्तमोत्तम ग्रंथ लिखे है। मध्ययुग के गुरुकुल सेवकों में उनका विशेष स्थान है। प्रो. सेवाराम फेरवानी प्रो. सेवाराम फेरवानी एम.ए.ई. उन व्यक्तियों में से थे जिन्हें असाधारण प्रतिभाशाली अथवा जीनियस नाम से निर्दिष्ट किया जा सकता है। वह लगभग दस वर्ष तक गुरुकुल कांगड़ी में अंग्रेजी के उपाध्याय रहे, परंतु केवल पढ़ाने का कार्य तो उनके लिए सर्वथा गौण था। उनके अंदर जीवन को प्रेरणा देने की अद्भुत शक्ति थी। उनमे से आशा और उत्साह के फव्वारे-से फूटते रहते थे। विद्यार्थी उनसे पढ़ने में अपूर्व आनंद का अनुभव करते थे। वे आश्रम और विद्यालय में आकर्षण का केंद्र बने रहते थे। विद्वान् तो थे ही, विद्या के प्रचारक भी थे। विद्या प्रचार का उन्हें पादरियों और भिक्षुओं जैसा उत्साह था। जिस दिन वह गुरुकुल की सेवा को छोड़ कर बंबई विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालय निरीक्षक वनकर गए उस दिन यहाँ के छात्रों और अध्यापकों पर मातम-सा छा गया था। हरेक ने यही कहा कि "काश कि प्रो. सेवाराम जी गुरुकुल में ही रह सकते ।" कुलपुत्र सुनें ! / एक सौ पाँच सरदार रघुवरदयाल सरदार साहब पुराने आर्यसमाजी एवं स्वामी जी के भक्त थे। आप आचार्य रामदेव जी के समय में गुरुकुल में आए और पाँच वर्ष तक यहाँ पर मुख्याधिष्ठाता का कार्य करते थे। आप रियासत ढर्रे के ऑफीसर थे, पर शीघ्र ही गुरुकुल के रग के में रंग गए। हिंदी लिखने-पढ़ने का अभ्यास भी कम ही था । उसको भी आपने कुछ दिनों में ही प्रयत्न से सिद्ध कर लिया। जब तक गुरुकुल में रहे उसी लगन और उसी शान से काम करते रहे। पेंशन काफी मिलती थी, अतः गुरुकुल से तो से कुछ लेते ही न थे, बल्कि उत्सव पर कुछ दे ही दिया करते। आचार्य रामदेव जी की बिदाई के साथ आप भी बिदा हो गए । यहाँ से जाकर अपने जन्मस्थान कसवा गंगोह में आपने धर्मार्थ औषधालय खोल दिया। जब तक जिए नगरी की सेवाएँ करते ही रहे । लाला नंदलाल जी लाला नंदलाल जी पंजाब के प्रसिद्ध आर्यसमाजी थे और उस प्रात के प्रसिद्ध इंजीनियर सर गंगाराम जी के यहाँ कार्य करते थे। जब इजीनियर साहब इस सदी के प्रारंभिक वर्षों में पटियाला गए तो लाला जी यहाॅ भी उनके दफ्तर के मुखिया रहे। पटियाला रियासत ने आर्यसमाजियों पर जो आफत ढाई थी उसमे लाला नदलाल जी रियासत से निर्वासित किए गए। तब महात्मा मुशीराम जी उनको गुरुकुल में ले आए और गुरुकुल का समस्त प्रबंध उन्हें सौंप दिया। लाला जी पॉच-छः साल यहाँ रहे। कुछ समय तक तो अवैतनिक ही थे और कुछ काल तक सभा के आग्रह पर साधारण निर्वाहार्थ लिया। इस आदमी ने यहाॅ वे काम किए कि आज तक उनकी दंत-कथाएँ सुनी जाती हैं। अत में सर गंगाराम जी उन्हें ले गए और अपनी ठेके की भूमियों में मिंटगुमरी जिले में प्रबंधक बना दिया। पुराने गुरुकुल प्रेमियों का कहना है आज गुरुकुल का कार्यालय लगभग सवा दो सौ छपे हुए फार्मों पर कार्य कर रहा है जो कुछ भी सौदर्य इसमें है उसका समस्त श्रेय श्री नंदलाल जी को ही है। भारत सरकार द्वारा निश्चित और अनुभूत फार्मो को गुरुकुल के साँचे में ढाल देना आपके ही दिमाग का कार्य था। आज लाला जी की बुद्धि ही गुरुकुल कार्यालय में कार्य करती हुई दिखाई दे रही है । श्री देवराज जी सेठी सहायक मुख्याधिष्ठाता के तौर गुरुकुल मे दो महानुभावों ने विशेष नाम पाया है । एक लाला नंदलाल और दूसरे प्रो. देवराज सेठी । आप लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर में एम.ए. में पढ़ रहे थे कि महात्मा गांधी जी ने असहयोग का आंदोलन शुरू किया। सेठी जी में देशभक्ति की भावना थी, एक सौ छः / कुलपुत्र सुनें ।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की आहट होते ही सियासी दलों ने अपनी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इस क्रम में जनसभाओं और रैलियों का आयोजन भी बड़ी संख्या में किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी ने भी श्रीनगर में एक जनसभा आयोजित की जिसमें पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा कि उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 और 35 ए की बहाली के लिए उच्चतम न्यायालय में कानूनी लड़ाई के वास्ते देश के बेहतरीन वकीलों की सेवा लेगी। बुखारी ने शेर-ए-कश्मीर क्रिक्रेट स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा भी बहाल करने की भी मांग की।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की आहट होते ही सियासी दलों ने अपनी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इस क्रम में जनसभाओं और रैलियों का आयोजन भी बड़ी संख्या में किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी ने भी श्रीनगर में एक जनसभा आयोजित की जिसमें पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा कि उनकी पार्टी अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए की बहाली के लिए उच्चतम न्यायालय में कानूनी लड़ाई के वास्ते देश के बेहतरीन वकीलों की सेवा लेगी। बुखारी ने शेर-ए-कश्मीर क्रिक्रेट स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा भी बहाल करने की भी मांग की।
जम्मू-कश्मीर के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक आतंकी को भारतीय सेना ने मार गिराया है. जानकारी के मुताबिक आतंकी घुसपैठ कर रहा था, लेकिन सेना ने इसे साजिश को नाकाम कर दिया है. इसके बाद सेना ने इलाके का सर्च ऑपरेशन चलाया है. बताया जा रहा है कि इंटरनेशनल बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से आ रहे घुसपैठिए को सेना ने पहले रुकने के लिए कहा. लेकिन उसने सिक्योरिटी फोर्स की बातों को अनसुना करते हुए घुसपैठ जारी रखी. इसके बाद सेना ने घुसपैठिए पर गोलीबारी शुरू कर दी और कुछ ही देर में उसे ढेर कर दिया. इससे पहले पिछले साल नवंबर के महीने में जम्मू-कश्मीर के अरनिया सेक्टर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिये को मार गिराया था. कुछ समय पहले मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) ने अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी. इसमें पाकिस्तान के घुसपैठ के प्लान का पर्दाफाश किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में घुसपैठ का प्लान तैयार कर लिया है. इसको लेकर पाक एजेंसी ने पीओके में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमांडर के साथ बैठक भी की. सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर आतंकी फिदायीन हमले की फिराक में हैं.
जम्मू-कश्मीर के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक आतंकी को भारतीय सेना ने मार गिराया है. जानकारी के मुताबिक आतंकी घुसपैठ कर रहा था, लेकिन सेना ने इसे साजिश को नाकाम कर दिया है. इसके बाद सेना ने इलाके का सर्च ऑपरेशन चलाया है. बताया जा रहा है कि इंटरनेशनल बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से आ रहे घुसपैठिए को सेना ने पहले रुकने के लिए कहा. लेकिन उसने सिक्योरिटी फोर्स की बातों को अनसुना करते हुए घुसपैठ जारी रखी. इसके बाद सेना ने घुसपैठिए पर गोलीबारी शुरू कर दी और कुछ ही देर में उसे ढेर कर दिया. इससे पहले पिछले साल नवंबर के महीने में जम्मू-कश्मीर के अरनिया सेक्टर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिये को मार गिराया था. कुछ समय पहले मल्टी एजेंसी सेंटर ने अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी. इसमें पाकिस्तान के घुसपैठ के प्लान का पर्दाफाश किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में घुसपैठ का प्लान तैयार कर लिया है. इसको लेकर पाक एजेंसी ने पीओके में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमांडर के साथ बैठक भी की. सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर आतंकी फिदायीन हमले की फिराक में हैं.
5. नौवहन कार्यवाही की स्वतंत्रता (FONOP) विषयः सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। (Places of Worship Act) विशेषज्ञों के अनुसार, उपासना स्थल अधिनियम (Places of Worship Act), 1991 के अंतर्गत काशी और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों की जाँच करना प्रतिबंधित है। संबंधित प्रकरणः - यह मामला, हाल ही में वाराणसी की एक अदालत द्वारा 'काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद' परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को जांच करने का आदेश जारी करने के बाद सामने आया है। - विशेषज्ञों ने यह भी सवाल उठाया है, कि क्या सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा उचित ठहराए गए कानून के खिलाफ, सिविल कोर्ट के न्यायाधीश को इस तरह का निर्देश जारी करने की शक्ति हासिल है? उपासना स्थल अधिनियम, 1991 के बारे मेंः - अधिनियम में यह घोषणा की गयी है, कि किसी भी उपासना स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही रहेगा जैसा 15 अगस्त 1947 को था। - इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के उपासना स्थल को अलग संप्रदाय या वर्ग में नहीं बदलेगा। - इस क़ानून के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को विद्यमान किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप के संपरिवर्तन के संदर्भ में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही इस अधिनियम के प्रारंभ पर उपशमित हो जाएगी और इसं पर आगे कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है। अधिनियम के उद्देश्यः - इस अधिनियम का उद्देश्य, किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप को, उसकी 15 अगस्त 1947 को विद्यमान स्थिति में स्थिर रखना है। - अधिनियम में, उपासना स्थल के उक्त तिथि को विद्यमान धार्मिक स्वरूप के रखरखाव का भी प्रावधान किया गया है। - इसका उद्देश्य किसी भी समूह द्वारा उपासना स्थल की पूर्व स्थिति के बारे में, तथा उस संरचना अथवा भूमि पर नए दावे करने से रोकने हेतु पहले से उपाय करना था। - इस क़ानून से दीर्घकालीन सांप्रदायिक सद्भाव के संरक्षण में मदद करने की अपेक्षा की गयी थी। अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित संदर्भों में लागू नहीं होंगेः - उक्त उपधाराओं में निर्दिष्ट कोई उपासना स्थल, जो प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत आने वाला कोई प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक या कोई पुरातत्वीय स्थल या अवशेष है। - इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा, उपरोक्त मामलों से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, जिसका अंतिम रूप से विनिश्चय, परिनिर्धारण या निपटारा कर दिया गया है। - इस अधिनियम की कोई बात उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के रूप में सामन्यतः ज्ञात स्थान या उपासना स्थल से संबंधित किसी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर लागू नहीं होगी। इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य लागू क़ानून के ऊपर प्रभावी होंगे । प्रीलिम्स लिंकः मेंस लिंकः 'उपासना स्थल अधिनियम' से संबंधित मुद्दों पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि जम्मू में बंद अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को कानून का पालन किए बगैर वापस म्यांमार नहीं भेजा जाएगा। केंद्र सरकार ने, अदालत को आश्वासन देते हुए कहा है कि रोहिंग्या प्रवासियों को देश से निर्वासित करने में कानून का निष्ठापूर्वक पालन किया जाएगा। संबंधित प्रकरणः कुछ समय पूर्व, अदालत में रोहिंग्या शरणार्थियों से संबंधित एक याचिका दायर की गई थी, जिसमे, हिरासत में लिए गये रोहिंग्या शरणार्थियों को तत्काल तुरंत रिहा करने तथा केंद्र शासित प्रदेश सरकार और गृह मंत्रालय को अनौपचारिक शिविरों में रोहिंग्याओं के लिए शीघ्र ही 'शरणार्थी पहचान पत्र' जारी करने हेतु निर्देश देने की मांग की गयी है। अदालत की टिप्पणीः हालांकि, संविधान में प्रतिष्ठापित 'समता का अधिकार' (अनुच्छेद 14) और 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (अनुच्छेद 21) का अधिकार भारत के नागरिकों तथा प्रवासियों, दोनों को प्राप्त है, तथा 'निर्वासित नहीं किए जाने का अधिकार' नागरिकता के आनुषंगिक है। - 'निर्वासित नहीं किए जाने का अधिकार', संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(e) के तहत प्रद्दत 'भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने या बसने के अधिकार' के 'आनुषांगिक' या 'सहवर्ती' है। - संविधान का अनुच्छेद 19 (1)(e), भारत के प्रत्येक नागरिक को, देश के संपूर्ण राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध रूप से भ्रमण करने, निवास करने और बसने का अधिकार प्रदान करता है। भारत में शरणार्थियों पर लागू होने वाले कानून और नियमः भारत में, विशेष रूप से शरणार्थियों से संबंधित कोई कानून पारित नहीं किया गया है। - इसलिए, रोहिंग्या शरणार्थियों को अक्सर 'विदेशियों विषयक अधिनियम' (Foreigners Act), 1946 तथा 'विदेशियों विषयक आदेश' (Foreigners Order), 1948 के तहत सरकार द्वारा निर्वासित किये जाने वाले अवैध आप्रवासियों के वर्ग में शामिल कर लिया जाता है। - हालांकि, एक विधिक रूप से, शरणार्थी, अप्रवासियों की एक विशेष श्रेणी होते है और उन्हें 'अवैध अप्रवासियों के वर्ग में शामिल नहीं किया जा सकता है। प्रीलिम्स लिंकः - रोहिंग्या कौन हैं? - 'रखाइन प्रदेश' की अवस्थिति। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के बारे में। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) बनाम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय। मेंस लिंकः रोहिंग्या संकट पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। भूटान और चीन, दोनों देश, शीघ्र ही सीमा-वार्ता आयोजित करने तथा सीमा-विवाद संबंधी समाधान प्रक्रिया को तेज करने हेतु रोडमैप पर चर्चा करने के लिए सहमत हो गए हैं। आगामी वार्ता, दोनों देशों के मध्य सीमा वार्ता प्रक्रिया का 25 वां दौर होगा। वर्ष 2017 में हुए डोकलाम गतिरोध, तथा अरुणाचल प्रदेश के साथ लगने वाली भूटान की पूर्वी सीमा पर जून 2020 में चीन के द्वारा अपना दावा करने के बाद यह पहली वार्ता होगी। विवादित क्षेत्रः अब तक, इन वार्ताओं में दो विवादित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया हैः भूटान के उत्तर में अवस्थित 'पसामलंग घाटी' (Pasamlung Valley) तथा 'जकरलंग घाटी' (Jakarlung Valley) और भूटान के पश्चिम में भारत के साथ त्रिकोणीय जंक्शन पर अवस्थित 'डोकलाम'। हालांकि, जून 2020 में संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरणीय बैठक में, चीन ने भूटान के पूर्वी क्षेत्र में अवस्थित 'सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य' (Sakteng Wildlife sanctuary) को भी विवादित बताते हुए, अभयारण्य को दिए जा रहे अनुदान पर आपत्ति जताई थी। भारत के लिए चिंता का विषयः - चीन द्वारा किये जाने वाले क्षेत्रीय दावे, भारत के छोटे पड़ोसी देशों पर दबाव डालने तथा इन देशों को भारत के साथ किसी प्रकार की निकटता रखने के लिए दंडित करने हेतु, चीनी रणनीति का एक हिस्सा है। - वर्ष 2017 में चीन ने 'डोकलाम पठार' में घुसपैठ की थी, जिस पर भूटान अपना दावा करता है, जिससे भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 'गतिरोध' की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। प्रीलिम्स लिंकः - मानचित्र पर निम्नलिखित को खोजेंः सकतेंग, डोकलाम, जकरलंग, चुम्बी घाटी और डोकलाम। - भारत, भूटान और चीन के मध्य त्रि-पक्षीय संधि-स्थल सीमा। मेंस लिंकः डोकलाम स्टैंड-ऑफ पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। चीन और पाकिस्तान ने संयुक्तराष्ट्र संबंधी मामलों पर द्विपक्षीय विमर्श करने के बाद, संयुक्त राष्ट्र में एक-दूसरे के "मूल एवं प्रमुख हितों" का समर्थन करने का वादा किया है। बीजिंग, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद' में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करेगा और इस्लामाबाद, चीन को हांगकांग और शिनजियांग मुद्दों पर समर्थन देगा। भारत के लिए चिंता का विषयः - चीन और पाकिस्तान, अपने संबंधों को आधिकारिक तौर पर 'हर-मौसम के साथी' (all-weather partners) तथा दोनों देशों को 'आयरन ब्रदर्स' बताते हैं। हाल ही के महीनों में, दोनों देशों ने अपने लिए संवेदनशील समझे जाने वाले मुद्दों पर एक दूसरे को अत्यंत महत्वपूर्ण समर्थन देने संबंधी समझौता किया है। - दोनों देशों के मध्य रिश्तों में यह विकास, विशेषकर भारत, यू.एस., ऑस्ट्रेलिया और जापान के चतुर्पक्षीय फ्रेमवर्क तथा 'नियम-आधारित व्यवस्था', जिसे 'क्वाड' भी कहा जाता है, को लक्षित करते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले "चयनात्मक बहुपक्षवाद" (Selective Multilateralism) की चीन द्वारा कड़ी आलोचना के दौरान हुआ है। - वर्ष 2019 और 2020 में, चीन ने 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद' में कम से कम तीन मौकों पर कश्मीर मुद्दे को उठाया था, जिसमे चीन ने, भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरसित करने, जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन तथा इसके विशेष दर्जे को रद्द करने संबंधी मामलों पर चर्चा करने का प्रस्ताव किया था। विषयः महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश। नौवहन कार्यवाही की स्वतंत्रता (FONOP) (Freedom of Navigation Operation) हाल ही में, अमेरिकी नौसेना ने सार्वजनिक रूप जारी एक बयान में कहा है, कि उसने, इसी सप्ताह की शुरुआती दिनों में भारत के 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' (Exclusive Economic Zone- EEZ) में लक्षद्वीप के निकट, जानबूझ कर, नई दिल्ली की पूर्व सहमति के बिना, 'नौवहन स्वतंत्रता कार्यवाही' अर्थात 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' (FONOP) को अंजाम दिया है। अमेरिका ने दावा किया है, कि भारत के समुद्री कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून- 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) - के अनुरूप नहीं है। भारत ने अमेरिका के इस दावे को खारिज करते हुए इस फैसले का विरोध किया है । - भारत के समुद्री कानून के अनुसार, किसी भी देश को उसके 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' (EEZ) में सैन्य अभ्यास करने से पहले उसकी सहमति लेना आवश्यक है। - हालांकि किसी देश की, अपने तट से 12 समुद्री मील की दूरी तक क्षेत्रीय-जल पर 'पूर्ण संप्रभुता' होती है, किंतु उसके लिए, आधाररेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तारित 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में केवल समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग संबंधी विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। संबंधित प्रकरणः अमेरिका का कहना है, कि, भारत की पूर्व सहमति लेने की आवश्यकता, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' (FONOP) से असंगत है। भारत, चीन और कई अन्य देशों के विपरीत, अमेरिका द्वारा 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' (UNCLOS) की अभिपुष्टि नहीं की गई है। तथा अमेरिका, चीन के आक्रामक क्षेत्रीय दावों को चुनौती देने के लिए विवादित दक्षिण चीन सागर तथा हिंद महासागर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में, नियमित रूप से 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' (FONOP) करता रहता है। वर्तमान में चिंता का विषयः ऐसे समय में जब अमेरिका द्वारा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ एक 'विश्वसनीय निवारण' तैयार करने हेतु 'क्वाड' तथा अन्य तंत्रों के माध्यम से भारत का नजदीकी सहयोग हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है, तब भारत के 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में अमेरिका द्वारा 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' की 'आक्रामक रूप से सार्वजनिक घोषणा का लहजा और तेवर' भारतीय सुरक्षा संस्थानों के कान खड़े करता है। 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' क्या है? 'नौवहन स्वतंत्रता कार्यवाही' अर्थात 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' (FONOP) में अमेरिकी नौसेना द्वारा तटवर्ती देशों के विशिष्ट क्षेत्रों के जल में मार्ग बनाना शामिल है। - इस प्रकार के अभिकथन इस बात का संकेत देते हैं, कि संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य देशों के अत्यधिक समुद्री दावों को चुपचाप स्वीकार नहीं करता है, और इस प्रकार, यह, इन देशों द्वारा किए गए दावों को अंतर्राष्ट्रीय कानून में स्वीकार किए जाने से रोक देता है। प्रीलिम्स लिंकः - UNCLOS क्या है? - EEZ क्या है? मेंस लिंकः विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के महत्व पर चर्चा कीजिए। विषयः संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन। (Ken-Betwa project) कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के लिए, 'केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना' (Ken-Betwa river linking project) लागू नहीं करने के लिए एक पत्र लिखा है। क्योंकि, इस 'नदी जोड़ो परियोजना' से 'पन्ना टाइगर रिजर्व' को काफी नुक्सान होगा। राज्य सरकार का खुला अनुमान है कि इस परियोजना से बाघ अभ्यारण्य का लगभग 40 प्रतिशत इलाक़ा नष्ट हो जाएगा। - केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा 'विश्व जल दिवस' के अवसर पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ भारत की पहली प्रमुख नदी-जोड़ो परियोजना पर काम शुरू करने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत केन और बेतवा नदियों को परस्पर जोड़ा जाएगा। - जल के बंटवारे को लेकर दो राज्यों के बीच असहमति के कारण, इस परियोजना के विचार को मंजूरी मिलने के लगभग 18 साल बाद इस समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। केन-बेतवा परियोजना के बारे मेंः दो-भागों में पूरी की जाने वाली परियोजना के रूप में परिकल्पित 'केन-बेतवा परियोजना' देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। - इसे अंतरराज्यीय नदी स्थानांतरण मिशन हेतु एक मॉडल परियोजना के रूप में माना जाता है। - इस परियोजना का उद्देश्य, मध्य प्रदेश में केन नदी से अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे सूखा-प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र के उत्तरप्रदेश में झांसी, बांदा, ललितपुर और महोबा जिलों और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर जिलों को सिंचित किया जा सकेगा। प्रमुख तथ्यः - केन और बेतवा नदियों का उद्गम मध्यप्रदेश में होता है और ये यमुना की सहायक नदियाँ हैं। - केन नदी, उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में और बेतवा नदी हमीरपुर जिले में यमुना नदी में मिल जाती हैं। - राजघाट, परीछा और माताटीला बांध, बेतवा नदी पर स्थित हैं। - केन नदी, पन्ना बाघ अभ्यारण्य से होकर गुजरती है। प्रीलिम्स लिंकः - केन और बेतवा- सहायक नदियाँ और संबंधित राज्य। मेंस लिंकः 'केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना' के महत्व पर चर्चा कीजिए। - यह एक 'माइक्रोसेंसर-आधारित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर' (Microsensor based explosive trace detector- ETD) है। - यह आईआईटी बॉम्बे इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोस्निफ टेक्नोलॉजीज (IIT Bombay Incubated Startup Nanosniff Technologies) द्वारा विकसित किया गया विश्व का पहला माइक्रोसेन्सर आधारित एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ETD) है। - 'नैनोस्निफर', अनुसंधान, विकास और विनिर्माण के मामले में 100% 'मेड इन इंडिया उत्पाद' है। 'नैनोस्निफर' की मुख्य तकनीक अमेरिका और यूरोप में पेटेंट द्वारा संरक्षित है। - यह उपकरण, 10 सेकंड से भी कम समय में विस्फोटक का पता लगा सकता है और यह विस्फोटको की विभिन्न वर्गों में पहचान और वर्गीकरण भी करता है।
पाँच. नौवहन कार्यवाही की स्वतंत्रता विषयः सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। विशेषज्ञों के अनुसार, उपासना स्थल अधिनियम , एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के अंतर्गत काशी और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों की जाँच करना प्रतिबंधित है। संबंधित प्रकरणः - यह मामला, हाल ही में वाराणसी की एक अदालत द्वारा 'काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद' परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को जांच करने का आदेश जारी करने के बाद सामने आया है। - विशेषज्ञों ने यह भी सवाल उठाया है, कि क्या सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा उचित ठहराए गए कानून के खिलाफ, सिविल कोर्ट के न्यायाधीश को इस तरह का निर्देश जारी करने की शक्ति हासिल है? उपासना स्थल अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बारे मेंः - अधिनियम में यह घोषणा की गयी है, कि किसी भी उपासना स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही रहेगा जैसा पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को था। - इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के उपासना स्थल को अलग संप्रदाय या वर्ग में नहीं बदलेगा। - इस क़ानून के अनुसार, पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को विद्यमान किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप के संपरिवर्तन के संदर्भ में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही इस अधिनियम के प्रारंभ पर उपशमित हो जाएगी और इसं पर आगे कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है। अधिनियम के उद्देश्यः - इस अधिनियम का उद्देश्य, किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप को, उसकी पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को विद्यमान स्थिति में स्थिर रखना है। - अधिनियम में, उपासना स्थल के उक्त तिथि को विद्यमान धार्मिक स्वरूप के रखरखाव का भी प्रावधान किया गया है। - इसका उद्देश्य किसी भी समूह द्वारा उपासना स्थल की पूर्व स्थिति के बारे में, तथा उस संरचना अथवा भूमि पर नए दावे करने से रोकने हेतु पहले से उपाय करना था। - इस क़ानून से दीर्घकालीन सांप्रदायिक सद्भाव के संरक्षण में मदद करने की अपेक्षा की गयी थी। अधिनियम के प्रावधान निम्नलिखित संदर्भों में लागू नहीं होंगेः - उक्त उपधाराओं में निर्दिष्ट कोई उपासना स्थल, जो प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन के अन्तर्गत आने वाला कोई प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक या कोई पुरातत्वीय स्थल या अवशेष है। - इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा, उपरोक्त मामलों से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, जिसका अंतिम रूप से विनिश्चय, परिनिर्धारण या निपटारा कर दिया गया है। - इस अधिनियम की कोई बात उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के रूप में सामन्यतः ज्ञात स्थान या उपासना स्थल से संबंधित किसी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर लागू नहीं होगी। इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य लागू क़ानून के ऊपर प्रभावी होंगे । प्रीलिम्स लिंकः मेंस लिंकः 'उपासना स्थल अधिनियम' से संबंधित मुद्दों पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि जम्मू में बंद अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को कानून का पालन किए बगैर वापस म्यांमार नहीं भेजा जाएगा। केंद्र सरकार ने, अदालत को आश्वासन देते हुए कहा है कि रोहिंग्या प्रवासियों को देश से निर्वासित करने में कानून का निष्ठापूर्वक पालन किया जाएगा। संबंधित प्रकरणः कुछ समय पूर्व, अदालत में रोहिंग्या शरणार्थियों से संबंधित एक याचिका दायर की गई थी, जिसमे, हिरासत में लिए गये रोहिंग्या शरणार्थियों को तत्काल तुरंत रिहा करने तथा केंद्र शासित प्रदेश सरकार और गृह मंत्रालय को अनौपचारिक शिविरों में रोहिंग्याओं के लिए शीघ्र ही 'शरणार्थी पहचान पत्र' जारी करने हेतु निर्देश देने की मांग की गयी है। अदालत की टिप्पणीः हालांकि, संविधान में प्रतिष्ठापित 'समता का अधिकार' और 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' का अधिकार भारत के नागरिकों तथा प्रवासियों, दोनों को प्राप्त है, तथा 'निर्वासित नहीं किए जाने का अधिकार' नागरिकता के आनुषंगिक है। - 'निर्वासित नहीं किए जाने का अधिकार', संविधान के अनुच्छेद उन्नीस के तहत प्रद्दत 'भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने या बसने के अधिकार' के 'आनुषांगिक' या 'सहवर्ती' है। - संविधान का अनुच्छेद उन्नीस , भारत के प्रत्येक नागरिक को, देश के संपूर्ण राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध रूप से भ्रमण करने, निवास करने और बसने का अधिकार प्रदान करता है। भारत में शरणार्थियों पर लागू होने वाले कानून और नियमः भारत में, विशेष रूप से शरणार्थियों से संबंधित कोई कानून पारित नहीं किया गया है। - इसलिए, रोहिंग्या शरणार्थियों को अक्सर 'विदेशियों विषयक अधिनियम' , एक हज़ार नौ सौ छियालीस तथा 'विदेशियों विषयक आदेश' , एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के तहत सरकार द्वारा निर्वासित किये जाने वाले अवैध आप्रवासियों के वर्ग में शामिल कर लिया जाता है। - हालांकि, एक विधिक रूप से, शरणार्थी, अप्रवासियों की एक विशेष श्रेणी होते है और उन्हें 'अवैध अप्रवासियों के वर्ग में शामिल नहीं किया जा सकता है। प्रीलिम्स लिंकः - रोहिंग्या कौन हैं? - 'रखाइन प्रदेश' की अवस्थिति। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के बारे में। - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय बनाम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय। मेंस लिंकः रोहिंग्या संकट पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। भूटान और चीन, दोनों देश, शीघ्र ही सीमा-वार्ता आयोजित करने तथा सीमा-विवाद संबंधी समाधान प्रक्रिया को तेज करने हेतु रोडमैप पर चर्चा करने के लिए सहमत हो गए हैं। आगामी वार्ता, दोनों देशों के मध्य सीमा वार्ता प्रक्रिया का पच्चीस वां दौर होगा। वर्ष दो हज़ार सत्रह में हुए डोकलाम गतिरोध, तथा अरुणाचल प्रदेश के साथ लगने वाली भूटान की पूर्वी सीमा पर जून दो हज़ार बीस में चीन के द्वारा अपना दावा करने के बाद यह पहली वार्ता होगी। विवादित क्षेत्रः अब तक, इन वार्ताओं में दो विवादित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया हैः भूटान के उत्तर में अवस्थित 'पसामलंग घाटी' तथा 'जकरलंग घाटी' और भूटान के पश्चिम में भारत के साथ त्रिकोणीय जंक्शन पर अवस्थित 'डोकलाम'। हालांकि, जून दो हज़ार बीस में संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरणीय बैठक में, चीन ने भूटान के पूर्वी क्षेत्र में अवस्थित 'सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य' को भी विवादित बताते हुए, अभयारण्य को दिए जा रहे अनुदान पर आपत्ति जताई थी। भारत के लिए चिंता का विषयः - चीन द्वारा किये जाने वाले क्षेत्रीय दावे, भारत के छोटे पड़ोसी देशों पर दबाव डालने तथा इन देशों को भारत के साथ किसी प्रकार की निकटता रखने के लिए दंडित करने हेतु, चीनी रणनीति का एक हिस्सा है। - वर्ष दो हज़ार सत्रह में चीन ने 'डोकलाम पठार' में घुसपैठ की थी, जिस पर भूटान अपना दावा करता है, जिससे भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 'गतिरोध' की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। प्रीलिम्स लिंकः - मानचित्र पर निम्नलिखित को खोजेंः सकतेंग, डोकलाम, जकरलंग, चुम्बी घाटी और डोकलाम। - भारत, भूटान और चीन के मध्य त्रि-पक्षीय संधि-स्थल सीमा। मेंस लिंकः डोकलाम स्टैंड-ऑफ पर एक टिप्पणी लिखिए। विषयः भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध। चीन और पाकिस्तान ने संयुक्तराष्ट्र संबंधी मामलों पर द्विपक्षीय विमर्श करने के बाद, संयुक्त राष्ट्र में एक-दूसरे के "मूल एवं प्रमुख हितों" का समर्थन करने का वादा किया है। बीजिंग, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद' में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करेगा और इस्लामाबाद, चीन को हांगकांग और शिनजियांग मुद्दों पर समर्थन देगा। भारत के लिए चिंता का विषयः - चीन और पाकिस्तान, अपने संबंधों को आधिकारिक तौर पर 'हर-मौसम के साथी' तथा दोनों देशों को 'आयरन ब्रदर्स' बताते हैं। हाल ही के महीनों में, दोनों देशों ने अपने लिए संवेदनशील समझे जाने वाले मुद्दों पर एक दूसरे को अत्यंत महत्वपूर्ण समर्थन देने संबंधी समझौता किया है। - दोनों देशों के मध्य रिश्तों में यह विकास, विशेषकर भारत, यू.एस., ऑस्ट्रेलिया और जापान के चतुर्पक्षीय फ्रेमवर्क तथा 'नियम-आधारित व्यवस्था', जिसे 'क्वाड' भी कहा जाता है, को लक्षित करते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले "चयनात्मक बहुपक्षवाद" की चीन द्वारा कड़ी आलोचना के दौरान हुआ है। - वर्ष दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस में, चीन ने 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद' में कम से कम तीन मौकों पर कश्मीर मुद्दे को उठाया था, जिसमे चीन ने, भारत द्वारा अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को निरसित करने, जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन तथा इसके विशेष दर्जे को रद्द करने संबंधी मामलों पर चर्चा करने का प्रस्ताव किया था। विषयः महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश। नौवहन कार्यवाही की स्वतंत्रता हाल ही में, अमेरिकी नौसेना ने सार्वजनिक रूप जारी एक बयान में कहा है, कि उसने, इसी सप्ताह की शुरुआती दिनों में भारत के 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में लक्षद्वीप के निकट, जानबूझ कर, नई दिल्ली की पूर्व सहमति के बिना, 'नौवहन स्वतंत्रता कार्यवाही' अर्थात 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' को अंजाम दिया है। अमेरिका ने दावा किया है, कि भारत के समुद्री कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून- 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' - के अनुरूप नहीं है। भारत ने अमेरिका के इस दावे को खारिज करते हुए इस फैसले का विरोध किया है । - भारत के समुद्री कानून के अनुसार, किसी भी देश को उसके 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में सैन्य अभ्यास करने से पहले उसकी सहमति लेना आवश्यक है। - हालांकि किसी देश की, अपने तट से बारह समुद्री मील की दूरी तक क्षेत्रीय-जल पर 'पूर्ण संप्रभुता' होती है, किंतु उसके लिए, आधाररेखा से दो सौ समुद्री मील तक विस्तारित 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में केवल समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग संबंधी विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। संबंधित प्रकरणः अमेरिका का कहना है, कि, भारत की पूर्व सहमति लेने की आवश्यकता, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' से असंगत है। भारत, चीन और कई अन्य देशों के विपरीत, अमेरिका द्वारा 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' की अभिपुष्टि नहीं की गई है। तथा अमेरिका, चीन के आक्रामक क्षेत्रीय दावों को चुनौती देने के लिए विवादित दक्षिण चीन सागर तथा हिंद महासागर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में, नियमित रूप से 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' करता रहता है। वर्तमान में चिंता का विषयः ऐसे समय में जब अमेरिका द्वारा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ एक 'विश्वसनीय निवारण' तैयार करने हेतु 'क्वाड' तथा अन्य तंत्रों के माध्यम से भारत का नजदीकी सहयोग हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है, तब भारत के 'विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र' में अमेरिका द्वारा 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' की 'आक्रामक रूप से सार्वजनिक घोषणा का लहजा और तेवर' भारतीय सुरक्षा संस्थानों के कान खड़े करता है। 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' क्या है? 'नौवहन स्वतंत्रता कार्यवाही' अर्थात 'फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन' में अमेरिकी नौसेना द्वारा तटवर्ती देशों के विशिष्ट क्षेत्रों के जल में मार्ग बनाना शामिल है। - इस प्रकार के अभिकथन इस बात का संकेत देते हैं, कि संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य देशों के अत्यधिक समुद्री दावों को चुपचाप स्वीकार नहीं करता है, और इस प्रकार, यह, इन देशों द्वारा किए गए दावों को अंतर्राष्ट्रीय कानून में स्वीकार किए जाने से रोक देता है। प्रीलिम्स लिंकः - UNCLOS क्या है? - EEZ क्या है? मेंस लिंकः विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के महत्व पर चर्चा कीजिए। विषयः संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के लिए, 'केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना' लागू नहीं करने के लिए एक पत्र लिखा है। क्योंकि, इस 'नदी जोड़ो परियोजना' से 'पन्ना टाइगर रिजर्व' को काफी नुक्सान होगा। राज्य सरकार का खुला अनुमान है कि इस परियोजना से बाघ अभ्यारण्य का लगभग चालीस प्रतिशत इलाक़ा नष्ट हो जाएगा। - केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा 'विश्व जल दिवस' के अवसर पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ भारत की पहली प्रमुख नदी-जोड़ो परियोजना पर काम शुरू करने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत केन और बेतवा नदियों को परस्पर जोड़ा जाएगा। - जल के बंटवारे को लेकर दो राज्यों के बीच असहमति के कारण, इस परियोजना के विचार को मंजूरी मिलने के लगभग अट्ठारह साल बाद इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। केन-बेतवा परियोजना के बारे मेंः दो-भागों में पूरी की जाने वाली परियोजना के रूप में परिकल्पित 'केन-बेतवा परियोजना' देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। - इसे अंतरराज्यीय नदी स्थानांतरण मिशन हेतु एक मॉडल परियोजना के रूप में माना जाता है। - इस परियोजना का उद्देश्य, मध्य प्रदेश में केन नदी से अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे सूखा-प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र के उत्तरप्रदेश में झांसी, बांदा, ललितपुर और महोबा जिलों और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर जिलों को सिंचित किया जा सकेगा। प्रमुख तथ्यः - केन और बेतवा नदियों का उद्गम मध्यप्रदेश में होता है और ये यमुना की सहायक नदियाँ हैं। - केन नदी, उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में और बेतवा नदी हमीरपुर जिले में यमुना नदी में मिल जाती हैं। - राजघाट, परीछा और माताटीला बांध, बेतवा नदी पर स्थित हैं। - केन नदी, पन्ना बाघ अभ्यारण्य से होकर गुजरती है। प्रीलिम्स लिंकः - केन और बेतवा- सहायक नदियाँ और संबंधित राज्य। मेंस लिंकः 'केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना' के महत्व पर चर्चा कीजिए। - यह एक 'माइक्रोसेंसर-आधारित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर' है। - यह आईआईटी बॉम्बे इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोस्निफ टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित किया गया विश्व का पहला माइक्रोसेन्सर आधारित एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर है। - 'नैनोस्निफर', अनुसंधान, विकास और विनिर्माण के मामले में एक सौ% 'मेड इन इंडिया उत्पाद' है। 'नैनोस्निफर' की मुख्य तकनीक अमेरिका और यूरोप में पेटेंट द्वारा संरक्षित है। - यह उपकरण, दस सेकंड से भी कम समय में विस्फोटक का पता लगा सकता है और यह विस्फोटको की विभिन्न वर्गों में पहचान और वर्गीकरण भी करता है।
अगले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार पिछड़ा वर्ग मध्य वर्ग और किसान वर्ग के लिए बड़ा सियासी दांव चलाने की तैयारी में है। जहां सरकार मध्य वर्ग को आयकर और होम लोन में बड़ी राहत देने की तैयारियों में जुटी है। वहीं ओबीसी आरक्षण में बड़े बदलाव के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार करा रही है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग ने शुक्रवार को ही विभिन्न मंत्रालयों में ओबीसी वर्ग की जातियों की अलग अलग स्थिति संबंधी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दी है। किसानों को राहत देने के लिए केंद्र पहले ही तेलांगाना सरकार की नकद राहत फ़ार्मूला अपनाने की तैयारी में है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अगले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार पिछड़ा वर्ग मध्य वर्ग और किसान वर्ग के लिए बड़ा सियासी दांव चलाने की तैयारी में है। जहां सरकार मध्य वर्ग को आयकर और होम लोन में बड़ी राहत देने की तैयारियों में जुटी है। वहीं ओबीसी आरक्षण में बड़े बदलाव के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार करा रही है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग ने शुक्रवार को ही विभिन्न मंत्रालयों में ओबीसी वर्ग की जातियों की अलग अलग स्थिति संबंधी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दी है। किसानों को राहत देने के लिए केंद्र पहले ही तेलांगाना सरकार की नकद राहत फ़ार्मूला अपनाने की तैयारी में है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
फूलमा अपने मन की है पेनियाँ के मसेर रहे है । हाम मेरी के हुए राइवे गहने तीत दूर रार पते डीने । नारंगी है अपनी महक स्टाय; रान अनार है कलियो की दुरवीन पतों ने निर-गिर तेरा पाँबड़ा बिठाया, झाड़-पौछ वायू ने उसको स्वच्छ बनाया। फुल सुघनी की टोली उड़-उड़ डाली डाली; झूम रही है मद में तेरे हो मतवाली । इस प्रकार है तेरें आने की तैयारी आ-आ प्यारी बसंत रान ऋतुओं में प्यारी।" इसकी भाषा कैसी सरळ, सुबोध और शुद्ध है। मात्र कैसा भव्य और रचना-शैली कैसी सुदर है । ब्रजभाषा के अनुरागियों से भी भेरा यही नम्र निवेदन है कि अब "यहि पाखें पतिव्रत ताखें धरै" और "उमठ शरीरी मैं मरीरी कद मुख ते" का ध्यान छोड़िए । अब "पजन प्रयत्न सो राकेत पर्जक पाय, प्रफेद फुंदी के फंद-फंदन दुराय ; कैलि कुल कलाकल, कुलकले कूल-कूल कुल कौल-कौल कील कली कुल काम है।
फूलमा अपने मन की है पेनियाँ के मसेर रहे है । हाम मेरी के हुए राइवे गहने तीत दूर रार पते डीने । नारंगी है अपनी महक स्टाय; रान अनार है कलियो की दुरवीन पतों ने निर-गिर तेरा पाँबड़ा बिठाया, झाड़-पौछ वायू ने उसको स्वच्छ बनाया। फुल सुघनी की टोली उड़-उड़ डाली डाली; झूम रही है मद में तेरे हो मतवाली । इस प्रकार है तेरें आने की तैयारी आ-आ प्यारी बसंत रान ऋतुओं में प्यारी।" इसकी भाषा कैसी सरळ, सुबोध और शुद्ध है। मात्र कैसा भव्य और रचना-शैली कैसी सुदर है । ब्रजभाषा के अनुरागियों से भी भेरा यही नम्र निवेदन है कि अब "यहि पाखें पतिव्रत ताखें धरै" और "उमठ शरीरी मैं मरीरी कद मुख ते" का ध्यान छोड़िए । अब "पजन प्रयत्न सो राकेत पर्जक पाय, प्रफेद फुंदी के फंद-फंदन दुराय ; कैलि कुल कलाकल, कुलकले कूल-कूल कुल कौल-कौल कील कली कुल काम है।
शुभ पक्षी : शुकन शास्त्र में पशु-पक्षियों को शुभ और अशुभ शकुन के रूप में देखा जाता है। शुकन शास्त्र में कुछ पक्षियों को देखना बहुत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि ये मनुष्य के भविष्य के संकेत देते हैं। दिन की शुरुआत में यदि इनमें से कोई भी आपको दिखाई दे तो आपका दिन बहुत ही भाग्यशाली रहेगा। आपको हर काम में सफलता मिलेगी। जानिए कौन से हैं ये पक्षी जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। शुकन शास्त्र के अनुसार अगर आप किसी काम से जा रहे हैं और आपको रास्ते में या रास्ते में गौरैया दिख जाए तो यह एक अच्छा संकेत है। यह संकेत करता है कि आपको हर हाल में अपने काम में सफलता मिलेगी। शुकण शास्त्र के अनुसार यदि आप चील या चील को अपने पंजों में मांस का टुकड़ा दबाते हुए देखते हैं तो यह भी शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आप जिस काम के लिए जा रहे हैं उसमें आपको सफलता जरूर मिलेगी। राशिफल के अनुसार घर की छत पर बैठा हुआ तोता दिखे तो यह बहुत शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपके घर में कोई शुभ कार्य होने वाला है। अगर घर के बाहर नीलकंठ दिख जाए तो यह बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। नीलकंठ को भाग्य की शुरुआत और बड़ी सफलता का संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि यह व्यक्ति को धन लाभ और हर क्षेत्र में सफलता का संकेत देता है। अगर आपको रात के समय घर के आसपास उल्लू दिखाई दे तो इसका मतलब है कि आप धनवान होने वाले हैं। अगर आपको घर के आसपास सफेद कबूतर दिखाई दे। तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपकी किस्मत चमकने वाली है और आपको धन लाभ होने वाला है।
शुभ पक्षी : शुकन शास्त्र में पशु-पक्षियों को शुभ और अशुभ शकुन के रूप में देखा जाता है। शुकन शास्त्र में कुछ पक्षियों को देखना बहुत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि ये मनुष्य के भविष्य के संकेत देते हैं। दिन की शुरुआत में यदि इनमें से कोई भी आपको दिखाई दे तो आपका दिन बहुत ही भाग्यशाली रहेगा। आपको हर काम में सफलता मिलेगी। जानिए कौन से हैं ये पक्षी जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। शुकन शास्त्र के अनुसार अगर आप किसी काम से जा रहे हैं और आपको रास्ते में या रास्ते में गौरैया दिख जाए तो यह एक अच्छा संकेत है। यह संकेत करता है कि आपको हर हाल में अपने काम में सफलता मिलेगी। शुकण शास्त्र के अनुसार यदि आप चील या चील को अपने पंजों में मांस का टुकड़ा दबाते हुए देखते हैं तो यह भी शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आप जिस काम के लिए जा रहे हैं उसमें आपको सफलता जरूर मिलेगी। राशिफल के अनुसार घर की छत पर बैठा हुआ तोता दिखे तो यह बहुत शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपके घर में कोई शुभ कार्य होने वाला है। अगर घर के बाहर नीलकंठ दिख जाए तो यह बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। नीलकंठ को भाग्य की शुरुआत और बड़ी सफलता का संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि यह व्यक्ति को धन लाभ और हर क्षेत्र में सफलता का संकेत देता है। अगर आपको रात के समय घर के आसपास उल्लू दिखाई दे तो इसका मतलब है कि आप धनवान होने वाले हैं। अगर आपको घर के आसपास सफेद कबूतर दिखाई दे। तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपकी किस्मत चमकने वाली है और आपको धन लाभ होने वाला है।
नई दिल्ली। ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन कोरोना पॉजिटिव पाए गए है. उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी लोगों के बीच साझा की है. इसके पहले ब्रिटेन के ही प्रिंस चार्ल्स कोरोना से संक्रमित पाए गए थे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि 24 घंटे में उनके भीतर हल्के लक्षण नजर आए. जब टेस्ट कराया तो करोना पॉजिटिव निकला. उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद को आइसोलेशन में रख लिया है, लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरकार चलाते रहेंगे. वायरस से लड़ेंगे हम सब मिलकर कोरोना को हराएंगे. एक तरफ देश भर में कोरोना पॉजिटिव की जानकारी छुपाई जा रही है. उनकी जानकारियों को लीक नहीं किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में ही उनकी जानकारी छुपाई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर ब्रिटेन के पीएम खुद अपने कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी साझा कर रहे हैं. जबकि सरकारों को कोरोना पॉजिटिव मरीजों की सूची सार्वजनिक करना चाहिए. जिससे लोग उनसे सतर्क रहे, पर ऐसा बिल्कुल नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि ब्रिटेन में कोरोना बड़ी तेजी से पैर पसार रहा है. ब्रिटेन में कोरोना वायरस से 578 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुल 11 हजार 658 मामले सामने आ चुके हैं.
नई दिल्ली। ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन कोरोना पॉजिटिव पाए गए है. उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. उन्होंने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी लोगों के बीच साझा की है. इसके पहले ब्रिटेन के ही प्रिंस चार्ल्स कोरोना से संक्रमित पाए गए थे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि चौबीस घंटाटे में उनके भीतर हल्के लक्षण नजर आए. जब टेस्ट कराया तो करोना पॉजिटिव निकला. उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद को आइसोलेशन में रख लिया है, लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरकार चलाते रहेंगे. वायरस से लड़ेंगे हम सब मिलकर कोरोना को हराएंगे. एक तरफ देश भर में कोरोना पॉजिटिव की जानकारी छुपाई जा रही है. उनकी जानकारियों को लीक नहीं किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में ही उनकी जानकारी छुपाई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर ब्रिटेन के पीएम खुद अपने कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी साझा कर रहे हैं. जबकि सरकारों को कोरोना पॉजिटिव मरीजों की सूची सार्वजनिक करना चाहिए. जिससे लोग उनसे सतर्क रहे, पर ऐसा बिल्कुल नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि ब्रिटेन में कोरोना बड़ी तेजी से पैर पसार रहा है. ब्रिटेन में कोरोना वायरस से पाँच सौ अठहत्तर लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुल ग्यारह हजार छः सौ अट्ठावन मामले सामने आ चुके हैं.
पायलट से मुलाकात से पहले राहुल गांधी और प्रियंका ने करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की । पायलट की कांग्रेस में वापसी का फॉर्मूला तलाशा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री पद के बारे में कोई बात नहीं होगी। पायलट अगर लौटना चाहें तो एडजस्टमेंट के लिए कुछ समय इंतजार भी करना पड़ेगा... बाद में दोनों राहुल गांधी के आवास से निकले और किसी अन्य स्थान पर जाकर पायलट से मिले... यह मुलाकात विधानसभा सत्र आरंभ होने से कुछ दिनों पहले हुई है और अब राजस्थान में कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से चली आ रही उठापठक थमने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को सभी दलों के विधायकों को एक भावुक चिट्ठी लिखकर कहा था कि आप सरकार गिराने की साजिश का हिस्सा नहीं बनें... अंतरात्मा क्या कहती है, उसके आधार पर फैसला करें। चिट्ठी जारी करने के कुछ देर बाद ही गहलोत जैसलमेर पहुंचे, वहां उनके अलग ही तेवर दिखे... वे कहते हैं कि भाजपा विधायकों में फूट पड़ गई, इसलिए 3-4 जगह बाड़ेबंदी की जा रही है। भाजपा विधायकों की पोल खुल गई है। विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग हो रही थी, इसलिए उन्हें बाड़ेबंदी करनी पड़ी। भाजपा के नेता बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन अब वे चार्टर विमानों से विधायकों को भेजकर बाड़ेबंदी कर रहे हैं।
पायलट से मुलाकात से पहले राहुल गांधी और प्रियंका ने करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की । पायलट की कांग्रेस में वापसी का फॉर्मूला तलाशा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री पद के बारे में कोई बात नहीं होगी। पायलट अगर लौटना चाहें तो एडजस्टमेंट के लिए कुछ समय इंतजार भी करना पड़ेगा... बाद में दोनों राहुल गांधी के आवास से निकले और किसी अन्य स्थान पर जाकर पायलट से मिले... यह मुलाकात विधानसभा सत्र आरंभ होने से कुछ दिनों पहले हुई है और अब राजस्थान में कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से चली आ रही उठापठक थमने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को सभी दलों के विधायकों को एक भावुक चिट्ठी लिखकर कहा था कि आप सरकार गिराने की साजिश का हिस्सा नहीं बनें... अंतरात्मा क्या कहती है, उसके आधार पर फैसला करें। चिट्ठी जारी करने के कुछ देर बाद ही गहलोत जैसलमेर पहुंचे, वहां उनके अलग ही तेवर दिखे... वे कहते हैं कि भाजपा विधायकों में फूट पड़ गई, इसलिए तीन-चार जगह बाड़ेबंदी की जा रही है। भाजपा विधायकों की पोल खुल गई है। विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग हो रही थी, इसलिए उन्हें बाड़ेबंदी करनी पड़ी। भाजपा के नेता बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन अब वे चार्टर विमानों से विधायकों को भेजकर बाड़ेबंदी कर रहे हैं।
बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज और उससे पहले से भी लगातार वनडे क्रिकेट की पिछली कुछ पारियों से संघर्ष कर रहे शिखर धवन के ऊपर खतरे की तलवार लटक रही है। वहीं तीसरे वनडे मैच में ईशान किशन ने दोहरा शतक लगाकर ओपनिंग के लिए जो दावेदारी ठोकी है उससे भी धवन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी बीच शिखर धवन जो टी20 व टेस्ट टीम से पहले ही बाहर चल रहे हैं, अब उनके वनडे के भविष्य पर भी अब खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आई है कि बीसीसीआई की तरफ से जल्द ही शिखर के भविष्य पर कोई फैसला लिया जा सकता है। कौन लेगा धवन के भविष्य पर फैसला? रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है कि भारतीय टीम की नई सेलेक्शन कमेटी के गठन के बाद पिछले कुछ समय से खराब लय में चल रहे धवन के भविष्य को लेकर चर्चा की जाएगी। आपको बता दें कि धवन ने अपने पिछले नौ वनडे में से आठ में बुरी तरह संघर्ष किया है। हालांकि, बाएं हाथ के स्टार बल्लेबाज का 2022 में ओवरऑल प्रदर्शन अच्छा रहा है और उन्होंने 22 मुकाबलों में 688 रन भी बनाए हैं, लेकिन पावर प्ले के ओवरों में उनकी धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए हानिकारक साबित हो रही है। वहीं टी20 के इस युग में शुभमन गिल और ईशान की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने पिछले कुछ समय से धवन फीके नजर आए हैं। बांग्लादेश में एकदिवसीय श्रृंखला गंवाने के बाद बोर्ड टीम के प्रदर्शन को लेकर समीक्षा बैठक करेगा। इसमें हेड कोच द्रविड़ और एनसीए (राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भविष्य के खाके पर चर्चा होगी। इस बैठक में विराट कोहली और रोहित शर्मा के भी शामिल होने की जानकारी है। इसके अलावा पीटीआई-भाषा ने ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप के दौरान बोर्ड के एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले रिपोर्ट किया कि, अनुभवी खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने की प्रक्रिया अगले साल से शुरू हो सकती है या उनके ऊपर फैसला लिया जा सकता है। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर बताया,"शिखर के भविष्य पर फैसला नई चयन समिति के गठन के बाद ही होगा, लेकिन इस मामले में हेड कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा के विचारों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। " दरअसल शिखर धवन के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आ रही कि वह पारी की शुरुआत में तेजी से रन नहीं बना पा रहे है। 2019 विश्व कप से पहले उनका स्ट्राइक रेट 100 से अधिक का हुआ करता था जबकि 2022 में उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 74. 21 का है। वहीं ईशान किशन के दोहरे शतक और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने टीम को वह आक्रामक रवैया दिया जिसकी जरूरत थी। उनकी इस पारी के बाद टीम मैनेजमेंट सेलेक्शन के मामलों पर विचार करने पर मजबूर होगा। एक तरफ ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना आसान नहीं है जिसने 167 एकदिवसीय मैच खेले हैं। वह मौजूदा टीम में रोहित (9454) और विराट कोहली (12471) के बाद भारत के तीसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी है। उनके नाम इस प्रारूप में 6793 रन दर्ज हैं। दूसरी तरफ दोहरा शतक लगाने वाले ईशान को भी नजरअंदाज करना अब मुश्किल होगा। इस मामले में दूसरा विचार यह भी हो सकता है कि, धवन को श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में कम से कम छह एकदिवसीय मैचों में मौका दिया जाना चाहिए और फिर प्रदर्शन के आधार पर मार्च के अंत में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज पर फैसला किया जाना चाहिए। शुभमन गिल को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। गिल पिछले छह महीने में भारत के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले एकदिवसीय बल्लेबाज रहे हैं। कुछ अजीब कारणों से चेतन शर्मा की अगुवाई वाली निवर्तमान समिति ने गिल को बांग्लादेश वनडे से आराम देने का फैसला किया। वह टी20 एशिया कप या विश्व कप टीम का हिस्सा नहीं थे, इसके बावजूद इस युवा बल्लेबाज को विश्राम देने का फैसला समझ से परे रहा। जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट के बाद भारत ने कोई भी टेस्ट नहीं खेला है। जब गिल और किशन जैसे बल्लेबाज टीम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हों तो उन्हें ज्यादा देर तक बाहर रखना मुश्किल होगा। भारतीय टीम के एक पूर्व चयनकर्ता ने कहा, "खेल के समय का कोई विकल्प नहीं है। क्या आपके कहने का मतलब है कि शिखर जनवरी के मध्य में अगले एक महीने तक बिना किसी मैच अभ्यास के वनडे खेलना शुरू करेंगे। यहां तक कि सूर्यकुमार यादव जैसा बल्लेबाज भी लय में रहने के लिए मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी मैच खेलने के लिए प्रतिबद्ध है। " भारतीय टीम का अगला कैलेंडर ईयर काफी व्यस्त है जिसकी शुरुआत तीन जनवरी को घरेलू सीरीज से होगी। तीन जनवरी से एक फरवरी के बीच भारत 29 दिनों के अंतराल में 12 लिमिटेड ओवर मैच खेलेगा। इसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ छह (3-3 वनडे व टी20) और श्रीलंका के खिलाफ छह (3-3 वनडे व टी20) मैच शामिल हैं। इस दौरान एकदिवसीय टीम में ऐसे खिलाड़ी हो सकते हैं जो टीम मैनेजमेंट को लगता है कि 2023 विश्व कप का हिस्सा होंगे।
बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज और उससे पहले से भी लगातार वनडे क्रिकेट की पिछली कुछ पारियों से संघर्ष कर रहे शिखर धवन के ऊपर खतरे की तलवार लटक रही है। वहीं तीसरे वनडे मैच में ईशान किशन ने दोहरा शतक लगाकर ओपनिंग के लिए जो दावेदारी ठोकी है उससे भी धवन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी बीच शिखर धवन जो टीबीस व टेस्ट टीम से पहले ही बाहर चल रहे हैं, अब उनके वनडे के भविष्य पर भी अब खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आई है कि बीसीसीआई की तरफ से जल्द ही शिखर के भविष्य पर कोई फैसला लिया जा सकता है। कौन लेगा धवन के भविष्य पर फैसला? रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है कि भारतीय टीम की नई सेलेक्शन कमेटी के गठन के बाद पिछले कुछ समय से खराब लय में चल रहे धवन के भविष्य को लेकर चर्चा की जाएगी। आपको बता दें कि धवन ने अपने पिछले नौ वनडे में से आठ में बुरी तरह संघर्ष किया है। हालांकि, बाएं हाथ के स्टार बल्लेबाज का दो हज़ार बाईस में ओवरऑल प्रदर्शन अच्छा रहा है और उन्होंने बाईस मुकाबलों में छः सौ अठासी रन भी बनाए हैं, लेकिन पावर प्ले के ओवरों में उनकी धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए हानिकारक साबित हो रही है। वहीं टीबीस के इस युग में शुभमन गिल और ईशान की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने पिछले कुछ समय से धवन फीके नजर आए हैं। बांग्लादेश में एकदिवसीय श्रृंखला गंवाने के बाद बोर्ड टीम के प्रदर्शन को लेकर समीक्षा बैठक करेगा। इसमें हेड कोच द्रविड़ और एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भविष्य के खाके पर चर्चा होगी। इस बैठक में विराट कोहली और रोहित शर्मा के भी शामिल होने की जानकारी है। इसके अलावा पीटीआई-भाषा ने ऑस्ट्रेलिया में टीबीस विश्व कप के दौरान बोर्ड के एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले रिपोर्ट किया कि, अनुभवी खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने की प्रक्रिया अगले साल से शुरू हो सकती है या उनके ऊपर फैसला लिया जा सकता है। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर बताया,"शिखर के भविष्य पर फैसला नई चयन समिति के गठन के बाद ही होगा, लेकिन इस मामले में हेड कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा के विचारों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। " दरअसल शिखर धवन के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आ रही कि वह पारी की शुरुआत में तेजी से रन नहीं बना पा रहे है। दो हज़ार उन्नीस विश्व कप से पहले उनका स्ट्राइक रेट एक सौ से अधिक का हुआ करता था जबकि दो हज़ार बाईस में उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ चौहत्तर. इक्कीस का है। वहीं ईशान किशन के दोहरे शतक और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने टीम को वह आक्रामक रवैया दिया जिसकी जरूरत थी। उनकी इस पारी के बाद टीम मैनेजमेंट सेलेक्शन के मामलों पर विचार करने पर मजबूर होगा। एक तरफ ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना आसान नहीं है जिसने एक सौ सरसठ एकदिवसीय मैच खेले हैं। वह मौजूदा टीम में रोहित और विराट कोहली के बाद भारत के तीसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी है। उनके नाम इस प्रारूप में छः हज़ार सात सौ तिरानवे रन दर्ज हैं। दूसरी तरफ दोहरा शतक लगाने वाले ईशान को भी नजरअंदाज करना अब मुश्किल होगा। इस मामले में दूसरा विचार यह भी हो सकता है कि, धवन को श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में कम से कम छह एकदिवसीय मैचों में मौका दिया जाना चाहिए और फिर प्रदर्शन के आधार पर मार्च के अंत में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज पर फैसला किया जाना चाहिए। शुभमन गिल को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। गिल पिछले छह महीने में भारत के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले एकदिवसीय बल्लेबाज रहे हैं। कुछ अजीब कारणों से चेतन शर्मा की अगुवाई वाली निवर्तमान समिति ने गिल को बांग्लादेश वनडे से आराम देने का फैसला किया। वह टीबीस एशिया कप या विश्व कप टीम का हिस्सा नहीं थे, इसके बावजूद इस युवा बल्लेबाज को विश्राम देने का फैसला समझ से परे रहा। जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट के बाद भारत ने कोई भी टेस्ट नहीं खेला है। जब गिल और किशन जैसे बल्लेबाज टीम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हों तो उन्हें ज्यादा देर तक बाहर रखना मुश्किल होगा। भारतीय टीम के एक पूर्व चयनकर्ता ने कहा, "खेल के समय का कोई विकल्प नहीं है। क्या आपके कहने का मतलब है कि शिखर जनवरी के मध्य में अगले एक महीने तक बिना किसी मैच अभ्यास के वनडे खेलना शुरू करेंगे। यहां तक कि सूर्यकुमार यादव जैसा बल्लेबाज भी लय में रहने के लिए मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी मैच खेलने के लिए प्रतिबद्ध है। " भारतीय टीम का अगला कैलेंडर ईयर काफी व्यस्त है जिसकी शुरुआत तीन जनवरी को घरेलू सीरीज से होगी। तीन जनवरी से एक फरवरी के बीच भारत उनतीस दिनों के अंतराल में बारह लिमिटेड ओवर मैच खेलेगा। इसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ छह और श्रीलंका के खिलाफ छह मैच शामिल हैं। इस दौरान एकदिवसीय टीम में ऐसे खिलाड़ी हो सकते हैं जो टीम मैनेजमेंट को लगता है कि दो हज़ार तेईस विश्व कप का हिस्सा होंगे।
अर्श मलसियानी उर्दू के मशहूर शायर थे। उनकी गज़लों में अपने वक्त और हालात का जिक्र कुछ तल्ख है। इस अंदाज़ेबयां ने उन्हें उनकी गज़लों को मशहूर बनाया। शायरी लेखन के अलावा उन्होंने उर्दू काव्य-परंपरा पर अच्छा आलोचनात्मक काम भी किया। सुलह के नाम पर लड़ाई है अम्ने-आलम तेरी दुहाई है (अम्ने-आलम : शांति का समय) इश्के-बुतां का ले के सहारा कभी-कभी अपने ख़ुदा को हमने पुकारा कभी-कभी (इश्के-बुतां : प्रेमी) इस इन्तहा-ए-तर्के-मुहब्बत के बावजूद हमने लिया है नाम तुम्हारा कभी-कभी (इन्तहा-ए-तर्के-मुहब्बत : प्रेम छूटने की हद) अपनी निगाहे-शोख़ से छुपिए तो जानिए महफिल में हमसे आपने पर्दा किया तो क्या?
अर्श मलसियानी उर्दू के मशहूर शायर थे। उनकी गज़लों में अपने वक्त और हालात का जिक्र कुछ तल्ख है। इस अंदाज़ेबयां ने उन्हें उनकी गज़लों को मशहूर बनाया। शायरी लेखन के अलावा उन्होंने उर्दू काव्य-परंपरा पर अच्छा आलोचनात्मक काम भी किया। सुलह के नाम पर लड़ाई है अम्ने-आलम तेरी दुहाई है इश्के-बुतां का ले के सहारा कभी-कभी अपने ख़ुदा को हमने पुकारा कभी-कभी इस इन्तहा-ए-तर्के-मुहब्बत के बावजूद हमने लिया है नाम तुम्हारा कभी-कभी अपनी निगाहे-शोख़ से छुपिए तो जानिए महफिल में हमसे आपने पर्दा किया तो क्या?
नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के असंतुष्ट नेता कुमार विश्वास ने कहा कि उन्हें सच बोलने के लिए दंडित किया गया है। विश्वास ने मीडिया से कहा, बीते डेढ़ सालों से चाहे पीएसी (राजनीति मामलों की समिति) हो या मेरे बड़े भाई अरविंद केजरीवाल का सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर फैसला, आतंकवादियों पर नरम रुख, टिकट बंटवारे पर उनकी चुप्पी व जेएनयू..जो भी सच मैंने बोला है, उसकी आज मुझे सजा दी गई है। 'आप' ने बुधवार को संजय सिंह, व्यापारी सुशील गुप्ता व चार्टर्ड अकांउटेंट एन.डी.गुप्ता को दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। विश्वास ने गुप्ता को लेकर कड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा, मैं गुप्ता को मनीष सिसोदिया के साथ बीते 40 साल, केजरीवाल के लिए 12 साल, पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सात साल व पार्टी विधायकों के लिए बीते पांच सालों से काम करने के लिए बधाई देता हूं। विश्वास ने स्पष्ट रूप से खुद को नामित नहीं किए जाने के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया। विश्वास ने कहा कि केजरीवाल की सहमति के बगैर पार्टी में कुछ नहीं होता। विश्वास ने कहा, आप (केजरीवाल) के खिलाफ बोलकर पार्टी में किसी का बने रहना असंभव है। नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 154वीं जयंती से एक दिन पूर आज देशभर में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत श्रमदान किया जा रहा है। मंत्री, नेता सहित आम लोग सुबह से ही स्वच्छता अभियान में भाग लेने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत देश के लिए महत्वपूर्ण है। एक मन की बात कहूंगा कि देश जागता है, जगाने वाला चाहिए। आज पीएम मोदी ने एक आह्वान किया पूरा देश झाड़ू लेकर निकल गया, जो अच्छी बात है। इसी तरह देश को आगे बढ़ाना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में 'स्वच्छता अभियान' में भाग लिया। मुंबई में BMC द्वारा आयोजित 'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बच्चों से बातचीत की। गौरतलब है, इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया था कि अभियान में भाग लेकर एक घंटे श्रमदान करें। उन्होंने कहा था कि स्वच्छ भारत साझी जिम्मेदारी है। इसलिए स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। उन्होंने अभियान के संबंध में 'एक तारीख, एक घंटा, एक साथ' का नारा दिया था। यह पहल स्वच्छता पखवाड़ा-स्वच्छता ही सेवा अभियान 2023 की एक कड़ी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि एक अक्तूबर को सुबह 10 बजे हम एक महत्वपूर्ण स्वच्छता पहल के लिए एक साथ आगे आएंगे। स्वच्छ भारत एक साझा जिम्मेदारी है और हर प्रयास अहमियत रखता है। स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए इस उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। इससे पहले मन की बात के 105वें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोगों से अपनी गली, मोहल्ले या किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, स्वच्छता अभियान के लिए देश भर में 6.4 लाख से अधिक स्थलों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य कचरा संवेदनशील बिंदुओं, रेलवे ट्रैक और स्टेशनों, हवाई अड्डों एवं उसके आसपास के क्षेत्रों, जल निकायों, घाटों, झुग्गियों, बाजार स्थानों, पूजा स्थलों और पर्यटन स्थलों को साफ करना है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकायों, कस्बों, ग्राम पंचायतों, विभिन्न मंत्रालयों ने 'स्वच्छता ही सेवा' नागरिक पोर्टल पर 'स्वच्छता श्रमदान' के लिए कार्यक्रम जोड़े हैं। इस पोर्टल पर सफाई वाले स्थल की पहचान कर सकते हैं और स्वच्छता में श्रमदान करने के दौरान अपनी तस्वीर खींच कर अपलोड कर सकते हैं। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
नई दिल्ली, तीन जनवरी । राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के असंतुष्ट नेता कुमार विश्वास ने कहा कि उन्हें सच बोलने के लिए दंडित किया गया है। विश्वास ने मीडिया से कहा, बीते डेढ़ सालों से चाहे पीएसी हो या मेरे बड़े भाई अरविंद केजरीवाल का सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर फैसला, आतंकवादियों पर नरम रुख, टिकट बंटवारे पर उनकी चुप्पी व जेएनयू..जो भी सच मैंने बोला है, उसकी आज मुझे सजा दी गई है। 'आप' ने बुधवार को संजय सिंह, व्यापारी सुशील गुप्ता व चार्टर्ड अकांउटेंट एन.डी.गुप्ता को दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। विश्वास ने गुप्ता को लेकर कड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा, मैं गुप्ता को मनीष सिसोदिया के साथ बीते चालीस साल, केजरीवाल के लिए बारह साल, पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सात साल व पार्टी विधायकों के लिए बीते पांच सालों से काम करने के लिए बधाई देता हूं। विश्वास ने स्पष्ट रूप से खुद को नामित नहीं किए जाने के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया। विश्वास ने कहा कि केजरीवाल की सहमति के बगैर पार्टी में कुछ नहीं होता। विश्वास ने कहा, आप के खिलाफ बोलकर पार्टी में किसी का बने रहना असंभव है। नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ चौवनवीं जयंती से एक दिन पूर आज देशभर में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत श्रमदान किया जा रहा है। मंत्री, नेता सहित आम लोग सुबह से ही स्वच्छता अभियान में भाग लेने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत देश के लिए महत्वपूर्ण है। एक मन की बात कहूंगा कि देश जागता है, जगाने वाला चाहिए। आज पीएम मोदी ने एक आह्वान किया पूरा देश झाड़ू लेकर निकल गया, जो अच्छी बात है। इसी तरह देश को आगे बढ़ाना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में 'स्वच्छता अभियान' में भाग लिया। मुंबई में BMC द्वारा आयोजित 'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बच्चों से बातचीत की। गौरतलब है, इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया था कि अभियान में भाग लेकर एक घंटे श्रमदान करें। उन्होंने कहा था कि स्वच्छ भारत साझी जिम्मेदारी है। इसलिए स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। उन्होंने अभियान के संबंध में 'एक तारीख, एक घंटा, एक साथ' का नारा दिया था। यह पहल स्वच्छता पखवाड़ा-स्वच्छता ही सेवा अभियान दो हज़ार तेईस की एक कड़ी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि एक अक्तूबर को सुबह दस बजे हम एक महत्वपूर्ण स्वच्छता पहल के लिए एक साथ आगे आएंगे। स्वच्छ भारत एक साझा जिम्मेदारी है और हर प्रयास अहमियत रखता है। स्वच्छ भविष्य की शुरुआत के लिए इस उत्कृष्ट प्रयास में शामिल हों। इससे पहले मन की बात के एक सौ पाँचवें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोगों से अपनी गली, मोहल्ले या किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, स्वच्छता अभियान के लिए देश भर में छः.चार लाख से अधिक स्थलों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य कचरा संवेदनशील बिंदुओं, रेलवे ट्रैक और स्टेशनों, हवाई अड्डों एवं उसके आसपास के क्षेत्रों, जल निकायों, घाटों, झुग्गियों, बाजार स्थानों, पूजा स्थलों और पर्यटन स्थलों को साफ करना है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकायों, कस्बों, ग्राम पंचायतों, विभिन्न मंत्रालयों ने 'स्वच्छता ही सेवा' नागरिक पोर्टल पर 'स्वच्छता श्रमदान' के लिए कार्यक्रम जोड़े हैं। इस पोर्टल पर सफाई वाले स्थल की पहचान कर सकते हैं और स्वच्छता में श्रमदान करने के दौरान अपनी तस्वीर खींच कर अपलोड कर सकते हैं। कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर चिदंबरम ने दिया यह सुझाव, क्या हल होगी समस्या?
तमिलनाडु के कोयंबटूर में दलालों के चुंगल में फंसी 24 लड़कियों को मुक्त करा लिया गया है. सभी को चेन्नई से एयर लिफ्ट करा कर बुधवार सुबह रांची लाया गया. ये लड़कियां पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला जिले के विभिन्न इलाकों की रहने वाली हैं. अब इन्हें घर भेजने की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि जोको नाम का दलाल ने इन लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई का काम दिलाने के नाम पर तमिलनाडु ले गया था. लेकिन वहां सभी को काम के लिए दवा कंपनी भेज दिया गया. जहां पर उन्हें बंधुआ मजदूर बना लिया गया. लड़कियां वहां पर करीब दो महीने से फंसी थीं. पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है. लड़कियों ने बताया कि उन्हें तीन अक्टूबर को रांची से कोयंबटूर सिलाई का काम करने के लिए लाया गया थी. लेकिन उन्हें दवा कंपनियों में पहुंचाया दिया गया. वहां पर उन्हें दो वक्त का खाना भी सही तरीके से नहीं दिया जाता था. रोज 12 से 15 घंटे तक इनसे काम लिया जाता था और बीमार होने पर छुट्टी भी दी जाती थी. लड़कियों को 12 हजार सैलरी देने की बात कही गई थी. लेकिन उन्हे सिर्फ 5 हजार रुपये ही दिये जाते थे. जब लड़कियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें अलग-अलग तरीके से परेशान किया जाने लगा. कभी खाना नहीं दिया जाता तो कभी कंपनी से बाहर कर दिया जाता. दलाल लड़कियों को घर पहुंचाने के लिए पैसे मांगते थे. लड़कियों ने बताया कि परेशान होकर उन्होंने राज्य सरकार की मदद से चलाई जा रही फिया फाउंडेशन के कंट्रोल रूम में फोन किया. फिर सरकार को इस मामले की जानकारी दी गई. श्रम विभाग की मदद से रेस्क्यू की कोशिश की गई. अब लड़कियां रांची पहुंचकर बेहद खुश हैं.
तमिलनाडु के कोयंबटूर में दलालों के चुंगल में फंसी चौबीस लड़कियों को मुक्त करा लिया गया है. सभी को चेन्नई से एयर लिफ्ट करा कर बुधवार सुबह रांची लाया गया. ये लड़कियां पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला जिले के विभिन्न इलाकों की रहने वाली हैं. अब इन्हें घर भेजने की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि जोको नाम का दलाल ने इन लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई का काम दिलाने के नाम पर तमिलनाडु ले गया था. लेकिन वहां सभी को काम के लिए दवा कंपनी भेज दिया गया. जहां पर उन्हें बंधुआ मजदूर बना लिया गया. लड़कियां वहां पर करीब दो महीने से फंसी थीं. पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है. लड़कियों ने बताया कि उन्हें तीन अक्टूबर को रांची से कोयंबटूर सिलाई का काम करने के लिए लाया गया थी. लेकिन उन्हें दवा कंपनियों में पहुंचाया दिया गया. वहां पर उन्हें दो वक्त का खाना भी सही तरीके से नहीं दिया जाता था. रोज बारह से पंद्रह घंटाटे तक इनसे काम लिया जाता था और बीमार होने पर छुट्टी भी दी जाती थी. लड़कियों को बारह हजार सैलरी देने की बात कही गई थी. लेकिन उन्हे सिर्फ पाँच हजार रुपये ही दिये जाते थे. जब लड़कियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें अलग-अलग तरीके से परेशान किया जाने लगा. कभी खाना नहीं दिया जाता तो कभी कंपनी से बाहर कर दिया जाता. दलाल लड़कियों को घर पहुंचाने के लिए पैसे मांगते थे. लड़कियों ने बताया कि परेशान होकर उन्होंने राज्य सरकार की मदद से चलाई जा रही फिया फाउंडेशन के कंट्रोल रूम में फोन किया. फिर सरकार को इस मामले की जानकारी दी गई. श्रम विभाग की मदद से रेस्क्यू की कोशिश की गई. अब लड़कियां रांची पहुंचकर बेहद खुश हैं.
आमतौर पर प्रसाद में आपने लड्डू, हलवा, या फिर कुछ और बंटते हुए सुना और देखा होगा। लेकिन हम कहें कि प्रसाद में बिरयानी मिले तो फिर आप क्या कहेंगे। जी हां, हाल ही में 2 क्विंटल चावल, 100 बकरे और 600 मुर्गे। ये सब एक खास तरह का प्रसाद बनाने के लिए इक्कठा किया गया था। इस प्रसाद को आसपास के गांव से आए लोगों में बांटा गया। दरअसल, यह तमिलनाडु के मदुरै स्थित वड़क्कमपट्टी और कल्लीगुड़ी जैसे गांवों की यह खास पहचान है। इसे हर साल उत्सव की तरह मनाया जाता है। इसके पीछे एक रोचक कहानी है। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक, ये कुछ ऐसे गांव हैं जहां कई किसान होटलों के मालिक बन गए। पहले मुनियांदी होटल की शुरुआत 1937 में गुरुसामी नायडू ने की थी। उसके बाद नायडू के एक करीबी दोस्त ने भी कल्लीगुड़ी और विरुधुनगर में ऐसे होटल खोले। पूरे दक्षिण भारत में फैले मुनियांदी होटलों के मालिक दो बातों का विशेष ध्यान रखते हैं, पहली यह कि ग्राहकों को स्वादिष्ट नॉन वेज भोज परोसा जाए और दूसरा कि अपने होटलों का नाम अपने कुलदेवता मुनियांदी के नाम पर रखा जाए।
आमतौर पर प्रसाद में आपने लड्डू, हलवा, या फिर कुछ और बंटते हुए सुना और देखा होगा। लेकिन हम कहें कि प्रसाद में बिरयानी मिले तो फिर आप क्या कहेंगे। जी हां, हाल ही में दो क्विंटल चावल, एक सौ बकरे और छः सौ मुर्गे। ये सब एक खास तरह का प्रसाद बनाने के लिए इक्कठा किया गया था। इस प्रसाद को आसपास के गांव से आए लोगों में बांटा गया। दरअसल, यह तमिलनाडु के मदुरै स्थित वड़क्कमपट्टी और कल्लीगुड़ी जैसे गांवों की यह खास पहचान है। इसे हर साल उत्सव की तरह मनाया जाता है। इसके पीछे एक रोचक कहानी है। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक, ये कुछ ऐसे गांव हैं जहां कई किसान होटलों के मालिक बन गए। पहले मुनियांदी होटल की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में गुरुसामी नायडू ने की थी। उसके बाद नायडू के एक करीबी दोस्त ने भी कल्लीगुड़ी और विरुधुनगर में ऐसे होटल खोले। पूरे दक्षिण भारत में फैले मुनियांदी होटलों के मालिक दो बातों का विशेष ध्यान रखते हैं, पहली यह कि ग्राहकों को स्वादिष्ट नॉन वेज भोज परोसा जाए और दूसरा कि अपने होटलों का नाम अपने कुलदेवता मुनियांदी के नाम पर रखा जाए।
क्रिप्टो निवेशकों को फायदा हो या नुकसान अब टीडीएस देना ही पड़ेगा. नई दिल्ली. आज से नया महीना शुरू होने के साथ कई नए बदलाव भी लागू हुए हैं, जो सीधे तौर पर आपकी वित्तीय जरूरतों और निवेश के तरीकों से जुड़े हैं. इसमें आयकर के नियम, टीडीएस कटौती और शेयर बाजार में निवेश से जुड़े नियम शामिल हैं. आपको भी इन बदलावों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि किसी संभावित परेशानी से बचा जा सके. आधार-पैन लिंक (Aadhaar-Pan Link) टैक्सपेयर्स के लिए यह काम सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर आपने अभी तक अपना आधार और पैन लिंक नहीं किया है तो आज से दोगुने जुर्माने के साथ इसे लिंक कराया जा सकता है. आधार से लिंक किए बिना आपका पैन इनवैलिड माना जाएगा और आप आयकर रिटर्न नहीं भर सकेंगे. 1 जुलाई से 31 मार्च, 2023 तक 1,000 रुपये का जुर्माना भरकर आप अपना पैन और आधार लिंक कर सकते हैं. किप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों पर आज से टैक्स से जुड़ा बड़ा नियम लागू हो गया है. अब क्रिप्टो निवेशकों को किसी भी ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस का भुगतान करना पड़ेगा. सबसे बड़ी बात ये है कि निवेशक को चाहे नफा हो या नुकसान उसे हर ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस देना ही होगा. दिल्ली सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने को प्रोत्साहित करने के लिए छूट का ऐलान किया था, जिसकी समय सीमा 30 जून को समाप्त हो चुकी है. 1 जुलाई से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने पर लोगों को 15 फीसदी छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा. ये भी पढ़ें - घरेलू क्रूड ऑयल संबंधी नियमों में बदलाव से खुदरा ग्राहकों पर क्या होगा असर, क्या हैं नए नियम? 1 जुलाई से डॉक्टरों और इंफ्लूएंशर्स के लिए भी टीडीएस का नया नियम लागू हो गया है. अब डॉक्टरों को कंपनी से मिलने वाले मुफ्त तोहफों पर टैक्स देना होगा. इसी तरह, यूट्यूबर्स को भी कंपनियों की ओर से मिलने वाली रकम पर टीडीएस देना होगा, जबकि सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी कंपनी से मिलने वाले मोबाइल, कार आदि उत्पादों पर 10 फीसदी टैक्स चुकाना होगा. हालांकि, अगर कंपनियों से मिले उत्पाद वापस कर दिए जाते हैं तो टैक्स नहीं लगेगा. आप भी शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और अभी तक अपने डीमैट अकाउंट की केवाई नहीं कराई है तो 1 जुलाई से आप मुश्किल में पड़ जाएंगे. बिना केवाईसी वाले खातों को 10 दिनों के भीतर बंद कर दिया जाएगा. यानी अब आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग नहीं कर सकेंगे. .
क्रिप्टो निवेशकों को फायदा हो या नुकसान अब टीडीएस देना ही पड़ेगा. नई दिल्ली. आज से नया महीना शुरू होने के साथ कई नए बदलाव भी लागू हुए हैं, जो सीधे तौर पर आपकी वित्तीय जरूरतों और निवेश के तरीकों से जुड़े हैं. इसमें आयकर के नियम, टीडीएस कटौती और शेयर बाजार में निवेश से जुड़े नियम शामिल हैं. आपको भी इन बदलावों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि किसी संभावित परेशानी से बचा जा सके. आधार-पैन लिंक टैक्सपेयर्स के लिए यह काम सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर आपने अभी तक अपना आधार और पैन लिंक नहीं किया है तो आज से दोगुने जुर्माने के साथ इसे लिंक कराया जा सकता है. आधार से लिंक किए बिना आपका पैन इनवैलिड माना जाएगा और आप आयकर रिटर्न नहीं भर सकेंगे. एक जुलाई से इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस तक एक,शून्य रुपयापये का जुर्माना भरकर आप अपना पैन और आधार लिंक कर सकते हैं. किप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों पर आज से टैक्स से जुड़ा बड़ा नियम लागू हो गया है. अब क्रिप्टो निवेशकों को किसी भी ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी टीडीएस का भुगतान करना पड़ेगा. सबसे बड़ी बात ये है कि निवेशक को चाहे नफा हो या नुकसान उसे हर ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी टीडीएस देना ही होगा. दिल्ली सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने को प्रोत्साहित करने के लिए छूट का ऐलान किया था, जिसकी समय सीमा तीस जून को समाप्त हो चुकी है. एक जुलाई से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने पर लोगों को पंद्रह फीसदी छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा. ये भी पढ़ें - घरेलू क्रूड ऑयल संबंधी नियमों में बदलाव से खुदरा ग्राहकों पर क्या होगा असर, क्या हैं नए नियम? एक जुलाई से डॉक्टरों और इंफ्लूएंशर्स के लिए भी टीडीएस का नया नियम लागू हो गया है. अब डॉक्टरों को कंपनी से मिलने वाले मुफ्त तोहफों पर टैक्स देना होगा. इसी तरह, यूट्यूबर्स को भी कंपनियों की ओर से मिलने वाली रकम पर टीडीएस देना होगा, जबकि सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी कंपनी से मिलने वाले मोबाइल, कार आदि उत्पादों पर दस फीसदी टैक्स चुकाना होगा. हालांकि, अगर कंपनियों से मिले उत्पाद वापस कर दिए जाते हैं तो टैक्स नहीं लगेगा. आप भी शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और अभी तक अपने डीमैट अकाउंट की केवाई नहीं कराई है तो एक जुलाई से आप मुश्किल में पड़ जाएंगे. बिना केवाईसी वाले खातों को दस दिनों के भीतर बंद कर दिया जाएगा. यानी अब आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग नहीं कर सकेंगे. .
