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जयपुर, 15 जुलाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हल्दीघाटी में लगी वे विवादास्पद पट्टिकाएं (बोर्ड) बृहस्पतिवार को हटा दीं जिनके अनुसार हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध में महाराणा प्रताप की सेनाएं "पीछे" हट गई थीं।
एएसआई के जोधपुर सर्किल के अधीक्षक बिपिन चंद्र नेगी ने बताया कि विभागीय आदेशों के बाद इन पट्टिकाओं को बृहस्पतिवार को हटा दिया गया।
नेगी ने कहा कि ये पट्टिकाएं 40 से भी अधिक साल पुरानी थीं। इनपर अंकित शब्द भी धुंधले हो गए हैं। ये बोर्ड एएसआई के नहीं थे। उन्हें राज्य के पर्यटन विभाग ने लगाया था और एएसआई ने 2003 में इस जगह का रखरखाव शुरू किया, इन्हें आज हटा दिया गया। इनकी जगह पर नये बोर्ड लगाए जाएंगे।
हल्दीघाटी राज्य के राजसमंद जिले में है।
एएसआई ने अपनी राज्य इकाई को इन विवादास्पद पट्टिकाओं को हटाने का निर्देश दिया था। अनेक राजपूत व लोक संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने एएसआई के इस बारे में आदेश जारी किए जाने की पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि निविदा जारी करने के बाद नए पट्ट लगाए जाएंगे। नए पट्ट लगाने का उद्देश्य इस जगह व घटना की महत्ता को रेखांकित करना है।
गौरतलब है कि उक्त पट्ट 1970 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यात्रा के दौरान राज्य के पर्यटन विभाग ने लगाए थे। महाराणा प्रताप व अकबर की सेनाओं के बीच हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में लड़ा गया था। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों में हल्दीघाटी की लड़ाई की तारीख 18 जून 1576 है जबकि पट्टिकाओं पर यह 21 जून 1576 लिखी गई है।
राजसमंद की सांसद दिया कुमारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा संगठन इस मुद्दे को उठा चुके हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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जयपुर, पंद्रह जुलाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने हल्दीघाटी में लगी वे विवादास्पद पट्टिकाएं बृहस्पतिवार को हटा दीं जिनके अनुसार हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध में महाराणा प्रताप की सेनाएं "पीछे" हट गई थीं। एएसआई के जोधपुर सर्किल के अधीक्षक बिपिन चंद्र नेगी ने बताया कि विभागीय आदेशों के बाद इन पट्टिकाओं को बृहस्पतिवार को हटा दिया गया। नेगी ने कहा कि ये पट्टिकाएं चालीस से भी अधिक साल पुरानी थीं। इनपर अंकित शब्द भी धुंधले हो गए हैं। ये बोर्ड एएसआई के नहीं थे। उन्हें राज्य के पर्यटन विभाग ने लगाया था और एएसआई ने दो हज़ार तीन में इस जगह का रखरखाव शुरू किया, इन्हें आज हटा दिया गया। इनकी जगह पर नये बोर्ड लगाए जाएंगे। हल्दीघाटी राज्य के राजसमंद जिले में है। एएसआई ने अपनी राज्य इकाई को इन विवादास्पद पट्टिकाओं को हटाने का निर्देश दिया था। अनेक राजपूत व लोक संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने एएसआई के इस बारे में आदेश जारी किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि निविदा जारी करने के बाद नए पट्ट लगाए जाएंगे। नए पट्ट लगाने का उद्देश्य इस जगह व घटना की महत्ता को रेखांकित करना है। गौरतलब है कि उक्त पट्ट एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यात्रा के दौरान राज्य के पर्यटन विभाग ने लगाए थे। महाराणा प्रताप व अकबर की सेनाओं के बीच हल्दीघाटी का युद्ध एक हज़ार पाँच सौ छिहत्तर में लड़ा गया था। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की किताबों में हल्दीघाटी की लड़ाई की तारीख अट्ठारह जून एक हज़ार पाँच सौ छिहत्तर है जबकि पट्टिकाओं पर यह इक्कीस जून एक हज़ार पाँच सौ छिहत्तर लिखी गई है। राजसमंद की सांसद दिया कुमारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा संगठन इस मुद्दे को उठा चुके हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नंगल -स्वां नदी में हो कथित अवैध माइनिंग को रोकने के लिए गांव भलड़ी के ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी कि अगर एक हफ्ते में अवैध माइनिंग पर लगाम न लगाई, तो नंगल डैम से नंगल-धर्मशाला मार्ग को जाम करने के लिए मजबूर होंगे। यह निर्णय गांव के सरपंच हरपाल सिंह भलड़ी के नेतृत्व में आयोजित एक बैठक में लिया गया। बैठक के उपरांत पत्रकारों से बात करते सरपंच हरपाल सिंह भलड़ी ने कहा कि उपमंडल नंगल के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से हो कर गुजर रही स्वां नदी में हो रही अवैध माइनिंग के कारण कृषि की जमीन बह रही है। वहीं कई जगहों पर घरों को भी इसका खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर हो रही अवैध माइनिंग के कारण स्वां नदी 20-30 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिसके कारण इलाके के कुंओं व बोरों का पानी भी सूखने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन और माइनिंग करने वाले लोगों के बीच कथित सांठ-गांठ के कारण ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर माइनिंग विभाग और प्रशासन ने गैर-कानूनी माइनिंग पर कारवाई नहीं की, तो वे वे मख्य मार्ग पर जाम लगाने के लिए तो मजबूर होंगे फिर भी अगर जरूरत पड़ी, तो माननीय हाई-कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस मौके पर तरलोचन सिंह, जगतार सिंह, वरजीत सिंह, महिंद्र सिंह, गुरदेव सिंह, बलवंत पंच, हरजिंद्र सिंह, सवर्ण सिंह, हरजाप सिंह, सुखवंत सिंह, जोगिंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, शमशेर सिंह, अमरीक सिंह, सोहन सिंह ग्रेवाल, डा. गुरनाम सिंह, सतनाम सिंह, करनैल सिंह, परमजीत सिंह, गुरनाम सिंह, राम सिंह, अजीत सिंह, गुरदयाल सिंहए पं. ओम प्रकाश, सतपाल सिंह, सुच्चा सिंह, चरण सिंह, गुरनाम सिंह आदि भी उपस्थित थे।
उधर जब इस बारे में जानकारी लेने हेतु एसडीएम कन्नू गर्ग से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और इलाके में किसी को भी अवैध माइनिंग की इजाजत नहीं दी जाएगी। जब इस बारे में जानकारी लेने हेतु थाना प्रभारी सब इंसपेक्टर पवन कुमार चौधरी से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा पुलिस माइनिंग विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर बनती कारवाई अकसर करती आ रही है।
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नंगल -स्वां नदी में हो कथित अवैध माइनिंग को रोकने के लिए गांव भलड़ी के ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी कि अगर एक हफ्ते में अवैध माइनिंग पर लगाम न लगाई, तो नंगल डैम से नंगल-धर्मशाला मार्ग को जाम करने के लिए मजबूर होंगे। यह निर्णय गांव के सरपंच हरपाल सिंह भलड़ी के नेतृत्व में आयोजित एक बैठक में लिया गया। बैठक के उपरांत पत्रकारों से बात करते सरपंच हरपाल सिंह भलड़ी ने कहा कि उपमंडल नंगल के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से हो कर गुजर रही स्वां नदी में हो रही अवैध माइनिंग के कारण कृषि की जमीन बह रही है। वहीं कई जगहों पर घरों को भी इसका खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर हो रही अवैध माइनिंग के कारण स्वां नदी बीस-तीस फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिसके कारण इलाके के कुंओं व बोरों का पानी भी सूखने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन और माइनिंग करने वाले लोगों के बीच कथित सांठ-गांठ के कारण ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर माइनिंग विभाग और प्रशासन ने गैर-कानूनी माइनिंग पर कारवाई नहीं की, तो वे वे मख्य मार्ग पर जाम लगाने के लिए तो मजबूर होंगे फिर भी अगर जरूरत पड़ी, तो माननीय हाई-कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस मौके पर तरलोचन सिंह, जगतार सिंह, वरजीत सिंह, महिंद्र सिंह, गुरदेव सिंह, बलवंत पंच, हरजिंद्र सिंह, सवर्ण सिंह, हरजाप सिंह, सुखवंत सिंह, जोगिंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, शमशेर सिंह, अमरीक सिंह, सोहन सिंह ग्रेवाल, डा. गुरनाम सिंह, सतनाम सिंह, करनैल सिंह, परमजीत सिंह, गुरनाम सिंह, राम सिंह, अजीत सिंह, गुरदयाल सिंहए पं. ओम प्रकाश, सतपाल सिंह, सुच्चा सिंह, चरण सिंह, गुरनाम सिंह आदि भी उपस्थित थे। उधर जब इस बारे में जानकारी लेने हेतु एसडीएम कन्नू गर्ग से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और इलाके में किसी को भी अवैध माइनिंग की इजाजत नहीं दी जाएगी। जब इस बारे में जानकारी लेने हेतु थाना प्रभारी सब इंसपेक्टर पवन कुमार चौधरी से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा पुलिस माइनिंग विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर बनती कारवाई अकसर करती आ रही है।
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आज के समय में डिजिटल लेन-देन काफी बढ़ गए हैं, ज्यादातर लोग अपने मोबाइल से ऑनलाइन पेमेंट और लेन-देन करना पसंद करते हैं।
आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करें और वो पूरा न हो, यानी आपका पैसा तो कट गया, मगर जिसे भेजा उसे नहीं मिला।
आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करें और वो पूरा न हो। यानी आपका पैसा तो कट गया, मगर जिसे भेजा उसे नहीं मिला।
कुछ बैंकों के ग्राहकों को ऑनलाइन लेन-देन में दिक्कत आई, अभी भी बहुत सारे लोगों को अपना कटा हुआ पैसा वापस नहीं मिला है।
अकाउंट से डेबिट हो जाने के बावजूद कैश नहीं मिला तो 5 दिनों के अंदर आपको पैसा वापस मिलना चाहिए।
19 सितंबर 2019 को आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी किया था।
सर्कुलर के अनुसार तय अवधि में कटा हुआ पैसा न मिलने पर बैंकों को ग्राहकों को जुर्माना देना होहगा।
आरबीआई के नियम के अनुसार यह जुर्माना प्रति दिन 100 रु होगा।
अगर कटा हुआ पैसा ग्राहक को निश्चित अवधि में नहीं मिलता तो हर दिन 100 रु का जुर्माना देना होगा।
पैसे कटने के किसी मामले में एसबीआई के ग्राहक बैंक की योनो ऐप में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस सिस्टम से आप पैसे ट्रांसफर, बिजली, मोबाइल फोन और ब्रॉडबैंड आदि के बिल का भुगतान कर सकते हैं।
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आज के समय में डिजिटल लेन-देन काफी बढ़ गए हैं, ज्यादातर लोग अपने मोबाइल से ऑनलाइन पेमेंट और लेन-देन करना पसंद करते हैं। आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करें और वो पूरा न हो, यानी आपका पैसा तो कट गया, मगर जिसे भेजा उसे नहीं मिला। आप ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करें और वो पूरा न हो। यानी आपका पैसा तो कट गया, मगर जिसे भेजा उसे नहीं मिला। कुछ बैंकों के ग्राहकों को ऑनलाइन लेन-देन में दिक्कत आई, अभी भी बहुत सारे लोगों को अपना कटा हुआ पैसा वापस नहीं मिला है। अकाउंट से डेबिट हो जाने के बावजूद कैश नहीं मिला तो पाँच दिनों के अंदर आपको पैसा वापस मिलना चाहिए। उन्नीस सितंबर दो हज़ार उन्नीस को आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी किया था। सर्कुलर के अनुसार तय अवधि में कटा हुआ पैसा न मिलने पर बैंकों को ग्राहकों को जुर्माना देना होहगा। आरबीआई के नियम के अनुसार यह जुर्माना प्रति दिन एक सौ रुपया होगा। अगर कटा हुआ पैसा ग्राहक को निश्चित अवधि में नहीं मिलता तो हर दिन एक सौ रुपया का जुर्माना देना होगा। पैसे कटने के किसी मामले में एसबीआई के ग्राहक बैंक की योनो ऐप में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस सिस्टम से आप पैसे ट्रांसफर, बिजली, मोबाइल फोन और ब्रॉडबैंड आदि के बिल का भुगतान कर सकते हैं।
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बालों का रंग एक सुंदर केश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और एक स्टाइलिश छवि है आसपास के विश्व के विभिन्न रंगों में विभिन्न तरीकों से इंद्रियों पर प्रभाव पड़ता है। बाल के रंग के रूप में, यह अंधेरे को गर्म या ठंडा, बड़ा या फ्लैट, घने या हवादार के रूप में माना जा सकता है।
और एक पूरे के रूप में, सिर पर बड़े पैमाने पर बालों का रंग भी दिखता है, जो बहुत हद तक रंग से निर्धारित होता है। यदि आपके ताले अंधेरे होते हैं - तो पूरे केश को भारी लगता है और बहुत रसीला नहीं लगता है लेकिन हल्के बालों के मालिक नोटिस कर सकते हैं कि उनके बाल कटाने नेत्रहीन बड़े, रसीला और लाइटर हैं।
कटरीन ("कूटिन") - एक बाल डाई, जिसमें पैलेट प्राकृतिक रंगों में समृद्ध है, जो पेशेवर हेयरड्रेसिंग सैलूनों में सराहना की जाती है।
कटरीन पेशेवर कॉस्मेटिक्स के फ़िनिश ब्रांड है जो अंतरराष्ट्रीय चिंता वाले Lumene Oy के स्वामित्व में है। 1971 के बाद से कंपनी बाल और स्कैल्प की देखभाल के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उत्पादन करती है। निरंतर परीक्षण और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण के साथ , आधुनिक यूरोपीय पर्यावरण के अनुकूल और संसाधन-बचत प्रौद्योगिकियों के अनुसार, उत्पाद की संपूर्ण श्रेणी फिनलैंड (एस्पू) में प्राकृतिक अवयवों से उत्पादित की जाती है। यहां तक कि विभिन्न जलवायु और मौसम के बाल संरचना को प्रभावित करने वाले कारक को उत्पादन में ध्यान में रखा जाता हैः गर्मी, ठंढ, हवा, बारिश, बर्फ आदि।
खरीदार सुखद रूप से कुतुरीन रंग के अमीर पैलेट से हैरान होते हैं। उत्पादों की गुणवत्ता के लिए पेशेवर देखभाल और इस फिनिश कंपनी को अलग करता है प्राकृतिक रंग के रंगों और फिक्सिंग एजेंटों का प्रयोग न केवल बालों को दागता है, बल्कि इसके लिए प्रतिभा और चिकनाई भी जोड़ता है। आप अपने आप को आईने में देखकर और अपने बाल के माध्यम से अपने हाथों को देखकर यह देख पाएंगे कि धुंधला होने का पहला अनुभव।
रंग पैलेट Koutrin बहुत विविध है और 95 रंगों के होते हैं इसमें तथाकथित "मिक्टन" (रंगों के रंगों को सही करने के लिए इस्तेमाल किया गया एम्पलीफायर) और एक विशेष स्वर - "सुबह" शामिल हैं। विकास के लिए इस दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद, प्रत्येक ग्राहक वास्तव में वह क्या ढूँढ सकता है। और बालों के खूबसूरत रंग के सभी रहस्य आपको "काउट्रीन" पेंट प्रकट करेंगे, जो पैलेट विविधता और रंगों और रंगों की सहजता में अलग है।
अपने संतृप्त और लगातार रंग पाने के लिए, आपको अतिरिक्त टोनिंग और बिजली की जरूरत नहीं है। यह सब पहले से ही पेंट में शामिल है, आपको उपयोग के निर्देशों का पालन करना होगा।
"काउट्रीन" - एक बाल डाई, जिसमें से पैलेट गोरा गोरा सेक्स को खुश कर देगा। और अप्रकाशित किस्में या पीले जड़ों के लिए हमेशा के लिए भूल जाओ। "गोरा" के एक विशेष सेट में पेस्टल, मैट, ऐश, कांस्य, सोना, कारमेल, खुबानी, नॉर्डिक सफ़ेद और शैंपेन जैसे रंग शामिल हैं।
गोरा और काले बालों वाली सुंदरियों के लिए फूलों के विशेष वर्ग कुतुरीन का एकमात्र फायदा नहीं हैं। पैलेट में ग्रे रंगों को प्रभावी रूप से रंग देने के लिए कई प्रकार के छाया विकल्प भी हैं।
यह बहुत सुविधाजनक है कि सभी प्रस्तुत रंग तीव्रता से विभाजित हैं। इसलिए, "गोरा" की छाया विविधता में पाए जाते हैंः पेस्टल, लाइट और नॉर्डिक डार्क रंग भी भिन्न होते हैंः हल्के भूरा, और भूरा और मोटी चॉकलेट और काले रंग भी होते हैं। प्रत्येक रंग का एक अनूठा साइड होता है, जो बहुत स्वाभाविक रूप से बालों पर दिखता है, "काउट्रीन" चित्रित किया गया है। इस पेशेवर पेंट की पैलेट आपको विविध, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्राकृतिक रंग और रंगों का एक अमीर विकल्प देगा।
आर्कटिक क्रैनबेरी के बीज से निचोड़ का उपयोग करके एक अनोखी जटिल, आपके बाल को पोषण और moisturizes करता है, यह कंघी करने के लिए आसान बनाता है, कर्ल को चमक और चमक देता है। इसके अलावा, देखभाल सूत्र अपने कोशिकाओं में एक प्रोटीन में बालों और दुकानों की संरचना को संतुलित करता है, इसलिए पदार्थों के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, आर्कटिक क्रैनबेरी के बीज से तेल पराबैंगनी और अन्य प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के नकारात्मक प्रभाव से बाल को बचाता है।
त्वचा और बालों पर प्राकृतिक अवयवों के सौम्य और मज़बूत प्रभाव क्षति के जोखिम को कम कर देता है। याद रखें, कैसे, धुंधला हो जाने के बाद, क्या आपके पास युक्तियां थीं, और प्राकृतिक रंग तो ध्यान से धुंधला हो गया, फिर से आप अपने बालों को रंगाने के लिए मजबूर हो गए? इसके बारे में भूल जाओ "काउट्रीन" का विशेष गौरव प्रस्तावित रंगों की बेज़मियाकेनोया पैलेट है।
लेकिन पता हैः रचना की अधिकतम सहजता और सूत्र की कोमलता के बावजूद, यह रंग एक रासायनिक उत्पाद है, और दुर्लभ मामलों में, लेकिन यह एलर्जी हो सकता है इसलिए, खोपड़ी के लिए आवेदन करने से पहले, हाथ पर उत्पाद का परीक्षण करना आवश्यक है। अगर यह 24 घंटे हो गया है और त्वचा में कोई लाली या एलर्जी नहीं है, तो आप रंग का उपयोग कर सकते हैं। आदर्श रूप में, निश्चित रूप से, त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए आवश्यक है ऐसी स्थिति होती है जब किसी विशेष व्यक्ति को किसी भी रासायनिक सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती है इस मामले में, हमें प्रयोगों सहित, छोड़ देना होगा "Kutrin"। इस मामले में पैलेट काफी संकीर्ण हो जाएगा (केवल पीले, सुनहरा, शाहबलूत और विभिन्न रंगों), लेकिन एलर्जी से बचा जायेगा।
पेंट में निहित रासायनिक यौगिकों के बालों की संरचना पर एक शक्तिशाली प्रभाव पड़ता है। इस वजह से, वे फीका, सुस्त, भंगुर हो सकते हैं। इस से बचने के लिए, हज्जामख़ाना विशेषज्ञ एक विशेष क्लाइंट के बालों की स्थिति का सही विश्लेषण करते हैं ताकि सही पेशेवर बाल डाई और पेशेवर ऑक्सीडिजर चुन सकें। कुटिन ब्रांड द्वारा प्रस्तुत पैलेट, सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती है।
रंग चुनने पर, निम्नलिखित को ध्यान में रखा जाता हैः
- आपका प्राकृतिक रंग;
- बालों की संवेदनशीलता;
- रंगों की संगतता (यदि कई हो तो);
- छोर पर टोन का स्तर और बालों की पूरी लंबाई;
- अतिप्रवाह जड़ों की लंबाई;
- स्पष्टीकरण की आवश्यक डिग्री;
- भूरे बालों की मात्रा (यदि कोई हो);
इसके अलावा, पेशेवर बैजमियामाचनीय कट्रिन के उपयोग के साथ, आपके बाल नरम, मॉइस्लाइज्ड और रेशमी स्पर्श के लिए, समृद्ध रंग और चमक भी पाएंगे, साथ ही एक बहुत ही सुखद कॉस्मेटिक खुशबू भी। अब कोई डर नहीं रहना चाहिए कि धुंधला हो जाना आपके बाल सूख सकता है, या वे उस छाया को प्राप्त करेंगे जिसे आप बिल्कुल नहीं समझते हैं फिनिश कंपनी के उत्पादों के साथ, ऐसी कोई समस्या नहीं है, मुख्य बात यह है कि बालों के संयोजन को लागू करने से पहले व्यक्तिगत प्रतिक्रिया परीक्षण करना चाहिए।
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बालों का रंग एक सुंदर केश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और एक स्टाइलिश छवि है आसपास के विश्व के विभिन्न रंगों में विभिन्न तरीकों से इंद्रियों पर प्रभाव पड़ता है। बाल के रंग के रूप में, यह अंधेरे को गर्म या ठंडा, बड़ा या फ्लैट, घने या हवादार के रूप में माना जा सकता है। और एक पूरे के रूप में, सिर पर बड़े पैमाने पर बालों का रंग भी दिखता है, जो बहुत हद तक रंग से निर्धारित होता है। यदि आपके ताले अंधेरे होते हैं - तो पूरे केश को भारी लगता है और बहुत रसीला नहीं लगता है लेकिन हल्के बालों के मालिक नोटिस कर सकते हैं कि उनके बाल कटाने नेत्रहीन बड़े, रसीला और लाइटर हैं। कटरीन - एक बाल डाई, जिसमें पैलेट प्राकृतिक रंगों में समृद्ध है, जो पेशेवर हेयरड्रेसिंग सैलूनों में सराहना की जाती है। कटरीन पेशेवर कॉस्मेटिक्स के फ़िनिश ब्रांड है जो अंतरराष्ट्रीय चिंता वाले Lumene Oy के स्वामित्व में है। एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के बाद से कंपनी बाल और स्कैल्प की देखभाल के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उत्पादन करती है। निरंतर परीक्षण और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण के साथ , आधुनिक यूरोपीय पर्यावरण के अनुकूल और संसाधन-बचत प्रौद्योगिकियों के अनुसार, उत्पाद की संपूर्ण श्रेणी फिनलैंड में प्राकृतिक अवयवों से उत्पादित की जाती है। यहां तक कि विभिन्न जलवायु और मौसम के बाल संरचना को प्रभावित करने वाले कारक को उत्पादन में ध्यान में रखा जाता हैः गर्मी, ठंढ, हवा, बारिश, बर्फ आदि। खरीदार सुखद रूप से कुतुरीन रंग के अमीर पैलेट से हैरान होते हैं। उत्पादों की गुणवत्ता के लिए पेशेवर देखभाल और इस फिनिश कंपनी को अलग करता है प्राकृतिक रंग के रंगों और फिक्सिंग एजेंटों का प्रयोग न केवल बालों को दागता है, बल्कि इसके लिए प्रतिभा और चिकनाई भी जोड़ता है। आप अपने आप को आईने में देखकर और अपने बाल के माध्यम से अपने हाथों को देखकर यह देख पाएंगे कि धुंधला होने का पहला अनुभव। रंग पैलेट Koutrin बहुत विविध है और पचानवे रंगों के होते हैं इसमें तथाकथित "मिक्टन" और एक विशेष स्वर - "सुबह" शामिल हैं। विकास के लिए इस दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद, प्रत्येक ग्राहक वास्तव में वह क्या ढूँढ सकता है। और बालों के खूबसूरत रंग के सभी रहस्य आपको "काउट्रीन" पेंट प्रकट करेंगे, जो पैलेट विविधता और रंगों और रंगों की सहजता में अलग है। अपने संतृप्त और लगातार रंग पाने के लिए, आपको अतिरिक्त टोनिंग और बिजली की जरूरत नहीं है। यह सब पहले से ही पेंट में शामिल है, आपको उपयोग के निर्देशों का पालन करना होगा। "काउट्रीन" - एक बाल डाई, जिसमें से पैलेट गोरा गोरा सेक्स को खुश कर देगा। और अप्रकाशित किस्में या पीले जड़ों के लिए हमेशा के लिए भूल जाओ। "गोरा" के एक विशेष सेट में पेस्टल, मैट, ऐश, कांस्य, सोना, कारमेल, खुबानी, नॉर्डिक सफ़ेद और शैंपेन जैसे रंग शामिल हैं। गोरा और काले बालों वाली सुंदरियों के लिए फूलों के विशेष वर्ग कुतुरीन का एकमात्र फायदा नहीं हैं। पैलेट में ग्रे रंगों को प्रभावी रूप से रंग देने के लिए कई प्रकार के छाया विकल्प भी हैं। यह बहुत सुविधाजनक है कि सभी प्रस्तुत रंग तीव्रता से विभाजित हैं। इसलिए, "गोरा" की छाया विविधता में पाए जाते हैंः पेस्टल, लाइट और नॉर्डिक डार्क रंग भी भिन्न होते हैंः हल्के भूरा, और भूरा और मोटी चॉकलेट और काले रंग भी होते हैं। प्रत्येक रंग का एक अनूठा साइड होता है, जो बहुत स्वाभाविक रूप से बालों पर दिखता है, "काउट्रीन" चित्रित किया गया है। इस पेशेवर पेंट की पैलेट आपको विविध, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से प्राकृतिक रंग और रंगों का एक अमीर विकल्प देगा। आर्कटिक क्रैनबेरी के बीज से निचोड़ का उपयोग करके एक अनोखी जटिल, आपके बाल को पोषण और moisturizes करता है, यह कंघी करने के लिए आसान बनाता है, कर्ल को चमक और चमक देता है। इसके अलावा, देखभाल सूत्र अपने कोशिकाओं में एक प्रोटीन में बालों और दुकानों की संरचना को संतुलित करता है, इसलिए पदार्थों के संतुलन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, आर्कटिक क्रैनबेरी के बीज से तेल पराबैंगनी और अन्य प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के नकारात्मक प्रभाव से बाल को बचाता है। त्वचा और बालों पर प्राकृतिक अवयवों के सौम्य और मज़बूत प्रभाव क्षति के जोखिम को कम कर देता है। याद रखें, कैसे, धुंधला हो जाने के बाद, क्या आपके पास युक्तियां थीं, और प्राकृतिक रंग तो ध्यान से धुंधला हो गया, फिर से आप अपने बालों को रंगाने के लिए मजबूर हो गए? इसके बारे में भूल जाओ "काउट्रीन" का विशेष गौरव प्रस्तावित रंगों की बेज़मियाकेनोया पैलेट है। लेकिन पता हैः रचना की अधिकतम सहजता और सूत्र की कोमलता के बावजूद, यह रंग एक रासायनिक उत्पाद है, और दुर्लभ मामलों में, लेकिन यह एलर्जी हो सकता है इसलिए, खोपड़ी के लिए आवेदन करने से पहले, हाथ पर उत्पाद का परीक्षण करना आवश्यक है। अगर यह चौबीस घंटाटे हो गया है और त्वचा में कोई लाली या एलर्जी नहीं है, तो आप रंग का उपयोग कर सकते हैं। आदर्श रूप में, निश्चित रूप से, त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए आवश्यक है ऐसी स्थिति होती है जब किसी विशेष व्यक्ति को किसी भी रासायनिक सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती है इस मामले में, हमें प्रयोगों सहित, छोड़ देना होगा "Kutrin"। इस मामले में पैलेट काफी संकीर्ण हो जाएगा , लेकिन एलर्जी से बचा जायेगा। पेंट में निहित रासायनिक यौगिकों के बालों की संरचना पर एक शक्तिशाली प्रभाव पड़ता है। इस वजह से, वे फीका, सुस्त, भंगुर हो सकते हैं। इस से बचने के लिए, हज्जामख़ाना विशेषज्ञ एक विशेष क्लाइंट के बालों की स्थिति का सही विश्लेषण करते हैं ताकि सही पेशेवर बाल डाई और पेशेवर ऑक्सीडिजर चुन सकें। कुटिन ब्रांड द्वारा प्रस्तुत पैलेट, सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती है। रंग चुनने पर, निम्नलिखित को ध्यान में रखा जाता हैः - आपका प्राकृतिक रंग; - बालों की संवेदनशीलता; - रंगों की संगतता ; - छोर पर टोन का स्तर और बालों की पूरी लंबाई; - अतिप्रवाह जड़ों की लंबाई; - स्पष्टीकरण की आवश्यक डिग्री; - भूरे बालों की मात्रा ; इसके अलावा, पेशेवर बैजमियामाचनीय कट्रिन के उपयोग के साथ, आपके बाल नरम, मॉइस्लाइज्ड और रेशमी स्पर्श के लिए, समृद्ध रंग और चमक भी पाएंगे, साथ ही एक बहुत ही सुखद कॉस्मेटिक खुशबू भी। अब कोई डर नहीं रहना चाहिए कि धुंधला हो जाना आपके बाल सूख सकता है, या वे उस छाया को प्राप्त करेंगे जिसे आप बिल्कुल नहीं समझते हैं फिनिश कंपनी के उत्पादों के साथ, ऐसी कोई समस्या नहीं है, मुख्य बात यह है कि बालों के संयोजन को लागू करने से पहले व्यक्तिगत प्रतिक्रिया परीक्षण करना चाहिए।
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कॉम्पैक्ट मॉडल लेक्सस आईएस 200 का प्रस्तुतियह 1999 में हुई। कार की सूचकांक छह सिलेंडर वाले 2 लीटर इंजन की उपस्थिति को इंगित करती है। मशीन एक सतत विन्यास है, ईंधन इंजेक्शन चरणों VVT-i, बिजली की इजाजत दी 155 लीटर तक पहुंचने के लिए। एक। कार के इंजन 9.6 सेकंड के लिए 100 किमी / घंटा के लिए तेज करता है और 217 किमी / घंटा की गति को प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। एक आधुनिक शक्तिशाली पर्याप्त इंजन लेक्सस है 200 के उत्तम पूरक एक मैनुअल 6 स्पीड (और चार गति) ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन बन गया है, एक नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स इकाई है, जो न केवल बदलते मोड और सड़क की स्थिति को समायोजित कर सकते हैं, लेकिन यह भी ड्राइवर का व्यक्तिगत शैली के सामने आए। इसके अलावा, वह आराम और इसके विपरीत करने के लिए खेल से स्वयं चयन स्विचिंग मोड करने में सक्षम है।
लेक्सस 200 के साथ एक जीवंत उपस्थिति है"क्रोध" के तत्व, जो उन्होंने पांच-भाषण मिश्र धातु पहियों से जुड़ा था। यह मोड़ के संकेतों के साथ हेडलैंप को प्रभावित करता है, रेडिएटर अस्तर, बड़े पीछे की पोस्ट और सामने वाले बम्पर पर बड़ी हवा का सेवन। विवरण पीटा जाने के बाद, लेक्सस विशेषज्ञ आधुनिक और अभिव्यक्तिपूर्ण कार बना सकते हैं।
अधिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए, सभी तत्व,जो गैस टैंक और बैटरी जैसे अतिरिक्त वजन जोड़ता है, को सामने और पीछे धुरी द्वारा बनाए गए समोच्च से परे केंद्र में धकेल दिया जाता है। इसने मोड़ के पारित होने के दौरान अप्रत्याशित क्षणों को कम करना संभव बना दिया।
यह अवमूल्यन प्रणाली स्थापित किया जाना चाहिएखेल। स्वतंत्र निलंबन, छोटा और पेंच जैसी स्प्रिंग्स सड़क पर कार के उचित व्यवहार को सुनिश्चित करते हैं। विशाल डिस्क ब्रेक, पूरी तरह से अपने कार्यों का प्रदर्शन, तस्वीर को पूरा करें।
मूल मॉडल भी 6-डिस्क से लैस हैफ्रंट कंसोल, एबीएस और पीबीएस में एकीकृत एक परिवर्तक, चार एयरबैग (जिनमें से दो फ्रंट सीटें, यात्री और ड्राइवर हैं), एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली और अलार्म।
सैलून लेक्सस आईएस 200 को सबसे ज्यादा सही कहा जा सकता हैमालिक के अनुकूल सबकुछ इस तरह से बनाया गया है कि जितना संभव हो उतना कम परेशान हो। एक कार में प्रकाश स्रोतों की व्यवस्था और संचालन के लिए एक विशेष एल्गोरिदम ग्लास पर हल्के प्रतिबिंबों की संभावना को शामिल करता है, और परिवर्तनीय थ्रुपुट रात में और अंधेरे चमकदार सूरज में आरामदायक महसूस करना संभव बनाता है। फ्रंट पैनल के सुखद किनारे शैली और अच्छी गुणवत्ता की विशिष्टता की भावना देते हैं। लेक्सस आईएस 200 में बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हैं (जो बाधाओं के बिना काम करते हैं और अब), कार की उच्च स्थिरता प्रदान करते हैं और ब्रेक सिस्टम की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। ऐसे तकनीकी समाधान यात्रा को अधिक आनंददायक बनाते हैं, आराम और सुरक्षा की भावना प्रदान करते हैं।
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कॉम्पैक्ट मॉडल लेक्सस आईएस दो सौ का प्रस्तुतियह एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में हुई। कार की सूचकांक छह सिलेंडर वाले दो लीटरटर इंजन की उपस्थिति को इंगित करती है। मशीन एक सतत विन्यास है, ईंधन इंजेक्शन चरणों VVT-i, बिजली की इजाजत दी एक सौ पचपन लीटरटर तक पहुंचने के लिए। एक। कार के इंजन नौ दशमलव छः सेकंड के लिए एक सौ किमी / घंटा के लिए तेज करता है और दो सौ सत्रह किमी / घंटा की गति को प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। एक आधुनिक शक्तिशाली पर्याप्त इंजन लेक्सस है दो सौ के उत्तम पूरक एक मैनुअल छः स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन बन गया है, एक नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स इकाई है, जो न केवल बदलते मोड और सड़क की स्थिति को समायोजित कर सकते हैं, लेकिन यह भी ड्राइवर का व्यक्तिगत शैली के सामने आए। इसके अलावा, वह आराम और इसके विपरीत करने के लिए खेल से स्वयं चयन स्विचिंग मोड करने में सक्षम है। लेक्सस दो सौ के साथ एक जीवंत उपस्थिति है"क्रोध" के तत्व, जो उन्होंने पांच-भाषण मिश्र धातु पहियों से जुड़ा था। यह मोड़ के संकेतों के साथ हेडलैंप को प्रभावित करता है, रेडिएटर अस्तर, बड़े पीछे की पोस्ट और सामने वाले बम्पर पर बड़ी हवा का सेवन। विवरण पीटा जाने के बाद, लेक्सस विशेषज्ञ आधुनिक और अभिव्यक्तिपूर्ण कार बना सकते हैं। अधिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए, सभी तत्व,जो गैस टैंक और बैटरी जैसे अतिरिक्त वजन जोड़ता है, को सामने और पीछे धुरी द्वारा बनाए गए समोच्च से परे केंद्र में धकेल दिया जाता है। इसने मोड़ के पारित होने के दौरान अप्रत्याशित क्षणों को कम करना संभव बना दिया। यह अवमूल्यन प्रणाली स्थापित किया जाना चाहिएखेल। स्वतंत्र निलंबन, छोटा और पेंच जैसी स्प्रिंग्स सड़क पर कार के उचित व्यवहार को सुनिश्चित करते हैं। विशाल डिस्क ब्रेक, पूरी तरह से अपने कार्यों का प्रदर्शन, तस्वीर को पूरा करें। मूल मॉडल भी छः-डिस्क से लैस हैफ्रंट कंसोल, एबीएस और पीबीएस में एकीकृत एक परिवर्तक, चार एयरबैग , एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली और अलार्म। सैलून लेक्सस आईएस दो सौ को सबसे ज्यादा सही कहा जा सकता हैमालिक के अनुकूल सबकुछ इस तरह से बनाया गया है कि जितना संभव हो उतना कम परेशान हो। एक कार में प्रकाश स्रोतों की व्यवस्था और संचालन के लिए एक विशेष एल्गोरिदम ग्लास पर हल्के प्रतिबिंबों की संभावना को शामिल करता है, और परिवर्तनीय थ्रुपुट रात में और अंधेरे चमकदार सूरज में आरामदायक महसूस करना संभव बनाता है। फ्रंट पैनल के सुखद किनारे शैली और अच्छी गुणवत्ता की विशिष्टता की भावना देते हैं। लेक्सस आईएस दो सौ में बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हैं , कार की उच्च स्थिरता प्रदान करते हैं और ब्रेक सिस्टम की क्षमताओं को बढ़ाते हैं। ऐसे तकनीकी समाधान यात्रा को अधिक आनंददायक बनाते हैं, आराम और सुरक्षा की भावना प्रदान करते हैं।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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प्रथम परिच्छेद
[ निष्काम कर्म करने की पात्रता तभी आती है, जब मनुष्य समग्र विश्व को अपने बन्धु के समान मानने लगे । ग्रन्थकार पहले इसी विषय का प्रतिपादन करते हैं । ]
जगत् सेवा और आत्म-सेवा ।। ११३ ।। एषोऽयं समयो अनुष्यजनुषो लधुं प्रकृष्ट फलं । तत्सेवैव निजात्मनश्च जगतो निष्कामबुद्धया परा ।। पौर्वापर्यविधानमन्त्र नियतं कर्त्तुं न शक्यं परैः । स्वेवास्तु नियामिका मतमतां संस्कारसामर्थजा ॥
भावार्थ- देश सेवा के पश्चात् मनुष्य जीवन का उच-फल प्राप्त करने का समय उपस्थित होता है । और वह फल हैसेवा करना, या निष्काम वृत्ति से जगत् की सेवा करना । जगत्-संवा पहले करनी चाहिए, या आत्म-सेवा ? इस क्रम का विधान दूसरे लोग नियम के रूप में नहीं कर सकते, इससे तो बुद्धिमान पुरुषो के संस्कार के सामर्थ्य से उत्पन्न अपनी इच्छा ही नियामक हो सकती है, अर्थात् - पूर्व संस्कारो के बल से जैसी जिसकी इच्छा हो वैसा उसे करना चाहिए । ( ११३ )
विवेचन - क्रमशः समग्र देश के साथ
वन्धु भाव धारण
करने वाला मनुष्य, जब इससे भी ऊँची सीढ़ी पर चढ़ना
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प्रथम परिच्छेद [ निष्काम कर्म करने की पात्रता तभी आती है, जब मनुष्य समग्र विश्व को अपने बन्धु के समान मानने लगे । ग्रन्थकार पहले इसी विषय का प्रतिपादन करते हैं । ] जगत् सेवा और आत्म-सेवा ।। एक सौ तेरह ।। एषोऽयं समयो अनुष्यजनुषो लधुं प्रकृष्ट फलं । तत्सेवैव निजात्मनश्च जगतो निष्कामबुद्धया परा ।। पौर्वापर्यविधानमन्त्र नियतं कर्त्तुं न शक्यं परैः । स्वेवास्तु नियामिका मतमतां संस्कारसामर्थजा ॥ भावार्थ- देश सेवा के पश्चात् मनुष्य जीवन का उच-फल प्राप्त करने का समय उपस्थित होता है । और वह फल हैसेवा करना, या निष्काम वृत्ति से जगत् की सेवा करना । जगत्-संवा पहले करनी चाहिए, या आत्म-सेवा ? इस क्रम का विधान दूसरे लोग नियम के रूप में नहीं कर सकते, इससे तो बुद्धिमान पुरुषो के संस्कार के सामर्थ्य से उत्पन्न अपनी इच्छा ही नियामक हो सकती है, अर्थात् - पूर्व संस्कारो के बल से जैसी जिसकी इच्छा हो वैसा उसे करना चाहिए । विवेचन - क्रमशः समग्र देश के साथ वन्धु भाव धारण करने वाला मनुष्य, जब इससे भी ऊँची सीढ़ी पर चढ़ना
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पुलिस ने कहा कि भवन के मलबे में करीब 5-6 लोगों के दबे होने की आशंका है।
नई दिल्ली. पश्चिम दिल्ली के विष्णु गार्डन इलाके में शनिवार को चार मंजिला इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत और अन्य आठ लोग जख्मी हो गए। पुलिस ने कहा कि भवन के मलबे में करीब 5-6 लोगों के दबे होने की आशंका है।
मरने वालों में 4 महिलाएं और एक पुरुष शामिल है। बताया जा रहा है कि NDRF ने 12 लोगों को बाहर निकाला है। बिल्डिंग का मालिक बिरजू भी हादसे में घायल हुआ है। एक बच्ची के अभी भी फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। मस्जिद ख्याला इलाके के सी ब्लॉक में भवन ढहने के स्थान पर दमकल की आठ गाड़ियां, राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के दल, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी राहत अभियान चला रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के ठीक बगल में बेसमेंट का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी बिल्डिंग गिर गई। एक अधिकारी ने बताया कि भवन के पास में एक नई इमारत बनाने के लिए खुदाई चल रही थी जिस कारण यह ढह गया। अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल पर भारी संख्या में भीड़ उमड़ने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ है।
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पुलिस ने कहा कि भवन के मलबे में करीब पाँच-छः लोगों के दबे होने की आशंका है। नई दिल्ली. पश्चिम दिल्ली के विष्णु गार्डन इलाके में शनिवार को चार मंजिला इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत और अन्य आठ लोग जख्मी हो गए। पुलिस ने कहा कि भवन के मलबे में करीब पाँच-छः लोगों के दबे होने की आशंका है। मरने वालों में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल है। बताया जा रहा है कि NDRF ने बारह लोगों को बाहर निकाला है। बिल्डिंग का मालिक बिरजू भी हादसे में घायल हुआ है। एक बच्ची के अभी भी फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। मस्जिद ख्याला इलाके के सी ब्लॉक में भवन ढहने के स्थान पर दमकल की आठ गाड़ियां, राष्ट्रीय आपदा राहत बल के दल, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी राहत अभियान चला रहे हैं। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के ठीक बगल में बेसमेंट का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी बिल्डिंग गिर गई। एक अधिकारी ने बताया कि भवन के पास में एक नई इमारत बनाने के लिए खुदाई चल रही थी जिस कारण यह ढह गया। अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल पर भारी संख्या में भीड़ उमड़ने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ है।
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आईपीएल 2020 में राहुल तेवतिया ने राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने बल्ले के साथ आईपीएल 2020 में 42. 5 की शानदार औसत से 255 रन बनाए थे. वहीं 7. 08 की बेहतरीन इकॉनामी रेट से उन्होंने 10 विकेट भी अपनी टीम के लिए हासिल किये थे.
राहुल तेवतिया भी टी-20 क्रिकेट में रविन्द्र जडेजा से बेहतर ऑलराउंडर साबित हो सकते हैं. हालांकि अब तक भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने तेवतिया को एक भी मौका नहीं दिया है, लेकिन भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि राहुल तेवतिया को बतौर ऑलराउंडर भारतीय टीम में मौका मिल सकता है.
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आईपीएल दो हज़ार बीस में राहुल तेवतिया ने राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने बल्ले के साथ आईपीएल दो हज़ार बीस में बयालीस. पाँच की शानदार औसत से दो सौ पचपन रन बनाए थे. वहीं सात. आठ की बेहतरीन इकॉनामी रेट से उन्होंने दस विकेट भी अपनी टीम के लिए हासिल किये थे. राहुल तेवतिया भी टी-बीस क्रिकेट में रविन्द्र जडेजा से बेहतर ऑलराउंडर साबित हो सकते हैं. हालांकि अब तक भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने तेवतिया को एक भी मौका नहीं दिया है, लेकिन भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि राहुल तेवतिया को बतौर ऑलराउंडर भारतीय टीम में मौका मिल सकता है.
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आधार पर देना चाहिए. वर्त्तमान व्यवस्था में जाति बिशेष के अमीर लोग भी इसका लाभ ले रहे हैं. नतीजतन कहीं-न-कहीं गरीबों की हकमारी हो रही है,जो गलत है. देश में गरीब सवर्णों की हालत सबसे अधिक दयनीय बनती जा रही है. केंद्र और राज्य की सरकारों को इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए. यह समय की मांग है.
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आधार पर देना चाहिए. वर्त्तमान व्यवस्था में जाति बिशेष के अमीर लोग भी इसका लाभ ले रहे हैं. नतीजतन कहीं-न-कहीं गरीबों की हकमारी हो रही है,जो गलत है. देश में गरीब सवर्णों की हालत सबसे अधिक दयनीय बनती जा रही है. केंद्र और राज्य की सरकारों को इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए. यह समय की मांग है.
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जावानीस मोस (वैसिक्युलरिया दुबायन) बहुत ही हैइंडोनेशिया में आम है वह बहुत ही मेहनती, सुंदर और व्यावहारिक हैः छोटे मछलियों को अपने बड़े रिश्तेदारों के उत्पीड़न से बचने, अपनी झाड़ियों में बच सकते हैं।
यह उल्लेखनीय संयंत्र परिवार को संदर्भित करता हैHypnaceae। काई के प्रत्येक टुकड़े में छोटे घुमक्कड़ होते हैं, पत्तियों की एक जोड़ीदार व्यवस्था के साथ। जावानीस का काई के साथ आकर्षण भी चला गया क्योंकि वह वास्तव में पानी के मापदंडों के प्रति उदासीन है।
लेकिन इसके बाद से इसकी शुद्धता पर लागू नहीं होता हैगंदे पानी, एक सुंदर पौधे जल्दी से एक ढलान लूफै़ा में बदल जाता है, मछलीघर के चारों ओर तैरते हुए एक बेरहमी का झींगा। इस वजह से, यह पानी में जलाशयों में खेती करने के लिए अत्यधिक निराश है, जिसमें मछली शामिल हैं, जो जमीन में खुदाई करना पसंद करते हैं, मिट्टी उठाते हैं।
प्रारंभिक लैंडिंग यह है कि आपउन जगहों को परिभाषित करना जरूरी है जहां में रसीला और खूबसूरत झाड़ियों को देखना अच्छा लगता है। जैसा कि हमने पहले ही उल्लेख किया है, यह एक नियमित कैरपोन धागा या एक सरल रेखा के माध्यम से सब्सट्रेट से जुड़ा जा सकता है।
यदि प्रकाश क्रम में होता है, और पानी में पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ होते हैं (बिना अधिक मात्रा में!), यहां तक कि एक छोटे से टहनी बहुत हरे भरे झाड़ में बदल सकती है।
यदि आप पूरी तरह से जावानीस का काटना चाहते हैंमछलीघर, बस अपने स्प्राउट्स को नियमित रूप से कट कर, उन्हें टैंक की परिधि के आसपास रोपण करें। हैरानी की बात है, यह भी एक छोटा सा टुकड़ा है कि कटाई के दौरान किसी का ध्यान नहीं गया है एक नया चहचहाना बढ़ सकता है।
हमने पहले ही कहा है कि संयंत्र शुद्धता के अलावा केवल पानी के मापदंडों के प्रति उदासीन है। लेकिन सबसे अच्छी बात, यह 5.8-8.0 पीएच के एक छोटे से क्षारीय माध्यम में बढ़ता है और 18-30 का तापमान 0एस यह बहुत महत्वपूर्ण है कि मछलीघर में पानी खिल नहीं है, अन्यथा आप जल्दी से जावानीस मोस को अलविदा कहेंगे। रोशनी के स्तर के साथ इसे अधिक करना बेहतर नहीं है, चूंकि काई का नरम, प्राकृतिक प्रकाश सबसे ज्यादा पसंद है।
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जावानीस मोस बहुत ही हैइंडोनेशिया में आम है वह बहुत ही मेहनती, सुंदर और व्यावहारिक हैः छोटे मछलियों को अपने बड़े रिश्तेदारों के उत्पीड़न से बचने, अपनी झाड़ियों में बच सकते हैं। यह उल्लेखनीय संयंत्र परिवार को संदर्भित करता हैHypnaceae। काई के प्रत्येक टुकड़े में छोटे घुमक्कड़ होते हैं, पत्तियों की एक जोड़ीदार व्यवस्था के साथ। जावानीस का काई के साथ आकर्षण भी चला गया क्योंकि वह वास्तव में पानी के मापदंडों के प्रति उदासीन है। लेकिन इसके बाद से इसकी शुद्धता पर लागू नहीं होता हैगंदे पानी, एक सुंदर पौधे जल्दी से एक ढलान लूफै़ा में बदल जाता है, मछलीघर के चारों ओर तैरते हुए एक बेरहमी का झींगा। इस वजह से, यह पानी में जलाशयों में खेती करने के लिए अत्यधिक निराश है, जिसमें मछली शामिल हैं, जो जमीन में खुदाई करना पसंद करते हैं, मिट्टी उठाते हैं। प्रारंभिक लैंडिंग यह है कि आपउन जगहों को परिभाषित करना जरूरी है जहां में रसीला और खूबसूरत झाड़ियों को देखना अच्छा लगता है। जैसा कि हमने पहले ही उल्लेख किया है, यह एक नियमित कैरपोन धागा या एक सरल रेखा के माध्यम से सब्सट्रेट से जुड़ा जा सकता है। यदि प्रकाश क्रम में होता है, और पानी में पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ होते हैं , यहां तक कि एक छोटे से टहनी बहुत हरे भरे झाड़ में बदल सकती है। यदि आप पूरी तरह से जावानीस का काटना चाहते हैंमछलीघर, बस अपने स्प्राउट्स को नियमित रूप से कट कर, उन्हें टैंक की परिधि के आसपास रोपण करें। हैरानी की बात है, यह भी एक छोटा सा टुकड़ा है कि कटाई के दौरान किसी का ध्यान नहीं गया है एक नया चहचहाना बढ़ सकता है। हमने पहले ही कहा है कि संयंत्र शुद्धता के अलावा केवल पानी के मापदंडों के प्रति उदासीन है। लेकिन सबसे अच्छी बात, यह पाँच.आठ-आठ.शून्य पीएच के एक छोटे से क्षारीय माध्यम में बढ़ता है और अट्ठारह-तीस का तापमान शून्यएस यह बहुत महत्वपूर्ण है कि मछलीघर में पानी खिल नहीं है, अन्यथा आप जल्दी से जावानीस मोस को अलविदा कहेंगे। रोशनी के स्तर के साथ इसे अधिक करना बेहतर नहीं है, चूंकि काई का नरम, प्राकृतिक प्रकाश सबसे ज्यादा पसंद है।
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आज के समय में अधिकांश लोगों को नॉनवज बहुत पसंद आता हैं। इसलिए आज हम आपके लिए एक नॉनवेज डिश लेकर आए हैं जिसका नाम हैं हनी चिल्ली चिकन। इसे बनाना बहुत ही आसान हैं और इसका स्वाद खट्टा और मीठा दोनों का टेस्ट देता हैं। तो आइये जानते हैं लोकप्रिय डिश हनी चिल्ली चिकन बनाने की रेसिपी।
पानी - 60 मि. ली.
