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प्रबन्ध कर रहे हैं । "
काशेई ने एक बार अपनी बहिन की ओर भेद-भरी दृष्टि से देखा । आँखो मे ही कुछ बात हुई, फिर बहिन ने सम्मतिसूचव सिर हिला दिया । कादोई बोला, "दादा, मुझे पता बता दो, मैं उनसे मिलूंगा ।" "क्यो ?"
"दादा, तुम सब कुछ जानते हुए भी पूछते हो ? मैं चीन जाना चाहता हूँ । वहाँ हमारी जरूरत है, वहाँ क्रान्तिकारी
आवेश में आकर कारोई चुप हो गया। फिर उस की बहिन बोली "दादा, हम यहाँ आ गये हैं, किन्तु अब देश से अलग रहना असम्भव है। विशेष कर जब देश सक्ट म हो लेकिन हम यहाँ ऐसे फसे हैं, एकदम अजनबी है। कभी शहर में जाना पड़े तो आफ्त आ जाती है। कभी-कभी सोचती हूँ, अगर आप न होते तो
"वाह लीना । तुम भी कैसी बातें करती हो..."
युवक बोला, "पिता / बहिन ठीक बहती है। हम तो यहाँ बस गये हैं, यहाँ रह कर काम चला लेते हैं, किन्तु ये नये आये हैं, क्रान्ति के दिनो म तो यहाँ सरकार इन पर सन्देह करेगी। और ये वापस भी नहीं जा सकेंगे। इन को मिल कर बात कर लेनी चाहिए। डॉक्टर अनुभवी आदमी है, कुछ तो बतायेंगे हो।"
वृद्ध ने बुछ सोच कर बढ़ा, "ठीक कहते हो वेदा ।" फिर अपनी पुत्री की ओर उन्मुख होकर बोला, "ता, जा मेरे कागज उठा ला ।"
'ता' गयी और कुछ वागज ले आयी। वृद्ध उन्हें देस वर धीरे-धीरे कारोई से बातें करन लगा । लीना और 'ता' उठ कर वहाँ से चली गयी ।
टाकियो नगर की रग-बिरंगी रोशनियो मे वादोई चुप-चाप चला जा रहा था। आज उम के शरीर पर वे श्रमिक के वस्त्र नहीं थे। वह विलायती ढग चा सूट पहने हुए था, और उस के हाथ में एक छोटा-सा बेंत था ।
लोग उस के मुख की ओर देखने, फिर उम्र के वस्त्रों को और, और फिर मुँह फेर घर सुरा देते। वह विमो को मोर देखता नहीं था, किन्तु किसी अज्ञात शक से उसे इस बात का अनुभव होता, और यह लज्जिन-सा होवर
यत्र घलता ।
74 / अभिशापित
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प्रबन्ध कर रहे हैं । " काशेई ने एक बार अपनी बहिन की ओर भेद-भरी दृष्टि से देखा । आँखो मे ही कुछ बात हुई, फिर बहिन ने सम्मतिसूचव सिर हिला दिया । कादोई बोला, "दादा, मुझे पता बता दो, मैं उनसे मिलूंगा ।" "क्यो ?" "दादा, तुम सब कुछ जानते हुए भी पूछते हो ? मैं चीन जाना चाहता हूँ । वहाँ हमारी जरूरत है, वहाँ क्रान्तिकारी आवेश में आकर कारोई चुप हो गया। फिर उस की बहिन बोली "दादा, हम यहाँ आ गये हैं, किन्तु अब देश से अलग रहना असम्भव है। विशेष कर जब देश सक्ट म हो लेकिन हम यहाँ ऐसे फसे हैं, एकदम अजनबी है। कभी शहर में जाना पड़े तो आफ्त आ जाती है। कभी-कभी सोचती हूँ, अगर आप न होते तो "वाह लीना । तुम भी कैसी बातें करती हो..." युवक बोला, "पिता / बहिन ठीक बहती है। हम तो यहाँ बस गये हैं, यहाँ रह कर काम चला लेते हैं, किन्तु ये नये आये हैं, क्रान्ति के दिनो म तो यहाँ सरकार इन पर सन्देह करेगी। और ये वापस भी नहीं जा सकेंगे। इन को मिल कर बात कर लेनी चाहिए। डॉक्टर अनुभवी आदमी है, कुछ तो बतायेंगे हो।" वृद्ध ने बुछ सोच कर बढ़ा, "ठीक कहते हो वेदा ।" फिर अपनी पुत्री की ओर उन्मुख होकर बोला, "ता, जा मेरे कागज उठा ला ।" 'ता' गयी और कुछ वागज ले आयी। वृद्ध उन्हें देस वर धीरे-धीरे कारोई से बातें करन लगा । लीना और 'ता' उठ कर वहाँ से चली गयी । टाकियो नगर की रग-बिरंगी रोशनियो मे वादोई चुप-चाप चला जा रहा था। आज उम के शरीर पर वे श्रमिक के वस्त्र नहीं थे। वह विलायती ढग चा सूट पहने हुए था, और उस के हाथ में एक छोटा-सा बेंत था । लोग उस के मुख की ओर देखने, फिर उम्र के वस्त्रों को और, और फिर मुँह फेर घर सुरा देते। वह विमो को मोर देखता नहीं था, किन्तु किसी अज्ञात शक से उसे इस बात का अनुभव होता, और यह लज्जिन-सा होवर यत्र घलता । चौहत्तर / अभिशापित
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तोक्यो में बढ़ा कोरोना का कहर, अमेरिका का अब यह खिलाड़ी भी हुआ कोरोना पॉजिटिव!
पोल वॉल्ट खिलाड़ी केंड्रिक्स कोविड पॉजिटिव पाए गए है। अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि केंड्रिक्स को होटल में अलग थलग रखा गया है। केंड्रिक्स ने 2016 रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और इसके बाद अगली दो विश्व चैंपियनशिप में वह खिताब जीतने में सफल रहे।
तोक्यो। अमेरिका के विश्व चैंपियन पोल वॉल्ट खिलाड़ी सैम केंड्रिक्स कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के कारण ओलंपिक खेलों से बाहर हो गए हैं। केंड्रिक्स के पिता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके बेटे में कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं लेकिन तोक्यो में उसे सूचित किया गया कि वह पॉजिटिव पाया गया है और प्रतियोगिता से बाहर हो गया है।
अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि केंड्रिक्स को होटल में अलग थलग रखा गया है। केंड्रिक्स ने 2016 रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और इसके बाद अगली दो विश्व चैंपियनशिप में वह खिताब जीतने में सफल रहे। वह 19 फीट 10. 5 इंच (6. 06 मीटर) के प्रयास के साथ अमेरिकी रिकॉर्ड धारक हैं।
Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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तोक्यो में बढ़ा कोरोना का कहर, अमेरिका का अब यह खिलाड़ी भी हुआ कोरोना पॉजिटिव! पोल वॉल्ट खिलाड़ी केंड्रिक्स कोविड पॉजिटिव पाए गए है। अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि केंड्रिक्स को होटल में अलग थलग रखा गया है। केंड्रिक्स ने दो हज़ार सोलह रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और इसके बाद अगली दो विश्व चैंपियनशिप में वह खिताब जीतने में सफल रहे। तोक्यो। अमेरिका के विश्व चैंपियन पोल वॉल्ट खिलाड़ी सैम केंड्रिक्स कोविड-उन्नीस पॉजिटिव पाए जाने के कारण ओलंपिक खेलों से बाहर हो गए हैं। केंड्रिक्स के पिता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके बेटे में कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं लेकिन तोक्यो में उसे सूचित किया गया कि वह पॉजिटिव पाया गया है और प्रतियोगिता से बाहर हो गया है। अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि केंड्रिक्स को होटल में अलग थलग रखा गया है। केंड्रिक्स ने दो हज़ार सोलह रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और इसके बाद अगली दो विश्व चैंपियनशिप में वह खिताब जीतने में सफल रहे। वह उन्नीस फीट दस. पाँच इंच के प्रयास के साथ अमेरिकी रिकॉर्ड धारक हैं। Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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आ गई । लेकिन विवाह होने के बाद ही लड़का बीमार हो गया । उसके बाप ने उसे बचाने का भरसक यत्न किया, लेकिन उसकी बीमारी बढ़ती ही गई और वह मरणासन्न हो गया। उसका बाप रोने लगा तो बेटे ने कहा कि अब क्यों रोता है ? मैं वही ठाकुर हूँ जिसके पाँच हजार रुपये तूने मार लिये थे । जितने रुपये तूने मेरी बीमारी पर लगा दिये हैं उतने छोड़कर शेष रुपये मेरे बच्चों को भेज दे, अन्यथा फिर अगले जन्म में तुझसे शेषरुपये वसूल करूंगा । तब उसके बाप ने कहा कि मैंने तो तुम्हारे रुपये मारे थे, लेकिन इस बेचारी बहू ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो इसे यों दुःख देकर जा रहा है । तब लड़का बोला कि यह इसी काबिल है, यह दुष्टा मेरे पिछले जन्म में घोड़ी थी और इसने युद्धक्षेत्र में मुझे जानबूझ कर मरवाया था, इसलिए इसे भी यह दंड भोगना ही पड़ेगा । यों कह कर लड़के ने दम तोड़ दिया ।
@ अब क्युं रोवै ?
एक पंडित बड़ा ज्ञानी था । बड़ी उम्र में जाकर उसके एक लड़का हुआ। पंडित ने अपने ज्ञान के बल से जान लिया कि मैं इस लड़के के पूर्व जन्म के एक लाख रुपये माँगता हूँ । लड़का अपना ऋण चुकाने आया है, वह जिस दिन यह ऋण चुका देगा उसी दिन चला जाएगा ( मर जाएगा ) ।
पंडित का राज दरबार में बहुत मान था, वह राज-पंडित था । उसने अपनी स्त्री को समझा दिया था कि मेरी अनुपस्थिति में लड़के को कहीं मत जाने देना और राज-सभा में तो कदापि न जाने देना ।
एक दिन राजा ने किसी आवश्यक काम से पंडित को बुलवा भेजा । लेकिन पंडित तब बाहर गया हुआ था। राजकर्मचारी ने पंडित के लड़के से कहा कि पंडितजी नहीं हैं तो आप ही चलें, सुना है आप भी बड़े विद्वान् हैं । लड़के की माँ ने उसे दरबार में जाने से बहुत मना किया, लेकिन लड़का नमाना । तब उसकी माँ ने कहा कि यदि जाते हो तो जाओ, लेकिन राजा से कोई उपहार मत लाना । लड़का चला गया। राजा के प्रश्नों का पंडित के लड़के ने समुचित उत्तर दिया । राजा बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने लड़के
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आ गई । लेकिन विवाह होने के बाद ही लड़का बीमार हो गया । उसके बाप ने उसे बचाने का भरसक यत्न किया, लेकिन उसकी बीमारी बढ़ती ही गई और वह मरणासन्न हो गया। उसका बाप रोने लगा तो बेटे ने कहा कि अब क्यों रोता है ? मैं वही ठाकुर हूँ जिसके पाँच हजार रुपये तूने मार लिये थे । जितने रुपये तूने मेरी बीमारी पर लगा दिये हैं उतने छोड़कर शेष रुपये मेरे बच्चों को भेज दे, अन्यथा फिर अगले जन्म में तुझसे शेषरुपये वसूल करूंगा । तब उसके बाप ने कहा कि मैंने तो तुम्हारे रुपये मारे थे, लेकिन इस बेचारी बहू ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो इसे यों दुःख देकर जा रहा है । तब लड़का बोला कि यह इसी काबिल है, यह दुष्टा मेरे पिछले जन्म में घोड़ी थी और इसने युद्धक्षेत्र में मुझे जानबूझ कर मरवाया था, इसलिए इसे भी यह दंड भोगना ही पड़ेगा । यों कह कर लड़के ने दम तोड़ दिया । @ अब क्युं रोवै ? एक पंडित बड़ा ज्ञानी था । बड़ी उम्र में जाकर उसके एक लड़का हुआ। पंडित ने अपने ज्ञान के बल से जान लिया कि मैं इस लड़के के पूर्व जन्म के एक लाख रुपये माँगता हूँ । लड़का अपना ऋण चुकाने आया है, वह जिस दिन यह ऋण चुका देगा उसी दिन चला जाएगा । पंडित का राज दरबार में बहुत मान था, वह राज-पंडित था । उसने अपनी स्त्री को समझा दिया था कि मेरी अनुपस्थिति में लड़के को कहीं मत जाने देना और राज-सभा में तो कदापि न जाने देना । एक दिन राजा ने किसी आवश्यक काम से पंडित को बुलवा भेजा । लेकिन पंडित तब बाहर गया हुआ था। राजकर्मचारी ने पंडित के लड़के से कहा कि पंडितजी नहीं हैं तो आप ही चलें, सुना है आप भी बड़े विद्वान् हैं । लड़के की माँ ने उसे दरबार में जाने से बहुत मना किया, लेकिन लड़का नमाना । तब उसकी माँ ने कहा कि यदि जाते हो तो जाओ, लेकिन राजा से कोई उपहार मत लाना । लड़का चला गया। राजा के प्रश्नों का पंडित के लड़के ने समुचित उत्तर दिया । राजा बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने लड़के
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Water Drinking Bad Habits: पानी हमारे लिए कितना जरूरी है, यह तो हम सभी जानते हैं। पानी न केवल हमारी प्यास बुझाता है बल्कि हमारे शरीर को हाइड्रेट करता है और स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। हालाँकि, क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी पीने की आदतें स्वस्थ हैं या नहीं? आप कब और कैसे पानी पीते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर की पाचन प्रक्रिया, चयापचय, हार्मोन आदि को प्रभावित करता है। आइए देखते हैं स्वस्थ तरीके से पानी पीने के बारे में 4 आवश्यक तथ्य।
1. सुबह सबसे पहले पानी पिएं जिसे आयुर्वेद में उषापान कहते हैं। स्वस्थ रहने के लिए गर्म पानी या तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए। यह आदत आपको अविश्वसनीय लाभ देगी।
2. खाने के तुरंत बाद पानी न पियें। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं तो आपका खाना धीरे-धीरे पचेगा, मेटाबॉलिज्म प्रभावित होगा और पाचन क्रिया कमजोर हो जाएगी।
3. पानी हमेशा बैठकर पिएं, पानी जल्दी-जल्दी या खड़े होकर न पिएं। पानी जल्दी-जल्दी न पिएं, बल्कि घूंट-घूंट कर पिएं।
4. प्लास्टिक की बोतलों में पानी न भरें. ऐसा करने से प्लास्टिक में मौजूद महीन कणों से न सिर्फ कैंसर होने का खतरा बढ़ जाएगा, बल्कि हार्मोनल असंतुलन और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।
सुबह-सुबह गुनगुना पानी पीने से क्या होता है?
सुबह सबसे पहले गर्म पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। मसालेदार या ऑयली खाना खाने से एसिडिटी हो सकती है। अगर आप रोज सुबह गुनगुना पानी पीते हैं तो आपको एसिडिटी की समस्या नहीं होगी। सुबह गर्म पानी पीने से शरीर की अशुद्धियां बाहर निकल जाती हैं और त्वचा स्वस्थ रहती है। गर्म पानी पीने से मेटाबॉलिज्म गियर में आ जाता है, जो शरीर की अतिरिक्त चर्बी को तोड़ने में मदद कर सकता है।
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Water Drinking Bad Habits: पानी हमारे लिए कितना जरूरी है, यह तो हम सभी जानते हैं। पानी न केवल हमारी प्यास बुझाता है बल्कि हमारे शरीर को हाइड्रेट करता है और स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। हालाँकि, क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी पीने की आदतें स्वस्थ हैं या नहीं? आप कब और कैसे पानी पीते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर की पाचन प्रक्रिया, चयापचय, हार्मोन आदि को प्रभावित करता है। आइए देखते हैं स्वस्थ तरीके से पानी पीने के बारे में चार आवश्यक तथ्य। एक. सुबह सबसे पहले पानी पिएं जिसे आयुर्वेद में उषापान कहते हैं। स्वस्थ रहने के लिए गर्म पानी या तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए। यह आदत आपको अविश्वसनीय लाभ देगी। दो. खाने के तुरंत बाद पानी न पियें। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं तो आपका खाना धीरे-धीरे पचेगा, मेटाबॉलिज्म प्रभावित होगा और पाचन क्रिया कमजोर हो जाएगी। तीन. पानी हमेशा बैठकर पिएं, पानी जल्दी-जल्दी या खड़े होकर न पिएं। पानी जल्दी-जल्दी न पिएं, बल्कि घूंट-घूंट कर पिएं। चार. प्लास्टिक की बोतलों में पानी न भरें. ऐसा करने से प्लास्टिक में मौजूद महीन कणों से न सिर्फ कैंसर होने का खतरा बढ़ जाएगा, बल्कि हार्मोनल असंतुलन और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा। सुबह-सुबह गुनगुना पानी पीने से क्या होता है? सुबह सबसे पहले गर्म पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। मसालेदार या ऑयली खाना खाने से एसिडिटी हो सकती है। अगर आप रोज सुबह गुनगुना पानी पीते हैं तो आपको एसिडिटी की समस्या नहीं होगी। सुबह गर्म पानी पीने से शरीर की अशुद्धियां बाहर निकल जाती हैं और त्वचा स्वस्थ रहती है। गर्म पानी पीने से मेटाबॉलिज्म गियर में आ जाता है, जो शरीर की अतिरिक्त चर्बी को तोड़ने में मदद कर सकता है।
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शेर-आदमी मिथुन औरत . . . इस तरह के एक जोड़ी की अनुकूलता सही कहा जा सकता है। उन दो एक साथ कभी बोर नहीं, वे आम हितों, चर्चा के लिए विषयों की एक बहुत कुछ है। रिश्ते की और तुरंत शादी के बाद शुरुआत में, प्रेमियों के एक भी कदम से एक दूसरे से विचलित नहीं है। हल्कापन, शोख़ी, आशावाद, कुशलता, बातूनी जुड़वाँ की तरह शेर, और वह स्थान उदारता, उसके प्रेमी के शानदार ध्यान पर हमला कर दिया। बेशक, जीवन इतना चिकनी नहीं है, इस जोड़ी में अनेक कठिनाइयां के माध्यम से जाना, अपने चरित्र बदलने के लिए, दूसरी छमाही की जरूरतों को समझने के लिए सीखने होगा। लेकिन यह अभी भी राशि चक्र का सबसे अच्छा जोड़े, जो बल के तहत आने वाले वर्षों में उनके गठबंधन बनाए रखने के लिए में से एक है।
मिथुन और सिंह कभी नहीं एक साथ ऊब, वे हमेशा क्या खुद के साथ क्या करना के साथ आते हैं। रोमन आमतौर पर जगह लेता है बहुत तेजी से है, लेकिन भावनाओं समय के साथ कम। समस्याओं मिथुन के चरित्र की वजह से उत्पन्न होती हैं। सिंह अनिर्णय, समय की पाबंदी, लगातार आलोचना, popliteus, निष्ठाहीन भावनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकते, लेकिन सब के बाद यह हवा तत्व का प्रतिनिधि के लिए निहित है। एक आदमी तुरंत नहीं, तथ्य यह है कि एक पति या पत्नी शायद ही कभी घर पर किया जाएगा स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वह इतना करना थाः खरीदारी यात्राएं, व्याख्यान में भाग लेने के, दोस्तों, यात्रा के साथ बैठक।
भागीदारों एक छोटा सा में सफल तो बेहतर करने के लिए अपने चरित्र को बदलने के लिए, दूसरी छमाही की जरूरतों को समझने के लिए, संघ मजबूत और टिकाऊ हो जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में महसूस किया जा करने के लिए, आत्म-सुधार में संलग्न करने के है। अन्यथा, महिला जुड़वां एक उबाऊ गृहिणी बड़बड़ा में बदल जाएगी, और आदमी शेर - जीवन में असंतुष्ट हारे हुए।
शेर-आदमी, औरत-मिथुन - इस जोड़ी की अनुकूलता आप के चारों ओर पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है। उनमें से दो किसी भी समाज में आकर्षक लग रहे हैं, वे एक दूसरे के पूरक हैं। क्योंकि हवा हस्ताक्षर महिला और ध्यान के केंद्र होने के लिए की तलाश नहीं है सिंह अपनी सुंदर, बहुश्रुत, मिलनसार साथी, छाया में मिथुन शाही पत्नी समाज पर गर्व है, लेकिन यह हस्तक्षेप नहीं करता है,।
सकारात्मक भावनाओं के कारण, विवादों को सुलझाने के लिए और चीजों को सुलझाने के लिए क्षमता की आवश्यकता के बिना नहीं औरत-एयर एक खुश शादी करता है। मिथुन आदमी, सिंह औरत को भी एक साथ अच्छा लग रहा है, लेकिन अभी भी वे उस चिंगारी कि लियो और मिथुन-आदमी औरत के बीच चलाता नहीं है। अग्नि तत्व के प्रतिनिधि कभी कभी आप अपने साथी के अधिक भावुक में देखना चाहते हैं। समय पर हवा बहुत ठंडा लगता है, लेकिन यह गुस्सा आशावाद, शोख़ी, सादगी की कमी की क्षतिपूर्ति करने में सक्षम है। शेर-आदमी मिथुन महिला - उनके उत्कृष्ट संगतता और आर्थिक रूप से। ज्यादातर मामलों में, जोड़ी समृद्ध रहता है। सिंह कैसे बनाने के लिए जानता है, और इसके साथ, यहां तक कि हवा मिथुन बाएँ और दाएँ अधिक खर्च करने के लिए, बुद्धिमानी से निवेश के लिए सीखने आदी।
रिश्ते की शुरुआत किसी को भी समस्याओं का कारण नहीं है, क्योंकि पुरुष सिर्फ भीड़ से अलग उसकी सुंदरता अपने शाही आकर्षण लुभाता है, और यहाँ वे एक जोड़े हैं। थोड़ी देर के बाद, सिंह को पता चला कि उसकी प्रेमिका अविश्वसनीय स्वतंत्रता प्यार और इच्छा नहीं करता है उसे नाटकीय रूप से अपने जीवन को बदलने के लिए। शादी, परिवार, एक आरामदायक घर मैन ऑफ द सपने, लेकिन वह बेचैन जुड़वाँ अचानक नहीं बदल सकते हैं और एक देखभाल परिचारिका के रूप में बदल सकते हैं, यह शादी की जल्दी में है नहीं।
शेर-आदमी मिथुन महिला - संगत संकेत अच्छे हैं, लेकिन अभी भी एक छोटे से प्यार अपने साथी को सुनने के लिए अपने चरित्र बदलना होगा। पति परिवार में मुख्य बात होना चाहिए, पत्नी के खाते में उनकी राय लेने के लिए बाध्य है। समस्या यह है कि जुड़वां बहुत ज्यादा जानते हैं और करने में सक्षम हैं, तो वे उच्च सौंप सिंह को पछाड़ने के, मेरे दो सेंट में फेंक मुश्किल नहीं हो जाएगा, और आदमी पसंद नहीं है। इस संघर्ष की वजह से चल रहा हो सकता है, एक दूसरे के साथ असंतोष।
कैसे एक शादी में सद्भाव को प्राप्त करने के?
प्रशंसा, आराधना, पूरा ध्यान - कि गर्व और शाही शेर पसंद करती है। एक औरत अपने कार्यों और कर्मों के अनुमोदन व्यक्त करने के लिए यह गर्व होना चाहिए,। यदि जुड़वां सराहना करते हैं और पति का सम्मान करेंगे, तो वे खुद को इस से लाभ होगा। बहुत अधिक लाभदायक नहीं बल्कि संदेह करने वालों को हारे हुए के पास से स्वयं का आश्वासन दिया आदमी के पास होने के लिए,। फिर भी आप नीचे अपमानित करने के लिए, कम करने के लिए सिंह प्रेस करने के लिए अपने आप को अनुमति नहीं दे सकते। एक आदमी सब कुछ के साथ संतुष्ट हो जाता है, तो यह घरेलू आराम अपनी पत्नी की देखभाल करेंगे। अन्यथा, सिंह अपनी पत्नी की कीमत पर खुद को जोर करने के लिए शुरू कर सकते हैं।
शेर-आदमी मिथुन महिला - प्यार में संगत संदेह में नहीं है। महिला जानता है कि कैसे ध्यान आकर्षित करने, हमेशा अलग होने की क्षमता आश्चर्य की बात। सिंह प्रभावित किया है, एक सुंदर, बुद्धिमान और मिलनसार औरत है जब वहाँ। यार, सो प्रिय उपहार हो जाता है आश्चर्य बनाता है, एक रसीला तारीख की व्यवस्था, इसके बजाय वह प्रशंसा और प्रशंसा के शब्द सुनना चाहता है। रिश्ता "महिला जुड़वां - नर-सिंह" अगर महिला अथक साथी प्रशंसा करने के लिए मुसीबत ले लिया है, शीर्ष पर हमेशा, प्रसिद्ध फिल्मों नायकों, बकाया हस्तियों के साथ यह तुलना करेंगे। स्तुति, चापलूसी - वह सब अग्नि तत्व का प्रतिनिधि करने के लिए जरूरत है।
पात्रों के बीच एक दोस्ती संभव है?
अनुकूलता प्यार नहीं है, लेकिन एक अलग योजना - वहाँ "मिथुन स्त्री शेर-आदमी" की एक जोड़ी है? हां। उन दोनों के बीच है, अक्सर एक मजबूत दोस्ती है, जो अग्नि तत्व के एक प्रतिनिधि के नेतृत्व में है और अधिक कुछ में विकसित हो सकता बंधे। दोनों में बात करना पसंद है, लेकिन वे एक दर्शकों से बात करने, और एक दूसरे के लिए कुछ भी बताने के लिए नहीं की जरूरत है। लियो और मिथुन के अलावा कोई वास्तविक शो बना सकते हैं। उन दोनों के बीच आकर्षण भी मजबूत है, इसलिए इन संकेतों के प्रतिनिधि यहां तक कि एक नए रिश्ते के लिए अपने साथियों को दे सकता है।
एक संयुक्त व्यापार के अवसरों का निर्माण किया गया है?
संगतता सिंह (महिला) और मिथुन (पुरुष) का एक संघ के रूप में, व्यापार में के रूप में उत्पादक नहीं है "नर-सिंह और महिला जुड़वां। " इस जोड़ी से उत्कृष्ट भागीदारों बनाने क्योंकि वे कड़ी मेहनत, सक्रिय, पहाड़ों एक साथ ले जाने के लिए तैयार हैं। मिथुन, नई चुनौतियों का सामना करने आगे बढ़ने के प्यार करता हूँ, और लियो हमेशा पहले बड़ी सफलता प्राप्त करने के लिए होना चाहता है। इस तरह के एक शक्तिशाली आदमी के साथ आसान काम नहीं है, लेकिन हवा संकेत के प्रतिनिधियों के लिए पूरी तरह से संभव है। क्या हथेली को जुड़वां, और लायंस इस सूट।
सबसे अच्छा विकल्प है, जब आग - सिर, और हवा - अधीनस्थ। संगतता सिंह (महिला) और मिथुन (पुरुष) व्यवसाय के क्षेत्र में महिला मिथुन और लियो पुरुष के अनुपात के रूप में है, इसलिए रोचक और होनहार नहीं है। आग एयर की मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व में अपनी पूर्ण क्षमता प्रकट करने के लिए सक्षम हो जाएगा। शेर - एक बहुत ही उदार और बहादुर प्रमुख, जो अपने मातहत धन्यवाद कर सकते हैं।
आप मिथुन के मालिक हैं, तो इस तरह के एक संघ बहुत अनुकूल नहीं है। शेर ही उज्ज्वल, आकर्षक होते हैं है, वह अद्भुत विचारों का एक बहुत कुछ है, इसलिए यह पेशेवर तेजी के लिए अपने प्रशिक्षक से बढ़ रहा है। मूल रूप से गठन गर्म रिश्तों के बीच हैं, तो इस तरह के एक व्यापार गठबंधन अधिक से अधिक लाभदायक परियोजनाओं को जन्म दे सकता है। लियो और मिथुन पूरी तरह से एक दूसरे के पूरक।
आग और एयर - एक अच्छी जोड़ी है, वे एक साथ ऊब कभी नहीं किया जाएगा। मिथुन और सिंह प्रेमी, दोस्तों, व्यापार भागीदारों और सहयोगियों हो सकता है। जोड़ी अनुकूलता जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट है। साथ में वे काफी ऊंचाई हासिल करते हैं।
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शेर-आदमी मिथुन औरत . . . इस तरह के एक जोड़ी की अनुकूलता सही कहा जा सकता है। उन दो एक साथ कभी बोर नहीं, वे आम हितों, चर्चा के लिए विषयों की एक बहुत कुछ है। रिश्ते की और तुरंत शादी के बाद शुरुआत में, प्रेमियों के एक भी कदम से एक दूसरे से विचलित नहीं है। हल्कापन, शोख़ी, आशावाद, कुशलता, बातूनी जुड़वाँ की तरह शेर, और वह स्थान उदारता, उसके प्रेमी के शानदार ध्यान पर हमला कर दिया। बेशक, जीवन इतना चिकनी नहीं है, इस जोड़ी में अनेक कठिनाइयां के माध्यम से जाना, अपने चरित्र बदलने के लिए, दूसरी छमाही की जरूरतों को समझने के लिए सीखने होगा। लेकिन यह अभी भी राशि चक्र का सबसे अच्छा जोड़े, जो बल के तहत आने वाले वर्षों में उनके गठबंधन बनाए रखने के लिए में से एक है। मिथुन और सिंह कभी नहीं एक साथ ऊब, वे हमेशा क्या खुद के साथ क्या करना के साथ आते हैं। रोमन आमतौर पर जगह लेता है बहुत तेजी से है, लेकिन भावनाओं समय के साथ कम। समस्याओं मिथुन के चरित्र की वजह से उत्पन्न होती हैं। सिंह अनिर्णय, समय की पाबंदी, लगातार आलोचना, popliteus, निष्ठाहीन भावनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकते, लेकिन सब के बाद यह हवा तत्व का प्रतिनिधि के लिए निहित है। एक आदमी तुरंत नहीं, तथ्य यह है कि एक पति या पत्नी शायद ही कभी घर पर किया जाएगा स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि वह इतना करना थाः खरीदारी यात्राएं, व्याख्यान में भाग लेने के, दोस्तों, यात्रा के साथ बैठक। भागीदारों एक छोटा सा में सफल तो बेहतर करने के लिए अपने चरित्र को बदलने के लिए, दूसरी छमाही की जरूरतों को समझने के लिए, संघ मजबूत और टिकाऊ हो जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में महसूस किया जा करने के लिए, आत्म-सुधार में संलग्न करने के है। अन्यथा, महिला जुड़वां एक उबाऊ गृहिणी बड़बड़ा में बदल जाएगी, और आदमी शेर - जीवन में असंतुष्ट हारे हुए। शेर-आदमी, औरत-मिथुन - इस जोड़ी की अनुकूलता आप के चारों ओर पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है। उनमें से दो किसी भी समाज में आकर्षक लग रहे हैं, वे एक दूसरे के पूरक हैं। क्योंकि हवा हस्ताक्षर महिला और ध्यान के केंद्र होने के लिए की तलाश नहीं है सिंह अपनी सुंदर, बहुश्रुत, मिलनसार साथी, छाया में मिथुन शाही पत्नी समाज पर गर्व है, लेकिन यह हस्तक्षेप नहीं करता है,। सकारात्मक भावनाओं के कारण, विवादों को सुलझाने के लिए और चीजों को सुलझाने के लिए क्षमता की आवश्यकता के बिना नहीं औरत-एयर एक खुश शादी करता है। मिथुन आदमी, सिंह औरत को भी एक साथ अच्छा लग रहा है, लेकिन अभी भी वे उस चिंगारी कि लियो और मिथुन-आदमी औरत के बीच चलाता नहीं है। अग्नि तत्व के प्रतिनिधि कभी कभी आप अपने साथी के अधिक भावुक में देखना चाहते हैं। समय पर हवा बहुत ठंडा लगता है, लेकिन यह गुस्सा आशावाद, शोख़ी, सादगी की कमी की क्षतिपूर्ति करने में सक्षम है। शेर-आदमी मिथुन महिला - उनके उत्कृष्ट संगतता और आर्थिक रूप से। ज्यादातर मामलों में, जोड़ी समृद्ध रहता है। सिंह कैसे बनाने के लिए जानता है, और इसके साथ, यहां तक कि हवा मिथुन बाएँ और दाएँ अधिक खर्च करने के लिए, बुद्धिमानी से निवेश के लिए सीखने आदी। रिश्ते की शुरुआत किसी को भी समस्याओं का कारण नहीं है, क्योंकि पुरुष सिर्फ भीड़ से अलग उसकी सुंदरता अपने शाही आकर्षण लुभाता है, और यहाँ वे एक जोड़े हैं। थोड़ी देर के बाद, सिंह को पता चला कि उसकी प्रेमिका अविश्वसनीय स्वतंत्रता प्यार और इच्छा नहीं करता है उसे नाटकीय रूप से अपने जीवन को बदलने के लिए। शादी, परिवार, एक आरामदायक घर मैन ऑफ द सपने, लेकिन वह बेचैन जुड़वाँ अचानक नहीं बदल सकते हैं और एक देखभाल परिचारिका के रूप में बदल सकते हैं, यह शादी की जल्दी में है नहीं। शेर-आदमी मिथुन महिला - संगत संकेत अच्छे हैं, लेकिन अभी भी एक छोटे से प्यार अपने साथी को सुनने के लिए अपने चरित्र बदलना होगा। पति परिवार में मुख्य बात होना चाहिए, पत्नी के खाते में उनकी राय लेने के लिए बाध्य है। समस्या यह है कि जुड़वां बहुत ज्यादा जानते हैं और करने में सक्षम हैं, तो वे उच्च सौंप सिंह को पछाड़ने के, मेरे दो सेंट में फेंक मुश्किल नहीं हो जाएगा, और आदमी पसंद नहीं है। इस संघर्ष की वजह से चल रहा हो सकता है, एक दूसरे के साथ असंतोष। कैसे एक शादी में सद्भाव को प्राप्त करने के? प्रशंसा, आराधना, पूरा ध्यान - कि गर्व और शाही शेर पसंद करती है। एक औरत अपने कार्यों और कर्मों के अनुमोदन व्यक्त करने के लिए यह गर्व होना चाहिए,। यदि जुड़वां सराहना करते हैं और पति का सम्मान करेंगे, तो वे खुद को इस से लाभ होगा। बहुत अधिक लाभदायक नहीं बल्कि संदेह करने वालों को हारे हुए के पास से स्वयं का आश्वासन दिया आदमी के पास होने के लिए,। फिर भी आप नीचे अपमानित करने के लिए, कम करने के लिए सिंह प्रेस करने के लिए अपने आप को अनुमति नहीं दे सकते। एक आदमी सब कुछ के साथ संतुष्ट हो जाता है, तो यह घरेलू आराम अपनी पत्नी की देखभाल करेंगे। अन्यथा, सिंह अपनी पत्नी की कीमत पर खुद को जोर करने के लिए शुरू कर सकते हैं। शेर-आदमी मिथुन महिला - प्यार में संगत संदेह में नहीं है। महिला जानता है कि कैसे ध्यान आकर्षित करने, हमेशा अलग होने की क्षमता आश्चर्य की बात। सिंह प्रभावित किया है, एक सुंदर, बुद्धिमान और मिलनसार औरत है जब वहाँ। यार, सो प्रिय उपहार हो जाता है आश्चर्य बनाता है, एक रसीला तारीख की व्यवस्था, इसके बजाय वह प्रशंसा और प्रशंसा के शब्द सुनना चाहता है। रिश्ता "महिला जुड़वां - नर-सिंह" अगर महिला अथक साथी प्रशंसा करने के लिए मुसीबत ले लिया है, शीर्ष पर हमेशा, प्रसिद्ध फिल्मों नायकों, बकाया हस्तियों के साथ यह तुलना करेंगे। स्तुति, चापलूसी - वह सब अग्नि तत्व का प्रतिनिधि करने के लिए जरूरत है। पात्रों के बीच एक दोस्ती संभव है? अनुकूलता प्यार नहीं है, लेकिन एक अलग योजना - वहाँ "मिथुन स्त्री शेर-आदमी" की एक जोड़ी है? हां। उन दोनों के बीच है, अक्सर एक मजबूत दोस्ती है, जो अग्नि तत्व के एक प्रतिनिधि के नेतृत्व में है और अधिक कुछ में विकसित हो सकता बंधे। दोनों में बात करना पसंद है, लेकिन वे एक दर्शकों से बात करने, और एक दूसरे के लिए कुछ भी बताने के लिए नहीं की जरूरत है। लियो और मिथुन के अलावा कोई वास्तविक शो बना सकते हैं। उन दोनों के बीच आकर्षण भी मजबूत है, इसलिए इन संकेतों के प्रतिनिधि यहां तक कि एक नए रिश्ते के लिए अपने साथियों को दे सकता है। एक संयुक्त व्यापार के अवसरों का निर्माण किया गया है? संगतता सिंह और मिथुन का एक संघ के रूप में, व्यापार में के रूप में उत्पादक नहीं है "नर-सिंह और महिला जुड़वां। " इस जोड़ी से उत्कृष्ट भागीदारों बनाने क्योंकि वे कड़ी मेहनत, सक्रिय, पहाड़ों एक साथ ले जाने के लिए तैयार हैं। मिथुन, नई चुनौतियों का सामना करने आगे बढ़ने के प्यार करता हूँ, और लियो हमेशा पहले बड़ी सफलता प्राप्त करने के लिए होना चाहता है। इस तरह के एक शक्तिशाली आदमी के साथ आसान काम नहीं है, लेकिन हवा संकेत के प्रतिनिधियों के लिए पूरी तरह से संभव है। क्या हथेली को जुड़वां, और लायंस इस सूट। सबसे अच्छा विकल्प है, जब आग - सिर, और हवा - अधीनस्थ। संगतता सिंह और मिथुन व्यवसाय के क्षेत्र में महिला मिथुन और लियो पुरुष के अनुपात के रूप में है, इसलिए रोचक और होनहार नहीं है। आग एयर की मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व में अपनी पूर्ण क्षमता प्रकट करने के लिए सक्षम हो जाएगा। शेर - एक बहुत ही उदार और बहादुर प्रमुख, जो अपने मातहत धन्यवाद कर सकते हैं। आप मिथुन के मालिक हैं, तो इस तरह के एक संघ बहुत अनुकूल नहीं है। शेर ही उज्ज्वल, आकर्षक होते हैं है, वह अद्भुत विचारों का एक बहुत कुछ है, इसलिए यह पेशेवर तेजी के लिए अपने प्रशिक्षक से बढ़ रहा है। मूल रूप से गठन गर्म रिश्तों के बीच हैं, तो इस तरह के एक व्यापार गठबंधन अधिक से अधिक लाभदायक परियोजनाओं को जन्म दे सकता है। लियो और मिथुन पूरी तरह से एक दूसरे के पूरक। आग और एयर - एक अच्छी जोड़ी है, वे एक साथ ऊब कभी नहीं किया जाएगा। मिथुन और सिंह प्रेमी, दोस्तों, व्यापार भागीदारों और सहयोगियों हो सकता है। जोड़ी अनुकूलता जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट है। साथ में वे काफी ऊंचाई हासिल करते हैं।
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Rinku Sharma murder case: किसी हत्या में सांप्रदायिक एंगल ढूंढने का घिनौना खेल!
चाहे हम हिंदू-मुस्लिम एकता की कितनी ही बात क्यों न कर लें एक अन-सेड वैमनस्यता दोनों तरफ़ से पलती ही रहती है. नहीं तो कोई ऐसे ही किसी छोटी सी बर्थ-डे पार्टी वाले झगड़े या जय श्री राम के नारे के ऊपर चाकू पीठ में नहीं घोप कर चला जाता है. और न ही सिर्फ़ गाय की जान के लिए किसी अख़लाक़ की जान ले ली जाती है.
अब्दुल एक ट्रक में गाय लेकर कहीं जा रहा था. रास्ते में कुछ लोगों ने उसे गायों के साथ देखा और उसका पीछा करने लगे. कुछ दूर पीछा करने के बाद उसे पकड़ कर पीटने लगे. इतने में पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनाई दिया और जो लोग अब्दुल को मार रहे थे वो भागने लगे और अब्दुल भी ट्रक स्टार्ट करके वहां से निकल गया. ट्रक की स्पीड ज़्यादा थी और एक टर्निंग पर उससे गाड़ी संभली नहीं और ऐक्सिडेंट हो गया. दुःखद बात ये रही कि घटना स्थल पर ही अब्दुल की मौत हो गयी. पुलिस ने इस हादसे को देखा और आस-पास के लोगों से बयान भी लिया और फिर रिपोर्ट में ये बताया कि अब्दुल की मौत सड़क हादसे में हुई है. अब ज़रा कल से जो लोग ज्ञान की उल्टियां कर रहें हैं ज़रा ईमान से एक बात बताएं कि आप में से कितने लोग इसे सड़क हादसा कहेंगे और कितने लोग लिंचिंग? जवाब आपको भी पता है. हैशटैग के साथ आप शर्मिंदा होना शुरू कर देंगे. आपके हिसाब से हिंदू और हिंदुस्तान डूब मरने पर तैयार हो जाएगा.
देखिए साहब, ऊपर जो मैंने लिखी है वो एक हायपोथेटिक्ल सिचुएशन है लेकिन वो फिर भी सच ही है. चाहे हम हिंदू-मुस्लिम एकता की कितनी ही बात क्यों न कर लें एक अन-सेड वैमनस्यता दोनों तरफ़ से पलती ही रहती है. नहीं तो कोई ऐसे ही किसी छोटी सी बर्थ-डे पार्टी वाले झगड़े या जय श्री राम के नारे के ऊपर चाकू पीठ में नहीं घोप कर चला जाता है. और न ही सिर्फ़ गाय की जान के लिए किसी अख़लाक़ की जान ले ली जाती है.
और पुलिस की रिपोर्ट को आप कब से सच मनाने लगे? यही पुलिस जब कोई इनकाउंटर करती है तब आपको उसमें खोट ही खोट नज़र आता है. जब दिल्ली दंगों की चार्जशीट दाख़िल होती है तब बेईमान कहने से आप गुरेज़ नहीं करते. आज अपनी सलाहीयत के हिसाब से आपको पुलिस की रिपोर्ट को मानना है. न कि जो मर गया उसके बाप के बयान को. कितनी हिपोक्रेसी, कितना दोगलापन. उफ़्फ़.
रिंकू शर्मा की मौत महज़ बर्थडे पार्टी पर हुई लड़ाई का ख़ामियाज़ा है. अब्दुल का ऐक्सिडेंट लिंचिंग हो जाता है. सुनिए जब तक हम सब ग़लत को ग़लत और सही को सही नहीं कहना सीखेंगे रिंकू शर्मा और रहीम शाह की मौतें होती रहेंगी. आपको सच में इस बात का ज़रा भी ग़म नहीं कि किसी बाप से उसकी औलाद छीन ली गयी, किसी मां का आंचल सूना हो गया. आपको ज़रा दुःख नहीं हुआ रिंकू की मौत का क्योंकि वो आपके प्रॉपगैंडा में फिट नहीं हो रही थी. शर्मनाक है ये. अमानवीय है आपकी ऐसी सोच.
मुझे तो अख़लाक़ की बिलखती बेवा को देख कर भी उतना ही दुःख हुआ जितना रिंकु की मां को रोते देख कर. आप कैसे नहीं देख पाते रिंकू शर्मा की मां के आंसू और कैसे सिर्फ़ सिलेक्टिव हो कर अख़लाक़ की बेवा के लिए दुःखी हो पाते हैं. सुनिए आपके बारे में एक सच कह दूं, आपको न तो रिंकू शर्मा की मौत का दुःख है और न ही अब्दुल की लिंचिंग का. आप अपनी सहूलियत से प्ले-कॉर्ड लाते हैं. आप खुद को बुद्धिजीवी बताते हैं मुझे तो आप में जीवन ही नज़र नहीं आता. आप मुर्दों की भीड़ से ज़्यादा नहीं हैं.
बहुत अखर रही है रिंकू शर्मा की हत्या के बाद सिलेक्टिव चुप्पी!
Femina Miss India: गांव की बेटी का 'मिस इंडिया' के मंच पर पहुंचना, संभावनाओं के कई द्वार खोलता है!
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Rinku Sharma murder case: किसी हत्या में सांप्रदायिक एंगल ढूंढने का घिनौना खेल! चाहे हम हिंदू-मुस्लिम एकता की कितनी ही बात क्यों न कर लें एक अन-सेड वैमनस्यता दोनों तरफ़ से पलती ही रहती है. नहीं तो कोई ऐसे ही किसी छोटी सी बर्थ-डे पार्टी वाले झगड़े या जय श्री राम के नारे के ऊपर चाकू पीठ में नहीं घोप कर चला जाता है. और न ही सिर्फ़ गाय की जान के लिए किसी अख़लाक़ की जान ले ली जाती है. अब्दुल एक ट्रक में गाय लेकर कहीं जा रहा था. रास्ते में कुछ लोगों ने उसे गायों के साथ देखा और उसका पीछा करने लगे. कुछ दूर पीछा करने के बाद उसे पकड़ कर पीटने लगे. इतने में पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनाई दिया और जो लोग अब्दुल को मार रहे थे वो भागने लगे और अब्दुल भी ट्रक स्टार्ट करके वहां से निकल गया. ट्रक की स्पीड ज़्यादा थी और एक टर्निंग पर उससे गाड़ी संभली नहीं और ऐक्सिडेंट हो गया. दुःखद बात ये रही कि घटना स्थल पर ही अब्दुल की मौत हो गयी. पुलिस ने इस हादसे को देखा और आस-पास के लोगों से बयान भी लिया और फिर रिपोर्ट में ये बताया कि अब्दुल की मौत सड़क हादसे में हुई है. अब ज़रा कल से जो लोग ज्ञान की उल्टियां कर रहें हैं ज़रा ईमान से एक बात बताएं कि आप में से कितने लोग इसे सड़क हादसा कहेंगे और कितने लोग लिंचिंग? जवाब आपको भी पता है. हैशटैग के साथ आप शर्मिंदा होना शुरू कर देंगे. आपके हिसाब से हिंदू और हिंदुस्तान डूब मरने पर तैयार हो जाएगा. देखिए साहब, ऊपर जो मैंने लिखी है वो एक हायपोथेटिक्ल सिचुएशन है लेकिन वो फिर भी सच ही है. चाहे हम हिंदू-मुस्लिम एकता की कितनी ही बात क्यों न कर लें एक अन-सेड वैमनस्यता दोनों तरफ़ से पलती ही रहती है. नहीं तो कोई ऐसे ही किसी छोटी सी बर्थ-डे पार्टी वाले झगड़े या जय श्री राम के नारे के ऊपर चाकू पीठ में नहीं घोप कर चला जाता है. और न ही सिर्फ़ गाय की जान के लिए किसी अख़लाक़ की जान ले ली जाती है. और पुलिस की रिपोर्ट को आप कब से सच मनाने लगे? यही पुलिस जब कोई इनकाउंटर करती है तब आपको उसमें खोट ही खोट नज़र आता है. जब दिल्ली दंगों की चार्जशीट दाख़िल होती है तब बेईमान कहने से आप गुरेज़ नहीं करते. आज अपनी सलाहीयत के हिसाब से आपको पुलिस की रिपोर्ट को मानना है. न कि जो मर गया उसके बाप के बयान को. कितनी हिपोक्रेसी, कितना दोगलापन. उफ़्फ़. रिंकू शर्मा की मौत महज़ बर्थडे पार्टी पर हुई लड़ाई का ख़ामियाज़ा है. अब्दुल का ऐक्सिडेंट लिंचिंग हो जाता है. सुनिए जब तक हम सब ग़लत को ग़लत और सही को सही नहीं कहना सीखेंगे रिंकू शर्मा और रहीम शाह की मौतें होती रहेंगी. आपको सच में इस बात का ज़रा भी ग़म नहीं कि किसी बाप से उसकी औलाद छीन ली गयी, किसी मां का आंचल सूना हो गया. आपको ज़रा दुःख नहीं हुआ रिंकू की मौत का क्योंकि वो आपके प्रॉपगैंडा में फिट नहीं हो रही थी. शर्मनाक है ये. अमानवीय है आपकी ऐसी सोच. मुझे तो अख़लाक़ की बिलखती बेवा को देख कर भी उतना ही दुःख हुआ जितना रिंकु की मां को रोते देख कर. आप कैसे नहीं देख पाते रिंकू शर्मा की मां के आंसू और कैसे सिर्फ़ सिलेक्टिव हो कर अख़लाक़ की बेवा के लिए दुःखी हो पाते हैं. सुनिए आपके बारे में एक सच कह दूं, आपको न तो रिंकू शर्मा की मौत का दुःख है और न ही अब्दुल की लिंचिंग का. आप अपनी सहूलियत से प्ले-कॉर्ड लाते हैं. आप खुद को बुद्धिजीवी बताते हैं मुझे तो आप में जीवन ही नज़र नहीं आता. आप मुर्दों की भीड़ से ज़्यादा नहीं हैं. बहुत अखर रही है रिंकू शर्मा की हत्या के बाद सिलेक्टिव चुप्पी! Femina Miss India: गांव की बेटी का 'मिस इंडिया' के मंच पर पहुंचना, संभावनाओं के कई द्वार खोलता है!
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने (26 अक्टूबर 2018 के निदेश डीसीबीएस.सीओ.बीएसडी-I/डी-3/12.22.163/2018-19 के तहत) द नीड्स ऑफ लाइफ को-ऑ. बैंक लि. मुंबई, महाराष्ट्र को निदेशाधीन रखा है। निदेशों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक निदेशों में निर्धारित शर्तों के अधीन जमाकर्ताओं को प्रत्येक बचत बैंक या चालू खाते या किसी भी अन्य जमा खाते में, कुल शेष में से ₹ 1,000/- (एक हजार रुपये मात्र) तक राशि आहरित करने की अनुमति होगी। द नीड्स ऑफ लाइफ को-ऑ. बैंक लि. मुंबई भारतीय रिज़र्व बैंक से लिखित रूप में पूर्वानुमति लिए बिना, भारतीय रिज़र्व बैंक के 26 अक्तूबर, 2018 के निदेशों में अधिसूचित सीमा और रीति को छोडकर, कोई भी ऋण और अग्रिम मंजूर नहीं करेगा या उसका नवीकरण नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा, निधियाँ उधार लेने और नई जमाराशियाँ स्वीकार करने सहित अपने ऊपर कोई भी देयता नहीं लेगा, कोई भुगतान नहीं करेगा और न ही भुगतान करने के लिए सहमत होगा, भले ही भुगतान उसकी देनदारियों और दायित्वों की चुकौती से या अन्यथा संबंधित क्यों न हो, कोई समझौता या इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्ति को न तो बेचेगा, न अंतरित करेगा या अन्यथा रीति से उसका निपटान करेगा। दिशानिदेश 29 अक्टूबर, 2018 को बैंक के कारोबार की समाप्ति से छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगे।
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निदेश जारी करने का यह अर्थ न लगाया जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक परिस्थितियों के आधार पर इन निदेशों में संशोधन करने पर विचार कर सकता है।
उक्त निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी सोसायटियों पर यथालागू) की धारा 35ए की उप धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लागू किए गए हैं। निदेशों की प्रतिलिपि हित रखनेवाले जनता के सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने द नीड्स ऑफ लाइफ को-ऑ. बैंक लि. मुंबई, महाराष्ट्र को निदेशाधीन रखा है। निदेशों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक निदेशों में निर्धारित शर्तों के अधीन जमाकर्ताओं को प्रत्येक बचत बैंक या चालू खाते या किसी भी अन्य जमा खाते में, कुल शेष में से एक रुपया,शून्य/- तक राशि आहरित करने की अनुमति होगी। द नीड्स ऑफ लाइफ को-ऑ. बैंक लि. मुंबई भारतीय रिज़र्व बैंक से लिखित रूप में पूर्वानुमति लिए बिना, भारतीय रिज़र्व बैंक के छब्बीस अक्तूबर, दो हज़ार अट्ठारह के निदेशों में अधिसूचित सीमा और रीति को छोडकर, कोई भी ऋण और अग्रिम मंजूर नहीं करेगा या उसका नवीकरण नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा, निधियाँ उधार लेने और नई जमाराशियाँ स्वीकार करने सहित अपने ऊपर कोई भी देयता नहीं लेगा, कोई भुगतान नहीं करेगा और न ही भुगतान करने के लिए सहमत होगा, भले ही भुगतान उसकी देनदारियों और दायित्वों की चुकौती से या अन्यथा संबंधित क्यों न हो, कोई समझौता या इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्ति को न तो बेचेगा, न अंतरित करेगा या अन्यथा रीति से उसका निपटान करेगा। दिशानिदेश उनतीस अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को बैंक के कारोबार की समाप्ति से छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगे। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निदेश जारी करने का यह अर्थ न लगाया जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक परिस्थितियों के आधार पर इन निदेशों में संशोधन करने पर विचार कर सकता है। उक्त निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा छप्पन के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा पैंतीसए की उप धारा के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लागू किए गए हैं। निदेशों की प्रतिलिपि हित रखनेवाले जनता के सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है।
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सिटी में कहने को तो तमाम मॉन्युमेंट हैं लेकिन सालों से बेहाल पड़े ताल फिरोज खां मॉन्युमेंट को खूबसूरत बनाने की पहल नगर निगम ने कर दी है। अब एडीए उसमें चार चांद लगाने की तैयारी कर रहा है। अब तक लोग इस मॉन्युमेंट के सामने अपने कूड़े के ढेर लगा दिया करते थे जिस पर अब पाबंदी लगा दी गई है. एडीए ने फिलहाल 25 लाख का प्रपोजल बनाकर मंडल आयुक्त प्रदीप भटनागर को भेजा है, जिनकी मोहर लगने के बाद ही मॉन्युमेंट के सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
इस मॉन्युमेंट को पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए नगर निगम ने ताल की सफाई कराकर इसकी शुरुआत कर दी है। अब सौंदर्यीकरण का काम एडीए कराने की तैयारी कर रहा है।
४मॉन्युमेंट के आस-पास लाइटें लगाई जाएं।
४पाथवे में टाइल्स लगाने का काम पूरा करवाया जाए।
४पार्क की स्थिति को सुधारा जाए।
४ताल के अंदर फाउंटेन लगाने पर विचार किया जा रहा है।
४मॉन्युमेंट के आस-पास हरियाली लगाने की योजना भी एडीए द्वारा बनाई जा रही है।
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सिटी में कहने को तो तमाम मॉन्युमेंट हैं लेकिन सालों से बेहाल पड़े ताल फिरोज खां मॉन्युमेंट को खूबसूरत बनाने की पहल नगर निगम ने कर दी है। अब एडीए उसमें चार चांद लगाने की तैयारी कर रहा है। अब तक लोग इस मॉन्युमेंट के सामने अपने कूड़े के ढेर लगा दिया करते थे जिस पर अब पाबंदी लगा दी गई है. एडीए ने फिलहाल पच्चीस लाख का प्रपोजल बनाकर मंडल आयुक्त प्रदीप भटनागर को भेजा है, जिनकी मोहर लगने के बाद ही मॉन्युमेंट के सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस मॉन्युमेंट को पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए नगर निगम ने ताल की सफाई कराकर इसकी शुरुआत कर दी है। अब सौंदर्यीकरण का काम एडीए कराने की तैयारी कर रहा है। चारमॉन्युमेंट के आस-पास लाइटें लगाई जाएं। चारपाथवे में टाइल्स लगाने का काम पूरा करवाया जाए। चारपार्क की स्थिति को सुधारा जाए। चारताल के अंदर फाउंटेन लगाने पर विचार किया जा रहा है। चारमॉन्युमेंट के आस-पास हरियाली लगाने की योजना भी एडीए द्वारा बनाई जा रही है।
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छत्तीसगढ़ भाजपा राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में चौपाटी का विरोध कर रही है। इस निश्चितकालीन धरने को समर्थन देने राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय शुक्रवार को साइंस कॉलेज धरना स्थल पर पहुंची। पूर्व मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में हो रहे इस धरने का समर्थन दिया।
छत्तीसगढ़ भाजपा राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में चौपाटी का विरोध कर रही है। इस निश्चितकालीन धरने को समर्थन देने राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय शुक्रवार को साइंस कॉलेज धरना स्थल पर पहुंची। पूर्व मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में हो रहे इस धरने का समर्थन दिया। सरोज पांडेय ने कहा कि साइंस कॉलेज में स्मार्ट सिटी की ओर से यह चौपाटी बनाई जा रही है, जिसका लगातार विरोध पूर्व मंत्री राजेश मूणत कर रहे हैं। भाजपा इसका लगातार विरोध करेगी, जब तक यह चौपाटी नहीं हटती तब तक विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकालीन के लिए चलता रहेगा।
वहीं राजेश मूणत ने कहा है कि अवैध चौपाटी हटाने 24 घंटे भाजपा कार्यकर्ता डटे रहेंगे। साफ नियत और सही दिशा में किए गए जनकार्य को जनता का समर्थन मिलना स्वाभाविक है। यह लड़ाई हमारी निजी लड़ाई नहीं है। हम तो उस व्यवस्था के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर हैं, जो गैर कानूनी है, जो अवैध है। इस शिक्षण परिक्षेत्र में निर्माण के नियम को धता बता कर किया जा रहा निर्माण कांग्रेसी महापौर और प्रदेश सरकार की दूषित नियत को दर्शाता है।
मूणत ने कहा है कि यह धरना निरंतर जारी रहेगा। हमें कार्यकर्ताओं एवं अन्य लोगों का जो समर्थन मिल रहा है, वह हमारे लिए ऊर्जा का कार्य कर रहा है। महापौर और कांग्रेस सरकार मेरी बात गांठ बांध लें ये लड़ाई लंबी चलेगी और कोई दोषी बक्शा नहीं जाएगा। सबका नम्बर आएगा। मूणत ने चौपाटी के विरोध में सड़क से लेकर अदालत तक की लड़ाई शुरू कर दी है। स्मार्ट सिटी की ओर से 6 करोड़ की लागत से चौपाटी का निर्माण किया गया है। यह चौपाटी लगभग बनकर तैयार है।
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छत्तीसगढ़ भाजपा राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में चौपाटी का विरोध कर रही है। इस निश्चितकालीन धरने को समर्थन देने राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय शुक्रवार को साइंस कॉलेज धरना स्थल पर पहुंची। पूर्व मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में हो रहे इस धरने का समर्थन दिया। छत्तीसगढ़ भाजपा राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में चौपाटी का विरोध कर रही है। इस निश्चितकालीन धरने को समर्थन देने राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय शुक्रवार को साइंस कॉलेज धरना स्थल पर पहुंची। पूर्व मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में हो रहे इस धरने का समर्थन दिया। सरोज पांडेय ने कहा कि साइंस कॉलेज में स्मार्ट सिटी की ओर से यह चौपाटी बनाई जा रही है, जिसका लगातार विरोध पूर्व मंत्री राजेश मूणत कर रहे हैं। भाजपा इसका लगातार विरोध करेगी, जब तक यह चौपाटी नहीं हटती तब तक विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकालीन के लिए चलता रहेगा। वहीं राजेश मूणत ने कहा है कि अवैध चौपाटी हटाने चौबीस घंटाटे भाजपा कार्यकर्ता डटे रहेंगे। साफ नियत और सही दिशा में किए गए जनकार्य को जनता का समर्थन मिलना स्वाभाविक है। यह लड़ाई हमारी निजी लड़ाई नहीं है। हम तो उस व्यवस्था के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर हैं, जो गैर कानूनी है, जो अवैध है। इस शिक्षण परिक्षेत्र में निर्माण के नियम को धता बता कर किया जा रहा निर्माण कांग्रेसी महापौर और प्रदेश सरकार की दूषित नियत को दर्शाता है। मूणत ने कहा है कि यह धरना निरंतर जारी रहेगा। हमें कार्यकर्ताओं एवं अन्य लोगों का जो समर्थन मिल रहा है, वह हमारे लिए ऊर्जा का कार्य कर रहा है। महापौर और कांग्रेस सरकार मेरी बात गांठ बांध लें ये लड़ाई लंबी चलेगी और कोई दोषी बक्शा नहीं जाएगा। सबका नम्बर आएगा। मूणत ने चौपाटी के विरोध में सड़क से लेकर अदालत तक की लड़ाई शुरू कर दी है। स्मार्ट सिटी की ओर से छः करोड़ की लागत से चौपाटी का निर्माण किया गया है। यह चौपाटी लगभग बनकर तैयार है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
खण्डेला भारतीय राज्य राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक नगरपालिका क्षेत्र है। खण्डेला राज्य खंडेलवाल दिगंबर जैन जाती का उत्पत्ती राज्य है। कई क्षत्रियों ने हजारों साल पहले जैन धर्म स्विकार कीया था। जो आज भी प्राचिन ग्रंथों तथा मुर्तीयो पर उल्लेखित है। . राजा रायसल दरबारी खण्डेला के प्रथम शेखावत राजा थे। उन्होंने ई॰सं॰ १५८४ से १६१४ तक शासन किया। उनका विवाह चौहान राजपूत राजकुमारी किंनवती निर्बन सके साथ हुआ जो खण्डेला के राजा की पुत्री थी। .
खण्डेला और रायसल दरबारी आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
खण्डेला 1 संबंध नहीं है और रायसल दरबारी 1 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (1 + 1)।
यह लेख खण्डेला और रायसल दरबारी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। खण्डेला भारतीय राज्य राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक नगरपालिका क्षेत्र है। खण्डेला राज्य खंडेलवाल दिगंबर जैन जाती का उत्पत्ती राज्य है। कई क्षत्रियों ने हजारों साल पहले जैन धर्म स्विकार कीया था। जो आज भी प्राचिन ग्रंथों तथा मुर्तीयो पर उल्लेखित है। . राजा रायसल दरबारी खण्डेला के प्रथम शेखावत राजा थे। उन्होंने ई॰सं॰ एक हज़ार पाँच सौ चौरासी से एक हज़ार छः सौ चौदह तक शासन किया। उनका विवाह चौहान राजपूत राजकुमारी किंनवती निर्बन सके साथ हुआ जो खण्डेला के राजा की पुत्री थी। . खण्डेला और रायसल दरबारी आम में शून्य बातें हैं । खण्डेला एक संबंध नहीं है और रायसल दरबारी एक है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख खण्डेला और रायसल दरबारी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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संगड़ाह - विधानसभा क्षेत्र शिलाई की नाया पंजोड़ पंचायत के पंजोड़ गांव में दो दिनों से चल रहे भाईचारा मिलन समारोह पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हजारों लोगों ने शिरकत की। महासू देवता प्रांगण में आरंभ हुए इस समारोह के दौरान रात में गांव के ईष्ट देव का जागरण किया गया। इस गांव में शिरगुल देवता व ठारी माता का भी मंदिर है, जिनके प्रांगण में यह आयोजन हुआ। गांव के मुखिया सुरेंद्र सरस्वती, दौलत राम, चंदन सिंह, धर्मपाल, जगत राम शर्मा, काल्टू राम, बारू राम शास्त्री, रति राम आदि ने बताया कि गांव में सैकड़ों वर्ष पुराने महासू मंदिर के जीर्णोंद्वार के अवसर पर करीब 40 वर्षों के उपरांत भाईचारा, जिसे स्थानीय भाषा में दाईचारा कहा जाता है संपन्न हुआ। मंदिर निर्माण के बाद महासू देवता को उनके जन्म स्थान हनौल ले जाया गया, जहां पर देव स्नान के उपरांत वापस पंजोड़ गांव लाया गया, जहां पर नवनिर्मित मंदिर में महासू देवता की विधिवत स्थापना व पूजा-अर्चना के उपरांत यह उत्सव आरंभ हुआ। देवता के आगमन के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु देव लिंबर के दौरान इस प्रकार झूम रहे थे मानों उन्हें अपनी कोई सुध-बुध न हो यह मनोहारी दृश्य देखते बनता था। इस पर्व में पंजोड़ गांव के लोगों ने अपने दाईचारे के लोगों को संगड़ाह क्षेत्र के टिकरी, डाहर, शिलाई क्षेत्र के दिगवा के राजपूतों के साथ भी इस गांव के लोगों का भाईचारा है जो इस पर्व पर भारी मात्रा मंे शरीक हुए। इसके अलावा नाया, काफनू, ठोठा के अलावा द्राबिल से गुबदोउ भाट, हलाहं से ज्वाउ खोश तथा दिगवा के शेरोई खोशों ने भाग लिया। इस दौरान दिन-रात नाटी व माला नृत्य का कार्यक्रम चलता रहा। माला नृत्य को स्थानीय भाषा में लांब कहा जाता है, जिसमें पुरुष व महिलाएं बिना किसी भेदभाव के एक माला में नृत्य करते हैं जो दो दिनों तक चलता रहा। इस आयोजन के दौरान कुखड़ेच गांव के लोेगांे का भोजन व्यवस्था में विशेष सहयोग रहा। बदलते परिवेश के साथ-साथ क्षेत्र के लोग अपने ईष्ट देवों के सैकड़ों वर्षों पुराने मंदिरों का जीर्णोंद्वार करने लगे हैं, जिस पर गांव के लोग लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं, जिसमें मंदिर की पौराणिकता को बरकरार रखते हुए आधुनिकता का रंग भी भरा जा रहा है, जिससेगांव में बना मंदिर दूर से ही अपने अलग स्वरूप में दिखाई देता है। इस दौरान सभी क्षेत्रों से आए दाईचारे की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसमंे कई अहम फैसले लिए गए।
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संगड़ाह - विधानसभा क्षेत्र शिलाई की नाया पंजोड़ पंचायत के पंजोड़ गांव में दो दिनों से चल रहे भाईचारा मिलन समारोह पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हजारों लोगों ने शिरकत की। महासू देवता प्रांगण में आरंभ हुए इस समारोह के दौरान रात में गांव के ईष्ट देव का जागरण किया गया। इस गांव में शिरगुल देवता व ठारी माता का भी मंदिर है, जिनके प्रांगण में यह आयोजन हुआ। गांव के मुखिया सुरेंद्र सरस्वती, दौलत राम, चंदन सिंह, धर्मपाल, जगत राम शर्मा, काल्टू राम, बारू राम शास्त्री, रति राम आदि ने बताया कि गांव में सैकड़ों वर्ष पुराने महासू मंदिर के जीर्णोंद्वार के अवसर पर करीब चालीस वर्षों के उपरांत भाईचारा, जिसे स्थानीय भाषा में दाईचारा कहा जाता है संपन्न हुआ। मंदिर निर्माण के बाद महासू देवता को उनके जन्म स्थान हनौल ले जाया गया, जहां पर देव स्नान के उपरांत वापस पंजोड़ गांव लाया गया, जहां पर नवनिर्मित मंदिर में महासू देवता की विधिवत स्थापना व पूजा-अर्चना के उपरांत यह उत्सव आरंभ हुआ। देवता के आगमन के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु देव लिंबर के दौरान इस प्रकार झूम रहे थे मानों उन्हें अपनी कोई सुध-बुध न हो यह मनोहारी दृश्य देखते बनता था। इस पर्व में पंजोड़ गांव के लोगों ने अपने दाईचारे के लोगों को संगड़ाह क्षेत्र के टिकरी, डाहर, शिलाई क्षेत्र के दिगवा के राजपूतों के साथ भी इस गांव के लोगों का भाईचारा है जो इस पर्व पर भारी मात्रा मंे शरीक हुए। इसके अलावा नाया, काफनू, ठोठा के अलावा द्राबिल से गुबदोउ भाट, हलाहं से ज्वाउ खोश तथा दिगवा के शेरोई खोशों ने भाग लिया। इस दौरान दिन-रात नाटी व माला नृत्य का कार्यक्रम चलता रहा। माला नृत्य को स्थानीय भाषा में लांब कहा जाता है, जिसमें पुरुष व महिलाएं बिना किसी भेदभाव के एक माला में नृत्य करते हैं जो दो दिनों तक चलता रहा। इस आयोजन के दौरान कुखड़ेच गांव के लोेगांे का भोजन व्यवस्था में विशेष सहयोग रहा। बदलते परिवेश के साथ-साथ क्षेत्र के लोग अपने ईष्ट देवों के सैकड़ों वर्षों पुराने मंदिरों का जीर्णोंद्वार करने लगे हैं, जिस पर गांव के लोग लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं, जिसमें मंदिर की पौराणिकता को बरकरार रखते हुए आधुनिकता का रंग भी भरा जा रहा है, जिससेगांव में बना मंदिर दूर से ही अपने अलग स्वरूप में दिखाई देता है। इस दौरान सभी क्षेत्रों से आए दाईचारे की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसमंे कई अहम फैसले लिए गए।
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कोलकाता, 21 अप्रैल । गुजरात लायंस के सहायक कोच सितांशु कोटक के मुताबिक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 10वें संस्करण में टीम के अभी तक के बुरे प्रदर्शन का कारण उनका गेंदबाजी आक्रमण नहीं है। उनका कहना है कि गुजरात का गेंदबाजी आक्रमण पिछले संस्करण से बेहतर है।
कोलकाता के खिलाफ शुक्रवार को होने वाले मैच से पहले संवाददाता सम्मेलन में कोटक ने कहा, "जब आप हारते हैं तो हर चीज आपके खिलाफ जाती है। हमारे पास इस बार पहले से बेहतर गेंदबाजी आक्रमण है और हमारे पास इस क्षेत्र में विकल्प भी बहुत हैं। जब आप हारते हो तो लगता है कि कुछ अलग तरीके से किया जा सकता था।" कोलकाता के खिलाफ गुजरात का यह इस संस्करण में यह दूसरा मुकाबला है। सात अप्रैल को हुए मैच में कोलकाता ने गुजरात को 10 विकेट से करारी हार दी थी।
इस बार की रणनीति के बारे में पूछने पर कोटक ने कहा, "हमें लड़ते रहना होगा। कई बार भाग्य आपके साथ नहीं रहता। आपको कुछ मैच लगातार जीतने होते हैं ताकि सब कुछ सही रहे।"
पहले दो मैचों में टीम के साथ न रहने वाले हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा पर कोटक ने कहा, "वह हर क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हैं। पहले कुछ मैचों में जडेजा आराम कर रहे थे। आखिरी मैच में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। लेकिन सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, जडेजा जैसे खिलाड़ी हमारे पास घरेलू क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।"
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कोलकाता, इक्कीस अप्रैल । गुजरात लायंस के सहायक कोच सितांशु कोटक के मुताबिक इंडियन प्रीमियर लीग के दसवें संस्करण में टीम के अभी तक के बुरे प्रदर्शन का कारण उनका गेंदबाजी आक्रमण नहीं है। उनका कहना है कि गुजरात का गेंदबाजी आक्रमण पिछले संस्करण से बेहतर है। कोलकाता के खिलाफ शुक्रवार को होने वाले मैच से पहले संवाददाता सम्मेलन में कोटक ने कहा, "जब आप हारते हैं तो हर चीज आपके खिलाफ जाती है। हमारे पास इस बार पहले से बेहतर गेंदबाजी आक्रमण है और हमारे पास इस क्षेत्र में विकल्प भी बहुत हैं। जब आप हारते हो तो लगता है कि कुछ अलग तरीके से किया जा सकता था।" कोलकाता के खिलाफ गुजरात का यह इस संस्करण में यह दूसरा मुकाबला है। सात अप्रैल को हुए मैच में कोलकाता ने गुजरात को दस विकेट से करारी हार दी थी। इस बार की रणनीति के बारे में पूछने पर कोटक ने कहा, "हमें लड़ते रहना होगा। कई बार भाग्य आपके साथ नहीं रहता। आपको कुछ मैच लगातार जीतने होते हैं ताकि सब कुछ सही रहे।" पहले दो मैचों में टीम के साथ न रहने वाले हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा पर कोटक ने कहा, "वह हर क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हैं। पहले कुछ मैचों में जडेजा आराम कर रहे थे। आखिरी मैच में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। लेकिन सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, जडेजा जैसे खिलाड़ी हमारे पास घरेलू क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।"
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पठानकोट में हुए आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था। देश की खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में भी यही बात उभर कर आई है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर और उसका भाई अब्दुल भाई रऊफ असगर उन चार दहशतगर्दों में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी हमले की साजिश रची। इस खुलासे ने जहां एक और आतंकवादी घटना की याद ताजा कर दी है, वहीं दोनों तरफ के विदेश सचिवों की प्रस्तावित बैठक पर सवालिया निशान भी लगा दिया है। रऊफ 1999 में काठमांडो में एअर इंडिया के विमान के अपहरण का षड्यंत्रकर्ता था जिसे बाद में अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया। इस अपहरण से आठ दिन चला संकट बंधक बनाए गए मुसाफिरों और चालक दल के सदस्यों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर सहित तीन आतंकवादियों की रिहाई के साथ खत्म हुआ था। विमान के अपहर्ताओं से उस वक्त हुए समझौते को लेकर दो राय रही है। कुछ लोगों की निगाह में इससे तत्कालीन सरकार की कमजोरी जाहिर हुई थी, वहीं कुछ लोग उसे मात्र परिस्थितिजन्य विवशता मानते हैं। पर मसूद अजहर और उसके साथियों को छोड़े जाने की कीमत भारत आज भी चुका रहा है। पठानकोट कांड के तार जैश-ए-मोहम्मद के रूप में पाकिस्तान से जुड़े होने के तथ्य भारत ने पाकिस्तान को सौंप दिए हैं। पर इसी के साथ मोदी सरकार के सामने यह दुविधा भी खड़ी हो गई है कि वह पाकिस्तान से बातचीतके फैसले को कायम रखे या उसे मुल्तवी कर दे। दोनों तरफ के विदेश सचिवों की बैठक पंद्रह-सोलह जनवरी को इस्लामाबाद में संभावित है, जिसमें 'व्यापक द्विपक्षीय वार्ता' के अगले छह महीने के एजेंडे और वार्ता के तौर-तरीकों पर विचार होना है। लेकिन भारत की प्रतिक्रिया ने एक तरह से बैठक के आयोजन को सशर्त बना दिया है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश सचिवों की बैठक का होना इस पर निर्भर करेगा कि पठानकोट की बाबत पाकिस्तान त्वरित कार्रवाई करता है या नहीं। यों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारत को त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और इस बारे में अपने आला अफसरों की बैठक भी की है। लेकिन क्या सेना का भी यही रुख होगा? दुनिया जानती है कि रणनीतिक मामलों में पाकिस्तान की सरकार से ज्यादा वहां की फौज की चलती है। 2008 में मुंबई हमले के बाद भारत से मिले सबूतों के बारे में पाकिस्तान ने कई दफा कहा था कि ये आधी-अधूरी सूचनाएं हैं, कार्रवाई के लिए पक्की सूचनाएं चाहिए जो अदालत में सबूत के तौर पर टिक सकें। अगर उसी तरह की बहानेबाजी फिर सुनाई दे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी। लेकिन तब मोदी सरकार क्या करेगी? क्या विदेश सचिवों की बैठक रद्द कर दी जाएगी, जैसा कि अगस्त 2014 में हुआ था, या हाल में प्रधानमंत्री की संक्षिप्त पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई पहल को आगे बढ़ाने की गुंजाइश निकाली जाएगी? यह सवाल अभी अनुत्तरित है। वार्ता के भविष्य को लेकर अनिश्चितता का आलम है। गेंद फिलहाल पाकिस्तान के पाले में है। भारतीय जनता पार्टी और खुद मोदी पाकिस्तान-विरोध का कार्ड खेलते आए हैं। लिहाजा, पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई के बगैर वार्ता का नया दौर शुरू करना मोदी के लिए राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।
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पठानकोट में हुए आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था। देश की खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में भी यही बात उभर कर आई है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर और उसका भाई अब्दुल भाई रऊफ असगर उन चार दहशतगर्दों में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी हमले की साजिश रची। इस खुलासे ने जहां एक और आतंकवादी घटना की याद ताजा कर दी है, वहीं दोनों तरफ के विदेश सचिवों की प्रस्तावित बैठक पर सवालिया निशान भी लगा दिया है। रऊफ एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में काठमांडो में एअर इंडिया के विमान के अपहरण का षड्यंत्रकर्ता था जिसे बाद में अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया। इस अपहरण से आठ दिन चला संकट बंधक बनाए गए मुसाफिरों और चालक दल के सदस्यों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर सहित तीन आतंकवादियों की रिहाई के साथ खत्म हुआ था। विमान के अपहर्ताओं से उस वक्त हुए समझौते को लेकर दो राय रही है। कुछ लोगों की निगाह में इससे तत्कालीन सरकार की कमजोरी जाहिर हुई थी, वहीं कुछ लोग उसे मात्र परिस्थितिजन्य विवशता मानते हैं। पर मसूद अजहर और उसके साथियों को छोड़े जाने की कीमत भारत आज भी चुका रहा है। पठानकोट कांड के तार जैश-ए-मोहम्मद के रूप में पाकिस्तान से जुड़े होने के तथ्य भारत ने पाकिस्तान को सौंप दिए हैं। पर इसी के साथ मोदी सरकार के सामने यह दुविधा भी खड़ी हो गई है कि वह पाकिस्तान से बातचीतके फैसले को कायम रखे या उसे मुल्तवी कर दे। दोनों तरफ के विदेश सचिवों की बैठक पंद्रह-सोलह जनवरी को इस्लामाबाद में संभावित है, जिसमें 'व्यापक द्विपक्षीय वार्ता' के अगले छह महीने के एजेंडे और वार्ता के तौर-तरीकों पर विचार होना है। लेकिन भारत की प्रतिक्रिया ने एक तरह से बैठक के आयोजन को सशर्त बना दिया है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश सचिवों की बैठक का होना इस पर निर्भर करेगा कि पठानकोट की बाबत पाकिस्तान त्वरित कार्रवाई करता है या नहीं। यों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारत को त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और इस बारे में अपने आला अफसरों की बैठक भी की है। लेकिन क्या सेना का भी यही रुख होगा? दुनिया जानती है कि रणनीतिक मामलों में पाकिस्तान की सरकार से ज्यादा वहां की फौज की चलती है। दो हज़ार आठ में मुंबई हमले के बाद भारत से मिले सबूतों के बारे में पाकिस्तान ने कई दफा कहा था कि ये आधी-अधूरी सूचनाएं हैं, कार्रवाई के लिए पक्की सूचनाएं चाहिए जो अदालत में सबूत के तौर पर टिक सकें। अगर उसी तरह की बहानेबाजी फिर सुनाई दे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी। लेकिन तब मोदी सरकार क्या करेगी? क्या विदेश सचिवों की बैठक रद्द कर दी जाएगी, जैसा कि अगस्त दो हज़ार चौदह में हुआ था, या हाल में प्रधानमंत्री की संक्षिप्त पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई पहल को आगे बढ़ाने की गुंजाइश निकाली जाएगी? यह सवाल अभी अनुत्तरित है। वार्ता के भविष्य को लेकर अनिश्चितता का आलम है। गेंद फिलहाल पाकिस्तान के पाले में है। भारतीय जनता पार्टी और खुद मोदी पाकिस्तान-विरोध का कार्ड खेलते आए हैं। लिहाजा, पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई के बगैर वार्ता का नया दौर शुरू करना मोदी के लिए राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।
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गोलघर मीडिया वेंचर्स के तत्वावधान में आगामी 23 जून से राजधानी के संजय गांधी स्टेडियम (जीएसी ग्राउंड) पर आयोजित होने वाली जेनिथ कामर्स कप अंडर-15 अंतर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण रविवार को किया गया। ट्रॉफी का अनावरण जेनिथ कामर्स एकेडमी के निदेशक सुनील कुमार सिंह, राजद बिहार प्रदेश के महासचिव मधु मंजरी, भाजपा कला,संस्कृति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वरुण सिंह, गायक अभिषेक मिश्रा, कला, संस्कृति प्रकोष्ठ पटना महानगर भाजपा के जिला अध्यक्ष सतीश के दास, प्रेम कुमार, विकास वैभव ने किया।
इस मौके पर जेनिथ कामर्स एकेडमी के निदेशक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि हमारा संस्था क्रिकेट समेत अन्य खेलों के विकास में पहले ही काफी तत्पर रहा है। हमारी संस्था स्कूली खेलकूद को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है और आने वाले दिनों में और भी आयोजन कराये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता के विजेता व उपविजेता टीमों को चमचमाती ट्रॉफी के अलावा टूर्नामेंट के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट, बेस्ट बैटर, बेस्ट बॉलर, बेस्ट फील्डर, बेस्ट विकेटकीपर समेत कई अन्य आकर्षक पुरस्कार दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि आयोजन के सफल संचालन के लिए संतोष तिवारी को आयोजन सचिव बनाया गया है।
आयोजन सचिव संतोष तिवारी बताया कि टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति का गठन किया गया है। इस आयोजन में कुल 24 टीमें हिस्सा लेंगी। मैच नॉक आउट आधार पर 25-25 ओवरों के खेले जायेंगे। खिलाड़ियों को उम्र सत्यापन के लिए आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र साथ लाना होगा। उन्होंने कहा कि उम्र संबंध में आयोजन समिति द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा।
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गोलघर मीडिया वेंचर्स के तत्वावधान में आगामी तेईस जून से राजधानी के संजय गांधी स्टेडियम पर आयोजित होने वाली जेनिथ कामर्स कप अंडर-पंद्रह अंतर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण रविवार को किया गया। ट्रॉफी का अनावरण जेनिथ कामर्स एकेडमी के निदेशक सुनील कुमार सिंह, राजद बिहार प्रदेश के महासचिव मधु मंजरी, भाजपा कला,संस्कृति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वरुण सिंह, गायक अभिषेक मिश्रा, कला, संस्कृति प्रकोष्ठ पटना महानगर भाजपा के जिला अध्यक्ष सतीश के दास, प्रेम कुमार, विकास वैभव ने किया। इस मौके पर जेनिथ कामर्स एकेडमी के निदेशक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि हमारा संस्था क्रिकेट समेत अन्य खेलों के विकास में पहले ही काफी तत्पर रहा है। हमारी संस्था स्कूली खेलकूद को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है और आने वाले दिनों में और भी आयोजन कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता के विजेता व उपविजेता टीमों को चमचमाती ट्रॉफी के अलावा टूर्नामेंट के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट, बेस्ट बैटर, बेस्ट बॉलर, बेस्ट फील्डर, बेस्ट विकेटकीपर समेत कई अन्य आकर्षक पुरस्कार दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि आयोजन के सफल संचालन के लिए संतोष तिवारी को आयोजन सचिव बनाया गया है। आयोजन सचिव संतोष तिवारी बताया कि टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति का गठन किया गया है। इस आयोजन में कुल चौबीस टीमें हिस्सा लेंगी। मैच नॉक आउट आधार पर पच्चीस-पच्चीस ओवरों के खेले जायेंगे। खिलाड़ियों को उम्र सत्यापन के लिए आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र साथ लाना होगा। उन्होंने कहा कि उम्र संबंध में आयोजन समिति द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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146 समाजशास्त्र
(6) जनता का निमारण सदैव उद्देश्य पूर्ण रूप से होता है, यह स्वयं कभी विकसित नहीं होती। जब कभी किसी विशेष विचार, घटना आदि में जब बहुत-से व्यक्ति रुचि लेत हैं या उसके प्रति चेतन हो जात है, तभी एक जनता का निर्माण हो जाता है ।
(7) जनता के स्वरूप अनेक हो सकते हैं। हम इन्हें सामान्य रूप से चार भागो मे बाट सकते हैं - अल्पकालीन, दोघकालीन, सामान्य और विशिष्ट । यदि रेडियो पर किसी आकस्मिक आग या बाढ का समाचार प्रसारित हो रहा हो तो इस समस्या का स्वरूप अल्पकालीन होने से इसे सुनने वाली जनता को भी हम अल्पकालीन जनता' के नाम स सम्बोधित करेंगे ।
( 8 ) यद्यपि जनता भीड के समान अबौद्धिव नहीं होती, लेकिन प्रचार के प्रभाव से कोई भी जनता उद्वगपूरा होकर भीड का रूप ले सकती है। जब जनता भीड का रूप ले लेती है तो दग फसाद हो जाते हैं ।
जनमत का प्रभाव
(The Effect of Public Opinion )
किंग्सले डेविस ने जनता ( The public ) के सन्दर्भ में जनमत के प्रभाव का उल्लेख किया है। डेविस के अनुसार, जब हजारो-लाखो लोग व्यक्तिगत रूप से विचार करके ही समान निराय पर पहुँचते हैं तो ऐसे निरराय का सार्वजनिक प्रभाव बडा गम्भीर हो सकता है। जनता को रुचि मे परिवर्तन आने से कोई एक उद्योग पनप सकता है तो दूसरा उद्योग समाप्त हो सकता है। जनता को सशक्त अभिक्रिया से किसी युद्ध का प्रारम्भ हो सकता है था कोई क्रान्ति पैदा हो सकती है। इसीलिए प्रत्येक सरकार जनमत (Public opinion ) को आवश्यक रूप से अपने पक्ष में रखने का प्रयास करती है ताकि उसके उखड़ जाने का भय न रहे ।
जनमत का प्रभाव बडा व्यापक और शक्तिशाली होता है, पर जनमत को कोई विशुद्ध भविष्यवाणी नही वा जा सकती : जनमत का परिणाम भी, बहुत-सो अवस्थाओं में प्राय बिलकुल अनिश्चित होता है। जो भी भविष्यवाणियां निरन्तर की जाती रहती हैं दे एक वैनिक उक्ति के रूप में नहीं बल्कि मन्तिम परिणाम को प्रभावित करने के प्रयत्न में प्रचार के एक साधन के रूप में की जाती है ।
आधुनिक समाज मे जनता का बढता हुआ महत्त्व
(Growing Importance of the Publie in Modern Society !