(www. arya-tv. com)दुनिया में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 7. 52 करोड़ के ज्यादा हो गया। 5 करोड़ 28 लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक 16 लाख 67 हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। अमेरिका और जर्मनी के बाद कोलंबिया में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसकी वजह छुट्टियों के दौरान लोगों का प्रतिबंधों को नजरअंदाज करना माना जा रहा है। गुरुवार को यहां 12 हजार से ज्यादा केस सामने आए। कोलंबिया में गुरुवार को कुल 12 हजार 196 केस सामने आए। इसके पहले अगस्त में एक दिन में 13 हजार 55 मामले सामने आए थे। यहां अब तक कुल 14 लाख 68 हजार 795 मामले सामने आ चुके हैं। इसी दौरान 39 हजार 787 लोगों की मौत भी हुई है। राष्ट्रपति इवान डुके ने गुरुवार को हेल्थ मिनिस्ट्री के अफसरों के साथ मीटिंग की। इसके बाद जारी बयान में लोगों को चेतावनी दी। कहा- फेस्टिव सीजन में संयम बरतें, क्योंकि संक्रमण कम होने की बजाए तेजी से फैल रहा है। कोलंबिया सरकार का कहना है कि जनवरी 2021 के पहले वैक्सीनेशन शुरू होना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इसके लिए सभी तैयारियां कर चुकी है। दक्षिण अमेरिकी देशों ब्राजील के अलावा कोलंबिया ही सबसे ज्यादा प्रभावित है। अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन की टेस्ट रिपोर्ट गुरुवार रात निगेटिव आई। उनके व्हाइट हाउस एडवाइजर सेड्रिक रिचमंड गुरुवार को ही पॉजिटिव पाए गए थे। वे कई दिन से बाइडेन के लगातार संपर्क में थे। बाइडेन की प्रवक्ता ने कहा- प्रेसिडेंट इलेक्ट का कोरोना टेस्ट कराया गया था। उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। उनके एडवाइजर मिस्टर रिचमंड पॉजिटिव पाए गए थे। प्रेसिडेंट इलेक्ट अगले हफ्ते सार्वजनिक तौर पर वैक्सीनेशन कराएंगे। दूसरी तरफ, हेल्थ मिनिस्ट्री ने साफ कर दिया है कि राज्यों को भेजी जाने वाली वैक्सीन डोजेस में सोमवार से काफी तेजी आएगी।
दुनिया में कोरोना मरीजों का आंकड़ा सात. बावन करोड़ के ज्यादा हो गया। पाँच करोड़ अट्ठाईस लाख से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक सोलह लाख सरसठ हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। अमेरिका और जर्मनी के बाद कोलंबिया में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसकी वजह छुट्टियों के दौरान लोगों का प्रतिबंधों को नजरअंदाज करना माना जा रहा है। गुरुवार को यहां बारह हजार से ज्यादा केस सामने आए। कोलंबिया में गुरुवार को कुल बारह हजार एक सौ छियानवे केस सामने आए। इसके पहले अगस्त में एक दिन में तेरह हजार पचपन मामले सामने आए थे। यहां अब तक कुल चौदह लाख अड़सठ हजार सात सौ पचानवे मामले सामने आ चुके हैं। इसी दौरान उनतालीस हजार सात सौ सत्तासी लोगों की मौत भी हुई है। राष्ट्रपति इवान डुके ने गुरुवार को हेल्थ मिनिस्ट्री के अफसरों के साथ मीटिंग की। इसके बाद जारी बयान में लोगों को चेतावनी दी। कहा- फेस्टिव सीजन में संयम बरतें, क्योंकि संक्रमण कम होने की बजाए तेजी से फैल रहा है। कोलंबिया सरकार का कहना है कि जनवरी दो हज़ार इक्कीस के पहले वैक्सीनेशन शुरू होना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इसके लिए सभी तैयारियां कर चुकी है। दक्षिण अमेरिकी देशों ब्राजील के अलावा कोलंबिया ही सबसे ज्यादा प्रभावित है। अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन की टेस्ट रिपोर्ट गुरुवार रात निगेटिव आई। उनके व्हाइट हाउस एडवाइजर सेड्रिक रिचमंड गुरुवार को ही पॉजिटिव पाए गए थे। वे कई दिन से बाइडेन के लगातार संपर्क में थे। बाइडेन की प्रवक्ता ने कहा- प्रेसिडेंट इलेक्ट का कोरोना टेस्ट कराया गया था। उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। उनके एडवाइजर मिस्टर रिचमंड पॉजिटिव पाए गए थे। प्रेसिडेंट इलेक्ट अगले हफ्ते सार्वजनिक तौर पर वैक्सीनेशन कराएंगे। दूसरी तरफ, हेल्थ मिनिस्ट्री ने साफ कर दिया है कि राज्यों को भेजी जाने वाली वैक्सीन डोजेस में सोमवार से काफी तेजी आएगी।
नरकेषु बिलानि स्युः प्रज्वलन्ति महान्ति च । नारका येषु पश्यन्ते 'कुम्भोज दुरामकाः ।।१२।। एकं त्रीणि तथा सप्त दश सप्तदशापि च । द्वाविंशतिस्त्रयस्त्रिंशदायुस्तत्राब्धिसंख्यया ॥९३ ॥ धनूंषि सप्त तिस्रः स्युः श्ररत्न्योऽङ्गलयश्च षट् । धर्मायां नारकोत्सेधो द्विद्विशेषासु लक्ष्यताम् ।।९४॥ 'पोगण्डा हुण्डसंस्थानाः 'पढकाः पूतिगन्धयः । दुर्वर्णाश्चैव दुःस्पर्शा दुःस्वरा दुर्भगाश्च ते ॥१५॥ तमोमयैरिवारब्धा विरुक्षैः परमाणुभिः । जायन्ते कालकालाभाः" नारका द्रव्यलेश्यया ॥१६॥ भावलेश्या तु कापोती जघन्या मध्यमोत्तमा । नीला च मध्यमा नीला नीलोत्कृष्टा च कृष्णया ॥९७॥ कृष्णा च मध्यमोत्कृष्टा कृष्णा चेति यथाक्रमम् । घर्मादि सप्तमी यावत् तावत्पृथिवीपु वर्णिताः ।।१८।। यादृशः कटुकालाबुकाञ्जीरादिसमागमे । रमः कटुरनिष्टश्च तद्द्वात्रेष्वपि तादृशः ॥१९॥ श्वमार्जारखरोष्ट्रादिकुण पानां 'समाहतौ । यगन्ध्यं तदप्येषां देहगन्धस्य नोपमा ॥१०० ॥ यादृशः करपत्रेषु गोक्षुरेपु" च यादृशः । तादृशः कर्कशः स्पर्शः तदङ्गेष्वपि जायते ॥११॥ लाख, दस लाख, तीन लाख, पांच कम एक लाख और पांच बिल हैं । ये बिल सदा ही जाज्वल्यमान रहते हैं और बड़े बड़े हैं। इन बिलोंमें पापी नारकी जीव हमेशा कुम्भीपाक ( बंद घड़े में पकाये जानेवाले जल आदि) के समान पकते रहते हैं ।।६१-६२ । उन नरकोंमें क्रमसे एक सागर, तीन सागर, सात सागर, दस सागर, सत्रह सागर, बाईस सागर और तेंतीस सागरकी उत्कृष्ट आयु है ।। ९३ ।। पहली पृथिवीमें नारकियों के शरीरकी ऊंचाई सात धनुष तीन हाथ और छह अंगुल है। और द्वितीय आदि पृथिवियोंमें क्रम क्रमसे दूनी दूनी समझना चाहिये । अर्थात् दूसरी पृथिवीमें पन्द्रह धनुप दो हाथ बारह अंगुल, तीसरी पृथिवीमें इकतीस धनुष एक हाथ, चौथी पृथिवीमें बासठ धनुष दो हाथ पांचवीं पृथिवीमें एक सौ पचीस धनुष, छठवी पृथिवीमें दो सौ पचास हाथ और सातवीं पृथिवीं में पांच सौ धनुष शरीरकी ऊंचाई है ॥ ६४ ॥ वे नारकी विकलांग, हुण्डक संस्थानवाले, नपुंसक, दुर्गन्धयुक्त, बुरे काले रंगके धारक, कठिन स्पर्शवाले, कठोर स्वर सहित तथा दुर्भग ( देखने में अप्रिय ) होते हैं ।।९५।। उन नारकियोंका शरीर अन्धकारके समान काले और रूखे परमाणुओं से बना हुआ होता है । उन सबकी द्रव्यलेश्या अत्यन्त कृष्ण होती है ॥ १६ ॥ परन्तु भावलेश्या में अन्तर है जो कि इस प्रकार है- पहली प्रथिवी में जघन्य कापोती भावलेश्या है, दूसरों पृथिवीमें मध्यम कापोती लेश्या है, तीसरी पृथिवी में उत्कृष्ट कापोती लेश्या और जघन्य नील लेश्या है, चौथी पृथिवीमें मध्यम नील लेश्या है, पांचवीं में उत्कृष्ट नील तथा जघन्य कृष्ण लेश्या है, छठवीं पृथिवीमें मध्यम कृष्ण लेश्या है और सातवीं पृथिवीमें उत्कृष्ट कृष्ण लेश्या है । इस प्रकार घर्मा आदि सात पृथिवियोंमें क्रमसे भावलेश्याका वर्णन किया ॥ ९७-६८ ॥ कड़वी तूंबी और कांजीरके संयोग से जैसा कड़ा और अनिष्ट रस उत्पन्न होता है वैसा ही रस नारकियों के शरीर में भी कडुआ उत्पन्न होता है ।। ९९ ॥ कुत्ता, बिलाव, गधा, ऊँट आदि जीवोंके मृतक कलेवरोंको इकट्ठा करनेसे है जो दुर्गन्ध उत्पन्न होती है वह भी इन नाकियोंके शरीरकी दुर्गन्धकी बराबरी नहीं कर सकती ॥ १०० ॥ करोत और गोखुरू में जैसा कठोर स्पर्श होता है वैसा ही कठोर स्पर्श नार१ पिठरेषु । 'कुम्भी तु पाटला वारी पर्णे पिटरकटफले' इत्यभिधानात् । कुम्भेष्विव म०, ल० । २ द्विगुणः द्विगुणः । ३ विकलाङ्गाः । ४ पण्डकाः च०, ग्र०, प० । ५ प्रतिकृष्णाः । ६ घर्मायां कापोती जघन्या । वंशायां मध्यमा कापोतो लेश्या मेघायाम् - उत्तमा कापोती लेश्या जघन्या नौललेश्या च । अञ्जयांमध्यमा नीललेश्या अरिष्टायाम् उत्कृष्टा नीललेश्या जघन्या कृष्णलेश्या च । मध्यमा कृष्णा माघव्यां मघव्यां सप्तभ्यां भूमौ उत्कृष्टा कृष्णलेश्या । ७ संयोगे । ८ संग्रहे । ६ ऋषु । १० गोकण्टकेषु । पृथग्विक्रियास्तेषाम् अशुभाद् दुरितोदयात् । ततो विकृतबीभत्सविरूपात्मैव सा मता ॥१०२॥ विवोधोऽस्ति विभङ्गाख्यः तेषां पर्याप्स्यनन्तरम् । तेनान्यजन्मवैराणां स्मरन्युयन्ति न ।।१०३।। यदमी प्राक्तने जन्मन्यासन् पापेपु पण्डिताः । कहदाश्च दुराचाराः तद्विपाकोऽयमुल्वणः" ॥१०४।। ईडग्विधं महादुःखं द्वितीयनरकाश्रितम् । पापेन कर्मणा प्रापत शतबुद्धिरसौ सुर ॥१०५॥ तस्माद्दुःखमनिच्छूनां नारकं तीव्रमीदृशम् । उपास्योऽयं जिनेन्द्राणां धर्मो मतिमतां नृणाम् ॥ १६॥ धर्मः प्रपाति दुःखेभ्यो धर्मः शर्म तनोत्ययम् । धर्मो नैःश्रेयस सौख्यं दत्ते कर्मक्षयोद्भवम् ।।१०७॥ धर्मादेव सुरेन्द्रत्वं नरेन्द्रत्वं गणेन्द्रता । धर्मात्तीर्थकरत्वञ्च परमानन्त्यमेव च ।।१०८॥ धर्मो बन्धुश्च मित्रञ्च धर्मोऽयं गुरुरङ्गिनाम् । तस्माद्मे मतिं धत्स्व स्वर्मोत्तसुखदायिनि ।।१०६॥ तदा प्रीतिङ्करस्येति वचः श्रुत्वा जिनेशिनः । श्रीधरो धर्मसंवेगं परं प्रापन स पुण्यधीः ।।११०।। 'गत्वा गुरुनिदेशेन शतबुद्धिबोधयत् । किं भद्रमुख मां वेन्सि शतद्धं महाबलम् ॥१११॥ तदासांत्तव मिथ्यात्वम् उक्त दुर्नयात् । पश्य तत्परिपाको यम् अस्वन्तम्ते पुरःस्थितः ॥११२ ।। इत्यसौ बांधितस्तेन शुद्धं दर्शनमग्रहीत । मिथ्यात्वकलुपापायान् परां शुद्धिमुपाश्रितः ।।११३॥ कालान्ते नरकाद्वीमान निर्गत्य शतधीचरः ।वदेहमुपागतः ॥ ११४॥ कियों के शरीर में भी होता है ।। १०१ ॥ उन नारकियोंके अशुभ कर्मका उदय होनसे अपृथक विक्रिया ही होती है और वह भी अत्यन्त विकृत, घृणित तथा कुरूप हुआ करती है। भावार्थएक नारकी एक समय में अपने शरीरका एक ही आकार बना सकता है सो वह भी अत्यन्त विकृत, घृणाका स्थान और कुरूप आकार बनाता है, देवोंके समान मनचाहे अनेक रूप बनानेकी सामर्थ्य नारकी जीवोंमें नहीं होती ॥१०२ ।। पर्याप्त होते ही उन्हें विभंगावधि ज्ञान प्राप्त हो जाता है जिससे वे पूर्वभवके वैरांका स्मरण कर लेते हैं और उन्हें प्रकट भी करने लगते हैं ।। १०३ ॥ जो जीव पूर्वजन्ममें पाप करने में बहुत ही पण्डित थे, जो खोटे वचन कहनेनें चतुर थे और दुराचारी थे यह उन्हींके दुष्कर्म का फल है ॥ १०४ ॥ हे देव वह शतबुद्धि मन्त्रीका जीव अपने पापकर्म के उदयसे ऊपर कहे अनुसार द्वितीय नरक सम्बन्धी बड़े बड़े दुःखांको प्रात हुआ है । १०५ ।। इसलिये जो जीव ऊपर कहे हुए नरकोंके तो दुःख नहीं चाहते उन बुद्धिमान पुरुषोंको इस जिनेन्द्रप्रणीत धर्मकी उपासना करना चाहिये ।। १०६ ।। यहा जैन धर्म हा दुःखांस रक्षा करता है, यही धर्म मुख विस्तृत करता है, और यहीं धर्म कर्मोंके दायमे उत्पन्न होने वाले मोक्षसुखको देता है ॥ १०७ ॥ इस जैन धर्मसे इन्द्र चक्रवर्ती और गणधरके पद प्राप्त होते हैं। तीर्थकर पढ़ भी इसी धर्म प्राप्त होता है और सर्वोत्कृष्ट सिद्ध पद भी इसीसे मिलता है ।।१०८ ॥ यह जैन धम ही जीवांका बन्धु है, यही मित्र है और यही गुरु है, इसलिये है देव, स्वर्ग और मोक्षके सुख देनेवाले इस जैनधर्म में ही तूं अपनी बुद्धि लगा ॥ १०६ ।। उस समय प्रीतिकर जिनेन्द्र के ऊपर कहे वचन सुनकर पवित्र बुद्धिका धारक श्रीधरदेव अतिशय धर्मप्रेमको प्राप्त हुआ ।। ११० ॥ और गुरुके आज्ञानुसार दूसरे नरक में जाकर शतबुद्धिको समझाने लगा कि है भले मृख शतबुद्धि, क्या तू मुझ महाबलको जानता है ? ॥ १११ ॥ उस भवमें अनेक मिथ्यानयोक आश्रयसे तेरा मिथ्यात्व बहुत ही प्रबल हो रहा था। देख, उसी मिथ्यात्वका यह दुःख दनवाला फल तेरे सामने है ।। ११२ ।। इस प्रकार श्रीधरदेवके द्वारा समझाये हुए शतबुद्धि के जीवन शुद्ध सम्यग्दर्शन धारण किया और मिथ्यात्वरूपी मैलके नष्ट हो जानेसे उत्कृष्ट विशुद्धि प्राप्त की ॥११३॥ तत्पश्चात् १ ततः कारणात् । नरकमेन्य । ७ भद्रश्रेष्ठ । २ विरूप दुर्व। ३ उद्धादयन्ति । ४ दुर्वचनाः । ५। ६ द्वितीयभद्र मुग्ध श्र०, प० स० ८ उत्कटम् । ६ दुःखायमानः ।
नरकेषु बिलानि स्युः प्रज्वलन्ति महान्ति च । नारका येषु पश्यन्ते 'कुम्भोज दुरामकाः ।।बारह।। एकं त्रीणि तथा सप्त दश सप्तदशापि च । द्वाविंशतिस्त्रयस्त्रिंशदायुस्तत्राब्धिसंख्यया ॥तिरानवे ॥ धनूंषि सप्त तिस्रः स्युः श्ररत्न्योऽङ्गलयश्च षट् । धर्मायां नारकोत्सेधो द्विद्विशेषासु लक्ष्यताम् ।।चौरानवे॥ 'पोगण्डा हुण्डसंस्थानाः 'पढकाः पूतिगन्धयः । दुर्वर्णाश्चैव दुःस्पर्शा दुःस्वरा दुर्भगाश्च ते ॥पंद्रह॥ तमोमयैरिवारब्धा विरुक्षैः परमाणुभिः । जायन्ते कालकालाभाः" नारका द्रव्यलेश्यया ॥सोलह॥ भावलेश्या तु कापोती जघन्या मध्यमोत्तमा । नीला च मध्यमा नीला नीलोत्कृष्टा च कृष्णया ॥सत्तानवे॥ कृष्णा च मध्यमोत्कृष्टा कृष्णा चेति यथाक्रमम् । घर्मादि सप्तमी यावत् तावत्पृथिवीपु वर्णिताः ।।अट्ठारह।। यादृशः कटुकालाबुकाञ्जीरादिसमागमे । रमः कटुरनिष्टश्च तद्द्वात्रेष्वपि तादृशः ॥उन्नीस॥ श्वमार्जारखरोष्ट्रादिकुण पानां 'समाहतौ । यगन्ध्यं तदप्येषां देहगन्धस्य नोपमा ॥एक सौ ॥ यादृशः करपत्रेषु गोक्षुरेपु" च यादृशः । तादृशः कर्कशः स्पर्शः तदङ्गेष्वपि जायते ॥ग्यारह॥ लाख, दस लाख, तीन लाख, पांच कम एक लाख और पांच बिल हैं । ये बिल सदा ही जाज्वल्यमान रहते हैं और बड़े बड़े हैं। इन बिलोंमें पापी नारकी जीव हमेशा कुम्भीपाक के समान पकते रहते हैं ।।इकसठ-बासठ । उन नरकोंमें क्रमसे एक सागर, तीन सागर, सात सागर, दस सागर, सत्रह सागर, बाईस सागर और तेंतीस सागरकी उत्कृष्ट आयु है ।। तिरानवे ।। पहली पृथिवीमें नारकियों के शरीरकी ऊंचाई सात धनुष तीन हाथ और छह अंगुल है। और द्वितीय आदि पृथिवियोंमें क्रम क्रमसे दूनी दूनी समझना चाहिये । अर्थात् दूसरी पृथिवीमें पन्द्रह धनुप दो हाथ बारह अंगुल, तीसरी पृथिवीमें इकतीस धनुष एक हाथ, चौथी पृथिवीमें बासठ धनुष दो हाथ पांचवीं पृथिवीमें एक सौ पचीस धनुष, छठवी पृथिवीमें दो सौ पचास हाथ और सातवीं पृथिवीं में पांच सौ धनुष शरीरकी ऊंचाई है ॥ चौंसठ ॥ वे नारकी विकलांग, हुण्डक संस्थानवाले, नपुंसक, दुर्गन्धयुक्त, बुरे काले रंगके धारक, कठिन स्पर्शवाले, कठोर स्वर सहित तथा दुर्भग होते हैं ।।पचानवे।। उन नारकियोंका शरीर अन्धकारके समान काले और रूखे परमाणुओं से बना हुआ होता है । उन सबकी द्रव्यलेश्या अत्यन्त कृष्ण होती है ॥ सोलह ॥ परन्तु भावलेश्या में अन्तर है जो कि इस प्रकार है- पहली प्रथिवी में जघन्य कापोती भावलेश्या है, दूसरों पृथिवीमें मध्यम कापोती लेश्या है, तीसरी पृथिवी में उत्कृष्ट कापोती लेश्या और जघन्य नील लेश्या है, चौथी पृथिवीमें मध्यम नील लेश्या है, पांचवीं में उत्कृष्ट नील तथा जघन्य कृष्ण लेश्या है, छठवीं पृथिवीमें मध्यम कृष्ण लेश्या है और सातवीं पृथिवीमें उत्कृष्ट कृष्ण लेश्या है । इस प्रकार घर्मा आदि सात पृथिवियोंमें क्रमसे भावलेश्याका वर्णन किया ॥ सत्तानवे-अड़सठ ॥ कड़वी तूंबी और कांजीरके संयोग से जैसा कड़ा और अनिष्ट रस उत्पन्न होता है वैसा ही रस नारकियों के शरीर में भी कडुआ उत्पन्न होता है ।। निन्यानवे ॥ कुत्ता, बिलाव, गधा, ऊँट आदि जीवोंके मृतक कलेवरोंको इकट्ठा करनेसे है जो दुर्गन्ध उत्पन्न होती है वह भी इन नाकियोंके शरीरकी दुर्गन्धकी बराबरी नहीं कर सकती ॥ एक सौ ॥ करोत और गोखुरू में जैसा कठोर स्पर्श होता है वैसा ही कठोर स्पर्श नारएक पिठरेषु । 'कुम्भी तु पाटला वारी पर्णे पिटरकटफले' इत्यभिधानात् । कुम्भेष्विव मशून्य, लशून्य । दो द्विगुणः द्विगुणः । तीन विकलाङ्गाः । चार पण्डकाः चशून्य, ग्रशून्य, पशून्य । पाँच प्रतिकृष्णाः । छः घर्मायां कापोती जघन्या । वंशायां मध्यमा कापोतो लेश्या मेघायाम् - उत्तमा कापोती लेश्या जघन्या नौललेश्या च । अञ्जयांमध्यमा नीललेश्या अरिष्टायाम् उत्कृष्टा नीललेश्या जघन्या कृष्णलेश्या च । मध्यमा कृष्णा माघव्यां मघव्यां सप्तभ्यां भूमौ उत्कृष्टा कृष्णलेश्या । सात संयोगे । आठ संग्रहे । छः ऋषु । दस गोकण्टकेषु । पृथग्विक्रियास्तेषाम् अशुभाद् दुरितोदयात् । ततो विकृतबीभत्सविरूपात्मैव सा मता ॥एक सौ दो॥ विवोधोऽस्ति विभङ्गाख्यः तेषां पर्याप्स्यनन्तरम् । तेनान्यजन्मवैराणां स्मरन्युयन्ति न ।।एक सौ तीन।। यदमी प्राक्तने जन्मन्यासन् पापेपु पण्डिताः । कहदाश्च दुराचाराः तद्विपाकोऽयमुल्वणः" ॥एक सौ चार।। ईडग्विधं महादुःखं द्वितीयनरकाश्रितम् । पापेन कर्मणा प्रापत शतबुद्धिरसौ सुर ॥एक सौ पाँच॥ तस्माद्दुःखमनिच्छूनां नारकं तीव्रमीदृशम् । उपास्योऽयं जिनेन्द्राणां धर्मो मतिमतां नृणाम् ॥ सोलह॥ धर्मः प्रपाति दुःखेभ्यो धर्मः शर्म तनोत्ययम् । धर्मो नैःश्रेयस सौख्यं दत्ते कर्मक्षयोद्भवम् ।।एक सौ सात॥ धर्मादेव सुरेन्द्रत्वं नरेन्द्रत्वं गणेन्द्रता । धर्मात्तीर्थकरत्वञ्च परमानन्त्यमेव च ।।एक सौ आठ॥ धर्मो बन्धुश्च मित्रञ्च धर्मोऽयं गुरुरङ्गिनाम् । तस्माद्मे मतिं धत्स्व स्वर्मोत्तसुखदायिनि ।।एक सौ छः॥ तदा प्रीतिङ्करस्येति वचः श्रुत्वा जिनेशिनः । श्रीधरो धर्मसंवेगं परं प्रापन स पुण्यधीः ।।एक सौ दस।। 'गत्वा गुरुनिदेशेन शतबुद्धिबोधयत् । किं भद्रमुख मां वेन्सि शतद्धं महाबलम् ॥एक सौ ग्यारह॥ तदासांत्तव मिथ्यात्वम् उक्त दुर्नयात् । पश्य तत्परिपाको यम् अस्वन्तम्ते पुरःस्थितः ॥एक सौ बारह ।। इत्यसौ बांधितस्तेन शुद्धं दर्शनमग्रहीत । मिथ्यात्वकलुपापायान् परां शुद्धिमुपाश्रितः ।।एक सौ तेरह॥ कालान्ते नरकाद्वीमान निर्गत्य शतधीचरः ।वदेहमुपागतः ॥ एक सौ चौदह॥ कियों के शरीर में भी होता है ।। एक सौ एक ॥ उन नारकियोंके अशुभ कर्मका उदय होनसे अपृथक विक्रिया ही होती है और वह भी अत्यन्त विकृत, घृणित तथा कुरूप हुआ करती है। भावार्थएक नारकी एक समय में अपने शरीरका एक ही आकार बना सकता है सो वह भी अत्यन्त विकृत, घृणाका स्थान और कुरूप आकार बनाता है, देवोंके समान मनचाहे अनेक रूप बनानेकी सामर्थ्य नारकी जीवोंमें नहीं होती ॥एक सौ दो ।। पर्याप्त होते ही उन्हें विभंगावधि ज्ञान प्राप्त हो जाता है जिससे वे पूर्वभवके वैरांका स्मरण कर लेते हैं और उन्हें प्रकट भी करने लगते हैं ।। एक सौ तीन ॥ जो जीव पूर्वजन्ममें पाप करने में बहुत ही पण्डित थे, जो खोटे वचन कहनेनें चतुर थे और दुराचारी थे यह उन्हींके दुष्कर्म का फल है ॥ एक सौ चार ॥ हे देव वह शतबुद्धि मन्त्रीका जीव अपने पापकर्म के उदयसे ऊपर कहे अनुसार द्वितीय नरक सम्बन्धी बड़े बड़े दुःखांको प्रात हुआ है । एक सौ पाँच ।। इसलिये जो जीव ऊपर कहे हुए नरकोंके तो दुःख नहीं चाहते उन बुद्धिमान पुरुषोंको इस जिनेन्द्रप्रणीत धर्मकी उपासना करना चाहिये ।। एक सौ छः ।। यहा जैन धर्म हा दुःखांस रक्षा करता है, यही धर्म मुख विस्तृत करता है, और यहीं धर्म कर्मोंके दायमे उत्पन्न होने वाले मोक्षसुखको देता है ॥ एक सौ सात ॥ इस जैन धर्मसे इन्द्र चक्रवर्ती और गणधरके पद प्राप्त होते हैं। तीर्थकर पढ़ भी इसी धर्म प्राप्त होता है और सर्वोत्कृष्ट सिद्ध पद भी इसीसे मिलता है ।।एक सौ आठ ॥ यह जैन धम ही जीवांका बन्धु है, यही मित्र है और यही गुरु है, इसलिये है देव, स्वर्ग और मोक्षके सुख देनेवाले इस जैनधर्म में ही तूं अपनी बुद्धि लगा ॥ एक सौ छः ।। उस समय प्रीतिकर जिनेन्द्र के ऊपर कहे वचन सुनकर पवित्र बुद्धिका धारक श्रीधरदेव अतिशय धर्मप्रेमको प्राप्त हुआ ।। एक सौ दस ॥ और गुरुके आज्ञानुसार दूसरे नरक में जाकर शतबुद्धिको समझाने लगा कि है भले मृख शतबुद्धि, क्या तू मुझ महाबलको जानता है ? ॥ एक सौ ग्यारह ॥ उस भवमें अनेक मिथ्यानयोक आश्रयसे तेरा मिथ्यात्व बहुत ही प्रबल हो रहा था। देख, उसी मिथ्यात्वका यह दुःख दनवाला फल तेरे सामने है ।। एक सौ बारह ।। इस प्रकार श्रीधरदेवके द्वारा समझाये हुए शतबुद्धि के जीवन शुद्ध सम्यग्दर्शन धारण किया और मिथ्यात्वरूपी मैलके नष्ट हो जानेसे उत्कृष्ट विशुद्धि प्राप्त की ॥एक सौ तेरह॥ तत्पश्चात् एक ततः कारणात् । नरकमेन्य । सात भद्रश्रेष्ठ । दो विरूप दुर्व। तीन उद्धादयन्ति । चार दुर्वचनाः । पाँच। छः द्वितीयभद्र मुग्ध श्रशून्य, पशून्य सशून्य आठ उत्कटम् । छः दुःखायमानः ।
का उत्पत्ति स्थान, आधार और जो कुछ उत्पन्न हुआ था, है और होगा उसका स्वामी था, है और होगा, वह पृथिवी से लेके सूर्य्यलोक पर्यन्त सृष्टि को बना के धारण कर रहा है। उस सुखस्वरूप परमात्मा ही की भक्ति जैसे हम करें, वैसे तुम लोग भी करो । ईश्वर व्यापक है वा किसी देशविशेष में रहता है ? (उत्तर) व्यापक है, क्योंकि जो एक देश में रहता तो सर्वान्तर्यामी, सर्वज्ञ, सर्वनियन्ता, सब का स्रष्टा, सब का धर्ता और प्रलयकर्त्ता नहीं हो सकता । ● ( प्रश्न ) परमेश्वर दयालु और न्यायकारी है वा नहीं ? ( उत्तर ) - है । जो न्याय से प्रयोजन सिद्ध होता है वही दया से । दण्ड देने का प्रयोजन है कि मनुष्य अपराध करने से बन्ध होकर दुःखों को प्राप्त न हों, वही दया कहाती है जो पराये दुःखों का छुड़ाना । • ( प्रश्न ) ईश्वर साकार है वा निराकार ! (उत्तर) निराकार, क्योंकि जो साकार होता तो व्यापक नहीं हो सकता। जब व्यापक न होता हो सर्वज्ञादि गुण भी ईश्वर में न घट सकते क्योंकि परिमित वस्तु में गुण, कर्म, स्वभाव भी परिमित रहते हैं तथा शीतोष्ण, क्षुधा, तृषा और रोग, दोष, छेदन, भेदन आदि से रहित नहीं हो सकता। इससे यही निश्चित है कि ईश्वर निराकार है । जो साकर हो तो उसके नाक, कान, आँख आदि अवयवों का बनानेहारा दूसरा होना चाहिये। जो कोई यहाँ ऐसा कहे कि ईश्वर ने स्वेच्छा से आप ही आप अपना शरीर बना लिया तो भी वही सिद्ध हुआ कि शरीर बनने के पूर्व निराकार था । • ( प्रश्न ) ईश्वर सर्व शक्तिमान् है वा नहीं ? (उत्तर) है, परन्तु जैसा तुम शक्तिमान् शब्द का अर्थ जानते हो वैसा नहीं । किन्तु सर्वशक्तिमान् शब्द का यही अर्थ है कि ईश्वर अपने काम अर्थात् उत्पत्ति, पालन, प्रलय आदि और सब जीवों के पुण्य-पाप की यथायोग्य व्यवस्था करने में किञ्चित् भी किसी की सहायता नहीं लेता अर्थात् अपने अनन्त सामर्थ्य से ही सब अपना काम पूर्ण कर लेता है।
का उत्पत्ति स्थान, आधार और जो कुछ उत्पन्न हुआ था, है और होगा उसका स्वामी था, है और होगा, वह पृथिवी से लेके सूर्य्यलोक पर्यन्त सृष्टि को बना के धारण कर रहा है। उस सुखस्वरूप परमात्मा ही की भक्ति जैसे हम करें, वैसे तुम लोग भी करो । ईश्वर व्यापक है वा किसी देशविशेष में रहता है ? व्यापक है, क्योंकि जो एक देश में रहता तो सर्वान्तर्यामी, सर्वज्ञ, सर्वनियन्ता, सब का स्रष्टा, सब का धर्ता और प्रलयकर्त्ता नहीं हो सकता । ● परमेश्वर दयालु और न्यायकारी है वा नहीं ? - है । जो न्याय से प्रयोजन सिद्ध होता है वही दया से । दण्ड देने का प्रयोजन है कि मनुष्य अपराध करने से बन्ध होकर दुःखों को प्राप्त न हों, वही दया कहाती है जो पराये दुःखों का छुड़ाना । • ईश्वर साकार है वा निराकार ! निराकार, क्योंकि जो साकार होता तो व्यापक नहीं हो सकता। जब व्यापक न होता हो सर्वज्ञादि गुण भी ईश्वर में न घट सकते क्योंकि परिमित वस्तु में गुण, कर्म, स्वभाव भी परिमित रहते हैं तथा शीतोष्ण, क्षुधा, तृषा और रोग, दोष, छेदन, भेदन आदि से रहित नहीं हो सकता। इससे यही निश्चित है कि ईश्वर निराकार है । जो साकर हो तो उसके नाक, कान, आँख आदि अवयवों का बनानेहारा दूसरा होना चाहिये। जो कोई यहाँ ऐसा कहे कि ईश्वर ने स्वेच्छा से आप ही आप अपना शरीर बना लिया तो भी वही सिद्ध हुआ कि शरीर बनने के पूर्व निराकार था । • ईश्वर सर्व शक्तिमान् है वा नहीं ? है, परन्तु जैसा तुम शक्तिमान् शब्द का अर्थ जानते हो वैसा नहीं । किन्तु सर्वशक्तिमान् शब्द का यही अर्थ है कि ईश्वर अपने काम अर्थात् उत्पत्ति, पालन, प्रलय आदि और सब जीवों के पुण्य-पाप की यथायोग्य व्यवस्था करने में किञ्चित् भी किसी की सहायता नहीं लेता अर्थात् अपने अनन्त सामर्थ्य से ही सब अपना काम पूर्ण कर लेता है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। केप ऑफ गुड होप (पुर्तगालीः Cabo da Boa Esperança) अथवा उत्तमाशा अंतरीप अफ्रीका के सुदूर दक्षिणी कोने पर एक स्थान है। यह क्षेत्र इसलिए जाना जाता है क्योंकि यहाँ से बहुत से जहाज़ पूर्व की ओर अटलांटिक महासागर से हिन्द महासागर में जाते हैं। यह स्थान दक्षिण अफ्रीका में है। इस स्थान का एतिहासिक महत्व भी है। इस स्थान तक पहुँचने वाला सर्वप्रथम यूरोपीय व्यक्ति था पुर्तगाल का बारटोलोमीयु डियास। उसने इस स्थान को १४८८ में देखा और इसका नाम "केप ऑफ़ स्टॉर्मस" (तूफ़ानों का केप) (पुर्तगालीः Cabo das Tormentas) रखा। इसी स्थान से होकर पुर्तगाली अन्वेषक वास्को द गामा भारत पहुँचा था। . चील नॅब्युला का वह भाग जिसे "सृजन के स्तम्भ" कहा जाता है क्योंकि यहाँ बहुत से तारे जन्म ले रहे हैं। त्रिकोणीय उत्सर्जन गैरेन नीहारिका (द ट्रेंगुलम एमीशन गैरन नॅब्युला) "NGC 604" नासा द्वारा जारी क्रैब नॅब्युला (कर्कट नीहारिका) वीडियो निहारिका या नॅब्युला अंतरतारकीय माध्यम (इन्टरस्टॅलर स्पेस) में स्थित ऐसे अंतरतारकीय बादल को कहते हैं जिसमें धूल, हाइड्रोजन गैस, हीलियम गैस और अन्य आयनीकृत (आयोनाइज़्ड) प्लाज़्मा गैसे उपस्थित हों। पुराने जमाने में "निहारिका" खगोल में दिखने वाली किसी भी विस्तृत वस्तु को कहते थे। आकाशगंगा (हमारी गैलेक्सी) से परे कि किसी भी गैलेक्सी को नीहारिका ही कहा जाता था। बाद में जब एडविन हबल के अनुसन्धान से यह ज्ञात हुआ कि यह गैलेक्सियाँ हैं, तो नाम बदल दिए गए। उदाहरण के लिए एंड्रोमेडा गैलेक्सी (देवयानी मन्दाकिनी) को पहले एण्ड्रोमेडा नॅब्युला के नाम से जाना जाता था। नीहारिकाओं में अक्सर तारे और ग्रहीय मण्डल जन्म लेते हैं, जैसे कि चील नीहारिका में देखा गया है। यह नीहारिका नासा द्वारा खींचे गए "पिलर्स ऑफ़ क्रियेशन" अर्थात् "सृष्टि के स्तम्भ" नामक अति-प्रसिद्ध चित्र में दर्शाई गई है। इन क्षेत्रों में गैस, धूल और अन्य सामग्री की संरचनाएं परस्पर "एक साथ जुड़कर" बड़े ढेरों की रचना करती हैं, जो अन्य पदार्थों को आकर्षित करता है एवं क्रमशः सितारों का गठन करने योग्य पर्याप्त बड़ा आकार ले लेता हैं। माना जाता है कि शेष सामग्री ग्रहों एवं ग्रह प्रणाली की अन्य वस्तुओं का गठन करती है। . केप ऑफ़ गुड होप और निहारिका आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। केप ऑफ़ गुड होप 8 संबंध है और निहारिका 51 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (8 + 51)। यह लेख केप ऑफ़ गुड होप और निहारिका के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। केप ऑफ गुड होप अथवा उत्तमाशा अंतरीप अफ्रीका के सुदूर दक्षिणी कोने पर एक स्थान है। यह क्षेत्र इसलिए जाना जाता है क्योंकि यहाँ से बहुत से जहाज़ पूर्व की ओर अटलांटिक महासागर से हिन्द महासागर में जाते हैं। यह स्थान दक्षिण अफ्रीका में है। इस स्थान का एतिहासिक महत्व भी है। इस स्थान तक पहुँचने वाला सर्वप्रथम यूरोपीय व्यक्ति था पुर्तगाल का बारटोलोमीयु डियास। उसने इस स्थान को एक हज़ार चार सौ अठासी में देखा और इसका नाम "केप ऑफ़ स्टॉर्मस" रखा। इसी स्थान से होकर पुर्तगाली अन्वेषक वास्को द गामा भारत पहुँचा था। . चील नॅब्युला का वह भाग जिसे "सृजन के स्तम्भ" कहा जाता है क्योंकि यहाँ बहुत से तारे जन्म ले रहे हैं। त्रिकोणीय उत्सर्जन गैरेन नीहारिका "NGC छः सौ चार" नासा द्वारा जारी क्रैब नॅब्युला वीडियो निहारिका या नॅब्युला अंतरतारकीय माध्यम में स्थित ऐसे अंतरतारकीय बादल को कहते हैं जिसमें धूल, हाइड्रोजन गैस, हीलियम गैस और अन्य आयनीकृत प्लाज़्मा गैसे उपस्थित हों। पुराने जमाने में "निहारिका" खगोल में दिखने वाली किसी भी विस्तृत वस्तु को कहते थे। आकाशगंगा से परे कि किसी भी गैलेक्सी को नीहारिका ही कहा जाता था। बाद में जब एडविन हबल के अनुसन्धान से यह ज्ञात हुआ कि यह गैलेक्सियाँ हैं, तो नाम बदल दिए गए। उदाहरण के लिए एंड्रोमेडा गैलेक्सी को पहले एण्ड्रोमेडा नॅब्युला के नाम से जाना जाता था। नीहारिकाओं में अक्सर तारे और ग्रहीय मण्डल जन्म लेते हैं, जैसे कि चील नीहारिका में देखा गया है। यह नीहारिका नासा द्वारा खींचे गए "पिलर्स ऑफ़ क्रियेशन" अर्थात् "सृष्टि के स्तम्भ" नामक अति-प्रसिद्ध चित्र में दर्शाई गई है। इन क्षेत्रों में गैस, धूल और अन्य सामग्री की संरचनाएं परस्पर "एक साथ जुड़कर" बड़े ढेरों की रचना करती हैं, जो अन्य पदार्थों को आकर्षित करता है एवं क्रमशः सितारों का गठन करने योग्य पर्याप्त बड़ा आकार ले लेता हैं। माना जाता है कि शेष सामग्री ग्रहों एवं ग्रह प्रणाली की अन्य वस्तुओं का गठन करती है। . केप ऑफ़ गुड होप और निहारिका आम में शून्य बातें हैं । केप ऑफ़ गुड होप आठ संबंध है और निहारिका इक्यावन है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख केप ऑफ़ गुड होप और निहारिका के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
सकलडीहा (चंदौली)। कोरोना महामारी के दूसरी लहर में दूसरी बार कस्बा के डा. अाम्बेडकर नगर में स्थापित डा. आम्बेडकर की प्रतिमा पर शनिवार की देर रात शरारती तत्वों ने गोबर फेंक दिया। रविवार की सुबह ग्रामीणों ने प्रतिमा की हालत देख बौखला गये। पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब एक घंटे तक विरोध जताया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने प्रतिमा को साफ कराकर ग्रामीणों को शंात कराया। इस दौरान ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश महासचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रमेश राम के नेतृत्व में अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दिया। तहरीर लेकर कोतवाली पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। कस्बे के डा. आंबेडकर नगर में ग्रामीणों ने संत रविदास मंदिर के समीप डा. आम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित किया है। पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान शरारती तत्वों ने प्रमिता को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास करते हुए कालिख पोत दिया था। जिसके बाद ग्रामीण आग बबूला हो गये थे। तत्कालीन इंस्पेक्टर की सूझबूझ से ग्रामीण शांत हुए। पुनः शनिवार की देर रात शरारती तत्वों ने प्रतिमा पर गोबर फेंक दिया। सुबह होते ही जंगल में आग की तरह बात फैल गयी। प्रतिमा के समीप दर्जनों की संख्या में ग्रामीण ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजेश सेठ के नेतृत्व में जुटकर विरोध जताने लगे। मौके पर पहुंचे कस्बा प्रभारी ने प्रतिमा को साफ कराकर ग्रामीणों को शांत कराया। अंत में ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश महासचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रमेश राम के नेतृत्व में कोतवाली पहुंचकर अज्ञात के खिलाफ तहरीर दिया। प्रतिमा स्थल पर रात में पुलिस की ड्यूटी लगाने सहित शरारती तत्वों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग किया। कोतवाल अवनीश कुमार राय ने तहरीर लेकर कार्रवाई में जुट गये। इस मौके पर राजनाथ, नंदन सोनी, विजय शाहनी, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजेश सेठ, गणेश राजभर आदि मौजूद रहे।
सकलडीहा । कोरोना महामारी के दूसरी लहर में दूसरी बार कस्बा के डा. अाम्बेडकर नगर में स्थापित डा. आम्बेडकर की प्रतिमा पर शनिवार की देर रात शरारती तत्वों ने गोबर फेंक दिया। रविवार की सुबह ग्रामीणों ने प्रतिमा की हालत देख बौखला गये। पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब एक घंटे तक विरोध जताया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने प्रतिमा को साफ कराकर ग्रामीणों को शंात कराया। इस दौरान ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश महासचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रमेश राम के नेतृत्व में अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दिया। तहरीर लेकर कोतवाली पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। कस्बे के डा. आंबेडकर नगर में ग्रामीणों ने संत रविदास मंदिर के समीप डा. आम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित किया है। पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान शरारती तत्वों ने प्रमिता को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास करते हुए कालिख पोत दिया था। जिसके बाद ग्रामीण आग बबूला हो गये थे। तत्कालीन इंस्पेक्टर की सूझबूझ से ग्रामीण शांत हुए। पुनः शनिवार की देर रात शरारती तत्वों ने प्रतिमा पर गोबर फेंक दिया। सुबह होते ही जंगल में आग की तरह बात फैल गयी। प्रतिमा के समीप दर्जनों की संख्या में ग्रामीण ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजेश सेठ के नेतृत्व में जुटकर विरोध जताने लगे। मौके पर पहुंचे कस्बा प्रभारी ने प्रतिमा को साफ कराकर ग्रामीणों को शांत कराया। अंत में ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश महासचिव देवेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रमेश राम के नेतृत्व में कोतवाली पहुंचकर अज्ञात के खिलाफ तहरीर दिया। प्रतिमा स्थल पर रात में पुलिस की ड्यूटी लगाने सहित शरारती तत्वों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की मांग किया। कोतवाल अवनीश कुमार राय ने तहरीर लेकर कार्रवाई में जुट गये। इस मौके पर राजनाथ, नंदन सोनी, विजय शाहनी, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजेश सेठ, गणेश राजभर आदि मौजूद रहे।
क्या आपने वीडियो देखा है जिसमें इवान ओकलाहोस्टिन "मकई" के क्रेडिट कार्ड का विज्ञापन करता है? तो यह कार्ड क्या है? कहां प्राप्त करें, कैसे जारी करें और "मकई" के मानचित्र को कैसे भरें? "मकई" का नक्शा कहां और कैसे प्राप्त करें? कड़ाई से बोलते हुए, वाणिज्यिक में दिया जाता हैइस सवाल का जवाब। आप "यूरोसेट" नेटवर्क के नेटवर्क के किसी भी सैलून में कार्ड जारी कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको केवल उम्र की आवश्यकता है और पासपोर्ट के साथ सैलून में आना चाहिए। कार्ड तीन हजार रूबल की राशि में एक खरीद बनाने के लिए आवश्यक प्राप्त करने के लिए, अब सिर्फ अपनी इच्छा परामर्शदाता ozvuchte एक बार से पहले, खाते में $ 100 की एक न्यूनतम है, और पांच से दस मिनट के लिए कार्ड "मकई" के भीतर - Euroset अपनी जेब में झूठ होगा । स्वाभाविक रूप से, आप पूरी तरह से पैसे का निपटान कर सकते हैं। परामर्शदाता आपको बताएगा कि "मकई" कार्ड को बड़ी मात्रा में कैसे भरना है। आप अपना खुद का धन बना सकते हैंएक कार्ड पर और अपने विवेकाधिकार पर उनका निपटान, या आप क्रेडिट सीमा तैयार कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको यूरोसेट सैलून के कर्मचारी से संपर्क करने की आवश्यकता है, क्रेडिट लाइन खोलने के लिए आवेदन भरें और बैंक की प्रतिक्रिया का इंतजार करें। सकारात्मक निर्णय के मामले में, पैसा तुरंत कार्ड पर जाएगा। "क्यों" मकई "?" - आप पूछ सकते हैं। इस बैंक कार्ड में दूसरों पर कई निस्संदेह फायदे हैं। उनमें से एक यह है कि कार्ड जारी और बनाए रखा जाता है। "मकई" भुगतान प्रणाली मास्टर का एक कार्ड हैकार्ड, इसकी मदद से आप न केवल सामान्य दुकानों में, बल्कि इंटरनेट पर भी खरीद के लिए भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा, कार्ड पेपैल से जोड़ा जा सकता है, और फिर आप अमेरिकी और पश्चिमी यूरोपीय ऑनलाइन स्टोरों के लिए उपलब्ध होंगे, आप विक्रेता या खरीदार ऑन-लाइन नीलामी ईबे बन सकते हैं। किसी अन्य बैंक में ऐसे कार्ड के वार्षिक रखरखाव के लिए आपको लगभग 700-800 रूबल खर्च होंगे। इसके अलावा, निशुल्क, आपको अपने मोबाइल फोन पर कार्ड के साथ किए गए सभी कार्यों के बारे में एसएमएस संदेश प्राप्त होंगे। एक और प्लस कार्ड की वैधता है, यह बहुत लंबा है, आपको 2019 में "मकई" को पहले से ही बदलना होगा। जब आप अपने व्यक्तिगत खाते में प्रवेश करते हैं, तबआप देखेंगे कि "कॉर्न" की मदद से आप अपने मोबाइल फोन खाते की भरपाई कर सकते हैं, इंटरनेट और यूटिलिटी बिलों का भुगतान कर सकते हैं, TNK स्टेशनों पर भुगतान कर सकते हैं और पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। मकई भी एक बोनस कार्ड है। इसका मतलब है कि सभी खरीद और भुगतान के लिए आपको बोनस अंक प्रदान किए जाएंगे। आमतौर पर यह खर्च की गई राशि का 1% होता है, लेकिन कुछ भागीदार स्टोर अधिक अंक लेते हैं। कार्ड "कॉर्न" को फिर से कैसे भरें? बिना कमीशन के ऐसा करने के दो मुख्य तरीके हैंः - आपको कार्ड "कॉर्न" के साथ सैलून "यूरोसेट" पर आने की जरूरत है और एक सलाहकार के माध्यम से पासपोर्ट और धन जमा करना होगा, स्थानांतरण तुरंत होगा;
क्या आपने वीडियो देखा है जिसमें इवान ओकलाहोस्टिन "मकई" के क्रेडिट कार्ड का विज्ञापन करता है? तो यह कार्ड क्या है? कहां प्राप्त करें, कैसे जारी करें और "मकई" के मानचित्र को कैसे भरें? "मकई" का नक्शा कहां और कैसे प्राप्त करें? कड़ाई से बोलते हुए, वाणिज्यिक में दिया जाता हैइस सवाल का जवाब। आप "यूरोसेट" नेटवर्क के नेटवर्क के किसी भी सैलून में कार्ड जारी कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको केवल उम्र की आवश्यकता है और पासपोर्ट के साथ सैलून में आना चाहिए। कार्ड तीन हजार रूबल की राशि में एक खरीद बनाने के लिए आवश्यक प्राप्त करने के लिए, अब सिर्फ अपनी इच्छा परामर्शदाता ozvuchte एक बार से पहले, खाते में एक सौ डॉलर की एक न्यूनतम है, और पांच से दस मिनट के लिए कार्ड "मकई" के भीतर - Euroset अपनी जेब में झूठ होगा । स्वाभाविक रूप से, आप पूरी तरह से पैसे का निपटान कर सकते हैं। परामर्शदाता आपको बताएगा कि "मकई" कार्ड को बड़ी मात्रा में कैसे भरना है। आप अपना खुद का धन बना सकते हैंएक कार्ड पर और अपने विवेकाधिकार पर उनका निपटान, या आप क्रेडिट सीमा तैयार कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको यूरोसेट सैलून के कर्मचारी से संपर्क करने की आवश्यकता है, क्रेडिट लाइन खोलने के लिए आवेदन भरें और बैंक की प्रतिक्रिया का इंतजार करें। सकारात्मक निर्णय के मामले में, पैसा तुरंत कार्ड पर जाएगा। "क्यों" मकई "?" - आप पूछ सकते हैं। इस बैंक कार्ड में दूसरों पर कई निस्संदेह फायदे हैं। उनमें से एक यह है कि कार्ड जारी और बनाए रखा जाता है। "मकई" भुगतान प्रणाली मास्टर का एक कार्ड हैकार्ड, इसकी मदद से आप न केवल सामान्य दुकानों में, बल्कि इंटरनेट पर भी खरीद के लिए भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा, कार्ड पेपैल से जोड़ा जा सकता है, और फिर आप अमेरिकी और पश्चिमी यूरोपीय ऑनलाइन स्टोरों के लिए उपलब्ध होंगे, आप विक्रेता या खरीदार ऑन-लाइन नीलामी ईबे बन सकते हैं। किसी अन्य बैंक में ऐसे कार्ड के वार्षिक रखरखाव के लिए आपको लगभग सात सौ-आठ सौ रूबल खर्च होंगे। इसके अलावा, निशुल्क, आपको अपने मोबाइल फोन पर कार्ड के साथ किए गए सभी कार्यों के बारे में एसएमएस संदेश प्राप्त होंगे। एक और प्लस कार्ड की वैधता है, यह बहुत लंबा है, आपको दो हज़ार उन्नीस में "मकई" को पहले से ही बदलना होगा। जब आप अपने व्यक्तिगत खाते में प्रवेश करते हैं, तबआप देखेंगे कि "कॉर्न" की मदद से आप अपने मोबाइल फोन खाते की भरपाई कर सकते हैं, इंटरनेट और यूटिलिटी बिलों का भुगतान कर सकते हैं, TNK स्टेशनों पर भुगतान कर सकते हैं और पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। मकई भी एक बोनस कार्ड है। इसका मतलब है कि सभी खरीद और भुगतान के लिए आपको बोनस अंक प्रदान किए जाएंगे। आमतौर पर यह खर्च की गई राशि का एक% होता है, लेकिन कुछ भागीदार स्टोर अधिक अंक लेते हैं। कार्ड "कॉर्न" को फिर से कैसे भरें? बिना कमीशन के ऐसा करने के दो मुख्य तरीके हैंः - आपको कार्ड "कॉर्न" के साथ सैलून "यूरोसेट" पर आने की जरूरत है और एक सलाहकार के माध्यम से पासपोर्ट और धन जमा करना होगा, स्थानांतरण तुरंत होगा;
चीन के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से आज 14 उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया। शांक्सी प्रांत के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से सुबह 11.14:2 बजे किलू-3 और किलू-14 सहित कुल XNUMX उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया। लॉन्ग मार्च-2डी वाहक रॉकेट के साथ लॉन्च किए गए उपग्रह सफलतापूर्वक अपनी निर्दिष्ट कक्षाओं में उतरे। अंतिम प्रक्षेपण मालवाहक रॉकेटों की लॉन्ग मार्च श्रृंखला का 462वां मिशन था।
चीन के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से आज चौदह उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया। शांक्सी प्रांत के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से सुबह ग्यारह.चौदह:दो बजे किलू-तीन और किलू-चौदह सहित कुल XNUMX उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया। लॉन्ग मार्च-दोडी वाहक रॉकेट के साथ लॉन्च किए गए उपग्रह सफलतापूर्वक अपनी निर्दिष्ट कक्षाओं में उतरे। अंतिम प्रक्षेपण मालवाहक रॉकेटों की लॉन्ग मार्च श्रृंखला का चार सौ बासठवां मिशन था।
आतंकी संगठन ने अक्टूबर में आगामी दशहरा उत्सव के दौरान छह राज्यों में कम से कम 11 रेलवे स्टेशनों और छह मंदिरों को निशाना बनाने की धमकी दी है। आतंकवादी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने सुरक्षा एजेंसियों को धमकी भरा पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने छह राज्यों के रेलवे स्टेशनों और मंदिरों को उड़ाने की धमकी दी है। यह पत्र रोहतक रेलवे स्टेशन प्रबंधन को भेजा गया। पत्र में रेवाड़ी सहित प्रदेश के कई एक रेलवे स्टेशनों को दशहरे के दौरान उड़ाने की धमकी दी गई है। पत्र के अनुसार, आतंकी संगठन ने अक्टूबर में आगामी दशहरा उत्सव के दौरान छह राज्यों में कम से कम 11 रेलवे स्टेशनों और छह मंदिरों को निशाना बनाने की धमकी दी है। आतंकियों ने रेवाड़ी के अलावा रोहतक, हिसार, कुरुक्षेत्र, मुंबई सिटी, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर, भोपाल, कोटा और इटारसी में रेलवे स्टेशन और राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, एमपी, यूपी और हरियाणा में मंदिरों को उड़ाने के लिए पत्र लिखा। पत्र में कहा गया है, 'हम जेहादी हजारों की संख्या में हिंदुस्तान को तबाह कर देंगे। चारों ओर खून ही खून नजर आएगा। खुदा हाफिज। ' आतंकी संगठन ने हरियाणा में रेवाड़ी रेलवे स्टेशन को 8 अक्टूबर तक निशाना बनाने की धमकी दी है। यह पत्र रोहतक जंक्शन स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय में शनिवार को दोपहर 3 बजे के आसपास साधारण डाक से मिला था। पत्र में पाकिस्तान के कराची से कथित तौर पर एक मसूद अहमद का नाम है। वहीं, इस मामले को लेकर हरियाणा पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद द्वारा कथित रूप से जारी किए गए एक धमकी पत्र की पुष्टि की है और मामले की जांच शुरू की है, जिसके बाद रेवाड़ी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास व अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर खतरे के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
आतंकी संगठन ने अक्टूबर में आगामी दशहरा उत्सव के दौरान छह राज्यों में कम से कम ग्यारह रेलवे स्टेशनों और छह मंदिरों को निशाना बनाने की धमकी दी है। आतंकवादी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने सुरक्षा एजेंसियों को धमकी भरा पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने छह राज्यों के रेलवे स्टेशनों और मंदिरों को उड़ाने की धमकी दी है। यह पत्र रोहतक रेलवे स्टेशन प्रबंधन को भेजा गया। पत्र में रेवाड़ी सहित प्रदेश के कई एक रेलवे स्टेशनों को दशहरे के दौरान उड़ाने की धमकी दी गई है। पत्र के अनुसार, आतंकी संगठन ने अक्टूबर में आगामी दशहरा उत्सव के दौरान छह राज्यों में कम से कम ग्यारह रेलवे स्टेशनों और छह मंदिरों को निशाना बनाने की धमकी दी है। आतंकियों ने रेवाड़ी के अलावा रोहतक, हिसार, कुरुक्षेत्र, मुंबई सिटी, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर, भोपाल, कोटा और इटारसी में रेलवे स्टेशन और राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, एमपी, यूपी और हरियाणा में मंदिरों को उड़ाने के लिए पत्र लिखा। पत्र में कहा गया है, 'हम जेहादी हजारों की संख्या में हिंदुस्तान को तबाह कर देंगे। चारों ओर खून ही खून नजर आएगा। खुदा हाफिज। ' आतंकी संगठन ने हरियाणा में रेवाड़ी रेलवे स्टेशन को आठ अक्टूबर तक निशाना बनाने की धमकी दी है। यह पत्र रोहतक जंक्शन स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय में शनिवार को दोपहर तीन बजे के आसपास साधारण डाक से मिला था। पत्र में पाकिस्तान के कराची से कथित तौर पर एक मसूद अहमद का नाम है। वहीं, इस मामले को लेकर हरियाणा पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद द्वारा कथित रूप से जारी किए गए एक धमकी पत्र की पुष्टि की है और मामले की जांच शुरू की है, जिसके बाद रेवाड़ी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास व अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर खतरे के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
कई लोग बीमारियों के लिए वैकल्पिक उपचार का उपयोग करते हैं - एलर्जी सहित। लेकिन अब तक इस तरह के उपचार विधियों की प्रभावशीलता का प्रमाण विफल रहा है। इसलिए, वर्तमान में केवल कुछ प्रक्रियाओं की सिफारिश की जाती है। - आराम विधियों और एक्यूपंक्चर एलर्जी के साथ मदद कर सकते हैं। घास बुखार जैसी एलर्जी के लिए वैकल्पिक दृष्टिकोण? राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के मुताबिक, लगभग सभी मरीजों में से आधे अतिरिक्त या यहां तक कि विशेष रूप से तथाकथित वैकल्पिक या उपयोग करते हैं पूरक तरीकों पर। इन शर्तों में मान्यता प्राप्त प्राकृतिक उपचार से लेकर प्रसाद की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जैसे हर्बल सामग्री का उपयोग संदिग्ध प्रक्रियाओं के बिना संदिग्ध प्रक्रियाओं के लिए। वैकल्पिक दवाओं का बाजार मूल्यांकन के unmanageability के अलावा अन्य बातों के अलावा प्रभावित है, कि कुछ तरीकों पारंपरिक चिकित्सा, जो हमेशा की तरह वैज्ञानिक अध्ययन के साथ प्रभावशीलता का एक सबूत बाधा से पूरी तरह से अलग विचारों के आधार पर कर रहे हैं। - एटोपिक डार्माटाइटिसः एटोपिक डार्माटाइटिस के खिलाफ क्या मदद करता है? कार्य समूह पूरक एलर्जी और क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी वर्तमान ज्ञान के अनुसार माना जाता है की जर्मन सोसाइटी की चिकित्सा के तरीकों आमतौर पर एलर्जी के में इस्तेमाल की कुछ वर्तमान में समझ में आता है - लेकिन यह केवल यदि वैकल्पिक पद्धति के बजाय नहीं है, लेकिन अतिरिक्त अनुशंसित पारंपरिक चिकित्सा उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। तो श्वसन और डाल दें फिजियोथेरेपी श्वसन रोगों के लिए प्रभावी तकनीकें, लेकिन एलर्जी से राहत न दें। भी घुटने की प्रक्रिया और स्नान चिकित्सा सौना या ठंडे शॉवर आवृत्ति और ऊपरी श्वास नलिका के संक्रमण की गंभीरता को कम करके इसके सकारात्मक प्रभाव में श्वसन रोगों को प्राप्त। जैकबसेन प्रगतिशील मांसपेशियों में छूट या ऑटोोजेनिक प्रशिक्षण जैसे आराम विधियां एटॉलिक डार्माटाइटिस या अस्थमा वाले बच्चों में सहायक हो सकती हैं। विशेष एलर्जी के लिएआहार यह व्यक्तिगत मामले पर बहुत निर्भर करता है। खाद्य एलर्जी में, एलर्जन से बचने और इस तरह एक इसी आहार आहार के एक केंद्रीय हिस्सा है। प्रभावकारिता का पर्याप्त प्रमाण के बिना - - कुछ मामलों में काफी एलर्जी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित और कुपोषण के जोखिम के साथ जुड़े इसके अलावा, आहार सिफारिशों कि अतर्कसंगत या यहाँ तक कि खतरनाक होते हैं क्योंकि वे के एक नंबर रहे हैं। अलग के लिए पूरक आहार ऐसे जस्ता या सेलेनियम के रूप में आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन ई, बी 2 और बी 6, मल्टीविटामिन और खनिज, के रूप में इस तरह के अध्ययन में किया गया था कोई ठोस प्रभावशीलता नहीं दिखाया गया है। एटॉलिक डार्माटाइटिस या अस्थमा से ग्रस्त बच्चों वाले परिवारों में, एलर्जी का बोझ कभी-कभी इतना बड़ा होता है कि यह बीमारी के कारण होता है व्यवहार की समस्याओं आता है। नतीजतन, प्रभावित व्यक्ति के लिए मनोचिकित्सा आवश्यक और सहायक हो सकता है। हालांकि जलवायु चिकित्सा का मूल्य आम तौर पर निर्विवाद होता है, इसकी सफलता विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे गंतव्य, प्रकाश, लवणता और देखभाल पर एलर्जी गरीबी। त्वचा के घावों के दौरान पूरी तरह से भाग लेने वालों में से 90 प्रतिशत पर दावोस, स्विट्ज़रलैंड और मृत सागर में एक चार को छह सप्ताह मनाने 1,000 से अधिक एक्जिमा रोगियों के साथ एक नैदानिक अवलोकन में चंगा। सुइयों या लेजर के साथ एक्यूपंक्चर रोगियों में दो अध्ययनों में शामिल किया गया था एलर्जीय राइनाइटिस या एलएआर लक्षणों में काफी सुधार के लिए एक शम एक्यूपंक्चर की तुलना में घास बुखार। अनुवर्ती परीक्षाओं ने दर्शाया कि यह प्रभाव अभी भी एक्यूपंक्चर उपचार के तीन वर्षों के बाद पता लगाने योग्य था, इसके अंत के कई सालों बाद भी। घर धूल पतंग एलर्जी वाले मरीजों में, प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ हस्तक्षेप का सबूत है और अस्थमा के रोगियों में कमजोर सहायक प्रभाव दिखाया गया है। आधुनिक हर्बल दवा, हर्बल सक्रिय अवयवों के साथ उपचार, अब एलर्जी के पारंपरिक चिकित्सा दवा चिकित्सा के एक स्थापित हिस्से माना जाता है। फार्मेसी की केवल विकलांगता और सुरक्षा-केवल हर्बल दवाओं का परीक्षण आज भी सिंथेटिक रूप से उत्पादित दवाओं के साथ किया जा रहा है। इसके अलावा, कई सिंथेटिक दवाएं ऐतिहासिक रूप से और औषधीय रूप से हर्बल दवाओं से ली गई हैं - जैसे अस्थमा उपचार में बीटा -2-सहानुभूति विज्ञान। एलर्जी में, हर्बल तैयारियां विशेष रूप से एटॉलिक डार्माटाइटिस में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।इनमें टैनिन, कैमोमाइल अर्क और सेंट जॉन के वॉर्ट ऑयल शामिल हैं, जो इसी तरह की तैयारी में त्वचा पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
कई लोग बीमारियों के लिए वैकल्पिक उपचार का उपयोग करते हैं - एलर्जी सहित। लेकिन अब तक इस तरह के उपचार विधियों की प्रभावशीलता का प्रमाण विफल रहा है। इसलिए, वर्तमान में केवल कुछ प्रक्रियाओं की सिफारिश की जाती है। - आराम विधियों और एक्यूपंक्चर एलर्जी के साथ मदद कर सकते हैं। घास बुखार जैसी एलर्जी के लिए वैकल्पिक दृष्टिकोण? राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के मुताबिक, लगभग सभी मरीजों में से आधे अतिरिक्त या यहां तक कि विशेष रूप से तथाकथित वैकल्पिक या उपयोग करते हैं पूरक तरीकों पर। इन शर्तों में मान्यता प्राप्त प्राकृतिक उपचार से लेकर प्रसाद की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जैसे हर्बल सामग्री का उपयोग संदिग्ध प्रक्रियाओं के बिना संदिग्ध प्रक्रियाओं के लिए। वैकल्पिक दवाओं का बाजार मूल्यांकन के unmanageability के अलावा अन्य बातों के अलावा प्रभावित है, कि कुछ तरीकों पारंपरिक चिकित्सा, जो हमेशा की तरह वैज्ञानिक अध्ययन के साथ प्रभावशीलता का एक सबूत बाधा से पूरी तरह से अलग विचारों के आधार पर कर रहे हैं। - एटोपिक डार्माटाइटिसः एटोपिक डार्माटाइटिस के खिलाफ क्या मदद करता है? कार्य समूह पूरक एलर्जी और क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी वर्तमान ज्ञान के अनुसार माना जाता है की जर्मन सोसाइटी की चिकित्सा के तरीकों आमतौर पर एलर्जी के में इस्तेमाल की कुछ वर्तमान में समझ में आता है - लेकिन यह केवल यदि वैकल्पिक पद्धति के बजाय नहीं है, लेकिन अतिरिक्त अनुशंसित पारंपरिक चिकित्सा उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। तो श्वसन और डाल दें फिजियोथेरेपी श्वसन रोगों के लिए प्रभावी तकनीकें, लेकिन एलर्जी से राहत न दें। भी घुटने की प्रक्रिया और स्नान चिकित्सा सौना या ठंडे शॉवर आवृत्ति और ऊपरी श्वास नलिका के संक्रमण की गंभीरता को कम करके इसके सकारात्मक प्रभाव में श्वसन रोगों को प्राप्त। जैकबसेन प्रगतिशील मांसपेशियों में छूट या ऑटोोजेनिक प्रशिक्षण जैसे आराम विधियां एटॉलिक डार्माटाइटिस या अस्थमा वाले बच्चों में सहायक हो सकती हैं। विशेष एलर्जी के लिएआहार यह व्यक्तिगत मामले पर बहुत निर्भर करता है। खाद्य एलर्जी में, एलर्जन से बचने और इस तरह एक इसी आहार आहार के एक केंद्रीय हिस्सा है। प्रभावकारिता का पर्याप्त प्रमाण के बिना - - कुछ मामलों में काफी एलर्जी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित और कुपोषण के जोखिम के साथ जुड़े इसके अलावा, आहार सिफारिशों कि अतर्कसंगत या यहाँ तक कि खतरनाक होते हैं क्योंकि वे के एक नंबर रहे हैं। अलग के लिए पूरक आहार ऐसे जस्ता या सेलेनियम के रूप में आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन ई, बी दो और बी छः, मल्टीविटामिन और खनिज, के रूप में इस तरह के अध्ययन में किया गया था कोई ठोस प्रभावशीलता नहीं दिखाया गया है। एटॉलिक डार्माटाइटिस या अस्थमा से ग्रस्त बच्चों वाले परिवारों में, एलर्जी का बोझ कभी-कभी इतना बड़ा होता है कि यह बीमारी के कारण होता है व्यवहार की समस्याओं आता है। नतीजतन, प्रभावित व्यक्ति के लिए मनोचिकित्सा आवश्यक और सहायक हो सकता है। हालांकि जलवायु चिकित्सा का मूल्य आम तौर पर निर्विवाद होता है, इसकी सफलता विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे गंतव्य, प्रकाश, लवणता और देखभाल पर एलर्जी गरीबी। त्वचा के घावों के दौरान पूरी तरह से भाग लेने वालों में से नब्बे प्रतिशत पर दावोस, स्विट्ज़रलैंड और मृत सागर में एक चार को छह सप्ताह मनाने एक,शून्य से अधिक एक्जिमा रोगियों के साथ एक नैदानिक अवलोकन में चंगा। सुइयों या लेजर के साथ एक्यूपंक्चर रोगियों में दो अध्ययनों में शामिल किया गया था एलर्जीय राइनाइटिस या एलएआर लक्षणों में काफी सुधार के लिए एक शम एक्यूपंक्चर की तुलना में घास बुखार। अनुवर्ती परीक्षाओं ने दर्शाया कि यह प्रभाव अभी भी एक्यूपंक्चर उपचार के तीन वर्षों के बाद पता लगाने योग्य था, इसके अंत के कई सालों बाद भी। घर धूल पतंग एलर्जी वाले मरीजों में, प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ हस्तक्षेप का सबूत है और अस्थमा के रोगियों में कमजोर सहायक प्रभाव दिखाया गया है। आधुनिक हर्बल दवा, हर्बल सक्रिय अवयवों के साथ उपचार, अब एलर्जी के पारंपरिक चिकित्सा दवा चिकित्सा के एक स्थापित हिस्से माना जाता है। फार्मेसी की केवल विकलांगता और सुरक्षा-केवल हर्बल दवाओं का परीक्षण आज भी सिंथेटिक रूप से उत्पादित दवाओं के साथ किया जा रहा है। इसके अलावा, कई सिंथेटिक दवाएं ऐतिहासिक रूप से और औषधीय रूप से हर्बल दवाओं से ली गई हैं - जैसे अस्थमा उपचार में बीटा -दो-सहानुभूति विज्ञान। एलर्जी में, हर्बल तैयारियां विशेष रूप से एटॉलिक डार्माटाइटिस में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।इनमें टैनिन, कैमोमाइल अर्क और सेंट जॉन के वॉर्ट ऑयल शामिल हैं, जो इसी तरह की तैयारी में त्वचा पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
धरती का स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में 12 महीने मौसम सुहावना बना रहता है। खासतौर पर उत्तर भारत की गर्मी में यहां आने पर सुकून का अहसास होता है। कश्मीर की झीलों में शिकारा राइड, हाउस बोट में रात बिताने का एक्सपीरियंस, गोंडोला केबल राइड पर घूमने का मजा, लिडर नदी पर राफ्टिंग और खूबसूरत घाटियों पर राफ्टिंग का एडवेंचर आपको पूरी तरह से तरोताजा कर देगा। दुनियाभर में योग कैपिटल के नाम से मशहूर ऋषिकेश में गंगा नदी की निर्मल धारा को देखने और घाट पर सुकून से बैठने में मन पूरी तरह से रिलैक्स हो जाता है। कल-कल करता नदी का शोर और साथ में मंदिरों में बजती घंटियां और आरती का संगीत आपके मन का माहौल पूरी तरह से बदलकर रख देते हैं। यहां आप गर्मियों की छुट्टियां बिताने आएं तो योगा करने के साथ रिवर राफ्टिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, बाजार से शॉपिंग जैसी कई चीजों का आनंद उठा सकती हैं। उत्तराखंड के प्यारे से शहर नैनीताल को कभी अंग्रेजों ने गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए डेवलप किया था। माना जाता है कि शिव जी जब सती के मृत शरीर को ले जाते हुए यहां से गुजर रहे थे तो उसी दौरान यहां यहां सती के नेत्र गिर गए थे और इसी से प्रेरित होकर यहां नैना देवी मंदिर की स्थापना की गई थी। नैनी झील को दो हिस्सों में बांटा गया है एक है तल्ली ताल और एक है मल्ली ताल। झील में बोटिंग करते हुए आप दोनों तरफ के पहाड़ों की कुदरती खूबसूरती निहार सकती हैं। नैनी झील के पानी में ढेर सारी मछलियां तैरती नजर आती हैं। यहां रोप वे की सवारी और सन सेट देखने का भी अपना ही आनंद है। केरल का मुन्नार इलाका अंग्रेजों के समय से ही काफी पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन रहा है। यहां दूर-दूर तक फैली हरियाली देखकर आपका दिल बाग-बाग हो जाएगा। साथ ही आप यहां घुड़सवारी, साइक्लिंग जैसी फन एक्टिविटीज का मजा उठा सकते हैं। तमिलनाडु के ऊटी शहर में देशभर में लोग अपनी छुट्टियां मनाने के लिए पहुंचते हैं। यहां के बाग-बगीचे, झीलें और कुदरती खूबसूरती देखने लायक हैं। यहां ऊटी बोट हाउस में घूमना, बोटेनिकल गार्डन और रोज गार्डन की सैर करना और सेंट स्टीफेंस चर्च घूमने जाना सबसे ज्यादा पॉपुलर एक्टिविटीज मानी जाती हैं। इसके अलावा आप यहां बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का भी मजा ले सकती हैं। इन शहरों में घूमते हुए आपको ढेर सारी नए चीजें जानने और सीखने को मिलेंगी। परिवार के साथ छुट्टियां बिताते हुए आपको यहां मौजमस्ती के साथ रिलैक्स करने के लिए भी ढेर सारे मौके मिलेंगे। तो इस बार समर वैकेशन के लिए चुन लीजिए अपना शहर और घूमने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दीजिए।
धरती का स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में बारह महीने मौसम सुहावना बना रहता है। खासतौर पर उत्तर भारत की गर्मी में यहां आने पर सुकून का अहसास होता है। कश्मीर की झीलों में शिकारा राइड, हाउस बोट में रात बिताने का एक्सपीरियंस, गोंडोला केबल राइड पर घूमने का मजा, लिडर नदी पर राफ्टिंग और खूबसूरत घाटियों पर राफ्टिंग का एडवेंचर आपको पूरी तरह से तरोताजा कर देगा। दुनियाभर में योग कैपिटल के नाम से मशहूर ऋषिकेश में गंगा नदी की निर्मल धारा को देखने और घाट पर सुकून से बैठने में मन पूरी तरह से रिलैक्स हो जाता है। कल-कल करता नदी का शोर और साथ में मंदिरों में बजती घंटियां और आरती का संगीत आपके मन का माहौल पूरी तरह से बदलकर रख देते हैं। यहां आप गर्मियों की छुट्टियां बिताने आएं तो योगा करने के साथ रिवर राफ्टिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, बाजार से शॉपिंग जैसी कई चीजों का आनंद उठा सकती हैं। उत्तराखंड के प्यारे से शहर नैनीताल को कभी अंग्रेजों ने गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए डेवलप किया था। माना जाता है कि शिव जी जब सती के मृत शरीर को ले जाते हुए यहां से गुजर रहे थे तो उसी दौरान यहां यहां सती के नेत्र गिर गए थे और इसी से प्रेरित होकर यहां नैना देवी मंदिर की स्थापना की गई थी। नैनी झील को दो हिस्सों में बांटा गया है एक है तल्ली ताल और एक है मल्ली ताल। झील में बोटिंग करते हुए आप दोनों तरफ के पहाड़ों की कुदरती खूबसूरती निहार सकती हैं। नैनी झील के पानी में ढेर सारी मछलियां तैरती नजर आती हैं। यहां रोप वे की सवारी और सन सेट देखने का भी अपना ही आनंद है। केरल का मुन्नार इलाका अंग्रेजों के समय से ही काफी पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन रहा है। यहां दूर-दूर तक फैली हरियाली देखकर आपका दिल बाग-बाग हो जाएगा। साथ ही आप यहां घुड़सवारी, साइक्लिंग जैसी फन एक्टिविटीज का मजा उठा सकते हैं। तमिलनाडु के ऊटी शहर में देशभर में लोग अपनी छुट्टियां मनाने के लिए पहुंचते हैं। यहां के बाग-बगीचे, झीलें और कुदरती खूबसूरती देखने लायक हैं। यहां ऊटी बोट हाउस में घूमना, बोटेनिकल गार्डन और रोज गार्डन की सैर करना और सेंट स्टीफेंस चर्च घूमने जाना सबसे ज्यादा पॉपुलर एक्टिविटीज मानी जाती हैं। इसके अलावा आप यहां बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का भी मजा ले सकती हैं। इन शहरों में घूमते हुए आपको ढेर सारी नए चीजें जानने और सीखने को मिलेंगी। परिवार के साथ छुट्टियां बिताते हुए आपको यहां मौजमस्ती के साथ रिलैक्स करने के लिए भी ढेर सारे मौके मिलेंगे। तो इस बार समर वैकेशन के लिए चुन लीजिए अपना शहर और घूमने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दीजिए।
फिल्ममेकर का US प्रेसीडेंट ट्रंप पर हमला, किसी दिन ये बंदा हम सबको मरवाएगा! डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर माइकल मूरे ने टीवी चैनल पर मजाकिया लहजे कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप नाम का व्यक्ति हम सभी को मरवा देगा। उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप के हाथ में न्यूक्लियर वेपन्स की चाबियां हैं। ये एक सूटकेश में होता है, जो सिर्फ वही खोल सकता है। ऐसे में इस व्यक्ति के पास हम सबको मरवाने की पूरी ताकत है। मूरे ने 'द टर्म्स ऑफ माय सरेंडर' नाम के पॉलिटिकल सटायर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जमकर हमला बोला। मूरे ने कहा कि ये बंदा हम सबको मरवाएगा। कोई इसे रोकने वाला नहीं है। ट्रंप के पास न्यूक्लियर कोड हैं। मूरे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि पेंटागन में कोई हमारी रक्षा करेगा। चाहे उस ब्रीफकेस में न्यूक्लियर वेपंस के कोड हों या गर्लफ्रेंड का फोन नंबर। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि उस ब्रीफकेस में गलत नंबर हों। हम बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। मूरे उदारवादी विचारधारा के माने जाते हैं और ट्रंप की नीतियों के कड़े विरोधी। माइकल मूरे साल 2003 में ऑस्कर अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
फिल्ममेकर का US प्रेसीडेंट ट्रंप पर हमला, किसी दिन ये बंदा हम सबको मरवाएगा! डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर माइकल मूरे ने टीवी चैनल पर मजाकिया लहजे कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप नाम का व्यक्ति हम सभी को मरवा देगा। उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप के हाथ में न्यूक्लियर वेपन्स की चाबियां हैं। ये एक सूटकेश में होता है, जो सिर्फ वही खोल सकता है। ऐसे में इस व्यक्ति के पास हम सबको मरवाने की पूरी ताकत है। मूरे ने 'द टर्म्स ऑफ माय सरेंडर' नाम के पॉलिटिकल सटायर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जमकर हमला बोला। मूरे ने कहा कि ये बंदा हम सबको मरवाएगा। कोई इसे रोकने वाला नहीं है। ट्रंप के पास न्यूक्लियर कोड हैं। मूरे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि पेंटागन में कोई हमारी रक्षा करेगा। चाहे उस ब्रीफकेस में न्यूक्लियर वेपंस के कोड हों या गर्लफ्रेंड का फोन नंबर। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि उस ब्रीफकेस में गलत नंबर हों। हम बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। मूरे उदारवादी विचारधारा के माने जाते हैं और ट्रंप की नीतियों के कड़े विरोधी। माइकल मूरे साल दो हज़ार तीन में ऑस्कर अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जामिया मिलिया के छात्र चंदन कुमार से बुधवार को करीब चार घंटे की पूछताछ की. चंदन आइसा यूनिट का सचिव भी है. पूछताछ के दौरान पुलिस ने हिंसा और धरना-प्रदर्शन से जुड़े कई सवाल किए. हालांकि कोविड-19 को देखते हुए चंदन कुमार ने वीडियो क्रॉफ्रेंस के जरिए जांच में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन स्पेशल सेल ने चंदन को अपने दफ्तर में बुलाकर पूछताछ की. चार घंटे तक पूछताछ हुई और इसके बाद चंदन कुमार को पुलिस ने छोड़ दिया. पुलिस सूत्रों की मानें तो जांच के सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है. जिसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं है, उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि इस छात्र संगठन ने दिल्ली पुलिस पर ज्यादती करने के आरोप लगाए हैं. चंदन से सेल की टीम ने धरना-प्रदर्शन और हिंसा के दौरान उसकी लोकेशन को लेकर कई सवाल किए. सूत्रों के मुताबिक, चंदन से सीएए व एनआरसी के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर मौजूद होने को लेकर पूछताछ की गई. इसके अलावा उसकी प्रदर्शनकारियों को भड़काने में कोई भूमिका थी या नहीं, इसे लेकर भी पूछताछ की गई. जामिया हिंसा के मामले में भी चंदन कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है.
दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जामिया मिलिया के छात्र चंदन कुमार से बुधवार को करीब चार घंटे की पूछताछ की. चंदन आइसा यूनिट का सचिव भी है. पूछताछ के दौरान पुलिस ने हिंसा और धरना-प्रदर्शन से जुड़े कई सवाल किए. हालांकि कोविड-उन्नीस को देखते हुए चंदन कुमार ने वीडियो क्रॉफ्रेंस के जरिए जांच में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन स्पेशल सेल ने चंदन को अपने दफ्तर में बुलाकर पूछताछ की. चार घंटे तक पूछताछ हुई और इसके बाद चंदन कुमार को पुलिस ने छोड़ दिया. पुलिस सूत्रों की मानें तो जांच के सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है. जिसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं है, उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि इस छात्र संगठन ने दिल्ली पुलिस पर ज्यादती करने के आरोप लगाए हैं. चंदन से सेल की टीम ने धरना-प्रदर्शन और हिंसा के दौरान उसकी लोकेशन को लेकर कई सवाल किए. सूत्रों के मुताबिक, चंदन से सीएए व एनआरसी के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर मौजूद होने को लेकर पूछताछ की गई. इसके अलावा उसकी प्रदर्शनकारियों को भड़काने में कोई भूमिका थी या नहीं, इसे लेकर भी पूछताछ की गई. जामिया हिंसा के मामले में भी चंदन कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है.
