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हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष राजेन्द्र राणा ने सराहकड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वह सराहकड़ में उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन का लोकार्पण करने के लिये आये हुए थे.
राणा ने कहाकि प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े चार साल के दौरान करोड़ों रूपए स्वास्थ्य सुविधाओं के आधारभूत ढांचे के विकास के लिये खर्चा किये हैं. हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 2 हजार पैरा मैडिकल स्टाफ के पदों को स्वीकृति दी है.
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही सराहकड़ पंचायत में विभिन्न स्थानों पर 11 हैंडपम्प लगाए हैं. जिससे लोगों की पेयजल समस्या काफी हद तक दूर हुई है. इसके अलावा बीड़-बगेहड़ा में 15 करोड़ रूपए की लागत से एक बड़ी पेयजल योजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. इस योजना के पूर्ण हो जाने से चमियाणा, पटलांदर, सहित कई पंचायतों के समस्त गांवों को समुचित मात्रा में पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी और इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा.
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हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष राजेन्द्र राणा ने सराहकड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वह सराहकड़ में उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन का लोकार्पण करने के लिये आये हुए थे. राणा ने कहाकि प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े चार साल के दौरान करोड़ों रूपए स्वास्थ्य सुविधाओं के आधारभूत ढांचे के विकास के लिये खर्चा किये हैं. हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने दो हजार पैरा मैडिकल स्टाफ के पदों को स्वीकृति दी है. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही सराहकड़ पंचायत में विभिन्न स्थानों पर ग्यारह हैंडपम्प लगाए हैं. जिससे लोगों की पेयजल समस्या काफी हद तक दूर हुई है. इसके अलावा बीड़-बगेहड़ा में पंद्रह करोड़ रूपए की लागत से एक बड़ी पेयजल योजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. इस योजना के पूर्ण हो जाने से चमियाणा, पटलांदर, सहित कई पंचायतों के समस्त गांवों को समुचित मात्रा में पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी और इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा.
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'थार सबके ऊपर चढ़ाते हुए जा रही थी, हम पीछे बैठे थे'. . . लखीमपुर के 'चश्मदीद' ने बताया एक और 'सच'
लखीमपुर खीरी कांड के एक और चश्मदीद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स से पुलिस के लोग पूछताछ कर रहे हैं और वह बता रहा है कि 3 अक्टूबर के रोज तिकुनिया में क्या हुआ था।
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'थार सबके ऊपर चढ़ाते हुए जा रही थी, हम पीछे बैठे थे'. . . लखीमपुर के 'चश्मदीद' ने बताया एक और 'सच' लखीमपुर खीरी कांड के एक और चश्मदीद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स से पुलिस के लोग पूछताछ कर रहे हैं और वह बता रहा है कि तीन अक्टूबर के रोज तिकुनिया में क्या हुआ था।
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Dhanbad: विधानसभा अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति ने जिले में चल रही योजनाओं की धीमी रफ्तर पर नाराजगी जताई है. शुकर्वार 19 मई को लेकर सर्किट हाउस में समिति के सदस्य समीर कुमार महंती ने वरीय अधिकारियों के साथ बैठक में ग्रामीण विकास विभाग, कृषि व पशुपालन, श्रम नियोजन, सहकारिता, प्रदूषण नियंत्रण, स्कूली शिक्षा, खनन, नगर निगम, सड़क, जल संसाधन, स्वास्थ्य, विद्युत, पंचायती राज, खेलकूद, उद्योग, समाज कल्याण, भूमि संरक्षण, विशेष प्रमंडल आदि विभागों की योजनाओं की जानकारी ली.
उन्होंने कुछ योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई. कई योजनाओं में गड़बड़ी भी पकड़ी व अधिकारियों को उसमें सुधार लाने का निर्देश दिया. कहा कि अगली बैठक में अपने विषय की पूरी तैयारी कर के आएं, ताकि प्रश्न पूछे जाने पर उसका सही सही जवाब मिल सके. उन्होंने समिति को लिखित में सटीक जवाब उपलब्ध कराने की बात भी कही. बैठक में डीआरडीए निदेशक मुमताज अली अहमद, जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार सिंह, नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार, कार्यपालक दंडाधिकारी अंशु पांडेय, सहकारिता पदाधिकारी कुमार झा, खनन पदाधिकारी मिहिर सलकर, डीएसपी मुख्यालय-2 अरविंद कुमार सिंह व प्रखंड विकास पदाधिकारी मौजूद थे.
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Dhanbad: विधानसभा अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति ने जिले में चल रही योजनाओं की धीमी रफ्तर पर नाराजगी जताई है. शुकर्वार उन्नीस मई को लेकर सर्किट हाउस में समिति के सदस्य समीर कुमार महंती ने वरीय अधिकारियों के साथ बैठक में ग्रामीण विकास विभाग, कृषि व पशुपालन, श्रम नियोजन, सहकारिता, प्रदूषण नियंत्रण, स्कूली शिक्षा, खनन, नगर निगम, सड़क, जल संसाधन, स्वास्थ्य, विद्युत, पंचायती राज, खेलकूद, उद्योग, समाज कल्याण, भूमि संरक्षण, विशेष प्रमंडल आदि विभागों की योजनाओं की जानकारी ली. उन्होंने कुछ योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई. कई योजनाओं में गड़बड़ी भी पकड़ी व अधिकारियों को उसमें सुधार लाने का निर्देश दिया. कहा कि अगली बैठक में अपने विषय की पूरी तैयारी कर के आएं, ताकि प्रश्न पूछे जाने पर उसका सही सही जवाब मिल सके. उन्होंने समिति को लिखित में सटीक जवाब उपलब्ध कराने की बात भी कही. बैठक में डीआरडीए निदेशक मुमताज अली अहमद, जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार सिंह, नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार, कार्यपालक दंडाधिकारी अंशु पांडेय, सहकारिता पदाधिकारी कुमार झा, खनन पदाधिकारी मिहिर सलकर, डीएसपी मुख्यालय-दो अरविंद कुमार सिंह व प्रखंड विकास पदाधिकारी मौजूद थे.
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कांग्रेस वर्किंग कमिटी की एक और बैठक बिना सोनिया-राहुल के इस्तीफे के खत्म हो गई. बात तो हुई थी कि मीटिंग में सोनिया और राहुल दोनों ही इस्तीफा देने को तैयार थे, लेकिन फिर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोर्चा संभाल लिया और जी 23 के नेताओं की वो मांग की सोनिया-राहुल इस्तीफा दें, फिर से धरी की धरी रह गई. हालांकि इस बैठक में सोनिया ने माना कि पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह पर फैसला लेने में कांग्रेस से गलती हुई, लेकिन अब इस गलती की भरपाई कैसे होगी, ये कोई नहीं बता रहा. आखिर ऐसी चुनौतियों के बीच कांग्रेस का क्या होगा और आखिर कौन है वो नेता, जो डूबती कांग्रेस की नैया को पार लगाएगा, समझने की कोशिश कर रहे हैं कार्यकारी संपादक विजय विद्रोही.
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कांग्रेस वर्किंग कमिटी की एक और बैठक बिना सोनिया-राहुल के इस्तीफे के खत्म हो गई. बात तो हुई थी कि मीटिंग में सोनिया और राहुल दोनों ही इस्तीफा देने को तैयार थे, लेकिन फिर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोर्चा संभाल लिया और जी तेईस के नेताओं की वो मांग की सोनिया-राहुल इस्तीफा दें, फिर से धरी की धरी रह गई. हालांकि इस बैठक में सोनिया ने माना कि पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह पर फैसला लेने में कांग्रेस से गलती हुई, लेकिन अब इस गलती की भरपाई कैसे होगी, ये कोई नहीं बता रहा. आखिर ऐसी चुनौतियों के बीच कांग्रेस का क्या होगा और आखिर कौन है वो नेता, जो डूबती कांग्रेस की नैया को पार लगाएगा, समझने की कोशिश कर रहे हैं कार्यकारी संपादक विजय विद्रोही.
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पुड्डुचेरी, कांग्रेस ने केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लोक निर्माण मंत्री ए नमशिवायम को सोमवार को अस्थायी रूप से पार्टी से निलंबित कर दिया है।
पुड्डुचेरी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ए . वी. सुब्रमण्यन ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि नमशिवायम को 'पार्टी विरोधी' गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि नमशिवायम ने कांग्रेस पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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पुड्डुचेरी, कांग्रेस ने केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लोक निर्माण मंत्री ए नमशिवायम को सोमवार को अस्थायी रूप से पार्टी से निलंबित कर दिया है। पुड्डुचेरी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ए . वी. सुब्रमण्यन ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि नमशिवायम को 'पार्टी विरोधी' गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नमशिवायम ने कांग्रेस पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से जो वीडियो सामने आया है। उसमें यूपी में हड़काम मचा दिया है। बता दे कि यहां एक स्कूल में महिला टीचर ने एक मुस्लिम छात्र को उनके ही क्लास के अन्य छात्रों से पिटवाया है। हैरानी की बात यह है कि महिला टीचर ने वकायदा अन्य छात्रों को आदेश दिया कि वह आए और छात्र को थप्पड़ मारे।
बता दे की महिला टीचर का नाम ट्रेक्ता त्यागी है जिस स्कूल से यह मामला सामने आया है। उसका नाम नेहा पब्लिक स्कूल अब इस मामले में जमकर सियासत हो रही है। स्पीच राष्ट्रीय लोकदल जैन चौधरी ने पीड़ित छात्रा के पिता से बातचीत की है।
राष्ट्रीय लोकदल के के जैन चौधरी ने पीढ़ी छात्र के पिता इरशाद से बातचीत की खोज जयंती ने ट्वीट कर इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा मैंने अभी सुबाहपुर गांव में इरशाद जी से बातचीत की और बहुत साहसी और उन्हें विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा।
इसके बाद जयंत ने लिखा मैंने अपनी तरफ से उनसे कहा है कि वह खुद वारदात को भूल जाए क्योंकि हमारा समाज ऐसा नहीं है।
दर्शन यह पूरा मामला मुजफ्फरनगर के दिल्ली देहरादून हाईवे पर स्थित मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खोबापुर गांव से सामने आया है। यहां नेहा पब्लिक स्कूल का नाम संचालित होता है यह वीडियो इसी स्कूल का बताया जा रहा है।
वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला टीचर कुर्सी पर बैठी है। बताया जा रहा है। महिला का नाम दृष्टि त्यागी यह स्कूल की टीचर होने के साथ-साथ इस स्कूल की प्रबंधक भी है। वीडियो में यह टीचर मुस्लिम समाज के एक छात्रा को अन्य छात्रों से थप्पड़ लगवा रही है।
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नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से जो वीडियो सामने आया है। उसमें यूपी में हड़काम मचा दिया है। बता दे कि यहां एक स्कूल में महिला टीचर ने एक मुस्लिम छात्र को उनके ही क्लास के अन्य छात्रों से पिटवाया है। हैरानी की बात यह है कि महिला टीचर ने वकायदा अन्य छात्रों को आदेश दिया कि वह आए और छात्र को थप्पड़ मारे। बता दे की महिला टीचर का नाम ट्रेक्ता त्यागी है जिस स्कूल से यह मामला सामने आया है। उसका नाम नेहा पब्लिक स्कूल अब इस मामले में जमकर सियासत हो रही है। स्पीच राष्ट्रीय लोकदल जैन चौधरी ने पीड़ित छात्रा के पिता से बातचीत की है। राष्ट्रीय लोकदल के के जैन चौधरी ने पीढ़ी छात्र के पिता इरशाद से बातचीत की खोज जयंती ने ट्वीट कर इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा मैंने अभी सुबाहपुर गांव में इरशाद जी से बातचीत की और बहुत साहसी और उन्हें विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा। इसके बाद जयंत ने लिखा मैंने अपनी तरफ से उनसे कहा है कि वह खुद वारदात को भूल जाए क्योंकि हमारा समाज ऐसा नहीं है। दर्शन यह पूरा मामला मुजफ्फरनगर के दिल्ली देहरादून हाईवे पर स्थित मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खोबापुर गांव से सामने आया है। यहां नेहा पब्लिक स्कूल का नाम संचालित होता है यह वीडियो इसी स्कूल का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला टीचर कुर्सी पर बैठी है। बताया जा रहा है। महिला का नाम दृष्टि त्यागी यह स्कूल की टीचर होने के साथ-साथ इस स्कूल की प्रबंधक भी है। वीडियो में यह टीचर मुस्लिम समाज के एक छात्रा को अन्य छात्रों से थप्पड़ लगवा रही है।
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उद्योगपति गौतम अदाणी के जन्मदिन पर उनके कारोबारी समूह ने इस साल होने वाले एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप के लिए 'जीतेंगे हम' अभियान शुरू किया है।
समूह ने इसके लिए कपिल देव समेत 1983 के क्रिकेट विश्वकप विजेता टीम के सदस्यों को भी आमंत्रित किया। अदाणी शनिवार को 61 वर्ष के हो गए।
समूह ने उनके जन्मदिन को 'अदाणी दिवस' के रूप में मनाया। यहां अहमदाबाद में अदाणी समूह के मुख्यालय पहुंचे 1983 विश्वकप विजेता टीम के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा, तत्कालीन उप-कप्तान मोहिंदर अमरनाथ, विकेट-कीपर सैयद किरमानी, रोजन बिन्नी, मदन लाल, कृष्णामचारी श्रीकांत और दिलीप वेंगसरकर भी थे।
आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2023 का आयोजन भारत में अक्टूबर-नवंबर के दौरान होगा।
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उद्योगपति गौतम अदाणी के जन्मदिन पर उनके कारोबारी समूह ने इस साल होने वाले एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप के लिए 'जीतेंगे हम' अभियान शुरू किया है। समूह ने इसके लिए कपिल देव समेत एक हज़ार नौ सौ तिरासी के क्रिकेट विश्वकप विजेता टीम के सदस्यों को भी आमंत्रित किया। अदाणी शनिवार को इकसठ वर्ष के हो गए। समूह ने उनके जन्मदिन को 'अदाणी दिवस' के रूप में मनाया। यहां अहमदाबाद में अदाणी समूह के मुख्यालय पहुंचे एक हज़ार नौ सौ तिरासी विश्वकप विजेता टीम के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा, तत्कालीन उप-कप्तान मोहिंदर अमरनाथ, विकेट-कीपर सैयद किरमानी, रोजन बिन्नी, मदन लाल, कृष्णामचारी श्रीकांत और दिलीप वेंगसरकर भी थे। आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप दो हज़ार तेईस का आयोजन भारत में अक्टूबर-नवंबर के दौरान होगा।
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प्रश्न :
उत्तर :
WHO के अनुसार उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियाँ (NTD), वे बीमारियाँ होती हैं, जो उष्ण व उपोष्ण कटिबंध में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में निवास करने वाले गरीब लोगों को प्रभावित करती हैं। जापानी इंसेफलाइटिस, डेंगु बुखार, कुष्ठ रोग, क्लेमाइडिया, बुरुलाई अल्सर, चैगास बीमारी आदि NTD के उदाहरण हैं। राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर इन बीमारियों का प्रभाव इतना भयंकर होता है कि इन्हें गरीबी के चिरस्थायीकरण के लिये उत्तरदायी माना जाता है।
- जापानी मस्तिष्क ज्वर (इंसेफलाइटिस) एक प्राणघातक संक्रामक बीमारी है, जो फ्लैविवायरस के संक्रमण से होती है। सूअर तथा जंगली पक्षी मस्तिष्क ज्वर के विषाणु के स्रोत होते हैं। क्यूलेक्स मच्छर इस बीमारी का वाहक होता है।
- जापानी इंसेफलाइटिस से प्रभावित क्षेत्रों में भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिसा, पश्चिम-बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा तथा आंध्र प्रदेश राज्य आते हैं। वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तथा कुशीनगर ज़िले इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। इस बीमारी का प्रकोप जुलाई से नवम्बर माह के अंत तक जारी रहता है। वयस्कों की तुलना में बच्चे इस बीमारी के ज़्यादा शिकार होते हैं।
- इस बीमारी के वाहक क्यूलेक्स मच्छर आमतौर पर स्थिर जलाशयों, जैसे- पोखर, तालाब, धान के खेतों में प्रजनन करते हैं।
- हरित क्रांति के फलस्वरूप सिंचाई-सुविधाओं के विस्तार, धान की फसल के क्षेत्रफल में वृद्धि तथा सिंचाई जल के कुप्रबंधन के कारण होने वाले जल-जमाव और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती उष्णता इस बीमारी के पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रकोप के कारण हैं।
- इन इलाकों की मानव बस्तियों में होने वाले सूअर-पालन की भी इस बीमारी के विकास और संचार में भूमिका होती है। इन क्षेत्रों में झीलों व दलदली भूमि की बाहुल्यता इसके विषाणुओं से ग्रस्त प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थलों का काम करती हैं।
- इस बीमारी के प्रकोप वाले क्षेत्रों में शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- मच्छरों के लार्वा का भक्षण करने वाली इटली से आयातित "गैम्बूसिया एफिनिस" प्रजाति की मछली को झीलों, तालाबों, नहरों, धान के खेतों में वृहद् पैमाने पर छोड़ना चाहिये।
- "पिस्टिया लैंसीओलेटा व साल्विनिया मोलेस्टा" नामक जलीय पौधों की प्रजातियाँ, जो क्यूलेक्स मच्छरों के प्रजनन में सहायक होती हैं, को वर्षा ऋतु के दौरान जलाशयों से निकालकर नष्ट कर देना चाहिये।
- सूअर पालन मानव बस्तियों से दूर किया जाए तथा इन बस्तियों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।
- मानव बस्तियों के आसपास जल-जमाव को हर हाल में रोका जाना चाहिये। खेतों में सिंचाई के दौरान जल प्रबंधन व नहरों की गाद की सफाई से जल-जमाव की स्थिति को रोका जा सकता है।
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- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : WHO के अनुसार उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियाँ , वे बीमारियाँ होती हैं, जो उष्ण व उपोष्ण कटिबंध में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में निवास करने वाले गरीब लोगों को प्रभावित करती हैं। जापानी इंसेफलाइटिस, डेंगु बुखार, कुष्ठ रोग, क्लेमाइडिया, बुरुलाई अल्सर, चैगास बीमारी आदि NTD के उदाहरण हैं। राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर इन बीमारियों का प्रभाव इतना भयंकर होता है कि इन्हें गरीबी के चिरस्थायीकरण के लिये उत्तरदायी माना जाता है। - जापानी मस्तिष्क ज्वर एक प्राणघातक संक्रामक बीमारी है, जो फ्लैविवायरस के संक्रमण से होती है। सूअर तथा जंगली पक्षी मस्तिष्क ज्वर के विषाणु के स्रोत होते हैं। क्यूलेक्स मच्छर इस बीमारी का वाहक होता है। - जापानी इंसेफलाइटिस से प्रभावित क्षेत्रों में भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिसा, पश्चिम-बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा तथा आंध्र प्रदेश राज्य आते हैं। वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। - पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तथा कुशीनगर ज़िले इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। इस बीमारी का प्रकोप जुलाई से नवम्बर माह के अंत तक जारी रहता है। वयस्कों की तुलना में बच्चे इस बीमारी के ज़्यादा शिकार होते हैं। - इस बीमारी के वाहक क्यूलेक्स मच्छर आमतौर पर स्थिर जलाशयों, जैसे- पोखर, तालाब, धान के खेतों में प्रजनन करते हैं। - हरित क्रांति के फलस्वरूप सिंचाई-सुविधाओं के विस्तार, धान की फसल के क्षेत्रफल में वृद्धि तथा सिंचाई जल के कुप्रबंधन के कारण होने वाले जल-जमाव और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती उष्णता इस बीमारी के पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रकोप के कारण हैं। - इन इलाकों की मानव बस्तियों में होने वाले सूअर-पालन की भी इस बीमारी के विकास और संचार में भूमिका होती है। इन क्षेत्रों में झीलों व दलदली भूमि की बाहुल्यता इसके विषाणुओं से ग्रस्त प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थलों का काम करती हैं। - इस बीमारी के प्रकोप वाले क्षेत्रों में शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। - मच्छरों के लार्वा का भक्षण करने वाली इटली से आयातित "गैम्बूसिया एफिनिस" प्रजाति की मछली को झीलों, तालाबों, नहरों, धान के खेतों में वृहद् पैमाने पर छोड़ना चाहिये। - "पिस्टिया लैंसीओलेटा व साल्विनिया मोलेस्टा" नामक जलीय पौधों की प्रजातियाँ, जो क्यूलेक्स मच्छरों के प्रजनन में सहायक होती हैं, को वर्षा ऋतु के दौरान जलाशयों से निकालकर नष्ट कर देना चाहिये। - सूअर पालन मानव बस्तियों से दूर किया जाए तथा इन बस्तियों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। - मानव बस्तियों के आसपास जल-जमाव को हर हाल में रोका जाना चाहिये। खेतों में सिंचाई के दौरान जल प्रबंधन व नहरों की गाद की सफाई से जल-जमाव की स्थिति को रोका जा सकता है।
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जब सवेरा हुआ और वस्ती से बाहरका आना जाना न हो सकनेके कारण लोग दुःखी होने लगे, तत्र राजाने रातके प्नको ' याद करके शहरकी सब स्त्रियोंको बुलवाया और हरएकसे निवाड खुलवाये, पर किसीसे न खुले । अन्तमें नीलीबाई पांवका अंगुठा लगनेसे ही सब दरवाजे खुल गये, यह देखकर राजाने और सत्र लोगोंने बाई नीलीकी बहुत बड़ाई की और बहुत सम्मान किया, जिससे पवित्र शीलवती बड़ी महीमा प्रसिद्ध हुई ।
इस सबको चाहिये कि नीलीबाई के समान पवित्र शोल धर्मकी पालना करें ।
(१३) जयकुमारकी कहानी । जिस समयकी यह कहानी है, उस समय हस्तनापुर में राज सोमं राज्य करते थे। उनके पुत्रका नाम जयकुमार था । वह बडा संतोषी और धर्मात्मा था। उसकी स्त्रीका नाम सुलोचना था।
एक दिन राजपुत्र जयकुमार और उनकी स्त्री सुलोचनाने एक विद्यापर और विद्याघरीको विमान में बैठकर जाते देखा, सो उन्हें पूर्वभवका स्मरण हो आया । इससे वे दोनों अर्थात् जयकुमार, सुलोचना, बेसुध हो गये। थोड़ी देरमें जम चे सचेत हुए तत्र पूर्व जन्मकी साधी हुई विद्याएं उनके पास आई और प्रगट होकर कहने लगीं कि, आप जो आज्ञा देवेंगे सो ही हम करेंगीं ।
जब इन्हें पूर्व जन्मकी विद्याएं सिद्ध हो गई तो वे दोनों स्त्री पुरुष, कैलाशगिरिकी वन्दनाको गये। वहां राजा भरतके वन१ जयकुमार और सुलोचना भी पूर्व भव में विद्याधर विद्याधरी थे ।
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जब सवेरा हुआ और वस्ती से बाहरका आना जाना न हो सकनेके कारण लोग दुःखी होने लगे, तत्र राजाने रातके प्नको ' याद करके शहरकी सब स्त्रियोंको बुलवाया और हरएकसे निवाड खुलवाये, पर किसीसे न खुले । अन्तमें नीलीबाई पांवका अंगुठा लगनेसे ही सब दरवाजे खुल गये, यह देखकर राजाने और सत्र लोगोंने बाई नीलीकी बहुत बड़ाई की और बहुत सम्मान किया, जिससे पवित्र शीलवती बड़ी महीमा प्रसिद्ध हुई । इस सबको चाहिये कि नीलीबाई के समान पवित्र शोल धर्मकी पालना करें । जयकुमारकी कहानी । जिस समयकी यह कहानी है, उस समय हस्तनापुर में राज सोमं राज्य करते थे। उनके पुत्रका नाम जयकुमार था । वह बडा संतोषी और धर्मात्मा था। उसकी स्त्रीका नाम सुलोचना था। एक दिन राजपुत्र जयकुमार और उनकी स्त्री सुलोचनाने एक विद्यापर और विद्याघरीको विमान में बैठकर जाते देखा, सो उन्हें पूर्वभवका स्मरण हो आया । इससे वे दोनों अर्थात् जयकुमार, सुलोचना, बेसुध हो गये। थोड़ी देरमें जम चे सचेत हुए तत्र पूर्व जन्मकी साधी हुई विद्याएं उनके पास आई और प्रगट होकर कहने लगीं कि, आप जो आज्ञा देवेंगे सो ही हम करेंगीं । जब इन्हें पूर्व जन्मकी विद्याएं सिद्ध हो गई तो वे दोनों स्त्री पुरुष, कैलाशगिरिकी वन्दनाको गये। वहां राजा भरतके वनएक जयकुमार और सुलोचना भी पूर्व भव में विद्याधर विद्याधरी थे ।
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नोटिस मिलने के बाद सारदा चिटफंड (Sarada Chit fund) मामले के आरोपी कुणाल घोष (kunal Ghosh) ने कहा है कि वह जांच में सहयोग करेंगे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) के मद्देनजर टीएमसी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों (Central Agencies) ने शिकंचा कसना शुरू कर दिया है. अब टीएमसी नेता कुणाल घोष (Kunal Ghosh) को प्रर्वतन निदेशालय (ED) ने नोटिस भेजा है. ईडी ने घोष को 2 मार्च यानी मंगलवार को पेश होने को कहा है. ईडी ने सारदा चिटफंड (Sarada Chit Fund) मामले में लिप्तता को लेकर कुणाल घोष को तलब किया है.
नोटिस मिलने के बाद कुणाल घोष ने कहा है कि वो जांच में सहयोग करेंगे. उन्होंने कहा कि वह सारदा मामले के प्रमुख सुदीप्त सेन (Sudipta Sen) के पत्र के साथ ईडी कार्यालय में जाएंगे और सुदीप्त सेन ने जिन लोगों को अपने पत्र में पैसे देने का आरोप लगाया था. उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करेंगे. बता दें कि सारदा मामले में कुणाल घोष को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन फिलहाल वह जमानत पर हैं.
सारदा चिटफंड में करोड़ों रुपए का लगा था चूना सारदा चिटफंड घोटाले की शुरुआत वर्ष 2000 में शुरू हुई. सुदीप्त सेन ने इस ग्रुप की स्थापना की थी. सुदीप्त ने इस ग्रुप के तहत 4-5 प्रमुख कंपनियों के अलावा 239 कंपनियां बनाईं. इन कंपनियों ने तीन तरह की स्कीमें चलाईं जिसके तहत ये फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट स्कीम थी. इन स्कीमों के जरिए जमाकर्ताओं के करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया था. फिलहाल सुदीप्त सेन और उनकी सहयोगी देवजानी जेल में हैं. मामले की जांच सीबीआई के अधीन है.
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नोटिस मिलने के बाद सारदा चिटफंड मामले के आरोपी कुणाल घोष ने कहा है कि वह जांच में सहयोग करेंगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर टीएमसी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों ने शिकंचा कसना शुरू कर दिया है. अब टीएमसी नेता कुणाल घोष को प्रर्वतन निदेशालय ने नोटिस भेजा है. ईडी ने घोष को दो मार्च यानी मंगलवार को पेश होने को कहा है. ईडी ने सारदा चिटफंड मामले में लिप्तता को लेकर कुणाल घोष को तलब किया है. नोटिस मिलने के बाद कुणाल घोष ने कहा है कि वो जांच में सहयोग करेंगे. उन्होंने कहा कि वह सारदा मामले के प्रमुख सुदीप्त सेन के पत्र के साथ ईडी कार्यालय में जाएंगे और सुदीप्त सेन ने जिन लोगों को अपने पत्र में पैसे देने का आरोप लगाया था. उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करेंगे. बता दें कि सारदा मामले में कुणाल घोष को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन फिलहाल वह जमानत पर हैं. सारदा चिटफंड में करोड़ों रुपए का लगा था चूना सारदा चिटफंड घोटाले की शुरुआत वर्ष दो हज़ार में शुरू हुई. सुदीप्त सेन ने इस ग्रुप की स्थापना की थी. सुदीप्त ने इस ग्रुप के तहत चार-पाँच प्रमुख कंपनियों के अलावा दो सौ उनतालीस कंपनियां बनाईं. इन कंपनियों ने तीन तरह की स्कीमें चलाईं जिसके तहत ये फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट स्कीम थी. इन स्कीमों के जरिए जमाकर्ताओं के करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया था. फिलहाल सुदीप्त सेन और उनकी सहयोगी देवजानी जेल में हैं. मामले की जांच सीबीआई के अधीन है. यह भी पढ़ें- West Bengal Chunav दो हज़ार इक्कीस: योगी आदित्यनाथ ममता बनर्जी के खिलाफ मालदा में भरेंगे हुंकार, जानें, क्या हैं प्लान?
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आंतरिक प्रकोष्ठों के प्रमुखों की पहली बैठक हुई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और एडीजीपी ने उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं।
तिरुवनंतपुरमः केरल में पुलिस बल और संगठित अपराधियों में संदिग्ध तत्वों के बीच मजबूत सांठगांठ की खतरनाक खबरों के बीच, अधिकारियों ने जांच बढ़ा दी है।
तदनुसार, प्रत्येक जिले में पुलिस के कामकाज पर दैनिक रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठों को पुनर्जीवित और पुनर्गठित किया गया है।
प्रत्येक जिले से पुलिस से संबंधित सभी मीडिया रिपोर्ट एक ही दिन में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस पर जांच के बाद एक विस्तृत अनुवर्ती रिपोर्ट बाद में दायर की जानी है।
विशेष इकाइयों के पुलिस अधीक्षक (एसपी), जो कानून और व्यवस्था के रखरखाव में शामिल नहीं हैं, जिला स्तर पर आंतरिक सतर्कता सेल का नेतृत्व करेंगे।
एसपी को हर दिन पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) को अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी होती है। दूसरे दिन आंतरिक प्रकोष्ठों के प्रमुखों की पहली बैठक हुई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और एडीजीपी ने उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं।
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आंतरिक प्रकोष्ठों के प्रमुखों की पहली बैठक हुई। पुलिस महानिदेशक और एडीजीपी ने उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं। तिरुवनंतपुरमः केरल में पुलिस बल और संगठित अपराधियों में संदिग्ध तत्वों के बीच मजबूत सांठगांठ की खतरनाक खबरों के बीच, अधिकारियों ने जांच बढ़ा दी है। तदनुसार, प्रत्येक जिले में पुलिस के कामकाज पर दैनिक रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठों को पुनर्जीवित और पुनर्गठित किया गया है। प्रत्येक जिले से पुलिस से संबंधित सभी मीडिया रिपोर्ट एक ही दिन में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस पर जांच के बाद एक विस्तृत अनुवर्ती रिपोर्ट बाद में दायर की जानी है। विशेष इकाइयों के पुलिस अधीक्षक , जो कानून और व्यवस्था के रखरखाव में शामिल नहीं हैं, जिला स्तर पर आंतरिक सतर्कता सेल का नेतृत्व करेंगे। एसपी को हर दिन पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी होती है। दूसरे दिन आंतरिक प्रकोष्ठों के प्रमुखों की पहली बैठक हुई। पुलिस महानिदेशक और एडीजीपी ने उन्हें जरूरी निर्देश दिए हैं।
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जगजीवन के मकान की ओर दौड़ा । इस समय जगजीवन और अग्निदत्त पांडेनिवास की ओर दौड़े चले जा रहे थे । दिवाकर तुरंत उनके पास पहुँच गया । पीछे से इसी मौके पर सहेंद्र, राजघर और नागदेव आ गए । यह असाधारण दौड़ देखकर वे भी अग्निदत्त के द्वार पर पहुँच गए ।
दिवाकर ने हाँफते-हाँफते अग्निदत्त से पूछा- "क्या बात है ? क्या किसी को से साँप ने काट खाया है ?' अग्निदत्त - "हाँ ।" दिवाकर - " किसको ?"
अग्निदत्त - "तारा को ।" दिवाकर - "कहाँ ? १
अग्निदत्त - "हाथ में, पहुँचे के ऊपर ।"
तारा बाहर से थोड़ी ही देर पहले आई थी । पौर के एक कोठे में से कुल सामान लेने गई । धूप में से आने के कारण आँखों में चकाचौध लगी हुई थी। ठीक तौर पर न देख सकी। सामान टटोलने के लिये हाथ डाला कि सौंप ने काट लाया ।
पौर में उस समय अग्निदत्त बैठा हुआ था । तारा ने चिल्लाकर कहा कि साँपने काट खाया । अग्निदत ने तुरंत कोठे में जाकर लकड़ी से साँप को मार डाला, क्योंकि वह अभी भागा नहीं था। बिलकुल काला और बड़ा साँप था । इसके पश्चात् तारा को वहीं थर-थर काँपते हुए लोहू-लुहान हाथ लिए छोड़कर वह जगजीवन वैद्य को लिवाने दौड़कर गया और दौड़ता हो लिवा लाया । यह प्रकट हो ही चुका है। दिवाकर इत्यादि भी साथ-ही-साथ आ गए थे ।
तारा कुछ तो घबराहट और कुछ दंश के कारण खड़ी न रह सकी। जिस समय जगजीवन इत्यादि पौर में आए, वह गिरी हुई मिली। श्रग्निदत्त की आँखों गए । बोला- "हाय मेरी बहन ! तारा ! तारा !" तारा ने क्षीण स्वर में कहा - "भैया !" पर वह रोई नहीं।
दिवाकर के चेहरे से भय और व्याकुलता टपकी पड़ती थी। परन्तु वह उत
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जगजीवन के मकान की ओर दौड़ा । इस समय जगजीवन और अग्निदत्त पांडेनिवास की ओर दौड़े चले जा रहे थे । दिवाकर तुरंत उनके पास पहुँच गया । पीछे से इसी मौके पर सहेंद्र, राजघर और नागदेव आ गए । यह असाधारण दौड़ देखकर वे भी अग्निदत्त के द्वार पर पहुँच गए । दिवाकर ने हाँफते-हाँफते अग्निदत्त से पूछा- "क्या बात है ? क्या किसी को से साँप ने काट खाया है ?' अग्निदत्त - "हाँ ।" दिवाकर - " किसको ?" अग्निदत्त - "तारा को ।" दिवाकर - "कहाँ ? एक अग्निदत्त - "हाथ में, पहुँचे के ऊपर ।" तारा बाहर से थोड़ी ही देर पहले आई थी । पौर के एक कोठे में से कुल सामान लेने गई । धूप में से आने के कारण आँखों में चकाचौध लगी हुई थी। ठीक तौर पर न देख सकी। सामान टटोलने के लिये हाथ डाला कि सौंप ने काट लाया । पौर में उस समय अग्निदत्त बैठा हुआ था । तारा ने चिल्लाकर कहा कि साँपने काट खाया । अग्निदत ने तुरंत कोठे में जाकर लकड़ी से साँप को मार डाला, क्योंकि वह अभी भागा नहीं था। बिलकुल काला और बड़ा साँप था । इसके पश्चात् तारा को वहीं थर-थर काँपते हुए लोहू-लुहान हाथ लिए छोड़कर वह जगजीवन वैद्य को लिवाने दौड़कर गया और दौड़ता हो लिवा लाया । यह प्रकट हो ही चुका है। दिवाकर इत्यादि भी साथ-ही-साथ आ गए थे । तारा कुछ तो घबराहट और कुछ दंश के कारण खड़ी न रह सकी। जिस समय जगजीवन इत्यादि पौर में आए, वह गिरी हुई मिली। श्रग्निदत्त की आँखों गए । बोला- "हाय मेरी बहन ! तारा ! तारा !" तारा ने क्षीण स्वर में कहा - "भैया !" पर वह रोई नहीं। दिवाकर के चेहरे से भय और व्याकुलता टपकी पड़ती थी। परन्तु वह उत
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की सहायता से ही १४ मई १९४८६० कोलस्तीन को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई । एक बार पुनः यहूदियों को अपना देश प्राप्त हुआ। परन्तु आज मी यहूदी तथा अरब देशों के मध्य तनाव है।
यहूदी जाति ने न तो किसी वैभवशाली साम्राज्य का ही निर्माण किया या और न कला तथा विज्ञान के क्षेत्र में ही अद्भुत वीशल का प्रदर्शन किया । परन्तु फिर भी विश्व की प्रमुख सभ्यताओं में अपना स्थान बना लिया। इस रहस्य का कारण उनका धार्मिक चिन्तन था। एकेश्वरवाद की भूतन भावना वा प्रदर्शन था । धार्मिक सिद्धान्तों को लिपिवद्ध पुस्तक में संग्रहीत करना था। इस पुस्तक को "ओल्ड टेस्टामैन्ट" या पुरानी बाइबल भी कहते हैं। इन सिद्धान्तो का विकास बेबीलोन में कैद के समय में हुआ था। शायद इसीलिए पुस्तक का नाम भी बाइबल रखा गया हो । यहूदी जाति अपने धार्मिक चिन्तन के कारण हो महान् बनी थी। परन्तु उनके धार्मिक सिद्धान्त अचानक ही परिपक्व नहीं हो पाये थे। धीरे धीरे उनके धर्म का विकास हुआ। प्रारम्भ में जब वे रत्र के मरुस्थल में भ्रमणशील जीवन व्यतीत करते थे, उस समय, अन्य जातियों की भाति वे भी प्राकृतिक शक्तियों, जानवरों तथा वृक्षों की पूजा किया करते थे। जुड़िया में बस जाने के उपरान्त भी यह परम्परा जारी रही। कालान्तर में यहूदी राज्य के विभाजन के साथ ही साथ यहूदी धर्म में भी परिवर्तन हुआ । नव निर्मित इजरायल राज्य के निवासियों ने धर्म के मौतिकवादी तत्व को ग्रहण किया परन्तु जुड़िया प्राचीन परम्परा को ही मानता रहा।
यहूदी धर्म का वास्तविक विकास होवा' की उपासना से होता है। जेहोरा उनका इष्टदेव या प्रारम्भ में यहूदी लोग अन्य देवताश्रों की मी उपासना करते थे । 'तनुज' उनके चरागाहू का देवता था। इसी प्रकार अन्य देवता भी थे। "जेवा" की उत्पत्ति के पश्चात् यहूदी धर्म में एकेश्वरवाद का प्रादुर्भाव हुआ। अन्य देवताओं की उपामना बन्द कर दी गई । प्रारम्भ में वे जेहोवा को युद्ध का देवता मानने थे तथा मानवीय रूप में उनकी की जाती थी। परन्तु धीरे धीरे उनके धार्मिक नेताथी (वैगम्बरों) के द्वारा जेद्दोपा के एवं शक्ति की स्थापना की गई और जेहोवा मई व्यापक गई शक्तिमान,
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की सहायता से ही चौदह मई एक लाख चौरानवे हज़ार आठ सौ साठ कोलस्तीन को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई । एक बार पुनः यहूदियों को अपना देश प्राप्त हुआ। परन्तु आज मी यहूदी तथा अरब देशों के मध्य तनाव है। यहूदी जाति ने न तो किसी वैभवशाली साम्राज्य का ही निर्माण किया या और न कला तथा विज्ञान के क्षेत्र में ही अद्भुत वीशल का प्रदर्शन किया । परन्तु फिर भी विश्व की प्रमुख सभ्यताओं में अपना स्थान बना लिया। इस रहस्य का कारण उनका धार्मिक चिन्तन था। एकेश्वरवाद की भूतन भावना वा प्रदर्शन था । धार्मिक सिद्धान्तों को लिपिवद्ध पुस्तक में संग्रहीत करना था। इस पुस्तक को "ओल्ड टेस्टामैन्ट" या पुरानी बाइबल भी कहते हैं। इन सिद्धान्तो का विकास बेबीलोन में कैद के समय में हुआ था। शायद इसीलिए पुस्तक का नाम भी बाइबल रखा गया हो । यहूदी जाति अपने धार्मिक चिन्तन के कारण हो महान् बनी थी। परन्तु उनके धार्मिक सिद्धान्त अचानक ही परिपक्व नहीं हो पाये थे। धीरे धीरे उनके धर्म का विकास हुआ। प्रारम्भ में जब वे रत्र के मरुस्थल में भ्रमणशील जीवन व्यतीत करते थे, उस समय, अन्य जातियों की भाति वे भी प्राकृतिक शक्तियों, जानवरों तथा वृक्षों की पूजा किया करते थे। जुड़िया में बस जाने के उपरान्त भी यह परम्परा जारी रही। कालान्तर में यहूदी राज्य के विभाजन के साथ ही साथ यहूदी धर्म में भी परिवर्तन हुआ । नव निर्मित इजरायल राज्य के निवासियों ने धर्म के मौतिकवादी तत्व को ग्रहण किया परन्तु जुड़िया प्राचीन परम्परा को ही मानता रहा। यहूदी धर्म का वास्तविक विकास होवा' की उपासना से होता है। जेहोरा उनका इष्टदेव या प्रारम्भ में यहूदी लोग अन्य देवताश्रों की मी उपासना करते थे । 'तनुज' उनके चरागाहू का देवता था। इसी प्रकार अन्य देवता भी थे। "जेवा" की उत्पत्ति के पश्चात् यहूदी धर्म में एकेश्वरवाद का प्रादुर्भाव हुआ। अन्य देवताओं की उपामना बन्द कर दी गई । प्रारम्भ में वे जेहोवा को युद्ध का देवता मानने थे तथा मानवीय रूप में उनकी की जाती थी। परन्तु धीरे धीरे उनके धार्मिक नेताथी के द्वारा जेद्दोपा के एवं शक्ति की स्थापना की गई और जेहोवा मई व्यापक गई शक्तिमान,
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
सड़क / . / .
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । सड़क / . / . ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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Tata Nexon Electric Coupe SUV के फ्रंट बम्पर को भी री-डिजाइन किया गया है, ये अब पहले से ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रहा है। बी-पिलर्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, जहां रूफलाइन में स्लोव दिया गया है। कूप एसयूवी में सनरूफ के साथ ब्लैक-आउट पिलर मिलेंगे।
ऑटो डेस्क, Pictures of Tata Nexon Electric Coupe SUV leaked : टाटा मोटर्स ने बीते साल धमाल मचा दिया था। वहीं कंपनी इस साल भी कई नई गाड़ियों को ला रही है। इसमें एक नई मिडसाइज की एसयूवी भी शामिल है। कंपनी नैक्सन और हैरियर के बीच में एक मिड साइज की एसयूवी लाने पर काम कर रही है। इसे हुंडई क्रेटा के ऑप्शन के तौर पर तैयार किया जा रहा है। यह मिड-साइज एसयूवी कंपनी की सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी नेक्सॉन पर आधारित होगी, इसकी डिजाइन कूपे स्टाइल का होगा। कंपनी इसका इलेक्ट्रिक वर्जन बाजार में पेश करेगी। वहीं कंपनी की इस इलेक्ट्रिक SUV की कुछ तस्वीरें लीक हुई हैं।
लीक तस्वीरों के आधार पर कहा जा सकता है कि मौजूदा नेक्सॉन ईवी के अपडेट वर्जन के रुप में कूपे एसयूवी को पेश किया जाएगा। टाटा के विभिन्न मॉडलों के जैसे ही इसमें ह्यूमैनिटी लाइन वाली ग्रिल और एक नया फ्रंट फेसिया दिया जाएगा। इस कूपे एसयूवी में एक स्प्लिट लाइटिंग सेटअप भी देखने को मिलेगा। बम्पर पर नए एलईडी हेडलैम्प्स दिए जाएंगे, वहीं इसके फ्रंट को आकर्षक बनाने के लिए स्लीक एलईडी डीआरएल दिए जाएंगे।
कूपे एसयूवी में फ्रंट बम्पर को भी री-डिजाइन किया गया है, ये अब पहले से ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रहा है। बी-पिलर्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, जहां रूफलाइन में स्लोव दिया गया है। कूप एसयूवी में सनरूफ के साथ ब्लैक-आउट पिलर मिलेंगे। साइड प्रोफाइल की बात करें तो ब्लैक क्लैडिंग और नए अलॉय व्हील्स इसमें दिए जाएंगे हैं।
Nexon Coupe EV में मौजूदा मॉडल की तरह Zipron पावरट्रेन दिया जाएगा। इसमें एक बड़ा 40kWh बैटरी पैक दिया जा सकता है। जानकारों की मानें तो यह 400 किलोमीटर से अधिक की रेंज के साथ पेश की जा सकती है। यह बैटरी पैक Nexon EV के अपडेट वेरिएंट में भी देखने को मिलेगा।
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Tata Nexon Electric Coupe SUV के फ्रंट बम्पर को भी री-डिजाइन किया गया है, ये अब पहले से ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रहा है। बी-पिलर्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, जहां रूफलाइन में स्लोव दिया गया है। कूप एसयूवी में सनरूफ के साथ ब्लैक-आउट पिलर मिलेंगे। ऑटो डेस्क, Pictures of Tata Nexon Electric Coupe SUV leaked : टाटा मोटर्स ने बीते साल धमाल मचा दिया था। वहीं कंपनी इस साल भी कई नई गाड़ियों को ला रही है। इसमें एक नई मिडसाइज की एसयूवी भी शामिल है। कंपनी नैक्सन और हैरियर के बीच में एक मिड साइज की एसयूवी लाने पर काम कर रही है। इसे हुंडई क्रेटा के ऑप्शन के तौर पर तैयार किया जा रहा है। यह मिड-साइज एसयूवी कंपनी की सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी नेक्सॉन पर आधारित होगी, इसकी डिजाइन कूपे स्टाइल का होगा। कंपनी इसका इलेक्ट्रिक वर्जन बाजार में पेश करेगी। वहीं कंपनी की इस इलेक्ट्रिक SUV की कुछ तस्वीरें लीक हुई हैं। लीक तस्वीरों के आधार पर कहा जा सकता है कि मौजूदा नेक्सॉन ईवी के अपडेट वर्जन के रुप में कूपे एसयूवी को पेश किया जाएगा। टाटा के विभिन्न मॉडलों के जैसे ही इसमें ह्यूमैनिटी लाइन वाली ग्रिल और एक नया फ्रंट फेसिया दिया जाएगा। इस कूपे एसयूवी में एक स्प्लिट लाइटिंग सेटअप भी देखने को मिलेगा। बम्पर पर नए एलईडी हेडलैम्प्स दिए जाएंगे, वहीं इसके फ्रंट को आकर्षक बनाने के लिए स्लीक एलईडी डीआरएल दिए जाएंगे। कूपे एसयूवी में फ्रंट बम्पर को भी री-डिजाइन किया गया है, ये अब पहले से ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रहा है। बी-पिलर्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, जहां रूफलाइन में स्लोव दिया गया है। कूप एसयूवी में सनरूफ के साथ ब्लैक-आउट पिलर मिलेंगे। साइड प्रोफाइल की बात करें तो ब्लैक क्लैडिंग और नए अलॉय व्हील्स इसमें दिए जाएंगे हैं। Nexon Coupe EV में मौजूदा मॉडल की तरह Zipron पावरट्रेन दिया जाएगा। इसमें एक बड़ा चालीस किलोवाट-घंटा बैटरी पैक दिया जा सकता है। जानकारों की मानें तो यह चार सौ किलोग्राममीटर से अधिक की रेंज के साथ पेश की जा सकती है। यह बैटरी पैक Nexon EV के अपडेट वेरिएंट में भी देखने को मिलेगा।
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कांग्रेस के आधा दर्जन महारथी टिकट संकट से बाहर नहीं आ पाए हैं। इन सीटों पर दिग्गजों के भाग्य का फैसला अब राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को करना है। दिल्ली में अब तक 68 सीटों स्क्रीनिंग कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं और इनमें से 46 सीटों पर केंद्रीय चुनाव समिति भी मंथन कर चुकी है और इन नेताओं की टिकटें केंद्रीय चुनाव समिति में भी फाइनल नहीं हो पाई हैं। जिन नेताओं की टिकटें फंसी हैं, उनमें धर्मशाला से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, द्रंग से कौल सिंह ठाकुर, पच्छाद से गंगूराम मुसाफिर, भरमौर से ठाकुर सिंह भरमौरी, नूरपुर से अजय महाजन और ठियोग से कुलदीप राठौर शामिल हैं। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की टिकट प्रदेश चुनाव समिति ने फाइनल कर दी थी। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव होने के नाते सिंगल नाम भेजने की पैरवी की गई।
सुधीर शर्मा टिकट के इस पूरे पचड़े से सीधे निकलते नजर आ रहे थे, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों धीरज गुर्जर और उमंग सिंघार ने ने अंतिम समय सर्वे के बाद जो रिपोर्ट स्क्रीनिंग कमेटी को सौंपी, उससे प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। सिरमौर जिला के कद्दावर नेता और पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रहे गंगूराम मुसाफिर की राहें यहां महिला नेता ने रोक दी हैं। उपचुनाव में कांग्रेस का मुकाबला दो महिला उम्मीदवारों से था। इनमें से एक भाजपा की विधायक बन गई हैं, जबकि दूसरी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। ऐसे में अब तक गंगूराम मुसाफिर जिस चुनाव क्षेत्र में इकलौती उम्मीदवारी जताते आए हैं, इस बार उनके लिए राहें आसान नहीं हैं। इस लिस्ट में अगला नाम नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन का है।
नूरपुर में दोनों राजनीतिक दलों की नजर निर्दलीय मैदान में कूदने का मन बना चुके रणवीर सिंह निक्का पर भी है। ऐसे में दोनों ही राजनीतिक पार्टियां नूरपुर सीट पर उम्मीदवार तय करने को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखा रही हैं। इस सूची में अंतिम नाम पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर का है। कुलदीप राठौर ने ठियोग से आवेदन दाखिल किया है, लेकिन यहां कांग्रेस की फेहरिस्त काफी लंबी है। टिकट के चार दावेदार इस विधानसभा सीट पर हैं और चारों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। यहां भाजपा के पूर्व विधायक रहे स्व . राकेश वर्मा की पत्नी इंदु वर्मा ने कांग्रेस ज्वाइन की है और उनके कांग्रेस में आने के बाद टिकट की जंग रोचक हो गई है। इसके अलावा अन्य ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा नेता पार्टी छोडक़र कांग्रेस से जुड़ते हैं, तो इन पर भी पार्टी शीर्ष नेतृत्व मंथन कर सकता है। (एचडीएम)
जिन सीटों पर इस सर्वे का असर हुआ है, उनमें धर्मशाला का बड़ा नाम शामिल है। यहां पूर्व में उपचुनाव न लडऩे, कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त होने और स्थानीय नेताओं में विरोध कहीं न कहीं, सुधीर शर्मा के लिए बड़ी बाधा के रूप में अब तक उभर कर सामने आता रहा है। ऐसे में धर्मशाला अब एक ऐसी सीट बन गई है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार का चेहरा अंतिम क्षणों में ही साफ हो पाएगा। इन सबके बीच एक अन्य बड़ी सीट जनजातीय क्षेत्र भरमौर की भी है। यहां पूर्व वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी की टिकट फंस गई है। उम्रदराज नेता को नए नवेले चेहरे सुरजीत भरमौरी से कड़ी टक्कर मिल रही है।
प्रदेश में दूसरा बड़ा नाम पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर का है। कौल सिंह लगातार चुनाव लडऩे की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने 'एक परिवार, एक टिकट' का नारा स्क्रीनिंग कमेटी में भी सुनाई देता रहा है। दरअसल, मंडी में अनिल शर्मा के पत्ते खुलने के बाद चंपा ठाकुर को टिकट देने की पैरवी कांग्रेस में होने लगी है, लेकिन राहुल गांधी के चिंतन शिविर में एक परिवार, एक टिकट की बात कही गई है। वहीं, कांग्रेस के शीर्ष नेता भी एक ही परिवार के दो सदस्यों को टिकट देने के हक में नहीं हैं और कौल सिंह की टिकट में यह नियम अभी तक बाधा बन रहा है। कौल सिंह दं्रग और चंपा ठाकुर मंडी सदर से टिकट के दावेदार हैं।
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कांग्रेस के आधा दर्जन महारथी टिकट संकट से बाहर नहीं आ पाए हैं। इन सीटों पर दिग्गजों के भाग्य का फैसला अब राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को करना है। दिल्ली में अब तक अड़सठ सीटों स्क्रीनिंग कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं और इनमें से छियालीस सीटों पर केंद्रीय चुनाव समिति भी मंथन कर चुकी है और इन नेताओं की टिकटें केंद्रीय चुनाव समिति में भी फाइनल नहीं हो पाई हैं। जिन नेताओं की टिकटें फंसी हैं, उनमें धर्मशाला से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, द्रंग से कौल सिंह ठाकुर, पच्छाद से गंगूराम मुसाफिर, भरमौर से ठाकुर सिंह भरमौरी, नूरपुर से अजय महाजन और ठियोग से कुलदीप राठौर शामिल हैं। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की टिकट प्रदेश चुनाव समिति ने फाइनल कर दी थी। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव होने के नाते सिंगल नाम भेजने की पैरवी की गई। सुधीर शर्मा टिकट के इस पूरे पचड़े से सीधे निकलते नजर आ रहे थे, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों धीरज गुर्जर और उमंग सिंघार ने ने अंतिम समय सर्वे के बाद जो रिपोर्ट स्क्रीनिंग कमेटी को सौंपी, उससे प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। सिरमौर जिला के कद्दावर नेता और पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष रहे गंगूराम मुसाफिर की राहें यहां महिला नेता ने रोक दी हैं। उपचुनाव में कांग्रेस का मुकाबला दो महिला उम्मीदवारों से था। इनमें से एक भाजपा की विधायक बन गई हैं, जबकि दूसरी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। ऐसे में अब तक गंगूराम मुसाफिर जिस चुनाव क्षेत्र में इकलौती उम्मीदवारी जताते आए हैं, इस बार उनके लिए राहें आसान नहीं हैं। इस लिस्ट में अगला नाम नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन का है। नूरपुर में दोनों राजनीतिक दलों की नजर निर्दलीय मैदान में कूदने का मन बना चुके रणवीर सिंह निक्का पर भी है। ऐसे में दोनों ही राजनीतिक पार्टियां नूरपुर सीट पर उम्मीदवार तय करने को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखा रही हैं। इस सूची में अंतिम नाम पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर का है। कुलदीप राठौर ने ठियोग से आवेदन दाखिल किया है, लेकिन यहां कांग्रेस की फेहरिस्त काफी लंबी है। टिकट के चार दावेदार इस विधानसभा सीट पर हैं और चारों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। यहां भाजपा के पूर्व विधायक रहे स्व . राकेश वर्मा की पत्नी इंदु वर्मा ने कांग्रेस ज्वाइन की है और उनके कांग्रेस में आने के बाद टिकट की जंग रोचक हो गई है। इसके अलावा अन्य ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा नेता पार्टी छोडक़र कांग्रेस से जुड़ते हैं, तो इन पर भी पार्टी शीर्ष नेतृत्व मंथन कर सकता है। जिन सीटों पर इस सर्वे का असर हुआ है, उनमें धर्मशाला का बड़ा नाम शामिल है। यहां पूर्व में उपचुनाव न लडऩे, कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त होने और स्थानीय नेताओं में विरोध कहीं न कहीं, सुधीर शर्मा के लिए बड़ी बाधा के रूप में अब तक उभर कर सामने आता रहा है। ऐसे में धर्मशाला अब एक ऐसी सीट बन गई है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार का चेहरा अंतिम क्षणों में ही साफ हो पाएगा। इन सबके बीच एक अन्य बड़ी सीट जनजातीय क्षेत्र भरमौर की भी है। यहां पूर्व वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी की टिकट फंस गई है। उम्रदराज नेता को नए नवेले चेहरे सुरजीत भरमौरी से कड़ी टक्कर मिल रही है। प्रदेश में दूसरा बड़ा नाम पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर का है। कौल सिंह लगातार चुनाव लडऩे की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने 'एक परिवार, एक टिकट' का नारा स्क्रीनिंग कमेटी में भी सुनाई देता रहा है। दरअसल, मंडी में अनिल शर्मा के पत्ते खुलने के बाद चंपा ठाकुर को टिकट देने की पैरवी कांग्रेस में होने लगी है, लेकिन राहुल गांधी के चिंतन शिविर में एक परिवार, एक टिकट की बात कही गई है। वहीं, कांग्रेस के शीर्ष नेता भी एक ही परिवार के दो सदस्यों को टिकट देने के हक में नहीं हैं और कौल सिंह की टिकट में यह नियम अभी तक बाधा बन रहा है। कौल सिंह दं्रग और चंपा ठाकुर मंडी सदर से टिकट के दावेदार हैं।
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न करें ये गलतियां - सिर्फ कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, ब्रेड या नूडल्स न लें। देर रात को खाना न खाएं और खाना खाते ही न सोएं। टीवी कंप्यूटर के आगे बैठकर, फोन पर बाते करते हुए खाना न खाएं। अपना खाना खुद परोसें, ताकि आप ज़रूरत से ज्यादा न खाएं। धीरे-धीरे खाएं, इससे मेटाबॉलिज्म मज़बूत होता है।
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न करें ये गलतियां - सिर्फ कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, ब्रेड या नूडल्स न लें। देर रात को खाना न खाएं और खाना खाते ही न सोएं। टीवी कंप्यूटर के आगे बैठकर, फोन पर बाते करते हुए खाना न खाएं। अपना खाना खुद परोसें, ताकि आप ज़रूरत से ज्यादा न खाएं। धीरे-धीरे खाएं, इससे मेटाबॉलिज्म मज़बूत होता है।
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जिले में गुरुवार को मुस्लिम समाज का मुख्य त्योहार बकरीद मनाया जाएगा। इसकी खरीदारी को लेकर बुधवार की सुबह से ही चौक बाजार पुलपर भरावपर आलमगंज सोहसराय मोगलकुआं रामचंद्रपुर खदंकपर अम्बेर आदि जगहों पर लोगों की भीड़ लगी रही। एक तरफ लोग कपड़े सवई व लच्छे की खरीदारी में जुटे रहे तो दूसरी ओर पुलपर बाजार में बकरों की बोली लगाई गई।
जागरण संवाददाता, बिहारशरीफः जिले में गुरुवार को मुस्लिम समाज का मुख्य त्योहार बकरीद मनाया जाएगा। इसकी खरीदारी को लेकर बुधवार की सुबह से ही चौक बाजार, पुलपर, भरावपर, आलमगंज, सोहसराय, मोगलकुआं, रामचंद्रपुर, खदंकपर, अम्बेर आदि जगहों पर लोगों की भीड़ लगी रही।
एक तरफ लोग कपड़े, सवई व लच्छे की खरीदारी में जुटे रहे तो दूसरी ओर पुलपर बाजार में बकरों की बोली लगाई गई। शाहरुख खां नाम के बकरे की बोली जहां 50 हजार रुपये में लगी तो वहीं, सलमान खां नाम के बकरे की बोली 60 हजार लगी।
इसके अलावा अन्य कई फिल्मी कलाकारों के नाम पर आए बकरे की कीमत 10 हजार से लेकर 40 हजार तक बेची गई। लोग अपनी हैसियत के हिसाब से बकरे की खरीदारी करते देखे गए।
बकरे की क्वालिटी के हिसाब से उसके दाम लगाए जा रहे थे, लेकिन, सलमान खांन व शाहरूख खां नाम के बकरे की बाजार में सबसे अधिक कीमत देखी गई। इसकी खरीदारी के लिए कई लोग बोली लगा रहे थे।
लखनऊ की सेवई व बनारस का लच्छा लोगों को खूब भा रहा है। बाजार में इन लक्ष्छों व सेवई की कीमत तीन सौ रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर पांच सौ रुपये तक है। लोग अपने हैसियत के मुताबिक खरीदारी करते देखे गए।
वहीं, बकरीद पर इस बार दुकानदारों ने हर तबके के लोगों के लिए कपड़े उपलब्ध कराए हैं। गरीब वर्ग के लिए सौ रुपये से लेकर चार सौ तो पैसे वालों के लिए हजार से लेकर तीन हजार तक में कुर्ता-पैजामा व लेडीज ड्रेस बेचे जा रहे थे। वहीं, महिलाएं चूड़ी व श्रंगार के अन्य समान की खरीदारी में जुटे रहे। कुल मिलाकर पूरा बाजार खरीदारों से पटा रहा।
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जिले में गुरुवार को मुस्लिम समाज का मुख्य त्योहार बकरीद मनाया जाएगा। इसकी खरीदारी को लेकर बुधवार की सुबह से ही चौक बाजार पुलपर भरावपर आलमगंज सोहसराय मोगलकुआं रामचंद्रपुर खदंकपर अम्बेर आदि जगहों पर लोगों की भीड़ लगी रही। एक तरफ लोग कपड़े सवई व लच्छे की खरीदारी में जुटे रहे तो दूसरी ओर पुलपर बाजार में बकरों की बोली लगाई गई। जागरण संवाददाता, बिहारशरीफः जिले में गुरुवार को मुस्लिम समाज का मुख्य त्योहार बकरीद मनाया जाएगा। इसकी खरीदारी को लेकर बुधवार की सुबह से ही चौक बाजार, पुलपर, भरावपर, आलमगंज, सोहसराय, मोगलकुआं, रामचंद्रपुर, खदंकपर, अम्बेर आदि जगहों पर लोगों की भीड़ लगी रही। एक तरफ लोग कपड़े, सवई व लच्छे की खरीदारी में जुटे रहे तो दूसरी ओर पुलपर बाजार में बकरों की बोली लगाई गई। शाहरुख खां नाम के बकरे की बोली जहां पचास हजार रुपये में लगी तो वहीं, सलमान खां नाम के बकरे की बोली साठ हजार लगी। इसके अलावा अन्य कई फिल्मी कलाकारों के नाम पर आए बकरे की कीमत दस हजार से लेकर चालीस हजार तक बेची गई। लोग अपनी हैसियत के हिसाब से बकरे की खरीदारी करते देखे गए। बकरे की क्वालिटी के हिसाब से उसके दाम लगाए जा रहे थे, लेकिन, सलमान खांन व शाहरूख खां नाम के बकरे की बाजार में सबसे अधिक कीमत देखी गई। इसकी खरीदारी के लिए कई लोग बोली लगा रहे थे। लखनऊ की सेवई व बनारस का लच्छा लोगों को खूब भा रहा है। बाजार में इन लक्ष्छों व सेवई की कीमत तीन सौ रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर पांच सौ रुपये तक है। लोग अपने हैसियत के मुताबिक खरीदारी करते देखे गए। वहीं, बकरीद पर इस बार दुकानदारों ने हर तबके के लोगों के लिए कपड़े उपलब्ध कराए हैं। गरीब वर्ग के लिए सौ रुपये से लेकर चार सौ तो पैसे वालों के लिए हजार से लेकर तीन हजार तक में कुर्ता-पैजामा व लेडीज ड्रेस बेचे जा रहे थे। वहीं, महिलाएं चूड़ी व श्रंगार के अन्य समान की खरीदारी में जुटे रहे। कुल मिलाकर पूरा बाजार खरीदारों से पटा रहा।
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उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज चिकित्सा व्यवसाय में जनशक्ति की कमी की समस्या का तत्काल समाधान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य के हमारे बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता को उजागर किया है।
सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, विजयवाड़ा में नई इकाइयों और अत्याधुनिक उपकरणों का उद्घाटन करने के बाद चिकित्सा (मेडिकल) छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत वर्ष 2024 तक प्रति 1,000 लोगों पर एक चिकित्सक के विश्व स्वास्थ्य सन्गठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित अनुपात को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने प्रधान मंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के शुभारंभ की भी सराहना की, जिसका लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में गांव से राष्ट्रीय स्तर तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास करना है।
इस बात पर अफसोस जताते हुए कि चिकित्सा व्यवसाय का पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बाजारीकरण हो गया है, उन्होंने उभरते चिकित्सा स्नातकों को सलाह दी कि वे अपने रोगियों का उपचार करते समय मानवीय स्पर्श दें । "चिकित्सा सबसे महान व्यवसायों में से एक है और आप सभी को हमेशा हिप्पोक्रेट्स शपथ के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि "कभी भी भलाई के मार्ग से विचलित न हों और उच्चतम नैतिक और नैतिक मानकों को बनाए रखें, "।
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में भारत की सामर्थ्य का पूरी तरह से लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, श्री नायडू ने दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन संपर्क (कनेक्टिविटी) स्थापित करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन ग्रामीण भारत में लागत कम करने और पहुंच में सुधार करने में मदद करेगा और यह विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक कुशल और समावेशी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच प्रदान करने के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सहायक बनेगा ।
ग्रामीण क्षेत्रों में जनशक्ति की कमी को देखते हुए, उपराष्ट्रपति ने राजकीय सेवा के चिकित्सकों को पहली पदोन्नति देने से पहले उनके लिए ग्रामीण सेवा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने इसके लिए प्रोत्साहन देकर और आवास और अन्य बुनियादी ढांचे में सुधार करके ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक डॉक्टरों को आकर्षित करने की आवश्यकता भी स्वीकारी ।
स्वास्थ्य पर व्यक्ति की क्षमता से बहुत अधिक व्यय होने पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री नायडू ने स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए वहनीय (सस्ता) और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकार की ओर से सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने कहा, "साथ ही, मैं स्वास्थ्य क्षेत्र के निजी खिलाड़ियों से भी लोगों को वहन योग्य अत्याधुनिक उपचार के तौर-तरीके उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाने का आग्रह करूंगा।"
वर्तमान में जारी कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए, श्री नायडू ने चिकित्सा बिरादरी को उभरती बीमारियों पर अनुसंधान पर अपना ध्यान बढ़ाकर भविष्य में ऐसी किसी भी बीमारी/महामारी से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और सभी अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की उनके समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए लोगों की जान बचाने और कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सराहना की। उपराष्ट्रपति ने अब तक वैक्सीन की 105 करोड़ से अधिक खुराक देने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की भी सराहना की । इस अवसर पर उन्होंने कॉलेज में मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट (1200 एलपीएम पीएसए), जैव-चिकित्सा उपकरणों (बायोमेडिकल इक्विपमेंट), हृदय सम्बन्धी विज्ञान (कार्डियक साइंसेज) की इकाई और तंत्रिका विज्ञान (न्यूरो साइंसेज) की इकाई का भी उद्घाटन किया ।
कोविड के बाद आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उन्होंने सभी को सतर्क रहने और स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने तक कोविड से संबंधित नियमों का पालन करना जारी रखने के लिए आगाह किया। "हम लापरवाही से काम नहीं कर सकते और न ही एक और लहर को आमंत्रित कर सकते हैं । उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के रूप में, आप सभी समाज में इस मुद्दे पर अधिक जागरूकता पैदा करेंगे, " ।
गैर-संचारी रोगों में तेजी से वृद्धि की चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, उन्होंने सभी हितधारकों का आह्वान किया कि वे सभी गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) में की प्रवृत्ति को रोकने के लिए ठोस प्रयास करें । उन्होंने युवा चिकित्सा पेशेवरों से कहा कि वे न केवल स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली अपनाएं बल्कि बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें ।
विजयवाड़ा शहर के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए, श्री नायडू ने कहा कि वह हमेशा इस जीवंत शहर का दौरा करने के लिए उत्सुक हैं। इस अवसर पर, उन्होंने सभी से अपने जीवन में मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार के महत्व पर भी प्रकाश डाला ।
नेतृत्व के गुणों पर एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति को एक 'संवेदनशील' नेता बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए, न कि 'सनसनीखेज' नेता बनने की । उन्होंने कहा कि "एक चिकित्सक (डॉक्टर) , एक नर्स और एक किसान भी अपने आप में एक महान नेता हो सकते हैं," साथ ही उन्होंने एक सच्चे नेता के महत्वपूर्ण गुणों के रूप में ईमानदारी और उच्च नैतिक मानकों को सूचीबद्ध किया ।
यह कहते हुए कि प्राचीन काल में, भारत को 'विश्व गुरु' के रूप में जाना जाता था, उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब भारत उस पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए फिर से उठ रहा है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को प्रतिबद्ध करने और "उच्च लक्ष्य, बड़े सपने देखने और जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करें" ।
इस अवसर पर सिद्धार्थ अकादमी के अध्यक्ष श्री एन. वेंकटेश्वरलू, डॉ. पिन्नामनेनी सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च फाउंडेशन (पीएसआईएमएस) के महानिदेशक डॉ. नागेश्वर राव, सिद्धार्थ अकादमी के सचिव डॉ. पी लक्ष्मण राव, डॉ. पीएसएन मूर्ति, प्राचार्य, पीएसआईएमएस के प्राचार्य, डॉ. पीएसएन मूर्ति, प्राचार्य, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, संकाय और छात्र उपस्थित थे ।
"प्रिय बहनों और भाइयों,
मुझे नई इकाइयों और अत्याधुनिक उपकरणों का उद्घाटन करने और आप सभी, विशेष रूप से युवा और ऊर्जावान मेडिकल छात्रों के साथ बातचीत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। विजयवाड़ा के साथ मेरी कई अच्छी यादें जुड़ी हैं और मैं हमेशा इस जीवंत शहर का दौरा करने के लिए उत्सुक रहता हूं ।
कोविड-19 मामलों की संख्या में धीरे-धीरे गिरावट और स्थिति में सुधार होने के लिए धन्यवाद, कि हम आज यहां मिलने में सक्षम हैं । सभी चिकित्सक, वैज्ञानिक और अग्रिम पंक्ति के सभी कार्यकर्ता लोगों का जीवन बचाने और कोविड-19 संचरण के प्रसार को रोकने के लिए अपने समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए विशेष प्रशंसा के पात्र हैं । मैं अब तक 105 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराक देने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों को बधाई देता हूं ।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, विभिन्न आर्थिक गतिविधियों ने अब जाकर गति पकड़ी है और यह अनुमान है कि भारत चालू वित्त वर्ष के दौरान 9.5 प्रतिशत और 2022 में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज करेगा। यह एक स्वागत योग्य संकेत है। फिर भी हम में से प्रत्येक को सतर्क रहना चाहिए और स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने तक कोविड से संबंधित नियमों का पालन करना जारी रखना चाहिए। हम लापरवाही से कार्य नहीं कर सकते हैं और न ही एक और लहर को आमंत्रित कर सकते हैं । मुझे विश्वास है कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के रूप में आप सभी जनसामान्य लोगों में इस मुद्दे पर अधिक से अधिक जागरूकता पैदा करेंगे।
प्रिय विद्यार्थियो,
चिकित्सा सबसे महान व्यवसायों में से एक है और आप सभी को हमेशा हिप्पोक्रेट्स शपथ के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। भलाई के मार्ग से कभी विचलित न हों और उच्चतम नैतिक और नैतिक मानकों को बनाए रखें। दुर्भाग्य से, चिकित्सा पेशे का पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बाजारीकरण हो गया है। सभी नवोदित मेडिकल स्नातकों को मेरी सलाह है कि वे ईमानदारी, समर्पण और जुनून के साथ लोगों की निस्वार्थ सेवा करें। मानवीयता का स्पर्श एक महत्वपूर्ण पहलू है किन्तु इन दिनों यह चिकित्सक-रोगी के आपसी सम्पर्क में मिलता ही नहीं है। मुझे लगता है कि रोग के हर मामले को नियमित और यांत्रिक तरीके से लेने की बजाय हर चिकित्सक को अपने रोगियों के साथ अधिक समय बिताने की कोशिश करनी चाहिए। चिकित्सकों के रूप में, आपको ऐसे रोगियों को मनोवैज्ञानिक आराम प्रदान करने औए उनके साथ सुहानुभूति रखने की आवश्यकता है जो आपका परामर्श चाहते हैं।
प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को भी अपने छात्रों को सामुदायिक सेवा में शामिल करना चाहिए ताकि उनमें साझा करने और देखभाल करने की भावना पैदा हो सके।
जहां एक ओर भारत ने चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों का उन्मूलन किया है और उसके विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, वहीं हमारे सामने स्वास्थ्य क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां हैं। कोविड-19 महामारी ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तरों पर हमारे स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की सख्त आवश्यकता को उजागर किया है । मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन शुरू करने के लिए बधाई देता हूं, जिसका लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में गांव से राष्ट्रीय स्तर तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास करना है ।
सभी हितधारकों द्वारा जनशक्ति की कमी की समस्या का युद्ध स्तर पर समाधान किए जाने की आवश्यकता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि भारत 2024 तक प्रति 1,000 लोगों पर एक चिकित्सक के विश्व स्वास्थ्य सन्गठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित अनुपात को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर है । इसी तरह, प्रशिक्षित नर्सों और चिकित्सा तकनीशियनों की संख्या में भी भारी वृद्धि की जानी है । इसके लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है और मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज और देश भर में 22 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एआईआईएमएस -एम्स ) के नेटवर्क की स्थापना की योजना की घोषणा की है।
स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का विस्तार करते हुए और जनशक्ति की कमी को दूर करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में भारत की सामर्थ्य का पूरी तरह से लाभ उठाना महत्वपूर्ण है । दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन सम्पर्क (कनेक्टिविटी) स्थापित करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। टेलीमेडिसिन चिकित्सा लागत कम करने और पहुंच में सुधार करने में मदद करेगा।
मुझे विश्वास है कि हाल ही में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक कुशल और समावेशी सार्वभौमिक स्वास्थ्य पहुँच (कवरेज) प्रदान करने के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा । इसी तरह, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री- जन आरोग्य योजना (पीएम - जेएवाई) के अंतर्गत विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य उस 10.74 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करना है जो कि भारतीय जनसंख्या का निचला 40% हिस्सा है ।
प्रिय बहनों और भाइयों,
स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए कम खर्चीला, किफायती और सुलभ बनाना समय की मांग है । व्यक्ति की सामर्थ्य से अधिक ( आउट-ऑफ-पॉकेट ) उच्च स्तर के व्यय को देखते हुए, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की ओर से सार्वजनिक व्यय में वृद्धि किया जाना महत्वपूर्ण है।
15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि राज्यों को 2022 तक अपने बजट में स्वास्थ्य पर खर्च को संबंधित बजट का 8% से भी अधिक बढ़ाना चाहिए और केंद्र और राज्यों के सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को भी 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए प्रगतिशील तरीके से बढ़ाया जाना चाहिए ।
इसके साथ ही, मैं स्वास्थ्य क्षेत्र के निजी खिलाड़ियों से भी आग्रह करूंगा कि लोगों को वहन योग्य अत्याधुनिक उपचार के तौर-तरीके उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाएं।
बहनों और भाइयों,
कोविड -19 महामारी के प्रकोप ने किसी भी नई बीमारी या महामारी के प्रकोप से निपटने के लिए चिकित्सा बिरादरी को तैयार रहने की आवश्यकता को उजागर किया है। इसलिए सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे उभरती बीमारियों पर शोध किए जाने पर अपना ध्यान केंद्रित करें। अधिक मेडिकल कॉलेजों (चिकित्सा महाविद्यालयों) की स्थापना करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो ।
इस महामारी का मुकाबला करने के साथ-साथ, हमें स्वास्थ्य के मोर्चे पर अन्य चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। हम गैर-संचारी रोगों में तेजी से वृद्धि की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देख रहे हैं। भारत में लगभग 65% मौतें अब गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण होती हैं। यह चिंता का कारण है। युवा चिकित्सा पेशेवरों के रूप में, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप न केवल एक स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली अपनाएं बल्कि इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करें । गैर-संचारी रोगों (एनडीसी) की प्रवृत्ति में वृद्धि को रोकने के लिए सभी हितधारकों द्वारा एक ठोस प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रिय छात्रों, आप में से प्रत्येक को सप्ताह या पखवाड़े में एक बार सामाजिक या सामुदायिक सेवा के लिए कुछ समय देना चाहिए। लोगों को गैर-संचारी रोगों ( एनसीडी ) के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने और नियमित शारीरिक व्यायाम करने, स्वस्थ आहार लेने और हानिकारक पदार्थों से बचने के लिए उन्हें स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए आपको पास की मलिन बस्तियों (झुग्गियों) या स्कूलों का दौरा करना चाहिए।
जय हिन्द!"