किंग्सले डेविस क इस निष्पर्य के बारे में दो राय नहीं हो सकती कि आधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप जनता का महत्व बहुत बढ़ गया है । इसने व्यक्तियों की सख्या को इतना अधिक बढ़ा दिया है कि किसी भी समस्या पर
I Ogburn and Nimkoff op cit,p 169 2 किग्सले दविस बही, पृष्ठ 310
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एक सौ छियालीस समाजशास्त्र जनता का निमारण सदैव उद्देश्य पूर्ण रूप से होता है, यह स्वयं कभी विकसित नहीं होती। जब कभी किसी विशेष विचार, घटना आदि में जब बहुत-से व्यक्ति रुचि लेत हैं या उसके प्रति चेतन हो जात है, तभी एक जनता का निर्माण हो जाता है । जनता के स्वरूप अनेक हो सकते हैं। हम इन्हें सामान्य रूप से चार भागो मे बाट सकते हैं - अल्पकालीन, दोघकालीन, सामान्य और विशिष्ट । यदि रेडियो पर किसी आकस्मिक आग या बाढ का समाचार प्रसारित हो रहा हो तो इस समस्या का स्वरूप अल्पकालीन होने से इसे सुनने वाली जनता को भी हम अल्पकालीन जनता' के नाम स सम्बोधित करेंगे । यद्यपि जनता भीड के समान अबौद्धिव नहीं होती, लेकिन प्रचार के प्रभाव से कोई भी जनता उद्वगपूरा होकर भीड का रूप ले सकती है। जब जनता भीड का रूप ले लेती है तो दग फसाद हो जाते हैं । जनमत का प्रभाव किंग्सले डेविस ने जनता के सन्दर्भ में जनमत के प्रभाव का उल्लेख किया है। डेविस के अनुसार, जब हजारो-लाखो लोग व्यक्तिगत रूप से विचार करके ही समान निराय पर पहुँचते हैं तो ऐसे निरराय का सार्वजनिक प्रभाव बडा गम्भीर हो सकता है। जनता को रुचि मे परिवर्तन आने से कोई एक उद्योग पनप सकता है तो दूसरा उद्योग समाप्त हो सकता है। जनता को सशक्त अभिक्रिया से किसी युद्ध का प्रारम्भ हो सकता है था कोई क्रान्ति पैदा हो सकती है। इसीलिए प्रत्येक सरकार जनमत को आवश्यक रूप से अपने पक्ष में रखने का प्रयास करती है ताकि उसके उखड़ जाने का भय न रहे । जनमत का प्रभाव बडा व्यापक और शक्तिशाली होता है, पर जनमत को कोई विशुद्ध भविष्यवाणी नही वा जा सकती : जनमत का परिणाम भी, बहुत-सो अवस्थाओं में प्राय बिलकुल अनिश्चित होता है। जो भी भविष्यवाणियां निरन्तर की जाती रहती हैं दे एक वैनिक उक्ति के रूप में नहीं बल्कि मन्तिम परिणाम को प्रभावित करने के प्रयत्न में प्रचार के एक साधन के रूप में की जाती है । आधुनिक समाज मे जनता का बढता हुआ महत्त्व (Growing Importance of the Publie in Modern Society ! किंग्सले डेविस क इस निष्पर्य के बारे में दो राय नहीं हो सकती कि आधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप जनता का महत्व बहुत बढ़ गया है । इसने व्यक्तियों की सख्या को इतना अधिक बढ़ा दिया है कि किसी भी समस्या पर I Ogburn and Nimkoff op cit,p एक सौ उनहत्तर दो किग्सले दविस बही, पृष्ठ तीन सौ दस
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नर्सिंग का अध्ययन बीमारियों और चोटों की रोकथाम, सभी उम्र के रोगियों की देखभाल और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह विषय किसी के लिए उपयोगी है, जो अस्पतालों, क्लीनिकों, सहायक रहने वाले केंद्रों या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में एक नर्स होना चाहती है।
साल के एक जोड़े के लिए अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय मानकों के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षा के स्तर में सुधार के द्वारा अपने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है. पाठ्यक्रम के कुछ चीनी और स्पेनिश अंग्रेजी, जैसे अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में की पेशकश कर रहे हैं जहां सुधार छात्रों रिश्ता भी है.
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नर्सिंग का अध्ययन बीमारियों और चोटों की रोकथाम, सभी उम्र के रोगियों की देखभाल और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह विषय किसी के लिए उपयोगी है, जो अस्पतालों, क्लीनिकों, सहायक रहने वाले केंद्रों या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में एक नर्स होना चाहती है। साल के एक जोड़े के लिए अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय मानकों के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षा के स्तर में सुधार के द्वारा अपने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है. पाठ्यक्रम के कुछ चीनी और स्पेनिश अंग्रेजी, जैसे अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में की पेशकश कर रहे हैं जहां सुधार छात्रों रिश्ता भी है.
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बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट शेयर कर लोगों को कोरोना के खिलाफ जंग में जागरूकता फैला रही हैं। साथ ही लोगों को कोविड- 19 प्रोटोकॉल्स का फॉलो करने की भी अपील करती रहती हैं। अब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें वो बेहद क्यूट दिख रही हैं।
बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं। अब उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर की हैं जो इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में एक्ट्रेस समुद्र किनारे पोज देती नजर आ रही हैं।
आलिया में अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर दो तस्वीरें शेयर की है, जिनमें वो समुद्र किनारे चिल करती नजर आ रही हैं। पहली तस्वीर में आलिया भट्ट पीले कलर की प्रिंटेड शॉर्ट्स ड्रेस के साथ व्हाइट फ्लोरल हैट लगाए पोज देती नजर आ रही हैं। जबकि दूसरी तस्वीर उनके बचपन की है, जिसमें वो बेहद क्यूट दिख रही हैं। इस फोटो में वो कैमरे की ओर देखते हुए पोज देती दिख रही हैं।
इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्होंने कैप्शन लिखा, 'क्योंकि कोई फर्क नहीं पडता कि हम कौन हैं। ' अभिनेत्री की इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर उनके फैंस दिल खोलकर लाइक कर रहे हैं। तस्वीरों को अब तक 11 लाख से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। साथ ही बॉलीवुड सेलेब्स कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इन तस्वीरों पर उनकी मां सोनी राजदान ने कमेंट कर लिखा, 'ओह्ह् बेबी। ' अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, रिद्धिमा कपूर सहानी, ताहिर कश्यप ने तस्वीरों पर हार्ड की इमोजी कमेंट की है। वहीं आकांक्षा रंजन ने गुस्से के फेस वाली इमोजी कमेंट की है।
हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर 5 एपिसोड वाली पॉडकास्ट सीरीज शुरू की थी, जिसमें उनकी डॉक्टरों की टीम ने वैक्सीन के मिथकों और झूटे दावों पर बात की थी। बात अगर उनके वर्कफ्रंट की करें तो वो जल्द मोस्ट अवेटेड फिल्म 'आरआरआर' में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में वो लीड एक्ट्रेस सीता का किरदार निभा रही हैं। फिल्म 'आरआरआर' एक पीरियड ड्रामा फिल्म है, जो दो तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम पर आधारित है।
इस फिल्म को बाहुबली निर्देशक एसएस राजामौली के निर्देशन में बनाया जा रहा है। इसके अलावा वो संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गंगूबाई काठियावाडी' में लीड रोल में नजर आने वाली हैं। साथ ही वो फिल्म 'ब्राह्मस्त्र' में अभिनेता रणबीर कपूर के साथ नजर आने वाली हैं।
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बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट शेयर कर लोगों को कोरोना के खिलाफ जंग में जागरूकता फैला रही हैं। साथ ही लोगों को कोविड- उन्नीस प्रोटोकॉल्स का फॉलो करने की भी अपील करती रहती हैं। अब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें वो बेहद क्यूट दिख रही हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं। अब उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर की हैं जो इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में एक्ट्रेस समुद्र किनारे पोज देती नजर आ रही हैं। आलिया में अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर दो तस्वीरें शेयर की है, जिनमें वो समुद्र किनारे चिल करती नजर आ रही हैं। पहली तस्वीर में आलिया भट्ट पीले कलर की प्रिंटेड शॉर्ट्स ड्रेस के साथ व्हाइट फ्लोरल हैट लगाए पोज देती नजर आ रही हैं। जबकि दूसरी तस्वीर उनके बचपन की है, जिसमें वो बेहद क्यूट दिख रही हैं। इस फोटो में वो कैमरे की ओर देखते हुए पोज देती दिख रही हैं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्होंने कैप्शन लिखा, 'क्योंकि कोई फर्क नहीं पडता कि हम कौन हैं। ' अभिनेत्री की इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर उनके फैंस दिल खोलकर लाइक कर रहे हैं। तस्वीरों को अब तक ग्यारह लाख से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। साथ ही बॉलीवुड सेलेब्स कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इन तस्वीरों पर उनकी मां सोनी राजदान ने कमेंट कर लिखा, 'ओह्ह् बेबी। ' अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, रिद्धिमा कपूर सहानी, ताहिर कश्यप ने तस्वीरों पर हार्ड की इमोजी कमेंट की है। वहीं आकांक्षा रंजन ने गुस्से के फेस वाली इमोजी कमेंट की है। हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर पाँच एपिसोड वाली पॉडकास्ट सीरीज शुरू की थी, जिसमें उनकी डॉक्टरों की टीम ने वैक्सीन के मिथकों और झूटे दावों पर बात की थी। बात अगर उनके वर्कफ्रंट की करें तो वो जल्द मोस्ट अवेटेड फिल्म 'आरआरआर' में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में वो लीड एक्ट्रेस सीता का किरदार निभा रही हैं। फिल्म 'आरआरआर' एक पीरियड ड्रामा फिल्म है, जो दो तेलुगु स्वतंत्रता सेनानियों अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम पर आधारित है। इस फिल्म को बाहुबली निर्देशक एसएस राजामौली के निर्देशन में बनाया जा रहा है। इसके अलावा वो संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गंगूबाई काठियावाडी' में लीड रोल में नजर आने वाली हैं। साथ ही वो फिल्म 'ब्राह्मस्त्र' में अभिनेता रणबीर कपूर के साथ नजर आने वाली हैं।
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Sardhana : सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। एक मुकाम पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत और लगन जरूरी होती है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए व्यक्ति को पूरी शिद्दत से काम करना पड़ता है। यदि व्यक्ति ठान ले तो ऐसा कोई काम नहीं जो नामुमकिन है। यह बात बॉलीवुड के मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कही।
सेंट जेवियर्स स्कूल के शुभारंभ के अवसर पर पहली बार सरधना पहुंचे राजपाल यादव यहां के लोगों की ऊर्जा के कायल दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि देखने से ही पता चलता है कि यहां के लोगों में कितनी ऊर्जा है। ऐसे ही ऊर्जावान रहें और एक-दूसरे के साथ प्यार मोहब्बत से रहें। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सभी लोगों के भीतर कोई न कोई कलाकार छिपा होता है। जरूरत है बस उसे पहचानने की और कला की बारीकियां सीखने की।
सफल होने के लिए व्यक्ति को खुद ही मेहनत करनी पड़ती है और आगे बढ़ना पड़ता है। पढ़ाई भी किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। टीवी कलाकार प्रत्युषा बैनर्जी की हाल ही में हुई मौत के बारे में उन्होंने कहा कि यह काफी दुखद घटना है। जीवन का दूसरा नाम कठिनाई है। सुख और दुख जीवन में आते जाते रहते हैं। कठिनाई से कभी हार नहीं मानना चाहिए। उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। इस मौके पर स्कूल का स्टाफ भी मौजूद रहा।
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Sardhana : सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। एक मुकाम पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत और लगन जरूरी होती है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए व्यक्ति को पूरी शिद्दत से काम करना पड़ता है। यदि व्यक्ति ठान ले तो ऐसा कोई काम नहीं जो नामुमकिन है। यह बात बॉलीवुड के मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कही। सेंट जेवियर्स स्कूल के शुभारंभ के अवसर पर पहली बार सरधना पहुंचे राजपाल यादव यहां के लोगों की ऊर्जा के कायल दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि देखने से ही पता चलता है कि यहां के लोगों में कितनी ऊर्जा है। ऐसे ही ऊर्जावान रहें और एक-दूसरे के साथ प्यार मोहब्बत से रहें। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सभी लोगों के भीतर कोई न कोई कलाकार छिपा होता है। जरूरत है बस उसे पहचानने की और कला की बारीकियां सीखने की। सफल होने के लिए व्यक्ति को खुद ही मेहनत करनी पड़ती है और आगे बढ़ना पड़ता है। पढ़ाई भी किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। टीवी कलाकार प्रत्युषा बैनर्जी की हाल ही में हुई मौत के बारे में उन्होंने कहा कि यह काफी दुखद घटना है। जीवन का दूसरा नाम कठिनाई है। सुख और दुख जीवन में आते जाते रहते हैं। कठिनाई से कभी हार नहीं मानना चाहिए। उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। इस मौके पर स्कूल का स्टाफ भी मौजूद रहा।
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से पैर लिए देखते-देखते, बात करते-करते, दस-दस, बारहबारह मिनट के अन्दर समाप्त होने लगे थे। कभोजो बरसते हुए पानी में सड़कों से मृतकों के विमान निकलते, तो दुर्बल तन और कातर मनवाले नर-नारी राम के साथ सत्य का निर्घोष सुनकर मांगलिक आशंकामों से थर-थरा उठते । खुले तौर पर शराब यों भी दुर्लभ थी, पर अब तो उन लोगों को और भी दुष्प्राप्य हो उठी, जो नित्य लुक-छिपकर दो-एक पेग चढ़ा लेने के अभ्यासी थे । कुछ ऐसे भी मनचले लोग थे, जिन्हें ऐसे ही समय खुलकर सौख्य-लाभ करने की प्रेरणा मिलती है । ऐसे समय उनके दलाल और निकटवर्ती प्रभिन्न लोग यत्र तत्र दौड़ने लगे । सरसैयाघाट के मंदिरों तथा पंडों के आसनों पर घंटों जमनेवाले गंगा स्नानार्थियों की संख्या बहुत कम हो गई थी ।
इतना सब कुछ होते हुए भी जीवन की सर्वग्राही और सर्वव्यापक रचना का क्रम पूर्ववत स्थिर था और भवानी बाबू का आत्म-निरीक्षरण बन्द नहीं हुआ था ।
सूर्योदय हुए केवल घंटा भर हुआ होगा । कई दिनों के बाद बादल हट गये थे । भवानी बाबू कमरे में बैठे-बैठे खुले आकाश को देखकर मन-ही-मन प्रसन्न हो रहे थे । अतीत के दिन उन्हें स्वप्न से लगते थे ।
उस दिन राधेगोविन्द का स्मरण करते हुए उन्होंने माया से कहा था - "अब तो घुटनों के बल चलने लगी होगी, सत्यवती । क्यों माया रानी ?"
माया को जब वे 'रानी' शब्द की शर्करा में डुबोकर
सम्बोधन करते, तब उसको यह समझते देख लगती थी कि ये मुझे बना रहे हैं ।
प्रश्न सुनकर उसने कहा - "तो ललचा क्यों रहे हो ? अब तक तो उसके मुँह में नन्हे-नन्हे दाँत भी निकल आए होंगे; राधेगोबिंद दौड़ने लगा होगा। नाना न सही, नानी उस की अँगुली पकड़े पास-पड़ौस के घरों में चक्कर लगाती होंगी गोकुल भैया उसे अपने साथ बैठाकर खाना खिलाते होंगे । भाभी कुढ़-कुढ़कर रह जाती होगी । मेरा क्या, मैं यो सोत ठहरी, पर तुमको तो एक बार देख आना चाहिए था । दीदी को छोड़ दिया है, लेकिन बच्चे कहीं छोड़े जा सकते हैं ।"
मां बरामदे में बैठी - बैठी झाडू लगाती हुई, नयी बहू की इन बातों को सुन-सुनकर मन-ही-मन कुड़कुड़ा रही थी - 'सत्यवती रांड को तो मैं लेने से रही । हां, राधेगोविंद को अलबत्ता किसी तरकीब से ले आना पड़ेगा ।
भवानी बाबू ने उत्तर दिया- "अच्छी बात है । कपड़े धुलकर आ जायँ, तो मैं दो-चार दिन के लिये वहाँ हो आऊँ ।"
माँ से न रहा गया । कमरे के अन्दर जा पहुंची। माया ने नयनों के नीचे तक अवगुष्ठन खींच लिया ।
अब इस वृद्धावस्था में भी भवानी बाबू को माया का वह प्रसन्न, पुलकित मुखारबिन्द स्मरण प्रा रहा था ।
जो वासना अन्याय और पाप को जन्म देती है उसका सौख्य अन्त में बड़ा ही दारुण और करुण रूप प्रकट करता है ।
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से पैर लिए देखते-देखते, बात करते-करते, दस-दस, बारहबारह मिनट के अन्दर समाप्त होने लगे थे। कभोजो बरसते हुए पानी में सड़कों से मृतकों के विमान निकलते, तो दुर्बल तन और कातर मनवाले नर-नारी राम के साथ सत्य का निर्घोष सुनकर मांगलिक आशंकामों से थर-थरा उठते । खुले तौर पर शराब यों भी दुर्लभ थी, पर अब तो उन लोगों को और भी दुष्प्राप्य हो उठी, जो नित्य लुक-छिपकर दो-एक पेग चढ़ा लेने के अभ्यासी थे । कुछ ऐसे भी मनचले लोग थे, जिन्हें ऐसे ही समय खुलकर सौख्य-लाभ करने की प्रेरणा मिलती है । ऐसे समय उनके दलाल और निकटवर्ती प्रभिन्न लोग यत्र तत्र दौड़ने लगे । सरसैयाघाट के मंदिरों तथा पंडों के आसनों पर घंटों जमनेवाले गंगा स्नानार्थियों की संख्या बहुत कम हो गई थी । इतना सब कुछ होते हुए भी जीवन की सर्वग्राही और सर्वव्यापक रचना का क्रम पूर्ववत स्थिर था और भवानी बाबू का आत्म-निरीक्षरण बन्द नहीं हुआ था । सूर्योदय हुए केवल घंटा भर हुआ होगा । कई दिनों के बाद बादल हट गये थे । भवानी बाबू कमरे में बैठे-बैठे खुले आकाश को देखकर मन-ही-मन प्रसन्न हो रहे थे । अतीत के दिन उन्हें स्वप्न से लगते थे । उस दिन राधेगोविन्द का स्मरण करते हुए उन्होंने माया से कहा था - "अब तो घुटनों के बल चलने लगी होगी, सत्यवती । क्यों माया रानी ?" माया को जब वे 'रानी' शब्द की शर्करा में डुबोकर सम्बोधन करते, तब उसको यह समझते देख लगती थी कि ये मुझे बना रहे हैं । प्रश्न सुनकर उसने कहा - "तो ललचा क्यों रहे हो ? अब तक तो उसके मुँह में नन्हे-नन्हे दाँत भी निकल आए होंगे; राधेगोबिंद दौड़ने लगा होगा। नाना न सही, नानी उस की अँगुली पकड़े पास-पड़ौस के घरों में चक्कर लगाती होंगी गोकुल भैया उसे अपने साथ बैठाकर खाना खिलाते होंगे । भाभी कुढ़-कुढ़कर रह जाती होगी । मेरा क्या, मैं यो सोत ठहरी, पर तुमको तो एक बार देख आना चाहिए था । दीदी को छोड़ दिया है, लेकिन बच्चे कहीं छोड़े जा सकते हैं ।" मां बरामदे में बैठी - बैठी झाडू लगाती हुई, नयी बहू की इन बातों को सुन-सुनकर मन-ही-मन कुड़कुड़ा रही थी - 'सत्यवती रांड को तो मैं लेने से रही । हां, राधेगोविंद को अलबत्ता किसी तरकीब से ले आना पड़ेगा । भवानी बाबू ने उत्तर दिया- "अच्छी बात है । कपड़े धुलकर आ जायँ, तो मैं दो-चार दिन के लिये वहाँ हो आऊँ ।" माँ से न रहा गया । कमरे के अन्दर जा पहुंची। माया ने नयनों के नीचे तक अवगुष्ठन खींच लिया । अब इस वृद्धावस्था में भी भवानी बाबू को माया का वह प्रसन्न, पुलकित मुखारबिन्द स्मरण प्रा रहा था । जो वासना अन्याय और पाप को जन्म देती है उसका सौख्य अन्त में बड़ा ही दारुण और करुण रूप प्रकट करता है ।
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बहराइच (उत्तर प्रदेश): जब लक्ष्मणपुर-शंकरपुर गांव में बारात पहुंची, तो लगभग पूरा गांव दूल्हे के साथ नहीं, बल्कि सजाए गए बुलडोजर के साथ सेल्फी लेने के लिए कार्यक्रम स्थल पर दौड़ पड़ा, जिस पर वह आया था.
शनिवार को दूल्हे के बुलडोजर पर पहुंचे और 'बुलडोजर बाबा की जय' के नारे लगाने से पूरे गांव में जश्न का माहौल था।
दूल्हे बादशाह उस ध्यान से खुश था जो उसने गांव में हासिल किया था।
"मैं अपनी शादी को एक यादगार घटना बनाना चाहता था और मुझे लगा कि यह विचार भी इसे अलग बना देगा," उन्होंने कहा।
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बहराइच : जब लक्ष्मणपुर-शंकरपुर गांव में बारात पहुंची, तो लगभग पूरा गांव दूल्हे के साथ नहीं, बल्कि सजाए गए बुलडोजर के साथ सेल्फी लेने के लिए कार्यक्रम स्थल पर दौड़ पड़ा, जिस पर वह आया था. शनिवार को दूल्हे के बुलडोजर पर पहुंचे और 'बुलडोजर बाबा की जय' के नारे लगाने से पूरे गांव में जश्न का माहौल था। दूल्हे बादशाह उस ध्यान से खुश था जो उसने गांव में हासिल किया था। "मैं अपनी शादी को एक यादगार घटना बनाना चाहता था और मुझे लगा कि यह विचार भी इसे अलग बना देगा," उन्होंने कहा।
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बीबीसी के अनुसार, 25 वर्षीय स्टोन ने अभी तक इंग्लैंड के लिए एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है। वुड वनडे सीरीज के लिए टीम का हिस्सा थे लेकिन अब वे टेस्ट सीरीज में भी खेलेंगे। वुड ने अब तक अपने देश के लिए टेस्ट क्रिकेट में 41. 73 के औसत से 30 विकेट लिए हैं। वे भी अपने करियर में लगातार चोट के कारण परेशानी में रहे हैं।
वुड ने कहा कि मैंने नवंबर और दिसंबर में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर इंग्लैंड की टीम के साथ काफी काम किया था। मेरा शरीर अच्छा है, मैं यूएई के दौर से फिट होकर ही लौटा था। टेस्ट सीरीज का पहला मैच 23 जनवरी से यहां ब्रिजटाउन में खेला जाएगा।
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बीबीसी के अनुसार, पच्चीस वर्षीय स्टोन ने अभी तक इंग्लैंड के लिए एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है। वुड वनडे सीरीज के लिए टीम का हिस्सा थे लेकिन अब वे टेस्ट सीरीज में भी खेलेंगे। वुड ने अब तक अपने देश के लिए टेस्ट क्रिकेट में इकतालीस. तिहत्तर के औसत से तीस विकेट लिए हैं। वे भी अपने करियर में लगातार चोट के कारण परेशानी में रहे हैं। वुड ने कहा कि मैंने नवंबर और दिसंबर में संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर इंग्लैंड की टीम के साथ काफी काम किया था। मेरा शरीर अच्छा है, मैं यूएई के दौर से फिट होकर ही लौटा था। टेस्ट सीरीज का पहला मैच तेईस जनवरी से यहां ब्रिजटाउन में खेला जाएगा।
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भी, इनमें 'अह' को पूर्ण शून्य बनाने की सामर्थ्य नहीं है। इनके पीछे कम-ज्यादा परिमाण में 'अह' का भान रहना ही है । अह को शून्य करने का मुख्य साधन है - हरि शरणता, भक्ति । उसे प्राप्त करने का प्रयत्न जो योगी करता है, वह अपने को मिटा सवता है, शून्य बना सकता है। जो फल अध्ययन, यज्ञ, तप और दान से नहीं मिलता, वह फल भी योगी प्राप्त कर लेता है। यानी अह् को शून्य बनाकर वह बडा भारी फल-मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इस महान फल मे और समस्त फल अतर्भूत हो जाते है ।
( ७ ) आद्यं परं स्थान उपैति । योगी । शून्यता प्राप्त करके श्रेष्ठ ब्रह्मस्थान को पहुँच जाता है। ब्रह्म को प्राप्त करने की एक ही गर्त है - अपने को शून्य बनाना । मपूर्ण जगत् का मूल कारण ब्रह्म है। वह मूल आधार है । वह शाश्वत है । लेकिन शरीर मे वह ब्रह्म प्रकट होने के साथ ही के
उस वहा पर 'मे'जन की कल्पना उठती हैं, और यही जीवभाव है। यदि यह क्षीण हो जाय, शून्य ही जाय तो सर्प की कल्पना दूर होने से जैसे डोरी का ज्ञान हो जाता है, वैसे ही अह की कल्पना दूर होते ही जिस पर यह अह की कल्पना उठती है, उस मूल कारण ब्रह्म या परमात्मा का ज्ञान हो जाता है, और मूलस्थान प्राप्त हो जाता है । वह मूलस्थान पहले से ही प्राप्त है। मगर अह की कल्पना जब तक दूर नहीं होती, तब तक ज्ञान न होने से यह स्थान प्राप्त नहीं होता । अह् की कल्पना दूर होते ही उन मूल कारण का, उस मूल आधार का ज्ञान हो जाता है।
यहाँ भगवान् ने बताया है कि योगी का लक्ष्य अपने को शून्य बनाना होने से यह स्वाध्याय, यज्ञ, तप, दान आदि की साधना करते हुए उनमे अतीत हो जाता है, और परमात्मा की एकरुपता का अनुभव करता है ।
हिना सण्ड समाप्त
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भी, इनमें 'अह' को पूर्ण शून्य बनाने की सामर्थ्य नहीं है। इनके पीछे कम-ज्यादा परिमाण में 'अह' का भान रहना ही है । अह को शून्य करने का मुख्य साधन है - हरि शरणता, भक्ति । उसे प्राप्त करने का प्रयत्न जो योगी करता है, वह अपने को मिटा सवता है, शून्य बना सकता है। जो फल अध्ययन, यज्ञ, तप और दान से नहीं मिलता, वह फल भी योगी प्राप्त कर लेता है। यानी अह् को शून्य बनाकर वह बडा भारी फल-मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इस महान फल मे और समस्त फल अतर्भूत हो जाते है । आद्यं परं स्थान उपैति । योगी । शून्यता प्राप्त करके श्रेष्ठ ब्रह्मस्थान को पहुँच जाता है। ब्रह्म को प्राप्त करने की एक ही गर्त है - अपने को शून्य बनाना । मपूर्ण जगत् का मूल कारण ब्रह्म है। वह मूल आधार है । वह शाश्वत है । लेकिन शरीर मे वह ब्रह्म प्रकट होने के साथ ही के उस वहा पर 'मे'जन की कल्पना उठती हैं, और यही जीवभाव है। यदि यह क्षीण हो जाय, शून्य ही जाय तो सर्प की कल्पना दूर होने से जैसे डोरी का ज्ञान हो जाता है, वैसे ही अह की कल्पना दूर होते ही जिस पर यह अह की कल्पना उठती है, उस मूल कारण ब्रह्म या परमात्मा का ज्ञान हो जाता है, और मूलस्थान प्राप्त हो जाता है । वह मूलस्थान पहले से ही प्राप्त है। मगर अह की कल्पना जब तक दूर नहीं होती, तब तक ज्ञान न होने से यह स्थान प्राप्त नहीं होता । अह् की कल्पना दूर होते ही उन मूल कारण का, उस मूल आधार का ज्ञान हो जाता है। यहाँ भगवान् ने बताया है कि योगी का लक्ष्य अपने को शून्य बनाना होने से यह स्वाध्याय, यज्ञ, तप, दान आदि की साधना करते हुए उनमे अतीत हो जाता है, और परमात्मा की एकरुपता का अनुभव करता है । हिना सण्ड समाप्त
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मेरठ पुलिस को अवैध हथियारों के मामले में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. पुलिस ने मेरठ में अवैध हथियार बनाने की 2 फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, साथ ही हथियारों की सप्लाई करने के 140 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से भारी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं, साथ ही हथियार बनाने के औजार भी मिले हैं.
मेरठ पुलिस ने अवैध हथियारों की जखीरे को बरामद कर बड़ा खुलासा किया. साथ ही 140 आरोपियों को धर दबोचा. मेरठ पुलिस की 10 टीमें इस ऑपरेशन में लगी थीं जिन्होंने दो दिन के अंदर इस कार्रवाई को अंजाम दिया.
मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने 10 टीमों का गठन किया जिन्होंने मेरठ शहर के विभिन्न इलाकों में उन अवैध हथियार बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जो मेरठ जिले में हथियार बना रहे थे या सप्लाई कर रहे थे. सभी 10 टीमों ने मिलकर 140 लोगों को गिरफ्तार किया. इनके पास से बड़ी संख्या में अवैध शस्त्र बरामद किए गए हैं. इसमें सभी प्रकार के तमंचे, पिस्टल आदि हथियार भी शामिल हैं.
पुलिस को 315 बोर के 179 तमंचे, 12 बोर के 35 तमंचे, 30 बोर के 2 तमंचे, अधबने 12 तमंचे, 32 बोर की एक पिस्टल, रिवॉल्वर देशी 38 बोर- एक, पोनिया- 4, अधबनी बंदूकें 12 बोर- 2, राइफल 315 बोर- 1 और 4 कारें मिलीं. इसके अलावा हथियार बनाने के औजार भी बड़ी मात्रा में बरामद किए गए हैं.
पुलिस ने इस दौरान दो हथियार बनाने की फैक्ट्रियों का भी भंडाफोड़ कर दिया जो कि मेरठ के ब्रह्मपुरी और किला परीक्षितगढ़ में चल रही थी, इसके साथ पुलिस ने चार लग्जरी गाड़ियों को भी बरामद किया है.
(इनपुट-अजय साहनी)
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मेरठ पुलिस को अवैध हथियारों के मामले में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. पुलिस ने मेरठ में अवैध हथियार बनाने की दो फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, साथ ही हथियारों की सप्लाई करने के एक सौ चालीस आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से भारी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं, साथ ही हथियार बनाने के औजार भी मिले हैं. मेरठ पुलिस ने अवैध हथियारों की जखीरे को बरामद कर बड़ा खुलासा किया. साथ ही एक सौ चालीस आरोपियों को धर दबोचा. मेरठ पुलिस की दस टीमें इस ऑपरेशन में लगी थीं जिन्होंने दो दिन के अंदर इस कार्रवाई को अंजाम दिया. मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने दस टीमों का गठन किया जिन्होंने मेरठ शहर के विभिन्न इलाकों में उन अवैध हथियार बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जो मेरठ जिले में हथियार बना रहे थे या सप्लाई कर रहे थे. सभी दस टीमों ने मिलकर एक सौ चालीस लोगों को गिरफ्तार किया. इनके पास से बड़ी संख्या में अवैध शस्त्र बरामद किए गए हैं. इसमें सभी प्रकार के तमंचे, पिस्टल आदि हथियार भी शामिल हैं. पुलिस को तीन सौ पंद्रह बोर के एक सौ उन्यासी तमंचे, बारह बोर के पैंतीस तमंचे, तीस बोर के दो तमंचे, अधबने बारह तमंचे, बत्तीस बोर की एक पिस्टल, रिवॉल्वर देशी अड़तीस बोर- एक, पोनिया- चार, अधबनी बंदूकें बारह बोर- दो, राइफल तीन सौ पंद्रह बोर- एक और चार कारें मिलीं. इसके अलावा हथियार बनाने के औजार भी बड़ी मात्रा में बरामद किए गए हैं. पुलिस ने इस दौरान दो हथियार बनाने की फैक्ट्रियों का भी भंडाफोड़ कर दिया जो कि मेरठ के ब्रह्मपुरी और किला परीक्षितगढ़ में चल रही थी, इसके साथ पुलिस ने चार लग्जरी गाड़ियों को भी बरामद किया है.
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कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में फिल्म्स की शूटिंग तक रोक दी गई है और सभी स्टार्स अपने घरों में परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं। वहीं, घर्मेंद्र अपना टाइम फार्महाउस में बिता रहे हैं।
मुंबई. कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में फिल्म्स की शूटिंग तक रोक दी गई है और सभी स्टार्स अपने घरों में परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं। वहीं, घर्मेंद्र अपना टाइम फार्महाउस में बिता रहे हैं। वो लगातार फार्महाउस से जुड़े वीडियो और फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर कर रहे हैं। अब उन्होंने अपना एक वीडियो और शेयर किया है। इसमें वो एक गाय के बछड़े को चारा खिलाते दिख रहे हैं और वो भी एक्टर पर प्यार जताता नजर आ रहा है। वीडियो में धर्मेंद्र बताते हैं कि उन्हें उनके चाहने वाले ने गाय दी थी। ये उसी का बछड़ा है। इसे शेयर करने के साथ ही धर्मेंद्र ने कैप्शन लिखा, 'बहुत ज्यादा खुश हूं इन प्यारे लोगों के साथ। '
पिछले दिनों धर्मेंद्र ने अपने फार्महाउस से खेत और अपनी वैनिटी वैन भी दिखाई थी। इसके अलावा वह अपने फार्महाउस पर उगी हुई ढेर सारी सब्जियों के साथ नजर आए थे। उनके वीडियोज को उनके फैंस बहुत पसंद कर रहे हैं। धर्मेंद्र ने बताया था कि लॉकडाउन से एक दिन पहले ही वो अपने फार्महाउस पर आए थे। तब से वो यहीं पर ही हैं।
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कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में फिल्म्स की शूटिंग तक रोक दी गई है और सभी स्टार्स अपने घरों में परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं। वहीं, घर्मेंद्र अपना टाइम फार्महाउस में बिता रहे हैं। मुंबई. कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू किया गया है। ऐसे में फिल्म्स की शूटिंग तक रोक दी गई है और सभी स्टार्स अपने घरों में परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहे हैं। वहीं, घर्मेंद्र अपना टाइम फार्महाउस में बिता रहे हैं। वो लगातार फार्महाउस से जुड़े वीडियो और फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर कर रहे हैं। अब उन्होंने अपना एक वीडियो और शेयर किया है। इसमें वो एक गाय के बछड़े को चारा खिलाते दिख रहे हैं और वो भी एक्टर पर प्यार जताता नजर आ रहा है। वीडियो में धर्मेंद्र बताते हैं कि उन्हें उनके चाहने वाले ने गाय दी थी। ये उसी का बछड़ा है। इसे शेयर करने के साथ ही धर्मेंद्र ने कैप्शन लिखा, 'बहुत ज्यादा खुश हूं इन प्यारे लोगों के साथ। ' पिछले दिनों धर्मेंद्र ने अपने फार्महाउस से खेत और अपनी वैनिटी वैन भी दिखाई थी। इसके अलावा वह अपने फार्महाउस पर उगी हुई ढेर सारी सब्जियों के साथ नजर आए थे। उनके वीडियोज को उनके फैंस बहुत पसंद कर रहे हैं। धर्मेंद्र ने बताया था कि लॉकडाउन से एक दिन पहले ही वो अपने फार्महाउस पर आए थे। तब से वो यहीं पर ही हैं।
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पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) की गलवान वैली (Galwan Vellay) में 15 जून को भारत-चीन (India-China Rift) के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। जिसके बाद से ही चीन (China) ये बात छुपाता रहा है कि इस संघर्ष में उसके कितने जवान शहीद हुए हैं।
एक तस्वीर चाइनीज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। ये तस्वीर गलवान घाटी की बताई जा रही है। इसमें भारत की पांच पोजिशन दिखाई जा रही है।
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पूर्वी लद्दाख की गलवान वैली में पंद्रह जून को भारत-चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। जिसके बाद से ही चीन ये बात छुपाता रहा है कि इस संघर्ष में उसके कितने जवान शहीद हुए हैं। एक तस्वीर चाइनीज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। ये तस्वीर गलवान घाटी की बताई जा रही है। इसमें भारत की पांच पोजिशन दिखाई जा रही है।
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दीप मालिका के दिन पांचक, गोपिन कहो बुलाई। वति सामग्री करहिं चढ़ाई, अवही कहो सुनाई। लेइ बुलाय महर महरानी, सुनतई आई धाई । नंद घरन तब कहत सखिन सों, कत हो रही भुलाई । भूली कहा कहो सो हमसों, कहत कहां कर पाई । सूत्दास सुरपति की पूजा, तुम सवहिन विसराई ।
अरे भैया बृजवासी चलो आज इन्द्र की पूजा करें दीवारी हो गई, परंतु तुमने ऐसी पूजा की खबर नाहीं कीन्हीं यह सुन सब गोपी ग्वाल तैयारी करने लगे ।
चौक परीं सव गोकुल नारी ॥ टेक ।। भली कही सब ही सुध भूली, तुमही करी सुधारी ॥ कहेउ महर सों करो चढ़ाई, हम अपने घर जाति ॥ तुमहू करो भोग सामग्री, कुल देवता प्रमाति ॥ यशुमति कहेउ अकेली हौं में, तुमहूं संग मोहि दीजो ॥ सूर हंसत वृजनारि महर सों, ऐहैं सांच पतीजो ॥
कहि मोहि भली कीन्ही महरि ॥
राज काजहिं रहेऊं डोलत, लोभ होके लहार ।।
क्षमा कीजे मोहि हो प्रभु तुमही गयो भुलाय ।। ग्वाल सों कहि तुरंत पठ्यो ल्याऊं महर बुलाय !! नंद कहेउ उपनंद वृज के अरू महर ब्रषभान ।। प्रबाह जाय बुलाय ल्यावहिं करत दिन अनुमान ।। आ गये दिन हीं नेरे करत मन यह छान ।। सूर नंद विनय करत कर जोर सुरपति ध्यान ॥
नंद महर उपनंद बुलाये ।। टेक ।।
बहु आदर कर बैठक दीन्ही, महरर कर शीश नवायें ।। मनही मन सब सोच करत हैं, कंस नृपति कछु मांग पठाये ॥ राज यंस धन जो कुछ उनको, विनु मांगे सो दे हम श्रये ॥ वृकत महर बात नंदजी सों, कौन काज हम सवनि बुलाये ।। सूर नंद यह कहि गोपिन सौं, सुरपति पूजा के दिन आये ।। वार्तिक
जब सिगरे वृजवासी नंद द्वार पर एकत्र अये, तब मिलके मंगलाचार करने लगे ।
गावत मंगलचार महर घर ।। टेक ।। यशुमति भोजन करत चढ़ाई, नेवज करि करि धरत श्याम डर ।। देखे रहो छुवै न कन्हैया कहा जात वह देव काज पर । और नहीं कुल देव हमारे, के गोधन के ये सुरपति वरं ॥ कहत विनय कर जोर यशोदा, कान्हहि कृपा करो करुणाकर ।। और देव कोऊ तुमसन नाहीं, सूर करे सेवा चरणन तर ।।
वाजत नंद दुवारे बधाई॥टेक ।।
बैठे खेलत द्वारे आपने सात बर्ष के कुंवर कन्हाई ।। बैठे नंद सहित वृषभानहि, और गोप बैठे सब आई ॥ देत असीस नंद के द्वारे, गावत मंगल नारि बधाई । पूजा करति इन्द्र की जानो, आये श्याम तहाँ अतुराई । बार बार कूफत हरि नदहि, कौन देव की करत पुजाई ! इन्द्र बड़े कुल देव हमारे, उन ते यह सब होत बड़ाई ।। सूर श्याम तुम्हरे हित कारने, यह पूजा की करत सदाई ।
राल रजावली बार्तिक
यह कौतुक देख के नंदलाल जी खेलते खेलते आय के नंदजू से पूछने लगे, बाबा याज काहे को उत्सव हो रह्योहै, तब नंद बोले भैया आज अपने कुलदेव इन्द्र की पूजा है, तुम जाय सोय रहो ।।
नंद कहेउ घर जाउ कन्हाई ॥ टेक ऐसे में तुम जाहु जिन कहूँ, अहो महिर सुत लेउ बुलाई । सोय रहो मेरे पलका पर, कहत महरि हरि सो समुझाई ॥ वरस दिवस को महा महोत्सव, आवेगो को कौन सुभाई ॥ और महिर ढिंग श्याम बैठ के, कीनो एक विचार बनाई ।। सपनो मोको मिलो आइक, वड़ो पुरुष अवतार जनाई ।। कहन लगो मोसों ये बातें, पूजत हो तुम काहे मनाई गिर गोवरधन देव को मन से, सेबहु ताको भोग चढ़ाई ।। भोजन करे सवन के आगे, देखहु व्रज जन सब सुख पाई । सूरदास प्रभु गोपन झागे, कहत श्याम यह मन उपजाई ।।
कृष्ण वचन वार्तिक
अरे भैया सखा हो आज मोको सपने में एक देवता ने कही जो गोवरधन पर्वत की पूजा करो, वृज में यो देव बड़ो प्रसिद्ध है ।
सुनी ग्वाल यह कहत कन्हाई ॥ टेक सुरपति की पूजा को मेटत, गोवरंधन की करत बड़ाई ।। फैल गई यह बात घरन घर, हरि कहा जाने देव पुजाई ।। हलधर कहत सुनो बृजवासी, यह महिमा तुम काहु न पाई ॥ कोउ २ कहत करो ऐसोऊ, कोउ एक कहत कहे को भाई ।।
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दीप मालिका के दिन पांचक, गोपिन कहो बुलाई। वति सामग्री करहिं चढ़ाई, अवही कहो सुनाई। लेइ बुलाय महर महरानी, सुनतई आई धाई । नंद घरन तब कहत सखिन सों, कत हो रही भुलाई । भूली कहा कहो सो हमसों, कहत कहां कर पाई । सूत्दास सुरपति की पूजा, तुम सवहिन विसराई । अरे भैया बृजवासी चलो आज इन्द्र की पूजा करें दीवारी हो गई, परंतु तुमने ऐसी पूजा की खबर नाहीं कीन्हीं यह सुन सब गोपी ग्वाल तैयारी करने लगे । चौक परीं सव गोकुल नारी ॥ टेक ।। भली कही सब ही सुध भूली, तुमही करी सुधारी ॥ कहेउ महर सों करो चढ़ाई, हम अपने घर जाति ॥ तुमहू करो भोग सामग्री, कुल देवता प्रमाति ॥ यशुमति कहेउ अकेली हौं में, तुमहूं संग मोहि दीजो ॥ सूर हंसत वृजनारि महर सों, ऐहैं सांच पतीजो ॥ कहि मोहि भली कीन्ही महरि ॥ राज काजहिं रहेऊं डोलत, लोभ होके लहार ।। क्षमा कीजे मोहि हो प्रभु तुमही गयो भुलाय ।। ग्वाल सों कहि तुरंत पठ्यो ल्याऊं महर बुलाय !! नंद कहेउ उपनंद वृज के अरू महर ब्रषभान ।। प्रबाह जाय बुलाय ल्यावहिं करत दिन अनुमान ।। आ गये दिन हीं नेरे करत मन यह छान ।। सूर नंद विनय करत कर जोर सुरपति ध्यान ॥ नंद महर उपनंद बुलाये ।। टेक ।। बहु आदर कर बैठक दीन्ही, महरर कर शीश नवायें ।। मनही मन सब सोच करत हैं, कंस नृपति कछु मांग पठाये ॥ राज यंस धन जो कुछ उनको, विनु मांगे सो दे हम श्रये ॥ वृकत महर बात नंदजी सों, कौन काज हम सवनि बुलाये ।। सूर नंद यह कहि गोपिन सौं, सुरपति पूजा के दिन आये ।। वार्तिक जब सिगरे वृजवासी नंद द्वार पर एकत्र अये, तब मिलके मंगलाचार करने लगे । गावत मंगलचार महर घर ।। टेक ।। यशुमति भोजन करत चढ़ाई, नेवज करि करि धरत श्याम डर ।। देखे रहो छुवै न कन्हैया कहा जात वह देव काज पर । और नहीं कुल देव हमारे, के गोधन के ये सुरपति वरं ॥ कहत विनय कर जोर यशोदा, कान्हहि कृपा करो करुणाकर ।। और देव कोऊ तुमसन नाहीं, सूर करे सेवा चरणन तर ।। वाजत नंद दुवारे बधाई॥टेक ।। बैठे खेलत द्वारे आपने सात बर्ष के कुंवर कन्हाई ।। बैठे नंद सहित वृषभानहि, और गोप बैठे सब आई ॥ देत असीस नंद के द्वारे, गावत मंगल नारि बधाई । पूजा करति इन्द्र की जानो, आये श्याम तहाँ अतुराई । बार बार कूफत हरि नदहि, कौन देव की करत पुजाई ! इन्द्र बड़े कुल देव हमारे, उन ते यह सब होत बड़ाई ।। सूर श्याम तुम्हरे हित कारने, यह पूजा की करत सदाई । राल रजावली बार्तिक यह कौतुक देख के नंदलाल जी खेलते खेलते आय के नंदजू से पूछने लगे, बाबा याज काहे को उत्सव हो रह्योहै, तब नंद बोले भैया आज अपने कुलदेव इन्द्र की पूजा है, तुम जाय सोय रहो ।। नंद कहेउ घर जाउ कन्हाई ॥ टेक ऐसे में तुम जाहु जिन कहूँ, अहो महिर सुत लेउ बुलाई । सोय रहो मेरे पलका पर, कहत महरि हरि सो समुझाई ॥ वरस दिवस को महा महोत्सव, आवेगो को कौन सुभाई ॥ और महिर ढिंग श्याम बैठ के, कीनो एक विचार बनाई ।। सपनो मोको मिलो आइक, वड़ो पुरुष अवतार जनाई ।। कहन लगो मोसों ये बातें, पूजत हो तुम काहे मनाई गिर गोवरधन देव को मन से, सेबहु ताको भोग चढ़ाई ।। भोजन करे सवन के आगे, देखहु व्रज जन सब सुख पाई । सूरदास प्रभु गोपन झागे, कहत श्याम यह मन उपजाई ।। कृष्ण वचन वार्तिक अरे भैया सखा हो आज मोको सपने में एक देवता ने कही जो गोवरधन पर्वत की पूजा करो, वृज में यो देव बड़ो प्रसिद्ध है । सुनी ग्वाल यह कहत कन्हाई ॥ टेक सुरपति की पूजा को मेटत, गोवरंधन की करत बड़ाई ।। फैल गई यह बात घरन घर, हरि कहा जाने देव पुजाई ।। हलधर कहत सुनो बृजवासी, यह महिमा तुम काहु न पाई ॥ कोउ दो कहत करो ऐसोऊ, कोउ एक कहत कहे को भाई ।।
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A Tailor Murder Story: गौरतलब है कि इस घटना को एक साल से ज्यादा हो गया है लेकिन कोर्ट की तरफ से मामले पर कोई फैसला नहीं आया है। परिवार भी इंसाफ की राह देख रहा है। परिवार ने अभी तक कन्हैयालाल की अस्थियों को विसर्जित नहीं किया है। परिवार का कहना है जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वो अस्थियां विसर्जित नहीं करेंगे।
Attack On Police: मामला उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य मांडवा इलाके का है जहां अपराधी को पकड़ने के लिए पहुंची पुलिस पर अपराधियों और उनके परिजनों द्वारा हमला कर दिया गया। अपराधियों और उनके परिवार द्वारा किए गए इस हमले में एसएचओ उत्तम सिंह कांस्टेबल मनोज समेत छह लोगों के घायल होने की खबर है। कहा जा रहा है कि एक कांस्टेबल मनोज की हालत गंभीर बनी हुई है।
Dhirendra Krishna Shastri: भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का ऐलान करने के बाद से ही धीरेंद्र शास्त्री की चर्चाएं टीवी और अखबारों में होने लगीं है। अब जब भी पंडित धीरेंद्र शास्त्री किसी दरबार या लोगों के बीच पहुंचते हैं तो वो अपने इस बयान को दोहराना नहीं भूलते। बीते दिनों धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उदयपुर में नव संवत्सर और चेटीचंड के मौके पर आयोजित धर्मसभा में शामिल होने पहुंचे थे।
अनिल नायडू ने पुलिस को बताया है कि युवकों ने पहले जमकर गालीगलौज की। फिर उनको सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। दोनों युवकों ने टेलर कन्हैयालाल के जैसा हश्र करने की बात अनिल से कही। अनिल के मुताबिक युवकों ने जहां उनको रोका था, उस जगह कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था।
Rajasthan: आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने विगत 31 अक्टूबर यानि 13 दिन पहले ही इस लाइन का लोकार्पण किया था। सर्वप्रथम यहां रहने वाले लोगों ने इस तेज धमाके की आवाज सुनी थी। जिसके बाद मौके पर बारूद मिला। ब्लास्ट से पटरियों पर क्रैक आ गया। धमाके से पूर्व चार घंटे पहले ट्रैक ट्रेेन से गुजरी थी। इस घटना के बाद अहमदाबाद से उदयपुर आ रही ट्रेन को डूंगरपुर तक ही रोक दिया गया है।
राजस्थान के उदयपुर में टेलर का काम करने वाले कन्हैयालाल की हत्या के मामले में ताजा खुलासा हुआ है। एनआईए सूत्रों के हवाले से पता चला है कि हत्या से पहले रिजाज अतारी और मोहम्मद गौस लगातार पाकिस्तान से संपर्क बनाए हुए थे। जबकि, 300 और लोग भी पाक से कनेक्शन जोड़े हुए हैं।
पैगंबर पर कथित तौर पर विवादित बयान देने के मामले में उनका समर्थन करने पर मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक युवक को जान से मारने की धमकी दी गई। युवक ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने नामजद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गिरफ्तार में से एक नाबालिग बताया जा रहा है।
कन्हैयालाल की बीते महीने उदयपुर में दो लोगों ने हत्या कर दी थी। हत्यारे कपड़े का नाप देने के बहाने उनकी दुकान में आए थे। दोनों हत्यारों को पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद पकड़ा था। जांच के दौरान पता चला कि हत्यारों का संबंध पाकिस्तान से है और उन्होंने वहां जाकर ट्रेनिंग भी ली।
दरअसल, अशोक पंडित ने ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि, जावेद अख्तर साहब उदयपुर घटना के बारे में आपने तो सुना ही होगा। फिलहाल, उनके इस ट्वीट पर लोग अलग-अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में ओआईसी का जिक्र कर कहा कि, "पूरी हिंदू आबादी कन्हैया लाल की हत्या के लिए OIC को जिम्मेदार ठहराती है।
Bundi News : मौलाना के बयान को देखते हुए उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी और प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया था कि बयान की संजीदगी को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार किया जाए, ताकि कोई भी अप्रिय स्थिति को धरातल पर उतारने से पहले ही रोका जा सकें।
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A Tailor Murder Story: गौरतलब है कि इस घटना को एक साल से ज्यादा हो गया है लेकिन कोर्ट की तरफ से मामले पर कोई फैसला नहीं आया है। परिवार भी इंसाफ की राह देख रहा है। परिवार ने अभी तक कन्हैयालाल की अस्थियों को विसर्जित नहीं किया है। परिवार का कहना है जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वो अस्थियां विसर्जित नहीं करेंगे। Attack On Police: मामला उदयपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य मांडवा इलाके का है जहां अपराधी को पकड़ने के लिए पहुंची पुलिस पर अपराधियों और उनके परिजनों द्वारा हमला कर दिया गया। अपराधियों और उनके परिवार द्वारा किए गए इस हमले में एसएचओ उत्तम सिंह कांस्टेबल मनोज समेत छह लोगों के घायल होने की खबर है। कहा जा रहा है कि एक कांस्टेबल मनोज की हालत गंभीर बनी हुई है। Dhirendra Krishna Shastri: भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का ऐलान करने के बाद से ही धीरेंद्र शास्त्री की चर्चाएं टीवी और अखबारों में होने लगीं है। अब जब भी पंडित धीरेंद्र शास्त्री किसी दरबार या लोगों के बीच पहुंचते हैं तो वो अपने इस बयान को दोहराना नहीं भूलते। बीते दिनों धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उदयपुर में नव संवत्सर और चेटीचंड के मौके पर आयोजित धर्मसभा में शामिल होने पहुंचे थे। अनिल नायडू ने पुलिस को बताया है कि युवकों ने पहले जमकर गालीगलौज की। फिर उनको सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। दोनों युवकों ने टेलर कन्हैयालाल के जैसा हश्र करने की बात अनिल से कही। अनिल के मुताबिक युवकों ने जहां उनको रोका था, उस जगह कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। Rajasthan: आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने विगत इकतीस अक्टूबर यानि तेरह दिन पहले ही इस लाइन का लोकार्पण किया था। सर्वप्रथम यहां रहने वाले लोगों ने इस तेज धमाके की आवाज सुनी थी। जिसके बाद मौके पर बारूद मिला। ब्लास्ट से पटरियों पर क्रैक आ गया। धमाके से पूर्व चार घंटे पहले ट्रैक ट्रेेन से गुजरी थी। इस घटना के बाद अहमदाबाद से उदयपुर आ रही ट्रेन को डूंगरपुर तक ही रोक दिया गया है। राजस्थान के उदयपुर में टेलर का काम करने वाले कन्हैयालाल की हत्या के मामले में ताजा खुलासा हुआ है। एनआईए सूत्रों के हवाले से पता चला है कि हत्या से पहले रिजाज अतारी और मोहम्मद गौस लगातार पाकिस्तान से संपर्क बनाए हुए थे। जबकि, तीन सौ और लोग भी पाक से कनेक्शन जोड़े हुए हैं। पैगंबर पर कथित तौर पर विवादित बयान देने के मामले में उनका समर्थन करने पर मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक युवक को जान से मारने की धमकी दी गई। युवक ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने नामजद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गिरफ्तार में से एक नाबालिग बताया जा रहा है। कन्हैयालाल की बीते महीने उदयपुर में दो लोगों ने हत्या कर दी थी। हत्यारे कपड़े का नाप देने के बहाने उनकी दुकान में आए थे। दोनों हत्यारों को पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद पकड़ा था। जांच के दौरान पता चला कि हत्यारों का संबंध पाकिस्तान से है और उन्होंने वहां जाकर ट्रेनिंग भी ली। दरअसल, अशोक पंडित ने ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि, जावेद अख्तर साहब उदयपुर घटना के बारे में आपने तो सुना ही होगा। फिलहाल, उनके इस ट्वीट पर लोग अलग-अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में ओआईसी का जिक्र कर कहा कि, "पूरी हिंदू आबादी कन्हैया लाल की हत्या के लिए OIC को जिम्मेदार ठहराती है। Bundi News : मौलाना के बयान को देखते हुए उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी और प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया था कि बयान की संजीदगी को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार किया जाए, ताकि कोई भी अप्रिय स्थिति को धरातल पर उतारने से पहले ही रोका जा सकें।
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इन राशियों के लिए सितम्बर महीना हो सकता है बुरा, फंस सकते है मुसीबत में..
मिथुन राशि वालो के लिए सितम्बर का महीना परेशानियों से भरा रहेगा. बता दे की इस राशि में शनि की साढ़े साती लगने वाली है.
इन राशि में शनि साढ़े साति लगने के कारण सेहत में नकारात्मकता आएगी और पैसो की तंगी भी आ सकती है.
इस राशि वालो के लिए सितम्बर का तीन हफ्ता फायदेमंद हो सकता है.
तुला राशि वालो को सितम्बर के महीने में किसी से झगड़ा और विवाद नहीं करना चाहिए नहीं तो मुश्किलो में फंस सकते है.
शनि साढ़े साती का पहला चरण होने के कारण इस राशियों के लिए सितम्बर का महीना खुशियों से भरा रहेगा . ऐसे में आप अपने रुके हुए काम पूरे कर सकते है.
इस राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण है जिससे बड़ी दुर्घटना और बीमारी का योग है. ऐसे में गाडी चलते समय ध्यान रखना होगा और किसी भी तरह से शराब का सेवन नहीं करना चाहिए.
शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण होने के कारण आज कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. पैसो की तंगी भी आ सकती है. कर्ज भी ले सकते है. ऐसे में कर्ज लेने से बचे.
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इन राशियों के लिए सितम्बर महीना हो सकता है बुरा, फंस सकते है मुसीबत में.. मिथुन राशि वालो के लिए सितम्बर का महीना परेशानियों से भरा रहेगा. बता दे की इस राशि में शनि की साढ़े साती लगने वाली है. इन राशि में शनि साढ़े साति लगने के कारण सेहत में नकारात्मकता आएगी और पैसो की तंगी भी आ सकती है. इस राशि वालो के लिए सितम्बर का तीन हफ्ता फायदेमंद हो सकता है. तुला राशि वालो को सितम्बर के महीने में किसी से झगड़ा और विवाद नहीं करना चाहिए नहीं तो मुश्किलो में फंस सकते है. शनि साढ़े साती का पहला चरण होने के कारण इस राशियों के लिए सितम्बर का महीना खुशियों से भरा रहेगा . ऐसे में आप अपने रुके हुए काम पूरे कर सकते है. इस राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण है जिससे बड़ी दुर्घटना और बीमारी का योग है. ऐसे में गाडी चलते समय ध्यान रखना होगा और किसी भी तरह से शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण होने के कारण आज कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. पैसो की तंगी भी आ सकती है. कर्ज भी ले सकते है. ऐसे में कर्ज लेने से बचे.
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हलिया थाना क्षेत्र के सिकटा गांव में दो घरों को चोरों ने बनाया निशाना। बेटी की शादी के रखे रुपये चोर ले गए।
मिर्जापुर जिले के हलिया थाना क्षेत्र के सिकटा गांव में सोमवार की रात चोरों ने दो घरों में सेंध लगाकर दरवाजे का ताला तोड़कर घरों में रखा नकदी समेत लगभग पांच लाख के आभूषण चोरी कर ले गए। सुबह सोकर उठने पर चोरी की जानकारी हुई तो गृहस्वामियों ने इसकी सूचना पीआरवी 112 पर दी। मौके पर पंहुची पीआरवी टीम मामले की जांच पड़ताल करने में जुट गई है। टूटा हुआ बाक्स व अटैची घर से पांच सौ मीटर दूर सीवान में मिला है।
सिकटा गांव निवासी दुर्गा प्रसाद चौबे के कच्चे मकान के मुख्य दरवाजे का ताला तोड़कर घर में अटैची व बाक्स में रखे 35 हजार रुपये नकद समेत सोने चांदी के आभूषण, एंड्रॉयड मोबाइल फोन व दो बोरी चावल चोरी कर ले गए। चोरी के समय परिजन दूसरे मकान में सो रहे थे। मंलगवार की सुबह कच्चे मकान में जाने पर चोरी की जानकारी हुई। मकान मालिक ने 112 पर फोन कर पीआरवी टीम को सूचना दी। टूटा हुआ बाक्स व अटैची घर से 500 मीटर दूर टूटा हुआ मिला। सामान बिखरा पड़ा था। इसी प्रकार कुछ दूर स्थित गांव के ही निवासी जलीला उर्फ़ बउराहे के कच्चे मकान के पीछे से सेंध लागाकर चोर घर में प्रवेश किए। घर में रखे बक्से से 70 हजार रुपये नकद व आभूषण को चोरी कर ले गए।
पीड़ित जलीला ने बताया कि बेटी की शादी के लिए नकदी को घर में रखा था। घर में सो रहे लोगों को चोरी की घटना की भनक तक नहीं लगी। सुबह उठने पर चोरी होने की जानकारी मिली तो तत्काल इसकी सूचना 112 पीआरवी को दिया। मौके पर पंहुची 112 पीआरवी टीम ने घटना की छानबीन किया। दोनों मकानों से लगभग पांच लाख की चोरी हुई है। सोमवार को जिले के जिन चार थानाध्यक्षों का स्थानांतरण गैर जनपद में किया गया है। उसमें हलिया थानाध्यक्ष भी हैं। सोमवार को थानाध्यक्ष के जाते ही चोरों ने दो मकानों में चोरी को अंजाम दिया।
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हलिया थाना क्षेत्र के सिकटा गांव में दो घरों को चोरों ने बनाया निशाना। बेटी की शादी के रखे रुपये चोर ले गए। मिर्जापुर जिले के हलिया थाना क्षेत्र के सिकटा गांव में सोमवार की रात चोरों ने दो घरों में सेंध लगाकर दरवाजे का ताला तोड़कर घरों में रखा नकदी समेत लगभग पांच लाख के आभूषण चोरी कर ले गए। सुबह सोकर उठने पर चोरी की जानकारी हुई तो गृहस्वामियों ने इसकी सूचना पीआरवी एक सौ बारह पर दी। मौके पर पंहुची पीआरवी टीम मामले की जांच पड़ताल करने में जुट गई है। टूटा हुआ बाक्स व अटैची घर से पांच सौ मीटर दूर सीवान में मिला है। सिकटा गांव निवासी दुर्गा प्रसाद चौबे के कच्चे मकान के मुख्य दरवाजे का ताला तोड़कर घर में अटैची व बाक्स में रखे पैंतीस हजार रुपये नकद समेत सोने चांदी के आभूषण, एंड्रॉयड मोबाइल फोन व दो बोरी चावल चोरी कर ले गए। चोरी के समय परिजन दूसरे मकान में सो रहे थे। मंलगवार की सुबह कच्चे मकान में जाने पर चोरी की जानकारी हुई। मकान मालिक ने एक सौ बारह पर फोन कर पीआरवी टीम को सूचना दी। टूटा हुआ बाक्स व अटैची घर से पाँच सौ मीटर दूर टूटा हुआ मिला। सामान बिखरा पड़ा था। इसी प्रकार कुछ दूर स्थित गांव के ही निवासी जलीला उर्फ़ बउराहे के कच्चे मकान के पीछे से सेंध लागाकर चोर घर में प्रवेश किए। घर में रखे बक्से से सत्तर हजार रुपये नकद व आभूषण को चोरी कर ले गए। पीड़ित जलीला ने बताया कि बेटी की शादी के लिए नकदी को घर में रखा था। घर में सो रहे लोगों को चोरी की घटना की भनक तक नहीं लगी। सुबह उठने पर चोरी होने की जानकारी मिली तो तत्काल इसकी सूचना एक सौ बारह पीआरवी को दिया। मौके पर पंहुची एक सौ बारह पीआरवी टीम ने घटना की छानबीन किया। दोनों मकानों से लगभग पांच लाख की चोरी हुई है। सोमवार को जिले के जिन चार थानाध्यक्षों का स्थानांतरण गैर जनपद में किया गया है। उसमें हलिया थानाध्यक्ष भी हैं। सोमवार को थानाध्यक्ष के जाते ही चोरों ने दो मकानों में चोरी को अंजाम दिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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नई दिल्ली, (भाषा)। आयु भले ही सचिन तेंदुलकर के पक्ष में नहीं हो लेकिन पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर का मानना है कि इस दिग्गज बल्लेबाज के अंदर का खेल अब तक खत्म नहीं हुआ है और वह अब भी शीर्ष स्तर पर रन बनाने में सक्षम हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल में संपन्न टेस्ट श्रृंखला में 40 वर्षीय तेंदुलकर तीनों बार बोल्ड होकर पवेलियन लौटे थे जिसके बाद कई विशेषज्ञों ने कहा था कि एक स्तरीय बल्लेबाज के रूप में उनका खेल खत्म हो गया है। मांजरेकर को लगता है कि तेंदुलकर अब भी भारतीय बल्लेबाजी क्रम को काफी कुछ दे सकते हैं और उन्हें नवंबर में दक्षिण अफीका का दौरा करने वाली टीम का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा, न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन पारियों में तेंदुलकर जिस तरह से आउट हुए उससे मुझे कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज के रूप में वह समाप्त हो चुके हैं। मांजरेकर ने क्रिकइंफो में अपने कालम में लिखा, मैंने तेंदुलकर के बारे में जो भी कुछ बोला मैं पूरी तरह से उसका समर्थन करता हूं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका रन बनाना तभी समाप्त होगा जब वह खेलना छोड़ देगा। तब तक, वह भले ही उतने दबदबे वाला बल्लेबाज नहीं हो जितना हुआ करता था लेकिन फिर भी वह इतना अच्छा बल्लेबाज है कि शीर्ष स्तर पर रन बना सके और भारतीय टीम में योगदान दे सके, विशेषकर टेस्ट क्रिकेट में। मांजरेकर ने कहा कि तेंदुलकर पहला बल्लेबाज नहीं है जिसे फुल लेंथ गेंदों के सामने जूझना पड़ा रहा है। उन्होंने हालांकि कहा कि तेंदुलकर के अंदर का जुझारू व्यक्ति निश्चित तौर पर इस समस्या का हल निकाल लेगा। इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने कहा कि तेंदुलकर उन मुश्किलों से अच्छी तरह वाकिफ हैं जिनका उम्रदराज बल्लेबाजों को सामना करना पड़ता है और जल्द ही वह इनका जवाब ढूंढ लेगा।
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नई दिल्ली, । आयु भले ही सचिन तेंदुलकर के पक्ष में नहीं हो लेकिन पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर का मानना है कि इस दिग्गज बल्लेबाज के अंदर का खेल अब तक खत्म नहीं हुआ है और वह अब भी शीर्ष स्तर पर रन बनाने में सक्षम हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल में संपन्न टेस्ट श्रृंखला में चालीस वर्षीय तेंदुलकर तीनों बार बोल्ड होकर पवेलियन लौटे थे जिसके बाद कई विशेषज्ञों ने कहा था कि एक स्तरीय बल्लेबाज के रूप में उनका खेल खत्म हो गया है। मांजरेकर को लगता है कि तेंदुलकर अब भी भारतीय बल्लेबाजी क्रम को काफी कुछ दे सकते हैं और उन्हें नवंबर में दक्षिण अफीका का दौरा करने वाली टीम का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा, न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन पारियों में तेंदुलकर जिस तरह से आउट हुए उससे मुझे कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज के रूप में वह समाप्त हो चुके हैं। मांजरेकर ने क्रिकइंफो में अपने कालम में लिखा, मैंने तेंदुलकर के बारे में जो भी कुछ बोला मैं पूरी तरह से उसका समर्थन करता हूं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका रन बनाना तभी समाप्त होगा जब वह खेलना छोड़ देगा। तब तक, वह भले ही उतने दबदबे वाला बल्लेबाज नहीं हो जितना हुआ करता था लेकिन फिर भी वह इतना अच्छा बल्लेबाज है कि शीर्ष स्तर पर रन बना सके और भारतीय टीम में योगदान दे सके, विशेषकर टेस्ट क्रिकेट में। मांजरेकर ने कहा कि तेंदुलकर पहला बल्लेबाज नहीं है जिसे फुल लेंथ गेंदों के सामने जूझना पड़ा रहा है। उन्होंने हालांकि कहा कि तेंदुलकर के अंदर का जुझारू व्यक्ति निश्चित तौर पर इस समस्या का हल निकाल लेगा। इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने कहा कि तेंदुलकर उन मुश्किलों से अच्छी तरह वाकिफ हैं जिनका उम्रदराज बल्लेबाजों को सामना करना पड़ता है और जल्द ही वह इनका जवाब ढूंढ लेगा।
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वादके स्थानपर बुध्यनुसारी यथार्थवाद, निराकार विचारोंकी जगहपर रक्तमांसके विचारोंको बाहरी दर्शनकी जगह विश्वदर्शनको स्थापित किया ।... इसलिए आप हमारे प्रकाशन तथा सत्यकी भारी सेवा करेंगे, अगर आप हमारे प्रथम के लिये शेलिंगकी रूपरेखाको प्रदान करें। आप ही इस काम के लिये उचित पुरुष हैं, क्योंकि आप शेलिंगसे बिल्कुल उलटे हैं । जहाँ तक शेलिंगका सम्बन्ध है, अपनी तरुणाईके ईमानदार विचारोंके कारण वह हमारा सबसे अच्छा प्रतिद्वन्द्वी कहा जा सकता है। अपने इन विचारोंके लिये उसके पास कल्पना छोड़ कोई दूसरे साधन नहीं, ग्रहम्मन्यता छोड़ कोई दूसरी शक्ति नहीं, अफीम छोड़ कोई प्रेरणादायक बल नहीं, स्त्रैण गहणक्षमता के अनुकुसपनके सिवा कोई ज्ञान-साधन नहीं। उसके पास तरुणाईके स्वप्नसे बढ़कर कभी कुछ नहीं थे, लेकिन तुम्हारे भीतर वह सत्य, वास्तविकता और पौरुषपूर्ण गभ्भीरता बन गये... इसीलिये में आपको प्रकृति और इतिहासकी यमल शक्तियों द्वारा नियुक्त शेलिंगका आवश्यक और स्वाभाविक प्रतिद्वन्द्वी मानता हूँ । इन पंक्तियोंसे फ्वारबाखके प्रति मार्क्सके उस समयके भाव प्रकट होते हैं। लेकिन फ्वारबाखने मार्क्सकी प्रार्थनाको स्वीकार करनेमें आनाकानी की। उसने पहले रूगेको सहायता करनेका वचन दिया था, लेकिन पीछे इन्कार कर दिया। इसका यह अर्थ नहीं समझना चाहिये, कि पवारजाव पलायनवृत्तिवाला आदमी था । लेकिन, इस समय उसके पास काफी हिम्मत नहीं थी, कि जर्मनीके घोर प्रतिक्रिया पूर्ण वातावरणमें फिर अपनी लौह लेखनी लेकर लड़नेके लिये तैयार हो जाता । उसने मार्क्सको यद्यपि बड़े सौहार्द्रपूर्ण शब्दों में जवाब दिया, लेकिन, वह इन्कार छोड़ और कुछ नहीं था ।
अध्याय ५
पैरिसमें ( १८४३-४५ ई० ) १. "जर्मन फ्रेंच वर्षपत्र"
मार्क्सने बडे उत्साहके साथ वर्षपत्रके सम्पादनको अपने हाथमे लिया, लेकिन पत्रका केवल एकही अंक दोहरी जिल्दोंमे फरवरी १८४४ ई० के अन्त मे प्रकाशितहो सका । यही उसका दिम और अन्तिम अंक था । जैसा कि नामसे मालूम होता है, इस पत्र द्वारा फ्रास और जर्मनी दोनो देशोंके मनीषियोंके बौद्धिक सहयोगकी आशाकी गई थी। जर्मनीकी विशेषता थी उसका हेगेलीय दर्शन, जोकि फ्रांसीसियोको केवल विज्ञानवादकी धुन्धमें भटकनेको प्रोत्साहन दे सकता था, और फ्रांसकी जर्मनीको विशेष देन हेगेलीय दर्शन के तीक्ष्ण तटकी और कोई दिलचस्पी नहीं थी । वह निश्चयही अध्यात्म और रहस्य - वाद की मरुभूमिमें भटकानेमें सहायक होता । रूगेने फ्रासके तत्कालीन मनीषियों लामारतीन लामेने, लुई ब्लाकं, लारू, प्रघोसे इसके बारेमें बातचीत की थी । केवल लारू और पूधों जर्मन दर्शनके बारेमें कुछ जानकारी रखते थे, उनमें मी एक पैरिससे बाहर रहता था, और दूसरेने लीनोटाइप मशीनके आविष्कार दिमागको खपाते अपनी लेखनीको विश्राम दे रखा था। अराजकतावादी लुई ब्लाक और दूसरोंने किसी तरहके सहयोग देनेसे इन्कार कर दिया। इस प्रकार जहाँ तक फ्रेंच लेखकोका सम्बन्ध था, वर्षपत्रको निराश होना पड़ा । लेकिन जर्मन लेखकोंके सहयोगमें जरूर सफलता मिली। सम्पादकोंके अतिरिक कवि हाइने, हेरवेग, और योहान याकोबी जैसे प्रथम श्रेणीके लेखकोंने अपने लेख मेजे, द्वितीय श्रेणीके लेखकोंमें मोजेज-हेस, पलाटिनेटके तरुण वकील फ० सी० चैनेंज, तथा सबसे तरुण लेखक फ्रेडरिक ( फ्रीडरिख ) एगेल्स जैसोंके सुन्दर लेख मिले। एंगेल्सने कई तरहके लेखनक्षेत्रमें घूमते हुये अव प्रथम बार पूरा हथियारबन्द होकर राजनीतिक क्षेत्रमें पैर रक्खा था। यद्यपि वर्षपत्रका उद्देश्य
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वादके स्थानपर बुध्यनुसारी यथार्थवाद, निराकार विचारोंकी जगहपर रक्तमांसके विचारोंको बाहरी दर्शनकी जगह विश्वदर्शनको स्थापित किया ।... इसलिए आप हमारे प्रकाशन तथा सत्यकी भारी सेवा करेंगे, अगर आप हमारे प्रथम के लिये शेलिंगकी रूपरेखाको प्रदान करें। आप ही इस काम के लिये उचित पुरुष हैं, क्योंकि आप शेलिंगसे बिल्कुल उलटे हैं । जहाँ तक शेलिंगका सम्बन्ध है, अपनी तरुणाईके ईमानदार विचारोंके कारण वह हमारा सबसे अच्छा प्रतिद्वन्द्वी कहा जा सकता है। अपने इन विचारोंके लिये उसके पास कल्पना छोड़ कोई दूसरे साधन नहीं, ग्रहम्मन्यता छोड़ कोई दूसरी शक्ति नहीं, अफीम छोड़ कोई प्रेरणादायक बल नहीं, स्त्रैण गहणक्षमता के अनुकुसपनके सिवा कोई ज्ञान-साधन नहीं। उसके पास तरुणाईके स्वप्नसे बढ़कर कभी कुछ नहीं थे, लेकिन तुम्हारे भीतर वह सत्य, वास्तविकता और पौरुषपूर्ण गभ्भीरता बन गये... इसीलिये में आपको प्रकृति और इतिहासकी यमल शक्तियों द्वारा नियुक्त शेलिंगका आवश्यक और स्वाभाविक प्रतिद्वन्द्वी मानता हूँ । इन पंक्तियोंसे फ्वारबाखके प्रति मार्क्सके उस समयके भाव प्रकट होते हैं। लेकिन फ्वारबाखने मार्क्सकी प्रार्थनाको स्वीकार करनेमें आनाकानी की। उसने पहले रूगेको सहायता करनेका वचन दिया था, लेकिन पीछे इन्कार कर दिया। इसका यह अर्थ नहीं समझना चाहिये, कि पवारजाव पलायनवृत्तिवाला आदमी था । लेकिन, इस समय उसके पास काफी हिम्मत नहीं थी, कि जर्मनीके घोर प्रतिक्रिया पूर्ण वातावरणमें फिर अपनी लौह लेखनी लेकर लड़नेके लिये तैयार हो जाता । उसने मार्क्सको यद्यपि बड़े सौहार्द्रपूर्ण शब्दों में जवाब दिया, लेकिन, वह इन्कार छोड़ और कुछ नहीं था । अध्याय पाँच पैरिसमें एक. "जर्मन फ्रेंच वर्षपत्र" मार्क्सने बडे उत्साहके साथ वर्षपत्रके सम्पादनको अपने हाथमे लिया, लेकिन पत्रका केवल एकही अंक दोहरी जिल्दोंमे फरवरी एक हज़ार आठ सौ चौंतालीस ईशून्य के अन्त मे प्रकाशितहो सका । यही उसका दिम और अन्तिम अंक था । जैसा कि नामसे मालूम होता है, इस पत्र द्वारा फ्रास और जर्मनी दोनो देशोंके मनीषियोंके बौद्धिक सहयोगकी आशाकी गई थी। जर्मनीकी विशेषता थी उसका हेगेलीय दर्शन, जोकि फ्रांसीसियोको केवल विज्ञानवादकी धुन्धमें भटकनेको प्रोत्साहन दे सकता था, और फ्रांसकी जर्मनीको विशेष देन हेगेलीय दर्शन के तीक्ष्ण तटकी और कोई दिलचस्पी नहीं थी । वह निश्चयही अध्यात्म और रहस्य - वाद की मरुभूमिमें भटकानेमें सहायक होता । रूगेने फ्रासके तत्कालीन मनीषियों लामारतीन लामेने, लुई ब्लाकं, लारू, प्रघोसे इसके बारेमें बातचीत की थी । केवल लारू और पूधों जर्मन दर्शनके बारेमें कुछ जानकारी रखते थे, उनमें मी एक पैरिससे बाहर रहता था, और दूसरेने लीनोटाइप मशीनके आविष्कार दिमागको खपाते अपनी लेखनीको विश्राम दे रखा था। अराजकतावादी लुई ब्लाक और दूसरोंने किसी तरहके सहयोग देनेसे इन्कार कर दिया। इस प्रकार जहाँ तक फ्रेंच लेखकोका सम्बन्ध था, वर्षपत्रको निराश होना पड़ा । लेकिन जर्मन लेखकोंके सहयोगमें जरूर सफलता मिली। सम्पादकोंके अतिरिक कवि हाइने, हेरवेग, और योहान याकोबी जैसे प्रथम श्रेणीके लेखकोंने अपने लेख मेजे, द्वितीय श्रेणीके लेखकोंमें मोजेज-हेस, पलाटिनेटके तरुण वकील फशून्य सीशून्य चैनेंज, तथा सबसे तरुण लेखक फ्रेडरिक एगेल्स जैसोंके सुन्दर लेख मिले। एंगेल्सने कई तरहके लेखनक्षेत्रमें घूमते हुये अव प्रथम बार पूरा हथियारबन्द होकर राजनीतिक क्षेत्रमें पैर रक्खा था। यद्यपि वर्षपत्रका उद्देश्य
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक धार्मिक व्यक्तित्व वाले इंसान के तौर पर काफी प्रचलित है. उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी योग की वकालत की है. योग के मद्देनज़र वो सिर्फ दूसरों को सीख ही नहीं देते हैं इसके अलावा वो खुद भी योग और व्यायाम का लगातार अभ्यास करते हैं. वो सिर्फ अपने आवास या राजधानी दिल्ली में ही योग और व्यायाम नहीं करते.. बाहर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखाई देता है.
प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से अपने गृह राज्य गुजरात में थे. पीएम मोदी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे थे. दरअसल गुजरात के केवड़िया में ऑल इंडिया डीजी कॉन्फ्रेंस चल रही थी. जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुंचे थे. जहां उन्होंने सुबह की सैर की.
भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया प्रभारी प्रीती गांधी ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह-सुबह सड़क पर मॉर्निंग वॉक करते साफ दिखाई दे रहे हैं. पीएम मोदी जिस वक्त सड़क पर टहलते दिखाई दिए उस वक्त सूरज भी नहीं उगा था.
वीडियो में वो कम से कम 6 लोग के साथ दिखाई दे रहे हैं. जिन्होंने सूट पहन रखा है. प्रधानमंत्री मोदी इस वीडियो में हाथ जोड़ कर नमस्ते करते दिखाई दे रहे हैं.
प्रीती गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी सुबह गुजरात यात्रा पर जाने के वक्त की झलक एक अनुशासन का उदाहरण है.
पीएम मोदी स्वास्थ्य और फिटनेस के एक स्थिर समर्थक रहे हैं और इस के बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं सबकुछ सामने है. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को एक ऐतिहासिक रूप से स्थापित किया और अर्जेंटीना जैसे देश में इसके महत्व पर सम्मेलनों को संबोधित किया.
संयोग से, जब केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपना फिटनेस चैलेंस (#FitnessChallenge) अभियान शुरू किया था. पीएम मोदी ने टीम इंडिया क्रिकेट के कप्तान विराट कोहली ने पीएम मोदी को नॉमिनेट किया था. और पीएम मोदी ने अपने रोज के योगा का एक वीडियो भी शेयर किया था.
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक धार्मिक व्यक्तित्व वाले इंसान के तौर पर काफी प्रचलित है. उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी योग की वकालत की है. योग के मद्देनज़र वो सिर्फ दूसरों को सीख ही नहीं देते हैं इसके अलावा वो खुद भी योग और व्यायाम का लगातार अभ्यास करते हैं. वो सिर्फ अपने आवास या राजधानी दिल्ली में ही योग और व्यायाम नहीं करते.. बाहर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखाई देता है. प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से अपने गृह राज्य गुजरात में थे. पीएम मोदी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे थे. दरअसल गुजरात के केवड़िया में ऑल इंडिया डीजी कॉन्फ्रेंस चल रही थी. जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी गुजरात की राजधानी गांधीनगर पहुंचे थे. जहां उन्होंने सुबह की सैर की. भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया प्रभारी प्रीती गांधी ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह-सुबह सड़क पर मॉर्निंग वॉक करते साफ दिखाई दे रहे हैं. पीएम मोदी जिस वक्त सड़क पर टहलते दिखाई दिए उस वक्त सूरज भी नहीं उगा था. वीडियो में वो कम से कम छः लोग के साथ दिखाई दे रहे हैं. जिन्होंने सूट पहन रखा है. प्रधानमंत्री मोदी इस वीडियो में हाथ जोड़ कर नमस्ते करते दिखाई दे रहे हैं. प्रीती गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी सुबह गुजरात यात्रा पर जाने के वक्त की झलक एक अनुशासन का उदाहरण है. पीएम मोदी स्वास्थ्य और फिटनेस के एक स्थिर समर्थक रहे हैं और इस के बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं सबकुछ सामने है. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को एक ऐतिहासिक रूप से स्थापित किया और अर्जेंटीना जैसे देश में इसके महत्व पर सम्मेलनों को संबोधित किया. संयोग से, जब केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपना फिटनेस चैलेंस अभियान शुरू किया था. पीएम मोदी ने टीम इंडिया क्रिकेट के कप्तान विराट कोहली ने पीएम मोदी को नॉमिनेट किया था. और पीएम मोदी ने अपने रोज के योगा का एक वीडियो भी शेयर किया था.
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सरों पर इस ढंग से रखा कि उनकी अनुपयुक्तता सिद्ध हो और कुछ शिक्षा भो दी जा सके। बात यह है कि तुलसीदास एक विरक्त संत थे और प्रसिद्ध है कि पत्नी की भर्त्सना के कारण हो उन्हें विराग हुआ था। इसी के आधार पर उनकी इन उत्तियों को नारी के प्रति उनकी हेय दृष्टि का परिणाम मान, उन्हें नारी-निन्दक ठहरा दिया गया। जो चल पड़ा सो चल पड़ा। उसकी छानबीन की अधिक आवश्यकता नहीं समझी गई । तुलसीदास के नारीनिन्दक समझे जाने का यही रहस्य है । अन्यथा हमारे विचार से तो नारीजाति को जितने ऊँचे आसन पर उन्होंने प्रतिष्ठित किया और उसे पूज्य दृष्टि से देखने की शिक्षा समाज को दी, हिन्दी के अन्य किसी कवि ने नही । इसके लिए पुरुष नहीं, तो नारी समाज को अवश्य ही उनका कृतज्ञ होना चाहिए ।
अध्याय ६
गोस्वामी जी के जीवनवृत्त के सम्बन्ध में पाश्चात्य विद्वानों से लेकर हिन्दी प्रमुख शोधकर्ताओं तक ने बहुत कुछ लिखा है। इस दिशा में अन्तिम शोधकार्य आचार्य चन्द्रबली जी पाडे का है। उन्होंने पहले 'तुलसीदास' में, तत्पश्चात् 'तुलसी की जीवन-भूमि में इसका विस्तृत विवेचन किया है । उनको पाडित्यपूर्ण विवेचना में तुलसीदास के जोवनवृत्त का सर्वाधिक प्रामाणिक रूप प्रस्तुत करने का प्रयास है । पाड़े जी की स्थापनाओ मे गोस्वामी जी को माता और उनकी पत्नी के सम्बन्ध में भी कुछ नूतन विचार है । अनेक विद्वानों ने अंतःसाक्ष्य के आधार पर तुलसीदास के व्यक्तिगत जीवन का स्वरूप प्रस्तुत करने की चेष्टा की है । परन्तु उनकी पत्नी का जो स्वरूप था और उसका जो प्रभाव उनपर पड़ा तथा उनका माता एवं अन्य स्त्रियों से जो कुछ सम्पर्क रहा, वह किस रूप में उनके काव्य में प्रतिबिम्बित हुआ है, इसका सूक्ष्म निरीक्षण एवं विश्लेषण किसी ने नहीं किया। इस अभाव की पूर्ति का प्रयत्न यहाँ किया जाता है ।
तुलसीदास की माता का क्या नाम था, उनका पर्यवसान बालक के जन्मकाल मे हो हुआ अथवा कुछ काल पश्चात् इसमें आलोचकों में मतभेद अवश्य है । परन्तु यह प्राय सभी मानते है कि वे मातृविहीन थे। पिता से भी उन्हें बाल्यावस्था में हो त्रियुक्त होना पड़ा। यह भी प्रायः सभी ने स्वीकार किया है कि पत्नी को भर्त्सना से ही विरक्त होकर तुलसीदास राम-भक्ति की ओर उन्मुख हुए। अनेक विचारकों को उनके जीवन की इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण घटना का प्रतिबिम्ब उनको तथाकथित नारी-निन्दा में दिखाई पड़ा है।
हमें यह देखना है कि उनके व्यक्तित्व पर नारी का जो प्रभाव पडा, उसको छाया किस प्रकार उनके काव्य में प्रतिबिम्बित हो उसकी शोभा का कारण बनी । सर्वप्रथम माता पर विचार करना उचित होगा ।
इसमें सदेह नहीं कि गोस्वामी जो बाल्यावस्था से हो माता के सहज स्नेह एवं वात्सल्य से वंचित रहे । जिज्ञासा होती है कि इस स्थिति में उनके काव्य में उसका जो स्वाभाविक और मार्मिक रूप चित्रित हुआ है क्या वह उनकी कल्पना मात्र का प्रसाद और व्यक्तिगत अनुभूति से एकदम अछूता है ? यदि यह सम्भव नहीं तो क्या कवि ने सौभाग्यवश किसी माता के पुनीत स्नेह को अनुभूति प्राप्त कर ली थी, जिससे वह उसका स्वाभाविक एवं उदात्त रूप अपने काव्य में अकित कर सका ?
तुलसीदास अपने काव्य में कहीं सीता से 'मातु', 'अंब', तो कहीं राम से 'बाप', 'माय-वाप' या 'माय' कहकर विविध प्रकार से निवेदन करते हैं। अतः पहले यह देख लेना ठीक होगा कि सीता तथा राम के माता एवं पिता-रूप की उनको भावना क्या है। सोता के वात्सल्य को किंचित् झलक 'गीतावली' में लव-कुश के प्रसंग में मिलती है। हाँ, जगज्जननी के नाते हनुमान अथवा भरत को आशीर्वाद देते हुए उनके मातृहृदय का परिचय अवश्य मिलता है । भरत के प्रति उनका प्रेमातिरेक मौन द्वारा व्यक्त होता है और 'मगन सनेह देह सुधि नाही " की अवस्था हो जाती है। हनुमान के प्रति उनके वात्सल्य के दर्शन अशोकवाटिका में होते हैं ।
भक्तो पर राम की कृपा के स्वरूप का गुणगान सर्वत्र है तथा उनके चरित में बराबर इसके दर्शन होते है । जिस भाव से द्रवीभूत हो वे भक्तो से प्रेम और उनपर कृपा करते हैं, उसे भी तुलसीदास ने स्पष्ट कर दिया है। अपने परम प्रिय काकभुशुंडि एवं नारद से राम ने अपनी भक्तवत्सलता का जो रहस्य प्रकट किया है, वह बडे महत्त्व का है। प्रस्तुत विषय से उसका घनिष्ठ सम्बन्ध है । काकभुशुंडि के मोहग्रस्त होने पर उन्हें 'रघुपति प्रेरित माया व्याप गई । फलत. उन्हें प्रभु के परम रूप का बोध हुआ और 'अविरल विशुद्ध भक्ति का वरदान देते हुए भगवान् ने उनसे कहा :१. 'मानस', अयो० २४१.१६ ।
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सरों पर इस ढंग से रखा कि उनकी अनुपयुक्तता सिद्ध हो और कुछ शिक्षा भो दी जा सके। बात यह है कि तुलसीदास एक विरक्त संत थे और प्रसिद्ध है कि पत्नी की भर्त्सना के कारण हो उन्हें विराग हुआ था। इसी के आधार पर उनकी इन उत्तियों को नारी के प्रति उनकी हेय दृष्टि का परिणाम मान, उन्हें नारी-निन्दक ठहरा दिया गया। जो चल पड़ा सो चल पड़ा। उसकी छानबीन की अधिक आवश्यकता नहीं समझी गई । तुलसीदास के नारीनिन्दक समझे जाने का यही रहस्य है । अन्यथा हमारे विचार से तो नारीजाति को जितने ऊँचे आसन पर उन्होंने प्रतिष्ठित किया और उसे पूज्य दृष्टि से देखने की शिक्षा समाज को दी, हिन्दी के अन्य किसी कवि ने नही । इसके लिए पुरुष नहीं, तो नारी समाज को अवश्य ही उनका कृतज्ञ होना चाहिए । अध्याय छः गोस्वामी जी के जीवनवृत्त के सम्बन्ध में पाश्चात्य विद्वानों से लेकर हिन्दी प्रमुख शोधकर्ताओं तक ने बहुत कुछ लिखा है। इस दिशा में अन्तिम शोधकार्य आचार्य चन्द्रबली जी पाडे का है। उन्होंने पहले 'तुलसीदास' में, तत्पश्चात् 'तुलसी की जीवन-भूमि में इसका विस्तृत विवेचन किया है । उनको पाडित्यपूर्ण विवेचना में तुलसीदास के जोवनवृत्त का सर्वाधिक प्रामाणिक रूप प्रस्तुत करने का प्रयास है । पाड़े जी की स्थापनाओ मे गोस्वामी जी को माता और उनकी पत्नी के सम्बन्ध में भी कुछ नूतन विचार है । अनेक विद्वानों ने अंतःसाक्ष्य के आधार पर तुलसीदास के व्यक्तिगत जीवन का स्वरूप प्रस्तुत करने की चेष्टा की है । परन्तु उनकी पत्नी का जो स्वरूप था और उसका जो प्रभाव उनपर पड़ा तथा उनका माता एवं अन्य स्त्रियों से जो कुछ सम्पर्क रहा, वह किस रूप में उनके काव्य में प्रतिबिम्बित हुआ है, इसका सूक्ष्म निरीक्षण एवं विश्लेषण किसी ने नहीं किया। इस अभाव की पूर्ति का प्रयत्न यहाँ किया जाता है । तुलसीदास की माता का क्या नाम था, उनका पर्यवसान बालक के जन्मकाल मे हो हुआ अथवा कुछ काल पश्चात् इसमें आलोचकों में मतभेद अवश्य है । परन्तु यह प्राय सभी मानते है कि वे मातृविहीन थे। पिता से भी उन्हें बाल्यावस्था में हो त्रियुक्त होना पड़ा। यह भी प्रायः सभी ने स्वीकार किया है कि पत्नी को भर्त्सना से ही विरक्त होकर तुलसीदास राम-भक्ति की ओर उन्मुख हुए। अनेक विचारकों को उनके जीवन की इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण घटना का प्रतिबिम्ब उनको तथाकथित नारी-निन्दा में दिखाई पड़ा है। हमें यह देखना है कि उनके व्यक्तित्व पर नारी का जो प्रभाव पडा, उसको छाया किस प्रकार उनके काव्य में प्रतिबिम्बित हो उसकी शोभा का कारण बनी । सर्वप्रथम माता पर विचार करना उचित होगा । इसमें सदेह नहीं कि गोस्वामी जो बाल्यावस्था से हो माता के सहज स्नेह एवं वात्सल्य से वंचित रहे । जिज्ञासा होती है कि इस स्थिति में उनके काव्य में उसका जो स्वाभाविक और मार्मिक रूप चित्रित हुआ है क्या वह उनकी कल्पना मात्र का प्रसाद और व्यक्तिगत अनुभूति से एकदम अछूता है ? यदि यह सम्भव नहीं तो क्या कवि ने सौभाग्यवश किसी माता के पुनीत स्नेह को अनुभूति प्राप्त कर ली थी, जिससे वह उसका स्वाभाविक एवं उदात्त रूप अपने काव्य में अकित कर सका ? तुलसीदास अपने काव्य में कहीं सीता से 'मातु', 'अंब', तो कहीं राम से 'बाप', 'माय-वाप' या 'माय' कहकर विविध प्रकार से निवेदन करते हैं। अतः पहले यह देख लेना ठीक होगा कि सीता तथा राम के माता एवं पिता-रूप की उनको भावना क्या है। सोता के वात्सल्य को किंचित् झलक 'गीतावली' में लव-कुश के प्रसंग में मिलती है। हाँ, जगज्जननी के नाते हनुमान अथवा भरत को आशीर्वाद देते हुए उनके मातृहृदय का परिचय अवश्य मिलता है । भरत के प्रति उनका प्रेमातिरेक मौन द्वारा व्यक्त होता है और 'मगन सनेह देह सुधि नाही " की अवस्था हो जाती है। हनुमान के प्रति उनके वात्सल्य के दर्शन अशोकवाटिका में होते हैं । भक्तो पर राम की कृपा के स्वरूप का गुणगान सर्वत्र है तथा उनके चरित में बराबर इसके दर्शन होते है । जिस भाव से द्रवीभूत हो वे भक्तो से प्रेम और उनपर कृपा करते हैं, उसे भी तुलसीदास ने स्पष्ट कर दिया है। अपने परम प्रिय काकभुशुंडि एवं नारद से राम ने अपनी भक्तवत्सलता का जो रहस्य प्रकट किया है, वह बडे महत्त्व का है। प्रस्तुत विषय से उसका घनिष्ठ सम्बन्ध है । काकभुशुंडि के मोहग्रस्त होने पर उन्हें 'रघुपति प्रेरित माया व्याप गई । फलत. उन्हें प्रभु के परम रूप का बोध हुआ और 'अविरल विशुद्ध भक्ति का वरदान देते हुए भगवान् ने उनसे कहा :एक. 'मानस', अयोशून्य दो सौ इकतालीस.सोलह ।
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल डोंगरगढ़ में पर्यटन सुविधाओं के विकास के स्वीकृत की गई 43.33 करोड़ रूपए की लागत की माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़ विकास परियोजना के पूरा होने से छत्तीसगढ़ का डोंगरगढ़ देश के पर्यटन नक्शे पर महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा। इससे जहां पर्यटन विकास की संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री आज यहां विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय कक्ष से डोंगरगढ़ में आयोजित माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़ विकास परियोजना के भूमिपूजन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने की। पटेल भी वर्चुअल माध्यम से समारोह में शामिल हुए। डोंगरगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भूमिपूजन किया। रायपुर में संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत भी उपस्थित थे।
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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल डोंगरगढ़ में पर्यटन सुविधाओं के विकास के स्वीकृत की गई तैंतालीस.तैंतीस करोड़ रूपए की लागत की माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़ विकास परियोजना के पूरा होने से छत्तीसगढ़ का डोंगरगढ़ देश के पर्यटन नक्शे पर महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा। इससे जहां पर्यटन विकास की संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री आज यहां विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय कक्ष से डोंगरगढ़ में आयोजित माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़ विकास परियोजना के भूमिपूजन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने की। पटेल भी वर्चुअल माध्यम से समारोह में शामिल हुए। डोंगरगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भूमिपूजन किया। रायपुर में संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत भी उपस्थित थे।
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IPL 2023 में एक युवा खिलाड़ी ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। इस प्लेयर ने अपने अपनी बल्लेबाजी से सभी का दिल जीता है।
सुरेश रैना ने किया बड़ा खुलासा! धोनी कब लेंगे संन्यास, कौन होगा CSK का अगला कप्तान?
ODI World Cup 2023 : विश्व कप में अड़ंगा लगाने में जुटा पाकिस्तान, अब ये खुराफात!
IPL 2023 में एक युवा खिलाड़ी ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। इस प्लेयर ने अपने अपनी बल्लेबाजी से सभी का दिल जीता है।
RCB vs MI: IPL 2023 का 54वां मुकाबला मुंबई इंडियंस और आरसीबी के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा।
IPL 2023 का 54वां मुकाबला मुंबई इंडियंस और आरसीबी के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा।
WTC Final : विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए चोटिल केएल राहुल की जगह इशान किशन को टीम इंडिया में शामिल किया गया है। वहीं सरफराज खान को एक बार फिर से भुला दिया गया है।
मुंबई इंडियंस का एक स्टार बॉलर चोटिल होकर आईपीएल 2023 से बाहर हो गया है।
IPL 2023 Orange Cap Purple Cap List : आईपीएल 2023 में ऑरेंज और पर्पल कैप को लेकर भी जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। खिलाड़ी एक दूसरे को पीछे करने के लिए जोरआजमाइश कर रहे हैं।
मुंबई की सीनियर टीम ने आगामी घरेलू सीजन के लिए एक दिग्गज को कोच बनाया है।
IPL 2023 Playoff Scenario : पंजाब किंग्स के खिलाफ केकेआर को मिली जीत के बाद सबसे ज्यादा नुकसान मुंबई इंडियंंस और आरसीबी को हुआ है।
IPL 2023 Playoffs: आईपीएल में अभी भी सभी टीमों के लिए प्लेऑफ के दरवाजे खुले हुए हैं और आखिरी स्थान पर मौजूद दिल्ली कैपिटल्स भी प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर सकती है।
IPL 2023: केकेआर ने पंजाब किंग्स को 5 विकेट से हरा दिया, लेकिन मैच जीतने के बाद केकेआर के एक स्टार खिलाड़ी पर बीसीसीआई ने बड़ा जुर्माना लगाया है।
केकेआर ने शानदार अंदाज में पंजाब किंग्स को 5 विकेट से हरा दिया। इसी के साथ केकेआर की टीम ने इतिहास रचते हुए चेन्नई सुपर किंग्स को पीछे छोड़ दिया।
MI vs RCB Playing 11, IPL 2023: आईपीएल 2023 के 54वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस का सामना आरसीबी से होगा। इस सीजन पिछली भिड़ंत में आरसीबी ने बाजी मारी थी।
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IPL दो हज़ार तेईस में एक युवा खिलाड़ी ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। इस प्लेयर ने अपने अपनी बल्लेबाजी से सभी का दिल जीता है। सुरेश रैना ने किया बड़ा खुलासा! धोनी कब लेंगे संन्यास, कौन होगा CSK का अगला कप्तान? ODI World Cup दो हज़ार तेईस : विश्व कप में अड़ंगा लगाने में जुटा पाकिस्तान, अब ये खुराफात! IPL दो हज़ार तेईस में एक युवा खिलाड़ी ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। इस प्लेयर ने अपने अपनी बल्लेबाजी से सभी का दिल जीता है। RCB vs MI: IPL दो हज़ार तेईस का चौवनवां मुकाबला मुंबई इंडियंस और आरसीबी के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। IPL दो हज़ार तेईस का चौवनवां मुकाबला मुंबई इंडियंस और आरसीबी के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। WTC Final : विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए चोटिल केएल राहुल की जगह इशान किशन को टीम इंडिया में शामिल किया गया है। वहीं सरफराज खान को एक बार फिर से भुला दिया गया है। मुंबई इंडियंस का एक स्टार बॉलर चोटिल होकर आईपीएल दो हज़ार तेईस से बाहर हो गया है। IPL दो हज़ार तेईस Orange Cap Purple Cap List : आईपीएल दो हज़ार तेईस में ऑरेंज और पर्पल कैप को लेकर भी जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। खिलाड़ी एक दूसरे को पीछे करने के लिए जोरआजमाइश कर रहे हैं। मुंबई की सीनियर टीम ने आगामी घरेलू सीजन के लिए एक दिग्गज को कोच बनाया है। IPL दो हज़ार तेईस Playoff Scenario : पंजाब किंग्स के खिलाफ केकेआर को मिली जीत के बाद सबसे ज्यादा नुकसान मुंबई इंडियंंस और आरसीबी को हुआ है। IPL दो हज़ार तेईस Playoffs: आईपीएल में अभी भी सभी टीमों के लिए प्लेऑफ के दरवाजे खुले हुए हैं और आखिरी स्थान पर मौजूद दिल्ली कैपिटल्स भी प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर सकती है। IPL दो हज़ार तेईस: केकेआर ने पंजाब किंग्स को पाँच विकेट से हरा दिया, लेकिन मैच जीतने के बाद केकेआर के एक स्टार खिलाड़ी पर बीसीसीआई ने बड़ा जुर्माना लगाया है। केकेआर ने शानदार अंदाज में पंजाब किंग्स को पाँच विकेट से हरा दिया। इसी के साथ केकेआर की टीम ने इतिहास रचते हुए चेन्नई सुपर किंग्स को पीछे छोड़ दिया। MI vs RCB Playing ग्यारह, IPL दो हज़ार तेईस: आईपीएल दो हज़ार तेईस के चौवनवें मुकाबले में मुंबई इंडियंस का सामना आरसीबी से होगा। इस सीजन पिछली भिड़ंत में आरसीबी ने बाजी मारी थी।
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कई लोगों के लिए, बगीचे में काम करना सबसे अधिक हैएक असली छुट्टी, खासकर अगर आपको शहर में लगभग पूरे साल रहना है। हालांकि, यह आराम अक्सर बिस्तरों और बगीचों की देखभाल के साथ जुड़ा हुआ है, और यहां अपने लिए सहायकों को खोजना बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रकार के उपकरणों को बागवानों से अच्छी समीक्षा मिली है। एक बवंडर कृषक, उदाहरण के लिए, एक समुच्चय है जो न केवल उपयोग करने के लिए सुविधाजनक है, बल्कि सस्ती भी है, इसलिए यहां तक कि एक रिटायर भी इसका मालिक बन सकता है। कृषक का उद्देश्य क्या है, और यह अभ्यास में कैसे मदद करता है?
इससे पहले कि हम कहानी के बारे में नीचे उतरेंकृषक "बवंडर", आपको यह बताना चाहिए कि इस तकनीक को कैसे चुनना है। सबसे पहले, उद्यान उपकरण के उन निर्माताओं को वरीयता दी जानी चाहिए जो लंबे समय से ज्ञात हैं। दूसरे, डिवाइस की शक्ति को ध्यान में रखना आवश्यक हैः उदाहरण के लिए, एक छोटी सी झोपड़ी के लिए, एक साधारण इकाई काफी पर्याप्त है, जिसके कई कार्यों को अच्छी समीक्षा मिली है। कल्टीवेटर "बवंडर" - इस पैरामीटर के लिए आदर्श रूप से अनुकूल है। तीसरा, किसी को क्षेत्र की स्थलाकृति, मिट्टी की स्थिति और संरचना के साथ-साथ उस क्षेत्र के आकार के साथ आगे बढ़ना चाहिए जहां काम करना आवश्यक है। चौथा, काश्तकार के कई मॉडल विभिन्न कार्य कर सकते हैंः रोपण के लिए भूमि तैयार करें, इसे नुकसान पहुंचाएं, जड़ों को खोदें, और इसी तरह। तदनुसार, इस पैरामीटर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
वह क्या है - मैनुअल कृषक "बवंडर"?
समीक्षा का सुझाव है कि बावजूदमैन्युअल रूप से काम करने की आवश्यकता है, यह मॉडल बगीचे के रखरखाव के लिए आदर्श है। अपनी सभी सादगी के साथ, यह उपकरण आपको कृषि कार्य को अधिक सरल बनाने की अनुमति देता है। एक बवंडर कल्टीवेटर की मदद से, आप किसी भी आकार की साइट पर जमीन को ढीला कर सकते हैं। यूनिट की डिज़ाइन विशेषताएं ऐसी हैं कि मिट्टी को ढीला करने की प्रक्रिया को सामान्य फावड़े के साथ तुलना में जल्दी और आसानी से किया जाता है।
इस प्रकार की प्रौद्योगिकी की विशिष्ट विशेषताओं में शामिल हैंः
- विभिन्न जुताई की क्षमताः खरपतवार निकालना, खरपतवार निकालना, खुदाई करना, रोपण छेद बनाना;
- आवेदन जब एक सीधी पीठ के साथ काम करने की क्षमतान्यूनतम प्रयास - कई समीक्षाएं यह कहती हैं; बवंडर कृषक आपको काम करते समय लोड को समान रूप से वितरित करने की अनुमति देता है, जब विभिन्न मांसपेशी समूह शामिल होते हैं;
- ज्यामितीय विशेषताएं और दांतों की ताकत प्रसंस्करण को जटिल, उपेक्षित क्षेत्रों की अनुमति देती है;
- चाप पकड़ हाथ और टिकाऊ दांत ढीलेपन की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाते हैं;
- उपकरण विधानसभा त्वरित और आसान है;
- इकाई को तीन भागों में विभाजित किया गया है, इसलिए परिवहन करना आसान है।
यह कैसे काम करता है?
कई उपयोगकर्ता इसकी तुलना में बताते हैंअन्य समान मॉडल, "बवंडर" आपको मिट्टी को 20 सेमी की गहराई तक तैयार करने की अनुमति देता है, जबकि यह सभी सूक्ष्मजीवों को बरकरार रखता है। उपकरण के साथ काम करना आसान हैः इसे जमीन पर रखा जाना चाहिए, जिसके बाद हैंडल 60 डिग्री पर मुड़ जाना चाहिए। लीवर एक अवतल संभाल के रूप में बनाया गया है, जो उपयोग करने के लिए सुविधाजनक है। उस पर थोड़ा दबाव डिवाइस को जमीन में पेंच करने और मातम काटने के लिए इसे ढीला करना शुरू कर देता है। दांतों के विशेष डिजाइन के कारण, डिवाइस यहां तक कि वतन और खरपतवार की जड़ों को भी उठाता है, जो बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि आपको लगातार झुकने की आवश्यकता नहीं है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऐसे कृषक को खरपतवार निकालने के लिए रसायनों के उपयोग के बारे में सोचना नहीं पड़ता है - उपकरण आसानी से गहरी जड़ों से भी सामना कर सकता है।
क्या यह मूल्य खरीदना है? कृषक "बवंडर"?
इस उपकरण के बारे में नकारात्मक प्रतिक्रियाएक नियम के रूप में, वे उन लोगों को छोड़ देते हैं जो सभी कार्य मैन्युअल रूप से करना पसंद करते हैं, यह मानते हुए कि कोई भी इकाई बेहतर सामना नहीं करेगी। हालाँकि, इस खरीद में बिंदु अभी भी हैः
- कल्टीवेटर आपको जमीन को जल्दी और आसानी से ढीला करने की अनुमति देता है, भले ही यह घास के साथ भारी हो।
- जुताई सही ढंग से की जाती है - बिना उपजाऊ परत को परेशान किए और इसे बाहर ले जाने, जैसे कि एक फावड़ा के साथ काम करते समय।
- पृथ्वी को बड़े करीने से और समान रूप से ढीला किया जाता है, जिसमें कोई गांठ शेष नहीं है, जिसका अर्थ है कि आपके बिस्तर नरम होंगे।
- मैनुअल कल्टीवेटर के कामकाजी हिस्से का तर्कशीलता आपको लीवर को थोड़ा मोड़कर मातम की जड़ों को हटाने की अनुमति देती है।
इसलिए, यदि आप काम करना चाहते हैंसाइट खोजने के लिए बहुत आसान है और एक रेक और फावड़ा के लिए एक सभ्य विकल्प, टॉर्नेडो कल्टीवेटर-रूट रिमूवर (समीक्षा जिसके बारे में लगभग हमेशा सकारात्मक हैं) आपका विश्वसनीय सहायक बनने में सक्षम है। इसके अलावा, यह इकाई पीठ और रीढ़ की हड्डी के दर्द से छुटकारा पाने का एक शानदार अवसर है, क्योंकि टॉरनेडो में एक विशेष डिज़ाइन है जो समान रूप से पूरे शरीर में भार वितरित करता है।
जो पहले से ही ऐसा उपयोग करने के लिए हुआ हैउद्यान उपकरण, उसे पर्याप्त नहीं मिल सकता है और केवल अच्छी समीक्षा छोड़ सकता है। कल्टीवेटर "बवंडर", उनकी राय में, डचा खेत के लिए एक बहुत ही उपयोगी और आवश्यक उपकरण है, खासकर यदि आपको लंबे समय तक कृषि कार्य करना है। सबसे पहले, जब उसके साथ काम करते हैं, तो पीठ के निचले हिस्से पर भार को हटा दिया जाता है, क्योंकि कंधे की कमर, पीठ, हाथ और पैर की मांसपेशियां एक साथ काम करेंगी। दूसरे, यह डिवाइस पेंशनभोगियों के लिए एक गॉडसेंड है जिन्हें प्रकाश और आसानी से उपयोग होने वाले उपकरण की आवश्यकता होती है। तो, मैनुअल कल्टीवेटर को क्रमशः ऊंचाई में समायोजित किया जा सकता है, यह एर्गोनोमिक हो जाएगा।
कृषक "टॉरनेडो" की समीक्षा कहते हैं किवह अपनी जड़ों को काटकर नहीं, बल्कि सावधानीपूर्वक काटकर खरपतवारों का कुशलतापूर्वक और आसानी से सामना करता है। यह खरपतवारों के गुणन से बचा जाता है। अनावश्यक घास से छुटकारा पाने के लिए, आपको बस खेती करने वाले को जमीन में डुबोना होगा और उसे 45 डिग्री तक घुमाना होगा, फिर उठाना और हिलाना होगा - सभी मातम सतह पर होंगे। इस प्रकार, मैनुअल कल्टीवेटर "टॉरनेडो" एक ही समय में एक फावड़ा, कुदाल, कांटा और रेक का एक बढ़िया विकल्प है।
इसका कितना खर्च होता है?
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कई लोगों के लिए, बगीचे में काम करना सबसे अधिक हैएक असली छुट्टी, खासकर अगर आपको शहर में लगभग पूरे साल रहना है। हालांकि, यह आराम अक्सर बिस्तरों और बगीचों की देखभाल के साथ जुड़ा हुआ है, और यहां अपने लिए सहायकों को खोजना बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रकार के उपकरणों को बागवानों से अच्छी समीक्षा मिली है। एक बवंडर कृषक, उदाहरण के लिए, एक समुच्चय है जो न केवल उपयोग करने के लिए सुविधाजनक है, बल्कि सस्ती भी है, इसलिए यहां तक कि एक रिटायर भी इसका मालिक बन सकता है। कृषक का उद्देश्य क्या है, और यह अभ्यास में कैसे मदद करता है? इससे पहले कि हम कहानी के बारे में नीचे उतरेंकृषक "बवंडर", आपको यह बताना चाहिए कि इस तकनीक को कैसे चुनना है। सबसे पहले, उद्यान उपकरण के उन निर्माताओं को वरीयता दी जानी चाहिए जो लंबे समय से ज्ञात हैं। दूसरे, डिवाइस की शक्ति को ध्यान में रखना आवश्यक हैः उदाहरण के लिए, एक छोटी सी झोपड़ी के लिए, एक साधारण इकाई काफी पर्याप्त है, जिसके कई कार्यों को अच्छी समीक्षा मिली है। कल्टीवेटर "बवंडर" - इस पैरामीटर के लिए आदर्श रूप से अनुकूल है। तीसरा, किसी को क्षेत्र की स्थलाकृति, मिट्टी की स्थिति और संरचना के साथ-साथ उस क्षेत्र के आकार के साथ आगे बढ़ना चाहिए जहां काम करना आवश्यक है। चौथा, काश्तकार के कई मॉडल विभिन्न कार्य कर सकते हैंः रोपण के लिए भूमि तैयार करें, इसे नुकसान पहुंचाएं, जड़ों को खोदें, और इसी तरह। तदनुसार, इस पैरामीटर को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वह क्या है - मैनुअल कृषक "बवंडर"? समीक्षा का सुझाव है कि बावजूदमैन्युअल रूप से काम करने की आवश्यकता है, यह मॉडल बगीचे के रखरखाव के लिए आदर्श है। अपनी सभी सादगी के साथ, यह उपकरण आपको कृषि कार्य को अधिक सरल बनाने की अनुमति देता है। एक बवंडर कल्टीवेटर की मदद से, आप किसी भी आकार की साइट पर जमीन को ढीला कर सकते हैं। यूनिट की डिज़ाइन विशेषताएं ऐसी हैं कि मिट्टी को ढीला करने की प्रक्रिया को सामान्य फावड़े के साथ तुलना में जल्दी और आसानी से किया जाता है। इस प्रकार की प्रौद्योगिकी की विशिष्ट विशेषताओं में शामिल हैंः - विभिन्न जुताई की क्षमताः खरपतवार निकालना, खरपतवार निकालना, खुदाई करना, रोपण छेद बनाना; - आवेदन जब एक सीधी पीठ के साथ काम करने की क्षमतान्यूनतम प्रयास - कई समीक्षाएं यह कहती हैं; बवंडर कृषक आपको काम करते समय लोड को समान रूप से वितरित करने की अनुमति देता है, जब विभिन्न मांसपेशी समूह शामिल होते हैं; - ज्यामितीय विशेषताएं और दांतों की ताकत प्रसंस्करण को जटिल, उपेक्षित क्षेत्रों की अनुमति देती है; - चाप पकड़ हाथ और टिकाऊ दांत ढीलेपन की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाते हैं; - उपकरण विधानसभा त्वरित और आसान है; - इकाई को तीन भागों में विभाजित किया गया है, इसलिए परिवहन करना आसान है। यह कैसे काम करता है? कई उपयोगकर्ता इसकी तुलना में बताते हैंअन्य समान मॉडल, "बवंडर" आपको मिट्टी को बीस सेमी की गहराई तक तैयार करने की अनुमति देता है, जबकि यह सभी सूक्ष्मजीवों को बरकरार रखता है। उपकरण के साथ काम करना आसान हैः इसे जमीन पर रखा जाना चाहिए, जिसके बाद हैंडल साठ डिग्री पर मुड़ जाना चाहिए। लीवर एक अवतल संभाल के रूप में बनाया गया है, जो उपयोग करने के लिए सुविधाजनक है। उस पर थोड़ा दबाव डिवाइस को जमीन में पेंच करने और मातम काटने के लिए इसे ढीला करना शुरू कर देता है। दांतों के विशेष डिजाइन के कारण, डिवाइस यहां तक कि वतन और खरपतवार की जड़ों को भी उठाता है, जो बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि आपको लगातार झुकने की आवश्यकता नहीं है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऐसे कृषक को खरपतवार निकालने के लिए रसायनों के उपयोग के बारे में सोचना नहीं पड़ता है - उपकरण आसानी से गहरी जड़ों से भी सामना कर सकता है। क्या यह मूल्य खरीदना है? कृषक "बवंडर"? इस उपकरण के बारे में नकारात्मक प्रतिक्रियाएक नियम के रूप में, वे उन लोगों को छोड़ देते हैं जो सभी कार्य मैन्युअल रूप से करना पसंद करते हैं, यह मानते हुए कि कोई भी इकाई बेहतर सामना नहीं करेगी। हालाँकि, इस खरीद में बिंदु अभी भी हैः - कल्टीवेटर आपको जमीन को जल्दी और आसानी से ढीला करने की अनुमति देता है, भले ही यह घास के साथ भारी हो। - जुताई सही ढंग से की जाती है - बिना उपजाऊ परत को परेशान किए और इसे बाहर ले जाने, जैसे कि एक फावड़ा के साथ काम करते समय। - पृथ्वी को बड़े करीने से और समान रूप से ढीला किया जाता है, जिसमें कोई गांठ शेष नहीं है, जिसका अर्थ है कि आपके बिस्तर नरम होंगे। - मैनुअल कल्टीवेटर के कामकाजी हिस्से का तर्कशीलता आपको लीवर को थोड़ा मोड़कर मातम की जड़ों को हटाने की अनुमति देती है। इसलिए, यदि आप काम करना चाहते हैंसाइट खोजने के लिए बहुत आसान है और एक रेक और फावड़ा के लिए एक सभ्य विकल्प, टॉर्नेडो कल्टीवेटर-रूट रिमूवर आपका विश्वसनीय सहायक बनने में सक्षम है। इसके अलावा, यह इकाई पीठ और रीढ़ की हड्डी के दर्द से छुटकारा पाने का एक शानदार अवसर है, क्योंकि टॉरनेडो में एक विशेष डिज़ाइन है जो समान रूप से पूरे शरीर में भार वितरित करता है। जो पहले से ही ऐसा उपयोग करने के लिए हुआ हैउद्यान उपकरण, उसे पर्याप्त नहीं मिल सकता है और केवल अच्छी समीक्षा छोड़ सकता है। कल्टीवेटर "बवंडर", उनकी राय में, डचा खेत के लिए एक बहुत ही उपयोगी और आवश्यक उपकरण है, खासकर यदि आपको लंबे समय तक कृषि कार्य करना है। सबसे पहले, जब उसके साथ काम करते हैं, तो पीठ के निचले हिस्से पर भार को हटा दिया जाता है, क्योंकि कंधे की कमर, पीठ, हाथ और पैर की मांसपेशियां एक साथ काम करेंगी। दूसरे, यह डिवाइस पेंशनभोगियों के लिए एक गॉडसेंड है जिन्हें प्रकाश और आसानी से उपयोग होने वाले उपकरण की आवश्यकता होती है। तो, मैनुअल कल्टीवेटर को क्रमशः ऊंचाई में समायोजित किया जा सकता है, यह एर्गोनोमिक हो जाएगा। कृषक "टॉरनेडो" की समीक्षा कहते हैं किवह अपनी जड़ों को काटकर नहीं, बल्कि सावधानीपूर्वक काटकर खरपतवारों का कुशलतापूर्वक और आसानी से सामना करता है। यह खरपतवारों के गुणन से बचा जाता है। अनावश्यक घास से छुटकारा पाने के लिए, आपको बस खेती करने वाले को जमीन में डुबोना होगा और उसे पैंतालीस डिग्री तक घुमाना होगा, फिर उठाना और हिलाना होगा - सभी मातम सतह पर होंगे। इस प्रकार, मैनुअल कल्टीवेटर "टॉरनेडो" एक ही समय में एक फावड़ा, कुदाल, कांटा और रेक का एक बढ़िया विकल्प है। इसका कितना खर्च होता है?
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बीते दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिलने के बाद उर्दू अख़बार इंक़लाब ने राहुल गांधी का हवाला देते हुए 'हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है' शीर्षक से ख़बर छापी. इसके बाद से प्रधानमंत्री समेत भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया.
संसद के मानसून सत्र के शुरू होने के पहले देश की राजनीति में हिंदू-मुस्लिम का तड़का लग चुका है. दरअसल गत 11 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक में मुसलमानों से जुड़े मुद्दों और देश की वर्तमान राजनीतिक व सामाजिक स्थिति पर चर्चा की थी.
इसके अगले दिन इस कार्यक्रम को लेकर उर्दू अखबार इंकलाब में 'हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है' शीर्षक से रिपोर्ट लिखी गई.
अखबार की इस रिपोर्ट के सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम नेता इंकलाब की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप लगाने लगे.
Urdu daily Inqalab has quoted Rahul Gandhi saying "Yes Congress is a Muslim party". Is the quote correct or party will contradict it?
उन्होंने आगे लिखा कि मुसलमान एक मुस्लिम पार्टी नहीं चाहते हैं, वे एक राष्ट्रीय धर्मनिरपेक्ष पार्टी चाहते हैं, जो नागरिकों के बीच भेदभाव न करती हो.
इसके बाद भाजपा नेताओं ने इस बयान को मुद्दा बना दिया. भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने 12 जुलाई को ट्वीट किया कि दैनिक इंक़लाब में 'जनेऊधारी' राहुल गांधी का बयानः कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है.
12 जुलाई को ही ज़ी हिंदुस्तान चैनल ने इस रिपोर्ट के हवाले से एक डिबेट कार्यक्रम भी चलाया.
इसके बाद 13 जुलाई को भाजपा की वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी एक मुस्लिम पार्टी है.
इसके अगले दिन यानी 14 जुलाई को आजमगढ़ में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक को लेकर कांग्रेस से पूछा कि वे मुस्लिम पुरूषों की ही पार्टी है या फिर मुस्लिम महिलाओं की भी पक्षधर है.
उन्होंने कहा कि हमने अखबार में पढ़ा कि कांग्रेस नामदार ने कहा है कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है. उन्होंने कहा, 'यह बहस पिछले दो दिनों से चल रही है लेकिन उन्हें राहुल के बयान पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि यूपीए सरकार में कांग्रेस के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का ही है.
हालांकि इसके बाद कांग्रेस ने भाजपा के दावे को खारिज करते हुए उर्दू अखबार की रिपोर्ट में बताए गये राहुल गांधी के बयान से इनकार किया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस भारत के सभी लोगों की पार्टी है और भाजपा सरकार झूठ फैला रही है.
कौन-कौन लोग थे राहुल के साथ बैठक में?
राहुल गांधी के साथ इस संवाद बैठक में इतिहासकार इरफान हबीब, सामाजिक कार्यकर्ता इलियास मलिक, कारोबारी जुनैद रहमान, ए एफ फारूकी, अमीर मोहम्मद खान, वकील जेड के फैजान, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट फराह नकवी, सामाजिक कार्यकर्ता रक्षंदा जलील सहित करीब 15 लोग शामिल हुए.
इनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद भी मौजूद थे.
अखबार के बयान पर क्या कहना है बैठक में शामिल लोगों का?
इस खबर के चर्चा में आने के बाद सबसे पहले इतिहासकार इरफान हबीब ने ट्वीट करके इसे झूठ बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई भी चर्चा बैठक के दौरान नहीं हुई.
Taken a back to hear that Rahul Gandhi is being accused of calling the Congress a Muslim party in a meeting where I was present. It seems to have malicious intent, no such issue came up at all.
वहीं, बैठक में उपस्थित रही जेएनयू की सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस में फैकल्टी गजाला जमील ने द वायर से कहा कि बैठक में राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि वह मुस्लिमों को समान नागरिक के तौर पर देखते हैं- न ज्यादा, न कम. कांग्रेस पार्टी को लेकर उन्होंने इस बात का संज्ञान लिया कि कई गलतियां हुईं हैं लेकिन उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस पारंपरिक रूप से भारत के समुदायों और वर्गों को जोड़ने का काम करती रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी भारतीय समाज के सभी वर्गों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका जारी रखेगी. बैठक में उपस्थित लोगों ने इस स्थिति की सराहना की और उन्हें सारी बातों के ऊपर न्याय और समानता के मूल्यों को दृढ़ता से बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया.
वहीं, ऑल्ट न्यूज से मीटिंग में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वकील फुजैल अहमद अयूब ने इस संबंध में बात की. उनके मुताबिक, ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि मीटिंग में राहुल गांधी से पूछा गया कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम कितने महत्वपूर्ण हैं. इस पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने दूसरे समुदाय या धर्म.
इसके अलावा लेखक और एक्टिविस्ट फराह नकवी भी बैठक में मौजूद थीं. उन्होंने भी राहुल गांधी के कथित बयान से इनकार किया है. द वायर में लिखे अपने लेख में उन्होंने इस बैठक के बाद भाजपा द्वारा बवाल करने पर कई सवाल उठाए है.
फराह लिखती हैं, 'अगर राहुल गांधी या मीटिंग में मौजूद किसी भी व्यक्ति द्वारा कांग्रेस को 'मुस्लिम पार्टी' कहे जाने की फेक न्यूज़ को भूल भी जाएं तो यह सोचना दिलचस्प होगा कि क्या सीतारमण सच में यह मानती हैं कि किसी ऐसे देश में जहां 86 फीसदी आबादी गैर-मुस्लिमों की है, वहां ऐसी किसी पार्टी का कोई लोकतांत्रिक भविष्य हो सकता है. बजाय इसके मैं यह जानना चाहती हूं कि क्यों कोई नेता- भले ही किसी भी पार्टी का हो- किसी सामान्य मुस्लिम नागरिक से नहीं मिल सकता, जिसके मन में कुछ वाजिब सवाल हों. या फिर भाजपा कहना चाहती है कि पार्टियों को मुस्लिमों के नाम पर केवल तीन तलाक़ पीड़ित मुस्लिम महिलाओं से मिलना चाहिए. भाजपा की बहस क्या है? क्या लोकतांत्रिक भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों पर बात नहीं कर सकते? क्या केवल मुस्लिम नाम के लोगों के मौजूद होने से ये सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मामला बन जाता है? क्या एक ही मुस्लिम होता तो ठीक था? 11 लोग ज्यादा होते हैं? मैं समझ नहीं पा रही हूं कि चल क्या रहा है?
क्या कहना है इंकलाब अख़बार का?
कांग्रेस भले ही इंकलाब की रिपोर्ट को खारिज कर चुकी हो लेकिन अखबार अपनी रिपोर्ट पर कायम है. इंकलाब के संपादक शकील शम्सी ने द वायर से बातचीत में कि वह रिपोर्ट पर कायम हैं.
उन्होंने कहा कि बवाल उनकी रिपोर्ट पर नहीं बल्कि पत्रकार शाहिद सिद्दीकी के ट्वीट पर हैं. उन्होंने हमारी रिपोर्ट का गलत अंग्रेजी अनुवाद किया. हमने अपने इंट्रो में साफ किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, हां कांग्रेस पार्टी मुसलमानों की पार्टी है क्योंकि मुल्क का मुसलमान कमजोर है और कांग्रेस हमेशा से कमजोरों के साथ रही है.
हालांकि रिपोर्ट को पढ़ने पर कई खामियां नजर आती हैं. सबसे पहले पूरी रिपोर्ट में रिपोर्टर ने यह कहीं भी नहीं लिखा है कि वह बैठक में उपस्थित था या नहीं. अगर नहीं रहा है तो किसके हवाले से खबर लिखी गई है.
रिपोर्टर ने किसी भी नेता या सूत्रों के हवाले से भी रिपोर्ट होने का जिक्र नहीं किया है. सूत्र का जिक्र सिर्फ रिपोर्ट की अाखिरी लाइन में है जिसमें यह कहा गया है कि राहुल गांधी बहुत ही जल्द कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात करेंगे.
लेकिन जब आप रिपोर्ट पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है कि सब कुछ उनकी आंखों के सामने हुआ है.
हालांकि अंसारी ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने का मक़सद किसी पार्टी की हिमायत या विरोध करना नहीं था बल्कि हमारे लिए यह एक सामान्य खबर थी.
रिपोर्ट में चार लोगों का बयान छापा गया है इलियास मलिक, फराह नकवी, जेडके फैजान और इरफान हबीब. लेकिन इरफान हबीब और फराह नकवी ने पहले ही इस बात से इनकार कर चुके हैं.
इसके बाद अखबार ने सोमवार के अंक में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के चेयरमैन नदीम जावेद का इंटरव्यू छापा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा है कि अखबार ने कोई गलत बयान नहीं छापा है.
उर्दू अखबार में छपे इंटरव्यू में नदीम जावेद ने कहा कि राहुल गांधी ने मुसलमानों के ताल्लुक से न कोई गलत बात कही है और न ही इंकलाब ने कोई गलत बात लिखी है.
फिलहाल कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे के चेयरमैन का यह बयान कांग्रेस के उस आधिकारिक रुख से पूरी तरह उलट है जिसमें पार्टी ने राहुल गांधी के ऐसे किसी बयान से इनकार किया है.
नदीम जावेद में अपने इस साक्षात्कार के संबंध में कई ट्वीट किए है, जिसमें उन्होंने अपना पक्ष रखा है.
उन्होंने लिखा, 'कांग्रेस गांधी,नेहरू और मौलाना आज़ाद की पार्टी है, अगर इस मुल्क को सुपर पावर बनाना है और दुनिया के विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करना है, तो हमे समाज के वंचित तबकों, दलितों, पिछड़ो,मुसलमानों आदि के सवाल उठाने और हल करने पड़ेंगे. राहुल गांधी कांग्रेस के इसी मूल विचार को बढ़ाने की बात करते हैं.
एक उर्दू दैनिक को दिए गए बयान में मैंने इसी बात को रेखांकित किया है,
भाजपा हमेशा ही राजनीतिक विमर्श को हिन्दू-मुसलमान की ओर ले जाने का घृणित एवं असफल प्रयास करती है,
हम इस तरह के विचार की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते है। (3/3)
फिलहाल नदीम जावेद के इस बयान के बाद भाजपा के नेताओं को फिर से मुद्दा मिल गया.
भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार एक ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस की अल्पसंख्यक इकाई के अध्यक्ष नदीम जावेद ने राहुल गांधी के इस विवादास्पद बयान की पुष्टि की.
दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस का इन आरोपों से इनकार करना उसका पाखंड है. कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिस वजह से इस देश को काफी नुकसान हुआ है.
प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा है, इसलिए वह चुप्पी साधे हुए हैं. उनके अल्पसंख्यक इकाई के अध्यक्ष ने भी कहा है कि कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है. इस बात को भी वह नकार नहीं रहे हैं. कांग्रेस हमेशा से पाखंड करती रही है, यह एक सांप्रदायिक पार्टी है.
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बीते दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिलने के बाद उर्दू अख़बार इंक़लाब ने राहुल गांधी का हवाला देते हुए 'हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है' शीर्षक से ख़बर छापी. इसके बाद से प्रधानमंत्री समेत भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया. संसद के मानसून सत्र के शुरू होने के पहले देश की राजनीति में हिंदू-मुस्लिम का तड़का लग चुका है. दरअसल गत ग्यारह जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक में मुसलमानों से जुड़े मुद्दों और देश की वर्तमान राजनीतिक व सामाजिक स्थिति पर चर्चा की थी. इसके अगले दिन इस कार्यक्रम को लेकर उर्दू अखबार इंकलाब में 'हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है' शीर्षक से रिपोर्ट लिखी गई. अखबार की इस रिपोर्ट के सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम नेता इंकलाब की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप लगाने लगे. Urdu daily Inqalab has quoted Rahul Gandhi saying "Yes Congress is a Muslim party". Is the quote correct or party will contradict it? उन्होंने आगे लिखा कि मुसलमान एक मुस्लिम पार्टी नहीं चाहते हैं, वे एक राष्ट्रीय धर्मनिरपेक्ष पार्टी चाहते हैं, जो नागरिकों के बीच भेदभाव न करती हो. इसके बाद भाजपा नेताओं ने इस बयान को मुद्दा बना दिया. भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने बारह जुलाई को ट्वीट किया कि दैनिक इंक़लाब में 'जनेऊधारी' राहुल गांधी का बयानः कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है. बारह जुलाई को ही ज़ी हिंदुस्तान चैनल ने इस रिपोर्ट के हवाले से एक डिबेट कार्यक्रम भी चलाया. इसके बाद तेरह जुलाई को भाजपा की वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी एक मुस्लिम पार्टी है. इसके अगले दिन यानी चौदह जुलाई को आजमगढ़ में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक को लेकर कांग्रेस से पूछा कि वे मुस्लिम पुरूषों की ही पार्टी है या फिर मुस्लिम महिलाओं की भी पक्षधर है. उन्होंने कहा कि हमने अखबार में पढ़ा कि कांग्रेस नामदार ने कहा है कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है. उन्होंने कहा, 'यह बहस पिछले दो दिनों से चल रही है लेकिन उन्हें राहुल के बयान पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि यूपीए सरकार में कांग्रेस के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का ही है. हालांकि इसके बाद कांग्रेस ने भाजपा के दावे को खारिज करते हुए उर्दू अखबार की रिपोर्ट में बताए गये राहुल गांधी के बयान से इनकार किया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस भारत के सभी लोगों की पार्टी है और भाजपा सरकार झूठ फैला रही है. कौन-कौन लोग थे राहुल के साथ बैठक में? राहुल गांधी के साथ इस संवाद बैठक में इतिहासकार इरफान हबीब, सामाजिक कार्यकर्ता इलियास मलिक, कारोबारी जुनैद रहमान, ए एफ फारूकी, अमीर मोहम्मद खान, वकील जेड के फैजान, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट फराह नकवी, सामाजिक कार्यकर्ता रक्षंदा जलील सहित करीब पंद्रह लोग शामिल हुए. इनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद भी मौजूद थे. अखबार के बयान पर क्या कहना है बैठक में शामिल लोगों का? इस खबर के चर्चा में आने के बाद सबसे पहले इतिहासकार इरफान हबीब ने ट्वीट करके इसे झूठ बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई भी चर्चा बैठक के दौरान नहीं हुई. Taken a back to hear that Rahul Gandhi is being accused of calling the Congress a Muslim party in a meeting where I was present. It seems to have malicious intent, no such issue came up at all. वहीं, बैठक में उपस्थित रही जेएनयू की सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस में फैकल्टी गजाला जमील ने द वायर से कहा कि बैठक में राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि वह मुस्लिमों को समान नागरिक के तौर पर देखते हैं- न ज्यादा, न कम. कांग्रेस पार्टी को लेकर उन्होंने इस बात का संज्ञान लिया कि कई गलतियां हुईं हैं लेकिन उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस पारंपरिक रूप से भारत के समुदायों और वर्गों को जोड़ने का काम करती रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी भारतीय समाज के सभी वर्गों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका जारी रखेगी. बैठक में उपस्थित लोगों ने इस स्थिति की सराहना की और उन्हें सारी बातों के ऊपर न्याय और समानता के मूल्यों को दृढ़ता से बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया. वहीं, ऑल्ट न्यूज से मीटिंग में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वकील फुजैल अहमद अयूब ने इस संबंध में बात की. उनके मुताबिक, ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि मीटिंग में राहुल गांधी से पूछा गया कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम कितने महत्वपूर्ण हैं. इस पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने दूसरे समुदाय या धर्म. इसके अलावा लेखक और एक्टिविस्ट फराह नकवी भी बैठक में मौजूद थीं. उन्होंने भी राहुल गांधी के कथित बयान से इनकार किया है. द वायर में लिखे अपने लेख में उन्होंने इस बैठक के बाद भाजपा द्वारा बवाल करने पर कई सवाल उठाए है. फराह लिखती हैं, 'अगर राहुल गांधी या मीटिंग में मौजूद किसी भी व्यक्ति द्वारा कांग्रेस को 'मुस्लिम पार्टी' कहे जाने की फेक न्यूज़ को भूल भी जाएं तो यह सोचना दिलचस्प होगा कि क्या सीतारमण सच में यह मानती हैं कि किसी ऐसे देश में जहां छियासी फीसदी आबादी गैर-मुस्लिमों की है, वहां ऐसी किसी पार्टी का कोई लोकतांत्रिक भविष्य हो सकता है. बजाय इसके मैं यह जानना चाहती हूं कि क्यों कोई नेता- भले ही किसी भी पार्टी का हो- किसी सामान्य मुस्लिम नागरिक से नहीं मिल सकता, जिसके मन में कुछ वाजिब सवाल हों. या फिर भाजपा कहना चाहती है कि पार्टियों को मुस्लिमों के नाम पर केवल तीन तलाक़ पीड़ित मुस्लिम महिलाओं से मिलना चाहिए. भाजपा की बहस क्या है? क्या लोकतांत्रिक भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों पर बात नहीं कर सकते? क्या केवल मुस्लिम नाम के लोगों के मौजूद होने से ये सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मामला बन जाता है? क्या एक ही मुस्लिम होता तो ठीक था? ग्यारह लोग ज्यादा होते हैं? मैं समझ नहीं पा रही हूं कि चल क्या रहा है? क्या कहना है इंकलाब अख़बार का? कांग्रेस भले ही इंकलाब की रिपोर्ट को खारिज कर चुकी हो लेकिन अखबार अपनी रिपोर्ट पर कायम है. इंकलाब के संपादक शकील शम्सी ने द वायर से बातचीत में कि वह रिपोर्ट पर कायम हैं. उन्होंने कहा कि बवाल उनकी रिपोर्ट पर नहीं बल्कि पत्रकार शाहिद सिद्दीकी के ट्वीट पर हैं. उन्होंने हमारी रिपोर्ट का गलत अंग्रेजी अनुवाद किया. हमने अपने इंट्रो में साफ किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, हां कांग्रेस पार्टी मुसलमानों की पार्टी है क्योंकि मुल्क का मुसलमान कमजोर है और कांग्रेस हमेशा से कमजोरों के साथ रही है. हालांकि रिपोर्ट को पढ़ने पर कई खामियां नजर आती हैं. सबसे पहले पूरी रिपोर्ट में रिपोर्टर ने यह कहीं भी नहीं लिखा है कि वह बैठक में उपस्थित था या नहीं. अगर नहीं रहा है तो किसके हवाले से खबर लिखी गई है. रिपोर्टर ने किसी भी नेता या सूत्रों के हवाले से भी रिपोर्ट होने का जिक्र नहीं किया है. सूत्र का जिक्र सिर्फ रिपोर्ट की अाखिरी लाइन में है जिसमें यह कहा गया है कि राहुल गांधी बहुत ही जल्द कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात करेंगे. लेकिन जब आप रिपोर्ट पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है कि सब कुछ उनकी आंखों के सामने हुआ है. हालांकि अंसारी ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने का मक़सद किसी पार्टी की हिमायत या विरोध करना नहीं था बल्कि हमारे लिए यह एक सामान्य खबर थी. रिपोर्ट में चार लोगों का बयान छापा गया है इलियास मलिक, फराह नकवी, जेडके फैजान और इरफान हबीब. लेकिन इरफान हबीब और फराह नकवी ने पहले ही इस बात से इनकार कर चुके हैं. इसके बाद अखबार ने सोमवार के अंक में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के चेयरमैन नदीम जावेद का इंटरव्यू छापा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा है कि अखबार ने कोई गलत बयान नहीं छापा है. उर्दू अखबार में छपे इंटरव्यू में नदीम जावेद ने कहा कि राहुल गांधी ने मुसलमानों के ताल्लुक से न कोई गलत बात कही है और न ही इंकलाब ने कोई गलत बात लिखी है. फिलहाल कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे के चेयरमैन का यह बयान कांग्रेस के उस आधिकारिक रुख से पूरी तरह उलट है जिसमें पार्टी ने राहुल गांधी के ऐसे किसी बयान से इनकार किया है. नदीम जावेद में अपने इस साक्षात्कार के संबंध में कई ट्वीट किए है, जिसमें उन्होंने अपना पक्ष रखा है. उन्होंने लिखा, 'कांग्रेस गांधी,नेहरू और मौलाना आज़ाद की पार्टी है, अगर इस मुल्क को सुपर पावर बनाना है और दुनिया के विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करना है, तो हमे समाज के वंचित तबकों, दलितों, पिछड़ो,मुसलमानों आदि के सवाल उठाने और हल करने पड़ेंगे. राहुल गांधी कांग्रेस के इसी मूल विचार को बढ़ाने की बात करते हैं. एक उर्दू दैनिक को दिए गए बयान में मैंने इसी बात को रेखांकित किया है, भाजपा हमेशा ही राजनीतिक विमर्श को हिन्दू-मुसलमान की ओर ले जाने का घृणित एवं असफल प्रयास करती है, हम इस तरह के विचार की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते है। फिलहाल नदीम जावेद के इस बयान के बाद भाजपा के नेताओं को फिर से मुद्दा मिल गया. भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार एक ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस की अल्पसंख्यक इकाई के अध्यक्ष नदीम जावेद ने राहुल गांधी के इस विवादास्पद बयान की पुष्टि की. दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस का इन आरोपों से इनकार करना उसका पाखंड है. कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिस वजह से इस देश को काफी नुकसान हुआ है. प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा है, इसलिए वह चुप्पी साधे हुए हैं. उनके अल्पसंख्यक इकाई के अध्यक्ष ने भी कहा है कि कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है. इस बात को भी वह नकार नहीं रहे हैं. कांग्रेस हमेशा से पाखंड करती रही है, यह एक सांप्रदायिक पार्टी है.
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जब परिवार के दो बच्चे होते हैं, तो घर भर जाता हैहंसी और खुशी दोगुना। लेकिन चिंताएं क्रमशः दो गुना ज्यादा हो जाती हैं। हर कोई बड़े अपार्टमेंट आकारों का दावा नहीं कर सकता, जिसका मतलब है कि प्रत्येक बच्चे को सोने और खेल खेलने के लिए बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत स्थान देना हमेशा संभव नहीं होता है। ऐसे मामलों के लिए, बंक बेड ट्रांसफार्मर बनाए गए थे। वे कमरे के एक छोटे से कोने में पूरी तरह फिट बैठते हैं, लेकिन साथ ही वे एक ही समय में दो बिस्तरों को व्यवस्थित करने में सक्षम होंगे, न केवल इसके लिए उनकी आवश्यकता है।
ये मॉडल क्या अच्छे हैं? बंक बेड ट्रांसफार्मर - यह एक असली बच्चों का कोना है। दो बिस्तर, एक दूसरे के ऊपर स्थित है, बच्चे को ट्रेन की गाड़ी में, फिर जहाज के डेक पर महसूस करने का मौका देता है - कल्पना और खेल के आधार पर। इसके अलावा, रेल की उपस्थिति के लिए धन्यवाद, इस तरह के बिस्तर के शीर्ष स्तर से गिरने की संभावना कम हो गई है। एक साइड सीढ़ी बंक बेड-ट्रांसफार्मर बच्चों के खेल और मनोरंजन के लिए एक वास्तविक परीक्षण ग्राउंड बनाता है, और इसलिए, अपार्टमेंट में भी एक बच्चे के कोने के लिए जगह बचाता है।
परंपरागत तुलना में उनकी विशिष्टताहमारे बचपन से चारपाई बिस्तरों कि उनकी स्थापना ऊंचाई बच्चे के विकास द्वारा समायोजित किया जा सकता है, और बाद में, जब बच्चे बड़े हो, सभी के शीर्ष स्तरीय ध्वस्त करके हटाया जा सकता है। अक्सर चारपाई बिस्तरों-ट्रांसफार्मर, जिनमें से फ़ोटो फर्नीचर के कई कैटलॉग, एक शैली है कि आसानी से किसी भी सजावट बच्चों के कमरे में फिट और उनकी विशेषताओं के लिए सभी कक्ष सजावट को समायोजित करने के मालिकों के लिए मजबूर नहीं होंगे में किए गए में उपलब्ध हैं। वे लकड़ी के बने होते हैं और लाह रंग के साथ कवर किया, खरीदार की इच्छा पर निर्भर करता है, तो आप लगभग हर संस्करण दीवारों और आंतरिक भागों के लिए लकड़ी का सही छाया चुन सकते हैं।
इस तरह के फर्नीचर के अधिग्रहण में एक और प्लसबच्चों की लागत है। फर्नीचर स्टोरों में बंक बेड-ट्रांसफॉर्मर्स की तलाश करना उचित है। कीमतें आपको सुखद आश्चर्यचकित करेंगी - वे दो समान मानक बच्चे के कोटों की तुलना में बहुत कम होंगी। ऐसा मॉडल बच्चों के फर्नीचर के मुद्दे पर आर्थिक रूप से पहुंचने का एक अच्छा अवसर होगा, लेकिन क्या माता-पिता के लिए यह आवश्यक नहीं है? आखिरकार, बच्चे की लागत आमतौर पर बहुत महत्वपूर्ण होती है।
आम तौर पर, उपरोक्त सभी को समेटने के लिए,आइए सोचें, जिनके लिए बंक बेड ट्रांसफार्मर पहुंचेंगे। यह उन बच्चों के परिवारों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है जिनके पास बड़ी आयु अंतर नहीं है। इसके अलावा, वे उन लोगों के लिए एक अनिवार्य समाधान होंगे जिनके आवास की स्थिति बच्चों के कमरे के लिए बड़े कमरे को आवंटित करने या प्रत्येक बच्चे के लिए एक अलग जगह व्यवस्थित करने की अनुमति नहीं देती है। और, ज़ाहिर है, यह उन लोगों का विकल्प है जो पैसे बचाने के बारे में जानते हैं, लेकिन एक ही समय में उच्च गुणवत्ता वाली चीजें चुनें। तो यदि आपकी योजना नर्सरी के लिए फर्नीचर खरीदना है, और आपने अपने बच्चों के लिए बिस्तरों पर फैसला नहीं किया है, तो इन स्टाइलिश और आरामदायक बिस्तर मॉडल पर ध्यान दें।
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जब परिवार के दो बच्चे होते हैं, तो घर भर जाता हैहंसी और खुशी दोगुना। लेकिन चिंताएं क्रमशः दो गुना ज्यादा हो जाती हैं। हर कोई बड़े अपार्टमेंट आकारों का दावा नहीं कर सकता, जिसका मतलब है कि प्रत्येक बच्चे को सोने और खेल खेलने के लिए बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत स्थान देना हमेशा संभव नहीं होता है। ऐसे मामलों के लिए, बंक बेड ट्रांसफार्मर बनाए गए थे। वे कमरे के एक छोटे से कोने में पूरी तरह फिट बैठते हैं, लेकिन साथ ही वे एक ही समय में दो बिस्तरों को व्यवस्थित करने में सक्षम होंगे, न केवल इसके लिए उनकी आवश्यकता है। ये मॉडल क्या अच्छे हैं? बंक बेड ट्रांसफार्मर - यह एक असली बच्चों का कोना है। दो बिस्तर, एक दूसरे के ऊपर स्थित है, बच्चे को ट्रेन की गाड़ी में, फिर जहाज के डेक पर महसूस करने का मौका देता है - कल्पना और खेल के आधार पर। इसके अलावा, रेल की उपस्थिति के लिए धन्यवाद, इस तरह के बिस्तर के शीर्ष स्तर से गिरने की संभावना कम हो गई है। एक साइड सीढ़ी बंक बेड-ट्रांसफार्मर बच्चों के खेल और मनोरंजन के लिए एक वास्तविक परीक्षण ग्राउंड बनाता है, और इसलिए, अपार्टमेंट में भी एक बच्चे के कोने के लिए जगह बचाता है। परंपरागत तुलना में उनकी विशिष्टताहमारे बचपन से चारपाई बिस्तरों कि उनकी स्थापना ऊंचाई बच्चे के विकास द्वारा समायोजित किया जा सकता है, और बाद में, जब बच्चे बड़े हो, सभी के शीर्ष स्तरीय ध्वस्त करके हटाया जा सकता है। अक्सर चारपाई बिस्तरों-ट्रांसफार्मर, जिनमें से फ़ोटो फर्नीचर के कई कैटलॉग, एक शैली है कि आसानी से किसी भी सजावट बच्चों के कमरे में फिट और उनकी विशेषताओं के लिए सभी कक्ष सजावट को समायोजित करने के मालिकों के लिए मजबूर नहीं होंगे में किए गए में उपलब्ध हैं। वे लकड़ी के बने होते हैं और लाह रंग के साथ कवर किया, खरीदार की इच्छा पर निर्भर करता है, तो आप लगभग हर संस्करण दीवारों और आंतरिक भागों के लिए लकड़ी का सही छाया चुन सकते हैं। इस तरह के फर्नीचर के अधिग्रहण में एक और प्लसबच्चों की लागत है। फर्नीचर स्टोरों में बंक बेड-ट्रांसफॉर्मर्स की तलाश करना उचित है। कीमतें आपको सुखद आश्चर्यचकित करेंगी - वे दो समान मानक बच्चे के कोटों की तुलना में बहुत कम होंगी। ऐसा मॉडल बच्चों के फर्नीचर के मुद्दे पर आर्थिक रूप से पहुंचने का एक अच्छा अवसर होगा, लेकिन क्या माता-पिता के लिए यह आवश्यक नहीं है? आखिरकार, बच्चे की लागत आमतौर पर बहुत महत्वपूर्ण होती है। आम तौर पर, उपरोक्त सभी को समेटने के लिए,आइए सोचें, जिनके लिए बंक बेड ट्रांसफार्मर पहुंचेंगे। यह उन बच्चों के परिवारों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है जिनके पास बड़ी आयु अंतर नहीं है। इसके अलावा, वे उन लोगों के लिए एक अनिवार्य समाधान होंगे जिनके आवास की स्थिति बच्चों के कमरे के लिए बड़े कमरे को आवंटित करने या प्रत्येक बच्चे के लिए एक अलग जगह व्यवस्थित करने की अनुमति नहीं देती है। और, ज़ाहिर है, यह उन लोगों का विकल्प है जो पैसे बचाने के बारे में जानते हैं, लेकिन एक ही समय में उच्च गुणवत्ता वाली चीजें चुनें। तो यदि आपकी योजना नर्सरी के लिए फर्नीचर खरीदना है, और आपने अपने बच्चों के लिए बिस्तरों पर फैसला नहीं किया है, तो इन स्टाइलिश और आरामदायक बिस्तर मॉडल पर ध्यान दें।
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Delhi Excise Policy: 28 फरवरी को पूरी हो रही पुरानी आबकारी नीति की मियाद, अब आगे क्या?
Delhi Excise Policy: 28 फरवरी को पूरी हो रही पुरानी आबकारी नीति की मियाद, अब आगे क्या?
नई दिल्लीः दिल्ली में एक बार फिर आबकारी नीति (शराब बिक्री की नीति) को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. दिल्ली में अभी जिस नीति के तहत शराब की दुकानों और होटलों में शराब की बिक्री हो रही है, उसकी समय सीमा 28 फरवरी को पूरी होने वाली है. शराब विक्रेता आगे शराब की बिक्री तभी कर पाएंगे जब वर्तमान लाइसेंस रिन्यू होगा. हालांकि इस संबंध में अभी विभाग द्वारा अधिकारिक तौर पर कोई भी जानकारी साझा नहीं की गई है.
दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति अगस्त 2022 में रद्द हो चुके हैं. नई आबकारी नीति में घोटाले की जांच जारी है. एक सितंबर 2022 से दिल्ली में पुरानी आबकारी नीति के तहत शराब की बिक्री हो रही है, जिसे छह महीने के लिए लागू किया था. इस दौरान उपराज्यपाल के निर्देश पर दिल्ली की नई आबकारी नीति नए सिरे से तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई, लेकिन तीन सदस्य कमेटी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है, जिससे दिल्ली में जिस नीति के तहत अभी शराब की बिक्री हो रही है वह 28 फरवरी को उसकी मियाद पूरी हो जाएगी. ऐसे में शराब विक्रेताओं में लाइसेंस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
दिल्ली सरकार द्वारा 17 नवंबर 2021 में लागू नई आबकारी नीति से पहले जिस पॉलिसी के तहत शराब की बिक्री हो रही थी और यह अभी भी जारी है. आबकारी विभाग के अधिकारी इसे ही कुछ समय के लिए और बढ़ाने को एकमात्र उपाय बता रहे हैं. उधर, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नई शराब आबकारी नीति बनाने के लिए वित्त विभाग के प्रधान सचिव आशीष चंद वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी. कमेटी ने रिपोर्ट देने के लिए कुछ समय और देने की मांग की है. ऐसे में दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जिस पुरानी नीति के तहत अभी दिल्ली की दुकानों में व होटलों, क्लब व बार में शराब की बिक्री हो रही है उन सबके लाइसेंस को रिन्यू करना पड़ेगा. तभी ये एक मार्च से शराब बेच पाएंगे. इस संबंध में जल्द ही विभाग नोटिस जारी कर उनसे आवेदन की मांग करेगा. दिल्ली में फिलहाल 570 दुकानों पर शराब की बिक्री होती है इसके अलावा कुल 960 होटल व बार हैं, जिनमें शराब परोसी जाती है.
- आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली में शराब से मिलने वाले राजस्व बढ़ाने के मकसद से नई शराब नीति नई आबकारी नीति को 17 नवंबर 2021 में लागू किया था.
- इसके तहत दिल्ली में शराब की बिक्री करने वाले सभी सरकारी दुकानों को खत्म कर उसकी जगह प्राइवेट वेंडर्स को शराब बेचने की इजाजत दी गई थी.
- शराब की दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी की गई, मॉल व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शराब की दुकानें खोली गई, जिससे राजस्व में इजाफा तो हुआ लेकिन दिल्ली की जनता ने इसके खिलाफ भी आवाज उठाए.
- क्योंकि शराब की दुकान है रिहायशी इलाकों, मुख्य बाजार में खोली गईं जहां बहुतायत में आप लोग अन्य चीजों की खरीदारी के लिए जाते थे. दिल्ली की महिलाओं ने इसका पुरजोर विरोध किया.
- इसी दौरान नई शराब नीति को लागू करने में दिल्ली सरकार पर शराब कंपनियों से रिश्वत लेने के भी आरोप लगे. इसकी शिकायत जब उपराज्यपाल से हुई तब सीबीआई की जांच के आदेश दे दिए गए.
- इसके साथ ही अगस्त 2022 में नई शराब नीति को रद्द कर दिया गया और दिल्ली में पहले की तरह पुरानी आबकारी नीति के तहत एक सितंबर 2022 से शराब की बिक्री शुरू हुई.
- उपराज्यपाल ने इस नीति के तहत 6 महीने तक शराब की बिक्री को मंजूरी दी और इस दौरान नई पॉलिसी बनाने के लिए दिल्ली सरकार के वित्त विभाग के प्रधान सचिव आशीष चंद्र वर्मा के नेतृत्व में 3 सदस्य कमेटी बना दी.
- जिसे 6 महीने के अंदर नई आबकारी नीति बनाने के आदेश दिए गए थे, कमेटी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है. इसलिए पुरानी नीति के तहत ही दिल्ली में शराब की बिक्री का एकमात्र विकल्प बचा है.
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Delhi Excise Policy: अट्ठाईस फरवरी को पूरी हो रही पुरानी आबकारी नीति की मियाद, अब आगे क्या? Delhi Excise Policy: अट्ठाईस फरवरी को पूरी हो रही पुरानी आबकारी नीति की मियाद, अब आगे क्या? नई दिल्लीः दिल्ली में एक बार फिर आबकारी नीति को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. दिल्ली में अभी जिस नीति के तहत शराब की दुकानों और होटलों में शराब की बिक्री हो रही है, उसकी समय सीमा अट्ठाईस फरवरी को पूरी होने वाली है. शराब विक्रेता आगे शराब की बिक्री तभी कर पाएंगे जब वर्तमान लाइसेंस रिन्यू होगा. हालांकि इस संबंध में अभी विभाग द्वारा अधिकारिक तौर पर कोई भी जानकारी साझा नहीं की गई है. दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति अगस्त दो हज़ार बाईस में रद्द हो चुके हैं. नई आबकारी नीति में घोटाले की जांच जारी है. एक सितंबर दो हज़ार बाईस से दिल्ली में पुरानी आबकारी नीति के तहत शराब की बिक्री हो रही है, जिसे छह महीने के लिए लागू किया था. इस दौरान उपराज्यपाल के निर्देश पर दिल्ली की नई आबकारी नीति नए सिरे से तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई, लेकिन तीन सदस्य कमेटी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है, जिससे दिल्ली में जिस नीति के तहत अभी शराब की बिक्री हो रही है वह अट्ठाईस फरवरी को उसकी मियाद पूरी हो जाएगी. ऐसे में शराब विक्रेताओं में लाइसेंस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. दिल्ली सरकार द्वारा सत्रह नवंबर दो हज़ार इक्कीस में लागू नई आबकारी नीति से पहले जिस पॉलिसी के तहत शराब की बिक्री हो रही थी और यह अभी भी जारी है. आबकारी विभाग के अधिकारी इसे ही कुछ समय के लिए और बढ़ाने को एकमात्र उपाय बता रहे हैं. उधर, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नई शराब आबकारी नीति बनाने के लिए वित्त विभाग के प्रधान सचिव आशीष चंद वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी. कमेटी ने रिपोर्ट देने के लिए कुछ समय और देने की मांग की है. ऐसे में दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जिस पुरानी नीति के तहत अभी दिल्ली की दुकानों में व होटलों, क्लब व बार में शराब की बिक्री हो रही है उन सबके लाइसेंस को रिन्यू करना पड़ेगा. तभी ये एक मार्च से शराब बेच पाएंगे. इस संबंध में जल्द ही विभाग नोटिस जारी कर उनसे आवेदन की मांग करेगा. दिल्ली में फिलहाल पाँच सौ सत्तर दुकानों पर शराब की बिक्री होती है इसके अलावा कुल नौ सौ साठ होटल व बार हैं, जिनमें शराब परोसी जाती है. - आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली में शराब से मिलने वाले राजस्व बढ़ाने के मकसद से नई शराब नीति नई आबकारी नीति को सत्रह नवंबर दो हज़ार इक्कीस में लागू किया था. - इसके तहत दिल्ली में शराब की बिक्री करने वाले सभी सरकारी दुकानों को खत्म कर उसकी जगह प्राइवेट वेंडर्स को शराब बेचने की इजाजत दी गई थी. - शराब की दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी की गई, मॉल व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शराब की दुकानें खोली गई, जिससे राजस्व में इजाफा तो हुआ लेकिन दिल्ली की जनता ने इसके खिलाफ भी आवाज उठाए. - क्योंकि शराब की दुकान है रिहायशी इलाकों, मुख्य बाजार में खोली गईं जहां बहुतायत में आप लोग अन्य चीजों की खरीदारी के लिए जाते थे. दिल्ली की महिलाओं ने इसका पुरजोर विरोध किया. - इसी दौरान नई शराब नीति को लागू करने में दिल्ली सरकार पर शराब कंपनियों से रिश्वत लेने के भी आरोप लगे. इसकी शिकायत जब उपराज्यपाल से हुई तब सीबीआई की जांच के आदेश दे दिए गए. - इसके साथ ही अगस्त दो हज़ार बाईस में नई शराब नीति को रद्द कर दिया गया और दिल्ली में पहले की तरह पुरानी आबकारी नीति के तहत एक सितंबर दो हज़ार बाईस से शराब की बिक्री शुरू हुई. - उपराज्यपाल ने इस नीति के तहत छः महीने तक शराब की बिक्री को मंजूरी दी और इस दौरान नई पॉलिसी बनाने के लिए दिल्ली सरकार के वित्त विभाग के प्रधान सचिव आशीष चंद्र वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्य कमेटी बना दी. - जिसे छः महीने के अंदर नई आबकारी नीति बनाने के आदेश दिए गए थे, कमेटी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है. इसलिए पुरानी नीति के तहत ही दिल्ली में शराब की बिक्री का एकमात्र विकल्प बचा है.
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Ghumarwin News हाईवे की सड़कों पर फर्राटा भर रहे दोपहिया वाहन नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं तो कहीं बाइक सवार हेलमेट पहनने के बजाय वाहन में हेलमेट लटकाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस वजह से दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
घुमारवीं, जागरण संवाददाता। घुमारवीं में शहर के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-103 पर बाइक चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यहां एक बाइक में चार लोग सफर कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन के लाख दावों के बाद भी बगैर हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने वालों पर लगाम नहीं लग पा रही है।
हाईवे की सड़कों पर फर्राटा भर रहे दोपहिया वाहन नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं तो कहीं बाइक सवार हेलमेट पहनने के बजाय वाहन में हेलमेट लटकाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक बाइक में दो-तीन लोग ही नहीं अब चार और पांच लोग बाइक पर सफर कर रहे हैं। इस वजह से दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
हेलमेट न पहने से कई युवक हो रहे दुर्घटना का शिकार बीते वर्ष में हेलमेट न पहनने की वजह से कई युवक दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन लगातार ओवरस्पीड, ओवरलोडिंग और बगैर हेलमेट बाइक चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा करती है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। क्षेत्र में बाइक सवार युवा ज्यादातर स्कूल, कालेज तथा आइटीआइ के छात्र हैं। जो एक साथ एक बाइक पर चार-चार युवक सवार होकर हाईवे पर फर्राटे भर रहे हैं।
घुमारवीं के डीएस पीचंद्रकांत सिंह ने कहा यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकांश दुर्घटनाएं लापरवाही से वाहन चलाने पर, नशे में वाहन चलाने पर हो रही हैं, जबकि हेलमेट न पहनने से जान जा रही है। लोगों को अपनी और दूसरों की जान की परवाह करनी चाहिए।
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Ghumarwin News हाईवे की सड़कों पर फर्राटा भर रहे दोपहिया वाहन नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं तो कहीं बाइक सवार हेलमेट पहनने के बजाय वाहन में हेलमेट लटकाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस वजह से दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना हुआ है। घुमारवीं, जागरण संवाददाता। घुमारवीं में शहर के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-एक सौ तीन पर बाइक चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यहां एक बाइक में चार लोग सफर कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन के लाख दावों के बाद भी बगैर हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने वालों पर लगाम नहीं लग पा रही है। हाईवे की सड़कों पर फर्राटा भर रहे दोपहिया वाहन नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं तो कहीं बाइक सवार हेलमेट पहनने के बजाय वाहन में हेलमेट लटकाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। एक बाइक में दो-तीन लोग ही नहीं अब चार और पांच लोग बाइक पर सफर कर रहे हैं। इस वजह से दुर्घटना होने का खतरा लगातार बना हुआ है। हेलमेट न पहने से कई युवक हो रहे दुर्घटना का शिकार बीते वर्ष में हेलमेट न पहनने की वजह से कई युवक दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन लगातार ओवरस्पीड, ओवरलोडिंग और बगैर हेलमेट बाइक चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा करती है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। क्षेत्र में बाइक सवार युवा ज्यादातर स्कूल, कालेज तथा आइटीआइ के छात्र हैं। जो एक साथ एक बाइक पर चार-चार युवक सवार होकर हाईवे पर फर्राटे भर रहे हैं। घुमारवीं के डीएस पीचंद्रकांत सिंह ने कहा यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकांश दुर्घटनाएं लापरवाही से वाहन चलाने पर, नशे में वाहन चलाने पर हो रही हैं, जबकि हेलमेट न पहनने से जान जा रही है। लोगों को अपनी और दूसरों की जान की परवाह करनी चाहिए।
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नई दिल्लीःपिछले सालों में ऐसे कई मौके आए हैं जब ऐसे लोग राजनीतिक विवाद में कूद पड़े हैं जिनके किसी भी खेल में नजर न आने की उम्मीद होती है. कई विवादों के चलते कई लोगों ने अवॉर्ड लौटा दिए। संसद की स्थायी समिति ने इसे देश का अपमान बताया और कहा कि इससे पुरस्कारों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच रहा है. इसलिए समिति ने सरकार को एक ऐसी प्रणाली बनाने की सिफारिश की है जिसमें पुरस्कार देने से पहले प्राप्तकर्ता की सहमति ली जाए कि वह भविष्य में पुरस्कार वापस नहीं करेगा। इसलिए उनसे शपथ पत्र लिया जाए। इस सहमति के बिना किसी को पुरस्कार नहीं दिया जाना चाहिए. समिति ने 2015 में कर्नाटक के मशहूर लेखक कलबुर्गी की हत्या के बाद देश में चलाए गए पुरस्कार वापसी अभियान समेत कई मामलों का भी जिक्र किया है और कहा है कि इनमें शामिल कई लोगों को उसके बाद भी पुरस्कारों और अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए दोबारा नामांकित किया गया था. अवॉर्ड वापसी का ऐलान करने वालों में कई लोग ऐसे भी थे.