1 सबसे पहले एक मिक्सिंग बाउल लें, उसमें 550 ग्राम बोनलेस चिकन, 2 टेबलस्पून मकई का आटा, 1 अंडा, 1/2 टीस्पून नमक, 1/4 टीस्पून काली मिर्च, 1 टीस्पून मिर्च के फ्लेक्स डालकर अच्छे से मिलाएं।
2 मिक्सचर को 20 - 25 मिनट के लिए मैरीनेट करें।
3 अब एक कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें और इन्हें गोल्डन ब्राउन और क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।
4 फ्राई करने के बाद इसे अब्सॉर्बेंट पेपर पर सूखाएं और एक तरफ रख दें।
5 फिर नया एक पैन ले उसमें 2 टेबलस्पून तेल गर्म करें, 1 टेबलस्पून लहसुन, 1 टेबलस्पून अदरक, 2 टीस्पून हरी मिर्च डालें और 1 - 2 मिनट तक पकाएं।
6 फिर, 2 टीस्पून सोया सॉस, 1 टीस्पून सिरका, 2 टेबलस्पून मिर्च सॉस, 2 टेबलस्पून शहद डालकर अच्छे से मिलाएं।
7 1/2 टीस्पून नमक, 1/4 टीस्पून काली मिर्च, 1/2 टीस्पून मिर्च फ्लेक्स, 60 मि. ली. पानी डालें और इसे फिर से मिलाएं और इसे उबाल लें।
8 अब इसमें फ्राई किया हुआ चिकन डालकर अच्छे से मिलाएं।
9 2 टेबलस्पून हरे प्याज, 1/2 टीस्पून सफेद तिल डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
10 मध्यम हीट पर 5-7 मिनट तक पकाएं फिर सफेद तिल और हरे प्याज के साथ गार्निश करे।
11 तैयार डिश हनी चिल्ली चिकन को गर्म गर्म परोसे।
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आज के समय में अधिकांश लोगों को नॉनवज बहुत पसंद आता हैं। इसलिए आज हम आपके लिए एक नॉनवेज डिश लेकर आए हैं जिसका नाम हैं हनी चिल्ली चिकन। इसे बनाना बहुत ही आसान हैं और इसका स्वाद खट्टा और मीठा दोनों का टेस्ट देता हैं। तो आइये जानते हैं लोकप्रिय डिश हनी चिल्ली चिकन बनाने की रेसिपी। पानी - साठ मि. ली. एक सबसे पहले एक मिक्सिंग बाउल लें, उसमें पाँच सौ पचास ग्राम बोनलेस चिकन, दो टेबलस्पून मकई का आटा, एक अंडा, एक/दो टीस्पून नमक, एक/चार टीस्पून काली मिर्च, एक टीस्पून मिर्च के फ्लेक्स डालकर अच्छे से मिलाएं। दो मिक्सचर को बीस - पच्चीस मिनट के लिए मैरीनेट करें। तीन अब एक कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें और इन्हें गोल्डन ब्राउन और क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें। चार फ्राई करने के बाद इसे अब्सॉर्बेंट पेपर पर सूखाएं और एक तरफ रख दें। पाँच फिर नया एक पैन ले उसमें दो टेबलस्पून तेल गर्म करें, एक टेबलस्पून लहसुन, एक टेबलस्पून अदरक, दो टीस्पून हरी मिर्च डालें और एक - दो मिनट तक पकाएं। छः फिर, दो टीस्पून सोया सॉस, एक टीस्पून सिरका, दो टेबलस्पून मिर्च सॉस, दो टेबलस्पून शहद डालकर अच्छे से मिलाएं। सात एक/दो टीस्पून नमक, एक/चार टीस्पून काली मिर्च, एक/दो टीस्पून मिर्च फ्लेक्स, साठ मि. ली. पानी डालें और इसे फिर से मिलाएं और इसे उबाल लें। आठ अब इसमें फ्राई किया हुआ चिकन डालकर अच्छे से मिलाएं। नौ दो टेबलस्पून हरे प्याज, एक/दो टीस्पून सफेद तिल डालकर अच्छी तरह मिलाएं। दस मध्यम हीट पर पाँच-सात मिनट तक पकाएं फिर सफेद तिल और हरे प्याज के साथ गार्निश करे। ग्यारह तैयार डिश हनी चिल्ली चिकन को गर्म गर्म परोसे।
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नई दिल्लीः पाकिस्तान और इंग्लैंड की टीमें 13 नवंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में टी 20 वर्ल्ड कप का महामुकाबला खेलेंगी। इस बड़े मुकाबले को लेकर दोनों टीमें बारिश की वजह से टेंशन में हैं, हालांकि अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उन्हें खुशखबरी दे दी है। पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप के फाइनल में परिणाम सुनिश्चित करने के लिए आईसीसी ने अपनी प्लेइंग कंडीशन में बदलाव किया है।
ICC ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इवेंट टेक्निकल कमेटी (ईटीसी) ने खेल परिस्थितियों के खंड 13. 7. 3 में दो घंटे के मूल प्रावधान से रिजर्व डे पर एडिशनल प्लेइंग टाइम को बढ़ाकर चार घंटे कर दिया है। आईसीसी ने पुष्टि की कि मैच को पूरा करने और परिणाम प्राप्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। यानी रिजर्व डे पर मैच दो घंटे में भी पूरा नहीं हो पाया तो दोनों टीमों को 2 घंटे एक्स्ट्रा मिलेंगे। इस तरह मैच पूरा करने के लिए रिजर्व डे पर कुल 4 घंटे मिलेंगे।
ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने रविवार और सोमवार को बारिश की भविष्यवाणी की है। सोमवार 14 नवंबर रिजर्व डे रखा गया है। बारिश की संभावना भले ही 95% से घटकर 75% हो गई हो, लेकिन रविवार को शाम 7 बजे से 11 बजे के बीच बारिश की संभावना अभी भी 65% है। आईसीसी ने यह भी कहा है कि नॉकआउट चरण में एक मैच के लिए प्रति पक्ष कम से कम 10 ओवर की आवश्यकता होती है। निर्धारित दिन पर मैच को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
आईसीसी ने बयान में कहा- "रविवार को मैच को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। ओवरों में किसी भी आवश्यक कमी के साथ और रविवार को मैच बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम ओवरों की गेंदबाजी नहीं होने पर ही मैच रिजर्व डे में जाएगा। " रिजर्व डे पर खेल दोपहर 1. 30 बजे से शुरू होगा और निर्धारित मैच के दिन से खेल जारी रहेगा।
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नई दिल्लीः पाकिस्तान और इंग्लैंड की टीमें तेरह नवंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में टी बीस वर्ल्ड कप का महामुकाबला खेलेंगी। इस बड़े मुकाबले को लेकर दोनों टीमें बारिश की वजह से टेंशन में हैं, हालांकि अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन्हें खुशखबरी दे दी है। पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच टीबीस विश्व कप के फाइनल में परिणाम सुनिश्चित करने के लिए आईसीसी ने अपनी प्लेइंग कंडीशन में बदलाव किया है। ICC ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इवेंट टेक्निकल कमेटी ने खेल परिस्थितियों के खंड तेरह. सात. तीन में दो घंटे के मूल प्रावधान से रिजर्व डे पर एडिशनल प्लेइंग टाइम को बढ़ाकर चार घंटे कर दिया है। आईसीसी ने पुष्टि की कि मैच को पूरा करने और परिणाम प्राप्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। यानी रिजर्व डे पर मैच दो घंटे में भी पूरा नहीं हो पाया तो दोनों टीमों को दो घंटाटे एक्स्ट्रा मिलेंगे। इस तरह मैच पूरा करने के लिए रिजर्व डे पर कुल चार घंटाटे मिलेंगे। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने रविवार और सोमवार को बारिश की भविष्यवाणी की है। सोमवार चौदह नवंबर रिजर्व डे रखा गया है। बारिश की संभावना भले ही पचानवे% से घटकर पचहत्तर% हो गई हो, लेकिन रविवार को शाम सात बजे से ग्यारह बजे के बीच बारिश की संभावना अभी भी पैंसठ% है। आईसीसी ने यह भी कहा है कि नॉकआउट चरण में एक मैच के लिए प्रति पक्ष कम से कम दस ओवर की आवश्यकता होती है। निर्धारित दिन पर मैच को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। आईसीसी ने बयान में कहा- "रविवार को मैच को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। ओवरों में किसी भी आवश्यक कमी के साथ और रविवार को मैच बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम ओवरों की गेंदबाजी नहीं होने पर ही मैच रिजर्व डे में जाएगा। " रिजर्व डे पर खेल दोपहर एक. तीस बजे से शुरू होगा और निर्धारित मैच के दिन से खेल जारी रहेगा।
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रसमलाई (rasmalai) बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट बंगाली मिठाई (Delicious Bengali sweets) है। आप इसे अक्सर ही त्यौहारों (Festivals) पर बाज़ार से लाकर खाते होंगे लेकिन अगर आप इसे घर पर ही बनाएं तो कितना अच्छा रहेगा बनाने में यह जितनी मुश्किल लगती है उतनी है नहीं। इस बार जब भी आपका रसमलाई खाने का मन हो तो फिर आप इसे घर पर ही बना कर देखें। तो फिर आइये आज रसमलाई ( rasmalai recipe) बनाएं।
छैना में एक चम्मच बारीक़ सूजी या फिर मैदा मिलाएं और हाथ और उंगलियों से छैना को दबाते हुए चिकनाहट आने तक मल लें अब छैने को छोटे-छोटे भागो में बाँट कर लड्डू ( how to make chocolate ladoo at home) की तरह से दबाकर उसे बाइन्ड करते हुए गोल और चपटा आकार देकर चिकना कर लें और सारे के सारे गोले इसी तरह से बनाकर तैयार कर लें।
अब एक भगोने में 350 ग्राम चीनी में 3 कप पानी डालकर तेज़ गैस पर रख दें जब पानी उबलने लगे और चीनी पानी में पूरी तरह से घुल जाएं तो छैने से बने हुए सारे गोले इस उबलते पानी में डाल दें और 20 मिनट तक पकने दें गोले उबल कर करीब आकार में दुगुने हो जाते हैं रसमलाई (chocolate rasmalai recipe) के लिए छैने के गोले पक कर बिलकुकल तैयार हैं।
आधा कप उबले हुए पानी में बादाम और पिस्ता को आधे घंटे के लिए भिगो कर रख दें आधे घंटे बाद बादाम का छिलका उतारकर काट लें।
दूध को कढ़ाई या फिर भारी तले के बर्तन में उबलने के लिए रख दें दूध में जब उबाल आने लगे तो दो टेबल स्पून दूध एक कटोरी में लेकर उसमे केसर डाल कर घोल ले दूध में जब उबाल आ जाए तो गैस को बिलकुल स्लो कर दें।
दूध को गाढ़ा होने तक उबालना है जब तक कि वह आधा न रह जाएं और इस दौरान दूध को बराबर चलाते रहे और किनारो पर से मलाई खुरच-खुरच कर दूध में मिलाते रहे ताकि मलाई किनारो पर बिलकुल न चिपके।
जब दूध जलकर आधा रह जाएं तो फिर इसमे चीनी मिला दें अब इलाइची पाउडर, कटे हुए बादाम पिस्ता और केसर का घोल मिला कर चलाएं अगर चीनी कम हो तो स्वादअनुसार और चीनी मिला लें।
अब छेने के गोलों को दूध में मिला दें और 2 से 3 मिनट बाद गैस को बंद कर दे और गुलाब जल भी मिला दें जब रसमलाई बिलकुल ठंडी हो जाए तो फिर इसे फ्रीज में रखकर और ठंडी कर लें अब आपकी रसमलाई (Ras malai) बनकर तैयार है इसे बादाम और पिस्ते से सजाकर ठंडी-ठंडी रसमलाई खुद भी खाए और मेहमानो को भी खिलाएं।
इस रेसिपी से जुडा हुआ कोई भी सवाल आप के मन में हो तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में लिखें या अपनी राय दें।
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रसमलाई बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट बंगाली मिठाई है। आप इसे अक्सर ही त्यौहारों पर बाज़ार से लाकर खाते होंगे लेकिन अगर आप इसे घर पर ही बनाएं तो कितना अच्छा रहेगा बनाने में यह जितनी मुश्किल लगती है उतनी है नहीं। इस बार जब भी आपका रसमलाई खाने का मन हो तो फिर आप इसे घर पर ही बना कर देखें। तो फिर आइये आज रसमलाई बनाएं। छैना में एक चम्मच बारीक़ सूजी या फिर मैदा मिलाएं और हाथ और उंगलियों से छैना को दबाते हुए चिकनाहट आने तक मल लें अब छैने को छोटे-छोटे भागो में बाँट कर लड्डू की तरह से दबाकर उसे बाइन्ड करते हुए गोल और चपटा आकार देकर चिकना कर लें और सारे के सारे गोले इसी तरह से बनाकर तैयार कर लें। अब एक भगोने में तीन सौ पचास ग्राम चीनी में तीन कप पानी डालकर तेज़ गैस पर रख दें जब पानी उबलने लगे और चीनी पानी में पूरी तरह से घुल जाएं तो छैने से बने हुए सारे गोले इस उबलते पानी में डाल दें और बीस मिनट तक पकने दें गोले उबल कर करीब आकार में दुगुने हो जाते हैं रसमलाई के लिए छैने के गोले पक कर बिलकुकल तैयार हैं। आधा कप उबले हुए पानी में बादाम और पिस्ता को आधे घंटे के लिए भिगो कर रख दें आधे घंटे बाद बादाम का छिलका उतारकर काट लें। दूध को कढ़ाई या फिर भारी तले के बर्तन में उबलने के लिए रख दें दूध में जब उबाल आने लगे तो दो टेबल स्पून दूध एक कटोरी में लेकर उसमे केसर डाल कर घोल ले दूध में जब उबाल आ जाए तो गैस को बिलकुल स्लो कर दें। दूध को गाढ़ा होने तक उबालना है जब तक कि वह आधा न रह जाएं और इस दौरान दूध को बराबर चलाते रहे और किनारो पर से मलाई खुरच-खुरच कर दूध में मिलाते रहे ताकि मलाई किनारो पर बिलकुल न चिपके। जब दूध जलकर आधा रह जाएं तो फिर इसमे चीनी मिला दें अब इलाइची पाउडर, कटे हुए बादाम पिस्ता और केसर का घोल मिला कर चलाएं अगर चीनी कम हो तो स्वादअनुसार और चीनी मिला लें। अब छेने के गोलों को दूध में मिला दें और दो से तीन मिनट बाद गैस को बंद कर दे और गुलाब जल भी मिला दें जब रसमलाई बिलकुल ठंडी हो जाए तो फिर इसे फ्रीज में रखकर और ठंडी कर लें अब आपकी रसमलाई बनकर तैयार है इसे बादाम और पिस्ते से सजाकर ठंडी-ठंडी रसमलाई खुद भी खाए और मेहमानो को भी खिलाएं। इस रेसिपी से जुडा हुआ कोई भी सवाल आप के मन में हो तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में लिखें या अपनी राय दें।
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महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ कौन बनेगा करोड़पति 14 (KBC 14) के सेट पर एक बड़ा हादसा हो गया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रात 1 बजे शूटिंग के दौरान गलती से उनके बाएं पैर की नस कट गई. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर ने उनके पैर में टांके लगाए. डॉक्टर ने बिग बी को फिलहाल आराम करने की सलाह दी है. अमिताभ बच्चन को पैरों पर जोर देने या चलने से मना किया गया है. यहां तक कि वो ट्रेडमिल पर भी नहीं चल सकेंगे. अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के माध्यम से इस घटना की जानकारी दी.
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महानायक अमिताभ बच्चन के साथ कौन बनेगा करोड़पति चौदह के सेट पर एक बड़ा हादसा हो गया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रात एक बजे शूटिंग के दौरान गलती से उनके बाएं पैर की नस कट गई. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर ने उनके पैर में टांके लगाए. डॉक्टर ने बिग बी को फिलहाल आराम करने की सलाह दी है. अमिताभ बच्चन को पैरों पर जोर देने या चलने से मना किया गया है. यहां तक कि वो ट्रेडमिल पर भी नहीं चल सकेंगे. अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के माध्यम से इस घटना की जानकारी दी.
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जन्माष्टमी (Janmashtami 2022) का व्रत हिंदू धर्म में सबसे पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत उन महिलाओं को जरूर रखना चाहिए , जो निःसंतान हैं। जन्माष्टमी का व्रत रखने से निःसंतान महिला को संतान की प्राप्ति होती है।
इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। अब मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद मंदिर में मौजूद सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें। इस दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाकर उन्हें झूला झुलाएं। इस दिन लड्डू गोपाल का दूध से जलाभिषेक करना चाहिए। अब लड्डू गोपाल को भोग लगाएं। (Janmashtami 2022)
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जन्माष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में सबसे पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत उन महिलाओं को जरूर रखना चाहिए , जो निःसंतान हैं। जन्माष्टमी का व्रत रखने से निःसंतान महिला को संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। अब मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद मंदिर में मौजूद सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें। इस दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाकर उन्हें झूला झुलाएं। इस दिन लड्डू गोपाल का दूध से जलाभिषेक करना चाहिए। अब लड्डू गोपाल को भोग लगाएं।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। साथ में पत्नी सविता कोविंद भी हैं। महामहिम शुक्रवार शाम विशेष विमान से भोपाल पहुंचे। जहां एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फूलों का गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया।
महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अब शाम सात बजे के बाद और सुबह छह बजे से पहले ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं होगी। साथ ही इस अवधि में कार्य करने से इंकार करने पर महिला को काम से हटाया नहीं जाएगा।
लखनऊ में पीजीआइ थाने में देर रात युवकों ने थाने के अंदर ही सिपाही पर रिवाल्वर तान दी। इतना ही नहीं कारण पूछने पर सिपाही के साथ मारपीट भी की। महिला के साथ हुए दुष्कर्म को लेकर पैरवी करने गए थे। पुलिसकर्मी की शिकायत के बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा(Bus accident in Jammu and Kashmir's Doda district) हो गया। डोडा जिले से आ रही एक एक बस उधमपुर के बट्टल बलियान इलाके में बेकाबू होकर पलट गई। इस हादसे में 25 से अधिक यात्री घायल हुए हैं। घायलों को उधमपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 6 घायलों को जम्मू के सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया है।
हरियाणा के सिरसा से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक युवक ने गाय के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने गाय के मुंह में विस्फोटक पदार्थ रख दिया। गाय ने इसे चबाया और धमाके के साथ उसका मुंह उड़ गया।
अमेठी में एक नवविवाहिता ने अपनी सास की मामूली बात से आहत होकर आत्महत्या कर ली। उसका शादी के बाद गौना भी नहीं हुआ था। मृतका के पति व ससुर दिल्ली में रहकर मजदूरी करते है। मृतका की मौत पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
राजधानी के गोसाईगंज मदरसे के अंदर बच्चों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सख्ती के नाम पर किशोरों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। मदरसे में दो बच्चों को पैरों में जंजीर बांधने के बाद ताला जड़कर उन्हें पढ़ाया जा रहा था। जिसकी सफाई उनके परिजनों ने दी है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक विधवा के निकाह से इनकार करने पर एक सनकी ने सरेआम चाकू से गोंदकर उसे मरने की स्थिति में भेज दिया। इस घटना का दिल दहलाने वाला CCTV फुटेज(Shocking CCTV footage of Attempt To murder) सामने आया है। देखिए वीडियो कि कैसे आरोपी ने दिया घटना को अंजाम. .
बिहार की स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना में ग्रामीण विकास विभाग के डिप्टी सचिव शैलेन्द्र कुमार भारती के घर छापा मारा। इस दौरान दो करोड़ के जेवरात, एक फ्लैट, बांका में 50 लाख की संपत्ति और अलग-अलग बैंकों में 27 लाख रुपए मिले।
गोंडा के बाद सोनभद्र में भी दुल्हन विदाई से पहले परीक्षा केंद्र पहुंची। जिसे देखकर हर कोई हैरान हो गया। उसके बाद युवती को कॉलेज से ही सीधा विदाई दी गई। इस वजह से वहां के स्थानीय लोग आश्चर्यचकित है और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। साथ में पत्नी सविता कोविंद भी हैं। महामहिम शुक्रवार शाम विशेष विमान से भोपाल पहुंचे। जहां एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फूलों का गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया। महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अब शाम सात बजे के बाद और सुबह छह बजे से पहले ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं होगी। साथ ही इस अवधि में कार्य करने से इंकार करने पर महिला को काम से हटाया नहीं जाएगा। लखनऊ में पीजीआइ थाने में देर रात युवकों ने थाने के अंदर ही सिपाही पर रिवाल्वर तान दी। इतना ही नहीं कारण पूछने पर सिपाही के साथ मारपीट भी की। महिला के साथ हुए दुष्कर्म को लेकर पैरवी करने गए थे। पुलिसकर्मी की शिकायत के बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। डोडा जिले से आ रही एक एक बस उधमपुर के बट्टल बलियान इलाके में बेकाबू होकर पलट गई। इस हादसे में पच्चीस से अधिक यात्री घायल हुए हैं। घायलों को उधमपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छः घायलों को जम्मू के सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया है। हरियाणा के सिरसा से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक युवक ने गाय के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने गाय के मुंह में विस्फोटक पदार्थ रख दिया। गाय ने इसे चबाया और धमाके के साथ उसका मुंह उड़ गया। अमेठी में एक नवविवाहिता ने अपनी सास की मामूली बात से आहत होकर आत्महत्या कर ली। उसका शादी के बाद गौना भी नहीं हुआ था। मृतका के पति व ससुर दिल्ली में रहकर मजदूरी करते है। मृतका की मौत पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी है। राजधानी के गोसाईगंज मदरसे के अंदर बच्चों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सख्ती के नाम पर किशोरों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। मदरसे में दो बच्चों को पैरों में जंजीर बांधने के बाद ताला जड़कर उन्हें पढ़ाया जा रहा था। जिसकी सफाई उनके परिजनों ने दी है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक विधवा के निकाह से इनकार करने पर एक सनकी ने सरेआम चाकू से गोंदकर उसे मरने की स्थिति में भेज दिया। इस घटना का दिल दहलाने वाला CCTV फुटेज सामने आया है। देखिए वीडियो कि कैसे आरोपी ने दिया घटना को अंजाम. . बिहार की स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना में ग्रामीण विकास विभाग के डिप्टी सचिव शैलेन्द्र कुमार भारती के घर छापा मारा। इस दौरान दो करोड़ के जेवरात, एक फ्लैट, बांका में पचास लाख की संपत्ति और अलग-अलग बैंकों में सत्ताईस लाख रुपए मिले। गोंडा के बाद सोनभद्र में भी दुल्हन विदाई से पहले परीक्षा केंद्र पहुंची। जिसे देखकर हर कोई हैरान हो गया। उसके बाद युवती को कॉलेज से ही सीधा विदाई दी गई। इस वजह से वहां के स्थानीय लोग आश्चर्यचकित है और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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DESK: पीएम मोदी ने देश में जारी लॉकडाउन की अवधि को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया है. साथ ही प्रधानमंत्री ने अगले एक सप्ताह लॉकडाउन को और कठोरता से लागू कराने की बात कही है।
पीएम मोदी ने कहा है कि अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी. 20 अप्रैल तक हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बारीकी से परखा जाएगा. इसके बाद कुछ शर्त के साथ ढील दी जा सकती है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लॉकडाउन के दौरान देशवासियों के धैर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारा ये प्रयास कोरोना को रोकने में काफी हद तक सफल रहा है. हालांकि, लॉकडाउन में ढील के बजाय पीएम मोदी ने और ज्यादा सख्ती का संदेश दिया है.
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DESK: पीएम मोदी ने देश में जारी लॉकडाउन की अवधि को तीन मई तक बढ़ाने का ऐलान किया है. साथ ही प्रधानमंत्री ने अगले एक सप्ताह लॉकडाउन को और कठोरता से लागू कराने की बात कही है। पीएम मोदी ने कहा है कि अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी. बीस अप्रैल तक हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बारीकी से परखा जाएगा. इसके बाद कुछ शर्त के साथ ढील दी जा सकती है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लॉकडाउन के दौरान देशवासियों के धैर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारा ये प्रयास कोरोना को रोकने में काफी हद तक सफल रहा है. हालांकि, लॉकडाउन में ढील के बजाय पीएम मोदी ने और ज्यादा सख्ती का संदेश दिया है.
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जयंत सेन धाम रात में रोशनी से जगमग है। रात में तीर्थ की छटा निराली हो जाती है। पूरे तीर्थ परिसर में लगी आकर्षक विद्युत सज्जा सबका मन मोह लेती है। राष्ट्र संत जैनाचार्य श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीश्वर जी के मंगल प्रवेश के बाद से अनुयायियों का तांता लगा हुआ है।
राष्ट्रसंत जयंतसेन सूरीश्वरजी की निश्रा में आराधकों ने जप-तप का क्रम शुरू कर दिया है। आराधक प्रतिदिन तपस्या के प्रत्याख्यान ले रहे हैं। मासक्षमण की तपस्या 24 जुलाई से शुरू होने वाली है, जबकि 21 उपवास की तपस्या 2 अगस्त, 16 उपवास की 7 अगस्त और 11 व 8 उपवास की तपस्या 12 अगस्त से प्रारंभ होगी। तपस्वियों का सामूहिक पारणा 23 अगस्त को होगा।
त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र लोढ़ा और अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र भंडारी ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया। चातुर्मास आयोजक व विधायक चेतन्य काश्यप परिवार के सदस्य, रतलाम श्रीसंघ की ओर से राजेंद्र सुराना, अभय बरबेटा, मुकेश ओरा, राजकमल जैन आदि ने उनका बहुमान किया।
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जयंत सेन धाम रात में रोशनी से जगमग है। रात में तीर्थ की छटा निराली हो जाती है। पूरे तीर्थ परिसर में लगी आकर्षक विद्युत सज्जा सबका मन मोह लेती है। राष्ट्र संत जैनाचार्य श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीश्वर जी के मंगल प्रवेश के बाद से अनुयायियों का तांता लगा हुआ है। राष्ट्रसंत जयंतसेन सूरीश्वरजी की निश्रा में आराधकों ने जप-तप का क्रम शुरू कर दिया है। आराधक प्रतिदिन तपस्या के प्रत्याख्यान ले रहे हैं। मासक्षमण की तपस्या चौबीस जुलाई से शुरू होने वाली है, जबकि इक्कीस उपवास की तपस्या दो अगस्त, सोलह उपवास की सात अगस्त और ग्यारह व आठ उपवास की तपस्या बारह अगस्त से प्रारंभ होगी। तपस्वियों का सामूहिक पारणा तेईस अगस्त को होगा। त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र लोढ़ा और अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र भंडारी ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया। चातुर्मास आयोजक व विधायक चेतन्य काश्यप परिवार के सदस्य, रतलाम श्रीसंघ की ओर से राजेंद्र सुराना, अभय बरबेटा, मुकेश ओरा, राजकमल जैन आदि ने उनका बहुमान किया।
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घेवड़ा की लता, पुष्प एवं फल गिल्की के परिपक्व फल के सूखने पर उसके अन्दर की रेशेदार रचना घेवड़ा (वैज्ञानिक नामः Luffa aegyptiaca) को 'नेनुआ' और 'गिल्की' आदि नामों से भी जाना जाता है। यह एक लता वाली वनस्पति है जिसके फलों की सब्जी बनती है। इसके फूल पीले रंग के होते हैं। .
1 संबंधः तिंवरी।
तिंवरी भारत के राजस्थान राज्य के जोधपुर ज़िले की एक तहसील तथा उपनगर है। तिंवरी के नजदीकी कस्बे मथानिया तथा घेवड़ा है। .
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घेवड़ा की लता, पुष्प एवं फल गिल्की के परिपक्व फल के सूखने पर उसके अन्दर की रेशेदार रचना घेवड़ा को 'नेनुआ' और 'गिल्की' आदि नामों से भी जाना जाता है। यह एक लता वाली वनस्पति है जिसके फलों की सब्जी बनती है। इसके फूल पीले रंग के होते हैं। . एक संबंधः तिंवरी। तिंवरी भारत के राजस्थान राज्य के जोधपुर ज़िले की एक तहसील तथा उपनगर है। तिंवरी के नजदीकी कस्बे मथानिया तथा घेवड़ा है। .
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जम्मूःजम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, न कि इसे खरीदने की पुरानी प्रथा जारी रखने के लिए।
सिन्हा ने यहां राजभवन में संवाददाताओं से कहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने में सुरक्षा बलों ने बढ़त हासिल कर ली है और वे केंद्र शासित प्रदेश में उग्रवादी इकोसिस्टम को नष्ट करने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, हम शांति नहीं खरीदेंगे। हम जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करेंगे।
सिन्हा ने कहा कि वे दिन गए, जब जम्मू-कश्मीर में शांति खरीदी जा रही थी।
हम आतंकवाद के इकोसिस्टम को उसकी जड़ों से नष्ट करना चाहते हैं। इसमें समय लग सकता है, लेकिन सरकार उग्रवादी इकोसिस्टम को नष्ट कर देगी।
उन्होंने कहा, सुरक्षा बलों का पलड़ा भारी है। यह एक स्वीकृत तथ्य है। हमारे सुरक्षा बल उनकी रीढ़ तोड़ने में सक्षम हैं।
सिन्हा ने कहा कि उग्रवादी हताशा में सॉफ्ट टारगेट पर हमला कर रहे हैं, लेकिन इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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जम्मूःजम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, न कि इसे खरीदने की पुरानी प्रथा जारी रखने के लिए। सिन्हा ने यहां राजभवन में संवाददाताओं से कहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने में सुरक्षा बलों ने बढ़त हासिल कर ली है और वे केंद्र शासित प्रदेश में उग्रवादी इकोसिस्टम को नष्ट करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम शांति नहीं खरीदेंगे। हम जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करेंगे। सिन्हा ने कहा कि वे दिन गए, जब जम्मू-कश्मीर में शांति खरीदी जा रही थी। हम आतंकवाद के इकोसिस्टम को उसकी जड़ों से नष्ट करना चाहते हैं। इसमें समय लग सकता है, लेकिन सरकार उग्रवादी इकोसिस्टम को नष्ट कर देगी। उन्होंने कहा, सुरक्षा बलों का पलड़ा भारी है। यह एक स्वीकृत तथ्य है। हमारे सुरक्षा बल उनकी रीढ़ तोड़ने में सक्षम हैं। सिन्हा ने कहा कि उग्रवादी हताशा में सॉफ्ट टारगेट पर हमला कर रहे हैं, लेकिन इस पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार चेन्नई की इस जीत में बल्लेबाज सुरेश रैना व स्पिनर इमरान ताहिर ने सबसे अहम किरदार अदा की. रैना ने जहां 42 गेंदों में 7 चौकों व एक छक्के की बदौलत नाबाद 58 रन की पारी खेली, वहीं ताहिर ने 4 ओवर में 27 रन देकर 4 अहम विकेट चटकाए. इसके अतिरिक्त ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा ने 17 गेंदों पर 5 चौकों की मदद से शानदार 31 रन बनाए.
इसी के साथ कोलकाता की तरफ से सुनील नरेन व पीयूष चावला ने गेंदबाजी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. दोनों ही गेंदबाजों ने दो-दो विकेट हासिल किए. इसके अतिरिक्त हैरी गर्नी के खाते में एक विकेट आया. वही इससे पहले चेन्नई को टीम को पहला झटका ओपनर बल्लेबाज शेन वॉटसन के रूप में लगा. कोलकाता के तेज गेंदबाज हैरी गर्नी ने उन्हें महज 6 रन के स्कोर एलबीडबल्यू आउट कर क्रीज से चलता किया. चेन्नई को दूसरा झटका उसके दूसरे ओपनर बल्लेबाज फाफ डूप्लेसिस के रूप मे लगा।
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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार चेन्नई की इस जीत में बल्लेबाज सुरेश रैना व स्पिनर इमरान ताहिर ने सबसे अहम किरदार अदा की. रैना ने जहां बयालीस गेंदों में सात चौकों व एक छक्के की बदौलत नाबाद अट्ठावन रन की पारी खेली, वहीं ताहिर ने चार ओवर में सत्ताईस रन देकर चार अहम विकेट चटकाए. इसके अतिरिक्त ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा ने सत्रह गेंदों पर पाँच चौकों की मदद से शानदार इकतीस रन बनाए. इसी के साथ कोलकाता की तरफ से सुनील नरेन व पीयूष चावला ने गेंदबाजी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. दोनों ही गेंदबाजों ने दो-दो विकेट हासिल किए. इसके अतिरिक्त हैरी गर्नी के खाते में एक विकेट आया. वही इससे पहले चेन्नई को टीम को पहला झटका ओपनर बल्लेबाज शेन वॉटसन के रूप में लगा. कोलकाता के तेज गेंदबाज हैरी गर्नी ने उन्हें महज छः रन के स्कोर एलबीडबल्यू आउट कर क्रीज से चलता किया. चेन्नई को दूसरा झटका उसके दूसरे ओपनर बल्लेबाज फाफ डूप्लेसिस के रूप मे लगा।
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लहसुन की चटनी बनाने के लिए आज आपको बताएँगे देसी तरीके . .
जानें तिल की रेवड़ी बनाने की ये आसान विधि. .
ऐसे बनाए स्वादिष्ट वेज मंचूरियन मोमोज. .
घर की पार्टी के लिए बनाए खास मखाना मटर की सब्जी. .
किसी भी पार्टी में स्टार्ट्स के रूप में सर्व करे काले चने का शामी कबाब. .
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लहसुन की चटनी बनाने के लिए आज आपको बताएँगे देसी तरीके . . जानें तिल की रेवड़ी बनाने की ये आसान विधि. . ऐसे बनाए स्वादिष्ट वेज मंचूरियन मोमोज. . घर की पार्टी के लिए बनाए खास मखाना मटर की सब्जी. . किसी भी पार्टी में स्टार्ट्स के रूप में सर्व करे काले चने का शामी कबाब. .
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बॉलीवुड एक्टर और सुपर मॉडल रहे मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस और हॉट बॉडी के लिए हमेशा चर्चा में रहते है. अक्सर सोशल मीडिया पर हम मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता के रनिंग या वर्क आउट वीडियोस देखते रहते है. ये दोनों कपल हमे बहुत मोटीवेट और फिटनेस गोल्स देते है. लेकिन आज इस विडियो में हम मिलिंद की फिटनेस नहीं बल्कि उनकी 81 साल की माँ के बारें में बात करेंगे.
मिलिंद सोमन की मां ऊषा सोमन का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायल हो रहा है. इस वीडियो में वो स्किपिंग और पुश-अप्स करते हुए नजर आ रही हैं. 81 साल की उम्र में उन्हें स्किपिंग और पुश-अप्स करते हुए देख हर कोई हैरान है. उम्र के इस पड़ाव पर भी उषा ने अपने आप को एकदम फिट रखा हुआ.
इस वीडियो को मिलिंद सोमन की पत्नी अंकिता कंवर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. इस वीडियो में ऊषा बता रही हैं कि age is उम्र सिर्फ एक नंबर भर है. वीडियो की शुरुआत में वह कहती हैं,"हम में से हर किसी में एक वंडर वुमन है. " इसके बाद वह एक छत पर स्किपिंग करती हुई नजर आ रही हैं. इसके बाद वह पुश-अप्स करती हुईं दिखाई दे रही हैं.
अंकिता ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा,"जो लोग मुझे जानते हैं, उन्हें पता है कि मैं वंडर वुमन को कितना पसंद करती हूं. हम में से हर किसी के भीतर एक वंडर वुमन है. ऊषा सोमन 81 की उम्र में! "
81 वर्ष की ऊषा को साड़ी पहनकर पुशअप्स लगाते देख हर कोई हैरान है और इस वीडियो को खूब शेयर कर रहा है. विडियो पर लोग खूब कमेंट कर रहे है. ऊषा सोमन का ये विडियो हम सबके लिए बहुत इन्स्पारिंग है. उषा सोमन रोज़ वर्कआउट करती है और साथ ही अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखती है.
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बॉलीवुड एक्टर और सुपर मॉडल रहे मिलिंद सोमन अपनी फिटनेस और हॉट बॉडी के लिए हमेशा चर्चा में रहते है. अक्सर सोशल मीडिया पर हम मिलिंद और उनकी पत्नी अंकिता के रनिंग या वर्क आउट वीडियोस देखते रहते है. ये दोनों कपल हमे बहुत मोटीवेट और फिटनेस गोल्स देते है. लेकिन आज इस विडियो में हम मिलिंद की फिटनेस नहीं बल्कि उनकी इक्यासी साल की माँ के बारें में बात करेंगे. मिलिंद सोमन की मां ऊषा सोमन का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायल हो रहा है. इस वीडियो में वो स्किपिंग और पुश-अप्स करते हुए नजर आ रही हैं. इक्यासी साल की उम्र में उन्हें स्किपिंग और पुश-अप्स करते हुए देख हर कोई हैरान है. उम्र के इस पड़ाव पर भी उषा ने अपने आप को एकदम फिट रखा हुआ. इस वीडियो को मिलिंद सोमन की पत्नी अंकिता कंवर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. इस वीडियो में ऊषा बता रही हैं कि age is उम्र सिर्फ एक नंबर भर है. वीडियो की शुरुआत में वह कहती हैं,"हम में से हर किसी में एक वंडर वुमन है. " इसके बाद वह एक छत पर स्किपिंग करती हुई नजर आ रही हैं. इसके बाद वह पुश-अप्स करती हुईं दिखाई दे रही हैं. अंकिता ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा,"जो लोग मुझे जानते हैं, उन्हें पता है कि मैं वंडर वुमन को कितना पसंद करती हूं. हम में से हर किसी के भीतर एक वंडर वुमन है. ऊषा सोमन इक्यासी की उम्र में! " इक्यासी वर्ष की ऊषा को साड़ी पहनकर पुशअप्स लगाते देख हर कोई हैरान है और इस वीडियो को खूब शेयर कर रहा है. विडियो पर लोग खूब कमेंट कर रहे है. ऊषा सोमन का ये विडियो हम सबके लिए बहुत इन्स्पारिंग है. उषा सोमन रोज़ वर्कआउट करती है और साथ ही अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखती है.
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राज्य भर में चिकित्सकों के हड़ताल के आहवान के चलते गुरुवार को जिला सिरमौर के नाहन सिथित डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन व जिला के अन्य क्षेत्रों में डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल पर रहे। सिरमौर जिला के समस्त हिस्सों से डॉक्टर पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए हैं। नाहन सिथित डॉण् वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज में इस दौरान जिला के विभिन्न हिस्सों से आने वाले तीमारदारों व मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों के विरोध में अब डाक्टरों का संयुक्त मोर्चा सामने आया है, जिसमें वेटरनरी एलोपैथी व आयुर्वेद से लेकर सभी श्रेणियां शामिल हैं। डॉ यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन के डॉक्टर्स भी सुबह साढ़े 9 से साढ़े 11 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक पर रहे। इस दौरान करीब 2 घंटे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भले ही इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रही। जिला सिरमौर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन नाहन के पदाधिकारी डॉ प्रवेश अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के डॉक्टर्स 2 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हंै। उन्होंने कहा कि सभी डाक्टरों के साथ वेतन विसंगतियां सामने आई हैं। चार प्रमुख बिंदुओं पर संघ संयुक्त मोर्चा के साथ खड़ा है। वेटरनरी डाक्टरों का उच्चतर वेतनमान पंजाब में 2 लाख 37 हजार हैए तो हिमाचल ने इसे 2 लाख 18 हजार पर फ्रीज कर दिया है। ऐसे में मांग है कि पंजाब की तर्ज पर वेतनमान दिया जाए। उधर, राजगढ़ में पंजाब वेतनमान को प्रदेश में लागू न किये जाने के विरोध में राजगढ़ के चिकित्सकों ने भी भाग लिया और सुबह साढ़े 9 साढ़े से साढ़े 11 बजे तक दो घण्टे तक ओ पी डी बाधित रही । आपातकालीन सेवाएं जारी रही लेकिन ओ पी डी में मरीजों को दो घण्टे इंतजार करना पड़ा । प्रभारी नागरिक चिकित्सालय राजगढ़ ने बताया कि प्रदेश के सभी चिकित्सक पंजाब वेतनमान को लागू नहीं करने पर अत्यंत हतोत्साहित हैं।
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राज्य भर में चिकित्सकों के हड़ताल के आहवान के चलते गुरुवार को जिला सिरमौर के नाहन सिथित डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन व जिला के अन्य क्षेत्रों में डॉक्टर पेन डाउन हड़ताल पर रहे। सिरमौर जिला के समस्त हिस्सों से डॉक्टर पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए हैं। नाहन सिथित डॉण् वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज में इस दौरान जिला के विभिन्न हिस्सों से आने वाले तीमारदारों व मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों के विरोध में अब डाक्टरों का संयुक्त मोर्चा सामने आया है, जिसमें वेटरनरी एलोपैथी व आयुर्वेद से लेकर सभी श्रेणियां शामिल हैं। डॉ यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन के डॉक्टर्स भी सुबह साढ़े नौ से साढ़े ग्यारह बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक पर रहे। इस दौरान करीब दो घंटाटे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भले ही इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रही। जिला सिरमौर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन नाहन के पदाधिकारी डॉ प्रवेश अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के डॉक्टर्स दो घंटाटे की पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हंै। उन्होंने कहा कि सभी डाक्टरों के साथ वेतन विसंगतियां सामने आई हैं। चार प्रमुख बिंदुओं पर संघ संयुक्त मोर्चा के साथ खड़ा है। वेटरनरी डाक्टरों का उच्चतर वेतनमान पंजाब में दो लाख सैंतीस हजार हैए तो हिमाचल ने इसे दो लाख अट्ठारह हजार पर फ्रीज कर दिया है। ऐसे में मांग है कि पंजाब की तर्ज पर वेतनमान दिया जाए। उधर, राजगढ़ में पंजाब वेतनमान को प्रदेश में लागू न किये जाने के विरोध में राजगढ़ के चिकित्सकों ने भी भाग लिया और सुबह साढ़े नौ साढ़े से साढ़े ग्यारह बजे तक दो घण्टे तक ओ पी डी बाधित रही । आपातकालीन सेवाएं जारी रही लेकिन ओ पी डी में मरीजों को दो घण्टे इंतजार करना पड़ा । प्रभारी नागरिक चिकित्सालय राजगढ़ ने बताया कि प्रदेश के सभी चिकित्सक पंजाब वेतनमान को लागू नहीं करने पर अत्यंत हतोत्साहित हैं।
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केंद्र सरकार ने विवाह कानूनों में सुधार को हरी झंडी दे दी है। संसद से मंजूरी मिल जाने पर अब पटरी पर वापस न आ सकने वाले वैवाहिक संबंधों को अलविदा कहना आसान हो जाएगा, अलग होने वाली पत्नी को पति की संपत्ति से हिस्सा मिल सकेगा, तलाक के समय बच्चों और पत्नी की आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा और गोद लिए गए बच्चे को खुद की संतानों जैसे हक हासिल होंगे। वैवाहिक संबंधों को जन्म-जन्मांतर का बंधन मानने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है और ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो इसे रजामंदी पर आधारित संबंध मानते हैं। इसलिए जब उन्हें लगता है कि अब उनके लिए एक साथ रहना असंभव हो गया है तो खूबसूरती से अलग हो जाना चाहते हैं। इसे कानूनी शक्ल देने की पहले कोशिशें की जा चुकी हैं। विधि आयोग ने सन 1978 में अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि ऐसे हालात में पति-पत्नी को विवाह विच्छेद का अधिकार मिलना चाहिए। 27 फरवरी, 1981 को लोकसभा में विधेयक पेश किया गया, लेकिन इसके पारित होने से पहले ही सातवीं लोकसभा भंग हो गई। इसके बाद सन 1985 में जॉर्डन बनाम चोपड़ा के मामले में और फिर 2006 में नवीन कोहली बनाम नीलू कोहली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे हालात में पारस्परिक सहमति के आधार पर पति-पत्नी को विवाह विच्छेद का अधिकार मिलना चाहिए किंतु उसे कानूनी जामा नहीं पहनाया जा सका।
प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से हिंदू विवाह अधिनियम में धारा-13सी जोड़कर तथा विशेष विवाह कानून में संशोधन करके यह व्यवस्था की गई है कि कोई भी व्यक्ति इस आधार पर तलाक की अर्जी दे सकेगा कि अब पति-पत्नी के बीच सामंजस्य की कोई संभावना नहीं है। चूंकि हमारे देश में अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हैं इसलिए उन्हें पति की तुलना में अधिक अधिकार दिए गए हैं। विवाह विच्छेद के लिए इस तरह का कोई मुकदमा यदि पत्नी की तरफ से लाया जाता है तो पति को इसके विरोध का सीमित अधिकार है, किंतु यदि पति तलाक लेना चाहता तो पत्नी की ओर से यह दलील दी जा सकती है कि विवाह-विच्छेद के कारण वह गंभीर आर्थिक कठिनाई में पड़ जाएगी। इसके अलावा इसमें यह व्यवस्था की गई है कि विवाह विच्छेद का आदेश देते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि पत्नी के आर्थिक हित सुरक्षित रहें। हमारी अदालतों में विवाह विच्छेद के करीब दो लाख मामले चल रहे हैं। परिवार अदालतों में लंबित कुल मुकदमों के करीब 80 फीसदी मामलों का संबंध विवाह विच्छेद से जुड़ा है। हमारे देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या अभी भी बहुत कम है।
आर्थिक रूप से वे आज भी पति के ऊपर निर्भर हैं। 95 फीसदी महिलाओं के पास अपने भरण-पोषण का कोई स्वतंत्र जरिया नहीं है। परिणामस्वरूप तलाक के बाद जब वे अलग होती हैं तो अपने मायके और समाज के रहमोकरम पर निर्भर होना पड़ता है। एक तो भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली राशि इतनी कम होती है कि उससे कोई व्यक्ति गुजारा नहीं कर सकता और दूसरे यह कि उसे हासिल करना इतना कठिन होता है कि करीब 90 फीसदी मामलों में उसकी आधी-अधूरी वसूली ही हो पाती है। ऐसे में लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि पत्नी को तलाक के बाद पति की संपत्ति में आधा हिस्सा मिलना चाहिए। सरकार ने इसे पूरे तौर पर स्वीकार करने के बजाय बीच का रास्ता अपनाया है। प्रस्तावित संशोधन में व्यवस्था है कि वैवाहिक जीवन के दौरान पति द्वारा अर्जित की गई संपत्ति में पत्नी को भी हिस्सा मिलेगा, किंतु उस हिस्से को तय करने का अधिकार अदालत को होगा। प्रस्तावित संशोधन में इस बात को मान्यता दी गई है कि गृहस्थी की गाड़ी में पति और पत्नी दोनों की समान भागीदारी होती है। इसलिए यदि विवाह विच्छेद होता है तो गृहस्थ जीवन के दौरान अर्जित की गई संपत्ति पर केवल पति का एकाधिकार न हो, बल्कि पत्नी को भी हिस्सा मिले। कुछ सामाजिक संगठनों ने पत्नी को आधी संपत्ति देने की मांग की थी, किंतु सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि उसके दुरुपयोग की आशंका थी। ऐसा भी संभव था कि केवल संपत्ति में हिस्सा हासिल करने के लिए विवाह करके तलाक देने वाले लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती। इसलिए यह व्यवस्था की गई कि वैवाहिक जीवन के हर पहलू को ध्यान में रखकर अदालत यह तय करे कि पत्नी को पति की संपत्ति में कितना हिस्सा मिलना चाहिए। यह एक प्रशंसनीय कदम है। प्रस्तावित संशोधन में बच्चों की आर्थिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।
हिंदू विवाह कानून में धारा-13इ जोड़कर अदालत की जिम्मेदारी तय की गई है कि विवाह विच्छेद का आदेश तब तक न दिया जाए जब तक कि बच्चों की आर्थिक सुरक्षा निश्चित न हो जाए। सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत बड़ा कदम है। विवाह विच्छेद का सबसे अधिक खामियाजा बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। वे उन बातों के लिए मानसिक तथा सामाजिक दंश का शिकार होते हैं जिन पर उनका कोई वश नहीं था। अपने पिता की अच्छी हैसियत के बावजूद कई बार वे पैसे-पैसे को मोहताज हो जाते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए विधेयक में कहा गया है कि तलाक देने से पहले बच्चों के आर्थिक हित को ऐसी सुरक्षा दी जाएगी जो उनके मां-बाप की हैसियत के अनुरूप हो। इस बहु प्रतिक्षित संशोधन से बच्चों की आर्थिक जरूरतों की भरपाई हो सकेगी और वे मानसिक झटकों से उबर कर उठ खड़े होने की स्थिति में आ सकेंगे।
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केंद्र सरकार ने विवाह कानूनों में सुधार को हरी झंडी दे दी है। संसद से मंजूरी मिल जाने पर अब पटरी पर वापस न आ सकने वाले वैवाहिक संबंधों को अलविदा कहना आसान हो जाएगा, अलग होने वाली पत्नी को पति की संपत्ति से हिस्सा मिल सकेगा, तलाक के समय बच्चों और पत्नी की आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा और गोद लिए गए बच्चे को खुद की संतानों जैसे हक हासिल होंगे। वैवाहिक संबंधों को जन्म-जन्मांतर का बंधन मानने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है और ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो इसे रजामंदी पर आधारित संबंध मानते हैं। इसलिए जब उन्हें लगता है कि अब उनके लिए एक साथ रहना असंभव हो गया है तो खूबसूरती से अलग हो जाना चाहते हैं। इसे कानूनी शक्ल देने की पहले कोशिशें की जा चुकी हैं। विधि आयोग ने सन एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि ऐसे हालात में पति-पत्नी को विवाह विच्छेद का अधिकार मिलना चाहिए। सत्ताईस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी को लोकसभा में विधेयक पेश किया गया, लेकिन इसके पारित होने से पहले ही सातवीं लोकसभा भंग हो गई। इसके बाद सन एक हज़ार नौ सौ पचासी में जॉर्डन बनाम चोपड़ा के मामले में और फिर दो हज़ार छः में नवीन कोहली बनाम नीलू कोहली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे हालात में पारस्परिक सहमति के आधार पर पति-पत्नी को विवाह विच्छेद का अधिकार मिलना चाहिए किंतु उसे कानूनी जामा नहीं पहनाया जा सका। प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से हिंदू विवाह अधिनियम में धारा-तेरहसी जोड़कर तथा विशेष विवाह कानून में संशोधन करके यह व्यवस्था की गई है कि कोई भी व्यक्ति इस आधार पर तलाक की अर्जी दे सकेगा कि अब पति-पत्नी के बीच सामंजस्य की कोई संभावना नहीं है। चूंकि हमारे देश में अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हैं इसलिए उन्हें पति की तुलना में अधिक अधिकार दिए गए हैं। विवाह विच्छेद के लिए इस तरह का कोई मुकदमा यदि पत्नी की तरफ से लाया जाता है तो पति को इसके विरोध का सीमित अधिकार है, किंतु यदि पति तलाक लेना चाहता तो पत्नी की ओर से यह दलील दी जा सकती है कि विवाह-विच्छेद के कारण वह गंभीर आर्थिक कठिनाई में पड़ जाएगी। इसके अलावा इसमें यह व्यवस्था की गई है कि विवाह विच्छेद का आदेश देते समय यह ध्यान रखा जाएगा कि पत्नी के आर्थिक हित सुरक्षित रहें। हमारी अदालतों में विवाह विच्छेद के करीब दो लाख मामले चल रहे हैं। परिवार अदालतों में लंबित कुल मुकदमों के करीब अस्सी फीसदी मामलों का संबंध विवाह विच्छेद से जुड़ा है। हमारे देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या अभी भी बहुत कम है। आर्थिक रूप से वे आज भी पति के ऊपर निर्भर हैं। पचानवे फीसदी महिलाओं के पास अपने भरण-पोषण का कोई स्वतंत्र जरिया नहीं है। परिणामस्वरूप तलाक के बाद जब वे अलग होती हैं तो अपने मायके और समाज के रहमोकरम पर निर्भर होना पड़ता है। एक तो भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली राशि इतनी कम होती है कि उससे कोई व्यक्ति गुजारा नहीं कर सकता और दूसरे यह कि उसे हासिल करना इतना कठिन होता है कि करीब नब्बे फीसदी मामलों में उसकी आधी-अधूरी वसूली ही हो पाती है। ऐसे में लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि पत्नी को तलाक के बाद पति की संपत्ति में आधा हिस्सा मिलना चाहिए। सरकार ने इसे पूरे तौर पर स्वीकार करने के बजाय बीच का रास्ता अपनाया है। प्रस्तावित संशोधन में व्यवस्था है कि वैवाहिक जीवन के दौरान पति द्वारा अर्जित की गई संपत्ति में पत्नी को भी हिस्सा मिलेगा, किंतु उस हिस्से को तय करने का अधिकार अदालत को होगा। प्रस्तावित संशोधन में इस बात को मान्यता दी गई है कि गृहस्थी की गाड़ी में पति और पत्नी दोनों की समान भागीदारी होती है। इसलिए यदि विवाह विच्छेद होता है तो गृहस्थ जीवन के दौरान अर्जित की गई संपत्ति पर केवल पति का एकाधिकार न हो, बल्कि पत्नी को भी हिस्सा मिले। कुछ सामाजिक संगठनों ने पत्नी को आधी संपत्ति देने की मांग की थी, किंतु सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि उसके दुरुपयोग की आशंका थी। ऐसा भी संभव था कि केवल संपत्ति में हिस्सा हासिल करने के लिए विवाह करके तलाक देने वाले लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती। इसलिए यह व्यवस्था की गई कि वैवाहिक जीवन के हर पहलू को ध्यान में रखकर अदालत यह तय करे कि पत्नी को पति की संपत्ति में कितना हिस्सा मिलना चाहिए। यह एक प्रशंसनीय कदम है। प्रस्तावित संशोधन में बच्चों की आर्थिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। हिंदू विवाह कानून में धारा-तेरहइ जोड़कर अदालत की जिम्मेदारी तय की गई है कि विवाह विच्छेद का आदेश तब तक न दिया जाए जब तक कि बच्चों की आर्थिक सुरक्षा निश्चित न हो जाए। सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत बड़ा कदम है। विवाह विच्छेद का सबसे अधिक खामियाजा बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। वे उन बातों के लिए मानसिक तथा सामाजिक दंश का शिकार होते हैं जिन पर उनका कोई वश नहीं था। अपने पिता की अच्छी हैसियत के बावजूद कई बार वे पैसे-पैसे को मोहताज हो जाते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए विधेयक में कहा गया है कि तलाक देने से पहले बच्चों के आर्थिक हित को ऐसी सुरक्षा दी जाएगी जो उनके मां-बाप की हैसियत के अनुरूप हो। इस बहु प्रतिक्षित संशोधन से बच्चों की आर्थिक जरूरतों की भरपाई हो सकेगी और वे मानसिक झटकों से उबर कर उठ खड़े होने की स्थिति में आ सकेंगे।
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रखनाराम ( स० पु० ) इयिक रवनारीच देखो। रहमारा ( हि० पु० ) १ एक प्रकारका धान (श्र०) २ लाखमा । ( वि० ) ३ रखना बे रामारोज (सं० ० ) रवे मार्या चिमोतीति विउ । १ काम । २ कर कुत्ता ३ भवारा संपर। ४ बर
बखन ।
रतनावका ( दि० स्ना० ) नागी खा
रतनिधि (सं० ० ) रवमेय निधियत गोप्य यस्य । पक्षो ममोसा ।
रतबन्ध ( सं० पु० ) रम्पार ।
रविन्च देखो। कि (सं० ला०) रसस्य प्रति दिमायेति कप् । १ दिवस दिन २ सुस्मान ३ अष्टमंगळ । रतलाम - १ मध्यमारत के पश्चिम मानसीक मत ने एक सामन्य राज्य । यह मझा० २३ ६स २३ ३३ उ० तथा ०३४ ३१ से १०० मध्य मे स्थित है। भूपरिमाण ३२६ वर्गमोड ६। राजपूताना माळपर रेलपथ इस राज्यको राजधानी हो कर चला गया है। इसके उत्तर में जीरा और प्रतापगढ़ राज्य, पूर्व में पाटिपर दक्षिण में पार और कुशलगढ़ तथा पुरवमें कुममगढ़ और बांसधारा है। कहते है कि इसक प्रविद्वावा इसमसिंहस राज्यका नामकरण हुआ है, पर यह ठोक नही जंचता क्योंकि बाइनर अकबरों में अबुलफजलन मिला है कि रखनसिक पहले यह राज्य विद्यमाम था और मालधा-सूवाको उज्जैन-सरकारक एक महालमें गिना जाता था ।
भेज कर रतमाम सरकार पर हुकूमत नही कर सकते थे। १८५४ मप्रेम साथ सिग्देराजको जो सम्धि हुई उसके अनुसार ग्वालियर सेनादलका कुछ समज दमेको लिये यह राजन भट्टरेशो के हाथ लगा दिया गया था । तमोस यह वृटिश सरकार के हाथ से ही दिया जाता है । १८५०ई० गरमें बलवन्त सिंह राजसिंहासन पर आये उन्होने गमे सरकारको बासी मदर पड़ा था इस कारण सर कारने उन्ह तथा उनके मंशभरको विसमत दो यो । पोछे १८६४ ६० में रणजित सिंह सिंहासन पर बैठे। उनका नाबालगो अर्थात् १८८० ६००क राजकार्य द्रो सभोत रहा। राज्यको १० साबा रुपयेका देन था, सो
यहाँका राजवंश जोधपुर-राजर्मशकी छोटो शाखा है। परियम मामय प्रजपूत सरदारोमं इन्हो का इस सबसे बेशी है। रतनसिह नामक इस पैशफ किसो विपुपने युद्ध बड़ो बोध्या दिया कर शाहजइसि मालय मम्मत एक जागार पाइ थो । मागे चलकर ये लोग सिम्राकर होकर स्पासियर राजसर कारमै मार्थिक ८४ हजार सम्रोमशाही मुद्रा ( ६६००० प) मे १८१६० तक मनु सार उस मनाया उनके राज्यासन सम्पर्क में म्यालियर-विका कोई अधिकार न रहा में सेना Vol X13 30
के शासनसे कुछ चुका दिया गया। रविवसिंह मे नमक भात्रि पर जो महसूल मगया था, उसे १८८१ इमें उठा दिया केवल भफोम पर रहन दिया। १८८१ ६०म रणजिसिहको R (1E की उपाधि मिठो । १८६३६० में उसका देहान्त बुमा पाछे उनके सड़ राजा सम्रनसिंह सिंहासन पर समिषिक हुए। पेहो वर्तमान राजा है। इन्ह दिन दाइस और राजाको उपाधि है तथा ११ सलामो ठोपें मिलती है।
राज्यमें रतलाम नामक शहर और २०६ माम भगते है। जनसंख्या ८३७७३१ जिसमेंसे हिम्को संख्या सैकड़ पोछे ३२ मोलका १३ मुसलमानकी १२ तथा सम्पान्य जातियां है। यहां की प्रधान प गेहू शुभार मारा और बना है। राज्यको माय ५ लाख रूपपेस ऊपर है। माँ १८३४ ई० में पश्य भोरसे बालकका स्कूल १८००१०में बालिकाका स्कूल मीर १८७२ में रतलाम सेण्ट्रल कालेज स्थापित हुआ। स्कूल मठाया एक मल्पवास और चिकि स्वाक्षय भी है।
२ उक राज्यको राजधानी यह मा० २३१३ उ० तथा देवा० ५२ पू० बम्बईसे ४११ मीसको दूरी पर अवस्थित है। समुश्की वहसे इसको ऊबाह १५३७ फुट है। जनसंख्या 21 हजारसे ऊपर है। यहां काम तथा दूसरे दूसरे मनाओंका जोरों कारभारा ६। नगर हो कर रेल पथक स्थानीय वाणिज्यकी
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रखनाराम इयिक रवनारीच देखो। रहमारा एक एक प्रकारका धान दो लाखमा । तीन रखना बे रामारोज रवे मार्या चिमोतीति विउ । एक काम । दो कर कुत्ता तीन भवारा संपर। चार बर बखन । रतनावका नागी खा रतनिधि रवमेय निधियत गोप्य यस्य । पक्षो ममोसा । रतबन्ध रम्पार । रविन्च देखो। कि रसस्य प्रति दिमायेति कप् । एक दिवस दिन दो सुस्मान तीन अष्टमंगळ । रतलाम - एक मध्यमारत के पश्चिम मानसीक मत ने एक सामन्य राज्य । यह मझाशून्य तेईस छःस तेईस तैंतीस उशून्य तथा चौंतीस इकतीस से एक सौ मध्य मे स्थित है। भूपरिमाण तीन सौ छब्बीस वर्गमोड छः। राजपूताना माळपर रेलपथ इस राज्यको राजधानी हो कर चला गया है। इसके उत्तर में जीरा और प्रतापगढ़ राज्य, पूर्व में पाटिपर दक्षिण में पार और कुशलगढ़ तथा पुरवमें कुममगढ़ और बांसधारा है। कहते है कि इसक प्रविद्वावा इसमसिंहस राज्यका नामकरण हुआ है, पर यह ठोक नही जंचता क्योंकि बाइनर अकबरों में अबुलफजलन मिला है कि रखनसिक पहले यह राज्य विद्यमाम था और मालधा-सूवाको उज्जैन-सरकारक एक महालमें गिना जाता था । भेज कर रतमाम सरकार पर हुकूमत नही कर सकते थे। एक हज़ार आठ सौ चौवन मप्रेम साथ सिग्देराजको जो सम्धि हुई उसके अनुसार ग्वालियर सेनादलका कुछ समज दमेको लिये यह राजन भट्टरेशो के हाथ लगा दिया गया था । तमोस यह वृटिश सरकार के हाथ से ही दिया जाता है । एक हज़ार आठ सौ पचासईशून्य गरमें बलवन्त सिंह राजसिंहासन पर आये उन्होने गमे सरकारको बासी मदर पड़ा था इस कारण सर कारने उन्ह तथा उनके मंशभरको विसमत दो यो । पोछे एक हज़ार आठ सौ चौंसठ साठ में रणजित सिंह सिंहासन पर बैठे। उनका नाबालगो अर्थात् एक हज़ार आठ सौ अस्सी छः सौक राजकार्य द्रो सभोत रहा। राज्यको दस साबा रुपयेका देन था, सो यहाँका राजवंश जोधपुर-राजर्मशकी छोटो शाखा है। परियम मामय प्रजपूत सरदारोमं इन्हो का इस सबसे बेशी है। रतनसिह नामक इस पैशफ किसो विपुपने युद्ध बड़ो बोध्या दिया कर शाहजइसि मालय मम्मत एक जागार पाइ थो । मागे चलकर ये लोग सिम्राकर होकर स्पासियर राजसर कारमै मार्थिक चौरासी हजार सम्रोमशाही मुद्रा मे अट्ठारह हज़ार एक सौ साठ तक मनु सार उस मनाया उनके राज्यासन सम्पर्क में म्यालियर-विका कोई अधिकार न रहा में सेना Vol Xतेरह तीस के शासनसे कुछ चुका दिया गया। रविवसिंह मे नमक भात्रि पर जो महसूल मगया था, उसे एक हज़ार आठ सौ इक्यासी इमें उठा दिया केवल भफोम पर रहन दिया। एक हज़ार आठ सौ इक्यासी साठम रणजिसिहको R (एकE की उपाधि मिठो । एक लाख छियासी हज़ार तीन सौ साठ में उसका देहान्त बुमा पाछे उनके सड़ राजा सम्रनसिंह सिंहासन पर समिषिक हुए। पेहो वर्तमान राजा है। इन्ह दिन दाइस और राजाको उपाधि है तथा ग्यारह सलामो ठोपें मिलती है। राज्यमें रतलाम नामक शहर और दो सौ छः माम भगते है। जनसंख्या आठ लाख सैंतीस हज़ार सात सौ इकतीस जिसमेंसे हिम्को संख्या सैकड़ पोछे बत्तीस मोलका तेरह मुसलमानकी बारह तथा सम्पान्य जातियां है। यहां की प्रधान प गेहू शुभार मारा और बना है। राज्यको माय पाँच लाख रूपपेस ऊपर है। माँ एक हज़ार आठ सौ चौंतीस ईशून्य में पश्य भोरसे बालकका स्कूल एक लाख अस्सी हज़ार दसमें बालिकाका स्कूल मीर एक हज़ार आठ सौ बहत्तर में रतलाम सेण्ट्रल कालेज स्थापित हुआ। स्कूल मठाया एक मल्पवास और चिकि स्वाक्षय भी है। दो उक राज्यको राजधानी यह माशून्य दो हज़ार तीन सौ तेरह उशून्य तथा देवाशून्य बावन पूशून्य बम्बईसे चार सौ ग्यारह मीसको दूरी पर अवस्थित है। समुश्की वहसे इसको ऊबाह एक हज़ार पाँच सौ सैंतीस फुट है। जनसंख्या इक्कीस हजारसे ऊपर है। यहां काम तथा दूसरे दूसरे मनाओंका जोरों कारभारा छः। नगर हो कर रेल पथक स्थानीय वाणिज्यकी
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ग्लेन मैक्सवेल अगले महीने शादी के अटूट बंधन में बंधने जा रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर कंगारु टीम को 24 साल बाद पाकिस्तान दौरे पर भी जाना है। लेकिन अपने शादी की वजह से Glenn Maxwell पाकिस्तान टूर के शुरुआती मैच का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। बता दें कि, खबरें हैं कि ग्लेन मैक्सवेल मार्च 27 को है और आईपीएल भी उसी दिन से शुरू होने वाले हैं जिस वजह से वह आईपीएल का भी हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
क्या है Glen Maxwell का फैसला शादी या पाकिस्तान का टूर?