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Posted On: उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज चिकित्सा व्यवसाय में जनशक्ति की कमी की समस्या का तत्काल समाधान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-उन्नीस महामारी ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य के हमारे बुनियादी ढांचे के विस्तार की आवश्यकता को उजागर किया है। सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, विजयवाड़ा में नई इकाइयों और अत्याधुनिक उपकरणों का उद्घाटन करने के बाद चिकित्सा छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत वर्ष दो हज़ार चौबीस तक प्रति एक,शून्य लोगों पर एक चिकित्सक के विश्व स्वास्थ्य सन्गठन द्वारा अनुशंसित अनुपात को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने प्रधान मंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के शुभारंभ की भी सराहना की, जिसका लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में गांव से राष्ट्रीय स्तर तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास करना है। इस बात पर अफसोस जताते हुए कि चिकित्सा व्यवसाय का पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बाजारीकरण हो गया है, उन्होंने उभरते चिकित्सा स्नातकों को सलाह दी कि वे अपने रोगियों का उपचार करते समय मानवीय स्पर्श दें । "चिकित्सा सबसे महान व्यवसायों में से एक है और आप सभी को हमेशा हिप्पोक्रेट्स शपथ के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि "कभी भी भलाई के मार्ग से विचलित न हों और उच्चतम नैतिक और नैतिक मानकों को बनाए रखें, "। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की सामर्थ्य का पूरी तरह से लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, श्री नायडू ने दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन संपर्क स्थापित करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन ग्रामीण भारत में लागत कम करने और पहुंच में सुधार करने में मदद करेगा और यह विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक कुशल और समावेशी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की पहुंच प्रदान करने के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सहायक बनेगा । ग्रामीण क्षेत्रों में जनशक्ति की कमी को देखते हुए, उपराष्ट्रपति ने राजकीय सेवा के चिकित्सकों को पहली पदोन्नति देने से पहले उनके लिए ग्रामीण सेवा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने इसके लिए प्रोत्साहन देकर और आवास और अन्य बुनियादी ढांचे में सुधार करके ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक डॉक्टरों को आकर्षित करने की आवश्यकता भी स्वीकारी । स्वास्थ्य पर व्यक्ति की क्षमता से बहुत अधिक व्यय होने पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री नायडू ने स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए वहनीय और सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस संबंध में उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकार की ओर से सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने कहा, "साथ ही, मैं स्वास्थ्य क्षेत्र के निजी खिलाड़ियों से भी लोगों को वहन योग्य अत्याधुनिक उपचार के तौर-तरीके उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाने का आग्रह करूंगा।" वर्तमान में जारी कोविड-उन्नीस महामारी का उल्लेख करते हुए, श्री नायडू ने चिकित्सा बिरादरी को उभरती बीमारियों पर अनुसंधान पर अपना ध्यान बढ़ाकर भविष्य में ऐसी किसी भी बीमारी/महामारी से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और सभी अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की उनके समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए लोगों की जान बचाने और कोविड-उन्नीस के प्रसार को रोकने के लिए सराहना की। उपराष्ट्रपति ने अब तक वैक्सीन की एक सौ पाँच करोड़ से अधिक खुराक देने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की भी सराहना की । इस अवसर पर उन्होंने कॉलेज में मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट , जैव-चिकित्सा उपकरणों , हृदय सम्बन्धी विज्ञान की इकाई और तंत्रिका विज्ञान की इकाई का भी उद्घाटन किया । कोविड के बाद आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उन्होंने सभी को सतर्क रहने और स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने तक कोविड से संबंधित नियमों का पालन करना जारी रखने के लिए आगाह किया। "हम लापरवाही से काम नहीं कर सकते और न ही एक और लहर को आमंत्रित कर सकते हैं । उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के रूप में, आप सभी समाज में इस मुद्दे पर अधिक जागरूकता पैदा करेंगे, " । गैर-संचारी रोगों में तेजी से वृद्धि की चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, उन्होंने सभी हितधारकों का आह्वान किया कि वे सभी गैर-संचारी रोगों में की प्रवृत्ति को रोकने के लिए ठोस प्रयास करें । उन्होंने युवा चिकित्सा पेशेवरों से कहा कि वे न केवल स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली अपनाएं बल्कि बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें । विजयवाड़ा शहर के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए, श्री नायडू ने कहा कि वह हमेशा इस जीवंत शहर का दौरा करने के लिए उत्सुक हैं। इस अवसर पर, उन्होंने सभी से अपने जीवन में मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार के महत्व पर भी प्रकाश डाला । नेतृत्व के गुणों पर एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति को एक 'संवेदनशील' नेता बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए, न कि 'सनसनीखेज' नेता बनने की । उन्होंने कहा कि "एक चिकित्सक , एक नर्स और एक किसान भी अपने आप में एक महान नेता हो सकते हैं," साथ ही उन्होंने एक सच्चे नेता के महत्वपूर्ण गुणों के रूप में ईमानदारी और उच्च नैतिक मानकों को सूचीबद्ध किया । यह कहते हुए कि प्राचीन काल में, भारत को 'विश्व गुरु' के रूप में जाना जाता था, उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब भारत उस पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए फिर से उठ रहा है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को प्रतिबद्ध करने और "उच्च लक्ष्य, बड़े सपने देखने और जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करें" । इस अवसर पर सिद्धार्थ अकादमी के अध्यक्ष श्री एन. वेंकटेश्वरलू, डॉ. पिन्नामनेनी सिद्धार्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च फाउंडेशन के महानिदेशक डॉ. नागेश्वर राव, सिद्धार्थ अकादमी के सचिव डॉ. पी लक्ष्मण राव, डॉ. पीएसएन मूर्ति, प्राचार्य, पीएसआईएमएस के प्राचार्य, डॉ. पीएसएन मूर्ति, प्राचार्य, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, संकाय और छात्र उपस्थित थे । "प्रिय बहनों और भाइयों, मुझे नई इकाइयों और अत्याधुनिक उपकरणों का उद्घाटन करने और आप सभी, विशेष रूप से युवा और ऊर्जावान मेडिकल छात्रों के साथ बातचीत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। विजयवाड़ा के साथ मेरी कई अच्छी यादें जुड़ी हैं और मैं हमेशा इस जीवंत शहर का दौरा करने के लिए उत्सुक रहता हूं । कोविड-उन्नीस मामलों की संख्या में धीरे-धीरे गिरावट और स्थिति में सुधार होने के लिए धन्यवाद, कि हम आज यहां मिलने में सक्षम हैं । सभी चिकित्सक, वैज्ञानिक और अग्रिम पंक्ति के सभी कार्यकर्ता लोगों का जीवन बचाने और कोविड-उन्नीस संचरण के प्रसार को रोकने के लिए अपने समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए विशेष प्रशंसा के पात्र हैं । मैं अब तक एक सौ पाँच करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराक देने के लिए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों को बधाई देता हूं । जैसा कि आप सभी जानते हैं, विभिन्न आर्थिक गतिविधियों ने अब जाकर गति पकड़ी है और यह अनुमान है कि भारत चालू वित्त वर्ष के दौरान नौ.पाँच प्रतिशत और दो हज़ार बाईस में आठ.पाँच प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज करेगा। यह एक स्वागत योग्य संकेत है। फिर भी हम में से प्रत्येक को सतर्क रहना चाहिए और स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने तक कोविड से संबंधित नियमों का पालन करना जारी रखना चाहिए। हम लापरवाही से कार्य नहीं कर सकते हैं और न ही एक और लहर को आमंत्रित कर सकते हैं । मुझे विश्वास है कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों के रूप में आप सभी जनसामान्य लोगों में इस मुद्दे पर अधिक से अधिक जागरूकता पैदा करेंगे। प्रिय विद्यार्थियो, चिकित्सा सबसे महान व्यवसायों में से एक है और आप सभी को हमेशा हिप्पोक्रेट्स शपथ के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। भलाई के मार्ग से कभी विचलित न हों और उच्चतम नैतिक और नैतिक मानकों को बनाए रखें। दुर्भाग्य से, चिकित्सा पेशे का पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बाजारीकरण हो गया है। सभी नवोदित मेडिकल स्नातकों को मेरी सलाह है कि वे ईमानदारी, समर्पण और जुनून के साथ लोगों की निस्वार्थ सेवा करें। मानवीयता का स्पर्श एक महत्वपूर्ण पहलू है किन्तु इन दिनों यह चिकित्सक-रोगी के आपसी सम्पर्क में मिलता ही नहीं है। मुझे लगता है कि रोग के हर मामले को नियमित और यांत्रिक तरीके से लेने की बजाय हर चिकित्सक को अपने रोगियों के साथ अधिक समय बिताने की कोशिश करनी चाहिए। चिकित्सकों के रूप में, आपको ऐसे रोगियों को मनोवैज्ञानिक आराम प्रदान करने औए उनके साथ सुहानुभूति रखने की आवश्यकता है जो आपका परामर्श चाहते हैं। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को भी अपने छात्रों को सामुदायिक सेवा में शामिल करना चाहिए ताकि उनमें साझा करने और देखभाल करने की भावना पैदा हो सके। जहां एक ओर भारत ने चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों का उन्मूलन किया है और उसके विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, वहीं हमारे सामने स्वास्थ्य क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां हैं। कोविड-उन्नीस महामारी ने प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्तरों पर हमारे स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की सख्त आवश्यकता को उजागर किया है । मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन शुरू करने के लिए बधाई देता हूं, जिसका लक्ष्य अगले चार से पांच वर्षों में गांव से राष्ट्रीय स्तर तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास करना है । सभी हितधारकों द्वारा जनशक्ति की कमी की समस्या का युद्ध स्तर पर समाधान किए जाने की आवश्यकता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि भारत दो हज़ार चौबीस तक प्रति एक,शून्य लोगों पर एक चिकित्सक के विश्व स्वास्थ्य सन्गठन द्वारा अनुशंसित अनुपात को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर है । इसी तरह, प्रशिक्षित नर्सों और चिकित्सा तकनीशियनों की संख्या में भी भारी वृद्धि की जानी है । इसके लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है और मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज और देश भर में बाईस अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के नेटवर्क की स्थापना की योजना की घोषणा की है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का विस्तार करते हुए और जनशक्ति की कमी को दूर करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की सामर्थ्य का पूरी तरह से लाभ उठाना महत्वपूर्ण है । दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन सम्पर्क स्थापित करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। टेलीमेडिसिन चिकित्सा लागत कम करने और पहुंच में सुधार करने में मदद करेगा। मुझे विश्वास है कि हाल ही में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक कुशल और समावेशी सार्वभौमिक स्वास्थ्य पहुँच प्रदान करने के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा । इसी तरह, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री- जन आरोग्य योजना के अंतर्गत विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य उस दस.चौहत्तर करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पाँच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करना है जो कि भारतीय जनसंख्या का निचला चालीस% हिस्सा है । प्रिय बहनों और भाइयों, स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए कम खर्चीला, किफायती और सुलभ बनाना समय की मांग है । व्यक्ति की सामर्थ्य से अधिक उच्च स्तर के व्यय को देखते हुए, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की ओर से सार्वजनिक व्यय में वृद्धि किया जाना महत्वपूर्ण है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि राज्यों को दो हज़ार बाईस तक अपने बजट में स्वास्थ्य पर खर्च को संबंधित बजट का आठ% से भी अधिक बढ़ाना चाहिए और केंद्र और राज्यों के सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को भी दो हज़ार पच्चीस तक सकल घरेलू उत्पाद के दो.पाँच प्रतिशत तक पहुंचने के लिए प्रगतिशील तरीके से बढ़ाया जाना चाहिए । इसके साथ ही, मैं स्वास्थ्य क्षेत्र के निजी खिलाड़ियों से भी आग्रह करूंगा कि लोगों को वहन योग्य अत्याधुनिक उपचार के तौर-तरीके उपलब्ध कराने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाएं। बहनों और भाइयों, कोविड -उन्नीस महामारी के प्रकोप ने किसी भी नई बीमारी या महामारी के प्रकोप से निपटने के लिए चिकित्सा बिरादरी को तैयार रहने की आवश्यकता को उजागर किया है। इसलिए सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे उभरती बीमारियों पर शोध किए जाने पर अपना ध्यान केंद्रित करें। अधिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो । इस महामारी का मुकाबला करने के साथ-साथ, हमें स्वास्थ्य के मोर्चे पर अन्य चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। हम गैर-संचारी रोगों में तेजी से वृद्धि की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देख रहे हैं। भारत में लगभग पैंसठ% मौतें अब गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं। यह चिंता का कारण है। युवा चिकित्सा पेशेवरों के रूप में, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप न केवल एक स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली अपनाएं बल्कि इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करें । गैर-संचारी रोगों की प्रवृत्ति में वृद्धि को रोकने के लिए सभी हितधारकों द्वारा एक ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। प्रिय छात्रों, आप में से प्रत्येक को सप्ताह या पखवाड़े में एक बार सामाजिक या सामुदायिक सेवा के लिए कुछ समय देना चाहिए। लोगों को गैर-संचारी रोगों के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने और नियमित शारीरिक व्यायाम करने, स्वस्थ आहार लेने और हानिकारक पदार्थों से बचने के लिए उन्हें स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए आपको पास की मलिन बस्तियों या स्कूलों का दौरा करना चाहिए। जय हिन्द!"
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आसिफ सुहाफ, श्रीनगरः घाटी में आज से सर्दियों के 40 दिनों का सख्त मौसम कहा जाने वाला 'चिल्लई कलां' की शुरुआत हो गई। पहले दिन ही पूरे कश्मीर घाटी में पारा मायनस में रिकॉर्ड किया गया। मंगलवार रात श्रीनगर में पारा मायनस 4. 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लद्दाख के द्रास इलाके का टेम्प्रेचर माइनस 19. 8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग ने कहा, "श्रीनगर में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2. 7 डिग्री सेल्सियस कम था। कश्मीर घाटी के काजीगुंड गेट पर भी तापमान शून्य से 4. 2 डिग्री सेल्सियस नीचे और सामान्य से 2. 6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।
प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 6. 2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया और यह कश्मीर में सबसे ठंडा स्थान रहा। गुलमर्ग में भी न्यूनतम तापमान 4. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लद्दाख घाटी में अधिक ठंड का प्रकोप दिखा। लेह में शून्य से 11. 8 डिग्री सेल्सियस और कारगिल में शून्य से 12. 1 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया, जबकि द्रास देश में सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान शून्य से 19. 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कड़ाके की इस ठंड ने श्रीनगर के विश्व प्रसिद्ध डल झील के किनारों और अंदरूनी भागों को जमा दिया। बुधवार सुबह डल झील में कश्तियां बड़ी मुश्किल से चली। कश्ती चालक को झील पर जमी बर्फ की परत को काट कर आगे बढ़ना पड़ा। इसके इलावा कई जगहों पर पानी के नल भी ठंड से जम गए।
चिल्लई-कलां को कश्मीर का सबसे कठोर समय माना जाता है। 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक 40 दिनों की लंबी अवधि तक घाटी के लोगों का ठंड से जीवन कठिन हो जाता है। इसके बाद 20 दिन की अवधि को 'चिल्लई-खुर्द' कहा जाता है, जो 30 जनवरी से 19 फरवरी के बीच होती है और फिर 10 दिन की अवधि 'चिल्लई-बच्चा' होती है जो 20 फरवरी से 1 मार्च तक होती है।
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आसिफ सुहाफ, श्रीनगरः घाटी में आज से सर्दियों के चालीस दिनों का सख्त मौसम कहा जाने वाला 'चिल्लई कलां' की शुरुआत हो गई। पहले दिन ही पूरे कश्मीर घाटी में पारा मायनस में रिकॉर्ड किया गया। मंगलवार रात श्रीनगर में पारा मायनस चार. दो डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लद्दाख के द्रास इलाके का टेम्प्रेचर माइनस उन्नीस. आठ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने कहा, "श्रीनगर में न्यूनतम तापमान सामान्य से दो. सात डिग्री सेल्सियस कम था। कश्मीर घाटी के काजीगुंड गेट पर भी तापमान शून्य से चार. दो डिग्री सेल्सियस नीचे और सामान्य से दो. छः डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से छः. दो डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया और यह कश्मीर में सबसे ठंडा स्थान रहा। गुलमर्ग में भी न्यूनतम तापमान चार. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लद्दाख घाटी में अधिक ठंड का प्रकोप दिखा। लेह में शून्य से ग्यारह. आठ डिग्री सेल्सियस और कारगिल में शून्य से बारह. एक डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया, जबकि द्रास देश में सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान शून्य से उन्नीस. आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कड़ाके की इस ठंड ने श्रीनगर के विश्व प्रसिद्ध डल झील के किनारों और अंदरूनी भागों को जमा दिया। बुधवार सुबह डल झील में कश्तियां बड़ी मुश्किल से चली। कश्ती चालक को झील पर जमी बर्फ की परत को काट कर आगे बढ़ना पड़ा। इसके इलावा कई जगहों पर पानी के नल भी ठंड से जम गए। चिल्लई-कलां को कश्मीर का सबसे कठोर समय माना जाता है। इक्कीस दिसंबर से इकतीस जनवरी तक चालीस दिनों की लंबी अवधि तक घाटी के लोगों का ठंड से जीवन कठिन हो जाता है। इसके बाद बीस दिन की अवधि को 'चिल्लई-खुर्द' कहा जाता है, जो तीस जनवरी से उन्नीस फरवरी के बीच होती है और फिर दस दिन की अवधि 'चिल्लई-बच्चा' होती है जो बीस फरवरी से एक मार्च तक होती है।
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कुशीनगर। जनपद के 331 विधानसभा क्षेत्र के गंगुआ स्थित प्राथमिक पाठशाला में बनाये गये मतदान केंद्र को दुल्हन की तरह सजाया था। इतना ही नहीं युवाओं को लुभाने के लिये वोटर सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया था। हर युवा मतदाता अपने मतदान के बाद एक सेल्फी अवश्य ले रहा था।
बता दें कि विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2022 के मतदान के महापर्व पर तमकुही विधानसभा के गंगुआ के युवा ग्राम प्रधान अख्तर अली गुड्डू ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। साथ ही अपने ग्रामीण मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक भी किया। मतदाताओं को सहूलियत व धूप से बचने के लिए पंडाल व पेय जल की उत्तम व्यवस्था भी की गई थी। मतदाताओं के स्वागत के लिए स्वागत द्वार भी बनवाये गए थे। लोगों को इस लोकतंत्र के महापर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कुशीनगर जिला निर्वाचन अधिकारी एस. राजलिंगम, पुलिस अधीक्षक सचिन्द्र पटेल ने गुरुवार को प्रातः बेलवा बुजुर्ग के प्राथमिक विद्यालय पहुंच कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। साथ ही आमजन व मीडिया बंधुओं के माध्यम से समस्त जनपदवासियों से अपने मत का प्रयोग करने की अपील की। इसके बाद जनपद में हो रहे विधानसभा चुनाव को सकुशल संपन्न कराए जाने के दृष्टिगत भ्रमणशील रह कर विधानसभा पड़रौना के बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज, सरपतही खुर्द, मैलानगरी, विधानसभा रामकोला के विभिन्न मतदान केंद्रों, विधान सभा कुशीनगर के टेकुआटार, कसया स्थित विभिन्न मतदान केंद्रों व हाटा के विभिन्न मतदान केंद्रों/ बूथ का निरीक्षण कर पीठासीन अधिकारी एवं मतदाताओं से व्यवस्थाओं के विषय में जानकारी प्राप्त किया। डीएम व एसपी ने उपस्थित मतदाताओं एवं पोलिंग एजेंटों से शांतिपूर्ण मतदान करने एवं कराने में सहयोग की अपील किया।
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कुशीनगर। जनपद के तीन सौ इकतीस विधानसभा क्षेत्र के गंगुआ स्थित प्राथमिक पाठशाला में बनाये गये मतदान केंद्र को दुल्हन की तरह सजाया था। इतना ही नहीं युवाओं को लुभाने के लिये वोटर सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया था। हर युवा मतदाता अपने मतदान के बाद एक सेल्फी अवश्य ले रहा था। बता दें कि विधानसभा सामान्य निर्वाचन दो हज़ार बाईस के मतदान के महापर्व पर तमकुही विधानसभा के गंगुआ के युवा ग्राम प्रधान अख्तर अली गुड्डू ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। साथ ही अपने ग्रामीण मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक भी किया। मतदाताओं को सहूलियत व धूप से बचने के लिए पंडाल व पेय जल की उत्तम व्यवस्था भी की गई थी। मतदाताओं के स्वागत के लिए स्वागत द्वार भी बनवाये गए थे। लोगों को इस लोकतंत्र के महापर्व में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया गया। कुशीनगर जिला निर्वाचन अधिकारी एस. राजलिंगम, पुलिस अधीक्षक सचिन्द्र पटेल ने गुरुवार को प्रातः बेलवा बुजुर्ग के प्राथमिक विद्यालय पहुंच कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। साथ ही आमजन व मीडिया बंधुओं के माध्यम से समस्त जनपदवासियों से अपने मत का प्रयोग करने की अपील की। इसके बाद जनपद में हो रहे विधानसभा चुनाव को सकुशल संपन्न कराए जाने के दृष्टिगत भ्रमणशील रह कर विधानसभा पड़रौना के बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज, सरपतही खुर्द, मैलानगरी, विधानसभा रामकोला के विभिन्न मतदान केंद्रों, विधान सभा कुशीनगर के टेकुआटार, कसया स्थित विभिन्न मतदान केंद्रों व हाटा के विभिन्न मतदान केंद्रों/ बूथ का निरीक्षण कर पीठासीन अधिकारी एवं मतदाताओं से व्यवस्थाओं के विषय में जानकारी प्राप्त किया। डीएम व एसपी ने उपस्थित मतदाताओं एवं पोलिंग एजेंटों से शांतिपूर्ण मतदान करने एवं कराने में सहयोग की अपील किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बॉलीवुड एक्ट्रेस अनन्या पांडे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियोज साझा करती रहती हैं। हालांकि, आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के बाद कुछ वक्त के लिए अनन्या पांडे ने सोशल मीडिया से एकदम से दूरी बना ली थी। लेकिन, फिर इसके बाद वह अपनी पहले वाली फॉर्म में वापस लौट आईं और फैंस ने तस्वीरें साझा करने का सिलसिला शुरू कर दिया। अनन्या पांडे ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम पर कुछ शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को उनके फैंस खूब पसंद कर रहे हैं।
अनन्या पांडे ने इंस्टाग्राम पर 5 तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में अनन्या पांडे व्हाइट ड्रेस में अलग-अलग लुक में पोज देती हुई दिख रही हैं। पांच तस्वीरों में अनन्या पांडे का लुक और स्टाइल देखने लायक है।
इन तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा है-वंडरलैंड में एनी। इन तस्वीरों को अब तक 73 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। इन तस्वीरों में अनन्या पांडे बेहद खूबसूरत लग रही हैं। एक फैन ने इन तस्वीरों पर कमेंट करते हुए लिखा है- कितनी सुंदर हो! वहीं अन्य यूजर्स इन तस्वीरों पर दिल वाली इमोजी बनाकर अनन्या पांडे पर प्यार लुटा रहे हैं।
कई बार अनन्या पांडे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। इससे पहले उन्होंने जालीदार कपड़ों में तस्वीरें शेयर की थीं। इन तस्वीरों को देखकर फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे।
अनन्या पांडे के वर्कफ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस फिल्म 'लाइगर' के लिए काम कर रही हैं। फिल्म विजय देवरकोंडा और बॉक्सर माइक टायसन फिल्म में लीड रोल में होंगे। गौरतलब है कि अनन्या पांडे महज 23 साल की हैं। वह अपने फैशन सेंस और स्टाइल को लेकर सुर्खियों में रहती हैं।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस अनन्या पांडे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें और वीडियोज साझा करती रहती हैं। हालांकि, आर्यन खान ड्रग्स मामले में पूछताछ के बाद कुछ वक्त के लिए अनन्या पांडे ने सोशल मीडिया से एकदम से दूरी बना ली थी। लेकिन, फिर इसके बाद वह अपनी पहले वाली फॉर्म में वापस लौट आईं और फैंस ने तस्वीरें साझा करने का सिलसिला शुरू कर दिया। अनन्या पांडे ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम पर कुछ शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों को उनके फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। अनन्या पांडे ने इंस्टाग्राम पर पाँच तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में अनन्या पांडे व्हाइट ड्रेस में अलग-अलग लुक में पोज देती हुई दिख रही हैं। पांच तस्वीरों में अनन्या पांडे का लुक और स्टाइल देखने लायक है। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा है-वंडरलैंड में एनी। इन तस्वीरों को अब तक तिहत्तर हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। इन तस्वीरों में अनन्या पांडे बेहद खूबसूरत लग रही हैं। एक फैन ने इन तस्वीरों पर कमेंट करते हुए लिखा है- कितनी सुंदर हो! वहीं अन्य यूजर्स इन तस्वीरों पर दिल वाली इमोजी बनाकर अनन्या पांडे पर प्यार लुटा रहे हैं। कई बार अनन्या पांडे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। इससे पहले उन्होंने जालीदार कपड़ों में तस्वीरें शेयर की थीं। इन तस्वीरों को देखकर फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे। अनन्या पांडे के वर्कफ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस फिल्म 'लाइगर' के लिए काम कर रही हैं। फिल्म विजय देवरकोंडा और बॉक्सर माइक टायसन फिल्म में लीड रोल में होंगे। गौरतलब है कि अनन्या पांडे महज तेईस साल की हैं। वह अपने फैशन सेंस और स्टाइल को लेकर सुर्खियों में रहती हैं।
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एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने सरोजनी नगर में अपनी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की लगभग 600 दुकानों और ऑफिस को बेचने का फैसला किया है.
अगर आप कमर्शियल दुकान में निवेश करने का प्लान कर रहे हैं तो दिल्ली में शॉप्स खरीदने का खास मौका NBCC ले कर आया है. जी हां, NBCC थोक दामों पर दिल्ली की मेन मार्केट सरोजनी नगर में दुकानों की बिक्री करने वाली है. ऐसे में अगर आप दुकान खरीदने की सोच रहे हैं तो ये अच्छा मौका है.
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी कुछ इकाइयों के लिए खरीदार खोज रही है. एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने सरोजनी नगर में अपनी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की लगभग 600 दुकानों और ऑफिस को बेचने का फैसला किया है.
पब्लिक सेक्टर की कंस्ट्रक्शन कंपनी जनरल पूल आवासीय आवास (जीपीआरए) जो सरोजनी नगर में रिडेवलपमेंट का काम कर रही है जल्द ही सरोजिनी नगर में दुकानों के लिए थोक नीलामी करने की योजना बना रही है. कंपनी ने कहा कि पहली बार, NBCC ने थोक नीलामी करने का फैसला किया है. कमर्शियल रियल स्टेट मॉडल के तहत इन्वेस्टर ऐसी जगह पर संपत्ति खरीदते हैं जहां व्यवसाय के जरिए वो लंबे समय तक टिक सकें. एनबीसीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पवन कुमार गुप्ता ने कहा कि खरीदार के पास इस चीज का का का बेनिफिट होगा कि वो यहां कौन का बिजनेस कर सकता है. क्योंकि एक ही फ्लोर और आसपास में कई अठारह की दुकानें हैं इससे खरीदार को बढ़िया बिजनेस आईडिया मिल सकता है.
इसको आप ऐसे समझ सकते हैं कि खरीदार ये डिसाइड करने में सक्षम होगा कि हाई-एंड स्टोर, सैलून, रेस्तरां, किराना स्टोर और अन्य प्रकार के ब्रांड समान स्टोर के साथ स्थित हैं. गुप्ता के मुताबिक, इस साल नवंबर तक ये प्रोजेक्ट कम्पलीट हो जायेगा.
इस प्रोजेक्ट में 329 दुकानें शामिल हैं, जिनकी कीमत 56 लाख रुपये और 2.63 करोड़ रुपये के बीच है. वहीं, 324 ऑफिस स्पेस है जिनकी कीमत 80 लाख रुपये से लेकर 3.28 करोड़ रुपये तक है. एनबीसीसी के अनुसार, पिछले साल जुलाई में लॉन्च होने के बाद से अब तक 31 दुकानें कुल 47.81 करोड़ रुपये में बिक चुकी हैं. बाकी बची दुकानों और दफ्तरों की जल्द ही एक साथ नीलामी की जाएगी.
NBCC के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में लगभग 1,393 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है. इसके बाद मिली रकम से बाकि बिल्डिंग्स का रिडेवलपमेंट किया जाएगा.
NBCC के कमर्शियल डायरेक्टर केपी महादेव स्वामी ने कहा कि सरोजनी नगर में इमारतें आठ मंजिल की होंगी और इसमें चार बेसमेंट लेवल शामिल होंगे.
अब तक, बेसमेंट स्तर, भूतल और तीन मंजिलों का निर्माण किया जा चुका है, साइट पर काम जुलाई 2022 में शुरू हो गया है. सरोजिनी नगर मेट्रो स्टेशन और सरोजनी नगर मार्केट के बगल में स्थित साइट के साथ, कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. डाउनटाउन प्रोजेक्ट सरोजिनी नगर जीपीआरए कॉलोनी के बड़े रिडेवलपमेंट के 14 पैकेजों में से एक है. इसके अलावा आवासीय टावरों के दो अन्य पैकेज पर काम चल रहा है.
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एनबीसीसी लिमिटेड ने सरोजनी नगर में अपनी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की लगभग छः सौ दुकानों और ऑफिस को बेचने का फैसला किया है. अगर आप कमर्शियल दुकान में निवेश करने का प्लान कर रहे हैं तो दिल्ली में शॉप्स खरीदने का खास मौका NBCC ले कर आया है. जी हां, NBCC थोक दामों पर दिल्ली की मेन मार्केट सरोजनी नगर में दुकानों की बिक्री करने वाली है. ऐसे में अगर आप दुकान खरीदने की सोच रहे हैं तो ये अच्छा मौका है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी कुछ इकाइयों के लिए खरीदार खोज रही है. एनबीसीसी लिमिटेड ने सरोजनी नगर में अपनी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की लगभग छः सौ दुकानों और ऑफिस को बेचने का फैसला किया है. पब्लिक सेक्टर की कंस्ट्रक्शन कंपनी जनरल पूल आवासीय आवास जो सरोजनी नगर में रिडेवलपमेंट का काम कर रही है जल्द ही सरोजिनी नगर में दुकानों के लिए थोक नीलामी करने की योजना बना रही है. कंपनी ने कहा कि पहली बार, NBCC ने थोक नीलामी करने का फैसला किया है. कमर्शियल रियल स्टेट मॉडल के तहत इन्वेस्टर ऐसी जगह पर संपत्ति खरीदते हैं जहां व्यवसाय के जरिए वो लंबे समय तक टिक सकें. एनबीसीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पवन कुमार गुप्ता ने कहा कि खरीदार के पास इस चीज का का का बेनिफिट होगा कि वो यहां कौन का बिजनेस कर सकता है. क्योंकि एक ही फ्लोर और आसपास में कई अठारह की दुकानें हैं इससे खरीदार को बढ़िया बिजनेस आईडिया मिल सकता है. इसको आप ऐसे समझ सकते हैं कि खरीदार ये डिसाइड करने में सक्षम होगा कि हाई-एंड स्टोर, सैलून, रेस्तरां, किराना स्टोर और अन्य प्रकार के ब्रांड समान स्टोर के साथ स्थित हैं. गुप्ता के मुताबिक, इस साल नवंबर तक ये प्रोजेक्ट कम्पलीट हो जायेगा. इस प्रोजेक्ट में तीन सौ उनतीस दुकानें शामिल हैं, जिनकी कीमत छप्पन लाख रुपये और दो.तिरेसठ करोड़ रुपये के बीच है. वहीं, तीन सौ चौबीस ऑफिस स्पेस है जिनकी कीमत अस्सी लाख रुपये से लेकर तीन.अट्ठाईस करोड़ रुपये तक है. एनबीसीसी के अनुसार, पिछले साल जुलाई में लॉन्च होने के बाद से अब तक इकतीस दुकानें कुल सैंतालीस.इक्यासी करोड़ रुपये में बिक चुकी हैं. बाकी बची दुकानों और दफ्तरों की जल्द ही एक साथ नीलामी की जाएगी. NBCC के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में लगभग एक,तीन सौ तिरानवे करोड़ रुपये आने की उम्मीद है. इसके बाद मिली रकम से बाकि बिल्डिंग्स का रिडेवलपमेंट किया जाएगा. NBCC के कमर्शियल डायरेक्टर केपी महादेव स्वामी ने कहा कि सरोजनी नगर में इमारतें आठ मंजिल की होंगी और इसमें चार बेसमेंट लेवल शामिल होंगे. अब तक, बेसमेंट स्तर, भूतल और तीन मंजिलों का निर्माण किया जा चुका है, साइट पर काम जुलाई दो हज़ार बाईस में शुरू हो गया है. सरोजिनी नगर मेट्रो स्टेशन और सरोजनी नगर मार्केट के बगल में स्थित साइट के साथ, कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. डाउनटाउन प्रोजेक्ट सरोजिनी नगर जीपीआरए कॉलोनी के बड़े रिडेवलपमेंट के चौदह पैकेजों में से एक है. इसके अलावा आवासीय टावरों के दो अन्य पैकेज पर काम चल रहा है.
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स्पोर्ट्स डेस्क : भले ही कोरोना काल में कई देश क्रिकेट सीरीज खेल चुके है और यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग खेली जा रही है लेकिन टीम इंडिया को अभी सीरीज खेलने का मौका नहीं मिला है. इस बीच बीसीसीआई ने अगले माह भारत के ऑस्ट्रेलिया टूर की योजना अगले महीने से शुरू होने वाला है.
हालांकि इस दौरे को मंजूरी का इंतजार था लेकिन अब इस दौरे को ऑस्ट्रेलिया सरकार की मंजूरी मिलने से आयोजन का रास्ता साफ़ हो गया है. जानकारी के अनुसार टीम इंडिया इस दौरे पर सरकार ने परमिशन दे दी है. भारत का ऑस्ट्रेलिया टूर अगले महीने से शुरू होने वाला है. अब अगले माह शुरू होने वाले इस टूर पर टीम इंडिया तीन वनडे, तीन टी-20 और चार टेस्ट मैच खेलेगी.
हालांकि यूएई में हो रही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने वाले भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर को ऑस्ट्रेलिया आने के बाद सिडनी में कोरोना गाइडलाइन्स के अनुसार क्वारंटाइन होना पड़ेगा. भारत के इस टूर में सीमित ओवर की सीरीज सिडनी और कैनबरा में होगी.
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स्पोर्ट्स डेस्क : भले ही कोरोना काल में कई देश क्रिकेट सीरीज खेल चुके है और यूएई में इंडियन प्रीमियर लीग खेली जा रही है लेकिन टीम इंडिया को अभी सीरीज खेलने का मौका नहीं मिला है. इस बीच बीसीसीआई ने अगले माह भारत के ऑस्ट्रेलिया टूर की योजना अगले महीने से शुरू होने वाला है. हालांकि इस दौरे को मंजूरी का इंतजार था लेकिन अब इस दौरे को ऑस्ट्रेलिया सरकार की मंजूरी मिलने से आयोजन का रास्ता साफ़ हो गया है. जानकारी के अनुसार टीम इंडिया इस दौरे पर सरकार ने परमिशन दे दी है. भारत का ऑस्ट्रेलिया टूर अगले महीने से शुरू होने वाला है. अब अगले माह शुरू होने वाले इस टूर पर टीम इंडिया तीन वनडे, तीन टी-बीस और चार टेस्ट मैच खेलेगी. हालांकि यूएई में हो रही इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई प्लेयर को ऑस्ट्रेलिया आने के बाद सिडनी में कोरोना गाइडलाइन्स के अनुसार क्वारंटाइन होना पड़ेगा. भारत के इस टूर में सीमित ओवर की सीरीज सिडनी और कैनबरा में होगी.
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कर्नाटक में हिजाब पर हुड़दंग के बाद अब ईसाई मिशनरियों की करतूत सामने आ रही है। आरोप है कि बेंगलुरु में एक स्कूल ने अभिभावकों से इस बात पर सहमति ली है कि वे अपने बच्चों के कक्षा में बाइबल लाने पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं करेंगे। खबरों के अनुसार क्लेरेंस हाई स्कूल नाम के निजी स्कूल के एडमिशन फॉर्म पर 11वें पॉइंट में लिखा है कि 'पैरेंट्स इसकी पुष्टि करते हैं कि उनका बच्चा अपने आध्यात्मिक कल्याण के लिए मॉर्निंग असेंबली, स्क्रिप्चर क्लास सहित अन्य क्लासेज में भाग लेगा। बच्चा स्कूल में पवित्र ग्रंथ बाइबिल की शिक्षा पर कोई आपत्ति नहीं करेगा। ' जब इस बात की जानकारी अभिभावकों और हिन्दुत्व निष्ठ संगठनों को हुई तो इसका विरोध शुरू हुआ। इन सभी का कहना है कि स्कूल द्वारा जबरन बाइबल पढ़ाना गलत है। इस पूरे मसले पर हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता गौड़ा ने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने गैर-ईसाई छात्रों के लिए बाइबल लाने और उसे पढ़ने को अनिवार्य बनाया है, यह संविधान के अनुच्छेद-25 और 30 का उल्लंघन है।
स्कूल के प्रधानाचार्य जैरी जार्ज मैथ्यू का इस मामले पर कहना है कि हमें मालूम है कि हमारे स्कूल की एक नीति से कुछ लोग नाराज हैं। हमारा स्कूल शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाला है। इस मामले में हमने अपने वकीलों से परामर्श किया है और हम उनकी सलाह का पालन करेंगे। हम कानून नहीं तोड़ेंगे।
राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि कोई भी शिक्षा संस्थान लोगों को किसी खास मत - पंथ का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर कोई संस्थान ऐसा करता मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी संस्थान पांथिक पुस्तकें नहीं पढ़ा सकता और ना ही किसी पांथिक गतिविधि की अनुमति है।
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कर्नाटक में हिजाब पर हुड़दंग के बाद अब ईसाई मिशनरियों की करतूत सामने आ रही है। आरोप है कि बेंगलुरु में एक स्कूल ने अभिभावकों से इस बात पर सहमति ली है कि वे अपने बच्चों के कक्षा में बाइबल लाने पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं करेंगे। खबरों के अनुसार क्लेरेंस हाई स्कूल नाम के निजी स्कूल के एडमिशन फॉर्म पर ग्यारहवें पॉइंट में लिखा है कि 'पैरेंट्स इसकी पुष्टि करते हैं कि उनका बच्चा अपने आध्यात्मिक कल्याण के लिए मॉर्निंग असेंबली, स्क्रिप्चर क्लास सहित अन्य क्लासेज में भाग लेगा। बच्चा स्कूल में पवित्र ग्रंथ बाइबिल की शिक्षा पर कोई आपत्ति नहीं करेगा। ' जब इस बात की जानकारी अभिभावकों और हिन्दुत्व निष्ठ संगठनों को हुई तो इसका विरोध शुरू हुआ। इन सभी का कहना है कि स्कूल द्वारा जबरन बाइबल पढ़ाना गलत है। इस पूरे मसले पर हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता गौड़ा ने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने गैर-ईसाई छात्रों के लिए बाइबल लाने और उसे पढ़ने को अनिवार्य बनाया है, यह संविधान के अनुच्छेद-पच्चीस और तीस का उल्लंघन है। स्कूल के प्रधानाचार्य जैरी जार्ज मैथ्यू का इस मामले पर कहना है कि हमें मालूम है कि हमारे स्कूल की एक नीति से कुछ लोग नाराज हैं। हमारा स्कूल शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाला है। इस मामले में हमने अपने वकीलों से परामर्श किया है और हम उनकी सलाह का पालन करेंगे। हम कानून नहीं तोड़ेंगे। राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि कोई भी शिक्षा संस्थान लोगों को किसी खास मत - पंथ का पालन करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर कोई संस्थान ऐसा करता मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी संस्थान पांथिक पुस्तकें नहीं पढ़ा सकता और ना ही किसी पांथिक गतिविधि की अनुमति है।
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बॉलीवुड में ए लिस्ट सेलिब्रिटियों को बेस्ट लुक दे चुकी सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट शालीना नथानी का कहना है कि स्टाइल वह है, जिससे फैशन बनता है। उनका कहना है कि आप वास्तविक जीवन में जो भी पहनते हैं वह स्क्रीन पर काफी अलग दिखता है। एच एंड एम प्रोजेक्ट लव इवेंट के लिए राजधानी आई नथानी ने आईएएनएस लाईव से बातचीत की जिसका कुछ अंश नीचे दिया गया है।
1. आपके अनुसार स्टाइल की परिभाषा क्या है?
नथानी- आमतौर पर स्टाइल वह है, जिससे फैशन बनता है। मुझे कपड़ों और लोगों के बारे बस इतनी दिलचस्पी है कि वे कैसे अलग-अलग तरीके से उसे पहनते हैं। जैसे एक सफेद शर्ट है, लेकिन मुझे दिलचस्पी इस बात में है कि लोग उसे किस तरह पहन रहे हैं। कहने का अर्थ है कि वे कैसे शर्ट के बाजुओं को मोड़ते हैं उसके साथ क्या एससरीज पहनते हैं।
2. बॉलीवुड में सबसे स्टाइलिश इंसान का नाम लेना हो, तो आप किसका नाम लेंगी?
नथानी- ईमानदारी से कहूं तो मेरे लिए शाहरुख खान सबसे ज्यादा स्टाइलिश इंसान हैं। हर दिन वो जिस तरह कपड़े पहनते हैं मुझे उसका तरीका पसंद है। उनका व्यक्तिगत स्टाइल शानदार है। उन्हें ब्लू जींस के साथ, सफेद टी-शर्ट, कूल जैकेट और एक बेहतरीन स्नीकर का जोड़ा बहुत पसंद है।
3. सर्दी के इस मौसम के लिए कुछ खास ट्रेंड?
नथानी- मेरे लिए हर सर्दी के हर मौसम का ट्रेंड इस बात पर निर्भर करता है कि आप ने कपड़ों की लेयरिंग कैसे की है। रंग और प्रिंट को मिश्रित करने से न डरे, यही वो चीज है जो आपके फैशन को दिलचस्प बनाती है। इस बार घुटने की ऊंचाई वाले बूट्स फैशन में है।
4. एच एंड एम के साथ अपने सहयोग के बारे में बताए?
नथानी- एच एंड एम प्रोजेक्ट लव ने इस बार मेरे पसंदीदा डिजाइनर जिआंबाटिस्टा वल्ली के साथ टाई-अप किया है। मेरा मानना है कि वे सबसे अच्छे कपड़े बनाते हैं। ऐसे में मेरे लिए उनके कपड़ों के साथ कैंपेन करना बहुत खास है।
5. आपने मिंत्रा फैशन सुपरस्टार में मेंटर के तौर पर शुरुआत की थी। आपका अनुभव कैसा था?
नथानी- मिंत्रा फैशन सुपरस्टार के साथ मेरा सहयोग बहुत खास था, क्योंकि पहली बार मैं रियालिटी शो की मेंटरिंग करने के साथ उसकी जज बनी थी। अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों के साथ काम करने का अनुभव शानदार था।
6. आपको अपने लिए लुक की प्लानिंग करना कैसा लगता है?
नथानी- मेरा मानना है कि अपने स्टाइल को थोड़ा स्टैंडर्ड रखना मेरे लिए काफी महत्वपूर्ण है। मुझे ड्रेसिंग अप होने के विचार बहुत अच्छे लगते हैं, इसके साथ ही यह मेरे फैशन और स्टाइल के सेंस को प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा जरिया है।
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बॉलीवुड में ए लिस्ट सेलिब्रिटियों को बेस्ट लुक दे चुकी सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट शालीना नथानी का कहना है कि स्टाइल वह है, जिससे फैशन बनता है। उनका कहना है कि आप वास्तविक जीवन में जो भी पहनते हैं वह स्क्रीन पर काफी अलग दिखता है। एच एंड एम प्रोजेक्ट लव इवेंट के लिए राजधानी आई नथानी ने आईएएनएस लाईव से बातचीत की जिसका कुछ अंश नीचे दिया गया है। एक. आपके अनुसार स्टाइल की परिभाषा क्या है? नथानी- आमतौर पर स्टाइल वह है, जिससे फैशन बनता है। मुझे कपड़ों और लोगों के बारे बस इतनी दिलचस्पी है कि वे कैसे अलग-अलग तरीके से उसे पहनते हैं। जैसे एक सफेद शर्ट है, लेकिन मुझे दिलचस्पी इस बात में है कि लोग उसे किस तरह पहन रहे हैं। कहने का अर्थ है कि वे कैसे शर्ट के बाजुओं को मोड़ते हैं उसके साथ क्या एससरीज पहनते हैं। दो. बॉलीवुड में सबसे स्टाइलिश इंसान का नाम लेना हो, तो आप किसका नाम लेंगी? नथानी- ईमानदारी से कहूं तो मेरे लिए शाहरुख खान सबसे ज्यादा स्टाइलिश इंसान हैं। हर दिन वो जिस तरह कपड़े पहनते हैं मुझे उसका तरीका पसंद है। उनका व्यक्तिगत स्टाइल शानदार है। उन्हें ब्लू जींस के साथ, सफेद टी-शर्ट, कूल जैकेट और एक बेहतरीन स्नीकर का जोड़ा बहुत पसंद है। तीन. सर्दी के इस मौसम के लिए कुछ खास ट्रेंड? नथानी- मेरे लिए हर सर्दी के हर मौसम का ट्रेंड इस बात पर निर्भर करता है कि आप ने कपड़ों की लेयरिंग कैसे की है। रंग और प्रिंट को मिश्रित करने से न डरे, यही वो चीज है जो आपके फैशन को दिलचस्प बनाती है। इस बार घुटने की ऊंचाई वाले बूट्स फैशन में है। चार. एच एंड एम के साथ अपने सहयोग के बारे में बताए? नथानी- एच एंड एम प्रोजेक्ट लव ने इस बार मेरे पसंदीदा डिजाइनर जिआंबाटिस्टा वल्ली के साथ टाई-अप किया है। मेरा मानना है कि वे सबसे अच्छे कपड़े बनाते हैं। ऐसे में मेरे लिए उनके कपड़ों के साथ कैंपेन करना बहुत खास है। पाँच. आपने मिंत्रा फैशन सुपरस्टार में मेंटर के तौर पर शुरुआत की थी। आपका अनुभव कैसा था? नथानी- मिंत्रा फैशन सुपरस्टार के साथ मेरा सहयोग बहुत खास था, क्योंकि पहली बार मैं रियालिटी शो की मेंटरिंग करने के साथ उसकी जज बनी थी। अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों के साथ काम करने का अनुभव शानदार था। छः. आपको अपने लिए लुक की प्लानिंग करना कैसा लगता है? नथानी- मेरा मानना है कि अपने स्टाइल को थोड़ा स्टैंडर्ड रखना मेरे लिए काफी महत्वपूर्ण है। मुझे ड्रेसिंग अप होने के विचार बहुत अच्छे लगते हैं, इसके साथ ही यह मेरे फैशन और स्टाइल के सेंस को प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा जरिया है।
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Motorola Edge 40 को कुछ दिन पहले ही भारत में लॉन्च किया गया था। फोन में कई दमदार फीचर्स दिए गए हैं जिसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी (Mediatek dimension) 8020 चिपसेट, 8 GB RAM, 144Hz रिफ्रेश रेट, 68W टर्बोपावर वायर्ड चार्जिंग जैसे कई शानदार फीचर्स शामिल हैं।
इस फोन की पहली SALE आज दोपहर से शुरू हो चुकी है। आइए आज आपको इस आर्टिकल में बताते हैं Motorola Edge 40 की कीमत और इस पर मिलने वाले शानदार Offers।
फोन में 8GB RAM और 256GB स्टोरेज दी गई है। इस फोन को 29,999 रुपये में पेश किया गया है। फोन को E-Commerce-Website Flipkart से खरीदा जा सकेगा। आज दोपहर 12 बजे से इसकी पहली SALE शुरू हो चुकी है।
इसके साथ कुछ Bank Offers भी दिए जा रहे हैं। कुछ बैंक Cards के साथ चुनिंदा ग्राहकों को 5,000 रुपये प्रति माह से शुरू होने वाली No-cost EMI का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक का Exchange Offer भी दिाय जा सकता है।
इस फोन को तीन कलर वेरिएंट में खरीदा जा सकेगा। इसे एक्लिप्स ब्लैक, लूनर ब्लू और नेबुला ग्रीन कलर में उपलब्ध कराया गया है। यह फोन ग्रीन और ब्लैक वेरिएंट वीगन लेदरबैक (Green and Black Variant Vegan Leatherback) फिनिश के साथ आता है।
फोन में 6. 55 इंच का फुल-एचडी+ (2400 x 1080 पिक्सल) Poled Display दिया गया है। इसका रिफ्रेश रेट 144Hz का है।
यह फोन ऑक्टा-कोर मीडियाटेक डाइमेंसिटी (Octa-Core MediaTek Dimensity) 8020 5G SoC से लैस है। इसमें 8 GB की RAM और 236 GB की स्टोरेज दी गई है।
यह फोन Android 13 पर काम करता है। फोन में ड्यूल रियर कैमरा (Dual Rear Camera) दिया गया है। इसका पहला सेंसर 50 मेगापिक्सल का है। दूसरा 13 मेगापिक्सल का है।
फोन में 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है। फोन में 68W टर्बोपावर वायर्ड चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग (68W TurboPower wired charging and 15W wireless charging) सपोर्ट के साथ 4400mAh की बैटरी दी गई है।
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Motorola Edge चालीस को कुछ दिन पहले ही भारत में लॉन्च किया गया था। फोन में कई दमदार फीचर्स दिए गए हैं जिसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी आठ हज़ार बीस चिपसेट, आठ GB RAM, एक सौ चौंतालीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट, अड़सठ वाट टर्बोपावर वायर्ड चार्जिंग जैसे कई शानदार फीचर्स शामिल हैं। इस फोन की पहली SALE आज दोपहर से शुरू हो चुकी है। आइए आज आपको इस आर्टिकल में बताते हैं Motorola Edge चालीस की कीमत और इस पर मिलने वाले शानदार Offers। फोन में आठGB RAM और दो सौ छप्पनGB स्टोरेज दी गई है। इस फोन को उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में पेश किया गया है। फोन को E-Commerce-Website Flipkart से खरीदा जा सकेगा। आज दोपहर बारह बजे से इसकी पहली SALE शुरू हो चुकी है। इसके साथ कुछ Bank Offers भी दिए जा रहे हैं। कुछ बैंक Cards के साथ चुनिंदा ग्राहकों को पाँच,शून्य रुपयापये प्रति माह से शुरू होने वाली No-cost EMI का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा दो,शून्य रुपयापये तक का Exchange Offer भी दिाय जा सकता है। इस फोन को तीन कलर वेरिएंट में खरीदा जा सकेगा। इसे एक्लिप्स ब्लैक, लूनर ब्लू और नेबुला ग्रीन कलर में उपलब्ध कराया गया है। यह फोन ग्रीन और ब्लैक वेरिएंट वीगन लेदरबैक फिनिश के साथ आता है। फोन में छः. पचपन इंच का फुल-एचडी+ Poled Display दिया गया है। इसका रिफ्रेश रेट एक सौ चौंतालीस हर्ट्ज़ का है। यह फोन ऑक्टा-कोर मीडियाटेक डाइमेंसिटी आठ हज़ार बीस पाँचG SoC से लैस है। इसमें आठ GB की RAM और दो सौ छत्तीस GB की स्टोरेज दी गई है। यह फोन Android तेरह पर काम करता है। फोन में ड्यूल रियर कैमरा दिया गया है। इसका पहला सेंसर पचास मेगापिक्सल का है। दूसरा तेरह मेगापिक्सल का है। फोन में बत्तीस मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है। फोन में अड़सठ वाट टर्बोपावर वायर्ड चार्जिंग और पंद्रह वाट वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ चार हज़ार चार सौmAh की बैटरी दी गई है।
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Amazon Great Summer Sale On Best Tablets अगर अच्छे टैबलेट को लेना चाहते हैं तो बेहद शानदार मौका आपके सामने आया है क्योंकि Amazon Great Summer Sale की शुरूआत हो चुकी है जिसकी मदद से आप आधी कीमत पर Best Tablet को खरीद सकते हैं। इनकी क्वालिटी बहुत अच्छी है।
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यह Apple iPad 64GB की स्टोरेज के साथ आ रहा है। इस टैबलेट का नाम Best Tablets In India की लिस्ट में शुमार हैं। यह बिना हैंग किये आपके मूवी और गेमिंग के मजे को डबल करता हैं। इसकी असली कीमत 33,990 है। Apple iPad Price: Rs 25,900.
Amazon sale 2023 पर यह Samsung Galaxy Tablet आपको 38% तक की बंपर छूट मिल रही हैं। यह गेमिंग के लिए सबसे अच्छा टैबलेट है। इसकी क्वालिटी बहुत अच्छी है।
यह 64GB स्टोरेज के साथ आता है और इसकी रैम 4GB है। इसमें आपको फास्ट चार्जिंग बैटरी मिलती है। इसके अलावा इसका लुक भी काफी स्टाइलिश हैं। इसकी असली किमत 23,999 है। Amazon Deals Today पर इसे 38%तक की बचत पर आसानी से खरीद सकते हैं। Samsung Galaxy Tablet Price: Rs 14,999.
Amazon Great Summer Sale 2023 पर मिल रहे इस Xiaomi Tablet का नाम Best Tablets In India की लिस्ट में शुमार है। इसमें आपको 128GB Data storage मिलती हैं। इसके मटेरियल की क्वालिटी बेहद टॉप क्लास हैं। जिसकी वजह से यह जल्दी खराब नहीं होता।
इस Android Tablet में 2560x1600 हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन है और यह लो ब्लू लाइट आई प्रोटेक्शन के साथ आता है। इसके अलावा इसमें आपको वाई-फाई कनेक्टिवटी मिलती है। Amazon Sale Offers में इस पर आप 29% तक का भारी डिस्काउंट मिल रहा है। Xiaomi Tablet Price: Rs 26,999.
इस realme Tablet को आप Amazon Offers 2023 में 37% की बचत पर घर ला सकते हैं। यह बच्चों की ऑनलाइन क्लास के लिए परफेक्ट चॉइस है। इसके अलावा यह Best Gaming Tablet भी है।
इसका स्क्रीन साइज 10. 4 इंच है। इसको आप वाई-फाई + सेलुलर कनेक्टिवटी से कनेक्ट कर नेट सर्फिंग कर सकते हैं। इसका लुक काफी अच्छा है। इसकी असली किमत 24,999 है। realme Tablet Price: Rs 15,747.