प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 11 में प्रवेश के लिए प्राक्चयन परीक्षा 16 जुलाई को सुबह 11 से 1. 30 बजे तक विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में आयोजित की जाएगी। जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन 6 जुलाई तक आमंत्रित की गई है। परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षार्थी को कक्षा 10वीं में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग या विभागीय वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा ग्यारह में प्रवेश के लिए प्राक्चयन परीक्षा सोलह जुलाई को सुबह ग्यारह से एक. तीस बजे तक विभिन्न परीक्षा केन्द्रों में आयोजित की जाएगी। जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन छः जुलाई तक आमंत्रित की गई है। परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षार्थी को कक्षा दसवीं में न्यूनतम साठ प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग या विभागीय वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
याचिका में कहा गया था कि ये आयतें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए खतरा हैं. याचिका उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) ने दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व प्रमुख वसीम रिजवी की याचिका को खारिज कर दिया है. उन्होंने कुरान से 26 आयतों को हटाने के लिए याचिका दायर की थी. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का 'आधारहीन' बताते हुए वसीम रिजवी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप इस याचिका को लेकर गंभीर हैं? इसके जवाब में याचिककर्ता के वकील ने कहा कि यह आयतें मदरसों में बच्चों को यह पढ़ाई जाती हैं और इन्हें मदरसों में कानून के तहत मान्यता दी गई है. याचिका में कहा गया था कि ये आयतें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए खतरा हैं. इस याचिका में दावा किया गया है कि कुरान की 26 आयतों को बाद में जोड़ा गया है. इस आधार पर इन आयतों को पवित्र किताब से हटाने का आदेश देने की मांग की गईं है. याचिका में कहा गया है कि इन 26 आयतों की इन दिनों गलत तरीके से व्याख्या की जा रही है. इस याचिका को लेकर वसीम रिजवी अपने ही धर्म के लोगों के निशाने पर आ गए थे. रिजवी ने कुरान की कुछ आयतों को आतंक को बढ़ावा देने वाला बताया और कहा कि ये आयतें कुरान में पहले नहीं थीं, इनको बाद में शामिल किया गया. शिया मुसलमानों के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कुरान शरीफ की 26 आयतें हटाने की उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी की याचिका को खारिज करने की अपील की थी.
याचिका में कहा गया था कि ये आयतें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए खतरा हैं. याचिका उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व प्रमुख वसीम रिजवी की याचिका को खारिज कर दिया है. उन्होंने कुरान से छब्बीस आयतों को हटाने के लिए याचिका दायर की थी. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का 'आधारहीन' बताते हुए वसीम रिजवी पर पचास,शून्य रुपयापये का जुर्माना भी लगाया. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप इस याचिका को लेकर गंभीर हैं? इसके जवाब में याचिककर्ता के वकील ने कहा कि यह आयतें मदरसों में बच्चों को यह पढ़ाई जाती हैं और इन्हें मदरसों में कानून के तहत मान्यता दी गई है. याचिका में कहा गया था कि ये आयतें देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए खतरा हैं. इस याचिका में दावा किया गया है कि कुरान की छब्बीस आयतों को बाद में जोड़ा गया है. इस आधार पर इन आयतों को पवित्र किताब से हटाने का आदेश देने की मांग की गईं है. याचिका में कहा गया है कि इन छब्बीस आयतों की इन दिनों गलत तरीके से व्याख्या की जा रही है. इस याचिका को लेकर वसीम रिजवी अपने ही धर्म के लोगों के निशाने पर आ गए थे. रिजवी ने कुरान की कुछ आयतों को आतंक को बढ़ावा देने वाला बताया और कहा कि ये आयतें कुरान में पहले नहीं थीं, इनको बाद में शामिल किया गया. शिया मुसलमानों के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कुरान शरीफ की छब्बीस आयतें हटाने की उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी की याचिका को खारिज करने की अपील की थी.
ट्राइफेड ने 27 नवंबर, 2021 को विदेश मंत्रालय के सहयोग से एक ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव (Tribes India Conclave) का आयोजन किया। - ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव का आयोजन प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल'के लिए और एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए समृद्ध आदिवासी विरासत को पेश करने के लिए किया गया। - इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा भारत में 20 से अधिक विदेशी मिशनों के लगभग 100 राजनयिकों ने भाग लिया। गणमान्य व्यक्तियों में किरिबाती, पोलैंड, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, लाओस, थाईलैंड, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड, ब्राजील, मालदीव और अमेरिका जैसे 20 से अधिक देशों के राजनयिक शामिल हैं। इस कॉन्क्लेव में संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव (Tribes India Conclave) - इस कॉन्क्लेव के दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने भारत के आदिवासी कारीगरों के स्टालों पर एक नज़र डाली और अद्वितीय हस्तशिल्प और परंपराओं के बारे में अधिक जानने की इच्छा दिखाई। - इसमें 200 स्टॉल थे, जो पारंपरिक बुनाई, आभूषण, पेंटिंग और खिलौनों जैसे उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे थे। - उन्हें आदिवासी कला और शिल्प में एक झलक दी गई। - इसके अलावा, कारीगरों द्वारा लाख की चूड़ियाँ, मिट्टी के बर्तनों और गोंड चित्रों को बनाने के लिए लाइव प्रदर्शन भी किए गए। - इस कॉन्क्लेव में कारीगरों ने लाइव कठपुतली शो भी किया। इस कॉन्क्लेव के दौरान, एक अलग GI स्टोर में पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय, कोटा डोरिया फैब्रिक, राजस्थान की ब्लू पॉटरी, हिमाचल प्रदेश का काला जीरा, ओडिशा की पट्टाचित्र, मध्य प्रदेश की चंदेरी और माहेश्वरी सिल्क, कर्नाटक की बिदरीवेयर, उत्तर प्रदेश से बनारसी सिल्क जैसी प्रसिद्ध, उत्तम वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया गया।
ट्राइफेड ने सत्ताईस नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को विदेश मंत्रालय के सहयोग से एक ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव का आयोजन किया। - ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव का आयोजन प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल'के लिए और एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए समृद्ध आदिवासी विरासत को पेश करने के लिए किया गया। - इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा भारत में बीस से अधिक विदेशी मिशनों के लगभग एक सौ राजनयिकों ने भाग लिया। गणमान्य व्यक्तियों में किरिबाती, पोलैंड, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, लाओस, थाईलैंड, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड, ब्राजील, मालदीव और अमेरिका जैसे बीस से अधिक देशों के राजनयिक शामिल हैं। इस कॉन्क्लेव में संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। ट्राइब्स इंडिया कॉन्क्लेव - इस कॉन्क्लेव के दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने भारत के आदिवासी कारीगरों के स्टालों पर एक नज़र डाली और अद्वितीय हस्तशिल्प और परंपराओं के बारे में अधिक जानने की इच्छा दिखाई। - इसमें दो सौ स्टॉल थे, जो पारंपरिक बुनाई, आभूषण, पेंटिंग और खिलौनों जैसे उत्पादों को प्रदर्शित कर रहे थे। - उन्हें आदिवासी कला और शिल्प में एक झलक दी गई। - इसके अलावा, कारीगरों द्वारा लाख की चूड़ियाँ, मिट्टी के बर्तनों और गोंड चित्रों को बनाने के लिए लाइव प्रदर्शन भी किए गए। - इस कॉन्क्लेव में कारीगरों ने लाइव कठपुतली शो भी किया। इस कॉन्क्लेव के दौरान, एक अलग GI स्टोर में पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय, कोटा डोरिया फैब्रिक, राजस्थान की ब्लू पॉटरी, हिमाचल प्रदेश का काला जीरा, ओडिशा की पट्टाचित्र, मध्य प्रदेश की चंदेरी और माहेश्वरी सिल्क, कर्नाटक की बिदरीवेयर, उत्तर प्रदेश से बनारसी सिल्क जैसी प्रसिद्ध, उत्तम वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया गया।
ऐसा माना जाता है कि कोई व्यक्ति अभ्यास कर सकता हैविभिन्न प्रकार के जादू, केवल हर किसी के लिए उनके संसाधनों के उपयोग की आवश्यकता होती है। इसमें, शायद, पकड़ है, खासकर उन लोगों के लिए जो शक्ति से मोहित हैं। उदाहरण के लिए, घर पर काले और सफेद जादू दोनों का पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता है, लेकिन एक सक्षम और अनुभवी सलाहकार से ज्ञान सबसे अच्छा अधिग्रहण किया जाता है। यह इस अभ्यास को सुरक्षित बनाएगा। आँकड़ों के अनुसार, अधिकांश लोगग्रह अलौकिक में विश्वास करता है बेशक, निवास के क्षेत्र के आधार पर, यह सूचक या तो कमी या वृद्धि कर सकता है उदाहरण के लिए, शहरों में, बड़े इलाकों में यह प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम है। यह समझ में आता है। यदि हम जादू के बारे में बात करते हैं, तो अक्सर गांवों में हर प्रकार के चुड़ैलों पाए जाते हैं, जहां चिकित्सकों का जीवन रहा, इस शक्ति के साथ संपन्न हुआ। कुछ लोग मानते हैं कि इसके अधिक सफल उपयोग के लिए, प्रकृति की शक्तियों से खिलाना आवश्यक है। हालांकि, अगर हम मेगासिटी के बारे में बात करते हैं, तो वहांअलौकिक एक व्यक्ति की सुपर शक्तियों से उभर रहे हैं - जैसे कि स्पाइडरमैन, एक्स-मेन फिल्म के पात्र, और जैसे। तो, जादू थोड़ा बदल गया? आप सफेद जादू का उपयोग कैसे कर सकते हैं? किस उद्देश्य के लिए? याद रखने की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बल का उपयोग अच्छे से करना आवश्यक है। इसकी मदद से आप लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं, अपनी इच्छानुसार लगा सकते हैं या किसी और को प्रतिबंधित कर सकते हैं। और इस बल की कार्रवाई से किसी व्यक्ति की मौत नहीं होनी चाहिए। तो, यदि आप तय करते हैं कि आपको सफेद की जरूरत हैघर पर जादू का अभ्यास किया जाता है, आपको यह जानने की ज़रूरत है कि यह सभी गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं है। उदाहरण के लिए, प्रकाश बलों की मदद से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना असंभव है। लेकिन अन्य क्रियाएं संभव हैं। चिकित्सा। हां, उपचार के लिए प्रकाश बलों की उपस्थिति की आवश्यकता होती है। लोगों को शुद्ध दिल की भविष्यवाणी करने में मदद करना। भविष्यवाणी। इसका मतलब एक भाग्य नहीं है। भविष्यवाणी केवल शुद्ध, निर्विवाद नज़र और भगवान की शक्ति और विश्वास में विश्वास के साथ संभव है। मंत्र और आकर्षण। कोई भी हो सकता है - और एक प्रिय, और पैसा, और भाग्य। बेशक, यह सिर्फ एक अनुमानित विभाजन है,लेकिन सार निम्नानुसार है। हालांकि, किसी तरह की षड्यंत्र, आचरण अनुष्ठानों के साथ सावधानी बरतना आवश्यक है। विशेष रूप से अगर वे चेक नहीं किया गया है। यह सब न केवल किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि खुद व्यवसायी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। जादू विभिन्न तरीकों से सीखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, शुरुआत में ताकत हासिल करें, एक सहज क्षमता के रूप में, या लंबे समय तक सीखने और काम के माध्यम से इसे प्राप्त करें। हालांकि, उनकी आवश्यकताओं भी हैं। उदाहरण के लिए, प्रकाश की शक्ति का उपयोग करने के लिए, आपको आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से शुद्ध होना चाहिए। अक्सर, ऐसे जादू का उपयोग करने वाले व्यक्ति के पास भगवान के साथ एक बड़ा संबंध होता है, और यह भी बपतिस्मा की संस्कार पारित करता है (यह कोई अन्य समान हो सकता है, लेकिन उसके धर्म में)। अगर हम जीवन के तरीके के बारे में बात करते हैं, तो प्राप्त करने के लिएइस बल को शराब, धूम्रपान, दवाओं को त्याग दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, नियमित पदों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकाल के दौरान, व्यक्ति के आंतरिक भंडार को मंजूरी और सक्रिय कर दिया जाता है, और इच्छाशक्ति को प्रशिक्षित किया जाता है। इस प्रकार, इससे आगे बढ़ना, मांस के उपयोग को सीमित करना आवश्यक है, और यहां तक कि इसे पूरी तरह से खाने से रोकना भी आवश्यक है। ऐसा माना जाता है कि मांस हत्या की कंपन को बरकरार रखता है, जो चेतना की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है, इसके अलावा, यह एक भारी उत्पाद है। किसी भी मामले में, यह माना जाता है कि जादुई शक्तियांहर व्यक्ति है। उनमें से बहुत सारे हैं, लेकिन दूसरों के पास कम है। इसके अलावा, आपको पता होना चाहिए कि घर पर भी बेहोशी से सफेद जादू का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। षड्यंत्र, साथ ही मंत्र - यह एक अनिवार्य विशेषता नहीं है। अगर किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त व्यक्तिगत शक्ति है, तो वह केवल अपनी ऊर्जा का उपयोग कर सकता है, उदाहरण के लिए, ठीक करने के लिए। लेकिन जिन्होंने इसे गंभीरता से लेने का फैसला किया, उन्हें चाहिएएक अनुभवी सलाहकार खोजें। यह एक शर्त है। यह सभी धर्मों में व्यर्थ नहीं है, जादू का स्वागत नहीं है। यदि आप ध्यान से इस मुद्दे पर आगे बढ़ते हैं, तो भी आप सही ट्रैक से बाहर निकल सकते हैं। इच्छा का प्रशिक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह ध्यान, और उपवास (जैसा कि यह ऊपर लिखा गया था), और अन्य कार्यों हो सकता है। और, ज़ाहिर है, किताबें। असली जादू साहित्य ढूंढना और इसका अध्ययन करना आवश्यक है। ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए, कई प्रक्रियाओं को समझना सीखना आवश्यक है। लेकिन फिर भी, जादूगर कौन हैं जो अधीन हैंघर पर सफेद जादू, जो षड्यंत्र का अभ्यास करते हैं, विभिन्न अनुष्ठानों को पूरा करते हैं? हम विश्वास से कह सकते हैं कि ये वे लोग हैं जो विशेष उपहार (जन्म से विकसित या प्राप्त) के साथ संपन्न हैं। बेशक, हर कोई इसे अच्छे के लिए उपयोग नहीं कर सकता, और काले जादूगर प्रकट होते हैं। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक असली सफेद जादूगर इस सिद्धांत का पालन करता है कि कोई भी बुराई के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकता है, वह अपने प्रत्येक कार्य के परिणामों को देखता है। घर पर सफेद जादू निम्नलिखित उपकरण शामिल हैः यह उन वस्तुओं की पूरी सूची नहीं है जो एक सफेद जादूगर उपयोग कर सकते हैं। अनुभव प्राप्त करने की प्रक्रिया में प्रत्येक "इसके" गुण प्राप्त करता है, जो अधिक सटीक और अधिक आसानी से काम करता है। एक सफेद जादूगर अपनी शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं,घर में पैसा खींचने के लिए। हालांकि, किसी अन्य प्रथाओं में, यहां बहुत सावधान रहना चाहिए। घर में सफेद जादू (पैसे के लिए) - यह कुछ अनुष्ठान और षड्यंत्र है। आइए तरीकों में से एक पर विचार करें। इस संस्कार को एक नए चंद्रमा पर आवश्यक है, जो सफल परिणाम की अधिक संभावना प्रदान करता है। अनुष्ठान (प्रति दिन) से पहले, उस स्थान को तैयार करें जहां आप प्रक्रिया का संचालन करने की योजना बना रहे हैं। केंद्र में एक वेदी बनाना जरूरी है जिसमें चार तत्वों का प्रतीक हैः एक पंख, एक मूंगा, एक कंकड़, एक हल्की मोमबत्ती। अनुष्ठान ही आधी रात को खर्च करने के लिए की जरूरत है। क्या आप जब तक आप अंदर से महसूस बहुत आसान हो जाता है के रूप में अपनी इच्छा दोहराना चाहते हैं पर ध्यान दें। घर पर सफेद जादू (प्यार के लिए) -बहुत आम अभ्यास। एक अनुभवहीन व्यक्ति के लिए, यह खतरनाक हो सकता है, इसे प्रारंभ में याद किया जाना चाहिए, क्योंकि, सिद्धांत रूप में, आकर्षक और आकर्षक प्यार के बीच एक बहुत अच्छी रेखा है। मैं ध्यान रखना चाहता हूं कि सच्चे सफेद जादू के उपयोग के लिए किसी व्यक्ति की इच्छा को लागू करने के लिए अस्वीकार्य है। यदि आप अपने आत्मा साथी को ढूंढना चाहते हैं, तो आदर्श विकल्प मंत्र को पढ़ने और अपने जीवन में प्यार को आकर्षित करने के लिए संस्कार करना है, न कि किसी विशेष व्यक्ति को। इस मामले में, भाग्य स्वयं सही व्यक्ति, एक और केवल एक भेज देगा। याद रखें कि घर पर सफेद जादूएक लड़के का प्यार (यानी, किसी व्यक्ति को आकर्षित करने के लिए अनुष्ठान जिन्हें आप जानते हैं और जिसे आप पसंद करते हैं), सामान्य आकर्षण के साथ समाप्त हो सकता है। प्रकाश के लिए कोई जगह नहीं है। प्यार को आकर्षित करने के लिए अनुष्ठान के लिएजब चंद्रमा विकास के चरण में होता है, तो एक स्पष्ट रात चुनना आवश्यक है। शुक्रवार को ऐसा करने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दिन शुक्र की दिन, प्यार की देवी माना जाता है। सुगंधित मोमबत्तियों को गंध, साजिश पढ़ें। आप क्रिस्टल का उपयोग कर सकते हैं जो प्रेम की ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, उदाहरण के लिए, क्वार्ट्ज, लैपिस लज़ुली, एमेथिस्ट। किस्मत के लिए घर पर बहुत लोकप्रिय सफेद जादू है। अनुष्ठानों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जो काफी विविध हैं। उदाहरण के लिए, बहुत दिलचस्प है। खुद को एक छोटा सा बैग सिलाई,किसी भी हरे कपड़े (लेकिन अधिमानतः प्राकृतिक) का उपयोग कर। तैयार होने के बाद, तुलसी (10 चुटकी), टकसाल (5 चुटकी), बड़े नमक (3 चुटकी) डाल दें। सूखे और पीसने के तीन सेब छीलिये। एक बैग में भी डाल दिया। अभी भी सिक्कों को रखने की जरूरत है - तांबे से 3 (उदाहरण के लिए, दस कोपेक), सफेद धातु में से 1 (उदाहरण के लिए, पांच सेंट)। अब यह साजिश पढ़ने के लिए बनी हुई है। "व्यापार पीछे है, व्यापार आगे है, लाभ मध्य में है।" यह बैग उस स्थान पर होना चाहिए जहां आप काम करते हैं। हर हफ्ते (इसकी शुरुआत में) साजिश को पढ़ते हैं, इसे अपने हाथों में रखते हैं। एक दिलचस्प बिंदु भी सफेद हैस्वास्थ्य पर घर पर जादू भी एक लोकप्रिय अभ्यास है। यह स्वास्थ्य को आकर्षित करने और तालिबान-ताबीज के निर्माण के लिए विभिन्न षड्यंत्रों और अनुष्ठानों की तरह हो सकता है। वैसे, कुछ दिन हैं,जब जादू इस चैनल को निर्देशित करता है, तो अधिक प्रभावी ढंग से काम करता है। उदाहरण के लिए, इवान कुपाला का दिन। इस दिन एकत्रित ओस में जादुई उपचार गुण हैं - यह प्राचीन काल से जाना जाता है। वहां कई षड्यंत्र भी हैंयह पढ़ा जा सकता है एक व्यक्ति कुछ दर्द होता है या नहीं। वे अलग हैं। उदाहरण के लिए, सिर में दर्द नेत्र रोग, दांत दर्द से, या से की साजिश एक उच्च तापमान पर निर्भर करता है। बेशक, यह पूरी सूची नहीं है। और आपको लगता है कि भूखंडों उपचार नहीं हैं पता होना चाहिए, लेकिन केवल रोग के खिलाफ लड़ाई में मानव बलों को सक्रिय करें। एक बीमारी तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है, यह उल्लेख करने के लिए सुनिश्चित करें। तो, उपरोक्त, सफेद जादू से स्पष्ट हैघर पर (मंत्र अनुष्ठान, साथ ही विभिन्न अनुष्ठान) पूरी तरह से अनुमत है। परिणाम जादूगर की व्यक्तिगत शक्ति, अपने अनुभव और ज्ञान पर निर्भर करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि कोई व्यक्ति अभ्यास कर सकता हैविभिन्न प्रकार के जादू, केवल हर किसी के लिए उनके संसाधनों के उपयोग की आवश्यकता होती है। इसमें, शायद, पकड़ है, खासकर उन लोगों के लिए जो शक्ति से मोहित हैं। उदाहरण के लिए, घर पर काले और सफेद जादू दोनों का पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता है, लेकिन एक सक्षम और अनुभवी सलाहकार से ज्ञान सबसे अच्छा अधिग्रहण किया जाता है। यह इस अभ्यास को सुरक्षित बनाएगा। आँकड़ों के अनुसार, अधिकांश लोगग्रह अलौकिक में विश्वास करता है बेशक, निवास के क्षेत्र के आधार पर, यह सूचक या तो कमी या वृद्धि कर सकता है उदाहरण के लिए, शहरों में, बड़े इलाकों में यह प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम है। यह समझ में आता है। यदि हम जादू के बारे में बात करते हैं, तो अक्सर गांवों में हर प्रकार के चुड़ैलों पाए जाते हैं, जहां चिकित्सकों का जीवन रहा, इस शक्ति के साथ संपन्न हुआ। कुछ लोग मानते हैं कि इसके अधिक सफल उपयोग के लिए, प्रकृति की शक्तियों से खिलाना आवश्यक है। हालांकि, अगर हम मेगासिटी के बारे में बात करते हैं, तो वहांअलौकिक एक व्यक्ति की सुपर शक्तियों से उभर रहे हैं - जैसे कि स्पाइडरमैन, एक्स-मेन फिल्म के पात्र, और जैसे। तो, जादू थोड़ा बदल गया? आप सफेद जादू का उपयोग कैसे कर सकते हैं? किस उद्देश्य के लिए? याद रखने की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बल का उपयोग अच्छे से करना आवश्यक है। इसकी मदद से आप लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं, अपनी इच्छानुसार लगा सकते हैं या किसी और को प्रतिबंधित कर सकते हैं। और इस बल की कार्रवाई से किसी व्यक्ति की मौत नहीं होनी चाहिए। तो, यदि आप तय करते हैं कि आपको सफेद की जरूरत हैघर पर जादू का अभ्यास किया जाता है, आपको यह जानने की ज़रूरत है कि यह सभी गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं है। उदाहरण के लिए, प्रकाश बलों की मदद से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना असंभव है। लेकिन अन्य क्रियाएं संभव हैं। चिकित्सा। हां, उपचार के लिए प्रकाश बलों की उपस्थिति की आवश्यकता होती है। लोगों को शुद्ध दिल की भविष्यवाणी करने में मदद करना। भविष्यवाणी। इसका मतलब एक भाग्य नहीं है। भविष्यवाणी केवल शुद्ध, निर्विवाद नज़र और भगवान की शक्ति और विश्वास में विश्वास के साथ संभव है। मंत्र और आकर्षण। कोई भी हो सकता है - और एक प्रिय, और पैसा, और भाग्य। बेशक, यह सिर्फ एक अनुमानित विभाजन है,लेकिन सार निम्नानुसार है। हालांकि, किसी तरह की षड्यंत्र, आचरण अनुष्ठानों के साथ सावधानी बरतना आवश्यक है। विशेष रूप से अगर वे चेक नहीं किया गया है। यह सब न केवल किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि खुद व्यवसायी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। जादू विभिन्न तरीकों से सीखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, शुरुआत में ताकत हासिल करें, एक सहज क्षमता के रूप में, या लंबे समय तक सीखने और काम के माध्यम से इसे प्राप्त करें। हालांकि, उनकी आवश्यकताओं भी हैं। उदाहरण के लिए, प्रकाश की शक्ति का उपयोग करने के लिए, आपको आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से शुद्ध होना चाहिए। अक्सर, ऐसे जादू का उपयोग करने वाले व्यक्ति के पास भगवान के साथ एक बड़ा संबंध होता है, और यह भी बपतिस्मा की संस्कार पारित करता है । अगर हम जीवन के तरीके के बारे में बात करते हैं, तो प्राप्त करने के लिएइस बल को शराब, धूम्रपान, दवाओं को त्याग दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, नियमित पदों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकाल के दौरान, व्यक्ति के आंतरिक भंडार को मंजूरी और सक्रिय कर दिया जाता है, और इच्छाशक्ति को प्रशिक्षित किया जाता है। इस प्रकार, इससे आगे बढ़ना, मांस के उपयोग को सीमित करना आवश्यक है, और यहां तक कि इसे पूरी तरह से खाने से रोकना भी आवश्यक है। ऐसा माना जाता है कि मांस हत्या की कंपन को बरकरार रखता है, जो चेतना की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है, इसके अलावा, यह एक भारी उत्पाद है। किसी भी मामले में, यह माना जाता है कि जादुई शक्तियांहर व्यक्ति है। उनमें से बहुत सारे हैं, लेकिन दूसरों के पास कम है। इसके अलावा, आपको पता होना चाहिए कि घर पर भी बेहोशी से सफेद जादू का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। षड्यंत्र, साथ ही मंत्र - यह एक अनिवार्य विशेषता नहीं है। अगर किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त व्यक्तिगत शक्ति है, तो वह केवल अपनी ऊर्जा का उपयोग कर सकता है, उदाहरण के लिए, ठीक करने के लिए। लेकिन जिन्होंने इसे गंभीरता से लेने का फैसला किया, उन्हें चाहिएएक अनुभवी सलाहकार खोजें। यह एक शर्त है। यह सभी धर्मों में व्यर्थ नहीं है, जादू का स्वागत नहीं है। यदि आप ध्यान से इस मुद्दे पर आगे बढ़ते हैं, तो भी आप सही ट्रैक से बाहर निकल सकते हैं। इच्छा का प्रशिक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह ध्यान, और उपवास , और अन्य कार्यों हो सकता है। और, ज़ाहिर है, किताबें। असली जादू साहित्य ढूंढना और इसका अध्ययन करना आवश्यक है। ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए, कई प्रक्रियाओं को समझना सीखना आवश्यक है। लेकिन फिर भी, जादूगर कौन हैं जो अधीन हैंघर पर सफेद जादू, जो षड्यंत्र का अभ्यास करते हैं, विभिन्न अनुष्ठानों को पूरा करते हैं? हम विश्वास से कह सकते हैं कि ये वे लोग हैं जो विशेष उपहार के साथ संपन्न हैं। बेशक, हर कोई इसे अच्छे के लिए उपयोग नहीं कर सकता, और काले जादूगर प्रकट होते हैं। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक असली सफेद जादूगर इस सिद्धांत का पालन करता है कि कोई भी बुराई के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकता है, वह अपने प्रत्येक कार्य के परिणामों को देखता है। घर पर सफेद जादू निम्नलिखित उपकरण शामिल हैः यह उन वस्तुओं की पूरी सूची नहीं है जो एक सफेद जादूगर उपयोग कर सकते हैं। अनुभव प्राप्त करने की प्रक्रिया में प्रत्येक "इसके" गुण प्राप्त करता है, जो अधिक सटीक और अधिक आसानी से काम करता है। एक सफेद जादूगर अपनी शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं,घर में पैसा खींचने के लिए। हालांकि, किसी अन्य प्रथाओं में, यहां बहुत सावधान रहना चाहिए। घर में सफेद जादू - यह कुछ अनुष्ठान और षड्यंत्र है। आइए तरीकों में से एक पर विचार करें। इस संस्कार को एक नए चंद्रमा पर आवश्यक है, जो सफल परिणाम की अधिक संभावना प्रदान करता है। अनुष्ठान से पहले, उस स्थान को तैयार करें जहां आप प्रक्रिया का संचालन करने की योजना बना रहे हैं। केंद्र में एक वेदी बनाना जरूरी है जिसमें चार तत्वों का प्रतीक हैः एक पंख, एक मूंगा, एक कंकड़, एक हल्की मोमबत्ती। अनुष्ठान ही आधी रात को खर्च करने के लिए की जरूरत है। क्या आप जब तक आप अंदर से महसूस बहुत आसान हो जाता है के रूप में अपनी इच्छा दोहराना चाहते हैं पर ध्यान दें। घर पर सफेद जादू -बहुत आम अभ्यास। एक अनुभवहीन व्यक्ति के लिए, यह खतरनाक हो सकता है, इसे प्रारंभ में याद किया जाना चाहिए, क्योंकि, सिद्धांत रूप में, आकर्षक और आकर्षक प्यार के बीच एक बहुत अच्छी रेखा है। मैं ध्यान रखना चाहता हूं कि सच्चे सफेद जादू के उपयोग के लिए किसी व्यक्ति की इच्छा को लागू करने के लिए अस्वीकार्य है। यदि आप अपने आत्मा साथी को ढूंढना चाहते हैं, तो आदर्श विकल्प मंत्र को पढ़ने और अपने जीवन में प्यार को आकर्षित करने के लिए संस्कार करना है, न कि किसी विशेष व्यक्ति को। इस मामले में, भाग्य स्वयं सही व्यक्ति, एक और केवल एक भेज देगा। याद रखें कि घर पर सफेद जादूएक लड़के का प्यार , सामान्य आकर्षण के साथ समाप्त हो सकता है। प्रकाश के लिए कोई जगह नहीं है। प्यार को आकर्षित करने के लिए अनुष्ठान के लिएजब चंद्रमा विकास के चरण में होता है, तो एक स्पष्ट रात चुनना आवश्यक है। शुक्रवार को ऐसा करने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दिन शुक्र की दिन, प्यार की देवी माना जाता है। सुगंधित मोमबत्तियों को गंध, साजिश पढ़ें। आप क्रिस्टल का उपयोग कर सकते हैं जो प्रेम की ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, उदाहरण के लिए, क्वार्ट्ज, लैपिस लज़ुली, एमेथिस्ट। किस्मत के लिए घर पर बहुत लोकप्रिय सफेद जादू है। अनुष्ठानों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जो काफी विविध हैं। उदाहरण के लिए, बहुत दिलचस्प है। खुद को एक छोटा सा बैग सिलाई,किसी भी हरे कपड़े का उपयोग कर। तैयार होने के बाद, तुलसी , टकसाल , बड़े नमक डाल दें। सूखे और पीसने के तीन सेब छीलिये। एक बैग में भी डाल दिया। अभी भी सिक्कों को रखने की जरूरत है - तांबे से तीन , सफेद धातु में से एक । अब यह साजिश पढ़ने के लिए बनी हुई है। "व्यापार पीछे है, व्यापार आगे है, लाभ मध्य में है।" यह बैग उस स्थान पर होना चाहिए जहां आप काम करते हैं। हर हफ्ते साजिश को पढ़ते हैं, इसे अपने हाथों में रखते हैं। एक दिलचस्प बिंदु भी सफेद हैस्वास्थ्य पर घर पर जादू भी एक लोकप्रिय अभ्यास है। यह स्वास्थ्य को आकर्षित करने और तालिबान-ताबीज के निर्माण के लिए विभिन्न षड्यंत्रों और अनुष्ठानों की तरह हो सकता है। वैसे, कुछ दिन हैं,जब जादू इस चैनल को निर्देशित करता है, तो अधिक प्रभावी ढंग से काम करता है। उदाहरण के लिए, इवान कुपाला का दिन। इस दिन एकत्रित ओस में जादुई उपचार गुण हैं - यह प्राचीन काल से जाना जाता है। वहां कई षड्यंत्र भी हैंयह पढ़ा जा सकता है एक व्यक्ति कुछ दर्द होता है या नहीं। वे अलग हैं। उदाहरण के लिए, सिर में दर्द नेत्र रोग, दांत दर्द से, या से की साजिश एक उच्च तापमान पर निर्भर करता है। बेशक, यह पूरी सूची नहीं है। और आपको लगता है कि भूखंडों उपचार नहीं हैं पता होना चाहिए, लेकिन केवल रोग के खिलाफ लड़ाई में मानव बलों को सक्रिय करें। एक बीमारी तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है, यह उल्लेख करने के लिए सुनिश्चित करें। तो, उपरोक्त, सफेद जादू से स्पष्ट हैघर पर पूरी तरह से अनुमत है। परिणाम जादूगर की व्यक्तिगत शक्ति, अपने अनुभव और ज्ञान पर निर्भर करते हैं।
बहुत तर्क-वितर्क के पीछे स्थिर हुआ कि नरसिंहदत्त ही कुमार के साथ यात्रा करें । उसी समय पीछे से अनंतवर्मा बोल उठे "प्रभो ! मुझे भी आज्ञा दीजिए, मैं भी युवराज के साथ युद्ध में जाऊँगा । " यशोधबलदेव ने पूछा " अनंत ! तुम जाकर क्या करोगे ?" उनका इतना आग्रह देख युवराज ने उन्हें भी साथ चलने के लिए कहा । दूसरे दिन बड़े तड़के दस सहस्र पदातिक, आठ सहस्र अश्वारोही और पचास नावें लेकर युवराज ने यात्रा की । पदातिक नौसेना धीरे-धीरे चलने लगी । युवराज नरसिंहदत्त को शंकरनद के किनारे प्रतीक्षा करने के लिए कह कर अश्वारोही सेना लेकर आगे बढ़े। उस समय कामरूप की सेना सीमा लाँघ कर वंग देश के उत्तर प्रांत के गाँवों में लूट-पाट कर रही थी। पर भास्करवर्मा अब तक शंकरनद के इस पार तक नहीं पहुँच सके थे । इधर युवराज के साथ जो लोग आए थे उनमें से अधिकांश लोग गौड़ के थे और अपना सारा जीवन युद्ध में ही बिता चुके थे। शत्रुसेना को बेखटके लूट-पाट में लित देख युवराज और वीरेंद्र सिंह गौड़ीय सामंतों के परामर्श के अनुसार सारी सेना लेकर उस पर टूट पड़े । कामरूप सेना इधर-उधर कई खंडों में होकर लूट पाट कर रही थी। उसके सेनापतियों को युवराज के चलने का संवाद मिल चुका था पर वे इतनी जल्दी सीमा पार करके आ धमकेंगे इस बात का उन लोगों को स्वप्न में भी ध्यान न था । अकस्मात् इतने अश्वारोहियों से घिर कर कामरूप सेना बार-बार परास्त हुई । जो सेना बची वह लूट का सारा धन छोड़ छाड़ कर भागी । सेनापतियों ने बहुत यत्न किया पर सेना एकत्र न हुई। अंत में परास्त कामरूप सेना शंकरनद के किनारे फिर इकट्ठी हुई । पर बार बार हार खाते खाते वह हतनी व्याकुल हो गई कि वीरेंद्रसिंह
बहुत तर्क-वितर्क के पीछे स्थिर हुआ कि नरसिंहदत्त ही कुमार के साथ यात्रा करें । उसी समय पीछे से अनंतवर्मा बोल उठे "प्रभो ! मुझे भी आज्ञा दीजिए, मैं भी युवराज के साथ युद्ध में जाऊँगा । " यशोधबलदेव ने पूछा " अनंत ! तुम जाकर क्या करोगे ?" उनका इतना आग्रह देख युवराज ने उन्हें भी साथ चलने के लिए कहा । दूसरे दिन बड़े तड़के दस सहस्र पदातिक, आठ सहस्र अश्वारोही और पचास नावें लेकर युवराज ने यात्रा की । पदातिक नौसेना धीरे-धीरे चलने लगी । युवराज नरसिंहदत्त को शंकरनद के किनारे प्रतीक्षा करने के लिए कह कर अश्वारोही सेना लेकर आगे बढ़े। उस समय कामरूप की सेना सीमा लाँघ कर वंग देश के उत्तर प्रांत के गाँवों में लूट-पाट कर रही थी। पर भास्करवर्मा अब तक शंकरनद के इस पार तक नहीं पहुँच सके थे । इधर युवराज के साथ जो लोग आए थे उनमें से अधिकांश लोग गौड़ के थे और अपना सारा जीवन युद्ध में ही बिता चुके थे। शत्रुसेना को बेखटके लूट-पाट में लित देख युवराज और वीरेंद्र सिंह गौड़ीय सामंतों के परामर्श के अनुसार सारी सेना लेकर उस पर टूट पड़े । कामरूप सेना इधर-उधर कई खंडों में होकर लूट पाट कर रही थी। उसके सेनापतियों को युवराज के चलने का संवाद मिल चुका था पर वे इतनी जल्दी सीमा पार करके आ धमकेंगे इस बात का उन लोगों को स्वप्न में भी ध्यान न था । अकस्मात् इतने अश्वारोहियों से घिर कर कामरूप सेना बार-बार परास्त हुई । जो सेना बची वह लूट का सारा धन छोड़ छाड़ कर भागी । सेनापतियों ने बहुत यत्न किया पर सेना एकत्र न हुई। अंत में परास्त कामरूप सेना शंकरनद के किनारे फिर इकट्ठी हुई । पर बार बार हार खाते खाते वह हतनी व्याकुल हो गई कि वीरेंद्रसिंह
बिहार लोक सेवा आयोग ने 63वें संयुक्त प्रारम्भिक प्रतियोगिता परीक्षा के लिए शुल्क भुगतान की तिथि बढ़ा दी है। अब जिन अभ्यर्थियों ने 4 दिसंबर तक अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है वो 11 दिसंबर तक Online विधि से या चालान के माध्यम से परीक्षा शुल्क भुगतान कर सकते है। गौरतलब है कि BPSC ने सुचना पत्र जारी करते हुए कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने 4 दिसंबर तक अपना पंजीयन करा लिया है ,वे अपना परीक्षा शुल्क भुगतान 11 दिसंबर तक कर सकते है। आयोग ने ऑनलाइन आवेदन भरने की तिथि भी 11 दिसंबर से बढाकर 15 दिसंबर तक कर दिया है। स्पीड पोस्ट या निबंधित डाक से आवेदन की हार्ड कॉपी एवं चालान की प्रति या ऑनलाइन भुगतान से संबंधित बैंक रसीद 18 दिसंबर की जगह 22 दिसंबर तक भेजा जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए बीपीएससी के वेबसाइट www. bpsc. bih. nic. in पर जानकारी प्राप्त करे।
बिहार लोक सेवा आयोग ने तिरेसठवें संयुक्त प्रारम्भिक प्रतियोगिता परीक्षा के लिए शुल्क भुगतान की तिथि बढ़ा दी है। अब जिन अभ्यर्थियों ने चार दिसंबर तक अपना रजिस्ट्रेशन करवा लिया है वो ग्यारह दिसंबर तक Online विधि से या चालान के माध्यम से परीक्षा शुल्क भुगतान कर सकते है। गौरतलब है कि BPSC ने सुचना पत्र जारी करते हुए कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने चार दिसंबर तक अपना पंजीयन करा लिया है ,वे अपना परीक्षा शुल्क भुगतान ग्यारह दिसंबर तक कर सकते है। आयोग ने ऑनलाइन आवेदन भरने की तिथि भी ग्यारह दिसंबर से बढाकर पंद्रह दिसंबर तक कर दिया है। स्पीड पोस्ट या निबंधित डाक से आवेदन की हार्ड कॉपी एवं चालान की प्रति या ऑनलाइन भुगतान से संबंधित बैंक रसीद अट्ठारह दिसंबर की जगह बाईस दिसंबर तक भेजा जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए बीपीएससी के वेबसाइट www. bpsc. bih. nic. in पर जानकारी प्राप्त करे।
चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को छज्जूबाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ साहित्यकार यादवेंद्र, फिल्मोत्सव की संयोजक प्रीति प्रभा और हिरावल के संयोजक संतोष झा ने बताया कि 13वाँ पटना फिल्मोत्सव 19 दिसंबर से 21 दिसंबर तक पटना में मनाया जाएगा। - कालिदास रंगालय में आयोजित होने वाले इस फिल्मोत्सव में एक दर्जन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिन्हें दर्शक निःशुल्क देख सकेंगे। - फिल्मोत्सव में मुंबई, केरल, कोलकाता, दिल्ली, अलीगढ़ और राँची से कुल आठ फिल्मकार अपनी फिल्मों के साथ आ रहे हैं। एक सेक्शन स्थानीय युवा फिल्मकारों का भी होगा। - 13वें फिल्मोत्सव का उद्घाटन हिन्दी के वरिष्ठ कवि और आईआईटी, हैदराबाद में प्रोफेसर हरजिंदर सिंह लाल्टू करेंगे। पहले दिन दो साहित्यिक कृतियों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें संवदिया (फणीश्वर नाथ रेणु) और लौट रही है बेला एक्का (अरुण प्रकाश) शामिल हैं। फिल्म के प्रदर्शन के बाद उपस्थित निर्देशकों के साथ दर्शकों के संवाद का भी सत्र होगा। - फिल्मोत्सव में दिखाई जानेवाली आखिरी फिल्म "मट्टो की साइकिल' होगी। जाने-माने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है। इस फिल्म का प्रीमियर बुसान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में हुआ था। इसके निर्देशक मो. गनी भी फिल्मोत्सव में शिरकत करेंगे। चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण को लेकर नया गाइडलाइन जारी किया है। नये नियम के मुताबिक अब सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को 611 प्रकार की दवाएँ मुफ्त में मिलेंगी। - नयी-नयी बीमारियाँ सामने आने के बाद सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण को लेकर नया गाइडलाइन जारी किया है। इसके तहत अब मरीजों को निजी दुकानों से दवा नहीं खरीदनी पड़ेगी। - सरकार की ओर से जारी नये संकल्प में मेडिकल कॉलेज से लेकर ज़िला अस्पताल व स्वास्थ्य उपकेंद्र तक के अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी में कुल 611 प्रकार की दवाओं के वितरण करने का निर्णय लिया गया है। चर्चा में क्यों? 15 दिसंबर, 2022 को राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस व पेट्रोलियम, डॉ. सुबोध अग्रवाल ने राज्य में कार्यरत सभी 14 संस्थाओं के प्रतिनिधियों की समीक्षा बैठक में बताया कि सीएनजी गैस वितरण के लिये 1187 स्टेशन स्थापित किये जाएंगे, वहीं 37824 इंच किमी. पाईपलाइन बिछाई जाएगी। - एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बैठक में बताया कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत 8 साल में 96 लाख पाईपलाइन से घरेलू गैस कनेक्शन उपलब्ध करा दिये जाएंगे। - उन्होंने राज्य की 33 ज़िलों में कार्यरत 14 गैस कंपनियों को तय समय सीमा में पाईपलाइन से गैस वितरण व्यवस्था और सीएनजी वितरण व्यवस्था को प्रभावी करने के निर्देश दिये। - उन्होंने बताया कि जयपुर के कालवाड़ रोड़, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और महेंद्र सेज में 10 हजार कनेक्शन मार्च 2023 तक जारी कर दिये जाएंगे। - एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में इस समय पाईपलाइन से एक लाख 877 घरेलू गैस कनेक्शन जारी किये जा चुके हैं। वहीं 221 सीएनजी स्टेशन की स्थापना के साथ ही 7767 इंच किमी. पाईपलाइन बिछाने का काम हो चुका है। - डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, भरतपुर, सिरोही, जालौर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, अलवर, जयपुर, धौलपुर, कोटा, रावतभाटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, बूंदी, अजमेर, पाली, जयसमंद में कार्य आरंभ हो चुका है। - एमडी आरएसजीएल रणवीर सिंह ने बताया कि राज्य में बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में एजएपी, अलवर (भिवाड़ी को छोड़कर), जयपुर (कोटा शहर को छोड़कर) बारां और चित्तौड़गढ़ (केवल रावतभाटा) में टोरेंट, भीलवाड़ा, बूंदी, रावतभाटा को छोड़कर चित्तौड़गढ़, उदयपुर और प्रतापगढ़ में अडानी गैस, धौलपुर में एस्सेल, अजमेर, पाली, राजसमंद में इंद्रप्रस्थ गैस, जालौर, सिरोही, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, में गुजरात गैस, कोटा में राजस्थान गैस, भरतपुर में गैल गैस, भिवाड़ी में हरियाणा गैस, बीकानेर, चुरु, में दिनेश इंजीनियरिंग, झुंझुनूं, सीकर, नागौर में इंडियन ऑयल, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर व टोंक में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, गंगानगर व हनुमानगढ़ में भारत पेट्रोलियम, झालावाड़ में मेघा इंजीनियिंरंग द्वारा आधारभूत संरचना, व पाईप लाइन से गैस वितरण और सीएनजी का कार्य किया जा रहा है। चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित बुंदेलखंड की 18 हज़ार 500 से अधिक महिला डेयरी किसानों की दुग्ध उत्पादक कंपनी मुक्ता ने अपना ब्रांड 'मुक्ता घी'विधिवत लॉन्च किया। - प्रदेश की महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी की यह बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश की 4 दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ प्रतिदिन 2 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन करती हैं, जिनमें अकेली मुक्ता कंपनी एक लाख लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन कर रही है। कंपनी का वार्षिक टर्न-ओवर 65 करोड़ रुपए से अधिक है। - इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एल.एम. बेलवाल ने कहा कि यह एक प्रेरणादायक स्टार्ट-अप है, जो महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रतीक है। - मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 4 लाख 12 हज़ार स्व-सहायता समूह गठित हैं, जिनसे 46 लाख ग्रामीण महिलाओं का आजीविका संवर्धन किया जा रहा है। - प्रदेश में 88 किसान उत्पादक कंपनियाँ भी बनाई गई हैं, जिनके एक लाख 79 हजार सदस्य प्रमुख रूप से कृषि आधारित गतिविधियाँ कर रहे हैं। इन कंपनियों का वर्ष 2022-23 में नवंबर माह तक 529 करोड़ रुपए टर्न ओवर हो चुका है। गत वर्ष अकेली मुक्ता महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी ने 65 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया, जिसमें 85 प्रतिशत बिक्री से आय का भुगतान सदस्यों को दूध के रूप में किया गया। - कंपनी द्वारा प्रत्येक गाँव में दूध की खरीदी के लिये उन्नत स्व-चलित दूध संग्रहण प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें दूध बेचने वाले सदस्य दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जाँच स्वयं कर सकते हैं। उन्हें मुद्रित पावती पर्ची भी मिलती है और उनके मोबाइल पर बेचे गए दूध का पूरा विवरण आ जाता है। - कंपनी का मोबाइल एप दूध के लेन-देन की जानकारी देता है। कंपनी पशुओं में दूध की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिये कृत्रिम गर्भाधान, खनिज मिश्रण, फर्टिलिटी केंप, अवेयरनेस जैसे कार्य कर रही है। - उल्लेखनीय है कि मुक्ता कंपनी ने इंडिया डेयरी अवार्ड-2021 में डेयरी एक्सटेंशन पुरस्कार भी प्राप्त किया है। कंपनी ने 4 साल की अल्प अवधि में यह सफलता पाई है। आगामी 2 वर्ष में प्रदेश में दुग्ध उत्पादक कंपनियों से 5 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य है। चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को झारखंड के गोड्डा में बने देश के अब तक के सबसे उत्कृष्ट थर्मल पावर प्लांट में से एक अडाणी पावर प्लांट से पहले चरण में 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया। पहले चरण में 800 मेगावाट का उत्पादन कर बांग्लादेश को बिजली पहुँचाया गया। इस पावर प्लांट से झारखंड सरकार को 25 प्रतिशत बिजली मिलेगी। - दो यूनिट वाले अडाणी पावर प्लांट के पहले फेज में 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन का ट्रायल दिसंबर में हो जाने के बाद बांग्लादेश को तय तिथि 16 दिसंबर को पावर ट्रांसमिट किया गया। दूसरे यूनिट के अप्रैल तक चालू होने की बात बताई जा रही है। उस समय कंपनी की ओर से कुल 1600 मेगावाट का उत्पादन शुरू हो जाएगा। - बांग्लादेश तक बिजली पहुँचाने के लिये गोड्डा से मुर्शिदाबाद तक 105 किमी. ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भी अडानी ने करवाया है। इसके अलावा पानी की ज़रुरत को पूरा करने के लिये साहिबगंज से गोड्डा तक वाटर पाइपलाइन बिछाई गई है। - गौरतलब है कि भारत सरकार और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के तहत यह पावर प्लांट बनाया गया है। यह अल्ट्रा सुपर थर्मल पावर प्लांट है। इस पावर प्लांट के निर्माण पर कुल 15000 करोड़ रुपए की लागत आई है। - अडाणी पावर प्लांट का काम साल 2016 में भूमि अधिग्रहण के साथ शुरू हुआ। मोतिया और आसपास के कई गाँव एवं मौजा की करीब 650 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया गया। इसके बाद 2018 में कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू किया। - इस प्लांट में नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया है। देश भर में लगे अब तक के लेटेस्ट चिमनी जिसकी ऊँचाई 275 मीटर है, यहाँ बनाया गया है। वहीं, पावर उत्पादन के साथ पर्यावरण की रक्षा के लिये इको फ्रेंडली एफडीजी एवं एससीआर केमिकल रिएक्शन का इस्तेमाल का यंत्र लगाया गया है। - एससीआर नामक तकनीक के माध्यम से गैसीय प्रदूषण को रोकने का काम किया गया है। साथ ही इएसपी यानी इलेक्ट्रो स्टेटिक प्रेसीप्रेटर सिस्टम का उपयोग किया गया है। इससे सूक्ष्म से सूक्ष्म कार्बन के उत्सर्जन को परिमार्जित कर प्रदूषण क्षमता को कम करता है। इस यंत्र और मशीन के इंस्टॉलेशन में कंपनी को करीब 2200 करोड़ रुपए अतिरिक्त राशि खर्च करना पड़ा है। - अडाणी संयंत्र में उच्च तापीय एवं क्वालिटी के बिटुमिनस कोयले का प्रयोग किया जा रहा है। यह कोयला अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण बताया जा रहा है। चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को विधानसभा स्थित कार्यालय में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड की 35वीं बैठक में किसानों के हित में कई फैसले लिये गए। कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना में किसान की मृत्यु होने पर मिलने वाली मुआवज़ा राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दिया गया है। - इसके अलावा दुर्घटना से दोनों हाथ या दोनों पैर या फिर एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग होने पर मुआवज़े को 60 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख और एक अंग से दिव्यांग होने पर मुआवज़े को 30 हज़ार से बढ़ाकर 50 हज़ार रुपए करने का निर्णय लिया गया। - व्यत्तिगत दुर्घटना की पात्रता में 18 से 60 वर्ष की आयु की शर्त को समाप्त किया गया है, जिससे अब दुर्घटना होने पर सभी किसानों को मुआवज़ा दिया जाएगा। - कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि बोर्ड के माध्यम से किसानों के मेधावी बच्चों के लिये छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई है। इस योजना में पात्रता के लिये आय सीमा दो लाख रुपए रखी गई थी। इसे बढ़ाकर तीन लाख रुपए प्रति वर्ष किया गया है। चर्चा में क्यों? 16 दिसंबर, 2022 को विजय दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के वीरता चक्र विजेता सैनिक और वीर नारियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा देने की घोषणा की। - मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रदेश में शहीद द्वार और स्मारकों का निर्माण कार्य अब सैनिक कल्याण विभाग के जरिये होगा। पहले यह संस्कृति विभाग के माध्यम से होता था। - उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 के युद्ध में उत्तराखंड के 255 जवानों ने भारत माँ की रक्षा के लिये प्राणों का बलिदान दिया था। युद्ध में अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देने वाले प्रदेश के 74 सैनिकों को विभिन्न वीरता पदकों से नवाज़ा गया था। - मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य परिवारों के लिये राज्य सरकार विशेष योजनाएँ बना रही है ताकि एक सैनिक को युद्ध लड़ते समय परिवार की चिंता न हो। सैनिकों या उनके आश्रितों को मिलने वाली अनुदान राशि बढ़ाने से लेकर शहीदों के आश्रितों को राज्य सरकार की नौकरियों में वरीयता के आधार पर नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है। - सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में 1727 सैनिकों और सेना के अधिकारियों को वीरता चक्र मिला है। इनमें एक परमवीर चक्र, छह अशोक चक्र, 13 महावीर चक्र, 32 कीर्ति चक्र, चार उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 102 वीर चक्र, 188 शौर्य चक्र, 36 युद्ध सेवा मेडल, 847 सेना मेडल (वीरता), 198 मेंशन इन डिस्पैच, 70 सेना मेडल, 45 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 56 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 129 विशिष्ट सेवा मेडल विजेता शामिल हैं। वहीं, प्रदेश में वीर नारियों की संख्या वर्तमान में करीब 1100 है। - गौरतलब है कि विजय दिवस भारतीय सेना के वीर जवानों के अदम्य साहस, शौर्य का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1971 में पाकिस्तान के 93,000 से अधिक सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी सेना का यह सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था।
चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को छज्जूबाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ साहित्यकार यादवेंद्र, फिल्मोत्सव की संयोजक प्रीति प्रभा और हिरावल के संयोजक संतोष झा ने बताया कि तेरहवाँ पटना फिल्मोत्सव उन्नीस दिसंबर से इक्कीस दिसंबर तक पटना में मनाया जाएगा। - कालिदास रंगालय में आयोजित होने वाले इस फिल्मोत्सव में एक दर्जन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिन्हें दर्शक निःशुल्क देख सकेंगे। - फिल्मोत्सव में मुंबई, केरल, कोलकाता, दिल्ली, अलीगढ़ और राँची से कुल आठ फिल्मकार अपनी फिल्मों के साथ आ रहे हैं। एक सेक्शन स्थानीय युवा फिल्मकारों का भी होगा। - तेरहवें फिल्मोत्सव का उद्घाटन हिन्दी के वरिष्ठ कवि और आईआईटी, हैदराबाद में प्रोफेसर हरजिंदर सिंह लाल्टू करेंगे। पहले दिन दो साहित्यिक कृतियों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें संवदिया और लौट रही है बेला एक्का शामिल हैं। फिल्म के प्रदर्शन के बाद उपस्थित निर्देशकों के साथ दर्शकों के संवाद का भी सत्र होगा। - फिल्मोत्सव में दिखाई जानेवाली आखिरी फिल्म "मट्टो की साइकिल' होगी। जाने-माने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है। इस फिल्म का प्रीमियर बुसान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में हुआ था। इसके निर्देशक मो. गनी भी फिल्मोत्सव में शिरकत करेंगे। चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण को लेकर नया गाइडलाइन जारी किया है। नये नियम के मुताबिक अब सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को छः सौ ग्यारह प्रकार की दवाएँ मुफ्त में मिलेंगी। - नयी-नयी बीमारियाँ सामने आने के बाद सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण को लेकर नया गाइडलाइन जारी किया है। इसके तहत अब मरीजों को निजी दुकानों से दवा नहीं खरीदनी पड़ेगी। - सरकार की ओर से जारी नये संकल्प में मेडिकल कॉलेज से लेकर ज़िला अस्पताल व स्वास्थ्य उपकेंद्र तक के अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी में कुल छः सौ ग्यारह प्रकार की दवाओं के वितरण करने का निर्णय लिया गया है। चर्चा में क्यों? पंद्रह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस व पेट्रोलियम, डॉ. सुबोध अग्रवाल ने राज्य में कार्यरत सभी चौदह संस्थाओं के प्रतिनिधियों की समीक्षा बैठक में बताया कि सीएनजी गैस वितरण के लिये एक हज़ार एक सौ सत्तासी स्टेशन स्थापित किये जाएंगे, वहीं सैंतीस हज़ार आठ सौ चौबीस इंच किमी. पाईपलाइन बिछाई जाएगी। - एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बैठक में बताया कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत आठ साल में छियानवे लाख पाईपलाइन से घरेलू गैस कनेक्शन उपलब्ध करा दिये जाएंगे। - उन्होंने राज्य की तैंतीस ज़िलों में कार्यरत चौदह गैस कंपनियों को तय समय सीमा में पाईपलाइन से गैस वितरण व्यवस्था और सीएनजी वितरण व्यवस्था को प्रभावी करने के निर्देश दिये। - उन्होंने बताया कि जयपुर के कालवाड़ रोड़, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर और महेंद्र सेज में दस हजार कनेक्शन मार्च दो हज़ार तेईस तक जारी कर दिये जाएंगे। - एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में इस समय पाईपलाइन से एक लाख आठ सौ सतहत्तर घरेलू गैस कनेक्शन जारी किये जा चुके हैं। वहीं दो सौ इक्कीस सीएनजी स्टेशन की स्थापना के साथ ही सात हज़ार सात सौ सरसठ इंच किमी. पाईपलाइन बिछाने का काम हो चुका है। - डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, भरतपुर, सिरोही, जालौर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, अलवर, जयपुर, धौलपुर, कोटा, रावतभाटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, बूंदी, अजमेर, पाली, जयसमंद में कार्य आरंभ हो चुका है। - एमडी आरएसजीएल रणवीर सिंह ने बताया कि राज्य में बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में एजएपी, अलवर , जयपुर बारां और चित्तौड़गढ़ में टोरेंट, भीलवाड़ा, बूंदी, रावतभाटा को छोड़कर चित्तौड़गढ़, उदयपुर और प्रतापगढ़ में अडानी गैस, धौलपुर में एस्सेल, अजमेर, पाली, राजसमंद में इंद्रप्रस्थ गैस, जालौर, सिरोही, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, में गुजरात गैस, कोटा में राजस्थान गैस, भरतपुर में गैल गैस, भिवाड़ी में हरियाणा गैस, बीकानेर, चुरु, में दिनेश इंजीनियरिंग, झुंझुनूं, सीकर, नागौर में इंडियन ऑयल, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर व टोंक में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, गंगानगर व हनुमानगढ़ में भारत पेट्रोलियम, झालावाड़ में मेघा इंजीनियिंरंग द्वारा आधारभूत संरचना, व पाईप लाइन से गैस वितरण और सीएनजी का कार्य किया जा रहा है। चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित बुंदेलखंड की अट्ठारह हज़ार पाँच सौ से अधिक महिला डेयरी किसानों की दुग्ध उत्पादक कंपनी मुक्ता ने अपना ब्रांड 'मुक्ता घी'विधिवत लॉन्च किया। - प्रदेश की महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी की यह बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश की चार दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ प्रतिदिन दो लाख लीटर दुग्ध उत्पादन करती हैं, जिनमें अकेली मुक्ता कंपनी एक लाख लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन कर रही है। कंपनी का वार्षिक टर्न-ओवर पैंसठ करोड़ रुपए से अधिक है। - इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एल.एम. बेलवाल ने कहा कि यह एक प्रेरणादायक स्टार्ट-अप है, जो महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रतीक है। - मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में चार लाख बारह हज़ार स्व-सहायता समूह गठित हैं, जिनसे छियालीस लाख ग्रामीण महिलाओं का आजीविका संवर्धन किया जा रहा है। - प्रदेश में अठासी किसान उत्पादक कंपनियाँ भी बनाई गई हैं, जिनके एक लाख उन्यासी हजार सदस्य प्रमुख रूप से कृषि आधारित गतिविधियाँ कर रहे हैं। इन कंपनियों का वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में नवंबर माह तक पाँच सौ उनतीस करोड़ रुपए टर्न ओवर हो चुका है। गत वर्ष अकेली मुक्ता महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी ने पैंसठ करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया, जिसमें पचासी प्रतिशत बिक्री से आय का भुगतान सदस्यों को दूध के रूप में किया गया। - कंपनी द्वारा प्रत्येक गाँव में दूध की खरीदी के लिये उन्नत स्व-चलित दूध संग्रहण प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें दूध बेचने वाले सदस्य दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जाँच स्वयं कर सकते हैं। उन्हें मुद्रित पावती पर्ची भी मिलती है और उनके मोबाइल पर बेचे गए दूध का पूरा विवरण आ जाता है। - कंपनी का मोबाइल एप दूध के लेन-देन की जानकारी देता है। कंपनी पशुओं में दूध की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिये कृत्रिम गर्भाधान, खनिज मिश्रण, फर्टिलिटी केंप, अवेयरनेस जैसे कार्य कर रही है। - उल्लेखनीय है कि मुक्ता कंपनी ने इंडिया डेयरी अवार्ड-दो हज़ार इक्कीस में डेयरी एक्सटेंशन पुरस्कार भी प्राप्त किया है। कंपनी ने चार साल की अल्प अवधि में यह सफलता पाई है। आगामी दो वर्ष में प्रदेश में दुग्ध उत्पादक कंपनियों से पाँच लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य है। चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को झारखंड के गोड्डा में बने देश के अब तक के सबसे उत्कृष्ट थर्मल पावर प्लांट में से एक अडाणी पावर प्लांट से पहले चरण में आठ सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया। पहले चरण में आठ सौ मेगावाट का उत्पादन कर बांग्लादेश को बिजली पहुँचाया गया। इस पावर प्लांट से झारखंड सरकार को पच्चीस प्रतिशत बिजली मिलेगी। - दो यूनिट वाले अडाणी पावर प्लांट के पहले फेज में आठ सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन का ट्रायल दिसंबर में हो जाने के बाद बांग्लादेश को तय तिथि सोलह दिसंबर को पावर ट्रांसमिट किया गया। दूसरे यूनिट के अप्रैल तक चालू होने की बात बताई जा रही है। उस समय कंपनी की ओर से कुल एक हज़ार छः सौ मेगावाट का उत्पादन शुरू हो जाएगा। - बांग्लादेश तक बिजली पहुँचाने के लिये गोड्डा से मुर्शिदाबाद तक एक सौ पाँच किमी. ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण भी अडानी ने करवाया है। इसके अलावा पानी की ज़रुरत को पूरा करने के लिये साहिबगंज से गोड्डा तक वाटर पाइपलाइन बिछाई गई है। - गौरतलब है कि भारत सरकार और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के तहत यह पावर प्लांट बनाया गया है। यह अल्ट्रा सुपर थर्मल पावर प्लांट है। इस पावर प्लांट के निर्माण पर कुल पंद्रह हज़ार करोड़ रुपए की लागत आई है। - अडाणी पावर प्लांट का काम साल दो हज़ार सोलह में भूमि अधिग्रहण के साथ शुरू हुआ। मोतिया और आसपास के कई गाँव एवं मौजा की करीब छः सौ पचास एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया गया। इसके बाद दो हज़ार अट्ठारह में कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू किया। - इस प्लांट में नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया है। देश भर में लगे अब तक के लेटेस्ट चिमनी जिसकी ऊँचाई दो सौ पचहत्तर मीटर है, यहाँ बनाया गया है। वहीं, पावर उत्पादन के साथ पर्यावरण की रक्षा के लिये इको फ्रेंडली एफडीजी एवं एससीआर केमिकल रिएक्शन का इस्तेमाल का यंत्र लगाया गया है। - एससीआर नामक तकनीक के माध्यम से गैसीय प्रदूषण को रोकने का काम किया गया है। साथ ही इएसपी यानी इलेक्ट्रो स्टेटिक प्रेसीप्रेटर सिस्टम का उपयोग किया गया है। इससे सूक्ष्म से सूक्ष्म कार्बन के उत्सर्जन को परिमार्जित कर प्रदूषण क्षमता को कम करता है। इस यंत्र और मशीन के इंस्टॉलेशन में कंपनी को करीब दो हज़ार दो सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त राशि खर्च करना पड़ा है। - अडाणी संयंत्र में उच्च तापीय एवं क्वालिटी के बिटुमिनस कोयले का प्रयोग किया जा रहा है। यह कोयला अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण बताया जा रहा है। चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को विधानसभा स्थित कार्यालय में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड की पैंतीसवीं बैठक में किसानों के हित में कई फैसले लिये गए। कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना में किसान की मृत्यु होने पर मिलने वाली मुआवज़ा राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दिया गया है। - इसके अलावा दुर्घटना से दोनों हाथ या दोनों पैर या फिर एक हाथ और एक पैर से दिव्यांग होने पर मुआवज़े को साठ हज़ार से बढ़ाकर एक लाख और एक अंग से दिव्यांग होने पर मुआवज़े को तीस हज़ार से बढ़ाकर पचास हज़ार रुपए करने का निर्णय लिया गया। - व्यत्तिगत दुर्घटना की पात्रता में अट्ठारह से साठ वर्ष की आयु की शर्त को समाप्त किया गया है, जिससे अब दुर्घटना होने पर सभी किसानों को मुआवज़ा दिया जाएगा। - कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि बोर्ड के माध्यम से किसानों के मेधावी बच्चों के लिये छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई है। इस योजना में पात्रता के लिये आय सीमा दो लाख रुपए रखी गई थी। इसे बढ़ाकर तीन लाख रुपए प्रति वर्ष किया गया है। चर्चा में क्यों? सोलह दिसंबर, दो हज़ार बाईस को विजय दिवस पर गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के वीरता चक्र विजेता सैनिक और वीर नारियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा देने की घोषणा की। - मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रदेश में शहीद द्वार और स्मारकों का निर्माण कार्य अब सैनिक कल्याण विभाग के जरिये होगा। पहले यह संस्कृति विभाग के माध्यम से होता था। - उन्होंने कहा कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के युद्ध में उत्तराखंड के दो सौ पचपन जवानों ने भारत माँ की रक्षा के लिये प्राणों का बलिदान दिया था। युद्ध में अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देने वाले प्रदेश के चौहत्तर सैनिकों को विभिन्न वीरता पदकों से नवाज़ा गया था। - मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य परिवारों के लिये राज्य सरकार विशेष योजनाएँ बना रही है ताकि एक सैनिक को युद्ध लड़ते समय परिवार की चिंता न हो। सैनिकों या उनके आश्रितों को मिलने वाली अनुदान राशि बढ़ाने से लेकर शहीदों के आश्रितों को राज्य सरकार की नौकरियों में वरीयता के आधार पर नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है। - सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तराखंड में एक हज़ार सात सौ सत्ताईस सैनिकों और सेना के अधिकारियों को वीरता चक्र मिला है। इनमें एक परमवीर चक्र, छह अशोक चक्र, तेरह महावीर चक्र, बत्तीस कीर्ति चक्र, चार उत्तम युद्ध सेवा मेडल, एक सौ दो वीर चक्र, एक सौ अठासी शौर्य चक्र, छत्तीस युद्ध सेवा मेडल, आठ सौ सैंतालीस सेना मेडल , एक सौ अट्ठानवे मेंशन इन डिस्पैच, सत्तर सेना मेडल, पैंतालीस परम विशिष्ट सेवा मेडल, छप्पन अति विशिष्ट सेवा मेडल, एक सौ उनतीस विशिष्ट सेवा मेडल विजेता शामिल हैं। वहीं, प्रदेश में वीर नारियों की संख्या वर्तमान में करीब एक हज़ार एक सौ है। - गौरतलब है कि विजय दिवस भारतीय सेना के वीर जवानों के अदम्य साहस, शौर्य का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में पाकिस्तान के तिरानवे,शून्य से अधिक सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी सेना का यह सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था।
6449 Written Answers AGRAHAYANA 29, 1882 ( SAKA) Written Answers 6450 (ख) ये जगहें सामुदायिक परियोजना केन्द्रों और कुछ अगम्य क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठी हो जाने के बाद चुनी जायेंगी । (ग) सहायक अनुदान अभी हाल ही में स्वीकार किये गये हैं, और अभी से अधिक उन्नति की आशा करना नितांत समयपूर्व होगा । तदापि सभी कामों के ३१ मार्च १९६१ से पहले सम्पूर्ण होने की सम्भावना है । (ग) (१) १२ यूनिट तैयार हो जाने और उनकी आज़माइश हो जाने के बाद २०० पवन चक्कियां बनाने का काम हाथ में लिया जायेगा । (२) विंड इलेक्ट्रिक जेनरेटरों की डिज़ाइन तैयार करने और उन्हें बनाने की संभावना पर विचार हो रहा है । (३) राज्य सरकारों ने जो जगहें बताई हैं, उन में पवन चक्कियां लगाने की संभावना का पता लगाने के लिये, उनका सर्वेक्षण किया जायेगा । १९६१ की गर्मी में इस तरह का एक सर्वेक्षण लाहौल और स्पिती में करने का इरादा है । २०७४. श्री भक्त दर्शन : क्या प्रतिरक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : ( क ) सन् १९६०-६१ के वित्तीय वर्ष में लैंसडौन, चकरौता, लंढौर, नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत, देहरादून और क्लीमेंट टाउन के छावनी बोर्डों ने किन-किन विकास कार्यों के लिये कितनी-कितनी वित्तीय सहायता की मांग की थी; ( ख ) उन में से प्रत्येक छावनी बोर्ड के प्रत्येक विकास कार्य के लिये अन्तिम रूप से कितना अनुदान देना स्वीकार किया गया है; ( ग ) इन विकास कार्यों के निर्माण में अब तक क्या प्रगति हुई है; और (घ) उपरोक्त छावनी बोर्डों को कितनी कितनी वित्तीय सहायता दी जायेगी ? प्रतिरक्षा उपमंत्री (सरदार मजीठिया) : ( क ) से (घ ). दो विवरण संलग्न हैं, जिन में आवश्यक सूचना दी गई है । [देखिए परिशिष्ट ३, अनुबन्ध संख्या ८३] Films of Music Education Will the Minister of Education be pleased to state: (a) whether Government have collected and supplied to the International Music Council, Paris, films on music education prepared in our country; and (b) if so, the names of such films? The Minister of Education (Dr. K. L. Shrimali ) : (a) No, Sir. (b) Does not arise. Education of Tribal Children in Mother Tongue Will the Minister of Education be pleased to refer to the reply given to Unstarred Question No. 414 on the 8th August, 1960 and state: (a) the names of States where no steps have yet been taken to teach the Tribal children in their mother tongue; and (b) whether it is a fact that Tribal children speaking one language but residing in different States are taught in the schools in their mother tongue in different scripts, such as the Santhal children in Bihar in Hindi scripts, and in Bengal in Bengali script? The Minister of Education (Dr. K. L. Shrimali) : (a) and (b). The
छः हज़ार चार सौ उनचास Written Answers AGRAHAYANA उनतीस, एक हज़ार आठ सौ बयासी Written Answers छः हज़ार चार सौ पचास ये जगहें सामुदायिक परियोजना केन्द्रों और कुछ अगम्य क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठी हो जाने के बाद चुनी जायेंगी । सहायक अनुदान अभी हाल ही में स्वीकार किये गये हैं, और अभी से अधिक उन्नति की आशा करना नितांत समयपूर्व होगा । तदापि सभी कामों के इकतीस मार्च एक हज़ार नौ सौ इकसठ से पहले सम्पूर्ण होने की सम्भावना है । बारह यूनिट तैयार हो जाने और उनकी आज़माइश हो जाने के बाद दो सौ पवन चक्कियां बनाने का काम हाथ में लिया जायेगा । विंड इलेक्ट्रिक जेनरेटरों की डिज़ाइन तैयार करने और उन्हें बनाने की संभावना पर विचार हो रहा है । राज्य सरकारों ने जो जगहें बताई हैं, उन में पवन चक्कियां लगाने की संभावना का पता लगाने के लिये, उनका सर्वेक्षण किया जायेगा । एक हज़ार नौ सौ इकसठ की गर्मी में इस तरह का एक सर्वेक्षण लाहौल और स्पिती में करने का इरादा है । दो हज़ार चौहत्तर. श्री भक्त दर्शन : क्या प्रतिरक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : सन् एक हज़ार नौ सौ साठ-इकसठ के वित्तीय वर्ष में लैंसडौन, चकरौता, लंढौर, नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत, देहरादून और क्लीमेंट टाउन के छावनी बोर्डों ने किन-किन विकास कार्यों के लिये कितनी-कितनी वित्तीय सहायता की मांग की थी; उन में से प्रत्येक छावनी बोर्ड के प्रत्येक विकास कार्य के लिये अन्तिम रूप से कितना अनुदान देना स्वीकार किया गया है; इन विकास कार्यों के निर्माण में अब तक क्या प्रगति हुई है; और उपरोक्त छावनी बोर्डों को कितनी कितनी वित्तीय सहायता दी जायेगी ? प्रतिरक्षा उपमंत्री : से . दो विवरण संलग्न हैं, जिन में आवश्यक सूचना दी गई है । [देखिए परिशिष्ट तीन, अनुबन्ध संख्या तिरासी] Films of Music Education Will the Minister of Education be pleased to state: whether Government have collected and supplied to the International Music Council, Paris, films on music education prepared in our country; and if so, the names of such films? The Minister of Education : No, Sir. Does not arise. Education of Tribal Children in Mother Tongue Will the Minister of Education be pleased to refer to the reply given to Unstarred Question No. चार सौ चौदह on the आठ अगस्तust, एक हज़ार नौ सौ साठ and state: the names of States where no steps have yet been taken to teach the Tribal children in their mother tongue; and whether it is a fact that Tribal children speaking one language but residing in different States are taught in the schools in their mother tongue in different scripts, such as the Santhal children in Bihar in Hindi scripts, and in Bengal in Bengali script? The Minister of Education : and . The