ऑस्ट्रेलिया 24 साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर जा रही है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर Glen Maxwell के सामने एक परेशानी खड़ी है। ऑस्ट्रेलिया को मार्च में पाकिस्तान दौरे पर जाना है और अगले महीने ही Glen Maxwell की शादी है जिस वजह से वह पाकिस्तान दौरे पर नहीं जा पाएंगे।
25 मार्च को लाहौर में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे टेस्ट का आखिरी दिन है। पहला वन डे रावलपिंडी में 29 मार्च को- शादी 27 मार्च को। लाहौर से शादी के लिए दक्षिण भारत पहुंचना और पहले वनडे तक वापस आना, आज के समय में कुछ ऐसा मुश्किल नहीं जिसे 'असंभव' कह दें। अगर मैक्सवेल चाहते तो ऐसा कर सकते थे।
साल 2004 में सेंचुरियन में साउथ अफ्रीका-वेस्टइंडीज चौथा टेस्ट शुरू होने से पहले मेजबान टीम सीरीज जीत चुकी थी। सीरीज में अंतिम प्रोग्राम बनने से पहले बता दें कि, साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी आंद्रे नेल ने अपने मंगेतर डीन वेइट्ज़ के साथ शादी की योजना बना ली थी। टेस्ट 16 जनवरी को था और 17 जनवरी को शादी। नेल ने भी कोशिश की, कि शादी टाल दें पर सब इंतजाम हो चुके थे- यहां तक की, ढेरों मेहमान बेनोनी में शादी के लिए अपनी फ्लाइट बुक करा चुके थे।
उस समय आंद्रे नेल बहुत ही अच्छे फॉर्म थे और वो सीरीज में तीन बार बार लारा को आउट कर चुके थे। इसलिए टीम को उनकी जरूरत थी। नेल ने उस समय मैच भी खेला और शादी भी की। टेस्ट मैच में पहली बैटिंग साउथ अफ्रीका ने की। मैच के शुरुआत में स्मिथ (139) और गिब्स (192) जोड़े। उसके बाद केलिस (130) चमके और स्मिथ ने दूसरे दिन 604-6 पर पारी समाप्त घोषित की।
वेस्टइंडीज की पारी कि शुरुआत में लाइट खराब होने लग गई थी। अभी स्कोर 7-0 ही था तो अंपायरों ने खराब रोशनी के कारण खेल एक घंटे पहले रोक दिया गया। स्टेडियम के पास ही हेलिकाप्टर का इंतजाम किया हुआ था। आंद्रे नेल हेलिकाप्टर में बैठ कर बेनोनी के लिए उड़ गए। चर्च के पास ही लेंडिंग का इंतज़ाम था। शादी के अगले दिन नेल सेंचुरियन लौट आए। अगले दिन लारा को आउट किया। साउथ अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को फॉलोऑन के लिए कहा। उसी दिन लारा को दूसरी बार आउट किया। जिन लारा का विकेट किसी भी गेंदबाज़ के लिए यादगार होता है, उन्हें नेल ने शादी से अगले दिन दो बार आउट किया।
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ग्लेन मैक्सवेल अगले महीने शादी के अटूट बंधन में बंधने जा रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर कंगारु टीम को चौबीस साल बाद पाकिस्तान दौरे पर भी जाना है। लेकिन अपने शादी की वजह से Glenn Maxwell पाकिस्तान टूर के शुरुआती मैच का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। बता दें कि, खबरें हैं कि ग्लेन मैक्सवेल मार्च सत्ताईस को है और आईपीएल भी उसी दिन से शुरू होने वाले हैं जिस वजह से वह आईपीएल का भी हिस्सा नहीं बन पाएंगे। क्या है Glen Maxwell का फैसला शादी या पाकिस्तान का टूर? ऑस्ट्रेलिया चौबीस साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर जा रही है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर Glen Maxwell के सामने एक परेशानी खड़ी है। ऑस्ट्रेलिया को मार्च में पाकिस्तान दौरे पर जाना है और अगले महीने ही Glen Maxwell की शादी है जिस वजह से वह पाकिस्तान दौरे पर नहीं जा पाएंगे। पच्चीस मार्च को लाहौर में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे टेस्ट का आखिरी दिन है। पहला वन डे रावलपिंडी में उनतीस मार्च को- शादी सत्ताईस मार्च को। लाहौर से शादी के लिए दक्षिण भारत पहुंचना और पहले वनडे तक वापस आना, आज के समय में कुछ ऐसा मुश्किल नहीं जिसे 'असंभव' कह दें। अगर मैक्सवेल चाहते तो ऐसा कर सकते थे। साल दो हज़ार चार में सेंचुरियन में साउथ अफ्रीका-वेस्टइंडीज चौथा टेस्ट शुरू होने से पहले मेजबान टीम सीरीज जीत चुकी थी। सीरीज में अंतिम प्रोग्राम बनने से पहले बता दें कि, साउथ अफ्रीका के खिलाड़ी आंद्रे नेल ने अपने मंगेतर डीन वेइट्ज़ के साथ शादी की योजना बना ली थी। टेस्ट सोलह जनवरी को था और सत्रह जनवरी को शादी। नेल ने भी कोशिश की, कि शादी टाल दें पर सब इंतजाम हो चुके थे- यहां तक की, ढेरों मेहमान बेनोनी में शादी के लिए अपनी फ्लाइट बुक करा चुके थे। उस समय आंद्रे नेल बहुत ही अच्छे फॉर्म थे और वो सीरीज में तीन बार बार लारा को आउट कर चुके थे। इसलिए टीम को उनकी जरूरत थी। नेल ने उस समय मैच भी खेला और शादी भी की। टेस्ट मैच में पहली बैटिंग साउथ अफ्रीका ने की। मैच के शुरुआत में स्मिथ और गिब्स जोड़े। उसके बाद केलिस चमके और स्मिथ ने दूसरे दिन छः सौ चार-छः पर पारी समाप्त घोषित की। वेस्टइंडीज की पारी कि शुरुआत में लाइट खराब होने लग गई थी। अभी स्कोर सात-शून्य ही था तो अंपायरों ने खराब रोशनी के कारण खेल एक घंटे पहले रोक दिया गया। स्टेडियम के पास ही हेलिकाप्टर का इंतजाम किया हुआ था। आंद्रे नेल हेलिकाप्टर में बैठ कर बेनोनी के लिए उड़ गए। चर्च के पास ही लेंडिंग का इंतज़ाम था। शादी के अगले दिन नेल सेंचुरियन लौट आए। अगले दिन लारा को आउट किया। साउथ अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को फॉलोऑन के लिए कहा। उसी दिन लारा को दूसरी बार आउट किया। जिन लारा का विकेट किसी भी गेंदबाज़ के लिए यादगार होता है, उन्हें नेल ने शादी से अगले दिन दो बार आउट किया।
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आईपीएल 2021 (IPL) में आज शाम सनराइजर्स हैदराबाद (Sunrisers Hyderabad) और दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के बीच मुकाबला खेला जाएगा। भारत में खेले गए पहले चरण में दिल्ली कैपिटल्स ने 8 में से 6 मैच जीते थे, वहीं सनराइजर्स हैदराबाद ने 7 में से सिर्फ 1 मैच जीता था। दोनों टीमें दूसरे चरण की शुरुआत जीत के साथ करना चाहेगी। इस वक्त प्वॉइंट्स टेबल में दिल्ली दूसरे और सनराइजर्स आखिरी पायदान पर है।
पहले चरण में खराब खेल के बाद हैदराबाद के कप्तान डेविड वॉर्नर को बीच में हटा दिया गया था। केन विलियमसन ने कप्तानी संभाली लेकिन तब भी सफलता नहीं मिली। वहीं ऋषभ पंत की अगुवाई में दिल्ली कैपिटल्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सनराइजर्स हैदराबाद को इस बार जॉनी बेयरेस्टो की भी कमी खलेगी जो दूसरे हाफ में नहीं खेल रहे हैं।
दोनों टीमों के बीच इस सीजन हुआ पहला मुकाबला सुपर ओवर तक गया था जिसमें दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने बाजी मारी थी। पृथ्वी शॉ ने दिल्ली और केन विलियमसन ने सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से बेहतरीन प्रदर्शन किया था।
इस मैच से पहले दोनों टीमों के बीच हेड डू हेड आंकड़ों के बारे में हम आपको बताते हैं।
1. हेड हू हेड आंकड़ों की अगर बात करें तो दोनों टीमों के बीच अभी तक हुए मुकाबलों में सनराइजर्स हैदराबाद का पलड़ा भारी रहा है। हैदराबाद ने 11 और दिल्ली कैपिटल्स ने 8 मुकाबलों में जीत हासिल की है।
2. दोनों ही टीमों के बीच पिछला मुकाबला सुपर ओवर तक गया था। इसके अलावा यूएई में दिल्ली कैपिटल्स का पलड़ा भारी रह सकता है।
3. दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ ऋषभ पंत ने सबसे ज्यादा 431 रन बनाए हैं।
4. सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ दिग्गज बल्लेबाज केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा 471 रन बनाए हैं।
5. सनरइजर्स हैदराबाद की तरफ से दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ दिग्गज स्पिनर राशिद खान ने सबसे ज्यादा 14 विकेट चटकाए हैं।
6. दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से सनराइजर्स के खिलाफ कगिसो रबाडा ने 11 विकेट चटकाए हैं।
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आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में आज शाम सनराइजर्स हैदराबाद और दिल्ली कैपिटल्स के बीच मुकाबला खेला जाएगा। भारत में खेले गए पहले चरण में दिल्ली कैपिटल्स ने आठ में से छः मैच जीते थे, वहीं सनराइजर्स हैदराबाद ने सात में से सिर्फ एक मैच जीता था। दोनों टीमें दूसरे चरण की शुरुआत जीत के साथ करना चाहेगी। इस वक्त प्वॉइंट्स टेबल में दिल्ली दूसरे और सनराइजर्स आखिरी पायदान पर है। पहले चरण में खराब खेल के बाद हैदराबाद के कप्तान डेविड वॉर्नर को बीच में हटा दिया गया था। केन विलियमसन ने कप्तानी संभाली लेकिन तब भी सफलता नहीं मिली। वहीं ऋषभ पंत की अगुवाई में दिल्ली कैपिटल्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सनराइजर्स हैदराबाद को इस बार जॉनी बेयरेस्टो की भी कमी खलेगी जो दूसरे हाफ में नहीं खेल रहे हैं। दोनों टीमों के बीच इस सीजन हुआ पहला मुकाबला सुपर ओवर तक गया था जिसमें दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने बाजी मारी थी। पृथ्वी शॉ ने दिल्ली और केन विलियमसन ने सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से बेहतरीन प्रदर्शन किया था। इस मैच से पहले दोनों टीमों के बीच हेड डू हेड आंकड़ों के बारे में हम आपको बताते हैं। एक. हेड हू हेड आंकड़ों की अगर बात करें तो दोनों टीमों के बीच अभी तक हुए मुकाबलों में सनराइजर्स हैदराबाद का पलड़ा भारी रहा है। हैदराबाद ने ग्यारह और दिल्ली कैपिटल्स ने आठ मुकाबलों में जीत हासिल की है। दो. दोनों ही टीमों के बीच पिछला मुकाबला सुपर ओवर तक गया था। इसके अलावा यूएई में दिल्ली कैपिटल्स का पलड़ा भारी रह सकता है। तीन. दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ ऋषभ पंत ने सबसे ज्यादा चार सौ इकतीस रन बनाए हैं। चार. सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ दिग्गज बल्लेबाज केन विलियमसन ने सबसे ज्यादा चार सौ इकहत्तर रन बनाए हैं। पाँच. सनरइजर्स हैदराबाद की तरफ से दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ दिग्गज स्पिनर राशिद खान ने सबसे ज्यादा चौदह विकेट चटकाए हैं। छः. दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से सनराइजर्स के खिलाफ कगिसो रबाडा ने ग्यारह विकेट चटकाए हैं।
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बॉडीगार्ड और मौसम (2011 फ़िल्म)
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
बॉडीगार्ड vs. मौसम (2011 फ़िल्म)
बॉडीगार्ड (Bodyguard) 2011 में बनी हिन्दी एक्शन फ़िल्म है जिसका निर्देशन सिद्दकी द्वारा किया गया है। यह निर्देशक द्वारा इसी नाम की फ़िल्म का तीसरा रीमेक है जिसका निर्माण अतुल अग्निहोत्री ने किया है और सलमान खान व करीना कपूर मुख्य भूमिका में है। फ़िल्म में राज बब्बर, महेश मांजरेकर और हजेल कीच अन्य भूमिकाओं में है। बॉडीगार्ड को ईद के दिन 31 अगस्त 2011 को 2,250 परदो पर 70 शहरों मे रिलिज किया गया था। फ़िल्म ने रिलीज होने पर कई रिकॉर्ड तोड़े. मौसम 2011 की एक हिन्दी प्रेम-नाटक फ़िल्म है। इस फ़िल्म का लेखन और निर्देशन पंकज कपूर ने किया है। शाहिद कपूर और सोनम कपूर ने इस फिल्म के मुख्य पात्रों का अभिनय किया है। पहले फ़िल्म का प्रदर्शन १६ सितम्बर २०११ को किया जाना था, लेकिन भारतीय वायु सेना से एनओसी मिलने में हुई देरी के कारण इसे २३ सितम्बर २०११ को प्रदर्शित किया गया। .
बॉडीगार्ड और मौसम (2011 फ़िल्म) आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): प्रीतम, राहत फ़तेह अली खान।
प्रीतम चक्रबोर्ती (चक्रवर्ती) (बंगालीः প্রীতম চক্রবর্ত্তী) जिन्हें प्रीतम के नाम से बेहतर जाना जाता है, (14 जून 1971) बॉलीवुड फिल्मों के एक प्रख्यात भारतीय संगीत निर्देशक, संगीतकार, गायक, वादक और रिकार्ड निर्माता है जो वर्तमान में मुम्बई में रहते हैं।। लगभग डेढ़ दशकों में फैले कैरियर में, प्रीतम ने सौ से अधिक बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत रचना की है। कई शैलियों को कवर कर चुके प्रीतम भारत में सबसे बहुमुखी संगीत संगीतकारों में से एक हैं। वह 2 फिल्मफेयर पुरस्कार, 4 जी सिने अवार्ड्स, 3 स्टार स्क्रीन पुरस्कार, 3 आईफा पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कार जीत चुके हैं। .
राहत फ़तह अली खान(जन्म 1974, फैसलाबाद, पाकिस्तान) एक पाकिस्तानी संगीतकार हैं। वह विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतह अली खान के भतीजे है । राहत भी मुख्य रूप से सूफी गीतकार हैं। कव्वाली के अलावा वह गजल भी गाते हैं। राहत भारतीय फिल्म उद्योग बालीवुड के एक जाने माने पार्श्वगायक हैं। .
बॉडीगार्ड 13 संबंध है और मौसम (2011 फ़िल्म) 30 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 4.65% है = 2 / (13 + 30)।
यह लेख बॉडीगार्ड और मौसम (2011 फ़िल्म) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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बॉडीगार्ड और मौसम शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। बॉडीगार्ड vs. मौसम बॉडीगार्ड दो हज़ार ग्यारह में बनी हिन्दी एक्शन फ़िल्म है जिसका निर्देशन सिद्दकी द्वारा किया गया है। यह निर्देशक द्वारा इसी नाम की फ़िल्म का तीसरा रीमेक है जिसका निर्माण अतुल अग्निहोत्री ने किया है और सलमान खान व करीना कपूर मुख्य भूमिका में है। फ़िल्म में राज बब्बर, महेश मांजरेकर और हजेल कीच अन्य भूमिकाओं में है। बॉडीगार्ड को ईद के दिन इकतीस अगस्त दो हज़ार ग्यारह को दो,दो सौ पचास परदो पर सत्तर शहरों मे रिलिज किया गया था। फ़िल्म ने रिलीज होने पर कई रिकॉर्ड तोड़े. मौसम दो हज़ार ग्यारह की एक हिन्दी प्रेम-नाटक फ़िल्म है। इस फ़िल्म का लेखन और निर्देशन पंकज कपूर ने किया है। शाहिद कपूर और सोनम कपूर ने इस फिल्म के मुख्य पात्रों का अभिनय किया है। पहले फ़िल्म का प्रदर्शन सोलह सितम्बर दो हज़ार ग्यारह को किया जाना था, लेकिन भारतीय वायु सेना से एनओसी मिलने में हुई देरी के कारण इसे तेईस सितम्बर दो हज़ार ग्यारह को प्रदर्शित किया गया। . बॉडीगार्ड और मौसम आम में दो बातें हैं : प्रीतम, राहत फ़तेह अली खान। प्रीतम चक्रबोर्ती जिन्हें प्रीतम के नाम से बेहतर जाना जाता है, बॉलीवुड फिल्मों के एक प्रख्यात भारतीय संगीत निर्देशक, संगीतकार, गायक, वादक और रिकार्ड निर्माता है जो वर्तमान में मुम्बई में रहते हैं।। लगभग डेढ़ दशकों में फैले कैरियर में, प्रीतम ने सौ से अधिक बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत रचना की है। कई शैलियों को कवर कर चुके प्रीतम भारत में सबसे बहुमुखी संगीत संगीतकारों में से एक हैं। वह दो फिल्मफेयर पुरस्कार, चार जी सिने अवार्ड्स, तीन स्टार स्क्रीन पुरस्कार, तीन आईफा पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कार जीत चुके हैं। . राहत फ़तह अली खान एक पाकिस्तानी संगीतकार हैं। वह विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतह अली खान के भतीजे है । राहत भी मुख्य रूप से सूफी गीतकार हैं। कव्वाली के अलावा वह गजल भी गाते हैं। राहत भारतीय फिल्म उद्योग बालीवुड के एक जाने माने पार्श्वगायक हैं। . बॉडीगार्ड तेरह संबंध है और मौसम तीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक चार.पैंसठ% है = दो / । यह लेख बॉडीगार्ड और मौसम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के आगरा मंडल अध्यक्ष आगरा राजकुमार तौमर को अलीगढ़ मंडल एवं गौतमबुद्ध नगर का प्रभारी बनाया है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने तौमर की किसानों के प्रति निष्ठा एवं किसान आंदोलन देखते हुए यह जिम्मेदारी दी है।
जिला मीडिया प्रभारी शिवकुमार तौमर ने बताया कि तौमर आगरा, अलीगढ़ मंडल में किसानों का बड़े चेहरा हैं। वह हमेशा किसान समस्याओं के लिए संघर्ष को तैयार रहते हैं। वह किसानों के मुद्दों पर कई बड़े आंदोलन भी कर चुके हैं। राजकुमार तौमर ने इसके लिए प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। किसानों की हर समस्या मेरी समस्या है। उनके प्रभारी बनने पर मथुरा जिलाध्यक्ष सोनवीर सिंह सहित विभिन्न जिलों के जिलाध्यक्ष दीपक तौमर, संजय प्रजापति, मदनपाल, सुनील सिंह, निधिराज यादव, चरन सिंह, मोहित यादव, महेन्द्र सिंह मुखिया आदि ने हर्ष जताया है।
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भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के आगरा मंडल अध्यक्ष आगरा राजकुमार तौमर को अलीगढ़ मंडल एवं गौतमबुद्ध नगर का प्रभारी बनाया है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने तौमर की किसानों के प्रति निष्ठा एवं किसान आंदोलन देखते हुए यह जिम्मेदारी दी है। जिला मीडिया प्रभारी शिवकुमार तौमर ने बताया कि तौमर आगरा, अलीगढ़ मंडल में किसानों का बड़े चेहरा हैं। वह हमेशा किसान समस्याओं के लिए संघर्ष को तैयार रहते हैं। वह किसानों के मुद्दों पर कई बड़े आंदोलन भी कर चुके हैं। राजकुमार तौमर ने इसके लिए प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। किसानों की हर समस्या मेरी समस्या है। उनके प्रभारी बनने पर मथुरा जिलाध्यक्ष सोनवीर सिंह सहित विभिन्न जिलों के जिलाध्यक्ष दीपक तौमर, संजय प्रजापति, मदनपाल, सुनील सिंह, निधिराज यादव, चरन सिंह, मोहित यादव, महेन्द्र सिंह मुखिया आदि ने हर्ष जताया है।
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IPL 2022 Ambati Rayudu Retirement एक बेहतरीन खिलाड़ी सिर्फ इस बात से कोई नहीं बन जाता कि वो बहुत अच्छा खेलता है बल्कि उसके तौर तरीके भी उनते ही मायने रखते हैं। विश्व क्रिकेट में जितने भी महान खिलाड़ी हुए हैं वो खेल के साथ-साथ खेल भावना में भी विश्वास रखते थे और यही कारण है कि उनके लिए पूरे विश्व में इज्जत होती है। सर विवि रिचर्ड्स, डॉन ब्रेडमैन, ब्रायन लारा, सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, राहुल द्रविड़ एक लंबी फेहरिस्त है ऐसे खिलाड़ियों ने की जिन्होंने अपना पूरा करियर शानदार ढंग से बिताया। मगर अंबाती रायुडू ऐसा नहीं कर पाए। अपने बल्ले से आग उगलने वाला खिलाड़ी हमेशा ही विवादों में फंसता चला गया।
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IPL दो हज़ार बाईस Ambati Rayudu Retirement एक बेहतरीन खिलाड़ी सिर्फ इस बात से कोई नहीं बन जाता कि वो बहुत अच्छा खेलता है बल्कि उसके तौर तरीके भी उनते ही मायने रखते हैं। विश्व क्रिकेट में जितने भी महान खिलाड़ी हुए हैं वो खेल के साथ-साथ खेल भावना में भी विश्वास रखते थे और यही कारण है कि उनके लिए पूरे विश्व में इज्जत होती है। सर विवि रिचर्ड्स, डॉन ब्रेडमैन, ब्रायन लारा, सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, राहुल द्रविड़ एक लंबी फेहरिस्त है ऐसे खिलाड़ियों ने की जिन्होंने अपना पूरा करियर शानदार ढंग से बिताया। मगर अंबाती रायुडू ऐसा नहीं कर पाए। अपने बल्ले से आग उगलने वाला खिलाड़ी हमेशा ही विवादों में फंसता चला गया।
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वेस्टइंडीज़ टीम के आक्रामक मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ शिमरोन हेटमायर (Shimron Hetmyer) पिछले काफी समय से आईपीएल का हिस्सा रहे हैं. इन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत 2019 में आरसीबी के साथ की थी. लेकिन, उस सीज़न यह ज़्यादा कुछ खास नहीं कर पाए थे. उसके बाद लगातार 2 आईपीएल सीज़न इन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेले हैं और उनके लिए अच्छा प्रदर्शन भी करके दिखाया है. ऐसे में अब आईपीएल 2022 में हेटमायर (Shimron Hetmyer) राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने जा रहे हैं.
आपको बता दें कि आईपीएल 2021 के बाद शिमरोन हेटमायर (Shimron Hetmyer) को दिल्ली कैपिटल्स ने रिलीज़ कर दिया था. जिसके चलते इन्होंने अपना नाम आईपीएल मेगा ऑक्शन में दिया. ऑक्शन में इस खिलाड़ी में सबसे ज़्यादा रूचि राजस्थान रॉयल्स ने दिखाई और 8. 5 करोड़ की मोटी रकम देकर इनको अपनी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनाया. ऐसे में अब आईपीएल 2022 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
अगर इनके आईपीएल करियर की बात करें तो, शिमरॉन हेटमायर ने अब तक आईपीएल में कुल 31 मुकाबले खेले हैं, जिसमें इन्होंने 25. 85 की औसत से 517 रन बनाए हैं. आईपीएल में इनका स्ट्राइक रेट 151. 16 का है. जोकि काफी शानदार है. इसके अलावा हाल ही में इन्होंने अपने प्राइस टैग को लेकर बड़ा बयान दिया है.
शिमरोन हेटमायर (Shimron Hetmyer) को राजस्थान रॉयल्स ने काफी मोटी रकम में खरीदा है. या कहें तो राजस्थान ने हेटमायर पर बहुत बड़ा दांव खेला है. लेकिन, जब इस खिलाड़ी ने इस प्राइस टैग को लेकर अपना बयान दिया तो कही से कही तक नहीं लगा कि आईपीएल 2022 में इन पर प्राइस टैग का कोई भी दबाव दिखने वाला है. शिमरोन हेटमायर ने आईपीएल 2022 में अपने प्राइस टैग को लेकर कहा कि,
उन्होंने आगे कहा कि,
राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच और क्रिकेट डायरेक्टर कुमार संगाकारा से एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने के लिए खेल को और अच्छे से जानने के लिए एक्ससिटेड हैं हेटमायर (Shimron Hetmyer). उन्होंने कुमार संगाकारा को लेकर कहा,
बहरहाल, 25 वर्षीय शिमरोन हेटमायर ने अपने बयान में यह भी कहा है कि आईपीएल खेलने से उनके खेल के विकास में मदद हुई है.
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वेस्टइंडीज़ टीम के आक्रामक मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ शिमरोन हेटमायर पिछले काफी समय से आईपीएल का हिस्सा रहे हैं. इन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत दो हज़ार उन्नीस में आरसीबी के साथ की थी. लेकिन, उस सीज़न यह ज़्यादा कुछ खास नहीं कर पाए थे. उसके बाद लगातार दो आईपीएल सीज़न इन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेले हैं और उनके लिए अच्छा प्रदर्शन भी करके दिखाया है. ऐसे में अब आईपीएल दो हज़ार बाईस में हेटमायर राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने जा रहे हैं. आपको बता दें कि आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के बाद शिमरोन हेटमायर को दिल्ली कैपिटल्स ने रिलीज़ कर दिया था. जिसके चलते इन्होंने अपना नाम आईपीएल मेगा ऑक्शन में दिया. ऑक्शन में इस खिलाड़ी में सबसे ज़्यादा रूचि राजस्थान रॉयल्स ने दिखाई और आठ. पाँच करोड़ की मोटी रकम देकर इनको अपनी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनाया. ऐसे में अब आईपीएल दो हज़ार बाईस में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अगर इनके आईपीएल करियर की बात करें तो, शिमरॉन हेटमायर ने अब तक आईपीएल में कुल इकतीस मुकाबले खेले हैं, जिसमें इन्होंने पच्चीस. पचासी की औसत से पाँच सौ सत्रह रन बनाए हैं. आईपीएल में इनका स्ट्राइक रेट एक सौ इक्यावन. सोलह का है. जोकि काफी शानदार है. इसके अलावा हाल ही में इन्होंने अपने प्राइस टैग को लेकर बड़ा बयान दिया है. शिमरोन हेटमायर को राजस्थान रॉयल्स ने काफी मोटी रकम में खरीदा है. या कहें तो राजस्थान ने हेटमायर पर बहुत बड़ा दांव खेला है. लेकिन, जब इस खिलाड़ी ने इस प्राइस टैग को लेकर अपना बयान दिया तो कही से कही तक नहीं लगा कि आईपीएल दो हज़ार बाईस में इन पर प्राइस टैग का कोई भी दबाव दिखने वाला है. शिमरोन हेटमायर ने आईपीएल दो हज़ार बाईस में अपने प्राइस टैग को लेकर कहा कि, उन्होंने आगे कहा कि, राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच और क्रिकेट डायरेक्टर कुमार संगाकारा से एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने के लिए खेल को और अच्छे से जानने के लिए एक्ससिटेड हैं हेटमायर . उन्होंने कुमार संगाकारा को लेकर कहा, बहरहाल, पच्चीस वर्षीय शिमरोन हेटमायर ने अपने बयान में यह भी कहा है कि आईपीएल खेलने से उनके खेल के विकास में मदद हुई है.
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अहमदाबाद के अरहम ओम तल्सानिया (Arham Om Talsania) ने पायथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को क्लियर करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है.
अगर कोई आपसे पूछे कि 6 साल का बच्चा क्या-क्या कर सकता है तो आप क्या जवाब देंगे? जाहिर सी बात है आप कहेंगे पोएट्री सुना लेगा, गाना, डांस कर लेगा, किताबें पढ़-लिख लेगा और क्या. लेकिन अगर आपको पता चले कि उसने कंप्यूटर प्रोग्राम बना दिया है तो क्या आप यकीन करेंगे. जी हां ये सच है, गुजरात के 6 साल के एक नन्हे से बच्चे ने अपने टैलेंट से पूरे देश को गर्व महसूस कराया है. उसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है.
अहमदाबाद के अरहम ओम तल्सानिया (Arham Om Talsania) ने पायथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को क्लियर करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है. अरहम की उम्र 6 साल है और वह सेकंड क्लास में पढ़ते हैं. इतनी कम उम्र में उन्होंने पियर्सन वीयूई टेस्ट सेंटर (Pearson VUE test centre) से माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफिकेशन एग्जाम पास किया है. सोशल मीडिया पर भी सब तरफ इस नन्हे प्रोग्रामर की ही चर्चा हो रही है.
अरहम ओम तल्सानिया ने बताया कि, "मेरे पिता ने मुझे कोडिंग सिखाई है. जब मैं 2 साल का था तभी मैंने टैबलेट का यूज़ करना शुरू कर दिया था. 3 साल की उम्र में मैंने iOS और Windows के साथ गैजेट्स खरीदे. बाद में मुझे पता चला कि मेरे पिता पायथन (Python) पर काम कर रहे थे." अरहम को जब पायथन से सर्टिफिकेट मिला तब वो छोटे गेम बना रहा था. कुछ समय के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने उनसे काम के कुछ सबूत भेजने के लिए कहा, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी और अरहम ओम को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट मिला.
Gujarat: Arham Om Talsania, a Class 2 student from Ahmedabad, created Guinness World Record as World's Youngest Computer Programmer by clearing Python programming language exam at the age of six.
अरहम ओम तल्सानिया एक बिजनेस इंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं और सबकी मदद करना चाहते हैं. वो कोडिंग के लिए ऐप, गेम और सिस्टम बनाना चाहते हैं. अरहम के पिता खुद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. अपने बेटे के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके बेटे को कोडिंग में रुचि थी और उन्होंने उन्हें बेसिक प्रोग्रामिंग सिखाई.
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अहमदाबाद के अरहम ओम तल्सानिया ने पायथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को क्लियर करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है. अगर कोई आपसे पूछे कि छः साल का बच्चा क्या-क्या कर सकता है तो आप क्या जवाब देंगे? जाहिर सी बात है आप कहेंगे पोएट्री सुना लेगा, गाना, डांस कर लेगा, किताबें पढ़-लिख लेगा और क्या. लेकिन अगर आपको पता चले कि उसने कंप्यूटर प्रोग्राम बना दिया है तो क्या आप यकीन करेंगे. जी हां ये सच है, गुजरात के छः साल के एक नन्हे से बच्चे ने अपने टैलेंट से पूरे देश को गर्व महसूस कराया है. उसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है. अहमदाबाद के अरहम ओम तल्सानिया ने पायथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को क्लियर करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे कम उम्र के कंप्यूटर प्रोग्रामर के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है. अरहम की उम्र छः साल है और वह सेकंड क्लास में पढ़ते हैं. इतनी कम उम्र में उन्होंने पियर्सन वीयूई टेस्ट सेंटर से माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफिकेशन एग्जाम पास किया है. सोशल मीडिया पर भी सब तरफ इस नन्हे प्रोग्रामर की ही चर्चा हो रही है. अरहम ओम तल्सानिया ने बताया कि, "मेरे पिता ने मुझे कोडिंग सिखाई है. जब मैं दो साल का था तभी मैंने टैबलेट का यूज़ करना शुरू कर दिया था. तीन साल की उम्र में मैंने iOS और Windows के साथ गैजेट्स खरीदे. बाद में मुझे पता चला कि मेरे पिता पायथन पर काम कर रहे थे." अरहम को जब पायथन से सर्टिफिकेट मिला तब वो छोटे गेम बना रहा था. कुछ समय के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने उनसे काम के कुछ सबूत भेजने के लिए कहा, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी और अरहम ओम को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट मिला. Gujarat: Arham Om Talsania, a Class दो student from Ahmedabad, created Guinness World Record as World's Youngest Computer Programmer by clearing Python programming language exam at the age of six. अरहम ओम तल्सानिया एक बिजनेस इंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं और सबकी मदद करना चाहते हैं. वो कोडिंग के लिए ऐप, गेम और सिस्टम बनाना चाहते हैं. अरहम के पिता खुद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. अपने बेटे के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके बेटे को कोडिंग में रुचि थी और उन्होंने उन्हें बेसिक प्रोग्रामिंग सिखाई.
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आज पूरी दुनिया कोरोने नामक महामारी से जूझ रही हैं, और इसी की वजह से पूरी दुनिया में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, 2020 वह वर्ष है, जब दुनिया ने इतनी ज्यादा मौतें देखीं। चाहे वह विकसित देश हों या विकासशील देश, मौत का आंकड़ा दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है। विश्व स्तर पर, कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 4722233 है और इससे होने वाली मौतों की संख्या 313266 हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है, यहाँ अब तक कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 90927 हो चुकी है, जब कि इससे मरने वलों की तादाद 2872 है। पिछले 52 दिन में तो ऐसा लग रहा कि इतने प्रयासों के बावजूद, कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या में कोई बाढ़ सी आ गई है। बाकी दुनिया की तरह, यहाँ भी लोगो से सामाजिक दूरी के लिए आग्रह किया जा रहा है, और अब तक 3 लॉकडाउन के तहत लोगों को उनके घरों में रखने की कोशिश की गई हैं, जो सरकार का एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय था। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए 24 मार्च से 14 अप्रैल तक राष्ट्रव्यापी तालाबंदी की गई थी। तब से, लॉकडाउन अवधि को दो बार बढ़ाई जा चुकी है। लॉकडाउन के पहले चरण में, जहां सभी सरकारी और निजी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, रेस्तरां, होटल आपूर्ति, रेल, हवाई सेवाएं बंद थीं, केवल आवश्यक सेवाएं की ही अनुमति थीं। वर्तमान समय में, देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है, जिसके आगे बढ़ने की भी उम्मीद है। तीसरा लॉकडाउन 4 मई, 2020 को लागू किया गया था, लेकिन यह पिछले लॉकडाउन की तरह नहीं था, अपितु इसमें कुछ विशेष बातें शामिल थीं। इसमें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई फैसले किए गए थे। ।
सरकार ने कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की संख्या के आधार पर देश को नारंगी, हरे और लाल क्षेत्रों में विभाजित किया है। प्रतिबंधों का स्तर रेड ज़ोन, ऑरेंज ज़ोन और ग्रीन ज़ोन भिन्न है। ये क्षेत्र भारत में 733 जिलों के एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं। रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन कोरोना वायरस के मामलों, केस दरों और परीक्षण और निगरानी की श्रेणी जैसे कारकों पर आधारित है। रेड ज़ोन में बड़ी संख्या में मामले हैं, ऑरेंज ज़ोन में अपेक्षाकृत कम मामले और पिछले 21 दिनों में ग्रीन ज़ोन में कोई मामले नहीं हैं। हालांकि अधिकांश गतिविधियों को ग्रीन ज़ोन में अनुमति दी जाती है, लेकिन ऑरेंज ज़ोन में अधिक प्रतिबंध हैं जो रेड ज़ोन में और बढ़ जाता हैं।
गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के अनुसार, "शराब और पान की दुकानों को ग्रीन और ऑरेंज ज़ोन में खोलने की इजाजत दी गई और इसमें सबसे अहम एक दूसरे से न्यूनतम छह फीट (2 गज) रखने पर विशेष ध्यान दिया गया और साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एक समय में पांच से अधिक लोग दुकान में मौजूद न हों । और आबकारी अधिनियम के तहत आने वाली दुकानें खोलने के निर्देश दिये गये। इन दुकानों में पान, गुटका, बीड़ी और शराब की दुकानें शामिल थीं। लेकिन सबसे ज्यादा विवाद शराब के ठेकों के लिए पैदा हुआ । दा हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से शराब की दुकानें बंद हो गईं, जिससे देश को 700 करोड़ का नुकसान हुआ। जिसके पीछे सरकार तर्क दे रही है, कि ऐसी दुकानें खोलने से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा क्योंकि इनसे राज्य सरकार को अच्छा राजस्व कर मिलता है। शराब की दुकानों से मिलने वाला राजस्व अन्य करों से अधिक है, जो 2019-20 में 12. 5% था। अकेले शराब उद्योग से कई राज्यों को 15 से 30 प्रतिशत तक कर प्राप्त होता है जो लगभग 2. 48 लाख करोड़ रुपये होता है। इस प्रकार, देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दी जिसमे सामाजिक दूरी को भी बहुत महत्वपूर्ण तरीके से लागू किया गया था।
लेकिन जिस तरह की तस्वीरें न्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसने सामाजिक बंदी को पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दीं। शराबियों का उत्पात सड़कों पर भी देखा गया है। इसके अलावा जूनापुर में एक पति ने अपनी गर्भवती पत्नी को शराब के लिए पैसे न देने पर गोली मार दी। कई स्थानों पर, महिलाओं को इस वजह से घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। बेकाबू भीड़ और सुरक्षा को खतरे में देखते हुए कई दुकानें समय से पहले बंद कर दी गईं। हालांकि दुकानों के खुलने का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक था, लेकिन लोग रात 9 बजे से ही कतार में खड़े थे। रिपोर्टों के अनुसार, इस बीच शराब के ठेकों पर पर लंबी लाइनें दिखाई दीं, ये कतारें छोटी नहीं थीं बल्कि शराब की चाहत ने लोगों को कई किलोमीटर तक कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर किया। भीड़ के द्वारा सामाजिक दूरी का पालन नहीं करने पर पुलिस को लाठियों का भी उपयोग करना पड़ा।
4 मई, 2020 के बाद से कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। पहले चरण में लॉकडाउन के बाद से सख्त नियम लागू किए गए हैं। गौरतलब है कि इतने सख्त लॉक डाउन के बावजूद, 24 मार्च को, देशभर में संक्रमण की संख्या 519 थी, जो अब 82933 को पार कर गई है।
इन सभी घटनाओं के मद्देनजर, सरकार के इस फैसले पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, लोग अपने अपने तरीकों से सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई मीमस भी वायरल हो रहे हैं, जैसे - "4 मई 2020 से पान की दुकान" , शराब इत्यादि, सभी आवश्यक चीजें खुली रहेंगी, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे और हम बेवक़ूफ़ यह सोचते रहते हैं कि सबसे ज़रूरी पढाई है "," अब बेब्ड़े बचायेंगे देश की अर्थव्यवस्था" इत्यादि। ये सब वे चीज़े है जो देश के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर, AIIMS, 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 14. 6 प्रतिशत लोग (10 से 75 साल की उम्र के बीच) कुल "160 मिलियन" शराब का सेवन करते हैं। और इसमें से पांच में से एक व्यक्ति अल्कोहल निर्भरता (Alcohol dependence) से प्रभावित है, और उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता है (गुप्ता, 2020)।
भारत, जो अपनी संस्कृति के लिए दुनिया में एक अलग पहचान रखता हैं, सरकार के इस फैसले ने दुनिया के सामने भारतीय सभ्यता को तार तार कार दिया है और साथ ही साथ भारत को नशा मुक्त करने का एक बेहतरीन अवसर भी छोड़ दिया। देश की अर्थव्यवस्था में सुधार अति आवश्यक है, लेकिन क्या देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार के पास केवल एक यही रास्ता बचा था? एक तरफ, कोरोनोवायरस संक्रमण और इस से होने वाली मौतों की तेजी से बढ़ती घटना, और दूसरी तरफ, हर कदम पर लॉकडाउन नियमों में छूट देश में एक भयावह तबाही के लिए अग्रणी कर रही हैं। एक बात सोचने की है कि संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बावजूद लॉकडाउन में छूट देना कितना सही हैं? क्या इस छूट से कोई सकारात्मक परिणाम मिला है? ऐसे मुश्किल समय में जब कोरोना वायरस के कारण सभी का जीवन खतरे में है, क्या सरकार के इस फैसले से 121 करोड़ (2011 की जनगणना) भारतीयों का जीवन खतरे में नहीं डाल दिया? लोगों के मन में इसी तरह के कई सवाल उठ रहे हैं। और अब बस यह देखना है कि सरकार का अगला कदम क्या होगा?
