raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
10. प्राधिकारी नोट करते हैं कि रॉल अथवा शीट रूप से इतर विनाइल टाइल्स भारतीय बाजार में एक नया उत्पाद है। यह उत्पाद आरंभिक स्तर पर है और संबद्ध सामानों के लिए उत्पादन केवल क्षति की अवधि के दौरान भारत में शुरु हुआ है। भारत में संबद्ध सामानों की मांग भारत में घरेलू उत्पादन शुरु होने से पूर्व विचाराधीन उत्पाद के आयातों द्वारा पूरी की जाती थी। 11. विचाराधीन उत्पाद का विनिर्माण किसी रूप में पीवीसी और कैल्शियम कार्बोनेट का प्रयोग करके किया जाता है। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने इस संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की है कि क्या रिसाइकिल पीवीसी का प्रयोग करके विनिर्मित विनाइल टाइलें विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अंतर्गत शामिल हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि यद्यपि घरेलू उद्योग अपने अपशिष्ट के रूप में पीवीसी में रिसाइकिल्ड और वर्जिन पीवीसी का प्रयोग करता है तथापि वह बाजार से रिसाइकिल्ड पीवीसी नहीं लेता है। किसी भी दशा में, यह नोट किया जाता है कि विभिन्न कच्ची सामग्री का प्रयोग इस उत्पाद को भिन्न नहीं बनाता और इसीलिए वर्तमान मामले में रिसाइकिल्ड तथा वर्जिन पीवीसी का प्रयोग करके विनिर्मित सामान विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। साफ्ट फ्लोरिंग को विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग किया गया है क्योंकि इसका विनिर्माण पीवीसी और कैल्शियम कार्बोनेट का प्रयोग करके नहीं किया जाता है। हितबद्ध पक्षकारों ने दावा किया है कि याचिकाकर्ताओं से उत्पाद में शामिल किए जा रहे नए घटकों को स्पष्ट करने के लिए कहा जाना चाहिए। उत्तर में याचिकाकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि यह उत्पाद अभी आरंभिक स्तर पर है जिसके कारण इसके घटक एक समायावधि में विकसित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, यद्यपि पूर्व में इस उत्पाद की बिक्री बिना कुशन के की जा रही थी, तथापि अब कुशनयुक्त उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। प्राधिकारी नोट करते हैं कि हितबद्ध पक्षकारों ने किसी उत्पाद विशिष्ट घटक का दावा नहीं किया है जिसके आधार पर इसे हटाए जाने की मांग की गई है और इस प्रकार उत्पाद के क्षेत्र में इस कारण किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या विनाइल प्लंक्स विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि विनाइल प्लंक्स आयताकार में टाइले हैं और इसीलिए विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने यह तर्क दिया है कि लचीली टाइलों को विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग किया जाना चाहिए। प्राधिकारी नोट करते हैं कि लचीली टाइलों के संबंध में अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा कोई सूचना दायर नहीं की गई है। प्राधिकारी नोट करते हैं कि रिजिड टाइलों में भी लचीलेपन का एक घटक है और लचीलापन वह घटक है जो विनाइल टाइलों की मोटाई और लंबाई से आता है। 2.5 एमएम की विनाइल टाइल 8 एमएम की विनाइल टाइल से अधिक लचीली है। रिकॉर्ड में उपलब्ध सूचना यह दर्शाती है कि संबद्ध सामान फोल्डेड अथवा रॉल्ड होने में अक्षमता के कारण बाजार क्षेत्र में रिजिड विनाइल टाइलों के रूप में जाने जाते हैं। इस प्रकार, टाइलों के लचीलेपन के आधार पर इसे हटाया जाना आवश्यक नहीं है । किसी भी हितबद्ध पक्षकार ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया है कि हटाए जाने के लिए अनुरोध किए गए उत्पाद की तकनीकी विशिष्टताएं घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित नहीं की जा सकती। इस तर्क के संबंध में कि क्या याचिकाकर्ता रॉल फार्म में उत्पादों का विनिर्माण कर रहे हैं, प्राधिकारी नोट करते हैं कि विचाराधीन उत्पाद रॉल अथवा शीट फार्म में विनाइल टाइलों को अलग करता है। याचिककर्ताओं ने यह अनुरोध किया है कि संबद्ध सामान रॉल्ड फार्म में नहीं हो सकते क्योंकि उत्पाद की रॉलिंग अथवा फोल्डिंग से उत्पाद में दरारें आ जाएंगी। प्राधिकारी यह भी नोट करते हैं कि याचिकाकर्ता केवल रॉल अथवा शीट फार्म से इतर विनाइल टाइलों का उत्पादन करते हैं और इसीलिए इन्हें विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग रखा गया है। रिकॉर्ड में उपलब्ध सूचना के आधार पर प्राधिकारी नोट करते हैं कि घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध सामानों और संबद्ध देशों से आयातित संबद्ध उत्पाद में कोई ज्ञात अंतर नहीं है। ये दोनों भौतिक विशेषताओं, विनिर्माण प्रक्रिया, प्रकार्य और प्रयोग, उत्पाद विशिष्टियों, वितरण एवं विपणन तथा सामानों के प्रशुल्क वर्गीकरण के संदर्भ में तुलनीय हैं। ये दोनों तकनीकी और वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्थापनीय हैं। उपभोक्ताओं ने इन दोनों का परस्पर परिवर्तनीय रूप से प्रयोग किया है और कर रहे हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा विनिर्मित उत्पाद नियमावली के नियम 2 (घ) के अनुसार संबद्ध देशों से भारत में आयात किए जा रहे विचाराधीन उत्पाद की समान वस्तु हैं। 18. अतः, वर्तमान जांच के लिए विचाराधीन उत्पाद संबद्ध देशों के मूल के अथवा वहां से निर्यातित 0.15 एमएम से 0.7 एमएम की रेंज में मोटाई वाली संरक्षी परत के साथ 8 एमएम की अधिकतम टाइल मोटाई और 2.5 एमएम की न्यूनतम टाइल मोटाई वाली "रॉल अथवा शीट फार्म से इतर विनाइल टाइल" है । टाइल की मोटाई में कुशन की मोटाई शामिल नहीं है। बाजार क्षेत्र में विचाराधीन उत्पाद लग्जरी विनाइल टाइल, लग्जरी विनाइल फ्लोरिंग, स्टोन प्लास्टिक कम्पोजिट, एसपीसी, पीवीसी फ्लोरिंग टाइल, पीवीसी टाइल्स या रिजिड विनाइल टाइल, रिजिड विनाइल फ्लोरिंग के रूप में जाना जाता है और वर्तमान जांच परिणाम में लग्जरी विनाइल टाइल अथवा एलवीटी के रूप में उल्लिखित किया गया है। लग्जरी विनाइल टाइल क्लिक अथवा लॉक यंत्र के साथ अथवा बिना उसके हो सकती हैं। लग्जरी विनाइल टाइल उस विनाइल की किस्म के लिए आमतौर पर उद्योग द्वारा प्रयुक्त शब्द है जो वास्तव में घिसाई और निष्पादन में सुधार लाने के लिए बढ़ाई गई परत के साथ प्राकृतिक सामग्री की दिखावट बताती है। विचाराधीन उत्पाद का प्रयोग आवासीय और वाणिज्यिक भवनों में फर्शों की कवरिंग के लिए किया जाता है। विचाराधीन उत्पाद शीर्ष 3918 के अंतर्गत सीमा प्रशुल्क अधिनियम के अध्याय 39 के तहत वर्गीकृत है। विचाराधीन उत्पाद का समर्पित सीमाशुल्क वर्गीकरण नहीं है । यद्यपि विचाराधीन उत्पाद 39181090 के तहत वर्गीकरण योग्य है, तथापि, आवेदकों ने दावा किया है कि उत्पाद का आयात कोड 39181010, 39189010, 39189020 और 39189090 के तहत भी हो रहा है । तथापि, सीमाशुल्क वर्गीकरण केवल सांकेतिक है और वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद के दायरे पर बाध्यकारी नहीं है। घरेलू उद्योग का क्षेत्र और आधार अन्य हितबद्ध पक्षकारों के विचार घरेलू उद्योग और आधार के संबंध में अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा निम्नलिखित अनुरोध किए गए थेः यह स्पष्ट नहीं है कि नियम 2(ख) के तहत एक व्यापारी के रूप में डब्ल्यूजीबीएल को घरेलू उद्योग के क्षेत्र में कैसे शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में, डब्ल्यूजीबीएल के व्यापारिक प्रचालनों के ब्यौरों पर विचार किया जा सकता है कि क्या उनके पास डब्ल्यूएफएल के उत्पाद को बेचने के विशिष्ट अधिकार हैं और क्या वे अन्य उत्पाद बेचते हैं। यह बात दोहराई जाती है कि पाटनरोधी नियमावली के नियम 2 ( ख ) के अनुसार केवल एक उत्पादक ही घरेलू उद्योग का भाग बनने का पात्र है। चूंकि नियम 2 (ख) में घरेलू उद्योग के भाग के रूप में "व्यापारी" की परिकल्पना नहीं है अतः घरेलू उद्योग के भाग के रूप में उनकी मूल कंपनी (डब्ल्यूआईएल) के व्यापारिक अंग (डब्ल्यूजीबीएल) पर विचार करने के लिए आवेदक उद्योग (डब्ल्यूएफएल) का कोई प्रयास झूठा, गलत माना गया और कानून के समर्थन के बिना है और इसीलिए इसे सीधे ही रद्द किया जाना चाहिए। घरेलू उद्योग द्वारा उद्धृत मामले के संबंध में यह अनुरोध है कि उद्धृत मामले का इस मामले पर कोई प्रभाव नहीं है क्योंकि नियम 2(ख) घरेलू उद्योग के क्षेत्र से संबंधित है जिसमें उद्धृत मामला एकल आर्थिक कंपनी के तहत किसी निर्यातक से पूरे उत्तर की स्थिति से संबंधित है। अतः, उद्धृत मामले का इस मामले पर कोई प्रभाव नहीं है। इसके विपरीत, घरेलू उद्योग एक भी उदाहरण देने में विफल रहा, जहां प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग के भाग के रूप में व्यापारी को माना है अथवा क्षति विश्लेषण या क्षति मार्जिन के लिए उसके खर्चों को शामिल किया है। उपर्युक्त के मद्देनजर यह विनम्र अनुरोध है कि वर्तमान जांच में डब्ल्यूएफएल और डब्ल्यूजीबीएल को एकल आर्थिक कंपनी के रूप में नहीं माना जा सकता। उत्तरदाता माननीय प्राधिकारी से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे कृपया घरेलू उद्योग के अनुरोध को रद्द करें। उपर्युक्त तथा घरेलू उद्योग के कानूनी रूप से असंधारणीय अनुरोध के पूर्वाग्रह के बिना यह अनुरोध है कि आवेदक उद्योग का यह दावा कि व्यापारिक कंपनी को घरेलू उद्योग माना जाना चाहिए, भी तथ्यों के किसी औचित्य के बिना है। इस संदर्भ में, प्राधिकारी का ध्यान उनकी वार्षिक रिपोर्ट की ओर आकर्षित किया जाता है जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि संबद्ध पक्षकारों के साथ उनके सभी लेन-देन समिपष्ट कीमतों के आधार पर हैं। मामला ऐसा होने पर आवेदक के लिए कानूनी तौर पर और संकल्प मात्र रूप से प्राधिकारी से यह अनुरोध करने का पूर्णतः कोई आधार नहीं है कि वे क्षतिरहित कीमत परिकलन के लिए अथवा क्षति विश्लेषण के लिए डब्ल्यूजीबीएल से संबंधित किसी आंकड़े पर विचार करें। यह अनुरोध है कि चूंकि डब्ल्यूएफएल अपनी संबद्ध कंपनी को आस-पास (जैसा कि उनकी वार्षिक रिपोर्ट में उल्लिखित है) की कीमतों पर संबद्ध सामानों की बिक्री कर रहा है। अतः, प्राधिकारी को उनकी कीमतों पर विचार करना चाहिए जिन पर डब्ल्यूएफएल ने डब्ल्यूजीबीएल को संबद्ध सामानों की बिक्री की है।
दस. प्राधिकारी नोट करते हैं कि रॉल अथवा शीट रूप से इतर विनाइल टाइल्स भारतीय बाजार में एक नया उत्पाद है। यह उत्पाद आरंभिक स्तर पर है और संबद्ध सामानों के लिए उत्पादन केवल क्षति की अवधि के दौरान भारत में शुरु हुआ है। भारत में संबद्ध सामानों की मांग भारत में घरेलू उत्पादन शुरु होने से पूर्व विचाराधीन उत्पाद के आयातों द्वारा पूरी की जाती थी। ग्यारह. विचाराधीन उत्पाद का विनिर्माण किसी रूप में पीवीसी और कैल्शियम कार्बोनेट का प्रयोग करके किया जाता है। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने इस संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की है कि क्या रिसाइकिल पीवीसी का प्रयोग करके विनिर्मित विनाइल टाइलें विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अंतर्गत शामिल हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि यद्यपि घरेलू उद्योग अपने अपशिष्ट के रूप में पीवीसी में रिसाइकिल्ड और वर्जिन पीवीसी का प्रयोग करता है तथापि वह बाजार से रिसाइकिल्ड पीवीसी नहीं लेता है। किसी भी दशा में, यह नोट किया जाता है कि विभिन्न कच्ची सामग्री का प्रयोग इस उत्पाद को भिन्न नहीं बनाता और इसीलिए वर्तमान मामले में रिसाइकिल्ड तथा वर्जिन पीवीसी का प्रयोग करके विनिर्मित सामान विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। साफ्ट फ्लोरिंग को विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग किया गया है क्योंकि इसका विनिर्माण पीवीसी और कैल्शियम कार्बोनेट का प्रयोग करके नहीं किया जाता है। हितबद्ध पक्षकारों ने दावा किया है कि याचिकाकर्ताओं से उत्पाद में शामिल किए जा रहे नए घटकों को स्पष्ट करने के लिए कहा जाना चाहिए। उत्तर में याचिकाकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि यह उत्पाद अभी आरंभिक स्तर पर है जिसके कारण इसके घटक एक समायावधि में विकसित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, यद्यपि पूर्व में इस उत्पाद की बिक्री बिना कुशन के की जा रही थी, तथापि अब कुशनयुक्त उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। प्राधिकारी नोट करते हैं कि हितबद्ध पक्षकारों ने किसी उत्पाद विशिष्ट घटक का दावा नहीं किया है जिसके आधार पर इसे हटाए जाने की मांग की गई है और इस प्रकार उत्पाद के क्षेत्र में इस कारण किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या विनाइल प्लंक्स विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि विनाइल प्लंक्स आयताकार में टाइले हैं और इसीलिए विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र के अन्तर्गत शामिल हैं। कुछ हितबद्ध पक्षकारों ने यह तर्क दिया है कि लचीली टाइलों को विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग किया जाना चाहिए। प्राधिकारी नोट करते हैं कि लचीली टाइलों के संबंध में अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा कोई सूचना दायर नहीं की गई है। प्राधिकारी नोट करते हैं कि रिजिड टाइलों में भी लचीलेपन का एक घटक है और लचीलापन वह घटक है जो विनाइल टाइलों की मोटाई और लंबाई से आता है। दो.पाँच एमएम की विनाइल टाइल आठ एमएम की विनाइल टाइल से अधिक लचीली है। रिकॉर्ड में उपलब्ध सूचना यह दर्शाती है कि संबद्ध सामान फोल्डेड अथवा रॉल्ड होने में अक्षमता के कारण बाजार क्षेत्र में रिजिड विनाइल टाइलों के रूप में जाने जाते हैं। इस प्रकार, टाइलों के लचीलेपन के आधार पर इसे हटाया जाना आवश्यक नहीं है । किसी भी हितबद्ध पक्षकार ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया है कि हटाए जाने के लिए अनुरोध किए गए उत्पाद की तकनीकी विशिष्टताएं घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित नहीं की जा सकती। इस तर्क के संबंध में कि क्या याचिकाकर्ता रॉल फार्म में उत्पादों का विनिर्माण कर रहे हैं, प्राधिकारी नोट करते हैं कि विचाराधीन उत्पाद रॉल अथवा शीट फार्म में विनाइल टाइलों को अलग करता है। याचिककर्ताओं ने यह अनुरोध किया है कि संबद्ध सामान रॉल्ड फार्म में नहीं हो सकते क्योंकि उत्पाद की रॉलिंग अथवा फोल्डिंग से उत्पाद में दरारें आ जाएंगी। प्राधिकारी यह भी नोट करते हैं कि याचिकाकर्ता केवल रॉल अथवा शीट फार्म से इतर विनाइल टाइलों का उत्पादन करते हैं और इसीलिए इन्हें विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र से अलग रखा गया है। रिकॉर्ड में उपलब्ध सूचना के आधार पर प्राधिकारी नोट करते हैं कि घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध सामानों और संबद्ध देशों से आयातित संबद्ध उत्पाद में कोई ज्ञात अंतर नहीं है। ये दोनों भौतिक विशेषताओं, विनिर्माण प्रक्रिया, प्रकार्य और प्रयोग, उत्पाद विशिष्टियों, वितरण एवं विपणन तथा सामानों के प्रशुल्क वर्गीकरण के संदर्भ में तुलनीय हैं। ये दोनों तकनीकी और वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्थापनीय हैं। उपभोक्ताओं ने इन दोनों का परस्पर परिवर्तनीय रूप से प्रयोग किया है और कर रहे हैं। प्राधिकारी नोट करते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा विनिर्मित उत्पाद नियमावली के नियम दो के अनुसार संबद्ध देशों से भारत में आयात किए जा रहे विचाराधीन उत्पाद की समान वस्तु हैं। अट्ठारह. अतः, वर्तमान जांच के लिए विचाराधीन उत्पाद संबद्ध देशों के मूल के अथवा वहां से निर्यातित शून्य.पंद्रह एमएम से शून्य.सात एमएम की रेंज में मोटाई वाली संरक्षी परत के साथ आठ एमएम की अधिकतम टाइल मोटाई और दो.पाँच एमएम की न्यूनतम टाइल मोटाई वाली "रॉल अथवा शीट फार्म से इतर विनाइल टाइल" है । टाइल की मोटाई में कुशन की मोटाई शामिल नहीं है। बाजार क्षेत्र में विचाराधीन उत्पाद लग्जरी विनाइल टाइल, लग्जरी विनाइल फ्लोरिंग, स्टोन प्लास्टिक कम्पोजिट, एसपीसी, पीवीसी फ्लोरिंग टाइल, पीवीसी टाइल्स या रिजिड विनाइल टाइल, रिजिड विनाइल फ्लोरिंग के रूप में जाना जाता है और वर्तमान जांच परिणाम में लग्जरी विनाइल टाइल अथवा एलवीटी के रूप में उल्लिखित किया गया है। लग्जरी विनाइल टाइल क्लिक अथवा लॉक यंत्र के साथ अथवा बिना उसके हो सकती हैं। लग्जरी विनाइल टाइल उस विनाइल की किस्म के लिए आमतौर पर उद्योग द्वारा प्रयुक्त शब्द है जो वास्तव में घिसाई और निष्पादन में सुधार लाने के लिए बढ़ाई गई परत के साथ प्राकृतिक सामग्री की दिखावट बताती है। विचाराधीन उत्पाद का प्रयोग आवासीय और वाणिज्यिक भवनों में फर्शों की कवरिंग के लिए किया जाता है। विचाराधीन उत्पाद शीर्ष तीन हज़ार नौ सौ अट्ठारह के अंतर्गत सीमा प्रशुल्क अधिनियम के अध्याय उनतालीस के तहत वर्गीकृत है। विचाराधीन उत्पाद का समर्पित सीमाशुल्क वर्गीकरण नहीं है । यद्यपि विचाराधीन उत्पाद तीन करोड़ इक्यानवे लाख इक्यासी हज़ार नब्बे के तहत वर्गीकरण योग्य है, तथापि, आवेदकों ने दावा किया है कि उत्पाद का आयात कोड तीन करोड़ इक्यानवे लाख इक्यासी हज़ार दस, तीन करोड़ इक्यानवे लाख नवासी हज़ार दस, तीन करोड़ इक्यानवे लाख नवासी हज़ार बीस और तीन करोड़ इक्यानवे लाख नवासी हज़ार नब्बे के तहत भी हो रहा है । तथापि, सीमाशुल्क वर्गीकरण केवल सांकेतिक है और वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद के दायरे पर बाध्यकारी नहीं है। घरेलू उद्योग का क्षेत्र और आधार अन्य हितबद्ध पक्षकारों के विचार घरेलू उद्योग और आधार के संबंध में अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा निम्नलिखित अनुरोध किए गए थेः यह स्पष्ट नहीं है कि नियम दो के तहत एक व्यापारी के रूप में डब्ल्यूजीबीएल को घरेलू उद्योग के क्षेत्र में कैसे शामिल किया जा सकता है। इस संबंध में, डब्ल्यूजीबीएल के व्यापारिक प्रचालनों के ब्यौरों पर विचार किया जा सकता है कि क्या उनके पास डब्ल्यूएफएल के उत्पाद को बेचने के विशिष्ट अधिकार हैं और क्या वे अन्य उत्पाद बेचते हैं। यह बात दोहराई जाती है कि पाटनरोधी नियमावली के नियम दो के अनुसार केवल एक उत्पादक ही घरेलू उद्योग का भाग बनने का पात्र है। चूंकि नियम दो में घरेलू उद्योग के भाग के रूप में "व्यापारी" की परिकल्पना नहीं है अतः घरेलू उद्योग के भाग के रूप में उनकी मूल कंपनी के व्यापारिक अंग पर विचार करने के लिए आवेदक उद्योग का कोई प्रयास झूठा, गलत माना गया और कानून के समर्थन के बिना है और इसीलिए इसे सीधे ही रद्द किया जाना चाहिए। घरेलू उद्योग द्वारा उद्धृत मामले के संबंध में यह अनुरोध है कि उद्धृत मामले का इस मामले पर कोई प्रभाव नहीं है क्योंकि नियम दो घरेलू उद्योग के क्षेत्र से संबंधित है जिसमें उद्धृत मामला एकल आर्थिक कंपनी के तहत किसी निर्यातक से पूरे उत्तर की स्थिति से संबंधित है। अतः, उद्धृत मामले का इस मामले पर कोई प्रभाव नहीं है। इसके विपरीत, घरेलू उद्योग एक भी उदाहरण देने में विफल रहा, जहां प्राधिकारी ने घरेलू उद्योग के भाग के रूप में व्यापारी को माना है अथवा क्षति विश्लेषण या क्षति मार्जिन के लिए उसके खर्चों को शामिल किया है। उपर्युक्त के मद्देनजर यह विनम्र अनुरोध है कि वर्तमान जांच में डब्ल्यूएफएल और डब्ल्यूजीबीएल को एकल आर्थिक कंपनी के रूप में नहीं माना जा सकता। उत्तरदाता माननीय प्राधिकारी से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे कृपया घरेलू उद्योग के अनुरोध को रद्द करें। उपर्युक्त तथा घरेलू उद्योग के कानूनी रूप से असंधारणीय अनुरोध के पूर्वाग्रह के बिना यह अनुरोध है कि आवेदक उद्योग का यह दावा कि व्यापारिक कंपनी को घरेलू उद्योग माना जाना चाहिए, भी तथ्यों के किसी औचित्य के बिना है। इस संदर्भ में, प्राधिकारी का ध्यान उनकी वार्षिक रिपोर्ट की ओर आकर्षित किया जाता है जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि संबद्ध पक्षकारों के साथ उनके सभी लेन-देन समिपष्ट कीमतों के आधार पर हैं। मामला ऐसा होने पर आवेदक के लिए कानूनी तौर पर और संकल्प मात्र रूप से प्राधिकारी से यह अनुरोध करने का पूर्णतः कोई आधार नहीं है कि वे क्षतिरहित कीमत परिकलन के लिए अथवा क्षति विश्लेषण के लिए डब्ल्यूजीबीएल से संबंधित किसी आंकड़े पर विचार करें। यह अनुरोध है कि चूंकि डब्ल्यूएफएल अपनी संबद्ध कंपनी को आस-पास की कीमतों पर संबद्ध सामानों की बिक्री कर रहा है। अतः, प्राधिकारी को उनकी कीमतों पर विचार करना चाहिए जिन पर डब्ल्यूएफएल ने डब्ल्यूजीबीएल को संबद्ध सामानों की बिक्री की है।
कंपनियों को जब लगता है कि उनके शेयरों की वैल्यू बहुत अधिक हो गई है। तब वो स्टॉक स्प्लिट का निर्णय करती हैं। इस हफ्ते ऐसी 5 कंपनियां हैं शेयर बाजार में एक्स-स्प्लिट के रूप में ट्रेड करेंगी। कंपनियों को जब लगता है कि उनके शेयरों की वैल्यू बहुत अधिक हो गई है। तब वो स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) का निर्णय करती हैं। इस हफ्ते ऐसी 5 कंपनियां हैं शेयर बाजार में एक्स-स्प्लिट के रूप में ट्रेड करेंगी। आइए जानते हैं कि वो 5 कंपनियां कौन-कौन सी हैं। और इनका रिकॉर्ड डेट कब है? 1- ओसिया हाइपर रिटेल (Osia Hyper Retail) शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने बताया है कि 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले एक शेयर को 10 हिस्सों में बांटा जाएगा। जिसके बाद स्टॉक की फेस वैल्यू घटकर 1 रुपये हो जाएगी। कंपनी ने इस स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट 13 मार्च 2023 तय किया है। 2- मेडिको रेमिडिस (Medico Remedies) कंपनी अपने शेयरों को 5 हिस्सों में बांटने जा रही है। इस स्टॉक स्प्लिट के लिए कंपनी ने 16 मार्च 2023 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। स्टॉक स्प्लिट के लिए कंपनी ने 16 मार्च 2023 की तारीख का ऐलान किया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 1 शेयर को हिस्सों में बांटने की मंजूरी दी है। इस कंपनी के शेयरों का भी बंटवारा 10 हिस्सों में किया जाएगा। जिसके बाद स्टॉक की फेस वैल्यू घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो जाएगी। बता दें, रिकॉर्ड डेट 17 मार्च 2023 तय किया गया है। कंपनी अपने शेयरों को 10 हिस्सों में बांटेगी। इस स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट 17 मार्च 2023 तय किया गया है।
कंपनियों को जब लगता है कि उनके शेयरों की वैल्यू बहुत अधिक हो गई है। तब वो स्टॉक स्प्लिट का निर्णय करती हैं। इस हफ्ते ऐसी पाँच कंपनियां हैं शेयर बाजार में एक्स-स्प्लिट के रूप में ट्रेड करेंगी। कंपनियों को जब लगता है कि उनके शेयरों की वैल्यू बहुत अधिक हो गई है। तब वो स्टॉक स्प्लिट का निर्णय करती हैं। इस हफ्ते ऐसी पाँच कंपनियां हैं शेयर बाजार में एक्स-स्प्लिट के रूप में ट्रेड करेंगी। आइए जानते हैं कि वो पाँच कंपनियां कौन-कौन सी हैं। और इनका रिकॉर्ड डेट कब है? एक- ओसिया हाइपर रिटेल शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने बताया है कि दस रुपयापये के फेस वैल्यू वाले एक शेयर को दस हिस्सों में बांटा जाएगा। जिसके बाद स्टॉक की फेस वैल्यू घटकर एक रुपयापये हो जाएगी। कंपनी ने इस स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट तेरह मार्च दो हज़ार तेईस तय किया है। दो- मेडिको रेमिडिस कंपनी अपने शेयरों को पाँच हिस्सों में बांटने जा रही है। इस स्टॉक स्प्लिट के लिए कंपनी ने सोलह मार्च दो हज़ार तेईस की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। स्टॉक स्प्लिट के लिए कंपनी ने सोलह मार्च दो हज़ार तेईस की तारीख का ऐलान किया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने एक शेयर को हिस्सों में बांटने की मंजूरी दी है। इस कंपनी के शेयरों का भी बंटवारा दस हिस्सों में किया जाएगा। जिसके बाद स्टॉक की फेस वैल्यू घटकर एक रुपयापये प्रति शेयर हो जाएगी। बता दें, रिकॉर्ड डेट सत्रह मार्च दो हज़ार तेईस तय किया गया है। कंपनी अपने शेयरों को दस हिस्सों में बांटेगी। इस स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट सत्रह मार्च दो हज़ार तेईस तय किया गया है।
रायटर के संवाददाताओं ने क्रीमिया में "सीमेंस टर्बाइन के समान वस्तुएं" देखीं। रायटर समाचार एजेंसी, जिसने पहले क्रीमिया में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा निर्मित दो गैस टर्बाइनों पर सामग्री जारी की थी, ने निर्णय लिया कि विषय "स्वीकृत" ब्याज का है, एक नया प्रकाशन जारी किया। इस प्रकाशन में, यह कहा गया है कि "सीमेंस द्वारा उत्पादित" कई और टर्बाइनों को कथित रूप से "स्वीकृत" प्रायद्वीप में आपूर्ति की गई थी। सामग्री से सवारः उन्हीं संवाददाताओं से स्पष्टता पूरी तरह से अजीब लगती है, कम से कम कहने के लिएः याद करें कि यूरोपीय कंपनी सीमेंस आयोग ने यूरोपीय आयोग पर क्रीमिया को विशेष उपकरण की आपूर्ति पर प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सीमेंस 11 जुलाई के प्रतिनिधियों ने कंपनी टेक्नोप्रोमेक्सपोर्ट के खिलाफ मॉस्को आर्बिट्रेशन कोर्ट के साथ मुकदमा दायर किया, जिसने क्रीमिया क्षेत्र में क्रास्नोडार क्षेत्र में परियोजना के लिए नियत किए गए टर्बाइनों को कथित रूप से धोखा दिया। सामग्री से सवारः संवाददाताओं ने Feodosia के बंदरगाह में टर्बाइनों को देखा, जो सीमेंस टर्बाइनों की छवि के साथ आकार और आकार में समान थे। उन्हीं संवाददाताओं से स्पष्टता पूरी तरह से अजीब लगती है, कम से कम कहने के लिएः हमने एक बेलनाकार 4 वस्तु को कुछ मीटर लंबा देखा, जो नीले और भूरे रंग के तिरपाल से ढकी थी। याद करें कि यूरोपीय कंपनी सीमेंस आयोग ने यूरोपीय आयोग पर क्रीमिया को विशेष उपकरण की आपूर्ति पर प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सीमेंस 11 जुलाई के प्रतिनिधियों ने कंपनी टेक्नोप्रोमेक्सपोर्ट के खिलाफ मॉस्को आर्बिट्रेशन कोर्ट के साथ मुकदमा दायर किया, जिसने क्रीमिया क्षेत्र में क्रास्नोडार क्षेत्र में परियोजना के लिए नियत किए गए टर्बाइनों को कथित रूप से धोखा दिया। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
रायटर के संवाददाताओं ने क्रीमिया में "सीमेंस टर्बाइन के समान वस्तुएं" देखीं। रायटर समाचार एजेंसी, जिसने पहले क्रीमिया में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा निर्मित दो गैस टर्बाइनों पर सामग्री जारी की थी, ने निर्णय लिया कि विषय "स्वीकृत" ब्याज का है, एक नया प्रकाशन जारी किया। इस प्रकाशन में, यह कहा गया है कि "सीमेंस द्वारा उत्पादित" कई और टर्बाइनों को कथित रूप से "स्वीकृत" प्रायद्वीप में आपूर्ति की गई थी। सामग्री से सवारः उन्हीं संवाददाताओं से स्पष्टता पूरी तरह से अजीब लगती है, कम से कम कहने के लिएः याद करें कि यूरोपीय कंपनी सीमेंस आयोग ने यूरोपीय आयोग पर क्रीमिया को विशेष उपकरण की आपूर्ति पर प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सीमेंस ग्यारह जुलाई के प्रतिनिधियों ने कंपनी टेक्नोप्रोमेक्सपोर्ट के खिलाफ मॉस्को आर्बिट्रेशन कोर्ट के साथ मुकदमा दायर किया, जिसने क्रीमिया क्षेत्र में क्रास्नोडार क्षेत्र में परियोजना के लिए नियत किए गए टर्बाइनों को कथित रूप से धोखा दिया। सामग्री से सवारः संवाददाताओं ने Feodosia के बंदरगाह में टर्बाइनों को देखा, जो सीमेंस टर्बाइनों की छवि के साथ आकार और आकार में समान थे। उन्हीं संवाददाताओं से स्पष्टता पूरी तरह से अजीब लगती है, कम से कम कहने के लिएः हमने एक बेलनाकार चार वस्तु को कुछ मीटर लंबा देखा, जो नीले और भूरे रंग के तिरपाल से ढकी थी। याद करें कि यूरोपीय कंपनी सीमेंस आयोग ने यूरोपीय आयोग पर क्रीमिया को विशेष उपकरण की आपूर्ति पर प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सीमेंस ग्यारह जुलाई के प्रतिनिधियों ने कंपनी टेक्नोप्रोमेक्सपोर्ट के खिलाफ मॉस्को आर्बिट्रेशन कोर्ट के साथ मुकदमा दायर किया, जिसने क्रीमिया क्षेत्र में क्रास्नोडार क्षेत्र में परियोजना के लिए नियत किए गए टर्बाइनों को कथित रूप से धोखा दिया। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
सुशांत सिंह राजपूत केस में दिन पर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. ऐसे में यह केस अब सीबीआई को सौंप दिया गया है और रिया चक्रवर्ती समेत 6 लोग फिलहाल स्कैनर में हैं. वहीँ आप इस बात से भी वाकिफ ही होंगे कि एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सुशांत के निधन के मामले में करण जौहर पर आरोप लगाया था और कहा था कि 'इंडस्ट्री में मौजूद नेपोटिज्म कल्चर और मूवी माफिया के चलते सुशांत की मौत हुई है. ' कंगना ने अब तक सुशांत केस में कई बातें की और उन्होंने दीपिका पादुकोण, महेश भट्ट, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, सलमान खान जैसे कई सितारों पर भी निशाना साधा. अब हाल ही में एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में सुशांत के फैमिली वकील विकास सिंह ने कहा है कि, 'कंगना के बयान महत्वपूर्ण नहीं हैं. ' उन्होंने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा कि, 'वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं और उन लोगों पर हमला बोल रही हैं जिनके साथ वे अपने स्कोर सेटल करना चाहती हैं. ऐसा लगता है कि वे अपनी खुद की ही ट्रिप पर हैं. सुशांत के परिवार की एफआईआर और कंगना के दावों का कोई लेना देना नहीं है. ' वहीँ विकास सिंह ने यह भी माना कि, 'कंगना ने कुछ जरूरी मुद्दे उठाए. ' उन्होंने यह तक कहा कि, 'सब जानते हैं कि नेपोटिज्म बॉलीवुड इंडस्ट्री में मौजूद है और सुशांत को भी कुछ भेदभाव झेलना पड़ा होगा लेकिन नेपोटिज्म इस केस की जांच में सबसे अहम मुद्दे में शामिल नहीं है. सबसे अहम ये है कि कैसे रिया और उनके गैंग ने सुशांत को पूरी तरह से खत्म करने की साजिश की. '
सुशांत सिंह राजपूत केस में दिन पर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. ऐसे में यह केस अब सीबीआई को सौंप दिया गया है और रिया चक्रवर्ती समेत छः लोग फिलहाल स्कैनर में हैं. वहीँ आप इस बात से भी वाकिफ ही होंगे कि एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सुशांत के निधन के मामले में करण जौहर पर आरोप लगाया था और कहा था कि 'इंडस्ट्री में मौजूद नेपोटिज्म कल्चर और मूवी माफिया के चलते सुशांत की मौत हुई है. ' कंगना ने अब तक सुशांत केस में कई बातें की और उन्होंने दीपिका पादुकोण, महेश भट्ट, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, सलमान खान जैसे कई सितारों पर भी निशाना साधा. अब हाल ही में एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में सुशांत के फैमिली वकील विकास सिंह ने कहा है कि, 'कंगना के बयान महत्वपूर्ण नहीं हैं. ' उन्होंने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा कि, 'वे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं और उन लोगों पर हमला बोल रही हैं जिनके साथ वे अपने स्कोर सेटल करना चाहती हैं. ऐसा लगता है कि वे अपनी खुद की ही ट्रिप पर हैं. सुशांत के परिवार की एफआईआर और कंगना के दावों का कोई लेना देना नहीं है. ' वहीँ विकास सिंह ने यह भी माना कि, 'कंगना ने कुछ जरूरी मुद्दे उठाए. ' उन्होंने यह तक कहा कि, 'सब जानते हैं कि नेपोटिज्म बॉलीवुड इंडस्ट्री में मौजूद है और सुशांत को भी कुछ भेदभाव झेलना पड़ा होगा लेकिन नेपोटिज्म इस केस की जांच में सबसे अहम मुद्दे में शामिल नहीं है. सबसे अहम ये है कि कैसे रिया और उनके गैंग ने सुशांत को पूरी तरह से खत्म करने की साजिश की. '
डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन (Joe Biden) ने कहा है कि उनकी रनिंग मेट कमला हैरिस (Kamala Harris) राष्ट्र के लिए सशक्त आवाज के साथ 'महान उपराष्ट्रपति' बनेंगी। बाइडेन(Joe Biden) ने कहा, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि कमला(Kamala Harris) तेजतर्रार हैं। वह मजबूत हैं। उनके पास अनुभव है। वह इस देश के मध्यमवर्ग और मध्यम वर्ग की श्रेणी में आने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए एक सिद्ध योद्धा हैं। अमेरिका में कई भारतीय मूल के नेता सीनेटर बन चुके हैं लेकिन ये पहला मौका है जब भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस (Kamala Harris) उपराष्ट्रपति पद (Vice President) की उम्मीदवार बनी हैं। अमेरकिा में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने जैसे ही भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के रूप में अपनी पसंद बताया, सोशल मीडिया पर लोगों की खुशी साफ नजर आने लगी।
डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन ने कहा है कि उनकी रनिंग मेट कमला हैरिस राष्ट्र के लिए सशक्त आवाज के साथ 'महान उपराष्ट्रपति' बनेंगी। बाइडेन ने कहा, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि कमला तेजतर्रार हैं। वह मजबूत हैं। उनके पास अनुभव है। वह इस देश के मध्यमवर्ग और मध्यम वर्ग की श्रेणी में आने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए एक सिद्ध योद्धा हैं। अमेरिका में कई भारतीय मूल के नेता सीनेटर बन चुके हैं लेकिन ये पहला मौका है जब भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनी हैं। अमेरकिा में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने जैसे ही भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के रूप में अपनी पसंद बताया, सोशल मीडिया पर लोगों की खुशी साफ नजर आने लगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
राजस्थान के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष गर्ग ने कहा कि राज्य के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थान संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें। डा. गर्ग ने आज माणिक्य लाल वर्मा टेक्सटाईल एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय भीलवाड़ की शाषी परिषद, की आठवीं बैठक को संबोधित करते हुये कहा इससे सरकार की मंशानुरूप राज्य तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति होगी तथा युवाओं को रोजगार सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिये कि फेकल्टी चयन में गुणवत्ता मानकों का पूरा ध्यान रखा जावे एवं प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता रखते हुए नियमों की कड़ई से पालना सुनिश्चित हों। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सरकारी खरीद में लोक उपापन नियमों, मित्तव्ययता एवं पारदर्शिता की पूर्ण रूप से पालना की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षण संस्थाएं समाज के भामाशाहों को प्रेरित करें ताकि वे युवाओं की शिक्षा, तकनीकी कौशल एवं रोजगार एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देकर पुण्य कमाएं। इससे संस्थानों को जन-सहभागिता के साथ ही वित्तीय संबल मिलेगा और युवाओं के बहुआयामी विकास में भी मदद मिलेगी।
राजस्थान के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष गर्ग ने कहा कि राज्य के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थान संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें। डा. गर्ग ने आज माणिक्य लाल वर्मा टेक्सटाईल एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय भीलवाड़ की शाषी परिषद, की आठवीं बैठक को संबोधित करते हुये कहा इससे सरकार की मंशानुरूप राज्य तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति होगी तथा युवाओं को रोजगार सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिये कि फेकल्टी चयन में गुणवत्ता मानकों का पूरा ध्यान रखा जावे एवं प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता रखते हुए नियमों की कड़ई से पालना सुनिश्चित हों। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सरकारी खरीद में लोक उपापन नियमों, मित्तव्ययता एवं पारदर्शिता की पूर्ण रूप से पालना की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षण संस्थाएं समाज के भामाशाहों को प्रेरित करें ताकि वे युवाओं की शिक्षा, तकनीकी कौशल एवं रोजगार एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देकर पुण्य कमाएं। इससे संस्थानों को जन-सहभागिता के साथ ही वित्तीय संबल मिलेगा और युवाओं के बहुआयामी विकास में भी मदद मिलेगी।
मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कभी पोस्टर वार तो कभी उन्हें कुर्ता सिलवाने के लिये डिमांड ड्राफ्ट भेजने का एक न एक मामला सुर्ख़ियों में ज़रूर बना रहता है। अब ताज़ा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 700 रूपए के एक डिमांड ड्राफ्ट का है। अमेठीः मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कभी पोस्टर वार तो कभी उन्हें कुर्ता सिलवाने के लिये डिमांड ड्राफ्ट भेजने का एक न एक मामला सुर्ख़ियों में ज़रूर बना रहता है। अब ताज़ा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 700 रूपए के एक डिमांड ड्राफ्ट का है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के नाम जारी ये चेक उन्हें जैकेट परचेज़ करने के लिये भेजा गया है। डिमांड ड्राफ्ट न. 073535 है। जो राहुल गांधी के नाम एकाउंट पेई है। वैसे अमेठी में सियासत को गर्म करने वाले इस ड्राफ्ट की हक़ीक़त बस बैंक के नाम और एड्रेस से खुल गई है, कयास लगाया जा रहा है कि वायरल उक्त ड्राफ्ट एक प्राइवेट कम्पनी में जाब करने वाले गाजियाबाद निवासी मुकेश मित्तल द्वारा भेजा गया है। दरअसल पिछले वर्ष 17 जनवरी 2017 को भी मुकेश ने इसी बैंक की इसी शाखा से 100 रूपए का एक डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर राहुल गांधी को भेजा था। उन्होंंने ऐसा इसलिये किया था के इस क़दम उठाने से दो दिन पहले राहुल गांधी ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में प्रधानमंत्री मोदी के कपड़ों पर तंज कसते हुए अपना फटा कुर्ता जनता को दिखाया था। मुकेश मित्तल ने आम नागरिक की तरह राहुल गांधी के नाम चिट्ठी लिखी और फटा कुर्ता सिलवाने के लिए 100 रुपए डिमांड ड्राफ्ट भेजा था। उस वक़्त मुकेश कुमार मित्तल ने कहा था कि राहुल गांधी की दादी और पिता ने देश के लिए बलिदान दिया था और वो एक राष्ट्रीय पार्टी के उपाध्यक्ष है। ऐसे में उन्होंने अपना फटा हुआ कुर्ता पूरे देश को दिखाया, जिससे उन्हें पीड़ा हुई, इसलिए उन्होंने 100 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा था। आपको बता दें कि हाल ही में जनवरी 2018 में पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यहां अपने संसदीय क्षेत्र के दौर से ठीक एक दिन पहले दीवारों पर चस्पा पोस्टरों पर उन्हें राम का रूप दिया गया था, वही दूसरे दिन इसके जवाब में लापता सांसद का स्वागत है स्लोगन के पोस्टर यहां लगे थे। पिछले साल अगस्त महीने में भी राहुल के खिलाफ़ इसी तरह के पोस्टर लगे थे। अमेठी संसदीय क्षेत्र में जगह-जगह लगे इन पोस्टरों में राहुल गांधी को ढूंढ़कर लाने वाले को गिफ्ट देने की घोषणा की गई थी। पोस्टर को जारी करने वाले की जगह पर अमेठी की जनता लिखा था। अमेठी के जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने लगाए गए इस पोस्टर में लिखा था कि "माननीय सांसद श्री राहुल गांधी अमेठी से लापता हैं, जिसके कारण सांसद द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य इनके कार्यकाल में ठप हैं। " पोस्टर में लिखा था "राहुल गांधी के व्यवहार से अमेठी की आम जनता ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रही है। अमेठी में इनकी जानकारी देने वालों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा। " वैसे डिमांड ड्राफ्ट के मामले पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिलहाल अभी तक वायरल ड्राफ्ट को उन्होंंने अपनी आंखों से नहीं देखा है, उन्हें मीडिया के माध्यम से जानकारी हो रही है। और अगर ऐसा किसी ने किया है तो ये हमारे विरोंधियों की साजिश है और वो गुजरात के बाद से हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को हज़म नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन 2019 में देश की जनता ऐसे विरोंधियों को जवाब देगी।
मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कभी पोस्टर वार तो कभी उन्हें कुर्ता सिलवाने के लिये डिमांड ड्राफ्ट भेजने का एक न एक मामला सुर्ख़ियों में ज़रूर बना रहता है। अब ताज़ा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सात सौ रूपए के एक डिमांड ड्राफ्ट का है। अमेठीः मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कभी पोस्टर वार तो कभी उन्हें कुर्ता सिलवाने के लिये डिमांड ड्राफ्ट भेजने का एक न एक मामला सुर्ख़ियों में ज़रूर बना रहता है। अब ताज़ा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सात सौ रूपए के एक डिमांड ड्राफ्ट का है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के नाम जारी ये चेक उन्हें जैकेट परचेज़ करने के लिये भेजा गया है। डिमांड ड्राफ्ट न. तिहत्तर हज़ार पाँच सौ पैंतीस है। जो राहुल गांधी के नाम एकाउंट पेई है। वैसे अमेठी में सियासत को गर्म करने वाले इस ड्राफ्ट की हक़ीक़त बस बैंक के नाम और एड्रेस से खुल गई है, कयास लगाया जा रहा है कि वायरल उक्त ड्राफ्ट एक प्राइवेट कम्पनी में जाब करने वाले गाजियाबाद निवासी मुकेश मित्तल द्वारा भेजा गया है। दरअसल पिछले वर्ष सत्रह जनवरी दो हज़ार सत्रह को भी मुकेश ने इसी बैंक की इसी शाखा से एक सौ रूपए का एक डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर राहुल गांधी को भेजा था। उन्होंंने ऐसा इसलिये किया था के इस क़दम उठाने से दो दिन पहले राहुल गांधी ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में प्रधानमंत्री मोदी के कपड़ों पर तंज कसते हुए अपना फटा कुर्ता जनता को दिखाया था। मुकेश मित्तल ने आम नागरिक की तरह राहुल गांधी के नाम चिट्ठी लिखी और फटा कुर्ता सिलवाने के लिए एक सौ रुपयापए डिमांड ड्राफ्ट भेजा था। उस वक़्त मुकेश कुमार मित्तल ने कहा था कि राहुल गांधी की दादी और पिता ने देश के लिए बलिदान दिया था और वो एक राष्ट्रीय पार्टी के उपाध्यक्ष है। ऐसे में उन्होंने अपना फटा हुआ कुर्ता पूरे देश को दिखाया, जिससे उन्हें पीड़ा हुई, इसलिए उन्होंने एक सौ रुपयापए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा था। आपको बता दें कि हाल ही में जनवरी दो हज़ार अट्ठारह में पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यहां अपने संसदीय क्षेत्र के दौर से ठीक एक दिन पहले दीवारों पर चस्पा पोस्टरों पर उन्हें राम का रूप दिया गया था, वही दूसरे दिन इसके जवाब में लापता सांसद का स्वागत है स्लोगन के पोस्टर यहां लगे थे। पिछले साल अगस्त महीने में भी राहुल के खिलाफ़ इसी तरह के पोस्टर लगे थे। अमेठी संसदीय क्षेत्र में जगह-जगह लगे इन पोस्टरों में राहुल गांधी को ढूंढ़कर लाने वाले को गिफ्ट देने की घोषणा की गई थी। पोस्टर को जारी करने वाले की जगह पर अमेठी की जनता लिखा था। अमेठी के जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने लगाए गए इस पोस्टर में लिखा था कि "माननीय सांसद श्री राहुल गांधी अमेठी से लापता हैं, जिसके कारण सांसद द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य इनके कार्यकाल में ठप हैं। " पोस्टर में लिखा था "राहुल गांधी के व्यवहार से अमेठी की आम जनता ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रही है। अमेठी में इनकी जानकारी देने वालों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा। " वैसे डिमांड ड्राफ्ट के मामले पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिलहाल अभी तक वायरल ड्राफ्ट को उन्होंंने अपनी आंखों से नहीं देखा है, उन्हें मीडिया के माध्यम से जानकारी हो रही है। और अगर ऐसा किसी ने किया है तो ये हमारे विरोंधियों की साजिश है और वो गुजरात के बाद से हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को हज़म नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन दो हज़ार उन्नीस में देश की जनता ऐसे विरोंधियों को जवाब देगी।
यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड (University of Iceland) में प्रोफेसर बेनेडिक्ट हालडोरसन ने बताया कि शुक्रवार की सुबह छोड़कर यहां लगातार भूकंप (Earthquake) के झटके आ रहे हैं. ये झटके (Tremors) कब रुकेंगे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. भूकंप (Earthquake) का एक झटका ही दिलों को दहलाने के लिए काफी होता है लेकिन पिछले एक हफ्ते से उत्तरी अटलांटिक देश आइसलैंड (Atlantic Country Iceland) में दस हजार भूकंप (Ten Thousand earthquake) आ चुके हैं. ये झटके अभी भी जारी है. इन भूकंपों की तीव्रता रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर 5.7 मापी गई है. हालांकि इनमें किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है. यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड में प्रोफेसर बेनेडिक्ट हालडोरसन ने बताया कि शुक्रवार की सुबह छोड़कर यहां लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं. ये झटके कब रुकेंगे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. कोरोना के चलते ज्यादातर लोग अपने घरों पर ही हैं. झटकों के बाद लोग सावधान हो गए हैं. वो घरों में बिस्तर या कुर्सी के नीचे सिर छिपाकर अपनी जान बचा रहे हैं. बेनेडिक्ट ने बताया कि भूकंप के एक बड़े झटके के बाद हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं, जिन्हें 'ऑफ्टरशॉक्स' कहा जाता है. ऑफ्टरशॉक्स से जरिए जमीन के नीचे की ऊर्जा निकलती है. भूकंप की ये तीव्रता और इतने झटके किसी भी देश को उथल-पुथल कर सकते हैं लेकिन आइसलैंड के लिए ये प्राकृतिक आपदा अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. प्रोफेसर ने कहा कि ये भूकंप हमारे लिए अब आम बात है. हमारा देश एक भूकंप जोन में है लिहाजा हमें हमेशा भूकंप के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि भूकंप से बचने के तरीके हमारे स्कूलों के बच्चों के सिलेबस का हिस्सा है. हमारे देश में इमारतें दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा मजबूती से बनाई जाती हैं. नेशनल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ डेनमार्क एंड ग्रीनलैंड (GEUS) में सीनियर रिसर्चर ट्राइन दाल-जेंसन ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में भूकंप के झटके एक दुर्लभ घटना है. उन्होंने कहा कि यहां भूकंप आते रहते हैं लेकिन ये घटना वाकई चौंकाने वाली है. बता दें कि आइसलैंड में कई स्टेशन मौजूद हैं जिनसे भूकंप के झटके नापे जाते हैं. आइसलैंड जोन में दो महाद्वीपीय प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में जाती हैं. यहां एक 'रिफ्ट' नाम का दर्रा है, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड में प्रोफेसर बेनेडिक्ट हालडोरसन ने बताया कि शुक्रवार की सुबह छोड़कर यहां लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं. ये झटके कब रुकेंगे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. भूकंप का एक झटका ही दिलों को दहलाने के लिए काफी होता है लेकिन पिछले एक हफ्ते से उत्तरी अटलांटिक देश आइसलैंड में दस हजार भूकंप आ चुके हैं. ये झटके अभी भी जारी है. इन भूकंपों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर पाँच.सात मापी गई है. हालांकि इनमें किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है. यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड में प्रोफेसर बेनेडिक्ट हालडोरसन ने बताया कि शुक्रवार की सुबह छोड़कर यहां लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं. ये झटके कब रुकेंगे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. कोरोना के चलते ज्यादातर लोग अपने घरों पर ही हैं. झटकों के बाद लोग सावधान हो गए हैं. वो घरों में बिस्तर या कुर्सी के नीचे सिर छिपाकर अपनी जान बचा रहे हैं. बेनेडिक्ट ने बताया कि भूकंप के एक बड़े झटके के बाद हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं, जिन्हें 'ऑफ्टरशॉक्स' कहा जाता है. ऑफ्टरशॉक्स से जरिए जमीन के नीचे की ऊर्जा निकलती है. भूकंप की ये तीव्रता और इतने झटके किसी भी देश को उथल-पुथल कर सकते हैं लेकिन आइसलैंड के लिए ये प्राकृतिक आपदा अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. प्रोफेसर ने कहा कि ये भूकंप हमारे लिए अब आम बात है. हमारा देश एक भूकंप जोन में है लिहाजा हमें हमेशा भूकंप के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि भूकंप से बचने के तरीके हमारे स्कूलों के बच्चों के सिलेबस का हिस्सा है. हमारे देश में इमारतें दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा मजबूती से बनाई जाती हैं. नेशनल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ डेनमार्क एंड ग्रीनलैंड में सीनियर रिसर्चर ट्राइन दाल-जेंसन ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में भूकंप के झटके एक दुर्लभ घटना है. उन्होंने कहा कि यहां भूकंप आते रहते हैं लेकिन ये घटना वाकई चौंकाने वाली है. बता दें कि आइसलैंड में कई स्टेशन मौजूद हैं जिनसे भूकंप के झटके नापे जाते हैं. आइसलैंड जोन में दो महाद्वीपीय प्लेटें एक-दूसरे से विपरीत दिशा में जाती हैं. यहां एक 'रिफ्ट' नाम का दर्रा है, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.