Posted On: नमस्ते, ओम शांति, कार्यक्रम में हमारे साथ उपस्थित लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी, राजस्थान के गवर्नर श्री कलराज मिश्रा जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्रीमान अशोक गहलोत जी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल जी, केंद्रीय मंत्री-मंडल में मेरे साथी श्री किशन रेड्डी जी, भूपेंदर यादव जी, अर्जुन राम मेघवाल जी, पुरषोत्तम रुपाला जी, और श्री कैलाश चौधरी जी, राजस्थान विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री गुलाबचंद कटारिया जी, ब्रह्मकुमारीज़ के executive सेक्रेटरी राजयोगी मृत्युंजय जी, राजयोगिनी बहन मोहिनी जी, बहन चंद्रिका जी, ब्रह्मकुमारीज़ की अन्य सभी बहनें, देवियों और सज्जनों और यहां उपस्थित सभी साधक-साधिकाएँ! कुछ स्थल ऐसे होते हैं, जिनमें अपनी एक अलग चेतना होती है, ऊर्जा का अपना ही एक अलग प्रवाह होता है! ये ऊर्जा उन महान व्यक्तित्वों की होती है, जिनकी तपस्या से वन, पर्वत, पहाड़ भी जाग्रत हो उठते हैं, मानवीय प्रेरणाओं का केंद्र बन जाते हैं। माउंट आबू की आभा भी दादा लेखराज और उन जैसे अनेकों सिद्ध व्यक्तित्वों की वजह से निरंतर बढ़ती रही है। आज इस पवित्र स्थान से ब्रह्मकुमारी संस्था के द्वारा आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर, एक बहुत बड़े अभियान का प्रारंभ हो रहा है। इस कार्यक्रम में स्वर्णिम भारत के लिए भावना भी है, साधना भी है। इसमें देश के लिए प्रेरणा भी है, ब्रह्मकुमारियों के प्रयास भी हैं। मैं देश के संकल्पों के साथ, देश के सपनों के साथ निरंतर जुड़े रहने के लिए ब्रह्मकुमारी परिवार का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। आज के इस कार्यक्रम में दादी जानकी, राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जी सशरीर हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं। मुझ पर उनका बहुत स्नेह था। आज के इस आयोजन पर मैं उनका आशीर्वाद भी महसूस कर रहा हूं। जब संकल्प के साथ साधना जुड़ जाती है, जब मानव मात्र के साथ हमारा ममभाव जुड़ जाता है, अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए 'इदं न मम्' यह भाव जागने लगता है, तो समझिए, हमारे संकल्पों के जरिए एक नए कालखंड का जन्म होने वाला है, एक नया सवेरा होने वाला है। सेवा और त्याग का यही अमृतभाव आज अमृत महोत्सव में नए भारत के लिए उमड़ रहा है। इसी त्याग और कर्तव्यभाव से करोड़ों देशवासी आज स्वर्णिम भारत की नींव रख रहे हैं। हमारे और राष्ट्र के सपने अलग-अलग नहीं हैं, हमारी निजी और राष्ट्रीय सफलताएँ अलग-अलग नहीं हैं। राष्ट्र की प्रगति में ही हमारी प्रगति है। हमसे ही राष्ट्र का अस्तित्व है, और राष्ट्र से ही हमारा अस्तित्व है। ये भाव, ये बोध नए भारत के निर्माण में हम भारतवासियों की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है। आज देश जो कुछ कर रहा है उसमें सबका प्रयास शामिल है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास' ये सब देश का मूल मंत्र बन रहा है। आज हम एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जिसमें भेदभाव की कोई जगह न हो, एक ऐसा समाज बना रहे हैं, जो समानता औऱ सामाजिक न्याय की बुनियाद पर मजबूती से खड़ा हो, हम एक ऐसे भारत को उभरते देख रहे हैं, जिसकी सोच और अप्रोच नई है, जिसके निर्णय प्रगतिशील हैं। भारत की सबसे बड़ी ताकत ये है कि कैसा भी समय आए, कितना भी अंधेरा छाए, भारत अपने मूल स्वभाव को बनाए रखता है। हमारा युगों-युगों का इतिहास इस बात साक्षी है। दुनिया जब अंधकार के गहरे दौर में थी, महिलाओं को लेकर पुरानी सोच में जकड़ी थी, तब भारत मातृशक्ति की पूजा, देवी के रूप में करता था। हमारे यहाँ गार्गी, मैत्रेयी, अनुसूया, अरुंधति और मदालसा जैसी विदुषियाँ समाज को ज्ञान देती थीं। कठिनाइयों से भरे मध्यकाल में भी इस देश में पन्नाधाय और मीराबाई जैसी महान नारियां हुईं। और अमृत महोत्सव में देश जिस स्वाधीनता संग्राम के इतिहास को याद कर रहा है, उसमें भी कितनी ही महिलाओं ने अपने बलिदान दिये हैं। कित्तूर की रानी चेनम्मा, मतंगिनी हाजरा, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना झलकारी बाई से लेकर सामाजिक क्षेत्र में अहल्याबाई होल्कर और सावित्रीबाई फुले तक, इन देवियों ने भारत की पहचान बनाए रखी। आज देश लाखों स्वाधीनता सेनानियों के साथ आज़ादी की लड़ाई में नारीशक्ति के इस योगदान को याद कर रहा है, और उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। और इसीलिए, आज सैनिक स्कूलों में पढ़ने का बेटियों का सपना पूरा हो रहा है, अब देश की कोई भी बेटी, राष्ट्र-रक्षा के लिए सेना में जाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ उठा सकती है, महिलाओं का जीवन और करियर दोनों एक साथ चलें, इसके लिए मातृ अवकाश को बढ़ाने जैसे फैसले भी किए गए हैं। देश के लोकतन्त्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। 2019 के चुनाव में हमने देखा कि किस तरह पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। आज देश की सरकार में बड़ी बड़ी जिम्मेदारियाँ महिला मंत्री संभाल रही हैं। और सबसे ज्यादा गर्व की बात है कि अब समाज इस बदलाव का नेतृत्व खुद कर रहा है। हाल के आंकड़ों से पता चला है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की सफलता से, वर्षों बाद देश में स्त्री-पुरुष का अनुपात भी बेहतर हुआ है। ये बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि नया भारत कैसा होगा, कितना सामर्थ्यशाली होगा। आप सभी जानते हैं कि हमारे ऋषियों ने उपनिषदों में 'तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय' की प्रार्थना की है। यानी, हम अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ें। मृत्यु से, परेशानियों से अमृत की ओर बढ़ें। अमृत और अमरत्व का रास्ता बिना ज्ञान के प्रकाशित नहीं होता। इसलिए, अमृतकाल का ये समय हमारे ज्ञान, शोध और इनोवेशन का समय है। हमें एक ऐसा भारत बनाना है जिसकी जड़ें प्राचीन परम्पराओं और विरासत से जुड़ी होंगी, और जिसका विस्तार आधुनिकता के आकाश में अनंत तक होगा। हमें अपनी संस्कृति, अपनी सभ्यता, अपने संस्कारों को जीवंत रखना है, अपनी आध्यात्मिकता को, अपनी विविधता को संरक्षित और संवर्धित करना है, और साथ ही, टेक्नोलॉजी, इनफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ की व्यवस्थाओं को निरंतर आधुनिक भी बनाना है। देश के इन प्रयासों में आप सभी की, ब्रह्मकुमारी जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं की बड़ी भूमिका है। मुझे खुशी है कि आप आध्यात्म के साथ साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में कई बड़े-बड़े काम कर रहे हैं। और आज जिस अभियान को आरंभ कर रहे हैं, आप उसे ही आगे बढ़ा रहे हैं। अमृत महोत्सव के लिए आपने कई लक्ष्य भी तय किए हैं। आपके ये प्रयास देश को अवश्य एक नई ऊर्जा देंगे, नई शक्ति देंगे। आज देश, किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए organic फ़ार्मिंग और नैचुरल फ़ार्मिंग की दिशा में प्रयास कर रहा है। खान-पान आहार की शुद्धता को लेकर हमारी ब्रह्मकुमारी बहनें समाज को लगातार जागरूक करती रहती हैं। लेकिन गुणवत्तापूर्ण आहार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन भी जरूरी है। इसलिए, ब्रह्मकुमारी नैचुरल फ़ार्मिंग को promote करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन सकती हैं। कुछ गांवों को प्रेरित करके ऐसे मॉडल खड़े किए जा सकते हैं। इसी तरह, क्लीन एनर्जी के और पर्यावरण के क्षेत्र में भी दुनिया को भारत से बहुत अपेक्षाएँ हैं। आज क्लीन एनर्जी के कई विकल्प विकसित हो रहे हैं। इसे लेकर भी जनजागरण के लिए बड़े अभियान की जरूरत है। ब्रह्मकुमारीज ने तो सोलर पावर के क्षेत्र में, सबके सामने एक उदाहरण रखा है। कितने ही समय से आपके आश्रम की रसोई में सोलर पावर से खाना बनाया जा रहा है। सोलर पावर का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोग करें, इसमें भी आपका बहुत सहयोग हो सकता है। इसी तरह आप सभी आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी गति दे सकते हैं। वोकल फॉर लोकल, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर, इस अभियान में मदद हो सकती है। अमृतकाल का ये समय, सोते हुए सपने देखने का नहीं बल्कि जागृत होकर अपने संकल्प पूरे करने का है। आने वाले 25 साल, परिश्रम की पराकाष्ठा, त्याग, तप-तपस्या के 25 वर्ष हैं। सैकड़ों वर्षों की गुलामी में हमारे समाज ने जो गंवाया है, ये 25 वर्ष का कालखंड, उसे दोबारा प्राप्त करने का है। इसलिए आजादी के इस अमृत महोत्सव में हमारा ध्यान भविष्य पर ही केंद्रित होना चाहिए। हमारे समाज में एक अद्भुत सामर्थ्य है। ये एक ऐसा समाज है जिसमें चिर पुरातन और नित्य नूतन व्यवस्था है। हालांकि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि समय के साथ कुछ बुराइयां व्यक्ति में भी, समाज में भी और देश में भी प्रवेश कर जाती हैं। जो लोग जागृत रहते हुए इन बुराइयों को जान लेते हैं, वो इन बुराइयों से बचने में सफल हो जाते हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में हर लक्ष्य प्राप्त कर पाते हैं। हमारे समाज की विशेषता है कि इसमें विशालता भी है, विविधता भी है और हजारों साल की यात्रा का अनुभव भी है। इसलिए हमारे समाज में, बदलते हुए युग के साथ अपने आप को ढालने की एक अलग ही शक्ति है, एक inner strength है। हमारे समाज की सबसे बड़ी ताकत ये है कि समाज के भीतर से ही समय-समय पर इसे सुधारने वाले पैदा होते हैं और वो समाज में व्याप्त बुराइयों पर कुठाराघात करते हैं। हमने ये भी देखा है कि समाज सुधार के प्रारंभिक वर्षों में अक्सर ऐसे लोगों को विरोध का भी सामना करना पड़ता है, कई बार तिरस्कार भी सहना पड़ता है। लेकिन ऐसे सिद्ध लोग, समाज सुधार के काम से पीछे नहीं हटते, वो अडिग रहते हैं। समय के साथ समाज भी उनको पहचानता है, उनको मान सम्मान देता है और उनकी सीखों को आत्मसात भी करता है। इसलिए साथियों, हर युग के कालखंड के मूल्यों के आधार पर समाज को सजग रखना, समाज को दोषमुक्त रखना, ये बहुत अनिवार्य है और निरंतर करने वाली प्रक्रिया है। उस समय की जो भी पीढ़ी होती है, उसे ये दायित्व निभाना ही होता है। व्यक्तिगत तौर पर हम लोग, संगठन के तौर पर भी ब्रह्मकुमारी जैसे लाखों संगठन, ये काम कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी मानना होगा कि आजादी के बाद के 75 वर्षों में, हमारे समाज में, हमारे राष्ट्र में, एक बुराई सबके भीतर घर कर गई है। ये बुराई है, अपने कर्तव्यों से विमुख होना, अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि ना रखना। बीते 75 वर्षों में हम सिर्फ अधिकारों की बात करते रहे, अधिकारों के लिए झगड़ते रहे, जूझते रहे, समय भी खपाते रहे। अधिकार की बात, कुछ हद तक, कुछ समय के लिए, किसी एक परिस्थिति में सही हो सकती है लेकिन अपने कर्तव्यों को पूरी तरह भूल जाना, इस बात ने भारत को कमजोर रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। भारत ने अपना बहुत बड़ा समय इसलिए गंवाया है क्योंकि कर्तव्यों को प्राथमिकता नहीं दी गई। इन 75 वर्षों में कर्तव्यों को दूर रखने की वजह से जो खाई पैदा हुई है, सिर्फ अधिकार की बात करने की वजह से समाज में जो कमी आई है, उसकी भरपाई हम मिल करके आने वाले 25 वर्ष में, कर्तव्य की साधना करके पूरी कर सकते हैं। ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं आने वाले 25 वर्ष के लिए, एक मंत्र बनाकर भारत के जन-जन को कर्तव्य के लिए जागरूक करके बहुत बड़ा बदलाव ला सकती हैं। मेरा आग्रह है कि ब्रह्मकुमारी और आप जैसी तमाम सामाजिक संस्थाएं इस एक मंत्र पर जरूर काम करें और वो है देश के नागरिकों में कर्तव्य भावना का विस्तार। आप सभी अपनी शक्ति और समय जन-जन में कर्तव्य बोध जागृत करने पर जरूर लगाएं। और ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं, जिस तरह दशकों से कर्तव्य के पथ पर चल रही हैं, आप लोग ये काम कर सकते हैं। आप लोग कर्तव्य में रचे बसे, कर्तव्य का पालन करने वाले लोग हैं। इसलिए, जिस भावना के साथ आप अपनी संस्था में काम करते हैं, उस कर्तव्य भावना का विस्तार समाज में हो, देश में हो, देश के लोगों में हो, ये आजादी के इस अमृत महोत्सव पर आपका देश को सबसे उत्तम उपहार होगा। आप लोगों ने एक कहानी जरूर सुनी होगी। एक कमरे में अंधेरा था तो उस अंधेरे को हटाने के लिए लोग अपने-अपने तरीके से अलग-अलग काम कर रहे थे। कोई कुछ कर रहा था, कोई कुछ कर रहा था। लेकिन किसी समझदार ने जब एक छोटा सा दीया जला दिया, तो अंधकार तुरंत दूर हो गया। वैसी ही ताकत कर्तव्य की है। वैसी ही ताकत छोटे से प्रयास की भी है। हम सभी को,देश के हर नागरिक के हृदय में एक दीया जलाना है- कर्तव्य का दीया जलाना है। हम सभी मिलकर, देश को कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ाएंगे, तो समाज में व्याप्त बुराइयां भी दूर होंगी और देश नई ऊंचाई पर भी पहुंचेगा। भारत भूमि को प्यार करने वाला, इस भूमि को मां मानने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो देश को नई ऊंचाई पर ना ले जाना चाहता हो, कोटि-कोटि लोगों के जीवन में खुशहाली ना लाना चाहता हो। इसके लिए हमें कर्तव्यों पर बल देना ही होगा। आज के इस कार्यक्रम में, मैं एक और विषय को उठाना चाहता हूं। आप सभी इस बात के साक्षी रहे हैं कि भारत की छवि को धूमिल करने के लिए किस तरह अलग-अलग प्रयास चलते रहते हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत कुछ चलता रहता है। इससे हम ये कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि ये सिर्फ राजनीति है। ये राजनीति नहीं है, ये हमारे देश का सवाल है। और जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो ये भी हमारा दायित्व है कि दुनिया भारत को सही रूप में जाने। ऐसी संस्थाएं जिनकी एक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में दुनिया के कई देशों में उपस्थिति है, वो दूसरे देशों के लोगों तक भारत की सही बात को पहुंचाएं, भारत के बारे में जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उनकी सच्चाई वहां के लोगों को बताएं, उन्हें जागरूक करें, ये भी हम सबका दायित्व है। ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं, इसी काम को आगे बढ़ाने के लिए एक और प्रयास कर सकती हैं। जहां जहां, जिन देशों में आपकी ब्रांचेज हैं वहां कोशिश करनी चाहिए कि वहां की हर ब्रांच से हर वर्ष कम से कम 500 लोग भारत के दर्शन करने के लिए आएं। भारत को जानने के लिए आएं। और ये 500 लोग, जो हिंदुस्तान के लोग वहां रहते हैं, वो नहीं, उस देश के नागरिक होने चाहिए। मूल भारतीयों की मैं बात नहीं कर रहा हूं। आप देखिएगा अगर इस प्रकार से लोगों का आना हुआ, देश को देखेंगे, यहां की हर बात को समझेंगे तो अपने-आप भारत की अच्छाइयों को विश्व में ले करके जाएंगे। आपके प्रयासों से इसमें कितना बड़ा फर्क पड़ जाएगा। परमार्थ करने की इच्छा तो हरेक की रहती है। लेकिन एक बात हम न भूलें कि परमार्थ और अर्थ जब एक साथ जुड़ते हैं तो सफल जीवन, सफल समाज, और सफल राष्ट्र का निर्माण अपने आप हो सकता है। अर्थ और परमार्थ के इस सामंजस्य की जिम्मेदारी हमेशा से भारत की आध्यात्मिक सत्ता के पास रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि, भारत की आध्यात्मिक सत्ता, आप सभी बहनें ये ज़िम्मेदारी इसी परिपक्वता के साथ निभाएँगी। आपके ये प्रयास देश की अन्य संस्थाओं, अन्य संगठनों को भी आजादी के अमृत महोत्सव में नए लक्ष्य गढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। अमृत महोत्सव की ताकत, जन-जन का मन है, जन-जन का समर्पण है। आपके प्रयासों से भारत आने वाले समय में और भी तेज गति से स्वर्णिम भारत की ओर बढ़ेगा। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद! ओम शांति! 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Posted On: नमस्ते, ओम शांति, कार्यक्रम में हमारे साथ उपस्थित लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी, राजस्थान के गवर्नर श्री कलराज मिश्रा जी, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्रीमान अशोक गहलोत जी, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल जी, केंद्रीय मंत्री-मंडल में मेरे साथी श्री किशन रेड्डी जी, भूपेंदर यादव जी, अर्जुन राम मेघवाल जी, पुरषोत्तम रुपाला जी, और श्री कैलाश चौधरी जी, राजस्थान विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री गुलाबचंद कटारिया जी, ब्रह्मकुमारीज़ के executive सेक्रेटरी राजयोगी मृत्युंजय जी, राजयोगिनी बहन मोहिनी जी, बहन चंद्रिका जी, ब्रह्मकुमारीज़ की अन्य सभी बहनें, देवियों और सज्जनों और यहां उपस्थित सभी साधक-साधिकाएँ! कुछ स्थल ऐसे होते हैं, जिनमें अपनी एक अलग चेतना होती है, ऊर्जा का अपना ही एक अलग प्रवाह होता है! ये ऊर्जा उन महान व्यक्तित्वों की होती है, जिनकी तपस्या से वन, पर्वत, पहाड़ भी जाग्रत हो उठते हैं, मानवीय प्रेरणाओं का केंद्र बन जाते हैं। माउंट आबू की आभा भी दादा लेखराज और उन जैसे अनेकों सिद्ध व्यक्तित्वों की वजह से निरंतर बढ़ती रही है। आज इस पवित्र स्थान से ब्रह्मकुमारी संस्था के द्वारा आज़ादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर, एक बहुत बड़े अभियान का प्रारंभ हो रहा है। इस कार्यक्रम में स्वर्णिम भारत के लिए भावना भी है, साधना भी है। इसमें देश के लिए प्रेरणा भी है, ब्रह्मकुमारियों के प्रयास भी हैं। मैं देश के संकल्पों के साथ, देश के सपनों के साथ निरंतर जुड़े रहने के लिए ब्रह्मकुमारी परिवार का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। आज के इस कार्यक्रम में दादी जानकी, राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जी सशरीर हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं। मुझ पर उनका बहुत स्नेह था। आज के इस आयोजन पर मैं उनका आशीर्वाद भी महसूस कर रहा हूं। जब संकल्प के साथ साधना जुड़ जाती है, जब मानव मात्र के साथ हमारा ममभाव जुड़ जाता है, अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए 'इदं न मम्' यह भाव जागने लगता है, तो समझिए, हमारे संकल्पों के जरिए एक नए कालखंड का जन्म होने वाला है, एक नया सवेरा होने वाला है। सेवा और त्याग का यही अमृतभाव आज अमृत महोत्सव में नए भारत के लिए उमड़ रहा है। इसी त्याग और कर्तव्यभाव से करोड़ों देशवासी आज स्वर्णिम भारत की नींव रख रहे हैं। हमारे और राष्ट्र के सपने अलग-अलग नहीं हैं, हमारी निजी और राष्ट्रीय सफलताएँ अलग-अलग नहीं हैं। राष्ट्र की प्रगति में ही हमारी प्रगति है। हमसे ही राष्ट्र का अस्तित्व है, और राष्ट्र से ही हमारा अस्तित्व है। ये भाव, ये बोध नए भारत के निर्माण में हम भारतवासियों की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है। आज देश जो कुछ कर रहा है उसमें सबका प्रयास शामिल है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास' ये सब देश का मूल मंत्र बन रहा है। आज हम एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जिसमें भेदभाव की कोई जगह न हो, एक ऐसा समाज बना रहे हैं, जो समानता औऱ सामाजिक न्याय की बुनियाद पर मजबूती से खड़ा हो, हम एक ऐसे भारत को उभरते देख रहे हैं, जिसकी सोच और अप्रोच नई है, जिसके निर्णय प्रगतिशील हैं। भारत की सबसे बड़ी ताकत ये है कि कैसा भी समय आए, कितना भी अंधेरा छाए, भारत अपने मूल स्वभाव को बनाए रखता है। हमारा युगों-युगों का इतिहास इस बात साक्षी है। दुनिया जब अंधकार के गहरे दौर में थी, महिलाओं को लेकर पुरानी सोच में जकड़ी थी, तब भारत मातृशक्ति की पूजा, देवी के रूप में करता था। हमारे यहाँ गार्गी, मैत्रेयी, अनुसूया, अरुंधति और मदालसा जैसी विदुषियाँ समाज को ज्ञान देती थीं। कठिनाइयों से भरे मध्यकाल में भी इस देश में पन्नाधाय और मीराबाई जैसी महान नारियां हुईं। और अमृत महोत्सव में देश जिस स्वाधीनता संग्राम के इतिहास को याद कर रहा है, उसमें भी कितनी ही महिलाओं ने अपने बलिदान दिये हैं। कित्तूर की रानी चेनम्मा, मतंगिनी हाजरा, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना झलकारी बाई से लेकर सामाजिक क्षेत्र में अहल्याबाई होल्कर और सावित्रीबाई फुले तक, इन देवियों ने भारत की पहचान बनाए रखी। आज देश लाखों स्वाधीनता सेनानियों के साथ आज़ादी की लड़ाई में नारीशक्ति के इस योगदान को याद कर रहा है, और उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। और इसीलिए, आज सैनिक स्कूलों में पढ़ने का बेटियों का सपना पूरा हो रहा है, अब देश की कोई भी बेटी, राष्ट्र-रक्षा के लिए सेना में जाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ उठा सकती है, महिलाओं का जीवन और करियर दोनों एक साथ चलें, इसके लिए मातृ अवकाश को बढ़ाने जैसे फैसले भी किए गए हैं। देश के लोकतन्त्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। दो हज़ार उन्नीस के चुनाव में हमने देखा कि किस तरह पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। आज देश की सरकार में बड़ी बड़ी जिम्मेदारियाँ महिला मंत्री संभाल रही हैं। और सबसे ज्यादा गर्व की बात है कि अब समाज इस बदलाव का नेतृत्व खुद कर रहा है। हाल के आंकड़ों से पता चला है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की सफलता से, वर्षों बाद देश में स्त्री-पुरुष का अनुपात भी बेहतर हुआ है। ये बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि नया भारत कैसा होगा, कितना सामर्थ्यशाली होगा। आप सभी जानते हैं कि हमारे ऋषियों ने उपनिषदों में 'तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय' की प्रार्थना की है। यानी, हम अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ें। मृत्यु से, परेशानियों से अमृत की ओर बढ़ें। अमृत और अमरत्व का रास्ता बिना ज्ञान के प्रकाशित नहीं होता। इसलिए, अमृतकाल का ये समय हमारे ज्ञान, शोध और इनोवेशन का समय है। हमें एक ऐसा भारत बनाना है जिसकी जड़ें प्राचीन परम्पराओं और विरासत से जुड़ी होंगी, और जिसका विस्तार आधुनिकता के आकाश में अनंत तक होगा। हमें अपनी संस्कृति, अपनी सभ्यता, अपने संस्कारों को जीवंत रखना है, अपनी आध्यात्मिकता को, अपनी विविधता को संरक्षित और संवर्धित करना है, और साथ ही, टेक्नोलॉजी, इनफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ की व्यवस्थाओं को निरंतर आधुनिक भी बनाना है। देश के इन प्रयासों में आप सभी की, ब्रह्मकुमारी जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं की बड़ी भूमिका है। मुझे खुशी है कि आप आध्यात्म के साथ साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में कई बड़े-बड़े काम कर रहे हैं। और आज जिस अभियान को आरंभ कर रहे हैं, आप उसे ही आगे बढ़ा रहे हैं। अमृत महोत्सव के लिए आपने कई लक्ष्य भी तय किए हैं। आपके ये प्रयास देश को अवश्य एक नई ऊर्जा देंगे, नई शक्ति देंगे। आज देश, किसानों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए organic फ़ार्मिंग और नैचुरल फ़ार्मिंग की दिशा में प्रयास कर रहा है। खान-पान आहार की शुद्धता को लेकर हमारी ब्रह्मकुमारी बहनें समाज को लगातार जागरूक करती रहती हैं। लेकिन गुणवत्तापूर्ण आहार के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन भी जरूरी है। इसलिए, ब्रह्मकुमारी नैचुरल फ़ार्मिंग को promote करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन सकती हैं। कुछ गांवों को प्रेरित करके ऐसे मॉडल खड़े किए जा सकते हैं। इसी तरह, क्लीन एनर्जी के और पर्यावरण के क्षेत्र में भी दुनिया को भारत से बहुत अपेक्षाएँ हैं। आज क्लीन एनर्जी के कई विकल्प विकसित हो रहे हैं। इसे लेकर भी जनजागरण के लिए बड़े अभियान की जरूरत है। ब्रह्मकुमारीज ने तो सोलर पावर के क्षेत्र में, सबके सामने एक उदाहरण रखा है। कितने ही समय से आपके आश्रम की रसोई में सोलर पावर से खाना बनाया जा रहा है। सोलर पावर का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोग करें, इसमें भी आपका बहुत सहयोग हो सकता है। इसी तरह आप सभी आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी गति दे सकते हैं। वोकल फॉर लोकल, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर, इस अभियान में मदद हो सकती है। अमृतकाल का ये समय, सोते हुए सपने देखने का नहीं बल्कि जागृत होकर अपने संकल्प पूरे करने का है। आने वाले पच्चीस साल, परिश्रम की पराकाष्ठा, त्याग, तप-तपस्या के पच्चीस वर्ष हैं। सैकड़ों वर्षों की गुलामी में हमारे समाज ने जो गंवाया है, ये पच्चीस वर्ष का कालखंड, उसे दोबारा प्राप्त करने का है। इसलिए आजादी के इस अमृत महोत्सव में हमारा ध्यान भविष्य पर ही केंद्रित होना चाहिए। हमारे समाज में एक अद्भुत सामर्थ्य है। ये एक ऐसा समाज है जिसमें चिर पुरातन और नित्य नूतन व्यवस्था है। हालांकि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि समय के साथ कुछ बुराइयां व्यक्ति में भी, समाज में भी और देश में भी प्रवेश कर जाती हैं। जो लोग जागृत रहते हुए इन बुराइयों को जान लेते हैं, वो इन बुराइयों से बचने में सफल हो जाते हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में हर लक्ष्य प्राप्त कर पाते हैं। हमारे समाज की विशेषता है कि इसमें विशालता भी है, विविधता भी है और हजारों साल की यात्रा का अनुभव भी है। इसलिए हमारे समाज में, बदलते हुए युग के साथ अपने आप को ढालने की एक अलग ही शक्ति है, एक inner strength है। हमारे समाज की सबसे बड़ी ताकत ये है कि समाज के भीतर से ही समय-समय पर इसे सुधारने वाले पैदा होते हैं और वो समाज में व्याप्त बुराइयों पर कुठाराघात करते हैं। हमने ये भी देखा है कि समाज सुधार के प्रारंभिक वर्षों में अक्सर ऐसे लोगों को विरोध का भी सामना करना पड़ता है, कई बार तिरस्कार भी सहना पड़ता है। लेकिन ऐसे सिद्ध लोग, समाज सुधार के काम से पीछे नहीं हटते, वो अडिग रहते हैं। समय के साथ समाज भी उनको पहचानता है, उनको मान सम्मान देता है और उनकी सीखों को आत्मसात भी करता है। इसलिए साथियों, हर युग के कालखंड के मूल्यों के आधार पर समाज को सजग रखना, समाज को दोषमुक्त रखना, ये बहुत अनिवार्य है और निरंतर करने वाली प्रक्रिया है। उस समय की जो भी पीढ़ी होती है, उसे ये दायित्व निभाना ही होता है। व्यक्तिगत तौर पर हम लोग, संगठन के तौर पर भी ब्रह्मकुमारी जैसे लाखों संगठन, ये काम कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी मानना होगा कि आजादी के बाद के पचहत्तर वर्षों में, हमारे समाज में, हमारे राष्ट्र में, एक बुराई सबके भीतर घर कर गई है। ये बुराई है, अपने कर्तव्यों से विमुख होना, अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि ना रखना। बीते पचहत्तर वर्षों में हम सिर्फ अधिकारों की बात करते रहे, अधिकारों के लिए झगड़ते रहे, जूझते रहे, समय भी खपाते रहे। अधिकार की बात, कुछ हद तक, कुछ समय के लिए, किसी एक परिस्थिति में सही हो सकती है लेकिन अपने कर्तव्यों को पूरी तरह भूल जाना, इस बात ने भारत को कमजोर रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। भारत ने अपना बहुत बड़ा समय इसलिए गंवाया है क्योंकि कर्तव्यों को प्राथमिकता नहीं दी गई। इन पचहत्तर वर्षों में कर्तव्यों को दूर रखने की वजह से जो खाई पैदा हुई है, सिर्फ अधिकार की बात करने की वजह से समाज में जो कमी आई है, उसकी भरपाई हम मिल करके आने वाले पच्चीस वर्ष में, कर्तव्य की साधना करके पूरी कर सकते हैं। ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं आने वाले पच्चीस वर्ष के लिए, एक मंत्र बनाकर भारत के जन-जन को कर्तव्य के लिए जागरूक करके बहुत बड़ा बदलाव ला सकती हैं। मेरा आग्रह है कि ब्रह्मकुमारी और आप जैसी तमाम सामाजिक संस्थाएं इस एक मंत्र पर जरूर काम करें और वो है देश के नागरिकों में कर्तव्य भावना का विस्तार। आप सभी अपनी शक्ति और समय जन-जन में कर्तव्य बोध जागृत करने पर जरूर लगाएं। और ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं, जिस तरह दशकों से कर्तव्य के पथ पर चल रही हैं, आप लोग ये काम कर सकते हैं। आप लोग कर्तव्य में रचे बसे, कर्तव्य का पालन करने वाले लोग हैं। इसलिए, जिस भावना के साथ आप अपनी संस्था में काम करते हैं, उस कर्तव्य भावना का विस्तार समाज में हो, देश में हो, देश के लोगों में हो, ये आजादी के इस अमृत महोत्सव पर आपका देश को सबसे उत्तम उपहार होगा। आप लोगों ने एक कहानी जरूर सुनी होगी। एक कमरे में अंधेरा था तो उस अंधेरे को हटाने के लिए लोग अपने-अपने तरीके से अलग-अलग काम कर रहे थे। कोई कुछ कर रहा था, कोई कुछ कर रहा था। लेकिन किसी समझदार ने जब एक छोटा सा दीया जला दिया, तो अंधकार तुरंत दूर हो गया। वैसी ही ताकत कर्तव्य की है। वैसी ही ताकत छोटे से प्रयास की भी है। हम सभी को,देश के हर नागरिक के हृदय में एक दीया जलाना है- कर्तव्य का दीया जलाना है। हम सभी मिलकर, देश को कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ाएंगे, तो समाज में व्याप्त बुराइयां भी दूर होंगी और देश नई ऊंचाई पर भी पहुंचेगा। भारत भूमि को प्यार करने वाला, इस भूमि को मां मानने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो देश को नई ऊंचाई पर ना ले जाना चाहता हो, कोटि-कोटि लोगों के जीवन में खुशहाली ना लाना चाहता हो। इसके लिए हमें कर्तव्यों पर बल देना ही होगा। आज के इस कार्यक्रम में, मैं एक और विषय को उठाना चाहता हूं। आप सभी इस बात के साक्षी रहे हैं कि भारत की छवि को धूमिल करने के लिए किस तरह अलग-अलग प्रयास चलते रहते हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत कुछ चलता रहता है। इससे हम ये कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि ये सिर्फ राजनीति है। ये राजनीति नहीं है, ये हमारे देश का सवाल है। और जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो ये भी हमारा दायित्व है कि दुनिया भारत को सही रूप में जाने। ऐसी संस्थाएं जिनकी एक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में दुनिया के कई देशों में उपस्थिति है, वो दूसरे देशों के लोगों तक भारत की सही बात को पहुंचाएं, भारत के बारे में जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उनकी सच्चाई वहां के लोगों को बताएं, उन्हें जागरूक करें, ये भी हम सबका दायित्व है। ब्रह्मकुमारी जैसी संस्थाएं, इसी काम को आगे बढ़ाने के लिए एक और प्रयास कर सकती हैं। जहां जहां, जिन देशों में आपकी ब्रांचेज हैं वहां कोशिश करनी चाहिए कि वहां की हर ब्रांच से हर वर्ष कम से कम पाँच सौ लोग भारत के दर्शन करने के लिए आएं। भारत को जानने के लिए आएं। और ये पाँच सौ लोग, जो हिंदुस्तान के लोग वहां रहते हैं, वो नहीं, उस देश के नागरिक होने चाहिए। मूल भारतीयों की मैं बात नहीं कर रहा हूं। आप देखिएगा अगर इस प्रकार से लोगों का आना हुआ, देश को देखेंगे, यहां की हर बात को समझेंगे तो अपने-आप भारत की अच्छाइयों को विश्व में ले करके जाएंगे। आपके प्रयासों से इसमें कितना बड़ा फर्क पड़ जाएगा। परमार्थ करने की इच्छा तो हरेक की रहती है। लेकिन एक बात हम न भूलें कि परमार्थ और अर्थ जब एक साथ जुड़ते हैं तो सफल जीवन, सफल समाज, और सफल राष्ट्र का निर्माण अपने आप हो सकता है। अर्थ और परमार्थ के इस सामंजस्य की जिम्मेदारी हमेशा से भारत की आध्यात्मिक सत्ता के पास रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि, भारत की आध्यात्मिक सत्ता, आप सभी बहनें ये ज़िम्मेदारी इसी परिपक्वता के साथ निभाएँगी। आपके ये प्रयास देश की अन्य संस्थाओं, अन्य संगठनों को भी आजादी के अमृत महोत्सव में नए लक्ष्य गढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। अमृत महोत्सव की ताकत, जन-जन का मन है, जन-जन का समर्पण है। आपके प्रयासों से भारत आने वाले समय में और भी तेज गति से स्वर्णिम भारत की ओर बढ़ेगा। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद! ओम शांति! 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Twitter पर ट्रेंड कर रहा हैश टैग #किसी_को_बताना_मत लोगों के लिए मनोरंजन का विषय बन गया है। लोग एक तरफ जहां इस पर अपने निजी विचार व्यक्त कर रहे हैं वहीं राजनेताओं की भी खूब खिंचाई हो रही है। लोगों ने यहां पर मोदी और केजरीवाल पर चुटकुले और उन पर टिप्पणियां ट्वीट की हैं। जिन्हें खूब रीट्वीट और लाइक किया जा रहा है।
Twitter पर ट्रेंड कर रहा हैश टैग #किसी_को_बताना_मत लोगों के लिए मनोरंजन का विषय बन गया है। लोग एक तरफ जहां इस पर अपने निजी विचार व्यक्त कर रहे हैं वहीं राजनेताओं की भी खूब खिंचाई हो रही है। लोगों ने यहां पर मोदी और केजरीवाल पर चुटकुले और उन पर टिप्पणियां ट्वीट की हैं। जिन्हें खूब रीट्वीट और लाइक किया जा रहा है।
आशारानी व्होरा और ११ (संख्या) शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आशारानी व्होरा vs. ११ (संख्या) आशारानी व्होरा (जन्मः ७ अप्रैल १९२१ - मृत्युः २१ दिसम्बर २००९) ब्रिटिश भारत में झेलम जिले में जन्मी एक हिन्दी लेखिका थीं जिन्होंने सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की। जीवन की अन्तिम साँस तक वह निरन्तर लिखती रहीं। ८८ वर्ष की आयु में उनका निधन नई दिल्ली में अपने बेटे डॉ॰ शशि व्होरा के घर पर हुआ। आशारानी को अपने जीवन काल में कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए। उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति एक ट्रस्ट बनाकर नोएडा स्थित सूर्या संस्थान को दान कर दी। . 11 (महिला की आवाज में, पुरुष की आवाज में,(उच्चारणः ग्यारह) एक प्राकृतिक संख्या है। इससे पूर्व 10 और इसके पश्चात् 12 आता है अर्थात् ग्यारह 10 से एक अधिक होता है एवं 12 में से एक कम करने पर ग्यारह प्राप्त होता है। इसे शब्दों में ग्यारह से लिखा जाता है। छः और पाँच का योग ग्यारह होता है। . आशारानी व्होरा और ११ (संख्या) आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। आशारानी व्होरा 53 संबंध है और ११ (संख्या) 48 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (53 + 48)। यह लेख आशारानी व्होरा और ११ (संख्या) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
आशारानी व्होरा और ग्यारह शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आशारानी व्होरा vs. ग्यारह आशारानी व्होरा ब्रिटिश भारत में झेलम जिले में जन्मी एक हिन्दी लेखिका थीं जिन्होंने सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की। जीवन की अन्तिम साँस तक वह निरन्तर लिखती रहीं। अठासी वर्ष की आयु में उनका निधन नई दिल्ली में अपने बेटे डॉ॰ शशि व्होरा के घर पर हुआ। आशारानी को अपने जीवन काल में कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुए। उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति एक ट्रस्ट बनाकर नोएडा स्थित सूर्या संस्थान को दान कर दी। . ग्यारह एक प्राकृतिक संख्या है। इससे पूर्व दस और इसके पश्चात् बारह आता है अर्थात् ग्यारह दस से एक अधिक होता है एवं बारह में से एक कम करने पर ग्यारह प्राप्त होता है। इसे शब्दों में ग्यारह से लिखा जाता है। छः और पाँच का योग ग्यारह होता है। . आशारानी व्होरा और ग्यारह आम में शून्य बातें हैं । आशारानी व्होरा तिरेपन संबंध है और ग्यारह अड़तालीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख आशारानी व्होरा और ग्यारह के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
'मैडम, हैव ए लुक औन दीज पेपर्स,' कागजों का पुलिंदा जरी की तरफ बढ़ाते हुए बोले प्राचार्य. 'आप के खिलाफ पेरैंट्स ने कंप्लेन की है कि आप क्लास में पढ़ाते समय बच्चों के मन में सांप्रदायिकता के कड़वे बीज बो रही हैं,' प्राचार्य कुटिलता से मुसकराए. सुन कर जरी की आंखों में हजारों अलाव सुलगने लगे. 'इट मींस यू आर ब्लेमिंग टू मी? मैं ने कोई साजिश रची है? जानती हैं, आप के द्वारा अथौरिटी की इंसल्ट करने और उस पर बेबुनियाद ब्लेम लगाने के जुर्म में मैं आप को सस्पैंड कर सकता हूं,' प्राचार्य ने जहरीला फन फुफकारा.
'मैडम, हैव ए लुक औन दीज पेपर्स,' कागजों का पुलिंदा जरी की तरफ बढ़ाते हुए बोले प्राचार्य. 'आप के खिलाफ पेरैंट्स ने कंप्लेन की है कि आप क्लास में पढ़ाते समय बच्चों के मन में सांप्रदायिकता के कड़वे बीज बो रही हैं,' प्राचार्य कुटिलता से मुसकराए. सुन कर जरी की आंखों में हजारों अलाव सुलगने लगे. 'इट मींस यू आर ब्लेमिंग टू मी? मैं ने कोई साजिश रची है? जानती हैं, आप के द्वारा अथौरिटी की इंसल्ट करने और उस पर बेबुनियाद ब्लेम लगाने के जुर्म में मैं आप को सस्पैंड कर सकता हूं,' प्राचार्य ने जहरीला फन फुफकारा.
पाकुड़, 14 अप्रैल झारखंड के पूर्व मंत्री एवं सांसद स्वर्गीय साइमन मरांडी का अंतिम संस्कार लिट्टीपाड़ा के उनके पैतृक गांव डुमरिया में बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूगी में किया गया । उनके अंतिम संस्कार हजारों की भीड़ उमड़ी जिसके चलते कोविड-19 निमयों की धज्जियां उड़ गयीं। ज्ञातव्य है कि कोरोना की हाल की लहर को देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई बैठक में छह अप्रैल को ही फैसला किया था कि अब राज्य में किसी भी मय्यत में सिर्फ पचास लोग और विवाह में अधिकतम दो सौ लोग शामिल हो सकेंगे। राज्य के पूर्व मंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता साइमन मरांडी की कोलकाता के एक निजी अस्पताल में सोमवार रात्रि मृत्यु हो गयी थी । उनके पार्थिव शरीर पर बुधवार यहां पुष्प अर्पित कर स्वयं मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि दी। मौके पर साइमन मरांडी के विधायक पुत्र दिनेश विलियम मरांडी सपरिवार मौजूद थे। साथ ही जिले के तमाम पार्टी नेता व कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में साइमन मरांडी के चाहने वालों का हुजुम मौजूद था। मरांडी को दफनाने का अंतिम संस्कार उनके विधायक पुत्र दिनेश विलियम मरांडी ने किया। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रविन्द्र नाथ महतो भी बुधवार की सुबह स्वर्गीय साइमन मरांडी के हिरणपुर स्थित आवास पर पहुँचे जहाँ उन्होंने मरांडी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य विपक्षी भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने साइमन मरांडी को श्रद्धांजलि अर्पित किया लेकिन सरकार को आगाह किया कि वह कोविड समुचित व्यवहार का पालन सिर्फ जनता से ही सुनिश्चित न करवाये बल्कि स्वयं भी ऐसा व्यवहार करना सीखे। पाठक ने कहा कि जिस प्रकार मरांडी के अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में कोविड के तय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हजारों लोग शामिल हुए वह शोचनीय है और इससे यह स्पष्ट होता है कि कोविड के लिए तय मान्य नियम वह शर्तें सिर्फ आम लोगों के लिए हैं वह राजनेताओं एवं अधिकारियों के लिए नहीं हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
पाकुड़, चौदह अप्रैल झारखंड के पूर्व मंत्री एवं सांसद स्वर्गीय साइमन मरांडी का अंतिम संस्कार लिट्टीपाड़ा के उनके पैतृक गांव डुमरिया में बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूगी में किया गया । उनके अंतिम संस्कार हजारों की भीड़ उमड़ी जिसके चलते कोविड-उन्नीस निमयों की धज्जियां उड़ गयीं। ज्ञातव्य है कि कोरोना की हाल की लहर को देखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई बैठक में छह अप्रैल को ही फैसला किया था कि अब राज्य में किसी भी मय्यत में सिर्फ पचास लोग और विवाह में अधिकतम दो सौ लोग शामिल हो सकेंगे। राज्य के पूर्व मंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता साइमन मरांडी की कोलकाता के एक निजी अस्पताल में सोमवार रात्रि मृत्यु हो गयी थी । उनके पार्थिव शरीर पर बुधवार यहां पुष्प अर्पित कर स्वयं मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि दी। मौके पर साइमन मरांडी के विधायक पुत्र दिनेश विलियम मरांडी सपरिवार मौजूद थे। साथ ही जिले के तमाम पार्टी नेता व कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में साइमन मरांडी के चाहने वालों का हुजुम मौजूद था। मरांडी को दफनाने का अंतिम संस्कार उनके विधायक पुत्र दिनेश विलियम मरांडी ने किया। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रविन्द्र नाथ महतो भी बुधवार की सुबह स्वर्गीय साइमन मरांडी के हिरणपुर स्थित आवास पर पहुँचे जहाँ उन्होंने मरांडी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्य विपक्षी भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने साइमन मरांडी को श्रद्धांजलि अर्पित किया लेकिन सरकार को आगाह किया कि वह कोविड समुचित व्यवहार का पालन सिर्फ जनता से ही सुनिश्चित न करवाये बल्कि स्वयं भी ऐसा व्यवहार करना सीखे। पाठक ने कहा कि जिस प्रकार मरांडी के अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में कोविड के तय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हजारों लोग शामिल हुए वह शोचनीय है और इससे यह स्पष्ट होता है कि कोविड के लिए तय मान्य नियम वह शर्तें सिर्फ आम लोगों के लिए हैं वह राजनेताओं एवं अधिकारियों के लिए नहीं हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मोदी सरकार लागातार किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है और योजनाओं के प्रभाव को जानने के लिये पीएम सीधे देश के कृषकों के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं। पूरी खबर. . देवरियाः यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पीएम मोदी के लागातार किसानों से बातचीत करने से न केवल कृषकों का मनोबल बढ़ रहा है बल्कि उन्हें उत्पादन बढ़ाने की भी नई-नई जानकारियों मिल रही है। शाही ने कहा कि पीएम मोदी लगातार किसानों की आय बढाने की कोशिशों में जुटे हुए है। पीएम द्वारा किसानो ने आधुनिक तकनीकी और विशेषज्ञों की राय से खेती करने और सरकारी योजनाओं को अपनाकर लाभ उठाने की भी अपील की जा रही है। डाइनामाइट न्यूज से बात करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से सीधे बात करके पीएम मोदी सरकारी योजनाओं के लागू होने की स्थिति की भी जानकारी ले रहे है साथ ही पीएम यह भी जान रहे हैं कि किसानों को योजनाओं का अब कितना लाभ पहुँचा। किसानों के अनुभव से प्रसारण देख रहे अन्य किसान भी लाभान्वित होंगे। NIC पर कृषि मन्त्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि उप निदेशक डॉ एके मिश्रा सहित कई किसानों ने भी बुधवार को पीएम के किसानों के साथ किये गये सीधे संवाद का प्रसारण देखा। अन्य कृषकों के अनुभवों को सुनकर किसान उत्साहित हुए और स्वयं भी वैसा करने की ठानी।
यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मोदी सरकार लागातार किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है और योजनाओं के प्रभाव को जानने के लिये पीएम सीधे देश के कृषकों के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं। पूरी खबर. . देवरियाः यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पीएम मोदी के लागातार किसानों से बातचीत करने से न केवल कृषकों का मनोबल बढ़ रहा है बल्कि उन्हें उत्पादन बढ़ाने की भी नई-नई जानकारियों मिल रही है। शाही ने कहा कि पीएम मोदी लगातार किसानों की आय बढाने की कोशिशों में जुटे हुए है। पीएम द्वारा किसानो ने आधुनिक तकनीकी और विशेषज्ञों की राय से खेती करने और सरकारी योजनाओं को अपनाकर लाभ उठाने की भी अपील की जा रही है। डाइनामाइट न्यूज से बात करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से सीधे बात करके पीएम मोदी सरकारी योजनाओं के लागू होने की स्थिति की भी जानकारी ले रहे है साथ ही पीएम यह भी जान रहे हैं कि किसानों को योजनाओं का अब कितना लाभ पहुँचा। किसानों के अनुभव से प्रसारण देख रहे अन्य किसान भी लाभान्वित होंगे। NIC पर कृषि मन्त्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि उप निदेशक डॉ एके मिश्रा सहित कई किसानों ने भी बुधवार को पीएम के किसानों के साथ किये गये सीधे संवाद का प्रसारण देखा। अन्य कृषकों के अनुभवों को सुनकर किसान उत्साहित हुए और स्वयं भी वैसा करने की ठानी।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। रायपुर। राजधानी में एक बार फिर ड्रग्स जैसे नशे के सौदागर को पुलिस ने धरदबोचा है। ये मामला आमानाका थाना इलाके के हीरापुर छठ तालाब के पास का है, जहां पुलिस को ट्रक क्र. CG 04 LQ 1677 के केबिन से 1. 2 ग्राम हेरोईन ड्रग मिली है जिसे पुलिस ने जप्त कर आरोपी सुखजीत सिंह उम्र 42 वर्ष के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21 ए के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ़्तार किया है। आशंका जताई जा रही है कि जेल से ज़मानत पर छूटे कुछ आरोपी अब फिर से इस रैकेट को सक्रिय कर रहे है जिसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है। फिलहाल पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी की निशानदेही पर अन्य सौदागरों पर भी पुलिस शिकंजा कस सकती है।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। रायपुर। राजधानी में एक बार फिर ड्रग्स जैसे नशे के सौदागर को पुलिस ने धरदबोचा है। ये मामला आमानाका थाना इलाके के हीरापुर छठ तालाब के पास का है, जहां पुलिस को ट्रक क्र. CG चार LQ एक हज़ार छः सौ सतहत्तर के केबिन से एक. दो ग्राम हेरोईन ड्रग मिली है जिसे पुलिस ने जप्त कर आरोपी सुखजीत सिंह उम्र बयालीस वर्ष के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा इक्कीस ए के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ़्तार किया है। आशंका जताई जा रही है कि जेल से ज़मानत पर छूटे कुछ आरोपी अब फिर से इस रैकेट को सक्रिय कर रहे है जिसकी जांच में पुलिस जुटी हुई है। फिलहाल पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी की निशानदेही पर अन्य सौदागरों पर भी पुलिस शिकंजा कस सकती है।
पैसे और हैसियत ने मेरे लिए किया ही क्या? मैं एक टूटे हुए परिवार में पैदा हुई थी। मैं गर्भ में ही थी, जब मेरे पिता दूसरी औरत के साथ भाग गए। मेरी माँ ने बहुत कष्टों से छह बच्चों को पाला-पोसा, मैं हर रात अपनी माँ को रोते-सिसकते हुए सुनती थी। उसे इस तरह फूट-फूटकर रोते देख मैं शादी और रिश्तों को लेकर बहुत नकारात्मक हो गई। मैंने मन ही मन कहा, "किसी पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। किसी पर भरोसा मत करना। जीवन में सिर्फ खुद पर और अपने कमाए पैसे पर ही भरोसा किया जा सकता है।" उसी क्षण से मैं सोचने लगी कि पैसा कैसे कमाया जाए। हाई स्कूल में, जब बाकी सभी अपनी छुट्टियों में मौज करते, मेरी माँ और मैं सड़क-किनारे खाने का स्टॉल लगाया करते। लेकिन उस समय हम जो पैसा कमाते, वह हमारी बुनियादी जरूरतों में ही लग जाता। हाई स्कूल के दूसरे वर्ष फीस न दे पाने के कारण मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद मैं स्टॉल चलाती रही। मैं रोज सुबह चार-पाँच बजे खाना बनाने के लिए उठती और छह बजे तक स्टॉल चली जाती। तीन साल बाद, मैंने इतने पैसे बचा लिए कि किसी बड़े शहर जा सकूँ। मैं रोज जल्दी उठती कड़ी मेहनत करती, लेकिन कमाई ज्यादा न होती, इससे मैं संतुष्ट नहीं थी। इसलिए, अपने बॉयफ्रेंड की मदद से, मैंने अपनी बचत लगाकर एक छोटी-सी दुकान खोल ली। दो साल बाद, हमने कुछ पैसे कमा लिए और हमारे बच्चे हो गए। हमारी शादी होने ही वाली थी, कि मेरे बॉयफ्रेंड ने धोखा देकर मेरा सब-कुछ हड़प लिया। सारे पैसे लेकर दूसरी औरत के साथ रहने लगा। उनका एक बच्चा भी था। मेरी सारी मेहनत की कमाई चली गई, मैं उदास और दुखी रहने लगी। मेरी माँ के साथ जो हुआ, उसके बाद से मुझे लगता था कि पुरुष भरोसे के लायक नहीं हैं, मुझे अपने बच्चे पालने के लिए पैसे कमाने पर ध्यान देना होगा। लेकिन मैं बहुत दबाव में थी, मेरे पास अपनी दुकान चलाने की ताकत नहीं थी, और मैं बीमार थी। मैं अब इस शहर में नहीं रहना चाहती थी। बाद में, जब मेरे बॉयफ्रेंड के पिता को पता चला, तो उन्होंने मुझे यूके का वीजा लेने के लिए पैसे दे दिए। चार साल बाद, मुझे निवास-परमिट मिल गया और मैंने विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। ज्यादा पैसा कमाने के लिए मैंने व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चुना। 2011 में मुझे छात्रवृत्ति मिली, तो उस पैसे से मैंने शहर में एक अफ्रीकी खाद्य भंडार खोल लिया। शुरुआत में, चूँकि स्टोर छोटा था, इसलिए मैंने सिर्फ एक व्यक्ति काम पर रखा। मैं स्टोर पर काम करने के लिए हर सुबह पाँच बजे उठती और काम खत्म होने के बाद स्कूल जाती। कक्षा के बाद मैं साफ-सफाई, सामान पहुँचाने और खाते सँभालने के लिए स्टोर पर लौट आती। व्यवसाय करना, विश्वविद्यालय में पढ़ना और साथ ही बच्चे भी पालना बहुत कठिन रहा होगा। लेकिन जब मैं हरेक को अपनी तारीफ करते सुनती, और उनकी प्रशंसात्मक और ईर्ष्यालु आँखें देखती, तो बहुत संतुष्टि महसूस करती। उस समय, स्टोर अच्छा चल रहा था, मैंने जितना सोचा नहीं था उससे भी ज्यादा पैसा कमा लिया, लेकिन मुझे वह काफी नहीं लगा। मैंने सोचा कि मुझे इतना अमीर होना चाहिए कि मैं बैंक खरीद सकूँ, ताकि दूसरे मेरी प्रशंसा करें और मुझसे ईर्ष्या करें। मैं वास्तव में यही चाहती थी। ज्यादा सम्मान और प्रशंसा पाने और यह साबित करने के लिए कि मैं मजबूत हूँ, अपने बच्चे पालने, शानदार जीवन जीने और ज्यादा पैसा कमाने के लिए मैंने अपनी दुकान बढ़ा ली। तीन साल बाद, मेरी छोटी-सी दुकान एक बड़ी दुकान में बदल गई, जिसमें विभिन्न अफ्रीकी देशों का खाना बिकता था। मुझे शहर के एकमात्र अफ्रीकी उद्यमी के रूप में भी जाना जाता था। हाई स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों ने मुझे यूके में प्रवासी युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं और सफलता के बारे में बोलने के लिए आमंत्रित किया, और उन्होंने मुझे एक ट्रॉफी दी। जब मैं ट्रॉफी लेकर भाषण देने गई, तो सभी ने मुझे पहचान लिया। मुझे लगा, जैसे मेरी सारी मेहनत और वर्षों की तकलीफ सफल रही, और मैंने अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त कर लिए। लेकिन मैंने पैसा कमाना बंद नहीं किया, क्योंकि हैसियत होने पर काम करना और पैसा कमाना आसान हो जाता है, और मेरी प्रसिद्धि पाने की चाह भी बढ़ गई। लेकिन इस समय तक मुझे शरीर में बेचैनी महसूस होने लगी थी। मैं ज्यादा देर खड़ी न रह पाती थी। डॉक्टर ने कहा कि मुझे गठिया, फाइब्रोमायल्जिया और साइटिका है, जिसका मतलब है कि मेरी पूरी रीढ़ में दर्द था। डॉक्टर ने कहा कि मुझे स्वस्थ होने में समय लगेगा, और मैं अब काम नहीं कर सकती, लेकिन मैंने अपनी बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा, व्यायाम से ठीक हो जाऊँगी। फिर, स्टोर इतना अच्छा चल रहा था कि उसे छोड़ना नहीं चाहती थी, इसलिए मैं काम करती रही। 2014 आते-आते मेरी हालत और खराब हो गई, पूरे शरीर में दर्द रहने लगा। लगा, जैसे मेरा पूरा शरीर जल रहा हो, मानो आग लग गई हो। मेरे पैर ज्यादातर समय सूजे रहते, लगता जैसे कूल्हे की हड्डी टूट- गई हो, रीढ़ नरम पड़ गई हो। उसे सीधा रखने के लिए मुझे पट्टी बाँधनी पड़ती। जब मैं चेकअप कराने गई, तो डॉक्टर ने कहा कि मुझे गठिया तो है ही, लेकिन अक्सर कसाई की दुकान के फ्रीजर में जाने के कारण ठंड मेरी हड्डियों तक पहुँच गई है, इसलिए किसी भी समय स्थायी रूप से लकवा मार सकता है। उस समय मैं बहुत घबरा गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बाद में, मैं हिल भी न पाती, तो मेरे पास दुकान बंद करने के अलावा कोई चारा न रहा। शहर के दूसरे लोगों ने मेरी नकल करते हुए अपनी दुकानें खोल लीं। मुझे जलन हो रही थी, और मैं अपनी हालत से बहुत दुखी भी थी। मैं इतनी गंभीर रूप से बीमार क्यों थी? चौबीसों घंटे दर्द होता रहता, ऐसा कोई दिन न जाता जब मैं चैन से सो पाती। ऐसा लगता, जैसे मेरे दिल में आग जल रही हो, मेरी शारीरिक और मानसिक पीड़ा विशेष रूप से कष्टप्रद थी। तब, मैंने वाकई चीजों पर विचार करने लगी। मैंने जो पैसा कमाया था, वह मेरी बीमारी का इलाज नहीं कर पाया, तो उसका क्या फायदा? उस समय, मैं असुरक्षित और असहाय महसूस कर रही थी। मुझे अपने बच्चों की चिंता थी, क्योंकि सिर्फ मैं ही उनका परिवार थी। मैं अब पैसे और प्रसिद्धि के बारे में नहीं सोचना चाहती थी। बस यही चाहती थी कि मेरा दर्द खत्म हो और मैं शांति से अपने बच्चे पाल सकूँ। एक साल से ज्यादा समय से बिस्तर पर पड़े हुए मैं खुद से पूछा करती, "लोगों को इतना कष्ट क्यों होता है? हम बीमार क्यों पड़ते हैं?" दुख और निराशा में, मैंने अपने दर्द से बचने में मदद करने के लिए प्रभु को पुकारा। मई 2019 में, एक बार, दस दिनों के उपवास और प्रार्थना के बाद, मैं भजन सुनना चाहती थी। मैंने ऑनलाइन खोजा, तो मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट मिली। मैंने उस पर कुछ फिल्में देखीं, कहाँ है मेरा घर नामक फिल्म ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी। उसमें दिखाई गई नन्ही-सी बच्ची का जीवन मेरे बचपन का प्रतिबिंब था, उसकी माँ का अनुभव बिलकुल मेरी माँ के अनुभव जैसा। पूरी रात मेरे सीने में दिल जोरों से धड़कता रहा, अगले दिन मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फोन किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर मुझे यकीन हो गया कि वह लौटकर आया हुआ प्रभु यीशु है। मैंने खुशी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य स्वीकार लिया, ऑनलाइन सभाओं में भाग लेने लगी। एक बार मैंने एक भजन सुना और बहुत प्रभावित हुई। "यदि परमेश्वर ने मुझे बचाया न होता, तो मैं संसार में अब तक भटक रहा होता, पापों के दलदल में जूझ रहा होता, और निराशा में जी रहा होता। यदि परमेश्वर ने मुझे न बचाया होता, दुष्ट आत्माएँ मुझे अब तक कुचलतीँ, पाप के सुखों को भोगते हुए, न जानते हुए कि मानव-जीवन की राह है कहाँ। सर्वशक्तिमान परमेश्वर मेरे प्रति दयालु है, उसके वचन मुझे पुकारते हैं, मैं सुनता हूँ परमेश्वर की आवाज़, उसके सिंहासन के सामने मैं उठाया गया हूँ। परमेश्वर के वचनों को रोज खाता-पीता हूँ, कई सत्यों को समझता हूँ, मैं देखता हूँ कितनी भ्रष्ट है मानवजाति, हमें वास्तव में परमेश्वर के उद्धार की ज़रूरत है। परमेश्वर का सत्य मुझे शुद्ध करता और बचाता है। निरंतर होते न्याय और शुद्धि से, मेरा जीवन स्वभाव कुछ बदला है, परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता का अनुभव कर, उसका प्यारापन मैंने समझा है। मैं परमेश्वर का भय मान सकता हूँ, बुराई से दूर रह सकता हूँ, अब इंसानों की तरह थोड़ा-बहुत जी सकता हूँ" (मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ, यदि परमेश्वर ने मुझे बचाया न होता)। इस गीत ने मेरा जीवन बहुत अच्छे से स्पष्ट कर दिया। अतीत में, मैं हमेशा अपने हाथों से एक खुशहाल जीवन बनाना चाहती थी, और मुझे विश्वास था कि मैं अपने बल पर बचपन के सपने और इच्छाएँ पूरी कर सकती हूँ, लेकिन अंत में, मैं आहत हुई, मैं दुख में बेसहारा जी रही थी। परमेश्वर ही था, जो मुझे अपने सामने लाया, मेरी पीड़ा शांत की, मुझे दुनिया के अँधेरे से बचाया, अपने वचन पढ़ने दिए, न्याय और शुद्धिकरण स्वीकारने का मौका दिया। परमेश्वर के उद्धार के लिए उसका धन्यवाद! उस समय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचन पढ़ने के लिए मैं बेचैन थी, क्योंकि मुझे लगा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में कई प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं। बाद में, मैंने परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा। "मनुष्य जीवन-भर जन्म, मृत्यु, बीमारी और वृद्धावस्था के कारण जो सहता है उसका स्रोत क्या है? किस कारण लोगों को यह कष्ट झेलना पड़ा? जब मनुष्य को पहली बार सृजित किया गया था तब यह नहीं था। है ना? तो फिर, यह कष्ट कहाँ से आया? यह कष्ट तब अस्तित्व में आया जब शैतान ने इंसानों को प्रलोभन दिया और वे शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिए गए और पतित हो गए। मानवीय देह की पीड़ा, उसकी यंत्रणा और उसका खोखलापन साथ ही मानवीय दुनिया की दयनीय दशा, ये सब तभी आए जब शैतान ने मानवजाति को भ्रष्ट कर दिया। जब मनुष्य शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया, तब वह उसे यंत्रणा देने लगा। परिणामस्वरूप, मनुष्य अधिकाधिक अपभ्रष्ट हो गया। मनुष्य की बीमारियाँ अधिकाधिक गंभीर होती गईं, और उसका कष्ट अधिकाधिक घोर होता गया। मनुष्य, मानवीय दुनिया के खोखलेपन, त्रासदी और साथ ही वहाँ जीवित रहने में अपनी असमर्थता को ज्यादा से ज्यादा महसूस करने लगा, और दुनिया में जीवित रहना अधिक से अधिक निराशा से भर गया। इस प्रकार, यह दुःख मनुष्य पर शैतान द्वारा लाया गया था और यह तभी हुआ जब शैतान ने मनुष्यों को भ्रष्ट कर दिया और उनका पतन हो गया" (वचन, खंड 3, अंत के दिनों के मसीह के प्रवचन, परमेश्वर द्वारा जगत की पीड़ा का अनुभव करने का अर्थ)। परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गई, कि उसने रोग, पीड़ा और मृत्यु से रहित संसार की रचना की थी। जब शैतान ने लोगों को परमेश्वर को धोखा देने और उससे दूर रहने के लिए ललचाया, तो लोग पतित और भ्रष्ट होने लगे, और बीमारी और मृत्यु भी मानव-जाति पर आ पड़ी। उसके बाद, जीवन और ज्यादा दयनीय हो गया। छह वर्षों में मैं बीमारी से पीड़ित रही, यहाँ तक कि आत्महत्या तक करनी चाही। मेरा जीवन व्यर्थ और दर्द से भरा था। लेकिन अब मुझे अपने दर्द का स्रोत समझ आ गया : शैतान ने मुझे भ्रष्ट किया और मैं परमेश्वर से दूर हो गई, सिर्फ प्रसिद्धि और दौलत के लिए जीने लगी। शैतान के प्रभुत्व में रहते हुए, मैं सिर्फ और दर्द महसूस कर सकती थी, मेरा जीवन व्यर्थ हो जाना था। परमेश्वर के वचन पढ़ने से मेरा दिल उजला होता गया, उन्होंने मेरी सूखी हुई आत्मा को पोषित किया। मैं ऐसा महसूस कर रही थी, मानो बुरे सपनों से जाग गई हूँ। बाद में, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचन पढ़े। "'पैसा दुनिया को नचाता है' यह शैतान का एक फ़लसफ़ा है और यह संपूर्ण मानवजाति में, हर मानव-समाज में प्रचलित है। तुम कह सकते हो कि यह एक रुझान है, क्योंकि यह हर एक व्यक्ति के हृदय में बैठा दिया गया है। बिलकुल शुरू से ही, लोगों ने इस कहावत को स्वीकार नहीं किया, किंतु फिर जब वे जीवन की वास्तविकताओं के संपर्क में आए, तो उन्होंने इसे मूक सहमति दे दी, और महसूस करना शुरू किया कि ये वचन वास्तव में सत्य हैं। क्या यह शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने की प्रक्रिया नहीं है? शायद लोग इस कहावत को समान रूप से नहीं समझते, बल्कि हर एक आदमी अपने आसपास घटित घटनाओं और अपने निजी अनुभवों के आधार पर इस कहावत की अलग-अलग रूप में व्याख्या करता है और इसे अलग-अलग मात्रा में स्वीकार करता है। क्या ऐसा नहीं है? चाहे इस कहावत के संबंध में किसी के पास कितना भी अनुभव हो, इसका किसी के हृदय पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है? तुम लोगों में से प्रत्येक को शामिल करते हुए, दुनिया के लोगों के स्वभाव के माध्यम से कोई चीज प्रकट होती है। यह क्या है? यह पैसे की उपासना है। क्या इसे किसी के हृदय में से निकालना कठिन है? यह बहुत कठिन है! ऐसा प्रतीत होता है कि शैतान का मनुष्य को भ्रष्ट करना सचमुच गहन है! शैतान लोगों को प्रलोभन देने के लिए धन का उपयोग करता है, और उन्हें भ्रष्ट करके उनसे धन की आराधना करवाता है और भौतिक चीजों की पूजा करवाता है। और लोगों में धन की इस आराधना की अभिव्यक्ति कैसे होती है? क्या तुम लोगों को लगता है कि बिना पैसे के तुम लोग इस दुनिया में जीवित नहीं रह सकते, कि पैसे के बिना एक दिन जीना भी असंभव होगा? लोगों की हैसियत इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास कितना पैसा है, और वे उतना ही सम्मान पाते हैं। गरीबों की कमर शर्म से झुक जाती है, जबकि धनी अपनी ऊँची हैसियत का मज़ा लेते हैं। वे ऊँचे और गर्व से खड़े होते हैं, ज़ोर से बोलते हैं और अंहकार से जीते हैं। यह कहावत और रुझान लोगों के लिए क्या लाता है? क्या यह सच नहीं है कि पैसे की खोज में लोग कुछ भी बलिदान कर सकते हैं? क्या अधिक पैसे की खोज में कई लोग अपनी गरिमा और ईमान का बलिदान नहीं कर देते? क्या कई लोग पैसे की खातिर अपना कर्तव्य निभाने और परमेश्वर का अनुसरण करने का अवसर नहीं गँवा देते? क्या सत्य प्राप्त करने और बचाए जाने का अवसर खोना लोगों का सबसे बड़ा नुकसान नहीं है? क्या मनुष्य को इस हद तक भ्रष्ट करने के लिए इस विधि और इस कहावत का उपयोग करने के कारण शैतान कुटिल नहीं है? क्या यह दुर्भावनापूर्ण चाल नहीं है? जैसे-जैसे तुम इस लोकप्रिय कहावत का विरोध करने से लेकर अंततः इसे सत्य के रूप में स्वीकार करने तक की प्रगति करते हो, तुम्हारा हृदय पूरी तरह से शैतान के चंगुल में फँस जाता है, और इस तरह तुम अनजाने में इस कहावत के अनुसार जीने लगते हो। इस कहावत ने तुम्हें किस हद तक प्रभावित किया है? हो सकता है कि तुम सच्चे मार्ग को जानते हो, और हो सकता है कि तुम सत्य को जानते हो, किंतु उसकी खोज करने में तुम असमर्थ हो। हो सकता है कि तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि परमेश्वर के वचन सत्य हैं, किंतु तुम सत्य को पाने के लिए क़ीमत चुकाने का कष्ट उठाने को तैयार नहीं हो। इसके बजाय, तुम बिलकुल अंत तक परमेश्वर का विरोध करने में अपने भविष्य और नियति को त्याग दोगे। चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न कहे, चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न करे, चाहे तुम्हें इस बात का एहसास क्यों न हो कि तुम्हारे लिए परमेश्वर का प्रेम कितना गहरा और कितना महान है, तुम फिर भी हठपूर्वक अपने रास्ते पर ही चलते रहने का आग्रह करोगे और इस कहावत की कीमत चुकाओगे। कहने का तात्पर्य यह है कि यह कहावत पहले ही तुम्हारे विचारों के साथ छल कर चुकी है और उन्हें नियंत्रित कर चुकी है, यह पहले ही तुम्हारे व्यवहार को नियंत्रित कर चुकी है, और तुम धन की खोज छोड़ने के बजाय इसे अपने भाग्य पर शासन करने दोगे। लोग इस प्रकार कार्य कर सकते हैं कि उन्हें शैतान के शब्दों द्वारा नियंत्रित और प्रभावित किया जा सकता है - क्या इसका यह अर्थ नहीं कि उन्हें शैतान द्वारा बरगलाया और भ्रष्ट किया गया है? क्या शैतान के दर्शन, उसकी मानसिकता और उसके स्वभाव ने तुम्हारे दिलों में जड़ें नहीं जमा ली हैं? जब तुम आँख मूँदकर धन के पीछे दौड़ते हो, और सत्य की खोज छोड़ देते हो, तो क्या शैतान ने तुम्हें बरगलाने का अपना उद्देश्य प्राप्त नहीं कर लिया है? ठीक यही मामला है" (वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है V)। परमेश्वर के वचन पढ़ने के बाद ही मुझे समझ आया कि "पैसा ही सब-कुछ नहीं है, किंतु उसके बिना आप कुछ नहीं कर सकते" और "दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है" जैसी चीजें, जिन पर मैं हमेशा विश्वास करती थी, असल में शैतानी फलसफे हैं। उन्होंने मेरे दिल में जड़ें जमा ली थीं, मेरे दिमाग पर कब्जा कर लिया था, जिससे मुझे पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं लगता था। उसे मैंने जीने की एकमात्र वजह माना, मुझे लगा कि इससे मुझे खुशी और सम्मान मिलेगा, इसलिए मैं बेतहाशा पैसे के पीछे दौड़ी। ज्यादा पैसे कमाने, ईर्ष्या और आदर का पात्र बनने, एक अच्छा जीवन जीने के लिए, शरीर की परवाह किए बिना मैं कड़ी मेहनत करती रही, लकवाग्रस्त होकर अपनी जान गँवाने वाली थी। यह मेरे द्वारा शैतान के फलसफे स्वीकार कर उनसे नियंत्रित होने का नतीजा था। हालाँकि मुझे पता था कि परमेश्वर है, पर मुझमें उसका अनुसरण कर जीवन के सच्चे मार्ग पर चलने की ताकत नहीं थी, क्योंकि शैतान के वचन और फलसफे मुझे नियंत्रित कर रहे थे। उन्होंने मुझे परमेश्वर से दूर कर सिर्फ देह की तृप्ति के लिए जीने को बाध्य किया। परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन से मैं जान गई कि मैं गलत रास्ते पर हूँ। बाद में, मैंने एक और अंश पढ़ा और मुझे पीड़ा से निकलने का रास्ता मिल गया। परमेश्वर के वचन कहते है, "क्योंकि लोग परमेश्वर के आयोजनों और परमेश्वर की संप्रभुता को नहीं पहचानते हैं, इसलिए वे हमेशा अवज्ञापूर्ण ढंग से, और एक विद्रोही दृष्टिकोण के साथ भाग्य का सामना करते हैं, और इस निरर्थक उम्मीद में कि वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों को बदल देंगे और अपने भाग्य को पलट देंगे, हमेशा परमेश्वर के अधिकार और उसकी संप्रभुता तथा उन चीज़ों को छोड़ देना चाहते हैं जो उनके भाग्य में होती हैं। परन्तु वे कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं; वे हर मोड़ पर नाकाम रहते हैं। यह संघर्ष, जो किसी व्यक्ति की आत्मा की गहराई में चलता है, ऐसी गहन पीड़ा देता है जो किसी को अंदर तक छलनी कर देती है, इस बीच व्यक्ति अपना जीवन व्यर्थ में नष्ट कर देता है। इस पीड़ा का कारण क्या है? क्या यह परमेश्वर की संप्रभुता के कारण है, या इसलिए है क्योंकि वह व्यक्ति अभागा ही जन्मा था? स्पष्ट है कि दोनों में कोई भी बात सही नहीं है। वास्तव में, लोग जिस मार्ग पर चलते हैं, जिस तरह से वे अपना जीवन बिताते हैं, उसी कारण से यह पीड़ा होती है। ... अपने आपको इस स्थिति से मुक्त करने का एक बहुत ही आसान तरीका है जो है जीवन जीने के अपने पुराने तरीके को विदा कहना; जीवन में अपने पुराने लक्ष्यों को अलविदा कहना; अपनी पुरानी जीवनशैली, जीवन को देखने के दृष्टिकोण, लक्ष्यों, इच्छाओं एवं आदर्शों को सारांशित करना, उनका विश्लेषण करना, और उसके बाद मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा और माँग के साथ उनकी तुलना करना, और देखना कि उनमें से कोई परमेश्वर की इच्छा और माँग के अनुकूल है या नहीं, उनमें से कोई जीवन के सही मूल्य प्रदान करता है या नहीं, यह व्यक्ति को सत्य को अच्छी तरह से समझने की दिशा में ले जाता है या नहीं, और उसे मानवता और मनुष्य की सदृशता के साथ जीवन जीने देता है या नहीं। जब तुम जीवन के उन विभिन्न लक्ष्यों की, जिनकी लोग खोज करते हैं और जीवन जीने के उनके अनेक अलग-अलग तरीकों की बार-बार जाँच-पड़ताल करोगे और सावधानीपूर्वक उनका विश्लेषण करोगे, तो तुम यह पाओगे कि उनमें से एक भी सृजनकर्ता के उस मूल इरादे के अनुरूप नहीं है जिसके साथ उसने मानवजाति का सृजन किया था। वे सभी, लोगों को सृजनकर्ता की संप्रभुता और उसकी देखभाल से दूर करते हैं; ये सभी ऐसे जाल हैं जो लोगों को भ्रष्ट बनने पर मजबूर करते हैं, और जो उन्हें नरक की ओर ले जाते हैं। जब तुम इस बात को समझ लेते हो, उसके पश्चात्, तुम्हारा काम है जीवन के अपने पुराने दृष्टिकोण को अपने से अलग करना, अलग-अलग तरह के जालों से दूर रहना, परमेश्वर को तुम्हारे जीवन को अपने हाथ में लेने देना और तुम्हारे लिए व्यवस्थाएं करने देना; तुम्हारा काम है केवल परमेश्वर के आयोजनों और मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करने का प्रयास करना, अपनी कोई निजी पसंद मत रखना, और एक ऐसा इंसान बनना जो परमेश्वर की आराधना करता है" (वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III)। परमेश्वर के वचनों ने मुझे समझा दिया कि पैसे के नियंत्रण से मुक्त होने का तरीका है, वे लक्ष्य छोड़ना जिन्हें मैं पहले पाना चाहती थी, अपने प्रयास से प्रसिद्धि और दौलत पाने के पीछे न दौड़ना, और परमेश्वर को अपने जीवन का निर्णय और व्यवस्था करने देना। मुझे परमेश्वर के आयोजन मानने, उसकी अपेक्षाओं के अनुसार अभ्यास करने, और उसकी आराधना करने वाला बनना है। मैं उसकी हृदय से आभारी थी। जीवन में पहली बार मैंने परमेश्वर का मार्गदर्शन महसूस किया। लगा जैसे वह सीधे मुझसे बात कर अभ्यास का मार्ग दिखा रहा हो। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के बाद मैं कलीसिया में कर्तव्य निभाना चाहती थी, लेकिन उस समय मैं एक ऑनलाइन दुकान चलाती थी। मैंने बहुत पैसा लगाया था, पर फायदा नहीं हुआ। और ज्यादा नुकसान के डर से, हर समय ऑनलाइन ऑर्डर देखती रहती थी, दिन की सभाओं के दौरान भी मैसेज आते रहते थे, इसलिए मैं अपने दिल को बिलकुल शांत नहीं कर पाती थी, मैं अभी भी सोचा करती थी कि कैसे निवेश कर ज्यादा पैसे बनाए जाएँ। दिन में ऑनलाइन स्टोर चलाना थकाऊ था, इसलिए कभी-कभी, शाम की सभाओं में, पूरे शरीर में दर्द के कारण, मैं खुद को सँभालने के लिए दवा लेकर लेट जाती, दवा से नींद आ जाती और मैं सभाओं के दौरान सो जाती थी। मैं ईमानदारी से परमेश्वर की आराधना करना चाहती थी। अपना पुराना जीवन नहीं जीना चाहती थी। इसलिए, मैंने ऑनलाइन दुकान बंद कर दी। बाद में, मेरी एक सहेली ने कहा कि वह ईंट-गारे का स्टोर खोलना चाहती है, चूँकि मैंने व्यवसाय प्रबंधन की पढ़ाई की थी, इसलिए मैंने योजना बनाने में उसकी मदद कर दी। उसे वह बहुत पसंद आया, तो बोली कि वह मेरे साथ काम करना चाहती है। वह चाहती थी मैं पैकेजिंग करूँ और वह शिपिंग, और पैसा बराबर बाँट लें। मैं ललचा गई। मुझे लगा कि यह पैसा कमाने का अच्छा मौका है, मेरे दिमाग में तुरंत बहुत सारे विचार आए। उस रात, जब मैंने अपनी स्थिति पर सोचने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की, तो लगा कि मैं फिर से पैसे के लिए लालच दिखा रही हूँ। मुझे पहले की अपनी तमाम तकलीफें याद आ गईं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के बाद मेरी आत्मा अब पीड़ित नहीं थी। मैंने शांति और दृढ़ता का आनंद लिया था, और मेरे शरीर का दर्द दवा लिए बिना ही बहुत बेहतर था। यह मेरे लिए परमेश्वर की सुरक्षा और उद्धार था। परमेश्वर ही था, जिसने मुझे प्रसिद्धि और दौलत की पीड़ा से बचने में मदद की थी, लेकिन मैं लाभ और प्रसिद्धि के पीछे दौड़ते रहना चाहती थी। क्या मैं फिर से शैतान के फंदे में नहीं फँस रही थी? मैं समझ गई कि मुझे अपनी सहेली का प्रस्ताव ठुकरा देना चाहिए, लेकिन अभी भी इसे पूरी तरह से नहीं छोड़ पाई। बाद में, मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े और अभ्यास का मार्ग पाया। परमेश्वर के वचन कहते है, "लोग अपना जीवन धन-दौलत और प्रसिद्धि का पीछा करते हुए बिता देते हैं; वे इन तिनकों को यह सोचकर कसकर पकड़े रहते हैं, कि केवल ये ही उनके जीवन का सहारा हैं, मानो कि उनके होने से वे निरंतर जीवित रह सकते हैं, और मृत्यु से बच सकते हैं। परन्तु जब मृत्यु उनके सामने खड़ी होती है, केवल तभी उन्हें समझ आता है कि ये चीज़ें उनकी पहुँच से कितनी दूर हैं, मृत्यु के सामने वे कितने कमज़ोर हैं, वे कितनी आसानी से बिखर जाते हैं, वे कितने एकाकी और असहाय हैं, और वे कहीं से सहायता नही माँग सकते हैं। उन्हें समझ आ जाता है कि जीवन को धन-दौलत और प्रसिद्धि से नहीं खरीदा जा सकता है, कि कोई व्यक्ति चाहे कितना ही धनी क्यों न हो, उसका पद कितना ही ऊँचा क्यों न हो, मृत्यु के सामने सभी समान रूप से कंगाल और महत्वहीन हैं। उन्हें समझ आ जाता है कि धन-दौलत से जीवन नहीं खरीदा जा सकता है, प्रसिद्धि मृत्यु को नहीं मिटा सकती है, न तो धन-दौलत और न ही प्रसिद्धि किसी व्यक्ति के जीवन को एक मिनट, या एक पल के लिए भी बढ़ा सकती है। लोग जितना अधिक इस प्रकार महसूस करते हैं, उतनी ही अधिक उनकी जीवित रहने की लालसा बढ़ जाती है; लोग जितना अधिक इस प्रकार महसूस करते हैं, उतना ही अधिक वे मृत्यु के पास आने से भयभीत होते हैं। केवल इसी मोड़ पर उन्हें वास्तव में समझ में आता है कि उनका जीवन उनका नहीं है, और उनके नियंत्रण में नहीं है, और किसी का इस पर वश नहीं है कि वह जीवित रहेगा या मर जाएगा - यह सब उसके नियंत्रण से बाहर है" (वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III)। परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गई कि लोग सोचते हैं कि पैसे से चिपके रहना जीवन बढ़ा सकता और मरने से बचा सकता है, लेकिन मृत्यु के कगार पर उन्हें एहसास होता है कि पैसा उन्हें नहीं बचा सकता, अनंत जीवन नहीं दे सकता, स्वस्थ होने में मदद नहीं कर सकता। क्या मौत आने पर जागने से बहुत देर नहीं हो जाती? मैं भी ऐसी ही थी, शरीर की परवाह छोड़ आँख मूँदे पैसे के पीछे दौड़ रही थी। डॉक्टर ने मुझे आराम करने और स्वस्थ होने के लिए कहा, लेकिन इस डर से कि अगर मैं घर पर रही तो पैसे नहीं कमा पाऊँगी, मैंने बीमारी में भी काम किया। मुझे लगता था कि मैं अपने भाग्य को नियंत्रित कर सकती हूँ, लेकिन मृत्यु के कगार पर, मुझे एहसास हुआ कि मेरे नियंत्रण में कुछ भी नहीं है। परमेश्वर के कारण मुझे उसके वचन सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं समझ गई कि लोगों के भाग्य पर परमेश्वर की संप्रभुता है, और मुझे उसकी व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए, भाग्य से नहीं लड़ना चाहिए। अगर मैंने पैसा कमाना चुना, तो मैं फिर से दुखी हो जाऊँगी। मैं पैसे के लिए खुद को थका डालूँगी, और शैतान मुझे नियंत्रित कर पीड़ा देता रहेगा। तभी मैं जान पाई कि यह मेरे लिए शैतान का प्रलोभन था। एक सहेली मेरे पास एक बिजनेस-आइडिया लेकर आई, उसने निवेश किया और आमदनी बराबर बाँटने के लिए तैयार थी। प्रस्ताव बहुत लुभावना था। शैतान इसका इस्तेमाल मुझे पैसे और प्रसिद्धि के जाल में फँसाने के लिए कर रहा था, मैं मूर्खता करके दुख और पीड़ा भरे अपने पुराने जीवन में लौटना चाहती थी। क्या यह सिर्फ शैतान की चाल में फँसना नहीं था? मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की, कहा कि मैं प्रसिद्धि और लाभ छोड़ कर्तव्य निभाना चाहती हूँ। इसके बाद मुझे बहुत आराम महसूस हुआ। यह एक भारी बोझ से मुक्त होने जैसा था। अगले तीन दिन तक खुद को प्रसिद्धि और लाभ के भँवर से बचाने के लिए मैंने रोज ज्यादा गहनता से प्रार्थना की। मैंने अपनी सहेली के साथ काम करने से मना करने का साहस जुटाया, लेकिन उसने मुझे मनाने की कोशिश की, "अब तुम सरकारी सहायता पर जीती हो। यह तुम्हारे लिए काफी नहीं है। तुम वो नीना नहीं हो, जिसे मैं जानती हूँ।" मैंने कहा, "यह सच है, मैं वो नहीं हूँ जो हुआ करती थी। मैंने परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य स्वीकार किया है, कुछ सत्य समझा है। परमेश्वर ही था, जिसने मुझे मेरी पीड़ा से बचाया। पहले, अस्पताल ने यह कहकर मेरे बचने की उम्मीद छोड़ दी थी कि मेरी बीमारी लाइलाज है। दर्द की दवा से भी दर्द कम नहीं होता था। लेकिन परमेश्वर के वचन पढ़ने से मेरा दर्द अपने आपकम हो गया। अगर मैं परमेश्वर का घर छोड़कर वापस दुनिया में आई, तो मैं अभी भी दर्द में जीऊँगी। मैं इस तरह जीते नहीं रहना चाहती।" मैंने उससे यह भी कहा : "तुम किसी और को साझेदार बना लो। मदद की जरूरत हुई तो मैं तुम्हें कुछ सलाह दे दूँगी।" बाद में, वह कई बार मेरे पास आई, जब तक कि यकीन नहीं हो गया कि मुझे मनाया नहीं जा सकता। अब मैं कलीसिया में अपना कर्तव्य निभाती हूँ, आजादी और शांति महसूस करती हूँ। मेरा शारीरिक दर्द 60-70 फीसदी कम हो गया है, अब मैं चल-फिर सकती हूँ, खाना बना सकती हूँ। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, मैं कलीसिया में अपना कर्तव्य निभा सकती हूँ। मुझे पैसे के नियंत्रण से बचाने और मेरे जीवन की दिशा बदलने के लिए मैं परमेश्वर की आभारी हूँ। मैं अब समझ गई हूँ कि परमेश्वर की संप्रभुता जानना, uसकी आराधना करना, उसके वचनों और अपेक्षाओं के अनुसार अभ्यास करना जीवन की सबसे सार्थक और मूल्यवान चीज है। हालाँकि मेरी बीमारी ने मुझे बहुत दर्द दिया है, लेकिन यह मेरे लिए वरदान भी है। इससे मुझे परमेश्वर के पास लौटने और उसका उद्धार पाने का मौका मिला, जिसे कितने भी पैसे से खरीदा नहीं जा सकता। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद! परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