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आज पूरी दुनिया कोरोने नामक महामारी से जूझ रही हैं, और इसी की वजह से पूरी दुनिया में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, दो हज़ार बीस वह वर्ष है, जब दुनिया ने इतनी ज्यादा मौतें देखीं। चाहे वह विकसित देश हों या विकासशील देश, मौत का आंकड़ा दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है। विश्व स्तर पर, कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या सैंतालीस लाख बाईस हज़ार दो सौ तैंतीस है और इससे होने वाली मौतों की संख्या तीन लाख तेरह हज़ार दो सौ छयासठ हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है, यहाँ अब तक कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या नब्बे हज़ार नौ सौ सत्ताईस हो चुकी है, जब कि इससे मरने वलों की तादाद दो हज़ार आठ सौ बहत्तर है। पिछले बावन दिन में तो ऐसा लग रहा कि इतने प्रयासों के बावजूद, कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या में कोई बाढ़ सी आ गई है। बाकी दुनिया की तरह, यहाँ भी लोगो से सामाजिक दूरी के लिए आग्रह किया जा रहा है, और अब तक तीन लॉकडाउन के तहत लोगों को उनके घरों में रखने की कोशिश की गई हैं, जो सरकार का एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय था। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए चौबीस मार्च से चौदह अप्रैल तक राष्ट्रव्यापी तालाबंदी की गई थी। तब से, लॉकडाउन अवधि को दो बार बढ़ाई जा चुकी है। लॉकडाउन के पहले चरण में, जहां सभी सरकारी और निजी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, रेस्तरां, होटल आपूर्ति, रेल, हवाई सेवाएं बंद थीं, केवल आवश्यक सेवाएं की ही अनुमति थीं। वर्तमान समय में, देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण चल रहा है, जिसके आगे बढ़ने की भी उम्मीद है। तीसरा लॉकडाउन चार मई, दो हज़ार बीस को लागू किया गया था, लेकिन यह पिछले लॉकडाउन की तरह नहीं था, अपितु इसमें कुछ विशेष बातें शामिल थीं। इसमें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई फैसले किए गए थे। । सरकार ने कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की संख्या के आधार पर देश को नारंगी, हरे और लाल क्षेत्रों में विभाजित किया है। प्रतिबंधों का स्तर रेड ज़ोन, ऑरेंज ज़ोन और ग्रीन ज़ोन भिन्न है। ये क्षेत्र भारत में सात सौ तैंतीस जिलों के एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं। रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन कोरोना वायरस के मामलों, केस दरों और परीक्षण और निगरानी की श्रेणी जैसे कारकों पर आधारित है। रेड ज़ोन में बड़ी संख्या में मामले हैं, ऑरेंज ज़ोन में अपेक्षाकृत कम मामले और पिछले इक्कीस दिनों में ग्रीन ज़ोन में कोई मामले नहीं हैं। हालांकि अधिकांश गतिविधियों को ग्रीन ज़ोन में अनुमति दी जाती है, लेकिन ऑरेंज ज़ोन में अधिक प्रतिबंध हैं जो रेड ज़ोन में और बढ़ जाता हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के अनुसार, "शराब और पान की दुकानों को ग्रीन और ऑरेंज ज़ोन में खोलने की इजाजत दी गई और इसमें सबसे अहम एक दूसरे से न्यूनतम छह फीट रखने पर विशेष ध्यान दिया गया और साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एक समय में पांच से अधिक लोग दुकान में मौजूद न हों । और आबकारी अधिनियम के तहत आने वाली दुकानें खोलने के निर्देश दिये गये। इन दुकानों में पान, गुटका, बीड़ी और शराब की दुकानें शामिल थीं। लेकिन सबसे ज्यादा विवाद शराब के ठेकों के लिए पैदा हुआ । दा हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से शराब की दुकानें बंद हो गईं, जिससे देश को सात सौ करोड़ का नुकसान हुआ। जिसके पीछे सरकार तर्क दे रही है, कि ऐसी दुकानें खोलने से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा क्योंकि इनसे राज्य सरकार को अच्छा राजस्व कर मिलता है। शराब की दुकानों से मिलने वाला राजस्व अन्य करों से अधिक है, जो दो हज़ार उन्नीस-बीस में बारह. पाँच% था। अकेले शराब उद्योग से कई राज्यों को पंद्रह से तीस प्रतिशत तक कर प्राप्त होता है जो लगभग दो. अड़तालीस लाख करोड़ रुपये होता है। इस प्रकार, देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दी जिसमे सामाजिक दूरी को भी बहुत महत्वपूर्ण तरीके से लागू किया गया था। लेकिन जिस तरह की तस्वीरें न्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसने सामाजिक बंदी को पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दीं। शराबियों का उत्पात सड़कों पर भी देखा गया है। इसके अलावा जूनापुर में एक पति ने अपनी गर्भवती पत्नी को शराब के लिए पैसे न देने पर गोली मार दी। कई स्थानों पर, महिलाओं को इस वजह से घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। बेकाबू भीड़ और सुरक्षा को खतरे में देखते हुए कई दुकानें समय से पहले बंद कर दी गईं। हालांकि दुकानों के खुलने का समय सुबह दस बजे से शाम छः बजे तक था, लेकिन लोग रात नौ बजे से ही कतार में खड़े थे। रिपोर्टों के अनुसार, इस बीच शराब के ठेकों पर पर लंबी लाइनें दिखाई दीं, ये कतारें छोटी नहीं थीं बल्कि शराब की चाहत ने लोगों को कई किलोमीटर तक कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर किया। भीड़ के द्वारा सामाजिक दूरी का पालन नहीं करने पर पुलिस को लाठियों का भी उपयोग करना पड़ा। चार मई, दो हज़ार बीस के बाद से कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। पहले चरण में लॉकडाउन के बाद से सख्त नियम लागू किए गए हैं। गौरतलब है कि इतने सख्त लॉक डाउन के बावजूद, चौबीस मार्च को, देशभर में संक्रमण की संख्या पाँच सौ उन्नीस थी, जो अब बयासी हज़ार नौ सौ तैंतीस को पार कर गई है। इन सभी घटनाओं के मद्देनजर, सरकार के इस फैसले पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, लोग अपने अपने तरीकों से सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई मीमस भी वायरल हो रहे हैं, जैसे - "चार मई दो हज़ार बीस से पान की दुकान" , शराब इत्यादि, सभी आवश्यक चीजें खुली रहेंगी, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे और हम बेवक़ूफ़ यह सोचते रहते हैं कि सबसे ज़रूरी पढाई है "," अब बेब्ड़े बचायेंगे देश की अर्थव्यवस्था" इत्यादि। ये सब वे चीज़े है जो देश के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर, AIIMS, दो हज़ार उन्नीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चौदह. छः प्रतिशत लोग कुल "एक सौ साठ मिलियन" शराब का सेवन करते हैं। और इसमें से पांच में से एक व्यक्ति अल्कोहल निर्भरता से प्रभावित है, और उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता है । भारत, जो अपनी संस्कृति के लिए दुनिया में एक अलग पहचान रखता हैं, सरकार के इस फैसले ने दुनिया के सामने भारतीय सभ्यता को तार तार कार दिया है और साथ ही साथ भारत को नशा मुक्त करने का एक बेहतरीन अवसर भी छोड़ दिया। देश की अर्थव्यवस्था में सुधार अति आवश्यक है, लेकिन क्या देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार के पास केवल एक यही रास्ता बचा था? एक तरफ, कोरोनोवायरस संक्रमण और इस से होने वाली मौतों की तेजी से बढ़ती घटना, और दूसरी तरफ, हर कदम पर लॉकडाउन नियमों में छूट देश में एक भयावह तबाही के लिए अग्रणी कर रही हैं। एक बात सोचने की है कि संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बावजूद लॉकडाउन में छूट देना कितना सही हैं? क्या इस छूट से कोई सकारात्मक परिणाम मिला है? ऐसे मुश्किल समय में जब कोरोना वायरस के कारण सभी का जीवन खतरे में है, क्या सरकार के इस फैसले से एक सौ इक्कीस करोड़ भारतीयों का जीवन खतरे में नहीं डाल दिया? लोगों के मन में इसी तरह के कई सवाल उठ रहे हैं। और अब बस यह देखना है कि सरकार का अगला कदम क्या होगा?
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मेलबर्न। कोरोना महामारी के चलते इस साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्वकप के उपर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के खेल मंत्री ने रिचर्ड कोलबेक ने एक सवाल उठाया है कि क्या बिना फैंस के विश्वकप को कराना सही फैसला रहेगा।
गौरतलब है कि सिर्फ टी20 विश्वकप ही नहीं बल्कि उसके बाद भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी संकट में हैं। ऐसे में अगर ये दोनों टूर्नामेंट दुर्भाग्यवश नहीं होते हैं तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को 30 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डालर का नुकसान हो सकता है।
टी20 विश्व कप 18 अक्टूबर से शुरू होना है जबकि भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा इससे पहले टी20 त्रिकोणीय श्रृंखला से शुरू होगा और दिसंबर में चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के साथ समाप्त होगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने हाल में कहा था कि 16 देशों के इस टूर्नामेंट के आयोजन की तैयारियां अब भी चल रही हैं और इस पर अंतिम फैसला अगस्त में किया जाएगा।
( With agency input from Bhasa )
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मेलबर्न। कोरोना महामारी के चलते इस साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टीबीस विश्वकप के उपर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के खेल मंत्री ने रिचर्ड कोलबेक ने एक सवाल उठाया है कि क्या बिना फैंस के विश्वकप को कराना सही फैसला रहेगा। गौरतलब है कि सिर्फ टीबीस विश्वकप ही नहीं बल्कि उसके बाद भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी संकट में हैं। ऐसे में अगर ये दोनों टूर्नामेंट दुर्भाग्यवश नहीं होते हैं तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को तीस करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डालर का नुकसान हो सकता है। टीबीस विश्व कप अट्ठारह अक्टूबर से शुरू होना है जबकि भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा इससे पहले टीबीस त्रिकोणीय श्रृंखला से शुरू होगा और दिसंबर में चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के साथ समाप्त होगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने हाल में कहा था कि सोलह देशों के इस टूर्नामेंट के आयोजन की तैयारियां अब भी चल रही हैं और इस पर अंतिम फैसला अगस्त में किया जाएगा।
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केन्द्रीय आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की पहल प्लेस मेकिंग मैराथन के तहत सेक्टर-38 स्थित पार्क की सूरत मात्र 75 घंटों में ही बदल गई है। नगर निगम द्वारा सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए पार्क का नवीनीकरण एवं सौंदर्यकरण करके इसे नया रूप एवं नाम दिया गया है। अब यह पार्क आनन्द पार्क के नाम से जाना जाएगा। मात्र 75 घंटों में पार्क के बदले नये रूप को देखकर पार्क में रोजाना आने वाले सेक्टर वासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। नगर निगम की अतिरिक्त आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए नॉलेज पार्टनर डब्ल्यूआरआई इंडिया, एक्टिविटी पार्टनर राहगीरी फाऊंडेशन, सीएसआर पार्टनर जुबिलियंट फूडवक्र्स लिमिटेड, कलाग्राम सोसायटी सहित निगम पार्षदों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों एवं नागरिकों का धन्यवाद किया।
प्लेस मेंकिंग मैराथन 75 घटे चली। इसके तहत पार्क में कई बदलाव करके पार्क को नया रूप दिया गया। इनमें कई सामुदायिक गतिविधियों के साथ पेड़ों को सुरक्षित रखने, उन्हें और अधिक आर्कषक बनाने और उनके नामों पर प्रकाश डालने के लिए उन्हें चूने के रंगों से रंगा गया।
- बागवानी कचरे के प्रबंधन के लिए पार्क में 4 कंपोस्ट पिट बनाए गए।
- क्षेत्र की सुरक्षा व सौंदर्यीकरण के लिए नई एंबियंस लाइटें लगाई गई ।
- पार्क में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण अभियान के तहत सामुदायिक भागीदारी से 500 से अधिक झाड़ीनुमा पौधे व 500 फूलदार पौधे लगाए गए।
- पार्क में आरडब्ल्यूए एवं नागरिकों के सहयोग से एक ओपन लाईब्रेरी स्थापित की गई, जिसे विशेषकर बच्चों ने खूब सराहा।
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केन्द्रीय आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की पहल प्लेस मेकिंग मैराथन के तहत सेक्टर-अड़तीस स्थित पार्क की सूरत मात्र पचहत्तर घंटाटों में ही बदल गई है। नगर निगम द्वारा सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए पार्क का नवीनीकरण एवं सौंदर्यकरण करके इसे नया रूप एवं नाम दिया गया है। अब यह पार्क आनन्द पार्क के नाम से जाना जाएगा। मात्र पचहत्तर घंटाटों में पार्क के बदले नये रूप को देखकर पार्क में रोजाना आने वाले सेक्टर वासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। नगर निगम की अतिरिक्त आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए नॉलेज पार्टनर डब्ल्यूआरआई इंडिया, एक्टिविटी पार्टनर राहगीरी फाऊंडेशन, सीएसआर पार्टनर जुबिलियंट फूडवक्र्स लिमिटेड, कलाग्राम सोसायटी सहित निगम पार्षदों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों एवं नागरिकों का धन्यवाद किया। प्लेस मेंकिंग मैराथन पचहत्तर घटे चली। इसके तहत पार्क में कई बदलाव करके पार्क को नया रूप दिया गया। इनमें कई सामुदायिक गतिविधियों के साथ पेड़ों को सुरक्षित रखने, उन्हें और अधिक आर्कषक बनाने और उनके नामों पर प्रकाश डालने के लिए उन्हें चूने के रंगों से रंगा गया। - बागवानी कचरे के प्रबंधन के लिए पार्क में चार कंपोस्ट पिट बनाए गए। - क्षेत्र की सुरक्षा व सौंदर्यीकरण के लिए नई एंबियंस लाइटें लगाई गई । - पार्क में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण अभियान के तहत सामुदायिक भागीदारी से पाँच सौ से अधिक झाड़ीनुमा पौधे व पाँच सौ फूलदार पौधे लगाए गए। - पार्क में आरडब्ल्यूए एवं नागरिकों के सहयोग से एक ओपन लाईब्रेरी स्थापित की गई, जिसे विशेषकर बच्चों ने खूब सराहा।
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लखनऊ। इक्कीस मार्च को विश्वभर में कठपुतली दिवस मनाया जाता है, देश भर में आज कठपुतली दिवस पर कार्यक्रम के आयोजन किए गए।
वाराणसी में इस अवसर पर जुटे सभी कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता हाथों में विभिन्न प्रकार कठपुतलियों को लिए हुए बनारस क्लब, गोलघर, पुलिस चौकी होते हुए जिला मुख्यालय पर पहुंचे। जिला मुख्यालय पर रैली सभा में तब्दील हो गयी और कठपुतली नाटक "गंदगी से जंग" का मंचन किया गया. इस नाटक में "स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत" का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मिथिलेश दुबे बताया, "विश्व कठपुतली दिवस की शुरूआत 21 मार्च 2003 को फ्रांस में की गई थी, यह दिवस भारत सहित विश्व के अन्य सभी देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है, तकनीक में विकास के क्रम में विलुप्त हो रही इस कला को जीवित रखने का प्रयास हम सभी लोगों को करना चाहिए।"
वरिष्ठ गांधी वादी चिन्तक राम धीरज भाई ने कहा कि इस अति प्राचीन लोक कला को जन-जन तक पहुंचना तथा आने वाली पीढ़ी को इससे अवगत करना है कठपुतली कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि लोगों को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी है। आज इस कला को आम लोगों एवं सरकार द्वारा संरक्षण दिये जाने की भी जरूरत है। जिससे इस प्राचीन कला को बचाया जा सके।
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लखनऊ। इक्कीस मार्च को विश्वभर में कठपुतली दिवस मनाया जाता है, देश भर में आज कठपुतली दिवस पर कार्यक्रम के आयोजन किए गए। वाराणसी में इस अवसर पर जुटे सभी कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता हाथों में विभिन्न प्रकार कठपुतलियों को लिए हुए बनारस क्लब, गोलघर, पुलिस चौकी होते हुए जिला मुख्यालय पर पहुंचे। जिला मुख्यालय पर रैली सभा में तब्दील हो गयी और कठपुतली नाटक "गंदगी से जंग" का मंचन किया गया. इस नाटक में "स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत" का संदेश दिया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मिथिलेश दुबे बताया, "विश्व कठपुतली दिवस की शुरूआत इक्कीस मार्च दो हज़ार तीन को फ्रांस में की गई थी, यह दिवस भारत सहित विश्व के अन्य सभी देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है, तकनीक में विकास के क्रम में विलुप्त हो रही इस कला को जीवित रखने का प्रयास हम सभी लोगों को करना चाहिए।" वरिष्ठ गांधी वादी चिन्तक राम धीरज भाई ने कहा कि इस अति प्राचीन लोक कला को जन-जन तक पहुंचना तथा आने वाली पीढ़ी को इससे अवगत करना है कठपुतली कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि लोगों को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी है। आज इस कला को आम लोगों एवं सरकार द्वारा संरक्षण दिये जाने की भी जरूरत है। जिससे इस प्राचीन कला को बचाया जा सके।
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फादर्स डे पर लोग अपने पिता से जुड़ी खास यादों को सोशल मीडिया पर साझा कर उन्हें याद कर रहे हैं। बॉलीवुड सितारे भी पिता की तस्वीर और उनसे जुड़ी यादों को लगातार साझा कर रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने भी फादर्स डे पर पिता के लिए खास पोस्ट साझा किया है। साथ ही उनसे जुड़ी यादों को याद किया है।
अनुष्का शर्मा के पिता एक आर्मी ऑफिसर थे। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पिता के साथ अपनी दो खास तस्वीरें साझा की है। अनुष्का शर्मा की यह तस्वीरें उनकी शादी में मेहंदी सेरेमनी की हैं। तस्वीर में उनके पिता उनको चूमते नजर आ रहे हैं। वहीं अनुष्का के पति विराट कोहली और अभिनेत्री की मां उन्हें देख रही हैं।
इन तस्वीरों को साझा करते हुए अनुष्का शर्मा ने पिता के लिए खास पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी और पिता की खास बातों को साझा किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, एक बात मेरे और पापा के बीच, जब वह जब बंगलूरू में अपनी सेना की पोस्टिंग पर ऑफिस जाने से पहले मुझे कॉलेज छोड़ते थे। पापा- 'जिंदगी में हमेशा सही काम करें चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। आप हमेशा अपने आप से खुश और शांति रहेंगे। '
अनुष्का ने पोस्ट में आगे अपनी बात काा जिक्र करते हुए लिखा, मैं- 'लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा कि जिंदगी की सभी स्थितियों में क्या करना सही है। ' पापा- 'उसके लिए, ज्ञान की प्रार्थना करो। सही और गलत के बीच अंतर जानने और हमेशा सही चीज चुनने की ताकत के बारे में जानने की इच्छा रखें'। अनुष्का ने पोस्ट के आखिरी में लिखा, 'मैं दुआ करता हूं कि आप सभी को वही ज्ञान मिले जिसकी मैं प्रार्थना करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि सभी लड़कियों को पिता की तरह मेरा आशीर्वाद मिले। '
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फादर्स डे पर लोग अपने पिता से जुड़ी खास यादों को सोशल मीडिया पर साझा कर उन्हें याद कर रहे हैं। बॉलीवुड सितारे भी पिता की तस्वीर और उनसे जुड़ी यादों को लगातार साझा कर रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने भी फादर्स डे पर पिता के लिए खास पोस्ट साझा किया है। साथ ही उनसे जुड़ी यादों को याद किया है। अनुष्का शर्मा के पिता एक आर्मी ऑफिसर थे। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पिता के साथ अपनी दो खास तस्वीरें साझा की है। अनुष्का शर्मा की यह तस्वीरें उनकी शादी में मेहंदी सेरेमनी की हैं। तस्वीर में उनके पिता उनको चूमते नजर आ रहे हैं। वहीं अनुष्का के पति विराट कोहली और अभिनेत्री की मां उन्हें देख रही हैं। इन तस्वीरों को साझा करते हुए अनुष्का शर्मा ने पिता के लिए खास पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी और पिता की खास बातों को साझा किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, एक बात मेरे और पापा के बीच, जब वह जब बंगलूरू में अपनी सेना की पोस्टिंग पर ऑफिस जाने से पहले मुझे कॉलेज छोड़ते थे। पापा- 'जिंदगी में हमेशा सही काम करें चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। आप हमेशा अपने आप से खुश और शांति रहेंगे। ' अनुष्का ने पोस्ट में आगे अपनी बात काा जिक्र करते हुए लिखा, मैं- 'लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा कि जिंदगी की सभी स्थितियों में क्या करना सही है। ' पापा- 'उसके लिए, ज्ञान की प्रार्थना करो। सही और गलत के बीच अंतर जानने और हमेशा सही चीज चुनने की ताकत के बारे में जानने की इच्छा रखें'। अनुष्का ने पोस्ट के आखिरी में लिखा, 'मैं दुआ करता हूं कि आप सभी को वही ज्ञान मिले जिसकी मैं प्रार्थना करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि सभी लड़कियों को पिता की तरह मेरा आशीर्वाद मिले। '
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Ranchi: 16 सितंबर से 2 अक्टूबर तक रांची रेल मंडल में स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया गया. इसका समापन गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर को हो गया. इस मौके पर डीआरएम प्रदीप गुप्ता ने रांची रेल मंडल के स्वच्छता अभियान की खूब बखान किया. लेकिन डीआरएम ऑफिस के बाहर नजारा कुछ बयां कर रहा था. डीआरएम ऑफिस के बाहर कचरे का अंबार लगा हुआ था. रांची रेल मंडल के रेलवे स्टेशनों में जहां साफ सफाई की जा रही है, वहीं रेलवे महकमे के अधिकारियों के बैठने वाले जगह के बाहर ही कचरे का अंबार लगा हुआ है.
इस मौके पर रांची रेल मंडल के डीआरएम प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता को लेकर रेल मंडल कार्यालय के प्रांगण में रेल अधिकारी और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई. मंडल के कोचिंग डिपो समेत सभी कार्यालयों में श्रमदान किया गया. वहीं रेल मंडल के सभी स्कूलों में भी कर्मचारियों द्वारा श्रमदान किया गया. साथ ही सभी रेलवे स्टेशनों की भी साफ- सफाई हुई है. सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ मशीनों, उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. साफ-सफाई बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जाए इस और विशेष ध्यान दिया गया है.
स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान रांची रेलवे स्टेशन समेत दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी सफाई अभियान चलाया गया है. सभी स्टेशनों पर कूड़ेदान रखे गए हैं. सफाई कर्मचारियों के लिए कई व्यवस्था की गई है. रांची रेल मंडल के सभी स्टेशनों पर युद्ध स्तर पर साफ सफाई का काम किया गया.
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Ranchi: सोलह सितंबर से दो अक्टूबर तक रांची रेल मंडल में स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया गया. इसका समापन गांधी जयंती के दिन दो अक्टूबर को हो गया. इस मौके पर डीआरएम प्रदीप गुप्ता ने रांची रेल मंडल के स्वच्छता अभियान की खूब बखान किया. लेकिन डीआरएम ऑफिस के बाहर नजारा कुछ बयां कर रहा था. डीआरएम ऑफिस के बाहर कचरे का अंबार लगा हुआ था. रांची रेल मंडल के रेलवे स्टेशनों में जहां साफ सफाई की जा रही है, वहीं रेलवे महकमे के अधिकारियों के बैठने वाले जगह के बाहर ही कचरे का अंबार लगा हुआ है. इस मौके पर रांची रेल मंडल के डीआरएम प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता को लेकर रेल मंडल कार्यालय के प्रांगण में रेल अधिकारी और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई. मंडल के कोचिंग डिपो समेत सभी कार्यालयों में श्रमदान किया गया. वहीं रेल मंडल के सभी स्कूलों में भी कर्मचारियों द्वारा श्रमदान किया गया. साथ ही सभी रेलवे स्टेशनों की भी साफ- सफाई हुई है. सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ मशीनों, उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. साफ-सफाई बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जाए इस और विशेष ध्यान दिया गया है. स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान रांची रेलवे स्टेशन समेत दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी सफाई अभियान चलाया गया है. सभी स्टेशनों पर कूड़ेदान रखे गए हैं. सफाई कर्मचारियों के लिए कई व्यवस्था की गई है. रांची रेल मंडल के सभी स्टेशनों पर युद्ध स्तर पर साफ सफाई का काम किया गया.
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले जनसंख्या नियंत्रण बिल लागू किए जाने की बात जब से उठायी गयी है तब से कई लोगों को तगड़ी मिर्ची लगी है. खासकर दूसरे मजहब के लोग, जो आए दिन इस बिल पर कुछ न कुछ बयानबाज़ी करने मैदान में उतर जाते हैं। वैसे आपको बता दें अभी तो बिल आया भी नहीं और इनके बयानबाजी अभी से ही शुरू हो चुकी है।
बता दें भारतीय किसान मजदूर मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद जौला ने मंगलवार को मुजफ्फरनगर के सिसौली पंचायत में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बच्चों का जो कानून बनाया है, उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। हमारे समाज के लोग चार-चार बीवी रख सकते हैं, तो अगर एक बीवी के दो बच्चे हुए तो कुल आठ बच्चें ऐसे ही हो जाएंगे। वोहीं वायरल हो रहे इस वीडियो वो लोगों को उकसा भी रहे हैं। जानकारी के लिए बता दूं कि लॉ कमिशन ने सोमवार को CM योगी आदित्यनाथ को जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़े बिल का ब्योड़ा सौंपा है.
वोहीं आयोग का दावा है कि इस कागजात में संसोधन को लेकर 8500 सुझाव प्राप्त हुए थे, इन प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की गई थी. इस बिल में सबसे खास बात यह है कि अगर सरकारी कर्मचारी इसका उल्लंघन करते है तो उसकी नौकरी भी जा सकती हैं. इसके साथ ही आयोग ने अपनी रिपोर्ट में महिलाओं को स्वेच्छा से नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने के लिए भी सुझाव दिया है और कहा है कि जो महिलाएं 45 वर्ष तक एक ही बच्चा रखेंगी उन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर सरकार एक लाभ रुपए देगी.
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले जनसंख्या नियंत्रण बिल लागू किए जाने की बात जब से उठायी गयी है तब से कई लोगों को तगड़ी मिर्ची लगी है. खासकर दूसरे मजहब के लोग, जो आए दिन इस बिल पर कुछ न कुछ बयानबाज़ी करने मैदान में उतर जाते हैं। वैसे आपको बता दें अभी तो बिल आया भी नहीं और इनके बयानबाजी अभी से ही शुरू हो चुकी है। बता दें भारतीय किसान मजदूर मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद जौला ने मंगलवार को मुजफ्फरनगर के सिसौली पंचायत में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बच्चों का जो कानून बनाया है, उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। हमारे समाज के लोग चार-चार बीवी रख सकते हैं, तो अगर एक बीवी के दो बच्चे हुए तो कुल आठ बच्चें ऐसे ही हो जाएंगे। वोहीं वायरल हो रहे इस वीडियो वो लोगों को उकसा भी रहे हैं। जानकारी के लिए बता दूं कि लॉ कमिशन ने सोमवार को CM योगी आदित्यनाथ को जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़े बिल का ब्योड़ा सौंपा है. वोहीं आयोग का दावा है कि इस कागजात में संसोधन को लेकर आठ हज़ार पाँच सौ सुझाव प्राप्त हुए थे, इन प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की गई थी. इस बिल में सबसे खास बात यह है कि अगर सरकारी कर्मचारी इसका उल्लंघन करते है तो उसकी नौकरी भी जा सकती हैं. इसके साथ ही आयोग ने अपनी रिपोर्ट में महिलाओं को स्वेच्छा से नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने के लिए भी सुझाव दिया है और कहा है कि जो महिलाएं पैंतालीस वर्ष तक एक ही बच्चा रखेंगी उन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर सरकार एक लाभ रुपए देगी.
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पानीपत : पानीपत शहर में सनौली रोड पर शराब सेल्समैन ने मामूली कहासुनी के बाद दो ग्राहक दोस्तों पर हमला किया। आरोपी ने अपने अन्य साथियों संग दोनों पर वार किया। इतना ही नहीं, बाइक से नीचे गिरने के बाद उनके ऊपर गाड़ी चढ़ाई और मोबाइल लूट लिया। मामले की शिकायत पीड़ितों ने पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में अनिल मदान ने बताया कि वह सोनीपत का रहने वाला है। वह पानीपत खन्ना रोड स्थित रीव नगर में वेस्ट का काम करता है। वह अपने दोस्त सूरजभान के साथ संजय चौक से शिव चौक की ओर जा रहा था। शिव चौक के पास शराब ठेके पर उसके दोस्त ने सेल्समैन मोहित से दो बीयर ली। जिसके उसने 360 रुपए दे दिए। इसके बाद सूरज ने ठेके के मालिक के बारे में पूछा तो सेल्समैन गाली-गलौज करने लगा। झगड़ा बढ़ते देख वे दोनों वहां से निकल गए।
रास्ते में सनौली रोड, मलिक पेट्रोल पंप के सामने परचून की दुकान से वे घरेलू सामान खरीदने लगे। इसी दौरान वहां दो कारें आई। उनमें से मोहित अपने तीन अन्य साथियों के साथ नीचे उतरा और उनके साथ हाथापाई करने लगा। अनिल ने डायल 112 को कॉल किया तो आरोपी वहां से चले गए। कुछ ही देर बाद गाड़ी वापस मुड़कर आई और अनिल के हाथ से फोन छीन लिया और अपने साथ ले गए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अनिल के ऊपर भी गाड़ी चढ़ा दी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
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पानीपत : पानीपत शहर में सनौली रोड पर शराब सेल्समैन ने मामूली कहासुनी के बाद दो ग्राहक दोस्तों पर हमला किया। आरोपी ने अपने अन्य साथियों संग दोनों पर वार किया। इतना ही नहीं, बाइक से नीचे गिरने के बाद उनके ऊपर गाड़ी चढ़ाई और मोबाइल लूट लिया। मामले की शिकायत पीड़ितों ने पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी शिकायत में अनिल मदान ने बताया कि वह सोनीपत का रहने वाला है। वह पानीपत खन्ना रोड स्थित रीव नगर में वेस्ट का काम करता है। वह अपने दोस्त सूरजभान के साथ संजय चौक से शिव चौक की ओर जा रहा था। शिव चौक के पास शराब ठेके पर उसके दोस्त ने सेल्समैन मोहित से दो बीयर ली। जिसके उसने तीन सौ साठ रुपयापए दे दिए। इसके बाद सूरज ने ठेके के मालिक के बारे में पूछा तो सेल्समैन गाली-गलौज करने लगा। झगड़ा बढ़ते देख वे दोनों वहां से निकल गए। रास्ते में सनौली रोड, मलिक पेट्रोल पंप के सामने परचून की दुकान से वे घरेलू सामान खरीदने लगे। इसी दौरान वहां दो कारें आई। उनमें से मोहित अपने तीन अन्य साथियों के साथ नीचे उतरा और उनके साथ हाथापाई करने लगा। अनिल ने डायल एक सौ बारह को कॉल किया तो आरोपी वहां से चले गए। कुछ ही देर बाद गाड़ी वापस मुड़कर आई और अनिल के हाथ से फोन छीन लिया और अपने साथ ले गए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अनिल के ऊपर भी गाड़ी चढ़ा दी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
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श्री सेटिया जैन म यमाला
मजान एवं विनयाचरण में अकुशल होता है तथा प्राप्त आहारादि अपने साथी या नहीं देता उसे कभी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। दर वैालिक अध्ययन दूसरा उदेशा गाथा
तयसव जहाइ से रय, इति सखाय मुणी य मज्जइ । गोयन्नतरेण माहणे, असेपकरी अन्नेसि इसिपी ।।८।। भावार्थ- जैसे सर्प अपनी फाँचली छोड़ देता है इसी प्रकार मुनि आत्मा के साथ लगी हुई कर्म ग्ज दूर करता है। कपा त्याग करने से कर्म रज दूर होती है यह जान फर वह गोत्रादि किसी का मद नहीं करता। दूसरों की निदा भकल्याण करने वाली है इसलिये वह उसका भी त्याग करता है ।
जे परिभवइ पर जय, ससारे परिवतई मह । मदुइग्वणियाउ पाविया, इति सग्वाय मुखी न मलई है।
भावार्य - जो व्यक्ति दूसर की अवज्ञा करता है वह चिरकाल तक ससार में परिभ्रमण करता है। पर निदा भी आत्मा का नीचे गिराने वाली है। यह जान कर मुनि जाते, कुल, श्रुत, तप यदि किसी का मद नहीं करता। यूयगाग भ० २ ३० ९ गाथा १, २
न माहिर परिभने, अत्ताण न समुक्कसे । सुथलाभे न मजिजा, जया तवस्सि वुद्धिए ॥१०॥
भावार्थ- साधु को चाहिये कि दूसरे का पराभव (अपमान) न करे, अपने को वडा न समझे और शास्त्रों का ज्ञान सीखकर अभिमान न करे । इसी प्रकार उसे जाति, तप, बुद्धि आदि का अहकार भी न करना चाहिये । दश्वेकालिक भाग्वां भगाया ३०
पन्नामय चेय तवोमयच, निन्नामणगोयमय व भिक्खु ।
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श्री सेटिया जैन म यमाला मजान एवं विनयाचरण में अकुशल होता है तथा प्राप्त आहारादि अपने साथी या नहीं देता उसे कभी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। दर वैालिक अध्ययन दूसरा उदेशा गाथा तयसव जहाइ से रय, इति सखाय मुणी य मज्जइ । गोयन्नतरेण माहणे, असेपकरी अन्नेसि इसिपी ।।आठ।। भावार्थ- जैसे सर्प अपनी फाँचली छोड़ देता है इसी प्रकार मुनि आत्मा के साथ लगी हुई कर्म ग्ज दूर करता है। कपा त्याग करने से कर्म रज दूर होती है यह जान फर वह गोत्रादि किसी का मद नहीं करता। दूसरों की निदा भकल्याण करने वाली है इसलिये वह उसका भी त्याग करता है । जे परिभवइ पर जय, ससारे परिवतई मह । मदुइग्वणियाउ पाविया, इति सग्वाय मुखी न मलई है। भावार्य - जो व्यक्ति दूसर की अवज्ञा करता है वह चिरकाल तक ससार में परिभ्रमण करता है। पर निदा भी आत्मा का नीचे गिराने वाली है। यह जान कर मुनि जाते, कुल, श्रुत, तप यदि किसी का मद नहीं करता। यूयगाग भशून्य दो तीस नौ गाथा एक, दो न माहिर परिभने, अत्ताण न समुक्कसे । सुथलाभे न मजिजा, जया तवस्सि वुद्धिए ॥दस॥ भावार्थ- साधु को चाहिये कि दूसरे का पराभव न करे, अपने को वडा न समझे और शास्त्रों का ज्ञान सीखकर अभिमान न करे । इसी प्रकार उसे जाति, तप, बुद्धि आदि का अहकार भी न करना चाहिये । दश्वेकालिक भाग्वां भगाया तीस पन्नामय चेय तवोमयच, निन्नामणगोयमय व भिक्खु ।
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छत्तीसगढ़ में कोल- ब्लॉक आवंटन मामले में अनियमितता केस में दिल्ली की विशेष अदालत ने पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा को चार साल की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उनके बेटे देवेंदर दर्डा और मेसर्स जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनोज कुमार जयसवाल को भी इतनी ही सजा सुनाई है। अदालत ने पूर्व कोल सचिव एचसी गुप्ता, दो वरिष्ठ लोकसेवकों केएस क्रोफा और केसी समरिया को इसी मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई है।
इससे पहले 13 जुलाई को अदालत ने पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता समेत पांच अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था।
विशेष न्यायाधीश संजय बंसल ने पूर्व सांसद के बेटे देवेंद्र दर्डा, वरिष्ठ लोक सेवक केएस क्रोफा और केसी सामरिया, जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशक मनोज कुमार जयसवाल को भी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दोषी ठहराया था। हालांकि सीबीआई ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, लेकिन साल 2014 में अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और निर्देश दिया था कि जांच एजेंसी द्वारा नए सिरे से जांच की जाए।
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छत्तीसगढ़ में कोल- ब्लॉक आवंटन मामले में अनियमितता केस में दिल्ली की विशेष अदालत ने पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा को चार साल की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उनके बेटे देवेंदर दर्डा और मेसर्स जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनोज कुमार जयसवाल को भी इतनी ही सजा सुनाई है। अदालत ने पूर्व कोल सचिव एचसी गुप्ता, दो वरिष्ठ लोकसेवकों केएस क्रोफा और केसी समरिया को इसी मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई है। इससे पहले तेरह जुलाई को अदालत ने पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता समेत पांच अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। विशेष न्यायाधीश संजय बंसल ने पूर्व सांसद के बेटे देवेंद्र दर्डा, वरिष्ठ लोक सेवक केएस क्रोफा और केसी सामरिया, जेएलडी यवतमाल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशक मनोज कुमार जयसवाल को भी कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दोषी ठहराया था। हालांकि सीबीआई ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, लेकिन साल दो हज़ार चौदह में अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और निर्देश दिया था कि जांच एजेंसी द्वारा नए सिरे से जांच की जाए।
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GORAKHPUR: मौसम का मिजाज बदलने का सिलसिला लगातार जारी है। रविवार शाम से एक बार फिर मौसम ने करवट बदल ली। इस दौरान सर्द हवाएं और कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाता रहा। मौसम विभाग की मानें तो आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। दो दिनों तक सुबह में घना कोहरा रहेगा। उसके बाद मौसम साफ रहेगा। इस दौरान सर्द हवाएं परेशान कर सकती हैं।
पिछले कई दिनों से तेज धूप लोगों को राहत दे रही थी। इस बीच शनिवार को हुई बारिश के बाद मौसम का मिजाज चेंज होने लगा। रविवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह से बदल गया। शाम होते-होते सर्द हवाएं चलने लगी, जो रात में काफी सर्द हो गई। सुबह होने के साथ ही घना कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाता रहा। वहीं, सुबह से ही हल्की धूप निकलने के बाद फिर बदली छाई गई। देर शाम तक बादल छाए रहे। शाम होते-होते थोड़ी देर सूरज के दर्शन हुए, लेकिन फिर बदली छा गई। देर शाम तेज हवाओं की वजह से गलन बढ़ गई और लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर हो गए।
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GORAKHPUR: मौसम का मिजाज बदलने का सिलसिला लगातार जारी है। रविवार शाम से एक बार फिर मौसम ने करवट बदल ली। इस दौरान सर्द हवाएं और कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाता रहा। मौसम विभाग की मानें तो आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। दो दिनों तक सुबह में घना कोहरा रहेगा। उसके बाद मौसम साफ रहेगा। इस दौरान सर्द हवाएं परेशान कर सकती हैं। पिछले कई दिनों से तेज धूप लोगों को राहत दे रही थी। इस बीच शनिवार को हुई बारिश के बाद मौसम का मिजाज चेंज होने लगा। रविवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह से बदल गया। शाम होते-होते सर्द हवाएं चलने लगी, जो रात में काफी सर्द हो गई। सुबह होने के साथ ही घना कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाता रहा। वहीं, सुबह से ही हल्की धूप निकलने के बाद फिर बदली छाई गई। देर शाम तक बादल छाए रहे। शाम होते-होते थोड़ी देर सूरज के दर्शन हुए, लेकिन फिर बदली छा गई। देर शाम तेज हवाओं की वजह से गलन बढ़ गई और लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर हो गए।
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मुंबई : महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार के बनने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा बुधवार को पहली बार राज्य के पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे।
नड्डा मंगलवार की रात यहां पहुंचे। वर्ष 2014 में 122 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 2019 के राज्य चुनावों में 105 सीटें हासिल कीं थी। हालांकि, शिवसेना ने भाजपा के साथ अपना संबंध तोड़ लिया और राकांपा तथा कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार बनाई।
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मुंबई : महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार के बनने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा बुधवार को पहली बार राज्य के पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे। नड्डा मंगलवार की रात यहां पहुंचे। वर्ष दो हज़ार चौदह में एक सौ बाईस सीटें जीतने वाली भाजपा ने दो हज़ार उन्नीस के राज्य चुनावों में एक सौ पाँच सीटें हासिल कीं थी। हालांकि, शिवसेना ने भाजपा के साथ अपना संबंध तोड़ लिया और राकांपा तथा कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार बनाई।
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बरेलीः बारादरी थाना क्षेत्र में अशोक नगर निवासी एक व्यक्ति से जमीन बेचने के नाम पर 11. 80 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
अशोकनगर निवासी बादाम सिंह ने बताया कि वह सेवानिवृत्त सैनिक हैं। एक वर्ष पहले उनके पास आबिद हुसैन निवासी एजाजनगर गौटिया और इस्माइलपुर थाना भुता निवासी सादिक और सुरेन्द्र अपने साथ नासिर उर्फ बबलू को लेकर आए और कहा कि इनके पिता की जमीन उदयपुर जसरथपुर थाना बिथरी चैनपुर में है। जिसे वह बेचना चाहते हैं।
जमीन का सौदा 14 लाख रुपये में तय हो गया। 7 फरवरी 2022 को 11. 80 लाख रुपये देकर इकरारनामा करा लिया और कहा कि 10 माह बाद बैनामा कर देंगे। खतौनी निकलवाने पर पता चला कि शाकिर खां ने अपनी जमीन सगे बेटे जाकिर खां को दान कर दी है। रुपये मांगने पर आरोपियों जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आबिद हुसैन, सादिक, सुरेन्द्र, नासिर उर्फ बबलू, नाजरीन, तौहीद खां और जाकिर खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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बरेलीः बारादरी थाना क्षेत्र में अशोक नगर निवासी एक व्यक्ति से जमीन बेचने के नाम पर ग्यारह. अस्सी लाख रुपये की ठगी कर ली गई। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। अशोकनगर निवासी बादाम सिंह ने बताया कि वह सेवानिवृत्त सैनिक हैं। एक वर्ष पहले उनके पास आबिद हुसैन निवासी एजाजनगर गौटिया और इस्माइलपुर थाना भुता निवासी सादिक और सुरेन्द्र अपने साथ नासिर उर्फ बबलू को लेकर आए और कहा कि इनके पिता की जमीन उदयपुर जसरथपुर थाना बिथरी चैनपुर में है। जिसे वह बेचना चाहते हैं। जमीन का सौदा चौदह लाख रुपये में तय हो गया। सात फरवरी दो हज़ार बाईस को ग्यारह. अस्सी लाख रुपये देकर इकरारनामा करा लिया और कहा कि दस माह बाद बैनामा कर देंगे। खतौनी निकलवाने पर पता चला कि शाकिर खां ने अपनी जमीन सगे बेटे जाकिर खां को दान कर दी है। रुपये मांगने पर आरोपियों जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आबिद हुसैन, सादिक, सुरेन्द्र, नासिर उर्फ बबलू, नाजरीन, तौहीद खां और जाकिर खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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ग्वालियर, न. सं. । बोर्ड परीक्षा शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे है और परीक्षाओं के लिए विद्यार्थी तैयारियों में जुटे हुए हैं। ऐसे में एक परीक्षा की तारीख पास आते ही विद्यार्थी अक्सर तनाव का शिकार होने लगते हैं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है, वह अच्छे रिजल्ट और कोर्स कंप्लीट करने की वजह से चिंता से घिरने लगते हैं। खासकर कमजोर बच्चे इस दौरान अधिक दबाव महसूस करते हैं। परिवार और शिक्षकों की उम्मीदें भी कई बार बच्चों में तनाव का कारण बन जाती है। ऐसे में मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान तनाव को दूर करने के लिए पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम भी करें। जिससे तानव को दूर किया जा सकता है।
दरअसल एमपी बोर्ड की 10 वीं की परीक्षा 1 मार्च से और 12 वीं की परीक्षा 2 मार्च से शुरू हो रही हैं। इसलिए विद्यार्थी भी परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
जयारोग्य मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि कई विद्यार्थी ऐसेे होते हैं जिन्हें अक्सर परीक्षा की तैयारी करते हुए यह समझ नहीं आता है कि वह कहां से शुरुआत करें। ऐसे में समय बीतने के साथ ही बच्चों में तनाव भी बढ़ता जाता है। इसलिए परीक्षा की तैयारी करने से पहले एक टाइम टेबल जरूर बनाएं। टाइम टेबल को फॉलो करने से आप आराम से अपनी पढ़ाई भी कर पाएंगे और आपका आत्मविश्वास भी बना रहेगा।
10वीं-12वीं बोर्ड की परीक्षाओं से पहले स्कूल जल्द ही सिलेबस खत्म कर देता है। ऐसे में परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को रिवीजन का काफी समय मिल जाता है। अगर आप परीक्षा से होने वाले तनाव को दूर रखना चाहते हैं, तो समय का उपयोग करते हुए रिवीजन शुरू कर दें, ताकि परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर आपको घबराहट या तनाव महसूस ना हो।
पढ़ाई के लिए अपना टाइम टेबल बनाते समय यह जरूर ध्यान रखें कि इसमें समय- समय पर ब्रेक भी शामिल हो। लगातार पढ़ाई करने से आपकी एकाग्रता में दिक्कत होती है और साथ ही यह आपको शारीरिक और मानसिक तकलीफ भी दे सकती है। इसलिए जरूरी है कि पढ़ाई के समय आप बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें, ताकि मानसिक तनाव फिर कम हो और आप रुचि के साथ पढ़ाई कर सकें।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि अक्सर परीक्षा के तनाव के चलते बच्चे रात भर जाग कर तैयारी करते हैं। लेकिन ऐसा करना आपकी सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। यह न सिर्फ आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि आपकी मानसिक स्थिति पर भी असर डालती है। इसलिए कोशिश करें कि परीक्षा की तैयारी करते समय 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें, ताकि आपका माइंड फ्रेश फील कर सकें।
अक्सर परीक्षा की तैयारी करते समय बच्चे अपना एक फिक्स शेड्यूल तय कर लेते हैं, जिसकी वजह से वह सिर्फ पढ़ाई में ही लगे रहते हैं। लेकिन अगर आप तनाव के बिना परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं, तो यह जरूरी है कि आप शारीरिक और मानसिक तौर पर एक्टिव रहें। इसलिए परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही कोशिश करें कि आप पर्याप्त धूप लें और शारीरिक गतिविधि जैसे व्यायाम, एक्सरसाइज, वॉकिंग आदि भी करते रहें। साथ ही स्वस्थ आहार का भी सेवन करें।
बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में 92 परीक्षा केंद्र निर्धारत किए गए हैं। इनमें से 45 सामान्य, 41 संवेदनशील और 6 अतिसंवेदनशील हैं। संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। परीक्षा सुबह की पाली में 9 से 12 बजे तक होगी। प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी केंद्र पर छात्र टाट पट्टी पर न बैठें। जहां फर्नीचर नहीं है, वहां फर्नीचर की व्यवस्था करें।
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ग्वालियर, न. सं. । बोर्ड परीक्षा शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे है और परीक्षाओं के लिए विद्यार्थी तैयारियों में जुटे हुए हैं। ऐसे में एक परीक्षा की तारीख पास आते ही विद्यार्थी अक्सर तनाव का शिकार होने लगते हैं। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है, वह अच्छे रिजल्ट और कोर्स कंप्लीट करने की वजह से चिंता से घिरने लगते हैं। खासकर कमजोर बच्चे इस दौरान अधिक दबाव महसूस करते हैं। परिवार और शिक्षकों की उम्मीदें भी कई बार बच्चों में तनाव का कारण बन जाती है। ऐसे में मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान तनाव को दूर करने के लिए पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम भी करें। जिससे तानव को दूर किया जा सकता है। दरअसल एमपी बोर्ड की दस वीं की परीक्षा एक मार्च से और बारह वीं की परीक्षा दो मार्च से शुरू हो रही हैं। इसलिए विद्यार्थी भी परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। जयारोग्य मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि कई विद्यार्थी ऐसेे होते हैं जिन्हें अक्सर परीक्षा की तैयारी करते हुए यह समझ नहीं आता है कि वह कहां से शुरुआत करें। ऐसे में समय बीतने के साथ ही बच्चों में तनाव भी बढ़ता जाता है। इसलिए परीक्षा की तैयारी करने से पहले एक टाइम टेबल जरूर बनाएं। टाइम टेबल को फॉलो करने से आप आराम से अपनी पढ़ाई भी कर पाएंगे और आपका आत्मविश्वास भी बना रहेगा। दसवीं-बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं से पहले स्कूल जल्द ही सिलेबस खत्म कर देता है। ऐसे में परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को रिवीजन का काफी समय मिल जाता है। अगर आप परीक्षा से होने वाले तनाव को दूर रखना चाहते हैं, तो समय का उपयोग करते हुए रिवीजन शुरू कर दें, ताकि परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर आपको घबराहट या तनाव महसूस ना हो। पढ़ाई के लिए अपना टाइम टेबल बनाते समय यह जरूर ध्यान रखें कि इसमें समय- समय पर ब्रेक भी शामिल हो। लगातार पढ़ाई करने से आपकी एकाग्रता में दिक्कत होती है और साथ ही यह आपको शारीरिक और मानसिक तकलीफ भी दे सकती है। इसलिए जरूरी है कि पढ़ाई के समय आप बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें, ताकि मानसिक तनाव फिर कम हो और आप रुचि के साथ पढ़ाई कर सकें। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि अक्सर परीक्षा के तनाव के चलते बच्चे रात भर जाग कर तैयारी करते हैं। लेकिन ऐसा करना आपकी सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। यह न सिर्फ आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि आपकी मानसिक स्थिति पर भी असर डालती है। इसलिए कोशिश करें कि परीक्षा की तैयारी करते समय सात से आठ घंटाटे की नींद जरूर लें, ताकि आपका माइंड फ्रेश फील कर सकें। अक्सर परीक्षा की तैयारी करते समय बच्चे अपना एक फिक्स शेड्यूल तय कर लेते हैं, जिसकी वजह से वह सिर्फ पढ़ाई में ही लगे रहते हैं। लेकिन अगर आप तनाव के बिना परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं, तो यह जरूरी है कि आप शारीरिक और मानसिक तौर पर एक्टिव रहें। इसलिए परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही कोशिश करें कि आप पर्याप्त धूप लें और शारीरिक गतिविधि जैसे व्यायाम, एक्सरसाइज, वॉकिंग आदि भी करते रहें। साथ ही स्वस्थ आहार का भी सेवन करें। बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में बानवे परीक्षा केंद्र निर्धारत किए गए हैं। इनमें से पैंतालीस सामान्य, इकतालीस संवेदनशील और छः अतिसंवेदनशील हैं। संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। परीक्षा सुबह की पाली में नौ से बारह बजे तक होगी। प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी केंद्र पर छात्र टाट पट्टी पर न बैठें। जहां फर्नीचर नहीं है, वहां फर्नीचर की व्यवस्था करें।
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ऑस्ट्रेलिया को श्रीलंका के खिलाफ मिली 3-0 की हार का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है. 21 अगस्त से प्रेमदासा स्टेडियम, कोलम्बो में हो रहे मैच के लिए संभावित टीम की घोषणा हो गयी. जिसमे एक रिप्लेसमेंट देखने को मिल रहा है.
बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ट्रेविस हेड को टीम में लेने के बाद हरफनमौला खिलाड़ी मिचेल मार्श को एकदिवसिय सीरीज के लिए आराम दे दिया गया है जिससे उनकी घर वापसी तय है.
ऑस्ट्रेलियाई कोच डारेन लेहमैन ने बताया कि,
(1). ऑस्ट्रेलियाई टीम में आलराउंडर की जगह मोजेस हेनरीक्स ले पाएंगे. ?
(2). क्या ऑस्ट्रेलियाई टीम अजय दिख रही श्रीलंकन टीम को पराजित कर पायेगी?
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ऑस्ट्रेलिया को श्रीलंका के खिलाफ मिली तीन-शून्य की हार का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है. इक्कीस अगस्त से प्रेमदासा स्टेडियम, कोलम्बो में हो रहे मैच के लिए संभावित टीम की घोषणा हो गयी. जिसमे एक रिप्लेसमेंट देखने को मिल रहा है. बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ट्रेविस हेड को टीम में लेने के बाद हरफनमौला खिलाड़ी मिचेल मार्श को एकदिवसिय सीरीज के लिए आराम दे दिया गया है जिससे उनकी घर वापसी तय है. ऑस्ट्रेलियाई कोच डारेन लेहमैन ने बताया कि, . ऑस्ट्रेलियाई टीम में आलराउंडर की जगह मोजेस हेनरीक्स ले पाएंगे. ? . क्या ऑस्ट्रेलियाई टीम अजय दिख रही श्रीलंकन टीम को पराजित कर पायेगी?
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मिथुन राशि के जातकों के लिए आज जायदाद संबंधित मामलों में चतुराई से निपटने की जरुरत है। संपत्ति निवेश आपको अपेक्षित लाभ नहीं दिला पाएगा। नौकरी में बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किसी गरीब को दान करना लाभकारी हो सकता है। जिन लोगों के होटल या रेस्टोरेंट है, वे महामारी से बचने के लिए अच्छे इंतज़ाम रखें। व्यापार में पार्टनर के साथ मतभेद हो सकता है।
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मिथुन राशि के जातकों के लिए आज जायदाद संबंधित मामलों में चतुराई से निपटने की जरुरत है। संपत्ति निवेश आपको अपेक्षित लाभ नहीं दिला पाएगा। नौकरी में बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किसी गरीब को दान करना लाभकारी हो सकता है। जिन लोगों के होटल या रेस्टोरेंट है, वे महामारी से बचने के लिए अच्छे इंतज़ाम रखें। व्यापार में पार्टनर के साथ मतभेद हो सकता है।
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आज क्रिसमस डे है। प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के लिए चर्च रंग-बिरंगी लाइट से सज चुके हैं। सत्य, प्रेम, करुणा और दया के पालनहार प्रभु यीशु के अवतरण का कार्यक्रम शनिवार रात 10 बजे से ही शुरू हो गया। लोगों ने चर्च में पहुंच कैंडल्स जलाईं। रविवार पूरा दिन गिरिजाघरों में कार्यक्रम होंगे।
अमृतसर की सभी चर्चों में मां मरियम की गोद में यीशु की प्रतिमा को सजाया गया है। चर्च के आसपास के एरिया में भी काफी अधिक रौनक रही। गिरिजाघरों में रात 10 बजे के करीब लोगों की भीड़ इकट्ठी होना शुरू हो गई। अमृतसर की कोर्ट रोड स्थित सेंट पॉल चर्च और रामबाग स्थित चर्च में बड़े आयोजन किए गए।
रात 12 बजते ही खुशी का माहौल छा गया। कैरल्स गाए गए और लोगों ने एक दूसरे को भगवान यीशु मसीह के जन्म दिवस की शुभकामनाएं दी गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां व केक देकर इस दिन की शुभकामनाएं दी।
पंजाब में बीते कुछ समय से निहंग जत्थेबंदियों और ईसाई समुदाय के बीच तनाव चल रहा है। इसी के मद्देनजर गिरिजाघरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। मेटल डिटेक्टर इन्स्टॉल किए गए और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जांच के बाद ही चर्च जाने दिया गया।
चर्च में नन्हें बच्चे सांता बनकर पहुंचे। लाल रंग के कपड़ों में बच्चे खूबसूरत लग रहे थे। सांता बने बच्चे अपने थैले में रखी टॉफियां बांट रहे हैं। इतना ही नहीं शहर के मॉल भी क्रिसमस सेलिब्रेशन के लिए सज चुके हैं। शुक्रवार से ही सड़कों पर भी लोग सांता बन बच्चों को मिठाई और टॉफियां बांट रहे हैं।
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आज क्रिसमस डे है। प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के लिए चर्च रंग-बिरंगी लाइट से सज चुके हैं। सत्य, प्रेम, करुणा और दया के पालनहार प्रभु यीशु के अवतरण का कार्यक्रम शनिवार रात दस बजे से ही शुरू हो गया। लोगों ने चर्च में पहुंच कैंडल्स जलाईं। रविवार पूरा दिन गिरिजाघरों में कार्यक्रम होंगे। अमृतसर की सभी चर्चों में मां मरियम की गोद में यीशु की प्रतिमा को सजाया गया है। चर्च के आसपास के एरिया में भी काफी अधिक रौनक रही। गिरिजाघरों में रात दस बजे के करीब लोगों की भीड़ इकट्ठी होना शुरू हो गई। अमृतसर की कोर्ट रोड स्थित सेंट पॉल चर्च और रामबाग स्थित चर्च में बड़े आयोजन किए गए। रात बारह बजते ही खुशी का माहौल छा गया। कैरल्स गाए गए और लोगों ने एक दूसरे को भगवान यीशु मसीह के जन्म दिवस की शुभकामनाएं दी गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां व केक देकर इस दिन की शुभकामनाएं दी। पंजाब में बीते कुछ समय से निहंग जत्थेबंदियों और ईसाई समुदाय के बीच तनाव चल रहा है। इसी के मद्देनजर गिरिजाघरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। मेटल डिटेक्टर इन्स्टॉल किए गए और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जांच के बाद ही चर्च जाने दिया गया। चर्च में नन्हें बच्चे सांता बनकर पहुंचे। लाल रंग के कपड़ों में बच्चे खूबसूरत लग रहे थे। सांता बने बच्चे अपने थैले में रखी टॉफियां बांट रहे हैं। इतना ही नहीं शहर के मॉल भी क्रिसमस सेलिब्रेशन के लिए सज चुके हैं। शुक्रवार से ही सड़कों पर भी लोग सांता बन बच्चों को मिठाई और टॉफियां बांट रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Independence Day 2023: 15 अगस्त के दिन इतना ही नहीं देश की सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों को राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे रंग (National Flag) की झालरों और सजावटी रोशनी से सजाया जाता है. खुशी और सद्भाव के रूप में मिठाइयां बांटी जाती है.
Independence Day 2023: इस दिन भारत का राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) कई सार्वजनिक स्थानों पर फहराया जाता है. इस ऐतिहासिक घटना के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री दिल्ली (Prime Minister) के लाल किले (Red Fort) पर राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) फहराते हैं. ध्वजारोहण समारोह के साथ-साथ परेड और लोक नृत्य प्रदर्शन भी होते हैं. पूरे देश में कई उत्सव होते हैं. स्कूलों और कॉलेजों समेत शैक्षणिक संस्थान, इस दिन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में स्टूडेंट्स को जानकारी देने के लिए एक विशेष समारोह का आयोजन करते हैं. इस अवसर का जश्न मनाने के लिए बच्चे तिरंगे रंग की पतंगें उड़ाते हैं. हाथ में तिरंगा लेकर जश्न मनाते हैं.
15 अगस्त के दिन इतना ही नहीं देश की सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों को राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे रंग (National Flag) की झालरों और सजावटी रोशनी से सजाया जाता है. खुशी और सद्भाव के रूप में मिठाइयां बांटी जाती है. दिल्ली के लाल किले (Red Fort) पर ध्वजारोहण समारोह का राष्ट्रीय टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर तिरंगा झंडा (National Flag) क्यों फहराया जाता है? इसके पीछे की कहानी क्या है? आप इस ऑर्टिकल को पूरा पढ़िए सारी जानकारी आपको मिल जाएगी अगर नहीं जानते होंगे, अगर जानते होंगे तो आपको कुछ नई जानकारियां भी मिलेंगी.
स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर लाल किले पर क्यों होता है ध्वजारोहण?
राष्ट्रीय ध्वज फहराना (National Flag) एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत के उदय और ब्रिटिश शासन के अंत की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है. लाल किले का समारोह उन स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की अभिव्यक्ति भी है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत (Independence India) के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. हर साल भारत के प्रधानमंत्री लाल (Prime Minister) किले पर तिरंगा झंडा (National Flag) फहराते हैं और उसके बाद भारत के लोगों, उपलब्धियों, चुनौतियों और राष्ट्र के लिए सरकार के दृष्टिकोण को स्वीकार करते हुए एक भाषण देते हैं.
भारत में 76वें स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) की थीम 'राष्ट्र पहले, हमेशा पहले' है, जिसे 'आजादी का अमृत मोहत्सव' के तहत कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाएगा. सरकार ने इस पहल के तहत कई कार्यक्रम करने का फैसला किया है जो अलग-अलग जश्न (National Flag) मनाएंगे.
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Independence Day दो हज़ार तेईस: पंद्रह अगस्त के दिन इतना ही नहीं देश की सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों को राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे रंग की झालरों और सजावटी रोशनी से सजाया जाता है. खुशी और सद्भाव के रूप में मिठाइयां बांटी जाती है. Independence Day दो हज़ार तेईस: इस दिन भारत का राष्ट्रीय ध्वज कई सार्वजनिक स्थानों पर फहराया जाता है. इस ऐतिहासिक घटना के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं. ध्वजारोहण समारोह के साथ-साथ परेड और लोक नृत्य प्रदर्शन भी होते हैं. पूरे देश में कई उत्सव होते हैं. स्कूलों और कॉलेजों समेत शैक्षणिक संस्थान, इस दिन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में स्टूडेंट्स को जानकारी देने के लिए एक विशेष समारोह का आयोजन करते हैं. इस अवसर का जश्न मनाने के लिए बच्चे तिरंगे रंग की पतंगें उड़ाते हैं. हाथ में तिरंगा लेकर जश्न मनाते हैं. पंद्रह अगस्त के दिन इतना ही नहीं देश की सड़कों, इमारतों और सार्वजनिक स्थानों को राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे रंग की झालरों और सजावटी रोशनी से सजाया जाता है. खुशी और सद्भाव के रूप में मिठाइयां बांटी जाती है. दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह का राष्ट्रीय टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर तिरंगा झंडा क्यों फहराया जाता है? इसके पीछे की कहानी क्या है? आप इस ऑर्टिकल को पूरा पढ़िए सारी जानकारी आपको मिल जाएगी अगर नहीं जानते होंगे, अगर जानते होंगे तो आपको कुछ नई जानकारियां भी मिलेंगी. स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर क्यों होता है ध्वजारोहण? राष्ट्रीय ध्वज फहराना एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत के उदय और ब्रिटिश शासन के अंत की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है. लाल किले का समारोह उन स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की अभिव्यक्ति भी है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. हर साल भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं और उसके बाद भारत के लोगों, उपलब्धियों, चुनौतियों और राष्ट्र के लिए सरकार के दृष्टिकोण को स्वीकार करते हुए एक भाषण देते हैं. भारत में छिहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस की थीम 'राष्ट्र पहले, हमेशा पहले' है, जिसे 'आजादी का अमृत मोहत्सव' के तहत कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाएगा. सरकार ने इस पहल के तहत कई कार्यक्रम करने का फैसला किया है जो अलग-अलग जश्न मनाएंगे.
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द डायलॉग ऑफ सिविलाइज़ेशन इंस्टीट्यूट के प्रमुख रिसर्चर एलेक्सी मालाशेंकों का कहना है कि पुतिन एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत नहीं होना चाहते. उन्होंने याद किया कि साल 2014 में पुतिन को पारंपरिक ग्रुप फोटो में दूर किनारे खड़ा किया गया था.
जी20 सम्मेलन में यूक्रेन में रूस के आक्रमण का मुद्दा उठने की पूरी संभावना है, इससे कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका लगा है और खाने की भी किल्लत हुई है.
क्रेमलिन के नज़दीकी विदेश मामलों के जानकार, फायोडोर लकीयानोव, ने संकेत दिया कि पुतिन यूक्रेन के मुद्दे पर टस से मस होने को तैयार नहीं है.
रूसी संसद ने कहा कि पुतिन जी20 सम्मेलन को वीडियो लिंक से भी संबोधित नहीं करेंगे.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन की तुलना में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की जी 20 नेताओं के साथ लॉबी करने में अधिक कामयाब होंगे. ज़ेलेंस्की इस जी 20 सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं.
रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे. वह जुलाई में ही हुए एक जी20 सम्मेलन में सभागार से बाहर निकल गए थे जब यूक्रेन में रूसी आक्रमण की निंदा की जा रही थी. यही वाकया उनके साथ दोबारा घट सकता है.
राजनैतिक विश्लेषक कोनस्टेंटिन कालाचेव ने कहा कि बाली में पुतिन का ना आना बताता है कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है. ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव है जो दोनों पक्षों को संतुष्ट कर सकता है.
सितंबर में हजारों रिज़र्व बलों को यूक्रेन में भेजने के फैसले के बाद भी रूसी सेना को यूक्रेन में खारकीव से पीछे हटना पड़ा. कुछ दिन पहले ही रूस ने रणनीतिक तौर पर अहम खेरसॉन क्षेत्र से भी वापसी की है. यह रूस के लिए शर्मिंदगी की बात है. शांतिवार्ता भी ठंडे बस्ते में है.
राजनैतिक विश्लेषक कंपनी आर. पोलिटिक (R. Politik) की फाउंडर तातियाना स्टानोव्या ने कहा, पुतिन का मानना है कि रूस की अमेरिका विरोधी मुहिम को काफी समर्थन मिल रहा है और उनके जी 20 में ना जाने से रूस के न्यूट्रल देशों के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
रूस पहले ही उन देशों के साथ संबंध गहरे कर रहा है जो वैश्विक मामलों में अमेरिकी दबदबे के खिलाफ हैं. पुतिन पश्चिम विरोधी गुट को मजबूत करना चाह रहे हैं.
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द डायलॉग ऑफ सिविलाइज़ेशन इंस्टीट्यूट के प्रमुख रिसर्चर एलेक्सी मालाशेंकों का कहना है कि पुतिन एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत नहीं होना चाहते. उन्होंने याद किया कि साल दो हज़ार चौदह में पुतिन को पारंपरिक ग्रुप फोटो में दूर किनारे खड़ा किया गया था. जीबीस सम्मेलन में यूक्रेन में रूस के आक्रमण का मुद्दा उठने की पूरी संभावना है, इससे कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका लगा है और खाने की भी किल्लत हुई है. क्रेमलिन के नज़दीकी विदेश मामलों के जानकार, फायोडोर लकीयानोव, ने संकेत दिया कि पुतिन यूक्रेन के मुद्दे पर टस से मस होने को तैयार नहीं है. रूसी संसद ने कहा कि पुतिन जीबीस सम्मेलन को वीडियो लिंक से भी संबोधित नहीं करेंगे. रूसी राष्ट्रपति पुतिन की तुलना में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की जी बीस नेताओं के साथ लॉबी करने में अधिक कामयाब होंगे. ज़ेलेंस्की इस जी बीस सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं. रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे. वह जुलाई में ही हुए एक जीबीस सम्मेलन में सभागार से बाहर निकल गए थे जब यूक्रेन में रूसी आक्रमण की निंदा की जा रही थी. यही वाकया उनके साथ दोबारा घट सकता है. राजनैतिक विश्लेषक कोनस्टेंटिन कालाचेव ने कहा कि बाली में पुतिन का ना आना बताता है कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है. ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव है जो दोनों पक्षों को संतुष्ट कर सकता है. सितंबर में हजारों रिज़र्व बलों को यूक्रेन में भेजने के फैसले के बाद भी रूसी सेना को यूक्रेन में खारकीव से पीछे हटना पड़ा. कुछ दिन पहले ही रूस ने रणनीतिक तौर पर अहम खेरसॉन क्षेत्र से भी वापसी की है. यह रूस के लिए शर्मिंदगी की बात है. शांतिवार्ता भी ठंडे बस्ते में है. राजनैतिक विश्लेषक कंपनी आर. पोलिटिक की फाउंडर तातियाना स्टानोव्या ने कहा, पुतिन का मानना है कि रूस की अमेरिका विरोधी मुहिम को काफी समर्थन मिल रहा है और उनके जी बीस में ना जाने से रूस के न्यूट्रल देशों के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. रूस पहले ही उन देशों के साथ संबंध गहरे कर रहा है जो वैश्विक मामलों में अमेरिकी दबदबे के खिलाफ हैं. पुतिन पश्चिम विरोधी गुट को मजबूत करना चाह रहे हैं.
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गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि शराबबंदी के बाद अब बिहार को दहेजमुक्त बनाया जायेगा। सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित ज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दहेजबंदी के लिए अभियान चलायेगी। आज ही के दिन 1917 में गांधी जी पटना पधारे थे।
इस मौके पर नीतीश कुमार ने बिना किसी का नाम लिये कहा कि, गांधी के नाम में इतना दम है कि सभी इसका लाभ उठाना चाहते हैं। यहां तक कि वे लोग भी यात्रा निकालेंगे, जो गांधी जी की विचारधारा के प्रतिकूल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवाद में महिलाओं ने दहेज प्रथा और बाल विवाह रोकने का सुझाव दिया है। वर्तमान में दहेज प्रथा और बाल विवाह के मामले बढ़ने लगे हैं। इसलिए अब नशामुक्ति के साथ-साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी अभियान चलाया जायेगा।
नीतीश ने कहा कि अभी देश और दुनिया में असहिष्णुता और टकराव का माहौल है। भौतिकतावादी चीजें लोगों के दिल और दिमाग पर हावी हैं। इस माहौल में गांधी जी के विचारों के लोग एक जगह हों और सार्थक विचार करें, तो इस विमर्श से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह देश-दुनिया के लिए लाभदायक होगा। हमने शुरू से न्याय के साथ विकास पर जोर दिया है। समाज के सभी तबकों के लोगों की भलाई के लिए काम किया गया है। हमने इस बात का ख्याल रखा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे। हमारी योजनाएं सभी के लिए हैं और सभी को इससे लाभ मिला है। साथ ही नारी सशक्तीकरण की दिशा में भी काफी काम हुआ है और इसका लाभ भी दिखाई पड़ रहा है।
शराबबंदी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 5 अप्रैल, 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गयी है। पहले शराबबंदी चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बारे में सोचा था। लोगों के बीच शराबबंदी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जन जागरण का जबरदस्त अभियान चलाया गया। छात्र-छात्राओं ने अपने अभिभावकों से शराब नहीं पीने का संकल्प पत्र भरवाया। एक करोड़ 19 लाख संकल्प पत्र भरे गये। नौ लाख जगहों पर नारे लिखे गये। 25 हजार जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन हुआ।
माहौल ऐसा बना कि चार दिनों के अंदर पांच अप्रैल, 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गयी। पूरे बिहार के लोगों ने इसका स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी सफलतापूर्वक लागू रखने के लिए जन चेतना जरूरी है। शराबबंदी के संदर्भ में राजस्थान का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि एनएच और एसएच के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकती हैं। पर, यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि कुछ राज्यों में एनएच और एसएच को डिनोटिफाइड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से सरकार को कोई नुकसान नहीं है। बिहार ने हिम्मत किया है, आप भी करके देखें।
नीतीश कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी जहां-जहां गये थे, उन जगहों पर स्मृति यात्रा का आयोजन होगा। 17 अप्रैल, 2017 को पटना में देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया जायेगा। इस आयोजन में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सहमति दे दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह में हमारा मुख्य उद्देश्य है गांधी जी के विचारों से सबको अवगत कराना। गांधी जी को सब मानते हैं, पर गांधी जी के विचारों को अपनाने के लिए कोई नजरिया नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बापू के विचारों पर घर-घर दस्तक देंगे। गांधी जी के विचारों पर फिल्म बना कर एक-एक गांव, सौ तक की आबादी वाले टोलों तक में दिखायेंगे। साथ ही स्कूल में बच्चों को रोज गांधी जी से जुड़ी कहानी प्रार्थना के बाद बतायी जायेगी। हर छात्र-छात्रा को इससे अवगत करायेंगे. अगर नयी पीढ़ी का दस प्रतिशत भी गांधीजी के विचारों के प्रति आकर्षित हो जाये, तो आनेवाले 10 से 15 साल में समाज बदल जायेगा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय विमर्श में आये लोगों से गांधीजी के विचारों के सभी पहलुओं पर विचार करने की अपील की।
पर्यावरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आप गंगा नदी के किनारे हैं, गंगा नदी को देख लें कि आज क्या हाल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विमर्श से जो नतीजा निकलेगा, उन नतीजों को हमलोग पुस्तक की शक्ल में प्रकाशित करेंगे। उन्होंने गांधीवादियों से अपील की कि आप एजेंडा सेट करें कि देश को कैसे आगे ले जाना है। आप लोगों को यह बताएं कि आपको क्या विकल्प नजर आता है। लोगों के सामने सारी चीजें रख दें। आप लोग जो भी विमर्श करेंगे और उससे जो बात निकल कर आयेगी, उसका अनुपालन करने की कोशिश करूंगा।
इस अवसर पर महात्मा गांधी के पौत्र व पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी, डॉ. रजी अहमद, मेधा पाटेकर, सच्चिदानंद सिन्हा, न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर, प्रेरणा देसाई ने भी विचार व्यक्त किये. डॉ एसएन सुब्बाराव ने एक गीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का स्वागत शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने किया। उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता, कला-संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम समेत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि शराबबंदी के बाद अब बिहार को दहेजमुक्त बनाया जायेगा। सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित ज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दहेजबंदी के लिए अभियान चलायेगी। आज ही के दिन एक हज़ार नौ सौ सत्रह में गांधी जी पटना पधारे थे। इस मौके पर नीतीश कुमार ने बिना किसी का नाम लिये कहा कि, गांधी के नाम में इतना दम है कि सभी इसका लाभ उठाना चाहते हैं। यहां तक कि वे लोग भी यात्रा निकालेंगे, जो गांधी जी की विचारधारा के प्रतिकूल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवाद में महिलाओं ने दहेज प्रथा और बाल विवाह रोकने का सुझाव दिया है। वर्तमान में दहेज प्रथा और बाल विवाह के मामले बढ़ने लगे हैं। इसलिए अब नशामुक्ति के साथ-साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी अभियान चलाया जायेगा। नीतीश ने कहा कि अभी देश और दुनिया में असहिष्णुता और टकराव का माहौल है। भौतिकतावादी चीजें लोगों के दिल और दिमाग पर हावी हैं। इस माहौल में गांधी जी के विचारों के लोग एक जगह हों और सार्थक विचार करें, तो इस विमर्श से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह देश-दुनिया के लिए लाभदायक होगा। हमने शुरू से न्याय के साथ विकास पर जोर दिया है। समाज के सभी तबकों के लोगों की भलाई के लिए काम किया गया है। हमने इस बात का ख्याल रखा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे। हमारी योजनाएं सभी के लिए हैं और सभी को इससे लाभ मिला है। साथ ही नारी सशक्तीकरण की दिशा में भी काफी काम हुआ है और इसका लाभ भी दिखाई पड़ रहा है। शराबबंदी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पाँच अप्रैल, दो हज़ार सोलह से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गयी है। पहले शराबबंदी चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बारे में सोचा था। लोगों के बीच शराबबंदी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जन जागरण का जबरदस्त अभियान चलाया गया। छात्र-छात्राओं ने अपने अभिभावकों से शराब नहीं पीने का संकल्प पत्र भरवाया। एक करोड़ उन्नीस लाख संकल्प पत्र भरे गये। नौ लाख जगहों पर नारे लिखे गये। पच्चीस हजार जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन हुआ। माहौल ऐसा बना कि चार दिनों के अंदर पांच अप्रैल, दो हज़ार सोलह से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गयी। पूरे बिहार के लोगों ने इसका स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी सफलतापूर्वक लागू रखने के लिए जन चेतना जरूरी है। शराबबंदी के संदर्भ में राजस्थान का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि एनएच और एसएच के पाँच सौ मीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकती हैं। पर, यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि कुछ राज्यों में एनएच और एसएच को डिनोटिफाइड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से सरकार को कोई नुकसान नहीं है। बिहार ने हिम्मत किया है, आप भी करके देखें। नीतीश कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी जहां-जहां गये थे, उन जगहों पर स्मृति यात्रा का आयोजन होगा। सत्रह अप्रैल, दो हज़ार सत्रह को पटना में देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया जायेगा। इस आयोजन में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सहमति दे दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह में हमारा मुख्य उद्देश्य है गांधी जी के विचारों से सबको अवगत कराना। गांधी जी को सब मानते हैं, पर गांधी जी के विचारों को अपनाने के लिए कोई नजरिया नहीं है। उन्होंने कहा कि हम बापू के विचारों पर घर-घर दस्तक देंगे। गांधी जी के विचारों पर फिल्म बना कर एक-एक गांव, सौ तक की आबादी वाले टोलों तक में दिखायेंगे। साथ ही स्कूल में बच्चों को रोज गांधी जी से जुड़ी कहानी प्रार्थना के बाद बतायी जायेगी। हर छात्र-छात्रा को इससे अवगत करायेंगे. अगर नयी पीढ़ी का दस प्रतिशत भी गांधीजी के विचारों के प्रति आकर्षित हो जाये, तो आनेवाले दस से पंद्रह साल में समाज बदल जायेगा। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय विमर्श में आये लोगों से गांधीजी के विचारों के सभी पहलुओं पर विचार करने की अपील की। पर्यावरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आप गंगा नदी के किनारे हैं, गंगा नदी को देख लें कि आज क्या हाल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विमर्श से जो नतीजा निकलेगा, उन नतीजों को हमलोग पुस्तक की शक्ल में प्रकाशित करेंगे। उन्होंने गांधीवादियों से अपील की कि आप एजेंडा सेट करें कि देश को कैसे आगे ले जाना है। आप लोगों को यह बताएं कि आपको क्या विकल्प नजर आता है। लोगों के सामने सारी चीजें रख दें। आप लोग जो भी विमर्श करेंगे और उससे जो बात निकल कर आयेगी, उसका अनुपालन करने की कोशिश करूंगा। इस अवसर पर महात्मा गांधी के पौत्र व पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी, डॉ. रजी अहमद, मेधा पाटेकर, सच्चिदानंद सिन्हा, न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर, प्रेरणा देसाई ने भी विचार व्यक्त किये. डॉ एसएन सुब्बाराव ने एक गीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का स्वागत शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने किया। उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता, कला-संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम समेत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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कोविड-19 के बाद, लाखों लोगों के जीवन को लेने वाली दूसरी घातक बीमारी ट्यूबरकुलोसिस (TB) है. टीबी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है जो भारत में हर साल 220,000 मृत्यु का कारण बनती है. बीमारी की गंभीरता और इससे प्रभावित लोगों की संख्या के बावजूद, टीबी के इलाज का तरीका एंटीबायोटिक्स की रेंज निर्धारित करना है. इलाज की इस विधि ने TB के इलाज के वर्षों को फैलाया. लंबे वर्ष अपने फाइनेंस के साथ-साथ किसी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बोझ डालेंगे. समय के साथ, इलाज कम प्रभावी हो जाता है जिससे दवा का प्रतिरोध होता है. उनके सभी प्रयास करने से नाले कम हो जाते हैं.
टीबी उपचार में इस कॉकटेल ड्रग दृष्टिकोण को बदलने के लिए, डॉ. प्राप्ति जयस्वाल और अवलोकिता तिवारी आरोग्यएआई इनोवेशन के साथ एक साथ आए. डॉ जयस्वाल के पास एक दशक से अधिक कीमत का अनुसंधान ज्ञान है. उसके पास नई दिल्ली में अनुवादक स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान से ट्यूबरकुलोसिस अनुसंधान में पीएचडी है. इसके साथ-साथ, उन्होंने अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) में भी कुछ समय बिताया है. तिवारी ने फिनलैंड में तुर्कू विश्वविद्यालय से बायोइन्फॉर्मेटिक्स में अपना एमएस पूरा किया है. वह कंपनी में टेक्नोलॉजी और बायोलॉजी के बीच के अंतर को कम करने के लिए जिम्मेदार है.
यह दिल्ली स्थित उद्यम TB में ड्रग रेजिस्टेंस का डायग्नोस करने के लिए AI का उपयोग करता है और ड्रग कॉम्बिनेशन की लिस्ट प्रदान करता है जो रोगी के पक्ष में काम करता है या नहीं करेगा. ड्रग प्रिस्क्रिप्शन की इस विधि से इलाज की अवधि 6 महीनों से कम हो सकती है. इस विचार को पहले यूके आधारित इनक्यूबेटर, उद्यमी से पिच किया गया था. बाद में उन्हें ट्यूबरकुलोसिस फिजिशियन मिला और जो मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. सौम्य स्वामीनाथन, एक सलाहकार के रूप में ऑनबोर्ड करते हैं. 2019 में, वे महिलाओं के लिए शक्ति चैलेंज में सर्वश्रेष्ठ पिच थे. एक साल बाद, उन्होंने बीआईआरएसी टाई वाइनर (उद्यमिता अनुसंधान में महिला) पुरस्कार जीता.
उनका सॉफ्टवेयर 2022 के मध्य तक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है. उन्होंने जीनोटाइपिक, कैंप लाइफलाइन प्रयोगशालाओं, भारतीय मेरुदंड चोट केंद्र, सर गंगाराम अस्पताल, चिकित्सा अनुसंधान की नींव और इक्विया के साथ भागीदारी स्थापित की है. 2020 में, उन्हें सीड फंड के रूप में $55,000 प्राप्त हुआ था. इस वर्ष, जनवरी 7 को, उन्हें रेडस्टार्ट लैब्स, अवाना कैपिटल, उद्यमी पहले, पहले वेंचर और इन्फो एज से $700,000 प्राप्त हुआ. इन फंड के साथ, क्या आरोग्यएआई इनोवेशन भारत में टीबी के इलाज को अधिक प्रभावी बना सकते हैं?
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कोविड-उन्नीस के बाद, लाखों लोगों के जीवन को लेने वाली दूसरी घातक बीमारी ट्यूबरकुलोसिस है. टीबी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है जो भारत में हर साल दो सौ बीस,शून्य मृत्यु का कारण बनती है. बीमारी की गंभीरता और इससे प्रभावित लोगों की संख्या के बावजूद, टीबी के इलाज का तरीका एंटीबायोटिक्स की रेंज निर्धारित करना है. इलाज की इस विधि ने TB के इलाज के वर्षों को फैलाया. लंबे वर्ष अपने फाइनेंस के साथ-साथ किसी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बोझ डालेंगे. समय के साथ, इलाज कम प्रभावी हो जाता है जिससे दवा का प्रतिरोध होता है. उनके सभी प्रयास करने से नाले कम हो जाते हैं. टीबी उपचार में इस कॉकटेल ड्रग दृष्टिकोण को बदलने के लिए, डॉ. प्राप्ति जयस्वाल और अवलोकिता तिवारी आरोग्यएआई इनोवेशन के साथ एक साथ आए. डॉ जयस्वाल के पास एक दशक से अधिक कीमत का अनुसंधान ज्ञान है. उसके पास नई दिल्ली में अनुवादक स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान से ट्यूबरकुलोसिस अनुसंधान में पीएचडी है. इसके साथ-साथ, उन्होंने अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान में भी कुछ समय बिताया है. तिवारी ने फिनलैंड में तुर्कू विश्वविद्यालय से बायोइन्फॉर्मेटिक्स में अपना एमएस पूरा किया है. वह कंपनी में टेक्नोलॉजी और बायोलॉजी के बीच के अंतर को कम करने के लिए जिम्मेदार है. यह दिल्ली स्थित उद्यम TB में ड्रग रेजिस्टेंस का डायग्नोस करने के लिए AI का उपयोग करता है और ड्रग कॉम्बिनेशन की लिस्ट प्रदान करता है जो रोगी के पक्ष में काम करता है या नहीं करेगा. ड्रग प्रिस्क्रिप्शन की इस विधि से इलाज की अवधि छः महीनों से कम हो सकती है. इस विचार को पहले यूके आधारित इनक्यूबेटर, उद्यमी से पिच किया गया था. बाद में उन्हें ट्यूबरकुलोसिस फिजिशियन मिला और जो मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. सौम्य स्वामीनाथन, एक सलाहकार के रूप में ऑनबोर्ड करते हैं. दो हज़ार उन्नीस में, वे महिलाओं के लिए शक्ति चैलेंज में सर्वश्रेष्ठ पिच थे. एक साल बाद, उन्होंने बीआईआरएसी टाई वाइनर पुरस्कार जीता. उनका सॉफ्टवेयर दो हज़ार बाईस के मध्य तक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है. उन्होंने जीनोटाइपिक, कैंप लाइफलाइन प्रयोगशालाओं, भारतीय मेरुदंड चोट केंद्र, सर गंगाराम अस्पताल, चिकित्सा अनुसंधान की नींव और इक्विया के साथ भागीदारी स्थापित की है. दो हज़ार बीस में, उन्हें सीड फंड के रूप में पचपन डॉलर,शून्य प्राप्त हुआ था. इस वर्ष, जनवरी सात को, उन्हें रेडस्टार्ट लैब्स, अवाना कैपिटल, उद्यमी पहले, पहले वेंचर और इन्फो एज से सात सौ डॉलर,शून्य प्राप्त हुआ. इन फंड के साथ, क्या आरोग्यएआई इनोवेशन भारत में टीबी के इलाज को अधिक प्रभावी बना सकते हैं?
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रायपुर। ब्रोशर के मुताबिक फ्लैट में सुविधा नहीं दोने के कारण उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने परिवादी को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश बिल्डर को दिया है। बिल्डर को एक महीने के अंदर पीड़ित को क्षतिपूर्ति के तीन लाख रुपये और वाद व्यय के 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
राज्य उपभोक्ता आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक 22 नवंबर 2014 को कोरबा जिले की निवासी प्रतिभा सोनी समेत उनके दो स्वजनों ने चार लाख रुपये अग्रिम भुगतान कर निर्माणाधीन आनंदम अपार्टमेंट में फ्लैट क्रमांक-ए 103 खरीदने अनुबंध किया था। फ्लैट निर्माण के दौरान भी परिवादियों ने कुल 25 लाख 34 हजार 876 रुपये जमा किए थे। अनुबंध के मुताबिक भूमिराज रियल इंफ्रा प्रोजेक्ट प्रालि. के प्रमोटर व बिल्डर नीरज पटेल, मक्खन सिंह धंजल (आनंदम अपार्टमेंट)को फ्लैट निर्माण पूरा करके नौ महीने के भीतर आधिपत्य देना था।
वहीं बिल्डर ने ब्रोशर में किए गए वादे के अनुसार व्यक्तिगत पार्किंग,रूपटाफ कम्युनिटी सेंटर का निर्माण नहीं किया गया। व्यक्तिगत पार्किंग के स्थान को गार्डन बना दिया। विजिटर पार्किंग की जगह को बिल्डरों ने अपने नाम पर नियमित कराकर वहां पर दो मंजिला भवन बना दिया। यहीं नहीं सौर उर्जा उपकरण, अग्निशमन की व्यवस्था अमानक स्तर पर की। यह देखकर परिवादी ने बिल्डरों से फ्लैट के स्थान पर जमा पैसा ब्याज समेत वापस मांगा तो बिल्डर ने 15 दिन के बाद बुकिंग रद करने पर पैसा वापस करने से मना कर दिया। इसके बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में बिल्डर की सेवा में कमी की शिकायत के साथ परिवाद पेश किया था।
आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बिल्डर ने सेवा में कमी की है। लिहाजा परिवादी द्वारा जमा की गई पूरी राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत देने, क्षतिपूर्ति 30 हजार रुपये वाद व्यय व्यय दस हजार रुपये का भुगतान एक महीने के भीतर करने का आदेश दिया। एक महीने के भीतर पैसा नहीं देने पर बिल्डर को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज अतिरिक्त देना होगा। इसी तरह से एक अन्य परिवाद में इन्हीं बिल्डरों के खिलाफ आयोग ने समान आदेश पारित किया है।
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रायपुर। ब्रोशर के मुताबिक फ्लैट में सुविधा नहीं दोने के कारण उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने परिवादी को ब्याज समेत पैसा लौटाने का आदेश बिल्डर को दिया है। बिल्डर को एक महीने के अंदर पीड़ित को क्षतिपूर्ति के तीन लाख रुपये और वाद व्यय के दस हजार रुपये देने का आदेश दिया है। राज्य उपभोक्ता आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक बाईस नवंबर दो हज़ार चौदह को कोरबा जिले की निवासी प्रतिभा सोनी समेत उनके दो स्वजनों ने चार लाख रुपये अग्रिम भुगतान कर निर्माणाधीन आनंदम अपार्टमेंट में फ्लैट क्रमांक-ए एक सौ तीन खरीदने अनुबंध किया था। फ्लैट निर्माण के दौरान भी परिवादियों ने कुल पच्चीस लाख चौंतीस हजार आठ सौ छिहत्तर रुपयापये जमा किए थे। अनुबंध के मुताबिक भूमिराज रियल इंफ्रा प्रोजेक्ट प्रालि. के प्रमोटर व बिल्डर नीरज पटेल, मक्खन सिंह धंजल को फ्लैट निर्माण पूरा करके नौ महीने के भीतर आधिपत्य देना था। वहीं बिल्डर ने ब्रोशर में किए गए वादे के अनुसार व्यक्तिगत पार्किंग,रूपटाफ कम्युनिटी सेंटर का निर्माण नहीं किया गया। व्यक्तिगत पार्किंग के स्थान को गार्डन बना दिया। विजिटर पार्किंग की जगह को बिल्डरों ने अपने नाम पर नियमित कराकर वहां पर दो मंजिला भवन बना दिया। यहीं नहीं सौर उर्जा उपकरण, अग्निशमन की व्यवस्था अमानक स्तर पर की। यह देखकर परिवादी ने बिल्डरों से फ्लैट के स्थान पर जमा पैसा ब्याज समेत वापस मांगा तो बिल्डर ने पंद्रह दिन के बाद बुकिंग रद करने पर पैसा वापस करने से मना कर दिया। इसके बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में बिल्डर की सेवा में कमी की शिकायत के साथ परिवाद पेश किया था। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बिल्डर ने सेवा में कमी की है। लिहाजा परिवादी द्वारा जमा की गई पूरी राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत देने, क्षतिपूर्ति तीस हजार रुपये वाद व्यय व्यय दस हजार रुपये का भुगतान एक महीने के भीतर करने का आदेश दिया। एक महीने के भीतर पैसा नहीं देने पर बिल्डर को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज अतिरिक्त देना होगा। इसी तरह से एक अन्य परिवाद में इन्हीं बिल्डरों के खिलाफ आयोग ने समान आदेश पारित किया है।
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नॉर्टन ने नॉर्टन एटलस (Norton Atlas) बाइक के लिए इच्छुक पार्टियों से रिजर्वेशन की घोषणा की है. ऐसे में माना जा रहा है कि 650 सीसी एटलस स्क्रैम्बलर्स कभी भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं.
ब्रिटिश मोटरसाइकिल ब्रांड नॉर्टन मोटरसाइकल (जो अब टीवीएस मोटर कंपनी के स्वामित्व में है) ने स्क्रैंबलर्स के नॉर्टन एटलस (Norton Atlas) रेंज के लिए संभावित ग्राहकों से राय मांगी हैं. नॉर्टन एटलस नोमैड (Norton Atlas Nomad) और नॉर्टन एटलस रेंजर (Norton Atlas Ranger) का उत्पादन 2021 में किया जाएगा. नॉर्टन एटलस स्क्रैम्बलर्स पहली बार 2018 में सामने आई थी और इसे 2019 से व्यावसायिक रूप से बनाया जाना था लेकिन नॉर्टन की वित्तीय समस्याओं और बाद की परेशानियों से उत्पादन में बहुत अधिक समय लगा है. अब नए स्वामित्व और नए सीईओ जॉन रसेल के साथ, कंपनी ने एटलस रेंज के पूर्ण उत्पादन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है.
नॉर्टन एटलस नोमैड और नॉर्टन एटलस रेंजर दोनों अलग-अलग ट्रिम, उपकरण के साथ एक सामान्य इंजन और चेसिस साझा करेंगे. दोनों नॉर्टन एटलस 650 मॉडल 270-डिग्री फायरिंग डिफरेंस के साथ समान 650 सीसी पैरेलल-ट्विन इंजन साझा करेंगे. प्रदर्शन के लिहाज से, 650 सीसी का ट्विन-इंजन, 11,000 आरपीएम पर 84 बीएचपी पावर के साथ 64 एनएम टॉर्क जनरेट करता है.
एटलस रेंजर को ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ लंबा सस्पेंशन ट्रेवल (200 मिमी यात्रा), चौड़े हैंडलबार का एक सेट, एक छोटा फ्लाईस्क्रीन, इंजन बैशप्लेट और फ्रंट फ़ेंडर मिलता है. रेंजर की सीट की ऊंचाई 875 मिमी है जबकि नोमैड की सीट ऊंचाई 824 मिमी है. दोनों का वजन लगभग 180 किलोग्राम होने की उम्मीद है.
अब तक, इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि 2021 में तैयार उत्पादन बाइक कब लॉन्च की जाएगी. हालांकि 2021 के लिए बस एक महीने से भी कम समय बचा है और नॉर्टन ने बाइक के लिए इच्छुक पार्टियों से रिजर्वेशन की घोषणा की है. ऐसे में माना जा रहा है कि 650 सीसी एटलस स्क्रैम्बलर्स कभी भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं.
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नॉर्टन ने नॉर्टन एटलस बाइक के लिए इच्छुक पार्टियों से रिजर्वेशन की घोषणा की है. ऐसे में माना जा रहा है कि छः सौ पचास सीसी एटलस स्क्रैम्बलर्स कभी भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं. ब्रिटिश मोटरसाइकिल ब्रांड नॉर्टन मोटरसाइकल ने स्क्रैंबलर्स के नॉर्टन एटलस रेंज के लिए संभावित ग्राहकों से राय मांगी हैं. नॉर्टन एटलस नोमैड और नॉर्टन एटलस रेंजर का उत्पादन दो हज़ार इक्कीस में किया जाएगा. नॉर्टन एटलस स्क्रैम्बलर्स पहली बार दो हज़ार अट्ठारह में सामने आई थी और इसे दो हज़ार उन्नीस से व्यावसायिक रूप से बनाया जाना था लेकिन नॉर्टन की वित्तीय समस्याओं और बाद की परेशानियों से उत्पादन में बहुत अधिक समय लगा है. अब नए स्वामित्व और नए सीईओ जॉन रसेल के साथ, कंपनी ने एटलस रेंज के पूर्ण उत्पादन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. नॉर्टन एटलस नोमैड और नॉर्टन एटलस रेंजर दोनों अलग-अलग ट्रिम, उपकरण के साथ एक सामान्य इंजन और चेसिस साझा करेंगे. दोनों नॉर्टन एटलस छः सौ पचास मॉडल दो सौ सत्तर-डिग्री फायरिंग डिफरेंस के साथ समान छः सौ पचास सीसी पैरेलल-ट्विन इंजन साझा करेंगे. प्रदर्शन के लिहाज से, छः सौ पचास सीसी का ट्विन-इंजन, ग्यारह,शून्य आरपीएम पर चौरासी बीएचपी पावर के साथ चौंसठ एनएम टॉर्क जनरेट करता है. एटलस रेंजर को ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ लंबा सस्पेंशन ट्रेवल , चौड़े हैंडलबार का एक सेट, एक छोटा फ्लाईस्क्रीन, इंजन बैशप्लेट और फ्रंट फ़ेंडर मिलता है. रेंजर की सीट की ऊंचाई आठ सौ पचहत्तर मिमी है जबकि नोमैड की सीट ऊंचाई आठ सौ चौबीस मिमी है. दोनों का वजन लगभग एक सौ अस्सी किलोग्रामग्राम होने की उम्मीद है. अब तक, इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि दो हज़ार इक्कीस में तैयार उत्पादन बाइक कब लॉन्च की जाएगी. हालांकि दो हज़ार इक्कीस के लिए बस एक महीने से भी कम समय बचा है और नॉर्टन ने बाइक के लिए इच्छुक पार्टियों से रिजर्वेशन की घोषणा की है. ऐसे में माना जा रहा है कि छः सौ पचास सीसी एटलस स्क्रैम्बलर्स कभी भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं.
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1/5 Fruit Face Pack For Glowing Skin 1 खूबसूरत त्वचा पाने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आपके घर में मौजूद फल आपकी त्वचा की रंगत को निखार सकते हैं। रोजाना फलों का सेवन करना जितना सेहत के लिए फायदेमंद होता है, उतना ही त्वचा की खूबसूरती निखारने में भी होता है। फ्रूट पैक लगाकर आप मिनटों में अपनी त्वचा की खूबसूरती बढ़ा सकती हैं। खूबसूरत त्वचा पाने के लिए घर पर बनाएं ये फ्रूट फेस पैक और पाएं चेहरे पर एक नया निखार और नई चमक।
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एक/पाँच स्विस फ़्रैंकuit Face Pack For Glowing Skin एक खूबसूरत त्वचा पाने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आपके घर में मौजूद फल आपकी त्वचा की रंगत को निखार सकते हैं। रोजाना फलों का सेवन करना जितना सेहत के लिए फायदेमंद होता है, उतना ही त्वचा की खूबसूरती निखारने में भी होता है। फ्रूट पैक लगाकर आप मिनटों में अपनी त्वचा की खूबसूरती बढ़ा सकती हैं। खूबसूरत त्वचा पाने के लिए घर पर बनाएं ये फ्रूट फेस पैक और पाएं चेहरे पर एक नया निखार और नई चमक।
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नई दिल्लीः लंबे सुनहरे बाल हर लड़की की ख्वाहिश होती है. पूराने जमाने की वेटरन एक्टरेस डिंपल कपाड़िया के बालों को आज भी लड़कियां वाव फैक्टर की तरह देखती हैं. बालों पर फिदा होना सिर्फ लड़कों की ही नहीं लड़कियों की भी फितरत में शामिल है. लेकिन बालों से जुड़ा एक राज जो शायद ही कोई जानता हो वो आज हम आपको बताएंगे.
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नई दिल्लीः लंबे सुनहरे बाल हर लड़की की ख्वाहिश होती है. पूराने जमाने की वेटरन एक्टरेस डिंपल कपाड़िया के बालों को आज भी लड़कियां वाव फैक्टर की तरह देखती हैं. बालों पर फिदा होना सिर्फ लड़कों की ही नहीं लड़कियों की भी फितरत में शामिल है. लेकिन बालों से जुड़ा एक राज जो शायद ही कोई जानता हो वो आज हम आपको बताएंगे.
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Assam Govt Appoints Hima Das as DSP: भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास (Sprinter Hima Das) जल्द ही खाकी वर्दी पहने नजर आएंगी। दरअसल असम सरकार (Assam govt) ने हिमा दास को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) नियुक्त किया है।
नई दिल्ली। भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास (Sprinter Hima Das) जल्द ही खाकी वर्दी पहने नजर आएंगी। दरअसल असम सरकार (Assam govt) ने हिमा दास को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) नियुक्त किया है। बुधवार को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Chief Minister Sarbananda Sonowal) की कैबिनेट ने यह फैसला लिया है। आपको बता दें कि हिमा दास को 2018 में अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं उद्योग मंत्री मोहन पटवारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हिमा दास को असम पुलिस में डीएसपी बनाया जाएगा जबकि ओलंपिक, एशियाई गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को क्लास-I अधिकारी बनाया जाएगा।
हिमा दास को डीएसपी बनाए जाने पर लोगों ने सोशल मीडिया पर असम सरकार की जमकर प्रशंसा की है।
20 साल की हिमा आईएएएफ विश्व अंडर-20 चैम्पियनशिप में किसी भी प्रारूप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं।
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Assam Govt Appoints Hima Das as DSP: भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास जल्द ही खाकी वर्दी पहने नजर आएंगी। दरअसल असम सरकार ने हिमा दास को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस नियुक्त किया है। नई दिल्ली। भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास जल्द ही खाकी वर्दी पहने नजर आएंगी। दरअसल असम सरकार ने हिमा दास को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस नियुक्त किया है। बुधवार को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की कैबिनेट ने यह फैसला लिया है। आपको बता दें कि हिमा दास को दो हज़ार अट्ठारह में अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं उद्योग मंत्री मोहन पटवारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हिमा दास को असम पुलिस में डीएसपी बनाया जाएगा जबकि ओलंपिक, एशियाई गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को क्लास-I अधिकारी बनाया जाएगा। हिमा दास को डीएसपी बनाए जाने पर लोगों ने सोशल मीडिया पर असम सरकार की जमकर प्रशंसा की है। बीस साल की हिमा आईएएएफ विश्व अंडर-बीस चैम्पियनशिप में किसी भी प्रारूप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं।
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चंद्रयान-3 के लॉन्च पर पाकिस्तानी शख्स का ट्वीट हुआ वायरल. (@alishanmomin23)
भारत ने शुक्रवार को अपना तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 को सफलता पूर्वक लॉन्च किया. देश के लाखों लोग इस महत्वपूर्ण पल के साक्षी हुए. वहीं, इसरों ने लोगों को प्रक्षेपण लाइव देखने का व्यवस्था किया था. लेकिन एक पाकिस्तानी यूजर अली शान मोमिन द्वारा ट्विटर पर शेयर किया गया है जिसमें पाकिस्तान के 500 फ़ीट ऊंचे झंडे फहराए जाने की चर्च की है. मिले जानकारी के अनुसार, पकिस्तान 2023 के अपने स्वतंत्र दिवस से पहले ये झंडा लाहौर में लगाएगा. लेकिन मोमिन के ट्वीट के नीचे एक भारतीय शख्स ने ट्वीट करके लिखा, 'रोंगटे खड़ा करने वाला पल, इंडिया...इंडिया! ; ये भारतीयों के लिए किसी गर्व से कम नहीं होगा.