गोस्वामी जी ने राम भक्ति को एक नए रूप में लोक के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने राम चरित्र का मंथन करके उसके भीतर से चार तत्त्व निकाले - कर्म, शील, शक्ति और सौन्दर्य । उन्होंने इन्हीं तत्त्वों को आधार मान कर राम की उस भक्ति का प्रचार किया, जिसमें लोक-कल्यारण की भावना मुख्य रूप से समाई हुई थी । गोस्वामी तुलसीदास जी ने उपरोक्त तत्त्वों को ही आधार मान कर अपने काव्य-ग्रन्थों की रचना भी की । इन्होंने 'श्रीरामचरित मानस' और 'विनय पत्रिका' आदि ग्रन्थों में राम की उस भक्ति का गुरगगान किया, जिसमें पीड़ा, दुःख, दरिद्र, और चारों के शमन की पूर्ण शक्ति थी । परिणामतः हिन्दू जनता राम-भक्ति की ओर आकर्षित हो उठी । क्योंकि उस समय उसे ऐसे ही ईश्वर की आवश्यकता थी, जिसकी भक्ति उसके जीवन में मंगल की वर्षा कर सके । राम-भक्ति के प्रचार और प्रसार का एक और भी कारण था । गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम-भक्ति को जिस रूप में सामने प्रस्तुत किया, उसमें न तो किसी के प्रति विरोध था, और न किसी के लिए मोह; दूसरे शब्दों में उसमें सबके प्रति आदर था, सबके प्रति निष्ठा थी । उसमें विष्णु के अवतार 'राम' के गुणगान की प्रधानता अवश्य थी, पर उसमें 'शिव' और 'दुर्गा' के लिए भी आदर था । उन्होंने अपने ग्रन्थों में बार-बार 'भक्ति' को प्रधानता अवश्य दी है, पर उन्होंने 'कर्म' और 'ज्ञान' का भी विरोध नहीं किया है । श्रीराम-भक्ति और गोस्वामी तुलसीदास जी का 'रामचरित मानस' - दोनों का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है। दोनों के प्रचार-प्रसार और सर्वप्रियता का यही रहस्य है, कि दोनों ने जन-जन को अपनाया है, भौर दोनों में जन-जन के कल्याण के लिए चिंता है । पूर्व मध्यकाल प्रमुख कविगोस्वामी तुलसीदास जी राम-भक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं । उनका जन्म संवत् १५५४ में बांदा जिलांतर्गत राजापुर में हुआ था । कुछ लोगों का कथन है कि उनका जन्म 'सोरों में हुआ था, और वे इसके लिए प्रमाण भी देते हैं । गोस्वामी जी के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी था । कहा जाता है कि गोस्वामी जी जब पैदा हुए थे, तो वे पाँच वर्ष के बालक के समान थे, और उनके मुँह में पूरे दाँत थे । इस लिए उनके माता-पिता ने उनका परित्याग कर दिया था । जो हो, यह तो सत्य है, कि गोस्वामी जी को बाल्यावस्था में अधिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ी थीं । वे भटकते-भटकते बाबा नरहरिदास के श्रम में पहुँचे। बाबा नरहरिदास जी ने ही उनका पालन-पोषण किया । सर्वप्रथम रामकथा भी गोस्वामी जी ने नरहरिदास जी से ही सुनी थी । कुछ वर्षों के पश्चात् गोस्वामी जी काशी चले गए । काशी में १५ वर्षों तक उन्होंने शेष सनातन नामक विद्वान् से वेद, वेदांग, शास्त्र, इतिहास और पुराणों का अध्ययन किया। तत्पश्चात् वे अपनी जन्मभूमि राजापुर लौट गए, और रत्नावली के साथ विवाह करके गृहस्थ का जीवन व्यतीत करने लगे । कहा जाता है, कि गोस्वामी जी की अपनी स्त्री के प्रति अधिक थी। एक दिन उनकी स्त्री उनकी अनुपस्थिति में अपने भाई के साथ पीहर चली गई । गोस्वामी जी को जब इस बात का पता लगा, तो वे भी तुरन्त ही वहाँ जा पहुँचे । इससे गोस्वामी जी की स्त्री को बड़ी व्यथा और लज्जा हुई । उसने निम्नांकित शब्दों में गोस्वामी जी को फटकार बताई
गोस्वामी जी ने राम भक्ति को एक नए रूप में लोक के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने राम चरित्र का मंथन करके उसके भीतर से चार तत्त्व निकाले - कर्म, शील, शक्ति और सौन्दर्य । उन्होंने इन्हीं तत्त्वों को आधार मान कर राम की उस भक्ति का प्रचार किया, जिसमें लोक-कल्यारण की भावना मुख्य रूप से समाई हुई थी । गोस्वामी तुलसीदास जी ने उपरोक्त तत्त्वों को ही आधार मान कर अपने काव्य-ग्रन्थों की रचना भी की । इन्होंने 'श्रीरामचरित मानस' और 'विनय पत्रिका' आदि ग्रन्थों में राम की उस भक्ति का गुरगगान किया, जिसमें पीड़ा, दुःख, दरिद्र, और चारों के शमन की पूर्ण शक्ति थी । परिणामतः हिन्दू जनता राम-भक्ति की ओर आकर्षित हो उठी । क्योंकि उस समय उसे ऐसे ही ईश्वर की आवश्यकता थी, जिसकी भक्ति उसके जीवन में मंगल की वर्षा कर सके । राम-भक्ति के प्रचार और प्रसार का एक और भी कारण था । गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम-भक्ति को जिस रूप में सामने प्रस्तुत किया, उसमें न तो किसी के प्रति विरोध था, और न किसी के लिए मोह; दूसरे शब्दों में उसमें सबके प्रति आदर था, सबके प्रति निष्ठा थी । उसमें विष्णु के अवतार 'राम' के गुणगान की प्रधानता अवश्य थी, पर उसमें 'शिव' और 'दुर्गा' के लिए भी आदर था । उन्होंने अपने ग्रन्थों में बार-बार 'भक्ति' को प्रधानता अवश्य दी है, पर उन्होंने 'कर्म' और 'ज्ञान' का भी विरोध नहीं किया है । श्रीराम-भक्ति और गोस्वामी तुलसीदास जी का 'रामचरित मानस' - दोनों का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है। दोनों के प्रचार-प्रसार और सर्वप्रियता का यही रहस्य है, कि दोनों ने जन-जन को अपनाया है, भौर दोनों में जन-जन के कल्याण के लिए चिंता है । पूर्व मध्यकाल प्रमुख कविगोस्वामी तुलसीदास जी राम-भक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं । उनका जन्म संवत् एक हज़ार पाँच सौ चौवन में बांदा जिलांतर्गत राजापुर में हुआ था । कुछ लोगों का कथन है कि उनका जन्म 'सोरों में हुआ था, और वे इसके लिए प्रमाण भी देते हैं । गोस्वामी जी के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी था । कहा जाता है कि गोस्वामी जी जब पैदा हुए थे, तो वे पाँच वर्ष के बालक के समान थे, और उनके मुँह में पूरे दाँत थे । इस लिए उनके माता-पिता ने उनका परित्याग कर दिया था । जो हो, यह तो सत्य है, कि गोस्वामी जी को बाल्यावस्था में अधिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ी थीं । वे भटकते-भटकते बाबा नरहरिदास के श्रम में पहुँचे। बाबा नरहरिदास जी ने ही उनका पालन-पोषण किया । सर्वप्रथम रामकथा भी गोस्वामी जी ने नरहरिदास जी से ही सुनी थी । कुछ वर्षों के पश्चात् गोस्वामी जी काशी चले गए । काशी में पंद्रह वर्षों तक उन्होंने शेष सनातन नामक विद्वान् से वेद, वेदांग, शास्त्र, इतिहास और पुराणों का अध्ययन किया। तत्पश्चात् वे अपनी जन्मभूमि राजापुर लौट गए, और रत्नावली के साथ विवाह करके गृहस्थ का जीवन व्यतीत करने लगे । कहा जाता है, कि गोस्वामी जी की अपनी स्त्री के प्रति अधिक थी। एक दिन उनकी स्त्री उनकी अनुपस्थिति में अपने भाई के साथ पीहर चली गई । गोस्वामी जी को जब इस बात का पता लगा, तो वे भी तुरन्त ही वहाँ जा पहुँचे । इससे गोस्वामी जी की स्त्री को बड़ी व्यथा और लज्जा हुई । उसने निम्नांकित शब्दों में गोस्वामी जी को फटकार बताई
आज यहां हम उन बदलावों के बारे में बात करेंगे जो इन दोनों ही स्थितियों में महिलएं अपने ब्रेस्ट में अनुभव करती हैं। कुछ महिलाओं के लिए यह स्थिति दर्द बढ़ानेवाली होती है तो कुछ महिलाओं को तो रेस्ट की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे में उन्हें अपनी हेल्थ को अनदेखा नहीं करना चाहिए और अपने आराम को प्राथमिकता देनी चाहिए। -जरूरी नहीं है कि हर महिला को और हर बार पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट में दर्द हो या हेवीनेस हो। लेकिन यह एक बहुत ही सामान्य लक्षण है, जो महिलाओं में पीरिड्स के पहले और पीरियड्स के दौरान देखने को मिलता है। -ऐसा शरीर में होनेवाले हॉर्मोनल चेंजेज के कारण होता है। खासतौर पर इस दौरान महिलाओं के शरीर में इस स्थिति के लिए प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन जिम्मेदार होता है। यह हॉर्मोन शरीर के अंदर वॉटर रिटेंशन का काम करता है। आप इसे पानी होल्ड करने की कैपिसिटी से समझ सकते हैं। -प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन के कारण ही शरीर में स्वेलिंग और भारीपन का अहसास होता है। इसलिए कुछ महिलाओं को पीरियड्स के कुछ दिन पहले या इस दौरान ऐसा महसूस होता है कि उनका ब्रेस्ट साइज बढ़ गया है या उन्होंने वेट गेन कर लिया है। -प्रेग्नेसी के दौरान महिलाओं के ब्रेस्ट में बहुत सारे बदलाव हो रहे होते हैं। इनमें मिल्क ग्लैंड्स, मिल्क डक्ट्स का बनना एरिओला और निप्पल के साइज का बढ़ जाना मुख्य रूप से शामिल हैं। Infertility In Men: पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ाने का यह है कारगर तरीका! - ब्रेस्ट साइज में चेंज और टेंडरनेस को लेकर यह बात जान लें कि यह जरूरी नहीं है कि ऐसा हर गर्भवती महिला के साथ हो। यह सबकी अपनी-अपनी बॉडी पर निर्भर करता है। प्रेग्नेंसी में निंपल और एरिओला का रंग पहले की तुलना में काफी डार्क हो जाता है। ऐसा बॉडी में पिग्मेंटेशन बढ़ने के कारण होता है। -इस दौरान कंफर्ट का ध्यान रखते हुए महिलाओं को अपने नए साइज के हिसाब से इनर्स का चुनाव करना चाहिए। ताकि अतिरिक्त खिंचाव के कारण दर्द ना बढ़े। साथ ही शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सामान्य बना रहे। एक्सपर्टः यह आर्टिकल डॉक्टर सोनिया चावला से बातचीत पर आधारित है। ये गाइनोकॉलजिक लेप्रोस्कोपिक सर्जन हैं और पिछले 8 साल से इस फील्ड में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ये रेजॉइस गाइनी लेप्रोस्कोपिक सेंटर, दिल्ली में कार्यरत हैं और आप इनसे मिलने के लिए 011-26261352 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
आज यहां हम उन बदलावों के बारे में बात करेंगे जो इन दोनों ही स्थितियों में महिलएं अपने ब्रेस्ट में अनुभव करती हैं। कुछ महिलाओं के लिए यह स्थिति दर्द बढ़ानेवाली होती है तो कुछ महिलाओं को तो रेस्ट की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे में उन्हें अपनी हेल्थ को अनदेखा नहीं करना चाहिए और अपने आराम को प्राथमिकता देनी चाहिए। -जरूरी नहीं है कि हर महिला को और हर बार पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट में दर्द हो या हेवीनेस हो। लेकिन यह एक बहुत ही सामान्य लक्षण है, जो महिलाओं में पीरिड्स के पहले और पीरियड्स के दौरान देखने को मिलता है। -ऐसा शरीर में होनेवाले हॉर्मोनल चेंजेज के कारण होता है। खासतौर पर इस दौरान महिलाओं के शरीर में इस स्थिति के लिए प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन जिम्मेदार होता है। यह हॉर्मोन शरीर के अंदर वॉटर रिटेंशन का काम करता है। आप इसे पानी होल्ड करने की कैपिसिटी से समझ सकते हैं। -प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन के कारण ही शरीर में स्वेलिंग और भारीपन का अहसास होता है। इसलिए कुछ महिलाओं को पीरियड्स के कुछ दिन पहले या इस दौरान ऐसा महसूस होता है कि उनका ब्रेस्ट साइज बढ़ गया है या उन्होंने वेट गेन कर लिया है। -प्रेग्नेसी के दौरान महिलाओं के ब्रेस्ट में बहुत सारे बदलाव हो रहे होते हैं। इनमें मिल्क ग्लैंड्स, मिल्क डक्ट्स का बनना एरिओला और निप्पल के साइज का बढ़ जाना मुख्य रूप से शामिल हैं। Infertility In Men: पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ाने का यह है कारगर तरीका! - ब्रेस्ट साइज में चेंज और टेंडरनेस को लेकर यह बात जान लें कि यह जरूरी नहीं है कि ऐसा हर गर्भवती महिला के साथ हो। यह सबकी अपनी-अपनी बॉडी पर निर्भर करता है। प्रेग्नेंसी में निंपल और एरिओला का रंग पहले की तुलना में काफी डार्क हो जाता है। ऐसा बॉडी में पिग्मेंटेशन बढ़ने के कारण होता है। -इस दौरान कंफर्ट का ध्यान रखते हुए महिलाओं को अपने नए साइज के हिसाब से इनर्स का चुनाव करना चाहिए। ताकि अतिरिक्त खिंचाव के कारण दर्द ना बढ़े। साथ ही शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सामान्य बना रहे। एक्सपर्टः यह आर्टिकल डॉक्टर सोनिया चावला से बातचीत पर आधारित है। ये गाइनोकॉलजिक लेप्रोस्कोपिक सर्जन हैं और पिछले आठ साल से इस फील्ड में अपनी सेवाएं दे रही हैं। ये रेजॉइस गाइनी लेप्रोस्कोपिक सेंटर, दिल्ली में कार्यरत हैं और आप इनसे मिलने के लिए ग्यारह-दो करोड़ बासठ लाख इकसठ हज़ार तीन सौ बावन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
भौतिक आधारिक संरचना के लिए परिदप्रेक्ष्य योजनाएं पी. के. त्रिपाठी आई.ए.एस प्रमुख कार्यपालक अधिकारी श्री मधुकर गुप्ता, आई.ए.एस. दिल्ली विकास प्राधिकरण विकास सदन, आई.एन.ए. नई दिल्ली कृपया दिल्ली के लिए आधारिक संरचना सेवाओं की परिप्रेक्ष्य योजना - 2021 के संबंध में अपना डी.ओ. संख्या डीआईआर / एमपीडी-2021 / डीडीए / एफ-298 / 898 - ई पी दिनाँक 7 अक्तूबर, 2003 देखें। जल आपूर्ति के संबंध में दिल्ली के लिए आधारिक संरचना सेवाओं की परिप्रेक्ष्य योजना-2021" इसके साथ संलग्न है। इस योजना को तैयार करते समय दिल्ली जल बोर्ड ने विशेष अधिकारियों, एम पी डी 2021, डी.डी.ए., केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड की राय को और जहां संभव हुआ है वहां जल आपूर्ति के क्षेत्र में विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए अध्ययनों के निष्कर्षों को ध्यान में रखा है। संलग्न : उपर्युक्त अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार * वरूणालय फेज-II ई-मेल : eeodjb@bolnet.in डी.ओ. संख्या डीजेबी / सीईओ / 2004/5880 दिनाँक 28-4-04 (पी. के. त्रिपाठी)
भौतिक आधारिक संरचना के लिए परिदप्रेक्ष्य योजनाएं पी. के. त्रिपाठी आई.ए.एस प्रमुख कार्यपालक अधिकारी श्री मधुकर गुप्ता, आई.ए.एस. दिल्ली विकास प्राधिकरण विकास सदन, आई.एन.ए. नई दिल्ली कृपया दिल्ली के लिए आधारिक संरचना सेवाओं की परिप्रेक्ष्य योजना - दो हज़ार इक्कीस के संबंध में अपना डी.ओ. संख्या डीआईआर / एमपीडी-दो हज़ार इक्कीस / डीडीए / एफ-दो सौ अट्ठानवे / आठ सौ अट्ठानवे - ई पी दिनाँक सात अक्तूबर, दो हज़ार तीन देखें। जल आपूर्ति के संबंध में दिल्ली के लिए आधारिक संरचना सेवाओं की परिप्रेक्ष्य योजना-दो हज़ार इक्कीस" इसके साथ संलग्न है। इस योजना को तैयार करते समय दिल्ली जल बोर्ड ने विशेष अधिकारियों, एम पी डी दो हज़ार इक्कीस, डी.डी.ए., केन्द्रीय भूमिगत जल बोर्ड की राय को और जहां संभव हुआ है वहां जल आपूर्ति के क्षेत्र में विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए अध्ययनों के निष्कर्षों को ध्यान में रखा है। संलग्न : उपर्युक्त अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार * वरूणालय फेज-II ई-मेल : eeodjb@bolnet.in डी.ओ. संख्या डीजेबी / सीईओ / दो हज़ार चार/पाँच हज़ार आठ सौ अस्सी दिनाँक अट्ठाईस अप्रैल चार
पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के इस शहर में एक प्राचीन हिंदू मंदिर को मरम्मत के नाम पर गुपचुप तरीके से ध्वस्त किया जा रहा। इस जमीन पर एक कर्मिशयल प्लाजा बनने वाला है। इलाके के बाशिंदों ने बताया कि यह मंदिर पेशावर के करीमपुरा में स्थित है। इसे मरम्मत के नाम पर ध्वस्त किया जा रहा। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया करीब 10 दिन पहले शुरू हुई थी और यह बगैर किसी बाधा के आगे बढ़ रही है। एक बाशिंदे ने कहा, 'एक धरोहर ढांचे को ढहाने का आपराधिक कार्य शुरू किया जा रहा है। वहां एक कमर्शियल प्लाजा बनाने के लिए मंदिर को ध्वस्त किया जा रहा है और किसी भी सरकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एक अन्य ने 'द न्यूज' को बताया कि एक ओर तो वे प्राचीन इमारत को ध्वस्त कर रहे हैं, दूसरी ओर पूरी तरह से एक रिहाइशी इलाके में कर्मिशयल प्लाजा बनाने वाले हैं। सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने एक बयान में कहा है कि पाकिस्तान के हर बड़े शहर की यही दर्दनाक कहानी है।
पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के इस शहर में एक प्राचीन हिंदू मंदिर को मरम्मत के नाम पर गुपचुप तरीके से ध्वस्त किया जा रहा। इस जमीन पर एक कर्मिशयल प्लाजा बनने वाला है। इलाके के बाशिंदों ने बताया कि यह मंदिर पेशावर के करीमपुरा में स्थित है। इसे मरम्मत के नाम पर ध्वस्त किया जा रहा। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया करीब दस दिन पहले शुरू हुई थी और यह बगैर किसी बाधा के आगे बढ़ रही है। एक बाशिंदे ने कहा, 'एक धरोहर ढांचे को ढहाने का आपराधिक कार्य शुरू किया जा रहा है। वहां एक कमर्शियल प्लाजा बनाने के लिए मंदिर को ध्वस्त किया जा रहा है और किसी भी सरकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एक अन्य ने 'द न्यूज' को बताया कि एक ओर तो वे प्राचीन इमारत को ध्वस्त कर रहे हैं, दूसरी ओर पूरी तरह से एक रिहाइशी इलाके में कर्मिशयल प्लाजा बनाने वाले हैं। सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने एक बयान में कहा है कि पाकिस्तान के हर बड़े शहर की यही दर्दनाक कहानी है।
आर के पुरम निवासी दास ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह पिछले छह-सात साल से पीड़िता के पिता का दोस्त है और अक्सर उनके घर आता रहता था। दास ने कहा कि उसने अपने दोस्त से वादा किया था कि वह उसकी बेटी को एक उपयुक्त नौकरी दिलाने में मदद करेगा। नई दिल्लीःदिल्ली पुलिस ने दोस्त की नाबालिग बेटी से बलात्कार के आरोपी 60 वर्षीय व्यक्ति को दो महीने की खोज के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि आरोपी की पहचान एक सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी (एसीआईओ- ग्रेड II) कैलाश कुमार लाल दास के रूप में हुई है, जो उप-निरीक्षक के समान दर्जा रखता है। आर के पुरम निवासी दास ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह पिछले छह-सात साल से पीड़िता के पिता का दोस्त है और अक्सर उनके घर आता रहता था। दास ने कहा कि उसने अपने दोस्त से वादा किया था कि वह उसकी बेटी को एक उपयुक्त नौकरी दिलाने में मदद करेगा। उसकी बातों पर विश्वास कर नाबालिग लड़की का पिता सात मार्च को उसे दास के पास मोती बाग मेट्रो स्टेशन के निकट छोड़ गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बाद में, आरोपी लालच देकर नाबालिग लड़की को मध्य दिल्ली के करोल बाग के एक होटल में ले गया, जहां उसने कथित तौर पर लड़की को धमकाया और उससे बलात्कार किया। पीड़िता ने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती सुनाई जिसके बाद करोल बाग पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया और दो महीने की खोजबीन के बाद आरोपी दास को गिरफ्तार कर लिया गया।
आर के पुरम निवासी दास ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह पिछले छह-सात साल से पीड़िता के पिता का दोस्त है और अक्सर उनके घर आता रहता था। दास ने कहा कि उसने अपने दोस्त से वादा किया था कि वह उसकी बेटी को एक उपयुक्त नौकरी दिलाने में मदद करेगा। नई दिल्लीःदिल्ली पुलिस ने दोस्त की नाबालिग बेटी से बलात्कार के आरोपी साठ वर्षीय व्यक्ति को दो महीने की खोज के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि आरोपी की पहचान एक सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी कैलाश कुमार लाल दास के रूप में हुई है, जो उप-निरीक्षक के समान दर्जा रखता है। आर के पुरम निवासी दास ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह पिछले छह-सात साल से पीड़िता के पिता का दोस्त है और अक्सर उनके घर आता रहता था। दास ने कहा कि उसने अपने दोस्त से वादा किया था कि वह उसकी बेटी को एक उपयुक्त नौकरी दिलाने में मदद करेगा। उसकी बातों पर विश्वास कर नाबालिग लड़की का पिता सात मार्च को उसे दास के पास मोती बाग मेट्रो स्टेशन के निकट छोड़ गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बाद में, आरोपी लालच देकर नाबालिग लड़की को मध्य दिल्ली के करोल बाग के एक होटल में ले गया, जहां उसने कथित तौर पर लड़की को धमकाया और उससे बलात्कार किया। पीड़िता ने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती सुनाई जिसके बाद करोल बाग पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छिहत्तर और पाँच सौ छः के तहत मामला दर्ज किया गया और दो महीने की खोजबीन के बाद आरोपी दास को गिरफ्तार कर लिया गया।
तिरुवनंतपुरम। केरल उच्च न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशि थरूर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस संबंध में शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि एलियास जॉन नाम के एक व्यक्ति ने थरूर के 2014 के निर्वाचन को यह कहते हुए चुनौती दी कि उन्होंने प्रचार अभियान के दौरान वर्ष 2009-14 के बीच की अपनी उपलब्धियों को लेकर जो दावे किए थे, उनमें से कई गलत थे। लेकिन न्यायालय इस मामले में थरूर के जवाब से संतुष्ट हुआ और उसने याचिका खारिज कर दी। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
तिरुवनंतपुरम। केरल उच्च न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशि थरूर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस संबंध में शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि एलियास जॉन नाम के एक व्यक्ति ने थरूर के दो हज़ार चौदह के निर्वाचन को यह कहते हुए चुनौती दी कि उन्होंने प्रचार अभियान के दौरान वर्ष दो हज़ार नौ-चौदह के बीच की अपनी उपलब्धियों को लेकर जो दावे किए थे, उनमें से कई गलत थे। लेकिन न्यायालय इस मामले में थरूर के जवाब से संतुष्ट हुआ और उसने याचिका खारिज कर दी। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
जंगली भैंसे से भिड़ने से पहले क्यों सोचते हैं शेर, ये VIDEO है उसका जवाब! VIRAL: कुत्ते को टहलाता नजर आया ड्रोन, वीडियो देख लोग बोले- गजब है यार..! पेड़ पर लटके टायर पर झूलता दिखा बंदर, लोग बोले- 'जिंदगी का मजा तो ये ले रहा है' चूजों संग बंदे को खेलना पड़ा भारी, मां हंस ने सिखाया ऐसा सबक कि याद आ गई नानी! मुकेश अंबानी के बच्चों को नहीं मिलती ₹1 की भी सैलरी, आखिर क्या है वजह?
जंगली भैंसे से भिड़ने से पहले क्यों सोचते हैं शेर, ये VIDEO है उसका जवाब! VIRAL: कुत्ते को टहलाता नजर आया ड्रोन, वीडियो देख लोग बोले- गजब है यार..! पेड़ पर लटके टायर पर झूलता दिखा बंदर, लोग बोले- 'जिंदगी का मजा तो ये ले रहा है' चूजों संग बंदे को खेलना पड़ा भारी, मां हंस ने सिखाया ऐसा सबक कि याद आ गई नानी! मुकेश अंबानी के बच्चों को नहीं मिलती एक रुपया की भी सैलरी, आखिर क्या है वजह?
Jawa 90th Anniversary Edition launched in India: जावा 90वीं एनिवर्सरी एडिशन को नए स्पेशल क्लासिक कलर से रंगा गया है जो 1929 मॉडल जावा 500 OHV मोटरसाइकल के डार्क रैड और क्रीम कलर कॉम्बिनेशन में होगा। पिछले साल भारतीय बाजार वापसी करने वाली क्लासिक लेजेंड्स कंपनी Jawa मोटरसाइकिल जल्द ही Jawa 90th Anniversary एडिशन मोटरसाइकिल लॉन्च करने जा रही है। भारत में यह बाइक जावा के 90वीं वर्षगांठ पर लॉन्च होगी। जिसकी एक्सशो रूम कीमत 1. 73 लाख निर्धारित की गई है। बता दें कि जावा 90वीं एनिवर्सरी एडिशन को नए स्पेशल क्लासिक कलर से रंगा गया है जो 1929 मॉडल जावा 500 OHV मोटरसाइकल के डार्क रैड और क्रीम कलर कॉम्बिनेशन में होगा। कंपनी देश में महज 90 बाइक्स की ही देश में बिक्री करेगी। लिमिटेड एडिशन मॉडल कंपनी की जावा स्टैंडर्ड पर बेस्ड होगी और इसमें कुछ एक्सक्लूजिव पेंट स्कीम्स दी जाएगी। इसके अलावा इसके फ्यूल टैंक पर 90वीं वर्षगांठ का स्टिकर भी लगाया जाएगा। कस्टमर इसे खरीदने के लिए 22 अक्टूबर 2019 से पहले बुकिंग कर सकते हैं। बाइक के फीचर्स की बात करें तो इसमें 293 cc सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड मोटर इंजन देगी, जो कि 26 bhp की पावर और 28 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन 6-स्पीड गियरबॉक्स से लैस है। बाइक के फ्रंट में टेलिस्कॉपिक फॉर्क्स और रियर में डुअल शॉक्स एब्जॉर्बर दिए जाएंगे।
Jawa नब्बेth Anniversary Edition launched in India: जावा नब्बेवीं एनिवर्सरी एडिशन को नए स्पेशल क्लासिक कलर से रंगा गया है जो एक हज़ार नौ सौ उनतीस मॉडल जावा पाँच सौ OHV मोटरसाइकल के डार्क रैड और क्रीम कलर कॉम्बिनेशन में होगा। पिछले साल भारतीय बाजार वापसी करने वाली क्लासिक लेजेंड्स कंपनी Jawa मोटरसाइकिल जल्द ही Jawa नब्बेth Anniversary एडिशन मोटरसाइकिल लॉन्च करने जा रही है। भारत में यह बाइक जावा के नब्बेवीं वर्षगांठ पर लॉन्च होगी। जिसकी एक्सशो रूम कीमत एक. तिहत्तर लाख निर्धारित की गई है। बता दें कि जावा नब्बेवीं एनिवर्सरी एडिशन को नए स्पेशल क्लासिक कलर से रंगा गया है जो एक हज़ार नौ सौ उनतीस मॉडल जावा पाँच सौ OHV मोटरसाइकल के डार्क रैड और क्रीम कलर कॉम्बिनेशन में होगा। कंपनी देश में महज नब्बे बाइक्स की ही देश में बिक्री करेगी। लिमिटेड एडिशन मॉडल कंपनी की जावा स्टैंडर्ड पर बेस्ड होगी और इसमें कुछ एक्सक्लूजिव पेंट स्कीम्स दी जाएगी। इसके अलावा इसके फ्यूल टैंक पर नब्बेवीं वर्षगांठ का स्टिकर भी लगाया जाएगा। कस्टमर इसे खरीदने के लिए बाईस अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस से पहले बुकिंग कर सकते हैं। बाइक के फीचर्स की बात करें तो इसमें दो सौ तिरानवे cc सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड मोटर इंजन देगी, जो कि छब्बीस bhp की पावर और अट्ठाईस Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इंजन छः-स्पीड गियरबॉक्स से लैस है। बाइक के फ्रंट में टेलिस्कॉपिक फॉर्क्स और रियर में डुअल शॉक्स एब्जॉर्बर दिए जाएंगे।
जीति शास्त्र का अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध संरक्षण राष्ट्र के ही द्वारा होता है। अतः नीति-शास्त्र का राजनीति विज्ञान से • सम्बन्ध है । नीति शास्त्र तथा राजनीति विज्ञान दोनों मानव-चरित्र और व्यवहार का जाति विज्ञान के रूप में विचार करते हैं। दोनों के लक्ष्य मनुष्य के हित साधन हैं । दोनों मनुष्यों के आचार को सामाजिक सम्बन्धों में निर्धारित होने वाला और निर्धारित करने वाले के रूप में विचार करते हैं । परन्तु नीति- विज्ञान व राजनीति विज्ञान परस्पर शाखा नहीं हैं । नीति शास्त्र व राजनीति विज्ञान के मध्य महत्वपूर्ण अंतर है। उनके मानदण्ड भिन्न-भिन्न हैं । नीति शास्त्र का मान-दण्ड नैतिक पूर्णता है, जब कि राजनीतिविज्ञान का लोकोपयोगिता है। राजनीति विज्ञान का लक्ष्य जनता का कल्याण है । नीति शास्त्र का लक्ष्य व्यक्ति का नैतिक उत्कर्ष है । नीति-शास्त्र का ध्येय है धर्म या नैतिक उत्कर्ष, राजनीति विज्ञान का ध्येय समाज कल्याण या लाभ है। राजनैतिक नियमों को दण्ड के भय से लागू किया जाता है। राजनैतिक नियमों के उल्लंघन का परिणाम दण्ड होता है, परन्तु नैतिक नियमों का पालन ऐच्छिक स्वीकृति से होता है। राज्य का अन्तिम अवलम्बन बल प्रयोग है। नैतिकता संकल्प की स्वाधीनता पर आधारित है। बल प्रयोग से नैतिकता नष्ट हो जाती है । राजनैतिक नियमों को राष्ट्र बाहर से लादता है, नैतिक नियमों को आत्मा स्वतः अपने ऊपर लादती है । राजनीति विज्ञान वाह्य वस्तु विषयक विज्ञान है, नीति-शास्त्र अन्तर विषयक विज्ञान है। राजनीति विज्ञान जन हित सम्बन्धी, मनुष्य की बाह्य क्रियाओं का विचार करता है, किन्तु नीति-शास्त्र आन्तरिक प्रवृत्तियों और अभिप्रायों का उनको अभिव्यक्त करने वाले कार्यों सहित विचार करता है। कानून व्यवहार के वाह्य परिणामों से अथवा कार्यों के आन्तरिक अभिप्रायों से सम्पर्क रखता है, जबकि नीति-शास्त्र और अधिक गहराई में उतरकर प्रेरणाओं तथा अभिप्रायों पर भी विचार करता है । नीति-शास्त्र मानस प्रेरणाओं से लेकर दूसरों को प्रभावित करने वाले स्थूल व्यवहार तक का विचार करता है। राजनीति विज्ञान व्यक्ति के आन्तरिक जीवन को अछूता छोड़ देता है। कानून बनाकर मनुष्य को नैतिक नहीं बनाया जा सकता । कानून के भय से अनैतिक कार्य न करने वाला नैतिक पुरुष नहीं है । नीति शास्त्र व्यवहार के आन्तरिक पक्ष से कार्य का विचार करता है; राजनीति विज्ञान वाह्य पक्ष से कार्य करता है । राजनीति विज्ञान का सम्बन्ध सामूहिक मन से है, यह मानव-कर्मों से समूह पर पड़ने वाले प्रभावों का विचार करता है। नीति-शास्त्र स्वयं अपने लिये नैतिक -मूल्य रखने वाले वैयक्तिक मन का विचार करता है। राजनीति विज्ञान का लक्ष्य जनहित है। नीति शास्त्र का लक्ष्य व्यक्तिगत हित है। इसका ध्येय मनुष्य का परम कल्याण है ।
जीति शास्त्र का अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध संरक्षण राष्ट्र के ही द्वारा होता है। अतः नीति-शास्त्र का राजनीति विज्ञान से • सम्बन्ध है । नीति शास्त्र तथा राजनीति विज्ञान दोनों मानव-चरित्र और व्यवहार का जाति विज्ञान के रूप में विचार करते हैं। दोनों के लक्ष्य मनुष्य के हित साधन हैं । दोनों मनुष्यों के आचार को सामाजिक सम्बन्धों में निर्धारित होने वाला और निर्धारित करने वाले के रूप में विचार करते हैं । परन्तु नीति- विज्ञान व राजनीति विज्ञान परस्पर शाखा नहीं हैं । नीति शास्त्र व राजनीति विज्ञान के मध्य महत्वपूर्ण अंतर है। उनके मानदण्ड भिन्न-भिन्न हैं । नीति शास्त्र का मान-दण्ड नैतिक पूर्णता है, जब कि राजनीतिविज्ञान का लोकोपयोगिता है। राजनीति विज्ञान का लक्ष्य जनता का कल्याण है । नीति शास्त्र का लक्ष्य व्यक्ति का नैतिक उत्कर्ष है । नीति-शास्त्र का ध्येय है धर्म या नैतिक उत्कर्ष, राजनीति विज्ञान का ध्येय समाज कल्याण या लाभ है। राजनैतिक नियमों को दण्ड के भय से लागू किया जाता है। राजनैतिक नियमों के उल्लंघन का परिणाम दण्ड होता है, परन्तु नैतिक नियमों का पालन ऐच्छिक स्वीकृति से होता है। राज्य का अन्तिम अवलम्बन बल प्रयोग है। नैतिकता संकल्प की स्वाधीनता पर आधारित है। बल प्रयोग से नैतिकता नष्ट हो जाती है । राजनैतिक नियमों को राष्ट्र बाहर से लादता है, नैतिक नियमों को आत्मा स्वतः अपने ऊपर लादती है । राजनीति विज्ञान वाह्य वस्तु विषयक विज्ञान है, नीति-शास्त्र अन्तर विषयक विज्ञान है। राजनीति विज्ञान जन हित सम्बन्धी, मनुष्य की बाह्य क्रियाओं का विचार करता है, किन्तु नीति-शास्त्र आन्तरिक प्रवृत्तियों और अभिप्रायों का उनको अभिव्यक्त करने वाले कार्यों सहित विचार करता है। कानून व्यवहार के वाह्य परिणामों से अथवा कार्यों के आन्तरिक अभिप्रायों से सम्पर्क रखता है, जबकि नीति-शास्त्र और अधिक गहराई में उतरकर प्रेरणाओं तथा अभिप्रायों पर भी विचार करता है । नीति-शास्त्र मानस प्रेरणाओं से लेकर दूसरों को प्रभावित करने वाले स्थूल व्यवहार तक का विचार करता है। राजनीति विज्ञान व्यक्ति के आन्तरिक जीवन को अछूता छोड़ देता है। कानून बनाकर मनुष्य को नैतिक नहीं बनाया जा सकता । कानून के भय से अनैतिक कार्य न करने वाला नैतिक पुरुष नहीं है । नीति शास्त्र व्यवहार के आन्तरिक पक्ष से कार्य का विचार करता है; राजनीति विज्ञान वाह्य पक्ष से कार्य करता है । राजनीति विज्ञान का सम्बन्ध सामूहिक मन से है, यह मानव-कर्मों से समूह पर पड़ने वाले प्रभावों का विचार करता है। नीति-शास्त्र स्वयं अपने लिये नैतिक -मूल्य रखने वाले वैयक्तिक मन का विचार करता है। राजनीति विज्ञान का लक्ष्य जनहित है। नीति शास्त्र का लक्ष्य व्यक्तिगत हित है। इसका ध्येय मनुष्य का परम कल्याण है ।
स्वतंत्रता कठिन परिभाषा की एक अमूर्त अवधारणा है; सिद्धांत रूप में, यह संकाय से जुड़ा हुआ है कि प्रत्येक जीवित व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार कार्रवाई करनी होगी । अठारहवीं शताब्दी से, न्याय और समानता जैसे अन्य संकायों या गुणों में स्वतंत्रता शामिल होने लगी। यह सामाजिक परिवर्तन समाज के संगठन के नए रूपों के विकास और पहले से अप्रकाशित राजनीतिक शासन के उद्भव के साथ था। एक स्वतंत्र होने के लिए दूसरों की इच्छा के साथ जबरदस्ती नहीं की जाती है । स्वतंत्रता व्यक्तिगत इच्छा के लिए सम्मान की गारंटी देती है और इसका मतलब है कि प्रत्येक को अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार होना चाहिए। यह स्वतंत्रता को पूर्ण स्वतंत्रता के रूप में जाना जाता है, जो अनिवार्य रूप से सामाजिक अशांति की ओर ले जाता है। उदाहरण के लिएः एक व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का उपयोग व्यवसाय बनाने और प्राप्त करने के लिए कर सकता है, व्यावसायिक गतिविधि के माध्यम से, संसाधन जो उसे जीवित रहने की अनुमति देते हैं। हालाँकि, यह स्वतंत्रता, कानून द्वारा सीमित है, जो आपको उन उत्पादों को बेचने से रोकती है जो आवश्यकताओं की एक श्रृंखला को पूरा नहीं करते हैं और जो आपको करों का भुगतान करने के लिए बाध्य करते हैं। ये दोष, स्पष्टीकरण पर, विषय की इच्छा से अधिक; हालाँकि, जिस तरह से मनुष्य हमारे जीवन को व्यवस्थित करते हैं, वह उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ प्रयास नहीं करता है। यह सबूत में एक बहुत ही विशेष प्रश्न छोड़ देता हैः कोई पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है। इस संबंध में, विभिन्न पद हैं, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं है जो एक ही समय में हमारे नैतिक और नैतिक सिद्धांतों को बनाए रखने की संभावना सुनिश्चित करता है कि हम अपने अदृश्य अवरोधों के साथ टूटते हैं और हर कदम पर पूरी आसानी से कार्य करते हैं। उन कोड में, हमारी प्रजातियों द्वारा आविष्कार किया गया, स्वतंत्रता की सीमा के कारण (कई अकाट्य द्वारा) का निवास करता है। उदाहरण के लिए तीन निषेधों को लें, जिन्हें अधिकांश लोग मानते हैं कि हम समझते हैं, कि हम उचित और उचित के रूप में स्वीकार करते हैंः हम वह नहीं ले सकते जो दूसरों का है; हम अपने माता-पिता या भाई-बहनों के साथ यौन संबंध नहीं बना सकते; हम दूसरे इंसान को नहीं मार सकते। चोरी और हत्या प्रत्येक देश के कानूनों द्वारा दंडनीय अपराध हैं, और अनाचार को अलग-अलग तरीकों से देखा जा सकता है, लेकिन हम अपनी संस्कृति में जिस नैतिकता का जवाब देते हैं, वह बताता है कि यह कुछ घृणित और अप्राकृतिक है, कुछ हम कभी नहीं करेंगे । हम पूर्ण स्वतंत्रता का आनंद नहीं लेते हैं क्योंकि हम उस आराम को पसंद करते हैं जो किसी को हमारे जीवन को व्यवस्थित करने और हमारी रक्षा करने से आता है। यदि एक भेड़िया अपने नेता से मांस का एक टुकड़ा छीनने की कोशिश करता है, तो यह उसे याद दिलाएगा कि वह पैक में उस स्थान पर क्यों रहता है; दूसरी ओर, मानव इस प्रकार की स्थिति को एक न्याय प्रणाली को सौंपता है, वही जिसे हम नकारात्मक रूप से आलोचना करते हैं जब हमें इसकी आवश्यकता नहीं होती है। स्वतंत्रता की सीमाओं के इस विचार के विपरीत होने की कोशिश करते हुए, हम यह सोच सकते हैं कि इसमें उन मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, जो इसकी परिभाषा में शामिल नहीं हैं, क्योंकि यह किसी भी ऐसे कार्य को स्वीकार नहीं करता है जो किसी अन्य जीवित व्यक्ति को परेशान करता है या जो नैतिकता की दीवारों को पार करता है, जो प्रत्येक राष्ट्र के पास है सदियों के लिए उठाया। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्रता एक अवधारणा नहीं है जिसे हम ग्रह की बाकी प्रजातियों के साथ साझा करते हैं, लेकिन यह हमारा आविष्कार है और, यदि हम चाहें, तो हम विश्वास दिला सकते हैं कि हम सभी बिल्कुल स्वतंत्र हैं। दूसरी ओर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्य द्वारा संरक्षित होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति दूसरों की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित नहीं कर सकता है; अन्यथा, सक्षम अधिकारियों को जिम्मेदार पार्टी को दंडित करने के लिए कार्य करना चाहिए। स्वतंत्रता का एक और विश्लेषण मनोवैज्ञानिक या आध्यात्मिक सवालों से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता का सार, एक निश्चित तरीके से, कभी भी प्रभावित नहीं हो सकता है क्योंकि यह प्रत्येक जीवित प्राणी के भीतर मौजूद है; कोई भी अन्य चीजों को सोचने या महसूस करने से रोक नहीं सकता है।
स्वतंत्रता कठिन परिभाषा की एक अमूर्त अवधारणा है; सिद्धांत रूप में, यह संकाय से जुड़ा हुआ है कि प्रत्येक जीवित व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार कार्रवाई करनी होगी । अठारहवीं शताब्दी से, न्याय और समानता जैसे अन्य संकायों या गुणों में स्वतंत्रता शामिल होने लगी। यह सामाजिक परिवर्तन समाज के संगठन के नए रूपों के विकास और पहले से अप्रकाशित राजनीतिक शासन के उद्भव के साथ था। एक स्वतंत्र होने के लिए दूसरों की इच्छा के साथ जबरदस्ती नहीं की जाती है । स्वतंत्रता व्यक्तिगत इच्छा के लिए सम्मान की गारंटी देती है और इसका मतलब है कि प्रत्येक को अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार होना चाहिए। यह स्वतंत्रता को पूर्ण स्वतंत्रता के रूप में जाना जाता है, जो अनिवार्य रूप से सामाजिक अशांति की ओर ले जाता है। उदाहरण के लिएः एक व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का उपयोग व्यवसाय बनाने और प्राप्त करने के लिए कर सकता है, व्यावसायिक गतिविधि के माध्यम से, संसाधन जो उसे जीवित रहने की अनुमति देते हैं। हालाँकि, यह स्वतंत्रता, कानून द्वारा सीमित है, जो आपको उन उत्पादों को बेचने से रोकती है जो आवश्यकताओं की एक श्रृंखला को पूरा नहीं करते हैं और जो आपको करों का भुगतान करने के लिए बाध्य करते हैं। ये दोष, स्पष्टीकरण पर, विषय की इच्छा से अधिक; हालाँकि, जिस तरह से मनुष्य हमारे जीवन को व्यवस्थित करते हैं, वह उनकी स्वतंत्रता के खिलाफ प्रयास नहीं करता है। यह सबूत में एक बहुत ही विशेष प्रश्न छोड़ देता हैः कोई पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है। इस संबंध में, विभिन्न पद हैं, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं है जो एक ही समय में हमारे नैतिक और नैतिक सिद्धांतों को बनाए रखने की संभावना सुनिश्चित करता है कि हम अपने अदृश्य अवरोधों के साथ टूटते हैं और हर कदम पर पूरी आसानी से कार्य करते हैं। उन कोड में, हमारी प्रजातियों द्वारा आविष्कार किया गया, स्वतंत्रता की सीमा के कारण का निवास करता है। उदाहरण के लिए तीन निषेधों को लें, जिन्हें अधिकांश लोग मानते हैं कि हम समझते हैं, कि हम उचित और उचित के रूप में स्वीकार करते हैंः हम वह नहीं ले सकते जो दूसरों का है; हम अपने माता-पिता या भाई-बहनों के साथ यौन संबंध नहीं बना सकते; हम दूसरे इंसान को नहीं मार सकते। चोरी और हत्या प्रत्येक देश के कानूनों द्वारा दंडनीय अपराध हैं, और अनाचार को अलग-अलग तरीकों से देखा जा सकता है, लेकिन हम अपनी संस्कृति में जिस नैतिकता का जवाब देते हैं, वह बताता है कि यह कुछ घृणित और अप्राकृतिक है, कुछ हम कभी नहीं करेंगे । हम पूर्ण स्वतंत्रता का आनंद नहीं लेते हैं क्योंकि हम उस आराम को पसंद करते हैं जो किसी को हमारे जीवन को व्यवस्थित करने और हमारी रक्षा करने से आता है। यदि एक भेड़िया अपने नेता से मांस का एक टुकड़ा छीनने की कोशिश करता है, तो यह उसे याद दिलाएगा कि वह पैक में उस स्थान पर क्यों रहता है; दूसरी ओर, मानव इस प्रकार की स्थिति को एक न्याय प्रणाली को सौंपता है, वही जिसे हम नकारात्मक रूप से आलोचना करते हैं जब हमें इसकी आवश्यकता नहीं होती है। स्वतंत्रता की सीमाओं के इस विचार के विपरीत होने की कोशिश करते हुए, हम यह सोच सकते हैं कि इसमें उन मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, जो इसकी परिभाषा में शामिल नहीं हैं, क्योंकि यह किसी भी ऐसे कार्य को स्वीकार नहीं करता है जो किसी अन्य जीवित व्यक्ति को परेशान करता है या जो नैतिकता की दीवारों को पार करता है, जो प्रत्येक राष्ट्र के पास है सदियों के लिए उठाया। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्रता एक अवधारणा नहीं है जिसे हम ग्रह की बाकी प्रजातियों के साथ साझा करते हैं, लेकिन यह हमारा आविष्कार है और, यदि हम चाहें, तो हम विश्वास दिला सकते हैं कि हम सभी बिल्कुल स्वतंत्र हैं। दूसरी ओर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्य द्वारा संरक्षित होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति दूसरों की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित नहीं कर सकता है; अन्यथा, सक्षम अधिकारियों को जिम्मेदार पार्टी को दंडित करने के लिए कार्य करना चाहिए। स्वतंत्रता का एक और विश्लेषण मनोवैज्ञानिक या आध्यात्मिक सवालों से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता का सार, एक निश्चित तरीके से, कभी भी प्रभावित नहीं हो सकता है क्योंकि यह प्रत्येक जीवित प्राणी के भीतर मौजूद है; कोई भी अन्य चीजों को सोचने या महसूस करने से रोक नहीं सकता है।
छठ पूजा की शुरुआत दो दिन पहले चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है, फिर पंचमी को लोहंडा खरना होता है. जिसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है. जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है. दिवाली के बाद अब छठ पूजा की बारी है. जी हां इस साल छठ पूजा 20 नवंबर के दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. छठ पूजा सूर्य देव की आराधना तथा संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए मनाई जाती है. इस त्योहार को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. जहां छठ पूजा का व्रत 18 तारीख से नहाय - खाय के दिन शुरू होगा. जिसके बाद इसे छठ पूजा के दिन सूर्योदय अर्घ्य के बाद खोला जाएगा. छठ पूजा की शुरुआत दो दिन पहले चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है, फिर पंचमी को लोहंडा-खरना होता है. जिसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है. जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है. इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है. बता दें, तिथि के अनुसार, छठ पूजा 4 दिनों की होती है. आइए जानते हैं इन 4 दिनों में क्या होता है खास. छठ पूजा की शुरुआत चतुर्थी तिथि से होती है. ये छठ पूजा सबसे पहला दिन होता है. इस दिन नहाय - खाय होता है. इस साल नहाय - खाय 18 नवंबर के दिन बुधवार को पड़ेगा. जहां इस दिन सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्योस्त शाम को 05:26 पर होगा. लोहंडा और खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है. ये कार्तिक माद के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है. इस वर्ष लोहंडा और खरना 19 नवंबर दिन गुरुवार को है. इस दिन सूर्योदय सुबह 06:47 बजे होगा और सूर्योस्त शाम को 05:26 पर होगा. छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है. इस दिन छठ पूजा होती है. इस दिन शाम को सूर्य को दिया जाता है. इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर को है. सूर्यादय 06:48 बजे पर होगा और सूर्योस्त 05:26 बजे होना है. छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारम्भ 19 नवबंर को रात 09:59 बजे से हो रहा है, जो 20 नवंबर को रात 09:29 बजे तक है. छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मॉस के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है. इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है. उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है, इस वर्ष छठ पूजा का सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण 21 नवंबर को होगा. इस दिन सूर्योदय सुबह 06:49 बजे तथा सूर्योस्त शाम को 05:25 बजे होगा.
छठ पूजा की शुरुआत दो दिन पहले चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है, फिर पंचमी को लोहंडा खरना होता है. जिसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है. जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है. दिवाली के बाद अब छठ पूजा की बारी है. जी हां इस साल छठ पूजा बीस नवंबर के दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. छठ पूजा सूर्य देव की आराधना तथा संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए मनाई जाती है. इस त्योहार को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. जहां छठ पूजा का व्रत अट्ठारह तारीख से नहाय - खाय के दिन शुरू होगा. जिसके बाद इसे छठ पूजा के दिन सूर्योदय अर्घ्य के बाद खोला जाएगा. छठ पूजा की शुरुआत दो दिन पहले चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होती है, फिर पंचमी को लोहंडा-खरना होता है. जिसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है. जिसमें सूर्य देव को शाम का अर्घ्य अर्पित किया जाता है. इसके बाद अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय के समय में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को पूरा किया जाता है. बता दें, तिथि के अनुसार, छठ पूजा चार दिनों की होती है. आइए जानते हैं इन चार दिनों में क्या होता है खास. छठ पूजा की शुरुआत चतुर्थी तिथि से होती है. ये छठ पूजा सबसे पहला दिन होता है. इस दिन नहाय - खाय होता है. इस साल नहाय - खाय अट्ठारह नवंबर के दिन बुधवार को पड़ेगा. जहां इस दिन सूर्योदय सुबह छः:छियालीस बजे और सूर्योस्त शाम को पाँच:छब्बीस पर होगा. लोहंडा और खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है. ये कार्तिक माद के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है. इस वर्ष लोहंडा और खरना उन्नीस नवंबर दिन गुरुवार को है. इस दिन सूर्योदय सुबह छः:सैंतालीस बजे होगा और सूर्योस्त शाम को पाँच:छब्बीस पर होगा. छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है. इस दिन छठ पूजा होती है. इस दिन शाम को सूर्य को दिया जाता है. इस वर्ष छठ पूजा बीस नवंबर को है. सूर्यादय छः:अड़तालीस बजे पर होगा और सूर्योस्त पाँच:छब्बीस बजे होना है. छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारम्भ उन्नीस नवबंर को रात नौ:उनसठ बजे से हो रहा है, जो बीस नवंबर को रात नौ:उनतीस बजे तक है. छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मॉस के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है. इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है. उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है, इस वर्ष छठ पूजा का सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण इक्कीस नवंबर को होगा. इस दिन सूर्योदय सुबह छः:उनचास बजे तथा सूर्योस्त शाम को पाँच:पच्चीस बजे होगा.
NAWADA : नवादा के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के बाघी बरडीहा मोड़ के समीप दर्दनाक सड़क हादसे में एम्बुलेंस चालक की मौत हो गई. एम्बुलेंस चालक दीपावली की छुट्टी में अपने परिवार से मिलने अपने गांव जा रहा था. मृत चालक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भोला बीघा निवासी अजय यादव के रूप में हुई है. इस घटना के बाद से चालक के घर में सबका रो-रोकर बुरा हाल है. घटना के संबंध में एम्बुलेंस चालक के पिता कुलपति यादव ने बताया कि मृतक अजय कुमार गया में एंबुलेंस चलाने का काम करता है. दिवाली में अपने परिवार और बच्चों के साथ दीपावली मनाने के लिए छुट्टी लेकर घर आया था. मंगलवार को वह अपने किसी परिवार से मिलने पकरीबरामा गया था. तभी घर लौटने के दौरान ट्रैक्टर ने उसे धक्का मार दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. धक्का मरने के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से ट्रैक्टर लेकर फरार हो गया. वहीँ सही वक्त पर इलाज न मिलने के कारण अजय की मौत हो गई. इस घटना के मृतक की पत्नी और दो बेटी की रो-रोकर बुरा हाल है.
NAWADA : नवादा के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के बाघी बरडीहा मोड़ के समीप दर्दनाक सड़क हादसे में एम्बुलेंस चालक की मौत हो गई. एम्बुलेंस चालक दीपावली की छुट्टी में अपने परिवार से मिलने अपने गांव जा रहा था. मृत चालक की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भोला बीघा निवासी अजय यादव के रूप में हुई है. इस घटना के बाद से चालक के घर में सबका रो-रोकर बुरा हाल है. घटना के संबंध में एम्बुलेंस चालक के पिता कुलपति यादव ने बताया कि मृतक अजय कुमार गया में एंबुलेंस चलाने का काम करता है. दिवाली में अपने परिवार और बच्चों के साथ दीपावली मनाने के लिए छुट्टी लेकर घर आया था. मंगलवार को वह अपने किसी परिवार से मिलने पकरीबरामा गया था. तभी घर लौटने के दौरान ट्रैक्टर ने उसे धक्का मार दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. धक्का मरने के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से ट्रैक्टर लेकर फरार हो गया. वहीँ सही वक्त पर इलाज न मिलने के कारण अजय की मौत हो गई. इस घटना के मृतक की पत्नी और दो बेटी की रो-रोकर बुरा हाल है.
यह बात हम सभी जानते है कि घुंघराले बाल वैसे तो दिखने में काफी अच्छे लगते हैं, लेकिन इन्हें संभालना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इन्हें खास ध्यान देने की जरूरत पड़ती है और यदि इनकी देखभाल अच्छे से की जाए, तो इनसे आपके व्यक्तित्व को एक अलग ही लुक मिलता है। स्ट्रीक्स प्रोफेश्नल की नेशनल टेक्निकल हेड एग्नेस चेन ने ऐसे ही कुछ खास टिप्स दिए हैं जिन्हें अपनाकर अपने घुंघराले बालों का बखूबी ध्यान रखा जा सकता है। अपने घुंघराले बालों के हिसाब से एक उपयुक्त शैम्पू, कंडीशनर और सीरम का चुनाव करें। अतिरिक्त पोषण और कंडीशनिंग को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें जिसमें थोड़ा गाढ़ापन हो। घुंघराले बालों को अधिक नमी की आवश्यकता होती है, क्योंकि हमारे सिर की त्वचा या स्कैल्प से जो तेल निकलता है, वह बालों तक सही से पहुंच नहीं पाते हैं और यही वजह है जिसके चलते घुंघराले बाल ज्यादा उलझे हुए और बेजान होते हैं। बालों की डीप कंडीशनिंग को अपनी आदत बना लें। घुंघराले बालों के लिए मिल्क क्रीम कंडीशनर भी काफी फायदेमंद हो सकता है। बालों की जड़ों या बीच में से कंघी कभी न करें। इससे बाल और भी ज्यादा टूटने लगते हैं और दोमुंहे बालों की भी समस्या पैदा हो जाती है। बालों को हमेशा पहले नीचे की ओर से कंघी करें और धीरे-धीरे ऐसे ही जड़ों तक जाए। घुंघराले बालों की देखभाल ऐसे ही की जानी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि घुंघराले बालों में आसानी से उलझने और बेजान होने की प्रवृत्ति होती है, क्योंकि स्कैल्प से उत्पन्न नैचुरल ऑयल बालों तक पूरी तरह से पहुंच नहीं पाते हैं, ऐसे में ऑयल-बेस्ड कंडीशनर जैसे कि कोकोनट ऑयल, आर्गन ऑयल इत्यादि के साथ अपने बालों की गहराई से कंडीशनिंग करें। घुंघराले बाल काफी संवेदनशील होते हैं, ऐसे में इन्हें सुखाने के लिए ब्लो डायर्स, डिफ्यूजर्स इत्यादि का उपयोग न करें। इनके अलावा स्टाइलिंग उत्पाद जैसे कि स्प्रे या जेल का भी इस्तेमाल करने से बचें, इससे बाल और भी जल्दी खराब हो जाते हैं। बेहतर परिणाम के लिए टी-शर्ट की मदद से बालों को कुछ देर के लिए टैप करें और उन्हें स्वाभाविक रूप से सूखने दें और स्टाइलिंग के लिए हल्के से कोई तेल छिड़क दें। रात में सोने से पहले बालों को ऊपर की ओर अच्छे से जुड़ा बना लें। अगर बाल छोटे हैं, तो सैटिन हेयर रैप पहनकर गहरी नींद लें।
यह बात हम सभी जानते है कि घुंघराले बाल वैसे तो दिखने में काफी अच्छे लगते हैं, लेकिन इन्हें संभालना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इन्हें खास ध्यान देने की जरूरत पड़ती है और यदि इनकी देखभाल अच्छे से की जाए, तो इनसे आपके व्यक्तित्व को एक अलग ही लुक मिलता है। स्ट्रीक्स प्रोफेश्नल की नेशनल टेक्निकल हेड एग्नेस चेन ने ऐसे ही कुछ खास टिप्स दिए हैं जिन्हें अपनाकर अपने घुंघराले बालों का बखूबी ध्यान रखा जा सकता है। अपने घुंघराले बालों के हिसाब से एक उपयुक्त शैम्पू, कंडीशनर और सीरम का चुनाव करें। अतिरिक्त पोषण और कंडीशनिंग को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें जिसमें थोड़ा गाढ़ापन हो। घुंघराले बालों को अधिक नमी की आवश्यकता होती है, क्योंकि हमारे सिर की त्वचा या स्कैल्प से जो तेल निकलता है, वह बालों तक सही से पहुंच नहीं पाते हैं और यही वजह है जिसके चलते घुंघराले बाल ज्यादा उलझे हुए और बेजान होते हैं। बालों की डीप कंडीशनिंग को अपनी आदत बना लें। घुंघराले बालों के लिए मिल्क क्रीम कंडीशनर भी काफी फायदेमंद हो सकता है। बालों की जड़ों या बीच में से कंघी कभी न करें। इससे बाल और भी ज्यादा टूटने लगते हैं और दोमुंहे बालों की भी समस्या पैदा हो जाती है। बालों को हमेशा पहले नीचे की ओर से कंघी करें और धीरे-धीरे ऐसे ही जड़ों तक जाए। घुंघराले बालों की देखभाल ऐसे ही की जानी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि घुंघराले बालों में आसानी से उलझने और बेजान होने की प्रवृत्ति होती है, क्योंकि स्कैल्प से उत्पन्न नैचुरल ऑयल बालों तक पूरी तरह से पहुंच नहीं पाते हैं, ऐसे में ऑयल-बेस्ड कंडीशनर जैसे कि कोकोनट ऑयल, आर्गन ऑयल इत्यादि के साथ अपने बालों की गहराई से कंडीशनिंग करें। घुंघराले बाल काफी संवेदनशील होते हैं, ऐसे में इन्हें सुखाने के लिए ब्लो डायर्स, डिफ्यूजर्स इत्यादि का उपयोग न करें। इनके अलावा स्टाइलिंग उत्पाद जैसे कि स्प्रे या जेल का भी इस्तेमाल करने से बचें, इससे बाल और भी जल्दी खराब हो जाते हैं। बेहतर परिणाम के लिए टी-शर्ट की मदद से बालों को कुछ देर के लिए टैप करें और उन्हें स्वाभाविक रूप से सूखने दें और स्टाइलिंग के लिए हल्के से कोई तेल छिड़क दें। रात में सोने से पहले बालों को ऊपर की ओर अच्छे से जुड़ा बना लें। अगर बाल छोटे हैं, तो सैटिन हेयर रैप पहनकर गहरी नींद लें।
उसी अन्य प्रकार के उपन्यास के आधार पर नहीं । (६) अन्तरङ्ग जीवन के उपन्यास संकुचित प्रादेशिक सीमा में पात्रों के व्यक्तिगत सुख-दुखः से रंजित एक स्मृतिपटलमात्र बना देने के साधन होते हैं। काल के प्रवाह में पड़े हुए पात्र का चित्र अंकित करते हुए ऐसे उपन्यास मानवजीवन का निसर्गसिद्ध रूप दिखाया करते हैं । (ग) - आख्यायिका आज का युग कार्य-संकुल युग है । मनोविनोद की आवश्य का भी निसर्गसिद्ध है। मनुष्य कार्य भी करना चाहता है और भनोविनोद भी । इसलिए युग प्रवृत्ति ने मनोविनोद के नये-नये. विन्तु अल्प समय में पूरे होने चाले, कई साधन निकाल लिये हैं । जबसे मनोविनोद ने मानव स्वभाव में स्थान पाया है, एक तरह से तो, कहानी या श्राख्यायिका का भी जन्म तभी से मानना चाहिए । मनुष्य स्वयं एक कहानी है, कहानी से उसे इसी कारण बुद्धि के विकास के साथ २ राग भी उत्पन्न होजाता है, परन्तु आख्यायिका का आधुनिक रूप कुछ लोग कहते हैं चंगालियों की 'गल्प' का अनुकरण है। इसीसे कहानी का पर्याय भी 'गल्प' को मान बैठे है । हगारा अपना निजी विचार है कि कहानी का अपना एक स्वतंत्र स्थान सदा से रहा है चाहे रूपों में परिवर्तन होता रहे, चहानी रहेगी सदा हो । यह कहानी जब विस्तार लेती है जीवन के समूचे क्षेत्र तक फैलकर 'उपन्यास' कहलाने लगती है, और जब उपन्यास संकोच करलेता है त्तव जीवन के किसी एक क्षेत्र में आख्यायिका कहलाने लगता है। इस संकोच-विस्तार की
उसी अन्य प्रकार के उपन्यास के आधार पर नहीं । अन्तरङ्ग जीवन के उपन्यास संकुचित प्रादेशिक सीमा में पात्रों के व्यक्तिगत सुख-दुखः से रंजित एक स्मृतिपटलमात्र बना देने के साधन होते हैं। काल के प्रवाह में पड़े हुए पात्र का चित्र अंकित करते हुए ऐसे उपन्यास मानवजीवन का निसर्गसिद्ध रूप दिखाया करते हैं । - आख्यायिका आज का युग कार्य-संकुल युग है । मनोविनोद की आवश्य का भी निसर्गसिद्ध है। मनुष्य कार्य भी करना चाहता है और भनोविनोद भी । इसलिए युग प्रवृत्ति ने मनोविनोद के नये-नये. विन्तु अल्प समय में पूरे होने चाले, कई साधन निकाल लिये हैं । जबसे मनोविनोद ने मानव स्वभाव में स्थान पाया है, एक तरह से तो, कहानी या श्राख्यायिका का भी जन्म तभी से मानना चाहिए । मनुष्य स्वयं एक कहानी है, कहानी से उसे इसी कारण बुद्धि के विकास के साथ दो राग भी उत्पन्न होजाता है, परन्तु आख्यायिका का आधुनिक रूप कुछ लोग कहते हैं चंगालियों की 'गल्प' का अनुकरण है। इसीसे कहानी का पर्याय भी 'गल्प' को मान बैठे है । हगारा अपना निजी विचार है कि कहानी का अपना एक स्वतंत्र स्थान सदा से रहा है चाहे रूपों में परिवर्तन होता रहे, चहानी रहेगी सदा हो । यह कहानी जब विस्तार लेती है जीवन के समूचे क्षेत्र तक फैलकर 'उपन्यास' कहलाने लगती है, और जब उपन्यास संकोच करलेता है त्तव जीवन के किसी एक क्षेत्र में आख्यायिका कहलाने लगता है। इस संकोच-विस्तार की
इस लिस्ट में आपको रिमोट कंट्रोल वाले सीलिंग फैन भी मिल रहे हैं। यह कमरे को भी मॉडर्न लुक दे सकते हैं। Polycab Eteri BLDC 5 Star Rated 1200 mm High Speed Ceiling Fan : Crompton Energion Riviera Energy Efficient BLDC Ceiling Fan : Orient Electric Hector Energy Efficient BLDC Motor Ceiling Fan : Bajaj Energos 26 5 Star Rated BLDC Ceiling Fan : V-Guard Ecowind Neo BLDC Motor Ceiling Fan : नोट : Electronics Store से अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
इस लिस्ट में आपको रिमोट कंट्रोल वाले सीलिंग फैन भी मिल रहे हैं। यह कमरे को भी मॉडर्न लुक दे सकते हैं। Polycab Eteri BLDC पाँच Star Rated एक हज़ार दो सौ मिलीमीटर High Speed Ceiling Fan : Crompton Energion Riviera Energy Efficient BLDC Ceiling Fan : Orient Electric Hector Energy Efficient BLDC Motor Ceiling Fan : Bajaj Energos छब्बीस पाँच Star Rated BLDC Ceiling Fan : V-Guard Ecowind Neo BLDC Motor Ceiling Fan : नोट : Electronics Store से अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
(बदरीनाथ मंदिर की फाइल फोटो, फोटो क्रेडिट-रवि कैंतुरा) Dehradun: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अपनी विभिन्न परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जे, लीज पर काबिज लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. बीकेटीसी की ओर से ऐसे 188 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. बीकेटीसी की कार्रवाई के बाद इस वर्ष अब तक बकायेदारों से 22 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है. बीकेटीसी की प्रदेश के अलावा देश के कुछ अन्य राज्यों में भी अलग-अलग परिसंपत्तियां हैं, जिनमें कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जा है उनके मामलों की सुनवाई न्यायालयों में विचाराधीन हैं. कुछ संपत्तियां बीकेटीसी की ओर से किराये पर दी गई हैं. साथ ही कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके साथ कोई अनुबंध नहीं हुआ है और वे लंबे समय से अनाधिकृत रूप से मंदिर की संपत्तियों पर काबिज हैं और वे किराये का भुगतान भी नहीं कर रहे हैं. कई लोगों की किराया राशि वर्तमान बाजार दरों के अनुसार संशोधित भी नहीं की हुई हैं. बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय की ओर से मंदिर की संपत्तियों का लेखा-जोखा तैयार कराया गया. उन्होंने बकायेदारों से वसूली के लिए निर्देश जारी किए हैं. पिछले एक वर्ष में बकायेदारों से 22 लाख रुपये की वसूली भी की गई है. बीकेटीसी ने ऐसे 188 लोगों को चिन्हित किया है, जो लंबे समय से मंदिर की सम्पत्ति पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं और जिन्होंने किराये का भुगतान नहीं किया है. यहां यह उल्लेखनीय है कि बीकेटीसी आठ संस्कृत कॉलेज, एक संस्कृत विश्वविद्यालय और 22 धर्मशालाओं का संचालन करता है. पिछले वर्ष यानी 2022 में बीकेटीसी को करीब 60 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला था. कोरोनाकाल से पहले वर्ष 2019 में ये चढ़ावा 44 करोड़ रुपये का था.
Dehradun: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपनी विभिन्न परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जे, लीज पर काबिज लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. बीकेटीसी की ओर से ऐसे एक सौ अठासी लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. बीकेटीसी की कार्रवाई के बाद इस वर्ष अब तक बकायेदारों से बाईस लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है. बीकेटीसी की प्रदेश के अलावा देश के कुछ अन्य राज्यों में भी अलग-अलग परिसंपत्तियां हैं, जिनमें कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जा है उनके मामलों की सुनवाई न्यायालयों में विचाराधीन हैं. कुछ संपत्तियां बीकेटीसी की ओर से किराये पर दी गई हैं. साथ ही कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके साथ कोई अनुबंध नहीं हुआ है और वे लंबे समय से अनाधिकृत रूप से मंदिर की संपत्तियों पर काबिज हैं और वे किराये का भुगतान भी नहीं कर रहे हैं. कई लोगों की किराया राशि वर्तमान बाजार दरों के अनुसार संशोधित भी नहीं की हुई हैं. बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय की ओर से मंदिर की संपत्तियों का लेखा-जोखा तैयार कराया गया. उन्होंने बकायेदारों से वसूली के लिए निर्देश जारी किए हैं. पिछले एक वर्ष में बकायेदारों से बाईस लाख रुपये की वसूली भी की गई है. बीकेटीसी ने ऐसे एक सौ अठासी लोगों को चिन्हित किया है, जो लंबे समय से मंदिर की सम्पत्ति पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं और जिन्होंने किराये का भुगतान नहीं किया है. यहां यह उल्लेखनीय है कि बीकेटीसी आठ संस्कृत कॉलेज, एक संस्कृत विश्वविद्यालय और बाईस धर्मशालाओं का संचालन करता है. पिछले वर्ष यानी दो हज़ार बाईस में बीकेटीसी को करीब साठ करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला था. कोरोनाकाल से पहले वर्ष दो हज़ार उन्नीस में ये चढ़ावा चौंतालीस करोड़ रुपये का था.