Lenovo Tab M10 Fhd Plus (2Nd Gen)
Amazon sale offers पर आधी कीमत में मिल रहा यह Lenovo Tablet अपने शानदार फीचर्स के कारण सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले टैबलेट हैं। इसका स्क्रीन रिफ्रेश रेट 60 Hz है। इसका लुक भी काफी स्टाइलिश हैं।
यह Tablet 10. 3 इंच डिस्प्ले के साथ आता है। इसकी बैटरी चार्ज होने के बाद 2 दिन तक आसानी से चल सकती हैं। इसमें आपको फिंगरप्रिंट सेंसर भी मिलता हैं। इस Amazon Great Summer Sale पर आपको इस पर 49% तक का डिस्काउंट मिल रहा हैं। Lenovo Tablet Price: Rs 17,999.
Amazon Sale On Best Tablet: स्टोर पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें।
डिस्क्लेमर : जागरण के पत्रकार इस लेख के निर्माण में शामिल नहीं है। यहां उल्लिखित कीमतें अमेज़न के संबंध में परिवर्तन के अधीन हैं।
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Amazon Great Summer Sale On Best Tablets अगर अच्छे टैबलेट को लेना चाहते हैं तो बेहद शानदार मौका आपके सामने आया है क्योंकि Amazon Great Summer Sale की शुरूआत हो चुकी है जिसकी मदद से आप आधी कीमत पर Best Tablet को खरीद सकते हैं। इनकी क्वालिटी बहुत अच्छी है। Amazon Great Summer Sale On Best Tablet: अगर आप किसी बेहतरीन टैबलेट को लेने का सोच रहे हैं, लेकिन प्राइस की चिंता आपको सता रही हैं, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं हैं, क्योंकि Amazon Great Summer Sale की शुरूआत हो चुकी हैं, जिसमें आपको सभी बेस्ट टैबलेट पर भारी डिस्काउंट मिल रहा हैं। इस Amazon sale दो हज़ार तेईस की मदद से आप अपने लिए अपने बजट के अनुसार कोई भी Best Tablets खरीद सकते हैं। Amazon sale पर मिल रहे ये सभी टैबलेट भारत के सबसे पॉपुलर ब्रांड के हैं। इनके फीचर्स काफई शानदार हैं, जिसकी वजह से इन्हें काफी पसंद किया गया है। Amazon offers के जरिए इन सभी Best Tablet पर आप % की बंपर छूट मिल रही हैं, Amazon Great Summer Sale की मदद से आप पसंद का कोई भी Best Tablet खरीद सकते हैं। तो चलिए नजर डालते हैं इस Amazon Sale On Best Tablet की लिस्ट पर। Amazon Great Summer Sale में आपको Xiaomi Tablet, Android Tablet, Samsung Tablet, Lenovo Tablet, Apple Tablet, Apple iPad, तक के सभी ब्रांड पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है। Amazon offers में दिए गए इन सभी टैबलेट का नाम Best Tablet की लिस्ट में शुमार है। इनकी क्वालिटी बेहद शानदार हैं, जिसकी वजह से यह गेमिंग के लिए भी बेस्ट है। इसके अलावा इनमें आपको बड़ी स्क्रीन, पॉवरफुल बैटरी और स्मूद प्रोसेसर मिलता है। इन टैबलेट को आप इस Amazon sale today पर आधी कीमत पर खरीद सकते हैं। Amazon Great Summer Sale में यह Apple Tablet आपको चौबीस% तक के भारी डिस्काउंट पर मिल रहा हैं। यह सबसे ज्यादा फेमस टैबलेट में से एक है। इसके शानदार फीचर्स और HD डिस्प्ले लोगों को सबेस ज्यादा पसंद आते हैं। यह Apple iPad चौंसठGB की स्टोरेज के साथ आ रहा है। इस टैबलेट का नाम Best Tablets In India की लिस्ट में शुमार हैं। यह बिना हैंग किये आपके मूवी और गेमिंग के मजे को डबल करता हैं। इसकी असली कीमत तैंतीस,नौ सौ नब्बे है। Apple iPad Price: पच्चीस रुपया,नौ सौ. Amazon sale दो हज़ार तेईस पर यह Samsung Galaxy Tablet आपको अड़तीस% तक की बंपर छूट मिल रही हैं। यह गेमिंग के लिए सबसे अच्छा टैबलेट है। इसकी क्वालिटी बहुत अच्छी है। यह चौंसठGB स्टोरेज के साथ आता है और इसकी रैम चारGB है। इसमें आपको फास्ट चार्जिंग बैटरी मिलती है। इसके अलावा इसका लुक भी काफी स्टाइलिश हैं। इसकी असली किमत तेईस,नौ सौ निन्यानवे है। Amazon Deals Today पर इसे अड़तीस%तक की बचत पर आसानी से खरीद सकते हैं। Samsung Galaxy Tablet Price: चौदह रुपया,नौ सौ निन्यानवे. Amazon Great Summer Sale दो हज़ार तेईस पर मिल रहे इस Xiaomi Tablet का नाम Best Tablets In India की लिस्ट में शुमार है। इसमें आपको एक सौ अट्ठाईसGB Data storage मिलती हैं। इसके मटेरियल की क्वालिटी बेहद टॉप क्लास हैं। जिसकी वजह से यह जल्दी खराब नहीं होता। इस Android Tablet में दो हज़ार पाँच सौ साठxएक हज़ार छः सौ हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन है और यह लो ब्लू लाइट आई प्रोटेक्शन के साथ आता है। इसके अलावा इसमें आपको वाई-फाई कनेक्टिवटी मिलती है। Amazon Sale Offers में इस पर आप उनतीस% तक का भारी डिस्काउंट मिल रहा है। Xiaomi Tablet Price: छब्बीस रुपया,नौ सौ निन्यानवे. इस realme Tablet को आप Amazon Offers दो हज़ार तेईस में सैंतीस% की बचत पर घर ला सकते हैं। यह बच्चों की ऑनलाइन क्लास के लिए परफेक्ट चॉइस है। इसके अलावा यह Best Gaming Tablet भी है। इसका स्क्रीन साइज दस. चार इंच है। इसको आप वाई-फाई + सेलुलर कनेक्टिवटी से कनेक्ट कर नेट सर्फिंग कर सकते हैं। इसका लुक काफी अच्छा है। इसकी असली किमत चौबीस,नौ सौ निन्यानवे है। realme Tablet Price: पंद्रह रुपया,सात सौ सैंतालीस. Lenovo Tab Mदस Fhd Plus Amazon sale offers पर आधी कीमत में मिल रहा यह Lenovo Tablet अपने शानदार फीचर्स के कारण सबसे ज्यादा पसंद किये जाने वाले टैबलेट हैं। इसका स्क्रीन रिफ्रेश रेट साठ हर्ट्ज़ है। इसका लुक भी काफी स्टाइलिश हैं। यह Tablet दस. तीन इंच डिस्प्ले के साथ आता है। इसकी बैटरी चार्ज होने के बाद दो दिन तक आसानी से चल सकती हैं। इसमें आपको फिंगरप्रिंट सेंसर भी मिलता हैं। इस Amazon Great Summer Sale पर आपको इस पर उनचास% तक का डिस्काउंट मिल रहा हैं। Lenovo Tablet Price: सत्रह रुपया,नौ सौ निन्यानवे. Amazon Sale On Best Tablet: स्टोर पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें। डिस्क्लेमर : जागरण के पत्रकार इस लेख के निर्माण में शामिल नहीं है। यहां उल्लिखित कीमतें अमेज़न के संबंध में परिवर्तन के अधीन हैं।
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CHSE Odisha Class 12th Arts Result 2022: काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन (CHSE) ओडिशा द्वारा आज शाम को 4 बजे कक्षा 12वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। रिजल्ट की तारीख को लेकर बोर्ड द्वारा 3 अगस्त को ही ऐलान किया जा चुका था। एक बार घोषित होने के बाद, छात्र अपने बोर्ड परीक्षा रोल नंबर और पंजीकरण संख्या का उपयोग करके अपने कक्षा 12 के परिणाम देख सकते हैं।
एक बार घोषित होने के बाद, छात्र अपने बोर्ड परीक्षा रोल नंबर और पंजीकरण संख्या का उपयोग करके अपने कक्षा 12 के परिणाम chseodisha. nic. in और orissaresults. nic. in पर देख सकते हैं। छात्र नीचे दी गई लिंक के माध्यम से भी परीक्षा का रिजल्ट एक क्लिक में चेक कर सकते हैं।
इस साल ओडिशा में 3 लाख से अधिक छात्र कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए हैं। ओडिशा कक्षा 12वीं की परीक्षा 28 अप्रैल से 31 मई तक आयोजित की गई थी।
-CHSE ओडिशा की आधिकारिक साइट chseodisha. nic. in पर जाएं।
-होम पेज पर उपलब्ध रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें।
- अब नए पेज पर CHSE Odisha 12th Arts Result 2022 की लिंक दबाएं और लॉगिन विवरण दर्ज करें।
-आपका परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा।
-रिजल्ट चेक करें और पेज डाउनलोड करें।
-आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
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CHSE Odisha Class बारहth Arts Result दो हज़ार बाईस: काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन ओडिशा द्वारा आज शाम को चार बजे कक्षा बारहवीं बोर्ड का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। रिजल्ट की तारीख को लेकर बोर्ड द्वारा तीन अगस्त को ही ऐलान किया जा चुका था। एक बार घोषित होने के बाद, छात्र अपने बोर्ड परीक्षा रोल नंबर और पंजीकरण संख्या का उपयोग करके अपने कक्षा बारह के परिणाम देख सकते हैं। एक बार घोषित होने के बाद, छात्र अपने बोर्ड परीक्षा रोल नंबर और पंजीकरण संख्या का उपयोग करके अपने कक्षा बारह के परिणाम chseodisha. nic. in और orissaresults. nic. in पर देख सकते हैं। छात्र नीचे दी गई लिंक के माध्यम से भी परीक्षा का रिजल्ट एक क्लिक में चेक कर सकते हैं। इस साल ओडिशा में तीन लाख से अधिक छात्र कक्षा बारह की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए हैं। ओडिशा कक्षा बारहवीं की परीक्षा अट्ठाईस अप्रैल से इकतीस मई तक आयोजित की गई थी। -CHSE ओडिशा की आधिकारिक साइट chseodisha. nic. in पर जाएं। -होम पेज पर उपलब्ध रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें। - अब नए पेज पर CHSE Odisha बारहth Arts Result दो हज़ार बाईस की लिंक दबाएं और लॉगिन विवरण दर्ज करें। -आपका परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। -रिजल्ट चेक करें और पेज डाउनलोड करें। -आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
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इंडियन प्रीमियर लीग पर एक तरफ जहां बल्लेबाजों और विकेटकीपर पर धनवर्षा हुई वहीं तेज गेंदबाजों को इतने पैसे नहीं मिले। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस को सबसे ज्यादा 5 करोड़ 40 लाख रु. कीमत मिली। कमिंस को मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में शामिल किया। द.अफ्रीका के तेज गेंदबाज कागिसो रबाडा को भी 4 करोड़ 20 लाख रु. मिले। रबाडा को उनकी पिछली फ्रेंचाइजी दिल्ली डेयरडेविल्स ने राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर अपनी टीम में शामिल किया।
टीम इंडिया के तेज गेंदबाज उमेश यादव को भी 4 करोड़ 20 लाख रु. की बड़ी कीमत मिली। उमेश यादव को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम में भी जगह मिली। मोहम्मद शमी को भी दिल्ली डेयरडेविल्स ने राइट टू मैच के तहत रीटेन किया। शमी महज 3 करोड़ रु. में बिके। बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तिफिजुर रहमान को मुंबई इंडियंस ने 2 करोड़ 20 लाख रु. में अपने स्क्वॉड में शामिल किया।
आईपीएल के सबसे सफल गेंदबाज लसिथ मलिंगा को कोई खरीदार नहीं मिला। ईशांत शर्मा को भी किसी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा। टिम साउदी और टी20 स्पेशलिस्ट मिचेल मैक्लेनेघन को भी किसी ने अपनी टीम में मौका नहीं दया। मिचेल जॉनसन, जॉश हेजलवुड पर भी किसी फ्रेंचाइजी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि अभी भी इन गेंदबाजों को खरीदा जा सकता है।
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इंडियन प्रीमियर लीग पर एक तरफ जहां बल्लेबाजों और विकेटकीपर पर धनवर्षा हुई वहीं तेज गेंदबाजों को इतने पैसे नहीं मिले। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस को सबसे ज्यादा पाँच करोड़ चालीस लाख रु. कीमत मिली। कमिंस को मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में शामिल किया। द.अफ्रीका के तेज गेंदबाज कागिसो रबाडा को भी चार करोड़ बीस लाख रु. मिले। रबाडा को उनकी पिछली फ्रेंचाइजी दिल्ली डेयरडेविल्स ने राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर अपनी टीम में शामिल किया। टीम इंडिया के तेज गेंदबाज उमेश यादव को भी चार करोड़ बीस लाख रु. की बड़ी कीमत मिली। उमेश यादव को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम में भी जगह मिली। मोहम्मद शमी को भी दिल्ली डेयरडेविल्स ने राइट टू मैच के तहत रीटेन किया। शमी महज तीन करोड़ रु. में बिके। बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तिफिजुर रहमान को मुंबई इंडियंस ने दो करोड़ बीस लाख रु. में अपने स्क्वॉड में शामिल किया। आईपीएल के सबसे सफल गेंदबाज लसिथ मलिंगा को कोई खरीदार नहीं मिला। ईशांत शर्मा को भी किसी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा। टिम साउदी और टीबीस स्पेशलिस्ट मिचेल मैक्लेनेघन को भी किसी ने अपनी टीम में मौका नहीं दया। मिचेल जॉनसन, जॉश हेजलवुड पर भी किसी फ्रेंचाइजी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि अभी भी इन गेंदबाजों को खरीदा जा सकता है। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
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अधिक संख्या प्रायः ऐसे ही लोगों की निकलेगी जो अपनी वासनाओं को न रोकना चाहेंगे और आनंद-विलास करना ही अधिक पसंद करेंगे। वे लोग अपनी सारी कमाई योंही खर्च कर देंगे। यह दशा केवल थोड़ी आयवाले लोगों की ही नहीं है । हम लोग यहाँ तक देखते और सुनते हैं कि सैकड़ों रुपये मासिक पानेवाले लोगों के मरने के बाद उनके परिवार के पास एक पैसा नहीं बचा। उनके मरते ही घर की चीजें बिकने लगी और इस बिक्रो से जो रुपया मिला वह उनके क्रिया-कम करने और ऋण चुकाने में लगा । और उपयोगों के सिवा धन से एक और बहुत बड़ा काम निकलता है। उसकी सहायता से मनुष्य स्वतंत्र हो जाता है । इस विचार से देखिए तो वह बहुत महत्त्व की चीज है। एक विद्वान् का कथन है - "धन की ओर से कभी लापरवाही मत करो । घन ही मनुष्य का आचरण है।" सुजनता, परोपकारिता, न्यायपरायणता, प्रामाणिकता और दूरदर्शिता आदि मनुष्य के अनेक उच्च गुण धन के सद्व्यय पर ही निर्भर हैं। इसी प्रकार घन के अपव्यय से लोभ, अन्याय, अर्थ, दरिद्रता आदि अनेक दुर्गुण उत्पन्न होते हैं ।
जो लोग अपनी सारी कमाई याँही खर्च कर देते हैं उनका कभी पूरा नहीं पड़ता और वे सदा दरिद्र बने रहते हैं। वे सदा दीन बने रहते हैं और अपनी प्रतिष्ठा खो देते हैं। वे
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अधिक संख्या प्रायः ऐसे ही लोगों की निकलेगी जो अपनी वासनाओं को न रोकना चाहेंगे और आनंद-विलास करना ही अधिक पसंद करेंगे। वे लोग अपनी सारी कमाई योंही खर्च कर देंगे। यह दशा केवल थोड़ी आयवाले लोगों की ही नहीं है । हम लोग यहाँ तक देखते और सुनते हैं कि सैकड़ों रुपये मासिक पानेवाले लोगों के मरने के बाद उनके परिवार के पास एक पैसा नहीं बचा। उनके मरते ही घर की चीजें बिकने लगी और इस बिक्रो से जो रुपया मिला वह उनके क्रिया-कम करने और ऋण चुकाने में लगा । और उपयोगों के सिवा धन से एक और बहुत बड़ा काम निकलता है। उसकी सहायता से मनुष्य स्वतंत्र हो जाता है । इस विचार से देखिए तो वह बहुत महत्त्व की चीज है। एक विद्वान् का कथन है - "धन की ओर से कभी लापरवाही मत करो । घन ही मनुष्य का आचरण है।" सुजनता, परोपकारिता, न्यायपरायणता, प्रामाणिकता और दूरदर्शिता आदि मनुष्य के अनेक उच्च गुण धन के सद्व्यय पर ही निर्भर हैं। इसी प्रकार घन के अपव्यय से लोभ, अन्याय, अर्थ, दरिद्रता आदि अनेक दुर्गुण उत्पन्न होते हैं । जो लोग अपनी सारी कमाई याँही खर्च कर देते हैं उनका कभी पूरा नहीं पड़ता और वे सदा दरिद्र बने रहते हैं। वे सदा दीन बने रहते हैं और अपनी प्रतिष्ठा खो देते हैं। वे
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Adnan Sami On YS Jagan Mohan Reddy: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने फिल्म RRR के 'नाटू-नाटू' गाने को ऑस्कर मिलने पर ट्वीट कर खुशी जताई। ट्वीट में सीएम रेड्डी ने लिखा, 'तेलुगू झंडा ऊंची उड़ान भर रहा है'। इस ट्वीट पर सिंगर अदनान सामी ने सीएम रेड्डी की आलोचना की है और कहा है कि ये उनकी छोटी मानसिकता को दिखाता है।
'हमें गौरवान्वित महसूस कराने के लिए धन्यवाद. . . '
ट्वीट में आगे जगन मोहन रेड्डी ने लिखा,"एसएस राजामौली, जूनियर एनटीआर, राम चरण, एम एम कीरावानी, चंद्रबोस और RRR फिल्म के सभी टीम को धन्यवाद। पूरी टीम का धन्यवाद, जो उन्होंने मुझे और दुनिया भर के करोड़ों तेलुगू और सभी भारतीयों को गौरवान्वित महसूस कराया। भारतीयों को अविश्वसनीय रूप से गर्व है। "
अदनान सामी ने कहा- 'ये तलाब के मेंढक हैं जो. . . '
जगन मोहन रेड्डी के ट्वीट पर अदनान सामी ने प्रतिक्रिया देकर उनके 'तेलुगू सोच' की आलोचना की है। अदनान सामी ने ट्वीट करते हुए लिख, "ये छोटी सोच वाले तलाब के मेंढक हैं, जो समुद्र के बारे में सोच ही नहीं सकता है. . . क्योंकि यह उनकी इज्जत वाली छोटी नाक से परे है. . . ! ! आपको क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए शर्म आनी चाहिए। आप राष्ट्रीय गौरव को गले लगाने और इसका प्रचार करने में असमर्थ होने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए! जय हिंद! "
अदनान सामी का ये ट्वीट वायरल हो गया है। कुछ यूजर्स ने उनको इस ट्वीट के लिए ट्रोल भी किया है। एक यूजर ने ट्वीट कर कहा, "आखिर नॉर्थ इंडिया वाले साउथ इंडिया की तरह उनकी भाषा क्यों नहीं सीखते हैं, जैसे साउथ इंडिया वाले हिंदी बोलना सीखते हैं। "
अदनान सामी ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, "ठीक है, ऐसी स्थिति में आपको अपनी फिल्मों को हिंदी में डब नहीं करना चाहिए। जिसकी वजह से उनकी फिल्में बड़ी हिट होती है। इन्हें क्षेत्रीय भाषा में ही रखें ! ! जबकि हर भाषा कीमती है और सभी प्यार और सम्मान के योग्य है, आपको इस हास्यास्पद बकवास को रोकने और बहुसंख्यकों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। "
'मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा. . . '
अदनान सामी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, "मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा है। मेरा मुद्दा बहुत सरल रहा है . . . सभी भाषाएं, चाहे उनकी उत्पत्ति और बोली कुछ भी हो, आखिरकर, हम सब एक भारतीय हैं और उसके बाद कुछ और हैं। बस इतना ही! मैंने सभी भाषाओं के लिए समान दिखाया है और सम्मान के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में असंख्य गीत गाए हैं। "
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Adnan Sami On YS Jagan Mohan Reddy: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने फिल्म RRR के 'नाटू-नाटू' गाने को ऑस्कर मिलने पर ट्वीट कर खुशी जताई। ट्वीट में सीएम रेड्डी ने लिखा, 'तेलुगू झंडा ऊंची उड़ान भर रहा है'। इस ट्वीट पर सिंगर अदनान सामी ने सीएम रेड्डी की आलोचना की है और कहा है कि ये उनकी छोटी मानसिकता को दिखाता है। 'हमें गौरवान्वित महसूस कराने के लिए धन्यवाद. . . ' ट्वीट में आगे जगन मोहन रेड्डी ने लिखा,"एसएस राजामौली, जूनियर एनटीआर, राम चरण, एम एम कीरावानी, चंद्रबोस और RRR फिल्म के सभी टीम को धन्यवाद। पूरी टीम का धन्यवाद, जो उन्होंने मुझे और दुनिया भर के करोड़ों तेलुगू और सभी भारतीयों को गौरवान्वित महसूस कराया। भारतीयों को अविश्वसनीय रूप से गर्व है। " अदनान सामी ने कहा- 'ये तलाब के मेंढक हैं जो. . . ' जगन मोहन रेड्डी के ट्वीट पर अदनान सामी ने प्रतिक्रिया देकर उनके 'तेलुगू सोच' की आलोचना की है। अदनान सामी ने ट्वीट करते हुए लिख, "ये छोटी सोच वाले तलाब के मेंढक हैं, जो समुद्र के बारे में सोच ही नहीं सकता है. . . क्योंकि यह उनकी इज्जत वाली छोटी नाक से परे है. . . ! ! आपको क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए शर्म आनी चाहिए। आप राष्ट्रीय गौरव को गले लगाने और इसका प्रचार करने में असमर्थ होने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए! जय हिंद! " अदनान सामी का ये ट्वीट वायरल हो गया है। कुछ यूजर्स ने उनको इस ट्वीट के लिए ट्रोल भी किया है। एक यूजर ने ट्वीट कर कहा, "आखिर नॉर्थ इंडिया वाले साउथ इंडिया की तरह उनकी भाषा क्यों नहीं सीखते हैं, जैसे साउथ इंडिया वाले हिंदी बोलना सीखते हैं। " अदनान सामी ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, "ठीक है, ऐसी स्थिति में आपको अपनी फिल्मों को हिंदी में डब नहीं करना चाहिए। जिसकी वजह से उनकी फिल्में बड़ी हिट होती है। इन्हें क्षेत्रीय भाषा में ही रखें ! ! जबकि हर भाषा कीमती है और सभी प्यार और सम्मान के योग्य है, आपको इस हास्यास्पद बकवास को रोकने और बहुसंख्यकों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। " 'मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा. . . ' अदनान सामी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, "मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा है। मेरा मुद्दा बहुत सरल रहा है . . . सभी भाषाएं, चाहे उनकी उत्पत्ति और बोली कुछ भी हो, आखिरकर, हम सब एक भारतीय हैं और उसके बाद कुछ और हैं। बस इतना ही! मैंने सभी भाषाओं के लिए समान दिखाया है और सम्मान के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में असंख्य गीत गाए हैं। "
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ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि साल 2019 में फिल्म और कमाई के लिहाज से अक्षय कुमार ने टॅाप किया है। इस साल उनकी चार फिल्में रिलीज हुईं। केसरी, मिशन मंगल और हाउसफुल 4 के बाद अक्षय कुमार की गुड न्यूज फिर साल के अंत में रिलीज होने वाली हैं।
अक्षय की ये सभी फिल्में कमाई के लिहाज से सफल रही हैं। ऐसे में साल 2019 के सबसे कमाऊ स्टार बन गए हैं, अक्षय कुमार। इसका खुलासा अमेरिकन मैगजीन फोर्ब्स ने अपने साल 2019 के 10 भारतीयों की लिस्ट जारी की है।
इस फेहरिस्त में कमाई के लिहाज से अक्षय कुमार आगे हो गए हैं। सलमान उनसे काफी पीछे हैं। चलिए देखते हैं कितनी कमाई की है अक्षय ने।
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Don't Miss! तीन सौ करोड़ की कमाई, अक्षय बन गए नंबर एक सुपरस्टार, सलमान को तगड़ा झटका, पूरी लिस्ट ! ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि साल दो हज़ार उन्नीस में फिल्म और कमाई के लिहाज से अक्षय कुमार ने टॅाप किया है। इस साल उनकी चार फिल्में रिलीज हुईं। केसरी, मिशन मंगल और हाउसफुल चार के बाद अक्षय कुमार की गुड न्यूज फिर साल के अंत में रिलीज होने वाली हैं। अक्षय की ये सभी फिल्में कमाई के लिहाज से सफल रही हैं। ऐसे में साल दो हज़ार उन्नीस के सबसे कमाऊ स्टार बन गए हैं, अक्षय कुमार। इसका खुलासा अमेरिकन मैगजीन फोर्ब्स ने अपने साल दो हज़ार उन्नीस के दस भारतीयों की लिस्ट जारी की है। इस फेहरिस्त में कमाई के लिहाज से अक्षय कुमार आगे हो गए हैं। सलमान उनसे काफी पीछे हैं। चलिए देखते हैं कितनी कमाई की है अक्षय ने।
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कोतवाली खुर्जा नगर क्षेत्र के आबिदा नगर में कुछ लोगों ने व्यक्ति से मारपीट कर करीब 12 हजार रुपए लूट लिए। मामले में पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार की सुबह नगला कोठी निवासी कमल सिंह पुत्र चेतराम सिंह ने पुलिस को बताया कि मंगलवार की रात वह अपने निजी कार्य से रोडवेज बस स्टैंड आया था। जहां से वह अपने एक साथी के साथ मोहल्ला आबिदा नगर पहुंचा। जहां कुछ लोगों ने उस पर पीछे से प्रहार कर दिया। मारपीट के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शोर मचाने पर उक्त लोग उससे 12 हजार रुपये लेकर फरार हो गए। लोगों ने आनन-फानन ही घायल को अस्पताल पहुंचाया। मामले में एसएसआई संदीप कुमार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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कोतवाली खुर्जा नगर क्षेत्र के आबिदा नगर में कुछ लोगों ने व्यक्ति से मारपीट कर करीब बारह हजार रुपए लूट लिए। मामले में पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। बुधवार की सुबह नगला कोठी निवासी कमल सिंह पुत्र चेतराम सिंह ने पुलिस को बताया कि मंगलवार की रात वह अपने निजी कार्य से रोडवेज बस स्टैंड आया था। जहां से वह अपने एक साथी के साथ मोहल्ला आबिदा नगर पहुंचा। जहां कुछ लोगों ने उस पर पीछे से प्रहार कर दिया। मारपीट के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शोर मचाने पर उक्त लोग उससे बारह हजार रुपये लेकर फरार हो गए। लोगों ने आनन-फानन ही घायल को अस्पताल पहुंचाया। मामले में एसएसआई संदीप कुमार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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रसोई में आधुनिक उपकरण महत्वपूर्ण हैंअपने मालिकों के लिए जीवन आसान बनाओ। यदि आप कस्टर्ड कॉफी के प्रेमी हैं, लेकिन वह अक्सर "बच निकलता है", कॉफी निर्माता खरीदने पर विचार करना उचित है। सबसे बजट विकल्प एक ड्रिप कॉफी निर्माता होगा। इसकी विशेषताओं के बारे में, इस आलेख को पढ़ें।
एक ड्रिप-प्रकार कॉफी निर्माता में प्लास्टिक या कांच की टंकी होती है (आमतौर पर बल्ब या जग के रूप में बनाई जाती है) दीवार पर एक पैमाने और एक गर्म स्टैंड के साथ।
विशेष टैंक आवश्यक से भरा हैपानी की मात्रा ड्रिप कॉफी मशीन इसे गर्म करता है। तापमान आमतौर पर 95 डिग्री तक पहुंचता है। इसके बाद, गर्म तरल धीरे-धीरे मल्ड अनाज के माध्यम से गुजरता है, जो इसके रंग और सुगंध को व्यक्त करता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि स्वाद, संतृप्ति और ताकत के अनुसार, जर्मन या अमेरिकी नामक परिणामस्वरूप पेय, अन्य मशीनों या तुर्की में कॉफी बनाने के लिए कम है।
पीने की कॉफी मशीन के फायदे क्या हैं? ग्राहकों की समीक्षा कहती है कि वे इसकी कम लागत से आकर्षित होते हैं। इस डिवाइस का एक महत्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैः गर्म स्टैंड के लिए धन्यवाद यह गर्म राज्य में लंबे समय तक तैयार कॉफी रखने में सक्षम है।
जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, मुख्य दोष, जोएक पेय कॉफी मशीन है, तैयार पेय की गुणवत्ता है। हालांकि, उन लोगों के लिए जो बहुत मजबूत कॉफी पसंद नहीं करते हैं, यह काफी उपयुक्त है। इस डिवाइस का एक और नुकसान फ़िल्टर के आवधिक प्रतिस्थापन की आवश्यकता है। यह सहायक अलग से खरीदा जाना चाहिए, और यह समय और धन का एक अतिरिक्त अपशिष्ट है। एक और कमी यह है कि कुछ कॉफी connoisseurs फोम की अनुपस्थिति पर विचार करें।
यदि आपको कॉफी अधिक पसंद है, तो 800 वाट से अधिक नहीं की क्षमता वाला एक कॉफी निर्माता प्राप्त करें। यदि मॉडल में उच्च शक्ति है, तो यह तेजी से पेय तैयार करेगा, जिसका अर्थ है कि यह बहुत कमजोर होगा।
एंटी-ड्रॉप सिस्टम का ख्याल रखें। वह कॉफी मेकर बंद कर देती है अगर कॉफ़ी पॉट बाहर निकाल दिया जाता है। जब यह अपने स्थान पर वापस आ जाता है, तो मशीन पेय तैयार करना जारी रखेगी। इसका मतलब है कि प्रतीक्षा करने के लिए आवश्यक नहीं है, आप समय से पहले अपने आप को एक या दो कप डाल सकते हैं।
आधान के खिलाफ संरक्षण खाना पकाने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करेगा जब बर्तन भरा हुआ होता है, तरल को मेज पर डालने से रोकता है।
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रसोई में आधुनिक उपकरण महत्वपूर्ण हैंअपने मालिकों के लिए जीवन आसान बनाओ। यदि आप कस्टर्ड कॉफी के प्रेमी हैं, लेकिन वह अक्सर "बच निकलता है", कॉफी निर्माता खरीदने पर विचार करना उचित है। सबसे बजट विकल्प एक ड्रिप कॉफी निर्माता होगा। इसकी विशेषताओं के बारे में, इस आलेख को पढ़ें। एक ड्रिप-प्रकार कॉफी निर्माता में प्लास्टिक या कांच की टंकी होती है दीवार पर एक पैमाने और एक गर्म स्टैंड के साथ। विशेष टैंक आवश्यक से भरा हैपानी की मात्रा ड्रिप कॉफी मशीन इसे गर्म करता है। तापमान आमतौर पर पचानवे डिग्री तक पहुंचता है। इसके बाद, गर्म तरल धीरे-धीरे मल्ड अनाज के माध्यम से गुजरता है, जो इसके रंग और सुगंध को व्यक्त करता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि स्वाद, संतृप्ति और ताकत के अनुसार, जर्मन या अमेरिकी नामक परिणामस्वरूप पेय, अन्य मशीनों या तुर्की में कॉफी बनाने के लिए कम है। पीने की कॉफी मशीन के फायदे क्या हैं? ग्राहकों की समीक्षा कहती है कि वे इसकी कम लागत से आकर्षित होते हैं। इस डिवाइस का एक महत्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैः गर्म स्टैंड के लिए धन्यवाद यह गर्म राज्य में लंबे समय तक तैयार कॉफी रखने में सक्षम है। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, मुख्य दोष, जोएक पेय कॉफी मशीन है, तैयार पेय की गुणवत्ता है। हालांकि, उन लोगों के लिए जो बहुत मजबूत कॉफी पसंद नहीं करते हैं, यह काफी उपयुक्त है। इस डिवाइस का एक और नुकसान फ़िल्टर के आवधिक प्रतिस्थापन की आवश्यकता है। यह सहायक अलग से खरीदा जाना चाहिए, और यह समय और धन का एक अतिरिक्त अपशिष्ट है। एक और कमी यह है कि कुछ कॉफी connoisseurs फोम की अनुपस्थिति पर विचार करें। यदि आपको कॉफी अधिक पसंद है, तो आठ सौ वाट से अधिक नहीं की क्षमता वाला एक कॉफी निर्माता प्राप्त करें। यदि मॉडल में उच्च शक्ति है, तो यह तेजी से पेय तैयार करेगा, जिसका अर्थ है कि यह बहुत कमजोर होगा। एंटी-ड्रॉप सिस्टम का ख्याल रखें। वह कॉफी मेकर बंद कर देती है अगर कॉफ़ी पॉट बाहर निकाल दिया जाता है। जब यह अपने स्थान पर वापस आ जाता है, तो मशीन पेय तैयार करना जारी रखेगी। इसका मतलब है कि प्रतीक्षा करने के लिए आवश्यक नहीं है, आप समय से पहले अपने आप को एक या दो कप डाल सकते हैं। आधान के खिलाफ संरक्षण खाना पकाने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करेगा जब बर्तन भरा हुआ होता है, तरल को मेज पर डालने से रोकता है।
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आज हम आपको एक ऐसे राइटर के बारे में बताने जा रहें है जो बहुत ही कम उम्र के है। जी हाँ हम बात कर रहें है कानपुर के रहने वाले ईशान की। जी हाँ, ईशान एक बायोग्राफिकल राइटर है जिन्होंने बही हाल ही में अब्दुल कलाम की जीवनी लिखी है उनके द्वारा लिखी गई किताब "दी टीचर आई नेवर मेट" इन दिनों काफी चर्चाओं में है। इस किताब को लिखने में ईशान की मदद करने वाले डॉक्टर कलाम के एडवाइजर डॉक्टर सृजन पाल, डॉ. शशि थरूर, पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी, आदि रहें है।
ईशान ने 16 साल की उम्र में ही इस किताब को लिखकर काफी नाम कमा लिया है। बड़े बड़े लोगो ने उन्हें ई-मेल के द्वारा बधाई दी है साथ ही एक पत्रकार ने उन्हें वंडर बॉय की उपाधि भी दे दी है। ईशान का मानना है की कलाम का पूरा जीवन एक छात्र के लिए प्रेरणा है और अगर कोई अपनी मंजिल से भटकता है तो वह एक बार अब्दुल कलाम की जीवनी को पढ़ ले उसे सही मार्ग मिल जाता है। इसी के साथ ईशान ने यह भी बताया है की उन्हें इस किताब को लिखने की प्रेरणा देने वाले रामजस और जेएनयु प्रोटेस्ट थे। इसी के साथ अब्दुल कलाम एक जीवन से राष्ट्वाद को भी समझने की प्रेरणा मिलती है।
इस किताब का नाम ईशान ने दी टीचर आई नेवर मेट इस वजह से रखा, क्योंकि वे आज तक कभी भी डॉ. अब्दुल कलाम से नहीं मिल पाए बस एक बार उन्हें दूर से देखा था। तब से ही ईशान उन्हें अपना गुरु, और पाने जीवन की प्रेरणा मानने लगे। आपको बता दें इस किताब में अब्दुल कलाम एक जीवन के हर पड़ाव को पेश किया गया है उनका बचपन भी और उनका राष्ट्रवाद भी। इसी के साथ अगर कोई इस किताब को पढ़ता है तो वह अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है अपनी पर्स्नालिटी को डेवलप कर सकता है और भी बहुत कुछ।
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आज हम आपको एक ऐसे राइटर के बारे में बताने जा रहें है जो बहुत ही कम उम्र के है। जी हाँ हम बात कर रहें है कानपुर के रहने वाले ईशान की। जी हाँ, ईशान एक बायोग्राफिकल राइटर है जिन्होंने बही हाल ही में अब्दुल कलाम की जीवनी लिखी है उनके द्वारा लिखी गई किताब "दी टीचर आई नेवर मेट" इन दिनों काफी चर्चाओं में है। इस किताब को लिखने में ईशान की मदद करने वाले डॉक्टर कलाम के एडवाइजर डॉक्टर सृजन पाल, डॉ. शशि थरूर, पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी, आदि रहें है। ईशान ने सोलह साल की उम्र में ही इस किताब को लिखकर काफी नाम कमा लिया है। बड़े बड़े लोगो ने उन्हें ई-मेल के द्वारा बधाई दी है साथ ही एक पत्रकार ने उन्हें वंडर बॉय की उपाधि भी दे दी है। ईशान का मानना है की कलाम का पूरा जीवन एक छात्र के लिए प्रेरणा है और अगर कोई अपनी मंजिल से भटकता है तो वह एक बार अब्दुल कलाम की जीवनी को पढ़ ले उसे सही मार्ग मिल जाता है। इसी के साथ ईशान ने यह भी बताया है की उन्हें इस किताब को लिखने की प्रेरणा देने वाले रामजस और जेएनयु प्रोटेस्ट थे। इसी के साथ अब्दुल कलाम एक जीवन से राष्ट्वाद को भी समझने की प्रेरणा मिलती है। इस किताब का नाम ईशान ने दी टीचर आई नेवर मेट इस वजह से रखा, क्योंकि वे आज तक कभी भी डॉ. अब्दुल कलाम से नहीं मिल पाए बस एक बार उन्हें दूर से देखा था। तब से ही ईशान उन्हें अपना गुरु, और पाने जीवन की प्रेरणा मानने लगे। आपको बता दें इस किताब में अब्दुल कलाम एक जीवन के हर पड़ाव को पेश किया गया है उनका बचपन भी और उनका राष्ट्रवाद भी। इसी के साथ अगर कोई इस किताब को पढ़ता है तो वह अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है अपनी पर्स्नालिटी को डेवलप कर सकता है और भी बहुत कुछ।
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पौष शुक्ला १५
क्या गांठ काटे विना भरपेट भोजन नहीं मिल सकता ? न्याय-नीति से आजीविका चलाने वाले क्या भूखों मरते हैं ? बेचारे बछड़े को उसकी माता का थोड़ा सा दूध पी लेने दोगे तो क्या तुम्हारे बाल-बच्चे विना दूध ही रह जाएंगे ?
अगर सब जीवों को मित्र बनाने से काम नहीं चलेगा तो क्या सब को शत्रु बनाने से संसार का काम ठीक चलेगा ? सब को शत्रु बनाने से ही ठीक काम चल सकता हो तो आप भी सबके शत्रु समझे जाएंगे और ऐसी दशा में संसार में एक क्षण का भी जीवन कठिन हो जाएगा ।
मनाने वाला हो तो मन क्या नहीं मान लेता ? वह सभी कुछ समझ लेता है, समझाने वाला चाहिए । विवेक से कार्य करने वालों के लिए मन अबोध शिशु के समान है।
उत्साही पुरुष पर्याप्त साधनों के अभाव में भी अपने तीव्र उत्साह से कठिन से कठिन कार्य भी साध लेता हैं ।
माघ कृष्णा १
जिन गरीवों ने नाना कष्ट सहन करके
दी है और जिन पशुओं की बदौलत आप पल रहे हैं, उनके प्रति कृतज्ञ होकर प्रत्युपकार क्यों नहीं करते ? साहूकार कहलाकर भी ॠरण चुकाना आपको अभीष्ट नहीं है ?
विवाह का उद्देश्य चतुष्पद वनना नहीं, चतुर्भुज वनना है । विवाह पाशविकता का पोपरण नहीं करता, उसे सामर्थ्य का पोषक होना चाहिए ।
अनीति का प्रतिकार न करना राजा के लिए कलंक का टीका है । युद्ध के भय से जो राजा अन्याय, अत्याचार् होने देगा, वह पृथ्वी को नरक बना डालेगा और अपने धर्म को कलंकित करेगा ।
हे आत्मा, तू परमात्मा को सुमर । तू और परमात्मा दो नहीं - एक है । अब तू चेत जा ।
साघ कृष्ण २
केवल धन के उपार्जन और रक्षरण में न लगे रहो । मनुष्य जीवन जड़ पदार्थों की उपासना के लिए नहीं है । दया- दान की ओर ध्यान दो ।
जो पुरुष पूर्णरूप से आत्माभिमुख हो जाता है, उसकी आत्मा ही उसका विश्व बन जाता है । उसे अपनी में जो रमणीयता प्रतीत होती है, वह अन्यत्र कहीं नहीं । आत्मा में अध्यवसायों के उत्थान और पतन की जो परम्परा निरन्तर जारी रहती है, उसे तटस्थभाव से निरीक्षण करने वाले आत्मदृष्टा को बाहरी दुनिया की ओर ध्यान देने की फुरसत ही नहीं रहती 11000
तत्त्वज्ञानी पुरुष विषयभोग से इसी प्रकार दूर भागते हैं, जैसे साधारण मनुष्य काले नाग को देख कर ।
विवेकपूर्ण वैराग्य की स्थिति में किसी को समझाबुझा कर संसार में नहीं साया जा सकता ।
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पौष शुक्ला पंद्रह क्या गांठ काटे विना भरपेट भोजन नहीं मिल सकता ? न्याय-नीति से आजीविका चलाने वाले क्या भूखों मरते हैं ? बेचारे बछड़े को उसकी माता का थोड़ा सा दूध पी लेने दोगे तो क्या तुम्हारे बाल-बच्चे विना दूध ही रह जाएंगे ? अगर सब जीवों को मित्र बनाने से काम नहीं चलेगा तो क्या सब को शत्रु बनाने से संसार का काम ठीक चलेगा ? सब को शत्रु बनाने से ही ठीक काम चल सकता हो तो आप भी सबके शत्रु समझे जाएंगे और ऐसी दशा में संसार में एक क्षण का भी जीवन कठिन हो जाएगा । मनाने वाला हो तो मन क्या नहीं मान लेता ? वह सभी कुछ समझ लेता है, समझाने वाला चाहिए । विवेक से कार्य करने वालों के लिए मन अबोध शिशु के समान है। उत्साही पुरुष पर्याप्त साधनों के अभाव में भी अपने तीव्र उत्साह से कठिन से कठिन कार्य भी साध लेता हैं । माघ कृष्णा एक जिन गरीवों ने नाना कष्ट सहन करके दी है और जिन पशुओं की बदौलत आप पल रहे हैं, उनके प्रति कृतज्ञ होकर प्रत्युपकार क्यों नहीं करते ? साहूकार कहलाकर भी ॠरण चुकाना आपको अभीष्ट नहीं है ? विवाह का उद्देश्य चतुष्पद वनना नहीं, चतुर्भुज वनना है । विवाह पाशविकता का पोपरण नहीं करता, उसे सामर्थ्य का पोषक होना चाहिए । अनीति का प्रतिकार न करना राजा के लिए कलंक का टीका है । युद्ध के भय से जो राजा अन्याय, अत्याचार् होने देगा, वह पृथ्वी को नरक बना डालेगा और अपने धर्म को कलंकित करेगा । हे आत्मा, तू परमात्मा को सुमर । तू और परमात्मा दो नहीं - एक है । अब तू चेत जा । साघ कृष्ण दो केवल धन के उपार्जन और रक्षरण में न लगे रहो । मनुष्य जीवन जड़ पदार्थों की उपासना के लिए नहीं है । दया- दान की ओर ध्यान दो । जो पुरुष पूर्णरूप से आत्माभिमुख हो जाता है, उसकी आत्मा ही उसका विश्व बन जाता है । उसे अपनी में जो रमणीयता प्रतीत होती है, वह अन्यत्र कहीं नहीं । आत्मा में अध्यवसायों के उत्थान और पतन की जो परम्परा निरन्तर जारी रहती है, उसे तटस्थभाव से निरीक्षण करने वाले आत्मदृष्टा को बाहरी दुनिया की ओर ध्यान देने की फुरसत ही नहीं रहती ग्यारह हज़ार तत्त्वज्ञानी पुरुष विषयभोग से इसी प्रकार दूर भागते हैं, जैसे साधारण मनुष्य काले नाग को देख कर । विवेकपूर्ण वैराग्य की स्थिति में किसी को समझाबुझा कर संसार में नहीं साया जा सकता ।
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केरल में 2 बच्चों की माँ शीबा ने शादी से इनकार करने पर अरुण नाम के एक शख्स के चेहरे पर तेजाब फेंका। घायल के आँखों की रोशनी जाने का खतरा।
मराठी एक्ट्रेस स्नेहा चव्हाण ने अपने पति और अभिनेता अनिकेत विश्वासराव के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मस्जिद के पास डीजे बंद करने को कहे जाने पर मारपीट का मामला सामने आया है। आरोपित और पीड़ित एक ही समुदाय के हैं।
उत्तर प्रदेश के बरेली में आपसी रंजिश के चलते युवती को जबरन जहर पिलाने का मामला सामने आया है।
प्रेरणा को इस घटना के बारे में तब पता चला जब उन्हें लड़कियों का तेलुगु में एक वीडियो मिला। वे इस वीडियो में अपनी आपबीती बता रही थीं।
युवती के पिता का कहना है कि उनके घर पर 5-10 लोग आते हैं और फिर धमकी देकर चले जाते हैं। उधर अल्ताफ के पिता ने अब अपना बयान बदल लिया है।
यह होटल मुस्लिम होटल के नाम से संचालित हो रहा है। रोटी पर थूकने वाले शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है।
एक राजस्थान के वीडियो उदयपुर का है, तो दूसरा झालावाड़ का। दोनों जगह हिंसक भीड़ को दो अलग-अलग युवकों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है।
इस मामले में अदालत के पूर्व कर्मियों दिनेश चंद शर्मा, पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी सात-सात साल कैद की सजा सुनाई गई है।
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केरल में दो बच्चों की माँ शीबा ने शादी से इनकार करने पर अरुण नाम के एक शख्स के चेहरे पर तेजाब फेंका। घायल के आँखों की रोशनी जाने का खतरा। मराठी एक्ट्रेस स्नेहा चव्हाण ने अपने पति और अभिनेता अनिकेत विश्वासराव के खिलाफ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मस्जिद के पास डीजे बंद करने को कहे जाने पर मारपीट का मामला सामने आया है। आरोपित और पीड़ित एक ही समुदाय के हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में आपसी रंजिश के चलते युवती को जबरन जहर पिलाने का मामला सामने आया है। प्रेरणा को इस घटना के बारे में तब पता चला जब उन्हें लड़कियों का तेलुगु में एक वीडियो मिला। वे इस वीडियो में अपनी आपबीती बता रही थीं। युवती के पिता का कहना है कि उनके घर पर पाँच-दस लोग आते हैं और फिर धमकी देकर चले जाते हैं। उधर अल्ताफ के पिता ने अब अपना बयान बदल लिया है। यह होटल मुस्लिम होटल के नाम से संचालित हो रहा है। रोटी पर थूकने वाले शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। एक राजस्थान के वीडियो उदयपुर का है, तो दूसरा झालावाड़ का। दोनों जगह हिंसक भीड़ को दो अलग-अलग युवकों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। इस मामले में अदालत के पूर्व कर्मियों दिनेश चंद शर्मा, पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी सात-सात साल कैद की सजा सुनाई गई है।
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देश की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) के लवर्स के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। कंपनी ने अपनी बाइक रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 (Royal Enfield Bullet 350) के बेड़े में नए कलर फॉरेस्ट ग्रीन (Forest Green) को शामिल किया है। यह कल बाइक के स्टैंडर्ड वेरिएंट पर मिलेगा। वहीं कीमत की बात की जाए तो इस रॉयल एनफील्ड बुलेट की कीमत 1. 33 लाख रुपये एक्स-शोरूम तय की गई है।
स्वदेशी वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड ने ग्राहकों को लुभाने के लिए अपनी बाइक बुलेट 350 को एक नए रंग फॉरेस्ट ग्रीन (Forest Green) में लांच कर दिया है। यह कलर बुलेट के सिर्फ स्टैंडर्ड वेरिएंट में ही उपलब्ध होगा।
गौरतलब है कि इंडिया में रॉयल एनफील्ड की सभी बाइक्स को यूथ के बीच काफी पसंद किया जाता है। बात करें अगर रॉयल एनफील्ड बुलेट की तो कंपनी की इस बाइक की कम प्राइज़ होने के साथ रॉयल एनफील्ड की ताकत मिलती है जो युवाओं को अपनी तरफ काफी आकर्षित करती है। हालांकि बुलेट 350 का नया फॉरेस्ट ग्रीन मॉडल ईएस (इलेक्ट्रिक स्टार्ट) वेरिएंट में यह नज़र नहीं आएगा और ये बाइक के पहले से मौजूद स्टैंडर्ड वेरिएंट, ओनिक्स ब्लैक और बुलेट सिल्वर के साथ बिक्री के लिए पेश किया गया है।
बात अगर रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 के इंजन और पॉवर की करें तो इसमें एक 346 सीसी का 4 स्ट्रोक एयर कूल्ड फ्यूल इंजेक्शन सिंगल सिलेंडर इंजन दिया गया है। जो 20. 7 पीएस पर अधिकतम 28 एनएम का टार्क जेनरेट करने की क्षमता वाला है। इलके अलावा इसके फ्रंट में डिस्क ब्रेक और बैक व्हील में ड्रम ब्रेक दिये गए हैं। रॉयल एनफील्ड बुलेट में एनालोग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। इसके फ्यूल टैंक की कैपेसिटी 13. 5 लीटर है। बुलेट में किक स्टार्ट और सेल्फ स्टार्ट दोनों ही ऑप्शन अवेलेबल हैं।
बता दें रॉयल एनफील्ड की योजना अगले 7 सालों में 28 बाइक लांच करने की है। जिसका मतलब है कि हर तीन माह के अंतराल में कंपनी एक बाइक को लांच करेगी। जिसकी शुरुआत इस साल होगी। रॉयल एनफील्ड साल 2021 में अपनी अपडेटेड हिमालयन, रॉयल एनफील्ड हंटर, न्यू 650 क्रूसर बाइक जैसी बाइक्स लांच करेगी। यह सभी बाइक्स नई तकनीक और एडवांस फीचर्स के साथ आएंगी।
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देश की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड के लवर्स के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। कंपनी ने अपनी बाइक रॉयल एनफील्ड बुलेट तीन सौ पचास के बेड़े में नए कलर फॉरेस्ट ग्रीन को शामिल किया है। यह कल बाइक के स्टैंडर्ड वेरिएंट पर मिलेगा। वहीं कीमत की बात की जाए तो इस रॉयल एनफील्ड बुलेट की कीमत एक. तैंतीस लाख रुपये एक्स-शोरूम तय की गई है। स्वदेशी वाहन निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड ने ग्राहकों को लुभाने के लिए अपनी बाइक बुलेट तीन सौ पचास को एक नए रंग फॉरेस्ट ग्रीन में लांच कर दिया है। यह कलर बुलेट के सिर्फ स्टैंडर्ड वेरिएंट में ही उपलब्ध होगा। गौरतलब है कि इंडिया में रॉयल एनफील्ड की सभी बाइक्स को यूथ के बीच काफी पसंद किया जाता है। बात करें अगर रॉयल एनफील्ड बुलेट की तो कंपनी की इस बाइक की कम प्राइज़ होने के साथ रॉयल एनफील्ड की ताकत मिलती है जो युवाओं को अपनी तरफ काफी आकर्षित करती है। हालांकि बुलेट तीन सौ पचास का नया फॉरेस्ट ग्रीन मॉडल ईएस वेरिएंट में यह नज़र नहीं आएगा और ये बाइक के पहले से मौजूद स्टैंडर्ड वेरिएंट, ओनिक्स ब्लैक और बुलेट सिल्वर के साथ बिक्री के लिए पेश किया गया है। बात अगर रॉयल एनफील्ड बुलेट तीन सौ पचास के इंजन और पॉवर की करें तो इसमें एक तीन सौ छियालीस सीसी का चार स्ट्रोक एयर कूल्ड फ्यूल इंजेक्शन सिंगल सिलेंडर इंजन दिया गया है। जो बीस. सात पीएस पर अधिकतम अट्ठाईस एनएम का टार्क जेनरेट करने की क्षमता वाला है। इलके अलावा इसके फ्रंट में डिस्क ब्रेक और बैक व्हील में ड्रम ब्रेक दिये गए हैं। रॉयल एनफील्ड बुलेट में एनालोग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है। इसके फ्यूल टैंक की कैपेसिटी तेरह. पाँच लीटरटर है। बुलेट में किक स्टार्ट और सेल्फ स्टार्ट दोनों ही ऑप्शन अवेलेबल हैं। बता दें रॉयल एनफील्ड की योजना अगले सात सालों में अट्ठाईस बाइक लांच करने की है। जिसका मतलब है कि हर तीन माह के अंतराल में कंपनी एक बाइक को लांच करेगी। जिसकी शुरुआत इस साल होगी। रॉयल एनफील्ड साल दो हज़ार इक्कीस में अपनी अपडेटेड हिमालयन, रॉयल एनफील्ड हंटर, न्यू छः सौ पचास क्रूसर बाइक जैसी बाइक्स लांच करेगी। यह सभी बाइक्स नई तकनीक और एडवांस फीचर्स के साथ आएंगी।
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काव्य रूप : २६६
मुस्लिम संस्कृति के संपर्क का परिणाम है । जैसे घरनीदास का यह अलिफ़नामा हैअलिफ़ - आप अन्दर वसे, वे वतलावै दूर ।' अलिफ़नामे और उससे प्रेरित ककहरे कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं
विनु हरि कृपा न होय ककहरा ज्ञान का ।। टेक ।। अलिफ़-अलाह अभेद सुरति जद मुर्सिद देवै । वे- बहकै नहि दूर निकटहीं दरसन लेवे ॥१॥ ते - ते व्यापक सकल है जल थल वन गृह छाइ ।
से - से आप मासूक बनो है कोउ आसिक दरसाइ ।। २ ।। जीम-जबून है जहर जक्त को भोग सुझारी ।
हे-हक्क न समुझत नान करम सों करत खुवारी ।।३।। से - खिन खिन मन रहत है माया के परपंच । दाल -- दभ निग्रह नहीं कस पावे सुख संच ।।४।। जाल - फांस नर फंस्यो आपु तें आपु वभाये । -
रे - ररंकार निरधार जन ही सहज छटाय ॥५॥ जे - जहूर वह नर देखि जिस आनद बिलास ।
सीन -ससे तम छूटि गयो है ता पद लियो निवास ।।६।। शीन-सनै सबै वह प्रेम प्रीति परमारथ लागे । साद - साधना सधै जुक्ति सों अनुभो जागे ॥७॥ जाद-जाती नाम भयो सब विधि पूरन काम । तो- तेज़ पुंज तपवत चहुँ जुग ऐसो प्रभु को नाम ॥८॥ जो -- जो मोज़ै करै पाप अरु पुन्न न लेखें ।
जैन - जैन लेय जद हाथ रूप निज साहब देखे ।।६।। गैन-ग्यान उद्वैत भयो है सतगुरु के परताप ।
फे-फहमंदा भजन को दिव्य दृष्टि को आप ॥१०॥ काफ - कह है लाफ झूठ की तजिये आसा । काफ- कमाल करार सत्त को जूह निरासा ॥११॥ लाम - लाहुत सुठि सिखर है दूरिहूँ तें बहु दूर
मीम - मरजीवा ह्व रहै सोइ पावै दरस हजुर ।।१२।। नूं - नूतन छवि देई दुरुहुरा सुंदर राजै ।
वाव - वाह वाह सो अहे वचन मुख कहत त छाजै ॥ १३॥
१. घरनीदास की वानी, पृ० ४५
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काव्य रूप : दो सौ छयासठ मुस्लिम संस्कृति के संपर्क का परिणाम है । जैसे घरनीदास का यह अलिफ़नामा हैअलिफ़ - आप अन्दर वसे, वे वतलावै दूर ।' अलिफ़नामे और उससे प्रेरित ककहरे कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं विनु हरि कृपा न होय ककहरा ज्ञान का ।। टेक ।। अलिफ़-अलाह अभेद सुरति जद मुर्सिद देवै । वे- बहकै नहि दूर निकटहीं दरसन लेवे ॥एक॥ ते - ते व्यापक सकल है जल थल वन गृह छाइ । से - से आप मासूक बनो है कोउ आसिक दरसाइ ।। दो ।। जीम-जबून है जहर जक्त को भोग सुझारी । हे-हक्क न समुझत नान करम सों करत खुवारी ।।तीन।। से - खिन खिन मन रहत है माया के परपंच । दाल -- दभ निग्रह नहीं कस पावे सुख संच ।।चार।। जाल - फांस नर फंस्यो आपु तें आपु वभाये । - रे - ररंकार निरधार जन ही सहज छटाय ॥पाँच॥ जे - जहूर वह नर देखि जिस आनद बिलास । सीन -ससे तम छूटि गयो है ता पद लियो निवास ।।छः।। शीन-सनै सबै वह प्रेम प्रीति परमारथ लागे । साद - साधना सधै जुक्ति सों अनुभो जागे ॥सात॥ जाद-जाती नाम भयो सब विधि पूरन काम । तो- तेज़ पुंज तपवत चहुँ जुग ऐसो प्रभु को नाम ॥आठ॥ जो -- जो मोज़ै करै पाप अरु पुन्न न लेखें । जैन - जैन लेय जद हाथ रूप निज साहब देखे ।।छः।। गैन-ग्यान उद्वैत भयो है सतगुरु के परताप । फे-फहमंदा भजन को दिव्य दृष्टि को आप ॥दस॥ काफ - कह है लाफ झूठ की तजिये आसा । काफ- कमाल करार सत्त को जूह निरासा ॥ग्यारह॥ लाम - लाहुत सुठि सिखर है दूरिहूँ तें बहु दूर मीम - मरजीवा ह्व रहै सोइ पावै दरस हजुर ।।बारह।। नूं - नूतन छवि देई दुरुहुरा सुंदर राजै । वाव - वाह वाह सो अहे वचन मुख कहत त छाजै ॥ तेरह॥ एक. घरनीदास की वानी, पृशून्य पैंतालीस
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इससे पहले 30 दिसंबर को एजीएम में डिश टीवी के शेयरधारकों ने चार प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। इनमें वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए एकल और वित्तीय ब्योरे को मंजूरी भी शामिल थी।
डिश टीवी ने चार नए स्वतंत्र निदेशक नियुक्ति करने को शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए आगामी तीन मार्च को असाधारण आम बैठक (ईजीएम) बुलाई है। डिश टीवी की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक ईजीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो माध्यमों से वर्चुअल होगी। इस खबर के बीच गुरुवार को डिश टीवी के शेयर में 2. 61% की तेजी आई और यह 15. 75 रुपये के भाव पर बंद हुआ।
क्या है मामलाः बता दें कि डिश टीवी के सबसे बड़े शेयरधारक यस बैंक लिमिटेड (वाईबीएल) और उसके पूर्व चेयरमैन जवाहरलाल गोयल की अगुवाई में प्रवर्तक परिवार के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। चार स्वतंत्र निदेशकों- सुनील कुमार गुप्ता, मदन मोहनलाल वर्मा, गौरव गुप्ता और ललित बिहारी सिंघल को नियुक्त किया जाना है। कंपनी के बोर्ड ने पिछले साल दिसंबर में उनकी नियुक्ति की घोषणा कर दी थी, जो जवाहरलाल गोयल के जाने के बाद पहली बड़ी नियुक्ति थी।
इससे पहले 30 दिसंबर को एजीएम में डिश टीवी के शेयरधारकों ने चार प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। इनमें वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए एकल और वित्तीय ब्योरे को मंजूरी भी शामिल थी।
शेयर का भावः डिश टीवी का शेयर भाव 15. 75 रुपये है। एक दिन पहले के मुकाबले 2. 61% की तेजी रही। बता दें कि दिसंबर में शेयर ने 24. 45 रुपये के लेवल को टच किया था, जो 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर है। 20 जून 2022 को शेयर का भाव 10. 23 रुपये था जो 52 वीक लो लेवल है।
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इससे पहले तीस दिसंबर को एजीएम में डिश टीवी के शेयरधारकों ने चार प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। इनमें वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस और दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए एकल और वित्तीय ब्योरे को मंजूरी भी शामिल थी। डिश टीवी ने चार नए स्वतंत्र निदेशक नियुक्ति करने को शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए आगामी तीन मार्च को असाधारण आम बैठक बुलाई है। डिश टीवी की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक ईजीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो माध्यमों से वर्चुअल होगी। इस खबर के बीच गुरुवार को डिश टीवी के शेयर में दो. इकसठ% की तेजी आई और यह पंद्रह. पचहत्तर रुपयापये के भाव पर बंद हुआ। क्या है मामलाः बता दें कि डिश टीवी के सबसे बड़े शेयरधारक यस बैंक लिमिटेड और उसके पूर्व चेयरमैन जवाहरलाल गोयल की अगुवाई में प्रवर्तक परिवार के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। चार स्वतंत्र निदेशकों- सुनील कुमार गुप्ता, मदन मोहनलाल वर्मा, गौरव गुप्ता और ललित बिहारी सिंघल को नियुक्त किया जाना है। कंपनी के बोर्ड ने पिछले साल दिसंबर में उनकी नियुक्ति की घोषणा कर दी थी, जो जवाहरलाल गोयल के जाने के बाद पहली बड़ी नियुक्ति थी। इससे पहले तीस दिसंबर को एजीएम में डिश टीवी के शेयरधारकों ने चार प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। इनमें वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस और दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए एकल और वित्तीय ब्योरे को मंजूरी भी शामिल थी। शेयर का भावः डिश टीवी का शेयर भाव पंद्रह. पचहत्तर रुपयापये है। एक दिन पहले के मुकाबले दो. इकसठ% की तेजी रही। बता दें कि दिसंबर में शेयर ने चौबीस. पैंतालीस रुपयापये के लेवल को टच किया था, जो बावन हफ्ते का उच्चतम स्तर है। बीस जून दो हज़ार बाईस को शेयर का भाव दस. तेईस रुपयापये था जो बावन वीक लो लेवल है।
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चार दिवसीय भारत दौरे पर आये फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का दौरे का आज दूसरा दिन है।
ज्ञात है कि गत दिवस यानी शनिवार को भारत और फ्रांसके बीच 14 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
वहीं आज पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance Summit) में शिरकत करने पहुंचे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में पुरे उत्साह के साथ स्वागत किया।
इस सोलर समिट में 23 देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत 121 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
मैक्रों के उद्भाटन भाषण के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई।
समिट का उद्देश्य यहां शिरकत करने वाले देशों को सस्ती, स्वच्छ और और नवीकरणीय ऊर्जा मुहैया कराना है।
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चार दिवसीय भारत दौरे पर आये फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का दौरे का आज दूसरा दिन है। ज्ञात है कि गत दिवस यानी शनिवार को भारत और फ्रांसके बीच चौदह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। वहीं आज पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शिरकत करने पहुंचे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में पुरे उत्साह के साथ स्वागत किया। इस सोलर समिट में तेईस देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत एक सौ इक्कीस देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। मैक्रों के उद्भाटन भाषण के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई। समिट का उद्देश्य यहां शिरकत करने वाले देशों को सस्ती, स्वच्छ और और नवीकरणीय ऊर्जा मुहैया कराना है।
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'किलों को तोड़ने वाले, धरती को जीतने वाले, बिजली को धारण करने वाले, जो सेना को परास्त करते हैं और अपनी शक्ति से उसका विनाश कर देते हैं, उस इन्द्र के साथ-साथ ऐ साथियो चलते चलो । वहादुर दोस्त की तरह कर्तव्य को पूरा करो।'
यायावर प्रकृति की स्वाभाविक प्रेरणा तथा अपनी विजय के उत्साह, उमंग और विश्वास के बल पर ये हिमालय से कन्याकुमारी तक अपनी दुन्दुभि से उद्घोषित कर डालते हैं । आर्यों का आगमन, विजय और मिलन एक नई संस्कृति, नई परम्परा और नये जीवन-दर्शन का प्रादुर्भाव भारत में करता है । यजुर्वेद की यज्ञबहुल और अथर्ववेद की तरह-तरह के विश्वास र भरी सभ्यता का जन्म होता है । यह सामासिक सभ्यता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है और भारतीय जीवन दर्शन का मूल स्रोत है।