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चंद्रयान-तीन के लॉन्च पर पाकिस्तानी शख्स का ट्वीट हुआ वायरल. भारत ने शुक्रवार को अपना तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-तीन को सफलता पूर्वक लॉन्च किया. देश के लाखों लोग इस महत्वपूर्ण पल के साक्षी हुए. वहीं, इसरों ने लोगों को प्रक्षेपण लाइव देखने का व्यवस्था किया था. लेकिन एक पाकिस्तानी यूजर अली शान मोमिन द्वारा ट्विटर पर शेयर किया गया है जिसमें पाकिस्तान के पाँच सौ फ़ीट ऊंचे झंडे फहराए जाने की चर्च की है. मिले जानकारी के अनुसार, पकिस्तान दो हज़ार तेईस के अपने स्वतंत्र दिवस से पहले ये झंडा लाहौर में लगाएगा. लेकिन मोमिन के ट्वीट के नीचे एक भारतीय शख्स ने ट्वीट करके लिखा, 'रोंगटे खड़ा करने वाला पल, इंडिया...इंडिया! ; ये भारतीयों के लिए किसी गर्व से कम नहीं होगा. .
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[PART III - SEC. 4]
परिषद् द्वारा वर्तमान विशिष्ट नर्सिंग कार्यक्रमों को योग्यता पर आधारित प्रशिक्षण दृष्टिकोण को अपनाते हुए एक-वर्षीय पोस्ट बेसिक डिप्लोमा आवासीय कार्यक्रमों के रूप में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई है। हेमेटोलॉजी नर्सिंग कार्यक्रम, संशोधित दिशानिर्देशों का उपयोग करते हुए भारतीय उपचर्या परिषद् द्वारा विकसित किया गया एक ऐसा नया विशिष्ट पाठ्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ नर्स तैयार करना है जो हेमेटोलॉजिकल विकारों से पीड़ित रोगियों, जिनकी नैदानिक परीक्षण, उपचार और देखभाल की आवश्यकताएं जटिल और गहन होती हैं, को सक्षम देखभाल प्रदान कर सकें।
हेमेटोलॉजी में रक्त के प्राथमिक विकारों के नैदानिक और प्रयोगशाला दोनों पहलुओं के साथ-साथ यह भी सम्मिलित है कि अन्य बीमारियां रक्त को कैसे प्रभावित करती हैं। प्राथमिक हेमेटोलॉजिकल रोग जन्मजात या उपार्जित हो सकते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया तथा लिंफोमा की विभिन्न अवस्थाएं, एनीमिया की कुछ अवस्थाएं और नाना प्रकार के रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉटिंग)/रक्तस्राव विकार शामिल हैं। रक्ताधान चिकित्सा पद्धति (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) भी हेमेटोलॉजी विशिष्टता में ही आती है।
हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास गतिशील एवं अत्यधिक जटिल देखभाल वाली विशिष्टता है। विशेषज्ञ हेमेटोलॉजी नर्सों के कार्यक्षेत्र में साध्य और असाध्य दोनों प्रकार की हेमेटोलॉजिकल परिस्थितियों की जानकारी का समावेश है। हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास में रोगियों की निवारक, प्रोत्साहक, चिकित्सीय और प्रशामक देखभाल सम्मिलित हैं। हेमेटोलॉजिकल रोगों की गंभीर और आवर्तक प्रकृति, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और/या प्रतिरक्षा दमनकारी दवाओं से जटिल परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं जिनमें समय रहते मध्यवर्तन करना आवश्यक है।
II. दर्शन
भातीय उपचर्या परिषद् का मानना है कि पंजीकृत नर्सों को अभ्यास के विभिन्न नए विशिष्ट क्षेत्रों में कार्य करने के लिए विशेषज्ञ नर्सों के रूप में आगे प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है और यह प्रशिक्षण योग्यता पर आधारित होना चाहिए । विशेषज्ञ नर्सों की जरूरत वाला एक ऐसा क्षेत्र हेमेटोलॉजी है जिसमें स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नर्सिंग भी शामिल है। हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तकनीक में हुई प्रगति और नर्सों की बढ़ती भूमिकाओं के मद्देनजर हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट केंद्रों में रोगियों को सक्षम, कुशल और उचित देखभाल प्रदान करने के लिए नर्सों को विशेष कौशल और जानकारी प्रदान करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
III. पाठ्यक्रम संरचना
हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग में पोस्ट बेसिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक-वर्षीय आवासीय कार्यक्रम है और इस पाठ्यक्रम की अवधारणा में मूल लघु पाठ्यक्रम और विशिष्ट नर्सिंग प्रथाओं के लिए बृहद विशिष्ट पाठ्यक्रम सम्मिलित किए गए हैं ।
हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास के मूल लघु पाठ्यक्रमों में दक्षता, संवाद एवं रोगी शिक्षा, नैदानिक नेतृत्व एवं संसाधन प्रबंधन, और साक्ष्य आधारित एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान सम्मिलित हैं, जिनका लक्ष्य छात्रों को जवाबदेह, प्रतिबद्ध, कुशल और सक्षम विशेषज्ञ नर्स की तरह कार्य करने की आवश्यक जानकारी, दृष्टिकोण और दक्षता प्रदान करना है। प्रमुख विशिष्ट पाठ्यक्रमों को हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग-1 और हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग-2 के तहत सुनियोजित किया गया है। स्पेशियलिटी नर्सिंग-1 में हेमेटोलॉजी नर्सिंग का संदर्भ / परिचय और हेमेटोलॉजी नर्सिंग में प्रयुक्त सामान्य विज्ञान (हेमेटोलॉजी विशिष्टता के अंतर्गत आने वाली नैदानिक परिस्थितियों के निदान, उपचार और देखभाल में सामान्य विज्ञान की जानकारी का प्रयोग ) सम्मिलित हैं। स्पेशियलिटी नर्सिंग - 2 में विशिष्ट हेमेटोलॉजिकल स्थितियों का नर्सिंग प्रबंधन शामिल है, जिसमें आंकलन, निदान, उपचार और विशिष्ट मध्यवर्तन तथा रोगी की सुरक्षा और गुणवत्ता तथा साथ ही बीमारी की विशिष्ट क्षतिपूर्ति सम्मिलित हैं। हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग आवासीय कार्यक्रम के पाठ्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित चित्र - 1 में दर्शाई गई है।
पोस्ट बेसिक डिप्लोमा न हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग (इनक्लूडिंग स्टेम सेल ट्रांसप्लांट) रेजिडेंसी प्रोग्राम
हेमेटोलॉजी नर्सिंग के मूल पाठ्यक्रम
संवाद, रोगी शिक्षा एवं परामर्श
नैदानिक नेतृत्व एवं संसाधन
साक्ष्य आधारित एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान
IV. उद्देश्य/अभिप्राय और दक्षताएं
हेमेटोलॉजी नर्सिंग के विशिष्ट पाठ्यक्रम
विशिष्ट नर्सिंग अभ्यासों का संदर्भ/परिचय
विशिष्ट देखभाल में प्रयुक्त सामान्य विज्ञान
नर्सिंग प्रबंधन (आंकलन और विशिष्ट मध्यवर्तनों सहित)
रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता और रोग संबंधी विवेचन
पंजीकृत नर्सों एवं दाईयों (आरएन एंड आरएम) के लिए एक-वर्षीय आवासीय कार्यक्रम
चित्र-1. पाठ्यक्रम संरचना : हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग आवासीय कार्यक्रम
इस कार्यक्रम को हेमेटोलॉजिकल विकारों से पीड़ित रोगियों को गुणवत्तापरक देखभाल प्रदान करने में विशेष कौशल, जानकारी और प्रवृत्ति वाले नर्स तैयार करने के लिए बनाया गया है। आगे, इसका उद्देश्य तकनीकी रूप से योग्य और प्रशिक्षित ऐसे विशेषज्ञ नर्स तैयार करना है, जो तृतीयक और चतुर्थक अस्पतालों के हेमेटोलॉजिकल केंद्रों पर उच्च स्तर की देखभाल प्रदान कर सफलतापूर्वक इष्टतम कार्य कर सकेंगे।
कार्यक्रम के पूरा होने पर, हेमेटोलॉजी विशेषज्ञ नर्स निम्नांकित कार्य करने में सक्षम होंगेः1.
भारतीय उपचर्या परिषद् के सदाचारी, परोपकारी, विधिसम्मत, नैतिक, विनियामक और मानवतावादी सिद्धांतों के अनुरूप मानकों के अनुसार हेमेटोलॉजी अभ्यास में नर्सिंग देखभाल प्रदान करने में पेशेवर जवाबदेही प्रदर्शित करना।
रोगियों, परिवारीजनों और व्यावसायिक सहयोगियों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करना जिससे आपस में सम्मान की भावना को बढ़ावा मिले और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने की दिशा में साझा निर्णय लिए जा सके ।
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[PART III - SEC. चार] परिषद् द्वारा वर्तमान विशिष्ट नर्सिंग कार्यक्रमों को योग्यता पर आधारित प्रशिक्षण दृष्टिकोण को अपनाते हुए एक-वर्षीय पोस्ट बेसिक डिप्लोमा आवासीय कार्यक्रमों के रूप में परिवर्तित करने की योजना बनाई गई है। हेमेटोलॉजी नर्सिंग कार्यक्रम, संशोधित दिशानिर्देशों का उपयोग करते हुए भारतीय उपचर्या परिषद् द्वारा विकसित किया गया एक ऐसा नया विशिष्ट पाठ्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ नर्स तैयार करना है जो हेमेटोलॉजिकल विकारों से पीड़ित रोगियों, जिनकी नैदानिक परीक्षण, उपचार और देखभाल की आवश्यकताएं जटिल और गहन होती हैं, को सक्षम देखभाल प्रदान कर सकें। हेमेटोलॉजी में रक्त के प्राथमिक विकारों के नैदानिक और प्रयोगशाला दोनों पहलुओं के साथ-साथ यह भी सम्मिलित है कि अन्य बीमारियां रक्त को कैसे प्रभावित करती हैं। प्राथमिक हेमेटोलॉजिकल रोग जन्मजात या उपार्जित हो सकते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया तथा लिंफोमा की विभिन्न अवस्थाएं, एनीमिया की कुछ अवस्थाएं और नाना प्रकार के रक्त के थक्के /रक्तस्राव विकार शामिल हैं। रक्ताधान चिकित्सा पद्धति भी हेमेटोलॉजी विशिष्टता में ही आती है। हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास गतिशील एवं अत्यधिक जटिल देखभाल वाली विशिष्टता है। विशेषज्ञ हेमेटोलॉजी नर्सों के कार्यक्षेत्र में साध्य और असाध्य दोनों प्रकार की हेमेटोलॉजिकल परिस्थितियों की जानकारी का समावेश है। हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास में रोगियों की निवारक, प्रोत्साहक, चिकित्सीय और प्रशामक देखभाल सम्मिलित हैं। हेमेटोलॉजिकल रोगों की गंभीर और आवर्तक प्रकृति, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और/या प्रतिरक्षा दमनकारी दवाओं से जटिल परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं जिनमें समय रहते मध्यवर्तन करना आवश्यक है। II. दर्शन भातीय उपचर्या परिषद् का मानना है कि पंजीकृत नर्सों को अभ्यास के विभिन्न नए विशिष्ट क्षेत्रों में कार्य करने के लिए विशेषज्ञ नर्सों के रूप में आगे प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है और यह प्रशिक्षण योग्यता पर आधारित होना चाहिए । विशेषज्ञ नर्सों की जरूरत वाला एक ऐसा क्षेत्र हेमेटोलॉजी है जिसमें स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नर्सिंग भी शामिल है। हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तकनीक में हुई प्रगति और नर्सों की बढ़ती भूमिकाओं के मद्देनजर हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट केंद्रों में रोगियों को सक्षम, कुशल और उचित देखभाल प्रदान करने के लिए नर्सों को विशेष कौशल और जानकारी प्रदान करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता है। III. पाठ्यक्रम संरचना हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग में पोस्ट बेसिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक-वर्षीय आवासीय कार्यक्रम है और इस पाठ्यक्रम की अवधारणा में मूल लघु पाठ्यक्रम और विशिष्ट नर्सिंग प्रथाओं के लिए बृहद विशिष्ट पाठ्यक्रम सम्मिलित किए गए हैं । हेमेटोलॉजी नर्सिंग अभ्यास के मूल लघु पाठ्यक्रमों में दक्षता, संवाद एवं रोगी शिक्षा, नैदानिक नेतृत्व एवं संसाधन प्रबंधन, और साक्ष्य आधारित एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान सम्मिलित हैं, जिनका लक्ष्य छात्रों को जवाबदेह, प्रतिबद्ध, कुशल और सक्षम विशेषज्ञ नर्स की तरह कार्य करने की आवश्यक जानकारी, दृष्टिकोण और दक्षता प्रदान करना है। प्रमुख विशिष्ट पाठ्यक्रमों को हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग-एक और हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग-दो के तहत सुनियोजित किया गया है। स्पेशियलिटी नर्सिंग-एक में हेमेटोलॉजी नर्सिंग का संदर्भ / परिचय और हेमेटोलॉजी नर्सिंग में प्रयुक्त सामान्य विज्ञान सम्मिलित हैं। स्पेशियलिटी नर्सिंग - दो में विशिष्ट हेमेटोलॉजिकल स्थितियों का नर्सिंग प्रबंधन शामिल है, जिसमें आंकलन, निदान, उपचार और विशिष्ट मध्यवर्तन तथा रोगी की सुरक्षा और गुणवत्ता तथा साथ ही बीमारी की विशिष्ट क्षतिपूर्ति सम्मिलित हैं। हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग आवासीय कार्यक्रम के पाठ्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित चित्र - एक में दर्शाई गई है। पोस्ट बेसिक डिप्लोमा न हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग रेजिडेंसी प्रोग्राम हेमेटोलॉजी नर्सिंग के मूल पाठ्यक्रम संवाद, रोगी शिक्षा एवं परामर्श नैदानिक नेतृत्व एवं संसाधन साक्ष्य आधारित एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान IV. उद्देश्य/अभिप्राय और दक्षताएं हेमेटोलॉजी नर्सिंग के विशिष्ट पाठ्यक्रम विशिष्ट नर्सिंग अभ्यासों का संदर्भ/परिचय विशिष्ट देखभाल में प्रयुक्त सामान्य विज्ञान नर्सिंग प्रबंधन रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता और रोग संबंधी विवेचन पंजीकृत नर्सों एवं दाईयों के लिए एक-वर्षीय आवासीय कार्यक्रम चित्र-एक. पाठ्यक्रम संरचना : हेमेटोलॉजी स्पेशियलिटी नर्सिंग आवासीय कार्यक्रम इस कार्यक्रम को हेमेटोलॉजिकल विकारों से पीड़ित रोगियों को गुणवत्तापरक देखभाल प्रदान करने में विशेष कौशल, जानकारी और प्रवृत्ति वाले नर्स तैयार करने के लिए बनाया गया है। आगे, इसका उद्देश्य तकनीकी रूप से योग्य और प्रशिक्षित ऐसे विशेषज्ञ नर्स तैयार करना है, जो तृतीयक और चतुर्थक अस्पतालों के हेमेटोलॉजिकल केंद्रों पर उच्च स्तर की देखभाल प्रदान कर सफलतापूर्वक इष्टतम कार्य कर सकेंगे। कार्यक्रम के पूरा होने पर, हेमेटोलॉजी विशेषज्ञ नर्स निम्नांकित कार्य करने में सक्षम होंगेःएक. भारतीय उपचर्या परिषद् के सदाचारी, परोपकारी, विधिसम्मत, नैतिक, विनियामक और मानवतावादी सिद्धांतों के अनुरूप मानकों के अनुसार हेमेटोलॉजी अभ्यास में नर्सिंग देखभाल प्रदान करने में पेशेवर जवाबदेही प्रदर्शित करना। रोगियों, परिवारीजनों और व्यावसायिक सहयोगियों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करना जिससे आपस में सम्मान की भावना को बढ़ावा मिले और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने की दिशा में साझा निर्णय लिए जा सके ।
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मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के स्वास्थ्य में सांस लेने में परेशानी तथा मूत्र संबंधी दिक्कत होने पर लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराए गया। जिसके बाद हालत अब पहले से बेहतर है। मेदांता अस्पताल के निदेशक डॉक्टर राकेश कपूर ने रविवार को बताया कि टंडन को इस वक्त मनोवैज्ञानिक सहारे की जरूरत है। वह होश में हैं और लोगों को पहचान पा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "सुरक्षा किट पहनाकर एक-एक रिश्तेदार को उनके सामने बैठाया जाएगा। इस वक्त उनका मनोबल बढ़ाए जाने की जरूरत है। उनके कमरे में टीवी लगा दिया गया है। वह होश में हैं। फिलहाल वह बोल नहीं पाएंगे क्योंकि ट्यूब लगी हुई है लेकिन वह आपको पहचान लेंगे। हाथ उठाएंगे, धीरे से मुस्कुराते भी हैं। "टंडन (85) को सांस लेने में दिक्कत, पेशाब में परेशानी और बुखार की शिकायत के बाद गत 11 जून को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के स्वास्थ्य में सांस लेने में परेशानी तथा मूत्र संबंधी दिक्कत होने पर लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराए गया। जिसके बाद हालत अब पहले से बेहतर है। मेदांता अस्पताल के निदेशक डॉक्टर राकेश कपूर ने रविवार को बताया कि टंडन को इस वक्त मनोवैज्ञानिक सहारे की जरूरत है। वह होश में हैं और लोगों को पहचान पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "सुरक्षा किट पहनाकर एक-एक रिश्तेदार को उनके सामने बैठाया जाएगा। इस वक्त उनका मनोबल बढ़ाए जाने की जरूरत है। उनके कमरे में टीवी लगा दिया गया है। वह होश में हैं। फिलहाल वह बोल नहीं पाएंगे क्योंकि ट्यूब लगी हुई है लेकिन वह आपको पहचान लेंगे। हाथ उठाएंगे, धीरे से मुस्कुराते भी हैं। "टंडन को सांस लेने में दिक्कत, पेशाब में परेशानी और बुखार की शिकायत के बाद गत ग्यारह जून को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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World Bank Cuts GDP: भारत के लिए झटका देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, वर्ल्ड बैंक ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था को 6. 5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान लगाया है। इससे पहले जून 2022 के अनुमान 7. 5 की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में 1 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, बैंक ने कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत हो रहा है। पिछले वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में 8. 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दक्षिण एशिया के विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है।
विश्व बैंक के शीर्ष अधिकारी ने कहा भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और विशेष रूप से सेवा निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन हमने अभी शुरू हुए वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वानुमान को डाउनग्रेड कर दिया है और इसका मुख्य कारण भारत और सभी देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वातावरण बिगड़ रहा है।
विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया पर अपनी साल में दो बार की रिपोर्ट में कहा, "निजी निवेश वृद्धि में अनिश्चितता और उच्च वित्तपोषण लागत से कम होने की संभावना है। " अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान ने यह भी कहा कि वैश्विक मांग में कमी से देश के निर्यात पर असर पड़ेगा। यह तीसरी बार है जब विश्व बैंक ने भारत के लिए अपने GDP के विकास के अनुमान को संशोधित किया है। जून में, इसने भारत के लिए अपने FY23 जीडीपी विकास अनुमान को घटाकर 7. 5% कर दिया था। इससे पहले अप्रैल में, इसने पूर्वानुमान को 8. 7% से घटाकर 8% कर दिया था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास के अनुमान को 7. 2% से घटाकर 7% कर दिया है।
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World Bank Cuts GDP: भारत के लिए झटका देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, वर्ल्ड बैंक ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस में भारतीय अर्थव्यवस्था को छः. पाँच प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान लगाया है। इससे पहले जून दो हज़ार बाईस के अनुमान सात. पाँच की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में एक प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, बैंक ने कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूत हो रहा है। पिछले वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में आठ. सात प्रतिशत की वृद्धि हुई। दक्षिण एशिया के विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है। विश्व बैंक के शीर्ष अधिकारी ने कहा भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और विशेष रूप से सेवा निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन हमने अभी शुरू हुए वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वानुमान को डाउनग्रेड कर दिया है और इसका मुख्य कारण भारत और सभी देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वातावरण बिगड़ रहा है। विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया पर अपनी साल में दो बार की रिपोर्ट में कहा, "निजी निवेश वृद्धि में अनिश्चितता और उच्च वित्तपोषण लागत से कम होने की संभावना है। " अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान ने यह भी कहा कि वैश्विक मांग में कमी से देश के निर्यात पर असर पड़ेगा। यह तीसरी बार है जब विश्व बैंक ने भारत के लिए अपने GDP के विकास के अनुमान को संशोधित किया है। जून में, इसने भारत के लिए अपने FYतेईस जीडीपी विकास अनुमान को घटाकर सात. पाँच% कर दिया था। इससे पहले अप्रैल में, इसने पूर्वानुमान को आठ. सात% से घटाकर आठ% कर दिया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास के अनुमान को सात. दो% से घटाकर सात% कर दिया है। यह भी पढ़ेंः
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How To Do Mindfulness Meditation: माइंडफुलनेस मेडिटेशन एक मानसिक ट्रेनिंग अभ्यास है, जो आपके दिमाग में दौड़ रही विचारों को धीमा करने, नकारात्मकता को दूर करने और अपने मन और शरीर दोनों को शांत करना सिखाता है। आज की भागती दौड़ती जिंदगी में व्यक्ति तनाव मुक्त रहना भूल गया है। दिमाग में तरह-तरह की चिंताओं के चलते वह धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होने लगा है। कई बार इसे निकल पाना लोगों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। उन्हें समझ नहीं आता कि खुद को किस तरह शांत करें। कई लोग खुश रहने के लिए बाहर आउटिंग कर लेते हैं, मूवी देख लेते हैं, लेकिन इससे मानसिक शांति नहीं मिल पाती है। ऐसे में थोड़ा समय खुद के साथ बिताना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए माइंडफुलनेस मेडिटेशन बहुत ही लाभदायक है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन के कई फायदे हैं। आइए जानते हैं माइंडफुलनेस डे पर माइंडफुलनेस मेडिटेशन के फायदे।
माइंडफुलनेस मेडिटेशन करने के कई तरीके हैं। इसे करने से आप अपने गुस्से में शांति पा सकते हैं। जब भी आपको गुस्सा आता है तो आप आंखें बंद करके गहरी सांस लें और पूरा ध्यान खुद पर केंद्रित करें। पांच मिनट ऐसा करने से आपका गुस्सा शांत हो जाएगा। इसके बाद आपको शांति और खुशी का आनंद होगा। माइंडफुलनेस मेडिटेशन से किसी भी काम के प्रति आपका फोकस बढ़ेगा। स्ट्रेस व चिंता से छुटकारा पा सकेंगे। बेहतर नींद भी मिलेगी। इसके साथ ही दूसरों को समझने और स्वीकार करने की क्षमता का विकास होगा।
माइंडफुलनेस मेडिटेशन करने के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करें जहां शांति हो और हल्की सूरज की रोशनी आती हो। इसे आप सुबह के वक्त कर सकते हैं। सुबह उठकर करने से कई फायदे होंगे। इसे करने के लिए आंखें बंद करें और अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें। सांस अंदर और बाहर जितनी बार आ रही है उतनी बार उसे महसूस करें। सांसों के उतार-चढ़ाव को अच्छे से महसूस करें।
इस दौरान एक हाथ पेट पर रखें और जब सांस लें तो पेट बाहर की तरफ जाए और जब सांस छोड़े तो पेट अंदर की तरफ जाए। इस मुद्रा में कम से कम 10 से 15 मिनट तक रहें और इसके बाद धीरे से आंख खोलें। आपको काफी हल्का महसूस होगा।
(डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। )
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How To Do Mindfulness Meditation: माइंडफुलनेस मेडिटेशन एक मानसिक ट्रेनिंग अभ्यास है, जो आपके दिमाग में दौड़ रही विचारों को धीमा करने, नकारात्मकता को दूर करने और अपने मन और शरीर दोनों को शांत करना सिखाता है। आज की भागती दौड़ती जिंदगी में व्यक्ति तनाव मुक्त रहना भूल गया है। दिमाग में तरह-तरह की चिंताओं के चलते वह धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होने लगा है। कई बार इसे निकल पाना लोगों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। उन्हें समझ नहीं आता कि खुद को किस तरह शांत करें। कई लोग खुश रहने के लिए बाहर आउटिंग कर लेते हैं, मूवी देख लेते हैं, लेकिन इससे मानसिक शांति नहीं मिल पाती है। ऐसे में थोड़ा समय खुद के साथ बिताना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए माइंडफुलनेस मेडिटेशन बहुत ही लाभदायक है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन के कई फायदे हैं। आइए जानते हैं माइंडफुलनेस डे पर माइंडफुलनेस मेडिटेशन के फायदे। माइंडफुलनेस मेडिटेशन करने के कई तरीके हैं। इसे करने से आप अपने गुस्से में शांति पा सकते हैं। जब भी आपको गुस्सा आता है तो आप आंखें बंद करके गहरी सांस लें और पूरा ध्यान खुद पर केंद्रित करें। पांच मिनट ऐसा करने से आपका गुस्सा शांत हो जाएगा। इसके बाद आपको शांति और खुशी का आनंद होगा। माइंडफुलनेस मेडिटेशन से किसी भी काम के प्रति आपका फोकस बढ़ेगा। स्ट्रेस व चिंता से छुटकारा पा सकेंगे। बेहतर नींद भी मिलेगी। इसके साथ ही दूसरों को समझने और स्वीकार करने की क्षमता का विकास होगा। माइंडफुलनेस मेडिटेशन करने के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करें जहां शांति हो और हल्की सूरज की रोशनी आती हो। इसे आप सुबह के वक्त कर सकते हैं। सुबह उठकर करने से कई फायदे होंगे। इसे करने के लिए आंखें बंद करें और अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें। सांस अंदर और बाहर जितनी बार आ रही है उतनी बार उसे महसूस करें। सांसों के उतार-चढ़ाव को अच्छे से महसूस करें। इस दौरान एक हाथ पेट पर रखें और जब सांस लें तो पेट बाहर की तरफ जाए और जब सांस छोड़े तो पेट अंदर की तरफ जाए। इस मुद्रा में कम से कम दस से पंद्रह मिनट तक रहें और इसके बाद धीरे से आंख खोलें। आपको काफी हल्का महसूस होगा।
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खाद्य तेलों तथा सब्जियों के दामों में लगातार बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति में बृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
महिलाओं द्वारा शुरू किए स्टार्टअप को पुरूषों की तुलना में काफी कम निवेशक मिलते हैं, वो भी बड़ी मुश्किल से।
हुंडई और निसान जैसी कार निर्यातक कंपनियों के निर्यात में 2 अंकों की गिरावट आई है, मारूति सुजूकी केवल घरेलू बिक्री पर ध्यान देती है।
डमी नंबर के जरिए आधार को और अधिक सुरक्षित बनाने को लेकर यूआईडीएआई की ओर से कवायदें तेज,अभी इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
बैंक खाते को आधार नंबर से लिंक कराए जाने के बाद सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनओं का लाभ उठाया जा सकता है।
आजकल अंडे के दाम आसमान छू रहे हैं, इसके पीछे अंडों की बढ़ती डिमांड, सब्जियों के दामों में बृद्धि तथा नोटबंदी आदि जिम्मेदार है।
भारत ने स्वदेशी हथियारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए स्पाइक के लिए हुए इजरायल डील को रद्द कर दिया है।
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खाद्य तेलों तथा सब्जियों के दामों में लगातार बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति में बृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। महिलाओं द्वारा शुरू किए स्टार्टअप को पुरूषों की तुलना में काफी कम निवेशक मिलते हैं, वो भी बड़ी मुश्किल से। हुंडई और निसान जैसी कार निर्यातक कंपनियों के निर्यात में दो अंकों की गिरावट आई है, मारूति सुजूकी केवल घरेलू बिक्री पर ध्यान देती है। डमी नंबर के जरिए आधार को और अधिक सुरक्षित बनाने को लेकर यूआईडीएआई की ओर से कवायदें तेज,अभी इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। बैंक खाते को आधार नंबर से लिंक कराए जाने के बाद सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनओं का लाभ उठाया जा सकता है। आजकल अंडे के दाम आसमान छू रहे हैं, इसके पीछे अंडों की बढ़ती डिमांड, सब्जियों के दामों में बृद्धि तथा नोटबंदी आदि जिम्मेदार है। भारत ने स्वदेशी हथियारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए स्पाइक के लिए हुए इजरायल डील को रद्द कर दिया है।
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नई दिल्ली। आईपीएल 2018 में महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला जमकर बोल रहा है। अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर माही ने उन ओलचकों के मुंह बंद कर दिए हैं, जो धोनी के खेल पर सवाल खड़ा कर रहे थे।
इस सीजन में माही जिस तरह से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि वो पांच साल पीछे चले गए हैं। धोनी का हमेशा से ही एक स्टाइल रहा है और वो है मैच को छक्का लगाकर खत्म करना। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि धोनी छक्का लगाकर ही अपनी टीम को जीत दिलाना चाहते हैं।
पंजाब के खिलाफ खेले गए आखिरी लीग मैच में भी धोनी ने मोहित शर्मा की गेंद पर सिक्स लगाकर न सिर्फ चेन्नई को जीत दिलाई बल्कि पंजाब को आईपीएल से बाहर भी कर दिया। धोनी का ये पुराना स्टाइल है, लेकिन अभी तक किसी को भी नहीं पता था कि वो ऐसा क्यों करते हैं, लेकिन अब खुद धोनी ने ही इसका खुलासा कर दिया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक धोनी से जब छक्का लगाकर मैच खत्म करने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, "फील्डिंग टीम की पूरी कोशिश होती है कि ऐसी स्थिति में वो हमें रन न बनाने दें, जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उन परिस्थितियों में गेंद को फील्डर्स के ऊपर से मारना ही खेल खत्म करने का सबसे अच्छा विकल्प होता है"।
मौजूदा आइपीएल में धोनी का बल्ला खूब रन बरसा रहा है। इस सीजन में लीग मैच में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 14 मैचों में 89. 20 की औसत के साथ 446 रन बनाए हैं। इस सीजन में उनके बल्ले से तीन अर्धशतक भी निकले हैं। खास बात ये है कि इन 14 मैचों की 14 पारियों में 9 बार वो नाबाद रहे हैं। पहले क्वालिफायर से पहले मैच तक उनका स्ट्राइक रेट 157. 04 रहा है।
चेन्नई की टीम दो साल के निलंबन के बाद इस साल आईपीएल में वापस लौटी और उसने अपने विरोधियों को पस्त करते हुए इस बार भी अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली। चेन्नई की टीम हर बार प्लेऑफ में जगह बनाने वाली एकमात्र टीम है। इसके अलावा कोई भी दूसरी टीम ऐसा करने में नाकाम रही है।
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नई दिल्ली। आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह में महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला जमकर बोल रहा है। अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर माही ने उन ओलचकों के मुंह बंद कर दिए हैं, जो धोनी के खेल पर सवाल खड़ा कर रहे थे। इस सीजन में माही जिस तरह से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि वो पांच साल पीछे चले गए हैं। धोनी का हमेशा से ही एक स्टाइल रहा है और वो है मैच को छक्का लगाकर खत्म करना। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि धोनी छक्का लगाकर ही अपनी टीम को जीत दिलाना चाहते हैं। पंजाब के खिलाफ खेले गए आखिरी लीग मैच में भी धोनी ने मोहित शर्मा की गेंद पर सिक्स लगाकर न सिर्फ चेन्नई को जीत दिलाई बल्कि पंजाब को आईपीएल से बाहर भी कर दिया। धोनी का ये पुराना स्टाइल है, लेकिन अभी तक किसी को भी नहीं पता था कि वो ऐसा क्यों करते हैं, लेकिन अब खुद धोनी ने ही इसका खुलासा कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक धोनी से जब छक्का लगाकर मैच खत्म करने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, "फील्डिंग टीम की पूरी कोशिश होती है कि ऐसी स्थिति में वो हमें रन न बनाने दें, जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उन परिस्थितियों में गेंद को फील्डर्स के ऊपर से मारना ही खेल खत्म करने का सबसे अच्छा विकल्प होता है"। मौजूदा आइपीएल में धोनी का बल्ला खूब रन बरसा रहा है। इस सीजन में लीग मैच में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने चौदह मैचों में नवासी. बीस की औसत के साथ चार सौ छियालीस रन बनाए हैं। इस सीजन में उनके बल्ले से तीन अर्धशतक भी निकले हैं। खास बात ये है कि इन चौदह मैचों की चौदह पारियों में नौ बार वो नाबाद रहे हैं। पहले क्वालिफायर से पहले मैच तक उनका स्ट्राइक रेट एक सौ सत्तावन. चार रहा है। चेन्नई की टीम दो साल के निलंबन के बाद इस साल आईपीएल में वापस लौटी और उसने अपने विरोधियों को पस्त करते हुए इस बार भी अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली। चेन्नई की टीम हर बार प्लेऑफ में जगह बनाने वाली एकमात्र टीम है। इसके अलावा कोई भी दूसरी टीम ऐसा करने में नाकाम रही है।
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केलांग - लाहुल-स्पीति में बनने वाले तांदी संगमघाट फाइलों में ही फंस कर रह गया है। भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल के दौरान उक्त स्थल पर घाट बनाने की जहां बात कही, वहीं तांदी संगम घाट के निर्माण की बाकायदा घोषणा भी की गई। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 2017 में ऑनलाइन घाट की आधारशिला भी रखी थी, वहीं उस समय यह कहा गया था कि उक्त घाट के निर्माण पर 24 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि घाट का नक्शा भी तैयार था। यही नहीं, भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने की अस्थियां यहां प्रवाहित की गई थीं, वहीं भाजपा के बड़े नेताओं ने भी तांदी संगम में घाट का जल्द निर्माण कार्य करवाने का दावा किया था। बात कुछ भी हो भाजपा व कांग्रेस की सरकारों की घोषणाओं के बीच तांदी संगमघाट फाइलों में ही रह गया और यह धरातल पर नहीं उतर सका। तांदी संगमघाट धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विशेष स्थान रखता है। यहां देश-विदेश के सैलानी पहुंच कर जहां विशेष पूजा करते हैं, वहीं स्थानीय लोगों में भी इस स्थल का विशेष महत्त्व है। लोगांे का कहना है कि लोकसभा चुनावों में राजनीति संगठनों के प्रत्याशियों को इसका जवाब भी देना होगा कि आखिर कार लाहुल में तांदी संगमघाट का निर्माण क्यों नहीं हो सका। लोगों का कहना है कि चुनाव चाहे विधानसभा के हों या फिर लोकसभा के यहां प्रत्याशियों को इस बात का जवाब लोगों को देना ही होगा। तांदी संगम घाट के निर्माण का मुद्दा अब लोकसभा चुनावों के दौरान शित मरुस्थल में गरमाने लगा है। लोगों का कहना है कि आस्था से जुड़े तांदी संगम में समय-समय पर सरकारें ने यहां हरिद्वार की तर्ज पर घाट बनाने की बात कही थी। कुछ राजनेताओं ने इस संबंध में बड़े-बड़े दावे भी किए, लेकिन यह सब हवा में ही रहे। तांदी संगम घाट फाइलों में ही बनता रहा और लोग इस उम्मीद में बैठे रहे कि आज नहीं तो कल उक्त स्थल पर विशाल घाट का निर्माण होगा, जो लाहुल को नए मौकाम पर पहुंचाएगा। लाहुल में घाट तो दूर यहां पर निर्माण के नाम पर आज तक काम तक शुरू नहीं हो पाया। भाजपा-कांग्रेस के नेता जहां इस मुद्दे पर एक दूसरे को कोस रहे हैं।
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केलांग - लाहुल-स्पीति में बनने वाले तांदी संगमघाट फाइलों में ही फंस कर रह गया है। भाजपा व कांग्रेस की सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल के दौरान उक्त स्थल पर घाट बनाने की जहां बात कही, वहीं तांदी संगम घाट के निर्माण की बाकायदा घोषणा भी की गई। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष दो हज़ार सत्रह में ऑनलाइन घाट की आधारशिला भी रखी थी, वहीं उस समय यह कहा गया था कि उक्त घाट के निर्माण पर चौबीस करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि घाट का नक्शा भी तैयार था। यही नहीं, भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने की अस्थियां यहां प्रवाहित की गई थीं, वहीं भाजपा के बड़े नेताओं ने भी तांदी संगम में घाट का जल्द निर्माण कार्य करवाने का दावा किया था। बात कुछ भी हो भाजपा व कांग्रेस की सरकारों की घोषणाओं के बीच तांदी संगमघाट फाइलों में ही रह गया और यह धरातल पर नहीं उतर सका। तांदी संगमघाट धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विशेष स्थान रखता है। यहां देश-विदेश के सैलानी पहुंच कर जहां विशेष पूजा करते हैं, वहीं स्थानीय लोगों में भी इस स्थल का विशेष महत्त्व है। लोगांे का कहना है कि लोकसभा चुनावों में राजनीति संगठनों के प्रत्याशियों को इसका जवाब भी देना होगा कि आखिर कार लाहुल में तांदी संगमघाट का निर्माण क्यों नहीं हो सका। लोगों का कहना है कि चुनाव चाहे विधानसभा के हों या फिर लोकसभा के यहां प्रत्याशियों को इस बात का जवाब लोगों को देना ही होगा। तांदी संगम घाट के निर्माण का मुद्दा अब लोकसभा चुनावों के दौरान शित मरुस्थल में गरमाने लगा है। लोगों का कहना है कि आस्था से जुड़े तांदी संगम में समय-समय पर सरकारें ने यहां हरिद्वार की तर्ज पर घाट बनाने की बात कही थी। कुछ राजनेताओं ने इस संबंध में बड़े-बड़े दावे भी किए, लेकिन यह सब हवा में ही रहे। तांदी संगम घाट फाइलों में ही बनता रहा और लोग इस उम्मीद में बैठे रहे कि आज नहीं तो कल उक्त स्थल पर विशाल घाट का निर्माण होगा, जो लाहुल को नए मौकाम पर पहुंचाएगा। लाहुल में घाट तो दूर यहां पर निर्माण के नाम पर आज तक काम तक शुरू नहीं हो पाया। भाजपा-कांग्रेस के नेता जहां इस मुद्दे पर एक दूसरे को कोस रहे हैं।
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अनुकम्पा- विचार ] कुगुरु तेने पापी कहे,
बतावे हो मिथ्यात रो भ्रम ॥शु. 71॥
भावार्थः - दया को प्रधान मानने वाला जैनधर्म तो यह बतलाता है कि "सभी जीवो को शान्ति हो इस प्रकार का जैन मुनि उपदेश देते हैं किन्तु सभी जीवो के शान्ति का उपदेश देने वाले को वे लोग पापी और मिथ्यात्वी कहते है यह उन लोगों की कितनी अज्ञानता है ।।७१।।
हिवे सद्गुरु कहे सांभलो,
सूतर थी हो निरणो लेवो जोय । छः काया रे शान्ति कारणे,
उपदेशे हो दयाधर्म ते होय ॥ शु. 721
सूयगडास श्रु तस्कन्ध दूसरे,
अध्ययन छठे हो भाख्यो पाठ रे मांय ।
त्रस थावर खेमकर वीरजो,
धर्म भाखे हो मत हणो तस वाय ॥शु. 731
त्रस यावर शान्ति कारणे,
करुणा कहो दसमा अंग रे मांय ।
ये सहू पाठ उत्थाप ने,
मिथ्यामति हो बोले झूठा वाय 11 शु. 74।।
भावार्थः- सद्गुरु कहते हैं कि हे भव्य जीवो । उन लोगों ने जैनजगत् मे जो झूठा भ्रम फैलाया है उसका उत्तर सूत्रपाठ की साक्षीपूर्वक दिया जाता है । अतः उसे ध्यानपूर्वक श्रवण करो ।
सूयगडाङ्ग सूत्र मे मरते जीव की प्रारगरक्षा करने के लिए एवं छः काय जीवों की शान्ति के लिए भगवान् का उपदेश देना स्पष्ट लिखा है । वह गाथा यह है :
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अनुकम्पा- विचार ] कुगुरु तेने पापी कहे, बतावे हो मिथ्यात रो भ्रम ॥शु. इकहत्तर॥ भावार्थः - दया को प्रधान मानने वाला जैनधर्म तो यह बतलाता है कि "सभी जीवो को शान्ति हो इस प्रकार का जैन मुनि उपदेश देते हैं किन्तु सभी जीवो के शान्ति का उपदेश देने वाले को वे लोग पापी और मिथ्यात्वी कहते है यह उन लोगों की कितनी अज्ञानता है ।।इकहत्तर।। हिवे सद्गुरु कहे सांभलो, सूतर थी हो निरणो लेवो जोय । छः काया रे शान्ति कारणे, उपदेशे हो दयाधर्म ते होय ॥ शु. सात सौ इक्कीस सूयगडास श्रु तस्कन्ध दूसरे, अध्ययन छठे हो भाख्यो पाठ रे मांय । त्रस थावर खेमकर वीरजो, धर्म भाखे हो मत हणो तस वाय ॥शु. सात सौ इकतीस त्रस यावर शान्ति कारणे, करुणा कहो दसमा अंग रे मांय । ये सहू पाठ उत्थाप ने, मिथ्यामति हो बोले झूठा वाय ग्यारह शु. चौहत्तर।। भावार्थः- सद्गुरु कहते हैं कि हे भव्य जीवो । उन लोगों ने जैनजगत् मे जो झूठा भ्रम फैलाया है उसका उत्तर सूत्रपाठ की साक्षीपूर्वक दिया जाता है । अतः उसे ध्यानपूर्वक श्रवण करो । सूयगडाङ्ग सूत्र मे मरते जीव की प्रारगरक्षा करने के लिए एवं छः काय जीवों की शान्ति के लिए भगवान् का उपदेश देना स्पष्ट लिखा है । वह गाथा यह है :
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सर्दियों में गाजर का हलवा खूब खाया और पसंद किया जाता है। गाजर के हलवे की तरह आप चुकंदर का हलवा भी बना सकती हैं, जो टेस्ट में काफी स्वादिष्ट लगता है। चुकंदर एक हेल्दी सब्जी है जिसका हलवा भी काफी हेल्दी होता है।
चुकंदर का हलवा बनाने के लिये यदि आप दूध का इस्तेमाल नहीं करना चाहती हैं, तो आल्मंड मिल्क या वेगन मिल्क का प्रयोग कर सकती हैं।
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सर्दियों में गाजर का हलवा खूब खाया और पसंद किया जाता है। गाजर के हलवे की तरह आप चुकंदर का हलवा भी बना सकती हैं, जो टेस्ट में काफी स्वादिष्ट लगता है। चुकंदर एक हेल्दी सब्जी है जिसका हलवा भी काफी हेल्दी होता है। चुकंदर का हलवा बनाने के लिये यदि आप दूध का इस्तेमाल नहीं करना चाहती हैं, तो आल्मंड मिल्क या वेगन मिल्क का प्रयोग कर सकती हैं।
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मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। हर जीव प्रजनन के लिए मिलन करते हैं। सभी विकसित प्राणियों में लेंगिक प्रजनन पाया जाता है। हमारे समाज में लेंगिक प्रजनन के बारे में बात करने पर बंधन होता है। इसी कारण से मादा के गर्भवती होने के कई अलेंगिक कारण दिए जाते है।
विज्ञान के अनुसार मोर और मोरनी का मिलाप भी किसी आम पक्षी की तरह ही होता है हालांकि वे काफी गुप्त तरीके से मिलाप करते हैं जिसके कारण यह दृश्य देखने को कम मिलता है। प्रकृति में प्रजनन के लिए मिलाप आवश्यक है इसके बिना अंडे का निषेचन संभव नहीं।
जिस समय इनका मिलाप होता है नर पक्षी मादा की पीठ पर सवार होता है और दोनों प्रबलता के साथ अपने 'क्लोका' एक छिद्र जिसके जरिये वे मल उत्सर्जन करते हैं उसे खोलते हैं इसी छिद्र के जरिये नर पक्षी अपना वीर्य मादा के शरीर में प्रत्यारोपित करता है।
Cloaca क्या है?
कुछ जीवो में मल त्याग, मूत्र त्याग और प्रजनन के लिए एक सामूहिक (Common) छिद्र होता है उसे क्लोअका कहते है।
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मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। हर जीव प्रजनन के लिए मिलन करते हैं। सभी विकसित प्राणियों में लेंगिक प्रजनन पाया जाता है। हमारे समाज में लेंगिक प्रजनन के बारे में बात करने पर बंधन होता है। इसी कारण से मादा के गर्भवती होने के कई अलेंगिक कारण दिए जाते है। विज्ञान के अनुसार मोर और मोरनी का मिलाप भी किसी आम पक्षी की तरह ही होता है हालांकि वे काफी गुप्त तरीके से मिलाप करते हैं जिसके कारण यह दृश्य देखने को कम मिलता है। प्रकृति में प्रजनन के लिए मिलाप आवश्यक है इसके बिना अंडे का निषेचन संभव नहीं। जिस समय इनका मिलाप होता है नर पक्षी मादा की पीठ पर सवार होता है और दोनों प्रबलता के साथ अपने 'क्लोका' एक छिद्र जिसके जरिये वे मल उत्सर्जन करते हैं उसे खोलते हैं इसी छिद्र के जरिये नर पक्षी अपना वीर्य मादा के शरीर में प्रत्यारोपित करता है। Cloaca क्या है? कुछ जीवो में मल त्याग, मूत्र त्याग और प्रजनन के लिए एक सामूहिक छिद्र होता है उसे क्लोअका कहते है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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श्रीराम और रावण के युद्ध के समय की घटना है। रावण के कई महारथी असुर मारे जा चुके थे। उस समय रावण ने अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाया। कुंभकर्ण ब्रह्मा जी के वरदान की वजह से 6 माह तक लगातार सोते रहता था और एक बार उठकर खाता-पीता और फिर सो जाता था।
रावण ने कुंभकर्ण को अधूरी नींद में जगाया और श्रीराम से युद्ध के बारे में सब कुछ बताया। कुंभकर्ण भी बहुत ज्ञानी था, वह जानता था कि श्रीराम सामान्य इंसान नहीं हैं।
कुंभकर्ण ने रावण को समझाने के लिए कहा कि भाई, आपने श्रीराम से बैर लेकर अच्छा नहीं किया है। देवी सीता का हरण करके पूरी लंका को खतरे में डाल दिया है। श्रीराम स्वयं नारायण के अवतार हैं। हमें देवी सीता को सकुशल लौटा देना चाहिए, इसी में हम सब की भलाई है।
कुंभकर्ण ये बातें सुनकर रावण ने सोचा कि ये तो ज्ञान और धर्म की बातें कर रहा है। रावण ने कुंभकर्ण के सामने मांस-मदिरा रखवा दी। मांस-मदिरा खाने-पीने के बाद कुंभकर्ण की बुद्धि पलट गई और वह भी श्रीराम से युद्ध करने के लिए तैयार हो गया।
जब कुंभकर्ण युद्ध के मैदान में पहुंचा तो उसका मुलाकात विभीषण से हो गई। विभीषण ने बताया कि किस तरह रावण ने उसे लात मारकर लंका से निकाल दिया था और श्रीराम ने उसे शरण दी है।
कुंभकर्ण ने विभीषण से कहा कि भाई तूने तो बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन मैंने रावण के दिए हुए मांस-मदिरा का सेवन किया है, इस कारण मुझे तो राम से युद्ध करना ही होगा। मैं सही-गलत जानता हूं, लेकिन रावण की संगत से मेरी बुद्धि पलट गई है।
युद्ध में जब कुंभकर्ण का सामना श्रीराम से हुआ तो श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध कर दिया।
इस किस्से की सीख यह है कि हमें अच्छे लोगों की संगत में रहना चाहिए। बुरे लोगों की संगत में रहने से सही-गलत जानते हुए भी व्यक्ति गलत काम देता है।
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श्रीराम और रावण के युद्ध के समय की घटना है। रावण के कई महारथी असुर मारे जा चुके थे। उस समय रावण ने अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाया। कुंभकर्ण ब्रह्मा जी के वरदान की वजह से छः माह तक लगातार सोते रहता था और एक बार उठकर खाता-पीता और फिर सो जाता था। रावण ने कुंभकर्ण को अधूरी नींद में जगाया और श्रीराम से युद्ध के बारे में सब कुछ बताया। कुंभकर्ण भी बहुत ज्ञानी था, वह जानता था कि श्रीराम सामान्य इंसान नहीं हैं। कुंभकर्ण ने रावण को समझाने के लिए कहा कि भाई, आपने श्रीराम से बैर लेकर अच्छा नहीं किया है। देवी सीता का हरण करके पूरी लंका को खतरे में डाल दिया है। श्रीराम स्वयं नारायण के अवतार हैं। हमें देवी सीता को सकुशल लौटा देना चाहिए, इसी में हम सब की भलाई है। कुंभकर्ण ये बातें सुनकर रावण ने सोचा कि ये तो ज्ञान और धर्म की बातें कर रहा है। रावण ने कुंभकर्ण के सामने मांस-मदिरा रखवा दी। मांस-मदिरा खाने-पीने के बाद कुंभकर्ण की बुद्धि पलट गई और वह भी श्रीराम से युद्ध करने के लिए तैयार हो गया। जब कुंभकर्ण युद्ध के मैदान में पहुंचा तो उसका मुलाकात विभीषण से हो गई। विभीषण ने बताया कि किस तरह रावण ने उसे लात मारकर लंका से निकाल दिया था और श्रीराम ने उसे शरण दी है। कुंभकर्ण ने विभीषण से कहा कि भाई तूने तो बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन मैंने रावण के दिए हुए मांस-मदिरा का सेवन किया है, इस कारण मुझे तो राम से युद्ध करना ही होगा। मैं सही-गलत जानता हूं, लेकिन रावण की संगत से मेरी बुद्धि पलट गई है। युद्ध में जब कुंभकर्ण का सामना श्रीराम से हुआ तो श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध कर दिया। इस किस्से की सीख यह है कि हमें अच्छे लोगों की संगत में रहना चाहिए। बुरे लोगों की संगत में रहने से सही-गलत जानते हुए भी व्यक्ति गलत काम देता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Uyghur Muslims: बहुत सारे मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन ने करीब 10 लाख से भी अधिक उइगर मुसलमानों को डिटैंशन कैंप में बंद किया है, और वहां उनपर पुनर्शिक्षण के नाम पर कठोरता बरत रहा है। शिंझियांग प्रांत में चीन पर यह आरोप लगता रहता है, कि वह उइगर मुसलमानों का नरसंहार करता है। हालांकि, वह इससे इंकार करता है।
नई दिल्ली। वैसे तो हम सभी चीन की उइगर मुसलमानों के प्रति अत्याचार से भली-भांति परिचित हैं। आए दिन हम इससे संबंधित खबरें सुनते रहते हैं, लेकिन अब खबर है कि चीन ने उनपर अत्याचार का नया तरीका ढूंढ निकाला है। वह अब उइगर मुसलमानों को ऐतिहासिक ग्रंथों को रखने के लिए निशाना बना रहा है। इसी को लेकर चीन ने पिछले साल एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा दी थी, क्योंकि उसके पास 1940 के दशक के दो चित्र मिले थे। आप सोच रहे होंगे कि इतनी छोटी बात के लिए चीन ऐसा क्यों करेगा. . तो जनाब आइए जानते हैं कि बात क्या है?