पैसे और हैसियत ने मेरे लिए किया ही क्या? मैं एक टूटे हुए परिवार में पैदा हुई थी। मैं गर्भ में ही थी, जब मेरे पिता दूसरी औरत के साथ भाग गए। मेरी माँ ने बहुत कष्टों से छह बच्चों को पाला-पोसा, मैं हर रात अपनी माँ को रोते-सिसकते हुए सुनती थी। उसे इस तरह फूट-फूटकर रोते देख मैं शादी और रिश्तों को लेकर बहुत नकारात्मक हो गई। मैंने मन ही मन कहा, "किसी पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। किसी पर भरोसा मत करना। जीवन में सिर्फ खुद पर और अपने कमाए पैसे पर ही भरोसा किया जा सकता है।" उसी क्षण से मैं सोचने लगी कि पैसा कैसे कमाया जाए। हाई स्कूल में, जब बाकी सभी अपनी छुट्टियों में मौज करते, मेरी माँ और मैं सड़क-किनारे खाने का स्टॉल लगाया करते। लेकिन उस समय हम जो पैसा कमाते, वह हमारी बुनियादी जरूरतों में ही लग जाता। हाई स्कूल के दूसरे वर्ष फीस न दे पाने के कारण मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद मैं स्टॉल चलाती रही। मैं रोज सुबह चार-पाँच बजे खाना बनाने के लिए उठती और छह बजे तक स्टॉल चली जाती। तीन साल बाद, मैंने इतने पैसे बचा लिए कि किसी बड़े शहर जा सकूँ। मैं रोज जल्दी उठती कड़ी मेहनत करती, लेकिन कमाई ज्यादा न होती, इससे मैं संतुष्ट नहीं थी। इसलिए, अपने बॉयफ्रेंड की मदद से, मैंने अपनी बचत लगाकर एक छोटी-सी दुकान खोल ली। दो साल बाद, हमने कुछ पैसे कमा लिए और हमारे बच्चे हो गए। हमारी शादी होने ही वाली थी, कि मेरे बॉयफ्रेंड ने धोखा देकर मेरा सब-कुछ हड़प लिया। सारे पैसे लेकर दूसरी औरत के साथ रहने लगा। उनका एक बच्चा भी था। मेरी सारी मेहनत की कमाई चली गई, मैं उदास और दुखी रहने लगी। मेरी माँ के साथ जो हुआ, उसके बाद से मुझे लगता था कि पुरुष भरोसे के लायक नहीं हैं, मुझे अपने बच्चे पालने के लिए पैसे कमाने पर ध्यान देना होगा। लेकिन मैं बहुत दबाव में थी, मेरे पास अपनी दुकान चलाने की ताकत नहीं थी, और मैं बीमार थी। मैं अब इस शहर में नहीं रहना चाहती थी। बाद में, जब मेरे बॉयफ्रेंड के पिता को पता चला, तो उन्होंने मुझे यूके का वीजा लेने के लिए पैसे दे दिए। चार साल बाद, मुझे निवास-परमिट मिल गया और मैंने विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। ज्यादा पैसा कमाने के लिए मैंने व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चुना। दो हज़ार ग्यारह में मुझे छात्रवृत्ति मिली, तो उस पैसे से मैंने शहर में एक अफ्रीकी खाद्य भंडार खोल लिया। शुरुआत में, चूँकि स्टोर छोटा था, इसलिए मैंने सिर्फ एक व्यक्ति काम पर रखा। मैं स्टोर पर काम करने के लिए हर सुबह पाँच बजे उठती और काम खत्म होने के बाद स्कूल जाती। कक्षा के बाद मैं साफ-सफाई, सामान पहुँचाने और खाते सँभालने के लिए स्टोर पर लौट आती। व्यवसाय करना, विश्वविद्यालय में पढ़ना और साथ ही बच्चे भी पालना बहुत कठिन रहा होगा। लेकिन जब मैं हरेक को अपनी तारीफ करते सुनती, और उनकी प्रशंसात्मक और ईर्ष्यालु आँखें देखती, तो बहुत संतुष्टि महसूस करती। उस समय, स्टोर अच्छा चल रहा था, मैंने जितना सोचा नहीं था उससे भी ज्यादा पैसा कमा लिया, लेकिन मुझे वह काफी नहीं लगा। मैंने सोचा कि मुझे इतना अमीर होना चाहिए कि मैं बैंक खरीद सकूँ, ताकि दूसरे मेरी प्रशंसा करें और मुझसे ईर्ष्या करें। मैं वास्तव में यही चाहती थी। ज्यादा सम्मान और प्रशंसा पाने और यह साबित करने के लिए कि मैं मजबूत हूँ, अपने बच्चे पालने, शानदार जीवन जीने और ज्यादा पैसा कमाने के लिए मैंने अपनी दुकान बढ़ा ली। तीन साल बाद, मेरी छोटी-सी दुकान एक बड़ी दुकान में बदल गई, जिसमें विभिन्न अफ्रीकी देशों का खाना बिकता था। मुझे शहर के एकमात्र अफ्रीकी उद्यमी के रूप में भी जाना जाता था। हाई स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों ने मुझे यूके में प्रवासी युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षाओं और सफलता के बारे में बोलने के लिए आमंत्रित किया, और उन्होंने मुझे एक ट्रॉफी दी। जब मैं ट्रॉफी लेकर भाषण देने गई, तो सभी ने मुझे पहचान लिया। मुझे लगा, जैसे मेरी सारी मेहनत और वर्षों की तकलीफ सफल रही, और मैंने अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त कर लिए। लेकिन मैंने पैसा कमाना बंद नहीं किया, क्योंकि हैसियत होने पर काम करना और पैसा कमाना आसान हो जाता है, और मेरी प्रसिद्धि पाने की चाह भी बढ़ गई। लेकिन इस समय तक मुझे शरीर में बेचैनी महसूस होने लगी थी। मैं ज्यादा देर खड़ी न रह पाती थी। डॉक्टर ने कहा कि मुझे गठिया, फाइब्रोमायल्जिया और साइटिका है, जिसका मतलब है कि मेरी पूरी रीढ़ में दर्द था। डॉक्टर ने कहा कि मुझे स्वस्थ होने में समय लगेगा, और मैं अब काम नहीं कर सकती, लेकिन मैंने अपनी बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा, व्यायाम से ठीक हो जाऊँगी। फिर, स्टोर इतना अच्छा चल रहा था कि उसे छोड़ना नहीं चाहती थी, इसलिए मैं काम करती रही। दो हज़ार चौदह आते-आते मेरी हालत और खराब हो गई, पूरे शरीर में दर्द रहने लगा। लगा, जैसे मेरा पूरा शरीर जल रहा हो, मानो आग लग गई हो। मेरे पैर ज्यादातर समय सूजे रहते, लगता जैसे कूल्हे की हड्डी टूट- गई हो, रीढ़ नरम पड़ गई हो। उसे सीधा रखने के लिए मुझे पट्टी बाँधनी पड़ती। जब मैं चेकअप कराने गई, तो डॉक्टर ने कहा कि मुझे गठिया तो है ही, लेकिन अक्सर कसाई की दुकान के फ्रीजर में जाने के कारण ठंड मेरी हड्डियों तक पहुँच गई है, इसलिए किसी भी समय स्थायी रूप से लकवा मार सकता है। उस समय मैं बहुत घबरा गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बाद में, मैं हिल भी न पाती, तो मेरे पास दुकान बंद करने के अलावा कोई चारा न रहा। शहर के दूसरे लोगों ने मेरी नकल करते हुए अपनी दुकानें खोल लीं। मुझे जलन हो रही थी, और मैं अपनी हालत से बहुत दुखी भी थी। मैं इतनी गंभीर रूप से बीमार क्यों थी? चौबीसों घंटे दर्द होता रहता, ऐसा कोई दिन न जाता जब मैं चैन से सो पाती। ऐसा लगता, जैसे मेरे दिल में आग जल रही हो, मेरी शारीरिक और मानसिक पीड़ा विशेष रूप से कष्टप्रद थी। तब, मैंने वाकई चीजों पर विचार करने लगी। मैंने जो पैसा कमाया था, वह मेरी बीमारी का इलाज नहीं कर पाया, तो उसका क्या फायदा? उस समय, मैं असुरक्षित और असहाय महसूस कर रही थी। मुझे अपने बच्चों की चिंता थी, क्योंकि सिर्फ मैं ही उनका परिवार थी। मैं अब पैसे और प्रसिद्धि के बारे में नहीं सोचना चाहती थी। बस यही चाहती थी कि मेरा दर्द खत्म हो और मैं शांति से अपने बच्चे पाल सकूँ। एक साल से ज्यादा समय से बिस्तर पर पड़े हुए मैं खुद से पूछा करती, "लोगों को इतना कष्ट क्यों होता है? हम बीमार क्यों पड़ते हैं?" दुख और निराशा में, मैंने अपने दर्द से बचने में मदद करने के लिए प्रभु को पुकारा। मई दो हज़ार उन्नीस में, एक बार, दस दिनों के उपवास और प्रार्थना के बाद, मैं भजन सुनना चाहती थी। मैंने ऑनलाइन खोजा, तो मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट मिली। मैंने उस पर कुछ फिल्में देखीं, कहाँ है मेरा घर नामक फिल्म ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी। उसमें दिखाई गई नन्ही-सी बच्ची का जीवन मेरे बचपन का प्रतिबिंब था, उसकी माँ का अनुभव बिलकुल मेरी माँ के अनुभव जैसा। पूरी रात मेरे सीने में दिल जोरों से धड़कता रहा, अगले दिन मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फोन किया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर मुझे यकीन हो गया कि वह लौटकर आया हुआ प्रभु यीशु है। मैंने खुशी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कार्य स्वीकार लिया, ऑनलाइन सभाओं में भाग लेने लगी। एक बार मैंने एक भजन सुना और बहुत प्रभावित हुई। "यदि परमेश्वर ने मुझे बचाया न होता, तो मैं संसार में अब तक भटक रहा होता, पापों के दलदल में जूझ रहा होता, और निराशा में जी रहा होता। यदि परमेश्वर ने मुझे न बचाया होता, दुष्ट आत्माएँ मुझे अब तक कुचलतीँ, पाप के सुखों को भोगते हुए, न जानते हुए कि मानव-जीवन की राह है कहाँ। सर्वशक्तिमान परमेश्वर मेरे प्रति दयालु है, उसके वचन मुझे पुकारते हैं, मैं सुनता हूँ परमेश्वर की आवाज़, उसके सिंहासन के सामने मैं उठाया गया हूँ। परमेश्वर के वचनों को रोज खाता-पीता हूँ, कई सत्यों को समझता हूँ, मैं देखता हूँ कितनी भ्रष्ट है मानवजाति, हमें वास्तव में परमेश्वर के उद्धार की ज़रूरत है। परमेश्वर का सत्य मुझे शुद्ध करता और बचाता है। निरंतर होते न्याय और शुद्धि से, मेरा जीवन स्वभाव कुछ बदला है, परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता का अनुभव कर, उसका प्यारापन मैंने समझा है। मैं परमेश्वर का भय मान सकता हूँ, बुराई से दूर रह सकता हूँ, अब इंसानों की तरह थोड़ा-बहुत जी सकता हूँ" । इस गीत ने मेरा जीवन बहुत अच्छे से स्पष्ट कर दिया। अतीत में, मैं हमेशा अपने हाथों से एक खुशहाल जीवन बनाना चाहती थी, और मुझे विश्वास था कि मैं अपने बल पर बचपन के सपने और इच्छाएँ पूरी कर सकती हूँ, लेकिन अंत में, मैं आहत हुई, मैं दुख में बेसहारा जी रही थी। परमेश्वर ही था, जो मुझे अपने सामने लाया, मेरी पीड़ा शांत की, मुझे दुनिया के अँधेरे से बचाया, अपने वचन पढ़ने दिए, न्याय और शुद्धिकरण स्वीकारने का मौका दिया। परमेश्वर के उद्धार के लिए उसका धन्यवाद! उस समय, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचन पढ़ने के लिए मैं बेचैन थी, क्योंकि मुझे लगा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में कई प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं। बाद में, मैंने परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा। "मनुष्य जीवन-भर जन्म, मृत्यु, बीमारी और वृद्धावस्था के कारण जो सहता है उसका स्रोत क्या है? किस कारण लोगों को यह कष्ट झेलना पड़ा? जब मनुष्य को पहली बार सृजित किया गया था तब यह नहीं था। है ना? तो फिर, यह कष्ट कहाँ से आया? यह कष्ट तब अस्तित्व में आया जब शैतान ने इंसानों को प्रलोभन दिया और वे शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिए गए और पतित हो गए। मानवीय देह की पीड़ा, उसकी यंत्रणा और उसका खोखलापन साथ ही मानवीय दुनिया की दयनीय दशा, ये सब तभी आए जब शैतान ने मानवजाति को भ्रष्ट कर दिया। जब मनुष्य शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया, तब वह उसे यंत्रणा देने लगा। परिणामस्वरूप, मनुष्य अधिकाधिक अपभ्रष्ट हो गया। मनुष्य की बीमारियाँ अधिकाधिक गंभीर होती गईं, और उसका कष्ट अधिकाधिक घोर होता गया। मनुष्य, मानवीय दुनिया के खोखलेपन, त्रासदी और साथ ही वहाँ जीवित रहने में अपनी असमर्थता को ज्यादा से ज्यादा महसूस करने लगा, और दुनिया में जीवित रहना अधिक से अधिक निराशा से भर गया। इस प्रकार, यह दुःख मनुष्य पर शैतान द्वारा लाया गया था और यह तभी हुआ जब शैतान ने मनुष्यों को भ्रष्ट कर दिया और उनका पतन हो गया" । परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गई, कि उसने रोग, पीड़ा और मृत्यु से रहित संसार की रचना की थी। जब शैतान ने लोगों को परमेश्वर को धोखा देने और उससे दूर रहने के लिए ललचाया, तो लोग पतित और भ्रष्ट होने लगे, और बीमारी और मृत्यु भी मानव-जाति पर आ पड़ी। उसके बाद, जीवन और ज्यादा दयनीय हो गया। छह वर्षों में मैं बीमारी से पीड़ित रही, यहाँ तक कि आत्महत्या तक करनी चाही। मेरा जीवन व्यर्थ और दर्द से भरा था। लेकिन अब मुझे अपने दर्द का स्रोत समझ आ गया : शैतान ने मुझे भ्रष्ट किया और मैं परमेश्वर से दूर हो गई, सिर्फ प्रसिद्धि और दौलत के लिए जीने लगी। शैतान के प्रभुत्व में रहते हुए, मैं सिर्फ और दर्द महसूस कर सकती थी, मेरा जीवन व्यर्थ हो जाना था। परमेश्वर के वचन पढ़ने से मेरा दिल उजला होता गया, उन्होंने मेरी सूखी हुई आत्मा को पोषित किया। मैं ऐसा महसूस कर रही थी, मानो बुरे सपनों से जाग गई हूँ। बाद में, मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचन पढ़े। "'पैसा दुनिया को नचाता है' यह शैतान का एक फ़लसफ़ा है और यह संपूर्ण मानवजाति में, हर मानव-समाज में प्रचलित है। तुम कह सकते हो कि यह एक रुझान है, क्योंकि यह हर एक व्यक्ति के हृदय में बैठा दिया गया है। बिलकुल शुरू से ही, लोगों ने इस कहावत को स्वीकार नहीं किया, किंतु फिर जब वे जीवन की वास्तविकताओं के संपर्क में आए, तो उन्होंने इसे मूक सहमति दे दी, और महसूस करना शुरू किया कि ये वचन वास्तव में सत्य हैं। क्या यह शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने की प्रक्रिया नहीं है? शायद लोग इस कहावत को समान रूप से नहीं समझते, बल्कि हर एक आदमी अपने आसपास घटित घटनाओं और अपने निजी अनुभवों के आधार पर इस कहावत की अलग-अलग रूप में व्याख्या करता है और इसे अलग-अलग मात्रा में स्वीकार करता है। क्या ऐसा नहीं है? चाहे इस कहावत के संबंध में किसी के पास कितना भी अनुभव हो, इसका किसी के हृदय पर कितना नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है? तुम लोगों में से प्रत्येक को शामिल करते हुए, दुनिया के लोगों के स्वभाव के माध्यम से कोई चीज प्रकट होती है। यह क्या है? यह पैसे की उपासना है। क्या इसे किसी के हृदय में से निकालना कठिन है? यह बहुत कठिन है! ऐसा प्रतीत होता है कि शैतान का मनुष्य को भ्रष्ट करना सचमुच गहन है! शैतान लोगों को प्रलोभन देने के लिए धन का उपयोग करता है, और उन्हें भ्रष्ट करके उनसे धन की आराधना करवाता है और भौतिक चीजों की पूजा करवाता है। और लोगों में धन की इस आराधना की अभिव्यक्ति कैसे होती है? क्या तुम लोगों को लगता है कि बिना पैसे के तुम लोग इस दुनिया में जीवित नहीं रह सकते, कि पैसे के बिना एक दिन जीना भी असंभव होगा? लोगों की हैसियत इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास कितना पैसा है, और वे उतना ही सम्मान पाते हैं। गरीबों की कमर शर्म से झुक जाती है, जबकि धनी अपनी ऊँची हैसियत का मज़ा लेते हैं। वे ऊँचे और गर्व से खड़े होते हैं, ज़ोर से बोलते हैं और अंहकार से जीते हैं। यह कहावत और रुझान लोगों के लिए क्या लाता है? क्या यह सच नहीं है कि पैसे की खोज में लोग कुछ भी बलिदान कर सकते हैं? क्या अधिक पैसे की खोज में कई लोग अपनी गरिमा और ईमान का बलिदान नहीं कर देते? क्या कई लोग पैसे की खातिर अपना कर्तव्य निभाने और परमेश्वर का अनुसरण करने का अवसर नहीं गँवा देते? क्या सत्य प्राप्त करने और बचाए जाने का अवसर खोना लोगों का सबसे बड़ा नुकसान नहीं है? क्या मनुष्य को इस हद तक भ्रष्ट करने के लिए इस विधि और इस कहावत का उपयोग करने के कारण शैतान कुटिल नहीं है? क्या यह दुर्भावनापूर्ण चाल नहीं है? जैसे-जैसे तुम इस लोकप्रिय कहावत का विरोध करने से लेकर अंततः इसे सत्य के रूप में स्वीकार करने तक की प्रगति करते हो, तुम्हारा हृदय पूरी तरह से शैतान के चंगुल में फँस जाता है, और इस तरह तुम अनजाने में इस कहावत के अनुसार जीने लगते हो। इस कहावत ने तुम्हें किस हद तक प्रभावित किया है? हो सकता है कि तुम सच्चे मार्ग को जानते हो, और हो सकता है कि तुम सत्य को जानते हो, किंतु उसकी खोज करने में तुम असमर्थ हो। हो सकता है कि तुम स्पष्ट रूप से जानते हो कि परमेश्वर के वचन सत्य हैं, किंतु तुम सत्य को पाने के लिए क़ीमत चुकाने का कष्ट उठाने को तैयार नहीं हो। इसके बजाय, तुम बिलकुल अंत तक परमेश्वर का विरोध करने में अपने भविष्य और नियति को त्याग दोगे। चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न कहे, चाहे परमेश्वर कुछ भी क्यों न करे, चाहे तुम्हें इस बात का एहसास क्यों न हो कि तुम्हारे लिए परमेश्वर का प्रेम कितना गहरा और कितना महान है, तुम फिर भी हठपूर्वक अपने रास्ते पर ही चलते रहने का आग्रह करोगे और इस कहावत की कीमत चुकाओगे। कहने का तात्पर्य यह है कि यह कहावत पहले ही तुम्हारे विचारों के साथ छल कर चुकी है और उन्हें नियंत्रित कर चुकी है, यह पहले ही तुम्हारे व्यवहार को नियंत्रित कर चुकी है, और तुम धन की खोज छोड़ने के बजाय इसे अपने भाग्य पर शासन करने दोगे। लोग इस प्रकार कार्य कर सकते हैं कि उन्हें शैतान के शब्दों द्वारा नियंत्रित और प्रभावित किया जा सकता है - क्या इसका यह अर्थ नहीं कि उन्हें शैतान द्वारा बरगलाया और भ्रष्ट किया गया है? क्या शैतान के दर्शन, उसकी मानसिकता और उसके स्वभाव ने तुम्हारे दिलों में जड़ें नहीं जमा ली हैं? जब तुम आँख मूँदकर धन के पीछे दौड़ते हो, और सत्य की खोज छोड़ देते हो, तो क्या शैतान ने तुम्हें बरगलाने का अपना उद्देश्य प्राप्त नहीं कर लिया है? ठीक यही मामला है" । परमेश्वर के वचन पढ़ने के बाद ही मुझे समझ आया कि "पैसा ही सब-कुछ नहीं है, किंतु उसके बिना आप कुछ नहीं कर सकते" और "दुनिया पैसों के इशारों पर नाचती है" जैसी चीजें, जिन पर मैं हमेशा विश्वास करती थी, असल में शैतानी फलसफे हैं। उन्होंने मेरे दिल में जड़ें जमा ली थीं, मेरे दिमाग पर कब्जा कर लिया था, जिससे मुझे पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं लगता था। उसे मैंने जीने की एकमात्र वजह माना, मुझे लगा कि इससे मुझे खुशी और सम्मान मिलेगा, इसलिए मैं बेतहाशा पैसे के पीछे दौड़ी। ज्यादा पैसे कमाने, ईर्ष्या और आदर का पात्र बनने, एक अच्छा जीवन जीने के लिए, शरीर की परवाह किए बिना मैं कड़ी मेहनत करती रही, लकवाग्रस्त होकर अपनी जान गँवाने वाली थी। यह मेरे द्वारा शैतान के फलसफे स्वीकार कर उनसे नियंत्रित होने का नतीजा था। हालाँकि मुझे पता था कि परमेश्वर है, पर मुझमें उसका अनुसरण कर जीवन के सच्चे मार्ग पर चलने की ताकत नहीं थी, क्योंकि शैतान के वचन और फलसफे मुझे नियंत्रित कर रहे थे। उन्होंने मुझे परमेश्वर से दूर कर सिर्फ देह की तृप्ति के लिए जीने को बाध्य किया। परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन से मैं जान गई कि मैं गलत रास्ते पर हूँ। बाद में, मैंने एक और अंश पढ़ा और मुझे पीड़ा से निकलने का रास्ता मिल गया। परमेश्वर के वचन कहते है, "क्योंकि लोग परमेश्वर के आयोजनों और परमेश्वर की संप्रभुता को नहीं पहचानते हैं, इसलिए वे हमेशा अवज्ञापूर्ण ढंग से, और एक विद्रोही दृष्टिकोण के साथ भाग्य का सामना करते हैं, और इस निरर्थक उम्मीद में कि वे अपनी वर्तमान परिस्थितियों को बदल देंगे और अपने भाग्य को पलट देंगे, हमेशा परमेश्वर के अधिकार और उसकी संप्रभुता तथा उन चीज़ों को छोड़ देना चाहते हैं जो उनके भाग्य में होती हैं। परन्तु वे कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं; वे हर मोड़ पर नाकाम रहते हैं। यह संघर्ष, जो किसी व्यक्ति की आत्मा की गहराई में चलता है, ऐसी गहन पीड़ा देता है जो किसी को अंदर तक छलनी कर देती है, इस बीच व्यक्ति अपना जीवन व्यर्थ में नष्ट कर देता है। इस पीड़ा का कारण क्या है? क्या यह परमेश्वर की संप्रभुता के कारण है, या इसलिए है क्योंकि वह व्यक्ति अभागा ही जन्मा था? स्पष्ट है कि दोनों में कोई भी बात सही नहीं है। वास्तव में, लोग जिस मार्ग पर चलते हैं, जिस तरह से वे अपना जीवन बिताते हैं, उसी कारण से यह पीड़ा होती है। ... अपने आपको इस स्थिति से मुक्त करने का एक बहुत ही आसान तरीका है जो है जीवन जीने के अपने पुराने तरीके को विदा कहना; जीवन में अपने पुराने लक्ष्यों को अलविदा कहना; अपनी पुरानी जीवनशैली, जीवन को देखने के दृष्टिकोण, लक्ष्यों, इच्छाओं एवं आदर्शों को सारांशित करना, उनका विश्लेषण करना, और उसके बाद मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा और माँग के साथ उनकी तुलना करना, और देखना कि उनमें से कोई परमेश्वर की इच्छा और माँग के अनुकूल है या नहीं, उनमें से कोई जीवन के सही मूल्य प्रदान करता है या नहीं, यह व्यक्ति को सत्य को अच्छी तरह से समझने की दिशा में ले जाता है या नहीं, और उसे मानवता और मनुष्य की सदृशता के साथ जीवन जीने देता है या नहीं। जब तुम जीवन के उन विभिन्न लक्ष्यों की, जिनकी लोग खोज करते हैं और जीवन जीने के उनके अनेक अलग-अलग तरीकों की बार-बार जाँच-पड़ताल करोगे और सावधानीपूर्वक उनका विश्लेषण करोगे, तो तुम यह पाओगे कि उनमें से एक भी सृजनकर्ता के उस मूल इरादे के अनुरूप नहीं है जिसके साथ उसने मानवजाति का सृजन किया था। वे सभी, लोगों को सृजनकर्ता की संप्रभुता और उसकी देखभाल से दूर करते हैं; ये सभी ऐसे जाल हैं जो लोगों को भ्रष्ट बनने पर मजबूर करते हैं, और जो उन्हें नरक की ओर ले जाते हैं। जब तुम इस बात को समझ लेते हो, उसके पश्चात्, तुम्हारा काम है जीवन के अपने पुराने दृष्टिकोण को अपने से अलग करना, अलग-अलग तरह के जालों से दूर रहना, परमेश्वर को तुम्हारे जीवन को अपने हाथ में लेने देना और तुम्हारे लिए व्यवस्थाएं करने देना; तुम्हारा काम है केवल परमेश्वर के आयोजनों और मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करने का प्रयास करना, अपनी कोई निजी पसंद मत रखना, और एक ऐसा इंसान बनना जो परमेश्वर की आराधना करता है" । परमेश्वर के वचनों ने मुझे समझा दिया कि पैसे के नियंत्रण से मुक्त होने का तरीका है, वे लक्ष्य छोड़ना जिन्हें मैं पहले पाना चाहती थी, अपने प्रयास से प्रसिद्धि और दौलत पाने के पीछे न दौड़ना, और परमेश्वर को अपने जीवन का निर्णय और व्यवस्था करने देना। मुझे परमेश्वर के आयोजन मानने, उसकी अपेक्षाओं के अनुसार अभ्यास करने, और उसकी आराधना करने वाला बनना है। मैं उसकी हृदय से आभारी थी। जीवन में पहली बार मैंने परमेश्वर का मार्गदर्शन महसूस किया। लगा जैसे वह सीधे मुझसे बात कर अभ्यास का मार्ग दिखा रहा हो। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के बाद मैं कलीसिया में कर्तव्य निभाना चाहती थी, लेकिन उस समय मैं एक ऑनलाइन दुकान चलाती थी। मैंने बहुत पैसा लगाया था, पर फायदा नहीं हुआ। और ज्यादा नुकसान के डर से, हर समय ऑनलाइन ऑर्डर देखती रहती थी, दिन की सभाओं के दौरान भी मैसेज आते रहते थे, इसलिए मैं अपने दिल को बिलकुल शांत नहीं कर पाती थी, मैं अभी भी सोचा करती थी कि कैसे निवेश कर ज्यादा पैसे बनाए जाएँ। दिन में ऑनलाइन स्टोर चलाना थकाऊ था, इसलिए कभी-कभी, शाम की सभाओं में, पूरे शरीर में दर्द के कारण, मैं खुद को सँभालने के लिए दवा लेकर लेट जाती, दवा से नींद आ जाती और मैं सभाओं के दौरान सो जाती थी। मैं ईमानदारी से परमेश्वर की आराधना करना चाहती थी। अपना पुराना जीवन नहीं जीना चाहती थी। इसलिए, मैंने ऑनलाइन दुकान बंद कर दी। बाद में, मेरी एक सहेली ने कहा कि वह ईंट-गारे का स्टोर खोलना चाहती है, चूँकि मैंने व्यवसाय प्रबंधन की पढ़ाई की थी, इसलिए मैंने योजना बनाने में उसकी मदद कर दी। उसे वह बहुत पसंद आया, तो बोली कि वह मेरे साथ काम करना चाहती है। वह चाहती थी मैं पैकेजिंग करूँ और वह शिपिंग, और पैसा बराबर बाँट लें। मैं ललचा गई। मुझे लगा कि यह पैसा कमाने का अच्छा मौका है, मेरे दिमाग में तुरंत बहुत सारे विचार आए। उस रात, जब मैंने अपनी स्थिति पर सोचने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की, तो लगा कि मैं फिर से पैसे के लिए लालच दिखा रही हूँ। मुझे पहले की अपनी तमाम तकलीफें याद आ गईं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करने के बाद मेरी आत्मा अब पीड़ित नहीं थी। मैंने शांति और दृढ़ता का आनंद लिया था, और मेरे शरीर का दर्द दवा लिए बिना ही बहुत बेहतर था। यह मेरे लिए परमेश्वर की सुरक्षा और उद्धार था। परमेश्वर ही था, जिसने मुझे प्रसिद्धि और दौलत की पीड़ा से बचने में मदद की थी, लेकिन मैं लाभ और प्रसिद्धि के पीछे दौड़ते रहना चाहती थी। क्या मैं फिर से शैतान के फंदे में नहीं फँस रही थी? मैं समझ गई कि मुझे अपनी सहेली का प्रस्ताव ठुकरा देना चाहिए, लेकिन अभी भी इसे पूरी तरह से नहीं छोड़ पाई। बाद में, मैंने परमेश्वर के वचन पढ़े और अभ्यास का मार्ग पाया। परमेश्वर के वचन कहते है, "लोग अपना जीवन धन-दौलत और प्रसिद्धि का पीछा करते हुए बिता देते हैं; वे इन तिनकों को यह सोचकर कसकर पकड़े रहते हैं, कि केवल ये ही उनके जीवन का सहारा हैं, मानो कि उनके होने से वे निरंतर जीवित रह सकते हैं, और मृत्यु से बच सकते हैं। परन्तु जब मृत्यु उनके सामने खड़ी होती है, केवल तभी उन्हें समझ आता है कि ये चीज़ें उनकी पहुँच से कितनी दूर हैं, मृत्यु के सामने वे कितने कमज़ोर हैं, वे कितनी आसानी से बिखर जाते हैं, वे कितने एकाकी और असहाय हैं, और वे कहीं से सहायता नही माँग सकते हैं। उन्हें समझ आ जाता है कि जीवन को धन-दौलत और प्रसिद्धि से नहीं खरीदा जा सकता है, कि कोई व्यक्ति चाहे कितना ही धनी क्यों न हो, उसका पद कितना ही ऊँचा क्यों न हो, मृत्यु के सामने सभी समान रूप से कंगाल और महत्वहीन हैं। उन्हें समझ आ जाता है कि धन-दौलत से जीवन नहीं खरीदा जा सकता है, प्रसिद्धि मृत्यु को नहीं मिटा सकती है, न तो धन-दौलत और न ही प्रसिद्धि किसी व्यक्ति के जीवन को एक मिनट, या एक पल के लिए भी बढ़ा सकती है। लोग जितना अधिक इस प्रकार महसूस करते हैं, उतनी ही अधिक उनकी जीवित रहने की लालसा बढ़ जाती है; लोग जितना अधिक इस प्रकार महसूस करते हैं, उतना ही अधिक वे मृत्यु के पास आने से भयभीत होते हैं। केवल इसी मोड़ पर उन्हें वास्तव में समझ में आता है कि उनका जीवन उनका नहीं है, और उनके नियंत्रण में नहीं है, और किसी का इस पर वश नहीं है कि वह जीवित रहेगा या मर जाएगा - यह सब उसके नियंत्रण से बाहर है" । परमेश्वर के वचनों से मैं समझ गई कि लोग सोचते हैं कि पैसे से चिपके रहना जीवन बढ़ा सकता और मरने से बचा सकता है, लेकिन मृत्यु के कगार पर उन्हें एहसास होता है कि पैसा उन्हें नहीं बचा सकता, अनंत जीवन नहीं दे सकता, स्वस्थ होने में मदद नहीं कर सकता। क्या मौत आने पर जागने से बहुत देर नहीं हो जाती? मैं भी ऐसी ही थी, शरीर की परवाह छोड़ आँख मूँदे पैसे के पीछे दौड़ रही थी। डॉक्टर ने मुझे आराम करने और स्वस्थ होने के लिए कहा, लेकिन इस डर से कि अगर मैं घर पर रही तो पैसे नहीं कमा पाऊँगी, मैंने बीमारी में भी काम किया। मुझे लगता था कि मैं अपने भाग्य को नियंत्रित कर सकती हूँ, लेकिन मृत्यु के कगार पर, मुझे एहसास हुआ कि मेरे नियंत्रण में कुछ भी नहीं है। परमेश्वर के कारण मुझे उसके वचन सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं समझ गई कि लोगों के भाग्य पर परमेश्वर की संप्रभुता है, और मुझे उसकी व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए, भाग्य से नहीं लड़ना चाहिए। अगर मैंने पैसा कमाना चुना, तो मैं फिर से दुखी हो जाऊँगी। मैं पैसे के लिए खुद को थका डालूँगी, और शैतान मुझे नियंत्रित कर पीड़ा देता रहेगा। तभी मैं जान पाई कि यह मेरे लिए शैतान का प्रलोभन था। एक सहेली मेरे पास एक बिजनेस-आइडिया लेकर आई, उसने निवेश किया और आमदनी बराबर बाँटने के लिए तैयार थी। प्रस्ताव बहुत लुभावना था। शैतान इसका इस्तेमाल मुझे पैसे और प्रसिद्धि के जाल में फँसाने के लिए कर रहा था, मैं मूर्खता करके दुख और पीड़ा भरे अपने पुराने जीवन में लौटना चाहती थी। क्या यह सिर्फ शैतान की चाल में फँसना नहीं था? मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की, कहा कि मैं प्रसिद्धि और लाभ छोड़ कर्तव्य निभाना चाहती हूँ। इसके बाद मुझे बहुत आराम महसूस हुआ। यह एक भारी बोझ से मुक्त होने जैसा था। अगले तीन दिन तक खुद को प्रसिद्धि और लाभ के भँवर से बचाने के लिए मैंने रोज ज्यादा गहनता से प्रार्थना की। मैंने अपनी सहेली के साथ काम करने से मना करने का साहस जुटाया, लेकिन उसने मुझे मनाने की कोशिश की, "अब तुम सरकारी सहायता पर जीती हो। यह तुम्हारे लिए काफी नहीं है। तुम वो नीना नहीं हो, जिसे मैं जानती हूँ।" मैंने कहा, "यह सच है, मैं वो नहीं हूँ जो हुआ करती थी। मैंने परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य स्वीकार किया है, कुछ सत्य समझा है। परमेश्वर ही था, जिसने मुझे मेरी पीड़ा से बचाया। पहले, अस्पताल ने यह कहकर मेरे बचने की उम्मीद छोड़ दी थी कि मेरी बीमारी लाइलाज है। दर्द की दवा से भी दर्द कम नहीं होता था। लेकिन परमेश्वर के वचन पढ़ने से मेरा दर्द अपने आपकम हो गया। अगर मैं परमेश्वर का घर छोड़कर वापस दुनिया में आई, तो मैं अभी भी दर्द में जीऊँगी। मैं इस तरह जीते नहीं रहना चाहती।" मैंने उससे यह भी कहा : "तुम किसी और को साझेदार बना लो। मदद की जरूरत हुई तो मैं तुम्हें कुछ सलाह दे दूँगी।" बाद में, वह कई बार मेरे पास आई, जब तक कि यकीन नहीं हो गया कि मुझे मनाया नहीं जा सकता। अब मैं कलीसिया में अपना कर्तव्य निभाती हूँ, आजादी और शांति महसूस करती हूँ। मेरा शारीरिक दर्द साठ-सत्तर फीसदी कम हो गया है, अब मैं चल-फिर सकती हूँ, खाना बना सकती हूँ। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, मैं कलीसिया में अपना कर्तव्य निभा सकती हूँ। मुझे पैसे के नियंत्रण से बचाने और मेरे जीवन की दिशा बदलने के लिए मैं परमेश्वर की आभारी हूँ। मैं अब समझ गई हूँ कि परमेश्वर की संप्रभुता जानना, uसकी आराधना करना, उसके वचनों और अपेक्षाओं के अनुसार अभ्यास करना जीवन की सबसे सार्थक और मूल्यवान चीज है। हालाँकि मेरी बीमारी ने मुझे बहुत दर्द दिया है, लेकिन यह मेरे लिए वरदान भी है। इससे मुझे परमेश्वर के पास लौटने और उसका उद्धार पाने का मौका मिला, जिसे कितने भी पैसे से खरीदा नहीं जा सकता। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का धन्यवाद! परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
वनवासी, हे हुए वस्तुत तुम दो हो ।" वहा सुमिना ने तव यो"निश्चय पर वितर्क अब क्यो ? जैसे रह रहेगी हम रोकर सही, सहेंगी हम उस मूच्छिता वधू का सिर, गोदो मे वसे अस्थिर, कोसल्या मत घाड मारवर यो "देव- वृन्द । देखो मत मारो मौस मीचे । जाश्री, वत्स कहा मैंने, जो या पडा सहा मैंने । जो जी सवी- और जीने की चेष्टा किया क्रुँगो, चौदह वर्ष बीतने पर तो मानो फिर न मरुँगी । देख उस समय तुम तीनो को छटा धैर्य धरूंगी, मानो तोन लोक वे घन से अपना भाग्य भएँगी ।
वनवासी, हे हुए वस्तुत तुम दो हो ।" वहा सुमिना ने तव यो"निश्चय पर वितर्क अब क्यो ? जैसे रह रहेगी हम रोकर सही, सहेंगी हम उस मूच्छिता वधू का सिर, गोदो मे वसे अस्थिर, कोसल्या मत घाड मारवर यो "देव- वृन्द । देखो मत मारो मौस मीचे । जाश्री, वत्स कहा मैंने, जो या पडा सहा मैंने । जो जी सवी- और जीने की चेष्टा किया क्रुँगो, चौदह वर्ष बीतने पर तो मानो फिर न मरुँगी । देख उस समय तुम तीनो को छटा धैर्य धरूंगी, मानो तोन लोक वे घन से अपना भाग्य भएँगी ।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए करोड़ों के राशन घोटाले में पुलिस 350 से ज्यादा लोगों को मुल्जिम बनाएगी। एसपी क्राइम रामअर्ज का कहना है कि विवेचना में सामने आया कि 127 नहीं 222 लोगों के आधार कार्ड की आईडी लगाकर मेरठ में 27 हजार लोगों के राशन को फर्जी तरीके से निकाला था। पुलिस कोटेदारों और सप्लाई इंस्पेक्टरों को भी मुल्जिम बनाने की तैयारी कर रही है। जिन लोगों के आधार कार्ड प्रयोग किए हैं, वह भी दोषी पाए गए हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कई जिलों में अपात्रों को फर्जी तरह से राशन देने के नाम पर करोड़ों के घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। एसपी क्राइम के अनुसार, प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई 2018 में जिले में राशन घोटाले के तहत 84 मामले दर्ज हुए थे। इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ। मेरठ में दर्ज मुकदमों की विवेचना उनके नेतृत्व में एसआईटी कर रही है। मंगलवार को गिरफ्तार जुल्फिकार (पूर्व में डीएसओ कार्यालय में ऑपरेटर) व सादिक ने पूछताछ में पुलिस को कई जानकारियां दीं। एसपी क्राइम का कहना है कि बुधवार को पांच अलग- अलग मुकदमों में विवेचना के लिए पर्चे काटे गए। इसमें जिन 222 लोगों के आधार कार्ड की आईडी व पासवर्ड प्रयोग किया। उनको मुल्जिम बनाया जा रहा है। इनके अलावा छह सप्लाई इंस्पेक्टर भी हैं। एसपी का कहना है कि 350 से ज्यादा लोग घोटाले में शामिल हैं। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुए करोड़ों के राशन घोटाले में पुलिस तीन सौ पचास से ज्यादा लोगों को मुल्जिम बनाएगी। एसपी क्राइम रामअर्ज का कहना है कि विवेचना में सामने आया कि एक सौ सत्ताईस नहीं दो सौ बाईस लोगों के आधार कार्ड की आईडी लगाकर मेरठ में सत्ताईस हजार लोगों के राशन को फर्जी तरीके से निकाला था। पुलिस कोटेदारों और सप्लाई इंस्पेक्टरों को भी मुल्जिम बनाने की तैयारी कर रही है। जिन लोगों के आधार कार्ड प्रयोग किए हैं, वह भी दोषी पाए गए हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कई जिलों में अपात्रों को फर्जी तरह से राशन देने के नाम पर करोड़ों के घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। एसपी क्राइम के अनुसार, प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई दो हज़ार अट्ठारह में जिले में राशन घोटाले के तहत चौरासी मामले दर्ज हुए थे। इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ। मेरठ में दर्ज मुकदमों की विवेचना उनके नेतृत्व में एसआईटी कर रही है। मंगलवार को गिरफ्तार जुल्फिकार व सादिक ने पूछताछ में पुलिस को कई जानकारियां दीं। एसपी क्राइम का कहना है कि बुधवार को पांच अलग- अलग मुकदमों में विवेचना के लिए पर्चे काटे गए। इसमें जिन दो सौ बाईस लोगों के आधार कार्ड की आईडी व पासवर्ड प्रयोग किया। उनको मुल्जिम बनाया जा रहा है। इनके अलावा छह सप्लाई इंस्पेक्टर भी हैं। एसपी का कहना है कि तीन सौ पचास से ज्यादा लोग घोटाले में शामिल हैं। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
जय जो यनस्पति स्थूल है उसके मुख्य दो मे ही प्रतिपादन किये गए हैं। जैसे किः- प्रत्येक और साधार सो प्रत्येक उसे कहते हैं जिसमें पृथक २ शरीर में पृथक र और साधारण उसका नाम है जिसके एक शरीर में अनंत जीव हो । जैसे कंद मूलादिः क्योकि यात्रन्मात्र आळू, मूली आदि कंदमूल है ये सर्व काय के धरनेवाले ही हैं। अनंत पांच जोडीन्द्रिय १ श्रीन्द्रिय २ चतुरिन्द्रिय ३ थे ही प्रकार के विकलेन्द्रियतिरंगू जव हैं। इनके केवल पर्यात और किंतु पंचेद्रिय नियंग जीयों के २० भेद इस प्रकार वर्णन किये गए हैं जैसे किः-जलचर, स्थलचर २ चर भुजपर ५ । सोपांची प्रकार के नियंग गर्भ से भी उनम होते और समुदिम भी है। अपुर है मृत होने वाले अंकादि में ज वादिना गर्म के केश के निमिषा मिल जान ही उन हो जाते है -
जय जो यनस्पति स्थूल है उसके मुख्य दो मे ही प्रतिपादन किये गए हैं। जैसे किः- प्रत्येक और साधार सो प्रत्येक उसे कहते हैं जिसमें पृथक दो शरीर में पृथक र और साधारण उसका नाम है जिसके एक शरीर में अनंत जीव हो । जैसे कंद मूलादिः क्योकि यात्रन्मात्र आळू, मूली आदि कंदमूल है ये सर्व काय के धरनेवाले ही हैं। अनंत पांच जोडीन्द्रिय एक श्रीन्द्रिय दो चतुरिन्द्रिय तीन थे ही प्रकार के विकलेन्द्रियतिरंगू जव हैं। इनके केवल पर्यात और किंतु पंचेद्रिय नियंग जीयों के बीस भेद इस प्रकार वर्णन किये गए हैं जैसे किः-जलचर, स्थलचर दो चर भुजपर पाँच । सोपांची प्रकार के नियंग गर्भ से भी उनम होते और समुदिम भी है। अपुर है मृत होने वाले अंकादि में ज वादिना गर्म के केश के निमिषा मिल जान ही उन हो जाते है -
माँ बनना शुरू में मुश्किल हो सकता है और आपको अपने लिए एक मिनट भी नहीं मिलता है जो आपको परेशान कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को अपनी गर्भावस्था के दौरान और बाद में बहुत सी चीजों को मैनेज करना पड़ता है। उस दौरान तनाव और तनाव हो सकता है। नई माताओं को पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन से भी निपटना पड़ता है। ये सभी मुद्दे आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं और इसे सुस्त बना सकते हैं। यह आपकी त्वचा के साथ समस्याओं का कारण हो सकता है लेकिन आपको महंगे कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे कठोर रसायनों के कारण हानिकारक हो सकते हैं। तो आयुर्वेद इन सभी त्वचा मुद्दों का सही और प्राकृतिक जवाब हो सकता है। 1. आराम करो, आराम करो, और आराम करोः भ्रूण और प्रसवोत्तर जरूरत दोनों एक-दूसरे से अलग होते हैं और उन्हें खोई हुई ऊर्जा और ताकत वापस पाने के लिए पर्याप्त नींद और आराम की आवश्यकता होती है। 2. आयुर्वेदिक मसाज थेरेपीः अभ्यंग के रूप में भी जाना जाता है आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मालिश अत्यधिक राहत देती है जो आपके वात-दोष को दूर करती है, आप इस मालिश को नियमित रूप से कर सकते हैं। 3. जड़ी बूटीः आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों का बहुत महत्व है और यह गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवस्था के लिए आवश्यक है। तो, आप अपने भोजन में केसर, शतावरी, बाला, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों को शामिल कर सकते हैं।
माँ बनना शुरू में मुश्किल हो सकता है और आपको अपने लिए एक मिनट भी नहीं मिलता है जो आपको परेशान कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को अपनी गर्भावस्था के दौरान और बाद में बहुत सी चीजों को मैनेज करना पड़ता है। उस दौरान तनाव और तनाव हो सकता है। नई माताओं को पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन से भी निपटना पड़ता है। ये सभी मुद्दे आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं और इसे सुस्त बना सकते हैं। यह आपकी त्वचा के साथ समस्याओं का कारण हो सकता है लेकिन आपको महंगे कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे कठोर रसायनों के कारण हानिकारक हो सकते हैं। तो आयुर्वेद इन सभी त्वचा मुद्दों का सही और प्राकृतिक जवाब हो सकता है। एक. आराम करो, आराम करो, और आराम करोः भ्रूण और प्रसवोत्तर जरूरत दोनों एक-दूसरे से अलग होते हैं और उन्हें खोई हुई ऊर्जा और ताकत वापस पाने के लिए पर्याप्त नींद और आराम की आवश्यकता होती है। दो. आयुर्वेदिक मसाज थेरेपीः अभ्यंग के रूप में भी जाना जाता है आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मालिश अत्यधिक राहत देती है जो आपके वात-दोष को दूर करती है, आप इस मालिश को नियमित रूप से कर सकते हैं। तीन. जड़ी बूटीः आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों का बहुत महत्व है और यह गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवस्था के लिए आवश्यक है। तो, आप अपने भोजन में केसर, शतावरी, बाला, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों को शामिल कर सकते हैं।
[ आयका मूलस्थानस्वीकार करते हैं कि : " उत्तरले दक्षिणकी ओर देशान्तर गमनसम्बन्धी व्यवस्था सूचित करनेको पर्याप्तरीतिसे अगणित घटनायेंभी नहीं हैं " इसके आगे वे लिखते हैं - " और न भारतमें ( उत्तरी जातियोंके, ) अस्तित्वके सम्बन्धकी भावनाही आमतौरसे विद्यमान है" (Medlicott and Blanford's manual of the Geology of Indin p. LXX ) इसके सिवा योरपीय कल्पनाके कट्टर अनुयायी इसाकटेलरभी अपनी पुस्तकमें यह निर्धारित करते हैं " सामान्यरीति से यह बात मालूम हुई है कि यदि उत्तरी जातियाँ दक्षिण में वसाई जाय तो मरजाय आर यदि दक्षिणी जातियाँ उत्तरमें तो वे लोप होजायँ" । वे यहभी लिखते हैं कि " साधारणतौर पर गोरी जातियाँ समशीतोष्णदेशमें अपना अस्तित्व कायम रखने में सफल होती हैं और कालीजातियाँ केवल उष्ण या अल्पोष्णदेशमें ( Vide p. 201 Second Edition of Dr, Issuck Taylor's work - The origin of the Aryans ' } अतएव यदि हमारा मूल स्थान उत्तरी ध्रुव - देशमें या योरुपमेंभी रहा होता तो, जैसा कि कुछ लोग अनुमान करते हैं, ( भारतीय आयोँ या भरतवंशियोंकी हमारी जाति पूर्वोक्त कारणों तथा प्राकृतिक नियमों के प्रभाव से अबतक बिलकुल नष्ट होगई होती । परन्तु इन बातोंका आशय कुछ दुसराही है, ये अपने आपही स्पष्ट हैं। क्योंकि यद्यपि हमारा अस्तित्व अत्यन्तही प्राचीन है, यही नहीं, किन्तु वह महान् पुरातन समयका तथा तृतयकालीन युगकाभी है तथापि हमारी शक्ति सदा उतनीही नवीन तथा हमारा साहस सदा१ हमारी जातिके सम्बन्धमें शेरिन महोदयने लिखा है- " हलकारङ्ग प्रशस्त ललाट, विलक्षण प्रतिष्ठा सूचक मुख छवि, पतले ओंठ, उद्बोधक मुख, लम्बी उंगलियाँ, चञ्चल तथा तेज आँखे, श्रेष्ठ तथा कुलीनता व्यजक धज आदि लक्षण उस सच्ची ब्राह्मणं जातिके है जो परंमात्माको पृथ्वीपर विचरनेवाली मानव जातिका उतनाही ताजा रहा है जितना कि पहले । वैसेही हमारे मूलस्थानके विनष्ट होजानेके कोई लक्षण नहीं है और न हमारी जाति मृत्यु - मार्ग में ही प्राप्त है या उसके लोप हो जानेकी सम्भावना है. क्योंकि आर्यावर्त हमारा मूलत्थान है और न हम भारतमें प्रवासीके रूपमें आये और न सप्तसिन्धु देशमें विदेशी या नवागन्तुकके रूपमें, अतएव यह बातभी जो पाठकोंके सामने उपस्थित कीजानेको है, - एक आश्चर्य पूर्ण नमूना है, जो योरपीय प्रभावों तथा व्यवहारोंसे भ्रष्ट नहीं जिसका गम्भीर आत्मवोध एवं उच्चताके गर्वीले विचार जिसके मुखाकृतिसे टपकते हैं तथा उसके शरीरके प्रत्येक हावभावसे प्रस्फुटित होते हैं । ( Vide, " Sherrings Hindu Tribes & Canstes " ) इसके सिवा, डा. सर, डब्ल्यू डब्ल्यू. इन्टर अपने भारतके इतिहास में लिखते हैंअतएव ब्राह्मण वे लोग थे जिन्होंने इस संसारके इतिहासके प्रथम चरणमें अपने आपको जीवनके नियमोंसे वाँध दिया था और जिनमें आत्म-सुधार तथा आत्मसंवरणके नियम प्रचलित थे । लगभग तीन हजार वर्षोंकी वंशगत शिक्षा तथा आत्मसंवरणके फल स्वरूप वर्तमान कालके ब्राह्मण हैं और उन्होंने ऐसे अध्यवसायसे मानवजातिका एक ऐसा नमूना विकसित किया है जो अपने समीपवर्ती जनतासे बिलकुल पृथक् है। भारतका राहचलता यात्रीभी उन्हें पहचान लेता है । ब्राह्मणजाति दोनों ( अर्थात् राजपूतों या योद्धाजाति तथा अनार्यो) से सष्ट रीतिसे भिन्न मालूम पड़ती है। ब्राह्मण केन्द्रीभूत आत्मगत विमलताका मनुष्य है । वह मनुष्योंके उस वर्गका उदाहरण है जो शत्रवलसे नहीं, किन्तु वंशगत सुधार तथा संयमके वलसे देशकी शासन करनेवाली शक्ति वनगयी है । एक जातिके वाद दूसरी जातिने भारतपर अपनी धाक जमाई, वंशपर वंश उदय हुए और अस्त हुए, मतमतान्तरोंने भी देशमें अपनी धूम मचाई और बादको स्वयम् लुप्त हो गये, परन्तु ब्राह्मण इतिहासके प्रारम्भिक कालसे वरावर शान्तिपूर्वक शासन करते रहे । जनताके मनोंपर उन्हीका अधिकार रहा और जनताभी सदा उनके अधीन बनी रही । विदेशी जातियोंने भी उन्हें उच्चकोटिंकी भारतीय जातिके उच्चतम नमूनेके रूपमें ग्रहण किया। जो सर्वप्रधान पद ब्राह्मणोंने प्राप्त किया है, उससे [ आर्यों का मूलस्थानदूसरे कारणों के साथ प्रमाणित करती है कि, हम लोग भरतके मूल निवासी हैं और इस देशके प्रवासी नहीं हैं । अस्तु - वैज्ञानिक प्रमाण और प्रामाणिक, साक्ष्य उत्तरी ध्रुव-सम्बन्धी सिद्धान्तके विरुद्ध ही मिलते हैं । वे उत्तरसे दक्षिणको या योरुपसे आर्यावर्तकी और देशान्तरगमन करनेके भी विरुद्ध हैं, जसा हम अन्त में - लोगोंको लाभभी कम नहीं हुए। इसके सिवा अध्यापक सीली लिखते हैं कि, "शायद किसी जातिने सभ्यतामें इस जातिसे अधिक योग्यता नहीं प्रकट को इस जातिके रवाज कानूनमें परिणत होगये और धर्मशास्त्र में लिपिवद्ध करके उन्हें पुष्टता प्रदान की गई । इसने परिश्रम के विभागका विचार किया कविता तथा दर्शनकी रचना की और विज्ञानके प्रारम्भका सूत्रपात किया । इसीसे बौद्धधर्मनामक एक शकिशाली धार्मिक सुधारका जन्म हुआ जो आजभी संसारके अप्रगण्यधर्मों में एक गिनाजाताहै, यहाँतक कि इसने उन भाग्यशाली जातियोंका सादृश्य प्रकट किया जिन्होंने खास हमारी सभ्यताको जन्म दिया" P. 24 इसके आगे वही विद्वान् लेखक दृढताके साथ कहता है कि - " हमलोग ( अंग्रेज लोग ) हिन्दुओंकी अपेक्षा अधिक चतुर नहीं हैं, उनकी अपेक्षा हमारे मस्तिष्क अधिक सम्पन्न तथा विस्तृत नहीं हैं। जैसे हमलोग जंगलियों के सामने अपने विचार, जिन्हें उन्होंने कभी स्वप्नमें भी नहीं देखा, उपस्थित करके चमत्कृत करते हैं, वैसे हम हिन्दुओंको चमत्कृत नहीं कर सकते हैं । वे अपनी कवितासे हमारे श्रेष्ठतम विचारोंका मुकावला कर सकते हैं, हमारे विज्ञानमें शायदही कुछ ऐसे विचार हैं जो उन्हें बिलकुल नई वस्तु समझ पडें । (Vide, The Expansion of England by Professor J. R. Seeley ) M, A, Ed, 1890, pp, 241, 244) अन्तमें किन्तु किसीसे कुछ कम नहीं, हमारे तैलङ्ग तथा रनाडे हमारे बोस और सिंह, हमारे गोखले और गान्धी, यही नहीं किन्तु रवीन्द्रनाथ टगोर, जो कवि सम्राट् कहलाये, जगत - कवि कहना तो कुछ बातही नहीं, ( और जिन्होंने नोवेल - प्रायज पाया है ) के सदृश लोग इस सुचीमें जोड दिये जायं, क्योंकि ये लोग अभी हाल में हुए हैं। (ग्रन्थकर्ता)
[ आयका मूलस्थानस्वीकार करते हैं कि : " उत्तरले दक्षिणकी ओर देशान्तर गमनसम्बन्धी व्यवस्था सूचित करनेको पर्याप्तरीतिसे अगणित घटनायेंभी नहीं हैं " इसके आगे वे लिखते हैं - " और न भारतमें अस्तित्वके सम्बन्धकी भावनाही आमतौरसे विद्यमान है" इसके सिवा योरपीय कल्पनाके कट्टर अनुयायी इसाकटेलरभी अपनी पुस्तकमें यह निर्धारित करते हैं " सामान्यरीति से यह बात मालूम हुई है कि यदि उत्तरी जातियाँ दक्षिण में वसाई जाय तो मरजाय आर यदि दक्षिणी जातियाँ उत्तरमें तो वे लोप होजायँ" । वे यहभी लिखते हैं कि " साधारणतौर पर गोरी जातियाँ समशीतोष्णदेशमें अपना अस्तित्व कायम रखने में सफल होती हैं और कालीजातियाँ केवल उष्ण या अल्पोष्णदेशमें इसके सिवा, डा. सर, डब्ल्यू डब्ल्यू. इन्टर अपने भारतके इतिहास में लिखते हैंअतएव ब्राह्मण वे लोग थे जिन्होंने इस संसारके इतिहासके प्रथम चरणमें अपने आपको जीवनके नियमोंसे वाँध दिया था और जिनमें आत्म-सुधार तथा आत्मसंवरणके नियम प्रचलित थे । लगभग तीन हजार वर्षोंकी वंशगत शिक्षा तथा आत्मसंवरणके फल स्वरूप वर्तमान कालके ब्राह्मण हैं और उन्होंने ऐसे अध्यवसायसे मानवजातिका एक ऐसा नमूना विकसित किया है जो अपने समीपवर्ती जनतासे बिलकुल पृथक् है। भारतका राहचलता यात्रीभी उन्हें पहचान लेता है । ब्राह्मणजाति दोनों से सष्ट रीतिसे भिन्न मालूम पड़ती है। ब्राह्मण केन्द्रीभूत आत्मगत विमलताका मनुष्य है । वह मनुष्योंके उस वर्गका उदाहरण है जो शत्रवलसे नहीं, किन्तु वंशगत सुधार तथा संयमके वलसे देशकी शासन करनेवाली शक्ति वनगयी है । एक जातिके वाद दूसरी जातिने भारतपर अपनी धाक जमाई, वंशपर वंश उदय हुए और अस्त हुए, मतमतान्तरोंने भी देशमें अपनी धूम मचाई और बादको स्वयम् लुप्त हो गये, परन्तु ब्राह्मण इतिहासके प्रारम्भिक कालसे वरावर शान्तिपूर्वक शासन करते रहे । जनताके मनोंपर उन्हीका अधिकार रहा और जनताभी सदा उनके अधीन बनी रही । विदेशी जातियोंने भी उन्हें उच्चकोटिंकी भारतीय जातिके उच्चतम नमूनेके रूपमें ग्रहण किया। जो सर्वप्रधान पद ब्राह्मणोंने प्राप्त किया है, उससे [ आर्यों का मूलस्थानदूसरे कारणों के साथ प्रमाणित करती है कि, हम लोग भरतके मूल निवासी हैं और इस देशके प्रवासी नहीं हैं । अस्तु - वैज्ञानिक प्रमाण और प्रामाणिक, साक्ष्य उत्तरी ध्रुव-सम्बन्धी सिद्धान्तके विरुद्ध ही मिलते हैं । वे उत्तरसे दक्षिणको या योरुपसे आर्यावर्तकी और देशान्तरगमन करनेके भी विरुद्ध हैं, जसा हम अन्त में - लोगोंको लाभभी कम नहीं हुए। इसके सिवा अध्यापक सीली लिखते हैं कि, "शायद किसी जातिने सभ्यतामें इस जातिसे अधिक योग्यता नहीं प्रकट को इस जातिके रवाज कानूनमें परिणत होगये और धर्मशास्त्र में लिपिवद्ध करके उन्हें पुष्टता प्रदान की गई । इसने परिश्रम के विभागका विचार किया कविता तथा दर्शनकी रचना की और विज्ञानके प्रारम्भका सूत्रपात किया । इसीसे बौद्धधर्मनामक एक शकिशाली धार्मिक सुधारका जन्म हुआ जो आजभी संसारके अप्रगण्यधर्मों में एक गिनाजाताहै, यहाँतक कि इसने उन भाग्यशाली जातियोंका सादृश्य प्रकट किया जिन्होंने खास हमारी सभ्यताको जन्म दिया" P. चौबीस इसके आगे वही विद्वान् लेखक दृढताके साथ कहता है कि - " हमलोग हिन्दुओंकी अपेक्षा अधिक चतुर नहीं हैं, उनकी अपेक्षा हमारे मस्तिष्क अधिक सम्पन्न तथा विस्तृत नहीं हैं। जैसे हमलोग जंगलियों के सामने अपने विचार, जिन्हें उन्होंने कभी स्वप्नमें भी नहीं देखा, उपस्थित करके चमत्कृत करते हैं, वैसे हम हिन्दुओंको चमत्कृत नहीं कर सकते हैं । वे अपनी कवितासे हमारे श्रेष्ठतम विचारोंका मुकावला कर सकते हैं, हमारे विज्ञानमें शायदही कुछ ऐसे विचार हैं जो उन्हें बिलकुल नई वस्तु समझ पडें । M, A, Ed, एक हज़ार आठ सौ नब्बे, pp, दो सौ इकतालीस, दो सौ चौंतालीस) अन्तमें किन्तु किसीसे कुछ कम नहीं, हमारे तैलङ्ग तथा रनाडे हमारे बोस और सिंह, हमारे गोखले और गान्धी, यही नहीं किन्तु रवीन्द्रनाथ टगोर, जो कवि सम्राट् कहलाये, जगत - कवि कहना तो कुछ बातही नहीं, के सदृश लोग इस सुचीमें जोड दिये जायं, क्योंकि ये लोग अभी हाल में हुए हैं।
हिन्दी कथासरित्सागर । [ भारम्भ से मर ७२ ] ऐसा कथन सुन, ध्यान कर देख पट्टहास बोला- "प्रिये !" इसी नगर में देवदर्शन नामक कोई ब्राह्मणं रहता है, वह पञ्चाग्नि तापता है, इनके अतिरिक्त उसे दोष ग्नियों का बड़ा सन्ताप है, एक तो उसको तथा उसको भार्या को जठराग्नि भूख से सदा जलती रहती है और दूसरी अग्नि प्रजा (सन्तति) का अभाव है। ब्राह्मण अग्निदेव का उपासक है, सो एक दिन भगवान् विभावसु ने अपने उस धन पुत्रार्थी तथा तपथर्य्या में लोन भक्त को स्वप्न में दर्शन देकर उससे कहा - "ब्रह्मन् ! (१) पुत्र तो तुम्हारे लिखा नहीं है हां क्वत्रिम ( २ ) होगा और उसी से तुम्हारा दारिद्रा भी नष्ट हो जायगा।" अग्निदेव के आदेशानुसार वह ब्राह्मण सप्तको प्रतीक्षा कर रहा है सो यह शिशु उसोको दे दिया जाय, इसकी ऐसोही भवि तव्यता है इसमें वश क्या है। इस प्रकार पपनी प्रिया से कह के अट्टहास कलश में सुवर्ण की मुद्रायें भरौं और ऊपर उसके मुंह पर बच्चे को रक्या उसके गले में दिव्य रत्नों को एक माला बांध दो। इतना कर वह रात्रि के समय बच्चे को ले जाकर उस ब्राह्मण के घर में छोड़ भाया और पश्चात् अपनी भार्या के कुछ कालोपरान्त वह देवदर्शन ब्राह्मण जागने पर क्या देखता है कि रखों के बोच में एक वालक पड़ा है, जैसे तारागणों के बीच चन्द्र । उस बालचन्द्र को देखकर दोनों माथी बड़े ही अचम्भित हुए कि यह का बात कि यह क्या बात है पथात् उसे उठाकर उस घ की ओर जो दृष्टि करें तो लो वह तो मोने से भरा है। अब तो उनके अथक । ठिकाना न रहा, उसो घण उन्हें भग्निदेव की वात स्मरण हुई तब तो दम्पती को आनन्द हुआ वह वर्णन क्योंकर हो सके। ब्राह्मण ने बड़े हर्ष से घड़े और बाक लिया और विधि का दान समझ मानन्द रात विताई । प्रातः काम होने य • वडा उत्सव किया। जब वालक ग्यारह दिन का हुआ सब ब्राह्मण ने उस नाम योदर्शन रक्सा । अब दरिद्र देवदर्शन महा धनी हो गया और मा के भोग विलास कर मानन्दपूर्वक दिन काटने लगा । लोग जब धमो है तय प्रायः अपने धर्मकर्म से बहिर्मुख हो जाते हैं पर ब्राह्मय देवदर्श में बराबर तत्पर रहा जिस प्रकार पग्निदेव के माद मे
हिन्दी कथासरित्सागर । [ भारम्भ से मर बहत्तर ] ऐसा कथन सुन, ध्यान कर देख पट्टहास बोला- "प्रिये !" इसी नगर में देवदर्शन नामक कोई ब्राह्मणं रहता है, वह पञ्चाग्नि तापता है, इनके अतिरिक्त उसे दोष ग्नियों का बड़ा सन्ताप है, एक तो उसको तथा उसको भार्या को जठराग्नि भूख से सदा जलती रहती है और दूसरी अग्नि प्रजा का अभाव है। ब्राह्मण अग्निदेव का उपासक है, सो एक दिन भगवान् विभावसु ने अपने उस धन पुत्रार्थी तथा तपथर्य्या में लोन भक्त को स्वप्न में दर्शन देकर उससे कहा - "ब्रह्मन् ! पुत्र तो तुम्हारे लिखा नहीं है हां क्वत्रिम होगा और उसी से तुम्हारा दारिद्रा भी नष्ट हो जायगा।" अग्निदेव के आदेशानुसार वह ब्राह्मण सप्तको प्रतीक्षा कर रहा है सो यह शिशु उसोको दे दिया जाय, इसकी ऐसोही भवि तव्यता है इसमें वश क्या है। इस प्रकार पपनी प्रिया से कह के अट्टहास कलश में सुवर्ण की मुद्रायें भरौं और ऊपर उसके मुंह पर बच्चे को रक्या उसके गले में दिव्य रत्नों को एक माला बांध दो। इतना कर वह रात्रि के समय बच्चे को ले जाकर उस ब्राह्मण के घर में छोड़ भाया और पश्चात् अपनी भार्या के कुछ कालोपरान्त वह देवदर्शन ब्राह्मण जागने पर क्या देखता है कि रखों के बोच में एक वालक पड़ा है, जैसे तारागणों के बीच चन्द्र । उस बालचन्द्र को देखकर दोनों माथी बड़े ही अचम्भित हुए कि यह का बात कि यह क्या बात है पथात् उसे उठाकर उस घ की ओर जो दृष्टि करें तो लो वह तो मोने से भरा है। अब तो उनके अथक । ठिकाना न रहा, उसो घण उन्हें भग्निदेव की वात स्मरण हुई तब तो दम्पती को आनन्द हुआ वह वर्णन क्योंकर हो सके। ब्राह्मण ने बड़े हर्ष से घड़े और बाक लिया और विधि का दान समझ मानन्द रात विताई । प्रातः काम होने य • वडा उत्सव किया। जब वालक ग्यारह दिन का हुआ सब ब्राह्मण ने उस नाम योदर्शन रक्सा । अब दरिद्र देवदर्शन महा धनी हो गया और मा के भोग विलास कर मानन्दपूर्वक दिन काटने लगा । लोग जब धमो है तय प्रायः अपने धर्मकर्म से बहिर्मुख हो जाते हैं पर ब्राह्मय देवदर्श में बराबर तत्पर रहा जिस प्रकार पग्निदेव के माद मे
Stock market: पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि जल्द ही भारत की सड़कों पर इथेनॉल (Ethanol) से चलने वाली गाड़ियां दौड़ेंगी। अगर इस खबर के बाद आप भी इथेनॉल का करोबार करने वाली कंपनी के शेयर ढूंढ रहे हैं तो हम आपका काम आसान कर देते हैं। इथेनॉल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रदान करने वाली कंपनी प्राज इंडस्ट्रीज (Praj Industries) है। यह एक बॉयो फ्यूल टेक्नोलॉजी प्रदान करने वाली लिडिंग कंपनी है। मौजूदा समय में कंपनी के फुटप्रिंट भारत के बाहर भी हैं। Praj Industries भारत के 2जी इथेनॉल टेक्नोलॉजी एंड एक्सपीरियंस के मार्केट का 70 प्रतिशत कंट्रोल करती है। इसके अलावा दुनिया का 10 प्रतिशत इथेनॉल प्रोडक्शन (चीन को छोड़कर) यही कंपनी करती है। इस स्मॉल कैप कंपनी मार्केट कैप 6948 करोड़ रुपये का है। कार्बन उत्सर्जन कम करने को लेकर जिस तरह से भारत प्रतिबध्द दिखाई दे रहा है ऐसे में यह स्टॉक आने वाले समय में हैवी डिमांड में रह सकता है। सरकार भी इथेनॉल के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।
Stock market: पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था कि जल्द ही भारत की सड़कों पर इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां दौड़ेंगी। अगर इस खबर के बाद आप भी इथेनॉल का करोबार करने वाली कंपनी के शेयर ढूंढ रहे हैं तो हम आपका काम आसान कर देते हैं। इथेनॉल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रदान करने वाली कंपनी प्राज इंडस्ट्रीज है। यह एक बॉयो फ्यूल टेक्नोलॉजी प्रदान करने वाली लिडिंग कंपनी है। मौजूदा समय में कंपनी के फुटप्रिंट भारत के बाहर भी हैं। Praj Industries भारत के दोजी इथेनॉल टेक्नोलॉजी एंड एक्सपीरियंस के मार्केट का सत्तर प्रतिशत कंट्रोल करती है। इसके अलावा दुनिया का दस प्रतिशत इथेनॉल प्रोडक्शन यही कंपनी करती है। इस स्मॉल कैप कंपनी मार्केट कैप छः हज़ार नौ सौ अड़तालीस करोड़ रुपये का है। कार्बन उत्सर्जन कम करने को लेकर जिस तरह से भारत प्रतिबध्द दिखाई दे रहा है ऐसे में यह स्टॉक आने वाले समय में हैवी डिमांड में रह सकता है। सरकार भी इथेनॉल के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।
Don't Miss! इस साल की 196 करोड़ का बिजनेस करने वाली फिल्म यह जवानी है दिवानी.. के हीरो रणबीर कपूर के लिए भारत की लड़कियां सबसे ज्यादा दिवानी हैं इस बात का खुलासा एक सर्वे के दौरान हुआ जिसमें रणबीर कपूर को सबसे चहेते कुवांरे की पोजिशन मिली है।वैवाहिक साइट 'शादी डॉट कॉम' द्वारा किए गए सर्वेक्षण में बॉलीवुड के युवा अभिनेता रणबीर कपूर को सर्वाधिक चहेते कुवांरो के रूप में नवाजा गया है। इस सर्वेक्षण में 24 से 30 साल की उम्र के 7,000 से ज्यादा पुरुष-महिलाओं ने भाग लिया। यह इंडियाज मोस्ट वांटेड सेलेब्रिटी सर्वेक्षण का हिस्सा था। रॉकस्टार' और 'ये जवानी है दिवानी' जैसी फिल्मों में अपना जादू चलाने वाले रणबीर के पक्ष में 31.4 प्रतिशत महिलाओं ने वोट किया और सर्वाधिक वांछित कुवांरों की श्रृंखला में वह पहले नंबर पर रहे। रणबीर के बाद दूसरे पायदान पर सलमान खान हैं जिन्हें 25.6 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 21.98 प्रतिशत वोटों से साथ तीसरे चहेते कुवारें हैं जबकि 21.02 प्रतिशत वोटों के साथ क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली चौथे नंबर पर रहे। शादी डॉट कॉम के मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव रक्षित ने बताया, "सर्वेक्षण से साबित होता है कि लोग अब मशहूर हस्तियों को वास्तविक इंसान के तौर पर देखते हैं और उनके वास्तविक गुणों को देखते हैं,जो उन्हें उनके रिश्तों में अच्छा बनाते हैं।" आगे की खबर स्लाइडों में..
Don't Miss! इस साल की एक सौ छियानवे करोड़ का बिजनेस करने वाली फिल्म यह जवानी है दिवानी.. के हीरो रणबीर कपूर के लिए भारत की लड़कियां सबसे ज्यादा दिवानी हैं इस बात का खुलासा एक सर्वे के दौरान हुआ जिसमें रणबीर कपूर को सबसे चहेते कुवांरे की पोजिशन मिली है।वैवाहिक साइट 'शादी डॉट कॉम' द्वारा किए गए सर्वेक्षण में बॉलीवुड के युवा अभिनेता रणबीर कपूर को सर्वाधिक चहेते कुवांरो के रूप में नवाजा गया है। इस सर्वेक्षण में चौबीस से तीस साल की उम्र के सात,शून्य से ज्यादा पुरुष-महिलाओं ने भाग लिया। यह इंडियाज मोस्ट वांटेड सेलेब्रिटी सर्वेक्षण का हिस्सा था। रॉकस्टार' और 'ये जवानी है दिवानी' जैसी फिल्मों में अपना जादू चलाने वाले रणबीर के पक्ष में इकतीस.चार प्रतिशत महिलाओं ने वोट किया और सर्वाधिक वांछित कुवांरों की श्रृंखला में वह पहले नंबर पर रहे। रणबीर के बाद दूसरे पायदान पर सलमान खान हैं जिन्हें पच्चीस.छः प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इक्कीस.अट्ठानवे प्रतिशत वोटों से साथ तीसरे चहेते कुवारें हैं जबकि इक्कीस.दो प्रतिशत वोटों के साथ क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली चौथे नंबर पर रहे। शादी डॉट कॉम के मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव रक्षित ने बताया, "सर्वेक्षण से साबित होता है कि लोग अब मशहूर हस्तियों को वास्तविक इंसान के तौर पर देखते हैं और उनके वास्तविक गुणों को देखते हैं,जो उन्हें उनके रिश्तों में अच्छा बनाते हैं।" आगे की खबर स्लाइडों में..