यहाँ इसका संक्षेप में मैंने इसलिए उल्लेख किया है कि इसको ध्यान में रखे बिना हम भारतीय संगीत कला के उद्भव एवं विकास का ठीक-ठीक अन्दाज़ नहीं लगा सकते । आर्चिक, गाथिक, सामिक, स्वरान्तर, प्रौड़, षाड़व एवं सम्पूर्ण गान के स्वरों का विकासक्रम तथा उनका देशी और मार्ग-संगीत की श्रेणी में विभाजन की प्रक्रिया इस बात को स्पष्ट कर देती है कि किस तरह संस्कृतियों के समन्वय, अदान-प्रदान ने भारतीय संगीतकला के शरीर को पुष्ट और मोहक बनाया है । यह सोचना आधारहीन न होगा कि ऋग्वैदिक काल के प्रार्यों का संगीत केवल लोक-संगीत के रूप में रहा होगा जबकि एक, दो या तीन स्वर में ही उनके सारे आचिक, गाथिक और सामिक गान का कलेवर पूर्ण हो जाया करता था, पर धीरे-धीरे उन्होंने उन सारी जातियों के संगीत की विशेषताओं को अपने संगीत में अन्तर्मुक्त कर लिया जो उनके सम्पर्क में आती गईं । प्रचलित संगीत को 'देशी', और उनकी विशेषताओं से अपने संगीत को परिमार्जित, परिवर्धित कर उसे 'मार्गी' के नाम से सम्बोधित किया, क्योंकि उनकी यह नई संगीत - परम्परा 'मार्गी' - खोजी हुई और मार्ग पर लगाई हुई थी। इस तथ्य को स्पष्ट करने का प्रयत्न आगे किया जाएगा ।
संगीत शब्द का व्यवहार आज जिस अर्थ में किया जाता है उस अर्थ में इसका प्रयोग कब से होने लगा, इसकी स्पष्टता भी आवश्यक है । 'संगीत' शब्द नृत्य, गीत और वाद्य, इन तीनों कलाओं को एक साथ व्यक्त करता है । पर ऐतिहासिक दृष्टि से देखने पर हम पाते हैं कि 'मकरन्द' - कार नारद के पहले इस शब्द का उपयोग इस अर्थ में किसी ने नहीं किया है। सबसे पहले नारद ने ही : 'गीतं वाद्यं च नृत्यं च त्रयं संगीतमुच्यते
१२. बाल संगीत और लोक-संगीत में दो या तीन स्वर ही लगा करते हैं। सामिक गान में चार पाँच, छः और सात स्वरों का समावेश भी पाया जाता है, पर ऐसा जान पड़ता है कि यह आर्य संस्कृति के साथ लोक-संस्कृतियों के मिलन और आदान-प्रदान का ही परिणाम है
१३. संगीत मकरन्द, १॥३॥९
कहा है । नाट्यशास्त्रकार भरत से प्रारम्भ करके दण्डिल ( या दत्तिल ), ब्रह्मा, कश्यप, याष्टिक, दुर्गाशक्ति, कोहल, विश्वाखिल, अश्वतर, विश्वावसु, तुम्बुरू, शिक्षाकार नारद और यहाँ तक कि पार्श्वदेव तक ने अपने-अपने संगीत - ग्रन्थों 'संगीत' शब्द का व्यवहार नहीं किया है । " प्रातिशाख्य और शिक्षा के युग में तथा ऋक्, यजु, सामवेद के किसी भी प्रातिशाख्य में, या नारदी, याज्ञवल्क्य, मनःसार प्रभृति शिक्षा ग्रन्थों में - कहीं भी 'संगीत' शब्द का व्यवहार उपरोक्त अर्थ में नहीं हुआ है । ब्राह्मण, संहिता और धर्मसूत्रों में भी 'संगीत' शब्द का कहीं कोई उल्लेख नहीं है । 'संगीत' शब्द का जिस प्र में प्राज व्यवहार होता है उसके लिए उपरोक्त ग्रन्थों में 'गान', 'गीति', 'गाथा' और 'गान्धर्वगान' शब्द का व्यवहार हुआ है। इसके अतिरिक्त आय एवं सामविधन ब्राह्मण में तथा सामतन्त्र में अरण्यगेगान, ग्रामगेयगान, उहगान तथा स्तोभ एवं रहस्यगान का उल्लेख है । वैदिक साहित्य में वाद्य की जहाँ चर्चा है वहाँ वीणा, मृदंग, वेणु आदि का वर्णन है और नृत्य तथा गान का अलग-अलग करके उल्लेख किया गया है । वैदिक युग में पुरोहित वैदिक मन्त्रों का गान करते थे और विज्ञजन यज्ञवेदी के चारों ओर बैठकर ताली बजा बजाकर गाथिक, सामिक और स्वरान्तर लय में ऋचाओं का गान करते थे । नाट्य शास्त्रकार भरत ने 'नृत्य' और 'नृत्त' शब्द के स्थान पर 'नाट्य' शब्द का व्यवहार किया है । नाट्य की पूर्णता एवं रसात्मकता गान, वाद्य, नृत्य और कथोपकथन की प्रांजलता एवं सामंजस्य पर निर्भर करती है, इसीलिए नाट्यकला का निरूपण करते हुए उन्होंने कहा है - ' एवं गानं च विविधा श्रयम् । "" इससे यह सोचा जा सकता है कि नाट्यशास्त्र कार ने भी गान का परिपोषक नाट्य और नृत्य को माना है, पर उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से कहीं कहा नहीं है । नाट्यशास्त्र से लेकर बृहद्देशी, मकरन्द, रत्नाकर, पारिजात, रागविबोध, संगीत दर्पण एवं संगीत समयसार के समय तक गीत, वाद्य और नृत्य का काफी प्रचलन था । पर 'संगीत' शब्दका प्रयोग उपरोक्त तीनों कलाओं का बोधक केवल ७वीं से ११वीं शताब्दी तक ही रहा । आज संगीत शब्द केवल गान मात्र का बोधक रह गया है ।
यह पहले कह आए हैं कि संगीत का आधार है 'स्वर' और स्वर का उत्स है 'नाद' । प्राचीन भारतीय प्राचार्यों ने योगशास्त्र, तन्त्रशास्त्र आदि में नाद की विवेचना जितनी गहराई से की है उतनी ही गहराई और तन्मयता के साथ भारतीय संगीत - शास्त्र के निष्णात आचार्यों ने इसे स्पष्ट करने का प्रयत्न किया है। नाद शब्द की व्युत्पत्ति करते हुए कहा है - 'न' प्राणवायु का द्योतक है और 'द' द्योतक है अग्नि का, इसलिए
१४. स्वामी प्रज्ञानानन्द, 'राग और रूप' पृ० ७२; इन्हीं का प्रबन्ध संगीत मकरन्द प्रशिक्षाकार नारद', प्रवासी, १३५३ वैशाष संख्या, पृ०४४-५०
१५. नाट्यशास्त्र, (काशी संस्करण ) २८, ७
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'किलों को तोड़ने वाले, धरती को जीतने वाले, बिजली को धारण करने वाले, जो सेना को परास्त करते हैं और अपनी शक्ति से उसका विनाश कर देते हैं, उस इन्द्र के साथ-साथ ऐ साथियो चलते चलो । वहादुर दोस्त की तरह कर्तव्य को पूरा करो।' यायावर प्रकृति की स्वाभाविक प्रेरणा तथा अपनी विजय के उत्साह, उमंग और विश्वास के बल पर ये हिमालय से कन्याकुमारी तक अपनी दुन्दुभि से उद्घोषित कर डालते हैं । आर्यों का आगमन, विजय और मिलन एक नई संस्कृति, नई परम्परा और नये जीवन-दर्शन का प्रादुर्भाव भारत में करता है । यजुर्वेद की यज्ञबहुल और अथर्ववेद की तरह-तरह के विश्वास र भरी सभ्यता का जन्म होता है । यह सामासिक सभ्यता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है और भारतीय जीवन दर्शन का मूल स्रोत है। यहाँ इसका संक्षेप में मैंने इसलिए उल्लेख किया है कि इसको ध्यान में रखे बिना हम भारतीय संगीत कला के उद्भव एवं विकास का ठीक-ठीक अन्दाज़ नहीं लगा सकते । आर्चिक, गाथिक, सामिक, स्वरान्तर, प्रौड़, षाड़व एवं सम्पूर्ण गान के स्वरों का विकासक्रम तथा उनका देशी और मार्ग-संगीत की श्रेणी में विभाजन की प्रक्रिया इस बात को स्पष्ट कर देती है कि किस तरह संस्कृतियों के समन्वय, अदान-प्रदान ने भारतीय संगीतकला के शरीर को पुष्ट और मोहक बनाया है । यह सोचना आधारहीन न होगा कि ऋग्वैदिक काल के प्रार्यों का संगीत केवल लोक-संगीत के रूप में रहा होगा जबकि एक, दो या तीन स्वर में ही उनके सारे आचिक, गाथिक और सामिक गान का कलेवर पूर्ण हो जाया करता था, पर धीरे-धीरे उन्होंने उन सारी जातियों के संगीत की विशेषताओं को अपने संगीत में अन्तर्मुक्त कर लिया जो उनके सम्पर्क में आती गईं । प्रचलित संगीत को 'देशी', और उनकी विशेषताओं से अपने संगीत को परिमार्जित, परिवर्धित कर उसे 'मार्गी' के नाम से सम्बोधित किया, क्योंकि उनकी यह नई संगीत - परम्परा 'मार्गी' - खोजी हुई और मार्ग पर लगाई हुई थी। इस तथ्य को स्पष्ट करने का प्रयत्न आगे किया जाएगा । संगीत शब्द का व्यवहार आज जिस अर्थ में किया जाता है उस अर्थ में इसका प्रयोग कब से होने लगा, इसकी स्पष्टता भी आवश्यक है । 'संगीत' शब्द नृत्य, गीत और वाद्य, इन तीनों कलाओं को एक साथ व्यक्त करता है । पर ऐतिहासिक दृष्टि से देखने पर हम पाते हैं कि 'मकरन्द' - कार नारद के पहले इस शब्द का उपयोग इस अर्थ में किसी ने नहीं किया है। सबसे पहले नारद ने ही : 'गीतं वाद्यं च नृत्यं च त्रयं संगीतमुच्यते बारह. बाल संगीत और लोक-संगीत में दो या तीन स्वर ही लगा करते हैं। सामिक गान में चार पाँच, छः और सात स्वरों का समावेश भी पाया जाता है, पर ऐसा जान पड़ता है कि यह आर्य संस्कृति के साथ लोक-संस्कृतियों के मिलन और आदान-प्रदान का ही परिणाम है तेरह. संगीत मकरन्द, एक॥तीन॥नौ कहा है । नाट्यशास्त्रकार भरत से प्रारम्भ करके दण्डिल , ब्रह्मा, कश्यप, याष्टिक, दुर्गाशक्ति, कोहल, विश्वाखिल, अश्वतर, विश्वावसु, तुम्बुरू, शिक्षाकार नारद और यहाँ तक कि पार्श्वदेव तक ने अपने-अपने संगीत - ग्रन्थों 'संगीत' शब्द का व्यवहार नहीं किया है । " प्रातिशाख्य और शिक्षा के युग में तथा ऋक्, यजु, सामवेद के किसी भी प्रातिशाख्य में, या नारदी, याज्ञवल्क्य, मनःसार प्रभृति शिक्षा ग्रन्थों में - कहीं भी 'संगीत' शब्द का व्यवहार उपरोक्त अर्थ में नहीं हुआ है । ब्राह्मण, संहिता और धर्मसूत्रों में भी 'संगीत' शब्द का कहीं कोई उल्लेख नहीं है । 'संगीत' शब्द का जिस प्र में प्राज व्यवहार होता है उसके लिए उपरोक्त ग्रन्थों में 'गान', 'गीति', 'गाथा' और 'गान्धर्वगान' शब्द का व्यवहार हुआ है। इसके अतिरिक्त आय एवं सामविधन ब्राह्मण में तथा सामतन्त्र में अरण्यगेगान, ग्रामगेयगान, उहगान तथा स्तोभ एवं रहस्यगान का उल्लेख है । वैदिक साहित्य में वाद्य की जहाँ चर्चा है वहाँ वीणा, मृदंग, वेणु आदि का वर्णन है और नृत्य तथा गान का अलग-अलग करके उल्लेख किया गया है । वैदिक युग में पुरोहित वैदिक मन्त्रों का गान करते थे और विज्ञजन यज्ञवेदी के चारों ओर बैठकर ताली बजा बजाकर गाथिक, सामिक और स्वरान्तर लय में ऋचाओं का गान करते थे । नाट्य शास्त्रकार भरत ने 'नृत्य' और 'नृत्त' शब्द के स्थान पर 'नाट्य' शब्द का व्यवहार किया है । नाट्य की पूर्णता एवं रसात्मकता गान, वाद्य, नृत्य और कथोपकथन की प्रांजलता एवं सामंजस्य पर निर्भर करती है, इसीलिए नाट्यकला का निरूपण करते हुए उन्होंने कहा है - ' एवं गानं च विविधा श्रयम् । "" इससे यह सोचा जा सकता है कि नाट्यशास्त्र कार ने भी गान का परिपोषक नाट्य और नृत्य को माना है, पर उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से कहीं कहा नहीं है । नाट्यशास्त्र से लेकर बृहद्देशी, मकरन्द, रत्नाकर, पारिजात, रागविबोध, संगीत दर्पण एवं संगीत समयसार के समय तक गीत, वाद्य और नृत्य का काफी प्रचलन था । पर 'संगीत' शब्दका प्रयोग उपरोक्त तीनों कलाओं का बोधक केवल सातवीं से ग्यारहवीं शताब्दी तक ही रहा । आज संगीत शब्द केवल गान मात्र का बोधक रह गया है । यह पहले कह आए हैं कि संगीत का आधार है 'स्वर' और स्वर का उत्स है 'नाद' । प्राचीन भारतीय प्राचार्यों ने योगशास्त्र, तन्त्रशास्त्र आदि में नाद की विवेचना जितनी गहराई से की है उतनी ही गहराई और तन्मयता के साथ भारतीय संगीत - शास्त्र के निष्णात आचार्यों ने इसे स्पष्ट करने का प्रयत्न किया है। नाद शब्द की व्युत्पत्ति करते हुए कहा है - 'न' प्राणवायु का द्योतक है और 'द' द्योतक है अग्नि का, इसलिए चौदह. स्वामी प्रज्ञानानन्द, 'राग और रूप' पृशून्य बहत्तर; इन्हीं का प्रबन्ध संगीत मकरन्द प्रशिक्षाकार नारद', प्रवासी, एक हज़ार तीन सौ तिरेपन वैशाष संख्या, पृचौंतालीस-पचास पंद्रह. नाट्यशास्त्र, अट्ठाईस, सात
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महाराष्ट्रके हरिहरेश्वर तट पर समुद्र में एक संदिग्ध नाव मिलने से हड़कंप मच गया। नाव से एक AK 47 राइफल और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। इस बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने संदिग्ध नाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
महाराष्ट्र (Maharashtra) के हरिहरेश्वर तट ( Rihareshwar Coast) पर समुद्र में एक संदिग्ध नाव मिलने से हड़कंप मच गया। नाव से एक AK 47 राइफल और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल इस मामले में ATS हर एंगल से जांच कर रही है। इस बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने संदिग्ध नाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मस्कट से यूरोप जाते समय यह नाव खराब हो गई। जिसके बाद वह बहकर भारत के तटों पर आ गई। उन्होंने बताया कि यह नाव एक ऑस्ट्रेलियाई महिला और उनके पति की है। डिप्टी सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि फिलहाल अभी किसी आतंकी एंगल की पुष्टि नहीं हुई है। डिप्टी सीएम ने कहा कि मछुआरों को 16 मीटर लंबी एक लावारिस नाव मिली है थी।
इसकी जानकारी उन्होंने स्थानीय पुलिस (Raigad Police) को दी। डिप्टी सीएम ने आगे बताया कि रायगढ़ से मिली संदिग्ध नाव में 3 एके 47 राइफल और बारूद मिला है। उन्हें वाटरप्रूफ बॉक्स में रखा गया था। देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस नाव का नाम लेडी हान है। इसकी मालिक ऑस्ट्रेलिया की एक महिला है। उनके पति इस नाव के कप्तान हैं।
यह नाव मस्कट (ओमान) से यूरोप की ओर जा रही थी। इस नाव का इंजन 26 जून 2022 को ख़राब हो गया था। उस नाव पर सवार लोगों ने बचाने का अलर्ट जारी किया था। तब कोरिया की नौसेना ने इन सभी लोगों को नाव से बचाकर ओमान में छोड़ दिया था। लेकिन खतरनाक मौसम की वजह से नाव को नहीं निकाला गया। फिर यह नाव बहकर हरिहरेश्वर बीच में तट पर आ गई है।
उन्होंने बताया इस नाव पर एक स्टीकर लगा हुआ था। उस स्टिकर में Neptune Maritime Security Limited लिखा हुआ था। इस संबंध में पुलिस ने इस कंपनी से संपर्क किया। कंपनी ने माना है कि यह नाव उसी की है। इस तरह पुलिस ने जानकारी दी है कि संबंधित नाव नेप्च्यून मैरीटाइम सिक्योरिटी लिमिटेड (Neptune Maritime Security Limite) की है। यह कंपनी 2009 में यूके में पंजीकृत हुई है। यह कंपनी किसी भी हमले से सुरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध करवाती है।
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महाराष्ट्रके हरिहरेश्वर तट पर समुद्र में एक संदिग्ध नाव मिलने से हड़कंप मच गया। नाव से एक AK सैंतालीस राइफल और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। इस बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संदिग्ध नाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। महाराष्ट्र के हरिहरेश्वर तट पर समुद्र में एक संदिग्ध नाव मिलने से हड़कंप मच गया। नाव से एक AK सैंतालीस राइफल और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल इस मामले में ATS हर एंगल से जांच कर रही है। इस बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संदिग्ध नाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मस्कट से यूरोप जाते समय यह नाव खराब हो गई। जिसके बाद वह बहकर भारत के तटों पर आ गई। उन्होंने बताया कि यह नाव एक ऑस्ट्रेलियाई महिला और उनके पति की है। डिप्टी सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि फिलहाल अभी किसी आतंकी एंगल की पुष्टि नहीं हुई है। डिप्टी सीएम ने कहा कि मछुआरों को सोलह मीटर लंबी एक लावारिस नाव मिली है थी। इसकी जानकारी उन्होंने स्थानीय पुलिस को दी। डिप्टी सीएम ने आगे बताया कि रायगढ़ से मिली संदिग्ध नाव में तीन एके सैंतालीस राइफल और बारूद मिला है। उन्हें वाटरप्रूफ बॉक्स में रखा गया था। देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस नाव का नाम लेडी हान है। इसकी मालिक ऑस्ट्रेलिया की एक महिला है। उनके पति इस नाव के कप्तान हैं। यह नाव मस्कट से यूरोप की ओर जा रही थी। इस नाव का इंजन छब्बीस जून दो हज़ार बाईस को ख़राब हो गया था। उस नाव पर सवार लोगों ने बचाने का अलर्ट जारी किया था। तब कोरिया की नौसेना ने इन सभी लोगों को नाव से बचाकर ओमान में छोड़ दिया था। लेकिन खतरनाक मौसम की वजह से नाव को नहीं निकाला गया। फिर यह नाव बहकर हरिहरेश्वर बीच में तट पर आ गई है। उन्होंने बताया इस नाव पर एक स्टीकर लगा हुआ था। उस स्टिकर में Neptune Maritime Security Limited लिखा हुआ था। इस संबंध में पुलिस ने इस कंपनी से संपर्क किया। कंपनी ने माना है कि यह नाव उसी की है। इस तरह पुलिस ने जानकारी दी है कि संबंधित नाव नेप्च्यून मैरीटाइम सिक्योरिटी लिमिटेड की है। यह कंपनी दो हज़ार नौ में यूके में पंजीकृत हुई है। यह कंपनी किसी भी हमले से सुरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध करवाती है।
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रविवार (तीन अप्रैल) को क्राइस्टचर्च के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को 71 रनों से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया की टीम सातवीं बार टूर्नामेंट को जीतने में सफल रही है। मेग लेनिंग अपनी कप्तानी में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बनाने में सफल हुई हैं।
ऑस्ट्रेलिया ने महिला वर्ल्ड कप को अपने नाम कर लिया है। रविवार (तीन अप्रैल) को क्राइस्टचर्च के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को 71 रनों से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया की टीम सातवीं बार टूर्नामेंट को जीतने में सफल रही है। मेग लेनिंग अपनी कप्तानी में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बनाने में सफल हुई हैं। उनका आईसीसी टूर्नामेंट में यह चौथा खिताब है।
मेग लेनिंग सबसे ज्यादा आईसीसी खिताब जीतने के मामले में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पुरुष कप्तान रिकी पोंटिंग के बराबर पहुंच गई हैं। लेंनिंग के नाम एक वनडे वर्ल्ड कप के अलावा तीन टी20 वर्ल्ड हैं। उन्होंने 2014, 2018 और 2020 में टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। रिकी पोंटिंग की बात करें तो उन्होंने दो वनडे वर्ल्ड कप और दो चैंपियंस ट्रॉफी जीते थे।
पोंटिंग को पहली बार 2003 में सफलता मिली थी। तब ऑस्ट्रेलिया ने वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत को हराया था। इसके बाद 2006 में कंगारू टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। 2007 में ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज में श्रीलंका को हराकर वनडे वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था। 2009 में पोंटिंग की टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी।
लेनिंग और पोंटिंग के बाद महेंद्र सिंह धोनी का नंबर आता है। धोनी ने तीन आईसीसी टूर्नामेंट जीते हैं। उन्होंने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को चैंपियन बनाया था। इसके बाद 2011 में 28 साल बाद भारत वनडे वर्ल्ड कप जीतने में सफल रहा था। 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब धोनी के हिस्से आया था।
अलिसा हीली ने 170 रन बनाए। वर्ल्ड कप फाइनल में हीली सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने पूर्व ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ा। गिलक्रिस्ट ने 2007 में श्रीलंका के खिलाफ 104 गेंद पर 149 रन ठोके थे। रिकी पोंटिंग ने 2003 में भारत के खिलाफ 121 गेंद पर नाबाद 140 और विवियन रिचर्ड्स ने इंग्लैंड के खिलाफ 1979 में नाबाद 138 रन बनाए थे। उन्होंने 157 गेंदों का सामना किया था।
अलिसा हीली के लिए यह टूर्नामेंट शानदार रहा है। उन्होंने सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भी शतक जड़ दिया। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल में 107 गेंदों पर 129 रन बनाए थे। अब फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 138 गेंदों पर 170 रन ठोक दिए। इससे पहले हीली ने भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप 2020 के फाइनल में 39 गेंदों पर 75 रन बनाए थे।
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रविवार को क्राइस्टचर्च के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को इकहत्तर रनों से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया की टीम सातवीं बार टूर्नामेंट को जीतने में सफल रही है। मेग लेनिंग अपनी कप्तानी में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बनाने में सफल हुई हैं। ऑस्ट्रेलिया ने महिला वर्ल्ड कप को अपने नाम कर लिया है। रविवार को क्राइस्टचर्च के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया की टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को इकहत्तर रनों से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया की टीम सातवीं बार टूर्नामेंट को जीतने में सफल रही है। मेग लेनिंग अपनी कप्तानी में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बनाने में सफल हुई हैं। उनका आईसीसी टूर्नामेंट में यह चौथा खिताब है। मेग लेनिंग सबसे ज्यादा आईसीसी खिताब जीतने के मामले में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पुरुष कप्तान रिकी पोंटिंग के बराबर पहुंच गई हैं। लेंनिंग के नाम एक वनडे वर्ल्ड कप के अलावा तीन टीबीस वर्ल्ड हैं। उन्होंने दो हज़ार चौदह, दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार बीस में टीबीस वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। रिकी पोंटिंग की बात करें तो उन्होंने दो वनडे वर्ल्ड कप और दो चैंपियंस ट्रॉफी जीते थे। पोंटिंग को पहली बार दो हज़ार तीन में सफलता मिली थी। तब ऑस्ट्रेलिया ने वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत को हराया था। इसके बाद दो हज़ार छः में कंगारू टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। दो हज़ार सात में ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज में श्रीलंका को हराकर वनडे वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था। दो हज़ार नौ में पोंटिंग की टीम चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। लेनिंग और पोंटिंग के बाद महेंद्र सिंह धोनी का नंबर आता है। धोनी ने तीन आईसीसी टूर्नामेंट जीते हैं। उन्होंने दो हज़ार सात टीबीस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को चैंपियन बनाया था। इसके बाद दो हज़ार ग्यारह में अट्ठाईस साल बाद भारत वनडे वर्ल्ड कप जीतने में सफल रहा था। दो हज़ार तेरह में चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब धोनी के हिस्से आया था। अलिसा हीली ने एक सौ सत्तर रन बनाए। वर्ल्ड कप फाइनल में हीली सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने पूर्व ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ा। गिलक्रिस्ट ने दो हज़ार सात में श्रीलंका के खिलाफ एक सौ चार गेंद पर एक सौ उनचास रन ठोके थे। रिकी पोंटिंग ने दो हज़ार तीन में भारत के खिलाफ एक सौ इक्कीस गेंद पर नाबाद एक सौ चालीस और विवियन रिचर्ड्स ने इंग्लैंड के खिलाफ एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में नाबाद एक सौ अड़तीस रन बनाए थे। उन्होंने एक सौ सत्तावन गेंदों का सामना किया था। अलिसा हीली के लिए यह टूर्नामेंट शानदार रहा है। उन्होंने सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भी शतक जड़ दिया। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल में एक सौ सात गेंदों पर एक सौ उनतीस रन बनाए थे। अब फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ एक सौ अड़तीस गेंदों पर एक सौ सत्तर रन ठोक दिए। इससे पहले हीली ने भारत के खिलाफ टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बीस के फाइनल में उनतालीस गेंदों पर पचहत्तर रन बनाए थे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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Samsung Galaxy S21 के साथ चार्जर और इयरफोन्स नहीं दिया जा सकता है. अभी ये कन्फर्म नहीं हुआ है और ये ख़बर रिपोर्ट्स के हवाले से है.
अब तक आप समझ ही गए होंगे कि ऐसा क्यों है? ऐपल ने हाल ही में iPhone 12 सीरीज़ लॉन्च के साथ ही ऐलान कर दिया कि बॉक्स में इयरफोन्स और चार्जर नहीं मिलेंगे.
कमोबेश हर मोबाइल कंपनियाँ कहीं न कहीं ऐपल को फ़ॉलो करती ही हैं. चूँकि ऐपल ने अब बॉक्स में इयरफोन्स और चार्जर न देने का फ़ैसला किया है तो ये मुमकिन है कि दूसरी कंपनियाँ भी इसे फ़ॉलो करें.
सैम मोबाइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ Galaxy S21 के बॉक्स में चार्जिंग सॉकेट और इयरफोन्स नहीं दिए जाएँगे. ये सिर्फ Galaxy S21 के साथ नहीं, बल्कि Galaxy S21+ ओर Galaxy S21 Ultra के साथ भी किया जाएगा.
सबसे अजीब बात ये है कि हाल ही में सैमसंग ने ऐपल के चार्जर न देने के फ़ैसले को लेकर ऐपल को ट्रोल किया था. सैमसंग ही नहीं ऐपल को शाओमी ने भी ट्रोल किया.
अगर ये रिपोर्ट सही होती है और Galaxy S21 के साथ चार्जर नहीं दिया जाता है तो ज़ाहिर फैंस सैमसंग से निराश होंगे ही.
ग़ौरतलब है कि ऐपल ने चार्जर और इयरफोन्स न देने के पीछे पर्यावरण बचाने का हवाला दिया था. लेकिन इस कदम से ऐपल को भी फ़ायदे होने शुरू हो गए हैं.
ऐपल के बाद अगर दूसरी कंपनियाँ भी अपने फ़ोन के साथ बॉक्स में चार्जर और इयरफोन्स देना बंद कर दें तो ज़ाहिर है कंपनियों को काफ़ी फ़ायदा होगा और यूज़र्स को नुक़सान होगा.
जुलाई में भी एक रिपोर्ट आई थी जिसमें ये बताया गया था कि कॉस्ट कटिंग की वजह से सैमसंग अपने फ़्लैगशिप के साथ चार्जर नहीं देने का फ़ैसला कर सकता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं था.
बहरहाल आने वाले समय में ही साफ़ होगा कि सैमसंग ये फ़ैसला लेती है या नहीं.
सैम मोबाइल की इस रिपोर्ट में कितनी सच्चाई है आने वाले कुछ समय में क्लियर हो ही जाएगा. लेकिन एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि ऐपल के फुटस्टेप्स को दूसरी कंपनियाँ फ़ॉलो करना शुरू कर सकती हैं.
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Samsung Galaxy Sइक्कीस के साथ चार्जर और इयरफोन्स नहीं दिया जा सकता है. अभी ये कन्फर्म नहीं हुआ है और ये ख़बर रिपोर्ट्स के हवाले से है. अब तक आप समझ ही गए होंगे कि ऐसा क्यों है? ऐपल ने हाल ही में iPhone बारह सीरीज़ लॉन्च के साथ ही ऐलान कर दिया कि बॉक्स में इयरफोन्स और चार्जर नहीं मिलेंगे. कमोबेश हर मोबाइल कंपनियाँ कहीं न कहीं ऐपल को फ़ॉलो करती ही हैं. चूँकि ऐपल ने अब बॉक्स में इयरफोन्स और चार्जर न देने का फ़ैसला किया है तो ये मुमकिन है कि दूसरी कंपनियाँ भी इसे फ़ॉलो करें. सैम मोबाइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ Galaxy Sइक्कीस के बॉक्स में चार्जिंग सॉकेट और इयरफोन्स नहीं दिए जाएँगे. ये सिर्फ Galaxy Sइक्कीस के साथ नहीं, बल्कि Galaxy Sइक्कीस+ ओर Galaxy Sइक्कीस Ultra के साथ भी किया जाएगा. सबसे अजीब बात ये है कि हाल ही में सैमसंग ने ऐपल के चार्जर न देने के फ़ैसले को लेकर ऐपल को ट्रोल किया था. सैमसंग ही नहीं ऐपल को शाओमी ने भी ट्रोल किया. अगर ये रिपोर्ट सही होती है और Galaxy Sइक्कीस के साथ चार्जर नहीं दिया जाता है तो ज़ाहिर फैंस सैमसंग से निराश होंगे ही. ग़ौरतलब है कि ऐपल ने चार्जर और इयरफोन्स न देने के पीछे पर्यावरण बचाने का हवाला दिया था. लेकिन इस कदम से ऐपल को भी फ़ायदे होने शुरू हो गए हैं. ऐपल के बाद अगर दूसरी कंपनियाँ भी अपने फ़ोन के साथ बॉक्स में चार्जर और इयरफोन्स देना बंद कर दें तो ज़ाहिर है कंपनियों को काफ़ी फ़ायदा होगा और यूज़र्स को नुक़सान होगा. जुलाई में भी एक रिपोर्ट आई थी जिसमें ये बताया गया था कि कॉस्ट कटिंग की वजह से सैमसंग अपने फ़्लैगशिप के साथ चार्जर नहीं देने का फ़ैसला कर सकता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं था. बहरहाल आने वाले समय में ही साफ़ होगा कि सैमसंग ये फ़ैसला लेती है या नहीं. सैम मोबाइल की इस रिपोर्ट में कितनी सच्चाई है आने वाले कुछ समय में क्लियर हो ही जाएगा. लेकिन एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि ऐपल के फुटस्टेप्स को दूसरी कंपनियाँ फ़ॉलो करना शुरू कर सकती हैं.
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अगर आप सोचते हैं कि जिंदगी के अस्सी साल पार कर लिए तो आपको केवल घर में बैठकर टीवी के सामने या भगवान के भजन में ही मन लगाना चाहिए तो एक बार इस वीडियो को देख ले।
इस फुटेज में अमेरिका की 85 साल की एक महिला लोइस ने 98 किलो का वजन उठाकर सबको हैरान कर दिया। इस प्रभावशाली और ताकतवर महिला को आसपास मौजूद हर कोई चीयर कर रहा था।
इस बुजुर्ग महिला ने एथलेटिक ड्रेसअप कर रखा था। उन्होंने फ्लोर पर रखे वेट को धीरे से उठाया और उसे फिर जमीन पर रखने से पहले गर्व से खड़ी रही।
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अगर आप सोचते हैं कि जिंदगी के अस्सी साल पार कर लिए तो आपको केवल घर में बैठकर टीवी के सामने या भगवान के भजन में ही मन लगाना चाहिए तो एक बार इस वीडियो को देख ले। इस फुटेज में अमेरिका की पचासी साल की एक महिला लोइस ने अट्ठानवे किलो का वजन उठाकर सबको हैरान कर दिया। इस प्रभावशाली और ताकतवर महिला को आसपास मौजूद हर कोई चीयर कर रहा था। इस बुजुर्ग महिला ने एथलेटिक ड्रेसअप कर रखा था। उन्होंने फ्लोर पर रखे वेट को धीरे से उठाया और उसे फिर जमीन पर रखने से पहले गर्व से खड़ी रही।
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से भिन्न, पर भावों से भिन्न जानना - पहिचानना, उसका अभ्यास करना ही मुक्ति मार्ग है। यही जिन वचन, जिनेन्द्र परमात्मा की देशना है।
समल पर्याय के चलते हुये ममल स्वभाव की साधना करने वाला ज्ञानी शूरवीर है।
सर्वोत्कृष्ट महिमा का भंडार चैतन्य देव, अनादि अनन्त परम पारिणामिक भाव में स्थित है, यह पंचम भाव पवित्र है, महिमावंत है, इसका आश्रय करने से शुद्धि के प्रारम्भ से लेकर पूर्णता प्रगट होती है।
जो मलिन हो अथवा जो अंशतः निर्मल हो अथवा जो अधूरा हो अथवा जो शुद्ध एवं पूर्ण होने पर भी सापेक्ष हो, अधुव हो, और त्रैकालिक परिपूर्ण सामर्थवान न हो, उसके आश्रय से शुद्धता प्रगट नहीं होती ; इसलिए औदयिक भाव, क्षायोपशमिक भाव, औपशमिक भाव, अवलम्बन के योग्य नहीं हैं ।
जो ममल है, पूरा निर्मल है, परिपूर्ण है, परम निरपेक्ष है, ध्रुव है और त्रैकालिक परिपूर्ण सामर्थ्यवान है, ऐसे अभेद एक परम पारिणामिक भाव का ही आश्रय करने योग्य है, इसी की शरण लेने योग्य है। इसी अपने ध्रुव ममल स्वभाव से सम्यकदर्शन से लेकर मोक्ष तक की सर्व दशायें प्राप्त होती हैं ; इसलिये द्रव्य दृष्टि करके अखड एक ज्ञायक वस्तु निज शुद्धात्म स्वरूप को .लक्ष्य में लेकर उसका अवलम्बन करो । वही वस्तु के अखंड एक परम पारिणामिक भाव का आश्रय है।
आत्मा अनन्त गुणमय है परन्तु द्रव्य दृष्टि गुणों के भेदों को ग्रहण नहीं करती । वह तो एक अखंड त्रैकालिक ध्रुव स्वभाव को अभेद रूप से ग्रहण करती है, यह पचम भाव पावन है, पूज्यनीय है। इसके आश्रय से सम्यक्दर्शन प्रगट होता है, सच्चा मुनिपना आता है, सुख और शांति आती है, वीतरागता होती है, पचम गति की प्राप्ति होती है।
हे शुद्धात्मा! तू मुक्ति स्वरूप है, तुझे पहिचानने से पाँच प्रकार के परावर्तनों से छुटकारा होता है इसलिये तू सम्पूर्ण मुक्ति का दाता है, तुझ पर निरन्तर दृष्टि रखने से तेरी शरण में आने से जन्म-मरण मिटते हैं, यह जिन वचन है।
जीव अपनी लगन से ज्ञायक परिणति को प्राप्त करता है। मैं ज्ञायक हूँ, मैं विभाव-भाव से भिन्न हूँ। शरीरादि कर्मोदय से भिन्न हूँ, किसी भी पर्याय में अटकने वाला मैं नहीं हूँ। मैं अगाध गुणों से भरा हूँ, मैं ध्रुव हूँ, मैं शुद्ध हूँ, मैं परम पारिणामिक भाव हूँ, इस प्रकार की तरंगें ज्ञानी
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से भिन्न, पर भावों से भिन्न जानना - पहिचानना, उसका अभ्यास करना ही मुक्ति मार्ग है। यही जिन वचन, जिनेन्द्र परमात्मा की देशना है। समल पर्याय के चलते हुये ममल स्वभाव की साधना करने वाला ज्ञानी शूरवीर है। सर्वोत्कृष्ट महिमा का भंडार चैतन्य देव, अनादि अनन्त परम पारिणामिक भाव में स्थित है, यह पंचम भाव पवित्र है, महिमावंत है, इसका आश्रय करने से शुद्धि के प्रारम्भ से लेकर पूर्णता प्रगट होती है। जो मलिन हो अथवा जो अंशतः निर्मल हो अथवा जो अधूरा हो अथवा जो शुद्ध एवं पूर्ण होने पर भी सापेक्ष हो, अधुव हो, और त्रैकालिक परिपूर्ण सामर्थवान न हो, उसके आश्रय से शुद्धता प्रगट नहीं होती ; इसलिए औदयिक भाव, क्षायोपशमिक भाव, औपशमिक भाव, अवलम्बन के योग्य नहीं हैं । जो ममल है, पूरा निर्मल है, परिपूर्ण है, परम निरपेक्ष है, ध्रुव है और त्रैकालिक परिपूर्ण सामर्थ्यवान है, ऐसे अभेद एक परम पारिणामिक भाव का ही आश्रय करने योग्य है, इसी की शरण लेने योग्य है। इसी अपने ध्रुव ममल स्वभाव से सम्यकदर्शन से लेकर मोक्ष तक की सर्व दशायें प्राप्त होती हैं ; इसलिये द्रव्य दृष्टि करके अखड एक ज्ञायक वस्तु निज शुद्धात्म स्वरूप को .लक्ष्य में लेकर उसका अवलम्बन करो । वही वस्तु के अखंड एक परम पारिणामिक भाव का आश्रय है। आत्मा अनन्त गुणमय है परन्तु द्रव्य दृष्टि गुणों के भेदों को ग्रहण नहीं करती । वह तो एक अखंड त्रैकालिक ध्रुव स्वभाव को अभेद रूप से ग्रहण करती है, यह पचम भाव पावन है, पूज्यनीय है। इसके आश्रय से सम्यक्दर्शन प्रगट होता है, सच्चा मुनिपना आता है, सुख और शांति आती है, वीतरागता होती है, पचम गति की प्राप्ति होती है। हे शुद्धात्मा! तू मुक्ति स्वरूप है, तुझे पहिचानने से पाँच प्रकार के परावर्तनों से छुटकारा होता है इसलिये तू सम्पूर्ण मुक्ति का दाता है, तुझ पर निरन्तर दृष्टि रखने से तेरी शरण में आने से जन्म-मरण मिटते हैं, यह जिन वचन है। जीव अपनी लगन से ज्ञायक परिणति को प्राप्त करता है। मैं ज्ञायक हूँ, मैं विभाव-भाव से भिन्न हूँ। शरीरादि कर्मोदय से भिन्न हूँ, किसी भी पर्याय में अटकने वाला मैं नहीं हूँ। मैं अगाध गुणों से भरा हूँ, मैं ध्रुव हूँ, मैं शुद्ध हूँ, मैं परम पारिणामिक भाव हूँ, इस प्रकार की तरंगें ज्ञानी
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मैं प्लास्टिक सर्जरी के बिना उपस्थिति बदल सकते हैं? आराम से! ऐसा करने के लिए, तुम्हें पता है कि कैसे मेकअप लागू करने या मेकअप कैसे करना है की भाषा में करने की जरूरत है मूर्तिकला चेहरे। इससे पहले, इस ज्ञान ब्रश और लिपस्टिक, आज की उपलब्ध केवल स्वामी था, किसी भी महिला सरल सुझावों का पालन करके तब्दील किया जा करने की कोशिश कर सकते हैं। ब्रश, पाउडर और नींव कई का एक सेट का उपयोग करना रंग आप जबड़े की रेखा को समायोजित करने में सक्षम हो जाएगा नेत्रहीन पतली नाक और संकीर्ण चेहरा बना दिया।
कैनवास के साथ मेकअप कलाकारों sravnivaniyut चेहरा कृति चित्रित किया जाएगा। इसलिए, उचित मूर्तिकला के लिए मुख्य शर्त एक आधार पूरी तरह से चिकनी त्वचा टोन है। इसलिए, पहले मेकअप लागू, सुधार पनाह का उपयोग कर छोटे दोष बनाया जाना चाहिए।
मेकअप लागू करने की योजना क्या है? सबसे पहले, आप 3 रंग की आवश्यकता होगी नींव - त्वचा टोन, अंधेरे और प्रकाश में, छाया और चमक के एक नाटक बनाने के लिए। सभी क्रीम,, सभी गुलाबी या सभी एक सुनहरे रंग के साथ एक ही रंग नंबर का ही होना चाहिए, उदाहरण के लिए। पर प्रकाश डाला ठोड़ी, माथे पर डाल करने के लिए, नाक के पीछे और आंखों क्षेत्र के अंतर्गत यकीन कर रहे हैं।
कैसे गालों पर मेकअप लागू करने के लिए? मानसिक रूप से कोने से एक रेखा खींच कान के ऊपरी किनारे के होंठ और सिर्फ इस रेखा के नीचे गहरे रंग के लागू होते हैं, छायांकन के बारे में भूल नहीं है। आंख के भीतरी कोने और, अंत में करने के लिए नाक के पंखों से आचरण के अगली पंक्ति, आंखों के बाहरी कोनों से मंदिरों में। इसी क्रम मेकअप करने के लिए प्राकृतिक देखा याद रखें और के रूप में नहीं युद्ध पेंट भारतीय सीमा रेखा छाया की जरूरत है। एक राहत - यह मेकअप योजना आँखों अधिक अर्थपूर्ण और cheekbones कर देगा।
कैसे मेकअप लागू करने के लिए गाल में? वहाँ दो तरीकों कि के आधार पर किया जाता है व्यक्ति के प्रकार। क्षैतिज धारियों और गालों के सेब पर घेरा स्मीयरों नेत्रहीन एक व्यक्ति का विस्तार, और ऊर्ध्वाधर और विकर्ण, इसके विपरीत, उसके दायरे को कम। आप चेहरे का विस्तार करने की जरूरत है, छोटे हलकों के रूप में गालों पर ब्लश लागू होते हैं। अपने कार्य है - चेहरे संकीर्ण करने के लिए, ब्रश स्ट्रोक, विकर्ण होना चाहिए उसके होठों को कान से। केवल हालत - रूज लाइन नाक के स्तर से कम नहीं होना चाहिए, जैसे कि चेहरे अनुपातहीन फैला लगेगा।
हम माथे के बारे में भूल नहीं कर सकते, या मेकअप एक मुखौटा तरह दिखाई देगा। आदेश माथे पहले से ही करने के लिए, सिर के मध्य के साथ bronzers के साथ एक व्यापक ब्रश करते हैं। साथ में मंदिरों पर छाया के साथ इस तकनीक माथे को संकीर्ण जाएगा, और बाल मोटा दिखाई देगा। लेकिन अगर आप एक कम माथे है, यह इसके लायक नहीं है।
आदेश जबड़े की रेखा और अधिक स्पष्ट करने के लिए, या आधार के गहरे लहज़े एक अंधेरे पाउडर पर क्रीम का उपयोग करें। जबड़े की हड्डी के साथ उत्पाद को लागू करें। अप करने के लिए प्राकृतिक देखा और गर्दन के लिए उपकरण खींचें या चेहरा गहरा दिखेगा।
एक गहरे लहज़े कि नाक पतला और इसे और अधिक सुंदर बनाने के - नाक का सवाल है, तो, पहले ही उल्लेख के रूप में, एक विशेषता की पीठ पर किनारों पर आरोपित किया जाता है। किसी भी मामले में, इससे पहले कि आप मेकअप लागू होते हैं, आप को समझने के लिए क्या प्रभाव हम को प्राप्त करने और क्या ठीक करने के लिए करना चाहते हैं की जरूरत है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी महिलाओं को अलग-अलग कर रहे हैं और क्या आदर्श रूप से एक दौर चेहरे के साथ अपने प्रेमिका से संपर्क किया है, तो आप केवल तथ्य यह है कि रंग को गलत तरीके से लागू किया गया था की वजह से छवि को बर्बाद कर सकता महत्वपूर्ण है। लेख मेकअप आवेदन तकनीक में जानकारी, जाहिर है, आसान नहीं है, लेकिन यह माहिर, आप प्लास्टिक सर्जरी के बिना उपस्थिति बदल सकते हैं।
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मैं प्लास्टिक सर्जरी के बिना उपस्थिति बदल सकते हैं? आराम से! ऐसा करने के लिए, तुम्हें पता है कि कैसे मेकअप लागू करने या मेकअप कैसे करना है की भाषा में करने की जरूरत है मूर्तिकला चेहरे। इससे पहले, इस ज्ञान ब्रश और लिपस्टिक, आज की उपलब्ध केवल स्वामी था, किसी भी महिला सरल सुझावों का पालन करके तब्दील किया जा करने की कोशिश कर सकते हैं। ब्रश, पाउडर और नींव कई का एक सेट का उपयोग करना रंग आप जबड़े की रेखा को समायोजित करने में सक्षम हो जाएगा नेत्रहीन पतली नाक और संकीर्ण चेहरा बना दिया। कैनवास के साथ मेकअप कलाकारों sravnivaniyut चेहरा कृति चित्रित किया जाएगा। इसलिए, उचित मूर्तिकला के लिए मुख्य शर्त एक आधार पूरी तरह से चिकनी त्वचा टोन है। इसलिए, पहले मेकअप लागू, सुधार पनाह का उपयोग कर छोटे दोष बनाया जाना चाहिए। मेकअप लागू करने की योजना क्या है? सबसे पहले, आप तीन रंग की आवश्यकता होगी नींव - त्वचा टोन, अंधेरे और प्रकाश में, छाया और चमक के एक नाटक बनाने के लिए। सभी क्रीम,, सभी गुलाबी या सभी एक सुनहरे रंग के साथ एक ही रंग नंबर का ही होना चाहिए, उदाहरण के लिए। पर प्रकाश डाला ठोड़ी, माथे पर डाल करने के लिए, नाक के पीछे और आंखों क्षेत्र के अंतर्गत यकीन कर रहे हैं। कैसे गालों पर मेकअप लागू करने के लिए? मानसिक रूप से कोने से एक रेखा खींच कान के ऊपरी किनारे के होंठ और सिर्फ इस रेखा के नीचे गहरे रंग के लागू होते हैं, छायांकन के बारे में भूल नहीं है। आंख के भीतरी कोने और, अंत में करने के लिए नाक के पंखों से आचरण के अगली पंक्ति, आंखों के बाहरी कोनों से मंदिरों में। इसी क्रम मेकअप करने के लिए प्राकृतिक देखा याद रखें और के रूप में नहीं युद्ध पेंट भारतीय सीमा रेखा छाया की जरूरत है। एक राहत - यह मेकअप योजना आँखों अधिक अर्थपूर्ण और cheekbones कर देगा। कैसे मेकअप लागू करने के लिए गाल में? वहाँ दो तरीकों कि के आधार पर किया जाता है व्यक्ति के प्रकार। क्षैतिज धारियों और गालों के सेब पर घेरा स्मीयरों नेत्रहीन एक व्यक्ति का विस्तार, और ऊर्ध्वाधर और विकर्ण, इसके विपरीत, उसके दायरे को कम। आप चेहरे का विस्तार करने की जरूरत है, छोटे हलकों के रूप में गालों पर ब्लश लागू होते हैं। अपने कार्य है - चेहरे संकीर्ण करने के लिए, ब्रश स्ट्रोक, विकर्ण होना चाहिए उसके होठों को कान से। केवल हालत - रूज लाइन नाक के स्तर से कम नहीं होना चाहिए, जैसे कि चेहरे अनुपातहीन फैला लगेगा। हम माथे के बारे में भूल नहीं कर सकते, या मेकअप एक मुखौटा तरह दिखाई देगा। आदेश माथे पहले से ही करने के लिए, सिर के मध्य के साथ bronzers के साथ एक व्यापक ब्रश करते हैं। साथ में मंदिरों पर छाया के साथ इस तकनीक माथे को संकीर्ण जाएगा, और बाल मोटा दिखाई देगा। लेकिन अगर आप एक कम माथे है, यह इसके लायक नहीं है। आदेश जबड़े की रेखा और अधिक स्पष्ट करने के लिए, या आधार के गहरे लहज़े एक अंधेरे पाउडर पर क्रीम का उपयोग करें। जबड़े की हड्डी के साथ उत्पाद को लागू करें। अप करने के लिए प्राकृतिक देखा और गर्दन के लिए उपकरण खींचें या चेहरा गहरा दिखेगा। एक गहरे लहज़े कि नाक पतला और इसे और अधिक सुंदर बनाने के - नाक का सवाल है, तो, पहले ही उल्लेख के रूप में, एक विशेषता की पीठ पर किनारों पर आरोपित किया जाता है। किसी भी मामले में, इससे पहले कि आप मेकअप लागू होते हैं, आप को समझने के लिए क्या प्रभाव हम को प्राप्त करने और क्या ठीक करने के लिए करना चाहते हैं की जरूरत है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी महिलाओं को अलग-अलग कर रहे हैं और क्या आदर्श रूप से एक दौर चेहरे के साथ अपने प्रेमिका से संपर्क किया है, तो आप केवल तथ्य यह है कि रंग को गलत तरीके से लागू किया गया था की वजह से छवि को बर्बाद कर सकता महत्वपूर्ण है। लेख मेकअप आवेदन तकनीक में जानकारी, जाहिर है, आसान नहीं है, लेकिन यह माहिर, आप प्लास्टिक सर्जरी के बिना उपस्थिति बदल सकते हैं।
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- दोस्तों को छोड़कर जाना नहीं चाहता था दूल्हा, फिर दुल्हन ने विदाई पर जो किया देख सभी के उड़े होश, बोले- घोर कलयुगBollywood । Edited by: शिखा यादव ।रविवार मई 28, 2023 05:58 AM ISTसोशल मीडिया पर शादी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दुल्हन की नहीं बल्कि दूल्हे की विदाई हो रही है. वीडियो में आप देख सलते हैं कि दूल्हा अपने दोस्तों को छोड़ कर जाना नहीं चाहता, लेकिन इसके बाद लड़की जो करती है उसे देख सभी हैरान रह गए.
- रोती हुई दुल्हन की भाई ने जबरन की विदाई, फिर लड़की ने जो किया देख लोगों को आई हंसी, बोले- अब ना बुलावे मम्मीBollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार मई 22, 2023 06:50 AM ISTकिसी भी शादी में वैसे तो सभी रस्म का अपना अलग महत्व होता है. लेकिन विदाई का रस्म एक ऐसा रस्म होता है, जो एक लड़की के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता. विदाई के समय एक लड़की अपने उस घर और मां-बाप को छोड़कर जा रही होती है, जहां उसने अपना बचपन बिताया है. आपने बहुत सारी ऐसी दुल्हनों को देखा होगा, जो विदाई के समय खूब रोती हैं. ऐसा ही एक वीडियो आपके लिए हम लेकर आए हैं.
- ससुराल जाने से पहले दुल्हन ने फूट-फूटकर रोते हुए पूर्व प्रेमी को डेडीकेट किया गाना, बोली- नाम लिया तो हो जाएंगे बदनामBollywood । Written by: शिखा यादव ।शनिवार अप्रैल 15, 2023 05:48 AM ISTBride Video: शादी का दिन सभी के लिए खास होता है. इस दिन को सभी अपने-अपने तरीके से स्पेशल बनाने की पूरी कोशिश करते हैं. लेकिन जरा सोचिए शादी वाले दिन अगर आपको अपनी एक्स गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड याद आ जाए तो?
- Zara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।गुरुवार मार्च 9, 2023 08:49 AM ISTWedding Viral Video: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दूल्हा-दुल्हन के इस वीडियो में दोनों को बेहद इमोशनल होते देखा जा रहा है. वीडियो में स्टेज पर खड़े दूल्हा-दुल्हन को एक-दूसरे को देखकर फूट-फूटकर रोते देखा जा रहा है.
- Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।बुधवार दिसम्बर 7, 2022 12:39 PM ISTDulha-Dulhan Video: वीडियो कुछ दिन पहले पोस्ट किया गया है. पोस्ट किए जाने के बाद से क्लिप को कई बार देखा जा चुका है. संख्या बढ़ता जा रही है. क्लिप को 341 से ज्यादा लाइक्स भी मिल चुके हैं. कई लोगों ने इस पर कमेंट भी किया है.
- ससुराल जाने से पहले दुल्हन ने रोते हुए एक्स बॉयफ्रेंड के लिए गाया अजय देवगन का गाना, दूल्हा रह गया शॉक्ड, लोग बोले- ओ भाई मारो मुझेBollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार नवम्बर 17, 2022 01:16 PM ISTBride Video: इस वीडियो में आप एक दुल्हन को अपने पति के सामने एक्स बॉयफ्रेंड के लिए गाना गाते हुए देख सकते हैं.
- Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।गुरुवार दिसम्बर 15, 2022 07:55 PM ISTDulhan Ki Vidai Ka Video: यह वीडियो एक शादी समारोह का है, जहां विदाई के दौरान मां अपनी बेटी को विदा कर रहा है. इस वीडियो को देख कर आप अपनी हंसी पर कंट्रोल नहीं रख पाएंगे.
- दूल्हे ने डांस करते हुए ली एंट्री तो दुल्हन ही नहीं सहेलियां भी हो गईं फिदा, लोग बोले- बॉलीवुड में होता तो शाहरुख-सलमान की छुट्टी कर देताBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार नवम्बर 4, 2022 05:21 AM ISTदूल्हा बॉलीवुड हीरो की तरह स्टाइल और डांस मूव्स से लोगों को इंप्रेस कर रहा है. वहीं मौजूद लोग उसके डांस को एंजॉय कर रहे हैं. इस वीडियो को ZoWed ने यूट्यूब पर शेयर किया है. इस वीडियो को अब तक 6. 2 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.
- Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार अक्टूबर 30, 2022 04:06 PM ISTवीडियो को इंस्टाग्राम पर "funtaap" नाम की आईडी से शेयर किया गया है. वीडियो को अब तक हजारों बार देखा जा चुका है. यूजर्स की इस वीडियो को देख कर हंसी नहीं रूक रही, लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं.
- Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार अक्टूबर 30, 2022 03:39 PM ISTट्विटर हैंडल "द फिगेन" द्वारा शेयर किया गया यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. ऑनलाइन शेयर किए जाने के बाद से वीडियो को अब तक 3 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है, वहीं इस वीडियो पर अब तक 122,000 लाइक्स और 15,000 रीट्वीट मिल चुके हैं.
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- दोस्तों को छोड़कर जाना नहीं चाहता था दूल्हा, फिर दुल्हन ने विदाई पर जो किया देख सभी के उड़े होश, बोले- घोर कलयुगBollywood । Edited by: शिखा यादव ।रविवार मई अट्ठाईस, दो हज़ार तेईस पाँच:अट्ठावन AM ISTसोशल मीडिया पर शादी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दुल्हन की नहीं बल्कि दूल्हे की विदाई हो रही है. वीडियो में आप देख सलते हैं कि दूल्हा अपने दोस्तों को छोड़ कर जाना नहीं चाहता, लेकिन इसके बाद लड़की जो करती है उसे देख सभी हैरान रह गए. - रोती हुई दुल्हन की भाई ने जबरन की विदाई, फिर लड़की ने जो किया देख लोगों को आई हंसी, बोले- अब ना बुलावे मम्मीBollywood । Written by: शिखा यादव ।सोमवार मई बाईस, दो हज़ार तेईस छः:पचास AM ISTकिसी भी शादी में वैसे तो सभी रस्म का अपना अलग महत्व होता है. लेकिन विदाई का रस्म एक ऐसा रस्म होता है, जो एक लड़की के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता. विदाई के समय एक लड़की अपने उस घर और मां-बाप को छोड़कर जा रही होती है, जहां उसने अपना बचपन बिताया है. आपने बहुत सारी ऐसी दुल्हनों को देखा होगा, जो विदाई के समय खूब रोती हैं. ऐसा ही एक वीडियो आपके लिए हम लेकर आए हैं. - ससुराल जाने से पहले दुल्हन ने फूट-फूटकर रोते हुए पूर्व प्रेमी को डेडीकेट किया गाना, बोली- नाम लिया तो हो जाएंगे बदनामBollywood । Written by: शिखा यादव ।शनिवार अप्रैल पंद्रह, दो हज़ार तेईस पाँच:अड़तालीस AM ISTBride Video: शादी का दिन सभी के लिए खास होता है. इस दिन को सभी अपने-अपने तरीके से स्पेशल बनाने की पूरी कोशिश करते हैं. लेकिन जरा सोचिए शादी वाले दिन अगर आपको अपनी एक्स गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड याद आ जाए तो? - Zara Hatke । Written by: शालिनी सेंगर ।गुरुवार मार्च नौ, दो हज़ार तेईस आठ:उनचास AM ISTWedding Viral Video: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दूल्हा-दुल्हन के इस वीडियो में दोनों को बेहद इमोशनल होते देखा जा रहा है. वीडियो में स्टेज पर खड़े दूल्हा-दुल्हन को एक-दूसरे को देखकर फूट-फूटकर रोते देखा जा रहा है. - Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।बुधवार दिसम्बर सात, दो हज़ार बाईस बारह:उनतालीस PM ISTDulha-Dulhan Video: वीडियो कुछ दिन पहले पोस्ट किया गया है. पोस्ट किए जाने के बाद से क्लिप को कई बार देखा जा चुका है. संख्या बढ़ता जा रही है. क्लिप को तीन सौ इकतालीस से ज्यादा लाइक्स भी मिल चुके हैं. कई लोगों ने इस पर कमेंट भी किया है. - ससुराल जाने से पहले दुल्हन ने रोते हुए एक्स बॉयफ्रेंड के लिए गाया अजय देवगन का गाना, दूल्हा रह गया शॉक्ड, लोग बोले- ओ भाई मारो मुझेBollywood । Written by: शिखा यादव ।गुरुवार नवम्बर सत्रह, दो हज़ार बाईस एक:सोलह PM ISTBride Video: इस वीडियो में आप एक दुल्हन को अपने पति के सामने एक्स बॉयफ्रेंड के लिए गाना गाते हुए देख सकते हैं. - Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।गुरुवार दिसम्बर पंद्रह, दो हज़ार बाईस सात:पचपन PM ISTDulhan Ki Vidai Ka Video: यह वीडियो एक शादी समारोह का है, जहां विदाई के दौरान मां अपनी बेटी को विदा कर रहा है. इस वीडियो को देख कर आप अपनी हंसी पर कंट्रोल नहीं रख पाएंगे. - दूल्हे ने डांस करते हुए ली एंट्री तो दुल्हन ही नहीं सहेलियां भी हो गईं फिदा, लोग बोले- बॉलीवुड में होता तो शाहरुख-सलमान की छुट्टी कर देताBollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।शुक्रवार नवम्बर चार, दो हज़ार बाईस पाँच:इक्कीस AM ISTदूल्हा बॉलीवुड हीरो की तरह स्टाइल और डांस मूव्स से लोगों को इंप्रेस कर रहा है. वहीं मौजूद लोग उसके डांस को एंजॉय कर रहे हैं. इस वीडियो को ZoWed ने यूट्यूब पर शेयर किया है. इस वीडियो को अब तक छः. दो मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. - Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार अक्टूबर तीस, दो हज़ार बाईस चार:छः PM ISTवीडियो को इंस्टाग्राम पर "funtaap" नाम की आईडी से शेयर किया गया है. वीडियो को अब तक हजारों बार देखा जा चुका है. यूजर्स की इस वीडियो को देख कर हंसी नहीं रूक रही, लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं. - Bollywood । Written by: प्रियंका तिवारी ।रविवार अक्टूबर तीस, दो हज़ार बाईस तीन:उनतालीस PM ISTट्विटर हैंडल "द फिगेन" द्वारा शेयर किया गया यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. ऑनलाइन शेयर किए जाने के बाद से वीडियो को अब तक तीन मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है, वहीं इस वीडियो पर अब तक एक सौ बाईस,शून्य लाइक्स और पंद्रह,शून्य रीट्वीट मिल चुके हैं.
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संडे वाले दिन बच्चों के लिए बनाएं उनका फेवरेट वाइट सॉस पास्ट। यहां देखें आसान रेसिपी।
- वाइट सॉस पास्ता बनाने के लिए आपको एक-दो कप पानी को उबालकर, उसमें एक बड़ा चम्मच तेल और स्वादानुसार नमक मिलाना होता है। पास्ता को डालें और उबलने दें, बाद में पास्ते को छान लें और एक तरफ रख दें।
- एक पैन में मक्खन और मैदा डालकर पेस्ट सा बनाएं और कुछ देर के लिए पकाएं। किसी भी तरह लम्प यानी गांठ से बचने के लिए थोड़ा थोड़ा दूध डालें और लगातार चलाते रहें। बाद में नमक और काली मिर्च डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं।
- इसके बाद गैस की आंच बंद कर दें और पनीर डालें। आपका सॉस तैयार है। पास्ता के लिए एक कड़ाही में तेल डालें, गर्म होने पर लहसुन और मिर्च डालें। तुलसी के पत्तों को भूनें और उसमें प्याज, शिमला मिर्च और मकई को पकाएं।
- आखिर में नमक और काली मिर्च डालें, पास्ता डालें और टॉस करें। पकने के बाद आपका पास्ता सर्व होने के लिए तैयार है।
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संडे वाले दिन बच्चों के लिए बनाएं उनका फेवरेट वाइट सॉस पास्ट। यहां देखें आसान रेसिपी। - वाइट सॉस पास्ता बनाने के लिए आपको एक-दो कप पानी को उबालकर, उसमें एक बड़ा चम्मच तेल और स्वादानुसार नमक मिलाना होता है। पास्ता को डालें और उबलने दें, बाद में पास्ते को छान लें और एक तरफ रख दें। - एक पैन में मक्खन और मैदा डालकर पेस्ट सा बनाएं और कुछ देर के लिए पकाएं। किसी भी तरह लम्प यानी गांठ से बचने के लिए थोड़ा थोड़ा दूध डालें और लगातार चलाते रहें। बाद में नमक और काली मिर्च डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं। - इसके बाद गैस की आंच बंद कर दें और पनीर डालें। आपका सॉस तैयार है। पास्ता के लिए एक कड़ाही में तेल डालें, गर्म होने पर लहसुन और मिर्च डालें। तुलसी के पत्तों को भूनें और उसमें प्याज, शिमला मिर्च और मकई को पकाएं। - आखिर में नमक और काली मिर्च डालें, पास्ता डालें और टॉस करें। पकने के बाद आपका पास्ता सर्व होने के लिए तैयार है।
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अमरावती/दि. 20- धारणी के मुख्य मार्ग पर गजानन मंदिर से जिला परिषद, विश्राम गृह को जाने वाले मार्ग पर बडी मात्रा में अतिक्रमण बढ गया है. इस बढते अतिक्रमण से नागरिक व महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड रहा है. इस अतिक्रमण के चलते क्षेत्र में किसी अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. इसलिए धारणी शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने की मांग गजानन महाराज मंदिर समिति व नागरिकों ने जिलाधीश को दिये निवेदन में की.
शहर में बढता अतिक्रमण फैशन बन गया है. लेकिन संबंधित विभाग इस ओर जानबूझकर अनदेखी कर रहे है. अधिकारियों की अनदेखी के कारण सभी प्रमुख रस्ते अतिक्रमण की भेट चढ रहे है. इसलिए संबंधित अतिक्रमण को उखाड फेंकने के साथ ही धारणी के अतिक्रमण विभाग व संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी मंदिर समिति तथा ग्रामस्थों ने की है.
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अमरावती/दि. बीस- धारणी के मुख्य मार्ग पर गजानन मंदिर से जिला परिषद, विश्राम गृह को जाने वाले मार्ग पर बडी मात्रा में अतिक्रमण बढ गया है. इस बढते अतिक्रमण से नागरिक व महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड रहा है. इस अतिक्रमण के चलते क्षेत्र में किसी अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. इसलिए धारणी शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने की मांग गजानन महाराज मंदिर समिति व नागरिकों ने जिलाधीश को दिये निवेदन में की. शहर में बढता अतिक्रमण फैशन बन गया है. लेकिन संबंधित विभाग इस ओर जानबूझकर अनदेखी कर रहे है. अधिकारियों की अनदेखी के कारण सभी प्रमुख रस्ते अतिक्रमण की भेट चढ रहे है. इसलिए संबंधित अतिक्रमण को उखाड फेंकने के साथ ही धारणी के अतिक्रमण विभाग व संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी मंदिर समिति तथा ग्रामस्थों ने की है.
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भाग ( ३ )
तीसरे भाग में दो बोधहैं ( 9 ) पहिले बोधमें बालपने के व्याहका निषेध है (२) दूसरे बोध में चन्द्रकलाके व्याहका वर्णन है। जिसमें व्याहसंबंधी समय समयके अनुसार स्त्रियोंका उचित व्यवहार दिखलाया गया है तथा गीत और कवित्त आदिकोंसे यह बोध अतिललित होगया है ।
भाग ( ४ )
चौथेभाग में चन्द्रकलाका ससुरालको जाना और गंगाजीकी स्तुति करना, और निंदित स्वभाववाली देवरानियोंको सुधारना, स्त्रीसभा कायम करके निंदित व्यवहारोंके तिरस्कार और वंदित व्यवहारोंके प्रचारके निमित्त व्याख्यान देना इत्यादिका वर्णन है और कोई व्याख्यान ऐसा नहीं है जिसमें दो एक कवित्त आदिक नहीं इससे यह भाग अत्यंत ललितहै ।
इस ग्रन्थभरमें सिवाय ( संक्षिप्त रामायण में गोसाईंजीके में वचनोंके ) और कहीं अन्य कविकृत कोई दोहा चौपाई वा कवित्त नहीं है सब ग्रंथकर्ता कृत हैं पर जहां देवी सुबोध कुँवरका व्याख्यान है वहां कवित्तमें उन्हींका नामहै और जो कवित्त देवीचन्द्रकलाकुँवरिके व्याख्यान में हैं उसमें उन्हींका नामहै बहुतोंमें किसीका नाम नहीं है परन्तु सव नवीन हैं ।
प्रार्थना ।
देशहितेषी महाशयोंसे आशा और प्रार्थना है कि, स्त्री शिक्षाका प्रचार अति आवश्यक समझकर इस ग्रन्थको अपनी २ कन्याओंको पढावें इस ग्रन्थका पढना स्त्रियोंको सर्वथा गुणदायक होगा ।
इति ।
ॐ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
अथ स्त्रीसबोध.