चीन द्वारा ऐतिहासिक ग्रंथों को लेकर अपनाई गई कठोरता इस बात की ओर इशारा है कि वह उइगर मुसलमानों को नियंत्रित करना चाहता है। वह उन्हें नए आकार में ढालना चाहता है। यह उसी आत्मसातवादी नीति का हिस्सा है, जिसके मुताबिक वह मंगोलियाई, तिबत्तन, और विभिन्न नृजातीय समूहों को साधता रहा है। बहुत सारे मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन ने करीब 10 लाख से भी अधिक उइगर मुसलमानों को डिटैंशन कैंप में बंद किया है, और वहां उनपर पुनर्शिक्षण के नाम पर कठोरता बरत रहा है। शिंझियांग प्रांत में चीन पर यह आरोप लगता रहता है, कि वह उइगर मुसलमानों का नरसंहार करता है। हालांकि, वह इससे इंकार करता है।
चीन ने अपने छात्रों को ऐतिहासिक ग्रंथों, धरोहरों को देखने, सुनने, और उसपर मनन करने से वंचित किया हुआ है। चीन ने अपना इतिहास भी बदल दिया है। छात्र वही सब पढ़ समझ सकते हैं, जो चीनी सरकार चाहती है। ऐसे में, ऐतिहासिक ग्रंथों को निशाना बनाना चीन का मकसद रहता है। और जिसके पास भी यह मिलता है, उसकी खैर नहीं रहती। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, चीन ने जिस व्यक्ति को उम्रकैद की सजा दी थी, वह चीन के पुरातन विचारों का समर्थक था। उसके पास से 1940 के दशक के दो चित्र मिले थे, जो सरकार के लिए हानिकारक हो सकते थे।
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Uyghur Muslims: बहुत सारे मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन ने करीब दस लाख से भी अधिक उइगर मुसलमानों को डिटैंशन कैंप में बंद किया है, और वहां उनपर पुनर्शिक्षण के नाम पर कठोरता बरत रहा है। शिंझियांग प्रांत में चीन पर यह आरोप लगता रहता है, कि वह उइगर मुसलमानों का नरसंहार करता है। हालांकि, वह इससे इंकार करता है। नई दिल्ली। वैसे तो हम सभी चीन की उइगर मुसलमानों के प्रति अत्याचार से भली-भांति परिचित हैं। आए दिन हम इससे संबंधित खबरें सुनते रहते हैं, लेकिन अब खबर है कि चीन ने उनपर अत्याचार का नया तरीका ढूंढ निकाला है। वह अब उइगर मुसलमानों को ऐतिहासिक ग्रंथों को रखने के लिए निशाना बना रहा है। इसी को लेकर चीन ने पिछले साल एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा दी थी, क्योंकि उसके पास एक हज़ार नौ सौ चालीस के दशक के दो चित्र मिले थे। आप सोच रहे होंगे कि इतनी छोटी बात के लिए चीन ऐसा क्यों करेगा. . तो जनाब आइए जानते हैं कि बात क्या है? चीन द्वारा ऐतिहासिक ग्रंथों को लेकर अपनाई गई कठोरता इस बात की ओर इशारा है कि वह उइगर मुसलमानों को नियंत्रित करना चाहता है। वह उन्हें नए आकार में ढालना चाहता है। यह उसी आत्मसातवादी नीति का हिस्सा है, जिसके मुताबिक वह मंगोलियाई, तिबत्तन, और विभिन्न नृजातीय समूहों को साधता रहा है। बहुत सारे मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन ने करीब दस लाख से भी अधिक उइगर मुसलमानों को डिटैंशन कैंप में बंद किया है, और वहां उनपर पुनर्शिक्षण के नाम पर कठोरता बरत रहा है। शिंझियांग प्रांत में चीन पर यह आरोप लगता रहता है, कि वह उइगर मुसलमानों का नरसंहार करता है। हालांकि, वह इससे इंकार करता है। चीन ने अपने छात्रों को ऐतिहासिक ग्रंथों, धरोहरों को देखने, सुनने, और उसपर मनन करने से वंचित किया हुआ है। चीन ने अपना इतिहास भी बदल दिया है। छात्र वही सब पढ़ समझ सकते हैं, जो चीनी सरकार चाहती है। ऐसे में, ऐतिहासिक ग्रंथों को निशाना बनाना चीन का मकसद रहता है। और जिसके पास भी यह मिलता है, उसकी खैर नहीं रहती। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, चीन ने जिस व्यक्ति को उम्रकैद की सजा दी थी, वह चीन के पुरातन विचारों का समर्थक था। उसके पास से एक हज़ार नौ सौ चालीस के दशक के दो चित्र मिले थे, जो सरकार के लिए हानिकारक हो सकते थे।
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वाशिंगटन : वैश्विक महामारी कोरोना का कहर किस कदर बरपा यह किसी से छिपा नहीं है। दुनिया भर में कोरोना ने जिस तरह से कोहराम मचाया है, वो किसी से छिपा नहीं है। भले ही दुनिया के कई देशों ने कोरोना से निपटने के लिए 'वैक्सीन' बना ली हो, लेकिन खतरा टला नहीं है। खुद चीन में कोरोना कहर बनकर टूटा। लेकिन अमेरिका ने नया खुलासा कर यह बता दिया है कि चीन की वुहान लैब में ही कोरोना का वायरस बना था।
जानकारी के लिए बता दें कि भले ही कई देशों ने वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन आज भी कोरोना का एक भी मामला स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा देता है। दुनियाभर की जांच एजेंसियां कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन को जिम्मेदार मानती हैं। दावा किया जाता है कि चीन की वुहान लैब में यह वायरस बनाया गया था।
हालांकि, चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि यह वायरस उसकी लैब में नहीं बना, बल्कि बाहर से आया। हालांकि, कई जांच एजेंसियों ने ऐसे कई सबूत पेश किए, जिससे पूरा शक चीन पर ही जाता है।
कोरोना को लेकर अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने नया खुलासा किया गया है। ऊर्जा विभाग ने कहा है कि सबसे अधिक संभावना इस बात की है कि कोरोना वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से उत्पन्न हुआ है। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा विभाग का निष्कर्ष नई खुफिया जानकारी का परिणाम है और महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी के पास काफी वैज्ञानिक विशेषज्ञता है। ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट को वर्गीकृत खुफिया रिपोर्ट के माध्यम से अधिसूचित किया गया है, जिसे हाल ही में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों को सौंपा गया।
हालांकि, नेशनल इंटेलिजेंस एवरिल हैन्स कार्यालय के निदेशक द्वारा 2021 के एक दस्तावेज बताया गया है कि कैसे खुफिया समुदाय के विभिन्न हिस्सों ने महामारी की उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग निर्णय लिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड -19 वायरस संभवत एक चीनी प्रयोगशाला में दुर्घटना के माध्यम से फैला था। इससे पहले FBI ने भी निष्कर्ष निकाला था कि 2021 में चीन में एक प्रयोगशाला रिसाव के कारण कोरोना वायरस महामारी उत्पन्न हुई थी। एजेंसी अभी भी अपने दृष्टिकोण पर कायम है।
2019 के अंत में पहली बार कोरोना वायरस की पुष्टि चीनी शहर वुहान में हुई थी। इसके बाद से ही इसकी उत्पत्ति के लिए चीन को शक की नजरों से देखा जाता है। दअअसल, चीन पर पहले भी इस तरह के प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, चीन ने हर बार इन आरोपों को खारिज किया है। चीन का कहना है कि वह वायरस बाहर से आया था, या फिर जानवरों से मानवों में आया। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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वाशिंगटन : वैश्विक महामारी कोरोना का कहर किस कदर बरपा यह किसी से छिपा नहीं है। दुनिया भर में कोरोना ने जिस तरह से कोहराम मचाया है, वो किसी से छिपा नहीं है। भले ही दुनिया के कई देशों ने कोरोना से निपटने के लिए 'वैक्सीन' बना ली हो, लेकिन खतरा टला नहीं है। खुद चीन में कोरोना कहर बनकर टूटा। लेकिन अमेरिका ने नया खुलासा कर यह बता दिया है कि चीन की वुहान लैब में ही कोरोना का वायरस बना था। जानकारी के लिए बता दें कि भले ही कई देशों ने वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन आज भी कोरोना का एक भी मामला स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा देता है। दुनियाभर की जांच एजेंसियां कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन को जिम्मेदार मानती हैं। दावा किया जाता है कि चीन की वुहान लैब में यह वायरस बनाया गया था। हालांकि, चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि यह वायरस उसकी लैब में नहीं बना, बल्कि बाहर से आया। हालांकि, कई जांच एजेंसियों ने ऐसे कई सबूत पेश किए, जिससे पूरा शक चीन पर ही जाता है। कोरोना को लेकर अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने नया खुलासा किया गया है। ऊर्जा विभाग ने कहा है कि सबसे अधिक संभावना इस बात की है कि कोरोना वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से उत्पन्न हुआ है। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा विभाग का निष्कर्ष नई खुफिया जानकारी का परिणाम है और महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी के पास काफी वैज्ञानिक विशेषज्ञता है। ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट को वर्गीकृत खुफिया रिपोर्ट के माध्यम से अधिसूचित किया गया है, जिसे हाल ही में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों को सौंपा गया। हालांकि, नेशनल इंटेलिजेंस एवरिल हैन्स कार्यालय के निदेशक द्वारा दो हज़ार इक्कीस के एक दस्तावेज बताया गया है कि कैसे खुफिया समुदाय के विभिन्न हिस्सों ने महामारी की उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग निर्णय लिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड -उन्नीस वायरस संभवत एक चीनी प्रयोगशाला में दुर्घटना के माध्यम से फैला था। इससे पहले FBI ने भी निष्कर्ष निकाला था कि दो हज़ार इक्कीस में चीन में एक प्रयोगशाला रिसाव के कारण कोरोना वायरस महामारी उत्पन्न हुई थी। एजेंसी अभी भी अपने दृष्टिकोण पर कायम है। दो हज़ार उन्नीस के अंत में पहली बार कोरोना वायरस की पुष्टि चीनी शहर वुहान में हुई थी। इसके बाद से ही इसकी उत्पत्ति के लिए चीन को शक की नजरों से देखा जाता है। दअअसल, चीन पर पहले भी इस तरह के प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, चीन ने हर बार इन आरोपों को खारिज किया है। चीन का कहना है कि वह वायरस बाहर से आया था, या फिर जानवरों से मानवों में आया। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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दिवस-30. न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक की अवधारणाओं की चर्चा करते हुए इनके बीच अंतर बताइये। सरकार की शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने एवं विधि का शासन सुनिश्चित करने में इनके महत्त्व पर प्रकाश डालिये। (250 शब्द)
हल करने का दृष्टिकोणः
- न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक को परिभाषित कीजिये।
- इन दोनों शब्दों में अंतर बताइये। इसके अलावा न्यायिक सक्रियता तथा न्यायिक अतिरेक के प्रासंगिक उदाहरण देते हुए इनका महत्त्व भी बताइये।
- संतुलित दृष्टिकोण के साथ निष्कर्ष लिखिये।
न्यायिक सक्रियता व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक न्याय या सार्वजनिक हित की रक्षा या विस्तार के लिये अपनी न्यायिक शक्ति का उपयोग करने की न्यायाधीशों की प्रवृत्ति को संदर्भित करती है, भले ही इसका मतलब कानून के अक्षर या संविधान के मूल इरादे से परे जाना हो। दूसरी ओर न्यायिक अतिरेक उस स्थिति को संदर्भित करता है जब न्यायाधीश अपने संवैधानिक अधिकार से आगे निकल जाते हैं और विधायी या कार्यकारी शाखाओं के कार्य में हस्तक्षेप करते हैं या नीति निर्धारण के क्षेत्र का अतिक्रमण करते हैं।
न्यायिक सक्रियता को आमतौर पर एक सकारात्मक और प्रगतिशील घटना के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह न्यायपालिका को सरकार के अन्य अंगों पर नियंत्रण एवं संतुलन के रूप में कार्य करने तथा कानून के शासन व मानवाधिकारों को बनाए रखने में सक्षम बनाता है। हालाँकि न्यायिक अतिरेक को एक नकारात्मक और प्रतिगामी घटना माना जाता है क्योंकि इससे शक्तियों के पृथक्करण तथा लोकतांत्रिक जवाबदेही का सिद्धांत कमज़ोर होने के साथ कानूनी अनिश्चितता एवं अस्थिरता पैदा होती है।
भारत में न्यायिक सक्रियता के कुछ उदाहरणः
- केशवानंद भारती मामले (1973) में मूल ढाँचा सिद्धांत' की उत्पत्ति हुई, जिसके द्वारा सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल विशेषताओं का उल्लंघन करने वाले किसी भी संविधान संशोधन की समीक्षा करने की अपनी शक्ति को महत्त्व दिया।
- किसी भी नागरिक या समूह को किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संवैधानिक या कानूनी अधिकारों को लागू करने के लिये न्यायालयों तक पहुँचने में सक्षम बनाने के लिये एक तंत्र के रूप में जनहित याचिका (PIL) की शुरूआत की गई।
- विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, आजीविका आदि जैसे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को शामिल करने के लिये अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के दायरे का विस्तार किया गया।
- न्यायिक स्वतंत्रता और अखंडता सुनिश्चित करने के एक तरीके के रूप में, उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत की गई।
भारत में न्यायिक अतिरेक के कुछ उदाहरणः
- राष्ट्रगान मामले (2016) में देशभक्ति को थोपना, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सिनेमाघरों के लिये हर फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले राष्ट्रगान बजाना तथा सभी उपस्थित लोगों के लिये खड़े होकर सम्मान दिखाना अनिवार्य कर दिया।
- हालाँकि बाद के एक फैसले में इस आदेश को अप्रभावी कर दिया गया।
- दिवाली (2017) के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध लगाना, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए दिल्ली-NCR क्षेत्र में पटाखों की बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया।
- पुलिस सुधारों पर आदेश (2006), जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने बिना किसी विधायी समर्थन के पुलिस प्रशासन के विभिन्न पहलुओं जैसे कार्यकाल की सुरक्षा, चयन प्रक्रिया, जवाबदेही तंत्र आदि पर केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किये।
शक्ति संतुलन बनाए रखने में न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक का महत्त्वः
- न्यायिक सक्रियता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार के अन्य अंगों की कमियों को दूर करने या विफलताओं को हल करने में मदद करती है, खासकर जब वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ या अनिच्छुक होते हैं। यह संविधान में निहित मौलिक अधिकारों और मूल्यों की रक्षा तथा प्रचार करने एवं समाज की बदलती जरूरतों तथा आकांक्षाओं को पूरा करने में भी सहायक है।
- न्यायिक अतिरेक सरकार की शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन के लिये खतरा पैदा करता है और इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहाँ सरकार का एक अंग दूसरों पर हावी हो जाता है या उन पर शासन करता है। यह न्यायपालिका की वैधता एवं विश्वसनीयता को भी नष्ट कर देता है, क्योंकि इसे मनमाने ढंग से या राजनीतिक रूप से कार्य करने के रूप में देखा जा सकता है।
- इससे विभिन्न कानूनों और नीतियों के बीच भ्रम एवं संघर्ष भी पैदा हो सकता है तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
इसलिये यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि जहाँ न्यायिक सक्रियता लोकतंत्र तथा न्याय सुनिश्चित करने के लिये वांछनीय और आवश्यक है, वहीं न्यायिक अतिरेक लोकतंत्र एवं न्याय व्यवस्था को कमज़ोर करता है। न्यायपालिका को अपनी सीमाओं के साथ-साथ सरकार के अन्य अंगों का सम्मान करते हुए सावधानी एवं संयम के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग करना चाहिये।
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दिवस-तीस. न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक की अवधारणाओं की चर्चा करते हुए इनके बीच अंतर बताइये। सरकार की शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने एवं विधि का शासन सुनिश्चित करने में इनके महत्त्व पर प्रकाश डालिये। हल करने का दृष्टिकोणः - न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक को परिभाषित कीजिये। - इन दोनों शब्दों में अंतर बताइये। इसके अलावा न्यायिक सक्रियता तथा न्यायिक अतिरेक के प्रासंगिक उदाहरण देते हुए इनका महत्त्व भी बताइये। - संतुलित दृष्टिकोण के साथ निष्कर्ष लिखिये। न्यायिक सक्रियता व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक न्याय या सार्वजनिक हित की रक्षा या विस्तार के लिये अपनी न्यायिक शक्ति का उपयोग करने की न्यायाधीशों की प्रवृत्ति को संदर्भित करती है, भले ही इसका मतलब कानून के अक्षर या संविधान के मूल इरादे से परे जाना हो। दूसरी ओर न्यायिक अतिरेक उस स्थिति को संदर्भित करता है जब न्यायाधीश अपने संवैधानिक अधिकार से आगे निकल जाते हैं और विधायी या कार्यकारी शाखाओं के कार्य में हस्तक्षेप करते हैं या नीति निर्धारण के क्षेत्र का अतिक्रमण करते हैं। न्यायिक सक्रियता को आमतौर पर एक सकारात्मक और प्रगतिशील घटना के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह न्यायपालिका को सरकार के अन्य अंगों पर नियंत्रण एवं संतुलन के रूप में कार्य करने तथा कानून के शासन व मानवाधिकारों को बनाए रखने में सक्षम बनाता है। हालाँकि न्यायिक अतिरेक को एक नकारात्मक और प्रतिगामी घटना माना जाता है क्योंकि इससे शक्तियों के पृथक्करण तथा लोकतांत्रिक जवाबदेही का सिद्धांत कमज़ोर होने के साथ कानूनी अनिश्चितता एवं अस्थिरता पैदा होती है। भारत में न्यायिक सक्रियता के कुछ उदाहरणः - केशवानंद भारती मामले में मूल ढाँचा सिद्धांत' की उत्पत्ति हुई, जिसके द्वारा सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की मूल विशेषताओं का उल्लंघन करने वाले किसी भी संविधान संशोधन की समीक्षा करने की अपनी शक्ति को महत्त्व दिया। - किसी भी नागरिक या समूह को किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संवैधानिक या कानूनी अधिकारों को लागू करने के लिये न्यायालयों तक पहुँचने में सक्षम बनाने के लिये एक तंत्र के रूप में जनहित याचिका की शुरूआत की गई। - विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, आजीविका आदि जैसे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को शामिल करने के लिये अनुच्छेद इक्कीस के दायरे का विस्तार किया गया। - न्यायिक स्वतंत्रता और अखंडता सुनिश्चित करने के एक तरीके के रूप में, उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत की गई। भारत में न्यायिक अतिरेक के कुछ उदाहरणः - राष्ट्रगान मामले में देशभक्ति को थोपना, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सिनेमाघरों के लिये हर फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले राष्ट्रगान बजाना तथा सभी उपस्थित लोगों के लिये खड़े होकर सम्मान दिखाना अनिवार्य कर दिया। - हालाँकि बाद के एक फैसले में इस आदेश को अप्रभावी कर दिया गया। - दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध लगाना, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए दिल्ली-NCR क्षेत्र में पटाखों की बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। - पुलिस सुधारों पर आदेश , जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने बिना किसी विधायी समर्थन के पुलिस प्रशासन के विभिन्न पहलुओं जैसे कार्यकाल की सुरक्षा, चयन प्रक्रिया, जवाबदेही तंत्र आदि पर केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किये। शक्ति संतुलन बनाए रखने में न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिरेक का महत्त्वः - न्यायिक सक्रियता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार के अन्य अंगों की कमियों को दूर करने या विफलताओं को हल करने में मदद करती है, खासकर जब वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ या अनिच्छुक होते हैं। यह संविधान में निहित मौलिक अधिकारों और मूल्यों की रक्षा तथा प्रचार करने एवं समाज की बदलती जरूरतों तथा आकांक्षाओं को पूरा करने में भी सहायक है। - न्यायिक अतिरेक सरकार की शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन के लिये खतरा पैदा करता है और इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जहाँ सरकार का एक अंग दूसरों पर हावी हो जाता है या उन पर शासन करता है। यह न्यायपालिका की वैधता एवं विश्वसनीयता को भी नष्ट कर देता है, क्योंकि इसे मनमाने ढंग से या राजनीतिक रूप से कार्य करने के रूप में देखा जा सकता है। - इससे विभिन्न कानूनों और नीतियों के बीच भ्रम एवं संघर्ष भी पैदा हो सकता है तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसलिये यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि जहाँ न्यायिक सक्रियता लोकतंत्र तथा न्याय सुनिश्चित करने के लिये वांछनीय और आवश्यक है, वहीं न्यायिक अतिरेक लोकतंत्र एवं न्याय व्यवस्था को कमज़ोर करता है। न्यायपालिका को अपनी सीमाओं के साथ-साथ सरकार के अन्य अंगों का सम्मान करते हुए सावधानी एवं संयम के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग करना चाहिये।
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Don't Miss!
उनकी बतौर निर्माता नई फिल्म 'तेरे संग' है। यह फिल्म एक किशोरी के गर्भवती होने पर आधारित है। इसका निर्देशन सतीश कौशिक ने किया है।
खेर ने कहा, "मैं समय-समय पर अलग-अलग तरह के किरदार निभाता हूं। आपको अपने जीवन में कोशिश करनी चाहिए और साथ ही जोखिम मोल लेना चाहिए। मेरा मानना है कि औसत लोग ही सुरक्षित रास्ता चुनते हैं।"
उन्होंने कहा, "मैंने फिल्म 'सारांश' में उस समय वृद्ध व्यक्ति का किरदार निभाया जब मैं नौजवान था। इसी तरह वर्ष 1991 में मैंने फिल्म 'मस्त कलंदर' में एक समलैंगिक का किरदार निभाया और उस समय बहुत से लोग आज की तरह 'समलैंगिकता' से परिचित नहीं थे।"
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Don't Miss! उनकी बतौर निर्माता नई फिल्म 'तेरे संग' है। यह फिल्म एक किशोरी के गर्भवती होने पर आधारित है। इसका निर्देशन सतीश कौशिक ने किया है। खेर ने कहा, "मैं समय-समय पर अलग-अलग तरह के किरदार निभाता हूं। आपको अपने जीवन में कोशिश करनी चाहिए और साथ ही जोखिम मोल लेना चाहिए। मेरा मानना है कि औसत लोग ही सुरक्षित रास्ता चुनते हैं।" उन्होंने कहा, "मैंने फिल्म 'सारांश' में उस समय वृद्ध व्यक्ति का किरदार निभाया जब मैं नौजवान था। इसी तरह वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में मैंने फिल्म 'मस्त कलंदर' में एक समलैंगिक का किरदार निभाया और उस समय बहुत से लोग आज की तरह 'समलैंगिकता' से परिचित नहीं थे।"
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मुलतान से, लाला मुरलीधर भी पहुँचे । पिछले जाड़ों में आपने सत्संग करके अपने जीवन को बहुत सुधारा था । मांस, शराब आदि अनेक दुर्व्यसनों से मुक्ति पाई थी। पर महाराजजी के चले आने पर कुसंग के कारण फिर गिर गये । सदाचार - मय जीवन का कुछ आनंद उठा चुके थे, इसलिये बल प्राप्तः करने के लिये फिर कश्मीर पहुँचे थे। सारा हाल सुना दिया । स्वामीजी ने वड़ी दयालुता से समझाया और प्रतिज्ञा भंग करने का पाप भी सुझाया। कुछ जाप आदि प्रायश्चित्त के लिये कहा 1 वहाँ से चलते समय उन्होंने कुछ भेंट करना चाहा, पर स्वामीजी ने जरूरत होते हुए भी, उनके व्यवहार से असन्तुष्ट होने के कारण कुछ ग्रहण न किया । यह वापस आकर प्रायश्चित्त करके अपव्रत में डटे रहे। दलाली के काम में जो गड़बड़ी हुआ करती थी, उससे भी धीरे-धीरे छुटकारा पा लिया । अपने व्यसनी साथियों के कटाक्ष सहते हुए भी सदाचार के व्रत से न हटे । इस अद्भुत परिवर्त्तन को देखकर वे भी इनके भक्त हो. गये और महाराजजी के सत्संग में आने लगे । पीछे भी १६२६ १६२७, १६२७-१९२८ में जब स्वामीजी मुलतान आते रहे, तो सत्संग में अनेक बार जाकर, अभ्यास में लगने के लिये आप प्रार्थना करते रहे। बाहर की गड़बड़ी छूट गई थी, पर अभी अपनी स्त्री के सम्बन्ध में ब्रह्मचर्य का पालन नहीं होता था । सन्तान भी थी, अवस्था भी ४५ वर्ष की हो चुकी थी, ईश्वरभजन की लग्न बढ़ रही थी; आखिर हिम्मत करके १९२८ के आदि में दम्पति ने विधि पूर्वक ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, जिस पर वे वड़ी दृढ़ता से डट गये। स्वामीजी महाराज ने प्रसन्न हो एक करोड़ गायत्री जाप करने की आज्ञा दी । जाप की विधि बताई । पहले तो वह घवराये, पर पीछे जब महाराजजी ने
योगीराज श्री सियाराम स्व मो [ ४ जाग्रति कांड
समझाया कि यही अभ्यास है, और इसी से लाभ भी होगा, तो उसमें जुट गये । दो-तीन समय नीयत करके बड़ी श्रद्धा से जाप करने लगे। कुछ दिनों में ही विचित्र - अनुभव होने लगा । हृदय बहुत शान्त रहने लगा । जिन पिछले पापों के कारण चित्त भयभीत रहा करता था, उनका भय जाता रहा । ऐसा प्रतीत होता था कि नींद में भी गायत्री जाप होता रहता है। काम काज भी सब भली-भाँति चलता रहा। अभी उनका यह जाप पूरा ही नहीं हुआ था कि इस वर्ष जनवरी, १६३० में नमोनिया के कारण आपका शरीरान्त हो गया । पर मरते समय भी बड़े सावधान रहे और बड़ी उपरामता और प्रसन्नता से शरीर को छोड़ा । इस प्रकार सन्तों की शरण पकड़ने से वे अपने जोवन को सुधार कर पुण्य संचय करते हुए परलोक को चले गये । सत्य है, जिन पर सन्तों की कृपा होजाय और जो श्रद्धा से उनको आज्ञा का अनुकरण करने लग जायें, फिर उनका बेड़ा पार हो ही जाता है।
इसी प्रकार मुलतान से लाला मोतीरामजी और उनकी भौजाई श्रीमती ईश्वरदेवोजी भी दोनों कश्मीर में आकर उपदेशों से लाभ उठाते रहे ।
कश्मीर में भी कई एक सज्जन सत्संग करते रहे । पण्डित जानकीनाथ वकील, नारायण ब्रह्मचारी आदि अनेक जन श्री सेवा में आकर भजन में दोक्षित हुए। एक देवो भी, भजन के मार्ग में प्रवृत्त हुई और अभी तक कल्याण के मार्ग में पुरुषार्थ करती जा रही है। उत्तरकाशी में जिस 'नाथ' साधु ने भजन उपदेश लिया था, वह भो यहाँ पर आये । आहार का नियम न रचने से, अब वे पाँच मिनट भी ध्यान में नहीं बैठ सकते थे । वह संकोचवश ऐसे पदार्थ माँगने में घबराते थे । स्त्रामोजी
ने कुछ तो स्वयं सामग्री दे दी, और उनके मिलने वालों से भी कह दिया कि उन्हें अभ्यास होने के कारण चिकने पदार्थों का सेवन कराते रहें। फिर उन्हें भो समझा दिया कि 'जब भिक्षुक बने हैं, तो मान का विचार छोड़, अपने शरीर को जरूरत के अनुसार याचना करने में संकोच नहीं करना चाहिये' । स्वामीजी को पीछे पता चला कि नाथजो शराव ओर मांस का सेवन कर लेते हैं। जब पूछा, तो, पहले तो वह वेदान्त के ढंग से अपनेनिर्दोष करने लगे। महाराजजी ने अनेक
प्रश्न करके उनके अपने मुख से ही यह सिद्ध करा लिया कि वे स्वावश इस व्यसन में फँसे हुए हैं और ऐसे निर्दोष नहीं जैसा कि वे समझते थे । जब वह चला गया, तो गुरूजी ने अपने सहवासियों से कहा, "देखो भाई, यह अभ्यास भी बहुत करते हैं, वड़े तप और निवृत्ति से रहते हैं, विद्वान् भी बड़े हैं, पर ब्रह्मवाद के नशे में अपने दूषणों को नहीं देख सके । इनके जीवन से शिक्षा लेनी चाहिये और मन की सूक्ष्म चालों से अपने रखना चाहिये" ।
यहाँ ही एक मदरासी ब्रह्मचारी रामचन्द्रजी वी० ए० महाराजजी से मिले । वे उत्तराखण्ड से योगी की तलाश करते हुए आये थे। वहाँ महाराजजी का नाम तो सुना था, पर उनका पता ठीक नहीं चला था। इधर अमरनाथ की यात्रा का भी इसी विचार से जा रहे थे । श्रीनगर में पता चला कि एक योगी महात्मा वहीं रहते हैं। इनके साथ कूपत स्वामी भी थे, यह दोनों दर्शनों को आए । महाराजजी ने सारा वृत्तान्त सुना और कहा, "अमरनाथ यात्रा का विचार पूरा कर आकर यहाँ रहना ।" जब वह अमरनाथ की यात्रा से लौट आये, तो उनके दूसरे गृहस्थी साथी कूपत स्वामी तो कुछ धन
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मुलतान से, लाला मुरलीधर भी पहुँचे । पिछले जाड़ों में आपने सत्संग करके अपने जीवन को बहुत सुधारा था । मांस, शराब आदि अनेक दुर्व्यसनों से मुक्ति पाई थी। पर महाराजजी के चले आने पर कुसंग के कारण फिर गिर गये । सदाचार - मय जीवन का कुछ आनंद उठा चुके थे, इसलिये बल प्राप्तः करने के लिये फिर कश्मीर पहुँचे थे। सारा हाल सुना दिया । स्वामीजी ने वड़ी दयालुता से समझाया और प्रतिज्ञा भंग करने का पाप भी सुझाया। कुछ जाप आदि प्रायश्चित्त के लिये कहा एक वहाँ से चलते समय उन्होंने कुछ भेंट करना चाहा, पर स्वामीजी ने जरूरत होते हुए भी, उनके व्यवहार से असन्तुष्ट होने के कारण कुछ ग्रहण न किया । यह वापस आकर प्रायश्चित्त करके अपव्रत में डटे रहे। दलाली के काम में जो गड़बड़ी हुआ करती थी, उससे भी धीरे-धीरे छुटकारा पा लिया । अपने व्यसनी साथियों के कटाक्ष सहते हुए भी सदाचार के व्रत से न हटे । इस अद्भुत परिवर्त्तन को देखकर वे भी इनके भक्त हो. गये और महाराजजी के सत्संग में आने लगे । पीछे भी एक हज़ार छः सौ छब्बीस एक हज़ार छः सौ सत्ताईस, एक हज़ार छः सौ सत्ताईस-एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में जब स्वामीजी मुलतान आते रहे, तो सत्संग में अनेक बार जाकर, अभ्यास में लगने के लिये आप प्रार्थना करते रहे। बाहर की गड़बड़ी छूट गई थी, पर अभी अपनी स्त्री के सम्बन्ध में ब्रह्मचर्य का पालन नहीं होता था । सन्तान भी थी, अवस्था भी पैंतालीस वर्ष की हो चुकी थी, ईश्वरभजन की लग्न बढ़ रही थी; आखिर हिम्मत करके एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस के आदि में दम्पति ने विधि पूर्वक ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, जिस पर वे वड़ी दृढ़ता से डट गये। स्वामीजी महाराज ने प्रसन्न हो एक करोड़ गायत्री जाप करने की आज्ञा दी । जाप की विधि बताई । पहले तो वह घवराये, पर पीछे जब महाराजजी ने योगीराज श्री सियाराम स्व मो [ चार जाग्रति कांड समझाया कि यही अभ्यास है, और इसी से लाभ भी होगा, तो उसमें जुट गये । दो-तीन समय नीयत करके बड़ी श्रद्धा से जाप करने लगे। कुछ दिनों में ही विचित्र - अनुभव होने लगा । हृदय बहुत शान्त रहने लगा । जिन पिछले पापों के कारण चित्त भयभीत रहा करता था, उनका भय जाता रहा । ऐसा प्रतीत होता था कि नींद में भी गायत्री जाप होता रहता है। काम काज भी सब भली-भाँति चलता रहा। अभी उनका यह जाप पूरा ही नहीं हुआ था कि इस वर्ष जनवरी, एक हज़ार छः सौ तीस में नमोनिया के कारण आपका शरीरान्त हो गया । पर मरते समय भी बड़े सावधान रहे और बड़ी उपरामता और प्रसन्नता से शरीर को छोड़ा । इस प्रकार सन्तों की शरण पकड़ने से वे अपने जोवन को सुधार कर पुण्य संचय करते हुए परलोक को चले गये । सत्य है, जिन पर सन्तों की कृपा होजाय और जो श्रद्धा से उनको आज्ञा का अनुकरण करने लग जायें, फिर उनका बेड़ा पार हो ही जाता है। इसी प्रकार मुलतान से लाला मोतीरामजी और उनकी भौजाई श्रीमती ईश्वरदेवोजी भी दोनों कश्मीर में आकर उपदेशों से लाभ उठाते रहे । कश्मीर में भी कई एक सज्जन सत्संग करते रहे । पण्डित जानकीनाथ वकील, नारायण ब्रह्मचारी आदि अनेक जन श्री सेवा में आकर भजन में दोक्षित हुए। एक देवो भी, भजन के मार्ग में प्रवृत्त हुई और अभी तक कल्याण के मार्ग में पुरुषार्थ करती जा रही है। उत्तरकाशी में जिस 'नाथ' साधु ने भजन उपदेश लिया था, वह भो यहाँ पर आये । आहार का नियम न रचने से, अब वे पाँच मिनट भी ध्यान में नहीं बैठ सकते थे । वह संकोचवश ऐसे पदार्थ माँगने में घबराते थे । स्त्रामोजी ने कुछ तो स्वयं सामग्री दे दी, और उनके मिलने वालों से भी कह दिया कि उन्हें अभ्यास होने के कारण चिकने पदार्थों का सेवन कराते रहें। फिर उन्हें भो समझा दिया कि 'जब भिक्षुक बने हैं, तो मान का विचार छोड़, अपने शरीर को जरूरत के अनुसार याचना करने में संकोच नहीं करना चाहिये' । स्वामीजी को पीछे पता चला कि नाथजो शराव ओर मांस का सेवन कर लेते हैं। जब पूछा, तो, पहले तो वह वेदान्त के ढंग से अपनेनिर्दोष करने लगे। महाराजजी ने अनेक प्रश्न करके उनके अपने मुख से ही यह सिद्ध करा लिया कि वे स्वावश इस व्यसन में फँसे हुए हैं और ऐसे निर्दोष नहीं जैसा कि वे समझते थे । जब वह चला गया, तो गुरूजी ने अपने सहवासियों से कहा, "देखो भाई, यह अभ्यास भी बहुत करते हैं, वड़े तप और निवृत्ति से रहते हैं, विद्वान् भी बड़े हैं, पर ब्रह्मवाद के नशे में अपने दूषणों को नहीं देख सके । इनके जीवन से शिक्षा लेनी चाहिये और मन की सूक्ष्म चालों से अपने रखना चाहिये" । यहाँ ही एक मदरासी ब्रह्मचारी रामचन्द्रजी वीशून्य एशून्य महाराजजी से मिले । वे उत्तराखण्ड से योगी की तलाश करते हुए आये थे। वहाँ महाराजजी का नाम तो सुना था, पर उनका पता ठीक नहीं चला था। इधर अमरनाथ की यात्रा का भी इसी विचार से जा रहे थे । श्रीनगर में पता चला कि एक योगी महात्मा वहीं रहते हैं। इनके साथ कूपत स्वामी भी थे, यह दोनों दर्शनों को आए । महाराजजी ने सारा वृत्तान्त सुना और कहा, "अमरनाथ यात्रा का विचार पूरा कर आकर यहाँ रहना ।" जब वह अमरनाथ की यात्रा से लौट आये, तो उनके दूसरे गृहस्थी साथी कूपत स्वामी तो कुछ धन
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नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर के डिमॉलिशन का आज ट्रायल ब्लास्ट है। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। करीब 5 किलो विस्फोटकों का इस्तेमाल ट्रायल ब्लास्ट के दौरान किया जाएगा। ट्विन टावर को पूरी तरह से 22 मई को गिराया जाना है। उससे पहले आज दोपहर करीब दो बजे ट्विन टावर को ढहाने के लिए ट्रायल ब्लास्ट किया जाएगा।
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नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर के डिमॉलिशन का आज ट्रायल ब्लास्ट है। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। करीब पाँच किलो विस्फोटकों का इस्तेमाल ट्रायल ब्लास्ट के दौरान किया जाएगा। ट्विन टावर को पूरी तरह से बाईस मई को गिराया जाना है। उससे पहले आज दोपहर करीब दो बजे ट्विन टावर को ढहाने के लिए ट्रायल ब्लास्ट किया जाएगा।
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Chakulia: चाकुलिया वन क्षेत्र के मौरबेड़ा गांव में बुधवार-गुरुवार की रात हाथियों के दल ने गांव में प्रवेश कर धान खाने के लिए गांव निवासी मेघराय मुर्मू के घर को तोड़ कर दिया. मेघराय मुर्मू ने बताया कि घर के सभी सदस्यों ने किसी तरह हाथियों से बच कर घर से बाहर निकल कर अपनी जान बचाई. ग्रामीणों के एकत्रित होने पर सभी ने हाथियों को गांव से दूर जंगल की ओर भगाया.
पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के इस सूदूरवर्ती मौरबेड़ा गांव से सटे जंगल में हाथी के रहने के कारण ग्रामीण भयभीत हैं. ग्रामीणों ने कहा कि यह गांव जंगल से घिरा हुआ है. हाथी के जंगल में रहने से ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. विदित हो कि इस इलाके में जंगली हाथियों का उपद्रव पिछले एक माह से निरंतर जारी है. जंगली हाथी दिनभर आसपास के जंगलों में रहते हैं और शाम होते ही गांव में घुसकर उपद्रव मचाने लगते हैं. जिस घर में धान रहता है, धान खाने के लिए हाथी उस घर को निशाना बनाते हैं.
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Chakulia: चाकुलिया वन क्षेत्र के मौरबेड़ा गांव में बुधवार-गुरुवार की रात हाथियों के दल ने गांव में प्रवेश कर धान खाने के लिए गांव निवासी मेघराय मुर्मू के घर को तोड़ कर दिया. मेघराय मुर्मू ने बताया कि घर के सभी सदस्यों ने किसी तरह हाथियों से बच कर घर से बाहर निकल कर अपनी जान बचाई. ग्रामीणों के एकत्रित होने पर सभी ने हाथियों को गांव से दूर जंगल की ओर भगाया. पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के इस सूदूरवर्ती मौरबेड़ा गांव से सटे जंगल में हाथी के रहने के कारण ग्रामीण भयभीत हैं. ग्रामीणों ने कहा कि यह गांव जंगल से घिरा हुआ है. हाथी के जंगल में रहने से ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. विदित हो कि इस इलाके में जंगली हाथियों का उपद्रव पिछले एक माह से निरंतर जारी है. जंगली हाथी दिनभर आसपास के जंगलों में रहते हैं और शाम होते ही गांव में घुसकर उपद्रव मचाने लगते हैं. जिस घर में धान रहता है, धान खाने के लिए हाथी उस घर को निशाना बनाते हैं.
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जब शिवदीप लांडे रोहतास का एसपी बनाया गया था, उस वक्त जिले में बालू और पत्थर माफिया बेलमाग थे। शिवदीप लांडे जब रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले उन्होंने बालू और पत्थर माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस दौरान उन पर हमला भी हुआ था, बावजूद इसके कई माफियाओं को उन्होंने दबोच कर सलाखों के पीछे डाल दिया।
यही नहीं, शिवदीप लांडे जब पटना के सीटी एसपी थे, उस वक्त कुछ समय के लिए ट्रैफिक एसपी का प्रभार था। उस वक्त पूरा पटना लहरिया कट बाइकर्स से परेशान था। तब शिवदीप लांडे ने सड़क पर खुद खड़े होकर मुहिम चलाई। लांडे को देखते ही लहरिया कट बाइकर्स के छक्के छूटने लगे थे।
साल 2015 में शिवदीप लांडे पटना के सिटी एसपी हुआ करते थे। उस वक्त शिवदीप लांडे को फोन पर जानकारी मिली कि पटना में यूपी पुलिस के एक दारोगा घूस ले रहे हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए लांडे ओढ़नी ओढ़ कर निकले और इंस्पेक्टर सर्वचंद को रिश्वत लेने के आरोप में डाकबंगला पर पकड़ लिया। हालांकि बाद में सबूत नहीं होने के कारण इंस्पेक्टर छोड़ दिया गया था।
बिहार की लड़कियां खासकर पटना की तो इस IPS अधिकारी की फैन हैं। राजधानी पटना में एक राह चलती लड़की को कुछ लोग परेशान कर रहे थे। इसके बाद उक्त लड़की ने तुरंत शिवदीप लांडे को कॉल किया। शिकायत के चंद मिनटों के बाद शिवदीप लांडे मौके पर पहुंचे और लड़की को बचा लिया। हालांकि बदमाश वहां से भाग निकले।
बता दें कि शिवदपी लांडे 5 साल बाद बिहार लौटे हैं। इस वक्त वे कोसी रेंज के डीआईजी हैं। इससे पहले वे मुंगेर, सहरसा, रोहतास और पटना में बतौर पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर वे अक्सर चर्चा में बने रहते थे। 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी शिवदीप वामनराव लांडे जब बिहार में एसटीएफ के एसपी के पद पर तैनात थे, तब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गृह राज्य महाराष्ट्र चले गए थे।
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जब शिवदीप लांडे रोहतास का एसपी बनाया गया था, उस वक्त जिले में बालू और पत्थर माफिया बेलमाग थे। शिवदीप लांडे जब रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले उन्होंने बालू और पत्थर माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस दौरान उन पर हमला भी हुआ था, बावजूद इसके कई माफियाओं को उन्होंने दबोच कर सलाखों के पीछे डाल दिया। यही नहीं, शिवदीप लांडे जब पटना के सीटी एसपी थे, उस वक्त कुछ समय के लिए ट्रैफिक एसपी का प्रभार था। उस वक्त पूरा पटना लहरिया कट बाइकर्स से परेशान था। तब शिवदीप लांडे ने सड़क पर खुद खड़े होकर मुहिम चलाई। लांडे को देखते ही लहरिया कट बाइकर्स के छक्के छूटने लगे थे। साल दो हज़ार पंद्रह में शिवदीप लांडे पटना के सिटी एसपी हुआ करते थे। उस वक्त शिवदीप लांडे को फोन पर जानकारी मिली कि पटना में यूपी पुलिस के एक दारोगा घूस ले रहे हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए लांडे ओढ़नी ओढ़ कर निकले और इंस्पेक्टर सर्वचंद को रिश्वत लेने के आरोप में डाकबंगला पर पकड़ लिया। हालांकि बाद में सबूत नहीं होने के कारण इंस्पेक्टर छोड़ दिया गया था। बिहार की लड़कियां खासकर पटना की तो इस IPS अधिकारी की फैन हैं। राजधानी पटना में एक राह चलती लड़की को कुछ लोग परेशान कर रहे थे। इसके बाद उक्त लड़की ने तुरंत शिवदीप लांडे को कॉल किया। शिकायत के चंद मिनटों के बाद शिवदीप लांडे मौके पर पहुंचे और लड़की को बचा लिया। हालांकि बदमाश वहां से भाग निकले। बता दें कि शिवदपी लांडे पाँच साल बाद बिहार लौटे हैं। इस वक्त वे कोसी रेंज के डीआईजी हैं। इससे पहले वे मुंगेर, सहरसा, रोहतास और पटना में बतौर पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर वे अक्सर चर्चा में बने रहते थे। दो हज़ार छः बैच के आईपीएस अधिकारी शिवदीप वामनराव लांडे जब बिहार में एसटीएफ के एसपी के पद पर तैनात थे, तब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गृह राज्य महाराष्ट्र चले गए थे।
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पटना, सात दिसंबर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सोनिया, गांधी, प्रियंका चोपड़ा और अक्षय कुमार ये दक्षिण बिहार के एक जिले के निवासियों के नाम हैं जिन्होंने कोरोना का परीक्षण कराया है और कोविड का टीका लगवाया है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग की माने तो ये सभी अरवल जिले की करपी पंचायत के निवासी हैं जिनका कोविड 19 का परीक्षण और टीकाकरण किया गया है।
अरवल के जिलाधिकारी जे. प्रियदर्शिनी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में करीब 20 दिन पहले आया जब सिविल सर्जन रिकॉर्ड का निरीक्षण कर रहे थे। संबंधित दो डेटा ऑपरेटरों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि जिले के अन्य हिस्सों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यदि इस तरह की और विसंगतियाँ सामने आती हैं तो कार्रवाई की जाएगी क्योंकि इस तरह की चूक महामारी के खिलाफ अभियान को तमाशा बना देगी।
अजीबो-गरीब रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए चर्चित रहे बिहार, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण 1990 के चारा घोटाले के दौरान मवेशियों को स्कूटर पर ले जाते दिखाया गया था, का नाम हाल ही में अभिनेता सनी लियोनी और इमरान हाशमी के नाम कॉलेज के छात्र-छात्राओं और नौकरी के उम्मीदवारों के तौर समाचार में आने के कारण सुर्खियों में था।
यादव ने नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के परोक्ष संदर्भ में ट्वीट किया जिसने राज्य को विभिन्न मापदंडों पर देश में सबसे नीचे रखा है। हालांकि सत्ता पक्ष द्वारा इसका जोरदार विरोध किया गया था।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पटना, सात दिसंबर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सोनिया, गांधी, प्रियंका चोपड़ा और अक्षय कुमार ये दक्षिण बिहार के एक जिले के निवासियों के नाम हैं जिन्होंने कोरोना का परीक्षण कराया है और कोविड का टीका लगवाया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की माने तो ये सभी अरवल जिले की करपी पंचायत के निवासी हैं जिनका कोविड उन्नीस का परीक्षण और टीकाकरण किया गया है। अरवल के जिलाधिकारी जे. प्रियदर्शिनी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में करीब बीस दिन पहले आया जब सिविल सर्जन रिकॉर्ड का निरीक्षण कर रहे थे। संबंधित दो डेटा ऑपरेटरों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य हिस्सों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यदि इस तरह की और विसंगतियाँ सामने आती हैं तो कार्रवाई की जाएगी क्योंकि इस तरह की चूक महामारी के खिलाफ अभियान को तमाशा बना देगी। अजीबो-गरीब रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए चर्चित रहे बिहार, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण एक हज़ार नौ सौ नब्बे के चारा घोटाले के दौरान मवेशियों को स्कूटर पर ले जाते दिखाया गया था, का नाम हाल ही में अभिनेता सनी लियोनी और इमरान हाशमी के नाम कॉलेज के छात्र-छात्राओं और नौकरी के उम्मीदवारों के तौर समाचार में आने के कारण सुर्खियों में था। यादव ने नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के परोक्ष संदर्भ में ट्वीट किया जिसने राज्य को विभिन्न मापदंडों पर देश में सबसे नीचे रखा है। हालांकि सत्ता पक्ष द्वारा इसका जोरदार विरोध किया गया था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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हाल ही में UPSC द्वारा COVID-19 को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा-2020 के लिए नई तिथि 4 अक्टूबर, 2020 की घोषणा की गयी है। ऐसे में इन 100 दिनों का सदुपयोग सही दिशा में करना अति महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसको देखते हुए IASBABA टीम द्वारा इष्टतम लाभ प्राप्त करने के लिए 10 जून 2020 से इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान-2020 लांच किया गया है, जिससे एक बार पुनः परीक्षा से संबंधित संपूर्ण पाठ्यक्रम का समुचित रिवीज़न किया जा सके।
इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान (IRP) 2020 के महत्वपूर्ण तथ्यः
- IRP 2020 एक निःशुल्क पहल है, जिसे आपको अगले 100 दिनों के लिए केंद्रित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है!
- कार्यक्रम 10 जून 2020 से आरंभ होगा। यह सप्ताह में 6 दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होगा - आप इस समय का उपयोग रिवीज़न और वैकल्पिक विषय के लिए कर सकते हैं।
- इसमें आपकी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों की तैयारी शामिल हैं।
- प्रतिदिन आधार पर - प्रारंभिक परीक्षा - 5 करंट अफेयर्स संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न, 10 स्टेटिक भाग जैसे इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थशास्त्र एवं पर्यावरण आदि संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे।
- प्रतिदिन आधार पर - मुख्य परीक्षा - TLP - 3 प्रश्न मुख्य परीक्षा संबंधी GS1, GS2, GS3 को कवर करते हुए पोस्ट किया जाएगा। इन 3 प्रश्नों में से 2 स्टेटिक भाग से और 1 करंट अफेयर्स से होंगे।
- GS 4 (नीतिशास्त्र) और निबंध पर विशेष जोर - प्रत्येक सप्ताह (शुक्रवार को) 3 प्रश्न पोस्ट किए जाएंगे। इसमें 2 नैतिकता सिद्धांत एवं 1 प्रश्न केस स्टडी पर आधारित होंगे।
- प्रत्येक शनिवार को 4 निबंध दिए जाएंगे (इसमें 2 सामान्य थीम आधारित और 2 दार्शनिक विषय पर आधारित होंगे)
- हिंदी माध्यम में प्रश्न शाम 5 बजे (5 PM) अपलोड किए जाएंगे।
Q.1) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु (EPCG) योजना निर्यातकों को शून्य सीमा शुल्क (zero customs duty) पर उत्पादन के लिए पूंजीगत सामान आयात करने की अनुमति देती है।
- डीम्ड एक्सपोर्ट्स (Deemed Exports) से तात्पर्य उन लेन-देन से है जिसमें आपूर्ति की गई वस्तुएं देश से बाहर नहीं जाती हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही नहीं है / हैं?
Q.2) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- शुद्ध प्रेषण में वृद्धि से भुगतान संतुलन (BoP) स्थिति में सुधार होता है।
- भारत 2018 में शीर्ष प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को अक्सर हॉट मनी (तप्त मुद्रा) के रूप में जाना जाता है।
- शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति (Net International Investment Position- NIIP) किसी विशिष्ट समय बिंदु पर किसी राष्ट्र के पास विदेशी संपत्ति के स्टॉक और विदेशी राष्ट्रों के पास उस देश की संपत्ति के स्टॉक के बीच अंतर को मापता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.4) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- आयात के लिए बंदरगाहों पर तीव्र मंजूरी की सुविधा के लिए डायरेक्ट पोर्ट एंट्री (Direct Port Entry -DPE) योजना आरंभ की गई है।
- आम तौर पर, शुद्ध बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECBs) में वृद्धि से भुगतान संतुलन (BoP) स्थिति में सुधार होता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही नहीं है / हैं?