समिति का कहना है कि भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत अन्य पुरस्कार देने वाली अकादमियां गैर-राजनीतिक संगठन हैं। राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है. समिति ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि जब भी कोई पुरस्कार दिया जाए तो प्राप्तकर्ता से यह सहमति पत्र अवश्य लिया जाना चाहिए कि वह इसे कभी वापस नहीं करेगा ताकि वह राजनीतिक कारणों से इसे वापस न करे। इसके साथ ही ऐसा करने वालों की सूची भी तैयार की जानी चाहिए और यह कोशिश की जानी चाहिए कि भविष्य में उन्हें कोई अन्य पुरस्कार न दिया जाए। न तो उन्हें किसी जूरी में रखा जाए और न ही किसी महत्वपूर्ण पद के लिए नामांकित किया जाए. संस्कृति मंत्रालय से जुड़ी संसद की इस स्थायी समिति के अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य और वाईएसआर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, जबकि इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य हैं।
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नई दिल्लीःपिछले सालों में ऐसे कई मौके आए हैं जब ऐसे लोग राजनीतिक विवाद में कूद पड़े हैं जिनके किसी भी खेल में नजर न आने की उम्मीद होती है. कई विवादों के चलते कई लोगों ने अवॉर्ड लौटा दिए। संसद की स्थायी समिति ने इसे देश का अपमान बताया और कहा कि इससे पुरस्कारों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच रहा है. इसलिए समिति ने सरकार को एक ऐसी प्रणाली बनाने की सिफारिश की है जिसमें पुरस्कार देने से पहले प्राप्तकर्ता की सहमति ली जाए कि वह भविष्य में पुरस्कार वापस नहीं करेगा। इसलिए उनसे शपथ पत्र लिया जाए। इस सहमति के बिना किसी को पुरस्कार नहीं दिया जाना चाहिए. समिति ने दो हज़ार पंद्रह में कर्नाटक के मशहूर लेखक कलबुर्गी की हत्या के बाद देश में चलाए गए पुरस्कार वापसी अभियान समेत कई मामलों का भी जिक्र किया है और कहा है कि इनमें शामिल कई लोगों को उसके बाद भी पुरस्कारों और अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए दोबारा नामांकित किया गया था. अवॉर्ड वापसी का ऐलान करने वालों में कई लोग ऐसे भी थे. समिति का कहना है कि भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत अन्य पुरस्कार देने वाली अकादमियां गैर-राजनीतिक संगठन हैं। राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है. समिति ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि जब भी कोई पुरस्कार दिया जाए तो प्राप्तकर्ता से यह सहमति पत्र अवश्य लिया जाना चाहिए कि वह इसे कभी वापस नहीं करेगा ताकि वह राजनीतिक कारणों से इसे वापस न करे। इसके साथ ही ऐसा करने वालों की सूची भी तैयार की जानी चाहिए और यह कोशिश की जानी चाहिए कि भविष्य में उन्हें कोई अन्य पुरस्कार न दिया जाए। न तो उन्हें किसी जूरी में रखा जाए और न ही किसी महत्वपूर्ण पद के लिए नामांकित किया जाए. संस्कृति मंत्रालय से जुड़ी संसद की इस स्थायी समिति के अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य और वाईएसआर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, जबकि इस समिति में लोकसभा के इक्कीस और राज्यसभा के दस सदस्य हैं।
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सिंदरी निवासी 22 वर्षीय साहिल सिद्दिकी की बीते दिनों हुई मौत के बाद शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी चोरी के आरोप की जांच के लिए गठित जिला स्तरीय टीम बुधवार को अस्पताल पहुंची। टीम में डीआरडीए के निदेशक मुमताज अली और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बंधु कच्छप थे।
जागरण संवाददाता, धनबादः सिंदरी निवासी 22 वर्षीय साहिल सिद्दिकी की बीते दिनों हुई मौत के बाद शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी चोरी के आरोप की जांच के लिए गठित जिला स्तरीय टीम बुधवार को अस्पताल पहुंची। टीम में डीआरडीए के निदेशक मुमताज अली और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बंधु कच्छप शामिल थे। इस दौरान टीम के सदस्यों ने साहिल सिद्दिकी के घरवालों से पूछताछ की। घरवालों ने बताया कि किडनी चोरी का आरोप वह लोग वापस ले रहे हैं। दूसरी ओर, शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने दोनों किडनी सही-सलामत पाई। इसके बाद टीम ने यह माना कि किडनी निकालने की बात बेबुनियाद है।
दूसरी ओर, टीम के सदस्यों ने एमरजेंसी में चूहों के प्रवेश करने के स्थानों की जांच की और सुराखों को तत्काल बंद कराया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मॉर्चरी की मरम्मत कराई गई। लगभग 15 दिनों से मॉर्चरी खराब थी, इसकी कुंडी टूटी हुई थी। इसी से चूहे प्रवेश कर रहे थे। इसके बाद टीम के सदस्यों ने इसका अवलोकन किया। यहां काम कर रहे कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिया। टीम के सदस्य गुरुवार को उपायुक्त संदीप सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।
टीम के सदस्यों ने इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार बरनवाल से जानकारी ली। अधीक्षक ने बताया कि एमरजेंसी में लगी मॉर्चरी के रखरखाव का करार एजेंसी से जून 2022 में ही खत्म हो गया था। बताया कि प्रबंधन ने जुलाई 2022 में इस संबंध में सरकार को पत्राचार करके मरम्मत कराने को कहा था। कहा कि किसी भी मशीन की मरम्मत बिना विभाग के निर्देश पर नहीं कराई जा सकती है, इसलिए उन्होंने मुख्यालय को पत्राचार किया था। फिलहाल अधीक्षक ने अपने पैसे से इमरजेंसी के मॉर्चरी की मरम्मत कराई।
जांच टीम ने यह पाया कि एमरजेंसी में मरीजों का निधन होने के बाद पुलिस तत्काल इसे कागजात बनाकर पोस्टमार्टम हाउस नहीं ले जा पाती है। इसके लिए पुलिस प्रशासन को भी सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।
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सिंदरी निवासी बाईस वर्षीय साहिल सिद्दिकी की बीते दिनों हुई मौत के बाद शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी चोरी के आरोप की जांच के लिए गठित जिला स्तरीय टीम बुधवार को अस्पताल पहुंची। टीम में डीआरडीए के निदेशक मुमताज अली और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बंधु कच्छप थे। जागरण संवाददाता, धनबादः सिंदरी निवासी बाईस वर्षीय साहिल सिद्दिकी की बीते दिनों हुई मौत के बाद शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी चोरी के आरोप की जांच के लिए गठित जिला स्तरीय टीम बुधवार को अस्पताल पहुंची। टीम में डीआरडीए के निदेशक मुमताज अली और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट बंधु कच्छप शामिल थे। इस दौरान टीम के सदस्यों ने साहिल सिद्दिकी के घरवालों से पूछताछ की। घरवालों ने बताया कि किडनी चोरी का आरोप वह लोग वापस ले रहे हैं। दूसरी ओर, शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने दोनों किडनी सही-सलामत पाई। इसके बाद टीम ने यह माना कि किडनी निकालने की बात बेबुनियाद है। दूसरी ओर, टीम के सदस्यों ने एमरजेंसी में चूहों के प्रवेश करने के स्थानों की जांच की और सुराखों को तत्काल बंद कराया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मॉर्चरी की मरम्मत कराई गई। लगभग पंद्रह दिनों से मॉर्चरी खराब थी, इसकी कुंडी टूटी हुई थी। इसी से चूहे प्रवेश कर रहे थे। इसके बाद टीम के सदस्यों ने इसका अवलोकन किया। यहां काम कर रहे कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिया। टीम के सदस्य गुरुवार को उपायुक्त संदीप सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। टीम के सदस्यों ने इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार बरनवाल से जानकारी ली। अधीक्षक ने बताया कि एमरजेंसी में लगी मॉर्चरी के रखरखाव का करार एजेंसी से जून दो हज़ार बाईस में ही खत्म हो गया था। बताया कि प्रबंधन ने जुलाई दो हज़ार बाईस में इस संबंध में सरकार को पत्राचार करके मरम्मत कराने को कहा था। कहा कि किसी भी मशीन की मरम्मत बिना विभाग के निर्देश पर नहीं कराई जा सकती है, इसलिए उन्होंने मुख्यालय को पत्राचार किया था। फिलहाल अधीक्षक ने अपने पैसे से इमरजेंसी के मॉर्चरी की मरम्मत कराई। जांच टीम ने यह पाया कि एमरजेंसी में मरीजों का निधन होने के बाद पुलिस तत्काल इसे कागजात बनाकर पोस्टमार्टम हाउस नहीं ले जा पाती है। इसके लिए पुलिस प्रशासन को भी सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पॉक्सो मामले में अपील दायर नहीं करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की खिंचाई की, जिसमें उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया था.
न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि इस मामले में निराशाजनक बात यह रही कि एक पिता को ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा. राज्य सरकार ने इसके लिए पहल नहीं की.
अदालत एक लड़की के पिता की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अप्रैल 2020 में बच्चे को जन्म देने के बाद आत्महत्या कर ली थी. उसके एक साल बाद बच्चे के पिता अमित तिवारी पर एक विशेष अदालत ने बलात्कार और POCSO का आरोप लगाया गया था. लेकिन दिसंबर 2021 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया.
हाईकोर्ट ने मामला दर्ज करने में 'देरी' का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत और एफआईआर लड़की के आत्महत्या करने के बाद दर्ज की गई थी, न कि तब जब वह जिंदा थी या जब वह प्रेग्नेंट हुई थी. हाईकोर्ट ने लड़की की उम्र को लेकर चल रहे भ्रम पर भी संज्ञान लिया था.
हालांकि, उसके माता-पिता ने दावा किया कि जब वह 17 साल और कुछ महीने की थी, तब उसने आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. लेकिन तिवारी इस तथ्य का विरोध करते हुए कहा कि वे दोनों एक सहमति के साथ संबंधों में थे और घटना के समय बालिग थे.
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उच्च न्यायालय के आदेश को 'कानून से इतर' बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'राज्य से उच्च न्यायालय के गैर-कानूनी फैसले को चुनौती देने की अपेक्षा की जाती है.
फैसला 12 अगस्त को सुनाया गया था.
फैसले के मुताबिक, पीड़िता को अप्रैल 2020 में पेट में 'तेज दर्द' हुआ और उसके पिता उसे अस्पताल लेकर गए. वहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया. उसी दिन उसने अपने पिता से कहा कि उसने तिवारी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे.
एक दिन बाद उसने अस्पताल में दुपट्टे से फांसी लगा ली. तब POCSO अधिनियम के प्रावधानों के साथ IPC की धारा 376 (बलात्कार) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.
अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'दुराग्रह और कानून से परे' बताते हुए रद्द कर दिया. लेकिन अदालत ने पीड़िता की उम्र के बारे में आगे कुछ भी कहने से परहेज किया और कहा कि यह निचली अदालत को फैसला करना है. निचली अदालत अब आरोपी के खिलाफ तय आरोपों के आधार पर उसके खिलाफ सुनवाई करेगी.
अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप को रद्द करने का आदेश 'केवल असाधारण मामलों और दुर्लभ अवसरों पर' पारित किया जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं था.
इसने कहा, 'हम फिर से दोहराते हैं कि उच्च न्यायालय का आवंछित आदेश पूरी तरह से समझ से बाहर है. हमें अभी तक एक ऐसा मामला नहीं मिला है, जहां उच्च न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने में देरी के आधार पर बलात्कार के एक आरोपी को बरी करना उचित समझा हो.
शीर्ष अदालत की पीठ को यह भी निराशाजनक लगा कि निचली अदालत ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत आरोप तय करना उचित नहीं समझा. लेकिन, चूंकि किसी ने भी आदेश के उस हिस्से पर सवाल नहीं उठाया था, इसलिए अदालत ने इस पर और कुछ नहीं कहा.
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पॉक्सो मामले में अपील दायर नहीं करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की खिंचाई की, जिसमें उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया था. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि इस मामले में निराशाजनक बात यह रही कि एक पिता को ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा. राज्य सरकार ने इसके लिए पहल नहीं की. अदालत एक लड़की के पिता की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अप्रैल दो हज़ार बीस में बच्चे को जन्म देने के बाद आत्महत्या कर ली थी. उसके एक साल बाद बच्चे के पिता अमित तिवारी पर एक विशेष अदालत ने बलात्कार और POCSO का आरोप लगाया गया था. लेकिन दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने मामला दर्ज करने में 'देरी' का हवाला देते हुए कहा कि शिकायत और एफआईआर लड़की के आत्महत्या करने के बाद दर्ज की गई थी, न कि तब जब वह जिंदा थी या जब वह प्रेग्नेंट हुई थी. हाईकोर्ट ने लड़की की उम्र को लेकर चल रहे भ्रम पर भी संज्ञान लिया था. हालांकि, उसके माता-पिता ने दावा किया कि जब वह सत्रह साल और कुछ महीने की थी, तब उसने आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. लेकिन तिवारी इस तथ्य का विरोध करते हुए कहा कि वे दोनों एक सहमति के साथ संबंधों में थे और घटना के समय बालिग थे. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. उच्च न्यायालय के आदेश को 'कानून से इतर' बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'राज्य से उच्च न्यायालय के गैर-कानूनी फैसले को चुनौती देने की अपेक्षा की जाती है. फैसला बारह अगस्त को सुनाया गया था. फैसले के मुताबिक, पीड़िता को अप्रैल दो हज़ार बीस में पेट में 'तेज दर्द' हुआ और उसके पिता उसे अस्पताल लेकर गए. वहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया. उसी दिन उसने अपने पिता से कहा कि उसने तिवारी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. एक दिन बाद उसने अस्पताल में दुपट्टे से फांसी लगा ली. तब POCSO अधिनियम के प्रावधानों के साथ IPC की धारा तीन सौ छिहत्तर और तीन सौ छः के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'दुराग्रह और कानून से परे' बताते हुए रद्द कर दिया. लेकिन अदालत ने पीड़िता की उम्र के बारे में आगे कुछ भी कहने से परहेज किया और कहा कि यह निचली अदालत को फैसला करना है. निचली अदालत अब आरोपी के खिलाफ तय आरोपों के आधार पर उसके खिलाफ सुनवाई करेगी. अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप को रद्द करने का आदेश 'केवल असाधारण मामलों और दुर्लभ अवसरों पर' पारित किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं था. इसने कहा, 'हम फिर से दोहराते हैं कि उच्च न्यायालय का आवंछित आदेश पूरी तरह से समझ से बाहर है. हमें अभी तक एक ऐसा मामला नहीं मिला है, जहां उच्च न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने में देरी के आधार पर बलात्कार के एक आरोपी को बरी करना उचित समझा हो. शीर्ष अदालत की पीठ को यह भी निराशाजनक लगा कि निचली अदालत ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा तीन सौ छः के तहत आरोप तय करना उचित नहीं समझा. लेकिन, चूंकि किसी ने भी आदेश के उस हिस्से पर सवाल नहीं उठाया था, इसलिए अदालत ने इस पर और कुछ नहीं कहा.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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डीपीएस आजाद नगर में पढ़ने वाले राहुल श्रीवास्तव के पिता दीपक महोबा में एलआईसी ऑफिस में ब्रांच मैनेजर हैं। घर में मां श्रृद्धा राहुल का पूरा ख्याल रखती हैं। राहुल की प्रॉब्लम है कि वह जो पढ़ता है उसे याद नहीं रहता। स्कूल जाता था तो बैग नहीं लगा पाता था। जिस सब्जेक्ट का पीरियड होता था उसकी बुक घर पर भूल आता था। ज्यादा देर एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता था। इस वजह से कई बार उसे स्कूल में टीचर्स की डांट भी खानी पड़ी। स्कूल वालों के ही कहने पर उन्होंने बच्चे को उर्सला में दिखाया तो एक्सपर्ट्स ने उसका आईक्यू लेवल नार्मल बच्चों से कम बताया। कुछ ऐसी ही प्रॉब्लम विकास नगर में रहने वाले अंचित शुक्ला को भी थी। उसकी बहन तो स्कूल टॉपर थी, लेकिन वह पढ़ने में उतना अच्छा नहीं था। मां ज्योति शुक्ला ही उसे पढ़ाती हैं। उसका आईक्यू लेवल भी राहुल जैसा ही है, गुरुवार को जब 10वीं का रिजल्ट आया तो राहुल का सीजीपीए 6. 6 था वहीं अंचित का 6. 8 था। पढ़ने लिखने में नार्मल बच्चों से थोड़े कमजोर इन दोनों ने कई पढ़ाकू बच्चों को भी पछाड़ दिया।
तारे जमीं पर फिल्म में मुख्य किरदार ईशान अवस्थी को डिस्लेक्सिया का शिकार बताया गया था। क्योंकि वह ठीक से कुछ लिख नहीं पाता था। उसे सब्जेक्ट से रिलेटेड चीजें आसानी से याद नहीं होती थीं। लिखने में मात्राओं की गलतियां होती थीं। वाक्य नहीं बना पाता था और उसकी राइटिंग बेहद खराब थी, लेकिन राहुल और अंचित का केस फिल्मी ईशान से थोड़ा अलग है। इन्हें प्रॉब्लम है कि सब्जेक्ट से रिलेटेड चीजें पढ़ने के थोड़ी देर बाद ही याद नहीं रहती। दो घंटे के दौरान पिछला पढ़ा हुआ सब भूल जाते हैं। दोनों ही पढ़ने में बेहद औसत हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ। आराधना गुप्ता इसे डिस्लेक्सिया नहीं मानती। उनका कहना है कि यह तो एक बीमारी है, लेकिन ऐसे ही लक्षण लर्निग डिफिकल्टी से परेशान बच्चों के भी होते हैं।
अंचित के पिता देवेंद्र शुक्ला सर्जन थे, लेकिन उनकी डेथ हो गई। मां ज्योति की मेहनत है कि पढ़ाई में बेहद औसत अंचित की प्रॉब्लम को समझा और खुद उसे दूर किया। नाना एसके अवस्थी बताते हैं कि अंचित को फुटबॉल खेलना पसंद है और वह टीवी भी खूब देखता है। बहुत मिलनसार है। अंचित अब अपने पापा की तरह ही सर्जन बनना चाहता है। स्कूल में उसे कॉमर्स लेने के लिए कहा गया है, लेकिन वह साइंस ही पढ़ना चाहता है। कुछ ऐसी ही सोच राहुल की भी है। वह बड़ा होकर आईपीएस अफसर बनना चाहता है। क्रिकेट खेलना, कार्टून देखना उसे बहुत पसंद है।
- हर बच्चे की एज के हिसाब से वोकेब्लरी डेवलप होती है। अगर एक निश्चित उम्र में बच्चे की वोकेब्लरी कमजोर है तो उस पर ध्यान देने की जरूरत है।
- जो याद करके जाता है, उसे कुछ ही देर में भूल जाता है।
'जिन बच्चों का आईक्यू लेवल 80 या 90 से थोड़ा सा कम होता है, उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट देने और ज्यादा ध्यान देने से उनकी प्रॉब्लम को दूर किया जा सकता है। लर्निग डिफिकल्टी से परेशान बच्चों की साइकोलॉजिकल टेस्टिंग भी करानी चाहिए. '
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डीपीएस आजाद नगर में पढ़ने वाले राहुल श्रीवास्तव के पिता दीपक महोबा में एलआईसी ऑफिस में ब्रांच मैनेजर हैं। घर में मां श्रृद्धा राहुल का पूरा ख्याल रखती हैं। राहुल की प्रॉब्लम है कि वह जो पढ़ता है उसे याद नहीं रहता। स्कूल जाता था तो बैग नहीं लगा पाता था। जिस सब्जेक्ट का पीरियड होता था उसकी बुक घर पर भूल आता था। ज्यादा देर एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता था। इस वजह से कई बार उसे स्कूल में टीचर्स की डांट भी खानी पड़ी। स्कूल वालों के ही कहने पर उन्होंने बच्चे को उर्सला में दिखाया तो एक्सपर्ट्स ने उसका आईक्यू लेवल नार्मल बच्चों से कम बताया। कुछ ऐसी ही प्रॉब्लम विकास नगर में रहने वाले अंचित शुक्ला को भी थी। उसकी बहन तो स्कूल टॉपर थी, लेकिन वह पढ़ने में उतना अच्छा नहीं था। मां ज्योति शुक्ला ही उसे पढ़ाती हैं। उसका आईक्यू लेवल भी राहुल जैसा ही है, गुरुवार को जब दसवीं का रिजल्ट आया तो राहुल का सीजीपीए छः. छः था वहीं अंचित का छः. आठ था। पढ़ने लिखने में नार्मल बच्चों से थोड़े कमजोर इन दोनों ने कई पढ़ाकू बच्चों को भी पछाड़ दिया। तारे जमीं पर फिल्म में मुख्य किरदार ईशान अवस्थी को डिस्लेक्सिया का शिकार बताया गया था। क्योंकि वह ठीक से कुछ लिख नहीं पाता था। उसे सब्जेक्ट से रिलेटेड चीजें आसानी से याद नहीं होती थीं। लिखने में मात्राओं की गलतियां होती थीं। वाक्य नहीं बना पाता था और उसकी राइटिंग बेहद खराब थी, लेकिन राहुल और अंचित का केस फिल्मी ईशान से थोड़ा अलग है। इन्हें प्रॉब्लम है कि सब्जेक्ट से रिलेटेड चीजें पढ़ने के थोड़ी देर बाद ही याद नहीं रहती। दो घंटे के दौरान पिछला पढ़ा हुआ सब भूल जाते हैं। दोनों ही पढ़ने में बेहद औसत हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ। आराधना गुप्ता इसे डिस्लेक्सिया नहीं मानती। उनका कहना है कि यह तो एक बीमारी है, लेकिन ऐसे ही लक्षण लर्निग डिफिकल्टी से परेशान बच्चों के भी होते हैं। अंचित के पिता देवेंद्र शुक्ला सर्जन थे, लेकिन उनकी डेथ हो गई। मां ज्योति की मेहनत है कि पढ़ाई में बेहद औसत अंचित की प्रॉब्लम को समझा और खुद उसे दूर किया। नाना एसके अवस्थी बताते हैं कि अंचित को फुटबॉल खेलना पसंद है और वह टीवी भी खूब देखता है। बहुत मिलनसार है। अंचित अब अपने पापा की तरह ही सर्जन बनना चाहता है। स्कूल में उसे कॉमर्स लेने के लिए कहा गया है, लेकिन वह साइंस ही पढ़ना चाहता है। कुछ ऐसी ही सोच राहुल की भी है। वह बड़ा होकर आईपीएस अफसर बनना चाहता है। क्रिकेट खेलना, कार्टून देखना उसे बहुत पसंद है। - हर बच्चे की एज के हिसाब से वोकेब्लरी डेवलप होती है। अगर एक निश्चित उम्र में बच्चे की वोकेब्लरी कमजोर है तो उस पर ध्यान देने की जरूरत है। - जो याद करके जाता है, उसे कुछ ही देर में भूल जाता है। 'जिन बच्चों का आईक्यू लेवल अस्सी या नब्बे से थोड़ा सा कम होता है, उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट देने और ज्यादा ध्यान देने से उनकी प्रॉब्लम को दूर किया जा सकता है। लर्निग डिफिकल्टी से परेशान बच्चों की साइकोलॉजिकल टेस्टिंग भी करानी चाहिए. '
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छत्तीसगढ़ श्रम आयोग के अध्यक्ष शफी अहमद ने सोमवार को जाकिर वार्ड क्रमांक 38 के अंतर्गत आने वाले बरेज तालाब में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्य में लापरवाही देखकर अहमद निगम इंजीनियरों पर जमकर बरसे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बरेज तालाब में मुख्य मार्ग की तरफ स्टील रेलिंग और लोहे की रेलिंग लगाने का कार्य चल रहा है।
स्टील रेलिंग ठेकेदार के अनुबंध पत्र के अनुरूप नहीं होने की शिकायत कुछ लोगों ने अहमद से की थी। इसके बाद उन्होंने निगम के इंजीनियर और ठेकेदार व वार्ड निवासियों के समक्ष इसकी जांच की। जांच में स्टील रेलिंग 18 गेज पाया, जिस पर शफी अहमद ने तत्काल लगी स्टील रेलिंग को हटाकर 14 गेज की स्टील रेलिंग लगाने के निर्देश दिए। इस दौरान अहमद ने बताया कि सभी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए ठेकेदार और निगम के इंजीनियरों को एक माह के भीतर काम पूरा करने का भी निर्देश दिया है। वार्ड के निवासी निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ श्रम आयोग के अध्यक्ष शफी अहमद ने सोमवार को जाकिर वार्ड क्रमांक अड़तीस के अंतर्गत आने वाले बरेज तालाब में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्य में लापरवाही देखकर अहमद निगम इंजीनियरों पर जमकर बरसे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बरेज तालाब में मुख्य मार्ग की तरफ स्टील रेलिंग और लोहे की रेलिंग लगाने का कार्य चल रहा है। स्टील रेलिंग ठेकेदार के अनुबंध पत्र के अनुरूप नहीं होने की शिकायत कुछ लोगों ने अहमद से की थी। इसके बाद उन्होंने निगम के इंजीनियर और ठेकेदार व वार्ड निवासियों के समक्ष इसकी जांच की। जांच में स्टील रेलिंग अट्ठारह गेज पाया, जिस पर शफी अहमद ने तत्काल लगी स्टील रेलिंग को हटाकर चौदह गेज की स्टील रेलिंग लगाने के निर्देश दिए। इस दौरान अहमद ने बताया कि सभी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए ठेकेदार और निगम के इंजीनियरों को एक माह के भीतर काम पूरा करने का भी निर्देश दिया है। वार्ड के निवासी निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लारिसा होटल एक गतिशील रूप से विकासशील होटल श्रृंखला है जो तुर्की में एक केंद्रीय कार्यालय है, जो कि इसके मेहमानों के लिए एक अपेक्षाकृत सस्ते गेस्टहाउस (लगभग $ 60 प्रति रात) प्रदान करने में विशेषज्ञता है। इस तरह की एक किफायती मूल्य-निर्धारण नीति ने इसे संभावित रूप से बढ़ते रिसॉर्ट्स पर तीन-और चार-स्टार अच्छी गुणवत्ता वाले और लागत प्रभावी होटल खोलने की अनुमति दी थी।
इस लेख का विषय चार सितारा होटल कॉम्प्लेक्स की तुलना समान रूप से किया गया हैः लारिसा सुल्तान होटल - और तुर्की में बनाया गया (कैम्युवा गांव) और मिस्र में (हूरगाडा शहर)। उनके उदाहरण पर, हम लारिसा से एक वादा प्रबंधन देख रहे हैंः सामान्य श्रेणी के होटल बनाने के लिए जो कि अर्थशास्त्र वर्ग की कीमतों पर क्लासिक की सेवाएं प्रदान करते हैं। हालांकि, एक ही होटल परिसरों में से प्रत्येक की अपनी विशेषताएं हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था से आ रही है जहां यह स्थित है। कम से कम, लेख पढ़ने के बाद, आप स्वयं निष्कर्ष पर पहुंचेंगेः कैमिउवा या हूरगाडा में - उसी नाम वाले होटल का - आपके लिए अधिक उपयुक्त है।
होटल, छोटा, "गैर-तेज", 137 कमरे के लिए डिजाइन किया गया है। यह परिवार की छुट्टियों के लिए अनुकूल है।
मिस्र के होटल परिसर हूरगाडा में हवाई अड्डे के बहुत करीब बनाया गया हैः 15 मिनट - और ट्रैवल एजेंसी से बस हवाई अड्डे से पहुंचा जा सकता है, जो कि सुल्तानों बीच होटल में पहुंचे, 6 किमी की दूरी को तोड़ते हैं। इसके "तुर्की नामक" के विपरीत, मिस्र के सुल्तानों समुद्र तट तीन गुना बड़ा है और शहर के लाल सागर तट पर स्थित है, इसके केंद्र से 8 किलोमीटर दूर है।
यह एक बहुत आरामदायक पैदल यात्री क्षेत्र से घिरा हुआ है जिसमें दुकानों, दुकानों, रेस्तरां शामिल हैं। सफल खरीदारी के लिए यह अनुकूल है लाल समुद्र के किनारे पर होटल समुद्र तट होटल परिसर से केवल 80 मीटर दूर है।
ध्यान दें कि दोनों होटलों का आर्किटेक्चर परिदृश्य डिजाइन के साथ एक एकल पहनावा में विलीन हो जाता है। समीक्षा उन पर विश्राम किया, न केवल सामंजस्यपूर्ण भूनिर्माण का जश्न मनाते हैं, बल्कि केवल स्वर्ग का दलः फव्वारे और फूलों के पेड़ से सुल्तानों बीच होटल के अपेक्षाकृत छोटे होटल क्षेत्र को जीवंत बनाते हैं। दोनों ही मामलों में, होटल परिसरों के इंटीरियर में एक स्पष्ट खुला वास्तुकला है, और बाहरी एक बंद है। नेटवर्क लारिसा सुल्तान होटल से समग्र वास्तुकला का एक और सिद्धांत इसकी कम वृद्धि है।
हमारी राय में, तुर्की होटल का डिज़ाइन अधिक रोचक है। यहां ओटोमन शैली की आधुनिक व्याख्या की प्रचलित है। मुख्य इमारत का बाहरी मुखौटा जो किम्युवा गांव की तरफ दिखता है, विशेषता दिखता है। डिजाइनरों ने शास्त्रीय ओटोमन रूपों का उदाहरण दियाः बीच में एक गुंबद और पक्षों पर दो मीनारों की नकल। मुख्य भवन के करीब, होटल के भीतर के आंगन के लिए अपने मुखौटे के विमानों को सीमित करते हुए, दो आवासीय भवन हैं। सुल्तान बीच होटल 4 * के सभी तीन भवनों के आंतरिक मुखौटे का डिजाइन मूल है। अतिथि समीक्षाएँ बताती हैं कि वे वास्तव में मेहराब, स्तंभ और फूल के पेड़ों के सुरुचिपूर्ण संयोजन की तरह हैं।
सुल्तान बीच होटल 4 * (हर्गाडा, मिस्र) की वास्तुकला उपर्युक्त कम वृद्धि और प्रमुख होटल भवनों के "घोड़े की नाल के आकार का" लेआउट की याद दिलाता है।
होटल की मुख्य इमारत चार मंजिला है। इसके अलावा, होटल परिसर में दो तीन मंजिला इमारतें शामिल हैं, साथ ही साथ एक छोटी सी दूरी पर निर्मित 13 दो मंजिला कॉटेज। केंद्र में मुख्य इमारत है, पक्षों पर - आवासीय। वे घोड़े की नाल एक काफी विशाल मुख्य पूल को कवर करते हैं।
यह मौका नहीं है कि इसकी संरचना और मुखौटा विमानों की व्यवस्था के साथ इस तरह के वास्तुकला कामुयूवा के तुर्की गांव के उपर्युक्त होटल परिसर जैसा दिखता है लारिसा सुल्तान एस बीच होटल से एक समान डिजाइन महसूस कर सकते हैं।
हालांकि, मिस्र में कोई वास्तुशिल्प विवरण नहीं है जो कि ऑट्टोमन शैली को इमारतों को देता हैः मेहराब, गुंबद आदि। मिनेरे का मॉडल वाला समोच्च दृश्यमान नहीं है। अधिक से अधिक मानक, वास्तुकला में, आधुनिकतावादी शैली प्रचलित है। लेकिन वास्तुकला के कुछ सरलीकरण को विशालकाय खिड़कियों की बहुतायत से मुआवजा दिया जाता है।
होटल कॉम्प्लेक्स की पारंपरिक वास्तुकला लारिसा सुल्तान एस बीच होटल (एशिया माइनर और मिस्र के लिए आम) कुछ हद तक एक घाटी की तरह हैः आरामदायक छतों के साथ पत्थर की इमारतों के फव्वारे के साथ बहुत ही खूबसूरती से डिजाइन किए मानव निर्मित जलाशय से घिरा हुआ है। यहां प्यारा सा द्वीप हैं, और विदेशी, भव्य शाही हथेलियां हैं।
मिस्र के होटल की आवासीय इमारतें, तुर्की के विपरीत, हल्के पीले में पेंट की जाती हैं, और बेज में नहीं। इसकी पृष्ठभूमि पर, सुल्तान बीच होटल 4 * की बर्फ़-सफेद बालकनियों और समृद्ध भूनिर्माण सुराग मिलते हैं।
दोनों होटल परिसरों के हस्ताक्षर तत्व उनके क्षेत्र का अति सुंदर परिदृश्य डिजाइन है। इसी समय, आश्चर्यजनक सौंदर्य का एक बड़ा लेकिन उथले पूल उसके केंद्र में स्थित है।
हम दोनों प्रमुख होटल पूल दोनों के इस अनुच्छेद के चित्रों को संलग्न करने में प्रसन्न हैं। कुशल भूनिर्माण के लिए धन्यवाद, छुट्टियों यहाँ आराम कर रहे हैं। आंखों को खुश करना ठाठ हथेलियां, फूलों के पेड़, कई पेशेवर डिजाइन किए फूलों के लॉन हैं।
मुख्य भवनों के तरफ के स्विमिंग पूल में मुख्य रेस्तरां हैं, जिनमें बुफे पद्धति का इस्तेमाल करते हुए छुट्टियों के निर्माताओं के लिए बुनियादी भोजन उपलब्ध है।
दोनों होटल में दो रेस्तरां हैं उनमें से एक (मुख्य एक) सिस्टम पर सभी समावेशी काम करता है , और दूसरे को भुगतान किया जाता है और नियुक्तियों द्वारा छुट्टी वाले लोगों को सेवा प्रदान करता है। मुख्य रेस्तरां का खुला हिस्सा एक आरामदायक क्षेत्र है जहां आप खा सकते हैं और चैट कर सकते हैं।
हालांकि, हम पूल क्षेत्र में बंद कर देंगे। दोनों तुर्की और मिस्र के होटल में, यह बाहरी गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान है। खुद के लिए न्यायाधीशः इस तालाब में आप तैर सकते हैं और वाटर पोलो खेल सकते हैं। आरामदायक एर्गोनोमिक इलेक्ट्रिक कार ट्रम्स पर, सनबाथिंग प्राप्त करना अच्छा है। आसपास के क्षेत्र को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि सभी होटल मेहमानों के लिए पर्याप्त जगह है।
निश्चित रूप से, कारक जो मनोरंजन की गुणवत्ता में सुधार करता है, साथ ही साथ सुल्तानों बीच होटल के अद्वितीय पता मुफ्त स्पा सेवाएं हैंः हमाम और सॉना इस होटल के एक ब्रेसलेट (एक अनूठा पास) वाला रिसोर्ट मालिक, दैनिक और मुफ्त में (सभी समावेशी) सॉना पर जा सकते हैं।
ऐसे पुष्प परिदृश्य डिजाइन का निर्माण करने वाले कार्मिकों का सम्मान किया जाता है। विशेष रूप से मिस्र के हुरगाडा में, जहां जलवायु गर्म और सुनसान है। इसी समय, सुल्तान बीच होटल 4 * का ऑर्डर और सफाई हड़ताली है। प्रबंधन टीम वर्क के लिए उल्लेखनीय है।
लारिसा सुल्तान होटल नेटवर्क से संबंधित होटल के कमरे मानक हैं। शायद, इसका एकमात्र कॉर्पोरेट मानकों का कारण है, हालांकि तुर्की और मिस्र में आवासीय सुइट्स समान हैं वे काफी कॉम्पैक्ट हैं, हालांकि वे अच्छी तरह से सुसज्जित हैं जब आप एक अधिक आरामदेह कमरे पाने के लिए तैयार हैं, तो हम आपको सुझाव देने की सलाह देते हैं। बेहतर है कि आपका अस्थायी प्रतिदान दूसरी मंजिल से ऊपर है, यह वांछनीय है कि कमरे की खिड़कियां समुद्र के परिदृश्य के खुले हिस्से के साथ-साथ पूल के नजदीकी परिदृश्य भी हैं। खिड़कियों के ऊपरी मंजिलों के मेहमानों और अपने कमरों की बालकनियों के लिए, इंटीरियर डिजाइन को व्यवस्थित रूप से खिड़कियों से दृश्यों को खोलने से पूरित किया गया है। ऐसे हालात हैं जब यह व्यक्त किए जाने के कुछ दिनों बाद vacationers के अनुरोध संतुष्ट हो जाते हैं - जैसे ही सुल्तानों बीच होटल में मुफ़्त सुइट्स लेकिन पूछने के लिए, निश्चित रूप से इसके लायक है।
हालांकि, मिस्र के होटल के तत्वों में "स्मार्ट हाउस" तकनीक का एहसास हो गया है। आप इसे स्वयं देखेंगे कमरे में प्रवेश सुल्तान बीच होटल 4 * (हर्गाडा) और प्रवेश द्वार पर एक विशेष जेब में चाबियाँ डालने के लिए, आप आज़ादी से प्रकाश को चालू कर सकते हैं। हालांकि, अपने अस्थायी आश्रय को छोड़कर और, स्वाभाविक रूप से, अपनी जेब से चाबियाँ ले रही हैं, हम स्वतः प्रकाश, टीवी बंद कर देते हैं।
जब बालकनी का दरवाजा खोल दिया जाता है, एयर कंडीशनर स्वतः बंद हो जाता है। इसके अलावा कमरे में एक अतिरिक्त सुविधा हैः आप बिस्तर से बाहर निकलने के बिना, कमरे में और दालान में दोनों की ओर प्रकाश कर सकते हैं।
बस यह ध्यान रखें कि एक अच्छा समग्र खानपान बेस मिस्री होटल के साथ विश्वास की बात है। यह खानपान के बारे में भी नहीं है हर्जदा और कैमयूवा में दोनों यह एकीकृत कॉर्पोरेट मानकों (फोटो देखें) के अधीन है, जो तालबद्ध काम और वर्गीकरण प्रदान करता है। हालांकि, मिस्र के होटल "बेयगे सुल्ताना" पैसे बचाने नहीं करता है, और अधिक महंगा मांस उत्पादों के साथ दैनिक मेनू प्रदान करता है और फल का एक बड़ा वर्गीकरण करता है। यह जठरांत्रिक प्रचुरता पर्यटकों को इस लोकप्रिय मिस्र के चार सितारा होटल प्रदान करता है। तुर्की के चार सितारा सुल्तान बीच होटल (बोड्रम) के विपरीत, एक ही नेटवर्क से, यहां मांस व्यंजनों का दैनिक आहार चिकन और टर्की से बने व्यंजन तक सीमित नहीं है इसमें गोमांस, मेमने, समुद्री खाद्य से बर्तन शामिल हैं मेनू पर मछली से स्थानीय मैकेरल (वाहा), ट्यूना, सार्डिन, समुद्री बास हैं। समय-समय पर, स्क्वीड भी तैयार करें।
सब्जियां वर्गीकरण में दी जाती हैं, बहुत सारे सलाद विशेष रूप से स्वादिष्ट पके हुए सब्जियां आलू और चावल के बर्तन बहुत अच्छे होते हैं बुफे तालिका में, फल प्रचुर मात्रा में है : अमरूद, तरबूज, आड़ू, अंगूर, नारंगी, अंगूर, खरबूजे, तिथियां सुल्तान बीच होटल में शेफ 4 * (हर्गाडा) मधुमक्खी के साथ मिलकर काम करते हैं।
पहले व्यंजन स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन थोड़ा अनैच्छिकः सूप-मैश्ड आलू और ब्रोथ।
रेस्तरां हमेशा साफ और व्यवस्थित होता है अपने व्यावसायिकता के लिए बार श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना आवश्यक है। प्रभावशाली है बोतलों को हथकंडा करने और कॉकटेल में सामग्री मिश्रण करने की उनकी क्षमता।
तो सुल्तान बीच होटल के पूर्व मेहमानों की राय क्या है? अक्सर की तुलना में पर्यटकों की समीक्षा की जाती हैः कई सुझाते हैं कि कैमयूवा में होटल अपने काम का अधिक अनुकूलन करें और बीफ़, मटन पर न बचाएं, मछली व्यंजनों की सीमा को संकीर्ण न करें।
यदि आप खानपान के संगठन का विश्लेषण करते हैं, तो मिस्र के होटल प्रबंधन के लिए होटल सुल्तान बीच के बाद से निष्कर्ष निकलता है, इसका सार मेनू का विस्तार करना और पेशेवरों की टीम के काम में लगातार सुधार करना है। इसे क्रेडिट दिया जाना चाहिएः पांच सितारा स्तर तक, मिस्र के होटल में केवल एक आधा कदम है।
बेशक, तुर्की और मिस्र की मांग करने वाले छुट्टियों, भूमध्य और लाल सागर के तट पर कम से कम समुद्र तट की छुट्टियों को आकर्षित नहीं किया। हम तुर्की के स्नानगृह हम्माम के होटल "सुल्तान के समुद्र तट" पर काम करने के लिए तुरन्त पहुंचने के तुरंत बाद अवकाशवानों की सलाह देते हैं, और त्वचा को छीलने के लिए भी। यह शरीर को पानी और सूरज स्नान की बेहतर अवधारणा के लिए तैयार करेगा।
इसकी अपनी रेतीले समुद्र तट और सवाल में होटल है। पानी में सूर्यास्त सुविधाजनक है हालांकि, जब आप पानी में जाते हैं, आप अपने आप को काफी उथले लैगून में मिलेंगे। यह बच्चों के साथ परिवार के लिए उपयुक्त है और युवा लोगों को जो गहराई में तैरना चाहते हैं और कोरल और उज्ज्वल, सुंदर मछली के तमाशा का आनंद लेना चाहते हैं? होटल सुल्तान एस बीच होटल 4 * में होटल के समुद्रतट में गोताखोरी की क्षमता नहीं है? बेशक यह करता है!
आम तौर पर लाल सागर की राहत और उसके तट विशेष रूप से मूल है। दोनों उथले पानी की प्रवृत्ति और गहराई में अचानक वृद्धि हुई है। प्रश्न के मुताबिक होटल के समुद्र तट पर, स्नान की गहराई तक पहुंचने के लिए, लैगून से बायीं तरफ तीस मीटर की दूरी पर चलने के लिए पर्याप्त है। और विशेष जूते के बिना, अर्थात नंगे पैर, यह नहीं किया जाना चाहिए। पानी के नीचे, आप प्यारे मूंगा के बारे में एक पैर कटौती कर सकते हैं (ध्यान दें कि लाल सागर के नीचे का एक सामान्य विशेषता है, और सिर्फ होटल के पानी का क्षेत्र लारिसा सुल्तान्स बीच होटल 4 * नहीं है)। छुट्टियों के प्रतिभाशाली छापें विशेष रूप से संगठित समुद्री भ्रमणों से जुड़ा हुआ है।
50 मीटर लंबी रेत और कंकड़ समुद्र तट fenced और landscaped है। सन बेड, छतरियां और तौलिया निः शुल्क हैं। दोपहर के भोजन के समय मेंः 11 00 से 15 00 तक - यहां आप पट्टी पर नाश्ता कर सकते हैं (होटल कंगन के मालिकों के लिए सभी समावेशी सिस्टम)।
समुद्र के पानी के क्षेत्र में समुद्र गर्म है, दूध की तरह, और क्रिस्टल स्पष्ट, फ़िरोज़ा टिंट के साथ। भूमध्यसागरीय की घटना इसकी आकर्षक शक्ति हैः यदि आप एक बार पानी में तैरते हैं, तो स्पा-गोवर इस प्राचीन और युवा समुद्र के पानी के साथ फिर से फिर से संपर्क करना चाहता है, जो एक बार प्राचीन सभ्यता का गढ़ बन गया था।
तुर्की और मिस्र दोनों में पर्यटकों के लिए पैसों की खरीदारी सामान्य विशेषताएं हैं होटल से एजेंटों की कीमत की रणनीति एक ज्ञात प्रकार के वित्तीय लेनदेन में व्यक्त की गई है - अटकलें।
में मिस्र के होटल द्वीप Tobiyu (यह भी स्वर्ग द्वीप के रूप में) के एक दौरे लेने का फैसला किया आप मान लें कि। आप को बचा सकता है। उदाहरण के लिए, होटल में सीधे अपने अतिथि $ 20-25 के लिए इस भ्रमण के लिए एक टिकट खरीद सकते हैं। और सरलता दिखा रहा है, वह होटल पर्यटन $ 14 के लिए एक ही टिकट की पेशकश एजेंसी के बाहर देख सकते हैं। इस अवतार पसंद किया जाता है। इस मामले में, हम सेवाओं स्पष्ट रूप से $ 10 की कीमत की पेशकश हस्तशिल्प उद्यमियों डंपिंग का उपयोग नहीं करने की सलाह देते हैं। नहीं, वित्तीय पहलू पर लौटने के लिए आगे सामान्यीकरणः हम अभी भी अनुशंसा करते हैं कि सुल्तान Beach Hotel (हर्गहाडा) पर किसी भी पर्यटन खरीदने, कई ट्रैवल एजेंसियों से बाजार की कीमतों के साथ उनकी लागत की तुलना करने से पहले। पैसा बचाएँ, दो बार आधे में अधिक भुगतान नहीं करते।
कौन सा मांग में भ्रमण सबसे स्पा हॉलिडे Chemyuva गांव (तुर्की) के पास से? "पत्थर के शहर 'में - Cappadocia; travertine स्नान, एक स्विमिंग पूल क्लियोपेट्रा के प्रसिद्ध झरना के लिए - Pamukkale; प्राचीन बीजान्टिन किले इश-Calais; शानदार भूमिगत stalactite कुटी Dalmatash, Corsairs के प्राचीन स्थल के रहस्य। पानी पार्क, डिस्कवरी पार्क, पूर्वी बाजार, Alanya: यह भी वस्तुओं एंटाल्या आधुनिक बुनियादी सुविधाओं में से कुछ की यात्रा करनी चाहिए।
हालांकि, अगर आप - प्रशंसक पानी के नीचे दुनिया अभी भी बेहतर लाल सागर तट पर मिस्र के लिए एक यात्रा का चयन करने को देखने के लिए, आप।
और कहाँ एक छुट्टी-यात्रा के लिए जा सकते हैं, एक होटल है, जो हर्गहाडा में इतना समृद्ध है में रह। सुल्तान बीच होटल, सामान्य रूप में, कई यात्रा के लिए एक प्रारंभिक बिंदु हो सकता है। सबसे पहले, पिरामिड घाटी, व्यापार कार्ड फिरौन देश के लिए। एक अच्छा विकल्प की मांग की और ईसाई साइटों पर जाकर के साथ स्कोरिंग दर्शनीय स्थलों की यात्रा यरूशलेम (इजराइल) है। अक्सर पर्यटकों को लक्सर के लिए पर्यटन (मिस्र की प्राचीन राजधानी के खंडहर) चुनें, डाइविंग और स्नोर्कलिंग रास मोहम्मद नेशनल पार्क की यात्रा करने के लिए पसंद करते हैं।
ऊपर संक्षेप में प्रस्तुत करना। तुर्की या मिस्रः विशेष रूप से कहां की योजना बनाई से कुछ देशों की सुंदरता को देखने के लिए नहीं किया गया है पर्यटकों के लिए जाने के लिए है? उन्होंने कहा कि एक या अन्य होटल सुल्तान Beach Hotel के लिए एक यात्रा खरीद सकते हैं? दोनों विकल्पों के लिए तैयार हैं! समीक्षा हॉलिडे दोनों होटलों में सेवा के एक उच्च स्तर का संकेत मिलता है। लेकिन भूल जाते हैं कि इस चार सितारा होटल जटिल नहीं है। तदनुसार, जब वहाँ आस की एक बुनियादी सेवा कार्यक्रम है और आराम के अतिथियों के लिए अपने स्वयं की योजना है। भूमध्य या लाल सागरः काफी हद तक आप एक विकल्प चुनें।
पानी, स्नान के लिए आदर्श प्रवेश करने के लिए तैराकी सुविधाजनक भूमध्य। एक खड़ी ड्रॉप गहराई के साथ तट के पास उथलेः लाल अपने परिसीमन है। हालांकि, यह सौंदर्य जो गोताखोरों और तैराकों के लिए आसान प्रदान करता है की समृद्ध मूंगा पानी के नीचे दुनिया है।
किसी भी मामले में, देश के चुनाव और होटल आप पर निर्भर है।
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लारिसा होटल एक गतिशील रूप से विकासशील होटल श्रृंखला है जो तुर्की में एक केंद्रीय कार्यालय है, जो कि इसके मेहमानों के लिए एक अपेक्षाकृत सस्ते गेस्टहाउस प्रदान करने में विशेषज्ञता है। इस तरह की एक किफायती मूल्य-निर्धारण नीति ने इसे संभावित रूप से बढ़ते रिसॉर्ट्स पर तीन-और चार-स्टार अच्छी गुणवत्ता वाले और लागत प्रभावी होटल खोलने की अनुमति दी थी। इस लेख का विषय चार सितारा होटल कॉम्प्लेक्स की तुलना समान रूप से किया गया हैः लारिसा सुल्तान होटल - और तुर्की में बनाया गया और मिस्र में । उनके उदाहरण पर, हम लारिसा से एक वादा प्रबंधन देख रहे हैंः सामान्य श्रेणी के होटल बनाने के लिए जो कि अर्थशास्त्र वर्ग की कीमतों पर क्लासिक की सेवाएं प्रदान करते हैं। हालांकि, एक ही होटल परिसरों में से प्रत्येक की अपनी विशेषताएं हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था से आ रही है जहां यह स्थित है। कम से कम, लेख पढ़ने के बाद, आप स्वयं निष्कर्ष पर पहुंचेंगेः कैमिउवा या हूरगाडा में - उसी नाम वाले होटल का - आपके लिए अधिक उपयुक्त है। होटल, छोटा, "गैर-तेज", एक सौ सैंतीस कमरे के लिए डिजाइन किया गया है। यह परिवार की छुट्टियों के लिए अनुकूल है। मिस्र के होटल परिसर हूरगाडा में हवाई अड्डे के बहुत करीब बनाया गया हैः पंद्रह मिनट - और ट्रैवल एजेंसी से बस हवाई अड्डे से पहुंचा जा सकता है, जो कि सुल्तानों बीच होटल में पहुंचे, छः किमी की दूरी को तोड़ते हैं। इसके "तुर्की नामक" के विपरीत, मिस्र के सुल्तानों समुद्र तट तीन गुना बड़ा है और शहर के लाल सागर तट पर स्थित है, इसके केंद्र से आठ किलोग्राममीटर दूर है। यह एक बहुत आरामदायक पैदल यात्री क्षेत्र से घिरा हुआ है जिसमें दुकानों, दुकानों, रेस्तरां शामिल हैं। सफल खरीदारी के लिए यह अनुकूल है लाल समुद्र के किनारे पर होटल समुद्र तट होटल परिसर से केवल अस्सी मीटर दूर है। ध्यान दें कि दोनों होटलों का आर्किटेक्चर परिदृश्य डिजाइन के साथ एक एकल पहनावा में विलीन हो जाता है। समीक्षा उन पर विश्राम किया, न केवल सामंजस्यपूर्ण भूनिर्माण का जश्न मनाते हैं, बल्कि केवल स्वर्ग का दलः फव्वारे और फूलों के पेड़ से सुल्तानों बीच होटल के अपेक्षाकृत छोटे होटल क्षेत्र को जीवंत बनाते हैं। दोनों ही मामलों में, होटल परिसरों के इंटीरियर में एक स्पष्ट खुला वास्तुकला है, और बाहरी एक बंद है। नेटवर्क लारिसा सुल्तान होटल से समग्र वास्तुकला का एक और सिद्धांत इसकी कम वृद्धि है। हमारी राय में, तुर्की होटल का डिज़ाइन अधिक रोचक है। यहां ओटोमन शैली की आधुनिक व्याख्या की प्रचलित है। मुख्य इमारत का बाहरी मुखौटा जो किम्युवा गांव की तरफ दिखता है, विशेषता दिखता है। डिजाइनरों ने शास्त्रीय ओटोमन रूपों का उदाहरण दियाः बीच में एक गुंबद और पक्षों पर दो मीनारों की नकल। मुख्य भवन के करीब, होटल के भीतर के आंगन के लिए अपने मुखौटे के विमानों को सीमित करते हुए, दो आवासीय भवन हैं। सुल्तान बीच होटल चार * के सभी तीन भवनों के आंतरिक मुखौटे का डिजाइन मूल है। अतिथि समीक्षाएँ बताती हैं कि वे वास्तव में मेहराब, स्तंभ और फूल के पेड़ों के सुरुचिपूर्ण संयोजन की तरह हैं। सुल्तान बीच होटल चार * की वास्तुकला उपर्युक्त कम वृद्धि और प्रमुख होटल भवनों के "घोड़े की नाल के आकार का" लेआउट की याद दिलाता है। होटल की मुख्य इमारत चार मंजिला है। इसके अलावा, होटल परिसर में दो तीन मंजिला इमारतें शामिल हैं, साथ ही साथ एक छोटी सी दूरी पर निर्मित तेरह दो मंजिला कॉटेज। केंद्र में मुख्य इमारत है, पक्षों पर - आवासीय। वे घोड़े की नाल एक काफी विशाल मुख्य पूल को कवर करते हैं। यह मौका नहीं है कि इसकी संरचना और मुखौटा विमानों की व्यवस्था के साथ इस तरह के वास्तुकला कामुयूवा के तुर्की गांव के उपर्युक्त होटल परिसर जैसा दिखता है लारिसा सुल्तान एस बीच होटल से एक समान डिजाइन महसूस कर सकते हैं। हालांकि, मिस्र में कोई वास्तुशिल्प विवरण नहीं है जो कि ऑट्टोमन शैली को इमारतों को देता हैः मेहराब, गुंबद आदि। मिनेरे का मॉडल वाला समोच्च दृश्यमान नहीं है। अधिक से अधिक मानक, वास्तुकला में, आधुनिकतावादी शैली प्रचलित है। लेकिन वास्तुकला के कुछ सरलीकरण को विशालकाय खिड़कियों की बहुतायत से मुआवजा दिया जाता है। होटल कॉम्प्लेक्स की पारंपरिक वास्तुकला लारिसा सुल्तान एस बीच होटल कुछ हद तक एक घाटी की तरह हैः आरामदायक छतों के साथ पत्थर की इमारतों के फव्वारे के साथ बहुत ही खूबसूरती से डिजाइन किए मानव निर्मित जलाशय से घिरा हुआ है। यहां प्यारा सा द्वीप हैं, और विदेशी, भव्य शाही हथेलियां हैं। मिस्र के होटल की आवासीय इमारतें, तुर्की के विपरीत, हल्के पीले में पेंट की जाती हैं, और बेज में नहीं। इसकी पृष्ठभूमि पर, सुल्तान बीच होटल चार * की बर्फ़-सफेद बालकनियों और समृद्ध भूनिर्माण सुराग मिलते हैं। दोनों होटल परिसरों के हस्ताक्षर तत्व उनके क्षेत्र का अति सुंदर परिदृश्य डिजाइन है। इसी समय, आश्चर्यजनक सौंदर्य का एक बड़ा लेकिन उथले पूल उसके केंद्र में स्थित है। हम दोनों प्रमुख होटल पूल दोनों के इस अनुच्छेद के चित्रों को संलग्न करने में प्रसन्न हैं। कुशल भूनिर्माण के लिए धन्यवाद, छुट्टियों यहाँ आराम कर रहे हैं। आंखों को खुश करना ठाठ हथेलियां, फूलों के पेड़, कई पेशेवर डिजाइन किए फूलों के लॉन हैं। मुख्य भवनों के तरफ के स्विमिंग पूल में मुख्य रेस्तरां हैं, जिनमें बुफे पद्धति का इस्तेमाल करते हुए छुट्टियों के निर्माताओं के लिए बुनियादी भोजन उपलब्ध है। दोनों होटल में दो रेस्तरां हैं उनमें से एक सिस्टम पर सभी समावेशी काम करता है , और दूसरे को भुगतान किया जाता है और नियुक्तियों द्वारा छुट्टी वाले लोगों को सेवा प्रदान करता है। मुख्य रेस्तरां का खुला हिस्सा एक आरामदायक क्षेत्र है जहां आप खा सकते हैं और चैट कर सकते हैं। हालांकि, हम पूल क्षेत्र में बंद कर देंगे। दोनों तुर्की और मिस्र के होटल में, यह बाहरी गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान है। खुद के लिए न्यायाधीशः इस तालाब में आप तैर सकते हैं और वाटर पोलो खेल सकते हैं। आरामदायक एर्गोनोमिक इलेक्ट्रिक कार ट्रम्स पर, सनबाथिंग प्राप्त करना अच्छा है। आसपास के क्षेत्र को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि सभी होटल मेहमानों के लिए पर्याप्त जगह है। निश्चित रूप से, कारक जो मनोरंजन की गुणवत्ता में सुधार करता है, साथ ही साथ सुल्तानों बीच होटल के अद्वितीय पता मुफ्त स्पा सेवाएं हैंः हमाम और सॉना इस होटल के एक ब्रेसलेट वाला रिसोर्ट मालिक, दैनिक और मुफ्त में सॉना पर जा सकते हैं। ऐसे पुष्प परिदृश्य डिजाइन का निर्माण करने वाले कार्मिकों का सम्मान किया जाता है। विशेष रूप से मिस्र के हुरगाडा में, जहां जलवायु गर्म और सुनसान है। इसी समय, सुल्तान बीच होटल चार * का ऑर्डर और सफाई हड़ताली है। प्रबंधन टीम वर्क के लिए उल्लेखनीय है। लारिसा सुल्तान होटल नेटवर्क से संबंधित होटल के कमरे मानक हैं। शायद, इसका एकमात्र कॉर्पोरेट मानकों का कारण है, हालांकि तुर्की और मिस्र में आवासीय सुइट्स समान हैं वे काफी कॉम्पैक्ट हैं, हालांकि वे अच्छी तरह से सुसज्जित हैं जब आप एक अधिक आरामदेह कमरे पाने के लिए तैयार हैं, तो हम आपको सुझाव देने की सलाह देते हैं। बेहतर है कि आपका अस्थायी प्रतिदान दूसरी मंजिल से ऊपर है, यह वांछनीय है कि कमरे की खिड़कियां समुद्र के परिदृश्य के खुले हिस्से के साथ-साथ पूल के नजदीकी परिदृश्य भी हैं। खिड़कियों के ऊपरी मंजिलों के मेहमानों और अपने कमरों की बालकनियों के लिए, इंटीरियर डिजाइन को व्यवस्थित रूप से खिड़कियों से दृश्यों को खोलने से पूरित किया गया है। ऐसे हालात हैं जब यह व्यक्त किए जाने के कुछ दिनों बाद vacationers के अनुरोध संतुष्ट हो जाते हैं - जैसे ही सुल्तानों बीच होटल में मुफ़्त सुइट्स लेकिन पूछने के लिए, निश्चित रूप से इसके लायक है। हालांकि, मिस्र के होटल के तत्वों में "स्मार्ट हाउस" तकनीक का एहसास हो गया है। आप इसे स्वयं देखेंगे कमरे में प्रवेश सुल्तान बीच होटल चार * और प्रवेश द्वार पर एक विशेष जेब में चाबियाँ डालने के लिए, आप आज़ादी से प्रकाश को चालू कर सकते हैं। हालांकि, अपने अस्थायी आश्रय को छोड़कर और, स्वाभाविक रूप से, अपनी जेब से चाबियाँ ले रही हैं, हम स्वतः प्रकाश, टीवी बंद कर देते हैं। जब बालकनी का दरवाजा खोल दिया जाता है, एयर कंडीशनर स्वतः बंद हो जाता है। इसके अलावा कमरे में एक अतिरिक्त सुविधा हैः आप बिस्तर से बाहर निकलने के बिना, कमरे में और दालान में दोनों की ओर प्रकाश कर सकते हैं। बस यह ध्यान रखें कि एक अच्छा समग्र खानपान बेस मिस्री होटल के साथ विश्वास की बात है। यह खानपान के बारे में भी नहीं है हर्जदा और कैमयूवा में दोनों यह एकीकृत कॉर्पोरेट मानकों के अधीन है, जो तालबद्ध काम और वर्गीकरण प्रदान करता है। हालांकि, मिस्र के होटल "बेयगे सुल्ताना" पैसे बचाने नहीं करता है, और अधिक महंगा मांस उत्पादों के साथ दैनिक मेनू प्रदान करता है और फल का एक बड़ा वर्गीकरण करता है। यह जठरांत्रिक प्रचुरता पर्यटकों को इस लोकप्रिय मिस्र के चार सितारा होटल प्रदान करता है। तुर्की के चार सितारा सुल्तान बीच होटल के विपरीत, एक ही नेटवर्क से, यहां मांस व्यंजनों का दैनिक आहार चिकन और टर्की से बने व्यंजन तक सीमित नहीं है इसमें गोमांस, मेमने, समुद्री खाद्य से बर्तन शामिल हैं मेनू पर मछली से स्थानीय मैकेरल , ट्यूना, सार्डिन, समुद्री बास हैं। समय-समय पर, स्क्वीड भी तैयार करें। सब्जियां वर्गीकरण में दी जाती हैं, बहुत सारे सलाद विशेष रूप से स्वादिष्ट पके हुए सब्जियां आलू और चावल के बर्तन बहुत अच्छे होते हैं बुफे तालिका में, फल प्रचुर मात्रा में है : अमरूद, तरबूज, आड़ू, अंगूर, नारंगी, अंगूर, खरबूजे, तिथियां सुल्तान बीच होटल में शेफ चार * मधुमक्खी के साथ मिलकर काम करते हैं। पहले व्यंजन स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन थोड़ा अनैच्छिकः सूप-मैश्ड आलू और ब्रोथ। रेस्तरां हमेशा साफ और व्यवस्थित होता है अपने व्यावसायिकता के लिए बार श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना आवश्यक है। प्रभावशाली है बोतलों को हथकंडा करने और कॉकटेल में सामग्री मिश्रण करने की उनकी क्षमता। तो सुल्तान बीच होटल के पूर्व मेहमानों की राय क्या है? अक्सर की तुलना में पर्यटकों की समीक्षा की जाती हैः कई सुझाते हैं कि कैमयूवा में होटल अपने काम का अधिक अनुकूलन करें और बीफ़, मटन पर न बचाएं, मछली व्यंजनों की सीमा को संकीर्ण न करें। यदि आप खानपान के संगठन का विश्लेषण करते हैं, तो मिस्र के होटल प्रबंधन के लिए होटल सुल्तान बीच के बाद से निष्कर्ष निकलता है, इसका सार मेनू का विस्तार करना और पेशेवरों की टीम के काम में लगातार सुधार करना है। इसे क्रेडिट दिया जाना चाहिएः पांच सितारा स्तर तक, मिस्र के होटल में केवल एक आधा कदम है। बेशक, तुर्की और मिस्र की मांग करने वाले छुट्टियों, भूमध्य और लाल सागर के तट पर कम से कम समुद्र तट की छुट्टियों को आकर्षित नहीं किया। हम तुर्की के स्नानगृह हम्माम के होटल "सुल्तान के समुद्र तट" पर काम करने के लिए तुरन्त पहुंचने के तुरंत बाद अवकाशवानों की सलाह देते हैं, और त्वचा को छीलने के लिए भी। यह शरीर को पानी और सूरज स्नान की बेहतर अवधारणा के लिए तैयार करेगा। इसकी अपनी रेतीले समुद्र तट और सवाल में होटल है। पानी में सूर्यास्त सुविधाजनक है हालांकि, जब आप पानी में जाते हैं, आप अपने आप को काफी उथले लैगून में मिलेंगे। यह बच्चों के साथ परिवार के लिए उपयुक्त है और युवा लोगों को जो गहराई में तैरना चाहते हैं और कोरल और उज्ज्वल, सुंदर मछली के तमाशा का आनंद लेना चाहते हैं? होटल सुल्तान एस बीच होटल चार * में होटल के समुद्रतट में गोताखोरी की क्षमता नहीं है? बेशक यह करता है! आम तौर पर लाल सागर की राहत और उसके तट विशेष रूप से मूल है। दोनों उथले पानी की प्रवृत्ति और गहराई में अचानक वृद्धि हुई है। प्रश्न के मुताबिक होटल के समुद्र तट पर, स्नान की गहराई तक पहुंचने के लिए, लैगून से बायीं तरफ तीस मीटर की दूरी पर चलने के लिए पर्याप्त है। और विशेष जूते के बिना, अर्थात नंगे पैर, यह नहीं किया जाना चाहिए। पानी के नीचे, आप प्यारे मूंगा के बारे में एक पैर कटौती कर सकते हैं । छुट्टियों के प्रतिभाशाली छापें विशेष रूप से संगठित समुद्री भ्रमणों से जुड़ा हुआ है। पचास मीटर लंबी रेत और कंकड़ समुद्र तट fenced और landscaped है। सन बेड, छतरियां और तौलिया निः शुल्क हैं। दोपहर के भोजन के समय मेंः ग्यारह शून्य से पंद्रह शून्य तक - यहां आप पट्टी पर नाश्ता कर सकते हैं । समुद्र के पानी के क्षेत्र में समुद्र गर्म है, दूध की तरह, और क्रिस्टल स्पष्ट, फ़िरोज़ा टिंट के साथ। भूमध्यसागरीय की घटना इसकी आकर्षक शक्ति हैः यदि आप एक बार पानी में तैरते हैं, तो स्पा-गोवर इस प्राचीन और युवा समुद्र के पानी के साथ फिर से फिर से संपर्क करना चाहता है, जो एक बार प्राचीन सभ्यता का गढ़ बन गया था। तुर्की और मिस्र दोनों में पर्यटकों के लिए पैसों की खरीदारी सामान्य विशेषताएं हैं होटल से एजेंटों की कीमत की रणनीति एक ज्ञात प्रकार के वित्तीय लेनदेन में व्यक्त की गई है - अटकलें। में मिस्र के होटल द्वीप Tobiyu के एक दौरे लेने का फैसला किया आप मान लें कि। आप को बचा सकता है। उदाहरण के लिए, होटल में सीधे अपने अतिथि बीस डॉलर-पच्चीस के लिए इस भ्रमण के लिए एक टिकट खरीद सकते हैं। और सरलता दिखा रहा है, वह होटल पर्यटन चौदह डॉलर के लिए एक ही टिकट की पेशकश एजेंसी के बाहर देख सकते हैं। इस अवतार पसंद किया जाता है। इस मामले में, हम सेवाओं स्पष्ट रूप से दस डॉलर की कीमत की पेशकश हस्तशिल्प उद्यमियों डंपिंग का उपयोग नहीं करने की सलाह देते हैं। नहीं, वित्तीय पहलू पर लौटने के लिए आगे सामान्यीकरणः हम अभी भी अनुशंसा करते हैं कि सुल्तान Beach Hotel पर किसी भी पर्यटन खरीदने, कई ट्रैवल एजेंसियों से बाजार की कीमतों के साथ उनकी लागत की तुलना करने से पहले। पैसा बचाएँ, दो बार आधे में अधिक भुगतान नहीं करते। कौन सा मांग में भ्रमण सबसे स्पा हॉलिडे Chemyuva गांव के पास से? "पत्थर के शहर 'में - Cappadocia; travertine स्नान, एक स्विमिंग पूल क्लियोपेट्रा के प्रसिद्ध झरना के लिए - Pamukkale; प्राचीन बीजान्टिन किले इश-Calais; शानदार भूमिगत stalactite कुटी Dalmatash, Corsairs के प्राचीन स्थल के रहस्य। पानी पार्क, डिस्कवरी पार्क, पूर्वी बाजार, Alanya: यह भी वस्तुओं एंटाल्या आधुनिक बुनियादी सुविधाओं में से कुछ की यात्रा करनी चाहिए। हालांकि, अगर आप - प्रशंसक पानी के नीचे दुनिया अभी भी बेहतर लाल सागर तट पर मिस्र के लिए एक यात्रा का चयन करने को देखने के लिए, आप। और कहाँ एक छुट्टी-यात्रा के लिए जा सकते हैं, एक होटल है, जो हर्गहाडा में इतना समृद्ध है में रह। सुल्तान बीच होटल, सामान्य रूप में, कई यात्रा के लिए एक प्रारंभिक बिंदु हो सकता है। सबसे पहले, पिरामिड घाटी, व्यापार कार्ड फिरौन देश के लिए। एक अच्छा विकल्प की मांग की और ईसाई साइटों पर जाकर के साथ स्कोरिंग दर्शनीय स्थलों की यात्रा यरूशलेम है। अक्सर पर्यटकों को लक्सर के लिए पर्यटन चुनें, डाइविंग और स्नोर्कलिंग रास मोहम्मद नेशनल पार्क की यात्रा करने के लिए पसंद करते हैं। ऊपर संक्षेप में प्रस्तुत करना। तुर्की या मिस्रः विशेष रूप से कहां की योजना बनाई से कुछ देशों की सुंदरता को देखने के लिए नहीं किया गया है पर्यटकों के लिए जाने के लिए है? उन्होंने कहा कि एक या अन्य होटल सुल्तान Beach Hotel के लिए एक यात्रा खरीद सकते हैं? दोनों विकल्पों के लिए तैयार हैं! समीक्षा हॉलिडे दोनों होटलों में सेवा के एक उच्च स्तर का संकेत मिलता है। लेकिन भूल जाते हैं कि इस चार सितारा होटल जटिल नहीं है। तदनुसार, जब वहाँ आस की एक बुनियादी सेवा कार्यक्रम है और आराम के अतिथियों के लिए अपने स्वयं की योजना है। भूमध्य या लाल सागरः काफी हद तक आप एक विकल्प चुनें। पानी, स्नान के लिए आदर्श प्रवेश करने के लिए तैराकी सुविधाजनक भूमध्य। एक खड़ी ड्रॉप गहराई के साथ तट के पास उथलेः लाल अपने परिसीमन है। हालांकि, यह सौंदर्य जो गोताखोरों और तैराकों के लिए आसान प्रदान करता है की समृद्ध मूंगा पानी के नीचे दुनिया है। किसी भी मामले में, देश के चुनाव और होटल आप पर निर्भर है।
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दरअसल पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने केएल राहुल और हार्दिक पांड्या की बदौलत 208 रन बनाए और कंगारू टीम को 209 रनों का लक्ष्य दिया। वहीं इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया टीम ने कैमरून ग्रीन के 61 और मैथ्यू वेड के नाबाद 45 रनों के दम पर छह विकेट खोकर मैच अपने नाम किया। वहीं मैच में मिली जीत के बाद कप्तान एरोन फिंच (Aaron Fitch) काफी खुश नजर आए। उन्होंने मैच के बाद हुई प्रेजेंटेशन के दौरान अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा,
बता दें (IND vs AUS) टीम इंडिया के दिए 209 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एरोन फिंच (Aaron Fitch) की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलिया टीम ने ताबड़तोड़ अंदाज में शुरुआत की। इस मैच में पहली बार सलामी बल्लेबाज के रूप में आए कैमरन ग्रीन ने भारतीय गेंदबाजों को खूब परेशान किया। उन्होंने उमेश यादव के पहले ही ओवर में 16 रन जड़े और बतौर ओपनर उन्होंने 30 गेंदों का सामना करते हुए 60 रनों की पारी खेली। इस मैच में उनके टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला अर्धशतक रहा।
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दरअसल पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने केएल राहुल और हार्दिक पांड्या की बदौलत दो सौ आठ रन बनाए और कंगारू टीम को दो सौ नौ रनों का लक्ष्य दिया। वहीं इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया टीम ने कैमरून ग्रीन के इकसठ और मैथ्यू वेड के नाबाद पैंतालीस रनों के दम पर छह विकेट खोकर मैच अपने नाम किया। वहीं मैच में मिली जीत के बाद कप्तान एरोन फिंच काफी खुश नजर आए। उन्होंने मैच के बाद हुई प्रेजेंटेशन के दौरान अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, बता दें टीम इंडिया के दिए दो सौ नौ रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एरोन फिंच की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलिया टीम ने ताबड़तोड़ अंदाज में शुरुआत की। इस मैच में पहली बार सलामी बल्लेबाज के रूप में आए कैमरन ग्रीन ने भारतीय गेंदबाजों को खूब परेशान किया। उन्होंने उमेश यादव के पहले ही ओवर में सोलह रन जड़े और बतौर ओपनर उन्होंने तीस गेंदों का सामना करते हुए साठ रनों की पारी खेली। इस मैच में उनके टी-बीस अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला अर्धशतक रहा।
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बीसी सखी अंगूरी जाटव ने बताया कि मैंने बीसी सखी का प्रशिक्षण लिया है और अब मैं अपने गांव में ही बैंकिंग काम करूंगी, जिससे हमारे गांवों के लोगों को गांव से अब बैंक तक नहीं जाना पड़ेगा और गांव में ही यह सुविधा मिल जाएगी।
शिवपुरी जिले में मप्र ग्रामीण आजीविका समूह से जुड़ी हुईं महिलाओं को बीसी सखी के माध्यम से जोड़कर बैंकिंग लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में समूह की दीदीयों को बीसी सखी के रूप में चयनित किया गया है। यह बीसी सखी ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पहुंच कर महिलाओं और बुजुर्गों को डिजीटल बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करेंगीं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं मिल सकेंगी।
इन चयनित बीसी सखियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। शिवपुरी जिला मुख्यालय पर मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्यालय पर इन बीसी सखियों को डिजीटल बैंकिंग से संबंधित जानकारी दी गई। चयनित बीसी सखियों को बैंकिंग से संबंधित ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे बीसी सखियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। केंद्र सरकार की पहल पर महिला समूहों की दीदीयों का यह प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद यह महिलाएं अपनी- अपनी ग्राम पंचायतों में बैंकिंग लेन-देन के काम करेंगी। इसमें बीसी सखी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य योजनाओं के खाते खुलवाने, राशि लेनदेन सहित बैंकिंग सुविधाएं दिलाने में ग्रामीणों की मदद कर सकेंगी।
बीसी सखी अंगूरी जाटव ने बताया कि मैंने बीसी सखी का प्रशिक्षण लिया है और अब मैं अपने गांव में ही बैंकिंग काम करूंगी, जिससे हमारे गांवों के लोगों को गांव से अब बैंक तक नहीं जाना पड़ेगा और गांव में ही यह सुविधा मिल जाएगी। एक अन्य बीसी सखी रामसखी रावत ने बताया कि गांवों में हम महिलाओं को पेमेंट सुविधा देंगे। मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन की बैंकिंग एक्सपर्ट शशी सिंह ने बताया कि महिलाओं को बीसी सखी के माध्यम से जोड़कर बैंकिंग लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। समूह की दीदीयों को बीसी सखी के रूप में चयनित किया गया है। यह बीसी सखी ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पहुंच कर महिलाओं और बुजुर्गों को डिजीटल बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करेंगीं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं मिल सकेंगी।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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बीसी सखी अंगूरी जाटव ने बताया कि मैंने बीसी सखी का प्रशिक्षण लिया है और अब मैं अपने गांव में ही बैंकिंग काम करूंगी, जिससे हमारे गांवों के लोगों को गांव से अब बैंक तक नहीं जाना पड़ेगा और गांव में ही यह सुविधा मिल जाएगी। शिवपुरी जिले में मप्र ग्रामीण आजीविका समूह से जुड़ी हुईं महिलाओं को बीसी सखी के माध्यम से जोड़कर बैंकिंग लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में समूह की दीदीयों को बीसी सखी के रूप में चयनित किया गया है। यह बीसी सखी ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पहुंच कर महिलाओं और बुजुर्गों को डिजीटल बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करेंगीं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं मिल सकेंगी। इन चयनित बीसी सखियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। शिवपुरी जिला मुख्यालय पर मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्यालय पर इन बीसी सखियों को डिजीटल बैंकिंग से संबंधित जानकारी दी गई। चयनित बीसी सखियों को बैंकिंग से संबंधित ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे बीसी सखियों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। केंद्र सरकार की पहल पर महिला समूहों की दीदीयों का यह प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद यह महिलाएं अपनी- अपनी ग्राम पंचायतों में बैंकिंग लेन-देन के काम करेंगी। इसमें बीसी सखी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य योजनाओं के खाते खुलवाने, राशि लेनदेन सहित बैंकिंग सुविधाएं दिलाने में ग्रामीणों की मदद कर सकेंगी। बीसी सखी अंगूरी जाटव ने बताया कि मैंने बीसी सखी का प्रशिक्षण लिया है और अब मैं अपने गांव में ही बैंकिंग काम करूंगी, जिससे हमारे गांवों के लोगों को गांव से अब बैंक तक नहीं जाना पड़ेगा और गांव में ही यह सुविधा मिल जाएगी। एक अन्य बीसी सखी रामसखी रावत ने बताया कि गांवों में हम महिलाओं को पेमेंट सुविधा देंगे। मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन की बैंकिंग एक्सपर्ट शशी सिंह ने बताया कि महिलाओं को बीसी सखी के माध्यम से जोड़कर बैंकिंग लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। समूह की दीदीयों को बीसी सखी के रूप में चयनित किया गया है। यह बीसी सखी ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पहुंच कर महिलाओं और बुजुर्गों को डिजीटल बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करेंगीं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं मिल सकेंगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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की दी गई । भीड़ घबरा कर गिरती पड़ती भागी और घायल छोड़ गई । छः मनुष्य मारे गये और बहुत से घायल हुये । यह घटना ई० १८१६ में हुई और इसे मैस्टर नरबलि कहते हैं । उस समय तक शिक्षित समाज में कारीगरों की मांग की उपेक्षा की जाती थी । जो मनुष्य राजनीति का थोड़ा भी ज्ञानरखता था उसके मन में यह बात आाही न सकती थी कि ऐसी मूर्खता के समय में सब को वोट मिलै । परन्तु विचारशील मनुष्य के मन में सन्देह न रहा कि मैञ्चस्टरवालों के साथ बड़ा अन्याय किया गया । जब उनपर सिपाहियों ने आक्रमण किया ने उन्होंने कोई अपराध न किया था और शान्ति के साथ व्याख्यान सुनने आये थे । विना पूरी जांच किये मैजिस्ट्रेट के काम को उचित कह कर गवर्मेण्ट ने बड़ी नासमझी की । पार्लासेण्ट
* गवर्मेण्ट के साथ थी और राजविद्रोही सभा बन्द करने के लिये
६ क़ानून बनाये परन्तु बहुतेरे जो अब तक गवर्सेण्ट के सहायक थे उससे घृणा करने लगे और सोचने लगे कि कोई ऐसा उपाय करना चाहिये जिससे स्थिति सुधर जाय ।
७ । - जार्ज तृतीय की मौत - मैञ्चेस्टर नरबलि के दूसरे - बरस अन्धा विक्षिप्त बुढ़ा राजा मर गया और उसका बेटा राजप्रतिनिधि जार्ज चतुर्थ के नाम से राजा हुआ ।
॥ अध्याय ४३ ॥
* जार्ज चतुर्थ *
१ । - केटो ( Cato ) की गली का षड़यन्त्र - जब बहुत लोग असन्तुष्ट हो जाते हैं तो उनमें से कुछ ऐसा समझने लगते
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की दी गई । भीड़ घबरा कर गिरती पड़ती भागी और घायल छोड़ गई । छः मनुष्य मारे गये और बहुत से घायल हुये । यह घटना ईशून्य एक हज़ार आठ सौ सोलह में हुई और इसे मैस्टर नरबलि कहते हैं । उस समय तक शिक्षित समाज में कारीगरों की मांग की उपेक्षा की जाती थी । जो मनुष्य राजनीति का थोड़ा भी ज्ञानरखता था उसके मन में यह बात आाही न सकती थी कि ऐसी मूर्खता के समय में सब को वोट मिलै । परन्तु विचारशील मनुष्य के मन में सन्देह न रहा कि मैञ्चस्टरवालों के साथ बड़ा अन्याय किया गया । जब उनपर सिपाहियों ने आक्रमण किया ने उन्होंने कोई अपराध न किया था और शान्ति के साथ व्याख्यान सुनने आये थे । विना पूरी जांच किये मैजिस्ट्रेट के काम को उचित कह कर गवर्मेण्ट ने बड़ी नासमझी की । पार्लासेण्ट * गवर्मेण्ट के साथ थी और राजविद्रोही सभा बन्द करने के लिये छः क़ानून बनाये परन्तु बहुतेरे जो अब तक गवर्सेण्ट के सहायक थे उससे घृणा करने लगे और सोचने लगे कि कोई ऐसा उपाय करना चाहिये जिससे स्थिति सुधर जाय । सात । - जार्ज तृतीय की मौत - मैञ्चेस्टर नरबलि के दूसरे - बरस अन्धा विक्षिप्त बुढ़ा राजा मर गया और उसका बेटा राजप्रतिनिधि जार्ज चतुर्थ के नाम से राजा हुआ । ॥ अध्याय तैंतालीस ॥ * जार्ज चतुर्थ * एक । - केटो की गली का षड़यन्त्र - जब बहुत लोग असन्तुष्ट हो जाते हैं तो उनमें से कुछ ऐसा समझने लगते
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पुडुचेरी, 11 मार्च पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदराजन ने केन्द्र शासित प्रदेश में एक से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को इस अकादमिक वर्ष में 'उत्तीर्ण' घोषित करने के प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी।
राजनिवास की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार उपराज्यपाल ने केन्द्र शासित प्रदेश के सभी चारों क्षेत्रों में एक से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को 'उत्तीर्ण' घोषित करने के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
पुडुचेरी में 10वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों और (तमिलनाडु के पाठ्यक्रम का पैटर्न अपना रहे) कराइकल क्षेत्र के छात्रों को तमिलनाडु राजकीय शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार 'उत्तीर्ण' घोषित किया जाएगा।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पुडुचेरी, ग्यारह मार्च पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदराजन ने केन्द्र शासित प्रदेश में एक से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को इस अकादमिक वर्ष में 'उत्तीर्ण' घोषित करने के प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। राजनिवास की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार उपराज्यपाल ने केन्द्र शासित प्रदेश के सभी चारों क्षेत्रों में एक से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को 'उत्तीर्ण' घोषित करने के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पुडुचेरी में दसवीं और ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों और कराइकल क्षेत्र के छात्रों को तमिलनाडु राजकीय शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार 'उत्तीर्ण' घोषित किया जाएगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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और उन्हें प्रत्येक दूसरे शब्द के अक्षर-समूह से अलग रक्खा जाना खटकतो है। "प्रति का लिपि-काल संवत् १८७० दिया गया है, इस समय के लगभग की एक भी प्रति शक्ाकार के देखने में नहीं है जिसमें उपर्युक्त लेखन शैली बर्ती गई हो ।"
उत्तर में निवेदन है कि हमारे देखने में कतिपय ऐसी पुस्तकें आई हैं। जिन पाठकों को पुरानी लिपियों को देखने का अवसर मिला हो वे इस चात के तथ्यातथ्य को भले प्रकार समझ सकते हैं। यह कह देना आवश्यक प्रतीत होता है कि इस पुस्तक की एक और खण्डित किन्तु प्राचीनतर प्रति विद्यमान है, जिसे परिडत मुरलीघर चतुर्वेदी ने स० १८०६ विस्मी मे नकल किया था ।
( ४ ) रतावली । इसके विषय में शकाकार मानते हैं कि "देखने मे प्रति इतनी पुरानी अवश्य जान पड़ती है कि उसे विनमीय १६वीं शताब्दी का कहा जा सके। फिर भी शका चलती है कि "रत्नावली अव दो सस्करणों में प्रकाशित है। एक पं० भद्रदत्तनी चैत्रभूषण, कासगज से प्राप्य है, और दूसरा प० प्रमुदयाल शर्मा, शर्माभवन, इटावा से प्राप्य है । उसमें जो चौथा छप्पय दिया हुआ है वह अवश्य 'पन्नावली' प्रति मे नहीं है।"
शकाकार का कथन चस्तुतः सत्य है, किन्तु शंकाओं के बीच वह अमोत्पादक हो गया है। इसका स्पष्टीकरण आवश्यक है। मुरलीधर चतुर्वेदी ने 'श्नावली चरित' लिखा था। उसकी नकल उनके शिष्य रायवल्लभ मिश्र ने की । जिस छप्पय का उल्लेख है वह चतुर्वेदीजी की प्रति में अनेक छप्पयों के साथ विद्यमान है, किन्तु मिश्रजी ने 'रत्नावली' सम्पूर्ण करने के पश्चात् केवल तीन छप्पय दिए हैं जिनम यह नहीं है । वैद्रभूषण वाली 'स्त्रावली' का सम्पादन श्री नाहरसिंह सोलड़ी ने
का घरबा.