प्रथम भाग । अन्धारंभ भूमिका ।
पद वन्दिके, विनऊँ शारद मात देहु सो वर जेहि तियन कहूँ, अति हित है ममवात ॥ भरतखंडके मध्य श्रीगंगाजीके तटपर एक आनन्दपुर नगरीथी. उस नगरी में मुन्शी सर्वसुखलाल जाति कायस्थ श्रीवास्तम धर्मशील नामक राजाके दीवानथे, जैसा नाम था, वैसाही सर्वसुख उनको प्राप्त था; उनकी स्त्री (देवी सुबोध कुँवार ) रूपकी राशि, शीलकी सागर, विद्याकी खान, बुद्धिकी निधन थीं; जैसा उनका नाम था, वैसेही सर्व व्यवहार में परम सुबोधं थीं; पातिव्रत धर्म में जो उनकी अचल निष्ठथी, वह मानो सोनेमें सोहागा पड़ाथा, पूजा करतीं तो अपने पतिकी, ध्यान धरतीं तो अपने पतिका, अपने पतिको परमेश्वर समान जानके सदा उनके प्रसन्नता हेतु यत्न करतीं ।
घर गृहस्थीके कार्य में भी वह अति कुशलथीं, दीवानजी सिवाय कमाकर देवीसुवोधकुँवरिको दे देनेके और कुछ नहीं जानतेथे कि कहां क्या होता हैः--बाजारसे जिन्स पात सँगाना, नौकरोंको तन्ख्वाह देना, आये गयेका आवभगत करना, नेवता बँकारी बैना
। देर-समूह ! २ गत । ३ सिखदुई । पुरानिय । ६ खतिरदारी ।
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भाग तीसरे भाग में दो बोधहैं पहिले बोधमें बालपने के व्याहका निषेध है दूसरे बोध में चन्द्रकलाके व्याहका वर्णन है। जिसमें व्याहसंबंधी समय समयके अनुसार स्त्रियोंका उचित व्यवहार दिखलाया गया है तथा गीत और कवित्त आदिकोंसे यह बोध अतिललित होगया है । भाग चौथेभाग में चन्द्रकलाका ससुरालको जाना और गंगाजीकी स्तुति करना, और निंदित स्वभाववाली देवरानियोंको सुधारना, स्त्रीसभा कायम करके निंदित व्यवहारोंके तिरस्कार और वंदित व्यवहारोंके प्रचारके निमित्त व्याख्यान देना इत्यादिका वर्णन है और कोई व्याख्यान ऐसा नहीं है जिसमें दो एक कवित्त आदिक नहीं इससे यह भाग अत्यंत ललितहै । इस ग्रन्थभरमें सिवाय और कहीं अन्य कविकृत कोई दोहा चौपाई वा कवित्त नहीं है सब ग्रंथकर्ता कृत हैं पर जहां देवी सुबोध कुँवरका व्याख्यान है वहां कवित्तमें उन्हींका नामहै और जो कवित्त देवीचन्द्रकलाकुँवरिके व्याख्यान में हैं उसमें उन्हींका नामहै बहुतोंमें किसीका नाम नहीं है परन्तु सव नवीन हैं । प्रार्थना । देशहितेषी महाशयोंसे आशा और प्रार्थना है कि, स्त्री शिक्षाका प्रचार अति आवश्यक समझकर इस ग्रन्थको अपनी दो कन्याओंको पढावें इस ग्रन्थका पढना स्त्रियोंको सर्वथा गुणदायक होगा । इति । ॐ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अथ स्त्रीसबोध. प्रथम भाग । अन्धारंभ भूमिका । पद वन्दिके, विनऊँ शारद मात देहु सो वर जेहि तियन कहूँ, अति हित है ममवात ॥ भरतखंडके मध्य श्रीगंगाजीके तटपर एक आनन्दपुर नगरीथी. उस नगरी में मुन्शी सर्वसुखलाल जाति कायस्थ श्रीवास्तम धर्मशील नामक राजाके दीवानथे, जैसा नाम था, वैसाही सर्वसुख उनको प्राप्त था; उनकी स्त्री रूपकी राशि, शीलकी सागर, विद्याकी खान, बुद्धिकी निधन थीं; जैसा उनका नाम था, वैसेही सर्व व्यवहार में परम सुबोधं थीं; पातिव्रत धर्म में जो उनकी अचल निष्ठथी, वह मानो सोनेमें सोहागा पड़ाथा, पूजा करतीं तो अपने पतिकी, ध्यान धरतीं तो अपने पतिका, अपने पतिको परमेश्वर समान जानके सदा उनके प्रसन्नता हेतु यत्न करतीं । घर गृहस्थीके कार्य में भी वह अति कुशलथीं, दीवानजी सिवाय कमाकर देवीसुवोधकुँवरिको दे देनेके और कुछ नहीं जानतेथे कि कहां क्या होता हैः--बाजारसे जिन्स पात सँगाना, नौकरोंको तन्ख्वाह देना, आये गयेका आवभगत करना, नेवता बँकारी बैना । देर-समूह ! दो गत । तीन सिखदुई । पुरानिय । छः खतिरदारी ।
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प्रयागराज। आईईआरटी में दो दिनी वार्षिकोत्सव का समापन रविवार को हुआ। जिसमे इलेक्ट्रिकल सोसायटी विजेता रही जबकि प्रथम रनर अप इलेक्ट्रॉनिक सोसायटी एवं द्वितीय रनर अप आईसी सोसायटी रही। निदेशक डॉ. विमल मिश्रा ने चैंपियन ट्रॉफी सोसायटी के चेयरमैन और विभागाध्यक्ष को प्रदान की।
समूह नृत्य में प्रथम स्थान किरन ग्रुप, द्वितीय स्थान आकाश ग्रुप एवं तृतीय स्थान शैल ऐंड ग्रुप ने प्राप्त किया। डंब साराड में हर्ष और रोहन प्रथम, आकांक्षा और जतिन द्वितीय तथा दिव्यांश और हर्षित तृतीय रहे। कामेडी शो में मन एवं हर्षित प्रथम, अर्पित और आशीष द्वितीय एवं आदर्श और अतुल तृतीय रहे।
वाद-विवाद में हर्ष धर प्रथम, विपिन कुमार द्वितीय, रिशिता तृतीय रहे। क्विज में रोहन मिश्रा प्रथम, अमित द्वितीय, निखिल तृतीय रहे। कोलाज में नैंसी, प्रियंका प्रथम, श्रेयांसि और श्रृष्टि द्वितीय, आकृति और पल्लवी तृतीय रहीं। इस दौरान उमाशंकर, सुनील निषाद, आरके सिंह, सत्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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प्रयागराज। आईईआरटी में दो दिनी वार्षिकोत्सव का समापन रविवार को हुआ। जिसमे इलेक्ट्रिकल सोसायटी विजेता रही जबकि प्रथम रनर अप इलेक्ट्रॉनिक सोसायटी एवं द्वितीय रनर अप आईसी सोसायटी रही। निदेशक डॉ. विमल मिश्रा ने चैंपियन ट्रॉफी सोसायटी के चेयरमैन और विभागाध्यक्ष को प्रदान की। समूह नृत्य में प्रथम स्थान किरन ग्रुप, द्वितीय स्थान आकाश ग्रुप एवं तृतीय स्थान शैल ऐंड ग्रुप ने प्राप्त किया। डंब साराड में हर्ष और रोहन प्रथम, आकांक्षा और जतिन द्वितीय तथा दिव्यांश और हर्षित तृतीय रहे। कामेडी शो में मन एवं हर्षित प्रथम, अर्पित और आशीष द्वितीय एवं आदर्श और अतुल तृतीय रहे। वाद-विवाद में हर्ष धर प्रथम, विपिन कुमार द्वितीय, रिशिता तृतीय रहे। क्विज में रोहन मिश्रा प्रथम, अमित द्वितीय, निखिल तृतीय रहे। कोलाज में नैंसी, प्रियंका प्रथम, श्रेयांसि और श्रृष्टि द्वितीय, आकृति और पल्लवी तृतीय रहीं। इस दौरान उमाशंकर, सुनील निषाद, आरके सिंह, सत्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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jaipur, 30 जून . Prime Minister Narendra Modi के ऐतिहासिक नौ वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा चलाए जा रहे महासंपर्क अभियान को लेकर प्रदेश मुख्यालय पर Uttar Pradesh विधान परिषद सदस्य और महासंपर्क अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी त्यागी ने प्रेसवार्ता को संबोधित किया. इस दौरान अश्विनी त्यागी ने कहा कि महासंपर्क अभियान के तहत Lok Sabha, विधानसभा, मंडल और बूथ स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें प्रबुद्धजन सम्मेलन, व्यापारिक सम्मेलन, लाभार्थी सम्मेलन, Media संवाद, विशिष्ट जन सम्मेलन, विकास तीर्थ, बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन सहित टिफिन बैठकें भी आयोजित हुई हैं. महासंपर्क अभियान के तहत समाज के सभी वर्गों से संवाद किया गया, जिसमें प्रदेश की जनता ने भरपूर जोश दिखाते हुए भाजपा को समर्थन दिया.
महासंपर्क अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजन अश्विनी त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नौ वर्षों में देश के आम नागरिक के जीवन स्तर में सुधार आया है. पहले जहां देश में Bank लेन देन के मामले में बहुत कम लोग जागरूक थे, वहीं इन नौ वर्षों में कुल 48 करोड़ 27 लाख जनधन खाते खुले जिसमें से महिलाओं के 26 करोड़ 54 लाख जनधन खाते खुले हैं. इन खातों के माध्यम से अभी तक 25 लाख करोड़ की डायरेक्ट सब्सिडी सीधा आमजन के खातों में पहुंची है. त्यागी ने कहा कि 11 करोड़ से ज्यादा शौचालय, 31 करोड़ 36 लाख एलपीजी गैस कनेक्शन, देश में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारें साठ साल में महज 723 विश्वविद्यालय बना पाई जबकि मोदी सरकार के इन नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1113 हो गई. देशभर में मेडिकल विद्यार्थियों की सीट जहां पहले 82 हजार थी उसको बढ़ाकर एक लाख 52 हजार कर दिया. देशभर में 2014 से पूर्व कुल 641 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, इन नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1341 हो गई. इसके अलावा एम्स की बात करें तो देशभर में पहले महज आठ एम्स थे, इन नौ वर्षों में बढ़कर 23 एम्स हो गए.
त्यागी ने कहा कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से दस करोड से ज्यादा परिवारों के 23 करोड़ से ज्यादा लोगों को निःशुल्क इलाज मिला. कोरोना महामारी (Epidemic) के समय मोदी सरकार के नेतृत्व में देशभर में 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन मिला. वहीं ऐतिहासिक 220 करोड़ लोगों को निःशुल्क वैक्सीन लगाई गई. यह आंकडा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा है. त्यागी ने कहा कि यूपीए सरकार के समय देश में आतंकी घटनाएं आम हो गई थी, देश में असुरक्षा का माहौल था लेकिन मोदी सरकार आने के बाद देश में कोई आतंकी घटना नहीं घटी. आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के मामले में देश पूरी तरह सुदृढ़ हुआ है. कांग्रेस के नेता बयान दिया करते थे कि कश्मीर से धारा 370 नहीं हट सकती. Prime Minister Narendra Modi के कार्यकाल में धारा 370 भी हटी और कश्मीर में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुआ. जी-20 देशों के सम्मेलन में भारत को अध्यक्षता करने का सौभाग्य मोदी के चलते मिला.
त्यागी ने कहा कि निर्यात के हिसाब से देखें तो 2014 से पहले भारत जहां 466 अरब Dollar का निर्यात करता था इन नौ वर्षों में वह बढकर 776 अरब Dollar हो गया. विश्व में भारत की अर्थव्यवस्था दसवें नंबर से पांचवे नंबर पर पहुंच गई. प्रेसवार्ता में अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस खान, भाजपा प्रदेश मंत्री अशोक सैनी और Media संपर्क प्रमुख आनन्द शर्मा मौजूद रहे.
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jaipur, तीस जून . Prime Minister Narendra Modi के ऐतिहासिक नौ वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा चलाए जा रहे महासंपर्क अभियान को लेकर प्रदेश मुख्यालय पर Uttar Pradesh विधान परिषद सदस्य और महासंपर्क अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी त्यागी ने प्रेसवार्ता को संबोधित किया. इस दौरान अश्विनी त्यागी ने कहा कि महासंपर्क अभियान के तहत Lok Sabha, विधानसभा, मंडल और बूथ स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें प्रबुद्धजन सम्मेलन, व्यापारिक सम्मेलन, लाभार्थी सम्मेलन, Media संवाद, विशिष्ट जन सम्मेलन, विकास तीर्थ, बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन सहित टिफिन बैठकें भी आयोजित हुई हैं. महासंपर्क अभियान के तहत समाज के सभी वर्गों से संवाद किया गया, जिसमें प्रदेश की जनता ने भरपूर जोश दिखाते हुए भाजपा को समर्थन दिया. महासंपर्क अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजन अश्विनी त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नौ वर्षों में देश के आम नागरिक के जीवन स्तर में सुधार आया है. पहले जहां देश में Bank लेन देन के मामले में बहुत कम लोग जागरूक थे, वहीं इन नौ वर्षों में कुल अड़तालीस करोड़ सत्ताईस लाख जनधन खाते खुले जिसमें से महिलाओं के छब्बीस करोड़ चौवन लाख जनधन खाते खुले हैं. इन खातों के माध्यम से अभी तक पच्चीस लाख करोड़ की डायरेक्ट सब्सिडी सीधा आमजन के खातों में पहुंची है. त्यागी ने कहा कि ग्यारह करोड़ से ज्यादा शौचालय, इकतीस करोड़ छत्तीस लाख एलपीजी गैस कनेक्शन, देश में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारें साठ साल में महज सात सौ तेईस विश्वविद्यालय बना पाई जबकि मोदी सरकार के इन नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर एक हज़ार एक सौ तेरह हो गई. देशभर में मेडिकल विद्यार्थियों की सीट जहां पहले बयासी हजार थी उसको बढ़ाकर एक लाख बावन हजार कर दिया. देशभर में दो हज़ार चौदह से पूर्व कुल छः सौ इकतालीस मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे, इन नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर एक हज़ार तीन सौ इकतालीस हो गई. इसके अलावा एम्स की बात करें तो देशभर में पहले महज आठ एम्स थे, इन नौ वर्षों में बढ़कर तेईस एम्स हो गए. त्यागी ने कहा कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से दस करोड से ज्यादा परिवारों के तेईस करोड़ से ज्यादा लोगों को निःशुल्क इलाज मिला. कोरोना महामारी के समय मोदी सरकार के नेतृत्व में देशभर में अस्सी करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन मिला. वहीं ऐतिहासिक दो सौ बीस करोड़ लोगों को निःशुल्क वैक्सीन लगाई गई. यह आंकडा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा है. त्यागी ने कहा कि यूपीए सरकार के समय देश में आतंकी घटनाएं आम हो गई थी, देश में असुरक्षा का माहौल था लेकिन मोदी सरकार आने के बाद देश में कोई आतंकी घटना नहीं घटी. आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के मामले में देश पूरी तरह सुदृढ़ हुआ है. कांग्रेस के नेता बयान दिया करते थे कि कश्मीर से धारा तीन सौ सत्तर नहीं हट सकती. Prime Minister Narendra Modi के कार्यकाल में धारा तीन सौ सत्तर भी हटी और कश्मीर में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुआ. जी-बीस देशों के सम्मेलन में भारत को अध्यक्षता करने का सौभाग्य मोदी के चलते मिला. त्यागी ने कहा कि निर्यात के हिसाब से देखें तो दो हज़ार चौदह से पहले भारत जहां चार सौ छयासठ अरब Dollar का निर्यात करता था इन नौ वर्षों में वह बढकर सात सौ छिहत्तर अरब Dollar हो गया. विश्व में भारत की अर्थव्यवस्था दसवें नंबर से पांचवे नंबर पर पहुंच गई. प्रेसवार्ता में अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस खान, भाजपा प्रदेश मंत्री अशोक सैनी और Media संपर्क प्रमुख आनन्द शर्मा मौजूद रहे.
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मध्यप्रदेश। आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 72वें जन्मदिवस के अवसर पर देश काे चीता युग की वापसी का उपहार दिया है। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिवस पर नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित औपचारिक तौर पर छोड़ा हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश के श्योपुर में महिला स्व-सहायता समूह सम्मेलन आयोजित किया, श्योपुर के कराहल में आयोजित महिला स्व-सहायता समूह सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय स्वागत किया।
प्रधानमंत्री द्वारा श्योपुर में महिला स्व-सहायता समूहों को संबोधन :
इस सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि, मध्य प्रदेश के श्योपुर में 'स्वयं सहायता समूह सम्मेलन' में लोगों के स्नेह से अभिभूत हूं। विश्वकर्मा जयंती पर स्वयं सहायता समूहों का इतना बड़ा सम्मेलन, अपने आप में बहुत विशेष है, मैं आप सभी को, सभी देशवासियों को विश्वकर्मा पूजा की भी शुभकामनाएं देता हूं। मोदी बोले- मुझे आज इस बात की भी खुशी है कि भारत की धरती पर अब 75 साल बाद चीता फिर से लौट आया है, अब से कुछ देर पहले मुझे कुनो नेशनल पार्क में चीतों को छोड़ने का सौभाग्य मिला।
मोदी बोले- "2014 के बाद से ही देश, महिलाओं की गरिमा बढ़ाने, महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में जुटा हुआ है। शौचालय के अभाव में जो दिक्कतें आती थीं, रसोई में लकड़ी के धुएं से जो तकलीफ होती थी, वो आप अच्छी तरह जानती हैं" पिछली शताब्दी के भारत और इस शताब्दी के नए भारत में एक बहुत बड़ा अंतर हमारी नारी शक्ति के प्रतिनिधित्व के रूप में आया है, आज के नए भारत में पंचायत भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक नारीशक्ति का परचम लहरा रहा है। जिस भी सेक्टर में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, उस क्षेत्र में, उस कार्य में सफलता अपने आप तय हो जाती है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसको महिलाओं ने नेतृत्व दिया है।
महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण उन्हें समाज में भी उतना ही सशक्त बनाता है। हमारी सरकार ने बेटियों के लिए बंद दरवाजे को खोल दिया है। बेटियां अब सैनिक स्कूलों में भी दाखिला ले रही हैं, पुलिस कमांडो भी बन रही हैं और फौज में भी भर्ती हो रही हैं।
💠 मेरा प्रयास रहता है कि अपने जन्मदिन पर मां के पास पहुंचकर उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करूं। आज मां के पास तो नहीं जा सका, लेकिन आप जैसी हजारों माताओं का आशीर्वाद मुझे मिला है, यह देखकर मेरी मां ज्यादा खुश होंगी।
💠 आज मुझे इस बात की खुशी है कि 70 साल बाद देश में चीता पुनः लौट आया है, नामीबिया से आये चीते के रूप में विशिष्ट अतिथियों का हम सब हृदय से स्वागत करें। मध्यप्रदेश के मेरे भाइयों-बहनों, भारत सरकार ने आपको यह चीता इसलिए भेंट किया है, क्योंकि हमारा विश्वास आप पर ज्यादा है, मध्यप्रदेश ने कभी मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने दी है और मैं जानता हूं कि श्योपुर के भाई-बहन भी मेरे विश्वास को टूटने नहीं देंगे।
💠 हाल में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में पूरे मध्यप्रदेश में लगभग 17000 बहनें जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी गई हैं। यह बड़े बदलाव का संकेत है, बड़े परिवर्तन का आह्वान है। आजादी की लड़ाई में सशस्त्र संघर्ष से लेकर सत्याग्रह तक देश की बेटियां किसी से पीछे नहीं रहीं हैं। आप स्वसहायता समूह की मेरी बहनों, आपने कोरोना काल में संकट की उस घड़ी में मानव मात्र की सेवा के लिए लाखों मास्क बनाये और उसके पश्चात आजादी के 75वें अमृत वर्ष में आपने असंख्य तिरंगे बनाकर हम सबको गौरवान्वित किया हैं।
💠 मध्यप्रदेश में अब तक 40 लाख परिवारों को नल से जल पहुंचाया जा चुका है। मैं इस अभियान की सफलता का श्रेय आप बहनों को देता हूं, 3 हजार से अधिक नल जल परियोजनाओं का प्रबंधन आप स्वसहायता समूह की बहनों द्वारा सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
💠 मध्यप्रदेश में जनजाति बहनों द्वारा बनाए बेहतरीन उत्पादों की बहुत अधिक प्रशंसा भी होती रही है। पीएम कौशल विकास योजना के तहत जनजाति क्षेत्रों में नए स्किलिंग सेंटर से इस प्रकार के प्रयासों को और बल मिलेगा।
💠 एक जिला एक उत्पाद के माध्यम से हर जिले के उत्पाद को बड़े मार्केट तक पहुंचाने का प्रयास सरकार कर रही है। मुझे खुशी है कि, शिवराज सिंह चौहान आपके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं।
👉 पात्र लाभार्थियों को लाभ देने के लिए आज शिविर लगाए जा रहे हैं। रक्तदान शिविर और वृक्षारोपण के कार्यक्रम हो रहे हैं। दिव्यांग भाई-बहनों को उपकरणों का वितरण हो रहा है, सारा प्रदेश आज आनंद और प्रसन्नता से झूम रहा है।
👉 अब चीता मध्यप्रदेश की धरती पर आए हैं। चीतों का आना साधारण घटना नहीं है। "प्राणियों में सद्भावना हो" यह भारत का मंत्र है। उसको साकार प्रधानमंत्री ने किया है।
👉 आज प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश की धरती पर आये हैं। आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री का जन्मदिन है और अपने जन्मदिन पर चीते के रूप में ऐतिहासिक उपहार लेकर आये हैं। मैं संपूर्ण मध्यप्रदेश की ओर से उनका अभिनंदन करता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।
👉 चीता अगर आए हैं तो चीतों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आएंगे। पर्यटक आएंगे तो गाड़ियां लगेगी, होटल और रेस्टोरेंट्स चलेंगे, कई तरह का रोजगार पैदा होगा। आज इस घटना से जनता की तकदीर बदलेगी और क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।
👉 मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के कारण मध्यप्रदेश में बेटियों की जन्मदर में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ जैसी योजना के माध्यम से बेटियों को नये आत्मविश्वास से भरने का काम किया है।
👉 जो होटल और रिसॉर्ट बनाएंगे और जनता और पर्यटकों की सुविधा के लिए अधोसंरचना बनाएंगे, हम उनको विशेष सुविधाएं देने का काम करेंगे। स्व सहायता समूह की बहनों से मैं कहना चाहता हूं कि रोजगार का एक और अवसर सामने है। आप दीदी कैफे चलाती हैं, तो अब केवल एक दीदी कैफे नहीं चलेगा, इस जिले में कई दीदी कैफे चल सकेंगे।
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मध्यप्रदेश। आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहत्तरवें जन्मदिवस के अवसर पर देश काे चीता युग की वापसी का उपहार दिया है। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिवस पर नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित औपचारिक तौर पर छोड़ा हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश के श्योपुर में महिला स्व-सहायता समूह सम्मेलन आयोजित किया, श्योपुर के कराहल में आयोजित महिला स्व-सहायता समूह सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय स्वागत किया। प्रधानमंत्री द्वारा श्योपुर में महिला स्व-सहायता समूहों को संबोधन : इस सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि, मध्य प्रदेश के श्योपुर में 'स्वयं सहायता समूह सम्मेलन' में लोगों के स्नेह से अभिभूत हूं। विश्वकर्मा जयंती पर स्वयं सहायता समूहों का इतना बड़ा सम्मेलन, अपने आप में बहुत विशेष है, मैं आप सभी को, सभी देशवासियों को विश्वकर्मा पूजा की भी शुभकामनाएं देता हूं। मोदी बोले- मुझे आज इस बात की भी खुशी है कि भारत की धरती पर अब पचहत्तर साल बाद चीता फिर से लौट आया है, अब से कुछ देर पहले मुझे कुनो नेशनल पार्क में चीतों को छोड़ने का सौभाग्य मिला। मोदी बोले- "दो हज़ार चौदह के बाद से ही देश, महिलाओं की गरिमा बढ़ाने, महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में जुटा हुआ है। शौचालय के अभाव में जो दिक्कतें आती थीं, रसोई में लकड़ी के धुएं से जो तकलीफ होती थी, वो आप अच्छी तरह जानती हैं" पिछली शताब्दी के भारत और इस शताब्दी के नए भारत में एक बहुत बड़ा अंतर हमारी नारी शक्ति के प्रतिनिधित्व के रूप में आया है, आज के नए भारत में पंचायत भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक नारीशक्ति का परचम लहरा रहा है। जिस भी सेक्टर में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, उस क्षेत्र में, उस कार्य में सफलता अपने आप तय हो जाती है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसको महिलाओं ने नेतृत्व दिया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण उन्हें समाज में भी उतना ही सशक्त बनाता है। हमारी सरकार ने बेटियों के लिए बंद दरवाजे को खोल दिया है। बेटियां अब सैनिक स्कूलों में भी दाखिला ले रही हैं, पुलिस कमांडो भी बन रही हैं और फौज में भी भर्ती हो रही हैं। 💠 मेरा प्रयास रहता है कि अपने जन्मदिन पर मां के पास पहुंचकर उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करूं। आज मां के पास तो नहीं जा सका, लेकिन आप जैसी हजारों माताओं का आशीर्वाद मुझे मिला है, यह देखकर मेरी मां ज्यादा खुश होंगी। 💠 आज मुझे इस बात की खुशी है कि सत्तर साल बाद देश में चीता पुनः लौट आया है, नामीबिया से आये चीते के रूप में विशिष्ट अतिथियों का हम सब हृदय से स्वागत करें। मध्यप्रदेश के मेरे भाइयों-बहनों, भारत सरकार ने आपको यह चीता इसलिए भेंट किया है, क्योंकि हमारा विश्वास आप पर ज्यादा है, मध्यप्रदेश ने कभी मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने दी है और मैं जानता हूं कि श्योपुर के भाई-बहन भी मेरे विश्वास को टूटने नहीं देंगे। 💠 हाल में संपन्न हुए पंचायत चुनावों में पूरे मध्यप्रदेश में लगभग सत्रह हज़ार बहनें जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी गई हैं। यह बड़े बदलाव का संकेत है, बड़े परिवर्तन का आह्वान है। आजादी की लड़ाई में सशस्त्र संघर्ष से लेकर सत्याग्रह तक देश की बेटियां किसी से पीछे नहीं रहीं हैं। आप स्वसहायता समूह की मेरी बहनों, आपने कोरोना काल में संकट की उस घड़ी में मानव मात्र की सेवा के लिए लाखों मास्क बनाये और उसके पश्चात आजादी के पचहत्तरवें अमृत वर्ष में आपने असंख्य तिरंगे बनाकर हम सबको गौरवान्वित किया हैं। 💠 मध्यप्रदेश में अब तक चालीस लाख परिवारों को नल से जल पहुंचाया जा चुका है। मैं इस अभियान की सफलता का श्रेय आप बहनों को देता हूं, तीन हजार से अधिक नल जल परियोजनाओं का प्रबंधन आप स्वसहायता समूह की बहनों द्वारा सफलतापूर्वक किया जा रहा है। 💠 मध्यप्रदेश में जनजाति बहनों द्वारा बनाए बेहतरीन उत्पादों की बहुत अधिक प्रशंसा भी होती रही है। पीएम कौशल विकास योजना के तहत जनजाति क्षेत्रों में नए स्किलिंग सेंटर से इस प्रकार के प्रयासों को और बल मिलेगा। 💠 एक जिला एक उत्पाद के माध्यम से हर जिले के उत्पाद को बड़े मार्केट तक पहुंचाने का प्रयास सरकार कर रही है। मुझे खुशी है कि, शिवराज सिंह चौहान आपके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। 👉 पात्र लाभार्थियों को लाभ देने के लिए आज शिविर लगाए जा रहे हैं। रक्तदान शिविर और वृक्षारोपण के कार्यक्रम हो रहे हैं। दिव्यांग भाई-बहनों को उपकरणों का वितरण हो रहा है, सारा प्रदेश आज आनंद और प्रसन्नता से झूम रहा है। 👉 अब चीता मध्यप्रदेश की धरती पर आए हैं। चीतों का आना साधारण घटना नहीं है। "प्राणियों में सद्भावना हो" यह भारत का मंत्र है। उसको साकार प्रधानमंत्री ने किया है। 👉 आज प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश की धरती पर आये हैं। आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री का जन्मदिन है और अपने जन्मदिन पर चीते के रूप में ऐतिहासिक उपहार लेकर आये हैं। मैं संपूर्ण मध्यप्रदेश की ओर से उनका अभिनंदन करता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। 👉 चीता अगर आए हैं तो चीतों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आएंगे। पर्यटक आएंगे तो गाड़ियां लगेगी, होटल और रेस्टोरेंट्स चलेंगे, कई तरह का रोजगार पैदा होगा। आज इस घटना से जनता की तकदीर बदलेगी और क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी। 👉 मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के कारण मध्यप्रदेश में बेटियों की जन्मदर में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ जैसी योजना के माध्यम से बेटियों को नये आत्मविश्वास से भरने का काम किया है। 👉 जो होटल और रिसॉर्ट बनाएंगे और जनता और पर्यटकों की सुविधा के लिए अधोसंरचना बनाएंगे, हम उनको विशेष सुविधाएं देने का काम करेंगे। स्व सहायता समूह की बहनों से मैं कहना चाहता हूं कि रोजगार का एक और अवसर सामने है। आप दीदी कैफे चलाती हैं, तो अब केवल एक दीदी कैफे नहीं चलेगा, इस जिले में कई दीदी कैफे चल सकेंगे। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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इटावा सदर विधायक का सरिता भदौरिया ने पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया। विधायक ने कहा पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलायें। जिले के लगभग 2. 89 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर जिला अस्पताल में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। रविवार को जिला अस्पताल में बीजेपी की सदर विधायक सरिता भदौरिया ने बच्चे को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। इसके साथ ही कहा सभी ग्राम प्रधान, सभासद व अन्य विभाग के लोग भी इस अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भगवान दास ने कहा कि पोलियो का टीका बच्चों को पोलियो की बीमारी से बचाता है। पोलियो बहुत ज्यादा संक्रामक है। ऐसा इसलिए है क्यों कि अब भी दुनिया के कुछ देशों में पोलियो बचा है। इसलिए इन लोगों से भारत में इस बीमारी के आने का अंदेशा बना रहता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ श्रीनिवास ने कहा कि पोलियो पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है। इसलिए बच्चों को इसकी खुराक लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पोलियो दिवस के अवसर पर जिले में लगभग 1111 बूथों का गठन किया गया है। इस पर लगभग 2. 89 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में 678 टीमों को लगाया गया, जो आज से 28 मार्च तक इस लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करेंगी। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए निजी अस्पताल व नर्सिंग होम की मदद भी ली जा रही है। अभियान के तहत जिले के पहुंच विहीन दूरस्थ क्षेत्रों, झुग्गी झोपड़ी, मलिन बस्ती, ईट भट्ठा, अस्थाई बसाहटों आदि क्षेत्रों के बच्चों को भी पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है। इसके साथ ही यात्रा करने बालों के बच्चों को बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर ट्रांजिट दलों के माध्यम से पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इटावा सदर विधायक का सरिता भदौरिया ने पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया। विधायक ने कहा पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलायें। जिले के लगभग दो. नवासी लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर जिला अस्पताल में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। रविवार को जिला अस्पताल में बीजेपी की सदर विधायक सरिता भदौरिया ने बच्चे को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। इसके साथ ही कहा सभी ग्राम प्रधान, सभासद व अन्य विभाग के लोग भी इस अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भगवान दास ने कहा कि पोलियो का टीका बच्चों को पोलियो की बीमारी से बचाता है। पोलियो बहुत ज्यादा संक्रामक है। ऐसा इसलिए है क्यों कि अब भी दुनिया के कुछ देशों में पोलियो बचा है। इसलिए इन लोगों से भारत में इस बीमारी के आने का अंदेशा बना रहता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ श्रीनिवास ने कहा कि पोलियो पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। पोलियो का कोई इलाज नहीं है। इसलिए बच्चों को इसकी खुराक लेना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि पोलियो दिवस के अवसर पर जिले में लगभग एक हज़ार एक सौ ग्यारह बूथों का गठन किया गया है। इस पर लगभग दो. नवासी लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में छः सौ अठहत्तर टीमों को लगाया गया, जो आज से अट्ठाईस मार्च तक इस लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करेंगी। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए निजी अस्पताल व नर्सिंग होम की मदद भी ली जा रही है। अभियान के तहत जिले के पहुंच विहीन दूरस्थ क्षेत्रों, झुग्गी झोपड़ी, मलिन बस्ती, ईट भट्ठा, अस्थाई बसाहटों आदि क्षेत्रों के बच्चों को भी पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है। इसके साथ ही यात्रा करने बालों के बच्चों को बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर ट्रांजिट दलों के माध्यम से पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सेक्रेड गेम्स में कुब्रा और नवाजुद्दीन के इंटीमेट सीन्स हैं। सीरीज के डायरेक्टर अनुराग कश्यप थे। इसमें सैफ अली खान और राधिका आप्टे ने भी एक्टिंग की है। बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में कुब्रा ने सेक्स सीन के बारे में बताया, वो सीन पहले दिन शूट हुआ था। यह दिन का आखिरी सीन था। मुझे जाकर इस सीन को पूरा करना था। मुझे याद है कि हमने सीन पूरा किया और इसे करने में हमें 7 टेक लगे थे। सातवें टेक तक, मैं भूल गई कि मैं कितने घंटे से शूटिंग कर रही हूं। मैं फर्श पर गिर गई और उठ नहीं पाई। मैं एग्जॉस्ट हो गई थी और रोए जा रही थी। नवाज और अनुराग कश्यप ने मुझे उठाया और जोर से गले लगाया क्योंकि मैं रो रही थी। मैं धीरे से कट सुना।
कुब्रा ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बारे में कहा, मैं उन्हें प्यार करती हूं। वह बहुत खूबसूरत इंसान हैं और बेहतरीन को-एक्टर भी। वह बहुत शरमीले भी हैं और हमारे वो सारे सीन्स साथ में थे। वह इस धरती के सबसे ज्यादा शरमाने वाले इंसान हैं। तो उनसे पकड़-पकड़कर सीन करवाना पड़ता था। मैं जाकर उनके गाल पर किस किया करती थी और बोलती थी, चल ना सेक्स सीन करते हैं। यह मेरी जॉब है और मुझे माहौल बनाना होता है।
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सेक्रेड गेम्स में कुब्रा और नवाजुद्दीन के इंटीमेट सीन्स हैं। सीरीज के डायरेक्टर अनुराग कश्यप थे। इसमें सैफ अली खान और राधिका आप्टे ने भी एक्टिंग की है। बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में कुब्रा ने सेक्स सीन के बारे में बताया, वो सीन पहले दिन शूट हुआ था। यह दिन का आखिरी सीन था। मुझे जाकर इस सीन को पूरा करना था। मुझे याद है कि हमने सीन पूरा किया और इसे करने में हमें सात टेक लगे थे। सातवें टेक तक, मैं भूल गई कि मैं कितने घंटे से शूटिंग कर रही हूं। मैं फर्श पर गिर गई और उठ नहीं पाई। मैं एग्जॉस्ट हो गई थी और रोए जा रही थी। नवाज और अनुराग कश्यप ने मुझे उठाया और जोर से गले लगाया क्योंकि मैं रो रही थी। मैं धीरे से कट सुना। कुब्रा ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बारे में कहा, मैं उन्हें प्यार करती हूं। वह बहुत खूबसूरत इंसान हैं और बेहतरीन को-एक्टर भी। वह बहुत शरमीले भी हैं और हमारे वो सारे सीन्स साथ में थे। वह इस धरती के सबसे ज्यादा शरमाने वाले इंसान हैं। तो उनसे पकड़-पकड़कर सीन करवाना पड़ता था। मैं जाकर उनके गाल पर किस किया करती थी और बोलती थी, चल ना सेक्स सीन करते हैं। यह मेरी जॉब है और मुझे माहौल बनाना होता है।
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सारा के साथ तस्वीर के पीछे की कहानी अब खुद कार्तिक आर्यन ने बताई है, जिसके बाद दोनों की डेटिंग की चाह रखने वाले फैन्स निराश हो सकते हैं। कार्तिक और सारा की वायरल तस्वीर एक सप्ताह पहले की है।
पिछले दिनों बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली और 'शहजादा' एक्टर कार्तिक आर्यन की आपस में बात करते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। फोटो इंटरनेट पर आने के बाद ये चर्चा होने लगी थी कि शायद दोनों फिर से डेटिंग कर रहे हैं। कयास इसलिए भी तेज हुए क्योंकि दोनों ने इस तस्वीर को अपनी-अपनी इंस्टा स्टोरी पर भी लगाया था। उदयपुर की इस तस्वीर के पीछे की कहानी अब खुद कार्तिक आर्यन ने बताई है, जिसके बाद दोनों की डेटिंग की चाह रखने वाले फैन्स निराश हो सकते हैं। कार्तिक और सारा की वायरल तस्वीर एक सप्ताह पहले की है। इस तस्वीर में दोनों एक-दूसरे से बात करते हुए दिख रहे थे।
आरजे सिद्धार्थ कन्नन ने कार्तिक से इस तस्वीर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा,"कुछ दिन पहले मैं और सारा एक ही जगह पर थे। वहां मौजूद लोगों ने काफी तस्वीरें लीं। मैं सरप्राइज़्ड हूं कि एक-दो तस्वीरें ही बाहर आईं। " जब कार्तिक से पूछा गया कि क्या वह और सारा कोई फिल्म साथ में कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि अभी तक तो ऐसी कोई अनाउंसमेंट नहीं हुई है और मुझे ऐसा कुछ पता भी नहीं है।
दोनों की इस तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर इतनी बातें इसलिए भी हुईं क्योंकि 'लव आजकल 2' फिल्म के दौरान कार्तिक और आर्यन काफी करीब आ गए थे। कुछ समय के लिए दोनों ने एक-दूसरे को डेट भी किया था। हालांकि, फिल्म की रिजील के बाद उनका ब्रेकअप हो गया था। करण जौहर के टॉक शो में इशारों-इशारों में सारा अली ने कार्तिक से अपने ब्रेकअप के बारे में बोला भी था। यह तो पता नहीं चला है कि ब्रेकअप का क्या कारण था, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया था।
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सारा के साथ तस्वीर के पीछे की कहानी अब खुद कार्तिक आर्यन ने बताई है, जिसके बाद दोनों की डेटिंग की चाह रखने वाले फैन्स निराश हो सकते हैं। कार्तिक और सारा की वायरल तस्वीर एक सप्ताह पहले की है। पिछले दिनों बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली और 'शहजादा' एक्टर कार्तिक आर्यन की आपस में बात करते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। फोटो इंटरनेट पर आने के बाद ये चर्चा होने लगी थी कि शायद दोनों फिर से डेटिंग कर रहे हैं। कयास इसलिए भी तेज हुए क्योंकि दोनों ने इस तस्वीर को अपनी-अपनी इंस्टा स्टोरी पर भी लगाया था। उदयपुर की इस तस्वीर के पीछे की कहानी अब खुद कार्तिक आर्यन ने बताई है, जिसके बाद दोनों की डेटिंग की चाह रखने वाले फैन्स निराश हो सकते हैं। कार्तिक और सारा की वायरल तस्वीर एक सप्ताह पहले की है। इस तस्वीर में दोनों एक-दूसरे से बात करते हुए दिख रहे थे। आरजे सिद्धार्थ कन्नन ने कार्तिक से इस तस्वीर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा,"कुछ दिन पहले मैं और सारा एक ही जगह पर थे। वहां मौजूद लोगों ने काफी तस्वीरें लीं। मैं सरप्राइज़्ड हूं कि एक-दो तस्वीरें ही बाहर आईं। " जब कार्तिक से पूछा गया कि क्या वह और सारा कोई फिल्म साथ में कर रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि अभी तक तो ऐसी कोई अनाउंसमेंट नहीं हुई है और मुझे ऐसा कुछ पता भी नहीं है। दोनों की इस तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर इतनी बातें इसलिए भी हुईं क्योंकि 'लव आजकल दो' फिल्म के दौरान कार्तिक और आर्यन काफी करीब आ गए थे। कुछ समय के लिए दोनों ने एक-दूसरे को डेट भी किया था। हालांकि, फिल्म की रिजील के बाद उनका ब्रेकअप हो गया था। करण जौहर के टॉक शो में इशारों-इशारों में सारा अली ने कार्तिक से अपने ब्रेकअप के बारे में बोला भी था। यह तो पता नहीं चला है कि ब्रेकअप का क्या कारण था, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया था।
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पोलैंड जल्द ही नए अमेरिकी प्राप्त करना शुरू कर देगा टैंक अब्राम्स, बख्तरबंद गाड़ियाँ इस महीने आने की उम्मीद है। यह गणराज्य मारिउज़ ब्लाशाक के रक्षा मंत्री ने कहा था।
पोलिश रक्षा मंत्रालय अमेरिकी अब्राम टैंकों के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा है, जो देश की पूर्वी सीमा के पास तैनात 18 वें मैकेनाइज्ड डिवीजन के साथ सेवा में जाएंगे। जैसा कि रक्षा विभाग के प्रमुख ने कहा, गणतंत्र के अधिकारी देश के पूर्व में एक शक्तिशाली बख्तरबंद मुट्ठी बनाने का इरादा रखते हैं, जो "किसी भी आक्रामकता" को रोकने में सक्षम हो। कुल मिलाकर, डंडे ने 250 नए टैंकों का आदेश दिया, और पुनर्शस्त्रीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए अमेरिकी सेना के भंडारण से 116 भी खरीदे।
हमारा लक्ष्य अब्राम्स टैंकों से लैस एक बहुत मजबूत सैन्य इकाई बनाना है। इस महीने की शुरुआत में, पहला अमेरिकी अब्राम पोलैंड में होगा और हमारे देश के पूर्व में तैनात 18वें मैकेनाइज्ड डिवीजन में शामिल होगा।
- मंत्री ने कहा।
इसके अलावा, मई में, अमेरिकी HIMARS मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, ATACMS ऑपरेशनल-टैक्टिकल मिसाइलों के साथ 300 किमी तक की रेंज के साथ, पोल्स्की के सैनिकों के साथ सेवा में प्रवेश करना शुरू कर देंगे। पोलैंड पर, यूक्रेन के विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। यह ध्यान दिया जाता है कि ये 2019 में वारसॉ द्वारा खरीदे गए सिस्टम हैं, हम 20 प्रतिष्ठानों के बारे में बात कर रहे हैं, जिनमें से 2 प्रशिक्षण हैं। हालाँकि, पोलैंड अन्य 500 HIMARS MLRS की खरीद पर बातचीत कर रहा है, अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले ही एक संभावित सौदे को मंजूरी दे दी है।
साथ ही मई में हमारे पास पहली हिमर यानी 300 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें होंगी। ये 2019 में ऑर्डर किए गए कॉम्प्लेक्स हैं। 500 ऐसी प्रणालियों से जुड़े एक और लेनदेन के लिए बातचीत चल रही है।
- मंत्री को जोड़ा।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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पोलैंड जल्द ही नए अमेरिकी प्राप्त करना शुरू कर देगा टैंक अब्राम्स, बख्तरबंद गाड़ियाँ इस महीने आने की उम्मीद है। यह गणराज्य मारिउज़ ब्लाशाक के रक्षा मंत्री ने कहा था। पोलिश रक्षा मंत्रालय अमेरिकी अब्राम टैंकों के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा है, जो देश की पूर्वी सीमा के पास तैनात अट्ठारह वें मैकेनाइज्ड डिवीजन के साथ सेवा में जाएंगे। जैसा कि रक्षा विभाग के प्रमुख ने कहा, गणतंत्र के अधिकारी देश के पूर्व में एक शक्तिशाली बख्तरबंद मुट्ठी बनाने का इरादा रखते हैं, जो "किसी भी आक्रामकता" को रोकने में सक्षम हो। कुल मिलाकर, डंडे ने दो सौ पचास नए टैंकों का आदेश दिया, और पुनर्शस्त्रीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए अमेरिकी सेना के भंडारण से एक सौ सोलह भी खरीदे। हमारा लक्ष्य अब्राम्स टैंकों से लैस एक बहुत मजबूत सैन्य इकाई बनाना है। इस महीने की शुरुआत में, पहला अमेरिकी अब्राम पोलैंड में होगा और हमारे देश के पूर्व में तैनात अट्ठारहवें मैकेनाइज्ड डिवीजन में शामिल होगा। - मंत्री ने कहा। इसके अलावा, मई में, अमेरिकी HIMARS मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, ATACMS ऑपरेशनल-टैक्टिकल मिसाइलों के साथ तीन सौ किमी तक की रेंज के साथ, पोल्स्की के सैनिकों के साथ सेवा में प्रवेश करना शुरू कर देंगे। पोलैंड पर, यूक्रेन के विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। यह ध्यान दिया जाता है कि ये दो हज़ार उन्नीस में वारसॉ द्वारा खरीदे गए सिस्टम हैं, हम बीस प्रतिष्ठानों के बारे में बात कर रहे हैं, जिनमें से दो प्रशिक्षण हैं। हालाँकि, पोलैंड अन्य पाँच सौ HIMARS MLRS की खरीद पर बातचीत कर रहा है, अमेरिकी विदेश विभाग ने पहले ही एक संभावित सौदे को मंजूरी दे दी है। साथ ही मई में हमारे पास पहली हिमर यानी तीन सौ किलोग्राममीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें होंगी। ये दो हज़ार उन्नीस में ऑर्डर किए गए कॉम्प्लेक्स हैं। पाँच सौ ऐसी प्रणालियों से जुड़े एक और लेनदेन के लिए बातचीत चल रही है। - मंत्री को जोड़ा। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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Entertainment HOT योगा करती इन जवान लड़कियों की फोटो देख, आप पागल हो जायेंगे Sabguru News - January 24, 2017 0 न्यू दिल्लीः जर्मनी में इन दिनों बियर और योगा का जबरदस्त कॉम्बिनेशन काफी हिट हो रहा हैं। यहाँ लोग बियर पीते-पीते योगा और वर्कआउट करते हैं। सोशल मीडिया पर इनकी फोटोज भी वायरल हुई हैं। यह भी पढ़ेंः सोशल मीडिया पर वायरल हुई शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान की HOT PICS! अकेले में देखें! सनी लियोन की 10 सबसे खूबसूरत तस्वीरें जो आपका मन मोह लेंगी! OMG. . ! तो ये सब करती है लडकियां अकेली होने पर! लड़कों को तो IDEA भी नहीं! लड़कियां लड़को के शरीर में क्या-क्या देखती हैं, पढ़ हैरान हो जायेंगे आप!
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Entertainment HOT योगा करती इन जवान लड़कियों की फोटो देख, आप पागल हो जायेंगे Sabguru News - January चौबीस, दो हज़ार सत्रह शून्य न्यू दिल्लीः जर्मनी में इन दिनों बियर और योगा का जबरदस्त कॉम्बिनेशन काफी हिट हो रहा हैं। यहाँ लोग बियर पीते-पीते योगा और वर्कआउट करते हैं। सोशल मीडिया पर इनकी फोटोज भी वायरल हुई हैं। यह भी पढ़ेंः सोशल मीडिया पर वायरल हुई शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान की HOT PICS! अकेले में देखें! सनी लियोन की दस सबसे खूबसूरत तस्वीरें जो आपका मन मोह लेंगी! OMG. . ! तो ये सब करती है लडकियां अकेली होने पर! लड़कों को तो IDEA भी नहीं! लड़कियां लड़को के शरीर में क्या-क्या देखती हैं, पढ़ हैरान हो जायेंगे आप!
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उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर सोमवार सुबह एक बस हादसे का शिकार हो गई. ये बस लखनऊ से दिल्ली आ रही थी, तभी आगरा के झरना नाले में जा गिरी. इस हादसे में 29 लोगों की मौत हो गई. पुलिस और बचाव दल मौके पर मौजूद है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रियों की मौत पर दुख जताते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को घायलों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
बस अवध डिपो की थी जो लखनऊ से दिल्ली आ रही थी. घटना के बाद यूपी रोडवेज ने मुआवजे का ऐलान कर दिया है. मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी. इस घटना में 2 दर्जन से ज्यादा लोग घायल हैं. राहत बचाव का काम जारी है. बस में 50 से ज्यादा लोग सवार थे. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
सुबह 4.30 बजे यह घटना हुई. एत्तमादपुर इलाके में झरना नाले में यह बस अनियंत्रित होकर गिर गई जिसमें अब तक 29 लोगों की मौत की खबर है. आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और राहत कार्यों का जायजा ले रहे हैं. पास के अस्पतालों में जख्मी लोगों का इलाज चल रहा है. घायलों में कुछ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने डीएम और एएसपी को राहत और बचाव का काम तेजी से निपटाने का निर्देश दिया है.
एत्तमादपुर थाना सीमा के अंतर्गत चौहान गांव के पास सुबह करीब 4:30 बजे यमुना एक्सप्रेस वे पर उस समय चीख-पुकार मच गई जब सवारियों से भरी बस हाईवे के बीच में बनी जगह से हो कर झरना नाले में गिर गई. घटना की सूचना पाकर थाना एत्तमादपुर सहित तमाम पुलिस थानों के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और जेसीबी क्रेन से राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया. सूचना के बाद डीएम आगरा एनजी रवि कुमार और एसएसपी बबलू कुमार भी मौके पर पहुंच गए हैं. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बस लखनऊ से दिल्ली आ रही थी. मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है.
पुलिस के मुताबिक दिल्ली आ रही अवध डिपो की जनरथ एक्सप्रेस रोडवेज बस सं. यूपी 33 एटी 5877 अनियंत्रित होकर ग्राम कुबेरपुर के पास झरना नाले में गिर जाने से पानी के अंदर आधी डूब गई. 27 शव निकाले गए और करीब 15-16 लोगों को घायल अवस्था में निकाल कर अस्पताल भेजा गया है. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाने का निर्देश दिया है और व्यक्तिगत तौर पर भी वे कार्यों की निगरानी कर रहे हैं. घटनास्थल पर सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. डीजीपी ने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी है.
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उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर सोमवार सुबह एक बस हादसे का शिकार हो गई. ये बस लखनऊ से दिल्ली आ रही थी, तभी आगरा के झरना नाले में जा गिरी. इस हादसे में उनतीस लोगों की मौत हो गई. पुलिस और बचाव दल मौके पर मौजूद है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रियों की मौत पर दुख जताते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को घायलों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. बस अवध डिपो की थी जो लखनऊ से दिल्ली आ रही थी. घटना के बाद यूपी रोडवेज ने मुआवजे का ऐलान कर दिया है. मृतकों के परिजनों को पाँच लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी. इस घटना में दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हैं. राहत बचाव का काम जारी है. बस में पचास से ज्यादा लोग सवार थे. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सुबह चार.तीस बजे यह घटना हुई. एत्तमादपुर इलाके में झरना नाले में यह बस अनियंत्रित होकर गिर गई जिसमें अब तक उनतीस लोगों की मौत की खबर है. आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और राहत कार्यों का जायजा ले रहे हैं. पास के अस्पतालों में जख्मी लोगों का इलाज चल रहा है. घायलों में कुछ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने डीएम और एएसपी को राहत और बचाव का काम तेजी से निपटाने का निर्देश दिया है. एत्तमादपुर थाना सीमा के अंतर्गत चौहान गांव के पास सुबह करीब चार:तीस बजे यमुना एक्सप्रेस वे पर उस समय चीख-पुकार मच गई जब सवारियों से भरी बस हाईवे के बीच में बनी जगह से हो कर झरना नाले में गिर गई. घटना की सूचना पाकर थाना एत्तमादपुर सहित तमाम पुलिस थानों के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और जेसीबी क्रेन से राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया. सूचना के बाद डीएम आगरा एनजी रवि कुमार और एसएसपी बबलू कुमार भी मौके पर पहुंच गए हैं. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बस लखनऊ से दिल्ली आ रही थी. मृतकों के परिजनों को पाँच लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है. पुलिस के मुताबिक दिल्ली आ रही अवध डिपो की जनरथ एक्सप्रेस रोडवेज बस सं. यूपी तैंतीस एटी पाँच हज़ार आठ सौ सतहत्तर अनियंत्रित होकर ग्राम कुबेरपुर के पास झरना नाले में गिर जाने से पानी के अंदर आधी डूब गई. सत्ताईस शव निकाले गए और करीब पंद्रह-सोलह लोगों को घायल अवस्था में निकाल कर अस्पताल भेजा गया है. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाने का निर्देश दिया है और व्यक्तिगत तौर पर भी वे कार्यों की निगरानी कर रहे हैं. घटनास्थल पर सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. डीजीपी ने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी है.
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) को लेकर भले ही पिछले कई महीनों से भारत (India) और चीन (China) की सेनाओं के बीच तनाव चल रहा हो लेकिन पर्यटकों (Tourist) को लद्दाख की सीमा (Ladakh Border) तक जाने की अब छूट दे दी गई है. भारत सरकार ने कई इलाकों में इनरलाइन परमिट की अनिवार्यता को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया है.
इससे लद्दाख में पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. भारत सरकार की ओर से लिए इस इस फैसले के बाद अब पर्यटक उन इलाकों में भी जा सकेंगे जहां पर वह अभी तक नहीं जा पाते थे. हालांकि विदेशी पर्यटकों को बिना अनुमति के इन इलाकों में जाने की छूट नहीं होगी.
केंद्र सरकार की ओर से लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए सरहद से लगते हुए कई इलाकों से इनरलाइन परमिट की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. भारतीय सेना की ओर से दी गई छूट के बाद पर्यटकों को सियाचिन ग्लेशियर के आधार शिविर तक जाने की इजाजत होगी. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही दिव्यांगों के एक दिल ने भी सियाचिन की कुमार पोस्ट तक ट्रैकिंग की थी.
भारत सरकार की ओर से दी गई इस छूट के बाद आम पर्यटक भी बिना किसी रोकटोक के वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे मान मराक से त्सागल होते हुए चुशुल तक जा सकेंगे. पर्यटक अब लेह के हानले व कारगिल के मुशकोह इलाके में भी घूमने जा सकेंगे. अभी तक इन इलाकों में जाने के लिए भारतीय सेना से इनरलाइन परमिट लेना होता था. इनरलाइन परमिट घूमने के लिए दिया भी नहीं जाता था.
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख को लेकर भले ही पिछले कई महीनों से भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव चल रहा हो लेकिन पर्यटकों को लद्दाख की सीमा तक जाने की अब छूट दे दी गई है. भारत सरकार ने कई इलाकों में इनरलाइन परमिट की अनिवार्यता को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया है. इससे लद्दाख में पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. भारत सरकार की ओर से लिए इस इस फैसले के बाद अब पर्यटक उन इलाकों में भी जा सकेंगे जहां पर वह अभी तक नहीं जा पाते थे. हालांकि विदेशी पर्यटकों को बिना अनुमति के इन इलाकों में जाने की छूट नहीं होगी. केंद्र सरकार की ओर से लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए सरहद से लगते हुए कई इलाकों से इनरलाइन परमिट की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. भारतीय सेना की ओर से दी गई छूट के बाद पर्यटकों को सियाचिन ग्लेशियर के आधार शिविर तक जाने की इजाजत होगी. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही दिव्यांगों के एक दिल ने भी सियाचिन की कुमार पोस्ट तक ट्रैकिंग की थी. भारत सरकार की ओर से दी गई इस छूट के बाद आम पर्यटक भी बिना किसी रोकटोक के वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे मान मराक से त्सागल होते हुए चुशुल तक जा सकेंगे. पर्यटक अब लेह के हानले व कारगिल के मुशकोह इलाके में भी घूमने जा सकेंगे. अभी तक इन इलाकों में जाने के लिए भारतीय सेना से इनरलाइन परमिट लेना होता था. इनरलाइन परमिट घूमने के लिए दिया भी नहीं जाता था. .
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Opposition Unity: नीति से ज्यादा अच्छी नीयत की ज़रूरत, क्या ममता और केजरीवाल को आज मना लेंगे नीतीश कुमार !
नीतीश कुमार का मानना है कि बिना कांग्रेस के विपक्षी एकता का कोई मतलब नहीं है. ऐसे में कल होने वाली विपक्षी नेताओं की बैठक से पहले नीतीश कुमार ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को मनाने में जुटे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में हैं और उनके खिलाफ विपक्ष के नेताओं का जमघट पटना में हो रहा है. वैसे तो बैठक कल सवेरे है. लेकिन कई बड़े नेता आज ही पहुंच रहे है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फ़ुल एक्शन में हैं. आज पटना पहुंचने के तुरंत बाद वे लालू यादव से मिलेंगी. कांग्रेस से ममता के छत्तीस के रिश्ते रहे हैं. हाल में ही उन्होंने बयान दिया था कि अगर कांग्रेस को उनका समर्थन चाहिए तो फिर उन्हें लेफ़्ट पार्टी से अलग होना होगा. बंगाल में लेफ़्ट और कांग्रेस का गठबंधन है. सूत्रों से जानकारी मिली है कि लालू चाहते थे कि कल की मीटिंग से पहले ममता से मुलाक़ात हो जाए. नीतीश कुमार के आग्रह पर ही ममता बनर्जी कल के बदले आज पहुंच रही है.
ममता ने ही नीतीश को विपक्षी नेताओं की बैठक पटना में करने का सुझाव दिया था. लालू यादव कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद साथी रहे हैं. समझा जाता है कि ममता से मिल कर लालू उन्हें कांग्रेस के लिए सॉफ़्ट करने की कोशिश करेंगे. कांग्रेस को लेकर ममता का स्टैंड खिलाफ का ही रहा है. हाल में हुए उपचुनाव में सागरदीघी विधानसभा से कांग्रेस जीत गई थी. इसके बाद कांग्रेस के इकलौते विधायक को ममता बनर्जी ने टीएमसी में शामिल करा लिया. इसके बाद से कांग्रेस और ममता के रिश्ते और ख़राब हुए. ममता चाहती हैं कि जिन राज्यों में जो क्षेत्रीय पार्टी मज़बूत है कांग्रेस को उसका नेतृत्व स्वीकार कर लेना चाहिए. वहीं विपक्षी एकता के लिए ममता का साथ और समर्थन बहुत ज़रूरी है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आज पटना पहुंच रहे हैं. उनके साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और राघव चड्ढा भी आज ही पटना पहुंच रहे हैं. कल की विपक्षी नेताओं की बैठक में सिर्फ़ केजरीवाल और मान ही मौजूद रहेंगे. केजरीवाल ने विपक्षी बैठक के लिए पहले ही शर्त लगा दी है. वे चाहते हैं कि केंद्र के अध्यादेश पर सब उनका समर्थन करें. लेकिन कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना स्टैंड अब तक तय नहीं किया है. नीतीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के कई नेता इस मुद्दे पर केजरीवाल के साथ हैं. सूत्रों से पता चला है कि नीतीश आज केजरीवाल से मिल सकते हैं. कहा गया है कि कल की मीटिंग से पहले ही नीतीश उनसे मिल कर एजेंडा सेट कर लेने की तैयारी में हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का कल सवेरे पटना पहुंचने का कार्यक्रम है. ममता बनर्जी की तरह ही उनके भी कांग्रेस से खराब रिश्ते रहे हैं. दोनों नेता अब तक यही कहते रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी उनके लिए एक समान है. लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस को लेकर अखिलेश के रूख नरम होने लगे हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि बीजेपी को हराने के लिए सभी पार्टियों को एकजुट होना चाहिए.
नीतीश कुमार बनेंगे UPA के संयोजक?
राहुल गांधी पर सबकी नज़र होगी. पटना के उनके कार्यक्रम में बदलाव हो गया है. कल विपक्षी बैठक से पहले वे सदाक़त आश्रम जायेंगे. ये कांग्रेस का ऑफिस हैं जहां राहुल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. नीतीश कुमार की राय रही है कि बिना कांग्रेस के विपक्षी एकता का कोई मतलब नहीं है. उनका मानना है कि तीसरा और चौथा मोर्चा बनने से तो बीजेपी को ही फ़ायदा होता है. नीतीश के एक करीबी नेता ने बताया कि पहली बैठक से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं है. पर ये तय है कि सब मिल कर बीजेपी को हराने की रणनीति पर काम करेंगे.
इस बात की चर्चा है कि शायद नीतीश कुमार को यूपीए का संयोजक बनाया जाए. वैसे भी बिहार में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस का गठबंधन पहले से ही है. नीतीश सरकार के एक मंत्री से जानेवाली मिली है कि बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास हो सकता है. विपक्षी एकता की राह में कई रोड़े हैं पर इतने सारे नेताओं का एक साथ जुटना एक बड़ी राजनीतिक घटना है. जिन राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुक़ाबला है वहॉं कोई अड़चन नहीं है. बिहार और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों में पहले से गठबंधन बना हुआ है. विपक्षी एकता के लिए नीति से अधिक अच्छी नीयत की ज़रूरत है.
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Opposition Unity: नीति से ज्यादा अच्छी नीयत की ज़रूरत, क्या ममता और केजरीवाल को आज मना लेंगे नीतीश कुमार ! नीतीश कुमार का मानना है कि बिना कांग्रेस के विपक्षी एकता का कोई मतलब नहीं है. ऐसे में कल होने वाली विपक्षी नेताओं की बैठक से पहले नीतीश कुमार ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को मनाने में जुटे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में हैं और उनके खिलाफ विपक्ष के नेताओं का जमघट पटना में हो रहा है. वैसे तो बैठक कल सवेरे है. लेकिन कई बड़े नेता आज ही पहुंच रहे है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फ़ुल एक्शन में हैं. आज पटना पहुंचने के तुरंत बाद वे लालू यादव से मिलेंगी. कांग्रेस से ममता के छत्तीस के रिश्ते रहे हैं. हाल में ही उन्होंने बयान दिया था कि अगर कांग्रेस को उनका समर्थन चाहिए तो फिर उन्हें लेफ़्ट पार्टी से अलग होना होगा. बंगाल में लेफ़्ट और कांग्रेस का गठबंधन है. सूत्रों से जानकारी मिली है कि लालू चाहते थे कि कल की मीटिंग से पहले ममता से मुलाक़ात हो जाए. नीतीश कुमार के आग्रह पर ही ममता बनर्जी कल के बदले आज पहुंच रही है. ममता ने ही नीतीश को विपक्षी नेताओं की बैठक पटना में करने का सुझाव दिया था. लालू यादव कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद साथी रहे हैं. समझा जाता है कि ममता से मिल कर लालू उन्हें कांग्रेस के लिए सॉफ़्ट करने की कोशिश करेंगे. कांग्रेस को लेकर ममता का स्टैंड खिलाफ का ही रहा है. हाल में हुए उपचुनाव में सागरदीघी विधानसभा से कांग्रेस जीत गई थी. इसके बाद कांग्रेस के इकलौते विधायक को ममता बनर्जी ने टीएमसी में शामिल करा लिया. इसके बाद से कांग्रेस और ममता के रिश्ते और ख़राब हुए. ममता चाहती हैं कि जिन राज्यों में जो क्षेत्रीय पार्टी मज़बूत है कांग्रेस को उसका नेतृत्व स्वीकार कर लेना चाहिए. वहीं विपक्षी एकता के लिए ममता का साथ और समर्थन बहुत ज़रूरी है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आज पटना पहुंच रहे हैं. उनके साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और राघव चड्ढा भी आज ही पटना पहुंच रहे हैं. कल की विपक्षी नेताओं की बैठक में सिर्फ़ केजरीवाल और मान ही मौजूद रहेंगे. केजरीवाल ने विपक्षी बैठक के लिए पहले ही शर्त लगा दी है. वे चाहते हैं कि केंद्र के अध्यादेश पर सब उनका समर्थन करें. लेकिन कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना स्टैंड अब तक तय नहीं किया है. नीतीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के कई नेता इस मुद्दे पर केजरीवाल के साथ हैं. सूत्रों से पता चला है कि नीतीश आज केजरीवाल से मिल सकते हैं. कहा गया है कि कल की मीटिंग से पहले ही नीतीश उनसे मिल कर एजेंडा सेट कर लेने की तैयारी में हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का कल सवेरे पटना पहुंचने का कार्यक्रम है. ममता बनर्जी की तरह ही उनके भी कांग्रेस से खराब रिश्ते रहे हैं. दोनों नेता अब तक यही कहते रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी उनके लिए एक समान है. लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस को लेकर अखिलेश के रूख नरम होने लगे हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि बीजेपी को हराने के लिए सभी पार्टियों को एकजुट होना चाहिए. नीतीश कुमार बनेंगे UPA के संयोजक? राहुल गांधी पर सबकी नज़र होगी. पटना के उनके कार्यक्रम में बदलाव हो गया है. कल विपक्षी बैठक से पहले वे सदाक़त आश्रम जायेंगे. ये कांग्रेस का ऑफिस हैं जहां राहुल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. नीतीश कुमार की राय रही है कि बिना कांग्रेस के विपक्षी एकता का कोई मतलब नहीं है. उनका मानना है कि तीसरा और चौथा मोर्चा बनने से तो बीजेपी को ही फ़ायदा होता है. नीतीश के एक करीबी नेता ने बताया कि पहली बैठक से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं है. पर ये तय है कि सब मिल कर बीजेपी को हराने की रणनीति पर काम करेंगे. इस बात की चर्चा है कि शायद नीतीश कुमार को यूपीए का संयोजक बनाया जाए. वैसे भी बिहार में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस का गठबंधन पहले से ही है. नीतीश सरकार के एक मंत्री से जानेवाली मिली है कि बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास हो सकता है. विपक्षी एकता की राह में कई रोड़े हैं पर इतने सारे नेताओं का एक साथ जुटना एक बड़ी राजनीतिक घटना है. जिन राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुक़ाबला है वहॉं कोई अड़चन नहीं है. बिहार और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों में पहले से गठबंधन बना हुआ है. विपक्षी एकता के लिए नीति से अधिक अच्छी नीयत की ज़रूरत है.