दिनिजित शाक्भरी भूपाल, ( उसने समरभूमिम शाकंभरी नरेशको पराजित किया था ) वा तो कुमारपालके अनव शिलालेखोम उल्लेख हुआ है। इसप्रकार स्पष्ट है वि कुमारपालकी उपाधिया अत्यन्त विशद तथा महान सत्ताव्यक्त करनेवाली थी । और इनसे यह भी स्पष्ट है कि कुमारपाल अपने समयवा एव महान राजा हो गया है। कुमारपालकी वीरता, उसकी महान राजकीय सत्ता, उसका साहित्य, संस्कृति तथा क्लासे प्रेम उक्त उपाधियोंके अनुरूप भी रहा है, इसमे सन्देह नही। गुजरातके चौलुक्योंके पूर्व उत्तरीभारतमें गुप्तनश तथा पुण्यभूति राज्यवशकी महान राज्यशक्ति थी । गुप्तवशके राजाओने भी परमभट्टारव महाराजाधिराज जैसी उपाधिया ग्रहण की थी। इसप्रकार राजा-महाराजाओ द्वारा उपाधि ग्रहणकी प्रथा तथा परम्परा बहुत प्राचीन चली आ रही थी । अत यह स्वाभाविक ही था कि महान विजेता कुमारपाल, जिसके समयमें गुजरातके चौलुक्योकी राजशक्ति चरम उत्पपंपर पहुच गयी थी, प्राचीन राजकीय परम्परानुसार विशद उपाधिया ग्रहण करता । गुर्जराधिप चौलुक्य कुमारपालकी विभिन्न उपाधियोंके विवेचन तथा विश्लेषण करनेपर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि उसने "समस्त राजावली" की उपाधि इसलिए ग्रहण को क्योकि वह सघटित तथा पक्तिचद्ध राजाओका प्रतीक था और उनमें सर्वशक्तिशाली था। महाराजाधिराज, परमेश्वर, परमभट्टार तथा चक्रवर्ती उपाधिया उसकी व्यापक और विशद राजकीय सत्ताकी द्योतक थी । 'निज भुज विक्रम रणागण दिनिर्जित शाकभरी भूपाल' उपाधि कुमारपाल द्वारा रणभूमिम शाकभरी नरेशको पराजित करनेकी घटनाका स्मारक है और अन्तम "उमापति वरल्ब्ध" तथा 'परमार्हत चौलुक्य" श्रमश उसकी शिवभक्ति तथा जैनधर्मके अति असीम प्रेम एवं श्रद्धाभक्तिी परिचायक है । सैनिक મિયાન और शुभाम्राज्य विस्तार गुजरातके इतिहासकारीका अभिमत है वि कुमारपाल अपने पूर्वजोकी भाति महान योद्धा था । जयसिंहसूरिके कुमारपालचरितमें उसके दिग्विजयका विशद वर्णन मिलता है। इस ग्रन्थके सम्पूर्ण चौथे सर्गमे कुमारपालके विजयी सैनिक अभियानोका विस्तृत उल्लेख है। इसमें कहा गया हैं कि कुमारपाल पहले जावालपुर' (आधुनिक जालोर) पहुंचा। यहाके नायकने उसका स्वागत किया। जावालीपुरसे वुमारपाल सपादलक्ष प्रदेशपर आश्रमण करनेके लिए आगे बढा । सपादलक्षके (शाकभरी ) राजा अरुणोराजानं जो कुमारपालका बहनोई भी था, उसका अत्यन्त आदर सत्कारपूर्वक अर्चन किया । यहासे कुमारपालने कुरुमडलकी दिशामें प्रस्थान किया और मन्दाकिनी (गगा ) के तटपर जानर रुखा । इसके अनन्तर गुर्जरनरेश कुमारपाल मालवाकी ओर अग्रसर हुआ मालवाकी दिशामे सैनिव अभियानके मध्य में चित्रकूटके अधिपतिने उसके प्रति कृतज्ञता प्रकट की। अवन्ती देश पहुचकर कुमारपालने इस प्रदेशके शासनको बन्दी बनाया। इसके बाद उसके सैनिक अभियानकी दिशा नर्मदा तटके किनारे-किनारे हुई। रेवलूरमे थोडा विश्राम करने के पश्चात् उसने नदी पार की तथा आभीर विषयमें प्रवेशकर प्रधादानगरीके अधिपतिको अधीनस्थ होने के लिए बाध्य किया । कुमारपालका सुदूर दक्षिण कहीं कहीं "जावालीपुर उच्चारण है। डी० एच० एन० आई० : खंड २,१०९८२ । अभियान विन्ध्य पर्वतोपे वारण अवरद्ध रहा। फिर भी उसने इस क्षेत्रने छोट-छोट ग्रामपतियों पर वसूला तथा पश्चिम दिशानी और मुहक्र लाटप्रदेशवे अधिपतिको अपन अधीहस्य किया। लाटप्रदेशसे कुमारपाल पश्चिमोत्तर दिशामें आगे बढा तथा उसने सौराष्ट्र विपयके प्रधानको पराजित किया। सौराष्ट्रमे उसने बच्टमें प्रवेश किया। यहावे प्रधान शामी पराजित भर कुमारपाल पचनदधिप नौमाघन समुद्धाताने युद्ध करने गया। उसपर विजय प्राप्त गर बुमारपाल मूल्स्यान (आयुनिय मुस्तान ) के राजा मूलराजपर आत्रमग मरने गया। मूल्दाजसे भीषण युद्ध पर तथा विजयश्री हस्तगत घर चौ नरेश कुमारपाल शप प्रदेशसे जालघर और महम्यान होता हुआ लौटा। इसके आग जयसिंहने शामरी नरेदा अरणोराजा और कुमारपालवे बीच हुए युद्धवा विस्तृत विवरण दिया है। जयसिया पचन है कि इस युद्धका कारण वदणोराजापा मारा बहिन देवदेवीने प्रति दुर्व्यवहार था । महते हैं कि चौहान राज्यको छोडपर यह घरी आयी और अपने भाई कुमारपालसे असभवहारसी शिकायत की। इमोशरण घुमारपालने चोहान राज्यपर आश्रमण किया और अरुणोराजाको रणभूमिमें पराजित किया, विन्तु वन्तमें उसे ही सिहासनारूद किया। यशपालके तत्कालीन नाटय मोहराजपराजयसे भी इस तथ्यी पुष्टि होती है कि गुजराधिप कुमारपाल्ने अपने शौर्य-वीयंसे साभरप्रदेश के अधिपतिको पराजित किया था। साभरखे राजावे पक्षमें रहनेवाले एक प्रसिद्ध राजा त्यागभट्टने कुमारपालके विरुद्ध संनिय आश्रमण किया। 'कुमारपाल घरित : जयसिंह, चतुर्य सगं १० १७० । देवगुज्जर नरेसर परक्कमक्रत साययरी भूपाल --मोहराजपराजयः चतुर्य अक पृ० १०६ । संनिव अभियान और साम्राज्य विस्तार इस आक्रमणको कुमारपाल्न पूर्णतया विफल ही नहीं किया अपितु त्यागभट्टको पराजित करनेमें भी पूर्ण सफलता प्राप्त की। द्वयाश्रय काव्यम हेमचद्रन कुमारपाल द्वारा श्रीनगर, काची तथा तिलगानापर विजय प्राप्त कर राज्य विस्तारको व्यापक करनकी घटनाका सक्षपमें विवरण दिया है। कुमारपारके न सैनिक अभियानोमें परिवमोत्तरसे सिधुके राजान भी अपनी सेवाए अर्पित की थी । द्वयाश्रय महाकाव्यके प्राकृत भागमें कुमारपालके सम्मुख अन्य प्रदेशोवे राजाओ द्वारा अधीनता स्वीकार करनकी घटनावा उल्लेख बहुत ही सक्षपमें किया गया है। जवणके राजान कुमारपालके भयसे सभी राग रगवा परित्याग कर दिया था। उव्वस्वरन कुमारपालको प्रचुर धनराशिकी भटके साथ उत्तम कोटिके अस्व प्रदान किय थ । वाराणसीवा राजा कुमारपालसे धन्यस्त्यागभर कुमारतिलक शाकम्भरीमाश्रितो योग्सौतस्य कुमारपाल नृपतेश्चौलुक्य चडामणे । युद्धायाभिमुखोऽभवज्जय विधि स्त्वास्य विधि प्रेक्षते प्रोद्गर्जन विफल शरधन इव त्व केवल वल्गसि ॥ --मोहराजपराजय अक ५, श्लोक ३६ । पहू सिरि नयर सिरोए जुज्जति जुप्पसि तिलग लच्छोए जुज्जति कचि सिरीए भुजन्तो दाहिणि इण्हि ७२ । सिंधु यई वह चमाण वेलिल्लो तुमइ दिन चड्डणओ न जिमई दिवसे जमई निसाह पश्छिम दिसाइ तह ७३ * तम्बोल न समाजई कम्मग-काले वि नण्हए जवणो विसए अ नोव भुजइ भएण तुट्ट वसुट्ट कम्मवण ७५ मणि गढ़िअ कणय घडिआहरणे उब्वेसरो वर-तुरगे सगलिअ लक्ख ससे पेसइ तुह रिउ असघडियो ७५ मिलनेके लिए सदा उसके प्रासाद द्वारपर अवस्थित रहा करता था।' मगध देशसे वहुमूल्य रत्नोकी तथा गोड देशसे श्रेष्ठनम हाथियोकी भेंट कुमारपालके समक्ष आती थी। उसकी सेनाने मान्यकुब्ज प्रदेशको पादाकान्त कर वहाके राजाको आतवित घर दिया था। दशर्न देशकी तो अत्यघिक शोचनीय स्थिति हो गयी थी। वहावा राजा भयत्रस्त होकर मृत्युको प्राप्त हुआ । इस प्रदेशका सारा धन कुमारपालके सैनिक ले गये तथा दशनं देशके अनेवानेषः सेनापति युद्धमें हत हुए । चेदिराज ( त्रिपुरी, त्रिपुरा ) की शक्ति तथा गर्वधा मर्दन कर कुमारपालको सेनाने रेवा नदीके तटपर अपना शिविर स्थापित किया। सैनिको द्वारा रेवा नदीके घडियालोको मारने तथा यहाके उपवनोको क्षतिग्रस्त करनेका भी उल्लेख मिलता है। इसके अनन्तर कुमारपालको सेनाने यमुना नदी पार की और भयुराके राजापर आश्रमण किया। मथुरावा राजा अपनी निर्बल स्थितिको अच्छी तरह समझता था । उसने स्वर्णराशिकी भेट द्वारा आक्रामकोको सन्तुष्ट किया और अपने नगरकी रक्षा की। कुमारपालको व्यापक प्रभुता तया महत्ताषा परिचय इस तथ्यसे भी मिल जाता है कि "जगलराज", "तुर्क मुसलमानोका शासक" तथा "दिल्लीके सम्राट" भी उसको प्रशसा और प्रशस्ति किया करते थे। पप्ठ सर्गके अन्तमें कविने जगलराजको कुमारपालकी प्रशस्ति करते हुए अक्ति किया 'हरिस मुरियाणणो सो महि मडण कासि-रोडयोराया टिविडिक्कड तुह वारं हम चिचिअ हत्यि चिचइअं :७६ः 'नीपाइअ जय कज अविअहिअ विक्कमं बलं तुज्झ अविलोहिअ जय मदुराहिवस्स फंसायही विजयं :८८ः अविसंवाद परिक्खा तणु पक्खोडण भडन्त पंसु कणा गोहरिअ नक्क चक्कं तुट्ट तुरया जंउणमुत्तिन्ना ८९ चौहानों के विरुद्ध युद्ध द्वयाश्रय काव्यमं कुमारपाल तथा अण अथवा अणक्से युद्धका जो वर्णन मिलता है, वह भिन्न है। इसमें कहा गया है कि उदयनके एक दूसरे पुत्र वहडने, जो सिद्धराज जयसिंहका अत्यन्त विश्वासपात्र था, कुमारपालके अधीनत्व और आदेशोपर कार्य करना अस्वीकार कर दिया। वहड कुमारपालकी सेवामे न रहकर, नागोरके राजा "अण" या जिसे मेरुतुगने "अणक" कहा है, के यहा चला गया । अणो या अगक वीसलदेव चौहानमा पौत्र था । लक्षग्रामोंके राजा "अण"ने जब सिद्धराज जयसिंहकी मृत्युवा समाचार सुना तो उसने सोचा कि नये और निर्बल सिंहासनाधिकारी कुमारपालके नेतृत्वमे इस समय गुजरातकी सरकार है। अब अपनेको स्वतन्त्र करनेका उपयुक्त समय आ गया है। इतना ही नहीं, अपने किसीसे कुछ प्रतिज्ञा करा और किसीको धमकी देकर, उज्जयनीके राजा वल्लाल तथा पश्चिमी गुजरातके राजाओंसे मंत्री कर ली । कुमारपालके गुप्तचरोने उसे सूचना दी कि अणराजा सेना लेवर गुजरातके पश्चिमी सीमान्तकी दिशामें अग्रसर हो रहा है। उसकी सेनामें अनेक सेनापति विदेशी भाषाओके भी ज्ञाता थे । अण राजाको कुथागम ( कुठकोट ) के राजाका सहयोग मिल गया तथा अहिल्वाडेकी सेनाका एक सैनिक वहड भी उसके पक्षमें जा मिला था। उज्जयिनीराज देश-देशान्तरमें भ्रमणशील व्यवसारिज अवकन्दावणयं अखिजमाण हयमजूरिएभकुल अविसुरन्त चमूवं पत्तं मदुराई तुह सेन्न ९०ः सग्गल्लि अन्त जस भर जंगल वइणोवसप्पिड दिण्णा तुह रिउ भलावण घण पयाव सतप्पि एण गया १९४ः तइ पेल्लिओ तुरुक्को टिल्ली नाही गलत्यिओ तह य अड्डसिओ अ कासी रिउ घतण छुह महाएस .९६ः द्वयाश्रय काव्य : सर्ग चतुर्थ, ५० २१३, २१६ । यियोंसे गुजरातकी वास्तविव स्थितिसे परिचित हो चुका था। उसने मालवनरेश वल्लालसे एक सैनिक अभिसन्धि कर ली थी। उसने सैनिक आत्रमणको योजना बनायी थी कि जैसे ही अणराजा आश्रमण घर प्रगति करेगा, वह पूर्व दिशावी ओरसे गुजरातके विरुद्ध युद्ध घोषित वर देगा । कुमारपालको जब यह स्थिति विदित हुई तो उसने पारावार न रहा। कुमारपालका सैनिक संघटन इस अवसरपर कुमारपालकी सहायता तथा सहयोगवे लिए भी अनेकानेक राजा आग आये । कुमारपालको कूली जातिवें लोगोवा भी सहयोग प्राप्त हुआ जो प्रसिद्ध अश्वारोही माने जाते थे । पहाडी जातिके लोग भी चारों ओरसे कुमारपालवे साथ आ गये । कुमारपालके अधीनस्थ वच्छवी जनताने भी उसका साथ देना निश्चय किया। वच्छके साथ ही सिन्धुको जनता भी सहयोगके लिए प्रस्तुत हो गयी । जैसे ही कुमारपाल आवकी ओर अग्रसर हुआ उसके साथ मृगचर्मका वस्त्र धारण करनेवाले पहाडी भी आ मिले। आबूबा परमार राजा विक्रमसिंह, जो जालघर देशवी जनतापा नेता था, कुमारपालके साथ हो गया और उसको अधीनता स्वीकार कर ली। अणराजाने कुमारपालके आगमनकी सूचना पाकर अपने मन्त्रियोंके परामर्शनी अवहेलना कर युद्ध करनेवा निश्चय किया। किन्तु अभी उसकी सेना युद्धके लिए प्रस्तुत भी न थी कि रणभेरी सुनाई पड़ी और गुजरातनी सेना पर्वतोकी ओरसे प्रवेश करने लगी । मेरुतुग तथा हेमचन्द्र दोनो ही इस वातपर एकमत है कि सपादलक्षके राजाने ही पहले आक्रमण किया था। मेरुतुगका यह भी चयन है वि गुजरातपर आश्रमण करने के लिए चौहान नरेशको वहडने हो प्रेरणा तथा प्रोत्साहन दिया था। वहड कुमारपार के विरुद्ध युद्ध करना चाहता था। उसने उन प्रदेशोंके सरकारी अधिकारियोको बहुमूल्य भेंट तथा रिश्वत देवर अपनी ओर मिला लिया था । बडने सपादलक्षके राजाको साथ लावर गुजरातके सीमान्तपर एक शक्तिशाली सेना खड़ी कर दी थी। किन्तु वहडके ये सभी प्रयल, जिनके द्वारा वह कुमारपालको पराजित तथा पदाकान्त करने की योजना बना चुका था, एक विचित्र घटनाके मारण विफल हो गये । कुमारपालके पास रणभूमिम कौशल प्रदर्शित करनवाला वल्हपचानन नामका एक अत्यन्त श्रेष्ठ हाथी था। इस हाथीवे महावतका नाम कालिंग था। इसे वहडन धन देकर अपनी ओर मिला लिया था । सयोगसे एक बार कुमारपालवी डाट फटकार उसे बहुत अप्रिय लगी और वह अपना कार्य छोड़कर चला गया। उसके रिक्त स्थानपर सामल नामका हस्तिचालक, जो अपन कौशल तथा ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध था, नियुक्त किया गया। रणक्षत्रम जब कुमारपाल तथा अणक्की सेनावा सघर्ष प्रारम्भ होनवाला ही था कि कुमारपालके गुप्तचरोने सूचना दी कि उसकी सेनामें असन्तोष फैला दिया गया है। इस विषम घडीमें वीर कुमारपाल विचलित नहीं हुआ बल्कि ठीक इसके विपरीत साहस एवं दृढतासे अणवसे अकेले ही सामना करनवा निश्चय किया। उसन सामलको अपना हाथी आगे बढानेकी आज्ञा दी। यह देख वि सामल उसकी आज्ञाका पालन करनेम द्विघासे काम ले रहा है कुमारपालने उसपर विश्वासघातका आरोप लगाया । सामलने इस आरापको अस्वीकार करते हुए अपनी कठिनाईका स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि विपक्षी दलकी सेनामें वहड भी हाथीपर सवार है। इसकी आवाज ऐसी है, जिससे हाथी भी आतक्ति हो जाते हैं। उसने अपन वस्त्रोसे हाथीके दोनो कानाको बाधकर उक्त बाधा हटा दी और उसके अनन्तर कुमारपाल रणभूमिम अणवके विरुद्ध अग्रसर हुआ। 'प्रमन्य चिन्तामणि : पृष्ठ १२० । अरुणोराजाकी पराजय वहडको हायीचे महावतवे परिवर्तनवी स्थिति ज्ञात न थी। उसे पूर्ण विश्वास था कि हस्तिचालय में अवश्य सहायता मिलेगी। यह सोचार उसने अपना हाथी कुमारपालवी ओर बढ़ाया और हाथमें तलवार लेवर उसके मस्तरपर चह जानमा प्रयत्न किया। सामन इस आणकी चालवो समझ लिया और अपन हायोको तनिक्सा पीछे हट जानका आदेश दिया। इस प्रकार बहड दो हाथियों मध्य गिर पडा और कुमार पालवे पंदल सैनिकों द्वारा पक्डवर बन्दी बना लिया गया। इसके अनन्तर तलाल कुमारपात्र अरुणोनी ओर बढा । उसके निकट जार सिद्धराजवे उत्तराधिकारी कुमारपालन वहा "जब तुम इतने वीर योद्धा थ तो सिद्धराजवे सम्मुख क्यो नतमस्तव हुए थे । पूर्वपलमें तुम्हारा वह कार्य निश्चय ही बुद्धिमत्तापूर्ण था । यदि अब मैं तुम्हे पराजित नही वरता तो सिद्धराजकी धवल फीतिमा प्रकाश मन्द पडता जायगा । इस प्रकार दोनो राजाओम युद्ध हुआ। दोनो पक्षोकी सेनाओमें भी भीवण रण मघर्ष हुआ । कुमारपान अरुणोराजाको क्षत्रियोकी भाति युद्ध करनकी चुनौती देवर ठीव उसके मुखपर ही वाण छोड़ा। वाणसे आहत होकर जन वह हाथीके सामन गिर पड़ा तो कुमारपालने अपन परिधानको वायुम प्रसन्नतापूर्वक फहराकर विजयकी घोषणा की। जब अरुणोराजावे पक्ष दोनो नता इस प्रकार पराजित हो गये तो सभीन घुमारपालकी अधीनता स्वीकार कर ली । कुमारपालको इस युद्धमें पूर्ण विजय प्राप्त हुई। प्रभावक चरित्र अध्याय २२, ५० २०१, २०२ रासमाला : अध्याय ११, पू०१७७ । साहित्य और शिलालेखोंमें वर्णन कुमारपालकी अरुणोराजापर इस विजय घटनाका उल्लेख वसन्त विलास' वस्तुपाल तेजपाल प्रशस्ति तथा सुकृत कीर्तिकल्लोलिनी में हुआ हँ । साहित्यमे उल्लिखित कुमारपाल तथा अरुणोराजाके इस युद्धका शिलालेखो और उत्कीर्ण लेखोमे भी वर्णन है । विरा* (वि० स० १२०६ ) तथा रतनपुर प्रस्तर लेखों में इस बातका स्पष्ट उल्लेख है कि नाडुल्य चौहानोवा प्रदेश कुमारपालके साम्राज्य के अन्तर्गत कर लिया गया था । भटुड शिलालेख में यह अकित है कि विक्रम संवत १२१०-१६मे कुमारपालका एक दण्डनायक नाडुल्य प्रदेशमे नियुक्त किया गया था। अनहिलपाटक तथा शाकभरी राज्योके मध्य चौहानोका नाहुल्य राज्य गायकवाड ओरियटल सिरीज : सल्या ७, ३, २९ । जैन धर्ममूरीचकार सहसाऽर्णोराजमत्रासयद् बाणः कुंकणमग्रहीदपि गुरुचक्रेस्मरध्वसिनम् इत्य यस्य परिक्षतक्षितिभूतो हसावलोनिर्मले रामस्यैव निरन्तर नवयशः पूदिश पूरिताः गा० ओ० सिरीज : सख्या १० : परिशिष्ट १, पू० ५८६ कथ्यन्ते न महीभूतः कति महीयासो महोशेखरा माहात्म्य स्तुमहे व हेतुनिगमा देतस्य चेतोहरम् मर्यादा मतिलघयन् रसल सद्यदद्वाहिनी वाहितो वर्णो राजः स जगाम जागल महोभागेषु भग्नोन्नतिः गा० ओ० सिरीज : सङ्ख्या १० परिशिष्ट २, पृ० ६७ । 'इपि० इडि० : खड ११, पू० ४४ । प्राकृत संस्कृत शिलालेख : भावनगर पुरातत्व विभाग, २०५-७८ आर्कलाजिकल सर्वे आव इडिया वेस्टर्न सकिल, १९०८, ५१, ५२
दिनिजित शाक्भरी भूपाल, वा तो कुमारपालके अनव शिलालेखोम उल्लेख हुआ है। इसप्रकार स्पष्ट है वि कुमारपालकी उपाधिया अत्यन्त विशद तथा महान सत्ताव्यक्त करनेवाली थी । और इनसे यह भी स्पष्ट है कि कुमारपाल अपने समयवा एव महान राजा हो गया है। कुमारपालकी वीरता, उसकी महान राजकीय सत्ता, उसका साहित्य, संस्कृति तथा क्लासे प्रेम उक्त उपाधियोंके अनुरूप भी रहा है, इसमे सन्देह नही। गुजरातके चौलुक्योंके पूर्व उत्तरीभारतमें गुप्तनश तथा पुण्यभूति राज्यवशकी महान राज्यशक्ति थी । गुप्तवशके राजाओने भी परमभट्टारव महाराजाधिराज जैसी उपाधिया ग्रहण की थी। इसप्रकार राजा-महाराजाओ द्वारा उपाधि ग्रहणकी प्रथा तथा परम्परा बहुत प्राचीन चली आ रही थी । अत यह स्वाभाविक ही था कि महान विजेता कुमारपाल, जिसके समयमें गुजरातके चौलुक्योकी राजशक्ति चरम उत्पपंपर पहुच गयी थी, प्राचीन राजकीय परम्परानुसार विशद उपाधिया ग्रहण करता । गुर्जराधिप चौलुक्य कुमारपालकी विभिन्न उपाधियोंके विवेचन तथा विश्लेषण करनेपर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि उसने "समस्त राजावली" की उपाधि इसलिए ग्रहण को क्योकि वह सघटित तथा पक्तिचद्ध राजाओका प्रतीक था और उनमें सर्वशक्तिशाली था। महाराजाधिराज, परमेश्वर, परमभट्टार तथा चक्रवर्ती उपाधिया उसकी व्यापक और विशद राजकीय सत्ताकी द्योतक थी । 'निज भुज विक्रम रणागण दिनिर्जित शाकभरी भूपाल' उपाधि कुमारपाल द्वारा रणभूमिम शाकभरी नरेशको पराजित करनेकी घटनाका स्मारक है और अन्तम "उमापति वरल्ब्ध" तथा 'परमार्हत चौलुक्य" श्रमश उसकी शिवभक्ति तथा जैनधर्मके अति असीम प्रेम एवं श्रद्धाभक्तिी परिचायक है । सैनिक મિયાન और शुभाम्राज्य विस्तार गुजरातके इतिहासकारीका अभिमत है वि कुमारपाल अपने पूर्वजोकी भाति महान योद्धा था । जयसिंहसूरिके कुमारपालचरितमें उसके दिग्विजयका विशद वर्णन मिलता है। इस ग्रन्थके सम्पूर्ण चौथे सर्गमे कुमारपालके विजयी सैनिक अभियानोका विस्तृत उल्लेख है। इसमें कहा गया हैं कि कुमारपाल पहले जावालपुर' पहुंचा। यहाके नायकने उसका स्वागत किया। जावालीपुरसे वुमारपाल सपादलक्ष प्रदेशपर आश्रमण करनेके लिए आगे बढा । सपादलक्षके राजा अरुणोराजानं जो कुमारपालका बहनोई भी था, उसका अत्यन्त आदर सत्कारपूर्वक अर्चन किया । यहासे कुमारपालने कुरुमडलकी दिशामें प्रस्थान किया और मन्दाकिनी के तटपर जानर रुखा । इसके अनन्तर गुर्जरनरेश कुमारपाल मालवाकी ओर अग्रसर हुआ मालवाकी दिशामे सैनिव अभियानके मध्य में चित्रकूटके अधिपतिने उसके प्रति कृतज्ञता प्रकट की। अवन्ती देश पहुचकर कुमारपालने इस प्रदेशके शासनको बन्दी बनाया। इसके बाद उसके सैनिक अभियानकी दिशा नर्मदा तटके किनारे-किनारे हुई। रेवलूरमे थोडा विश्राम करने के पश्चात् उसने नदी पार की तथा आभीर विषयमें प्रवेशकर प्रधादानगरीके अधिपतिको अधीनस्थ होने के लिए बाध्य किया । कुमारपालका सुदूर दक्षिण कहीं कहीं "जावालीपुर उच्चारण है। डीशून्य एचशून्य एनशून्य आईशून्य : खंड दो,दस हज़ार नौ सौ बयासी । अभियान विन्ध्य पर्वतोपे वारण अवरद्ध रहा। फिर भी उसने इस क्षेत्रने छोट-छोट ग्रामपतियों पर वसूला तथा पश्चिम दिशानी और मुहक्र लाटप्रदेशवे अधिपतिको अपन अधीहस्य किया। लाटप्रदेशसे कुमारपाल पश्चिमोत्तर दिशामें आगे बढा तथा उसने सौराष्ट्र विपयके प्रधानको पराजित किया। सौराष्ट्रमे उसने बच्टमें प्रवेश किया। यहावे प्रधान शामी पराजित भर कुमारपाल पचनदधिप नौमाघन समुद्धाताने युद्ध करने गया। उसपर विजय प्राप्त गर बुमारपाल मूल्स्यान के राजा मूलराजपर आत्रमग मरने गया। मूल्दाजसे भीषण युद्ध पर तथा विजयश्री हस्तगत घर चौ नरेश कुमारपाल शप प्रदेशसे जालघर और महम्यान होता हुआ लौटा। इसके आग जयसिंहने शामरी नरेदा अरणोराजा और कुमारपालवे बीच हुए युद्धवा विस्तृत विवरण दिया है। जयसिया पचन है कि इस युद्धका कारण वदणोराजापा मारा बहिन देवदेवीने प्रति दुर्व्यवहार था । महते हैं कि चौहान राज्यको छोडपर यह घरी आयी और अपने भाई कुमारपालसे असभवहारसी शिकायत की। इमोशरण घुमारपालने चोहान राज्यपर आश्रमण किया और अरुणोराजाको रणभूमिमें पराजित किया, विन्तु वन्तमें उसे ही सिहासनारूद किया। यशपालके तत्कालीन नाटय मोहराजपराजयसे भी इस तथ्यी पुष्टि होती है कि गुजराधिप कुमारपाल्ने अपने शौर्य-वीयंसे साभरप्रदेश के अधिपतिको पराजित किया था। साभरखे राजावे पक्षमें रहनेवाले एक प्रसिद्ध राजा त्यागभट्टने कुमारपालके विरुद्ध संनिय आश्रमण किया। 'कुमारपाल घरित : जयसिंह, चतुर्य सगं दस एक सौ सत्तर । देवगुज्जर नरेसर परक्कमक्रत साययरी भूपाल --मोहराजपराजयः चतुर्य अक पृशून्य एक सौ छः । संनिव अभियान और साम्राज्य विस्तार इस आक्रमणको कुमारपाल्न पूर्णतया विफल ही नहीं किया अपितु त्यागभट्टको पराजित करनेमें भी पूर्ण सफलता प्राप्त की। द्वयाश्रय काव्यम हेमचद्रन कुमारपाल द्वारा श्रीनगर, काची तथा तिलगानापर विजय प्राप्त कर राज्य विस्तारको व्यापक करनकी घटनाका सक्षपमें विवरण दिया है। कुमारपारके न सैनिक अभियानोमें परिवमोत्तरसे सिधुके राजान भी अपनी सेवाए अर्पित की थी । द्वयाश्रय महाकाव्यके प्राकृत भागमें कुमारपालके सम्मुख अन्य प्रदेशोवे राजाओ द्वारा अधीनता स्वीकार करनकी घटनावा उल्लेख बहुत ही सक्षपमें किया गया है। जवणके राजान कुमारपालके भयसे सभी राग रगवा परित्याग कर दिया था। उव्वस्वरन कुमारपालको प्रचुर धनराशिकी भटके साथ उत्तम कोटिके अस्व प्रदान किय थ । वाराणसीवा राजा कुमारपालसे धन्यस्त्यागभर कुमारतिलक शाकम्भरीमाश्रितो योग्सौतस्य कुमारपाल नृपतेश्चौलुक्य चडामणे । युद्धायाभिमुखोऽभवज्जय विधि स्त्वास्य विधि प्रेक्षते प्रोद्गर्जन विफल शरधन इव त्व केवल वल्गसि ॥ --मोहराजपराजय अक पाँच, श्लोक छत्तीस । पहू सिरि नयर सिरोए जुज्जति जुप्पसि तिलग लच्छोए जुज्जति कचि सिरीए भुजन्तो दाहिणि इण्हि बहत्तर । सिंधु यई वह चमाण वेलिल्लो तुमइ दिन चड्डणओ न जिमई दिवसे जमई निसाह पश्छिम दिसाइ तह तिहत्तर * तम्बोल न समाजई कम्मग-काले वि नण्हए जवणो विसए अ नोव भुजइ भएण तुट्ट वसुट्ट कम्मवण पचहत्तर मणि गढ़िअ कणय घडिआहरणे उब्वेसरो वर-तुरगे सगलिअ लक्ख ससे पेसइ तुह रिउ असघडियो पचहत्तर मिलनेके लिए सदा उसके प्रासाद द्वारपर अवस्थित रहा करता था।' मगध देशसे वहुमूल्य रत्नोकी तथा गोड देशसे श्रेष्ठनम हाथियोकी भेंट कुमारपालके समक्ष आती थी। उसकी सेनाने मान्यकुब्ज प्रदेशको पादाकान्त कर वहाके राजाको आतवित घर दिया था। दशर्न देशकी तो अत्यघिक शोचनीय स्थिति हो गयी थी। वहावा राजा भयत्रस्त होकर मृत्युको प्राप्त हुआ । इस प्रदेशका सारा धन कुमारपालके सैनिक ले गये तथा दशनं देशके अनेवानेषः सेनापति युद्धमें हत हुए । चेदिराज की शक्ति तथा गर्वधा मर्दन कर कुमारपालको सेनाने रेवा नदीके तटपर अपना शिविर स्थापित किया। सैनिको द्वारा रेवा नदीके घडियालोको मारने तथा यहाके उपवनोको क्षतिग्रस्त करनेका भी उल्लेख मिलता है। इसके अनन्तर कुमारपालको सेनाने यमुना नदी पार की और भयुराके राजापर आश्रमण किया। मथुरावा राजा अपनी निर्बल स्थितिको अच्छी तरह समझता था । उसने स्वर्णराशिकी भेट द्वारा आक्रामकोको सन्तुष्ट किया और अपने नगरकी रक्षा की। कुमारपालको व्यापक प्रभुता तया महत्ताषा परिचय इस तथ्यसे भी मिल जाता है कि "जगलराज", "तुर्क मुसलमानोका शासक" तथा "दिल्लीके सम्राट" भी उसको प्रशसा और प्रशस्ति किया करते थे। पप्ठ सर्गके अन्तमें कविने जगलराजको कुमारपालकी प्रशस्ति करते हुए अक्ति किया 'हरिस मुरियाणणो सो महि मडण कासि-रोडयोराया टिविडिक्कड तुह वारं हम चिचिअ हत्यि चिचइअं :छिहत्तरः 'नीपाइअ जय कज अविअहिअ विक्कमं बलं तुज्झ अविलोहिअ जय मदुराहिवस्स फंसायही विजयं :अठासीः अविसंवाद परिक्खा तणु पक्खोडण भडन्त पंसु कणा गोहरिअ नक्क चक्कं तुट्ट तुरया जंउणमुत्तिन्ना नवासी चौहानों के विरुद्ध युद्ध द्वयाश्रय काव्यमं कुमारपाल तथा अण अथवा अणक्से युद्धका जो वर्णन मिलता है, वह भिन्न है। इसमें कहा गया है कि उदयनके एक दूसरे पुत्र वहडने, जो सिद्धराज जयसिंहका अत्यन्त विश्वासपात्र था, कुमारपालके अधीनत्व और आदेशोपर कार्य करना अस्वीकार कर दिया। वहड कुमारपालकी सेवामे न रहकर, नागोरके राजा "अण" या जिसे मेरुतुगने "अणक" कहा है, के यहा चला गया । अणो या अगक वीसलदेव चौहानमा पौत्र था । लक्षग्रामोंके राजा "अण"ने जब सिद्धराज जयसिंहकी मृत्युवा समाचार सुना तो उसने सोचा कि नये और निर्बल सिंहासनाधिकारी कुमारपालके नेतृत्वमे इस समय गुजरातकी सरकार है। अब अपनेको स्वतन्त्र करनेका उपयुक्त समय आ गया है। इतना ही नहीं, अपने किसीसे कुछ प्रतिज्ञा करा और किसीको धमकी देकर, उज्जयनीके राजा वल्लाल तथा पश्चिमी गुजरातके राजाओंसे मंत्री कर ली । कुमारपालके गुप्तचरोने उसे सूचना दी कि अणराजा सेना लेवर गुजरातके पश्चिमी सीमान्तकी दिशामें अग्रसर हो रहा है। उसकी सेनामें अनेक सेनापति विदेशी भाषाओके भी ज्ञाता थे । अण राजाको कुथागम के राजाका सहयोग मिल गया तथा अहिल्वाडेकी सेनाका एक सैनिक वहड भी उसके पक्षमें जा मिला था। उज्जयिनीराज देश-देशान्तरमें भ्रमणशील व्यवसारिज अवकन्दावणयं अखिजमाण हयमजूरिएभकुल अविसुरन्त चमूवं पत्तं मदुराई तुह सेन्न नब्बेः सग्गल्लि अन्त जस भर जंगल वइणोवसप्पिड दिण्णा तुह रिउ भलावण घण पयाव सतप्पि एण गया एक सौ चौरानवेः तइ पेल्लिओ तुरुक्को टिल्ली नाही गलत्यिओ तह य अड्डसिओ अ कासी रिउ घतण छुह महाएस .छियानवेः द्वयाश्रय काव्य : सर्ग चतुर्थ, पचास दो सौ तेरह, दो सौ सोलह । यियोंसे गुजरातकी वास्तविव स्थितिसे परिचित हो चुका था। उसने मालवनरेश वल्लालसे एक सैनिक अभिसन्धि कर ली थी। उसने सैनिक आत्रमणको योजना बनायी थी कि जैसे ही अणराजा आश्रमण घर प्रगति करेगा, वह पूर्व दिशावी ओरसे गुजरातके विरुद्ध युद्ध घोषित वर देगा । कुमारपालको जब यह स्थिति विदित हुई तो उसने पारावार न रहा। कुमारपालका सैनिक संघटन इस अवसरपर कुमारपालकी सहायता तथा सहयोगवे लिए भी अनेकानेक राजा आग आये । कुमारपालको कूली जातिवें लोगोवा भी सहयोग प्राप्त हुआ जो प्रसिद्ध अश्वारोही माने जाते थे । पहाडी जातिके लोग भी चारों ओरसे कुमारपालवे साथ आ गये । कुमारपालके अधीनस्थ वच्छवी जनताने भी उसका साथ देना निश्चय किया। वच्छके साथ ही सिन्धुको जनता भी सहयोगके लिए प्रस्तुत हो गयी । जैसे ही कुमारपाल आवकी ओर अग्रसर हुआ उसके साथ मृगचर्मका वस्त्र धारण करनेवाले पहाडी भी आ मिले। आबूबा परमार राजा विक्रमसिंह, जो जालघर देशवी जनतापा नेता था, कुमारपालके साथ हो गया और उसको अधीनता स्वीकार कर ली। अणराजाने कुमारपालके आगमनकी सूचना पाकर अपने मन्त्रियोंके परामर्शनी अवहेलना कर युद्ध करनेवा निश्चय किया। किन्तु अभी उसकी सेना युद्धके लिए प्रस्तुत भी न थी कि रणभेरी सुनाई पड़ी और गुजरातनी सेना पर्वतोकी ओरसे प्रवेश करने लगी । मेरुतुग तथा हेमचन्द्र दोनो ही इस वातपर एकमत है कि सपादलक्षके राजाने ही पहले आक्रमण किया था। मेरुतुगका यह भी चयन है वि गुजरातपर आश्रमण करने के लिए चौहान नरेशको वहडने हो प्रेरणा तथा प्रोत्साहन दिया था। वहड कुमारपार के विरुद्ध युद्ध करना चाहता था। उसने उन प्रदेशोंके सरकारी अधिकारियोको बहुमूल्य भेंट तथा रिश्वत देवर अपनी ओर मिला लिया था । बडने सपादलक्षके राजाको साथ लावर गुजरातके सीमान्तपर एक शक्तिशाली सेना खड़ी कर दी थी। किन्तु वहडके ये सभी प्रयल, जिनके द्वारा वह कुमारपालको पराजित तथा पदाकान्त करने की योजना बना चुका था, एक विचित्र घटनाके मारण विफल हो गये । कुमारपालके पास रणभूमिम कौशल प्रदर्शित करनवाला वल्हपचानन नामका एक अत्यन्त श्रेष्ठ हाथी था। इस हाथीवे महावतका नाम कालिंग था। इसे वहडन धन देकर अपनी ओर मिला लिया था । सयोगसे एक बार कुमारपालवी डाट फटकार उसे बहुत अप्रिय लगी और वह अपना कार्य छोड़कर चला गया। उसके रिक्त स्थानपर सामल नामका हस्तिचालक, जो अपन कौशल तथा ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध था, नियुक्त किया गया। रणक्षत्रम जब कुमारपाल तथा अणक्की सेनावा सघर्ष प्रारम्भ होनवाला ही था कि कुमारपालके गुप्तचरोने सूचना दी कि उसकी सेनामें असन्तोष फैला दिया गया है। इस विषम घडीमें वीर कुमारपाल विचलित नहीं हुआ बल्कि ठीक इसके विपरीत साहस एवं दृढतासे अणवसे अकेले ही सामना करनवा निश्चय किया। उसन सामलको अपना हाथी आगे बढानेकी आज्ञा दी। यह देख वि सामल उसकी आज्ञाका पालन करनेम द्विघासे काम ले रहा है कुमारपालने उसपर विश्वासघातका आरोप लगाया । सामलने इस आरापको अस्वीकार करते हुए अपनी कठिनाईका स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि विपक्षी दलकी सेनामें वहड भी हाथीपर सवार है। इसकी आवाज ऐसी है, जिससे हाथी भी आतक्ति हो जाते हैं। उसने अपन वस्त्रोसे हाथीके दोनो कानाको बाधकर उक्त बाधा हटा दी और उसके अनन्तर कुमारपाल रणभूमिम अणवके विरुद्ध अग्रसर हुआ। 'प्रमन्य चिन्तामणि : पृष्ठ एक सौ बीस । अरुणोराजाकी पराजय वहडको हायीचे महावतवे परिवर्तनवी स्थिति ज्ञात न थी। उसे पूर्ण विश्वास था कि हस्तिचालय में अवश्य सहायता मिलेगी। यह सोचार उसने अपना हाथी कुमारपालवी ओर बढ़ाया और हाथमें तलवार लेवर उसके मस्तरपर चह जानमा प्रयत्न किया। सामन इस आणकी चालवो समझ लिया और अपन हायोको तनिक्सा पीछे हट जानका आदेश दिया। इस प्रकार बहड दो हाथियों मध्य गिर पडा और कुमार पालवे पंदल सैनिकों द्वारा पक्डवर बन्दी बना लिया गया। इसके अनन्तर तलाल कुमारपात्र अरुणोनी ओर बढा । उसके निकट जार सिद्धराजवे उत्तराधिकारी कुमारपालन वहा "जब तुम इतने वीर योद्धा थ तो सिद्धराजवे सम्मुख क्यो नतमस्तव हुए थे । पूर्वपलमें तुम्हारा वह कार्य निश्चय ही बुद्धिमत्तापूर्ण था । यदि अब मैं तुम्हे पराजित नही वरता तो सिद्धराजकी धवल फीतिमा प्रकाश मन्द पडता जायगा । इस प्रकार दोनो राजाओम युद्ध हुआ। दोनो पक्षोकी सेनाओमें भी भीवण रण मघर्ष हुआ । कुमारपान अरुणोराजाको क्षत्रियोकी भाति युद्ध करनकी चुनौती देवर ठीव उसके मुखपर ही वाण छोड़ा। वाणसे आहत होकर जन वह हाथीके सामन गिर पड़ा तो कुमारपालने अपन परिधानको वायुम प्रसन्नतापूर्वक फहराकर विजयकी घोषणा की। जब अरुणोराजावे पक्ष दोनो नता इस प्रकार पराजित हो गये तो सभीन घुमारपालकी अधीनता स्वीकार कर ली । कुमारपालको इस युद्धमें पूर्ण विजय प्राप्त हुई। प्रभावक चरित्र अध्याय बाईस, पचास दो सौ एक, दो सौ दो रासमाला : अध्याय ग्यारह, पूएक सौ सतहत्तर । साहित्य और शिलालेखोंमें वर्णन कुमारपालकी अरुणोराजापर इस विजय घटनाका उल्लेख वसन्त विलास' वस्तुपाल तेजपाल प्रशस्ति तथा सुकृत कीर्तिकल्लोलिनी में हुआ हँ । साहित्यमे उल्लिखित कुमारपाल तथा अरुणोराजाके इस युद्धका शिलालेखो और उत्कीर्ण लेखोमे भी वर्णन है । विरा* तथा रतनपुर प्रस्तर लेखों में इस बातका स्पष्ट उल्लेख है कि नाडुल्य चौहानोवा प्रदेश कुमारपालके साम्राज्य के अन्तर्गत कर लिया गया था । भटुड शिलालेख में यह अकित है कि विक्रम संवत एक हज़ार दो सौ दस-सोलहमे कुमारपालका एक दण्डनायक नाडुल्य प्रदेशमे नियुक्त किया गया था। अनहिलपाटक तथा शाकभरी राज्योके मध्य चौहानोका नाहुल्य राज्य गायकवाड ओरियटल सिरीज : सल्या सात, तीन, उनतीस । जैन धर्ममूरीचकार सहसाऽर्णोराजमत्रासयद् बाणः कुंकणमग्रहीदपि गुरुचक्रेस्मरध्वसिनम् इत्य यस्य परिक्षतक्षितिभूतो हसावलोनिर्मले रामस्यैव निरन्तर नवयशः पूदिश पूरिताः गाशून्य ओशून्य सिरीज : सख्या दस : परिशिष्ट एक, पूशून्य पाँच सौ छियासी कथ्यन्ते न महीभूतः कति महीयासो महोशेखरा माहात्म्य स्तुमहे व हेतुनिगमा देतस्य चेतोहरम् मर्यादा मतिलघयन् रसल सद्यदद्वाहिनी वाहितो वर्णो राजः स जगाम जागल महोभागेषु भग्नोन्नतिः गाशून्य ओशून्य सिरीज : सङ्ख्या दस परिशिष्ट दो, पृशून्य सरसठ । 'इपिशून्य इडिशून्य : खड ग्यारह, पूशून्य चौंतालीस । प्राकृत संस्कृत शिलालेख : भावनगर पुरातत्व विभाग, दो सौ पाँच-अठहत्तर आर्कलाजिकल सर्वे आव इडिया वेस्टर्न सकिल, एक हज़ार नौ सौ आठ, इक्यावन, बावन
त्वचा की देखभाल (Night Skin Care Tips ) के लिए दिन के समय सभी कुछ न कुछ ब्यूटी टिप्स अपनाते हैं. पूरे दिन बाहर रहने वाले लोगों की स्किन प्रदूषण, धूल और सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है. ऐसे में रात में सोने से पहले स्किन केयर (Night Beauty Tips) के कुछ खास उपाय करने जरूरी होते हैं. महिलाओं की त्वचा कोमल और मुलायम होती है. दिन में प्रदुषण और धूल की वजह से त्वचा पर बूरा असर पड़ता है. सुंदर त्वचा के लिए यह जरूरी होता है कि आप रात में सोने से पहले कुछ ब्यूटी केयर वाले उपाय अपनाएं. आइए जानते हैं सोने से पहले स्किन केयर के लिए क्या-क्या करना जरूरी होता है. जब भी आप सोते हैं शरीर पूरे दिन के नुकसान को फिर से ठीक करने में लग जाता है. दिन में त्वचा पर हुए प्रदूषण और धूल के हमलों से भी त्वचा को शरीर रात में ठीक करता है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि त्वचा को सामान्य तौर पर साफ करके ही सोने जाएं. सर्दियों में त्वचा की देखभाल के लिए आसान ब्यूटी टिप्स. सोने से पहले आपको अपने चेहरे की सफाई जरूर करनी चाहिए. रात में सोने से पहले चेहरे को हल्के गुनगुने पानी के साथ किसी फेसवॉश या घरेलू उबटन से साफ करना चाहिए. आप बेसन या मुल्तानी मिट्टी के उबटन का भी प्रयोग कर सकती हैं. रात को स्किन केयर के 8 टिप्स. बढ़ती उम्र के साथ चेहरे में झुर्रियां बढ़ने लगती है. ऐसे में आप सोने से पहले चेहरे पर रेटिनॉल का उपयोग जरूर करें. रेटिनॉल का उपयोग आपके चेहरे की झुर्रियों को कम करने का काम करता है. रेटिनॉल का उपयोग करने से पहले किसी ब्यूटी एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें. ऑयली स्किन के लिए बेस्ट फेस वाश और फेस पैक. स्किन केयर के लिए सबसे जरूरी होता है एंटी ऑक्सीडेंट. त्वचा के पोषण के लिए एंटी ऑक्सीडेंट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. त्वचा की देखभाल के लिए एंटी ऑक्सीडेंट वाले कुछ क्रीम भी आती हैं आप उनका भी उपयोग कर सकी हैं. एंटी ऑक्सीडेंट्स क्रीम एक तरह से सीरम होती है जो त्वचा को सेहतमंद बनाती हैं. सोने से पहले जब भी चेहरा साफ करें तो स्क्रबिंग न करें. ब्यूटी एक्सपर्ट्स मानते हैं की स्किन स्क्रबिंग से चेहरे की त्वचा को नुकसान होता है. सप्ताह में एक बार आप चेहरे की स्क्रबिंग कर सकते हैं. सर्दियों में फेस वॉश की ये गलतियां स्किन को करती है डैमेज. Total Wellness is now just a click away.
त्वचा की देखभाल के लिए दिन के समय सभी कुछ न कुछ ब्यूटी टिप्स अपनाते हैं. पूरे दिन बाहर रहने वाले लोगों की स्किन प्रदूषण, धूल और सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है. ऐसे में रात में सोने से पहले स्किन केयर के कुछ खास उपाय करने जरूरी होते हैं. महिलाओं की त्वचा कोमल और मुलायम होती है. दिन में प्रदुषण और धूल की वजह से त्वचा पर बूरा असर पड़ता है. सुंदर त्वचा के लिए यह जरूरी होता है कि आप रात में सोने से पहले कुछ ब्यूटी केयर वाले उपाय अपनाएं. आइए जानते हैं सोने से पहले स्किन केयर के लिए क्या-क्या करना जरूरी होता है. जब भी आप सोते हैं शरीर पूरे दिन के नुकसान को फिर से ठीक करने में लग जाता है. दिन में त्वचा पर हुए प्रदूषण और धूल के हमलों से भी त्वचा को शरीर रात में ठीक करता है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि त्वचा को सामान्य तौर पर साफ करके ही सोने जाएं. सर्दियों में त्वचा की देखभाल के लिए आसान ब्यूटी टिप्स. सोने से पहले आपको अपने चेहरे की सफाई जरूर करनी चाहिए. रात में सोने से पहले चेहरे को हल्के गुनगुने पानी के साथ किसी फेसवॉश या घरेलू उबटन से साफ करना चाहिए. आप बेसन या मुल्तानी मिट्टी के उबटन का भी प्रयोग कर सकती हैं. रात को स्किन केयर के आठ टिप्स. बढ़ती उम्र के साथ चेहरे में झुर्रियां बढ़ने लगती है. ऐसे में आप सोने से पहले चेहरे पर रेटिनॉल का उपयोग जरूर करें. रेटिनॉल का उपयोग आपके चेहरे की झुर्रियों को कम करने का काम करता है. रेटिनॉल का उपयोग करने से पहले किसी ब्यूटी एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें. ऑयली स्किन के लिए बेस्ट फेस वाश और फेस पैक. स्किन केयर के लिए सबसे जरूरी होता है एंटी ऑक्सीडेंट. त्वचा के पोषण के लिए एंटी ऑक्सीडेंट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. त्वचा की देखभाल के लिए एंटी ऑक्सीडेंट वाले कुछ क्रीम भी आती हैं आप उनका भी उपयोग कर सकी हैं. एंटी ऑक्सीडेंट्स क्रीम एक तरह से सीरम होती है जो त्वचा को सेहतमंद बनाती हैं. सोने से पहले जब भी चेहरा साफ करें तो स्क्रबिंग न करें. ब्यूटी एक्सपर्ट्स मानते हैं की स्किन स्क्रबिंग से चेहरे की त्वचा को नुकसान होता है. सप्ताह में एक बार आप चेहरे की स्क्रबिंग कर सकते हैं. सर्दियों में फेस वॉश की ये गलतियां स्किन को करती है डैमेज. Total Wellness is now just a click away.
मध्यप्रदेश में बिजली गिरने से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा रायसेन जिले के चार लोग चपेट में आए हैं। मध्यप्रदेश में इस समय मौसम बिगड़ा है। कई जिलों में बारिश और ओले गिर रहे हैं। इधर बिजली गिरने से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा रायसेन जिले के चार लोग चपेट में आए हैं। वहीं खंडवा जिले में दो महिलाओं पर बिजली गिरी है। मौसम विभाग ने रविवार को भी शहडोल संभाग के जिलों में तथा छतरपुर, टीकमगढ़, कटनी, बैतूल जिलों में वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बता दें कि प्रदेश में बीते कुछ दिनों से बारिश-ओले गिर रहे हैं। प्रदेश के 26 जिलों में पिछले 24 घंटे से बारिश जारी है। इससे फसलें तबाह हो रही हैं, वहीं बिजली गिरने से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। रायसेन में 4, खंडवा में 2 तो दमोह-नर्मदापुरम-सागर-बैतूल-अशोकनगर-धार में 1-1 व्यक्ति की मौत वज्रपात से होना बताया जा रहा है। बैतूल में बिजली गिरने 33 बकरे-बकरियों की मौत भी हुई है। बताया जा रहा है कि ये मवेशी बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे तभी बिजली गिर गई। खंडवा में शनिवार दोपहर आकाशीय बिजली गिरने से खेत में काम कर रही दो महिलाओं की मौत हो गई। इसके अलावा चार अन्य लोग भी झुलस गए। घटना पंधाना थाना क्षेत्र अंर्तगत ग्राम बाबली और अंजनगांव की है। गांव में पिंकी और रविता समेत अन्य महिलाएं खेत में गेहूं फसल की कटाई कर रही थीं। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई। बिजली गिरने से पिंकी और रविता की मौत हो गई। मौसम विभाग की मानें तो बीते 24 घंटों में प्रदेश के नर्मदापुरम, शहडोल, जबलपुर, चंबल संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर, उज्जैन, सागर, इंदौर तथा ग्वालियर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर, रीवा-भोपाल संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई। अगले 24 घंटों का पूर्वानुमान कहता है कि शहडोल, जबलपुर, नर्मदापुरम, रीवा, सागर संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर, ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण-पूर्वी हवाएं बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी लेकर आ रही है। इन दोनों के मिश्रण से प्रदेश में बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी का असर है। 20 मार्च तक ऐसी ही स्थिति रहेगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मध्यप्रदेश में बिजली गिरने से अब तक बारह लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा रायसेन जिले के चार लोग चपेट में आए हैं। मध्यप्रदेश में इस समय मौसम बिगड़ा है। कई जिलों में बारिश और ओले गिर रहे हैं। इधर बिजली गिरने से अब तक बारह लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा रायसेन जिले के चार लोग चपेट में आए हैं। वहीं खंडवा जिले में दो महिलाओं पर बिजली गिरी है। मौसम विभाग ने रविवार को भी शहडोल संभाग के जिलों में तथा छतरपुर, टीकमगढ़, कटनी, बैतूल जिलों में वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बता दें कि प्रदेश में बीते कुछ दिनों से बारिश-ओले गिर रहे हैं। प्रदेश के छब्बीस जिलों में पिछले चौबीस घंटाटे से बारिश जारी है। इससे फसलें तबाह हो रही हैं, वहीं बिजली गिरने से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। रायसेन में चार, खंडवा में दो तो दमोह-नर्मदापुरम-सागर-बैतूल-अशोकनगर-धार में एक-एक व्यक्ति की मौत वज्रपात से होना बताया जा रहा है। बैतूल में बिजली गिरने तैंतीस बकरे-बकरियों की मौत भी हुई है। बताया जा रहा है कि ये मवेशी बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे तभी बिजली गिर गई। खंडवा में शनिवार दोपहर आकाशीय बिजली गिरने से खेत में काम कर रही दो महिलाओं की मौत हो गई। इसके अलावा चार अन्य लोग भी झुलस गए। घटना पंधाना थाना क्षेत्र अंर्तगत ग्राम बाबली और अंजनगांव की है। गांव में पिंकी और रविता समेत अन्य महिलाएं खेत में गेहूं फसल की कटाई कर रही थीं। इसी दौरान बारिश शुरू हो गई। बिजली गिरने से पिंकी और रविता की मौत हो गई। मौसम विभाग की मानें तो बीते चौबीस घंटाटों में प्रदेश के नर्मदापुरम, शहडोल, जबलपुर, चंबल संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर, उज्जैन, सागर, इंदौर तथा ग्वालियर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर, रीवा-भोपाल संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई। अगले चौबीस घंटाटों का पूर्वानुमान कहता है कि शहडोल, जबलपुर, नर्मदापुरम, रीवा, सागर संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर, ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण-पूर्वी हवाएं बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी लेकर आ रही है। इन दोनों के मिश्रण से प्रदेश में बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी का असर है। बीस मार्च तक ऐसी ही स्थिति रहेगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
हमेशा से अपने लुक और हेयर स्टाइल को लेकर चर्चे में रहने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने एक बार फिर से लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है , और एक बार फिर से उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. यह तस्वीर धोनी के फैन्स के साथ साथ csk के फैन्स के लिए भी उतना ही मायने रखता है. फिलहाल csk ने मेगा ऑक्शन से पहले महेंद्र सिंह धोनी के साथ साथ रविंद्र जडेजा, मोईन अली, ऋतुराज गायकवाड अपने चार खिलाडियों को रिटेन कर लिया है, आपको ये भी बताते चलें कि क्रिकेट के महान खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी पर फ्रेंचाईजी ने रविन्द्र जडेजा से भी कम रकम लगाकार 12 करोड़ में ख़रीदा है जबकि रविन्द्र जडेजा पुरे 16 करोड़ में ख़रीदा गया है. आपको बता दें कि whistle podu club और csk फैन्स क्लब के तरफ से उन खिलाडियों को कार्टून के रूप में दर्शाया गया है जिन्हें csk ने रिटेन किया है, इस तस्वीर में चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पिली लुंगी में थलाइवा लुक में कुर्सी पर बैठे नज़र आ रहे, वहीँ मोईन अली और रविन्द्र जडेजा को धोनी के पीछे खड़ा दिखाया गया है. वहीं ऋतुराज गायकवाड इस कार्टून तस्वीर में अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर यह तस्वीर धूम मचा रही है, जितने इसके लाइक्स और शेयर बढ़ रहें हैं उतने ही फैन्स इस तस्वीर को लेकर कमेंट कर रहे हैं.
हमेशा से अपने लुक और हेयर स्टाइल को लेकर चर्चे में रहने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने एक बार फिर से लोगो का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है , और एक बार फिर से उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. यह तस्वीर धोनी के फैन्स के साथ साथ csk के फैन्स के लिए भी उतना ही मायने रखता है. फिलहाल csk ने मेगा ऑक्शन से पहले महेंद्र सिंह धोनी के साथ साथ रविंद्र जडेजा, मोईन अली, ऋतुराज गायकवाड अपने चार खिलाडियों को रिटेन कर लिया है, आपको ये भी बताते चलें कि क्रिकेट के महान खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी पर फ्रेंचाईजी ने रविन्द्र जडेजा से भी कम रकम लगाकार बारह करोड़ में ख़रीदा है जबकि रविन्द्र जडेजा पुरे सोलह करोड़ में ख़रीदा गया है. आपको बता दें कि whistle podu club और csk फैन्स क्लब के तरफ से उन खिलाडियों को कार्टून के रूप में दर्शाया गया है जिन्हें csk ने रिटेन किया है, इस तस्वीर में चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पिली लुंगी में थलाइवा लुक में कुर्सी पर बैठे नज़र आ रहे, वहीँ मोईन अली और रविन्द्र जडेजा को धोनी के पीछे खड़ा दिखाया गया है. वहीं ऋतुराज गायकवाड इस कार्टून तस्वीर में अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर यह तस्वीर धूम मचा रही है, जितने इसके लाइक्स और शेयर बढ़ रहें हैं उतने ही फैन्स इस तस्वीर को लेकर कमेंट कर रहे हैं.
हिजाब विवाद को लेकर अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की टिप्पणी के बाद, समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान ने इस विवाद को उठाते हुए कहा कि भारत में रेप मामलों को कम करने के लिए हिजाब की जरूरत है। हिजाब पर जोर देना एक धार्मिक मुद्दा है, इस्लाम मान्यताओं के अनुसार एक किशोर लड़की को सार्वजनिक रूप से 'पर्दा' में रहना चाहिए। हिजाब विवाद पर अल-कायदा प्रमुख के संदेश का जवाब देते हुए, शफीकुर रहमान ने रिपब्लिक से कहा, "अल कायदा सहित कोई भी विदेशी टिप्पणी हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती। हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे इस मामले का समर्थन करते हैं या विरोध करते हैं।" एक वीडियो संदेश में अल-कायदा प्रमुख ने भारत के लोकतंत्र को टारगेट करने के लिए कर्नाटक में हाल ही में हिजाब विवाद पर टिप्पणी की और कहा, "हमें मूर्तिपूजक हिंदू लोकतंत्र की मृगतृष्णा से धोखा देना बंद करना चाहिए"। उन्होंने फरवरी की शुरुआत में अपने कॉलेज में हिजाब का विरोध करने वाले छात्रों के एक समूह का सामना करने के लिए कर्नाटक कॉलेज की छात्रा मुस्कान खान की प्रशंसा की। उन्होंने मुस्कान के वीडियो को कवर करने के लिए मीडिया की सराहना की। हिजाब सहित शैक्षणिक संस्थानों के अंदर धार्मिक कपड़ों पर प्रतिबंध को बरकरार रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए, सपा सांसद ने इस कदम की निंदा की और कहा, "हिजाब पहनने में क्या गलत है'" इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार को हिजाब के रूप में दोषी ठहराया जाना एक धार्मिक विश्वास है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि हिजाब विवाद इस्लामिक स्टेट और अल कायदा सहित कुछ वैश्विक आतंकी समूहों के प्रचार साहित्य में प्रमुखता से सामने आई है, जिनके कवर पर यह मुद्दा था। आईएस से जुड़ी पत्रिका वॉयस ऑफ हिंद में "द डॉटर्स ऑफ द कम्पेनियंस" टाइटल्स से एक कहानी छपी थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और हिजाब सहित शैक्षणिक संस्थानों के अंदर धार्मिक कपड़ों पर प्रतिबंध को बरकरार रखा है। इससे पहले जनवरी में, उडुपी के गवर्नमेंट गर्ल्स पीयू कॉलेज में हिजाब पहनने का विरोध शुरू हुआ था, जब छह छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें हेडस्कार्फ़ पहनने पर जोर देने के लिए कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं थी। क्लास में हिजाब पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों का उडुपी और चिक्कमगलुरु में दक्षिणपंथी समूहों द्वारा विरोध किया गया था।
हिजाब विवाद को लेकर अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की टिप्पणी के बाद, समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान ने इस विवाद को उठाते हुए कहा कि भारत में रेप मामलों को कम करने के लिए हिजाब की जरूरत है। हिजाब पर जोर देना एक धार्मिक मुद्दा है, इस्लाम मान्यताओं के अनुसार एक किशोर लड़की को सार्वजनिक रूप से 'पर्दा' में रहना चाहिए। हिजाब विवाद पर अल-कायदा प्रमुख के संदेश का जवाब देते हुए, शफीकुर रहमान ने रिपब्लिक से कहा, "अल कायदा सहित कोई भी विदेशी टिप्पणी हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती। हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे इस मामले का समर्थन करते हैं या विरोध करते हैं।" एक वीडियो संदेश में अल-कायदा प्रमुख ने भारत के लोकतंत्र को टारगेट करने के लिए कर्नाटक में हाल ही में हिजाब विवाद पर टिप्पणी की और कहा, "हमें मूर्तिपूजक हिंदू लोकतंत्र की मृगतृष्णा से धोखा देना बंद करना चाहिए"। उन्होंने फरवरी की शुरुआत में अपने कॉलेज में हिजाब का विरोध करने वाले छात्रों के एक समूह का सामना करने के लिए कर्नाटक कॉलेज की छात्रा मुस्कान खान की प्रशंसा की। उन्होंने मुस्कान के वीडियो को कवर करने के लिए मीडिया की सराहना की। हिजाब सहित शैक्षणिक संस्थानों के अंदर धार्मिक कपड़ों पर प्रतिबंध को बरकरार रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए, सपा सांसद ने इस कदम की निंदा की और कहा, "हिजाब पहनने में क्या गलत है'" इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार को हिजाब के रूप में दोषी ठहराया जाना एक धार्मिक विश्वास है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि हिजाब विवाद इस्लामिक स्टेट और अल कायदा सहित कुछ वैश्विक आतंकी समूहों के प्रचार साहित्य में प्रमुखता से सामने आई है, जिनके कवर पर यह मुद्दा था। आईएस से जुड़ी पत्रिका वॉयस ऑफ हिंद में "द डॉटर्स ऑफ द कम्पेनियंस" टाइटल्स से एक कहानी छपी थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और हिजाब सहित शैक्षणिक संस्थानों के अंदर धार्मिक कपड़ों पर प्रतिबंध को बरकरार रखा है। इससे पहले जनवरी में, उडुपी के गवर्नमेंट गर्ल्स पीयू कॉलेज में हिजाब पहनने का विरोध शुरू हुआ था, जब छह छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें हेडस्कार्फ़ पहनने पर जोर देने के लिए कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं थी। क्लास में हिजाब पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों का उडुपी और चिक्कमगलुरु में दक्षिणपंथी समूहों द्वारा विरोध किया गया था।
MOTIHARI: मोतिहारी में दहेज दानवों ने बड़ी घटना को अंजाम दिया है। दहेज में भैंस व दो लाख रुपया नहीं मिलने पर देवर ने तेजाब छिड़कर भाभी को जला दिया है। गंभीर हालत में महिला को निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। महिला के मायके के सूचना पर मधुबन पुलिस पहुचकर कार्रवाई में जुटी है। घटना मधुबन थाना के बारा मंगरु गांव की बतायी जा रही है। मधुबन थाना क्षेत्र के बारा मंगरु गांव में दहेज लोभियों द्वारा महिला के शरीर पर एसिड डालकर जलाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित महिला के मायके वाले ने ससुराल वाले पर दहेज में भैंस व 2 लाख रुपया की मांग को लेकर पहले जमकर मारपीट करने। उसके बाद देवर द्वारा तेजाब शरीर पर डालकर जला देने का आरोप लगाया गया है। महिला को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों के अनुसार महिला की शादी 2017 में हुई थी। शादी के बाद से ही दहेज के लिए सास, ससुर, जेठानी, पति, देवर द्वारा मारपीट व प्रताड़ित किया जा रहा था। तीन दिन पूर्व पति, सास सहित अन्य लोगों ने बेरहमी से मारपीट की। इतने से मन नहीं भरा तो देवर ने भाभी पर तेजाब डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की। हल्ला सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और महिला को बचाया। सूचना पर मायके वाले पहुंचे और महिला को अस्पताल ले गए। जहां निजी क्लिनिक में महिला को भर्ती कराया गया है। डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि महिला का शरीर जला हुआ है। पीड़ित पक्ष के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों के गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पीड़ित पक्ष द्वारा एसिड से जलाने का आरोप लगाया गया है, इसकी पुष्टी मेडिकल रिपोर्ट मिलने पर स्पष्ट होगी। पकड़ीदयाल डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों के गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
MOTIHARI: मोतिहारी में दहेज दानवों ने बड़ी घटना को अंजाम दिया है। दहेज में भैंस व दो लाख रुपया नहीं मिलने पर देवर ने तेजाब छिड़कर भाभी को जला दिया है। गंभीर हालत में महिला को निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। महिला के मायके के सूचना पर मधुबन पुलिस पहुचकर कार्रवाई में जुटी है। घटना मधुबन थाना के बारा मंगरु गांव की बतायी जा रही है। मधुबन थाना क्षेत्र के बारा मंगरु गांव में दहेज लोभियों द्वारा महिला के शरीर पर एसिड डालकर जलाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित महिला के मायके वाले ने ससुराल वाले पर दहेज में भैंस व दो लाख रुपया की मांग को लेकर पहले जमकर मारपीट करने। उसके बाद देवर द्वारा तेजाब शरीर पर डालकर जला देने का आरोप लगाया गया है। महिला को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों के अनुसार महिला की शादी दो हज़ार सत्रह में हुई थी। शादी के बाद से ही दहेज के लिए सास, ससुर, जेठानी, पति, देवर द्वारा मारपीट व प्रताड़ित किया जा रहा था। तीन दिन पूर्व पति, सास सहित अन्य लोगों ने बेरहमी से मारपीट की। इतने से मन नहीं भरा तो देवर ने भाभी पर तेजाब डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की। हल्ला सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और महिला को बचाया। सूचना पर मायके वाले पहुंचे और महिला को अस्पताल ले गए। जहां निजी क्लिनिक में महिला को भर्ती कराया गया है। डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि महिला का शरीर जला हुआ है। पीड़ित पक्ष के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों के गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पीड़ित पक्ष द्वारा एसिड से जलाने का आरोप लगाया गया है, इसकी पुष्टी मेडिकल रिपोर्ट मिलने पर स्पष्ट होगी। पकड़ीदयाल डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों के गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
डिजाइनिंग के मामले में मिनी का परफॉर्मेंस शानदार रहता है. कंपनी कॉम्पैक्ट हैचबैक बनाने में हमेशा से कामयाब रही है. अब लेटेस्ट मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट भी इसी कड़ी में एक बेहतरीन पेशकश है. बाहर और अंदर दोनों साइड से मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट काफी खूबसूरत है. टेक्नोलॉजी के मामले में भी ये कार बेहतरीन कही जा सकती है. BMW की मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट में इलेक्ट्रिक पावरट्रेन है. BMW ने इलेक्ट्रिक i3 हैचबैक का अनावरण कर दिया है. जो इलेक्ट्रिक मिनी के साथ फ्रैंकफर्ट ऑटो शो में फ्लोर पर दिखेगी. उम्मीद है कि शानदार लुक और बेहतरीन टेक्नोलॉजी से लैस ये कार लोगों को लुभाने में कामयाब होगी.
डिजाइनिंग के मामले में मिनी का परफॉर्मेंस शानदार रहता है. कंपनी कॉम्पैक्ट हैचबैक बनाने में हमेशा से कामयाब रही है. अब लेटेस्ट मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट भी इसी कड़ी में एक बेहतरीन पेशकश है. बाहर और अंदर दोनों साइड से मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट काफी खूबसूरत है. टेक्नोलॉजी के मामले में भी ये कार बेहतरीन कही जा सकती है. BMW की मिनी इलेक्ट्रिक कॉन्सेप्ट में इलेक्ट्रिक पावरट्रेन है. BMW ने इलेक्ट्रिक iतीन हैचबैक का अनावरण कर दिया है. जो इलेक्ट्रिक मिनी के साथ फ्रैंकफर्ट ऑटो शो में फ्लोर पर दिखेगी. उम्मीद है कि शानदार लुक और बेहतरीन टेक्नोलॉजी से लैस ये कार लोगों को लुभाने में कामयाब होगी.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
लोगों की कमाई पर हुआ असर ( Image Source : PTI Photo ) हालिया कुछ महीनों के दौरान महंगाई दर (Inflation in India) में भले ही नरमी आई है, लेकिन इसने अभी भी लोगों को परेशान करना कम नहीं किया है. एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि उच्च महंगाई के कारण पिछले 12 महीने के दौरान करीब 40 फीसदी भारतीयों की खर्च करने योग्य कमाई (Disposable Income) कम हुई है. हालांकि राहत की बात यह है कि अन्य देशों की तुलना में देखें तो भारत में आई गिरावट कम है. YouGov के एक सर्वे के अनुसार, इस सर्वे में 18 देशों के लोगों ने हिस्सा लिया और उनमें से 50 फीसदी लोगों ने कहा कि महंगाई की ऊंची दरों के कारण उनकी खर्च योग्य कमाई में गिरावट आई है. हालांकि कुछ लोगों की आमदनी इस दौरान बढ़ी भी है. सर्वे के अनुसार, वैश्विक स्तर पर करीब 25 फीसदी लोगों ने पिछले एक साल में खर्च योग्य आमदनी बढ़ने की बात की, जबकि भारत में ऐसे लोग सिर्फ 14 फीसदी रहे. खर्च योग्य आमदनी यानी डिस्पोजेबल इनकम कमाई के उस हिस्से को कहते हैं, जो किसी परिवार के पास टैक्स चुकाने तथा घर के किराये समेत अन्य खर्चे और ईंधन के खर्च के बाद बचता है. डिस्पोजेबल इनकम पर महंगाई का सीधा असर होता है, क्योंकि महंगाई बढ़ने से घर व ईंधन के खर्चे भी तत्काल बढ़ जाते हैं. सर्वे के अनुसार, जिन 18 देशों के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया, सभी में डिस्पोजेबल इनकम में गिरावट आई है. ब्रिटेन में इसका असर सबसे ज्यादा हुआ है, क्योंकि वहीं के 65 फीसदी लोगों का मानना है कि उनकी डिस्पोजेबल इनकम कम हुई है, जबकि 20 फीसदी लोगों ने बढ़ने की बात की है. इसी तरह कनाडा के 58 फीसदी, फ्रांस के 55 फीसदी और डेनमार्क, पोलैंड व स्वीडन के 54-54 फीसदी लोगों ने खर्च योग्य कमाई में गिरावट की बात की है. भारत की बात करें तो लोग पिछले 12 महीने की तुलना में आने वाले महीनों को लेकर ज्यादा परेशान हैं. भारत से सर्वे में शामिल हुए 66 फीसदी लोगों को आने वाले समय में खर्च की चिंता सता रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर 62 फीसदी लोग इस बारे में चिंतित हैं. समय के साथ भारतीयों की खरीदारी के तरीके में भी बदलाव आ रहा है. सर्वे के अनुसार, 45 फीसदी भारतीय ऑनलाइन और स्टोर से कीमतों की तुलना करते हैं तथा डिस्काउंट कूपन का इस्तेमाल कर सस्ते में खरीदारी का फायदा उठाते हैं. वहीं 42 फीसदी लोगों का कहना है कि वे सेल का इंतजार करते हैं, जबकि 40 फीसदी भारतीय अपने खर्चों को बजट में रखने के लिए सस्ते दुकानों का रुख करते हैं.
लोगों की कमाई पर हुआ असर हालिया कुछ महीनों के दौरान महंगाई दर में भले ही नरमी आई है, लेकिन इसने अभी भी लोगों को परेशान करना कम नहीं किया है. एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि उच्च महंगाई के कारण पिछले बारह महीने के दौरान करीब चालीस फीसदी भारतीयों की खर्च करने योग्य कमाई कम हुई है. हालांकि राहत की बात यह है कि अन्य देशों की तुलना में देखें तो भारत में आई गिरावट कम है. YouGov के एक सर्वे के अनुसार, इस सर्वे में अट्ठारह देशों के लोगों ने हिस्सा लिया और उनमें से पचास फीसदी लोगों ने कहा कि महंगाई की ऊंची दरों के कारण उनकी खर्च योग्य कमाई में गिरावट आई है. हालांकि कुछ लोगों की आमदनी इस दौरान बढ़ी भी है. सर्वे के अनुसार, वैश्विक स्तर पर करीब पच्चीस फीसदी लोगों ने पिछले एक साल में खर्च योग्य आमदनी बढ़ने की बात की, जबकि भारत में ऐसे लोग सिर्फ चौदह फीसदी रहे. खर्च योग्य आमदनी यानी डिस्पोजेबल इनकम कमाई के उस हिस्से को कहते हैं, जो किसी परिवार के पास टैक्स चुकाने तथा घर के किराये समेत अन्य खर्चे और ईंधन के खर्च के बाद बचता है. डिस्पोजेबल इनकम पर महंगाई का सीधा असर होता है, क्योंकि महंगाई बढ़ने से घर व ईंधन के खर्चे भी तत्काल बढ़ जाते हैं. सर्वे के अनुसार, जिन अट्ठारह देशों के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया, सभी में डिस्पोजेबल इनकम में गिरावट आई है. ब्रिटेन में इसका असर सबसे ज्यादा हुआ है, क्योंकि वहीं के पैंसठ फीसदी लोगों का मानना है कि उनकी डिस्पोजेबल इनकम कम हुई है, जबकि बीस फीसदी लोगों ने बढ़ने की बात की है. इसी तरह कनाडा के अट्ठावन फीसदी, फ्रांस के पचपन फीसदी और डेनमार्क, पोलैंड व स्वीडन के चौवन-चौवन फीसदी लोगों ने खर्च योग्य कमाई में गिरावट की बात की है. भारत की बात करें तो लोग पिछले बारह महीने की तुलना में आने वाले महीनों को लेकर ज्यादा परेशान हैं. भारत से सर्वे में शामिल हुए छयासठ फीसदी लोगों को आने वाले समय में खर्च की चिंता सता रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर बासठ फीसदी लोग इस बारे में चिंतित हैं. समय के साथ भारतीयों की खरीदारी के तरीके में भी बदलाव आ रहा है. सर्वे के अनुसार, पैंतालीस फीसदी भारतीय ऑनलाइन और स्टोर से कीमतों की तुलना करते हैं तथा डिस्काउंट कूपन का इस्तेमाल कर सस्ते में खरीदारी का फायदा उठाते हैं. वहीं बयालीस फीसदी लोगों का कहना है कि वे सेल का इंतजार करते हैं, जबकि चालीस फीसदी भारतीय अपने खर्चों को बजट में रखने के लिए सस्ते दुकानों का रुख करते हैं.
डेवलपमेंट प्रोसेस के दौरान लीड सिस्टम इंजीनियर होने के अलावा डॉ स्वाति मोहन (Dr Swati Mohan) पर ऐसे महत्वपूर्ण अभियानों में टीम की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है. वह ही GN&C के लिए मिशन कंट्रोल स्टाफिंग का शेड्यूल भी तैयार करती हैं. वॉशिंगटनः नासा (NASA) के पर्सीवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ली है और इस सफलता में भारतीय मूल की वैज्ञानिक डॉ स्वाति मोहन (Dr Swati Mohan) का बहुत बड़ा योगदान है. जब पूरी दुनिया की निगाहें नासा के रोवर की ऐतिहासिक लैंडिग पर टिकी हुईं थीं, स्वाति कंट्रोल रूम में नेविगेशन एंड कंट्रोल (Navigation, and Controls-GN&C) सबसिस्टम और पूरी प्रोजेक्ट टीम के साथ कॉरडिनेट कर रही थीं. डॉ स्वाति पिछले काफी समय से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़ी हुईं हैं और इस उपलब्धि पर बेहद खुश हैं. डेवलपमेंट प्रोसेस के दौरान लीड सिस्टम इंजीनियर होने के अलावा डॉ स्वाति मोहन (Dr Swati Mohan) पर ऐसे महत्वपूर्ण अभियानों में टीम की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है. वह ही GN&C के लिए मिशन कंट्रोल स्टाफिंग का शेड्यूल तैयार करती हैं. डॉ स्वाति एक वर्ष की उम्र में ही अपने परिवार के साथ भारत से अमेरिका शिफ्ट हो गई थीं. उनका ज्यादातर बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वॉशिंगटन DC मेट्रो क्षेत्र में बिता है. ज्यादातर बच्चों की तरह स्वाति मोहन को भी शुरुआत में नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है. जब वह 9 साल की थीं, तब पहली बार 'स्टार ट्रेक' देखकर उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिक बनने का सोचा, लेकिन 16 वर्ष की होने पर उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ बनने की इच्छा जाहिर की. डॉ मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने एयरोनॉटिक्स/एस्ट्रोनॉटिक्स में एमआईटी से एमएस और पीएचडी भी की है. डॉ स्वाति मोहन नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला में शुरुआत से ही मार्स रोवर मिशन की सदस्य रही हैं. इसके अलावा भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया है. भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक ने कैसिनी (शनि के लिए एक मिशन) और GRAIL (मिशन मून) परियोजनाओं पर भी काम किया है. स्वाति नासा की इस सफलता को लेकर बेहद उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह पर टचडाउन की पुष्टि हो गई है. अब यह जीवन के संकेतों की तलाश शुरू करने के लिए तैयार है.
डेवलपमेंट प्रोसेस के दौरान लीड सिस्टम इंजीनियर होने के अलावा डॉ स्वाति मोहन पर ऐसे महत्वपूर्ण अभियानों में टीम की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है. वह ही GN&C के लिए मिशन कंट्रोल स्टाफिंग का शेड्यूल भी तैयार करती हैं. वॉशिंगटनः नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ली है और इस सफलता में भारतीय मूल की वैज्ञानिक डॉ स्वाति मोहन का बहुत बड़ा योगदान है. जब पूरी दुनिया की निगाहें नासा के रोवर की ऐतिहासिक लैंडिग पर टिकी हुईं थीं, स्वाति कंट्रोल रूम में नेविगेशन एंड कंट्रोल सबसिस्टम और पूरी प्रोजेक्ट टीम के साथ कॉरडिनेट कर रही थीं. डॉ स्वाति पिछले काफी समय से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़ी हुईं हैं और इस उपलब्धि पर बेहद खुश हैं. डेवलपमेंट प्रोसेस के दौरान लीड सिस्टम इंजीनियर होने के अलावा डॉ स्वाति मोहन पर ऐसे महत्वपूर्ण अभियानों में टीम की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है. वह ही GN&C के लिए मिशन कंट्रोल स्टाफिंग का शेड्यूल तैयार करती हैं. डॉ स्वाति एक वर्ष की उम्र में ही अपने परिवार के साथ भारत से अमेरिका शिफ्ट हो गई थीं. उनका ज्यादातर बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वॉशिंगटन DC मेट्रो क्षेत्र में बिता है. ज्यादातर बच्चों की तरह स्वाति मोहन को भी शुरुआत में नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है. जब वह नौ साल की थीं, तब पहली बार 'स्टार ट्रेक' देखकर उन्होंने ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिक बनने का सोचा, लेकिन सोलह वर्ष की होने पर उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ बनने की इच्छा जाहिर की. डॉ मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने एयरोनॉटिक्स/एस्ट्रोनॉटिक्स में एमआईटी से एमएस और पीएचडी भी की है. डॉ स्वाति मोहन नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला में शुरुआत से ही मार्स रोवर मिशन की सदस्य रही हैं. इसके अलावा भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया है. भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक ने कैसिनी और GRAIL परियोजनाओं पर भी काम किया है. स्वाति नासा की इस सफलता को लेकर बेहद उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह पर टचडाउन की पुष्टि हो गई है. अब यह जीवन के संकेतों की तलाश शुरू करने के लिए तैयार है.