लखनऊ। शहर में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए लखनऊ जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बड़ा निर्णय लिया है। डीएम अभिषेक ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अब अस्पतालों में बिना अनुमति मेडिकल व पैरा मेडिकल कर्मी छुट्टïी नहीं ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में मेडिकलकर्मी कार्यरत हो या सरकारी में, कोविड-19 की सेवा में आवश्यकता पडऩे पर उसे अस्पताल में हाजिर होना पड़ेगा। विशेष रूप से किसी भी प्रकार के कोविड अस्पतालों में कार्यरत कर्मियों के प्रकरण में सेवा छोडऩे, अवकाश लेने अथवा अनुपस्थिति के समस्त प्रकरणों में सक्षम स्तर से पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि संशय की स्थिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से परामर्श करना पड़ेगा। सीएमओ ही अंतिम निर्णय लेंगे कि अगर छुटï्टी जरूरी है तो ही मिलेगी। अन्यथा बेवजह अनुपस्थिति रहने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते अस्पतालों के डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी छुट्टïी लेने के तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने इस बात को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार मिश्र के अनुसार बुधवार और गुरुवार दो दिन कलेक्ट्रेट बंद रहेगा। इस दो दिन कलेक्ट्रेट परिसर सहित कार्यालय के सभी कक्षों का सेनेटाइजेशन कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा कलेक्ट्रेट में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। लखनऊ। कोरोना काल में नगर निगम कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जोन पांच के बंगला बाजार में सेनेटाइजेशन करते समय निगम कर्मियों ने सडक़ किनारे लगाए हुए सब्जी और फलों के ठेलों पर भी छिडक़ाव कर दिया। इससे वहां सब्जी खरीदने वाले लोग भाग खड़े हुए। सब्जियां पर सेनेटाइजेशन होने से विक्रेताओं को अपनी सब्जियां फेंकनी पड़ी। ठेले वालों ने निगम कर्मियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्हें खूब कोसा। नगर आयुक्त को शिकायत करने की बात कही। मामले में सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि सोडियम हाईपोक्लोराइट मानव त्वचा के लिए हानिकारक होता है। सब्जियों पर ऐसा छिडक़ाव होने से सेहत को नुकसान पहुंचेगा। निगम कर्मियों ने यह बहुत ही गलत किया है। बता दें कि बीते मई माह में चारबाग में नगर निगम के कर्मचारियों ने दूसरे प्रदेशों से आ रहे श्रमिकों पर सोडियम हाईपोक्लोराइट का छिडक़ाव कर दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। लखनऊ। आज तुम्हारा जन्मदिन है इसकी तुम्हें कोटि-कोटि बधाई। हमेशा तरक्की करो, यही मेरी सबसे बड़ी कामना। यह कहना है यूपी सरकार में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी की जीवनसंगिनी मालिनी अवस्थी का। मालिनी अवस्थी प्रदेश ही नहीं देशभर में चर्चित यूपी की लोक नृत्यांगना है। वे अपने पति अवनीश के जन्मदिन पर कहती है कि 33 वर्ष पूर्व आज के दिन ही पूर्वजों के आशीर्वाद ने हम दोनों का प्रारब्ध तय कर दिया था। आंखों में कच्चे सपने थे जब तुमसे मिली और तुम्हें जानते जानते जान गई कि मेरा विवाह 24 कैरेट सोने से स्वच्छ और खरे व्यक्तित्व से होने जा रहा है। याद है तुमने पहली ही मुलाकात में कहा था मुझसे मेरे लिए यह प्रशासनिक सेवा, देश सेवा जनसेवा का मार्ग है। निष्ठा और लगन से जनसेवा के इस कर्तव्यपथ पर चलने के लिए मुझे मेरी जैसी साहसी और जनसेवा को ही जीवन मानने वाली जीवनसंगिनी चाहिए। तब मैं 21 बरस की थी मैं और तुम 25 के। उसी क्षण तुम्हारे लक्ष्य को मैंने अपना लक्ष्य मान लिया और तुम्हारे प्रति सम्मान ऐसा गहराया जो प्रति दिन गहराता ही जाता है। काम के प्रति आज भी वहीं निष्ठा, तत्परता, वहीं चौबीस घंटे काम करने का जज्बा, वहीं खरी ईमानदारी, अच्छाई पर कभी न डिगने वाला दृढ़ विश्वास। इस जन्मदिन के अवसर पर मेरी यही मंगलकामना कि तुम ऐसे ही बने रहो, स्वच्छ दृढ़ तेजस। तुम्हारा जीवन लोककल्याण के सभी लक्ष्यों को प्राप्त करे। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी के जन्मदिन पर बधाई देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। यूपी सरकार के कई मंत्री, आईएएस-आईपीएस अफसर, अधिकारी-कर्मचारी सहित प्रदेश के चर्चित लोगों व जनप्रतिनिधियों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। सुशांत सिंह केस की जांच मुंबई पुलिस नहीं, बल्कि सीबीआई ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से महाराष्टï्र सरकार, मुंबई पुलिस और रिया को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि महाराष्टï्र पुलिस इस मामले की जांच खुद करना चाहती थी, वहीं रिया इस मामले को पटना से मुंबई ट्रांसफर करवाना चाहती थीं। सुशांत सिंह की मौत के करीब दो महीने हो गए हैं और तब से ही सीबीआई जांच की मांग चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बिहार में दर्ज एफआईआर को सही ठहराया है। मुंबई पुलिस को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुशांत केस संबंधित यदि कोई अन्य मामला भी दर्ज है तो उसकी जांच भी सीबीआई ही करेगी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय ने 11 अगस्त को इस याचिका पर सुनवाई पूरी की थी। इधर, फैसले पर रिया के वकील सतीश मनेशिंडे ने कहा सुप्रीमकोर्ट ने मामले के तथ्यों की जांच करने के बाद, यह देखा है कि सीबीआई जांच वांछित न्याय होगा। जिसकी मांग रिया ने भी की थी। सुशांत केस की सीबीआई जांच पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि ये अन्याय के विरुद्ध न्याय की जीत है। सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है उससे 130 करोड़ जनता के दिल में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के लिए जो आस्था थी वो और ज्यादा दृढ़ हुई है। वहीं अभिनेत्री के मुख्यमंत्री नीतीश पर कमेंट के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री पर कमेंट करने की औकात रिया चक्रवर्ती की नहीं है।
लखनऊ। शहर में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए लखनऊ जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बड़ा निर्णय लिया है। डीएम अभिषेक ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अब अस्पतालों में बिना अनुमति मेडिकल व पैरा मेडिकल कर्मी छुट्टïी नहीं ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में मेडिकलकर्मी कार्यरत हो या सरकारी में, कोविड-उन्नीस की सेवा में आवश्यकता पडऩे पर उसे अस्पताल में हाजिर होना पड़ेगा। विशेष रूप से किसी भी प्रकार के कोविड अस्पतालों में कार्यरत कर्मियों के प्रकरण में सेवा छोडऩे, अवकाश लेने अथवा अनुपस्थिति के समस्त प्रकरणों में सक्षम स्तर से पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि संशय की स्थिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से परामर्श करना पड़ेगा। सीएमओ ही अंतिम निर्णय लेंगे कि अगर छुटï्टी जरूरी है तो ही मिलेगी। अन्यथा बेवजह अनुपस्थिति रहने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते अस्पतालों के डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी छुट्टïी लेने के तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने इस बात को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार मिश्र के अनुसार बुधवार और गुरुवार दो दिन कलेक्ट्रेट बंद रहेगा। इस दो दिन कलेक्ट्रेट परिसर सहित कार्यालय के सभी कक्षों का सेनेटाइजेशन कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोविड-उन्नीस से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा कलेक्ट्रेट में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। लखनऊ। कोरोना काल में नगर निगम कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जोन पांच के बंगला बाजार में सेनेटाइजेशन करते समय निगम कर्मियों ने सडक़ किनारे लगाए हुए सब्जी और फलों के ठेलों पर भी छिडक़ाव कर दिया। इससे वहां सब्जी खरीदने वाले लोग भाग खड़े हुए। सब्जियां पर सेनेटाइजेशन होने से विक्रेताओं को अपनी सब्जियां फेंकनी पड़ी। ठेले वालों ने निगम कर्मियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्हें खूब कोसा। नगर आयुक्त को शिकायत करने की बात कही। मामले में सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि सोडियम हाईपोक्लोराइट मानव त्वचा के लिए हानिकारक होता है। सब्जियों पर ऐसा छिडक़ाव होने से सेहत को नुकसान पहुंचेगा। निगम कर्मियों ने यह बहुत ही गलत किया है। बता दें कि बीते मई माह में चारबाग में नगर निगम के कर्मचारियों ने दूसरे प्रदेशों से आ रहे श्रमिकों पर सोडियम हाईपोक्लोराइट का छिडक़ाव कर दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। लखनऊ। आज तुम्हारा जन्मदिन है इसकी तुम्हें कोटि-कोटि बधाई। हमेशा तरक्की करो, यही मेरी सबसे बड़ी कामना। यह कहना है यूपी सरकार में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी की जीवनसंगिनी मालिनी अवस्थी का। मालिनी अवस्थी प्रदेश ही नहीं देशभर में चर्चित यूपी की लोक नृत्यांगना है। वे अपने पति अवनीश के जन्मदिन पर कहती है कि तैंतीस वर्ष पूर्व आज के दिन ही पूर्वजों के आशीर्वाद ने हम दोनों का प्रारब्ध तय कर दिया था। आंखों में कच्चे सपने थे जब तुमसे मिली और तुम्हें जानते जानते जान गई कि मेरा विवाह चौबीस कैरेट सोने से स्वच्छ और खरे व्यक्तित्व से होने जा रहा है। याद है तुमने पहली ही मुलाकात में कहा था मुझसे मेरे लिए यह प्रशासनिक सेवा, देश सेवा जनसेवा का मार्ग है। निष्ठा और लगन से जनसेवा के इस कर्तव्यपथ पर चलने के लिए मुझे मेरी जैसी साहसी और जनसेवा को ही जीवन मानने वाली जीवनसंगिनी चाहिए। तब मैं इक्कीस बरस की थी मैं और तुम पच्चीस के। उसी क्षण तुम्हारे लक्ष्य को मैंने अपना लक्ष्य मान लिया और तुम्हारे प्रति सम्मान ऐसा गहराया जो प्रति दिन गहराता ही जाता है। काम के प्रति आज भी वहीं निष्ठा, तत्परता, वहीं चौबीस घंटे काम करने का जज्बा, वहीं खरी ईमानदारी, अच्छाई पर कभी न डिगने वाला दृढ़ विश्वास। इस जन्मदिन के अवसर पर मेरी यही मंगलकामना कि तुम ऐसे ही बने रहो, स्वच्छ दृढ़ तेजस। तुम्हारा जीवन लोककल्याण के सभी लक्ष्यों को प्राप्त करे। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी के जन्मदिन पर बधाई देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। यूपी सरकार के कई मंत्री, आईएएस-आईपीएस अफसर, अधिकारी-कर्मचारी सहित प्रदेश के चर्चित लोगों व जनप्रतिनिधियों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। नई दिल्ली। सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। सुशांत सिंह केस की जांच मुंबई पुलिस नहीं, बल्कि सीबीआई ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से महाराष्टï्र सरकार, मुंबई पुलिस और रिया को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि महाराष्टï्र पुलिस इस मामले की जांच खुद करना चाहती थी, वहीं रिया इस मामले को पटना से मुंबई ट्रांसफर करवाना चाहती थीं। सुशांत सिंह की मौत के करीब दो महीने हो गए हैं और तब से ही सीबीआई जांच की मांग चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बिहार में दर्ज एफआईआर को सही ठहराया है। मुंबई पुलिस को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुशांत केस संबंधित यदि कोई अन्य मामला भी दर्ज है तो उसकी जांच भी सीबीआई ही करेगी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय ने ग्यारह अगस्त को इस याचिका पर सुनवाई पूरी की थी। इधर, फैसले पर रिया के वकील सतीश मनेशिंडे ने कहा सुप्रीमकोर्ट ने मामले के तथ्यों की जांच करने के बाद, यह देखा है कि सीबीआई जांच वांछित न्याय होगा। जिसकी मांग रिया ने भी की थी। सुशांत केस की सीबीआई जांच पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि ये अन्याय के विरुद्ध न्याय की जीत है। सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है उससे एक सौ तीस करोड़ जनता के दिल में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के लिए जो आस्था थी वो और ज्यादा दृढ़ हुई है। वहीं अभिनेत्री के मुख्यमंत्री नीतीश पर कमेंट के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री पर कमेंट करने की औकात रिया चक्रवर्ती की नहीं है।
सीवानः बिहार के सीवान जिले की पांच महिला खिलाडियों का चयन ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा चेन्नई में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए हुआ है. प्रशिक्षण के लिए पांचों खिलाड़ी पटना एयरपोर्ट से चेन्नई के लिए रवाना हो गए हैं. प्रशिक्षण शिविर में चयनित होने के बाद ही सीवान की बेटियां इंडिया टीम का हिस्सा बन भारत का नेतृत्व कर सकती हैं. जिले की पांच खिलाड़ी प्रिया कुमारी, शिबू कुमारी, निक्की कुमारी और रूबी कुमारी रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी की आवासीय प्रशिक्षु खिलाड़ी है. वहीं मनीषा कुमारी मैरवा के स्वतंत्र फुटबॉल खिलाड़ी हैं. इन खिलाडियों का पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कंपलेक्स में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा 23 और 24 जनवरी को लगाए गए चयन शिविर से किया गया है. जहां पूरे बिहार से 20 खिलाड़ी ट्रायल देने के लिए पहुंची थी. जिनकी जन्म तिथि 1/1/2007 से 31/12/2008 रखा गया था. इन सभी पांचों खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर चेन्नई में शुरू होगा और इसमें बेहतर करने वाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में जगह दी जाएगी. रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी के निदेशक सह प्रशिक्षक व सचिव संजय पाठक ने बताया कि यह सीवान जिला के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. सीमित संसाधनों व गरीबी के बोझ के तले दबने के बावजूद जिले की बेटियां अपनी काबिलियत के बलबूते बाहर निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा दिखाकर मुकाम हासिल कर रही है. जिससे सीवान जिला की ख्याति काफी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे ही 5 खिलाड़ियों का फिर से चयन हुआ है. सभी खिलाड़ियों के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में चयनित होने पर बिहार राज्य फुटबॉल संघ के सचिव इम्तियाज हुसैन, संयोजक असगर हुसैन, रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी के मुख्य संरक्षक डॉ. आरएन ओझा, आईएमए सिवान के अध्यक्ष डॉ. शशि भूषण सिन्हा, सचिव डॉ. शरद चौधरी सहित कई लोगों ने चयनित बेटियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी है. .
सीवानः बिहार के सीवान जिले की पांच महिला खिलाडियों का चयन ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा चेन्नई में आयोजित अंडर-सत्रह राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए हुआ है. प्रशिक्षण के लिए पांचों खिलाड़ी पटना एयरपोर्ट से चेन्नई के लिए रवाना हो गए हैं. प्रशिक्षण शिविर में चयनित होने के बाद ही सीवान की बेटियां इंडिया टीम का हिस्सा बन भारत का नेतृत्व कर सकती हैं. जिले की पांच खिलाड़ी प्रिया कुमारी, शिबू कुमारी, निक्की कुमारी और रूबी कुमारी रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी की आवासीय प्रशिक्षु खिलाड़ी है. वहीं मनीषा कुमारी मैरवा के स्वतंत्र फुटबॉल खिलाड़ी हैं. इन खिलाडियों का पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कंपलेक्स में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा तेईस और चौबीस जनवरी को लगाए गए चयन शिविर से किया गया है. जहां पूरे बिहार से बीस खिलाड़ी ट्रायल देने के लिए पहुंची थी. जिनकी जन्म तिथि एक जनवरी दो हज़ार सात से इकतीस दिसंबर दो हज़ार आठ रखा गया था. इन सभी पांचों खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर चेन्नई में शुरू होगा और इसमें बेहतर करने वाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में जगह दी जाएगी. रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी के निदेशक सह प्रशिक्षक व सचिव संजय पाठक ने बताया कि यह सीवान जिला के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. सीमित संसाधनों व गरीबी के बोझ के तले दबने के बावजूद जिले की बेटियां अपनी काबिलियत के बलबूते बाहर निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा दिखाकर मुकाम हासिल कर रही है. जिससे सीवान जिला की ख्याति काफी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे ही पाँच खिलाड़ियों का फिर से चयन हुआ है. सभी खिलाड़ियों के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में चयनित होने पर बिहार राज्य फुटबॉल संघ के सचिव इम्तियाज हुसैन, संयोजक असगर हुसैन, रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी के मुख्य संरक्षक डॉ. आरएन ओझा, आईएमए सिवान के अध्यक्ष डॉ. शशि भूषण सिन्हा, सचिव डॉ. शरद चौधरी सहित कई लोगों ने चयनित बेटियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी है. .
कर्नाटक। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आज कर्नाटक में दो चुनावी रैली है। वे एचएएल हवाई अड्डे से विशेष विमान से बीदर जिले के भाल्की जाएंगे। जहां वह एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके तुरंत बाद राहुल इसी जिले के हूमनाबाद में एक अन्य सभा को संबोधित करेंगे। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खांदरे भाल्की से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, हूमनाबाद से राजशेखर बसवराज पाटिल को उम्मीदवार बनाया गया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से 24 दिन पहले रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोलार में जनसभा को संबोधित किया। ये वही कोलार है, जहां राहुल ने मोदी सरनेम को लेकर बयान दिया था। 23 मार्च को सूरत की कोर्ट ने उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई और एक दिन बाद उनकी सांसदी चली गई। राहुल ने अपने संबोधन में एक बार फिर अडाणी मामले का जिक्र किया। कर्नाटक में भाजपा सरकार के 40% कमीशन का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर बेरोजगार युवाओं को दो साल तक 1500 से 3000 रुपए, महिलाओं को 2000 रुपए भत्ता और राज्य के हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया।
कर्नाटक। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आज कर्नाटक में दो चुनावी रैली है। वे एचएएल हवाई अड्डे से विशेष विमान से बीदर जिले के भाल्की जाएंगे। जहां वह एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके तुरंत बाद राहुल इसी जिले के हूमनाबाद में एक अन्य सभा को संबोधित करेंगे। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खांदरे भाल्की से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, हूमनाबाद से राजशेखर बसवराज पाटिल को उम्मीदवार बनाया गया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से चौबीस दिन पहले रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोलार में जनसभा को संबोधित किया। ये वही कोलार है, जहां राहुल ने मोदी सरनेम को लेकर बयान दिया था। तेईस मार्च को सूरत की कोर्ट ने उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई और एक दिन बाद उनकी सांसदी चली गई। राहुल ने अपने संबोधन में एक बार फिर अडाणी मामले का जिक्र किया। कर्नाटक में भाजपा सरकार के चालीस% कमीशन का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर बेरोजगार युवाओं को दो साल तक एक हज़ार पाँच सौ से तीन हज़ार रुपयापए, महिलाओं को दो हज़ार रुपयापए भत्ता और राज्य के हर परिवार को दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया।
४७२ * मजविलास 93 भये काह प्रीतम अनुकूले बढ्यो अनद सक्ल दुस भूले । तब हरिसों मन नवलकिशोरी * पूछन लगीं विहँसि वर नोरी ।। प्रेम प्रीतिची रीति मुहाई * हम कहो समुदाय कहाई ॥ इक ओ प्रीति परस्पर कहिये # एक एक ही दिशि ते रहिये ।। एक दुहुनको मानत नाही * ताको कहा बहत नगमाहीं ।। उत्तम प्रौनि कहावति नोई कह श्याम हमसों तुम सोई ॥ हम अबला नानति कछु नाही * दाते पूछतिहें तुम पार्टी । * सुनि गोपियन वचन रसाल भये प्रेमवश परम कृपाला ।। दो०- यदपि जगतगुरु धजिते प्रभु, जानराय ब्रजचद । प्रेमविवस हारे तदपि, अपने मुख नन्दनन्द ।। सो०कहत भये तब कान्ह, सुनहु प्राणवल्लभप्रिया ॥ नहिं तुमसम कोड आन, निपुण प्रेमके पथमे ॥ सद्यपि तुम पूछतिहो जैसे * प्रगट करो लक्षण सब तैसे ।। एक नो प्रीति परस्पर होई * सारथहेतु क्रत सब कोई ॥ जैसे पशु पशुको जाने * आपुसमें अतिहितकर माने ॥ ३ सो वह प्रीति निष्ठे बहावे * जासों सब ससार वधावे ।। दूजी प्रीति एक दिशि जोई * करति धर्म अधिकारी सोई ॥ जैसे मात पिता चित धरिके *रत है सुतके हित बरिके ।। सो वह मध्यम प्रीति कहावत * उत्तम गति ताते जन पावत ॥ तो यह दोउनको नहि जाने * गुण दूपण बहु उर नहिँ आने ।। ति है सुनो मै वहत वसानी * के कृतज्ञ के पुरी अज्ञानी ।। उत्तम प्रीति जानिये सोई * अनायास उपन्त उर सोइ ।। २ जो जीता न जाय इ छोटी
चार सौ बहत्तर * मजविलास तिरानवे भये काह प्रीतम अनुकूले बढ्यो अनद सक्ल दुस भूले । तब हरिसों मन नवलकिशोरी * पूछन लगीं विहँसि वर नोरी ।। प्रेम प्रीतिची रीति मुहाई * हम कहो समुदाय कहाई ॥ इक ओ प्रीति परस्पर कहिये # एक एक ही दिशि ते रहिये ।। एक दुहुनको मानत नाही * ताको कहा बहत नगमाहीं ।। उत्तम प्रौनि कहावति नोई कह श्याम हमसों तुम सोई ॥ हम अबला नानति कछु नाही * दाते पूछतिहें तुम पार्टी । * सुनि गोपियन वचन रसाल भये प्रेमवश परम कृपाला ।। दोशून्य- यदपि जगतगुरु धजिते प्रभु, जानराय ब्रजचद । प्रेमविवस हारे तदपि, अपने मुख नन्दनन्द ।। सोशून्यकहत भये तब कान्ह, सुनहु प्राणवल्लभप्रिया ॥ नहिं तुमसम कोड आन, निपुण प्रेमके पथमे ॥ सद्यपि तुम पूछतिहो जैसे * प्रगट करो लक्षण सब तैसे ।। एक नो प्रीति परस्पर होई * सारथहेतु क्रत सब कोई ॥ जैसे पशु पशुको जाने * आपुसमें अतिहितकर माने ॥ तीन सो वह प्रीति निष्ठे बहावे * जासों सब ससार वधावे ।। दूजी प्रीति एक दिशि जोई * करति धर्म अधिकारी सोई ॥ जैसे मात पिता चित धरिके *रत है सुतके हित बरिके ।। सो वह मध्यम प्रीति कहावत * उत्तम गति ताते जन पावत ॥ तो यह दोउनको नहि जाने * गुण दूपण बहु उर नहिँ आने ।। ति है सुनो मै वहत वसानी * के कृतज्ञ के पुरी अज्ञानी ।। उत्तम प्रीति जानिये सोई * अनायास उपन्त उर सोइ ।। दो जो जीता न जाय इ छोटी
प्रभावशाली जीवनयह मतलव होना जरूरी नहीं है कि ऐसा विद्वान् सभ्य और संयत भी वन गया हो । संस्कारका सम्बन्ध आत्मासे होता है । यह सत्यको एकत्रित करना है और अन्तरंग ज्ञानका भाण्डार भरना है । यह अपने सामयिक विचारोंका गहरा तथा हार्दिक परिचय होता है और प्राचीन तथा नवीन कालके महान विचारकों तथा लेखकों, कवियों तथा फिलास्फरों, और आत्मज्ञानियों तथा ऋपियोंका संत्संग होता है । शिष्टाचार, कृपा, सहानुभूति, सभ्यता, सद्व्यवहार, प्रतिभा और आत्म-संयम सदा संस्कारके साथ रहते हैं। जहाँ संस्कार होता है, वहाँ उपर्युक्त सद्गुण भी अवश्य होते हैं । पति-पत्नीके मानसिक संस्कार न मिलनेका जो नतीजा होता है, उसको नीचेकी रोचक किन्तु सहानुभूतिपूर्ण घटनाद्वारा अच्छी तरह समझा जा सकता है 1 एक विद्वान् नवयुवकने एक आदर्श स्वास्थ्यवाली लड़ कीसे विवाह कर लिया । उसने सोचा कि उसे अपने हृदयके भावोंके अनुकूल एक सहचरी मिल गई और अब उसकी समस्त आशाएँ पूर्ण हो जायँगी । इत्तेफाकसे उन्ही दिनों कवि-सम्राट् दैनीसनका देहान्त हुआ था । उस नवयुवकने अपनी धर्म-पत्नीसे वातचीत आरम्भ करनेकी मन्शास कहा कि क्या तुम्हें मालूम है कि आज कवि-सम्राट् ( Poet Laureate ) का देहान्त हो गया है ? उस लड़कीने उत्तर दिया कि कवि-सम्राट् क्या होता है ? यह किस चिडियाका नाम है ? जब उसे टैनीसनका नाम बताया गया, तब भी उसने बड़े ही आश्चर्य के साथ पूछा कि टैनीसन था कौन ? लड़केके हृदयको बड़ा धक्का लगा, वह चुप हो गया और आगे कुछ न वोला । एक चार जब वह नवयुवक अपने किसी मित्रसे अपनी धर्म-पत्नीका जिकर कर रहा था, तब उसने कहा कि मुझे तो एक सच्चे साधीकी आवश्यकता थी, केवल अपने घरका प्रवन्ध करनेवाली और अपने चच्चोंका पालन पोषण करनेवाली स्त्रीकी जरूरत न थी ।
प्रभावशाली जीवनयह मतलव होना जरूरी नहीं है कि ऐसा विद्वान् सभ्य और संयत भी वन गया हो । संस्कारका सम्बन्ध आत्मासे होता है । यह सत्यको एकत्रित करना है और अन्तरंग ज्ञानका भाण्डार भरना है । यह अपने सामयिक विचारोंका गहरा तथा हार्दिक परिचय होता है और प्राचीन तथा नवीन कालके महान विचारकों तथा लेखकों, कवियों तथा फिलास्फरों, और आत्मज्ञानियों तथा ऋपियोंका संत्संग होता है । शिष्टाचार, कृपा, सहानुभूति, सभ्यता, सद्व्यवहार, प्रतिभा और आत्म-संयम सदा संस्कारके साथ रहते हैं। जहाँ संस्कार होता है, वहाँ उपर्युक्त सद्गुण भी अवश्य होते हैं । पति-पत्नीके मानसिक संस्कार न मिलनेका जो नतीजा होता है, उसको नीचेकी रोचक किन्तु सहानुभूतिपूर्ण घटनाद्वारा अच्छी तरह समझा जा सकता है एक एक विद्वान् नवयुवकने एक आदर्श स्वास्थ्यवाली लड़ कीसे विवाह कर लिया । उसने सोचा कि उसे अपने हृदयके भावोंके अनुकूल एक सहचरी मिल गई और अब उसकी समस्त आशाएँ पूर्ण हो जायँगी । इत्तेफाकसे उन्ही दिनों कवि-सम्राट् दैनीसनका देहान्त हुआ था । उस नवयुवकने अपनी धर्म-पत्नीसे वातचीत आरम्भ करनेकी मन्शास कहा कि क्या तुम्हें मालूम है कि आज कवि-सम्राट् का देहान्त हो गया है ? उस लड़कीने उत्तर दिया कि कवि-सम्राट् क्या होता है ? यह किस चिडियाका नाम है ? जब उसे टैनीसनका नाम बताया गया, तब भी उसने बड़े ही आश्चर्य के साथ पूछा कि टैनीसन था कौन ? लड़केके हृदयको बड़ा धक्का लगा, वह चुप हो गया और आगे कुछ न वोला । एक चार जब वह नवयुवक अपने किसी मित्रसे अपनी धर्म-पत्नीका जिकर कर रहा था, तब उसने कहा कि मुझे तो एक सच्चे साधीकी आवश्यकता थी, केवल अपने घरका प्रवन्ध करनेवाली और अपने चच्चोंका पालन पोषण करनेवाली स्त्रीकी जरूरत न थी ।
अजमेर। नाथ समाज अजमेर द्वारा चतुर्थ विशाल सामुहिक विवाह सम्मेलन आज शनिवार 23 को आयोजित हुआ। यह आयोजन समस्त पांच गाँवों के तत्वाधान में गुरू गोरक्षनाथ जयन्ति के पावन पर्व पर अजयनगर रोड़ स्थित संत कंवरराम स्कूल प्रांगण में आयोजित किया गया। नाथ समाज के शंकर नाथ चिन्टा, ज्ञाननाथ, बजरंगनाथ कोतवाल और कैलाश नाथ चिन्टा ने बताया कि गुरू गोरक्षनाथ जयंति के पावन अवसर पर नाथ समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन समस्त पांच गांव के तत्वाधान में चतुर्थ विशाल सामूहिक विवाह सम्मेलन पुरे विधि-विधान से समाज के गणमान्य अतिथियों के सानिध्य में संपन्न हुआ और 10 वर-वधू के जोड़ो को मंगल परिणय कराया में बांधा गया। बारात प्रातः 09 बजे नाथ मार्ग, डिग्गी बाजार रवाना हुई जो नाथ मोहल्ला, डिग्गी बाजार, केसरगंज, रावण की बगीची, मलूसर होते हुए नाथ मोहल्ला, पहाड़गंज होते हुए संत कंवरराम स्कूल गाजे-बाजों और ढ़ोल के साथ पहुंची। उसके बाद तोरण और वरमाला, पाणिग्रहण संस्कार की रस्मे पुरी गयी। उसके बाद मुख्य अतिथि समारोह एवं आर्शीवाद समारोह का कार्यक्रम रखा गया। नाथ समाज के शंकर नाथ चिन्टा, ज्ञाननाथ, बजरंगनाथ कोतवाल और कैलाश नाथ चिन्टा ने बताया कि इस सम्मलेन को शान्तिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करने के लिये सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी ओर से एवं समाज के अन्य व्यक्ति ने सहयोग प्रदान किया है और यह आये हुए सभी वर-वधु के पक्षकारों को एवं पधारे हुए सभी गणमान्य व्यक्तियों के भोजन एवं पानी की उत्तम व्यवस्था की गयी। इस सम्मेलन में समिति द्वारा सभी वर-वधू को सोने के टोप्स, लोंग, चांदी की पायजेब, बिछीया, सहित घर गृहस्थी के काम आने वाला सामान उपहार स्वरूप दिया जायेगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि राजगढ़ भैरवधाम के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज ने परिणय सूत्र में बंधे 10 नवविवाहित जोड़ो को आर्शीवाद और उपहार प्रदान किये। चपांलाल जी महाराज ने नवविवाहित जोडो और समाज के लोगो से नशा नही करने, कन्या भू्रण हत्या नही करने का संकल्प दिलवाया। सम्मेलन में आये विशिष्ठ अतिथि दक्षिण विधायक अनिता भदेल, वासुदेव देवनानी, कंवल प्रकाश किशनानी, पार्षद बीना सिंघारिया, भारती श्रीवास्तव, खेमचंद नारवानी आदि गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। जिन्होने सभी वर-वधु केा आर्शीवाद देते हुए उनके सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर समाज के अतिथि चतरनाथ धर्मावत, बाबूनाथ चिंटा, नाथूनाथ धर्मावत, गणपत नाथ भरपूर और काननाथ वर्मन, ज्ञाननाथ, शंकर नाथ चिंटा, कैलाशनाथ चिंटा सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
अजमेर। नाथ समाज अजमेर द्वारा चतुर्थ विशाल सामुहिक विवाह सम्मेलन आज शनिवार तेईस को आयोजित हुआ। यह आयोजन समस्त पांच गाँवों के तत्वाधान में गुरू गोरक्षनाथ जयन्ति के पावन पर्व पर अजयनगर रोड़ स्थित संत कंवरराम स्कूल प्रांगण में आयोजित किया गया। नाथ समाज के शंकर नाथ चिन्टा, ज्ञाननाथ, बजरंगनाथ कोतवाल और कैलाश नाथ चिन्टा ने बताया कि गुरू गोरक्षनाथ जयंति के पावन अवसर पर नाथ समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन समस्त पांच गांव के तत्वाधान में चतुर्थ विशाल सामूहिक विवाह सम्मेलन पुरे विधि-विधान से समाज के गणमान्य अतिथियों के सानिध्य में संपन्न हुआ और दस वर-वधू के जोड़ो को मंगल परिणय कराया में बांधा गया। बारात प्रातः नौ बजे नाथ मार्ग, डिग्गी बाजार रवाना हुई जो नाथ मोहल्ला, डिग्गी बाजार, केसरगंज, रावण की बगीची, मलूसर होते हुए नाथ मोहल्ला, पहाड़गंज होते हुए संत कंवरराम स्कूल गाजे-बाजों और ढ़ोल के साथ पहुंची। उसके बाद तोरण और वरमाला, पाणिग्रहण संस्कार की रस्मे पुरी गयी। उसके बाद मुख्य अतिथि समारोह एवं आर्शीवाद समारोह का कार्यक्रम रखा गया। नाथ समाज के शंकर नाथ चिन्टा, ज्ञाननाथ, बजरंगनाथ कोतवाल और कैलाश नाथ चिन्टा ने बताया कि इस सम्मलेन को शान्तिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करने के लिये सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी ओर से एवं समाज के अन्य व्यक्ति ने सहयोग प्रदान किया है और यह आये हुए सभी वर-वधु के पक्षकारों को एवं पधारे हुए सभी गणमान्य व्यक्तियों के भोजन एवं पानी की उत्तम व्यवस्था की गयी। इस सम्मेलन में समिति द्वारा सभी वर-वधू को सोने के टोप्स, लोंग, चांदी की पायजेब, बिछीया, सहित घर गृहस्थी के काम आने वाला सामान उपहार स्वरूप दिया जायेगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि राजगढ़ भैरवधाम के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज ने परिणय सूत्र में बंधे दस नवविवाहित जोड़ो को आर्शीवाद और उपहार प्रदान किये। चपांलाल जी महाराज ने नवविवाहित जोडो और समाज के लोगो से नशा नही करने, कन्या भू्रण हत्या नही करने का संकल्प दिलवाया। सम्मेलन में आये विशिष्ठ अतिथि दक्षिण विधायक अनिता भदेल, वासुदेव देवनानी, कंवल प्रकाश किशनानी, पार्षद बीना सिंघारिया, भारती श्रीवास्तव, खेमचंद नारवानी आदि गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। जिन्होने सभी वर-वधु केा आर्शीवाद देते हुए उनके सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर समाज के अतिथि चतरनाथ धर्मावत, बाबूनाथ चिंटा, नाथूनाथ धर्मावत, गणपत नाथ भरपूर और काननाथ वर्मन, ज्ञाननाथ, शंकर नाथ चिंटा, कैलाशनाथ चिंटा सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
चर्चा में क्यों? - 22 अगस्त, 2023 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सांस्कृतिक गतिविधियों के हृदयस्थल जयपुर के रवींद्र मंच को मल्टीकल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करने तथा जयपुर कथक केंद्र आधुनिकीकरण करने के आशय के वित्तीय प्रस्ताव को मंज़ूरी प्रदान की। - राज्य सरकार द्वारा दोनों ही केंद्रों के सौंदर्यीकरण, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण के लिये 4 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। - रवींद्र मंच पर 3 करोड़ रुपए से विकास कार्य होंगे, जबकि कथक नृत्य शैली के प्रमुख जयपुर कथक केंद्र में 1 करोड़ रुपए की लागत से केंद्र का आधुनिकीकरण होगा। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की थी।
चर्चा में क्यों? - बाईस अगस्त, दो हज़ार तेईस को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सांस्कृतिक गतिविधियों के हृदयस्थल जयपुर के रवींद्र मंच को मल्टीकल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करने तथा जयपुर कथक केंद्र आधुनिकीकरण करने के आशय के वित्तीय प्रस्ताव को मंज़ूरी प्रदान की। - राज्य सरकार द्वारा दोनों ही केंद्रों के सौंदर्यीकरण, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण के लिये चार करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। - रवींद्र मंच पर तीन करोड़ रुपए से विकास कार्य होंगे, जबकि कथक नृत्य शैली के प्रमुख जयपुर कथक केंद्र में एक करोड़ रुपए की लागत से केंद्र का आधुनिकीकरण होगा। - उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के बजट में इस संबंध में घोषणा की थी।
नासिक : जिले के इगतपुरी तहसील (Igatpuri Tehsil) में कुछ दिन पहले आदिवासी कातकरी समुदाय (Tribal Katkari Community) के नाबालिग बच्चों (Minor Children) को कुछ हजार रुपए में बेचा था। जब इस बारे में पुलिस (Police) ने गहन पूछताछ की तो पता चला कि वहां देह व्यापार (Prostitution) का धंधा चलता था। इसके बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई। नासिक जिले के पूर्व पालक मंत्री और विधायक छगन भुजबल ने नागपुर में हुए शीतकालीन सत्र में इस मामले में सरकार का ध्यान खींचा था, उस वक्त भुजबल ने कहा था कि अहमदनगर जिले के संगमनेर और पारनेर तहसील के छह बच्चों को एक भेड़ और दो हजार रुपये में खरीदा गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनसे मजदूरी भी ली गई। उक्त दुर्व्यवहार के मामले में विभिन्न पुलिस स्टेशन में अपराध दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि लापता बच्चों और फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से देरी की जा रही है, इसके बाद, केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने नासिक और अहमदनगर के जिला अधिकारी के साथ-साथ पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ नाबालिग बच्चों के अपहरण मामले में गवाह के रूप में पेश न होने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इसके अनुसार, आयोग ने 2 जनवरी, 2023 को नासिक के जिला अधिकारी गंगाधरन डी, अहमदनगर के जिला अधिकारी राजेंद्र भोसले, नासिक के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शाह जी उमाप, अहमदनगर के पुलिस अधीक्षक राकेश ओला इन सभी अधिकारियों को समन जारी किया था, फिर 9 जनवरी को चारों को आयोग के सामने गवाह के तौर पर पेश होकर इस मामले में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया तो आयोग ने सीधे पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा। क्या है मामला? इगतपुरी तहसील के उवाडे गांव में आदिवासी कातकरी समुदाय के एक परिवार को अपने बच्चों को बेचने का लालच दिया गया था। मामला तब सामने आया जब उनमें से एक की हत्या कर दी गई। कुछ पीड़ितों के बयानों के मुताबिक, संगमनेर पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। एक अपराध पारनेर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, इसके मुताबिक पुलिस ने नाशिक और अहमदनगर में जांच शुरू की। इन मामलों में संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन उसके बाद जब अदालती कार्यवाही के दौरान संबंधित अधिकारियों के मौजूद रहने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन वे वहां उपस्थित नहीं हुए, उसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को वारंट जारी किया।
नासिक : जिले के इगतपुरी तहसील में कुछ दिन पहले आदिवासी कातकरी समुदाय के नाबालिग बच्चों को कुछ हजार रुपए में बेचा था। जब इस बारे में पुलिस ने गहन पूछताछ की तो पता चला कि वहां देह व्यापार का धंधा चलता था। इसके बाद पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई। नासिक जिले के पूर्व पालक मंत्री और विधायक छगन भुजबल ने नागपुर में हुए शीतकालीन सत्र में इस मामले में सरकार का ध्यान खींचा था, उस वक्त भुजबल ने कहा था कि अहमदनगर जिले के संगमनेर और पारनेर तहसील के छह बच्चों को एक भेड़ और दो हजार रुपये में खरीदा गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनसे मजदूरी भी ली गई। उक्त दुर्व्यवहार के मामले में विभिन्न पुलिस स्टेशन में अपराध दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि लापता बच्चों और फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से देरी की जा रही है, इसके बाद, केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने नासिक और अहमदनगर के जिला अधिकारी के साथ-साथ पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ नाबालिग बच्चों के अपहरण मामले में गवाह के रूप में पेश न होने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इसके अनुसार, आयोग ने दो जनवरी, दो हज़ार तेईस को नासिक के जिला अधिकारी गंगाधरन डी, अहमदनगर के जिला अधिकारी राजेंद्र भोसले, नासिक के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शाह जी उमाप, अहमदनगर के पुलिस अधीक्षक राकेश ओला इन सभी अधिकारियों को समन जारी किया था, फिर नौ जनवरी को चारों को आयोग के सामने गवाह के तौर पर पेश होकर इस मामले में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया तो आयोग ने सीधे पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा। क्या है मामला? इगतपुरी तहसील के उवाडे गांव में आदिवासी कातकरी समुदाय के एक परिवार को अपने बच्चों को बेचने का लालच दिया गया था। मामला तब सामने आया जब उनमें से एक की हत्या कर दी गई। कुछ पीड़ितों के बयानों के मुताबिक, संगमनेर पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। एक अपराध पारनेर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, इसके मुताबिक पुलिस ने नाशिक और अहमदनगर में जांच शुरू की। इन मामलों में संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन उसके बाद जब अदालती कार्यवाही के दौरान संबंधित अधिकारियों के मौजूद रहने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन वे वहां उपस्थित नहीं हुए, उसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को वारंट जारी किया।
भारत की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कम्पनी मारुती सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने आज आज अपने गाड़ियों की कीमत Rs 6,100 तक बढाने का एलान किया। ऐसा कमोडिटी, डिस्ट्रीब्यूशन कोस्ट और विदेशी मुद्रा दर में बढ़त होने के कारण किया गया। कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल के लिए लिए अलग-अलग है और कम्पनी के डेल्ही शोरूम में Rs 6100 तक कीमतों में उछाल देखा गया। साथ ही कम्पनी ने ये भी बताया कि नये बढ़ाये गये दाम आज से ही लागू हो जायेंगे। बता दें कि एमएसआई आल्टो 800 से लेकर माध्यम आकार के सेडान सिआज़ तक बहुत सारे रेंज में गाड़ियों की बिक्री करती आ रही है। इस बढ़ोतरी से पहले इसकी कीमत रू 2.51 लाख से लेकर रू 11.51 लाख तक थी। इसी महीने में एमएसआई के मार्केटिंग एवं सेल्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव आर एस कलसी ने कहा था कि कंपनी कमोडिटी की कीमतों में हो रहे बदलावों के असर को लेकर विश्लेषण करने में लगी हुई है जो लगातार लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।। इसके अलावे विदेशी मुद्रा दर ने भी कम्पनी को ये निर्णय लेने को मजबूर किया। चूँकि इंधन के दाम भी बढ़ गये हैं जिस से कम्पनी ने ये कदम उठाया। वहीं जर्मनी की लक्ज़री कार बनाने वाली कम्पनी मर्सिडीज बेंज ने भी आज घोषणा की कि उसने सितम्बर से अपनी गाड़ियों के दाम चार प्रतिशत तक बढाने का कडा फैसला लिया है। दूसरी कम्पनियां जैसे कि महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और हौंडा कार्स इंडिया ने भी बढ़ते इनपुट कोस्ट को लेकर अपनी-अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। अप्रैल में लक्ज़री कार बनाने वाली कम्पनियां जैसे ऑडी, जेएलआर और मर्सिडीज बेंज ने कस्टम ड्यूटी के बढ़ने के कारण अपने मॉडलों की कीमत में एक से दस लाख तक की बढ़ोतरी की थी।
भारत की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कम्पनी मारुती सुजुकी इंडिया ने आज आज अपने गाड़ियों की कीमत छः रुपया,एक सौ तक बढाने का एलान किया। ऐसा कमोडिटी, डिस्ट्रीब्यूशन कोस्ट और विदेशी मुद्रा दर में बढ़त होने के कारण किया गया। कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल के लिए लिए अलग-अलग है और कम्पनी के डेल्ही शोरूम में छः हज़ार एक सौ रुपया तक कीमतों में उछाल देखा गया। साथ ही कम्पनी ने ये भी बताया कि नये बढ़ाये गये दाम आज से ही लागू हो जायेंगे। बता दें कि एमएसआई आल्टो आठ सौ से लेकर माध्यम आकार के सेडान सिआज़ तक बहुत सारे रेंज में गाड़ियों की बिक्री करती आ रही है। इस बढ़ोतरी से पहले इसकी कीमत रू दो.इक्यावन लाख से लेकर रू ग्यारह.इक्यावन लाख तक थी। इसी महीने में एमएसआई के मार्केटिंग एवं सेल्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव आर एस कलसी ने कहा था कि कंपनी कमोडिटी की कीमतों में हो रहे बदलावों के असर को लेकर विश्लेषण करने में लगी हुई है जो लगातार लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।। इसके अलावे विदेशी मुद्रा दर ने भी कम्पनी को ये निर्णय लेने को मजबूर किया। चूँकि इंधन के दाम भी बढ़ गये हैं जिस से कम्पनी ने ये कदम उठाया। वहीं जर्मनी की लक्ज़री कार बनाने वाली कम्पनी मर्सिडीज बेंज ने भी आज घोषणा की कि उसने सितम्बर से अपनी गाड़ियों के दाम चार प्रतिशत तक बढाने का कडा फैसला लिया है। दूसरी कम्पनियां जैसे कि महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और हौंडा कार्स इंडिया ने भी बढ़ते इनपुट कोस्ट को लेकर अपनी-अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। अप्रैल में लक्ज़री कार बनाने वाली कम्पनियां जैसे ऑडी, जेएलआर और मर्सिडीज बेंज ने कस्टम ड्यूटी के बढ़ने के कारण अपने मॉडलों की कीमत में एक से दस लाख तक की बढ़ोतरी की थी।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरओ) ने उच्च गुणवत्ता वाली वायु मिसाइल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। बुधवार को उड़ीसा तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज में सतह से हवा में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। मालूम हो कि यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी है। नतीजतन, भारत रक्षा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया। इससे पहले 2015 में, हवाई मिसाइल प्रणाली को आधिकारिक तौर पर सेना और वायु सेना में शामिल किया गया था। यह मिसाइल ब्रह्मोस की तरह सुपरसोनिक है। इसकी अधिकतम गति 2. 5 मच (306 किमी प्रति घंटा) है। यह मध्यम दूरी की मिसाइल है जो 25 किमी दूर तक के लक्ष्य को आसानी से नष्ट कर सकती है। स्काई मिसाइलें 60 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम हैं।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने उच्च गुणवत्ता वाली वायु मिसाइल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। बुधवार को उड़ीसा तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज में सतह से हवा में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। मालूम हो कि यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी है। नतीजतन, भारत रक्षा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया। इससे पहले दो हज़ार पंद्रह में, हवाई मिसाइल प्रणाली को आधिकारिक तौर पर सेना और वायु सेना में शामिल किया गया था। यह मिसाइल ब्रह्मोस की तरह सुपरसोनिक है। इसकी अधिकतम गति दो. पाँच मच है। यह मध्यम दूरी की मिसाइल है जो पच्चीस किमी दूर तक के लक्ष्य को आसानी से नष्ट कर सकती है। स्काई मिसाइलें साठ किलोग्रामग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम हैं।
लखनऊः बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म पठान रिलीज़ से पहले भी सुर्ख़ियों में थी और रिलीज़ के बाद भी इसकी चर्चा जमकर चल रही है. फिल्म को लेकर अब उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. एक इंटरव्यू में सीएम योगी ने पठान और इसके बायकॉट पर खुलकर अपनी राय रखी. सीएम योगी ने कहा कि वो सभी कलाकारों का सम्मान करते हैं. इसके साथ ही सीएम ने ये नसीहत भी दी कि किसी को भी जन भावनाओं को भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. बता दें कि, शाहरुख़-दीपिका की फिल्म पठान को लेकर देशभर में खूब हंगामा मचा था. यहाँ तक कि, शाहरुख खान के पुतले फूंके गए थे और कुछ सिनेमाघरों में तोड़फोड़ भी मचाई गई थी. विवाद ने ऐसा रंग लिया कि फिल्म में सेंसर बोर्ड को कई कट लगाने पड़े थे. हाल ही में सीएम योगी ने एक साक्षात्कार में पठान पर खुलकर चर्चा की. पठान देखने के सवाल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'सॉरी, मैं देख नहीं पाता हूं, न मेरे पास इतना वक़्त होता है, क्योंकि 25 करोड़ की आबादी है राज्य में, मैं कलाकारों का सम्मान करता हूं. साहित्यकारों का सम्मान करता हूं. जिसके भीतर कुछ भी प्रतिभा है, उसको हम पूरा सम्मान देते हैं. इतना वक़्त नहीं होता है कि हम फ़िल्में देख पाएं, मगर कोई भी कलाकार या किसी भी साहित्यतार, जिसके अंदर कुछ भी प्रतिभा है, उसको भरपूर सम्मान, व्यक्तिगत स्तर पर भी और शासकीय स्तर पर भी हम लोग देते हैं. ' पठान के बायकॉट पर उन्होंने कहा कि, 'यूपी में कोई विरोध कहीं नहीं हुआ था. एक जगह वो आपसी झगड़ा था. वहां पर एक दर्शक उस फिल्म की रील बना रहा था. इसको लेकर सिनेमा हॉल के कर्मचारियों ने उसे रोक दिया था. इसी में उन लोगों में विवाद हुआ था, इसके अतिरिक्त कोई और विवाद नहीं था. हम एक बात का अवश्य ध्यान दें, जब भी कोई इस तरह की फिल्म आती है या इस प्रकार का कोई मंचन होता है, तो जन भावनाओं का सम्मान अवश्य होना चाहिए. प्रस्तुतिकरण के साथ साथ उन भावनाओं का सम्मान होना चाहिए, जिनके लिए हम प्रस्तुत करना चाहते हैं और किसी को भी भावनाओं को भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. ' 'मोदी की हवा है. . . ', आखिर क्यों ऐसा बोले PK? कांग्रेस से निलंबित किए जाने पर कैप्टन अमरिंदर की पत्नी परनीत ने तोड़ी चुप्पी, जानिए क्या कहा ?
लखनऊः बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान की फिल्म पठान रिलीज़ से पहले भी सुर्ख़ियों में थी और रिलीज़ के बाद भी इसकी चर्चा जमकर चल रही है. फिल्म को लेकर अब उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. एक इंटरव्यू में सीएम योगी ने पठान और इसके बायकॉट पर खुलकर अपनी राय रखी. सीएम योगी ने कहा कि वो सभी कलाकारों का सम्मान करते हैं. इसके साथ ही सीएम ने ये नसीहत भी दी कि किसी को भी जन भावनाओं को भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. बता दें कि, शाहरुख़-दीपिका की फिल्म पठान को लेकर देशभर में खूब हंगामा मचा था. यहाँ तक कि, शाहरुख खान के पुतले फूंके गए थे और कुछ सिनेमाघरों में तोड़फोड़ भी मचाई गई थी. विवाद ने ऐसा रंग लिया कि फिल्म में सेंसर बोर्ड को कई कट लगाने पड़े थे. हाल ही में सीएम योगी ने एक साक्षात्कार में पठान पर खुलकर चर्चा की. पठान देखने के सवाल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'सॉरी, मैं देख नहीं पाता हूं, न मेरे पास इतना वक़्त होता है, क्योंकि पच्चीस करोड़ की आबादी है राज्य में, मैं कलाकारों का सम्मान करता हूं. साहित्यकारों का सम्मान करता हूं. जिसके भीतर कुछ भी प्रतिभा है, उसको हम पूरा सम्मान देते हैं. इतना वक़्त नहीं होता है कि हम फ़िल्में देख पाएं, मगर कोई भी कलाकार या किसी भी साहित्यतार, जिसके अंदर कुछ भी प्रतिभा है, उसको भरपूर सम्मान, व्यक्तिगत स्तर पर भी और शासकीय स्तर पर भी हम लोग देते हैं. ' पठान के बायकॉट पर उन्होंने कहा कि, 'यूपी में कोई विरोध कहीं नहीं हुआ था. एक जगह वो आपसी झगड़ा था. वहां पर एक दर्शक उस फिल्म की रील बना रहा था. इसको लेकर सिनेमा हॉल के कर्मचारियों ने उसे रोक दिया था. इसी में उन लोगों में विवाद हुआ था, इसके अतिरिक्त कोई और विवाद नहीं था. हम एक बात का अवश्य ध्यान दें, जब भी कोई इस तरह की फिल्म आती है या इस प्रकार का कोई मंचन होता है, तो जन भावनाओं का सम्मान अवश्य होना चाहिए. प्रस्तुतिकरण के साथ साथ उन भावनाओं का सम्मान होना चाहिए, जिनके लिए हम प्रस्तुत करना चाहते हैं और किसी को भी भावनाओं को भड़काने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. ' 'मोदी की हवा है. . . ', आखिर क्यों ऐसा बोले PK? कांग्रेस से निलंबित किए जाने पर कैप्टन अमरिंदर की पत्नी परनीत ने तोड़ी चुप्पी, जानिए क्या कहा ?
दो अप्रैल को इंदौर में होने वाले एक समारोह में राकेश शर्मा को इस सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। इससे पहले वह यहां डिप्टी इंटरनेट एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' (The Hindu) के एसोसिएट एडिटर वर्गीस के. जॉर्ज का प्रमोशन हुआ है। केरल में मुख्यमंत्री पी. विजयन सोमवार को कैबिनेट विस्तार किया। इस कैबिनेट विस्तार में एक नया इतिहास रचा गया।
दो अप्रैल को इंदौर में होने वाले एक समारोह में राकेश शर्मा को इस सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। इससे पहले वह यहां डिप्टी इंटरनेट एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के एसोसिएट एडिटर वर्गीस के. जॉर्ज का प्रमोशन हुआ है। केरल में मुख्यमंत्री पी. विजयन सोमवार को कैबिनेट विस्तार किया। इस कैबिनेट विस्तार में एक नया इतिहास रचा गया।
दून मेडिकल कालेज में कोरोना जांच रिपोर्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के पोर्टल से वैध डाटा लेकर मरीज का नाम बदल दिया गया और संबंधित व्यक्ति को इच्छानुसार पाजिटिव या निगेटिव दिखाया गया। जागरण संवाददाता, देहरादून। दून मेडिकल कालेज में कोरोना जांच रिपोर्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के पोर्टल से वैध डाटा लेकर मरीज का नाम बदल दिया गया और संबंधित व्यक्ति को इच्छानुसार पाजिटिव या निगेटिव दिखाया गया। ऐसे एक या दो नहीं, कई मामले हैं। बीती 25 मई को बिनय कुमार नाम के व्यक्ति की रिपोर्ट में उसे कोरोना पाजिटिव दिखाया गया था। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केसी पंत को इस रिपोर्ट में कुछ बातें खटकीं। रिपोर्ट में न केवल शाब्दिक गलतियां थीं, बल्कि रिपोर्ट से अनिवार्य क्यूआर कोड भी गायब था। उन्होंने रिपोर्ट को सत्यापन के लिए भेजा तो पता चला कि मूल रिपोर्ट महाराष्ट्र के 21 वर्षीय किसी व्यक्ति की है। पड़ताल करने पर पता चला कि ऐसे कई मामले हैं। बताया गया कि प्रत्येक प्रयोगशाला और अस्पताल में बहुत कम व्यक्ति आइसीएमआर पोर्टल को एक्सेस कर सकते हैं। पोर्टल पर ही परीक्षण के परिणाम अपडेट किए जाते हैं। प्रत्येक रिपोर्ट में तीन आइडी होती हैं। जिनमें आइसीएमआर आइडी, एसआरएफ (सैंपल रेफरल फार्म) आइडी और रोगी की आइडी शामिल है। न तो इन आइडी में फेरबदल किया जा सकता है और न ही टेस्ट के परिणाम में। ऐसे में मूल डाटा में नाम आदि परिवर्तित कर रिपोर्ट बनाई गई हैं। दून मेडिकल कालेज के ही एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार रिपोर्ट अपलोड होने के बाद नाम, उम्र और लिंग में बदलाव संभव है। यह भी वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके पास पोर्टल पर एक्सेस है। दून मेडिकल कालेज में इससे पहले भी जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। तब बाहर से सैंपल लेकर इनकी जांच मेडिकल कालेज में मुफ्त कराने की बात सामने आई थी। इसमें कालेज के स्टाफ के साथ ही एक निजी लैब के कर्मचारी का नाम सामने आया था। निजी लैब का कर्मचारी घरों में जाकर सैंपल लेता था और इसके एवज में पैसे भी लेता था। ये सैंपल जांच के लिए मेडिकल कालेज भिजवाए जाते थे, जहां जांच मुफ्त होती है। इस मामले की जांच चल रही है। फर्जी कोरोना रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति अपने कई हित साध सकता है। किसी यात्रा, परीक्षा में बैठने या फिर वापस ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए निगेटिव रिपोर्ट इस्तेमाल की जा सकती है। वहीं पाजिटिव रिपोर्ट का फायदा व्यक्ति किसी चिकित्सकीय दावे या अवकाश आदि के लिए उठा सकता है। -डा. आशुतोष सयाना (प्राचार्य, दून मेडिकल कालेज) का कहना है कि इस प्रकरण की जांच की जा रही है। कुछ पक्ष अभी स्पष्ट नहीं हैं। पोर्टल से छेड़छाड़ हुई है तो किस स्तर पर हुई, इसकी जानकारी ली जा रही है। इसके अलावा शासन से भी परामर्श लिया जा रहा है।
दून मेडिकल कालेज में कोरोना जांच रिपोर्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के पोर्टल से वैध डाटा लेकर मरीज का नाम बदल दिया गया और संबंधित व्यक्ति को इच्छानुसार पाजिटिव या निगेटिव दिखाया गया। जागरण संवाददाता, देहरादून। दून मेडिकल कालेज में कोरोना जांच रिपोर्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के पोर्टल से वैध डाटा लेकर मरीज का नाम बदल दिया गया और संबंधित व्यक्ति को इच्छानुसार पाजिटिव या निगेटिव दिखाया गया। ऐसे एक या दो नहीं, कई मामले हैं। बीती पच्चीस मई को बिनय कुमार नाम के व्यक्ति की रिपोर्ट में उसे कोरोना पाजिटिव दिखाया गया था। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केसी पंत को इस रिपोर्ट में कुछ बातें खटकीं। रिपोर्ट में न केवल शाब्दिक गलतियां थीं, बल्कि रिपोर्ट से अनिवार्य क्यूआर कोड भी गायब था। उन्होंने रिपोर्ट को सत्यापन के लिए भेजा तो पता चला कि मूल रिपोर्ट महाराष्ट्र के इक्कीस वर्षीय किसी व्यक्ति की है। पड़ताल करने पर पता चला कि ऐसे कई मामले हैं। बताया गया कि प्रत्येक प्रयोगशाला और अस्पताल में बहुत कम व्यक्ति आइसीएमआर पोर्टल को एक्सेस कर सकते हैं। पोर्टल पर ही परीक्षण के परिणाम अपडेट किए जाते हैं। प्रत्येक रिपोर्ट में तीन आइडी होती हैं। जिनमें आइसीएमआर आइडी, एसआरएफ आइडी और रोगी की आइडी शामिल है। न तो इन आइडी में फेरबदल किया जा सकता है और न ही टेस्ट के परिणाम में। ऐसे में मूल डाटा में नाम आदि परिवर्तित कर रिपोर्ट बनाई गई हैं। दून मेडिकल कालेज के ही एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार रिपोर्ट अपलोड होने के बाद नाम, उम्र और लिंग में बदलाव संभव है। यह भी वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके पास पोर्टल पर एक्सेस है। दून मेडिकल कालेज में इससे पहले भी जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। तब बाहर से सैंपल लेकर इनकी जांच मेडिकल कालेज में मुफ्त कराने की बात सामने आई थी। इसमें कालेज के स्टाफ के साथ ही एक निजी लैब के कर्मचारी का नाम सामने आया था। निजी लैब का कर्मचारी घरों में जाकर सैंपल लेता था और इसके एवज में पैसे भी लेता था। ये सैंपल जांच के लिए मेडिकल कालेज भिजवाए जाते थे, जहां जांच मुफ्त होती है। इस मामले की जांच चल रही है। फर्जी कोरोना रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति अपने कई हित साध सकता है। किसी यात्रा, परीक्षा में बैठने या फिर वापस ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए निगेटिव रिपोर्ट इस्तेमाल की जा सकती है। वहीं पाजिटिव रिपोर्ट का फायदा व्यक्ति किसी चिकित्सकीय दावे या अवकाश आदि के लिए उठा सकता है। -डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि इस प्रकरण की जांच की जा रही है। कुछ पक्ष अभी स्पष्ट नहीं हैं। पोर्टल से छेड़छाड़ हुई है तो किस स्तर पर हुई, इसकी जानकारी ली जा रही है। इसके अलावा शासन से भी परामर्श लिया जा रहा है।
महिला प्रीमियर लीग (WPL) के पहले सीजन के एलिमिनेटर में मुंबई इंडियंस की टीम यूपी वॉरियर्स को 72 रनों से हराकर फाइनल में पहुंच गई। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली मुंबई इंडियंस की जीत में अहम योगदान निभाया इंग्लैंड की मीडियम पेस बॉलर इस्सी वोंग ने। उन्होंने इस लीग के इतिहास की पहली हैट्रिक लेकर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवा लिया है। अब कितने भी सीजन आने वाले सालों में हो जाएं और आगे कितनी भी हैट्रिक ले ली जाएं लेकिन इस्सी वोंग का नाम हमेशा याद रखा जाएगा। जिस तरह हमें आज भी याद है कि आईपीएल (Indian Premier League) के इतिहास में किसने पहली बार ऐसा किया था? जब कोई भी चीज पहली बार होती है तो उसका महत्व ही अलग होता है। ठीक उसी तरह है WPL और IPL में पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड। महिला प्रीमियर लीग के इतिहास में यह रिकॉर्ड अब मुंबई इंडियंस की इस्सी वोंग के नाम दर्ज हो गया है। वहीं अगर पुरुष लीग की बात करें जिसकी शुरुआत 2008 में हुई थी उसमें यह रिकॉर्ड भारत के एक पूर्व गेंदबाज के नाम दर्ज है। खास बात यह है कि उन्होंने भी पहले ही सीजन यानी 2008 में ही यह कारनामा कर दिखाया था। उसके बाद से अब तक आईपीएल में कुल 21 हैट्रिक लग चुकी हैं। हाल ही में आईपीएल 2022 में युजवेंद्र चहल ने यह कारनामा कर दिखाया था। IPL में किसने ली थी पहली हैट्रिक? आईपीएल के इतिहास में पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय पेसर लक्ष्मीपति बालाजी के नाम दर्ज है। यह हैट्रिक उन्होंने 2008 के पहले सीजन में पंजाब किंग्स के खिलाफ ली थी। वह उस समय चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे। वो मुकाबला चेन्नई में खेला गया था और उन्होंने इरफान पठान, पीयूष चावला, वीआरवी सिंह को आउट कर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवाया था। उसके बाद 20 हैट्रिक लग चुकी हैं लेकिन उनका नाम 15 साल के बाद आज भी हर किसी को याद है। ऐसा ही कारनामा WPL में इस्सी वोंग ने कर दिखाया है। इंग्लिश पेसर इस्सी वोंग ने एलिमिनेटर मुकाबले में 4 ओवर में 15 रन देकर चार विकेट झटके और मुंबई की जीत में शानदार भूमिका निभाई। उन्होंने सबसे पहले यूपी की कप्तान और ओपनर एलिसा हीली को पवेलियन का रास्ता दिखाया था। उसके बाद 13वें ओवर में इस्सी ने पहले सेट बैटर किरण नावगिरे, फिर सिमर शेख और सोफी एक्लेस्टोन को पहली-पहली गेंद पर चलता करते हुए ऐतिहासिक हैट्रिक ली। उनकी इस चमत्कारी गेंदबाजी के कारण यूपी की टीम 183 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 110 रनों पर सिमट गई। मुंबई इंडियंस की टीम इसी के साथ फाइनल में पहुंची जहां रविवार 26 मार्च को उसका मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के साथ होगा।
महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन के एलिमिनेटर में मुंबई इंडियंस की टीम यूपी वॉरियर्स को बहत्तर रनों से हराकर फाइनल में पहुंच गई। हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली मुंबई इंडियंस की जीत में अहम योगदान निभाया इंग्लैंड की मीडियम पेस बॉलर इस्सी वोंग ने। उन्होंने इस लीग के इतिहास की पहली हैट्रिक लेकर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवा लिया है। अब कितने भी सीजन आने वाले सालों में हो जाएं और आगे कितनी भी हैट्रिक ले ली जाएं लेकिन इस्सी वोंग का नाम हमेशा याद रखा जाएगा। जिस तरह हमें आज भी याद है कि आईपीएल के इतिहास में किसने पहली बार ऐसा किया था? जब कोई भी चीज पहली बार होती है तो उसका महत्व ही अलग होता है। ठीक उसी तरह है WPL और IPL में पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड। महिला प्रीमियर लीग के इतिहास में यह रिकॉर्ड अब मुंबई इंडियंस की इस्सी वोंग के नाम दर्ज हो गया है। वहीं अगर पुरुष लीग की बात करें जिसकी शुरुआत दो हज़ार आठ में हुई थी उसमें यह रिकॉर्ड भारत के एक पूर्व गेंदबाज के नाम दर्ज है। खास बात यह है कि उन्होंने भी पहले ही सीजन यानी दो हज़ार आठ में ही यह कारनामा कर दिखाया था। उसके बाद से अब तक आईपीएल में कुल इक्कीस हैट्रिक लग चुकी हैं। हाल ही में आईपीएल दो हज़ार बाईस में युजवेंद्र चहल ने यह कारनामा कर दिखाया था। IPL में किसने ली थी पहली हैट्रिक? आईपीएल के इतिहास में पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड पूर्व भारतीय पेसर लक्ष्मीपति बालाजी के नाम दर्ज है। यह हैट्रिक उन्होंने दो हज़ार आठ के पहले सीजन में पंजाब किंग्स के खिलाफ ली थी। वह उस समय चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे। वो मुकाबला चेन्नई में खेला गया था और उन्होंने इरफान पठान, पीयूष चावला, वीआरवी सिंह को आउट कर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवाया था। उसके बाद बीस हैट्रिक लग चुकी हैं लेकिन उनका नाम पंद्रह साल के बाद आज भी हर किसी को याद है। ऐसा ही कारनामा WPL में इस्सी वोंग ने कर दिखाया है। इंग्लिश पेसर इस्सी वोंग ने एलिमिनेटर मुकाबले में चार ओवर में पंद्रह रन देकर चार विकेट झटके और मुंबई की जीत में शानदार भूमिका निभाई। उन्होंने सबसे पहले यूपी की कप्तान और ओपनर एलिसा हीली को पवेलियन का रास्ता दिखाया था। उसके बाद तेरहवें ओवर में इस्सी ने पहले सेट बैटर किरण नावगिरे, फिर सिमर शेख और सोफी एक्लेस्टोन को पहली-पहली गेंद पर चलता करते हुए ऐतिहासिक हैट्रिक ली। उनकी इस चमत्कारी गेंदबाजी के कारण यूपी की टीम एक सौ तिरासी रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए महज एक सौ दस रनों पर सिमट गई। मुंबई इंडियंस की टीम इसी के साथ फाइनल में पहुंची जहां रविवार छब्बीस मार्च को उसका मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के साथ होगा।
चंडीगढ़, 10 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित हरियाणा में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में सभी 10 सीटों पर 12 मई को मतदान होगा। यहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व उनके पूर्ववर्ती कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए करो या मरो की लड़ाई है। भाजपा, कांग्रेस व ओम प्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) तीन मुख्य पार्टियां हैं, जिनके बीच चुनावी लड़ाई है। इस बार राज्य, विधानसभा चुनाव से कुछ ही पहले रोमांचक मुकाबले का साक्षी बन रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला के पौत्र अर्जुन व उनसे अलग हुए दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं। अर्जुन व दिग्विजय चौटाला क्रमशः कुरुक्षेत्र व सोनीपत सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। अर्जुन, इनेलो से और दिग्विजय जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से उम्मीदवार हैं। जेजेपी, इनेलो से अलग होकर बनी है। हिसार वंशवाद के त्रिकोणीय संघर्ष का साक्षी बनने जा रहा है, जहां से जेजेपी का नेतृत्व कर रहे दुष्यंत चौटाला अपनी सीट बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह कांग्रेस के भव्य विश्नोई व भाजपा के नौकरशाह से राजनेता बने बृजेंद्र सिंह के खिलाफ मुकाबले में हैं। भव्य मुकाबले में सबसे कम क्रम उम्र के हैं। वह तीन बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत भजन लाल के पोते हैं। बृजेंद्र सिंह, स्टील मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। इन चुनावों में हुड्डा-पिता व पुत्र की प्रतिष्ठा दांव पर है, जो कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। राज्य में 2014 की हार के बाद से कांग्रेस की स्थिति लगातार गिरती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा सोनीपत से अपना भाग्य आजमा रहे हैं जबकि उनके बेटे दीपेंद्र, रोहतक से चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। दीपेंद्र हुड्डा, दस उम्मीदवारों में से एकमात्र कांग्रेस उम्मीदवार रहे जो 2014 के लोकसभा चुनावों में जीतने में कामयाब रहे। उस समय भाजपा को 34. 8 फीसदी वोट मिले थे और सात सीटों पर जीत मिली थी। इनेलो को दो सीटों पर जीत मिली थी। खट्टर सरकार को मोदी फैक्टर से 'असाधारण जीत' का भरोसा है। इससे पहले खट्टर सरकार जनवरी में जींद में हुए विधानसभा उपचुनाव को जीत चुकी है। इस उप चुनाव में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, जेजेपी के दिग्विजय चौटाला के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे। यह पहली बार है कि भाजपा ने जींद सीट जीती है। राजनीतिक जानकारों ने आईएएनएस से कहा कि भाजपा को इस बार दोहरी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। पहला, भाजपा सरकार अपने कार्यकाल के अंत में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। दूसरी बात यह है कि चुनाव में जाट आरक्षण उस राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जहां जातिगत समीकरण ने प्रत्येक चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभाई है।
चंडीगढ़, दस मई । भारतीय जनता पार्टी शासित हरियाणा में लोकसभा चुनाव के छठे चरण में सभी दस सीटों पर बारह मई को मतदान होगा। यहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व उनके पूर्ववर्ती कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए करो या मरो की लड़ाई है। भाजपा, कांग्रेस व ओम प्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल तीन मुख्य पार्टियां हैं, जिनके बीच चुनावी लड़ाई है। इस बार राज्य, विधानसभा चुनाव से कुछ ही पहले रोमांचक मुकाबले का साक्षी बन रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला के पौत्र अर्जुन व उनसे अलग हुए दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं। अर्जुन व दिग्विजय चौटाला क्रमशः कुरुक्षेत्र व सोनीपत सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। अर्जुन, इनेलो से और दिग्विजय जननायक जनता पार्टी से उम्मीदवार हैं। जेजेपी, इनेलो से अलग होकर बनी है। हिसार वंशवाद के त्रिकोणीय संघर्ष का साक्षी बनने जा रहा है, जहां से जेजेपी का नेतृत्व कर रहे दुष्यंत चौटाला अपनी सीट बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह कांग्रेस के भव्य विश्नोई व भाजपा के नौकरशाह से राजनेता बने बृजेंद्र सिंह के खिलाफ मुकाबले में हैं। भव्य मुकाबले में सबसे कम क्रम उम्र के हैं। वह तीन बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत भजन लाल के पोते हैं। बृजेंद्र सिंह, स्टील मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। इन चुनावों में हुड्डा-पिता व पुत्र की प्रतिष्ठा दांव पर है, जो कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। राज्य में दो हज़ार चौदह की हार के बाद से कांग्रेस की स्थिति लगातार गिरती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा सोनीपत से अपना भाग्य आजमा रहे हैं जबकि उनके बेटे दीपेंद्र, रोहतक से चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। दीपेंद्र हुड्डा, दस उम्मीदवारों में से एकमात्र कांग्रेस उम्मीदवार रहे जो दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनावों में जीतने में कामयाब रहे। उस समय भाजपा को चौंतीस. आठ फीसदी वोट मिले थे और सात सीटों पर जीत मिली थी। इनेलो को दो सीटों पर जीत मिली थी। खट्टर सरकार को मोदी फैक्टर से 'असाधारण जीत' का भरोसा है। इससे पहले खट्टर सरकार जनवरी में जींद में हुए विधानसभा उपचुनाव को जीत चुकी है। इस उप चुनाव में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, जेजेपी के दिग्विजय चौटाला के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे। यह पहली बार है कि भाजपा ने जींद सीट जीती है। राजनीतिक जानकारों ने आईएएनएस से कहा कि भाजपा को इस बार दोहरी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। पहला, भाजपा सरकार अपने कार्यकाल के अंत में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। दूसरी बात यह है कि चुनाव में जाट आरक्षण उस राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जहां जातिगत समीकरण ने प्रत्येक चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभाई है।
Don't Miss! इंडियन आइडल अभिजीत सावंत ने खाई मार! इसी तेज रफ्तार के चक्कर में प्राजक्ता की गाड़ी से स्कूटर पर सवार दो युवकों को टक्कर लग गई। जिससे दोनों लड़के घायल हो गए और घटना स्थल पर भीड़ जमा हो गई। इसी बीच प्राजक्ता को बचाने जब अभिजीत सावंत नीचे उतरे तो उनके साथ वहां मौजूद भीड़ ने ने धक्का-मुक्की की और उनकी पिटाई कर दी। भीड़ को शांत करने की कोशिश में सोनू निगम भी पहुँचे तो उनके साथ भी लोगों ने बदतमीजी की। खबरों के मुताबिक वहां मौजूद लोगों का कहना है कि अभिजीत और प्राजक्ता नशे की हालत में थे और कार रेस कर रहे थे।
Don't Miss! इंडियन आइडल अभिजीत सावंत ने खाई मार! इसी तेज रफ्तार के चक्कर में प्राजक्ता की गाड़ी से स्कूटर पर सवार दो युवकों को टक्कर लग गई। जिससे दोनों लड़के घायल हो गए और घटना स्थल पर भीड़ जमा हो गई। इसी बीच प्राजक्ता को बचाने जब अभिजीत सावंत नीचे उतरे तो उनके साथ वहां मौजूद भीड़ ने ने धक्का-मुक्की की और उनकी पिटाई कर दी। भीड़ को शांत करने की कोशिश में सोनू निगम भी पहुँचे तो उनके साथ भी लोगों ने बदतमीजी की। खबरों के मुताबिक वहां मौजूद लोगों का कहना है कि अभिजीत और प्राजक्ता नशे की हालत में थे और कार रेस कर रहे थे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है। लेकिन ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इसबार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा द्वापर युग में कान्हा के जन्म क समय बना था। इस खास संयोग को कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट के अनुसार, इस साल भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि दो-तीन सितंबर को दो दिन आने से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। ऐसे में लोगों में दुविधा है कि आखिर किस दिन पर्व मनाया जाए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसी स्थिति में निर्णय सिंधु के अनुसार अष्टमी व्यापिनी तिथि में ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है। ऐसे में दो सितंबर को व्रत, जागरण और तीन सितंबर को जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की रात्रि को हुआ था। हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इस साल अष्टमी तिथि रविवार दो सितंबर को रात्रि 8. 51 बजे से शुरू हो रही है, जो कि सोमवार तीन सितंबर को शाम 7. 21 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस बार अष्टमी तिथि दो दिन आने से लोग दुविधा में हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो सितंबर को मनेगी या तीन को। इस प्रश्न का उत्तर निर्णय सिंधु में दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अर्द्ध व्यापिनी सप्तमी युक्त अष्टमी को व्रत, उपवास और जागरण करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि किसी भी पर्व के दिन को तय करने में तिथि महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। वार और नक्षत्र का इसमें इतना असर नहीं पड़ता है। इस लिहाज से निर्णय सिंधु के अनुसार दो सितंबर को अर्द्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी को व्रत, उपवास और जागरण करना शुभ है, जबकि अगले दिन तीन को जन्मोत्सव को मनाया जाना चाहिए। कभी-कभी हिंदू पर्वों की तिथि निर्णय में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस दुविधा को दूर करने के लिए धर्माचार्यों और विशेषज्ञों ने समस्त धर्मशास्त्र और पुराणों का सार संग्रह करके बड़े-बड़े निबंधों की रचना की है। यह इतने वृहत हैं कि सर्वसाधारण की समझ और पहुंच से परे हैं। उन निबंधों को देखते हुए हिंदू धर्म शास्त्र, पुराणों का सार संग्रह करके निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ की रचना की गयी है। धर्मशास्त्रों में प्रमाणिकता की दृष्टि में निर्णय सिंधु मान्य है। ( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. ) This website uses cookies.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है। लेकिन ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इसबार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा द्वापर युग में कान्हा के जन्म क समय बना था। इस खास संयोग को कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट के अनुसार, इस साल भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि दो-तीन सितंबर को दो दिन आने से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। ऐसे में लोगों में दुविधा है कि आखिर किस दिन पर्व मनाया जाए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसी स्थिति में निर्णय सिंधु के अनुसार अष्टमी व्यापिनी तिथि में ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है। ऐसे में दो सितंबर को व्रत, जागरण और तीन सितंबर को जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की रात्रि को हुआ था। हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इस साल अष्टमी तिथि रविवार दो सितंबर को रात्रि आठ. इक्यावन बजे से शुरू हो रही है, जो कि सोमवार तीन सितंबर को शाम सात. इक्कीस बजे तक रहेगी। ऐसे में इस बार अष्टमी तिथि दो दिन आने से लोग दुविधा में हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो सितंबर को मनेगी या तीन को। इस प्रश्न का उत्तर निर्णय सिंधु में दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अर्द्ध व्यापिनी सप्तमी युक्त अष्टमी को व्रत, उपवास और जागरण करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि किसी भी पर्व के दिन को तय करने में तिथि महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। वार और नक्षत्र का इसमें इतना असर नहीं पड़ता है। इस लिहाज से निर्णय सिंधु के अनुसार दो सितंबर को अर्द्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी को व्रत, उपवास और जागरण करना शुभ है, जबकि अगले दिन तीन को जन्मोत्सव को मनाया जाना चाहिए। कभी-कभी हिंदू पर्वों की तिथि निर्णय में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस दुविधा को दूर करने के लिए धर्माचार्यों और विशेषज्ञों ने समस्त धर्मशास्त्र और पुराणों का सार संग्रह करके बड़े-बड़े निबंधों की रचना की है। यह इतने वृहत हैं कि सर्वसाधारण की समझ और पहुंच से परे हैं। उन निबंधों को देखते हुए हिंदू धर्म शास्त्र, पुराणों का सार संग्रह करके निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ की रचना की गयी है। धर्मशास्त्रों में प्रमाणिकता की दृष्टि में निर्णय सिंधु मान्य है। This website uses cookies.
