raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
मुजफ्फरनगर। जनपद में कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान हेल्थ वर्कर्स का कोविड-19 टीकाकरण कार्य आज चले अभियान के बाद पूर्ण कर लिया गया है। जनपद में 12036 हेल्थ वर्कर्स को टीकाकरण के लिए चुना गया था। इसके साथ ही जनपद में आज से कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर्स का भी टीकारण शुरू हो चुका है। आज शुभारम्भ अवसर पर जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने अब इस कोविड टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण की तैयायरियों को भी शुरू कर दिया गया है। आज जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान नहीं चलाया गया है। वहां पर हेल्र्थ वर्कर्स का टीकाकरण कार्य पूर्ण कर लिये जाने का दावा किया गया है। बता दें कि 16 जनवरी को हेल्थ वर्कर्स के लिए कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड का टीका अभियान प्रारम्भ किया गया था। जनपद में 16 जनवरी के बाद 22, 28 और 29 जनवरी को वृहद अभियान चलाया गया। इसके बाद 4 और 5 फरवरी को यह अभियान चलाया गया है। इस छह दिवसीय अभियान के अन्तर्गत जनपद में प्रथम चरण में 12036 हेल्थ वर्कर्स को कोरोना टीका लगाये जाने का लक्ष्य तय किया गया था। इन सभी अभियानों में इन हेल्थ वर्कर्स को टीका के लिए निमंत्रण दिया गया था। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एसीएमओ डा. राजीव निगम ने बताया कि शुक्रवार को केवल नगरीय क्षेत्र के 6 स्थानों में कोविड टीकाकरण अभियान चलाया गया, इसके लिए 8 सत्रों का आयोजन हुआ। इसमें जिला पुरुष चिकित्सालय, पुलिस लाइन, कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत के चौ. चरण सिंह सभागार, वर्धमान हाॅस्पिटल जानसठ रोड में एक-एक सत्र तथा शान्ति मदन हाॅस्पिटल व मेडिकल काॅलेज बेगराजपुर में दो-दो सत्रों में टीकाकरण किया गया। इन 8 स्थानों पर कुल 582 चयनित लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाने का शुभारम्भ हुआ। पुलिस लाइन में 118 और कलेक्ट्रेट में 100 फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीका लगाने की तैयारी की गयी थी, लेकिन यहां पर इस लक्ष्य को शत प्रतिशत हासिल नहीं किया जा सका। आज पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोविड-19 टीकाकरण के लिए कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स में उत्साह नजर आया। कलेक्ट्रेट में कार्यरत कर्मचारियों के साथ ही राजस्व विभाग के कर्मचारी भी काफी संख्या में सवेरे ही कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत के सभाकक्ष में बने कोविड- वैक्सीन रूम में पहंुच गये थे। कुछ ऐसा ही उत्साहपूर्ण वातावरण पुलिस लाइन में बना हुआ था। यहां पर पुलिस कर्मियों को कोविड टीका लगाया गया। वहीं शान्ति मदन हाॅस्पिटल में आज चले अभियान में ग्रेन चैम्बर हाॅस्पिटल नई मण्डी के सचिव एवं व्यापारी नेता संजय मित्तल को भी कोविड टीकाकरण किया गया।
मुजफ्फरनगर। जनपद में कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान हेल्थ वर्कर्स का कोविड-उन्नीस टीकाकरण कार्य आज चले अभियान के बाद पूर्ण कर लिया गया है। जनपद में बारह हज़ार छत्तीस हेल्थ वर्कर्स को टीकाकरण के लिए चुना गया था। इसके साथ ही जनपद में आज से कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर्स का भी टीकारण शुरू हो चुका है। आज शुभारम्भ अवसर पर जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने अब इस कोविड टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण की तैयायरियों को भी शुरू कर दिया गया है। आज जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान नहीं चलाया गया है। वहां पर हेल्र्थ वर्कर्स का टीकाकरण कार्य पूर्ण कर लिये जाने का दावा किया गया है। बता दें कि सोलह जनवरी को हेल्थ वर्कर्स के लिए कोविड-उन्नीस वैक्सीन कोविशील्ड का टीका अभियान प्रारम्भ किया गया था। जनपद में सोलह जनवरी के बाद बाईस, अट्ठाईस और उनतीस जनवरी को वृहद अभियान चलाया गया। इसके बाद चार और पाँच फरवरी को यह अभियान चलाया गया है। इस छह दिवसीय अभियान के अन्तर्गत जनपद में प्रथम चरण में बारह हज़ार छत्तीस हेल्थ वर्कर्स को कोरोना टीका लगाये जाने का लक्ष्य तय किया गया था। इन सभी अभियानों में इन हेल्थ वर्कर्स को टीका के लिए निमंत्रण दिया गया था। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एसीएमओ डा. राजीव निगम ने बताया कि शुक्रवार को केवल नगरीय क्षेत्र के छः स्थानों में कोविड टीकाकरण अभियान चलाया गया, इसके लिए आठ सत्रों का आयोजन हुआ। इसमें जिला पुरुष चिकित्सालय, पुलिस लाइन, कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत के चौ. चरण सिंह सभागार, वर्धमान हाॅस्पिटल जानसठ रोड में एक-एक सत्र तथा शान्ति मदन हाॅस्पिटल व मेडिकल काॅलेज बेगराजपुर में दो-दो सत्रों में टीकाकरण किया गया। इन आठ स्थानों पर कुल पाँच सौ बयासी चयनित लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाने का शुभारम्भ हुआ। पुलिस लाइन में एक सौ अट्ठारह और कलेक्ट्रेट में एक सौ फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीका लगाने की तैयारी की गयी थी, लेकिन यहां पर इस लक्ष्य को शत प्रतिशत हासिल नहीं किया जा सका। आज पुलिस लाइन और कलेक्ट्रेट में कोविड-उन्नीस टीकाकरण के लिए कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स में उत्साह नजर आया। कलेक्ट्रेट में कार्यरत कर्मचारियों के साथ ही राजस्व विभाग के कर्मचारी भी काफी संख्या में सवेरे ही कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत के सभाकक्ष में बने कोविड- वैक्सीन रूम में पहंुच गये थे। कुछ ऐसा ही उत्साहपूर्ण वातावरण पुलिस लाइन में बना हुआ था। यहां पर पुलिस कर्मियों को कोविड टीका लगाया गया। वहीं शान्ति मदन हाॅस्पिटल में आज चले अभियान में ग्रेन चैम्बर हाॅस्पिटल नई मण्डी के सचिव एवं व्यापारी नेता संजय मित्तल को भी कोविड टीकाकरण किया गया।
लाइफ़स्टाइल डेस्क। शादी में हर किसी की नजरें बस दुल्हन पर ही टिकी होती हैं। इसलिए उसकी हर कोशिश होती है अपने इस स्पेशल दिन सबसे खूबसूरत नजर आने की। यही वजह है कि इंडियन ब्राइड्स अपने लुक को अलग और खास बनाने के लिए सिर्फ ड्रेसेज़ के साथ ही नहीं उस पर किए जाने वाले वर्क में भी एक्सपेरिमेंट्स कर रही हैं। लहंगे, चोली, दुपट्टे में लेटेस्ट से लेकर पुराने हर एक तरह की एम्ब्रॉयडरी को शामिल किया जा रहा है। जो सिर्फ आउटफिट को ही नहीं आपके ओवर ऑल लुक को खूबसूरत बनाते हैं। अगर आप शादी में ग्लैमरस नज़र आना चाहती हैं तो हाथों से बने जरदोजी लहंगे के साथ करें एक्सपेरिमेंट। सिल्क और वेल्वेट फैब्रिक पर मैटल और ग्लिटरी जरी वर्क से सजे ब्राइडल आउटफिट्स को खासतौर से रॉयल लुक के लिए पहना जा रहा है। लहंगे के अलावा जरी ब्लाउज़ भी सिंपल साड़ी के साथ पेयर किए जा रहे हैं। जरदोजी से बने मोर, हाथी, फ्लावर और कमल के फूल उसे हैवी लुक देते हैं। पंजाब के मशहूर फुलकारी वर्क की खासियत होती है कि कपड़ों पर दोनों ओर से एक जैसे ही दिखते हैं। ब्राइट कलर्स पर रंग-बिरंगे धागों से किए गए इस वर्क में मिरर और सितारे भी शामिल किए जाते हैं जो उसे और ज्यादा रिच बनाते हैं। पंजाबी शादियों में पहने जाने वाले सलवार-सूट, दुपट्टों के अलावा अब इंडिया के और कई जगहों पर ब्राइड्स फुलकारी वर्क वाले आउटफिट्स को पहन रही हैं। गोटा-पट्टी वर्क वाले लहंगे को अलग लुक के साथ ब्राइड्स कर रही हैं कैरी। जो एथनिक ही नहीं इंडो-वेस्टर्न लुक के लिए भी हैं बेस्ट। राजस्थान का ये खास वर्क मुगलकालीन ब्राइड्स के बीच भी खासा लोकप्रिय था। चोली, दुपट्टों के अलावा गोटा-पट्टी का काम जूलरी और फुटवेयर्स में भी देखा जा सकता है जो उसे ट्रेडिशनल बनाते हैं।
लाइफ़स्टाइल डेस्क। शादी में हर किसी की नजरें बस दुल्हन पर ही टिकी होती हैं। इसलिए उसकी हर कोशिश होती है अपने इस स्पेशल दिन सबसे खूबसूरत नजर आने की। यही वजह है कि इंडियन ब्राइड्स अपने लुक को अलग और खास बनाने के लिए सिर्फ ड्रेसेज़ के साथ ही नहीं उस पर किए जाने वाले वर्क में भी एक्सपेरिमेंट्स कर रही हैं। लहंगे, चोली, दुपट्टे में लेटेस्ट से लेकर पुराने हर एक तरह की एम्ब्रॉयडरी को शामिल किया जा रहा है। जो सिर्फ आउटफिट को ही नहीं आपके ओवर ऑल लुक को खूबसूरत बनाते हैं। अगर आप शादी में ग्लैमरस नज़र आना चाहती हैं तो हाथों से बने जरदोजी लहंगे के साथ करें एक्सपेरिमेंट। सिल्क और वेल्वेट फैब्रिक पर मैटल और ग्लिटरी जरी वर्क से सजे ब्राइडल आउटफिट्स को खासतौर से रॉयल लुक के लिए पहना जा रहा है। लहंगे के अलावा जरी ब्लाउज़ भी सिंपल साड़ी के साथ पेयर किए जा रहे हैं। जरदोजी से बने मोर, हाथी, फ्लावर और कमल के फूल उसे हैवी लुक देते हैं। पंजाब के मशहूर फुलकारी वर्क की खासियत होती है कि कपड़ों पर दोनों ओर से एक जैसे ही दिखते हैं। ब्राइट कलर्स पर रंग-बिरंगे धागों से किए गए इस वर्क में मिरर और सितारे भी शामिल किए जाते हैं जो उसे और ज्यादा रिच बनाते हैं। पंजाबी शादियों में पहने जाने वाले सलवार-सूट, दुपट्टों के अलावा अब इंडिया के और कई जगहों पर ब्राइड्स फुलकारी वर्क वाले आउटफिट्स को पहन रही हैं। गोटा-पट्टी वर्क वाले लहंगे को अलग लुक के साथ ब्राइड्स कर रही हैं कैरी। जो एथनिक ही नहीं इंडो-वेस्टर्न लुक के लिए भी हैं बेस्ट। राजस्थान का ये खास वर्क मुगलकालीन ब्राइड्स के बीच भी खासा लोकप्रिय था। चोली, दुपट्टों के अलावा गोटा-पट्टी का काम जूलरी और फुटवेयर्स में भी देखा जा सकता है जो उसे ट्रेडिशनल बनाते हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने एफबीआई की मदद से देश से फरार हुए टॉप गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को मैक्सिको के पकड़ा है। बॉक्सर को दो दिन में भारत लाया जा सकता है। दीपक बॉक्सर सिविल लाइंस इलाके में हुई एक बिल्डर अमित गुप्ता की हत्या में तलाश थी। दीपक रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या के बाद से गोगी गिरोह की कमान संभाल रहा था। दिल्ली-एनसीआर का टॉप गैंगस्टर दीपक बॉक्सर ने मुरादाबाद से रवि अंटिल के नाम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया हुआ था और कोलकाता से फ्लाइट लेकर 29 जनवरी 2023 को मैक्सिको भाग गया था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने एफबीआई की मदद से देश से फरार हुए टॉप गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को मैक्सिको के पकड़ा है। बॉक्सर को दो दिन में भारत लाया जा सकता है। दीपक बॉक्सर सिविल लाइंस इलाके में हुई एक बिल्डर अमित गुप्ता की हत्या में तलाश थी। दीपक रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या के बाद से गोगी गिरोह की कमान संभाल रहा था। दिल्ली-एनसीआर का टॉप गैंगस्टर दीपक बॉक्सर ने मुरादाबाद से रवि अंटिल के नाम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया हुआ था और कोलकाता से फ्लाइट लेकर उनतीस जनवरी दो हज़ार तेईस को मैक्सिको भाग गया था।
नीति आयोग से संबद्ध डीएमईओ ने 'शासन में स्त्री-पुरूष बराबरी को मुख्यधारा में लाने' पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट में समानता स्थापित करने वाले सिद्धांतों को बजट-निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि 'जेंडर बजट' की प्रक्रिया अधिकतर राज्यों में नहीं अपनाई जाती है और विभिन्न क्षेत्रों में चलाई जा रही कई योजनाओं में भी इसका अनुपालन देखने को नहीं मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, "सभी मंत्रालयों एवं राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में स्त्री- पुरूष समानता आधारित बजट' निर्माण को मुख्यधारा में लाने के लिए 'जेंडर बजटिंग' अधिनियम की जरूरत है। इससे आकड़े जुटाने वाले सभी संस्थान स्त्री-पुरूष आधार पर आंकड़ों के विश्लेषण एवं प्रकाशन के लिए कानूनी तौर पर बाध्य होंगे। " डीएमईओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रही 119 योजनाओं में से सिर्फ 62 योजनाएं ही 'जेंडर-आधारित बजट' प्रक्रिया का पालन कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्त्री-पुरुष विभेद पर आधारित नजरिये को मुख्यधारा में लेकर आना किसी भी नियोजित कार्य के निहितार्थों के महिलाओं एवं पुरुषों के हिसाब से आकलन करने की प्रक्रिया है। यह सभी राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में संचालित नीतियों एवं कार्यक्रमों के डिजाइन, क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की चिंताओं एवं अनुभवों को अनिवार्य अंग बनाने की एक रणनीति भी है। इस तरह महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को ही समान रूप से लाभांवित होना सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके साथ ही डीएमईओ ने राष्ट्रीय महिला नीति को अंतिम रूप देने जरूरत भी बताई है। इसके लिए वर्ष 2016 की मसौदा नीति में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। इस रिपोर्ट में डीएमईओ ने समाज में 'ट्रांसजेंडर' व्यक्तियों की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
नीति आयोग से संबद्ध डीएमईओ ने 'शासन में स्त्री-पुरूष बराबरी को मुख्यधारा में लाने' पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट में समानता स्थापित करने वाले सिद्धांतों को बजट-निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि 'जेंडर बजट' की प्रक्रिया अधिकतर राज्यों में नहीं अपनाई जाती है और विभिन्न क्षेत्रों में चलाई जा रही कई योजनाओं में भी इसका अनुपालन देखने को नहीं मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, "सभी मंत्रालयों एवं राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में स्त्री- पुरूष समानता आधारित बजट' निर्माण को मुख्यधारा में लाने के लिए 'जेंडर बजटिंग' अधिनियम की जरूरत है। इससे आकड़े जुटाने वाले सभी संस्थान स्त्री-पुरूष आधार पर आंकड़ों के विश्लेषण एवं प्रकाशन के लिए कानूनी तौर पर बाध्य होंगे। " डीएमईओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रही एक सौ उन्नीस योजनाओं में से सिर्फ बासठ योजनाएं ही 'जेंडर-आधारित बजट' प्रक्रिया का पालन कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्त्री-पुरुष विभेद पर आधारित नजरिये को मुख्यधारा में लेकर आना किसी भी नियोजित कार्य के निहितार्थों के महिलाओं एवं पुरुषों के हिसाब से आकलन करने की प्रक्रिया है। यह सभी राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में संचालित नीतियों एवं कार्यक्रमों के डिजाइन, क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की चिंताओं एवं अनुभवों को अनिवार्य अंग बनाने की एक रणनीति भी है। इस तरह महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को ही समान रूप से लाभांवित होना सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके साथ ही डीएमईओ ने राष्ट्रीय महिला नीति को अंतिम रूप देने जरूरत भी बताई है। इसके लिए वर्ष दो हज़ार सोलह की मसौदा नीति में कुछ संशोधन किए जा सकते हैं। इस रिपोर्ट में डीएमईओ ने समाज में 'ट्रांसजेंडर' व्यक्तियों की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
दि हॉली वंडर स्मार्ट स्कूल, नजदीक सनी एन्क्लेव लाइट्स का सालाना समागम धूम धाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों के अभिभावकों का उत्साह देखने योग्य था। इस रंगारंग प्रोग्राम की शुरुआत स्कूल के चेयरमैन चरन सिंह सैनी द्वारा द्वीप प्रज्जवलित कर की गई। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रभू वंदना के साथ प्रोग्राम की शुरुआत की गई। उसके बाद एक के बाद एक बच्चों द्वारा कई प्रोग्राम पेश किए गए। छोटे छोटे बच्चों ने विभिन्न प्रदेशों के नृत्य पेश करके भारत के खूबसूरत सभ्याचार की झलक पेश की गई। छोटे छोटे विद्यार्थियों ने मलवई गिद्दे का प्रोग्राम पेश करके माहौल को खूबसूरत बना दिया। प्रिंसीपल ग्रोवर द्वारा स्कूल की वार्षिक रिर्पोट में स्कूल द्वारा की गई कारगुजारियों बारे जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा मां सर्सवती की वंदना से प्रोग्राम की शुरुआत की गई। इसके बाद छोटे छोटे बच्चों द्वारा सोला डांस, गु्रप डांस से माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। एक के बाद एक विद्यार्थियों द्वारा पेश किए गए प्रोग्रामों को उपस्थित दर्शकों ने बेहद पसंद किया। विद्यार्थियों ने चांद तारे, डांस पे चांस आदि गीतों पर बच्चों ने सोलो व गु्रप डांस पेश किया। स्कूल के डायरैक्टर अश्विन अरोड़ा ने इस अवसर पर दर्शकों का संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन के दौरान पढ़ाई के साथ साथ खेलों, कला व सामाजिक कार्य में हिस्सा लेने से न सिर्फ बच्चों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है बल्कि उनके भीतर छिपे कलाकार के बारे में भी सभी को जानकार मिलती है, जो उनकी प्रोफेशनल जिंदगी के लिए बेहद सहायक होती है। इस रंगारंग समागम के अंत में पढ़ाई, खेल व अन्य गतीविधियों में विजयी रहने वाले विद्यार्थियों को स्कूल मैनेजमेंट द्वारा इनाम वितरित करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
दि हॉली वंडर स्मार्ट स्कूल, नजदीक सनी एन्क्लेव लाइट्स का सालाना समागम धूम धाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों के अभिभावकों का उत्साह देखने योग्य था। इस रंगारंग प्रोग्राम की शुरुआत स्कूल के चेयरमैन चरन सिंह सैनी द्वारा द्वीप प्रज्जवलित कर की गई। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रभू वंदना के साथ प्रोग्राम की शुरुआत की गई। उसके बाद एक के बाद एक बच्चों द्वारा कई प्रोग्राम पेश किए गए। छोटे छोटे बच्चों ने विभिन्न प्रदेशों के नृत्य पेश करके भारत के खूबसूरत सभ्याचार की झलक पेश की गई। छोटे छोटे विद्यार्थियों ने मलवई गिद्दे का प्रोग्राम पेश करके माहौल को खूबसूरत बना दिया। प्रिंसीपल ग्रोवर द्वारा स्कूल की वार्षिक रिर्पोट में स्कूल द्वारा की गई कारगुजारियों बारे जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा मां सर्सवती की वंदना से प्रोग्राम की शुरुआत की गई। इसके बाद छोटे छोटे बच्चों द्वारा सोला डांस, गु्रप डांस से माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। एक के बाद एक विद्यार्थियों द्वारा पेश किए गए प्रोग्रामों को उपस्थित दर्शकों ने बेहद पसंद किया। विद्यार्थियों ने चांद तारे, डांस पे चांस आदि गीतों पर बच्चों ने सोलो व गु्रप डांस पेश किया। स्कूल के डायरैक्टर अश्विन अरोड़ा ने इस अवसर पर दर्शकों का संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन के दौरान पढ़ाई के साथ साथ खेलों, कला व सामाजिक कार्य में हिस्सा लेने से न सिर्फ बच्चों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है बल्कि उनके भीतर छिपे कलाकार के बारे में भी सभी को जानकार मिलती है, जो उनकी प्रोफेशनल जिंदगी के लिए बेहद सहायक होती है। इस रंगारंग समागम के अंत में पढ़ाई, खेल व अन्य गतीविधियों में विजयी रहने वाले विद्यार्थियों को स्कूल मैनेजमेंट द्वारा इनाम वितरित करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में पेट्रोटेक - 2019 का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी आयोजन के उद्घाटन सत्र को भी संबोधित करेंगे। पेट्रोटेक - 2019 को भारत का प्रमुख हाइड्रोकार्बन सम्मेलन माना जाता है। भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में पेट्रोटेक -2019 यानी 13वां अंतर्राष्ट्रीय तेल और गैस सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। 10 से 12 फरवरी 2019 तक आयोजित इस तीन दिवसीय वृहद कार्यक्रम में भारत के तेल और गैस क्षेत्र में हाल के बाजार और निवेशकों के अनुकूल विकास को दर्शाया जाएगा। पेट्रोटेक - 2019 में साझेदार देशों के 95 से अधिक ऊर्जा मंत्रियों और लगभग 70 देशों के 7000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन के साथ-साथ, इंडिया एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा में 20,000 वर्ग मीटर में फैली एक प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। पेट्रोटेक -2019 प्रदर्शनी में मेक इन इंडिया और अक्षय ऊर्जा थीम पर विशेष क्षेत्रों के साथ-साथ 40 से अधिक देशों के 13 से अधिक देशी मंडप और लगभग 750 प्रदर्शक शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने पिछले 5 दिसंबर, 2016 को पेट्रोटेक - 2016 के 12वें आयोजन का उद्घाटन किया था। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए मेरी दृष्टि में चार स्तंभ हैंः ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा। " प्रधानमंत्री ने ग्लोबल हाइड्रोकार्बन कंपनियों को भी मेक इन इंडिया में आने का न्योता दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि हमारा मकसद रेड टेप के स्थान पर रेड कारपेट तैयार करना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ग्यारह फरवरी, दो हज़ार उन्नीस को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में पेट्रोटेक - दो हज़ार उन्नीस का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी आयोजन के उद्घाटन सत्र को भी संबोधित करेंगे। पेट्रोटेक - दो हज़ार उन्नीस को भारत का प्रमुख हाइड्रोकार्बन सम्मेलन माना जाता है। भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में पेट्रोटेक -दो हज़ार उन्नीस यानी तेरहवां अंतर्राष्ट्रीय तेल और गैस सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। दस से बारह फरवरी दो हज़ार उन्नीस तक आयोजित इस तीन दिवसीय वृहद कार्यक्रम में भारत के तेल और गैस क्षेत्र में हाल के बाजार और निवेशकों के अनुकूल विकास को दर्शाया जाएगा। पेट्रोटेक - दो हज़ार उन्नीस में साझेदार देशों के पचानवे से अधिक ऊर्जा मंत्रियों और लगभग सत्तर देशों के सात हज़ार प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन के साथ-साथ, इंडिया एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा में बीस,शून्य वर्ग मीटर में फैली एक प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। पेट्रोटेक -दो हज़ार उन्नीस प्रदर्शनी में मेक इन इंडिया और अक्षय ऊर्जा थीम पर विशेष क्षेत्रों के साथ-साथ चालीस से अधिक देशों के तेरह से अधिक देशी मंडप और लगभग सात सौ पचास प्रदर्शक शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने पिछले पाँच दिसंबर, दो हज़ार सोलह को पेट्रोटेक - दो हज़ार सोलह के बारहवें आयोजन का उद्घाटन किया था। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए मेरी दृष्टि में चार स्तंभ हैंः ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा। " प्रधानमंत्री ने ग्लोबल हाइड्रोकार्बन कंपनियों को भी मेक इन इंडिया में आने का न्योता दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि हमारा मकसद रेड टेप के स्थान पर रेड कारपेट तैयार करना है।
यूपी पुलिस चंदौली जिले के मनराजपुर गांव में एक युवती की मौत के बाद अपनी कार्यशैली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। 'ऑपरेशन लंगड़ा' के लिए देश भर में मशहूर यूपी पुलिस पर आरोप है कि सैयदराजा थाने की पुलिस ने दबिश के दौरान सारी सीमाएं पार कर दीं। दो सगी बहनों की इतनी पिटाई हुई कि बड़ी बहन की मौत हो गई। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने एक पुलिसकर्मी की जमकर पिटाई करते हुए वाहनों में तोड़फोड़ की। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी चंदौली अंकुर अग्रवाल ने सैयदराजा थाने के इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह को सस्पेंड कर जांच का आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश में दोबारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो लॉ एंड ऑर्डर भी एक अहम मुद्दा था। हालांकि, पुलिस ही जब मनमानी करने लगे तो पब्लिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती। योगी के 25 मार्च को शपथ लेने के बाद से प्रदेश भर में कई ऐसी छोटी-बड़ी घटनाएं हुई हैं जब खुद पुलिसकर्मियों ने ही खाकी को कलंकित किया है। अलीगढ़ जिले के जामुका गांव में 30 अप्रैल को 55 साल के सगीर मोहम्मद के परिजनों ने पुलिस की पिटाई से उनकी मौत का आरोप लगाया। परिजनों ने कहा कि पुलिस सगीर को रास्ते भर पीटते हुए ले गई और इसी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, अलीगढ़ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि एक शिकायत के आधार पर पुलिस सगीर को चंडौस थाने ले जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई। कानपुर के किदवईनगर के ब्लॉक निवासी 26 साल के मोनू हक्कल की बीते 26 अप्रैल को संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि बगाही चौकी में मोनू हक्कल की पुलिसकर्मियों ने इतनी पिटाई की थी कि उसकी मौत हो गई। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर दो अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-इरदातन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। यूपी पुलिस से सिर्फ जनता ही नहीं उसके अपने भी परेशान हैं। 23 अप्रैल को वाराणसी के लालपुर पांडेयपुर थाने के थानाध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर ड्राइवर यशवंत सिंह ने सिर में गोली मार ली। गोली मारने से पहले यशवंत ने अपने बेटे को सुसाइड नोट वाट्सऐप पर भेजा था। यशवंत का इलाज अभी चल रहा है। इस मामले में इंस्पेक्टर सुधीर कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर जांच का आदेश देते हुए अफसरों ने मामला रफा-दफा ही कर दिया। यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान बलिया में पेपर लीक की खबर प्रकाशित करने पर पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को गिरफ्तार कर पुलिस ने 30 मार्च को जेल भेज दिया था। जांच में तीनों पत्रकारों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन 27 दिन तक बिना कारण के ही उन्हें जेल में रहना पड़ा। सबूत न मिलने के कारण पुलिस को तीनों पत्रकारों पर लगाई गई संगीन धाराएं हटानी पड़ी और अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। इस मामले से पुलिस और प्रशासन की किरकिरी प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में हुई थी। बीते अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र सर्वेश यादव की कर्नलगंज पुलिस चौकी पर बेरहमी से पिटाई की गई। हंगामा बढ़ते देख एसएसपी प्रयागराज ने सब इंस्पेक्टर हर्षवीर सिंह और सोहराब आलम को निलंबित कर दिया था। छात्र सर्वेश के अनुसार वह लाइब्रेरी से निकल रहा था। उसी दौरान पुलिस आई और कुछ पूछे बगैर ही उसका कॉलर पकड़ कर चौकी ले गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी जमकर पिटाई की थी। अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में लखनऊ में नाका थाने के पुलिसकर्मी ने वाहन में धक्का न लगाने पर नाबालिग की पिटाई कर दी थी। पुलिसकर्मी की करतूत घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई थी। नाबालिग की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ तो सीनियर अफसरों ने आरोपी पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर जांच का आदेश दिया था। इसी तरह से बीते अप्रैल महीने में ही संभल जिले के बहजोई थाने के हलका एक पर तैनात दरोगा मुरलीधर चौहान और तीन कांस्टेबल को घूस लेने के आरोप में निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई पुलिसकर्मियों का घूस लेने का वीडियो वायरल होने के बाद की गई थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यूपी पुलिस चंदौली जिले के मनराजपुर गांव में एक युवती की मौत के बाद अपनी कार्यशैली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। 'ऑपरेशन लंगड़ा' के लिए देश भर में मशहूर यूपी पुलिस पर आरोप है कि सैयदराजा थाने की पुलिस ने दबिश के दौरान सारी सीमाएं पार कर दीं। दो सगी बहनों की इतनी पिटाई हुई कि बड़ी बहन की मौत हो गई। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने एक पुलिसकर्मी की जमकर पिटाई करते हुए वाहनों में तोड़फोड़ की। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी चंदौली अंकुर अग्रवाल ने सैयदराजा थाने के इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह को सस्पेंड कर जांच का आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश में दोबारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो लॉ एंड ऑर्डर भी एक अहम मुद्दा था। हालांकि, पुलिस ही जब मनमानी करने लगे तो पब्लिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती। योगी के पच्चीस मार्च को शपथ लेने के बाद से प्रदेश भर में कई ऐसी छोटी-बड़ी घटनाएं हुई हैं जब खुद पुलिसकर्मियों ने ही खाकी को कलंकित किया है। अलीगढ़ जिले के जामुका गांव में तीस अप्रैल को पचपन साल के सगीर मोहम्मद के परिजनों ने पुलिस की पिटाई से उनकी मौत का आरोप लगाया। परिजनों ने कहा कि पुलिस सगीर को रास्ते भर पीटते हुए ले गई और इसी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, अलीगढ़ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि एक शिकायत के आधार पर पुलिस सगीर को चंडौस थाने ले जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई। कानपुर के किदवईनगर के ब्लॉक निवासी छब्बीस साल के मोनू हक्कल की बीते छब्बीस अप्रैल को संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि बगाही चौकी में मोनू हक्कल की पुलिसकर्मियों ने इतनी पिटाई की थी कि उसकी मौत हो गई। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर दो अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-इरदातन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। यूपी पुलिस से सिर्फ जनता ही नहीं उसके अपने भी परेशान हैं। तेईस अप्रैल को वाराणसी के लालपुर पांडेयपुर थाने के थानाध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर ड्राइवर यशवंत सिंह ने सिर में गोली मार ली। गोली मारने से पहले यशवंत ने अपने बेटे को सुसाइड नोट वाट्सऐप पर भेजा था। यशवंत का इलाज अभी चल रहा है। इस मामले में इंस्पेक्टर सुधीर कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर जांच का आदेश देते हुए अफसरों ने मामला रफा-दफा ही कर दिया। यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान बलिया में पेपर लीक की खबर प्रकाशित करने पर पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को गिरफ्तार कर पुलिस ने तीस मार्च को जेल भेज दिया था। जांच में तीनों पत्रकारों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन सत्ताईस दिन तक बिना कारण के ही उन्हें जेल में रहना पड़ा। सबूत न मिलने के कारण पुलिस को तीनों पत्रकारों पर लगाई गई संगीन धाराएं हटानी पड़ी और अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। इस मामले से पुलिस और प्रशासन की किरकिरी प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में हुई थी। बीते अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र सर्वेश यादव की कर्नलगंज पुलिस चौकी पर बेरहमी से पिटाई की गई। हंगामा बढ़ते देख एसएसपी प्रयागराज ने सब इंस्पेक्टर हर्षवीर सिंह और सोहराब आलम को निलंबित कर दिया था। छात्र सर्वेश के अनुसार वह लाइब्रेरी से निकल रहा था। उसी दौरान पुलिस आई और कुछ पूछे बगैर ही उसका कॉलर पकड़ कर चौकी ले गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी जमकर पिटाई की थी। अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में लखनऊ में नाका थाने के पुलिसकर्मी ने वाहन में धक्का न लगाने पर नाबालिग की पिटाई कर दी थी। पुलिसकर्मी की करतूत घटनास्थल के पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई थी। नाबालिग की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ तो सीनियर अफसरों ने आरोपी पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर जांच का आदेश दिया था। इसी तरह से बीते अप्रैल महीने में ही संभल जिले के बहजोई थाने के हलका एक पर तैनात दरोगा मुरलीधर चौहान और तीन कांस्टेबल को घूस लेने के आरोप में निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई पुलिसकर्मियों का घूस लेने का वीडियो वायरल होने के बाद की गई थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वर्तमान में राजकोट में नियुक्त विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक जवरी मल बिश्नोई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नई दिल्लीः वर्तमान में राजकोट में नियुक्त विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक जवरी मल बिश्नोई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिश्नोई ने एक कारोबारी को 'फूड कैन' आयात करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के बदले कथित रूप से नौ लाख रुपये मांगे थे जिससे उन्हें 50 लाख रुपये की बैंक गारंटी वापस लेने की अनुमति मिली थी। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा था कि कारोबारी ने एनओसी प्राप्त करने के लिए राजकोट में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) को 'फूड कैन' के नियमित अंतराल पर निर्यात से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज वाली छह फाइलें पहले ही जमा कर दी थीं। जांच एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा कि आरोप है कि आरोपी ने पहली किश्त के तौर पर पांच लाख रुपये मांगे थे और एनओसी जारी करने के समय शेष रकम देने को कहा था। अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई की टीम कथित रिश्वत के लेन-देन के वक्त वहां पहुंची और बिश्नोई को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। प्रवक्ता ने कहा कि "आरोपी के कार्यालय और राजकोट (गुजरात) एवं उनके पैतृक स्थान पर आवासीय परिसरों में तलाशी ली गई।
वर्तमान में राजकोट में नियुक्त विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक जवरी मल बिश्नोई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने पांच लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नई दिल्लीः वर्तमान में राजकोट में नियुक्त विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक जवरी मल बिश्नोई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने पांच लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिश्नोई ने एक कारोबारी को 'फूड कैन' आयात करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के बदले कथित रूप से नौ लाख रुपये मांगे थे जिससे उन्हें पचास लाख रुपये की बैंक गारंटी वापस लेने की अनुमति मिली थी। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा था कि कारोबारी ने एनओसी प्राप्त करने के लिए राजकोट में विदेश व्यापार महानिदेशालय को 'फूड कैन' के नियमित अंतराल पर निर्यात से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज वाली छह फाइलें पहले ही जमा कर दी थीं। जांच एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा कि आरोप है कि आरोपी ने पहली किश्त के तौर पर पांच लाख रुपये मांगे थे और एनओसी जारी करने के समय शेष रकम देने को कहा था। अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई की टीम कथित रिश्वत के लेन-देन के वक्त वहां पहुंची और बिश्नोई को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। प्रवक्ता ने कहा कि "आरोपी के कार्यालय और राजकोट एवं उनके पैतृक स्थान पर आवासीय परिसरों में तलाशी ली गई।
रोहित बर्मन , रायपुरः राजधानी रायपुर में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे विद्या मितान लगातार अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे है। इसी कड़ी में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे का बयान सामने आया है। चौबे ने बाताया कि सरकार ने विद्या मितान कि लिए निर्देश जारी किया है। स्कूल अगर लगेंगे तो उनकी जगह जो पहले थी वहां उन्हें रखा जाएगा। हमने पहले भी यही कमिटमेंट किया था और आज भी यही कमिटमेंट है। इसके अलावा इस संदर्भ में और किसी तरह की कोई बात नहीं कही जा सकती।
रोहित बर्मन , रायपुरः राजधानी रायपुर में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे विद्या मितान लगातार अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे है। इसी कड़ी में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे का बयान सामने आया है। चौबे ने बाताया कि सरकार ने विद्या मितान कि लिए निर्देश जारी किया है। स्कूल अगर लगेंगे तो उनकी जगह जो पहले थी वहां उन्हें रखा जाएगा। हमने पहले भी यही कमिटमेंट किया था और आज भी यही कमिटमेंट है। इसके अलावा इस संदर्भ में और किसी तरह की कोई बात नहीं कही जा सकती।
सचिन तेंदुलकर ने मोहम्मद शमी को जसप्रीत बुमराह का सबसे सटीक विकल्प बताया है। उन्होंने टीम के युवा गेंदबाज अर्शदीप सिंह की तारीफ करते हुए स्पिनर्स के चयन में सावधानी बरतने की सलाह टीम इंडिया को दी है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शमी ने मचाया धमालअमरोहा के इस 32 वर्षीय गेंदबाज ने हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सोमवार को खेले गए अभ्यास मैच में 20वें ओवर में गेंद संभाली और तीन विकेट लेकर भारत को छह रन से जीत दिलाई। तेंदुलकर ने पीटीआई से विशेष साक्षात्कार में कहा, 'बुमराह का नहीं होना बड़ा नुकसान है क्योंकि हमें निश्चित तौर पर एक स्ट्राइक गेंदबाज चाहिए। एक ऐसा वास्तविक तेज गेंदबाज जो बल्लेबाजों पर हावी होकर विकेट ले सके। शमी इसे साबित कर चुका है और वह आदर्श विकल्प नजर आता है। ' अर्शदीप ने जगाई हैं उम्मीदेंयह दिग्गज बल्लेबाज बाएं हाथ के युवा तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह से काफी प्रभावित नजर आता है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने कहा, 'अर्शदीप ने काफी उम्मीदें जगाई हैं और वह संतुलित गेंदबाज नजर आता है। मैंने उनमें जो कुछ भी देखा मुझे प्रतिबद्ध खिलाड़ी लगा क्योंकि जब आप किसी खिलाड़ी पर गौर करते हैं तो उसकी मानसिकता देखते हैं। ' बाउंड्री को ध्यान में रखकर करें स्पिनर का चुनावभारत को अपने मैच मेलबर्न, सिडनी, एडिलेड और पर्थ में खेलने हैं जहां की सीमा रेखा काफी बड़ी है। तेंदुलकर का मानना है अंतिम एकादश में स्पिनरों का चयन करते समय मैदान का आकार ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आप अधिकतर उस दिशा में खेलते हैं जहां गेंद टर्न हो रही हो कुछ बल्लेबाज होते हैं जो टर्न के विपरीत लगातार हिट करते हैं। आमतौर पर कप्तान सीमा रेखा की दूरी को देखकर फैसला करते हैं कि किस तरह का स्पिनर अंतिम एकादश में रखना है। आप स्पिनर का चयन करते समय हवा की दिशा का ध्यान भी रखते हैं। ' टॉस की भी होगी अहम भूमिकातेंदुलकर ने इसके साथ ही कहा कि परिस्थितियों और टॉस की भूमिका भी अहम होगी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है की कुछ अवसरों पर परिस्थितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी और स्कोर का बचाव करना आसान नहीं होगा। परिस्थितियां मैच के दौरान बदल सकती हैं और लक्ष्य का पीछा करना आसान हो सकता है। कुछ मैदानों पर टॉस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ' US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी? पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता' Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद ! क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान?
सचिन तेंदुलकर ने मोहम्मद शमी को जसप्रीत बुमराह का सबसे सटीक विकल्प बताया है। उन्होंने टीम के युवा गेंदबाज अर्शदीप सिंह की तारीफ करते हुए स्पिनर्स के चयन में सावधानी बरतने की सलाह टीम इंडिया को दी है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शमी ने मचाया धमालअमरोहा के इस बत्तीस वर्षीय गेंदबाज ने हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सोमवार को खेले गए अभ्यास मैच में बीसवें ओवर में गेंद संभाली और तीन विकेट लेकर भारत को छह रन से जीत दिलाई। तेंदुलकर ने पीटीआई से विशेष साक्षात्कार में कहा, 'बुमराह का नहीं होना बड़ा नुकसान है क्योंकि हमें निश्चित तौर पर एक स्ट्राइक गेंदबाज चाहिए। एक ऐसा वास्तविक तेज गेंदबाज जो बल्लेबाजों पर हावी होकर विकेट ले सके। शमी इसे साबित कर चुका है और वह आदर्श विकल्प नजर आता है। ' अर्शदीप ने जगाई हैं उम्मीदेंयह दिग्गज बल्लेबाज बाएं हाथ के युवा तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह से काफी प्रभावित नजर आता है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। तेंदुलकर ने कहा, 'अर्शदीप ने काफी उम्मीदें जगाई हैं और वह संतुलित गेंदबाज नजर आता है। मैंने उनमें जो कुछ भी देखा मुझे प्रतिबद्ध खिलाड़ी लगा क्योंकि जब आप किसी खिलाड़ी पर गौर करते हैं तो उसकी मानसिकता देखते हैं। ' बाउंड्री को ध्यान में रखकर करें स्पिनर का चुनावभारत को अपने मैच मेलबर्न, सिडनी, एडिलेड और पर्थ में खेलने हैं जहां की सीमा रेखा काफी बड़ी है। तेंदुलकर का मानना है अंतिम एकादश में स्पिनरों का चयन करते समय मैदान का आकार ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आप अधिकतर उस दिशा में खेलते हैं जहां गेंद टर्न हो रही हो कुछ बल्लेबाज होते हैं जो टर्न के विपरीत लगातार हिट करते हैं। आमतौर पर कप्तान सीमा रेखा की दूरी को देखकर फैसला करते हैं कि किस तरह का स्पिनर अंतिम एकादश में रखना है। आप स्पिनर का चयन करते समय हवा की दिशा का ध्यान भी रखते हैं। ' टॉस की भी होगी अहम भूमिकातेंदुलकर ने इसके साथ ही कहा कि परिस्थितियों और टॉस की भूमिका भी अहम होगी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है की कुछ अवसरों पर परिस्थितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी और स्कोर का बचाव करना आसान नहीं होगा। परिस्थितियां मैच के दौरान बदल सकती हैं और लक्ष्य का पीछा करना आसान हो सकता है। कुछ मैदानों पर टॉस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ' US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी? पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता' Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद ! क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान?
झारखंड के सात जिलों में सात मार्च से स्कूल खुल जाएंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के बाद स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने गाइडलाइन जारी कर दिया है। राज्य के 17 जिलों में चार फरवरी से स्कूल खुल चुके हैं। इन सात जिलों में नौवीं से 12वीं के छात्र छात्राओं के लिए स्कूल खोले गये थे। इन जिलों में अब स्कूल में पूरी तरह से पढ़ाई चलेगी। राज्य के सात जिलों रांची, पूर्वी सिंहभूम, देवघर, चतरा, सिमडेगा, सरायकेला खरसावां तथा बोकारो में सात मार्च से कक्षा एक से आठ के लिए भी स्कूल खुलेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिया। गृह एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 26 फरवरी को हुई बैठक में इस पर स्वीकृति प्रदान की थी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने इन सभी जिलों के उपायुक्तों तथा जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर सात मार्च से स्कूल खोलने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने निर्देश में कहा है कि कक्षा एक से आठ की परीक्षा का निर्धारण 31 मार्च के बाद किया जाएगा। प्ले स्कूल नन्हे कदम की प्रिंसिपल विभा सिंह ने बताया कि सात मार्च से उनके यहां बेबी प्री से लेकर चौथी तक की क्लास शुरू हो जाएगी। अभिभावकों से भी राय ली तो सभी ने ऑफलाइन क्लास शुरू करने की अनुमति दी है। इन वर्गों के छात्र छात्राओं की परीक्षाएं 31 मार्च के बाद ही संचालित की जाएंगी। बच्चे अभिभावकों की सहमति के बाद ही स्कूल आ सकेंगे।
झारखंड के सात जिलों में सात मार्च से स्कूल खुल जाएंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के बाद स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने गाइडलाइन जारी कर दिया है। राज्य के सत्रह जिलों में चार फरवरी से स्कूल खुल चुके हैं। इन सात जिलों में नौवीं से बारहवीं के छात्र छात्राओं के लिए स्कूल खोले गये थे। इन जिलों में अब स्कूल में पूरी तरह से पढ़ाई चलेगी। राज्य के सात जिलों रांची, पूर्वी सिंहभूम, देवघर, चतरा, सिमडेगा, सरायकेला खरसावां तथा बोकारो में सात मार्च से कक्षा एक से आठ के लिए भी स्कूल खुलेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिया। गृह एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने छब्बीस फरवरी को हुई बैठक में इस पर स्वीकृति प्रदान की थी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने इन सभी जिलों के उपायुक्तों तथा जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर सात मार्च से स्कूल खोलने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने निर्देश में कहा है कि कक्षा एक से आठ की परीक्षा का निर्धारण इकतीस मार्च के बाद किया जाएगा। प्ले स्कूल नन्हे कदम की प्रिंसिपल विभा सिंह ने बताया कि सात मार्च से उनके यहां बेबी प्री से लेकर चौथी तक की क्लास शुरू हो जाएगी। अभिभावकों से भी राय ली तो सभी ने ऑफलाइन क्लास शुरू करने की अनुमति दी है। इन वर्गों के छात्र छात्राओं की परीक्षाएं इकतीस मार्च के बाद ही संचालित की जाएंगी। बच्चे अभिभावकों की सहमति के बाद ही स्कूल आ सकेंगे।
64 मेगापिक्सल कैमरा वाले स्मार्टफोन को लेकर पिछले कुछ महीनों से काफी चर्चा हो रही है। पहले माना जा रहा था रियलमी दुनिया का पहला 64 मेगापिक्सल वाला स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली कंपनी बनेगी। हालांकि, रियलमी ने अब तक इस टेकनॉलजी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। इसी बीच 64 मेगापिक्सल कैमरा फोन लाने के मामले में शाओमी आगे निकलता नजर आ रहा है। आज चीन में हुए एक ग्लोबल इवेंट Xiaomi ने अपने 64 मेगापिक्सल स्मार्टफोन इमेजिंग टेक्नॉलजी की घोषणा कर दी है। इस इवेंट के साथ ही शाओमी दुनिया की पहली कंपनी बन गई है जिसने अपकमिंग 64 मेगापिक्सल इमेजिंग टेक्नॉलजी को दुनिया के सामने पेश किया। सैमसंग के GW1 64MP सेंसर से पावर्ड यह 64 मेगापिक्सल स्मार्टफोन इमेजिंग टेक्नॉलजी सबसे पहले भारत में लॉन्च होने वाले रेडमी स्मार्टफोन में दी जाएगी। कंपनी ने कहा वह इस फोन को इस साल अक्टूबर के बाद कभी भी लॉन्च कर सकती है। इस नई टेक्नॉलजी वाले कैमरा फोन के बारे में शाओमी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनु कुमार जैन ने भी ट्वीट कर जानकारी दी। यह GW1 सेंसर ISOCELL प्लस टेक्नॉलजी की मदद से पिक्सल-टू-पिक्सल बैरियर बनाता है जिससे पिक्सल के बीच होने वाली लाइट के दखल को कम करता है। इसके साथ ही यह टेक्नॉलजी इमेज के कलर रिप्रॉडक्शन को भी बेहतर बनाता है। सैमसंग का यह सेंसर 9248x6936 पिक्सल रेजॉलूशन के साथ 64 मेगापिक्सल का इमेज आउटपुट देता है। इसमें 100 डेसिबल तक के HDR के लिए रियल-टाइम हार्डवेयर सपॉर्ट दिया गया है। मौजूदा कैमरा सेंसर्स की बात करें तो उनकी HDR क्षमता 60 डेसिबल तक है। इंसान के आंखों की अगर बात करें तो यह 120 डेसिबल तक है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि रेडमी फोन में आने वाला यह 64 मेगापिक्सल का कैमरा काफी रियल फोटो क्लिक करेगा। शाओमी अपने अपकमिंग स्मार्टफोन्स के कैमरा स्पेसिफिकेशन्स को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रहा है। इसका पता उस वक्त चला जब कंपनी ने आज हुए इवेंट में शाओमी ब्रैंड के तहत 100 मेगापिक्सल कैमरा सेंसर वाले स्मार्टफोन को भी लॉन्च करने की बात कही। शाओमी के इस फोन में 108 मेगापिक्सल वाले सैमसंग ISOCELL सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कंपनी इस फोन को कब तक लॉन्च करेगी इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
चौंसठ मेगापिक्सल कैमरा वाले स्मार्टफोन को लेकर पिछले कुछ महीनों से काफी चर्चा हो रही है। पहले माना जा रहा था रियलमी दुनिया का पहला चौंसठ मेगापिक्सल वाला स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली कंपनी बनेगी। हालांकि, रियलमी ने अब तक इस टेकनॉलजी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। इसी बीच चौंसठ मेगापिक्सल कैमरा फोन लाने के मामले में शाओमी आगे निकलता नजर आ रहा है। आज चीन में हुए एक ग्लोबल इवेंट Xiaomi ने अपने चौंसठ मेगापिक्सल स्मार्टफोन इमेजिंग टेक्नॉलजी की घोषणा कर दी है। इस इवेंट के साथ ही शाओमी दुनिया की पहली कंपनी बन गई है जिसने अपकमिंग चौंसठ मेगापिक्सल इमेजिंग टेक्नॉलजी को दुनिया के सामने पेश किया। सैमसंग के GWएक चौंसठMP सेंसर से पावर्ड यह चौंसठ मेगापिक्सल स्मार्टफोन इमेजिंग टेक्नॉलजी सबसे पहले भारत में लॉन्च होने वाले रेडमी स्मार्टफोन में दी जाएगी। कंपनी ने कहा वह इस फोन को इस साल अक्टूबर के बाद कभी भी लॉन्च कर सकती है। इस नई टेक्नॉलजी वाले कैमरा फोन के बारे में शाओमी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर मनु कुमार जैन ने भी ट्वीट कर जानकारी दी। यह GWएक सेंसर ISOCELL प्लस टेक्नॉलजी की मदद से पिक्सल-टू-पिक्सल बैरियर बनाता है जिससे पिक्सल के बीच होने वाली लाइट के दखल को कम करता है। इसके साथ ही यह टेक्नॉलजी इमेज के कलर रिप्रॉडक्शन को भी बेहतर बनाता है। सैमसंग का यह सेंसर नौ हज़ार दो सौ अड़तालीसxछः हज़ार नौ सौ छत्तीस पिक्सल रेजॉलूशन के साथ चौंसठ मेगापिक्सल का इमेज आउटपुट देता है। इसमें एक सौ डेसिबल तक के HDR के लिए रियल-टाइम हार्डवेयर सपॉर्ट दिया गया है। मौजूदा कैमरा सेंसर्स की बात करें तो उनकी HDR क्षमता साठ डेसिबल तक है। इंसान के आंखों की अगर बात करें तो यह एक सौ बीस डेसिबल तक है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि रेडमी फोन में आने वाला यह चौंसठ मेगापिक्सल का कैमरा काफी रियल फोटो क्लिक करेगा। शाओमी अपने अपकमिंग स्मार्टफोन्स के कैमरा स्पेसिफिकेशन्स को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रहा है। इसका पता उस वक्त चला जब कंपनी ने आज हुए इवेंट में शाओमी ब्रैंड के तहत एक सौ मेगापिक्सल कैमरा सेंसर वाले स्मार्टफोन को भी लॉन्च करने की बात कही। शाओमी के इस फोन में एक सौ आठ मेगापिक्सल वाले सैमसंग ISOCELL सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कंपनी इस फोन को कब तक लॉन्च करेगी इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फरवरी में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेली जाएगी। इस सीरीज में ऋषभ पंत भारतीय टीम का हिस्सा नहीं होंगे। IND vs AUS Test: ऋषभ पंत चोटिल हैं, जिस वजह से वह आने वाले समय में भारतीय टीम के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। टेस्ट में पंत टीम के अहम सदस्य हैं, लेकिन वह आगामी कुछ समय तक क्रिकेट से दूर हो चुके हैं। यही वजह है आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे उन 3 विकेटकीपर बैटर के नाम जो भारत ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज यानी बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में विकेटकीपिंग करते नजर आ सकते हैं। ईशान किशन (Ishan Kishan) ईशान किशन भारत ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में टीम का हिस्सा हैं, ऐसे में वह ऋषभ पंत की रिप्लेसमेंट बनकर विकेटकीपिंग करते नजर आ सकते हैं। ईशान और पंत की बल्लेबाज़ी में काफी समानताएं नज़र आती है। दोनों ही विस्फोटक बल्लेबाजी करते हैं और बड़े शॉट्स लगाकर गेंदबाज पर दबाव बनाते हैं। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने अब तक टेस्ट डेब्यू नहीं किया है, लेकिन ऋषभ की गैरमौजूदगी में उन्हें मौका मिल सकता। केएस भरत (KS Bharat) केएस भरत लगातार ही भारतीय टेस्ट टीम के साथ ट्रेवल कर रहे हैं। उन्हें ऋषभ पंत का बैकअप टेस्ट विकेटकीपर माना जाता है। ऐसे में इस बात के काफी ज्यादा चांस है कि केएस भरत पंत की गैर मौजूदगी में टीम का हिस्सा बन सकते हैं। केएस भरत ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 85 मैचों में 4627 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर 308 रनों का रहा। वह BGT में विकेटकीपर के तौर पर नज़र आ सकते हैं। केएल राहुल (KL Rahul) भारतीय उपकप्तान केएल राहुल बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान विकेटकीपिंग करते नज़र आ सकते हैं। कई मौकों पर केएल राहुल ने भारतीय टीम के लिए विकेटकीपिंग की है। ऐसे में अगर रोहित शर्मा केएस भरत और ईशान किशन दोनों को ही प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं करते तब केएल राहुल को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि रोहित शर्मा केएल राहुल को विकेटकीपर के तौर पर थर्ड ऑप्शन रखेंगे।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फरवरी में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेली जाएगी। इस सीरीज में ऋषभ पंत भारतीय टीम का हिस्सा नहीं होंगे। IND vs AUS Test: ऋषभ पंत चोटिल हैं, जिस वजह से वह आने वाले समय में भारतीय टीम के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। टेस्ट में पंत टीम के अहम सदस्य हैं, लेकिन वह आगामी कुछ समय तक क्रिकेट से दूर हो चुके हैं। यही वजह है आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे उन तीन विकेटकीपर बैटर के नाम जो भारत ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज यानी बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में विकेटकीपिंग करते नजर आ सकते हैं। ईशान किशन ईशान किशन भारत ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में टीम का हिस्सा हैं, ऐसे में वह ऋषभ पंत की रिप्लेसमेंट बनकर विकेटकीपिंग करते नजर आ सकते हैं। ईशान और पंत की बल्लेबाज़ी में काफी समानताएं नज़र आती है। दोनों ही विस्फोटक बल्लेबाजी करते हैं और बड़े शॉट्स लगाकर गेंदबाज पर दबाव बनाते हैं। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने अब तक टेस्ट डेब्यू नहीं किया है, लेकिन ऋषभ की गैरमौजूदगी में उन्हें मौका मिल सकता। केएस भरत केएस भरत लगातार ही भारतीय टेस्ट टीम के साथ ट्रेवल कर रहे हैं। उन्हें ऋषभ पंत का बैकअप टेस्ट विकेटकीपर माना जाता है। ऐसे में इस बात के काफी ज्यादा चांस है कि केएस भरत पंत की गैर मौजूदगी में टीम का हिस्सा बन सकते हैं। केएस भरत ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पचासी मैचों में चार हज़ार छः सौ सत्ताईस रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर तीन सौ आठ रनों का रहा। वह BGT में विकेटकीपर के तौर पर नज़र आ सकते हैं। केएल राहुल भारतीय उपकप्तान केएल राहुल बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान विकेटकीपिंग करते नज़र आ सकते हैं। कई मौकों पर केएल राहुल ने भारतीय टीम के लिए विकेटकीपिंग की है। ऐसे में अगर रोहित शर्मा केएस भरत और ईशान किशन दोनों को ही प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं करते तब केएल राहुल को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि रोहित शर्मा केएल राहुल को विकेटकीपर के तौर पर थर्ड ऑप्शन रखेंगे।
ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर एडम जाम्पा ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2021 के लिए बनाया गया बायो-बबल सबसे असुरक्षित है, जोकि उन्होंने भारत में भारत में कोविड-19 के दौरान देखा है। जाम्पा और केन रिचर्डसन आईपीएल के 14वें सीजन को बीच में ही छोड़कर व्यक्तिगत कारणों से घर लौट गए हैं। दोनों खिलाड़ी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) टीम का हिस्सा थे। जाम्पा ने सिडनी मॉनिर्ंग हेराल्ड से कहा, " हम कुछ (बायो-बबल) में रहे हैं और मुझे लगता है कि यह शायद सबसे असुरक्षित है।" उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में किया जाना चाहिए था, जैसा कि पिछली बार हुआ था। जाम्पा ने कहा, " टूर्नामेंट भारत में खेला जा रहा है, इस वजह से ज्यादा डर लग रहा है। हमें यहां हमेशा हाइजीन और अधिक सुरक्षा बरतने को कहा जाता है। मुझे यही सबसे अजीब लगता है। मुझे लगता है कि भारत का बायो बबल सबसे असुरक्षित है।" उन्होंने आगे कहा, " छह महीने पहले दुबई में जो आईपीएल हुआ था, उसमें ऐसा नहीं था। मुझे लगता है कि वह काफी अधिक सुरक्षित था। निजी तौर पर मेरी राय है कि इस बार भी आईपीएल को वहीं करवाया जाना चाहिए था, लेकिन इसमें कई बार राजनीति वगैरह शामिल होती है।" तेज गेंदबाज रिचर्डसन ने इस सीजन में एक मैच खेला था जिसमें उन्होंने एक विकेट लिया था जबकि जाम्पा बिना खेले ही चले गए। जाम्पा और रिचर्डसन के अलावा कई अन्य ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डर के कारण इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) छोड़ना चाह रहे हैं। इन्हें डर है कि भारत में बढ़ते कोविड-19 मामलों के बाद वे अपने देश में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। जाम्पा ने आगे कहा कि अगली चर्चा इस बात को लेकर होगी क्या भारत में अक्टूबर नवंबर में टी20 विश्व कप होना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा, " बेशक इसी साल भारत में टी-20 विश्व कप भी होना है। संभवतः क्रिकेट जगत में अब अगली चर्चा इसी पर होगी, लेकिन छह माह एक लंबा समय है और तब शायद भारत में स्थिति बेहतर हो।"
ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर एडम जाम्पा ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार इक्कीस के लिए बनाया गया बायो-बबल सबसे असुरक्षित है, जोकि उन्होंने भारत में भारत में कोविड-उन्नीस के दौरान देखा है। जाम्पा और केन रिचर्डसन आईपीएल के चौदहवें सीजन को बीच में ही छोड़कर व्यक्तिगत कारणों से घर लौट गए हैं। दोनों खिलाड़ी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम का हिस्सा थे। जाम्पा ने सिडनी मॉनिर्ंग हेराल्ड से कहा, " हम कुछ में रहे हैं और मुझे लगता है कि यह शायद सबसे असुरक्षित है।" उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात में किया जाना चाहिए था, जैसा कि पिछली बार हुआ था। जाम्पा ने कहा, " टूर्नामेंट भारत में खेला जा रहा है, इस वजह से ज्यादा डर लग रहा है। हमें यहां हमेशा हाइजीन और अधिक सुरक्षा बरतने को कहा जाता है। मुझे यही सबसे अजीब लगता है। मुझे लगता है कि भारत का बायो बबल सबसे असुरक्षित है।" उन्होंने आगे कहा, " छह महीने पहले दुबई में जो आईपीएल हुआ था, उसमें ऐसा नहीं था। मुझे लगता है कि वह काफी अधिक सुरक्षित था। निजी तौर पर मेरी राय है कि इस बार भी आईपीएल को वहीं करवाया जाना चाहिए था, लेकिन इसमें कई बार राजनीति वगैरह शामिल होती है।" तेज गेंदबाज रिचर्डसन ने इस सीजन में एक मैच खेला था जिसमें उन्होंने एक विकेट लिया था जबकि जाम्पा बिना खेले ही चले गए। जाम्पा और रिचर्डसन के अलावा कई अन्य ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डर के कारण इंडियन प्रीमियर लीग छोड़ना चाह रहे हैं। इन्हें डर है कि भारत में बढ़ते कोविड-उन्नीस मामलों के बाद वे अपने देश में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। जाम्पा ने आगे कहा कि अगली चर्चा इस बात को लेकर होगी क्या भारत में अक्टूबर नवंबर में टीबीस विश्व कप होना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा, " बेशक इसी साल भारत में टी-बीस विश्व कप भी होना है। संभवतः क्रिकेट जगत में अब अगली चर्चा इसी पर होगी, लेकिन छह माह एक लंबा समय है और तब शायद भारत में स्थिति बेहतर हो।"
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक भारत उच्च आर्थिक विकास के बावजूद नौकरियों का सृजन करने में नाकाम रहा है. नई दिल्लीः एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च आर्थिक विकास के बावजूद भारत नौकरियों के सृजन करने में नाकाम रहा है. अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के द्वारा मंगलवार को प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, जीडीपी में 10 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले रोज़गार में 1 फीसदी से भी कम की वृद्धि हुई है, जो अर्थव्यवस्था में बेरोज़गारी की वृद्धि को दर्शाती है. यह अध्ययन कहता है कि युवाओं और सुशिक्षित लोगों में बेरोज़गारी की दर 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है - "कम से कम पिछले 20 वर्षों में भारत में सबसे अधिक देखा गया". 'स्टेट ऑफ़ वर्किंग इंडिया ' नामक अध्ययन के मुताबिक ये रुझान विशेष रूप से उत्तरी राज्यों में दिखाई दे रहे हैं. यह अध्ययन श्रम बाज़ार, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इकट्ठा किए गए आंकड़ों पर आधारित है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि संगठित विनिर्माण में श्रम उत्पादकता पिछले तीन दशकों में छह गुना बढ़ी है, मज़दूरी केवल 1. 5 गुना बढ़ी है. यह दर्शाता है कि श्रमिकों की तुलना में नियोक्ताओं को विकास से कहीं ज़्यादा फायदा हुआ है. अध्ययन से यह भी पता चलता है कि जाति और लिंग के आधार पर उपलब्ध नौकरियों के मामलें में अंतर-विभागीय असमानता भी है. महिलाएं सभी सेवा क्षेत्र के श्रमिकों का मात्र 16 प्रतिशत हैं, लेकिन घरेलू श्रमिकों का 60 प्रतिशत है. यह लिंग असमानता देश के विभिन्न हिस्सों में भी भिन्न-भिन्न होती है. अध्ययन के मुताबिक यूपी में हर 100 पुरुषों पर केवल 20 महिलाएं सवेतन रोज़गार में हैं, जबकि यह संख्या तमिलनाडू में 50 और पूर्नोतर भारत में 70 है. हालांकि, अध्ययन से यह भी पता चलता है कि लिंग के आधार पर कमाई का अंतर अब समय के साथ घट रहा है. अनुसूचित जाति सभी श्रमिकों का 18. 5 प्रतिशत है. रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले दशक में विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में वृद्धि हुई है, खासतौर पर बुनाई, प्लास्टिक और जूते जैसे उद्योगों में और समय के साथ काम भी अधिक अनिश्चित हो गया है. आईटी और आधुनिक रिटेल में रोज़गार 2011 में 11. 5 प्रतिशत से 2015 में बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया. हालांकि, रिपोर्ट से पता चलता है कि 50 प्रतिशत से अधिक सेवा क्षेत्र का रोज़गार अभी भी छोटे व्यापार, घरेलू सेवाओं और अन्य अनौपचारिक रोज़गार में जारी है. पिछले डेढ़ दशक में मज़दूरी में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन सातवें वेतन आयोग की न्यूनतम वेतन की सिफारिश के मुक़ाबले काफी कम है. रिपोर्ट के लेखकों का सुझाव है कि सरकार को अन्य नौकरी के अन्य क्षेत्रों में मनरेगा योजना के अनुरूप रोज़गार गारंटी प्रदान करने की ज़रूरत है. उन्होंने औद्योगिक नीति की ज़रुरत पर बल दिया जो श्रमिकों को कौशल विकास और वेतन सब्सिडी के माध्यम से श्रमिकों को प्रोत्साहन देती रहे. हालांकि, विभिन्न राज्यों में रोज़गार की विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर के रोज़गार विश्लेषण के माध्यम से इन्हें करने की आवश्यकता है. रिपोर्ट कृषि क्षेत्र के मुद्दों का समाधान करने की अत्यावश्यकता पर भी ज़ोर देती है जहां आय के स्त्रोत बहुत कम है.
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक भारत उच्च आर्थिक विकास के बावजूद नौकरियों का सृजन करने में नाकाम रहा है. नई दिल्लीः एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च आर्थिक विकास के बावजूद भारत नौकरियों के सृजन करने में नाकाम रहा है. अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के द्वारा मंगलवार को प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, जीडीपी में दस फीसदी की वृद्धि के मुकाबले रोज़गार में एक फीसदी से भी कम की वृद्धि हुई है, जो अर्थव्यवस्था में बेरोज़गारी की वृद्धि को दर्शाती है. यह अध्ययन कहता है कि युवाओं और सुशिक्षित लोगों में बेरोज़गारी की दर सोलह प्रतिशत तक पहुंच गई है - "कम से कम पिछले बीस वर्षों में भारत में सबसे अधिक देखा गया". 'स्टेट ऑफ़ वर्किंग इंडिया ' नामक अध्ययन के मुताबिक ये रुझान विशेष रूप से उत्तरी राज्यों में दिखाई दे रहे हैं. यह अध्ययन श्रम बाज़ार, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इकट्ठा किए गए आंकड़ों पर आधारित है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि संगठित विनिर्माण में श्रम उत्पादकता पिछले तीन दशकों में छह गुना बढ़ी है, मज़दूरी केवल एक. पाँच गुना बढ़ी है. यह दर्शाता है कि श्रमिकों की तुलना में नियोक्ताओं को विकास से कहीं ज़्यादा फायदा हुआ है. अध्ययन से यह भी पता चलता है कि जाति और लिंग के आधार पर उपलब्ध नौकरियों के मामलें में अंतर-विभागीय असमानता भी है. महिलाएं सभी सेवा क्षेत्र के श्रमिकों का मात्र सोलह प्रतिशत हैं, लेकिन घरेलू श्रमिकों का साठ प्रतिशत है. यह लिंग असमानता देश के विभिन्न हिस्सों में भी भिन्न-भिन्न होती है. अध्ययन के मुताबिक यूपी में हर एक सौ पुरुषों पर केवल बीस महिलाएं सवेतन रोज़गार में हैं, जबकि यह संख्या तमिलनाडू में पचास और पूर्नोतर भारत में सत्तर है. हालांकि, अध्ययन से यह भी पता चलता है कि लिंग के आधार पर कमाई का अंतर अब समय के साथ घट रहा है. अनुसूचित जाति सभी श्रमिकों का अट्ठारह. पाँच प्रतिशत है. रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले दशक में विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में वृद्धि हुई है, खासतौर पर बुनाई, प्लास्टिक और जूते जैसे उद्योगों में और समय के साथ काम भी अधिक अनिश्चित हो गया है. आईटी और आधुनिक रिटेल में रोज़गार दो हज़ार ग्यारह में ग्यारह. पाँच प्रतिशत से दो हज़ार पंद्रह में बढ़कर पंद्रह प्रतिशत हो गया. हालांकि, रिपोर्ट से पता चलता है कि पचास प्रतिशत से अधिक सेवा क्षेत्र का रोज़गार अभी भी छोटे व्यापार, घरेलू सेवाओं और अन्य अनौपचारिक रोज़गार में जारी है. पिछले डेढ़ दशक में मज़दूरी में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन सातवें वेतन आयोग की न्यूनतम वेतन की सिफारिश के मुक़ाबले काफी कम है. रिपोर्ट के लेखकों का सुझाव है कि सरकार को अन्य नौकरी के अन्य क्षेत्रों में मनरेगा योजना के अनुरूप रोज़गार गारंटी प्रदान करने की ज़रूरत है. उन्होंने औद्योगिक नीति की ज़रुरत पर बल दिया जो श्रमिकों को कौशल विकास और वेतन सब्सिडी के माध्यम से श्रमिकों को प्रोत्साहन देती रहे. हालांकि, विभिन्न राज्यों में रोज़गार की विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर के रोज़गार विश्लेषण के माध्यम से इन्हें करने की आवश्यकता है. रिपोर्ट कृषि क्षेत्र के मुद्दों का समाधान करने की अत्यावश्यकता पर भी ज़ोर देती है जहां आय के स्त्रोत बहुत कम है.