मोरांबाई को पदावली शैली के उपर्युक्त भेदों के साथ-साथ छंद - वैविध्य की दृष्टि से भी मीरों का काव्य संपन्न है । जैसा कि श्री परशुराम चतुर्वेदी ने 'मीराँ की पदावली' की भूमिका में स्पष्ट किया है, मीराँ ने सार, सरसी, विष्णुपद, दोहा शोभन, ताटंक, कुण्डल, चान्द्रयण, आदि छंदों का प्रयोग किया है। उनकी भाषा मुख्यतः राजस्थानी है किन्तु उनके कतिपय पद गुजराती एवं ब्रज भाषा में भी मिलते हैं । राजस्थानी से अनभिज्ञ संपादकों ने मीरों की भाषा को तोड़-मरोड़ दिया है, पर इसके लिए मीरों को दोष नहीं दिया जा सकता । इस प्रकार 'मीरों की पदावली' के विभिन्न पक्षों पर विचार कर लेने के अनन्तर हम निष्कर्ष रूप में कह सकते हैं कि भारतीय - गीति परम्परा में 'मीरां क - में पदावली' एक विशिष्ट स्थिति की सूचक है - वह विशिष्ट स्थिति है जबकि एक नारी-हृदय से प्ररणय-वेदना के दिव्य उद्गार सहज स्वाभाविक रूप में फूट पड़े । पुरुष के ओजस्वी स्वर भी गीति के क्षेत्र में जाकर कोमल कान्त पदावली में परिणत हो जाते हैं, फिर नारी के विरह-व्यथित करुण स्वरों की कोमलता का तो कहना ही क्या । हिन्दी की काव्य-परम्परा में मीरों के स्वरों का उद्घोष एक सर्वथा नूतन घटना का द्योतक है जबकि एक विद्रोहिणी नारी कुल, परिवार, समाज और देश की कृत्रिम दीवारों और मिथ्या-विश्वासों के बंधनों को तोड़ती हुई अपने पवित्र लक्ष्य दिव्य - प्रेम की घोषणा डंके की चोट, पुकार पुकार कर करती है : भक्ति काव्य के क्षेत्र में मीराँ सगुण और नि ु रंग, भक्ति और रहस्यवाद, श्रद्धा और प्रेम के अन्तर की खाइयों को पाटती हुई माधुर्य भाव के उज्ज्वल मधुर क्षेत्र का अनुसंधान करती हैं । त्रे संतों और भक्तों की साधना का सर्वत्र ग्रहण करती हुई भी किसी भी संप्रदाय की सीमाओं में बँधना अस्वीकार कर देती हैं। उन्हें न राणा के द्वारा भेजे गये विष के प्यालों को परवाह है, न पुष्टिसंप्रदाय के अर्थ-संग्राहक द्वारा ठुकराई गई भेंट की चिन्ता और न ही वे समाज की फब्तियों और निन्दकों की उक्तियों से त्रस्त होती हैं : वे तो केवल अपने साँवरिया के ध्यान में उसके सम्मुख नृत्य करने में और उसे अपने रागिनी सुनाने में लीन हैं, तन्मय हैं : वे कविता नहीं लिखतीं, पद नहीं जोड़ती और छंदों को नहीं गिनतीं; यह सब कुछ तो स्वतः ही हो जाता है जिस प्रकार वायु अथाह कम्पनों से वन-वीथिका के वंश-समूह स्वतः ही निनादित हो उठते हैं, कुछ उसी प्रकार प्रणयानुभूतियों से द्रवित, विरहानुभूतियों से उच्छ्वसित एवं आनन्दानुभूतियों से तरंगित होकर उनके स्वर विभिन्न राग-रागिनियों में फूट पड़े हैं जिन्हें हम लोग कविता, पद या गोति की संज्ञा देते हैं । प्रस्तु, मोरों की इन सहज स्वाभाविक दिव्य अनुभूतियों के साथ किसी से क्या तुलना ? मीराबाई की पदावली एवं कृत्रिमताओं से मुक्त है । वस्तुतः मीरां को काव्यानुभूति, परम्परा युग एवं व्यक्तित्व सुन्दर सम्मिश्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है । वह परम्परा का एक नया मोड़, युग का एक व्यापक बोध एवं व्यक्तित्व की एक नूतन सहजता का श्रादर्श प्रस्तुत करता है जो समग्र रूप में कवि प्रतिभा की विकासोन्मुखता का परिचायक है । बौद्धिक पक्ष 'पदावली' के बौद्धिक पक्ष पर विचार करने के लिये हमें सर्वप्रथम यह देखना होगा कि मीरां किस धर्म-सम्प्रदाय व दार्शनिक मत की अनुयायिनी थीं। इस सम्बन्ध में कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलता । उनके गीतों में विभिन्न धर्म-संप्रदायों एवं दर्शनों का प्रभाव मिश्रित रूप में दृष्टिगोचर होता है, अतः उन्हें किसी एक के. संप्रदाय से सम्बद्ध करना उचित प्रतीत नहीं होता। उनके माता-पिता सगुण उपासक थे तथा इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि मीरां बाल्यकाल में ही कृष्ण की मूर्ति की पूजा करने लग गई थीं- इससे वे सगुण की आराधिका सिद्ध होती हैं । उनके पदों में प्रायः कृष्ण के प्रति हो श्रात्म-निवेदन किया गया है, इससे भी वे कृष्णभक्तों की परंपरा में आती हैं । किन्तु कृष्ण भक्त मान लेने पर भी एक प्रश्न यह उठता है कि वे कृष्ण-भक्ति से सम्बद्ध किस संप्रदाय की अनुयायिनी थीं ? कुछ विद्वान् उन्हें वल्लभ-संप्रदाय से सम्बद्ध कराना चाहते हैं किन्तु यह ठीक नहीं है। अवश्य ही वल्लभ-सम्प्रदाय से मीरां का थोड़ा संपर्क रहा था, किन्तु उन्होंने इसकी दीक्षा ग्रहण नहीं की थी । वार्ता के अनुसार वल्लभ - संप्रदाय के प्रतिनिधि गोबिन्द दुवे मीरां के यहाँ गये थे किन्तु वे मीरा से प्रसन्न होकर लौट आये थे तथा मोरां की दी हुई भेंट को स्वीकार करते हुए कहा था- 'तू तो श्री आचार्य की महाप्रभून नहीं होत ताते तेरी भेंट हाथ से छूवेगी नहो ।' एक अन्य उल्लेख के अनुसार मीरां स्वयं भी वृन्दावन आई थीं किन्तु वे यहाँ नहीं ठहीं। इन सब बातों से यही सिद्ध होता है कि वल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों ने मीरां को अपने मत की दीक्षा देने का प्रयास किया था किन्तु इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। स्वयं मीरां की पदावली में गुरु के रूप में सन्त रैदास का स्मरण बार-बार श्रद्धापूर्वक किया है, यथा - मिलिया रैदास जी, दोन्हीं ग्यान की गुटकी । लगी निज नाम हरि की, म्हारे हिवड़े खटकी ॥१ दूसरी ओर सन्त रैदास की उपलब्ध जीवनियों में भी उनकी शिष्याओं में "चित्तौड़ की झाली रानी" का उल्लेख मिलता है - यद्यपि यह "झालो रानी" स्वयं मीरां का विशेषरण नहीं माना जाता-पर सम्भव है कि यह मीरां की माता, चाची 'मीरां की पदावली' (परशुराम चतुर्वेदी) - पदसंख्या - २४, २६,१६६ ।
मोरांबाई को पदावली शैली के उपर्युक्त भेदों के साथ-साथ छंद - वैविध्य की दृष्टि से भी मीरों का काव्य संपन्न है । जैसा कि श्री परशुराम चतुर्वेदी ने 'मीराँ की पदावली' की भूमिका में स्पष्ट किया है, मीराँ ने सार, सरसी, विष्णुपद, दोहा शोभन, ताटंक, कुण्डल, चान्द्रयण, आदि छंदों का प्रयोग किया है। उनकी भाषा मुख्यतः राजस्थानी है किन्तु उनके कतिपय पद गुजराती एवं ब्रज भाषा में भी मिलते हैं । राजस्थानी से अनभिज्ञ संपादकों ने मीरों की भाषा को तोड़-मरोड़ दिया है, पर इसके लिए मीरों को दोष नहीं दिया जा सकता । इस प्रकार 'मीरों की पदावली' के विभिन्न पक्षों पर विचार कर लेने के अनन्तर हम निष्कर्ष रूप में कह सकते हैं कि भारतीय - गीति परम्परा में 'मीरां क - में पदावली' एक विशिष्ट स्थिति की सूचक है - वह विशिष्ट स्थिति है जबकि एक नारी-हृदय से प्ररणय-वेदना के दिव्य उद्गार सहज स्वाभाविक रूप में फूट पड़े । पुरुष के ओजस्वी स्वर भी गीति के क्षेत्र में जाकर कोमल कान्त पदावली में परिणत हो जाते हैं, फिर नारी के विरह-व्यथित करुण स्वरों की कोमलता का तो कहना ही क्या । हिन्दी की काव्य-परम्परा में मीरों के स्वरों का उद्घोष एक सर्वथा नूतन घटना का द्योतक है जबकि एक विद्रोहिणी नारी कुल, परिवार, समाज और देश की कृत्रिम दीवारों और मिथ्या-विश्वासों के बंधनों को तोड़ती हुई अपने पवित्र लक्ष्य दिव्य - प्रेम की घोषणा डंके की चोट, पुकार पुकार कर करती है : भक्ति काव्य के क्षेत्र में मीराँ सगुण और नि ु रंग, भक्ति और रहस्यवाद, श्रद्धा और प्रेम के अन्तर की खाइयों को पाटती हुई माधुर्य भाव के उज्ज्वल मधुर क्षेत्र का अनुसंधान करती हैं । त्रे संतों और भक्तों की साधना का सर्वत्र ग्रहण करती हुई भी किसी भी संप्रदाय की सीमाओं में बँधना अस्वीकार कर देती हैं। उन्हें न राणा के द्वारा भेजे गये विष के प्यालों को परवाह है, न पुष्टिसंप्रदाय के अर्थ-संग्राहक द्वारा ठुकराई गई भेंट की चिन्ता और न ही वे समाज की फब्तियों और निन्दकों की उक्तियों से त्रस्त होती हैं : वे तो केवल अपने साँवरिया के ध्यान में उसके सम्मुख नृत्य करने में और उसे अपने रागिनी सुनाने में लीन हैं, तन्मय हैं : वे कविता नहीं लिखतीं, पद नहीं जोड़ती और छंदों को नहीं गिनतीं; यह सब कुछ तो स्वतः ही हो जाता है जिस प्रकार वायु अथाह कम्पनों से वन-वीथिका के वंश-समूह स्वतः ही निनादित हो उठते हैं, कुछ उसी प्रकार प्रणयानुभूतियों से द्रवित, विरहानुभूतियों से उच्छ्वसित एवं आनन्दानुभूतियों से तरंगित होकर उनके स्वर विभिन्न राग-रागिनियों में फूट पड़े हैं जिन्हें हम लोग कविता, पद या गोति की संज्ञा देते हैं । प्रस्तु, मोरों की इन सहज स्वाभाविक दिव्य अनुभूतियों के साथ किसी से क्या तुलना ? मीराबाई की पदावली एवं कृत्रिमताओं से मुक्त है । वस्तुतः मीरां को काव्यानुभूति, परम्परा युग एवं व्यक्तित्व सुन्दर सम्मिश्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है । वह परम्परा का एक नया मोड़, युग का एक व्यापक बोध एवं व्यक्तित्व की एक नूतन सहजता का श्रादर्श प्रस्तुत करता है जो समग्र रूप में कवि प्रतिभा की विकासोन्मुखता का परिचायक है । बौद्धिक पक्ष 'पदावली' के बौद्धिक पक्ष पर विचार करने के लिये हमें सर्वप्रथम यह देखना होगा कि मीरां किस धर्म-सम्प्रदाय व दार्शनिक मत की अनुयायिनी थीं। इस सम्बन्ध में कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलता । उनके गीतों में विभिन्न धर्म-संप्रदायों एवं दर्शनों का प्रभाव मिश्रित रूप में दृष्टिगोचर होता है, अतः उन्हें किसी एक के. संप्रदाय से सम्बद्ध करना उचित प्रतीत नहीं होता। उनके माता-पिता सगुण उपासक थे तथा इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि मीरां बाल्यकाल में ही कृष्ण की मूर्ति की पूजा करने लग गई थीं- इससे वे सगुण की आराधिका सिद्ध होती हैं । उनके पदों में प्रायः कृष्ण के प्रति हो श्रात्म-निवेदन किया गया है, इससे भी वे कृष्णभक्तों की परंपरा में आती हैं । किन्तु कृष्ण भक्त मान लेने पर भी एक प्रश्न यह उठता है कि वे कृष्ण-भक्ति से सम्बद्ध किस संप्रदाय की अनुयायिनी थीं ? कुछ विद्वान् उन्हें वल्लभ-संप्रदाय से सम्बद्ध कराना चाहते हैं किन्तु यह ठीक नहीं है। अवश्य ही वल्लभ-सम्प्रदाय से मीरां का थोड़ा संपर्क रहा था, किन्तु उन्होंने इसकी दीक्षा ग्रहण नहीं की थी । वार्ता के अनुसार वल्लभ - संप्रदाय के प्रतिनिधि गोबिन्द दुवे मीरां के यहाँ गये थे किन्तु वे मीरा से प्रसन्न होकर लौट आये थे तथा मोरां की दी हुई भेंट को स्वीकार करते हुए कहा था- 'तू तो श्री आचार्य की महाप्रभून नहीं होत ताते तेरी भेंट हाथ से छूवेगी नहो ।' एक अन्य उल्लेख के अनुसार मीरां स्वयं भी वृन्दावन आई थीं किन्तु वे यहाँ नहीं ठहीं। इन सब बातों से यही सिद्ध होता है कि वल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों ने मीरां को अपने मत की दीक्षा देने का प्रयास किया था किन्तु इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। स्वयं मीरां की पदावली में गुरु के रूप में सन्त रैदास का स्मरण बार-बार श्रद्धापूर्वक किया है, यथा - मिलिया रैदास जी, दोन्हीं ग्यान की गुटकी । लगी निज नाम हरि की, म्हारे हिवड़े खटकी ॥एक दूसरी ओर सन्त रैदास की उपलब्ध जीवनियों में भी उनकी शिष्याओं में "चित्तौड़ की झाली रानी" का उल्लेख मिलता है - यद्यपि यह "झालो रानी" स्वयं मीरां का विशेषरण नहीं माना जाता-पर सम्भव है कि यह मीरां की माता, चाची 'मीरां की पदावली' - पदसंख्या - चौबीस, छब्बीस,एक सौ छयासठ ।
Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Spoiler 18 April: टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में धांसू ट्विस्ट आएगा। अभिनव खुद अबीर के पिता होने का हक अभिमन्यु को देने की बात करेगा, जिससे अक्षरा हैरान रह जाएगी। Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Written Update: स्टार प्लस का शानदार टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है दर्शकों के दिलों पर छाया हुआ है। बीते दिनों इस सीरियल की कहानी को फैंस ने बोर होने लगे थे। लेकिन जैसे ही अक्षरा और अभिमन्यु आमने-सामने आए, तो फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ गई। प्रणाली राठौड़ (Pranali Rathod) और हर्षद चोपड़ा (Harshad Chopda) स्टारर इस सीरियल के दर्शक अक्षरा और अभिमन्यु को एक होता देखना चाहते हैं। हालांकि, कहानी अबीर की इर्द-गिर्द घूम रही है। अक्षरा अपने बेटे अबीर को लेकर यूएस जाने का फैसला ले चुकी है और इस वजह से अभिमन्यु भी परेशान है। अब अपकमिंग एपिसोड में इस वजह से गोयनका हाउस में तमाशा होगा। ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के अपकमिंग एपिसोड की शुरुआत बिरला हाउस से होगी, जहां पर आरोही सबको बताएगी कि अक्षरा ने अबीर को यूएस ले जाने का फैसला लिया है। लेकिन यहां पर आरू अपना झूठ जारी रखेगी और बताएगी कि उसे नहीं पता कि अक्षु ने ऐसा फैसला क्यों लिया है। इस वजह से सब भड़क जाएंगे। दूसरी तरफ गोयनका हाउस में भी बडे़ पापा अक्षरा के फैसले से नाराज होंगे। वह उसे बताएंगे कि उसने अभिमन्यु की बात न मानकर गलत फैसला लिया है। इस वजह से अक्षरा इमोशनल हो जाती है और हाथ जोड़कर रोने लगती है। हालांकि, घर के बाकी लोग अक्षरा का साथ देते हैं। कहानी में आगे देखने के लिए मिलेगा कि अबीर की जाने की खबर से ही अभिमन्यु काफी परेशान हो जाता है। वह अपने आप को रोने से रोक नहीं पाता और बार-बार माफी मांगता है। क्योंकि अबीर को ठीक नहीं कर पाया। यह सब कुछ आरोही देख रही होती है। लेकिन वह कुछ नहीं करती। दूसरी तरफ अक्षरा भी अबीर को पता देती है कि वह लोग यूएस जा रहे हैं। इस दौरान अबीर डॉक मैन यानी अभिमन्यु के बारे में पूछता है तो अक्षु कहती है कि उन्होंने भी जाने की परमीशन दे दी है। ये रिश्ता क्या कहलाता है में आगे देखने के लिए मिलेगा कि मिमी घर में अबीर के लिए महापूजा रखने की बात करती है और वह इस बारे में अभिनव-अक्षरा को बताती है। मिमी कहती है कि अबीर के नाम की पूजा उसके पिता को ही करनी है। वह अभिनव के हाथ में एक धागा भी देती है, जो अबीर के पिता उसके हाथ में बांधेंगे। यह बात सुनकर अभिनव थोड़ा परेशान हो जाता है और अभिमन्यु से यह सब करवाने की बात करता है। इतना ही नहीं, जैसे ही पूजा का समय आता है तो अभिनव अभिमन्यु को लेने घर पहुंच जाता है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Spoiler अट्ठारह अप्रैलil: टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में धांसू ट्विस्ट आएगा। अभिनव खुद अबीर के पिता होने का हक अभिमन्यु को देने की बात करेगा, जिससे अक्षरा हैरान रह जाएगी। Yeh Rishta Kya Kehlata Hai Written Update: स्टार प्लस का शानदार टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है दर्शकों के दिलों पर छाया हुआ है। बीते दिनों इस सीरियल की कहानी को फैंस ने बोर होने लगे थे। लेकिन जैसे ही अक्षरा और अभिमन्यु आमने-सामने आए, तो फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ गई। प्रणाली राठौड़ और हर्षद चोपड़ा स्टारर इस सीरियल के दर्शक अक्षरा और अभिमन्यु को एक होता देखना चाहते हैं। हालांकि, कहानी अबीर की इर्द-गिर्द घूम रही है। अक्षरा अपने बेटे अबीर को लेकर यूएस जाने का फैसला ले चुकी है और इस वजह से अभिमन्यु भी परेशान है। अब अपकमिंग एपिसोड में इस वजह से गोयनका हाउस में तमाशा होगा। ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड की शुरुआत बिरला हाउस से होगी, जहां पर आरोही सबको बताएगी कि अक्षरा ने अबीर को यूएस ले जाने का फैसला लिया है। लेकिन यहां पर आरू अपना झूठ जारी रखेगी और बताएगी कि उसे नहीं पता कि अक्षु ने ऐसा फैसला क्यों लिया है। इस वजह से सब भड़क जाएंगे। दूसरी तरफ गोयनका हाउस में भी बडे़ पापा अक्षरा के फैसले से नाराज होंगे। वह उसे बताएंगे कि उसने अभिमन्यु की बात न मानकर गलत फैसला लिया है। इस वजह से अक्षरा इमोशनल हो जाती है और हाथ जोड़कर रोने लगती है। हालांकि, घर के बाकी लोग अक्षरा का साथ देते हैं। कहानी में आगे देखने के लिए मिलेगा कि अबीर की जाने की खबर से ही अभिमन्यु काफी परेशान हो जाता है। वह अपने आप को रोने से रोक नहीं पाता और बार-बार माफी मांगता है। क्योंकि अबीर को ठीक नहीं कर पाया। यह सब कुछ आरोही देख रही होती है। लेकिन वह कुछ नहीं करती। दूसरी तरफ अक्षरा भी अबीर को पता देती है कि वह लोग यूएस जा रहे हैं। इस दौरान अबीर डॉक मैन यानी अभिमन्यु के बारे में पूछता है तो अक्षु कहती है कि उन्होंने भी जाने की परमीशन दे दी है। ये रिश्ता क्या कहलाता है में आगे देखने के लिए मिलेगा कि मिमी घर में अबीर के लिए महापूजा रखने की बात करती है और वह इस बारे में अभिनव-अक्षरा को बताती है। मिमी कहती है कि अबीर के नाम की पूजा उसके पिता को ही करनी है। वह अभिनव के हाथ में एक धागा भी देती है, जो अबीर के पिता उसके हाथ में बांधेंगे। यह बात सुनकर अभिनव थोड़ा परेशान हो जाता है और अभिमन्यु से यह सब करवाने की बात करता है। इतना ही नहीं, जैसे ही पूजा का समय आता है तो अभिनव अभिमन्यु को लेने घर पहुंच जाता है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
यूपी के एटा जिले में मामूली सी बात पर थानाध्यक्ष का पारा इतना चढ़ा कि उन्होंने लोहे की रॉड से अपनी पत्नी की पिटाई कर डाली। जिसके बाद पीड़िता स्वयं ही इलाज करवाने के लिए एटा मेडिकल कॉलेज पहुंची है। पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान हैं। एटाः उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले में तैनात एक थानाध्यक्ष ने शनिवार की रात अपनी पत्नी की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस दौरान पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान भी बन गए हैं। पिटाई से गायल पत्नी को इलाज के लिए एटा मेडिकल कॉलेज लेकर आया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता ने थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुद के साथ होने वाली घरेलू हिंसा की जानकारी दी। पीड़िता का कहना है कि शादी के पांच दिनों बाद से ही उसका पति उसकी पिटाई करता चला आ रहा है। जिससे वह काफी परेशान हो गई है। मेडिकल कॉलेज में पीड़िता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बीते शनिवार की रात को उनके पति आगरा से ड्यूटी कर घर वापस आए थे। इस दौरान खाने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ जाने पर नाराज थानाध्यक्ष ने लोहे की रॉड से पत्नी की बेरहमी से पिटाई कर डाली। पीड़िता ने बताया कि इस दौरान वह मदद के लिए भी काफी चीखी-चिल्लाई लेकिन उन्हें कोई बचाने नहीं आया। जिसके बाद वह खुद किसी तरह से एटा मेडिकल कॉलेज अपना इलाज करवाने पहुंची है। थानाध्यक्ष की पत्नी ने बताया कि शादी के पांच दिन के बाद ही उसके पति ने उसे प्रताड़ित करना और मारपीट करना शुरूकर दिया था। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति के किसी महिला कांस्टेबल से संबंध हैं। जिसके चलते भी उन दोनों के बीच में अक्सर विवाद होता है। वहीं पति के परिजनों को भी थानाध्यक्ष के महिला कांस्टेबल से संबंध होने की जानकारी है। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मामले को छिपाकर उनकी शादी करवा दी। उन्होंने बताया कि वह इस मामले की पहले भी उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं।
यूपी के एटा जिले में मामूली सी बात पर थानाध्यक्ष का पारा इतना चढ़ा कि उन्होंने लोहे की रॉड से अपनी पत्नी की पिटाई कर डाली। जिसके बाद पीड़िता स्वयं ही इलाज करवाने के लिए एटा मेडिकल कॉलेज पहुंची है। पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान हैं। एटाः उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले में तैनात एक थानाध्यक्ष ने शनिवार की रात अपनी पत्नी की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस दौरान पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान भी बन गए हैं। पिटाई से गायल पत्नी को इलाज के लिए एटा मेडिकल कॉलेज लेकर आया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता ने थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुद के साथ होने वाली घरेलू हिंसा की जानकारी दी। पीड़िता का कहना है कि शादी के पांच दिनों बाद से ही उसका पति उसकी पिटाई करता चला आ रहा है। जिससे वह काफी परेशान हो गई है। मेडिकल कॉलेज में पीड़िता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बीते शनिवार की रात को उनके पति आगरा से ड्यूटी कर घर वापस आए थे। इस दौरान खाने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ जाने पर नाराज थानाध्यक्ष ने लोहे की रॉड से पत्नी की बेरहमी से पिटाई कर डाली। पीड़िता ने बताया कि इस दौरान वह मदद के लिए भी काफी चीखी-चिल्लाई लेकिन उन्हें कोई बचाने नहीं आया। जिसके बाद वह खुद किसी तरह से एटा मेडिकल कॉलेज अपना इलाज करवाने पहुंची है। थानाध्यक्ष की पत्नी ने बताया कि शादी के पांच दिन के बाद ही उसके पति ने उसे प्रताड़ित करना और मारपीट करना शुरूकर दिया था। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति के किसी महिला कांस्टेबल से संबंध हैं। जिसके चलते भी उन दोनों के बीच में अक्सर विवाद होता है। वहीं पति के परिजनों को भी थानाध्यक्ष के महिला कांस्टेबल से संबंध होने की जानकारी है। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मामले को छिपाकर उनकी शादी करवा दी। उन्होंने बताया कि वह इस मामले की पहले भी उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं।
रेलवे स्टेडियम में 11 जून 2019 को 'हरियाणवी नाइट' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच जमकर हंगामे के साथ मारपीट हुई थी। मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी के खिलाफ दर्ज परिवाद में कोर्ट ने आयोजकों की सूची तलब की है। वादी के बयान दर्ज करने के बाद कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख दी है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित रेलवे स्टेडियम में 11 जून 2019 को 'हरियाणवी नाइट' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच जमकर हंगामे के साथ मारपीट हुई थी। हंगामे के चलते कार्यक्रम को बीच में ही प्रशासन को बंद कराना पड़ा था। वहीं बेकाबू पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठियां पटककर भगाया गया था। इस कार्यक्रम अधिवक्ता सचिन कश्यप ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। जिसकी सुनवाई एसीजेएम पांच दानवीर सिंह की कोर्ट में चल रही है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वादी के बयान दर्ज होने के बाद आयोजकों की सूची मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख दी है। भूमि से अवैध कब्जा हटवाने को मुख्यमंत्री को भेजा पत्र : रामपुर के बिलापुर में गांव महुनागर के ग्रामीणों ने दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर धार्मिक स्थल की भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और पुलिस से शिकायत की है। शिकायती पत्र के अनुसार गांव में होलिका दहन और धार्मिक स्थल की भूमि खाली पड़ी हुई थी। समुदाय के लोग द्वारा धार्मिक स्थल पर होने वाले कार्यक्रमों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भूमि पर दूसरे समुदाय के गांव के कुछ दबंग लोगों ने अपना कब्जा कर लिया है। दबंगई दिखाते हुए अवैध निर्माण तक करवाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों समुदायों के लोगों में तनातनी का माहौल है। समुदाय के लोगों ने जब भूमि से कब्ज़ा हटाने का अनुरोध किया तो कब्जाधारी मारपीट पर उतारू हो गए।
रेलवे स्टेडियम में ग्यारह जून दो हज़ार उन्नीस को 'हरियाणवी नाइट' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच जमकर हंगामे के साथ मारपीट हुई थी। मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी के खिलाफ दर्ज परिवाद में कोर्ट ने आयोजकों की सूची तलब की है। वादी के बयान दर्ज करने के बाद कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए अट्ठाईस जनवरी की तारीख दी है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित रेलवे स्टेडियम में ग्यारह जून दो हज़ार उन्नीस को 'हरियाणवी नाइट' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें हरियाणा की लोक गायिका व डांसर सपना चौधरी ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच जमकर हंगामे के साथ मारपीट हुई थी। हंगामे के चलते कार्यक्रम को बीच में ही प्रशासन को बंद कराना पड़ा था। वहीं बेकाबू पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठियां पटककर भगाया गया था। इस कार्यक्रम अधिवक्ता सचिन कश्यप ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। जिसकी सुनवाई एसीजेएम पांच दानवीर सिंह की कोर्ट में चल रही है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वादी के बयान दर्ज होने के बाद आयोजकों की सूची मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए अट्ठाईस जनवरी की तारीख दी है। भूमि से अवैध कब्जा हटवाने को मुख्यमंत्री को भेजा पत्र : रामपुर के बिलापुर में गांव महुनागर के ग्रामीणों ने दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर धार्मिक स्थल की भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और पुलिस से शिकायत की है। शिकायती पत्र के अनुसार गांव में होलिका दहन और धार्मिक स्थल की भूमि खाली पड़ी हुई थी। समुदाय के लोग द्वारा धार्मिक स्थल पर होने वाले कार्यक्रमों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भूमि पर दूसरे समुदाय के गांव के कुछ दबंग लोगों ने अपना कब्जा कर लिया है। दबंगई दिखाते हुए अवैध निर्माण तक करवाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों समुदायों के लोगों में तनातनी का माहौल है। समुदाय के लोगों ने जब भूमि से कब्ज़ा हटाने का अनुरोध किया तो कब्जाधारी मारपीट पर उतारू हो गए।
सम्मामिच्छत्त-सम्मत्ताणि खवेमाणस्स अंतोमुहुत्तकालं छावद्विअभंतरे पयदसंकमो ण लब्भइ तेणेत्थ पुच्चमुवसमसम्मत्तं घेत्तूण द्विदस्स अंतोमुहुत्तकालमाणेदूण ट्ठविदे सादिरेयछावसिागरोवममेत्तो पयदसंकमस्स कालो लद्धो, ऊणकालादो अहियकालस्स संखेज - गुणत्तुवलंभादो । कधमेदं परिच्छिजदे ? सम्मामिच्छत्त-सम्मत्तक्खवणद्वादो उवसमसम्मत्तकालो बहुओ त्ति पुग्दो भण्णमाणप्पाबहुआदो । तं जहा - 'दसण मोहक्खवयस्स सयलअणियट्टिअद्धादो तस्सेव अपुच्वकरणद्धा संखेजगुणा, तत्तो अनंताणुबंधिविसंजोजयस्स अणियट्टिअद्धा संखेजगुणा, तस्सेव अपुञ्चकरणद्धा संखेजगुणा, तदो दसणमोहमुवसातयस्स अणियट्टिअद्धा संखेज्जगुणा, एदस्स चेय अपुव्वकरणद्धा संखेज्जगुणा, तेणेव अपुव्ब करणपढमसमयम्मि कदगुणसेढिणिक्खेवो विसेसाहिओ, तस्सुवरि उवसमसम्मत्तद्धा संखेज्जगुणा' त्ति । लिये उद्यत हुआ ऐसा जो जीव मिथ्यात्वकी क्षपणा करता हुआ उसका उदयाचलिमें प्रवेश कराके सम्यग्मिथ्यात्व और सम्यक्त्वकी क्षपरणा कर रहा है उसके छयासठ सागर में एक अन्तर्मुहूर्त कालतक प्रकृत संक्रम नहीं प्राप्त होता, इसलिये वेदकसम्यक्त्वके प्राप्त होनेके पूर्व में जो मुहूर्तउपशम सम्यक्त्वका काल है उसे लाकर इस वेदकसम्यक्त्व के काल में मिलाने पर साधिक छयासठ सागर प्रमाण प्रकृत संक्रमका काल प्राप्त होता है, क्यों कि यहाँ पर छयासठ सागरमेंसे जितना काल घटाया गया है उससे उपशम सम्यक्त्वका जोड़ा गया काल संख्यातगुरणा है । शंका - यह कैसे जाना जाता है ? समाधान- -सम्यग्मिथ्यात्व और सम्यक्त्वके क्षपरणा कालसे उपशमसम्यक्त्वका काल बहुत है यह अल्पबहुत्व आगे कहनेवाले हैं, इससे जाना जाता है कि यहाँ जितना काल घटाया गया है उससे, जो उपशमसम्यक्त्वका काल जोड़ा गया है, वह संख्यातगुणा है। यथा - 'दर्शनमोहनीयकी क्षपणा करनेवाले जीव अनिवृत्तिकरणके पूरे कालसे उसीके अपूर्वकरणका काल संख्यातगुणा है। उससे अनन्तानुबन्धीकी विसंयोजना करनेवाले जीवके अनिवृत्तिकरणका काल संख्यातगुरणा है। उससे इसी विसंयोजक जीवके अपूर्वकरणका काल संख्यातगुणा है। उससे दर्शन मोहनीयकी उपशमना करनेवाले जीवके अनिवृत्तिकरणका काल संख्यातगुग्ण है। उससे इसीके पूर्वकाल संख्यातगुणा है। उससे इसके पूर्वकरके प्रथम समय में की गई गुणश्रेणिका निक्षेप विशेष अधिक है। उससे उपशमसम्यक्त्वका काल संख्यातगुणा है। इससे जाना जाता है कि वेदकसम्यक्त्व के उत्कृष्ट कालमें से जो काल कम किया गया है उससे वेदकसम्यक्त्वके प्राप्त होनेके पूर्व प्राप्त हुआ उपशमसम्यक्त्वका काल संख्यातगुरणा है। विशेषार्थ - - यहां मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य और उत्कृष्ट काल बतलाया है । यह तो पहले ही बतला आये हैं कि मिथ्यात्वका संक्रम सम्यग्दृष्टिके ही होता है, इसलिये सम्यक्त्वका जो सबसे जघन्य काल है वह यहां मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य काल जानना चाहिये । यतः सम्यक्त्वका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त बतलाया है अतः मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य काल अ तर्मुहूर्त प्राप्त होता है। अब रही उत्कृष्ट कालकी बात सो यद्यपि सामान्यसे सम्यक्त्वका उत्कृष्ट काल साधिक चार पूर्वकोटि अधिक छयासठ सागर है। पर इसमें क्षायिकसम्यग्दर्शनका काल भी सम्मिलित है अतः इसे छोड़कर केवल वेदकसम्यक्त्वका कुछ कम उत्कृष्ट काल और उपशमसम्यक्त्व
सम्मामिच्छत्त-सम्मत्ताणि खवेमाणस्स अंतोमुहुत्तकालं छावद्विअभंतरे पयदसंकमो ण लब्भइ तेणेत्थ पुच्चमुवसमसम्मत्तं घेत्तूण द्विदस्स अंतोमुहुत्तकालमाणेदूण ट्ठविदे सादिरेयछावसिागरोवममेत्तो पयदसंकमस्स कालो लद्धो, ऊणकालादो अहियकालस्स संखेज - गुणत्तुवलंभादो । कधमेदं परिच्छिजदे ? सम्मामिच्छत्त-सम्मत्तक्खवणद्वादो उवसमसम्मत्तकालो बहुओ त्ति पुग्दो भण्णमाणप्पाबहुआदो । तं जहा - 'दसण मोहक्खवयस्स सयलअणियट्टिअद्धादो तस्सेव अपुच्वकरणद्धा संखेजगुणा, तत्तो अनंताणुबंधिविसंजोजयस्स अणियट्टिअद्धा संखेजगुणा, तस्सेव अपुञ्चकरणद्धा संखेजगुणा, तदो दसणमोहमुवसातयस्स अणियट्टिअद्धा संखेज्जगुणा, एदस्स चेय अपुव्वकरणद्धा संखेज्जगुणा, तेणेव अपुव्ब करणपढमसमयम्मि कदगुणसेढिणिक्खेवो विसेसाहिओ, तस्सुवरि उवसमसम्मत्तद्धा संखेज्जगुणा' त्ति । लिये उद्यत हुआ ऐसा जो जीव मिथ्यात्वकी क्षपणा करता हुआ उसका उदयाचलिमें प्रवेश कराके सम्यग्मिथ्यात्व और सम्यक्त्वकी क्षपरणा कर रहा है उसके छयासठ सागर में एक अन्तर्मुहूर्त कालतक प्रकृत संक्रम नहीं प्राप्त होता, इसलिये वेदकसम्यक्त्वके प्राप्त होनेके पूर्व में जो मुहूर्तउपशम सम्यक्त्वका काल है उसे लाकर इस वेदकसम्यक्त्व के काल में मिलाने पर साधिक छयासठ सागर प्रमाण प्रकृत संक्रमका काल प्राप्त होता है, क्यों कि यहाँ पर छयासठ सागरमेंसे जितना काल घटाया गया है उससे उपशम सम्यक्त्वका जोड़ा गया काल संख्यातगुरणा है । शंका - यह कैसे जाना जाता है ? समाधान- -सम्यग्मिथ्यात्व और सम्यक्त्वके क्षपरणा कालसे उपशमसम्यक्त्वका काल बहुत है यह अल्पबहुत्व आगे कहनेवाले हैं, इससे जाना जाता है कि यहाँ जितना काल घटाया गया है उससे, जो उपशमसम्यक्त्वका काल जोड़ा गया है, वह संख्यातगुणा है। यथा - 'दर्शनमोहनीयकी क्षपणा करनेवाले जीव अनिवृत्तिकरणके पूरे कालसे उसीके अपूर्वकरणका काल संख्यातगुणा है। उससे अनन्तानुबन्धीकी विसंयोजना करनेवाले जीवके अनिवृत्तिकरणका काल संख्यातगुरणा है। उससे इसी विसंयोजक जीवके अपूर्वकरणका काल संख्यातगुणा है। उससे दर्शन मोहनीयकी उपशमना करनेवाले जीवके अनिवृत्तिकरणका काल संख्यातगुग्ण है। उससे इसीके पूर्वकाल संख्यातगुणा है। उससे इसके पूर्वकरके प्रथम समय में की गई गुणश्रेणिका निक्षेप विशेष अधिक है। उससे उपशमसम्यक्त्वका काल संख्यातगुणा है। इससे जाना जाता है कि वेदकसम्यक्त्व के उत्कृष्ट कालमें से जो काल कम किया गया है उससे वेदकसम्यक्त्वके प्राप्त होनेके पूर्व प्राप्त हुआ उपशमसम्यक्त्वका काल संख्यातगुरणा है। विशेषार्थ - - यहां मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य और उत्कृष्ट काल बतलाया है । यह तो पहले ही बतला आये हैं कि मिथ्यात्वका संक्रम सम्यग्दृष्टिके ही होता है, इसलिये सम्यक्त्वका जो सबसे जघन्य काल है वह यहां मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य काल जानना चाहिये । यतः सम्यक्त्वका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त बतलाया है अतः मिथ्यात्व के संक्रमका जघन्य काल अ तर्मुहूर्त प्राप्त होता है। अब रही उत्कृष्ट कालकी बात सो यद्यपि सामान्यसे सम्यक्त्वका उत्कृष्ट काल साधिक चार पूर्वकोटि अधिक छयासठ सागर है। पर इसमें क्षायिकसम्यग्दर्शनका काल भी सम्मिलित है अतः इसे छोड़कर केवल वेदकसम्यक्त्वका कुछ कम उत्कृष्ट काल और उपशमसम्यक्त्व
इस साल यानी 2019 कई सितारों के लिए खुशियां लेकर आया। इस साल कई सेलिब्रिटीज ने अपनी नई लाइफ की शुरूआत की। चलिए, आपको बताते है कि इस साल कौन-कौन शादी के बंधन में बंधा और किसके सिर सेहरा सज़ा. . शादियों का सीजन चल रहा है। हर तरफ शहनाई और ढोल नगाड़ो की आवाजें आपको आसानी से सुनने को मिल जाएंगी। सभी की कोशिश ये है कि उनकी शादी बॉलीवुड सितारों की शादियों की तरह हो। चलिए इस मौके पर जानते है कि इस साल कौनसे सेलिब्रिटी शादी के बंधन में बंधे। किसके घर धूम-धड़ाका हुआ. ,. गाने-बाजे बजे. . . इस सेलिब्रेटी में साउथ इंड्रस्टी से लेकर टीवी सितारें भी शामिल है। प्रतीक बब्बर और सान्या सागर (Prateik Babbar Sanya Sagar) बॉलीवुड एक्टर प्रतीक बब्बर ने 23 जनवरी को सान्या सागर के साथ शादी रचाई। प्रतीक बब्बर की शादी महाराष्ट्रियन रीति रिवाजों में हुई। प्रतीक राज बब्बर की दूसरी पत्नी स्मिता पाटिल के बेटे है। वहीं सान्या सागर राजनीति परिवार से है। उनके पिता पवन सागर बीएसपी लीडर है। प्रतीक और सान्या बचपन के दोस्त है। धीरे-धीरे दोनों ने डेट करना शुरू किया और प्यार परवान चढ़ गया। जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली। आरती छाबड़िया और विशारद बीडेसी (Aarti Chabria Visharad Beedassy) अक्षय कुमार की फिल्म 'आवारा पागल दीवाना' की एक्ट्रेस आरती छाबड़िया ने 24 जून को विशारद बीदासेसी के साथ सात फेरे लिए। उन्होंने अपनी शादी गुपचुप तरीके से की। किसी भी बड़े सितारों को शादी में इन्वाइट नहीं किया गया। शादी की फोटो सामने आने पर इस बात का खुलासा हुआ। विशारद ऑस्ट्रेलिया में टैक्स कंसल्टंट की जॉब करते है। दोनों ने 11 मार्च को सगाई और 24 जून को शादी की। रोहित पुरोहित और शीना बजाज (Rohit Purohit Sheena Bajaj) टीवी एक्टर रोहित पुरोहित ने 22 जनवरी को शीना बजाज के साथ सात फेरे लेकर शादी का लड्डू खाया। दोनों की शादी जयपुर में संपन्न हुई। दोनों 6 साल तक एक दूसरे को डेट कर रहे थे। जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। दोनों का प्री वेडिंग शूट भी काफी वायरल हुआ। शीना 24 साल की है जबकि रोहित 29 साल के है। उम्र के इस फासले को लेकर जब लोगों ने सवाल उठाएं, तो रोहित ने उनके इन सवालों का जवाब देते हुए कहा 'प्यार में उम्र मायने नहीं रखती. . . मायने ये रखता है कि आप पार्टनर से कितना प्यार करते हो और उसे कितना समझते हो' नुसरत जहां और निखिल जैन (Nusrat Jahan Nikhil Jain) साउथ की मशहूर एक्ट्रेसल और पश्चिम बंगाल के बशीरघाट से टीएमसी सांसद नुसरत जहां ने 19 जून को निखिल जैन से शादी की। ये शादी तुर्की में हिंदू रीती रिवाज से सात फेरे लेकर संपन्न हुई। निखिल जैन कोलकाता के बड़े बिजनेसमैन की लिस्ट में शुमार है। शादी में नुसरक ने फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया गया लंहगा पहना था. . वहीं निखिल ने शेरवानी पहनीं हुई थी। दोनों की लव स्टोरी एक साड़ी शोरूम से शुरू हुई थी। ये साड़ी शोरूम निखिल का था, इसके लिए उन्हें एक मॉडल की जरूरत थीं, जिसके बाद नुसरत को हायर किया गया। तब से दोनों की मुलाकातें होने लगी और फिर प्यार हो गया। शरद मल्होत्रा और रिप्सी भाटिया (Sharad Malhotra Ripci Bhatia) टीवी एक्टर शरद मल्होत्रा ने 20 अप्रैल को अपनी गर्लफ्रेंड रिप्सी भाटिया संग शादी रचाई। ये शादी सिख रीति रिवाजों से गुरुद्वारे में आनंद कारज की रस्म से संपन्न की गई। रिप्सी ने गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। इसके साथ ही गोल्डन ज्वैलरी कैरी की हुई थी। जबकि शरद मल्होत्रा ने सफेद शेरवानी के साथ गुलाबी रंग की पगड़ी पहने हुए थे। साथ ही हाथ में कृपाण पकड़े हुए हैं। शादी की फोटोज खूब वायरल हुई।
इस साल यानी दो हज़ार उन्नीस कई सितारों के लिए खुशियां लेकर आया। इस साल कई सेलिब्रिटीज ने अपनी नई लाइफ की शुरूआत की। चलिए, आपको बताते है कि इस साल कौन-कौन शादी के बंधन में बंधा और किसके सिर सेहरा सज़ा. . शादियों का सीजन चल रहा है। हर तरफ शहनाई और ढोल नगाड़ो की आवाजें आपको आसानी से सुनने को मिल जाएंगी। सभी की कोशिश ये है कि उनकी शादी बॉलीवुड सितारों की शादियों की तरह हो। चलिए इस मौके पर जानते है कि इस साल कौनसे सेलिब्रिटी शादी के बंधन में बंधे। किसके घर धूम-धड़ाका हुआ. ,. गाने-बाजे बजे. . . इस सेलिब्रेटी में साउथ इंड्रस्टी से लेकर टीवी सितारें भी शामिल है। प्रतीक बब्बर और सान्या सागर बॉलीवुड एक्टर प्रतीक बब्बर ने तेईस जनवरी को सान्या सागर के साथ शादी रचाई। प्रतीक बब्बर की शादी महाराष्ट्रियन रीति रिवाजों में हुई। प्रतीक राज बब्बर की दूसरी पत्नी स्मिता पाटिल के बेटे है। वहीं सान्या सागर राजनीति परिवार से है। उनके पिता पवन सागर बीएसपी लीडर है। प्रतीक और सान्या बचपन के दोस्त है। धीरे-धीरे दोनों ने डेट करना शुरू किया और प्यार परवान चढ़ गया। जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली। आरती छाबड़िया और विशारद बीडेसी अक्षय कुमार की फिल्म 'आवारा पागल दीवाना' की एक्ट्रेस आरती छाबड़िया ने चौबीस जून को विशारद बीदासेसी के साथ सात फेरे लिए। उन्होंने अपनी शादी गुपचुप तरीके से की। किसी भी बड़े सितारों को शादी में इन्वाइट नहीं किया गया। शादी की फोटो सामने आने पर इस बात का खुलासा हुआ। विशारद ऑस्ट्रेलिया में टैक्स कंसल्टंट की जॉब करते है। दोनों ने ग्यारह मार्च को सगाई और चौबीस जून को शादी की। रोहित पुरोहित और शीना बजाज टीवी एक्टर रोहित पुरोहित ने बाईस जनवरी को शीना बजाज के साथ सात फेरे लेकर शादी का लड्डू खाया। दोनों की शादी जयपुर में संपन्न हुई। दोनों छः साल तक एक दूसरे को डेट कर रहे थे। जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। दोनों का प्री वेडिंग शूट भी काफी वायरल हुआ। शीना चौबीस साल की है जबकि रोहित उनतीस साल के है। उम्र के इस फासले को लेकर जब लोगों ने सवाल उठाएं, तो रोहित ने उनके इन सवालों का जवाब देते हुए कहा 'प्यार में उम्र मायने नहीं रखती. . . मायने ये रखता है कि आप पार्टनर से कितना प्यार करते हो और उसे कितना समझते हो' नुसरत जहां और निखिल जैन साउथ की मशहूर एक्ट्रेसल और पश्चिम बंगाल के बशीरघाट से टीएमसी सांसद नुसरत जहां ने उन्नीस जून को निखिल जैन से शादी की। ये शादी तुर्की में हिंदू रीती रिवाज से सात फेरे लेकर संपन्न हुई। निखिल जैन कोलकाता के बड़े बिजनेसमैन की लिस्ट में शुमार है। शादी में नुसरक ने फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया गया लंहगा पहना था. . वहीं निखिल ने शेरवानी पहनीं हुई थी। दोनों की लव स्टोरी एक साड़ी शोरूम से शुरू हुई थी। ये साड़ी शोरूम निखिल का था, इसके लिए उन्हें एक मॉडल की जरूरत थीं, जिसके बाद नुसरत को हायर किया गया। तब से दोनों की मुलाकातें होने लगी और फिर प्यार हो गया। शरद मल्होत्रा और रिप्सी भाटिया टीवी एक्टर शरद मल्होत्रा ने बीस अप्रैल को अपनी गर्लफ्रेंड रिप्सी भाटिया संग शादी रचाई। ये शादी सिख रीति रिवाजों से गुरुद्वारे में आनंद कारज की रस्म से संपन्न की गई। रिप्सी ने गुलाबी रंग का लहंगा पहना हुआ था। इसके साथ ही गोल्डन ज्वैलरी कैरी की हुई थी। जबकि शरद मल्होत्रा ने सफेद शेरवानी के साथ गुलाबी रंग की पगड़ी पहने हुए थे। साथ ही हाथ में कृपाण पकड़े हुए हैं। शादी की फोटोज खूब वायरल हुई।
गर्भवती हैं तो जरूर रखें इन सात बातों का ख्याल.... . घर के बाहर उतारेंगे जूते चप्पल तो होंगे ये फायदे....... ऐसा फेस पैक जो आपकी खूबसूरती को लगा देंगे चार चाँद....... . पतली आईब्रो को 10 दिन में मोटा और घना बना देता है ये चमत्कारी तेल....... . बच्चे को सही ढंग से स्तनपान करवाने के टिप्स....... झुर्रियां हटाने में कैसे मदद करता है आलू का रस.... . इन ब्रशेज़ की मदद से मिनटों में पाएं परफेक्ट स्मोकी आईज.......
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक 'लव जिहाद' का मामला सामने आया है। यहाँ फ़िरोज़ नाम एक एक व्यक्ति पर अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की का निकाहनामा बनवाने के साथ रेप और ब्लैकमेल कर के पैसे ऐंठने का आरोप लगा है। इसी मामले में एक मौलवी द्वारा दिखाए गए जिन्न के डर की भी चर्चा हो रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला थाना बसंत विहार क्षेत्र का है। यहाँ पर काँवली इलाके में रहने वाली एक युवती ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वो कोरोना काल में पढ़ाई और कैरियर को ले कर डिप्रेशन में थी। उसके पड़ोस में फ़िरोज़ नाम का एक व्यक्ति रहता था, जो मूल रूप से सहारनपुर का निवासी है। फ़िरोज़ ने पीड़िता को बातचीत के दौरान विश्वास में ले लिया। पीड़िता ने फ़िरोज़ को अपनी समस्या बताई तो उसने एक मौलवी का परिचय दिया और अपने साथ पीड़िता को ले कर गया। आरोप है कि मौलवी ने पीड़िता पर जिन्न की सवारी होने का डर दिखाया। मौलवी ने पीड़िता को बताया कि अगर उसका निकाह जल्द नहीं हुआ तो जिन्न उसे मार डालेगा। इसी दौरान उसने लड़की को फ़िरोज़ से निकाह करने की सलाह भी दे डाली। पीड़िता को बताया गया कि केवल फर्जी निकाहनामा बनवाना है। जिन्न से डरी पीड़िता इस निकाहनामें के लिए तैयार हो गई। निकाहनामा तैयार करते समय कागजातों में 2 गवाह भी डाले गए। इसमें एक गवाह का नाम विकास और दूसरे का जुल्फिकार है। बताया जा रहा है कि यह निकाहनामा 27 अक्टूबर, 2020 को बनाया गया। अपनी शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि 26 जनवरी, 2021 को फिरोज ने उसे अपने कमरे पर बुलाया। इस दौरान फ़िरोज़ ने युवती के साथ रेप किया और उसका अश्लील वीडियो भी बना डाला। बाद में इसी वीडियो का डर दिखा कर आरोपित ने पीड़िता से 2 लाख 70 हजार रुपए ऐंठ लिए। फ़िरोज़ पर आरोप है कि उसने पैसे लेने के बाद भी निकाहनामे की कॉपी लड़की के पड़ोसियों को भेज दिया। इस से लड़की के परिवार की मोहल्ले में काफी बदनामी हुई। बाद में फ़िरोज़ निकाहनामा और अश्लील वीडियो छिपाने के नाम पर पीड़ित परिवार से 5 लाख रुपए की और माँग करने लगा। पुलिस के मुताबिक तहरीर के आधार पर फ़िरोज़ व उसके 2 साथी विकास और जुल्फिकार पर FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जाँच की जा रही है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक 'लव जिहाद' का मामला सामने आया है। यहाँ फ़िरोज़ नाम एक एक व्यक्ति पर अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की का निकाहनामा बनवाने के साथ रेप और ब्लैकमेल कर के पैसे ऐंठने का आरोप लगा है। इसी मामले में एक मौलवी द्वारा दिखाए गए जिन्न के डर की भी चर्चा हो रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला थाना बसंत विहार क्षेत्र का है। यहाँ पर काँवली इलाके में रहने वाली एक युवती ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वो कोरोना काल में पढ़ाई और कैरियर को ले कर डिप्रेशन में थी। उसके पड़ोस में फ़िरोज़ नाम का एक व्यक्ति रहता था, जो मूल रूप से सहारनपुर का निवासी है। फ़िरोज़ ने पीड़िता को बातचीत के दौरान विश्वास में ले लिया। पीड़िता ने फ़िरोज़ को अपनी समस्या बताई तो उसने एक मौलवी का परिचय दिया और अपने साथ पीड़िता को ले कर गया। आरोप है कि मौलवी ने पीड़िता पर जिन्न की सवारी होने का डर दिखाया। मौलवी ने पीड़िता को बताया कि अगर उसका निकाह जल्द नहीं हुआ तो जिन्न उसे मार डालेगा। इसी दौरान उसने लड़की को फ़िरोज़ से निकाह करने की सलाह भी दे डाली। पीड़िता को बताया गया कि केवल फर्जी निकाहनामा बनवाना है। जिन्न से डरी पीड़िता इस निकाहनामें के लिए तैयार हो गई। निकाहनामा तैयार करते समय कागजातों में दो गवाह भी डाले गए। इसमें एक गवाह का नाम विकास और दूसरे का जुल्फिकार है। बताया जा रहा है कि यह निकाहनामा सत्ताईस अक्टूबर, दो हज़ार बीस को बनाया गया। अपनी शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि छब्बीस जनवरी, दो हज़ार इक्कीस को फिरोज ने उसे अपने कमरे पर बुलाया। इस दौरान फ़िरोज़ ने युवती के साथ रेप किया और उसका अश्लील वीडियो भी बना डाला। बाद में इसी वीडियो का डर दिखा कर आरोपित ने पीड़िता से दो लाख सत्तर हजार रुपए ऐंठ लिए। फ़िरोज़ पर आरोप है कि उसने पैसे लेने के बाद भी निकाहनामे की कॉपी लड़की के पड़ोसियों को भेज दिया। इस से लड़की के परिवार की मोहल्ले में काफी बदनामी हुई। बाद में फ़िरोज़ निकाहनामा और अश्लील वीडियो छिपाने के नाम पर पीड़ित परिवार से पाँच लाख रुपए की और माँग करने लगा। पुलिस के मुताबिक तहरीर के आधार पर फ़िरोज़ व उसके दो साथी विकास और जुल्फिकार पर FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जाँच की जा रही है।
PATNA : इस वक़्त एक बड़ी खबर पटना से सामने आ रही है. महिला दारोगा और ASI समेत 7 पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया है. मद्य निषेध विभाग के आयुक्त ने चेकपोस्ट पर लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ा एक्शन लेते हुए इन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने बताया कि शराबबंदी को लेकर लगातार सख्ती बरती जा रहा है, जिसके कारण इन लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने बताया कि शराबबंदी को लेकर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. चेक पोस्ट पर लापरवाही बरतने के कारण ही महिला दारोगा और ASI समेत 7 पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया है. निलंबित होने वालों में मद्य निषेध की अवर निरीक्षक रूबी कुमारी, सहायक अवर निरीक्षक चंद्रशेखर कुमार, सिपाही कृष्णा कुमार सिंह, संतोष कुमार, सुजीत कुमार पासवान, राजीव कुमार और सुधांशु कुमार सुमन शामिल हैं. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने आगे बताया कि शराबबंदी को लेकर लगातार सख्ती जारी है. इसमें कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उत्पाद विभाग की जिला और केंद्रीय टीम लगातार छापेमारी कर रही है. होली को लेकर मद्य निषेध विभाग ने सभी जिला उत्पाद निरीक्षकों और चेकपोस्ट को और ज्यादा सतर्क रहने को कहा है. सभी गाडिय़ों की बाकायदा चेकिंग अनिवार्य की गई है. हर पाली में पुलिसकर्मियों को मुस्तैदी से काम करने को कहा गया है.
PATNA : इस वक़्त एक बड़ी खबर पटना से सामने आ रही है. महिला दारोगा और ASI समेत सात पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया है. मद्य निषेध विभाग के आयुक्त ने चेकपोस्ट पर लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ा एक्शन लेते हुए इन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने बताया कि शराबबंदी को लेकर लगातार सख्ती बरती जा रहा है, जिसके कारण इन लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने बताया कि शराबबंदी को लेकर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. चेक पोस्ट पर लापरवाही बरतने के कारण ही महिला दारोगा और ASI समेत सात पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया है. निलंबित होने वालों में मद्य निषेध की अवर निरीक्षक रूबी कुमारी, सहायक अवर निरीक्षक चंद्रशेखर कुमार, सिपाही कृष्णा कुमार सिंह, संतोष कुमार, सुजीत कुमार पासवान, राजीव कुमार और सुधांशु कुमार सुमन शामिल हैं. मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के उपायुक्त कृष्णा कुमार ने आगे बताया कि शराबबंदी को लेकर लगातार सख्ती जारी है. इसमें कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उत्पाद विभाग की जिला और केंद्रीय टीम लगातार छापेमारी कर रही है. होली को लेकर मद्य निषेध विभाग ने सभी जिला उत्पाद निरीक्षकों और चेकपोस्ट को और ज्यादा सतर्क रहने को कहा है. सभी गाडिय़ों की बाकायदा चेकिंग अनिवार्य की गई है. हर पाली में पुलिसकर्मियों को मुस्तैदी से काम करने को कहा गया है.
करने में वाण किस गली का आश्रय लेते इसका कोई संकेत हमे नहीं मिलता। कुछ विद्वानों ने तो उत्तराधं के उपसंहार को भी दोषपूर्ण माना है तथा कुछ लोगो का यह भी सन्देह है कि क्या वाण स्वय शूद्रक को चन्द्रापीड़ का इस जन्म का अवतरण मानना चाहते थे। पर जहाँ तक बाण की कथा के उपसहार का प्रश्न है, यह सदेह निराधार जान पड़ता है। वाण ने पहले से ही कथा को रूपरेखा अवश्य बना ली होगी और तीसरे जन्म मे पुराने प्रेमियों का मिलाप करा देना उनका ही प्रतिपाद्य रहा होगा। स्वय बाण-पुत्र ने इसका संकेत किया है। जहाँ तक वर्णन शैली का प्रश्न हैं, यह कहा जा सकता है कि बाण के पुत्र ने कथा को कुछ तेजी से समेट लिया है, संभवतः बाण प्रतिपाद्य तक मन्द गति से बढते, और पता नहीं कितने वर्णनो, कितनी कल्पनाओं, कितनी सानुप्रासिक समासान्त वावयततियो के बाद कथा कही अपने लक्ष्य की की ओर मुहती । जहाँ तक अलंकृत शैली का प्रश्न है, वाण का पुत्र अपने पिता के कई गुणों का प्रदर्शन करता है, किन्तु बाण को कई शाब्दी कलाबाजियाँ भी वहीं दिखाई पड़ती हैं, जिनमे पुत्र ने अपनी कलाबाजियो को और जोड़ दिया है। उत्तरार्ध के आरम्भ में उसने कादम्बरी को पूरा कराने का केवल एकमात्र कारण यह बताया है कि कादम्बरी को बधूरी देखकर सज्जन व्यक्ति दुखी हो रहे थे और पिता उसे अधूरी ही छोड़ गये थे, अतः सज्जनों को प्रसन्न करने के लिए इस कथा को पूरा किया गया है, इसमें बाणतनय का कोई 'कवित्वदर्प' कारण नहीं । याते दिवं पितरि तद्ववव साधं विच्छेदमाप भुवि वस्तु कथाप्रवन्धः । दुसं सतां तदसमासिकृतं विलोक्य प्रारम्य एव स मया न कवित्वदर्थात् ॥ बाणतनय के पास पिता की भाँति कल्पना का अपार भाण्डार, अनुप्रासों की लड़ो पर लडी, वर्ण्य विषय की हर बारीकी को देखने की पर्यवेक्षणशक्ति नही दिखाई पड़ती, बाण को शैली के साथ उत्तरभाग की शैली की तुलना करने पर यह स्पष्ट प्रतीत होता है। इतना होते हुए भी कई स्थानों पर १. बीजानि गर्भाितफलानि बिकामभाजि । वप्त्रेव यान्सुचितकर्मबलात्कृतानि ॥ उत्कृष्टभूमिबिततानि च यान्ति पुष्टि तान्येव तस्य तनयेन तु संहानि ॥ ( कादम्बरी उत्तरभाग ८)
करने में वाण किस गली का आश्रय लेते इसका कोई संकेत हमे नहीं मिलता। कुछ विद्वानों ने तो उत्तराधं के उपसंहार को भी दोषपूर्ण माना है तथा कुछ लोगो का यह भी सन्देह है कि क्या वाण स्वय शूद्रक को चन्द्रापीड़ का इस जन्म का अवतरण मानना चाहते थे। पर जहाँ तक बाण की कथा के उपसहार का प्रश्न है, यह सदेह निराधार जान पड़ता है। वाण ने पहले से ही कथा को रूपरेखा अवश्य बना ली होगी और तीसरे जन्म मे पुराने प्रेमियों का मिलाप करा देना उनका ही प्रतिपाद्य रहा होगा। स्वय बाण-पुत्र ने इसका संकेत किया है। जहाँ तक वर्णन शैली का प्रश्न हैं, यह कहा जा सकता है कि बाण के पुत्र ने कथा को कुछ तेजी से समेट लिया है, संभवतः बाण प्रतिपाद्य तक मन्द गति से बढते, और पता नहीं कितने वर्णनो, कितनी कल्पनाओं, कितनी सानुप्रासिक समासान्त वावयततियो के बाद कथा कही अपने लक्ष्य की की ओर मुहती । जहाँ तक अलंकृत शैली का प्रश्न है, वाण का पुत्र अपने पिता के कई गुणों का प्रदर्शन करता है, किन्तु बाण को कई शाब्दी कलाबाजियाँ भी वहीं दिखाई पड़ती हैं, जिनमे पुत्र ने अपनी कलाबाजियो को और जोड़ दिया है। उत्तरार्ध के आरम्भ में उसने कादम्बरी को पूरा कराने का केवल एकमात्र कारण यह बताया है कि कादम्बरी को बधूरी देखकर सज्जन व्यक्ति दुखी हो रहे थे और पिता उसे अधूरी ही छोड़ गये थे, अतः सज्जनों को प्रसन्न करने के लिए इस कथा को पूरा किया गया है, इसमें बाणतनय का कोई 'कवित्वदर्प' कारण नहीं । याते दिवं पितरि तद्ववव साधं विच्छेदमाप भुवि वस्तु कथाप्रवन्धः । दुसं सतां तदसमासिकृतं विलोक्य प्रारम्य एव स मया न कवित्वदर्थात् ॥ बाणतनय के पास पिता की भाँति कल्पना का अपार भाण्डार, अनुप्रासों की लड़ो पर लडी, वर्ण्य विषय की हर बारीकी को देखने की पर्यवेक्षणशक्ति नही दिखाई पड़ती, बाण को शैली के साथ उत्तरभाग की शैली की तुलना करने पर यह स्पष्ट प्रतीत होता है। इतना होते हुए भी कई स्थानों पर एक. बीजानि गर्भाितफलानि बिकामभाजि । वप्त्रेव यान्सुचितकर्मबलात्कृतानि ॥ उत्कृष्टभूमिबिततानि च यान्ति पुष्टि तान्येव तस्य तनयेन तु संहानि ॥
आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने दिल्ली की लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर निशाना साधा है. आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के बॉस नए एलजी जबसे आए हैं, सरकार के काम में अड़ंगा लगाने में व्यस्त हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक दुर्गेश पाठक (MLA Durgesh Pathak) ने शुक्रवार को दिल्ली की लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना पर सवाल खड़े किए हैं. दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली के लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति देखकर अब डर लगता है. हर दिन ब्रूटल क्राइम हो रहे हैं. रोकने के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है. आप विधायक ने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए हाल ही में दिल्ली में हुई आपराधिक घटनाएं भी गिनाई है. उन्होंने कहा कि बीती 4 जुलाई को एक लड़की के साथ रेप की कोशिश हुई. 7 जुलाई को तिलक विहार में पड़ोसियों ने एक लड़की पर अटैक किया. वहीं, आज यानी 8 जुलाई को 12 साल की एक लड़की की हत्या की कोशिश हुई है. पिछले कुछ दिनों के समाचार पत्र देखें तो दिल कांप उठता है. दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति इतनी कोलैप्स हो गई है कि 2020 की तुलना में 15 फीसदी क्राइम बढ़ा है. जनवरी 2021 से जून 2021 की तुलना में जनवरी 2022 से जून 2022 में क्राइम बढ़ा है. दिल्ली धीरे-धीरे बीजेपी की दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में क्राइम सिटी बनती जा रही है. देशभर के मेट्रो पोलिटन सिटी के 40 फीसदी रेप और 25 फीसदी मर्डर की कोशिश दिल्ली से सामने आए हैं. लेकिन दिल्ली पुलिस इन मामलों में कुछ नहीं कर रही, केवल आप के नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाने में लगी है. पाठक ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के बॉस नए एलजी जबसे आए हैं, दिल्ली सरकार के काम में अड़ंगा लगाने में व्यस्त हैं. लगातार हर दिन वे दिल्ली के अधिकारियों को बुलाकर धमका रहे हैं. ज्वाइन करते ही बिना सरकार से मशवरा किए 40 बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए. दिल्ली जब पानी के क्राइसिस से जूझ रही है, ऐसे में उन्होंने बोर्ड के सीईओ को हटा दिया. स्कूल अस्पताल के काम में बाधा डाल रहे हैं, मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे से जुड़ी फाइल रोककर रखे हुए हैं. पाठक ने कहा कि मैं उपराज्यपाल से पूछना चाहता हूं कि अपराध के इन मामलों पर एलजी ने अब तक कोई मजबूत स्टेप लेने की कोशिश की क्या? पुलिस और नागरिकों के बीच बढ़ती दूरी को पाटने की कोशिश की क्या? दिल्ली वालों का भरोसा बीजेपी और एलजी की पुलिस से कम होता जा रहा है. दिल्ली वालों को डर लगता है कि अगर रात में निकले तो कुछ हो न जाए. जनता की तरफ से एक अपील है कि यह समय राजनीति का नहीं है, हाथ जोड़कर विनती है कि छोटी राजनीति को त्यागें और दिल्ली वालों की सुरक्षा के लिए काम करें. दुर्गेश पाठक ने कहा कि उन्होंने भी उपराज्यपाल से मिलने का समय मांगा था, लेकिन नहीं मिला. हर शुक्रवार मुख्यमंत्री और एलजी की मीटिंग होती है, उस मीटिंग में भी यह मुद्दा उठाएंगे. हमारे कई विधायकों ने एलजी से मिलकर इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन उनकी तरफ से कोई सार्थक पहल नहीं हुई. CAG रिपोर्ट को लेकर विपक्ष के सवालों पर पाठक ने क्या कहा? CAG की रिपोर्ट पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आज हर सरकार ने कर्ज लिया है, हर सरकार पर कर्ज है. CAG कहती है कि हर प्रोजेक्ट का स्टेटस रिपोर्ट देना होता है, हमारे हर प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. CAG की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली सरकार साल दर साल सरप्लस बजट में है और इस पर सबको गर्व होना चाहिए.
आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने दिल्ली की लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर निशाना साधा है. आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के बॉस नए एलजी जबसे आए हैं, सरकार के काम में अड़ंगा लगाने में व्यस्त हैं. आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने शुक्रवार को दिल्ली की लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर सवाल खड़े किए हैं. दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली के लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति देखकर अब डर लगता है. हर दिन ब्रूटल क्राइम हो रहे हैं. रोकने के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है. आप विधायक ने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए हाल ही में दिल्ली में हुई आपराधिक घटनाएं भी गिनाई है. उन्होंने कहा कि बीती चार जुलाई को एक लड़की के साथ रेप की कोशिश हुई. सात जुलाई को तिलक विहार में पड़ोसियों ने एक लड़की पर अटैक किया. वहीं, आज यानी आठ जुलाई को बारह साल की एक लड़की की हत्या की कोशिश हुई है. पिछले कुछ दिनों के समाचार पत्र देखें तो दिल कांप उठता है. दुर्गेश पाठक ने कहा कि दिल्ली में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति इतनी कोलैप्स हो गई है कि दो हज़ार बीस की तुलना में पंद्रह फीसदी क्राइम बढ़ा है. जनवरी दो हज़ार इक्कीस से जून दो हज़ार इक्कीस की तुलना में जनवरी दो हज़ार बाईस से जून दो हज़ार बाईस में क्राइम बढ़ा है. दिल्ली धीरे-धीरे बीजेपी की दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में क्राइम सिटी बनती जा रही है. देशभर के मेट्रो पोलिटन सिटी के चालीस फीसदी रेप और पच्चीस फीसदी मर्डर की कोशिश दिल्ली से सामने आए हैं. लेकिन दिल्ली पुलिस इन मामलों में कुछ नहीं कर रही, केवल आप के नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाने में लगी है. पाठक ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के बॉस नए एलजी जबसे आए हैं, दिल्ली सरकार के काम में अड़ंगा लगाने में व्यस्त हैं. लगातार हर दिन वे दिल्ली के अधिकारियों को बुलाकर धमका रहे हैं. ज्वाइन करते ही बिना सरकार से मशवरा किए चालीस बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए. दिल्ली जब पानी के क्राइसिस से जूझ रही है, ऐसे में उन्होंने बोर्ड के सीईओ को हटा दिया. स्कूल अस्पताल के काम में बाधा डाल रहे हैं, मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे से जुड़ी फाइल रोककर रखे हुए हैं. पाठक ने कहा कि मैं उपराज्यपाल से पूछना चाहता हूं कि अपराध के इन मामलों पर एलजी ने अब तक कोई मजबूत स्टेप लेने की कोशिश की क्या? पुलिस और नागरिकों के बीच बढ़ती दूरी को पाटने की कोशिश की क्या? दिल्ली वालों का भरोसा बीजेपी और एलजी की पुलिस से कम होता जा रहा है. दिल्ली वालों को डर लगता है कि अगर रात में निकले तो कुछ हो न जाए. जनता की तरफ से एक अपील है कि यह समय राजनीति का नहीं है, हाथ जोड़कर विनती है कि छोटी राजनीति को त्यागें और दिल्ली वालों की सुरक्षा के लिए काम करें. दुर्गेश पाठक ने कहा कि उन्होंने भी उपराज्यपाल से मिलने का समय मांगा था, लेकिन नहीं मिला. हर शुक्रवार मुख्यमंत्री और एलजी की मीटिंग होती है, उस मीटिंग में भी यह मुद्दा उठाएंगे. हमारे कई विधायकों ने एलजी से मिलकर इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन उनकी तरफ से कोई सार्थक पहल नहीं हुई. CAG रिपोर्ट को लेकर विपक्ष के सवालों पर पाठक ने क्या कहा? CAG की रिपोर्ट पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आज हर सरकार ने कर्ज लिया है, हर सरकार पर कर्ज है. CAG कहती है कि हर प्रोजेक्ट का स्टेटस रिपोर्ट देना होता है, हमारे हर प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. CAG की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली सरकार साल दर साल सरप्लस बजट में है और इस पर सबको गर्व होना चाहिए.
गनाथ के माँ-बाप उसके बचपन में ही मर गये थे। उसके रामनाथ नामक एक छोटा भाई था। रंगनाथ ने उसे बड़े ही लाड़-प्यार में पाला-पोसा और बड़ी मेहनत करके उसे पढ़ाया-लिखाया। रंगनाथ को जल्द ही कचहरी में अच्छी नौकरी लग गई। उस वक्त तक रामनाथ की पढ़ाई पूरी नहीं हुई। कचहरी के एक-दूसरे कर्मचारी ने अपनी कन्या के साथ रंगनाथ की शादी की । इसके एक-दो साल बाद रामनाथ की पढ़ाई पूरी हो गई। इस पर रंगनाथ ने अपने परिचितों की सिफ़ारिश से छोटे भाई रामनाथ को भी नौकरी दिलाई, मगर तीसरे ही दिन रामनाथ उस नौकरी को तिलांजलि देकर घर लौट आया । रंगनाथ ने आश्चर्य में आकर पूछारामनाथ, तुमने वह नौकरी क्यों छोड़ नौकरी की कीमत दी? क्या तुम्हारे मालिक ने तुम्हें कुछ बुरा-भला कह दिया है ?" रामनाथ खीझकर बोला-"मेरे मालिक थोड़ा भी शिष्टाचार नहीं जानते ! मुझे नौकरी एक चीज़ की दी और मुझसे दूसरे प्रकार के काम लेते हैं। इसलिए मैं वह नौकरी बिलकुल नहीं करना चाहता । रंगनाथ चुप रह गया। कुछ दिन बाद अपने छोटे भाई के लिए एक जगह दूसरी नौकरी दिलाई। रामनाथ ने तीसरे ही दिन उस नौकरी को भी छोड़ दिया । रंगनाथ अपने छोटे भाई पर बिंगड़ पड़ा, इस पर रामनाथ बोला-"मेरे अधिकारी हर छोटी सी बात पर मुझे धमकी दे रहे थे कि तुमको नौकरी से हटा दूंगा। मैंने उनसे कहा कि आप को मुझे नौकरी से हटाने का मौक़ा क्यों दूं? मैं ही खुद इस्तीफ़ा देता हूँ, यों कहकर मैंने ही इस्तीफ़ा दे दिया है । प्रमीला ठाकुर "हर नौकरी के पीछे तुम यों अंट-संट कारण बताकर नौकरी को इस्तीफ़ा देते जाओगे तो में तुम्हारे वास्ते नौकरियाँ कहाँ ढूंढ सकता हूँ ? इस बार तुम्हें तक़लीफ़ भी हुई तो नौकरी को छोड़कर मत आना । मुझे बताओ, मैं तुम्हारी समस्या को हल कर दूंगा।" यों रंगनाथ ने उसे चेतावनी दी । रामनाथ ने सारी बातें चुपचाप सुन लीं एक सप्ताह बीत गया। एक दिन रंगनाथ अपने छोटे भाई को साथ ले कचहरी पहुँचा। रंगनाथ ने रामनाथ को एक नौकरी दिलाई, उसे सारी बातें सिखाई, समझा-बुझाकर घर लौट आया । चार दिन बीत गये। पांचवें दिन रामनाथ ने अपने भाई से कहा-"भैया, में यह नौकरी बिलकुल नहीं कर सकता । मेरे अधिकारी तो मेरे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे किसी बच्चे के साथ किया जाता है ! मेरे ऊपर के अधिकारियों को मेरा काम बिलकुल संतोषजनक नहीं है।" इस पर रंगनाथ ने अपने क्रोध को निगलते हुए पूछा- "तब तो क्या तुम नौकरी छोड़कर चले आये हो ?" 'अभी तक नहीं छोड़ी। आप ने नौकरी छोड़ने के पहले सारी तक़लीफ़े आपको बताने को कहा था न ? " रामनाथ ने जवाब दिया। "यह तो बताओ कि आखिर तुम करना क्या चाहते हो ?" रंगनाथ ने पूछा । "मैं अफ़सरों के दुत्कार सुनते अपने स्वाभिमान को बेचना नहीं चाहता । रामनाथ ने साफ़ कह दिया। ने तब तो तुम्हारे मन में जो आये, सो करो।" यों कहकर रंगनाथ वहाँ से चले गये। इस घटना के चौथे दिन रंगनाथ उदास भरे चेह्रा लिये घर पहुँचा । क्या बात है? आप दुखी क्यों हैं !" रंगनाथ के छोटे भाई और पत्नी ने पूछा । "मेरी नौकरी छूट गई है । रंगनाथ ने जवाब दिया। ऐसा क्यों ? आप कई सालों से यह नौकरी कर रहे हैं न ?" रामनाथ ने अचरज में आकर पूछा। 'इसीलिए तो मुझे सबसे ज्यादा दुख हो गहा है। कोई दूसरी नौकरी भी करना चाहूँ तो मिलने की गुंजाइश नहीं रंगनाथ ने जवाब दिया । धीरे-धीरे उस परिवार में आर्थिक कठिनाइयाँ शुरू हुई। दिन गुजारना मुश्किल मालूम होने लगा । खाने-पीने की चिंता उन पर सवार हो गई। रामनाथ आज तक कभी फाका न रहा । ये बातें सोचकर रामनाथ दुखी होने लगा कि उसने बहुत सारी नौकरियाँ जानबूझ कर छोड़ दी हैं। अगर कम से कम उसकी भी नौकरी होती तो परिवार का यह बुरा हाल न होता । अब यह नौकरी करना भी चाहे तो देनेवाला महानुभाव कोई नहीं है ! आज तक अपने भाई का सहारा पाकर ही उसने नौकरियों के प्रति लापरवाही दिखाई है । अब मजदूरी करके ही सही परिवार का पेट पालना होगा । यों विचार कर रामनाथ ने अपना निर्णय अपने बड़े भाई को सुनाया। अपने छोटे भाई में यह परिवर्तन देख बड़ा भाई खुश हुआ और बोला-"भैया, कचहरी में जाकर पहले तुम इस बात का पता तो लगाओ कि तुम जिस नौकरी को छोड़ आये हो, वह अभी तक खाली है या नहीं ?" रामनाथ ने आँखों में आँसू भरकर कहा
गनाथ के माँ-बाप उसके बचपन में ही मर गये थे। उसके रामनाथ नामक एक छोटा भाई था। रंगनाथ ने उसे बड़े ही लाड़-प्यार में पाला-पोसा और बड़ी मेहनत करके उसे पढ़ाया-लिखाया। रंगनाथ को जल्द ही कचहरी में अच्छी नौकरी लग गई। उस वक्त तक रामनाथ की पढ़ाई पूरी नहीं हुई। कचहरी के एक-दूसरे कर्मचारी ने अपनी कन्या के साथ रंगनाथ की शादी की । इसके एक-दो साल बाद रामनाथ की पढ़ाई पूरी हो गई। इस पर रंगनाथ ने अपने परिचितों की सिफ़ारिश से छोटे भाई रामनाथ को भी नौकरी दिलाई, मगर तीसरे ही दिन रामनाथ उस नौकरी को तिलांजलि देकर घर लौट आया । रंगनाथ ने आश्चर्य में आकर पूछारामनाथ, तुमने वह नौकरी क्यों छोड़ नौकरी की कीमत दी? क्या तुम्हारे मालिक ने तुम्हें कुछ बुरा-भला कह दिया है ?" रामनाथ खीझकर बोला-"मेरे मालिक थोड़ा भी शिष्टाचार नहीं जानते ! मुझे नौकरी एक चीज़ की दी और मुझसे दूसरे प्रकार के काम लेते हैं। इसलिए मैं वह नौकरी बिलकुल नहीं करना चाहता । रंगनाथ चुप रह गया। कुछ दिन बाद अपने छोटे भाई के लिए एक जगह दूसरी नौकरी दिलाई। रामनाथ ने तीसरे ही दिन उस नौकरी को भी छोड़ दिया । रंगनाथ अपने छोटे भाई पर बिंगड़ पड़ा, इस पर रामनाथ बोला-"मेरे अधिकारी हर छोटी सी बात पर मुझे धमकी दे रहे थे कि तुमको नौकरी से हटा दूंगा। मैंने उनसे कहा कि आप को मुझे नौकरी से हटाने का मौक़ा क्यों दूं? मैं ही खुद इस्तीफ़ा देता हूँ, यों कहकर मैंने ही इस्तीफ़ा दे दिया है । प्रमीला ठाकुर "हर नौकरी के पीछे तुम यों अंट-संट कारण बताकर नौकरी को इस्तीफ़ा देते जाओगे तो में तुम्हारे वास्ते नौकरियाँ कहाँ ढूंढ सकता हूँ ? इस बार तुम्हें तक़लीफ़ भी हुई तो नौकरी को छोड़कर मत आना । मुझे बताओ, मैं तुम्हारी समस्या को हल कर दूंगा।" यों रंगनाथ ने उसे चेतावनी दी । रामनाथ ने सारी बातें चुपचाप सुन लीं एक सप्ताह बीत गया। एक दिन रंगनाथ अपने छोटे भाई को साथ ले कचहरी पहुँचा। रंगनाथ ने रामनाथ को एक नौकरी दिलाई, उसे सारी बातें सिखाई, समझा-बुझाकर घर लौट आया । चार दिन बीत गये। पांचवें दिन रामनाथ ने अपने भाई से कहा-"भैया, में यह नौकरी बिलकुल नहीं कर सकता । मेरे अधिकारी तो मेरे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे किसी बच्चे के साथ किया जाता है ! मेरे ऊपर के अधिकारियों को मेरा काम बिलकुल संतोषजनक नहीं है।" इस पर रंगनाथ ने अपने क्रोध को निगलते हुए पूछा- "तब तो क्या तुम नौकरी छोड़कर चले आये हो ?" 'अभी तक नहीं छोड़ी। आप ने नौकरी छोड़ने के पहले सारी तक़लीफ़े आपको बताने को कहा था न ? " रामनाथ ने जवाब दिया। "यह तो बताओ कि आखिर तुम करना क्या चाहते हो ?" रंगनाथ ने पूछा । "मैं अफ़सरों के दुत्कार सुनते अपने स्वाभिमान को बेचना नहीं चाहता । रामनाथ ने साफ़ कह दिया। ने तब तो तुम्हारे मन में जो आये, सो करो।" यों कहकर रंगनाथ वहाँ से चले गये। इस घटना के चौथे दिन रंगनाथ उदास भरे चेह्रा लिये घर पहुँचा । क्या बात है? आप दुखी क्यों हैं !" रंगनाथ के छोटे भाई और पत्नी ने पूछा । "मेरी नौकरी छूट गई है । रंगनाथ ने जवाब दिया। ऐसा क्यों ? आप कई सालों से यह नौकरी कर रहे हैं न ?" रामनाथ ने अचरज में आकर पूछा। 'इसीलिए तो मुझे सबसे ज्यादा दुख हो गहा है। कोई दूसरी नौकरी भी करना चाहूँ तो मिलने की गुंजाइश नहीं रंगनाथ ने जवाब दिया । धीरे-धीरे उस परिवार में आर्थिक कठिनाइयाँ शुरू हुई। दिन गुजारना मुश्किल मालूम होने लगा । खाने-पीने की चिंता उन पर सवार हो गई। रामनाथ आज तक कभी फाका न रहा । ये बातें सोचकर रामनाथ दुखी होने लगा कि उसने बहुत सारी नौकरियाँ जानबूझ कर छोड़ दी हैं। अगर कम से कम उसकी भी नौकरी होती तो परिवार का यह बुरा हाल न होता । अब यह नौकरी करना भी चाहे तो देनेवाला महानुभाव कोई नहीं है ! आज तक अपने भाई का सहारा पाकर ही उसने नौकरियों के प्रति लापरवाही दिखाई है । अब मजदूरी करके ही सही परिवार का पेट पालना होगा । यों विचार कर रामनाथ ने अपना निर्णय अपने बड़े भाई को सुनाया। अपने छोटे भाई में यह परिवर्तन देख बड़ा भाई खुश हुआ और बोला-"भैया, कचहरी में जाकर पहले तुम इस बात का पता तो लगाओ कि तुम जिस नौकरी को छोड़ आये हो, वह अभी तक खाली है या नहीं ?" रामनाथ ने आँखों में आँसू भरकर कहा
बीजिंग, 25 नवंबर । चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने 24 नवंबर को पेइचिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, विश्व व्यापार संगठन के उप महानिदेशक एलन वोल्फ, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाइ राइडर, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के महासचिव एंजेल गुरिया और वित्तीय स्थिरता बोर्ड के अध्यक्ष रैंडल क्वार्ल्स के साथ पांचवीं 1 प्लस 6 गोलमेज बैठक आयोजित की। उन्होंने महामारी के बाद के युग में विश्व की आर्थिक बहाली व वृद्धि को बढ़ावा देने के विषय पर विश्व की आर्थिक स्थिति, चीन की आर्थिक स्थिति और महामारी के बाद वैश्विक आर्थिक प्रशासन के बारे में गहन रूप से आदान-प्रदान किया। ली खछ्यांग ने कहा कि कोविड-19 महामारी के गंभीर प्रभाव के सामने चीन ने आर्थिक स्थिरता व बहाली को बनाए रखा, जो बाजार के संरक्षण के लिए चीन द्वारा सिलसिलेवार राहत नीतियां लागू करने, और साध ही सुधार व खुलेपन बढ़ाते हुए बाजार की जीवंत शक्ति और विकास की अंतर्जात शक्ति को उत्तेजित करने, चीन के विशाल घरेलू मांग बाजार पर निर्भर करता है। ली खछ्यांग ने बताया कि 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चीन सुधार और नवाचार को मूल प्रेरक शक्ति बनाकर कारोबारी माहौल के बाजारीकरण, कानूनीकरण और वैश्वीकरण को तेज करेगा। चीन एक नए विकास पैटर्न का निर्माण कर घरेलू मांग के विस्तार और खुलेपन को समान बढ़ावा देगा। और अधिक उच्चस्तरीय खुलेपन को बढ़ाते हुए बौद्धिक संपदा संरक्षण को मजबूत करेगा, घरेलू और विदेशी उद्यमों की निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा, और समान लाभ व जीत प्राप्त करेगा। बैठक में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों के प्रमुखों ने कोविड-19 महामारी के मुकाबले में चीन की उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा की। सभी पक्षों का मानना है कि महामारी और अर्थव्यवस्था की दोहरी चुनौतियों के सामने दुनिया भर के देशों को समग्र आर्थिक नीतिगत समन्वय बढ़ाना और हाथ मिलाकर महामारी के बाद के युग में वैश्विक आर्थिक बहाली बढ़ानी चाहिए। सभी पक्ष चीन के साथ संबंधों और सहयोग को बहुत महत्व देते हैं और वित्त, रोजगार, गरीबी उन्मूलन और ऋण राहत के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने, संयुक्त रूप से बहुपक्षवाद का समर्थन करने और विश्व के विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने को तैयार है। (साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
बीजिंग, पच्चीस नवंबर । चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने चौबीस नवंबर को पेइचिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, विश्व व्यापार संगठन के उप महानिदेशक एलन वोल्फ, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाइ राइडर, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के महासचिव एंजेल गुरिया और वित्तीय स्थिरता बोर्ड के अध्यक्ष रैंडल क्वार्ल्स के साथ पांचवीं एक प्लस छः गोलमेज बैठक आयोजित की। उन्होंने महामारी के बाद के युग में विश्व की आर्थिक बहाली व वृद्धि को बढ़ावा देने के विषय पर विश्व की आर्थिक स्थिति, चीन की आर्थिक स्थिति और महामारी के बाद वैश्विक आर्थिक प्रशासन के बारे में गहन रूप से आदान-प्रदान किया। ली खछ्यांग ने कहा कि कोविड-उन्नीस महामारी के गंभीर प्रभाव के सामने चीन ने आर्थिक स्थिरता व बहाली को बनाए रखा, जो बाजार के संरक्षण के लिए चीन द्वारा सिलसिलेवार राहत नीतियां लागू करने, और साध ही सुधार व खुलेपन बढ़ाते हुए बाजार की जीवंत शक्ति और विकास की अंतर्जात शक्ति को उत्तेजित करने, चीन के विशाल घरेलू मांग बाजार पर निर्भर करता है। ली खछ्यांग ने बताया कि चौदहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चीन सुधार और नवाचार को मूल प्रेरक शक्ति बनाकर कारोबारी माहौल के बाजारीकरण, कानूनीकरण और वैश्वीकरण को तेज करेगा। चीन एक नए विकास पैटर्न का निर्माण कर घरेलू मांग के विस्तार और खुलेपन को समान बढ़ावा देगा। और अधिक उच्चस्तरीय खुलेपन को बढ़ाते हुए बौद्धिक संपदा संरक्षण को मजबूत करेगा, घरेलू और विदेशी उद्यमों की निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा, और समान लाभ व जीत प्राप्त करेगा। बैठक में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों के प्रमुखों ने कोविड-उन्नीस महामारी के मुकाबले में चीन की उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा की। सभी पक्षों का मानना है कि महामारी और अर्थव्यवस्था की दोहरी चुनौतियों के सामने दुनिया भर के देशों को समग्र आर्थिक नीतिगत समन्वय बढ़ाना और हाथ मिलाकर महामारी के बाद के युग में वैश्विक आर्थिक बहाली बढ़ानी चाहिए। सभी पक्ष चीन के साथ संबंधों और सहयोग को बहुत महत्व देते हैं और वित्त, रोजगार, गरीबी उन्मूलन और ऋण राहत के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने, संयुक्त रूप से बहुपक्षवाद का समर्थन करने और विश्व के विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने को तैयार है।
अनलॉक के बाद सिनेमाघरों में पहली फिल्म 'द पिकअप आर्टिस्ट 'रिलीज़ ! हॉउसफुल रहे सिनेमाहाल ! लोकगायिका माया उपाध्याय का नया कुमाउँनी गीत रिलीज़! ठेठ पहाड़ी शब्दों का किया है मिश्रण! पहाड़ की वादियों में गूंजे रामेश्वर,प्रमिला के मधुर स्वर! 'सांची माया कु बंधन'डिजिटल प्लेटफार्म पर एक साथ रिलीज़! उत्तराखंड की दो युवा गायिकाओं ने मैशअप को दी आवाज ! हुनर का परचम लहरा रही हैं ,पहाड़ की बेटियां ! लोकगायक किशन महिपाल के गीत सोबनि बाना का प्रोमो वीडियो रिलीज़! एक साथ नजर आएंगे कई सितारे ! बोल्या देवता का ऐसा जागर जिसे सुनते ही थिरकने लगते हैं श्रोता! सोशल मीडिया पर हैं सैकड़ों वीडियो! धनराज शौर्य का नया वीडियो गीत मचा रहा यूट्यूब पर धमाल ! हिमाचली धुन में बना है गीत ! राम कौशल एवं स्वरकोकिला मीना राणा की आवाज में नया गीत रिलीज़ ! पहाड़ी फोक को पसंद कर रहे श्रोता ! दीवान सिंह पंवार के गीतों की डीजे पर धूम ! ये गीत भी मचा रहा धमाल ! राज टाइगर,प्रियंका पंवार की जुगलबंदी ! शादियों के सीजन में 'बुडड़ी' डीजे सॉन्ग की बीट पर थिरकेंगे उत्तराखंडवासी!