गौरा पंत जिन्हें "शिवानी" के नाम से जाना जाता है। बीसवीं सदी की सबसे लोकप्रिय हिंदी पत्रिका की कहानी लेखिकाओं में से एक थीं तथा भारतीय महिला आधारित उपन्यास लिखने में अग्रणी थीं। हिंदी साहित्य जगत में शिवानी एक ऐसी शख्सियत रहीं जिनकी हिंदी, संस्कृत, गुजराती, बंगाली, उर्दू और अंग्रेजी पर बेहद अच्छी पकड़ रही। गौरा पंत "शिवानी" अपनी कृतियों में उत्तर भारत के कुमाऊं क्षेत्र के आसपास की लोक-संस्कृति की झलक दिखलाने और किरदारों के बेमिसाल चरित्र चित्रण करने के लिए जानी गई थी। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए 1982 में उन्हें "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया था। साठ और सत्तर के दशक में इनकी लिखी कहानियां और उपन्यास हिन्दी पाठकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हुए और आज भी लोग उन्हें बहुत चाव से पढ़ते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की मूल निवासी गौरा पंत 'शिवानी' का जन्म 17 अक्टूबर 1923 को विजयादशमी के दिन राजकोट, गुजरात में हुआ था। उनके पिता अश्विनी कुमार पांडे राजकोट रियासत में शिक्षक थे। उनके पिता रामपुर के नवाब के दीवान भी बने और वायसराय की बार काउंसिल के सदस्य भी रहे थे। उसके बाद उनका परिवार ओरछा की रियासत में चला गया था, जहां उनके पिता महत्वपूर्ण पद पर रहें। गौरा पंत के जीवन में इन सभी स्थानों का प्रभाव था और विशेषाधिकार प्राप्त महिलाओं के सम्बंध में एक विशेष अंतर्दृष्टि थी, जो उनके अधिकांश कार्यों में परिलक्षित होती थी। गौरा पंत की पहली कहानी 1935 में बारह साल की उम्र में हिंदी बाल पत्रिका "नटखट" में प्रकाशित हुई थी। गौरा पंत को रवींद्रनाथ टैगोर के विश्व-भारती विश्वविद्यालय शांति निकेतन में अध्ययन के लिए भेजा गया था। जिसमें वह 9 वर्षों तक शांति निकेतन में रहीं और 1943 में स्नातक शिक्षा के बाद छोड़ दिया था। शांति निकेतन में बिताए समय के अनुभव से उनका गंभीर लेखन शुरू हुआ था। 1951 में धर्मयुग में उनकी लघुकथा "मैं मुर्गा हूँ" प्रकाशित हुई और वह गौरा पंत से शिवानी बन गईं। शिवानी का विवाह शुकदेव पंत से हुआ जो उत्तरप्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत थे, इसी कारण उनका परिवार लखनऊ में बसने से पहले इलाहाबाद और नैनीताल सहित विभिन्न स्थानों की यात्रा करने लगा था, जहां वह अपने अंतिम दिनों तक रहीं। केवल 12 वर्ष की उम्र में पहली कहानी प्रकाशित होने से लेकर 21 मार्च 2003 को उनके निधन तक उनका लेखन निरंतर जारी रहा था। शिवानी ने अपने जीवन के अंत में आत्मकथात्मक लेखन किया था, जो पहली बार उनकी पुस्तक शिवानी की श्रेष्ठ कहानियां में देखा गया। उनकी मृत्यु के बाद भारत सरकार ने वर्णित किया "हिंदी साहित्य में उनके योगदान के रूप में शिवानी की मृत्यु ने हिंदी साहित्य जगत ने एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित उपन्यासकार खो दिया है, इस शून्य को भरना मुश्किल है"। शिवानी को कहानी के क्षेत्र में पाठकों और लेखकों की रुचि निर्मित करने तथा कहानी को केंद्रीय विधा के रूप में विकसित करने का श्रेय जाता है। वह कुछ इस तरह लिखती थीं कि लोगों की उसे पढ़ने को लेकर जिज्ञासा पैदा होती थी। उनकी भाषा शैली कुछ-कुछ महादेवी वर्मा जैसी रही पर उनके लेखन में एक लोकप्रिय किस्म का मसविदा था। उनकी कृतियों से झलकता है कि उन्होंने अपने समय के यथार्थ को बदलने की कोशिश नहीं की है। शिवानी की कृतियों के चरित्र चित्रण में एक तरह का आवेग दिखाई देता है, वह चरित्र को शब्दों में कुछ इस तरह पिरोकर पेश करती थीं जैसे पाठकों की आंखों के सामने राजा रविवर्मा का कोई खूबसूरत चित्र तैर रहा है। उनके पहले उपन्यास "लाल हवेली" ने साठ के दशक की शुरुआत में उनकी प्रतिष्ठा स्थापित की थी। उन्होंने संस्कृतनिष्ठ हिंदी का इस्तेमाल किया था। जब शिवानी का उपन्यास कृष्णकली प्रकाशित हो रहा था तो हर जगह इसकी चर्चा होती थी। उनके उपन्यास ऐसे हैं, जिन्हें पढ़कर यह एहसास होता था कि वह खत्म ही न हों, उपन्यास का कोई भी अंश उसकी कहानी में पूरी तरह डुबो देता था। शिवानी भारतवर्ष के हिंदी साहित्य के इतिहास का बहुत प्यारा पन्ना थीं, अपने समकालीन साहित्यकारों की तुलना में वह काफी सहज और सादगी से भरी थीं। उनकी कृतियों का पाठकों की पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत आकर्षण है। उनका साहित्य के क्षेत्र में योगदान बड़ा है, वह एक विपुल लेखिका थीं, उनकी ग्रंथ सूची में 40 से अधिक उपन्यास, कई लघु कथाएं और सैकड़ों लेख और निबंध शामिल हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में चौदह फेरे, कृष्णकली, लाल हवेली, श्मशान चंपा, भारवी, रति विलाप, विषकन्या, अपराधिनी शामिल हैं। शिवानी ने अपनी लंदन यात्रा के आधार पर "यात्रीकी" और रूस की अपनी यात्रा के आधार पर "चरिवती" जैसे यात्रा वृतांत भी प्रकाशित किए हैं।
गौरा पंत जिन्हें "शिवानी" के नाम से जाना जाता है। बीसवीं सदी की सबसे लोकप्रिय हिंदी पत्रिका की कहानी लेखिकाओं में से एक थीं तथा भारतीय महिला आधारित उपन्यास लिखने में अग्रणी थीं। हिंदी साहित्य जगत में शिवानी एक ऐसी शख्सियत रहीं जिनकी हिंदी, संस्कृत, गुजराती, बंगाली, उर्दू और अंग्रेजी पर बेहद अच्छी पकड़ रही। गौरा पंत "शिवानी" अपनी कृतियों में उत्तर भारत के कुमाऊं क्षेत्र के आसपास की लोक-संस्कृति की झलक दिखलाने और किरदारों के बेमिसाल चरित्र चित्रण करने के लिए जानी गई थी। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए एक हज़ार नौ सौ बयासी में उन्हें "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया था। साठ और सत्तर के दशक में इनकी लिखी कहानियां और उपन्यास हिन्दी पाठकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हुए और आज भी लोग उन्हें बहुत चाव से पढ़ते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की मूल निवासी गौरा पंत 'शिवानी' का जन्म सत्रह अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ तेईस को विजयादशमी के दिन राजकोट, गुजरात में हुआ था। उनके पिता अश्विनी कुमार पांडे राजकोट रियासत में शिक्षक थे। उनके पिता रामपुर के नवाब के दीवान भी बने और वायसराय की बार काउंसिल के सदस्य भी रहे थे। उसके बाद उनका परिवार ओरछा की रियासत में चला गया था, जहां उनके पिता महत्वपूर्ण पद पर रहें। गौरा पंत के जीवन में इन सभी स्थानों का प्रभाव था और विशेषाधिकार प्राप्त महिलाओं के सम्बंध में एक विशेष अंतर्दृष्टि थी, जो उनके अधिकांश कार्यों में परिलक्षित होती थी। गौरा पंत की पहली कहानी एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में बारह साल की उम्र में हिंदी बाल पत्रिका "नटखट" में प्रकाशित हुई थी। गौरा पंत को रवींद्रनाथ टैगोर के विश्व-भारती विश्वविद्यालय शांति निकेतन में अध्ययन के लिए भेजा गया था। जिसमें वह नौ वर्षों तक शांति निकेतन में रहीं और एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में स्नातक शिक्षा के बाद छोड़ दिया था। शांति निकेतन में बिताए समय के अनुभव से उनका गंभीर लेखन शुरू हुआ था। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में धर्मयुग में उनकी लघुकथा "मैं मुर्गा हूँ" प्रकाशित हुई और वह गौरा पंत से शिवानी बन गईं। शिवानी का विवाह शुकदेव पंत से हुआ जो उत्तरप्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत थे, इसी कारण उनका परिवार लखनऊ में बसने से पहले इलाहाबाद और नैनीताल सहित विभिन्न स्थानों की यात्रा करने लगा था, जहां वह अपने अंतिम दिनों तक रहीं। केवल बारह वर्ष की उम्र में पहली कहानी प्रकाशित होने से लेकर इक्कीस मार्च दो हज़ार तीन को उनके निधन तक उनका लेखन निरंतर जारी रहा था। शिवानी ने अपने जीवन के अंत में आत्मकथात्मक लेखन किया था, जो पहली बार उनकी पुस्तक शिवानी की श्रेष्ठ कहानियां में देखा गया। उनकी मृत्यु के बाद भारत सरकार ने वर्णित किया "हिंदी साहित्य में उनके योगदान के रूप में शिवानी की मृत्यु ने हिंदी साहित्य जगत ने एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित उपन्यासकार खो दिया है, इस शून्य को भरना मुश्किल है"। शिवानी को कहानी के क्षेत्र में पाठकों और लेखकों की रुचि निर्मित करने तथा कहानी को केंद्रीय विधा के रूप में विकसित करने का श्रेय जाता है। वह कुछ इस तरह लिखती थीं कि लोगों की उसे पढ़ने को लेकर जिज्ञासा पैदा होती थी। उनकी भाषा शैली कुछ-कुछ महादेवी वर्मा जैसी रही पर उनके लेखन में एक लोकप्रिय किस्म का मसविदा था। उनकी कृतियों से झलकता है कि उन्होंने अपने समय के यथार्थ को बदलने की कोशिश नहीं की है। शिवानी की कृतियों के चरित्र चित्रण में एक तरह का आवेग दिखाई देता है, वह चरित्र को शब्दों में कुछ इस तरह पिरोकर पेश करती थीं जैसे पाठकों की आंखों के सामने राजा रविवर्मा का कोई खूबसूरत चित्र तैर रहा है। उनके पहले उपन्यास "लाल हवेली" ने साठ के दशक की शुरुआत में उनकी प्रतिष्ठा स्थापित की थी। उन्होंने संस्कृतनिष्ठ हिंदी का इस्तेमाल किया था। जब शिवानी का उपन्यास कृष्णकली प्रकाशित हो रहा था तो हर जगह इसकी चर्चा होती थी। उनके उपन्यास ऐसे हैं, जिन्हें पढ़कर यह एहसास होता था कि वह खत्म ही न हों, उपन्यास का कोई भी अंश उसकी कहानी में पूरी तरह डुबो देता था। शिवानी भारतवर्ष के हिंदी साहित्य के इतिहास का बहुत प्यारा पन्ना थीं, अपने समकालीन साहित्यकारों की तुलना में वह काफी सहज और सादगी से भरी थीं। उनकी कृतियों का पाठकों की पीढ़ियों के लिए एक शाश्वत आकर्षण है। उनका साहित्य के क्षेत्र में योगदान बड़ा है, वह एक विपुल लेखिका थीं, उनकी ग्रंथ सूची में चालीस से अधिक उपन्यास, कई लघु कथाएं और सैकड़ों लेख और निबंध शामिल हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में चौदह फेरे, कृष्णकली, लाल हवेली, श्मशान चंपा, भारवी, रति विलाप, विषकन्या, अपराधिनी शामिल हैं। शिवानी ने अपनी लंदन यात्रा के आधार पर "यात्रीकी" और रूस की अपनी यात्रा के आधार पर "चरिवती" जैसे यात्रा वृतांत भी प्रकाशित किए हैं।
कल तक अपने मुखर और परोपकारी स्वभाव के लिए चर्चित रहनेवाली 'वह' आज कुछ और अधिक मुखर थी। उसने कब सोचा था कि समाचारों में सुनी या चलचित्रों में देखी घटनाओं की तरह यह घटना उसके जीवन में घट जायेगी और उसे चाहे-अनचाहे, जाने-अनजाने लोगों के अप्रिय प्रश्नों के व्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले जूझना पड़ेगा। कभी-कभी तो ऐसा प्रतीत होता मानो पुलिस अधिकारी, पत्रकार और वकील ही नहीं तथाकथित शुभ चिन्तक भी उसके कहे पर विश्वास न कर कुछ और सुनना चाहते हैं। कुछ ऐसा जो उनकी दबी हुई मनोवृत्ति को संतुष्ट कर सके, कुछ मजेदार जिस पर प्रगट में थू-थू करते हुए भी वे मन ही मन चटखारे लेता हुआ अनुभव कर सकें, कुछ ऐसा जो वे चाहकर भी देख या कर नहीं सके। उसका मन होता ऐसी गलीज मानसिकता के मुँह पर थप्पड़ जड़ दे किन्तु उसे खुद को संयत रखते हुए उनके अभद्रता की सीमा को स्पर्श करते प्रश्नों के उत्तर शालीनतापूर्वक देना था। जिन लुच्चों ने उसे परेशान करने का प्रयास किया वे तो अपने पिता के राजनैतिक-आर्थिक असर के कारण कहीं छिपे हुए मौज कर रहे थे और वह निरपराध तथा प्रताड़ित किये जाने के बाद भी नाना प्रकार के अभियोग झेल रही थी। वह समझ चुकी थी कि उसे परिस्थितियों से पार पाना है तो न केवल दुस्साहसी हो कर व्यवस्था से जूझते हुए छद्म हितैषी पुरुषों को मुँह तोड़ जवाब देना होगा बल्कि उसे कठिनाई में देखकर मन ही मन आनंदित होती महिलाओं के साथ भी लगातार खेलने होगी आँख मिचौली।
कल तक अपने मुखर और परोपकारी स्वभाव के लिए चर्चित रहनेवाली 'वह' आज कुछ और अधिक मुखर थी। उसने कब सोचा था कि समाचारों में सुनी या चलचित्रों में देखी घटनाओं की तरह यह घटना उसके जीवन में घट जायेगी और उसे चाहे-अनचाहे, जाने-अनजाने लोगों के अप्रिय प्रश्नों के व्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले जूझना पड़ेगा। कभी-कभी तो ऐसा प्रतीत होता मानो पुलिस अधिकारी, पत्रकार और वकील ही नहीं तथाकथित शुभ चिन्तक भी उसके कहे पर विश्वास न कर कुछ और सुनना चाहते हैं। कुछ ऐसा जो उनकी दबी हुई मनोवृत्ति को संतुष्ट कर सके, कुछ मजेदार जिस पर प्रगट में थू-थू करते हुए भी वे मन ही मन चटखारे लेता हुआ अनुभव कर सकें, कुछ ऐसा जो वे चाहकर भी देख या कर नहीं सके। उसका मन होता ऐसी गलीज मानसिकता के मुँह पर थप्पड़ जड़ दे किन्तु उसे खुद को संयत रखते हुए उनके अभद्रता की सीमा को स्पर्श करते प्रश्नों के उत्तर शालीनतापूर्वक देना था। जिन लुच्चों ने उसे परेशान करने का प्रयास किया वे तो अपने पिता के राजनैतिक-आर्थिक असर के कारण कहीं छिपे हुए मौज कर रहे थे और वह निरपराध तथा प्रताड़ित किये जाने के बाद भी नाना प्रकार के अभियोग झेल रही थी। वह समझ चुकी थी कि उसे परिस्थितियों से पार पाना है तो न केवल दुस्साहसी हो कर व्यवस्था से जूझते हुए छद्म हितैषी पुरुषों को मुँह तोड़ जवाब देना होगा बल्कि उसे कठिनाई में देखकर मन ही मन आनंदित होती महिलाओं के साथ भी लगातार खेलने होगी आँख मिचौली।
मेड्रिड, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। रूस एथलेटिक्स महासंघ (आरयूएसएएफ) ने अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) द्वारा अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) में अपील की है। आरएएफ ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, आईएएएफ ने जुलाई में आरयूएसएएफ की पूर्ण सदस्यता को खत्म कर दिया था और इसके प्रतिबंध को दिसंबर में होने वाली अगली बैठक तक बढ़ा दिया था। सीएएस द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, आरयूएसएएफ ने सीएएस से कहा है कि वह आईएएएफ के 27 जुलाई 2018 के फैसले को रद्द कर उसकी पूर्ण सदस्यता को बहाल करे। आरयूएफएफ को आईएएएफ ने रियो ओलम्पिक-2016 से पहले डोप के बढ़ते मामलों के कारण प्रतिबंधित कर दिया था।
मेड्रिड, सत्ताईस सितम्बर । रूस एथलेटिक्स महासंघ ने अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ खेल पंचाट न्यायालय में अपील की है। आरएएफ ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, आईएएएफ ने जुलाई में आरयूएसएएफ की पूर्ण सदस्यता को खत्म कर दिया था और इसके प्रतिबंध को दिसंबर में होने वाली अगली बैठक तक बढ़ा दिया था। सीएएस द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, आरयूएसएएफ ने सीएएस से कहा है कि वह आईएएएफ के सत्ताईस जुलाई दो हज़ार अट्ठारह के फैसले को रद्द कर उसकी पूर्ण सदस्यता को बहाल करे। आरयूएफएफ को आईएएएफ ने रियो ओलम्पिक-दो हज़ार सोलह से पहले डोप के बढ़ते मामलों के कारण प्रतिबंधित कर दिया था।
नई दिल्ली। साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) को झटका लगा है। टाटा समूह से विवाद मामले में उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने एसपी समूह की, 2021 को दिए गए उस फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका ठुकरा दी जिसमें साइरस मिस्त्री को टाटा संस (Tata Sons) के प्रमुख के पद से हटाए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया था। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 26 मार्च, 2021 के अपने फैसले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के दिसंबर 2019 के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसने साइरस मिस्त्री को टाटा संस लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में बहाल किया था। कोर्ट ने कहा कि उसे पुनर्विचार याचिका में कोई आधार नहीं मिला है। तीन जजों की बेंच ने चेंबर में इस पर विचार किया, हालांकि जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम (Justice V Ramasubramaniam) ने अल्पमत के फैसले में कहा कि पुनर्विचार याचिका खारिज किया जाए। यहां बता दें कि 26 मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा समूह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साइरस मिस्त्री को टाटा संस के प्रमुख के पद से हटाने के फैसले को बरकरार रखा था।
नई दिल्ली। साइरस मिस्त्री को झटका लगा है। टाटा समूह से विवाद मामले में उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने एसपी समूह की, दो हज़ार इक्कीस को दिए गए उस फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका ठुकरा दी जिसमें साइरस मिस्त्री को टाटा संस के प्रमुख के पद से हटाए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया था। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने छब्बीस मार्च, दो हज़ार इक्कीस के अपने फैसले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के दिसंबर दो हज़ार उन्नीस के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसने साइरस मिस्त्री को टाटा संस लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में बहाल किया था। कोर्ट ने कहा कि उसे पुनर्विचार याचिका में कोई आधार नहीं मिला है। तीन जजों की बेंच ने चेंबर में इस पर विचार किया, हालांकि जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम ने अल्पमत के फैसले में कहा कि पुनर्विचार याचिका खारिज किया जाए। यहां बता दें कि छब्बीस मार्च दो हज़ार इक्कीस में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा समूह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साइरस मिस्त्री को टाटा संस के प्रमुख के पद से हटाने के फैसले को बरकरार रखा था।
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टाे ने हत्या से चार साल पहले दिसंबर 2007 में अपने देश की सेना पर न्यूक्लियर हथियारों की नीति को खतरनाक तरीके से आगे बढ़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना को खारिज किया था। 2003 में दिए इंटरव्यू में बेनजीर ने कहा था कि,' वे सोचते हैं कि न्यूक्लियर हथियार बढ़ाकर वे भारत को झुका देंगे। क्योंकि उन्हें लगता था कि कश्मीर में चाहे जितना विद्रोह हो जाए भारत कहां तक जा सकता है। यदि भारत युद्ध छेड़ेगा तो दुनिया के अन्य देश दखल देंगे क्योंकि दोनों देश परमाणु सम्पन्न हैं। और यदि अन्य देश नहीं आए तो भी भारत जानता है कि यदि वह लाहौर की तरफ बढ़ेगा तो पाकिस्तान न्यूक्लियर बम इस्तेमाल कर सकता है। भारत इसका जवाब दे सकता है लेकिन फिर भी भारत में काफी लोग मारे जाएंगे। ' श्याम भाटिया ने अपनी किताब 'बुलेट्स एंड बायलाइंस, डिस्पैचेस फ्रॉम काबुल, दिल्ली, दमिश्क एंड बियॉन्ड' में इस इंटरव्यू को प्रकाशित किया है। - श्याम भाटिया पत्रकार हैं और लंदन में रहते हैं।
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टाे ने हत्या से चार साल पहले दिसंबर दो हज़ार सात में अपने देश की सेना पर न्यूक्लियर हथियारों की नीति को खतरनाक तरीके से आगे बढ़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना को खारिज किया था। दो हज़ार तीन में दिए इंटरव्यू में बेनजीर ने कहा था कि,' वे सोचते हैं कि न्यूक्लियर हथियार बढ़ाकर वे भारत को झुका देंगे। क्योंकि उन्हें लगता था कि कश्मीर में चाहे जितना विद्रोह हो जाए भारत कहां तक जा सकता है। यदि भारत युद्ध छेड़ेगा तो दुनिया के अन्य देश दखल देंगे क्योंकि दोनों देश परमाणु सम्पन्न हैं। और यदि अन्य देश नहीं आए तो भी भारत जानता है कि यदि वह लाहौर की तरफ बढ़ेगा तो पाकिस्तान न्यूक्लियर बम इस्तेमाल कर सकता है। भारत इसका जवाब दे सकता है लेकिन फिर भी भारत में काफी लोग मारे जाएंगे। ' श्याम भाटिया ने अपनी किताब 'बुलेट्स एंड बायलाइंस, डिस्पैचेस फ्रॉम काबुल, दिल्ली, दमिश्क एंड बियॉन्ड' में इस इंटरव्यू को प्रकाशित किया है। - श्याम भाटिया पत्रकार हैं और लंदन में रहते हैं।
जिनके सुत विकुक्षि से नामित, हुआ अवध में दिनकर वंश । जो अपने धन, बल, विवेक से, कहलाए मनु कुल अवतंस ॥ ६३ ॥ वह विकुक्षि जो समरांगण में, हो दुर्जेय पुरन्दरवाह । असुरों का मद मर्दन करके, बने पुरंजय पुरपति - नाह।। ६४।। इस दिग्विजयी वंश की, दिव्यकथा का गान, नाराशंसी रूप से, गाते पुण्य पुराण ।। ६५ ।। डॉ० विष्णुदत्त राकेश, डी.लिट् प्रोफेसर हिन्दी एवं संकायाध्यक्ष मानविकी संकाय, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार ("नभग" महाकाव्य से साभार)
जिनके सुत विकुक्षि से नामित, हुआ अवध में दिनकर वंश । जो अपने धन, बल, विवेक से, कहलाए मनु कुल अवतंस ॥ तिरेसठ ॥ वह विकुक्षि जो समरांगण में, हो दुर्जेय पुरन्दरवाह । असुरों का मद मर्दन करके, बने पुरंजय पुरपति - नाह।। चौंसठ।। इस दिग्विजयी वंश की, दिव्यकथा का गान, नाराशंसी रूप से, गाते पुण्य पुराण ।। पैंसठ ।। डॉशून्य विष्णुदत्त राकेश, डी.लिट् प्रोफेसर हिन्दी एवं संकायाध्यक्ष मानविकी संकाय, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
2022 KTM RC 390 में सिंगल-पॉड हेडलाइट, फेयरिंग-माउंटेड रियर-व्यू मिरर, अपडेटेड टर्न इंडिकेटर सेटअप मिलेगा। इसमें एक शार्प फेयरिंग डिज़ाइन, एक 13. 7-लीटर फ्यूल टैंक, एक रीडिज़ाइन किया गया टेल सेक्शन और एक साइड-स्लंग एग्जॉस्ट पैक ऑफर करेगा। ऑटो डेस्क, 2022 KTM RC 390 : बजाज ने 2022 केटीएम आरसी 390 के लिए टाइप अप्रूवल दस्तावेज दाखिल किए हैं, इससे इशारा मिलता है कि कंपनी इसकी आधिकारिक लॉन्च करने जा रही है। ये डॉक्युमेंट 10 मार्च, 2022 को दायर किया गया था, next-gen RC 390 को भारत की परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया गया है, और इसमें अपकमिंग मॉडल के लिए कुछ खासियतों को भी शामिल किया गया है। नेक्स्ट-जेन आरसी 390 अपने 43. 5hp पावर आउटपुट को बरकरार रखा गया है। यह KTM की भारत वेबसाइट पर दिए गए पावर फिगर के अकॉर्डिंग ही है, जहां हाल ही में 2022 RC 390 को लिस्ट किया गया था। बाइक के व्हीलबेस और आयामों के बारे में भी डिटेल दी गई है। हालांकि दस्तावेज़ में कुछ भी नया नहीं हैं, लेकिन यह हमें बताता है कि देर से ही सही, कंपनी आखिरकार बाइक के अपडेटेड वर्जन को लॉन्च करने के लिए तैयार है। अपडेटेड RC 125 और RC 200 को पिछले साल के अंत में लॉन्च किया गया था, लेकिन 2022 RC 390 को 390 लाइन-अप में नया TFT डिस्प्ले दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस TFT डैश के साथ सप्लाई संबंधी समस्याएं हैं। सेमीकंडक्टर की कमी का भी असर पड़ा है। इसी वजह से 390 ड्यूक की इस समय बहुत सीमित यूनिट सप्लाई की जा रहीं हैं। यही वजह है कि इसका प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। सूत्रों की मानें तो इसका उत्पादन 21 मार्च को फिर से शुरू हुआ, इस वजह से इसके लॉन्चिंग की सुगबुगाहट बढ़ गई हैं। 2022 RC390 को आउटगोइंग वर्जन के लिए 2,77,635 रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) प्राइस टैग हो सकती है। यह सिंगल-पॉड हेडलाइट, फेयरिंग-माउंटेड रियर-व्यू मिरर, अपडेटेड टर्न इंडिकेटर सेटअप, एक शार्प फेयरिंग डिज़ाइन, एक 13. 7-लीटर फ्यूल टैंक, एक रीडिज़ाइन किया गया टेल सेक्शन और एक साइड-स्लंग एग्जॉस्ट पैक ऑफर करेगा। भारत की वेबसाइट मौजूदा 2022 RC390 के लिए एडजस्टेबल फ्रंट फोर्क्स को लिस्ट करती है। हालांकि, ये सुविधा भारतीय बाजार के लिए दी जाएगी या नहीं, इश पर संशय बरकरार है।
दो हज़ार बाईस KTM RC तीन सौ नब्बे में सिंगल-पॉड हेडलाइट, फेयरिंग-माउंटेड रियर-व्यू मिरर, अपडेटेड टर्न इंडिकेटर सेटअप मिलेगा। इसमें एक शार्प फेयरिंग डिज़ाइन, एक तेरह. सात-लीटर फ्यूल टैंक, एक रीडिज़ाइन किया गया टेल सेक्शन और एक साइड-स्लंग एग्जॉस्ट पैक ऑफर करेगा। ऑटो डेस्क, दो हज़ार बाईस KTM RC तीन सौ नब्बे : बजाज ने दो हज़ार बाईस केटीएम आरसी तीन सौ नब्बे के लिए टाइप अप्रूवल दस्तावेज दाखिल किए हैं, इससे इशारा मिलता है कि कंपनी इसकी आधिकारिक लॉन्च करने जा रही है। ये डॉक्युमेंट दस मार्च, दो हज़ार बाईस को दायर किया गया था, next-gen RC तीन सौ नब्बे को भारत की परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया गया है, और इसमें अपकमिंग मॉडल के लिए कुछ खासियतों को भी शामिल किया गया है। नेक्स्ट-जेन आरसी तीन सौ नब्बे अपने तैंतालीस. पाँचhp पावर आउटपुट को बरकरार रखा गया है। यह KTM की भारत वेबसाइट पर दिए गए पावर फिगर के अकॉर्डिंग ही है, जहां हाल ही में दो हज़ार बाईस RC तीन सौ नब्बे को लिस्ट किया गया था। बाइक के व्हीलबेस और आयामों के बारे में भी डिटेल दी गई है। हालांकि दस्तावेज़ में कुछ भी नया नहीं हैं, लेकिन यह हमें बताता है कि देर से ही सही, कंपनी आखिरकार बाइक के अपडेटेड वर्जन को लॉन्च करने के लिए तैयार है। अपडेटेड RC एक सौ पच्चीस और RC दो सौ को पिछले साल के अंत में लॉन्च किया गया था, लेकिन दो हज़ार बाईस RC तीन सौ नब्बे को तीन सौ नब्बे लाइन-अप में नया TFT डिस्प्ले दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस TFT डैश के साथ सप्लाई संबंधी समस्याएं हैं। सेमीकंडक्टर की कमी का भी असर पड़ा है। इसी वजह से तीन सौ नब्बे ड्यूक की इस समय बहुत सीमित यूनिट सप्लाई की जा रहीं हैं। यही वजह है कि इसका प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। सूत्रों की मानें तो इसका उत्पादन इक्कीस मार्च को फिर से शुरू हुआ, इस वजह से इसके लॉन्चिंग की सुगबुगाहट बढ़ गई हैं। दो हज़ार बाईस RCतीन सौ नब्बे को आउटगोइंग वर्जन के लिए दो,सतहत्तर,छः सौ पैंतीस रुपयापये प्राइस टैग हो सकती है। यह सिंगल-पॉड हेडलाइट, फेयरिंग-माउंटेड रियर-व्यू मिरर, अपडेटेड टर्न इंडिकेटर सेटअप, एक शार्प फेयरिंग डिज़ाइन, एक तेरह. सात-लीटर फ्यूल टैंक, एक रीडिज़ाइन किया गया टेल सेक्शन और एक साइड-स्लंग एग्जॉस्ट पैक ऑफर करेगा। भारत की वेबसाइट मौजूदा दो हज़ार बाईस RCतीन सौ नब्बे के लिए एडजस्टेबल फ्रंट फोर्क्स को लिस्ट करती है। हालांकि, ये सुविधा भारतीय बाजार के लिए दी जाएगी या नहीं, इश पर संशय बरकरार है।
मारण प्रयोग तन्त्र ग्रन्थों में मारण, मोहन, उच्चाटन आदि के कितने ही प्रयोग मिलते हैं। शत्रु नाश के लिये मारण प्रयोगों को काम में लाया जाता है। मारण कितने ही प्रकार का होता है। एक तो ऐसा है जिससे किसी मनुष्य की तुरन्त मृत्यु हो जाए। ऐसे प्रयोगों में "घात" या "कृत्या" प्रसिद्ध है। यह शक्तिशाली तान्त्रिक अग्नि अस्त्र है, जो प्रत्यक्षतः दिखाई नहीं पड़ता, तो भी बन्दूक की गोली की तरह निशाने पर पहुँचता है और शत्रु को गिरा देता है। दूसरे प्रकार के मारण, मन्द-मारण कहे जाते हैं। इनके प्रयोग से किसी व्यक्ति को रोगी बनाया जा सकता है। ज्वर, दस्त, दर्द, लकवा, उन्माद, मतिभ्रम आदि रोगों का आक्रमण किसी व्यक्ति पर उसी प्रकार हो सकता है, जिस प्रकार कीटाणु बमों से प्लेग, हैजा आदि महामारियों को फैलाया जा सकता है। इस प्रकार के प्रयोग नैतिक दृष्टि से उचित हैं या अनुचित यह प्रश्न दूसरा है, पर इतना निश्चित है कि यह असम्भव नहीं, सम्भव है। जिस प्रकार विष खिलाकर या शस्त्र चलाकर किसी मनुष्य को मार डाला जा सकता है, वैसे ही ऐसे अदृश्य उपकरण भी हो सकते हैं, जिनको प्रेरित करने से प्रकृति के घातक परमाणु एकत्रित होकर अभीष्ट लक्ष्य की ओर दौड़ पड़ते हैं और उस पर भयंकर आक्रमण करके ऊपर चढ़ बैठते हैं और परास्त करके प्राण संकट में डाल देते हैं। इसी प्रकार प्रकृति के गर्भ में विचरण करते हुए रोग विशेष के कीटाणुओं को किसी व्यक्ति विशेष की ओर विशेष रूप से प्रेरित किया जा सकता है। 'मृत्यु किरण' आज का ऐसा ही वैज्ञानिक आविष्कार है। किसी प्राणी पर इन किरणों को डाला जाए, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। प्रत्यक्ष देखने में उस व्यक्ति को किसी प्रकार का घाव आदि नहीं होता, पर अदृश्य मार्ग से उसके भीतर अवयवों पर ऐसा सूक्ष्म प्रभाव होता है कि उस प्रहार से उसका प्राणान्त हो जाता है। यदि वह आघात हलके दर्जे का हुआ, तो उससे मृत्यु तो नहीं होती, पर मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाले या घुला-घुलाकर मार डालने वाले रोग पैदा हो जाते हैं। शाप देने की विद्या प्राचीनकाल में अनेक लोगों को ज्ञात थी। जिसे शाप दिया जाता था, उसका बड़ा अनिष्ट होता था । शाप देने वाला अपनी आत्मिक शक्तियों को एकत्रित करके एक विशेष विधि व्यवस्था के साथ जिसके ऊपर उनका प्रहार करता था, उसका वैसा ही अनिष्ट हो जाता था, जैसा कि शाप देने वाला चाहता था । तान्त्रिक अभिचारों द्वारा भी इस प्रकार से दूसरों का अनिष्ट हो सकता है। परन्तु ध्यान रखने की बात यह है कि इस प्रकार के प्रयोगों के प्रयोगकर्ता की शक्ति भी कम नष्ट नहीं होती। बालक के प्रसव करने के उपरांत माता बिल्कुल निर्बल, निःसत्त्व हो जाती है, किसी को काटने के बाद साँप निस्तेज, हतवीर्य और शक्ति रहित हो जाता है। मारण, उच्चाटन के अभिचार करने वाले लोगों की शक्तियाँ भी काफी परिमाण में व्यय हो जाती हैं और उसकी क्षतिपूर्ति के लिये उन्हें असाधारण प्रयोग करने होते हैं। जिस प्रकार मन्त्र द्वारा दूसरों का मारण, मोहन, उच्चाटन आदि अनिष्ट हो सकता है, उसी प्रकार कोई कुशल तांत्रिक इस प्रकार के अभिचारों को रोक भी सकता है। यहाँ तक कि उस आक्रमण को इस प्रकार उलट सकता है कि वह प्रयोगकर्ता पर उलटा पड़े और उसी का अनिष्ट कर दे। घात कृत्या, चोरी आदि को कोई अन्य तांत्रिक पलट दे, तो उसके प्रेरक प्रयोक्ता पर विपत्ति का पहाड़ टूटा हुआ ही समझिये । उपर्युक्त अनिष्टकर प्रयोग अक्सर होते हैं- तन्त्र - विद्या द्वारा हो सकते हैं। पर नीति, धर्म, मनुष्यता और ईश्वरीय विधान की सुस्थिरता की दृष्टि से ऐसे प्रयोगों का किया जाना नितान्त अनुचित, अवांछनीय है। यदि इस प्रकार की गुप्त हत्याओं का ताँता चल पड़े, तो उससे लोक व्यवस्था में भारी गड़बड़ी उपस्थित हो जाए और परस्पर के सद्भाव एवं विश्वास का नाश हो जाए। हर व्यक्ति दूसरों को आशंका, सन्देह एवं अविश्वास की दृष्टि से देखने लगे। इसलिये तन्त्र विद्या के भारतीय ज्ञाताओं ने इन क्रियाओं को निषिद्ध घोषित करके उन विधियों
मारण प्रयोग तन्त्र ग्रन्थों में मारण, मोहन, उच्चाटन आदि के कितने ही प्रयोग मिलते हैं। शत्रु नाश के लिये मारण प्रयोगों को काम में लाया जाता है। मारण कितने ही प्रकार का होता है। एक तो ऐसा है जिससे किसी मनुष्य की तुरन्त मृत्यु हो जाए। ऐसे प्रयोगों में "घात" या "कृत्या" प्रसिद्ध है। यह शक्तिशाली तान्त्रिक अग्नि अस्त्र है, जो प्रत्यक्षतः दिखाई नहीं पड़ता, तो भी बन्दूक की गोली की तरह निशाने पर पहुँचता है और शत्रु को गिरा देता है। दूसरे प्रकार के मारण, मन्द-मारण कहे जाते हैं। इनके प्रयोग से किसी व्यक्ति को रोगी बनाया जा सकता है। ज्वर, दस्त, दर्द, लकवा, उन्माद, मतिभ्रम आदि रोगों का आक्रमण किसी व्यक्ति पर उसी प्रकार हो सकता है, जिस प्रकार कीटाणु बमों से प्लेग, हैजा आदि महामारियों को फैलाया जा सकता है। इस प्रकार के प्रयोग नैतिक दृष्टि से उचित हैं या अनुचित यह प्रश्न दूसरा है, पर इतना निश्चित है कि यह असम्भव नहीं, सम्भव है। जिस प्रकार विष खिलाकर या शस्त्र चलाकर किसी मनुष्य को मार डाला जा सकता है, वैसे ही ऐसे अदृश्य उपकरण भी हो सकते हैं, जिनको प्रेरित करने से प्रकृति के घातक परमाणु एकत्रित होकर अभीष्ट लक्ष्य की ओर दौड़ पड़ते हैं और उस पर भयंकर आक्रमण करके ऊपर चढ़ बैठते हैं और परास्त करके प्राण संकट में डाल देते हैं। इसी प्रकार प्रकृति के गर्भ में विचरण करते हुए रोग विशेष के कीटाणुओं को किसी व्यक्ति विशेष की ओर विशेष रूप से प्रेरित किया जा सकता है। 'मृत्यु किरण' आज का ऐसा ही वैज्ञानिक आविष्कार है। किसी प्राणी पर इन किरणों को डाला जाए, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। प्रत्यक्ष देखने में उस व्यक्ति को किसी प्रकार का घाव आदि नहीं होता, पर अदृश्य मार्ग से उसके भीतर अवयवों पर ऐसा सूक्ष्म प्रभाव होता है कि उस प्रहार से उसका प्राणान्त हो जाता है। यदि वह आघात हलके दर्जे का हुआ, तो उससे मृत्यु तो नहीं होती, पर मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाले या घुला-घुलाकर मार डालने वाले रोग पैदा हो जाते हैं। शाप देने की विद्या प्राचीनकाल में अनेक लोगों को ज्ञात थी। जिसे शाप दिया जाता था, उसका बड़ा अनिष्ट होता था । शाप देने वाला अपनी आत्मिक शक्तियों को एकत्रित करके एक विशेष विधि व्यवस्था के साथ जिसके ऊपर उनका प्रहार करता था, उसका वैसा ही अनिष्ट हो जाता था, जैसा कि शाप देने वाला चाहता था । तान्त्रिक अभिचारों द्वारा भी इस प्रकार से दूसरों का अनिष्ट हो सकता है। परन्तु ध्यान रखने की बात यह है कि इस प्रकार के प्रयोगों के प्रयोगकर्ता की शक्ति भी कम नष्ट नहीं होती। बालक के प्रसव करने के उपरांत माता बिल्कुल निर्बल, निःसत्त्व हो जाती है, किसी को काटने के बाद साँप निस्तेज, हतवीर्य और शक्ति रहित हो जाता है। मारण, उच्चाटन के अभिचार करने वाले लोगों की शक्तियाँ भी काफी परिमाण में व्यय हो जाती हैं और उसकी क्षतिपूर्ति के लिये उन्हें असाधारण प्रयोग करने होते हैं। जिस प्रकार मन्त्र द्वारा दूसरों का मारण, मोहन, उच्चाटन आदि अनिष्ट हो सकता है, उसी प्रकार कोई कुशल तांत्रिक इस प्रकार के अभिचारों को रोक भी सकता है। यहाँ तक कि उस आक्रमण को इस प्रकार उलट सकता है कि वह प्रयोगकर्ता पर उलटा पड़े और उसी का अनिष्ट कर दे। घात कृत्या, चोरी आदि को कोई अन्य तांत्रिक पलट दे, तो उसके प्रेरक प्रयोक्ता पर विपत्ति का पहाड़ टूटा हुआ ही समझिये । उपर्युक्त अनिष्टकर प्रयोग अक्सर होते हैं- तन्त्र - विद्या द्वारा हो सकते हैं। पर नीति, धर्म, मनुष्यता और ईश्वरीय विधान की सुस्थिरता की दृष्टि से ऐसे प्रयोगों का किया जाना नितान्त अनुचित, अवांछनीय है। यदि इस प्रकार की गुप्त हत्याओं का ताँता चल पड़े, तो उससे लोक व्यवस्था में भारी गड़बड़ी उपस्थित हो जाए और परस्पर के सद्भाव एवं विश्वास का नाश हो जाए। हर व्यक्ति दूसरों को आशंका, सन्देह एवं अविश्वास की दृष्टि से देखने लगे। इसलिये तन्त्र विद्या के भारतीय ज्ञाताओं ने इन क्रियाओं को निषिद्ध घोषित करके उन विधियों
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि अगर सड़क पर नमाज पढ़ने से किसी को तकलीफ हो तो मजबूरी में भी मुसलमान सड़क पर नमाज अदा न करें। एक मस्जिद में जगह न होने पर नमाजी दूसरी मस्जिद जाकर नमाज अदा कर लें। ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद ने सड़क पर नमाज को लेकर खड़े हुए विवाद पर यह बात कही है। मौलाना का कहना है कि मुसलमान नमाज मस्जिद में ही अदा करते हैं। सिर्फ जुमे के दिन कुछ ही जगहों पर मस्जिद में जगह न होने की वजह से कुछ लोग सड़क पर नमाज पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि नमाज अल्लाह की इबादत के लिये पढ़ी जाती है। नमाज से किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाई जा सकती है। अलीगढ़ के जिलाधिकारी ने बगैर अनुमति सड़क पर किसी भी तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। ये प्रशासन का एक अच्छा कदम है क्योंकि इस तरह का प्रावधान कानून में पहले से ही मौजूद है। अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, उन्नाव में जय श्रीराम का जबरन नारा लगवाने की घटना पर मौलाना फरंगी महली ने कहा कि हिंदू धर्म में जबरदस्ती की जगह नहीं है। कोई राम के नाम पर इस तरह की हरकत कैसे कर सकता है। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा है कि खुले में नमाज पढ़ना शरई ऐतबार से गलत नहीं है। हालांकि मौलाना ने सड़क पर नमाज को लेकर विस्तृत तौर पर नही बोला। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाने की कुछ भगवाधारी लोगों की आदत बन गई है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि अगर सड़क पर नमाज पढ़ने से किसी को तकलीफ हो तो मजबूरी में भी मुसलमान सड़क पर नमाज अदा न करें। एक मस्जिद में जगह न होने पर नमाजी दूसरी मस्जिद जाकर नमाज अदा कर लें। ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद ने सड़क पर नमाज को लेकर खड़े हुए विवाद पर यह बात कही है। मौलाना का कहना है कि मुसलमान नमाज मस्जिद में ही अदा करते हैं। सिर्फ जुमे के दिन कुछ ही जगहों पर मस्जिद में जगह न होने की वजह से कुछ लोग सड़क पर नमाज पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि नमाज अल्लाह की इबादत के लिये पढ़ी जाती है। नमाज से किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाई जा सकती है। अलीगढ़ के जिलाधिकारी ने बगैर अनुमति सड़क पर किसी भी तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। ये प्रशासन का एक अच्छा कदम है क्योंकि इस तरह का प्रावधान कानून में पहले से ही मौजूद है। अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, उन्नाव में जय श्रीराम का जबरन नारा लगवाने की घटना पर मौलाना फरंगी महली ने कहा कि हिंदू धर्म में जबरदस्ती की जगह नहीं है। कोई राम के नाम पर इस तरह की हरकत कैसे कर सकता है। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा है कि खुले में नमाज पढ़ना शरई ऐतबार से गलत नहीं है। हालांकि मौलाना ने सड़क पर नमाज को लेकर विस्तृत तौर पर नही बोला। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाने की कुछ भगवाधारी लोगों की आदत बन गई है।
पंजाबी गायक-अभिनेता बब्बल राय ने बीते कल यानी 3 मार्च को अपना जन्मदिन मनाया है। इसी के साथ उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म से अपने पहले लुक को भी रिलीज कर दिया है। जी दरअसल गायक-अभिनेता ने खुद अपनी आगामी फिल्म 'मां' के अपने किरदार 'ताकड़े' के पहले लुक को रिलीज कर दिया है जो आप देख सकते हैं। वहीं बब्बल राय ने अपनी आने वाली फिल्म से अपने चरित्र के पहले लुक को शेयर करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया है और लुक को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है On my Birthday today, I'm sharing the first look of "Taqdeer" from our upcoming film #MAA। Your blessings will give me more positive energy to work harder। film releasing on Mother's Day 8th may 2020 @gippygrewal @officialranaranbir @bal_deo @divyadutta25 @ghuggigurpreet @iaarushi @princekanwaljitsingh @vaddagrewal @raghveerboliofficial @humblemotionpictures @bhana_l। a @officialgopisarpanch by @abhinav_peer & @sharmaabhishekmr #staystrong आप देख सकते हैं उनका लुक काफी शानदार दिखाई दे रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक उन्हें इस फिल्म में एक एथलीट के किरदार को निभाते हुए देखा जाने वाला है। वैसे इससे पहले, एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा था कि, 'उन्होंने एक खिलाड़ी की तरह एक परिपूर्ण काया पाने के लिए कड़ी मेहनत की है। ' इस तस्वीर में टोंड बॉडी से लेकर उनकी आकर्षक अभिव्यक्ति तक सब कुछ परफेक्ट है। अपने फर्स्ट लुक को साझा करते हुए बब्बल राय बहुत खुश हैं। उनकी फिल्म 20 मार्च को रिलीज़ होने वाली है और आपको यह भी बता दें कि गायक-अभिनेता को आखिरी बार फिल्म 'हु इक संधू हुंडा सी' फिल्म में देखा गया था। रिलीज हुआ हनी सिंह का नया पार्टी सांग 'लोका'
पंजाबी गायक-अभिनेता बब्बल राय ने बीते कल यानी तीन मार्च को अपना जन्मदिन मनाया है। इसी के साथ उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म से अपने पहले लुक को भी रिलीज कर दिया है। जी दरअसल गायक-अभिनेता ने खुद अपनी आगामी फिल्म 'मां' के अपने किरदार 'ताकड़े' के पहले लुक को रिलीज कर दिया है जो आप देख सकते हैं। वहीं बब्बल राय ने अपनी आने वाली फिल्म से अपने चरित्र के पहले लुक को शेयर करने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया है और लुक को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है On my Birthday today, I'm sharing the first look of "Taqdeer" from our upcoming film #MAA। Your blessings will give me more positive energy to work harder। film releasing on Mother's Day आठth may दो हज़ार बीस @gippygrewal @officialranaranbir @bal_deo @divyaduttaपच्चीस @ghuggigurpreet @iaarushi @princekanwaljitsingh @vaddagrewal @raghveerboliofficial @humblemotionpictures @bhana_l। a @officialgopisarpanch by @abhinav_peer & @sharmaabhishekmr #staystrong आप देख सकते हैं उनका लुक काफी शानदार दिखाई दे रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक उन्हें इस फिल्म में एक एथलीट के किरदार को निभाते हुए देखा जाने वाला है। वैसे इससे पहले, एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा था कि, 'उन्होंने एक खिलाड़ी की तरह एक परिपूर्ण काया पाने के लिए कड़ी मेहनत की है। ' इस तस्वीर में टोंड बॉडी से लेकर उनकी आकर्षक अभिव्यक्ति तक सब कुछ परफेक्ट है। अपने फर्स्ट लुक को साझा करते हुए बब्बल राय बहुत खुश हैं। उनकी फिल्म बीस मार्च को रिलीज़ होने वाली है और आपको यह भी बता दें कि गायक-अभिनेता को आखिरी बार फिल्म 'हु इक संधू हुंडा सी' फिल्म में देखा गया था। रिलीज हुआ हनी सिंह का नया पार्टी सांग 'लोका'
जब स्कूल में बच्चों को दाखिल कराने का समय आता है तो कई पैरेंटस् जानकारी के अभाव में बच्चों का दाखिला ऐसे स्कूलों में करा देते हैं, जहां न तो बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पाती है और न ही उनकी सुरक्षा, मानसिक विकास व अन्य सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। एक बेहतर स्कूल आपके बच्चे के भविष्य के लिए उठाया गया पहला कदम होता है, जहां घर से पहली बार बाहर निकलकर बच्चा बाहरी दुनिया से मिलता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप बच्चे के लिए स्कूल का चयन करते समय बच्चे की पढ़ाई से लेकर अपनी आर्थिक स्थिति तक हर छोटी-बड़ी बात को ध्यान में रखें, तभी आप अपने बच्चे के लिए एक बेस्ट स्कूल चुन पाएंगे और उसे एक बेहतर भविष्य दे पाएंगे। अगर आप रांची से हैं और अपनी बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर स्कूल की तलाश में हैं तो बता दें कि रांची शहर में मौजूद शारदा ग्लोबल स्कूल एक बेहतर विकल्प है। यब स्कूल शिक्षा के सभी मानकों पर खरा उतरता है। शारदा ग्लोबल स्कूल एक को- एजुकेशन स्कूल है, जो सीबीएससी बोर्ड से एफिलिएटेड है। यह स्कूल को करिकुलर गतिविधियों के जरिए बच्चों के सम्पूर्ण विकास पर जोर देता है। शिक्षा में निरन्तर हो रहे बदलावों व विश्व समुदाय की जरूरतों को देखते हुए एक आधुनिक तकनीक से परिपूर्ण शारदा ग्लोबल स्कूल गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने हेतु प्रतिबद्ध है। यह रांची में शिक्षा के क्षेत्र में एक मात्र स्कूल है जिसमें बच्चों के अन्दर छिपी हुई प्रतिभा को निखार कर उनका शैक्षणिक विकास किया जाता है, जिससे वह भारतीय विचारों व सभ्यता के साथ विश्व समुदाय में हो रहे बदलावों व आधुनिक विचारों के साथ सन्तुलन बनाए रखते हैं। यह सर्वविदित है कि परीक्षा पास करना और जीवन में सफलता पाना दोनों ही अलग है। शारदा ग्लोबल स्कूल का सदैव लक्ष्य रहा है कि अपने छात्र/छात्राओं को इस प्रकार शिक्षा दे जिससे वे अपनी वार्षिक परीक्षा के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें। सभी छात्र-छात्राओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना स्कूल का उद्देश्य है। बता दें कि यहां के शिक्षक, छात्रों का सर्वांगीण विकास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस स्कूल में छात्राओं के लिए अलग अलग छात्रावास की सुविधा भी है। छात्रवास में उन्हें घर जैसा माहौल मिलता है। शारदा ग्लोबल स्कूल में कक्षा 11वीं व 12वीं के लिए पीसीएम, कॉमर्स, आर्टस, पीसीबी कोर्सेस पेश किए जाते हैं। • कंप्यूटर लैब एवं पुस्तकालय। • इंडोर/ आउटडोर स्पोर्ट्स की सुविधा। स्कूल छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। शारदा ग्लोबल स्कूल छात्रों के सर्वांगीण विकास का खास ख्याल रखता है। इसके लिए यहां किताबी ज्ञान के अलावा व्यावहारिक ज्ञान, एक्सट्रा करीकुलर एक्टिविटीज जैसे- खेल-कूद, नृत्य व संगीत प्रतियोगिता, पीडीपी आदि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्कूल की इमारत सुंदर और बड़ी है। इमारत में प्रशासनिक कार्यालय, आधुनिक शिक्षण सहायक सामग्री के साथ, संगोष्ठी कक्ष, कंप्यूटर लैब, बेहतर क्लास रूम व शानदार लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ का कैंपस पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। सपनों का पालन करने की ताकत हमारे वर्षों के समृद्ध अनुभव, उपलब्धि हासिल करने के गौरव और शिक्षा द्वारा समाज को बदलने के साधन के रूप में उपयोग करने की प्रेरणा से आती है। इन दिनों में जब क्षरणकारी संस्कृति की तेज हवाएं हमारे नैतिक और सामाजिक मूल्यों के स्तम्भों को हिलाने का प्रयास कर रही हैं, ऐसे में शारदा ग्लोबल स्कूल की शिक्षा सही मूल्यों का सम्मिश्रण करके सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को मजबूती दे रही है। (अस्वीकरण : इस लेख में किए गए दावों की सत्यता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति/ संस्थान की है। )
जब स्कूल में बच्चों को दाखिल कराने का समय आता है तो कई पैरेंटस् जानकारी के अभाव में बच्चों का दाखिला ऐसे स्कूलों में करा देते हैं, जहां न तो बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पाती है और न ही उनकी सुरक्षा, मानसिक विकास व अन्य सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। एक बेहतर स्कूल आपके बच्चे के भविष्य के लिए उठाया गया पहला कदम होता है, जहां घर से पहली बार बाहर निकलकर बच्चा बाहरी दुनिया से मिलता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप बच्चे के लिए स्कूल का चयन करते समय बच्चे की पढ़ाई से लेकर अपनी आर्थिक स्थिति तक हर छोटी-बड़ी बात को ध्यान में रखें, तभी आप अपने बच्चे के लिए एक बेस्ट स्कूल चुन पाएंगे और उसे एक बेहतर भविष्य दे पाएंगे। अगर आप रांची से हैं और अपनी बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर स्कूल की तलाश में हैं तो बता दें कि रांची शहर में मौजूद शारदा ग्लोबल स्कूल एक बेहतर विकल्प है। यब स्कूल शिक्षा के सभी मानकों पर खरा उतरता है। शारदा ग्लोबल स्कूल एक को- एजुकेशन स्कूल है, जो सीबीएससी बोर्ड से एफिलिएटेड है। यह स्कूल को करिकुलर गतिविधियों के जरिए बच्चों के सम्पूर्ण विकास पर जोर देता है। शिक्षा में निरन्तर हो रहे बदलावों व विश्व समुदाय की जरूरतों को देखते हुए एक आधुनिक तकनीक से परिपूर्ण शारदा ग्लोबल स्कूल गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने हेतु प्रतिबद्ध है। यह रांची में शिक्षा के क्षेत्र में एक मात्र स्कूल है जिसमें बच्चों के अन्दर छिपी हुई प्रतिभा को निखार कर उनका शैक्षणिक विकास किया जाता है, जिससे वह भारतीय विचारों व सभ्यता के साथ विश्व समुदाय में हो रहे बदलावों व आधुनिक विचारों के साथ सन्तुलन बनाए रखते हैं। यह सर्वविदित है कि परीक्षा पास करना और जीवन में सफलता पाना दोनों ही अलग है। शारदा ग्लोबल स्कूल का सदैव लक्ष्य रहा है कि अपने छात्र/छात्राओं को इस प्रकार शिक्षा दे जिससे वे अपनी वार्षिक परीक्षा के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें। सभी छात्र-छात्राओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना स्कूल का उद्देश्य है। बता दें कि यहां के शिक्षक, छात्रों का सर्वांगीण विकास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस स्कूल में छात्राओं के लिए अलग अलग छात्रावास की सुविधा भी है। छात्रवास में उन्हें घर जैसा माहौल मिलता है। शारदा ग्लोबल स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं व बारहवीं के लिए पीसीएम, कॉमर्स, आर्टस, पीसीबी कोर्सेस पेश किए जाते हैं। • कंप्यूटर लैब एवं पुस्तकालय। • इंडोर/ आउटडोर स्पोर्ट्स की सुविधा। स्कूल छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। शारदा ग्लोबल स्कूल छात्रों के सर्वांगीण विकास का खास ख्याल रखता है। इसके लिए यहां किताबी ज्ञान के अलावा व्यावहारिक ज्ञान, एक्सट्रा करीकुलर एक्टिविटीज जैसे- खेल-कूद, नृत्य व संगीत प्रतियोगिता, पीडीपी आदि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्कूल की इमारत सुंदर और बड़ी है। इमारत में प्रशासनिक कार्यालय, आधुनिक शिक्षण सहायक सामग्री के साथ, संगोष्ठी कक्ष, कंप्यूटर लैब, बेहतर क्लास रूम व शानदार लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ का कैंपस पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। सपनों का पालन करने की ताकत हमारे वर्षों के समृद्ध अनुभव, उपलब्धि हासिल करने के गौरव और शिक्षा द्वारा समाज को बदलने के साधन के रूप में उपयोग करने की प्रेरणा से आती है। इन दिनों में जब क्षरणकारी संस्कृति की तेज हवाएं हमारे नैतिक और सामाजिक मूल्यों के स्तम्भों को हिलाने का प्रयास कर रही हैं, ऐसे में शारदा ग्लोबल स्कूल की शिक्षा सही मूल्यों का सम्मिश्रण करके सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को मजबूती दे रही है।
हाल ही में, खुले क्षेत्रों में वाहनों में आग लगने की घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति बनती जा रही है। कुछ दिन पहले खुली सड़क पर Tata Harrier चलाते समय आग लग गई थी। एक अन्य घटना मेरठ में हुई है जहां एक Volvo XC90 में आग लग गई और हाईवे पर चलाते समय जलकर राख हो गई। Prateek Singh के एक Youtube Video में हाईवे के किनारे एक सफेद रंग की Volvo XC90 जलती दिख रही है। Video प्रस्तुतकर्ता के अनुसार, XC90 के मालिक परिवार के सदस्यों के साथ SUV के अंदर थे, जब मालिक ने गाड़ी चलाते समय इंजन बे से धुआं निकलते देखा। आग लगने के डर से, मालिक ने SUV को पार्क किया और अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ निकल गया। 2019 में वॉल्वो ने इंजन बे में आग लगने के खतरे के चलते वैश्विक स्तर पर 5 लाख से अधिक कारों को रिकॉल किया था। सभी प्रभावित वाहन 2014 और 2019 के बीच बनाए गए थे और 2.0-लीटर, चार-सिलेंडर डीजल इंजन द्वारा संचालित थे। XC90 इंजन बे में एक समस्याग्रस्त प्लास्टिक इंजन इनटेक मैनिफोल्ड के साथ आता है जो पिघल सकता है और आग लग सकता है। लक्षण में एक गंध शामिल हो सकती है। कुछ ही सेकेंड में बोनट के नीचे आग और तेज हो गई और एसयूवी आग की चपेट में आ गई। दमकल बुलाने के बावजूद जब तक वे पहुंचे एसयूवी पूरी तरह से जलकर राख हो चुकी थी। सौभाग्य से, घटना के समय XC90 में मौजूद मालिक और परिवार के सदस्य सुरक्षित और सुरक्षित हैं, हालांकि वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस Volvo XC90 में आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है। चूंकि XC90 उपलब्ध सबसे सुरक्षित SUVs में से एक मानी जाती है, यह घटना एक सदमा देने वाली है। Volvo ने अभी तक एक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह अनुमान लगाया गया है कि एक संभावित वायरिंग सिस्टम की विफलता या बाद की एक्सेसरी में खराबी के कारण आग लग सकती है। हालांकि, मालिक ने अभी तक अपनी कार में ऐसी किसी एक्सेसरी या कंपोनेंट की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। XC90 दुनिया भर में Volvo का प्रमुख उत्पाद है और यह उनकी सबसे महंगी SUV है। भारत में, XC90 पहले पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्पों के साथ उपलब्ध थी। हालाँकि, BS6 उत्सर्जन की समय सीमा के बाद, Volvo XC90 अब केवल 2.0-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन के साथ उपलब्ध है, जिसे 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। यह इंजन अधिकतम 300 पीएस का पावर आउटपुट और 420 एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट दे सकता है। आधुनिक कारें एक जटिल वायरिंग सिस्टम से लैस हैं, और किसी भी शॉर्ट-सर्किट से आग लग सकती है। यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज का उपयोग ऐसी घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकता है, और यह अनुशंसा की जाती है कि किसी भी तृतीय-पक्ष एक्सेसरीज का उपयोग करने से बचें।
हाल ही में, खुले क्षेत्रों में वाहनों में आग लगने की घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति बनती जा रही है। कुछ दिन पहले खुली सड़क पर Tata Harrier चलाते समय आग लग गई थी। एक अन्य घटना मेरठ में हुई है जहां एक Volvo XCनब्बे में आग लग गई और हाईवे पर चलाते समय जलकर राख हो गई। Prateek Singh के एक Youtube Video में हाईवे के किनारे एक सफेद रंग की Volvo XCनब्बे जलती दिख रही है। Video प्रस्तुतकर्ता के अनुसार, XCनब्बे के मालिक परिवार के सदस्यों के साथ SUV के अंदर थे, जब मालिक ने गाड़ी चलाते समय इंजन बे से धुआं निकलते देखा। आग लगने के डर से, मालिक ने SUV को पार्क किया और अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ निकल गया। दो हज़ार उन्नीस में वॉल्वो ने इंजन बे में आग लगने के खतरे के चलते वैश्विक स्तर पर पाँच लाख से अधिक कारों को रिकॉल किया था। सभी प्रभावित वाहन दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस के बीच बनाए गए थे और दो.शून्य-लीटर, चार-सिलेंडर डीजल इंजन द्वारा संचालित थे। XCनब्बे इंजन बे में एक समस्याग्रस्त प्लास्टिक इंजन इनटेक मैनिफोल्ड के साथ आता है जो पिघल सकता है और आग लग सकता है। लक्षण में एक गंध शामिल हो सकती है। कुछ ही सेकेंड में बोनट के नीचे आग और तेज हो गई और एसयूवी आग की चपेट में आ गई। दमकल बुलाने के बावजूद जब तक वे पहुंचे एसयूवी पूरी तरह से जलकर राख हो चुकी थी। सौभाग्य से, घटना के समय XCनब्बे में मौजूद मालिक और परिवार के सदस्य सुरक्षित और सुरक्षित हैं, हालांकि वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस Volvo XCनब्बे में आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है। चूंकि XCनब्बे उपलब्ध सबसे सुरक्षित SUVs में से एक मानी जाती है, यह घटना एक सदमा देने वाली है। Volvo ने अभी तक एक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह अनुमान लगाया गया है कि एक संभावित वायरिंग सिस्टम की विफलता या बाद की एक्सेसरी में खराबी के कारण आग लग सकती है। हालांकि, मालिक ने अभी तक अपनी कार में ऐसी किसी एक्सेसरी या कंपोनेंट की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। XCनब्बे दुनिया भर में Volvo का प्रमुख उत्पाद है और यह उनकी सबसे महंगी SUV है। भारत में, XCनब्बे पहले पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्पों के साथ उपलब्ध थी। हालाँकि, BSछः उत्सर्जन की समय सीमा के बाद, Volvo XCनब्बे अब केवल दो.शून्य-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन के साथ उपलब्ध है, जिसे आठ-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। यह इंजन अधिकतम तीन सौ पीएस का पावर आउटपुट और चार सौ बीस एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट दे सकता है। आधुनिक कारें एक जटिल वायरिंग सिस्टम से लैस हैं, और किसी भी शॉर्ट-सर्किट से आग लग सकती है। यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज का उपयोग ऐसी घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकता है, और यह अनुशंसा की जाती है कि किसी भी तृतीय-पक्ष एक्सेसरीज का उपयोग करने से बचें।