सोनु केदार अम्बिकापुर - ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां बरकरार है जिसका खामियाजा वैक्सीनेशन के लिए गांव गई स्वास्थ्य विभाग की टीम को भुगतना पड़ा.... दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन करने गए कर्मचारियों के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की है मामला अम्बिकापुर से लगे मणिपुर चौकी क्षेत्र का है। जहां लब्जी गांव में अम्बिकापुर जनपद उप अभियंता धनेश राम, स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ घर-घर जाकर वैक्सीन लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान गांव के रोजगार सहायक महेश्वर के घर परिवार वालों ने ये कहकर वैक्सीन लगवाने मना किया गया कि वैक्सीन लगवाने से बुखार आ जाता है और अभी खेती बाड़ी का समय है। इसी बात पर विवाद इतना बढ़ गया कि वैक्सीन लगाने गए कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। वही इस मामले में शिकायत के बाद मणिपुर चौकी में 7 लोगो के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन करने गए कर्मचारियों को ग्रामीणों पीटा है। बताया जा रहा है कि अंबिकापुर के ग्राम लब्जी में कर्मचारी टीकाकरण करने गए हुए थे। अंबिकापुर जनपद उप अभियंता की टीकाकरण में ड्यूटी लगाई गई थी । मणिपुर चौकी में अभियंता से मारपीट गाली-गलौज करने के मामले में कई धाराओं के तहत अपराध दर्ज। किया गया है।
सोनु केदार अम्बिकापुर - ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां बरकरार है जिसका खामियाजा वैक्सीनेशन के लिए गांव गई स्वास्थ्य विभाग की टीम को भुगतना पड़ा.... दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन करने गए कर्मचारियों के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की है मामला अम्बिकापुर से लगे मणिपुर चौकी क्षेत्र का है। जहां लब्जी गांव में अम्बिकापुर जनपद उप अभियंता धनेश राम, स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ घर-घर जाकर वैक्सीन लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान गांव के रोजगार सहायक महेश्वर के घर परिवार वालों ने ये कहकर वैक्सीन लगवाने मना किया गया कि वैक्सीन लगवाने से बुखार आ जाता है और अभी खेती बाड़ी का समय है। इसी बात पर विवाद इतना बढ़ गया कि वैक्सीन लगाने गए कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। वही इस मामले में शिकायत के बाद मणिपुर चौकी में सात लोगो के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन करने गए कर्मचारियों को ग्रामीणों पीटा है। बताया जा रहा है कि अंबिकापुर के ग्राम लब्जी में कर्मचारी टीकाकरण करने गए हुए थे। अंबिकापुर जनपद उप अभियंता की टीकाकरण में ड्यूटी लगाई गई थी । मणिपुर चौकी में अभियंता से मारपीट गाली-गलौज करने के मामले में कई धाराओं के तहत अपराध दर्ज। किया गया है।
आज एक महीने बीत गए पर पिया अभी तक खुद को सम्हाल नहीं पाईं और आलेख भी कहां हिम्मत हारने वाला था उसको तो पिया को वो सब खुशी लौटाना चाहता था जिसे पिया सब कुछ गंवा चुकी थी। आलेख हर रोज कालेज जाने से पहले पिया से मिलने आता और फिर साथ ही पीले गुलाब की गुलदस्ता देकर उसे अपने प्यार का इजहार करता। पिया ने कहा हर रोज तुम ये फुल क्यों लाते हो? अगले दिन तो मुरझा जाते हैं ये।। आलेख ने कहा अरे तो क्या हुआ अगर मैं ये गुलदस्ता खरीद कर किसी को दो वक्त की रोटी मिल रहा है तो क्या बुराई है हर एक काली रात के बाद एक सुनहरी धूप भी तो आती है और क्या पता किसी की दुआ भी लग रही है शायद मैं तुम्हें खुश न कर पा रहा हूं पर किसी के घर चूल्हा तो जल रहा है।।। पिया ने कहा हां ये तो अच्छी बात है फिर तुम रोज गुलाब लाया करो। आलेख ने कहा हां, जरूर पर क्या अब तक तुम कालेज नहीं जाओगी? पढ़ाई तो पुरी करनी चाहिए? पिया ने कहा नहीं, नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती हूं सब मुझे मनहूस कहेंगे। आलेख ने कहा अरे बाबा सोच मनहूस होता है इन्सान नहीं!इतनी सी बात तुम नहीं समझ पाई।। पिया ने कहा अरे तुम जाओ वरना बस मिस हो जाएगी। आलेख ने कहा हां ठीक है पर! आलेख भी बिना बोले ही निकल गया। बस में बैठ कर सोचने लगा कि कैसे पिया को मैं वापस लाऊ। छोटी मां जब आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है तब आप नहीं है।।आपके जाने के बाद ज़िंदगी थम सी गई थी पर पिया के आने के बाद सब कुछ बदल चुका था मुझे लगा था कि आप मुझे वापस मिल गई पर दूसरे रूप में।। पिया को मैं खो नहीं सकता।। फिर मेडिकल कॉलेज पहुंच कर सबसे पहले लैब में चला गया। अरे आलेख पिया आज भी नहीं आईं? आलेख ने कहा नहीं। तो क्या वो इस बार एक्जाम नहीं देगी। आलेख ने कहा पता नहीं कुछ।। आलेख का भी मन नहीं लग रहा था। किसी तरह कालेज करने के बाद हवेली लौट आए। आलोक ने देखते ही कहा अरे बेटा क्या बात है? आलेख ने पुरी बात बताई।। आलोक ने कहा मेरी एक मुंह बोली बहन है वो दिमाग की डाक्टर है। चलो एक बार बात करता हूं। आलेख ने सर हिलाया और अपने कमरे में चला गया। आलेख ने कहा हां ठीक है मुझे किसी भी तरह से ठीक करना होगा उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। फिर इस तरह से एक महीने बाद ही आलोक ने अपनी बहन डाक्टर गीता को बुला लिया। गीता ने आते ही कहा भाई आज बरसों बाद ही आप ने आखिर अपनी बहन को कुछ करने का मौका दिया आज मैं जो कुछ भी हुं वो आप की वजह से हुं। आलोक ने कहा हां, ठीक है ये आलेख है मेरा बेटा। आलेख ने पैर छुए। गीता ने कहा अरे बेटा इतने परेशान मत हो। चलो बैठ कर बातें करे। छाया ने जल्दी से चाय नाश्ता लगा दिया। फिर आलेख ने पुरी बात बताई। गीता ने कहा ओह ओह बहुत बुरा हुआ पिया के साथ और वो अभी तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई क्योंकि उसके मन से वह काली रात नहीं निकली है पर डरने की बात नहीं मैं सब कुछ ठीक कर दुगी। आलेख रोने लगा।। गीता ने कहा मुझे गर्व है बेटा कि तुमने उसका साथ नहीं छोड़ा। दूसरे दिन सुबह आलोक ने जतिन को फोन करके सब बताया। जतिन ने हामी भर दी। फिर सब हवेली से निकल कर सीधे पिया के घर पहुंच गए। गीता ने पिया के घर पहुंच कर ही कहा कि वो पिया से मिलना चाहती है। आलेख ही गीता को पिया के रूम में लेकर गया। गीता ने देखा कि सब कुछ इधर उधर बिखरे हुए पड़े थे।गुलाब के फुल भी सुख चुके थे। पिया पलंग पर बैठी थी। गीता ने कहा अरे वाह कितने प्यारे और खुशबूदार फुल। किसको गुलाब पसंद है? पिया ने कहा मुझे। गीता ने कहा अरे वाह मुझे भी! पिया ये सुनकर उठकर बैठ गई और फिर बोली आप कौन? गीता ने कहा अरे मैं तो आलेख की बुआ पर तुम्हारी दोस्त हूं! पिया ने कहा दोस्त! गीता ने कहा हां, मैं दोस्ती करना चाहती हुं। पिया ने कहा पर क्यों? गीता ने कहा अरे मुझे अच्छी लगती हो तुम और हम दोनों एक दूसरे से बातें कर सकते हैं अपनी अपनी इच्छा, रूचि के बारे में।। पिया आश्चर्य से देखने लगी।
आज एक महीने बीत गए पर पिया अभी तक खुद को सम्हाल नहीं पाईं और आलेख भी कहां हिम्मत हारने वाला था उसको तो पिया को वो सब खुशी लौटाना चाहता था जिसे पिया सब कुछ गंवा चुकी थी। आलेख हर रोज कालेज जाने से पहले पिया से मिलने आता और फिर साथ ही पीले गुलाब की गुलदस्ता देकर उसे अपने प्यार का इजहार करता। पिया ने कहा हर रोज तुम ये फुल क्यों लाते हो? अगले दिन तो मुरझा जाते हैं ये।। आलेख ने कहा अरे तो क्या हुआ अगर मैं ये गुलदस्ता खरीद कर किसी को दो वक्त की रोटी मिल रहा है तो क्या बुराई है हर एक काली रात के बाद एक सुनहरी धूप भी तो आती है और क्या पता किसी की दुआ भी लग रही है शायद मैं तुम्हें खुश न कर पा रहा हूं पर किसी के घर चूल्हा तो जल रहा है।।। पिया ने कहा हां ये तो अच्छी बात है फिर तुम रोज गुलाब लाया करो। आलेख ने कहा हां, जरूर पर क्या अब तक तुम कालेज नहीं जाओगी? पढ़ाई तो पुरी करनी चाहिए? पिया ने कहा नहीं, नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती हूं सब मुझे मनहूस कहेंगे। आलेख ने कहा अरे बाबा सोच मनहूस होता है इन्सान नहीं!इतनी सी बात तुम नहीं समझ पाई।। पिया ने कहा अरे तुम जाओ वरना बस मिस हो जाएगी। आलेख ने कहा हां ठीक है पर! आलेख भी बिना बोले ही निकल गया। बस में बैठ कर सोचने लगा कि कैसे पिया को मैं वापस लाऊ। छोटी मां जब आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है तब आप नहीं है।।आपके जाने के बाद ज़िंदगी थम सी गई थी पर पिया के आने के बाद सब कुछ बदल चुका था मुझे लगा था कि आप मुझे वापस मिल गई पर दूसरे रूप में।। पिया को मैं खो नहीं सकता।। फिर मेडिकल कॉलेज पहुंच कर सबसे पहले लैब में चला गया। अरे आलेख पिया आज भी नहीं आईं? आलेख ने कहा नहीं। तो क्या वो इस बार एक्जाम नहीं देगी। आलेख ने कहा पता नहीं कुछ।। आलेख का भी मन नहीं लग रहा था। किसी तरह कालेज करने के बाद हवेली लौट आए। आलोक ने देखते ही कहा अरे बेटा क्या बात है? आलेख ने पुरी बात बताई।। आलोक ने कहा मेरी एक मुंह बोली बहन है वो दिमाग की डाक्टर है। चलो एक बार बात करता हूं। आलेख ने सर हिलाया और अपने कमरे में चला गया। आलेख ने कहा हां ठीक है मुझे किसी भी तरह से ठीक करना होगा उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। फिर इस तरह से एक महीने बाद ही आलोक ने अपनी बहन डाक्टर गीता को बुला लिया। गीता ने आते ही कहा भाई आज बरसों बाद ही आप ने आखिर अपनी बहन को कुछ करने का मौका दिया आज मैं जो कुछ भी हुं वो आप की वजह से हुं। आलोक ने कहा हां, ठीक है ये आलेख है मेरा बेटा। आलेख ने पैर छुए। गीता ने कहा अरे बेटा इतने परेशान मत हो। चलो बैठ कर बातें करे। छाया ने जल्दी से चाय नाश्ता लगा दिया। फिर आलेख ने पुरी बात बताई। गीता ने कहा ओह ओह बहुत बुरा हुआ पिया के साथ और वो अभी तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई क्योंकि उसके मन से वह काली रात नहीं निकली है पर डरने की बात नहीं मैं सब कुछ ठीक कर दुगी। आलेख रोने लगा।। गीता ने कहा मुझे गर्व है बेटा कि तुमने उसका साथ नहीं छोड़ा। दूसरे दिन सुबह आलोक ने जतिन को फोन करके सब बताया। जतिन ने हामी भर दी। फिर सब हवेली से निकल कर सीधे पिया के घर पहुंच गए। गीता ने पिया के घर पहुंच कर ही कहा कि वो पिया से मिलना चाहती है। आलेख ही गीता को पिया के रूम में लेकर गया। गीता ने देखा कि सब कुछ इधर उधर बिखरे हुए पड़े थे।गुलाब के फुल भी सुख चुके थे। पिया पलंग पर बैठी थी। गीता ने कहा अरे वाह कितने प्यारे और खुशबूदार फुल। किसको गुलाब पसंद है? पिया ने कहा मुझे। गीता ने कहा अरे वाह मुझे भी! पिया ये सुनकर उठकर बैठ गई और फिर बोली आप कौन? गीता ने कहा अरे मैं तो आलेख की बुआ पर तुम्हारी दोस्त हूं! पिया ने कहा दोस्त! गीता ने कहा हां, मैं दोस्ती करना चाहती हुं। पिया ने कहा पर क्यों? गीता ने कहा अरे मुझे अच्छी लगती हो तुम और हम दोनों एक दूसरे से बातें कर सकते हैं अपनी अपनी इच्छा, रूचि के बारे में।। पिया आश्चर्य से देखने लगी।
PATNA: प्रदेश के फ् आइएएस अधिकारियों को अवैध रूप से सचिव से प्रधान सचिव बनाने के मामले में कई खेल किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारों को इस्तेमाल कर सरकार ने चहेते अफसरों को तेहरा लाभ पहुंचाया। तीनों अफसरों ने लगभग साढ़े तीन लाख रुपए बढ़ा वेतन ले लिया है जिसकी रिकवरी के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। आई नेक्स्ट ने जब इस बड़े खुलासे के बाद आइएएस और आईपीएस अफसरों से बात की तो लाभ की मंशा उजागर हुई। एक जुलाई को देश के सभी आइएएस को इंक्रीमेंट मिलता है। सरकार के तीनों चहते अफसरों को इसका लाभ देने के लिए ख्ब् जून को ही चंचल कुमार, हरजोत कौर और दीपक कुमार सिंह को प्रधान सचिव के पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नति दे दी गई। इस प्रमोशन से पहला लाभ बढ़े वेतनमान का लाभ मिला और फिर इंक्रीमेंट लगने के साथ सातवें पे कमीशन का भी लाभ दिलाने की मंशा रही। दस हजार रुपए से अधिक की निकासी पर कार्मिक विभाग में जांच का नियम है। भारत सरकार की आपत्ति के बाद अवैध रूप से पदोन्नति पाए आइएएस अधिकारियों द्वारा निकाली गई लगभग साढ़े तीन लाख रुपए की अतिरिक्त धनराशि की जांच भी कराई जाएगी। कुछ आइएएस अफसरों का कहना है कि ऐसे मामलों में रिकवरी के साथ वैधानिक कार्रवाई का भी नियम है। इस बारे में कई आइएएस और आइपीएस अधिकारियों ने कहा कि पदोन्नति सरासर अवैध है। आउट ऑफ टर्म पदोन्नति का अधिकार सिर्फ पीएमओ को है। बिहार सरकार ने ऐसा कर भारत सरकार के अधिकारों में दखल दिया है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का इस मामले में चुप्पी साध जाना भी कई सवाल खड़ा कर रहा है। एक आइएएस का कहना है कि भारत सरकार की गाइड लाइन के बाद बिहार सरकार ने वर्ष ख्008 में संकल्प तैयार किया था जिसमें डीपीसी यानि डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी में प्रधान सचिव और मुख्य सचिव के साथ वित्त सचिव को शामिल करना था। लेकिन जूनियर आइएएस अफसर सचिव व्यय को शामिल कर प्रदेश सरकार ने संकल्प तोड़ दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में ऐसा क्यों किया गया ये बड़ा और अनसुलझा सवाल है। प्रमोशन आउट ऑफ टर्म किया गया है जिसपर भारत सरकार ने आपत्ति की है। अब इसकी पड़ताल की जा रही है।
PATNA: प्रदेश के फ् आइएएस अधिकारियों को अवैध रूप से सचिव से प्रधान सचिव बनाने के मामले में कई खेल किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारों को इस्तेमाल कर सरकार ने चहेते अफसरों को तेहरा लाभ पहुंचाया। तीनों अफसरों ने लगभग साढ़े तीन लाख रुपए बढ़ा वेतन ले लिया है जिसकी रिकवरी के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। आई नेक्स्ट ने जब इस बड़े खुलासे के बाद आइएएस और आईपीएस अफसरों से बात की तो लाभ की मंशा उजागर हुई। एक जुलाई को देश के सभी आइएएस को इंक्रीमेंट मिलता है। सरकार के तीनों चहते अफसरों को इसका लाभ देने के लिए ख्ब् जून को ही चंचल कुमार, हरजोत कौर और दीपक कुमार सिंह को प्रधान सचिव के पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नति दे दी गई। इस प्रमोशन से पहला लाभ बढ़े वेतनमान का लाभ मिला और फिर इंक्रीमेंट लगने के साथ सातवें पे कमीशन का भी लाभ दिलाने की मंशा रही। दस हजार रुपए से अधिक की निकासी पर कार्मिक विभाग में जांच का नियम है। भारत सरकार की आपत्ति के बाद अवैध रूप से पदोन्नति पाए आइएएस अधिकारियों द्वारा निकाली गई लगभग साढ़े तीन लाख रुपए की अतिरिक्त धनराशि की जांच भी कराई जाएगी। कुछ आइएएस अफसरों का कहना है कि ऐसे मामलों में रिकवरी के साथ वैधानिक कार्रवाई का भी नियम है। इस बारे में कई आइएएस और आइपीएस अधिकारियों ने कहा कि पदोन्नति सरासर अवैध है। आउट ऑफ टर्म पदोन्नति का अधिकार सिर्फ पीएमओ को है। बिहार सरकार ने ऐसा कर भारत सरकार के अधिकारों में दखल दिया है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का इस मामले में चुप्पी साध जाना भी कई सवाल खड़ा कर रहा है। एक आइएएस का कहना है कि भारत सरकार की गाइड लाइन के बाद बिहार सरकार ने वर्ष ख्आठ में संकल्प तैयार किया था जिसमें डीपीसी यानि डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी में प्रधान सचिव और मुख्य सचिव के साथ वित्त सचिव को शामिल करना था। लेकिन जूनियर आइएएस अफसर सचिव व्यय को शामिल कर प्रदेश सरकार ने संकल्प तोड़ दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में ऐसा क्यों किया गया ये बड़ा और अनसुलझा सवाल है। प्रमोशन आउट ऑफ टर्म किया गया है जिसपर भारत सरकार ने आपत्ति की है। अब इसकी पड़ताल की जा रही है।
आनन्दपुर साहिब भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्य पंजाब के रूपनगर ज़िले का एक इतिहासक नगर है। . 10 संबंधोंः डाक सूचक संख्या, पंजाब (भारत), पंजाबी भाषा, भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश, भारत के ज़िले, भारतीय मानक समय, रूपनगर जिला, सिखों के दस गुरू, होला मोहल्ला, गुरु तेग़ बहादुर। डाक सूचक संख्या या पोस्टल इंडेक्स नंबर (लघुरूपः पिन नंबर) एक ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से किसी स्थान विशेष को एक विशिष्ट सांख्यिक पहचान प्रदान की जाती है। भारत में पिन कोड में ६ अंकों की संख्या होती है और इन्हें भारतीय डाक विभाग द्वारा छांटा जाता है। पिन प्रणाली को १५ अगस्त १९७२ को आरंभ किया गया था। . पंजाब (भारत) पंजाब (पंजाबीः ਪੰਜਾਬ) उत्तर-पश्चिम भारत का एक राज्य है जो वृहद्तर पंजाब क्षेत्र का एक भाग है। इसका दूसरा भाग पाकिस्तान में है। पंजाब क्षेत्र के अन्य भाग (भारत के) हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों में हैं। इसके पश्चिम में पाकिस्तानी पंजाब, उत्तर में जम्मू और कश्मीर, उत्तर-पूर्व में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में हरियाणा, दक्षिण-पूर्व में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और दक्षिण-पश्चिम में राजस्थान राज्य हैं। राज्य की कुल जनसंख्या २,४२,८९,२९६ है एंव कुल क्षेत्रफल ५०,३६२ वर्ग किलोमीटर है। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है जोकि हरियाणा राज्य की भी राजधानी है। पंजाब के प्रमुख नगरों में अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और बठिंडा हैं। 1947 भारत का विभाजन के बाद बर्तानवी भारत के पंजाब सूबे को भारत और पाकिस्तान दरमियान विभाजन दिया गया था। 1966 में भारतीय पंजाब का विभाजन फिर से हो गया और नतीजे के तौर पर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश वजूद में आए और पंजाब का मौजूदा राज बना। यह भारत का अकेला सूबा है जहाँ सिख बहुमत में हैं। युनानी लोग पंजाब को पैंटापोटाम्या नाम के साथ जानते थे जो कि पाँच इकठ्ठा होते दरियाओं का अंदरूनी डेल्टा है। पारसियों के पवित्र ग्रंथ अवैस्टा में पंजाब क्षेत्र को पुरातन हपता हेंदू या सप्त-सिंधु (सात दरियाओं की धरती) के साथ जोड़ा जाता है। बर्तानवी लोग इस को "हमारा प्रशिया" कह कर बुलाते थे। ऐतिहासिक तौर पर पंजाब युनानियों, मध्य एशियाईओं, अफ़ग़ानियों और ईरानियों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप का प्रवेश-द्वार रहा है। कृषि पंजाब का सब से बड़ा उद्योग है; यह भारत का सब से बड़ा गेहूँ उत्पादक है। यहाँ के प्रमुख उद्योग हैंः वैज्ञानिक साज़ों सामान, कृषि, खेल और बिजली सम्बन्धित माल, सिलाई मशीनें, मशीन यंत्रों, स्टार्च, साइकिलों, खादों आदि का निर्माण, वित्तीय रोज़गार, सैर-सपाटा और देवदार के तेल और खंड का उत्पादन। पंजाब में भारत में से सब से अधिक इस्पात के लुढ़का हुआ मीलों के कारख़ाने हैं जो कि फ़तहगढ़ साहब की इस्पात नगरी मंडी गोबिन्दगढ़ में हैं। . पंजाबी (गुरमुखीः ਪੰਜਾਬੀ; शाहमुखीः پنجابی) एक हिंद-आर्यन भाषा है और ऐतिहासिक पंजाब क्षेत्र (अब भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित) के निवासियों तथा प्रवासियों द्वारा बोली जाती है। इसके बोलने वालों में सिख, मुसलमान और हिंदू सभी शामिल हैं। पाकिस्तान की १९९८ की जनगणना और २००१ की भारत की जनगणना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान में भाषा के कुल वक्ताओं की संख्या लगभग ९-१३ करोड़ है, जिसके अनुसार यह विश्व की ११वीं सबसे व्यापक भाषा है। कम से कम पिछले ३०० वर्षों से लिखित पंजाबी भाषा का मानक रूप, माझी बोली पर आधारित है, जो ऐतिहासिक माझा क्षेत्र की भाषा है। . भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें उन्तीस राज्य और सात केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।. तालुकों में बंटे हैं ज़िला भारतीय राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश का प्रशासनिक हिस्सा होता है। जिले फिर उप-भागों में या सीधे तालुकों में बंटे होते हैं। जिले के अधिकारियों की गिनती में निम्न आते हैं. मिर्ज़ापुर और 82.5° पू के स्थान, जो भारतीय मानक समय के संदर्भ लम्बाई के लिए व्यवहार होता है भारतीय मानक समय (संक्षेप में आइएसटी) (अंग्रेज़ीः Indian Standard Time इंडियन् स्टैंडर्ड् टाइम्, IST) भारत का समय मंडल है, एक यूटीसी+5:30 समय ऑफ़सेट के साथ में। भारत में दिवालोक बचत समय (डीएसटी) या अन्य कोइ मौसमी समायोग नहीं है, यद्यपि डीएसटी 1962 भारत-चीन युद्ध, 1965 भारत-पाक युद्ध और 1971 भारत-पाक युद्ध में व्यवहार था। सामरिक और विमानन समय में, आइएसटी का E* ("गूंज-सितारा") के साथ में नामित होता है। --> . रूपनगर भारतीय राज्य पंजाब का एक ज़िला है। क्षेत्रफल - वर्ग कि॰मी॰ जनसंख्या - (2001 जनगणना) साक्षरता - एस॰टी॰डी॰ कोड - जिलाधिकारी - (सितम्बर 2006 में) समुद्र तल से उचाई - अक्षांश - उत्तर देशांतर - पूर्व औसत वर्षा - मि॰मी॰ . श्रेणीःसिख धर्म. होला मोहल्ला सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनन्दपुर साहिब मे होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला मोहल्ला कहते है। सिखों के लिये यह धर्मस्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ पर होली पौरुष के प्रतीक पर्व के रूप में मनाई जाती है। इसीलिए दशम गुरू गोविंद सिंह जी ने होली के लिए पुल्लिंग शब्द होला मोहल्ला का प्रयोग किया। गुरु जी इसके माध्यम से समाज के दुर्बल और शोषित वर्ग की प्रगति चाहते थे। होला महल्ला का उत्सव आनंदपुर साहिब में छः दिन तक चलता है। इस अवसर पर, भांग की तरंग में मस्त घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं। जुलूस तीन काले बकरों की बलि से प्रारंभ होता है। एक ही झटके से बकरे की गर्दन धड़ से अलग करके उसके मांस से 'महा प्रसाद' पका कर वितरित किया जाता है। पंज पियारे जुलूस का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और जुलूस में निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखते हुए बोले सो निहाल के नारे बुलंद करते हैं। आनन्दपुर साहिब की सजावट की जाती है और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। कहते है गुरु गोबिन्द सिंह (सिक्खों के दसवें गुरु) ने स्वयं इस मेले की शुरुआत की थी। यह जुलूस हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है। . गुरू तेग़ बहादुर (1 अप्रैल, 1621 - 24 नवम्बर, 1675) सिखों के नवें गुरु थे जिन्होने प्रथम गुरु नानक द्वारा बताए गये मार्ग का अनुसरण करते रहे। उनके द्वारा रचित ११५ पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। उन्होने काश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। इस्लाम स्वीकार न करने के कारण 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हे इस्लाम कबूल करने को कहा कि पर गुरु साहब ने कहा सीस कटा सकते है केश नहीं। फिर उसने गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग़ बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। अंगूठाकार गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के अन्दर का दृष्य इस महावाक्य अनुसार गुरुजी का बलिदान न केवल धर्म पालन के लिए नहीं अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था। इसलिए धर्म के सत्य शाश्वत मूल्यों के लिए उनका बलि चढ़ जाना वस्तुतः सांस्कृतिक विरासत और इच्छित जीवन विधान के पक्ष में एक परम साहसिक अभियान था। आततायी शासक की धर्म विरोधी और वैचारिक स्वतंत्रता का दमन करने वाली नीतियों के विरुद्ध गुरु तेग़ बहादुरजी का बलिदान एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी। यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। 11 नवंबर, 1675 ई को दिल्ली के चांदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार करके गुरू साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया। किन्तु गुरु तेग़ बहादुर ने अपने मुंह से सी तक नहीं कहा। आपके अद्वितीय बलिदान के बारे में गुरु गोविन्द सिंह जी ने 'बिचित्र नाटक में लिखा है- .
आनन्दपुर साहिब भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्य पंजाब के रूपनगर ज़िले का एक इतिहासक नगर है। . दस संबंधोंः डाक सूचक संख्या, पंजाब , पंजाबी भाषा, भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश, भारत के ज़िले, भारतीय मानक समय, रूपनगर जिला, सिखों के दस गुरू, होला मोहल्ला, गुरु तेग़ बहादुर। डाक सूचक संख्या या पोस्टल इंडेक्स नंबर एक ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से किसी स्थान विशेष को एक विशिष्ट सांख्यिक पहचान प्रदान की जाती है। भारत में पिन कोड में छः अंकों की संख्या होती है और इन्हें भारतीय डाक विभाग द्वारा छांटा जाता है। पिन प्रणाली को पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ बहत्तर को आरंभ किया गया था। . पंजाब पंजाब उत्तर-पश्चिम भारत का एक राज्य है जो वृहद्तर पंजाब क्षेत्र का एक भाग है। इसका दूसरा भाग पाकिस्तान में है। पंजाब क्षेत्र के अन्य भाग हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों में हैं। इसके पश्चिम में पाकिस्तानी पंजाब, उत्तर में जम्मू और कश्मीर, उत्तर-पूर्व में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में हरियाणा, दक्षिण-पूर्व में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और दक्षिण-पश्चिम में राजस्थान राज्य हैं। राज्य की कुल जनसंख्या दो,बयालीस,नवासी,दो सौ छियानवे है एंव कुल क्षेत्रफल पचास,तीन सौ बासठ वर्ग किलोमीटर है। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है जोकि हरियाणा राज्य की भी राजधानी है। पंजाब के प्रमुख नगरों में अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला और बठिंडा हैं। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस भारत का विभाजन के बाद बर्तानवी भारत के पंजाब सूबे को भारत और पाकिस्तान दरमियान विभाजन दिया गया था। एक हज़ार नौ सौ छयासठ में भारतीय पंजाब का विभाजन फिर से हो गया और नतीजे के तौर पर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश वजूद में आए और पंजाब का मौजूदा राज बना। यह भारत का अकेला सूबा है जहाँ सिख बहुमत में हैं। युनानी लोग पंजाब को पैंटापोटाम्या नाम के साथ जानते थे जो कि पाँच इकठ्ठा होते दरियाओं का अंदरूनी डेल्टा है। पारसियों के पवित्र ग्रंथ अवैस्टा में पंजाब क्षेत्र को पुरातन हपता हेंदू या सप्त-सिंधु के साथ जोड़ा जाता है। बर्तानवी लोग इस को "हमारा प्रशिया" कह कर बुलाते थे। ऐतिहासिक तौर पर पंजाब युनानियों, मध्य एशियाईओं, अफ़ग़ानियों और ईरानियों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप का प्रवेश-द्वार रहा है। कृषि पंजाब का सब से बड़ा उद्योग है; यह भारत का सब से बड़ा गेहूँ उत्पादक है। यहाँ के प्रमुख उद्योग हैंः वैज्ञानिक साज़ों सामान, कृषि, खेल और बिजली सम्बन्धित माल, सिलाई मशीनें, मशीन यंत्रों, स्टार्च, साइकिलों, खादों आदि का निर्माण, वित्तीय रोज़गार, सैर-सपाटा और देवदार के तेल और खंड का उत्पादन। पंजाब में भारत में से सब से अधिक इस्पात के लुढ़का हुआ मीलों के कारख़ाने हैं जो कि फ़तहगढ़ साहब की इस्पात नगरी मंडी गोबिन्दगढ़ में हैं। . पंजाबी एक हिंद-आर्यन भाषा है और ऐतिहासिक पंजाब क्षेत्र के निवासियों तथा प्रवासियों द्वारा बोली जाती है। इसके बोलने वालों में सिख, मुसलमान और हिंदू सभी शामिल हैं। पाकिस्तान की एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे की जनगणना और दो हज़ार एक की भारत की जनगणना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान में भाषा के कुल वक्ताओं की संख्या लगभग नौ-तेरह करोड़ है, जिसके अनुसार यह विश्व की ग्यारहवीं सबसे व्यापक भाषा है। कम से कम पिछले तीन सौ वर्षों से लिखित पंजाबी भाषा का मानक रूप, माझी बोली पर आधारित है, जो ऐतिहासिक माझा क्षेत्र की भाषा है। . भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें उन्तीस राज्य और सात केन्द्र शासित प्रदेश हैं। ये राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश पुनः जिलों और अन्य क्षेत्रों में बांटे गए हैं।. तालुकों में बंटे हैं ज़िला भारतीय राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश का प्रशासनिक हिस्सा होता है। जिले फिर उप-भागों में या सीधे तालुकों में बंटे होते हैं। जिले के अधिकारियों की गिनती में निम्न आते हैं. मिर्ज़ापुर और बयासी.पाँच° पू के स्थान, जो भारतीय मानक समय के संदर्भ लम्बाई के लिए व्यवहार होता है भारतीय मानक समय भारत का समय मंडल है, एक यूटीसी+पाँच:तीस समय ऑफ़सेट के साथ में। भारत में दिवालोक बचत समय या अन्य कोइ मौसमी समायोग नहीं है, यद्यपि डीएसटी एक हज़ार नौ सौ बासठ भारत-चीन युद्ध, एक हज़ार नौ सौ पैंसठ भारत-पाक युद्ध और एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर भारत-पाक युद्ध में व्यवहार था। सामरिक और विमानन समय में, आइएसटी का E* के साथ में नामित होता है। --> . रूपनगर भारतीय राज्य पंजाब का एक ज़िला है। क्षेत्रफल - वर्ग कि॰मी॰ जनसंख्या - साक्षरता - एस॰टी॰डी॰ कोड - जिलाधिकारी - समुद्र तल से उचाई - अक्षांश - उत्तर देशांतर - पूर्व औसत वर्षा - मि॰मी॰ . श्रेणीःसिख धर्म. होला मोहल्ला सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनन्दपुर साहिब मे होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला मोहल्ला कहते है। सिखों के लिये यह धर्मस्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ पर होली पौरुष के प्रतीक पर्व के रूप में मनाई जाती है। इसीलिए दशम गुरू गोविंद सिंह जी ने होली के लिए पुल्लिंग शब्द होला मोहल्ला का प्रयोग किया। गुरु जी इसके माध्यम से समाज के दुर्बल और शोषित वर्ग की प्रगति चाहते थे। होला महल्ला का उत्सव आनंदपुर साहिब में छः दिन तक चलता है। इस अवसर पर, भांग की तरंग में मस्त घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं। जुलूस तीन काले बकरों की बलि से प्रारंभ होता है। एक ही झटके से बकरे की गर्दन धड़ से अलग करके उसके मांस से 'महा प्रसाद' पका कर वितरित किया जाता है। पंज पियारे जुलूस का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और जुलूस में निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखते हुए बोले सो निहाल के नारे बुलंद करते हैं। आनन्दपुर साहिब की सजावट की जाती है और विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है। कहते है गुरु गोबिन्द सिंह ने स्वयं इस मेले की शुरुआत की थी। यह जुलूस हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है। . गुरू तेग़ बहादुर सिखों के नवें गुरु थे जिन्होने प्रथम गुरु नानक द्वारा बताए गये मार्ग का अनुसरण करते रहे। उनके द्वारा रचित एक सौ पंद्रह पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। उन्होने काश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। इस्लाम स्वीकार न करने के कारण एक हज़ार छः सौ पचहत्तर में मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हे इस्लाम कबूल करने को कहा कि पर गुरु साहब ने कहा सीस कटा सकते है केश नहीं। फिर उसने गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग़ बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। अंगूठाकार गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के अन्दर का दृष्य इस महावाक्य अनुसार गुरुजी का बलिदान न केवल धर्म पालन के लिए नहीं अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था। इसलिए धर्म के सत्य शाश्वत मूल्यों के लिए उनका बलि चढ़ जाना वस्तुतः सांस्कृतिक विरासत और इच्छित जीवन विधान के पक्ष में एक परम साहसिक अभियान था। आततायी शासक की धर्म विरोधी और वैचारिक स्वतंत्रता का दमन करने वाली नीतियों के विरुद्ध गुरु तेग़ बहादुरजी का बलिदान एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी। यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। ग्यारह नवंबर, एक हज़ार छः सौ पचहत्तर ई को दिल्ली के चांदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार करके गुरू साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया। किन्तु गुरु तेग़ बहादुर ने अपने मुंह से सी तक नहीं कहा। आपके अद्वितीय बलिदान के बारे में गुरु गोविन्द सिंह जी ने 'बिचित्र नाटक में लिखा है- .
हाजीपुर रेलवे स्टेशन से 21 अर्धनिर्मित पिस्टल और लाेहे के 21 बैरल के साथ एक युवक काे रेल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है। युवक ने अपना घर मुंगेर बताया गोरखपुर से अर्धनिर्मित हथियार लाने की बात कही। उसके बताए दाेनाें ठिकाने पर छापेमारी की गई। गोरखपुर से उसके एक साथी गाेलू असरफ उर्फ माेहम्मद आरिफ काे पकड़ा गया। ज्ञात हाे कि रविवार काे निरीक्षण के दाैरान संदिग्ध हालत में एक व्यक्ति काे हाजीपुर में प्लेटफार्म संख्या दाे और तीन के बीच पकड़ा गया था। उसके बैग में 21 अर्धनिर्मित पिस्टल और लाेहे के 21 बैरल मिले थे। इस संबंध में रेल एसपी कुमार आशीष ने बताया कि पूछताछ के आधार पर पता चला कि उक्त युवक मुंगेर का रहने वाला है। उसका परिवार पहले से अवैध काम में संलिप्त है। रेल एसपी के अनुसार पूछताछ के आधार पर उसके दाे ठिकाने गोरखपुर और मुंगेर में छापेमारी की गई है। मुंगेर में पता चला कि उसके पिता भी इसी काम में संलिप्त थे। गोरखपुर से गिरफ्तार माेहम्मद आरिफ के के साथ वह पार्टनरशिप में अवैध हथियार का धंधा करता था। एसपी ने दावा किया कि गिरोह का तार बिहार, झारखंड, यूपी और बंगाल तक जुड़ा है। हाजीपुर स्टेशन से गिरफ्तार व्यक्ति मुंगेर जिले के कासिम बाजार थाना के पुरानी गंज का निवासी सोनू अग्रवाल है। उसकी निशानदेही पर गिरफ्तार आरिफ गोरखपुर के गोरखनाथ थाना के हुसैनाबाद का निवासी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हाजीपुर रेलवे स्टेशन से इक्कीस अर्धनिर्मित पिस्टल और लाेहे के इक्कीस बैरल के साथ एक युवक काे रेल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है। युवक ने अपना घर मुंगेर बताया गोरखपुर से अर्धनिर्मित हथियार लाने की बात कही। उसके बताए दाेनाें ठिकाने पर छापेमारी की गई। गोरखपुर से उसके एक साथी गाेलू असरफ उर्फ माेहम्मद आरिफ काे पकड़ा गया। ज्ञात हाे कि रविवार काे निरीक्षण के दाैरान संदिग्ध हालत में एक व्यक्ति काे हाजीपुर में प्लेटफार्म संख्या दाे और तीन के बीच पकड़ा गया था। उसके बैग में इक्कीस अर्धनिर्मित पिस्टल और लाेहे के इक्कीस बैरल मिले थे। इस संबंध में रेल एसपी कुमार आशीष ने बताया कि पूछताछ के आधार पर पता चला कि उक्त युवक मुंगेर का रहने वाला है। उसका परिवार पहले से अवैध काम में संलिप्त है। रेल एसपी के अनुसार पूछताछ के आधार पर उसके दाे ठिकाने गोरखपुर और मुंगेर में छापेमारी की गई है। मुंगेर में पता चला कि उसके पिता भी इसी काम में संलिप्त थे। गोरखपुर से गिरफ्तार माेहम्मद आरिफ के के साथ वह पार्टनरशिप में अवैध हथियार का धंधा करता था। एसपी ने दावा किया कि गिरोह का तार बिहार, झारखंड, यूपी और बंगाल तक जुड़ा है। हाजीपुर स्टेशन से गिरफ्तार व्यक्ति मुंगेर जिले के कासिम बाजार थाना के पुरानी गंज का निवासी सोनू अग्रवाल है। उसकी निशानदेही पर गिरफ्तार आरिफ गोरखपुर के गोरखनाथ थाना के हुसैनाबाद का निवासी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
1)जब ट्रांसफर करने शक्तियों का न्यायपूर्ण या उचित प्रयोग नही किया गया हो। 2) स्थानांतरण से द्वेष परिलक्षित होने पर। 3) कर्मचारी के प्रशासनिक ट्रांसफर में प्रशासनिक आवश्यकता की अनुपस्थिति परिलक्षित होना। 4) बाहरी निर्देश या दबाब गया या आंतरिक उद्देश्य , कर्मचारी ट्रांसफर के पीछे परिलक्षित होना। 5) निर्धारित कार्यकाल के पूर्व ट्रांसफर का किया जाना। 6) दंड स्वरूप ट्रांसफर किया जाना। 7) किसी अन्य व्यक्ति को, पीड़ित व्यक्ति के स्थान पर प्रतिस्थापित या पदस्थ करने के उद्देश्य से, स्थानांतरण का किया जाना। 8) सक्षम अधिकारी के अतिरिक्त, अन्य किसी अधिकारी द्वारा , शक्तियों के प्रत्यायोजन के बिना, कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना। 9) संवर्ग के बाहर ट्रांसफर का किया जाना। 10) सेवा नियमों या किसी विशिष्ट आदेश के अतिक्रमण में (अधिनियम के रूप में) ट्रांसफर किया जाना। दूसरे शब्दों में, जहां ,सेवा नियम ट्रांसफर को प्रतिबंधित करते हों, या ट्रांसफर के परिणामस्वरूप वरिष्ठता का हनन या समाप्ति होना। उपरोक्त जानकारी न्यायलयीन प्रकरणों के तथ्यों के आधार पर है, स्थानांतरण, सरकारी सेवा की एक आवश्यक शर्त है, जो कि नियुक्ति के समय ही कर्मचारी स्वीकार करता है। प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर, ट्रांसफर करना शासन का अधिकार है। (लेखक श्री अमित चतुर्वेदी, अधिवक्ता हैं एवं उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रैक्टिस करते हैं। )
एक)जब ट्रांसफर करने शक्तियों का न्यायपूर्ण या उचित प्रयोग नही किया गया हो। दो) स्थानांतरण से द्वेष परिलक्षित होने पर। तीन) कर्मचारी के प्रशासनिक ट्रांसफर में प्रशासनिक आवश्यकता की अनुपस्थिति परिलक्षित होना। चार) बाहरी निर्देश या दबाब गया या आंतरिक उद्देश्य , कर्मचारी ट्रांसफर के पीछे परिलक्षित होना। पाँच) निर्धारित कार्यकाल के पूर्व ट्रांसफर का किया जाना। छः) दंड स्वरूप ट्रांसफर किया जाना। सात) किसी अन्य व्यक्ति को, पीड़ित व्यक्ति के स्थान पर प्रतिस्थापित या पदस्थ करने के उद्देश्य से, स्थानांतरण का किया जाना। आठ) सक्षम अधिकारी के अतिरिक्त, अन्य किसी अधिकारी द्वारा , शक्तियों के प्रत्यायोजन के बिना, कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना। नौ) संवर्ग के बाहर ट्रांसफर का किया जाना। दस) सेवा नियमों या किसी विशिष्ट आदेश के अतिक्रमण में ट्रांसफर किया जाना। दूसरे शब्दों में, जहां ,सेवा नियम ट्रांसफर को प्रतिबंधित करते हों, या ट्रांसफर के परिणामस्वरूप वरिष्ठता का हनन या समाप्ति होना। उपरोक्त जानकारी न्यायलयीन प्रकरणों के तथ्यों के आधार पर है, स्थानांतरण, सरकारी सेवा की एक आवश्यक शर्त है, जो कि नियुक्ति के समय ही कर्मचारी स्वीकार करता है। प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर, ट्रांसफर करना शासन का अधिकार है।
3 में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :अधिनियम की विद्यमान धारा-53 के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा - 54 (लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं अथवा उसके सेवकों के कतिपय विधि विरूद्ध कार्यों के लिए शास्तियों) में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापनःअधिनियम की विद्यमान धारा-54 के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 7. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा-55 के अंत में नई धारा 55- 'क' 55- 'ख', 55-'ग', 55-'घ', 55-ड.' एवं 55-'च' का अन्तःस्थापन : धारा 55- 'क'- किसी स्थान को सामान्य मदिरा पान गृह के रूप में खोलने, रखने या उपयोग में लाने के लिए या किसी भी ऐसे स्थान के देख-रेख उसका प्रबंध या नियंत्रण रखने के लिए या ऐसे किसी स्थान के कारोबार का संचालन करने की सहायता करने के लिए शास्ति- जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई किसी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, परमिट या पास के उल्लंघन में (क) किसी स्थान को सामान्य मदिरा पान - गृह के रूप में खोलेगा, रखेगा या उपयोग में लायेगा, या (ख) सामान्य मदिरा पान गृह के रूप में खोले गये, रखे गये या उपयोग में लाये गये किसी स्थान की देख-रेख या उसका प्रबंध' या नियंत्रण रखेगा या ऐसे स्थान का कारोबार का संचालन करने में किसी भी रीति में सहायता करेगा. "वह ऐसे कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से जो पाँच हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा और पश्चातवर्ती अपराध कारित करने के लिए वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। धारा 55 - 'ख' मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में मत्त पाये जाने के लिए या मदिरा पान करने के प्रयोजन के लिए मदिरा के साथ पाये जाने के लिए शास्तिजो कोई इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई अधिसूचना, या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति परमिट या पास के उल्लंघन में, मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में मत्त पाया जाये या मदिरा पान करता हुआ पाया जायेगा या मदिरा पान करने के प्रयोजन से मदिरा के साथ वहाँ उपस्थित पाया जायेगा वह ऐसे जुर्माने से, जो पाँच हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा और किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में जो किसी मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में उस समय पाया जाएगा जबकि वहाँ मदिरा पान चल रहा हो, जबतक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि वह वहाँ मदिरा पान करने के प्रयोजन से उपस्थित था। धारा 55-'ग- किसी स्थान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा अपराध, जो धारा 47, धारा 49, धारा 55, धारा 55- 'क' एवं 55- 'ख' के अधीन दंडनीय है, किये जाने हेतु उपयोग में लाये जाने देने के लिए शास्ति- जो कोई किसी स्थान का स्वामी होते हुए या उसका उपयोग या देख-रेख या प्रबंध या नियंत्रण रखते हुए, उस स्थान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा अपराध, जो कि धारा 47 धारा 49, या धारा 55 या धारा 55- 'क' एवं 55- 'ख' के अधीन दंडनीय है, किये जाने हेतु जानते हुए उपयोग में लाये जाने देगा, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस (10) हजार रूपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो बीस (20) हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। पश्चातवर्ती अपराध के लिए वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो रू0 20000/- (बीस हजार रूपये) से कम का नहीं होगा किन्तु जो रू0 50000/- (पचास हजार रूपये) तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। धारा 55- 'घ- धारा 47 या 55 के अधीन दंडनीय अपराधों को करने से अलग रहने के लिए बंध - पत्र का निष्पादन(क) जब कभी कोई व्यक्ति धारा-47 या धारा-55 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का दोष-सिद्धि ठहराया जाता है एवं दोष-सिद्धि ठहराने वाले मजिस्ट्रेट का यह मत है कि ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा करना आवश्यक है कि वह उन धाराओं के अधीन दंडनीय अपराधों को करने से अलग रहने के लिए एक बंध-पत्र निष्पादित करे तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति पर दंडादेश पारित करते समय यह आदेश कर सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनाधिक की ऐसी कालावधि के दौरान जैसा वह निर्दिष्ट करे, ऐसे अपराध को करने से प्रविरत रहने के लिए उसकी आय के अनुपात के अनुसार राशि का प्रतिभूतिओं सहित या रहित (With or without Securities) एक बंध-पत्र निष्पादित करें। (ख) बन्ध-पत्र का प्रारूप और ऐसे बंध-पत्र से संबंद्ध समस्त विषयों को दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंधों का लागू होना- बंध-पत्र द्वितीय अनुसूची में अन्तर्विष्ट प्रारूप में होगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का अधिनियम संख्याक-2) के उपबंध जहाँ तक वे लागू होते है, ऐसे बंध-पत्र से संबंद्ध समस्त विषयों को उसी प्रकार लागू होंगे, मानो वह शान्ति बनाये रखने के लिए उस संहिता कि धारा 106 के अधीन निष्पादित किये जाने के लिए आदेशित बंध-पत्र है। (ग) परिस्थितियाँ जिनमें बंध-पत्र शून्य होगा- यदि अपील में या अन्यथा दोष-सिद्धी अपास्त कर दी जाए, तो इस प्रकार निष्पादित बंध-पत्र शून्य हो जाएगा। (घ) अपील न्यायालय या उच्च न्यायालय की आदेश करने की शक्ति- इस धारा के अधीन, किसी अपील न्यायालय द्वारा या उच्च न्यायालय द्वारा, जबकि वह पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा है, भी आदेश किया जा सकेगा। धारा 55- 'ड. - मजिस्ट्रेट का किसी व्यक्ति को यह कारण बताने के लिए अपेक्षित करना कि सद्व्यवहार के लिए बंध-पत्र निष्पादित करने के लिए क्यों न आदेशित किया जाए(क) जब कभी राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किये गये प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को यह सूचना प्राप्त होती है कि उसकी अधिकारिता के स्थानीय सीमाओं के भीतर कोई व्यक्ति इस अधिनियम की धारा 47 या धारा 55 के अधीन दण्डनीय अपराध को अभ्यासिक / भय मुक्त / निडर रूप से करता है, या करने का प्रयत्न करता है, या उसके किये जाने का दुष्प्रेरण करता है तो ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से यह कारण बताने की अपेक्षा कर सकेगा कि क्यों न उसे तीन वर्ष से अनाधिक ऐसी कालावधि के लिए, जैसा मजिस्ट्रेट निर्देशित करें, अपने सद्व्यवहार हेतु प्रतिभूतिओं सहित बंध-पत्र (Bond with surities) निष्पादित करने के लिए आदेशित किया जाए। (ख) उपधारा (क) के अधीन कार्यवाही में दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंध का लागू होना-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का अधिनियम संख्याक - 2) के उपबंध जहाँ तक वे लागू होते हैं उपधारा (क) के अधीन किन्हीं भी कार्यवाहियों को उसी प्रकार लागू होंगे, मानो कि उसमें निर्देशित बंध-पत्र उस संहिता की धारा 110 के अधीन निष्पादित किए जाने के लिए अपेक्षित बंध-पत्र है। धारा 55- 'च'- सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान या मद्यपान कर उत्पात के लिए शास्ति (क) सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान के लिए शास्ति- जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्नान घाट, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन तथा आम रास्ता आदि में मदिरा पान करते हुए या नशे आदि में चूर पाया जाता है तो उसे जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के लिए एक हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु 5 (पाँच) हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा अपराध के पुनरावृत्त किए जाने की दशा में, जुर्माने से जो 5 (पाँच) हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो 10 (दस) हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा। (ख) सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान कर उत्पात करने के लिए शास्ति- जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्नान घाट, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, आम रास्ता आदि में मदिरा पान करने के पश्चात उत्पात करते हुए पाया जाता है तो उसे जुर्माना से, जो दस हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की धारा 56 (केमिस्ट की दुकान आदि में उपभोग के लिए शास्ति / दण्ड) में संशोधन :- अधिनियम की धारा 56 की उपधारा (1) में पाँच हजार रूपये शब्द समूह के स्थान में दस हजार रूपये शब्द समूह और अधिनियम की धारा 56 की उपधारा (2) में एक हजार रूपये शब्द समूहों के स्थान में पाँच हजार रूपये समूह प्रतिस्थापित किये जायेंगे। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा - 57 (अनुज्ञप्तिधारी या उसके सेवक के कतिपय कृत्यों के लिए दण्ड) में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :- अधिनियम की विद्यमान धारा 57 के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता हैझारखण्ड विधान सभा की त्रैमासिक पत्रिका "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 10. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा-58 (किसी व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति के लिए आयात निर्यात, परिवहन, विनिर्माण, विक्रय या कब्जा) के अन्त में धारा 58 (3) का अन्तःस्थापनः- अधिनियम की धारा 58 के अन्त में धारा 58 (3) के रूप में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : धारा - 58 ( 3 ) " परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 11. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा-59 (अनुज्ञप्तिधारी का उनके सेवकों के कृत्यों के लिए आपराधिक दायित्व) में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :- अधिनियम की विद्यमान धारा-59 के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है :79 "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 12. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की धारा-62 (उन अपराधों के लिए शास्ति / दण्ड, जो अन्यथा दण्डनीय न हो) में संशोधनः- अधिनियम की धारा-62 में संशोधन निम्नवत किया जाता है जो कोई किसी भी ऐसे कार्य या जान बुझकर किसी ऐसे गतिविधि का, जोकि इस अधिनियम के उसके अधीन बनाये गये किसी भी नियम जारी की गई किसी भी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के उपबंधों में से किसी भी उपबंध के उल्लंघन में किया गया हो, और जिसके लिए इस अधिनियम में अन्यथा उपबंध न हो, दोषी हो, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 13. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा-64 (अपराध करने के प्रयत्न के लिए शास्ति) के अन्त में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापनःअधिनियम की संशाधित धारा 64 के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है, यथा"परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। 14. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की वर्तमान धारा-66 ( अधिहरण योग्य वस्तुएं) में संशोधन :- अधिनियम की धारा-66 में संशोधन निम्नवत किया जाता है, यथाधारा-66 (2) में अंकित वाक्य "shall likewise be liable to confiscation" के उपरान्त एवं अंकित Proviso के पहले निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगासाथ ही यह कि उपरोक्त वर्णित वाहन, कार्ट, जलयान, रॉफ्ट अथवा परिवहन के अन्य साधन को बॉण्ड अथवा स्यूरिटी पर विमुक्त नहीं किया जाएगा। ये सभी, न्यायालय के आदेश के उपरान्त ही विमुक्त किये जायेंगे। 15. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की विद्यमान धारा-68 में संशोधन अधिनियम की धारा 68 में संशोधन निम्नवत किया जाता है, यथा" 68. अपराधों का प्रशमन करने और अधिहरण योग्य सम्पत्ति को निर्मुक्त करने की शक्ति(1) आयुक्त, समाहर्ता या राज्य सरकार द्वारा इसके लिए शक्ति प्रदत्त उत्पाद पदाधिकारी जो उत्पाद अधीक्षक की पंक्ति के नीचे का न हो(क) धारा 89 के खण्ड (ञ) के अधीन बने किन्हीं नियमों द्वारा अधिरोपित किसी प्रतिबन्ध के अधीन रहते हुए किसी व्यक्ति से, जिसकी अनुज्ञप्ति, पारक या पास धारा-42 के खण्ड (क), खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन विखण्डित या निलम्बित किये जाने योग्य हो, या जिसपर इस अधिनियम की धारा-47, 49, 52, 52-'क', 53, 55, 56, 58 और 61 से भिन्न किसी अन्य धारा के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के करने का युक्तियुक्त रूप से संदेह किया जाता हो, यथास्थिति विखण्डित या निलंबित करने के बदले या ऐसे अपराध के प्रशमन स्वरूप, यथा विहित न्यूनतम रकम के अध्यधीन, कम गम्भीर अनियमिततओं के लिए 10 (दस) हजार रूपये तक एवं वैसी गम्भीर अनियमिततओं के लिए जिससे राजस्व की क्षति पहुँची हो, प्रथम बार में वास्तविक राजस्व क्षति का दो गुणा या पाँच लाख रूपये जो अधिक हो एवं द्वितीय बार उल्लंघन में वास्तविक राजस्व क्षति का चार गुणा एवं दस लाख रूपये जो अधिक हो, स्वीकार कर सकेंगा अधिनियम या नियम के प्रावधानों के संबंध में तीसरे बार उल्लंघन या अपराध के लिए जिससे राजस्व की क्षति हुई हो अनुज्ञप्ति, पारक एवं पास विखण्डित कर दी जाएगी। (ख) किसी भी मामले में, जिसमें कोई सम्पत्ति धारा-66 अधीन अधिहरण योग्य समझी जाकर अभिगृहीत की गई हो, दण्डाधिकारी द्वारा धारा 67 (1) के तहत आदेश पारित किये जाने के पूर्व तक उतनी रकम के भुगतान पर जो समाहर्ता या वैसे उत्पाद पदाधिकारी द्वारा प्राक्कलित मूल्य से अधिक न हो, उस सम्पत्ति को निर्मुक्त कर सकेगा। परन्तु यह भी कि जहाँ इस प्रकार अभिग्रहीत की गई सम्पत्ति, इस अधिनियम के उल्लंघन में आयातित, निर्यातित, परवहित या विनिर्मित की गई मदिरा हो, तो वैसी मदिरा निर्मुक्त नहीं की जायेगी परन्तु इसका निष्पादन उस तरीके से किया जायेगा जैसा कि विहित किया जाय। (2) जब उपधारा (1) के खण्ड (क) में उल्लिखित राशियों का शोधन किया जा चुका हो तो अभियुक्त व्यक्ति यदि वह हिरासत में हो तो रिहा कर दिया जायेगा और मदिरा को छोड़कर अभिग्रहित की गई सम्पत्ति (यदि कोई हो) निर्मुक्त कर दी जायेगी और ऐसे व्यक्ति या ऐसी सम्पत्ति के विरूद्ध आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। 16. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की धारा - 78 (अपराधों का अन्वेषण करने वाले उत्पाद पदाधिकारियों की शक्तियाँ और कर्त्तव्य) के साथ नई उपधारा-78 (5) का अन्तःस्थापन : धारा 78 (5). अधिकारी आदि को बाधा पहुंचाना या उस पर हमला करने के लिए दण्ड- जो कोई (i) किसी उत्पाद पदाधिकारी या इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी व्यक्ति, या (ii) इत्तिला देने वाले किसी व्यक्ति या किसी ऐसे अधिकारी या व्यक्ति की, जबकि वह इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, सहायता करने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर हमला करेगा या उसे बाधा पहुंचाएगा, वह ऐसे कारावास से जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। 17. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, 1915 की धारा-79 (4) में संशोधन : जब कभी कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन बिना वारंट के, धारा 47 के अंतर्गत विधि विरूद्ध तरीके से संग्रहित की गई 20 (बीस) लीटर से कम मदिरा की जप्ति की स्थिति में धारा 49, 52, 52- 'क', 53, 55, 56 या धारा 58 को छोड़कर अधिनियम के अधीन किसी अन्य धारा के तहत दण्डनीय किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, और वह जमानत देने को तैयार हो, तो वह जमानत पर, अथवा उसे अपने स्वयं के बंध-पत्र पर रिहा करने वाले अधिकारी के विवेकानुसार मुक्त किया जायेगा। धारा 47 के तहत अवैध मदिरा की जप्ति 20 (बीस) लीटर से कम होने पर भी आरोपी किसी भी अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। विधि विरूद्ध तरीके से संग्रहित 20 (बीस) लीटर से अधिक मदिरा की जप्ति की स्थिति में धारा-47. धारा-49, धारा-52, 52- 'क', धारा-53, धारा-55, धारा 56 या धारा-58 के तहत अपराध गैर-जमानतीय होंगे और इस संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 के अधिनियम 2) के प्रावधान ऐसे अपराधों पर भी लागू होंगे। यह विधेयक झारखण्ड उत्पाद (संशोधन) विधेयक, 2022 दिनांक 04 अगस्त, 2022 को झारखण्ड विधान सभा में उद्भूत हुआ और दिनांक 04 अगस्त, 2022 को सभा द्वारा पारित हुआ।
तीन में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :अधिनियम की विद्यमान धारा-तिरेपन के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा - चौवन में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापनःअधिनियम की विद्यमान धारा-चौवन के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। सात. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा-पचपन के अंत में नई धारा पचपन- 'क' पचपन- 'ख', पचपन-'ग', पचपन-'घ', पचपन-ड.' एवं पचपन-'च' का अन्तःस्थापन : धारा पचपन- 'क'- किसी स्थान को सामान्य मदिरा पान गृह के रूप में खोलने, रखने या उपयोग में लाने के लिए या किसी भी ऐसे स्थान के देख-रेख उसका प्रबंध या नियंत्रण रखने के लिए या ऐसे किसी स्थान के कारोबार का संचालन करने की सहायता करने के लिए शास्ति- जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई किसी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, परमिट या पास के उल्लंघन में किसी स्थान को सामान्य मदिरा पान - गृह के रूप में खोलेगा, रखेगा या उपयोग में लायेगा, या सामान्य मदिरा पान गृह के रूप में खोले गये, रखे गये या उपयोग में लाये गये किसी स्थान की देख-रेख या उसका प्रबंध' या नियंत्रण रखेगा या ऐसे स्थान का कारोबार का संचालन करने में किसी भी रीति में सहायता करेगा. "वह ऐसे कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से जो पाँच हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा और पश्चातवर्ती अपराध कारित करने के लिए वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पचास हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। धारा पचपन - 'ख' मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में मत्त पाये जाने के लिए या मदिरा पान करने के प्रयोजन के लिए मदिरा के साथ पाये जाने के लिए शास्तिजो कोई इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम, जारी की गई अधिसूचना, या दिये गये किसी आदेश के या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति परमिट या पास के उल्लंघन में, मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में मत्त पाया जाये या मदिरा पान करता हुआ पाया जायेगा या मदिरा पान करने के प्रयोजन से मदिरा के साथ वहाँ उपस्थित पाया जायेगा वह ऐसे जुर्माने से, जो पाँच हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा और किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में जो किसी मदिरा पान हेतु स्वीकृत अनुज्ञप्ति परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य मदिरा पान-गृह में उस समय पाया जाएगा जबकि वहाँ मदिरा पान चल रहा हो, जबतक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि वह वहाँ मदिरा पान करने के प्रयोजन से उपस्थित था। धारा पचपन-'ग- किसी स्थान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा अपराध, जो धारा सैंतालीस, धारा उनचास, धारा पचपन, धारा पचपन- 'क' एवं पचपन- 'ख' के अधीन दंडनीय है, किये जाने हेतु उपयोग में लाये जाने देने के लिए शास्ति- जो कोई किसी स्थान का स्वामी होते हुए या उसका उपयोग या देख-रेख या प्रबंध या नियंत्रण रखते हुए, उस स्थान को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा अपराध, जो कि धारा सैंतालीस धारा उनचास, या धारा पचपन या धारा पचपन- 'क' एवं पचपन- 'ख' के अधीन दंडनीय है, किये जाने हेतु जानते हुए उपयोग में लाये जाने देगा, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो दस हजार रूपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो बीस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। पश्चातवर्ती अपराध के लिए वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो रूशून्य बीस हज़ार/- से कम का नहीं होगा किन्तु जो रूशून्य पचास हज़ार/- तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। धारा पचपन- 'घ- धारा सैंतालीस या पचपन के अधीन दंडनीय अपराधों को करने से अलग रहने के लिए बंध - पत्र का निष्पादन जब कभी कोई व्यक्ति धारा-सैंतालीस या धारा-पचपन के अधीन दंडनीय किसी अपराध का दोष-सिद्धि ठहराया जाता है एवं दोष-सिद्धि ठहराने वाले मजिस्ट्रेट का यह मत है कि ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा करना आवश्यक है कि वह उन धाराओं के अधीन दंडनीय अपराधों को करने से अलग रहने के लिए एक बंध-पत्र निष्पादित करे तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति पर दंडादेश पारित करते समय यह आदेश कर सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनाधिक की ऐसी कालावधि के दौरान जैसा वह निर्दिष्ट करे, ऐसे अपराध को करने से प्रविरत रहने के लिए उसकी आय के अनुपात के अनुसार राशि का प्रतिभूतिओं सहित या रहित एक बंध-पत्र निष्पादित करें। बन्ध-पत्र का प्रारूप और ऐसे बंध-पत्र से संबंद्ध समस्त विषयों को दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंधों का लागू होना- बंध-पत्र द्वितीय अनुसूची में अन्तर्विष्ट प्रारूप में होगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के उपबंध जहाँ तक वे लागू होते है, ऐसे बंध-पत्र से संबंद्ध समस्त विषयों को उसी प्रकार लागू होंगे, मानो वह शान्ति बनाये रखने के लिए उस संहिता कि धारा एक सौ छः के अधीन निष्पादित किये जाने के लिए आदेशित बंध-पत्र है। परिस्थितियाँ जिनमें बंध-पत्र शून्य होगा- यदि अपील में या अन्यथा दोष-सिद्धी अपास्त कर दी जाए, तो इस प्रकार निष्पादित बंध-पत्र शून्य हो जाएगा। अपील न्यायालय या उच्च न्यायालय की आदेश करने की शक्ति- इस धारा के अधीन, किसी अपील न्यायालय द्वारा या उच्च न्यायालय द्वारा, जबकि वह पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा है, भी आदेश किया जा सकेगा। धारा पचपन- 'ड. - मजिस्ट्रेट का किसी व्यक्ति को यह कारण बताने के लिए अपेक्षित करना कि सद्व्यवहार के लिए बंध-पत्र निष्पादित करने के लिए क्यों न आदेशित किया जाए जब कभी राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किये गये प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को यह सूचना प्राप्त होती है कि उसकी अधिकारिता के स्थानीय सीमाओं के भीतर कोई व्यक्ति इस अधिनियम की धारा सैंतालीस या धारा पचपन के अधीन दण्डनीय अपराध को अभ्यासिक / भय मुक्त / निडर रूप से करता है, या करने का प्रयत्न करता है, या उसके किये जाने का दुष्प्रेरण करता है तो ऐसा मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से यह कारण बताने की अपेक्षा कर सकेगा कि क्यों न उसे तीन वर्ष से अनाधिक ऐसी कालावधि के लिए, जैसा मजिस्ट्रेट निर्देशित करें, अपने सद्व्यवहार हेतु प्रतिभूतिओं सहित बंध-पत्र निष्पादित करने के लिए आदेशित किया जाए। उपधारा के अधीन कार्यवाही में दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंध का लागू होना-दण्ड प्रक्रिया संहिता, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के उपबंध जहाँ तक वे लागू होते हैं उपधारा के अधीन किन्हीं भी कार्यवाहियों को उसी प्रकार लागू होंगे, मानो कि उसमें निर्देशित बंध-पत्र उस संहिता की धारा एक सौ दस के अधीन निष्पादित किए जाने के लिए अपेक्षित बंध-पत्र है। धारा पचपन- 'च'- सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान या मद्यपान कर उत्पात के लिए शास्ति सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान के लिए शास्ति- जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्नान घाट, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन तथा आम रास्ता आदि में मदिरा पान करते हुए या नशे आदि में चूर पाया जाता है तो उसे जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के लिए एक हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु पाँच हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा अपराध के पुनरावृत्त किए जाने की दशा में, जुर्माने से जो पाँच हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा। सार्वजनिक स्थानों पर मद्यपान कर उत्पात करने के लिए शास्ति- जो कोई मद्यपान हेतु अनुज्ञप्त परिसर अनुज्ञप्त परिसर के अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्नान घाट, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, आम रास्ता आदि में मदिरा पान करने के पश्चात उत्पात करते हुए पाया जाता है तो उसे जुर्माना से, जो दस हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु जो पच्चीस हजार रूपये तक का हो सकेगा तथा तीन मास के कारावास से दण्डित किया जायेगा। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा छप्पन में संशोधन :- अधिनियम की धारा छप्पन की उपधारा में पाँच हजार रूपये शब्द समूह के स्थान में दस हजार रूपये शब्द समूह और अधिनियम की धारा छप्पन की उपधारा में एक हजार रूपये शब्द समूहों के स्थान में पाँच हजार रूपये समूह प्रतिस्थापित किये जायेंगे। झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा - सत्तावन में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :- अधिनियम की विद्यमान धारा सत्तावन के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता हैझारखण्ड विधान सभा की त्रैमासिक पत्रिका "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। दस. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा-अट्ठावन के अन्त में धारा अट्ठावन का अन्तःस्थापनः- अधिनियम की धारा अट्ठावन के अन्त में धारा अट्ठावन के रूप में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है : धारा - अट्ठावन " परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य किसी व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। ग्यारह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा-उनसठ में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापन :- अधिनियम की विद्यमान धारा-उनसठ के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है :उन्यासी "परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। बारह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा-बासठ में संशोधनः- अधिनियम की धारा-बासठ में संशोधन निम्नवत किया जाता है जो कोई किसी भी ऐसे कार्य या जान बुझकर किसी ऐसे गतिविधि का, जोकि इस अधिनियम के उसके अधीन बनाये गये किसी भी नियम जारी की गई किसी भी अधिसूचना या दिये गये किसी आदेश के उपबंधों में से किसी भी उपबंध के उल्लंघन में किया गया हो, और जिसके लिए इस अधिनियम में अन्यथा उपबंध न हो, दोषी हो, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है, तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। तेरह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा-चौंसठ के अन्त में निम्न प्रावधान का अन्तःस्थापनःअधिनियम की संशाधित धारा चौंसठ के अन्त में निम्न प्रावधान अन्तःस्थापित किया जाता है, यथा"परन्तु राज्य शासन के नियंत्रणाधीन निगम, द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी एवं नियुक्त कर्मचारी, अवैधानिक कृत्य के लिए उत्तरदायी होंगे। उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिसपर अपराध अधिरोपित किया गया हो, परंतु यह भी कि अनुसंधान के दौरान अन्य कोई व्यक्ति / लोक सेवक, जिनके अवैधानिक कृत्य का मामला संज्ञान में आता है तो उनके मामले में सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत आरोप अधिरोपित किया जा सकेगा। चौदह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की वर्तमान धारा-छयासठ में संशोधन :- अधिनियम की धारा-छयासठ में संशोधन निम्नवत किया जाता है, यथाधारा-छयासठ में अंकित वाक्य "shall likewise be liable to confiscation" के उपरान्त एवं अंकित Proviso के पहले निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगासाथ ही यह कि उपरोक्त वर्णित वाहन, कार्ट, जलयान, रॉफ्ट अथवा परिवहन के अन्य साधन को बॉण्ड अथवा स्यूरिटी पर विमुक्त नहीं किया जाएगा। ये सभी, न्यायालय के आदेश के उपरान्त ही विमुक्त किये जायेंगे। पंद्रह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की विद्यमान धारा-अड़सठ में संशोधन अधिनियम की धारा अड़सठ में संशोधन निम्नवत किया जाता है, यथा" अड़सठ. अपराधों का प्रशमन करने और अधिहरण योग्य सम्पत्ति को निर्मुक्त करने की शक्ति आयुक्त, समाहर्ता या राज्य सरकार द्वारा इसके लिए शक्ति प्रदत्त उत्पाद पदाधिकारी जो उत्पाद अधीक्षक की पंक्ति के नीचे का न हो धारा नवासी के खण्ड के अधीन बने किन्हीं नियमों द्वारा अधिरोपित किसी प्रतिबन्ध के अधीन रहते हुए किसी व्यक्ति से, जिसकी अनुज्ञप्ति, पारक या पास धारा-बयालीस के खण्ड , खण्ड या खण्ड के अधीन विखण्डित या निलम्बित किये जाने योग्य हो, या जिसपर इस अधिनियम की धारा-सैंतालीस, उनचास, बावन, बावन-'क', तिरेपन, पचपन, छप्पन, अट्ठावन और इकसठ से भिन्न किसी अन्य धारा के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के करने का युक्तियुक्त रूप से संदेह किया जाता हो, यथास्थिति विखण्डित या निलंबित करने के बदले या ऐसे अपराध के प्रशमन स्वरूप, यथा विहित न्यूनतम रकम के अध्यधीन, कम गम्भीर अनियमिततओं के लिए दस हजार रूपये तक एवं वैसी गम्भीर अनियमिततओं के लिए जिससे राजस्व की क्षति पहुँची हो, प्रथम बार में वास्तविक राजस्व क्षति का दो गुणा या पाँच लाख रूपये जो अधिक हो एवं द्वितीय बार उल्लंघन में वास्तविक राजस्व क्षति का चार गुणा एवं दस लाख रूपये जो अधिक हो, स्वीकार कर सकेंगा अधिनियम या नियम के प्रावधानों के संबंध में तीसरे बार उल्लंघन या अपराध के लिए जिससे राजस्व की क्षति हुई हो अनुज्ञप्ति, पारक एवं पास विखण्डित कर दी जाएगी। किसी भी मामले में, जिसमें कोई सम्पत्ति धारा-छयासठ अधीन अधिहरण योग्य समझी जाकर अभिगृहीत की गई हो, दण्डाधिकारी द्वारा धारा सरसठ के तहत आदेश पारित किये जाने के पूर्व तक उतनी रकम के भुगतान पर जो समाहर्ता या वैसे उत्पाद पदाधिकारी द्वारा प्राक्कलित मूल्य से अधिक न हो, उस सम्पत्ति को निर्मुक्त कर सकेगा। परन्तु यह भी कि जहाँ इस प्रकार अभिग्रहीत की गई सम्पत्ति, इस अधिनियम के उल्लंघन में आयातित, निर्यातित, परवहित या विनिर्मित की गई मदिरा हो, तो वैसी मदिरा निर्मुक्त नहीं की जायेगी परन्तु इसका निष्पादन उस तरीके से किया जायेगा जैसा कि विहित किया जाय। जब उपधारा के खण्ड में उल्लिखित राशियों का शोधन किया जा चुका हो तो अभियुक्त व्यक्ति यदि वह हिरासत में हो तो रिहा कर दिया जायेगा और मदिरा को छोड़कर अभिग्रहित की गई सम्पत्ति निर्मुक्त कर दी जायेगी और ऐसे व्यक्ति या ऐसी सम्पत्ति के विरूद्ध आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सोलह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा - अठहत्तर के साथ नई उपधारा-अठहत्तर का अन्तःस्थापन : धारा अठहत्तर . अधिकारी आदि को बाधा पहुंचाना या उस पर हमला करने के लिए दण्ड- जो कोई किसी उत्पाद पदाधिकारी या इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी व्यक्ति, या इत्तिला देने वाले किसी व्यक्ति या किसी ऐसे अधिकारी या व्यक्ति की, जबकि वह इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो, सहायता करने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर हमला करेगा या उसे बाधा पहुंचाएगा, वह ऐसे कारावास से जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जायेगा। सत्रह. झारखण्ड उत्पाद अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ पंद्रह की धारा-उन्यासी में संशोधन : जब कभी कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन बिना वारंट के, धारा सैंतालीस के अंतर्गत विधि विरूद्ध तरीके से संग्रहित की गई बीस लीटर से कम मदिरा की जप्ति की स्थिति में धारा उनचास, बावन, बावन- 'क', तिरेपन, पचपन, छप्पन या धारा अट्ठावन को छोड़कर अधिनियम के अधीन किसी अन्य धारा के तहत दण्डनीय किसी भी अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, और वह जमानत देने को तैयार हो, तो वह जमानत पर, अथवा उसे अपने स्वयं के बंध-पत्र पर रिहा करने वाले अधिकारी के विवेकानुसार मुक्त किया जायेगा। धारा सैंतालीस के तहत अवैध मदिरा की जप्ति बीस लीटर से कम होने पर भी आरोपी किसी भी अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। विधि विरूद्ध तरीके से संग्रहित बीस लीटर से अधिक मदिरा की जप्ति की स्थिति में धारा-सैंतालीस. धारा-उनचास, धारा-बावन, बावन- 'क', धारा-तिरेपन, धारा-पचपन, धारा छप्पन या धारा-अट्ठावन के तहत अपराध गैर-जमानतीय होंगे और इस संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के प्रावधान ऐसे अपराधों पर भी लागू होंगे। यह विधेयक झारखण्ड उत्पाद विधेयक, दो हज़ार बाईस दिनांक चार अगस्त, दो हज़ार बाईस को झारखण्ड विधान सभा में उद्भूत हुआ और दिनांक चार अगस्त, दो हज़ार बाईस को सभा द्वारा पारित हुआ।