किया और उन्होंने उस छप्पयको भी सम्मिलित कर दिया । या तो उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए या अथवा उन्हें वहाँ पाद-टिप्पणी दे देनी चाहिए थी किन्तु में पाठकों को यह आश्वासन दे देना उचित समझता हूँ कि चतुर्थ छप्पय एवं अन्य कतिपय छन्द शिष्य की प्रति में नहीं हैं। फिर भी शंकाकार ने इस ओर इशारा कर ही किया। हमने उचित समझा कि सोरों की सामग्री को मूल रूप में जनता के समक्ष रख दें और इसी दृष्टि से 'तुलसी चर्चा' नामक पुस्तक में मई १९४१ तक की प्राप्त सभी आवश्यक सामग्री यथासंम्भन ज्यों की त्यों उपस्थित कर दी और प्रस्तुत ग्रन्थ में यह सत्र एवं तत्पश्चात् प्राप्त छोरों की अन्य सामग्री दी जा रही है।
मुरलीधर चतुर्वेदी की रचना - शैली के विषय में भी शंका इस प्रकार उठाई गई है --"जब हम मुरलीधर चतुर्वेदी कृत 'रत्नावली' की जाँच करते हैं तो हमें एक बात उसमें भी खटकती है। वह है उसकी शैली और शब्दविन्यास का अपेक्षाकृत आधुनिक होना । नीचे लिखी पंक्तियों में यह बात ध्यान देने योग्य है"सीम प्रेम तुम करी पार, नाथ प्रेम के तुम अधार मम सुप्रेम निज हिये धार, उतरे पिय सुरसरित पार जग अधार पद प्रेम धार, जात मनुज भव उदधि पार प्रेम हीन जीवन असार, नाथ प्रेम महिमा अपार ॥"
शंकाकार ने यह निर्देश नहीं किया है कि उक्त पंक्ति में आधुनिकता किन कारणों से है। उन्होंने यह नहीं दिखलाया कि अमुक शब्द छन्द या भाव उन दिनों प्रयुक्त नहीं होता था जिन दिनों को यह कृति है। देहली विश्व विद्यालय के संस्कृत हिन्दी विभाग के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डा० लक्ष्मीघर शास्त्री एम. ए., एम. श्री. एल पी. डी. इस कृति को तत्कालीन समझते है ।
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और उन्हें प्रत्येक दूसरे शब्द के अक्षर-समूह से अलग रक्खा जाना खटकतो है। "प्रति का लिपि-काल संवत् एक हज़ार आठ सौ सत्तर दिया गया है, इस समय के लगभग की एक भी प्रति शक्ाकार के देखने में नहीं है जिसमें उपर्युक्त लेखन शैली बर्ती गई हो ।" उत्तर में निवेदन है कि हमारे देखने में कतिपय ऐसी पुस्तकें आई हैं। जिन पाठकों को पुरानी लिपियों को देखने का अवसर मिला हो वे इस चात के तथ्यातथ्य को भले प्रकार समझ सकते हैं। यह कह देना आवश्यक प्रतीत होता है कि इस पुस्तक की एक और खण्डित किन्तु प्राचीनतर प्रति विद्यमान है, जिसे परिडत मुरलीघर चतुर्वेदी ने सशून्य एक हज़ार आठ सौ छः विस्मी मे नकल किया था । रतावली । इसके विषय में शकाकार मानते हैं कि "देखने मे प्रति इतनी पुरानी अवश्य जान पड़ती है कि उसे विनमीय सोलहवीं शताब्दी का कहा जा सके। फिर भी शका चलती है कि "रत्नावली अव दो सस्करणों में प्रकाशित है। एक पंशून्य भद्रदत्तनी चैत्रभूषण, कासगज से प्राप्य है, और दूसरा पशून्य प्रमुदयाल शर्मा, शर्माभवन, इटावा से प्राप्य है । उसमें जो चौथा छप्पय दिया हुआ है वह अवश्य 'पन्नावली' प्रति मे नहीं है।" शकाकार का कथन चस्तुतः सत्य है, किन्तु शंकाओं के बीच वह अमोत्पादक हो गया है। इसका स्पष्टीकरण आवश्यक है। मुरलीधर चतुर्वेदी ने 'श्नावली चरित' लिखा था। उसकी नकल उनके शिष्य रायवल्लभ मिश्र ने की । जिस छप्पय का उल्लेख है वह चतुर्वेदीजी की प्रति में अनेक छप्पयों के साथ विद्यमान है, किन्तु मिश्रजी ने 'रत्नावली' सम्पूर्ण करने के पश्चात् केवल तीन छप्पय दिए हैं जिनम यह नहीं है । वैद्रभूषण वाली 'स्त्रावली' का सम्पादन श्री नाहरसिंह सोलड़ी ने का घरबा. किया और उन्होंने उस छप्पयको भी सम्मिलित कर दिया । या तो उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए या अथवा उन्हें वहाँ पाद-टिप्पणी दे देनी चाहिए थी किन्तु में पाठकों को यह आश्वासन दे देना उचित समझता हूँ कि चतुर्थ छप्पय एवं अन्य कतिपय छन्द शिष्य की प्रति में नहीं हैं। फिर भी शंकाकार ने इस ओर इशारा कर ही किया। हमने उचित समझा कि सोरों की सामग्री को मूल रूप में जनता के समक्ष रख दें और इसी दृष्टि से 'तुलसी चर्चा' नामक पुस्तक में मई एक हज़ार नौ सौ इकतालीस तक की प्राप्त सभी आवश्यक सामग्री यथासंम्भन ज्यों की त्यों उपस्थित कर दी और प्रस्तुत ग्रन्थ में यह सत्र एवं तत्पश्चात् प्राप्त छोरों की अन्य सामग्री दी जा रही है। मुरलीधर चतुर्वेदी की रचना - शैली के विषय में भी शंका इस प्रकार उठाई गई है --"जब हम मुरलीधर चतुर्वेदी कृत 'रत्नावली' की जाँच करते हैं तो हमें एक बात उसमें भी खटकती है। वह है उसकी शैली और शब्दविन्यास का अपेक्षाकृत आधुनिक होना । नीचे लिखी पंक्तियों में यह बात ध्यान देने योग्य है"सीम प्रेम तुम करी पार, नाथ प्रेम के तुम अधार मम सुप्रेम निज हिये धार, उतरे पिय सुरसरित पार जग अधार पद प्रेम धार, जात मनुज भव उदधि पार प्रेम हीन जीवन असार, नाथ प्रेम महिमा अपार ॥" शंकाकार ने यह निर्देश नहीं किया है कि उक्त पंक्ति में आधुनिकता किन कारणों से है। उन्होंने यह नहीं दिखलाया कि अमुक शब्द छन्द या भाव उन दिनों प्रयुक्त नहीं होता था जिन दिनों को यह कृति है। देहली विश्व विद्यालय के संस्कृत हिन्दी विभाग के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डाशून्य लक्ष्मीघर शास्त्री एम. ए., एम. श्री. एल पी. डी. इस कृति को तत्कालीन समझते है ।
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मुंबईः अपने स्ट्रीमिंग शो 'आरण्यक' ('Aranyaka') को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन, (Raveena Tandon) जिन्होंने 1990 के दशक में बॉलीवुड में राज किया था और जिन्हें हाल ही में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, एक और OTT show में अभिनय करने के लिए तैयार हैं।
निर्माता शो के शीर्षक और कहानी को फिलहाल गुप्त रखे हुए हैं।
अपना उत्साह साझा करते हुए रवीना टंडन ने कहा, "मैं इस Show का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं।
अभी तक का शीर्षक वाला Show OTT Platform Disney Plus Hotstar पर स्ट्रीम होगा, इसके शीर्षक और स्ट्रीमिंग की तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी।
Disney Star में Disney Plus Hotstar और HSM एंटरटेनमेंट नेटवर्क के कंटेंट, हेड, गौरव बनर्जी ने कहा, "रवीना टंडन के साथ अपने जुड़ाव की घोषणा करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है।
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मुंबईः अपने स्ट्रीमिंग शो 'आरण्यक' को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में बॉलीवुड में राज किया था और जिन्हें हाल ही में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, एक और OTT show में अभिनय करने के लिए तैयार हैं। निर्माता शो के शीर्षक और कहानी को फिलहाल गुप्त रखे हुए हैं। अपना उत्साह साझा करते हुए रवीना टंडन ने कहा, "मैं इस Show का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं। अभी तक का शीर्षक वाला Show OTT Platform Disney Plus Hotstar पर स्ट्रीम होगा, इसके शीर्षक और स्ट्रीमिंग की तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी। Disney Star में Disney Plus Hotstar और HSM एंटरटेनमेंट नेटवर्क के कंटेंट, हेड, गौरव बनर्जी ने कहा, "रवीना टंडन के साथ अपने जुड़ाव की घोषणा करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है।
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फर्रुखाबाद के घरेलू कलह के कारण दो तो महिलाओं को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। पति की बंदूक की गोली से पत्नी की मौत हो जाने से गुस्साए पति ने समधन को भी मार डाला। पुलिस ने दोहरा हत्याकांड करने के बाद घर से न भागने वाले कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला शिवाजी कॉलोनी गली नंबर 4 निवासी पूर्व सैनिक विजय शंकर श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर उनकी लाइसेंसी एक नाली बंदूक कब्जे में ले ली है।
जानकारी के मुताबिक, विजय शंकर के पुत्र माधव की मोहल्ला नगला नैन निवासी राजेश श्रीवास्तव की पुत्री काजल से 4 फरवरी को विवाह हुआ था। विवाह के बाद बद मिजाज काजल ने सास सत्यवती व ससुर विजय शंकर सहित पति को भी प्रताडित करना शुरू कर दिया। विवाह के बाद काजल ससुराल से जेवरात समेटकर मायके ले गयी। उसने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का भी मुकदमा कर दिया।
काजल बीते 3 दिन पूर्व ही ससुराल गई थी और आज काजल की मां सरिता देवी बेटी की ससुराल गई पंचायत करने गई थी। सायं घरेलू बातचीत के दौरान सरिता का सत्यवती से विवाद हुआ और दोनों में मारपीट होने लगी। यह देखकर गुस्साए विजय शंकर ने लाइसेंसी बंदूक से गोली मारने के लिए बंदूक सरिता की ओर सीधी कर दी। जब विजय शंकर ने समधिन को मार डालने के लिए बंदूक का टेगर दबाया तभी पत्नी सत्यवती सरिता के सामने आ गई।
सीने में नजदीकी घातक गोली लगने से 58 वर्षीय सत्यवती की तुरंत ही मौत हो गई। तब गुस्साए विजय शंकर ने मसाला कूपने वाले खल्लड से सरिता के ऊपर प्रहार किये। इसी दौरान काजल ने मां सरिता को बचाने का प्रयास किया हमले से सरिता की मौत हो गई। जबकि काजल गंभीर रूप से घायल हो गयी काजल को लोहिया अस्पताल से मिलिट्री हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया।
हादसे की जानकारी मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक अजय प्रताप, सीओ सिटी प्रदीप सिंह एवं कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार ने घटनास्थल जाकर जांच पड़ताल की। पुलिस ने घर में मौजूद विजय शंकर को गिरफ्तार कर उनकी बंदूक कब्जे में ले ली। विजय शंकर ने मीडिया को बताया की पुत्र बधू काजल ने मेरे परिवार का सत्यानाश कर दिया है। मालूम हो कि माधव सेना में कार्यरत है और राजेश भी सैनिक है।
दोहरे हत्याकांड की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। शव लोग को देखने के लिए भीड़ लग गई। एसपी अजय प्रताप ने मीडिया को बताया कि तत्काल की घटना होने के कारण तथ्यों का पता लगाएंगे। बहू के मायके से समधन के अलावा एक और लड़की थी और कितने लोग आए थे इस बात की जानकारी की जा रही है।
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फर्रुखाबाद के घरेलू कलह के कारण दो तो महिलाओं को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। पति की बंदूक की गोली से पत्नी की मौत हो जाने से गुस्साए पति ने समधन को भी मार डाला। पुलिस ने दोहरा हत्याकांड करने के बाद घर से न भागने वाले कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला शिवाजी कॉलोनी गली नंबर चार निवासी पूर्व सैनिक विजय शंकर श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर उनकी लाइसेंसी एक नाली बंदूक कब्जे में ले ली है। जानकारी के मुताबिक, विजय शंकर के पुत्र माधव की मोहल्ला नगला नैन निवासी राजेश श्रीवास्तव की पुत्री काजल से चार फरवरी को विवाह हुआ था। विवाह के बाद बद मिजाज काजल ने सास सत्यवती व ससुर विजय शंकर सहित पति को भी प्रताडित करना शुरू कर दिया। विवाह के बाद काजल ससुराल से जेवरात समेटकर मायके ले गयी। उसने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का भी मुकदमा कर दिया। काजल बीते तीन दिन पूर्व ही ससुराल गई थी और आज काजल की मां सरिता देवी बेटी की ससुराल गई पंचायत करने गई थी। सायं घरेलू बातचीत के दौरान सरिता का सत्यवती से विवाद हुआ और दोनों में मारपीट होने लगी। यह देखकर गुस्साए विजय शंकर ने लाइसेंसी बंदूक से गोली मारने के लिए बंदूक सरिता की ओर सीधी कर दी। जब विजय शंकर ने समधिन को मार डालने के लिए बंदूक का टेगर दबाया तभी पत्नी सत्यवती सरिता के सामने आ गई। सीने में नजदीकी घातक गोली लगने से अट्ठावन वर्षीय सत्यवती की तुरंत ही मौत हो गई। तब गुस्साए विजय शंकर ने मसाला कूपने वाले खल्लड से सरिता के ऊपर प्रहार किये। इसी दौरान काजल ने मां सरिता को बचाने का प्रयास किया हमले से सरिता की मौत हो गई। जबकि काजल गंभीर रूप से घायल हो गयी काजल को लोहिया अस्पताल से मिलिट्री हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। हादसे की जानकारी मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक अजय प्रताप, सीओ सिटी प्रदीप सिंह एवं कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार ने घटनास्थल जाकर जांच पड़ताल की। पुलिस ने घर में मौजूद विजय शंकर को गिरफ्तार कर उनकी बंदूक कब्जे में ले ली। विजय शंकर ने मीडिया को बताया की पुत्र बधू काजल ने मेरे परिवार का सत्यानाश कर दिया है। मालूम हो कि माधव सेना में कार्यरत है और राजेश भी सैनिक है। दोहरे हत्याकांड की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। शव लोग को देखने के लिए भीड़ लग गई। एसपी अजय प्रताप ने मीडिया को बताया कि तत्काल की घटना होने के कारण तथ्यों का पता लगाएंगे। बहू के मायके से समधन के अलावा एक और लड़की थी और कितने लोग आए थे इस बात की जानकारी की जा रही है।
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पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और 140 से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण कई मकान गिर गए।
वरिष्ठ बचाव अधिकारी खतिर अहमद ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू, लक्की मरवत और करक जिलों में बारिश और ओलावृष्टि हुई है, जिससे कई पेड़ उखड़ गये और बिजली के खंभे गिर गये।
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पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण कम से कम पच्चीस लोगों की मौत हो गई और एक सौ चालीस से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण कई मकान गिर गए। वरिष्ठ बचाव अधिकारी खतिर अहमद ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू, लक्की मरवत और करक जिलों में बारिश और ओलावृष्टि हुई है, जिससे कई पेड़ उखड़ गये और बिजली के खंभे गिर गये।
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पताही। सावन की पहली सोमवारी को शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐतिहासिक व पौराणिक धार्मिक स्थल बाबा ठीकरनाथ महादेव मंदिर नारायणपुर व गौरी शंकर महादेव मंदिर महमदा पर भक्तजनों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से हजारों लोगों ने महादेव पर जलाभिषेक किया। कई भक्त पोखर से जल बोझी कर रहे हैं तो कई भक्त बागमती नदी से जलबोझी कर भगवान भोले शंकर को जल चढ़ा रहे थे। प्रखंड के देवापुर, जिहुली, पदुमकेर, रतनसायर, जरदहा, चम्पापुर, बोकाने, पताही आदि शिव मंदिर मंे भी महिलाओं व युवतियों की भीड़ देखी गई। थानाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार गश्त लागाती रही।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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पताही। सावन की पहली सोमवारी को शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐतिहासिक व पौराणिक धार्मिक स्थल बाबा ठीकरनाथ महादेव मंदिर नारायणपुर व गौरी शंकर महादेव मंदिर महमदा पर भक्तजनों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से हजारों लोगों ने महादेव पर जलाभिषेक किया। कई भक्त पोखर से जल बोझी कर रहे हैं तो कई भक्त बागमती नदी से जलबोझी कर भगवान भोले शंकर को जल चढ़ा रहे थे। प्रखंड के देवापुर, जिहुली, पदुमकेर, रतनसायर, जरदहा, चम्पापुर, बोकाने, पताही आदि शिव मंदिर मंे भी महिलाओं व युवतियों की भीड़ देखी गई। थानाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार गश्त लागाती रही। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को कहा कि सभी लोगों को उनकी सरकार में राय रखने का हक है। उन्होंने कहा कि वह चाहे जो हों, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी मानवीय गरिमा, अवसरों में समानता, विधि का शासन, धार्मिक स्वतंत्रता समेत मौलिक स्वतंत्रता में यकीन रखते हैं। यहां पहुंचने के बाद और भारतीय नेतृत्व के साथ बैठकों से पहले सार्वजनिक कार्यंक्रमों में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को संबोधित करते हुए ब्लिंकन ने कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रातिबद्धता को साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रातिबद्धता द्विपक्षीय संबंधों के आधार का एक हिस्सा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि सफल लोकतांत्रिक देशों में जीवंत नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतांत्रिक देशों में जीवंत नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतंत्र को अधिक खुला, ज्यादा समावेशी, ज्यादा लचीला और अधिक समतामूलक बनाने के लिए उनकी जरूरत होती है। ब्लिंकन ने कारोबारी सहयोग, शैक्षणिक कार्यंव््राम, धार्मिक व आध्यात्मिक संबंधों और लाखों परिवारों के बीच संबंधों को समूचे संबंध का प्रामुख स्तम्भ बताया। उन्होंने कहा - संभवतः सबसे अहम है कि हम साझा मूल्यों और साझा आकांक्षाओं से जुड़े हुए हैं जो हमारे लोगों के बीच समान है। भारत के लोग मानवीय गरिमा, अवसरों में समानता, कानून के शासन, धार्मिक व मान्यताओं की स्वतंत्रता समेत मौलिक स्वतंत्रता में भरोसा रखते हैं। ब्लिंकन ने कहा - हम मानते हैं कि सभी लोग अपनी सरकार में आवाज उठाने के हकदार हैं और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, चाहे वह कोईं भी हों। हमारा मकसद इन शब्दों को असल अर्थ देना और इन आदर्शो के प्राति हमारी प्रातिबद्धता को लगातार बढ़ाते रहना है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बिडेन की सरकार बनने के बाद ब्लिंकन की भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने दबे शब्दों में भारत सरकार को कईं नसीहतें दी हैं। उन्होंने भारत में जो चल रहा है उसकी अपने ढंग से व्याख्या की और नसीहत भी दी। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों को जो नया आयाम देने के संकेत दिए हैं, वह उत्साहवर्धक हैं। पहली और सबसे बड़ी बात तो यही है कि अमेरिका ने भारत को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी माना है।
इसे भारत के लिए भी किसी वूटनीतिक उपलब्धि से कम नहीं माना जाना चाहिए। बिडेन के सत्ता में आने के बाद ब्लिंकन पहली बार भारत आए हैं। वह ऐसे नाजुक वक्त में भारत पहुंचे हैं जब अमेरिका न सिर्प घरेलू मोर्चो पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
अमेरिका कोरोना से तो लड़ ही रहा है, साथ ही वह चीन और अफगानिस्तान जैसे संकटों से भी जूझ रहा है। भारत भी इन्हीं मुसीबतों से जूझ रहा है। ब्लिंकन की भारत यात्रा का असल मकसद अफगानिस्तान और चीन के मुद्दों पर भारत को अपने साथ खड़ा करना लगता है।
अफगानिस्तान में जिस रफ्तार से तालिबान अपने पांव पसारता जा रहा है वह अमेरिका और भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत ने तो अफगान में करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं चला रखी हैं। भारत के लिए एक और बड़ा संकट यह भी है कि कहीं तालिबान अपने लड़ाकों को कश्मीर में न भेजने लगे। इसलिए ब्लिंकन ने सुरक्षा चुनौतियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी लंबी चर्चा की।
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को कहा कि सभी लोगों को उनकी सरकार में राय रखने का हक है। उन्होंने कहा कि वह चाहे जो हों, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी मानवीय गरिमा, अवसरों में समानता, विधि का शासन, धार्मिक स्वतंत्रता समेत मौलिक स्वतंत्रता में यकीन रखते हैं। यहां पहुंचने के बाद और भारतीय नेतृत्व के साथ बैठकों से पहले सार्वजनिक कार्यंक्रमों में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को संबोधित करते हुए ब्लिंकन ने कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रातिबद्धता को साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रातिबद्धता द्विपक्षीय संबंधों के आधार का एक हिस्सा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि सफल लोकतांत्रिक देशों में जीवंत नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतांत्रिक देशों में जीवंत नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतंत्र को अधिक खुला, ज्यादा समावेशी, ज्यादा लचीला और अधिक समतामूलक बनाने के लिए उनकी जरूरत होती है। ब्लिंकन ने कारोबारी सहयोग, शैक्षणिक कार्यंव््राम, धार्मिक व आध्यात्मिक संबंधों और लाखों परिवारों के बीच संबंधों को समूचे संबंध का प्रामुख स्तम्भ बताया। उन्होंने कहा - संभवतः सबसे अहम है कि हम साझा मूल्यों और साझा आकांक्षाओं से जुड़े हुए हैं जो हमारे लोगों के बीच समान है। भारत के लोग मानवीय गरिमा, अवसरों में समानता, कानून के शासन, धार्मिक व मान्यताओं की स्वतंत्रता समेत मौलिक स्वतंत्रता में भरोसा रखते हैं। ब्लिंकन ने कहा - हम मानते हैं कि सभी लोग अपनी सरकार में आवाज उठाने के हकदार हैं और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए, चाहे वह कोईं भी हों। हमारा मकसद इन शब्दों को असल अर्थ देना और इन आदर्शो के प्राति हमारी प्रातिबद्धता को लगातार बढ़ाते रहना है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बिडेन की सरकार बनने के बाद ब्लिंकन की भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने दबे शब्दों में भारत सरकार को कईं नसीहतें दी हैं। उन्होंने भारत में जो चल रहा है उसकी अपने ढंग से व्याख्या की और नसीहत भी दी। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों को जो नया आयाम देने के संकेत दिए हैं, वह उत्साहवर्धक हैं। पहली और सबसे बड़ी बात तो यही है कि अमेरिका ने भारत को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी माना है। इसे भारत के लिए भी किसी वूटनीतिक उपलब्धि से कम नहीं माना जाना चाहिए। बिडेन के सत्ता में आने के बाद ब्लिंकन पहली बार भारत आए हैं। वह ऐसे नाजुक वक्त में भारत पहुंचे हैं जब अमेरिका न सिर्प घरेलू मोर्चो पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका कोरोना से तो लड़ ही रहा है, साथ ही वह चीन और अफगानिस्तान जैसे संकटों से भी जूझ रहा है। भारत भी इन्हीं मुसीबतों से जूझ रहा है। ब्लिंकन की भारत यात्रा का असल मकसद अफगानिस्तान और चीन के मुद्दों पर भारत को अपने साथ खड़ा करना लगता है। अफगानिस्तान में जिस रफ्तार से तालिबान अपने पांव पसारता जा रहा है वह अमेरिका और भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत ने तो अफगान में करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं चला रखी हैं। भारत के लिए एक और बड़ा संकट यह भी है कि कहीं तालिबान अपने लड़ाकों को कश्मीर में न भेजने लगे। इसलिए ब्लिंकन ने सुरक्षा चुनौतियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी लंबी चर्चा की।
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कुंभ राशि वाले लोगों की क्या खासियत है और क्या उनमें कमियां हैं, इसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. वो बुद्धिमान होते हैं, रचनात्मक होते हैं और एक डिसीजन मेकर होते हैं.
20 जनवरी से 18 फरवरी के बीच जन्म लेने वाले लोग कुंभ राशि के होते हैं. कुंभा राशि वाले लोग इन्नोवेटर्स हैं और उनमें एक रेबेलियस स्ट्रीक है. वो अनुमानित रूप से चीजों को करने में विश्वास नहीं करते हैं. वो क्रांतिकारी प्राणी हैं जो दुनिया को बदलना चाहते हैं.
वो फ्री-स्पीरिटेड और नॉनकनफॉर्मिस्ट हैं और आमतौर पर ऑफबीट और अनूठी गतिविधियों की ओर झुकाव रखते हैं. इस राशि के प्रसिद्ध नामों में शकीरा, जेनिफर एनिस्टन, एलिसिया कीज और एलिजाबेथ बैंक्स शामिल हैं. यहां आपको इस एयर साइन के बारे में जानने की जरूरत है.
कुंभ राशि के लोग कनवेंशनल रास्ता अपनाने वाले आखिरी लोग हैं. वो सभी ऑफबीट और अनकनवेंशनल ऑप्शन्स के लिए हैं, चाहे वो फिल्म हो, संगीत हो, फैशन हो, आदि. वो कम-से-कम रास्ता अपनाते हैं और अपनी शर्तों पर जीवन जीने में विश्वास करते हैं.
वो अविश्वसनीय रूप से बुद्धिमान और तेज व्यक्ति हैं. कुंभ राशि के जातक इसके बारे में उपद्रव करने के बजाय हाथ की स्थिति का विश्लेषण करके समस्या को हल करने में विश्वास करते हैं. वो खुले दिमाग के होते हैं और हमेशा नए और यहां तक कि परस्पर विरोधी व्यूपॉइंट्स का स्वागत करते हैं.
कुंभ राशि के लोग मिलनसार और गर्म आत्मा होते हैं. वो अपनी क्रांति में सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं और सभी को सहज महसूस कराने का प्रयास करते हैं. वो अपने रिश्तों को महत्व देते हैं और अपने लोगों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.
कुंभ राशि के लोग दुनिया को बदलने और क्रांति लाने के अपने प्रयास में, अक्सर इसके लिए कनवेंशन के खिलाफ जाते हैं. वो चीजों को बदलने पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और कई बार थोड़े जिद्दी भी हो सकते हैं.
कुंभ राशि के लोग धनु राशि के जातकों के अनुकूल होते हैं क्योंकि दोनों ही अपने दृष्टिकोण में स्वतंत्र और साहसी होते हैं. वो इसे मिथुन राशि के लोगों के साथ भी काम कर सकते हैं क्योंकि वो कुंभ राशि वाले लोगों की तरह सामाजिक और गर्म-आत्मा होते हैं. कर्क राशि के लोग भी अपनी समान ऊर्जाओं और विचारधाराओं के कारण कुंभ राशि के लोगों के साथ अच्छी तरह घुल-मिल जाते हैं.
सिंह राशि के लोग मजबूत और विचारों वाली आत्मा होते हैं जो कुंभ राशि के जातकों की तरह ही जिद्दी और हठी होते हैं. इस प्रकार, दोनों राशियों के लिए परस्पर विरोधी दृष्टिकोण और तर्क रखना आसान है. वृषभ राशि के लोग सीधे-सादे और विनम्र प्राणी होते हैं जो कनवेंशन और ट्रैडिशन से चिपके रहते हैं, और इसलिए वो कभी-कभी फ्री-स्पीरिटेड कुंभ राशि वालों के साथ संघर्ष कर सकते हैं.
नोट- यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.
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कुंभ राशि वाले लोगों की क्या खासियत है और क्या उनमें कमियां हैं, इसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. वो बुद्धिमान होते हैं, रचनात्मक होते हैं और एक डिसीजन मेकर होते हैं. बीस जनवरी से अट्ठारह फरवरी के बीच जन्म लेने वाले लोग कुंभ राशि के होते हैं. कुंभा राशि वाले लोग इन्नोवेटर्स हैं और उनमें एक रेबेलियस स्ट्रीक है. वो अनुमानित रूप से चीजों को करने में विश्वास नहीं करते हैं. वो क्रांतिकारी प्राणी हैं जो दुनिया को बदलना चाहते हैं. वो फ्री-स्पीरिटेड और नॉनकनफॉर्मिस्ट हैं और आमतौर पर ऑफबीट और अनूठी गतिविधियों की ओर झुकाव रखते हैं. इस राशि के प्रसिद्ध नामों में शकीरा, जेनिफर एनिस्टन, एलिसिया कीज और एलिजाबेथ बैंक्स शामिल हैं. यहां आपको इस एयर साइन के बारे में जानने की जरूरत है. कुंभ राशि के लोग कनवेंशनल रास्ता अपनाने वाले आखिरी लोग हैं. वो सभी ऑफबीट और अनकनवेंशनल ऑप्शन्स के लिए हैं, चाहे वो फिल्म हो, संगीत हो, फैशन हो, आदि. वो कम-से-कम रास्ता अपनाते हैं और अपनी शर्तों पर जीवन जीने में विश्वास करते हैं. वो अविश्वसनीय रूप से बुद्धिमान और तेज व्यक्ति हैं. कुंभ राशि के जातक इसके बारे में उपद्रव करने के बजाय हाथ की स्थिति का विश्लेषण करके समस्या को हल करने में विश्वास करते हैं. वो खुले दिमाग के होते हैं और हमेशा नए और यहां तक कि परस्पर विरोधी व्यूपॉइंट्स का स्वागत करते हैं. कुंभ राशि के लोग मिलनसार और गर्म आत्मा होते हैं. वो अपनी क्रांति में सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं और सभी को सहज महसूस कराने का प्रयास करते हैं. वो अपने रिश्तों को महत्व देते हैं और अपने लोगों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. कुंभ राशि के लोग दुनिया को बदलने और क्रांति लाने के अपने प्रयास में, अक्सर इसके लिए कनवेंशन के खिलाफ जाते हैं. वो चीजों को बदलने पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और कई बार थोड़े जिद्दी भी हो सकते हैं. कुंभ राशि के लोग धनु राशि के जातकों के अनुकूल होते हैं क्योंकि दोनों ही अपने दृष्टिकोण में स्वतंत्र और साहसी होते हैं. वो इसे मिथुन राशि के लोगों के साथ भी काम कर सकते हैं क्योंकि वो कुंभ राशि वाले लोगों की तरह सामाजिक और गर्म-आत्मा होते हैं. कर्क राशि के लोग भी अपनी समान ऊर्जाओं और विचारधाराओं के कारण कुंभ राशि के लोगों के साथ अच्छी तरह घुल-मिल जाते हैं. सिंह राशि के लोग मजबूत और विचारों वाली आत्मा होते हैं जो कुंभ राशि के जातकों की तरह ही जिद्दी और हठी होते हैं. इस प्रकार, दोनों राशियों के लिए परस्पर विरोधी दृष्टिकोण और तर्क रखना आसान है. वृषभ राशि के लोग सीधे-सादे और विनम्र प्राणी होते हैं जो कनवेंशन और ट्रैडिशन से चिपके रहते हैं, और इसलिए वो कभी-कभी फ्री-स्पीरिटेड कुंभ राशि वालों के साथ संघर्ष कर सकते हैं. नोट- यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.
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पुडुचेरी, (भाषा)। पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बनाने का लक्ष्य तय करते हुए उप राज्यपाल किरण बेदी ने आज सरकार से कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान केंदित करने को कहा और शहर की छवि बदलने के लिए स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान देने का मुद्दा उ"ाया। विधानसभा को उसके बजट सत्र के पहले दिन अपने पारंपरिक संबोधन में बेदी ने कहा, `` हमें कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि निगरानी और पुलिस बल के आधुनिकीरण के जरिए हम पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बना सकें। हम इसे तेजी से हासिल कर सकते हैं। "उन्होंने कहा, `` यह नागरिकों और सैलानियों में सुरक्षा की भावना लाएगा। "पुडुचेरी द्वारा उल्लेखनीय विकास करने खास तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, `` फिर भी सुधार की काफी गुंजाइश है। "उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान केंदित करे ताकि पुडुचेरी देश में पहला खुले में शौच मुक्त केंद शासित प्रदेश बन सके। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सार्वजनिक स्थानों और प्रत्येक घर में शौचालय बनाने के साथ ही लोगों को जागरूक करना चाहिए। किरण ने कहा, `` हमें एक मिशन की तरह कूड़ा संग्रह, टैंको, नालियों और सीवर की सफाई को भी व्यवस्थित करने और केंद शासित प्रदेश की छवि में बदलाव करने की जरूरत है। "पुडुचेरी अपने वित्तीय संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय में खर्च करता है और विकास कार्यों के लिए सिर्फ सीमित हिस्सा होता है। किरण बेदी ने कहा कि इसलिए उचित प्रणाली के माध्यम से आवंटित संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नीतियां बनाना अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार वित्तीय मुद्दों से प्राथमिकता से निपटेगी। उन्होंने कहा कि सरकार केंद शासित प्रदेश को स्मार्ट सिटी की सूची में लाने के लिए प्रयासरत है। उपराज्यपाल ने कहा कि पुडुचेरी नगरपालिका के लिए स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और केंदीय शहरी विकास मंत्रालय को जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्गों, अल्पसंख्यकों, निशक्तों और समाज के अन्य कमजोर तबकों का विकास करने और उन्हें सशक्त करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकार को ``प्रगतिशील नेतृत्व" प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी को मुबारकबाद भी दी।
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पुडुचेरी, । पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बनाने का लक्ष्य तय करते हुए उप राज्यपाल किरण बेदी ने आज सरकार से कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान केंदित करने को कहा और शहर की छवि बदलने के लिए स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान देने का मुद्दा उ"ाया। विधानसभा को उसके बजट सत्र के पहले दिन अपने पारंपरिक संबोधन में बेदी ने कहा, `` हमें कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि निगरानी और पुलिस बल के आधुनिकीरण के जरिए हम पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बना सकें। हम इसे तेजी से हासिल कर सकते हैं। "उन्होंने कहा, `` यह नागरिकों और सैलानियों में सुरक्षा की भावना लाएगा। "पुडुचेरी द्वारा उल्लेखनीय विकास करने खास तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, `` फिर भी सुधार की काफी गुंजाइश है। "उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान केंदित करे ताकि पुडुचेरी देश में पहला खुले में शौच मुक्त केंद शासित प्रदेश बन सके। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सार्वजनिक स्थानों और प्रत्येक घर में शौचालय बनाने के साथ ही लोगों को जागरूक करना चाहिए। किरण ने कहा, `` हमें एक मिशन की तरह कूड़ा संग्रह, टैंको, नालियों और सीवर की सफाई को भी व्यवस्थित करने और केंद शासित प्रदेश की छवि में बदलाव करने की जरूरत है। "पुडुचेरी अपने वित्तीय संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय में खर्च करता है और विकास कार्यों के लिए सिर्फ सीमित हिस्सा होता है। किरण बेदी ने कहा कि इसलिए उचित प्रणाली के माध्यम से आवंटित संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नीतियां बनाना अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार वित्तीय मुद्दों से प्राथमिकता से निपटेगी। उन्होंने कहा कि सरकार केंद शासित प्रदेश को स्मार्ट सिटी की सूची में लाने के लिए प्रयासरत है। उपराज्यपाल ने कहा कि पुडुचेरी नगरपालिका के लिए स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और केंदीय शहरी विकास मंत्रालय को जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्गों, अल्पसंख्यकों, निशक्तों और समाज के अन्य कमजोर तबकों का विकास करने और उन्हें सशक्त करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकार को ``प्रगतिशील नेतृत्व" प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी को मुबारकबाद भी दी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष हसीना बाई बाबूलाल भाटे के निधन के बाद से रिक्त पड़े पद पर भाजपा समर्थित 11 सदस्यों ने बैठक में एक नाम पर मुहर लगाई, जबकि कांग्रेस के शामिल 4 सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और बोले- यह तो लोकतंत्र की हत्या है।
अध्यक्ष के निर्वाचन को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट में हुई बैठक में 16 सदस्यों में 15 सदस्य शामिल थे। जिपं सीईओ ने बंद सभाकक्ष में एक-एक कर दोनों गुटों के सदस्यों से चर्चा की। जिसमें भाजपा समर्थित 11 सदस्यों ने जिपं अध्यक्ष के लिए ग्राम सराय की गंगाबाई पति प्रेमलाल मोरे के नाम का प्रस्ताव रखा। जिपं में रणधीर कैथवास, मायाबाई भैयालाल, गुलाबबाई तिलोकचंद, दौलत हरिसिंह पटेल कांग्रेस समर्थित सदस्य हैं।
वहीं बाकी 11 सदस्य भाजपा समर्थक हैं। इधर, कलेक्टोरेट के बाद एक बैठक भाजपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष सेवादास पटेल के मार्गदर्शन में हुई। जिसमें सदस्यों की आम सहमति के पश्चात ग्राम सराय की गंगाबाई पति प्रेमलाल मोरे को पार्टी की ओर से जिपं अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया। इस कार्यवाही को जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। इंदौर संभाग के संभागायुक्त इस पर अपनी मुहर लगाएंगे।
बैठक का बहिष्कार कर बाहर आए सदस्य रणधीर कैथवास ने बताया भाजपा समर्थित सदस्य सावित्रीबाई बिसनलाल इंदौरे पूर्व में पद से इस्तीफा दे चुकी हैं, वह भी बैठक में उपस्थित थी, जबकि निर्वाचन आयोग का नियम है कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ शासन के दोहरे लाभ के पद पर नहीं रह सकता। सावित्री बाई वर्तमान में आशा कार्यकर्ता के पद पर भी काबिज है। पूर्व में हमने जिला निर्वाचन आयोग में शिकायत भी की थी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
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जिला पंचायत अध्यक्ष हसीना बाई बाबूलाल भाटे के निधन के बाद से रिक्त पड़े पद पर भाजपा समर्थित ग्यारह सदस्यों ने बैठक में एक नाम पर मुहर लगाई, जबकि कांग्रेस के शामिल चार सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया और बोले- यह तो लोकतंत्र की हत्या है। अध्यक्ष के निर्वाचन को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट में हुई बैठक में सोलह सदस्यों में पंद्रह सदस्य शामिल थे। जिपं सीईओ ने बंद सभाकक्ष में एक-एक कर दोनों गुटों के सदस्यों से चर्चा की। जिसमें भाजपा समर्थित ग्यारह सदस्यों ने जिपं अध्यक्ष के लिए ग्राम सराय की गंगाबाई पति प्रेमलाल मोरे के नाम का प्रस्ताव रखा। जिपं में रणधीर कैथवास, मायाबाई भैयालाल, गुलाबबाई तिलोकचंद, दौलत हरिसिंह पटेल कांग्रेस समर्थित सदस्य हैं। वहीं बाकी ग्यारह सदस्य भाजपा समर्थक हैं। इधर, कलेक्टोरेट के बाद एक बैठक भाजपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष सेवादास पटेल के मार्गदर्शन में हुई। जिसमें सदस्यों की आम सहमति के पश्चात ग्राम सराय की गंगाबाई पति प्रेमलाल मोरे को पार्टी की ओर से जिपं अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया। इस कार्यवाही को जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। इंदौर संभाग के संभागायुक्त इस पर अपनी मुहर लगाएंगे। बैठक का बहिष्कार कर बाहर आए सदस्य रणधीर कैथवास ने बताया भाजपा समर्थित सदस्य सावित्रीबाई बिसनलाल इंदौरे पूर्व में पद से इस्तीफा दे चुकी हैं, वह भी बैठक में उपस्थित थी, जबकि निर्वाचन आयोग का नियम है कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ शासन के दोहरे लाभ के पद पर नहीं रह सकता। सावित्री बाई वर्तमान में आशा कार्यकर्ता के पद पर भी काबिज है। पूर्व में हमने जिला निर्वाचन आयोग में शिकायत भी की थी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कृषि मंत्रालय के एगमार्कनेट के अनुसार, हस्तक्षेप के बाद से, महाराष्ट्र के अकोला में तूर की थोक कीमत लगभग 3 फीसदी घटकर 8,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.
सरकार अब दालों की कीमतों को लेकर काफी सतर्क हो गई है और साफ संदेश दे दिया है कि वो किसी तरह की जमोखोरी को बर्दाश्त नहीं करेगी. उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है कि कि सरकार दालों और दूसरे फूड आइटम की जमाखोरी को लेकर काफी सख्त हो गई है. ऐसे में कोई भी व्यापारी इस तरह का कोई काम ना करें किे जिससे बाजार में आर्टिफिशियल कमी या ऐसी कोई आशंका पैदा हो. यह बयान ऐसे समय में आया है जब बेमौसम बारिश हो रही है और देश मे फसल के नुकसान की आशंका बढ़ गई है. पिछले साल अक्टूबर में बेमौसम बारिश की वजह से फसल के नुकसान के बाद कम सप्लाई होने के कारण खरीफ दाल, तुअर के स्टॉक की जमाखोरी शुरू कर दी है.
अधिकारी अगले साल की अरहर की फसल को भी देख रहे हैं, जो मौसम विज्ञानियों की अल नीनो की भविष्यवाणी के सच होने पर प्रभावित हो सकती है. घरेलू दलहन बास्केट में अरहर की हिस्सेदारी 13 फीसदी है. सचिव रोहित कुमार सिंह के अनुसार अरहर की कीमत सरकार द्वारा व्यापारियों पर शिकंजा कसने के बाद स्थिर हो गई है, स्टॉक के खुलासे को अनिवार्य कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सरकार के पास अच्छा स्टॉक है.
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार इंपोर्टर म्यांमार में दालों की जमाखोरी कर रहे हैं और कीमत में इजाफे के बीच मुनाफावसूली कर रहे हैं. 27 मार्च को उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा राज्य सरकारों के कॉर्डिनेशन में इंपोटर्स, मिलर्स, स्टॉकिस्टों और व्यापारियों के तुअर के स्टॉक की निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन करने के बाद दालों, विशेष रूप से अरहर की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई.
कृषि मंत्रालय के एगमार्कनेट के अनुसार, हस्तक्षेप के बाद से, महाराष्ट्र के अकोला में तूर की थोक कीमत लगभग 3 फीसदी घटकर 8,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. एगमार्कनेट के अनुसार, जनवरी-मार्च में थोक मिल-क्वालिटी वाली तूर की कीमतों में 12.1 फीसदी की वृद्धि हुई थी, जिससे सरकार को स्टॉक डिसक्लॉजर को अनिवार्य करने को कहा गया था. जमाखोरी न हो सरकार इसके लिए अरहर और उड़द के स्टॉक के खुलासे पर कड़ी निगरानी रख रही है.
केंद्र के हस्तक्षेप से 21 अप्रैल तक, 14,265 इंपोटर्स, व्यापारियों, मिलर्स और स्टॉकिस्टों ने अपने स्टॉक में 507,303 टन अरहर का खुलासा किया है, जबकि एक महीने पहले 12,850 बेनिफिशरीज ने 96,593 टन अरहर का स्टॉक किया था. वित्त वर्ष 2022-23 जुलाई-जून में तुअर का प्रोडक्शन 34 लाख टन (एमटी) होने की उम्मीद हैं, जबकि कृषि मंत्रालय ने अपने दूसरे एडवांस अनुमान में लगभग 37 लाख टन का अनुमान लगाया था. हालांकि, उद्योग को उम्मीद है कि वर्ष के लिए उत्पादन 2.7-2.8 मीट्रिक टन कम रहेगा, क्योंकि अक्टूबर में मूसलाधार बारिश से महाराष्ट्र में अरहर की खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है. सरकार का कहना है कि घबराने की जरुरत नहीं है, केंद्र के पास 150,000 टन अरहर का अच्छा स्टॉक है.
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कृषि मंत्रालय के एगमार्कनेट के अनुसार, हस्तक्षेप के बाद से, महाराष्ट्र के अकोला में तूर की थोक कीमत लगभग तीन फीसदी घटकर आठ,सात सौ रुपयापये प्रति क्विंटल हो गई है. सरकार अब दालों की कीमतों को लेकर काफी सतर्क हो गई है और साफ संदेश दे दिया है कि वो किसी तरह की जमोखोरी को बर्दाश्त नहीं करेगी. उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है कि कि सरकार दालों और दूसरे फूड आइटम की जमाखोरी को लेकर काफी सख्त हो गई है. ऐसे में कोई भी व्यापारी इस तरह का कोई काम ना करें किे जिससे बाजार में आर्टिफिशियल कमी या ऐसी कोई आशंका पैदा हो. यह बयान ऐसे समय में आया है जब बेमौसम बारिश हो रही है और देश मे फसल के नुकसान की आशंका बढ़ गई है. पिछले साल अक्टूबर में बेमौसम बारिश की वजह से फसल के नुकसान के बाद कम सप्लाई होने के कारण खरीफ दाल, तुअर के स्टॉक की जमाखोरी शुरू कर दी है. अधिकारी अगले साल की अरहर की फसल को भी देख रहे हैं, जो मौसम विज्ञानियों की अल नीनो की भविष्यवाणी के सच होने पर प्रभावित हो सकती है. घरेलू दलहन बास्केट में अरहर की हिस्सेदारी तेरह फीसदी है. सचिव रोहित कुमार सिंह के अनुसार अरहर की कीमत सरकार द्वारा व्यापारियों पर शिकंजा कसने के बाद स्थिर हो गई है, स्टॉक के खुलासे को अनिवार्य कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सरकार के पास अच्छा स्टॉक है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार इंपोर्टर म्यांमार में दालों की जमाखोरी कर रहे हैं और कीमत में इजाफे के बीच मुनाफावसूली कर रहे हैं. सत्ताईस मार्च को उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा राज्य सरकारों के कॉर्डिनेशन में इंपोटर्स, मिलर्स, स्टॉकिस्टों और व्यापारियों के तुअर के स्टॉक की निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन करने के बाद दालों, विशेष रूप से अरहर की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई. कृषि मंत्रालय के एगमार्कनेट के अनुसार, हस्तक्षेप के बाद से, महाराष्ट्र के अकोला में तूर की थोक कीमत लगभग तीन फीसदी घटकर आठ,सात सौ रुपयापये प्रति क्विंटल हो गई है. एगमार्कनेट के अनुसार, जनवरी-मार्च में थोक मिल-क्वालिटी वाली तूर की कीमतों में बारह.एक फीसदी की वृद्धि हुई थी, जिससे सरकार को स्टॉक डिसक्लॉजर को अनिवार्य करने को कहा गया था. जमाखोरी न हो सरकार इसके लिए अरहर और उड़द के स्टॉक के खुलासे पर कड़ी निगरानी रख रही है. केंद्र के हस्तक्षेप से इक्कीस अप्रैल तक, चौदह,दो सौ पैंसठ इंपोटर्स, व्यापारियों, मिलर्स और स्टॉकिस्टों ने अपने स्टॉक में पाँच सौ सात,तीन सौ तीन टन अरहर का खुलासा किया है, जबकि एक महीने पहले बारह,आठ सौ पचास बेनिफिशरीज ने छियानवे,पाँच सौ तिरानवे टन अरहर का स्टॉक किया था. वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस जुलाई-जून में तुअर का प्रोडक्शन चौंतीस लाख टन होने की उम्मीद हैं, जबकि कृषि मंत्रालय ने अपने दूसरे एडवांस अनुमान में लगभग सैंतीस लाख टन का अनुमान लगाया था. हालांकि, उद्योग को उम्मीद है कि वर्ष के लिए उत्पादन दो.सात-दो.आठ मीट्रिक टन कम रहेगा, क्योंकि अक्टूबर में मूसलाधार बारिश से महाराष्ट्र में अरहर की खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है. सरकार का कहना है कि घबराने की जरुरत नहीं है, केंद्र के पास एक सौ पचास,शून्य टन अरहर का अच्छा स्टॉक है.
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मुंबई. अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने हाल के एक इंटरव्यू में अपनी कथित जातिवादी टिप्पणी के लिए माफी मांगी है. उन्होंने कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया और उनकी मंशा किसी की भावना को आहत करने की नहीं थी.
मुंबई पुलिस ने कल कहा कि वह उस शिकायत की जांच कर रही है, जिसमें जातिवादी मुहावरे के इस्तेमाल के लिए शिल्पा और सलमान खान पर मामला दर्ज करने की मांग की गयी है. शिल्पा (42) ने ट्विटर पर माफी मांगी.
पुलिस के मुताबिक रोजगार अघाड़ी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव नवीन रामचंद्र लाडे ने अंधेरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने कथित जातिवादी टिप्पणी के लिए दोनों अभिनेताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी.
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मुंबई. अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने हाल के एक इंटरव्यू में अपनी कथित जातिवादी टिप्पणी के लिए माफी मांगी है. उन्होंने कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया और उनकी मंशा किसी की भावना को आहत करने की नहीं थी. मुंबई पुलिस ने कल कहा कि वह उस शिकायत की जांच कर रही है, जिसमें जातिवादी मुहावरे के इस्तेमाल के लिए शिल्पा और सलमान खान पर मामला दर्ज करने की मांग की गयी है. शिल्पा ने ट्विटर पर माफी मांगी. पुलिस के मुताबिक रोजगार अघाड़ी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव नवीन रामचंद्र लाडे ने अंधेरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने कथित जातिवादी टिप्पणी के लिए दोनों अभिनेताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी.
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PATNA : 17 मार्च को मुसल्लहपुर समिति में भीषण आग लग गई थी। इस दौरान 6 दमकल गाडि़यों की मदद से आग पर काबू पाया गया था। व्यापारियों ने दावा किया था कि उनकी लगभग 5 से 6 लाख रुपए की संपत्ति जलकर खाक हो गई है। आग लगने के पीछे सबसे बड़ा कारण खुले में रखे पुआल को जलाना है।
बाजार समिति में कारोबारी पुआल और कचरा में आग लगा देते हैं। ऐसे ही लगाए गए पुआल के ढेर में आग को इस रिपोर्टर में कैद कर लिया। पछिया हवा के बहाव के बीच पुआल के ढेर में आग लगा दिया गया। ऊपर से बिजली का तार गुजर रहा है। जहां पर आग लगाई गई उससे कुछ दूरी पर फुटपाथ पर दुकान आबाद थी। आग की एक चिंगारी मंडी को बर्बाद करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि फल, सजी, मछली और बकरी की बिक्री को लेकर मुसल्लहपुर बाजार समिति प्रसिद्ध है। यह मंडी पटना जिला को नहीं, बल्कि बिहार के अन्य जिलों को भी फल और सब्जी की आपूर्ति करता है। फिर भी मंडी में गंदगी के बीच आग लगने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
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PATNA : सत्रह मार्च को मुसल्लहपुर समिति में भीषण आग लग गई थी। इस दौरान छः दमकल गाडि़यों की मदद से आग पर काबू पाया गया था। व्यापारियों ने दावा किया था कि उनकी लगभग पाँच से छः लाख रुपए की संपत्ति जलकर खाक हो गई है। आग लगने के पीछे सबसे बड़ा कारण खुले में रखे पुआल को जलाना है। बाजार समिति में कारोबारी पुआल और कचरा में आग लगा देते हैं। ऐसे ही लगाए गए पुआल के ढेर में आग को इस रिपोर्टर में कैद कर लिया। पछिया हवा के बहाव के बीच पुआल के ढेर में आग लगा दिया गया। ऊपर से बिजली का तार गुजर रहा है। जहां पर आग लगाई गई उससे कुछ दूरी पर फुटपाथ पर दुकान आबाद थी। आग की एक चिंगारी मंडी को बर्बाद करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि फल, सजी, मछली और बकरी की बिक्री को लेकर मुसल्लहपुर बाजार समिति प्रसिद्ध है। यह मंडी पटना जिला को नहीं, बल्कि बिहार के अन्य जिलों को भी फल और सब्जी की आपूर्ति करता है। फिर भी मंडी में गंदगी के बीच आग लगने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की तस्वीरों ने सभी का दिल जीत लिया। दोनों ने 14-15 नवंबर को शादी करने के बाद अपनी शादी से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थी। वहीं, हाल ही में हुए उनके पहले रिसेप्शन ने सभी की ध्यान पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया। दोनों के बीच मौजूदा प्यार को देखकर इश्कबाज की एक्ट्रेस सुरभि चांदना का दिल भी कहीं न कहीं प्यार की दुनिया में खो गया। इस बात की जानकारी खुद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दी।
इश्कबाज से सुरभि चांदना उर्फ अन्निका शुक्रवार को दीपवीर के रिसेप्शन की तस्वीर देखने के बाद प्यार में पड़ गई। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद अपनी इंस्टा स्टोरी के जरिए दी। सुरभि चांदना के इंस्टा स्टोरी में बताया कि वो दीपिका-रणवीर के रिसेप्शन की तस्वीरें और वीडियो को देखकर प्यार में पड़ गई। हर कोई रिसेप्शन में खूबसूरत नजर आ रहा था। सभी चीजों को देखने के बाद उनका दिल प्यार की वादियों में खो गया। आखिर हो भी क्यों न दीपवीर अपने रिसेप्शन में दिख ही इतने सुदंर रहे थे।
इसके साथ ही सीरियल इश्कबाज से सुरभि चांदना ने विदाई ले ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए इस बात का खुलासा अपने फैन्स के सामने किया है। सुरभि ने अपने पोस्ट में इस सीरियल में अन्निका के किरदार को पसंद करने वाले लोगों का आभारी व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि वो अनिका के किरदार को निभाने को बहुत मिस करने वाली है। ट्विटर पर अपनी बात करते हुए सुरभि बहुत ही इमोशनल हो गई थी।
सुरभि ने अपने ट्विटर पर तीन वीडियो पोस्ट किए थे जिसमें पहले में उन्होंने कहा कि वह दिल से इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का धन्यवाद करना चाहती क्योंकि उन्होंने मेरी तरफ से जवाब पाने का इतना इंतजार किया। तो अब ये खबर मैं बता ही देती हूँ कि मैं अब एक नई जर्नी की शुरुआत करने जा रही हूँ और इश्कबाज जो मेरे दिल के बहुत करीब है उससे विदा ले रही हूँ। मैंने जो भी इस सफर में पाया है चाहें वो आपका प्यार हो या फिर आपकी केयर आप ये हमेशा बनाये रखे। इसके साथ ही उन्होंने कई बातें भी कहीं।
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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की तस्वीरों ने सभी का दिल जीत लिया। दोनों ने चौदह-पंद्रह नवंबर को शादी करने के बाद अपनी शादी से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थी। वहीं, हाल ही में हुए उनके पहले रिसेप्शन ने सभी की ध्यान पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया। दोनों के बीच मौजूदा प्यार को देखकर इश्कबाज की एक्ट्रेस सुरभि चांदना का दिल भी कहीं न कहीं प्यार की दुनिया में खो गया। इस बात की जानकारी खुद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दी। इश्कबाज से सुरभि चांदना उर्फ अन्निका शुक्रवार को दीपवीर के रिसेप्शन की तस्वीर देखने के बाद प्यार में पड़ गई। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद अपनी इंस्टा स्टोरी के जरिए दी। सुरभि चांदना के इंस्टा स्टोरी में बताया कि वो दीपिका-रणवीर के रिसेप्शन की तस्वीरें और वीडियो को देखकर प्यार में पड़ गई। हर कोई रिसेप्शन में खूबसूरत नजर आ रहा था। सभी चीजों को देखने के बाद उनका दिल प्यार की वादियों में खो गया। आखिर हो भी क्यों न दीपवीर अपने रिसेप्शन में दिख ही इतने सुदंर रहे थे। इसके साथ ही सीरियल इश्कबाज से सुरभि चांदना ने विदाई ले ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए इस बात का खुलासा अपने फैन्स के सामने किया है। सुरभि ने अपने पोस्ट में इस सीरियल में अन्निका के किरदार को पसंद करने वाले लोगों का आभारी व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि वो अनिका के किरदार को निभाने को बहुत मिस करने वाली है। ट्विटर पर अपनी बात करते हुए सुरभि बहुत ही इमोशनल हो गई थी। सुरभि ने अपने ट्विटर पर तीन वीडियो पोस्ट किए थे जिसमें पहले में उन्होंने कहा कि वह दिल से इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का धन्यवाद करना चाहती क्योंकि उन्होंने मेरी तरफ से जवाब पाने का इतना इंतजार किया। तो अब ये खबर मैं बता ही देती हूँ कि मैं अब एक नई जर्नी की शुरुआत करने जा रही हूँ और इश्कबाज जो मेरे दिल के बहुत करीब है उससे विदा ले रही हूँ। मैंने जो भी इस सफर में पाया है चाहें वो आपका प्यार हो या फिर आपकी केयर आप ये हमेशा बनाये रखे। इसके साथ ही उन्होंने कई बातें भी कहीं।
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गाजियाबाद। मुरादनगर के आर्यनगर स्थित क्लीनिक में चिकित्सक को बदमाशों ने गोलियों से भून दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना शनिवार देर रात की है।
उपायुक्त ग्रामीण रवि कुमार ने रविवार को बताया कि शनिवार रात आर्य नगर कॉलोनी में शमशाद नामक व्यक्ति अपना क्लीनिक चलाते हैं।
रात में वे अपने क्लीनिक में बैठे थे। तभी मोटरसाइकिल पर सवार बदमाश मरीज बनकर आए और डॉक्टर शमशाद पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी और फरार हो गए।
उन्होंने कहा कि गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा होकर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रवि कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। हालांकि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन कर दिया गया है।
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गाजियाबाद। मुरादनगर के आर्यनगर स्थित क्लीनिक में चिकित्सक को बदमाशों ने गोलियों से भून दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना शनिवार देर रात की है। उपायुक्त ग्रामीण रवि कुमार ने रविवार को बताया कि शनिवार रात आर्य नगर कॉलोनी में शमशाद नामक व्यक्ति अपना क्लीनिक चलाते हैं। रात में वे अपने क्लीनिक में बैठे थे। तभी मोटरसाइकिल पर सवार बदमाश मरीज बनकर आए और डॉक्टर शमशाद पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी और फरार हो गए। उन्होंने कहा कि गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा होकर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रवि कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। हालांकि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन कर दिया गया है।
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गृहरक्षाकवच मन्त्र
घर बान्धम दोर मान्धम उटन बन्धन आर । बन्धन करीनू आमी नामे ते अल्लार । जिब्राईल, मीकाईल, ईस्राफील, आर । इज्राईल अल्लार गोलाम हुकुम बर्दार । बाड़िर चारि कोने ईहादेर राखिया मौजूद । अल्लाह वो नबीर नामे भेजिया दरूद। बन्धन करीनूं आमी (फलानार) बड़ी । मेहर करिवे अल्ला आपे पाक बारी। एई बाड़ीर ऊपर ते भूत-प्रेत डाईने योगिनी, देव दैत्य यदि थाके केहो । मारिया गुर्जर बाढ़ी दूर करके देहो। या इलाहो, माबूद, करीम, रहीम, साबूद, बहक लाइलाहा इल्लल्लाहा मोहम्मदुर रसूलल्लाह।
किसी भी शनिवार या मंगलवार को चार काली मिट्टी के घड़े लाकर उनमें सात गांवों की मिट्टी लाकर रखें। शनिवार या मंगलवार को ही किसी लुहार के यहाँ से चार लोहे की कांटी बनवायें और सात घाट का पानी तथा बिना फूले सीमल गाछ की जड़ लाकर इन समस्त वस्तुओं के चार हिस्से करके चारों घड़ों में रखकर प्रत्येक घड़े में तीन-तीन बार उक्त मन्त्र पढ़कर उनका मुँह ढक्कन से अच्छी तरह बन्द करके थोड़ा-सा सरसों का तेल घड़ों के ऊपर लगा दें। अब चारो घड़ों को घर के चारो कोनों में अजान देते हुए एक-एक घड़ा एक-एक कोने में गाड़ दें। इस प्रकार का प्रयोग पूर्णतः गोपनीयता के साथ करें। ऐसा करने से वह घर ताजिन्दगी सभी आफ़तों से महफूज बना रहेगा।
गृह रक्षामन्त्र
या अल्लाह पाक, इस आंगन को मैं आज करता हूँ बन्द, हजरत सुलेमानी की बरकत से बन्द, हजरत मूसा की आज्ञा से बन्द, हजरत अली की शमेशर से बन्द, हजरत अहमद के कलाम से बन्द, या रहमान की रहमत से बन्द, या करीम की करम से बन्द, या खालिक की बरकत से बन्द, या मालिक की रहमत से बंद, या अल्लाह पाक मालिक रब्बुल गफूर, हमारे इस दोआ को तू करले कबूल, बहक्के हक ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुरसूलल्लाह।
घर की अस्थायी रक्षा करने के लिए यह एक आसान किन्तु शीघ्र प्रभावशाली और विशेष चमत्कारी मन्त्रप्रयोग है । रात्रि में सोने से पूर्व बुजू (हाथ, पाँव, मुँह धोकर) करके पानी के साथ पाँच दफा उक्त मन्त्र पढ़कर ताली मारकर सो जाये। इस ताली की आवाज घर के जितने हिस्से तक पहुंच जायेगी, घर का उतना ही भाग पूर्णतः रक्षित रहेगा। इस प्रयोग को प्रतिदिन रात्रि में नियमपूर्वक करते रहने से किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं होगी।
आग कम करने का मन्त्र
रहमकुन अए इलाही पाक बारी, इस घर के ऊपर अपने फजल से कर तू
रहमत - जारी। जैसी रहमत की थी तूने खलील पर, वैसी रहमत कर तू ए परवरदिगार । बहके इकला हलाहा इल्लल्लाहा मुहम्मदुर रसूलल्लाह।
यदि अचानक किसी घर में आग लग जाय तो चाहिए कि तुरन्त वुजू (हाथ, पाँव, धोकर) करके पाक-साफ होकर थोड़ी-सी साफ-सुथरी मिट्टी अपने हाथों में लेकर इक्कीस बार उक्त मन्त्र को पढ़कर मिट्टी पर फूँक मार दें तो आश्चर्यजनक रूप से उस घर में लगी हुई आग में कमी हो जायेगी।
देह - रक्षक मुस्लिम मन्त्र
दोआ आयतल कुर्सी बन्दन कोरान, बाहिरे भीतरे सुब्हान, लोहे की कोठरी, ताम्बे का किवाड़, सामने की छड़ी पैगम्बरेर बाड़ी, अमुकेर शरीर र दिनेर चारि पहर, रातिर चारि पहर किन्छू नाहिं देखी खाली, बहके हक लाएलाहा
इल्लल्लाह महम्मदुर रसूलल्लाह ।
एक बुजुर्ग मौलवी ने इस मन्त्र के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक अत्यन्त ही सरल एवं हानिरहित होने के साथ-साथ शीघ्र प्रभावशाली रक्षक मन्त्र है। उस मौलवी के कथनानुसार प्रतिदिन नमाज के पूर्व इस मन्त्र को जप करके अपने दोनों हाथ पूरे शरीर पर फेर लेने से साधक का शरीर तमाम तरह की भौतिक तथा पारलौकिक बाधाओं से पूर्णतः महफूज हो जाता है। फिर उसे किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक और आत्मिक परेशानी उत्पन्न नहीं होती है। पीर- पैगम्बर बुलाने का मन्त्र
ॐ बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, या जिब्राईल, या तत काफीलया, अज्राईल, या मेखाईल बहक, या बन्धु हयन - हयन, ईस्मन-ईस्मन, बहक लाइल्लाहो इल्ला हो, मोहम्मद रसूलल्लाहो खतुमां सलेमान बिंदाउद अले सलाम हजरकाब्द, हजरकाब्द, हजरकाब्द।
यह एक अत्यन्त चमत्कारी मन्त्रप्रयोग है। प्रतिदिन रात्रि में सोते समय धूपलोबान करके चालीस दिनों तक नित्य प्रति रात्रि में १०८ दफा इस मन्त्र का पाठ करते रहें। प्रयोग- समाप्ति के पश्चात् पीर-पैगम्बर अथवा कोई पवित्र रूह सफेद वस्त्र धारण किये हुए साधक के समक्ष प्रकट होकर उसे मुँहमांगा वरदान देने को कहेगी। साधक को ऐसे में चाहिए कि वह तुरन्त ही कोई अच्छी मुराद मांग ले । यदि उसने कोई वरदान नहीं मांगा तो वह रूह साधक पर नाराज होकर उसका अनिष्ट भी कर सकती है। इस प्रयोग को विशेष सावधानी के साथ किसी आमिल के निर्देशन में ही करना चाहिये ।
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गृहरक्षाकवच मन्त्र घर बान्धम दोर मान्धम उटन बन्धन आर । बन्धन करीनू आमी नामे ते अल्लार । जिब्राईल, मीकाईल, ईस्राफील, आर । इज्राईल अल्लार गोलाम हुकुम बर्दार । बाड़िर चारि कोने ईहादेर राखिया मौजूद । अल्लाह वो नबीर नामे भेजिया दरूद। बन्धन करीनूं आमी बड़ी । मेहर करिवे अल्ला आपे पाक बारी। एई बाड़ीर ऊपर ते भूत-प्रेत डाईने योगिनी, देव दैत्य यदि थाके केहो । मारिया गुर्जर बाढ़ी दूर करके देहो। या इलाहो, माबूद, करीम, रहीम, साबूद, बहक लाइलाहा इल्लल्लाहा मोहम्मदुर रसूलल्लाह। किसी भी शनिवार या मंगलवार को चार काली मिट्टी के घड़े लाकर उनमें सात गांवों की मिट्टी लाकर रखें। शनिवार या मंगलवार को ही किसी लुहार के यहाँ से चार लोहे की कांटी बनवायें और सात घाट का पानी तथा बिना फूले सीमल गाछ की जड़ लाकर इन समस्त वस्तुओं के चार हिस्से करके चारों घड़ों में रखकर प्रत्येक घड़े में तीन-तीन बार उक्त मन्त्र पढ़कर उनका मुँह ढक्कन से अच्छी तरह बन्द करके थोड़ा-सा सरसों का तेल घड़ों के ऊपर लगा दें। अब चारो घड़ों को घर के चारो कोनों में अजान देते हुए एक-एक घड़ा एक-एक कोने में गाड़ दें। इस प्रकार का प्रयोग पूर्णतः गोपनीयता के साथ करें। ऐसा करने से वह घर ताजिन्दगी सभी आफ़तों से महफूज बना रहेगा। गृह रक्षामन्त्र या अल्लाह पाक, इस आंगन को मैं आज करता हूँ बन्द, हजरत सुलेमानी की बरकत से बन्द, हजरत मूसा की आज्ञा से बन्द, हजरत अली की शमेशर से बन्द, हजरत अहमद के कलाम से बन्द, या रहमान की रहमत से बन्द, या करीम की करम से बन्द, या खालिक की बरकत से बन्द, या मालिक की रहमत से बंद, या अल्लाह पाक मालिक रब्बुल गफूर, हमारे इस दोआ को तू करले कबूल, बहक्के हक ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदुरसूलल्लाह। घर की अस्थायी रक्षा करने के लिए यह एक आसान किन्तु शीघ्र प्रभावशाली और विशेष चमत्कारी मन्त्रप्रयोग है । रात्रि में सोने से पूर्व बुजू करके पानी के साथ पाँच दफा उक्त मन्त्र पढ़कर ताली मारकर सो जाये। इस ताली की आवाज घर के जितने हिस्से तक पहुंच जायेगी, घर का उतना ही भाग पूर्णतः रक्षित रहेगा। इस प्रयोग को प्रतिदिन रात्रि में नियमपूर्वक करते रहने से किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं होगी। आग कम करने का मन्त्र रहमकुन अए इलाही पाक बारी, इस घर के ऊपर अपने फजल से कर तू रहमत - जारी। जैसी रहमत की थी तूने खलील पर, वैसी रहमत कर तू ए परवरदिगार । बहके इकला हलाहा इल्लल्लाहा मुहम्मदुर रसूलल्लाह। यदि अचानक किसी घर में आग लग जाय तो चाहिए कि तुरन्त वुजू करके पाक-साफ होकर थोड़ी-सी साफ-सुथरी मिट्टी अपने हाथों में लेकर इक्कीस बार उक्त मन्त्र को पढ़कर मिट्टी पर फूँक मार दें तो आश्चर्यजनक रूप से उस घर में लगी हुई आग में कमी हो जायेगी। देह - रक्षक मुस्लिम मन्त्र दोआ आयतल कुर्सी बन्दन कोरान, बाहिरे भीतरे सुब्हान, लोहे की कोठरी, ताम्बे का किवाड़, सामने की छड़ी पैगम्बरेर बाड़ी, अमुकेर शरीर र दिनेर चारि पहर, रातिर चारि पहर किन्छू नाहिं देखी खाली, बहके हक लाएलाहा इल्लल्लाह महम्मदुर रसूलल्लाह । एक बुजुर्ग मौलवी ने इस मन्त्र के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक अत्यन्त ही सरल एवं हानिरहित होने के साथ-साथ शीघ्र प्रभावशाली रक्षक मन्त्र है। उस मौलवी के कथनानुसार प्रतिदिन नमाज के पूर्व इस मन्त्र को जप करके अपने दोनों हाथ पूरे शरीर पर फेर लेने से साधक का शरीर तमाम तरह की भौतिक तथा पारलौकिक बाधाओं से पूर्णतः महफूज हो जाता है। फिर उसे किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक और आत्मिक परेशानी उत्पन्न नहीं होती है। पीर- पैगम्बर बुलाने का मन्त्र ॐ बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, या जिब्राईल, या तत काफीलया, अज्राईल, या मेखाईल बहक, या बन्धु हयन - हयन, ईस्मन-ईस्मन, बहक लाइल्लाहो इल्ला हो, मोहम्मद रसूलल्लाहो खतुमां सलेमान बिंदाउद अले सलाम हजरकाब्द, हजरकाब्द, हजरकाब्द। यह एक अत्यन्त चमत्कारी मन्त्रप्रयोग है। प्रतिदिन रात्रि में सोते समय धूपलोबान करके चालीस दिनों तक नित्य प्रति रात्रि में एक सौ आठ दफा इस मन्त्र का पाठ करते रहें। प्रयोग- समाप्ति के पश्चात् पीर-पैगम्बर अथवा कोई पवित्र रूह सफेद वस्त्र धारण किये हुए साधक के समक्ष प्रकट होकर उसे मुँहमांगा वरदान देने को कहेगी। साधक को ऐसे में चाहिए कि वह तुरन्त ही कोई अच्छी मुराद मांग ले । यदि उसने कोई वरदान नहीं मांगा तो वह रूह साधक पर नाराज होकर उसका अनिष्ट भी कर सकती है। इस प्रयोग को विशेष सावधानी के साथ किसी आमिल के निर्देशन में ही करना चाहिये ।
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इन्दौर। कृत्रिम अंगों के लिए विभिन्न क्षेत्रों से 12 बसों में दिव्यांग अमरदास हॉल पहुंचे, लेकिन हॉल के अंदर चाकचौबंद व्यवस्था का सिर्फ आश्वासन ही दिखा। मुख्य गेट से 100 मीटर से अधिक की दूरी दिव्यांगों को घिसटकर पार करना पड़ी। प्रशासन ने सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग को जिम्मा सौंपा, लेकिन कर्मचारी और अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहे।
अंगों की उम्मीद में 12 बसों से पहुंचे दिव्यांगों के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नजर नहीं आया। विभाग की आला अधिकारी सुचिता फिरकी बेग को जानकारी ही नहीं थी कि कितनी ट्रायसाइकिल, व्हीलचेयर, कानों की मशीन, कृत्रिम हाथ-पैर की व्यवस्था की गई है। कृत्रिम अंगों के लिए पहुंचे 1 हजार से अधिक दिव्यांग समस्याओं से संघर्ष करते रहे। आज प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर जनसहयोग शिविर के माध्यम से कृत्रिम अंगों के वितरण का आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी सहित विभिन्न क्षेत्र के पार्षद और अधिकारी मौजूद थे। 11. 30 बजे से शुरु होने वाले कार्यक्रम के लिए 10 बजे से दिव्यांगों को एकत्रित किया गया, लेकिन विभाग के कर्मचारी व्हीलचेयर की व्यवस्था करना ही भूल गए। बांटी जाने वाली नई कुर्सियों के इस्तेमाल के लिए भी आपसी हुज्जत करते रहे। 2 व्हीलचेयरों को हजार से अधिक दिव्यांगों को हॉल में लाने के लिए तैनात किया गया, लेकिन व्हीलचेयर पर कोई भी कर्मचारी नजर नहीं आया। Share:
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इन्दौर। कृत्रिम अंगों के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बारह बसों में दिव्यांग अमरदास हॉल पहुंचे, लेकिन हॉल के अंदर चाकचौबंद व्यवस्था का सिर्फ आश्वासन ही दिखा। मुख्य गेट से एक सौ मीटर से अधिक की दूरी दिव्यांगों को घिसटकर पार करना पड़ी। प्रशासन ने सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग को जिम्मा सौंपा, लेकिन कर्मचारी और अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहे। अंगों की उम्मीद में बारह बसों से पहुंचे दिव्यांगों के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नजर नहीं आया। विभाग की आला अधिकारी सुचिता फिरकी बेग को जानकारी ही नहीं थी कि कितनी ट्रायसाइकिल, व्हीलचेयर, कानों की मशीन, कृत्रिम हाथ-पैर की व्यवस्था की गई है। कृत्रिम अंगों के लिए पहुंचे एक हजार से अधिक दिव्यांग समस्याओं से संघर्ष करते रहे। आज प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर जनसहयोग शिविर के माध्यम से कृत्रिम अंगों के वितरण का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी सहित विभिन्न क्षेत्र के पार्षद और अधिकारी मौजूद थे। ग्यारह. तीस बजे से शुरु होने वाले कार्यक्रम के लिए दस बजे से दिव्यांगों को एकत्रित किया गया, लेकिन विभाग के कर्मचारी व्हीलचेयर की व्यवस्था करना ही भूल गए। बांटी जाने वाली नई कुर्सियों के इस्तेमाल के लिए भी आपसी हुज्जत करते रहे। दो व्हीलचेयरों को हजार से अधिक दिव्यांगों को हॉल में लाने के लिए तैनात किया गया, लेकिन व्हीलचेयर पर कोई भी कर्मचारी नजर नहीं आया। Share:
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लंपी स्किन वायरस ने बिहार में दस्तक दे दी है। गाय और भैंस में काटने वाली मक्खी, मच्छर और टिक्स (परजीवी) से फैलने वाले लंपी स्किन डिजीज से दो पशुओं की मौत हो गई है। पटना सहित 10 जिलों के कई सैकड़ों गांवों में 1258 पशुओं में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। इस बीमारी से प्रभावित दुधारू पशुओं से इसके दूध में वायरस नहीं आता है, लेकिन दूध उत्पादन कम हो जाता है।
इस बीमारी का मनुष्य पर प्रभाव नहीं पड़ता है। बुधवार को पशु व मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव डॉ. एन. सरवण कुमार ने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए 9 जनवरी से पशुओं निःशुल्क टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में है।
पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान पटना क्षेत्रीय निदेशक एवं जिला स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। पूरे राज्य में 1. 38 करोड़ गाय में लंपी रोग की रोकथाम को वैक्सीनेशन कराया जा रहा है। 28 जिला में इसकी शुरुआत चुकी है और 40 हजार 100 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। बिहार में गाय में ही यह रोग अभी तक पाया गया है। राज्य के सभी पशु चिकित्सकों को रोग के संबंध में प्रशिक्षण कराया गया है।
क्या है लंपी त्वचा रोग?