कोलम्बो, (आईएएनएस)। शेन वॉटसन के शानदार ऑलराउंड पदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को कोलम्बो स्थित पेमदासा स्टेडियम में खेले गए ग्रुप बी के एक मुकाबले में आयरलैंड को सात विकेट से पराजित कर दिया। इसके साथ ही आस्ट्रेलिया ने जीत के साथ श्रृंखला में आगाज की। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए आयरलैंड टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 123 रन बनाए थे। इसके जवाब में खेलने उतरी आस्ट्रेलिया की टीम ने शेन वॉटसन की नाबाद अर्धशतकीय पारी की बदौलत 29 गेंद रहते सात विकेट से जीत हासिल कर ली। वॉटसन ने गेंदबाजी में भी अपना जलवा बिखेरा और आयरलैंड के तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार पदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। 124 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आस्ट्रेलिया की ओर से डेविड वार्नर और वॉटसन ने पारी की शुरुआत की। दोनों ने पहले विकेट के लिए 60 रन जोड़े। आठवें ओवर में इसी योग पर वार्नर 26 रन बनाकर आउट हुए। जॉर्ज डॉकरेल की गेंद पर केविन ओब्रायन ने उनका कैच लपका। उन्होंने 23 गेंदों का सामना किया और चार चौके लगाए। वॉटसन ने 51 रनों की तेज पारी खेल टीम की जीत सुनिश्चित की। उन्होंने 30 गेंदों का सामना किया और इस दौरान पांच चौके और तीन छक्के लगाए। वह बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हुए। माइक हसी के रूप में आस्ट्रेलिया का तीसरा व आखिरी विकेट गिरा। हसी ने 11 गेंदों पर 10 रन बनाए। केविन ओब्रायन की गेंद पर वह पगबाधा करार दिए गए। इसके बाद केग व्हाइट और जार्ज बैली ने अपनी टीम को 15. 1 ओवरों में जीत दिला दी। व्हाइट ने 19 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 22 रनों की नाबाद पारी खेली वहीं बैली ने आठ गेंदों पर नाबाद छह रन बनाए। इससे पहले, आयरलैंड की ओर से केविन ओब्रायन ने सबसे अधिक 35 रन बनाए जबकि नियाल ओब्रायन ने 20 रनों की पारी खेली। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए सबसे अधिक 52 रन जोड़े। आयरलैंड की शुरुआत बहुत ही खराब रही। पारी की पहली ही गेंद पर सलामी बल्लेबाज कप्तान विलियम्स पोर्टरफील्ड बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। वॉटसन की गेंद पर वह मिशेल स्टार्प के हाथों लपके गए। चौथे ही ओवर में आयरलैंड को दूसरा झटका लगा जब 15 रन के कुल योग पर पॉल स्टर्लिंग भी चलते बने। स्टार्प की गेंद पर इस बार वॉटसन ने उनका कैच लपका। वह सात रन ही बना सके। उन्होंने 12 गेंदों का सामना किया और एक चौके लगाए। एड जॉयस के रूप में आयरलैंड को तीसरा झटका लगा। उस समय टीम का स्कोर 25 रन था। जॉयस ने 18 गेंदों का सामना किया और तीन चौकों की मदद से उन्होंने 16 रन बनाए। ग्लेन मैक्सवेल की गेंद पर डेविड वार्नर ने उनका कैच लपका। स्कोर बोर्ड में अभी आठ रन और जुड़े थे कि गैरी विल्सन भी अपना विकेट गंवा बैठे। ब्रेड हॉग की गेंद पर वह पगबाधा आउट करार दिए गए। उन्होंने पांच गेंदों का सामना किया और पांच रन बनाए। केविन ओब्रायन और नियाल ओब्रायन ने पांचवें विकेट के लिए 52 रन जोड़कर टीम को मुश्किलों से निकालने की भरपूर कोशिश की। अंतिम ओवरों में अलेक्स क्यूसैक और निगेल जोन्स भी कुछ रन बटोरने में सफल रहे। क्यूसैक ने नाबाद 15 रन बनाए जबकि जोंस ने नाबाद 14 रन बनाए। दोनों के बीच नाबाद 22 रनों की साझेदारी हुई। आस्ट्रेलिया की ओर से वॉटसन सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन विकेट हासिल किए जबकि स्टार्प के खाते में दो विकेट गए। मैक्सवेल और हॉग को एक-एक विकेट मिला।
कोलम्बो, । शेन वॉटसन के शानदार ऑलराउंड पदर्शन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को कोलम्बो स्थित पेमदासा स्टेडियम में खेले गए ग्रुप बी के एक मुकाबले में आयरलैंड को सात विकेट से पराजित कर दिया। इसके साथ ही आस्ट्रेलिया ने जीत के साथ श्रृंखला में आगाज की। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए आयरलैंड टीम ने निर्धारित बीस ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर एक सौ तेईस रन बनाए थे। इसके जवाब में खेलने उतरी आस्ट्रेलिया की टीम ने शेन वॉटसन की नाबाद अर्धशतकीय पारी की बदौलत उनतीस गेंद रहते सात विकेट से जीत हासिल कर ली। वॉटसन ने गेंदबाजी में भी अपना जलवा बिखेरा और आयरलैंड के तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार पदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। एक सौ चौबीस रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आस्ट्रेलिया की ओर से डेविड वार्नर और वॉटसन ने पारी की शुरुआत की। दोनों ने पहले विकेट के लिए साठ रन जोड़े। आठवें ओवर में इसी योग पर वार्नर छब्बीस रन बनाकर आउट हुए। जॉर्ज डॉकरेल की गेंद पर केविन ओब्रायन ने उनका कैच लपका। उन्होंने तेईस गेंदों का सामना किया और चार चौके लगाए। वॉटसन ने इक्यावन रनों की तेज पारी खेल टीम की जीत सुनिश्चित की। उन्होंने तीस गेंदों का सामना किया और इस दौरान पांच चौके और तीन छक्के लगाए। वह बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हुए। माइक हसी के रूप में आस्ट्रेलिया का तीसरा व आखिरी विकेट गिरा। हसी ने ग्यारह गेंदों पर दस रन बनाए। केविन ओब्रायन की गेंद पर वह पगबाधा करार दिए गए। इसके बाद केग व्हाइट और जार्ज बैली ने अपनी टीम को पंद्रह. एक ओवरों में जीत दिला दी। व्हाइट ने उन्नीस गेंदों पर तीन चौकों की मदद से बाईस रनों की नाबाद पारी खेली वहीं बैली ने आठ गेंदों पर नाबाद छह रन बनाए। इससे पहले, आयरलैंड की ओर से केविन ओब्रायन ने सबसे अधिक पैंतीस रन बनाए जबकि नियाल ओब्रायन ने बीस रनों की पारी खेली। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए सबसे अधिक बावन रन जोड़े। आयरलैंड की शुरुआत बहुत ही खराब रही। पारी की पहली ही गेंद पर सलामी बल्लेबाज कप्तान विलियम्स पोर्टरफील्ड बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। वॉटसन की गेंद पर वह मिशेल स्टार्प के हाथों लपके गए। चौथे ही ओवर में आयरलैंड को दूसरा झटका लगा जब पंद्रह रन के कुल योग पर पॉल स्टर्लिंग भी चलते बने। स्टार्प की गेंद पर इस बार वॉटसन ने उनका कैच लपका। वह सात रन ही बना सके। उन्होंने बारह गेंदों का सामना किया और एक चौके लगाए। एड जॉयस के रूप में आयरलैंड को तीसरा झटका लगा। उस समय टीम का स्कोर पच्चीस रन था। जॉयस ने अट्ठारह गेंदों का सामना किया और तीन चौकों की मदद से उन्होंने सोलह रन बनाए। ग्लेन मैक्सवेल की गेंद पर डेविड वार्नर ने उनका कैच लपका। स्कोर बोर्ड में अभी आठ रन और जुड़े थे कि गैरी विल्सन भी अपना विकेट गंवा बैठे। ब्रेड हॉग की गेंद पर वह पगबाधा आउट करार दिए गए। उन्होंने पांच गेंदों का सामना किया और पांच रन बनाए। केविन ओब्रायन और नियाल ओब्रायन ने पांचवें विकेट के लिए बावन रन जोड़कर टीम को मुश्किलों से निकालने की भरपूर कोशिश की। अंतिम ओवरों में अलेक्स क्यूसैक और निगेल जोन्स भी कुछ रन बटोरने में सफल रहे। क्यूसैक ने नाबाद पंद्रह रन बनाए जबकि जोंस ने नाबाद चौदह रन बनाए। दोनों के बीच नाबाद बाईस रनों की साझेदारी हुई। आस्ट्रेलिया की ओर से वॉटसन सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन विकेट हासिल किए जबकि स्टार्प के खाते में दो विकेट गए। मैक्सवेल और हॉग को एक-एक विकेट मिला।
Bajaj Chetak Electric Scooter Premium Edition : Bajaj अपने ग्राहकों के लिए लेकर आया है चेतक स्कूटर भारत में लॉन्च (Launch) कर दिया गया है। इस Premium Edition की कीमत 1,51,910 रुपये (एक्स-शोरूम, बेंगलुरू) रखी गई है। वहीं, मौजूदा बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर (Bajaj Chetak Electric Scooter) की कीमत को भी Update किया गया है जिसकी कीमत 1,21,933 रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कंपनी ने Chetak Premium Edition 2023 के लिए बुकिंग भी शुरू कर दी है। बजाज ने बताया कि प्रीमियम एडिशन के इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) की डिलीवरी अप्रैल 2023 के बाद शुरू कर दी जाएगी। Bajaj की चेतक के Electric Scooter के नए Premium Edition की बात करें तो Premium Edition पूरी तरह से मेटल बॉडी के साथ लाया गया है। शानदार लुक के लिए स्लीक अपीयरेन्स (Sleek Appearance) को बढ़ाया गया है। इसके साथ ही, हेडलैम्प केसिंग (Headlamp Casing), ब्लिंकर्स और सेंट्रल ट्रिम्स चारकोल ब्लैक फिनिश में हैं। स्कूटर में प्रीमियम फील (Premium Feel) देने के लिए पहले से बड़ा और नया ऑल-कलर LCD डिस्प्ले कंसोल को भी जोड़ा गया है। कलर ऑप्शन के लिए इस Electric Scooter में 3 ऑप्शन मिलते हैं। जिनमे मैट ग्रे, मैट कैरेबियन ब्लू (Matte Caribbean Blue) और सैटिन ब्लैक शामिल हैं। ईको (Eco) के साथ स्पोर्ट मोड (Sport Mode) में क्या होगा स्कूटर का रेंज Bajaj Chetak Electric Scooter के पावरट्रेन (Powertrain) में 3 किलोवॉट वाला लिथियम-आयन बैटरी पैक (Lithium-ion Battery Pack) मिलता है, जिसमें 3. 8 किलोवॉट इलेक्ट्रिक मोटर दिया गया है। ये पावरपैक (Power Pack) 1,400rpm पर 16Nm का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। स्कूटर को दो राइडिंग मोड Echo और स्पोर्ट में भी लाया गया है। बजाज का नया Electric Chetak Scooter Eco Mode में सिंगल चार्ज में 95 किलोमीटर और स्पोर्ट मोड में 85 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। हालांकि, ये देखना दिलचस्प होगा कि बजाज चेतक का Premium Edition Ola, Aether , Hero , TVS के Electric Scooter को टक्कर में कितना कामयाब होता है।
Bajaj Chetak Electric Scooter Premium Edition : Bajaj अपने ग्राहकों के लिए लेकर आया है चेतक स्कूटर भारत में लॉन्च कर दिया गया है। इस Premium Edition की कीमत एक,इक्यावन,नौ सौ दस रुपयापये रखी गई है। वहीं, मौजूदा बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत को भी Update किया गया है जिसकी कीमत एक,इक्कीस,नौ सौ तैंतीस रुपयापये रखी गई है। कंपनी ने Chetak Premium Edition दो हज़ार तेईस के लिए बुकिंग भी शुरू कर दी है। बजाज ने बताया कि प्रीमियम एडिशन के इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिलीवरी अप्रैल दो हज़ार तेईस के बाद शुरू कर दी जाएगी। Bajaj की चेतक के Electric Scooter के नए Premium Edition की बात करें तो Premium Edition पूरी तरह से मेटल बॉडी के साथ लाया गया है। शानदार लुक के लिए स्लीक अपीयरेन्स को बढ़ाया गया है। इसके साथ ही, हेडलैम्प केसिंग , ब्लिंकर्स और सेंट्रल ट्रिम्स चारकोल ब्लैक फिनिश में हैं। स्कूटर में प्रीमियम फील देने के लिए पहले से बड़ा और नया ऑल-कलर LCD डिस्प्ले कंसोल को भी जोड़ा गया है। कलर ऑप्शन के लिए इस Electric Scooter में तीन ऑप्शन मिलते हैं। जिनमे मैट ग्रे, मैट कैरेबियन ब्लू और सैटिन ब्लैक शामिल हैं। ईको के साथ स्पोर्ट मोड में क्या होगा स्कूटर का रेंज Bajaj Chetak Electric Scooter के पावरट्रेन में तीन किलोग्रामवॉट वाला लिथियम-आयन बैटरी पैक मिलता है, जिसमें तीन. आठ किलोग्रामवॉट इलेक्ट्रिक मोटर दिया गया है। ये पावरपैक एक,चार सौrpm पर सोलहNm का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। स्कूटर को दो राइडिंग मोड Echo और स्पोर्ट में भी लाया गया है। बजाज का नया Electric Chetak Scooter Eco Mode में सिंगल चार्ज में पचानवे किलोग्राममीटर और स्पोर्ट मोड में पचासी किलोग्राममीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। हालांकि, ये देखना दिलचस्प होगा कि बजाज चेतक का Premium Edition Ola, Aether , Hero , TVS के Electric Scooter को टक्कर में कितना कामयाब होता है।
यूपी के औरैया की बिधूना विधानसभा क्षेत्र से बीसपी प्रत्याशी शिवप्रसाद यादव ने ब्राह्माण सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में जाति विशेष पर टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। जिसके बाद एसडीएम ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि बीएसपी के पूर्व मंत्री अनंत मिश्र आए थे।
यूपी के औरैया की बिधूना विधानसभा क्षेत्र से बीसपी प्रत्याशी शिवप्रसाद यादव ने ब्राह्माण सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में जाति विशेष पर टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। जिसके बाद एसडीएम ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि बीएसपी के पूर्व मंत्री अनंत मिश्र आए थे।
पाना भासान रहे । इस प्रकार पाठ्यक्रम को और अच्छा बनाने के लिए उसमे कुछ दस्तारियो तथा भय कई प्रकार की सूजनात्मक गतिविधियों को स्याम देने का प्रयत्न भी किया गया है । प्राथमिक शिया पर होने वाले व्यम में हुई वृद्धि से भी यह बात सूचित होती है कि देश संविधान में बललाय हुए सक्ष्य को जी से जल्दी पूरा करन मे सियत है । ३१ माघ १९४८ का श्रेणी के राज्यों में प्राथमिन विद्यालयों पर होने वाला कुल व्यय १८ बरोड़ ७० लाख रुपये प्रतिवर्ष था। १९५३ में ३१ मार्ग का २४ करोड ९० लाख रुपये प्रतिषप हो गया था । ३१ मार्च १९५३ को सम्पूर्ण भारत में प्राथमिक विद्यालया पर होन वाला कुल व्यय ४५ रोड ७० लाख रुपय प्रतिवप था । यदि दो अन्य महत्वपूर्ण तत्वा का उल्लेख न किया जाय तो भारत में भारम्भिक शिक्षा में हुई वृद्धि का यह चित्रन सो स्पष्ट ही हो पायगा औौर न सम्पूर्ण ही होगा । स्वायोनता में भागमन के फलस्वरूप प्रम लोग अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए घने हो उठ जसे कि वे पहले पानी नही हुए थे भोर वे अपन बच्चा को उचित शिक्षा दिमान के लिय पधीर है। सारे दन में लोगा म गावों में विद्यालया के भवना के निर्माण के लिए जमीन पैसा और पारीरिक श्रम सुले दिल से प्रदान किया है। वेवल एवं जिले में हो स्थानीय साया में विद्यालयों के लिए ६०० महान तयार पिये । जिन क्षत्रा में १९४७ से पहलेषण की सुविधाएँ थी ही नहीं या बहुत भला भी उनमें शिवा पाने पीता और क्षेत्रा की अपेक्षा वही पघि ससष्ट दोस पहनी है। उत्तर-पूर्वी मीमान्त एजेन्सी मे क्वाइली इसावे में जो लगभग यम मौल में है १९४७ से पहले एक भो विद्यालय नहीं था। १९५३ में इस एजन्सी में लगभग १९०० विद्यालय बन पुने थे। राष्ट्र केसों का सर्वप्रथम उपयोग बालोंधी शिक्षा में लिप किया जाना चाहिये । परन्तु वालों में बड़े होने में समय लगता है और इस बीच में संसार पर घटनापत्र देना नहीं रहेगा । १९३७ में प्रान्तीय स्वारान प्रारम्भ होने भौर देहाती इलाकों में मताधिकार का फैनाव हो जान से प भारत में मिश्रा ना स्थिति विगावलोकन शिक्षा को बहुत बडा भोर अत्यन प्रात्साहन मिला । aor शिक्षा के इस भादोलन के फत्यम्वरूप साक्षरता में काफी वृद्धि हुई हिन्दु उमये बात भ ५ वर्ष से अधिक प्रायु की कुल जनसंख्या में से १९४१ में सार साग बचन १४६ प्रतिगत ८ । १९०१ तब यह मम्या सहकर १८ तक पहुँच गई या परन्तु वेचलका जनम हा माग वृतान्त पन नहीं हा जाता १० ७ में वयस्वाक्षत्र में जा बडी साय गतिविधि प्रारम्भ दूसरा विश्वयुद्ध छिए जान में बडी बाया पह गई हामीकि विश्वयुद्ध का पूरा प्रभाव भारत में १९४१ क या" ही अनुभव होना शुरू हुमा । सद काल में शिक्षा सम्बधी सुविधामा में यदि सो बहा हानी भी उन बहुत बड़े पैमान पर गयी हो गई। विद्यालय बनकर गए और अवस्वमिण की गतिविधियों लगभग ठप हो गई । १४६ में पापर नहीं फिर वयस्क शिक्षा का प्रारम्भ किया जा समा। १०४६ मौर १९४७ के वर्षों में भाबडा तनाव और निश्चिततायो रहो जिसके कारण सर्व प्रकार का रचनात्मक काय रखा-सा रहा और इस सनाव का परि अन्त में देग विभाजन के रूप में प्रकट हुमा । मलिए यह लगभग निश्चित हो है कि स्वाधीनता प्राप्ति के में साक्षरता के प्रवड १९४१ वा अपरा हम नम हो रह होंगे। इसलिए मासस्वा में १४६ न १८३ प्रि को वृद्धि पूतया स्वापानला के पन्चात् के हाल में प्राप्त मनता समस्ये नो बाहिय मुत्रियायों में प्रचधित विस्तार के अतिरिक्त विद्यालयों में नहीं को सम्पा घाम गुनी म मा प्रति हो गई है --भारत में यक्ष उत्कृष्टताका दृष्टि से भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वापानवास पहल बदस्त शिक्षा में पालिखना मिखाना मयान् मर न भर राना था। परन्तु अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि कल पर ज्ञान है पीसा जाता है। इसलिए ये वायत्रमा में एसा पद्धतियों खोज निकालन पर और किया गया जिनमोनिया में रवि बनी रह और साथ हो यह शिवा उन कामों को पूरा करन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जो उन शिक्षा पान वाले भोगों का करना ह
पाना भासान रहे । इस प्रकार पाठ्यक्रम को और अच्छा बनाने के लिए उसमे कुछ दस्तारियो तथा भय कई प्रकार की सूजनात्मक गतिविधियों को स्याम देने का प्रयत्न भी किया गया है । प्राथमिक शिया पर होने वाले व्यम में हुई वृद्धि से भी यह बात सूचित होती है कि देश संविधान में बललाय हुए सक्ष्य को जी से जल्दी पूरा करन मे सियत है । इकतीस माघ एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस का श्रेणी के राज्यों में प्राथमिन विद्यालयों पर होने वाला कुल व्यय अट्ठारह बरोड़ सत्तर लाख रुपये प्रतिवर्ष था। एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में इकतीस मार्ग का चौबीस करोड नब्बे लाख रुपये प्रतिषप हो गया था । इकतीस मार्च एक हज़ार नौ सौ तिरेपन को सम्पूर्ण भारत में प्राथमिक विद्यालया पर होन वाला कुल व्यय पैंतालीस रोड सत्तर लाख रुपय प्रतिवप था । यदि दो अन्य महत्वपूर्ण तत्वा का उल्लेख न किया जाय तो भारत में भारम्भिक शिक्षा में हुई वृद्धि का यह चित्रन सो स्पष्ट ही हो पायगा औौर न सम्पूर्ण ही होगा । स्वायोनता में भागमन के फलस्वरूप प्रम लोग अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए घने हो उठ जसे कि वे पहले पानी नही हुए थे भोर वे अपन बच्चा को उचित शिक्षा दिमान के लिय पधीर है। सारे दन में लोगा म गावों में विद्यालया के भवना के निर्माण के लिए जमीन पैसा और पारीरिक श्रम सुले दिल से प्रदान किया है। वेवल एवं जिले में हो स्थानीय साया में विद्यालयों के लिए छः सौ महान तयार पिये । जिन क्षत्रा में एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से पहलेषण की सुविधाएँ थी ही नहीं या बहुत भला भी उनमें शिवा पाने पीता और क्षेत्रा की अपेक्षा वही पघि ससष्ट दोस पहनी है। उत्तर-पूर्वी मीमान्त एजेन्सी मे क्वाइली इसावे में जो लगभग यम मौल में है एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से पहले एक भो विद्यालय नहीं था। एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में इस एजन्सी में लगभग एक हज़ार नौ सौ विद्यालय बन पुने थे। राष्ट्र केसों का सर्वप्रथम उपयोग बालोंधी शिक्षा में लिप किया जाना चाहिये । परन्तु वालों में बड़े होने में समय लगता है और इस बीच में संसार पर घटनापत्र देना नहीं रहेगा । एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में प्रान्तीय स्वारान प्रारम्भ होने भौर देहाती इलाकों में मताधिकार का फैनाव हो जान से प भारत में मिश्रा ना स्थिति विगावलोकन शिक्षा को बहुत बडा भोर अत्यन प्रात्साहन मिला । aor शिक्षा के इस भादोलन के फत्यम्वरूप साक्षरता में काफी वृद्धि हुई हिन्दु उमये बात भ पाँच वर्ष से अधिक प्रायु की कुल जनसंख्या में से एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में सार साग बचन एक सौ छियालीस प्रतिगत आठ । एक हज़ार नौ सौ एक तब यह मम्या सहकर अट्ठारह तक पहुँच गई या परन्तु वेचलका जनम हा माग वृतान्त पन नहीं हा जाता दस सात में वयस्वाक्षत्र में जा बडी साय गतिविधि प्रारम्भ दूसरा विश्वयुद्ध छिए जान में बडी बाया पह गई हामीकि विश्वयुद्ध का पूरा प्रभाव भारत में एक हज़ार नौ सौ इकतालीस क या" ही अनुभव होना शुरू हुमा । सद काल में शिक्षा सम्बधी सुविधामा में यदि सो बहा हानी भी उन बहुत बड़े पैमान पर गयी हो गई। विद्यालय बनकर गए और अवस्वमिण की गतिविधियों लगभग ठप हो गई । एक सौ छियालीस में पापर नहीं फिर वयस्क शिक्षा का प्रारम्भ किया जा समा। एक हज़ार छियालीस मौर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के वर्षों में भाबडा तनाव और निश्चिततायो रहो जिसके कारण सर्व प्रकार का रचनात्मक काय रखा-सा रहा और इस सनाव का परि अन्त में देग विभाजन के रूप में प्रकट हुमा । मलिए यह लगभग निश्चित हो है कि स्वाधीनता प्राप्ति के में साक्षरता के प्रवड एक हज़ार नौ सौ इकतालीस वा अपरा हम नम हो रह होंगे। इसलिए मासस्वा में एक सौ छियालीस न एक सौ तिरासी प्रि को वृद्धि पूतया स्वापानला के पन्चात् के हाल में प्राप्त मनता समस्ये नो बाहिय मुत्रियायों में प्रचधित विस्तार के अतिरिक्त विद्यालयों में नहीं को सम्पा घाम गुनी म मा प्रति हो गई है --भारत में यक्ष उत्कृष्टताका दृष्टि से भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वापानवास पहल बदस्त शिक्षा में पालिखना मिखाना मयान् मर न भर राना था। परन्तु अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि कल पर ज्ञान है पीसा जाता है। इसलिए ये वायत्रमा में एसा पद्धतियों खोज निकालन पर और किया गया जिनमोनिया में रवि बनी रह और साथ हो यह शिवा उन कामों को पूरा करन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जो उन शिक्षा पान वाले भोगों का करना ह
तस्करी के लिए पैंट में तीन अजगर रखकर कनाडा से अमेरिका लाने वाले शख्स पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. उसे अधिकतम 20 साल जेल की सजा भी हो सकती है. यह शख्स 3 बर्मीज अजगरों को कनाडा से अमेरिका लाया था. NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक- 36 साल का कॉल्विन बातिस्ता इन 3 बर्मीस पायथन (अजगर) को पैंट में रखकर 15 जुलाई 2018 को बस में रखकर लाया था. उसने अमेरिका में प्रवेश 'चैंपलिन पोर्ट एंट्री' के रास्ते से किया था. बॉतिस्ता को करीब चार साल पुराने स्मगलिंग के मामले में औपचारिक रूप से अभियोग लगाने के लिए 4 अक्टूबर को अल्बाने (न्यूयॉर्क) लाया गया. इस मामले में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से प्रेस रिलीज भी जारी की गई है. NBC News ने इस मामले में बॉतिस्ता के वकील को भी ईमेल किया, ताकि उनकी प्रतिक्रिया मिल सके. वैसे अगर बॉतिस्ता पर आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उन्हें 20 साल जेल की सजा काटनी पड़ेगी और अमेरिकी कानूनों के मुताबिक 2 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगेगा. बर्मीज अजगर, दुनिया के सबसे लंबे सांपों में से एक हैं. एशिया में इनकी संख्या कम हो रही है. वहीं, फ्लोरिडा में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है. इस कारण ये सांप यहां पाए जाने वाले जानवरों के लिए खतरा भी बन गए हैं. अमेरिका में बर्मीज अजगरों को अंतरर्राष्ट्रीय संधि के माध्यम से रेगुलेट किया जाता है. वहीं अजगरों को 'मनुष्य के लिए हानिकारक जीव' के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है. वहीं, काल्विन बॉतिस्ता तीन अजगरों को पैंट के अंदर रखकर एक बड़ा जोखिम उठाया था. लेकिन अब उसे कड़ी सजा हो सकती है.
तस्करी के लिए पैंट में तीन अजगर रखकर कनाडा से अमेरिका लाने वाले शख्स पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. उसे अधिकतम बीस साल जेल की सजा भी हो सकती है. यह शख्स तीन बर्मीज अजगरों को कनाडा से अमेरिका लाया था. NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक- छत्तीस साल का कॉल्विन बातिस्ता इन तीन बर्मीस पायथन को पैंट में रखकर पंद्रह जुलाई दो हज़ार अट्ठारह को बस में रखकर लाया था. उसने अमेरिका में प्रवेश 'चैंपलिन पोर्ट एंट्री' के रास्ते से किया था. बॉतिस्ता को करीब चार साल पुराने स्मगलिंग के मामले में औपचारिक रूप से अभियोग लगाने के लिए चार अक्टूबर को अल्बाने लाया गया. इस मामले में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से प्रेस रिलीज भी जारी की गई है. NBC News ने इस मामले में बॉतिस्ता के वकील को भी ईमेल किया, ताकि उनकी प्रतिक्रिया मिल सके. वैसे अगर बॉतिस्ता पर आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उन्हें बीस साल जेल की सजा काटनी पड़ेगी और अमेरिकी कानूनों के मुताबिक दो करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगेगा. बर्मीज अजगर, दुनिया के सबसे लंबे सांपों में से एक हैं. एशिया में इनकी संख्या कम हो रही है. वहीं, फ्लोरिडा में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है. इस कारण ये सांप यहां पाए जाने वाले जानवरों के लिए खतरा भी बन गए हैं. अमेरिका में बर्मीज अजगरों को अंतरर्राष्ट्रीय संधि के माध्यम से रेगुलेट किया जाता है. वहीं अजगरों को 'मनुष्य के लिए हानिकारक जीव' के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है. वहीं, काल्विन बॉतिस्ता तीन अजगरों को पैंट के अंदर रखकर एक बड़ा जोखिम उठाया था. लेकिन अब उसे कड़ी सजा हो सकती है.
अल्पसंख्यक बहुल जिलों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, समान एवं गुणवत्ता युक्त शिक्षा में सुधार के उद्देश्य के साथ शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना सरकार की प्राथमिकता है। यह बात आज लोकसभा में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. शशि थरुर ने कही। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुस्लिम बहुल जिलों में स्कूलों तक छात्रों की पहुंच बढ़ाने और आधारभूत कमियों को दूर करने का खासतौर पर लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम के तहत दिसंबर 2012 तक अल्पसंख्यक बहुल जिलों में 20512 प्राथमिक स्कूल और 9918 अपर प्राथमिक स्कूल खोले गए हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत भी मुस्लिम बहुल इलाकों में 890 नए माध्यमिक स्कूल खोले जाने की मंजूरी दी गई है। शैक्षिक रुप से पिछड़े प्रखंडों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के लिए अपर प्राथमिक स्तर के 3609 आवासीय स्कूल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में से 544 विद्यालय मुस्लिम बहुल जिलों में खुल गए हैं, जिनमें 10,821 मुस्लिम छात्राओं का नामांकन हो चुका है। इसके अलावा उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय औसत से कम कुल नामांकन औसत वाले जिलों में 374 आदर्श डिग्री महाविद्यालय की स्थापना योजना के तहत 12 प्रस्ताव मिले और मुस्लिम बहुल जिलों में इनकी स्थापना के लिए मंजूरी दी गई। पोलिटेक्निक संस्थानों की स्थापना योजना के तहत 13 राज्यों में प्रस्तावित 57 में से 54 नए पोलिटेक्निक संस्थान मुस्लिम बहुल जिलों में खोले जाने की मंजूरी दी गई हैं। इनके लिए अब तक 315.16 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दो नए परिसर मल्लापुरम (केरल) और मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) में खोल दिए गए हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान आयोग ने 31.1.2013 तक 7292 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया है। डॉ. थरूर अल्पसंख्यक शिक्षा पर एक लिखित सवाल का जवाब दे रहे थे।
अल्पसंख्यक बहुल जिलों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, समान एवं गुणवत्ता युक्त शिक्षा में सुधार के उद्देश्य के साथ शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना सरकार की प्राथमिकता है। यह बात आज लोकसभा में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. शशि थरुर ने कही। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुस्लिम बहुल जिलों में स्कूलों तक छात्रों की पहुंच बढ़ाने और आधारभूत कमियों को दूर करने का खासतौर पर लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम के तहत दिसंबर दो हज़ार बारह तक अल्पसंख्यक बहुल जिलों में बीस हज़ार पाँच सौ बारह प्राथमिक स्कूल और नौ हज़ार नौ सौ अट्ठारह अपर प्राथमिक स्कूल खोले गए हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत भी मुस्लिम बहुल इलाकों में आठ सौ नब्बे नए माध्यमिक स्कूल खोले जाने की मंजूरी दी गई है। शैक्षिक रुप से पिछड़े प्रखंडों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के लिए अपर प्राथमिक स्तर के तीन हज़ार छः सौ नौ आवासीय स्कूल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में से पाँच सौ चौंतालीस विद्यालय मुस्लिम बहुल जिलों में खुल गए हैं, जिनमें दस,आठ सौ इक्कीस मुस्लिम छात्राओं का नामांकन हो चुका है। इसके अलावा उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय औसत से कम कुल नामांकन औसत वाले जिलों में तीन सौ चौहत्तर आदर्श डिग्री महाविद्यालय की स्थापना योजना के तहत बारह प्रस्ताव मिले और मुस्लिम बहुल जिलों में इनकी स्थापना के लिए मंजूरी दी गई। पोलिटेक्निक संस्थानों की स्थापना योजना के तहत तेरह राज्यों में प्रस्तावित सत्तावन में से चौवन नए पोलिटेक्निक संस्थान मुस्लिम बहुल जिलों में खोले जाने की मंजूरी दी गई हैं। इनके लिए अब तक तीन सौ पंद्रह.सोलह करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दो नए परिसर मल्लापुरम और मुर्शिदाबाद में खोल दिए गए हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान आयोग ने इकतीस.एक.दो हज़ार तेरह तक सात हज़ार दो सौ बानवे शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया है। डॉ. थरूर अल्पसंख्यक शिक्षा पर एक लिखित सवाल का जवाब दे रहे थे।
शुक्रवार, अप्रैल 18 पर, यूक्रेनी सेना ने क्रामटोरस्क के निवासियों द्वारा पकड़े गए दो लैंडिंग वाहनों को हटा दिया। रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उपकरण जब्त करने के लिए एक विशेष ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, नागरिक घायल नहीं हुए थे। दो दिन पहले, क्रामटोरस्क निवासियों को छह बीएमडी मिले, जिस पर सैनिकों ने शहर में एक सैन्य अभियान चलाने की योजना बनाई, आईटीएआर-टीएएस याद करते हैं। प्रदर्शनकारियों ने चारों ओर से घेर लिया और उन्हें रोक दिया, सेना को हटा दिया और सैन्य उपकरणों पर कब्जा कर लिया। इस बीच, स्लाव्यास्क में एक कैश के साथ खोज की गई थी हथियार और राइट सेक्टर से कट्टरपंथियों से संबंधित विस्फोटक। स्थानीय निवासियों के अनुसार, आतंकवादियों ने एक मोड़ की योजना बनाई। इस बीच, पूर्वी यूक्रेन में विशेष ऑपरेशन जारी है, लेकिन जेनेवा समझौते और ईस्टर की छुट्टियों के संबंध में "निष्क्रिय चरण" में चला जाता है। - मूल स्रोतः
शुक्रवार, अप्रैल अट्ठारह पर, यूक्रेनी सेना ने क्रामटोरस्क के निवासियों द्वारा पकड़े गए दो लैंडिंग वाहनों को हटा दिया। रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने कहा कि उपकरण जब्त करने के लिए एक विशेष ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, नागरिक घायल नहीं हुए थे। दो दिन पहले, क्रामटोरस्क निवासियों को छह बीएमडी मिले, जिस पर सैनिकों ने शहर में एक सैन्य अभियान चलाने की योजना बनाई, आईटीएआर-टीएएस याद करते हैं। प्रदर्शनकारियों ने चारों ओर से घेर लिया और उन्हें रोक दिया, सेना को हटा दिया और सैन्य उपकरणों पर कब्जा कर लिया। इस बीच, स्लाव्यास्क में एक कैश के साथ खोज की गई थी हथियार और राइट सेक्टर से कट्टरपंथियों से संबंधित विस्फोटक। स्थानीय निवासियों के अनुसार, आतंकवादियों ने एक मोड़ की योजना बनाई। इस बीच, पूर्वी यूक्रेन में विशेष ऑपरेशन जारी है, लेकिन जेनेवा समझौते और ईस्टर की छुट्टियों के संबंध में "निष्क्रिय चरण" में चला जाता है। - मूल स्रोतः
अलग हो गये हैं और अब इस विषय में उनके फिरोजपुरी मित्र ही से पूछ-ताछ की जाय । भाई साहब ने जिस निष्ठा से लांडरी खोली थी, उससे कहीं अधिक निष्ठा से वे राष्ट्र सेवा में निमग्न हो गये । दिन रात वे कांग्रेस के काम में व्यस्त रहते। कहीं चन्दा इकट्ठा कर रहे हैं; कहीं झण्डे को सलामी दे रहे हैं; कहीं जलूम निकाल रहे हैं और कहीं सभा की व्यवस्था कर रहे हैं। घर वालों को उनके दर्शन भी दुर्लभ हो गये। अपने लम्बे छरहरे शरीर पर खादी की शेरवानी और खादी ही का चूड़ीदार पायजामा पहने, सिर पर तिरछी गांधी टोपी रखे वे शुतर-बे-मुद्दार की भाँति घूमते और घर वालों को इस प्रकार देखते मानो वे किसी नाली में कुलबुझाने वाले अत्यन्त उपेक्षणीय और हेय, अन्धे, बुच्चे, कीड़े हों। चेतन के मन में अपने भाई का सम्मान, घर में नित्य नयी दी जाने वाली गालियों के बावजूद, बढ़ने लगा कि उसे कांग्रेस की एक सभा देखने का सुयोग मिला और उसे ज्ञात हो गया कि भाई साहब के लिए कांग्रेस की डिक्टेटरी भी लांडरी से अधिक महत्व नहीं रखती। उस दिन भाई साहब ने उससे अनुरोध किया था कि वह आज की सभा देखने अवश्य आये और उन्होंने बताया था कि प्रेस के विषय में सरकार ने जिस कठोरता की नीति से काम लिया है, उसके विरुद्ध प्रोटेस्ट के तौर पर अखबार बन्द हो गये हैं। देश में चारों ओर टेस्ट हो रही है। इसी सम्बन्ध में उन्होंने भी सभा की व्यवस्था की है, जिसमें वे स्वयं एक बहुत जोरदार भाषण देने
अलग हो गये हैं और अब इस विषय में उनके फिरोजपुरी मित्र ही से पूछ-ताछ की जाय । भाई साहब ने जिस निष्ठा से लांडरी खोली थी, उससे कहीं अधिक निष्ठा से वे राष्ट्र सेवा में निमग्न हो गये । दिन रात वे कांग्रेस के काम में व्यस्त रहते। कहीं चन्दा इकट्ठा कर रहे हैं; कहीं झण्डे को सलामी दे रहे हैं; कहीं जलूम निकाल रहे हैं और कहीं सभा की व्यवस्था कर रहे हैं। घर वालों को उनके दर्शन भी दुर्लभ हो गये। अपने लम्बे छरहरे शरीर पर खादी की शेरवानी और खादी ही का चूड़ीदार पायजामा पहने, सिर पर तिरछी गांधी टोपी रखे वे शुतर-बे-मुद्दार की भाँति घूमते और घर वालों को इस प्रकार देखते मानो वे किसी नाली में कुलबुझाने वाले अत्यन्त उपेक्षणीय और हेय, अन्धे, बुच्चे, कीड़े हों। चेतन के मन में अपने भाई का सम्मान, घर में नित्य नयी दी जाने वाली गालियों के बावजूद, बढ़ने लगा कि उसे कांग्रेस की एक सभा देखने का सुयोग मिला और उसे ज्ञात हो गया कि भाई साहब के लिए कांग्रेस की डिक्टेटरी भी लांडरी से अधिक महत्व नहीं रखती। उस दिन भाई साहब ने उससे अनुरोध किया था कि वह आज की सभा देखने अवश्य आये और उन्होंने बताया था कि प्रेस के विषय में सरकार ने जिस कठोरता की नीति से काम लिया है, उसके विरुद्ध प्रोटेस्ट के तौर पर अखबार बन्द हो गये हैं। देश में चारों ओर टेस्ट हो रही है। इसी सम्बन्ध में उन्होंने भी सभा की व्यवस्था की है, जिसमें वे स्वयं एक बहुत जोरदार भाषण देने
ओन्नुपुरम में दोपहर की हवा के माध्यम से हथकरघा पैडल की लयबद्ध आवाज़ें गूंज रही हैं। "सुबह 5 बजे आएं और हमें रेशम के धागों पर काम करते हुए देखें," 67 वर्षीय एमके गोधंडबणी मुझसे कहते हैं। कच्चे और रंगहीन रेशमी लार्वा के धागे के जो बंडल ओन्नुपुरम में प्रवेश करते हैं, जिस पर यहां गोधंडबणी और अन्य बुनकर काम करते हैं, 150 किलोमीटर दूर, चेन्नई के बड़े शोरूम और अन्य बाज़ारों में आलीशान, रंगीन छह-गज़ की साड़ियों के रूप में पहुंचते हैं। तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के पश्चिमी अरणी ब्लॉक के ओन्नुपुरम गांव के अधिकांश बुनकर परिवार एक-दूसरे के सीधे या विवाह के माध्यम से रिश्तेदार हैं। लगभग हर घर में कम से कम एक करघा है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। "हमारे बच्चे बाहर जाकर पढ़ते हैं लेकिन बुनाई की कला भी सीखते हैं, यह हमारी परंपरा है," 57 वर्षीय देवसेनाथिपति राजगोपाल कहते हैं, जो अपने 16 वर्षीय बेटे को एक चमकदार गुलाबी रेशम की साड़ी बुनने में मदद कर रहे हैं। विभिन्न सहकारी समितियां या छोटे पैमाने की निर्माण इकाइयां, उनमें से ज्यादातर अरणी ब्लॉक में स्थित बुनकर परिवारों द्वारा स्थापित की गई हैं, बुनकरों से साड़ियां ख़रीदती हैं और उन्हें ब्रांडेड कंपनियों और शोरूमों में वितरित करती हैं। ये ग्राहक बुनकरों को लोकप्रिय मांग के आधार पर डिज़ाइन प्रदान करते हैं, और अक्सर आधुनिक रूपांकन पारंपरिक डिज़ाइनों की जगह ले लेते हैं। बदले में, बुनकर अच्छा पैसा कमाते हैं। सरस्वती ईश्वरायन पावु पुनाइथल को ठीक करती हैं। यह आमतौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता है, जो बुनी जाने वाली साड़ी के बाना के लिए करघे पर 4,500-4,800 व्यक्तिगत धागे की लड़ी को लपेटती हैं। ऐसे प्रत्येक ताना के लिए उन्हें सहकारी समितियों या जिन परिवारों ने उन्हें काम पर रखा है उनके द्वारा 250 रुपये दिये जाते हैं, और उन्हें एक महीने में छह से आठ ऐसे काम मिल जाते हैं। यहां के बुनकर सरल डिजाइन वाली चार साड़ियों की बुनाई करके आमतौर पर 2,500 रुपये कमा लेते हैं। "हम सप्ताह के सभी सात दिन काम करते हैं। हमारी एकमात्र छुट्टी पूर्णिमा के दिन होती है, महीने में केवल एक बार," हथकरघे से अपनी आंख हटाए बिना सरस्वती गंगाधरन कहती हैं। "यह वह दिन होता है जब हम भगवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिसने हमें भाग्यशाली बनाया है।" अन्य बुनकरों की तरह सरस्वती को भी सहकारी समितियों से साड़ी के ऑर्डर मिलते हैं। वह एक महीने में 15 से 20 साड़ियां बुनती हैं, और लगभग 10,000 रुपये कमाती हैं। "इसी से हमारा घर चलता है और हम इसे जाने नहीं देना चाहते हैं। अगर हम आराम करेंगे, तो इससे कमाई का नुकसान होगा," जगदेशन गोपाल कहते हैं जो सुनहरी ज़री वाली भारी साड़ी की बुनाई कर रहे हैं। इस फोटो स्टोरी का एक अलग संस्करण 28 फरवरी, 2018 को द पंच पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।
ओन्नुपुरम में दोपहर की हवा के माध्यम से हथकरघा पैडल की लयबद्ध आवाज़ें गूंज रही हैं। "सुबह पाँच बजे आएं और हमें रेशम के धागों पर काम करते हुए देखें," सरसठ वर्षीय एमके गोधंडबणी मुझसे कहते हैं। कच्चे और रंगहीन रेशमी लार्वा के धागे के जो बंडल ओन्नुपुरम में प्रवेश करते हैं, जिस पर यहां गोधंडबणी और अन्य बुनकर काम करते हैं, एक सौ पचास किलोग्राममीटर दूर, चेन्नई के बड़े शोरूम और अन्य बाज़ारों में आलीशान, रंगीन छह-गज़ की साड़ियों के रूप में पहुंचते हैं। तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के पश्चिमी अरणी ब्लॉक के ओन्नुपुरम गांव के अधिकांश बुनकर परिवार एक-दूसरे के सीधे या विवाह के माध्यम से रिश्तेदार हैं। लगभग हर घर में कम से कम एक करघा है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। "हमारे बच्चे बाहर जाकर पढ़ते हैं लेकिन बुनाई की कला भी सीखते हैं, यह हमारी परंपरा है," सत्तावन वर्षीय देवसेनाथिपति राजगोपाल कहते हैं, जो अपने सोलह वर्षीय बेटे को एक चमकदार गुलाबी रेशम की साड़ी बुनने में मदद कर रहे हैं। विभिन्न सहकारी समितियां या छोटे पैमाने की निर्माण इकाइयां, उनमें से ज्यादातर अरणी ब्लॉक में स्थित बुनकर परिवारों द्वारा स्थापित की गई हैं, बुनकरों से साड़ियां ख़रीदती हैं और उन्हें ब्रांडेड कंपनियों और शोरूमों में वितरित करती हैं। ये ग्राहक बुनकरों को लोकप्रिय मांग के आधार पर डिज़ाइन प्रदान करते हैं, और अक्सर आधुनिक रूपांकन पारंपरिक डिज़ाइनों की जगह ले लेते हैं। बदले में, बुनकर अच्छा पैसा कमाते हैं। सरस्वती ईश्वरायन पावु पुनाइथल को ठीक करती हैं। यह आमतौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता है, जो बुनी जाने वाली साड़ी के बाना के लिए करघे पर चार,पाँच सौ-चार,आठ सौ व्यक्तिगत धागे की लड़ी को लपेटती हैं। ऐसे प्रत्येक ताना के लिए उन्हें सहकारी समितियों या जिन परिवारों ने उन्हें काम पर रखा है उनके द्वारा दो सौ पचास रुपयापये दिये जाते हैं, और उन्हें एक महीने में छह से आठ ऐसे काम मिल जाते हैं। यहां के बुनकर सरल डिजाइन वाली चार साड़ियों की बुनाई करके आमतौर पर दो,पाँच सौ रुपयापये कमा लेते हैं। "हम सप्ताह के सभी सात दिन काम करते हैं। हमारी एकमात्र छुट्टी पूर्णिमा के दिन होती है, महीने में केवल एक बार," हथकरघे से अपनी आंख हटाए बिना सरस्वती गंगाधरन कहती हैं। "यह वह दिन होता है जब हम भगवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिसने हमें भाग्यशाली बनाया है।" अन्य बुनकरों की तरह सरस्वती को भी सहकारी समितियों से साड़ी के ऑर्डर मिलते हैं। वह एक महीने में पंद्रह से बीस साड़ियां बुनती हैं, और लगभग दस,शून्य रुपयापये कमाती हैं। "इसी से हमारा घर चलता है और हम इसे जाने नहीं देना चाहते हैं। अगर हम आराम करेंगे, तो इससे कमाई का नुकसान होगा," जगदेशन गोपाल कहते हैं जो सुनहरी ज़री वाली भारी साड़ी की बुनाई कर रहे हैं। इस फोटो स्टोरी का एक अलग संस्करण अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार अट्ठारह को द पंच पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।
सत्तुआनी को लेकर पटना सिटी के आलमगंज स्थित भद्र घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। जहां लोग गंगा में डुबकी लगा कर भगवान विष्णु की पूजा की। बताया जाता है कि आज के दिन गंगा स्नान कर सत्तू और रवि फसल के फल दान करने का विशेष महत्व है। सत्तुआनी पर्व पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। आज के दिन लोग सत्तू और गुड़ का सेवन करना लाभकारी मानते है। गंगा स्नान करने आये श्रद्धालु पूरी आस्था और विश्वास के साथ विष्णु भगवान की पूजा कर अपने और अपने परिवार के सुख शांति की कामना की है। वहीं सामाजिक लोगो ने गंगा स्नान करने वाले लोगो से गंगा में कूड़ा कचरा न फेंकने की अपील की है। कई वर्षों से चली आ रही या परंपरा लोगों के बीच आज भी आस्था से जुड़ा हुआ है। बच्चे बूढ़े औरतों की काफी भीड़ पटना के गंगा घाटों पर देखने को मिली। लोगों ने गुरुवार की सुबह गंगा में स्नान ध्यान कर पूजा पाठ एवं आरती कीर्तन किया। ऐसी मान्यताएं हैं कि आज के बाद से सवा महीने से चली आ रही खरमास खत्म हो गई और अब लोग शादी विवाह एवं शुभ मुहूर्त का कार्य शुरू करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सत्तुआनी को लेकर पटना सिटी के आलमगंज स्थित भद्र घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। जहां लोग गंगा में डुबकी लगा कर भगवान विष्णु की पूजा की। बताया जाता है कि आज के दिन गंगा स्नान कर सत्तू और रवि फसल के फल दान करने का विशेष महत्व है। सत्तुआनी पर्व पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। आज के दिन लोग सत्तू और गुड़ का सेवन करना लाभकारी मानते है। गंगा स्नान करने आये श्रद्धालु पूरी आस्था और विश्वास के साथ विष्णु भगवान की पूजा कर अपने और अपने परिवार के सुख शांति की कामना की है। वहीं सामाजिक लोगो ने गंगा स्नान करने वाले लोगो से गंगा में कूड़ा कचरा न फेंकने की अपील की है। कई वर्षों से चली आ रही या परंपरा लोगों के बीच आज भी आस्था से जुड़ा हुआ है। बच्चे बूढ़े औरतों की काफी भीड़ पटना के गंगा घाटों पर देखने को मिली। लोगों ने गुरुवार की सुबह गंगा में स्नान ध्यान कर पूजा पाठ एवं आरती कीर्तन किया। ऐसी मान्यताएं हैं कि आज के बाद से सवा महीने से चली आ रही खरमास खत्म हो गई और अब लोग शादी विवाह एवं शुभ मुहूर्त का कार्य शुरू करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऐसी कई महिलाए है जिन पर पाकिस्तान को नाज है कोई आर्मी में है तो कोई पाइलेट है। आज हम आपको पकिस्तान की ऐसी ही महिलाओ के बारे में बताने जा रहे है जिन पर पाकिस्तान को नाज है। 1. शरमीन ओबैद चिनोए - शरमीन पाकिस्तान की जानी मानी जर्नलिस्ट और फिल्मेकर है। इन्होंने 2 डॉक्यूमेंट्री के लिए ऑस्कर भी जीता है। इन्होंने इस के साथ एमी अवार्ड भी जीता है। 2. आएशा फारूक - आइशा पाकिस्तान की उन 5 महिलाओ में से एक है जिन्होंने पाकिस्तान की ऐयरफोर्स में अपना नाम शामिल किया है। ये पाक की पहली फायटर पायलेट है। 3. ज़मीन बैग - माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला है। यह पहली युवा मुस्लिम महिला है। 4. नमीरा सलीम - नमीरा पहली ऐसी पाकिस्तानी महिला है जो स्पेस में जा चुकी है। ये साउथ पोल भी जा चुकी है। 5. मुनीबा मजारी - मुनीबा मजारी पाक की जानी मानी आर्टिस्ट, राइटर और मोटिवेशनल स्पीकर है। इन्हें बीबीसी ने भी 100 मोस्ट इन्स्पिरेशनल वुमन 2015 में शामिल किया गया था।
ऐसी कई महिलाए है जिन पर पाकिस्तान को नाज है कोई आर्मी में है तो कोई पाइलेट है। आज हम आपको पकिस्तान की ऐसी ही महिलाओ के बारे में बताने जा रहे है जिन पर पाकिस्तान को नाज है। एक. शरमीन ओबैद चिनोए - शरमीन पाकिस्तान की जानी मानी जर्नलिस्ट और फिल्मेकर है। इन्होंने दो डॉक्यूमेंट्री के लिए ऑस्कर भी जीता है। इन्होंने इस के साथ एमी अवार्ड भी जीता है। दो. आएशा फारूक - आइशा पाकिस्तान की उन पाँच महिलाओ में से एक है जिन्होंने पाकिस्तान की ऐयरफोर्स में अपना नाम शामिल किया है। ये पाक की पहली फायटर पायलेट है। तीन. ज़मीन बैग - माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला है। यह पहली युवा मुस्लिम महिला है। चार. नमीरा सलीम - नमीरा पहली ऐसी पाकिस्तानी महिला है जो स्पेस में जा चुकी है। ये साउथ पोल भी जा चुकी है। पाँच. मुनीबा मजारी - मुनीबा मजारी पाक की जानी मानी आर्टिस्ट, राइटर और मोटिवेशनल स्पीकर है। इन्हें बीबीसी ने भी एक सौ मोस्ट इन्स्पिरेशनल वुमन दो हज़ार पंद्रह में शामिल किया गया था।
Toyota Fortuner, भारतीय ऑटोमोटिव बाजार में सबसे सफल पूर्ण आकार की एसयूवी है। 2009 में लॉन्च होने के बाद से, इस एसयूवी ने बिक्री में लगातार वृद्धि देखी है, बावजूद इसके कीमत खगोलीय आंकड़ों तक पहुंच गई है। वर्तमान में, Toyota Fortuner भारत में अपनी दूसरी पीढ़ी में है, और यह पहले से ही एक नया रूप और एक नया मॉडल जोड़ चुकी है। हालाँकि, यह बताया गया है कि कंपनी इस बेहद सफल फुल-साइज़ एसयूवी की तीसरी पीढ़ी पर काम कर रही है, और संभावना है कि इसकी नई पीढ़ी को आने वाले दो वर्षों में लॉन्च किया जाएगा। हाल ही में, इस एसयूवी के हालिया स्पाई शॉट पर आधारित एक वीडियो रेंडरिंग ऑनलाइन साझा किया गया है, जिससे हमें एक झलक मिलती है कि क्या हो सकता है। तीसरी पीढ़ी की Toyota Fortuner का वीडियो रेंडरिंग YouTube पर SRK Designs द्वारा अपने चैनल पर साझा किया गया है। एसआरके डिज़ाइन्स देश के सबसे प्रतिभाशाली डिजिटल कलाकारों में से एक है, जो कई लोकप्रिय कारों के रेंडर तैयार करता रहा है। सबसे हालिया रेंडर में, हम देख सकते हैं कि कलाकार ने Fortuner के आगामी पीढ़ी के मॉडल की हाल ही में लीक हुई तस्वीरों से डिजाइन प्रेरणा ली है। नई पीढ़ी की एसयूवी में पूरी तरह से नया फ्रंट-एंड डिज़ाइन होगा, और सबसे अधिक संभावना है, इसमें एक बिल्कुल नया इंटीरियर डिज़ाइन भी होगा। नए जारी किए गए रेंडर से यह स्पष्ट है कि आगामी Fortuner के फ्रंट को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है और अब यह और भी बोल्ड और बड़ा दिखता है। जबकि बोनट वही प्रतीत होता है, सामने के बाकी हिस्से को बड़े पैमाने पर संशोधित किया गया है। इस नए फ्रंट एंड का मुख्य आकर्षण अपडेटेड ऑल-एलईडी हेडलाइट्स और काफी बड़ा फ्रंट ग्रिल है। फ्रंट ग्रिल में एक विशाल Toyota प्रतीक के साथ तीन क्षैतिज पट्टियाँ हैं और यह बॉडी कलर में मोटी गार्निश से घिरा हुआ है। आगे बढ़ते हुए, जैसा कि पहले बताया गया है, हेडलाइट्स को बदल दिया गया है और अब एलईडी डीआरएल के साथ एक अलग उलटा एल डिजाइन पेश किया गया है। लाइटें, पुराने मॉडल की तरह ही, बहुत चिकनी हैं। नई एलईडी हेडलाइट्स के ठीक नीचे एक अनोखा एयर वेंट देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फ्रंट बम्पर को भी पूरी तरह से नया डिज़ाइन दिया गया है और अब यह अधिक बोल्ड दिखाई देता है। नए फ्रंट बम्पर के केंद्र में एक बड़ी सिल्वर स्किड प्लेट है, और दोनों तरफ, फॉग लैंप के लिए आयताकार आवास हैं। फॉग लैंप के ठीक नीचे एलईडी डीआरएल भी लगाए गए हैं। साइड प्रोफाइल से ऐसा लगता है कि इस Fortuner में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। एकमात्र उल्लेखनीय अंतर मिश्र धातु पहियों का नया डिज़ाइन है, हालांकि ये संभवतः वे नहीं हैं जो उत्पादन मॉडल पर देखे जाएंगे। जहां तक रियर एंड डिज़ाइन की बात है, यह रेंडरिंग आगामी Fortuner के पिछले हिस्से को नहीं दिखाता है। हालाँकि, रिपोर्टों और पिछली लीक तस्वीरों के अनुसार, यह ध्यान दिया गया है कि इसमें व्यापक संशोधन भी होंगे। अभी तक यह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है कि आने वाली Fortuner किन इंजनों से लैस होगी। हालाँकि, अटकलें हैं कि कंपनी एक माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम पेश कर सकती है, जिसका लक्ष्य एसयूवी की ईंधन दक्षता को बढ़ाना और इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। कुछ रिपोर्टों ने संकेत दिया है कि मौजूदा 2.8-liter GD श्रृंखला चार-सिलेंडर डीजल इंजन एक माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम से लैस होने की संभावना है, जो कि अत्यधिक लोकप्रिय Toyota MPV, Innova Hycross में उपयोग किए गए सिस्टम के समान है। यह प्रणाली एक 48V बैटरी और एक छोटे इलेक्ट्रिक मोटर जनरेटर को एकीकृत कर सकती है, जो प्रदर्शन और दक्षता दोनों को अनुकूलित करने के लिए इंजन के साथ तालमेल बिठाकर काम करती है।
Toyota Fortuner, भारतीय ऑटोमोटिव बाजार में सबसे सफल पूर्ण आकार की एसयूवी है। दो हज़ार नौ में लॉन्च होने के बाद से, इस एसयूवी ने बिक्री में लगातार वृद्धि देखी है, बावजूद इसके कीमत खगोलीय आंकड़ों तक पहुंच गई है। वर्तमान में, Toyota Fortuner भारत में अपनी दूसरी पीढ़ी में है, और यह पहले से ही एक नया रूप और एक नया मॉडल जोड़ चुकी है। हालाँकि, यह बताया गया है कि कंपनी इस बेहद सफल फुल-साइज़ एसयूवी की तीसरी पीढ़ी पर काम कर रही है, और संभावना है कि इसकी नई पीढ़ी को आने वाले दो वर्षों में लॉन्च किया जाएगा। हाल ही में, इस एसयूवी के हालिया स्पाई शॉट पर आधारित एक वीडियो रेंडरिंग ऑनलाइन साझा किया गया है, जिससे हमें एक झलक मिलती है कि क्या हो सकता है। तीसरी पीढ़ी की Toyota Fortuner का वीडियो रेंडरिंग YouTube पर SRK Designs द्वारा अपने चैनल पर साझा किया गया है। एसआरके डिज़ाइन्स देश के सबसे प्रतिभाशाली डिजिटल कलाकारों में से एक है, जो कई लोकप्रिय कारों के रेंडर तैयार करता रहा है। सबसे हालिया रेंडर में, हम देख सकते हैं कि कलाकार ने Fortuner के आगामी पीढ़ी के मॉडल की हाल ही में लीक हुई तस्वीरों से डिजाइन प्रेरणा ली है। नई पीढ़ी की एसयूवी में पूरी तरह से नया फ्रंट-एंड डिज़ाइन होगा, और सबसे अधिक संभावना है, इसमें एक बिल्कुल नया इंटीरियर डिज़ाइन भी होगा। नए जारी किए गए रेंडर से यह स्पष्ट है कि आगामी Fortuner के फ्रंट को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है और अब यह और भी बोल्ड और बड़ा दिखता है। जबकि बोनट वही प्रतीत होता है, सामने के बाकी हिस्से को बड़े पैमाने पर संशोधित किया गया है। इस नए फ्रंट एंड का मुख्य आकर्षण अपडेटेड ऑल-एलईडी हेडलाइट्स और काफी बड़ा फ्रंट ग्रिल है। फ्रंट ग्रिल में एक विशाल Toyota प्रतीक के साथ तीन क्षैतिज पट्टियाँ हैं और यह बॉडी कलर में मोटी गार्निश से घिरा हुआ है। आगे बढ़ते हुए, जैसा कि पहले बताया गया है, हेडलाइट्स को बदल दिया गया है और अब एलईडी डीआरएल के साथ एक अलग उलटा एल डिजाइन पेश किया गया है। लाइटें, पुराने मॉडल की तरह ही, बहुत चिकनी हैं। नई एलईडी हेडलाइट्स के ठीक नीचे एक अनोखा एयर वेंट देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, फ्रंट बम्पर को भी पूरी तरह से नया डिज़ाइन दिया गया है और अब यह अधिक बोल्ड दिखाई देता है। नए फ्रंट बम्पर के केंद्र में एक बड़ी सिल्वर स्किड प्लेट है, और दोनों तरफ, फॉग लैंप के लिए आयताकार आवास हैं। फॉग लैंप के ठीक नीचे एलईडी डीआरएल भी लगाए गए हैं। साइड प्रोफाइल से ऐसा लगता है कि इस Fortuner में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। एकमात्र उल्लेखनीय अंतर मिश्र धातु पहियों का नया डिज़ाइन है, हालांकि ये संभवतः वे नहीं हैं जो उत्पादन मॉडल पर देखे जाएंगे। जहां तक रियर एंड डिज़ाइन की बात है, यह रेंडरिंग आगामी Fortuner के पिछले हिस्से को नहीं दिखाता है। हालाँकि, रिपोर्टों और पिछली लीक तस्वीरों के अनुसार, यह ध्यान दिया गया है कि इसमें व्यापक संशोधन भी होंगे। अभी तक यह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है कि आने वाली Fortuner किन इंजनों से लैस होगी। हालाँकि, अटकलें हैं कि कंपनी एक माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम पेश कर सकती है, जिसका लक्ष्य एसयूवी की ईंधन दक्षता को बढ़ाना और इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। कुछ रिपोर्टों ने संकेत दिया है कि मौजूदा दो.आठ-liter GD श्रृंखला चार-सिलेंडर डीजल इंजन एक माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम से लैस होने की संभावना है, जो कि अत्यधिक लोकप्रिय Toyota MPV, Innova Hycross में उपयोग किए गए सिस्टम के समान है। यह प्रणाली एक अड़तालीस वोल्ट बैटरी और एक छोटे इलेक्ट्रिक मोटर जनरेटर को एकीकृत कर सकती है, जो प्रदर्शन और दक्षता दोनों को अनुकूलित करने के लिए इंजन के साथ तालमेल बिठाकर काम करती है।
टीवी दुनिया की जानी मानी अभिनेत्री रुखसार रहमान इन दिनों अपने हॉट लुक को लेकर चर्चा में बनी हुई है. बता दे कि रुखसार टीवी की ही नहीं बल्कि बॉलीवुड की भी एक चर्चित अभिनेत्री है जो कई फिल्मों में नजर आ चुकी है. उन्होंने सरकार, डी, क्नौक आउट, पीके, अल्लाह के बन्दे, दी स्टोनमेन मर्डर, भेजा फ्राई 2, जैसी कई फिल्मों में काम किया है. माँ का किरदार निभाने वाली ये एक्ट्रेस रियल लाइफ में बहुत ही हॉट एंड स्टाइलिश है और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है, अब हाल ही में उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की है जिसमे वह बेहद बोल्ड एंड खूबसूरत नजर आ रही है. बता दे कि जी टीवी के मशहूर शो 'और प्यार हो गया' में इस एक्ट्रेस ने माँ का किरदार निभाया था जिसे दर्शको ने खूब पसंद किया था. वह इस शो के अलावा भी टीवी के कई शोज में नजर आ चुकी है. वहीं आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'पीके' में रुखसार ने एक छोटी सी भूमिका निभाई थी. रुखसार आये दिन सोशल मीडिया पर अपनी अलग-अलग अंदाज़ में तस्वीरें शेयर करती है जो बड़ी ही तेजी से वायरल होती है. रुखसार ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत मशहूर अभिनेता आदित्य पंचोली के साथ फिल्म 'याद रखेगी दुनिया' से की थी.