टोंक जिले के पीपलू थाना क्षेत्र में 8 महीने पहले एक मकान में करीब 7 लाख रुपए की चोरी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले में 3 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ में जुटी है, जिसमें चोरी की अन्य वारदातों का खुलासा होने की संभावना है। आरोपी पीपलू थाने के टॉप-10 आरोपियों में शामिल है। थाना प्रभारी प्रहलाद सहाय ने बताया कि पिछले साल जुलाई महीने में कल्याणपुरा गांव के रमेश मीणा के मकान से करीब 7 लाख रुपए की नकदी और जेवर की चोरी हुई थी। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। साइबर सेल और मुखबिर की मदद से की गई जांच में सामने आया कि 4 लोगों ने मिलकर चोरी की थी। पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए जयपुर और टोंक में तलाश की थी। पुलिस ने 3 आरोपियों को पहले गिरफ्तार कर लिया था, जबकि 1 आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस ने बुधवार को कानाराम उर्फ तोल्या मोग्या पुत्र रामेश्वर मोग्या निवासी श्रीकिशनपुरा हाल निवासी केरिया नाडा जोबनेर (जयपुर) को गिरफ्तार किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
टोंक जिले के पीपलू थाना क्षेत्र में आठ महीने पहले एक मकान में करीब सात लाख रुपए की चोरी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले में तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ में जुटी है, जिसमें चोरी की अन्य वारदातों का खुलासा होने की संभावना है। आरोपी पीपलू थाने के टॉप-दस आरोपियों में शामिल है। थाना प्रभारी प्रहलाद सहाय ने बताया कि पिछले साल जुलाई महीने में कल्याणपुरा गांव के रमेश मीणा के मकान से करीब सात लाख रुपए की नकदी और जेवर की चोरी हुई थी। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। साइबर सेल और मुखबिर की मदद से की गई जांच में सामने आया कि चार लोगों ने मिलकर चोरी की थी। पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए जयपुर और टोंक में तलाश की थी। पुलिस ने तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस ने बुधवार को कानाराम उर्फ तोल्या मोग्या पुत्र रामेश्वर मोग्या निवासी श्रीकिशनपुरा हाल निवासी केरिया नाडा जोबनेर को गिरफ्तार किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
स्टिव्हन्स के मतानुसार ऊपरका चलन ३३०; नीचेका चढन ५००; अन्वरकी ओरका चलन ५५° और बाहरी ओरका चलन ५०० होता है । चित्र नं. २८ ट्रासिटर (सिद्धनमन) नेत्रके तिनका नापनः-- इस कार्यका नापन हर्शबर्गकी कसौटी, ढक्कन कसोटी, हकक्षेत्रनापन यंत्र ओर प्रीस्टले स्मिथ का फीना इसकी सहायनासे होसकता है। हर्शवर्गकी कसौटीः -सामने एक फुट फासलेपर रखी हुई मोमबत्तीकी ज्योतिकी तारकापिधान पर परावृत्त होनेवाली प्रतिमा स्थानसे नेत्रके तिरछेपनका प्रमाण नापा जा सकता है । प्रयोगः - रोगीको दोनों नेत्रोंसे सामनेकी मोमबत्तीकी ज्यांतिकी तरफ देखनेको कहना । नैसगिक नेत्रीमं ज्योतिकी प्रतिमायें तारकाविधानके केन्द्र स्थानमें दिखाई पड़ती हे । यदि कनीनिकाका आकार ३५ मि. मि. हं, और प्रतिमा कनीनिकाके केन्द्र और उसकी किनारक बीचमं दिखाई देती हो, तो नेत्रके तिरछेपनको मात्रा १० अंगसे कम है, ऐसा समझना चाहिये । प्रतिमा कनीनिक के किनारके पास हो, तो तिरछेपनकी मात्रा १२ ते १५० इतनी समझनी चाहिये । यदि प्रतिमा कrtfretat किनार और शुक्लकृष्ण सधीके बीचमें हो, तो तिरछेपनकी मात्रा २५" होती है । ज्योतिकी प्रतिमा शुक्लकृष्ण संधिके पास हो, तो सानुपात ४५० से ६०९, और शुक्लपटलपर हो, तो ६०°१८०० इतना समझते हैं । रक्षेत्र नापन यंत्रसे नापनाः--नेत्रके तिरछेपन का नापन वृक्षेत्रनापन यंत्रसे भी कर सकते हैं। लेकिन इस यंत्रका उपयोग बिलकुल छोटे बच्चोंके लिये बराबर नहीं हो सकता। इसके लिये दुक्क्षेत्रनीपन यंत्र और एक मोमबत्तीकी आवश्यकता होती है। प्रयोगः• रोगीको दुहक्षेत्रनापन यंत्रके सामने कुर्सीपर इस तरहसे बिठाना चाहिये कि उसका
स्टिव्हन्स के मतानुसार ऊपरका चलन तीन सौ तीस; नीचेका चढन पाँच सौ; अन्वरकी ओरका चलन पचपन° और बाहरी ओरका चलन पाँच सौ होता है । चित्र नं. अट्ठाईस ट्रासिटर नेत्रके तिनका नापनः-- इस कार्यका नापन हर्शबर्गकी कसौटी, ढक्कन कसोटी, हकक्षेत्रनापन यंत्र ओर प्रीस्टले स्मिथ का फीना इसकी सहायनासे होसकता है। हर्शवर्गकी कसौटीः -सामने एक फुट फासलेपर रखी हुई मोमबत्तीकी ज्योतिकी तारकापिधान पर परावृत्त होनेवाली प्रतिमा स्थानसे नेत्रके तिरछेपनका प्रमाण नापा जा सकता है । प्रयोगः - रोगीको दोनों नेत्रोंसे सामनेकी मोमबत्तीकी ज्यांतिकी तरफ देखनेको कहना । नैसगिक नेत्रीमं ज्योतिकी प्रतिमायें तारकाविधानके केन्द्र स्थानमें दिखाई पड़ती हे । यदि कनीनिकाका आकार पैंतीस मि. मि. हं, और प्रतिमा कनीनिकाके केन्द्र और उसकी किनारक बीचमं दिखाई देती हो, तो नेत्रके तिरछेपनको मात्रा दस अंगसे कम है, ऐसा समझना चाहिये । प्रतिमा कनीनिक के किनारके पास हो, तो तिरछेपनकी मात्रा बारह ते एक सौ पचास इतनी समझनी चाहिये । यदि प्रतिमा कrtfretat किनार और शुक्लकृष्ण सधीके बीचमें हो, तो तिरछेपनकी मात्रा पच्चीस" होती है । ज्योतिकी प्रतिमा शुक्लकृष्ण संधिके पास हो, तो सानुपात चार सौ पचास से छः सौ नौ, और शुक्लपटलपर हो, तो साठ°एक हज़ार आठ सौ इतना समझते हैं । रक्षेत्र नापन यंत्रसे नापनाः--नेत्रके तिरछेपन का नापन वृक्षेत्रनापन यंत्रसे भी कर सकते हैं। लेकिन इस यंत्रका उपयोग बिलकुल छोटे बच्चोंके लिये बराबर नहीं हो सकता। इसके लिये दुक्क्षेत्रनीपन यंत्र और एक मोमबत्तीकी आवश्यकता होती है। प्रयोगः• रोगीको दुहक्षेत्रनापन यंत्रके सामने कुर्सीपर इस तरहसे बिठाना चाहिये कि उसका
तालेबान का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में राजनैतिक दलों की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे केवल मतभेद फैलाते हैं। तालेबान के एक मंत्री का कहना है कि देश में राजनैतिक दलों की कोई आवश्यकता नहीं है। अफ़ग़ानिस्तान की शफ़क़ना समाचार एजेन्सी के अनुसार तालेबान के उप न्यायमंत्री अब्दुल करीम हैदर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजनैतिक दल, देश के भीतर मतभेद फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि राजनैतिक दल लोगों को धर्म, जाति, भाषा, भौगोलिक दृष्टि तथा अन्य मुद्दों के आधार पर बांटकर मतभेदों को हवा देते हैं जिसके कारण देश को कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। तालेबान के मंत्री के अनुसार राजनैतिक दलों की उपयोगिता इसके अलावा कुछ और नहीं है। दूसरी ओर अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक दलों का कहना है कि तालेबान को देश के राजनैतिक दलों की गतिविधियों के बारे में कुछ कहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनको राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता हासिल नहीं है। उल्लेखनीय है कि विश्व के बहुत से देशों ने तालेबान से मांग की है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन करें जिसके बाद उनको मान्यता दी जा सकती है। तालेबान ने 15 अगस्त 2021 को अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था और वह इस देश पर अपना एकछत्र राज चाहता है जबकि विश्व समुदाय की इच्छा है कि अफ़ग़ानिस्तान में एसी सरकार का गठन किया जाए जिसमें इस देश के सभी वर्गों की भागीदारी होनी चाहिए। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
तालेबान का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में राजनैतिक दलों की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे केवल मतभेद फैलाते हैं। तालेबान के एक मंत्री का कहना है कि देश में राजनैतिक दलों की कोई आवश्यकता नहीं है। अफ़ग़ानिस्तान की शफ़क़ना समाचार एजेन्सी के अनुसार तालेबान के उप न्यायमंत्री अब्दुल करीम हैदर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजनैतिक दल, देश के भीतर मतभेद फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि राजनैतिक दल लोगों को धर्म, जाति, भाषा, भौगोलिक दृष्टि तथा अन्य मुद्दों के आधार पर बांटकर मतभेदों को हवा देते हैं जिसके कारण देश को कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। तालेबान के मंत्री के अनुसार राजनैतिक दलों की उपयोगिता इसके अलावा कुछ और नहीं है। दूसरी ओर अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक दलों का कहना है कि तालेबान को देश के राजनैतिक दलों की गतिविधियों के बारे में कुछ कहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनको राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता हासिल नहीं है। उल्लेखनीय है कि विश्व के बहुत से देशों ने तालेबान से मांग की है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन करें जिसके बाद उनको मान्यता दी जा सकती है। तालेबान ने पंद्रह अगस्त दो हज़ार इक्कीस को अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था और वह इस देश पर अपना एकछत्र राज चाहता है जबकि विश्व समुदाय की इच्छा है कि अफ़ग़ानिस्तान में एसी सरकार का गठन किया जाए जिसमें इस देश के सभी वर्गों की भागीदारी होनी चाहिए। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
दिया। राजासाहब शान्त पड़े हुए थे, परन्तु जहां वे पड़े थे, वहांसे नदीके घाटपर दृष्टि पूरी पूरी जारही थी । नदीमें जल अगाधभरा हुआ था। उसके उस पार भी एक बस्ती थी, और इसी पारकी तरह वहां भी मन्दिर था। उस मन्दिर और उसके घाटकी ओर स्वाभाविक ही राजासाहबकी नज़र गई। इतने में एक विचित्र ही दृश्य उनको उस पार दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि, नदीसे एक ब्राह्मण, स्नान करके, अपने उन्हीं भीगे वस्त्रोंसे, हाथमें जलसे भरा हुआ लोटा लिये, मन्दिरकी सीढ़ियोंसे ऊपर चढ़ रहा है। अभी बह चार सीढ़ियां भी ऊपर चढ़ने नहीं पाया था कि, नीचे की ओरसे नदीमें न जाने क्या कुछ धोनेवाला एक आदमी दौड़ता हुआ उस ब्राह्मणकी ओर गया; और उसके शरीरपर थूक दिया ! यह देखते ही राजा शिवाजीके क्रोध की सीमा न रही, उन्होंने सोचा कि यह है क्या बात ? हम जो कुछ देख रहे हैं, यह सच है अथवा स्वप्न ? उस वक्त वे पड़े हुए थे, सो तुरन्त उठ बैठे, और एकटक उसी ओर देखने लगे। देखते क्या है कि, वह ब्राह्मण क्रोध में आकर कुछ कह रहा है; और वह थू कनेवाला व्यक्ति भी कुछ क्रोधमें और कुछ हंसते हुए उसको चिढ़ा रहा है। इतनेमें ब्राह्मण फिर नीचे उतरकर नदीमें पैठता है, और अच्छी तरह स्नान करके और लोटा भरकर फिर चढ़ने लगता है। इधर वह दूसरा आदमी भी अपने धोनेके स्थान पर चला गया था। सो वहांस फिर न जाने क्या लेकर वह ब्राह्मणके पीछे फिर दौड़ता है; और
दिया। राजासाहब शान्त पड़े हुए थे, परन्तु जहां वे पड़े थे, वहांसे नदीके घाटपर दृष्टि पूरी पूरी जारही थी । नदीमें जल अगाधभरा हुआ था। उसके उस पार भी एक बस्ती थी, और इसी पारकी तरह वहां भी मन्दिर था। उस मन्दिर और उसके घाटकी ओर स्वाभाविक ही राजासाहबकी नज़र गई। इतने में एक विचित्र ही दृश्य उनको उस पार दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि, नदीसे एक ब्राह्मण, स्नान करके, अपने उन्हीं भीगे वस्त्रोंसे, हाथमें जलसे भरा हुआ लोटा लिये, मन्दिरकी सीढ़ियोंसे ऊपर चढ़ रहा है। अभी बह चार सीढ़ियां भी ऊपर चढ़ने नहीं पाया था कि, नीचे की ओरसे नदीमें न जाने क्या कुछ धोनेवाला एक आदमी दौड़ता हुआ उस ब्राह्मणकी ओर गया; और उसके शरीरपर थूक दिया ! यह देखते ही राजा शिवाजीके क्रोध की सीमा न रही, उन्होंने सोचा कि यह है क्या बात ? हम जो कुछ देख रहे हैं, यह सच है अथवा स्वप्न ? उस वक्त वे पड़े हुए थे, सो तुरन्त उठ बैठे, और एकटक उसी ओर देखने लगे। देखते क्या है कि, वह ब्राह्मण क्रोध में आकर कुछ कह रहा है; और वह थू कनेवाला व्यक्ति भी कुछ क्रोधमें और कुछ हंसते हुए उसको चिढ़ा रहा है। इतनेमें ब्राह्मण फिर नीचे उतरकर नदीमें पैठता है, और अच्छी तरह स्नान करके और लोटा भरकर फिर चढ़ने लगता है। इधर वह दूसरा आदमी भी अपने धोनेके स्थान पर चला गया था। सो वहांस फिर न जाने क्या लेकर वह ब्राह्मणके पीछे फिर दौड़ता है; और
कात्यायन के अतिरिक्त आचायें १. सुनाग, २. भारद्वाज, ३. क्रोष्टा, तथा ४. वाडव के भी कुछ वार्तिक मिलते हैं। कुछ विद्वानों द्वारा प्रयास किये जाने पर भी आज तक वात्तिकों के विषय में अपेक्षित ज्ञान सम्भव नहीं हो सका है। महाभाष्य ही इस विषय में आधार माना जाता है । ३. आचार्य पतञ्जलि पाणिनि तथा कात्यायन दोनों आचार्यों ने अपने मत सूत्र ( संक्षिप्त ) रूप में व्यक्त किये हैं। उनकी व्याख्या की आवश्यकता का अनुभव स्वयं पाणिनि ने भी किया था। इसीलिए सूत्रों को स्वोपज्ञ वृत्ति भी लिखी थी । किन्तु वह आजकल उपलब्ध नहीं है। सूत्रों की अपेक्षित व्याख्या प्रस्तुत करने का श्रेय आचार्य पतञ्जलि को है। इन्होंने अपने महाभाग्य में रोचक, सुबोध किन्तु गम्भीर शैली में व्याकरणशास्त्रीय पदार्थों का प्रतिपादन किया है । इन्होंने सूत्रों पर लिखे गये वार्तिकों को साथ में लेकर उन दोनों की विस्तृत समीक्षात्मक व्याख्या लिखी है। इन्होंने केवल व्याख्या ही नहीं लिखी अपितु अनेक स्थलों पर अपने स्वतन्त्र मत भी प्रस्तुत किये हैं जिन्हें 'इष्टि' कहा जाता है। इनके महाभाष्य में 'आह्निकों' के माध्यम से प्रकरण विभक्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उतना विषय एक दिन में पढ़ाया या पढ़ा जाता था । यह उस युग की अध्ययन की विशेषता प्रकट करता है । पतञ्जलि का देश ( स्थान ) - पतञ्जलि के जन्मस्थान के बारे में कुछ विवाद है । कुछ विद्वानों ने इन्हें १. ( क ) इह हि - सौनागाः पठन्ति - वुञरचाञकृतप्रसङ्गः । म० भ० ४।३।११५ । भारद्वाजीयाः पठन्ति - नित्यम कित्त्वमिडाद्योः, क्त्वाग्रहणमुत्त रार्थम् । म० भा० १॥२॥२२ । (ग) परिभाषान्तर मिति च कृत्वा क्रोष्ट्रीयाः पठन्ति - नियमादिकोगुणवृद्धी भवतो विप्रतिषेधेन । म० भा० १ । १ । ३ । (घ) अनिष्टिज्ञो वाडवः पठति । म० भा० ८/२/१०६ इस पर उद्योत - "सिद्धिं त्विदितोरिति वात्तिकं वाडवस्य । ( क ) उभयथा ह्याचार्येण शिष्याः प्रतिपादिताः... । महाभाष्यदीपिका ॥१॥४५ (ख) सूत्रार्थद्वयमपि चैतदाचार्येण शिष्याः प्रतिपादिताः । काशिका ५/१/40 (क) प्राप्तिज्ञो देवानां प्रियः न तु इष्टिज्ञः । म०मा० २१४/५६ (ख) पाणिनीयव्याख्यानभूतत्वेऽपि इष्टयादिकथनेन अन्वाख्यातृत्वाद् अस्य इतरभाष्यवैलक्षण्येन महत्त्वम् । कैयट १।१।१ कश्मीर का माना है । दूसरे इन्हें काशीक्षेत्र का सिद्ध करते हैं। इनका एक नाम 'गोनर्दीय' है । इस आधार पर इनका जन्मस्थान 'गोनर्द' था । यह पंजाब के किसी स्थान का नाम है, ऐसा कुछ लोग मानते हैं । दूसरे इसे उत्तरप्रदेश के 'गोंडा' को मानते हैं । पतञ्जलि का कालइनका काल अधिक विवादग्रस्त नहीं है क्योंकि इन्होंने वर्तमानकालि कता के उपपादन के प्रसंग में काण्ववंशीय राजा 'पुष्यमित्र' के यज्ञ कराने का उल्लेख किया है । ये स्वयं भी उसमें आचार्य थे । इसी प्रकार लङ्लकार के उपपादन में 'मिनाण्डर' नामक यवन के आक्रमण का उल्लेख किया है । वह अक्रामक शासक बाद में बौद्ध बनकर 'मिलिन्द' नाम से प्रसिद्ध हुआ । उसका शासन काल १४२ ई० पू० के आसपास माना जाता है । इन प्रमाणों के आधार पर इनका जन्मकाल ई० पू० द्वितीय शती माना जाना चाहिये । महाभाष्य की विशेषतासंस्कृत साहित्य में 'महाभाष्य' यह गौरवमय पद केवल इन्हीं के भाष्य को प्राप्त है। इसकी अनेक विशेषतायें हैं। इसमें रोचक प्रश्नोत्तर - शैली में व्याकरण जैसे नीरस विषय को भी आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है । भाषा और शैली सरल होने पर भी भाव समझना कठिन है । पूरा प्रसंग पढ़ जाने पर सामान्यतया आशय ज्ञात नहीं हो पाता है । चिन्तन और मनन की आवश्यकता पड़ती है । तभी वस्तुस्थिति का ज्ञान होता है। इन्होंने पाणिनि अथवा कात्यायन के मतों की व्याख्यामात्र नहीं की है। जहाँ भी किसी के मत में कोई भी अनुपपत्ति प्रतीत हुई उसकी समालोचना करने में संकोच नहीं किया है । इसी लिये अनेक वात्तिकों की अनावश्यकता तो सिद्ध की ही है कहीं-कहीं सूत्रों की भी आवश्यकता का निराकरण किया है। इन्होंने भाषा के विषय में लोकव्यवहार को सर्वाधिक मान्यता दी है । आज के भाषा वैज्ञानिक भी इसी को मानकर चल रहे हैं । इन्होंने अपने भी मत १. संस्कृतव्याकरण का इतिहास पृ० ३१५ २. संस्कृतशास्त्रों का इतिहास पृ० ४४९ ३. इह पुष्यमित्रं याजयामः । म०भा० ३।२।१२३ ४. अरुणयवनः साकेतम्, अरुणद् यवनो माध्यमिकाम् । म० भा० ३/२/१११ ५. संस्कृतशास्त्रों का इतिहास पृ० ४५० ६. द्र० अपादानसंज्ञा विषयक सूत्रों पर महाभाष्य । ७. लोकतोऽर्थं प्रयुक्त शब्दप्रयोगे शास्त्रेण धर्मनियमः । म०भा० पस्पशा ।
कात्यायन के अतिरिक्त आचायें एक. सुनाग, दो. भारद्वाज, तीन. क्रोष्टा, तथा चार. वाडव के भी कुछ वार्तिक मिलते हैं। कुछ विद्वानों द्वारा प्रयास किये जाने पर भी आज तक वात्तिकों के विषय में अपेक्षित ज्ञान सम्भव नहीं हो सका है। महाभाष्य ही इस विषय में आधार माना जाता है । तीन. आचार्य पतञ्जलि पाणिनि तथा कात्यायन दोनों आचार्यों ने अपने मत सूत्र रूप में व्यक्त किये हैं। उनकी व्याख्या की आवश्यकता का अनुभव स्वयं पाणिनि ने भी किया था। इसीलिए सूत्रों को स्वोपज्ञ वृत्ति भी लिखी थी । किन्तु वह आजकल उपलब्ध नहीं है। सूत्रों की अपेक्षित व्याख्या प्रस्तुत करने का श्रेय आचार्य पतञ्जलि को है। इन्होंने अपने महाभाग्य में रोचक, सुबोध किन्तु गम्भीर शैली में व्याकरणशास्त्रीय पदार्थों का प्रतिपादन किया है । इन्होंने सूत्रों पर लिखे गये वार्तिकों को साथ में लेकर उन दोनों की विस्तृत समीक्षात्मक व्याख्या लिखी है। इन्होंने केवल व्याख्या ही नहीं लिखी अपितु अनेक स्थलों पर अपने स्वतन्त्र मत भी प्रस्तुत किये हैं जिन्हें 'इष्टि' कहा जाता है। इनके महाभाष्य में 'आह्निकों' के माध्यम से प्रकरण विभक्त हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उतना विषय एक दिन में पढ़ाया या पढ़ा जाता था । यह उस युग की अध्ययन की विशेषता प्रकट करता है । पतञ्जलि का देश - पतञ्जलि के जन्मस्थान के बारे में कुछ विवाद है । कुछ विद्वानों ने इन्हें एक. इह हि - सौनागाः पठन्ति - वुञरचाञकृतप्रसङ्गः । मशून्य भशून्य चार।तीन।एक सौ पंद्रह । भारद्वाजीयाः पठन्ति - नित्यम कित्त्वमिडाद्योः, क्त्वाग्रहणमुत्त रार्थम् । मशून्य भाशून्य एक॥दो॥बाईस । परिभाषान्तर मिति च कृत्वा क्रोष्ट्रीयाः पठन्ति - नियमादिकोगुणवृद्धी भवतो विप्रतिषेधेन । मशून्य भाशून्य एक । एक । तीन । अनिष्टिज्ञो वाडवः पठति । मशून्य भाशून्य आठ फ़रवरी एक सौ छः इस पर उद्योत - "सिद्धिं त्विदितोरिति वात्तिकं वाडवस्य । उभयथा ह्याचार्येण शिष्याः प्रतिपादिताः... । महाभाष्यदीपिका ॥एक॥पैंतालीस सूत्रार्थद्वयमपि चैतदाचार्येण शिष्याः प्रतिपादिताः । काशिका पाँच जनवरी चालीस प्राप्तिज्ञो देवानां प्रियः न तु इष्टिज्ञः । मशून्यमाशून्य दो सौ चौदह/छप्पन पाणिनीयव्याख्यानभूतत्वेऽपि इष्टयादिकथनेन अन्वाख्यातृत्वाद् अस्य इतरभाष्यवैलक्षण्येन महत्त्वम् । कैयट एक।एक।एक कश्मीर का माना है । दूसरे इन्हें काशीक्षेत्र का सिद्ध करते हैं। इनका एक नाम 'गोनर्दीय' है । इस आधार पर इनका जन्मस्थान 'गोनर्द' था । यह पंजाब के किसी स्थान का नाम है, ऐसा कुछ लोग मानते हैं । दूसरे इसे उत्तरप्रदेश के 'गोंडा' को मानते हैं । पतञ्जलि का कालइनका काल अधिक विवादग्रस्त नहीं है क्योंकि इन्होंने वर्तमानकालि कता के उपपादन के प्रसंग में काण्ववंशीय राजा 'पुष्यमित्र' के यज्ञ कराने का उल्लेख किया है । ये स्वयं भी उसमें आचार्य थे । इसी प्रकार लङ्लकार के उपपादन में 'मिनाण्डर' नामक यवन के आक्रमण का उल्लेख किया है । वह अक्रामक शासक बाद में बौद्ध बनकर 'मिलिन्द' नाम से प्रसिद्ध हुआ । उसका शासन काल एक सौ बयालीस ईशून्य पूशून्य के आसपास माना जाता है । इन प्रमाणों के आधार पर इनका जन्मकाल ईशून्य पूशून्य द्वितीय शती माना जाना चाहिये । महाभाष्य की विशेषतासंस्कृत साहित्य में 'महाभाष्य' यह गौरवमय पद केवल इन्हीं के भाष्य को प्राप्त है। इसकी अनेक विशेषतायें हैं। इसमें रोचक प्रश्नोत्तर - शैली में व्याकरण जैसे नीरस विषय को भी आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है । भाषा और शैली सरल होने पर भी भाव समझना कठिन है । पूरा प्रसंग पढ़ जाने पर सामान्यतया आशय ज्ञात नहीं हो पाता है । चिन्तन और मनन की आवश्यकता पड़ती है । तभी वस्तुस्थिति का ज्ञान होता है। इन्होंने पाणिनि अथवा कात्यायन के मतों की व्याख्यामात्र नहीं की है। जहाँ भी किसी के मत में कोई भी अनुपपत्ति प्रतीत हुई उसकी समालोचना करने में संकोच नहीं किया है । इसी लिये अनेक वात्तिकों की अनावश्यकता तो सिद्ध की ही है कहीं-कहीं सूत्रों की भी आवश्यकता का निराकरण किया है। इन्होंने भाषा के विषय में लोकव्यवहार को सर्वाधिक मान्यता दी है । आज के भाषा वैज्ञानिक भी इसी को मानकर चल रहे हैं । इन्होंने अपने भी मत एक. संस्कृतव्याकरण का इतिहास पृशून्य तीन सौ पंद्रह दो. संस्कृतशास्त्रों का इतिहास पृशून्य चार सौ उनचास तीन. इह पुष्यमित्रं याजयामः । मशून्यभाशून्य तीन।दो।एक सौ तेईस चार. अरुणयवनः साकेतम्, अरुणद् यवनो माध्यमिकाम् । मशून्य भाशून्य तीन फ़रवरी एक सौ ग्यारह पाँच. संस्कृतशास्त्रों का इतिहास पृशून्य चार सौ पचास छः. द्रशून्य अपादानसंज्ञा विषयक सूत्रों पर महाभाष्य । सात. लोकतोऽर्थं प्रयुक्त शब्दप्रयोगे शास्त्रेण धर्मनियमः । मशून्यभाशून्य पस्पशा ।
कई बार हमारी जिंदगी में ना चाहते हुए भी निगेटिव एनर्जी (negative energy) आ जाती है. जिसकी वजह से हमारे घर की खुशहाली भंग हो जाती है और चारों ओर नकारात्मकता छाने लगती है. कई बार इसकी वजह हम खुद नहीं जान पाते. ऐसे में हर में मौजूद गृहदोष (negative energy works) के कारण ही ऐसा होता है.
कई बार हमारी जिंदगी में ना चाहते हुए भी निगेटिव एनर्जी आ जाती है. जिसकी वजह से हमारे घर की खुशहाली भंग हो जाती है और चारों ओर नकारात्मकता छाने लगती है. कई बार इसकी वजह हम खुद नहीं जान पाते. ऐसे में हर में मौजूद गृहदोष के कारण ही ऐसा होता है.
अगर आपके मन में भी है किसी के लिए प्यार है, तो ये तरीके आपके काफी काम आने वाले हैं। जिससे आप अपने क्रश को इंप्रेस और पार्टनर का गुस्सा भी पल में कर सकते हैं दूर। रिलेशनशिप (Relationship) काफी लंबे समय तक भी चलते हैं, और कई बार वो कुछ समय में ही खत्म हो जाते हैं। जिसकी वजह दोनों पार्टनर में से कोई भी नहीं जान पाता। इस बात का अहसास ही नहीं होता कि, गलती आखिर किसने की। रिश्तों में दूरी का असली कारण क्या रहा। लहसुन के फायदे : लहसुन को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है और यह आपके सर्दियों के आहार में एक सुपर फूड हो सकता है। वजन कम (Weight Loss) करने के लिए हम अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। जिम जाते हैं, डिटॉक्स ड्रिंक का सेवन करते हैं, योगा करते हैं। लेकिन कभी ये सोचते हैं कि हमारे घर की रसोई में मौजूद दाल भी हमारा वजन कम कर सकती हैं। आज हम आपको चने की दाल के गुणों के बारे में बताएंगे। जिसके जरिए आप वजन कर सकते हैं कम। सर्दियों के मौसम में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा इम्यूनिटी (Immunity) की जरूरत होती है। जिसके लिए हम तरह-तरह की ड्रिंक, फूड और अन्य चीजों का सेवन करते हैं। जिसके कारण हमारा शरीर कम इंफ्केटेड होता है और हम स्वस्थ रहते है। ऐसी ही Detox Drink के बारे में हम आपको बताएं जो आपको देगी एनर्जी। Best Parents बनना हर किसी को पसंद होता है। हर कोई चाहता है कि, वो अपने बच्चे को वो सारी खुशियां दे जो उसके लिए जरूरी है। लेकिन इसमें एक चीज हम भूल जाते हैं उनका स्पेस जो हम नहीं देते। जिसके कारण वो हमसे दूर होने लगते हैं। अगर आप नहीं चाहते बच्चों से दूर होना तो इन टिप्स को ध्यान में जरूर रखें।
अगर आपके मन में भी है किसी के लिए प्यार है, तो ये तरीके आपके काफी काम आने वाले हैं। जिससे आप अपने क्रश को इंप्रेस और पार्टनर का गुस्सा भी पल में कर सकते हैं दूर। रिलेशनशिप काफी लंबे समय तक भी चलते हैं, और कई बार वो कुछ समय में ही खत्म हो जाते हैं। जिसकी वजह दोनों पार्टनर में से कोई भी नहीं जान पाता। इस बात का अहसास ही नहीं होता कि, गलती आखिर किसने की। रिश्तों में दूरी का असली कारण क्या रहा। लहसुन के फायदे : लहसुन को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है और यह आपके सर्दियों के आहार में एक सुपर फूड हो सकता है। वजन कम करने के लिए हम अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। जिम जाते हैं, डिटॉक्स ड्रिंक का सेवन करते हैं, योगा करते हैं। लेकिन कभी ये सोचते हैं कि हमारे घर की रसोई में मौजूद दाल भी हमारा वजन कम कर सकती हैं। आज हम आपको चने की दाल के गुणों के बारे में बताएंगे। जिसके जरिए आप वजन कर सकते हैं कम। सर्दियों के मौसम में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा इम्यूनिटी की जरूरत होती है। जिसके लिए हम तरह-तरह की ड्रिंक, फूड और अन्य चीजों का सेवन करते हैं। जिसके कारण हमारा शरीर कम इंफ्केटेड होता है और हम स्वस्थ रहते है। ऐसी ही Detox Drink के बारे में हम आपको बताएं जो आपको देगी एनर्जी। Best Parents बनना हर किसी को पसंद होता है। हर कोई चाहता है कि, वो अपने बच्चे को वो सारी खुशियां दे जो उसके लिए जरूरी है। लेकिन इसमें एक चीज हम भूल जाते हैं उनका स्पेस जो हम नहीं देते। जिसके कारण वो हमसे दूर होने लगते हैं। अगर आप नहीं चाहते बच्चों से दूर होना तो इन टिप्स को ध्यान में जरूर रखें।
2005 में रिलीज होने के बादनिसान नोट ने पूरी दुनिया को साबित कर दिया है कि अधिक कॉम्पैक्ट और किफायती कार ढूंढना संभव नहीं है, कंपनी के मालिकों ने पहिया को फिर से शुरू करने का फैसला नहीं किया, लेकिन थोड़ा संशोधित और अद्यतन संस्करण दिखाने के लिए, जारी किए गए मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कहा। जापान, यूरोप और अमेरिका में कार पहले से ही निर्मित की जा रही है कतार में हैं। अमेरिका में, इसे वर्सा नोट कहा जाएगा। नेटवर्क न केवल फोटो को बाहरी रूप से दिखाई दिया हैनिसान, "सुंदर" निसान, लेकिन कार की आंतरिक व्यवस्था के कुछ विवरण भी। कार को बाहरी ठोसता, स्वच्छता में जोड़ा गया था, अब यह और अधिक हो गया है - 4100 मीटर लंबा और चौड़ाई में 16 9 5 मिमी, और अन्य चीजों के साथ, यह निसान नोट का हैचबैक बन गया है। समीक्षाओं का कहना है कि यदि आप कार के अंदर देखते हैं, तो यह संभावना नहीं है कि पहली नज़र में आप अपने पूर्ववर्ती की आंतरिक व्यवस्था से मतभेद पा सकते हैं, लेकिन मामूली बदलाव हैं। विशाल इंटीरियर में अब एक दो-रेडियो रिकॉर्डर है, जिसमें टच स्क्रीन (5-इंच) और रूसी में लिखने और बोलने में सक्षम एक नेविगेटर है। एक दस्ताने बॉक्स में prying आंखों से यूएसबी कनेक्टर छिपाने के विचार के लिए धन्यवाद, आप चोरों से जुड़े उपकरणों की सापेक्ष सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। अभी भी कुछ बिंदु हैं जिनके लिए आप कर सकते हैंनिर्माता की प्रशंसा करें। सबसे पहले, जलवायु नियंत्रण के एक सरल संस्करण के लिए। दूसरा, निसान का निलंबन अधिक आरामदायक हो गया, जिसने कार निसान नोट के संचालन को प्रभावित नहीं किया। इंजन और कॉन्फ़िगरेशन के प्रकार के आधार पर मशीन की विशेषताओं में कुछ बदलाव होता है। जापानी नोट तीन सिलेंडर के साथ आता है1.2-लीटर इंजन, जिसकी शक्ति, संशोधन के आधार पर 80 से 98 लीटर के बीच भिन्न हो सकती है। एक। रूस में, निसान नोट बेचते हैं, जिनकी समीक्षा नेटवर्क पर पाई जा सकती है, मुख्य रूप से 1.4-लीटर इंजन और एमसीपी के साथ। अमेरिकी कार के लिए, इसका इंजन 1.6 लीटर होगा, और हुड के नीचे 109 अश्वशक्ति होगी। इस कार में ट्रांसमिशन के दो संस्करण होंगे - एक एमसीपी या एक वैरिएटर। उपकरण के प्रकार के लिए, केवल चार हैं। वैसे, निसान को "शक्ति" के प्रकार से भी प्रतिष्ठित किया जाता है, क्योंकि इस मॉडल में गैसोलीन और डीजल इंजन दोनों हो सकते हैं। यह समझने के लिए कि यह किस तरह की मशीन है, कितना सुविधाजनक हैऔर यह सड़क पर आरामदायक है, आपको एक टेस्ट ड्राइव करना चाहिए। इस तरह की एक छोटी सी जांच सभी फायदों को देखने में मदद करेगी और कार निसान नोट की संभावित कमियों की पहचान करेगी। परीक्षण परिणामों पर प्रतिक्रिया और पूरी तरह से कार सकारात्मक मामलों में पाया जा सकता है। चालक पहिया के पीछे बैठे व्यक्ति के आदेशों को संभालने, हस्तक्षेप और त्वरित प्रतिक्रिया में अपनी सादगी के लिए कार की प्रशंसा करते हैं। शहर में ईंधन की खपत लगभग है9 लीटर, ऐसी मशीन का औसत है। आप किफायती और आरामदायक कार खरीदने के लिए चाहते हैं, तो यह कम से निसान नोट देखने के लिए लायक है। समीक्षा एक कॉम्पैक्ट के रूप में इस कार का वर्णन है, लेकिन एक ही समय आरामदायक और रेडी-टू-कार परिवर्तन पर। फिर भी, यह मूल रूप से शहर से बाहर परिवार यात्राएं, प्रकृति पर के लिए योजना बनाई गई थी, लेकिन फिर डेवलपर्स अपनी कल्पना करने के लिए स्वतंत्र लगाम देने के लिए और रियर सीटें, जिसके साथ आप ट्रंक में अंतरिक्ष को बढ़ा सकते हैं, कार मिनी बस के बनाने के लिए, अगर आप इन सीटों को जोड़ चलती बनाने का फैसला किया। इस प्रकार, यह कार के अंदर लंबे वस्तुओं, जो लगभग 2.5 मीटर तक पहुंच के परिवहन के लिए संभव है।
दो हज़ार पाँच में रिलीज होने के बादनिसान नोट ने पूरी दुनिया को साबित कर दिया है कि अधिक कॉम्पैक्ट और किफायती कार ढूंढना संभव नहीं है, कंपनी के मालिकों ने पहिया को फिर से शुरू करने का फैसला नहीं किया, लेकिन थोड़ा संशोधित और अद्यतन संस्करण दिखाने के लिए, जारी किए गए मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कहा। जापान, यूरोप और अमेरिका में कार पहले से ही निर्मित की जा रही है कतार में हैं। अमेरिका में, इसे वर्सा नोट कहा जाएगा। नेटवर्क न केवल फोटो को बाहरी रूप से दिखाई दिया हैनिसान, "सुंदर" निसान, लेकिन कार की आंतरिक व्यवस्था के कुछ विवरण भी। कार को बाहरी ठोसता, स्वच्छता में जोड़ा गया था, अब यह और अधिक हो गया है - चार हज़ार एक सौ मीटर लंबा और चौड़ाई में सोलह नौ पाँच मिमी, और अन्य चीजों के साथ, यह निसान नोट का हैचबैक बन गया है। समीक्षाओं का कहना है कि यदि आप कार के अंदर देखते हैं, तो यह संभावना नहीं है कि पहली नज़र में आप अपने पूर्ववर्ती की आंतरिक व्यवस्था से मतभेद पा सकते हैं, लेकिन मामूली बदलाव हैं। विशाल इंटीरियर में अब एक दो-रेडियो रिकॉर्डर है, जिसमें टच स्क्रीन और रूसी में लिखने और बोलने में सक्षम एक नेविगेटर है। एक दस्ताने बॉक्स में prying आंखों से यूएसबी कनेक्टर छिपाने के विचार के लिए धन्यवाद, आप चोरों से जुड़े उपकरणों की सापेक्ष सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। अभी भी कुछ बिंदु हैं जिनके लिए आप कर सकते हैंनिर्माता की प्रशंसा करें। सबसे पहले, जलवायु नियंत्रण के एक सरल संस्करण के लिए। दूसरा, निसान का निलंबन अधिक आरामदायक हो गया, जिसने कार निसान नोट के संचालन को प्रभावित नहीं किया। इंजन और कॉन्फ़िगरेशन के प्रकार के आधार पर मशीन की विशेषताओं में कुछ बदलाव होता है। जापानी नोट तीन सिलेंडर के साथ आता हैएक.दो-लीटर इंजन, जिसकी शक्ति, संशोधन के आधार पर अस्सी से अट्ठानवे लीटरटर के बीच भिन्न हो सकती है। एक। रूस में, निसान नोट बेचते हैं, जिनकी समीक्षा नेटवर्क पर पाई जा सकती है, मुख्य रूप से एक.चार-लीटर इंजन और एमसीपी के साथ। अमेरिकी कार के लिए, इसका इंजन एक दशमलव छः लीटरटर होगा, और हुड के नीचे एक सौ नौ अश्वशक्ति होगी। इस कार में ट्रांसमिशन के दो संस्करण होंगे - एक एमसीपी या एक वैरिएटर। उपकरण के प्रकार के लिए, केवल चार हैं। वैसे, निसान को "शक्ति" के प्रकार से भी प्रतिष्ठित किया जाता है, क्योंकि इस मॉडल में गैसोलीन और डीजल इंजन दोनों हो सकते हैं। यह समझने के लिए कि यह किस तरह की मशीन है, कितना सुविधाजनक हैऔर यह सड़क पर आरामदायक है, आपको एक टेस्ट ड्राइव करना चाहिए। इस तरह की एक छोटी सी जांच सभी फायदों को देखने में मदद करेगी और कार निसान नोट की संभावित कमियों की पहचान करेगी। परीक्षण परिणामों पर प्रतिक्रिया और पूरी तरह से कार सकारात्मक मामलों में पाया जा सकता है। चालक पहिया के पीछे बैठे व्यक्ति के आदेशों को संभालने, हस्तक्षेप और त्वरित प्रतिक्रिया में अपनी सादगी के लिए कार की प्रशंसा करते हैं। शहर में ईंधन की खपत लगभग हैनौ लीटरटर, ऐसी मशीन का औसत है। आप किफायती और आरामदायक कार खरीदने के लिए चाहते हैं, तो यह कम से निसान नोट देखने के लिए लायक है। समीक्षा एक कॉम्पैक्ट के रूप में इस कार का वर्णन है, लेकिन एक ही समय आरामदायक और रेडी-टू-कार परिवर्तन पर। फिर भी, यह मूल रूप से शहर से बाहर परिवार यात्राएं, प्रकृति पर के लिए योजना बनाई गई थी, लेकिन फिर डेवलपर्स अपनी कल्पना करने के लिए स्वतंत्र लगाम देने के लिए और रियर सीटें, जिसके साथ आप ट्रंक में अंतरिक्ष को बढ़ा सकते हैं, कार मिनी बस के बनाने के लिए, अगर आप इन सीटों को जोड़ चलती बनाने का फैसला किया। इस प्रकार, यह कार के अंदर लंबे वस्तुओं, जो लगभग दो दशमलव पाँच मीटर तक पहुंच के परिवहन के लिए संभव है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडोनेशिया गणराज्य (दीपान्तर गणराज्य) दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। १७५०८ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग 26 करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . उबाल के परिणाम स्वरूप ताड़ के तेल का ब्लॉक हल्के रंग दिखा रहा है। ताड़ का तेल, नारियल तेल और ताड़ की गरी का तेल ताड़ के पेड़ों के फल से निकाले गये खाने योग्य वनस्पति तेल हैं। ताड़ का तेल आयल पाम एलएईस गुइनीन्सिस के फल की लुगदी से निकाला जाता है; ताड़ की गरी का तेल आयल पाम के फल की गरी (बीज) से निकाला जाता है और नारियल का तेल नारियल (कोकोस नुसिफेरा) की गरी से प्राप्त किया जाता है। ताड़ के तेल का रंग स्वाभाविक रूप से लाल होता है, क्योंकि इसमें बीटा कैरोटीन का एक उच्च परिमाण शामिल रहता है। ताड़ का तेल, ताड़ की गरी का तेल और नारियल तेल कुछ अत्यधिक संतृप्त वनस्पति वसाओं में से तीन हैं। ताड़ का तेल कमरे के तापमान पर अर्ध ठोस रहता है। ताड़ के तेल में कई संतृप्त और असंतृप्त वसाएं ग्लिसरिल ल्यूरेट (0.1%, संतृप्त), मिरिस्टेट (1%, संतृप्त), पामिटेट (44%, संतृप्त), स्टीयरेट (5%, संतृप्त), ओलेट (39%, एकलअसंतृप्त) लीनोलियेट (10%, बहुलअसंतृप्त और लिनोलेनेट (0.3%, बहुलअसंतृप्त) के रूप में शामिल हैं। ताड़ की गरी का तेल और नारियल तेल, ताड़ के तेल से अधिक उच्च संतृप्त तेल हैं। सभी वनस्पति तेलों की तरह ताड़ के तेल में कोलेस्ट्रॉल (अपरिष्कृत पशु वसा में पाया जाने वाला) नहीं होता, हालांकि संतृप्त वसा के सेवन से एलडीएल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों बढ़ जाते हैं। ताड़ का तेल अफ्रीका, दक्षिणपूर्व एशिया और ब्राजील के कुछ भागों की उष्णकटिबंधीय पट्टी में खाना पकाने का एक आम उपादान है। इसकी कम लागत और तलने में उपयोग के समय परिष्कृत उत्पाद की उच्च जारणकारी स्थिरता (संतृप्ति) दुनिया के अन्य भागों में व्यावसायिक भोजन उद्योग में इसके बढ़ते उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। . इंडोनेशिया और ताड़ का तेल आम में 5 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): द्वितीय विश्वयुद्ध, पापुआ न्यू गिनी, मलेशिया, यूरोप, सिंगापुर। द्वितीय विश्वयुद्ध १९३९ से १९४५ तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग ७० देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं। इस युद्ध में विश्व दो भागों मे बँटा हुआ था - मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र। इस युद्ध के दौरान पूर्ण युद्ध का मनोभाव प्रचलन में आया क्योंकि इस युद्ध में लिप्त सारी महाशक्तियों ने अपनी आर्थिक, औद्योगिक तथा वैज्ञानिक क्षमता इस युद्ध में झोंक दी थी। इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के लगभग १० करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया, तथा यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ। इस महायुद्ध में ५ से ७ करोड़ व्यक्तियों की जानें गईं क्योंकि इसके महत्वपूर्ण घटनाक्रम में असैनिक नागरिकों का नरसंहार- जिसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है- तथा परमाणु हथियारों का एकमात्र इस्तेमाल शामिल है (जिसकी वजह से युद्ध के अंत मे मित्र राष्ट्रों की जीत हुई)। इसी कारण यह मानव इतिहास का सबसे भयंकर युद्ध था। हालांकि जापान चीन से सन् १९३७ ई. से युद्ध की अवस्था में था किन्तु अमूमन दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत ०१ सितम्बर १९३९ में जानी जाती है जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोला और उसके बाद जब फ्रांस ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा कर दी तथा इंग्लैंड और अन्य राष्ट्रमंडल देशों ने भी इसका अनुमोदन किया। जर्मनी ने १९३९ में यूरोप में एक बड़ा साम्राज्य बनाने के उद्देश्य से पोलैंड पर हमला बोल दिया। १९३९ के अंत से १९४१ की शुरुआत तक, अभियान तथा संधि की एक शृंखला में जर्मनी ने महाद्वीपीय यूरोप का बड़ा भाग या तो अपने अधीन कर लिया था या उसे जीत लिया था। नाट्सी-सोवियत समझौते के तहत सोवियत रूस अपने छः पड़ोसी मुल्कों, जिसमें पोलैंड भी शामिल था, पर क़ाबिज़ हो गया। फ़्रांस की हार के बाद युनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देश ही धुरी राष्ट्रों से संघर्ष कर रहे थे, जिसमें उत्तरी अफ़्रीका की लड़ाइयाँ तथा लम्बी चली अटलांटिक की लड़ाई शामिल थे। जून १९४१ में युरोपीय धुरी राष्ट्रों ने सोवियत संघ पर हमला बोल दिया और इसने मानव इतिहास में ज़मीनी युद्ध के सबसे बड़े रणक्षेत्र को जन्म दिया। दिसंबर १९४१ को जापानी साम्राज्य भी धुरी राष्ट्रों की तरफ़ से इस युद्ध में कूद गया। दरअसल जापान का उद्देश्य पूर्वी एशिया तथा इंडोचायना में अपना प्रभुत्व स्थापित करने का था। उसने प्रशान्त महासागर में युरोपीय देशों के आधिपत्य वाले क्षेत्रों तथा संयुक्त राज्य अमेरीका के पर्ल हार्बर पर हमला बोल दिया और जल्द ही पश्चिमी प्रशान्त पर क़ब्ज़ा बना लिया। सन् १९४२ में आगे बढ़ती धुरी सेना पर लगाम तब लगी जब पहले तो जापान सिलसिलेवार कई नौसैनिक झड़पें हारा, युरोपीय धुरी ताकतें उत्तरी अफ़्रीका में हारीं और निर्णायक मोड़ तब आया जब उनको स्तालिनग्राड में हार का मुँह देखना पड़ा। सन् १९४३ में जर्मनी पूर्वी युरोप में कई झड़पें हारा, इटली में मित्र राष्ट्रों ने आक्रमण बोल दिया तथा अमेरिका ने प्रशान्त महासागर में जीत दर्ज करनी शुरु कर दी जिसके कारणवश धुरी राष्ट्रों को सारे मोर्चों पर सामरिक दृश्टि से पीछे हटने की रणनीति अपनाने को मजबूर होना पड़ा। सन् १९४४ में जहाँ एक ओर पश्चिमी मित्र देशों ने जर्मनी द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़्रांस पर आक्रमण किया वहीं दूसरी ओर से सोवियत संघ ने अपनी खोई हुयी ज़मीन वापस छीनने के बाद जर्मनी तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों पर हमला बोल दिया। सन् १९४५ के अप्रैल-मई में सोवियत और पोलैंड की सेनाओं ने बर्लिन पर क़ब्ज़ा कर लिया और युरोप में दूसरे विश्वयुद्ध का अन्त ८ मई १९४५ को तब हुआ जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। सन् १९४४ और १९४५ के दौरान अमेरिका ने कई जगहों पर जापानी नौसेना को शिकस्त दी और पश्चिमी प्रशान्त के कई द्वीपों में अपना क़ब्ज़ा बना लिया। जब जापानी द्वीपसमूह पर आक्रमण करने का समय क़रीब आया तो अमेरिका ने जापान में दो परमाणु बम गिरा दिये। १५ अगस्त १९४५ को एशिया में भी दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार कर लिया। . कोई विवरण नहीं। मलेशिया अधिनियम 1963 (दस्तावेज़) अंग्रेजी ग्रंथों में मलेशिया से संबंधित समझौते (दस्तावेज़) मलेशिया दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित एक उष्णकटिबंधीय देश है। यह दक्षिण चीन सागर से दो भागों में विभाजित है। मलय प्रायद्वीप पर स्थित मुख्य भूमि के पश्चिम तट पर मलक्का जलडमरू और इसके पूर्व तट पर दक्षिण चीन सागर है। देश का दूसरा हिस्सा, जिसे कभी-कभी पूर्व मलेशिया के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण चीन सागर में बोर्नियो द्वीप के उत्तरी भाग पर स्थित है। मलय प्रायद्वीप पर स्थित कुआलालंपुर देश की राजधानी है, लेकिन हाल ही में संघीय राजधानी को खासतौर से प्रशासन के लिए बनाए गए नए शहर पुत्रजया में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह 13 राज्यों से बनाया गया एक एक संघीय राज्य है। मलेशिया में चीनी, मलय और भारतीय जैसे विभिन्न जातीय समूह निवास करते हैं। यहां की आधिकारिक भाषा मलय है, लेकिन शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में ज्यादातर अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाता है। मलेशिया में १३० से ज्यादा बोलियां बोली जाती हैं, इनमें से ९४ मलेशियाई बोर्नियो में और ४० प्रायद्वीप में बोली जाती हैं। यद्यपि देश सरकारी धर्म इस्लाम है, लेकिन नागरिकों को अन्य धर्मों को मानने की स्वतंत्रता है। . यूरोप पृथ्वी पर स्थित सात महाद्वीपों में से एक महाद्वीप है। यूरोप, एशिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यूरोप और एशिया वस्तुतः यूरेशिया के खण्ड हैं और यूरोप यूरेशिया का सबसे पश्चिमी प्रायद्वीपीय खंड है। एशिया से यूरोप का विभाजन इसके पूर्व में स्थित यूराल पर्वत के जल विभाजक जैसे यूराल नदी, कैस्पियन सागर, कॉकस पर्वत शृंखला और दक्षिण पश्चिम में स्थित काले सागर के द्वारा होता है। यूरोप के उत्तर में आर्कटिक महासागर और अन्य जल निकाय, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और दक्षिण पश्चिम में काला सागर और इससे जुड़े जलमार्ग स्थित हैं। इस सबके बावजूद यूरोप की सीमायें बहुत हद तक काल्पनिक हैं और इसे एक महाद्वीप की संज्ञा देना भौगोलिक आधार पर कम, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर अधिक है। ब्रिटेन, आयरलैंड और आइसलैंड जैसे देश एक द्वीप होते हुए भी यूरोप का हिस्सा हैं, पर ग्रीनलैंड उत्तरी अमरीका का हिस्सा है। रूस सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यूरोप में ही माना जाता है, हालाँकि इसका सारा साइबेरियाई इलाका एशिया का हिस्सा है। आज ज़्यादातर यूरोपीय देशों के लोग दुनिया के सबसे ऊँचे जीवनस्तर का आनन्द लेते हैं। यूरोप पृष्ठ क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का दूसरा सबसे छोटा महाद्वीप है, इसका क्षेत्रफल के १०,१८०,००० वर्ग किलोमीटर (३,९३०,००० वर्ग मील) है जो पृथ्वी की सतह का २% और इसके भूमि क्षेत्र का लगभग ६.८% है। यूरोप के ५० देशों में, रूस क्षेत्रफल और आबादी दोनों में ही सबसे बड़ा है, जबकि वैटिकन नगर सबसे छोटा देश है। जनसंख्या के हिसाब से यूरोप एशिया और अफ्रीका के बाद तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है, ७३.१ करोड़ की जनसंख्या के साथ यह विश्व की जनसंख्या में लगभग ११% का योगदान करता है, तथापि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार (मध्यम अनुमान), २०५० तक विश्व जनसंख्या में यूरोप का योगदान घटकर ७% पर आ सकता है। १९०० में, विश्व की जनसंख्या में यूरोप का हिस्सा लगभग 25% था। पुरातन काल में यूरोप, विशेष रूप से यूनान पश्चिमी संस्कृति का जन्मस्थान है। मध्य काल में इसी ने ईसाईयत का पोषण किया है। यूरोप ने १६ वीं सदी के बाद से वैश्विक मामलों में एक प्रमुख भूमिका अदा की है, विशेष रूप से उपनिवेशवाद की शुरुआत के बाद. सिंगापुर (अंग्रेज़ीः Singapore सिंगपोर, चीनीः 新加坡 शीन्जियापो, मलयः Singapura सिंगापुरा, Tamil: சிங்கப்பூர் चिंकाप्पूर) विश्व के प्रमुख बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यह दक्षिण एशिया में मलेशिया तथा इंडोनेशिया के बीच में स्थित है। सिंगापुर यानी सिंहों का पुर। यानी इसे सिंहों का शहर कहा जाता है। यहाँ पर कई धर्मों में विश्वास रखने वाले, विभिन्न देशों की संस्कृति, इतिहास तथा भाषा के लोग एकजुट होकर रहते हैं। मुख्य रूप से यहाँ चीनी तथा अँग्रेजी दोनों भाषाएँ प्रचलित हैं। आकार में मुंबई से थोड़े छोटे इस देश में बसने वाली करीब 35 लाख की आबादी में चीनी, मलय व 8 प्रतिशत भारतीय लोग रहते हैं। . इंडोनेशिया 34 संबंध है और ताड़ का तेल 33 है। वे आम 5 में है, समानता सूचकांक 7.46% है = 5 / (34 + 33)। यह लेख इंडोनेशिया और ताड़ का तेल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडोनेशिया गणराज्य दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक देश है। सत्रह हज़ार पाँच सौ आठ द्वीपों वाले इस देश की जनसंख्या लगभग छब्बीस करोड़ है, यह दुनिया का तीसरा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बौद्ध आबादी वाला देश है। देश की राजधानी जकार्ता है। देश की जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, पूर्वी तिमोर और मलेशिया के साथ मिलती है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों सिंगापुर, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र शामिल है। . उबाल के परिणाम स्वरूप ताड़ के तेल का ब्लॉक हल्के रंग दिखा रहा है। ताड़ का तेल, नारियल तेल और ताड़ की गरी का तेल ताड़ के पेड़ों के फल से निकाले गये खाने योग्य वनस्पति तेल हैं। ताड़ का तेल आयल पाम एलएईस गुइनीन्सिस के फल की लुगदी से निकाला जाता है; ताड़ की गरी का तेल आयल पाम के फल की गरी से निकाला जाता है और नारियल का तेल नारियल की गरी से प्राप्त किया जाता है। ताड़ के तेल का रंग स्वाभाविक रूप से लाल होता है, क्योंकि इसमें बीटा कैरोटीन का एक उच्च परिमाण शामिल रहता है। ताड़ का तेल, ताड़ की गरी का तेल और नारियल तेल कुछ अत्यधिक संतृप्त वनस्पति वसाओं में से तीन हैं। ताड़ का तेल कमरे के तापमान पर अर्ध ठोस रहता है। ताड़ के तेल में कई संतृप्त और असंतृप्त वसाएं ग्लिसरिल ल्यूरेट , मिरिस्टेट , पामिटेट , स्टीयरेट , ओलेट लीनोलियेट के रूप में शामिल हैं। ताड़ की गरी का तेल और नारियल तेल, ताड़ के तेल से अधिक उच्च संतृप्त तेल हैं। सभी वनस्पति तेलों की तरह ताड़ के तेल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता, हालांकि संतृप्त वसा के सेवन से एलडीएल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों बढ़ जाते हैं। ताड़ का तेल अफ्रीका, दक्षिणपूर्व एशिया और ब्राजील के कुछ भागों की उष्णकटिबंधीय पट्टी में खाना पकाने का एक आम उपादान है। इसकी कम लागत और तलने में उपयोग के समय परिष्कृत उत्पाद की उच्च जारणकारी स्थिरता दुनिया के अन्य भागों में व्यावसायिक भोजन उद्योग में इसके बढ़ते उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। . इंडोनेशिया और ताड़ का तेल आम में पाँच बातें हैं : द्वितीय विश्वयुद्ध, पापुआ न्यू गिनी, मलेशिया, यूरोप, सिंगापुर। द्वितीय विश्वयुद्ध एक हज़ार नौ सौ उनतालीस से एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग सत्तर देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं। इस युद्ध में विश्व दो भागों मे बँटा हुआ था - मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र। इस युद्ध के दौरान पूर्ण युद्ध का मनोभाव प्रचलन में आया क्योंकि इस युद्ध में लिप्त सारी महाशक्तियों ने अपनी आर्थिक, औद्योगिक तथा वैज्ञानिक क्षमता इस युद्ध में झोंक दी थी। इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के लगभग दस करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया, तथा यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ। इस महायुद्ध में पाँच से सात करोड़ व्यक्तियों की जानें गईं क्योंकि इसके महत्वपूर्ण घटनाक्रम में असैनिक नागरिकों का नरसंहार- जिसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है- तथा परमाणु हथियारों का एकमात्र इस्तेमाल शामिल है । इसी कारण यह मानव इतिहास का सबसे भयंकर युद्ध था। हालांकि जापान चीन से सन् एक हज़ार नौ सौ सैंतीस ई. से युद्ध की अवस्था में था किन्तु अमूमन दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत एक सितम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में जानी जाती है जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोला और उसके बाद जब फ्रांस ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा कर दी तथा इंग्लैंड और अन्य राष्ट्रमंडल देशों ने भी इसका अनुमोदन किया। जर्मनी ने एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में यूरोप में एक बड़ा साम्राज्य बनाने के उद्देश्य से पोलैंड पर हमला बोल दिया। एक हज़ार नौ सौ उनतालीस के अंत से एक हज़ार नौ सौ इकतालीस की शुरुआत तक, अभियान तथा संधि की एक शृंखला में जर्मनी ने महाद्वीपीय यूरोप का बड़ा भाग या तो अपने अधीन कर लिया था या उसे जीत लिया था। नाट्सी-सोवियत समझौते के तहत सोवियत रूस अपने छः पड़ोसी मुल्कों, जिसमें पोलैंड भी शामिल था, पर क़ाबिज़ हो गया। फ़्रांस की हार के बाद युनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देश ही धुरी राष्ट्रों से संघर्ष कर रहे थे, जिसमें उत्तरी अफ़्रीका की लड़ाइयाँ तथा लम्बी चली अटलांटिक की लड़ाई शामिल थे। जून एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में युरोपीय धुरी राष्ट्रों ने सोवियत संघ पर हमला बोल दिया और इसने मानव इतिहास में ज़मीनी युद्ध के सबसे बड़े रणक्षेत्र को जन्म दिया। दिसंबर एक हज़ार नौ सौ इकतालीस को जापानी साम्राज्य भी धुरी राष्ट्रों की तरफ़ से इस युद्ध में कूद गया। दरअसल जापान का उद्देश्य पूर्वी एशिया तथा इंडोचायना में अपना प्रभुत्व स्थापित करने का था। उसने प्रशान्त महासागर में युरोपीय देशों के आधिपत्य वाले क्षेत्रों तथा संयुक्त राज्य अमेरीका के पर्ल हार्बर पर हमला बोल दिया और जल्द ही पश्चिमी प्रशान्त पर क़ब्ज़ा बना लिया। सन् एक हज़ार नौ सौ बयालीस में आगे बढ़ती धुरी सेना पर लगाम तब लगी जब पहले तो जापान सिलसिलेवार कई नौसैनिक झड़पें हारा, युरोपीय धुरी ताकतें उत्तरी अफ़्रीका में हारीं और निर्णायक मोड़ तब आया जब उनको स्तालिनग्राड में हार का मुँह देखना पड़ा। सन् एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में जर्मनी पूर्वी युरोप में कई झड़पें हारा, इटली में मित्र राष्ट्रों ने आक्रमण बोल दिया तथा अमेरिका ने प्रशान्त महासागर में जीत दर्ज करनी शुरु कर दी जिसके कारणवश धुरी राष्ट्रों को सारे मोर्चों पर सामरिक दृश्टि से पीछे हटने की रणनीति अपनाने को मजबूर होना पड़ा। सन् एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में जहाँ एक ओर पश्चिमी मित्र देशों ने जर्मनी द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़्रांस पर आक्रमण किया वहीं दूसरी ओर से सोवियत संघ ने अपनी खोई हुयी ज़मीन वापस छीनने के बाद जर्मनी तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों पर हमला बोल दिया। सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस के अप्रैल-मई में सोवियत और पोलैंड की सेनाओं ने बर्लिन पर क़ब्ज़ा कर लिया और युरोप में दूसरे विश्वयुद्ध का अन्त आठ मई एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को तब हुआ जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। सन् एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस और एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस के दौरान अमेरिका ने कई जगहों पर जापानी नौसेना को शिकस्त दी और पश्चिमी प्रशान्त के कई द्वीपों में अपना क़ब्ज़ा बना लिया। जब जापानी द्वीपसमूह पर आक्रमण करने का समय क़रीब आया तो अमेरिका ने जापान में दो परमाणु बम गिरा दिये। पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को एशिया में भी दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार कर लिया। . कोई विवरण नहीं। मलेशिया अधिनियम एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ अंग्रेजी ग्रंथों में मलेशिया से संबंधित समझौते मलेशिया दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित एक उष्णकटिबंधीय देश है। यह दक्षिण चीन सागर से दो भागों में विभाजित है। मलय प्रायद्वीप पर स्थित मुख्य भूमि के पश्चिम तट पर मलक्का जलडमरू और इसके पूर्व तट पर दक्षिण चीन सागर है। देश का दूसरा हिस्सा, जिसे कभी-कभी पूर्व मलेशिया के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण चीन सागर में बोर्नियो द्वीप के उत्तरी भाग पर स्थित है। मलय प्रायद्वीप पर स्थित कुआलालंपुर देश की राजधानी है, लेकिन हाल ही में संघीय राजधानी को खासतौर से प्रशासन के लिए बनाए गए नए शहर पुत्रजया में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह तेरह राज्यों से बनाया गया एक एक संघीय राज्य है। मलेशिया में चीनी, मलय और भारतीय जैसे विभिन्न जातीय समूह निवास करते हैं। यहां की आधिकारिक भाषा मलय है, लेकिन शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में ज्यादातर अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाता है। मलेशिया में एक सौ तीस से ज्यादा बोलियां बोली जाती हैं, इनमें से चौरानवे मलेशियाई बोर्नियो में और चालीस प्रायद्वीप में बोली जाती हैं। यद्यपि देश सरकारी धर्म इस्लाम है, लेकिन नागरिकों को अन्य धर्मों को मानने की स्वतंत्रता है। . यूरोप पृथ्वी पर स्थित सात महाद्वीपों में से एक महाद्वीप है। यूरोप, एशिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यूरोप और एशिया वस्तुतः यूरेशिया के खण्ड हैं और यूरोप यूरेशिया का सबसे पश्चिमी प्रायद्वीपीय खंड है। एशिया से यूरोप का विभाजन इसके पूर्व में स्थित यूराल पर्वत के जल विभाजक जैसे यूराल नदी, कैस्पियन सागर, कॉकस पर्वत शृंखला और दक्षिण पश्चिम में स्थित काले सागर के द्वारा होता है। यूरोप के उत्तर में आर्कटिक महासागर और अन्य जल निकाय, पश्चिम में अटलांटिक महासागर, दक्षिण में भूमध्य सागर और दक्षिण पश्चिम में काला सागर और इससे जुड़े जलमार्ग स्थित हैं। इस सबके बावजूद यूरोप की सीमायें बहुत हद तक काल्पनिक हैं और इसे एक महाद्वीप की संज्ञा देना भौगोलिक आधार पर कम, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर अधिक है। ब्रिटेन, आयरलैंड और आइसलैंड जैसे देश एक द्वीप होते हुए भी यूरोप का हिस्सा हैं, पर ग्रीनलैंड उत्तरी अमरीका का हिस्सा है। रूस सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यूरोप में ही माना जाता है, हालाँकि इसका सारा साइबेरियाई इलाका एशिया का हिस्सा है। आज ज़्यादातर यूरोपीय देशों के लोग दुनिया के सबसे ऊँचे जीवनस्तर का आनन्द लेते हैं। यूरोप पृष्ठ क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का दूसरा सबसे छोटा महाद्वीप है, इसका क्षेत्रफल के दस,एक सौ अस्सी,शून्य वर्ग किलोमीटर है जो पृथ्वी की सतह का दो% और इसके भूमि क्षेत्र का लगभग छः.आठ% है। यूरोप के पचास देशों में, रूस क्षेत्रफल और आबादी दोनों में ही सबसे बड़ा है, जबकि वैटिकन नगर सबसे छोटा देश है। जनसंख्या के हिसाब से यूरोप एशिया और अफ्रीका के बाद तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है, तिहत्तर.एक करोड़ की जनसंख्या के साथ यह विश्व की जनसंख्या में लगभग ग्यारह% का योगदान करता है, तथापि, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार , दो हज़ार पचास तक विश्व जनसंख्या में यूरोप का योगदान घटकर सात% पर आ सकता है। एक हज़ार नौ सौ में, विश्व की जनसंख्या में यूरोप का हिस्सा लगभग पच्चीस% था। पुरातन काल में यूरोप, विशेष रूप से यूनान पश्चिमी संस्कृति का जन्मस्थान है। मध्य काल में इसी ने ईसाईयत का पोषण किया है। यूरोप ने सोलह वीं सदी के बाद से वैश्विक मामलों में एक प्रमुख भूमिका अदा की है, विशेष रूप से उपनिवेशवाद की शुरुआत के बाद. सिंगापुर विश्व के प्रमुख बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यह दक्षिण एशिया में मलेशिया तथा इंडोनेशिया के बीच में स्थित है। सिंगापुर यानी सिंहों का पुर। यानी इसे सिंहों का शहर कहा जाता है। यहाँ पर कई धर्मों में विश्वास रखने वाले, विभिन्न देशों की संस्कृति, इतिहास तथा भाषा के लोग एकजुट होकर रहते हैं। मुख्य रूप से यहाँ चीनी तथा अँग्रेजी दोनों भाषाएँ प्रचलित हैं। आकार में मुंबई से थोड़े छोटे इस देश में बसने वाली करीब पैंतीस लाख की आबादी में चीनी, मलय व आठ प्रतिशत भारतीय लोग रहते हैं। . इंडोनेशिया चौंतीस संबंध है और ताड़ का तेल तैंतीस है। वे आम पाँच में है, समानता सूचकांक सात.छियालीस% है = पाँच / । यह लेख इंडोनेशिया और ताड़ का तेल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