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स्वामीकी आज्ञाको, जिस प्रकार गणधर जिनवरकी वाणीको, जिस प्रकार तार्किक शिव शाइवतरूपी मोतीको, जिस प्रकार वैयाकरण उत्तमशब्दों की उत्पत्तिको तोड़ लेते हैं । फिर उन्हें तुंगभद्रा नामक महानदी मिली, जो हाथियों, मगरमच्छ और ओहरोंसे अत्यन्त भयानक थी । वह ऐसी लगती थी, मानो संध्या असह्य किरण सूर्यकी सीमान्ती हवाओंको सहन नहीं कर सकी और व्यासके कारण उसने सागरकी और अपनी जीभ फैला दी हो ॥१-९॥
[६] धरतीपर बहती हुई काले रंगकी वह नदी ऐसी लगी मानो किसी कंजूसकी उक्ति हो । मानो इन्द्रनीलपर्वतने आदरपूर्वक उसे समुद्रका रास्ता दिखाया हो। अपने जलसमुहके विस्तारके साथ वह नदी घूम रही थी, वह नदी जो सेण देशके लिए अमृतकी धारा थी। फिर उन्हें गोदावरी नदी दिखाई दी, जो ऐसी लगती थी मानो सन्ध्याने अपनी बाँह फेला दी हो । सेनाओंने उन नदियोंको जब पार कर लिया तो ऐसा लगा मानो किसी आदमीने कुटिल स्वभावकी स्त्रीको, अपने वश कर लिया हो । उसके बाद, वे महानदोके पास पहुँचे, सज्जनके समान जिसकी थाह नहीं ली जा सकती। उससे थोड़ी दूरपर, विन्ध्याचल पहाड़ था, मानो धरतीका सीमान्त हो । सहसा क्रुद्ध होकर हनुमान्ने रेवा नदीको निन्दा की और कहा, "विन्ध्याचलकी तुलना में समुद्र सुन्दर है, वह समुद्र, जो विपसहित (जलसहित ) है, जो कृपण है और अत्यन्त खारा है।" यह सुनकर आकाशवासी विद्याधर भामण्डल ने कहा, "विन्ध्याचलको छोड़कर, रेवा नदी जो समुद्र के पास जा रही है, इसके लिए उसपर क्रोध करना वेकार है, क्योंकि यह तो स्त्रियका स्वभाव "होता है कि वे असुन्दरको छोड़कर सुन्दरके पास जाती हैं ॥ १-११।।
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स्वामीकी आज्ञाको, जिस प्रकार गणधर जिनवरकी वाणीको, जिस प्रकार तार्किक शिव शाइवतरूपी मोतीको, जिस प्रकार वैयाकरण उत्तमशब्दों की उत्पत्तिको तोड़ लेते हैं । फिर उन्हें तुंगभद्रा नामक महानदी मिली, जो हाथियों, मगरमच्छ और ओहरोंसे अत्यन्त भयानक थी । वह ऐसी लगती थी, मानो संध्या असह्य किरण सूर्यकी सीमान्ती हवाओंको सहन नहीं कर सकी और व्यासके कारण उसने सागरकी और अपनी जीभ फैला दी हो ॥एक-नौ॥ [छः] धरतीपर बहती हुई काले रंगकी वह नदी ऐसी लगी मानो किसी कंजूसकी उक्ति हो । मानो इन्द्रनीलपर्वतने आदरपूर्वक उसे समुद्रका रास्ता दिखाया हो। अपने जलसमुहके विस्तारके साथ वह नदी घूम रही थी, वह नदी जो सेण देशके लिए अमृतकी धारा थी। फिर उन्हें गोदावरी नदी दिखाई दी, जो ऐसी लगती थी मानो सन्ध्याने अपनी बाँह फेला दी हो । सेनाओंने उन नदियोंको जब पार कर लिया तो ऐसा लगा मानो किसी आदमीने कुटिल स्वभावकी स्त्रीको, अपने वश कर लिया हो । उसके बाद, वे महानदोके पास पहुँचे, सज्जनके समान जिसकी थाह नहीं ली जा सकती। उससे थोड़ी दूरपर, विन्ध्याचल पहाड़ था, मानो धरतीका सीमान्त हो । सहसा क्रुद्ध होकर हनुमान्ने रेवा नदीको निन्दा की और कहा, "विन्ध्याचलकी तुलना में समुद्र सुन्दर है, वह समुद्र, जो विपसहित है, जो कृपण है और अत्यन्त खारा है।" यह सुनकर आकाशवासी विद्याधर भामण्डल ने कहा, "विन्ध्याचलको छोड़कर, रेवा नदी जो समुद्र के पास जा रही है, इसके लिए उसपर क्रोध करना वेकार है, क्योंकि यह तो स्त्रियका स्वभाव "होता है कि वे असुन्दरको छोड़कर सुन्दरके पास जाती हैं ॥ एक-ग्यारह।।
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नई दिल्लीः अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनल मेसी ने पीएसजी को छोड़कर अमेरिकी फुटबटॉल क्लब इंटर मियामी ज्वाइन कर लिया है। मेसी का इंटर मियामी में स्थानांतरण शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। विश्व कप विजेता काफी धूमधाम के बीच मियामी पहुंचे और सोमवार को एक शानदार समारोह में उनका स्वागत किया गया।
मियामी द्वारा मेसी को साइन करना क्लब के लिए एक बड़ी घटना है। इससे क्लब को फायदा मिल रहा है। इंटर मियामी की सोशल मीडिया फॉलोइंग काफी बढ़ रही है। साथ ही उनकी व्यापारिक बिक्री में भी नाटकीय रूप से वृद्धि हुई।
यूएसए टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेसी के पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) से हटने के बाद इंटर मियामी के फॉलोअर्स 1 मिलियन से बढ़कर 4. 5 मिलियन हो गए। दिलचस्प बात यह है कि मेस्सी के पीएसजी छोड़ने से फ्रेंच क्लब ने कथित तौर पर लगभग दस लाख इंस्टाग्राम फॉलोअर्स खो दिए हैं। Goal. com के अनुसार, PSG को एक सप्ताहांत में कम से कम 8,00,000 का नुकसान हुआ।
टिकट बिक्री के बारे में क्या?
क्लब ने टिकटों की बिक्री में भी वृद्धि देखी है और वे अब एमएलएस में सबसे लोकप्रिय टीमों में से एक बनने की राह पर हैं। ऑनलाइन मार्केटप्लेस टिकपिक के डेटा से पता चला कि मेस्सी के एमएलएस में जाने की खबर के बाद से इंटर मियामी के टिकट की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। उदाहरण के लिए, मेस्सी की घोषणा से पहले टिकट की सबसे कम कीमत $29 थी। लेकिन जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि मेस्सी अमेरिका जा रहे हैं, सबसे सस्ता उपलब्ध टिकट कथित तौर पर $544 का है।
मेसी के आने से अब धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से लोग वैश्विक आइकन को देखने के लिए आ रहे हैं। ऐप्पल टीवी के साथ समझौते से यह भी पता चलता है कि इससे एमएलएस को अपनी दर्शकों की संख्या बढ़ाने और अपने ब्रांड को ऊपर उठाने में मदद मिलेगी। एमएलएस में मेस्सी की उपस्थिति ने लीग को खिलाड़ियों, प्रायोजकों और निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया है।
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नई दिल्लीः अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनल मेसी ने पीएसजी को छोड़कर अमेरिकी फुटबटॉल क्लब इंटर मियामी ज्वाइन कर लिया है। मेसी का इंटर मियामी में स्थानांतरण शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। विश्व कप विजेता काफी धूमधाम के बीच मियामी पहुंचे और सोमवार को एक शानदार समारोह में उनका स्वागत किया गया। मियामी द्वारा मेसी को साइन करना क्लब के लिए एक बड़ी घटना है। इससे क्लब को फायदा मिल रहा है। इंटर मियामी की सोशल मीडिया फॉलोइंग काफी बढ़ रही है। साथ ही उनकी व्यापारिक बिक्री में भी नाटकीय रूप से वृद्धि हुई। यूएसए टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेसी के पेरिस सेंट-जर्मेन से हटने के बाद इंटर मियामी के फॉलोअर्स एक मिलियन से बढ़कर चार. पाँच मिलियन हो गए। दिलचस्प बात यह है कि मेस्सी के पीएसजी छोड़ने से फ्रेंच क्लब ने कथित तौर पर लगभग दस लाख इंस्टाग्राम फॉलोअर्स खो दिए हैं। Goal. com के अनुसार, PSG को एक सप्ताहांत में कम से कम आठ,शून्य,शून्य का नुकसान हुआ। टिकट बिक्री के बारे में क्या? क्लब ने टिकटों की बिक्री में भी वृद्धि देखी है और वे अब एमएलएस में सबसे लोकप्रिय टीमों में से एक बनने की राह पर हैं। ऑनलाइन मार्केटप्लेस टिकपिक के डेटा से पता चला कि मेस्सी के एमएलएस में जाने की खबर के बाद से इंटर मियामी के टिकट की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। उदाहरण के लिए, मेस्सी की घोषणा से पहले टिकट की सबसे कम कीमत उनतीस डॉलर थी। लेकिन जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि मेस्सी अमेरिका जा रहे हैं, सबसे सस्ता उपलब्ध टिकट कथित तौर पर पाँच सौ चौंतालीस डॉलर का है। मेसी के आने से अब धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से लोग वैश्विक आइकन को देखने के लिए आ रहे हैं। ऐप्पल टीवी के साथ समझौते से यह भी पता चलता है कि इससे एमएलएस को अपनी दर्शकों की संख्या बढ़ाने और अपने ब्रांड को ऊपर उठाने में मदद मिलेगी। एमएलएस में मेस्सी की उपस्थिति ने लीग को खिलाड़ियों, प्रायोजकों और निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया है।
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इस समय भारत में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन का नियम लागू है और ऐसे में खिलाड़ी घर में कैद रहते हुए अपनी क्रिएटिविटी का भरपूर परिचय दे रहे हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह अपनी जादुई कला को दिखा रहे हैं। भारत की सीमित ओवरों की टीम के नंबर-4 के बल्लेबाज अय्यर अपने बल्ले से टेनिस गेंद को मारते हैं तो वह उनके कुत्ते के पास जाती है और फिर उनके परिवार वालों से होते हुए पंखे से टकरा एक अलमारी में रखे एक गिलास में जाती है।
अय्यर ने इस वीडियो के अंत में कहा, "यह जादू है या हकीकत। ' उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, 'बैटिंग प्रैक्टिस। ' बता दें कि अगर हालात सामान्य होते तो अय्यर इस समय आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर रहे होते। उनकी कप्तानी में टीम ने पिछली बार काफी बढ़िया प्रदर्शन किया था। दिल्ली कैपिटल्स आईपीएल की उन चुनिंदा टीमों में से एक है जिसके खाते में अब तक एक बार भी आईपीएल का खिताब नहीं आ सका है।
बता दें कि पिछले कुछ वक्त में श्रेयस अय्यर ने लिमिडेट ओवर के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस के दम पर भारतीय क्रिकेट टीम में नंबर 4 के स्लॉट को भर दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की टी-20 सीरीज में श्रेयस अय्यर ने अहम भूमिका निभाई थी। इस स्टाइलिश बल्लेबाज ने 5 टी-20 मैचों की सीरीज में 51 की औसत से 153 रन बनाए थे। वह इस सीरीज में केएल राहुल के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे थे।
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इस समय भारत में कोविड-उन्नीस के कारण लॉकडाउन का नियम लागू है और ऐसे में खिलाड़ी घर में कैद रहते हुए अपनी क्रिएटिविटी का भरपूर परिचय दे रहे हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह अपनी जादुई कला को दिखा रहे हैं। भारत की सीमित ओवरों की टीम के नंबर-चार के बल्लेबाज अय्यर अपने बल्ले से टेनिस गेंद को मारते हैं तो वह उनके कुत्ते के पास जाती है और फिर उनके परिवार वालों से होते हुए पंखे से टकरा एक अलमारी में रखे एक गिलास में जाती है। अय्यर ने इस वीडियो के अंत में कहा, "यह जादू है या हकीकत। ' उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, 'बैटिंग प्रैक्टिस। ' बता दें कि अगर हालात सामान्य होते तो अय्यर इस समय आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर रहे होते। उनकी कप्तानी में टीम ने पिछली बार काफी बढ़िया प्रदर्शन किया था। दिल्ली कैपिटल्स आईपीएल की उन चुनिंदा टीमों में से एक है जिसके खाते में अब तक एक बार भी आईपीएल का खिताब नहीं आ सका है। बता दें कि पिछले कुछ वक्त में श्रेयस अय्यर ने लिमिडेट ओवर के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस के दम पर भारतीय क्रिकेट टीम में नंबर चार के स्लॉट को भर दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पाँच मैचों की टी-बीस सीरीज में श्रेयस अय्यर ने अहम भूमिका निभाई थी। इस स्टाइलिश बल्लेबाज ने पाँच टी-बीस मैचों की सीरीज में इक्यावन की औसत से एक सौ तिरेपन रन बनाए थे। वह इस सीरीज में केएल राहुल के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे थे।
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हे पुत्र सू स्मन्त शुद्ध स्मरूप है, धान खरूप है, निरकन निराकार है । हे दु यह संसार माया है, यायें तू सोपी जाम, इसके मोह में मत स मैं तेरी माता मदालसा ओ मे गुप्त मंत्र साधी है। इसके सुमरण करन मे, वा सिक करके इसके रहस्य को आणनस हे पुत्र । इस दुख रूप संसार स तुम्हारा शीघ्र ही सकार इ वगा। जैस राणी मवाळसा के पुत्रों का माया के वचनों में मद्धा करने से तत्काल ही काम बना है और माल घाम को प्राप्त हुये हैं। या तू मध्ये मत, भापा मागी झामांगा। और हे पत्र जो मोगा तो पूर्ण लिखे दाख जो मालन का हुआ है, जैसा ही मेरा भी होगा। पुत्र । पर मन्त्र मदालसा राणी ने भो अपने पत्र दिया था, मो सरेको तेरी समझ में भाया था नहीं १ नहीं माया होठो पुसू मरे से पूछ, मै धेरे प्रति फिर कहूँगीशु मरे प्राप्त से भी प्यारा एक पुत्र है इसम मैने तरे कु यह मंत्र सुणामा है। पुत्रोबाथ माता पहनवाला और पानवास परमात्मा हूं प्रसन्न क्यूँ नहीं कर सकते है ? दे मातु भी । इसमें कौन कारण ६१ सो कमरे ई एसी होती है, शीघ्र हो मरो शंका
का समाधान कीजिये ।
मातीबाप-पुत्र फ निर्मित जो माप प्रतिगाना है
ओ सू शंका करता है, इसको आन्त ि सुरसार विष स मैंन है, सो तेर
- जननी सुत पउडेडा
यम्य नास्ति स्त्रय प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किम । लोचनाभ्या विहीनस्य, दर्पण कि करिष्यति ॥१॥
हे पुत्र । जिन्होंने अपनी बुद्धि को पेट के निमित्त बेचदी, स्वय बुद्धिहीन हैं, या हे पुत्र शास्त्रो को कोई दूषण नहीं। शास्त्रों मे जो लिखा है सो महापुरुषों के मुखारविन्दो के वचन हैं, सो वचन सत्य हैं, सत्य का कभी अभाव नही होता सत्य को त्रिकालावाध कहते । याते दूपण पढने वाले और पढ़ाने वाले में है। एक पेट के निमित्त तेली के बैल की नाई रैन दिन इधर उधर फिरता है, कामना पूर्ण होती नहीं, सुख से निद्रा आती नहीं, सुख से भोजन करते नहीं और सुखी देह से रहते नहीं । हे पुत्र । जिसके बुद्धि रूपी लोचन फूट गये हैं उनको शास्त्र के गुप्त रहस्य का पता लगता नहीं। जैसे किसी पुरुप के दोनों नेत्र फूट जाँय और वह अपना मुख दर्पण में देखना चाहे तो हे पुत्र । वो स्पष्ट अपने मुख को कैसे देख सकता है ? हे पुत्र, दर्पण तो ज्यों का त्यों स्वच्छ है । परन्तु उसके नेत्र फूटे हुए हैं, दर्पण कू दूपण नहीं। इसी प्रकार से हे पुत्र, पढने वाले या पढाने वाले प्रभू कृ प्रसन्न क्यों नहीं करते, ऐसी तै ने शका करी कि इसमें कौन कारणता है, सो हे पुत्र । जो कारणता थी सो मैंने तेरे कू स्पष्ट कही है, अपनी वृत्ति से तूभी विचार कर और भरणे मत, अपन दोनू माँ बेटा माग खावाँगा ।। इति ।। पुत्रोवाच - हे मातुश्रो । मेरे कू जो तैने वचन कहे सो मेरो बुद्धि में ठस गये हैं। परन्तु हे मातु श्री । एक मेरे कूँ शका
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हे पुत्र सू स्मन्त शुद्ध स्मरूप है, धान खरूप है, निरकन निराकार है । हे दु यह संसार माया है, यायें तू सोपी जाम, इसके मोह में मत स मैं तेरी माता मदालसा ओ मे गुप्त मंत्र साधी है। इसके सुमरण करन मे, वा सिक करके इसके रहस्य को आणनस हे पुत्र । इस दुख रूप संसार स तुम्हारा शीघ्र ही सकार इ वगा। जैस राणी मवाळसा के पुत्रों का माया के वचनों में मद्धा करने से तत्काल ही काम बना है और माल घाम को प्राप्त हुये हैं। या तू मध्ये मत, भापा मागी झामांगा। और हे पत्र जो मोगा तो पूर्ण लिखे दाख जो मालन का हुआ है, जैसा ही मेरा भी होगा। पुत्र । पर मन्त्र मदालसा राणी ने भो अपने पत्र दिया था, मो सरेको तेरी समझ में भाया था नहीं एक नहीं माया होठो पुसू मरे से पूछ, मै धेरे प्रति फिर कहूँगीशु मरे प्राप्त से भी प्यारा एक पुत्र है इसम मैने तरे कु यह मंत्र सुणामा है। पुत्रोबाथ माता पहनवाला और पानवास परमात्मा हूं प्रसन्न क्यूँ नहीं कर सकते है ? दे मातु भी । इसमें कौन कारण इकसठ सो कमरे ई एसी होती है, शीघ्र हो मरो शंका का समाधान कीजिये । मातीबाप-पुत्र फ निर्मित जो माप प्रतिगाना है ओ सू शंका करता है, इसको आन्त ि सुरसार विष स मैंन है, सो तेर - जननी सुत पउडेडा यम्य नास्ति स्त्रय प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किम । लोचनाभ्या विहीनस्य, दर्पण कि करिष्यति ॥एक॥ हे पुत्र । जिन्होंने अपनी बुद्धि को पेट के निमित्त बेचदी, स्वय बुद्धिहीन हैं, या हे पुत्र शास्त्रो को कोई दूषण नहीं। शास्त्रों मे जो लिखा है सो महापुरुषों के मुखारविन्दो के वचन हैं, सो वचन सत्य हैं, सत्य का कभी अभाव नही होता सत्य को त्रिकालावाध कहते । याते दूपण पढने वाले और पढ़ाने वाले में है। एक पेट के निमित्त तेली के बैल की नाई रैन दिन इधर उधर फिरता है, कामना पूर्ण होती नहीं, सुख से निद्रा आती नहीं, सुख से भोजन करते नहीं और सुखी देह से रहते नहीं । हे पुत्र । जिसके बुद्धि रूपी लोचन फूट गये हैं उनको शास्त्र के गुप्त रहस्य का पता लगता नहीं। जैसे किसी पुरुप के दोनों नेत्र फूट जाँय और वह अपना मुख दर्पण में देखना चाहे तो हे पुत्र । वो स्पष्ट अपने मुख को कैसे देख सकता है ? हे पुत्र, दर्पण तो ज्यों का त्यों स्वच्छ है । परन्तु उसके नेत्र फूटे हुए हैं, दर्पण कू दूपण नहीं। इसी प्रकार से हे पुत्र, पढने वाले या पढाने वाले प्रभू कृ प्रसन्न क्यों नहीं करते, ऐसी तै ने शका करी कि इसमें कौन कारणता है, सो हे पुत्र । जो कारणता थी सो मैंने तेरे कू स्पष्ट कही है, अपनी वृत्ति से तूभी विचार कर और भरणे मत, अपन दोनू माँ बेटा माग खावाँगा ।। इति ।। पुत्रोवाच - हे मातुश्रो । मेरे कू जो तैने वचन कहे सो मेरो बुद्धि में ठस गये हैं। परन्तु हे मातु श्री । एक मेरे कूँ शका
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T20 World Cup 2021: वानिंदु हसरंगा (Wanindu Hasaranga) ने टी20 इंटरनेशनल में इतिहास रच दिया है. वे एक कैलेंडर ईयर में टी20 इंटरनेशनल में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं. श्रीलंका के हसरंगा ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में (England vs Sri lanka) यह कारनामा किया.
T20 World Cup 2021: विराट कोहली (Virat Kohli) की कप्तानी में टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप के अपने दोनों शुरुआती मैच हार चुकी है. उसके सेमीफाइनल की राह बेहद ही मुश्किल है. टीम ने 2 मैच में 13 खिलाड़ियों को मौका दिया. ये 13 खिलाड़ी आईपीएल 2021 (IPL 2021) में अच्छा प्रदर्शन करके उतरे थे.
IND vs NZ T20 World Cup: टी20 विश्व कप में टीम इंडिया को लगातार दूसरी हार झेलनी पड़ी. रविवार को हुए मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को शिकस्त दी. इस हार के बाद टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल में पहुंचने की राह बेहद मुश्किल हो गई है. इस मैच में टीम इंडिया के खिलाड़ी थके (Bio-Bubble Fatigue) हुए नजर आ रहे थे. मैच के बाद जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ ऐसी ही बात कही. उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीने से घर से दूर हैं. कई बार आपको ब्रेक की जरूरत होती है. फिलहाल, शरीर थक गया है.
T20 World Cup 2021: टीम इंडिया (Team India) एक मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 110 रन बना सकी. कोई बल्लेबाज 30 रन का आंकड़ा (India vs New Zealand) नहीं छू सका. इससे पहले आईपीएल 2021 (IPL 2021) में टीम के सभी बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करके टी20 वर्ल्ड कप में उतरे थे.
T20 World Cup 2021: केएल राहुल (KL Rahul) लगातार दूसरे मैच में फेल रहे. टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच में वे (India vs New Zealand) न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 18 रन बना सके. पाकिस्तान के खिलाफ (India vs Pakistan) उन्होंने 3 रन बनाए थे. राहुल ने आईपीएल 2021 (2021) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 600 से अधिक रन बनाए थे.
IPL 2022: हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) अगले सीजन से आईपीएल में नई टीम से खेलते हुए दिख सकते हैं. मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के उन्हें रिटेन करने की संभावना कम है. ऐसे में उन्हें घरेलू टीम अहमदाबाद (Ahmedabad) से खेलने का मौका मिल सकता है. वे आईपीएल 2021 (IPL 2021) में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके थे.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 विश्व कप में इस रविवार को अहम मैच खेला (IND vs NZ T20 World Cup 2021) जाएगा. इस मैच में रोहित शर्मा की आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस से खेलने वाले गेंदबाज एडम मिल्ने (Adam Milne) टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. उन्हें चोटिल लॉकी फर्ग्यूसन (Lockie Ferguson injury) की जगह रिजर्व से सीधे न्यूजीलैंड टीम में शामिल किया गया है. उन्होंने भारत के खिलाफ अपना प्लान भी तैयार कर लिया है.
क्रिकेटर दिनेश कार्तिक (Dinesh karthik) जुड़वा बच्चों के पिता बन गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी दी. बच्चों के विशेष नाम फैंस को पसंद आ रहे हैं. उन्होंने स्क्वॉश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल (Deepika Pallikal) से शादी की है.
आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने बीसीसीआई पर निशाना साधा है. उन्होंने बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि - क्या सट्टेबाजी करने वाली कंपनियां भी IPL टीमें खरीद सकती हैं ? अहमदाबाद फ्रेंचाइजी को खरीदने वाली सीवीसी कैपिटल द्वारा सट्टेबाजी और जुआ कंपनियों में निवेश का विवाद तूल पकड़ रहा है.
आईपीएल 2021 (IPL 2021) में रनों का अंबार लगाने वाले महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की चेन्नई सुपर किंग्स के धुरंधर बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaikwad) को अब इसका इनाम मिला है. उन्हें सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट (Syed Mushtaq Ali T20 Tournament) के लिए महाराष्ट्र का कप्तान बनाया गया है. ऋतुराज ने 16 मैच में 45 से ज्यादा के औसत से 635 रन बनाए थे और सबसे कम उम्र में ऑरेंज कैप जीतने वाले खिलाड़ी बने थे.
IPL New Teams Auction: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई (BCCI) 2 नई आईपीएल टीमें जुड़ने के बाद मालामाल हो जाएगी. बीसीसीआई को एक नई फ्रेंचाइजी से 7 से 10 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है. इस हिसाब से दो नई टीमों की नीलामी से बीसीसीआई के खजाने में 20 हजार करोड़ रुपए आ सकते हैं. इसके लिए अगले हफ्ते से बोली प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि बीसीसीआई सोमवार को ही तकनीकी मल्यांकन करने के बाद सफल बोली लगाने वालों की घोषणा करेगी या नहीं.
टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) में टीम इंडिया को ग्रुप चरण के 4 मैच दुबई में खेलने हैं. पाकिस्तान के खिलाफ मैच भी दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेला जाएगा. इससे पहले विराट कोहली (Virat Kohli) ने उम्मीद जताई कि टी20 विश्व कप में पिचों की गुणवत्ता निश्चित रूप से IPL-2021 के मुकाबले बेहतर होने वाली है.
दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) आईपीएल-2021 के प्लेऑफ के दौरान घुटने की चोट से जूझ रहे थे और इसी वजह से उन्हें दर्द निवारक इंजेक्शन लेने पड़े. चोट के चलते दाएं हाथ का यह बल्लेबाज 4 नवंबर से शुरू होने वाली सैयद मुश्ताक टी20 ट्रॉफी के आगामी सीजन का हिस्सा नहीं बन पाएगा.
T20 World Cup 2021: टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-12 के मुकाबले 23 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. सभी मुकाबले यूएई (UAE) में होंगे. आईपीएल 2020 और आईपीएल 2021 के मुकाबले यूएई में हुए थे. इनके रिकॉर्ड को देखें तो यहां लक्ष्य का पीछा करना आसान होता है. यानी टॉस यहां महत्वपूर्ण हो जाएगा.
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Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस: वानिंदु हसरंगा ने टीबीस इंटरनेशनल में इतिहास रच दिया है. वे एक कैलेंडर ईयर में टीबीस इंटरनेशनल में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं. श्रीलंका के हसरंगा ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में यह कारनामा किया. Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस: विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया टीबीस वर्ल्ड कप के अपने दोनों शुरुआती मैच हार चुकी है. उसके सेमीफाइनल की राह बेहद ही मुश्किल है. टीम ने दो मैच में तेरह खिलाड़ियों को मौका दिया. ये तेरह खिलाड़ी आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में अच्छा प्रदर्शन करके उतरे थे. IND vs NZ Tबीस World Cup: टीबीस विश्व कप में टीम इंडिया को लगातार दूसरी हार झेलनी पड़ी. रविवार को हुए मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को शिकस्त दी. इस हार के बाद टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल में पहुंचने की राह बेहद मुश्किल हो गई है. इस मैच में टीम इंडिया के खिलाड़ी थके हुए नजर आ रहे थे. मैच के बाद जसप्रीत बुमराह ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ ऐसी ही बात कही. उन्होंने कहा कि पिछले छः महीने से घर से दूर हैं. कई बार आपको ब्रेक की जरूरत होती है. फिलहाल, शरीर थक गया है. Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस: टीम इंडिया एक मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ एक सौ दस रन बना सकी. कोई बल्लेबाज तीस रन का आंकड़ा नहीं छू सका. इससे पहले आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में टीम के सभी बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करके टीबीस वर्ल्ड कप में उतरे थे. Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस: केएल राहुल लगातार दूसरे मैच में फेल रहे. टीबीस वर्ल्ड कप के एक मैच में वे न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ अट्ठारह रन बना सके. पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने तीन रन बनाए थे. राहुल ने आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में शानदार प्रदर्शन करते हुए छः सौ से अधिक रन बनाए थे. IPL दो हज़ार बाईस: हार्दिक पंड्या अगले सीजन से आईपीएल में नई टीम से खेलते हुए दिख सकते हैं. मुंबई इंडियंस के उन्हें रिटेन करने की संभावना कम है. ऐसे में उन्हें घरेलू टीम अहमदाबाद से खेलने का मौका मिल सकता है. वे आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके थे. भारत और न्यूजीलैंड के बीच टीबीस विश्व कप में इस रविवार को अहम मैच खेला जाएगा. इस मैच में रोहित शर्मा की आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस से खेलने वाले गेंदबाज एडम मिल्ने टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. उन्हें चोटिल लॉकी फर्ग्यूसन की जगह रिजर्व से सीधे न्यूजीलैंड टीम में शामिल किया गया है. उन्होंने भारत के खिलाफ अपना प्लान भी तैयार कर लिया है. क्रिकेटर दिनेश कार्तिक जुड़वा बच्चों के पिता बन गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी दी. बच्चों के विशेष नाम फैंस को पसंद आ रहे हैं. उन्होंने स्क्वॉश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल से शादी की है. आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने बीसीसीआई पर निशाना साधा है. उन्होंने बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि - क्या सट्टेबाजी करने वाली कंपनियां भी IPL टीमें खरीद सकती हैं ? अहमदाबाद फ्रेंचाइजी को खरीदने वाली सीवीसी कैपिटल द्वारा सट्टेबाजी और जुआ कंपनियों में निवेश का विवाद तूल पकड़ रहा है. आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में रनों का अंबार लगाने वाले महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स के धुरंधर बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ को अब इसका इनाम मिला है. उन्हें सैयद मुश्ताक अली टीबीस टूर्नामेंट के लिए महाराष्ट्र का कप्तान बनाया गया है. ऋतुराज ने सोलह मैच में पैंतालीस से ज्यादा के औसत से छः सौ पैंतीस रन बनाए थे और सबसे कम उम्र में ऑरेंज कैप जीतने वाले खिलाड़ी बने थे. IPL New Teams Auction: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई दो नई आईपीएल टीमें जुड़ने के बाद मालामाल हो जाएगी. बीसीसीआई को एक नई फ्रेंचाइजी से सात से दस हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है. इस हिसाब से दो नई टीमों की नीलामी से बीसीसीआई के खजाने में बीस हजार करोड़ रुपए आ सकते हैं. इसके लिए अगले हफ्ते से बोली प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि बीसीसीआई सोमवार को ही तकनीकी मल्यांकन करने के बाद सफल बोली लगाने वालों की घोषणा करेगी या नहीं. टीबीस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को ग्रुप चरण के चार मैच दुबई में खेलने हैं. पाकिस्तान के खिलाफ मैच भी दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेला जाएगा. इससे पहले विराट कोहली ने उम्मीद जताई कि टीबीस विश्व कप में पिचों की गुणवत्ता निश्चित रूप से IPL-दो हज़ार इक्कीस के मुकाबले बेहतर होने वाली है. दिनेश कार्तिक आईपीएल-दो हज़ार इक्कीस के प्लेऑफ के दौरान घुटने की चोट से जूझ रहे थे और इसी वजह से उन्हें दर्द निवारक इंजेक्शन लेने पड़े. चोट के चलते दाएं हाथ का यह बल्लेबाज चार नवंबर से शुरू होने वाली सैयद मुश्ताक टीबीस ट्रॉफी के आगामी सीजन का हिस्सा नहीं बन पाएगा. Tबीस World Cup दो हज़ार इक्कीस: टीबीस वर्ल्ड कप के सुपर-बारह के मुकाबले तेईस अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. सभी मुकाबले यूएई में होंगे. आईपीएल दो हज़ार बीस और आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के मुकाबले यूएई में हुए थे. इनके रिकॉर्ड को देखें तो यहां लक्ष्य का पीछा करना आसान होता है. यानी टॉस यहां महत्वपूर्ण हो जाएगा.
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बिहार के दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान ( सुरक्षित) एवं तारापुर के उपचुनाव में 49. 59 फीसदी मतदान हुआ। शनिवार को हुए मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) उपनिर्वाचन क्षेत्र में 49 फीसदी एवं तारापुर उपनिर्वाचन क्षेत्र में 50. 05 फीसदी वोट डाले गए। पिछले दो विधानसभा आम चुनावों की तुलना में इन दोनों क्षेत्रों के उपचुनाव में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ। इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना कार्य दो नवंबर को होगा और चुनाव परिणाम जारी कर दिए जाएंगे।
लाइव अपडेटः
- बिहार के दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान ( सुरक्षित) एवं तारापुर के उपचुनाव में 49. 59 फीसदी मतदान हुआ। शनिवार को हुए मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) उपनिर्वाचन क्षेत्र में 49 फीसदी एवं तारापुर उपनिर्वाचन क्षेत्र में 50. 05 फीसदी वोट डाले गए।
- संपूर्ण तारापुर विधानसभा क्षेत्र में दोपहर 3 बजे के बाद मतदान का प्रतिशत 48. 3 रहा। वहीं कुशेश्वरस्थान में दोपहर 3 बजे तक 45. 8% मतदान हो चुका है।
- बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने अपना वोट डाला।
- कुशेश्वरस्थान में 1 बजे तक 36. 55% मतदान हुआ।
- मध्य विद्यालय के बड़ी कुरियन स्थित मतदान केंद्र संख्या 37 पर 11 बजे पर महिलाओं की भीड़ लगी हुई है।
- तारापुर विधानसभा के असरगंज प्रखंड क्षेत्र में 11 बजे तक 28. 62% मतदान हुआ।
- तारापुर विधानसभा उपचुनाव सुबह के 11 बजे तक 23 प्रतिशत मतदान होने की सूचना।
- कुशेश्वरस्थान में 11 बजे तक 20. 25% मतदान हुआ।
- कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के मतदान केंद्र संख्या 193, 197, 231 और 235 पर ईवीएम खराब हो गई। ईवीएम को ठीक करके मतदान शुरू कराया गया।
- कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र के बिरौल प्रखंड की अफजला पंचायत के खेबा में बूथ नंबर 35 पर मतदान करने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई है।
- कुशेश्वरस्थान विधानसभा उपचुनाव के तहत शनिवार सुबह सात बजे से कड़ी सुरक्षा में मतदान शुरू हुआ। इस सीट पर जदयू विधायक शशिभूषण हजारी के निधन की वजह से उपचुनाव हो रहा है। आज यहां दो लाख 57 हजार 153 मतदाता आठ प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान के लिए शाम चार बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। गुलाबी ठंड के बीच मतदाता सुबह से ही केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं। मतदान को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएं भी अच्छी-खासी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंच रही हैं। पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवान जगह-जगह गश्त लगा रहे हैं। मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान के बूथ सं 124 व 143 (क) पर वीवीपैट खराब होने पर इसे बदला गया। पहले एक घंटे में सुबह आठ बजे तक 07 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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बिहार के दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान एवं तारापुर के उपचुनाव में उनचास. उनसठ फीसदी मतदान हुआ। शनिवार को हुए मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान उपनिर्वाचन क्षेत्र में उनचास फीसदी एवं तारापुर उपनिर्वाचन क्षेत्र में पचास. पाँच फीसदी वोट डाले गए। पिछले दो विधानसभा आम चुनावों की तुलना में इन दोनों क्षेत्रों के उपचुनाव में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ। इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना कार्य दो नवंबर को होगा और चुनाव परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। लाइव अपडेटः - बिहार के दो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान एवं तारापुर के उपचुनाव में उनचास. उनसठ फीसदी मतदान हुआ। शनिवार को हुए मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान उपनिर्वाचन क्षेत्र में उनचास फीसदी एवं तारापुर उपनिर्वाचन क्षेत्र में पचास. पाँच फीसदी वोट डाले गए। - संपूर्ण तारापुर विधानसभा क्षेत्र में दोपहर तीन बजे के बाद मतदान का प्रतिशत अड़तालीस. तीन रहा। वहीं कुशेश्वरस्थान में दोपहर तीन बजे तक पैंतालीस. आठ% मतदान हो चुका है। - बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने अपना वोट डाला। - कुशेश्वरस्थान में एक बजे तक छत्तीस. पचपन% मतदान हुआ। - मध्य विद्यालय के बड़ी कुरियन स्थित मतदान केंद्र संख्या सैंतीस पर ग्यारह बजे पर महिलाओं की भीड़ लगी हुई है। - तारापुर विधानसभा के असरगंज प्रखंड क्षेत्र में ग्यारह बजे तक अट्ठाईस. बासठ% मतदान हुआ। - तारापुर विधानसभा उपचुनाव सुबह के ग्यारह बजे तक तेईस प्रतिशत मतदान होने की सूचना। - कुशेश्वरस्थान में ग्यारह बजे तक बीस. पच्चीस% मतदान हुआ। - कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के मतदान केंद्र संख्या एक सौ तिरानवे, एक सौ सत्तानवे, दो सौ इकतीस और दो सौ पैंतीस पर ईवीएम खराब हो गई। ईवीएम को ठीक करके मतदान शुरू कराया गया। - कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्र के बिरौल प्रखंड की अफजला पंचायत के खेबा में बूथ नंबर पैंतीस पर मतदान करने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई है। - कुशेश्वरस्थान विधानसभा उपचुनाव के तहत शनिवार सुबह सात बजे से कड़ी सुरक्षा में मतदान शुरू हुआ। इस सीट पर जदयू विधायक शशिभूषण हजारी के निधन की वजह से उपचुनाव हो रहा है। आज यहां दो लाख सत्तावन हजार एक सौ तिरेपन मतदाता आठ प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान के लिए शाम चार बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। गुलाबी ठंड के बीच मतदाता सुबह से ही केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं। मतदान को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएं भी अच्छी-खासी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंच रही हैं। पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवान जगह-जगह गश्त लगा रहे हैं। मतदान के दौरान कुशेश्वरस्थान के बूथ सं एक सौ चौबीस व एक सौ तैंतालीस पर वीवीपैट खराब होने पर इसे बदला गया। पहले एक घंटे में सुबह आठ बजे तक सात प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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Investment Tips- साल 2022 ने निवेशकों को खासा निराश किया है। इस साल इक्विटी, सोन, क्रिप्टोकरेंसी सभी में गिरावट की स्थिति रही है। विश्व के प्रमुख देशों के केन्द्रिय बैंको ने ब्याज दरों को समय सयम पर बढ़ाकर बाजार में अस्थिरता पैदा की है। रूस-युक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। हालांकि गिरावट के बाद भारत के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक में दशहरा के पहले से ही तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में चल रहे उठापटक के बीच क्या निवेशकों को इक्विटी में जोखिम उठाना चाहिए या फिर अन्य निवेश विकल्पों में निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए, चलिए हम आपकों बताते हैं।
सभी निवेशकों को हमेशा अपनी जोखिम की भूख को अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से ही रखना चाहिए। उदाहरण के लिए 5 साल या उससे अधिक के वित्तीय लक्ष्य रखने वाले निवेशकों को इक्विटी या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना सही रहेगा। क्योंकि यहां लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की ज्यादे उम्मीद है। छोटे निवेश के लिए फिलहाल इक्विटी मार्केट से दूर रहना चाहिए।
वैश्विक बाधाओं के बावजूद, लंबी अवधि में दांव लगाने के लिए इक्विटी एक बेहतर विकल्प है। निवेशकों के लिए कुल मिलाकर वर्ष 2022 निराशाजनक रहा है। वैश्विक भू-राजनैतिक कारणों से शेयर बाजरा में अस्थिरता बनी रही है। निवेशकों को इस सयम अपने 40 से 50 प्रतिशत धन को लंबे समय के लिए इक्विटी मार्केट में निवेश करना चाहिए। गिरावट का समय लंबी अवधि के निवेश के लिए सही होता है।
इस बीच, सावधि जमा और सरकारी बॉन्ड, लगभग 6-7% रिटर्न दे सकते हैं, जबकि सोना सपाट रह सकता है, विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में स्थितियों को देखते हुए इन अस्थिर बाजारों में एसआईपी के माध्यम से म्यूचुअल फंड में अपने निवेश योग्य धन का 20-25 प्रतिशत के आवंटन कनरा चाहिए। इससे निवेशकों को लंबी अवधि के लिए रुपये की लागत में औसत रणनिती बनाने में सफरलता मिलेगी।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए एसआईपी का उपयोग करने वाले निवेशकों को अपने एसआईपी के साथ बने रहना चाहिए। ऐसा करने से उन्हें कम एनएवी पर अधिक इक्विटी फंड यूनिट खरीदने का लाभ मिलेगा। इससे निवेशकों की औसत लागत कम होगी और उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को जल्द हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।
गोल्ड ईटीएफ/सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए गोल्ड में निवेश किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि जब निवेश उत्पाद के रूप में सोने की बात आती है, तो निवेशकों को निवेश किए जाने योग्य राशि का 20-25 प्रतिशत ही लंबी अवधि के लिए इनमें निवेश किए जा सकते हैं।
बैंक एफडी को भारत में सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि एफडी जो उच्च मुद्रास्फीति के समय में 5-6 प्रतिशत रिटर्न दे रहे हैं। इनमें निवेश कनरे से अभी बचना चाहिए। इसके बदले निवेशक कम जोखिम वाले निवेश पर 8-9 प्रतिशत रिटर्न के लिए इनविट या आरईआईटी जैसे वैकल्पिक निवेश उत्पादों में निवेश कर सकते हैं।
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Investment Tips- साल दो हज़ार बाईस ने निवेशकों को खासा निराश किया है। इस साल इक्विटी, सोन, क्रिप्टोकरेंसी सभी में गिरावट की स्थिति रही है। विश्व के प्रमुख देशों के केन्द्रिय बैंको ने ब्याज दरों को समय सयम पर बढ़ाकर बाजार में अस्थिरता पैदा की है। रूस-युक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। हालांकि गिरावट के बाद भारत के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक में दशहरा के पहले से ही तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में चल रहे उठापटक के बीच क्या निवेशकों को इक्विटी में जोखिम उठाना चाहिए या फिर अन्य निवेश विकल्पों में निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए, चलिए हम आपकों बताते हैं। सभी निवेशकों को हमेशा अपनी जोखिम की भूख को अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से ही रखना चाहिए। उदाहरण के लिए पाँच साल या उससे अधिक के वित्तीय लक्ष्य रखने वाले निवेशकों को इक्विटी या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना सही रहेगा। क्योंकि यहां लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की ज्यादे उम्मीद है। छोटे निवेश के लिए फिलहाल इक्विटी मार्केट से दूर रहना चाहिए। वैश्विक बाधाओं के बावजूद, लंबी अवधि में दांव लगाने के लिए इक्विटी एक बेहतर विकल्प है। निवेशकों के लिए कुल मिलाकर वर्ष दो हज़ार बाईस निराशाजनक रहा है। वैश्विक भू-राजनैतिक कारणों से शेयर बाजरा में अस्थिरता बनी रही है। निवेशकों को इस सयम अपने चालीस से पचास प्रतिशत धन को लंबे समय के लिए इक्विटी मार्केट में निवेश करना चाहिए। गिरावट का समय लंबी अवधि के निवेश के लिए सही होता है। इस बीच, सावधि जमा और सरकारी बॉन्ड, लगभग छः-सात% रिटर्न दे सकते हैं, जबकि सोना सपाट रह सकता है, विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में स्थितियों को देखते हुए इन अस्थिर बाजारों में एसआईपी के माध्यम से म्यूचुअल फंड में अपने निवेश योग्य धन का बीस-पच्चीस प्रतिशत के आवंटन कनरा चाहिए। इससे निवेशकों को लंबी अवधि के लिए रुपये की लागत में औसत रणनिती बनाने में सफरलता मिलेगी। इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए एसआईपी का उपयोग करने वाले निवेशकों को अपने एसआईपी के साथ बने रहना चाहिए। ऐसा करने से उन्हें कम एनएवी पर अधिक इक्विटी फंड यूनिट खरीदने का लाभ मिलेगा। इससे निवेशकों की औसत लागत कम होगी और उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को जल्द हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। गोल्ड ईटीएफ/सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए गोल्ड में निवेश किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि जब निवेश उत्पाद के रूप में सोने की बात आती है, तो निवेशकों को निवेश किए जाने योग्य राशि का बीस-पच्चीस प्रतिशत ही लंबी अवधि के लिए इनमें निवेश किए जा सकते हैं। बैंक एफडी को भारत में सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि एफडी जो उच्च मुद्रास्फीति के समय में पाँच-छः प्रतिशत रिटर्न दे रहे हैं। इनमें निवेश कनरे से अभी बचना चाहिए। इसके बदले निवेशक कम जोखिम वाले निवेश पर आठ-नौ प्रतिशत रिटर्न के लिए इनविट या आरईआईटी जैसे वैकल्पिक निवेश उत्पादों में निवेश कर सकते हैं।
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हुए उसे मानवताके प्रति दयाभावसे भरा बतलाया था। लॉर्ड इविनने मानवताके लिए की गई अपीलका अच्छा उत्तर दिया था। जो लोग रियायतोसे लाभ उठाते है, वे इस बातका ध्यान रखे कि इससे व्यापारिक लाभ उठानेका प्रयत्न न किया जाये, चाहे वह प्रयत्न प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, और इस धाराका उपयोग केवल उन्ही हलकोंमें करें, जिनका कि सरकारी विज्ञप्तिमें उल्लेख है। कांग्रेसजनो तथा उन अन्य सभी लोगोंको जो गांववालोमें दिलचस्पी लेते हैं, इस बातको भलीभाँति याद रखना चाहिए कि मुफ्त नमक बनाने और इकट्ठा करनेकी रियायत किन क्षेत्रोसे हटा ली गई है। कार्यकर्ताओंको चाहिए कि ये रियायते फिरसे हासिल करनेके लिए वे स्थानीय अधिकारियोसे लिखा-पढ़ी करे। किन्तु अनुमति प्राप्त किये बिना इन रियायतोसे लाभ किसी हालतमे नही उठाना चाहिए।
४७६. पत्र : नारणदास गांधीको
तुम्हारा पत्र मिला । गोसेवा-सघका जो पैसा खर्च हो गया उसे गया समझो। अब उसे मांगना योग्य नही लगता । अम्बालालभाई का मन बदल गया है। कही से भी निकाले, गोसेवा-सघका घाटा तो पूरा करना पड़ेगा न ? देखना, अब मावलंकर और रणछोडभाई क्या मदद कर सकते हैं। यदि वे चन्दा इकट्ठा करें तो संघकी रकममें से बहुत नही देना पड़ेगा।
वाल-मन्दिर ओर कुमार-मन्दिर शालाके ही अंग है न ? क्या इन दोनोका उपयोग नही है ?
हरिलालके विषयमें जो कुछ तुमने बताया वह समझ गया । मै यहाँ स्वतन्त्र रूपसे नही रहता। जमनालालजीके घरमे भी उसे नहीं रखा जा सकता। इसलिए यदि वह तैयार हो जाये और नियमोका पालन करने लगे तो उसका वही रहना ठीक जान पड़ता है।
मेरा खयाल है कि चरखा- संघ और ग्रामोद्योग-सघके दफ्तर एकसाथ नही रह सकते । ग्रामोद्योग-सघमें तो बहुत सी तफसीले आ जायेगी, इसलिए फिलहाल तो इन दोनोंका अलग रहना ही ठीक लगता है। काम तो एक-दूसरेकी पूर्ति स्वरूप ही होगा ग्रामोद्योगका केन्द्र वर्धा ही होगा, ऐसा मुझे लगता है। तुमने जब मुझे पत्र लिखा तब तुम्हे कदाचित् मेरा वह पत्र नही मिला होगा जिसमे मैंने पूछा है कि क्या तुम्हे वहाँसे छुट्टी मिल सकती है ?
१. देखिए " पत्र : गणेश वासुदेव मावलंकरको ५, २०-११-१९३४।
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हुए उसे मानवताके प्रति दयाभावसे भरा बतलाया था। लॉर्ड इविनने मानवताके लिए की गई अपीलका अच्छा उत्तर दिया था। जो लोग रियायतोसे लाभ उठाते है, वे इस बातका ध्यान रखे कि इससे व्यापारिक लाभ उठानेका प्रयत्न न किया जाये, चाहे वह प्रयत्न प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, और इस धाराका उपयोग केवल उन्ही हलकोंमें करें, जिनका कि सरकारी विज्ञप्तिमें उल्लेख है। कांग्रेसजनो तथा उन अन्य सभी लोगोंको जो गांववालोमें दिलचस्पी लेते हैं, इस बातको भलीभाँति याद रखना चाहिए कि मुफ्त नमक बनाने और इकट्ठा करनेकी रियायत किन क्षेत्रोसे हटा ली गई है। कार्यकर्ताओंको चाहिए कि ये रियायते फिरसे हासिल करनेके लिए वे स्थानीय अधिकारियोसे लिखा-पढ़ी करे। किन्तु अनुमति प्राप्त किये बिना इन रियायतोसे लाभ किसी हालतमे नही उठाना चाहिए। चार सौ छिहत्तर. पत्र : नारणदास गांधीको तुम्हारा पत्र मिला । गोसेवा-सघका जो पैसा खर्च हो गया उसे गया समझो। अब उसे मांगना योग्य नही लगता । अम्बालालभाई का मन बदल गया है। कही से भी निकाले, गोसेवा-सघका घाटा तो पूरा करना पड़ेगा न ? देखना, अब मावलंकर और रणछोडभाई क्या मदद कर सकते हैं। यदि वे चन्दा इकट्ठा करें तो संघकी रकममें से बहुत नही देना पड़ेगा। वाल-मन्दिर ओर कुमार-मन्दिर शालाके ही अंग है न ? क्या इन दोनोका उपयोग नही है ? हरिलालके विषयमें जो कुछ तुमने बताया वह समझ गया । मै यहाँ स्वतन्त्र रूपसे नही रहता। जमनालालजीके घरमे भी उसे नहीं रखा जा सकता। इसलिए यदि वह तैयार हो जाये और नियमोका पालन करने लगे तो उसका वही रहना ठीक जान पड़ता है। मेरा खयाल है कि चरखा- संघ और ग्रामोद्योग-सघके दफ्तर एकसाथ नही रह सकते । ग्रामोद्योग-सघमें तो बहुत सी तफसीले आ जायेगी, इसलिए फिलहाल तो इन दोनोंका अलग रहना ही ठीक लगता है। काम तो एक-दूसरेकी पूर्ति स्वरूप ही होगा ग्रामोद्योगका केन्द्र वर्धा ही होगा, ऐसा मुझे लगता है। तुमने जब मुझे पत्र लिखा तब तुम्हे कदाचित् मेरा वह पत्र नही मिला होगा जिसमे मैंने पूछा है कि क्या तुम्हे वहाँसे छुट्टी मिल सकती है ? एक. देखिए " पत्र : गणेश वासुदेव मावलंकरको पाँच, बीस नवंबर एक हज़ार नौ सौ चौंतीस।
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लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का नाम बदला जा चुका है। अब इसे उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही इस रेल कॉर्पोरेशन में भर्तियों की भी जानकारी दी गई है।
दरअसल लखनऊ मेट्रो के संबंध में दिल्ली में सोमवार को बोर्ड की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय शहरी आवास सचिव ने की। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की इस बोर्ड बैठक में कानपुर और आगरा मेट्रो के निर्माण के लिए इंजीनियरों की भर्ती का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं के लिए करीब 250 इंजीनियरों की जरूरत है।
बैठक में बोर्ड ने इंजीनियरों की भर्ती के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। साथ ही लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन को इसके लिए जल्द ही विज्ञापन जारी करने और भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया है।
इस संबंध में लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि अभी निर्माण से जुड़े इंजीनियरों की ही भर्ती होगी। इसमें अवर अभियंता, सहायक अभियंता, सहायक प्रबंधक, उप महाप्रबंधक जैसे पदों पर भर्तियां की जाएंगी। फिर जब निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, तब मेट्रो के संचालन से जुड़े तकनीकी अधिकारियों, इंजीनियरों व कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
जहां तक लखनऊ मेट्रो का नाम बदलने की बात है, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने जून 2019 में ही लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। लेकिन केंद्र की मंजूरी न मिलने के कारण नाम नहीं बदल पा रहा था। अब लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के कार्यालय से नाम में संशोधन कराएगा।
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लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का नाम बदला जा चुका है। अब इसे उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही इस रेल कॉर्पोरेशन में भर्तियों की भी जानकारी दी गई है। दरअसल लखनऊ मेट्रो के संबंध में दिल्ली में सोमवार को बोर्ड की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय शहरी आवास सचिव ने की। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की इस बोर्ड बैठक में कानपुर और आगरा मेट्रो के निर्माण के लिए इंजीनियरों की भर्ती का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं के लिए करीब दो सौ पचास इंजीनियरों की जरूरत है। बैठक में बोर्ड ने इंजीनियरों की भर्ती के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। साथ ही लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन को इसके लिए जल्द ही विज्ञापन जारी करने और भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया है। इस संबंध में लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि अभी निर्माण से जुड़े इंजीनियरों की ही भर्ती होगी। इसमें अवर अभियंता, सहायक अभियंता, सहायक प्रबंधक, उप महाप्रबंधक जैसे पदों पर भर्तियां की जाएंगी। फिर जब निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, तब मेट्रो के संचालन से जुड़े तकनीकी अधिकारियों, इंजीनियरों व कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। जहां तक लखनऊ मेट्रो का नाम बदलने की बात है, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने जून दो हज़ार उन्नीस में ही लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। लेकिन केंद्र की मंजूरी न मिलने के कारण नाम नहीं बदल पा रहा था। अब लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के कार्यालय से नाम में संशोधन कराएगा।
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२९. 'विधिरत्यन्तमप्राप्तौ ।' - तन्त्रवार्तिक, १॥२॥३४ ।
३०. 'प्रमाणान्तरेणाप्राप्तस्य प्रापको विधिरपूर्वविधिः । - अर्थसंग्रह, पृ० ९३ । ३१ 'नियमः पाक्षिके सति ।' -तन्त्रवात्तिक, १२ १३४ ।
३२ नानासाधनसाध्य क्रियायामेकसाधन प्राप्ताव प्राप्तस्यापरसाधनस्य प्रापको विधिनियमविधिः ।' -अर्थसंग्रह, पृ० ९२-९३ ।
३३ 'उभयोश्च युगपत्प्राप्तावितव्यावृत्तिपरो विधिः परिसङख्याविधिः ।
--उपरिवत्, पृ० ९४ ।
३४. अर्थसंग्रह स० डॉ० जी० थीबो, पृ० १८, चौखम्बा अमरभारती प्रकाशन,
वाराणसी, सन् १९७४ ई० ।
३५. अर्थसग्रह, 'अर्थालोक' - संस्कृतटीका सहित : सं० डॉ० वाचस्पति उपाध्याय, पृ० १६३, चौखम्बा ओरियण्टालिया, वाराणसी, सन् १९७७ ई० ।
4 संस्कृत विभाग, वनस्थली विद्यापीठ वनस्थली (राजस्थान)
महाभाष्य : प्राचीनतम श्रेष्ठ गद्यग्रन्थ
"पातंजल महाभाष्य संस्कृत व्याकरण का अत्यन्त प्रमाणभूत मूलग्रन्थ है । संस्कृत साहित्य की विपुल ग्रन्थराशि मे, ब्राह्मणो और आरण्यको को छोड़कर, यही प्राचीनतम श्रेष्ठ गद्यग्रन्थ माना जाता है । संस्कृत मे प्रत्येक शास्त्र पर सामान्यतया पाँच प्रकार के ग्रन्थ मिलते हैं सूत्र, वृत्ति, भाष्य, वार्तिक और टीका । इनमे सून अत्यन्त संक्षिप्त, असन्दिग्ध, सारवान् और प्रामाणिक होते है। वात्तिक ग्रन्थो मे सूत्रो की उक्त, अनुक्त और दुरुक्त वातो का विवेचन किया जाता है तथा भाष्य मे सूत्रानुसारी शब्दो के द्वारा सूनार्थ-चिन्तन के साथ-साथ बहुत कुछ मौलिक विवेचन भी रहता है। व्याकरण -शास्त्र मे सूत्रकार पाणिनि, वात्तिककार कात्यायन और भाष्यकार पतंजलि को सयुक्त रूप से 'मुनित्रय' कहते हैं और इन्ही तीन पुष्ट स्तम्भो पर आघृत होने के कारण संस्कृत व्याकरण 'त्रिमुनि व्याकरण' कहलाता है ।
4 डॉ० प्रभुदयाल अग्निहोत्री : 'पतंजलिकालीन भारत'
'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' : नाम-निरूपण
डॉ० श्रीधर वासुदेव सोहोनी
कविकुलगुरु कालिदास के विश्वविख्यात नाटक के तीन नाम देखने में आते हैंः १. 'अभिज्ञानशकुन्तला' २. 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' और ३. 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' । इस अनुपम कृति के तीन भिन्न नाम रखना विश्वकवि के मन मे था ही नहीं, यह कहने की आवश्यकता नहीं है । इनमे मूल नाम केवल एक ही था । अव प्रश्न उठता है कि वह कौन-सा नाम था । कालिदास की कविता का परिचय पाश्चात्त्य जगत् के विद्वानों में दो शतियों से है । इस नाटक के जो अनुवाद वहाँ प्रसिद्ध हुए, अधिकांश 'अभिज्ञानशकुन्तला' नाम से हुए; क्योंकि तब पूर्व भारत में आंग्ल राज्यसत्ता शासन करती थी, जहाँ वह नाम प्रचलित था । 'अभिज्ञानशकुन्तला' का अर्थ इस प्रकार है : 'अभिज्ञानेन स्मृता परिगृहोता शकुन्तला ।' कालिदास जैसे अत्यन्त प्रतिभाशाली सरस्वतीपुत्र ने शकुन्तला के द्वारा, अखिल संसार के लिए नारी के सौन्दर्य की, और उससे सम्बद्ध सम्पूर्ण कोमल भावों की जो कल्पना रसिकों के सामने प्रस्तुत को उसको ध्यान में रखते हुए इस नाट्यकृति मे दुष्यन्त के द्वारा शकुन्तला का अभिज्ञान एक मुख्य विन्दु माना जा सकता है । इस नाट्यकृति का नाम, 'अभिज्ञान' और 'शकुन्तला', इन दो शब्दों को जोड़कर रखना, पाश्चात्त्य जगत् में भी बौचित्यपूर्ण माना गया है । उसके अनुकरण में, इस देश में भी, नाटक के इसी नाम को कुछ मात्रा में प्रसिद्धि मिली; और आश्चर्य नही कि जहाँ दाक्षिण्य भाव का दृष्टिकोण अधिकाधिक रूढ होने लगा, वहाँ नाटक के नाम मे, 'शकुन्तला' को ही प्राधान्य देना लोगों ने आवश्यक समझा विशेषत, विश्वकवि कालिदास समस्त नारी-जगत् की ओर दाक्षिण्य भाव से प्रेरित होकर देखते थे तथा शृंगार रस के वे अद्वितीय प्रवतंक थे, इत्यादि कल्पनाएँ प्रचलित होने लगी ।
इधर कुछ विद्वानो ने केवल संस्कृत व्याकरण के आधार पर अपना यह अभिप्राय स्थापित करने की चेष्टा की है कि विश्वकवि के द्वारा प्रदत्त नाटक-नाम, 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' ही था । 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' की व्युत्पत्ति को तीन प्रकार से उपस्थापित किया जा सकता है : १. 'अभिज्ञानेन स्मृता परिगृहीता शकुन्तला अभेदोपचारात् तदाख्यं नाटकम् ; २. 'अभिज्ञानं च शकुन्तला च अमेदोपचारात् तदास्यं नाटकम्' और ३. 'अभिज्ञानं शकुन्तलायाः यस्मिन् नाटके तद् अभिज्ञानशकुन्तलम् । स्वर्गीय श्रीमोरेश्वर रामचन्द्र काले तथा प्राध्यापक सुशीलचन्द्र रे महोदय ने नाटक की अपनी आवृत्तियों में इसी नाम का समर्थन किया है। श्रीकाले 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' के सम्बन्ध में इस प्रकार टिप्पणी
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उनतीस. 'विधिरत्यन्तमप्राप्तौ ।' - तन्त्रवार्तिक, एक॥दो॥चौंतीस । तीस. 'प्रमाणान्तरेणाप्राप्तस्य प्रापको विधिरपूर्वविधिः । - अर्थसंग्रह, पृशून्य तिरानवे । इकतीस 'नियमः पाक्षिके सति ।' -तन्त्रवात्तिक, बारह एक सौ चौंतीस । बत्तीस नानासाधनसाध्य क्रियायामेकसाधन प्राप्ताव प्राप्तस्यापरसाधनस्य प्रापको विधिनियमविधिः ।' -अर्थसंग्रह, पृशून्य बानवे-तिरानवे । तैंतीस 'उभयोश्च युगपत्प्राप्तावितव्यावृत्तिपरो विधिः परिसङख्याविधिः । --उपरिवत्, पृशून्य चौरानवे । चौंतीस. अर्थसंग्रह सशून्य डॉशून्य जीशून्य थीबो, पृशून्य अट्ठारह, चौखम्बा अमरभारती प्रकाशन, वाराणसी, सन् एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर ईशून्य । पैंतीस. अर्थसग्रह, 'अर्थालोक' - संस्कृतटीका सहित : संशून्य डॉशून्य वाचस्पति उपाध्याय, पृशून्य एक सौ तिरेसठ, चौखम्बा ओरियण्टालिया, वाराणसी, सन् एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर ईशून्य । चार संस्कृत विभाग, वनस्थली विद्यापीठ वनस्थली महाभाष्य : प्राचीनतम श्रेष्ठ गद्यग्रन्थ "पातंजल महाभाष्य संस्कृत व्याकरण का अत्यन्त प्रमाणभूत मूलग्रन्थ है । संस्कृत साहित्य की विपुल ग्रन्थराशि मे, ब्राह्मणो और आरण्यको को छोड़कर, यही प्राचीनतम श्रेष्ठ गद्यग्रन्थ माना जाता है । संस्कृत मे प्रत्येक शास्त्र पर सामान्यतया पाँच प्रकार के ग्रन्थ मिलते हैं सूत्र, वृत्ति, भाष्य, वार्तिक और टीका । इनमे सून अत्यन्त संक्षिप्त, असन्दिग्ध, सारवान् और प्रामाणिक होते है। वात्तिक ग्रन्थो मे सूत्रो की उक्त, अनुक्त और दुरुक्त वातो का विवेचन किया जाता है तथा भाष्य मे सूत्रानुसारी शब्दो के द्वारा सूनार्थ-चिन्तन के साथ-साथ बहुत कुछ मौलिक विवेचन भी रहता है। व्याकरण -शास्त्र मे सूत्रकार पाणिनि, वात्तिककार कात्यायन और भाष्यकार पतंजलि को सयुक्त रूप से 'मुनित्रय' कहते हैं और इन्ही तीन पुष्ट स्तम्भो पर आघृत होने के कारण संस्कृत व्याकरण 'त्रिमुनि व्याकरण' कहलाता है । चार डॉशून्य प्रभुदयाल अग्निहोत्री : 'पतंजलिकालीन भारत' 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' : नाम-निरूपण डॉशून्य श्रीधर वासुदेव सोहोनी कविकुलगुरु कालिदास के विश्वविख्यात नाटक के तीन नाम देखने में आते हैंः एक. 'अभिज्ञानशकुन्तला' दो. 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' और तीन. 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' । इस अनुपम कृति के तीन भिन्न नाम रखना विश्वकवि के मन मे था ही नहीं, यह कहने की आवश्यकता नहीं है । इनमे मूल नाम केवल एक ही था । अव प्रश्न उठता है कि वह कौन-सा नाम था । कालिदास की कविता का परिचय पाश्चात्त्य जगत् के विद्वानों में दो शतियों से है । इस नाटक के जो अनुवाद वहाँ प्रसिद्ध हुए, अधिकांश 'अभिज्ञानशकुन्तला' नाम से हुए; क्योंकि तब पूर्व भारत में आंग्ल राज्यसत्ता शासन करती थी, जहाँ वह नाम प्रचलित था । 'अभिज्ञानशकुन्तला' का अर्थ इस प्रकार है : 'अभिज्ञानेन स्मृता परिगृहोता शकुन्तला ।' कालिदास जैसे अत्यन्त प्रतिभाशाली सरस्वतीपुत्र ने शकुन्तला के द्वारा, अखिल संसार के लिए नारी के सौन्दर्य की, और उससे सम्बद्ध सम्पूर्ण कोमल भावों की जो कल्पना रसिकों के सामने प्रस्तुत को उसको ध्यान में रखते हुए इस नाट्यकृति मे दुष्यन्त के द्वारा शकुन्तला का अभिज्ञान एक मुख्य विन्दु माना जा सकता है । इस नाट्यकृति का नाम, 'अभिज्ञान' और 'शकुन्तला', इन दो शब्दों को जोड़कर रखना, पाश्चात्त्य जगत् में भी बौचित्यपूर्ण माना गया है । उसके अनुकरण में, इस देश में भी, नाटक के इसी नाम को कुछ मात्रा में प्रसिद्धि मिली; और आश्चर्य नही कि जहाँ दाक्षिण्य भाव का दृष्टिकोण अधिकाधिक रूढ होने लगा, वहाँ नाटक के नाम मे, 'शकुन्तला' को ही प्राधान्य देना लोगों ने आवश्यक समझा विशेषत, विश्वकवि कालिदास समस्त नारी-जगत् की ओर दाक्षिण्य भाव से प्रेरित होकर देखते थे तथा शृंगार रस के वे अद्वितीय प्रवतंक थे, इत्यादि कल्पनाएँ प्रचलित होने लगी । इधर कुछ विद्वानो ने केवल संस्कृत व्याकरण के आधार पर अपना यह अभिप्राय स्थापित करने की चेष्टा की है कि विश्वकवि के द्वारा प्रदत्त नाटक-नाम, 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' ही था । 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' की व्युत्पत्ति को तीन प्रकार से उपस्थापित किया जा सकता है : एक. 'अभिज्ञानेन स्मृता परिगृहीता शकुन्तला अभेदोपचारात् तदाख्यं नाटकम् ; दो. 'अभिज्ञानं च शकुन्तला च अमेदोपचारात् तदास्यं नाटकम्' और तीन. 'अभिज्ञानं शकुन्तलायाः यस्मिन् नाटके तद् अभिज्ञानशकुन्तलम् । स्वर्गीय श्रीमोरेश्वर रामचन्द्र काले तथा प्राध्यापक सुशीलचन्द्र रे महोदय ने नाटक की अपनी आवृत्तियों में इसी नाम का समर्थन किया है। श्रीकाले 'अभिज्ञानशकुन्तलम्' के सम्बन्ध में इस प्रकार टिप्पणी
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Ropin 0.5 Injection 20 ml डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई इंजेक्शन में मिलती है। यह दवाई खासतौर से एनेस्थीसिया के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Ropin 0.5 Injection 20 ml को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Ropin 0.5 Injection 20 ml की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है।
Ropin 0.5 Injection 20 ml के कुछ अन्य नुकसान भी हैं जो साइड इफेक्ट के खंड में लिखे गए हैं। Ropin 0.5 Injection 20 ml के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें।
यह भी जानना जरूरी है कि Ropin 0.5 Injection 20 ml का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर सुरक्षित है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए हल्का है। इसके अतिरिक्त Ropin 0.5 Injection 20 ml का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Ropin 0.5 Injection 20 ml से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है।
ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Ropin 0.5 Injection 20 ml न लें।
Ropin 0.5 Injection 20 ml के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है।
ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Ropin 0.5 Injection 20 ml लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ropin 0.5 Injection 20 ml की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ropin 0.5 Injection 20 ml की खुराक अलग हो सकती है।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
प्रेग्नेंट महिलाएं भी Ropin का सेवन कर सकती हैं।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
डॉक्टर की सलाह के बिना Ropin का सेवन किया जा सकता। स्तनपान करवाने वाली महिला पर इसका विपरीत असर बहुत हल्का ही होता है।
Ropin 0.5 Injection 20 ml का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Ropin के इस्तेमाल से किडनी को किसी प्रकार से हानि नहीं होती है।
Ropin 0.5 Injection 20 ml का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Ropin से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है।
क्या ह्रदय पर Ropin 0.5 Injection 20 ml का प्रभाव पड़ता है?