लंपी त्वचा रोग गायों-भैंसों जैसे मवेशियों में कैप्रिपॉक्स नाम के वायरस से फैलने वाली बीमारी है। ये बहुत तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। यह वायरस बकरियों में होने वाले गोट पॉक्स और भेड़ों में होने वाले शीप पॉक्स जैसी वायरल इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार वायरस जैसा ही है। कैप्रिपॉक्स उसी पॉक्सविरिडे वायरस फैमिली से आता है, जिससे स्मॉलपॉक्स यानी चेचक और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियां होती हैं। इस रोग के कारण मवेशियों को बुखार और शरीर में गांठें पड़ जाती हैं।
लंपी वायरस से देश में अब तक 57 हजार मवेशियों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा करीब 37 हजार मौतें राजस्थान में हुई हैं। यह बीमारी अब तक राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरयाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में फैल चुकी है। इसके लिए केंद्र सरकार पशुओं को गोट पॉक्स वैक्सीन लगवा रही है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लंपी स्किन वायरस ने बिहार में दस्तक दे दी है। गाय और भैंस में काटने वाली मक्खी, मच्छर और टिक्स से फैलने वाले लंपी स्किन डिजीज से दो पशुओं की मौत हो गई है। पटना सहित दस जिलों के कई सैकड़ों गांवों में एक हज़ार दो सौ अट्ठावन पशुओं में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। इस बीमारी से प्रभावित दुधारू पशुओं से इसके दूध में वायरस नहीं आता है, लेकिन दूध उत्पादन कम हो जाता है। इस बीमारी का मनुष्य पर प्रभाव नहीं पड़ता है। बुधवार को पशु व मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव डॉ. एन. सरवण कुमार ने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए नौ जनवरी से पशुओं निःशुल्क टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में है। पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान पटना क्षेत्रीय निदेशक एवं जिला स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। पूरे राज्य में एक. अड़तीस करोड़ गाय में लंपी रोग की रोकथाम को वैक्सीनेशन कराया जा रहा है। अट्ठाईस जिला में इसकी शुरुआत चुकी है और चालीस हजार एक सौ पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। बिहार में गाय में ही यह रोग अभी तक पाया गया है। राज्य के सभी पशु चिकित्सकों को रोग के संबंध में प्रशिक्षण कराया गया है। क्या है लंपी त्वचा रोग? लंपी त्वचा रोग गायों-भैंसों जैसे मवेशियों में कैप्रिपॉक्स नाम के वायरस से फैलने वाली बीमारी है। ये बहुत तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। यह वायरस बकरियों में होने वाले गोट पॉक्स और भेड़ों में होने वाले शीप पॉक्स जैसी वायरल इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार वायरस जैसा ही है। कैप्रिपॉक्स उसी पॉक्सविरिडे वायरस फैमिली से आता है, जिससे स्मॉलपॉक्स यानी चेचक और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियां होती हैं। इस रोग के कारण मवेशियों को बुखार और शरीर में गांठें पड़ जाती हैं। लंपी वायरस से देश में अब तक सत्तावन हजार मवेशियों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा करीब सैंतीस हजार मौतें राजस्थान में हुई हैं। यह बीमारी अब तक राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरयाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में फैल चुकी है। इसके लिए केंद्र सरकार पशुओं को गोट पॉक्स वैक्सीन लगवा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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प्रौर श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कुछ कांग्रेसियों ने भी कांग्रेस के निर्णय को न मानकर उनका समर्थन किया । इस प्रकार श्री गिरि को काफी समर्थन मिल गया । कुलं निर्वाचक मत साढ़े आठ लाख थे । श्री गिरि १४६५० मतों से विजयी हुए । जनतंत्र में बहुमत का जाता है। वह बहुमत अधिक है या अल्प, यह निःसार है । श्री गिरि को भारतीय संविधान के अनुसार चुना गया है और देश ने उन्हें राष्ट्रपति पद पर आसीन किया है । हम उनका हार्दिक अभिनन्दन करते है ।
जीवन वड़ा सुखी और आदर्श है। उनके १६ सन्तान हुई जिनमें ११ जीवित हैं । वे आस्थावान व्यक्ति हैं और धर्मनिरपेक्षता में पूर्ण विश्वास रखते हुए भी अपने धर्म में उनकी श्रद्धा है। राष्ट्रपति पद ग्रहरण करने के एक दिन पूर्व वे रामकृष्ण पुरम् (नई दिल्ली) में हाल ही में बने श्री वेङ्कटेश्वर भगवान् के मन्दिर में दर्शनार्थ गये थे। उनका व्यक्तिगत चरित्र निर्मल और उच्च है । वे हिन्दी के विरोधी नहीं है, किन्तु उन्हें हिन्दी में कोई विशेष रुचि भी नही है । वे अंग्रेजी ही में भाषरण देते रहे हैं । उन्होंने राष्ट्रपतिपद की शपथ भी अंग्रेजी ही में ग्रहण की थी और अपना पदग्रहरण-भाषरण भी अंग्रेजी ही में दिया । स्व० डाक्टर जाकिर हुसेन हिन्दी में भाषण देते थे । राष्ट्रपति राजेन्द्रप्रसादजी के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन और कार्यालय में राजभाषा हिन्दी को जो स्थान मिल गया था वह उनके उत्तराधिकारियों के समय में नहीं रहा ।
श्री गिरि का जन्म अगस्त, १८९४ में वरहामपुर में हुआ था । यह नगर पहिले तत्कालीन मदरास प्रान्त में था, किंतु उड़ीसा से मिली हुई सीमा पर था । यहाँके बहुसंख्यक निवासी उड़ियाभाषी है। मदरास प्रान्त में उत्तरी क्षेत्र में तेलगू भाषी आंध्र और दक्षिण में तामिलभाषी द्रविड़ या तमिल लोग रहते थे । जब भाषावार प्रान्त बने तब वरहामपुर उड़ीसा में चला गया । श्री गिरि का परिवार तेलगूभापी आंध्र है । उनके पिता साधारण वकील थे 7 श्री गिरि उच्च शिक्षा के लिए आयरलैण्ड गये थे, किंतु उन दिनों आयरलैण्ड अंग्रेजों के शासन मे था और वहाँके लोग अंग्रेजों से मुक्त होने के लिए उग्र आन्दोलन कर रहे थे । श्री डि वैलरा उसके नेता थे । आयरलैण्ड में श्री गिरि ने उस आन्दोलन में इतना सक्रिय भाग लिया कि अंग्रेज सरकार ने आयरलैण्ड से उनका निष्कासन करके उन्हें भारत लौटने को बाध्य किया। यहाँ आकर वे महात्माजी के सम्पर्क में प्राये और उनकी सलाह से उन्होंने श्रमिक आन्दोलन में काम करना आरंभ किया। उन्होंने अखिल भारतीय रेल कर्मचारी संघ संगठित किया और उसे एक बड़ी शक्तिशाली संस्था बना दिया। वे दीर्घकाल तक उसके सर्वेसर्वा रहे। बाद में वे मदरास विधानसभा के लिए चुनाव लड़े, सफल हुए और मंत्री बने । वे संसद के सदस्य भी रहे । स्वतंत्रता के बाद वे भारत के उच्च आयुक्त वनाकर श्रीलंका भेजे गये, जहाँ उन्होंने भारत और लंका के संबंधों को सुधारने में बड़ा काम किया। बाद में वे उत्तर प्रदेश, केरल प्रौर मैसूर के राज्यपाल बनाये गये, और डा० जाकिर हुसेन के राष्ट्रपति चुने जाने पर कांग्रेस ने उन्हें उपराष्ट्रपति के लिए अपना प्रत्याशी बनाया और वे चुनाव में सफल होकर उपराष्ट्रपति हुए ।
श्री गिरि मध्यवित्त परिवार के हैं और उनका गृहस्थयद्यपि राष्ट्रपति का यह चुनाव सबके मध्य में हुआ है, तथापि संविधान के अनुसार उनका कार्यकाल पूरे पाँच वर्ष का होगा । श्री गिरि की अवस्था ७५ वर्ष की है, किन्तु वे बहुत स्वस्थ, क्रियाशील औौर कर्मठ है । उनके विचार संतुलित और उदार है । उनका सारा जीवन देश और देश के मेहनतकश लोगों की सेवा में बीता है। उन्होंने अपने को भारत की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है । अपनी योग्यता, उदार विचारों, दीर्घ अनुभव और उच्च चरित्र के कारण वे सारे देश के हार्दिक सम्मान और आदर के पात्र है। हमें विश्वास है कि वे भारत के राष्ट्रपतिपद की गरिमा और गौरव को बढ़ाएँगे । हम एक बार फिर उनका हार्दिक अभिनन्दन करते हुए उनकी सफलता और उनके दीर्घ जीवन की कामना करते हैं ।
घटनाबहुल और उत्तेजनापूर्ण दो पखवारे-हम प्रत्येक भास की १५-१६ र २०-२१ तारीखों के बीच ये टिप्पगियाँ लिखते है, इस मास हम उन्हें कुछ देर से लिख रहे है, किन्तु जब हम टिप्पणी लिखने के लिए जुलाई के उत्तरार्द्ध और अगस्त के पूर्वार्द्ध के इन दो पखवारों की घटनाओं में से उपयुक्त विषय चुनने लगे तो असमंजस में पड़ गये । इन दो पखवारों में एक साथ नाना प्रकार की इतनी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटी है कि उनमें से टिप्पणियाँ
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प्रौर श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कुछ कांग्रेसियों ने भी कांग्रेस के निर्णय को न मानकर उनका समर्थन किया । इस प्रकार श्री गिरि को काफी समर्थन मिल गया । कुलं निर्वाचक मत साढ़े आठ लाख थे । श्री गिरि चौदह हज़ार छः सौ पचास मतों से विजयी हुए । जनतंत्र में बहुमत का जाता है। वह बहुमत अधिक है या अल्प, यह निःसार है । श्री गिरि को भारतीय संविधान के अनुसार चुना गया है और देश ने उन्हें राष्ट्रपति पद पर आसीन किया है । हम उनका हार्दिक अभिनन्दन करते है । जीवन वड़ा सुखी और आदर्श है। उनके सोलह सन्तान हुई जिनमें ग्यारह जीवित हैं । वे आस्थावान व्यक्ति हैं और धर्मनिरपेक्षता में पूर्ण विश्वास रखते हुए भी अपने धर्म में उनकी श्रद्धा है। राष्ट्रपति पद ग्रहरण करने के एक दिन पूर्व वे रामकृष्ण पुरम् में हाल ही में बने श्री वेङ्कटेश्वर भगवान् के मन्दिर में दर्शनार्थ गये थे। उनका व्यक्तिगत चरित्र निर्मल और उच्च है । वे हिन्दी के विरोधी नहीं है, किन्तु उन्हें हिन्दी में कोई विशेष रुचि भी नही है । वे अंग्रेजी ही में भाषरण देते रहे हैं । उन्होंने राष्ट्रपतिपद की शपथ भी अंग्रेजी ही में ग्रहण की थी और अपना पदग्रहरण-भाषरण भी अंग्रेजी ही में दिया । स्वशून्य डाक्टर जाकिर हुसेन हिन्दी में भाषण देते थे । राष्ट्रपति राजेन्द्रप्रसादजी के कार्यकाल में राष्ट्रपति भवन और कार्यालय में राजभाषा हिन्दी को जो स्थान मिल गया था वह उनके उत्तराधिकारियों के समय में नहीं रहा । श्री गिरि का जन्म अगस्त, एक हज़ार आठ सौ चौरानवे में वरहामपुर में हुआ था । यह नगर पहिले तत्कालीन मदरास प्रान्त में था, किंतु उड़ीसा से मिली हुई सीमा पर था । यहाँके बहुसंख्यक निवासी उड़ियाभाषी है। मदरास प्रान्त में उत्तरी क्षेत्र में तेलगू भाषी आंध्र और दक्षिण में तामिलभाषी द्रविड़ या तमिल लोग रहते थे । जब भाषावार प्रान्त बने तब वरहामपुर उड़ीसा में चला गया । श्री गिरि का परिवार तेलगूभापी आंध्र है । उनके पिता साधारण वकील थे सात श्री गिरि उच्च शिक्षा के लिए आयरलैण्ड गये थे, किंतु उन दिनों आयरलैण्ड अंग्रेजों के शासन मे था और वहाँके लोग अंग्रेजों से मुक्त होने के लिए उग्र आन्दोलन कर रहे थे । श्री डि वैलरा उसके नेता थे । आयरलैण्ड में श्री गिरि ने उस आन्दोलन में इतना सक्रिय भाग लिया कि अंग्रेज सरकार ने आयरलैण्ड से उनका निष्कासन करके उन्हें भारत लौटने को बाध्य किया। यहाँ आकर वे महात्माजी के सम्पर्क में प्राये और उनकी सलाह से उन्होंने श्रमिक आन्दोलन में काम करना आरंभ किया। उन्होंने अखिल भारतीय रेल कर्मचारी संघ संगठित किया और उसे एक बड़ी शक्तिशाली संस्था बना दिया। वे दीर्घकाल तक उसके सर्वेसर्वा रहे। बाद में वे मदरास विधानसभा के लिए चुनाव लड़े, सफल हुए और मंत्री बने । वे संसद के सदस्य भी रहे । स्वतंत्रता के बाद वे भारत के उच्च आयुक्त वनाकर श्रीलंका भेजे गये, जहाँ उन्होंने भारत और लंका के संबंधों को सुधारने में बड़ा काम किया। बाद में वे उत्तर प्रदेश, केरल प्रौर मैसूर के राज्यपाल बनाये गये, और डाशून्य जाकिर हुसेन के राष्ट्रपति चुने जाने पर कांग्रेस ने उन्हें उपराष्ट्रपति के लिए अपना प्रत्याशी बनाया और वे चुनाव में सफल होकर उपराष्ट्रपति हुए । श्री गिरि मध्यवित्त परिवार के हैं और उनका गृहस्थयद्यपि राष्ट्रपति का यह चुनाव सबके मध्य में हुआ है, तथापि संविधान के अनुसार उनका कार्यकाल पूरे पाँच वर्ष का होगा । श्री गिरि की अवस्था पचहत्तर वर्ष की है, किन्तु वे बहुत स्वस्थ, क्रियाशील औौर कर्मठ है । उनके विचार संतुलित और उदार है । उनका सारा जीवन देश और देश के मेहनतकश लोगों की सेवा में बीता है। उन्होंने अपने को भारत की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है । अपनी योग्यता, उदार विचारों, दीर्घ अनुभव और उच्च चरित्र के कारण वे सारे देश के हार्दिक सम्मान और आदर के पात्र है। हमें विश्वास है कि वे भारत के राष्ट्रपतिपद की गरिमा और गौरव को बढ़ाएँगे । हम एक बार फिर उनका हार्दिक अभिनन्दन करते हुए उनकी सफलता और उनके दीर्घ जीवन की कामना करते हैं । घटनाबहुल और उत्तेजनापूर्ण दो पखवारे-हम प्रत्येक भास की पंद्रह-सोलह र बीस-इक्कीस तारीखों के बीच ये टिप्पगियाँ लिखते है, इस मास हम उन्हें कुछ देर से लिख रहे है, किन्तु जब हम टिप्पणी लिखने के लिए जुलाई के उत्तरार्द्ध और अगस्त के पूर्वार्द्ध के इन दो पखवारों की घटनाओं में से उपयुक्त विषय चुनने लगे तो असमंजस में पड़ गये । इन दो पखवारों में एक साथ नाना प्रकार की इतनी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटी है कि उनमें से टिप्पणियाँ
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फ्रंट लॉन्स में जावेद अख्तर की नज्मों की पुस्तक "इन अदर वर्ड्स" को उनकी पत्नी शबाना आजमी ने रिलीज किया। इस पुस्तक में जावेद की नज्में अंग्रेजी में हैं।
अंग्रेजी अनुवाद डेविड मैथ्यूज और अली हुसैन मीर ने किया है।
बुक लॉन्च के मौके पर जावेद, अली के अलावा फ्लोरेंस नॉविले भी मौजूद थीं।
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फ्रंट लॉन्स में जावेद अख्तर की नज्मों की पुस्तक "इन अदर वर्ड्स" को उनकी पत्नी शबाना आजमी ने रिलीज किया। इस पुस्तक में जावेद की नज्में अंग्रेजी में हैं। अंग्रेजी अनुवाद डेविड मैथ्यूज और अली हुसैन मीर ने किया है। बुक लॉन्च के मौके पर जावेद, अली के अलावा फ्लोरेंस नॉविले भी मौजूद थीं।
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बॉलीवुड के मशहूर एक्टर रोहित शेट्टी अपनी हर फिल्म के जरिए धमाल मचाते हैं. हाल ही में उनकी फिल्म सिंबा रिलीज़ हुई थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. इसके बाद से ही रोहित शेट्टी अगली फिल्म सूर्यवंशी को लेकर चर्चाओं में आ गए हैं. उनकी इस अगली फिल्म में अक्षय कुमार लीड रोल प्ले करते नजर आएंगे. इस बात की जानकारी तो सिंबा के अंत में ही मिल चुकी थी. सभी लोग ये समझ रहे है कि सूर्यवंशी तमिल फिल्म का रीमेक होगी.
ऐसे में रोहित शेट्टी ने हाल ही में अपना एक बयान जारी किया है जिसमें ये साफ हो गया है कि सूर्यवंशी अपनी एक अलग कहानी के साथ रिलीज होगी ना ही किसी फिल्म का रीमेक होगी. रोहित शेट्टी ने इस फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि, 'मैंने किसी तमिल फिल्म का राईट फिल्म सूर्यवंशी के लिए खरीदा है ये बिल्कुक गलत खबर है. ' खास बात तो ये है कि इस फिल्म को खुद अक्षय कुमार ही प्रोड्यूस कर रहे हैं और फिल्म का निर्देशन रोहित शेट्टी जार रहे हैं.
इससे भी ज्यादा खास बात तो ये है कि रोहित शेट्टी पहली बार अक्षय कुमार के साथ काम करने जा रहे है. सुनने में ये भी आया है कि इस फिल्म में रणवीर सिंह और अजय देवगन का भी केमियो रोल देखने को मिलेगा. इस फिल्म के अलावा अक्षय जल्द ही हाउसफुल-4, केसरी, गुड न्यूज़ और मिशन मंगल में नजर आने वाले हैं.
हेरा फेरी 3 : फिर हंसाने को तैयार है राजू, बाबू भाई और श्याम. .
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बॉलीवुड के मशहूर एक्टर रोहित शेट्टी अपनी हर फिल्म के जरिए धमाल मचाते हैं. हाल ही में उनकी फिल्म सिंबा रिलीज़ हुई थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. इसके बाद से ही रोहित शेट्टी अगली फिल्म सूर्यवंशी को लेकर चर्चाओं में आ गए हैं. उनकी इस अगली फिल्म में अक्षय कुमार लीड रोल प्ले करते नजर आएंगे. इस बात की जानकारी तो सिंबा के अंत में ही मिल चुकी थी. सभी लोग ये समझ रहे है कि सूर्यवंशी तमिल फिल्म का रीमेक होगी. ऐसे में रोहित शेट्टी ने हाल ही में अपना एक बयान जारी किया है जिसमें ये साफ हो गया है कि सूर्यवंशी अपनी एक अलग कहानी के साथ रिलीज होगी ना ही किसी फिल्म का रीमेक होगी. रोहित शेट्टी ने इस फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि, 'मैंने किसी तमिल फिल्म का राईट फिल्म सूर्यवंशी के लिए खरीदा है ये बिल्कुक गलत खबर है. ' खास बात तो ये है कि इस फिल्म को खुद अक्षय कुमार ही प्रोड्यूस कर रहे हैं और फिल्म का निर्देशन रोहित शेट्टी जार रहे हैं. इससे भी ज्यादा खास बात तो ये है कि रोहित शेट्टी पहली बार अक्षय कुमार के साथ काम करने जा रहे है. सुनने में ये भी आया है कि इस फिल्म में रणवीर सिंह और अजय देवगन का भी केमियो रोल देखने को मिलेगा. इस फिल्म के अलावा अक्षय जल्द ही हाउसफुल-चार, केसरी, गुड न्यूज़ और मिशन मंगल में नजर आने वाले हैं. हेरा फेरी तीन : फिर हंसाने को तैयार है राजू, बाबू भाई और श्याम. .
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हिमालीनि डेस्क, ७ जेठ, सुन्सरी । जेठ ३१ होने जा रहे दुसरे चरण की स्थानिय तह चुनाव के लिए नेपाली कांग्रेस ने धरान में चुनावि प्रचार प्रसार को तेज किया । पार्टी की झण्डा, चुनाव चिन्ह सहित नेता कार्यकर्ता बजार पसल और स्थानिय वाशियों के घर-घर पहुँच कर कांग्रेस में मतदान करने के लिए आग्रह कर रहे है । नेपाली कांग्रेस पार्टी के चुनावी प्रचार समिति के नेता-कार्यकर्ता 'भोट के मा रुख मा, रुख कसको जनता को, जनता कसको कांग्रेस को' नारा के साथ जोर-तोर से प्रचार कर रही है ।
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हिमालीनि डेस्क, सात जेठ, सुन्सरी । जेठ इकतीस होने जा रहे दुसरे चरण की स्थानिय तह चुनाव के लिए नेपाली कांग्रेस ने धरान में चुनावि प्रचार प्रसार को तेज किया । पार्टी की झण्डा, चुनाव चिन्ह सहित नेता कार्यकर्ता बजार पसल और स्थानिय वाशियों के घर-घर पहुँच कर कांग्रेस में मतदान करने के लिए आग्रह कर रहे है । नेपाली कांग्रेस पार्टी के चुनावी प्रचार समिति के नेता-कार्यकर्ता 'भोट के मा रुख मा, रुख कसको जनता को, जनता कसको कांग्रेस को' नारा के साथ जोर-तोर से प्रचार कर रही है ।
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नागपुर, 20 अगस्त (भाषा) Rane's Thackeray memorial visit: भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व शिवसैनिक और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बाल ठाकरे स्मारक का दौरा करने के बाद कुछ शिवसैनिकों द्वारा स्मारक को धोये जाने की शुक्रवार को निंदा की।
राणे ने 2005 में मतभेद के कारण शिवसेना छोड़ दी थी। उन्होंने बृहस्पतिवार को मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में 'जन आशीर्वाद यात्रा' के तहत स्मारक का दौरा किया जिसके बाद कुछ शिवसैनिकों ने उस स्थान की 'गोमूत्र' से धुलाई की और इसके "शुद्धिकरण" के लिए दूध से 'अभिषेक' किया।
उन्होंने कहा कि शिवसेना महा विकास आघाडी में उन दलों के साथ सत्ता साझा कर रही है जिन्होंने इसके दिवंगत संस्थापक को जुलाई 2000 में कथित भड़काऊ संपादकीय को लेकर जेल भेजने का प्रयास किया था लेकिन मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
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नागपुर, बीस अगस्त Rane's Thackeray memorial visit: भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व शिवसैनिक और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बाल ठाकरे स्मारक का दौरा करने के बाद कुछ शिवसैनिकों द्वारा स्मारक को धोये जाने की शुक्रवार को निंदा की। राणे ने दो हज़ार पाँच में मतभेद के कारण शिवसेना छोड़ दी थी। उन्होंने बृहस्पतिवार को मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में 'जन आशीर्वाद यात्रा' के तहत स्मारक का दौरा किया जिसके बाद कुछ शिवसैनिकों ने उस स्थान की 'गोमूत्र' से धुलाई की और इसके "शुद्धिकरण" के लिए दूध से 'अभिषेक' किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना महा विकास आघाडी में उन दलों के साथ सत्ता साझा कर रही है जिन्होंने इसके दिवंगत संस्थापक को जुलाई दो हज़ार में कथित भड़काऊ संपादकीय को लेकर जेल भेजने का प्रयास किया था लेकिन मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
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भा. भापा एवं साहित्य में श्रमण संस्कृति के स्वर
हैं, तथा अन्य अनेक तैयार करने में संलग्न हैं, जिन सभी लोगों के नाम स्थानाभाव के कारण यहाँ देना संभव नहीं है ।
हाँ, जैन साहित्य के शीर्षस्थ प्रतिभासम्पन्न लेखकों में पं० सुखलालजी, पं० वेचरदास डोशो, दलसुख मालवणिया, रिषभदास रांका, प्रो० चम्पालाल सिंघई, प्रो० रामाश्रय प्र० सिंह प्रभृति के नाम हिन्दी के जैन साहित्यकारों में आदर के साथ लिए जाएँगे ।
जैसा कि पहले इंगित किया गया है, हिन्दी की जैन पत्र-पत्रि काएँ जो कि आज विपुल परिमाण में निकल रही हैं, जैन साहित्य के विकास में उनके संपादकों तथा उनसे सम्बद्ध लेखकों का योगदान महत्त्वपूर्ण है ।
इस प्रकार हम देखते हैं कि हिन्दी के उद्भवकाल से भी पूर्व से जबकि अपभ्रंश भषा जन-जीवन के बोच प्रचलित थी, जैन साहित्यकारों ने धर्म, अध्यात्म, दर्शन, समाज, राष्ट्र, संस्कृति, सभ्यता आदि विषय-विन्दुओं से सम्बद्ध रचनाएँ करके जन-सामान्य के वीच प्रचलित किया, धर्म की नींव को सुदृढ़ किया । हिन्दी साहित्य का आदिकाल तो जैन साहित्यकारों की रचनाओं की माधारभित्ति पर ही स्थित है, मध्यकाल पूर्णतः प्रभावित है, रीतकाल सम्पन्न है तथा आधुनिक काल विविध विधान्तर्गत प्रणीत कृतियों से भव्य विकास पा रहा है । आज तो जैनधर्म की युगभाषा के रूप में हिन्दी भाषा ही प्रतिष्ठित है ।
राजस्थानी भाषा और साहित्य
राजस्थानी भाषा -- यह नाम इस भाषा का आदिनाम नहीं है । जब प्रदेश का नाम राजस्थान पड़ा, तभी से इसे इस नाम से अभिहित किया जाता है। भारत की स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान २१ छोटे-वड़े विभागों में बँटा हुआ था। इसके अतिरिक्त अजमेर-मेरवाड़ा का प्रदेश अंग्रेजी शासन में अलग से संयुक्त था । २१ राज्य थे-१. उदयपुर, २. डूंगरपुर, ३. वांसवाड़ा, ४. प्रतापगढ़, ५. शाहपुरा, ६. करौली, ७. जैसलमेर, ८. बूँदी, 8. कोटा, १०. सिरोही, ११. जयपुर, १२. अलवर, १३ जोधपुर, १४ वीकानेर, १५. किशनगढ़, १६. दांता, १७. झालावाड़, १८. भरतपुर, १६. धौलपुर, २०. पालन
पुर तथा २१. टौंक । इस राज्य के लिए जार्ज टॉमस ने सन् १८५७ में राजपूताना १९ नाम का प्रयोग किया। उसके उपरान्त कर्नल टॉड ने अपने इतिहास में राजपूताना को राजस्थान के नाम से संबोधित किया २० पुराकाल में इस प्रदेश पुराकाल में इस प्रदेश के भिन्न-भिन्न भूखंडों के भिन्न-भिन्न नाम थे । जैसे - उत्तरी भाग का नाम जांगल, पूर्वी भाग का नाम मत्स्य, दक्षिणी-पूर्वी का शिविदेश, दक्षिण का मेदपाट, बागड़, प्राग्वाट, मालव एवं गुर्जरत्रा, पश्चिम का मद, माडबल्ल, त्रवणी, तथा मध्यभाग का अर्बुद और सपालदक्षसाल्व जनपद २२ तथा पारियात्र मंडल 2 3 भी इस प्रदेश के ही अंग थे । अधुनातम स्थिति में यह प्रदेश प्राकृतिक दृष्टि से दो भागों में विभक्त है, जिसे अरावली पर्वत विभाजित करता है - - प्रथम, उत्तर पश्चिमी भाग जिसके अंतर्गत वोकानेर, जैसलमेर, जोधपुर तथा जयपुर का कुछ भाग जिन्हें समग्र रूप से मारवाड़ अथवा मरुदेश कहते हैं । तथा दूसरा, दक्षिणी-पूर्वी भाग, जिसके अंतर्गत वाको सभी देशो राज्य तथा अजमेर- मेरवाड़ा के राज्य सम्मिलित हैं । और दोनों भागों को राजस्थान राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है, तथा इसी राज्य के नामसाम्य के अनुसार इस राज्य की भाषा को राजस्थानी भाषा कहते हैं ।
राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास में जितना अन्य साहित्यकारों ने योगदान दिया है, जैन साहित्यकारों का योगदान उसमें अपना गौरवपूर्ण स्थान रखता है ।
राजस्थानी भाषा में वज्रसेन सूरि प्रणीत 'भारतेश्वर वाहुवलिघोर' पुरानी राजस्थानी की प्राचीनतम रचना है । इसी प्रकार शालिभद्र सूरि रचित 'भरतेश्वर-बाहुवलीरास' नामक खंडकाव्य है जो
१९. विलियम फ्रेंकलिन मिलिट्री मेमाउर्स आव मिस्टर जार्ज ट मस - दृ०३४७ २० : Annals and Antiquities of Rajsthan, Part I २१. विजयराजेन्द्रसूरि स्मारक ग्रन्य पृष्ठ ७१८ तथा पृथ्वीसिंह मेहता : हमारा राजस्थान
२२. डा० वासुदेवशरण अग्रवाल : 'साल्व जनपद'
- राजस्थान भारती, भाग ३, अंक ३-४ २३. पृथ्वीसिंह मेहता : हमारा राजस्थान, पृष्ठ २०-२२
पुरानी राजस्थानी का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है । यह संवत् १२४१ की रचना है । तेरहवीं शताब्दी में बुद्धिरास, जंबू स्वामी चरित, स्थूलभद्ररास, रेवंत गिरि रासो, आवूरास, जीवदया रासु तथा चंदनबाला रास उल्लेखनीय कृतियाँ हैं । चौदहवीं शताब्दी में नेमिनाथ चतुष्पिका, सप्तक्षेत्रि रासु, जिनेश्वर सूरि दीक्षा - विवाह वर्णना रास सम्यक्त्व माई चउपई, समरारासो, श्री स्थूलिभद्र फाग, चर्चारिका, सालिभद्र कक्क, दूहा मातृका आदि कृतियाँ प्रमुख हैं।
पन्द्रहवीं शताब्दी में जिन कवियों ने अपनी रचनाओं द्वारा राजस्थानी को गौरवान्वित किया उनमें - सर्वश्री तरुणप्रभ सूरि, विनय प्रभ, मेरुनन्दन, राजशेखर सूरि, शालिभद्र सूरि, जयशेखर सूरि, हीरानन्द सूरि, रत्नमंडण गणि तथा जयसागर के नाम उल्लेख - नीय हैं ।
सोलहवीं शताब्दी में महोपाध्याय जयसागर दरड़ा गोत्रीय का नाम वड़े आदर के साथ लिया जाता है। उनकी 'जिनकुशल सूरि सप्ततिका' का तो वड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने छोटीबड़ी ३२ कृतियों की रचना की । इनके अतिरिक्त राजस्थानी साहित्य की श्री वृद्धि करने वाले कृतिकारों में सर्वश्री देपाल, ऋषिवर्द्धन सूर, मति शेखर, पद्मनाभ, धर्म समुद्रगणि, सहजसुन्दर, पार्श्वचन्द्र सूर, छीहल, विनय समुद्र, राजशील आदि के नाम उल्लेखनीय हैं ।
सत्रहवीं शताब्दी में सर्वश्री पुण्यसागर, कुशलप्रभ, मालदेव, हीरकलश, कनकसोम, हेमरत्न सूरि, उपाध्याय गुणविजय, समय सुन्दर आदि के नाम विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। इनके अतिरिक्त जिन कवियों के नाम उल्लेखनीय हैं, उनमें सर्वश्री विजयदेव सूरि, जयसोम, नयरंग, कल्याणदेव, सारंग, मंगल-माणिक्य, साधु कीर्ति, धर्मरत्न, विजय शेखर तथा चरित्र सिंह आदि के नाम लिये जा सकते हैं ।
अठारवीं शती में रास, चौपई के अतिरिक्त लावनी, छत्तीसी, बत्तीसी आदि काव्यरूपों में भी प्रचुर परिमाण में रचनाएं हुई । इस काव्य के सर्जकों में कविवर जिनहर्ष का स्थान प्रमुख है। इन्होंने एक लाख पद्यों को रचना रास, चौपई, वार्तासूत्र, दशवैकालिक गीत आदि के रूप में की, बताया जाता है । इनके अतिरिक्त महोपाध्याय लब्धोदय, मर्मवर्धन लाभवर्द्धन, कुशलधीर,
जिन समुद्र सूरि, लक्ष्मी वल्लभ, राम विजय आदि प्रसिद्ध साहित्यकार हुए । राम विजय ने पद्य की अपेक्षा गद्य में अधिक रचनाएँ कीं ।
उन्नीसवीं शदी में रघुपति, ज्ञानसार, क्षमाकल्याण, आचार्य जयमल आदि अनेक साहित्यकार हुए। इस काल में तेरापंथी के संस्थापक आचार्य रमणजी ने राजस्थानी जैन साहित्य में एक नया स्रोत बहाया । उन्होंने आचार क्रांति करके तेरापंथ की स्थापना की थी, अतः उनके लेखन में उसी क्रांति भावना का उद्दाम स्वर विस्फुटित हुआ है। उनका समग्र साहित्य ३८ सहस्र पद्यप्रमाण है ।
वीसवीं शती के साहित्यकारों में श्री जयाचार्य का उल्लेखनीय स्थान है। उन्होंने राजस्थानी में साढ़े तीन लाख पद्यप्रमाण साहित्य लिखा है। उनकी लेखनी से गद्य और पद्य - दोनों ही क्षेत्रों में साधिकार सर्जना हुई है ।
जयाचार्य के पश्चात् आचार्य तुलसी तथा उनके शिष्यसंघ के विद्वान् शिष्य आज भी राजस्थानी भाषा और साहित्य मे रचनाएँ करके राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनके अतिरिक्त भी बहुत से उल्लेखनीय साहित्यकार हैं, जिनका स्थानाभाव के कारण यहाँ उल्लेख करना संभव नहीं ।
गुजराती भाषा और साहित्य
गुजरात प्रदेश जैन धर्म का एक प्रधान केन्द्र रहा है। बहुत प्राचीन काल से गुजरात में जैन धर्म के प्रचलित होने के प्रमाण मिलते हैं । जैन धर्म के २२वें तीर्थंकर नेमिनाथ के गिरिनार में समाधि लेने और ई० ५वीं शती में मुनि सुव्रत तीर्थंकर के शकुनि - बिहार नामक आश्रम, भृगुकच्छ में होने का उल्लेख अनेक विद्वानों ने किया है । २४ इसके अतिरिक्त वल्लभी के राजा शिलादित्य ( ५वीं शती ) , वृद्धपुर के राजा ध्रुवसेन ( ५वीं शती) और फिर आगे चलकर वनराज चावड़ा आदि के जैनधर्म में दीक्षित होने का उल्लेख मिलता है । इन ऐतिहासिक उल्लेखों तथा गिरनार, पावागढ़ आदि सिद्ध क्षेत्रों
२४. मध्यकालीन गुजराती साहित्य
- क० मा० मुंशी
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भा. भापा एवं साहित्य में श्रमण संस्कृति के स्वर हैं, तथा अन्य अनेक तैयार करने में संलग्न हैं, जिन सभी लोगों के नाम स्थानाभाव के कारण यहाँ देना संभव नहीं है । हाँ, जैन साहित्य के शीर्षस्थ प्रतिभासम्पन्न लेखकों में पंशून्य सुखलालजी, पंशून्य वेचरदास डोशो, दलसुख मालवणिया, रिषभदास रांका, प्रोशून्य चम्पालाल सिंघई, प्रोशून्य रामाश्रय प्रशून्य सिंह प्रभृति के नाम हिन्दी के जैन साहित्यकारों में आदर के साथ लिए जाएँगे । जैसा कि पहले इंगित किया गया है, हिन्दी की जैन पत्र-पत्रि काएँ जो कि आज विपुल परिमाण में निकल रही हैं, जैन साहित्य के विकास में उनके संपादकों तथा उनसे सम्बद्ध लेखकों का योगदान महत्त्वपूर्ण है । इस प्रकार हम देखते हैं कि हिन्दी के उद्भवकाल से भी पूर्व से जबकि अपभ्रंश भषा जन-जीवन के बोच प्रचलित थी, जैन साहित्यकारों ने धर्म, अध्यात्म, दर्शन, समाज, राष्ट्र, संस्कृति, सभ्यता आदि विषय-विन्दुओं से सम्बद्ध रचनाएँ करके जन-सामान्य के वीच प्रचलित किया, धर्म की नींव को सुदृढ़ किया । हिन्दी साहित्य का आदिकाल तो जैन साहित्यकारों की रचनाओं की माधारभित्ति पर ही स्थित है, मध्यकाल पूर्णतः प्रभावित है, रीतकाल सम्पन्न है तथा आधुनिक काल विविध विधान्तर्गत प्रणीत कृतियों से भव्य विकास पा रहा है । आज तो जैनधर्म की युगभाषा के रूप में हिन्दी भाषा ही प्रतिष्ठित है । राजस्थानी भाषा और साहित्य राजस्थानी भाषा -- यह नाम इस भाषा का आदिनाम नहीं है । जब प्रदेश का नाम राजस्थान पड़ा, तभी से इसे इस नाम से अभिहित किया जाता है। भारत की स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान इक्कीस छोटे-वड़े विभागों में बँटा हुआ था। इसके अतिरिक्त अजमेर-मेरवाड़ा का प्रदेश अंग्रेजी शासन में अलग से संयुक्त था । इक्कीस राज्य थे-एक. उदयपुर, दो. डूंगरपुर, तीन. वांसवाड़ा, चार. प्रतापगढ़, पाँच. शाहपुरा, छः. करौली, सात. जैसलमेर, आठ. बूँदी, आठ. कोटा, दस. सिरोही, ग्यारह. जयपुर, बारह. अलवर, तेरह जोधपुर, चौदह वीकानेर, पंद्रह. किशनगढ़, सोलह. दांता, सत्रह. झालावाड़, अट्ठारह. भरतपुर, सोलह. धौलपुर, बीस. पालन पुर तथा इक्कीस. टौंक । इस राज्य के लिए जार्ज टॉमस ने सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तावन में राजपूताना उन्नीस नाम का प्रयोग किया। उसके उपरान्त कर्नल टॉड ने अपने इतिहास में राजपूताना को राजस्थान के नाम से संबोधित किया बीस पुराकाल में इस प्रदेश पुराकाल में इस प्रदेश के भिन्न-भिन्न भूखंडों के भिन्न-भिन्न नाम थे । जैसे - उत्तरी भाग का नाम जांगल, पूर्वी भाग का नाम मत्स्य, दक्षिणी-पूर्वी का शिविदेश, दक्षिण का मेदपाट, बागड़, प्राग्वाट, मालव एवं गुर्जरत्रा, पश्चिम का मद, माडबल्ल, त्रवणी, तथा मध्यभाग का अर्बुद और सपालदक्षसाल्व जनपद बाईस तथा पारियात्र मंडल दो तीन भी इस प्रदेश के ही अंग थे । अधुनातम स्थिति में यह प्रदेश प्राकृतिक दृष्टि से दो भागों में विभक्त है, जिसे अरावली पर्वत विभाजित करता है - - प्रथम, उत्तर पश्चिमी भाग जिसके अंतर्गत वोकानेर, जैसलमेर, जोधपुर तथा जयपुर का कुछ भाग जिन्हें समग्र रूप से मारवाड़ अथवा मरुदेश कहते हैं । तथा दूसरा, दक्षिणी-पूर्वी भाग, जिसके अंतर्गत वाको सभी देशो राज्य तथा अजमेर- मेरवाड़ा के राज्य सम्मिलित हैं । और दोनों भागों को राजस्थान राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है, तथा इसी राज्य के नामसाम्य के अनुसार इस राज्य की भाषा को राजस्थानी भाषा कहते हैं । राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास में जितना अन्य साहित्यकारों ने योगदान दिया है, जैन साहित्यकारों का योगदान उसमें अपना गौरवपूर्ण स्थान रखता है । राजस्थानी भाषा में वज्रसेन सूरि प्रणीत 'भारतेश्वर वाहुवलिघोर' पुरानी राजस्थानी की प्राचीनतम रचना है । इसी प्रकार शालिभद्र सूरि रचित 'भरतेश्वर-बाहुवलीरास' नामक खंडकाव्य है जो उन्नीस. विलियम फ्रेंकलिन मिलिट्री मेमाउर्स आव मिस्टर जार्ज ट मस - दृतीन सौ सैंतालीस बीस : Annals and Antiquities of Rajsthan, Part I इक्कीस. विजयराजेन्द्रसूरि स्मारक ग्रन्य पृष्ठ सात सौ अट्ठारह तथा पृथ्वीसिंह मेहता : हमारा राजस्थान बाईस. डाशून्य वासुदेवशरण अग्रवाल : 'साल्व जनपद' - राजस्थान भारती, भाग तीन, अंक तीन-चार तेईस. पृथ्वीसिंह मेहता : हमारा राजस्थान, पृष्ठ बीस-बाईस पुरानी राजस्थानी का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है । यह संवत् एक हज़ार दो सौ इकतालीस की रचना है । तेरहवीं शताब्दी में बुद्धिरास, जंबू स्वामी चरित, स्थूलभद्ररास, रेवंत गिरि रासो, आवूरास, जीवदया रासु तथा चंदनबाला रास उल्लेखनीय कृतियाँ हैं । चौदहवीं शताब्दी में नेमिनाथ चतुष्पिका, सप्तक्षेत्रि रासु, जिनेश्वर सूरि दीक्षा - विवाह वर्णना रास सम्यक्त्व माई चउपई, समरारासो, श्री स्थूलिभद्र फाग, चर्चारिका, सालिभद्र कक्क, दूहा मातृका आदि कृतियाँ प्रमुख हैं। पन्द्रहवीं शताब्दी में जिन कवियों ने अपनी रचनाओं द्वारा राजस्थानी को गौरवान्वित किया उनमें - सर्वश्री तरुणप्रभ सूरि, विनय प्रभ, मेरुनन्दन, राजशेखर सूरि, शालिभद्र सूरि, जयशेखर सूरि, हीरानन्द सूरि, रत्नमंडण गणि तथा जयसागर के नाम उल्लेख - नीय हैं । सोलहवीं शताब्दी में महोपाध्याय जयसागर दरड़ा गोत्रीय का नाम वड़े आदर के साथ लिया जाता है। उनकी 'जिनकुशल सूरि सप्ततिका' का तो वड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने छोटीबड़ी बत्तीस कृतियों की रचना की । इनके अतिरिक्त राजस्थानी साहित्य की श्री वृद्धि करने वाले कृतिकारों में सर्वश्री देपाल, ऋषिवर्द्धन सूर, मति शेखर, पद्मनाभ, धर्म समुद्रगणि, सहजसुन्दर, पार्श्वचन्द्र सूर, छीहल, विनय समुद्र, राजशील आदि के नाम उल्लेखनीय हैं । सत्रहवीं शताब्दी में सर्वश्री पुण्यसागर, कुशलप्रभ, मालदेव, हीरकलश, कनकसोम, हेमरत्न सूरि, उपाध्याय गुणविजय, समय सुन्दर आदि के नाम विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। इनके अतिरिक्त जिन कवियों के नाम उल्लेखनीय हैं, उनमें सर्वश्री विजयदेव सूरि, जयसोम, नयरंग, कल्याणदेव, सारंग, मंगल-माणिक्य, साधु कीर्ति, धर्मरत्न, विजय शेखर तथा चरित्र सिंह आदि के नाम लिये जा सकते हैं । अठारवीं शती में रास, चौपई के अतिरिक्त लावनी, छत्तीसी, बत्तीसी आदि काव्यरूपों में भी प्रचुर परिमाण में रचनाएं हुई । इस काव्य के सर्जकों में कविवर जिनहर्ष का स्थान प्रमुख है। इन्होंने एक लाख पद्यों को रचना रास, चौपई, वार्तासूत्र, दशवैकालिक गीत आदि के रूप में की, बताया जाता है । इनके अतिरिक्त महोपाध्याय लब्धोदय, मर्मवर्धन लाभवर्द्धन, कुशलधीर, जिन समुद्र सूरि, लक्ष्मी वल्लभ, राम विजय आदि प्रसिद्ध साहित्यकार हुए । राम विजय ने पद्य की अपेक्षा गद्य में अधिक रचनाएँ कीं । उन्नीसवीं शदी में रघुपति, ज्ञानसार, क्षमाकल्याण, आचार्य जयमल आदि अनेक साहित्यकार हुए। इस काल में तेरापंथी के संस्थापक आचार्य रमणजी ने राजस्थानी जैन साहित्य में एक नया स्रोत बहाया । उन्होंने आचार क्रांति करके तेरापंथ की स्थापना की थी, अतः उनके लेखन में उसी क्रांति भावना का उद्दाम स्वर विस्फुटित हुआ है। उनका समग्र साहित्य अड़तीस सहस्र पद्यप्रमाण है । वीसवीं शती के साहित्यकारों में श्री जयाचार्य का उल्लेखनीय स्थान है। उन्होंने राजस्थानी में साढ़े तीन लाख पद्यप्रमाण साहित्य लिखा है। उनकी लेखनी से गद्य और पद्य - दोनों ही क्षेत्रों में साधिकार सर्जना हुई है । जयाचार्य के पश्चात् आचार्य तुलसी तथा उनके शिष्यसंघ के विद्वान् शिष्य आज भी राजस्थानी भाषा और साहित्य मे रचनाएँ करके राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनके अतिरिक्त भी बहुत से उल्लेखनीय साहित्यकार हैं, जिनका स्थानाभाव के कारण यहाँ उल्लेख करना संभव नहीं । गुजराती भाषा और साहित्य गुजरात प्रदेश जैन धर्म का एक प्रधान केन्द्र रहा है। बहुत प्राचीन काल से गुजरात में जैन धर्म के प्रचलित होने के प्रमाण मिलते हैं । जैन धर्म के बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ के गिरिनार में समाधि लेने और ईशून्य पाँचवीं शती में मुनि सुव्रत तीर्थंकर के शकुनि - बिहार नामक आश्रम, भृगुकच्छ में होने का उल्लेख अनेक विद्वानों ने किया है । चौबीस इसके अतिरिक्त वल्लभी के राजा शिलादित्य , वृद्धपुर के राजा ध्रुवसेन और फिर आगे चलकर वनराज चावड़ा आदि के जैनधर्म में दीक्षित होने का उल्लेख मिलता है । इन ऐतिहासिक उल्लेखों तथा गिरनार, पावागढ़ आदि सिद्ध क्षेत्रों चौबीस. मध्यकालीन गुजराती साहित्य - कशून्य माशून्य मुंशी
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भोपाल, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 142वीं जयंती उत्साह व उमंग के साथ मनाई जा रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान में मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने की शपथ दिलाई। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मरण किया।
चौहान ने अपने संबोधन में कहा, भारत का वर्तमान स्वरूप सरदार वल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने पांच सौ रियासतों को भारत में शामिल करने में अविस्मरणीय योगदान दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत जवाहर लाल नेहरू ने जम्मू एवं कश्मीर का मामला भी सरदार पटेल को सौंप दिया होता, तो आज पाक अधिकृत कश्मीर भारत का हिस्सा होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने भोपाल, हैदराबाद और जूनागढ़ की रियासतों को भी भारत में विलय होने के लिए मजबूर किया। जो भी भारत की एकता और अखंडता को विखंडित करने का प्रयास करेगा उनके प्रयासों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। भारत की एकता को खंडित करने के प्रयासों को मुंह तोड़ जवाब मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत अब 1962 का भारत नहीं रहा। आज भारत एक सशक्त और सक्षम राष्ट्र है, जो पाकिस्तान की सीमा पर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है और चीन की सेना को वापस जाने के लिए मजबूर कर सकता है।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी सरदार पटेल की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। सभी स्थानों पर रन फॉर यूनिटी का भी आयोजन किया गया है।
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भोपाल, इकतीस अक्टूबर । मध्य प्रदेश में सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक सौ बयालीसवीं जयंती उत्साह व उमंग के साथ मनाई जा रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल उद्यान में मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने की शपथ दिलाई। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मरण किया। चौहान ने अपने संबोधन में कहा, भारत का वर्तमान स्वरूप सरदार वल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने पांच सौ रियासतों को भारत में शामिल करने में अविस्मरणीय योगदान दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत जवाहर लाल नेहरू ने जम्मू एवं कश्मीर का मामला भी सरदार पटेल को सौंप दिया होता, तो आज पाक अधिकृत कश्मीर भारत का हिस्सा होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने भोपाल, हैदराबाद और जूनागढ़ की रियासतों को भी भारत में विलय होने के लिए मजबूर किया। जो भी भारत की एकता और अखंडता को विखंडित करने का प्रयास करेगा उनके प्रयासों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। भारत की एकता को खंडित करने के प्रयासों को मुंह तोड़ जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत अब एक हज़ार नौ सौ बासठ का भारत नहीं रहा। आज भारत एक सशक्त और सक्षम राष्ट्र है, जो पाकिस्तान की सीमा पर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है और चीन की सेना को वापस जाने के लिए मजबूर कर सकता है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी सरदार पटेल की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। सभी स्थानों पर रन फॉर यूनिटी का भी आयोजन किया गया है।
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भारत के लिए खेल चुके इरफ़ान पठान और युसूफ पठान ने लोगो को कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क दिए थे. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी भी लोगों को साबुन और मास्क बाट रहे हैं. 27 बांग्लादेशी क्रिकेटरों ने कोरोनो वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए बांग्लादेश सरकार को अपने मासिक वेतन का आधा हिस्सा दान करने का फैसला किया है. सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने 50-50 लाख रूपये दिए हैं. कई क्रिकेटर्स इस मौके पर अपने-अपने देश की सेवा कर रहे हैं.
आज गुरूवार को एक खबर आई थी, जिसमे बताया गया था कि धोनी को कोरना वायरस से लड़ने के लिए एक एनजीओ को 1 लाख रूपये की राशि दी है.
सोशल मीडिया पर यहां तक लिखा गया कि धोनी की सालाना कमाई 800 करोड़ के करीब है और इतने पैसे कमाने के बावजूद उन्होंने मामूली राशि दान की है.
हालांकि अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुणे की एक एनजीओ 12. 5 लाख का फंड जुटा रही थी जिससे दिहाड़ी मजदूरों की मदद हो सके. उसमें 1 लाख रुपये कम पड़ रहे थे जो धोनी ने अपनी तरफ से दिए. वह इस फंड जुटाने में सबसे ज्यादा राशि दान करने वाले व्यक्ति रहे, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा था.
I request all media houses to stop carrying out false news at sensitive times like these ! Shame on You ! I wonder where responsible journalism has disappeared !
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भारत के लिए खेल चुके इरफ़ान पठान और युसूफ पठान ने लोगो को कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क दिए थे. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी भी लोगों को साबुन और मास्क बाट रहे हैं. सत्ताईस बांग्लादेशी क्रिकेटरों ने कोरोनो वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए बांग्लादेश सरकार को अपने मासिक वेतन का आधा हिस्सा दान करने का फैसला किया है. सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने पचास-पचास लाख रूपये दिए हैं. कई क्रिकेटर्स इस मौके पर अपने-अपने देश की सेवा कर रहे हैं. आज गुरूवार को एक खबर आई थी, जिसमे बताया गया था कि धोनी को कोरना वायरस से लड़ने के लिए एक एनजीओ को एक लाख रूपये की राशि दी है. सोशल मीडिया पर यहां तक लिखा गया कि धोनी की सालाना कमाई आठ सौ करोड़ के करीब है और इतने पैसे कमाने के बावजूद उन्होंने मामूली राशि दान की है. हालांकि अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुणे की एक एनजीओ बारह. पाँच लाख का फंड जुटा रही थी जिससे दिहाड़ी मजदूरों की मदद हो सके. उसमें एक लाख रुपये कम पड़ रहे थे जो धोनी ने अपनी तरफ से दिए. वह इस फंड जुटाने में सबसे ज्यादा राशि दान करने वाले व्यक्ति रहे, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा था. I request all media houses to stop carrying out false news at sensitive times like these ! Shame on You ! I wonder where responsible journalism has disappeared !
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बिहारः राजद विधायक आंख पर पट्टी बांधकर पहुंचे विधानसभा, कहा, 'मै सुशासन हूं, मुझे कुछ नहीं दिख रहा'
बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। राज्य शराबबंदी के बाद भी कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से हो रही है मौत को लेकर बुधवार को राजद विधायकों सहित विपक्षी सदस्यों ने बिहार विधानसभा में जमकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान महुआ क्षेत्र से राजद विधायक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए आंख पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। राजद विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि, मैं सुशासन हूं, जिसे दिखाई नहीं दे रहा है।
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को होली में जहरीली शराब से मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा बाहर और सदन के अंदर जमकर प्रदर्शन और हंगामा किया गया। इस दौरान महुआ से राजद विधायक मुकेश रौशन आंखों पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे।
उन्होंने कहा कि मैं सुशासन बाबू हूं, मुझे कुछ नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बावजूद सैकड़ों लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है, लेकिन सरकार को दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि आखिर इन लोगों की मौत के जिम्मेदार कौन हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में लीपापोती में लगी है। उन्होंने कहा कि 'सुशासन की सरकार' को कुछ दिखता नहीं है।
इधर, सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही सदन में भी जहरीली शराब पीने से हो रही मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि लोग जहरीली शराब पीकर मर रहे हैं और प्रशासन कह रहा है कि बीमारी से मौत हो रही है।
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा सदस्यों को बार-बार शांत रहने की अपील करते रहे, लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।
उल्लेखनीय है कि होली के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध परिस्थिति से 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन इसे बीमारी से मौत की बात कह रहा है।
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बिहारः राजद विधायक आंख पर पट्टी बांधकर पहुंचे विधानसभा, कहा, 'मै सुशासन हूं, मुझे कुछ नहीं दिख रहा' बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। राज्य शराबबंदी के बाद भी कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से हो रही है मौत को लेकर बुधवार को राजद विधायकों सहित विपक्षी सदस्यों ने बिहार विधानसभा में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान महुआ क्षेत्र से राजद विधायक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए आंख पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। राजद विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि, मैं सुशासन हूं, जिसे दिखाई नहीं दे रहा है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को होली में जहरीली शराब से मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा बाहर और सदन के अंदर जमकर प्रदर्शन और हंगामा किया गया। इस दौरान महुआ से राजद विधायक मुकेश रौशन आंखों पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैं सुशासन बाबू हूं, मुझे कुछ नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बावजूद सैकड़ों लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है, लेकिन सरकार को दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि आखिर इन लोगों की मौत के जिम्मेदार कौन हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में लीपापोती में लगी है। उन्होंने कहा कि 'सुशासन की सरकार' को कुछ दिखता नहीं है। इधर, सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही सदन में भी जहरीली शराब पीने से हो रही मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि लोग जहरीली शराब पीकर मर रहे हैं और प्रशासन कह रहा है कि बीमारी से मौत हो रही है। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा सदस्यों को बार-बार शांत रहने की अपील करते रहे, लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। उल्लेखनीय है कि होली के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध परिस्थिति से तीस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन इसे बीमारी से मौत की बात कह रहा है।
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काममें घन देनेमें असमर्थ थी । यह उद्योग सिर्फ प्रचारपर नहीं टिक सकता था। इसलिये सरकारी सहायताके अभावमें यह आन्दोलन शान्त हो गया।
३०१. गोपालक संघ : आगे चलकर एक गोपालक संघ बनाया गया। बबईसे रक्षाके लिये कुछ विसुकी गायें इकट्ठी की गयीं । इन गरओंकी दूध-उत्पत्ति संतोषदायक थी और बच्चे भी अच्छे किस्मके मालूम हुए। सरकार और जनता किसीसे धन नहीं मिलनेके कारण यह प्रयासभी चल नहीं सका। कठिनाइयों और धनका अभाव होते हुए भी ग्रामीके कामके जरिये बबईमें ढोर- उन्नति का कार्य मुस्तैदीसे हो रहा था ।
श्री ब्रूएनने सन् १९३९ में पशुपालन शाखाकी मोंटिंगमें कहा था कि बहुतसे ग्राम समूह हैं जिनमें केवल शुद्ध नस्लके ढोर ही पाये जा सकते हैं। नंबर पडे और रजिस्टरी किये हुए है । एक एक ग्राम समूहों में ९० ग्राम तक हैं । ३०२. काँकरेंज अचल : भारतके सात सवर्धन अचलकी जाँच में दबईके काँकरेज अंचलकी जाँच हुई थी । यह स्थान अहमदाबादके आसपासका है। बबई प्रान्तका सानन्द महाल कांकरेज ढोरका घर माना जाता है । यद्यपि काठियावाड़ की सीमापर धोलका और वीरमगांवमें गीर भी काफी होते हैं । इस इलाकेमें पेशेवर संवर्धक और किसान गव्य के लिये भैंस बहुत पालते हैं । (५६, २०२, २५८, २६६, २८७, ३१५,३३७, ३४४, ३६६)
३०३. कांकरेज गायोंकी कम संभाल : अनेक दूसरे अचलोंसे यहाँक ढोरकी हालत अलग नहीं है । कांकरेज इलाके में भैंसकी तुलनामें गायकी सभाल अच्छी नहीं होती । कहा जाना है कि इस इलाके के भीतरी हिस्से में गायकी जगह भैंस तेजीसे छीनती जा रही है।
- साधारण तौरपर गायाँको कम खिलाते हैं । गरमीमें उन्हें गोचरों (जिनपर) गुजाइशसे जांढे पशु चरते है ) और फसल कट जानेके बाद खेतोंमे जो कुछ चर पाती हैं 'उसीसे गुजारा करनेको छोड़ दिया जाता है। शायद ही दुही जाती है । वछियावाली गायको सानी दी जाता है।
भैंसकी सॅभाल जरूर अच्छी होती है । उसे बिनौला, ग्वार, जौका चोकर और खली दी जाती है । (५६, १०६ - २७, २१६, २३६, २५७, २७८, ३७२-७६)
भारतके प्रान्तीमें सवर्धन : वबई
३०४. काँकरेजके खाड़ी और भरवाद संवर्धकः इस इलाकेके पेशेवर सवर्धक रवाड़ी और भरवाद है । बबई प्रान्तके इस उत्तरी भागका यह भाग्य है कि वह यहाँ हैं। इनकी जानि बहुत वली है। इनकी देह सुडौल होती है तथा आँखाम बुद्धिमानी कलकती है ।
बलिष्ट देह, आकार, दूध देनेकी सामर्थ्य तथा उचिन रग और आकृनिवाले पितरोके होनहार बछड़ोंको पेशेवर सवर्भक जन्म होनेके बादही पसन्द कर लेते हैं । वह लोग माँका साग दूध बछड़ेको पीने देते हैं और २ या ३ महीनेकी उमर होनेपर उसको दूसरी गायसे भी पिलवाते हैं, जिससे कि उसे काफी पूर्ण दध मिले । छोड़नेपर साँढ-चछड़े को खास चारा दिया जाता है, जिसमें माधारण चारा और पौष्टिकके अलावा घी और हल्दीभी रहती है। दूध छोडते ही बउईको वधिया कर किसानोंके हाथ बेच देते हैं। यह लोग इसे पालकर बैल तैयार करते है ।
यह लोग सवर्धनके अपने तरीकेके बारेमें सावधानी रखते हैं और सपिट सवर्धन नही होने देते । जब किसी सँगढकी सनान जवान हो जाती है तब यह लोग दूसरे मवर्धकोंसे उसे बदल लेते है । पशुपालकों की साधारण आदतके अनुसार यह लंगभी गायकी उपेक्षा करते हैं। यह इनके बारें महत्वकी बात है। बछिया या गायको जिस सावधानी से खिलाना चाहिये, यह लोग नहीं खिलाते । बढड़की जैसी गंभाल ये करते हैं उससे स्पष्ट है कि यह पोषणका महत्व जरूर जानते हैं। फिरभी नाटकी जननी गायकी उपेक्षा उसके बचपनसे ही करते हैं । यह लोग बछियों और गायकी आपसमें बदलीअल करलेते हैं, पर उन्हें बेचते नहीं है । (१९६, २७६)
३०५. बंबईमें साँढ़ तैयार करना : श्री ब्र.एनने पाया कि यथेष्ट सरकारी सहायताके बिना बहुत बड़ी सख्यामे माँद तैयार करना असम्भव है। "... उन्होंने (श्री ब्रुएन) इनलोगोंको (प्रान्तके व्यवसायी गव्यक्षेत्र) बार बार अच्छे सौढ़ तैयार करनेके लिये राजी करने की कोशिश की। पर वह लोग सदा यही चाहते थे कि सरकार इस बातका भरोसा दे कि वह जवान सौह एक निश्चिन दाम पर सरोद लिया करेगी।" वह मानते थे कि "जवनक सरकार सर्वजिको सहायता-उत्ति नहीं देगी, अच्छे मौद पानेकी कोई संभावना नहीं है। और भारवहन, नया भारवहनको नस्लोंके मामले में एक दूसरी कठिनाई हूँ । aaiet उमरसे जादेके कोई दो सांह मजेमे एक साथ नहीं रह सकते । इसलिये
अधिक साँढ तैयार करनेमे किसानको अतिरिक्त मजूर रखना होता है। सहायतावृत्तिके बिना वह लोग यह नहीं कर सकते....." (१४२)
३०६. साँढ़ तैयार करना : वृत्ति आवश्यक : "गुजरातमें हरेक गाव में कांकरेज ढोर पैदा किये जाते है । पर कोई संवर्भक ६ महीनेकी उमरसे अधिकके साँढ़ और बछड़े नहीं रखेगा। क्योंकि दो साँढ़ साथ रखने में कठिनाई होती है । इसलिये इन साँढ-चच्चोंको वचपन में ही वधिया कर दिया जाता है और वह संवर्धनके कामके नहीं रहते। अगर इन बच्चा - साढ़ोको पालना हो तो उन्हें सरकारी क्षेत्रोंमें रखा जाय या उन्हे पालनेके लिये सरकारी वृति दी जाय । सरकारी_ क्षेत्रों में पालना बहुत खर्चीला होगा
••• जिन किमानोंके पास अपनी जमीन है वह इन बच्चा सौढोंको भारवाही ढोर बनाकर बेचनेके विचारसे खरीदते हैं।" उन्होंने सोचा कि "इन पशुओको हलमें जोतनेसे बचाना होगा और यह करनेका एकही उपाय वृत्ति देना है। इंगलैन्डमै साँढ पैदा करना भारतसे एकदम भिन्न है। दुनियाँके दूसरे हिस्सों में एक या दो से जादे साँढ़ पालने वाले गव्य क्षेत्रवालों को अच्छे साँढ की कीमतमें ३०० से ४०० पाउन्ड मिल जाते हैं। पर भारत में अच्छा साँढ लागत दामपर भी नहीं बिक सकता" ("पशु पालन शाखाकी तोसरी मीटिग," १९३९, पृ० ९२-९३) (१४१-४२)
३०७. वंबईके दक्खिनी भागमें संवर्धन : परलोक्गत श्री ब्रूएनने सौढ पालनेके वारेमें ठीक ही कहा है। कांकरेज इलाके के रवाड़ी और भरवाद सवर्धक ढोर-सवर्धन के विशेषज्ञ हैं। अगर सरकार उनके माँढ़ खास दाम में खरीद लेनेका भरोसा ढे या उन्हें वृत्ति ढे तो वह लोग निश्चय ही सारे प्रान्तको अनेक काँकरेज साँढ दे सकते हैं, और इसमें सन्देह नहीं कि इससे सारे प्रान्तका कोटि-निर्माण हो सकता है ।
३०८. उत्तर कन्नड़ भाग : बबई प्रान्तका सबसे दक्खिनी हिस्सा उत्तर कन्नड़ जिला है। यहाँकी जलवायु ढोर संवर्धनके लिये एकदम प्रतिकूल है। १२० दिनमें ८० से १५० इंचतक वर्षा हो सकती है । ३ महीनेको लगातार वर्षाक बाद ९ महीना सूखा रहता है। फिरभी ढोर पालनाही होता है। कोई यह भी सोच सकता है कि वर्षके अधिकांश भागमें गर्मीके लम्बे महीनों के कारण लोग भैंस के बदले गाय पालना पसन्द करते होंगे । पर नहीं। यहाँ भी किसान थोडेसे
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काममें घन देनेमें असमर्थ थी । यह उद्योग सिर्फ प्रचारपर नहीं टिक सकता था। इसलिये सरकारी सहायताके अभावमें यह आन्दोलन शान्त हो गया। तीन सौ एक. गोपालक संघ : आगे चलकर एक गोपालक संघ बनाया गया। बबईसे रक्षाके लिये कुछ विसुकी गायें इकट्ठी की गयीं । इन गरओंकी दूध-उत्पत्ति संतोषदायक थी और बच्चे भी अच्छे किस्मके मालूम हुए। सरकार और जनता किसीसे धन नहीं मिलनेके कारण यह प्रयासभी चल नहीं सका। कठिनाइयों और धनका अभाव होते हुए भी ग्रामीके कामके जरिये बबईमें ढोर- उन्नति का कार्य मुस्तैदीसे हो रहा था । श्री ब्रूएनने सन् एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में पशुपालन शाखाकी मोंटिंगमें कहा था कि बहुतसे ग्राम समूह हैं जिनमें केवल शुद्ध नस्लके ढोर ही पाये जा सकते हैं। नंबर पडे और रजिस्टरी किये हुए है । एक एक ग्राम समूहों में नब्बे ग्राम तक हैं । तीन सौ दो. काँकरेंज अचल : भारतके सात सवर्धन अचलकी जाँच में दबईके काँकरेज अंचलकी जाँच हुई थी । यह स्थान अहमदाबादके आसपासका है। बबई प्रान्तका सानन्द महाल कांकरेज ढोरका घर माना जाता है । यद्यपि काठियावाड़ की सीमापर धोलका और वीरमगांवमें गीर भी काफी होते हैं । इस इलाकेमें पेशेवर संवर्धक और किसान गव्य के लिये भैंस बहुत पालते हैं । तीन सौ तीन. कांकरेज गायोंकी कम संभाल : अनेक दूसरे अचलोंसे यहाँक ढोरकी हालत अलग नहीं है । कांकरेज इलाके में भैंसकी तुलनामें गायकी सभाल अच्छी नहीं होती । कहा जाना है कि इस इलाके के भीतरी हिस्से में गायकी जगह भैंस तेजीसे छीनती जा रही है। - साधारण तौरपर गायाँको कम खिलाते हैं । गरमीमें उन्हें गोचरों गुजाइशसे जांढे पशु चरते है ) और फसल कट जानेके बाद खेतोंमे जो कुछ चर पाती हैं 'उसीसे गुजारा करनेको छोड़ दिया जाता है। शायद ही दुही जाती है । वछियावाली गायको सानी दी जाता है। भैंसकी सॅभाल जरूर अच्छी होती है । उसे बिनौला, ग्वार, जौका चोकर और खली दी जाती है । भारतके प्रान्तीमें सवर्धन : वबई तीन सौ चार. काँकरेजके खाड़ी और भरवाद संवर्धकः इस इलाकेके पेशेवर सवर्धक रवाड़ी और भरवाद है । बबई प्रान्तके इस उत्तरी भागका यह भाग्य है कि वह यहाँ हैं। इनकी जानि बहुत वली है। इनकी देह सुडौल होती है तथा आँखाम बुद्धिमानी कलकती है । बलिष्ट देह, आकार, दूध देनेकी सामर्थ्य तथा उचिन रग और आकृनिवाले पितरोके होनहार बछड़ोंको पेशेवर सवर्भक जन्म होनेके बादही पसन्द कर लेते हैं । वह लोग माँका साग दूध बछड़ेको पीने देते हैं और दो या तीन महीनेकी उमर होनेपर उसको दूसरी गायसे भी पिलवाते हैं, जिससे कि उसे काफी पूर्ण दध मिले । छोड़नेपर साँढ-चछड़े को खास चारा दिया जाता है, जिसमें माधारण चारा और पौष्टिकके अलावा घी और हल्दीभी रहती है। दूध छोडते ही बउईको वधिया कर किसानोंके हाथ बेच देते हैं। यह लोग इसे पालकर बैल तैयार करते है । यह लोग सवर्धनके अपने तरीकेके बारेमें सावधानी रखते हैं और सपिट सवर्धन नही होने देते । जब किसी सँगढकी सनान जवान हो जाती है तब यह लोग दूसरे मवर्धकोंसे उसे बदल लेते है । पशुपालकों की साधारण आदतके अनुसार यह लंगभी गायकी उपेक्षा करते हैं। यह इनके बारें महत्वकी बात है। बछिया या गायको जिस सावधानी से खिलाना चाहिये, यह लोग नहीं खिलाते । बढड़की जैसी गंभाल ये करते हैं उससे स्पष्ट है कि यह पोषणका महत्व जरूर जानते हैं। फिरभी नाटकी जननी गायकी उपेक्षा उसके बचपनसे ही करते हैं । यह लोग बछियों और गायकी आपसमें बदलीअल करलेते हैं, पर उन्हें बेचते नहीं है । तीन सौ पाँच. बंबईमें साँढ़ तैयार करना : श्री ब्र.एनने पाया कि यथेष्ट सरकारी सहायताके बिना बहुत बड़ी सख्यामे माँद तैयार करना असम्भव है। "... उन्होंने इनलोगोंको बार बार अच्छे सौढ़ तैयार करनेके लिये राजी करने की कोशिश की। पर वह लोग सदा यही चाहते थे कि सरकार इस बातका भरोसा दे कि वह जवान सौह एक निश्चिन दाम पर सरोद लिया करेगी।" वह मानते थे कि "जवनक सरकार सर्वजिको सहायता-उत्ति नहीं देगी, अच्छे मौद पानेकी कोई संभावना नहीं है। और भारवहन, नया भारवहनको नस्लोंके मामले में एक दूसरी कठिनाई हूँ । aaiet उमरसे जादेके कोई दो सांह मजेमे एक साथ नहीं रह सकते । इसलिये अधिक साँढ तैयार करनेमे किसानको अतिरिक्त मजूर रखना होता है। सहायतावृत्तिके बिना वह लोग यह नहीं कर सकते....." तीन सौ छः. साँढ़ तैयार करना : वृत्ति आवश्यक : "गुजरातमें हरेक गाव में कांकरेज ढोर पैदा किये जाते है । पर कोई संवर्भक छः महीनेकी उमरसे अधिकके साँढ़ और बछड़े नहीं रखेगा। क्योंकि दो साँढ़ साथ रखने में कठिनाई होती है । इसलिये इन साँढ-चच्चोंको वचपन में ही वधिया कर दिया जाता है और वह संवर्धनके कामके नहीं रहते। अगर इन बच्चा - साढ़ोको पालना हो तो उन्हें सरकारी क्षेत्रोंमें रखा जाय या उन्हे पालनेके लिये सरकारी वृति दी जाय । सरकारी_ क्षेत्रों में पालना बहुत खर्चीला होगा ••• जिन किमानोंके पास अपनी जमीन है वह इन बच्चा सौढोंको भारवाही ढोर बनाकर बेचनेके विचारसे खरीदते हैं।" उन्होंने सोचा कि "इन पशुओको हलमें जोतनेसे बचाना होगा और यह करनेका एकही उपाय वृत्ति देना है। इंगलैन्डमै साँढ पैदा करना भारतसे एकदम भिन्न है। दुनियाँके दूसरे हिस्सों में एक या दो से जादे साँढ़ पालने वाले गव्य क्षेत्रवालों को अच्छे साँढ की कीमतमें तीन सौ से चार सौ पाउन्ड मिल जाते हैं। पर भारत में अच्छा साँढ लागत दामपर भी नहीं बिक सकता" तीन सौ सात. वंबईके दक्खिनी भागमें संवर्धन : परलोक्गत श्री ब्रूएनने सौढ पालनेके वारेमें ठीक ही कहा है। कांकरेज इलाके के रवाड़ी और भरवाद सवर्धक ढोर-सवर्धन के विशेषज्ञ हैं। अगर सरकार उनके माँढ़ खास दाम में खरीद लेनेका भरोसा ढे या उन्हें वृत्ति ढे तो वह लोग निश्चय ही सारे प्रान्तको अनेक काँकरेज साँढ दे सकते हैं, और इसमें सन्देह नहीं कि इससे सारे प्रान्तका कोटि-निर्माण हो सकता है । तीन सौ आठ. उत्तर कन्नड़ भाग : बबई प्रान्तका सबसे दक्खिनी हिस्सा उत्तर कन्नड़ जिला है। यहाँकी जलवायु ढोर संवर्धनके लिये एकदम प्रतिकूल है। एक सौ बीस दिनमें अस्सी से एक सौ पचास इंचतक वर्षा हो सकती है । तीन महीनेको लगातार वर्षाक बाद नौ महीना सूखा रहता है। फिरभी ढोर पालनाही होता है। कोई यह भी सोच सकता है कि वर्षके अधिकांश भागमें गर्मीके लम्बे महीनों के कारण लोग भैंस के बदले गाय पालना पसन्द करते होंगे । पर नहीं। यहाँ भी किसान थोडेसे
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सभी क्षेत्रों से होने वाला लाभ उस कंपनी कार्यरत् व्यक्तियों की कार्यकुशलता पर ही निर्भर करती है।
किसी भी संगठन में संख्या की दृष्टि से एक विशाल जनशक्ति हो सकती है परन्तु यदि वे पूर्ण उत्पादक नहीं हैं अथवा यदि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो इसे संगठन की हानि ही कहा जा सकता है ।
किसी भी संगठन की पहली चुनौती होती है अच्छे लोगो को लेना और इसके बाद अगली चुनौती के रुप में उसे उन लोगों को प्रशिक्षित करके अच्छा मार्गदर्शक बनाना होता है।
इस विषय में चाणक्य का कथन है"जब वह (राजकुमार) इसके लिए (ज्ञान) तैयार हो, तभी विशेषज्ञों को उसे प्रशिक्षित करना चाहिये।" (१.१७.२७)
जब एचआर विभाग बिजनेस स्कूलों या अन्य कंपनियों से लोगों की भर्ती कर रहा होता है, तो वह प्रारंभिक तौर पर अच्छे प्रबंधको की तलाश करता है। लेकिन यदि कंपनी को आगे बढ़ना है, तो उसकी अगली चुनौती होती है, इन प्रबंधकों को अच्छा मार्गदर्शक बनाना । ऊपर दिये गये सूत्र में चाणक्य योग्य मार्गदर्शकों की पहचान पर जोर देते हैं ; फिर उन्हे नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण देने की बात कहते हैं। लेकिन प्रश्न है कि हम यह किस प्रकार निर्णय लें कि कोई प्रबंधक या कर्मचारी एक योग्य मार्गदर्शक बन सकता है ?
यहां कुछ सुझाव दिये गये हैं :
नेतृत्व एक मनोभाव है
नेतृत्व एक स्थिति या पद नही होता। यह सोचने का तरीका है- एक मनोभाव । इसलिए व्यापारिक नेता को अपने अधीनस्थों के मानसिक चिन्तन की गुणवत्ता पर ध्यान देना होता है। नेतृत्व की महान बुद्धी की परिचायक है। यह निरन्तर सीखने हेतु प्रयासरत रहती है। समस्या आने पर यह उलझती नहीं बल्कि उसके समाधान के विकल्पों को तलाश कर उससे बाहर निकलने का मार्ग निकाल लेती है। यह स्वयं को भी चुनौती देती है।
समाधान पर केन्द्रित
कोई भी सक्षम नेता समाधान पर ध्यान केन्द्रित करता है। एक बार मैं "अच्छे प्रबंधकों से महान् नेता" विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम कर रहा था। उस दौरान एक प्रतिनिधि ने मुझसे प्रश्न किया, "मेरा बॉस ही सदैव निर्णय करने वाला है। वह प्रायः समाधान निकाल ही लेता है, तो मैं उसके पास अपनी समस्यांए क्यों न ले जाऊं ?"
मैंने उतर दिया, "हां", आप ठीक कहते हैं। आपको अपनी समस्या उनके पास अवश्य ले जाना चाहिये, परंतु दो या तीन वैकल्पिक समाधानों के साथ। फिर बॉस पर निर्णय छोड़ दें कि इनमें से कौन सा समाधान उस संगठन के लिए सबसे उपयुक्त लेकिन वह सोच भी आपकी अपनी होनी चाहिये न कि केवल आपके बॉस की
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सभी क्षेत्रों से होने वाला लाभ उस कंपनी कार्यरत् व्यक्तियों की कार्यकुशलता पर ही निर्भर करती है। किसी भी संगठन में संख्या की दृष्टि से एक विशाल जनशक्ति हो सकती है परन्तु यदि वे पूर्ण उत्पादक नहीं हैं अथवा यदि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो इसे संगठन की हानि ही कहा जा सकता है । किसी भी संगठन की पहली चुनौती होती है अच्छे लोगो को लेना और इसके बाद अगली चुनौती के रुप में उसे उन लोगों को प्रशिक्षित करके अच्छा मार्गदर्शक बनाना होता है। इस विषय में चाणक्य का कथन है"जब वह इसके लिए तैयार हो, तभी विशेषज्ञों को उसे प्रशिक्षित करना चाहिये।" जब एचआर विभाग बिजनेस स्कूलों या अन्य कंपनियों से लोगों की भर्ती कर रहा होता है, तो वह प्रारंभिक तौर पर अच्छे प्रबंधको की तलाश करता है। लेकिन यदि कंपनी को आगे बढ़ना है, तो उसकी अगली चुनौती होती है, इन प्रबंधकों को अच्छा मार्गदर्शक बनाना । ऊपर दिये गये सूत्र में चाणक्य योग्य मार्गदर्शकों की पहचान पर जोर देते हैं ; फिर उन्हे नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण देने की बात कहते हैं। लेकिन प्रश्न है कि हम यह किस प्रकार निर्णय लें कि कोई प्रबंधक या कर्मचारी एक योग्य मार्गदर्शक बन सकता है ? यहां कुछ सुझाव दिये गये हैं : नेतृत्व एक मनोभाव है नेतृत्व एक स्थिति या पद नही होता। यह सोचने का तरीका है- एक मनोभाव । इसलिए व्यापारिक नेता को अपने अधीनस्थों के मानसिक चिन्तन की गुणवत्ता पर ध्यान देना होता है। नेतृत्व की महान बुद्धी की परिचायक है। यह निरन्तर सीखने हेतु प्रयासरत रहती है। समस्या आने पर यह उलझती नहीं बल्कि उसके समाधान के विकल्पों को तलाश कर उससे बाहर निकलने का मार्ग निकाल लेती है। यह स्वयं को भी चुनौती देती है। समाधान पर केन्द्रित कोई भी सक्षम नेता समाधान पर ध्यान केन्द्रित करता है। एक बार मैं "अच्छे प्रबंधकों से महान् नेता" विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम कर रहा था। उस दौरान एक प्रतिनिधि ने मुझसे प्रश्न किया, "मेरा बॉस ही सदैव निर्णय करने वाला है। वह प्रायः समाधान निकाल ही लेता है, तो मैं उसके पास अपनी समस्यांए क्यों न ले जाऊं ?" मैंने उतर दिया, "हां", आप ठीक कहते हैं। आपको अपनी समस्या उनके पास अवश्य ले जाना चाहिये, परंतु दो या तीन वैकल्पिक समाधानों के साथ। फिर बॉस पर निर्णय छोड़ दें कि इनमें से कौन सा समाधान उस संगठन के लिए सबसे उपयुक्त लेकिन वह सोच भी आपकी अपनी होनी चाहिये न कि केवल आपके बॉस की
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अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च । नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ।।
( अयम् ) यह आत्मा, ( अच्छेद्यः ) शस्त्रोंसे काटे जाने योग्य नहीं है, ( अयम, ) यह आत्मा, ( अदाह्यः ) अग्निसे जलाने योग्य नहीं है, यह आत्मा, ( अक्लेद्यः ) जलसे गलाने योग्य नहीं है, ( च ) और, ( अशोष्यः एव ) निश्चय ही वायुसे सुखाने योग्य नहीं है। इसलिए, ( अयम् ) यह आत्मा, ( नित्यः ) नित्य अर्थात् तीनों कालोंमें एकरस है, ( सर्वगतः ) सबमें व्यापक है, ( स्थाणुः ) स्थिर स्वभाववाला है, ( अचलः ) हिलनेवाला नहीं है, और, ( सनातनः ) सदासे चला आ रहा है ॥ २४ ॥
पञ्चारे चक्रे परिवर्तमाने तस्मिन्ना तस्थुर्भुवनानि विश्वा । तस्य नाक्षस्तप्यते भूरिभारः सनादेव न शोर्यते सनाभिः ॥ ( ऋग्वेदः १-१६४ - १३ )
( पञ्चारे ) पञ्चज्ञानेन्द्रियों, या पञ्चकर्मेन्द्रियों, या पञ्चमहाभूतोंके आरोंवाले, (चक्रे ) चक्कर लगानेवाले या भ्रमणशील, ( परिवर्तमाने ) पुनः पुनः परिवर्तित होनेवाले, ( तस्मिन् ) उस देह - चक्रमें, ( विश्वा ) सारे, ( भुवनानि ) प्राणिमात्र, ( आतस्थुः ) रहते हैं । ( तस्य ) उस चक्रके मध्यमें रहनेवाला यह जीवात्मा, ( अ-क्षः ) नक्षत्र होनेवाला, तथा, ( भूरिभारः ) सकल भारी देहके उठानेसे बहुत भारवाला होनेके कारण, ( न तप्यते ) दाह-क्लेशादि प नहीं होता, और यह आत्मा, ( सनात् एव ) सदासे ही एकरस चला आ रहा है अतः इसे सनातन कहते हैं। इसलिए ही, ( सनाभिः ) सर्वदा एकरूप नाभिवाला जाते हैं यह आत्मा, ( न शीर्यते ) नहीं टूटता । जैसे रथके आरे भारसे टूट और अक्षके नाश होनेसे रथकी नाभि या मध्यभाग भी मुड़ जाता या टूट जाता है वैसे यह आत्मा देहरूपी चक्रके चीरे जानेपर, जलसे गीले होनेपर या अग्निसे जल जानेपर भी न चीरा जाता है, न गीला होता है और न जलता है, इसलिए आत्मा नित्य और देह अनित्य है।
तुलना - गीतामें देहको छेद्य, क्लेद्य, शोष्य और दाह्य एवं आत्माको अच्छेद्य, अभेद्य, अक्लेद्य, अशोष्य, नित्य, सर्वगत और सनातन कहा गया है । वेदमें भी कहा गया है कि देह-चक्र आरे आदिके टूटने से नष्ट हो जाता है परन्तु आत्मा नित्य, अच्छेच, अभेद्य, अदाह्य है ।
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते । तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ।।
( अयम् ) यह आत्मा, ( अव्यक्तः ) अव्यक्त या अप्रत्यक्ष, अर्थात् किसी भी इन्द्रिय द्वारा प्रत्यक्ष न होनेवाला है । ( अयम् ) यह आत्मा, ( अचिन्त्यः ) अनुमानादि द्वारा चिन्ता करने योग्य नहीं है । ( अयम् ) यह आत्मा, ( अविकार्यः ) न विकृत होने योग्य, ( उच्यते ) कहा जाता है । ( तस्मात् ) इसलिए, ( एनम् ) इस आत्माको, ( एवम् ) इस प्रकार, ( विदित्वा ) जानकर, ( अनुशोचितुम् ) इसके मरने-मारनेका शोच करने के लिए, ( न अर्हसि ) योग्य नहीं है, अर्थात् तू अपने बन्धुओंके मरने या मारनेका शोच मत कर ॥ २५ ॥
को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभत । भूम्या असुरसुगात्मा क्वस्वित् को विद्वांसमुप गात्प्रष्टुमेतत् ॥ ( ऋग्वेदः १-१६४-४ )
( प्रथमम् ) सबसे प्रथम अर्थात् अनादि कालमें, ( जायमानम् ) शरीरमें प्रकट होते हुए आत्माको, ( क : ) किसने, ( ददर्श ) देखा ? अव्यक्त होनेसे उसे कोई पुरुष चक्षुआदि इन्द्रियोंसे नहीं देख सकता, ( यत् ) क्योंकि, यह आत्मा, ( अनस्थाः=न + अ + स्थाः ) सर्वदा एकरस रहनेवाला और विकारसे रहित है, अथवा हड्डियोंसे रहित होकर, ( अस्थन्वन्तम् ) विनाशी पृथिव्यादिसंघातात्मक, अथवा हड्डियोंवाले देहको, (बिर्भात ) धारण करता है । ( भूम्याः ) पार्थिव स्थूल शरीरका, ( असुः ) प्राणरूप होकर धारण करनेवाला, ( असृक् ) किसीसे न बनाया गया या सृज् यानी राग अर्थात् देहादिके रागसे रहित वह, (आत्मा ) जीवात्मा, ( क्वस्वित् ) कहाँ रहता है, इस चिन्ताका विषय न होनेसे वह आत्मा अचिन्त्य कहा गया है । ( क ) कौन मनुष्य, ( विद्वांसम् ) विद्वान् पुरुष के पास, ( एतत् ) इस आश्चर्यमय वस्तुको, ( प्रष्टुम् ) पूछनेके लिए, ( उपगात् ) जाता है !