इंदौर में पकड़ा गया MDMA ड्रग्स गिरोह पिछले दो साल में 100 करोड़ से अधिक की ड्रग्स को इंदौर में खपा चुका है। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उन्होंने कई इलाके और अलग-अलग काम को बांटा हुआ था। ड्रग को इंदौर और आसपास के इलाकों में लाने का जिम्मा मंदसौर के चिमन का था। दरअसल, चिमन अग्रवाल गिरोह के टेंट व्यवसायी महालक्ष्मी नगर निवासी दिनेश अग्रवाल का भतीजा है। चिमन कई अलग-अलग तरीकों से तेलंगाना से ड्रग ला रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया, चिमन ट्रांसपोर्टिंग के अलग-अलग तरीके अपनाकर देश के दूसरी जगहों से ड्रग इंदौर लाता था। कभी ट्रकों के अंदर मुर्गी दाना की कोडिंग कर ड्रग्स लाता, तो कभी पीथमपुर की फार्मा कंपनियों में सप्लाई किए जाने वाले पाउडर बताकर ड्रग्स लाता था। दिनेश अग्रवाल के बारे में बताया जा रहा है कि वह हैदराबाद के वेदप्रकाश व्यास से नशा लाता था। वेद प्रकाश की तेलंगाना में मेडिसिन लैब है, जिसमें दवाइयां बनाई जाती हैं। पुलिस इस बात की तफ्तीश करने हैदराबाद जाएगी, कहीं लैब में ड्रग तो तैयार नहीं हो रहा था। आईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि दिनेश अग्रवाल का भतीजा हमेशा ड्रग्स की खेप के साथ रहता था। एक गाड़ी में ड्रग्स रहता था, दूसरी गाड़ी से वह आगे-पीछे चलता था। ड्रग मौके पर पहुंचाने के बाद ही वह रवाना होता था। इधर, आरोपी वेद प्रकाश व्यास के ड्राइवर ने पूछताछ में बताया, अब तक 100 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स इंदौर में खफा चुके हैं। कोरोना काल में भी आरोपी नशे की खेप लेकर आते थे। पकड़ाए आरोपी वेद प्रकाश व्यास के देशभर के ड्रग्स तस्करों से संबंध हैं। मध्य प्रदेश के भी कई जिलों में वह माल सप्लाई करने आता था। आईजी मिश्र के अनुसार आरोपियों से उनके इंदौरी अन्य कनेक्शनों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इंदौर में पकड़ा गया MDMA ड्रग्स गिरोह पिछले दो साल में एक सौ करोड़ से अधिक की ड्रग्स को इंदौर में खपा चुका है। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उन्होंने कई इलाके और अलग-अलग काम को बांटा हुआ था। ड्रग को इंदौर और आसपास के इलाकों में लाने का जिम्मा मंदसौर के चिमन का था। दरअसल, चिमन अग्रवाल गिरोह के टेंट व्यवसायी महालक्ष्मी नगर निवासी दिनेश अग्रवाल का भतीजा है। चिमन कई अलग-अलग तरीकों से तेलंगाना से ड्रग ला रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया, चिमन ट्रांसपोर्टिंग के अलग-अलग तरीके अपनाकर देश के दूसरी जगहों से ड्रग इंदौर लाता था। कभी ट्रकों के अंदर मुर्गी दाना की कोडिंग कर ड्रग्स लाता, तो कभी पीथमपुर की फार्मा कंपनियों में सप्लाई किए जाने वाले पाउडर बताकर ड्रग्स लाता था। दिनेश अग्रवाल के बारे में बताया जा रहा है कि वह हैदराबाद के वेदप्रकाश व्यास से नशा लाता था। वेद प्रकाश की तेलंगाना में मेडिसिन लैब है, जिसमें दवाइयां बनाई जाती हैं। पुलिस इस बात की तफ्तीश करने हैदराबाद जाएगी, कहीं लैब में ड्रग तो तैयार नहीं हो रहा था। आईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि दिनेश अग्रवाल का भतीजा हमेशा ड्रग्स की खेप के साथ रहता था। एक गाड़ी में ड्रग्स रहता था, दूसरी गाड़ी से वह आगे-पीछे चलता था। ड्रग मौके पर पहुंचाने के बाद ही वह रवाना होता था। इधर, आरोपी वेद प्रकाश व्यास के ड्राइवर ने पूछताछ में बताया, अब तक एक सौ करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स इंदौर में खफा चुके हैं। कोरोना काल में भी आरोपी नशे की खेप लेकर आते थे। पकड़ाए आरोपी वेद प्रकाश व्यास के देशभर के ड्रग्स तस्करों से संबंध हैं। मध्य प्रदेश के भी कई जिलों में वह माल सप्लाई करने आता था। आईजी मिश्र के अनुसार आरोपियों से उनके इंदौरी अन्य कनेक्शनों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कहते है 'अक्ल का इस्तेमाल अगर सही जगह किया जाए, तो मुसीबतें भी हार मान लेती है। ' यूपी 100 के पुलिसकर्मी आस मोहम्म्द पर यह कहावत बिलकुल सटीक बैठती है। दरअसल, शनिवार को एक युवक जेजे बेकर्स के पास स्टे वायर की चपेट में आ गया। पास खड़े आस सिपाही की नज़र जब इस युवक पर पड़ी तो उसने झट से मुस्तैदी दिखाते हुए डंडे की मदद से उसके पास से तार को अलग किया और उसे अस्पताल भी ले गया। वजीरगंज के निवासी मोहम्मद अनस आईटी चौराहे के पास एक निजी कंपनी में काम करते है। दोपहर को जब वह खाना खाने बाहर निकले थे तभी बाइक पर सवार अनस का संतुलन बिगड़ गया और वो लटक रहे स्टेवायर की चपेट में आ गए। बता दें, कि यहाँ के निवासियों का कहना है कि पहले भी इस स्टेवायर करंट से कई जानवरों की मौत हो चुकी है फिलहाल, अब लेसा ने इस फाल्ट को सही करवा दिया है। लाइव उत्तराखंड आस मोहम्म्द को सलाम करता है, जिनकी वजह से एक युवक की जान बच गई।
कहते है 'अक्ल का इस्तेमाल अगर सही जगह किया जाए, तो मुसीबतें भी हार मान लेती है। ' यूपी एक सौ के पुलिसकर्मी आस मोहम्म्द पर यह कहावत बिलकुल सटीक बैठती है। दरअसल, शनिवार को एक युवक जेजे बेकर्स के पास स्टे वायर की चपेट में आ गया। पास खड़े आस सिपाही की नज़र जब इस युवक पर पड़ी तो उसने झट से मुस्तैदी दिखाते हुए डंडे की मदद से उसके पास से तार को अलग किया और उसे अस्पताल भी ले गया। वजीरगंज के निवासी मोहम्मद अनस आईटी चौराहे के पास एक निजी कंपनी में काम करते है। दोपहर को जब वह खाना खाने बाहर निकले थे तभी बाइक पर सवार अनस का संतुलन बिगड़ गया और वो लटक रहे स्टेवायर की चपेट में आ गए। बता दें, कि यहाँ के निवासियों का कहना है कि पहले भी इस स्टेवायर करंट से कई जानवरों की मौत हो चुकी है फिलहाल, अब लेसा ने इस फाल्ट को सही करवा दिया है। लाइव उत्तराखंड आस मोहम्म्द को सलाम करता है, जिनकी वजह से एक युवक की जान बच गई।
श्रीदेवी (Sridevi) के निधन को हुए डेढ़ साल हो गया है। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी अदाओं, खूबरसूरती और शानदार परफॉर्मेंस से आज भी लोगों के दिलों में बरकरार है और आने वाले वक्त में भी वो हमेशा लोगों के दिलों पर राज करेंगी। आने वाली पीढ़ी उनकी फिल्मों के जरिए उन्हें देखेगी और उनके बारे में जानेगी। इस खूबसूरत एक्ट्रेस को अब आप सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अपने सामने भी देख सकेंगे। दरअसल, सिंगापुर के मैडम तुसाद म्यूजियम (Madame Tussauds) में श्रीदेवी का वैक्स स्टैच्यू रखा गया है, जिसका उद्घाटन आज उनके पति और फिल्ममेकर बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियों जान्हवी और खुशी कपूर ने किया है। मैडम तुसाद म्यूजियम (Madame Tussade Museum) में श्रीदेवी के वैक्स स्टैच्यू के उद्घाटन के वक्त श्रीदेवी की दोनों बेटियां जान्हवी कपूर और खुशी कपूर इमोशनल नजर आईं। दोनों अपनी मां के लगे वैक्स स्टैच्यू को एकटक देख रहे थे। इस स्टैच्यू को देखकर लगता है कि श्रीदेवी सचमुच सामने खड़ी हैं। जान्हवी कपूर ने मां की स्टैच्यू को देख काफी भावुक दिखी। वह श्रीदेवी के पुतले को बार-बार छू कर देख रही थी। इस साल 13 अगस्त को श्रीदेवी के 56वें बर्थडे पर मैडम तुसाद ने एक्ट्रेस को श्रद्धांजलि देने के लिए उनका वैक्स स्टैच्यू बनाने की घोषणा की थी। इस वैक्स स्टैच्यू में श्रीदेवी का मिस्टर इंडिया की 'हवाहवाई' वाला लुक नजर आ रहा है। बता दें कि पिछले साल 24 फरवरी को दुबई में एक्ट्रेस का निधन हो गया था। इसी साल यानी 2018 में उनकी बेटी जान्हवी कपूर (Janhvi Kapoor) ने फिल्म 'धड़क' से बॉलीवुड में डेब्यू किया। ये फिल्म लोगों को काफी पसंद आई थी। इसमें उनके साथ ईशान खट्टर नजर आए थे।
श्रीदेवी के निधन को हुए डेढ़ साल हो गया है। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी अदाओं, खूबरसूरती और शानदार परफॉर्मेंस से आज भी लोगों के दिलों में बरकरार है और आने वाले वक्त में भी वो हमेशा लोगों के दिलों पर राज करेंगी। आने वाली पीढ़ी उनकी फिल्मों के जरिए उन्हें देखेगी और उनके बारे में जानेगी। इस खूबसूरत एक्ट्रेस को अब आप सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अपने सामने भी देख सकेंगे। दरअसल, सिंगापुर के मैडम तुसाद म्यूजियम में श्रीदेवी का वैक्स स्टैच्यू रखा गया है, जिसका उद्घाटन आज उनके पति और फिल्ममेकर बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियों जान्हवी और खुशी कपूर ने किया है। मैडम तुसाद म्यूजियम में श्रीदेवी के वैक्स स्टैच्यू के उद्घाटन के वक्त श्रीदेवी की दोनों बेटियां जान्हवी कपूर और खुशी कपूर इमोशनल नजर आईं। दोनों अपनी मां के लगे वैक्स स्टैच्यू को एकटक देख रहे थे। इस स्टैच्यू को देखकर लगता है कि श्रीदेवी सचमुच सामने खड़ी हैं। जान्हवी कपूर ने मां की स्टैच्यू को देख काफी भावुक दिखी। वह श्रीदेवी के पुतले को बार-बार छू कर देख रही थी। इस साल तेरह अगस्त को श्रीदेवी के छप्पनवें बर्थडे पर मैडम तुसाद ने एक्ट्रेस को श्रद्धांजलि देने के लिए उनका वैक्स स्टैच्यू बनाने की घोषणा की थी। इस वैक्स स्टैच्यू में श्रीदेवी का मिस्टर इंडिया की 'हवाहवाई' वाला लुक नजर आ रहा है। बता दें कि पिछले साल चौबीस फरवरी को दुबई में एक्ट्रेस का निधन हो गया था। इसी साल यानी दो हज़ार अट्ठारह में उनकी बेटी जान्हवी कपूर ने फिल्म 'धड़क' से बॉलीवुड में डेब्यू किया। ये फिल्म लोगों को काफी पसंद आई थी। इसमें उनके साथ ईशान खट्टर नजर आए थे।
एक्टर ने ट्वीट कर बताया कि रुबीना बीते शनिवार को देपहर में ट्रेवल कर रही थी और इसी दैरान ये हादसा हो गया। सोशल मीडिया पर सक्रिए रहने वाली राखी हर रोज कॉफी पीने के लिए बाहर जाती है, इस दौरान वे सभी मीडियो कर्मियो से खूब सारी मजेदार बातें करती हैं। हाल ही में राखी ने एक अजीबोगरीब हरकत की। सोशल मीडिया पर सक्रिए रहने वाली राखी सावंत हर रोज कॉफी पीने के लिए बाहर जाती है, इस दौरान वे सभी मीडियो कर्मियो से खूब सारी मजेदार बातें करती हैं। हाल ही में राखी ने सलमान खान को लेकर एक बड़ी बात कही है। बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं देवोलीना भट्टाचार्जी। Shirtless फोटो शेयर करने से पहले इस खास शख्स की Permission लेते हैं एजाज खान। "ताउते" तूफान की वजह से टूटी राखी सावंत के घर की छत। कंगना रनौत अपने ट्वीट्स की वजह से आए दिन सुर्खियों में बनी रहती हैं। अपने विवादित बयानों को लेकर कंगना बहुत से राजनेताओं और कलाकारों के निशाने पर रहती हैं। कंगना ने हाल ही में विदेशी मीडिया पर भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। राखी ने बेहद खुश होकर अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। दरअसल, राखी खुशी से फूली नहीं समा रही हैं क्योंकि आज उनकी मां का कैंसर का ऑपरेशन है। राहुल वैद्य-दिशा परमार की शादी का VIDEO आया सामने। शादी के बंधन में बंधे राहुल वैद्य और दिशा परमार। एजाज खान के साथ शादी को लेकर पवित्रा पुनिया ने कही ये बात।
एक्टर ने ट्वीट कर बताया कि रुबीना बीते शनिवार को देपहर में ट्रेवल कर रही थी और इसी दैरान ये हादसा हो गया। सोशल मीडिया पर सक्रिए रहने वाली राखी हर रोज कॉफी पीने के लिए बाहर जाती है, इस दौरान वे सभी मीडियो कर्मियो से खूब सारी मजेदार बातें करती हैं। हाल ही में राखी ने एक अजीबोगरीब हरकत की। सोशल मीडिया पर सक्रिए रहने वाली राखी सावंत हर रोज कॉफी पीने के लिए बाहर जाती है, इस दौरान वे सभी मीडियो कर्मियो से खूब सारी मजेदार बातें करती हैं। हाल ही में राखी ने सलमान खान को लेकर एक बड़ी बात कही है। बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं देवोलीना भट्टाचार्जी। Shirtless फोटो शेयर करने से पहले इस खास शख्स की Permission लेते हैं एजाज खान। "ताउते" तूफान की वजह से टूटी राखी सावंत के घर की छत। कंगना रनौत अपने ट्वीट्स की वजह से आए दिन सुर्खियों में बनी रहती हैं। अपने विवादित बयानों को लेकर कंगना बहुत से राजनेताओं और कलाकारों के निशाने पर रहती हैं। कंगना ने हाल ही में विदेशी मीडिया पर भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया था। राखी ने बेहद खुश होकर अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। दरअसल, राखी खुशी से फूली नहीं समा रही हैं क्योंकि आज उनकी मां का कैंसर का ऑपरेशन है। राहुल वैद्य-दिशा परमार की शादी का VIDEO आया सामने। शादी के बंधन में बंधे राहुल वैद्य और दिशा परमार। एजाज खान के साथ शादी को लेकर पवित्रा पुनिया ने कही ये बात।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक भी अब प्रोफेसर बनेंगे। कॉलेज के शिक्षकों को कॅरियर एडवांसमेट स्कीम (कैश) के तहत प्रमोशन देने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए कॉलेज के शिक्षकों से एक सितंबर से 30 सितंबर तक आवेदन मांगे गए थे। अर्ह शिक्षकों ने कॉलेज के प्राचार्य के पास आवेदन जमा कर दिया है। सभी कॉलेजों के तकरीबन 284 शिक्षक कैश के तहत लाभान्वित होंगे। डीन कॉलेज एंड डेवलपमेंट (डीन सीडीसी) प्रो. प्रशांत अग्रवाल जल्द ही आवेदनों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसके बाद सलेक्शन कमेटी के समक्ष अर्ह शिक्षकों को इंटरव्यू देना होगा। ज्ञात हो कि कॉलेजों में अब तब प्रोफेसर का पद ही नहीं था। शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर के पद से ही रिटायर होते रहे हैं। प्रोफेसर बनने के लिए किसी भी शिक्षक को अधिकतम तीन वर्ष तक एसोसिएट प्रोफेसर का अनुभव होना आवश्यक है। इसके लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की तरह ही आवेदकों को गुजरना होगा। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि इविवि के सभी कॉलेजों से तकरीबन 284 शिक्षक कैश के तहत लाभान्वित होंगे। कॉलेज स्तर पर ही कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन की अध्यक्षता में सेलेक्शन कमेटी का गठन होगा। यह कमेटी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अर्ह शिक्षकों का साक्षात्कार लेगी। इसके बाद चयनित की सूची कॉलेज के गवर्निंग बॉडी को भेजी जाएगी। गवर्निंग बॉडी की मुहर लगने के बाद बंद लिफाफे में चयनित शिक्षकों के नाम कुलपति को भेजे जाएंगे। कुलपति की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद फिर से यह लिफाफा गवर्निंग बॉडी के बाद आएगा। इसके बाद कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी की बैठक शिक्षकों के प्रोन्नत का लिफाफा खुलेगा। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि यूजीसी के रेगुलेशन 2018 के अनुसार कॉलेज के शिक्षकों को प्रोन्नत किया जाएगा। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक भी अब प्रोफेसर बनेंगे। कॉलेज के शिक्षकों को कॅरियर एडवांसमेट स्कीम के तहत प्रमोशन देने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए कॉलेज के शिक्षकों से एक सितंबर से तीस सितंबर तक आवेदन मांगे गए थे। अर्ह शिक्षकों ने कॉलेज के प्राचार्य के पास आवेदन जमा कर दिया है। सभी कॉलेजों के तकरीबन दो सौ चौरासी शिक्षक कैश के तहत लाभान्वित होंगे। डीन कॉलेज एंड डेवलपमेंट प्रो. प्रशांत अग्रवाल जल्द ही आवेदनों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसके बाद सलेक्शन कमेटी के समक्ष अर्ह शिक्षकों को इंटरव्यू देना होगा। ज्ञात हो कि कॉलेजों में अब तब प्रोफेसर का पद ही नहीं था। शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर के पद से ही रिटायर होते रहे हैं। प्रोफेसर बनने के लिए किसी भी शिक्षक को अधिकतम तीन वर्ष तक एसोसिएट प्रोफेसर का अनुभव होना आवश्यक है। इसके लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की तरह ही आवेदकों को गुजरना होगा। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि इविवि के सभी कॉलेजों से तकरीबन दो सौ चौरासी शिक्षक कैश के तहत लाभान्वित होंगे। कॉलेज स्तर पर ही कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन की अध्यक्षता में सेलेक्शन कमेटी का गठन होगा। यह कमेटी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अर्ह शिक्षकों का साक्षात्कार लेगी। इसके बाद चयनित की सूची कॉलेज के गवर्निंग बॉडी को भेजी जाएगी। गवर्निंग बॉडी की मुहर लगने के बाद बंद लिफाफे में चयनित शिक्षकों के नाम कुलपति को भेजे जाएंगे। कुलपति की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद फिर से यह लिफाफा गवर्निंग बॉडी के बाद आएगा। इसके बाद कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी की बैठक शिक्षकों के प्रोन्नत का लिफाफा खुलेगा। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि यूजीसी के रेगुलेशन दो हज़ार अट्ठारह के अनुसार कॉलेज के शिक्षकों को प्रोन्नत किया जाएगा। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं।
लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब बेटियों को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगी। अभी इस योजना में बेटियों के जन्म लेने से लेकर उनकी पढ़ाई तक छह अलग-अलग चरणों में 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती रही है। भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए इस वादे को पूरा करने के लिए महिला कल्याण विभाग ने इसे 100 दिनों की कार्ययोजना में शामिल कर लिया है। जल्द ही विभाग मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजेगा। बता दें कि कन्या सुमंगला योजना बेटियों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। इस योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई के बीच छह अलग-अलग श्रेणियों में सरकार एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देती है। सीएम योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि लोग बालिकाओं के जन्म को एक उत्सव के तौर पर मनाएं। योगी सरकार 1. 0 की कन्या सुमंगला योजना की सफलता के मद्देनज़र भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में इस योजना में मिलने वाली आर्थिक मदद राशि को 25 हजार रुपये करने का वादा किया था। महिला कल्याण विभाग भाजपा के इस वादे को पूरा करने में लग गया है। इसके साथ ही निराश्रित महिला पेंशन पाने वाली महिलाओं को वित्तीय वर्ष 2022-23 के पहली तिमाही की पेंशन भी उनके बैंक अकाउंट में भेज दी जाएगी। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के नए मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम (MIS) पोर्टल का शुभारंभ भी 100 दिनों की कार्ययोजना में शामिल है। बता दें कि, यूपी के राजकीय संप्रेक्षण गृहों में क्षमता से ज्यादा बच्चे रह रहे हैं, इसलिए सरकार ने शाहजहांपुर में 50 बच्चों की क्षमता का नया संप्रेक्षण गृह बनवाया है। इसका उद्घाटन भी 100 दिनों की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके संचालन से राज्य में संप्रेक्षण गृहों की तादाद 27 हो जाएगी।
लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब बेटियों को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक मदद देगी। अभी इस योजना में बेटियों के जन्म लेने से लेकर उनकी पढ़ाई तक छह अलग-अलग चरणों में पंद्रह हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती रही है। भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए इस वादे को पूरा करने के लिए महिला कल्याण विभाग ने इसे एक सौ दिनों की कार्ययोजना में शामिल कर लिया है। जल्द ही विभाग मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजेगा। बता दें कि कन्या सुमंगला योजना बेटियों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। इस योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई के बीच छह अलग-अलग श्रेणियों में सरकार एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देती है। सीएम योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि लोग बालिकाओं के जन्म को एक उत्सव के तौर पर मनाएं। योगी सरकार एक. शून्य की कन्या सुमंगला योजना की सफलता के मद्देनज़र भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में इस योजना में मिलने वाली आर्थिक मदद राशि को पच्चीस हजार रुपये करने का वादा किया था। महिला कल्याण विभाग भाजपा के इस वादे को पूरा करने में लग गया है। इसके साथ ही निराश्रित महिला पेंशन पाने वाली महिलाओं को वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के पहली तिमाही की पेंशन भी उनके बैंक अकाउंट में भेज दी जाएगी। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के नए मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम पोर्टल का शुभारंभ भी एक सौ दिनों की कार्ययोजना में शामिल है। बता दें कि, यूपी के राजकीय संप्रेक्षण गृहों में क्षमता से ज्यादा बच्चे रह रहे हैं, इसलिए सरकार ने शाहजहांपुर में पचास बच्चों की क्षमता का नया संप्रेक्षण गृह बनवाया है। इसका उद्घाटन भी एक सौ दिनों की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके संचालन से राज्य में संप्रेक्षण गृहों की तादाद सत्ताईस हो जाएगी।
और ऑस्ट्रेलिया के बीच शुक्रवार को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में तीसरा टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज 1-1 की बराबरी पर खत्म हुई। ने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। तीनों ने बाएं हाथ से बल्लेबाजी का प्रयास किया और लंबे शॉट्स जमाने की कोशिश की। की नकल करने की कोशिश की। दोनों ने हूबहू वॉर्नर जैसे शॉट्स जमाए। फिर धोनी ने भी बाएं हाथ से बल्लेबाजी में अपनी महारत साबित करने की कोशिश की। फैंस को भले ही मैच का एक्शन देखने का मौका नहीं मिला, लेकिन इस तिकड़ी की बल्लेबाजी देखकर सभी रोमांचित हो उठे। हालांकि, ग्राउंडस्टाफ की पूरी कोशिश के बावजूद स्टेडियम की स्थिति में सुधार नहीं आया और करीब दो इंस्पेक्शन करने के बाद अंपायरों ने मैच रद्द कर दिया। भारत ने पहले टी20 9 विकेट से जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया ने दूसरा मुकाबला 8 विकेट से जीता। इससे पहले टीम इंडिया ने पांच मैचों की वन-डे सीरीज 4-1 से अपने नाम की थी।
और ऑस्ट्रेलिया के बीच शुक्रवार को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में तीसरा टीबीस अंतर्राष्ट्रीय मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। तीन मैचों की टीबीस इंटरनेशनल सीरीज एक-एक की बराबरी पर खत्म हुई। ने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। तीनों ने बाएं हाथ से बल्लेबाजी का प्रयास किया और लंबे शॉट्स जमाने की कोशिश की। की नकल करने की कोशिश की। दोनों ने हूबहू वॉर्नर जैसे शॉट्स जमाए। फिर धोनी ने भी बाएं हाथ से बल्लेबाजी में अपनी महारत साबित करने की कोशिश की। फैंस को भले ही मैच का एक्शन देखने का मौका नहीं मिला, लेकिन इस तिकड़ी की बल्लेबाजी देखकर सभी रोमांचित हो उठे। हालांकि, ग्राउंडस्टाफ की पूरी कोशिश के बावजूद स्टेडियम की स्थिति में सुधार नहीं आया और करीब दो इंस्पेक्शन करने के बाद अंपायरों ने मैच रद्द कर दिया। भारत ने पहले टीबीस नौ विकेट से जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया ने दूसरा मुकाबला आठ विकेट से जीता। इससे पहले टीम इंडिया ने पांच मैचों की वन-डे सीरीज चार-एक से अपने नाम की थी।
चंडीगढ़ - मेहर चंद महाजन डीएवी कालेज फॉर वूमन में 'प्लानिंग, प्रेपरेशन, एंड एग्जिक्यूशन ऑफ मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (मूक्स) पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कॉलेज की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) और मूक्स कमेटी ने संयुक्त रूप से इस कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य स्टाफ के सदस्यों को मूक्स के माध्यम से टीचिंग लर्निंग रिसोर्सेस से शिक्षण के लिए ई-कंटेंट बनाने का प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस अवसर पर डीएवी कालेज सेक्टर 10 के प्रिंसिपल डा. पवन शर्मा बतौर मुख्य अतिथि तथा एमसीएम डीएवी कालेज फॉर वूमन की प्रिंसिपल डा. निशा भार्गव बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यशाला में लगभग 30 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। आईसीटी द्वारा लाए गए शिक्षा के परिदृश्य में प्रवाह की चर्चा करते हुए डा. पवन शर्मा ने वर्तमान के सूचना युग में एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाने के महत्त्व पर बल दिया। यह दोहराते हुए कि शिक्षण में कुछ भी शिक्षक एवं उसकी भूमिका को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता, डा. शर्मा ने ने एक शिक्षक के रूप में एक ऐसे गुरु की भूमिका को फिर से परिभाषित करने का आह्वान किया जो मूल्य प्रणाली को बनाए रखते हुए नवाचार करता है और शिक्षण प्रणाली में नवीन प्रौद्योगिकी को भी इस्तेमाल करता है। अपने संबोधन में डा. निशा भार्गव ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती हुई सूचना एवं संप्रेषण प्रद्योगिकी (इंफार्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी आईसीटी) और इसके बढ़ते हुए उपयोग को ध्यान में रखते हुए, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सक्षम छात्रों को तैयार करने के लिए शिक्षाशास्त्र में प्रौद्योगिकी को शामिल करना अनिवार्य है। इस कार्यशाला की शुरुआत में कॉलेज की आईक्यूएसी कमेटी की चीफ को-ओर्डिनेटर डा. विभा शर्मा ने मूक्स कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
चंडीगढ़ - मेहर चंद महाजन डीएवी कालेज फॉर वूमन में 'प्लानिंग, प्रेपरेशन, एंड एग्जिक्यूशन ऑफ मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कॉलेज की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल और मूक्स कमेटी ने संयुक्त रूप से इस कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य स्टाफ के सदस्यों को मूक्स के माध्यम से टीचिंग लर्निंग रिसोर्सेस से शिक्षण के लिए ई-कंटेंट बनाने का प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस अवसर पर डीएवी कालेज सेक्टर दस के प्रिंसिपल डा. पवन शर्मा बतौर मुख्य अतिथि तथा एमसीएम डीएवी कालेज फॉर वूमन की प्रिंसिपल डा. निशा भार्गव बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यशाला में लगभग तीस से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। आईसीटी द्वारा लाए गए शिक्षा के परिदृश्य में प्रवाह की चर्चा करते हुए डा. पवन शर्मा ने वर्तमान के सूचना युग में एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाने के महत्त्व पर बल दिया। यह दोहराते हुए कि शिक्षण में कुछ भी शिक्षक एवं उसकी भूमिका को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता, डा. शर्मा ने ने एक शिक्षक के रूप में एक ऐसे गुरु की भूमिका को फिर से परिभाषित करने का आह्वान किया जो मूल्य प्रणाली को बनाए रखते हुए नवाचार करता है और शिक्षण प्रणाली में नवीन प्रौद्योगिकी को भी इस्तेमाल करता है। अपने संबोधन में डा. निशा भार्गव ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती हुई सूचना एवं संप्रेषण प्रद्योगिकी और इसके बढ़ते हुए उपयोग को ध्यान में रखते हुए, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सक्षम छात्रों को तैयार करने के लिए शिक्षाशास्त्र में प्रौद्योगिकी को शामिल करना अनिवार्य है। इस कार्यशाला की शुरुआत में कॉलेज की आईक्यूएसी कमेटी की चीफ को-ओर्डिनेटर डा. विभा शर्मा ने मूक्स कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
Gujarat News : सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले पाटीदार समाज की कुल देवी उमिया माता मंदिर में पूजन-अर्चन किया। इसके बाद उन्होंने यहां कार्यकर्ताओं से परिचय प्राप्त किया। बता दें कि गुजरात में पाटीदार समाज की भागीदारी 14 प्रतिशत है। वे यहां की 70 सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। उसी की एक बानगी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 8,62,767 नये आवास की मांग की थी। उनका यह प्रयास रंग लाया और केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सीएम योगी की मांग पर मुहर लगाते हुए 8,62,767 नये आवास को स्वीकृत करते हुए 10 हजार करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। सभी आवास मार्च 2024 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। Uttar Pradesh: इसके अलावा पेंटिंग्स की अहम बात ये भी है कि पीएम मोदी द्वारा लिए अहम फैसले जिनमें सर्जिकल स्ट्राइक, विमुद्रीकरण, जीएसटी को बाखूबी उकेरा गया है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के सामने आने वाले चैलेंजस और उनकी अचीवमेंट को बड़े ही शानदार तरीके से पेंटिंग्स में दिखाया गया है। वध टीम द्वारा मारीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन से भेंट के दौरान उन्हें रामजन्मभूमि का मॉडल, जय श्रीराम अंकित एक अंगवस्त्रम तथा यूपी की फिल्म पॉलिसी किताब भेंट की गई। हिंदू हाउस में आयोजित मारीशस के राष्ट्रीय दीवाली उत्सव में प्रधानमंत्री प्रविंद्र कुमार जगन्नाथ को भी मंदिर का मॉडल, अंगवस्त्रम और पुस्तक भेंट की गई। पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से वाराणसी की देव दीपावली साल दर साल भव्य से भव्यतम रूप में दिखाई देने लगी है। हाल ही में काशी को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की और से एक साल के लिए सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है। सीएम योगी ने कहा कि यहां के किसान खेती बाड़ी में थोड़े और प्रयास कर लें तो इस आमदनी को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। यहां पर थोड़े से प्रयास और अंतरदेशीय जलमार्ग सुविधा के उपयोग से इसके सफल परिणाम देखने को मिलेंगे। सीएम ने कहा कि किसी शहर का पर्यटन पूरी इकोनॉमी को बल देता है। वाराणसी में सावन महीने में बाबा विश्वनाथ धाम के एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे वहां पर होटल इंडस्ट्री से लेकर टैक्सी, दुकानदार, रेस्टोरेंट, पंडो आदि को रोजगार मिला। Uttar Pradesh News: गौरतलब है कि मंत्रिपरिषद ने गुरुवार को आईटी विभाग से संबंधित दो प्रस्तावों पर मुहर लगाई है। ग्लोबल इनवेस्टर समिट से पहले सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि विभाग अपनी नीतियों में लक्ष्य के अनुरूप बदलाव करें, ताकि न सिर्फ वो अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर हों बल्कि निवेशकों के अनुरूप भी हों। इसी के तहत यह फैसला लिया गया है। प्रदेश कैबिनेट ने हाल ही में अपने नई जेल मैन्युअल को अनुमोदित किया है। जेल सुधारों की ओर यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा। हमें कारागारों को सुधार के बेहतर केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस प्रयास करना होगा। "ओपन जेल" और "हाई सिक्योरिटी जेल" इस संबंध में उपयोगी हो सकते हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मध्यप्रदेश के रीवा में हुई बस दुर्घटना में मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक मदद का एलान किया है। योगी ने मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख और घायलों को 50-50000 रुपए की मदद देने की बात कही है। योगी ने घटना को बहुत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों से संवेदना जताई है। UP News: दीपोत्सव के सभी सेक्टरों में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सफाई नायक के साथ वे आवंटित सेक्टरों में निरंतर भ्रमण कर हकीकत परखेंगे और मुश्तैद रहेंगे। साथ ही संबंधित सफाई नायकों को सूचित कर तत्काल कमियों को दुरुस्त भी कराएंगे।
Gujarat News : सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले पाटीदार समाज की कुल देवी उमिया माता मंदिर में पूजन-अर्चन किया। इसके बाद उन्होंने यहां कार्यकर्ताओं से परिचय प्राप्त किया। बता दें कि गुजरात में पाटीदार समाज की भागीदारी चौदह प्रतिशत है। वे यहां की सत्तर सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। उसी की एक बानगी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आठ,बासठ,सात सौ सरसठ नये आवास की मांग की थी। उनका यह प्रयास रंग लाया और केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सीएम योगी की मांग पर मुहर लगाते हुए आठ,बासठ,सात सौ सरसठ नये आवास को स्वीकृत करते हुए दस हजार करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। सभी आवास मार्च दो हज़ार चौबीस तक बनकर तैयार हो जाएंगे। Uttar Pradesh: इसके अलावा पेंटिंग्स की अहम बात ये भी है कि पीएम मोदी द्वारा लिए अहम फैसले जिनमें सर्जिकल स्ट्राइक, विमुद्रीकरण, जीएसटी को बाखूबी उकेरा गया है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के सामने आने वाले चैलेंजस और उनकी अचीवमेंट को बड़े ही शानदार तरीके से पेंटिंग्स में दिखाया गया है। वध टीम द्वारा मारीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन से भेंट के दौरान उन्हें रामजन्मभूमि का मॉडल, जय श्रीराम अंकित एक अंगवस्त्रम तथा यूपी की फिल्म पॉलिसी किताब भेंट की गई। हिंदू हाउस में आयोजित मारीशस के राष्ट्रीय दीवाली उत्सव में प्रधानमंत्री प्रविंद्र कुमार जगन्नाथ को भी मंदिर का मॉडल, अंगवस्त्रम और पुस्तक भेंट की गई। पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से वाराणसी की देव दीपावली साल दर साल भव्य से भव्यतम रूप में दिखाई देने लगी है। हाल ही में काशी को शंघाई सहयोग संगठन की और से एक साल के लिए सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी घोषित किया गया है। सीएम योगी ने कहा कि यहां के किसान खेती बाड़ी में थोड़े और प्रयास कर लें तो इस आमदनी को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। यहां पर थोड़े से प्रयास और अंतरदेशीय जलमार्ग सुविधा के उपयोग से इसके सफल परिणाम देखने को मिलेंगे। सीएम ने कहा कि किसी शहर का पर्यटन पूरी इकोनॉमी को बल देता है। वाराणसी में सावन महीने में बाबा विश्वनाथ धाम के एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे वहां पर होटल इंडस्ट्री से लेकर टैक्सी, दुकानदार, रेस्टोरेंट, पंडो आदि को रोजगार मिला। Uttar Pradesh News: गौरतलब है कि मंत्रिपरिषद ने गुरुवार को आईटी विभाग से संबंधित दो प्रस्तावों पर मुहर लगाई है। ग्लोबल इनवेस्टर समिट से पहले सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि विभाग अपनी नीतियों में लक्ष्य के अनुरूप बदलाव करें, ताकि न सिर्फ वो अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर हों बल्कि निवेशकों के अनुरूप भी हों। इसी के तहत यह फैसला लिया गया है। प्रदेश कैबिनेट ने हाल ही में अपने नई जेल मैन्युअल को अनुमोदित किया है। जेल सुधारों की ओर यह महत्वपूर्ण प्रयास होगा। हमें कारागारों को सुधार के बेहतर केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस प्रयास करना होगा। "ओपन जेल" और "हाई सिक्योरिटी जेल" इस संबंध में उपयोगी हो सकते हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मध्यप्रदेश के रीवा में हुई बस दुर्घटना में मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक मदद का एलान किया है। योगी ने मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख और घायलों को पचास-पचास हज़ार रुपयापए की मदद देने की बात कही है। योगी ने घटना को बहुत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों से संवेदना जताई है। UP News: दीपोत्सव के सभी सेक्टरों में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सफाई नायक के साथ वे आवंटित सेक्टरों में निरंतर भ्रमण कर हकीकत परखेंगे और मुश्तैद रहेंगे। साथ ही संबंधित सफाई नायकों को सूचित कर तत्काल कमियों को दुरुस्त भी कराएंगे।
गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर में चार महीने पहले बाड़े के भीतर वह घायल हो गए शेर की घर वापसी हुई है. जब शेर घायल हुआ था तो इसकी जानकारी दो दिन बाद प्रबंधन को हो सकी थी. उसके तलवे में दो इंच का घाव हो गया था. जिसके चलते चलना तो दूर खड़े होने में भी उसे दिक्कत आ रही थी. ऐसे में उसे इलाज के लिए बाड़े से हटा दिया गया था. चार महीने बाद एक बार फिर से चिड़ियाघर का बब्बर शेर पटौदी लोगों के बीच में होगा. अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और घूम-टहल सकता है. दर्शकों द्वारा फेंके गए शीशे के टुकड़े से पटौदी घायल हो गया था. चिड़ियाघर में ही उसका इलाज चल रहा था. इस संबंध में चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि घायल होने से शेर को बाड़े से हटा दिया गया था. पशु अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. इस सप्ताह सोमवार को भी चिड़ियाघर खुला रहेगा. घूमने आने वाले दर्शक लुत्फ ले सकेंगे. बुधवार को इस बार साप्ताहिक बंदी रहेगी. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि घूमने आने वाले लोग बाड़े के अंदर किसी प्रकार का कोई सामान न फेंके.
गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर में चार महीने पहले बाड़े के भीतर वह घायल हो गए शेर की घर वापसी हुई है. जब शेर घायल हुआ था तो इसकी जानकारी दो दिन बाद प्रबंधन को हो सकी थी. उसके तलवे में दो इंच का घाव हो गया था. जिसके चलते चलना तो दूर खड़े होने में भी उसे दिक्कत आ रही थी. ऐसे में उसे इलाज के लिए बाड़े से हटा दिया गया था. चार महीने बाद एक बार फिर से चिड़ियाघर का बब्बर शेर पटौदी लोगों के बीच में होगा. अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और घूम-टहल सकता है. दर्शकों द्वारा फेंके गए शीशे के टुकड़े से पटौदी घायल हो गया था. चिड़ियाघर में ही उसका इलाज चल रहा था. इस संबंध में चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि घायल होने से शेर को बाड़े से हटा दिया गया था. पशु अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. इस सप्ताह सोमवार को भी चिड़ियाघर खुला रहेगा. घूमने आने वाले दर्शक लुत्फ ले सकेंगे. बुधवार को इस बार साप्ताहिक बंदी रहेगी. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि घूमने आने वाले लोग बाड़े के अंदर किसी प्रकार का कोई सामान न फेंके.
बिलासपुर पुलिस ने बलौदाबाजार के युवक को सोने के गहनों के साथ गिरफ्तार किया है। उसने सोने की मंगलसूत्र, चेन, झूमका सहित अन्य जेवरों को किसी महिला यात्री से पार किया था, जिसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में निकला था। मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र का है। टीआई बृजलाल भारद्वाज ने बताया कि होली पर्व के दौरान पुलिस संदेहियों की सघन जांच कर रही थी। इस दौरान संदिग्ध रूप से घूम रहे बदमाशों की धरपकड़ भी की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ग्राम मानिकचौरी में एक युवक सोने की मंगलसूत्र वगैरह रखा है, जिसे बेचने के लिए ग्राहक ढूंढ रहा है। खबर मिलते पुलिस गांव पहुंची और घेराबंदी कर युवक को दबोच लिया। आरोपी युवक से पुलिस ने गहनों के बारे में पूछताछ की, तब उसने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। वह तरह-तरह की बहानेबाजी कर जरूरत के लिए गहनों को बेचने की बात कहता रहा। जब जेवरों के बिल की मांग की, तब वह गोलमोल जवाब देने लगा। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उसने चोरी का राज खोल दिया। इस दौरान पुलिस ने पूछताछ में उसने बताया कि वह बलौदाबाजार के भैंसापसरा के देवारपारा का रहने वाला जयकिशन देवार (36) पिता संजय देवार है। उसने कुछ दिन पहले ट्रेन में महिला यात्री के बैग को चोरी किया था, जिसमें से उसे मंगलसूत्र, चेन वगैरह मिला। इन गहनों को बेचने के लिए वह मानिकचौरी आया था। पुलिस के अनुसार गहनों की कीमत करीब चार लाख रुपए है। चोरी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिलासपुर पुलिस ने बलौदाबाजार के युवक को सोने के गहनों के साथ गिरफ्तार किया है। उसने सोने की मंगलसूत्र, चेन, झूमका सहित अन्य जेवरों को किसी महिला यात्री से पार किया था, जिसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में निकला था। मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र का है। टीआई बृजलाल भारद्वाज ने बताया कि होली पर्व के दौरान पुलिस संदेहियों की सघन जांच कर रही थी। इस दौरान संदिग्ध रूप से घूम रहे बदमाशों की धरपकड़ भी की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ग्राम मानिकचौरी में एक युवक सोने की मंगलसूत्र वगैरह रखा है, जिसे बेचने के लिए ग्राहक ढूंढ रहा है। खबर मिलते पुलिस गांव पहुंची और घेराबंदी कर युवक को दबोच लिया। आरोपी युवक से पुलिस ने गहनों के बारे में पूछताछ की, तब उसने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। वह तरह-तरह की बहानेबाजी कर जरूरत के लिए गहनों को बेचने की बात कहता रहा। जब जेवरों के बिल की मांग की, तब वह गोलमोल जवाब देने लगा। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उसने चोरी का राज खोल दिया। इस दौरान पुलिस ने पूछताछ में उसने बताया कि वह बलौदाबाजार के भैंसापसरा के देवारपारा का रहने वाला जयकिशन देवार पिता संजय देवार है। उसने कुछ दिन पहले ट्रेन में महिला यात्री के बैग को चोरी किया था, जिसमें से उसे मंगलसूत्र, चेन वगैरह मिला। इन गहनों को बेचने के लिए वह मानिकचौरी आया था। पुलिस के अनुसार गहनों की कीमत करीब चार लाख रुपए है। चोरी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता का आह्वान किया कि इस बार 35 से ज्यादा सीटें देकर मोदी जी को फिर प्रधानमंत्री बनाइए। इसके बाद हम देखते हैं कि बंगाल में रामनवमी के जुलूस में कौन हमला करता है। बीरभूमः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पहुंचे। जहां उन्होने एक जनसभा को संबोधित करते हुए बंगाल सरकार की नाकामियों पर करारा प्रहार किया। इसके साथ ही उन्होने मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया। उन्होने कहा कि बंगाल की मां-माटी-मानुष की सरकार अत्याचार, भ्रष्टाचार व तानाशाह सरकार है। अमित शाह ने कहा कि अगर बंगाल में लोकतंत्र स्थापित करना है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 35 सीटें बंगाल से जिताएं। अमित शाह बांग्ला नव वर्ष पर बीरभूम जिले के सिउड़ी में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जहा उनको सुनने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जनसभा में गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंबेडकर के पांच तीर्थ स्थान का निर्माण कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होने कहा कि पीएम मोदी नेतृत्व में बीजेपी ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाने का काम किया है। उन्होने जनता का आह्वान किया कि इस बार 35 से ज्यादा सीटें देकर मोदी जी को फिर प्रधानमंत्री बनाइए। इसके बाद हम देखते हैं कि बंगाल में रामनवमी के जुलूस में कौन हमला करता है। उन्होने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल की सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आप सभी का समर्थन चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता का आह्वान किया कि इस बार पैंतीस से ज्यादा सीटें देकर मोदी जी को फिर प्रधानमंत्री बनाइए। इसके बाद हम देखते हैं कि बंगाल में रामनवमी के जुलूस में कौन हमला करता है। बीरभूमः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पहुंचे। जहां उन्होने एक जनसभा को संबोधित करते हुए बंगाल सरकार की नाकामियों पर करारा प्रहार किया। इसके साथ ही उन्होने मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया। उन्होने कहा कि बंगाल की मां-माटी-मानुष की सरकार अत्याचार, भ्रष्टाचार व तानाशाह सरकार है। अमित शाह ने कहा कि अगर बंगाल में लोकतंत्र स्थापित करना है तो दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पैंतीस सीटें बंगाल से जिताएं। अमित शाह बांग्ला नव वर्ष पर बीरभूम जिले के सिउड़ी में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जहा उनको सुनने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जनसभा में गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंबेडकर के पांच तीर्थ स्थान का निर्माण कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होने कहा कि पीएम मोदी नेतृत्व में बीजेपी ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाने का काम किया है। उन्होने जनता का आह्वान किया कि इस बार पैंतीस से ज्यादा सीटें देकर मोदी जी को फिर प्रधानमंत्री बनाइए। इसके बाद हम देखते हैं कि बंगाल में रामनवमी के जुलूस में कौन हमला करता है। उन्होने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल की सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आप सभी का समर्थन चाहिए।
देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में दो दिवसीय किसान रैली में भाग लेने वाले महाराष्ट्र के कोल्हापुर निवासी किरण शांतप्पा घोरवडे (52) की शनिवार (1 दिसंबर, 2018) को अंबेडकर भवन की इमारत से गिरने से मौत हो गई। घोरवडे को कोल्हापुर जिला कोऑपरेटिव बैंक और एक क्रेडिट सोसायटी को करीब 6 लाख रुपए कर्ज की अदायगी करने थी। पोस्टमार्टम के बाद किसान का शव स्वाभिमानी शेतकरी संगठन (SSS) को सौंप दिया गया है। SSS एक किसान संगठन है जो एमपी राजू शेट्टी के नेतृत्व में काम करता है। घोरवडे इस संगठन से करीब 15 सालों तक जुड़े रहे। शव किसान के गांव पहुंचने पर स्थानीय निवासियों ने बताया कि घोरवडे साल 2002 से किसान राजनीति में सक्रिय थे और एसएसएस के पैदल सैनिक थे, जिन्होंने अच्छी गन्ना कीमतों के लिए कई आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। एसएसएस कोल्हापुर से करीब 600 किसानों को लेकर दिल्ली पहुंचा था। बता दें कि राजनीतिक भाषण, घंटों चले मार्च और नारेबाजी के बाद घोरवडे शुक्रवार सशाम को अंबेडकर भवन की तीसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर 29 में लौट आए। शनिवार सुबह करीब 3:15 बजे पुलिस को घटना की जानकारी मिली, जिसके तुरंत बाद उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया। हालंकि डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि लगता है कि वह गलती से तीसरे मंजिल से गिर गए। इसमें गड़बड़ी की आशंका नहीं है। गौरतलब है कि मृतक घोरवडे के पास चार बीघा जमीन थी, जिसमें से दो बीघा जमीन हमेशा गन्ने की खेती के लिए आरक्षित रही। जमीन के अन्य हिस्से पर उड़द, गेहूं और सोयाबीन की फसल उगाया करता। मगर इस साल कीड़ों और बेमौसमी बारिश की वजह से उड़द की पूरी फसल बर्बाद हो गई। मृतक के पड़ोसी आदिनाथ हिंगमारे कहते हैं, 'घोरवडे को जब यकीन हो गया कि जिस लाभ के लिए उसने फसल बोई उसमें मुनाफा नहीं, तो उसने फसल उखाड़कर फेंक दी और गन्ने की खेती का विकल्प चुना। मगर उसका नुकसान और कर्ज खत्म होता नजर नहीं आ रहा था। क्योंकि महाराष्ट्र के कई हिस्से में पानी क वजह से घोरवडे भी खासा परेशान। ' हिंगमारे ने यह बात इंडियन एक्सप्रेस को बताई है। हिंगमारे ने आगे बताया कि घोरवडे करीब एक दशक तक भुगतान ना कीए गई बकाया राशि के बारे में खासा चिंतित था। कोल्हापुर जिला कोऑपरेटिव बैंक तीन लाख रुपए बकाया था, जहां से उसने 1. 2 लाख रुपए का कर्ज लिया। इसके अलावा अपनी जमीन गिरवी रखकर तीन लाख रुपए साहू कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी से लिए। उसके पास यही एक मात्र तरीका से जिससे वह पूंजी जुटा सकता था।
देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में दो दिवसीय किसान रैली में भाग लेने वाले महाराष्ट्र के कोल्हापुर निवासी किरण शांतप्पा घोरवडे की शनिवार को अंबेडकर भवन की इमारत से गिरने से मौत हो गई। घोरवडे को कोल्हापुर जिला कोऑपरेटिव बैंक और एक क्रेडिट सोसायटी को करीब छः लाख रुपए कर्ज की अदायगी करने थी। पोस्टमार्टम के बाद किसान का शव स्वाभिमानी शेतकरी संगठन को सौंप दिया गया है। SSS एक किसान संगठन है जो एमपी राजू शेट्टी के नेतृत्व में काम करता है। घोरवडे इस संगठन से करीब पंद्रह सालों तक जुड़े रहे। शव किसान के गांव पहुंचने पर स्थानीय निवासियों ने बताया कि घोरवडे साल दो हज़ार दो से किसान राजनीति में सक्रिय थे और एसएसएस के पैदल सैनिक थे, जिन्होंने अच्छी गन्ना कीमतों के लिए कई आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। एसएसएस कोल्हापुर से करीब छः सौ किसानों को लेकर दिल्ली पहुंचा था। बता दें कि राजनीतिक भाषण, घंटों चले मार्च और नारेबाजी के बाद घोरवडे शुक्रवार सशाम को अंबेडकर भवन की तीसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर उनतीस में लौट आए। शनिवार सुबह करीब तीन:पंद्रह बजे पुलिस को घटना की जानकारी मिली, जिसके तुरंत बाद उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया। हालंकि डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि लगता है कि वह गलती से तीसरे मंजिल से गिर गए। इसमें गड़बड़ी की आशंका नहीं है। गौरतलब है कि मृतक घोरवडे के पास चार बीघा जमीन थी, जिसमें से दो बीघा जमीन हमेशा गन्ने की खेती के लिए आरक्षित रही। जमीन के अन्य हिस्से पर उड़द, गेहूं और सोयाबीन की फसल उगाया करता। मगर इस साल कीड़ों और बेमौसमी बारिश की वजह से उड़द की पूरी फसल बर्बाद हो गई। मृतक के पड़ोसी आदिनाथ हिंगमारे कहते हैं, 'घोरवडे को जब यकीन हो गया कि जिस लाभ के लिए उसने फसल बोई उसमें मुनाफा नहीं, तो उसने फसल उखाड़कर फेंक दी और गन्ने की खेती का विकल्प चुना। मगर उसका नुकसान और कर्ज खत्म होता नजर नहीं आ रहा था। क्योंकि महाराष्ट्र के कई हिस्से में पानी क वजह से घोरवडे भी खासा परेशान। ' हिंगमारे ने यह बात इंडियन एक्सप्रेस को बताई है। हिंगमारे ने आगे बताया कि घोरवडे करीब एक दशक तक भुगतान ना कीए गई बकाया राशि के बारे में खासा चिंतित था। कोल्हापुर जिला कोऑपरेटिव बैंक तीन लाख रुपए बकाया था, जहां से उसने एक. दो लाख रुपए का कर्ज लिया। इसके अलावा अपनी जमीन गिरवी रखकर तीन लाख रुपए साहू कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी से लिए। उसके पास यही एक मात्र तरीका से जिससे वह पूंजी जुटा सकता था।
Weight Loss Drink: वजन घटाना एक चुनौती होता है। इस चुनौती से हर कोई पार नहीं पा पाता। अगर आप मोटापे से परेशान हैं और वजन घटाना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डिनर में कुछ भी गड़बड़ खाना आपके वजन घटाने के टारगेट में बाधा डाल सकता है। जानिए वजन घटाने के लिए किन चीजों का सेवन करना चाहिए। वनज बढ़ने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। क्योंकि भागदौड़ भरी इस जिंदगी में उम्र बढ़ने के साथ वजन बढ़ना पूरी तरह से सामान्य है। उम्र बढ़ने से फिजिकल एक्टिविटीज घटने लगती है, आपका दौड़ना, खेलना-कूदना भी लगभग बंद हो जाता है। उल्टा सीधा खानपान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने से आपका वजन बढ़ने लगता है। डाइट एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि वजन कम करने केल लिए आप कैलोरी से भरपूर मिठाइयों और तले-भुने फूड्स से दूर रह सकते हैं, लेकिन आपने देखा होगा कि कई बार खुद पर कंट्रोल नहीं हो पाता। ऐसे में आइए आपको कुछ ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में बताते हैं, जिनका सेवन रात के वक्त करने से वजन घटाने में हेल्प मिलती है। हल्दी वाला दूध वजन घटाने में आपकी मदद कर सकता है। इससे सर्दी, खांसी और अन्य बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। हल्दी एंटीऑक्सिडेंट के साथ भरी हुई है, जो शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, इसमें कैल्शियम और प्रोटीन भी होता है, जो अच्छी नींद और वजन घटाने को बढ़ावा देता है। दालचीनी की मदद से भी आप वनज कम कर सकते हैं। दरअसल, दालचीनी में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो इसे एक संपूर्ण डिटॉक्स ड्रिंक बनाता है। खास बात ये है कि दालचीनी आपको फैट बर्न करने में मदद करता है, अगर आपको इसका स्वाद पसंद नहीं है, तो आप एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। वजन घटाने में चुकंदर और नींबू भी आपकी मदद कर सकता है। इन दोनों चीजों से बना ड्रिंक हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है। यह आपके लिए बॉडी डिटॉक्स ड्रिंक्स की तरह काम करता है, आप सोने से पहले इस ड्रिंक का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है, लिहाजा वजन घटाने में मदद मिलती है। मेथी दाने भी वजन घटाते हैं। खास बात ये है कि भीगी हुई मेथी के दाने ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए बहुत अच्छे हैं। आमतौर पर इसका सेवन सुबह के समय में किया जाता है, लेकिन रात में भी इसका सेवन किया जा सकता है। मेथी के बीज शरीर में गर्मी पैदा करते हैं और वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। Disclaimer- खबर में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हालांकि इसकी नैतिक जिम्मेदारी न्यूज 24 हिन्दी की नहीं है। आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से जरूर संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
Weight Loss Drink: वजन घटाना एक चुनौती होता है। इस चुनौती से हर कोई पार नहीं पा पाता। अगर आप मोटापे से परेशान हैं और वजन घटाना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डिनर में कुछ भी गड़बड़ खाना आपके वजन घटाने के टारगेट में बाधा डाल सकता है। जानिए वजन घटाने के लिए किन चीजों का सेवन करना चाहिए। वनज बढ़ने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। क्योंकि भागदौड़ भरी इस जिंदगी में उम्र बढ़ने के साथ वजन बढ़ना पूरी तरह से सामान्य है। उम्र बढ़ने से फिजिकल एक्टिविटीज घटने लगती है, आपका दौड़ना, खेलना-कूदना भी लगभग बंद हो जाता है। उल्टा सीधा खानपान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने से आपका वजन बढ़ने लगता है। डाइट एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि वजन कम करने केल लिए आप कैलोरी से भरपूर मिठाइयों और तले-भुने फूड्स से दूर रह सकते हैं, लेकिन आपने देखा होगा कि कई बार खुद पर कंट्रोल नहीं हो पाता। ऐसे में आइए आपको कुछ ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में बताते हैं, जिनका सेवन रात के वक्त करने से वजन घटाने में हेल्प मिलती है। हल्दी वाला दूध वजन घटाने में आपकी मदद कर सकता है। इससे सर्दी, खांसी और अन्य बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। हल्दी एंटीऑक्सिडेंट के साथ भरी हुई है, जो शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, इसमें कैल्शियम और प्रोटीन भी होता है, जो अच्छी नींद और वजन घटाने को बढ़ावा देता है। दालचीनी की मदद से भी आप वनज कम कर सकते हैं। दरअसल, दालचीनी में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो इसे एक संपूर्ण डिटॉक्स ड्रिंक बनाता है। खास बात ये है कि दालचीनी आपको फैट बर्न करने में मदद करता है, अगर आपको इसका स्वाद पसंद नहीं है, तो आप एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। वजन घटाने में चुकंदर और नींबू भी आपकी मदद कर सकता है। इन दोनों चीजों से बना ड्रिंक हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है। यह आपके लिए बॉडी डिटॉक्स ड्रिंक्स की तरह काम करता है, आप सोने से पहले इस ड्रिंक का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है, लिहाजा वजन घटाने में मदद मिलती है। मेथी दाने भी वजन घटाते हैं। खास बात ये है कि भीगी हुई मेथी के दाने ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए बहुत अच्छे हैं। आमतौर पर इसका सेवन सुबह के समय में किया जाता है, लेकिन रात में भी इसका सेवन किया जा सकता है। मेथी के बीज शरीर में गर्मी पैदा करते हैं और वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। Disclaimer- खबर में दी गई जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है। हालांकि इसकी नैतिक जिम्मेदारी न्यूज चौबीस हिन्दी की नहीं है। आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से जरूर संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा (पंजाब) पुलिस के अनुसार, किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था। वह घर के पास मीट की एक दुकान से मीट काटने वाला तेजधार हथियार लाया था। दुश्मनी निकालने के लिए उसने वीडियो वायरल कर कुछ लोगों के नाम लिए। मोगा के बधनी कलां में इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी कुलविंदर किंदा के घर पर हमले के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था और इसके बाद वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था। कुलविंदर अपनी मां के चरित्र पर शक करता था, इसलिए उसने इस घटना को अंजाम दिया। गुरुवार को मोगा के बधनी कलां में कबड्डी खिलाड़ी कुलविंदर किंदा ने सोशल मीडिया पर अपनी एक वीडियो वायरल कर कुछ लोगों पर उनके घर पर हमला करने और उनकी मां को बुरी तरह से घायल करने के आरोप लगाए थे। अब इस मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था। वह घर के पास मीट की एक दुकान से मीट काटने वाला तेजधार हथियार लाया था। दुश्मनी निकालने के लिए उसने वीडियो वायरल कर कुछ लोगों के नाम लिए। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी खंगाले तो ऐसा कुछ सामने नहीं आया कि उनके घर पर किसी ने हमला किया हो। पुलिस को कुलविंदर खुद अपने घर में भाग कर दाखिल होता दिखाई दिया। कुलविंदर ने वीडियो वायरल कर जिन लोगों के नाम लिए थे, वो भी उसी रात पुलिस के पास पहुंचे और बताया कि वे घर पर ही थे। पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि कुलविंदर अपनी मां के चरित्र पर शक करता था जिसके चलते वह अपने घर के पास मीट की एक दुकान से कापा लाया और अपनी मां पर हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में कुलविंदर किंदा को गिरफ्तार कर लिया। पहले पुलिस ने कुलविंदर की मां के बयान पर दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर भी लिया था लेकिन पुलिस ने इस मामले को सुलझाते हुए किंदा को गिरफ्तार कर लिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
संवाद न्यूज एजेंसी, मोगा पुलिस के अनुसार, किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था। वह घर के पास मीट की एक दुकान से मीट काटने वाला तेजधार हथियार लाया था। दुश्मनी निकालने के लिए उसने वीडियो वायरल कर कुछ लोगों के नाम लिए। मोगा के बधनी कलां में इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी कुलविंदर किंदा के घर पर हमले के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था और इसके बाद वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था। कुलविंदर अपनी मां के चरित्र पर शक करता था, इसलिए उसने इस घटना को अंजाम दिया। गुरुवार को मोगा के बधनी कलां में कबड्डी खिलाड़ी कुलविंदर किंदा ने सोशल मीडिया पर अपनी एक वीडियो वायरल कर कुछ लोगों पर उनके घर पर हमला करने और उनकी मां को बुरी तरह से घायल करने के आरोप लगाए थे। अब इस मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि किंदा ने खुद ही अपनी मां पर हमला किया था। वह घर के पास मीट की एक दुकान से मीट काटने वाला तेजधार हथियार लाया था। दुश्मनी निकालने के लिए उसने वीडियो वायरल कर कुछ लोगों के नाम लिए। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी खंगाले तो ऐसा कुछ सामने नहीं आया कि उनके घर पर किसी ने हमला किया हो। पुलिस को कुलविंदर खुद अपने घर में भाग कर दाखिल होता दिखाई दिया। कुलविंदर ने वीडियो वायरल कर जिन लोगों के नाम लिए थे, वो भी उसी रात पुलिस के पास पहुंचे और बताया कि वे घर पर ही थे। पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि कुलविंदर अपनी मां के चरित्र पर शक करता था जिसके चलते वह अपने घर के पास मीट की एक दुकान से कापा लाया और अपनी मां पर हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में कुलविंदर किंदा को गिरफ्तार कर लिया। पहले पुलिस ने कुलविंदर की मां के बयान पर दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर भी लिया था लेकिन पुलिस ने इस मामले को सुलझाते हुए किंदा को गिरफ्तार कर लिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
आइजोलः मिजोरम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) का कहर जारी है, क्योंकि खतरनाक स्वाइन बीमारी ने वर्तमान में छह जिलों के 31 गांवों और इलाकों को प्रभावित किया है। रविवार को 25 मौतों के साथ, फरवरी में स्वाइन रोग के ताजा प्रकोप के बाद से अब तक 1,983 सूअर मारे जा चुके हैं। इसी अवधि के दौरान रविवार को 111 सहित कम से कम 1,201 सूअर मारे गए। इसके अलावा रविवार को एएसएफ से संक्रमित 34 सूअरों की भी मौत हो गई है। उनकी वास्तविक मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। फरवरी से अब तक संदिग्ध एएसएफ की चपेट में आने से अब तक 473 सुअरों की मौत हो चुकी है। पिछले साल एएसएफ के प्रकोप के कारण 33,417 सूअरों की मौत हो गई है, जिससे 60. 82 करोड़ रुपये का मौद्रिक नुकसान हुआ है। उसी वर्ष एएसएफ के आगे प्रसार को रोकने के लिए कुल 10,910 सूअर भी मारे गए हैं। अत्यधिक संक्रामक सुअर रोग, जिसे पिछले साल मार्च में राज्य में पहली बार रिपोर्ट किया गया था, को शुरू में कमोबेश माना गया था क्योंकि दिसंबर के बाद से प्रकोप के कारण सुअर की मौत नहीं हुई थी।
आइजोलः मिजोरम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर जारी है, क्योंकि खतरनाक स्वाइन बीमारी ने वर्तमान में छह जिलों के इकतीस गांवों और इलाकों को प्रभावित किया है। रविवार को पच्चीस मौतों के साथ, फरवरी में स्वाइन रोग के ताजा प्रकोप के बाद से अब तक एक,नौ सौ तिरासी सूअर मारे जा चुके हैं। इसी अवधि के दौरान रविवार को एक सौ ग्यारह सहित कम से कम एक,दो सौ एक सूअर मारे गए। इसके अलावा रविवार को एएसएफ से संक्रमित चौंतीस सूअरों की भी मौत हो गई है। उनकी वास्तविक मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। फरवरी से अब तक संदिग्ध एएसएफ की चपेट में आने से अब तक चार सौ तिहत्तर सुअरों की मौत हो चुकी है। पिछले साल एएसएफ के प्रकोप के कारण तैंतीस,चार सौ सत्रह सूअरों की मौत हो गई है, जिससे साठ. बयासी करोड़ रुपये का मौद्रिक नुकसान हुआ है। उसी वर्ष एएसएफ के आगे प्रसार को रोकने के लिए कुल दस,नौ सौ दस सूअर भी मारे गए हैं। अत्यधिक संक्रामक सुअर रोग, जिसे पिछले साल मार्च में राज्य में पहली बार रिपोर्ट किया गया था, को शुरू में कमोबेश माना गया था क्योंकि दिसंबर के बाद से प्रकोप के कारण सुअर की मौत नहीं हुई थी।
गुरुग्राम. हरियाणा (Haryana) के गुरुग्राम (Gurugram) जिले में पति-पत्नी के छोटे मोटे झगड़े की कीमत पटौदी की रहने वाली सरोज को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. दरअसल, मंगलवार देर शाम पुलिस कंट्रोल रूम (PCC) को सूचना मिली थी कि दौलताबाद कुंदी गांव में 26 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. सूचना मिलते ही गुरुग्राम पुलिस (Gurugram Police) जब मौके पर पहुंची तो प्राथमिक जांच में महिला के सिर में गंभीर चोट पाई गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों ने ससुराल वालों पर सरोज की दहेज (Dowry) के लिए हत्या (Murder) करने का गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी है. परिजनों का यह भी कहना है कि सरोज को दूसरी बेटी हुई थी, जिसके बाद से घर में तनाव व झगड़े और ज्यादा होने लगे थे. संबंधित मामले में गुरुग्राम पुलिस ने महिला के पति सुनील को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पति निजी कंपनी में काम करता है. मंगलवार देर शाम किसी बात को लेकर उसका अपनी पत्नी से विवाद हो गया था, जिसमें दोनों में हाथापाई भी हुई. पुलिस का कहना है कि शव की हालत देख ऐसा लग रहा है कि झगड़े में महिला के सिर को दीवार में मारा गया हो, जिससे उसकी मौत हो गई. फिलहाल, पति-पत्नी में झगड़े और महिला के मौत के कारणों को लेकर पुलिस पति और ससुराल वालों से पूछताछ कर रही है. ऐसे में पुलिस की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट काफी अहमियत रखती है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का पता चल सकेगा कि सरोज की मौत दीवार से सिर टकराने की वजह से हुई है या मौत की वजह कुछ और है. .