कुछ मामलों में Ropin हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml आदत या लत बन सकती है?
नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Ropin 0.5 Injection 20 ml को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
नहींं, Ropin 0.5 Injection 20 ml को लने के बाद आप इस तरह का काम नहीं कर पाएंगे।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml को लेना सुरखित है?
हां, डॉक्टर के कहने पर आप Ropin 0.5 Injection 20 ml को खा सकते हैं।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ropin 0.5 Injection 20 ml इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, Ropin 0.5 Injection 20 ml दिमागी विकारों के इलाज में सक्षम नहीं है।
क्या Ropin 0.5 Injection 20 ml को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
खाने के साथ Ropin 0.5 Injection 20 ml को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
जब Ropin 0.5 Injection 20 ml ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Ropin 0.5 Injection 20 ml का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा।
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Naropin (ropivacaine HCl)
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Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई इंजेक्शन में मिलती है। यह दवाई खासतौर से एनेस्थीसिया के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस दवाई Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को अन्य दिक्कतों में भी काम लिया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर के कुछ अन्य नुकसान भी हैं जो साइड इफेक्ट के खंड में लिखे गए हैं। Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। यह भी जानना जरूरी है कि Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर सुरक्षित है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए हल्का है। इसके अतिरिक्त Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का लिवर, हृदय और किडनी पर क्या असर होता है इस बारे में नीचे Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर से जुड़ी चेतावनी के सेक्शन में चर्चा की गई है। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर न लें। Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर की खुराक अलग हो सकती है। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? प्रेग्नेंट महिलाएं भी Ropin का सेवन कर सकती हैं। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? डॉक्टर की सलाह के बिना Ropin का सेवन किया जा सकता। स्तनपान करवाने वाली महिला पर इसका विपरीत असर बहुत हल्का ही होता है। Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Ropin के इस्तेमाल से किडनी को किसी प्रकार से हानि नहीं होती है। Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का जिगर पर क्या असर होता है? Ropin से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है। क्या ह्रदय पर Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का प्रभाव पड़ता है? कुछ मामलों में Ropin हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को लने के बाद आप इस तरह का काम नहीं कर पाएंगे। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टर के कहने पर आप Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को खा सकते हैं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर दिमागी विकारों के इलाज में सक्षम नहीं है। क्या Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने के साथ Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर को लेना आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है। जब Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Ropin शून्य.पाँच Injection बीस मिलीलीटर का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Naropin
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हुगली लोकसभा सीट कभी सीपीएम का गढ़ हुआ करती थी. इस सीट से कांग्रेस ने सिर्फ एक बार जीत हासिल की है. जबकि 2009 से इस सीट पर टीएमसी का कब्जा है. 2009 में इस सीट से टीएमसी की डॉ रत्ना डे ने विजय हासिल की. 2014 के चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बचाए रखी. टीएमसी ने 2019 के चुनाव में एक बार फिर उनपर भरोसा जताया है. बीजेपी ने इस सीट से लॉकेट चटर्जी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं 2014 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रदीप साहा सीपीएम के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने प्रतुल चंद्रा साहा, बीएसपी ने विजय कुमार माहतो को अपना उम्मीदवार बनाया है. यहां मामला त्रिकोणीय लड़ाई का बन गया है.
2014 में इस सीट से टीएमसी के डॉ रत्ना डे ने जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के प्रदीप साहा को शिकस्त दी थी. डॉ रत्ना डे ने 6 लाख 14 हजार 312 वोट हासिल किए थे. वहीं सीपीएम के प्रदीप साहा को 4 लाख 25 हजार 228 वोट मिले थे. बीजेपी के उम्मीदवार चंदन मित्रा इस सीट से तीसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें 2 लाख 21 हजार 271 वोट (16 फीसदी) मिले थे.
2009 के चुनाव से हुगली लोकसभा सीट का राजनीतिक समीकरण बदला था. सीपीएम के बरसों के राज को 2009 में टीएमसी की डॉ रत्ना डे ने खत्म कर डाला. 2009 के चुनाव में उऩ्होंने सीपीएम के रुपचंद पाल को हराया था.
1952 में हुए पहले चुनाव में जहां पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी हुगली लोकसभा सीट से अखिल भारतीय हिंदू महासभा के एनसी चटर्जी ने जीत हासिल की थी. इसके बाद के दो चुनावों (1957 और 1962) में सीपीआई के प्रोवत कर ने जीत हासिल की. 1967 के चुनाव में यहां से सीपीएम के बिजॉय कृष्ण मोदक सांसद चुने गए. 1971 और 1977 के चुनावों में भी बिजॉय कृष्ण मोदक ने अपनी जीत बरकरार रखी. 1980 के चुनाव में सीपीएम के रुपचंद पाल ने जीत हासिल की. 1984 के चुनाव में पहली बार इस सीट से कांग्रेस को सफलता मिली और इंदुमति भट्टाचार्य यहां से सांसद बनीं.
1989 से लेकर 2004 तक लगातार इस सीट से सीपीएम के टिकट पर रुपचंद पाल जीतते आए. लगातार 20 वर्षों तक रुपचंद पाल ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 2009 में ये सीट टीएमसी के खाते में गई. तबसे इस सीट से टीएमसी का कब्जा बरकरार है.
हुगली संसदीय क्षेत्र में ही सिंगूर आता है, जहां की नैनो कार परियोजना को भारी विरोध के बाद वहां से हटा लिया गया था. सिंगूर एक विधानसभा सीट भी है. आज भी यहां आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें हैं- जिनमें सिंगूर, चंदननगर, चुंचुड़ा, बालागढ़, पांडुआ, सप्तग्राम और धनियाखाली शामिल हैं.
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कांग्रेस के गढ़ मालदा दक्षिण में क्यों बीजेपी को है कमल खिलने की उम्मीद?
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हुगली लोकसभा सीट कभी सीपीएम का गढ़ हुआ करती थी. इस सीट से कांग्रेस ने सिर्फ एक बार जीत हासिल की है. जबकि दो हज़ार नौ से इस सीट पर टीएमसी का कब्जा है. दो हज़ार नौ में इस सीट से टीएमसी की डॉ रत्ना डे ने विजय हासिल की. दो हज़ार चौदह के चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बचाए रखी. टीएमसी ने दो हज़ार उन्नीस के चुनाव में एक बार फिर उनपर भरोसा जताया है. बीजेपी ने इस सीट से लॉकेट चटर्जी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं दो हज़ार चौदह के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रदीप साहा सीपीएम के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने प्रतुल चंद्रा साहा, बीएसपी ने विजय कुमार माहतो को अपना उम्मीदवार बनाया है. यहां मामला त्रिकोणीय लड़ाई का बन गया है. दो हज़ार चौदह में इस सीट से टीएमसी के डॉ रत्ना डे ने जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के प्रदीप साहा को शिकस्त दी थी. डॉ रत्ना डे ने छः लाख चौदह हजार तीन सौ बारह वोट हासिल किए थे. वहीं सीपीएम के प्रदीप साहा को चार लाख पच्चीस हजार दो सौ अट्ठाईस वोट मिले थे. बीजेपी के उम्मीदवार चंदन मित्रा इस सीट से तीसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें दो लाख इक्कीस हजार दो सौ इकहत्तर वोट मिले थे. दो हज़ार नौ के चुनाव से हुगली लोकसभा सीट का राजनीतिक समीकरण बदला था. सीपीएम के बरसों के राज को दो हज़ार नौ में टीएमसी की डॉ रत्ना डे ने खत्म कर डाला. दो हज़ार नौ के चुनाव में उऩ्होंने सीपीएम के रुपचंद पाल को हराया था. एक हज़ार नौ सौ बावन में हुए पहले चुनाव में जहां पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी हुगली लोकसभा सीट से अखिल भारतीय हिंदू महासभा के एनसी चटर्जी ने जीत हासिल की थी. इसके बाद के दो चुनावों में सीपीआई के प्रोवत कर ने जीत हासिल की. एक हज़ार नौ सौ सरसठ के चुनाव में यहां से सीपीएम के बिजॉय कृष्ण मोदक सांसद चुने गए. एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर और एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर के चुनावों में भी बिजॉय कृष्ण मोदक ने अपनी जीत बरकरार रखी. एक हज़ार नौ सौ अस्सी के चुनाव में सीपीएम के रुपचंद पाल ने जीत हासिल की. एक हज़ार नौ सौ चौरासी के चुनाव में पहली बार इस सीट से कांग्रेस को सफलता मिली और इंदुमति भट्टाचार्य यहां से सांसद बनीं. एक हज़ार नौ सौ नवासी से लेकर दो हज़ार चार तक लगातार इस सीट से सीपीएम के टिकट पर रुपचंद पाल जीतते आए. लगातार बीस वर्षों तक रुपचंद पाल ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. दो हज़ार नौ में ये सीट टीएमसी के खाते में गई. तबसे इस सीट से टीएमसी का कब्जा बरकरार है. हुगली संसदीय क्षेत्र में ही सिंगूर आता है, जहां की नैनो कार परियोजना को भारी विरोध के बाद वहां से हटा लिया गया था. सिंगूर एक विधानसभा सीट भी है. आज भी यहां आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें हैं- जिनमें सिंगूर, चंदननगर, चुंचुड़ा, बालागढ़, पांडुआ, सप्तग्राम और धनियाखाली शामिल हैं. ये भी पढ़ेंः कांग्रेस के गढ़ मालदा दक्षिण में क्यों बीजेपी को है कमल खिलने की उम्मीद? .
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IPS Sagar Singh Kalsi: चप्पे-चप्पे पर नजर, 650 से ज्यादा गुमशुदा लोगों की कर चुके हैं तलाश। Delhi करीब 650 से ज्यादा गुमशुदा बच्चों, बुजुर्गों को तलाशने के बाद उनके परिवार वालों तक मिलवाने वाले नॉर्थ दिल्ली के डीसीपी आईपीएस सागर सिंह कलसी से News18 संवाददाता शंकर आनंद के खास बातचीत. .
चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
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IPS Sagar Singh Kalsi: चप्पे-चप्पे पर नजर, छः सौ पचास से ज्यादा गुमशुदा लोगों की कर चुके हैं तलाश। Delhi करीब छः सौ पचास से ज्यादा गुमशुदा बच्चों, बुजुर्गों को तलाशने के बाद उनके परिवार वालों तक मिलवाने वाले नॉर्थ दिल्ली के डीसीपी आईपीएस सागर सिंह कलसी से Newsअट्ठारह संवाददाता शंकर आनंद के खास बातचीत. . चीन पर नरमी बरतने के लिए पुतिन बना रहे बाइडन पर दबाव?
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मेरठः उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक दर्दनाक हादसा देखने को मिला जहां एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली ने बाइक सवार को रौंद डाला. ट्रैक्टर बाइक सवार को कुचलते हुए फुटपाथ पर खड़ी कई गाड़ियों के ऊपर जा चढ़ी. यह पूरी घटना पास लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई. प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र के रोहटा रोड की है जहां एक बाइक सवार सड़क पार करने के लिए जैसे ही मुड़ा ठीक उसी वक्त एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्रॉली वहां से गुजरी और अचानक अनियंत्रित होकर सीधी जाने की बजाए सड़क किनारे खड़े इन बाइक सवारों पर जा चढ़ी.
अनियंत्रित ट्रेक्टर एक बाइक सवार को कुचलते हुए उसके ऊपर से गुजर गया. इस घटना के बीड इलाके में अफरा तफरी मच गई. राहगीरों ने घायल बाइक सवार को बिना समय गवाए अस्पताल में भर्ती कराया जहां युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है.
हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रेक्टर को अपने कब्जे में ले लिया है हालांकि चालक मौके से फरार हो गया जो कि फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.
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मेरठः उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक दर्दनाक हादसा देखने को मिला जहां एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली ने बाइक सवार को रौंद डाला. ट्रैक्टर बाइक सवार को कुचलते हुए फुटपाथ पर खड़ी कई गाड़ियों के ऊपर जा चढ़ी. यह पूरी घटना पास लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई. प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र के रोहटा रोड की है जहां एक बाइक सवार सड़क पार करने के लिए जैसे ही मुड़ा ठीक उसी वक्त एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्रॉली वहां से गुजरी और अचानक अनियंत्रित होकर सीधी जाने की बजाए सड़क किनारे खड़े इन बाइक सवारों पर जा चढ़ी. अनियंत्रित ट्रेक्टर एक बाइक सवार को कुचलते हुए उसके ऊपर से गुजर गया. इस घटना के बीड इलाके में अफरा तफरी मच गई. राहगीरों ने घायल बाइक सवार को बिना समय गवाए अस्पताल में भर्ती कराया जहां युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है. हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रेक्टर को अपने कब्जे में ले लिया है हालांकि चालक मौके से फरार हो गया जो कि फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.
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से सीखा है। इस के अजज़ा को मामूली समझकर इसको नज़र अन्दाज़ नहीं करना चाहिये। क्योंकि मामूली और कम क़ीमत चीज़ों में भी जब अल्लाह तआला का हुक्म हो जाता है तो ऐसी अज़ीम तासीर व ताकत पैदा हो जाती है कि हकीमों और डाक्टरों ने कभी इसको सोचा भी नहीं होगा। इस लिए मुसलमानों को चाहिये कि इस अज़ीम और मुफ़ीद गिज़ा को कभी कभी खुद भी खाते और मरीज़ों और ग़मज़दों को भी खिलाते रहें। चूँकि यह हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की महबूब व मरगूब गिज़ा है जिसको है आपने अपने घर के मरीजों को बारहा बतौर दवा के इस्तेमाल कराया है। लिहाज़ा जो मुसलमान तिब्बे नबवी के इस नुस्खे को बतौरे दवा या गिज़ा इस्तेमाल करेगा वह इन्शा अल्लाह तआला एक सुन्नत पर अमल करने की वजह से अजरे अज़ीम भी पायेगा । और उसके फवाइद व मुनाफेअ से भी इन्शा अल्लाह तआला ज़रुर फैज़ याब होगा।
खुराक में सादगी
हदीस 1 :- हज़रत अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं कि न नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने ख़ान पर खाया न छोटी छोटी प्यालियों में खाया न आपने कभी चपाती खायी। कुछ लोगों ने हज़रत कतादा से पूछा कि (दौरे रिसालात में) लोग किस चीज़ पर खाते थे ? तो आपने कहा कि चमड़े या कपड़े के दस्तरख्वान पर । ( मिश्कात जिल्द 2 सफा 363)
हदीस 2 :- हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी बेअसत से अपनी वफ़ात तक कभी मैदा नहीं देखा। और अपनी बेअसत से अपनी वफात तक छलनी नहीं देखी। तो किसी ने कहा कि आप लोग जौ का आटा बगैर छलनी में छना हुआ कैसे खाते थे? तो हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि हम जौं को चक्की में पीस लेते थे फिर उस पर फूँक मारा करते थे तो जो फँसियाँ उड़ने वाली हुआ करती थीं वह उड़ जाती थीं। और जो बाकी रह जाती थीं हम उसको गूँध कर और पका कर खा लिया करते थे ।
हज़रत सहल बिन सअद :- हदीस के रावी हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु अन्सार के क़बीला बनी सअद से ख़ानदानी
• að ve kad.
तअल्लुक रखते थे। उनकी कुन्नियत अबुल अब्बास है। पहले इनका नाम हज़न था। जिसको बदल कर हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इनका नाम सहल रख दिया था। वफाते नबवी के वक्त इनकी उम्र पन्द्रह बरस की थी। 91 हिजरी में मदीना मुनव्वरा के अन्दर इनकी वफ़ात हुई। इनके बाद मदीना मुनव्वरा में कोई सहाबी बाक़ी न रहा। इमाम ज़हरी और इमाम अबू हाज़िम इनके शगिर्दो की फेहरिस्त में बहुत मशहूर और नामवर हैं। इनके फ़रज़न्द अब्बास भी उन शागिर्दो में हैं।
शरहे हदीस :- जमाना - ए - रिसालत में सहाबा किराम और खुद रहमते आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम खुराक व पोशाक वगैरह के मामले में बहुत ही सादगी पसन्द थे । और इन पाक नुफूस की मुक़द्दस ज़िन्दगी मालदारों और दुनिया दारों के तकल्लुफात और इसराफ की आलाइशों से कभी दाग़दार नहीं हुआ करती थी। चुनाँचे हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कभी बारीक आटे और मैदा का इस्तेमाल तो बड़ी चीज़ है। आपने अपनी हयाते मुक़द्दसा में कभी मैदा देखा तक नहीं। हमेशा जौ का आटा बिगैर छलनी में छाने हुए उसकी मोटी मोटी रोटियाँ तनावुल फ़रमाते रहे। हज़रत सहल बिन सअद सहाबी रवियल्लाहु तआला अन्हु का बयान है कि आटे को छान कर उसकी रोटी पकवाना तो कुज़ा ? हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने तो अपनी ज़िन्दगी भर में कभी छलनी देखी ही नहीं। क्योंकि उस मुबारक ज़माने का आम तौर पर यही दस्तूर था कि जौ के आटे पर फूँक मार मार कर बड़ी . बड़ी फँसियों को उड़ा दिया करते थे। फिर उस आटे की मोटी मोटी रोटियाँ पकवा कर खा लिया करते थे। हज़रत अनस सहाबी का बयान है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी हयाते मुबारका में कभी भी चपाती नही खायीं। और खाने पीने में भी यह सादगी कि न कभी सीनी को टेबिल पर रख कर खाना खाते न प्यालों और प्यालियों में सालन 1. रख कर तनावुल फरमाते बल्कि चमड़े या कपड़े का दस्तरख्वान ज़मीन पर बिछा कर उसके ऊपर खाना रख कर खा लिया करते थे। (मिशकात जि2 स364) उ... पतली पतली चपातियाँ, पराठे, रोगिनी नान, शीर माल, बाक़र ख़ानियाँ पाउ रोटियाँ वगैरह और गोश्त वगैरह के किस्म किस्म के पकवान यह सब हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के बाद की पुर तकल्लुफ़ ईजादात https://t.me/Ahlesunnat HindiBooks
। जो ऐश पसन्द मालदारों और इसराफ परस्त दुनियादारों ने अपने काम व दहन की लज्ज़तों और ज़बान के चटखारों के लिए तैयार किये हैं। वरना हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मुक़द्दस दौर में जौ के बे छने हुए आर्ट, मोटी मोटी रोटियाँ और उबले हुए गोश्त यह आम तौर पर उस ज़माने की बेहतरीन ग़िज़ा और खुराक थी। मुर्ग या बकरी को मुसल्लम तन्दूर में भून कर निहायत पुर तकल्लुफ़ मसालों और घी चर्बी वगैरह से मुरग्गन बना कर खाना । इसका रिवाज हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मुक़द्दस दौर में बिल्कुल था ही नहीं ।
यह और बात है कि नफीस ग़िज़ाओं और उम्दा उम्दा खानों को हुजूर है सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने न मना फ़रमाया है, न यह इस्लाम में नाजाइज़ है। बल्केि माले हलाल से नेक नीयती के साथ उम्दा से उम्दा खाना और नफ़ीस से नफ़ीस तर ग़िज़ा और खुराक हर मुसलमान के लिए से मुबाह व जाइज़ है। मगर फिर भी मुसलमान को यह ध्यान रखना चाहिये कि सहाबा किराम और हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खुराक व पोशाक और ग़िज़ाओं में कैसी सादगी थी। और आज हम लोगों की गिजाओं में कितने तकल्लुफ़ात हैं कि कई किस्मों के सालन हमारे दस्तरख्वान पर होते हैं फिर भी हम नाक भौं सिकोड़ते रहते हैं कि फलाँ सालन मज़ेदार नहीं हुआ। फलाँ पकवान फीका रह गया। कोरमे में घी कम रहा वगैरह वगैरह। हमें गौर करना चहिये कि हमारे असलाफ़ कैसे थे और हम क्या हो गये हैं ? काश हम मुसलमान अपनी गिज़ाओं में कुछ सादगी बरत कर अपने मुफ़लिस और गरीब पड़ोसियों की ख़बर गीरी करते तो हमारा मुआशरा 'कितना बेहतरीन हो जाता। लेकिन खुद गर्ज़ और नफ़्स परवर मुसलमानों से भला इसकी क्या उम्मीद की जा सकती है? अफसोस ! ऐ बसा आरजू कि ख़ाक शुदा । मौला तआला नेक हिदायत फ़रमाये । आमीन।
खाने के बाद उँगलियों और बर्तन को चाटना
हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उँगलियों और रकाबी को चाट लेने का हुक्म फ़रमाया है। और फ़रमाया है कि तुम लोग नहीं जानते क्रि खाने के कौन से हिस्से में बरकत है।
हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह :- यह मशहूर सहाबी हैं इनकी कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह है और यह अन्सारी हैं इनसे बकस्रत हदीसें मरवी हैं। यह जंगे बदर और इसके बाद की इस्लामी लड़ाईयों में शरीके जिहाद रहे। अठारह जंगो में बड़े जोश और जवाँ मर्दी के साथ कुफ़्फ़ार से लड़ते रहे। शाम व मिश्र की लड़ाईयों में भी मुजाहिदीन के साथ शामिल रहे। आखिर उम्र में ना बीना हो गये थे। 74 हिजरी में मदीना मुनव्वरा के अन्दर चौरानवे बरस की उम्र पाकर विसाल फ़रमाया आपके शगिर्दो की फेहरिस्त बहुत तवील है।
शरहे हृदीस् :- इस मज़मून की दूसरी हदीसें भी हैं। चुनाँचे हज़रत कअब बिन मालिक रदियल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तीन उँगलियों से खाना तनावुल फरमाते थे और उँगलियों को पोंछने से पहले चाट लिया करते थे।
और हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहु तआला अन्हु की रिवायत में है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब तुम खाना खाओ तो अपने हाथ को उस वक्त तक न पोंछा करो जब तक कि अपनी उँगलियो को या तो खुद चाट लो या किसी दूसरे को चटा दो।
और हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु की दूसरी रिवायत में यूँ भी वारिद हुआ है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि
"तुम लोग खाने के लिए बैठते हो तो उस वक़्त शैतान वहाँ हाज़िर हो जाता है तो अगर तुम्हारा कोई लुकमा हाथ से छूट कर गिर पड़े तो उसको उठाकर और साफ करके खा लिया करो। और उस लुकमे को शैतान के लिए न छोड़ दिया करो। और जब तुम खाने से फारिग हो चुको
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से सीखा है। इस के अजज़ा को मामूली समझकर इसको नज़र अन्दाज़ नहीं करना चाहिये। क्योंकि मामूली और कम क़ीमत चीज़ों में भी जब अल्लाह तआला का हुक्म हो जाता है तो ऐसी अज़ीम तासीर व ताकत पैदा हो जाती है कि हकीमों और डाक्टरों ने कभी इसको सोचा भी नहीं होगा। इस लिए मुसलमानों को चाहिये कि इस अज़ीम और मुफ़ीद गिज़ा को कभी कभी खुद भी खाते और मरीज़ों और ग़मज़दों को भी खिलाते रहें। चूँकि यह हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की महबूब व मरगूब गिज़ा है जिसको है आपने अपने घर के मरीजों को बारहा बतौर दवा के इस्तेमाल कराया है। लिहाज़ा जो मुसलमान तिब्बे नबवी के इस नुस्खे को बतौरे दवा या गिज़ा इस्तेमाल करेगा वह इन्शा अल्लाह तआला एक सुन्नत पर अमल करने की वजह से अजरे अज़ीम भी पायेगा । और उसके फवाइद व मुनाफेअ से भी इन्शा अल्लाह तआला ज़रुर फैज़ याब होगा। खुराक में सादगी हदीस एक :- हज़रत अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं कि न नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने ख़ान पर खाया न छोटी छोटी प्यालियों में खाया न आपने कभी चपाती खायी। कुछ लोगों ने हज़रत कतादा से पूछा कि लोग किस चीज़ पर खाते थे ? तो आपने कहा कि चमड़े या कपड़े के दस्तरख्वान पर । हदीस दो :- हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी बेअसत से अपनी वफ़ात तक कभी मैदा नहीं देखा। और अपनी बेअसत से अपनी वफात तक छलनी नहीं देखी। तो किसी ने कहा कि आप लोग जौ का आटा बगैर छलनी में छना हुआ कैसे खाते थे? तो हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया कि हम जौं को चक्की में पीस लेते थे फिर उस पर फूँक मारा करते थे तो जो फँसियाँ उड़ने वाली हुआ करती थीं वह उड़ जाती थीं। और जो बाकी रह जाती थीं हम उसको गूँध कर और पका कर खा लिया करते थे । हज़रत सहल बिन सअद :- हदीस के रावी हज़रत सहल बिन सअद रदियल्लाहु तआला अन्हु अन्सार के क़बीला बनी सअद से ख़ानदानी • að ve kad. तअल्लुक रखते थे। उनकी कुन्नियत अबुल अब्बास है। पहले इनका नाम हज़न था। जिसको बदल कर हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इनका नाम सहल रख दिया था। वफाते नबवी के वक्त इनकी उम्र पन्द्रह बरस की थी। इक्यानवे हिजरी में मदीना मुनव्वरा के अन्दर इनकी वफ़ात हुई। इनके बाद मदीना मुनव्वरा में कोई सहाबी बाक़ी न रहा। इमाम ज़हरी और इमाम अबू हाज़िम इनके शगिर्दो की फेहरिस्त में बहुत मशहूर और नामवर हैं। इनके फ़रज़न्द अब्बास भी उन शागिर्दो में हैं। शरहे हदीस :- जमाना - ए - रिसालत में सहाबा किराम और खुद रहमते आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम खुराक व पोशाक वगैरह के मामले में बहुत ही सादगी पसन्द थे । और इन पाक नुफूस की मुक़द्दस ज़िन्दगी मालदारों और दुनिया दारों के तकल्लुफात और इसराफ की आलाइशों से कभी दाग़दार नहीं हुआ करती थी। चुनाँचे हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कभी बारीक आटे और मैदा का इस्तेमाल तो बड़ी चीज़ है। आपने अपनी हयाते मुक़द्दसा में कभी मैदा देखा तक नहीं। हमेशा जौ का आटा बिगैर छलनी में छाने हुए उसकी मोटी मोटी रोटियाँ तनावुल फ़रमाते रहे। हज़रत सहल बिन सअद सहाबी रवियल्लाहु तआला अन्हु का बयान है कि आटे को छान कर उसकी रोटी पकवाना तो कुज़ा ? हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने तो अपनी ज़िन्दगी भर में कभी छलनी देखी ही नहीं। क्योंकि उस मुबारक ज़माने का आम तौर पर यही दस्तूर था कि जौ के आटे पर फूँक मार मार कर बड़ी . बड़ी फँसियों को उड़ा दिया करते थे। फिर उस आटे की मोटी मोटी रोटियाँ पकवा कर खा लिया करते थे। हज़रत अनस सहाबी का बयान है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी हयाते मुबारका में कभी भी चपाती नही खायीं। और खाने पीने में भी यह सादगी कि न कभी सीनी को टेबिल पर रख कर खाना खाते न प्यालों और प्यालियों में सालन एक. रख कर तनावुल फरमाते बल्कि चमड़े या कपड़े का दस्तरख्वान ज़मीन पर बिछा कर उसके ऊपर खाना रख कर खा लिया करते थे। उ... पतली पतली चपातियाँ, पराठे, रोगिनी नान, शीर माल, बाक़र ख़ानियाँ पाउ रोटियाँ वगैरह और गोश्त वगैरह के किस्म किस्म के पकवान यह सब हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के बाद की पुर तकल्लुफ़ ईजादात https://t.me/Ahlesunnat HindiBooks । जो ऐश पसन्द मालदारों और इसराफ परस्त दुनियादारों ने अपने काम व दहन की लज्ज़तों और ज़बान के चटखारों के लिए तैयार किये हैं। वरना हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मुक़द्दस दौर में जौ के बे छने हुए आर्ट, मोटी मोटी रोटियाँ और उबले हुए गोश्त यह आम तौर पर उस ज़माने की बेहतरीन ग़िज़ा और खुराक थी। मुर्ग या बकरी को मुसल्लम तन्दूर में भून कर निहायत पुर तकल्लुफ़ मसालों और घी चर्बी वगैरह से मुरग्गन बना कर खाना । इसका रिवाज हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मुक़द्दस दौर में बिल्कुल था ही नहीं । यह और बात है कि नफीस ग़िज़ाओं और उम्दा उम्दा खानों को हुजूर है सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने न मना फ़रमाया है, न यह इस्लाम में नाजाइज़ है। बल्केि माले हलाल से नेक नीयती के साथ उम्दा से उम्दा खाना और नफ़ीस से नफ़ीस तर ग़िज़ा और खुराक हर मुसलमान के लिए से मुबाह व जाइज़ है। मगर फिर भी मुसलमान को यह ध्यान रखना चाहिये कि सहाबा किराम और हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खुराक व पोशाक और ग़िज़ाओं में कैसी सादगी थी। और आज हम लोगों की गिजाओं में कितने तकल्लुफ़ात हैं कि कई किस्मों के सालन हमारे दस्तरख्वान पर होते हैं फिर भी हम नाक भौं सिकोड़ते रहते हैं कि फलाँ सालन मज़ेदार नहीं हुआ। फलाँ पकवान फीका रह गया। कोरमे में घी कम रहा वगैरह वगैरह। हमें गौर करना चहिये कि हमारे असलाफ़ कैसे थे और हम क्या हो गये हैं ? काश हम मुसलमान अपनी गिज़ाओं में कुछ सादगी बरत कर अपने मुफ़लिस और गरीब पड़ोसियों की ख़बर गीरी करते तो हमारा मुआशरा 'कितना बेहतरीन हो जाता। लेकिन खुद गर्ज़ और नफ़्स परवर मुसलमानों से भला इसकी क्या उम्मीद की जा सकती है? अफसोस ! ऐ बसा आरजू कि ख़ाक शुदा । मौला तआला नेक हिदायत फ़रमाये । आमीन। खाने के बाद उँगलियों और बर्तन को चाटना हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी है कि नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उँगलियों और रकाबी को चाट लेने का हुक्म फ़रमाया है। और फ़रमाया है कि तुम लोग नहीं जानते क्रि खाने के कौन से हिस्से में बरकत है। हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह :- यह मशहूर सहाबी हैं इनकी कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह है और यह अन्सारी हैं इनसे बकस्रत हदीसें मरवी हैं। यह जंगे बदर और इसके बाद की इस्लामी लड़ाईयों में शरीके जिहाद रहे। अठारह जंगो में बड़े जोश और जवाँ मर्दी के साथ कुफ़्फ़ार से लड़ते रहे। शाम व मिश्र की लड़ाईयों में भी मुजाहिदीन के साथ शामिल रहे। आखिर उम्र में ना बीना हो गये थे। चौहत्तर हिजरी में मदीना मुनव्वरा के अन्दर चौरानवे बरस की उम्र पाकर विसाल फ़रमाया आपके शगिर्दो की फेहरिस्त बहुत तवील है। शरहे हृदीस् :- इस मज़मून की दूसरी हदीसें भी हैं। चुनाँचे हज़रत कअब बिन मालिक रदियल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तीन उँगलियों से खाना तनावुल फरमाते थे और उँगलियों को पोंछने से पहले चाट लिया करते थे। और हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहु तआला अन्हु की रिवायत में है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब तुम खाना खाओ तो अपने हाथ को उस वक्त तक न पोंछा करो जब तक कि अपनी उँगलियो को या तो खुद चाट लो या किसी दूसरे को चटा दो। और हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु की दूसरी रिवायत में यूँ भी वारिद हुआ है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि "तुम लोग खाने के लिए बैठते हो तो उस वक़्त शैतान वहाँ हाज़िर हो जाता है तो अगर तुम्हारा कोई लुकमा हाथ से छूट कर गिर पड़े तो उसको उठाकर और साफ करके खा लिया करो। और उस लुकमे को शैतान के लिए न छोड़ दिया करो। और जब तुम खाने से फारिग हो चुको
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बॉलवुड के माचो मैन संजय दत्त ने उन सभी कोरोना वारियर्स को धन्यवाद दिया है जो कोरोना महामारी के समय अपने जीवन को खतरे में डाल कर दिन-रात सेवा में लगे हैं।
मुंबईः बॉलवुड के माचो मैन संजय दत्त ने उन सभी कोरोना वारियर्स को धन्यवाद दिया है जो कोरोना महामारी के समय अपने जीवन को खतरे में डाल कर दिन-रात सेवा में लगे हैं।
बॉलीवुड सेलेब्स सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक रह रहे हैं। संजय दत्त भी लॉकडाउन में सोशल मीडिया पर जागरूकता का संदेश और सतर्कता पैदा करने की कोशिश कर रहें हैं। वह अपने फॉलोअर्स से सामाजिक दूरी बनाने और सुरक्षित एवं स्वस्थ रहने के लिए आग्रह कर रहे हैं।
संजय दत्त ने इस महामारी से लड़ने वाले व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, "मैं सभी पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, फ्रंट-लाइन वर्कर्स, एसेंशियल कमोडिटी प्रोवाइडर को धन्यवाद देना चाहता हूं जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। हमें सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं। "(वार्ता)
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बॉलवुड के माचो मैन संजय दत्त ने उन सभी कोरोना वारियर्स को धन्यवाद दिया है जो कोरोना महामारी के समय अपने जीवन को खतरे में डाल कर दिन-रात सेवा में लगे हैं। मुंबईः बॉलवुड के माचो मैन संजय दत्त ने उन सभी कोरोना वारियर्स को धन्यवाद दिया है जो कोरोना महामारी के समय अपने जीवन को खतरे में डाल कर दिन-रात सेवा में लगे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक रह रहे हैं। संजय दत्त भी लॉकडाउन में सोशल मीडिया पर जागरूकता का संदेश और सतर्कता पैदा करने की कोशिश कर रहें हैं। वह अपने फॉलोअर्स से सामाजिक दूरी बनाने और सुरक्षित एवं स्वस्थ रहने के लिए आग्रह कर रहे हैं। संजय दत्त ने इस महामारी से लड़ने वाले व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, "मैं सभी पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, फ्रंट-लाइन वर्कर्स, एसेंशियल कमोडिटी प्रोवाइडर को धन्यवाद देना चाहता हूं जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। हमें सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं। "
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उत्तराखंडी शार्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा (Bol Diyaan Unma) का फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवेल(Free Spirit Film Festival) के लिए चयन हुआ है. इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की लगभग 23 फिल्में दिखाई जाएंगी. जिनमें उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व भी देखने को मिलेगा.
यह भी पढ़ेंः उत्तराखंड की प्रियंका भट्ट की फिल्म में बॉलीवुड स्टार दिखाएंगे जलवे,पढ़ें रिपोर्ट।
पहाड़ों से पलायन और खाली होते गांवों पर बनी उत्तराखंडी शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बोल दियां ऊंमा फिल्म को खूब पसंद किया जा रहा है, दर्शकों की पसंद ने इस फिल्म को सुपरहिट बना दिया है. इस फिल्म का फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवल के लिए चयन हुआ है, इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की लगभग 23 बेहतरीन फिल्में दिखाई जाएंगी. इससे पहले बोल दियां ऊंमा फिल्म का चयन टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के लिए भी हो चुका है.
यह भी पढ़ेंः लस कमरी वीडियो की शूटिंग हुई पूरी,पहली बार संजू,दीक्षा एक साथ आएंगे नजर।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने ऑफिसियल फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवल मैक्लॉडगंज में दुनिया की 23 फिल्मों का सेलेक्शन हुआ है, जिनमें भारत की दो फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों में बोल दियां ऊंमा (Bol Diyaan Unma) ने भी अपना स्थान बनाया है, उत्तराखंडी शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा उन परिवारों की कहानी है, जिनके अपने रोजगार की तलाश में घर-गांव छोड़कर शहर चले गए हैं.
इसी पलायन और गांव की महिलाओं की पीड़ा पर बनी ये शानदार फिल्म आपको भीतर तक झकझोर कर रख देगी. फिल्म वाकई में दिल को छुने वाली है, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की गाइडेंस में तैयार फिल्म का डायरेक्शन कविलास नेगी ने किया है. ओरिजनल स्टोरी का क्रेडिट वल्लभ डोभाल को जाता है. कलाकारों में अंजली नेगी और राजेश नौगांई का काम लाजवाब है, फिल्म के प्रोड्यूसर अतुलान दास गुप्ता हैं, पहाड़ में 'बोल दियां ऊंमा' जैसी फिल्में बनने से सच्चाई को समाज के सामने लाने का सार्थक प्रयास है.
आप भी देखिए हृदय को झकझोर देने वाली शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा।
उत्तराखंड फिल्म एवं संगीत जगत की सभी ख़बरों के लिए हिलीवुड न्यूज़ को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें।
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उत्तराखंडी शार्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा का फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवेल के लिए चयन हुआ है. इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की लगभग तेईस फिल्में दिखाई जाएंगी. जिनमें उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व भी देखने को मिलेगा. यह भी पढ़ेंः उत्तराखंड की प्रियंका भट्ट की फिल्म में बॉलीवुड स्टार दिखाएंगे जलवे,पढ़ें रिपोर्ट। पहाड़ों से पलायन और खाली होते गांवों पर बनी उत्तराखंडी शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बोल दियां ऊंमा फिल्म को खूब पसंद किया जा रहा है, दर्शकों की पसंद ने इस फिल्म को सुपरहिट बना दिया है. इस फिल्म का फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवल के लिए चयन हुआ है, इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की लगभग तेईस बेहतरीन फिल्में दिखाई जाएंगी. इससे पहले बोल दियां ऊंमा फिल्म का चयन टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के लिए भी हो चुका है. यह भी पढ़ेंः लस कमरी वीडियो की शूटिंग हुई पूरी,पहली बार संजू,दीक्षा एक साथ आएंगे नजर। उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने ऑफिसियल फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि फ्री स्पिरिट फिल्म फेस्टिवल मैक्लॉडगंज में दुनिया की तेईस फिल्मों का सेलेक्शन हुआ है, जिनमें भारत की दो फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों में बोल दियां ऊंमा ने भी अपना स्थान बनाया है, उत्तराखंडी शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा उन परिवारों की कहानी है, जिनके अपने रोजगार की तलाश में घर-गांव छोड़कर शहर चले गए हैं. इसी पलायन और गांव की महिलाओं की पीड़ा पर बनी ये शानदार फिल्म आपको भीतर तक झकझोर कर रख देगी. फिल्म वाकई में दिल को छुने वाली है, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की गाइडेंस में तैयार फिल्म का डायरेक्शन कविलास नेगी ने किया है. ओरिजनल स्टोरी का क्रेडिट वल्लभ डोभाल को जाता है. कलाकारों में अंजली नेगी और राजेश नौगांई का काम लाजवाब है, फिल्म के प्रोड्यूसर अतुलान दास गुप्ता हैं, पहाड़ में 'बोल दियां ऊंमा' जैसी फिल्में बनने से सच्चाई को समाज के सामने लाने का सार्थक प्रयास है. आप भी देखिए हृदय को झकझोर देने वाली शॉर्ट फिल्म बोल दियां ऊंमा। उत्तराखंड फिल्म एवं संगीत जगत की सभी ख़बरों के लिए हिलीवुड न्यूज़ को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें।
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निकालनेका काम निष्णात डॉक्टर लोग नहीं, बल्कि सामान्य परन्तु, अत्याही जिज्ञासु ही करनेवाले हैं। यदि सत्यके जिन विनम्र शोधकोंको वैज्ञानिक लोग मदद दें, तो मुझे अससे ही सन्तोप हो जायगा । यंग लिडिया, १५-८-२९
मेरा यह विश्वास है कि मनुष्योंको शायद ही दवा लेनेकी आवश्यकता रहती है। पथ्य तथा पानी मिट्टी वित्यादिके वरेल अपचारोंसे लेक हजारमें से ९९९ रोगी स्वस्थ हो सकते हैं ।
आत्मकथा, पृ० २३२
शरीरका भगवानके मन्दिरकी तरह अपयोग करनेके वजाय हम असका जुपयोग विषय-भोगोंके सावनकी तरह करते हैं और जिन विषयसुखोंको बढ़ानेकी कोशिश में डॉक्टरोंके पास दीड़े जाने में तथा अपने पार्थिव आवास, विस शरीरका दुरुपयोग करनेमें लज्जाका अनुभव नहीं करते ।
मनुष्य जैसा आहार करता है वैसा ही वह बनता है जिल कहावतमें काफी सत्य है । आहार जितना तामस होगा, शरीर भी अतना ही तामस होगा ।
मैं यह अवश्य महसूस करता हूं कि आव्यात्मिक प्रगतिके क्रममें लेक अवस्था जैसी जरूर आती है, जिसकी यह मांग होती है कि हम अपने शरीरकी आवश्यकताओंकी पूर्तिके लिये अपने सहजीवी प्राणियोंकी 'हत्या करना वन्द कर दें। आपके साथ शाकाहारके प्रति अपने जिस आकर्षणकी चर्चा करते हुने मुझे गोल्डस्थिमकी सुन्दर पंक्तियां याद • आती हैं :
पहाड़की जिस घाटीमें आजादीसे विचरनेवाले जिन प्राणियोंकी मैं हत्या नहीं करता ।
जो परमशक्ति हमें अपनी दयाका दान देती है,
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निकालनेका काम निष्णात डॉक्टर लोग नहीं, बल्कि सामान्य परन्तु, अत्याही जिज्ञासु ही करनेवाले हैं। यदि सत्यके जिन विनम्र शोधकोंको वैज्ञानिक लोग मदद दें, तो मुझे अससे ही सन्तोप हो जायगा । यंग लिडिया, पंद्रह अगस्त उनतीस मेरा यह विश्वास है कि मनुष्योंको शायद ही दवा लेनेकी आवश्यकता रहती है। पथ्य तथा पानी मिट्टी वित्यादिके वरेल अपचारोंसे लेक हजारमें से नौ सौ निन्यानवे रोगी स्वस्थ हो सकते हैं । आत्मकथा, पृशून्य दो सौ बत्तीस शरीरका भगवानके मन्दिरकी तरह अपयोग करनेके वजाय हम असका जुपयोग विषय-भोगोंके सावनकी तरह करते हैं और जिन विषयसुखोंको बढ़ानेकी कोशिश में डॉक्टरोंके पास दीड़े जाने में तथा अपने पार्थिव आवास, विस शरीरका दुरुपयोग करनेमें लज्जाका अनुभव नहीं करते । मनुष्य जैसा आहार करता है वैसा ही वह बनता है जिल कहावतमें काफी सत्य है । आहार जितना तामस होगा, शरीर भी अतना ही तामस होगा । मैं यह अवश्य महसूस करता हूं कि आव्यात्मिक प्रगतिके क्रममें लेक अवस्था जैसी जरूर आती है, जिसकी यह मांग होती है कि हम अपने शरीरकी आवश्यकताओंकी पूर्तिके लिये अपने सहजीवी प्राणियोंकी 'हत्या करना वन्द कर दें। आपके साथ शाकाहारके प्रति अपने जिस आकर्षणकी चर्चा करते हुने मुझे गोल्डस्थिमकी सुन्दर पंक्तियां याद • आती हैं : पहाड़की जिस घाटीमें आजादीसे विचरनेवाले जिन प्राणियोंकी मैं हत्या नहीं करता । जो परमशक्ति हमें अपनी दयाका दान देती है,
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एजेन्सी/नई दिल्लीः दिल्ली में 15 दिनों के ऑड-ईवन फॉर्मूले को मिले समर्थन से उत्साहित दिल्ली सरकार एक बार फिर इसे अमल में लाने की तैयारी में है। सूबे के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को इस मुद्दे पर अहम बैठक की। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने जानकारी दी है कि गुरुवार को ऑड-ईवन के अगले चरण पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज यानी बुधवार को जनमत संग्रह की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा खत्म होने के बाद अप्रैल में इसे लागू किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पिछली बार महिलाओं को इस नियम से मिली छूट इस बार वापस ली सकती है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि लाइसेंस प्लेट नीति 'एक बार फिर' आएगी जबकि सूत्रों ने कहा कि इसका अगला चरण सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के बाद अप्रैल में लागू किया जाएगा।
सूत्रों ने कहा, योजना फिर आएगी। मुख्यमंत्री सहित मंत्री आज होने वाले संवाददाता सम्मेलन में घोषणा करेंगे। इससे पहले राय ने ट्वीट किया, दिल्ली सरकार कल सम-विषम योजना पर निर्णय करेगी। लोगों का फीडबैक रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है। वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से सम विषम योजना को एक से 15 जनवरी तक लागू किया गया था और रविवार को इस योजना से छूट थी।
इसके बाद सरकार ने ई-मेल, मिस्ड कॉल, ऑनलाइन फॉर्म और इंटरेक्टिव वायस सिस्टम से करीब नौ लाख लोगों से संपर्क किया।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ऑनलाइन फॉर्म से करीब 28 हजार 300 सुझाव प्राप्त हुए जबकि अन्य नौ हजार और एक लाख 82 हजार 808 सुझाव क्रमशः ई. . मेल और मिस्ड कॉल से प्राप्त हुए। लोगों का सुझाव जानने के लिए सरकार ने नौ लाख से ज्यादा कॉल किए। इस विषय पर जनसभा करने वाले आप विधायकों ने दावा किया कि इस योजना को फिर से लागू करने के लिए लोगों से 'उत्साहजनक' प्रतिक्रिया मिली।
सम-विषम योजना के पहले चरण में ज्यादातर निजी स्कूलों द्वारा अपनी बसें नहीं दिए जाने से नाराज दिल्ली सरकार ने फैसला किया कि सीबीएसई परीक्षा के बाद दूसरे चरण में निजी स्कूलों की बसों की सेवा की मांग नहीं की जाएगी।
परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि क्योंकि सरकार को पहले चरण के दौरान केवल 300 स्कूली बसें मिली थीं, इसलिए उन्होंने दूसरे चरण में स्कूली बसों की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है।
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एजेन्सी/नई दिल्लीः दिल्ली में पंद्रह दिनों के ऑड-ईवन फॉर्मूले को मिले समर्थन से उत्साहित दिल्ली सरकार एक बार फिर इसे अमल में लाने की तैयारी में है। सूबे के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को इस मुद्दे पर अहम बैठक की। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने जानकारी दी है कि गुरुवार को ऑड-ईवन के अगले चरण पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज यानी बुधवार को जनमत संग्रह की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा खत्म होने के बाद अप्रैल में इसे लागू किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पिछली बार महिलाओं को इस नियम से मिली छूट इस बार वापस ली सकती है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि लाइसेंस प्लेट नीति 'एक बार फिर' आएगी जबकि सूत्रों ने कहा कि इसका अगला चरण सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के बाद अप्रैल में लागू किया जाएगा। सूत्रों ने कहा, योजना फिर आएगी। मुख्यमंत्री सहित मंत्री आज होने वाले संवाददाता सम्मेलन में घोषणा करेंगे। इससे पहले राय ने ट्वीट किया, दिल्ली सरकार कल सम-विषम योजना पर निर्णय करेगी। लोगों का फीडबैक रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है। वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से सम विषम योजना को एक से पंद्रह जनवरी तक लागू किया गया था और रविवार को इस योजना से छूट थी। इसके बाद सरकार ने ई-मेल, मिस्ड कॉल, ऑनलाइन फॉर्म और इंटरेक्टिव वायस सिस्टम से करीब नौ लाख लोगों से संपर्क किया। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ऑनलाइन फॉर्म से करीब अट्ठाईस हजार तीन सौ सुझाव प्राप्त हुए जबकि अन्य नौ हजार और एक लाख बयासी हजार आठ सौ आठ सुझाव क्रमशः ई. . मेल और मिस्ड कॉल से प्राप्त हुए। लोगों का सुझाव जानने के लिए सरकार ने नौ लाख से ज्यादा कॉल किए। इस विषय पर जनसभा करने वाले आप विधायकों ने दावा किया कि इस योजना को फिर से लागू करने के लिए लोगों से 'उत्साहजनक' प्रतिक्रिया मिली। सम-विषम योजना के पहले चरण में ज्यादातर निजी स्कूलों द्वारा अपनी बसें नहीं दिए जाने से नाराज दिल्ली सरकार ने फैसला किया कि सीबीएसई परीक्षा के बाद दूसरे चरण में निजी स्कूलों की बसों की सेवा की मांग नहीं की जाएगी। परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि क्योंकि सरकार को पहले चरण के दौरान केवल तीन सौ स्कूली बसें मिली थीं, इसलिए उन्होंने दूसरे चरण में स्कूली बसों की सेवाएं नहीं लेने का फैसला किया है।
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भूषन-भार सँभारि है क्यों यह तनु सुकुमार, ! सूघे पायँ न घर परत सोभा ही के भार !
पक्षपात का एक उदाहरण और चीजिए। तोषजी की कविता का एक पद इस प्रकार है- "कूजि छठै घटकाली, चहुँ दिसि फैल गई नभ-ऊपर लाबी ।" इसमें "कूलि उठे चटकाली" के विषय में भाष्यकार का मंतव्य मनन करने योग्य है । वह इस प्रकार है 'कूजि उठे चटकाली चहूँ दिसिं' में मुहाविरा बिगढ़ गया। चिड़ियों के लिये 'चहकना' और औरों के लिये 'गुंजारना' बोलते है, 'कूजना' नहीं कहते। आश्चर्य ! महान् आश्चर्य !! यह भूल तो विचित्र ही है । देखिए, तोषजी ने एक स्थान पर यही भूल और भी की है; यथा --- "कबूतर-सी फल कूजन लागी " कविवर रघुनाथ भी भूलते हैं; उन्होंने भी कह डाला है - "देखु, मधुव्रत गंजे चहुँ दिशि, कोयल बोजी, कपोतह क्रूजे ।" यही क्यों, यदि मैं भूलता नहीं हूँ, तो- "विमल सलिल, सरसिज बहु रंगा, जल-खग, क्रूजत, गुंजत भृगा।" में महात्मा तुलसीदास से भी भूळ हो गई है । बेचारे सूर तो उपेक्षणीय हैं हो; पर वे भी इस भूल से बचे नहीं हैं; यथा-"बंदु.कंठ नाना मनि-भूषन, उर मुक्ता की माल; उनक- किंकिनी, नूपुर-कलरव, कृजत बाल-मराळ ।" प्यारे हरिश्चंद्र, तुम तो ऐसी भूल न करते ; पर हा ! "कोकिच-कूजित कुंज-कुटो" कहकर तुमने तो गीतगोविंद की याद दिला दी, जिसमें जयदेव से भी यही भूळ हो गई है । नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित और बाबू श्यामसुंदरदास बी० ए० द्वारा संपादित 'हिंदी शब्दसागर' के पृष्ठ ६१४ पर भी यह भूल न जाने कैसे भ्रम-वश आ गई ! धन्य ! इसे भूल कहें या हठ या शुद्ध प्रयोग १
● देव और विहारी [ घ ]
विहारी के समान हिंदी के अनेकानेक और कवियों ने चमत्कार - पूर्ण दोहे लिखे हैं । भाष्यकार का यह कथन हम मानते हैं कि "जैसे अनु. पम दोहे सतसई में पाए जाते हैं, वैसे श्रन्यन्त्र मायः कम पाए जाते हैं। चो भी यह बात श्रमत्य है कि "विहारी के अनुकरण में किसी को कहीं भी सफलता नहीं हुड़े । सफलता तो एक ओर, कहीं-कहीं तो किसीकिसी ने बे-तरह ठोकर खाई है, अ' का अनर्थ हो गया है ( पृष्ठ है १२६ ) ।" जिस नीति का श्रवलंबन भाष्यकार ने अपनी समग्र पुस्तक में लिया है, उसी का अनुगमन करते हुए उन्होंने रसनिधि, विक्रम एवं रामसहाय के दोदों से विहारी के दोहों की तुलना की है, और इस प्रकार विहारी श्रेष्ठ ठहराए गए हैं। मतिराम, बैरीसाल, तुलसीदास, रहीम एवं रमलीन के शत-शत अनुपम दोहे उपस्थित रहते हुए भी उनका कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। विषयांतर होने से इस विषय पर भी हम यहाँ विशेष कुछ लिखना नहीं चाहते। केवल उदाहरण. स्वरूप कुछ दोहे उ त करते हैं, जिसमें पाठकगण हमारे कथन की सत्यता का निश्चय कर सके । कविवर मतिराम के अनेकानेक दोहे निश्चय-पूर्वक सनई के दोहों की टकर के हैं । रमनिधि और विक्रम
दोहे चिहारीलाल के दोहों के सामने वैसे ही निष्प्रभ हैं, जैसे सनकी उक्लि के सामने सुंदर और तोष की उक्तियाँ हैं। इनके साथ तुलना करना विहारी के साथ अन्याय करना है-( १ ) कहा दवागिनि के पिए ? कहा धरे गिरि धीर ? विरहानज मैं जरत व्रज, वूड़त लोचन-नीर ।
( २ ) जेहि सिरीप कोमल कुसुम लियो सुरस सुख-मूल, क्यों अलि-मन तूसे रहे चूसे रूसे-फूल ।
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भूषन-भार सँभारि है क्यों यह तनु सुकुमार, ! सूघे पायँ न घर परत सोभा ही के भार ! पक्षपात का एक उदाहरण और चीजिए। तोषजी की कविता का एक पद इस प्रकार है- "कूजि छठै घटकाली, चहुँ दिसि फैल गई नभ-ऊपर लाबी ।" इसमें "कूलि उठे चटकाली" के विषय में भाष्यकार का मंतव्य मनन करने योग्य है । वह इस प्रकार है 'कूजि उठे चटकाली चहूँ दिसिं' में मुहाविरा बिगढ़ गया। चिड़ियों के लिये 'चहकना' और औरों के लिये 'गुंजारना' बोलते है, 'कूजना' नहीं कहते। आश्चर्य ! महान् आश्चर्य !! यह भूल तो विचित्र ही है । देखिए, तोषजी ने एक स्थान पर यही भूल और भी की है; यथा --- "कबूतर-सी फल कूजन लागी " कविवर रघुनाथ भी भूलते हैं; उन्होंने भी कह डाला है - "देखु, मधुव्रत गंजे चहुँ दिशि, कोयल बोजी, कपोतह क्रूजे ।" यही क्यों, यदि मैं भूलता नहीं हूँ, तो- "विमल सलिल, सरसिज बहु रंगा, जल-खग, क्रूजत, गुंजत भृगा।" में महात्मा तुलसीदास से भी भूळ हो गई है । बेचारे सूर तो उपेक्षणीय हैं हो; पर वे भी इस भूल से बचे नहीं हैं; यथा-"बंदु.कंठ नाना मनि-भूषन, उर मुक्ता की माल; उनक- किंकिनी, नूपुर-कलरव, कृजत बाल-मराळ ।" प्यारे हरिश्चंद्र, तुम तो ऐसी भूल न करते ; पर हा ! "कोकिच-कूजित कुंज-कुटो" कहकर तुमने तो गीतगोविंद की याद दिला दी, जिसमें जयदेव से भी यही भूळ हो गई है । नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित और बाबू श्यामसुंदरदास बीशून्य एशून्य द्वारा संपादित 'हिंदी शब्दसागर' के पृष्ठ छः सौ चौदह पर भी यह भूल न जाने कैसे भ्रम-वश आ गई ! धन्य ! इसे भूल कहें या हठ या शुद्ध प्रयोग एक ● देव और विहारी [ घ ] विहारी के समान हिंदी के अनेकानेक और कवियों ने चमत्कार - पूर्ण दोहे लिखे हैं । भाष्यकार का यह कथन हम मानते हैं कि "जैसे अनु. पम दोहे सतसई में पाए जाते हैं, वैसे श्रन्यन्त्र मायः कम पाए जाते हैं। चो भी यह बात श्रमत्य है कि "विहारी के अनुकरण में किसी को कहीं भी सफलता नहीं हुड़े । सफलता तो एक ओर, कहीं-कहीं तो किसीकिसी ने बे-तरह ठोकर खाई है, अ' का अनर्थ हो गया है ।" जिस नीति का श्रवलंबन भाष्यकार ने अपनी समग्र पुस्तक में लिया है, उसी का अनुगमन करते हुए उन्होंने रसनिधि, विक्रम एवं रामसहाय के दोदों से विहारी के दोहों की तुलना की है, और इस प्रकार विहारी श्रेष्ठ ठहराए गए हैं। मतिराम, बैरीसाल, तुलसीदास, रहीम एवं रमलीन के शत-शत अनुपम दोहे उपस्थित रहते हुए भी उनका कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। विषयांतर होने से इस विषय पर भी हम यहाँ विशेष कुछ लिखना नहीं चाहते। केवल उदाहरण. स्वरूप कुछ दोहे उ त करते हैं, जिसमें पाठकगण हमारे कथन की सत्यता का निश्चय कर सके । कविवर मतिराम के अनेकानेक दोहे निश्चय-पूर्वक सनई के दोहों की टकर के हैं । रमनिधि और विक्रम दोहे चिहारीलाल के दोहों के सामने वैसे ही निष्प्रभ हैं, जैसे सनकी उक्लि के सामने सुंदर और तोष की उक्तियाँ हैं। इनके साथ तुलना करना विहारी के साथ अन्याय करना है- कहा दवागिनि के पिए ? कहा धरे गिरि धीर ? विरहानज मैं जरत व्रज, वूड़त लोचन-नीर । जेहि सिरीप कोमल कुसुम लियो सुरस सुख-मूल, क्यों अलि-मन तूसे रहे चूसे रूसे-फूल ।
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15 और 16 मार्च को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल का असर एटीएम सेवा पर नहीं पड़ेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के एटीएम में नियमित रूप से पैसे भी डाले जाएंगे। हड़ताली बैंककर्मी एटीएम सेवा को किसी भी रूप में बाधित नहीं करेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के संयोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि दो दिनों के हड़ताल में एटीएम सेवा बाधित नहीं की जाएगी। कहा कि एटीएम अनिवार्य सेवा की श्रेणी में आता है, इसलिए इसको बाहर रखा गया है। उन्होंने बताया कि यूएफबीयू में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक शामिल हैं। यूनियन में कुल नौ बैंक संगठन में तीन ऑफिसर्स यूनियन हैं जबकि छह बैंककर्मियों का यूनियन है।
वहीं, हड़ताल को लेकर सभी बैंक यूनियन की ओर से रणनीति तैयार कर ली गई है। एसबीआईओए के महासचिव अजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि शनिवार से ही बैंकिंग बाधित है। किसी प्रकार के मैनुअल काम बैंक में चार दिन नहीं होंगे। कहा कि 15 और 16 मार्च को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मी अपने अपने शाखाओं के सामने में प्रदर्शन करेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर यूएफबीयू की ओर से दो दिनों तक हड़ताल किया जा रहा है। इसमें अपनी मांगों के साथ सरकार द्वारा निजीकरण का विरोध होगा।
ऑल इंडिया बैंकिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कुमार अरविंद ने बताया कि हड़ताल निजीकरण के खिलाफ है। निजीकरण कर्मचारी विरोधी तो है ही, इसके साथ साथ जन विरोधी व राष्ट्रविरोधी है। उन्होंने कहा कि 1969 से पहले सभी बैंक निजी थे। एसबीआई को छोड सभी बैंक निजीकरण को बढ़ावा देते थे। उस समय कृषि, उद्योग समेत सभी क्षेत्र का विकास अवरूद्ध था। लेकिन राष्ट्रीयकरण के बाद देश को काफी ऊंचाई मिली। ऐसे में निजीकरण की बात भी बेमानी है। उन्होंने बताया कि देश के कार्पोरेट के हाथ में सरकार बैंकों को पूंजी देना चाहती है। हड़ताल के दिन मुख्य रूप से आर ब्लॉक चौराहा, बैंक ऑफ इंडिया के मेन ब्रांच के सामने, एसबीआई जोनल ऑफिस व मुख्य शाखा, एसबीआई अंटा घाट, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मौर्या लोक, समेत अन्य जगहों पर बैंककर्मी हड़ताल करेंगे। बता दें कि हड़ताल में रिटायरिज बैंक यूनियन बिहार भी हड़ताल को समर्थन देगा।
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पंद्रह और सोलह मार्च को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल का असर एटीएम सेवा पर नहीं पड़ेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के एटीएम में नियमित रूप से पैसे भी डाले जाएंगे। हड़ताली बैंककर्मी एटीएम सेवा को किसी भी रूप में बाधित नहीं करेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के संयोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि दो दिनों के हड़ताल में एटीएम सेवा बाधित नहीं की जाएगी। कहा कि एटीएम अनिवार्य सेवा की श्रेणी में आता है, इसलिए इसको बाहर रखा गया है। उन्होंने बताया कि यूएफबीयू में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक शामिल हैं। यूनियन में कुल नौ बैंक संगठन में तीन ऑफिसर्स यूनियन हैं जबकि छह बैंककर्मियों का यूनियन है। वहीं, हड़ताल को लेकर सभी बैंक यूनियन की ओर से रणनीति तैयार कर ली गई है। एसबीआईओए के महासचिव अजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि शनिवार से ही बैंकिंग बाधित है। किसी प्रकार के मैनुअल काम बैंक में चार दिन नहीं होंगे। कहा कि पंद्रह और सोलह मार्च को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मी अपने अपने शाखाओं के सामने में प्रदर्शन करेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर यूएफबीयू की ओर से दो दिनों तक हड़ताल किया जा रहा है। इसमें अपनी मांगों के साथ सरकार द्वारा निजीकरण का विरोध होगा। ऑल इंडिया बैंकिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कुमार अरविंद ने बताया कि हड़ताल निजीकरण के खिलाफ है। निजीकरण कर्मचारी विरोधी तो है ही, इसके साथ साथ जन विरोधी व राष्ट्रविरोधी है। उन्होंने कहा कि एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर से पहले सभी बैंक निजी थे। एसबीआई को छोड सभी बैंक निजीकरण को बढ़ावा देते थे। उस समय कृषि, उद्योग समेत सभी क्षेत्र का विकास अवरूद्ध था। लेकिन राष्ट्रीयकरण के बाद देश को काफी ऊंचाई मिली। ऐसे में निजीकरण की बात भी बेमानी है। उन्होंने बताया कि देश के कार्पोरेट के हाथ में सरकार बैंकों को पूंजी देना चाहती है। हड़ताल के दिन मुख्य रूप से आर ब्लॉक चौराहा, बैंक ऑफ इंडिया के मेन ब्रांच के सामने, एसबीआई जोनल ऑफिस व मुख्य शाखा, एसबीआई अंटा घाट, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मौर्या लोक, समेत अन्य जगहों पर बैंककर्मी हड़ताल करेंगे। बता दें कि हड़ताल में रिटायरिज बैंक यूनियन बिहार भी हड़ताल को समर्थन देगा।
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ध्येय नहीं, नित्य कर्तव्य
'क्रांति' का पहला नम्बर मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूँ। उसके पहले लेख में ये शब्द हैं -- "जिसने इसका ( क्रांति का ) नतीजा जानना चाहा; इसे समझने की कोई कोशिश की, वह फिर कभी इसका नाम न लेगा।"
मैंने क्रांति का नतीजा जानना चाहा है और उसे समझने की कोशिश की है। और यह भी ठीक है कि मेरी राय हुई है कि उसका कभी नाम नहीं लेना चाहिए ।
क्रांति से डरना उसे बुलाना है। मैं उसे बुलाना नहीं चाहता । इसलिए उस से डरने की मेरे लिए कोई ज़रूरत नहीं रह जाती ।
लेकिन यह सोचने की बात है कि क्रांति करने वालों को क्या उस अपनी क्रांति को बिना समझेबूके करना होगा ! जो बे-समझे की जायगी वह नादानी होगी। तो क्या नादानी को ही क्रांति कहना होगा ?