उपनिषद् में आया है -
न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग्गच्छति नो मनो न विद्मो न विजानीमो यथैतदनुशिष्यादन्यदेव तद्विदितादयो अविदितादधि । इति शुश्रुम पूर्वेषां ये नस्तद्व चाचचक्षिरे ।
उस आत्मातक न नेत्र जाते, न वाणी जाती, न मन जाता । हम उसके विषयमें नहीं जानते कि उसे क्या बताया जाय । पूर्वाचार्योंके बतानेसे सुना कि वह विदित और अविदित दोनोंसे भिन्न है ।
तुलना - गीतामें कहा गया है कि आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य, अविकार्य है । जो ऐसा जानता है वह कभी किसी स्थान या किसी वस्तु के लिए शोक नहीं करता । वेदमें भी कहा गया है कि आत्मा हड्डी आदिसे रहित, देहधारक तथा अचिन्त्य है, जिसका ज्ञान विद्वान् पुरुषके पास जानेसे हो सकता है ।
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् । तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि ।। ( महाबाहो ! ) हे विशाल बाहुवाले अर्जुन ! ( अथ च ) यदि तू, ( एनम् ) इस आत्माको, (नित्यजातम् ) जब-जब देह उत्पन्न होता है तब तब देहके साथ ही तत्काल जन्म लेनेवाला, ( वा ) अथवा ( नित्यं मृतम् ) देहके मरनेपर देहके साथ ही मरनेवाला, ( मन्यसे ) मानता है, ( तथापि ) तो भी, इस पक्षके स्वीकार करनेपर भी, ( त्वम् ) तू, ( एवम् ) 'हमें धृतराष्ट्र के पुत्रोंको मारना उचित नहीं है' इस रीतिसे, ( शोचितुम् ) शोच करने के लिये, ( नार्हसि ) योग्य नहीं है ॥ २६ ॥
अयं पन्था अनुवित्तः पुराणो यतो देवा उदजायन्त विश्वे । अतश्चिदा जनिषोष्ट प्रवृद्धो मा मातरममुया पत्तवे कः ॥
( अयं पन्थाः ) प्रत्यक्ष प्रतीत होता हुआ यह जन्म-मरणका मार्ग, ( पुराणः ) अनादि कालसे, ( अनुवित्तः ) यथाक्रम उत्पन्न होनेवाले सब जीवोंसे पाया जाता है, ( यतः ) जिस जन्म-मार्ग से, ( विश्वे ) सब, ( देवाः ) ज्ञानी और अज्ञानी जीवात्मा, ( उदजायन्त ) उत्पन्न होते हैं । ( अतः + चित् ) इस योनिमार्ग से ही, ( प्रवृद्धः ) गर्भ में अथवा संसारमें अतीव वृद्धिको प्राप्त हुआ, ( आ जनिषीष्ट ) यह जीवात्मा उत्पन्न होता है । ( अमुया ) नित्य जन्ममरणकी इस रीतिसे, ( मातरम् ) शोकके मापक ज्ञानको, ( पत्तवे ) विनाशके लिये, ( मा कः ) मत कर, अर्थात् जन्म के साथ मृत्यु आवश्यक है इसलिये शोक व्यर्थ ही है ।
तुलना - गीता अर्जुनके सन्तोषके लिये कहा गया है कि जन्मके साथ मृत्यु और मृत्युके साथ जन्म यदि आवश्यक है तो भी मृत्यु के लिये शोक व्यर्थ है
क्योंकि मृत्यु होनेपर पुनः जन्म होगा । वेदमें भी जन्म-मरणका मार्ग पुराना बताते हुए कहा गया है कि सब जीवात्मा देहके साथ जन्म लेते, बढ़ते और मरते हैं इसलिए किसीकी मृत्युपर शोक करना व्यर्थ है ।
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्रुवं जन्म मृतस्य च । तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ।।
( हि ) क्योंकि, ( जातस्य ) जन्म लेनेवाले की, ( मृत्युः ) मृत्यु, ( ध्रुवः ) अवश्य ही होती है, ( च ) और, ( मृतस्य ) मरे हुएका, ( जन्म ) जन्म भी, ( ध्रुवम् ) अवश्य होता है, ( तस्मात् ) इसलिए, ( त्वम् ) तू, ( अपरिहार्ये अर्थ ) अवश्य होनेवाले इस विषयमें भी, ( शोचितुम् ) शोच करनेके लिये, ( न अर्हसि ) योग्य नहीं है ॥ २७ ॥
मृत्युरोशे द्विपदां मृत्युरीशे चतुष्पदाम् । तस्मात् त्वां मृत्योर्गोपतेरुद्भरामि स मा बिभेः ॥
( द्विपदाम् ) मनुष्य, पक्षी आदिपर, ( मृत्यु : ) मृत्यु, ( ईशे ) प्रभुत्व करती है, और, ( चतुष्पदाम् ) चार पाँववाले जीवोंपर ( मृत्युः ) मृत्यु, ( ईशे ) अधिकार रखती है, अर्थात् मृत्यु प्रत्येक प्राणीके लिये आवश्यक है । ( तस्मात् ) इस कारण ( त्वाम् ) तुझ जीवात्माको, ( गोपतेः ) द्विपद और चतुष्पद दोनों प्रकारके पशुओंके स्वामी, ( मृत्योः ) मृत्युसे, ( उद्भरामि ) ऊपर उठाता हूँ । ( सः ) मृत्युके भयको पाया हुआ वह तू, ( मा बिभेः ) मृत्युसे
भय मत कर ।
तुलना- - गीता में बताया गया है कि प्रत्येक प्राणीके लिये जन्मके अनन्तर मृत्यु और मृत्यु के अनन्तर जन्म अनिवार्य है, इसलिए न टलनेवाली बात में शोक न करना चाहिए । वेदमें भी कहा गया है कि प्रत्येक प्राणीकी मृत्यु अवश्य होती है । भगवान्की शरण आनेसे मृत्युका डर दूर हो सकता है । मृत्युको अनिवार्य समझकर उससे किसीको भय न करना चाहिये ।
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत । अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिवेदना ।।
( भारत ! ) हे भरतकुलोत्पन्न अर्जुन ! ( भूतानि ) शरीर अथवा आकाशादि पञ्चमहाभूत, (अव्यक्तादीनि ) उत्पत्तिसे पहले शरीर-रहित होनेसे अव्यक्तावस्था होनेके कारण देखे नहीं जाते, ( व्यक्तमध्यानि ) मध्यमें थोड़े कालके लिये
व्यक्त शरीरवाले होते हैं, और, ( अव्यक्तनिधनानि ) अन्तकालमें भी अव्यक्त ही हो जाते हैं । । ( तत्र ) इनके विषयमें, ( का ) क्या, ( परिवेदना ) दुःख किया जा सकता है ! अर्थात् इन भीष्मादिके लिये शोकसे जर्जरीभूत होकर प्रलाप करना व्यर्थ है ॥ २८ ॥
तमिद्गर्भं प्रथमं दध्र आपो यत्र देवाः समगच्छन्त विश्वे । अजस्य नाभावध्येकमर्पितं यस्मिन् विश्वानि भुवनानि तस्थुः ॥ ( ऋग्वेदः १०-८२-६ )
( आपः ) उत्पत्तिसे पूर्व संसारावस्थामें प्राप्त हुए पदार्थमात्र, ( तम् इत् ) उस परमात्माकी ही, ( गर्भम् ) सर्वलोकोंक उत्पत्तिस्थान प्रकृतिम, ( प्रथमम् ) पहले, ( दधे ) स्थित रहते हैं, क्योंकि सब पदार्थ उत्पत्तिसे पूर्व अव्यक्तावस्थामें रहते हैं, ( यत्र ) जिस परमात्मामें, ( देवाः ) ज्योतिर्मय सूर्यादिलोक भी, ( समगच्छन्त ) मध्यावस्थामें दृश्यमान होते हुए लीन हो जाते हैं, ( विश्वे ) सब भूतजात अर्थात् स्थावर जंगम मात्र, ( अजस्य ) परमात्माके, ( नाभौ ) मध्यमें, ( एकम् ) मुख्यतया, ( अर्पितम् ) स्थित हैं, ( यस्मिन् ) जिस परब्रह्ममें, ( विश्वानि ) सारे, ( भुवनानि ) लोक-लोकान्तर, ( अधितस्थुः ) वास करते हैं, अर्थात् सब पदार्थ सृष्टिको उत्पत्तिसे पूर्व ब्रह्ममें थे अतः अव्यक्तरूप थे, विनाशानन्तर ब्रह्ममें लीन होनेसे भी अव्यक्त रहते हैं, केवल मध्यस्थितिमें व्यक्त होते हैं। ऐसे पदार्थोंके लिये दुखी होनेकी क्या आवश्यकता है !
उपनिषद्का भी कथन हैयथा सुदीप्तात् पावकाद् विस्फुलिङ्गाः सहस्रशः प्रभवन्ते सरूपाः । तथाक्षराद्विविधाः सोम्य भावाः प्रजायन्ते तत्र चैवापियन्ति ।।
जैसे अत्यन्त प्रदीप्त अग्निसे उसीके समान रूपवाली सहस्रों चिनगारियाँ निकलती हैं, हे सोम्य ! उसी प्रकार उस अक्षरसे अनेक भाव प्रकट होते हैं और उसीमें लीन हो जाते हैं ।
तुलना - विद्युत्के प्रकाशकी भाँति मध्यकालमें प्राणियोंका प्रकाश बताकर गीता भूतमात्रके दुखित न होनेकी आवश्यकता बतलाई गई है । वेदमें भी पदार्थ - मात्रकी ब्रह्मसे उत्पत्ति, ब्रह्ममें लीनत, और केवल मध्यकालमें पदार्थमात्रका प्रकाश
बताया गया
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ।। ( कश्चित् ) कोई पुरुष, ( एनम् ) इस आत्माको, ( आश्चर्यवत् ) अलौकिक या अद्भुत तत्त्वके समान, ( पश्यति ) देखता है, ( च ) और, ( तथैव ) वैसे ही, ( अन्यः ) कोई दूसरा पुरुष, इस आत्माको, ( आश्चर्यवत् ) विस्मयसे भरे हुए तत्त्वके समान, ( वदति ) बोलता है, ( च ) और, (अन्य ) इससे भी अन्य पुरुष, ( एनम् ) इसको, ( आश्चर्यवत् ) आश्चर्यमयके समान, ( शृणोति ) सुनता है, ( च ) और, ( कश्चित् ) कोई पुरुष, ( एनम् ) इस आत्माको, ( श्रुत्वा अपि ) सुनकर भी, ( न एव ) निश्चित रूप से नहीं, ( वेद ) जानता ॥ २९ ॥
उत त्वः पश्यन्न ददर्श वाचमुत त्वः शृण्वन्न शृणोत्येनाम् । उतो त्वस्मै तन्वं वि सत्रे जायेव पत्य उशती सुवासाः ।। ( ऋग्वेदः १०-७१ ४ )
( त्वः) कोई पुरुष, ( वाचम्) वाणीके बोलनेवालेकी, (पश्यन् उत) मनसे पर्यालोचना करता हुआ भी, ( न ददर्श ) जीवात्माके तत्त्वको नहीं देखता । ( त्वः) कोई पुरुष, ( एनाम् ) इस जीवात्माकी देहके उठाने, बोलने, सुनने, छूनेकी शक्तिको, ( शृण्वन् ) सुनता हुआ भी, ( न शृणोति ) नहीं सुनता कि यह आत्मतत्त्व क्या है । ( त्वस्मै उत) किसी तत्त्वजिज्ञासु पुरुषके आगे हस्तामलकवत् यह आत्मतत्त्व, (तन्वम्) अपने विस्तृत शरीर अर्थात् अपने आशयको, (वि सत्रे ) खोल देता है । ( इव) जैसे, (सुवासाः) अच्छे वस्त्रोंवाली, ( उशती ) पतिको चाहती हुई, (जाया) भार्या, निजस्वामीके निकट निज देहको समर्पित कर देती है ।
शिवास्त एका अशिवास्त एकाः सर्वा, बिर्भाष सुमनस्यमानः । । तित्रो वाचो निहिता अन्तरस्मिन् तासामेका वि पपातानु घोषम् ॥ ( अथर्ववेदः ७-४४-१ )
हे जीवात्मन् ! (ते) तेरी, ( एका :) 'इस देहमें चलने-फिरनेवाला कौन है' ऐसी आश्चर्यमयी कई बातें, (शिवाः ) कल्याण करनेवाली, या 'शिव-शिव ! ' ऐसे वाक्योंसे आश्चर्यमयी हैं । (ते) तेरी, (एकाः ) कई एक बातें, (अशिवाः) 'आत्मा कोई पृथक् नहीं, यह देह ही सब कुछ करता है', इस प्रकार दुःख देनेवाली, नरकमें डालनेवाली, अशुभ हैं। परन्तु, ( सुमनस्यमानः ) उत्तम मनवाला
तू, (सर्वाः) उन सब 'आत्मा क्या है ? देह है, क्षणिक विज्ञान है, परमाणु है'. इन सब बातोंको, (बिभष) धारण करता है । (तिस्रः वाचः ) आत्माके तत्त्वको आश्चर्यमय देखना, आश्चर्यमय कहना, आश्चर्यमय सुनना ये तीन प्रकारकी बातें, ( अस्मिन्) इस पुरुष में, (अन्तः) भीतर, (निहिताः) स्थित हैं । ( तासाम् ) उन तीनों बातोंमें - से, (एका) ज्ञानरूप वार्ता, (घोषम् ) सहस्रों बार कानमें सुने हुए शब्दको, ( अनु विपपात ) लक्ष्य करके भी विरुद्ध प्राप्त होती है अर्थात् सहस्रों बार सुनकर भी लोग इस आत्माको नहीं जानते।
सन्तमप्यसन्तमिव । स्वप्रकाश चैतन्यरूपमपि जडमिव । आनन्दधनमपि दुःखितमिव । निर्विकारमपि सविकारमिव । नित्यमप्यनित्यमिव । ब्रह्माभिन्नमपि तद्भिन्नमिव । मुक्तमपि बद्धमिव । अद्वितीयमपि सद्वितीयमिव ।
यह आत्मा स्थिर रहनेपर भी न रहनेके समान, स्वप्रकाश चैतन्यरूप होनेपर भी जडके समान, आनन्दघन होनेपर भी दुखितके समान, सर्व पञ्चभूतोंके विकारोंसे निर्मल और निर्द्वन्द्व होनेपर भी विकारवान्के समान, नित्य होनेपर भी अनित्यके समान, ब्रह्मसे भिन्न न होनेपर भी ब्रह्मसे भिन्न, सदा मुक्त होनेपर भी बद्धके समान, अद्वितीय होनेपर भी द्वितीयके साथ-सा दिखाई पड़ता है ।
यतो वाचो निवर्तन्ते अप्राप्य मनसा सह । ( शा. उ. २-३ ) वाणी मनके साथ दौड़ते-दौड़ते इसके अन्तको न प्राप्त होकर निवृत्त हो जाती है. अर्थात् इसकी आश्चर्यमय लीलाको देखकर चुप हो जाती है ।
तुलना - - गीतामें आत्माके सम्बन्ध में लोगोंके विचार आश्चर्यमय बताए गए हैं। वेदमें भी आत्माको आश्चर्यमय स्वरूपवाला बताया गया है । देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत । तस्मात् सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ।।
( भारत ! ) हे भरतवंशोत्पन्न अर्जुन ! ( सर्वस्य ) सब प्राणियोंके, (देहे ) देहमें, (अयम्) यह, (देही) जीवात्मा, (नित्यम् ) सदा, ( अवध्यः ) वध न होने योग्य है, (तस्मात् ) इसलिये, (त्वम् ) तू, ( सर्वाणि ) इन सब, ( भूतानि) भीष्मादि जीवोंके लिये, ( शोचितुम् ) शोक करने के लिये, (न अर्हसि ) योग्य नहीं है ।। ३० ॥
दिवि ।
पनौ पार्थिवं रजो बबधे रोचना
न त्वावाँ इन्द्र कश्चन न जातो न जनिष्यतेऽति विश्वं ववक्षिय ।। ( ऋग्वेदः १-८१-५ )
( इन्द्र ! ) हे जीवात्मन् ! तू, ( पार्थिवम् ) पृथिवीके विकारवाले, ( रजः ) लोक अर्थात् देहको, ( आ पप्रौ) भरपूर करता है अर्थात् देहका स्वामी होकर रहता है, और, (दिवि ) हृदयाकाश में, ( रोचना ) प्रकाशमान विवेकको (बद्द्बधे) बाँघता है अर्थात् हृदयमें विवेचनात्मक ज्ञानको धारण करता हे आत्मन् ! (त्वावान्) तुझ जैसा, (कश्चन ) और कोई भी, (न) नहीं है । ( न जातः ) न तेरे जैसा कोई उत्पन्न है, (न जनिष्यते) न ही कोई पदार्थ उत्पन्न होगा । जब आत्माकी उत्पत्ति नहीं है तब उसकी मृत्यु क्यों होगी ! इसलियें तू नित्य होता हुआ, (विश्वम् ) सारे देहको, (अतिववक्षिथ) अत्यधिक उठाये हुए है । इसलिये आत्माको अज और नित्य मानना चाहिये ।
अपश्यमस्य महतो महित्वममर्त्यस्य मर्त्यासु विक्षु ।
( मर्त्यासु ) मृत्युको प्राप्त होनेवाली, (विक्षु ) प्रजाओं में या देहोंमें, ( अस्य ) इस, ( महतः ) महान्, (अमर्त्यस्य ) न मरनेवाले आत्माका, (महित्वम्) महत्त्व, ( अपश्यम्): देखा है, अर्थात मरणधर्मी शरीरोंमें यह अमर और अविनाशी आत्मशक्ति रहती है ।
तुलना - गीता में देहको अनित्य एवं आत्माको नित्य बताकर यह सिद्ध किया गया है कि देहका नाश होनेपर शोक नहीं करना चाहिये । वेदमें भी देहको मृत्युधर्मक और आत्माको अजर-अमर बताया गया है ।
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि । धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्र योऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते ।।
(च) और, ( स्वधर्मम् ) युद्ध करना क्षत्रियका अपना सहज धर्म है इसलिये तू अपने क्षत्रियधर्मको, (अवेक्ष्य) देखकर, (विकम्पितुं न अर्हसि ) कम्पायमान होने योग्य नहीं है, (हि) क्योंकि, (धर्म्यात्) क्षत्रियों द्वारा सम्पादन किये जाने योग्य न्याययुक्त धर्मवाले, (युद्धात्) युद्धसे, (अन्यत्) और, ( श्रेयः ) कल्याण करनेवाला कोई धर्म, ( क्षत्रियस्य ) क्षत्रियके लिये ( न विद्यते) नहीं है ।। ३१ ।।
युध्मो अनर्वा खजकृत् समद्वा शूरः सत्राषाड् जनुषेमषाळ्हः । व्यास इन्द्रः पृतनाः स्वोजा अधा विश्वं शत्रूयन्तं जघान ।। ( ऋग्वेदः ७ - २० - ३ )
( युध्मः) क्षत्रिय, (अनर्वा) युद्धमें पीठ न दिखानेवाला, (खजकृत्) युद्ध करनेवाला ['खले खजे' युद्धनाम, निघंटु ], (समद्वा) दुष्टोंको मारकर सज्जनोंको प्रसन्न करनेवाला या युद्धको अपना धर्म समझनेवाला, (शूरः) शूरतायुक्त, ( जनुषा ) जन्मसे ही, ( सत्राषाट् ) बहुतोंपर प्रभाव डालनेवाला, ( अषाळहः) स्वयं किसी के प्रभाव में न आनेवाला, ( स्वोजाः) अच्छे बलवाला, (ईम्) यह, ( इन्द्रः) क्षत्रियात्मा, (पृतनाः) शत्रुओंकी सेनाओंको, (व्यासे) परास्त कर देता है, (अघा) और ( शत्रूयन्तम् ) शत्रुता करते हुए, ( विश्वम् ) सारे शत्रुमण्डलको, (जघान ) नाश कर देता है ।
महाभारतका भी इस विषय में स्पष्ट कथन है -
अधर्मः क्षत्रियस्यैष यच्छय्यामरणं भवेत् । विसृजलेष्ममूत्राणि कृपणं परिदेवयन् ।। अविक्षतेन देहेन प्रलयं योऽधिगच्छति ।
क्षत्रियो नास्य तत्कर्म प्रशंसन्ति पुराविदः ।। न गृहे मरणं तात क्षत्रियाणां प्रशस्यते । शौटीराणामशौटीरमधर्म्यं कृपणं च तत् ।।
बीमार होकर खाटपर पड़कर मरना क्षत्रियके लिये महान् अधर्म है जिसमें श्लेष्म-मलमूत्रादि-त्यागसे अतिकृपणतासे देह त्यागा जाता है। जो क्षत्रिय घावसे रहित देहका त्याग कर देता है अर्थात् बिना शस्त्रप्रहारके देह त्याग करता है, तत्त्वज्ञानी क्षत्रिय लोग उसके इस कर्मको अच्छी दृष्टि से नहीं देखते अर्थात् उसे क्षत्रिय नहीं गिनते । क्षत्रियोंका घरमें मरना प्रशंसित जाता, अपितु ऐसा मरना अत्यन्त निन्दित, अधर्म और अति कायरताका काम समझा जाता है ।
मनुस्मृतिमें कहा गया हैन निवर्तेत सङ्ग्रामात् क्षात्रं धर्ममनुस्मरन् । सङ्ग्रामेष्वनिवतित्वं प्रजानां चैव पालनम् ।
क्षत्रिय क्षात्रधर्मको स्मरण करता हुआ संग्रामसे न भागे । प्रजाका पालना और संग्रामसे मुख न मोड़ना क्षत्रियका कर्त्तव्य है । वह्निपुराणमें कहा गया है -
धर्मलाभोऽर्थलाभच यशोलाभस्तथैव च । यः शूरो वध्यते युद्धे विमर्दन् परवाहिनीम् ।। यां यज्ञसङ्घैस्तपसा च विप्राः स्वर्गैषिणो यत्र न वै प्रयान्ति । क्षणेन तामेव गतिं प्रयान्ति महाहवे स्वां तनुं संत्यजन्तः ॥
जो वीर शत्रुकी बहुत बड़ी विशाल सेनाको मसलता हुआ युद्धमें मारा जाता है वह धर्म, अर्थ तथा यश पाता है । स्वर्गकी इच्छा करनेवाले ब्राह्मण असंख्य यज्ञ करनेसे तथा कठिन तपस्यादिसे जिस गतिको नहीं पाते, संग्राममें अपने शरीरको छोड़नेवाले क्षत्रिय लोग क्षणमात्र में ही उस गतिको पा लेते हैं ।
तुलना - - - गीतामें कहा गया है कि अपने-अपने वर्णानुसार अपने-अपने धर्मको करनेवाले पुरुष उत्तम गतिको पाते हैं । अर्जुन क्षत्रिय था अतः उसे क्षात्र धर्मसे न हटनेका उपदेश दिया गया है। महाभारत आदि तथा वेदमें भी यही बताया गया है कि युद्धमें पीठ न दिखाना, शूर बनना, दूसरेपर क्षात्रप्रभाव डालना, अपने आप किसीसे न दबना, शत्रुता करनेवाले शत्रुका नाश करना क्षत्रियका कर्तव्य है ।
यदृच्छया चोपपत्रं स्वर्गद्वारमपावृतम् । सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ।।
( पार्थ ! ) अर्जुन ! ( यदृच्छया उपपन्नम् ) अपने आप प्राप्त हुए, ( अपावृतम् ) खुले हुए किवाड़ोंसे युक्त, ( स्वर्गद्वारम् ) स्वर्ग-द्वारवाले, ( ईदृशं युद्धम् ) ऐसे युद्धको, ( सुखिनः ) सुखी, भाग्यशाली, ( क्षत्रियाः ) क्षत्रियकुलोत्पन्न पुरुष, ( लभन्ते ) प्राप्त करते हैं ॥ ३२ ॥
ये युध्यन्ते प्रधनेषु शूरासो ये तनूत्यजः । ये वा सहस्रदक्षिणास्तांश्चिदेवापि गच्छतात् ॥
( प्रधनेषु ) शूर-वीरोंकी मृत्यु होनेपर कटक- कुण्डलादि स्वर्ण- धन जहाँ बिखरे पड़े हों ऐसे युद्धस्थलोंमें, ( शूरासः) युद्धवीर शूरजन, ( ये ) जो क्षत्रिय,
( युध्यन्ते ) युद्ध करते हैं अर्थात् शत्रुओंपर आक्रमण करते हैं, ( ये तनूत्यजः ) जो युद्धवीर क्षत्रिय युद्ध में शरीर छोड़ते हैं, ( ये वा ) अथवा जो शूर वीर, ( सहस्रदक्षिणा : ) दक्षिणकी ओर आनेवाले अर्थात् सम्मुख आए हुए क्रूरसे क्रूर शत्रुओंको युद्ध - विजयके लिये सहस्रों प्रकारकी दक्षिणां देनेवाले हैं, ( तान् ) उन शत्रुओंकी, ( चित् एव अपि ) ओर भी अर्थात् उनके सम्मुख भी, (गच्छतात- मध्यमपुरुषैकवचने) तू जा, अर्थात् युद्ध कर । युद्धके अनन्तर तू भी मरकर स्वर्गलोकको प्राप्त हो ।
तुलना - गीता में कहा गया है कि क्षत्रिय वीर युद्ध में शत्रुओंसे युद्ध करता हुआ यदि मृत्युको प्राप्त होता है तो वह खुले द्वारवाले स्वर्गको प्राप्त करता है । वेद और मनुस्मृतिमें भी यही कहा गया है कि जो शूर वीर महायुद्धोंमें सम्मुख प्राप्त हुए शत्रुओंके साथ युद्ध करता हुआ मृत्युको प्राप्त होता है वह उन लोकोंको जाता है जिन लोकोंमें विविध याज्ञिक और दानी गमन करते हैं
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्य सङ्ग्रामं न करिष्यसि । ततः स्वधर्म कीर्तिञ्च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥
( अथ ) फिर, ( चेत् ) यदि, ( त्वम् ) तू, ( इमम् ) इस, ( धर्म्यम् ) धर्मसंयुक्त, ( सङ्ग्रामम् ) युद्धको, ( न करिष्यसि ) नहीं करेगा, अर्थात् भीरु हो जायगा, ( ततः ) तो, युद्ध-पराङ्मुख होनेके अनन्तर, ( स्वधर्मम् ) अपने क्षात्रधर्मंको, ( च कीर्तिम् ) और कीर्तिको, ( हित्वा ) छोड़कर, ( पापम् अवाप्स्यसि ) पापको प्राप्त करेगा अर्थात् नरंकको जाएगा ॥ ३३ ॥ वि दुर्गा वि द्विषः पुरो ध्नन्ति राजान एषाम् । नयन्ति दुरिता तिरः ॥
( राजानः ) राजा अर्थात् क्षत्रिय जन, सेनानियोंके, ( पुरः ) सम्मुख, ( दुर्गा = दुर्गाणि )
३. घ्नन्ति - हन्तेरदादित्वाच्छपो लुक् ।
( ऋग्वेदः १ - ४१- ३ ) ( एषाम् ) युद्धस्थलके इन दृढ़ दुर्गस्थलों और कठोर
१. दुर्गा-दुःखेन गच्छन्त्यत्रेति दुर्गाणि । 'सुदुरोरधिकरणे' इति गमेर्डप्रत्ययः । 'शेश्छन्दसि बहुलम्' इति शेर्लोपः ।
२. पुरः - कालवाचिनः पूर्वशव्दात् सप्तम्य पूर्वंशव्दात् सप्तम्यर्थे 'पूर्वाधरावराणामसिपुरधवश्चैषाम्' इत्यसिप्रत्ययः, तत्सन्नियोगेन पूर्वशब्दस्य पुरादेशश्च ।
शस्त्रास्त्रोंको, ( वि घ्नन्ति ) विशेषतासे नष्ट कर देते हैं, ( द्विषः विघ्नन्ति ) शत्रुओंको भी विशेष करके नष्ट कर देते हैं, और, ( दुरिता = दुरितानि) क्षात्रधर्मके त्यागसे उत्पन्न होनेवाले अपकीर्तिमय पापोंको, ( तिरः नयन्ति ) दूर कर देते हैं ।
तुलना-तामें कहा गया है कि जो क्षत्रिय क्षात्रधर्मका परित्याग करता है वह अपकीर्ति और पापको प्राप्त करता है अर्थात् क्षात्रधर्म छोड़ देनेसे नरकगामी होता है । वेदमें भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्ध में सम्मुख आए शत्रुओंके साथ युद्ध करके उन्हें परास्त कर देते हैं वे अपनी अपकीर्ति मिटाकर संसारमें यशस्वी हो जाते हैं ।
अकीर्तिव्यापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् । सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥
हे अर्जुन ! ( भूतानि ) सब प्राणी, ( ते ) रणसे भागे तुझ वीर पुरुषकी, ( अव्ययाम् ) सदा रहनेवाली, ( अकीर्तिम् ) अपकीर्तिको, ( कथयिष्यन्ति ) कहेंगे, ( च ) और, ( सम्भावितस्य ) मान्य पुरुषका, (अकीर्तिः ) अपयश, ( मरणात् अतिरिच्यते ) मृत्युसे भी बुरा होता है ॥ ३४ ॥
यदचरस्तन्वा वावृधानो बलानीन्द्र प्रब्रुवाणो जनेषु । मायेत्सा ते यानि युद्धान्याहुर्नाद्य शत्रुं ननु पुरा विवित्से । ( ऋग्वेदः १० -५४- २ )
( इन्द्र ! ) हे क्षत्रियराज ! ( तन्वा ) शूरतासे परिपूर्ण अपने शरीरसे, ( वावृधानः ) युद्धोंमें जय प्राप्त करके अपने नाम और यशको बढ़ाता हुआ, ( जनेषु ) सब प्राणियोंमें, ( बलानि) अपने सब प्रकारके बलोंको, ( प्रब्रुवाणः) प्रकर्षतासे बताता हुआ, ( यत् ) जिस संग्रामको, ( अचरः ) तूने किया, ( ते ) तेरी, ( सा ) वह कीर्ति, ( माया इत् ) व्यर्थ ही है, ( पुरा ) पहले, ( यानि युद्धानि ) शत्रुओंके साथ जो युद्ध किये हैं, [ ( पुराविदः ) तेरे पूर्व युद्धोंके कर्तव्योंको जाननेवाले] ( आहुः) कहते हैं, ( माया इत् ) वे युद्ध भी वृथा हैं, क्योंकि अब तू भीरु होकर धर्मयुद्धसे भागता है, ( अद्य ) आज तू, ( शत्रुम् ) रणमें सम्मुख आए हुए मारने योग्य शत्रुको, ( न विवित्से ) विशेषकर नहीं जानता और न ही जाननेकी इच्छा करता है । ( ननु ) क्या तू पूर्वयुद्धों में भी ऐसा ही भीरु था ? क्योंकि अब तू युद्धभूमिसे भागता है ।
तुलना - गीतामें कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्धभूमिसे भागता है, सब लोगोंमें उसका अपयश होता है और अपयश मृत्युसे भी अधिक बुरा माना
जाता है । मृत्यु अच्छी है, अपयश अच्छा नहीं ! वेदमें भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्ध से भागता है उसकी इस अपकीर्तिसे पूर्व कालमें जीते हुए युद्धोंका यश भी नष्ट हो जाता है। पहले जीते हुए युद्ध भी उसके व्यर्थ माने जाते हैं ।
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः । येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ।।
( महारथाः ) कर्ण - द्रुपद - भगदत्तादि महारथी, ( त्वाम् ) तुझे, ( भयात् ) भयके कारण, ( रणात् ) युद्धभूमिसे, ( उपरतम् ) भागा हुआ, ( मंस्यन्ते ) मानेंगे, ( च ) और, ( येषाम् ) जिन महारथियोंके सामने, ( बहुमतो भूत्वा ) बहुत मानवाला होकर तू, ( लाघवं यास्यसि ) लघुताको प्राप्त हो जायगा । वे कहेंगे - कैसा शूर वीर था, अब तो शृगालसे भी अधिक क्षुद्र अवस्थामें पहुँच गया है ॥ ३५ ॥
दूरे तन्नाम गुह्यं पराचैर्यत्त्वा भोते अह्वयेतां वयोधं । उदस्तभ्नाः पृथिवीं द्यामभीके भ्रातुः पुत्रान्मघवन्तित्विषाणः ॥ ( ऋग्वेदः १०-५५ - १ )
( मघवन् ! ) हे धनके धारण करनेवाले या राजाधिराज ! ( यत् ) जब, ( भीते = भीतानि ) शत्रुसे डरे हुए प्राणी अर्थात् तेरे सैनिकगण, ( वयोर्घं ) अपने आपको बचाने के लिये अर्थात् प्रबल शत्रुओंसे अपनी रक्षाके लिये, ( त्वा ) तुझ शूर वीर क्षत्रियको, ( अह्वयेताम् ) बुलाते थे, तब तू अपने अस्त्र-शस्त्रायुधोंसे सुसज्जित होकर सैनिक वेशसे, ( अभीके - अन्तिकनामैतत् ) शत्रुओंसे डरे हुए उन प्राणियोंके समीप ही, ( पृथिवीं द्याम् ) पृथिवीवासी और अन्तरिक्षस्थ अर्थात् वायुयानपर स्थित प्राणियोंको, तथा, ( भ्रातुः पुत्रान् ) भाईके पुत्रोंको, ( तित्विषाणः ) अपने शूर-वीरताके वचनों से उत्तेजित करता हुआ, ( उत् अस्तस्नाः ) भीरुतासे हटाकर युद्ध करनेके लिये खड़ा कर देता था अर्थात् युद्धस्थलसे भागते हुए सैनिकोंको भी युद्धमें खड़ा कर देता था । ( पराचैः ) अब तू भयभीत होकर युद्धसे परामको प्राप्त हुआ है अतः तुझसे विमुख हुए योद्धागणोंसे ( तत् नाम ) अब वह शूर वीरतावाला तेरा नाम, ( गुह्यम् ) गुप्त है अर्थात् कोई भी मनुष्य तेरे नामको यशके साथ न पुकारेगा । वीरजन तेरी अपकीति फैलायेंगे । ( दूरे ) तेरा नाम जगत्से दूर हो जायगा, नष्ट हो जायगा ।
तुलना - गीता में कहा गया है कि जो वीर भयके कारण युद्ध नहीं करता वह पहले बड़ा भारी शूरवीर होता हुआ भी अपकीर्तिका पात्र बन जाता है । अपकीति मृत्युसे भी अधिक निम्न होती है । वेदमें भी कहा गया है कि आक्रमणकारी प्रबल शत्रुसे डरे हुए जीव अपनी रक्षाके लिये जिस युद्धवीरकी शरणमें जाते हैं वह शरण्य, शरणागतोंकी रक्षा करता हुआ, यशस्वी होता है । यदि वहीं यशस्वी शूर वीर क्षत्रिय स्वयं ही युद्धस्थलसे भागता है तो उसकी पूर्व युद्धविजयवाली कीर्ति भी नष्ट हो जाती है । संसारसे उसका नाम उठ जाता है । अतः उसका अपयश मृत्युसे भी अधिक बुरा माना जाता है ।
अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः । निन्दन्तस्तव सामर्थ्य ततो दुःखतरं नु किम् ।।
हे अर्जुन ! ( अहिताः ) दुर्योधन, कर्ण आदि शत्रु, ( तव सामर्थ्य निन्दन्तः ) 'अर्जुन कैसा युद्धवीर था, उसने कैसे-कैसे कठोर युद्धोंको जीता, किन्तु अब वह भीरु हो गया। इस प्रकार तेरी शक्तिकी निन्दा करते हुए, ( अवाच्यवादान् ) 'ऐसे क्षात्र जन्मको धिक्कार है ! ' ऐसे-ऐसे न कहने योग्य अनेक वचनोंको, ( वदिष्यन्ति ) कहेंगे । ( ततः ) इससे अधिक, ( दुःखतरम् नु किम् ) दुःख और क्या है ! यह महादुःखकी बात है ॥ ३६ ॥
या शशाप 'शपनेन याघं मूरमादधे । या रसस्य हरणाय जातमा रेभे तोकमत्तु सा ॥
( अथर्ववेदः १ - २८- ३ )
( या ) जो क्षत्रिय-वर्ग, ( शपनेन ) भयके कारण युद्धस्थलसे भागे हुए क्षत्रिय वीरकी अकथनीय या निन्दित वचनों द्वारा, ( शशाप ) निन्दा करता है, ( या ) जो क्षत्रिय-वर्ग, ( मूरम् - मूढम् ) सांसारिक मोहसे मूढ होकर युद्धस्थलसे उपराम-रूप, ( अघम् ) पापको, ( आदघे ) प्राप्त करता है, ( या ) जो क्षत्रिय-वर्ग, ( जातम् ) क्षात्र धर्ममें उत्पन्न हुए पुत्रादि सन्तानके, ( रसस्य हरणाय ) देहगत बलके नाशके लिए, ( आरेभे ) आरम्भ हो जाता है, प्रयत्नशील हो जाता है, ( सा ) भयके कारण युद्धसे उपराम हुआ वह क्षत्रिय१. शपनेन - 'शप आक्रोशे', करणे ल्युट् ।
२. मूरम् - 'मुर्च्छा मोहसमुच्छ्राययोः', 'क्विप् च' इति क्विप्, 'रात्लोपः' इति
छकारस्य लोपः ।
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अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च । नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ।। यह आत्मा, शस्त्रोंसे काटे जाने योग्य नहीं है, यह आत्मा, अग्निसे जलाने योग्य नहीं है, यह आत्मा, जलसे गलाने योग्य नहीं है, और, निश्चय ही वायुसे सुखाने योग्य नहीं है। इसलिए, यह आत्मा, नित्य अर्थात् तीनों कालोंमें एकरस है, सबमें व्यापक है, स्थिर स्वभाववाला है, हिलनेवाला नहीं है, और, सदासे चला आ रहा है ॥ चौबीस ॥ पञ्चारे चक्रे परिवर्तमाने तस्मिन्ना तस्थुर्भुवनानि विश्वा । तस्य नाक्षस्तप्यते भूरिभारः सनादेव न शोर्यते सनाभिः ॥ पञ्चज्ञानेन्द्रियों, या पञ्चकर्मेन्द्रियों, या पञ्चमहाभूतोंके आरोंवाले, चक्कर लगानेवाले या भ्रमणशील, पुनः पुनः परिवर्तित होनेवाले, उस देह - चक्रमें, सारे, प्राणिमात्र, रहते हैं । उस चक्रके मध्यमें रहनेवाला यह जीवात्मा, नक्षत्र होनेवाला, तथा, सकल भारी देहके उठानेसे बहुत भारवाला होनेके कारण, दाह-क्लेशादि प नहीं होता, और यह आत्मा, सदासे ही एकरस चला आ रहा है अतः इसे सनातन कहते हैं। इसलिए ही, सर्वदा एकरूप नाभिवाला जाते हैं यह आत्मा, नहीं टूटता । जैसे रथके आरे भारसे टूट और अक्षके नाश होनेसे रथकी नाभि या मध्यभाग भी मुड़ जाता या टूट जाता है वैसे यह आत्मा देहरूपी चक्रके चीरे जानेपर, जलसे गीले होनेपर या अग्निसे जल जानेपर भी न चीरा जाता है, न गीला होता है और न जलता है, इसलिए आत्मा नित्य और देह अनित्य है। तुलना - गीतामें देहको छेद्य, क्लेद्य, शोष्य और दाह्य एवं आत्माको अच्छेद्य, अभेद्य, अक्लेद्य, अशोष्य, नित्य, सर्वगत और सनातन कहा गया है । वेदमें भी कहा गया है कि देह-चक्र आरे आदिके टूटने से नष्ट हो जाता है परन्तु आत्मा नित्य, अच्छेच, अभेद्य, अदाह्य है । अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते । तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ।। यह आत्मा, अव्यक्त या अप्रत्यक्ष, अर्थात् किसी भी इन्द्रिय द्वारा प्रत्यक्ष न होनेवाला है । यह आत्मा, अनुमानादि द्वारा चिन्ता करने योग्य नहीं है । यह आत्मा, न विकृत होने योग्य, कहा जाता है । इसलिए, इस आत्माको, इस प्रकार, जानकर, इसके मरने-मारनेका शोच करने के लिए, योग्य नहीं है, अर्थात् तू अपने बन्धुओंके मरने या मारनेका शोच मत कर ॥ पच्चीस ॥ को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभत । भूम्या असुरसुगात्मा क्वस्वित् को विद्वांसमुप गात्प्रष्टुमेतत् ॥ सबसे प्रथम अर्थात् अनादि कालमें, शरीरमें प्रकट होते हुए आत्माको, किसने, देखा ? अव्यक्त होनेसे उसे कोई पुरुष चक्षुआदि इन्द्रियोंसे नहीं देख सकता, क्योंकि, यह आत्मा, सर्वदा एकरस रहनेवाला और विकारसे रहित है, अथवा हड्डियोंसे रहित होकर, विनाशी पृथिव्यादिसंघातात्मक, अथवा हड्डियोंवाले देहको, धारण करता है । पार्थिव स्थूल शरीरका, प्राणरूप होकर धारण करनेवाला, किसीसे न बनाया गया या सृज् यानी राग अर्थात् देहादिके रागसे रहित वह, जीवात्मा, कहाँ रहता है, इस चिन्ताका विषय न होनेसे वह आत्मा अचिन्त्य कहा गया है । कौन मनुष्य, विद्वान् पुरुष के पास, इस आश्चर्यमय वस्तुको, पूछनेके लिए, जाता है ! उपनिषद् में आया है - न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग्गच्छति नो मनो न विद्मो न विजानीमो यथैतदनुशिष्यादन्यदेव तद्विदितादयो अविदितादधि । इति शुश्रुम पूर्वेषां ये नस्तद्व चाचचक्षिरे । उस आत्मातक न नेत्र जाते, न वाणी जाती, न मन जाता । हम उसके विषयमें नहीं जानते कि उसे क्या बताया जाय । पूर्वाचार्योंके बतानेसे सुना कि वह विदित और अविदित दोनोंसे भिन्न है । तुलना - गीतामें कहा गया है कि आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य, अविकार्य है । जो ऐसा जानता है वह कभी किसी स्थान या किसी वस्तु के लिए शोक नहीं करता । वेदमें भी कहा गया है कि आत्मा हड्डी आदिसे रहित, देहधारक तथा अचिन्त्य है, जिसका ज्ञान विद्वान् पुरुषके पास जानेसे हो सकता है । अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् । तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि ।। हे विशाल बाहुवाले अर्जुन ! यदि तू, इस आत्माको, जब-जब देह उत्पन्न होता है तब तब देहके साथ ही तत्काल जन्म लेनेवाला, अथवा देहके मरनेपर देहके साथ ही मरनेवाला, मानता है, तो भी, इस पक्षके स्वीकार करनेपर भी, तू, 'हमें धृतराष्ट्र के पुत्रोंको मारना उचित नहीं है' इस रीतिसे, शोच करने के लिये, योग्य नहीं है ॥ छब्बीस ॥ अयं पन्था अनुवित्तः पुराणो यतो देवा उदजायन्त विश्वे । अतश्चिदा जनिषोष्ट प्रवृद्धो मा मातरममुया पत्तवे कः ॥ प्रत्यक्ष प्रतीत होता हुआ यह जन्म-मरणका मार्ग, अनादि कालसे, यथाक्रम उत्पन्न होनेवाले सब जीवोंसे पाया जाता है, जिस जन्म-मार्ग से, सब, ज्ञानी और अज्ञानी जीवात्मा, उत्पन्न होते हैं । इस योनिमार्ग से ही, गर्भ में अथवा संसारमें अतीव वृद्धिको प्राप्त हुआ, यह जीवात्मा उत्पन्न होता है । नित्य जन्ममरणकी इस रीतिसे, शोकके मापक ज्ञानको, विनाशके लिये, मत कर, अर्थात् जन्म के साथ मृत्यु आवश्यक है इसलिये शोक व्यर्थ ही है । तुलना - गीता अर्जुनके सन्तोषके लिये कहा गया है कि जन्मके साथ मृत्यु और मृत्युके साथ जन्म यदि आवश्यक है तो भी मृत्यु के लिये शोक व्यर्थ है क्योंकि मृत्यु होनेपर पुनः जन्म होगा । वेदमें भी जन्म-मरणका मार्ग पुराना बताते हुए कहा गया है कि सब जीवात्मा देहके साथ जन्म लेते, बढ़ते और मरते हैं इसलिए किसीकी मृत्युपर शोक करना व्यर्थ है । जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्रुवं जन्म मृतस्य च । तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ।। क्योंकि, जन्म लेनेवाले की, मृत्यु, अवश्य ही होती है, और, मरे हुएका, जन्म भी, अवश्य होता है, इसलिए, तू, अवश्य होनेवाले इस विषयमें भी, शोच करनेके लिये, योग्य नहीं है ॥ सत्ताईस ॥ मृत्युरोशे द्विपदां मृत्युरीशे चतुष्पदाम् । तस्मात् त्वां मृत्योर्गोपतेरुद्भरामि स मा बिभेः ॥ मनुष्य, पक्षी आदिपर, मृत्यु, प्रभुत्व करती है, और, चार पाँववाले जीवोंपर मृत्यु, अधिकार रखती है, अर्थात् मृत्यु प्रत्येक प्राणीके लिये आवश्यक है । इस कारण तुझ जीवात्माको, द्विपद और चतुष्पद दोनों प्रकारके पशुओंके स्वामी, मृत्युसे, ऊपर उठाता हूँ । मृत्युके भयको पाया हुआ वह तू, मृत्युसे भय मत कर । तुलना- - गीता में बताया गया है कि प्रत्येक प्राणीके लिये जन्मके अनन्तर मृत्यु और मृत्यु के अनन्तर जन्म अनिवार्य है, इसलिए न टलनेवाली बात में शोक न करना चाहिए । वेदमें भी कहा गया है कि प्रत्येक प्राणीकी मृत्यु अवश्य होती है । भगवान्की शरण आनेसे मृत्युका डर दूर हो सकता है । मृत्युको अनिवार्य समझकर उससे किसीको भय न करना चाहिये । अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत । अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिवेदना ।। हे भरतकुलोत्पन्न अर्जुन ! शरीर अथवा आकाशादि पञ्चमहाभूत, उत्पत्तिसे पहले शरीर-रहित होनेसे अव्यक्तावस्था होनेके कारण देखे नहीं जाते, मध्यमें थोड़े कालके लिये व्यक्त शरीरवाले होते हैं, और, अन्तकालमें भी अव्यक्त ही हो जाते हैं । । इनके विषयमें, क्या, दुःख किया जा सकता है ! अर्थात् इन भीष्मादिके लिये शोकसे जर्जरीभूत होकर प्रलाप करना व्यर्थ है ॥ अट्ठाईस ॥ तमिद्गर्भं प्रथमं दध्र आपो यत्र देवाः समगच्छन्त विश्वे । अजस्य नाभावध्येकमर्पितं यस्मिन् विश्वानि भुवनानि तस्थुः ॥ उत्पत्तिसे पूर्व संसारावस्थामें प्राप्त हुए पदार्थमात्र, उस परमात्माकी ही, सर्वलोकोंक उत्पत्तिस्थान प्रकृतिम, पहले, स्थित रहते हैं, क्योंकि सब पदार्थ उत्पत्तिसे पूर्व अव्यक्तावस्थामें रहते हैं, जिस परमात्मामें, ज्योतिर्मय सूर्यादिलोक भी, मध्यावस्थामें दृश्यमान होते हुए लीन हो जाते हैं, सब भूतजात अर्थात् स्थावर जंगम मात्र, परमात्माके, मध्यमें, मुख्यतया, स्थित हैं, जिस परब्रह्ममें, सारे, लोक-लोकान्तर, वास करते हैं, अर्थात् सब पदार्थ सृष्टिको उत्पत्तिसे पूर्व ब्रह्ममें थे अतः अव्यक्तरूप थे, विनाशानन्तर ब्रह्ममें लीन होनेसे भी अव्यक्त रहते हैं, केवल मध्यस्थितिमें व्यक्त होते हैं। ऐसे पदार्थोंके लिये दुखी होनेकी क्या आवश्यकता है ! उपनिषद्का भी कथन हैयथा सुदीप्तात् पावकाद् विस्फुलिङ्गाः सहस्रशः प्रभवन्ते सरूपाः । तथाक्षराद्विविधाः सोम्य भावाः प्रजायन्ते तत्र चैवापियन्ति ।। जैसे अत्यन्त प्रदीप्त अग्निसे उसीके समान रूपवाली सहस्रों चिनगारियाँ निकलती हैं, हे सोम्य ! उसी प्रकार उस अक्षरसे अनेक भाव प्रकट होते हैं और उसीमें लीन हो जाते हैं । तुलना - विद्युत्के प्रकाशकी भाँति मध्यकालमें प्राणियोंका प्रकाश बताकर गीता भूतमात्रके दुखित न होनेकी आवश्यकता बतलाई गई है । वेदमें भी पदार्थ - मात्रकी ब्रह्मसे उत्पत्ति, ब्रह्ममें लीनत, और केवल मध्यकालमें पदार्थमात्रका प्रकाश बताया गया आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ।। कोई पुरुष, इस आत्माको, अलौकिक या अद्भुत तत्त्वके समान, देखता है, और, वैसे ही, कोई दूसरा पुरुष, इस आत्माको, विस्मयसे भरे हुए तत्त्वके समान, बोलता है, और, इससे भी अन्य पुरुष, इसको, आश्चर्यमयके समान, सुनता है, और, कोई पुरुष, इस आत्माको, सुनकर भी, निश्चित रूप से नहीं, जानता ॥ उनतीस ॥ उत त्वः पश्यन्न ददर्श वाचमुत त्वः शृण्वन्न शृणोत्येनाम् । उतो त्वस्मै तन्वं वि सत्रे जायेव पत्य उशती सुवासाः ।। कोई पुरुष, वाणीके बोलनेवालेकी, मनसे पर्यालोचना करता हुआ भी, जीवात्माके तत्त्वको नहीं देखता । कोई पुरुष, इस जीवात्माकी देहके उठाने, बोलने, सुनने, छूनेकी शक्तिको, सुनता हुआ भी, नहीं सुनता कि यह आत्मतत्त्व क्या है । किसी तत्त्वजिज्ञासु पुरुषके आगे हस्तामलकवत् यह आत्मतत्त्व, अपने विस्तृत शरीर अर्थात् अपने आशयको, खोल देता है । जैसे, अच्छे वस्त्रोंवाली, पतिको चाहती हुई, भार्या, निजस्वामीके निकट निज देहको समर्पित कर देती है । शिवास्त एका अशिवास्त एकाः सर्वा, बिर्भाष सुमनस्यमानः । । तित्रो वाचो निहिता अन्तरस्मिन् तासामेका वि पपातानु घोषम् ॥ हे जीवात्मन् ! तेरी, 'इस देहमें चलने-फिरनेवाला कौन है' ऐसी आश्चर्यमयी कई बातें, कल्याण करनेवाली, या 'शिव-शिव ! ' ऐसे वाक्योंसे आश्चर्यमयी हैं । तेरी, कई एक बातें, 'आत्मा कोई पृथक् नहीं, यह देह ही सब कुछ करता है', इस प्रकार दुःख देनेवाली, नरकमें डालनेवाली, अशुभ हैं। परन्तु, उत्तम मनवाला तू, उन सब 'आत्मा क्या है ? देह है, क्षणिक विज्ञान है, परमाणु है'. इन सब बातोंको, धारण करता है । आत्माके तत्त्वको आश्चर्यमय देखना, आश्चर्यमय कहना, आश्चर्यमय सुनना ये तीन प्रकारकी बातें, इस पुरुष में, भीतर, स्थित हैं । उन तीनों बातोंमें - से, ज्ञानरूप वार्ता, सहस्रों बार कानमें सुने हुए शब्दको, लक्ष्य करके भी विरुद्ध प्राप्त होती है अर्थात् सहस्रों बार सुनकर भी लोग इस आत्माको नहीं जानते। सन्तमप्यसन्तमिव । स्वप्रकाश चैतन्यरूपमपि जडमिव । आनन्दधनमपि दुःखितमिव । निर्विकारमपि सविकारमिव । नित्यमप्यनित्यमिव । ब्रह्माभिन्नमपि तद्भिन्नमिव । मुक्तमपि बद्धमिव । अद्वितीयमपि सद्वितीयमिव । यह आत्मा स्थिर रहनेपर भी न रहनेके समान, स्वप्रकाश चैतन्यरूप होनेपर भी जडके समान, आनन्दघन होनेपर भी दुखितके समान, सर्व पञ्चभूतोंके विकारोंसे निर्मल और निर्द्वन्द्व होनेपर भी विकारवान्के समान, नित्य होनेपर भी अनित्यके समान, ब्रह्मसे भिन्न न होनेपर भी ब्रह्मसे भिन्न, सदा मुक्त होनेपर भी बद्धके समान, अद्वितीय होनेपर भी द्वितीयके साथ-सा दिखाई पड़ता है । यतो वाचो निवर्तन्ते अप्राप्य मनसा सह । वाणी मनके साथ दौड़ते-दौड़ते इसके अन्तको न प्राप्त होकर निवृत्त हो जाती है. अर्थात् इसकी आश्चर्यमय लीलाको देखकर चुप हो जाती है । तुलना - - गीतामें आत्माके सम्बन्ध में लोगोंके विचार आश्चर्यमय बताए गए हैं। वेदमें भी आत्माको आश्चर्यमय स्वरूपवाला बताया गया है । देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत । तस्मात् सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ।। हे भरतवंशोत्पन्न अर्जुन ! सब प्राणियोंके, देहमें, यह, जीवात्मा, सदा, वध न होने योग्य है, इसलिये, तू, इन सब, भीष्मादि जीवोंके लिये, शोक करने के लिये, योग्य नहीं है ।। तीस ॥ दिवि । पनौ पार्थिवं रजो बबधे रोचना न त्वावाँ इन्द्र कश्चन न जातो न जनिष्यतेऽति विश्वं ववक्षिय ।। हे जीवात्मन् ! तू, पृथिवीके विकारवाले, लोक अर्थात् देहको, भरपूर करता है अर्थात् देहका स्वामी होकर रहता है, और, हृदयाकाश में, प्रकाशमान विवेकको बाँघता है अर्थात् हृदयमें विवेचनात्मक ज्ञानको धारण करता हे आत्मन् ! तुझ जैसा, और कोई भी, नहीं है । न तेरे जैसा कोई उत्पन्न है, न ही कोई पदार्थ उत्पन्न होगा । जब आत्माकी उत्पत्ति नहीं है तब उसकी मृत्यु क्यों होगी ! इसलियें तू नित्य होता हुआ, सारे देहको, अत्यधिक उठाये हुए है । इसलिये आत्माको अज और नित्य मानना चाहिये । अपश्यमस्य महतो महित्वममर्त्यस्य मर्त्यासु विक्षु । मृत्युको प्राप्त होनेवाली, प्रजाओं में या देहोंमें, इस, महान्, न मरनेवाले आत्माका, महत्त्व, : देखा है, अर्थात मरणधर्मी शरीरोंमें यह अमर और अविनाशी आत्मशक्ति रहती है । तुलना - गीता में देहको अनित्य एवं आत्माको नित्य बताकर यह सिद्ध किया गया है कि देहका नाश होनेपर शोक नहीं करना चाहिये । वेदमें भी देहको मृत्युधर्मक और आत्माको अजर-अमर बताया गया है । स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि । धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्र योऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते ।। और, युद्ध करना क्षत्रियका अपना सहज धर्म है इसलिये तू अपने क्षत्रियधर्मको, देखकर, कम्पायमान होने योग्य नहीं है, क्योंकि, क्षत्रियों द्वारा सम्पादन किये जाने योग्य न्याययुक्त धर्मवाले, युद्धसे, और, कल्याण करनेवाला कोई धर्म, क्षत्रियके लिये नहीं है ।। इकतीस ।। युध्मो अनर्वा खजकृत् समद्वा शूरः सत्राषाड् जनुषेमषाळ्हः । व्यास इन्द्रः पृतनाः स्वोजा अधा विश्वं शत्रूयन्तं जघान ।। क्षत्रिय, युद्धमें पीठ न दिखानेवाला, युद्ध करनेवाला ['खले खजे' युद्धनाम, निघंटु ], दुष्टोंको मारकर सज्जनोंको प्रसन्न करनेवाला या युद्धको अपना धर्म समझनेवाला, शूरतायुक्त, जन्मसे ही, बहुतोंपर प्रभाव डालनेवाला, स्वयं किसी के प्रभाव में न आनेवाला, अच्छे बलवाला, यह, क्षत्रियात्मा, शत्रुओंकी सेनाओंको, परास्त कर देता है, और शत्रुता करते हुए, सारे शत्रुमण्डलको, नाश कर देता है । महाभारतका भी इस विषय में स्पष्ट कथन है - अधर्मः क्षत्रियस्यैष यच्छय्यामरणं भवेत् । विसृजलेष्ममूत्राणि कृपणं परिदेवयन् ।। अविक्षतेन देहेन प्रलयं योऽधिगच्छति । क्षत्रियो नास्य तत्कर्म प्रशंसन्ति पुराविदः ।। न गृहे मरणं तात क्षत्रियाणां प्रशस्यते । शौटीराणामशौटीरमधर्म्यं कृपणं च तत् ।। बीमार होकर खाटपर पड़कर मरना क्षत्रियके लिये महान् अधर्म है जिसमें श्लेष्म-मलमूत्रादि-त्यागसे अतिकृपणतासे देह त्यागा जाता है। जो क्षत्रिय घावसे रहित देहका त्याग कर देता है अर्थात् बिना शस्त्रप्रहारके देह त्याग करता है, तत्त्वज्ञानी क्षत्रिय लोग उसके इस कर्मको अच्छी दृष्टि से नहीं देखते अर्थात् उसे क्षत्रिय नहीं गिनते । क्षत्रियोंका घरमें मरना प्रशंसित जाता, अपितु ऐसा मरना अत्यन्त निन्दित, अधर्म और अति कायरताका काम समझा जाता है । मनुस्मृतिमें कहा गया हैन निवर्तेत सङ्ग्रामात् क्षात्रं धर्ममनुस्मरन् । सङ्ग्रामेष्वनिवतित्वं प्रजानां चैव पालनम् । क्षत्रिय क्षात्रधर्मको स्मरण करता हुआ संग्रामसे न भागे । प्रजाका पालना और संग्रामसे मुख न मोड़ना क्षत्रियका कर्त्तव्य है । वह्निपुराणमें कहा गया है - धर्मलाभोऽर्थलाभच यशोलाभस्तथैव च । यः शूरो वध्यते युद्धे विमर्दन् परवाहिनीम् ।। यां यज्ञसङ्घैस्तपसा च विप्राः स्वर्गैषिणो यत्र न वै प्रयान्ति । क्षणेन तामेव गतिं प्रयान्ति महाहवे स्वां तनुं संत्यजन्तः ॥ जो वीर शत्रुकी बहुत बड़ी विशाल सेनाको मसलता हुआ युद्धमें मारा जाता है वह धर्म, अर्थ तथा यश पाता है । स्वर्गकी इच्छा करनेवाले ब्राह्मण असंख्य यज्ञ करनेसे तथा कठिन तपस्यादिसे जिस गतिको नहीं पाते, संग्राममें अपने शरीरको छोड़नेवाले क्षत्रिय लोग क्षणमात्र में ही उस गतिको पा लेते हैं । तुलना - - - गीतामें कहा गया है कि अपने-अपने वर्णानुसार अपने-अपने धर्मको करनेवाले पुरुष उत्तम गतिको पाते हैं । अर्जुन क्षत्रिय था अतः उसे क्षात्र धर्मसे न हटनेका उपदेश दिया गया है। महाभारत आदि तथा वेदमें भी यही बताया गया है कि युद्धमें पीठ न दिखाना, शूर बनना, दूसरेपर क्षात्रप्रभाव डालना, अपने आप किसीसे न दबना, शत्रुता करनेवाले शत्रुका नाश करना क्षत्रियका कर्तव्य है । यदृच्छया चोपपत्रं स्वर्गद्वारमपावृतम् । सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ।। अर्जुन ! अपने आप प्राप्त हुए, खुले हुए किवाड़ोंसे युक्त, स्वर्ग-द्वारवाले, ऐसे युद्धको, सुखी, भाग्यशाली, क्षत्रियकुलोत्पन्न पुरुष, प्राप्त करते हैं ॥ बत्तीस ॥ ये युध्यन्ते प्रधनेषु शूरासो ये तनूत्यजः । ये वा सहस्रदक्षिणास्तांश्चिदेवापि गच्छतात् ॥ शूर-वीरोंकी मृत्यु होनेपर कटक- कुण्डलादि स्वर्ण- धन जहाँ बिखरे पड़े हों ऐसे युद्धस्थलोंमें, युद्धवीर शूरजन, जो क्षत्रिय, युद्ध करते हैं अर्थात् शत्रुओंपर आक्रमण करते हैं, जो युद्धवीर क्षत्रिय युद्ध में शरीर छोड़ते हैं, अथवा जो शूर वीर, दक्षिणकी ओर आनेवाले अर्थात् सम्मुख आए हुए क्रूरसे क्रूर शत्रुओंको युद्ध - विजयके लिये सहस्रों प्रकारकी दक्षिणां देनेवाले हैं, उन शत्रुओंकी, ओर भी अर्थात् उनके सम्मुख भी, तू जा, अर्थात् युद्ध कर । युद्धके अनन्तर तू भी मरकर स्वर्गलोकको प्राप्त हो । तुलना - गीता में कहा गया है कि क्षत्रिय वीर युद्ध में शत्रुओंसे युद्ध करता हुआ यदि मृत्युको प्राप्त होता है तो वह खुले द्वारवाले स्वर्गको प्राप्त करता है । वेद और मनुस्मृतिमें भी यही कहा गया है कि जो शूर वीर महायुद्धोंमें सम्मुख प्राप्त हुए शत्रुओंके साथ युद्ध करता हुआ मृत्युको प्राप्त होता है वह उन लोकोंको जाता है जिन लोकोंमें विविध याज्ञिक और दानी गमन करते हैं अथ चेत्त्वमिमं धर्म्य सङ्ग्रामं न करिष्यसि । ततः स्वधर्म कीर्तिञ्च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥ फिर, यदि, तू, इस, धर्मसंयुक्त, युद्धको, नहीं करेगा, अर्थात् भीरु हो जायगा, तो, युद्ध-पराङ्मुख होनेके अनन्तर, अपने क्षात्रधर्मंको, और कीर्तिको, छोड़कर, पापको प्राप्त करेगा अर्थात् नरंकको जाएगा ॥ तैंतीस ॥ वि दुर्गा वि द्विषः पुरो ध्नन्ति राजान एषाम् । नयन्ति दुरिता तिरः ॥ राजा अर्थात् क्षत्रिय जन, सेनानियोंके, सम्मुख, तीन. घ्नन्ति - हन्तेरदादित्वाच्छपो लुक् । युद्धस्थलके इन दृढ़ दुर्गस्थलों और कठोर एक. दुर्गा-दुःखेन गच्छन्त्यत्रेति दुर्गाणि । 'सुदुरोरधिकरणे' इति गमेर्डप्रत्ययः । 'शेश्छन्दसि बहुलम्' इति शेर्लोपः । दो. पुरः - कालवाचिनः पूर्वशव्दात् सप्तम्य पूर्वंशव्दात् सप्तम्यर्थे 'पूर्वाधरावराणामसिपुरधवश्चैषाम्' इत्यसिप्रत्ययः, तत्सन्नियोगेन पूर्वशब्दस्य पुरादेशश्च । शस्त्रास्त्रोंको, विशेषतासे नष्ट कर देते हैं, शत्रुओंको भी विशेष करके नष्ट कर देते हैं, और, क्षात्रधर्मके त्यागसे उत्पन्न होनेवाले अपकीर्तिमय पापोंको, दूर कर देते हैं । तुलना-तामें कहा गया है कि जो क्षत्रिय क्षात्रधर्मका परित्याग करता है वह अपकीर्ति और पापको प्राप्त करता है अर्थात् क्षात्रधर्म छोड़ देनेसे नरकगामी होता है । वेदमें भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्ध में सम्मुख आए शत्रुओंके साथ युद्ध करके उन्हें परास्त कर देते हैं वे अपनी अपकीर्ति मिटाकर संसारमें यशस्वी हो जाते हैं । अकीर्तिव्यापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् । सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥ हे अर्जुन ! सब प्राणी, रणसे भागे तुझ वीर पुरुषकी, सदा रहनेवाली, अपकीर्तिको, कहेंगे, और, मान्य पुरुषका, अपयश, मृत्युसे भी बुरा होता है ॥ चौंतीस ॥ यदचरस्तन्वा वावृधानो बलानीन्द्र प्रब्रुवाणो जनेषु । मायेत्सा ते यानि युद्धान्याहुर्नाद्य शत्रुं ननु पुरा विवित्से । हे क्षत्रियराज ! शूरतासे परिपूर्ण अपने शरीरसे, युद्धोंमें जय प्राप्त करके अपने नाम और यशको बढ़ाता हुआ, सब प्राणियोंमें, अपने सब प्रकारके बलोंको, प्रकर्षतासे बताता हुआ, जिस संग्रामको, तूने किया, तेरी, वह कीर्ति, व्यर्थ ही है, पहले, शत्रुओंके साथ जो युद्ध किये हैं, [ तेरे पूर्व युद्धोंके कर्तव्योंको जाननेवाले] कहते हैं, वे युद्ध भी वृथा हैं, क्योंकि अब तू भीरु होकर धर्मयुद्धसे भागता है, आज तू, रणमें सम्मुख आए हुए मारने योग्य शत्रुको, विशेषकर नहीं जानता और न ही जाननेकी इच्छा करता है । क्या तू पूर्वयुद्धों में भी ऐसा ही भीरु था ? क्योंकि अब तू युद्धभूमिसे भागता है । तुलना - गीतामें कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्धभूमिसे भागता है, सब लोगोंमें उसका अपयश होता है और अपयश मृत्युसे भी अधिक बुरा माना जाता है । मृत्यु अच्छी है, अपयश अच्छा नहीं ! वेदमें भी कहा गया है कि जो क्षत्रिय युद्ध से भागता है उसकी इस अपकीर्तिसे पूर्व कालमें जीते हुए युद्धोंका यश भी नष्ट हो जाता है। पहले जीते हुए युद्ध भी उसके व्यर्थ माने जाते हैं । भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः । येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ।। कर्ण - द्रुपद - भगदत्तादि महारथी, तुझे, भयके कारण, युद्धभूमिसे, भागा हुआ, मानेंगे, और, जिन महारथियोंके सामने, बहुत मानवाला होकर तू, लघुताको प्राप्त हो जायगा । वे कहेंगे - कैसा शूर वीर था, अब तो शृगालसे भी अधिक क्षुद्र अवस्थामें पहुँच गया है ॥ पैंतीस ॥ दूरे तन्नाम गुह्यं पराचैर्यत्त्वा भोते अह्वयेतां वयोधं । उदस्तभ्नाः पृथिवीं द्यामभीके भ्रातुः पुत्रान्मघवन्तित्विषाणः ॥ हे धनके धारण करनेवाले या राजाधिराज ! जब, शत्रुसे डरे हुए प्राणी अर्थात् तेरे सैनिकगण, अपने आपको बचाने के लिये अर्थात् प्रबल शत्रुओंसे अपनी रक्षाके लिये, तुझ शूर वीर क्षत्रियको, बुलाते थे, तब तू अपने अस्त्र-शस्त्रायुधोंसे सुसज्जित होकर सैनिक वेशसे, शत्रुओंसे डरे हुए उन प्राणियोंके समीप ही, पृथिवीवासी और अन्तरिक्षस्थ अर्थात् वायुयानपर स्थित प्राणियोंको, तथा, भाईके पुत्रोंको, अपने शूर-वीरताके वचनों से उत्तेजित करता हुआ, भीरुतासे हटाकर युद्ध करनेके लिये खड़ा कर देता था अर्थात् युद्धस्थलसे भागते हुए सैनिकोंको भी युद्धमें खड़ा कर देता था । अब तू भयभीत होकर युद्धसे परामको प्राप्त हुआ है अतः तुझसे विमुख हुए योद्धागणोंसे अब वह शूर वीरतावाला तेरा नाम, गुप्त है अर्थात् कोई भी मनुष्य तेरे नामको यशके साथ न पुकारेगा । वीरजन तेरी अपकीति फैलायेंगे । तेरा नाम जगत्से दूर हो जायगा, नष्ट हो जायगा । तुलना - गीता में कहा गया है कि जो वीर भयके कारण युद्ध नहीं करता वह पहले बड़ा भारी शूरवीर होता हुआ भी अपकीर्तिका पात्र बन जाता है । अपकीति मृत्युसे भी अधिक निम्न होती है । वेदमें भी कहा गया है कि आक्रमणकारी प्रबल शत्रुसे डरे हुए जीव अपनी रक्षाके लिये जिस युद्धवीरकी शरणमें जाते हैं वह शरण्य, शरणागतोंकी रक्षा करता हुआ, यशस्वी होता है । यदि वहीं यशस्वी शूर वीर क्षत्रिय स्वयं ही युद्धस्थलसे भागता है तो उसकी पूर्व युद्धविजयवाली कीर्ति भी नष्ट हो जाती है । संसारसे उसका नाम उठ जाता है । अतः उसका अपयश मृत्युसे भी अधिक बुरा माना जाता है । अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः । निन्दन्तस्तव सामर्थ्य ततो दुःखतरं नु किम् ।। हे अर्जुन ! दुर्योधन, कर्ण आदि शत्रु, 'अर्जुन कैसा युद्धवीर था, उसने कैसे-कैसे कठोर युद्धोंको जीता, किन्तु अब वह भीरु हो गया। इस प्रकार तेरी शक्तिकी निन्दा करते हुए, 'ऐसे क्षात्र जन्मको धिक्कार है ! ' ऐसे-ऐसे न कहने योग्य अनेक वचनोंको, कहेंगे । इससे अधिक, दुःख और क्या है ! यह महादुःखकी बात है ॥ छत्तीस ॥ या शशाप 'शपनेन याघं मूरमादधे । या रसस्य हरणाय जातमा रेभे तोकमत्तु सा ॥ जो क्षत्रिय-वर्ग, भयके कारण युद्धस्थलसे भागे हुए क्षत्रिय वीरकी अकथनीय या निन्दित वचनों द्वारा, निन्दा करता है, जो क्षत्रिय-वर्ग, सांसारिक मोहसे मूढ होकर युद्धस्थलसे उपराम-रूप, पापको, प्राप्त करता है, जो क्षत्रिय-वर्ग, क्षात्र धर्ममें उत्पन्न हुए पुत्रादि सन्तानके, देहगत बलके नाशके लिए, आरम्भ हो जाता है, प्रयत्नशील हो जाता है, भयके कारण युद्धसे उपराम हुआ वह क्षत्रियएक. शपनेन - 'शप आक्रोशे', करणे ल्युट् । दो. मूरम् - 'मुर्च्छा मोहसमुच्छ्राययोः', 'क्विप् च' इति क्विप्, 'रात्लोपः' इति छकारस्य लोपः ।
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Faridabad/Alive News : समाज में संगठन खड़ा करना संघ का उद्देश्य नहीं बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करना संघ का उद्देश्य है। सम्पूर्ण हिन्दू समाज अर्थात हिन्दुस्थान की सभी जाति, पंथ एवं समुदायों के जागरण एवं संगठन के माध्यम से ही देश का सर्वांगीण विकास संभव है। उक्त विचार अग्रवाल कॉलेज बल्लभगढ़ में आयोजित एक विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने व्यक्त किए। गोष्ठी में पधारे प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी को राष्ट्रहित में अपने सभी व्यक्तिगत, जातिगत, दलगत एवं पांथिक मतभेद भुलाकर राष्ट्र की उन्नति के लिए कार्य करना होगा ।
उन्होंने कहा कि हमारे सभी जलस्रोत, मंदिर एवं शमशान घाट सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सांझा होने चाहिए। हमारे आपसी मतभेदों के कारण ही भारत के शत्रु भारत देश के अंदर ही भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जैसे नारे लगाते है। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी एवं योगाचार्य मास्टर प्रेमचंद ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में मास्टर प्रेमचंद ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति लोगों का रुझान अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि अच्छे विचार और अच्छे कार्यों की कद्र होती है।
योग के महत्व को दर्शाते हुए प्रेमचंद ने कहा कि समर्थ भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ भारत होना भी बहुत जरुरी है। इस अवसर पर संघ के जिला संघचालक डॉ. चंद्रशेखर, नगर संघचालक राजेंद्र जैन, जिला कार्यवाह अधिवक्ता संतोष वत्स, जिला प्रचार प्रचार प्रमुख राजेंद्र गोयल, जिला व्यवस्था प्रमुख चुन्नीलाल गर्ग, आदेश सिंघल, कृष्ण मुरारी, महेश, सीताराम आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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Faridabad/Alive News : समाज में संगठन खड़ा करना संघ का उद्देश्य नहीं बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करना संघ का उद्देश्य है। सम्पूर्ण हिन्दू समाज अर्थात हिन्दुस्थान की सभी जाति, पंथ एवं समुदायों के जागरण एवं संगठन के माध्यम से ही देश का सर्वांगीण विकास संभव है। उक्त विचार अग्रवाल कॉलेज बल्लभगढ़ में आयोजित एक विचार गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने व्यक्त किए। गोष्ठी में पधारे प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी को राष्ट्रहित में अपने सभी व्यक्तिगत, जातिगत, दलगत एवं पांथिक मतभेद भुलाकर राष्ट्र की उन्नति के लिए कार्य करना होगा । उन्होंने कहा कि हमारे सभी जलस्रोत, मंदिर एवं शमशान घाट सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सांझा होने चाहिए। हमारे आपसी मतभेदों के कारण ही भारत के शत्रु भारत देश के अंदर ही भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जैसे नारे लगाते है। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी एवं योगाचार्य मास्टर प्रेमचंद ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में मास्टर प्रेमचंद ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति लोगों का रुझान अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि अच्छे विचार और अच्छे कार्यों की कद्र होती है। योग के महत्व को दर्शाते हुए प्रेमचंद ने कहा कि समर्थ भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ भारत होना भी बहुत जरुरी है। इस अवसर पर संघ के जिला संघचालक डॉ. चंद्रशेखर, नगर संघचालक राजेंद्र जैन, जिला कार्यवाह अधिवक्ता संतोष वत्स, जिला प्रचार प्रचार प्रमुख राजेंद्र गोयल, जिला व्यवस्था प्रमुख चुन्नीलाल गर्ग, आदेश सिंघल, कृष्ण मुरारी, महेश, सीताराम आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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सेना के दो पूर्व उप प्रमुखों समेत सात सेवानिवृत अधिकारी शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्र की सेवा करने वाले ऐसे वरिष्ठ पूर्व सैनिकों की मौजूदगी से भाजपा को फायदा होगा। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, वे राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी नीतियों में मार्गदर्शन कर सकते हैं। Ó सेना के दो पूर्व उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जेबीएस यादव और लेफ्टिनेंट जनरल एस के पटयाल पार्टी में शामिल हुए हैं। यादव ने पत्रकारों से कहा, पूर्व सैनिक भी देश की सेवा करना चाहते हैं। हम भले ही सेवानिवृत हो गए हों, लेकिन हम थके नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुरक्षित एवं सक्षम हाथों में है। सैन्य खुफिया विभाग के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह, सेना की सूचना सेवाओं एवं आईटी के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल सुनीत कुमार और सेना मुख्यालय में सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ के रूप में कार्य कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली भी पार्टी में शामिल हुए हैं। इसके अलावा कर्नल आरके सिंह और विंग कमांडर (सेवानिवृत) नवनीत मेगन भी भाजपा में शामिल हुए।
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सेना के दो पूर्व उप प्रमुखों समेत सात सेवानिवृत अधिकारी शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्र की सेवा करने वाले ऐसे वरिष्ठ पूर्व सैनिकों की मौजूदगी से भाजपा को फायदा होगा। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, वे राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी नीतियों में मार्गदर्शन कर सकते हैं। Ó सेना के दो पूर्व उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जेबीएस यादव और लेफ्टिनेंट जनरल एस के पटयाल पार्टी में शामिल हुए हैं। यादव ने पत्रकारों से कहा, पूर्व सैनिक भी देश की सेवा करना चाहते हैं। हम भले ही सेवानिवृत हो गए हों, लेकिन हम थके नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुरक्षित एवं सक्षम हाथों में है। सैन्य खुफिया विभाग के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह, सेना की सूचना सेवाओं एवं आईटी के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल सुनीत कुमार और सेना मुख्यालय में सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ के रूप में कार्य कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली भी पार्टी में शामिल हुए हैं। इसके अलावा कर्नल आरके सिंह और विंग कमांडर नवनीत मेगन भी भाजपा में शामिल हुए।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो- सोशल मीडिया)
Jharkhand Siblings Died: तालाब-पोखरों में बच्चों का खेलना या नहाना आम-सी बात है. अब जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहे है और मौसम गर्म हो रहा है गांव-कस्बों में लोग तालाब-पोखरों में नहाने के लिए उतरने लगे हैं. लेकिन झारखंड से एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है कि शायद अब लोग अपने बच्चों को तालाब में नहाने या खेलने की अनुमति दें. दरअसल राज्य के हजारीबाग जिले (Hazaribagh District) में इचाक पुलिस थाना क्षेत्र (Ichak Police Station) के मगनपुर (Maganpur) में सोमवार को एक तालाब में स्नान करने उतरे एक छह वर्षीय बच्चे की मौत हो गई.
अपने मासूम भाई को गहरे पानी में डूबता (Drowning) देखकर जब उसकी 12 वर्षीय बहन ने उसे बचाने के लिए पानी में छलांग लगाई तो उसकी भी जान न बच सकी. इस तरह दोनों भाई बहनों की हादसे में मौत (Death) हो गई.
पुलिस सूत्रों की दी गई जानकारी के मुताबिक मगनपुर में छह वर्षीय सौरव कुमार जैसे ही नहाने के लिए तालाब में उतरा, वह गहरे पानी में फिसल गया और डूबने लगा. अपने भाई को डूबता देख उसकी बड़ी बहन सुमन कुमारी उसे बचाने के लिए बिना कुछ सोचे समझे तालाब में कूद गई. सूत्रों ने बताया कि बहन को तैरना नहीं आता था जिसकी वजह से वह भी अपने भाई के साथ गहरे पानी में डूब गई और दोनों की जान चली गई.
पुलिस ने बताया कि दोनों भाई-बहन को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए भेज कर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है. वहीं हजारीबाग में पेश आए इस हादसे के बाद दोनों बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पूरे घर में मातम पसरा है. एक ही परिवार के दो बच्चे की मौत ने पूरे इलाके को सहमा कर रख दिया है.
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Jharkhand Siblings Died: तालाब-पोखरों में बच्चों का खेलना या नहाना आम-सी बात है. अब जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहे है और मौसम गर्म हो रहा है गांव-कस्बों में लोग तालाब-पोखरों में नहाने के लिए उतरने लगे हैं. लेकिन झारखंड से एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है कि शायद अब लोग अपने बच्चों को तालाब में नहाने या खेलने की अनुमति दें. दरअसल राज्य के हजारीबाग जिले में इचाक पुलिस थाना क्षेत्र के मगनपुर में सोमवार को एक तालाब में स्नान करने उतरे एक छह वर्षीय बच्चे की मौत हो गई. अपने मासूम भाई को गहरे पानी में डूबता देखकर जब उसकी बारह वर्षीय बहन ने उसे बचाने के लिए पानी में छलांग लगाई तो उसकी भी जान न बच सकी. इस तरह दोनों भाई बहनों की हादसे में मौत हो गई. पुलिस सूत्रों की दी गई जानकारी के मुताबिक मगनपुर में छह वर्षीय सौरव कुमार जैसे ही नहाने के लिए तालाब में उतरा, वह गहरे पानी में फिसल गया और डूबने लगा. अपने भाई को डूबता देख उसकी बड़ी बहन सुमन कुमारी उसे बचाने के लिए बिना कुछ सोचे समझे तालाब में कूद गई. सूत्रों ने बताया कि बहन को तैरना नहीं आता था जिसकी वजह से वह भी अपने भाई के साथ गहरे पानी में डूब गई और दोनों की जान चली गई. पुलिस ने बताया कि दोनों भाई-बहन को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज कर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है. वहीं हजारीबाग में पेश आए इस हादसे के बाद दोनों बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पूरे घर में मातम पसरा है. एक ही परिवार के दो बच्चे की मौत ने पूरे इलाके को सहमा कर रख दिया है.