टीवी दुनिया की जानी मानी अभिनेत्री रुखसार रहमान इन दिनों अपने हॉट लुक को लेकर चर्चा में बनी हुई है. बता दे कि रुखसार टीवी की ही नहीं बल्कि बॉलीवुड की भी एक चर्चित अभिनेत्री है जो कई फिल्मों में नजर आ चुकी है. उन्होंने सरकार, डी, क्नौक आउट, पीके, अल्लाह के बन्दे, दी स्टोनमेन मर्डर, भेजा फ्राई दो, जैसी कई फिल्मों में काम किया है. माँ का किरदार निभाने वाली ये एक्ट्रेस रियल लाइफ में बहुत ही हॉट एंड स्टाइलिश है और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है, अब हाल ही में उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की है जिसमे वह बेहद बोल्ड एंड खूबसूरत नजर आ रही है. बता दे कि जी टीवी के मशहूर शो 'और प्यार हो गया' में इस एक्ट्रेस ने माँ का किरदार निभाया था जिसे दर्शको ने खूब पसंद किया था. वह इस शो के अलावा भी टीवी के कई शोज में नजर आ चुकी है. वहीं आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'पीके' में रुखसार ने एक छोटी सी भूमिका निभाई थी. रुखसार आये दिन सोशल मीडिया पर अपनी अलग-अलग अंदाज़ में तस्वीरें शेयर करती है जो बड़ी ही तेजी से वायरल होती है. रुखसार ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत मशहूर अभिनेता आदित्य पंचोली के साथ फिल्म 'याद रखेगी दुनिया' से की थी.
बॉलीवुड के टाइगर यानि सलमान खान की भाभी एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा को फिल्म इंडस्ट्री में आइटम क्वीन के नाम से जाना जाता है। उन्होंने आज तक जो भी आइटम सॉन्ग किया है उसने तहलका मचाया है। कई फिल्में तो ऐसी रहीं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर भले ही अच्छा प्रदर्शन नहीं किया हो लेकिन उस फिल्म में मौजूद मलाइका का आइटम सॉन्ग ब्लॉकबस्टर रहा है। अब मलाइका अरोड़ा को टक्कर देने उनकी हमशक्ल और दक्षिण भारतीय फिल्मों की आइटम क्वीन हिना पांचाल अब बॉलीवुड में अपने जलवे दिखाने को तैयार हैं। हिना का आइटम सॉन्ग 'ऐ राजा' रिलीज हो गया है जो 'जाने क्यों दे यारो' फिल्म का है। इस आइटम सॉन्ग में वह जबरदस्त डांस कर रही हैं और मलाइका अरोड़ा को चुनौती देती नजर आ रही हैं। इस फिल्म को अक्षय आनंद ने डायरेक्ट किया है। इस सॉन्ग में हिना बेहद ही बोल्ड और हॉट नजर आ रही हैं। इस गाने में कबीर बेदी भी नजर आ रहे हैं और हिना के डांस का भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं। हालांकि कुछ समय पहले ही हिना अपने टॉपलेस फोटोशूट की वजह से सुर्खियों में आई थीं। वह पहले भी कई फिल्मों में आइटम सॉन्ग कर चुकी हैं। लोगों का मानना है कि हिना बॉलीवुड में अपना जादू चलाने में पूरी तरह से कामयाब होंगी।
बॉलीवुड के टाइगर यानि सलमान खान की भाभी एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा को फिल्म इंडस्ट्री में आइटम क्वीन के नाम से जाना जाता है। उन्होंने आज तक जो भी आइटम सॉन्ग किया है उसने तहलका मचाया है। कई फिल्में तो ऐसी रहीं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर भले ही अच्छा प्रदर्शन नहीं किया हो लेकिन उस फिल्म में मौजूद मलाइका का आइटम सॉन्ग ब्लॉकबस्टर रहा है। अब मलाइका अरोड़ा को टक्कर देने उनकी हमशक्ल और दक्षिण भारतीय फिल्मों की आइटम क्वीन हिना पांचाल अब बॉलीवुड में अपने जलवे दिखाने को तैयार हैं। हिना का आइटम सॉन्ग 'ऐ राजा' रिलीज हो गया है जो 'जाने क्यों दे यारो' फिल्म का है। इस आइटम सॉन्ग में वह जबरदस्त डांस कर रही हैं और मलाइका अरोड़ा को चुनौती देती नजर आ रही हैं। इस फिल्म को अक्षय आनंद ने डायरेक्ट किया है। इस सॉन्ग में हिना बेहद ही बोल्ड और हॉट नजर आ रही हैं। इस गाने में कबीर बेदी भी नजर आ रहे हैं और हिना के डांस का भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं। हालांकि कुछ समय पहले ही हिना अपने टॉपलेस फोटोशूट की वजह से सुर्खियों में आई थीं। वह पहले भी कई फिल्मों में आइटम सॉन्ग कर चुकी हैं। लोगों का मानना है कि हिना बॉलीवुड में अपना जादू चलाने में पूरी तरह से कामयाब होंगी।
क्रीज पर रविंद्र जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज बल्लेबाज थे लेकिन इस युवा गेंदबाज ने इससे विचलित हुए बिना गेंदबाज की। उन्होंने 19वें ओवर में सिर्फ 8 रन देकर चेन्नई को दबाव में ला दिया। यॉर्कर फेंकने में महारत रखने वाले अर्शदीप से कप्तान मयंक अग्रवाल काफी प्रभावित नजर आए। अग्रवाल ने कहा कि अर्शदीप मुश्किल परिस्थितयों में आगे बढ़कर बोलिंग करते हैं।
क्रीज पर रविंद्र जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज बल्लेबाज थे लेकिन इस युवा गेंदबाज ने इससे विचलित हुए बिना गेंदबाज की। उन्होंने उन्नीसवें ओवर में सिर्फ आठ रन देकर चेन्नई को दबाव में ला दिया। यॉर्कर फेंकने में महारत रखने वाले अर्शदीप से कप्तान मयंक अग्रवाल काफी प्रभावित नजर आए। अग्रवाल ने कहा कि अर्शदीप मुश्किल परिस्थितयों में आगे बढ़कर बोलिंग करते हैं।
मेट्रो में होने वाली कई घटनाए हम सभी ने देखी ही है। कुछ समय पहले ही दिल्ली मेट्रो में खुलेआम कपल रोमांस करते हुए नजर आए थे उन लोगो ने तो अश्लीलता की सारी हदे पार कर दी थी। और अभी हाल ही में भी एक वीडियो बहुत ही तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे कुछ विदेशी महिलाएं बदतमीजी करते हुए नजर आ रहीं है। जी हाँ इन विदेशी महिलाओं ने अपने कपडे तक उतार दिए है। आपको बता दें की यह वीडियो बहुत ही तेजी से वायरल हो रहा है। और इसे अब तक लाखो लोगो द्वारा देखा जा चुका है। इस वीडियो को काफी लोगो ने शेयर भी किया है। आइए देखते है।
मेट्रो में होने वाली कई घटनाए हम सभी ने देखी ही है। कुछ समय पहले ही दिल्ली मेट्रो में खुलेआम कपल रोमांस करते हुए नजर आए थे उन लोगो ने तो अश्लीलता की सारी हदे पार कर दी थी। और अभी हाल ही में भी एक वीडियो बहुत ही तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे कुछ विदेशी महिलाएं बदतमीजी करते हुए नजर आ रहीं है। जी हाँ इन विदेशी महिलाओं ने अपने कपडे तक उतार दिए है। आपको बता दें की यह वीडियो बहुत ही तेजी से वायरल हो रहा है। और इसे अब तक लाखो लोगो द्वारा देखा जा चुका है। इस वीडियो को काफी लोगो ने शेयर भी किया है। आइए देखते है।
नई दिल्ली। भारत ने जापान के काकामिगहारा में आयोजित महिला जूनियर हॉकी एशिया कप 2023 में रविवार को रोमांचक फाइनल मैच में कोरिया को 2-1 से हराकर अपना पहला खिताब जीता। रविवार को खेले गए रोमांचक फाइनल मैच में भारत के लिए अन्नू (22') और नीलम (41') ने एक-एक गोल किया जबकि कोरिया के लिए एकमात्र गोल सियोन पार्क (25') ने किया। यह भारतीय जूनियर महिला टीम का एक सामूहिक टीम प्रयास था जिसने अंततः इस महत्वपूर्ण मुकाबले में उनकी जीत का मार्ग प्रशस्त किया। यह पहली बार है जब भारत ने महिला जूनियर एशिया कप जीता है। भारत ने खेल के शुरूआती मिनट में पेनल्टी कार्नर जीतकर आक्रामक शुरूआत की, लेकिन वे इसे भुनाने में नाकाम रहे। हालांकि, कोरिया ने जवाबी हमला करके और गेंद पर कब्जे को नियंत्रित करके गति को अपने पक्ष में कर लिया। उन्होंने शुरूआती पेनल्टी कार्नर भी जीता लेकिन नीलम ने कोरिया को नकारने के लिए गोल-लाइन क्लीयरेंस किया। दोनों टीमों के आक्रामक खेल के बावजूद पहला क्वार्टर गोलरहित समाप्त हुआ। कोरिया दूसरे क्वार्टर में भी अपने आक्रामक रवैये पर अड़ा रहा और इस तरह भारत को बैकफुट पर धकेल दिया। कोरिया को कुछ पेनल्टी कार्नर भी मिले, लेकिन, भारत न केवल विपक्ष के हमलावरों को दूर रखने के लिए रक्षा में मजबूत खड़ा था, बल्कि अन्नू (22') के माध्यम से बढ़त बनाकर उसने कोरिया को दबाव में भी रखा, अन्नू ने शांति से पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदला। हालांकि, भारत की बढ़त लंबे समय तक नहीं टिकी क्योंकि सियोन पार्क (25') ने डी के अंदर से अच्छी तरह से लगाए गए शॉट के माध्यम से कोरिया के लिए बराबरी का स्कोर बनाया। दूसरे क्वार्टर में कोई और गोल नहीं हुआ क्योंकि दोनों टीमें आधे ब्रेक में 1-1 के स्कोर के साथ गयीं। मैच का दूसरा भाग कोरिया के कब्जे में रखने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ शुरू हुआ, जबकि भारतीय टीम ने जवाबी हमला किया और उसे नीलम (41') के रूप में फायदा मिला, जिन्होंने शानदार ढंग से पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलकर भारत को आगे कर दिया। तीसरा क्वार्टर समाप्त हो गया। स्कोर 2-1 से भारतीय टीम के पक्ष में था। अपनी बढ़त की रक्षा के लिए, भारत ने चौथे क्वार्टर में गेंद पर कब्जे को बनाए रखते हुए खेल की गति को बचाने और नियंत्रित करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। दूसरी ओर, कोरिया ने कुछ जबरन गलतियाँ कीं और बराबरी का गोल खोजने के लिए अपनी हताशा में गलत दिशा में पास किए। अंततः भारत मजबूत बना रहा और शिखर मुकाबले को 2-1 से जीतने की अपनी रणनीति पर सफल रहा। फाइनल के बाद, भारत की जूनियर महिला टीम की कप्तान प्रीति ने कहा, "राउंड-रॉबिन चरण में 1-1 से ड्रॉ के बाद, हम उन विशिष्ट क्षेत्रों के बारे में गहराई से जानते थे, जो हमारे लिए कोरिया पर काबू पाने के लिए आवश्यक थे। फाइनल मैच में काफी कुछ हुआ। हालांकि, हम जानते थे कि एक टीम के रूप में हमें कुछ खास हासिल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलना होगा और हमने वही किया। हम अपने देश को गौरवान्वित करने के लिए उत्साहित हैं। "
नई दिल्ली। भारत ने जापान के काकामिगहारा में आयोजित महिला जूनियर हॉकी एशिया कप दो हज़ार तेईस में रविवार को रोमांचक फाइनल मैच में कोरिया को दो-एक से हराकर अपना पहला खिताब जीता। रविवार को खेले गए रोमांचक फाइनल मैच में भारत के लिए अन्नू और नीलम ने एक-एक गोल किया जबकि कोरिया के लिए एकमात्र गोल सियोन पार्क ने किया। यह भारतीय जूनियर महिला टीम का एक सामूहिक टीम प्रयास था जिसने अंततः इस महत्वपूर्ण मुकाबले में उनकी जीत का मार्ग प्रशस्त किया। यह पहली बार है जब भारत ने महिला जूनियर एशिया कप जीता है। भारत ने खेल के शुरूआती मिनट में पेनल्टी कार्नर जीतकर आक्रामक शुरूआत की, लेकिन वे इसे भुनाने में नाकाम रहे। हालांकि, कोरिया ने जवाबी हमला करके और गेंद पर कब्जे को नियंत्रित करके गति को अपने पक्ष में कर लिया। उन्होंने शुरूआती पेनल्टी कार्नर भी जीता लेकिन नीलम ने कोरिया को नकारने के लिए गोल-लाइन क्लीयरेंस किया। दोनों टीमों के आक्रामक खेल के बावजूद पहला क्वार्टर गोलरहित समाप्त हुआ। कोरिया दूसरे क्वार्टर में भी अपने आक्रामक रवैये पर अड़ा रहा और इस तरह भारत को बैकफुट पर धकेल दिया। कोरिया को कुछ पेनल्टी कार्नर भी मिले, लेकिन, भारत न केवल विपक्ष के हमलावरों को दूर रखने के लिए रक्षा में मजबूत खड़ा था, बल्कि अन्नू के माध्यम से बढ़त बनाकर उसने कोरिया को दबाव में भी रखा, अन्नू ने शांति से पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदला। हालांकि, भारत की बढ़त लंबे समय तक नहीं टिकी क्योंकि सियोन पार्क ने डी के अंदर से अच्छी तरह से लगाए गए शॉट के माध्यम से कोरिया के लिए बराबरी का स्कोर बनाया। दूसरे क्वार्टर में कोई और गोल नहीं हुआ क्योंकि दोनों टीमें आधे ब्रेक में एक-एक के स्कोर के साथ गयीं। मैच का दूसरा भाग कोरिया के कब्जे में रखने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ शुरू हुआ, जबकि भारतीय टीम ने जवाबी हमला किया और उसे नीलम के रूप में फायदा मिला, जिन्होंने शानदार ढंग से पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलकर भारत को आगे कर दिया। तीसरा क्वार्टर समाप्त हो गया। स्कोर दो-एक से भारतीय टीम के पक्ष में था। अपनी बढ़त की रक्षा के लिए, भारत ने चौथे क्वार्टर में गेंद पर कब्जे को बनाए रखते हुए खेल की गति को बचाने और नियंत्रित करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। दूसरी ओर, कोरिया ने कुछ जबरन गलतियाँ कीं और बराबरी का गोल खोजने के लिए अपनी हताशा में गलत दिशा में पास किए। अंततः भारत मजबूत बना रहा और शिखर मुकाबले को दो-एक से जीतने की अपनी रणनीति पर सफल रहा। फाइनल के बाद, भारत की जूनियर महिला टीम की कप्तान प्रीति ने कहा, "राउंड-रॉबिन चरण में एक-एक से ड्रॉ के बाद, हम उन विशिष्ट क्षेत्रों के बारे में गहराई से जानते थे, जो हमारे लिए कोरिया पर काबू पाने के लिए आवश्यक थे। फाइनल मैच में काफी कुछ हुआ। हालांकि, हम जानते थे कि एक टीम के रूप में हमें कुछ खास हासिल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलना होगा और हमने वही किया। हम अपने देश को गौरवान्वित करने के लिए उत्साहित हैं। "
राष्ट्रपति ने मेट्रो चरण-1 परियोजना कर्नाटक और बेंगलूरू की जनता को समर्पित की। राष्ट्रपति ने आज (17 जून, 2017) बेंगलूरू में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा जिसमें मेट्रो चरण-1 परियोजना कर्नाटक के लोगों को समर्पित की गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मूल रूप में गार्डन सिटी के नाम से विख्यात, बेंगलूरू ने अपने को धीरे-धीरे भारत की सिलिकन घाटी में रूपांतरित कर लिया। वैश्विक रैंकिंग के अनुसार इसे दुनिया के सर्वाधिक गतिशील शहर, यहां तक कि सिलिकन वैली से भी अधिक गतिशील शहर का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे कर्नाटक राज्य के लोगों को मट्रो चरण-1 परियोजना सौंपते हुए अत्यन्त हर्ष अनुभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहली मेट्रोपोलिटन रेलवे सेवा 1863 में लंदन में शुरू हुई थी। इस दृष्टि से देखें तो भारत में मेट्रो सेवा को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में अपनाने में अनेक दशकों का विलम्ब हुआ है। 20वीं सदी के प्रारंभ में लगभग समूचे यूरोप, उत्तर अमरीका और दक्षिण अमरीका के सभी बड़े शहरों में मेट्रो का जाल फैल चुका था। हमारे यहां प्रथम मेट्रो नेटवर्क 1984 में कोलकाता प्रारंभ हुआ, लेकिन उसके बाद वर्ष 2000 में दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रारंभ होने के बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। राष्ट्रपति ने कहा कि 'नम्मा मेट्रो के पहले चरण में वर्ष 2008 में 42.3 कि.मी. लम्बी रेल परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था और अतीत में विभिन्न चरणों में 31 कि.मी. लाइन पर मेट्रो सेवा प्रारंभ की गई। आज अंतिम चरण में 11.3 कि.मी. लाइन पर मेट्रो सेवा के खुल जाने के साथ ही यह परियोजना पूर्ण हो गयी है। इस परियोजना में मुख्य भागीदारी कर्नाटक सरकार, भारत सरकार, जापान इंटरनेशनल काऑपरेशन एजेंसी और फ्रांस की एजेंसे फ्रैंकाइसे द डिवेलप्मेंट की रही है। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि नम्मा मेट्रों के दूसरे चरण का निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे इस नेटवर्क में 72 कि.मी. लाइन और जुड़ जायेगी। राष्ट्रपति ने बेंगलूरू मेट्रो रेल परियोजना की टीम को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी। उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय, कर्नाटक की जनता और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और जापान सरकार तथा फ्रांस सरकार की वित्तीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रपति ने मेट्रो चरण-एक परियोजना कर्नाटक और बेंगलूरू की जनता को समर्पित की। राष्ट्रपति ने आज बेंगलूरू में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा जिसमें मेट्रो चरण-एक परियोजना कर्नाटक के लोगों को समर्पित की गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मूल रूप में गार्डन सिटी के नाम से विख्यात, बेंगलूरू ने अपने को धीरे-धीरे भारत की सिलिकन घाटी में रूपांतरित कर लिया। वैश्विक रैंकिंग के अनुसार इसे दुनिया के सर्वाधिक गतिशील शहर, यहां तक कि सिलिकन वैली से भी अधिक गतिशील शहर का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे कर्नाटक राज्य के लोगों को मट्रो चरण-एक परियोजना सौंपते हुए अत्यन्त हर्ष अनुभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहली मेट्रोपोलिटन रेलवे सेवा एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ में लंदन में शुरू हुई थी। इस दृष्टि से देखें तो भारत में मेट्रो सेवा को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में अपनाने में अनेक दशकों का विलम्ब हुआ है। बीसवीं सदी के प्रारंभ में लगभग समूचे यूरोप, उत्तर अमरीका और दक्षिण अमरीका के सभी बड़े शहरों में मेट्रो का जाल फैल चुका था। हमारे यहां प्रथम मेट्रो नेटवर्क एक हज़ार नौ सौ चौरासी में कोलकाता प्रारंभ हुआ, लेकिन उसके बाद वर्ष दो हज़ार में दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रारंभ होने के बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। राष्ट्रपति ने कहा कि 'नम्मा मेट्रो के पहले चरण में वर्ष दो हज़ार आठ में बयालीस.तीन कि.मी. लम्बी रेल परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था और अतीत में विभिन्न चरणों में इकतीस कि.मी. लाइन पर मेट्रो सेवा प्रारंभ की गई। आज अंतिम चरण में ग्यारह.तीन कि.मी. लाइन पर मेट्रो सेवा के खुल जाने के साथ ही यह परियोजना पूर्ण हो गयी है। इस परियोजना में मुख्य भागीदारी कर्नाटक सरकार, भारत सरकार, जापान इंटरनेशनल काऑपरेशन एजेंसी और फ्रांस की एजेंसे फ्रैंकाइसे द डिवेलप्मेंट की रही है। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि नम्मा मेट्रों के दूसरे चरण का निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे इस नेटवर्क में बहत्तर कि.मी. लाइन और जुड़ जायेगी। राष्ट्रपति ने बेंगलूरू मेट्रो रेल परियोजना की टीम को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई दी। उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय, कर्नाटक की जनता और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और जापान सरकार तथा फ्रांस सरकार की वित्तीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
'जजमेन्टल है क्या' की सबसे बडी उपलब्धि है कलाकारों का अभिनय. कंगना रनौत और राजकुमार राव दोनों ने शानदार परफोर्मन्स दी है. कंगना की जितनी तारीफ करे उतनी कम है. मानसिक रोगी के किरदार में वो इस कदर घूस गई है की वो कब, क्या करेगी इसका अंदाजा भी दर्शक नहीं लगा सकते. उनकी बोडीलेंग्वेज, हावभाव, लूक सभी बहेतरिन है. अपने पात्र की बेबसी, डर, गुस्से, पागलपन, जूनून को कंगना ने अफलातून ढंग से दर्शाया है. वहीं राजकुमार राव भी बडा ही सटिक परफोर्मन्स देने में पूरी तरह से कामियाब हुए है. ये किरदार उनकी करियर के सबसे अच्छे किरदारों में से एक है. अपनी पीछली फिल्मों से वो काफी ज्यादा हेन्डसम भी लगे. अन्य कलाकारों में बॉबी के बॉयफ्रेंड बनें हुसैन दलाल का काम विशेषतः सराहनीय है. अमायरा दस्तूर, नुसरत भरुचा, सतीष कौशिक ने अपने पात्रों को अच्छा न्याय दिया है. जिम्मी शेरगिल ने ये फिल्म क्यों की इसका जबाव तो वही दे सकते है. उनका पात्र बहोत ही साधारण सा है. इस ब्लेक कोमेडी फिल्म की कहानी के तानेबाने काफी अच्छे से बूने गए है, जिसका श्रेय जाता है लेखिका कनिका धिल्लों को. (उन्होंने फिल्म में 'सीता' का केमियो भी किया है, जिसमें वो काफी खूबसूरत लगीं.) मानसिक रोगी का व्यक्तित्व वास्तविक रूप में पर्दे पर दिखे एसे कई बढिया सीन उनकी लिखावट से सजे है. डायलोग्स भी कनिका ने ही लिखे है और वो भी इतने उमदा है की गंभीर सिच्युएशन में भी हंसी आ जाए. फिल्म का डायरेक्शन किया है तेलुगु फिल्ममेकर प्रकाश कोवलामुदी ने. उन्होंने वाकई में 'हटके' फिल्म बनाई है, लेकिन कहीं कहीं मनोरंजन की कमी खलती है. फिल्म में रंगो का इस्तेमाल अच्छे से किया गया है और उसे पंकज कुमार के केमेरे ने और निखार के पेश किया है. गाने कुछ खास नहीं है लेकिन बेकग्राउन्ड म्युजिक तगडा है और फिल्म के रहस्य को और गहेरा बनाने में इसकी अहम भूमिका है. यहां रामायण के पात्रों को प्रतीकात्मक रूप में अच्छे से इस्तेमाल किया गया है. गंभीर विषय होने के बावजूद 'जजमेन्टल है क्या' कहीं भी बोर नहीं करती. रहस्य आखरी सीन तक दर्शकों को उल्झाए रखने में कामियाब होता है. दूसरे हाफ को कांटछांट कर थोडा कम किया जा सकता था, लेकिन फिर भी फिल्म का एडिटिंग खासा दमदार है. हां, क्लाइमैक्स को थोडा ज्यादा बहेलाने की जरूरत थी. अंत को जल्दी जल्दी में निपटा दिया गया हो, एसा लगता है. अच्छी होने के बावजूद 'जजमेन्टल है क्या' में टिपिकल हिन्दी फिल्मोंवाले मनोरंजन की साफ कमी है. अगर आप मनोरंजन पाने के लिए फिल्में देखते है तो आपको ये फिल्म इतनी अच्छी नहीं लगेगी, लेकिन अगर आप फिल्म के ओफबिट कन्टेन्ट से खुश होते है तो ये फिल्म आपको जरूर पसंद आयेगी. रनौत और राव के फैन्स के लिए तो ये फिल्म किसी तोहफे से कम नहीं है. इस उलझी हुई, अलग सी फिल्म को मेरी ओर से 5 में से 3 स्टार्स.
'जजमेन्टल है क्या' की सबसे बडी उपलब्धि है कलाकारों का अभिनय. कंगना रनौत और राजकुमार राव दोनों ने शानदार परफोर्मन्स दी है. कंगना की जितनी तारीफ करे उतनी कम है. मानसिक रोगी के किरदार में वो इस कदर घूस गई है की वो कब, क्या करेगी इसका अंदाजा भी दर्शक नहीं लगा सकते. उनकी बोडीलेंग्वेज, हावभाव, लूक सभी बहेतरिन है. अपने पात्र की बेबसी, डर, गुस्से, पागलपन, जूनून को कंगना ने अफलातून ढंग से दर्शाया है. वहीं राजकुमार राव भी बडा ही सटिक परफोर्मन्स देने में पूरी तरह से कामियाब हुए है. ये किरदार उनकी करियर के सबसे अच्छे किरदारों में से एक है. अपनी पीछली फिल्मों से वो काफी ज्यादा हेन्डसम भी लगे. अन्य कलाकारों में बॉबी के बॉयफ्रेंड बनें हुसैन दलाल का काम विशेषतः सराहनीय है. अमायरा दस्तूर, नुसरत भरुचा, सतीष कौशिक ने अपने पात्रों को अच्छा न्याय दिया है. जिम्मी शेरगिल ने ये फिल्म क्यों की इसका जबाव तो वही दे सकते है. उनका पात्र बहोत ही साधारण सा है. इस ब्लेक कोमेडी फिल्म की कहानी के तानेबाने काफी अच्छे से बूने गए है, जिसका श्रेय जाता है लेखिका कनिका धिल्लों को. मानसिक रोगी का व्यक्तित्व वास्तविक रूप में पर्दे पर दिखे एसे कई बढिया सीन उनकी लिखावट से सजे है. डायलोग्स भी कनिका ने ही लिखे है और वो भी इतने उमदा है की गंभीर सिच्युएशन में भी हंसी आ जाए. फिल्म का डायरेक्शन किया है तेलुगु फिल्ममेकर प्रकाश कोवलामुदी ने. उन्होंने वाकई में 'हटके' फिल्म बनाई है, लेकिन कहीं कहीं मनोरंजन की कमी खलती है. फिल्म में रंगो का इस्तेमाल अच्छे से किया गया है और उसे पंकज कुमार के केमेरे ने और निखार के पेश किया है. गाने कुछ खास नहीं है लेकिन बेकग्राउन्ड म्युजिक तगडा है और फिल्म के रहस्य को और गहेरा बनाने में इसकी अहम भूमिका है. यहां रामायण के पात्रों को प्रतीकात्मक रूप में अच्छे से इस्तेमाल किया गया है. गंभीर विषय होने के बावजूद 'जजमेन्टल है क्या' कहीं भी बोर नहीं करती. रहस्य आखरी सीन तक दर्शकों को उल्झाए रखने में कामियाब होता है. दूसरे हाफ को कांटछांट कर थोडा कम किया जा सकता था, लेकिन फिर भी फिल्म का एडिटिंग खासा दमदार है. हां, क्लाइमैक्स को थोडा ज्यादा बहेलाने की जरूरत थी. अंत को जल्दी जल्दी में निपटा दिया गया हो, एसा लगता है. अच्छी होने के बावजूद 'जजमेन्टल है क्या' में टिपिकल हिन्दी फिल्मोंवाले मनोरंजन की साफ कमी है. अगर आप मनोरंजन पाने के लिए फिल्में देखते है तो आपको ये फिल्म इतनी अच्छी नहीं लगेगी, लेकिन अगर आप फिल्म के ओफबिट कन्टेन्ट से खुश होते है तो ये फिल्म आपको जरूर पसंद आयेगी. रनौत और राव के फैन्स के लिए तो ये फिल्म किसी तोहफे से कम नहीं है. इस उलझी हुई, अलग सी फिल्म को मेरी ओर से पाँच में से तीन स्टार्स.
घर में तुलसी का पौधा लगाने से घर में माता लक्ष्मी का निवास होता है। घर के आंगन में तुलसी का पौधा सभी प्रकार के वास्तुदोष को दूर करता है। लेकिन कई बार तुलसी का पौधा नहीं मिलता है तो आप घर में पारिजात का पौधा भी लगा सकते हैं। पारिजात का पौधा भी तुलसी के तुल्य ही पूजनीय है। घर में पारिजात का फूल पूरे घर के वातावरण को सकारात्मक बनाता है। मान्यता है कि पारिजात के वृक्ष में स्वयं माता लक्ष्मी का वास होता है। घर में पारिजात को लगाने से तुलसी के बराबर ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का व्रत भी कर सकते हैं। शुक्रदेव को धन और विलासिता का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पारिजात का पौधा तुलसी के पौधे की तरह ही पवित्र होता है। इसमें साक्षात माता लक्ष्मी का निवास होता है। घर में आगन में पारिजात का पौधा लगाने से घर से सभी प्रकार के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं। ज्योतिष के मुताबिक, घर में पारिजात का पौधा लगाने से परिवार में कहल खत्म होता है और घर के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल रहता है। इससे घर में रहने वाले सदस्यों का मानसिक तनाव भी दूर होता है और घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। पारिजात के फूल का रंग उजला होता है। इसकी खुशबू से पूरा घर महक उठता है। कहा जाता है कि घर में पारिजात का फूल खिलने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। माँ लक्ष्मी को पारिजात का फूल बेहद प्रिय है। पारिजात का फूल माँ लक्ष्मी को पूजा के दौरान अर्पण करना चाहिए, इससे माता प्रसन्न होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। नोट- यह पौराणिक मान्यताओं पर आधारित जानकारी है। इसपर हिंदी खबर दावा नहीं करता है।
घर में तुलसी का पौधा लगाने से घर में माता लक्ष्मी का निवास होता है। घर के आंगन में तुलसी का पौधा सभी प्रकार के वास्तुदोष को दूर करता है। लेकिन कई बार तुलसी का पौधा नहीं मिलता है तो आप घर में पारिजात का पौधा भी लगा सकते हैं। पारिजात का पौधा भी तुलसी के तुल्य ही पूजनीय है। घर में पारिजात का फूल पूरे घर के वातावरण को सकारात्मक बनाता है। मान्यता है कि पारिजात के वृक्ष में स्वयं माता लक्ष्मी का वास होता है। घर में पारिजात को लगाने से तुलसी के बराबर ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का व्रत भी कर सकते हैं। शुक्रदेव को धन और विलासिता का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पारिजात का पौधा तुलसी के पौधे की तरह ही पवित्र होता है। इसमें साक्षात माता लक्ष्मी का निवास होता है। घर में आगन में पारिजात का पौधा लगाने से घर से सभी प्रकार के वास्तुदोष दूर हो जाते हैं। ज्योतिष के मुताबिक, घर में पारिजात का पौधा लगाने से परिवार में कहल खत्म होता है और घर के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल रहता है। इससे घर में रहने वाले सदस्यों का मानसिक तनाव भी दूर होता है और घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। पारिजात के फूल का रंग उजला होता है। इसकी खुशबू से पूरा घर महक उठता है। कहा जाता है कि घर में पारिजात का फूल खिलने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। माँ लक्ष्मी को पारिजात का फूल बेहद प्रिय है। पारिजात का फूल माँ लक्ष्मी को पूजा के दौरान अर्पण करना चाहिए, इससे माता प्रसन्न होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। नोट- यह पौराणिक मान्यताओं पर आधारित जानकारी है। इसपर हिंदी खबर दावा नहीं करता है।
नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। इंटरनेट स्विच, रॉउटर और डब्ल्यूएलएएन सेगमेंट समेत भारत के नेटवर्किं ग बाजार में पिछले साल के मुकाबले 2019 की पहली तिमाही में 14. 8 फीसदी का प्रसार हुआ है। यह बात सोमवार को आईडीसी की एक रिपोर्ट में कही गई। रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट स्विच बाजार में सिस्को का दबदबा लगातार कायम रहा और कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में पहली तिमाही में 53. 4 फीसदी रही। इसके बाद हैवलेट पैकार्ड इंटरप्राइजेज (एचपीई) और हुआवेई का स्थान रहा। राउटर बाजार में सिस्को की बाजार हिस्सेदारी 59. 5 फीसदी रही। इस बाजार में नोकिया और हुआवेई क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रही। वर्ष 2019 की पहली तिमाही में डब्ल्यूएलएएन सेगमेंट में एचपीई की बाजार हिस्सेदारी 20. 8 फीसदी रही जिसके बाद सिस्को और टीपी-लिंक की हिस्सेदारी रही।
नई दिल्ली, आठ जुलाई । इंटरनेट स्विच, रॉउटर और डब्ल्यूएलएएन सेगमेंट समेत भारत के नेटवर्किं ग बाजार में पिछले साल के मुकाबले दो हज़ार उन्नीस की पहली तिमाही में चौदह. आठ फीसदी का प्रसार हुआ है। यह बात सोमवार को आईडीसी की एक रिपोर्ट में कही गई। रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट स्विच बाजार में सिस्को का दबदबा लगातार कायम रहा और कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में पहली तिमाही में तिरेपन. चार फीसदी रही। इसके बाद हैवलेट पैकार्ड इंटरप्राइजेज और हुआवेई का स्थान रहा। राउटर बाजार में सिस्को की बाजार हिस्सेदारी उनसठ. पाँच फीसदी रही। इस बाजार में नोकिया और हुआवेई क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रही। वर्ष दो हज़ार उन्नीस की पहली तिमाही में डब्ल्यूएलएएन सेगमेंट में एचपीई की बाजार हिस्सेदारी बीस. आठ फीसदी रही जिसके बाद सिस्को और टीपी-लिंक की हिस्सेदारी रही।
WTC Final: 10 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी जीतने से 280 रन दूर टीम इंडिया, टेस्ट ड्रॉ हुआ तो किस टीम को मिलेगा खिताब? विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत को जीत के लिए 280 रन की जरूरत है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया जीत से सात विकेट दूर है। अगर भारतीय टीम यह मैच जीत लेती है तो 10 साल बाद टीम इंडिया को आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम करेगी। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। चार दिन का खेल होने के बाद भारतीय टीम जीत से 280 रन दूर है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए सात विकेट की जरूरत है। भारत के दो सबसे अच्छे बल्लेबाज विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे क्रीज पर जमे हुए हैं और इन दोनों से ही टीम इंडिया को मैच जिताऊ पारी की उम्मीद है। अगर भारतीय टीम यह मैच ड्रॉ भी करा लेती है तो दोनों टीमें संयुक्त विजेता बनेंगी और टीम इंडिया 10 साल बाद आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम करेगी। भारत ने आखिरी आईसीसी ट्रॉफी साल 2013 में इंग्लैंड में ही जीती थी। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया था। अब भारत के पास इंग्लैंड में ही फिर से आईसीसी ट्रॉफी जीतने का मौका है। मैच में अब तक क्या हुआ? फाइनल मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। टीम इंडिया ने अच्छी शुरुआत की और 76 रन पर ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट गिरा दिए। इसके बाद स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड ने 285 रन की साझेदारी कर मैच में ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। ट्रेविस हेड के 163 और स्टीव स्मिथ के 121 रन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 469 रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। 71 रन पर भारत के चार विकेट गिर गए। अजिंक्य रहाणे और रवींद्र जडेजा ने अर्धशतकीय साझेदारी कर भारत की वापसी कराई। इसके बाद रहाणे ने शार्दुल के साथ शतकीय साझेदारी कर भारत के ऊपर से फॉलोऑन का खतरा टाला। रहाणे के 89, शार्दुल के 51 और रवींद्र जडेजा के 48 रन के चलते भारत ने पहली पारी में 296 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 173 रन की बढ़त मिल गई। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में भी शुरुआत अच्छी नहीं थी। 24 रन के स्कोर पर दोनों सलामी बल्लेबाज आउट हो गए। हालांकि, मार्नस लाबुशेन ने 41 रन की पारी खेल टीम को संभाला। अंत में एलेक्स कैरी के नाबाद 66 रन और मिचेल स्टार्क के 41 रन के चलते ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 250 रन के पार पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने आठ विकेट पर 270 रन बनाने के बाद पारी घोषित की और भारत के सामने 444 रन का लक्ष्य रखा। इसके जवाब में भारत ने तीन विकेट खोकर 164 रन बना लिए हैं। विराट कोहली 44 और अजिंक्य रहाणे 20 रन बनाकर खेल रहे हैं। भारत को जीत के लिए 280 रन की जरूरत है। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई टीम जीत से सात विकेट दूर है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
WTC Final: दस साल बाद आईसीसी ट्रॉफी जीतने से दो सौ अस्सी रन दूर टीम इंडिया, टेस्ट ड्रॉ हुआ तो किस टीम को मिलेगा खिताब? विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत को जीत के लिए दो सौ अस्सी रन की जरूरत है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया जीत से सात विकेट दूर है। अगर भारतीय टीम यह मैच जीत लेती है तो दस साल बाद टीम इंडिया को आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम करेगी। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। चार दिन का खेल होने के बाद भारतीय टीम जीत से दो सौ अस्सी रन दूर है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए सात विकेट की जरूरत है। भारत के दो सबसे अच्छे बल्लेबाज विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे क्रीज पर जमे हुए हैं और इन दोनों से ही टीम इंडिया को मैच जिताऊ पारी की उम्मीद है। अगर भारतीय टीम यह मैच ड्रॉ भी करा लेती है तो दोनों टीमें संयुक्त विजेता बनेंगी और टीम इंडिया दस साल बाद आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम करेगी। भारत ने आखिरी आईसीसी ट्रॉफी साल दो हज़ार तेरह में इंग्लैंड में ही जीती थी। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया था। अब भारत के पास इंग्लैंड में ही फिर से आईसीसी ट्रॉफी जीतने का मौका है। मैच में अब तक क्या हुआ? फाइनल मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। टीम इंडिया ने अच्छी शुरुआत की और छिहत्तर रन पर ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट गिरा दिए। इसके बाद स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड ने दो सौ पचासी रन की साझेदारी कर मैच में ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। ट्रेविस हेड के एक सौ तिरेसठ और स्टीव स्मिथ के एक सौ इक्कीस रन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में चार सौ उनहत्तर रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। इकहत्तर रन पर भारत के चार विकेट गिर गए। अजिंक्य रहाणे और रवींद्र जडेजा ने अर्धशतकीय साझेदारी कर भारत की वापसी कराई। इसके बाद रहाणे ने शार्दुल के साथ शतकीय साझेदारी कर भारत के ऊपर से फॉलोऑन का खतरा टाला। रहाणे के नवासी, शार्दुल के इक्यावन और रवींद्र जडेजा के अड़तालीस रन के चलते भारत ने पहली पारी में दो सौ छियानवे रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को एक सौ तिहत्तर रन की बढ़त मिल गई। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में भी शुरुआत अच्छी नहीं थी। चौबीस रन के स्कोर पर दोनों सलामी बल्लेबाज आउट हो गए। हालांकि, मार्नस लाबुशेन ने इकतालीस रन की पारी खेल टीम को संभाला। अंत में एलेक्स कैरी के नाबाद छयासठ रन और मिचेल स्टार्क के इकतालीस रन के चलते ऑस्ट्रेलिया का स्कोर दो सौ पचास रन के पार पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने आठ विकेट पर दो सौ सत्तर रन बनाने के बाद पारी घोषित की और भारत के सामने चार सौ चौंतालीस रन का लक्ष्य रखा। इसके जवाब में भारत ने तीन विकेट खोकर एक सौ चौंसठ रन बना लिए हैं। विराट कोहली चौंतालीस और अजिंक्य रहाणे बीस रन बनाकर खेल रहे हैं। भारत को जीत के लिए दो सौ अस्सी रन की जरूरत है। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई टीम जीत से सात विकेट दूर है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
[ लब्धिसार गाया ३८१३८३ चटतः च नामगोत्रजघन्यस्थितीनां बंधश्च । त्रयोदशपदेषु क्रमशः, संख्येन च भवंति गुरिगतमाः ।।३८० ॥ टीका - तातै चढनेवाले के नामगोत्र का जघन्य स्थितिबध सख्यात गुरगा है, सो सोलह मुहूर्त मात्र है । ५६ । सो यहु जघन्य वध अपनी अपनी व्युच्छित्ति का प्रत समय विषै जानना । चलतदियश्रवरबंधं, पडरगामागोदप्रवरठिदिबंधो । पडतदियस्स य प्रवरं, तिणि पदा होंति अकमा ।।३८१॥ चटतृतीयावरबंधं, पतन्नामगोत्रावरस्थितिबंधः । पतत्तृतीयस्य च अवरं, त्रीणि पदानि भवंति अधिकार ।। ३८१ ॥ टीका - तातै चढनेवाले के वेदनीय का जघन्य स्थितिबंध विशेष अधिक है, सो चौईस मुहूर्तं मात्र है ।६०। तातै पडने वाले के नाम गोत्र का जघन्य स्थिति बंध विशेष अधिक है, सो बत्तीस मुहूर्त मात्र है । ६१ । तातै पडनेवाले के वेदनीय का जघन्य स्थितिबध विशेष अधिक है, सो तालीस मुहूर्त मात्र है । ६२ । चडमायमारणकोहो, मासादी दुगुण प्रवरठिदिबंधो । पडरणे तारणं दुगुणं, सोलसवस्सारिग चलरगपुरिसस्स ।।३८२ ।। चटमायामानक्रोधो, मासादिद्विगुरगावरस्थितिबंधः । पतने तेषां द्विगुणं, षोडशवर्षाणि चटनपुरुषस्य ।। ३८२॥ टोका - तातै चढनेवाले के सज्वलन माया का जघन्य स्थितिबंध संख्यात गुरणा है, सो एक मास मात्र है । ६३ । ताते तिस ही के मान का जघन्य स्थितिबध दूरगा है ।६४ । तातै तिस ही के क्रोध का जघन्य स्थितिबंध दूरगा है ।६५ । बहुरि उतरनेवाले के तिन ही मायादिकनि का जघन्य स्थितिबध चढनेवाले तै दूणा है, सो माया का दोय मास, मान का च्यारि मास, क्रोध का आठ मास मात्र जानना । बहुरि चढनेवाले कै पुरुषवेद का जघन्य स्थितिबंध सोलह वर्ष मात्र है । पडरगस्स तस्स दुगुरणं, संजलणाणं तु तत्थ दुट्ठाणे । बत्तीसं चउसट्ठी, वस्सपमाणेण ठिदिबंधो ॥ ३८३ ।। पतनस्य तस्य द्विगुणं, संज्वलनानां तु तत्र द्विस्थाने । द्वात्रिंशत् चतुः षष्टिः वर्षप्रमाणेन स्थितिबंधः ॥ ३८३ ।। टीका - पडनेवाले के पुरुषवेद का जघन्य स्थितिबध तातै दूणा बत्तीस वर्ष मात्र है । बहुरि तिस काल विषै सज्वलन चतुष्क का स्थितिबंध चढनेवाले के बत्तीस वर्ष, उतरनेवाले के चौसठि वर्ष मात्र हो है । चडपडणमोहपढमं, चरिमं तु तहा तिघादियादीणं । संखेज्जवस्सबंधो, संखेज्जगुणक्कमो छण्हं ॥ ३८४ ॥ चटपतनमोहप्रथमं चरमं तु तथा त्रिघातकादीनाम् ॥ संख्येयवर्षबधः संख्येयगुणक्रमः षण्णाम् ।।३८४॥ टीका - तातै चढनेवाले के अंतरकरण करने की समाप्ति होने के तर समय विषै संभवता सा मोहनीय का प्रथम स्थितिबध सख्यात गुरगा है, सो संख्यात हजार वर्ष मात्र है । तातै उतरनेवाले कै तिस समय को समान अवस्था विषै सभवता असा मोह का प्रतस्थितिबंध है, सो सख्यात गुरगा है । सो भी सख्यात हजार वर्ष मात्र है । जैसे पूर्वै चढनेवाले ते उतरनेवाले के दूसा स्थितिबध कहा था, तैसे अब न जानना । अब यथासंभव सख्यात गुणा जानना । तातै चढनेवाले कै तोन घातियानि का प्रथम स्थितिबंध संख्यात गुणा है । तातै उतरनेवाले के तिनका तहा अतस्थितिबध संख्यात गुणा है । ताते चढनेवाले कै सप्त नोकषायनि का उपशम काल विषे तीन कर्मनिका प्रथम स्थितिबध सख्यात गुरगा है । तातै उतरनेवाले के तहां अंत स्थितिबध सख्यात गुरगा है । चडपडरगमोहचरिमं, पढमं तु तहा तिघादियादीरणं । असंखेज्जवस्सबंधो, संखेज्जगुणक्कमो छहं ॥३८५।। चटपतन मोहचरमं, प्रथमं तु तथा त्रिघातकादीनाम् । प्रसंख्येयवर्षबंधः संख्येयगुरक्रमः षण्णाम् ॥ ३८५॥ टोका - तातै चढनेवाले कै मोहनीय का प्रख्यात वर्ष मात्र स्थितिबध है, सो असंख्यात गुणा है । यहु पल्य का प्रख्यातवा भाग मात्र है, अतरकरण करने का प्रारंभ समय विषै सभवै है । तातै उतरनेवाले के मोह का प्रख्यात वर्ष मात्र
[ लब्धिसार गाया तीन लाख इक्यासी हज़ार तीन सौ तिरासी चटतः च नामगोत्रजघन्यस्थितीनां बंधश्च । त्रयोदशपदेषु क्रमशः, संख्येन च भवंति गुरिगतमाः ।।तीन सौ अस्सी ॥ टीका - तातै चढनेवाले के नामगोत्र का जघन्य स्थितिबध सख्यात गुरगा है, सो सोलह मुहूर्त मात्र है । छप्पन । सो यहु जघन्य वध अपनी अपनी व्युच्छित्ति का प्रत समय विषै जानना । चलतदियश्रवरबंधं, पडरगामागोदप्रवरठिदिबंधो । पडतदियस्स य प्रवरं, तिणि पदा होंति अकमा ।।तीन सौ इक्यासी॥ चटतृतीयावरबंधं, पतन्नामगोत्रावरस्थितिबंधः । पतत्तृतीयस्य च अवरं, त्रीणि पदानि भवंति अधिकार ।। तीन सौ इक्यासी ॥ टीका - तातै चढनेवाले के वेदनीय का जघन्य स्थितिबंध विशेष अधिक है, सो चौईस मुहूर्तं मात्र है ।साठ। तातै पडने वाले के नाम गोत्र का जघन्य स्थिति बंध विशेष अधिक है, सो बत्तीस मुहूर्त मात्र है । इकसठ । तातै पडनेवाले के वेदनीय का जघन्य स्थितिबध विशेष अधिक है, सो तालीस मुहूर्त मात्र है । बासठ । चडमायमारणकोहो, मासादी दुगुण प्रवरठिदिबंधो । पडरणे तारणं दुगुणं, सोलसवस्सारिग चलरगपुरिसस्स ।।तीन सौ बयासी ।। चटमायामानक्रोधो, मासादिद्विगुरगावरस्थितिबंधः । पतने तेषां द्विगुणं, षोडशवर्षाणि चटनपुरुषस्य ।। तीन सौ बयासी॥ टोका - तातै चढनेवाले के सज्वलन माया का जघन्य स्थितिबंध संख्यात गुरणा है, सो एक मास मात्र है । तिरेसठ । ताते तिस ही के मान का जघन्य स्थितिबध दूरगा है ।चौंसठ । तातै तिस ही के क्रोध का जघन्य स्थितिबंध दूरगा है ।पैंसठ । बहुरि उतरनेवाले के तिन ही मायादिकनि का जघन्य स्थितिबध चढनेवाले तै दूणा है, सो माया का दोय मास, मान का च्यारि मास, क्रोध का आठ मास मात्र जानना । बहुरि चढनेवाले कै पुरुषवेद का जघन्य स्थितिबंध सोलह वर्ष मात्र है । पडरगस्स तस्स दुगुरणं, संजलणाणं तु तत्थ दुट्ठाणे । बत्तीसं चउसट्ठी, वस्सपमाणेण ठिदिबंधो ॥ तीन सौ तिरासी ।। पतनस्य तस्य द्विगुणं, संज्वलनानां तु तत्र द्विस्थाने । द्वात्रिंशत् चतुः षष्टिः वर्षप्रमाणेन स्थितिबंधः ॥ तीन सौ तिरासी ।। टीका - पडनेवाले के पुरुषवेद का जघन्य स्थितिबध तातै दूणा बत्तीस वर्ष मात्र है । बहुरि तिस काल विषै सज्वलन चतुष्क का स्थितिबंध चढनेवाले के बत्तीस वर्ष, उतरनेवाले के चौसठि वर्ष मात्र हो है । चडपडणमोहपढमं, चरिमं तु तहा तिघादियादीणं । संखेज्जवस्सबंधो, संखेज्जगुणक्कमो छण्हं ॥ तीन सौ चौरासी ॥ चटपतनमोहप्रथमं चरमं तु तथा त्रिघातकादीनाम् ॥ संख्येयवर्षबधः संख्येयगुणक्रमः षण्णाम् ।।तीन सौ चौरासी॥ टीका - तातै चढनेवाले के अंतरकरण करने की समाप्ति होने के तर समय विषै संभवता सा मोहनीय का प्रथम स्थितिबध सख्यात गुरगा है, सो संख्यात हजार वर्ष मात्र है । तातै उतरनेवाले कै तिस समय को समान अवस्था विषै सभवता असा मोह का प्रतस्थितिबंध है, सो सख्यात गुरगा है । सो भी सख्यात हजार वर्ष मात्र है । जैसे पूर्वै चढनेवाले ते उतरनेवाले के दूसा स्थितिबध कहा था, तैसे अब न जानना । अब यथासंभव सख्यात गुणा जानना । तातै चढनेवाले कै तोन घातियानि का प्रथम स्थितिबंध संख्यात गुणा है । तातै उतरनेवाले के तिनका तहा अतस्थितिबध संख्यात गुणा है । ताते चढनेवाले कै सप्त नोकषायनि का उपशम काल विषे तीन कर्मनिका प्रथम स्थितिबध सख्यात गुरगा है । तातै उतरनेवाले के तहां अंत स्थितिबध सख्यात गुरगा है । चडपडरगमोहचरिमं, पढमं तु तहा तिघादियादीरणं । असंखेज्जवस्सबंधो, संखेज्जगुणक्कमो छहं ॥तीन सौ पचासी।। चटपतन मोहचरमं, प्रथमं तु तथा त्रिघातकादीनाम् । प्रसंख्येयवर्षबंधः संख्येयगुरक्रमः षण्णाम् ॥ तीन सौ पचासी॥ टोका - तातै चढनेवाले कै मोहनीय का प्रख्यात वर्ष मात्र स्थितिबध है, सो असंख्यात गुणा है । यहु पल्य का प्रख्यातवा भाग मात्र है, अतरकरण करने का प्रारंभ समय विषै सभवै है । तातै उतरनेवाले के मोह का प्रख्यात वर्ष मात्र
अमेरिका के मिनियापोलिस में पुलिस हिरासत में मारे गए अश्वेत जाॅर्ज फ्लायड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। इससे यह पता चला है कि फ्लाॅयड कोविड-19 से भी संक्रमित रह चुका था। हेनपिन काउंटी के चिकित्सा परीक्षक ने फ्लाॅयड के परिवार की अनुममि के बाद 20 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें मौत की वजह का पता लगाने के लिए अधिकृत सरकारी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि फ्लाॅयड को दिल का दौरा पड़ा था। मुख्य चिकित्सा परीक्षक एंड्रयू बेकर की रिपोर्ट में कई चिकित्सीय जानकारियों के साथ यह भी बताया है कि फ्लाॅयड तीन अप्रैल को कोविड-19 से संक्रमित पाया गया था, लेकिन उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। बता दें कि जाॅर्ज फ्लाॅयड की मौत के खिलाफ अमेरिका में शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन लगातार जारी है। कई शहरों में लगे कफ्र्यू के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने इसका उल्लंघन किया।
अमेरिका के मिनियापोलिस में पुलिस हिरासत में मारे गए अश्वेत जाॅर्ज फ्लायड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई। इससे यह पता चला है कि फ्लाॅयड कोविड-उन्नीस से भी संक्रमित रह चुका था। हेनपिन काउंटी के चिकित्सा परीक्षक ने फ्लाॅयड के परिवार की अनुममि के बाद बीस पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें मौत की वजह का पता लगाने के लिए अधिकृत सरकारी अधिकारी ने सोमवार को बताया कि फ्लाॅयड को दिल का दौरा पड़ा था। मुख्य चिकित्सा परीक्षक एंड्रयू बेकर की रिपोर्ट में कई चिकित्सीय जानकारियों के साथ यह भी बताया है कि फ्लाॅयड तीन अप्रैल को कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाया गया था, लेकिन उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। बता दें कि जाॅर्ज फ्लाॅयड की मौत के खिलाफ अमेरिका में शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन लगातार जारी है। कई शहरों में लगे कफ्र्यू के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने इसका उल्लंघन किया।
शिबरघनः देश के उत्तरी जावज्जन प्रांत में एक अफगानी महिला ने लड़कियों के लिए एक स्कूल बनाने में मदद की है, जिसका अफगानों ने देश में शिक्षा के विकास की दिशा में एक पहल के रूप में स्वागत किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जावजान प्रांत के दूर-दराज जिले अक्चो में, हाजी बीबी नजीरा ने 65,000 डॉलर की लागत से 650 वर्ग मीटर भूमि पर एक 12- क्लासरूम का स्कूल बनाया है, जो बड़े पैमाने पर लड़कियों के लिए स्कूल की कमी को हल करेगा। पिछले साल अगस्त के मध्य में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से वह पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति से लड़कियों के लिये स्कूल का निर्माण किया है। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय छात्राएं, जो टेंट के नीचे कक्षाओं में जाती थीं, उन्हें अब छतों के साथ पढ़ने के लिए जगह मिल गई है। शिक्षा विभाग के प्रांतीय निदेशक मोहम्मद ताहिर जवाद ने हाल ही में सिन्हुआ को बताया कि शिक्षा प्राप्त करना सभी के साथ-साथ पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है। ताहिर जवाद ने कहा, इस्लामिक अमीरात लड़कियों के लिए शिक्षा को प्रोत्साहित करता है और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार के समर्थन से नया स्कूल बनाया गया है। प्रांतीय शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल का नाम हाजी बीबी नजीरा गर्ल स्कूल रखा है और अधिक सक्षम अफगानों को नियम का पालन करने का आह्वान किया है। क्षेत्र के एक बुजुर्ग नेमातुल्लाह ने सिन्हुआ को बताया, अफगानिस्तान की आबादी में आधी महिलाएं हैं और लड़कियां उनके लिए शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। निश्चित रूप से इसका हमारे समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यद्यपि युद्धग्रस्त देश की लगभग 3. 5 करोड़ आबादी में पढ़े-लिखे और गैर-पढ़े लिखे लोगों की संख्या पर कोई आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं, यह बताया गया है कि अधिकांश अफगान, विशेष रूप से महिलाएं, निरक्षर (पढ़ी-लिखी नहीं) हैं। स्थानीय व्यवसायी अब्दुल्ला सफी, नजीरा के परोपकार से प्रेरित होकर, अधिक छात्रों को समायोजित करने के लिए अक्चो में एक और स्कूल बनाने के लिए 2,50,000 अमेरिकी डॉलर का दान दिया है। सफी के एक करीबी रोहुल्लाह हबीबजई ने कहा, कक्षाओं में भाग लेने और नए स्कूल के निर्माण के लिए रोजाना दसियों किलोमीटर की यात्रा करने वाले बच्चे और छात्र हमारे क्षेत्र की समस्या का समाधान करेंगे। मार्च के अंत में शुरू होने वाले नए शैक्षिक वर्ष से पहले, हबीबजई ने कहा कि शिक्षा का समर्थन करने के लिए निवेश और दान से अधिक लोगों को अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