सच यह है कि 'क्रांति' शब्द को सस्ता नहीं बनाना चाहिए । घिसे पैसे की नाईं उसका चलन चलाने से सच्ची क्रांति पास नहीं आती, दूर होती है। मूल्य घटता है। शब्द को लोग ले उड़ते हैं, अस्लियत छूट जाती है।
और ऐसा हो रहा है। 'इन्किलाब ज़िन्दाबाद' का नारा ही कइयों
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ध्येय नहीं, नित्य कर्तव्य 'क्रांति' का पहला नम्बर मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूँ। उसके पहले लेख में ये शब्द हैं -- "जिसने इसका नतीजा जानना चाहा; इसे समझने की कोई कोशिश की, वह फिर कभी इसका नाम न लेगा।" मैंने क्रांति का नतीजा जानना चाहा है और उसे समझने की कोशिश की है। और यह भी ठीक है कि मेरी राय हुई है कि उसका कभी नाम नहीं लेना चाहिए । क्रांति से डरना उसे बुलाना है। मैं उसे बुलाना नहीं चाहता । इसलिए उस से डरने की मेरे लिए कोई ज़रूरत नहीं रह जाती । लेकिन यह सोचने की बात है कि क्रांति करने वालों को क्या उस अपनी क्रांति को बिना समझेबूके करना होगा ! जो बे-समझे की जायगी वह नादानी होगी। तो क्या नादानी को ही क्रांति कहना होगा ? सच यह है कि 'क्रांति' शब्द को सस्ता नहीं बनाना चाहिए । घिसे पैसे की नाईं उसका चलन चलाने से सच्ची क्रांति पास नहीं आती, दूर होती है। मूल्य घटता है। शब्द को लोग ले उड़ते हैं, अस्लियत छूट जाती है। और ऐसा हो रहा है। 'इन्किलाब ज़िन्दाबाद' का नारा ही कइयों
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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झारखंड में कांट्रैक्ट (संविदा) पर नियुक्त महिला कर्मचारियों को भी 180 दिन मातृत्व अवकाश मिलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है। यह प्रावधान उन्हीं महिला कर्मियों पर लागू होगा, जो पिछले 12 महीनों में 80 दिन तक काम कर चुकी हैं।
यह नियम दो बच्चों तक मान्य होगा। तीसरे बच्चे के जन्म पर छुट्टी नहीं मिलेगी। मातृत्व अवकाश के लिए कांट्रैक्ट सैलरी, छुट्टी पर जाने से पहले मिले अंतिम सैलरी के बराबर होगी। हालांकि, आउटसोर्स पर कार्यरत महिलाकर्मियों के मामले में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
राज्य सरकार के फैसले से 30-35 हजार महिलाकर्मियों को लाभ होगा। राज्य में लगभग 60 हजार पारा टीचर कार्यरत हैं। इनमें 25 हजार से अधिक महिलाएं हैं। साथ ही, संविदा पर मनरेगा व स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत महिलाओं की संख्या भी 10 हजार से अधिक है। इन्हें छुट्टी का सीधा लाभ मिलेगा।
इधर, राज्यकर्मी भी चाइल्ड केयर लीव की मांग कर रहे हैं। झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ, झारखंड सचिवालय सेवा संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठन इस मांग को दुहराते रहे हैं। पिछले दिनों सीएम ने चाइल्ड केयर लीव देने का भरोसा दिया था।
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झारखंड में कांट्रैक्ट पर नियुक्त महिला कर्मचारियों को भी एक सौ अस्सी दिन मातृत्व अवकाश मिलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है। यह प्रावधान उन्हीं महिला कर्मियों पर लागू होगा, जो पिछले बारह महीनों में अस्सी दिन तक काम कर चुकी हैं। यह नियम दो बच्चों तक मान्य होगा। तीसरे बच्चे के जन्म पर छुट्टी नहीं मिलेगी। मातृत्व अवकाश के लिए कांट्रैक्ट सैलरी, छुट्टी पर जाने से पहले मिले अंतिम सैलरी के बराबर होगी। हालांकि, आउटसोर्स पर कार्यरत महिलाकर्मियों के मामले में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार के फैसले से तीस-पैंतीस हजार महिलाकर्मियों को लाभ होगा। राज्य में लगभग साठ हजार पारा टीचर कार्यरत हैं। इनमें पच्चीस हजार से अधिक महिलाएं हैं। साथ ही, संविदा पर मनरेगा व स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत महिलाओं की संख्या भी दस हजार से अधिक है। इन्हें छुट्टी का सीधा लाभ मिलेगा। इधर, राज्यकर्मी भी चाइल्ड केयर लीव की मांग कर रहे हैं। झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ, झारखंड सचिवालय सेवा संघ सहित अन्य कर्मचारी संगठन इस मांग को दुहराते रहे हैं। पिछले दिनों सीएम ने चाइल्ड केयर लीव देने का भरोसा दिया था।
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GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी को सोमवार को 83 नए प्रोफेसर्स की सौगात मिल गई। कार्यपरिषद की इमरजेंट मीटिंग ऑर्गनाइज कर शिक्षक भर्ती का पिटारा खोला गया, जिसमें 12 सब्जेक्ट के 101 पदों के लिए कंडक्ट हुए इंटरव्यू में 83 कैंडिडेट्स का फाइनल सेलेक्शन कर लिया गया। इस दौरान प्रोफेसर्स पोस्ट पर कुछ पहले से वर्किंग टीचर्स को प्रमोट किया गया। 29 अप्रैल को भी यूनिवर्सिटी को 56 टीचर्स मिले थे। अब सिर्फ चार विभागों का फाइनल सेलेक्शन और होना है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी में काफी हद तक टीचर्स की कमी दूर हो जाएगी।
सेलेक्शन का लिफाफा खोलने के लिए यूनिवर्सिटी में 10. 30 बजे एग्जिक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग हुई थी। इस दौरान एक-एक सब्जेक्ट के लिफाफे खुले और फाइनल नाम पर मुहर लगी। सभी लिफाफे खुलने के बाद फाइनल लिस्ट करीब दो बजे यूनिवर्सिटी की एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग पर चिपकाई गई, जिसके बाद उसे देखने के लिए कैंडिडेट्स की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद बधाई देने का दौर शुरू हो गया।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कई डिपार्टमेंट्स पर प्रोफेसर पद के लिए इंटरव्यू कंडक्ट किए गए, जिसमें बड़ी तादाद में कैंडिडेट्स ने शिरकत भी की। लेकिन इसमें बड़ी तादाद में टीचर्स का इंटरव्यू होने के बाद भी कोई प्रोफेसर पद के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सका। कुछ विभाग में तो एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए भी कैंडिडेट्स नहीं मिले। असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भरमार रही और ज्यादातर विभागों को असिस्टेंट प्रोफेसर मिलने से राहत मिल गइर्1.
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में करीब सभी डिपार्टमेंट को नए टीचर्स मिल चुके हैं। इससे नए सेशन में यूनिवर्सिटी को पढ़ाई कराने में ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी। जहां उनकी क्लासेज टाइमली चल सकेंगी, वहीं उन्हें रिसर्च करने का भी मौका मिल जाएगा. उर्दू और होमसाइंस जैसे डिपार्टमेंट जिसका भार एक ही टीचर के कंधों पर था, उन्हें राहत मिलेगी और उनको भी अपना कोर्स कंप्लीट करने में ज्यादा परेशानी नहीं फेस करनी पड़ेगी।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में टीचर्स की नियुक्ति के लिए सील बंद लिफाफा कार्यपरिषद की बैठक में खोला गया है। जिसमें 83 कैंडिडेट्स का फाइनल सेलेक्शन किया गया है। इससे यूनिवर्सिटी को और नए टीचर्स मिल गए हैं, जिससे पठन-पाठन व्यवस्था और बेहतर होगी।
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GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी को सोमवार को तिरासी नए प्रोफेसर्स की सौगात मिल गई। कार्यपरिषद की इमरजेंट मीटिंग ऑर्गनाइज कर शिक्षक भर्ती का पिटारा खोला गया, जिसमें बारह सब्जेक्ट के एक सौ एक पदों के लिए कंडक्ट हुए इंटरव्यू में तिरासी कैंडिडेट्स का फाइनल सेलेक्शन कर लिया गया। इस दौरान प्रोफेसर्स पोस्ट पर कुछ पहले से वर्किंग टीचर्स को प्रमोट किया गया। उनतीस अप्रैल को भी यूनिवर्सिटी को छप्पन टीचर्स मिले थे। अब सिर्फ चार विभागों का फाइनल सेलेक्शन और होना है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी में काफी हद तक टीचर्स की कमी दूर हो जाएगी। सेलेक्शन का लिफाफा खोलने के लिए यूनिवर्सिटी में दस. तीस बजे एग्जिक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग हुई थी। इस दौरान एक-एक सब्जेक्ट के लिफाफे खुले और फाइनल नाम पर मुहर लगी। सभी लिफाफे खुलने के बाद फाइनल लिस्ट करीब दो बजे यूनिवर्सिटी की एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग पर चिपकाई गई, जिसके बाद उसे देखने के लिए कैंडिडेट्स की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद बधाई देने का दौर शुरू हो गया। गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कई डिपार्टमेंट्स पर प्रोफेसर पद के लिए इंटरव्यू कंडक्ट किए गए, जिसमें बड़ी तादाद में कैंडिडेट्स ने शिरकत भी की। लेकिन इसमें बड़ी तादाद में टीचर्स का इंटरव्यू होने के बाद भी कोई प्रोफेसर पद के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सका। कुछ विभाग में तो एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए भी कैंडिडेट्स नहीं मिले। असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भरमार रही और ज्यादातर विभागों को असिस्टेंट प्रोफेसर मिलने से राहत मिल गइर्एक. गोरखपुर यूनिवर्सिटी में करीब सभी डिपार्टमेंट को नए टीचर्स मिल चुके हैं। इससे नए सेशन में यूनिवर्सिटी को पढ़ाई कराने में ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी। जहां उनकी क्लासेज टाइमली चल सकेंगी, वहीं उन्हें रिसर्च करने का भी मौका मिल जाएगा. उर्दू और होमसाइंस जैसे डिपार्टमेंट जिसका भार एक ही टीचर के कंधों पर था, उन्हें राहत मिलेगी और उनको भी अपना कोर्स कंप्लीट करने में ज्यादा परेशानी नहीं फेस करनी पड़ेगी। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में टीचर्स की नियुक्ति के लिए सील बंद लिफाफा कार्यपरिषद की बैठक में खोला गया है। जिसमें तिरासी कैंडिडेट्स का फाइनल सेलेक्शन किया गया है। इससे यूनिवर्सिटी को और नए टीचर्स मिल गए हैं, जिससे पठन-पाठन व्यवस्था और बेहतर होगी।
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के आधीन है। प्रधान इंजीनियर के नीचे कई सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर होते हैं। इनकी संख्या सब प्रांतों में एक सी नहीं है। मध्य प्रदेश में सड़क इमारत विभाग के तीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर हैं। प्रत्येक अपने डिवीज़न के कार्य का निरीक्षण करता है। इनके आधीन प्रत्येक जिले में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर होता है जिसका कार्य जिले की सरकारी इमारतों सड़कों आदि की मरम्मत तथा निर्माण के अतिरिक्त म्यूनिसिपेलिटी और डिस्ट्रिक्टबोर्ड के इमारत-सड़क विभाग का नियंत्रण करना है। यह् म्यूनिसिपल इंजीनियर, वाटरवर्क्स इंजीनियर आदि की नियुक्ति में स्वीकृति देता है। इसका नियंत्रण इसी प्रकार है जिस प्रकार सिविल सर्जन का सफ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर है। एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के आधीन अनेकों ओवरसियर सव ओवरसियर आदि हैं ।
सिंचाई विभाग - - सिचाई विभाग के प्रान्तीय सेक्रेटरी के आधीन भी डिवीजन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर हैं। मध्यप्रांत में इनकी भी संख्या ३ हैं। इनके नीचे भी रक्जीक्यूटिव इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर, ओवरसियर सब ओवरसियर आदि अनेकों कर्मचारी हैं ।
सिंचाई विभाग का कार्य नहरें खुदवाना तथा उनकी रक्षा का प्रबंध करना है। सिंचाई की आवश्यकता तथा उपयोगिता प्राचीन समय से शासक मानते आये हैं। मुसलमान शासकों ने अनेकों कुएँ, तालाब, नहरें आदि सिंचाई के निमित्त बनवा कर दुर्भिक्ष रोकने के उपाय किये । अंग्रेजी काल में इस ओर विशेष उन्नति हुई है। देश में अनेकों बड़ी बड़ी नहरें और जलाशय बनाने में सरकार ने सालाना धन देना आरंभ किया। सन् १८९३ के पहिले वह रकम केवल ५५ लाख रुपये थी । सन् ९३ में ७५ लाख, १८९९ में ८५ लाख और उसके बाद बढ़ा कर १२५ लाख वार्षिक देना आरंभ कर दिया है । सन् १९९८ तक सिंचाई के लिये नहरें, जलाशय आदि बनवाने में लगभग १ अरब रुपया व्यय हो गया जिससे २ करोड़ १० लाख एकड़ जमीन प्रतिवर्ष सींची जाती थी । सन् १९ में सिंचाई
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के आधीन है। प्रधान इंजीनियर के नीचे कई सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर होते हैं। इनकी संख्या सब प्रांतों में एक सी नहीं है। मध्य प्रदेश में सड़क इमारत विभाग के तीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर हैं। प्रत्येक अपने डिवीज़न के कार्य का निरीक्षण करता है। इनके आधीन प्रत्येक जिले में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर होता है जिसका कार्य जिले की सरकारी इमारतों सड़कों आदि की मरम्मत तथा निर्माण के अतिरिक्त म्यूनिसिपेलिटी और डिस्ट्रिक्टबोर्ड के इमारत-सड़क विभाग का नियंत्रण करना है। यह् म्यूनिसिपल इंजीनियर, वाटरवर्क्स इंजीनियर आदि की नियुक्ति में स्वीकृति देता है। इसका नियंत्रण इसी प्रकार है जिस प्रकार सिविल सर्जन का सफ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर है। एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के आधीन अनेकों ओवरसियर सव ओवरसियर आदि हैं । सिंचाई विभाग - - सिचाई विभाग के प्रान्तीय सेक्रेटरी के आधीन भी डिवीजन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर हैं। मध्यप्रांत में इनकी भी संख्या तीन हैं। इनके नीचे भी रक्जीक्यूटिव इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर, ओवरसियर सब ओवरसियर आदि अनेकों कर्मचारी हैं । सिंचाई विभाग का कार्य नहरें खुदवाना तथा उनकी रक्षा का प्रबंध करना है। सिंचाई की आवश्यकता तथा उपयोगिता प्राचीन समय से शासक मानते आये हैं। मुसलमान शासकों ने अनेकों कुएँ, तालाब, नहरें आदि सिंचाई के निमित्त बनवा कर दुर्भिक्ष रोकने के उपाय किये । अंग्रेजी काल में इस ओर विशेष उन्नति हुई है। देश में अनेकों बड़ी बड़ी नहरें और जलाशय बनाने में सरकार ने सालाना धन देना आरंभ किया। सन् एक हज़ार आठ सौ तिरानवे के पहिले वह रकम केवल पचपन लाख रुपये थी । सन् तिरानवे में पचहत्तर लाख, एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे में पचासी लाख और उसके बाद बढ़ा कर एक सौ पच्चीस लाख वार्षिक देना आरंभ कर दिया है । सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे तक सिंचाई के लिये नहरें, जलाशय आदि बनवाने में लगभग एक अरब रुपया व्यय हो गया जिससे दो करोड़ दस लाख एकड़ जमीन प्रतिवर्ष सींची जाती थी । सन् उन्नीस में सिंचाई
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'जी हाँ' कह कर वह बैठ गया । कुशल वृत्तान्त के पश्चात् उसने पूछा- मैंने तुम्हें जो लाल दिया था, वह कहाँ है ? उसने कहा- वह तो आते ही मैंने तुम्हारी पत्नी को दे दिया।
दूसरे ने कहा --वह तो कहती है, मुझे दिया ही नहीं।
प्रथम मित्र-झूठी है। स्त्रियों का क्या भरोसा न जाने किसी को दे दिया होगा और मुझे चोर बनाती है ।
इस प्रकार कह कर वह उरजने लगा- अपनी स्त्री को तो देखते नहीं और मुझे चोर, बेईमान बनाते हो । ऐसा जानता तो मैं लाता ही क्यों ? खत्ररदार, जो मुझसे श्रघ लाल के विषय में कभी कुछ पूछा ।
झूठा आदमी चिल्लाता बहुत है । उसका रंग-ढंग देखकर लाल वाले मित्र ने सोचा --यह लाल भी हजम कर गया और ऊपर से मेरी पत्नी को दुराचारिणी प्रकट करना चाहता है और मुझे धमकी दे रहा है ।
आखिर वह हाकिम के पास गया और सारा किस्मा सुनाया । हाकिम ने पूछातुमने किसके सामने लाल दिया था ? उसने कहा - मैंने केवल विश्वास पर ही दिया था। किसी को गवाह नहीं बनाया । उसकी इस स्पष्टोक्ति से हाकिम को उसके कथन पर विश्वास हो गया । हाकिम ने सान्त्वना देते हुए कहा- मैं समझ गया हूँ । तुम सच्चे हो । मैं तुम्हारा लाल दिलाने का प्रयत्न करूंगा। कदाचित लाल न मिला तो तुम्हारी इज्जत अवश्य वापिस आयगी । तुम अपने घर जाओ ।
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'जी हाँ' कह कर वह बैठ गया । कुशल वृत्तान्त के पश्चात् उसने पूछा- मैंने तुम्हें जो लाल दिया था, वह कहाँ है ? उसने कहा- वह तो आते ही मैंने तुम्हारी पत्नी को दे दिया। दूसरे ने कहा --वह तो कहती है, मुझे दिया ही नहीं। प्रथम मित्र-झूठी है। स्त्रियों का क्या भरोसा न जाने किसी को दे दिया होगा और मुझे चोर बनाती है । इस प्रकार कह कर वह उरजने लगा- अपनी स्त्री को तो देखते नहीं और मुझे चोर, बेईमान बनाते हो । ऐसा जानता तो मैं लाता ही क्यों ? खत्ररदार, जो मुझसे श्रघ लाल के विषय में कभी कुछ पूछा । झूठा आदमी चिल्लाता बहुत है । उसका रंग-ढंग देखकर लाल वाले मित्र ने सोचा --यह लाल भी हजम कर गया और ऊपर से मेरी पत्नी को दुराचारिणी प्रकट करना चाहता है और मुझे धमकी दे रहा है । आखिर वह हाकिम के पास गया और सारा किस्मा सुनाया । हाकिम ने पूछातुमने किसके सामने लाल दिया था ? उसने कहा - मैंने केवल विश्वास पर ही दिया था। किसी को गवाह नहीं बनाया । उसकी इस स्पष्टोक्ति से हाकिम को उसके कथन पर विश्वास हो गया । हाकिम ने सान्त्वना देते हुए कहा- मैं समझ गया हूँ । तुम सच्चे हो । मैं तुम्हारा लाल दिलाने का प्रयत्न करूंगा। कदाचित लाल न मिला तो तुम्हारी इज्जत अवश्य वापिस आयगी । तुम अपने घर जाओ ।
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लेकिन उसकी अपेक्षा इमारत बनवानेको बेहतर समझते हैं जिसकी वजह सिर्फ यह होती है, कि इमारतसे जो चिरस्थायी प्रसिद्धि मिलती है, वह गरीबोंको देनेमे नही हो सकती ।
३- तोहाफ़तुल- फिलासफा ( = दर्शन - खंडन)
(क) लिखनेका प्रयोजन -- कितनेही मुसलमान इस पुस्तकके नाम और गजालीकी सर्वप्रियताको देखकर यह समझने की गलती करते हैं, कि गजालीन सत्रमच दर्शनका विश्वस ( खंडन) कर दिया। ग़ज़ालीके अपने ही विचार दर्शन छोड़ और है क्या? उन्होंने कभी बदुओंके सीधे-सादे इस्लामकी ओर लोटनका नारा नहीं लगाया यद्यपि उनकी कुछ सामाजिक बातों-- कबीलाशाही, भाई-चारा समानता की वह जरूर अनकरणीय बनाना चाहते थे । शिक्षित संस्कृत नागरिक श्रेणीमें उस वक्त दर्शन बहुत सम्मान था. खुद इस्लामके भीतर पवित्र संघ
( अखवान सफा ) वातनी आदि सम्प्रदाय पैदा हो गये थे, जो कि अफलातं अरस्तुको सूक्ष्म ज्ञान रसुल अरवी भी बड़ा समझते थेः इसलिए इस्लामके जबर्दस्त वरील गजालीको ऐसी पुस्तक लिखना जरूरी या. जैसा कि उन्होंने स्वय पुस्तककी भूमिकाम लिखा है
"हमारे जमानेस एसे लाग पैदा हो गए हैं जिनको यह अभिमान है, कि उनका दिल-व-दिमाग साधारण आदमियरोसे श्रेष्ठ है। यह लोग मज़हबी आजाओ और नियमोका घृणाकी निगाहसे देखते हैं। इनका ख्याल है कि अफलातू, अरस्तु आदि पुराने हकीम (मुनि या आचार्य) मज़हबको झठा समझते थे। चूंकि हकीम ज्ञान-विज्ञानके प्रवत्तंक और प्रतिष्ठापक थे, और बुद्धि तथा प्रतिभायें उनके जैसा कोई नहीं हुआ; इसलिए उनका धर्मको न मानता इस वा का प्रमाण है कि मजहब ( धर्म ) वस्तुत. झूठ और फजूल है। उसके नियम तथा सिद्धान्त मनगढन्त और बनावटी हैं, जो सिर्फ देखने हीमें सुन्दर और चित्ताकर्षक मालूम होते है। इसी वजहमें मैंने निश्चय किया कि (यूनानी) आचायत आध्यात्मिक विषयपर
जो कुछ लिखा है, उसकी गलतियाँ दिखलाऊँ, और साबित करूँ कि उनके सिद्धान्त और बहसें लड़कोंके खेल हैं ।'
(ख) दार्शनिक तत्त्व सभी त्याज्य नहीं - ग़ज़ाली दर्शनको सत्यताको जानते थे, इसलिए दर्शनकी सभी वातोंको गलत कहना उनके लिए असंभव था, उनका तो काम था कुमारिल भट्टकी भाँति दर्शनको खंडन करते हुए भी उसीकी आड़ लेकर लचर विश्वासोंकी स्थापना करना । स्तुपी स्थिति साफ करते हुए ग़जाली लिखते हैं"दर्शनमें तीन तरहके सिद्धान्त आते हैं -- ( १ ) वह सिद्धान्त, जो केवल शब्द और परिभाषाको लेनेपर इस्लाम के सिद्धान्तोंसे भेद रखते हैं, जैसे खुदा ( ईश्वर ) को वह द्रव्य बतलाते हैं, लेकिन द्रव्यसे उनका अभि प्राय अनित्य ( वस्तु ) नहीं बल्कि ऐसी वस्तुसे है, जो स्वयं बिना किसीके सहारे, अपना अस्तित्व रखती है। इस ख्यालसे खुदाकी द्रव्य कहना बिलकुल ठीक है, यद्यपि शरीअत (इस्लामी धर्म ग्रंथ ) में यह शब्द इस्तेमाल नहीं किया गया है ।
" ( २ ) वह सिद्धान्त जो इस्लामके सिद्धान्तोंके विरुद्ध नहीं है । जैसे चन्द्रमामे इस वजहसे ग्रहण लगता है कि उसके और सूर्यके बीचमें पृथ्वी या बाधक हो जाती है। ऐसे सिद्धान्तोंका खंडन करना मेरा काम नहीं है। जो लोग ऐसे सिद्धान्तोंके इन्कार और झुठलानेको इस्लामका अंग समझते हैं, वह वस्तुतः इस्लामपर अन्याय करते हैं; क्योंकि इन सिद्धान्तोंकी बुनियाद गणित-शास्त्रकी युक्तियाँ हैं, जिनको जान लेनेपर उनकी सत्यतामें कोई सन्देह नहीं रह जाता। अब अगर कोई आदमी यह साबित करे, कि ये सिद्धान्त इस्लाम के विरुद्ध हैं, तो विद्याके जानकार पुरुपके मन में स्वयं इस्लाम के प्रति सन्देह पैदा हो जायगा ।
( ३ ) तीसरे प्रकार के वे सिद्धान्त हैं, जो कि इस्लामके निश्चित सिद्धान्तोंके विरुद्ध हैं, जैसे जगतकी अनादिता, कयामत से इनकार आदि । यही सिद्धान्त हैं जिनसे यहाँ हमें काम है, और जिनको झूठा साबित करना हमारी ( इस ) पुस्तकका प्रयोजन है ।"
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लेकिन उसकी अपेक्षा इमारत बनवानेको बेहतर समझते हैं जिसकी वजह सिर्फ यह होती है, कि इमारतसे जो चिरस्थायी प्रसिद्धि मिलती है, वह गरीबोंको देनेमे नही हो सकती । तीन- तोहाफ़तुल- फिलासफा लिखनेका प्रयोजन -- कितनेही मुसलमान इस पुस्तकके नाम और गजालीकी सर्वप्रियताको देखकर यह समझने की गलती करते हैं, कि गजालीन सत्रमच दर्शनका विश्वस कर दिया। ग़ज़ालीके अपने ही विचार दर्शन छोड़ और है क्या? उन्होंने कभी बदुओंके सीधे-सादे इस्लामकी ओर लोटनका नारा नहीं लगाया यद्यपि उनकी कुछ सामाजिक बातों-- कबीलाशाही, भाई-चारा समानता की वह जरूर अनकरणीय बनाना चाहते थे । शिक्षित संस्कृत नागरिक श्रेणीमें उस वक्त दर्शन बहुत सम्मान था. खुद इस्लामके भीतर पवित्र संघ वातनी आदि सम्प्रदाय पैदा हो गये थे, जो कि अफलातं अरस्तुको सूक्ष्म ज्ञान रसुल अरवी भी बड़ा समझते थेः इसलिए इस्लामके जबर्दस्त वरील गजालीको ऐसी पुस्तक लिखना जरूरी या. जैसा कि उन्होंने स्वय पुस्तककी भूमिकाम लिखा है "हमारे जमानेस एसे लाग पैदा हो गए हैं जिनको यह अभिमान है, कि उनका दिल-व-दिमाग साधारण आदमियरोसे श्रेष्ठ है। यह लोग मज़हबी आजाओ और नियमोका घृणाकी निगाहसे देखते हैं। इनका ख्याल है कि अफलातू, अरस्तु आदि पुराने हकीम मज़हबको झठा समझते थे। चूंकि हकीम ज्ञान-विज्ञानके प्रवत्तंक और प्रतिष्ठापक थे, और बुद्धि तथा प्रतिभायें उनके जैसा कोई नहीं हुआ; इसलिए उनका धर्मको न मानता इस वा का प्रमाण है कि मजहब वस्तुत. झूठ और फजूल है। उसके नियम तथा सिद्धान्त मनगढन्त और बनावटी हैं, जो सिर्फ देखने हीमें सुन्दर और चित्ताकर्षक मालूम होते है। इसी वजहमें मैंने निश्चय किया कि आचायत आध्यात्मिक विषयपर जो कुछ लिखा है, उसकी गलतियाँ दिखलाऊँ, और साबित करूँ कि उनके सिद्धान्त और बहसें लड़कोंके खेल हैं ।' दार्शनिक तत्त्व सभी त्याज्य नहीं - ग़ज़ाली दर्शनको सत्यताको जानते थे, इसलिए दर्शनकी सभी वातोंको गलत कहना उनके लिए असंभव था, उनका तो काम था कुमारिल भट्टकी भाँति दर्शनको खंडन करते हुए भी उसीकी आड़ लेकर लचर विश्वासोंकी स्थापना करना । स्तुपी स्थिति साफ करते हुए ग़जाली लिखते हैं"दर्शनमें तीन तरहके सिद्धान्त आते हैं -- वह सिद्धान्त, जो केवल शब्द और परिभाषाको लेनेपर इस्लाम के सिद्धान्तोंसे भेद रखते हैं, जैसे खुदा को वह द्रव्य बतलाते हैं, लेकिन द्रव्यसे उनका अभि प्राय अनित्य नहीं बल्कि ऐसी वस्तुसे है, जो स्वयं बिना किसीके सहारे, अपना अस्तित्व रखती है। इस ख्यालसे खुदाकी द्रव्य कहना बिलकुल ठीक है, यद्यपि शरीअत में यह शब्द इस्तेमाल नहीं किया गया है । " वह सिद्धान्त जो इस्लामके सिद्धान्तोंके विरुद्ध नहीं है । जैसे चन्द्रमामे इस वजहसे ग्रहण लगता है कि उसके और सूर्यके बीचमें पृथ्वी या बाधक हो जाती है। ऐसे सिद्धान्तोंका खंडन करना मेरा काम नहीं है। जो लोग ऐसे सिद्धान्तोंके इन्कार और झुठलानेको इस्लामका अंग समझते हैं, वह वस्तुतः इस्लामपर अन्याय करते हैं; क्योंकि इन सिद्धान्तोंकी बुनियाद गणित-शास्त्रकी युक्तियाँ हैं, जिनको जान लेनेपर उनकी सत्यतामें कोई सन्देह नहीं रह जाता। अब अगर कोई आदमी यह साबित करे, कि ये सिद्धान्त इस्लाम के विरुद्ध हैं, तो विद्याके जानकार पुरुपके मन में स्वयं इस्लाम के प्रति सन्देह पैदा हो जायगा । तीसरे प्रकार के वे सिद्धान्त हैं, जो कि इस्लामके निश्चित सिद्धान्तोंके विरुद्ध हैं, जैसे जगतकी अनादिता, कयामत से इनकार आदि । यही सिद्धान्त हैं जिनसे यहाँ हमें काम है, और जिनको झूठा साबित करना हमारी पुस्तकका प्रयोजन है ।"
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एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड (Axis Bank Freecharge Credit Card) (Photo Credit: Axis Bank)
नई दिल्लीः
देश की प्रमुख ई वॉलेट कंपनियों में शुमार फ्रीचार्ज (Freecharge) अपने यूजर्स को बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज, बस की बुकिंग, डीटीएच और अन्य सुविधाएं ऑफर कर रहा है. बहुत से यूजर इस ऐप पर भुगतान के दौरान कैशबैक (Cashback) की तलाश में रहते हैं. आज की इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसे ही क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके जरिए Freecharge ऐप पर भुगतान करे से यूजर को निश्चित रूप से 5 फीसदी कैश बैक मिलेगा. एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड (Axis Bank Freecharge Credit Card) के जरिए फ्रीचार्ज ऐप या वेबसाइट पर किसी भी तरह की खरीदारी करने पर 5 फीसदी का कैशबैक दिया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक फ्रीचार्ज पर चल रहे ऑफर के अलावा ये कैशबैक भी दिए जा रहे हैं. हालांकि यूजर्स को दिए जा रहे कैशबैक पर 500 रुपये की कैपिंग है. इसका मतलब यह है कि एक बिलिंग साइकिल में यूजर्स को 500 रुपये तक कैशबैक ही मिल सकता है. एक्सिस बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड के यूजर को हर साल कुल 6 हजार रुपये का कैशबैक मिलेगा.
फ्रीचार्ज ऐप पर किसी कैटेगरी (मोबाइल रिचार्च, बिल पेमेंट, बस बुकिंग, डीटीएच रिचार्ज आदि) में खर्च करने पर 5 फीसदी कैशबैक दिया जा रहा है. Ola, Uber और Shuttle पर 2 फीसदी का कैशबैक ऑफर किया जा रहा है. इसके अलावा अन्य सभी ट्रांजैक्शन पर भी 2 फीसदी का कैशबैक दिया जा रहा है. हालांकि यूजर्स को वॉलेट में पैसा डालने पर कोई भी कैशबैक नहीं मिलेगा. एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड की ज्वाइनिंग फीस 250 रुपये और सालाना फीस भी 250 रुपये रखी गई है. ज्वाइनिंग फीस और सालाना फीस के अलावा इसके ऊपर टैक्स भी देना होगा. बता दें कि मौजूदा बिलिंग साइकिल में हासिल किया गया कैशबैक अगली बिलिंग की तारीख से 3 दिन पहले क्रेडिट कार्ड अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है.
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एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड नई दिल्लीः देश की प्रमुख ई वॉलेट कंपनियों में शुमार फ्रीचार्ज अपने यूजर्स को बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज, बस की बुकिंग, डीटीएच और अन्य सुविधाएं ऑफर कर रहा है. बहुत से यूजर इस ऐप पर भुगतान के दौरान कैशबैक की तलाश में रहते हैं. आज की इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसे ही क्रेडिट कार्ड के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके जरिए Freecharge ऐप पर भुगतान करे से यूजर को निश्चित रूप से पाँच फीसदी कैश बैक मिलेगा. एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड के जरिए फ्रीचार्ज ऐप या वेबसाइट पर किसी भी तरह की खरीदारी करने पर पाँच फीसदी का कैशबैक दिया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक फ्रीचार्ज पर चल रहे ऑफर के अलावा ये कैशबैक भी दिए जा रहे हैं. हालांकि यूजर्स को दिए जा रहे कैशबैक पर पाँच सौ रुपयापये की कैपिंग है. इसका मतलब यह है कि एक बिलिंग साइकिल में यूजर्स को पाँच सौ रुपयापये तक कैशबैक ही मिल सकता है. एक्सिस बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड के यूजर को हर साल कुल छः हजार रुपये का कैशबैक मिलेगा. फ्रीचार्ज ऐप पर किसी कैटेगरी में खर्च करने पर पाँच फीसदी कैशबैक दिया जा रहा है. Ola, Uber और Shuttle पर दो फीसदी का कैशबैक ऑफर किया जा रहा है. इसके अलावा अन्य सभी ट्रांजैक्शन पर भी दो फीसदी का कैशबैक दिया जा रहा है. हालांकि यूजर्स को वॉलेट में पैसा डालने पर कोई भी कैशबैक नहीं मिलेगा. एक्सिस बैंक फ्रीचार्ज क्रेडिट कार्ड की ज्वाइनिंग फीस दो सौ पचास रुपयापये और सालाना फीस भी दो सौ पचास रुपयापये रखी गई है. ज्वाइनिंग फीस और सालाना फीस के अलावा इसके ऊपर टैक्स भी देना होगा. बता दें कि मौजूदा बिलिंग साइकिल में हासिल किया गया कैशबैक अगली बिलिंग की तारीख से तीन दिन पहले क्रेडिट कार्ड अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है.
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पेरिस, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्रांस में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 29,837 नए मामले सामने आए हैं, इसके बाद देश में कुल मामलों की संख्या 8,97,034 हो गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने यह जानकारी दी है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सामने आए मामलों की संख्या शनिवार के 32,427 की संख्या से कम थी। शनिवार को दर्ज हुए ये मामले फ्रांस में अब तक दर्ज हुए एक दिवसीय मामलों में सर्वाधिक थे।
वहीं रविवार को 85 नई मौतें भी दर्ज हुईं, जिससे मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 33,477 हो गई है।
पिछले कुछ हफ्तों में फ्रांस में कोरोनावायरस के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। खासकर संक्रमण में यह वृद्धि युवाओं में ज्यादा हुई है। इन हालातों ने सरकार को पेरिस समेत देश के 9 बड़े शहरों में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कर्फ्यू लगाने के लिए मजबूर किया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए ये कदम कम से कम 4 हफ्तों तक जारी रहेंगे।
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पेरिस, उन्नीस अक्टूबर । फ्रांस में पिछले चौबीस घंटाटों में कोरोनावायरस के उनतीस,आठ सौ सैंतीस नए मामले सामने आए हैं, इसके बाद देश में कुल मामलों की संख्या आठ,सत्तानवे,चौंतीस हो गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने यह जानकारी दी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सामने आए मामलों की संख्या शनिवार के बत्तीस,चार सौ सत्ताईस की संख्या से कम थी। शनिवार को दर्ज हुए ये मामले फ्रांस में अब तक दर्ज हुए एक दिवसीय मामलों में सर्वाधिक थे। वहीं रविवार को पचासी नई मौतें भी दर्ज हुईं, जिससे मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर तैंतीस,चार सौ सतहत्तर हो गई है। पिछले कुछ हफ्तों में फ्रांस में कोरोनावायरस के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। खासकर संक्रमण में यह वृद्धि युवाओं में ज्यादा हुई है। इन हालातों ने सरकार को पेरिस समेत देश के नौ बड़े शहरों में रात नौ बजे से सुबह छः बजे के बीच कर्फ्यू लगाने के लिए मजबूर किया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए ये कदम कम से कम चार हफ्तों तक जारी रहेंगे।
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जिनके ऊपर उथला पानी है और कहीं पानी में छिपी हुई बड़ीबड़ी चट्टानें हैं जिनके ऊपर पहाड़ की चोटियाँ पानी के भीतर छिपी हुई हैं। इन चट्टानों और पहाड़ियों की नोकीली चोटियों से टकर खाकर जलयान टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। समुद्री यात्रियों को इन गुप्त संकटों के कारण बड़ी-बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता था। अतएव इन संकटों से बचने के लिए मनुष्यों ने ज्योति गृहों का जन्म दिया।
जलयान पानी में चल सके इसके लिए इतने गहरे पानी की आवश्यकता होती है कि उसका पैदा तलहटी को न ले। यदि उथला पानी हुआ तो जलग्रान पानी में तैर न सकेगा। इतने उथले पानी में बड़े-बड़े जलयानों के मिट्टी में धँस जाने पर कोई युक्ति काम नहीं कर सकती । ऐसे स्थानों से सचेत रहने के लिये तैरते हुए ज्योति गृहों की आवश्यकता थी । पोत-स्थलों और निर्दिष्ट स्थानों पर पहुँचने के लिए भी जलयानों को ऐसे संकेत की ear at fजनकी सहायता से रात के अंधेरे में भी में वे वहाँ पहुँच सकें। इस कारण उन स्थानों में ज्योति-गृह निर्मित किये गये ।
प्राचीन काल में नाविकों ने इन असुविधाओं को दूर करने के लिए कुछ-कुछ अवश्य हो यत्न किया होगा, परन्तु उन यत्नों का कहीं उल्लेख नहीं मिलता। पाश्चात्य देशों में मिश्र देश के निकट ज्योति गृहों के होने का पता चलता है। उनमें अधिक प्रसिद्ध फैरोज-द्वीप पर बना हुआ ज्योति-गृह था जिससे सिकंदरिया जाने
वाले जलयानों के मार्ग में उसके कँगूरे की सूचना मिलती थी । यह संगमरमर का बना हुआ और ६० फुट ऊँचा था। इसके ऊपर दिन-रात लकड़ी जलती रहती थी जिससे रात को तो इसके प्रकाश से नाविकों को कँगूरे की सूचना मिलती थी और दिन को उसका धुआँ ही उन्हें सचेत करता था ।
इस ज्योति गृह का निर्माण ईसवी सन् से तीन सौ वर्ष पूर्व हुआ था । और डेढ़ सहस्र वर्ष नक समुद्र यात्रियों का पथ-प्रदर्शन करने के पश्चात् एक बार भूडोल के कारण यह गिर गया। इसके गिरने के पश्चात् फैराज द्वीप में इसके स्थान पर कई बार ज्योति गृह निर्मित किये गये । फेरीज-द्वीप के ज्योति गृह ने इतना गौरव प्राप्त किया कि जब अन्य स्थानों पर ज्योति-गृह का निर्माण हुआ तो लोगों ने ज्योति-गृह का अर्थ प्रकट करने के लिए उन्हें रोज नाम से ही प्रसिद्ध किया । बहुत दिनों तक इनमें प्रकाश के लिए लकड़ी का ही उपयोग होता रहा, परन्तु पीछे कोयले ने लकड़ी का स्थान ग्रहण किया। आधुनिक युग में प्रकाश के लिए लकड़ी और कोयले के स्थान पर तेल और विद्युत् का उपयोग होता है।
नाविकों ने संसार के प्रायः सभी सागरों को जान डाला और सभी ज्ञात समुद्री चट्टानों और छिपी हुई पहाड़ियों की चोटियों पर ज्योति-गृह बन गये हैं जिनमें प्रकाश का प्रबन्ध करने के लिए निरंतर दे। या तीन व्यक्ति रहते हैं। उनके रहने के लिए उसी में सारी व्यवस्था रहती है। महीने में एक या दो बार उनके
पास जलयानों द्वारा भोजन आदि की सामग्री पहुँचा दी जाती है । अगर ये जलयान इन तक सामान पहुँचाने में विलम्ब कर देते इनके। भूखों मरना पड़े
इनका काम बहुत उत्तरदायित्व का होता है । यदि तनिक सी उपेक्षा करने से रात को किसी समय प्रकाश बुझ जाय तो किसी पोत के चट्टान से टकरा जाने पर न मालूम कितने मनुष्यों की जान चली जाय। इस कारण बारी-बारी से रात भर जागते रह कर उन्हें इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि किसी प्रकार ज्योतिगृह का प्रकाश बुझने न पावे ।
प्रकाश करने के लिये या तो इंजन से पंप द्वारा तेल ऊपर भेजते हैं वा यन्त्रों द्वारा उत्पन्न हुई विद्युत् ऊपर पहुँचाई जाती है । इनका प्रकाश इतनी चकाचौंध उत्पन्न करने वाला होता है कि इन्हें देखने पर कभी-कभी लोग पागल हो जाते हैं। इस कारण ज्योतिगृह में दो या तीन आदमी रक्खे जाते हैं जिससे एक के अशक हो जाने पर या मृत हो जाने पर दूसरे आदमी प्रकाश का प्रबन्ध कर सकें। जब इस प्रकार का कोई संकट आ उपस्थित होता है तो काले झंडे हिला कर संकेत करते हैं, जिससे उनकी सहायता के लिए पोत पहुँच जाएँ। अब प्रायः सभी ज्योति गृहों पर बेतार के तार भी लग गये हैं जिनसे दूर के मनुष्यों से बातचीत की जा सकती है। इन ज्योति गृहों का प्रकाश १७-१८ मील तक दिखायी पड़ता है जिसे देखकर पोत सावधान हो जाते हैं ।
प्रत्येक ज्योति-गृह में भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रकाश का प्रबन्ध
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जिनके ऊपर उथला पानी है और कहीं पानी में छिपी हुई बड़ीबड़ी चट्टानें हैं जिनके ऊपर पहाड़ की चोटियाँ पानी के भीतर छिपी हुई हैं। इन चट्टानों और पहाड़ियों की नोकीली चोटियों से टकर खाकर जलयान टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं। समुद्री यात्रियों को इन गुप्त संकटों के कारण बड़ी-बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता था। अतएव इन संकटों से बचने के लिए मनुष्यों ने ज्योति गृहों का जन्म दिया। जलयान पानी में चल सके इसके लिए इतने गहरे पानी की आवश्यकता होती है कि उसका पैदा तलहटी को न ले। यदि उथला पानी हुआ तो जलग्रान पानी में तैर न सकेगा। इतने उथले पानी में बड़े-बड़े जलयानों के मिट्टी में धँस जाने पर कोई युक्ति काम नहीं कर सकती । ऐसे स्थानों से सचेत रहने के लिये तैरते हुए ज्योति गृहों की आवश्यकता थी । पोत-स्थलों और निर्दिष्ट स्थानों पर पहुँचने के लिए भी जलयानों को ऐसे संकेत की ear at fजनकी सहायता से रात के अंधेरे में भी में वे वहाँ पहुँच सकें। इस कारण उन स्थानों में ज्योति-गृह निर्मित किये गये । प्राचीन काल में नाविकों ने इन असुविधाओं को दूर करने के लिए कुछ-कुछ अवश्य हो यत्न किया होगा, परन्तु उन यत्नों का कहीं उल्लेख नहीं मिलता। पाश्चात्य देशों में मिश्र देश के निकट ज्योति गृहों के होने का पता चलता है। उनमें अधिक प्रसिद्ध फैरोज-द्वीप पर बना हुआ ज्योति-गृह था जिससे सिकंदरिया जाने वाले जलयानों के मार्ग में उसके कँगूरे की सूचना मिलती थी । यह संगमरमर का बना हुआ और साठ फुट ऊँचा था। इसके ऊपर दिन-रात लकड़ी जलती रहती थी जिससे रात को तो इसके प्रकाश से नाविकों को कँगूरे की सूचना मिलती थी और दिन को उसका धुआँ ही उन्हें सचेत करता था । इस ज्योति गृह का निर्माण ईसवी सन् से तीन सौ वर्ष पूर्व हुआ था । और डेढ़ सहस्र वर्ष नक समुद्र यात्रियों का पथ-प्रदर्शन करने के पश्चात् एक बार भूडोल के कारण यह गिर गया। इसके गिरने के पश्चात् फैराज द्वीप में इसके स्थान पर कई बार ज्योति गृह निर्मित किये गये । फेरीज-द्वीप के ज्योति गृह ने इतना गौरव प्राप्त किया कि जब अन्य स्थानों पर ज्योति-गृह का निर्माण हुआ तो लोगों ने ज्योति-गृह का अर्थ प्रकट करने के लिए उन्हें रोज नाम से ही प्रसिद्ध किया । बहुत दिनों तक इनमें प्रकाश के लिए लकड़ी का ही उपयोग होता रहा, परन्तु पीछे कोयले ने लकड़ी का स्थान ग्रहण किया। आधुनिक युग में प्रकाश के लिए लकड़ी और कोयले के स्थान पर तेल और विद्युत् का उपयोग होता है। नाविकों ने संसार के प्रायः सभी सागरों को जान डाला और सभी ज्ञात समुद्री चट्टानों और छिपी हुई पहाड़ियों की चोटियों पर ज्योति-गृह बन गये हैं जिनमें प्रकाश का प्रबन्ध करने के लिए निरंतर दे। या तीन व्यक्ति रहते हैं। उनके रहने के लिए उसी में सारी व्यवस्था रहती है। महीने में एक या दो बार उनके पास जलयानों द्वारा भोजन आदि की सामग्री पहुँचा दी जाती है । अगर ये जलयान इन तक सामान पहुँचाने में विलम्ब कर देते इनके। भूखों मरना पड़े इनका काम बहुत उत्तरदायित्व का होता है । यदि तनिक सी उपेक्षा करने से रात को किसी समय प्रकाश बुझ जाय तो किसी पोत के चट्टान से टकरा जाने पर न मालूम कितने मनुष्यों की जान चली जाय। इस कारण बारी-बारी से रात भर जागते रह कर उन्हें इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि किसी प्रकार ज्योतिगृह का प्रकाश बुझने न पावे । प्रकाश करने के लिये या तो इंजन से पंप द्वारा तेल ऊपर भेजते हैं वा यन्त्रों द्वारा उत्पन्न हुई विद्युत् ऊपर पहुँचाई जाती है । इनका प्रकाश इतनी चकाचौंध उत्पन्न करने वाला होता है कि इन्हें देखने पर कभी-कभी लोग पागल हो जाते हैं। इस कारण ज्योतिगृह में दो या तीन आदमी रक्खे जाते हैं जिससे एक के अशक हो जाने पर या मृत हो जाने पर दूसरे आदमी प्रकाश का प्रबन्ध कर सकें। जब इस प्रकार का कोई संकट आ उपस्थित होता है तो काले झंडे हिला कर संकेत करते हैं, जिससे उनकी सहायता के लिए पोत पहुँच जाएँ। अब प्रायः सभी ज्योति गृहों पर बेतार के तार भी लग गये हैं जिनसे दूर के मनुष्यों से बातचीत की जा सकती है। इन ज्योति गृहों का प्रकाश सत्रह-अट्ठारह मील तक दिखायी पड़ता है जिसे देखकर पोत सावधान हो जाते हैं । प्रत्येक ज्योति-गृह में भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रकाश का प्रबन्ध
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सरदारशहर में भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र पर कार्यरत ई मित्र संचालकों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपते हुए नरेगा कम्प्यूटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त करने की मांग की। ई-मित्र संचालक महेंद्र ने बताया कि राजस्थान प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के राजीव गांधी सेवा केन्द्रों पर 8 वर्षों से कार्यरत ई मित्र संचालको की तर्ज पर हम भी आमजन को ई मित्र सम्बन्धी सेवाएं नियमित उपलब्ध करवा रहे और केन्द्र पर स्थापित ई मित्र प्लस मशीन का संचालन भी बिना मानदेय के कर रहे हैं। विनोद कुमार नायक ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग द्वारा हमारे से प्रति महीने में बायोमेट्रिक हाजरी भी करवाते हैं, जो पर्याप्त मात्रा में नियमित आमदनी नही होने से हमारे परिवार के पालन पोषण में अत्यधिक आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ई-मित्र संचालकों ने कहा कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में नरेगा योजनान्तर्गत लगाए जाने वाले नरेगा कम्प्यूटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद की तर्ज पर समस्त ई मित्र प्लस ऑपरेटर को ही नियुक्त किया जाए, नहीं तो पूरे प्रदेश ई-मित्र संचालक विरोध प्रदर्शन करेगें। इस मौके पर महेंद्र उदासर,मनोज कुमार, जितेंद्रसिंह, बनवारीलाल, रामचंद्र, तेजपाल, विनोद रामसीसर सहित बड़ी संख्या में ई-मित्र संचालक उपस्थित थे।
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सरदारशहर में भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र पर कार्यरत ई मित्र संचालकों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपते हुए नरेगा कम्प्यूटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त करने की मांग की। ई-मित्र संचालक महेंद्र ने बताया कि राजस्थान प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के राजीव गांधी सेवा केन्द्रों पर आठ वर्षों से कार्यरत ई मित्र संचालको की तर्ज पर हम भी आमजन को ई मित्र सम्बन्धी सेवाएं नियमित उपलब्ध करवा रहे और केन्द्र पर स्थापित ई मित्र प्लस मशीन का संचालन भी बिना मानदेय के कर रहे हैं। विनोद कुमार नायक ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग द्वारा हमारे से प्रति महीने में बायोमेट्रिक हाजरी भी करवाते हैं, जो पर्याप्त मात्रा में नियमित आमदनी नही होने से हमारे परिवार के पालन पोषण में अत्यधिक आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ई-मित्र संचालकों ने कहा कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में नरेगा योजनान्तर्गत लगाए जाने वाले नरेगा कम्प्यूटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद की तर्ज पर समस्त ई मित्र प्लस ऑपरेटर को ही नियुक्त किया जाए, नहीं तो पूरे प्रदेश ई-मित्र संचालक विरोध प्रदर्शन करेगें। इस मौके पर महेंद्र उदासर,मनोज कुमार, जितेंद्रसिंह, बनवारीलाल, रामचंद्र, तेजपाल, विनोद रामसीसर सहित बड़ी संख्या में ई-मित्र संचालक उपस्थित थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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रामपुर बुशहर - 23 मई तक रामपुर में ईवीएम मशीनें थ्री टायर कार्डन सकेयोरटी में रहेगी। इसके लिए रामपुर प्रशासन व निर्वाचन विभाग द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए है। ईवीएम मशीनों का स्ट्रांग रूम पदम वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में रखा गया है। जहां आईटीबीपी व जिला पुलिस के जवान दिन रात ड्यूटी दे रहे है। हर दिन इस स्ट्रांग रूम की जांच की जाती है। इस रूम की सुरक्षा के लिए रामपुर प्रशासन द्वारा सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है। जहां स्ट्रांग रूम की हर समय की गतिविधियों का पूरा ब्यौरा फीड होता रहता है। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ईवीएम मशीनों की रखवाली के पुख्ता इंतजाम किए गए है। हर दिन स्ट्रांग रूम की चैकिंग प्रशासन के आला अधिकारियों के द्वारा की जाती है। इसके लिए बाकायदा लाग बुक भरी जाती है। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि 23 मई को मतगणना होगी। मतगणना का क्रम भी पदम वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में ही चलेगा। निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि थ्री कार्डन सकेयोरटी में सबसे पहले आईटीबीपी के जवान तैनात किए गए है। जिसके बाद जिला पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि 100 मीटर के दायरे में हर व्यक्ति की चैंकिग होगी। यहां तक कि मोबाईल भी भीतर ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। गौरतलब है कि 19 मई को हुए मतदान में भी स्थानीय प्रशासन ने काफी अहम भूमिका निभाई। यहां के दुर्गम क्षेत्रों में चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से निपटा। यहां पर चुनाव ड्यूटी पर आए कर्मचारियों का कहना था कि जिस तरह का इंतजाम इस बार स्थानीय प्रशासन ने किया है वह काफी बेहतर रहा। जहां खाने का उचित इंतजाम किया गया था वहीं इस बार चुनाव ड्यूटी पर आए कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों तक इस बार बसों का उचित इंतजाम था। इसके अलावा चुनाव निपटाने के बाद जब पोलिंग पार्टियां रामपुर पहुंची तो स्कूल में ईवीएम मशीनों व अन्य सामग्री को लेने के भी उचित इंतजाम किए गए थे। जानकारी के मुताबिक रविवार मध्य रात्रि तक विभिन्न पोलिंग बूथों से चुनाव कर्मचारी ईवीएम मशीनों के साथ पहुंचे।
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रामपुर बुशहर - तेईस मई तक रामपुर में ईवीएम मशीनें थ्री टायर कार्डन सकेयोरटी में रहेगी। इसके लिए रामपुर प्रशासन व निर्वाचन विभाग द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए है। ईवीएम मशीनों का स्ट्रांग रूम पदम वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में रखा गया है। जहां आईटीबीपी व जिला पुलिस के जवान दिन रात ड्यूटी दे रहे है। हर दिन इस स्ट्रांग रूम की जांच की जाती है। इस रूम की सुरक्षा के लिए रामपुर प्रशासन द्वारा सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है। जहां स्ट्रांग रूम की हर समय की गतिविधियों का पूरा ब्यौरा फीड होता रहता है। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ईवीएम मशीनों की रखवाली के पुख्ता इंतजाम किए गए है। हर दिन स्ट्रांग रूम की चैकिंग प्रशासन के आला अधिकारियों के द्वारा की जाती है। इसके लिए बाकायदा लाग बुक भरी जाती है। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि तेईस मई को मतगणना होगी। मतगणना का क्रम भी पदम वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में ही चलेगा। निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि थ्री कार्डन सकेयोरटी में सबसे पहले आईटीबीपी के जवान तैनात किए गए है। जिसके बाद जिला पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि एक सौ मीटर के दायरे में हर व्यक्ति की चैंकिग होगी। यहां तक कि मोबाईल भी भीतर ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। गौरतलब है कि उन्नीस मई को हुए मतदान में भी स्थानीय प्रशासन ने काफी अहम भूमिका निभाई। यहां के दुर्गम क्षेत्रों में चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से निपटा। यहां पर चुनाव ड्यूटी पर आए कर्मचारियों का कहना था कि जिस तरह का इंतजाम इस बार स्थानीय प्रशासन ने किया है वह काफी बेहतर रहा। जहां खाने का उचित इंतजाम किया गया था वहीं इस बार चुनाव ड्यूटी पर आए कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों तक इस बार बसों का उचित इंतजाम था। इसके अलावा चुनाव निपटाने के बाद जब पोलिंग पार्टियां रामपुर पहुंची तो स्कूल में ईवीएम मशीनों व अन्य सामग्री को लेने के भी उचित इंतजाम किए गए थे। जानकारी के मुताबिक रविवार मध्य रात्रि तक विभिन्न पोलिंग बूथों से चुनाव कर्मचारी ईवीएम मशीनों के साथ पहुंचे।
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सेंट्रल इनवेस्टीगेशन ब्यूरो (सीआईबी) ने रविवार को नेपाल पुलिस में एसएसपी पद पर तैनात श्याम खत्री को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी पिछले दिनों त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तस्करी के 33 किलो सोना जब्ती मामले में की गई। सीआईबी की जांच में एसएसपी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सीआईबी श्री खत्री के निलंबन के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखने की तैयारी में जुट गया है। सीआईबी का कहना है कि सोना जब्ती के दिन श्री खत्री हवाई अड्डे पर सुरक्षा में तैनात थे। मालूम हो कि पिछले 5 जनवरी को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 33 किलो तस्करी के सोना के साथ गोपाल बहादुर शाही को गिरफ्तार किया गया था।
सीआईबी सूत्रों के अनुसार, 18 जनवरी को नेपाल पुलिस ने इस मामले में श्री खत्री को सम्मन किया था। इसमें उनसे कई सवाल किए गए थे। इस मामले में कस्टम विभाग अपने छह अफसरों को पहले ही सस्पेंड कर चुका है। सोना जब्ती के समय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग के 29 अफसर तैनात थे। 14 जनवरी को इनमें 9 अफसरों को वहां से हटा दिया गया था।
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सेंट्रल इनवेस्टीगेशन ब्यूरो ने रविवार को नेपाल पुलिस में एसएसपी पद पर तैनात श्याम खत्री को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी पिछले दिनों त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तस्करी के तैंतीस किलो सोना जब्ती मामले में की गई। सीआईबी की जांच में एसएसपी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सीआईबी श्री खत्री के निलंबन के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखने की तैयारी में जुट गया है। सीआईबी का कहना है कि सोना जब्ती के दिन श्री खत्री हवाई अड्डे पर सुरक्षा में तैनात थे। मालूम हो कि पिछले पाँच जनवरी को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैंतीस किलो तस्करी के सोना के साथ गोपाल बहादुर शाही को गिरफ्तार किया गया था। सीआईबी सूत्रों के अनुसार, अट्ठारह जनवरी को नेपाल पुलिस ने इस मामले में श्री खत्री को सम्मन किया था। इसमें उनसे कई सवाल किए गए थे। इस मामले में कस्टम विभाग अपने छह अफसरों को पहले ही सस्पेंड कर चुका है। सोना जब्ती के समय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग के उनतीस अफसर तैनात थे। चौदह जनवरी को इनमें नौ अफसरों को वहां से हटा दिया गया था।
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के बोर्ड की बैठक में मदरसों में घटती छात्र संख्या पर भी बैठक में चिंता जताई गई। साथ ही तय किया गया कि जिन मदरसों में छात्र कम हैं और शिक्षक अधिक हैं वहां के शिक्षकों को दूसरे मदरसों में समायोजित किया जाएगा। बैठक में सदस्यों ने कहा कि बहुत से मदरसा शिक्षक ऐसे हैं जो अपने बेटे-बेटियों को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाते हैं जबकि अन्य को मदरसा शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करते हैं। मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों व कर्मचारियों के पुत्र-पुत्रियां कहां पढ़ रहे इस बारे में मदरसा बोर्ड सर्वे कराएगा।
बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत संचालित मदरसों की शैक्षिक गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए जो प्रस्ताव आए हैं वह विनियमावली 2016 के अनुरूप हों तो उन्हें स्वीकृत किया जाए अन्यथा वापस भेज दिया जाए। भूमि व भवन के ट्रांसफर संबंधी प्रस्ताव बोर्ड के रजिस्ट्रार निस्तारित करेंगे।
आगामी सत्र से मदरसों में छात्रों के पंजीकरण आनलाइन कराए जाने की व्यवस्था कराने व आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मदरसे में बायोमीटिक उपस्थिति प्रणाली की स्थापना की जाएगी। बैठक में सदस्य कमर अली, तनवीर रिजवी, डा. इमरान अहमद, असद हुसैन के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी आशीष आनन्द व रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मदरसा बोर्ड ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया गया।
बोर्ड ने रजिस्ट्रार को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब मदरसों में रिक्त पदों पर भर्तियां उन्हीं अभ्यर्थियों से की जाएंगी जो एमटीईटी परीक्षा पास होंगे। वर्तमान में करीब 550 मदरसा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। एमटीईटी के लागू होने से भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी नहीं लगेंगे।
बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 14 मई से शुरू होकर 27 मई तक चलेंगी। रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय परीक्षा समिति से विचार कर विस्तृत कार्यक्रम जारी करेंगे। बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं राज्य के अनुदानित मदरसों व आलिया स्तर के स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होंगी।
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के बोर्ड की बैठक में मदरसों में घटती छात्र संख्या पर भी बैठक में चिंता जताई गई। साथ ही तय किया गया कि जिन मदरसों में छात्र कम हैं और शिक्षक अधिक हैं वहां के शिक्षकों को दूसरे मदरसों में समायोजित किया जाएगा। बैठक में सदस्यों ने कहा कि बहुत से मदरसा शिक्षक ऐसे हैं जो अपने बेटे-बेटियों को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाते हैं जबकि अन्य को मदरसा शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करते हैं। मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों व कर्मचारियों के पुत्र-पुत्रियां कहां पढ़ रहे इस बारे में मदरसा बोर्ड सर्वे कराएगा। बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत संचालित मदरसों की शैक्षिक गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए जो प्रस्ताव आए हैं वह विनियमावली दो हज़ार सोलह के अनुरूप हों तो उन्हें स्वीकृत किया जाए अन्यथा वापस भेज दिया जाए। भूमि व भवन के ट्रांसफर संबंधी प्रस्ताव बोर्ड के रजिस्ट्रार निस्तारित करेंगे। आगामी सत्र से मदरसों में छात्रों के पंजीकरण आनलाइन कराए जाने की व्यवस्था कराने व आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मदरसे में बायोमीटिक उपस्थिति प्रणाली की स्थापना की जाएगी। बैठक में सदस्य कमर अली, तनवीर रिजवी, डा. इमरान अहमद, असद हुसैन के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी आशीष आनन्द व रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित थे। मदरसा बोर्ड ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू करने का निर्णय लिया गया। बोर्ड ने रजिस्ट्रार को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब मदरसों में रिक्त पदों पर भर्तियां उन्हीं अभ्यर्थियों से की जाएंगी जो एमटीईटी परीक्षा पास होंगे। वर्तमान में करीब पाँच सौ पचास मदरसा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। एमटीईटी के लागू होने से भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी नहीं लगेंगे। बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं चौदह मई से शुरू होकर सत्ताईस मई तक चलेंगी। रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय परीक्षा समिति से विचार कर विस्तृत कार्यक्रम जारी करेंगे। बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं राज्य के अनुदानित मदरसों व आलिया स्तर के स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होंगी।
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