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ईश्वर का अस्तित्व
यह दलील सनातन है। मेरे पास इसका कोई नया मौलिक जवाब नहीं है। मगर तौभी मैं बतलाऊँगा कि मैं ईश्वर में क्यों विश्वास करता हूँ। ऐसा करने की प्रेरणा मुझे इसलिए होती है कि मुझे मालूम है कि ऐसे नवजवान है जो मेरे विचारों और कार्यों में दिलचस्पी रखते हैं। एक तरह की कथनोय, अज्ञात शक्ति सर्वत्र व्याप्त है। मैं उसका अनुभव करता हूँ, गो कि देखता नहीं हूँ । इस अदृष्ट शक्ति का अनुभव होता है, मगर तौभी इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि जिन सब शक्तियों का ज्ञान मुझे इन्द्रियों से होता है, यह उन सब से परे हैं । यह इन्द्रियों के परे है।
मगर मर्यादित क्षेत्र में ईश्वर का अस्तित्व युक्तियों से भो प्रमाणित किया जा सकता है। मामूली मामलों में हम जानते हैं कि लोगों को यह पता नहीं होता है कि कौन या क्यों और कैसे शासन करता है। और तौभी वे जानते हैं कि निश्चय ही ऐसी कोई शक्ति है जो शासन करती है । गत वर्ष अपनी मैसूर की मुसाफिरी में मैं कितने ही ग़रीब आदमियों से मिला था । पूछने पर मालूम हुआ कि वे यह नहीं जानते कि उनका राजा कौन है । उन्होंने सिर्फ यही कहा कि कोई देवता राज करता होगा । जब कि इन गरीब देहातियों का ज्ञान अपने शासक के विषय में इतना कम है तब मैं इस पर क्यों आश्चर्य करूँ कि मैं राजाओं के राजा परमात्मा के अस्तित्व को नहीं जानता जो मुझसे महाराजा मैसूर अपनी प्रजा से जितने बड़े हैं उसके अनन्त गुण अधिक बड़ा है। मगर तौ भी जैसे कि मैसूर के ग़रीब देहातियों को अनुभव होता था, मुझे भी ऐसा अवश्य लगता है कि विश्व में नियमितता है, व्यवस्था है, सभी प्राणियों सभी वस्तुओं के सम्बन्ध में जिनका कि इस संसार में अस्तित्व है कोई अपरिधर्म-पथ
वर्त्तनीय, अटल नियम लागू होता है । यह कोई अन्धा निष्प्राण नियम नहीं है। क्योंकि कोई निष्प्राण नियम सजीव प्राणियों पर शासन नहीं कर सकता । सर जगदीशचन्द्र वसु की खोजों की बदौलत तो अब सभी पदार्थों को सजीव कहा जा सकता है। इसलिये जो नियम सभी प्राणियों, सभी जीवों पर शासन करता है, वह परमात्मा है। नियम और नियमकर्त्ता किसी के अस्तित्व को इन्कार नहीं कर सकता; क्योंकि इनके बारे में मैं बहुत ही कम जानता हूँ। जैसे कि किसी सांसारिक शक्ति के अस्तित्व को न मानने से मेरा कुछ भी बचाव नहीं हो सकता, उसी तरह परमात्मा को और उसके नियम को इन्कार करने से मैं उनके प्रभाव से बच नहीं सकता । इसके उल्टे नम्रतापूर्वक शान्ति से दैव का बल स्वीकार कर लेने से जोवनयात्रा सहज हो जाती है जैसे कि सांसारिक शासन को भी मान लेने से उसके नीचे जीवन सहज हो जाता है ।
मैं धुँधले तौर पर यह अनुभव जरूर करता हूँ कि जब कि मेरे चारों ओर सभी कुछ बदल रहा है, मर भी रहा है इन सब परिवत्तेनों के नीचे एक जीवित शक्ति है जो कभी भी नहीं बदलती जो सब को एक में बाँध कर रखती है । जो नयी सृष्टिपैदा करती है। यही शक्ति ईश्वर है । परमात्मा है । इन्द्रियों से जिसका अनुभव कर पाता हूँ उनमें से और कोई वस्तु टिकी नहीं रह सकती, नहीं रहेगी इसलिये 'तत्सत्' एक वही है ।
और वह शक्ति शिव (कल्याणकारी) है या अशिव (अनिष्ट चिंतक) ? मैं तो इसे शुद्ध कल्याणकारी रूप में ही देखता हूँ । क्योंकि मैं देखता हूँ कि मृत्यु के मध्य में जीवन कायम रहता है । असत्य के मध्य में सत्य का अस्तित्व बना रहता है, इसलिये
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ईश्वर का अस्तित्व यह दलील सनातन है। मेरे पास इसका कोई नया मौलिक जवाब नहीं है। मगर तौभी मैं बतलाऊँगा कि मैं ईश्वर में क्यों विश्वास करता हूँ। ऐसा करने की प्रेरणा मुझे इसलिए होती है कि मुझे मालूम है कि ऐसे नवजवान है जो मेरे विचारों और कार्यों में दिलचस्पी रखते हैं। एक तरह की कथनोय, अज्ञात शक्ति सर्वत्र व्याप्त है। मैं उसका अनुभव करता हूँ, गो कि देखता नहीं हूँ । इस अदृष्ट शक्ति का अनुभव होता है, मगर तौभी इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि जिन सब शक्तियों का ज्ञान मुझे इन्द्रियों से होता है, यह उन सब से परे हैं । यह इन्द्रियों के परे है। मगर मर्यादित क्षेत्र में ईश्वर का अस्तित्व युक्तियों से भो प्रमाणित किया जा सकता है। मामूली मामलों में हम जानते हैं कि लोगों को यह पता नहीं होता है कि कौन या क्यों और कैसे शासन करता है। और तौभी वे जानते हैं कि निश्चय ही ऐसी कोई शक्ति है जो शासन करती है । गत वर्ष अपनी मैसूर की मुसाफिरी में मैं कितने ही ग़रीब आदमियों से मिला था । पूछने पर मालूम हुआ कि वे यह नहीं जानते कि उनका राजा कौन है । उन्होंने सिर्फ यही कहा कि कोई देवता राज करता होगा । जब कि इन गरीब देहातियों का ज्ञान अपने शासक के विषय में इतना कम है तब मैं इस पर क्यों आश्चर्य करूँ कि मैं राजाओं के राजा परमात्मा के अस्तित्व को नहीं जानता जो मुझसे महाराजा मैसूर अपनी प्रजा से जितने बड़े हैं उसके अनन्त गुण अधिक बड़ा है। मगर तौ भी जैसे कि मैसूर के ग़रीब देहातियों को अनुभव होता था, मुझे भी ऐसा अवश्य लगता है कि विश्व में नियमितता है, व्यवस्था है, सभी प्राणियों सभी वस्तुओं के सम्बन्ध में जिनका कि इस संसार में अस्तित्व है कोई अपरिधर्म-पथ वर्त्तनीय, अटल नियम लागू होता है । यह कोई अन्धा निष्प्राण नियम नहीं है। क्योंकि कोई निष्प्राण नियम सजीव प्राणियों पर शासन नहीं कर सकता । सर जगदीशचन्द्र वसु की खोजों की बदौलत तो अब सभी पदार्थों को सजीव कहा जा सकता है। इसलिये जो नियम सभी प्राणियों, सभी जीवों पर शासन करता है, वह परमात्मा है। नियम और नियमकर्त्ता किसी के अस्तित्व को इन्कार नहीं कर सकता; क्योंकि इनके बारे में मैं बहुत ही कम जानता हूँ। जैसे कि किसी सांसारिक शक्ति के अस्तित्व को न मानने से मेरा कुछ भी बचाव नहीं हो सकता, उसी तरह परमात्मा को और उसके नियम को इन्कार करने से मैं उनके प्रभाव से बच नहीं सकता । इसके उल्टे नम्रतापूर्वक शान्ति से दैव का बल स्वीकार कर लेने से जोवनयात्रा सहज हो जाती है जैसे कि सांसारिक शासन को भी मान लेने से उसके नीचे जीवन सहज हो जाता है । मैं धुँधले तौर पर यह अनुभव जरूर करता हूँ कि जब कि मेरे चारों ओर सभी कुछ बदल रहा है, मर भी रहा है इन सब परिवत्तेनों के नीचे एक जीवित शक्ति है जो कभी भी नहीं बदलती जो सब को एक में बाँध कर रखती है । जो नयी सृष्टिपैदा करती है। यही शक्ति ईश्वर है । परमात्मा है । इन्द्रियों से जिसका अनुभव कर पाता हूँ उनमें से और कोई वस्तु टिकी नहीं रह सकती, नहीं रहेगी इसलिये 'तत्सत्' एक वही है । और वह शक्ति शिव है या अशिव ? मैं तो इसे शुद्ध कल्याणकारी रूप में ही देखता हूँ । क्योंकि मैं देखता हूँ कि मृत्यु के मध्य में जीवन कायम रहता है । असत्य के मध्य में सत्य का अस्तित्व बना रहता है, इसलिये
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CM शिवराज के काम से कितनी खुश है MP की जनता? सर्वे में आए चौंकाने वाले नतीजे; कांग्रेस के लिए एक टेंशन!
सर्वे में लगभग 32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वो एमपी की शिवराज सरकार से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, इस सर्वे में लगभाग 40 प्रतिशत लोगों ने शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट होने की बात कही है।
साल के अंत में मध्य प्रदेश समेत तीन बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान भी शामिल है। इस दौरान एक सवाल सामने आ रहा है कि मध्य प्रदेश में किसकी सरकार आएगी? क्या शिवराज सिंह चौहान फिर से सीएम बनेंगे या सत्ता कांग्रेस के हिस्से में जाएगी। इसी सवाल जानने के लिए सी-वोटर ने पीएसई के साथ मिलकर एक सर्वे किया। सर्वे में पूछा गया कि एमपी के लोग शिवराज सिंह सरकार के काम से कितने संतुष्ट हैं? बता दें कि सर्वे के नतीजे भाजपा के लिए खुश कर देने वाले हैं, क्योंकि इस सर्वे के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत लोग चौहान के काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं। इसी सर्वे का औसत निकलकर सामने आया कि एमपी की लगभग 35 प्रतिशत जनता शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट है।
रविवार को पीएसई और सी-वोटर के सर्वे के नतीजे सामने आए। नतीजों में राजस्थान सरकार के कामकाज का भी सर्वे किया गया था। वहां की कांग्रेस सरकार से भी ज्यादातर लोग संतुष्ट नजर आए हैं, लेकिन इस सर्वे में एमपी को लेकर जो नतीजे आए हैं वो कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। चूंकि मध्य प्रदेश में चुनाव होने में ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में अगर जनता को लगता है कि शिवराज सरकार ने ठीक काम किया है और लोग उस काम से संतुष्ट हैं तो यहां सत्ता में कांग्रेस की वापसी का रास्ता बहुत मुश्किल हो जाएगा।
सी-वोटर द्वारा किए गए सर्वे में लगभग 32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वो एमपी की शिवराज सरकार से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, इस सर्वे में लगभाग 40 प्रतिशत लोगों ने शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट होने की बात कही है।
पिछली बार हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी। नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। कांग्रेस नेता कमलनाथ को सीएम बनाया गया था। बाद में अंदरखाने की नाराजगी के बाद कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी छोड़कर चले गए थे जिस कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी। भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को एमपी की कमान सौंपी थी। अब एक बार फिर एमपी में चुनावी रण सजने वाला है। यह देखने वाली बात होगी कि राज्य में किसकी सरकार बनती है। क्या शिवराज सिंह चौहान भाजपा को जीत दिलाकर दोबार सीएम की कुर्सी पर बैठेंगे या सत्ता परिवर्तन होगा और कर्नाटक की तरह ही कांग्रेस एमपी में भी जीत दर्ज करेगी?
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CM शिवराज के काम से कितनी खुश है MP की जनता? सर्वे में आए चौंकाने वाले नतीजे; कांग्रेस के लिए एक टेंशन! सर्वे में लगभग बत्तीस प्रतिशत लोगों का मानना है कि वो एमपी की शिवराज सरकार से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, इस सर्वे में लगभाग चालीस प्रतिशत लोगों ने शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट होने की बात कही है। साल के अंत में मध्य प्रदेश समेत तीन बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान भी शामिल है। इस दौरान एक सवाल सामने आ रहा है कि मध्य प्रदेश में किसकी सरकार आएगी? क्या शिवराज सिंह चौहान फिर से सीएम बनेंगे या सत्ता कांग्रेस के हिस्से में जाएगी। इसी सवाल जानने के लिए सी-वोटर ने पीएसई के साथ मिलकर एक सर्वे किया। सर्वे में पूछा गया कि एमपी के लोग शिवराज सिंह सरकार के काम से कितने संतुष्ट हैं? बता दें कि सर्वे के नतीजे भाजपा के लिए खुश कर देने वाले हैं, क्योंकि इस सर्वे के अनुसार, लगभग चालीस प्रतिशत लोग चौहान के काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं। इसी सर्वे का औसत निकलकर सामने आया कि एमपी की लगभग पैंतीस प्रतिशत जनता शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट है। रविवार को पीएसई और सी-वोटर के सर्वे के नतीजे सामने आए। नतीजों में राजस्थान सरकार के कामकाज का भी सर्वे किया गया था। वहां की कांग्रेस सरकार से भी ज्यादातर लोग संतुष्ट नजर आए हैं, लेकिन इस सर्वे में एमपी को लेकर जो नतीजे आए हैं वो कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। चूंकि मध्य प्रदेश में चुनाव होने में ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में अगर जनता को लगता है कि शिवराज सरकार ने ठीक काम किया है और लोग उस काम से संतुष्ट हैं तो यहां सत्ता में कांग्रेस की वापसी का रास्ता बहुत मुश्किल हो जाएगा। सी-वोटर द्वारा किए गए सर्वे में लगभग बत्तीस प्रतिशत लोगों का मानना है कि वो एमपी की शिवराज सरकार से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, इस सर्वे में लगभाग चालीस प्रतिशत लोगों ने शिवराज सरकार के काम से संतुष्ट होने की बात कही है। पिछली बार हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी। नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। कांग्रेस नेता कमलनाथ को सीएम बनाया गया था। बाद में अंदरखाने की नाराजगी के बाद कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी छोड़कर चले गए थे जिस कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी। भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को एमपी की कमान सौंपी थी। अब एक बार फिर एमपी में चुनावी रण सजने वाला है। यह देखने वाली बात होगी कि राज्य में किसकी सरकार बनती है। क्या शिवराज सिंह चौहान भाजपा को जीत दिलाकर दोबार सीएम की कुर्सी पर बैठेंगे या सत्ता परिवर्तन होगा और कर्नाटक की तरह ही कांग्रेस एमपी में भी जीत दर्ज करेगी?
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वैश्विक निवेश फर्म जनरल अटलांटिक 0. 84 प्रतिशत इक्विटी के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) में 3,675 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। सिल्वर लेक और केकेआर के बाद यह रिलायंस रिटेल में तीसरा बड़ा निवेश है। बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड( आरआईएल) और रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने इस निवेश की घोषणा की। सौदे में रिलायंस रिटेल की प्री-मनी इक्विटी को 4. 285 लाख करोड़ रुपये आंका गया।
इस वर्ष की शुरुआत में जनरल अटलांटिक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 6,598. 38 करोड़ का निवेश किया था। यह जनरल अटलांटिक का रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक सहायक कंपनी में दूसरा निवेश है। रिलायंस रिटेल लिमिटेड के देश भर में फैले 12 हजार से ज्यादा स्टोर्स में सालाना करीब 64 करोड़ खरीददार आते हैं। यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से विकसित होने वाला खुदरा कारोबार है। रिलायंस रिटेल के पास देश के सबसे लाभदायक रिटेल बिजनेस तमगा भी है। कंपनी खुदरा वैश्विक और घरेलू कंपनियों, छोटे उद्योगों, खुदरा व्यापारियों और किसानों का एक ऐसा तंत्र विकसित करना चाहती है, जिससे उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर सेवा प्रदान की जा सके और लाखों रोजगार पैदा किए जा सकें।
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वैश्विक निवेश फर्म जनरल अटलांटिक शून्य. चौरासी प्रतिशत इक्विटी के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड में तीन,छः सौ पचहत्तर करोड़ रुपये का निवेश करेगी। सिल्वर लेक और केकेआर के बाद यह रिलायंस रिटेल में तीसरा बड़ा निवेश है। बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड ने इस निवेश की घोषणा की। सौदे में रिलायंस रिटेल की प्री-मनी इक्विटी को चार. दो सौ पचासी लाख करोड़ रुपये आंका गया। इस वर्ष की शुरुआत में जनरल अटलांटिक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में छः,पाँच सौ अट्ठानवे. अड़तीस करोड़ का निवेश किया था। यह जनरल अटलांटिक का रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक सहायक कंपनी में दूसरा निवेश है। रिलायंस रिटेल लिमिटेड के देश भर में फैले बारह हजार से ज्यादा स्टोर्स में सालाना करीब चौंसठ करोड़ खरीददार आते हैं। यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से विकसित होने वाला खुदरा कारोबार है। रिलायंस रिटेल के पास देश के सबसे लाभदायक रिटेल बिजनेस तमगा भी है। कंपनी खुदरा वैश्विक और घरेलू कंपनियों, छोटे उद्योगों, खुदरा व्यापारियों और किसानों का एक ऐसा तंत्र विकसित करना चाहती है, जिससे उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य पर सेवा प्रदान की जा सके और लाखों रोजगार पैदा किए जा सकें।
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आर्य टीवी डेस्क। चीन के वुहान शहर से तबाही मचाने वाला कोरोना के लक्षणों में बार बार परिवर्तन हो रहा है। चीन में कोविड-19 के 21 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें बिना लक्षण वाले 13 मामले शामिल हैं। इन नये मामलों के साथ देश में संक्रमण के मामले बढ़ कर 82,941 पर पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। वुहान शहर में बड़े पैमाने पर लोगों की जांच शुरू हुई है, जहां से यह प्रकोप शुरू हुआ था। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने बताया कि शुक्रवार को सामने आए कोविड-19 के आठ नए पुष्ट मामलों में से छह ऐसे लोग हैं, जो बाहर से आये हुए हैं।
आयोग ने बताया कि अन्य दो मामले स्थानीय स्तर पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के हैं। ये दोनों मामले जिलिन प्रांत के हैं, जहां बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले आने के बाद हाल ही में लॉकडाउन लगाया गया। हालांकि, बिना लक्षण वाले मामलों की संख्या में वृद्धि जारी रही, शुक्रवार को ऐसे 13 और मामले सामने आए। एनएचसी ने कहा कि बिना लक्षण वाले 561 मामलों में से 30 विदेश से आये हुए हैं, जो अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं। बिना लक्षण वाले मामलों में व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है, लेकिन उसमें बुखार, खांसी या गले में खराश जैसे कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, उनसे बीमारी दूसरों तक फैलने का खतरा रहता है।
मध्य हुबेई प्रांत और इसकी राजधानी वुहान में शुक्रवार तक कोविड-19 के बिना लक्षण वाले 439 मामले सामने आ चुके हैं। चीनी अधिकारियों ने बुधवार से 1. 1 करोड़ की आबादी वाले इस शहर में सब की जांच शुरू की है। शुक्रवार तक, हुबेई प्रांत में वायरस से मौत का आंकड़ा 4,512 था, जिनमें से केवल वुहान में ही 3,869 मौतें हुई हैं।
हुबेई में अब तक कोविड-19 के कुल 68,134 मामलों की पुष्टि हुई है, जिसमें वुहान में सामने आए 50,339 मामले शामिल हैं। एनएचसी ने कहा कि शुक्रवार तक, पूरे चीन में कोविड-19 के पुष्ट मामले 82,941 तक पहुंच गए, जिसमें 89 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है, और 78,219 लोग ठीक हो चुके हैं। कुल 4,633 लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है।
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आर्य टीवी डेस्क। चीन के वुहान शहर से तबाही मचाने वाला कोरोना के लक्षणों में बार बार परिवर्तन हो रहा है। चीन में कोविड-उन्नीस के इक्कीस नए मामले सामने आए हैं, जिसमें बिना लक्षण वाले तेरह मामले शामिल हैं। इन नये मामलों के साथ देश में संक्रमण के मामले बढ़ कर बयासी,नौ सौ इकतालीस पर पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। वुहान शहर में बड़े पैमाने पर लोगों की जांच शुरू हुई है, जहां से यह प्रकोप शुरू हुआ था। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि शुक्रवार को सामने आए कोविड-उन्नीस के आठ नए पुष्ट मामलों में से छह ऐसे लोग हैं, जो बाहर से आये हुए हैं। आयोग ने बताया कि अन्य दो मामले स्थानीय स्तर पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के हैं। ये दोनों मामले जिलिन प्रांत के हैं, जहां बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले आने के बाद हाल ही में लॉकडाउन लगाया गया। हालांकि, बिना लक्षण वाले मामलों की संख्या में वृद्धि जारी रही, शुक्रवार को ऐसे तेरह और मामले सामने आए। एनएचसी ने कहा कि बिना लक्षण वाले पाँच सौ इकसठ मामलों में से तीस विदेश से आये हुए हैं, जो अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं। बिना लक्षण वाले मामलों में व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है, लेकिन उसमें बुखार, खांसी या गले में खराश जैसे कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, उनसे बीमारी दूसरों तक फैलने का खतरा रहता है। मध्य हुबेई प्रांत और इसकी राजधानी वुहान में शुक्रवार तक कोविड-उन्नीस के बिना लक्षण वाले चार सौ उनतालीस मामले सामने आ चुके हैं। चीनी अधिकारियों ने बुधवार से एक. एक करोड़ की आबादी वाले इस शहर में सब की जांच शुरू की है। शुक्रवार तक, हुबेई प्रांत में वायरस से मौत का आंकड़ा चार,पाँच सौ बारह था, जिनमें से केवल वुहान में ही तीन,आठ सौ उनहत्तर मौतें हुई हैं। हुबेई में अब तक कोविड-उन्नीस के कुल अड़सठ,एक सौ चौंतीस मामलों की पुष्टि हुई है, जिसमें वुहान में सामने आए पचास,तीन सौ उनतालीस मामले शामिल हैं। एनएचसी ने कहा कि शुक्रवार तक, पूरे चीन में कोविड-उन्नीस के पुष्ट मामले बयासी,नौ सौ इकतालीस तक पहुंच गए, जिसमें नवासी मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है, और अठहत्तर,दो सौ उन्नीस लोग ठीक हो चुके हैं। कुल चार,छः सौ तैंतीस लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है।
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मुंबई इडियंस के बल्लेबाज सूर्याकुमार यादव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि टीम से जुड़कर और टीम के साथ अभ्यास करके अच्छा लग रहा है। छह दिनों का क्वारंटीन पूरा करने के बाद सूर्या के अलावा कप्तान रोहित शर्मा और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने भी टीम के साथ अभ्यास किया। फ्रैंचाइजी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सूर्या ने कहा, यहां आ कर अच्छा लग रहा है। मुझे लग रहा है कि मैं पिछले 6-8 महीने से यहीं हूं। ड्रेसिंग रुम में आकर और नेट्स में अभ्यास कर के अच्छा लग रहा है।
सूर्या ने कहा, पहले छह सात दिन आज को मिलाकर काफी मुश्किल भरा रहा, क्योंकि जब हम इंग्लैंड में खेल रहे थे तब वहां का तापमान 18-20 डिग्री था और यहां का 40 डिग्री के आसपास है, पर टीम प्रबंधक ने हमारा ख्याल रखा है और हम आने वाले पहले मैच के लिए तैयारी कर रहे हैं।
गत चैपिंयन मुंबई इंडियंस आईपीएल 2021 के दूसरे चरण में 19 सितम्बर को चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। सात मैचों के बाद मुंबई की टीम आठ अंक के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर है।
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मुंबई इडियंस के बल्लेबाज सूर्याकुमार यादव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि टीम से जुड़कर और टीम के साथ अभ्यास करके अच्छा लग रहा है। छह दिनों का क्वारंटीन पूरा करने के बाद सूर्या के अलावा कप्तान रोहित शर्मा और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने भी टीम के साथ अभ्यास किया। फ्रैंचाइजी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सूर्या ने कहा, यहां आ कर अच्छा लग रहा है। मुझे लग रहा है कि मैं पिछले छः-आठ महीने से यहीं हूं। ड्रेसिंग रुम में आकर और नेट्स में अभ्यास कर के अच्छा लग रहा है। सूर्या ने कहा, पहले छह सात दिन आज को मिलाकर काफी मुश्किल भरा रहा, क्योंकि जब हम इंग्लैंड में खेल रहे थे तब वहां का तापमान अट्ठारह-बीस डिग्री था और यहां का चालीस डिग्री के आसपास है, पर टीम प्रबंधक ने हमारा ख्याल रखा है और हम आने वाले पहले मैच के लिए तैयारी कर रहे हैं। गत चैपिंयन मुंबई इंडियंस आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण में उन्नीस सितम्बर को चेन्नई सुपर किंग्स के साथ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। सात मैचों के बाद मुंबई की टीम आठ अंक के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर है।
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- बारिश को देखते हुए मुंबई के कई रास्तों में ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है.
- गांधी मार्केट के ट्रैफिक को भाऊदाजी रोड और सुलोचना शेट्टी रोड पर डायवर्ट किया गया है.
- इसके अलावा नेशनल कॉलेज, एसवी रोड, बांद्रा रोड के ट्रैफिक को लिंक रोड पर डायवर्ट किया गया है.
- तेज बारिश के चलते मुंबई में अलग-अगल हादसों में 4 लोगों की मौत हो गई है. इसमें एक नाबालिग लड़का भी शामिल है.
- महाराष्ट्र के पुणे में एक दीवार गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में मरने वालों में ज्यादातर लोग यूपी और बिहार के थे.
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- बारिश को देखते हुए मुंबई के कई रास्तों में ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है. - गांधी मार्केट के ट्रैफिक को भाऊदाजी रोड और सुलोचना शेट्टी रोड पर डायवर्ट किया गया है. - इसके अलावा नेशनल कॉलेज, एसवी रोड, बांद्रा रोड के ट्रैफिक को लिंक रोड पर डायवर्ट किया गया है. - तेज बारिश के चलते मुंबई में अलग-अगल हादसों में चार लोगों की मौत हो गई है. इसमें एक नाबालिग लड़का भी शामिल है. - महाराष्ट्र के पुणे में एक दीवार गिरने से पंद्रह लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में मरने वालों में ज्यादातर लोग यूपी और बिहार के थे.
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पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर पांच विकेट पर 193 रन बनाए थे। उसकी तरफ से सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 62 गेंदों पर नाबाद 98 रन बनाए जिसमें सात चौके और चार छक्के शामिल हैं। इस विकेटकीपर बल्लेबाज के अलावा इफ्तिखार अहमद ने 36 और इमाद वसीम ने 31 रन का योगदान दिया। न्यूजीलैंड के लिए ब्लेयर टिकनर ने 33 रन देकर तीन विकेट लिये।
- BLACKCAPS (@BLACKCAPS) April 25, 2023न्यूजीलैंड के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके प्रमुख खिलाड़ी भारत में इंडियन प्रीमियर लीग में खेल रहे हैं। उसने पाकिस्तान के खिलाफ खेल के सबसे छोटे प्रारूप में दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया। न्यूजीलैंड की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह 100वीं जीत है। दोनों टीमों के बीच अब पांच मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला खेली जाएगी जिसका पहला मैच गुरुवार को रावलपिंडी में होगा। (भाषा)
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पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर पांच विकेट पर एक सौ तिरानवे रन बनाए थे। उसकी तरफ से सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने बासठ गेंदों पर नाबाद अट्ठानवे रन बनाए जिसमें सात चौके और चार छक्के शामिल हैं। इस विकेटकीपर बल्लेबाज के अलावा इफ्तिखार अहमद ने छत्तीस और इमाद वसीम ने इकतीस रन का योगदान दिया। न्यूजीलैंड के लिए ब्लेयर टिकनर ने तैंतीस रन देकर तीन विकेट लिये। - BLACKCAPS April पच्चीस, दो हज़ार तेईसन्यूजीलैंड के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके प्रमुख खिलाड़ी भारत में इंडियन प्रीमियर लीग में खेल रहे हैं। उसने पाकिस्तान के खिलाफ खेल के सबसे छोटे प्रारूप में दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया। न्यूजीलैंड की टीबीस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह एक सौवीं जीत है। दोनों टीमों के बीच अब पांच मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला खेली जाएगी जिसका पहला मैच गुरुवार को रावलपिंडी में होगा।
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छत्तीसगढ़ः कोई नहीं जानता 'इनमें से कोई नहीं'
सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 18 सीटों के लिए मतदान है. यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है.
वहाँ के मतदाता देश में पहली बार सभी उम्मीदवारों को नकारने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं.
इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है.
'नोटा' के बारे में एक आम मतदाता कितना जान पाया है, बीबीसी इसका पता लगाने के लिए पहुंचा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कटेकल्याण के बीच बसे गाँव जारम में.
यह माओवादियों के प्रभाव वाला और आदिवासी बहुल इलाक़ा है. यहाँ आम तौर पर सरकारी मशीनरी काम नहीं कर पाती हैं. यहाँ माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है.
हम जब जारम पहुँचे तो वहाँ कई गाँवों के लोग जमा थे. उन्हें मतदाता सूची के बारे में बताया जा रहा था.
वहाँ मौजदू कुछ लोगों से हमने 'नोटा' के बारे में पूछा. लेकिन उनमें से केवल कुछ लोगों को ही यह पता था कि 'नोटा' आखिर है किस लिए. उस बटन को दबाने का मतलब क्या है.
अधिकांश लोगों ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ईवीएम पर नोटा का बटन किस लिए बनाया गया है. उसे दबाने से क्या होगा. उनका मत किस रूप में गिना जाएगा.
वहाँ मौज़ूद गोंडीभाषी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मुन्ना रमणकम से जब यह पूछा गया कि आखिर एक आम मतदाता 'नोटा' के बारे में क्यों नहीं जान पाया है तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों को इसके बारे में बताया था. लेकिन वो सबको नहीं बता पाए.
'मज़बूत लोकतंत्र के लिए'
मुन्ना ने बताया कि इसकी जानकारी उन्हें ही नहीं दी गई थी. मुन्ना का यह बयान यह जानने के लिए काफी है कि 'नोटा' के बारे में आम लोग कितना जान पाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही मतदाताओं को चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार दिया है. इसे लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय क़दम के रूप में देखा जा रहा है.
अदालत ने चुनाव आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' का विकल्प उपलब्ध कराने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को यह अधिकार दे रहा है कि वे चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकें.
इसके लिए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है.
इस बटन को दबाकर मतदाता चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकते हैं.
इसके बाद भी इस अधिकार को पाने के लिए अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता इसे आधा-अधूरा ही बता रहे हैं. उनका कहना है कि जब इस तरह के मतों की गणना ही नहीं होगी तो इसका मतलब क्या रह जाएगा.
उनकी मांग थी कि अगर किसी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में 50 फ़ीसदी से अधिक मतदाता इस विकल्प को चुनते हैं तो वहाँ दोबारा मतदान कराया जाए.
इसके पहले भी सभी उम्मीदवारों को नकारने की व्यवस्था थी. इसके तहत मतदाता को मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी से 49 ओ फ़ॉर्म लेकर उसे भर कर वापस करना होता था. लेकिन इस तरह के फॉर्म की गणना नहीं होती थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
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छत्तीसगढ़ः कोई नहीं जानता 'इनमें से कोई नहीं' सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल अट्ठारह सीटों के लिए मतदान है. यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है. वहाँ के मतदाता देश में पहली बार सभी उम्मीदवारों को नकारने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है. 'नोटा' के बारे में एक आम मतदाता कितना जान पाया है, बीबीसी इसका पता लगाने के लिए पहुंचा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कटेकल्याण के बीच बसे गाँव जारम में. यह माओवादियों के प्रभाव वाला और आदिवासी बहुल इलाक़ा है. यहाँ आम तौर पर सरकारी मशीनरी काम नहीं कर पाती हैं. यहाँ माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है. हम जब जारम पहुँचे तो वहाँ कई गाँवों के लोग जमा थे. उन्हें मतदाता सूची के बारे में बताया जा रहा था. वहाँ मौजदू कुछ लोगों से हमने 'नोटा' के बारे में पूछा. लेकिन उनमें से केवल कुछ लोगों को ही यह पता था कि 'नोटा' आखिर है किस लिए. उस बटन को दबाने का मतलब क्या है. अधिकांश लोगों ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ईवीएम पर नोटा का बटन किस लिए बनाया गया है. उसे दबाने से क्या होगा. उनका मत किस रूप में गिना जाएगा. वहाँ मौज़ूद गोंडीभाषी बूथ लेवल अधिकारी मुन्ना रमणकम से जब यह पूछा गया कि आखिर एक आम मतदाता 'नोटा' के बारे में क्यों नहीं जान पाया है तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों को इसके बारे में बताया था. लेकिन वो सबको नहीं बता पाए. 'मज़बूत लोकतंत्र के लिए' मुन्ना ने बताया कि इसकी जानकारी उन्हें ही नहीं दी गई थी. मुन्ना का यह बयान यह जानने के लिए काफी है कि 'नोटा' के बारे में आम लोग कितना जान पाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही मतदाताओं को चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार दिया है. इसे लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय क़दम के रूप में देखा जा रहा है. अदालत ने चुनाव आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' का विकल्प उपलब्ध कराने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को यह अधिकार दे रहा है कि वे चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकें. इसके लिए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है. इस बटन को दबाकर मतदाता चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकते हैं. इसके बाद भी इस अधिकार को पाने के लिए अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता इसे आधा-अधूरा ही बता रहे हैं. उनका कहना है कि जब इस तरह के मतों की गणना ही नहीं होगी तो इसका मतलब क्या रह जाएगा. उनकी मांग थी कि अगर किसी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में पचास फ़ीसदी से अधिक मतदाता इस विकल्प को चुनते हैं तो वहाँ दोबारा मतदान कराया जाए. इसके पहले भी सभी उम्मीदवारों को नकारने की व्यवस्था थी. इसके तहत मतदाता को मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी से उनचास ओ फ़ॉर्म लेकर उसे भर कर वापस करना होता था. लेकिन इस तरह के फॉर्म की गणना नहीं होती थी.
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भले ही निर्वाचन आयोग की तरफ से कोरोना महामारी का संक्रमण देखते हुए 22 जनवरी तक प्रचार सभाओं पर रोक लगा दी गई हो और राजनीतिक दलों और नेताओं को ऑनलाइन माध्यम का सहारा लेकर प्रचार करने की छूट दी गई हो लेकिन उसका रास्ता भी दलों और नेताओं ने ढूढ निकाला है। वह अब डोर टू डोर घर-घर जाकर मतादाताओं से मिल रहे हैं। कई ने तो कहा कि उनको इस तरह की पाबंदी से नुकसान है तो किसी ने कहा कि उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।
इससे जुड़ा आर्टिकल नीचे दिए गए लिंक के ज़रिये पढ़ें :
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भले ही निर्वाचन आयोग की तरफ से कोरोना महामारी का संक्रमण देखते हुए बाईस जनवरी तक प्रचार सभाओं पर रोक लगा दी गई हो और राजनीतिक दलों और नेताओं को ऑनलाइन माध्यम का सहारा लेकर प्रचार करने की छूट दी गई हो लेकिन उसका रास्ता भी दलों और नेताओं ने ढूढ निकाला है। वह अब डोर टू डोर घर-घर जाकर मतादाताओं से मिल रहे हैं। कई ने तो कहा कि उनको इस तरह की पाबंदी से नुकसान है तो किसी ने कहा कि उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे जुड़ा आर्टिकल नीचे दिए गए लिंक के ज़रिये पढ़ें :
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नैनीताल न्यूज़ः कांग्रेस ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से बांटे जा रहे फोर्टिफाइड चावल को लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार देशभर में यह चावल बंटवा रही है.
कांग्रेस भवन में पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी और मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने पत्रकार वार्ता की. इस दौरान जोशी ने कहा कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च और नीति आयोग के दो वरिष्ठ सदस्यों ने केंद्र सरकार को फोर्टिफाइड चावल के प्रयोग को लेकर आगाह किया है. सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मिनरलयुक्त चावल से एनीमिया और मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं. दसौनी ने दावा किया कि चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी आयरन-फोर्टिफाइड चावल के बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव के बारे में गंभीर चिंता जताई है. इसी तरह नीति आयोग की अध्ययन रिपोर्ट में फोर्टिफाइड चावल को 'उच्च जोखिम' श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में एक बड़ी आबादी को फोर्टिफाइड चावल बांटने के पीछे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबाव भी एक प्रमुख वजह है. इस दौरान मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, पछुवादून जिलाध्यक्ष लक्ष्मी अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे.
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रस्तावित वन दरोगा भर्ती लिखित परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली हैं.
आयोग के सचिव एसएस रावत ने बताया कि परीक्षा के लिए आठ जिलों में केंद्र बनाए गए हैं. परीक्षा एक बजे के बीच होगी. उन्होंने बताया कि सचिवालय रक्षक भर्ती की शारीरिक माप जांच आयोग कार्यालय में आयोजित की जाएगी. इसी दिन सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी.
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नैनीताल न्यूज़ः कांग्रेस ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से बांटे जा रहे फोर्टिफाइड चावल को लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार देशभर में यह चावल बंटवा रही है. कांग्रेस भवन में पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी और मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने पत्रकार वार्ता की. इस दौरान जोशी ने कहा कि इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च और नीति आयोग के दो वरिष्ठ सदस्यों ने केंद्र सरकार को फोर्टिफाइड चावल के प्रयोग को लेकर आगाह किया है. सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मिनरलयुक्त चावल से एनीमिया और मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं. दसौनी ने दावा किया कि चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी आयरन-फोर्टिफाइड चावल के बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव के बारे में गंभीर चिंता जताई है. इसी तरह नीति आयोग की अध्ययन रिपोर्ट में फोर्टिफाइड चावल को 'उच्च जोखिम' श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में एक बड़ी आबादी को फोर्टिफाइड चावल बांटने के पीछे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबाव भी एक प्रमुख वजह है. इस दौरान मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, पछुवादून जिलाध्यक्ष लक्ष्मी अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रस्तावित वन दरोगा भर्ती लिखित परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली हैं. आयोग के सचिव एसएस रावत ने बताया कि परीक्षा के लिए आठ जिलों में केंद्र बनाए गए हैं. परीक्षा एक बजे के बीच होगी. उन्होंने बताया कि सचिवालय रक्षक भर्ती की शारीरिक माप जांच आयोग कार्यालय में आयोजित की जाएगी. इसी दिन सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी.
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आदिलाबाद : क्रांतिकारी लेखक एवं नेता वरवरा राव की रिहाई के लिए इन दिनों मांग की जा रही है. ऐसे में अब मिली जानकारी के मुताबिक इसी मांग को लेकर माओवादियों ने तेलंगाना आहूत बंद का आह्वान कर दिया है. जी दरअसल इस आह्वान के मद्देनजर आज यानी शनिवार को राज्य में पुलिस ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त अधिक बढ़ा दी गई है. बताया जा रहा है मुख्य तौर पर संयुक्त आदिलाबाद जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इसके अलावा एजेंसी क्षेत्रों में पुलिस गहन तलाशियां लेने में लग चुकी है. इसके अलावा प्राणहिता और गोदावरी के सिंचाई क्षेत्रों पर पुलिस ने पैनी नजर बना ली है.
इसी के साथ पुलिस विशेष दल और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनके द्वारा वह क्षेत्रों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं. इसी के साथ संदेहास्पद स्थिति में घूमनेवालों पर भी नजर रखने के बारे में कहा गया है. वैसे हम आप सभी को यह भी बता दें कि सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी के वरिष्ठ नेता और सशस्त्र दल के संचार के शक के कारण पुलिस सतर्क हो चुकी है.
वहीं तेलंगाना के मंचीरियाल और महाराष्ट्र के कोटापल्ली, वेमनापल्ली, प्राणहिता के तटीय क्षेत्रों के साथ गोदावरी के सिंचाई क्षेत्रों में पिछले काफी समय से गश्त लगा रही है. इसी के साथ माओवादी आधिकारिक प्रवक्ता जगन ने राज्य सचिव के दौर पर आज शनिवार, 25 जुलाई को तेलंगाना आहूत बंद का आह्वान किया है. बताया जा रहा है इसी के साथ इस महीने की 28 तारीख से अमर शहीदों के नाम सभा का आयोजन करने के बारे में भी कहा गया है. इसी दृश्य को देखने के बाद पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है. इसके अलावा रामागुंडम सीपी सत्यनारायण के मार्गदर्शन पर जिला डीसीपी, एसीपी के साथ कुल 500 विशेष दल, जंगल में गश्त में लगे हुए हैं.
तेलंगाना के 16 इंजीनियरिंग कॉलेजों पर लगेगा ताला!
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आदिलाबाद : क्रांतिकारी लेखक एवं नेता वरवरा राव की रिहाई के लिए इन दिनों मांग की जा रही है. ऐसे में अब मिली जानकारी के मुताबिक इसी मांग को लेकर माओवादियों ने तेलंगाना आहूत बंद का आह्वान कर दिया है. जी दरअसल इस आह्वान के मद्देनजर आज यानी शनिवार को राज्य में पुलिस ने प्रभावित क्षेत्रों में गश्त अधिक बढ़ा दी गई है. बताया जा रहा है मुख्य तौर पर संयुक्त आदिलाबाद जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इसके अलावा एजेंसी क्षेत्रों में पुलिस गहन तलाशियां लेने में लग चुकी है. इसके अलावा प्राणहिता और गोदावरी के सिंचाई क्षेत्रों पर पुलिस ने पैनी नजर बना ली है. इसी के साथ पुलिस विशेष दल और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनके द्वारा वह क्षेत्रों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं. इसी के साथ संदेहास्पद स्थिति में घूमनेवालों पर भी नजर रखने के बारे में कहा गया है. वैसे हम आप सभी को यह भी बता दें कि सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी के वरिष्ठ नेता और सशस्त्र दल के संचार के शक के कारण पुलिस सतर्क हो चुकी है. वहीं तेलंगाना के मंचीरियाल और महाराष्ट्र के कोटापल्ली, वेमनापल्ली, प्राणहिता के तटीय क्षेत्रों के साथ गोदावरी के सिंचाई क्षेत्रों में पिछले काफी समय से गश्त लगा रही है. इसी के साथ माओवादी आधिकारिक प्रवक्ता जगन ने राज्य सचिव के दौर पर आज शनिवार, पच्चीस जुलाई को तेलंगाना आहूत बंद का आह्वान किया है. बताया जा रहा है इसी के साथ इस महीने की अट्ठाईस तारीख से अमर शहीदों के नाम सभा का आयोजन करने के बारे में भी कहा गया है. इसी दृश्य को देखने के बाद पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है. इसके अलावा रामागुंडम सीपी सत्यनारायण के मार्गदर्शन पर जिला डीसीपी, एसीपी के साथ कुल पाँच सौ विशेष दल, जंगल में गश्त में लगे हुए हैं. तेलंगाना के सोलह इंजीनियरिंग कॉलेजों पर लगेगा ताला!
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यूरोप, अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में लगातार कोविड मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एशिया में कोविड मामले अभी भी लगातार घट रहे हैं। भारत में पिछले 2 सप्ताह से प्रतिदिन नए मामले लगभग 7000 हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण (Rajesh Bhushan) ने शुक्रवार को ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) की स्थिति को लेकर बयान दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण (Ministry of Health Secretary Rajesh Bhushan) ने कहा कि विश्व में वर्तमान में चौथी बार कोविड मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कोविड (Covid) मामले फिर से पीक (एक दिन में सबसे ज्यादा मामले) छू रहे हैं। 23 दिसंबर को पूरे विश्व में एक दिन में 9,64,000 मामले दर्ज़ किए गए हैं।
यूरोप, अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में लगातार कोविड मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एशिया में कोविड मामले अभी भी लगातार घट रहे हैं। भारत में पिछले 2 सप्ताह से प्रतिदिन नए मामले लगभग 7000 हैं। भारत में भी कोविड मामले लगातार घट रहे हैं। विटी रेट 6% से ज्यादा है। भारत में केस पॉजिटिविटी 5. 3% है। पिछले 2 सप्ताह में भारत में केस पॉजिटिविटी 0. 6% है। देश में 20 ज़िले ऐसे हैं जहां केस पॉजिटिविटी रेट 5-10% है। इनमें से 9 केरल में और 8 मिजोरम में हैं। 2 ज़िले ऐसे हैं जहां केस पॉजिटिविटी 10% से ज्यादा है, ये 2 जिले मिजोरम में हैं। अब तक विश्व के 108 देशों में 1,51,000 से ज्यादा ऑमिक्रोन के मामले दर्ज़ किए गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है और हमने भी अपने देश में देखा है कि जो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल हमने कोविड और डेल्टा के लिए अपनाए थे वो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल ऑमिक्रोन पर भी प्रभावी होंगे। इस समय देश के 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 358 ऑमिक्रोन मामले दर्ज़ किए गए हैं। इनमें से 114 मामले ठीक हो चुके हैं।
183 ऑमिक्रोन मामलों का विश्लेषण किया गया है जिसमें से 121 ने विदेश की यात्रा की थी। 44 विदेश नहीं गए थे परन्तु ज्यादातर के कॉन्टैक्ट ने विदेश यात्रा की थी। 183 में से 87 लोगों ने कोविड की दोनों डोज़ ली थी। 3 लोगों ने तीन डोज़ लगवाई हुई थी। देश की 89% वयस्क आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ मिल गई है। 61% वयस्क आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज़ मिल गई हैं।
वहीं आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव ने कहा कि हाल ही में पहचाने गए समूहों समेत भारत में प्रमुख प्रभावी डेल्टा है। इसलिए, हमें कोविड के उपयुक्त व्यवहार और टीकाकरण को बढ़ाने की समान रणनीति के साथ जारी रखने की आवश्यकता है। आईसीएमआर और डीबीटी मिलकर वायरस को कल्चर करने का काम कर रहे हैं। हम कोविड-19 के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ टीकों की प्रभावकारिता का परीक्षण कर रहे हैं। विचार-विमर्श चल रहा है, हम नीति बनाने के लिए वैज्ञानिक डेटा की समीक्षा कर रहे हैं।
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यूरोप, अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में लगातार कोविड मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एशिया में कोविड मामले अभी भी लगातार घट रहे हैं। भारत में पिछले दो सप्ताह से प्रतिदिन नए मामले लगभग सात हज़ार हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने शुक्रवार को ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश में कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर बयान दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि विश्व में वर्तमान में चौथी बार कोविड मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कोविड मामले फिर से पीक छू रहे हैं। तेईस दिसंबर को पूरे विश्व में एक दिन में नौ,चौंसठ,शून्य मामले दर्ज़ किए गए हैं। यूरोप, अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में लगातार कोविड मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एशिया में कोविड मामले अभी भी लगातार घट रहे हैं। भारत में पिछले दो सप्ताह से प्रतिदिन नए मामले लगभग सात हज़ार हैं। भारत में भी कोविड मामले लगातार घट रहे हैं। विटी रेट छः% से ज्यादा है। भारत में केस पॉजिटिविटी पाँच. तीन% है। पिछले दो सप्ताह में भारत में केस पॉजिटिविटी शून्य. छः% है। देश में बीस ज़िले ऐसे हैं जहां केस पॉजिटिविटी रेट पाँच-दस% है। इनमें से नौ केरल में और आठ मिजोरम में हैं। दो ज़िले ऐसे हैं जहां केस पॉजिटिविटी दस% से ज्यादा है, ये दो जिले मिजोरम में हैं। अब तक विश्व के एक सौ आठ देशों में एक,इक्यावन,शून्य से ज्यादा ऑमिक्रोन के मामले दर्ज़ किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है और हमने भी अपने देश में देखा है कि जो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल हमने कोविड और डेल्टा के लिए अपनाए थे वो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल ऑमिक्रोन पर भी प्रभावी होंगे। इस समय देश के सत्रह राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में तीन सौ अट्ठावन ऑमिक्रोन मामले दर्ज़ किए गए हैं। इनमें से एक सौ चौदह मामले ठीक हो चुके हैं। एक सौ तिरासी ऑमिक्रोन मामलों का विश्लेषण किया गया है जिसमें से एक सौ इक्कीस ने विदेश की यात्रा की थी। चौंतालीस विदेश नहीं गए थे परन्तु ज्यादातर के कॉन्टैक्ट ने विदेश यात्रा की थी। एक सौ तिरासी में से सत्तासी लोगों ने कोविड की दोनों डोज़ ली थी। तीन लोगों ने तीन डोज़ लगवाई हुई थी। देश की नवासी% वयस्क आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ मिल गई है। इकसठ% वयस्क आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज़ मिल गई हैं। वहीं आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव ने कहा कि हाल ही में पहचाने गए समूहों समेत भारत में प्रमुख प्रभावी डेल्टा है। इसलिए, हमें कोविड के उपयुक्त व्यवहार और टीकाकरण को बढ़ाने की समान रणनीति के साथ जारी रखने की आवश्यकता है। आईसीएमआर और डीबीटी मिलकर वायरस को कल्चर करने का काम कर रहे हैं। हम कोविड-उन्नीस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ टीकों की प्रभावकारिता का परीक्षण कर रहे हैं। विचार-विमर्श चल रहा है, हम नीति बनाने के लिए वैज्ञानिक डेटा की समीक्षा कर रहे हैं।
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थाना सराभा नगर की पुलिस ने चोरीशुदा मोटरसाइकिलों के साथ 4 आरोपियों को काबू किया है।
लुधियाना (राज): थाना सराभा नगर की पुलिस ने चोरीशुदा मोटरसाइकिलों के साथ 4 आरोपियों को काबू किया है। आरोपी जिला मोगा के गांव कोकरी कलां के रहने वाले जसप्रीत सिंह, सोनी सिंह, गुरमुख सिंह और जसप्रीत सिंह हैं। आरोपियों से 6 मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं।
ए. एस. आई. बलवीर सिंह के मुताबिक वह इलाके में गश्त कर रहे थे। इस दौरान उन्हें सूचना मिली कि उक्त आरोपी चोरियां करने के आदी हैं जोकि चोरीशुदा बाइक बेचने की फिराक में हैं। फिर पुलिस ने अयाली चौक पर छापेमारी कर चारों आरोपियों को काबू कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर चोरीशुदा 6 मोटरसाइकिल भी बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों को अदालत पेश कर उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया है और आगे की पूछताछ शुरू कर दी है।
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थाना सराभा नगर की पुलिस ने चोरीशुदा मोटरसाइकिलों के साथ चार आरोपियों को काबू किया है। लुधियाना : थाना सराभा नगर की पुलिस ने चोरीशुदा मोटरसाइकिलों के साथ चार आरोपियों को काबू किया है। आरोपी जिला मोगा के गांव कोकरी कलां के रहने वाले जसप्रीत सिंह, सोनी सिंह, गुरमुख सिंह और जसप्रीत सिंह हैं। आरोपियों से छः मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं। ए. एस. आई. बलवीर सिंह के मुताबिक वह इलाके में गश्त कर रहे थे। इस दौरान उन्हें सूचना मिली कि उक्त आरोपी चोरियां करने के आदी हैं जोकि चोरीशुदा बाइक बेचने की फिराक में हैं। फिर पुलिस ने अयाली चौक पर छापेमारी कर चारों आरोपियों को काबू कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर चोरीशुदा छः मोटरसाइकिल भी बरामद हुए। पुलिस ने आरोपियों को अदालत पेश कर उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया है और आगे की पूछताछ शुरू कर दी है।
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आगराः नेशनल हाईवे-19 हो या फिर ग्वालियर, अलीगढ़ और जयपुर हाईवे। इन हाईवे पर हर दिन लाखों रुपये का टोल वसूला जाता है लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अफसरों द्वारा रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। ठीक तरीके से सफाई नहीं हो रही है। नालियां चोक पड़ी हैं और हरियाली को बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गड्ढों की भरमार है और संरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं। यह पर्दाफाश मंडलायुक्त अमित गुप्ता के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। यह जांच मथुरा, आगरा और फीरोजाबाद के प्रशासन और नगर निगम के अफसरों ने संयुक्त रूप से की। मंडलायुक्त ने संरक्षा के इंतजामों को बेहतर करने के आदेश दिए। वहीं हाईवे पर अवैध कट को भी बंद करने के लिए कहा है। दस दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
संयुक्त टीम ने रुनकता से फीरोजाबाद तक जांच की। दो दर्जन स्थलों पर अवैध कट मिले। 45 स्थलों पर रे¨लग टूटी हुई थी। 200 स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई हैं। 100 पोल ऐसे हैं, जिन पर लाइट नहीं हैं। सिकंदरा सब्जी मंडी अंडरपास की रुनकता से सिकंदरा लेन बंद मिली। खंदारी और भगवान टाकीज फ्लाईओवर के बीस-बीस मीटर के क्षेत्र में संरक्षा के इंतजाम नहीं थे। यानी दिशा सूचक बोर्ड नहीं लगे थे। न ही ब्लैक स्पॉट को ठीक से चिन्हित किया गया।
कलक्ट्रेट से शाहगंज तक इस रोड की हालत ठीक मिली लेकिन फिर सफेद पट्टी ठीक से नहीं बनाई गई। कई जगहों पर गड्ढे मिले। आबादी वाले क्षेत्र में संरक्षा के नजरिए से बोर्ड लगे होने चाहिए। 80 स्ट्रीट लाइट खराब मिलीं।
- आगरा-ग्वालियर हाईवे :
कई जगहों पर हाईवे के किनारे जलभराव मिला। एक किमी क्षेत्र में गड्ढे मिले। क्षेत्रीय लोगों ने गड्ढों की मरम्मत की मांग की। हाईवे के किनारे ठीक तरीके से न तो टेप लगाए गए थे और न ही बोर्ड।
इस रोड पर जगह-जगह गड्ढे मिले। 20 स्थलों पर रे¨लग टूटी हुई थी। 11 स्थलों पर अवैध कट मिले। शिकायतों के बाद भी कट को बंद नहीं किया जा रहा था।
- नेशनल हाईवे-19 सहित चार की जांच कराई गई। गड्ढों की मरम्मत और संरक्षा के ठीक तरीके से इंतजाम के लिए कहा गया है। इसकी रिपोर्ट डीएम और नगरायुक्त को भेजी जा रही है।
- एनएचएआई आगरा, मथुरा सहित अन्य खंड के अफसरों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। हाईवे के गड्ढे भरने और रे¨लग की मरम्मत करवाने, संरक्षा के इंतजाम करने के लिए कहा गया है।
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आगराः नेशनल हाईवे-उन्नीस हो या फिर ग्वालियर, अलीगढ़ और जयपुर हाईवे। इन हाईवे पर हर दिन लाखों रुपये का टोल वसूला जाता है लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अफसरों द्वारा रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। ठीक तरीके से सफाई नहीं हो रही है। नालियां चोक पड़ी हैं और हरियाली को बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गड्ढों की भरमार है और संरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं। यह पर्दाफाश मंडलायुक्त अमित गुप्ता के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। यह जांच मथुरा, आगरा और फीरोजाबाद के प्रशासन और नगर निगम के अफसरों ने संयुक्त रूप से की। मंडलायुक्त ने संरक्षा के इंतजामों को बेहतर करने के आदेश दिए। वहीं हाईवे पर अवैध कट को भी बंद करने के लिए कहा है। दस दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। संयुक्त टीम ने रुनकता से फीरोजाबाद तक जांच की। दो दर्जन स्थलों पर अवैध कट मिले। पैंतालीस स्थलों पर रे¨लग टूटी हुई थी। दो सौ स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई हैं। एक सौ पोल ऐसे हैं, जिन पर लाइट नहीं हैं। सिकंदरा सब्जी मंडी अंडरपास की रुनकता से सिकंदरा लेन बंद मिली। खंदारी और भगवान टाकीज फ्लाईओवर के बीस-बीस मीटर के क्षेत्र में संरक्षा के इंतजाम नहीं थे। यानी दिशा सूचक बोर्ड नहीं लगे थे। न ही ब्लैक स्पॉट को ठीक से चिन्हित किया गया। कलक्ट्रेट से शाहगंज तक इस रोड की हालत ठीक मिली लेकिन फिर सफेद पट्टी ठीक से नहीं बनाई गई। कई जगहों पर गड्ढे मिले। आबादी वाले क्षेत्र में संरक्षा के नजरिए से बोर्ड लगे होने चाहिए। अस्सी स्ट्रीट लाइट खराब मिलीं। - आगरा-ग्वालियर हाईवे : कई जगहों पर हाईवे के किनारे जलभराव मिला। एक किमी क्षेत्र में गड्ढे मिले। क्षेत्रीय लोगों ने गड्ढों की मरम्मत की मांग की। हाईवे के किनारे ठीक तरीके से न तो टेप लगाए गए थे और न ही बोर्ड। इस रोड पर जगह-जगह गड्ढे मिले। बीस स्थलों पर रे¨लग टूटी हुई थी। ग्यारह स्थलों पर अवैध कट मिले। शिकायतों के बाद भी कट को बंद नहीं किया जा रहा था। - नेशनल हाईवे-उन्नीस सहित चार की जांच कराई गई। गड्ढों की मरम्मत और संरक्षा के ठीक तरीके से इंतजाम के लिए कहा गया है। इसकी रिपोर्ट डीएम और नगरायुक्त को भेजी जा रही है। - एनएचएआई आगरा, मथुरा सहित अन्य खंड के अफसरों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। हाईवे के गड्ढे भरने और रे¨लग की मरम्मत करवाने, संरक्षा के इंतजाम करने के लिए कहा गया है।
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'प्राणप्रिय काव्य' के रचयिता जैनाचार्य रत्नसिंह का समय अविदित है। इस काव्यकृति का हिन्दी अनुवाद श्री प्रेमीजी ने किया है। काव्य बड़ा ही सरम है ।
संस्कृत में स्फुट काव्यों के निर्माण का अंत नहीं है। आज भी बहुत बड़े पैमाने पर इस प्रकार के उत्कृष्ट काव्य लिखने की परिपाटी है । इस प्रकार की अनेक कृतियाँ, जिनके समय और जिनके कर्ता का कोई पता नहीं चलता है, विभिन्न हस्तलेख संग्रहों में सुरक्षित हैं। संस्कृत की जो इनी गिनी पत्रिकाएँ आज प्रकाशित होती हैं, उनमें धारावाहिक रूप से आज के कुड काव्यों और उच्चकोटि की स्फुट कविताओं का दर्शन प्रायः होता ही रहता है।
गीत या गीति का अर्थ सामान्यतया गाना समझ लिया जाना है, जिसमें साज-शृङ्गार, गायन-वादन की प्रधानता हो; किन्तु यहाँ गीत या गीति का अर्थ हृदय की रागात्मक भावना को छंदबद्ध रूप में प्रकट करना अभिप्रेत है । गीतकाव्य में रागात्मकता या ध्वन्यात्मकता का होना 'धूम में अग्नि की भाँति अनिवार्य है। गीतकाव्य ( 1.yric Poetry ) में गेयात्मकता तो होनी ही चाहिए; किन्तु ऐसी पच रचना जो कवि की आत्मानुभूति पर आधारित हो, अगेय होने पर भी गीतकाव्य के भीतर समा जाती है ; और इसके विपरीत आत्मानुभूतिशून्य, बायाभिव्यंजन मात्र रचना भी गीतकाव्य के भीतर आ जाने से रह जाती है। इसी कारण हिन्दी की प्रसिद्ध संस्कृतज्ञ कवयित्री श्री महादेवी जी ने भी 'साधारणतः गीत व्यक्तिगत सीमा में सुख-दुःखात्मक अनुभूति का वह शब्दरूप है, जो अपनी ध्वन्यात्मकता में में गेय हो सके अपनी इस परिभाषा में संगीतात्मकता को गोण स्मकता को प्रमुख स्थान दिया है। इस परिभाषा से संगीत और गीत या गीति का मौलिक अंतर भी स्पष्ट हो जाता है।
डॉ० ओझा ने गीतकाव्य की परिभाषा को चौकोर सीमा रेखाओं में इस प्रकार फिट किया है : ( १ ) जिस छंदबद्ध रचना में भावातिरेक की धारा इस रूप में प्रवाहित हो कि उसमें स्वर लहरियाँ स्वभावतः तरंगायित हो; २) जिसमें कवि या पात्र की रागात्मकता उसके व्यक्तित्व के साथ मिलकर
५. जैन हितैषी, भाग ६ अङ्क १ ३
आत्म-निवेदन के रूप में प्रकट हो ; ( ३ ) जिसका आयतन इतना ही बड़ा हो कि जिसमें कवि की रागात्मकता का प्रवाह शिथिल न पड़ने पावे; और ( ४ ) जिसमें घटना वर्णन को गौण, किन्तु भावना को उच्चतम आसन प्राप्त हो; जिस काव्य में एक लय या एक ही भाव के साथ-साथ एक ही निवेदन, एक ही रस एवं एक ही परिपाटी हो, वह गीत-काव्य है । "
गीतकाव्य की भावना की उभूति
गीत-काव्यों के प्रणयन में संस्कृति के कवियों में विशेष उत्सुकता दिखाई देती है। इस प्रकार की स्फुट संदेश-रचनाओं का अनुवर्तन लगभग वैदिकयुग में ही हो चुका था; और उदाहरणस्वरूप ऋग्वेद में सरमा नामक एक कुत्ते को पाणियों के निकट संदेशवाहक रूप में भेजने का प्रसंग यहाँ स्मरण किए जाने योग्य है। 'रामायण', 'महाभारत' और उनके परवर्ती काव्यों में भी इस प्रकार के स्फुट प्रसंग प्रचुर रूप में मिलते हैं। कदाचित् महामुनि वाल्मीकि के शोकोद्वारों में भी यह भावना या अनुभूति गोपित रूप में विद्यमान दिखाई देती है। पति-चियुक्ता प्रवासिनी सीता के प्रति प्रेषित राम का संदेशवाहक हनुमान दुर्योधन के प्रति धर्मराज युधिष्टिर द्वारा प्रेषित श्रीकृष्ण और सुंदरी दमयंती के निकट राजा नल द्वारा प्रेषित संदेशवाहक हंस इसी परम्परा के अन्तर्गत गिने जाने वाले पूर्व प्रसंग हैं। इस दिशा में 'भागवत' का वेणुगीत विशेष रूप से उद्धरणीय है, जिसकी रस-विभोर कर देने वाली सुंदर भावना की छाप संस्कृत के गीतग्रंथों पर स्पष्टतया अंकित है 1
गीतकाव्य के भेद
संस्कृत के ये गीत-काव्य कई प्रकार से लिखे गए। इनको प्रमुख दो भागों में अलग किया जा सकता हैः ( १ ) स्तोत्रकाव्य या भक्तिकाव्य और ( २ ) शृंगारकाव्य या संदेश-काव्य । स्तोत्र-काव्य या भक्ति-काव्य वे हैं, जिनमें आध्यात्मिक भावना में अभिभूत होकर भक्तजन के एकांतिक हृदयोद्वार अथाह वेग से प्रवाहित होते हैं। इसके अतिरिक्त जिन गीत-काव्यों में शृङ्गार की भावना का प्राधान्य है उन्हें संदेश-काव्यों के अंतर्गत रखा गया है। आत्म१. डॉ० दशरथ ओझाः हिन्दी नाटक : उद्भव और विकास, १० ३८१-३८२, राजपाल पेण्ड सन्स, दिल्ली, द्वितीय संस्करण
२. ब्रजभारती, मथुरा, ज्येष्ठ २०१४ वि०, वर्ष १५, अङ्क १
निवेदन की तीव्रानुभूति शृङ्गार कायों की विशिष्टता है। संस्कृत में ये शृङ्गारकाव्य कई प्रकार से लिखे गए, जिनमें दूतपद्धति के काव्य प्रमुख हैं। इन दूतकाव्यों में प्रेमी अथवा प्रेमिका का किसी दूस के माध्यम से अपने वियुक्त प्रणयी के प्रति प्रणय-संदेश निवेदित होता है ।
संदेश-काव्य या दूत-काव्यों की परंपरा में 'मेघदूत' और 'घटकर्पर काव्य पहिली कृतियाँ हैं । इन दोनों के रचयिता क्रमशः महाकवि कालिदास और घटकर्पर कवि हुए । इन दोनों काव्यों में किसकी रचना पहिले हुई, इस सम्बन्ध में एक निश्चित मत अभी तक तय नहीं हो पाया है। धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वैतालभट्ट, घटकर्पर और कालिदास, इन सबको विक्रमादित्य की विद्वत्सभा का भूषण माना गया है। इस नामावली में घटकपर को पहिले और कालिदास को बाद में रखा गया है; किन्तु यह पूर्वापर का सम्बन्ध उनकी स्थिति पर कोई भी विश्वसनीय प्रकाश नहीं डालता है। छंद-रचना की दृष्टि से ही कदाचित् यह पूर्वापर का क्रम रखा गया हो; और इसके अतिरिक्त कथंचित् इसमें भी संदेह है कि 'ज्योतिर्विदाभरण' की उक्त बात ही सर्वथा कल्पित हो । फिर भी इन दोनों काव्य-ग्रन्थों के अध्ययन से इतना निश्चित हो जाता है कि 'मेघदूत' की भावानुभूति एवं उसके बाह्य शिल्प पर 'रामायण' का और 'घटकर्पर काव्य' पर 'महाभारत' का प्रभाव है।
'घटकर्पर काव्य" के अन्तिम श्लोक में कवि ने प्रतिज्ञा की है कि जो भी कवि इससे उत्तम काव्य की रचना कर देगा, उसके लिए वह घड़े के कर्पर ( टुकड़े ) पर पानी भर कर ला देगा । उसकी इसी प्रतिज्ञा पर काव्य का ऐसा नामकरण हुआ और सम्भवतथा इस नामकरण पर ही उसके निर्माता की भी 'घटकर्पर' नाम से प्रसिद्धि हुई। उसका वास्तविक नाम क्या था, इस सम्बन्ध में कुछ भी विदित नहीं है। काव्यशास्त्र के १. ज्योतिर्विदाभरण
२. डॉ० यतीन्द्र विमल चौधरी : हिस्ट्री ऑफ दूतकाव्य ऑफ बंगाल, १०९, १९५३ ई०
४. डॉ० जे० बी० चौधरीः प्राध्यवाणी मन्दिर, संस्कृत दूतकाव्य ग्रन्थमाका, पृ० १.६० १९५३ ई०
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'प्राणप्रिय काव्य' के रचयिता जैनाचार्य रत्नसिंह का समय अविदित है। इस काव्यकृति का हिन्दी अनुवाद श्री प्रेमीजी ने किया है। काव्य बड़ा ही सरम है । संस्कृत में स्फुट काव्यों के निर्माण का अंत नहीं है। आज भी बहुत बड़े पैमाने पर इस प्रकार के उत्कृष्ट काव्य लिखने की परिपाटी है । इस प्रकार की अनेक कृतियाँ, जिनके समय और जिनके कर्ता का कोई पता नहीं चलता है, विभिन्न हस्तलेख संग्रहों में सुरक्षित हैं। संस्कृत की जो इनी गिनी पत्रिकाएँ आज प्रकाशित होती हैं, उनमें धारावाहिक रूप से आज के कुड काव्यों और उच्चकोटि की स्फुट कविताओं का दर्शन प्रायः होता ही रहता है। गीत या गीति का अर्थ सामान्यतया गाना समझ लिया जाना है, जिसमें साज-शृङ्गार, गायन-वादन की प्रधानता हो; किन्तु यहाँ गीत या गीति का अर्थ हृदय की रागात्मक भावना को छंदबद्ध रूप में प्रकट करना अभिप्रेत है । गीतकाव्य में रागात्मकता या ध्वन्यात्मकता का होना 'धूम में अग्नि की भाँति अनिवार्य है। गीतकाव्य में गेयात्मकता तो होनी ही चाहिए; किन्तु ऐसी पच रचना जो कवि की आत्मानुभूति पर आधारित हो, अगेय होने पर भी गीतकाव्य के भीतर समा जाती है ; और इसके विपरीत आत्मानुभूतिशून्य, बायाभिव्यंजन मात्र रचना भी गीतकाव्य के भीतर आ जाने से रह जाती है। इसी कारण हिन्दी की प्रसिद्ध संस्कृतज्ञ कवयित्री श्री महादेवी जी ने भी 'साधारणतः गीत व्यक्तिगत सीमा में सुख-दुःखात्मक अनुभूति का वह शब्दरूप है, जो अपनी ध्वन्यात्मकता में में गेय हो सके अपनी इस परिभाषा में संगीतात्मकता को गोण स्मकता को प्रमुख स्थान दिया है। इस परिभाषा से संगीत और गीत या गीति का मौलिक अंतर भी स्पष्ट हो जाता है। डॉशून्य ओझा ने गीतकाव्य की परिभाषा को चौकोर सीमा रेखाओं में इस प्रकार फिट किया है : जिस छंदबद्ध रचना में भावातिरेक की धारा इस रूप में प्रवाहित हो कि उसमें स्वर लहरियाँ स्वभावतः तरंगायित हो; दो) जिसमें कवि या पात्र की रागात्मकता उसके व्यक्तित्व के साथ मिलकर पाँच. जैन हितैषी, भाग छः अङ्क एक तीन आत्म-निवेदन के रूप में प्रकट हो ; जिसका आयतन इतना ही बड़ा हो कि जिसमें कवि की रागात्मकता का प्रवाह शिथिल न पड़ने पावे; और जिसमें घटना वर्णन को गौण, किन्तु भावना को उच्चतम आसन प्राप्त हो; जिस काव्य में एक लय या एक ही भाव के साथ-साथ एक ही निवेदन, एक ही रस एवं एक ही परिपाटी हो, वह गीत-काव्य है । " गीतकाव्य की भावना की उभूति गीत-काव्यों के प्रणयन में संस्कृति के कवियों में विशेष उत्सुकता दिखाई देती है। इस प्रकार की स्फुट संदेश-रचनाओं का अनुवर्तन लगभग वैदिकयुग में ही हो चुका था; और उदाहरणस्वरूप ऋग्वेद में सरमा नामक एक कुत्ते को पाणियों के निकट संदेशवाहक रूप में भेजने का प्रसंग यहाँ स्मरण किए जाने योग्य है। 'रामायण', 'महाभारत' और उनके परवर्ती काव्यों में भी इस प्रकार के स्फुट प्रसंग प्रचुर रूप में मिलते हैं। कदाचित् महामुनि वाल्मीकि के शोकोद्वारों में भी यह भावना या अनुभूति गोपित रूप में विद्यमान दिखाई देती है। पति-चियुक्ता प्रवासिनी सीता के प्रति प्रेषित राम का संदेशवाहक हनुमान दुर्योधन के प्रति धर्मराज युधिष्टिर द्वारा प्रेषित श्रीकृष्ण और सुंदरी दमयंती के निकट राजा नल द्वारा प्रेषित संदेशवाहक हंस इसी परम्परा के अन्तर्गत गिने जाने वाले पूर्व प्रसंग हैं। इस दिशा में 'भागवत' का वेणुगीत विशेष रूप से उद्धरणीय है, जिसकी रस-विभोर कर देने वाली सुंदर भावना की छाप संस्कृत के गीतग्रंथों पर स्पष्टतया अंकित है एक गीतकाव्य के भेद संस्कृत के ये गीत-काव्य कई प्रकार से लिखे गए। इनको प्रमुख दो भागों में अलग किया जा सकता हैः स्तोत्रकाव्य या भक्तिकाव्य और शृंगारकाव्य या संदेश-काव्य । स्तोत्र-काव्य या भक्ति-काव्य वे हैं, जिनमें आध्यात्मिक भावना में अभिभूत होकर भक्तजन के एकांतिक हृदयोद्वार अथाह वेग से प्रवाहित होते हैं। इसके अतिरिक्त जिन गीत-काव्यों में शृङ्गार की भावना का प्राधान्य है उन्हें संदेश-काव्यों के अंतर्गत रखा गया है। आत्मएक. डॉशून्य दशरथ ओझाः हिन्दी नाटक : उद्भव और विकास, दस तीन सौ इक्यासी-तीन सौ बयासी, राजपाल पेण्ड सन्स, दिल्ली, द्वितीय संस्करण दो. ब्रजभारती, मथुरा, ज्येष्ठ दो हज़ार चौदह विशून्य, वर्ष पंद्रह, अङ्क एक निवेदन की तीव्रानुभूति शृङ्गार कायों की विशिष्टता है। संस्कृत में ये शृङ्गारकाव्य कई प्रकार से लिखे गए, जिनमें दूतपद्धति के काव्य प्रमुख हैं। इन दूतकाव्यों में प्रेमी अथवा प्रेमिका का किसी दूस के माध्यम से अपने वियुक्त प्रणयी के प्रति प्रणय-संदेश निवेदित होता है । संदेश-काव्य या दूत-काव्यों की परंपरा में 'मेघदूत' और 'घटकर्पर काव्य पहिली कृतियाँ हैं । इन दोनों के रचयिता क्रमशः महाकवि कालिदास और घटकर्पर कवि हुए । इन दोनों काव्यों में किसकी रचना पहिले हुई, इस सम्बन्ध में एक निश्चित मत अभी तक तय नहीं हो पाया है। धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वैतालभट्ट, घटकर्पर और कालिदास, इन सबको विक्रमादित्य की विद्वत्सभा का भूषण माना गया है। इस नामावली में घटकपर को पहिले और कालिदास को बाद में रखा गया है; किन्तु यह पूर्वापर का सम्बन्ध उनकी स्थिति पर कोई भी विश्वसनीय प्रकाश नहीं डालता है। छंद-रचना की दृष्टि से ही कदाचित् यह पूर्वापर का क्रम रखा गया हो; और इसके अतिरिक्त कथंचित् इसमें भी संदेह है कि 'ज्योतिर्विदाभरण' की उक्त बात ही सर्वथा कल्पित हो । फिर भी इन दोनों काव्य-ग्रन्थों के अध्ययन से इतना निश्चित हो जाता है कि 'मेघदूत' की भावानुभूति एवं उसके बाह्य शिल्प पर 'रामायण' का और 'घटकर्पर काव्य' पर 'महाभारत' का प्रभाव है। 'घटकर्पर काव्य" के अन्तिम श्लोक में कवि ने प्रतिज्ञा की है कि जो भी कवि इससे उत्तम काव्य की रचना कर देगा, उसके लिए वह घड़े के कर्पर पर पानी भर कर ला देगा । उसकी इसी प्रतिज्ञा पर काव्य का ऐसा नामकरण हुआ और सम्भवतथा इस नामकरण पर ही उसके निर्माता की भी 'घटकर्पर' नाम से प्रसिद्धि हुई। उसका वास्तविक नाम क्या था, इस सम्बन्ध में कुछ भी विदित नहीं है। काव्यशास्त्र के एक. ज्योतिर्विदाभरण दो. डॉशून्य यतीन्द्र विमल चौधरी : हिस्ट्री ऑफ दूतकाव्य ऑफ बंगाल, एक सौ नौ, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन ईशून्य चार. डॉशून्य जेशून्य बीशून्य चौधरीः प्राध्यवाणी मन्दिर, संस्कृत दूतकाव्य ग्रन्थमाका, पृशून्य एक.साठ एक हज़ार नौ सौ तिरेपन ईशून्य
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अमेरिकी विमान विनिर्माता बोइंग ने बुधवार को भारत के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत के लिए डेक आधारित लड़ाकू विमानों की भारतीय नौसेना की जरूरत को पूरा करने के लिए अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट को सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म बताया। बोइंग के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अगर एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट ब्लॉक-3 को चुना जाता है तो कंपनी का पूर्वानुमान है कि अगले 10 वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र और रक्षा उद्योग में 3. 6 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। नौसेना ने खरीद के लिए एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट और फ्रांस की दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल एम को चुना है। भारतीय नौसेना ने चार साल पहले अपने विमान वाहक पोत के लिए 57 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। बोइंग इंडिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट ब्लॉक 3 भारतीय नौसेना के लिए सर्वश्रेष्ठ डेक आधारित विमान होगा और कंपनी देश के स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में योगदान के अपने सफल ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर 'मेक इन इंडिया' पहल को और मजबूत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि बोइंग का पूर्वानुमान है कि यदि एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट को भारत के अगले विमान वाहक पोत आधारित लड़ाकू विमान के रूप में शामिल किया जाता है तो अगले 10 वर्षों में भारत के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग पर 3. 6 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी नौसेना के दो एफ/ए-18ई सुपर हॉर्नेट विमानों ने हाल में गोवा में एक नौसेना केंद्र पर कई प्रदर्शन किए थे।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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अमेरिकी विमान विनिर्माता बोइंग ने बुधवार को भारत के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत के लिए डेक आधारित लड़ाकू विमानों की भारतीय नौसेना की जरूरत को पूरा करने के लिए अपने एफ/ए-अट्ठारह सुपर हॉर्नेट को सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म बताया। बोइंग के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अगर एफ/ए-अट्ठारह सुपर हॉर्नेट ब्लॉक-तीन को चुना जाता है तो कंपनी का पूर्वानुमान है कि अगले दस वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र और रक्षा उद्योग में तीन. छः अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। नौसेना ने खरीद के लिए एफ/ए-अट्ठारह सुपर हॉर्नेट और फ्रांस की दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल एम को चुना है। भारतीय नौसेना ने चार साल पहले अपने विमान वाहक पोत के लिए सत्तावन बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। बोइंग इंडिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि एफ/ए-अट्ठारह सुपर हॉर्नेट ब्लॉक तीन भारतीय नौसेना के लिए सर्वश्रेष्ठ डेक आधारित विमान होगा और कंपनी देश के स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में योगदान के अपने सफल ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर 'मेक इन इंडिया' पहल को और मजबूत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि बोइंग का पूर्वानुमान है कि यदि एफ/ए-अट्ठारह सुपर हॉर्नेट को भारत के अगले विमान वाहक पोत आधारित लड़ाकू विमान के रूप में शामिल किया जाता है तो अगले दस वर्षों में भारत के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग पर तीन. छः अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी नौसेना के दो एफ/ए-अट्ठारहई सुपर हॉर्नेट विमानों ने हाल में गोवा में एक नौसेना केंद्र पर कई प्रदर्शन किए थे। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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इस व्रत के पांच अतिचार हैः- सचित्त वस्तु का त्याग करने वाले व्यक्ति को अपेक्षा-सचित्तका आहार करना, सचित्त से सम्बद्ध वस्तु का आहार करना, अचित्त और सचित्त मिश्र का आहार करना, अनेक द्रव्यों के संयोग से बने हुए मदिरा, सौवीर आादि का आहार करना पूरी तरह नहीं पके हुए सचित्त पदार्थ आहार करना- ये पांच अतिचार कहे गये हैं। जानबूझ कर करने से तो व्रत का भंग होता है परन्तु विना उपयोग ऐसा की अवस्था में ये अतिचार कहे गये हैं। अपय औषधि और छ औषधि (असार वस्तु) का भक्षण करना भी अतिचार गये हैं। वहीं मिश्र और अभिषय नहीं बताये गये हैं ।
भोगोपभोग परिमाण यत दो प्रकार का हैः- प्रथम भोजन अम्बन्धी और दूसरा कर्म (व्यापार) सम्बन्धी व्रत का वर्णन ऊपर कया जा चुका है अब व्यापार सम्बन्धी व्रत का वर्णन किया जाता है
श्रावक आजीविका के साधन का चुनाव करते हुए इस बात का ध्यान रखता है कि वह आजीविका महारम्भ-निष्पत न हो । महारम्भ निष्पन्न आजीविका श्रावक के लिए बजनीय है । जिस व्यापार से महा-आरम्भ होता है उसे श्रावक नहीं करता है । शास्त्रकारों ने ऐसे पन्द्रह व्यापार बताये हैं जो महा-पाप के कारण होने से फर्मादान कहे जाते हैं और जिनका परित्याग करना श्रावक के लिए अनिवार्य है । वे इस प्रकार हैं
(१) अंगार कर्मः- लकड़ी के कोयले बनाकर बेचने का व्यापार
करना । तथा जिस में अधिक प्रमाण में अग्नि प्रयोग करता पड़े
ऐसे व्यापार करना ।
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इस व्रत के पांच अतिचार हैः- सचित्त वस्तु का त्याग करने वाले व्यक्ति को अपेक्षा-सचित्तका आहार करना, सचित्त से सम्बद्ध वस्तु का आहार करना, अचित्त और सचित्त मिश्र का आहार करना, अनेक द्रव्यों के संयोग से बने हुए मदिरा, सौवीर आादि का आहार करना पूरी तरह नहीं पके हुए सचित्त पदार्थ आहार करना- ये पांच अतिचार कहे गये हैं। जानबूझ कर करने से तो व्रत का भंग होता है परन्तु विना उपयोग ऐसा की अवस्था में ये अतिचार कहे गये हैं। अपय औषधि और छ औषधि का भक्षण करना भी अतिचार गये हैं। वहीं मिश्र और अभिषय नहीं बताये गये हैं । भोगोपभोग परिमाण यत दो प्रकार का हैः- प्रथम भोजन अम्बन्धी और दूसरा कर्म सम्बन्धी व्रत का वर्णन ऊपर कया जा चुका है अब व्यापार सम्बन्धी व्रत का वर्णन किया जाता है श्रावक आजीविका के साधन का चुनाव करते हुए इस बात का ध्यान रखता है कि वह आजीविका महारम्भ-निष्पत न हो । महारम्भ निष्पन्न आजीविका श्रावक के लिए बजनीय है । जिस व्यापार से महा-आरम्भ होता है उसे श्रावक नहीं करता है । शास्त्रकारों ने ऐसे पन्द्रह व्यापार बताये हैं जो महा-पाप के कारण होने से फर्मादान कहे जाते हैं और जिनका परित्याग करना श्रावक के लिए अनिवार्य है । वे इस प्रकार हैं अंगार कर्मः- लकड़ी के कोयले बनाकर बेचने का व्यापार करना । तथा जिस में अधिक प्रमाण में अग्नि प्रयोग करता पड़े ऐसे व्यापार करना ।
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