गुरुग्राम. हरियाणा के गुरुग्राम जिले में पति-पत्नी के छोटे मोटे झगड़े की कीमत पटौदी की रहने वाली सरोज को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. दरअसल, मंगलवार देर शाम पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि दौलताबाद कुंदी गांव में छब्बीस वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. सूचना मिलते ही गुरुग्राम पुलिस जब मौके पर पहुंची तो प्राथमिक जांच में महिला के सिर में गंभीर चोट पाई गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों ने ससुराल वालों पर सरोज की दहेज के लिए हत्या करने का गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी है. परिजनों का यह भी कहना है कि सरोज को दूसरी बेटी हुई थी, जिसके बाद से घर में तनाव व झगड़े और ज्यादा होने लगे थे. संबंधित मामले में गुरुग्राम पुलिस ने महिला के पति सुनील को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पति निजी कंपनी में काम करता है. मंगलवार देर शाम किसी बात को लेकर उसका अपनी पत्नी से विवाद हो गया था, जिसमें दोनों में हाथापाई भी हुई. पुलिस का कहना है कि शव की हालत देख ऐसा लग रहा है कि झगड़े में महिला के सिर को दीवार में मारा गया हो, जिससे उसकी मौत हो गई. फिलहाल, पति-पत्नी में झगड़े और महिला के मौत के कारणों को लेकर पुलिस पति और ससुराल वालों से पूछताछ कर रही है. ऐसे में पुलिस की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट काफी अहमियत रखती है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का पता चल सकेगा कि सरोज की मौत दीवार से सिर टकराने की वजह से हुई है या मौत की वजह कुछ और है. .
नई दिल्लीः अपने शानदार डांस और अभिनय के लिए फेमस शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव रहती हैं. शिल्पा (Shilpa Shetty) अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज और फिटनेस वीडियो शेयर करती रहती हैं. शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) के इंस्टाग्राम पर 12.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं. हाल ही में शिल्पा (Shilpa Shetty)ने एक कंपनी के स्लिमिंग पिल के इंडोर्समेंट के 10 करोड़ रुपये का ऑफर को ठुकरा दिया. एक खबर के मुताबिक शिल्पा को एक आयुर्वेदिक कंपनी ने पतला होने की पिल्स को एंडोर्स करने के लिए एप्रोच किया था. लेकिन शिल्पा (Shilpa Shetty) ने इस ऑफर को इसलिए ठुकरा दिया. शिल्पा के अनुसार, वह ऐसी कोई चीज नहीं बेचना चाहती, जिसमें उन्हें खुद यकीन ना हो. इसी मामले में अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने शिल्पा (Shilpa Shetty) की तारीफ की है. शिवराज सिंह चौहान ने एक ट्वीट करके लिखा, 'समाज के प्रति सेलिब्रिटी की भी जिम्मेदारी होती है, जिसे अभिनेत्री @TheShilpaShetty ने बखूबी निभाया. उन्होंने स्लिम पिल्स के विज्ञापन के 10 करोड़ के ऑफर को केवल इसलिए मना कर दिया,क्योंकि उन्हें प्रोडक्ट के परिणाम पर भरोसा नहीं था. यह उनका प्रशंसनीय कदम है. मैं अभिनंदन करता हूं. इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए शिल्पा ने लिखा, 'Thank you, Sir, for all the encouragement and the compliment. Striving to do the right thing.' वर्कफ्रंट की बात करें तो अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा (Shilpa Shetty) 13 साल बाद शब्बीर खान की एक्शन फिल्म 'निकम्मा' से कमबैक करने जा रही हैं. शिल्पा शेट्टी कुंद्रा (Shilpa Shetty) को आखिरी बार बड़े पर्दे पर साल 2007 में आई फिल्म 'लाइफ इन ए..मेट्रो' और 'अपने' में देखा गया था. 'निकम्मा' में अभिमन्यु दस्सानी और सोशल मीडिया स्टार शर्ली सेतिया भी हैं. सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल प्रोडक्शन्स और शब्बीर खान फिल्म्स मिलकर इसे बना रही है. यह फिल्म 2020 के गर्मियों में रिलीज होगी. शब्बीर ने इससे पहले 'हीरोपंती' और 'बागी' जैसी सुपरहिट मसाला एंटरटेनर फिल्मों का निर्देशन किया है.
नई दिल्लीः अपने शानदार डांस और अभिनय के लिए फेमस शिल्पा शेट्टी सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव रहती हैं. शिल्पा अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज और फिटनेस वीडियो शेयर करती रहती हैं. शिल्पा शेट्टी के इंस्टाग्राम पर बारह.तीन मिलियन फॉलोअर्स हैं. हाल ही में शिल्पा ने एक कंपनी के स्लिमिंग पिल के इंडोर्समेंट के दस करोड़ रुपये का ऑफर को ठुकरा दिया. एक खबर के मुताबिक शिल्पा को एक आयुर्वेदिक कंपनी ने पतला होने की पिल्स को एंडोर्स करने के लिए एप्रोच किया था. लेकिन शिल्पा ने इस ऑफर को इसलिए ठुकरा दिया. शिल्पा के अनुसार, वह ऐसी कोई चीज नहीं बेचना चाहती, जिसमें उन्हें खुद यकीन ना हो. इसी मामले में अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने शिल्पा की तारीफ की है. शिवराज सिंह चौहान ने एक ट्वीट करके लिखा, 'समाज के प्रति सेलिब्रिटी की भी जिम्मेदारी होती है, जिसे अभिनेत्री @TheShilpaShetty ने बखूबी निभाया. उन्होंने स्लिम पिल्स के विज्ञापन के दस करोड़ के ऑफर को केवल इसलिए मना कर दिया,क्योंकि उन्हें प्रोडक्ट के परिणाम पर भरोसा नहीं था. यह उनका प्रशंसनीय कदम है. मैं अभिनंदन करता हूं. इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए शिल्पा ने लिखा, 'Thank you, Sir, for all the encouragement and the compliment. Striving to do the right thing.' वर्कफ्रंट की बात करें तो अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा तेरह साल बाद शब्बीर खान की एक्शन फिल्म 'निकम्मा' से कमबैक करने जा रही हैं. शिल्पा शेट्टी कुंद्रा को आखिरी बार बड़े पर्दे पर साल दो हज़ार सात में आई फिल्म 'लाइफ इन ए..मेट्रो' और 'अपने' में देखा गया था. 'निकम्मा' में अभिमन्यु दस्सानी और सोशल मीडिया स्टार शर्ली सेतिया भी हैं. सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल प्रोडक्शन्स और शब्बीर खान फिल्म्स मिलकर इसे बना रही है. यह फिल्म दो हज़ार बीस के गर्मियों में रिलीज होगी. शब्बीर ने इससे पहले 'हीरोपंती' और 'बागी' जैसी सुपरहिट मसाला एंटरटेनर फिल्मों का निर्देशन किया है.
कौन सा मछली पकड़ने वाली नाव सबसे अच्छी है? कैसे आदर्श शरीर को खोजने के लिए? लड़कियां, हम एक साथ मिलकर काम करते हैं! वजन घटाने के लिए दवा "लावाकोल" 2018 ओलंपिकः अगले शीतकालीन ओलंपिक कब होगा? कैसे अधिकतम लाभ के साथ बार पर खींचने के लिए? कैसे कुश्ती चड्डी और जूते चुनने के लिए?
कौन सा मछली पकड़ने वाली नाव सबसे अच्छी है? कैसे आदर्श शरीर को खोजने के लिए? लड़कियां, हम एक साथ मिलकर काम करते हैं! वजन घटाने के लिए दवा "लावाकोल" दो हज़ार अट्ठारह ओलंपिकः अगले शीतकालीन ओलंपिक कब होगा? कैसे अधिकतम लाभ के साथ बार पर खींचने के लिए? कैसे कुश्ती चड्डी और जूते चुनने के लिए?
हमीरपुर - अतिथि विश्राम गृह हमीरपुर में महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर कांग्रेसजनों ने दो मिनट का मौन रखकर व उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने गांधी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यकर्ताओं ने उनके योगदान का स्मरण करते हुए उनके दिखाए पथ पर चलने की प्रतिज्ञा ली। कार्यक्रम में सेवादल प्रदेश सहसंगठक किशोरी लाल वर्मा, जिला महासचिव अजय शर्मा, राजेश चौधरी, विधि विभाग हमीरपुर के जिला अध्यक्ष केसी भटिया, पुरुषोत्तम कालिया, मनोज शर्मा हमीरपुर शहरी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा पार्षद, हमीरपुर ब्लॉक अध्यक्ष सुनील कुमार, एससी सेल के जिला अध्यक्ष होशियार सिंह आदि उपस्थित रहे।
हमीरपुर - अतिथि विश्राम गृह हमीरपुर में महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर कांग्रेसजनों ने दो मिनट का मौन रखकर व उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने गांधी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यकर्ताओं ने उनके योगदान का स्मरण करते हुए उनके दिखाए पथ पर चलने की प्रतिज्ञा ली। कार्यक्रम में सेवादल प्रदेश सहसंगठक किशोरी लाल वर्मा, जिला महासचिव अजय शर्मा, राजेश चौधरी, विधि विभाग हमीरपुर के जिला अध्यक्ष केसी भटिया, पुरुषोत्तम कालिया, मनोज शर्मा हमीरपुर शहरी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा पार्षद, हमीरपुर ब्लॉक अध्यक्ष सुनील कुमार, एससी सेल के जिला अध्यक्ष होशियार सिंह आदि उपस्थित रहे।
सीआईएल ने एक बयान में कहा कि अप्रैल-दिसंबर, 2021 के दौरान उसका पूंजीगत व्यय एक साल पहले की समान अवधि से 37. 4 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2020-21 के पहले नौ महीनों में कंपनी ने 7,801 करोड़ रुपये का पूंजी व्यय किया था। सीआईएल के मुताबिक, इस अवधि में उसके पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण, भारी मशीनों की खरीद और संयुक्त उद्यमों के मद में हुआ। यह राशि 5,786 करोड़ रुपये रही जो इस दौरान के कुल पूंजी व्यय का 54 प्रतिशत बैठता है। इसके अलावा कोयले का निस्तारण करने वाले संयंत्रों के निर्माण पर 1,344 करोड़ रुपये और रेल गलियारों पर 1,785 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह कंपनी के कुल पूंजीगत व्यय का 29 फीसदी है। कोल इंडिया ने कहा कि वह रेल मार्ग से ढुलाई क्षमता के विस्तार पर ध्यान दे रही है। उसका लक्ष्य वर्ष 2023-24 के अंत तक रेल मार्ग से कोयला ढुलाई की क्षमता में 33 करोड़ टन प्रतिवर्ष की वृद्धि करना है। बयान के मुताबिक, सीआईएल पुरानी मशीनरी की जगह उन्नत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है। इसके लिए वह कोयले के खनन में भारी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
सीआईएल ने एक बयान में कहा कि अप्रैल-दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस के दौरान उसका पूंजीगत व्यय एक साल पहले की समान अवधि से सैंतीस. चार प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के पहले नौ महीनों में कंपनी ने सात,आठ सौ एक करोड़ रुपये का पूंजी व्यय किया था। सीआईएल के मुताबिक, इस अवधि में उसके पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण, भारी मशीनों की खरीद और संयुक्त उद्यमों के मद में हुआ। यह राशि पाँच,सात सौ छियासी करोड़ रुपये रही जो इस दौरान के कुल पूंजी व्यय का चौवन प्रतिशत बैठता है। इसके अलावा कोयले का निस्तारण करने वाले संयंत्रों के निर्माण पर एक,तीन सौ चौंतालीस करोड़ रुपये और रेल गलियारों पर एक,सात सौ पचासी करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह कंपनी के कुल पूंजीगत व्यय का उनतीस फीसदी है। कोल इंडिया ने कहा कि वह रेल मार्ग से ढुलाई क्षमता के विस्तार पर ध्यान दे रही है। उसका लक्ष्य वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के अंत तक रेल मार्ग से कोयला ढुलाई की क्षमता में तैंतीस करोड़ टन प्रतिवर्ष की वृद्धि करना है। बयान के मुताबिक, सीआईएल पुरानी मशीनरी की जगह उन्नत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है। इसके लिए वह कोयले के खनन में भारी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
नवंबर महीने में 8 बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 3. 1 प्रतिशत रह गई है, जो 9 माह का निचला स्तर है। डर है कि 2022 के शुरुआती महीनों में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर वृद्धि की रफ्तार को सुस्त कर सकती है, जिसकी वजह से ज्यादातर क्षेत्रों की गतिविधियों में गिरावट आई है। उद्योग विभाग की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि सिर्फ फर्टिलाइजर का उत्पादन नवंबर महीने में बढ़ा (2. 5 प्रतिशत) है, जबकि सीमेंट का उत्पादन 10 महीने के अंतराल के बाद ऋणात्मक (-3. 2 प्रतिशत) हो गया है। अन्य सभी क्षेत्रों जैसे कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, स्टील और बिजली उत्पादन में पिछले महीने की तुलना में कमी आई है। विश्व बैंक और मूडीज ने भारत की अर्थव्यवस्था में क्रमशः 8. 3 प्रतिशत और 9. 3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। इक्रा लिमिटेड ने इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त वर्ष 22 के लिए वृद्धि अनुमान 9 प्रतिशत बरकरार रखा था। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 22 मेंं सालाना जीडीपी वृद्धि 9. 5 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने दिसंबर तिमाही का वृद्धि अनुमान 6. 8 प्रतिशत से घटाकर 6. 6 प्रतिशत करक दिया है और मार्च तिमाही की वृद्धि का अनुमान 6. 1 प्रतिशत से कम करके 6. 1 प्रतिशत कर दिया है। सितंबर तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8. 4 प्रतिशत बढ़ी है, जो महामारी के पहले के आकार को पार कर गई है, क्योंकि टीकाकरण बढऩे के बाद सेवा गतिविधियां तेज हुईं और जून तिमाही में महामारी के व्यवधान के बाद स्थिति तेजी से सामान्य हुई थी। वहीं लेखा महानियंत्रक की ओर से आज जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर तक सरकार वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में पूरे साल के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के 46. 2 प्रतिशत तक ही पहुंची है। ग 11 साल का सबसे निचला स्तर है। कर राजस्व में जोरदार बढ़ोतरी की वजह से ऐसा हो सका है। नवंबर महीने में 8 बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 3. 1 प्रतिशत रह गई है, जो 9 माह का निचला स्तर है। डर है कि 2022 के शुरुआती महीनों में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर वृद्धि की रफ्तार को सुस्त कर सकती है, जिसकी वजह से ज्यादातर क्षेत्रों की गतिविधियों में गिरावट आई है।
नवंबर महीने में आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर तीन. एक प्रतिशत रह गई है, जो नौ माह का निचला स्तर है। डर है कि दो हज़ार बाईस के शुरुआती महीनों में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर वृद्धि की रफ्तार को सुस्त कर सकती है, जिसकी वजह से ज्यादातर क्षेत्रों की गतिविधियों में गिरावट आई है। उद्योग विभाग की ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि सिर्फ फर्टिलाइजर का उत्पादन नवंबर महीने में बढ़ा है, जबकि सीमेंट का उत्पादन दस महीने के अंतराल के बाद ऋणात्मक हो गया है। अन्य सभी क्षेत्रों जैसे कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, स्टील और बिजली उत्पादन में पिछले महीने की तुलना में कमी आई है। विश्व बैंक और मूडीज ने भारत की अर्थव्यवस्था में क्रमशः आठ. तीन प्रतिशत और नौ. तीन प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। इक्रा लिमिटेड ने इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त वर्ष बाईस के लिए वृद्धि अनुमान नौ प्रतिशत बरकरार रखा था। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष बाईस मेंं सालाना जीडीपी वृद्धि नौ. पाँच प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने दिसंबर तिमाही का वृद्धि अनुमान छः. आठ प्रतिशत से घटाकर छः. छः प्रतिशत करक दिया है और मार्च तिमाही की वृद्धि का अनुमान छः. एक प्रतिशत से कम करके छः. एक प्रतिशत कर दिया है। सितंबर तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था आठ. चार प्रतिशत बढ़ी है, जो महामारी के पहले के आकार को पार कर गई है, क्योंकि टीकाकरण बढऩे के बाद सेवा गतिविधियां तेज हुईं और जून तिमाही में महामारी के व्यवधान के बाद स्थिति तेजी से सामान्य हुई थी। वहीं लेखा महानियंत्रक की ओर से आज जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर तक सरकार वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में पूरे साल के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के छियालीस. दो प्रतिशत तक ही पहुंची है। ग ग्यारह साल का सबसे निचला स्तर है। कर राजस्व में जोरदार बढ़ोतरी की वजह से ऐसा हो सका है। नवंबर महीने में आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर तीन. एक प्रतिशत रह गई है, जो नौ माह का निचला स्तर है। डर है कि दो हज़ार बाईस के शुरुआती महीनों में कोरोनावायरस महामारी की तीसरी लहर वृद्धि की रफ्तार को सुस्त कर सकती है, जिसकी वजह से ज्यादातर क्षेत्रों की गतिविधियों में गिरावट आई है।
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत जिले में गठीत टीम द्वारा बुधवार को कांकरोली स्थित गोमाता सर्कल स्थित हिमांशी रसगुल्ला भंडार पर जांच की गई। जांच में 40 किलो मिल्क केक और 60 किलो मावा मिलावटी मिला। टीम ने मौके पर टेस्ट कर स्टार्च पाए जाने पर मावे और मिल्क केक को नष्ट करवा दिया। साथ ही दो सैंपल लेकर जांच लैब में भिजवाए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सैनी ने बताया कि मोबाइल जांच प्रयोगशाला राजसमंद में 10 जनवरी को फव्वारा चौक राजनगर और बस स्टैंड कांकरोली पर खड़ी रहेगी। 4 फरवरी को खमनोर व नाथद्वारा और 28 फरवरी को रेलमगरा व दरीबा क्षेत्र में रहेगी। इस मोबाइल जांच प्रयोगशाला में करीब 85 खाद्य सामग्रियों के मौके पर ही आम उपभोक्ता को जांच परिणाम बताए जाएंगे। इस प्रयोगशाला के माध्यम से आमजन निःशुल्क घर में उपयोग लिए जाने वाले खाद्य पदार्थो की जांच करवा सकते है, जिसका परिणाम मौके पर उन्हें दे दिया जाएगा। सैनी ने बताया कि खाद्य विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत वैद्य रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस लिया जाना अनिवार्य है। जिन व्यापारियों का टर्नओवर 12 लाख रुपए तक है, उनको 100 रुपए प्रतिवर्ष और 12 लाख से अधिक होने पर 2 हजार रुपए की फीस के साथ लाइसेंस और खाद्य निर्माताओं को 3 हजार रुपए प्रतिवर्ष की फीस से लाइसेंस बनवाया जाना अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के पाए जाने पर अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत जिले में गठीत टीम द्वारा बुधवार को कांकरोली स्थित गोमाता सर्कल स्थित हिमांशी रसगुल्ला भंडार पर जांच की गई। जांच में चालीस किलो मिल्क केक और साठ किलो मावा मिलावटी मिला। टीम ने मौके पर टेस्ट कर स्टार्च पाए जाने पर मावे और मिल्क केक को नष्ट करवा दिया। साथ ही दो सैंपल लेकर जांच लैब में भिजवाए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सैनी ने बताया कि मोबाइल जांच प्रयोगशाला राजसमंद में दस जनवरी को फव्वारा चौक राजनगर और बस स्टैंड कांकरोली पर खड़ी रहेगी। चार फरवरी को खमनोर व नाथद्वारा और अट्ठाईस फरवरी को रेलमगरा व दरीबा क्षेत्र में रहेगी। इस मोबाइल जांच प्रयोगशाला में करीब पचासी खाद्य सामग्रियों के मौके पर ही आम उपभोक्ता को जांच परिणाम बताए जाएंगे। इस प्रयोगशाला के माध्यम से आमजन निःशुल्क घर में उपयोग लिए जाने वाले खाद्य पदार्थो की जांच करवा सकते है, जिसका परिणाम मौके पर उन्हें दे दिया जाएगा। सैनी ने बताया कि खाद्य विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत वैद्य रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस लिया जाना अनिवार्य है। जिन व्यापारियों का टर्नओवर बारह लाख रुपए तक है, उनको एक सौ रुपयापए प्रतिवर्ष और बारह लाख से अधिक होने पर दो हजार रुपए की फीस के साथ लाइसेंस और खाद्य निर्माताओं को तीन हजार रुपए प्रतिवर्ष की फीस से लाइसेंस बनवाया जाना अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के पाए जाने पर अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जन सिद्धात थोक् संग्रह भाग २ धमध्यान-धम के स्वरूप के पर्यालोचन मे मन का एकाग्र करना । इसके चार भद हैं । १ आज्ञाविचय - भगवान् को प्राज्ञा को सत्य मानकर, श्रद्धा पूवक तत्त्वो वा चिंतन मनन करते हुए एकाग्र होना । २ अपाय विचय-राग, द्वप, चपाय, मिथ्यात्व, भविरति आदि पापा और उनके बुफल का चिंतन करना । ३ विपाव विचय - कम क शुभाशुभ फल विषयक चिन्तन करना । जसे- शुद्ध आत्मा का स्वरूप ज्ञान, दशन, सुख आदि रूप है, फिर भी कमवश आत्मा के निजी गुण दबे हुए हैं। कर्मों के वश होकर आत्मा ससार मे चारो गतियो म भ्रमण कर रही है । सपत्ति, विपत्ति सयोग वियोग आदि से होने वाले सुख दुख तो जीव वे पूर्वोपार्जित शुभाशभ कर्मों का हो फल है। इस प्रकार कम विषयक चित्तन मे मन को लगाना । ४ संस्थान विचय - लोक का स्वरूप, पथ्वी, द्वीप, सागर, नरक स्वग आदि के आकार का चिंतन करना । लोक स्थिति, जीव की गति, आगति, जीवन, मरण आदि शास्त्रोक्त पदार्थों का चितन करना तथा इस अनादि अन त ससार सागर से पार करने वाली ज्ञान, दशन, चारित्र, तप, सवर रूप नौका का विचार करने में एकाग्र होना । धमध्यान के चार लिंग इस प्रकार है१ आज्ञा रुचि - शास्त्रोक्त अर्थो पर रुचि रखना । २ निसग रुचि - किसी के उपदेश के बिना, स्वभाव से ही जिन भाषित तत्त्वो पर श्रद्धा होना ।
जन सिद्धात थोक् संग्रह भाग दो धमध्यान-धम के स्वरूप के पर्यालोचन मे मन का एकाग्र करना । इसके चार भद हैं । एक आज्ञाविचय - भगवान् को प्राज्ञा को सत्य मानकर, श्रद्धा पूवक तत्त्वो वा चिंतन मनन करते हुए एकाग्र होना । दो अपाय विचय-राग, द्वप, चपाय, मिथ्यात्व, भविरति आदि पापा और उनके बुफल का चिंतन करना । तीन विपाव विचय - कम क शुभाशुभ फल विषयक चिन्तन करना । जसे- शुद्ध आत्मा का स्वरूप ज्ञान, दशन, सुख आदि रूप है, फिर भी कमवश आत्मा के निजी गुण दबे हुए हैं। कर्मों के वश होकर आत्मा ससार मे चारो गतियो म भ्रमण कर रही है । सपत्ति, विपत्ति सयोग वियोग आदि से होने वाले सुख दुख तो जीव वे पूर्वोपार्जित शुभाशभ कर्मों का हो फल है। इस प्रकार कम विषयक चित्तन मे मन को लगाना । चार संस्थान विचय - लोक का स्वरूप, पथ्वी, द्वीप, सागर, नरक स्वग आदि के आकार का चिंतन करना । लोक स्थिति, जीव की गति, आगति, जीवन, मरण आदि शास्त्रोक्त पदार्थों का चितन करना तथा इस अनादि अन त ससार सागर से पार करने वाली ज्ञान, दशन, चारित्र, तप, सवर रूप नौका का विचार करने में एकाग्र होना । धमध्यान के चार लिंग इस प्रकार हैएक आज्ञा रुचि - शास्त्रोक्त अर्थो पर रुचि रखना । दो निसग रुचि - किसी के उपदेश के बिना, स्वभाव से ही जिन भाषित तत्त्वो पर श्रद्धा होना ।
रिनॉल्ट की कारों पर 65 हजार तक का डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है. नई दिल्ली. यदि आप भी इस महीने कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. हाथों हाथ डिलीवरी के साथ ही कार पर यदि डिस्काउंट भी मिल जाए तो क्या कहना. ऐसा ही कुछ रिनॉल्ट कर रही है. रिनॉल्ट अपनी तीन गाड़ियों पर 65 हजार रुपये तक का डिस्काउंट ऑफर कर रही है. कंपनी की तीनों ही कारें अपने अपने सेगमेंट में हॉट सेलिंग व्हीकल हैं. इन तीनों ही कारों का माइलेज शानदार है और फीचर्स भी काफी बेहतर दिए गए हैं. कंपनी ने ये डिस्काउंट कॉर्पोरेट छूट, कैश डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस के तौर पर दिया है. हालांकि तीनों कारों के टॉप एंड वेरिएंट पर कंपनी केवल लॉयल्टी बोनस ऑफर कर रही है. आइये जानते हैं किस कार पर कितना है डिस्काउंट. Renault Triber: रेनो की पॉपुलर एमपीवी ट्राइबर पर कंपनी 62 हजार रुपये का डिस्काउंट ऑफर कर रही है. कंपनी की ओर से कार कुछ वेरिएंट्स पर 25 हजार रुपये का कैश डिस्काउंट, 12 हजार रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउंट दिया जा रहा है. वहीं 2023 में मैन्युफैक्चर्ड बीएस 6 वेरिएंट पर कंपनी 15 हजार का कैश डिस्काउंट, 25 हजार का एक्सचेंज बोनस और 12 हजार रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउं ऑफर कर रही है. इतना ही नहीं बीएस 6 फेज 2 की कारों पर कंपनी 45 हजार रुपये तक की छूट दे रही है. Renault Kiger: काईगर पर कंपनी आरएक्सटी और आरएक्सटी ओ वेरिएंट पर 25 हजार रुपये की छूट दे रही है. वहीं कार के आएक्सजेड वेरिएंट पर 10 हजार रुपये का कैश डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है. वहीं कुछ वेरिएंट्स पर 20 हजार रुपये का एक्सचेंज बोनस भी मिल रहा है. वहीं आप लॉयल्टी बोनस 10 रुपये और ले सकते हैं. Renault Kwid: कंपनी की सबसे पॉपुलर हैचबैक और बजट कार के तौर पर पॉपुलर क्विड पर कंपनी 15 हजार रुपये का कैश डिस्काउंट ऑफर कर रही है. वहीं 20 हजार रुपये एक्सचेंज बोनस के तौर पर दिए जा रहे हैं. 12 हजार का कॉर्पोरेट डिस्काउंट और 10 हजार रुपये लॉयल्टी बोनस भी इस कार को खरीदने पर आपको मिलेगा. . जुलाई में खरीदना है 25 हजार से कम में बेस्ट 5G स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
रिनॉल्ट की कारों पर पैंसठ हजार तक का डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है. नई दिल्ली. यदि आप भी इस महीने कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. हाथों हाथ डिलीवरी के साथ ही कार पर यदि डिस्काउंट भी मिल जाए तो क्या कहना. ऐसा ही कुछ रिनॉल्ट कर रही है. रिनॉल्ट अपनी तीन गाड़ियों पर पैंसठ हजार रुपये तक का डिस्काउंट ऑफर कर रही है. कंपनी की तीनों ही कारें अपने अपने सेगमेंट में हॉट सेलिंग व्हीकल हैं. इन तीनों ही कारों का माइलेज शानदार है और फीचर्स भी काफी बेहतर दिए गए हैं. कंपनी ने ये डिस्काउंट कॉर्पोरेट छूट, कैश डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस के तौर पर दिया है. हालांकि तीनों कारों के टॉप एंड वेरिएंट पर कंपनी केवल लॉयल्टी बोनस ऑफर कर रही है. आइये जानते हैं किस कार पर कितना है डिस्काउंट. Renault Triber: रेनो की पॉपुलर एमपीवी ट्राइबर पर कंपनी बासठ हजार रुपये का डिस्काउंट ऑफर कर रही है. कंपनी की ओर से कार कुछ वेरिएंट्स पर पच्चीस हजार रुपये का कैश डिस्काउंट, बारह हजार रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउंट दिया जा रहा है. वहीं दो हज़ार तेईस में मैन्युफैक्चर्ड बीएस छः वेरिएंट पर कंपनी पंद्रह हजार का कैश डिस्काउंट, पच्चीस हजार का एक्सचेंज बोनस और बारह हजार रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउं ऑफर कर रही है. इतना ही नहीं बीएस छः फेज दो की कारों पर कंपनी पैंतालीस हजार रुपये तक की छूट दे रही है. Renault Kiger: काईगर पर कंपनी आरएक्सटी और आरएक्सटी ओ वेरिएंट पर पच्चीस हजार रुपये की छूट दे रही है. वहीं कार के आएक्सजेड वेरिएंट पर दस हजार रुपये का कैश डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है. वहीं कुछ वेरिएंट्स पर बीस हजार रुपये का एक्सचेंज बोनस भी मिल रहा है. वहीं आप लॉयल्टी बोनस दस रुपयापये और ले सकते हैं. Renault Kwid: कंपनी की सबसे पॉपुलर हैचबैक और बजट कार के तौर पर पॉपुलर क्विड पर कंपनी पंद्रह हजार रुपये का कैश डिस्काउंट ऑफर कर रही है. वहीं बीस हजार रुपये एक्सचेंज बोनस के तौर पर दिए जा रहे हैं. बारह हजार का कॉर्पोरेट डिस्काउंट और दस हजार रुपये लॉयल्टी बोनस भी इस कार को खरीदने पर आपको मिलेगा. . जुलाई में खरीदना है पच्चीस हजार से कम में बेस्ट पाँचG स्मार्टफोन? इस लिस्ट को देखे बिना कोई भी फैसला लेना पड़ेगा भारी!
सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की यह पहली श्रीलंका यात्रा है। वह यहां चीन की ओर से लगातार प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के मद्देनजर क्षेत्रीय चुनौतियों पर श्रीलंका के शीर्ष सैन्य अफसरों से चर्चा करेंगे। उनका श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भारत-श्रीलंका के बीच सैन्य संबंध को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को चार दिवसीय यात्रा पर कोलंबो पहुंचे। वह यहां चीन की ओर से लगातार प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के मद्देनजर क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। सैन्य प्रमुख श्रीलंका के शीर्ष सैन्य अफसरों से मुलाकात करेंगे। उनका श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। सैन्य प्रमुख नरवणे की यह पहली श्रीलंका यात्रा है। हाल ही में विदेश सचिव हर्षवर्द्धन शृंगला ने वहां का दौरा किया था और दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श किया था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे श्रीलंका के शीर्ष असैन्य और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात करेंगे तथा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। वह श्रीलंका सेना के गजाबा रेजिमेंटल हेडक्वार्टर और मिलिट्री अकादमी भी जाएंगे। अपने श्रीलंकाई समकक्ष जनरल शावेंद्र सिल्वा के निमंत्रण पर चार दिवसीय दौरे पर पहुंचे जनरल नरवणे का हवाई अड्डे पर श्रीलंका के शीर्ष जनरल ने गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारतीय उच्चायोग ने एक ट्वीट में कहा,(उनका) दौरा भारत और श्रीलंका के बाच रक्षा क्षेत्र में गहन सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। बृहस्पतिवार को वह पूर्व में मदुरू ओया स्पेशल फोर्स ट्रेनिंग स्कूल में चल रहे द्विपक्षीय अभ्यास 'मित्र शक्ति' का अंतिम प्रदर्शन देखेंगे। भारत और श्रीलंका ने पिछले सप्ताह द्वीपीय राष्ट्र के पूर्वी जिले अम्पारा में युद्धक प्रशिक्षण स्कूल में आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान देने के साथ 12 दिवसीय व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू किया था। कर्नल प्रकाश कुमार की अध्यक्षता में भारतीय सेना के 120 जवानों की सशस्त्र टुकड़ी की भागीदारी के साथ चार से 15 अक्तूबर तक 'मित्र शक्ति' अभ्यास का आठवां संस्करण चल रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की यह पहली श्रीलंका यात्रा है। वह यहां चीन की ओर से लगातार प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के मद्देनजर क्षेत्रीय चुनौतियों पर श्रीलंका के शीर्ष सैन्य अफसरों से चर्चा करेंगे। उनका श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भारत-श्रीलंका के बीच सैन्य संबंध को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को चार दिवसीय यात्रा पर कोलंबो पहुंचे। वह यहां चीन की ओर से लगातार प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के मद्देनजर क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। सैन्य प्रमुख श्रीलंका के शीर्ष सैन्य अफसरों से मुलाकात करेंगे। उनका श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। सैन्य प्रमुख नरवणे की यह पहली श्रीलंका यात्रा है। हाल ही में विदेश सचिव हर्षवर्द्धन शृंगला ने वहां का दौरा किया था और दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श किया था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे श्रीलंका के शीर्ष असैन्य और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात करेंगे तथा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। वह श्रीलंका सेना के गजाबा रेजिमेंटल हेडक्वार्टर और मिलिट्री अकादमी भी जाएंगे। अपने श्रीलंकाई समकक्ष जनरल शावेंद्र सिल्वा के निमंत्रण पर चार दिवसीय दौरे पर पहुंचे जनरल नरवणे का हवाई अड्डे पर श्रीलंका के शीर्ष जनरल ने गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारतीय उच्चायोग ने एक ट्वीट में कहा, दौरा भारत और श्रीलंका के बाच रक्षा क्षेत्र में गहन सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। बृहस्पतिवार को वह पूर्व में मदुरू ओया स्पेशल फोर्स ट्रेनिंग स्कूल में चल रहे द्विपक्षीय अभ्यास 'मित्र शक्ति' का अंतिम प्रदर्शन देखेंगे। भारत और श्रीलंका ने पिछले सप्ताह द्वीपीय राष्ट्र के पूर्वी जिले अम्पारा में युद्धक प्रशिक्षण स्कूल में आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान देने के साथ बारह दिवसीय व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू किया था। कर्नल प्रकाश कुमार की अध्यक्षता में भारतीय सेना के एक सौ बीस जवानों की सशस्त्र टुकड़ी की भागीदारी के साथ चार से पंद्रह अक्तूबर तक 'मित्र शक्ति' अभ्यास का आठवां संस्करण चल रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
नई दिल्ली : मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। हिंदू धर्म में हनुमान जी का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, उपासना, मंत्र और चालीसा पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। धार्मिक मान्यतानुसार श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए आज भी हनुमान जी भक्तों की रक्षा और कल्याण के लिए पृथ्वीलोक पर वास करते हैं और बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण हनुमान जी की पूजा (Puja) से हो जाता है। हनुमान जी की कृपा से धन, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जिन जातकों को आर्थिक परेशानी है या जो लोग लंबे समय से सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें मंगलवार के दिन कुछ खास उपाय करने चाहिए। मान्यता है कि प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी का सिंदूर से पूजन करने से समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार को अगर सुबह बरगद के पेड़ के एक पत्ते को तोड़कर गंगा जल से धोकर हनुमान जी को अर्पित करें तो धन बढ़ता है। आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार को पान का बीड़ा नियम से चढ़ाने से रोजगार के रास्ते खुलते हैं। नौकरीपेशा लोगों की उन्नति होती है। मंगलवार को शाम के समय हनुमान जी को केवड़े का इत्र एवं गुलाब की माला या फूल चढ़ाएं और कोशिश करें कि खुद लाल रंग के वस्त्र पहनें। धन के लिए हनुमान जी को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल उपाय है। मंगलवार के दिन शाम को घर के ही हनुमान मंदिर में सरसों का तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद चालीसा का पाठ करें। पाठ के बाद कुछ प्रसाद गरीबों में बांटने से हनुमानजी की कृपा पूरे घर पर बनी रहती है। इस दिन हनुमान जी के पैरों में फिटकरी रखने से बुरे सपनों से पीछा छूट जाता है। हनुमान जी के सामने बैठ कर रामरक्षास्त्रोत का पाठ करने से सारे बिगड़े काम संवर जाते हैं। अटके कामों की बाधा दूर होती है। कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अगर आप किसी समस्या में है, तो भगवान हनुमान के नामों हनुमान, बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनी पुत्र का जाप करें तो फल जरूर मिलेगा। साथ ही मंगलवार के दिन शाम को व्रत करके बूंदी के लड्डू या बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं और लोगों में बांटें। मान्यता है कि इससे संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
नई दिल्ली : मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। हिंदू धर्म में हनुमान जी का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, उपासना, मंत्र और चालीसा पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। धार्मिक मान्यतानुसार श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए आज भी हनुमान जी भक्तों की रक्षा और कल्याण के लिए पृथ्वीलोक पर वास करते हैं और बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण हनुमान जी की पूजा से हो जाता है। हनुमान जी की कृपा से धन, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जिन जातकों को आर्थिक परेशानी है या जो लोग लंबे समय से सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें मंगलवार के दिन कुछ खास उपाय करने चाहिए। मान्यता है कि प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी का सिंदूर से पूजन करने से समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार को अगर सुबह बरगद के पेड़ के एक पत्ते को तोड़कर गंगा जल से धोकर हनुमान जी को अर्पित करें तो धन बढ़ता है। आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। मंगलवार को पान का बीड़ा नियम से चढ़ाने से रोजगार के रास्ते खुलते हैं। नौकरीपेशा लोगों की उन्नति होती है। मंगलवार को शाम के समय हनुमान जी को केवड़े का इत्र एवं गुलाब की माला या फूल चढ़ाएं और कोशिश करें कि खुद लाल रंग के वस्त्र पहनें। धन के लिए हनुमान जी को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल उपाय है। मंगलवार के दिन शाम को घर के ही हनुमान मंदिर में सरसों का तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद चालीसा का पाठ करें। पाठ के बाद कुछ प्रसाद गरीबों में बांटने से हनुमानजी की कृपा पूरे घर पर बनी रहती है। इस दिन हनुमान जी के पैरों में फिटकरी रखने से बुरे सपनों से पीछा छूट जाता है। हनुमान जी के सामने बैठ कर रामरक्षास्त्रोत का पाठ करने से सारे बिगड़े काम संवर जाते हैं। अटके कामों की बाधा दूर होती है। कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अगर आप किसी समस्या में है, तो भगवान हनुमान के नामों हनुमान, बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनी पुत्र का जाप करें तो फल जरूर मिलेगा। साथ ही मंगलवार के दिन शाम को व्रत करके बूंदी के लड्डू या बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं और लोगों में बांटें। मान्यता है कि इससे संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
Neemuch Crime News : नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। 20 वर्षीय शादीशुदा युवती के गुम होने के मामले में अब तक कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित हिंदू समाज ने रविवार को जिले के रतनगढ़ में रैली निकाली। नायब तहसीलदार मोनिका जैन को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में हिंदू समाजजन का आरोप है कि 27 वर्षीय रेहान खान साथियों की मदद से उसे ले गया है। हिंदू समाजजन ने रेहान और उसके सहयोगियों की अवैध संपत्ति ध्वस्त करने की मांग की है। साथ ही युवती को जल्द तलाश करने और आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने की दशा में आंदोलन की चेतावनी दी है। आरोप है कि 29 नवंबर को आरोपित रेहान खान निवासी अलोरी गरवाड़ा अपने साथियों की मदद से उक्त युवती को उसके ससुराल (नयागांव के समीप गांव) से ले गया। स्वजन ने नयागांव पुलिस चौकी पर आरोपित की गिरफ्तार व युवती की बरामदगी के लिए ज्ञापन भी सौंपा। बावजूद पुलिस मात्र गुमशुदगी दर्ज की है और पुलिस लगातार युवती की खोज में लगी हुई है। इसी कड़ी में युवती के पीहर पक्ष लुहारिया चुंडावत से सैकड़ों लोगों ने एक दिसंबर को रतनगढ़ पुलिस थाने पर नामजद आरोपितों पर कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी सूरज कुमार के नाम ज्ञापन सौंपा। उसमें युवती के साथ अनहोनी होने का भी जिक्र किया था। इसके बाद रविवार को एक बार फिर हिंदू समाज रतनगढ़ में सड़कों पर उतरा और आरोपितों की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगना चाहिए। आए दिन ऐसे मामले प्रकाश में आ रहे हैं। जिले में आधा दर्जन से अधिक मामले हो चुके हैं, जो हिंदू धर्म के लिए खतरा है। एक समाज विशेष द्वारा हिंदू युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है। रतनगढ़ के मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद जल्द ही बड़ा आंदोलन करेगा। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया गया है। युवती की तलाश के लिए टीम रवाना की गई है। मामले में जल्द ही सफलता मिल जाएगी।
Neemuch Crime News : नीमच । बीस वर्षीय शादीशुदा युवती के गुम होने के मामले में अब तक कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित हिंदू समाज ने रविवार को जिले के रतनगढ़ में रैली निकाली। नायब तहसीलदार मोनिका जैन को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में हिंदू समाजजन का आरोप है कि सत्ताईस वर्षीय रेहान खान साथियों की मदद से उसे ले गया है। हिंदू समाजजन ने रेहान और उसके सहयोगियों की अवैध संपत्ति ध्वस्त करने की मांग की है। साथ ही युवती को जल्द तलाश करने और आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने की दशा में आंदोलन की चेतावनी दी है। आरोप है कि उनतीस नवंबर को आरोपित रेहान खान निवासी अलोरी गरवाड़ा अपने साथियों की मदद से उक्त युवती को उसके ससुराल से ले गया। स्वजन ने नयागांव पुलिस चौकी पर आरोपित की गिरफ्तार व युवती की बरामदगी के लिए ज्ञापन भी सौंपा। बावजूद पुलिस मात्र गुमशुदगी दर्ज की है और पुलिस लगातार युवती की खोज में लगी हुई है। इसी कड़ी में युवती के पीहर पक्ष लुहारिया चुंडावत से सैकड़ों लोगों ने एक दिसंबर को रतनगढ़ पुलिस थाने पर नामजद आरोपितों पर कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी सूरज कुमार के नाम ज्ञापन सौंपा। उसमें युवती के साथ अनहोनी होने का भी जिक्र किया था। इसके बाद रविवार को एक बार फिर हिंदू समाज रतनगढ़ में सड़कों पर उतरा और आरोपितों की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगना चाहिए। आए दिन ऐसे मामले प्रकाश में आ रहे हैं। जिले में आधा दर्जन से अधिक मामले हो चुके हैं, जो हिंदू धर्म के लिए खतरा है। एक समाज विशेष द्वारा हिंदू युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है। रतनगढ़ के मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद जल्द ही बड़ा आंदोलन करेगा। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया गया है। युवती की तलाश के लिए टीम रवाना की गई है। मामले में जल्द ही सफलता मिल जाएगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
कुछ महीनों पहले मॉडल अपर्णा ने बॉलीवुड एक्टर जैकी भगनानी समेत 9 लोगों पर रेप और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. इन सभी लोगों के खिलाफ मॉडल ने मुंबई के पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. अब मॉडल ने फिर से आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसके मामले में किसी भी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया . इसके साथ ही महिला ने यह भी कहा कि अब तो उसको जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है. मॉडल ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इनको शेयर करते हुए मॉडल ने इस अकाउंट को फेक बताया है. मॉडल ने कहा है कि आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाकर उसे जान से मारने की धमकी दी. मैंने बहुत से फर्जी खातों को ब्लॉक भी कर दिया. कुछ अकाउंट को रिपोर्ट भी किया है. इस कारण मुझे अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट भी करना पड़ा. 2 साल तक मैं इंस्टाग्राम से दूर रही लेकिन इन लोगों ने गैंग कास्टिंग करना नहीं छोड़ा. मॉडल का कहना है कि हाईप्रोफाइल लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद मुझे जान से मारने की धमकी आने लगी. इस बारे में मैंने जांच अधिकारी को बताया, उन्होंने मुझको नया केस दर्ज करवाने के लिए पास के पुलिस स्टेशन में भेज दिया. लेकिन मैं वहां नहीं गई ऐसा इसलिए क्योंकि पहला केस दर्ज करवाने में ही मुझे हफ्तो लग गए थे और अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार ही नहीं किया गया है. बताते चलें कि पीड़िता ने क्वान एंटरटेनमेंट के फाउंडर अनिरबान ब्लाह, जैकी भगनानी, अजित ठाकुर कृष्ण कुमार, निखिल कामत, विष्णु वर्धान इंदुरी, शील गुप्ता और गुरुज्योत सिंह पर छेड़खानी का आरोप लगाया था. इसी के साथ मॉडल ने आरोप लगाया कि साल 2014 से 2018 के बीच फोटोग्राफर कोलस्टन ज्युलियन ने माॅडलिंग में काम दिलाने के नाम पर उसके साथ रेप किया. तो जैकी भगनानी ने बांद्रा में, निखिल कामत ने सांताक्रुज के फाइव स्टार होटल में और साल 2015 में शील गुप्ता ने अंधेरी के एक इमारत में उसके साथ छेड़खानी की.
कुछ महीनों पहले मॉडल अपर्णा ने बॉलीवुड एक्टर जैकी भगनानी समेत नौ लोगों पर रेप और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. इन सभी लोगों के खिलाफ मॉडल ने मुंबई के पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. अब मॉडल ने फिर से आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसके मामले में किसी भी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया . इसके साथ ही महिला ने यह भी कहा कि अब तो उसको जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है. मॉडल ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इनको शेयर करते हुए मॉडल ने इस अकाउंट को फेक बताया है. मॉडल ने कहा है कि आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाकर उसे जान से मारने की धमकी दी. मैंने बहुत से फर्जी खातों को ब्लॉक भी कर दिया. कुछ अकाउंट को रिपोर्ट भी किया है. इस कारण मुझे अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट भी करना पड़ा. दो साल तक मैं इंस्टाग्राम से दूर रही लेकिन इन लोगों ने गैंग कास्टिंग करना नहीं छोड़ा. मॉडल का कहना है कि हाईप्रोफाइल लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद मुझे जान से मारने की धमकी आने लगी. इस बारे में मैंने जांच अधिकारी को बताया, उन्होंने मुझको नया केस दर्ज करवाने के लिए पास के पुलिस स्टेशन में भेज दिया. लेकिन मैं वहां नहीं गई ऐसा इसलिए क्योंकि पहला केस दर्ज करवाने में ही मुझे हफ्तो लग गए थे और अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार ही नहीं किया गया है. बताते चलें कि पीड़िता ने क्वान एंटरटेनमेंट के फाउंडर अनिरबान ब्लाह, जैकी भगनानी, अजित ठाकुर कृष्ण कुमार, निखिल कामत, विष्णु वर्धान इंदुरी, शील गुप्ता और गुरुज्योत सिंह पर छेड़खानी का आरोप लगाया था. इसी के साथ मॉडल ने आरोप लगाया कि साल दो हज़ार चौदह से दो हज़ार अट्ठारह के बीच फोटोग्राफर कोलस्टन ज्युलियन ने माॅडलिंग में काम दिलाने के नाम पर उसके साथ रेप किया. तो जैकी भगनानी ने बांद्रा में, निखिल कामत ने सांताक्रुज के फाइव स्टार होटल में और साल दो हज़ार पंद्रह में शील गुप्ता ने अंधेरी के एक इमारत में उसके साथ छेड़खानी की.