शिबरघनः देश के उत्तरी जावज्जन प्रांत में एक अफगानी महिला ने लड़कियों के लिए एक स्कूल बनाने में मदद की है, जिसका अफगानों ने देश में शिक्षा के विकास की दिशा में एक पहल के रूप में स्वागत किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जावजान प्रांत के दूर-दराज जिले अक्चो में, हाजी बीबी नजीरा ने पैंसठ,शून्य डॉलर की लागत से छः सौ पचास वर्ग मीटर भूमि पर एक बारह- क्लासरूम का स्कूल बनाया है, जो बड़े पैमाने पर लड़कियों के लिए स्कूल की कमी को हल करेगा। पिछले साल अगस्त के मध्य में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से वह पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति से लड़कियों के लिये स्कूल का निर्माण किया है। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय छात्राएं, जो टेंट के नीचे कक्षाओं में जाती थीं, उन्हें अब छतों के साथ पढ़ने के लिए जगह मिल गई है। शिक्षा विभाग के प्रांतीय निदेशक मोहम्मद ताहिर जवाद ने हाल ही में सिन्हुआ को बताया कि शिक्षा प्राप्त करना सभी के साथ-साथ पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है। ताहिर जवाद ने कहा, इस्लामिक अमीरात लड़कियों के लिए शिक्षा को प्रोत्साहित करता है और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार के समर्थन से नया स्कूल बनाया गया है। प्रांतीय शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल का नाम हाजी बीबी नजीरा गर्ल स्कूल रखा है और अधिक सक्षम अफगानों को नियम का पालन करने का आह्वान किया है। क्षेत्र के एक बुजुर्ग नेमातुल्लाह ने सिन्हुआ को बताया, अफगानिस्तान की आबादी में आधी महिलाएं हैं और लड़कियां उनके लिए शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। निश्चित रूप से इसका हमारे समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यद्यपि युद्धग्रस्त देश की लगभग तीन. पाँच करोड़ आबादी में पढ़े-लिखे और गैर-पढ़े लिखे लोगों की संख्या पर कोई आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं, यह बताया गया है कि अधिकांश अफगान, विशेष रूप से महिलाएं, निरक्षर हैं। स्थानीय व्यवसायी अब्दुल्ला सफी, नजीरा के परोपकार से प्रेरित होकर, अधिक छात्रों को समायोजित करने के लिए अक्चो में एक और स्कूल बनाने के लिए दो,पचास,शून्य अमेरिकी डॉलर का दान दिया है। सफी के एक करीबी रोहुल्लाह हबीबजई ने कहा, कक्षाओं में भाग लेने और नए स्कूल के निर्माण के लिए रोजाना दसियों किलोमीटर की यात्रा करने वाले बच्चे और छात्र हमारे क्षेत्र की समस्या का समाधान करेंगे। मार्च के अंत में शुरू होने वाले नए शैक्षिक वर्ष से पहले, हबीबजई ने कहा कि शिक्षा का समर्थन करने के लिए निवेश और दान से अधिक लोगों को अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
मृतका खैरथल निवासी निशा (22) पुत्री तेजपाल यादव की चार माह पहले ही बहरोड़ में शादी हुई थी। उसका अटेली के बेगपुर निवासी कृष्ण यादव पुत्र धर्मवीर यादव से प्रेम प्रसंग था। प्रेमिका की दूसरी जगह शादी हो जाने से युवक खिन्न था। शुक्रवार को सुबह निशा बीएड कॉलेज जाने की बात कहकर ससुराल से स्कूटी लेकर निकली थी। कृष्ण भी बहरोड़ आ गया था। पुलिस ने शव बरामद कर एफएसएल टीम से साक्ष्य एकत्र कराए हैं। शवों का पोस्टमार्टम भी मेडिकल बोर्ड से कराया गया। गेस्ट हाउस संचालक घटना के बाद मौके से फरार हो गया। थाना अधिकारी भरत महर ने बताया कि कमरे में महिला का शव बेड पर और युवक जमीन पर पड़ा मिला। दोनों शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे यहां पहुंचे और कमरा किराये पर लिया था। गोली चलने की आवाज सुन गेस्ट हाउस संचालकों ने पुलिस को सूचना दी। दोपहर करीब एक बजे कमरे का दरवाजा तोड़कर शव निकाले गए। पुलिस का मानना है कि युवक ने पहले युवती को गोली मारी फिर अपनी कनपटी में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वारदात में इस्तेमाल देशी कट्टा जमीन पर युवक के शव के पास पड़ा मिलने से यह आशंका जताई गई है। दोनों शवों के एक्स-रे करवाने के बाद मेडिकल टीम ने शवों की कनपटी से गोली बाहर निकाली। सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे और शव उन्हें सौंप दिए गए।
मृतका खैरथल निवासी निशा पुत्री तेजपाल यादव की चार माह पहले ही बहरोड़ में शादी हुई थी। उसका अटेली के बेगपुर निवासी कृष्ण यादव पुत्र धर्मवीर यादव से प्रेम प्रसंग था। प्रेमिका की दूसरी जगह शादी हो जाने से युवक खिन्न था। शुक्रवार को सुबह निशा बीएड कॉलेज जाने की बात कहकर ससुराल से स्कूटी लेकर निकली थी। कृष्ण भी बहरोड़ आ गया था। पुलिस ने शव बरामद कर एफएसएल टीम से साक्ष्य एकत्र कराए हैं। शवों का पोस्टमार्टम भी मेडिकल बोर्ड से कराया गया। गेस्ट हाउस संचालक घटना के बाद मौके से फरार हो गया। थाना अधिकारी भरत महर ने बताया कि कमरे में महिला का शव बेड पर और युवक जमीन पर पड़ा मिला। दोनों शुक्रवार सुबह करीब दस बजे यहां पहुंचे और कमरा किराये पर लिया था। गोली चलने की आवाज सुन गेस्ट हाउस संचालकों ने पुलिस को सूचना दी। दोपहर करीब एक बजे कमरे का दरवाजा तोड़कर शव निकाले गए। पुलिस का मानना है कि युवक ने पहले युवती को गोली मारी फिर अपनी कनपटी में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वारदात में इस्तेमाल देशी कट्टा जमीन पर युवक के शव के पास पड़ा मिलने से यह आशंका जताई गई है। दोनों शवों के एक्स-रे करवाने के बाद मेडिकल टीम ने शवों की कनपटी से गोली बाहर निकाली। सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे और शव उन्हें सौंप दिए गए।
रोहडू - प्रदेश राज्य सहकारी बैंक शाखा छपोटी में नाबार्ड के सौजन्य से कुई बारला गांव में डिजिटल वित्तीय साक्षरता का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता सहकारी बैंक शाखा प्रबंधक लायक राम खूंद ने किया। इस शिविर में लोगों को डिजिल बैंकिंग व कैशलैस बैकिंग के प्रति विस्तृत जानकारी देते हुए जागरूक किया गया। शिविर में प्रबंधक लायक राम खूंद, अशोक वर्मा व बलवान रूपटा ने बताया कि डिजिटल व कैशलैस बैंकिंग पूरी तरह से सरल व सुरक्षित है। लोग इस बैंकिंग प्रणाली को अपनाकर पारदर्शी व सुरक्षित लेनदेन किया जा सकता है। कैशलैस बैंकिंग आम लोगों के लिए हित में है। इस शिविर में किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, फसल बीमा योजना, रुपे, डेबिट कार्ड, हिम पैसा, मोबाइल ऐप, आरटीजीएस व एनएफटी सहित कई योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इस शिविर में 50 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
रोहडू - प्रदेश राज्य सहकारी बैंक शाखा छपोटी में नाबार्ड के सौजन्य से कुई बारला गांव में डिजिटल वित्तीय साक्षरता का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता सहकारी बैंक शाखा प्रबंधक लायक राम खूंद ने किया। इस शिविर में लोगों को डिजिल बैंकिंग व कैशलैस बैकिंग के प्रति विस्तृत जानकारी देते हुए जागरूक किया गया। शिविर में प्रबंधक लायक राम खूंद, अशोक वर्मा व बलवान रूपटा ने बताया कि डिजिटल व कैशलैस बैंकिंग पूरी तरह से सरल व सुरक्षित है। लोग इस बैंकिंग प्रणाली को अपनाकर पारदर्शी व सुरक्षित लेनदेन किया जा सकता है। कैशलैस बैंकिंग आम लोगों के लिए हित में है। इस शिविर में किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, फसल बीमा योजना, रुपे, डेबिट कार्ड, हिम पैसा, मोबाइल ऐप, आरटीजीएस व एनएफटी सहित कई योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इस शिविर में पचास से अधिक लोगों ने भाग लिया।
कानपुर (ब्यूरो) फरारी के दौरान सपा विधायक इरफान सोलंकी ने नई दिल्ली एयरपोर्ट से मुम्बई तक हवाई यात्रा की थी। पुलिस का दावा है कि विधायक ने यह यात्रा कूटरचित आधार कार्ड की मदद से की, जिसमें उन्होंने अपनी पहचान अशरफ अली बताई। इस प्रकरण में 26 नवंबर को मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें सपा नेत्री नूरी शौकत, उसके भाई अशरफ, मौसा इशरत, ड्राइवर अम्मार उर्फ अली, विधायक के साले अनवर मंसूरी और अख्तर मंसूरी के अलावा एक अन्य को आरोपी बनाया था। इस प्रकरण में पुलिस ने गुरुवार को नूरी शौकत के मौसा इशरत अली को गिरफ्तार कर लिया। जेसीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि फर्जी आधार कार्ड मामले का मास्टरमाइंड इशरत ही है। उसने ही विधायक को सुरक्षित नई दिल्ली से बाहर निकालने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाकर हवाई यात्रा का सुझाव दिया था। इशरत ने ही फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले अली को नूरी शौकत के घर बुलवाया। पुलिस ने इशरत के घर से विधायक द्वारा अशरफ नाम से प्रयोग किया गया फर्जी आधार कार्ड बरामद कर लिया है। इशरत से पूछताछ के बाद पुलिस ने नूरी शौकत के घर पर स्थित व्यूटी पार्लर पर छापा मारा। यहां पर पुलिस को आठ भागों में फटे हुए दो आधार कार्ड और मिले। दावा है कि फर्जी आधार कार्ड बनाते समय कोई कमी रहने की वजह से उन्हें फाड़ा गया होगा। पुलिस के मुताबिक नूरी शौकत का मौसा इशरत दिल्ली तक सपा विधायक के साथ था। उसके साथ ही विधायक लखनऊ गए और जब वह कार से दिल्ली भागे तक भी इशरत उनके साथ ही था। नोएडा में होटल दिलाने में इशरत ने ही मदद की और बाद में वह विधायक व नूरी शौतक के साथ दिल्ली एयरपोर्ट तक गया। इशरत के वकील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि फर्जी तथ्यों के आधार पर इशरत को आरोपी बनाया गया है। किसी तरह का कोई आधार कार्ड नहीं बनाया गया है। तर्क दिया कि 30 नवंबर को अशरफ और इशरत के सरेंडर की अर्जी कोर्ट में दी गई थी। पुलिस के पास भी दोनों सरेंडर करने गए थे। सरेंडर एप्लीकेशन पर पुलिस ने कोई रिपोर्ट नहीं भेजी और घर से उठाकर आरोपी बना दिया। इस पर अभियोजन अधिकारी डा। लवलेश कुमार और सिद्धार्थ ङ्क्षसह ने अदालत के सामने फर्जी आधार कार्ड की बरामदगी का तथ्य रखा। इस पर कोर्ट ने इशरत को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
कानपुर फरारी के दौरान सपा विधायक इरफान सोलंकी ने नई दिल्ली एयरपोर्ट से मुम्बई तक हवाई यात्रा की थी। पुलिस का दावा है कि विधायक ने यह यात्रा कूटरचित आधार कार्ड की मदद से की, जिसमें उन्होंने अपनी पहचान अशरफ अली बताई। इस प्रकरण में छब्बीस नवंबर को मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें सपा नेत्री नूरी शौकत, उसके भाई अशरफ, मौसा इशरत, ड्राइवर अम्मार उर्फ अली, विधायक के साले अनवर मंसूरी और अख्तर मंसूरी के अलावा एक अन्य को आरोपी बनाया था। इस प्रकरण में पुलिस ने गुरुवार को नूरी शौकत के मौसा इशरत अली को गिरफ्तार कर लिया। जेसीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि फर्जी आधार कार्ड मामले का मास्टरमाइंड इशरत ही है। उसने ही विधायक को सुरक्षित नई दिल्ली से बाहर निकालने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाकर हवाई यात्रा का सुझाव दिया था। इशरत ने ही फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले अली को नूरी शौकत के घर बुलवाया। पुलिस ने इशरत के घर से विधायक द्वारा अशरफ नाम से प्रयोग किया गया फर्जी आधार कार्ड बरामद कर लिया है। इशरत से पूछताछ के बाद पुलिस ने नूरी शौकत के घर पर स्थित व्यूटी पार्लर पर छापा मारा। यहां पर पुलिस को आठ भागों में फटे हुए दो आधार कार्ड और मिले। दावा है कि फर्जी आधार कार्ड बनाते समय कोई कमी रहने की वजह से उन्हें फाड़ा गया होगा। पुलिस के मुताबिक नूरी शौकत का मौसा इशरत दिल्ली तक सपा विधायक के साथ था। उसके साथ ही विधायक लखनऊ गए और जब वह कार से दिल्ली भागे तक भी इशरत उनके साथ ही था। नोएडा में होटल दिलाने में इशरत ने ही मदद की और बाद में वह विधायक व नूरी शौतक के साथ दिल्ली एयरपोर्ट तक गया। इशरत के वकील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि फर्जी तथ्यों के आधार पर इशरत को आरोपी बनाया गया है। किसी तरह का कोई आधार कार्ड नहीं बनाया गया है। तर्क दिया कि तीस नवंबर को अशरफ और इशरत के सरेंडर की अर्जी कोर्ट में दी गई थी। पुलिस के पास भी दोनों सरेंडर करने गए थे। सरेंडर एप्लीकेशन पर पुलिस ने कोई रिपोर्ट नहीं भेजी और घर से उठाकर आरोपी बना दिया। इस पर अभियोजन अधिकारी डा। लवलेश कुमार और सिद्धार्थ ङ्क्षसह ने अदालत के सामने फर्जी आधार कार्ड की बरामदगी का तथ्य रखा। इस पर कोर्ट ने इशरत को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सोमवार को सारे टोल प्लाजा पर कैशलेन को रात 12 बजे से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं. अगर आपने अभी तक अपनी गाड़ी के लिए FASTag नहीं लगवाया है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि आज रात से टोल प्लाजा पर कैश का भुगतान पूरी तरह से बंद होने जा रहा है. दरअसल सरकार ने 1 जनवरी, 2021 से सभी गाड़ियों के लिए फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया था. लेकिन बाद में वाहन चालकों को थोड़ी राहत देते हुए फास्टैग लगवाने की तारीख को 15 फरवरी कर दिया गया था. अब सरकार फास्टैग लगवाने की तारीख को आगे बढ़ाने की प्लानिंग में नहीं है और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सोमवार को सारे टोल प्लाजा पर कैशलेन को रात 12 बजे से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं. ऐसे में सभी वाहन चालकों को वाहन टोल केवल फास्टैग से अदा करना होगा और अगर कोई फास्टैग से टोल नहीं देता है तो उसे दोगुना भुगतान करना पड़ेगा. यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे सेक्रेटरी गिरिधर अरमाने ने सभी राज्य के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर फास्टैग को अनिवार्य करने के लिए कहा है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि 15 फरवरी से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर मात्र FASTag से कलेक्शन किया जाएगा. इसके लिए मंत्रालय और NHAI सभी तरीके की जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराएगा. NHAI के अनुसार वर्तमान में FASTag का शेयर लगभग 80 प्रतिशत है और यह लगातार बढ़ रहा है. क्या होता है FASTag? आपको बता दें कि फास्टैग एक स्टीकर होता है जो आपकी गाड़ी के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है. जब आप किसी टोल प्लाजा को क्रॉस करते हैं तो वहां पर लगे स्कैनर गाड़ी पर लगे स्टीकर को डिवाइस रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टेकनीक के जरिए स्कैन कर लेते हैं और जगह के हिसाब से पैसे काट लिए जाते हैं. इसके माध्यम से गाड़ी को टोल पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ती है. FASTag को आप PayTM, Amazon, गूगल पे, Snapdeal आदि से खरीद सकते हैं. इसके देश के 25 बैंक भी इसे मुहैया करवा रहे हैं. साथ ही आप इसे सड़क परिवहन प्राधिकरण के ऑफिस से भी खरीद सकते हैं. NHAI के अनुसार FASTag की कीमत 200 रुपये है और इसमें आप कम से कम 100 रुपये का रिचार्ज करा सकते हैं. अगर आपका फास्टैग किसी प्रीपेड अकाउंट या फिर डेबिट/क्रेडिट कार्ड से लिंक है तो टोल प्लाजा क्रॉस करने पर डायरेक्ट आपके अकाउंट से पैसे काट लिए जाएंगे. वहीं अगर आपका अकाउंट लिंक नहीं है तो आपको इसे रिचार्ज कराना पड़ेगा. NHAI ने बीते बुधवार को फास्टैग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है. इससे वाहन चालक फास्टैग वॉलेट में मिनिमम बैलेंस के बिना भी बिना किसी रोकटोक के टोल प्लाजा क्रॉस कर सकते हैं. इससे वाहन चालकों को काफी सुविधा मिलेगी और टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार नहीं लगेगी. हालांकि, अभी यह सुविधा वाहन कार, जीप, वैन को ही दी गई है. NHAI का कहना है कि अगर किसी यूजर का खाता निगेटिव नहीं है, भले ही उसमें मिनिमम बैलेंस न हो, फिर भी वह टोल प्लाजा से गुजर सकता है. यदि टोल से गुजरने के बाद उसके खाते में पैसा नहीं बचता, तो फिर बैंक सिक्योरिटी मनी से पैसे काट सकता है. ऐसे में यूजर को अगली बार रिचार्ज के समय सिक्योरिटी मनी को मेंटेन करना पड़ेगा. Fastag के बिना चलाई गाड़ी तो देना होगा दोगुना Toll Tax, जानें- कहां से खरीदें फास्टैग और कैसे कराएं रिचार्ज?
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सोमवार को सारे टोल प्लाजा पर कैशलेन को रात बारह बजे से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं. अगर आपने अभी तक अपनी गाड़ी के लिए FASTag नहीं लगवाया है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि आज रात से टोल प्लाजा पर कैश का भुगतान पूरी तरह से बंद होने जा रहा है. दरअसल सरकार ने एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से सभी गाड़ियों के लिए फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया था. लेकिन बाद में वाहन चालकों को थोड़ी राहत देते हुए फास्टैग लगवाने की तारीख को पंद्रह फरवरी कर दिया गया था. अब सरकार फास्टैग लगवाने की तारीख को आगे बढ़ाने की प्लानिंग में नहीं है और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सोमवार को सारे टोल प्लाजा पर कैशलेन को रात बारह बजे से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं. ऐसे में सभी वाहन चालकों को वाहन टोल केवल फास्टैग से अदा करना होगा और अगर कोई फास्टैग से टोल नहीं देता है तो उसे दोगुना भुगतान करना पड़ेगा. यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे सेक्रेटरी गिरिधर अरमाने ने सभी राज्य के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर फास्टैग को अनिवार्य करने के लिए कहा है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि पंद्रह फरवरी से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर मात्र FASTag से कलेक्शन किया जाएगा. इसके लिए मंत्रालय और NHAI सभी तरीके की जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराएगा. NHAI के अनुसार वर्तमान में FASTag का शेयर लगभग अस्सी प्रतिशत है और यह लगातार बढ़ रहा है. क्या होता है FASTag? आपको बता दें कि फास्टैग एक स्टीकर होता है जो आपकी गाड़ी के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है. जब आप किसी टोल प्लाजा को क्रॉस करते हैं तो वहां पर लगे स्कैनर गाड़ी पर लगे स्टीकर को डिवाइस रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेकनीक के जरिए स्कैन कर लेते हैं और जगह के हिसाब से पैसे काट लिए जाते हैं. इसके माध्यम से गाड़ी को टोल पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ती है. FASTag को आप PayTM, Amazon, गूगल पे, Snapdeal आदि से खरीद सकते हैं. इसके देश के पच्चीस बैंक भी इसे मुहैया करवा रहे हैं. साथ ही आप इसे सड़क परिवहन प्राधिकरण के ऑफिस से भी खरीद सकते हैं. NHAI के अनुसार FASTag की कीमत दो सौ रुपयापये है और इसमें आप कम से कम एक सौ रुपयापये का रिचार्ज करा सकते हैं. अगर आपका फास्टैग किसी प्रीपेड अकाउंट या फिर डेबिट/क्रेडिट कार्ड से लिंक है तो टोल प्लाजा क्रॉस करने पर डायरेक्ट आपके अकाउंट से पैसे काट लिए जाएंगे. वहीं अगर आपका अकाउंट लिंक नहीं है तो आपको इसे रिचार्ज कराना पड़ेगा. NHAI ने बीते बुधवार को फास्टैग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है. इससे वाहन चालक फास्टैग वॉलेट में मिनिमम बैलेंस के बिना भी बिना किसी रोकटोक के टोल प्लाजा क्रॉस कर सकते हैं. इससे वाहन चालकों को काफी सुविधा मिलेगी और टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार नहीं लगेगी. हालांकि, अभी यह सुविधा वाहन कार, जीप, वैन को ही दी गई है. NHAI का कहना है कि अगर किसी यूजर का खाता निगेटिव नहीं है, भले ही उसमें मिनिमम बैलेंस न हो, फिर भी वह टोल प्लाजा से गुजर सकता है. यदि टोल से गुजरने के बाद उसके खाते में पैसा नहीं बचता, तो फिर बैंक सिक्योरिटी मनी से पैसे काट सकता है. ऐसे में यूजर को अगली बार रिचार्ज के समय सिक्योरिटी मनी को मेंटेन करना पड़ेगा. Fastag के बिना चलाई गाड़ी तो देना होगा दोगुना Toll Tax, जानें- कहां से खरीदें फास्टैग और कैसे कराएं रिचार्ज?
Delhi Sakshi Murder Case शाहबाद डेरी इलाके में सिरफिरे आशिक साहिल खान द्वारा साक्षी नामक किशोरी की निर्मम हत्या करने का दिल दहला देने वाला वीडियो ने दिल्लीवासियों के असंवेदनशील चेहरे को बेनकाब कर दिया है। सिरफिरा किशोरी पर सरेआम चाकू घोंपता रहा और लोग तमाशबीन बने रहे। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi Sakshi Murder Case : बाहरी दिल्ली के शाहबाद डेरी इलाके में हुई साक्षी की हत्या के बाद विभिन्न दलों के लोग उसके माता-पिता को सांत्वना देने उसके घर पहुंच रहे हैं। शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष संदीप चौधरी, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अक्ष्यक्ष विनोद सहरावत समेत आसपास के भाजपा पार्षद व कार्यकर्ता साक्षी के माता-पिता से मिलकर उनका दुख साझा किया। शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा, "साहिल ने जघन्य अपराध किया है। यह लव जिहाद का मामला है। साहिल ने हाथ पर कलावा बांध रखा था, लेकिन साक्षी की हत्या करते समय कहा था कि वह पठान है, मुसलमान है। यह समाज के लिए खतरनाक है। इसे रोकना चाहिए। " चौधरी ने आगे कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, ताकि वह ऐसे लड़कों के झांसे में न आएं। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विनोद सहरावत ने कहा कि यह लव जिहाद का मामला है। पहले साहिल खान ने खुद को हिंदू बताकर लड़की को बहला-फुसलाकर अपने झांसे में लिया। जब लड़की और लड़के के परिवार को पता चला कि लड़का गैर हिंदू परिवार से है, तो लड़की ने उससे बातचीत बंद कर दी। उसका नतीजा यह हुआ कि साक्षी को चाकू से गोदकर और पत्थरों से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया। विश्व हिंदू परिषद ने शाहबाद डेरी में साक्षी नामक किशोरी की हत्या को लव जिहाद बताया है। विहिप के सुखदेव नगर प्रखंड के सह-मंत्री कपिल कपूर ने बताया कि यह सीधा-सीधा लव जिहाद का मामला है। विहिप के वरिष्ठ साथियों के साथ मंगलवार को साक्षी के माता-पिता से मिलूंगा। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उत्तरी दिल्ली में लड़की की हत्या पर दुख जताते हुए इसे लव जिहाद बताया है। उन्होंने कहा कि इस वारदात से स्पष्ट है कि दूसरे राज्यों के बाद अब दिल्ली में भी लव जिहाद के तहत हिंदू लड़कियों की हत्या होने लगी है। यह गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि आस पड़ोस के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार हत्या आरोपित पिछले काफी समय से लड़की को परेशान कर रहा था। लड़की के विरोध जताने पर उसने उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी। आरोपित मुस्लिम है, लेकिन उसके हाथ में कलावा बंधा हुआ था, जिससे पता चलता है कि लव जिहाद गैंग का सदस्य है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस हत्या को कानून व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वह मुस्लिम वोट बैंक के नाराज होने के कारण सच्चाई बोलने बच रहे हैं। सचदेवा ने कहा कि कुछ दिनों पहले जीबी पंत अस्पताल में भी एक हिंदू महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। उस मामले में भी आम आदमी पार्टी की सरकार व मुख्यमंत्री चुप थी। उन्होंने आरोपित की गिरफ्तारी पर संतोष व्यक्त करते हुए इस मामले को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की। कपिल मिश्रा ने उठाया सवाल? भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया इस साहिल के हाथ में कलावा कैसे? ये लव जिहाद है। ये बेटियों के खिलाफ सुनियोजित हमला है। साहिल के मास्टर माइंड कौन है? इस साहिल के हाथ में कलावा कैसे ?
Delhi Sakshi Murder Case शाहबाद डेरी इलाके में सिरफिरे आशिक साहिल खान द्वारा साक्षी नामक किशोरी की निर्मम हत्या करने का दिल दहला देने वाला वीडियो ने दिल्लीवासियों के असंवेदनशील चेहरे को बेनकाब कर दिया है। सिरफिरा किशोरी पर सरेआम चाकू घोंपता रहा और लोग तमाशबीन बने रहे। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi Sakshi Murder Case : बाहरी दिल्ली के शाहबाद डेरी इलाके में हुई साक्षी की हत्या के बाद विभिन्न दलों के लोग उसके माता-पिता को सांत्वना देने उसके घर पहुंच रहे हैं। शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष संदीप चौधरी, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अक्ष्यक्ष विनोद सहरावत समेत आसपास के भाजपा पार्षद व कार्यकर्ता साक्षी के माता-पिता से मिलकर उनका दुख साझा किया। शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा, "साहिल ने जघन्य अपराध किया है। यह लव जिहाद का मामला है। साहिल ने हाथ पर कलावा बांध रखा था, लेकिन साक्षी की हत्या करते समय कहा था कि वह पठान है, मुसलमान है। यह समाज के लिए खतरनाक है। इसे रोकना चाहिए। " चौधरी ने आगे कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, ताकि वह ऐसे लड़कों के झांसे में न आएं। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विनोद सहरावत ने कहा कि यह लव जिहाद का मामला है। पहले साहिल खान ने खुद को हिंदू बताकर लड़की को बहला-फुसलाकर अपने झांसे में लिया। जब लड़की और लड़के के परिवार को पता चला कि लड़का गैर हिंदू परिवार से है, तो लड़की ने उससे बातचीत बंद कर दी। उसका नतीजा यह हुआ कि साक्षी को चाकू से गोदकर और पत्थरों से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया। विश्व हिंदू परिषद ने शाहबाद डेरी में साक्षी नामक किशोरी की हत्या को लव जिहाद बताया है। विहिप के सुखदेव नगर प्रखंड के सह-मंत्री कपिल कपूर ने बताया कि यह सीधा-सीधा लव जिहाद का मामला है। विहिप के वरिष्ठ साथियों के साथ मंगलवार को साक्षी के माता-पिता से मिलूंगा। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उत्तरी दिल्ली में लड़की की हत्या पर दुख जताते हुए इसे लव जिहाद बताया है। उन्होंने कहा कि इस वारदात से स्पष्ट है कि दूसरे राज्यों के बाद अब दिल्ली में भी लव जिहाद के तहत हिंदू लड़कियों की हत्या होने लगी है। यह गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि आस पड़ोस के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार हत्या आरोपित पिछले काफी समय से लड़की को परेशान कर रहा था। लड़की के विरोध जताने पर उसने उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी। आरोपित मुस्लिम है, लेकिन उसके हाथ में कलावा बंधा हुआ था, जिससे पता चलता है कि लव जिहाद गैंग का सदस्य है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस हत्या को कानून व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वह मुस्लिम वोट बैंक के नाराज होने के कारण सच्चाई बोलने बच रहे हैं। सचदेवा ने कहा कि कुछ दिनों पहले जीबी पंत अस्पताल में भी एक हिंदू महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। उस मामले में भी आम आदमी पार्टी की सरकार व मुख्यमंत्री चुप थी। उन्होंने आरोपित की गिरफ्तारी पर संतोष व्यक्त करते हुए इस मामले को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की। कपिल मिश्रा ने उठाया सवाल? भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया इस साहिल के हाथ में कलावा कैसे? ये लव जिहाद है। ये बेटियों के खिलाफ सुनियोजित हमला है। साहिल के मास्टर माइंड कौन है? इस साहिल के हाथ में कलावा कैसे ?
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला मुख्यालय ढालपुर में मतदान के महत्व, मतदान प्रतिशतता में वृद्धि तथा महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से स्वीप कार्यक्रम चल रहा है। इसके तहत कुल्लू के ऐतिहासिक रथ मैदान में आज वोटर कार्ड के साथ महिलाओं की महानाटी का आयोजन किया गया। इस दौरान अमर उजाला की ओर से अपराजिता कार्यक्रम भी हुआ जिसमें मुख्यातिथि उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने महिलाओं को महिला सशक्तीकरण के साथ मतदान करने का संदेश दिया। इस महानाटी में जिला भर से 5250 महिलाओं ने भाग लिया। यूनुस ने बताया कि महिलाओं ने कुल्लू के पारंपरिक परिधानों में मेगा नाटी में भाग लिया। इनमें सभी आयु वर्ग की महिलाओं को खुला निमंत्रण दिया गया था। उन्होंने कहा कि मतदाता महिलाएं वोटर कार्ड साथ लेकर आई थीं और नाटी के समय एकसाथ सभी ने अपने वोटर कार्ड प्रदर्शित किए और नाटी डाली। नाटी के लिए गीत-संगीत भी बहुत ही शानदार था। रथ मैदान में सुनियोजित तरीके से नाटी के लिए महिलाओं की एक चेन का सृजन किया गया।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला मुख्यालय ढालपुर में मतदान के महत्व, मतदान प्रतिशतता में वृद्धि तथा महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से स्वीप कार्यक्रम चल रहा है। इसके तहत कुल्लू के ऐतिहासिक रथ मैदान में आज वोटर कार्ड के साथ महिलाओं की महानाटी का आयोजन किया गया। इस दौरान अमर उजाला की ओर से अपराजिता कार्यक्रम भी हुआ जिसमें मुख्यातिथि उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने महिलाओं को महिला सशक्तीकरण के साथ मतदान करने का संदेश दिया। इस महानाटी में जिला भर से पाँच हज़ार दो सौ पचास महिलाओं ने भाग लिया। यूनुस ने बताया कि महिलाओं ने कुल्लू के पारंपरिक परिधानों में मेगा नाटी में भाग लिया। इनमें सभी आयु वर्ग की महिलाओं को खुला निमंत्रण दिया गया था। उन्होंने कहा कि मतदाता महिलाएं वोटर कार्ड साथ लेकर आई थीं और नाटी के समय एकसाथ सभी ने अपने वोटर कार्ड प्रदर्शित किए और नाटी डाली। नाटी के लिए गीत-संगीत भी बहुत ही शानदार था। रथ मैदान में सुनियोजित तरीके से नाटी के लिए महिलाओं की एक चेन का सृजन किया गया।
सोमवार को दोपहर दो बजे ही बुक हो गए सभी टिकट। ताजमहल की कैपिंग बढ़ने की उम्मीद नहीं। एक दिन में स्मारक देख सकते हैं केवल पांच हजार वयस्क पर्यटक। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े व जनवरी के पहले पखवाड़े में आते हैं अधिक पर्यटक। कोरोना काल में 188 दिनों की बंदी के बाद ताजमहल 21 सितंबर को खोला गया था। गृह मंत्रालय की स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार एक दिन में अधिकतम पांच हजार वयस्क पर्यटकों को ही ताजमहल में प्रवेश दिया जा रहा है। इनमें सुबह के स्लाट में 1500 और दोपहर के स्लाट में 3500 पर्यटकों को प्रवेश देने का ट्रायल चल रहा है। सोमवार को दोपहर दो बजे तक दोपहर के स्लाट के सभी 3500 टिकट बुक हो गए। इसके बाद जो पर्यटक एडवांस टिकट बुक कराए बगैर ताजमहल पहुंचे, उन्हें स्मारक के गेट से वापस लाैटना पड़ा। एडवांस टिकट बुक नहीं कराने वाले पर्यटकों को दिसंबर व जनवरी में इस स्थिति से जूझना पड़ सकता है। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े और जनवरी के पहले पखवाड़े में ताजमहल देखने पिछले वर्षों में अधिक संख्या में पर्यटक आगरा आते रहे हैं। 25 दिसंबर से लेकर पांच जनवरी तक तो पर्यटकों की भीड़ होती है। इस बार पांच हजार पर्यटकों को ही प्रवेश की अनुमति से रोजाना सैकड़ों पर्यटकों का ताजमहल देखने का ख्वाब टिकट नहीं उपलब्ध होने की स्थिति में टूटेगा। रविवार को तो सुबह के स्लाट के टिकट सुबह 7:30 बजे और दोपहर के स्लाट के टिकट 11:30 बजे ही बुक हो गए थे। अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि परेशानी से बचने को पर्यटक एडवांस टिकट बुक कराकर ही ताजमहल देखने आएं। सात दिन तक के टिकट एडवांस बुक कराए जा सकते हैं। पर्यटन उद्यमी ताजमहल पर पर्यटकों को हो रही परेशानी को देखते हुए कैपिंग को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार व रविवार को 15 हजार और सप्ताह के अन्य दिनों में वो कैपिंग को 10 हजार करने की मांग कर रहे हैं, जिससे ताजमहल तक पहुंचने के बाद पर्यटकों को वापस नहीं लौटना पड़े।
सोमवार को दोपहर दो बजे ही बुक हो गए सभी टिकट। ताजमहल की कैपिंग बढ़ने की उम्मीद नहीं। एक दिन में स्मारक देख सकते हैं केवल पांच हजार वयस्क पर्यटक। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े व जनवरी के पहले पखवाड़े में आते हैं अधिक पर्यटक। कोरोना काल में एक सौ अठासी दिनों की बंदी के बाद ताजमहल इक्कीस सितंबर को खोला गया था। गृह मंत्रालय की स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार एक दिन में अधिकतम पांच हजार वयस्क पर्यटकों को ही ताजमहल में प्रवेश दिया जा रहा है। इनमें सुबह के स्लाट में एक हज़ार पाँच सौ और दोपहर के स्लाट में तीन हज़ार पाँच सौ पर्यटकों को प्रवेश देने का ट्रायल चल रहा है। सोमवार को दोपहर दो बजे तक दोपहर के स्लाट के सभी तीन हज़ार पाँच सौ टिकट बुक हो गए। इसके बाद जो पर्यटक एडवांस टिकट बुक कराए बगैर ताजमहल पहुंचे, उन्हें स्मारक के गेट से वापस लाैटना पड़ा। एडवांस टिकट बुक नहीं कराने वाले पर्यटकों को दिसंबर व जनवरी में इस स्थिति से जूझना पड़ सकता है। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े और जनवरी के पहले पखवाड़े में ताजमहल देखने पिछले वर्षों में अधिक संख्या में पर्यटक आगरा आते रहे हैं। पच्चीस दिसंबर से लेकर पांच जनवरी तक तो पर्यटकों की भीड़ होती है। इस बार पांच हजार पर्यटकों को ही प्रवेश की अनुमति से रोजाना सैकड़ों पर्यटकों का ताजमहल देखने का ख्वाब टिकट नहीं उपलब्ध होने की स्थिति में टूटेगा। रविवार को तो सुबह के स्लाट के टिकट सुबह सात:तीस बजे और दोपहर के स्लाट के टिकट ग्यारह:तीस बजे ही बुक हो गए थे। अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि परेशानी से बचने को पर्यटक एडवांस टिकट बुक कराकर ही ताजमहल देखने आएं। सात दिन तक के टिकट एडवांस बुक कराए जा सकते हैं। पर्यटन उद्यमी ताजमहल पर पर्यटकों को हो रही परेशानी को देखते हुए कैपिंग को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार व रविवार को पंद्रह हजार और सप्ताह के अन्य दिनों में वो कैपिंग को दस हजार करने की मांग कर रहे हैं, जिससे ताजमहल तक पहुंचने के बाद पर्यटकों को वापस नहीं लौटना पड़े।
वैदिक संहिताओं में कृषि / 81 4. वर्षा का पानी कृत्रिम झीलों में एकत्र कराके उससे नहरें निकलवाना । यूरोपियन विद्वान् भी 'खनित्रिमाः आपः' शब्द से नहरों की स्थिति को असंदिग्ध रूप से स्वीकार करते हैं। कूप तथा अवट ( खोद कर बनाये गड्ढे) शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में अनेक स्थानों पर मिलता है। मानव नहरों के समान कूप खोदकर खेत बगीचा आदि की सिंचाई कर उससे उत्पन्न अन्नादि से प्राणियों को तृप्त करके सुखी करते हैं। कुछ कूप ऐसे होते हैं जिनका जल कभी समाप्त नही होता था 'उत्तम जल पीने के स्थान से युक्त, उत्तम रस्सियों से युक्त, सुखपूर्वक सेचन करने वाले, जल वाले, अक्षय कूप को प्राप्त कर सिंचाई की प्रार्थना' की गई है। रस्सी युक्त कोश (बाल्टी) से कुओं का पानी निकाल कर सिंचाई की जाती थी। उ वैदिक काल में अक्षय जल वाले कुओं का अनेकशः उल्लेख किया गया है - 'जल से भरे अच्छी प्रकार सींचने योग्य, कभी भी जिसका जल क्षीण न हो ऐसे कूप से खेत की सिंचाई करें। " ऋग्वेद में ऐसे कूपों का वर्णन भी है जो अस्थायी होते थे अर्थात् खोदे हुए गड्ढे।' नहर और कूप के समान तालाबों को सिंचाई का मुख्य साधन माना जाता था। छोटी-छोटी नहरों से बड़े तालाबों में पानी एकत्रित करके उससे कृषि की सिंचाई की जाती थी। नहर को गाय रूपी नदी का वत्स माना गया है । 'वेगवती जलधाराएँ समुद्र को जाती हैं, नाले तालाब को प्राप्त करते हैं, आकाश से होने वाली वृष्टि रूपी दान से किसान यव आदि बढ़ाते हैं। " शतपथ ब्राह्मण (11.5.1.4) में प्लक्षा झील का उल्लेख आया है। इस बात पर विशेष बल दिया जाता था कि कृषि की सिंचाई के समस्त माध्यमों से प्राप्त होने वाला जल प्रदूषित न हो। वैदिक ऋषि जल-शोधन के उपायों से अच्छी प्रकार परिचित थे। यजुर्वेद में प्रार्थना की गई है- हे जलो! अशुद्ध वस्तुओं ने यदि तुम्हें अपवित्र कर दिया है, तो मैं तुम्हें शुद्ध कर लेता हूँ।' ऋग्वेद में कहा गया है कि यदि नदियों का जल विषैला हो गया है, तो सब विद्वान् जन मिल कर उसे दूर कर लें। इस प्रकार समस्त नदियाँ प्रदूषण रहित हो जाएँ।' 1. जिह्यं नुनुद्रेऽवतं तया दिशासिञ्चन्नुत्सं गोतमाय तृष्णजे । ऋ. 1.85.11 2. इष्टकृताहावमवतं सुवरत्रं सुषेचनम्। उद्रिणं सिञ्चे अक्षितम् ॥ ऋ. 10.101.6 3. द्रोणाहावमवतमश्मचक्रमं सत्र कोशं सिञ्चता नृपाणम् । ॠ. 10.101.7 4. निराहावान्कृणोतन सं वरत्रा दधातन । सिञ्चामहा अवतमुद्रिणं वयं सुषेकमनुपक्षितम् । ऋ. 10.101.5 5. त्रितः कूपेऽवहितो देवान्हवत ऊतये ॥ ऋ. 1.105.17 6. आपो न सिन्धुमभि यत्समक्षरन्सोमास इन्द्रं कुल्या इव हृदम् । वर्धन्ति विप्रा महो अस्य सादने यवं न वृष्टिर्दिव्येनदानुना ।। ऋ. 10.43.7 7. यद्वोऽशुद्धाः पराजघ्नुरिदं वस्तच्छुन्धामि । यजु. 13.13 8. यच्छल्मलौ भवति यन्नदीषु यदोषधीभ्यः परिजायते विषम् । विश्वे देवा निरितस्तत्सुवन्तु मा मां पद्येन रपसा विदत्सरुः ॥ ऋ. 7.50.3 9. शिवा देवीरशिपदा भवन्तु, सर्वा नद्यो अशिमिदा भवन्तु ।। ऋ. 7.50.4 82/ वैदिक अर्थ-व्यवस्था ■कृषिविनाशक जीव-जन्तुअन्न पकने से पूर्व उसके संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता होती है। लहलहाती फसल को हानि पहुँचाने वाले पक्षी एवं कीट आदि से कृषि की रक्षा का उल्लेख वेद में मिलता है। बहुत से अन्न खाने वाले कीड़े तो सूर्य की किरणों द्वारा ही नष्ट हो जाते हैं। जहाँ अन्नोत्पादक क्षेत्र में सूर्य किरणों का व्यवधान रहित आवागमन होता है, वह स्थान कृषि के लिए कल्याणप्रद माना गया है। फसल को चूहों से भी हानि पहुँचती है। अतः उनको नष्ट करने का निर्देश दिया गया है- 'हे अश्वि देवो! नाश करने वाले और भूमि में बिल बनाकर रहने वाले चूहे को मारो और उसका सिर काटो, उसकी पीठ तोड़ो, वे चूहे जौ आदि अन्न को कभी न खावें, उनका मुख बन्द करो और धान्य के लिए निर्भयता करो । कृषि को हानि पहुँचाने वाले कीटों को पतंग, जभ्य और उपक्वस नाम दिया गया है।" हे हिंसकशलभ, हे वध्य और दुष्टजभ्य तथा उपक्वस । ब्रह्मा जिस प्रकार असंस्कृत हवि को छोड़ देता है उसी प्रकार इन जौ आदि अन्नों को न खाते हुए और न नष्ट करते हुए तुम दूर हट जाओ अर्थात् इसको छोड़ दो। पक्षी भी फसल को हानि पहुँचाते हैं। अतः उनसे सावधान रहने के लिए फसल के क्षेत्र से उनको उड़ाते रहना चाहिए। पक्षियों को खेत से उड़ाने का वर्णन मिलता है- 'जैसे जल से सींचने वाला किसान अपने अन्न वाले खेत से पक्षियों को उड़ाने के लिए शब्द करता है। 4 ■ वेदों में अन्नवाची शब्द - यव शब्द यद्यपि जौ के लिए आता है, परन्तु वेद में अन्न के लिए भी प्रयुक्त हुआ है। वेद में अन्नार्थक अनेक शब्दों का प्रयोग हुआ है। जैसे- अन्न, अन्ध, वाज, इरा, श्रवः, पयः, पितुः, सुतः, पृक्षः, सिनम् अवः, क्षुघासि, इषम्, इडा, ऊर्क्, रसः, स्वधा, अर्कः, क्षद्म, नेमः, ससम्, नमः, आयुः सूनृता, वर्चः, ब्रह्म, कीलालम्, आज्यम्, हविः, द्युम्नम्, भक्षः, उख्यः, धान्य, पाथः आदि । ■ वेद वर्णित विविध अन्नवेद में जहाँ अन्नवाचक अनेक शब्दों का प्रयोग किया गया है, वहाँ अन्न के विविध रूप भी दृष्टिगोचर होते हैं। विविध प्रकार के अन्नों को बोने, काटने एवं उनके उपयोग का वैदिक समाज के लोगों को श्रेष्ठ ज्ञान था। वैदिक युग का मुख्य अन्न जौ (यव) है, द्वितीय स्थान चावल (व्रीहि) को प्राप्त है। इन दोनों के प्रयोग बाहुल्य को देखकर इन्हें अन्नों के साधारण नामों में भी माना गया है। ये यव, व्रीहि अन्न के सामान्य नाम माने जाते हैं। 1. हतं तर्द समङक-माखुमश्विना छिन्त शिरो अपि पृष्टीः श्रृणीतम् । यवान्नेददानपि नह्यतं मुखमथाभयं कृणुतं धान्याय । अथर्व. 6.50.1 2. तर्द है पंतग है जभ्य हा उपक्वस । अथर्व. 6.50.2 3. ब्रह्मेवासंस्थितं हविरनदन्त इमान् यवानहिंसन्तो अपोदितः । अथर्व. 6.50.2 4. उदप्रुतो न वयो रक्षमाणा वावदतो अभ्रियस्येव घोषाः । ऋ. 10.68.1 5. यस्यामन्न व्रीहियवौ यस्या इमा पंचवृष्टयः । अथर्व. 12.1.
वैदिक संहिताओं में कृषि / इक्यासी चार. वर्षा का पानी कृत्रिम झीलों में एकत्र कराके उससे नहरें निकलवाना । यूरोपियन विद्वान् भी 'खनित्रिमाः आपः' शब्द से नहरों की स्थिति को असंदिग्ध रूप से स्वीकार करते हैं। कूप तथा अवट शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में अनेक स्थानों पर मिलता है। मानव नहरों के समान कूप खोदकर खेत बगीचा आदि की सिंचाई कर उससे उत्पन्न अन्नादि से प्राणियों को तृप्त करके सुखी करते हैं। कुछ कूप ऐसे होते हैं जिनका जल कभी समाप्त नही होता था 'उत्तम जल पीने के स्थान से युक्त, उत्तम रस्सियों से युक्त, सुखपूर्वक सेचन करने वाले, जल वाले, अक्षय कूप को प्राप्त कर सिंचाई की प्रार्थना' की गई है। रस्सी युक्त कोश से कुओं का पानी निकाल कर सिंचाई की जाती थी। उ वैदिक काल में अक्षय जल वाले कुओं का अनेकशः उल्लेख किया गया है - 'जल से भरे अच्छी प्रकार सींचने योग्य, कभी भी जिसका जल क्षीण न हो ऐसे कूप से खेत की सिंचाई करें। " ऋग्वेद में ऐसे कूपों का वर्णन भी है जो अस्थायी होते थे अर्थात् खोदे हुए गड्ढे।' नहर और कूप के समान तालाबों को सिंचाई का मुख्य साधन माना जाता था। छोटी-छोटी नहरों से बड़े तालाबों में पानी एकत्रित करके उससे कृषि की सिंचाई की जाती थी। नहर को गाय रूपी नदी का वत्स माना गया है । 'वेगवती जलधाराएँ समुद्र को जाती हैं, नाले तालाब को प्राप्त करते हैं, आकाश से होने वाली वृष्टि रूपी दान से किसान यव आदि बढ़ाते हैं। " शतपथ ब्राह्मण में प्लक्षा झील का उल्लेख आया है। इस बात पर विशेष बल दिया जाता था कि कृषि की सिंचाई के समस्त माध्यमों से प्राप्त होने वाला जल प्रदूषित न हो। वैदिक ऋषि जल-शोधन के उपायों से अच्छी प्रकार परिचित थे। यजुर्वेद में प्रार्थना की गई है- हे जलो! अशुद्ध वस्तुओं ने यदि तुम्हें अपवित्र कर दिया है, तो मैं तुम्हें शुद्ध कर लेता हूँ।' ऋग्वेद में कहा गया है कि यदि नदियों का जल विषैला हो गया है, तो सब विद्वान् जन मिल कर उसे दूर कर लें। इस प्रकार समस्त नदियाँ प्रदूषण रहित हो जाएँ।' एक. जिह्यं नुनुद्रेऽवतं तया दिशासिञ्चन्नुत्सं गोतमाय तृष्णजे । ऋ. एक.पचासी.ग्यारह दो. इष्टकृताहावमवतं सुवरत्रं सुषेचनम्। उद्रिणं सिञ्चे अक्षितम् ॥ ऋ. दस.एक सौ एक.छः तीन. द्रोणाहावमवतमश्मचक्रमं सत्र कोशं सिञ्चता नृपाणम् । ॠ. दस.एक सौ एक.सात चार. निराहावान्कृणोतन सं वरत्रा दधातन । सिञ्चामहा अवतमुद्रिणं वयं सुषेकमनुपक्षितम् । ऋ. दस.एक सौ एक.पाँच पाँच. त्रितः कूपेऽवहितो देवान्हवत ऊतये ॥ ऋ. एक.एक सौ पाँच.सत्रह छः. आपो न सिन्धुमभि यत्समक्षरन्सोमास इन्द्रं कुल्या इव हृदम् । वर्धन्ति विप्रा महो अस्य सादने यवं न वृष्टिर्दिव्येनदानुना ।। ऋ. दस.तैंतालीस.सात सात. यद्वोऽशुद्धाः पराजघ्नुरिदं वस्तच्छुन्धामि । यजु. तेरह.तेरह आठ. यच्छल्मलौ भवति यन्नदीषु यदोषधीभ्यः परिजायते विषम् । विश्वे देवा निरितस्तत्सुवन्तु मा मां पद्येन रपसा विदत्सरुः ॥ ऋ. सात.पचास.तीन नौ. शिवा देवीरशिपदा भवन्तु, सर्वा नद्यो अशिमिदा भवन्तु ।। ऋ. सात.पचास.चार बयासी/ वैदिक अर्थ-व्यवस्था ■कृषिविनाशक जीव-जन्तुअन्न पकने से पूर्व उसके संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता होती है। लहलहाती फसल को हानि पहुँचाने वाले पक्षी एवं कीट आदि से कृषि की रक्षा का उल्लेख वेद में मिलता है। बहुत से अन्न खाने वाले कीड़े तो सूर्य की किरणों द्वारा ही नष्ट हो जाते हैं। जहाँ अन्नोत्पादक क्षेत्र में सूर्य किरणों का व्यवधान रहित आवागमन होता है, वह स्थान कृषि के लिए कल्याणप्रद माना गया है। फसल को चूहों से भी हानि पहुँचती है। अतः उनको नष्ट करने का निर्देश दिया गया है- 'हे अश्वि देवो! नाश करने वाले और भूमि में बिल बनाकर रहने वाले चूहे को मारो और उसका सिर काटो, उसकी पीठ तोड़ो, वे चूहे जौ आदि अन्न को कभी न खावें, उनका मुख बन्द करो और धान्य के लिए निर्भयता करो । कृषि को हानि पहुँचाने वाले कीटों को पतंग, जभ्य और उपक्वस नाम दिया गया है।" हे हिंसकशलभ, हे वध्य और दुष्टजभ्य तथा उपक्वस । ब्रह्मा जिस प्रकार असंस्कृत हवि को छोड़ देता है उसी प्रकार इन जौ आदि अन्नों को न खाते हुए और न नष्ट करते हुए तुम दूर हट जाओ अर्थात् इसको छोड़ दो। पक्षी भी फसल को हानि पहुँचाते हैं। अतः उनसे सावधान रहने के लिए फसल के क्षेत्र से उनको उड़ाते रहना चाहिए। पक्षियों को खेत से उड़ाने का वर्णन मिलता है- 'जैसे जल से सींचने वाला किसान अपने अन्न वाले खेत से पक्षियों को उड़ाने के लिए शब्द करता है। चार ■ वेदों में अन्नवाची शब्द - यव शब्द यद्यपि जौ के लिए आता है, परन्तु वेद में अन्न के लिए भी प्रयुक्त हुआ है। वेद में अन्नार्थक अनेक शब्दों का प्रयोग हुआ है। जैसे- अन्न, अन्ध, वाज, इरा, श्रवः, पयः, पितुः, सुतः, पृक्षः, सिनम् अवः, क्षुघासि, इषम्, इडा, ऊर्क्, रसः, स्वधा, अर्कः, क्षद्म, नेमः, ससम्, नमः, आयुः सूनृता, वर्चः, ब्रह्म, कीलालम्, आज्यम्, हविः, द्युम्नम्, भक्षः, उख्यः, धान्य, पाथः आदि । ■ वेद वर्णित विविध अन्नवेद में जहाँ अन्नवाचक अनेक शब्दों का प्रयोग किया गया है, वहाँ अन्न के विविध रूप भी दृष्टिगोचर होते हैं। विविध प्रकार के अन्नों को बोने, काटने एवं उनके उपयोग का वैदिक समाज के लोगों को श्रेष्ठ ज्ञान था। वैदिक युग का मुख्य अन्न जौ है, द्वितीय स्थान चावल को प्राप्त है। इन दोनों के प्रयोग बाहुल्य को देखकर इन्हें अन्नों के साधारण नामों में भी माना गया है। ये यव, व्रीहि अन्न के सामान्य नाम माने जाते हैं। एक. हतं तर्द समङक-माखुमश्विना छिन्त शिरो अपि पृष्टीः श्रृणीतम् । यवान्नेददानपि नह्यतं मुखमथाभयं कृणुतं धान्याय । अथर्व. छः.पचास.एक दो. तर्द है पंतग है जभ्य हा उपक्वस । अथर्व. छः.पचास.दो तीन. ब्रह्मेवासंस्थितं हविरनदन्त इमान् यवानहिंसन्तो अपोदितः । अथर्व. छः.पचास.दो चार. उदप्रुतो न वयो रक्षमाणा वावदतो अभ्रियस्येव घोषाः । ऋ. दस.अड़सठ.एक पाँच. यस्यामन्न व्रीहियवौ यस्या इमा पंचवृष्टयः । अथर्व. बारह.एक.
गाजियाबाद के नंदग्राम थानाक्षेत्र में मायके आई स्त्री की 22 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस ऑफिसरों के मुताबिक, स्त्री के पति ने ही दुपट्टे से गला घोंटकर उसे मृत्यु के घाट उतारा था. पति को अपनी पत्नी के गैर कानूनी संबंध होने का संदेह था तथा ससुर की मृत्यु होने पर टेलीफोन करने के बाद भी वह मायके से ससुराल नहीं गई थी. पुलिस का बोलना है कि मर्डर में प्रयुक्त दुपट्टा बरामद कर लिया गया है. नई बस्ती निवासी 24 वर्षीय संध्या की विवाह करीब चार माह पूर्व थाना इंचौली मेरठ के गांव महल निवासी ड्राइवर बिजेंद्र के साथ हुई थी. 19 मार्च को संध्या के चाचा का देहांत हो गया था, जिसके चलते पति ने उसे 20 मार्च को मायके भेज दिया था. 20 मार्च को ही मायके में संध्या का मृत शरीर बेड पर पड़ा मिला था. उसके गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था. पुलिस के मुताबिक, बिजेंद्र 22 मार्च को मुजफ्फरनगर जाने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन ससुराल आकर पत्नी की मर्डर कर दी थी. मर्डर के बाद वह अपने घर मेरठ चला गया था. शाम के समय उसके पास ससुराल से पत्नी की मृत्यु के संबंध में टेलीफोन आया तो उसने बेहोश होने का नाटक किया. डीसीपी सिटी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे ने उसका राज खोल दिया और कठोरता से पूछताछ करने पर उसने अपराध कबूल कर लिया था. बिजेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी के किसी से गैर कानूनी संबंध थे. इसके अतिरिक्त 19 मई को चाचा के देहांत के बाद वह 20 मार्च को मायके आ गई. संध्या के चाचा शाहजहांपुर में रहते थे. परिवार के सभी लोग वहां चले गए, लेकिन संध्या घर पर ही रह गई. 21 मार्च को बिजेंद्र के पिता की भी मृत्यु हो गई और उसने संध्या को टेलीफोन कर घर वापस आने को कहा, लेकिन वह नहीं आई. इससे बिजेंद्र को गुस्सा आ गया और उसने उसे मारने की षड्यंत्र रची. तैश में आकर वह 22 मार्च की सुबह अपनी ससुराल पहुंचा और संध्या से पूछा कि वह उसके पिता की मौत के बाद घर क्यों नहीं आई. इसी को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गई. इसके बाद तैश में आकर उसने संदेह और गुस्से के चलते संध्या की मर्डर कर दी.
गाजियाबाद के नंदग्राम थानाक्षेत्र में मायके आई स्त्री की बाईस मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस ऑफिसरों के मुताबिक, स्त्री के पति ने ही दुपट्टे से गला घोंटकर उसे मृत्यु के घाट उतारा था. पति को अपनी पत्नी के गैर कानूनी संबंध होने का संदेह था तथा ससुर की मृत्यु होने पर टेलीफोन करने के बाद भी वह मायके से ससुराल नहीं गई थी. पुलिस का बोलना है कि मर्डर में प्रयुक्त दुपट्टा बरामद कर लिया गया है. नई बस्ती निवासी चौबीस वर्षीय संध्या की विवाह करीब चार माह पूर्व थाना इंचौली मेरठ के गांव महल निवासी ड्राइवर बिजेंद्र के साथ हुई थी. उन्नीस मार्च को संध्या के चाचा का देहांत हो गया था, जिसके चलते पति ने उसे बीस मार्च को मायके भेज दिया था. बीस मार्च को ही मायके में संध्या का मृत शरीर बेड पर पड़ा मिला था. उसके गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था. पुलिस के मुताबिक, बिजेंद्र बाईस मार्च को मुजफ्फरनगर जाने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन ससुराल आकर पत्नी की मर्डर कर दी थी. मर्डर के बाद वह अपने घर मेरठ चला गया था. शाम के समय उसके पास ससुराल से पत्नी की मृत्यु के संबंध में टेलीफोन आया तो उसने बेहोश होने का नाटक किया. डीसीपी सिटी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे ने उसका राज खोल दिया और कठोरता से पूछताछ करने पर उसने अपराध कबूल कर लिया था. बिजेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी के किसी से गैर कानूनी संबंध थे. इसके अतिरिक्त उन्नीस मई को चाचा के देहांत के बाद वह बीस मार्च को मायके आ गई. संध्या के चाचा शाहजहांपुर में रहते थे. परिवार के सभी लोग वहां चले गए, लेकिन संध्या घर पर ही रह गई. इक्कीस मार्च को बिजेंद्र के पिता की भी मृत्यु हो गई और उसने संध्या को टेलीफोन कर घर वापस आने को कहा, लेकिन वह नहीं आई. इससे बिजेंद्र को गुस्सा आ गया और उसने उसे मारने की षड्यंत्र रची. तैश में आकर वह बाईस मार्च की सुबह अपनी ससुराल पहुंचा और संध्या से पूछा कि वह उसके पिता की मौत के बाद घर क्यों नहीं आई. इसी को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गई. इसके बाद तैश में आकर उसने संदेह और गुस्से के चलते संध्या की मर्डर कर दी.
इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित वीर बगीची के वीर आलीजा सरकार को हनुमान जयंती पर शुक्रवार को हीरे की आंखें लगाई गईं। 600 साल पुरानी दोनों हाथों में गदा लिए भगवान हनुमान के वीर स्वरूप वाली पांच फीट की मूर्ति पर तीन इंच लंबे और एक इंच चौड़े नेत्र लगाए गए। चार लाख रुपए के इन नेत्रों में साढ़े तीन लाख की अस्सी सीटी के टेस्टेड डीप फाइन डायमंड लगाए गए हैं। इसके साथ डेढ़ तोले सोना और मीना से भी कारीगरी की गई है। नेत्रों का निर्माण पंचकुइया स्थित वीर बगीची की व्यवस्था समिति ने कराया है। नेत्रों में लगाने के लिए हीरे को मुंबई से लाया गया है। पश्चिममुखी प्राचीन मूर्ति के पास यूं भी सोने-चांदी के आभूषणों की कमी नहीं है। डेढ़ किलो सोने और 10 किलो चांदी के जेवरात हैं। इनमें सोने के तीन कंठे, हार, गले की चेन शामिल है। कंठे की कीमत 15-15 लाख रुपए है। वीर आलीजा भक्त मंडल के अनुसार मंदिर में चार सौ साल से धूनी जल रही है। यह सनातन धर्म की परंपरानुसार पूजा-अर्चना होती है। हनुमान जयंती पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान को हीरे के नेत्र भगवान को लगाए गए। इस अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया गया। वीर बगीची एक एकड़ में फैली है। इसका संबंध अग्नि अखाड़े से है। कैलाशानंद महाराज ने नेपाल से आकर यहां तप किया था। वे अग्नि अखाड़े से दीक्षित थे। यहां बद्री विशाल का मंदिर है। हनुमानजी के सामने बद्री विशाल का मंदिर उत्तराखंड के बाद इंदौर में है। लक्ष्मीजी व संतानेश्वर महादेव का मंदिर भी बना है।
इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित वीर बगीची के वीर आलीजा सरकार को हनुमान जयंती पर शुक्रवार को हीरे की आंखें लगाई गईं। छः सौ साल पुरानी दोनों हाथों में गदा लिए भगवान हनुमान के वीर स्वरूप वाली पांच फीट की मूर्ति पर तीन इंच लंबे और एक इंच चौड़े नेत्र लगाए गए। चार लाख रुपए के इन नेत्रों में साढ़े तीन लाख की अस्सी सीटी के टेस्टेड डीप फाइन डायमंड लगाए गए हैं। इसके साथ डेढ़ तोले सोना और मीना से भी कारीगरी की गई है। नेत्रों का निर्माण पंचकुइया स्थित वीर बगीची की व्यवस्था समिति ने कराया है। नेत्रों में लगाने के लिए हीरे को मुंबई से लाया गया है। पश्चिममुखी प्राचीन मूर्ति के पास यूं भी सोने-चांदी के आभूषणों की कमी नहीं है। डेढ़ किलो सोने और दस किलो चांदी के जेवरात हैं। इनमें सोने के तीन कंठे, हार, गले की चेन शामिल है। कंठे की कीमत पंद्रह-पंद्रह लाख रुपए है। वीर आलीजा भक्त मंडल के अनुसार मंदिर में चार सौ साल से धूनी जल रही है। यह सनातन धर्म की परंपरानुसार पूजा-अर्चना होती है। हनुमान जयंती पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान को हीरे के नेत्र भगवान को लगाए गए। इस अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया गया। वीर बगीची एक एकड़ में फैली है। इसका संबंध अग्नि अखाड़े से है। कैलाशानंद महाराज ने नेपाल से आकर यहां तप किया था। वे अग्नि अखाड़े से दीक्षित थे। यहां बद्री विशाल का मंदिर है। हनुमानजी के सामने बद्री विशाल का मंदिर उत्तराखंड के बाद इंदौर में है। लक्ष्मीजी व संतानेश्वर महादेव का मंदिर भी बना है।
केशोरायपाटन थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ तस्करी में रविवार दोपहर एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 350 ग्राम गांजा जब्त किया है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है। थानाधिकारी लोकेन्द्र पालीवाल ने बताया कि गांजा तस्करी में आरोपी नन्द किशोर (55) निवासी माधोराज पुरा को गिरफ्तार किया है। रविवार दोपहर मुखबिर से सूचना मिली कि शुगर मिल चौराहा के पास एक व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ बेचने की फिराक में घूम रहा है। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी में उसके पास गांजा मिला। पुलिस ने आरोपी नन्द किशोर को गिरफ्तार किया। उसके पास मिले 350 ग्राम गांजे को जब्त किया गया। पूछताछ में आरोपी ने कोटा और सवाई माधोपुर से गांजे की तस्करी कर लाना बताया और केशोरायपाटन में छोटे-छोटे पैकेट बनाकर बेचना स्वीकार किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
केशोरायपाटन थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ तस्करी में रविवार दोपहर एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीन सौ पचास ग्राम गांजा जब्त किया है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है। थानाधिकारी लोकेन्द्र पालीवाल ने बताया कि गांजा तस्करी में आरोपी नन्द किशोर निवासी माधोराज पुरा को गिरफ्तार किया है। रविवार दोपहर मुखबिर से सूचना मिली कि शुगर मिल चौराहा के पास एक व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ बेचने की फिराक में घूम रहा है। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी में उसके पास गांजा मिला। पुलिस ने आरोपी नन्द किशोर को गिरफ्तार किया। उसके पास मिले तीन सौ पचास ग्राम गांजे को जब्त किया गया। पूछताछ में आरोपी ने कोटा और सवाई माधोपुर से गांजे की तस्करी कर लाना बताया और केशोरायपाटन में छोटे-छोटे पैकेट बनाकर बेचना स्वीकार किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
देश में एक बार फिर से कोरोना के कहर की खबरें सामने आ रहीं हैं। सरल भाषा में कहें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिन प्रतिदिन कोरोना के मामले बढ़ रहे हैँ। आपको बता दें कि मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार हरकत में आ गई है। फिलहाल केन्द्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की 6 राज्य सरकारों को खत लिखा है। देश के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच, केंद्र सरकार ने इसे रोकने के लिए दिल्ली और छह राज्यों को पर्याप्त जांच सुनिश्चित करने, कोविड-उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने और टीकाकरण (Covid19 Vaccination) की गति बढ़ाने के लिए हिदायती पत्र लिखा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने दिल्ली (Delhi Corona Update), केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना को लिखे पत्र में सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले त्योहार और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से से कोविड-19 (Covid19 in India) सहित संक्रामक रोगों में वृद्धि होने के आसार हैं, इसीलिए जागरुकता बहुत जरूरी है।
देश में एक बार फिर से कोरोना के कहर की खबरें सामने आ रहीं हैं। सरल भाषा में कहें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिन प्रतिदिन कोरोना के मामले बढ़ रहे हैँ। आपको बता दें कि मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार हरकत में आ गई है। फिलहाल केन्द्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की छः राज्य सरकारों को खत लिखा है। देश के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच, केंद्र सरकार ने इसे रोकने के लिए दिल्ली और छह राज्यों को पर्याप्त जांच सुनिश्चित करने, कोविड-उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देने और टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए हिदायती पत्र लिखा है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने दिल्ली , केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना को लिखे पत्र में सरकार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले त्योहार और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से से कोविड-उन्नीस सहित संक्रामक रोगों में वृद्धि होने के आसार हैं, इसीलिए जागरुकता बहुत जरूरी है।
यहां निर्वस्त्र विवाह का मतलब बिना दहेज की शादी से है. जो लोग बिना घर और कार लिए विवाह करते हैं उसे यहां निर्वस्त्र विवाह की संज्ञा दी जा जाती है. यह बात एक सर्वे में सामने आई है. यहां के एक दैनिक चीन डेली के मुताबिक एक मीडिया कंपनी ने 13 अगस्त यानी चीनी वैलेंटाइन डे पर इस आशय से सर्वे कराया. सर्वे में तीन शहर बीजिंग, शंघाई और क्वांगचो के 15. 9 लाख टैक्सी पैसेंजर्स शामिल थे. सर्वे में शामिल 45 परसेंट लोगों ने इस तरह विवाह करने के लिए अपनी सहमति दी. यह बात अलग है कि चीन में 30 परसेंट से भी कम लोग बिना दहेज की शादी करते हैं. सर्वेक्षण में शामिल 70 परसेंट लोगों ने कहा कि वे शादी के बाद अपनी सेलरी अपने पार्टनर के साथ बांटेंगे.
यहां निर्वस्त्र विवाह का मतलब बिना दहेज की शादी से है. जो लोग बिना घर और कार लिए विवाह करते हैं उसे यहां निर्वस्त्र विवाह की संज्ञा दी जा जाती है. यह बात एक सर्वे में सामने आई है. यहां के एक दैनिक चीन डेली के मुताबिक एक मीडिया कंपनी ने तेरह अगस्त यानी चीनी वैलेंटाइन डे पर इस आशय से सर्वे कराया. सर्वे में तीन शहर बीजिंग, शंघाई और क्वांगचो के पंद्रह. नौ लाख टैक्सी पैसेंजर्स शामिल थे. सर्वे में शामिल पैंतालीस परसेंट लोगों ने इस तरह विवाह करने के लिए अपनी सहमति दी. यह बात अलग है कि चीन में तीस परसेंट से भी कम लोग बिना दहेज की शादी करते हैं. सर्वेक्षण में शामिल सत्तर परसेंट लोगों ने कहा कि वे शादी के बाद अपनी सेलरी अपने पार्टनर के साथ बांटेंगे.
आजकल लोग अभी भी देह की चीज़ें छोड़ने में असमर्थ हैं; वे देह के सुख नहीं छोड़ सकते, न वे संसार, धन और अपने भ्रष्ट स्वभाव छोड़ पाते हैं। अधिकांश लोग अपनी कोशिशें बेपरवाही से करते हैं। वास्तव में इन लोगों के हृदय में परमेश्वर है ही नहीं; इससे भी बुरा यह है कि वे परमेश्वर का भय नहीं मानते। परमेश्वर उनके दिलों में नहीं है और इसलिए वे वह सब नहीं समझ पाते, जो परमेश्वर करता है और वे उसके द्वारा कहे गए वचनों पर विश्वास करने में तो और भी असमर्थ हैं। ऐसे लोग अत्यधिक देह में रमे होते हैं, वे आकंठ भ्रष्ट होते हैं और उनमें पूरी तरह सत्य का अभाव होता है। और तो और, उन्हें विश्वास नहीं कि परमेश्वर देहधारी हो सकता है। जो कोई देहधारी परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता - अर्थात, जो कोई प्रत्यक्ष परमेश्वर या उसके कार्य और वचनों पर विश्वास नहीं करता और इसके बजाय स्वर्ग के अदृश्य परमेश्वर की आराधना करता है - वह व्यक्ति है, जिसके हृदय में परमेश्वर नहीं है। ये लोग विद्रोही हैं और परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। इन लोगों में मानवता और तर्क का अभाव होता है, सत्य के बारे में तो कहना ही क्या। इसके अतिरिक्त, इन लोगों के लिए, प्रत्यक्ष और स्पर्शनीय परमेश्वर तो और भी विश्वास के योग्य नहीं है, फिर भी वे अदृश्य और अस्पर्शनीय परमेश्वर को सर्वाधिक विश्वसनीय और खुशी देने वाला मानते हैं। वे जिसे खोजते हैं, वह वास्तविक सत्य नहीं है, न ही वह जीवन का वास्तविक सार है; परमेश्वर की इच्छा तो और भी नहीं। इसके उलट वे रोमांच खोजते हैं। जो भी वस्तुएं उन्हें अधिक से अधिक उनकी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनाती हैं, बिना शक वे वो वस्तुएँ हैं जिनमें उनका विश्वास है और जिसका वे अनुसरण करते हैं। वे परमेश्वर पर केवल इसलिए विश्वास करते हैं ताकि निजी इच्छाएं पूरी कर पाएं, सत्य की खोज के लिए नहीं। क्या ऐसे लोग बुराई करने वाले नहीं हैं? वे आत्मविश्वास से अत्यधिक भरे हैं, और वे यह बिल्कुल विश्वास नहीं करते कि स्वर्ग का परमेश्वर उनके जैसे इन "भले लोगों" को नष्ट कर देगा। इसके बजाय, उनका मानना है कि परमेश्वर उन्हें बना रहने देगा और इसके अलावा, उन्हें परमेश्वर के लिए कई चीज़ें करने और उसके प्रति यथेष्ट "वफ़ादारी" दिखाने के कारण उन्हें अच्छी तरह पुरस्कृत करेगा। अगर वे भी प्रत्यक्ष परमेश्वर का भी अनुसरण करते, तो जैसे ही उनकी इच्छाएँ पूरी न होतीं, वे तुरंत परमेश्वर के ख़िलाफ़ जवाबी हमला कर देते या बेहद नाराज़ हो जाते। वे ख़ुद को नीच और अवमानना करने वाले लोगों की तरह दिखाते हैं, जो हमेशा अपनी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं; वे सत्य की खोज में लगे ईमानदार लोग नहीं हैं। ऐसे लोग वे तथाकथित दुष्ट हैं, जो मसीह के पीछे चलते हैं। जो लोग सत्य की खोज नहीं करते, वे संभवतः सत्य पर विश्वास नहीं कर सकते और मानवता के भविष्य का परिणाम समझने में और भी अधिक अयोग्य हैं, क्योंकि वे प्रत्यक्ष परमेश्वर के किसी कार्य या वचनों पर विश्वास नहीं करते - और इसमें मानवता के भविष्य के गंतव्य पर विश्वास नहीं कर पाना शामिल है। इसलिए, यदि वे साक्षात परमेश्वर का अनुसरण करते भी हैं, तब भी वे बुरा करेंगे और सत्य को बिल्कुल नहीं खोजेंगे, न ही वे उस सत्य का अभ्यास करेंगे, जिसकी मुझे अपेक्षा है। वे लोग जो यह विश्वास नहीं करते कि वे नष्ट हो जाएंगे, वही लोग असल में नष्ट होंगे। वे सब स्वयं को बहुत चतुर मानते हैं और वे सोचते हैं कि वे ही वो लोग हैं, जो सत्य का अभ्यास करते हैं। वे अपने बुरे आचरण को सत्य मानते हैं और इसलिए उसे सँजोते हैं। ऐसे दुष्ट लोग अत्यधिक आत्मविश्वास से भरे हैं; वे सत्य को सिद्धांत मानते हैं और अपने बुरे कार्यों को सत्य मानते हैं, लेकिन अंत में, वे केवल वहीं काटेंगे, जो उन्होंने बोया है। लोग जितना अधिक आत्मविश्वासी हैं और जितना अधिक घमंडी हैं, उतना ही अधिक वे सत्य को पाने में असमर्थ हैं; लोग जितना ज़्यादा स्वर्गिक परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, वे उतना अधिक परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। ये वे लोग हैं, जो दंडित किए जाएंगे। परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
आजकल लोग अभी भी देह की चीज़ें छोड़ने में असमर्थ हैं; वे देह के सुख नहीं छोड़ सकते, न वे संसार, धन और अपने भ्रष्ट स्वभाव छोड़ पाते हैं। अधिकांश लोग अपनी कोशिशें बेपरवाही से करते हैं। वास्तव में इन लोगों के हृदय में परमेश्वर है ही नहीं; इससे भी बुरा यह है कि वे परमेश्वर का भय नहीं मानते। परमेश्वर उनके दिलों में नहीं है और इसलिए वे वह सब नहीं समझ पाते, जो परमेश्वर करता है और वे उसके द्वारा कहे गए वचनों पर विश्वास करने में तो और भी असमर्थ हैं। ऐसे लोग अत्यधिक देह में रमे होते हैं, वे आकंठ भ्रष्ट होते हैं और उनमें पूरी तरह सत्य का अभाव होता है। और तो और, उन्हें विश्वास नहीं कि परमेश्वर देहधारी हो सकता है। जो कोई देहधारी परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता - अर्थात, जो कोई प्रत्यक्ष परमेश्वर या उसके कार्य और वचनों पर विश्वास नहीं करता और इसके बजाय स्वर्ग के अदृश्य परमेश्वर की आराधना करता है - वह व्यक्ति है, जिसके हृदय में परमेश्वर नहीं है। ये लोग विद्रोही हैं और परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। इन लोगों में मानवता और तर्क का अभाव होता है, सत्य के बारे में तो कहना ही क्या। इसके अतिरिक्त, इन लोगों के लिए, प्रत्यक्ष और स्पर्शनीय परमेश्वर तो और भी विश्वास के योग्य नहीं है, फिर भी वे अदृश्य और अस्पर्शनीय परमेश्वर को सर्वाधिक विश्वसनीय और खुशी देने वाला मानते हैं। वे जिसे खोजते हैं, वह वास्तविक सत्य नहीं है, न ही वह जीवन का वास्तविक सार है; परमेश्वर की इच्छा तो और भी नहीं। इसके उलट वे रोमांच खोजते हैं। जो भी वस्तुएं उन्हें अधिक से अधिक उनकी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनाती हैं, बिना शक वे वो वस्तुएँ हैं जिनमें उनका विश्वास है और जिसका वे अनुसरण करते हैं। वे परमेश्वर पर केवल इसलिए विश्वास करते हैं ताकि निजी इच्छाएं पूरी कर पाएं, सत्य की खोज के लिए नहीं। क्या ऐसे लोग बुराई करने वाले नहीं हैं? वे आत्मविश्वास से अत्यधिक भरे हैं, और वे यह बिल्कुल विश्वास नहीं करते कि स्वर्ग का परमेश्वर उनके जैसे इन "भले लोगों" को नष्ट कर देगा। इसके बजाय, उनका मानना है कि परमेश्वर उन्हें बना रहने देगा और इसके अलावा, उन्हें परमेश्वर के लिए कई चीज़ें करने और उसके प्रति यथेष्ट "वफ़ादारी" दिखाने के कारण उन्हें अच्छी तरह पुरस्कृत करेगा। अगर वे भी प्रत्यक्ष परमेश्वर का भी अनुसरण करते, तो जैसे ही उनकी इच्छाएँ पूरी न होतीं, वे तुरंत परमेश्वर के ख़िलाफ़ जवाबी हमला कर देते या बेहद नाराज़ हो जाते। वे ख़ुद को नीच और अवमानना करने वाले लोगों की तरह दिखाते हैं, जो हमेशा अपनी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं; वे सत्य की खोज में लगे ईमानदार लोग नहीं हैं। ऐसे लोग वे तथाकथित दुष्ट हैं, जो मसीह के पीछे चलते हैं। जो लोग सत्य की खोज नहीं करते, वे संभवतः सत्य पर विश्वास नहीं कर सकते और मानवता के भविष्य का परिणाम समझने में और भी अधिक अयोग्य हैं, क्योंकि वे प्रत्यक्ष परमेश्वर के किसी कार्य या वचनों पर विश्वास नहीं करते - और इसमें मानवता के भविष्य के गंतव्य पर विश्वास नहीं कर पाना शामिल है। इसलिए, यदि वे साक्षात परमेश्वर का अनुसरण करते भी हैं, तब भी वे बुरा करेंगे और सत्य को बिल्कुल नहीं खोजेंगे, न ही वे उस सत्य का अभ्यास करेंगे, जिसकी मुझे अपेक्षा है। वे लोग जो यह विश्वास नहीं करते कि वे नष्ट हो जाएंगे, वही लोग असल में नष्ट होंगे। वे सब स्वयं को बहुत चतुर मानते हैं और वे सोचते हैं कि वे ही वो लोग हैं, जो सत्य का अभ्यास करते हैं। वे अपने बुरे आचरण को सत्य मानते हैं और इसलिए उसे सँजोते हैं। ऐसे दुष्ट लोग अत्यधिक आत्मविश्वास से भरे हैं; वे सत्य को सिद्धांत मानते हैं और अपने बुरे कार्यों को सत्य मानते हैं, लेकिन अंत में, वे केवल वहीं काटेंगे, जो उन्होंने बोया है। लोग जितना अधिक आत्मविश्वासी हैं और जितना अधिक घमंडी हैं, उतना ही अधिक वे सत्य को पाने में असमर्थ हैं; लोग जितना ज़्यादा स्वर्गिक परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, वे उतना अधिक परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं। ये वे लोग हैं, जो दंडित किए जाएंगे। परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
मेरठ सिटी में इंटेलीजेंस टेस्ट का आयोजन 17 स्कूलों में एक साथ हुआ। इस आयोजन को कराने में स्कूलों के एडमिनिस्टे्रशन, टीचर्स और अन्य स्टाफ का पूरा सहयोग रहा। स्कूलों ने माना इस तरह के टेस्ट होना स्टूडेंट्स के करियर को लेकर काफी जरूरी है। हमें काफी खुशी है कि हम इस इवेंट के हिस्सा हैं। इंडियन इंटेलीजेंस टेस्ट में सिटी के 4000 स्टूडेंट्स अपना भाग्य आजमाया। स्टूडेंट्स ने रोटोमैक के पेन से ओएमआर शीट आसंर्स फिल किए। स्टूडेंट्स ने बातचीत में बताया कि हम इस तरह के टेस्ट में पहली बार पार्टिसिपेट कर रहे। जिस तरह के सवाल किए गए हैं उनका आंसर देना तो कोई मुश्किल नहीं था, लेकिन कौन सा जवाब हमारे पर्सनैलिटी को सूट करता है उसका सेलेक्शन थोड़ा टफ था। भागदौड़ भरी लाइफ में अगर आप अपने बच्चों को स्ट्रेस से दूर रखकर उनसे बेस्ट परफॉर्मेंस की उम्मीद करते हैं तो इंडियन इंटेलिजेंस टेस्ट उसके लिए बेहद कारगर साबित होगा। यह टेस्ट ही वह मीडियम है, जिससे यह पता चल सकता है कि आपका बच्चा किस फील्ड में बेस्ट परफॉर्म कर करियर संवार सकता है। टेस्ट को आयोजित करवाने में मुख्य रूप से आईआईटी बीएचयू, नॉलेज पार्टनर बंसल क्लासेज, टेक्नोलॉजी पार्टनर आई बॉल एंड राइटिंग पार्टनर रोटोमैक एंड पॉवर बाय सीग्रीड एजुकेशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सोमवार को ये इंडियन इंटेलीजेंस टेस्ट सिर्फ एक अपनी सिटी मेरठ में ही नहीं हुआ। बल्कि देश के 8 राज्यों के 35 शहरों में एक साथ हुआ। जिनमें करीब एक पार्टिसिपेंट्स शामिल हुए।
मेरठ सिटी में इंटेलीजेंस टेस्ट का आयोजन सत्रह स्कूलों में एक साथ हुआ। इस आयोजन को कराने में स्कूलों के एडमिनिस्टे्रशन, टीचर्स और अन्य स्टाफ का पूरा सहयोग रहा। स्कूलों ने माना इस तरह के टेस्ट होना स्टूडेंट्स के करियर को लेकर काफी जरूरी है। हमें काफी खुशी है कि हम इस इवेंट के हिस्सा हैं। इंडियन इंटेलीजेंस टेस्ट में सिटी के चार हज़ार स्टूडेंट्स अपना भाग्य आजमाया। स्टूडेंट्स ने रोटोमैक के पेन से ओएमआर शीट आसंर्स फिल किए। स्टूडेंट्स ने बातचीत में बताया कि हम इस तरह के टेस्ट में पहली बार पार्टिसिपेट कर रहे। जिस तरह के सवाल किए गए हैं उनका आंसर देना तो कोई मुश्किल नहीं था, लेकिन कौन सा जवाब हमारे पर्सनैलिटी को सूट करता है उसका सेलेक्शन थोड़ा टफ था। भागदौड़ भरी लाइफ में अगर आप अपने बच्चों को स्ट्रेस से दूर रखकर उनसे बेस्ट परफॉर्मेंस की उम्मीद करते हैं तो इंडियन इंटेलिजेंस टेस्ट उसके लिए बेहद कारगर साबित होगा। यह टेस्ट ही वह मीडियम है, जिससे यह पता चल सकता है कि आपका बच्चा किस फील्ड में बेस्ट परफॉर्म कर करियर संवार सकता है। टेस्ट को आयोजित करवाने में मुख्य रूप से आईआईटी बीएचयू, नॉलेज पार्टनर बंसल क्लासेज, टेक्नोलॉजी पार्टनर आई बॉल एंड राइटिंग पार्टनर रोटोमैक एंड पॉवर बाय सीग्रीड एजुकेशन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सोमवार को ये इंडियन इंटेलीजेंस टेस्ट सिर्फ एक अपनी सिटी मेरठ में ही नहीं हुआ। बल्कि देश के आठ राज्यों के पैंतीस शहरों में एक साथ हुआ। जिनमें करीब एक पार्टिसिपेंट्स शामिल हुए।
शिवपुरी। अभी हाल ही में कोलारस से ट्रांसफर होकर भौंती गए टीआई सतीश चौहान के स्थान पर पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर ने कोलारस थाने की कमान टीआई सुरेन्द्र सिंह सिकरवार को सौंपी है। सुरेन्द्र सिंह सिकरवार अभी हाल ही में पोहरी थाने से शिकायतों के बाद लाईन भेंजे गए थे। जानकारी के अनुसार बीते रोज जारी आदेश में पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर ने कोलारस थाने की कमान सौंपते हुए सुरेन्द्र सिंह सिकरवार को भेजा है। बताया जा रहा है कि सतीश चौहान को पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू की मांग पर पिछोर के भौंती थाने की कमान सौंपी गई है। हांलाकि सतीश चौहान काफी सुलझे और शहर के देहात थाने में भी अपनी अनूठी छाप के लिए शहर की चर्चा में बने हुए है।
शिवपुरी। अभी हाल ही में कोलारस से ट्रांसफर होकर भौंती गए टीआई सतीश चौहान के स्थान पर पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर ने कोलारस थाने की कमान टीआई सुरेन्द्र सिंह सिकरवार को सौंपी है। सुरेन्द्र सिंह सिकरवार अभी हाल ही में पोहरी थाने से शिकायतों के बाद लाईन भेंजे गए थे। जानकारी के अनुसार बीते रोज जारी आदेश में पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर ने कोलारस थाने की कमान सौंपते हुए सुरेन्द्र सिंह सिकरवार को भेजा है। बताया जा रहा है कि सतीश चौहान को पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू की मांग पर पिछोर के भौंती थाने की कमान सौंपी गई है। हांलाकि सतीश चौहान काफी सुलझे और शहर के देहात थाने में भी अपनी अनूठी छाप के लिए शहर की चर्चा में बने हुए है।
ठियोग -पिछले दिनों ठियोग में रोगी कल्याण समिति की बैठक में तय हुआ था कि ठियोग के सिविल अस्पताल परिसर में निजी वाहनों की पार्किंग को बंद कर दिया जाएगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं जो समस्या पहले थी आज भी वही समस्या अस्पताल में पार्किंग को लेकर चल रही है। अस्पताल परिसर में निजी वाहन भरपूर संख्या में लगे होते हैं ऐसे में जो मरीज अपने वाहनों में यहां तक पहुंचते हैं, उन्हें अपनी गाडि़यां गेट से बाहर ही लगानी पड़ती है। जिससे कि अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। यहां पर वाहनों की संख्यां इतनी अधिक है कि परिसर में पैदल चलना भी बेहद मुश्किल हो जाता है, लेकिन प्रशासन की अेर से कोई कारवाई नहीं की जाती। जबकि सिविल अस्पताल परिसर के मेंन गेट पर चेन भी लगी है, लेकिन उसे भी लाक नहीं किया जा रहा। ऊपरी शिमला के मुख्य द्वार ठियोग के सिविल अस्पताल में दिन में सैकड़ों मरीज अपना ईलाज करवाने आते हैं, लेकिन समस्या यह है कि मरीजों के वाहनों को गेट के बाहर खड़ा करना पड़ता है, जबकि अस्पताल परिसर में निजी लगे होते हैं यहां तक कि अस्पताल में तैनात डाक्टरों के वाहनों को भी कई बार गेट के बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। जिससे कि मरीजों को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। ठियोग सिविल अस्पताल में ठियोग के अलावा कोटखाई चौपाल रामपुर आदि से भी लोग ईलाज करवाने आते हैं और यहां पर दिनभर काफी भीड़ मरीजों की लगी रहती है। इसके अलावा अस्पताल के लिए जाने वाले रोड़ की भी हालत खराब है फिर वो चाहे बाजार से निकलने वाला रोड़ हो या फिर एनएच से कटने वाला रोड़ दोनों ही रोड़ जगह-जगह से धंसे होने के कारण यहां कभी भी हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों की मांग पर कई बार यहां गेट के अंदर चैन लगाने की भी मांग उठी है जो कि कुछ समय के लिए काम कर रही थी, लेकिन उसके बाद अब ये चेन भी यहां पर नहीं लगाई जाती है, जिससे हर कोई अस्पताल परिसर में अपनी गाड़ी को पार्क करने के बाद निकल जाता है। ठियोग में इसी तरह से कई जगह गलत पार्किंग को लेकर हर दिन जाम की भी समस्या बनी रहती है। सिविल अस्पताल में निजी वाहनों की पार्किंग को लेकर पुलिस को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे कि यहां पर मरीजों को आ रही परेशानियों से छुटकारा मिल सके। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
ठियोग -पिछले दिनों ठियोग में रोगी कल्याण समिति की बैठक में तय हुआ था कि ठियोग के सिविल अस्पताल परिसर में निजी वाहनों की पार्किंग को बंद कर दिया जाएगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं जो समस्या पहले थी आज भी वही समस्या अस्पताल में पार्किंग को लेकर चल रही है। अस्पताल परिसर में निजी वाहन भरपूर संख्या में लगे होते हैं ऐसे में जो मरीज अपने वाहनों में यहां तक पहुंचते हैं, उन्हें अपनी गाडि़यां गेट से बाहर ही लगानी पड़ती है। जिससे कि अव्यवस्था का माहौल बना रहता है। यहां पर वाहनों की संख्यां इतनी अधिक है कि परिसर में पैदल चलना भी बेहद मुश्किल हो जाता है, लेकिन प्रशासन की अेर से कोई कारवाई नहीं की जाती। जबकि सिविल अस्पताल परिसर के मेंन गेट पर चेन भी लगी है, लेकिन उसे भी लाक नहीं किया जा रहा। ऊपरी शिमला के मुख्य द्वार ठियोग के सिविल अस्पताल में दिन में सैकड़ों मरीज अपना ईलाज करवाने आते हैं, लेकिन समस्या यह है कि मरीजों के वाहनों को गेट के बाहर खड़ा करना पड़ता है, जबकि अस्पताल परिसर में निजी लगे होते हैं यहां तक कि अस्पताल में तैनात डाक्टरों के वाहनों को भी कई बार गेट के बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। जिससे कि मरीजों को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। ठियोग सिविल अस्पताल में ठियोग के अलावा कोटखाई चौपाल रामपुर आदि से भी लोग ईलाज करवाने आते हैं और यहां पर दिनभर काफी भीड़ मरीजों की लगी रहती है। इसके अलावा अस्पताल के लिए जाने वाले रोड़ की भी हालत खराब है फिर वो चाहे बाजार से निकलने वाला रोड़ हो या फिर एनएच से कटने वाला रोड़ दोनों ही रोड़ जगह-जगह से धंसे होने के कारण यहां कभी भी हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों की मांग पर कई बार यहां गेट के अंदर चैन लगाने की भी मांग उठी है जो कि कुछ समय के लिए काम कर रही थी, लेकिन उसके बाद अब ये चेन भी यहां पर नहीं लगाई जाती है, जिससे हर कोई अस्पताल परिसर में अपनी गाड़ी को पार्क करने के बाद निकल जाता है। ठियोग में इसी तरह से कई जगह गलत पार्किंग को लेकर हर दिन जाम की भी समस्या बनी रहती है। सिविल अस्पताल में निजी वाहनों की पार्किंग को लेकर पुलिस को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे कि यहां पर मरीजों को आ रही परेशानियों से छुटकारा मिल सके। अपने सपनों के जीवनसंगी को ढूँढिये भारत मैट्रिमोनी पर - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
कर सकते हैं और उसकी दुआ हदीस में यह है :اللهم حوالينا و لا علينا اللهم على الأكام والظراب و بطون الأودية و منابت الشجر ऐ अल्लाह ! हमारे आस-पास बरसा हमारे ऊपर न बरसा। ऐ अल्लाह! बारिश कर टीलों और पहाड़ियों पर और नालों में और जहाँ दरख़्त उगते हैं। इस हदीस को बुख़ारी व मुस्लिम ने अनस रढ़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत किया। नमाज़े ख़ौफ का बयान अल्लाह तआला फरमाता है فإن خفتم فرجا لا أوركبانافإذا أمنتم فاذكروالله كما علمكم ما لم تكونُوا تعلمون 0 तर्जमा :अगर तुम्हें ख़ौफ़ हो तो पैदल या सवारी पर नमाज़ पढ़ो फिर जब ख़ौफ़ जाता रहे तो अल्लाह को उस तरह याद करो जैसा उसने सिखाया वह कि तुम नहीं जानते थे। और फरमाता हैःوإذا كنت فيهم فاقمت لهم الصلوة قلتفم طائفة منهم معك ولياخذوا أسلحتهم بد فإذا سجلوا فليكوانوا من ورائكم ، ولتـات طائفة أخرى لم يصلوا فليصلوا معك وليأخذوا حذرهم و أسلحتهم ج وذالذين كفروا لو تغفلون عن أسلحتكم و أمتعتكم فيميلون عليكم ميلة واحدة، ولا جناح عليكم إن كان بكم أذى من مطر أو كتم مرضى أن تضعوا أسلحتكم وخلوا حذر كم ط إن الله أعد للكفرين عذابا مهينا تفإذا قضيتم الصلوة فاذكر والـلـه قـيـامـا وقـعـودا وعلى جنوبكمج فإذا اطما ننتم فأقيموا الصلوة إن الصلوة كانت على المؤمنين كتبا موقوتاه तर्जमा :- दो मगर पनाह की चीज़ लिए रहो बेशक अल्लाह ने काफिरों के लिए ज़िल्लत का अजाब तैयार कर रखा है फिर जब नमाज़ पूरी कर चुको फिर अल्लाह को याद करो खड़े और बैठे और करवटों पर लेटे और जब तुम उनमें हो और नमाज़ काइम करो तो उनमें का एक गिरोह तुम्हारे साथखड़ा हो और उन्हें चाहिए कि अपने हथियार लिए हों फिर जब एक रकअत का सजदा कर लें तो वह तुम्हारे पीछे हों और अब दूसरा गिरोह आये जिसने तुम्हारे साथ न पढ़ी थी वह तुम्हारे साथ पढ़ें और अपनी पनाह और अपने हथियार लिए रहें। काफिरों की तमन्ना है कि कहीं तुम अपने हर्थि है।'यारों और अपने असबाब से गाफिल हो जाओ तो एक साथ तुम पर झुक पड़ें और तुम पर कुछ गुनाह नहीं अगर तुम्हें मेंह से तकलीफ हो या बीमार हो कि अपने हथियार रख फर जब इत्मीनान से हो जाओ तो नमांज़ हसबै दस्तूर काइम करो बेशक नमाज़ मुसलमानों पर वक़्त बाँधा हुआ फ़ज़ तिर्मिज़ी व नसई में ब - रिवायते अबू हुरैरा रदियल्लाहु तआला अन्हु मरवी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम असफ़ान व दजवान (जगहों के नाम हैं) के दरमियान उतरे मुशरिक़ीन ने कहा इन के लिए एक नमाज़ है जो बाप और बेटों से भी ज़्यादा प्यारी है और वह नमाज़े अस्र है। लिहाज़ा सब काम ठीक रखो जब नमाज़ को खड़े हों एक दम हमला कर दो जिब्रील अलैहिस्सलातु वसल्लम नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ की कि हुजूर अपने असहाब के दो हिस्से करें एक गिरोह के साथ नमाज़ पढ़ें और दूसरा गिरोह उन के पीछे सिपर यानी ढाल और अस्लेहा यअनी हथियार लिये खड़ा रहे तो उनकी एक एक रकअत होगी यानी हुजूर के साथ और रसुलुल्लाह सल्लल्लहु तआला अलैहि वसल्लम की दो रकअतें। सही बुख़ारी व सही मुस्लिम में जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी कहते हैं हम रसूलुल्लाह https://t.me/ शहरी हरु at HindiBooks
कर सकते हैं और उसकी दुआ हदीस में यह है :اللهم حوالينا و لا علينا اللهم على الأكام والظراب و بطون الأودية و منابت الشجر ऐ अल्लाह ! हमारे आस-पास बरसा हमारे ऊपर न बरसा। ऐ अल्लाह! बारिश कर टीलों और पहाड़ियों पर और नालों में और जहाँ दरख़्त उगते हैं। इस हदीस को बुख़ारी व मुस्लिम ने अनस रढ़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत किया। नमाज़े ख़ौफ का बयान अल्लाह तआला फरमाता है فإن خفتم فرجا لا أوركبانافإذا أمنتم فاذكروالله كما علمكم ما لم تكونُوا تعلمون शून्य तर्जमा :अगर तुम्हें ख़ौफ़ हो तो पैदल या सवारी पर नमाज़ पढ़ो फिर जब ख़ौफ़ जाता रहे तो अल्लाह को उस तरह याद करो जैसा उसने सिखाया वह कि तुम नहीं जानते थे। और फरमाता हैःوإذا كنت فيهم فاقمت لهم الصلوة قلتفم طائفة منهم معك ولياخذوا أسلحتهم بد فإذا سجلوا فليكوانوا من ورائكم ، ولتـات طائفة أخرى لم يصلوا فليصلوا معك وليأخذوا حذرهم و أسلحتهم ج وذالذين كفروا لو تغفلون عن أسلحتكم و أمتعتكم فيميلون عليكم ميلة واحدة، ولا جناح عليكم إن كان بكم أذى من مطر أو كتم مرضى أن تضعوا أسلحتكم وخلوا حذر كم ط إن الله أعد للكفرين عذابا مهينا تفإذا قضيتم الصلوة فاذكر والـلـه قـيـامـا وقـعـودا وعلى جنوبكمج فإذا اطما ننتم فأقيموا الصلوة إن الصلوة كانت على المؤمنين كتبا موقوتاه तर्जमा :- दो मगर पनाह की चीज़ लिए रहो बेशक अल्लाह ने काफिरों के लिए ज़िल्लत का अजाब तैयार कर रखा है फिर जब नमाज़ पूरी कर चुको फिर अल्लाह को याद करो खड़े और बैठे और करवटों पर लेटे और जब तुम उनमें हो और नमाज़ काइम करो तो उनमें का एक गिरोह तुम्हारे साथखड़ा हो और उन्हें चाहिए कि अपने हथियार लिए हों फिर जब एक रकअत का सजदा कर लें तो वह तुम्हारे पीछे हों और अब दूसरा गिरोह आये जिसने तुम्हारे साथ न पढ़ी थी वह तुम्हारे साथ पढ़ें और अपनी पनाह और अपने हथियार लिए रहें। काफिरों की तमन्ना है कि कहीं तुम अपने हर्थि है।'यारों और अपने असबाब से गाफिल हो जाओ तो एक साथ तुम पर झुक पड़ें और तुम पर कुछ गुनाह नहीं अगर तुम्हें मेंह से तकलीफ हो या बीमार हो कि अपने हथियार रख फर जब इत्मीनान से हो जाओ तो नमांज़ हसबै दस्तूर काइम करो बेशक नमाज़ मुसलमानों पर वक़्त बाँधा हुआ फ़ज़ तिर्मिज़ी व नसई में ब - रिवायते अबू हुरैरा रदियल्लाहु तआला अन्हु मरवी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम असफ़ान व दजवान के दरमियान उतरे मुशरिक़ीन ने कहा इन के लिए एक नमाज़ है जो बाप और बेटों से भी ज़्यादा प्यारी है और वह नमाज़े अस्र है। लिहाज़ा सब काम ठीक रखो जब नमाज़ को खड़े हों एक दम हमला कर दो जिब्रील अलैहिस्सलातु वसल्लम नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ की कि हुजूर अपने असहाब के दो हिस्से करें एक गिरोह के साथ नमाज़ पढ़ें और दूसरा गिरोह उन के पीछे सिपर यानी ढाल और अस्लेहा यअनी हथियार लिये खड़ा रहे तो उनकी एक एक रकअत होगी यानी हुजूर के साथ और रसुलुल्लाह सल्लल्लहु तआला अलैहि वसल्लम की दो रकअतें। सही बुख़ारी व सही मुस्लिम में जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी कहते हैं हम रसूलुल्लाह https://t.me/ शहरी हरु at HindiBooks
पहलवान दीपक नेहरा, जिन्होंने अपने कांस्य पदक मुकाबले में पाकिस्तान को हराया और भारत की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाल दिया। हालांकि इससे पहले मुकाबले में मिली हार से दीपक नेहरा निराश नहीं हुए, बल्कि उन्हें अपने ऊपर विश्वास था कि वह भारत के लिए पदक ज़रूर जीतेंगे। दीपक नेहरा के कोच अजय ढांडा ने दीपक की जीत पर कहा कि दीपक पहला मुकाबला बेशक हार गया, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह देश को मेडल ज़रूर दिलाएगा। जिसे उसने पूरा किया। क्योंकि दीपक ने अपने खेल को इस कदर निखारा हुआ है कि बड़े-बड़े पहलवानों के भी उसके सामने पसीने छूट जाते हैं। दीपक नेहरा हरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गाँव के रहने वाले हैं। वहीं दीपक के पिता सुरेंद्र सिंह ने दीपक की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए उनके संघर्ष के बारे में बताया। दीपक के पिता ने कहा, दीपक का बचपन से ही खेल के प्रति लगाव था। जब वे 5 साल के थे तो उन्हें मिर्चपुर एकेडमी में भेज दिया था। ताकि वह पहलवानी के गुर सीख सकें और आगे बढ़ पाए। तब से लेकर अब तक करीब 12-13 साल के इस अंतराल में लगातार अभ्यास कर रहा है। दीपक की जीत से केवल उनके गाँव में ही नहीं, बल्कि हरियाणा समेत पूरे देश भर में खुशी का माहौल है। दीपक ने पाकिस्तान के खिलाड़ी को 8-6 के अंतर से हराया और पाकिस्तानी खिलाड़ी पर जीत दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम किया। दीपक मेहरा हर रोज़ 8 घंटे अभ्यास करते हैं और कुश्ती की नई-नई तकनीकी सीखते हैं। आज उसी अभ्यास का परिणाम है कि उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक हासिल किया है। इसी साल हुए सीनियर-23 एशियन चैंपियनशिप में भी दीपक ने कांस्य पदक जीता था। वहीं, पिछले साल हुई विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक अपने नाम किया था। और अब राष्ट्रमंडल खेलों में जीत दर्ज करके दीपक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
पहलवान दीपक नेहरा, जिन्होंने अपने कांस्य पदक मुकाबले में पाकिस्तान को हराया और भारत की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाल दिया। हालांकि इससे पहले मुकाबले में मिली हार से दीपक नेहरा निराश नहीं हुए, बल्कि उन्हें अपने ऊपर विश्वास था कि वह भारत के लिए पदक ज़रूर जीतेंगे। दीपक नेहरा के कोच अजय ढांडा ने दीपक की जीत पर कहा कि दीपक पहला मुकाबला बेशक हार गया, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह देश को मेडल ज़रूर दिलाएगा। जिसे उसने पूरा किया। क्योंकि दीपक ने अपने खेल को इस कदर निखारा हुआ है कि बड़े-बड़े पहलवानों के भी उसके सामने पसीने छूट जाते हैं। दीपक नेहरा हरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गाँव के रहने वाले हैं। वहीं दीपक के पिता सुरेंद्र सिंह ने दीपक की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए उनके संघर्ष के बारे में बताया। दीपक के पिता ने कहा, दीपक का बचपन से ही खेल के प्रति लगाव था। जब वे पाँच साल के थे तो उन्हें मिर्चपुर एकेडमी में भेज दिया था। ताकि वह पहलवानी के गुर सीख सकें और आगे बढ़ पाए। तब से लेकर अब तक करीब बारह-तेरह साल के इस अंतराल में लगातार अभ्यास कर रहा है। दीपक की जीत से केवल उनके गाँव में ही नहीं, बल्कि हरियाणा समेत पूरे देश भर में खुशी का माहौल है। दीपक ने पाकिस्तान के खिलाड़ी को आठ-छः के अंतर से हराया और पाकिस्तानी खिलाड़ी पर जीत दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम किया। दीपक मेहरा हर रोज़ आठ घंटाटे अभ्यास करते हैं और कुश्ती की नई-नई तकनीकी सीखते हैं। आज उसी अभ्यास का परिणाम है कि उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक हासिल किया है। इसी साल हुए सीनियर-तेईस एशियन चैंपियनशिप में भी दीपक ने कांस्य पदक जीता था। वहीं, पिछले साल हुई विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक अपने नाम किया था। और अब राष्ट्रमंडल खेलों में जीत दर्ज करके दीपक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
रायपुर। कार्टून पत्रिका 'कार्टून वॉच' की ओर से होली के अवसर पर आयोजित महामूर्ख सम्मेलन संपन्न हो गया है। 'हरिभूमि' और 'INH 24x7' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हरिभूमि परिसर में इसका आयोजन किया गया था। हर साल किसी ना किसी गणमान्य व्यक्ति को यह उपाधि दी जाती है। इस बार महामूर्ख की उपाधि से रायपुर के मेयर एजाज ढेबर को नवाजा गया। कार्यक्रम में शामिल हुए सभी कवि एवं कवियित्रियों ने अपनी रचनाएं सुनाई और दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। इस उपाधि से भूपेश बघेल सन 2000 में ही नवाजे जा चुके हैं, जब वे अविभाजित मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री थे। इस सूची में काफी प्रतिष्ठित नाम शमिल हैं, जैसे रमेश बैस, सरोज पाण्डेय, बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, अजय चंद्राकर, कुलदीप जुनेजा, चंद्रशेखर साहू, विमल चोपड़ा, प्रमोद दुबे, केदार कश्यप, विकास उपाध्याय एवं अन्य शामिल हैं।
रायपुर। कार्टून पत्रिका 'कार्टून वॉच' की ओर से होली के अवसर पर आयोजित महामूर्ख सम्मेलन संपन्न हो गया है। 'हरिभूमि' और 'INH चौबीसxसात' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हरिभूमि परिसर में इसका आयोजन किया गया था। हर साल किसी ना किसी गणमान्य व्यक्ति को यह उपाधि दी जाती है। इस बार महामूर्ख की उपाधि से रायपुर के मेयर एजाज ढेबर को नवाजा गया। कार्यक्रम में शामिल हुए सभी कवि एवं कवियित्रियों ने अपनी रचनाएं सुनाई और दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। इस उपाधि से भूपेश बघेल सन दो हज़ार में ही नवाजे जा चुके हैं, जब वे अविभाजित मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री थे। इस सूची में काफी प्रतिष्ठित नाम शमिल हैं, जैसे रमेश बैस, सरोज पाण्डेय, बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, अजय चंद्राकर, कुलदीप जुनेजा, चंद्रशेखर साहू, विमल चोपड़ा, प्रमोद दुबे, केदार कश्यप, विकास उपाध्याय एवं अन्य शामिल हैं।
यदि हमारा देश पराधीन न होता और हमारे यहां राष्ट्रीय आंदोलन की श्रावश्यकता न रही होती तो भी प्राधुनिक प्रौद्योगिक समाज का विकास होते ही काव्य में स्वच्छंदतावादी भावना और व्यक्तिवाद की प्रवृत्ति मुखरित हो उठती। इसलिए छायावादी कविता राष्ट्रीय आंदोलन या जागृति का सीधा परिणाम नहीं । बल्कि पाश्चात्य अर्थव्यवस्था और संस्कृति के सम्पर्क में आने के परिणामस्वरूप हमारे देश और समाज में जो बाहरी और भीतरी प्रत्यक्ष और परोक्ष परिवर्तन हो रहे थे, उन्होंने जिस तरह सामूहिक व्यवहार और कर्म के क्षेत्र में राष्ट्रीय एकता की भावना जगाई और राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरणा दी, उसी तरह संस्कृति और पाश्चात्य काव्य साहित्य के प्रभावों को ग्रहरण करती हुई छायावाद कविता राष्ट्रीय जागरण के कोरण में पनपी और फली-फूली है ।" छायाचादी काव्य की धार्मिक पृष्ठभूमि - भी बिल्कुल स्पष्ट है । छायावादी काव्य रामकृष्ण परमहंस, विवेकानन्द, गांधी, टैगोर और अरविन्द के दर्शनों की छाया में पला और बढ़ा है। इसमें जो दार्शनिक तत्व मिलते हैं वे प्राचीन वाद और सर्वात्मवाद के तत्वों से प्रभावित हैं। महादेवी वर्मा ने ठीक ही लिखा है कि "छायावाद का कवि धर्म के अध्यात्म से अधिक दर्शन के ब्रह्म का ऋणी है जो मूर्त और अमूर्त विश्व को मिला कर पूर्णता पाता है। बुद्धि के सूक्ष्म धरातल पर कवि ने जीवन की प्रखंडता का भावन किया । हृदय की भावभूमि पर उसने प्रकृति में बिखरी सौन्दर्यसत्ता की रहस्यमयी अनुभूति की, और दोनों के साथ स्वानुभूत सुख-दुःखों को मिला कर एक ऐसी काव्यसृष्टि उपस्थित कर दी जो प्रकृतिवाद, हृदयवाद, अध्यात्मवाद, रहस्यवाद और छायावाद आदि अनेक नामों का भार सम्भाल सको।" धार्मिक और राजनैतिक परिवर्तनों की प्रक्रिया ने जहां विचारों में क्रांति ला दो वहीं सामाजिक व्यवस्था भी पीछे नहीं रही । सामाजिक परिस्थितियों ने तो छायावादी कविता को सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया। भारतीय समाज में पूजनीय सभ्यता और संस्कृति पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के सम्पर्क में आने के कारण अपना चोला बदल बैठी। इस वदलाव में जहां सामाजिक क्रांति को जन्म मिला वहीं विचारों में नई भंगिमाएं और भावनाओं में नूतन उन्मेष किया । राष्ट्रीय एकता की वृद्धि के साथ साथ स्वच्छंद प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । परिणामतः व्यक्तिवाद का प्रचार वढ़ा । स्वच्छन्दतावादी नवीन पीढ़ी धार्मिक, सामाजिक रूढ़ियों से उद्भुत अनेक अन्धविश्वासों और मिथ्या डम्बरों को समाप्त करने की बात सोचने लगी। किन्तु इन रूढ़ियों को तोड़ना इतना श्रासान काम नहीं था । अतः न तो ये रूढ़ियां पूरी तरह रह हो सकीं और न टूट ही सक। इन सबका अर्थ यह हुआ कि कल्पनाजीवी कवि, साहित्यकार कुण्ठा, ऋतृप्ति और निराशा से भरने लगे। छायावादी काव्य में यही सब देखने को मिलता है । छायावादी काव्य की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के विवेचन में डा० केसरीनारायण शुक्ल ने उचित लिखा है कि 'छायावाद के व्यक्तिवाद, श्रात्माभिव्यक्ति, कलावाद आदि बुजुआई संस्कृति के ही विविध रूप हैं।' हमारे समाज की व्यवस्था प्रतिद्वन्द्विता के धार पर है। आज के समाज के मूल्यांकन का मानदण्ड अधिकार स्वायत्त मूल्य के आधार पर है तो जनहित की अपेक्षा व्यक्तिगत सफलता की भावना प्रमुख हो गई । Capitalist Economy पूंजीवादी मितव्ययता जिसका प्राधार ही व्यक्तिगत एकाधिकार है - संगठित समाज में व्यक्ति का प्राधान्य अनिवार्य था । पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति ने जहां जीवन को अपने रंग में रंग डाला, वहां दूसरी ओर अंग्रेजी की Romanticism वाली प्रवृत्ति ने हिन्दी के छायावादी काव्य को पर्याप्त प्रभावित किया । अंग्रेजी साहित्य में स्वच्छन्दतावाद का प्रारम्भ १८वीं शताब्दी में हुआ । इसी में आगे चलकर वर्डसवर्थ, शैली और कीट्स, वायरन आदि ने योगदान दिया । अंग्रेजी साहित्य के स्वच्छन्दतावाद से मिलते-जुलते होने के कारण कुछ विद्वानों ने तो छायावाद को ही जी के स्वच्छन्दतावाद का हिन्दी संस्करण तक कह डाला। किन्तु यह वात नहीं। कारण स्पष्ट है - छायावाद का उद्भव भारत को सांस्कृतिक र सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल हुआ है । वास्तविकता यह है कि जैसे अंग्रेजी साहित्य में स्वच्छन्दतावाद के जन्म से पहिले साहित्य में अतिनैतिकता, सुधार वाद, इतिवृत्तात्मकता और शास्त्रीय रूढ़ियों का बोलबाला था बिल्कुल यही दशा छायावाद के युदय से पूर्व हिन्दी में द्विवेदी युग में थी, जिसकी प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप छायावाद का जन्म हुआ। कहने का तात्पर्य यह है कि छायावाद एक ओर जहां सामाजिक और आर्थिक ढांचे में परिवर्तन ला सका वहीं दूसरी ओर साहित्यिक दृष्टि से भी वह काफी आगे बढ़ा हुआ दिखाई देता है । छायावाद ने यदि काव्यगत शुष्कता को दूर किया तो शिल्पगत सूक्ष्म कल्पनाओं के मार्ग भी खोले । छायावाद को परिभाषा - छायावाद काव्यधारा अपनी पूर्वगत काव्य-धाराओं से एक और नया कदम लेकर आई । भारतेन्दुयुगीन, द्विवेदीयुगीन कविता की नैतिकता घोर उपदेशात्मक प्रवृत्ति इतनी वढी कि लोग उससे ऊब उठे और उनके मन ही मन में बाह्य की पेक्षा प्रान्तरिक अभिव्यक्ति की भावना जागृत हुई । बाह्य की तर अभिव्यक्ति को इतना महत्व देने वाली धारा काव्य में छायावाद नामसे अभिहित को गई । प्रथम महायुद्ध के उपरान्त जीवन में एक खोखलापन और निस्सारपन या गया था । पश्चिम के स्वतंत्र विचारों के सम्पर्क से राजनीति और सामाजिक बंधनों के प्रति असंतोष की भावना मधुर उन्माद के साथ उठ रही थी, भले ही उसके तोड़ने का निश्चित विधान अभी तक मन में नहीं आ रहा था । राजनीति में ब्रिटिश साम्राज्य की प्रचल सत्ता और समाज में सुधारवाद को दृढ़ नैतिकता, असंतोष व विद्रोह की इन भावनाओं को वहिमुखी अभिव्यक्ति का अवसर नहीं दे रही थी । छायावाद में प्रारम्भ से ही जीवन की वास्तविकता और निकटता के प्रति एक उपेक्षा एक विमुखता का भाव मिलता है । नये विचारों से प्रेरित कवि की भावनाएं धीरे-धीरे अभिव्यक्ति के लिए छटपटा रही थीं । डा० नगेन्द्र ने लिखा है कि "नैतिकता और उपदेशात्मकता के प्रति विद्रोह लेकर जन्मी भावनाएं अन्तमुखी होकर धीरे-धीरे
यदि हमारा देश पराधीन न होता और हमारे यहां राष्ट्रीय आंदोलन की श्रावश्यकता न रही होती तो भी प्राधुनिक प्रौद्योगिक समाज का विकास होते ही काव्य में स्वच्छंदतावादी भावना और व्यक्तिवाद की प्रवृत्ति मुखरित हो उठती। इसलिए छायावादी कविता राष्ट्रीय आंदोलन या जागृति का सीधा परिणाम नहीं । बल्कि पाश्चात्य अर्थव्यवस्था और संस्कृति के सम्पर्क में आने के परिणामस्वरूप हमारे देश और समाज में जो बाहरी और भीतरी प्रत्यक्ष और परोक्ष परिवर्तन हो रहे थे, उन्होंने जिस तरह सामूहिक व्यवहार और कर्म के क्षेत्र में राष्ट्रीय एकता की भावना जगाई और राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरणा दी, उसी तरह संस्कृति और पाश्चात्य काव्य साहित्य के प्रभावों को ग्रहरण करती हुई छायावाद कविता राष्ट्रीय जागरण के कोरण में पनपी और फली-फूली है ।" छायाचादी काव्य की धार्मिक पृष्ठभूमि - भी बिल्कुल स्पष्ट है । छायावादी काव्य रामकृष्ण परमहंस, विवेकानन्द, गांधी, टैगोर और अरविन्द के दर्शनों की छाया में पला और बढ़ा है। इसमें जो दार्शनिक तत्व मिलते हैं वे प्राचीन वाद और सर्वात्मवाद के तत्वों से प्रभावित हैं। महादेवी वर्मा ने ठीक ही लिखा है कि "छायावाद का कवि धर्म के अध्यात्म से अधिक दर्शन के ब्रह्म का ऋणी है जो मूर्त और अमूर्त विश्व को मिला कर पूर्णता पाता है। बुद्धि के सूक्ष्म धरातल पर कवि ने जीवन की प्रखंडता का भावन किया । हृदय की भावभूमि पर उसने प्रकृति में बिखरी सौन्दर्यसत्ता की रहस्यमयी अनुभूति की, और दोनों के साथ स्वानुभूत सुख-दुःखों को मिला कर एक ऐसी काव्यसृष्टि उपस्थित कर दी जो प्रकृतिवाद, हृदयवाद, अध्यात्मवाद, रहस्यवाद और छायावाद आदि अनेक नामों का भार सम्भाल सको।" धार्मिक और राजनैतिक परिवर्तनों की प्रक्रिया ने जहां विचारों में क्रांति ला दो वहीं सामाजिक व्यवस्था भी पीछे नहीं रही । सामाजिक परिस्थितियों ने तो छायावादी कविता को सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया। भारतीय समाज में पूजनीय सभ्यता और संस्कृति पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के सम्पर्क में आने के कारण अपना चोला बदल बैठी। इस वदलाव में जहां सामाजिक क्रांति को जन्म मिला वहीं विचारों में नई भंगिमाएं और भावनाओं में नूतन उन्मेष किया । राष्ट्रीय एकता की वृद्धि के साथ साथ स्वच्छंद प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । परिणामतः व्यक्तिवाद का प्रचार वढ़ा । स्वच्छन्दतावादी नवीन पीढ़ी धार्मिक, सामाजिक रूढ़ियों से उद्भुत अनेक अन्धविश्वासों और मिथ्या डम्बरों को समाप्त करने की बात सोचने लगी। किन्तु इन रूढ़ियों को तोड़ना इतना श्रासान काम नहीं था । अतः न तो ये रूढ़ियां पूरी तरह रह हो सकीं और न टूट ही सक। इन सबका अर्थ यह हुआ कि कल्पनाजीवी कवि, साहित्यकार कुण्ठा, ऋतृप्ति और निराशा से भरने लगे। छायावादी काव्य में यही सब देखने को मिलता है । छायावादी काव्य की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के विवेचन में डाशून्य केसरीनारायण शुक्ल ने उचित लिखा है कि 'छायावाद के व्यक्तिवाद, श्रात्माभिव्यक्ति, कलावाद आदि बुजुआई संस्कृति के ही विविध रूप हैं।' हमारे समाज की व्यवस्था प्रतिद्वन्द्विता के धार पर है। आज के समाज के मूल्यांकन का मानदण्ड अधिकार स्वायत्त मूल्य के आधार पर है तो जनहित की अपेक्षा व्यक्तिगत सफलता की भावना प्रमुख हो गई । Capitalist Economy पूंजीवादी मितव्ययता जिसका प्राधार ही व्यक्तिगत एकाधिकार है - संगठित समाज में व्यक्ति का प्राधान्य अनिवार्य था । पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति ने जहां जीवन को अपने रंग में रंग डाला, वहां दूसरी ओर अंग्रेजी की Romanticism वाली प्रवृत्ति ने हिन्दी के छायावादी काव्य को पर्याप्त प्रभावित किया । अंग्रेजी साहित्य में स्वच्छन्दतावाद का प्रारम्भ अट्ठारहवीं शताब्दी में हुआ । इसी में आगे चलकर वर्डसवर्थ, शैली और कीट्स, वायरन आदि ने योगदान दिया । अंग्रेजी साहित्य के स्वच्छन्दतावाद से मिलते-जुलते होने के कारण कुछ विद्वानों ने तो छायावाद को ही जी के स्वच्छन्दतावाद का हिन्दी संस्करण तक कह डाला। किन्तु यह वात नहीं। कारण स्पष्ट है - छायावाद का उद्भव भारत को सांस्कृतिक र सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल हुआ है । वास्तविकता यह है कि जैसे अंग्रेजी साहित्य में स्वच्छन्दतावाद के जन्म से पहिले साहित्य में अतिनैतिकता, सुधार वाद, इतिवृत्तात्मकता और शास्त्रीय रूढ़ियों का बोलबाला था बिल्कुल यही दशा छायावाद के युदय से पूर्व हिन्दी में द्विवेदी युग में थी, जिसकी प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप छायावाद का जन्म हुआ। कहने का तात्पर्य यह है कि छायावाद एक ओर जहां सामाजिक और आर्थिक ढांचे में परिवर्तन ला सका वहीं दूसरी ओर साहित्यिक दृष्टि से भी वह काफी आगे बढ़ा हुआ दिखाई देता है । छायावाद ने यदि काव्यगत शुष्कता को दूर किया तो शिल्पगत सूक्ष्म कल्पनाओं के मार्ग भी खोले । छायावाद को परिभाषा - छायावाद काव्यधारा अपनी पूर्वगत काव्य-धाराओं से एक और नया कदम लेकर आई । भारतेन्दुयुगीन, द्विवेदीयुगीन कविता की नैतिकता घोर उपदेशात्मक प्रवृत्ति इतनी वढी कि लोग उससे ऊब उठे और उनके मन ही मन में बाह्य की पेक्षा प्रान्तरिक अभिव्यक्ति की भावना जागृत हुई । बाह्य की तर अभिव्यक्ति को इतना महत्व देने वाली धारा काव्य में छायावाद नामसे अभिहित को गई । प्रथम महायुद्ध के उपरान्त जीवन में एक खोखलापन और निस्सारपन या गया था । पश्चिम के स्वतंत्र विचारों के सम्पर्क से राजनीति और सामाजिक बंधनों के प्रति असंतोष की भावना मधुर उन्माद के साथ उठ रही थी, भले ही उसके तोड़ने का निश्चित विधान अभी तक मन में नहीं आ रहा था । राजनीति में ब्रिटिश साम्राज्य की प्रचल सत्ता और समाज में सुधारवाद को दृढ़ नैतिकता, असंतोष व विद्रोह की इन भावनाओं को वहिमुखी अभिव्यक्ति का अवसर नहीं दे रही थी । छायावाद में प्रारम्भ से ही जीवन की वास्तविकता और निकटता के प्रति एक उपेक्षा एक विमुखता का भाव मिलता है । नये विचारों से प्रेरित कवि की भावनाएं धीरे-धीरे अभिव्यक्ति के लिए छटपटा रही थीं । डाशून्य नगेन्द्र ने लिखा है कि "नैतिकता और उपदेशात्मकता के प्रति विद्रोह लेकर जन्मी भावनाएं अन्तमुखी होकर धीरे-धीरे