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दूदू थाना परिसर में ग्राम रक्षक दल और सीएलजी सदस्यों की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश शर्मा ने थाना क्षेत्र के ग्राम रक्षा दल के सदस्यों और सीएलजी सदस्यों के साथ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक ली। बैठक के दौरान आगामी दिनों में परशुराम जयंती महोत्सव और ईद पर्व पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने। कानून व्यवस्था की पालना करवाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दूदू थाना परिसर में ग्राम रक्षक दल और सीएलजी सदस्यों की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश शर्मा ने थाना क्षेत्र के ग्राम रक्षा दल के सदस्यों और सीएलजी सदस्यों के साथ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक ली। बैठक के दौरान आगामी दिनों में परशुराम जयंती महोत्सव और ईद पर्व पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने। कानून व्यवस्था की पालना करवाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
क्या है वह मान करने बैठ जाती है । उसके मान करने का ढंग भी एकदम निराला है । नायिका नायक से कुछ नहीं कहती अपितु रिक्त-नेत्रों में अश्रुजल भर कर पैर से जमीन खुरचने लग जाती है - प्रयच्छतोच्चैः कुसुमानि मानिनी विपक्षगोत्रं दयितेन लम्भिता । न किञ्चिदूचे चरणेन केवलं लिलेख बाष्पाकुललोचना सुवम् ॥ प्रकृति-वर्णन में भारवि की रुचि उतनी नहीं है जितनी वाल्मीकि, कालिदास या भवभूति की । फिर भी भारवि के यहाँ प्रकृति के प्रालंबन, उद्दीपन तथा अलंकरण रूप के अनेक सुन्दर चित्र देखने को मिलते हैं । किरातार्जुनीय के चतुर्थ तथा पंचम सर्ग में आलम्वन रूप के अनेक सुन्दर उदाहरण देखने को मिलते हैं । चतुर्थ सर्ग के शरद् वर्णन के कुछ चित्र तो निश्चित रूप से अत्यन्त मार्मिक बन पड़े हैं । प्रकृति के उद्दीपन रूप का वर्णन देखने वालों के लिए किरातार्जुनीय का नवम सर्ग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । अप्सराविहार में सूर्यास्त वर्णन, रात्रिवर्णन, प्रभातवर्णन निश्चित रूप से शृंगार के उद्दीपन विभाव के अंतर्गत समाविष्ट होंगे। प्रकृति के प्रलंकृत वर्णन छाँटने के लिए भारवि के यहाँ किसी स्थल विशेष को चुनने की कोई आवश्यकता ही नहीं है । चतुर्थ सर्ग के लगभग सभी वर्णन अलंकृत हैं । केवल दो-तीन पद्य जिनमें गायों का वर्णन है, अपवाद कहे जा सकते हैं । इस संबन्ध में डा० भोलाशंकर व्यास का यह कथन विशेषरूपेण ध्यातव्य है, "कालिदास की भारती सदा श्रनलंकृत रमणीयता लेकर प्राती है, पर प्रकृति में दिल को न रमाने वाले भारवि या साघ यमक के फेर में पड़ जाते हैं ।" वस्तुतः भारवि की काव्य-कला की प्रसिद्धि कारभाव पक्ष न होकर, कलापक्ष है । वे तो अल्प शब्दों में ही विपुल अर्थ के समावेश के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके सम्बन्ध में यह उक्ति प्रसिद्ध ही है - 'भारवेरर्थगौरवम्' । उनकी इसी विशेषता को दृष्टि-पथ में रखते हुए कृष्ण कवि ने लिखा हैप्रदेशवृत्यापि महान्तमर्थ प्रदर्शयन्ती रसमादधाना । सा भारवेः सत्पथदीपिकेव रम्या कृतिः कैरिव नोपजीव्या ।।
क्या है वह मान करने बैठ जाती है । उसके मान करने का ढंग भी एकदम निराला है । नायिका नायक से कुछ नहीं कहती अपितु रिक्त-नेत्रों में अश्रुजल भर कर पैर से जमीन खुरचने लग जाती है - प्रयच्छतोच्चैः कुसुमानि मानिनी विपक्षगोत्रं दयितेन लम्भिता । न किञ्चिदूचे चरणेन केवलं लिलेख बाष्पाकुललोचना सुवम् ॥ प्रकृति-वर्णन में भारवि की रुचि उतनी नहीं है जितनी वाल्मीकि, कालिदास या भवभूति की । फिर भी भारवि के यहाँ प्रकृति के प्रालंबन, उद्दीपन तथा अलंकरण रूप के अनेक सुन्दर चित्र देखने को मिलते हैं । किरातार्जुनीय के चतुर्थ तथा पंचम सर्ग में आलम्वन रूप के अनेक सुन्दर उदाहरण देखने को मिलते हैं । चतुर्थ सर्ग के शरद् वर्णन के कुछ चित्र तो निश्चित रूप से अत्यन्त मार्मिक बन पड़े हैं । प्रकृति के उद्दीपन रूप का वर्णन देखने वालों के लिए किरातार्जुनीय का नवम सर्ग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । अप्सराविहार में सूर्यास्त वर्णन, रात्रिवर्णन, प्रभातवर्णन निश्चित रूप से शृंगार के उद्दीपन विभाव के अंतर्गत समाविष्ट होंगे। प्रकृति के प्रलंकृत वर्णन छाँटने के लिए भारवि के यहाँ किसी स्थल विशेष को चुनने की कोई आवश्यकता ही नहीं है । चतुर्थ सर्ग के लगभग सभी वर्णन अलंकृत हैं । केवल दो-तीन पद्य जिनमें गायों का वर्णन है, अपवाद कहे जा सकते हैं । इस संबन्ध में डाशून्य भोलाशंकर व्यास का यह कथन विशेषरूपेण ध्यातव्य है, "कालिदास की भारती सदा श्रनलंकृत रमणीयता लेकर प्राती है, पर प्रकृति में दिल को न रमाने वाले भारवि या साघ यमक के फेर में पड़ जाते हैं ।" वस्तुतः भारवि की काव्य-कला की प्रसिद्धि कारभाव पक्ष न होकर, कलापक्ष है । वे तो अल्प शब्दों में ही विपुल अर्थ के समावेश के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके सम्बन्ध में यह उक्ति प्रसिद्ध ही है - 'भारवेरर्थगौरवम्' । उनकी इसी विशेषता को दृष्टि-पथ में रखते हुए कृष्ण कवि ने लिखा हैप्रदेशवृत्यापि महान्तमर्थ प्रदर्शयन्ती रसमादधाना । सा भारवेः सत्पथदीपिकेव रम्या कृतिः कैरिव नोपजीव्या ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उस सस्पेंस से पर्दा हटा दिया जिसमें उनके सोशल मीडिया को छोड़ने की बातें चल रही थी. मंगलवार को प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि इस महिला दिवस को वो अपना सोशल मीडिया अकाउंट उन महिलाओं को समर्पित करेंगे जिनसे वो प्रेरित हुए हैं. करीब 16 घंटे के बाद पीएम मोदी ने इस सस्पेंस से पर्दा उठाया और ऐलान किया कि महिला दिवस के मौके पर चलाए जा रहे इस कैंपेन में कोई भी हिस्सा ले सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार दोपहर को ट्वीट किया, 'इस महिला दिवस, मैं अपना सोशल मीडिया अकाउंट उन महिलाओं को सौंपूंगा जिनके जीवन और काम ने हमें प्रेरित किया है. ये उन्हें लाखों को प्रेरित करने के लिए मोटिवेट करेगा'. प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, 'क्या आप वो महिला हैं या आप ऐसी किसी महिला को जानती हैं जिन्होंने आपको प्रेरित किया हो? ' अपनी ऐसी ही कहानी को साझा करें. इसके साथ #SheInspiresUs. कैसे संभाल पाएंगे पीएम मोदी का सोशल मीडिया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कैंपेन के तहत कुछ चिन्हित महिलाओं को पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट संभालने का मौका मिलेगा. इसमें ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट को कोई भी महिला संभालेगी और महिला दिवस के दिन पूरा संचालन वहीं करेंगी. This Women's Day, I will give away my social media accounts to women whose life & work inspire us. This will help them ignite motivation in millions. पीएम मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि #SheInspireUs के साथ ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक या फिर यूट्यूब पर अपनी कहानी बताकर आप इस कैंपेन में हिस्सा ले सकते हैं. बता दें कि सोमवार की रात 8. 56 मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया था, जिसके बाद एक हलचल मच गई थी. पीएम मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि इस रविवार को वह फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. This Sunday, thinking of giving up my social media accounts on Facebook, Twitter, Instagram & YouTube. Will keep you all posted. प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के बाद कयास लगाए जाने लगे थे कि पीएम सोशल मीडिया को छोड़ रहे हैं. ट्विटर पर कुछ ही मिनटों में #NoSir ट्रेंड होने लगा था, जिसमें प्रधानमंत्री के समर्थक उनसे सोशल मीडिया ना छोड़ने की अपील कर रहे थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उस सस्पेंस से पर्दा हटा दिया जिसमें उनके सोशल मीडिया को छोड़ने की बातें चल रही थी. मंगलवार को प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि इस महिला दिवस को वो अपना सोशल मीडिया अकाउंट उन महिलाओं को समर्पित करेंगे जिनसे वो प्रेरित हुए हैं. करीब सोलह घंटाटे के बाद पीएम मोदी ने इस सस्पेंस से पर्दा उठाया और ऐलान किया कि महिला दिवस के मौके पर चलाए जा रहे इस कैंपेन में कोई भी हिस्सा ले सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार दोपहर को ट्वीट किया, 'इस महिला दिवस, मैं अपना सोशल मीडिया अकाउंट उन महिलाओं को सौंपूंगा जिनके जीवन और काम ने हमें प्रेरित किया है. ये उन्हें लाखों को प्रेरित करने के लिए मोटिवेट करेगा'. प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, 'क्या आप वो महिला हैं या आप ऐसी किसी महिला को जानती हैं जिन्होंने आपको प्रेरित किया हो? ' अपनी ऐसी ही कहानी को साझा करें. इसके साथ #SheInspiresUs. कैसे संभाल पाएंगे पीएम मोदी का सोशल मीडिया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कैंपेन के तहत कुछ चिन्हित महिलाओं को पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट संभालने का मौका मिलेगा. इसमें ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट को कोई भी महिला संभालेगी और महिला दिवस के दिन पूरा संचालन वहीं करेंगी. This Women's Day, I will give away my social media accounts to women whose life & work inspire us. This will help them ignite motivation in millions. पीएम मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि #SheInspireUs के साथ ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक या फिर यूट्यूब पर अपनी कहानी बताकर आप इस कैंपेन में हिस्सा ले सकते हैं. बता दें कि सोमवार की रात आठ. छप्पन मिनट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया था, जिसके बाद एक हलचल मच गई थी. पीएम मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि इस रविवार को वह फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. This Sunday, thinking of giving up my social media accounts on Facebook, Twitter, Instagram & YouTube. Will keep you all posted. प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के बाद कयास लगाए जाने लगे थे कि पीएम सोशल मीडिया को छोड़ रहे हैं. ट्विटर पर कुछ ही मिनटों में #NoSir ट्रेंड होने लगा था, जिसमें प्रधानमंत्री के समर्थक उनसे सोशल मीडिया ना छोड़ने की अपील कर रहे थे.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस के 74 नए मामले सामने आने के साथ संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 3,145 हो गई। यूपी के 68 जिले कोरोना वायरस से प्रभावित हुए हैं जिनमें से 9 जिलों में फिलहाल कोई एक्टिव केस नहीं है। यह जानकारी आज राज्य के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य),अमित मोहन प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से कुल 63 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि 1,261 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और इन्हें अस्पतालों से डिस्चार्ज किया जा चुका है। वहीं राज्य में कोरोना वायरस के 1,821 एक्टिव मामले हैं। प्रसाद ने बताया कि 4 मई के बाद से राज्य में कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या में गिरावट देखी गई है। उन्होंने बताया कि देश के स्तर पर मरीजों की रिकवरी दर 29. 35 फीसदी है जबकि राज्य में रिकवरी की दर 40. 9 फीसदी है। उन्होंने बताया कि कल 4848 नमूनों की जांच की गई। लगातार प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता विस्तार का नतीजा हमें दिख रहा है। उन्होंने कहा कि शुरू में 200-250 जांच से बढ़कर कल 4848 जांच की गईं। प्रसाद ने बताया कि सरकारी और निजी क्षेत्र की लैब मिलाकर अब तक कुल एक लाख 16 हजार 30 टेस्ट किये गये । कल 373 पूल लगाये गये और 1779 सैम्पल की जांच की गयी । इनमें से 18 पूल संक्रमित निकले । उन्होंने बताया कि सक्रिय संक्रमण के मामलों में एक अच्छा रूझान देखने को मिल रहा है कि संख्या में लगातार कमी आ रही है । चार मई को इलाजरत संक्रमण के मामलों की संख्या 1939 थी जो पांच मई को 1862 हो गयी । छह मई को 1831, सात मई को 1868 और आज 1821 इलाजरत संक्रमण के मामले हैं । उधर मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार को लखनऊ लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार अपने प्रदेश के हर श्रमिक एवं कामगार को सुरक्षित उनके घर तक लाएगी। यह प्रक्रिया मार्च के अंतिम हफ्ते से ही जारी है। जरूरत के अनुसार हम इसके लिए ट्रेन और बसों का इंतजाम कर रहे हैं। अलग-प्रदेशों (महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना आदि) से प्रदेश के श्रमिकों को लेकर चलीं 79 ट्रेनें रास्ते में हैं। शनिवार तक ये अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगी। 56 ट्रेनों से अब तक गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, आंध्र प्रदेश और केरल आदि राज्यों से करीब 70 हजार श्रमिकों की वापसी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के अलावा उप्र परिवहन निगम की करीब 10 हजार बसें भी आने वालों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचा रही हैं। शुक्रवार को हरियाणा से 30,000 श्रमिक अपने प्रदेश में पहुंचेगें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की प्रदेश में सुरक्षित वापसी के लिए कार्य कर रही है। इसके लिए सम्बन्धित राज्य सरकारों से ऐसे प्रवासियों की सूची प्राप्त की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी अवैध रूप से प्रदेश में न आने पाए। मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों से वापस आ रहे प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की जनपदवार सूची सम्बन्धित जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विभिन्न राज्यों से प्रवासी कामगारों/श्रमिकों को लेकर सर्वाधिक ट्रेनें पहुंचीं हैं। मुख्यमंत्री ने अपील की कि खुद के स्वास्थ्य और सुरक्षा के नाते कोई भी श्रमिक पैदल, साइकिल या दो पहिया से अपने घर के लिए न निकले। ये सारी व्यवस्था उनके लिए ही की गई है। धैर्य रखें सरकार उन तक जल्दी ही पहुंचेगी। उन्होंने कहा आने वाले हर प्रवासी के स्वास्थ्य की जांच उस जिले के पृथक-वास केंद्र पर अनिवार्य रूप से हो रही है। (इनपुट-भाषा)
लखनऊः उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस के चौहत्तर नए मामले सामने आने के साथ संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर तीन,एक सौ पैंतालीस हो गई। यूपी के अड़सठ जिले कोरोना वायरस से प्रभावित हुए हैं जिनमें से नौ जिलों में फिलहाल कोई एक्टिव केस नहीं है। यह जानकारी आज राज्य के प्रधान सचिव ,अमित मोहन प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से कुल तिरेसठ लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि एक,दो सौ इकसठ लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और इन्हें अस्पतालों से डिस्चार्ज किया जा चुका है। वहीं राज्य में कोरोना वायरस के एक,आठ सौ इक्कीस एक्टिव मामले हैं। प्रसाद ने बताया कि चार मई के बाद से राज्य में कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या में गिरावट देखी गई है। उन्होंने बताया कि देश के स्तर पर मरीजों की रिकवरी दर उनतीस. पैंतीस फीसदी है जबकि राज्य में रिकवरी की दर चालीस. नौ फीसदी है। उन्होंने बताया कि कल चार हज़ार आठ सौ अड़तालीस नमूनों की जांच की गई। लगातार प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता विस्तार का नतीजा हमें दिख रहा है। उन्होंने कहा कि शुरू में दो सौ-दो सौ पचास जांच से बढ़कर कल चार हज़ार आठ सौ अड़तालीस जांच की गईं। प्रसाद ने बताया कि सरकारी और निजी क्षेत्र की लैब मिलाकर अब तक कुल एक लाख सोलह हजार तीस टेस्ट किये गये । कल तीन सौ तिहत्तर पूल लगाये गये और एक हज़ार सात सौ उन्यासी सैम्पल की जांच की गयी । इनमें से अट्ठारह पूल संक्रमित निकले । उन्होंने बताया कि सक्रिय संक्रमण के मामलों में एक अच्छा रूझान देखने को मिल रहा है कि संख्या में लगातार कमी आ रही है । चार मई को इलाजरत संक्रमण के मामलों की संख्या एक हज़ार नौ सौ उनतालीस थी जो पांच मई को एक हज़ार आठ सौ बासठ हो गयी । छह मई को एक हज़ार आठ सौ इकतीस, सात मई को एक हज़ार आठ सौ अड़सठ और आज एक हज़ार आठ सौ इक्कीस इलाजरत संक्रमण के मामले हैं । उधर मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार को लखनऊ लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार अपने प्रदेश के हर श्रमिक एवं कामगार को सुरक्षित उनके घर तक लाएगी। यह प्रक्रिया मार्च के अंतिम हफ्ते से ही जारी है। जरूरत के अनुसार हम इसके लिए ट्रेन और बसों का इंतजाम कर रहे हैं। अलग-प्रदेशों से प्रदेश के श्रमिकों को लेकर चलीं उन्यासी ट्रेनें रास्ते में हैं। शनिवार तक ये अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगी। छप्पन ट्रेनों से अब तक गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, आंध्र प्रदेश और केरल आदि राज्यों से करीब सत्तर हजार श्रमिकों की वापसी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के अलावा उप्र परिवहन निगम की करीब दस हजार बसें भी आने वालों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचा रही हैं। शुक्रवार को हरियाणा से तीस,शून्य श्रमिक अपने प्रदेश में पहुंचेगें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की प्रदेश में सुरक्षित वापसी के लिए कार्य कर रही है। इसके लिए सम्बन्धित राज्य सरकारों से ऐसे प्रवासियों की सूची प्राप्त की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी अवैध रूप से प्रदेश में न आने पाए। मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों से वापस आ रहे प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की जनपदवार सूची सम्बन्धित जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विभिन्न राज्यों से प्रवासी कामगारों/श्रमिकों को लेकर सर्वाधिक ट्रेनें पहुंचीं हैं। मुख्यमंत्री ने अपील की कि खुद के स्वास्थ्य और सुरक्षा के नाते कोई भी श्रमिक पैदल, साइकिल या दो पहिया से अपने घर के लिए न निकले। ये सारी व्यवस्था उनके लिए ही की गई है। धैर्य रखें सरकार उन तक जल्दी ही पहुंचेगी। उन्होंने कहा आने वाले हर प्रवासी के स्वास्थ्य की जांच उस जिले के पृथक-वास केंद्र पर अनिवार्य रूप से हो रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सोमवार को प्रतापगढ़ में रहे। औद्योगिक क्षेत्र सुखपालनगर के निकट स्थित बनवारीकाछ में आयोजित भव्य समारोह में योगी और गडकरी ने बेल्हा को पांच हजार करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। जनसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भाजपा कार्यकाल में बेल्हा को विकास की मिली नई ऊंचाइयां मिली हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सोमवार को प्रतापगढ़ में रहे। औद्योगिक क्षेत्र सुखपालनगर के निकट स्थित बनवारीकाछ में आयोजित भव्य समारोह में योगी और गडकरी ने बेल्हा को पांच हजार करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। जनसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भाजपा कार्यकाल में बेल्हा को विकास की मिली नई ऊंचाइयां मिली हैं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
UP Board Result 2023: बोर्ड के सचिव द्वारा उत्तर प्रदेश के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परिक्षाओं के परिणामों की घोषणा की तारीख का एलान कर दिया गया है। उम्मीदवारों का रिजल्ट कल यानी 25 अप्रैल को जारी किया जाएगा। Tarek Fatah Death : तारिक फ़तेह बीते कई दिनों से कैंसर की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थे। Ajit Pawar: उन्होंने आगे कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नुमाइंदों को इस दिशा में गंभीरता से विचार-विमर्श करना चाहिए और बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने की दिशा में गंभीरतापूर्वक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, लेकिन मुझे यह जानकर अफसोस होता है कि अभी तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई भी कदम उठाने की दिशा में इच्छा नहीं जाहिर की जा रही है। UP Board Result 2023: माध्यमिक शिक्षा परिषद ने लेटर जारी करते हुए बताया, साल 2023 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा का परीक्षाफल दिनांक 25 अप्रैल को अपराह्न 1. 30 बजे माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्यालय प्रयागराज से घोषित किया जायेगा। Maharashtra: शरद पवार का ये बयान उन सरगर्मियों को हवा देता है जो MVA में सबकुछ ठीक नहीं होने को लेकर बीते काफी समय से चली आ रही है। तो ऐसे में एक बड़ा सवाल तो खड़ा ये भी होता है कि यदि MVA को लेकर ही महाराष्ट्र में शरद पवार अनिश्चित हैं तो फिर जिस विपक्षी एकता और राष्ट्रीय गठबंधन को बीजेपी के खिलाफ बनाने की बात कर रहे हैं उसका क्या भविष्य रह जाता है। Opposition Unity: नीतीश कुमार ने ममता से मुलाकात के बाद कहा कि वर्तमान में सभी संवैधानिक खतरे में हैं। ईडी-सीबीआई के नाम पर विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसी सूरत में इस संकट से निपटने के लिए सभी एक छत के तले आना होगा। Lakhimpur Kheri Case: सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर जारी सुनवाई पर कहा कि ऐसा करने से दूसरे मामलों की सुनवाई पर असर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि ट्रायल जज मामले की सुनवाई कर रही है, ताकि जल्द से जल्द मामले का निपटारा हो सकें। वहीं, अब तक मामले में 6 स्टेटस रिपोर्ट दाखिल हो चुकी हैं। अब अगली सुनवाई जुलाई में होगी। Asad Ahmed: सोशल मीडिया पर माफिया अतीक अहमद के बेटे असद की ये फोटो तेजी से वायरल हो रही है। ये तस्वीर कॉलेज के फेयरवेल की बताई जा रही है। जहां उसके चेहरे पर डॉन के साथ दिल का निशाना बनाया गया है। इस फोटो से साफ हो जाता है कि असद भी कॉलेज टाइम से ही अपने माफिया पिता अतीक अहमद की राह पर चल पड़ा था। परिवार में इतनी बड़ी घटनाएं हो गईं, लेकिन अतीक की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन सामने नहीं आई। वो अब तक फरार है। ऐसे में अब प्रयागराज के चकिया इलाके में अतीक अहमद के दफ्तर में जगह-जगह खून के धब्बे, टूटी चूड़ियां, दुपट्टा और खून लगा चाकू मिलने से शाइस्ता को लेकर चर्चा का बाजार गरम है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज सहारनपुर में तो क्या, उत्तर प्रदेश में भी कहीं कर्फ्यू नहीं लगाता, अब तो कांवड़ यात्रा निकलती है। ये कांवड़ यात्रा पहचान बन चुकी है। पहले नौजवानों पर झूठे मुकदमें होते थे, आज झूठा मुकदमा कोई नहीं कर सकता। किसान आत्महत्या करता था, आज किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि मिल रही है।
UP Board Result दो हज़ार तेईस: बोर्ड के सचिव द्वारा उत्तर प्रदेश के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परिक्षाओं के परिणामों की घोषणा की तारीख का एलान कर दिया गया है। उम्मीदवारों का रिजल्ट कल यानी पच्चीस अप्रैल को जारी किया जाएगा। Tarek Fatah Death : तारिक फ़तेह बीते कई दिनों से कैंसर की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थे। Ajit Pawar: उन्होंने आगे कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नुमाइंदों को इस दिशा में गंभीरता से विचार-विमर्श करना चाहिए और बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने की दिशा में गंभीरतापूर्वक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, लेकिन मुझे यह जानकर अफसोस होता है कि अभी तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई भी कदम उठाने की दिशा में इच्छा नहीं जाहिर की जा रही है। UP Board Result दो हज़ार तेईस: माध्यमिक शिक्षा परिषद ने लेटर जारी करते हुए बताया, साल दो हज़ार तेईस की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा का परीक्षाफल दिनांक पच्चीस अप्रैल को अपराह्न एक. तीस बजे माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्यालय प्रयागराज से घोषित किया जायेगा। Maharashtra: शरद पवार का ये बयान उन सरगर्मियों को हवा देता है जो MVA में सबकुछ ठीक नहीं होने को लेकर बीते काफी समय से चली आ रही है। तो ऐसे में एक बड़ा सवाल तो खड़ा ये भी होता है कि यदि MVA को लेकर ही महाराष्ट्र में शरद पवार अनिश्चित हैं तो फिर जिस विपक्षी एकता और राष्ट्रीय गठबंधन को बीजेपी के खिलाफ बनाने की बात कर रहे हैं उसका क्या भविष्य रह जाता है। Opposition Unity: नीतीश कुमार ने ममता से मुलाकात के बाद कहा कि वर्तमान में सभी संवैधानिक खतरे में हैं। ईडी-सीबीआई के नाम पर विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसी सूरत में इस संकट से निपटने के लिए सभी एक छत के तले आना होगा। Lakhimpur Kheri Case: सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर जारी सुनवाई पर कहा कि ऐसा करने से दूसरे मामलों की सुनवाई पर असर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि ट्रायल जज मामले की सुनवाई कर रही है, ताकि जल्द से जल्द मामले का निपटारा हो सकें। वहीं, अब तक मामले में छः स्टेटस रिपोर्ट दाखिल हो चुकी हैं। अब अगली सुनवाई जुलाई में होगी। Asad Ahmed: सोशल मीडिया पर माफिया अतीक अहमद के बेटे असद की ये फोटो तेजी से वायरल हो रही है। ये तस्वीर कॉलेज के फेयरवेल की बताई जा रही है। जहां उसके चेहरे पर डॉन के साथ दिल का निशाना बनाया गया है। इस फोटो से साफ हो जाता है कि असद भी कॉलेज टाइम से ही अपने माफिया पिता अतीक अहमद की राह पर चल पड़ा था। परिवार में इतनी बड़ी घटनाएं हो गईं, लेकिन अतीक की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन सामने नहीं आई। वो अब तक फरार है। ऐसे में अब प्रयागराज के चकिया इलाके में अतीक अहमद के दफ्तर में जगह-जगह खून के धब्बे, टूटी चूड़ियां, दुपट्टा और खून लगा चाकू मिलने से शाइस्ता को लेकर चर्चा का बाजार गरम है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज सहारनपुर में तो क्या, उत्तर प्रदेश में भी कहीं कर्फ्यू नहीं लगाता, अब तो कांवड़ यात्रा निकलती है। ये कांवड़ यात्रा पहचान बन चुकी है। पहले नौजवानों पर झूठे मुकदमें होते थे, आज झूठा मुकदमा कोई नहीं कर सकता। किसान आत्महत्या करता था, आज किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि मिल रही है।
के लड़का पैदा हुआ । वह महान पराक्रमी और बुद्धिमान था। उसके कोई पुत्र न होने के कारण उसका छोटा भाई जाल को अधिकार मिला। उसके बाद मानराजा अधिकारी बना । अनलदेव उसका पुत्र था ।* मानराजा कुछ दिनो तक चौहानो का प्रधान रहा और वह अपने वश पर शासन करता रहा । इसके बाद उसमे ससार के प्रति विराग की भावना उत्पन्न हुई । संसार का जीवन उसको व्यर्थ मालूम होने लगा । उसको विश्वास हो गया कि जीवन मे दुख भोगने के सिवा और कुछ नही है, यह ससार कष्टमय है । वह धार्मिक ग्रंथो का अध्ययन किया करता था और इस बात को सोचा करता था कि यह ससार नाशवान है । इसकी कोई बात स्थायी नही है । जीवन मे जो कुछ दिखायी देता है, वह किसी भी क्षरण नष्ट हो सकता है । माया और मोह के सिचा इसमे और कुछ नही है । इस प्रकार के विचारों से प्रभावित होकर उसने एक बार अपने प्रधीन सामन्तो के पास आदेश भेजा कि ग्राप लोग धार्मिक जीवन व्यतीत करते हुए दूसरो को गदा सहायता पहुँचाने की चेष्टा करो । मानराजा ने एक होम का श्रीगणेश कराया और उस होम का कार्य सम्वत् १२१८ श्रावण मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को समाप्त हुआ । उस समय शिव की मूर्ति को पञ्चामृत से स्नान कराया और अपने गुरु तथा ब्राह्मणो को उनकी अभिलाषा के अनुसार सोना, चाँदी अन्न और वस्त्र दान मे दिये । उँगलियो मे कुश की गूठियां पहनकर तिल, चावल और जल लेकर वह महावीर के मन्दिर मे गया और अपने इष्ट देवता के माथे पर चन्दन लगाकर जल देने के बाद उसकी आराधना की और उसने सुन्दर गाँछा ↑ वश के लोगो के लिए भेट का सकेत करते हुए पाँच मुद्रा मासिक वृत्ति निर्धारित कर दी । उसने कहा : 'मैं अपने निर्णय के अनुसार इस बात की घोषणा करता हूँ कि इस वश का जो कोई अधिकारी होगा । वह इस वृत्ति को बराबर प्रचलित रखेगा । जो इस वृत्ति का दान करेगा, वह साठ हजार वर्ष तक वैकुण्ठ मे रहेगा और जो इस वृत्ति को पूरा न करेगा, वह साठ हजार वर्ष तक नरक मे रहेगा । प्रायवशीय, जैन धर्मावलम्बी ओसवाल लोगो की एक शाखा है, धरणीधर के लडके करमचद मेरे मंत्री और शास्त्री मनोरथ राम, इसके विशाल और श्रीधर नामक दो लडको ने शिला लेख पर लिखकर मेरा नाम अमर कर दिया है ।" श्री अनल ने अपने हाथ से यह पत्र लिखकर प्रदान किया । सम्वत् १२१८ वहाँ पर मैंने कई एक ग्रथ ऐसे प्राप्त किये, जो मेरे इस कार्य के लिए उपयोगी है । इन ग्रथो मे एक ग्रन्थ राजस्थान के ३६ राजवशी का विवरण देता है । एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमे भारतवर्ष के प्राचीन भूगोल का वर्णन है । इस तरह यहाँ जो कई एक ग्रन्थ मिले है, उनसे मुझे अपने इतिहास की बहुत अच्छी सामग्री प्राप्त होती है । एक ग्रन्थ ऐसा भी मिला है, जिसमे विक्रम तथा महावीर के जन्म का वर्णन है और जैन धर्माविलम्बी नरेशो मे सब से प्रसिद्ध श्रीनीक और अम्प्रोति के वशजो का इतिहास है । महमूद बुलवन, अल्ला पुकारने का नाम खूनी और भारत विजयी नादिरशाह के नामो के सिक्के मुझे इस स्थान में मिले है । * मानराजा जो जाल के बाद प्रधान बनाया गया था, उसका लडका देव देव लक्षम मे बारह पीढी पहले सन् ८८ ईसवी मे पैदा हुआ था । ↑ सुन्दर गाँछा जैनियो की चौरासी शाखाओ मे एक शाखा है ।
के लड़का पैदा हुआ । वह महान पराक्रमी और बुद्धिमान था। उसके कोई पुत्र न होने के कारण उसका छोटा भाई जाल को अधिकार मिला। उसके बाद मानराजा अधिकारी बना । अनलदेव उसका पुत्र था ।* मानराजा कुछ दिनो तक चौहानो का प्रधान रहा और वह अपने वश पर शासन करता रहा । इसके बाद उसमे ससार के प्रति विराग की भावना उत्पन्न हुई । संसार का जीवन उसको व्यर्थ मालूम होने लगा । उसको विश्वास हो गया कि जीवन मे दुख भोगने के सिवा और कुछ नही है, यह ससार कष्टमय है । वह धार्मिक ग्रंथो का अध्ययन किया करता था और इस बात को सोचा करता था कि यह ससार नाशवान है । इसकी कोई बात स्थायी नही है । जीवन मे जो कुछ दिखायी देता है, वह किसी भी क्षरण नष्ट हो सकता है । माया और मोह के सिचा इसमे और कुछ नही है । इस प्रकार के विचारों से प्रभावित होकर उसने एक बार अपने प्रधीन सामन्तो के पास आदेश भेजा कि ग्राप लोग धार्मिक जीवन व्यतीत करते हुए दूसरो को गदा सहायता पहुँचाने की चेष्टा करो । मानराजा ने एक होम का श्रीगणेश कराया और उस होम का कार्य सम्वत् एक हज़ार दो सौ अट्ठारह श्रावण मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को समाप्त हुआ । उस समय शिव की मूर्ति को पञ्चामृत से स्नान कराया और अपने गुरु तथा ब्राह्मणो को उनकी अभिलाषा के अनुसार सोना, चाँदी अन्न और वस्त्र दान मे दिये । उँगलियो मे कुश की गूठियां पहनकर तिल, चावल और जल लेकर वह महावीर के मन्दिर मे गया और अपने इष्ट देवता के माथे पर चन्दन लगाकर जल देने के बाद उसकी आराधना की और उसने सुन्दर गाँछा ↑ वश के लोगो के लिए भेट का सकेत करते हुए पाँच मुद्रा मासिक वृत्ति निर्धारित कर दी । उसने कहा : 'मैं अपने निर्णय के अनुसार इस बात की घोषणा करता हूँ कि इस वश का जो कोई अधिकारी होगा । वह इस वृत्ति को बराबर प्रचलित रखेगा । जो इस वृत्ति का दान करेगा, वह साठ हजार वर्ष तक वैकुण्ठ मे रहेगा और जो इस वृत्ति को पूरा न करेगा, वह साठ हजार वर्ष तक नरक मे रहेगा । प्रायवशीय, जैन धर्मावलम्बी ओसवाल लोगो की एक शाखा है, धरणीधर के लडके करमचद मेरे मंत्री और शास्त्री मनोरथ राम, इसके विशाल और श्रीधर नामक दो लडको ने शिला लेख पर लिखकर मेरा नाम अमर कर दिया है ।" श्री अनल ने अपने हाथ से यह पत्र लिखकर प्रदान किया । सम्वत् एक हज़ार दो सौ अट्ठारह वहाँ पर मैंने कई एक ग्रथ ऐसे प्राप्त किये, जो मेरे इस कार्य के लिए उपयोगी है । इन ग्रथो मे एक ग्रन्थ राजस्थान के छत्तीस राजवशी का विवरण देता है । एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमे भारतवर्ष के प्राचीन भूगोल का वर्णन है । इस तरह यहाँ जो कई एक ग्रन्थ मिले है, उनसे मुझे अपने इतिहास की बहुत अच्छी सामग्री प्राप्त होती है । एक ग्रन्थ ऐसा भी मिला है, जिसमे विक्रम तथा महावीर के जन्म का वर्णन है और जैन धर्माविलम्बी नरेशो मे सब से प्रसिद्ध श्रीनीक और अम्प्रोति के वशजो का इतिहास है । महमूद बुलवन, अल्ला पुकारने का नाम खूनी और भारत विजयी नादिरशाह के नामो के सिक्के मुझे इस स्थान में मिले है । * मानराजा जो जाल के बाद प्रधान बनाया गया था, उसका लडका देव देव लक्षम मे बारह पीढी पहले सन् अठासी ईसवी मे पैदा हुआ था । ↑ सुन्दर गाँछा जैनियो की चौरासी शाखाओ मे एक शाखा है ।
19 नवंबर से 4 दिसंबर तक तीर्थों पर कार्यक्रम का शेड्यूल तैयार होगा। वहीं कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से प्रस्तुतियां और तीर्थों पर हवन यज्ञ के भी कार्यक्रम होंगे। कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिधि के अंतर्गत आने वाले 75 तीर्थों पर भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 को लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इन तीर्थों पर हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। यह कार्यक्रम इस वर्ष 19 नवंबर से लेकर 4 दिसंबर तक आयोजित किए जाएंगे। कुरुक्षेत्र के उपायुक्त शांतनु शर्मा ने केडीबी के अधिकारियों को 48 कोस तीर्थों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के निर्देश देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस के अंतर्गत करनाल, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र और पानीपत के 75 तीर्थों को शामिल किया गया है। इन सभी तीर्थों को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रमों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन तीर्थो पर जहां हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से लोकल कलाकारों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी, वहीं तीर्थ कमेटी या फिर ग्रामीणों के साथ मिलकर तीर्थ स्थल पर हवन यज्ञ, धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से टीमों की सूची उपलब्ध करवाई जाएगी और केडीबी की तरफ से 19 नवंबर से 4 दिसंबर तक 75 तीर्थों पर होने वाले कार्यक्रमों का एक शैडयूल तैयार किया जाएगा। इस शैडयूल को सभी संबंधित जिलों के उपायुक्तों के साथ सांझा किया जाएगा ताकि संबंधित जिले के अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रमों को सफल बना सके। उपायुक्त ने कहा कि कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयेाजन 19 नवंबर से 6 दिसंबर तक किया जाएगा। इस समय अवधि में क्राफ्ट और सरस मेला लगाया जाएगा और मुख्य कार्यक्रम 29 नवंबर से 4 दिसंबर तक आयोजित किए जाएंगे। इन तीर्थो पर कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए है।
उन्नीस नवंबर से चार दिसंबर तक तीर्थों पर कार्यक्रम का शेड्यूल तैयार होगा। वहीं कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से प्रस्तुतियां और तीर्थों पर हवन यज्ञ के भी कार्यक्रम होंगे। कुरुक्षेत्र अड़तालीस कोस की परिधि के अंतर्गत आने वाले पचहत्तर तीर्थों पर भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-दो हज़ार बाईस को लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इन तीर्थों पर हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। यह कार्यक्रम इस वर्ष उन्नीस नवंबर से लेकर चार दिसंबर तक आयोजित किए जाएंगे। कुरुक्षेत्र के उपायुक्त शांतनु शर्मा ने केडीबी के अधिकारियों को अड़तालीस कोस तीर्थों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के निर्देश देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र अड़तालीस कोस के अंतर्गत करनाल, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र और पानीपत के पचहत्तर तीर्थों को शामिल किया गया है। इन सभी तीर्थों को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रमों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन तीर्थो पर जहां हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से लोकल कलाकारों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी, वहीं तीर्थ कमेटी या फिर ग्रामीणों के साथ मिलकर तीर्थ स्थल पर हवन यज्ञ, धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कला एवं सांस्कृतिक विभाग की तरफ से टीमों की सूची उपलब्ध करवाई जाएगी और केडीबी की तरफ से उन्नीस नवंबर से चार दिसंबर तक पचहत्तर तीर्थों पर होने वाले कार्यक्रमों का एक शैडयूल तैयार किया जाएगा। इस शैडयूल को सभी संबंधित जिलों के उपायुक्तों के साथ सांझा किया जाएगा ताकि संबंधित जिले के अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रमों को सफल बना सके। उपायुक्त ने कहा कि कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयेाजन उन्नीस नवंबर से छः दिसंबर तक किया जाएगा। इस समय अवधि में क्राफ्ट और सरस मेला लगाया जाएगा और मुख्य कार्यक्रम उनतीस नवंबर से चार दिसंबर तक आयोजित किए जाएंगे। इन तीर्थो पर कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए है।
प्यार न जाति देखता है, न धर्म देखता है, न रिश्ते देखता है, न उम्र देखता है, न शोहरत देखता है और न ही दौलत देखता है. प्यार तो किसी को भी किसी से भी, कहीं भी, कभी भी हो जाता है. प्यार की गहराइयों में उतरकर इंसान अपने रिश्तों की भी बलि चढ़ा देता है. अक्सर कई ऐसी हैरान करने वाली घटनाएं सुनने और देखने को मिलती है जिन पर एक पल के लिए तो विश्वास तक करना मुश्किल हो जाता है. हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर से प्रेम प्रसंग का एक अनूठा मामला सामने आया है जहां 50 साल की एक सास को अपने 25 साल के दामाद से ही प्यार हो गया. वहीं जवान दामाद भी अपनी बूढ़ी सास के प्रेम में कैद हो गया. यहां तक कि सास और दामाद की जोड़ी ने साथ जीने मरने की कसमें भी खा ली. कहते हैं कि प्यार के आगे हर रिश्ता और हर बंधन दम तोड़ देता है. बिहार के मुजफ्फरपुर में भी एक सास और दामाद की जोड़ी ने ऐसा ही कर दिखाया. बताया जाता है कि, दोनों एक दूसरे के प्यार में इस कदर खोए कि दोनों घर से भाग गए और सात फेरे ले लिए. प्यार के चलते सास और दामाद की जोड़ी पति-पत्नी की जोड़ी में तब्दील हो गई. इस घटना की जानकारी जब लोगों को लगी तो इस ख़बर ने हर किसी के होश उड़ा दिए. सास और दामाद के भागने की खबर घटना संबंधित क्षेत्र में आग की तरह फ़ैल गई. इस घटना पर महिला के पति और उसकी बेटी ने भी ख़ूब आपत्ति जताई. जब इस हैरान करने वाली मामले के बारे में लोगों को ख़बर लगी तो फिर पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई. पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए सास और दामाद को हिरासत में लेकर शांतिभंग में चालान कर दिया. यह मामला मुजफ्फरपुर जिले के भौराकलां थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा हुआ है. यहां की एक महिला को अपनी बेटी के पति से ही प्यार हो गया. वहीं शख़्स भी अपनी पत्नी के होते हुए अपनी सास पर दिल हार बैठा. सास और दामाद एक होने के लिए 10 माह पहले घर से भाग गए थे. लेकिन परिजनों ने दोनों को लेकर कोई शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी. लेकिन 10 माह बाद दोनों कोर्ट मैरिज करके घर वापस लौट आए थे. घर पहुंचने पर महिला की बेटी ने हंगामा खड़ा कर दिया. सूचना मिलते ही पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया. सास और दामाद दोनों ही पुलिस के सामने ही साथ जीने मरने की कसमें खाने लगे. जब मामला बढ़ने लगा और हाईवोल्टेज ड्रामा होने लगा तो पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और दोनों के ख़िलाफ़ शांति भंग में चालान कर दिया. गांव में अब यह मामला ख़ूब सुर्ख़ियों में है. इस तरह की अजीब घटना गांव के साथ ही आस पास के क्षेत्र में भी जोर शोर से चर्चा का विषय बनी हुई है. इसके चलते परिजनों ने महिला और युवक से दूरी बना ली है. परिवार में दोनों को लेकर आक्रोश का माहौल है.
प्यार न जाति देखता है, न धर्म देखता है, न रिश्ते देखता है, न उम्र देखता है, न शोहरत देखता है और न ही दौलत देखता है. प्यार तो किसी को भी किसी से भी, कहीं भी, कभी भी हो जाता है. प्यार की गहराइयों में उतरकर इंसान अपने रिश्तों की भी बलि चढ़ा देता है. अक्सर कई ऐसी हैरान करने वाली घटनाएं सुनने और देखने को मिलती है जिन पर एक पल के लिए तो विश्वास तक करना मुश्किल हो जाता है. हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर से प्रेम प्रसंग का एक अनूठा मामला सामने आया है जहां पचास साल की एक सास को अपने पच्चीस साल के दामाद से ही प्यार हो गया. वहीं जवान दामाद भी अपनी बूढ़ी सास के प्रेम में कैद हो गया. यहां तक कि सास और दामाद की जोड़ी ने साथ जीने मरने की कसमें भी खा ली. कहते हैं कि प्यार के आगे हर रिश्ता और हर बंधन दम तोड़ देता है. बिहार के मुजफ्फरपुर में भी एक सास और दामाद की जोड़ी ने ऐसा ही कर दिखाया. बताया जाता है कि, दोनों एक दूसरे के प्यार में इस कदर खोए कि दोनों घर से भाग गए और सात फेरे ले लिए. प्यार के चलते सास और दामाद की जोड़ी पति-पत्नी की जोड़ी में तब्दील हो गई. इस घटना की जानकारी जब लोगों को लगी तो इस ख़बर ने हर किसी के होश उड़ा दिए. सास और दामाद के भागने की खबर घटना संबंधित क्षेत्र में आग की तरह फ़ैल गई. इस घटना पर महिला के पति और उसकी बेटी ने भी ख़ूब आपत्ति जताई. जब इस हैरान करने वाली मामले के बारे में लोगों को ख़बर लगी तो फिर पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई. पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए सास और दामाद को हिरासत में लेकर शांतिभंग में चालान कर दिया. यह मामला मुजफ्फरपुर जिले के भौराकलां थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा हुआ है. यहां की एक महिला को अपनी बेटी के पति से ही प्यार हो गया. वहीं शख़्स भी अपनी पत्नी के होते हुए अपनी सास पर दिल हार बैठा. सास और दामाद एक होने के लिए दस माह पहले घर से भाग गए थे. लेकिन परिजनों ने दोनों को लेकर कोई शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी. लेकिन दस माह बाद दोनों कोर्ट मैरिज करके घर वापस लौट आए थे. घर पहुंचने पर महिला की बेटी ने हंगामा खड़ा कर दिया. सूचना मिलते ही पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया. सास और दामाद दोनों ही पुलिस के सामने ही साथ जीने मरने की कसमें खाने लगे. जब मामला बढ़ने लगा और हाईवोल्टेज ड्रामा होने लगा तो पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और दोनों के ख़िलाफ़ शांति भंग में चालान कर दिया. गांव में अब यह मामला ख़ूब सुर्ख़ियों में है. इस तरह की अजीब घटना गांव के साथ ही आस पास के क्षेत्र में भी जोर शोर से चर्चा का विषय बनी हुई है. इसके चलते परिजनों ने महिला और युवक से दूरी बना ली है. परिवार में दोनों को लेकर आक्रोश का माहौल है.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एक पौधे का तना पौधे का वह भाग जो भुमि के ऊपर भ्रूण के प्रांकुर से विकसित होकर पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण के विपरीत प्रकाश की ओर बढ़ता है, तना कहलाता है। इससे शाखाएँ, पत्ते, फूल और फल उत्पन्न होते हैं। . अलोए हेरेरोएन्सिस,पुष्पक्रम डंठल के साथ दिखाई जा रही हैं। एक संग्रह या फूलों का एकत्रीकरण फूलों की पुष्पक्रम के रूप में जाना जाता है। वनस्पति पत्तियों द्वारा निर्धारित सीमाओं। आकृति विज्ञान के अनुसार, यह बीज की शूटिंग का हिस्सा पौधों जहाँ फूल बनते हैं और जो उसके अनुसार संशोधित किया गया है। पुष्पक्रम एक संयंत्र है कि फूलों के एक कुंज में एक विशिष्ट स्वरूप भालू का प्रजनन भाग के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। पूरे पुष्पक्रम कहा जाता है एक डंठल और प्रमुख तना(गलत तरीके से मुख्य स्तंभ के रूप में संदर्भित) धुरी धारण धारण तना फूल या अधिक शाखाओं पुष्पक्रम के भीतर कहा जाता है पुष्पक्रम। प्रत्येक एकल फूल के डंठल एक डंडी कहा जाता है। एक फूल कि एक उन्नति का हिस्सा नहीं है तो एक एकान्त फूल कहा जाता है और इसके तना भी करने के लिए एक डंठल के रूप में संदर्भित किया जाता है। एक पुष्पक्रम में किसी भी फूल के रूप में एक पुष् भेजा जा सकता है। उन्नति, सरल (एकल) या जटिल (पुष्पगुच्छ) हो सकता है। पुष्पक्रम एक एकल, मिश्रित, अंबल, स्पाइक या रेसीम सहित कई प्रकार का हो सकता है। . तना और पुष्पक्रम आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): पुष्प। flower bouquet) पर चित्रकारी रेशम पर स्याही और रंग, १२ वीं शताब्दी की अंत-अंत में और १३ वीं शताब्दी के प्रारम्भ में. पुष्प, अथवा फूल, जनन संरचना है जो पौधों में पाए जाते हैं। ये (मेग्नोलियोफाईटा प्रकार के पौधों में पाए जाते हैं, जिसे एग्नियो शुक्राणु भी कहा जाता है। एक फूल की जैविक क्रिया यह है कि वह पुरूष शुक्राणु और मादा बीजाणु के संघ के लिए मध्यस्तता करे। प्रक्रिया परागन से शुरू होती है, जिसका अनुसरण गर्भधारण से होता है, जो की बीज के निर्माण और विखराव/ विसर्जन में ख़त्म होता है। बड़े पौधों के लिए, बीज अगली पुश्त के मूल रूप में सेवा करते हैं, जिनसे एक प्रकार की विशेष प्रजाति दुसरे भूभागों में विसर्जित होती हैं। एक पौधे पर फूलों के जमाव को पुष्पण (inflorescence) कहा जाता है। फूल-पौधों के प्रजनन अवयव के साथ-साथ, फूलों को इंसानों/मनुष्यों ने सराहा है और इस्तेमाल भी किया है, खासकर अपने माहोल को सजाने के लिए और खाद्य के स्रोत के रूप में भी। . तना 5 संबंध है और पुष्पक्रम 10 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 6.67% है = 1 / (5 + 10)। यह लेख तना और पुष्पक्रम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। एक पौधे का तना पौधे का वह भाग जो भुमि के ऊपर भ्रूण के प्रांकुर से विकसित होकर पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण के विपरीत प्रकाश की ओर बढ़ता है, तना कहलाता है। इससे शाखाएँ, पत्ते, फूल और फल उत्पन्न होते हैं। . अलोए हेरेरोएन्सिस,पुष्पक्रम डंठल के साथ दिखाई जा रही हैं। एक संग्रह या फूलों का एकत्रीकरण फूलों की पुष्पक्रम के रूप में जाना जाता है। वनस्पति पत्तियों द्वारा निर्धारित सीमाओं। आकृति विज्ञान के अनुसार, यह बीज की शूटिंग का हिस्सा पौधों जहाँ फूल बनते हैं और जो उसके अनुसार संशोधित किया गया है। पुष्पक्रम एक संयंत्र है कि फूलों के एक कुंज में एक विशिष्ट स्वरूप भालू का प्रजनन भाग के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। पूरे पुष्पक्रम कहा जाता है एक डंठल और प्रमुख तना धुरी धारण धारण तना फूल या अधिक शाखाओं पुष्पक्रम के भीतर कहा जाता है पुष्पक्रम। प्रत्येक एकल फूल के डंठल एक डंडी कहा जाता है। एक फूल कि एक उन्नति का हिस्सा नहीं है तो एक एकान्त फूल कहा जाता है और इसके तना भी करने के लिए एक डंठल के रूप में संदर्भित किया जाता है। एक पुष्पक्रम में किसी भी फूल के रूप में एक पुष् भेजा जा सकता है। उन्नति, सरल या जटिल हो सकता है। पुष्पक्रम एक एकल, मिश्रित, अंबल, स्पाइक या रेसीम सहित कई प्रकार का हो सकता है। . तना और पुष्पक्रम आम में एक बात है : पुष्प। flower bouquet) पर चित्रकारी रेशम पर स्याही और रंग, बारह वीं शताब्दी की अंत-अंत में और तेरह वीं शताब्दी के प्रारम्भ में. पुष्प, अथवा फूल, जनन संरचना है जो पौधों में पाए जाते हैं। ये कहा जाता है। फूल-पौधों के प्रजनन अवयव के साथ-साथ, फूलों को इंसानों/मनुष्यों ने सराहा है और इस्तेमाल भी किया है, खासकर अपने माहोल को सजाने के लिए और खाद्य के स्रोत के रूप में भी। . तना पाँच संबंध है और पुष्पक्रम दस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक छः.सरसठ% है = एक / । यह लेख तना और पुष्पक्रम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्ली. आईपीएल 2021 से पहले ही रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (Royal Challengers Bangalore) को बड़ा झटका लगा है. बिग बैश लीग में बेस्ट खिलाड़ी का अवॉर्ड जीतने वाले जोश फिलीपी (Josh Philippe) ने आईपीएल से नाम वापस ले लिया है. दाएं हाथ के इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने टूर्नामेंट से क्यों हटने का फैसला किया इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है. (फोटो-जोश फिलीपी इंस्टाग्राम) जोश फिलीपी की जगह बैंगलोर ने न्यूजीलैंड के खिलाड़ी फिन एलेन (Finn Allen) को अपनी टीम में शामिल किया है. फिल एलेन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और उन्हें 20 लाख रुपये के बेस प्राइस पर बैंगलोर ने अपने स्क्वाड में जगह दी है. (फोटो-फिन एलेन इंस्टाग्राम) जोश फिलीपी ने आईपीएल 2020 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए डेब्यू किया था. हालांकि वो कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे और उनके बल्ले से 78 रन ही निकले थे. (फोटो-जोश फिलीपी इंस्टाग्राम) दाएं हाथ के फिन एलेन को उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. ऑकलैंड के लिए खेलने वाले फिन ने 13 टी20 मैचों में 48 से ज्यादा की औसत से 537 रन बनाए हैं. उनका स्ट्राइक रेट भी 180 से ज्यादा का है. (फोटो-फिन एलेन इंस्टाग्राम) Royal Challengers Bangalore Full Squad: विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, युजवेंद्र चहल, देवदत्त पडिक्कल, वाशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, एडम जम्पा, शहबाज अहमद, फिन एलेन, केन रिचर्डसन, पवन देशपांडे. ग्लेन मैक्सवेल, सचिन बेबी, रजत पाटीदार,मोहम्मद अजहरुद्दीन, कायल जेमिसन, डेनियल क्रिस्टियन, सुयश प्रभुदेसाई, केएस भरत. (फोटो-विराट कोहली इंस्टाग्राम) 237 से ज्यादा फिल्में, 93 रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर? नई दिल्ली. आईपीएल 2021 से पहले ही रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (Royal Challengers Bangalore) को बड़ा झटका लगा है. बिग बैश लीग में बेस्ट खिलाड़ी का अवॉर्ड जीतने वाले जोश फिलीपी (Josh Philippe) ने आईपीएल से नाम वापस ले लिया है. दाएं हाथ के इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने टूर्नामेंट से क्यों हटने का फैसला किया इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है. (फोटो-जोश फिलीपी इंस्टाग्राम)
नई दिल्ली. आईपीएल दो हज़ार इक्कीस से पहले ही रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को बड़ा झटका लगा है. बिग बैश लीग में बेस्ट खिलाड़ी का अवॉर्ड जीतने वाले जोश फिलीपी ने आईपीएल से नाम वापस ले लिया है. दाएं हाथ के इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने टूर्नामेंट से क्यों हटने का फैसला किया इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है. जोश फिलीपी की जगह बैंगलोर ने न्यूजीलैंड के खिलाड़ी फिन एलेन को अपनी टीम में शामिल किया है. फिल एलेन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और उन्हें बीस लाख रुपये के बेस प्राइस पर बैंगलोर ने अपने स्क्वाड में जगह दी है. जोश फिलीपी ने आईपीएल दो हज़ार बीस में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए डेब्यू किया था. हालांकि वो कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे और उनके बल्ले से अठहत्तर रन ही निकले थे. दाएं हाथ के फिन एलेन को उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है. ऑकलैंड के लिए खेलने वाले फिन ने तेरह टीबीस मैचों में अड़तालीस से ज्यादा की औसत से पाँच सौ सैंतीस रन बनाए हैं. उनका स्ट्राइक रेट भी एक सौ अस्सी से ज्यादा का है. Royal Challengers Bangalore Full Squad: विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, युजवेंद्र चहल, देवदत्त पडिक्कल, वाशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी, एडम जम्पा, शहबाज अहमद, फिन एलेन, केन रिचर्डसन, पवन देशपांडे. ग्लेन मैक्सवेल, सचिन बेबी, रजत पाटीदार,मोहम्मद अजहरुद्दीन, कायल जेमिसन, डेनियल क्रिस्टियन, सुयश प्रभुदेसाई, केएस भरत. दो सौ सैंतीस से ज्यादा फिल्में, तिरानवे रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर? नई दिल्ली. आईपीएल दो हज़ार इक्कीस से पहले ही रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को बड़ा झटका लगा है. बिग बैश लीग में बेस्ट खिलाड़ी का अवॉर्ड जीतने वाले जोश फिलीपी ने आईपीएल से नाम वापस ले लिया है. दाएं हाथ के इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने टूर्नामेंट से क्यों हटने का फैसला किया इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है.
सहारनपुर (भाषा)। बसपा सुप्रीमों मायावती ने आज यहां कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता को प्रलोभन झूठे वादे करके गुमराह किया था। मायावती ने चुनावी रैली में कहा कि विदेशों से कालाधन वापस लाकर हर गरीब के खाते में 15 रुपए डालने का वादा किया और कर्ज में डूबे किसान के कर्ज माफी का प्रलोभन दिया था जिसे देश प्रदेश की जनता समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि मीडिया एक्जिट पोल और सर्वे में भले ही बसपा की ताकत को कम आंका जा रहा है लेकिन बसपा अपने बलबूते पर उतर प्रदेश में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने देश के आम नागरिक की कमर तोड़ने का काम किया है। क्या मोदी बता सकते है कि नोटबंदी से कितना कालाधन इकट्ठा हुआ है और काले धन को लेकर कितने लोगों को सजा दी गई है। अपने चुनावी वादों से जनता का ध्यान बटाने के लिये ही नोटबंदी का खेल खेला गया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि नरेन्द्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अब तक कोई बड़ा काम नहीं कर पाये है। उनके पूजीपति मित्र पहले से ज्यादा मालामाल हो गये है। मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश मे मजहबी माहौल बना रही है। आतंकवाद के नाम पर अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है। यदि किसी तरह उतर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो आरएसएस के एजेन्डे के मुताबिक आरक्षण को समाप्त करने या उसे निष्प्रभावी बनाने का काम किया जायेगा, जबकि बसपा की सरकार बनने पर अल्पसंख्यकों को अलग से आरक्षण दिलाने का काम किया जायेगा। सपा को आड़े हाथ लेते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश मे कानून व्यवस्था की सच्चाई बताने को मुजफरनगर, दादरी और बुलदंशहर कांड ही काफी है। सपा के गुण्डाराज से प्रदेश की जनता त्रस्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बसपा की सरकार बनने पर बेरोजगार युवकों को लैपटॉप नहीं बल्कि उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी, गरीबों के पट्टे कब्जामुक्त होंगे, माफियाओ को जेल भेजा जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि इस बार सरकार बनने पर कोई संग्रहालय मूर्ति, स्मारक नहीं बनाया जायेगा। अब केवल उतर प्रदेश की जनता के उत्थान और विकास का कार्य किया जायेगा।
सहारनपुर । बसपा सुप्रीमों मायावती ने आज यहां कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता को प्रलोभन झूठे वादे करके गुमराह किया था। मायावती ने चुनावी रैली में कहा कि विदेशों से कालाधन वापस लाकर हर गरीब के खाते में पंद्रह रुपयापए डालने का वादा किया और कर्ज में डूबे किसान के कर्ज माफी का प्रलोभन दिया था जिसे देश प्रदेश की जनता समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि मीडिया एक्जिट पोल और सर्वे में भले ही बसपा की ताकत को कम आंका जा रहा है लेकिन बसपा अपने बलबूते पर उतर प्रदेश में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने देश के आम नागरिक की कमर तोड़ने का काम किया है। क्या मोदी बता सकते है कि नोटबंदी से कितना कालाधन इकट्ठा हुआ है और काले धन को लेकर कितने लोगों को सजा दी गई है। अपने चुनावी वादों से जनता का ध्यान बटाने के लिये ही नोटबंदी का खेल खेला गया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि नरेन्द्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अब तक कोई बड़ा काम नहीं कर पाये है। उनके पूजीपति मित्र पहले से ज्यादा मालामाल हो गये है। मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश मे मजहबी माहौल बना रही है। आतंकवाद के नाम पर अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है। यदि किसी तरह उतर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो आरएसएस के एजेन्डे के मुताबिक आरक्षण को समाप्त करने या उसे निष्प्रभावी बनाने का काम किया जायेगा, जबकि बसपा की सरकार बनने पर अल्पसंख्यकों को अलग से आरक्षण दिलाने का काम किया जायेगा। सपा को आड़े हाथ लेते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश मे कानून व्यवस्था की सच्चाई बताने को मुजफरनगर, दादरी और बुलदंशहर कांड ही काफी है। सपा के गुण्डाराज से प्रदेश की जनता त्रस्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बसपा की सरकार बनने पर बेरोजगार युवकों को लैपटॉप नहीं बल्कि उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी, गरीबों के पट्टे कब्जामुक्त होंगे, माफियाओ को जेल भेजा जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि इस बार सरकार बनने पर कोई संग्रहालय मूर्ति, स्मारक नहीं बनाया जायेगा। अब केवल उतर प्रदेश की जनता के उत्थान और विकास का कार्य किया जायेगा।
Sonbhadra News: ओबरा सी बिजली परियोजना का निर्माण करा रही 'दुसान' कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित छह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। Sonbhadra News: ओबरा सी बिजली परियोजना का निर्माण करा रही 'दुसान' कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित छह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। ओबरा में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में दिए गए शिकायती पत्र के क्रम में ओबरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एसपी की तरफ से दिए गए निर्देश पर, एफआईआर दर्ज करने के साथ ही प्रकरण की छानबीन भी शुरू कर दी गई है। बभनी थाना क्षेत्र के टेकुआरी निवासी प्रदीप कुमार ने ओबरा तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने दुसान कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज को अपना ट्रैक्टर किराए पर दिया हुआ था। संबंधित फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजर आदि की मिलीभगत से उस ट्रैक्टर पर सरिया लादकर बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। तभी उसे पुलिस ने पकड़ कर सीज कर दिया। जानकारी होने पर जब उसने एतराज जताया तो फर्म के संचालन का काम देखने वाले सौरभ कुमार निवासी ओबरा ने ट्रैक्टर को छुड़वा लेने और किराया अनवरत अदा करते रहने का भरोसा दिया। लेकिन न तो ट्रैक्टर का किराया 3. 90 लाख अदा किया गया, न ही ट्रैक्टर को जमानत पर छुड़ाने का व्यय ही वहन किया गया। सौरभ और उनके सहयोगियों पर बड़े स्तर पर राजस्व चोरी का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि दुसान कंपनी में सौरभ कुमार S. K. P. L और पूजा इंटरप्राइजेज नामक दो फर्में काम कर रही हैं और दोनों के जरिए राजस्व चोरी का काम जारी है। मामले में पुलिस ने फर्म के संचालक सौरभ कुमार, साइड इंचार्ज जगन्नाथ, प्रोजेक्ट मैनेजर दिवाकर भारद्वाज, स्टोर इंचार्ज घनश्याम उपाध्याय, एचआर के दीपक सिंह और स्टोर कीपर रितेश कुमार यादव के खिलाफ धारा 406, 420 और 506 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक मामले की छानबीन की जा रही है। इस मामले में फर्म के संचालक सौरभ कुमार और प्रोजेक्ट मैनेजर दिवाकर भारद्वाज के सेलफोन पर कॉल कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन दोनों लोग उपलब्ध नहीं हुए।
Sonbhadra News: ओबरा सी बिजली परियोजना का निर्माण करा रही 'दुसान' कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित छह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। Sonbhadra News: ओबरा सी बिजली परियोजना का निर्माण करा रही 'दुसान' कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित छह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। ओबरा में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में दिए गए शिकायती पत्र के क्रम में ओबरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एसपी की तरफ से दिए गए निर्देश पर, एफआईआर दर्ज करने के साथ ही प्रकरण की छानबीन भी शुरू कर दी गई है। बभनी थाना क्षेत्र के टेकुआरी निवासी प्रदीप कुमार ने ओबरा तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने दुसान कंपनी से जुड़ी फर्म मेसर्स पूजा इंटरप्राइजेज को अपना ट्रैक्टर किराए पर दिया हुआ था। संबंधित फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजर आदि की मिलीभगत से उस ट्रैक्टर पर सरिया लादकर बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। तभी उसे पुलिस ने पकड़ कर सीज कर दिया। जानकारी होने पर जब उसने एतराज जताया तो फर्म के संचालन का काम देखने वाले सौरभ कुमार निवासी ओबरा ने ट्रैक्टर को छुड़वा लेने और किराया अनवरत अदा करते रहने का भरोसा दिया। लेकिन न तो ट्रैक्टर का किराया तीन. नब्बे लाख अदा किया गया, न ही ट्रैक्टर को जमानत पर छुड़ाने का व्यय ही वहन किया गया। सौरभ और उनके सहयोगियों पर बड़े स्तर पर राजस्व चोरी का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि दुसान कंपनी में सौरभ कुमार S. K. P. L और पूजा इंटरप्राइजेज नामक दो फर्में काम कर रही हैं और दोनों के जरिए राजस्व चोरी का काम जारी है। मामले में पुलिस ने फर्म के संचालक सौरभ कुमार, साइड इंचार्ज जगन्नाथ, प्रोजेक्ट मैनेजर दिवाकर भारद्वाज, स्टोर इंचार्ज घनश्याम उपाध्याय, एचआर के दीपक सिंह और स्टोर कीपर रितेश कुमार यादव के खिलाफ धारा चार सौ छः, चार सौ बीस और पाँच सौ छः आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक मामले की छानबीन की जा रही है। इस मामले में फर्म के संचालक सौरभ कुमार और प्रोजेक्ट मैनेजर दिवाकर भारद्वाज के सेलफोन पर कॉल कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन दोनों लोग उपलब्ध नहीं हुए।
नई दिल्ली। सैफ अंडर-18 चैम्पियनशिप के फाइनल मुकाबले में रविवार को भारतीय फुटबाल टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और बांग्लादेश की टीम को हराकर पहली बार सैफ अंडर-18 चैम्पियनशिप का खिताब जीतने में कामयाब रही। रविवार को हुए इस फाइनल में बेहद रोमांच मैच में भारत ने बांग्लादेश को 2-1 से हराया। अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के अनुसार, इस महत्वपूर्ण मैच में भारत के लिए विक्रम प्रताप सिंह और रवि बहादुर राणा ने गोल किए। भारत ने इस आयु वर्ग में पहली बार सैफ चैम्पियनशिप खिताब जीता है। भारतीय टीम ने मैच की शुरुआत दमदार तरीके से करते हुए मैच के दूसरे मिनट में ही पहला गोल कर दिया। इस गोल के लिए टीम ने बेहतरीन मूव बनाया और विक्रम सिंह ने शानदार गोल करते हुए अपनी टीम को बढ़त दिला दी। शुरुआत में ही पिछड़ने के बाद भी बांग्लादेश की टीम ने हार नहीं मानी और वापसी के प्रयास जारी रखे। मैच के 22वें मिनट में भारत के गुरकीरत सिंह और विपक्षी टीम के मोहम्मद फाहीम को रेड कार्ड मिला। मैच 40वें मिनट में बांग्लादेश को सफलता मिली और यासीन अराफात ने अपनी टीम के लिए बराबरी का गोल किया। गोल के बाद आक्रामक सेलिब्रेशन के कारण अराफात को भी रेड कार्ड दिखाया गया और बांग्लादेश को बाकी का मैच नौ खिलाड़ियों से खेलना पड़ा। दूसरा हाफ दमदार रहा और दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। एक समय ऐसा लगा कि मुकाबला अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन इंजुरी टाइम (91वें मिनट) में रवि ने 30 गज की दूरी से गोल करते हुए भारत को रोमांचक जीत दिला दी। एन. मेतेई को टूर्नामेंट का सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी चुना गया।
नई दिल्ली। सैफ अंडर-अट्ठारह चैम्पियनशिप के फाइनल मुकाबले में रविवार को भारतीय फुटबाल टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और बांग्लादेश की टीम को हराकर पहली बार सैफ अंडर-अट्ठारह चैम्पियनशिप का खिताब जीतने में कामयाब रही। रविवार को हुए इस फाइनल में बेहद रोमांच मैच में भारत ने बांग्लादेश को दो-एक से हराया। अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के अनुसार, इस महत्वपूर्ण मैच में भारत के लिए विक्रम प्रताप सिंह और रवि बहादुर राणा ने गोल किए। भारत ने इस आयु वर्ग में पहली बार सैफ चैम्पियनशिप खिताब जीता है। भारतीय टीम ने मैच की शुरुआत दमदार तरीके से करते हुए मैच के दूसरे मिनट में ही पहला गोल कर दिया। इस गोल के लिए टीम ने बेहतरीन मूव बनाया और विक्रम सिंह ने शानदार गोल करते हुए अपनी टीम को बढ़त दिला दी। शुरुआत में ही पिछड़ने के बाद भी बांग्लादेश की टीम ने हार नहीं मानी और वापसी के प्रयास जारी रखे। मैच के बाईसवें मिनट में भारत के गुरकीरत सिंह और विपक्षी टीम के मोहम्मद फाहीम को रेड कार्ड मिला। मैच चालीसवें मिनट में बांग्लादेश को सफलता मिली और यासीन अराफात ने अपनी टीम के लिए बराबरी का गोल किया। गोल के बाद आक्रामक सेलिब्रेशन के कारण अराफात को भी रेड कार्ड दिखाया गया और बांग्लादेश को बाकी का मैच नौ खिलाड़ियों से खेलना पड़ा। दूसरा हाफ दमदार रहा और दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। एक समय ऐसा लगा कि मुकाबला अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन इंजुरी टाइम में रवि ने तीस गज की दूरी से गोल करते हुए भारत को रोमांचक जीत दिला दी। एन. मेतेई को टूर्नामेंट का सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी चुना गया।
तान्कथमपि रसातलनिवासी वासुकिर्नाम विषमुचामीशः । स च तैर्मुकाफलैः पातालतलेऽपि तारागणमिव दर्शयद्भिरेकावलीमकल्पयत् । चकार च मन्दाकिनीति नाम तस्याः । सा च भगवतः सोमस्य सर्वासामोष धीनामधिपतेः प्रभावादत्यन्तविषघ्नी हिमामृतसंभवत्वाच स्पर्शेन सर्वस स्त्रसंतापहारिणी बभूव । यतः स तां सर्वदा विषोष्मशान्तये वासुकिः पर्यघत्त । समतिकामति च कियत्यपि काले कदाचिन्ना मैकावलीं तस्माभागराजाभागार्जुनो नाम नागैरेवानीतः पातालतलं भिक्षुरभिक्षत लेभे च । निर्गत्य च रसातलान्त्रिसमुद्राधिपतये सातवाहननाम्ने नरेन्द्राय सुहृदे स ददौ ताम । सा चास्माकं कालेन शिष्यपरम्परया कथमपि हस्तमुपगता । यद्यपि च परिभव इव भवति भवादृशां दन्त्रिम उपचारस्तथाप्योषधिबुद्धया बुद्धिमता सर्वसत्त्वराशिरक्षाप्रवृत्तेन रक्षणीयशरीरेणायुष्मता विषरक्षापेक्षया गृह्यताम' इत्यभिधाय भिक्षोरभ्याशवर्तिनश्चीवरपटान्तसं यतां मुमोच तामेकावलीं मन्दाकिनीम् । उन्मुच्यमानाया एव यस्याः प्रभालेपिनि लब्धावकाशे त्रिशदमहसि दानेन निर्वृत्तो दत्रिमः । अभ्याशो निकटः । रहने वाले नागराज वासुकि के हाथ लगे। उसने उन मुक्तफलों को गूँध कर एककड़ी माला बनाई, जिसका नाम मन्दाकिनी रखा। वह एकलड़ी माला समस्त औषधियों के अधिपति भगवान् चन्द्रमा के प्रभाव से अत्यन्त विषनी है और हिमरूपी अमृत से उत्पन्न होने के कारण समस्त प्राणियों की सन्तापहारिणी है। इसकिये विषज्वालाओं को शान्त रखने के लिए वासुकि सदा उसे पहने रहता है। कुछ समय के बाद कभी नागों से ही पाताल में काये गये नागार्जुन नाम के किसी मिक्षु ने वासुकि से उस माला को माँगकर प्राप्त कर लिया। पाताल से निकल कर नागार्जुन ने तीन समुद्रों के अधिपति अपने मित्र सातबाइन नाम के राजा को वह एकावली माला प्रदान की और वही माला किसी प्रकार शिष्यपरम्परा द्वारा हमारे हाथ आई। यद्यपि आपको किसी वस्तु का देना अपमान है तथापि औषधि समझकर विष से अपनो रक्षा के लिए आप कृपया इसे स्वीकार करें।" यह कहकर उन्होंने शिष्य के चीवर बसों में के कर वह मन्दाकिनी राजा को दी। निकालते ही उस माछा की उज्ज्वल किरणे अवकाश पाकर फैल गयीं। उसके प्रकाश
तान्कथमपि रसातलनिवासी वासुकिर्नाम विषमुचामीशः । स च तैर्मुकाफलैः पातालतलेऽपि तारागणमिव दर्शयद्भिरेकावलीमकल्पयत् । चकार च मन्दाकिनीति नाम तस्याः । सा च भगवतः सोमस्य सर्वासामोष धीनामधिपतेः प्रभावादत्यन्तविषघ्नी हिमामृतसंभवत्वाच स्पर्शेन सर्वस स्त्रसंतापहारिणी बभूव । यतः स तां सर्वदा विषोष्मशान्तये वासुकिः पर्यघत्त । समतिकामति च कियत्यपि काले कदाचिन्ना मैकावलीं तस्माभागराजाभागार्जुनो नाम नागैरेवानीतः पातालतलं भिक्षुरभिक्षत लेभे च । निर्गत्य च रसातलान्त्रिसमुद्राधिपतये सातवाहननाम्ने नरेन्द्राय सुहृदे स ददौ ताम । सा चास्माकं कालेन शिष्यपरम्परया कथमपि हस्तमुपगता । यद्यपि च परिभव इव भवति भवादृशां दन्त्रिम उपचारस्तथाप्योषधिबुद्धया बुद्धिमता सर्वसत्त्वराशिरक्षाप्रवृत्तेन रक्षणीयशरीरेणायुष्मता विषरक्षापेक्षया गृह्यताम' इत्यभिधाय भिक्षोरभ्याशवर्तिनश्चीवरपटान्तसं यतां मुमोच तामेकावलीं मन्दाकिनीम् । उन्मुच्यमानाया एव यस्याः प्रभालेपिनि लब्धावकाशे त्रिशदमहसि दानेन निर्वृत्तो दत्रिमः । अभ्याशो निकटः । रहने वाले नागराज वासुकि के हाथ लगे। उसने उन मुक्तफलों को गूँध कर एककड़ी माला बनाई, जिसका नाम मन्दाकिनी रखा। वह एकलड़ी माला समस्त औषधियों के अधिपति भगवान् चन्द्रमा के प्रभाव से अत्यन्त विषनी है और हिमरूपी अमृत से उत्पन्न होने के कारण समस्त प्राणियों की सन्तापहारिणी है। इसकिये विषज्वालाओं को शान्त रखने के लिए वासुकि सदा उसे पहने रहता है। कुछ समय के बाद कभी नागों से ही पाताल में काये गये नागार्जुन नाम के किसी मिक्षु ने वासुकि से उस माला को माँगकर प्राप्त कर लिया। पाताल से निकल कर नागार्जुन ने तीन समुद्रों के अधिपति अपने मित्र सातबाइन नाम के राजा को वह एकावली माला प्रदान की और वही माला किसी प्रकार शिष्यपरम्परा द्वारा हमारे हाथ आई। यद्यपि आपको किसी वस्तु का देना अपमान है तथापि औषधि समझकर विष से अपनो रक्षा के लिए आप कृपया इसे स्वीकार करें।" यह कहकर उन्होंने शिष्य के चीवर बसों में के कर वह मन्दाकिनी राजा को दी। निकालते ही उस माछा की उज्ज्वल किरणे अवकाश पाकर फैल गयीं। उसके प्रकाश
दतिया - (ईपत्रकार. कॉम) ।कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में राजस्व न्यायालय शिविर लगाये गए। शिविरों में संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार द्वारा अपने अमले व कागजात के साथ जाकर न्यायालीयन प्रक्रिया सम्पन्न की और लोगों के प्रकरण मौके पर ही निराकरण किए। जिन प्रकरणों में समय-सीमा दी जाना थी उन्हें दर्ज कर आगामी तारीख दी गई। जिन तहसीलदार, नायब तहसीलदारों द्वारा मौके पर जाकर शिविर लगाये गए उनमें तहसीलदार श्री अशोक अवस्थी द्वारा ग्राम बरजोरपुरा, लोधीपुरा, खैरोनाघाट में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 34 आवेदन प्राप्त हुए। तहसीलदार श्री सत्येन्द्र गुर्जर द्वारा बस्तूरी, ईगुई और मेवली में शिविर का आयोजन किया गया। नायब तहसीलदार श्री एमएल शर्मा द्वारा ग्राम चंद्रोल और धर्मपुरा में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें कुल 22 आवेदन पत्र हुए और 4 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया शेष में समय सीमा दी गई। नायब तहसीदलार श्री भगवती शरण शिल्पकार द्वारा ग्राम मेवली में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 27 आवेदन प्राप्त हुए और 22 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया पांच आवेदन फाँलोअप में लिए गए। नायब तहसीलदार श्री अनिरूद्ध श्रीवास्तव द्वारा ग्राम रिछारी में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 50 आवेदन प्राप्त हुए। नायब तहसीलदार श्री ओपी तिवारी द्वारा ग्राम गुलमऊ में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें कुल 32 आवेदन आए। इसी प्रकार अन्य ग्रामों में राजस्व न्यायालय शिविर का आयोजन किया गया और प्राप्त हुए आवेदनों का निराकरण किया गया।
दतिया - ।कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में राजस्व न्यायालय शिविर लगाये गए। शिविरों में संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार द्वारा अपने अमले व कागजात के साथ जाकर न्यायालीयन प्रक्रिया सम्पन्न की और लोगों के प्रकरण मौके पर ही निराकरण किए। जिन प्रकरणों में समय-सीमा दी जाना थी उन्हें दर्ज कर आगामी तारीख दी गई। जिन तहसीलदार, नायब तहसीलदारों द्वारा मौके पर जाकर शिविर लगाये गए उनमें तहसीलदार श्री अशोक अवस्थी द्वारा ग्राम बरजोरपुरा, लोधीपुरा, खैरोनाघाट में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें चौंतीस आवेदन प्राप्त हुए। तहसीलदार श्री सत्येन्द्र गुर्जर द्वारा बस्तूरी, ईगुई और मेवली में शिविर का आयोजन किया गया। नायब तहसीलदार श्री एमएल शर्मा द्वारा ग्राम चंद्रोल और धर्मपुरा में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें कुल बाईस आवेदन पत्र हुए और चार आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया शेष में समय सीमा दी गई। नायब तहसीदलार श्री भगवती शरण शिल्पकार द्वारा ग्राम मेवली में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें सत्ताईस आवेदन प्राप्त हुए और बाईस आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया पांच आवेदन फाँलोअप में लिए गए। नायब तहसीलदार श्री अनिरूद्ध श्रीवास्तव द्वारा ग्राम रिछारी में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें पचास आवेदन प्राप्त हुए। नायब तहसीलदार श्री ओपी तिवारी द्वारा ग्राम गुलमऊ में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें कुल बत्तीस आवेदन आए। इसी प्रकार अन्य ग्रामों में राजस्व न्यायालय शिविर का आयोजन किया गया और प्राप्त हुए आवेदनों का निराकरण किया गया।
भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के हेड राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) को कोच बनाए जाने में बीसीसीआई अध्यक्ष और उनके साथी खिलाड़ी रह चुके सौरव गांगुली (Saurav Ganguly) की काफी अहम् भूमिका रही थी. द्रविड़ को अगले 2 सालों के लिए भारतीय टीम का नया कोच बनाया गया. अब गांगुली (Saurav Ganguly)एक और भारतीय ,महान क्रिकेटर और क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को वापस भारतीय क्रिकेट टीम के साथ जोड़ने की तैयारी में हैं. T20 World cup 2021 के बाद भारतीय टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) का कार्यकाल समाप्त हो गया था. जिसके बाद द्रविड़ को ये जिम्मेदारी दी गयी . सचिन तेंदुलकर (Sachin tendulkar), सौरव गांगुली (Saurav Ganguly), राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) और वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाजी क्रम के फैब-4 का हिस्सा रह चुके हैं. ये चारो ही दिग्गज बल्लेबाज अब क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. हालाँकि द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण अभी भी भारतीय टीम से जुड़े हुए हैं. द्रविड़ टीम के हेड कोच के रूप में काम कर रहे हैं. गांगुली (Saurav Ganguly) बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर काबिज हैं. वही लक्ष्मण को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के हेड की जिम्मेदारी दी गयी हैं. अब फैव-4 का हिस्सा रहे चारो बल्लेबाजों में से केवल एक सचिन तेंदुलकर ही इंडियन क्रिकेट से दूर चल रहे हैं. और अगर वो भी किसी रोले में इससे जुड़ जाते हैं. तो वो केवल भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए ही नहीं बल्कि पुरे वर्ल्ड क्रिकेट के लिए काफी ख़ुशी की बात होगी. खेल पत्रकार बोरिया मजूमदार (Boria Majumder) के शो 'बैकस्टेज विद बोरिया' में सौरव गांगुली (Saurav Ganguly) ने सचिन तेंदुलकर (Sachin tendulkar) को इंडियन क्रिकेट से जोड़ने को लेकर कुछ बड़ी बाते कही. उन्होंने कहा, सचिन स्पष्ट रूप से थोड़ा अलग हैं. वह इन सब में शामिल नहीं होना चाहते हैं. मुझे यकीन है कि सचिन के भारतीय क्रिकेट में शामिल होने से बेहतर खबर नहीं हो सकती है. किस तरह ये होगा उस पर काम करने की जरूरत है. क्योंकि चारों ओर बहुत अधिक विवाद हैं. सही या गलत आप कुछ भी करो और कैसे भी करो. विवाद खिड़की के अंदर आ ही जाता है. आपको खेल में सबसे अच्छे टैलेंट को शामिल करने के सबसे अच्छे तरीके खोजने चाहिए और किसी स्टेज पर सचिन भी भारतीय क्रिकेट में शामिल होने का एक तरीका खोज लेंगे.
भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के हेड राहुल द्रविड़ को कोच बनाए जाने में बीसीसीआई अध्यक्ष और उनके साथी खिलाड़ी रह चुके सौरव गांगुली की काफी अहम् भूमिका रही थी. द्रविड़ को अगले दो सालों के लिए भारतीय टीम का नया कोच बनाया गया. अब गांगुली एक और भारतीय ,महान क्रिकेटर और क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को वापस भारतीय क्रिकेट टीम के साथ जोड़ने की तैयारी में हैं. Tबीस World cup दो हज़ार इक्कीस के बाद भारतीय टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल समाप्त हो गया था. जिसके बाद द्रविड़ को ये जिम्मेदारी दी गयी . सचिन तेंदुलकर , सौरव गांगुली , राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाजी क्रम के फैब-चार का हिस्सा रह चुके हैं. ये चारो ही दिग्गज बल्लेबाज अब क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. हालाँकि द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण अभी भी भारतीय टीम से जुड़े हुए हैं. द्रविड़ टीम के हेड कोच के रूप में काम कर रहे हैं. गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर काबिज हैं. वही लक्ष्मण को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के हेड की जिम्मेदारी दी गयी हैं. अब फैव-चार का हिस्सा रहे चारो बल्लेबाजों में से केवल एक सचिन तेंदुलकर ही इंडियन क्रिकेट से दूर चल रहे हैं. और अगर वो भी किसी रोले में इससे जुड़ जाते हैं. तो वो केवल भारतीय क्रिकेट फैन्स के लिए ही नहीं बल्कि पुरे वर्ल्ड क्रिकेट के लिए काफी ख़ुशी की बात होगी. खेल पत्रकार बोरिया मजूमदार के शो 'बैकस्टेज विद बोरिया' में सौरव गांगुली ने सचिन तेंदुलकर को इंडियन क्रिकेट से जोड़ने को लेकर कुछ बड़ी बाते कही. उन्होंने कहा, सचिन स्पष्ट रूप से थोड़ा अलग हैं. वह इन सब में शामिल नहीं होना चाहते हैं. मुझे यकीन है कि सचिन के भारतीय क्रिकेट में शामिल होने से बेहतर खबर नहीं हो सकती है. किस तरह ये होगा उस पर काम करने की जरूरत है. क्योंकि चारों ओर बहुत अधिक विवाद हैं. सही या गलत आप कुछ भी करो और कैसे भी करो. विवाद खिड़की के अंदर आ ही जाता है. आपको खेल में सबसे अच्छे टैलेंट को शामिल करने के सबसे अच्छे तरीके खोजने चाहिए और किसी स्टेज पर सचिन भी भारतीय क्रिकेट में शामिल होने का एक तरीका खोज लेंगे.
जींद के कालवन गांव के पास रेलवे ट्रैक पर 3 शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. तीनों मृतक दोस्त बताए जा रहे हैं. तीनों जींद के कालवन और फतेहाबाद के कन्हड़ी के निवासी थे. स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. मृतकों की पहचान नवीन गांव कालवन जींद, अशोक और मोनू गांव कन्हड़ी जिला फतेहाबाद के रूप में हुई है. ग्रामीण राजेश कुमार और होशियार सिंह ने बताया कि ये बच्चे घर से कुरुक्षेत्र के लिए जाने की बात कह कर निकले थे. इनका किसी से कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं था. सुबह फोन पर इसके बारे में सूचना मिली कि यह हादसा हो गया है. ये तीनों आपस में दोस्त थे और दसवीं व ग्याहरी कक्षा के विद्यार्थी थे. उनका यह भी कहना था कि इनका स्वभाव भी अच्छा था. इनकी मौत को लेकर उन्हें किसी पर कोई शक-शुबा नहीं है. वहीं जांच अधिकरी सतबीर ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी कि बुर्जी नं 186 के पास तीन लाशें मिली हैं जिसके बाद वो यहां पर पहुंचे. प्रथम दृष्टि में ये आत्महत्या का मामला लग रहा है. कार्यवाही जारी है परिवारवालों बयानों के आधार पर कार्यवाही की जाएगी. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
जींद के कालवन गांव के पास रेलवे ट्रैक पर तीन शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. तीनों मृतक दोस्त बताए जा रहे हैं. तीनों जींद के कालवन और फतेहाबाद के कन्हड़ी के निवासी थे. स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. मृतकों की पहचान नवीन गांव कालवन जींद, अशोक और मोनू गांव कन्हड़ी जिला फतेहाबाद के रूप में हुई है. ग्रामीण राजेश कुमार और होशियार सिंह ने बताया कि ये बच्चे घर से कुरुक्षेत्र के लिए जाने की बात कह कर निकले थे. इनका किसी से कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं था. सुबह फोन पर इसके बारे में सूचना मिली कि यह हादसा हो गया है. ये तीनों आपस में दोस्त थे और दसवीं व ग्याहरी कक्षा के विद्यार्थी थे. उनका यह भी कहना था कि इनका स्वभाव भी अच्छा था. इनकी मौत को लेकर उन्हें किसी पर कोई शक-शुबा नहीं है. वहीं जांच अधिकरी सतबीर ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी कि बुर्जी नं एक सौ छियासी के पास तीन लाशें मिली हैं जिसके बाद वो यहां पर पहुंचे. प्रथम दृष्टि में ये आत्महत्या का मामला लग रहा है. कार्यवाही जारी है परिवारवालों बयानों के आधार पर कार्यवाही की जाएगी. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
Gujarat Assembly Election 2022, Gujarat Exit Polls: गुजरात विधानसभा चुनाव का Exit Polls आ चुका है। इसमें बीजेपी की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है। बीजेपी के नेता गुजरात में सरकार बनने का दावा कर रहे हैं। 5 दिसंबर को आए Exit Polls में बीजेपी की प्रचंड वापसी का अनुमान जताया गया है। कुछ एक्जिट पोल में बीजेपी में बीजेपी के अधिकतम 148 से 151 सीटें जीतने का अनुमान जताया गया है। 15वें विधानसभा चुनाव में अगर बीजेपी को जीत मिलती है, जो राज्य में 7वीं बार बीजेपी की सरकार बनेगी। Gujarat Assembly Election 2022, Interesting facts: इन सबके बीच सबसे ज्यादा रोचक और दिलचस्प बात ये है कि क्या सीएम भूपेन्द्र पटेल PM नरेंद्र मोदी के 127 सीटें को क्रॉस कर आगे निकल पाएंगे? , कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी के 149 सीटों को कीर्तिमान को तोड़ पाएंगे? क्या कीर्तिमान रच पाएंगे? मामले में राजनीति के पंडितों का मानना है कि बीजेपी पुराना रिकॉर्ड ही दोहराएगी। उनके मुताबिक 100 के आसपास ही बीजेपी की सीटें रहेंगी। इसके पीछे की वजह कम वोटिंग और उत्साह की कमी बताई जा रही है। बीजेपी के वोटर, कार्यकर्ताओं और कैडर में जोश नहीं था। उनके हिसाब से कांग्रेस को कम से कम 60-70 सीट मिल सकती है। आप 6 प्रतिशत के करीब वोट शेयर हासिल करेगी और उसे 10 से कम सीटें मिलेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक्जिट पोल में रिकॉर्डतोड़ जीत का आकलन है। उनकी नजर में बीजेपी 120 से 130 सीट के आसपास रह सकती है। Gujarat CM Bhupendra Patel: राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीजेपी का राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 127 सीटों का है। बीजेपी इस आंकड़े को क्रॉस कर सकती है। माधव सिंह सोलंकी के खाम के रिकॉर्ड को धवस्त नहीं कर पाएगी। एंटी बीजेपी वोटों का बंटवारा और आखिरी वक्त में आप के प्रचार में आई कमी से मैदान बीजेपी को मिल गया। इसका पूरा फायदा बीजेपी ने उठाया। PM narendra modi, Gujarat CM Bhupendra Patel : बता दें कि गुजरात में विधानसभा कुल सीटों की संख्या 182 है। इसमें 40 सीटें आरक्षित हैं। 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए और 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 92 सीटों का है। 2017 के चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी मुश्किल से सरकार बचा पाने में सफल रही थी। दो दशक में पहली बार पार्टी की सीटों की संख्या दो अंकों में सिमट गई थी और बीजेपी सिर्फ 99 सीटें जीत सकती थी। कांग्रेस को 2017 के चुनाव 77 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस से गठबंधन करके लड़ी भारतीय ट्राइबल पार्टी को 2 सीटें मिली और 1 सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विजयी हुई थी। तीन सीटों पर निर्दलीय जीते थे। इनमें वडगाम से दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की कांग्रेस के समर्थन से जीत हुई थी।
Gujarat Assembly Election दो हज़ार बाईस, Gujarat Exit Polls: गुजरात विधानसभा चुनाव का Exit Polls आ चुका है। इसमें बीजेपी की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है। बीजेपी के नेता गुजरात में सरकार बनने का दावा कर रहे हैं। पाँच दिसंबर को आए Exit Polls में बीजेपी की प्रचंड वापसी का अनुमान जताया गया है। कुछ एक्जिट पोल में बीजेपी में बीजेपी के अधिकतम एक सौ अड़तालीस से एक सौ इक्यावन सीटें जीतने का अनुमान जताया गया है। पंद्रहवें विधानसभा चुनाव में अगर बीजेपी को जीत मिलती है, जो राज्य में सातवीं बार बीजेपी की सरकार बनेगी। Gujarat Assembly Election दो हज़ार बाईस, Interesting facts: इन सबके बीच सबसे ज्यादा रोचक और दिलचस्प बात ये है कि क्या सीएम भूपेन्द्र पटेल PM नरेंद्र मोदी के एक सौ सत्ताईस सीटें को क्रॉस कर आगे निकल पाएंगे? , कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी के एक सौ उनचास सीटों को कीर्तिमान को तोड़ पाएंगे? क्या कीर्तिमान रच पाएंगे? मामले में राजनीति के पंडितों का मानना है कि बीजेपी पुराना रिकॉर्ड ही दोहराएगी। उनके मुताबिक एक सौ के आसपास ही बीजेपी की सीटें रहेंगी। इसके पीछे की वजह कम वोटिंग और उत्साह की कमी बताई जा रही है। बीजेपी के वोटर, कार्यकर्ताओं और कैडर में जोश नहीं था। उनके हिसाब से कांग्रेस को कम से कम साठ-सत्तर सीट मिल सकती है। आप छः प्रतिशत के करीब वोट शेयर हासिल करेगी और उसे दस से कम सीटें मिलेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक्जिट पोल में रिकॉर्डतोड़ जीत का आकलन है। उनकी नजर में बीजेपी एक सौ बीस से एक सौ तीस सीट के आसपास रह सकती है। Gujarat CM Bhupendra Patel: राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीजेपी का राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक सौ सत्ताईस सीटों का है। बीजेपी इस आंकड़े को क्रॉस कर सकती है। माधव सिंह सोलंकी के खाम के रिकॉर्ड को धवस्त नहीं कर पाएगी। एंटी बीजेपी वोटों का बंटवारा और आखिरी वक्त में आप के प्रचार में आई कमी से मैदान बीजेपी को मिल गया। इसका पूरा फायदा बीजेपी ने उठाया। PM narendra modi, Gujarat CM Bhupendra Patel : बता दें कि गुजरात में विधानसभा कुल सीटों की संख्या एक सौ बयासी है। इसमें चालीस सीटें आरक्षित हैं। सत्ताईस सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए और तेरह सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा बानवे सीटों का है। दो हज़ार सत्रह के चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी मुश्किल से सरकार बचा पाने में सफल रही थी। दो दशक में पहली बार पार्टी की सीटों की संख्या दो अंकों में सिमट गई थी और बीजेपी सिर्फ निन्यानवे सीटें जीत सकती थी। कांग्रेस को दो हज़ार सत्रह के चुनाव सतहत्तर सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस से गठबंधन करके लड़ी भारतीय ट्राइबल पार्टी को दो सीटें मिली और एक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विजयी हुई थी। तीन सीटों पर निर्दलीय जीते थे। इनमें वडगाम से दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की कांग्रेस के समर्थन से जीत हुई थी।
जय सिया का उत्तर नहिं पाया # तो अपने मुख को मोड़ लिया। भ्रमण करया फर के सिय का # या देव रमण में छोड़ दिया ।। यह हाल विभीषण ने देखा #रायण उन्मन्त हुवा भारी । समझाये नहीं मानता है * ठुकरा दी नेक सला सारी ।। इस पर विचार करन के हेत * युलधाये हैं मत्री सारे । रस्त्र के प्रस्ताव दिया सन्मुख * और यचन इस तरह उधारे । दशकघर के शीश पर हुवा काम असार । यह मारग वे छोड़ कर # करो कोई उपचार ५४६३॥ बहर खड़ी इस पथ को जो नहि त्यागेगा # तो अनथ भारी हो जाये । सव में है कहो कौन ऐसा * ओ जाकर उसको समझाये ॥ इस कामदेव के कारण ही यह आफत में फँस जायेगा। लफागढ़ मिलायेगा * कस अटिल पाश में जायेगा । फेवल इस नाम के सभी ई मन्त्री का साहस भाप में हैं। समझाओ उन्हें भाप आकर * जो फैसे नाथ सताप में है ॥ हो असर हमारे कहने का # इसको अनुमाम नहीं होता । मिथ्याइष्टि को जिस तरिया जिन धर्म का ज्ञान नहीं होता। क्षमन राम से मिल गये * बड़े बड़े पौरुप उनका देस कर * कपि कपि अरु हनुमान ॥४१८॥ बहर खड़ी न्यायी महात्माओं का पक्ष # कहो कौ महण नहि करता है। सत गुरु के सुन्दर सुगर शब्द अपने सिर कौम न धरता है।
जय सिया का उत्तर नहिं पाया # तो अपने मुख को मोड़ लिया। भ्रमण करया फर के सिय का # या देव रमण में छोड़ दिया ।। यह हाल विभीषण ने देखा #रायण उन्मन्त हुवा भारी । समझाये नहीं मानता है * ठुकरा दी नेक सला सारी ।। इस पर विचार करन के हेत * युलधाये हैं मत्री सारे । रस्त्र के प्रस्ताव दिया सन्मुख * और यचन इस तरह उधारे । दशकघर के शीश पर हुवा काम असार । यह मारग वे छोड़ कर # करो कोई उपचार पाँच हज़ार चार सौ तिरेसठ॥ बहर खड़ी इस पथ को जो नहि त्यागेगा # तो अनथ भारी हो जाये । सव में है कहो कौन ऐसा * ओ जाकर उसको समझाये ॥ इस कामदेव के कारण ही यह आफत में फँस जायेगा। लफागढ़ मिलायेगा * कस अटिल पाश में जायेगा । फेवल इस नाम के सभी ई मन्त्री का साहस भाप में हैं। समझाओ उन्हें भाप आकर * जो फैसे नाथ सताप में है ॥ हो असर हमारे कहने का # इसको अनुमाम नहीं होता । मिथ्याइष्टि को जिस तरिया जिन धर्म का ज्ञान नहीं होता। क्षमन राम से मिल गये * बड़े बड़े पौरुप उनका देस कर * कपि कपि अरु हनुमान ॥चार सौ अट्ठारह॥ बहर खड़ी न्यायी महात्माओं का पक्ष # कहो कौ महण नहि करता है। सत गुरु के सुन्दर सुगर शब्द अपने सिर कौम न धरता है।