संसद भवन के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धोती - कुर्ता पहन अपनी भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान जाहिर किया है। जोकि दुनिया को यह संदेश देता है की हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत के साथ - साथ गौरवान्वित और स्वतंत्र राष्ट्र है। - अपने गले में गमछा और काले रंग के जूते पहन अपने इस ट्रेशनल लुक को पूरा किया। New Parliament Building Inauguration: पिछले कुछ दिनों से देश की जनता काफी बेसब्री से नए संसद का इंतज़ार कर रही है। जिसके चलते रविवार यानी 28 मई 2023 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य कार्यक्रम में शिकरत की और नए संसद भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय पारंपरिक लुक देखने को मिला, जिसकी अब हर तरफ चर्चाएं चल रहीं हैं। अक्सर ही हमारे देश के प्रधानमंत्री अपने अलग - अलग लुक को लेकर जाने जाते हैं, कभी कोट पेंट लुक तो कभी कुर्ता और चूड़ीदार पयजामा लुक। ऐसे में संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पीएम के लुक को लेकर काफी चर्चा चल रही है, जिसमें वह फुल ट्रेडिशनल अवतार में नज़र आ रहें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन का उद्घाटन करने के लिए एक अलग ही अंदाज़ में पहुचें। उन्होंने इस दौरान ट्रेडिशनल लुक धारण किया था। कुर्ते और पयजामे के एकदम विपरीत वह धोती - कुर्ते में नज़र आये। सफेद रंग की धोती - कुर्ते के साथ उन्होंने हल्के सुनहरे कलर की सदरी पहनी थी। जिसके साथ - साथ उन्होंने अपने गले में गमछा और काले रंग के जूते पहन अपने इस ट्रेशनल लुक को पूरा किया। उनके इस सादगी भरे लुक को देख लोग तारीफ करते नहीं थक रहें हैं। संसद भवन के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धोती - कुर्ता पहन अपनी भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान जाहिर किया है। जोकि दुनिया को यह संदेश देता है की हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत के साथ - साथ गौरवान्वित और स्वतंत्र राष्ट्र (proud and independent nation) है। जब हमारे देश के प्रधानमंत्री होकर अपनी संस्कृति को बढ़ावा दे रहें हैं और अपने भारतीय पहनावे को गर्व से देश के सामने लेकर आ रहें हैं तो हमें भी उनका साथ देना चाहिए। हमें भारतीय होने पर गर्व करना चाहिए।
संसद भवन के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धोती - कुर्ता पहन अपनी भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान जाहिर किया है। जोकि दुनिया को यह संदेश देता है की हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत के साथ - साथ गौरवान्वित और स्वतंत्र राष्ट्र है। - अपने गले में गमछा और काले रंग के जूते पहन अपने इस ट्रेशनल लुक को पूरा किया। New Parliament Building Inauguration: पिछले कुछ दिनों से देश की जनता काफी बेसब्री से नए संसद का इंतज़ार कर रही है। जिसके चलते रविवार यानी अट्ठाईस मई दो हज़ार तेईस को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य कार्यक्रम में शिकरत की और नए संसद भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय पारंपरिक लुक देखने को मिला, जिसकी अब हर तरफ चर्चाएं चल रहीं हैं। अक्सर ही हमारे देश के प्रधानमंत्री अपने अलग - अलग लुक को लेकर जाने जाते हैं, कभी कोट पेंट लुक तो कभी कुर्ता और चूड़ीदार पयजामा लुक। ऐसे में संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पीएम के लुक को लेकर काफी चर्चा चल रही है, जिसमें वह फुल ट्रेडिशनल अवतार में नज़र आ रहें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन का उद्घाटन करने के लिए एक अलग ही अंदाज़ में पहुचें। उन्होंने इस दौरान ट्रेडिशनल लुक धारण किया था। कुर्ते और पयजामे के एकदम विपरीत वह धोती - कुर्ते में नज़र आये। सफेद रंग की धोती - कुर्ते के साथ उन्होंने हल्के सुनहरे कलर की सदरी पहनी थी। जिसके साथ - साथ उन्होंने अपने गले में गमछा और काले रंग के जूते पहन अपने इस ट्रेशनल लुक को पूरा किया। उनके इस सादगी भरे लुक को देख लोग तारीफ करते नहीं थक रहें हैं। संसद भवन के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धोती - कुर्ता पहन अपनी भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान जाहिर किया है। जोकि दुनिया को यह संदेश देता है की हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत के साथ - साथ गौरवान्वित और स्वतंत्र राष्ट्र है। जब हमारे देश के प्रधानमंत्री होकर अपनी संस्कृति को बढ़ावा दे रहें हैं और अपने भारतीय पहनावे को गर्व से देश के सामने लेकर आ रहें हैं तो हमें भी उनका साथ देना चाहिए। हमें भारतीय होने पर गर्व करना चाहिए।
कोलकाता, 31 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जारी हिंसक झड़पों में दो व्यक्तियों की मौत हो गई व कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के एक हफ्ते बाद भी जिलों से हिंसक घटनाओं की सूचना आ रही है। भाजपा के कई कार्यकर्ताओं व दूसरी विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं को पीटा गया है, जबकि उनके घरों व वाहनों में तोड़-फोड़ की गई है। उन्होंने कहा कि अगर हत्या का कोई राजनीतिक संबंध हुआ तो आगे जांच हो सकती है। एक अन्य घटना में बांकुरा की पूर्व तृणमूल पंचायत प्रधान काजल मंडल (38) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
कोलकाता, इकतीस मई । पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी के बीच जारी हिंसक झड़पों में दो व्यक्तियों की मौत हो गई व कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के एक हफ्ते बाद भी जिलों से हिंसक घटनाओं की सूचना आ रही है। भाजपा के कई कार्यकर्ताओं व दूसरी विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं को पीटा गया है, जबकि उनके घरों व वाहनों में तोड़-फोड़ की गई है। उन्होंने कहा कि अगर हत्या का कोई राजनीतिक संबंध हुआ तो आगे जांच हो सकती है। एक अन्य घटना में बांकुरा की पूर्व तृणमूल पंचायत प्रधान काजल मंडल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
केशव पूर्व रीति कवियों में कृपाराम का नाम इसलिये लिया जाता है कि इनकी 'हित तरंगिणी' ( सं० १५६८ ) से यह स्पष्ट आभास मिल जाता है कि इनसे पहले या इनके सम-सामयिक कवि शृंगार रस का वर्णन विस्तारपूर्वक करते थे । इसी कारण इन्होंने दोहे जैसे छोटे छन्द में शृंगार रस का निरूपण संक्षिप्त शैली मे किया। कदाचित् संक्षिप्त शैली को स्मरण-सौर्य के लिये ही इन्होंने अपनाया होगा ।' सम्प्रति 'हित तरंगिणी' की प्रामाणिकता के सम्बन्ध में विद्वानों को सन्देह है। सर्वप्रथम पं० चन्द्रबली पाण्डेय ने अपने 'केशवदास' ग्रन्थ में 'हित तरंगिणी' के रचना - काल से सम्बन्धित दोहे के आधार पर इसे परवर्ती रचना माना है। 'हित तरगिणी' का रचना काल विषयक दोहा इस प्रकार है( हित तरंगिणी, छन्द सं० २०६ ) आचार्य पं० चन्द्रबली पाण्डेय ने इस दोहे में पाठान्तर माना है और तदनुसार इसका रचना - काल सं० १७६८ निर्धारित किया है। इसकी अप्रामाणिकता के सम्बन्ध में दूसरा तर्क यह दिया जाता है कि इसमें दिन का उल्लेख नहीं है, पर दिन के उल्लेख न होने से किसी कृति की रचना विषयक प्रामाणिकता संदिग्ध नहीं मानी जा सकती । यह तर्क इसकी प्रामाणिकता का विशेष पुष्ट आधार नहीं है। ब्रजभाषा साहित्य के ऐसे बहुत से ग्रन्थ हैं, जिनमें तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है। क्या इस आधार पर उन्हें प्रप्रामाणिक माना जा सकता है ? प्रताप साहि कृत प्रसिद्ध रीति ग्रन्थ 'व्यंग्यार्थ कौमुदी' के अन्त में रचना-काल विषयक जो दोहा दिया गया है, उसमें भी तिथि का उल्लेख नहीं है। क्या इस आधार पर विद्वान उसे भी परवर्ती रचना मानते हैं ? 'हिततरंगिणी' के सम्बन्ध में डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी और सिधि निधि शिव मुख चन्द्र लखि माघ शुक्ल तृतियासु । हित तरंगिरणी हो रची, कवि हित, परम प्रकास ॥ १. बरनत कवि शृंगार रस, छन्द बड़े विस्तारि । बड़े मैं बरन्यो दोहान बिच, यातें सुघर विचारि ॥४ ( हित तरंगिणी - कृपाराम, सं० जगन्नाथदास रत्नाकर, पृ० १, सं० १६५२, भारत जीवन प्रेस, काशी ) । केशवदास - आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय, पृ० ४०८, प्र० सं० - । संवत् ससि वसु वसु सु दूँ, गनि अषाढ़ को मास । किय व्यंग्यारथ कौमुदी, सुकवि प्रताप प्रकास ( व्यंग्या कौमुदी, सं० रामकृष्ण वर्मा, पृ० ८४ प्र० सं० ) ४. हिन्दी साहित्य उसका उद्भव और विकास - डा० हजारी प्रसाद द्विवेदी,
केशव पूर्व रीति कवियों में कृपाराम का नाम इसलिये लिया जाता है कि इनकी 'हित तरंगिणी' से यह स्पष्ट आभास मिल जाता है कि इनसे पहले या इनके सम-सामयिक कवि शृंगार रस का वर्णन विस्तारपूर्वक करते थे । इसी कारण इन्होंने दोहे जैसे छोटे छन्द में शृंगार रस का निरूपण संक्षिप्त शैली मे किया। कदाचित् संक्षिप्त शैली को स्मरण-सौर्य के लिये ही इन्होंने अपनाया होगा ।' सम्प्रति 'हित तरंगिणी' की प्रामाणिकता के सम्बन्ध में विद्वानों को सन्देह है। सर्वप्रथम पंशून्य चन्द्रबली पाण्डेय ने अपने 'केशवदास' ग्रन्थ में 'हित तरंगिणी' के रचना - काल से सम्बन्धित दोहे के आधार पर इसे परवर्ती रचना माना है। 'हित तरगिणी' का रचना काल विषयक दोहा इस प्रकार है आचार्य पंशून्य चन्द्रबली पाण्डेय ने इस दोहे में पाठान्तर माना है और तदनुसार इसका रचना - काल संशून्य एक हज़ार सात सौ अड़सठ निर्धारित किया है। इसकी अप्रामाणिकता के सम्बन्ध में दूसरा तर्क यह दिया जाता है कि इसमें दिन का उल्लेख नहीं है, पर दिन के उल्लेख न होने से किसी कृति की रचना विषयक प्रामाणिकता संदिग्ध नहीं मानी जा सकती । यह तर्क इसकी प्रामाणिकता का विशेष पुष्ट आधार नहीं है। ब्रजभाषा साहित्य के ऐसे बहुत से ग्रन्थ हैं, जिनमें तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है। क्या इस आधार पर उन्हें प्रप्रामाणिक माना जा सकता है ? प्रताप साहि कृत प्रसिद्ध रीति ग्रन्थ 'व्यंग्यार्थ कौमुदी' के अन्त में रचना-काल विषयक जो दोहा दिया गया है, उसमें भी तिथि का उल्लेख नहीं है। क्या इस आधार पर विद्वान उसे भी परवर्ती रचना मानते हैं ? 'हिततरंगिणी' के सम्बन्ध में डाशून्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और सिधि निधि शिव मुख चन्द्र लखि माघ शुक्ल तृतियासु । हित तरंगिरणी हो रची, कवि हित, परम प्रकास ॥ एक. बरनत कवि शृंगार रस, छन्द बड़े विस्तारि । बड़े मैं बरन्यो दोहान बिच, यातें सुघर विचारि ॥चार । केशवदास - आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय, पृशून्य चार सौ आठ, प्रशून्य संशून्य - । संवत् ससि वसु वसु सु दूँ, गनि अषाढ़ को मास । किय व्यंग्यारथ कौमुदी, सुकवि प्रताप प्रकास चार. हिन्दी साहित्य उसका उद्भव और विकास - डाशून्य हजारी प्रसाद द्विवेदी,
'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि' पुस्तक पढ़ गया हूँ । इसमें प्राचीन काल के वैदिक धर्म से लेकर मध्ययुगीन वैष्णव, शैव, शाक्त तथा सिद्ध, नाथ और सूफी सम्प्रदाय तक का विवरण दिया गया है । आरम्भ के तीन अध्याय हिन्दी साहित्य के उद्गम और विकास के पूर्व की स्थिति का परिचय कराते हैं वे प्रत्यक्ष रूप से हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि की सीमा में नहीं आते, परन्तु भारतीय धर्म और दर्शन की मध्ययुगीन धारा के मूलस्रोत अतिशय प्राचीन हैं, उनका उल्लेख किये बिना किसी भी भारतीय धार्मिक या दार्शनिक सम्प्रदाय का विवरण अधूरा ही रहेगा। इस पुस्तक में लेखक की दूसरी विशेषता यह है कि वह विभिन्न सम्प्रदायों की दार्शनिक उपपत्तियों का परिचय कराता हुआ उन सामाजिक स्थितियों का भी निरूपण करता है जिनमें वे परिवर्तन हुये थे । विभिन्न सम्प्रदायों का एक-दूसरे पर किस प्रकार प्रभाव पड़ा, कितनी बातों में समानता है और कितना अन्तर है, इन प्रश्नों का उत्तर भी पुस्तक में दिया गया है । हिन्दी के कतिपय प्रमुख कवियों - सूर, तुलसी, कबीर और जायसी के दार्शनिक विश्वासों और विचारों पर स्वतन्त्र लेख भी दिये गये हैं । पुस्तक के विवेचन का क्रम सैद्धान्तिक न होकर व्याव हारिक और सर्वसामान्य है । इससे पण्डितों और विशेषज्ञों का काम भले ही न चले, हिन्दी के सामान्य पाठकों के लिए पुस्तक की उपयोगिता विशेष रूप से बढ़ गई है । दर्शन को स्वतन्त्र विषय मानकर उसके विकास-क्रम की विवेचना करने में लेखक को उतनी दिलचस्पी नहीं है जितनी भारतीय समाज और संस्कृति की विकास-धारा में विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों का योग और महत्त्व प्रदर्शित करने में है 1 यह पुस्तक की नवीनता और विशेषता है पर यहीं उसकी सीमा रेखा और उसका निर्दिष्ट प्रयोजन भी हैं। इस सीमा और प्रयोजन के भीतर पुस्तक की उपादेयता असंदिग्ध है और इसके लिए लेखक का परिश्रम सार्थक और अभिनन्दनीय है । विश्वविद्यालयों में साहित्यिक इतिहास के साथ सम-सामयिक सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का ज्ञान अपेक्षित है, कुछ स्थानों पर तो इसका नियमित रूप से अध्ययन भी होता है और यह पाठ्यक्रम का एक अङ्ग ही है। प्रस्तुत पुस्तक सांस्कृतिक विकास के दार्शनिक पक्ष को स्पष्ट करने में पूरी तरह सहायक होगी। मेरा विश्वास है कि विश्वविद्यालयों में तथा अन्यत्र भी साहित्य के उच्च श्रेणी के विद्यार्थियों द्वारा पुस्तक का अधिकाधिक उपयोग होगा। मैं विवेक और परिश्रम पूर्वक प्रणीत इस पुस्तक लिये लेखक को हार्दिक साधुवाद देता हूँ । सागर विश्वविद्यालय ] - नन्ददुलारे वाजपेयी दो शब्द प्रस्तुत पुस्तक 'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि' मध्यकालीन हिन्दी काव्य में प्राप्त दार्शनिक धारणाओं का विवेचन प्रस्तुत करती है। हिन्दी साहित्य एक सहस्राब्दी से भी अधिक प्राचीन है, इतनी दीर्घ अवधि में धार्मिक एवं दार्शनिक विकास के अनेक सोपान मिलते हैं, फिर हिन्दी के प्रारम्भिक युग तक शतशः दार्शनिक धारगायें विकास के अनेक स्तरों को पार करती हुई, सर्वथा नवीन रूपों में, हिन्दी साहित्य में प्रतिविम्बित होने के लिए प्रस्तुत हो चुकी थीं । अतः सिद्ध-साहित्य से भी पूर्व, वेदों से लेकर बौद्ध दर्शन तक विकास की एक संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत करने की आवश्यकता थी, इस पुस्तक में मैंने यही प्रयत्न किया है । किन्तु साथ ही वैदिक युग में तथा उसके पश्चात् जो दार्शनिक धारणायें और विश्वास हमें मिलते हैं उनका स्रोत तर चिन्तन के गर्भ में खोजा जा सकता है, परन्तु यदि मैं ऐसा प्रयत्न इसी पुस्तक में करता तो पुस्तक का कलेवर बहुत बढ़ जाता, अतः उस पर फिर कभी विचार करूँगा । मैंने उन्हीं दार्शनिक सम्प्रदायों पर विस्तार से विचार किया है जिन्होंने हमारे मध्यकालीन काव्य को अधिक प्रभावित किया परन्तु 'प्रामाण्यवाद' पर विचार नहीं किया गया, वह अनावश्यक भी था । मेरा उद्देश्य तो निश्चित दार्शनिक धारणाओं का विश्लेषण कर, काव्य में उनके प्रतिबिम्चित एवम् अभिव्यक्त रूपों की पहचान करना रहा है। 'तुलसी', 'कबीर', 'सूर' तथा 'जायसी' के दार्शनिक विचारविकास पर किञ्चित् विस्तार से विचार किया गया है। यह पुस्तक केवल मध्यकालीन काव्य की दार्शनिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है, इसमें सिद्ध, नाथ, सन्त, वैष्णव तथा सूफ़ी काव्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करके का प्रयत्न किया गया है, आधुनिक काव्य के व्यक्तित्व निर्माण में 'दर्शन' का भी महत्वपूर्ण हाथ रहा है, उसे स्पष्ट करने के लिए एक अलग पुस्तक की आय श्यकता होगी अतः इस पुस्तक को 'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठ भूमि' का 'प्रथम भाग' समझना चाहिये । साहित्य की तरह 'दर्शन' भी सामाजिक परिस्थितियों से प्रभा वित होता है, मैंने दार्शनिक आन्दोलनों को द्वन्द्वात्मक दृष्टि से ही देखा है । - विश्वम्भरनाथ उपाध्याय
'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि' पुस्तक पढ़ गया हूँ । इसमें प्राचीन काल के वैदिक धर्म से लेकर मध्ययुगीन वैष्णव, शैव, शाक्त तथा सिद्ध, नाथ और सूफी सम्प्रदाय तक का विवरण दिया गया है । आरम्भ के तीन अध्याय हिन्दी साहित्य के उद्गम और विकास के पूर्व की स्थिति का परिचय कराते हैं वे प्रत्यक्ष रूप से हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि की सीमा में नहीं आते, परन्तु भारतीय धर्म और दर्शन की मध्ययुगीन धारा के मूलस्रोत अतिशय प्राचीन हैं, उनका उल्लेख किये बिना किसी भी भारतीय धार्मिक या दार्शनिक सम्प्रदाय का विवरण अधूरा ही रहेगा। इस पुस्तक में लेखक की दूसरी विशेषता यह है कि वह विभिन्न सम्प्रदायों की दार्शनिक उपपत्तियों का परिचय कराता हुआ उन सामाजिक स्थितियों का भी निरूपण करता है जिनमें वे परिवर्तन हुये थे । विभिन्न सम्प्रदायों का एक-दूसरे पर किस प्रकार प्रभाव पड़ा, कितनी बातों में समानता है और कितना अन्तर है, इन प्रश्नों का उत्तर भी पुस्तक में दिया गया है । हिन्दी के कतिपय प्रमुख कवियों - सूर, तुलसी, कबीर और जायसी के दार्शनिक विश्वासों और विचारों पर स्वतन्त्र लेख भी दिये गये हैं । पुस्तक के विवेचन का क्रम सैद्धान्तिक न होकर व्याव हारिक और सर्वसामान्य है । इससे पण्डितों और विशेषज्ञों का काम भले ही न चले, हिन्दी के सामान्य पाठकों के लिए पुस्तक की उपयोगिता विशेष रूप से बढ़ गई है । दर्शन को स्वतन्त्र विषय मानकर उसके विकास-क्रम की विवेचना करने में लेखक को उतनी दिलचस्पी नहीं है जितनी भारतीय समाज और संस्कृति की विकास-धारा में विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों का योग और महत्त्व प्रदर्शित करने में है एक यह पुस्तक की नवीनता और विशेषता है पर यहीं उसकी सीमा रेखा और उसका निर्दिष्ट प्रयोजन भी हैं। इस सीमा और प्रयोजन के भीतर पुस्तक की उपादेयता असंदिग्ध है और इसके लिए लेखक का परिश्रम सार्थक और अभिनन्दनीय है । विश्वविद्यालयों में साहित्यिक इतिहास के साथ सम-सामयिक सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का ज्ञान अपेक्षित है, कुछ स्थानों पर तो इसका नियमित रूप से अध्ययन भी होता है और यह पाठ्यक्रम का एक अङ्ग ही है। प्रस्तुत पुस्तक सांस्कृतिक विकास के दार्शनिक पक्ष को स्पष्ट करने में पूरी तरह सहायक होगी। मेरा विश्वास है कि विश्वविद्यालयों में तथा अन्यत्र भी साहित्य के उच्च श्रेणी के विद्यार्थियों द्वारा पुस्तक का अधिकाधिक उपयोग होगा। मैं विवेक और परिश्रम पूर्वक प्रणीत इस पुस्तक लिये लेखक को हार्दिक साधुवाद देता हूँ । सागर विश्वविद्यालय ] - नन्ददुलारे वाजपेयी दो शब्द प्रस्तुत पुस्तक 'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि' मध्यकालीन हिन्दी काव्य में प्राप्त दार्शनिक धारणाओं का विवेचन प्रस्तुत करती है। हिन्दी साहित्य एक सहस्राब्दी से भी अधिक प्राचीन है, इतनी दीर्घ अवधि में धार्मिक एवं दार्शनिक विकास के अनेक सोपान मिलते हैं, फिर हिन्दी के प्रारम्भिक युग तक शतशः दार्शनिक धारगायें विकास के अनेक स्तरों को पार करती हुई, सर्वथा नवीन रूपों में, हिन्दी साहित्य में प्रतिविम्बित होने के लिए प्रस्तुत हो चुकी थीं । अतः सिद्ध-साहित्य से भी पूर्व, वेदों से लेकर बौद्ध दर्शन तक विकास की एक संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत करने की आवश्यकता थी, इस पुस्तक में मैंने यही प्रयत्न किया है । किन्तु साथ ही वैदिक युग में तथा उसके पश्चात् जो दार्शनिक धारणायें और विश्वास हमें मिलते हैं उनका स्रोत तर चिन्तन के गर्भ में खोजा जा सकता है, परन्तु यदि मैं ऐसा प्रयत्न इसी पुस्तक में करता तो पुस्तक का कलेवर बहुत बढ़ जाता, अतः उस पर फिर कभी विचार करूँगा । मैंने उन्हीं दार्शनिक सम्प्रदायों पर विस्तार से विचार किया है जिन्होंने हमारे मध्यकालीन काव्य को अधिक प्रभावित किया परन्तु 'प्रामाण्यवाद' पर विचार नहीं किया गया, वह अनावश्यक भी था । मेरा उद्देश्य तो निश्चित दार्शनिक धारणाओं का विश्लेषण कर, काव्य में उनके प्रतिबिम्चित एवम् अभिव्यक्त रूपों की पहचान करना रहा है। 'तुलसी', 'कबीर', 'सूर' तथा 'जायसी' के दार्शनिक विचारविकास पर किञ्चित् विस्तार से विचार किया गया है। यह पुस्तक केवल मध्यकालीन काव्य की दार्शनिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है, इसमें सिद्ध, नाथ, सन्त, वैष्णव तथा सूफ़ी काव्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करके का प्रयत्न किया गया है, आधुनिक काव्य के व्यक्तित्व निर्माण में 'दर्शन' का भी महत्वपूर्ण हाथ रहा है, उसे स्पष्ट करने के लिए एक अलग पुस्तक की आय श्यकता होगी अतः इस पुस्तक को 'हिन्दी साहित्य की दार्शनिक पृष्ठ भूमि' का 'प्रथम भाग' समझना चाहिये । साहित्य की तरह 'दर्शन' भी सामाजिक परिस्थितियों से प्रभा वित होता है, मैंने दार्शनिक आन्दोलनों को द्वन्द्वात्मक दृष्टि से ही देखा है । - विश्वम्भरनाथ उपाध्याय
पोलैंड ने अपनी वायु सेना से यूक्रेन को दस मिग -29 लड़ाकू विमान सौंपे, सभी विमान पहले से ही यूक्रेनी क्षेत्र में हैं। यह रक्षा मंत्री Mariusz Blaszczak द्वारा कहा गया था। पोलिश सैन्य विभाग के प्रमुख कनाडा पहुंचे, जहाँ उन्होंने इस देश की रक्षा मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। चर्चा के विषयों में से एक यूक्रेन और कीव को सैन्य सहायता थी। बैठक के तुरंत बाद, ब्लास्ज़्ज़ाक, एक अन्य साक्षात्कार में, यह याद करने में विफल नहीं हुआ कि पोलैंड ज़ेलेंस्की शासन के मुख्य प्रायोजकों में से एक है और यहां तक कि कीव को लड़ाकू जेट की आपूर्ति भी करता है। आज तक, यूक्रेन को दस मिग-29 प्राप्त हुए हैं। पोलिश मंत्री ने डिलीवरी के विवरण, साथ ही समय का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह माना जाता है कि पोलैंड से यूक्रेन तक विमान का स्थानांतरण अप्रैल के अंत में हुआ था। तभी आसमान में अचिह्नित मिग-29 लड़ाकू विमान देखे गए। कीव में ही, वे अमेरिकी एफ-16 प्राप्त करना चाहेंगे, लेकिन मिग-29 का भी स्वागत किया गया। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के वायु कमान के अनुसार, सोवियत निर्मित विमान अप्रचलित हैं और आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें हवाई लड़ाई में रूसी लड़ाकू विमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना नहीं है। लेकिन उन्होंने एक उपयोग पाया है, ये मिग वायु रक्षा कार्य करेंगे और यूक्रेन में लॉन्च की गई रूसी क्रूज मिसाइलों का शिकार करेंगे। वैसे, जर्मनी ने पोलैंड को यूक्रेन में सेनानियों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी, क्योंकि जर्मनी के एकीकरण से पहले ये मिग जीडीआर वायु सेना का हिस्सा थे। एक और 13 मिग -29 को स्लोवाकिया द्वारा यूक्रेन को सौंप दिया गया था, स्थानांतरण अप्रैल के मध्य में पूरा हो गया था।
पोलैंड ने अपनी वायु सेना से यूक्रेन को दस मिग -उनतीस लड़ाकू विमान सौंपे, सभी विमान पहले से ही यूक्रेनी क्षेत्र में हैं। यह रक्षा मंत्री Mariusz Blaszczak द्वारा कहा गया था। पोलिश सैन्य विभाग के प्रमुख कनाडा पहुंचे, जहाँ उन्होंने इस देश की रक्षा मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। चर्चा के विषयों में से एक यूक्रेन और कीव को सैन्य सहायता थी। बैठक के तुरंत बाद, ब्लास्ज़्ज़ाक, एक अन्य साक्षात्कार में, यह याद करने में विफल नहीं हुआ कि पोलैंड ज़ेलेंस्की शासन के मुख्य प्रायोजकों में से एक है और यहां तक कि कीव को लड़ाकू जेट की आपूर्ति भी करता है। आज तक, यूक्रेन को दस मिग-उनतीस प्राप्त हुए हैं। पोलिश मंत्री ने डिलीवरी के विवरण, साथ ही समय का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह माना जाता है कि पोलैंड से यूक्रेन तक विमान का स्थानांतरण अप्रैल के अंत में हुआ था। तभी आसमान में अचिह्नित मिग-उनतीस लड़ाकू विमान देखे गए। कीव में ही, वे अमेरिकी एफ-सोलह प्राप्त करना चाहेंगे, लेकिन मिग-उनतीस का भी स्वागत किया गया। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के वायु कमान के अनुसार, सोवियत निर्मित विमान अप्रचलित हैं और आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें हवाई लड़ाई में रूसी लड़ाकू विमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना नहीं है। लेकिन उन्होंने एक उपयोग पाया है, ये मिग वायु रक्षा कार्य करेंगे और यूक्रेन में लॉन्च की गई रूसी क्रूज मिसाइलों का शिकार करेंगे। वैसे, जर्मनी ने पोलैंड को यूक्रेन में सेनानियों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी, क्योंकि जर्मनी के एकीकरण से पहले ये मिग जीडीआर वायु सेना का हिस्सा थे। एक और तेरह मिग -उनतीस को स्लोवाकिया द्वारा यूक्रेन को सौंप दिया गया था, स्थानांतरण अप्रैल के मध्य में पूरा हो गया था।
इराक़ में अमरीकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद, अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और दूसरे अधिकारियों ने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्यवाही में कोई एक सैनिक भी घायल नहीं हुआ है। शुक्रवार को डिफ़ेंस वन वेबसाइट ने रहस्योद्घाटन किया था कि ईरानी हमले के बाद कम से कम घायल 11 अमरीकी सैनिकों को जर्मनी और कुवैत स्थानांतरित किया गया था। इस ख़बर के लीक होने के बाद, उसी दिन अमरीकी सेना ने स्वीकार किया कि ईरानी हमले में 11 सैनिक घायल हुए थे, जिन्हें उपचार के लिए जर्मनी और कुवैत ले जाया गया है। 19 जनवरी को कुवैत के अलक़बस अख़बार ने एक नया ख़ुलासा किया है कि घायल होने वाले 16 अमरीकी सैनिकों को इलाज के लिए कुवैत के अरीफ़जान इलाक़े में स्थित एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुवैती अख़बार का कहना है कि इन सैनिकों को कुवैत स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे के अस्पताल में भर्ती किया गया है। इन सैनिकों के शरीर पर जलने के गहरे घाव हैं और बदन पर मिसाइल के टुकड़े लगने के भी घाव हैं।
इराक़ में अमरीकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद, अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और दूसरे अधिकारियों ने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्यवाही में कोई एक सैनिक भी घायल नहीं हुआ है। शुक्रवार को डिफ़ेंस वन वेबसाइट ने रहस्योद्घाटन किया था कि ईरानी हमले के बाद कम से कम घायल ग्यारह अमरीकी सैनिकों को जर्मनी और कुवैत स्थानांतरित किया गया था। इस ख़बर के लीक होने के बाद, उसी दिन अमरीकी सेना ने स्वीकार किया कि ईरानी हमले में ग्यारह सैनिक घायल हुए थे, जिन्हें उपचार के लिए जर्मनी और कुवैत ले जाया गया है। उन्नीस जनवरी को कुवैत के अलक़बस अख़बार ने एक नया ख़ुलासा किया है कि घायल होने वाले सोलह अमरीकी सैनिकों को इलाज के लिए कुवैत के अरीफ़जान इलाक़े में स्थित एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुवैती अख़बार का कहना है कि इन सैनिकों को कुवैत स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे के अस्पताल में भर्ती किया गया है। इन सैनिकों के शरीर पर जलने के गहरे घाव हैं और बदन पर मिसाइल के टुकड़े लगने के भी घाव हैं।
सीएचपी के गोक ने काय्योलु-किज़िले मेट्रो लाइन की कमियों के बारे में पूछाः सीएचपी के लेवेंट गोक ने पूछा कि सोगुतोज़ु-अंकारे कनेक्शन, जो वर्षों पहले पूरा हो गया था, अभी तक सेवा में क्यों नहीं लाया गया है और काय्योलु-किज़िले मेट्रो लाइन की कमियां क्यों हैं समाधान नहीं किया गया. गोक ने अपने संसदीय प्रश्न में निम्नलिखित कथनों का उपयोग कियाः Kızılay - Çayyolu मेट्रो लाइन को 2014 में सेवा में लाया गया था। हालाँकि यह पूरा हो चुका है, Söğütözü - Aşti Ankaray कनेक्शन अभी तक सेवा में नहीं डाला गया है। हमारे नागरिक जो काय्योलू मेट्रो का उपयोग करते हैं, वे AŞTİ तक पहुंचने के लिए Söğütözü स्टॉप पर उतरते हैं और फिर AŞTİ तक पहुंचने के लिए मिनीबस या बस लेते हैं। चूंकि कनेक्शन पूरा नहीं हुआ है, अंकारे लाइन पर अन्य स्टॉप्स तक किज़िले कनेक्शन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। मेट्रो लाइन ने अपेक्षा के अनुरूप परिवहन की सुविधा नहीं दी, और अंकारा निवासियों को एक-दूसरे से दूर के कनेक्शन का शिकार होना पड़ा। इस्कीसिर सड़क भारी वाहन यातायात वाली एक मुख्य धमनी है, जिसके दोनों ओर बस्तियाँ और सार्वजनिक इमारतें हैं। इस्कीसिर रोड के अधिकांश मेट्रो स्टेशनों में पैदल यात्री अंडरपास नहीं हैं जो सड़क के पार सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे। बिलकेंट स्टेशन पर पैदल यात्री अंडरपास अक्सर विभिन्न कारणों से बंद रहता है, और बिलकेंट स्टेशन छोड़ने वाले हमारे नागरिक खुद को वाहन यातायात में पाते हैं। इस जानकारी के आलोक मेंः 1. Söğütözü - AŞTİ Ankaray कनेक्शन को सेवा में क्यों नहीं डाला गया है, जबकि इसका निर्माण पूरा हो चुका है? 2. क्या आपको लगता है कि यह सही है कि अंकारे और मेट्रो लाइनें, जिनसे शहर के यातायात को कम करने की उम्मीद है, को अधिकांश दिशाओं में सतही परिवहन की आवश्यकता होती है? 3. 2014, 2015, 2016 और 2017 में निजी बस और मिनीबस लाइनों से अंकारा मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका की वार्षिक आय क्या है? 4. इस्कीसिर रोड पर स्टेशनों का उपयोग करने वाले पैदल यात्री सुरक्षित अंडरपास के साथ सड़क पार करने में सक्षम क्यों नहीं हैं? 5. हमारे विकलांग नागरिक इन मेट्रो स्टेशनों का उपयोग करने के बाद सड़क के दोनों ओर कैसे जा पाते हैं? 6. क्या काय्योलू मेट्रो लाइन, जो 3 साल से अधिक समय से सेवा में है, की कमियों को दूर करने के लिए कोई काम किया जा रहा है?
सीएचपी के गोक ने काय्योलु-किज़िले मेट्रो लाइन की कमियों के बारे में पूछाः सीएचपी के लेवेंट गोक ने पूछा कि सोगुतोज़ु-अंकारे कनेक्शन, जो वर्षों पहले पूरा हो गया था, अभी तक सेवा में क्यों नहीं लाया गया है और काय्योलु-किज़िले मेट्रो लाइन की कमियां क्यों हैं समाधान नहीं किया गया. गोक ने अपने संसदीय प्रश्न में निम्नलिखित कथनों का उपयोग कियाः Kızılay - Çayyolu मेट्रो लाइन को दो हज़ार चौदह में सेवा में लाया गया था। हालाँकि यह पूरा हो चुका है, Söğütözü - Aşti Ankaray कनेक्शन अभी तक सेवा में नहीं डाला गया है। हमारे नागरिक जो काय्योलू मेट्रो का उपयोग करते हैं, वे AŞTİ तक पहुंचने के लिए Söğütözü स्टॉप पर उतरते हैं और फिर AŞTİ तक पहुंचने के लिए मिनीबस या बस लेते हैं। चूंकि कनेक्शन पूरा नहीं हुआ है, अंकारे लाइन पर अन्य स्टॉप्स तक किज़िले कनेक्शन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। मेट्रो लाइन ने अपेक्षा के अनुरूप परिवहन की सुविधा नहीं दी, और अंकारा निवासियों को एक-दूसरे से दूर के कनेक्शन का शिकार होना पड़ा। इस्कीसिर सड़क भारी वाहन यातायात वाली एक मुख्य धमनी है, जिसके दोनों ओर बस्तियाँ और सार्वजनिक इमारतें हैं। इस्कीसिर रोड के अधिकांश मेट्रो स्टेशनों में पैदल यात्री अंडरपास नहीं हैं जो सड़क के पार सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे। बिलकेंट स्टेशन पर पैदल यात्री अंडरपास अक्सर विभिन्न कारणों से बंद रहता है, और बिलकेंट स्टेशन छोड़ने वाले हमारे नागरिक खुद को वाहन यातायात में पाते हैं। इस जानकारी के आलोक मेंः एक. Söğütözü - AŞTİ Ankaray कनेक्शन को सेवा में क्यों नहीं डाला गया है, जबकि इसका निर्माण पूरा हो चुका है? दो. क्या आपको लगता है कि यह सही है कि अंकारे और मेट्रो लाइनें, जिनसे शहर के यातायात को कम करने की उम्मीद है, को अधिकांश दिशाओं में सतही परिवहन की आवश्यकता होती है? तीन. दो हज़ार चौदह, दो हज़ार पंद्रह, दो हज़ार सोलह और दो हज़ार सत्रह में निजी बस और मिनीबस लाइनों से अंकारा मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका की वार्षिक आय क्या है? चार. इस्कीसिर रोड पर स्टेशनों का उपयोग करने वाले पैदल यात्री सुरक्षित अंडरपास के साथ सड़क पार करने में सक्षम क्यों नहीं हैं? पाँच. हमारे विकलांग नागरिक इन मेट्रो स्टेशनों का उपयोग करने के बाद सड़क के दोनों ओर कैसे जा पाते हैं? छः. क्या काय्योलू मेट्रो लाइन, जो तीन साल से अधिक समय से सेवा में है, की कमियों को दूर करने के लिए कोई काम किया जा रहा है?
दीपक दुबे, नई दिल्लीः श्रद्धा वाकर हत्याकांड के आरोपी आफताब पूनावाला को तिहाड जेल नंबर 4 में एक अलग सेल में रखा गया है। जेल प्रबंधन के मुताबिक, आफताब को स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं है। शनिवार को जब उसे लाया गया था तब उसका हेल्थ चेकअप किया गया था, आज भी हेल्थ चेकअप किया गया है। प्रबंधन के मुताबिक, आफताब के साथ दो अन्य कैदियों को भी रखा गया है। सेल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। जब बाकी अन्य कैदी अपने सेल में चले जाते हैं तब थोड़ी देर के लिए आफताब को अपने सेल से निकलकर टहलने का मौका दिया जाता है। जानकारी के मुताबिक, जेल सुपरिटेंडेंट को कोर्ट से ऑर्डर मिला है कि आफताब को 28, 29 नवंबर और 5 जनवरी को सीधा FSL रोहणी के सामने पेश किया जाए। संभावना है कि आफताब पूनावाला का 28 नवंबर को नार्को टेस्ट हो सकता है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने खुद को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। आफ़ताब का नार्को टेस्ट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अंबेडकर अस्पताल में किया जाएगा और इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 3 से 4 घंटे लग सकते हैं। आफताब ने जेल में अपनी पहली रात बेफिक्र होकर गुजारी। उसने बिना किसी आपत्ति के जेल मैनुअल के अनुसार खाना खाया और सेल में शांति होकर सो गया। बता दें कि आफताब पर अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या करने का आरोप है, जिसने बाद में उसकी लाश को 35 टुकड़ों में काट दिया और दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर फेंक दिया।
दीपक दुबे, नई दिल्लीः श्रद्धा वाकर हत्याकांड के आरोपी आफताब पूनावाला को तिहाड जेल नंबर चार में एक अलग सेल में रखा गया है। जेल प्रबंधन के मुताबिक, आफताब को स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं है। शनिवार को जब उसे लाया गया था तब उसका हेल्थ चेकअप किया गया था, आज भी हेल्थ चेकअप किया गया है। प्रबंधन के मुताबिक, आफताब के साथ दो अन्य कैदियों को भी रखा गया है। सेल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे से चौबीस घंटाटे मॉनिटरिंग की जा रही है। जब बाकी अन्य कैदी अपने सेल में चले जाते हैं तब थोड़ी देर के लिए आफताब को अपने सेल से निकलकर टहलने का मौका दिया जाता है। जानकारी के मुताबिक, जेल सुपरिटेंडेंट को कोर्ट से ऑर्डर मिला है कि आफताब को अट्ठाईस, उनतीस नवंबर और पाँच जनवरी को सीधा FSL रोहणी के सामने पेश किया जाए। संभावना है कि आफताब पूनावाला का अट्ठाईस नवंबर को नार्को टेस्ट हो सकता है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी ने खुद को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। आफ़ताब का नार्को टेस्ट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अंबेडकर अस्पताल में किया जाएगा और इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग तीन से चार घंटाटे लग सकते हैं। आफताब ने जेल में अपनी पहली रात बेफिक्र होकर गुजारी। उसने बिना किसी आपत्ति के जेल मैनुअल के अनुसार खाना खाया और सेल में शांति होकर सो गया। बता दें कि आफताब पर अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या करने का आरोप है, जिसने बाद में उसकी लाश को पैंतीस टुकड़ों में काट दिया और दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर फेंक दिया।
Borreliosis एक गंभीर पर्याप्त संक्रामक बीमारी है। यह रोग स्पिरोकेट्स के रोगाणुओं के कारण होता है, जिन्हें बोरेलिया भी कहा जाता है। Borrelia iksodovyh pliers स्थानांतरण। वे त्वचा से चिपके रहते हैं और चूसने की प्रक्रिया में वे संक्रमण के कारक एजेंट से संक्रमित लार शुरू करते हैं। एक बार त्वचा के नीचे, बोरेलियास काटने के स्थल पर तीव्रता से गुणा करना शुरू होता है और फिर रक्त के माध्यम से शरीर के चारों ओर ले जाया जाता है, जो मुख्य रूप से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी, हृदय की मांसपेशियों और बड़े जोड़ों को प्रभावित करता है। इस तरह की बीमारी की उपस्थिति में समस्या यह है कि स्पिरोचैएट के कारक एजेंट कई दशकों तक शरीर में बने कैप्सूल में "छिपा" सकते हैं और उन्हें समय-समय पर अपने बारे में जान सकते हैं, यानी, यह रोग पुरानी हो जाती है। एक राय है कि इस बीमारी को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है। जब त्वचा पर संक्रामक सूक्ष्मजीवों के साथ संक्रमण एक दाग के रूप में विशेषता लाल रंग और सामान्य त्वचा रंग के लुमेन के साथ एक लाल अंगूठी दिखाई देता है। समय के साथ रिंग 1 से 10 सेमी, या इससे भी अधिक बढ़ता है। दवा में, इसे प्रवासी कणिका erythema कहा जाता है। बोरेलीओसिस के लिए रक्त परीक्षण कब लेना है? यह बीमारी आम तौर पर टिक के संपर्क के 7 दिन बाद विकसित होने लगती है, सक्रिय विकास की अवधि 3 से 33 दिनों तक होती है। यदि स्पिरोचैटेस के साथ संक्रमण के पहले लक्षण पाए जाते हैं, तो कथित निदान की पुष्टि प्राप्त करने के लिए टिक-बोर्न बोरेलीओसिस के लिए विश्लेषण जमा करने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर संभावित संक्रमण के बाद 2 से 4 सप्ताह के भीतर परीक्षण लेने की सलाह देते हैं। टिक-बोर्न बोरेलीओसिस के लिए रक्त परीक्षण कैसा है? नस को नस से लिया जाता है, फिर इसे एक खाली परीक्षण ट्यूब में रखा जाता है, कभी-कभी विशेष जेल वाले ट्यूबों का उपयोग किया जाता है। विश्लेषण का उद्देश्य एम और जी वर्ग के सुरक्षात्मक प्रोटीन के इम्यूनोग्लोबुलिन की पहचान करना है, जो बॉरेलियोसिस वायरस के खिलाफ सुरक्षा के लिए शरीर द्वारा उत्पादित होते हैं। बीमारी के निदान की पुष्टि करने के लिए, एक सीरोलॉजिकल अध्ययन किया जाता है। यह सूक्ष्म जीवों में एंटीबॉडी के पता लगाने पर आधारित है एंजाइम immunoassay (ELISA) की मदद से सीरम। आधे मामलों में, विश्लेषण का परिणाम एंटीबॉडी की उपस्थिति नहीं दिखाता है, लेकिन इसका मतलब संक्रमण की अनुपस्थिति नहीं है। इसलिए, 20-30 दिनों के बाद, दूसरा विश्लेषण किया जाता है, यानी, तथाकथित जोड़ी रक्त सीरम की जांच की जानी चाहिए। यदि विश्लेषण में आईजी एम एंटीबॉडी हैंः - 0. 8 यू / एमएल से कम - इसका मतलब है कि परिणाम नकारात्मक है, यानी, एक व्यक्ति संक्रमित नहीं है; - 0,8 से 1,1 यू / एमएल तक - परिणाम संदिग्ध है, फिर विश्लेषण बार-बार लिया जाता है; - 1. 1 यू / एमएल के बराबर या उससे अधिक - परिणाम सकारात्मक है, यानी, शरीर में संक्रमण होता है।
Borreliosis एक गंभीर पर्याप्त संक्रामक बीमारी है। यह रोग स्पिरोकेट्स के रोगाणुओं के कारण होता है, जिन्हें बोरेलिया भी कहा जाता है। Borrelia iksodovyh pliers स्थानांतरण। वे त्वचा से चिपके रहते हैं और चूसने की प्रक्रिया में वे संक्रमण के कारक एजेंट से संक्रमित लार शुरू करते हैं। एक बार त्वचा के नीचे, बोरेलियास काटने के स्थल पर तीव्रता से गुणा करना शुरू होता है और फिर रक्त के माध्यम से शरीर के चारों ओर ले जाया जाता है, जो मुख्य रूप से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी, हृदय की मांसपेशियों और बड़े जोड़ों को प्रभावित करता है। इस तरह की बीमारी की उपस्थिति में समस्या यह है कि स्पिरोचैएट के कारक एजेंट कई दशकों तक शरीर में बने कैप्सूल में "छिपा" सकते हैं और उन्हें समय-समय पर अपने बारे में जान सकते हैं, यानी, यह रोग पुरानी हो जाती है। एक राय है कि इस बीमारी को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है। जब त्वचा पर संक्रामक सूक्ष्मजीवों के साथ संक्रमण एक दाग के रूप में विशेषता लाल रंग और सामान्य त्वचा रंग के लुमेन के साथ एक लाल अंगूठी दिखाई देता है। समय के साथ रिंग एक से दस सेमी, या इससे भी अधिक बढ़ता है। दवा में, इसे प्रवासी कणिका erythema कहा जाता है। बोरेलीओसिस के लिए रक्त परीक्षण कब लेना है? यह बीमारी आम तौर पर टिक के संपर्क के सात दिन बाद विकसित होने लगती है, सक्रिय विकास की अवधि तीन से तैंतीस दिनों तक होती है। यदि स्पिरोचैटेस के साथ संक्रमण के पहले लक्षण पाए जाते हैं, तो कथित निदान की पुष्टि प्राप्त करने के लिए टिक-बोर्न बोरेलीओसिस के लिए विश्लेषण जमा करने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर संभावित संक्रमण के बाद दो से चार सप्ताह के भीतर परीक्षण लेने की सलाह देते हैं। टिक-बोर्न बोरेलीओसिस के लिए रक्त परीक्षण कैसा है? नस को नस से लिया जाता है, फिर इसे एक खाली परीक्षण ट्यूब में रखा जाता है, कभी-कभी विशेष जेल वाले ट्यूबों का उपयोग किया जाता है। विश्लेषण का उद्देश्य एम और जी वर्ग के सुरक्षात्मक प्रोटीन के इम्यूनोग्लोबुलिन की पहचान करना है, जो बॉरेलियोसिस वायरस के खिलाफ सुरक्षा के लिए शरीर द्वारा उत्पादित होते हैं। बीमारी के निदान की पुष्टि करने के लिए, एक सीरोलॉजिकल अध्ययन किया जाता है। यह सूक्ष्म जीवों में एंटीबॉडी के पता लगाने पर आधारित है एंजाइम immunoassay की मदद से सीरम। आधे मामलों में, विश्लेषण का परिणाम एंटीबॉडी की उपस्थिति नहीं दिखाता है, लेकिन इसका मतलब संक्रमण की अनुपस्थिति नहीं है। इसलिए, बीस-तीस दिनों के बाद, दूसरा विश्लेषण किया जाता है, यानी, तथाकथित जोड़ी रक्त सीरम की जांच की जानी चाहिए। यदि विश्लेषण में आईजी एम एंटीबॉडी हैंः - शून्य. आठ यू / एमएल से कम - इसका मतलब है कि परिणाम नकारात्मक है, यानी, एक व्यक्ति संक्रमित नहीं है; - शून्य,आठ से एक,एक यू / एमएल तक - परिणाम संदिग्ध है, फिर विश्लेषण बार-बार लिया जाता है; - एक. एक यू / एमएल के बराबर या उससे अधिक - परिणाम सकारात्मक है, यानी, शरीर में संक्रमण होता है।
दिलेर समाचार,फर्जी पुलिसकर्मी ने करनाल के एक व्यक्ति को विदेशी कंपनी में पैसा लगाकर दोगुने करने का झांसा देकर बुलाया। जब वह रुपये लेकर पहुंचा तो उसने रुपये छीन लिये। उसने धमकी दी कि अगर अानाकानी की और किसी काे बताया तो महिला से दुष्कर्म के केस में फंसाकर जेल भिजवा देगा। यह वारदात बस अड्डा चौकी से 100 मीटर दूर सुखदेव नगर में जितेंद्रा अस्पताल के सामने पार्क में हुई। शिकायत के बाद पुलिस ने फर्जी पुलिसकर्मी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उनको दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना करनाल के कुटेल गांव का शहजाद है। उसने उत्तर प्रदेश के मेरठ, शामली सहित कई जगहों पर लोगों से ठगी कर रखी है। करनाल के निजी अस्पताल में काम करने वाले सांभली गांव के भगवान दास शर्मा ने बताया कि करनाल के बुढऩपुर गांव का प्रॉपर्टी डीलर सुलिंद्र उर्फ सोनू उसे फरवरी में मिला था। उसने बताया कि एक कंपनी ने हरियाणा में 200 एकड़ जमीन खरीदनी है। यदि वह जमीन दिला देगा तो मोटा कमीशन मिलेगा। इसके बाद उसने 25 फरवरी को सोनू व कंपनी के कथित मैनेजर आदित्य बंसल को गांव में एक किसान की जमीन दिखा दी। भगवान दास शर्मा ने बताया कि इसके बाद सोनू ने बताया कि वह विदेशी कंपनी में रुपये जमा करवाएगा तो उसे दोगुना वापस मिलेंगे। उसने सोनू को दस हजार रुपये दिए। सोनू ने उसे 20 हजार रुपये लौटा दिए। इससे उसे सोनू पर विश्वास हो गया। 8 मार्च को सोनू ने उसे फोन किया कि वह दो लाख रुपये लेकर पानीपत में जितेंद्रा अस्पताल के सामने पार्क में आ जाए। वह रुपये कंपनी में जमा करवा देंगे। इसके दोगुने रुपये हाथो-हाथ दिला देगा। इस पर वह दो लाख रुपये लेकर पानीपत पहुंचा। भगवान दास शर्मा ने बताया कि वहां पर सोनू के अलावा कुटैल का सरवर, पानीपत की महादेव कालोनी का वीरेंद्र और करनाल वासी महिला काजल भी थी। इसके अलावा 10-15 और लोग साथ थे। इसी दौरान पुलिस वर्दी में पानीपत के गुड़मंडी धारीवाल चौक निवासी अमन भी आ गया। उसने धमकाकर उससे दो लाख रुपये छीन लिए। वह गिड़गिड़ाता रहा कि ये रुपये उसने प्लाट खरीदने के लिए ये रुपये जमा किए हैं। इस पर अमन ने धमकी दी कि शोर मचाया या विरोध किया तो काजल उसे दुष्कर्म के झूठे केस में फंसा देगी। इसके बाद वह घर लौट गया। बाद में उसने थाना शहर में शिकायत दी। थाना शहर के कार्यकारी प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि भगवान दास शर्मा की शिकायत पर एक महिला सहित पांच नामजद और 16 अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने सोनू, अमन, वीरेंद्र और सरवर को ताऊ देवीलाल पार्क से गिरफ्तार कर लिया। गिरोह के सरगना सहित 17 अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।
दिलेर समाचार,फर्जी पुलिसकर्मी ने करनाल के एक व्यक्ति को विदेशी कंपनी में पैसा लगाकर दोगुने करने का झांसा देकर बुलाया। जब वह रुपये लेकर पहुंचा तो उसने रुपये छीन लिये। उसने धमकी दी कि अगर अानाकानी की और किसी काे बताया तो महिला से दुष्कर्म के केस में फंसाकर जेल भिजवा देगा। यह वारदात बस अड्डा चौकी से एक सौ मीटर दूर सुखदेव नगर में जितेंद्रा अस्पताल के सामने पार्क में हुई। शिकायत के बाद पुलिस ने फर्जी पुलिसकर्मी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उनको दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना करनाल के कुटेल गांव का शहजाद है। उसने उत्तर प्रदेश के मेरठ, शामली सहित कई जगहों पर लोगों से ठगी कर रखी है। करनाल के निजी अस्पताल में काम करने वाले सांभली गांव के भगवान दास शर्मा ने बताया कि करनाल के बुढऩपुर गांव का प्रॉपर्टी डीलर सुलिंद्र उर्फ सोनू उसे फरवरी में मिला था। उसने बताया कि एक कंपनी ने हरियाणा में दो सौ एकड़ जमीन खरीदनी है। यदि वह जमीन दिला देगा तो मोटा कमीशन मिलेगा। इसके बाद उसने पच्चीस फरवरी को सोनू व कंपनी के कथित मैनेजर आदित्य बंसल को गांव में एक किसान की जमीन दिखा दी। भगवान दास शर्मा ने बताया कि इसके बाद सोनू ने बताया कि वह विदेशी कंपनी में रुपये जमा करवाएगा तो उसे दोगुना वापस मिलेंगे। उसने सोनू को दस हजार रुपये दिए। सोनू ने उसे बीस हजार रुपये लौटा दिए। इससे उसे सोनू पर विश्वास हो गया। आठ मार्च को सोनू ने उसे फोन किया कि वह दो लाख रुपये लेकर पानीपत में जितेंद्रा अस्पताल के सामने पार्क में आ जाए। वह रुपये कंपनी में जमा करवा देंगे। इसके दोगुने रुपये हाथो-हाथ दिला देगा। इस पर वह दो लाख रुपये लेकर पानीपत पहुंचा। भगवान दास शर्मा ने बताया कि वहां पर सोनू के अलावा कुटैल का सरवर, पानीपत की महादेव कालोनी का वीरेंद्र और करनाल वासी महिला काजल भी थी। इसके अलावा दस-पंद्रह और लोग साथ थे। इसी दौरान पुलिस वर्दी में पानीपत के गुड़मंडी धारीवाल चौक निवासी अमन भी आ गया। उसने धमकाकर उससे दो लाख रुपये छीन लिए। वह गिड़गिड़ाता रहा कि ये रुपये उसने प्लाट खरीदने के लिए ये रुपये जमा किए हैं। इस पर अमन ने धमकी दी कि शोर मचाया या विरोध किया तो काजल उसे दुष्कर्म के झूठे केस में फंसा देगी। इसके बाद वह घर लौट गया। बाद में उसने थाना शहर में शिकायत दी। थाना शहर के कार्यकारी प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि भगवान दास शर्मा की शिकायत पर एक महिला सहित पांच नामजद और सोलह अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने सोनू, अमन, वीरेंद्र और सरवर को ताऊ देवीलाल पार्क से गिरफ्तार कर लिया। गिरोह के सरगना सहित सत्रह अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने ये निर्देश बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे परियोजना की तैयारियों की समीक्षा केदौरान दिए। यूपीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे 294 किमी. लंबा होगा। इसके लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण करने पर 3000 करोड़ रुपये और निर्माण कार्य पर 11 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अवस्थी ने बताया कि महोबा और चित्रकूट जिले में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव भेज दिया गया है। दोनों जिलों के डीएम इस पर कार्यवाही कराएंगे। बाकी जिलों में भी जल्दी ही अधिग्रहण शुरू करने के निर्देश दे दिए जाएंगे। यह एक्सप्रेस-वे औरैया, इटावा, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट को जोड़ेगा। इसके लिए दो महीने में 70 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से बुंदेलखंड से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तेज रफ्तार परिवहन से जुड़ जाएगा। सड़क परियोजनाओं में पीपीपी मॉडल पर निवेशकों की बेरुखी के बाद केंद्र सरकार ने 2016 में मिश्रित ऐनुइटी मॉडल (सुनिश्चित वार्षिक भुगतान) को मंजूरी दी थी। इसके तहत किसी प्रोजेक्ट के लिए डवलपर को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है। बाकी राशि डवलपर लगाता है। प्रदेश सरकार इस एक्सप्रेस-वे को इसी मॉडल पर बनाने की संभावना तलाशेगी।
मुख्यमंत्री ने ये निर्देश बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे परियोजना की तैयारियों की समीक्षा केदौरान दिए। यूपीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे दो सौ चौरानवे किमी. लंबा होगा। इसके लिए आवश्यक जमीन अधिग्रहण करने पर तीन हज़ार करोड़ रुपये और निर्माण कार्य पर ग्यारह हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अवस्थी ने बताया कि महोबा और चित्रकूट जिले में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव भेज दिया गया है। दोनों जिलों के डीएम इस पर कार्यवाही कराएंगे। बाकी जिलों में भी जल्दी ही अधिग्रहण शुरू करने के निर्देश दे दिए जाएंगे। यह एक्सप्रेस-वे औरैया, इटावा, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट को जोड़ेगा। इसके लिए दो महीने में सत्तर प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से बुंदेलखंड से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तेज रफ्तार परिवहन से जुड़ जाएगा। सड़क परियोजनाओं में पीपीपी मॉडल पर निवेशकों की बेरुखी के बाद केंद्र सरकार ने दो हज़ार सोलह में मिश्रित ऐनुइटी मॉडल को मंजूरी दी थी। इसके तहत किसी प्रोजेक्ट के लिए डवलपर को परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है। बाकी राशि डवलपर लगाता है। प्रदेश सरकार इस एक्सप्रेस-वे को इसी मॉडल पर बनाने की संभावना तलाशेगी।
लखनऊः इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी के निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर फैसला दे दिया है। उसके अनुसार निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के होंगे। इससे चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए निकाय चुनावों के लिए 5 दिसम्बर को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने के आदेश दिए हैं। निकाय चुनाव का फैसला न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने लिया है। इस मुद्दे पर दाखिल 93 याचिकाओं पर एक साथ पारित किया। कोर्ट में सुनवाई चलते रहने के कारण राज्य निर्वाचन आयोग के अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। कोर्ट ने बिना आरक्षण के तत्काल चुनाव कराने के निर्देश दिए। इस मामले में याची पक्ष ने कहा था कि निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण एक प्रकार का राजनीतिक आरक्षण है। याची पक्ष में निकाय चुनावों में सामाजिक, आर्थिक अथवा शैक्षिक पिछड़ेपन से कोई लेना देना नहीं है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण तय किए जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत डेडिकेटेड कमेटी द्वारा ट्रिपल टेस्ट कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने दाखिल किए गए अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि स्थानीय निकाय चुनाव मामले में 2017 में हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सर्वे को आरक्षण का आधार माना जाए। सरकार ने कहा है कि इसी सर्वे को ट्रिपल टेस्ट माना जाए। राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि ट्रांसजेंडर्स को चुनाव में आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इस मामले को लेकर हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि किन प्रावधानों के तहत निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। इस पर सरकार ने कहा कि 5 दिसंबर 2011 के हाईकोर्ट के फैसले के तहत इसका प्रावधान है। बता दें कि रैपिड सर्वे में जिला प्रशासन की देखरेख में नगर निकायों द्वारा वार्डवार ओबीसी वर्ग की गिनती कराई जाती है। जिसके आधार पर ही ओबीसी की सीटों का निर्धारण करते हुए, इनके लिए आरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाता है। दूसरी ओर नगर निकाय चुनावों में ओबीसी का आरक्षण निर्धारित करने से पहले एक आयोग का गठन किया जाएगा। जो निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति का आकलन करेगा। उसके बाद पिछड़ों के लिए सीटों के आरक्षण को प्रस्तावित करेगा। फिर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों द्वारा ओबीसी की संख्या का परीक्षण कराया जाएगा और तीसरे चरण में शासन के स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा।
लखनऊः इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी के निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर फैसला दे दिया है। उसके अनुसार निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के होंगे। इससे चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए निकाय चुनावों के लिए पाँच दिसम्बर को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने के आदेश दिए हैं। निकाय चुनाव का फैसला न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने लिया है। इस मुद्दे पर दाखिल तिरानवे याचिकाओं पर एक साथ पारित किया। कोर्ट में सुनवाई चलते रहने के कारण राज्य निर्वाचन आयोग के अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। कोर्ट ने बिना आरक्षण के तत्काल चुनाव कराने के निर्देश दिए। इस मामले में याची पक्ष ने कहा था कि निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण एक प्रकार का राजनीतिक आरक्षण है। याची पक्ष में निकाय चुनावों में सामाजिक, आर्थिक अथवा शैक्षिक पिछड़ेपन से कोई लेना देना नहीं है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण तय किए जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत डेडिकेटेड कमेटी द्वारा ट्रिपल टेस्ट कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने दाखिल किए गए अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि स्थानीय निकाय चुनाव मामले में दो हज़ार सत्रह में हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के सर्वे को आरक्षण का आधार माना जाए। सरकार ने कहा है कि इसी सर्वे को ट्रिपल टेस्ट माना जाए। राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि ट्रांसजेंडर्स को चुनाव में आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इस मामले को लेकर हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि किन प्रावधानों के तहत निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। इस पर सरकार ने कहा कि पाँच दिसंबर दो हज़ार ग्यारह के हाईकोर्ट के फैसले के तहत इसका प्रावधान है। बता दें कि रैपिड सर्वे में जिला प्रशासन की देखरेख में नगर निकायों द्वारा वार्डवार ओबीसी वर्ग की गिनती कराई जाती है। जिसके आधार पर ही ओबीसी की सीटों का निर्धारण करते हुए, इनके लिए आरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाता है। दूसरी ओर नगर निकाय चुनावों में ओबीसी का आरक्षण निर्धारित करने से पहले एक आयोग का गठन किया जाएगा। जो निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति का आकलन करेगा। उसके बाद पिछड़ों के लिए सीटों के आरक्षण को प्रस्तावित करेगा। फिर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों द्वारा ओबीसी की संख्या का परीक्षण कराया जाएगा और तीसरे चरण में शासन के स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा।
Bholaa Box Office Collection Day 1: क्रिटिक की तरफ से मिले-जुले रेस्पोंस मिले हैं और ओवरऑल एक्शन एक्सपीरियंस के लिए वन टाइम्स वॉच फिल्म भोला बन सकती है। तो आखिर अजय देवगन के अभिनय और निर्देशन में बनी फिल्म भोला के पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन क्या रहा ? इस बारे में हम आपको बताने वाले हैं। Akshay Kumar: साल 2022 में अक्षय कुमार ने बड़ी से बड़ी फ्लॉप फिल्म दी है और अब साल की शुरुआत में ही उन्होंने एक और फ्लॉप फिल्म अपने खाते में जोड़ ली है। वहीं अक्षय कुमार की लगातार हो रही फ्लॉप फिल्मों की वजह भी उन्होंने खुद को ही माना है, यहां हम इसी बारी में बात करने वाले हैं। Akshay Kumar: अक्षय कुमार की हालिया रिलीज फिल्म कठपुतली को ओटीटी पर अच्छा रिस्पांस मिला है। इसके साथ ही अब एक्टर की 8 बड़ी फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं। Box Office Collection: यहां देखिए Laal Singh Chaddha, Shamshera, Smarat Prithviraj जैसी तमाम अन्य फिल्मों ने मेकर्स के कितने अधिक रुपये डुबो दिए इन सभी बड़े स्टार और उनकी बड़ी फिल्मों की वजह से बॉक्स ऑफिस को कितना आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। Bollywood News: विश्व सुंदरी किसी तारीफ की मोहताज नहीं है लेकिन वह इस लुक में काफी ग्लैमरस लग रही थीं। हालांकि वह जैसे ही कैमरे के सामने पोज देने के लिए खड़ी हुईं उन्हें ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। एक्ट्रेस का ये वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही खूब वायरल होने लगा। Akshay Kumar: इसी बयान को लेकर आर माधवन ने हाल ही में अपनी फिल्म रिलीज के दौरान कहा था कि किसी भी फिल्म को पूरा करने के लिए अच्छे से समय देना चाहिए। आरआरआर और पुष्पा जैसी फिल्मों को बनने में काफी समय लगा। Samrat Prithviraj Review: वहीं फिल्म में अक्षय कुमार की एक्टिंग भी काफी अच्छी है। पृथ्वीराज के रोल के साथ उन्होंने पूरा न्याय किया है। फिल्म में साक्षी तंवर का कैमियो भी शामिल किया गया है। जो लाजवाब है। अगर आप फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो ये फिल्म आपके लिए पैसा वसूल होगी। Prithviraj Movie: लोकभवन में आयोजित स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद सीएम ने कलाकारों का अभिनन्दन किया। साथ ही कहा कि वर्षों के अंतराल के बाद आज फ़िल्म देखने का सुअवसर मिला। हालांकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों की व्यस्तता के कारण शो में थोड़ी देर से पहुंच सके। सीएम ने फ़िल्म निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी कृत टीवी धारावाहिक 'चाणक्य' को भी याद किया।
Bholaa Box Office Collection Day एक: क्रिटिक की तरफ से मिले-जुले रेस्पोंस मिले हैं और ओवरऑल एक्शन एक्सपीरियंस के लिए वन टाइम्स वॉच फिल्म भोला बन सकती है। तो आखिर अजय देवगन के अभिनय और निर्देशन में बनी फिल्म भोला के पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन क्या रहा ? इस बारे में हम आपको बताने वाले हैं। Akshay Kumar: साल दो हज़ार बाईस में अक्षय कुमार ने बड़ी से बड़ी फ्लॉप फिल्म दी है और अब साल की शुरुआत में ही उन्होंने एक और फ्लॉप फिल्म अपने खाते में जोड़ ली है। वहीं अक्षय कुमार की लगातार हो रही फ्लॉप फिल्मों की वजह भी उन्होंने खुद को ही माना है, यहां हम इसी बारी में बात करने वाले हैं। Akshay Kumar: अक्षय कुमार की हालिया रिलीज फिल्म कठपुतली को ओटीटी पर अच्छा रिस्पांस मिला है। इसके साथ ही अब एक्टर की आठ बड़ी फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं। Box Office Collection: यहां देखिए Laal Singh Chaddha, Shamshera, Smarat Prithviraj जैसी तमाम अन्य फिल्मों ने मेकर्स के कितने अधिक रुपये डुबो दिए इन सभी बड़े स्टार और उनकी बड़ी फिल्मों की वजह से बॉक्स ऑफिस को कितना आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। Bollywood News: विश्व सुंदरी किसी तारीफ की मोहताज नहीं है लेकिन वह इस लुक में काफी ग्लैमरस लग रही थीं। हालांकि वह जैसे ही कैमरे के सामने पोज देने के लिए खड़ी हुईं उन्हें ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा। एक्ट्रेस का ये वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही खूब वायरल होने लगा। Akshay Kumar: इसी बयान को लेकर आर माधवन ने हाल ही में अपनी फिल्म रिलीज के दौरान कहा था कि किसी भी फिल्म को पूरा करने के लिए अच्छे से समय देना चाहिए। आरआरआर और पुष्पा जैसी फिल्मों को बनने में काफी समय लगा। Samrat Prithviraj Review: वहीं फिल्म में अक्षय कुमार की एक्टिंग भी काफी अच्छी है। पृथ्वीराज के रोल के साथ उन्होंने पूरा न्याय किया है। फिल्म में साक्षी तंवर का कैमियो भी शामिल किया गया है। जो लाजवाब है। अगर आप फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो ये फिल्म आपके लिए पैसा वसूल होगी। Prithviraj Movie: लोकभवन में आयोजित स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद सीएम ने कलाकारों का अभिनन्दन किया। साथ ही कहा कि वर्षों के अंतराल के बाद आज फ़िल्म देखने का सुअवसर मिला। हालांकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों की व्यस्तता के कारण शो में थोड़ी देर से पहुंच सके। सीएम ने फ़िल्म निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी कृत टीवी धारावाहिक 'चाणक्य' को भी याद किया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अक्टूबर-नवंबर में भारत में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप के दो मैचों के आयोजन स्थल बदलने की पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की मांग को खारिज कर दिया है। क्रिकबज की ओर से बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआई और आईसीसी ने मंगलवार को एक बैठक के बाद पीसीबी आवेदन को खारिज करने का फैसला लिया। पीसीबी को इस संयुक्त फैसले की जानकारी दी जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबी ने चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ और बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मैचों के आयोजन स्थल बदलने की मांग की थी। आईसीसी और बीसीसीआई ने पीसीबी को दिए गए संदेश में कहा है कि उनके पास इस समय आयोजन स्थल बदलने का कोई कारण नहीं है। आईसीसी प्रतियोगिताओं में आयोजन स्थल सुरक्षा कारणों से बदला जा सकता है, हालांकि पाकिस्तान ने अपने आवेदन में कोई कारण स्पष्ट नहीं किया था। उल्लेखनीय है कि 2016 में भारत-पाकिस्तान टी20 विश्व कप मैच को सुरक्षा कारणों से धर्मशाला से कोलकाता स्थानांतरित करना पड़ा था। पाकिस्तान के लिए चेन्नई और बेंगलुरु सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। पीसीबी के पूर्व प्रमुख नजम सेठी ने अहमदाबाद में भारत से खेलने को लेकर भी चिंता जताई थी, लेकिन उस अनुरोध पर भी विचार नहीं किया गया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अक्टूबर-नवंबर में भारत में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप के दो मैचों के आयोजन स्थल बदलने की पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की मांग को खारिज कर दिया है। क्रिकबज की ओर से बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआई और आईसीसी ने मंगलवार को एक बैठक के बाद पीसीबी आवेदन को खारिज करने का फैसला लिया। पीसीबी को इस संयुक्त फैसले की जानकारी दी जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबी ने चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ और बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मैचों के आयोजन स्थल बदलने की मांग की थी। आईसीसी और बीसीसीआई ने पीसीबी को दिए गए संदेश में कहा है कि उनके पास इस समय आयोजन स्थल बदलने का कोई कारण नहीं है। आईसीसी प्रतियोगिताओं में आयोजन स्थल सुरक्षा कारणों से बदला जा सकता है, हालांकि पाकिस्तान ने अपने आवेदन में कोई कारण स्पष्ट नहीं किया था। उल्लेखनीय है कि दो हज़ार सोलह में भारत-पाकिस्तान टीबीस विश्व कप मैच को सुरक्षा कारणों से धर्मशाला से कोलकाता स्थानांतरित करना पड़ा था। पाकिस्तान के लिए चेन्नई और बेंगलुरु सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। पीसीबी के पूर्व प्रमुख नजम सेठी ने अहमदाबाद में भारत से खेलने को लेकर भी चिंता जताई थी, लेकिन उस अनुरोध पर भी विचार नहीं किया गया।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर (IIT Kanpur) ने एक समिति गठित की है, जो यह तय करेगी कि क्या फैज अहमद फैज की कविता 'हम देखेंगे, लाजिम है कि हम भी देखेंगे' हिंदू विरोधी है या नहीं। आईआईटी कानपुर के फैकल्टी सदस्यों की शिकायत के बाद ये समिति गठित की गई है। फैकल्टी सदस्यों का दावा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान यह 'हिंदू विरोधी' गीत गाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या छात्रों ने धारा-144 का उल्लंघ किया और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की। अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए प्रसिद्ध रहे फैज अहमद फैज ने 1979 में यह नज्म लिखी थी। फैज ने यह कविता सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के संदर्भ में लिखी थी और पाकिस्तान में सैन्य शासन के विरोध में लिखी थी। तानाशाही का विरोध करने वाले फैज कई सालों तक जेल में भी रहे।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर ने एक समिति गठित की है, जो यह तय करेगी कि क्या फैज अहमद फैज की कविता 'हम देखेंगे, लाजिम है कि हम भी देखेंगे' हिंदू विरोधी है या नहीं। आईआईटी कानपुर के फैकल्टी सदस्यों की शिकायत के बाद ये समिति गठित की गई है। फैकल्टी सदस्यों का दावा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान यह 'हिंदू विरोधी' गीत गाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या छात्रों ने धारा-एक सौ चौंतालीस का उल्लंघ किया और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की। अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए प्रसिद्ध रहे फैज अहमद फैज ने एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में यह नज्म लिखी थी। फैज ने यह कविता सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के संदर्भ में लिखी थी और पाकिस्तान में सैन्य शासन के विरोध में लिखी थी। तानाशाही का विरोध करने वाले फैज कई सालों तक जेल में भी रहे।
घर एक सपनाः देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कैसे मिले घर? घर एक सपनाः स्मार्ट सिटी में कैसा रहेगा निवेश ? सितारों को देख कैसे फंसते हैं लोग बिल्डरों के जाल में! घर एक सपनाः आम बजट से रियल स्टेट को होगा फायदा !
घर एक सपनाः देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कैसे मिले घर? घर एक सपनाः स्मार्ट सिटी में कैसा रहेगा निवेश ? सितारों को देख कैसे फंसते हैं लोग बिल्डरों के जाल में! घर एक सपनाः आम बजट से रियल स्टेट को होगा फायदा !
भोपाल, (ब्यूरो मप)। भारतीय जनता पार्टी की पदेश महामंत्री और सांसद माया सिंह ने कहा कि केन्द सरकार ने केंदीय सतर्कता आयुक्प के पद पर पीजे थामस की नियुक्पि करके संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, विश्वसनीयता संदेह के घेरे में ला दी है। दूरसंचार मंत्रालय के स्पेक्ट्रम टू घोटाले में देश को 60 हजार करोड़ रु. की राजस्व राशि से वंचित होना पड़ा। दूरसंचार मंत्रालय के सचिव के रूप में थामस साहब पर भी स्पेक्ट्रम टू घोटाला की आंच आयी थी। ऐसे में इस नियुक्पि को लेकर यदि कयास लगाये जाते हैं कि विपक्ष की आपश्रियों को दर करार करके यदि नियुक्पि की गयी है तो यह केन्द सरकार का निरा अहंकार ही नहीं स्पेक्ट्रम टू घोटाला को कप न उड़ाने की कोशिश है। वरिष्ठ अधिकारी थामस केरल में बहुचर्चित पाम आयल घोटाले में भी चर्चा में आये थे। यदि यह मान भी लिया जाए कि वे पाम आयल घोटाला में दोषमुक्प हो चुके है तो भी केन्द सरकार का फर्ज बनता है कि ऐसा व्यक्पि सर्तकता आयोग के शीर्ष पद पर न बैठाया जाए जिसे दागी करार दिया जा चुका हो, अथवा उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ चुके हो। सतर्कता आयुक्प के रूप में नियुक्प व्यक्पि संदेह से परे होना चाहिए और ऐसा दिखना भी चाहिए। माया सिंह ने केन्द सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केन्दीय सर्तकता आयुक्प की नियुक्पि के लिए पधानमंत्री, गृहमंत्री और लोकसभा में नेता पतिपक्ष का पैनल होता है, इसमें नेता पतिपक्ष ने जब थामस की नियुक्पि पर सवाल उठाया उसे केन्द सरकार को गंभीरता से लेना था। लेकिन केन्द सरकार ने थामस जैसे अधिकारी को आयोग में आयुक्प बनाकर अपनी मंशा साप कर दी है। आने वाले समय में कामनवेल्थ गेम के घोटालों पर पर्दा डालने का इंतजाम कर दिया गया है। कॉमनवेल्थ गे स घोटाला ने देष की छवि धूमिल की है। कोयला की जांच करने के बजाय केन्द सरकार ने इसे हरादतन गेम समाप्त होने तक जांच को टाल दिया है। अब केन्द सरकार ने थामस की नियुक्पि करके उसे दपन करने का बंदोबस्त भी कर लिया है।
भोपाल, । भारतीय जनता पार्टी की पदेश महामंत्री और सांसद माया सिंह ने कहा कि केन्द सरकार ने केंदीय सतर्कता आयुक्प के पद पर पीजे थामस की नियुक्पि करके संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, विश्वसनीयता संदेह के घेरे में ला दी है। दूरसंचार मंत्रालय के स्पेक्ट्रम टू घोटाले में देश को साठ हजार करोड़ रु. की राजस्व राशि से वंचित होना पड़ा। दूरसंचार मंत्रालय के सचिव के रूप में थामस साहब पर भी स्पेक्ट्रम टू घोटाला की आंच आयी थी। ऐसे में इस नियुक्पि को लेकर यदि कयास लगाये जाते हैं कि विपक्ष की आपश्रियों को दर करार करके यदि नियुक्पि की गयी है तो यह केन्द सरकार का निरा अहंकार ही नहीं स्पेक्ट्रम टू घोटाला को कप न उड़ाने की कोशिश है। वरिष्ठ अधिकारी थामस केरल में बहुचर्चित पाम आयल घोटाले में भी चर्चा में आये थे। यदि यह मान भी लिया जाए कि वे पाम आयल घोटाला में दोषमुक्प हो चुके है तो भी केन्द सरकार का फर्ज बनता है कि ऐसा व्यक्पि सर्तकता आयोग के शीर्ष पद पर न बैठाया जाए जिसे दागी करार दिया जा चुका हो, अथवा उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ चुके हो। सतर्कता आयुक्प के रूप में नियुक्प व्यक्पि संदेह से परे होना चाहिए और ऐसा दिखना भी चाहिए। माया सिंह ने केन्द सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केन्दीय सर्तकता आयुक्प की नियुक्पि के लिए पधानमंत्री, गृहमंत्री और लोकसभा में नेता पतिपक्ष का पैनल होता है, इसमें नेता पतिपक्ष ने जब थामस की नियुक्पि पर सवाल उठाया उसे केन्द सरकार को गंभीरता से लेना था। लेकिन केन्द सरकार ने थामस जैसे अधिकारी को आयोग में आयुक्प बनाकर अपनी मंशा साप कर दी है। आने वाले समय में कामनवेल्थ गेम के घोटालों पर पर्दा डालने का इंतजाम कर दिया गया है। कॉमनवेल्थ गे स घोटाला ने देष की छवि धूमिल की है। कोयला की जांच करने के बजाय केन्द सरकार ने इसे हरादतन गेम समाप्त होने तक जांच को टाल दिया है। अब केन्द सरकार ने थामस की नियुक्पि करके उसे दपन करने का बंदोबस्त भी कर लिया है।
यह शातिर ठग 4 लाख रुपये में गैंगमैन तो 6 लाख रुपये में टीसी की नौकरी दिलाने का दावा करते थे। मुंबई. भारत में जिस तरह से युवाओं के बीच में किसी भी जॉब को लेकर कॉम्पिटिशन है उसे देखते हुए कई गैंग सक्रिय हो चुके हैं। ये गैंग लोगों से फर्जी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे ऐठ रहे हैं। इसी तरह का एक फर्जी गैंग मुंबई में पकड़ा गया है। मुंबई मिरर के मुताबिक मुंबई रेलवे पुलिस यानी कि जीआरपी ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ना सिर्फ बेरोजगारों को रेलवे मे नौकरी देने के नाम पर ठग रहा था बल्कि अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिये एक वेबसाइट बनाकर फर्जी रेलवे भर्ती बोर्ड भी चला रहा था। ख़ास बात है कि कानून के हाथों बचने के लिए यह वेबसाइट देश के बाहर चीन से बनवाई गई है। जीआरपी की माने तो वेबसाइट के जरिए देश भर में बेरोजगारों को चूना लगाया जा रहा था। यह शातिर ठग 4 लाख रुपये में गैंगमैन तो 6 लाख रुपये में टीसी की नौकरी दिलाने का दावा करते थे। मुंबई जीआरपी पुलिस आयुक्त दीपक देवराज के मुताबिक यह लोग फर्जी वेबसाइट के जरिए ऑनलाईन परीक्षा लेते और उस पर रिजल्ट भी घोषित करते जिससे लोग धोखा खाकर आसानी से इनके जाल में फंस जाते थे। पुलिस के मुताबिक तकरीबन साल भर से चल रहे ठगों के इस गोरखधंधे का राज तब खुला जब चर्नीरोड रेलवे स्टेशन पर टिकट चेक करते समय एक यात्री प्रकाश घोडबे ने टिकट दिखाने की बजाय खूद को टीसी बताया और पहचान पत्र भी दिखाया। मौके पर मौजूद टीसी को शक हुआ और उसने पुलिस को सूचित कर दिया। दीपक देवराज के मुताबिक जब जीआरपी ने जांच की तो इस शातिर ठगी का पर्दाफाश हुआ। प्रकाश ने बताया कि उसे अभी सिर्फ पहचान पत्र दिया गया है और बदले में एक लाख रुपये वह दे चुका है। जल्द उसे नौकरी और नियुक्ति का पत्र देने का वादा किया गया है। पत्र मिलते ही उसे बाकी के रुपये भी देने होंगे। प्रकाश से पूछताछ के बाद पुलिस ने मेहमूद आलम शेख और नरेश पाटिल को पकड़ा। उनसे पुछताछ के बाद तुफेल खान और नागपूर के सौरभ भगत का पता चला। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के तार मुंबई से नागपुर - दिल्ली और उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैले हैं। अभी मामले में 5 आरोपी पकड़े गए हैं लेकिन गिरोह का सरगना अब भी फरार है।
यह शातिर ठग चार लाख रुपये में गैंगमैन तो छः लाख रुपये में टीसी की नौकरी दिलाने का दावा करते थे। मुंबई. भारत में जिस तरह से युवाओं के बीच में किसी भी जॉब को लेकर कॉम्पिटिशन है उसे देखते हुए कई गैंग सक्रिय हो चुके हैं। ये गैंग लोगों से फर्जी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे ऐठ रहे हैं। इसी तरह का एक फर्जी गैंग मुंबई में पकड़ा गया है। मुंबई मिरर के मुताबिक मुंबई रेलवे पुलिस यानी कि जीआरपी ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ना सिर्फ बेरोजगारों को रेलवे मे नौकरी देने के नाम पर ठग रहा था बल्कि अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिये एक वेबसाइट बनाकर फर्जी रेलवे भर्ती बोर्ड भी चला रहा था। ख़ास बात है कि कानून के हाथों बचने के लिए यह वेबसाइट देश के बाहर चीन से बनवाई गई है। जीआरपी की माने तो वेबसाइट के जरिए देश भर में बेरोजगारों को चूना लगाया जा रहा था। यह शातिर ठग चार लाख रुपये में गैंगमैन तो छः लाख रुपये में टीसी की नौकरी दिलाने का दावा करते थे। मुंबई जीआरपी पुलिस आयुक्त दीपक देवराज के मुताबिक यह लोग फर्जी वेबसाइट के जरिए ऑनलाईन परीक्षा लेते और उस पर रिजल्ट भी घोषित करते जिससे लोग धोखा खाकर आसानी से इनके जाल में फंस जाते थे। पुलिस के मुताबिक तकरीबन साल भर से चल रहे ठगों के इस गोरखधंधे का राज तब खुला जब चर्नीरोड रेलवे स्टेशन पर टिकट चेक करते समय एक यात्री प्रकाश घोडबे ने टिकट दिखाने की बजाय खूद को टीसी बताया और पहचान पत्र भी दिखाया। मौके पर मौजूद टीसी को शक हुआ और उसने पुलिस को सूचित कर दिया। दीपक देवराज के मुताबिक जब जीआरपी ने जांच की तो इस शातिर ठगी का पर्दाफाश हुआ। प्रकाश ने बताया कि उसे अभी सिर्फ पहचान पत्र दिया गया है और बदले में एक लाख रुपये वह दे चुका है। जल्द उसे नौकरी और नियुक्ति का पत्र देने का वादा किया गया है। पत्र मिलते ही उसे बाकी के रुपये भी देने होंगे। प्रकाश से पूछताछ के बाद पुलिस ने मेहमूद आलम शेख और नरेश पाटिल को पकड़ा। उनसे पुछताछ के बाद तुफेल खान और नागपूर के सौरभ भगत का पता चला। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के तार मुंबई से नागपुर - दिल्ली और उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैले हैं। अभी मामले में पाँच आरोपी पकड़े गए हैं लेकिन गिरोह का सरगना अब भी फरार है।
यह केवल एक पहलू नहीं है, और भी हैं। जातियों को भी उपजातियों में बांटा गया है। उनकी संख्या अनगणित हैं। ब्राह्मण जातियों की कुल आबादी लगभग डेढ़ करोड़ है। लेकिन ब्राह्मण जाति में भी 1,886 उपजातियों हैं। केवल पंजाब में ही सारस्वत ब्राह्मण 469 उपजातियों में बंटे हैं। पंजाब के कायस्थों की 890 उपजातियां हैं। इसी प्रकार समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने वाली इस अंतहीन प्रक्रिया के अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। टुकड़ों में बांटने वाली इस प्रक्रिया से सामाजिक जीवन बिल्कुल असंभव सा हो गया हैं। इससे जातियां इतने छोटे समूहों में बंट गई हैं कि उससे बाह्य जातियों के साथ विवाह-संबंध करना बिल्कुल असंभव सा हो गया है। बनियों की कुछ उपजातियों के तो सौ परिवारों से ज्यादा घर नहीं है। वे आपस में इतने मिले-जुले हैं कि सगोत्रता के नियमों का उल्लंघन किए बिना उनकी जातियों में शादी-विवाह करना कठिन हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि छोटे-मोटे बहाने ही इन जातियों के उपजातियों में विभाजित होने के कारण हैं। जातियों-उपजातियों में स्थान परिवर्तन, व्यवसाय परिवर्तन, सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन, प्रदूषण के कारण परिवर्तन, व्यवसाय परिवर्तन, सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन, प्रदूषण के कारण परिवर्तन, मालिकाना हक के कारण परिवर्तन, झगड़े के कारण परिवर्तन, धर्म परिवर्तन के कारण से बिखराव आता जाता है। श्री ब्लंट ने हिंदुओं में विद्यमान इस प्रवृत्ति का जीवंत वर्णन करने के लिए कई उदाहरण दिए हैं यहां सभी को प्रस्तुत करना संभव नहीं है। अतः यहां केवल एक उदाहरण ही प्रस्तुत किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि छोटे-मोटे झगड़े एक जाति को उपजातियों में कैसे बांट देते हैं। जैसा कि श्री ब्लंट ने कहा है : लखनऊ में खटीक नाम की एक उपजाति है, जिसमें तीन गोल अथवा समूह थे। इन्हें मानिकपुर, जायसवाल तथा दलमान के नाम से जाना जात था। उनमें रोटी-बेटी का व्यवहार था और वे अपने चौधरी अथवा प्रधान के नेतृत्व में पंचायत में एक साथ बैठते थे। बीस वर्ष पहले प्रत्येक समूह का एक ही चौधरी होता था। लेकिन आज जैसवाल-समूह के ही तीन चौधरी हैं तथा मानिकपुर-समूह के दो । झगड़े का पहला कारण यह था कि एक औरत (जिसका गोल नहीं दिया गया है) गली में फल बेचा करती थी। उसके भाई-बंधुओं ने उसे ऐसा न करने का आदेश दिया क्योंकि ऐसा करना उनकी बिरादरी की शान के खिलाफ था। औरतों को केवल दुकानों पर बैठकर बिक्री करना चाहिए। वह और उसका पति हठी थे, और अंत में उसके ही अपने गोल ने उन्हें बिरादरी से बाहर कर दिया। वैसे दलमान गोल, जो इस कार्यवाही से सहमत नहीं था, उसने औरत के पति को जाति से बाहर रखने के बजाए 80 रूपये दंड लेकर अपने वर्ग में ले लिया। झगड़े का दूसरा कारण 1. दि कास्ट सिस्टम आफ नदर्न इंडिया, पृ. 51-56
यह केवल एक पहलू नहीं है, और भी हैं। जातियों को भी उपजातियों में बांटा गया है। उनकी संख्या अनगणित हैं। ब्राह्मण जातियों की कुल आबादी लगभग डेढ़ करोड़ है। लेकिन ब्राह्मण जाति में भी एक,आठ सौ छियासी उपजातियों हैं। केवल पंजाब में ही सारस्वत ब्राह्मण चार सौ उनहत्तर उपजातियों में बंटे हैं। पंजाब के कायस्थों की आठ सौ नब्बे उपजातियां हैं। इसी प्रकार समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने वाली इस अंतहीन प्रक्रिया के अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। टुकड़ों में बांटने वाली इस प्रक्रिया से सामाजिक जीवन बिल्कुल असंभव सा हो गया हैं। इससे जातियां इतने छोटे समूहों में बंट गई हैं कि उससे बाह्य जातियों के साथ विवाह-संबंध करना बिल्कुल असंभव सा हो गया है। बनियों की कुछ उपजातियों के तो सौ परिवारों से ज्यादा घर नहीं है। वे आपस में इतने मिले-जुले हैं कि सगोत्रता के नियमों का उल्लंघन किए बिना उनकी जातियों में शादी-विवाह करना कठिन हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि छोटे-मोटे बहाने ही इन जातियों के उपजातियों में विभाजित होने के कारण हैं। जातियों-उपजातियों में स्थान परिवर्तन, व्यवसाय परिवर्तन, सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन, प्रदूषण के कारण परिवर्तन, व्यवसाय परिवर्तन, सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन, प्रदूषण के कारण परिवर्तन, मालिकाना हक के कारण परिवर्तन, झगड़े के कारण परिवर्तन, धर्म परिवर्तन के कारण से बिखराव आता जाता है। श्री ब्लंट ने हिंदुओं में विद्यमान इस प्रवृत्ति का जीवंत वर्णन करने के लिए कई उदाहरण दिए हैं यहां सभी को प्रस्तुत करना संभव नहीं है। अतः यहां केवल एक उदाहरण ही प्रस्तुत किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि छोटे-मोटे झगड़े एक जाति को उपजातियों में कैसे बांट देते हैं। जैसा कि श्री ब्लंट ने कहा है : लखनऊ में खटीक नाम की एक उपजाति है, जिसमें तीन गोल अथवा समूह थे। इन्हें मानिकपुर, जायसवाल तथा दलमान के नाम से जाना जात था। उनमें रोटी-बेटी का व्यवहार था और वे अपने चौधरी अथवा प्रधान के नेतृत्व में पंचायत में एक साथ बैठते थे। बीस वर्ष पहले प्रत्येक समूह का एक ही चौधरी होता था। लेकिन आज जैसवाल-समूह के ही तीन चौधरी हैं तथा मानिकपुर-समूह के दो । झगड़े का पहला कारण यह था कि एक औरत गली में फल बेचा करती थी। उसके भाई-बंधुओं ने उसे ऐसा न करने का आदेश दिया क्योंकि ऐसा करना उनकी बिरादरी की शान के खिलाफ था। औरतों को केवल दुकानों पर बैठकर बिक्री करना चाहिए। वह और उसका पति हठी थे, और अंत में उसके ही अपने गोल ने उन्हें बिरादरी से बाहर कर दिया। वैसे दलमान गोल, जो इस कार्यवाही से सहमत नहीं था, उसने औरत के पति को जाति से बाहर रखने के बजाए अस्सी रूपये दंड लेकर अपने वर्ग में ले लिया। झगड़े का दूसरा कारण एक. दि कास्ट सिस्टम आफ नदर्न इंडिया, पृ. इक्यावन-छप्पन
उत्तराखंड के कुमाऊंनी रीजन के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला और मुंसियारी क्षेत्र में पड़ने वाले 100 से अधिक गांवों में आज भी होली नहीं मनाई जाती है। त्यौहार के दिन भी लोग सामान्य दिनों की तरह ही रोजमर्रा के काम में जुटे रहते हैं। धारचूला के बारम गांव के रहने वाले नरेंद्र सिंह बताते हैं कि इन गांवों के सभी निवासी छिपला केदार देव की पूजा करते हैं, जो कि भगवान शिव और भगवती का ही एक रूप हैं। इन पहाड़ी गांवों के निवासी परिक्रमा करते हैं और छिपला केदार कुंड में पवित्र डुबकी लगाते हैं, जिसे गुप्त कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। इस पूरे क्षेत्र में बसे ग्रामीणों का मानना है कि रंग से उनके देवताओं की भूमि और पवित्र हो जाएगी। धारचूला के अनवल समुदाय और मुन्सियारी के जोहार क्षेत्र के बरपतिया गांवों में बसे आदिवासी समुदायों में आज भी होली को लेकर परम्परागत मान्यता है। पिथौरागढ़ जिले के 100 से अधिक गांवों में ऐसी मान्यता है। चिपला केदार एक प्रसिद्ध ट्रक है और तीर्थ स्थल है, जहां हर 3 साल बाद श्रद्धालु पहुंचते हैं। 16 हजार फुट की ऊंचाई पर बने स्कूल को लेकर मान्यता है कि रंग खेले जाने से देवता अपवित्र हो जाएंगे। हरकोट गांव के रहने वाले खुशल हरकोटिया बताते हैं कि रंगों के इस त्यौहार को अशुभ माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि इन इलाकों में होली खेलने की कोशिश करने वालों पर कोई ना कोई आपदा आ जाती है। कहीं किसी परिवार में मृत्यु हो सकती है या फिर पशु को चोरी हो जाने जैसी घटना। स्थानीय ग्रामीण यहां पर रंग खेलने को देवताओं की नाराजगी से जोड़कर देखते हैं। इतिहासकार जयप्रकाश बताते हैं कि होली कभी पहाड़ी राज्य का उत्सव नहीं रहा। पहाड़ों के अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में बसे समुदायों का विश्वास होली में नहीं है। हां, बड़े पैमाने पर पहाड़ों से हुए लोगों के विस्थापन की वजह से लोग दूसरों के संपर्क में आने से नए रीति-रिवाजों और परंपराओं से परिचित होते हैं। लेकिन सुदूर गांव में बरपतिया और अनवल समुदायों के लोग अभी भी होली को अपवित्र मानते हैं।
उत्तराखंड के कुमाऊंनी रीजन के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला और मुंसियारी क्षेत्र में पड़ने वाले एक सौ से अधिक गांवों में आज भी होली नहीं मनाई जाती है। त्यौहार के दिन भी लोग सामान्य दिनों की तरह ही रोजमर्रा के काम में जुटे रहते हैं। धारचूला के बारम गांव के रहने वाले नरेंद्र सिंह बताते हैं कि इन गांवों के सभी निवासी छिपला केदार देव की पूजा करते हैं, जो कि भगवान शिव और भगवती का ही एक रूप हैं। इन पहाड़ी गांवों के निवासी परिक्रमा करते हैं और छिपला केदार कुंड में पवित्र डुबकी लगाते हैं, जिसे गुप्त कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। इस पूरे क्षेत्र में बसे ग्रामीणों का मानना है कि रंग से उनके देवताओं की भूमि और पवित्र हो जाएगी। धारचूला के अनवल समुदाय और मुन्सियारी के जोहार क्षेत्र के बरपतिया गांवों में बसे आदिवासी समुदायों में आज भी होली को लेकर परम्परागत मान्यता है। पिथौरागढ़ जिले के एक सौ से अधिक गांवों में ऐसी मान्यता है। चिपला केदार एक प्रसिद्ध ट्रक है और तीर्थ स्थल है, जहां हर तीन साल बाद श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोलह हजार फुट की ऊंचाई पर बने स्कूल को लेकर मान्यता है कि रंग खेले जाने से देवता अपवित्र हो जाएंगे। हरकोट गांव के रहने वाले खुशल हरकोटिया बताते हैं कि रंगों के इस त्यौहार को अशुभ माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि इन इलाकों में होली खेलने की कोशिश करने वालों पर कोई ना कोई आपदा आ जाती है। कहीं किसी परिवार में मृत्यु हो सकती है या फिर पशु को चोरी हो जाने जैसी घटना। स्थानीय ग्रामीण यहां पर रंग खेलने को देवताओं की नाराजगी से जोड़कर देखते हैं। इतिहासकार जयप्रकाश बताते हैं कि होली कभी पहाड़ी राज्य का उत्सव नहीं रहा। पहाड़ों के अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में बसे समुदायों का विश्वास होली में नहीं है। हां, बड़े पैमाने पर पहाड़ों से हुए लोगों के विस्थापन की वजह से लोग दूसरों के संपर्क में आने से नए रीति-रिवाजों और परंपराओं से परिचित होते हैं। लेकिन सुदूर गांव में बरपतिया और अनवल समुदायों के लोग अभी भी होली को अपवित्र मानते हैं।
कुछ सोवियत डिजाइनरों द्वारा बड़ी संख्या में प्रयासों के बावजूद एक एकल मशीन गन बनाने के लिए जिसमें राइफल कारतूस का उपयोग किया जाएगा (वी. आई. सिलिन SG-43 पर आधारित, V. A. डीग्युटेरेव डीपी पर आधारित, आदि) जो आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, इस विचार को लागू करें। लंबे समय तक विफल रहा। इसी समय, 50s के मध्य तक, 7,62-millim6 सिंगल मशीन गन (मैडसेन-सेटर (डेनमार्क) से 1949 से MAG (बेल्जियम), MG3 (जर्मनी और अल्फा) स्पेन) 1959 जी। )। सोवियत संघ में, 7,62x53 के लिए एक मशीन गन, जिसे कंपनी RP-46 और चित्रफलक SGM द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना था, को सोकोलो-निकोसिन के "युगल" द्वारा विकसित किया गया था, साथ ही साथ अन्य प्रसिद्ध डिजाइनरों द्वारा भी। जब सोकोलोव और निकितिन का नमूना, जो एक्सएनयूएमएक्स में सैन्य परीक्षण पास करता था, पहले से ही "बाहर निकलने पर" था, सेवा में लगाए जाने की महान संभावना के साथ, कलाश्निकोव समूह प्रतियोगिता में शामिल हो गया। एक्सएनयूएमएक्स में, कई कलाश्निकोव प्रोटोटाइप का निर्माण किया गया था और, अंतिम चरण में, इन मशीन गनों को सोकोलोव-निकितिन मशीन गन के साथ समानांतर में परीक्षण किया गया था। 1958 में, एकल PK / PKS मशीन गन (1960PZ इंडेक्स, "कलाश्निकोव मशीन गन / कलाश्निकोव मशीन गन") मैनुअल PKK के साथ सेवा के लिए अपनाया गया था। डिजाइन में मुहर लगी भागों का उपयोग किया गया था, उस समय तक उनके निर्माण की तकनीक पहले से ही काम कर रही थी। रिसीवर में मशीन गन के त्वरित-वियोज्य बैरल को एक संपर्ककर्ता का उपयोग करके रस्क संयुक्त के साथ सुरक्षित किया गया था। कठोरता को बढ़ाने के लिए, साथ ही बैरल पर गर्मी सिंक में कुछ वृद्धि, अनुदैर्ध्य पसलियों को बनाया गया था। बैरल के परिवर्तन में तेजी लाने के लिए, साथ ही मशीन गन को ले जाने के लिए, यह एक तह संभाल से सुसज्जित है। एसवीडी राइफल के समान एक शंक्वाकार लौ बन्दी, जिसे बाद में एक बेलनाकार भट्ठा द्वारा बदल दिया गया था, बैरल के अंत में संलग्न था। ऑटोमेशन बैरल की दीवार में एक साइड होल का उपयोग करके, पाउडर गैसों को हटाने के सिद्धांत पर काम करता है। गैस चैंबर बैरल के नीचे स्थित है और इसे एक नियामक के साथ दिया जाता है जिसमें तीन निश्चित स्थान होते हैं। नियामक चेंबर से वायुमंडल में विखंडित होने वाली पाउडर गैसों की मात्रा को बदल देता है, जिससे पिस्टन में संचारित आवेग की भयावहता बदल जाती है। कारतूस मामले के रिम का उपयोग करके नियामक का क्रमांकन किया गया था। जब बोल्ट को चालू किया जाता है, तो लॉकिंग का प्रदर्शन किया जाता है, जिसके दौरान रिसीवर में लग्स के पीछे लग्स की एक जोड़ी सेट होती है। अपने काम में पीसी का शटर और योजना पीकेके और एकेएम के शटर के समान है। स्वचालन का ड्राइविंग लिंक बोल्ट वाहक है, जिसके साथ गैस पिस्टन रॉड टिका है। बोल्ट का चैनल पारस्परिक वसंत को समायोजित करने के लिए उपयोग किया जाता है। फ्रेम के पीछे रैक पर चिमटा और कुंडी तय की जाती है। दाईं ओर स्थित लोडिंग हैंडल में स्लाइड फ्रेम के साथ एक कठोर संबंध नहीं होता है, इसे निकाल दिया जाता है। ट्रिगर तंत्र केवल निरंतर आग की अनुमति देता है। वह ट्रिगर बॉक्स में जा रहा है। डिवाइस का तंत्र काफी सरल है और इसमें एक धुरी वाला एक ट्रिगर शामिल है, एक ट्रिगर लीवर है, साथ ही एक ध्वज गैर-स्वचालित फ्यूज जिसमें लॉक है। ट्रिगर का हुक जब इसे दबाया जाता है ट्रिगर लीवर को कम करता है, तो बोल्ट वाहक के पलटन के नीचे से निकल जाता है। सुरक्षा लॉक ट्रिगर लीवर को बंद कर देता है, जो कि स्लाइड फ्रेम का मुकाबला पलटन के पीछे रखता है, जबकि ट्रिगर हुक की प्रक्रिया स्लाइड फ्रेम की गति को अवरुद्ध करती है, जो इसे पूरी तरह से वापस लेने की अनुमति नहीं देती है। पर्क्यूशन मैकेनिज्म एक प्रत्यावर्ती-लड़ वसंत से काम करता है - स्लाइड फ्रेम, आगे बढ़ते हुए, फायरिंग पिन के फलाव को टकराता है, जिसे गेट चैनल में रखा गया है। बैरल से एक शॉट के बाद शॉट मामले को शटर बेदखलदार द्वारा हटा दिया जाता है और रिसीवर पर एक परावर्तक फलाव की मदद से बाईं ओर फेंक दिया जाता है। लाइनर की इजेक्शन विंडो को स्प्रिंग-लोडेड फ्लैप द्वारा बंद कर दिया जाता है, फ्लैप जब लाइनर को बाहर निकालता है तो एक पुशर से खुलता है जो स्लाइड फ्रेम से पीछे की ओर बढ़ता है। पिस्तौल की पकड़ रिसीवर से जुड़ती है, साथ ही साथ एक बट जिसमें बाएं हाथ से पकड़ने के लिए थ्रू कट होता है और लड़ाई के दौरान ले जाने में आसान होता है। मोहरबंद, स्व-उन्मुख, तह बिपोड एक वियोज्य गैस पाइप पर लगाए जाते हैं, एक टूटे हुए रैमरोड के हिस्सों को दाहिने पैर में रखा जाता है, और बट सीटों में एक तेल कैन और शेष गौण होता है। पीसी टेप पावर पर, टेप दाईं ओर खिलाया जाता है। टेप - लिंक, धातु, गैर-फैला हुआ एक बंद लिंक। घरेलू राइफल कारतूस के विन्यास में टेप से कक्ष में कारतूस के आस्तीन के सीधे फ़ीड का एक फैला हुआ रिम होता है, जिसे कारतूस के प्रारंभिक निष्कर्षण के साथ एक सर्किट द्वारा बदल दिया जाता था। टेप फीड मैकेनिज्म, जिसमें एक मूल लीवर लेआउट होता है, रिसीवर के हिंगेड कवर और रिसीवर के हिंग वाले बेस पर लगाया जाता है। टेप का फ़ीड तंत्र एक फीडर द्वारा संचालित होता है, जो रिसीवर की दाहिनी दीवार पर लगाया जाता है। फीडर ने स्लाइड को अपने रोलर (बाएं) और फलाव (दाएं) के साथ कवर किया। जबकि स्लाइड फ्रेम पीछे की ओर बढ़ रहा है, इसका बायाँ तिरछा पहलू फीडर रोलर पर कार्य करता है, जो घूमता है और फ़ीड उंगली, इससे जुड़ी, टेप को एक कदम बाईं ओर ले जाती है। इस मामले में, पिछला कारतूस, जिसे बोल्ट वाहक के चिमटा के हुक द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, बोल्ट वाहक के साथ वापस ले जाया जाता है और खिड़की के माध्यम से एक घूर्णन फ़ीड लीवर की मदद से डिस्चार्जिंग लाइन में ले जाया जाता है। आगे बढ़ते सिस्टम के दौरान कारतूस बोल्ट द्वारा भेजा जाता है और बेदखलदार द्वारा कब्जा कर लिया जाता है। उसी समय, फीडर, जो स्लाइड फ्रेम के दाहिने किनारे से प्रभावित होता है, दाईं ओर स्थानांतरित हो जाता है, जबकि रिबन की अगली उंगली फ़ीड उंगली में गिरती है। 100, 200 और 250 कारतूस के रिबन के लिए कारतूस के बक्से हैं। एक बिपोड पर मशीन गन का उपयोग करने के मामले में, 100 क्षमता वाले टेप के साथ बॉक्स बॉक्स के नीचे रिसीवर को तय किया जाता है; समोझानकोव बॉक्स तिपाई पर स्थापना के मामले में, इसे अलग से तैनात किया जाता है। 100 कारतूस पर बॉक्स के ढक्कन में मशीन गन से जुड़ी होने पर टेप के पारित होने के लिए डिज़ाइन किया गया एक फ्लैप वाल्व होता है। जब लैस कारतूस बेल्ट मशीन Rakov का उपयोग करें। एक एकल मशीन गन के लिए एक लंबी और छोटी लाइन की अवधारणा अलग है - एक लंबे एक में एक्सएनयूएमएक्स शॉट्स तक शामिल है, एक एक्सएनयूएमएक्स से कम। अलग-अलग समय पर, राइफल कारतूस (या "राइफल-मशीन-गन") 30x10 का उत्पादन विभिन्न प्रकार की गोलियों के साथ किया गयाः बुलेट "L" - वर्ष का एक सामान्य प्रकाश 7,62 मॉडल, "D" (एक ग्राम का 53-1908 द्रव्यमान) स्टील कोर "पीएस" (चांदी का सिर, वजन 11,7-11,9 ग्राम); ट्रेसर "T-1930", "T-9,45" (हरा सिर, बाद का द्रव्यमान - 9,75-30 ग्राम), 46 हजार मीटर पर एक चमकदार निशान देता है; कवच-भेदी आग लगानेवाला "बी- 9,4", "BS-9,9" (उत्तरार्द्ध में एक धातु-सिरेमिक कोर, ग्राम का 1-32 द्रव्यमान, एक लाल सिर वाला एक लाल बेल्ट, 40-12 चार्जिंग द्रव्यमान का भार होता है), दृष्टि और आग लगानेवाला "PZ"; कवच-भेदी अनुरेखक "बीटी- 12,5" (अनुरेखक के बजाय बनाया गया)। 3,15 में, B-3,2 बुलेट वाले कारतूस अपग्रेड किए गए थे, 90 में, T-1954M, बेहतर बैलिस्टिक की एक ट्रेसर बुलेट, विकसित की गई थी (मशीन गन को निकालते समय फैलाव को कम करने और शूटिंग की दक्षता बढ़ाने के लिए), 32 वर्ष में - एक लाइट बुलेट "सीटी बुलेट"। -M1974 "बढ़ी हुई लचीलापन (एक आधुनिक" पीएस "था जिसका हीट-ट्रीटेड स्टील कोर है)। वस्तुतः इन सभी कारतूसों का उपयोग मशीन गन में किया जाता है - हालाँकि, "L" और "D" बुलेट वाले कारतूस उपयोग से बाहर हैं। आस्तीन की सामग्री और बुलेट के प्रकार के आधार पर कारतूस का वजन 46 से 1988 ग्राम तक है। मशीन गन एक खुले यांत्रिक क्षेत्र-दृष्टि से सुसज्जित है, इसका ब्लॉक रिसीवर कवर पर लगाया गया है, सामने का दृश्य एक त्रिकोणीय आधार पर बैरल के थूथन पर लगाया गया है, इसे पक्षों से बचाने के लिए, "कान" स्थापित किए जाते हैं। दृष्टि सुधारों को पेश करने के लिए एक तंत्र से लैस है। PKN संशोधन NSPU, NSPUM और PPN-3 रात्रिकालीन दर्शनीय स्थलों से सुसज्जित हो सकता है। ES द्वारा विकसित मशीन 6TC2 पर मशीनगन समोझेनकोव पहिये के पहिये से सामने की छटनी ट्रंकियन, अवकाश और प्रोट्रूशियंस के लिए पालने (फ्रेम) पर चढ़ा। फ़्रेम को एक प्लग-इन पिन कुंडा से जोड़ा जाता है, जिसमें एक सेक्टर क्षैतिज मार्गदर्शन तंत्र होता है, साथ ही एक रॉड पेंच - एक ऊर्ध्वाधर, पतली पिकअप। क्षैतिज मार्गदर्शन क्षेत्र में हजारवें कोण में निशान हैं और स्थिर फैलाव के लिए रुकता है। विमान-रोधी अग्नि के संचालन के लिए, साथ ही घुटने से जमीन के निशाने पर आग के लिए, फ्रेम में एक तह स्टैंड होता है जिसमें अंत में एक घूर्णन ब्रैकेट होता है। मशीन की एक विशिष्ट विशेषता एक बॉक्स सेक्शन के साथ मोड़े हुए पैरों के सिरों पर लगाए गए अनकैप्ड कप्लर्स थे - रिकॉइल के प्रभाव में पैरों का फिसलन दफन सलामी बल्लेबाजों के आसपास मशीन को "उछल" करने की तुलना में टिप-ऑफ को बहुत कम करता है। चलती और फिसलन वाली मिट्टी के लिए, सामने के पैर में एक अतिरिक्त तह कप्लर है। हिंगिंग पैर आपको घुटने से मशीन से फायर करने, बैठने या लेटने की अनुमति देता है, क्लैम्पिंग शिकंजा और दांतेदार वाशर की मदद से पैरों की स्थिति तय की जाती है। समोझेनकोव मशीन का उपयोग करते समय आग की रेखा की ऊंचाई 320 से 820 मिलीमीटर तक है, जमीन के लक्ष्यों पर क्षैतिज मार्गदर्शन के कोण 90 डिग्री और हवा 360 डिग्री पर हैं। यह परीक्षण किया गया था, हालांकि, इसे सेवा, आसान स्थापना के लिए स्वीकार नहीं किया गया था - रात में शॉट लक्ष्यों पर फायरिंग के लिए पीसी को एक बैक सपोर्ट। पीसी के कई संशोधन बनाए गए थेः एक टैंक पीकेटी और एक बख्तरबंद कार्मिक पीकेबी (6P10)। पीकेबी मशीन गन लगभग पीसी जैसी ही है। BRDM और BTR पर कुंडा इंस्टॉलेशन 6У1 का उपयोग करके माउंट किया गया, जिसमें आस्तीन का मामला है और कारतूस टेप के लिए धारक। टेप के बिना पीसीबी वजन, स्थापना के साथ 18,5 किलोग्राम है। पुराने बख्तरबंद वाहनों को हटाने के साथ, पीकेबी को परिवहन-लड़ाकू हेलीकाप्टरों पर स्थापित किया जाना शुरू हुआ - यहां मशीन गन, जिसमें रिसीवर की पीठ पर एक नियंत्रण हैंडल है, एक रिंग दृष्टि और सामने की दृष्टि से सुसज्जित है। सच है, "एविएशन" मशीन गन के लिए पीसी की दर बहुत कम है। पीसीटी पीसी से एक भारी चिकनी बैरल, विद्युत-संचालित, एक गैस नियामक डिजाइन, अपने स्वयं के लक्ष्य उपकरणों की अनुपस्थिति, बट और संभाल के साथ-साथ रिसीवर के बाहरी हिस्सों में परिवर्तन से भिन्न होता है। एक जोड़ी के रूप में पीसीटी स्थापित करने के लिए, एक नम कोष्ठक है। रिमोट कंट्रोल के साथ प्रतिष्ठानों पर पीकेटी मशीन गन का भी उपयोग किया जाता है। Единый пулемет ПК/ПКС является мощным, маневренным и удобным групповым оружием, которое отличается сравнительно небольшими массой и размерами при отличной кучности стрельбы. Ленточное питание и сменный ствол позволяют вести интенсивный огонь в напряженные периоды боя. Единый пулемет ПК был принят на вооружение армиями пятнадцати стран.
कुछ सोवियत डिजाइनरों द्वारा बड़ी संख्या में प्रयासों के बावजूद एक एकल मशीन गन बनाने के लिए जिसमें राइफल कारतूस का उपयोग किया जाएगा जो आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, इस विचार को लागू करें। लंबे समय तक विफल रहा। इसी समय, पचास सेकंड के मध्य तक, सात,बासठ-millimछः सिंगल मशीन गन से एक हज़ार नौ सौ उनचास से MAG , MGतीन स्पेन) एक हज़ार नौ सौ उनसठ जी। )। सोवियत संघ में, सात,बासठxतिरेपन के लिए एक मशीन गन, जिसे कंपनी RP-छियालीस और चित्रफलक SGM द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना था, को सोकोलो-निकोसिन के "युगल" द्वारा विकसित किया गया था, साथ ही साथ अन्य प्रसिद्ध डिजाइनरों द्वारा भी। जब सोकोलोव और निकितिन का नमूना, जो एक्सएनयूएमएक्स में सैन्य परीक्षण पास करता था, पहले से ही "बाहर निकलने पर" था, सेवा में लगाए जाने की महान संभावना के साथ, कलाश्निकोव समूह प्रतियोगिता में शामिल हो गया। एक्सएनयूएमएक्स में, कई कलाश्निकोव प्रोटोटाइप का निर्माण किया गया था और, अंतिम चरण में, इन मशीन गनों को सोकोलोव-निकितिन मशीन गन के साथ समानांतर में परीक्षण किया गया था। एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में, एकल PK / PKS मशीन गन मैनुअल PKK के साथ सेवा के लिए अपनाया गया था। डिजाइन में मुहर लगी भागों का उपयोग किया गया था, उस समय तक उनके निर्माण की तकनीक पहले से ही काम कर रही थी। रिसीवर में मशीन गन के त्वरित-वियोज्य बैरल को एक संपर्ककर्ता का उपयोग करके रस्क संयुक्त के साथ सुरक्षित किया गया था। कठोरता को बढ़ाने के लिए, साथ ही बैरल पर गर्मी सिंक में कुछ वृद्धि, अनुदैर्ध्य पसलियों को बनाया गया था। बैरल के परिवर्तन में तेजी लाने के लिए, साथ ही मशीन गन को ले जाने के लिए, यह एक तह संभाल से सुसज्जित है। एसवीडी राइफल के समान एक शंक्वाकार लौ बन्दी, जिसे बाद में एक बेलनाकार भट्ठा द्वारा बदल दिया गया था, बैरल के अंत में संलग्न था। ऑटोमेशन बैरल की दीवार में एक साइड होल का उपयोग करके, पाउडर गैसों को हटाने के सिद्धांत पर काम करता है। गैस चैंबर बैरल के नीचे स्थित है और इसे एक नियामक के साथ दिया जाता है जिसमें तीन निश्चित स्थान होते हैं। नियामक चेंबर से वायुमंडल में विखंडित होने वाली पाउडर गैसों की मात्रा को बदल देता है, जिससे पिस्टन में संचारित आवेग की भयावहता बदल जाती है। कारतूस मामले के रिम का उपयोग करके नियामक का क्रमांकन किया गया था। जब बोल्ट को चालू किया जाता है, तो लॉकिंग का प्रदर्शन किया जाता है, जिसके दौरान रिसीवर में लग्स के पीछे लग्स की एक जोड़ी सेट होती है। अपने काम में पीसी का शटर और योजना पीकेके और एकेएम के शटर के समान है। स्वचालन का ड्राइविंग लिंक बोल्ट वाहक है, जिसके साथ गैस पिस्टन रॉड टिका है। बोल्ट का चैनल पारस्परिक वसंत को समायोजित करने के लिए उपयोग किया जाता है। फ्रेम के पीछे रैक पर चिमटा और कुंडी तय की जाती है। दाईं ओर स्थित लोडिंग हैंडल में स्लाइड फ्रेम के साथ एक कठोर संबंध नहीं होता है, इसे निकाल दिया जाता है। ट्रिगर तंत्र केवल निरंतर आग की अनुमति देता है। वह ट्रिगर बॉक्स में जा रहा है। डिवाइस का तंत्र काफी सरल है और इसमें एक धुरी वाला एक ट्रिगर शामिल है, एक ट्रिगर लीवर है, साथ ही एक ध्वज गैर-स्वचालित फ्यूज जिसमें लॉक है। ट्रिगर का हुक जब इसे दबाया जाता है ट्रिगर लीवर को कम करता है, तो बोल्ट वाहक के पलटन के नीचे से निकल जाता है। सुरक्षा लॉक ट्रिगर लीवर को बंद कर देता है, जो कि स्लाइड फ्रेम का मुकाबला पलटन के पीछे रखता है, जबकि ट्रिगर हुक की प्रक्रिया स्लाइड फ्रेम की गति को अवरुद्ध करती है, जो इसे पूरी तरह से वापस लेने की अनुमति नहीं देती है। पर्क्यूशन मैकेनिज्म एक प्रत्यावर्ती-लड़ वसंत से काम करता है - स्लाइड फ्रेम, आगे बढ़ते हुए, फायरिंग पिन के फलाव को टकराता है, जिसे गेट चैनल में रखा गया है। बैरल से एक शॉट के बाद शॉट मामले को शटर बेदखलदार द्वारा हटा दिया जाता है और रिसीवर पर एक परावर्तक फलाव की मदद से बाईं ओर फेंक दिया जाता है। लाइनर की इजेक्शन विंडो को स्प्रिंग-लोडेड फ्लैप द्वारा बंद कर दिया जाता है, फ्लैप जब लाइनर को बाहर निकालता है तो एक पुशर से खुलता है जो स्लाइड फ्रेम से पीछे की ओर बढ़ता है। पिस्तौल की पकड़ रिसीवर से जुड़ती है, साथ ही साथ एक बट जिसमें बाएं हाथ से पकड़ने के लिए थ्रू कट होता है और लड़ाई के दौरान ले जाने में आसान होता है। मोहरबंद, स्व-उन्मुख, तह बिपोड एक वियोज्य गैस पाइप पर लगाए जाते हैं, एक टूटे हुए रैमरोड के हिस्सों को दाहिने पैर में रखा जाता है, और बट सीटों में एक तेल कैन और शेष गौण होता है। पीसी टेप पावर पर, टेप दाईं ओर खिलाया जाता है। टेप - लिंक, धातु, गैर-फैला हुआ एक बंद लिंक। घरेलू राइफल कारतूस के विन्यास में टेप से कक्ष में कारतूस के आस्तीन के सीधे फ़ीड का एक फैला हुआ रिम होता है, जिसे कारतूस के प्रारंभिक निष्कर्षण के साथ एक सर्किट द्वारा बदल दिया जाता था। टेप फीड मैकेनिज्म, जिसमें एक मूल लीवर लेआउट होता है, रिसीवर के हिंगेड कवर और रिसीवर के हिंग वाले बेस पर लगाया जाता है। टेप का फ़ीड तंत्र एक फीडर द्वारा संचालित होता है, जो रिसीवर की दाहिनी दीवार पर लगाया जाता है। फीडर ने स्लाइड को अपने रोलर और फलाव के साथ कवर किया। जबकि स्लाइड फ्रेम पीछे की ओर बढ़ रहा है, इसका बायाँ तिरछा पहलू फीडर रोलर पर कार्य करता है, जो घूमता है और फ़ीड उंगली, इससे जुड़ी, टेप को एक कदम बाईं ओर ले जाती है। इस मामले में, पिछला कारतूस, जिसे बोल्ट वाहक के चिमटा के हुक द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, बोल्ट वाहक के साथ वापस ले जाया जाता है और खिड़की के माध्यम से एक घूर्णन फ़ीड लीवर की मदद से डिस्चार्जिंग लाइन में ले जाया जाता है। आगे बढ़ते सिस्टम के दौरान कारतूस बोल्ट द्वारा भेजा जाता है और बेदखलदार द्वारा कब्जा कर लिया जाता है। उसी समय, फीडर, जो स्लाइड फ्रेम के दाहिने किनारे से प्रभावित होता है, दाईं ओर स्थानांतरित हो जाता है, जबकि रिबन की अगली उंगली फ़ीड उंगली में गिरती है। एक सौ, दो सौ और दो सौ पचास कारतूस के रिबन के लिए कारतूस के बक्से हैं। एक बिपोड पर मशीन गन का उपयोग करने के मामले में, एक सौ क्षमता वाले टेप के साथ बॉक्स बॉक्स के नीचे रिसीवर को तय किया जाता है; समोझानकोव बॉक्स तिपाई पर स्थापना के मामले में, इसे अलग से तैनात किया जाता है। एक सौ कारतूस पर बॉक्स के ढक्कन में मशीन गन से जुड़ी होने पर टेप के पारित होने के लिए डिज़ाइन किया गया एक फ्लैप वाल्व होता है। जब लैस कारतूस बेल्ट मशीन Rakov का उपयोग करें। एक एकल मशीन गन के लिए एक लंबी और छोटी लाइन की अवधारणा अलग है - एक लंबे एक में एक्सएनयूएमएक्स शॉट्स तक शामिल है, एक एक्सएनयूएमएक्स से कम। अलग-अलग समय पर, राइफल कारतूस तीसxदस का उत्पादन विभिन्न प्रकार की गोलियों के साथ किया गयाः बुलेट "L" - वर्ष का एक सामान्य प्रकाश सात,बासठ मॉडल, "D" स्टील कोर "पीएस" ; ट्रेसर "T-एक हज़ार नौ सौ तीस", "T-नौ,पैंतालीस" , छियालीस हजार मीटर पर एक चमकदार निशान देता है; कवच-भेदी आग लगानेवाला "बी- नौ,चार", "BS-नौ,नौ" , दृष्टि और आग लगानेवाला "PZ"; कवच-भेदी अनुरेखक "बीटी- बारह,पाँच" । तीन,पंद्रह में, B-तीन,दो बुलेट वाले कारतूस अपग्रेड किए गए थे, नब्बे में, T-एक हज़ार नौ सौ चौवनM, बेहतर बैलिस्टिक की एक ट्रेसर बुलेट, विकसित की गई थी , बत्तीस वर्ष में - एक लाइट बुलेट "सीटी बुलेट"। -Mएक हज़ार नौ सौ चौहत्तर "बढ़ी हुई लचीलापन । वस्तुतः इन सभी कारतूसों का उपयोग मशीन गन में किया जाता है - हालाँकि, "L" और "D" बुलेट वाले कारतूस उपयोग से बाहर हैं। आस्तीन की सामग्री और बुलेट के प्रकार के आधार पर कारतूस का वजन छियालीस से एक हज़ार नौ सौ अठासी ग्राम तक है। मशीन गन एक खुले यांत्रिक क्षेत्र-दृष्टि से सुसज्जित है, इसका ब्लॉक रिसीवर कवर पर लगाया गया है, सामने का दृश्य एक त्रिकोणीय आधार पर बैरल के थूथन पर लगाया गया है, इसे पक्षों से बचाने के लिए, "कान" स्थापित किए जाते हैं। दृष्टि सुधारों को पेश करने के लिए एक तंत्र से लैस है। PKN संशोधन NSPU, NSPUM और PPN-तीन रात्रिकालीन दर्शनीय स्थलों से सुसज्जित हो सकता है। ES द्वारा विकसित मशीन छःTCदो पर मशीनगन समोझेनकोव पहिये के पहिये से सामने की छटनी ट्रंकियन, अवकाश और प्रोट्रूशियंस के लिए पालने पर चढ़ा। फ़्रेम को एक प्लग-इन पिन कुंडा से जोड़ा जाता है, जिसमें एक सेक्टर क्षैतिज मार्गदर्शन तंत्र होता है, साथ ही एक रॉड पेंच - एक ऊर्ध्वाधर, पतली पिकअप। क्षैतिज मार्गदर्शन क्षेत्र में हजारवें कोण में निशान हैं और स्थिर फैलाव के लिए रुकता है। विमान-रोधी अग्नि के संचालन के लिए, साथ ही घुटने से जमीन के निशाने पर आग के लिए, फ्रेम में एक तह स्टैंड होता है जिसमें अंत में एक घूर्णन ब्रैकेट होता है। मशीन की एक विशिष्ट विशेषता एक बॉक्स सेक्शन के साथ मोड़े हुए पैरों के सिरों पर लगाए गए अनकैप्ड कप्लर्स थे - रिकॉइल के प्रभाव में पैरों का फिसलन दफन सलामी बल्लेबाजों के आसपास मशीन को "उछल" करने की तुलना में टिप-ऑफ को बहुत कम करता है। चलती और फिसलन वाली मिट्टी के लिए, सामने के पैर में एक अतिरिक्त तह कप्लर है। हिंगिंग पैर आपको घुटने से मशीन से फायर करने, बैठने या लेटने की अनुमति देता है, क्लैम्पिंग शिकंजा और दांतेदार वाशर की मदद से पैरों की स्थिति तय की जाती है। समोझेनकोव मशीन का उपयोग करते समय आग की रेखा की ऊंचाई तीन सौ बीस से आठ सौ बीस मिलीमीटर तक है, जमीन के लक्ष्यों पर क्षैतिज मार्गदर्शन के कोण नब्बे डिग्री और हवा तीन सौ साठ डिग्री पर हैं। यह परीक्षण किया गया था, हालांकि, इसे सेवा, आसान स्थापना के लिए स्वीकार नहीं किया गया था - रात में शॉट लक्ष्यों पर फायरिंग के लिए पीसी को एक बैक सपोर्ट। पीसी के कई संशोधन बनाए गए थेः एक टैंक पीकेटी और एक बख्तरबंद कार्मिक पीकेबी । पीकेबी मशीन गन लगभग पीसी जैसी ही है। BRDM और BTR पर कुंडा इंस्टॉलेशन छःУएक का उपयोग करके माउंट किया गया, जिसमें आस्तीन का मामला है और कारतूस टेप के लिए धारक। टेप के बिना पीसीबी वजन, स्थापना के साथ अट्ठारह,पाँच किलोग्रामग्राम है। पुराने बख्तरबंद वाहनों को हटाने के साथ, पीकेबी को परिवहन-लड़ाकू हेलीकाप्टरों पर स्थापित किया जाना शुरू हुआ - यहां मशीन गन, जिसमें रिसीवर की पीठ पर एक नियंत्रण हैंडल है, एक रिंग दृष्टि और सामने की दृष्टि से सुसज्जित है। सच है, "एविएशन" मशीन गन के लिए पीसी की दर बहुत कम है। पीसीटी पीसी से एक भारी चिकनी बैरल, विद्युत-संचालित, एक गैस नियामक डिजाइन, अपने स्वयं के लक्ष्य उपकरणों की अनुपस्थिति, बट और संभाल के साथ-साथ रिसीवर के बाहरी हिस्सों में परिवर्तन से भिन्न होता है। एक जोड़ी के रूप में पीसीटी स्थापित करने के लिए, एक नम कोष्ठक है। रिमोट कंट्रोल के साथ प्रतिष्ठानों पर पीकेटी मशीन गन का भी उपयोग किया जाता है। Единый пулемет ПК/ПКС является мощным, маневренным и удобным групповым оружием, которое отличается сравнительно небольшими массой и размерами при отличной кучности стрельбы. Ленточное питание и сменный ствол позволяют вести интенсивный огонь в напряженные периоды боя. Единый пулемет ПК был принят на вооружение армиями пятнадцати стран.
Jamshedpur : स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 97वीं जयंती पर सामाजिक अटल विचार वाहिनी की ओर से कार्यशाला सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें सभी जाति, धर्म संप्रदाय और राजनीतिक दलों के लोग मौजूद थे. विधायक सरयू राय भी मौजूद थे. संस्था के संरक्षक पूर्व भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी भारतीय राजनीति के इकलौते ऐसे नेता थे, जिनकी कद्र सभी दलों में होती थी. जब वे सदन में बोलने के लिए खड़े होते थे, तब समूचा विपक्ष उन्हें सुनता था और उनकी बातों पर अमल करता था. आज के नेता सत्ता मिलने के बाद मदांध हो जाते हैं. ऐसा व्यवहार करते हैं, कि मानो उन्हें सदा के लिए सत्ता मिल गई है. कार्यशाला के माध्यम से समाज के हर वर्गों को सम्मानित किया गया. जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, विमला देसाई, भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह, जयप्रकाश राय, मनमोहन चौधरी, शिवशंकर सिंह आदि को सम्मानित किया गया.
Jamshedpur : स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की सत्तानवेवीं जयंती पर सामाजिक अटल विचार वाहिनी की ओर से कार्यशाला सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें सभी जाति, धर्म संप्रदाय और राजनीतिक दलों के लोग मौजूद थे. विधायक सरयू राय भी मौजूद थे. संस्था के संरक्षक पूर्व भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी भारतीय राजनीति के इकलौते ऐसे नेता थे, जिनकी कद्र सभी दलों में होती थी. जब वे सदन में बोलने के लिए खड़े होते थे, तब समूचा विपक्ष उन्हें सुनता था और उनकी बातों पर अमल करता था. आज के नेता सत्ता मिलने के बाद मदांध हो जाते हैं. ऐसा व्यवहार करते हैं, कि मानो उन्हें सदा के लिए सत्ता मिल गई है. कार्यशाला के माध्यम से समाज के हर वर्गों को सम्मानित किया गया. जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, विमला देसाई, भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह, जयप्रकाश राय, मनमोहन चौधरी, शिवशंकर सिंह आदि को सम्मानित किया गया.
चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस ने आज से अपना डोर टू डोर कैंपेन शुरू किया है, जिसकी शुरूआत चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित पेट्रोल पंप पर लोगों को पम्फलेट बांट कर की गई। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा द्वारा किए जा रहे कार्यो असलियत बताई। इस पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। कांग्रेस नेता एचएस लक्की का कहना है कि भाजपा के शासन में महंगाई अपने चरम पर है। पेट्रोल और डीजल के रेट जिस तरह से बढ़े थे, उस तरह घटाए नहीं गए। रेट 40 रुपए तक बढ़ाए गए थ और 5 रुपए की मामूली राहत देकर इसे भाजपा सरकार दीवाली गिफ्ट बता रही है। यह दीवाली गिफ्ट नहीं, बल्कि लोगों की जेब पर डाका है। जब तेल 40 रुपए तक महंगा किया गया तो 5 रुपए क्यों घटाए गए, 40 रुपए घटाए जाने चाहिए थे। भाजपा सरकार द्वारा जो वादे किए थे, उन पर यह सरकार खरी नहीं उतरी है। उन्होंने जनता के साथ धोखा किया है। आज महंगाई से आम आदमी त्रस्त है। जिस तरह से यह सरकार महंगाई कम करने का नारा देकर सत्ता में आई थी, जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ हुआ देखने को नहीं मिल रहा है। अब चंडीगढ़ की जनता मन बना चुकी है और आने वाले नगर निगम के चुनाव में भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देगी। यूथ कांग्रेस का कहना है कि उनका यह अभियान अगले एक हफ्ते तक चलेगा। वह डोर टू डोर जाएंगे और लोगों को भाजपा द्वारा बढ़ती महंगाई के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही आग्रह करेंगे कि वह निगम चुनाव में भाजपा को वोट न करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस ने आज से अपना डोर टू डोर कैंपेन शुरू किया है, जिसकी शुरूआत चंडीगढ़ के सेक्टर-सात स्थित पेट्रोल पंप पर लोगों को पम्फलेट बांट कर की गई। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा द्वारा किए जा रहे कार्यो असलियत बताई। इस पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। कांग्रेस नेता एचएस लक्की का कहना है कि भाजपा के शासन में महंगाई अपने चरम पर है। पेट्रोल और डीजल के रेट जिस तरह से बढ़े थे, उस तरह घटाए नहीं गए। रेट चालीस रुपयापए तक बढ़ाए गए थ और पाँच रुपयापए की मामूली राहत देकर इसे भाजपा सरकार दीवाली गिफ्ट बता रही है। यह दीवाली गिफ्ट नहीं, बल्कि लोगों की जेब पर डाका है। जब तेल चालीस रुपयापए तक महंगा किया गया तो पाँच रुपयापए क्यों घटाए गए, चालीस रुपयापए घटाए जाने चाहिए थे। भाजपा सरकार द्वारा जो वादे किए थे, उन पर यह सरकार खरी नहीं उतरी है। उन्होंने जनता के साथ धोखा किया है। आज महंगाई से आम आदमी त्रस्त है। जिस तरह से यह सरकार महंगाई कम करने का नारा देकर सत्ता में आई थी, जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ हुआ देखने को नहीं मिल रहा है। अब चंडीगढ़ की जनता मन बना चुकी है और आने वाले नगर निगम के चुनाव में भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देगी। यूथ कांग्रेस का कहना है कि उनका यह अभियान अगले एक हफ्ते तक चलेगा। वह डोर टू डोर जाएंगे और लोगों को भाजपा द्वारा बढ़ती महंगाई के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही आग्रह करेंगे कि वह निगम चुनाव में भाजपा को वोट न करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोरिया जिले के विकासखण्ड भरतपुर के कोरिया महिला संकुल संगठन के अंतर्गत जाग्रती महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं 26 फरवरी से नोएडा हाट सेक्टर-33 ए में आयोजित सरस मेला में अपने हाथों से तैयार किये गये मसालों की सुगंध बिखेर रही हैं। सरस मेला में कोरिया जिले के उत्पादों को खरीदने प्रति लोगों में बेहद रूचि देखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित सरस मेला 26 फरवरी से 14 मार्च में संचालित किया जा रहा है। जाग्रती महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कोरिया मसाला एवं रेडी टू इट जैसे उत्पाद तैयार किये गये हैं। इन उत्पादों के साथ समूह ने सरस मेला में भाग लिया है। स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष माया सांडे एवं सचिव सीता सरस मेला में उत्पादों के विक्रय और मेला में हुए नए अनुभवों को साझा करते हुए बताती हैं कि मसालों एवं रेडी टू इट जैसे उत्पादों के अतिरिक्त इस मेले में समूह द्वारा आगर्निक हल्दी पाउडर, जीरा फूल चावल, अचार, आटा, पापड़, नमकीन, पौष्टिक लड्डू एवं हेण्ड क्राफ्ट सामान आदि का स्टॉल भी लगाया गया है। जिसमें अभी तक 30 हजार रूपये तक के उत्पादों का विक्रय हो चुका है। हमें उम्मीद है कि लगभग 1 लाख रूपये तक की आय होगी। सरस मेला में जिले का प्रतिनिधित्व करने के इस बेहतरीन अवसर के लिए उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
कोरिया जिले के विकासखण्ड भरतपुर के कोरिया महिला संकुल संगठन के अंतर्गत जाग्रती महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं छब्बीस फरवरी से नोएडा हाट सेक्टर-तैंतीस ए में आयोजित सरस मेला में अपने हाथों से तैयार किये गये मसालों की सुगंध बिखेर रही हैं। सरस मेला में कोरिया जिले के उत्पादों को खरीदने प्रति लोगों में बेहद रूचि देखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित सरस मेला छब्बीस फरवरी से चौदह मार्च में संचालित किया जा रहा है। जाग्रती महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कोरिया मसाला एवं रेडी टू इट जैसे उत्पाद तैयार किये गये हैं। इन उत्पादों के साथ समूह ने सरस मेला में भाग लिया है। स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष माया सांडे एवं सचिव सीता सरस मेला में उत्पादों के विक्रय और मेला में हुए नए अनुभवों को साझा करते हुए बताती हैं कि मसालों एवं रेडी टू इट जैसे उत्पादों के अतिरिक्त इस मेले में समूह द्वारा आगर्निक हल्दी पाउडर, जीरा फूल चावल, अचार, आटा, पापड़, नमकीन, पौष्टिक लड्डू एवं हेण्ड क्राफ्ट सामान आदि का स्टॉल भी लगाया गया है। जिसमें अभी तक तीस हजार रूपये तक के उत्पादों का विक्रय हो चुका है। हमें उम्मीद है कि लगभग एक लाख रूपये तक की आय होगी। सरस मेला में जिले का प्रतिनिधित्व करने के इस बेहतरीन अवसर के लिए उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
भास की कृतियों का सांस्कृतिक विवेचन / ४७१ कम्बोज-फाम्बोजफुलेषु-कर्णभारम् १११३ अफगानिस्तान या उसके आस-पास का उत्तरी भाग कम्ब्रोज या काम्बोज कहा गया है । यह हिमालय और सिन्धु नदी के बीच का जनपद है। कनिंघम और राय चौधरी के अनुसार वर्तमान रामपुर-राजोरी कम्बोजों की राजधानी थी । महाभारत के अनुसार काम्बोज गणराज्य था । कम्बोज जनपद के क्षत्रिय काम्बोज कहलाते थे तथा इन्हीं के नाम पर इस प्रदेश का उक्त नाम पड़ा होगा । डॉ० वासुदेव शरण अग्रवाल ने आधुनिक पामीर और बदरुशां का सम्मिलित प्राचीन नाम कम्बोज जनपद माना है। प्रो० लास ने कम्बोज की पहचान काशगर के दक्षिणी प्रदेश से की है । पाणिनि ने भी इसे एक व्यवस्थित जनपद माना है । भास ने कम्बोज के राजकुमारों के साथ अश्वों को भी प्रसिद्धि बतलायी है । डॉ० राइस डेविड ने कम्बोज की राजधानी द्वारका मानी है ।२ काशी काशिराज - प्रतिज्ञा० २१८, अविमारक, षष्ठ अङ्क, पृ० १६७ इस जनपद में वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर जिलों का भू-भाग सम्मिलित था । काशी और कोशल के अठारह गण राजाओं ने वैशाली के राजा चेटक की ओर से कुणक के विरुद्ध युद्ध किया था। काशी के राजा शंख का उल्लेख इस जनपद की समृद्धि और कलाप्रियता पर प्रकाश डालता है । बुद्ध के पूर्व काशी की राजनीतिक शक्ति अत्यधिक थी । ब्राह्मण काल में काशी जनपद का राजा धृतराष्ट्र था, जिसने अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किया था। महाभारत में बताया गया है कि काशी का राजा प्रतर्दन था । जातक साहित्य से ज्ञात होता है कि कोशल में राज्य करने वाला ब्रह्मदत्त काशी का हो राजा था । इस जनपद की राजधानी वाराणसी थी । कुन्तिभोज-अविमारक- विशेषतः, षष्ठ अङ्क, पृ० १४७-१७४, २१, पृ०५१ डे० के मतानुसार इसे भोज भी कहा गया है । यह प्रदेश प्राचीन समय में मालव के अन्तर्गत था । यह एक छोटी नदी-अश्वनदी या अश्वार्थानदी के तट पर स्थित था, यह नदी चम्बल नदी में जा कर मिलती थी । अविमारक के अध्ययन से ज्ञात होता है कि कुन्तिभोज समृद्ध प्रदेश था । महाभारत के समय १ पाणिनिकालीन भारत, हिन्दी संस्करण, पृ० ६१ २. बुद्धिस्ट इण्डिया, पृ० २८ मे यह चर्मण्वती नदी के तट पर अवस्थित था । सम्भवतः यह ग्वालियर जनपद से सम्बद्ध था। कुरु- पञ्चरात्रम्, पृ० ४, ऊरुभंग १।३१ भास ने कुरु और कुरुजागल' इन दो जनपदो का उल्लेख किया है। गंगा-यमुना के बीच मेरठ कमिश्नरी का भू-भाग इस जनपद में सम्मिलित था, इसकी राजधानी हस्तिनापुर थी। थानेश्वर, हिसार, अथवा सरस्वती-यमुनागगा के बीच का प्रदेश कुरुजागल कहलाता था । वस्तुतः कुरु जनपद और कुरुजागल एक दूसरे से सटे हुए थे । पाणिनि ने भी कुरु जनपद का निर्देश किया है। इस जनपद में हिरण्यवती, कौशिकी, अरणा, अप्या और सरस्वती नदियाँ प्रवाहित होती थी । २ यह जनपद तीन भागो मे विभक्त था - ( १ ) कुरक्षेत्र ( २ ) कुरु और (३) कुषजागल । कुरुक्षेत्र थानेश्वर मण्डल से सम्बद्ध था और इसमे सोनपत, पानीपत, अमीन और कर्नाल पडते थे । यह सरस्वती और दृशद्वती के मध्य मे स्थित था। वैदिक युग मे आसनदीवत जिस स्थान पर स्थित था, आजकल उसी स्थान पर थानेश्वर स्थित है। ऊरुभग मे अश्वत्थामा ने वृहत् कुरु जनपद मे युद्ध किया था। कोशल अभिषेक और प्रतिमा अवध देश को कोशल जनपद माना गया है। अयोध्या, श्रावस्ती, लखनऊ आदि नगर कोसल जनपद में सम्मिलित थे। रामायण के अनुसार श्रीरामचन्द्र जी ने श्रावस्ती का राज्य लव को और दक्षिण कोशल की कुशावती का राज्य कुश को दिया था । दक्षिण कोशल को विदर्भ या महाकोशल भी कहा गया है। बौद्ध और जैन साहित्य में सोलह जनपदो मे कोशल की गणना की गयी है । अचिरावती नदी कोशल तथा मत्लदेश को सीमा को विभक्त करती थी। भास की दृष्टि मे राम का जन्म कोशल में होने से यह बहुत पवित्र I राम-कथा का सम्बन्ध इसी जनपद के साथ है। १. कुरुजागल, मध्यम व्यायोग, पृ० २८ २. राय चौधरी, पॉलिटिकल ऍसियेन्ट इण्डिया, द्वितीय संस्करण, पृ० १२ ३. बुलनर और सरूप तेरह त्रिवेन्द्र रूपक भाग २ ० ४५ भास की कृतियों का सांस्कृतिक विवेचन / ४७३ः केकय - प्रतिमा नाटक, भरत केकय देश - - ननिहाल में गये थे पंजाब के व्यास और सतलज के मध्य का भाग केकय कहा गया है । यह सिन्ध देश की सीमा से मिलता है । पाजिटर ने केकय की स्थिति मद्र देश के पास मानी है। कनिंघम ने इसकी पहचान झेलम जिले के गिरिजक से की है । इस जनपद की स्थिति गान्धार के उत्तर तथा मद्र के पश्चिम में सम्भव है । पाणिनि ने भी केकय जनपद का निर्देश किया है । यह झेलम शाहपुर और गुजरात का पुराना नाम है । उपनिपदों में ब्रह्मवादी केकय अश्वपति का नाम मिलता है । गान्धार - ऊरुभंग १११, पञ्चरात्रम्, पृ० २६ गान्धार जनपद का सोलह जनपदों में उल्लेख आया है। इस जनपद का उल्लेख अशोक के पञ्चम शिलालेख में मिलता है । मज्झिम निकाय की अट्ठकथा में गान्धार जनपद को सोमान्त जनपद कहा गया है। गान्धार की स्थिति स्वात नदी से झेलम नदी तक व्याप्त थी । इस प्रकार इस जनपद में पूर्वी अफगानिस्तान और पश्चिमी पंजाव सम्मिलित थे । गान्धार की राजधानी. तक्षशिला शिक्षा और व्यापार इन दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण थी । जीवक वैद्य तक्षशिला का प्रसिद्ध स्नातक था। भास ने गान्धार देश की निवासिनी होने के कारण धृतराष्ट्र की पत्नी को गान्धारी कहा है । जनस्थान - प्रतिमा नाटक, पृ० १४२, १५२ सम्भवतः यह स्थान निजाम राज्य के औरंगावाद मण्डल में अवस्थित है । गोदावरी और कृष्णा नदी के तट पर स्थित पंचवटी का भू-भाग जनस्थान कह -- लाता है । रामायण में दण्डकारण्य के भू-भाग को जनस्थान कहा है। पाजिटर ने गोदावरी के उभय तट पर स्थित प्रदेश को जनपद कहा है । दक्षिणापथ - अभिषेक-तृतीय-अङ्क, पृ० २३, पञ्चरात्रम् - दक्षिणापथ परि- घभूतो, प्रथम अङ्क, पृ० २३ यह दक्षिण भारत का द्योतक है । ऋग्वेद में इसे दक्षिण पथ कहा गया हैं ।१. आर्किओलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट, भाग २, पृ० १४ तथा एथनिक सेटल - मेण्ट इन एन्शिएण्ट इण्डिया, पृ० ८९ २. वही, अष्टाध्यायी, ७१३२. ३. मज्झिम निकाय, जिल्द दूसरी, पृ० ९८२
भास की कृतियों का सांस्कृतिक विवेचन / चार सौ इकहत्तर कम्बोज-फाम्बोजफुलेषु-कर्णभारम् एक हज़ार एक सौ तेरह अफगानिस्तान या उसके आस-पास का उत्तरी भाग कम्ब्रोज या काम्बोज कहा गया है । यह हिमालय और सिन्धु नदी के बीच का जनपद है। कनिंघम और राय चौधरी के अनुसार वर्तमान रामपुर-राजोरी कम्बोजों की राजधानी थी । महाभारत के अनुसार काम्बोज गणराज्य था । कम्बोज जनपद के क्षत्रिय काम्बोज कहलाते थे तथा इन्हीं के नाम पर इस प्रदेश का उक्त नाम पड़ा होगा । डॉशून्य वासुदेव शरण अग्रवाल ने आधुनिक पामीर और बदरुशां का सम्मिलित प्राचीन नाम कम्बोज जनपद माना है। प्रोशून्य लास ने कम्बोज की पहचान काशगर के दक्षिणी प्रदेश से की है । पाणिनि ने भी इसे एक व्यवस्थित जनपद माना है । भास ने कम्बोज के राजकुमारों के साथ अश्वों को भी प्रसिद्धि बतलायी है । डॉशून्य राइस डेविड ने कम्बोज की राजधानी द्वारका मानी है ।दो काशी काशिराज - प्रतिज्ञाशून्य दो सौ अट्ठारह, अविमारक, षष्ठ अङ्क, पृशून्य एक सौ सरसठ इस जनपद में वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर जिलों का भू-भाग सम्मिलित था । काशी और कोशल के अठारह गण राजाओं ने वैशाली के राजा चेटक की ओर से कुणक के विरुद्ध युद्ध किया था। काशी के राजा शंख का उल्लेख इस जनपद की समृद्धि और कलाप्रियता पर प्रकाश डालता है । बुद्ध के पूर्व काशी की राजनीतिक शक्ति अत्यधिक थी । ब्राह्मण काल में काशी जनपद का राजा धृतराष्ट्र था, जिसने अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किया था। महाभारत में बताया गया है कि काशी का राजा प्रतर्दन था । जातक साहित्य से ज्ञात होता है कि कोशल में राज्य करने वाला ब्रह्मदत्त काशी का हो राजा था । इस जनपद की राजधानी वाराणसी थी । कुन्तिभोज-अविमारक- विशेषतः, षष्ठ अङ्क, पृशून्य एक सौ सैंतालीस-एक सौ चौहत्तर, इक्कीस, पृइक्यावन डेशून्य के मतानुसार इसे भोज भी कहा गया है । यह प्रदेश प्राचीन समय में मालव के अन्तर्गत था । यह एक छोटी नदी-अश्वनदी या अश्वार्थानदी के तट पर स्थित था, यह नदी चम्बल नदी में जा कर मिलती थी । अविमारक के अध्ययन से ज्ञात होता है कि कुन्तिभोज समृद्ध प्रदेश था । महाभारत के समय एक पाणिनिकालीन भारत, हिन्दी संस्करण, पृशून्य इकसठ दो. बुद्धिस्ट इण्डिया, पृशून्य अट्ठाईस मे यह चर्मण्वती नदी के तट पर अवस्थित था । सम्भवतः यह ग्वालियर जनपद से सम्बद्ध था। कुरु- पञ्चरात्रम्, पृशून्य चार, ऊरुभंग एक।इकतीस भास ने कुरु और कुरुजागल' इन दो जनपदो का उल्लेख किया है। गंगा-यमुना के बीच मेरठ कमिश्नरी का भू-भाग इस जनपद में सम्मिलित था, इसकी राजधानी हस्तिनापुर थी। थानेश्वर, हिसार, अथवा सरस्वती-यमुनागगा के बीच का प्रदेश कुरुजागल कहलाता था । वस्तुतः कुरु जनपद और कुरुजागल एक दूसरे से सटे हुए थे । पाणिनि ने भी कुरु जनपद का निर्देश किया है। इस जनपद में हिरण्यवती, कौशिकी, अरणा, अप्या और सरस्वती नदियाँ प्रवाहित होती थी । दो यह जनपद तीन भागो मे विभक्त था - कुरक्षेत्र कुरु और कुषजागल । कुरुक्षेत्र थानेश्वर मण्डल से सम्बद्ध था और इसमे सोनपत, पानीपत, अमीन और कर्नाल पडते थे । यह सरस्वती और दृशद्वती के मध्य मे स्थित था। वैदिक युग मे आसनदीवत जिस स्थान पर स्थित था, आजकल उसी स्थान पर थानेश्वर स्थित है। ऊरुभग मे अश्वत्थामा ने वृहत् कुरु जनपद मे युद्ध किया था। कोशल अभिषेक और प्रतिमा अवध देश को कोशल जनपद माना गया है। अयोध्या, श्रावस्ती, लखनऊ आदि नगर कोसल जनपद में सम्मिलित थे। रामायण के अनुसार श्रीरामचन्द्र जी ने श्रावस्ती का राज्य लव को और दक्षिण कोशल की कुशावती का राज्य कुश को दिया था । दक्षिण कोशल को विदर्भ या महाकोशल भी कहा गया है। बौद्ध और जैन साहित्य में सोलह जनपदो मे कोशल की गणना की गयी है । अचिरावती नदी कोशल तथा मत्लदेश को सीमा को विभक्त करती थी। भास की दृष्टि मे राम का जन्म कोशल में होने से यह बहुत पवित्र I राम-कथा का सम्बन्ध इसी जनपद के साथ है। एक. कुरुजागल, मध्यम व्यायोग, पृशून्य अट्ठाईस दो. राय चौधरी, पॉलिटिकल ऍसियेन्ट इण्डिया, द्वितीय संस्करण, पृशून्य बारह तीन. बुलनर और सरूप तेरह त्रिवेन्द्र रूपक भाग दो शून्य पैंतालीस भास की कृतियों का सांस्कृतिक विवेचन / चार सौ तिहत्तरः केकय - प्रतिमा नाटक, भरत केकय देश - - ननिहाल में गये थे पंजाब के व्यास और सतलज के मध्य का भाग केकय कहा गया है । यह सिन्ध देश की सीमा से मिलता है । पाजिटर ने केकय की स्थिति मद्र देश के पास मानी है। कनिंघम ने इसकी पहचान झेलम जिले के गिरिजक से की है । इस जनपद की स्थिति गान्धार के उत्तर तथा मद्र के पश्चिम में सम्भव है । पाणिनि ने भी केकय जनपद का निर्देश किया है । यह झेलम शाहपुर और गुजरात का पुराना नाम है । उपनिपदों में ब्रह्मवादी केकय अश्वपति का नाम मिलता है । गान्धार - ऊरुभंग एक सौ ग्यारह, पञ्चरात्रम्, पृशून्य छब्बीस गान्धार जनपद का सोलह जनपदों में उल्लेख आया है। इस जनपद का उल्लेख अशोक के पञ्चम शिलालेख में मिलता है । मज्झिम निकाय की अट्ठकथा में गान्धार जनपद को सोमान्त जनपद कहा गया है। गान्धार की स्थिति स्वात नदी से झेलम नदी तक व्याप्त थी । इस प्रकार इस जनपद में पूर्वी अफगानिस्तान और पश्चिमी पंजाव सम्मिलित थे । गान्धार की राजधानी. तक्षशिला शिक्षा और व्यापार इन दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण थी । जीवक वैद्य तक्षशिला का प्रसिद्ध स्नातक था। भास ने गान्धार देश की निवासिनी होने के कारण धृतराष्ट्र की पत्नी को गान्धारी कहा है । जनस्थान - प्रतिमा नाटक, पृशून्य एक सौ बयालीस, एक सौ बावन सम्भवतः यह स्थान निजाम राज्य के औरंगावाद मण्डल में अवस्थित है । गोदावरी और कृष्णा नदी के तट पर स्थित पंचवटी का भू-भाग जनस्थान कह -- लाता है । रामायण में दण्डकारण्य के भू-भाग को जनस्थान कहा है। पाजिटर ने गोदावरी के उभय तट पर स्थित प्रदेश को जनपद कहा है । दक्षिणापथ - अभिषेक-तृतीय-अङ्क, पृशून्य तेईस, पञ्चरात्रम् - दक्षिणापथ परि- घभूतो, प्रथम अङ्क, पृशून्य तेईस यह दक्षिण भारत का द्योतक है । ऋग्वेद में इसे दक्षिण पथ कहा गया हैं ।एक. आर्किओलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट, भाग दो, पृशून्य चौदह तथा एथनिक सेटल - मेण्ट इन एन्शिएण्ट इण्डिया, पृशून्य नवासी दो. वही, अष्टाध्यायी, सात हज़ार एक सौ बत्तीस. तीन. मज्झिम निकाय, जिल्द दूसरी, पृशून्य नौ सौ बयासी
7 केसिंगटन पैलेस गार्डन---लंदन स्थित यह घर रोमन अग्रामोविच का है. रोमन चेल्सिया फुटबॉल क्लब के मालिक हैं. घर में 15 बेडरूम हैं और शानदार गार्डनिंग एरिया है. घर की सबसे बड़ी खासियत इसमें एक पर्सनल म्यूजियम का होना है जिसमें रोमन की छह विंटेज फरारी भी रखी है. रोमन खुद खेल से जुड़े हैं इसलिए इनके घर में प्लेग्राउंड की शानदार व्यवस्था है. टेनिस कोर्ट और फिटनेस सेंटर भी इसकी पहचान हैं. लक्ष्मी मित्तल का घर भी पास ही में है. घर का मॉडर्न इंटीरियर आपको प्राचीन काल में ले जाता है. रोमन शैली का प्रयोग अधिक हुआ है.
सात केसिंगटन पैलेस गार्डन---लंदन स्थित यह घर रोमन अग्रामोविच का है. रोमन चेल्सिया फुटबॉल क्लब के मालिक हैं. घर में पंद्रह बेडरूम हैं और शानदार गार्डनिंग एरिया है. घर की सबसे बड़ी खासियत इसमें एक पर्सनल म्यूजियम का होना है जिसमें रोमन की छह विंटेज फरारी भी रखी है. रोमन खुद खेल से जुड़े हैं इसलिए इनके घर में प्लेग्राउंड की शानदार व्यवस्था है. टेनिस कोर्ट और फिटनेस सेंटर भी इसकी पहचान हैं. लक्ष्मी मित्तल का घर भी पास ही में है. घर का मॉडर्न इंटीरियर आपको प्राचीन काल में ले जाता है. रोमन शैली का प्रयोग अधिक हुआ है.
अमृतसर - सांसद श्वेत मलिक ने नेता व अभिनेता विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ-साथ लोकप्रिय नेता थे। चार बार गुरदासपुर, पंजाब से सांसद रहे और जनता के बेहद करीब थे और उन्होंने जिला का सर्वपक्षीय विकास करवाया था। सांसद मलिक ने सांसद विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि खन्ना ने राजनीति पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर ज्वांइन की थी और तन-मन से देश की सेवा में अर्पण रहे। जितने अच्छे वह इनसान थे उतनी ही अच्छी तरह से उन्होंने गुरदासपुर का विकास करवाया था। पठानकोट में एयरपोर्ट के निर्माण का श्रेय भी इन्हीं को जाता है, जबकि स्कूल, श्मशानघाट, स्टेडियम का निर्माण, बच्चों की एजुकेशन के लिए जेब से पैसे देने, गरीब बच्चों का मुफ्त इलाज आदि ऐसे बहुत से कार्य हैं, जो कि उनकी जिंदगी के पलों को एक अमिट छाप बना गए हैं।
अमृतसर - सांसद श्वेत मलिक ने नेता व अभिनेता विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ-साथ लोकप्रिय नेता थे। चार बार गुरदासपुर, पंजाब से सांसद रहे और जनता के बेहद करीब थे और उन्होंने जिला का सर्वपक्षीय विकास करवाया था। सांसद मलिक ने सांसद विनोद खन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि खन्ना ने राजनीति पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर ज्वांइन की थी और तन-मन से देश की सेवा में अर्पण रहे। जितने अच्छे वह इनसान थे उतनी ही अच्छी तरह से उन्होंने गुरदासपुर का विकास करवाया था। पठानकोट में एयरपोर्ट के निर्माण का श्रेय भी इन्हीं को जाता है, जबकि स्कूल, श्मशानघाट, स्टेडियम का निर्माण, बच्चों की एजुकेशन के लिए जेब से पैसे देने, गरीब बच्चों का मुफ्त इलाज आदि ऐसे बहुत से कार्य हैं, जो कि उनकी जिंदगी के पलों को एक अमिट छाप बना गए हैं।
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. धड़क एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग और शेड्यूल्स में काफी व्यस्त चल रही हैं. इस बीच जाह्नवी कपूर का एक बेहद हॉट वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जाह्नवी कपूर सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा की फिल्म लवरात्री के सॉन्ग अंख लड़ जावे पर बेली डांस करती हुई नजर आ रही हैं. वीडियो में उनके साथ उनकी डांस ट्रेनर भी उनके साथ ठुमके लगाती हुई नजर आ रही हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर के सेक्सी डांस मूव्स डांस फ्लोर पर आग लगाने के लिए काफी हैं. वायरल हुई इस वीडियो पर काफी सारे व्यूज आ चुके हैं. इसके अलावा वीडियो पर फैंस भर भर कर लाइक औक कमेंट्स कर रहे हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर पिंक कलर की क्रॉप टॉप के साथ व्हाइट कलर के शॉर्ट्स में नजर आ रही हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर के सेक्सी बेली डांस मूव्य उनके सभी फैंस को उनका दीवाना बना रही हैं. वायगर होने के साथ-साथ फैंस वीडियो को शेयर भी कर रहे हैं. इससे पहले भी जाह्नवी कपूर के डांस की वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ चुकी हैं. वायरल हुआ यह विडियो थोड़ा पुराना है, लेकिन जाह्नवी कपूर एक फैन क्लब ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. जाह्नवी कपूर के काम की बात की जाए तो, हाल ही में जाह्नवी कपूर ने अपनी अपकमिंग फिल्म रूहीअफ्जा की शूटिंग का पहला शेड्यबूल खत्म किया है. रूहीअफ्जा के अलावा जाह्नवी कपूर कार्गिल गर्ल गुंजन सक्सेना की बायोपिक और दोस्ताना 2 और तख्त जैसी बड़ी फिल्मों में भी नजर आने वाली हैं. जाह्नवी कपूर ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत पिछले साल शशांक खेतान की फिल्म धड़क से किया था. इस फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर भी मुख्य भूमिका में नजर आए थे. फिल्म को काफी पसंद किया गया था.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. धड़क एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्मों की शूटिंग और शेड्यूल्स में काफी व्यस्त चल रही हैं. इस बीच जाह्नवी कपूर का एक बेहद हॉट वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जाह्नवी कपूर सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा की फिल्म लवरात्री के सॉन्ग अंख लड़ जावे पर बेली डांस करती हुई नजर आ रही हैं. वीडियो में उनके साथ उनकी डांस ट्रेनर भी उनके साथ ठुमके लगाती हुई नजर आ रही हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर के सेक्सी डांस मूव्स डांस फ्लोर पर आग लगाने के लिए काफी हैं. वायरल हुई इस वीडियो पर काफी सारे व्यूज आ चुके हैं. इसके अलावा वीडियो पर फैंस भर भर कर लाइक औक कमेंट्स कर रहे हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर पिंक कलर की क्रॉप टॉप के साथ व्हाइट कलर के शॉर्ट्स में नजर आ रही हैं. वीडियो में जाह्नवी कपूर के सेक्सी बेली डांस मूव्य उनके सभी फैंस को उनका दीवाना बना रही हैं. वायगर होने के साथ-साथ फैंस वीडियो को शेयर भी कर रहे हैं. इससे पहले भी जाह्नवी कपूर के डांस की वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ चुकी हैं. वायरल हुआ यह विडियो थोड़ा पुराना है, लेकिन जाह्नवी कपूर एक फैन क्लब ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. जाह्नवी कपूर के काम की बात की जाए तो, हाल ही में जाह्नवी कपूर ने अपनी अपकमिंग फिल्म रूहीअफ्जा की शूटिंग का पहला शेड्यबूल खत्म किया है. रूहीअफ्जा के अलावा जाह्नवी कपूर कार्गिल गर्ल गुंजन सक्सेना की बायोपिक और दोस्ताना दो और तख्त जैसी बड़ी फिल्मों में भी नजर आने वाली हैं. जाह्नवी कपूर ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत पिछले साल शशांक खेतान की फिल्म धड़क से किया था. इस फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर भी मुख्य भूमिका में नजर आए थे. फिल्म को काफी पसंद किया गया था.
का आधार बालक के अनुभव के सरल तत्वों से सम्पूर्ण की ओर अग्रसर होना स्वीकार किया । इन सब कार्यों का शिक्षा पर जो प्रभाव पड़ा, उसके सम्बन्ध में ठामसन का विचार है कि पेस्तालात्सी ने उन्नीसवों सदी की प्रारम्भिक पाठशालाओं के उद्देश्य और कार्य में इस दृष्टि से परिवर्तन किया कि ये ( स्कूल ) अब चर्च के प्रसार के साधन न होकर समाज के हित के साधन बन जाय । इस प्रकार जिन नये स्कूलों की स्थापना हुई उनमें (क) वास्तविक वस्तुओं के अध्ययन, (ख) ज्ञानेन्द्रियों द्वारा शिक्षा, (ग) व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति, (घ) बाल-क्रिया, श्रौर (ङ) बालक की शक्तियों के सम्यक विकास पर बल दिया गया । इसके अतिरिक्त ठामसन के अनुसार पेस्तालात्सी ने अध्यापन कला की शिक्षा की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया । इसके फलस्वरूप नार्मल स्कूलों की स्थापना की अधिकारियों का ध्यान आकर्षित हुआ । हरवार्ट - हरवार्ट के सम्बन्ध में ठामसन का विचार है कि इन्होंने (१) मानसिक शक्तियों ( faculty ) का मनोविज्ञान स्वीकार किया और उसके स्थान पर नवीन शिक्षा मनोविज्ञान का प्रतिपादन किया । (२) शिक्षा का उद्देश्य चरित्र और नैतिकता का विकास माना । (३) शिक्षा में कुछ नवीन शब्दावली का समावेश किया ; जैसे - रुचि, पूर्वानुवर्ती प्रत्यक्ष शिक्षण के पाँच सोपान आदि । (४) साहित्य और इतिहास की शिक्षा पर नवीन प्रकाश डाला । (५) इतिहास के पाठ्यक्रम को बाल विकास के क्रमानुसार बनाया । (६) इतिहास और भूगोल की शिक्षा में सामाजिक दृष्टिकोण को प्रधानता दी । कक्षा प्रबन्ध की नवीन रीतियाँ बताईं । शिक्षा में वातावरण को स्थान देने पर बल दिया । (७) मनोविज्ञान पर शिक्षा के साधन और पद्धति को आधारित किया । फ्रोयवेल - ठामसन के अनुसार फ्रोयवेल के सिद्धांतों का सार निम्नलिखित है :- (१) प्रकृति श्रौर मनुष्य में एक निश्चित एकता है। इसी पर मनुष्य की चेतना भी निर्भर है। (२) जीवन का उद्देश्य ईश्वर की सत्ता को प्रकट करना है। (३) प्रकृति ईश्वर का बोध बालक को कराती है । (४) मन क्रिया है ( Mind is activity ) । ( ५ ) शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं वरन् उस जीवन में सम्मिलित होना है जो व्यक्ति के चारों ओर है। इसी दृष्टि से शिक्षालय को समाज का एक लघु रूप समझना चाहिए । (६) खेल बालक का स्वाभाविक कार्य है । (७) उसकी (बालक की ) अभिव्यक्ति के साधन है गति, गीत औौर भाषा । फ्रोयबेल के किंडर-गार्टन में ठामसन के अनुसार ग्रात्म-क्रिया द्वारा शैक्षिक, सामाजिक और नैतिक विकास का सिद्धांत केंद्रीय स्थान रखता है। इसका
का आधार बालक के अनुभव के सरल तत्वों से सम्पूर्ण की ओर अग्रसर होना स्वीकार किया । इन सब कार्यों का शिक्षा पर जो प्रभाव पड़ा, उसके सम्बन्ध में ठामसन का विचार है कि पेस्तालात्सी ने उन्नीसवों सदी की प्रारम्भिक पाठशालाओं के उद्देश्य और कार्य में इस दृष्टि से परिवर्तन किया कि ये अब चर्च के प्रसार के साधन न होकर समाज के हित के साधन बन जाय । इस प्रकार जिन नये स्कूलों की स्थापना हुई उनमें वास्तविक वस्तुओं के अध्ययन, ज्ञानेन्द्रियों द्वारा शिक्षा, व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति, बाल-क्रिया, श्रौर बालक की शक्तियों के सम्यक विकास पर बल दिया गया । इसके अतिरिक्त ठामसन के अनुसार पेस्तालात्सी ने अध्यापन कला की शिक्षा की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया । इसके फलस्वरूप नार्मल स्कूलों की स्थापना की अधिकारियों का ध्यान आकर्षित हुआ । हरवार्ट - हरवार्ट के सम्बन्ध में ठामसन का विचार है कि इन्होंने मानसिक शक्तियों का मनोविज्ञान स्वीकार किया और उसके स्थान पर नवीन शिक्षा मनोविज्ञान का प्रतिपादन किया । शिक्षा का उद्देश्य चरित्र और नैतिकता का विकास माना । शिक्षा में कुछ नवीन शब्दावली का समावेश किया ; जैसे - रुचि, पूर्वानुवर्ती प्रत्यक्ष शिक्षण के पाँच सोपान आदि । साहित्य और इतिहास की शिक्षा पर नवीन प्रकाश डाला । इतिहास के पाठ्यक्रम को बाल विकास के क्रमानुसार बनाया । इतिहास और भूगोल की शिक्षा में सामाजिक दृष्टिकोण को प्रधानता दी । कक्षा प्रबन्ध की नवीन रीतियाँ बताईं । शिक्षा में वातावरण को स्थान देने पर बल दिया । मनोविज्ञान पर शिक्षा के साधन और पद्धति को आधारित किया । फ्रोयवेल - ठामसन के अनुसार फ्रोयवेल के सिद्धांतों का सार निम्नलिखित है :- प्रकृति श्रौर मनुष्य में एक निश्चित एकता है। इसी पर मनुष्य की चेतना भी निर्भर है। जीवन का उद्देश्य ईश्वर की सत्ता को प्रकट करना है। प्रकृति ईश्वर का बोध बालक को कराती है । मन क्रिया है । शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं वरन् उस जीवन में सम्मिलित होना है जो व्यक्ति के चारों ओर है। इसी दृष्टि से शिक्षालय को समाज का एक लघु रूप समझना चाहिए । खेल बालक का स्वाभाविक कार्य है । उसकी अभिव्यक्ति के साधन है गति, गीत औौर भाषा । फ्रोयबेल के किंडर-गार्टन में ठामसन के अनुसार ग्रात्म-क्रिया द्वारा शैक्षिक, सामाजिक और नैतिक विकास का सिद्धांत केंद्रीय स्थान रखता है। इसका
पीएमओ की टीम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित प्रधानमंत्री के सलाहकार भी शामिल होते हैं. ये अधिकारी पीएम को नीति, भविष्य से जुड़ी योजनाओं और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सलाह देते हैं. भारत जिसकी आबादी 140 करोड़ से भी अधिक है, उसके प्रधानमंत्री अकेले इतने सुचारू रूप से देश कैसे चला पाते हैं ? आपको बता दें कि पीएम अकेले नहीं बल्कि देश चलाने के लिए उनके साथ पूरी टीम होती है. ये सभी दिल्ली स्थिति प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम करते हैं. अधिकतर लोग सोचते हैं कि विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री आदि व्यक्ति ही देश को चलाते हैं, और देश की नीतियां तय करते हैं. नहीं, ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कौन हैं वो अधिकारी जो PMO में काम करते हैं.
पीएमओ की टीम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित प्रधानमंत्री के सलाहकार भी शामिल होते हैं. ये अधिकारी पीएम को नीति, भविष्य से जुड़ी योजनाओं और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सलाह देते हैं. भारत जिसकी आबादी एक सौ चालीस करोड़ से भी अधिक है, उसके प्रधानमंत्री अकेले इतने सुचारू रूप से देश कैसे चला पाते हैं ? आपको बता दें कि पीएम अकेले नहीं बल्कि देश चलाने के लिए उनके साथ पूरी टीम होती है. ये सभी दिल्ली स्थिति प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करते हैं. अधिकतर लोग सोचते हैं कि विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री आदि व्यक्ति ही देश को चलाते हैं, और देश की नीतियां तय करते हैं. नहीं, ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कौन हैं वो अधिकारी जो PMO में काम करते हैं.
भुवनेश्वर. अनुभवी संबलपुरी फिल्म अभिनेता और पटकथा लेखक अटल बिहारी पंडा का शनिवार को बुर्ला के वीर सुरेंद्र साई आयुर्विज्ञान और अनुसंधान संस्थान (विमसार) में इलाज के दौरान निधन हो गया. बताया जाता है कि पिछले महीने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पंडा की तबीयत बिगड़ गई थी. अस्पताल में उनका सेप्टीसीमिया का इलाज चल रहा था. इसी बीच उन्होंने आज तड़के करीब 3. 45 बजे अंतिम सांस ली. वह 92 वर्ष के थे. वह ओडिशा के सोनपुर जिले के बिनिका गांव के रहने वाले थे. पंडा को 'साला बुद्धा' और 'आदिम विचार' में उनकी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है. उन्हें 25वें राज्य फिल्म पुरस्कारों में फिल्म साला बुद्धा के लिए 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार' और 26वें राज्य फिल्म पुरस्कारों में 'आदिम विचार' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' और 'सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक' का पुरस्कार मिला था. उन्होंने 83 साल की उम्र में फिल्म 'साला बुद्धा' से अपने अभिनय की शुरुआत की थी. इससे पहले उन्होंने ओड़िया और कोशाली दोनों भाषाओं में 60 से अधिक नाटक लिखे थे. उन्हें संबलपुर विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह के दौरान मानद डी लिट डिग्री से सम्मानित किया गया था.
भुवनेश्वर. अनुभवी संबलपुरी फिल्म अभिनेता और पटकथा लेखक अटल बिहारी पंडा का शनिवार को बुर्ला के वीर सुरेंद्र साई आयुर्विज्ञान और अनुसंधान संस्थान में इलाज के दौरान निधन हो गया. बताया जाता है कि पिछले महीने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पंडा की तबीयत बिगड़ गई थी. अस्पताल में उनका सेप्टीसीमिया का इलाज चल रहा था. इसी बीच उन्होंने आज तड़के करीब तीन. पैंतालीस बजे अंतिम सांस ली. वह बानवे वर्ष के थे. वह ओडिशा के सोनपुर जिले के बिनिका गांव के रहने वाले थे. पंडा को 'साला बुद्धा' और 'आदिम विचार' में उनकी भूमिकाओं के लिए जाना जाता है. उन्हें पच्चीसवें राज्य फिल्म पुरस्कारों में फिल्म साला बुद्धा के लिए 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार' और छब्बीसवें राज्य फिल्म पुरस्कारों में 'आदिम विचार' के लिए 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' और 'सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक' का पुरस्कार मिला था. उन्होंने तिरासी साल की उम्र में फिल्म 'साला बुद्धा' से अपने अभिनय की शुरुआत की थी. इससे पहले उन्होंने ओड़िया और कोशाली दोनों भाषाओं में साठ से अधिक नाटक लिखे थे. उन्हें संबलपुर विश्वविद्यालय के तीसवें दीक्षांत समारोह के दौरान मानद डी लिट डिग्री से सम्मानित किया गया था.
Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में गिरिराज सेना के प्रमुख कमलदेव गिरि हत्याकांड के पांचवें दिन बुधवार (16 नवंबर, 2022) को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास चक्रधरपुर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने चांदमारी स्थित कमलदेव गिरि के आवास पहुंचकर उनके परिवार वालों से मुलाकात किया. कमलदेव के पिता महादेव नंद गिरि ने पिछले दो साल से हो रहे अत्याचार और घटना की जानकारी पूर्व सीएम को दी. इस पर पूर्व सीएम श्री दास ने परिवार वालों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया. पूर्वी सीएम श्री दास ने दिवंगत कमलदेव गिरि को श्रद्धांजलि देते हुए सभा में उपस्थित उनके समर्थकों को कहा कि कमलदेव की जघन्य हत्या हुई है. भारतीय जनता पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है. इस मौके पर उन्होंने कहा कि कमलदेव के परिवार वालों की CBI जांच की मांग कर बीजेपी भी पक्षधर है. इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह से जांच कराने की मांग रखेंगे. कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. परिवार को न्याय मिलेगा. हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार में कोई सुरक्षित नहीं है. आनेवाले समय में भष्ट्राचार, भय और आतंक खत्म होगा. जल्द ही राज्य की जनता इस सरकार को जवाब देगी. मौके पर भाजपा नेता जेबी तुबिद, पूर्व विधायक शशिभूषण सामड, पूर्व विधायक पुतकर हेंब्रम, जिलाध्यक्ष सतीश पुरी, गीता बालमुचू, सुरेश साव, राजेश गुप्ता, प्रताप कटियार समेत काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और गिरि के समर्थक मौजूद थे. इस मौके पर दिवंगत कमलदेव गिरि की छोटी बहन पूजा गिरि ने पूर्व सीएम रघुवर दास से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कहा कि उनके दोनों भाई उमाशंकर गिरि और फूलदेव गिरि को जान का खतरा है. जिसे ध्यान में रखते हुए दोनों को बॉडीगार्ड मुहैया करायी जाएग. साथ ही घर की सुरक्षा में भी पुलिसबल तैनात किए जाए. इस पर पूर्व सीएम ने एसपी आशुतोष शेखर को फोन कर कमलदेव गिरि के दोनों बड़े भाई को तत्काल बॉडीगार्ड उपलब्ध कराने को कहा. साथ ही परिवार के सदस्यों की सुरक्षा बढ़ाने की बात भी कही.
Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में गिरिराज सेना के प्रमुख कमलदेव गिरि हत्याकांड के पांचवें दिन बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास चक्रधरपुर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने चांदमारी स्थित कमलदेव गिरि के आवास पहुंचकर उनके परिवार वालों से मुलाकात किया. कमलदेव के पिता महादेव नंद गिरि ने पिछले दो साल से हो रहे अत्याचार और घटना की जानकारी पूर्व सीएम को दी. इस पर पूर्व सीएम श्री दास ने परिवार वालों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया. पूर्वी सीएम श्री दास ने दिवंगत कमलदेव गिरि को श्रद्धांजलि देते हुए सभा में उपस्थित उनके समर्थकों को कहा कि कमलदेव की जघन्य हत्या हुई है. भारतीय जनता पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है. इस मौके पर उन्होंने कहा कि कमलदेव के परिवार वालों की CBI जांच की मांग कर बीजेपी भी पक्षधर है. इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह से जांच कराने की मांग रखेंगे. कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. परिवार को न्याय मिलेगा. हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार में कोई सुरक्षित नहीं है. आनेवाले समय में भष्ट्राचार, भय और आतंक खत्म होगा. जल्द ही राज्य की जनता इस सरकार को जवाब देगी. मौके पर भाजपा नेता जेबी तुबिद, पूर्व विधायक शशिभूषण सामड, पूर्व विधायक पुतकर हेंब्रम, जिलाध्यक्ष सतीश पुरी, गीता बालमुचू, सुरेश साव, राजेश गुप्ता, प्रताप कटियार समेत काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और गिरि के समर्थक मौजूद थे. इस मौके पर दिवंगत कमलदेव गिरि की छोटी बहन पूजा गिरि ने पूर्व सीएम रघुवर दास से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कहा कि उनके दोनों भाई उमाशंकर गिरि और फूलदेव गिरि को जान का खतरा है. जिसे ध्यान में रखते हुए दोनों को बॉडीगार्ड मुहैया करायी जाएग. साथ ही घर की सुरक्षा में भी पुलिसबल तैनात किए जाए. इस पर पूर्व सीएम ने एसपी आशुतोष शेखर को फोन कर कमलदेव गिरि के दोनों बड़े भाई को तत्काल बॉडीगार्ड उपलब्ध कराने को कहा. साथ ही परिवार के सदस्यों की सुरक्षा बढ़ाने की बात भी कही.
कई रूसी पर्यटक, आराम से थक गएमिस्र या तुर्की, जल्दी या बाद में वे ध्यान केंद्रित करना शुरू करते हैं कि कहां आराम करना है और "घर पर" क्या देखना है। और मेरा विश्वास करो, अगर हमारे देश में समुद्र तटों की गुणवत्ता, इसे स्वीकार किया जाना चाहिए, हमेशा "उत्कृष्ट" नहीं होता है, तो वहां बहुत सारे स्थान हैं जहां आप रूस की आश्चर्यजनक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। इस कारण से, अपने देश की सीमाओं को छोड़ दिए बिना छोड़ना उचित है, अगर सही निर्णय नहीं है। वास्तव में अद्वितीय देखना चाहते हैंसबसे खूबसूरत पेंटिंग्स जो प्रकृति ने स्वयं बनाई है? सोची के अग्रूर झरनों पर जाएं! यह वास्तव में दुनिया का स्वर्गीय कोने है, जहां हजारों पर्यटक आते हैं, न केवल रूसी, बल्कि विदेशी भी। यह काला सागर तट पर स्थित है - "ओलंपिक" खेलों की राजधानी खोस्त जिले में। 1 9 11 की शुरुआत में, अग्रूर वाटरफॉल बन गयासबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल। इसका कारण क्या था? यह बहुत आसान है। उस समय पर्वत क्लब के सदस्यों में से एक ने सिर्फ चट्टानों में एक रास्ता काट दिया, जो कि सभी छुट्टियों के लिए खोला गया जो प्रकृति के इस अद्भुत चमत्कार के रूप में अग्रूर झरना के रूप में पहुंच गया। करीब की परीक्षा में, अब "अग्रणी" छोड़े गए गड्ढे और गड्ढे से अंकों की जांच करना संभव है। अग्रूर झरना वास्तव में शानदार दृष्टि है। यहां आप सबकुछ देख सकते हैंः विदेशी पौधे, चक्कर लगाने वाले चट्टानों, राजसी घाटी। यात्रा के शुरुआती चरण में, पर्यटक दृश्य देख सकते हैंछोटे आकार के एक उदास तालाब पर, जो उच्च और खड़ी चट्टानों में घिरा हुआ है। इस जगह को "डेविल का फ़ॉन्ट" कहा जाता है। यहां चट्टानों में से एक में आप गुफा "डेविल के नेस्ट" में थोड़ा डरावना छेद देख सकते हैं। अग्रूर वाटरफॉल अगुरा नदी की संतान है, जो ऊर्जावान और अशांत है। इसका स्रोत काला सागर से अलेक पहाड़ों की दक्षिणी सीमाओं से दस किलोमीटर दूर है। प्राचीन किंवदंतियों में से एक कहते हैं कि एक बारआगरा नाम की एक खूबसूरत महिला ने गुप्त रूप से अपने प्रेमी को पानी लाया, जो चट्टान पर बंधे थे। अंत में, उसका रहस्य प्रकट हुआ, और युवा दीवा को एक घाटी में दंड की सजा सुनाई गई, जहां वह चट्टानों में टूट गई और एक घूमने वाली पर्वत नदी में बदल गई। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नदी एक हाइड्रोजन सल्फाइड गंध से निकलती है, इसलिए इसे "सड़ा हुआ वसंत" उपनाम दिया गया था। नदी रैपिड्स और पहाड़ के निशान बहुत जल्दीकिनारे के तल को छोड़कर, समुद्र तट पर उतरता है, सुरम्य पानी के कैस्केड की एक श्रृंखला बनाता है। मेरा विश्वास करो, वे दुनिया के प्रसिद्ध झरने के रूप में अद्भुत और सुंदर हैं, जिनकी तस्वीरें अक्सर प्रकृति के बारे में प्रसिद्ध चमकदार पत्रिकाओं के कवर के साथ सजाए जाते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रकृति का उपरोक्त निर्माण तीन जल निकायों का संयोजन है, वैकल्पिक रूप से एक दूसरे को बदल रहा है। सुंदरता में सबसे शानदार और असामान्य निचला झरना है। यह दो कैस्केड द्वारा बनाया गया है - ऊपरी और निचला। पहले की लंबाई 12 मीटर है, और नीचे 18 हैमीटर है। उस स्थान पर जहां वे छेड़छाड़ करते हैं, आप एक अनूठी दृष्टि देख सकते हैं, जब धूप की एक अविश्वसनीय मात्रा में छिड़काव किया जाता है। निचले झरने के तल पर क्रिस्टल स्पष्ट, लेकिन ठंडा पानी के साथ एक झील है। औसत झरना निचले भाग से ऊपर स्थित हैआधा किलोमीटर, इसकी ऊंचाई 23 मीटर है। इसमें पानी पांच मीटर के पूल में जेट के पूरे शस्त्रागार को हटा देता है। यहां एक सुरम्य अग्रूर झरना है। प्रकृति का यह "चमत्कार" कहां है? तथ्य यह है कि इसे दृष्टि से पहचानना लगभग असंभव है, उद्देश्य पर एक खड़े रास्ते पर जाना जरूरी है। तीसरा अद्वितीय अग्रूर झरना ऊपरी झरना कहा जाता है। उसके पीछे, "शोर" और "गर्जन" की स्थिति दृढ़ता से फैली हुई है, क्योंकि इसका पानी 21 मीटर की ऊंचाई से गिरता है और एक विशाल स्नान से जुड़ा हुआ है। झरने के तल पर पत्थरों और रैपिड्स बनते हैं,तो पानी एक रंगीन कैस्केड बनाने, एक सीढ़ी से दूसरे में तेजी से चलता है। ऊपरी झरने से बहुत दूर "ईगल" चट्टानें हैं, जिनमें से शहरी परिवेश का एक शानदार पैनोरमा और माउंट अखुन खुलता है। भ्रमण मार्ग का अंतिम चरण एक छोटी सी यात्रा है, लेकिन सूरज में चमकती बहुत गहरी झील है, जो खड़ी चट्टानों द्वारा बनाई गई है। जगहों को देखना बेहतर कब है? बेशक, अग्रूर झरने किसी भी में महान हैंवर्ष का समय हालांकि, वे बरसात के मौसम के दौरान वसंत में, अच्छी तरह से, और स्वाभाविक रूप से सर्दियों में पानी से भरे हुए हैं। जब पर्याप्त नमी नहीं होती है, तो आगरा नदी सूख जाती है, और झरने अपनी ऊर्जा और ताकत खो देते हैं। बेशक, प्राकृतिक सौंदर्य का मानक औरअनुग्रह को दुनिया के झरने माना जा सकता है, जिनकी तस्वीरें आसानी से उनके आकर्षण और अनुग्रह से मोहक होती हैं। निश्चित रूप से, ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो इस अविश्वसनीय रूप से आश्चर्यजनक प्रदर्शन की प्रशंसा नहीं करेगा, जब एक क्रैश के साथ धाराओं को तेजी से स्ट्रीम करना पानी के लाखों छोटे कणों में बदल जाता है, नमी के साथ आसपास के क्षेत्र को समृद्ध करता है। और इंद्रधनुष कितना अद्भुत और सुंदर है, जिसे अक्सर दुनिया के झरने पर गर्म दिनों में बनाया जाता है? तो, प्रकृति के इस चमत्कार की प्रशंसा करने के लिए आप किन देशों में जा सकते हैं? स्कॉटलैंड में किल्ट फॉल्स झरना को देखना सुनिश्चित करें। इसका पानी चट्टानों से सीधे अटलांटिक महासागर तक उतरता है। अनुभवी पर्यटक अमेरिका में स्थित नियाग्रा फॉल्स को देखने की सलाह देते हैं। वह हर किसी को अपनी उदार और अनजाने ऊर्जा के साथ जीत जाएगा। विशेषज्ञों ने भी हमारे ग्रह - इगाज़ू फॉल्स पर पानी के सबसे शक्तिशाली प्रवाह की प्रशंसा करने के लिए अर्जेंटीना जाने की सलाह दी है। वहां कैसे पहुंचे? पर्यटक सोची पानी के टुकड़े आते हैं,शहर के झगड़े और प्रतिकूल पारिस्थितिकी से बचने के लिए। सभी को लंबे समय से आश्वस्त किया गया है कि एक शानदार और अविस्मरणीय अवकाश केवल अग्रूर झरने दे सकता है। "मैं इन सुरम्य स्थानों पर कैसे जा सकता हूं?" - निश्चित रूप से यह सवाल कई को पीड़ा देता है। कुछ भी जटिल नहीं है। शहर शटल बस के केंद्रीय क्षेत्र से चलता हैसंख्या 110, जिस पर बुवाई, आपको "स्पुतनिक" स्टॉप पर जाना होगा। इस स्टॉप से, मार्ग पुल के साथ चलता है, फिर आपको बाएं मोड़ बनाना होता है, फिर आप एक कांटा देखेंगे, जिस पर पहुंचने के बाद, आपको फिर से बाएं मुड़ना होगा। हम लगभग एक किलोमीटर चलने के बाद राजमार्ग के ऊपर जाते हैं, आप रेस्तरां "कोकेशियान औल" देखेंगे, और सौ मीटर दूर आपको सीधे अग्रूर झरनों तक जाने वाला रास्ता दिखाई देगा। पथ के बाईं ओर से केवल 300 मीटर की दूरी पर आप पहले से ही पहले घाटी की प्रशंसा करेंगे, साथ ही साथ "शैतान का फ़ॉन्ट", दाईं ओर मुड़कर, आप "शैतान का छेद" देख सकते हैं। यह जोर दिया जाना चाहिए कि "ईगल चट्टानों" के बादजो ऊपर वर्णित थे, प्राकृतिक आकर्षण वहां खत्म नहीं होते हैं। यदि आप थोड़ा आगे जाते हैं, तो आप अपनी सहायक के साथ अगुरा नदी के विलय का निरीक्षण कर सकते हैं। इस जगह के तत्काल आस-पास में एक विशाल रंगीन ग्लेड है, जिसके पीछे "ग्लैड ऑफ रैम्स" नाम तय किया गया था। इसे पहुंचने के लिए, आपको नदी पार करने की जरूरत है। सड़क की शुरुआत से ऊपर उल्लिखित आकर्षण की दूरी लगभग 2.5 किमी है।
कई रूसी पर्यटक, आराम से थक गएमिस्र या तुर्की, जल्दी या बाद में वे ध्यान केंद्रित करना शुरू करते हैं कि कहां आराम करना है और "घर पर" क्या देखना है। और मेरा विश्वास करो, अगर हमारे देश में समुद्र तटों की गुणवत्ता, इसे स्वीकार किया जाना चाहिए, हमेशा "उत्कृष्ट" नहीं होता है, तो वहां बहुत सारे स्थान हैं जहां आप रूस की आश्चर्यजनक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। इस कारण से, अपने देश की सीमाओं को छोड़ दिए बिना छोड़ना उचित है, अगर सही निर्णय नहीं है। वास्तव में अद्वितीय देखना चाहते हैंसबसे खूबसूरत पेंटिंग्स जो प्रकृति ने स्वयं बनाई है? सोची के अग्रूर झरनों पर जाएं! यह वास्तव में दुनिया का स्वर्गीय कोने है, जहां हजारों पर्यटक आते हैं, न केवल रूसी, बल्कि विदेशी भी। यह काला सागर तट पर स्थित है - "ओलंपिक" खेलों की राजधानी खोस्त जिले में। एक नौ ग्यारह की शुरुआत में, अग्रूर वाटरफॉल बन गयासबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल। इसका कारण क्या था? यह बहुत आसान है। उस समय पर्वत क्लब के सदस्यों में से एक ने सिर्फ चट्टानों में एक रास्ता काट दिया, जो कि सभी छुट्टियों के लिए खोला गया जो प्रकृति के इस अद्भुत चमत्कार के रूप में अग्रूर झरना के रूप में पहुंच गया। करीब की परीक्षा में, अब "अग्रणी" छोड़े गए गड्ढे और गड्ढे से अंकों की जांच करना संभव है। अग्रूर झरना वास्तव में शानदार दृष्टि है। यहां आप सबकुछ देख सकते हैंः विदेशी पौधे, चक्कर लगाने वाले चट्टानों, राजसी घाटी। यात्रा के शुरुआती चरण में, पर्यटक दृश्य देख सकते हैंछोटे आकार के एक उदास तालाब पर, जो उच्च और खड़ी चट्टानों में घिरा हुआ है। इस जगह को "डेविल का फ़ॉन्ट" कहा जाता है। यहां चट्टानों में से एक में आप गुफा "डेविल के नेस्ट" में थोड़ा डरावना छेद देख सकते हैं। अग्रूर वाटरफॉल अगुरा नदी की संतान है, जो ऊर्जावान और अशांत है। इसका स्रोत काला सागर से अलेक पहाड़ों की दक्षिणी सीमाओं से दस किलोमीटर दूर है। प्राचीन किंवदंतियों में से एक कहते हैं कि एक बारआगरा नाम की एक खूबसूरत महिला ने गुप्त रूप से अपने प्रेमी को पानी लाया, जो चट्टान पर बंधे थे। अंत में, उसका रहस्य प्रकट हुआ, और युवा दीवा को एक घाटी में दंड की सजा सुनाई गई, जहां वह चट्टानों में टूट गई और एक घूमने वाली पर्वत नदी में बदल गई। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नदी एक हाइड्रोजन सल्फाइड गंध से निकलती है, इसलिए इसे "सड़ा हुआ वसंत" उपनाम दिया गया था। नदी रैपिड्स और पहाड़ के निशान बहुत जल्दीकिनारे के तल को छोड़कर, समुद्र तट पर उतरता है, सुरम्य पानी के कैस्केड की एक श्रृंखला बनाता है। मेरा विश्वास करो, वे दुनिया के प्रसिद्ध झरने के रूप में अद्भुत और सुंदर हैं, जिनकी तस्वीरें अक्सर प्रकृति के बारे में प्रसिद्ध चमकदार पत्रिकाओं के कवर के साथ सजाए जाते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रकृति का उपरोक्त निर्माण तीन जल निकायों का संयोजन है, वैकल्पिक रूप से एक दूसरे को बदल रहा है। सुंदरता में सबसे शानदार और असामान्य निचला झरना है। यह दो कैस्केड द्वारा बनाया गया है - ऊपरी और निचला। पहले की लंबाई बारह मीटर है, और नीचे अट्ठारह हैमीटर है। उस स्थान पर जहां वे छेड़छाड़ करते हैं, आप एक अनूठी दृष्टि देख सकते हैं, जब धूप की एक अविश्वसनीय मात्रा में छिड़काव किया जाता है। निचले झरने के तल पर क्रिस्टल स्पष्ट, लेकिन ठंडा पानी के साथ एक झील है। औसत झरना निचले भाग से ऊपर स्थित हैआधा किलोमीटर, इसकी ऊंचाई तेईस मीटर है। इसमें पानी पांच मीटर के पूल में जेट के पूरे शस्त्रागार को हटा देता है। यहां एक सुरम्य अग्रूर झरना है। प्रकृति का यह "चमत्कार" कहां है? तथ्य यह है कि इसे दृष्टि से पहचानना लगभग असंभव है, उद्देश्य पर एक खड़े रास्ते पर जाना जरूरी है। तीसरा अद्वितीय अग्रूर झरना ऊपरी झरना कहा जाता है। उसके पीछे, "शोर" और "गर्जन" की स्थिति दृढ़ता से फैली हुई है, क्योंकि इसका पानी इक्कीस मीटर की ऊंचाई से गिरता है और एक विशाल स्नान से जुड़ा हुआ है। झरने के तल पर पत्थरों और रैपिड्स बनते हैं,तो पानी एक रंगीन कैस्केड बनाने, एक सीढ़ी से दूसरे में तेजी से चलता है। ऊपरी झरने से बहुत दूर "ईगल" चट्टानें हैं, जिनमें से शहरी परिवेश का एक शानदार पैनोरमा और माउंट अखुन खुलता है। भ्रमण मार्ग का अंतिम चरण एक छोटी सी यात्रा है, लेकिन सूरज में चमकती बहुत गहरी झील है, जो खड़ी चट्टानों द्वारा बनाई गई है। जगहों को देखना बेहतर कब है? बेशक, अग्रूर झरने किसी भी में महान हैंवर्ष का समय हालांकि, वे बरसात के मौसम के दौरान वसंत में, अच्छी तरह से, और स्वाभाविक रूप से सर्दियों में पानी से भरे हुए हैं। जब पर्याप्त नमी नहीं होती है, तो आगरा नदी सूख जाती है, और झरने अपनी ऊर्जा और ताकत खो देते हैं। बेशक, प्राकृतिक सौंदर्य का मानक औरअनुग्रह को दुनिया के झरने माना जा सकता है, जिनकी तस्वीरें आसानी से उनके आकर्षण और अनुग्रह से मोहक होती हैं। निश्चित रूप से, ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो इस अविश्वसनीय रूप से आश्चर्यजनक प्रदर्शन की प्रशंसा नहीं करेगा, जब एक क्रैश के साथ धाराओं को तेजी से स्ट्रीम करना पानी के लाखों छोटे कणों में बदल जाता है, नमी के साथ आसपास के क्षेत्र को समृद्ध करता है। और इंद्रधनुष कितना अद्भुत और सुंदर है, जिसे अक्सर दुनिया के झरने पर गर्म दिनों में बनाया जाता है? तो, प्रकृति के इस चमत्कार की प्रशंसा करने के लिए आप किन देशों में जा सकते हैं? स्कॉटलैंड में किल्ट फॉल्स झरना को देखना सुनिश्चित करें। इसका पानी चट्टानों से सीधे अटलांटिक महासागर तक उतरता है। अनुभवी पर्यटक अमेरिका में स्थित नियाग्रा फॉल्स को देखने की सलाह देते हैं। वह हर किसी को अपनी उदार और अनजाने ऊर्जा के साथ जीत जाएगा। विशेषज्ञों ने भी हमारे ग्रह - इगाज़ू फॉल्स पर पानी के सबसे शक्तिशाली प्रवाह की प्रशंसा करने के लिए अर्जेंटीना जाने की सलाह दी है। वहां कैसे पहुंचे? पर्यटक सोची पानी के टुकड़े आते हैं,शहर के झगड़े और प्रतिकूल पारिस्थितिकी से बचने के लिए। सभी को लंबे समय से आश्वस्त किया गया है कि एक शानदार और अविस्मरणीय अवकाश केवल अग्रूर झरने दे सकता है। "मैं इन सुरम्य स्थानों पर कैसे जा सकता हूं?" - निश्चित रूप से यह सवाल कई को पीड़ा देता है। कुछ भी जटिल नहीं है। शहर शटल बस के केंद्रीय क्षेत्र से चलता हैसंख्या एक सौ दस, जिस पर बुवाई, आपको "स्पुतनिक" स्टॉप पर जाना होगा। इस स्टॉप से, मार्ग पुल के साथ चलता है, फिर आपको बाएं मोड़ बनाना होता है, फिर आप एक कांटा देखेंगे, जिस पर पहुंचने के बाद, आपको फिर से बाएं मुड़ना होगा। हम लगभग एक किलोमीटर चलने के बाद राजमार्ग के ऊपर जाते हैं, आप रेस्तरां "कोकेशियान औल" देखेंगे, और सौ मीटर दूर आपको सीधे अग्रूर झरनों तक जाने वाला रास्ता दिखाई देगा। पथ के बाईं ओर से केवल तीन सौ मीटर की दूरी पर आप पहले से ही पहले घाटी की प्रशंसा करेंगे, साथ ही साथ "शैतान का फ़ॉन्ट", दाईं ओर मुड़कर, आप "शैतान का छेद" देख सकते हैं। यह जोर दिया जाना चाहिए कि "ईगल चट्टानों" के बादजो ऊपर वर्णित थे, प्राकृतिक आकर्षण वहां खत्म नहीं होते हैं। यदि आप थोड़ा आगे जाते हैं, तो आप अपनी सहायक के साथ अगुरा नदी के विलय का निरीक्षण कर सकते हैं। इस जगह के तत्काल आस-पास में एक विशाल रंगीन ग्लेड है, जिसके पीछे "ग्लैड ऑफ रैम्स" नाम तय किया गया था। इसे पहुंचने के लिए, आपको नदी पार करने की जरूरत है। सड़क की शुरुआत से ऊपर उल्लिखित आकर्षण की दूरी लगभग दो.पाँच किमी है।
Animal New Song Arjan Valley: रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' का नया गाना 'अर्जन वैली' रिलीज किया गया है। गाने 'अर्जन वैली' में रणबीर कपूर का खौफनाक अवतार देखने को मिल रहा है। Ranbir Kapoor Film New Song Arjan Valley : बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी और इसके लिए फैंस के बीच काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। फिल्म का टीजर रिलीज किया जा चुका है और फैंस ट्रेलर का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, मेकर्स फिल्म के गाने रिलीज कर रहे हैं। फिल्म के जितने भी गाने रिलीज हुए हैं उन्हें काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म 'एनिमल' का एक और गाना 'अर्जन वैली' रिलीज कर दिया गया है जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। गाने 'अर्जन वैली' में रणबीर कपूर का खौफनाक अवतार देखकर रोंगटे खड़े हो रहे हैं। फिल्म 'एनिमल' के इस गाने को भूपिंदर बब्बल ने अपनी आवाज और उन्होंने इस गाने को लिखा भी है। संदीप वांगा रेड्डी के डायरेक्शन में बनने वाली इस फिल्म 'एनिमल' में रणबीर कपूर के अलावा रश्मिका मंदाना, अनिल कपूर, बॉबी देओल और तृप्ति डिमरी भी नजर आएंगी।
Animal New Song Arjan Valley: रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' का नया गाना 'अर्जन वैली' रिलीज किया गया है। गाने 'अर्जन वैली' में रणबीर कपूर का खौफनाक अवतार देखने को मिल रहा है। Ranbir Kapoor Film New Song Arjan Valley : बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' एक दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी और इसके लिए फैंस के बीच काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। फिल्म का टीजर रिलीज किया जा चुका है और फैंस ट्रेलर का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, मेकर्स फिल्म के गाने रिलीज कर रहे हैं। फिल्म के जितने भी गाने रिलीज हुए हैं उन्हें काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म 'एनिमल' का एक और गाना 'अर्जन वैली' रिलीज कर दिया गया है जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। गाने 'अर्जन वैली' में रणबीर कपूर का खौफनाक अवतार देखकर रोंगटे खड़े हो रहे हैं। फिल्म 'एनिमल' के इस गाने को भूपिंदर बब्बल ने अपनी आवाज और उन्होंने इस गाने को लिखा भी है। संदीप वांगा रेड्डी के डायरेक्शन में बनने वाली इस फिल्म 'एनिमल' में रणबीर कपूर के अलावा रश्मिका मंदाना, अनिल कपूर, बॉबी देओल और तृप्ति डिमरी भी नजर आएंगी।
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' रिलीज के बाद से ही सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में दिखाई गई कश्मीर पंडितों की कहानी इस वक्त बहस का विषय बनी हुई है। कुछ लोगों का मानना है इस फिल्म में सन् 1990 की सच्चाई दिखाई गई है, तो कई लोग कह रहे हैं कि ये महज प्रोपेगेंडा है। रिपब्लिक टीवी पर अर्णब गोस्वामी की डिबेट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जब पेनलिस्ट बनकर आए एक्टर और फिल्ममेकर आपस में भिड़ गए। इसका वीडियो रिपब्लिक टीवी ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। जिसमें देखा जा सकता है कि अशोक पंडित और शेहजाद खान फिल्म कश्मीर फाइल्स की कहानी को लेकर बहस करते नजर आ रहे हैं। एक्टर शहजाद खान ने कहा कि इससे पहले भी कश्मीर के मुद्दों को लेकर फिल्में बनाई गई हैं। फिल्म को फिल्म के तरह ही देखना चाहिए। लेकिन इस फिल्म के बाद मैं देख रहा हूं लोग व्हाट्सएप पर या वीडियो के जरिए मुस्लिम को भला-बुरा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में ये सब घट रहा था, भाजपा ने उस वक्त की सरकार का पूरा समर्थन किया था। इसके जवाब में अशोक पंडित ने कहा कि शहजाद साहब आप मेरे मित्र हैं, लेकिन आप गूगल करके काफी जानकारी लेकर आए हैं। मैं आपको हकीकत बताऊंगा। मैं एक कश्मीरी पंडित और फिल्ममेकर होने के नाते इस पूरे दौर से गुजरा हूं। ऐसा बोलना झूठ और कायरता की निशानी है। आप मेरे घाव पर नमक छिड़क रहे हैं, आपको कुछ पता नहीं हैं। जिस वक्त कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ, वो मैंने अपनी आंखों से देखा है।
विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' रिलीज के बाद से ही सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में दिखाई गई कश्मीर पंडितों की कहानी इस वक्त बहस का विषय बनी हुई है। कुछ लोगों का मानना है इस फिल्म में सन् एक हज़ार नौ सौ नब्बे की सच्चाई दिखाई गई है, तो कई लोग कह रहे हैं कि ये महज प्रोपेगेंडा है। रिपब्लिक टीवी पर अर्णब गोस्वामी की डिबेट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जब पेनलिस्ट बनकर आए एक्टर और फिल्ममेकर आपस में भिड़ गए। इसका वीडियो रिपब्लिक टीवी ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। जिसमें देखा जा सकता है कि अशोक पंडित और शेहजाद खान फिल्म कश्मीर फाइल्स की कहानी को लेकर बहस करते नजर आ रहे हैं। एक्टर शहजाद खान ने कहा कि इससे पहले भी कश्मीर के मुद्दों को लेकर फिल्में बनाई गई हैं। फिल्म को फिल्म के तरह ही देखना चाहिए। लेकिन इस फिल्म के बाद मैं देख रहा हूं लोग व्हाट्सएप पर या वीडियो के जरिए मुस्लिम को भला-बुरा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में ये सब घट रहा था, भाजपा ने उस वक्त की सरकार का पूरा समर्थन किया था। इसके जवाब में अशोक पंडित ने कहा कि शहजाद साहब आप मेरे मित्र हैं, लेकिन आप गूगल करके काफी जानकारी लेकर आए हैं। मैं आपको हकीकत बताऊंगा। मैं एक कश्मीरी पंडित और फिल्ममेकर होने के नाते इस पूरे दौर से गुजरा हूं। ऐसा बोलना झूठ और कायरता की निशानी है। आप मेरे घाव पर नमक छिड़क रहे हैं, आपको कुछ पता नहीं हैं। जिस वक्त कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ, वो मैंने अपनी आंखों से देखा है।
एक्ट्रेस नेहा मलिक ( Neha Malik ) का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। एंटरटेनमेंट डेस्क, Neha Malik created a ruckus in a black net bra : भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक अपने बोल्ड एंड हॉट वीडियो शूट और ग्रेसफुल डांस मूव्स की वजह से सोशल मीडिया सनसनी बन चुकी हैं। नेहा मलिक ने हाल फिलहाल दो ग्लैमरस वीडियो शेयर किए हैं। इसमें वे बहुत हॉट अंदाज़ में डांस मूव्स दिखा रही हैं। इस एक्ट्रेस ने इस वीडियो के लिए पिंक ब्लिंग हॉट एंड सेक्सी आउटफिट चुना है। इस वीडियो में उन्होंने बदन से चिपका हुआ ऑफ सोल्डर वेस्टर्न ड्रेस पहना हुआ है। पिंक कलर का ये ड्रेस बेहद आकर्षक है। इसके साथ सेम कलर की फैंसी चप्पल पहनी हुई हैं। एक्ट्रेस ने इस ड्रेस के साथ कानों में व्हाइट कलर के बड़े स्कवायर कैरी किए हैं। एक्ट्रेस का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। पिंक ड्रेस में ओपन हेयर और न्यूड मेकअप के साथ एक्ट्रेस नेहा मलिक का लुक काफी ग्लैमरस नजर आ रहा है। उन्होंने अपने इंस्टा अकाउंट पर इसी ड्रेस में फोटोशूट भी कराया है। वहीं इससे पहले नेहा ने एक औऱ वीडियो शेयर किया है, जिसमें होला कैप्शन देते हुए इस सांग पर डांस मूव्स दिखाए हैं। इसमें उन्होंने ब्लैक नेट वाली ब्रा के ऊपर लाइट सेफ्रॉन कलर का कोट पहना है, जिसमें वे बेहद सेक्सी नज़र आ रही हैं।
एक्ट्रेस नेहा मलिक का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। एंटरटेनमेंट डेस्क, Neha Malik created a ruckus in a black net bra : भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक अपने बोल्ड एंड हॉट वीडियो शूट और ग्रेसफुल डांस मूव्स की वजह से सोशल मीडिया सनसनी बन चुकी हैं। नेहा मलिक ने हाल फिलहाल दो ग्लैमरस वीडियो शेयर किए हैं। इसमें वे बहुत हॉट अंदाज़ में डांस मूव्स दिखा रही हैं। इस एक्ट्रेस ने इस वीडियो के लिए पिंक ब्लिंग हॉट एंड सेक्सी आउटफिट चुना है। इस वीडियो में उन्होंने बदन से चिपका हुआ ऑफ सोल्डर वेस्टर्न ड्रेस पहना हुआ है। पिंक कलर का ये ड्रेस बेहद आकर्षक है। इसके साथ सेम कलर की फैंसी चप्पल पहनी हुई हैं। एक्ट्रेस ने इस ड्रेस के साथ कानों में व्हाइट कलर के बड़े स्कवायर कैरी किए हैं। एक्ट्रेस का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। पिंक ड्रेस में ओपन हेयर और न्यूड मेकअप के साथ एक्ट्रेस नेहा मलिक का लुक काफी ग्लैमरस नजर आ रहा है। उन्होंने अपने इंस्टा अकाउंट पर इसी ड्रेस में फोटोशूट भी कराया है। वहीं इससे पहले नेहा ने एक औऱ वीडियो शेयर किया है, जिसमें होला कैप्शन देते हुए इस सांग पर डांस मूव्स दिखाए हैं। इसमें उन्होंने ब्लैक नेट वाली ब्रा के ऊपर लाइट सेफ्रॉन कलर का कोट पहना है, जिसमें वे बेहद सेक्सी नज़र आ रही हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के जिस भी भाग में कोरोना का प्रसार देखने को मिला है, उसके पीछे तबलीगी जमात का हाथ है। जफरुल इस्लाम ने अरब के लोगों की आँधी लाने की धमकी दी थी। अब उनका कहना है, "मेरा इरादा गलत नहीं था। " राज्यपाल जगदीप धनखड़ का कहना है कि राज्य सरकार के मुताबिक कोरोना से बंगाल में 105 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि आँकड़ा इससे अधिक है। देश में रेड जोन के तहत 130 जिले, ऑरेंज जोन के तहत 284 जिले और ग्रीन जोन के तहत 319 जिलों को रखा गया है। हर सप्ताह इसका आकलन किया जाएगा। हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर गोली चलाने वाले शाहरूख पठान के खिलाफ 350 पृष्ठों से अधिक का आरोप पत्र दाखिल किया है। भगवा झंडे से समुदाय विशेष को परेशानी क्यों? वो ध्वजा है, मिर्ची नहीं! भगवा रंग किसी की आँखों को चुभता है तो समस्या उसकी है। ये उसकी दुष्टता है कि उसे हमारे धर्म के प्रतीक चिह्नों से घृणा है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई एक लम्बी लड़ाई है। ये तय है कि मानवता के साथ-साथ भारत भी इस लड़ाई को जीत ही लेगा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के जिस भी भाग में कोरोना का प्रसार देखने को मिला है, उसके पीछे तबलीगी जमात का हाथ है। जफरुल इस्लाम ने अरब के लोगों की आँधी लाने की धमकी दी थी। अब उनका कहना है, "मेरा इरादा गलत नहीं था। " राज्यपाल जगदीप धनखड़ का कहना है कि राज्य सरकार के मुताबिक कोरोना से बंगाल में एक सौ पाँच लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि आँकड़ा इससे अधिक है। देश में रेड जोन के तहत एक सौ तीस जिले, ऑरेंज जोन के तहत दो सौ चौरासी जिले और ग्रीन जोन के तहत तीन सौ उन्नीस जिलों को रखा गया है। हर सप्ताह इसका आकलन किया जाएगा। हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर गोली चलाने वाले शाहरूख पठान के खिलाफ तीन सौ पचास पृष्ठों से अधिक का आरोप पत्र दाखिल किया है। भगवा झंडे से समुदाय विशेष को परेशानी क्यों? वो ध्वजा है, मिर्ची नहीं! भगवा रंग किसी की आँखों को चुभता है तो समस्या उसकी है। ये उसकी दुष्टता है कि उसे हमारे धर्म के प्रतीक चिह्नों से घृणा है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई एक लम्बी लड़ाई है। ये तय है कि मानवता के साथ-साथ भारत भी इस लड़ाई को जीत ही लेगा।
चंडीगढ़, पठानकोट -पंजाब में शनिवार को 16 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए। राज्य में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 2045 हो गई, जिनमें 1870 ठीक हुए और 39 मौतें शामिल हैं। यह जानकारी पंजाब सरकार ने दी। राज्य में शनिवार को अमृतसर में चार, जालंधर और पटियाला में तीन-तीन, बठिंडा, गुरदासपुर, कपूरथला, लुधियाना, पठानकोट व श्रीमुक्तसर साहिब में एक-एक नया मरीज सामने आया। शनिवार को एक दिन में 23 मरीज कोरोना को मात देकर घर पहुंच गए। वहीं 2045 मामलों में अभी भी 136 मामले सक्रिय हैं। उधर, शनिवार को एक और कोरोना पॉजिटिव मिलने से वर्तमान में पठानकोट जिला के आइसोलेशन अस्पताल चिंतपूर्णी मेडिकल कालेज में कुल तीन कोरोना पॉजिटिव लोगों का इलाज किया जा रहा है। यह जानकारी पठानकोट के उपायुक्त गुरप्रीत सिंह खैहरा ने दी। उपायुक्त ने कहा कि जो व्यक्ति शनिवार को सकारात्मक आया है, वह मुंबई में काम कर रहा था और पिछले दिनों वह पठानकोट जिला के लिए रवाना हुआ था। 21 मई को जब वह आया, तो उसे कुछ लक्षण कोरोना के लगे, तो वह घर न जाकर सीधा हास्पिटल पहुंचा, जहां उसने कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल दिया और शनिवार को उसे कोरोना पॉजिटिव बताया गया।
चंडीगढ़, पठानकोट -पंजाब में शनिवार को सोलह नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए। राज्य में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या दो हज़ार पैंतालीस हो गई, जिनमें एक हज़ार आठ सौ सत्तर ठीक हुए और उनतालीस मौतें शामिल हैं। यह जानकारी पंजाब सरकार ने दी। राज्य में शनिवार को अमृतसर में चार, जालंधर और पटियाला में तीन-तीन, बठिंडा, गुरदासपुर, कपूरथला, लुधियाना, पठानकोट व श्रीमुक्तसर साहिब में एक-एक नया मरीज सामने आया। शनिवार को एक दिन में तेईस मरीज कोरोना को मात देकर घर पहुंच गए। वहीं दो हज़ार पैंतालीस मामलों में अभी भी एक सौ छत्तीस मामले सक्रिय हैं। उधर, शनिवार को एक और कोरोना पॉजिटिव मिलने से वर्तमान में पठानकोट जिला के आइसोलेशन अस्पताल चिंतपूर्णी मेडिकल कालेज में कुल तीन कोरोना पॉजिटिव लोगों का इलाज किया जा रहा है। यह जानकारी पठानकोट के उपायुक्त गुरप्रीत सिंह खैहरा ने दी। उपायुक्त ने कहा कि जो व्यक्ति शनिवार को सकारात्मक आया है, वह मुंबई में काम कर रहा था और पिछले दिनों वह पठानकोट जिला के लिए रवाना हुआ था। इक्कीस मई को जब वह आया, तो उसे कुछ लक्षण कोरोना के लगे, तो वह घर न जाकर सीधा हास्पिटल पहुंचा, जहां उसने कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल दिया और शनिवार को उसे कोरोना पॉजिटिव बताया गया।
गो फर्स्ट एयरलाइंस को डीजीसीए ने परिचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। डीजीसीए ने गोफर्स्ट को शर्तों के साथ सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति दी। डीजीसीए ने उड़ानें फिर से शुरू करने के गो के प्रस्ताव को सशर्त स्वीकार कर लिया है। नियंत्रक का निर्णय ऑडिट के बाद लिया जाता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गो फर्स्ट को सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उड़ान सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। आईआरपी शर्त पूरी करने के बाद उड़ान कार्यक्रम की मंजूरी डीजीसीए से लेनी होगी। इसके बाद टिकट बुकिंग शुरू हो जाएगी. बुकिंग के साथ ही कंपनी रिफंड की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाएगी। गो फर्स्ट सेवा पिछले दो महीनों से निलंबित है। 3 मई से, एयरलाइन ने 30 जून, 2023 तक अपने सभी मार्गों पर उड़ानें रद्द कर दी थीं। इसकी घोषणा भी एयरलाइन ने ट्विटर पर की. अगर कोई एयरलाइन कंपनी फ्लाइट कैंसिल करती है तो वह यात्रियों को टिकट का 100 फीसदी रिफंड करेगी। इस मामले में, यात्री की सिफारिश पर रिफंड की भी व्यवस्था की जाती है।
गो फर्स्ट एयरलाइंस को डीजीसीए ने परिचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। डीजीसीए ने गोफर्स्ट को शर्तों के साथ सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति दी। डीजीसीए ने उड़ानें फिर से शुरू करने के गो के प्रस्ताव को सशर्त स्वीकार कर लिया है। नियंत्रक का निर्णय ऑडिट के बाद लिया जाता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गो फर्स्ट को सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उड़ान सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। आईआरपी शर्त पूरी करने के बाद उड़ान कार्यक्रम की मंजूरी डीजीसीए से लेनी होगी। इसके बाद टिकट बुकिंग शुरू हो जाएगी. बुकिंग के साथ ही कंपनी रिफंड की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाएगी। गो फर्स्ट सेवा पिछले दो महीनों से निलंबित है। तीन मई से, एयरलाइन ने तीस जून, दो हज़ार तेईस तक अपने सभी मार्गों पर उड़ानें रद्द कर दी थीं। इसकी घोषणा भी एयरलाइन ने ट्विटर पर की. अगर कोई एयरलाइन कंपनी फ्लाइट कैंसिल करती है तो वह यात्रियों को टिकट का एक सौ फीसदी रिफंड करेगी। इस मामले में, यात्री की सिफारिश पर रिफंड की भी व्यवस्था की जाती है।