Q.5) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- एक व्युत्क्रमित शुल्क संरचना (inverted duty structure) निर्यात के विनिर्माण के लिए आयात किए गए मध्यवर्ती आदानों (intermediate inputs) की लागत को कम कर देगी जिससे देश का निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।
- कच्चे माल और मध्यवर्ती माल के आयात में वृद्धि से भारत से तैयार माल के निर्यात में वृद्धि होती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.6) चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
- यह किसी देश के व्यापार का माप है जिसमें आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, उसके द्वारा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य से अधिक होता है।
- यदि किसी चालू खाते के घाटे को उधार के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता है, तो इसे अधिक अस्थिर (unsustainable) कहा जाता है।
- एक चालू खाता घाटा तब हो सकता है कि आप उपभोक्ता व्यय पर भरोसा कर रहे हैं, और गैर-प्रतिस्पर्धी हो रहे हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है / हैं?
Q.7) निम्नलिखित में से कौन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (FOREX reserve) का गठन करता है?
- IMF के साथ RBI की रिज़र्व स्थिति (RBI's Reserve position with IMF)
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः
Q.8) भारत में विदेशी मुद्रा भंडार (FOREX reserves) के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें?
- भारत में विदेशी मुद्रा भंडार SEBI द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
- विदेशी मुद्रा और सोने का अन्तर्वाह से अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है।
- विश्व के कई देश, जो छोटी अर्थव्यवस्थाएँ हैं, उनके पास कोई विदेशी मुद्रा भंडार नहीं है।
उपरोक्त में से कौन सा कथन सही नहीं हैं?
Q.9) मूल्यह्रास (Depreciation) और अवमूल्यन (Devaluation) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- अवमूल्यन से अभिप्राय उस मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन से है जिसका मूल्य देश की सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है।
- मूल्यह्रास मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन को संदर्भित करता है, जिसका मूल्य खुले मुद्रा बाजार (open money market) में उत्पन्न बाजार की शक्तियों द्वारा निर्धारित किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.10) J- वक्र (J-curve) के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
- एक सिद्धांत जिसमें कहा गया है कि किसी देश का व्यापार घाटा उसकी मुद्रा के मूल्यह्रास के बाद आरंभ में खराब हो जाएगा क्योंकि विदेशी आयात पर उच्च कीमतें अधिक होंगी, जिससे आयात की मात्रा कम होगी।
- निजी इक्विटी फंडों (private equity funds) में, J-वक्र प्रभाव तब होता है जब फंड पूर्व कई वर्षों के लिए नकारात्मक रिटर्न का अनुभव करते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.1) चाइना स्टडी ग्रुप (China Study Group- CSG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें, जिन्हें अक्सर समाचारों में देखा जाता है?
- यह एक सरकारी संस्था है, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं।
- यह हाल ही में चीन के साथ बढ़ते सीमा तनाव के मद्देनजर स्थापित किया गया था।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.2) सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- यह रक्षा मंत्रालय के अधीन है।
- यह भारत के कई राज्यों के साथ-साथ अपने कुछ पड़ोसी देशों में भी परिचालन बनाए रखता है।
- यह भारत-चीन सीमा सड़क (ICBR) परियोजना के निर्माण के लिए उत्तरदायी एकमात्र इकाई है।
ऊपर दिए गए कौन से कथन सही हैं?
Q.3) एशियाई विकास बैंक (ADB) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- ADB के 60 से अधिक सदस्य राष्ट्र हैं।
- ADB में भारत दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है।
- ADB एक आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.4) निम्नलिखित में से किस शहर ने जुलाई 2020 में इसकी स्थापना की 160 वीं वर्षगांठ को चिह्नित किया तथा इसे शाब्दिक रूप से 'पूर्व के शासक' (Ruler of the East) के रूप में जाना जाता है?
Q.5) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- PMKVY कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत एक प्रमुख योजना है।
- इसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा कार्यान्वित किया गया था।
- कौशल प्रशिक्षण राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) और उद्योग के नेतृत्व वाले मानकों के आधार पर किया जाएगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
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हाल ही में UPSC द्वारा COVID-उन्नीस को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा-दो हज़ार बीस के लिए नई तिथि चार अक्टूबर, दो हज़ार बीस की घोषणा की गयी है। ऐसे में इन एक सौ दिनों का सदुपयोग सही दिशा में करना अति महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसको देखते हुए IASBABA टीम द्वारा इष्टतम लाभ प्राप्त करने के लिए दस जून दो हज़ार बीस से इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान-दो हज़ार बीस लांच किया गया है, जिससे एक बार पुनः परीक्षा से संबंधित संपूर्ण पाठ्यक्रम का समुचित रिवीज़न किया जा सके। इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान दो हज़ार बीस के महत्वपूर्ण तथ्यः - IRP दो हज़ार बीस एक निःशुल्क पहल है, जिसे आपको अगले एक सौ दिनों के लिए केंद्रित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है! - कार्यक्रम दस जून दो हज़ार बीस से आरंभ होगा। यह सप्ताह में छः दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होगा - आप इस समय का उपयोग रिवीज़न और वैकल्पिक विषय के लिए कर सकते हैं। - इसमें आपकी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों की तैयारी शामिल हैं। - प्रतिदिन आधार पर - प्रारंभिक परीक्षा - पाँच करंट अफेयर्स संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न, दस स्टेटिक भाग जैसे इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थशास्त्र एवं पर्यावरण आदि संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। - प्रतिदिन आधार पर - मुख्य परीक्षा - TLP - तीन प्रश्न मुख्य परीक्षा संबंधी GSएक, GSदो, GSतीन को कवर करते हुए पोस्ट किया जाएगा। इन तीन प्रश्नों में से दो स्टेटिक भाग से और एक करंट अफेयर्स से होंगे। - GS चार और निबंध पर विशेष जोर - प्रत्येक सप्ताह तीन प्रश्न पोस्ट किए जाएंगे। इसमें दो नैतिकता सिद्धांत एवं एक प्रश्न केस स्टडी पर आधारित होंगे। - प्रत्येक शनिवार को चार निबंध दिए जाएंगे - हिंदी माध्यम में प्रश्न शाम पाँच बजे अपलोड किए जाएंगे। Q.एक) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु योजना निर्यातकों को शून्य सीमा शुल्क पर उत्पादन के लिए पूंजीगत सामान आयात करने की अनुमति देती है। - डीम्ड एक्सपोर्ट्स से तात्पर्य उन लेन-देन से है जिसमें आपूर्ति की गई वस्तुएं देश से बाहर नहीं जाती हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही नहीं है / हैं? Q.दो) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - शुद्ध प्रेषण में वृद्धि से भुगतान संतुलन स्थिति में सुधार होता है। - भारत दो हज़ार अट्ठारह में शीर्ष प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? - विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को अक्सर हॉट मनी के रूप में जाना जाता है। - शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति किसी विशिष्ट समय बिंदु पर किसी राष्ट्र के पास विदेशी संपत्ति के स्टॉक और विदेशी राष्ट्रों के पास उस देश की संपत्ति के स्टॉक के बीच अंतर को मापता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.चार) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - आयात के लिए बंदरगाहों पर तीव्र मंजूरी की सुविधा के लिए डायरेक्ट पोर्ट एंट्री योजना आरंभ की गई है। - आम तौर पर, शुद्ध बाह्य वाणिज्यिक उधार में वृद्धि से भुगतान संतुलन स्थिति में सुधार होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही नहीं है / हैं? Q.पाँच) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - एक व्युत्क्रमित शुल्क संरचना निर्यात के विनिर्माण के लिए आयात किए गए मध्यवर्ती आदानों की लागत को कम कर देगी जिससे देश का निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। - कच्चे माल और मध्यवर्ती माल के आयात में वृद्धि से भारत से तैयार माल के निर्यात में वृद्धि होती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.छः) चालू खाता घाटे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। - यह किसी देश के व्यापार का माप है जिसमें आयात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, उसके द्वारा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य से अधिक होता है। - यदि किसी चालू खाते के घाटे को उधार के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता है, तो इसे अधिक अस्थिर कहा जाता है। - एक चालू खाता घाटा तब हो सकता है कि आप उपभोक्ता व्यय पर भरोसा कर रहे हैं, और गैर-प्रतिस्पर्धी हो रहे हैं। निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है / हैं? Q.सात) निम्नलिखित में से कौन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का गठन करता है? - IMF के साथ RBI की रिज़र्व स्थिति नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः Q.आठ) भारत में विदेशी मुद्रा भंडार के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें? - भारत में विदेशी मुद्रा भंडार SEBI द्वारा प्रबंधित किया जाता है। - विदेशी मुद्रा और सोने का अन्तर्वाह से अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है। - विश्व के कई देश, जो छोटी अर्थव्यवस्थाएँ हैं, उनके पास कोई विदेशी मुद्रा भंडार नहीं है। उपरोक्त में से कौन सा कथन सही नहीं हैं? Q.नौ) मूल्यह्रास और अवमूल्यन के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - अवमूल्यन से अभिप्राय उस मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन से है जिसका मूल्य देश की सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। - मूल्यह्रास मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन को संदर्भित करता है, जिसका मूल्य खुले मुद्रा बाजार में उत्पन्न बाजार की शक्तियों द्वारा निर्धारित किया जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.दस) J- वक्र के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। - एक सिद्धांत जिसमें कहा गया है कि किसी देश का व्यापार घाटा उसकी मुद्रा के मूल्यह्रास के बाद आरंभ में खराब हो जाएगा क्योंकि विदेशी आयात पर उच्च कीमतें अधिक होंगी, जिससे आयात की मात्रा कम होगी। - निजी इक्विटी फंडों में, J-वक्र प्रभाव तब होता है जब फंड पूर्व कई वर्षों के लिए नकारात्मक रिटर्न का अनुभव करते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.एक) चाइना स्टडी ग्रुप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें, जिन्हें अक्सर समाचारों में देखा जाता है? - यह एक सरकारी संस्था है, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं। - यह हाल ही में चीन के साथ बढ़ते सीमा तनाव के मद्देनजर स्थापित किया गया था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.दो) सीमा सड़क संगठन के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - यह रक्षा मंत्रालय के अधीन है। - यह भारत के कई राज्यों के साथ-साथ अपने कुछ पड़ोसी देशों में भी परिचालन बनाए रखता है। - यह भारत-चीन सीमा सड़क परियोजना के निर्माण के लिए उत्तरदायी एकमात्र इकाई है। ऊपर दिए गए कौन से कथन सही हैं? Q.तीन) एशियाई विकास बैंक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - ADB के साठ से अधिक सदस्य राष्ट्र हैं। - ADB में भारत दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है। - ADB एक आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.चार) निम्नलिखित में से किस शहर ने जुलाई दो हज़ार बीस में इसकी स्थापना की एक सौ साठ वीं वर्षगांठ को चिह्नित किया तथा इसे शाब्दिक रूप से 'पूर्व के शासक' के रूप में जाना जाता है? Q.पाँच) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - PMKVY कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत एक प्रमुख योजना है। - इसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा कार्यान्वित किया गया था। - कौशल प्रशिक्षण राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क और उद्योग के नेतृत्व वाले मानकों के आधार पर किया जाएगा। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
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धनश्री वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में अपने नाम से चहल का सरनेम हटा दिया था. इसी के बाद चहल ने भी एक स्टोरी शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि नई जिंदगी अभी लोड हो रही है.
क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ रिश्ता टूटने की खबर काफी दिनों से आ रही थीं. लोग इस खबर पर रिएक्ट भी कर रहे थे, लेकिन इन खबरों के बीच अब युजवेंद्र चहल ने अपनी पत्नी धनश्री की एक तस्वीर अपने इंस्टा स्टोरी पर शेयर की है, जिससे ये पता चलता है कि दोनों के बीच ऐसी कोई भी बात नहीं है. वहीं, धनश्री ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया है और कहा है कि रिश्ता टूटने की अफवाह ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है.
युजवेंद्र चहल ने अपनी पत्नी धनश्री की वही फोटो अपने इंस्टा स्टोरी पर शेयर की है, जिस तस्वीर को खुद धनश्री ने भी शेयर किया है. धनश्री इन तस्वीरों में पर्पल कलर की ड्रेस में मुस्कुराती हुई नजर आ रही हैं. धनश्री ने अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में अपने घुटने की चोट के बारे में विस्तार से बताया है और कहा है कि वो घुटने की चोट के बाद वो पहले ही मुश्किल में थीं और बाद में चहल के साथ रिश्ता टूटने की अफवाह ने उनकी परेशानी को और भी बढ़ा दिया.
युजवेंद्र चहल की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा है और धनश्री वर्मा के साथ उनका रिश्ता सही सलामत है. चहल और धनश्री दोनों ने ही अपने रिश्ते को लेकर बताया है कि उनके बीच सब कुछ ठीक है और अब उनके रिश्ते के टूटने की अफवाह पर विराम लगना चाहिए. धनश्री ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके ये जानकारी दी है कि उनके जीवन में बहुत ज्यादा परेशानी चल रही है और इस तरह की अफवाहों ने उनकी परेशानी को और भी बढ़ा दिया है.
धनश्री ने अपने पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा है कि, वो डांस करने के दौरान गिर गई थीं जिसकी वजह से उनके घुटने में गंभीर चोट लगी है. इसके चलते उनका एक लिगमेंट भी टूट चुका है. अब डांस करने के लिए उन्हें इसकी सर्जरी करानी होगी. लेकिन सर्जरी के बाद भी उन्हें डांस शुरू करने में काफी समय लगेगा. इस वक्त वो काफी दर्द में हैं और बेड रेस्ट ले रही हैं. यहां तक कि उनके लिए घर के अंदर भी टहलना काफी मुश्किल सा है.
धनश्री ने कहा कि, एक तो मैं पहले ही चोट लगने की वजह से परेशान थी और फिर लोगों ने चहल के साथ रिश्ता टूटने की अफवाह को फैलाना शुरू कर दिया. हालांकि, इन बातों का कोई भी आधार नहीं था लेकिन ये खबर चोट पहुंचाने वाली थी और तो और ये नफरत से भरी हुई थी. इस घटना से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और पहले से औऱ भी ज्यादा मजबूत और समझदार हो चुकी हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, धनश्री वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में अपने नाम से चहल का सरनेम हटा दिया था. इसी के बाद चहल ने भी एक स्टोरी शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि नई जिंदगी अभी लोड हो रही है. इसके बाद धनश्री ने भी एक पोस्ट में ये लिखा था कि, राजकुमारी अपने दर्द को मजबूती में बदल देती है. बस, यहीं से दोनों के रिश्ते टूटने की अफवाहें सामने आने लगीं.
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धनश्री वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में अपने नाम से चहल का सरनेम हटा दिया था. इसी के बाद चहल ने भी एक स्टोरी शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि नई जिंदगी अभी लोड हो रही है. क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ रिश्ता टूटने की खबर काफी दिनों से आ रही थीं. लोग इस खबर पर रिएक्ट भी कर रहे थे, लेकिन इन खबरों के बीच अब युजवेंद्र चहल ने अपनी पत्नी धनश्री की एक तस्वीर अपने इंस्टा स्टोरी पर शेयर की है, जिससे ये पता चलता है कि दोनों के बीच ऐसी कोई भी बात नहीं है. वहीं, धनश्री ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया है और कहा है कि रिश्ता टूटने की अफवाह ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है. युजवेंद्र चहल ने अपनी पत्नी धनश्री की वही फोटो अपने इंस्टा स्टोरी पर शेयर की है, जिस तस्वीर को खुद धनश्री ने भी शेयर किया है. धनश्री इन तस्वीरों में पर्पल कलर की ड्रेस में मुस्कुराती हुई नजर आ रही हैं. धनश्री ने अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में अपने घुटने की चोट के बारे में विस्तार से बताया है और कहा है कि वो घुटने की चोट के बाद वो पहले ही मुश्किल में थीं और बाद में चहल के साथ रिश्ता टूटने की अफवाह ने उनकी परेशानी को और भी बढ़ा दिया. युजवेंद्र चहल की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा है और धनश्री वर्मा के साथ उनका रिश्ता सही सलामत है. चहल और धनश्री दोनों ने ही अपने रिश्ते को लेकर बताया है कि उनके बीच सब कुछ ठीक है और अब उनके रिश्ते के टूटने की अफवाह पर विराम लगना चाहिए. धनश्री ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके ये जानकारी दी है कि उनके जीवन में बहुत ज्यादा परेशानी चल रही है और इस तरह की अफवाहों ने उनकी परेशानी को और भी बढ़ा दिया है. धनश्री ने अपने पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा है कि, वो डांस करने के दौरान गिर गई थीं जिसकी वजह से उनके घुटने में गंभीर चोट लगी है. इसके चलते उनका एक लिगमेंट भी टूट चुका है. अब डांस करने के लिए उन्हें इसकी सर्जरी करानी होगी. लेकिन सर्जरी के बाद भी उन्हें डांस शुरू करने में काफी समय लगेगा. इस वक्त वो काफी दर्द में हैं और बेड रेस्ट ले रही हैं. यहां तक कि उनके लिए घर के अंदर भी टहलना काफी मुश्किल सा है. धनश्री ने कहा कि, एक तो मैं पहले ही चोट लगने की वजह से परेशान थी और फिर लोगों ने चहल के साथ रिश्ता टूटने की अफवाह को फैलाना शुरू कर दिया. हालांकि, इन बातों का कोई भी आधार नहीं था लेकिन ये खबर चोट पहुंचाने वाली थी और तो और ये नफरत से भरी हुई थी. इस घटना से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और पहले से औऱ भी ज्यादा मजबूत और समझदार हो चुकी हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, धनश्री वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में अपने नाम से चहल का सरनेम हटा दिया था. इसी के बाद चहल ने भी एक स्टोरी शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि नई जिंदगी अभी लोड हो रही है. इसके बाद धनश्री ने भी एक पोस्ट में ये लिखा था कि, राजकुमारी अपने दर्द को मजबूती में बदल देती है. बस, यहीं से दोनों के रिश्ते टूटने की अफवाहें सामने आने लगीं.
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बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन इंडस्ट्री के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं। बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस उनके साथ डेट पर जाने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं जिनमें सारा अली खान और अनन्या पांडे का नाम शामिल हैं। हाल ही में वो एक्ट्रेस करीना कपूर खान के साथ एक चैट शो में नजर आए।
करीना और कार्तिक एक चैट शो में साथ पहुंचे। यह पहली बार नहीं था जब दोनों साथ में नजर आए हों इससे पहले दोनों साथ में रैंप वॉक कर चुके हैं। अब एक बार फिर दोनों साथ में नजर आए जिसे लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। सामने आए वीडियो में दोनों बाते करते और हंसते नजर आ रहे हैं, जिसपर लोग कमेंट कर उन्हें सास और दामाद कह रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट कर लिखा, 'कार्तिक अपनी भविष्य में होने वाली सासु मां के साथ। ' तो वहीं एक यूजर ने लिखा, 'कार्तिक और सासु मां'।
मालूम हो कि कार्तिक आर्यन और सारा अली खान (जो कि करीना कपूर के पति सैफ अली खान की बेटी हैं) के अफेयर की खबरें कई बार आ चुकी हैं। दोनों कई बार साथ नजर आते हैं और उनके बीच की केमिस्ट्री उनकी तस्वीरों और वीडियो में देखी जा सकती है। सारा के जन्मदिन पर कार्तिक बैंकॉक गए थे और सोशल मीडिया पर सारा के साथ फोटो शेयर कर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए प्रिंसेस कहा था। दोनों साथ में फिल्म लव आजकल 2 में भी नजर आएंगे।
कार्तिक ने करीना कपूर के साथ इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की है। फोटो में करीना हाथ में रेड कलर का कुशन लिए खड़ी हैं जिसपर 'इश्क' लिखा है। इस फोटो को शेयर करते हुए कार्तिक ने लिखा, 'ये इश्क हाए. . '।
कार्तिक आर्यन के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो सारा अली खान के साथ फिल्म लव आजकल 2 में नजर आएंगे। इसके अलावा भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे के साथ फिल्म पति, पत्नी और वो में भी दिखेंगे। इसके साथ ही वो फिल्म भूल भुलैया के सीक्वल में काम करते दिखेंगे। वहीं करीना कपूर इरफान खान के साथ फिल्म अंग्रेजी मीडियम में नजर आएंगी, यह फिल्म साल 2017 में रिलीज हुई फिल्म हिंदी मीडियम की सीक्वल होगी। इसके अलावा वो अक्षय कुमार के साथ फिल्म गुड न्यूज में दिखाई देंगी।
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बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन इंडस्ट्री के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं। बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस उनके साथ डेट पर जाने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं जिनमें सारा अली खान और अनन्या पांडे का नाम शामिल हैं। हाल ही में वो एक्ट्रेस करीना कपूर खान के साथ एक चैट शो में नजर आए। करीना और कार्तिक एक चैट शो में साथ पहुंचे। यह पहली बार नहीं था जब दोनों साथ में नजर आए हों इससे पहले दोनों साथ में रैंप वॉक कर चुके हैं। अब एक बार फिर दोनों साथ में नजर आए जिसे लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। सामने आए वीडियो में दोनों बाते करते और हंसते नजर आ रहे हैं, जिसपर लोग कमेंट कर उन्हें सास और दामाद कह रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट कर लिखा, 'कार्तिक अपनी भविष्य में होने वाली सासु मां के साथ। ' तो वहीं एक यूजर ने लिखा, 'कार्तिक और सासु मां'। मालूम हो कि कार्तिक आर्यन और सारा अली खान के अफेयर की खबरें कई बार आ चुकी हैं। दोनों कई बार साथ नजर आते हैं और उनके बीच की केमिस्ट्री उनकी तस्वीरों और वीडियो में देखी जा सकती है। सारा के जन्मदिन पर कार्तिक बैंकॉक गए थे और सोशल मीडिया पर सारा के साथ फोटो शेयर कर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए प्रिंसेस कहा था। दोनों साथ में फिल्म लव आजकल दो में भी नजर आएंगे। कार्तिक ने करीना कपूर के साथ इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की है। फोटो में करीना हाथ में रेड कलर का कुशन लिए खड़ी हैं जिसपर 'इश्क' लिखा है। इस फोटो को शेयर करते हुए कार्तिक ने लिखा, 'ये इश्क हाए. . '। कार्तिक आर्यन के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो सारा अली खान के साथ फिल्म लव आजकल दो में नजर आएंगे। इसके अलावा भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे के साथ फिल्म पति, पत्नी और वो में भी दिखेंगे। इसके साथ ही वो फिल्म भूल भुलैया के सीक्वल में काम करते दिखेंगे। वहीं करीना कपूर इरफान खान के साथ फिल्म अंग्रेजी मीडियम में नजर आएंगी, यह फिल्म साल दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई फिल्म हिंदी मीडियम की सीक्वल होगी। इसके अलावा वो अक्षय कुमार के साथ फिल्म गुड न्यूज में दिखाई देंगी।
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देहरादून, 10 मई। भाजपा हाईकमान के लिए धाकड़ धामी साबित हुए पुष्कर सिंह धामी चंपावत उपचुनाव में क्या धाकड़ बनकर जीत पाएंगे। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। ऐसे में इस बार सबकी नजर अब तक बतौर सीएम लड़े प्रत्याशियों के रिकॉर्ड को लेकर भी है। उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्रियों के लिए उपचुनाव हो चुका है। जिनमें कांग्रेस की ओर से दिवंगत पूर्व सीएम एनडी तिवारी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा अब भाजपा में, हरीश रावत और भाजपा की ओर से पूर्व सीएम बीसी खंडूरी उपचुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन उपचुनाव में सबसे ज्यादा मतों से जीतने का रिकॉर्ड विजय बहुगुणा के नाम पर है।
सबसे अधिक वोटों के अंतर से उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड मुख्यमंत्री के तौर पर विजय बहुगुणा का है। सबसे पहले 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने रामनगर से उपचुनाव लड़ा और भाजपा के राम सिंह को 9693 वोटों के अंतर से हराया था। 2007 में भाजपा के जनरल बीसी खंडूड़ी ने धुमाकोट से उपचुनाव लड़ा। खंडूड़ी के कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को 14171 मतों के अंतर से हराया। 2012 में कांग्रेस के सीएम विजय बहुगुणा ने सितारगंज से उपचुनाव लड़े। भाजपा ने उनके खिलाफ प्रकाश पंत को मैदान में उतारा। बहुगुणा ने यह चुनाव 40154 वोटों के अंतर से जीता। जो कि रिकॉर्ड बन गया। अब इस सीट पर विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा विधायक और सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 2014 में विजय बहुगुणा के इस्तीफे के बाद हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। जिनके लिए धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सीट छोड़ी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धारचूला से उपचुनाव लड़ा। रावत ने भाजपा के भानु दत्त को 20600 वोटों के अंतर से चुनाव हराया। इस तरह से सीएम रहते विजय बहुगुणा ने सबसे ज्यादा 40 हजार से भी ज्यादा वोटों से चुनाव जीता। अब भाजपा पुष्कर सिंह धामी की जीत को भी ऐतिहासिक बनाना चाहती है।
मुख्यमंत्री के लिए 4 बार हो चुका है उपचुनाव उत्तराखंड में अब तक 4 बार मुख्यमंत्री उपचुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें एनडी तिवारी और हरीश रावत के लिए अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सीट छोड़ी जबकि बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस और विजय बहुगुणा के लिए तब भाजपा के विधायक ने सीट छोड़ी थी। उत्तराखंड के इतिहास में मुख्यमंत्री के लिए तक 4 बार उपचुनाव हो चुके हैं। 2002 में पहली कांग्रेस की सरकार में एनडी तिवारी को सीएम चुना गया। एनडी तिवारी ने रामनगर सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद 2007 में भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस के विधायक टीपीएस रावत ने सीट छोड़ी थी। पहले खंडूरी के लिए निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम को सीट छोड़ने को कहा गया लेकिन जब वे नहीं माने तो भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर धुमाकोट सीट से टीपीएस रावत को इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया। उस समय पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक की भी इस प्रकरण में अहम भूमिका मानी जाती है। 2012 में कांग्रेस के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के लिए सितारगंज से भाजपा के विधायक किरण मंडल को इस्तीफा दिलवाकर कांग्रेस में शामिल किया और बहुगुणा इसी सीट से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2014 में हरीश रावत के लिए कांग्रेस केही विधायक हरीश धामी ने धारचूला सीट छोड़ी थी। जिसके बाद वे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। अब पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी चुनाव मैदान में हैं। जो कि कमजोर प्रत्याशी मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा को इस बार रिकॉर्ड टूटने का भरोसा है। चंपावत विधानसभा में 95648 वोटर पंजीकृत हैं। तराई और पहाड़ से मिली इस विधानसभा सीट में आधे से अधिक मतदाता (48657) टनकपुर-चंपावत क्षेत्र से हैं, जबकि पहाड़ी हिस्से में करीब 47 हजार मतदाता पंजीकृत हैं।
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देहरादून, दस मई। भाजपा हाईकमान के लिए धाकड़ धामी साबित हुए पुष्कर सिंह धामी चंपावत उपचुनाव में क्या धाकड़ बनकर जीत पाएंगे। इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। ऐसे में इस बार सबकी नजर अब तक बतौर सीएम लड़े प्रत्याशियों के रिकॉर्ड को लेकर भी है। उत्तराखंड में अब तक चार बार मुख्यमंत्रियों के लिए उपचुनाव हो चुका है। जिनमें कांग्रेस की ओर से दिवंगत पूर्व सीएम एनडी तिवारी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा अब भाजपा में, हरीश रावत और भाजपा की ओर से पूर्व सीएम बीसी खंडूरी उपचुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन उपचुनाव में सबसे ज्यादा मतों से जीतने का रिकॉर्ड विजय बहुगुणा के नाम पर है। सबसे अधिक वोटों के अंतर से उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड मुख्यमंत्री के तौर पर विजय बहुगुणा का है। सबसे पहले दो हज़ार दो में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने रामनगर से उपचुनाव लड़ा और भाजपा के राम सिंह को नौ हज़ार छः सौ तिरानवे वोटों के अंतर से हराया था। दो हज़ार सात में भाजपा के जनरल बीसी खंडूड़ी ने धुमाकोट से उपचुनाव लड़ा। खंडूड़ी के कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को चौदह हज़ार एक सौ इकहत्तर मतों के अंतर से हराया। दो हज़ार बारह में कांग्रेस के सीएम विजय बहुगुणा ने सितारगंज से उपचुनाव लड़े। भाजपा ने उनके खिलाफ प्रकाश पंत को मैदान में उतारा। बहुगुणा ने यह चुनाव चालीस हज़ार एक सौ चौवन वोटों के अंतर से जीता। जो कि रिकॉर्ड बन गया। अब इस सीट पर विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा विधायक और सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। दो हज़ार चौदह में विजय बहुगुणा के इस्तीफे के बाद हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। जिनके लिए धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने सीट छोड़ी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धारचूला से उपचुनाव लड़ा। रावत ने भाजपा के भानु दत्त को बीस हज़ार छः सौ वोटों के अंतर से चुनाव हराया। इस तरह से सीएम रहते विजय बहुगुणा ने सबसे ज्यादा चालीस हजार से भी ज्यादा वोटों से चुनाव जीता। अब भाजपा पुष्कर सिंह धामी की जीत को भी ऐतिहासिक बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री के लिए चार बार हो चुका है उपचुनाव उत्तराखंड में अब तक चार बार मुख्यमंत्री उपचुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें एनडी तिवारी और हरीश रावत के लिए अपनी ही पार्टी के विधायकों ने सीट छोड़ी जबकि बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस और विजय बहुगुणा के लिए तब भाजपा के विधायक ने सीट छोड़ी थी। उत्तराखंड के इतिहास में मुख्यमंत्री के लिए तक चार बार उपचुनाव हो चुके हैं। दो हज़ार दो में पहली कांग्रेस की सरकार में एनडी तिवारी को सीएम चुना गया। एनडी तिवारी ने रामनगर सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद दो हज़ार सात में भाजपा सरकार में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूरी के लिए कांग्रेस के विधायक टीपीएस रावत ने सीट छोड़ी थी। पहले खंडूरी के लिए निर्दलीय विधायक यशपाल बेनाम को सीट छोड़ने को कहा गया लेकिन जब वे नहीं माने तो भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर धुमाकोट सीट से टीपीएस रावत को इस्तीफा दिलाकर चुनाव जीताया। उस समय पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक की भी इस प्रकरण में अहम भूमिका मानी जाती है। दो हज़ार बारह में कांग्रेस के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के लिए सितारगंज से भाजपा के विधायक किरण मंडल को इस्तीफा दिलवाकर कांग्रेस में शामिल किया और बहुगुणा इसी सीट से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद दो हज़ार चौदह में हरीश रावत के लिए कांग्रेस केही विधायक हरीश धामी ने धारचूला सीट छोड़ी थी। जिसके बाद वे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। अब पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी चुनाव मैदान में हैं। जो कि कमजोर प्रत्याशी मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा को इस बार रिकॉर्ड टूटने का भरोसा है। चंपावत विधानसभा में पचानवे हज़ार छः सौ अड़तालीस वोटर पंजीकृत हैं। तराई और पहाड़ से मिली इस विधानसभा सीट में आधे से अधिक मतदाता टनकपुर-चंपावत क्षेत्र से हैं, जबकि पहाड़ी हिस्से में करीब सैंतालीस हजार मतदाता पंजीकृत हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा जाए इसकी कवायद तेज हो गई है। इस बार जनपद में 22,400 परिवरों को मनरेगा के तहत 14 लाख, 58 हजार मानव दिवस मिलेंगे। जो कि पिछले बार के मुकाबले सात लाख ज्यादा हैं। इस बार का बजट भी 16 करोड़ सात लाख है।
अप्रैल 2020 से मनरेगा का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ है। अभियान के तहत अब तक 10. 74 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए हैं। सितंबर तक 1. 11 लाख अकुशल श्रमिकों ने रोजगार मांगा था। इसमें 23179 अकुशल श्रमिक परिवारों को रोजगार मुहैया कराया गया। जनपद में नौ लाख मानव दिवस के सापेक्ष 10. 74 लाख मानव दिवस सृजित हुए। कुल लक्ष्य का यह 119 फीसदी अधिक है। इसमें महिलाओं को 3. 59 लाख दिवस मिले।
कोटः
डीडीओ दिग्विजय तिवारी ने बताया कि मनरेगा के तहत हर गांव में पार्क व ओपन जिम निर्माण कार्य शुरू होगा। अकबरपुर में स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा। आचार संहिता हटने के बाद मनरेगा में नए कार्य कराए जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा जाए इसकी कवायद तेज हो गई है। इस बार जनपद में बाईस,चार सौ परिवरों को मनरेगा के तहत चौदह लाख, अट्ठावन हजार मानव दिवस मिलेंगे। जो कि पिछले बार के मुकाबले सात लाख ज्यादा हैं। इस बार का बजट भी सोलह करोड़ सात लाख है। अप्रैल दो हज़ार बीस से मनरेगा का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ है। अभियान के तहत अब तक दस. चौहत्तर लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए हैं। सितंबर तक एक. ग्यारह लाख अकुशल श्रमिकों ने रोजगार मांगा था। इसमें तेईस हज़ार एक सौ उन्यासी अकुशल श्रमिक परिवारों को रोजगार मुहैया कराया गया। जनपद में नौ लाख मानव दिवस के सापेक्ष दस. चौहत्तर लाख मानव दिवस सृजित हुए। कुल लक्ष्य का यह एक सौ उन्नीस फीसदी अधिक है। इसमें महिलाओं को तीन. उनसठ लाख दिवस मिले। कोटः डीडीओ दिग्विजय तिवारी ने बताया कि मनरेगा के तहत हर गांव में पार्क व ओपन जिम निर्माण कार्य शुरू होगा। अकबरपुर में स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा। आचार संहिता हटने के बाद मनरेगा में नए कार्य कराए जाएंगे।
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चेन्नई, 24 मईः तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पिछले दिनों हुई पुलिस फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई और इलाके में अभी भी हिंसा की छिट-पुट घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले को लेकर वकील जीएस मणि ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और एक जनहित याचिका दाखिल की। यह याचिका तूतीकोरिन के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर दायर की गई है।
वहीं, याचिका में मारे गए लोगों के परिजन को 50-50 लाख और घायलों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही तूतीकोरिन, कन्याकुमारी और अन्य जिलों में इंटरनेट सेवा को बहाल करने की भी मांग की गई है। बता दें, लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए यहां इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इधर, घटना के विरोध में राज्य सचिवालय में प्रदर्शन के दौरान द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन को गुरुवार को हिरासत में ले लिया गया। इस बीच , मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने हिंसा भड़काने के लिए विपक्षी पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। चेन्नई से करीब 600 किलोमीटर दूर तूतीकोरिन में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा एवं आगजनी के कारण पलानीस्वामी के इस्तीफे और राज्य के पुलिस प्रमुख टी के राजेंद्रन की बर्खास्तगी की मांग करते हुए स्टालिन ने फोर्ट सेंट जॉर्ज कॉम्प्लेक्स में पार्टी विधायकों के साथ धरना दिया।
पुलिस की ओर से सचिवालय परिसर से प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद भी उन्होंने फोर्ट सेंट जॉर्ज के ठीक सामने स्थित राजाजी सलाई में अपना प्रदर्शन जारी रखा। "हमें इंसाफ चाहिए " और "सरकार शर्म करो " जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पलानीस्वामी सरकार के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
मंगलवार और बुधवार को स्थानीय लोगों ने प्रदूषण संबंधी चिंता के कारण वेदांत समूह के तांबे के कारखाने को बंद किए जाने की मांग करते हुए सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे। शहर में गुरुवार को कहीं से ताजा हिंसा की सूचना नहीं मिली है, लेकिन स्थिति नाजुक बनी रही। कुछ खबरों में कहा गया कि पुलिस फायरिंग में जख्मी हुए शख्स की मौत हो गई, लेकिन इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं आया है।
खबरों में कहा गया कि स्टालिन, अभिनेता से नेता बने कमल हासन और एमडीएमके नेता वाइको के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इस बीच पलानीस्वामी ने तूतीकोरिन की घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए हिंसा के लिए विपक्षी पार्टियों और असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मुख्यमंत्री ने मौतों पर शोक व्यक्त किया और कहा कि संयंत्र को बंद करने के लिए पहले हुए सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे।
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चेन्नई, चौबीस मईः तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पिछले दिनों हुई पुलिस फायरिंग में ग्यारह लोगों की मौत हो गई और इलाके में अभी भी हिंसा की छिट-पुट घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले को लेकर वकील जीएस मणि ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और एक जनहित याचिका दाखिल की। यह याचिका तूतीकोरिन के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर दायर की गई है। वहीं, याचिका में मारे गए लोगों के परिजन को पचास-पचास लाख और घायलों को पच्चीस-पच्चीस लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही तूतीकोरिन, कन्याकुमारी और अन्य जिलों में इंटरनेट सेवा को बहाल करने की भी मांग की गई है। बता दें, लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए यहां इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इधर, घटना के विरोध में राज्य सचिवालय में प्रदर्शन के दौरान द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन को गुरुवार को हिरासत में ले लिया गया। इस बीच , मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने हिंसा भड़काने के लिए विपक्षी पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। चेन्नई से करीब छः सौ किलोग्राममीटर दूर तूतीकोरिन में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा एवं आगजनी के कारण पलानीस्वामी के इस्तीफे और राज्य के पुलिस प्रमुख टी के राजेंद्रन की बर्खास्तगी की मांग करते हुए स्टालिन ने फोर्ट सेंट जॉर्ज कॉम्प्लेक्स में पार्टी विधायकों के साथ धरना दिया। पुलिस की ओर से सचिवालय परिसर से प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद भी उन्होंने फोर्ट सेंट जॉर्ज के ठीक सामने स्थित राजाजी सलाई में अपना प्रदर्शन जारी रखा। "हमें इंसाफ चाहिए " और "सरकार शर्म करो " जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पलानीस्वामी सरकार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। मंगलवार और बुधवार को स्थानीय लोगों ने प्रदूषण संबंधी चिंता के कारण वेदांत समूह के तांबे के कारखाने को बंद किए जाने की मांग करते हुए सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे। शहर में गुरुवार को कहीं से ताजा हिंसा की सूचना नहीं मिली है, लेकिन स्थिति नाजुक बनी रही। कुछ खबरों में कहा गया कि पुलिस फायरिंग में जख्मी हुए शख्स की मौत हो गई, लेकिन इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं आया है। खबरों में कहा गया कि स्टालिन, अभिनेता से नेता बने कमल हासन और एमडीएमके नेता वाइको के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इस बीच पलानीस्वामी ने तूतीकोरिन की घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए हिंसा के लिए विपक्षी पार्टियों और असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मुख्यमंत्री ने मौतों पर शोक व्यक्त किया और कहा कि संयंत्र को बंद करने के लिए पहले हुए सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे। लोकमत न्यूज के लेटेस्ट यूट्यूब वीडियो और स्पेशल पैकेज के लिए यहाँ क्लिक कर सब्सक्राइब करें!
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हरिभूमि न्यूज. रतिया। रतिया नगर पालिका कार्यालय में एनडीसी जारी करने में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद वीरवार को सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने इंचार्ज राजेश कुमार के नेतृत्व में नगर पालिका में छापामार कार्रवाई की। टीम की इस कार्रवाई से नगरपालिका अधिकारियों में हड़कंप मच गया। टीम द्वारा कार्रवाई के दौरान नगरपालिका कर्मचारियों से एनडीसी से संबंधित रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया गया। एनडीसी इंचार्ज व जेई के न होने के कारण टीम द्वारा शुक्रवार को फिर जांच की जाएगी। टीम द्वारा उच्च अधिकारियों को सूचना देने के बाद सीएम फ्लाइंग स्क्वाड के उप अधीक्षक अजय शर्मा व सीआईडी के जिला इंचार्ज विक्रमजीत सिंह भादू भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों की हाजिरी की भी जांच की गई जिसमें 3 कर्मचारी गैरहाजिर मिले। बाद में नगरपालिका के एम ई सुमेर सिंह टोहाना से रतिया पहुंचे जबकि बाकी 2 कर्मचारियों की गैर हाजरी बारे उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय को पिछले कुछ दिनों से काफी शिकायतें मिल रही थी कि रतिया नगर पालिका द्वारा एनडीसी जारी करने में काफी अनियमितताएं एवं रिश्वततखोरी की जा रही है। जो लोग एनडीसी के लिए नगरपालिका कर्मचारियों को रिश्वत नहीं देते, उनकी जमीन को अवैध बताकर एनडीसी जारी नहीं की जाती है जबकि उसी जमीन के लिए अगर कोई व्यक्ति रिश्वत दे देता है तो उसे तुरंत एनडीसी जारी की जाती है। इस कारण लोगों को एनडीसी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इस तरह के आरोप नगरपालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि व पार्षदों ने भी नगरपालिका की मीटिंग में गत दिनों लगाए थे।
इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत सीएम फ्लाइंग स्क्वायड को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश मिलते ही आज सीएम फ्लाइंग स्क्वायड टीम ने इंचार्ज राजेश कुमार सब इंस्पेक्टर, कुलदीप सिंह सब इंस्पेक्टर, सुरेंद्र कुमार एएसआई के नेतृत्व में रतिया नगर पालिका कार्यालय में छापा मारा। टीम ने सर्वप्रथम नगरपालिका कर्मचारियों का रिकॉर्ड चेक किया तो एमई सुमेर सिंह व नगर पालिका के दो कच्चे कर्मचारी गैरहाजिर मिले। इसके बाद टीम ने एनडीसी क्लर्क से एनडीसी के बारे में रिकॉर्ड तलब कर लिया। बताया गया है कि एनडीसी के इंचार्ज जेई रितेश मौके पर नहीं थे जिस कारण टीम को पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। क्लर्क द्वारा जो रिकॉर्ड सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम को उपलब्ध करवाया गया, उसका टीम द्वारा गहन अवलोकन किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीम को एनडीसी के रिकॉर्ड में काफी अनियमितताएं मिली जिसकी जानकारी टीम इंचार्ज द्वारा सीएम फ्लाइंग स्क्वायड के उच्च अधिकारियों को दी गई है। सूचना मिलते ही स्क्वायड के उप पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा, सीआईडी के जिला इंचार्ज बिक्रमजीत सिंह भादू और नायब तहसीलदार राकेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने एनडीसी के रिकॉर्ड का अवलोकन किया।
जांच के दौरान एक पार्षद व शहर के अन्य व्यक्तियों ने टीम के समक्ष संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि नगरपालिका कर्मचारियों द्वारा बिना रिश्वत दिए एनडीसी जारी नहीं की जाती वहीं एक महिला कैला देवी की एनडीसी पिछले काफी समय से पेंडिंग पड़ी थी, जिसे टीम ने मौके पर ही जारी करवा दिया। एक अन्य महिला भतेरी देवी की कन्या छात्रवृत्ति की फाइल भी कर्मचारियों द्वारा पेंडिंग रखी गई थी, उसे भी टीम ने मौके पर जारी करवा दिया।
उप पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा व टीम इंचार्ज राजेश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि एनडीसी में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद वीरवार को टीम द्वारा जांच की जा रही है। टीम ने कुछ रिकॉर्ड का अवलोकन कर लिया है जिसमें कुछ कमियां पाई गई है। रिकॉर्ड का अवलोकन किया जाएगा और मिलान करने के बाद अगर अनियमितताएं पाई गई तो उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान तीन कर्मचारी गैरहाजिर मिले जिसमें से सुमेर सिंह की टोहाना में एडिशनल ड्यूटी होने के कारण वह बाद में टोहाना से आ गए थे और सुमेर सिंह द्वारा टोहाना कार्यालय की फोटो भी प्रस्तुत की गई है वहीं दो अन्य कर्मचारियों के बारे में विभाग को लिख दिया जाएगा।
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हरिभूमि न्यूज. रतिया। रतिया नगर पालिका कार्यालय में एनडीसी जारी करने में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद वीरवार को सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने इंचार्ज राजेश कुमार के नेतृत्व में नगर पालिका में छापामार कार्रवाई की। टीम की इस कार्रवाई से नगरपालिका अधिकारियों में हड़कंप मच गया। टीम द्वारा कार्रवाई के दौरान नगरपालिका कर्मचारियों से एनडीसी से संबंधित रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया गया। एनडीसी इंचार्ज व जेई के न होने के कारण टीम द्वारा शुक्रवार को फिर जांच की जाएगी। टीम द्वारा उच्च अधिकारियों को सूचना देने के बाद सीएम फ्लाइंग स्क्वाड के उप अधीक्षक अजय शर्मा व सीआईडी के जिला इंचार्ज विक्रमजीत सिंह भादू भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों की हाजिरी की भी जांच की गई जिसमें तीन कर्मचारी गैरहाजिर मिले। बाद में नगरपालिका के एम ई सुमेर सिंह टोहाना से रतिया पहुंचे जबकि बाकी दो कर्मचारियों की गैर हाजरी बारे उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय को पिछले कुछ दिनों से काफी शिकायतें मिल रही थी कि रतिया नगर पालिका द्वारा एनडीसी जारी करने में काफी अनियमितताएं एवं रिश्वततखोरी की जा रही है। जो लोग एनडीसी के लिए नगरपालिका कर्मचारियों को रिश्वत नहीं देते, उनकी जमीन को अवैध बताकर एनडीसी जारी नहीं की जाती है जबकि उसी जमीन के लिए अगर कोई व्यक्ति रिश्वत दे देता है तो उसे तुरंत एनडीसी जारी की जाती है। इस कारण लोगों को एनडीसी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इस तरह के आरोप नगरपालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि व पार्षदों ने भी नगरपालिका की मीटिंग में गत दिनों लगाए थे। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत सीएम फ्लाइंग स्क्वायड को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश मिलते ही आज सीएम फ्लाइंग स्क्वायड टीम ने इंचार्ज राजेश कुमार सब इंस्पेक्टर, कुलदीप सिंह सब इंस्पेक्टर, सुरेंद्र कुमार एएसआई के नेतृत्व में रतिया नगर पालिका कार्यालय में छापा मारा। टीम ने सर्वप्रथम नगरपालिका कर्मचारियों का रिकॉर्ड चेक किया तो एमई सुमेर सिंह व नगर पालिका के दो कच्चे कर्मचारी गैरहाजिर मिले। इसके बाद टीम ने एनडीसी क्लर्क से एनडीसी के बारे में रिकॉर्ड तलब कर लिया। बताया गया है कि एनडीसी के इंचार्ज जेई रितेश मौके पर नहीं थे जिस कारण टीम को पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। क्लर्क द्वारा जो रिकॉर्ड सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम को उपलब्ध करवाया गया, उसका टीम द्वारा गहन अवलोकन किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीम को एनडीसी के रिकॉर्ड में काफी अनियमितताएं मिली जिसकी जानकारी टीम इंचार्ज द्वारा सीएम फ्लाइंग स्क्वायड के उच्च अधिकारियों को दी गई है। सूचना मिलते ही स्क्वायड के उप पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा, सीआईडी के जिला इंचार्ज बिक्रमजीत सिंह भादू और नायब तहसीलदार राकेश कुमार भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने एनडीसी के रिकॉर्ड का अवलोकन किया। जांच के दौरान एक पार्षद व शहर के अन्य व्यक्तियों ने टीम के समक्ष संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि नगरपालिका कर्मचारियों द्वारा बिना रिश्वत दिए एनडीसी जारी नहीं की जाती वहीं एक महिला कैला देवी की एनडीसी पिछले काफी समय से पेंडिंग पड़ी थी, जिसे टीम ने मौके पर ही जारी करवा दिया। एक अन्य महिला भतेरी देवी की कन्या छात्रवृत्ति की फाइल भी कर्मचारियों द्वारा पेंडिंग रखी गई थी, उसे भी टीम ने मौके पर जारी करवा दिया। उप पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा व टीम इंचार्ज राजेश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि एनडीसी में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद वीरवार को टीम द्वारा जांच की जा रही है। टीम ने कुछ रिकॉर्ड का अवलोकन कर लिया है जिसमें कुछ कमियां पाई गई है। रिकॉर्ड का अवलोकन किया जाएगा और मिलान करने के बाद अगर अनियमितताएं पाई गई तो उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान तीन कर्मचारी गैरहाजिर मिले जिसमें से सुमेर सिंह की टोहाना में एडिशनल ड्यूटी होने के कारण वह बाद में टोहाना से आ गए थे और सुमेर सिंह द्वारा टोहाना कार्यालय की फोटो भी प्रस्तुत की गई है वहीं दो अन्य कर्मचारियों के बारे में विभाग को लिख दिया जाएगा।
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भारतीय टीम और इंग्लैंड की टीम के बीच तीसरा टी-20 मैच ब्रिस्टल के मैदान पर खेला जा रहा है. यह मैच सीरीज का निर्णायक मुकाबला होगा. जो भी टीम इस मैच को जीतेगी. वह टीम सीरीज भी जीत जाएगी. इस मैच से पहले एक बहुत बड़ी खबर आ रही है.
आपकों बता दें, कि भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले तीसरे टी-20 मैच में दीपक चाहर को अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका मिल गया है. अब वो भारत की तरफ से डेब्यू करने वाले 75 वें खिलाड़ी है.
दीपक चाहर को जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के बाद टीम में शामिल किया गया था. वह गेंद को बहुत अच्छी तरह से स्विंग कराते है. वह अपनी स्विंग के दम पर ही भारत की प्लेइंग इलेवन में शामिल हो गये है. बीसीसीआई ने अपने एक अधिकारिक ट्विट के जरिये दीपक चाहर के टीम में शामिल होने की जानकरी दी है.
आपकों बता दें, कि दीपक चाहर वर्तमान में शानदार फॉर्म में है और वह अपनी इस शानदार फॉर्म के चलते ही भारत की तीसरे टी-20 मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह दी है. दीपक चाहर ने आईपीएल 2018 में भी शानदार गेंदबाजी की थी.
दीपक चाहर ने आईपीएल 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हुए अपने खेले 12 मैचों में 7. 28 की शानदार इकॉनामी रेट से 10 विकेट हासिल किये थे.
वही इसके बाद इंडिया ए की टीम के लिए खेलते हुए दीपक चाहर ने अपने खेले 6 मैचों में 16 विकेट हासिल किये. उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें भारत की 16 सदस्यी टीम में जगह दी है और अब वह भारत की अंतिम एकादश में भी शामिल हो गये है.
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भारतीय टीम और इंग्लैंड की टीम के बीच तीसरा टी-बीस मैच ब्रिस्टल के मैदान पर खेला जा रहा है. यह मैच सीरीज का निर्णायक मुकाबला होगा. जो भी टीम इस मैच को जीतेगी. वह टीम सीरीज भी जीत जाएगी. इस मैच से पहले एक बहुत बड़ी खबर आ रही है. आपकों बता दें, कि भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले तीसरे टी-बीस मैच में दीपक चाहर को अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका मिल गया है. अब वो भारत की तरफ से डेब्यू करने वाले पचहत्तर वें खिलाड़ी है. दीपक चाहर को जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के बाद टीम में शामिल किया गया था. वह गेंद को बहुत अच्छी तरह से स्विंग कराते है. वह अपनी स्विंग के दम पर ही भारत की प्लेइंग इलेवन में शामिल हो गये है. बीसीसीआई ने अपने एक अधिकारिक ट्विट के जरिये दीपक चाहर के टीम में शामिल होने की जानकरी दी है. आपकों बता दें, कि दीपक चाहर वर्तमान में शानदार फॉर्म में है और वह अपनी इस शानदार फॉर्म के चलते ही भारत की तीसरे टी-बीस मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह दी है. दीपक चाहर ने आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह में भी शानदार गेंदबाजी की थी. दीपक चाहर ने आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हुए अपने खेले बारह मैचों में सात. अट्ठाईस की शानदार इकॉनामी रेट से दस विकेट हासिल किये थे. वही इसके बाद इंडिया ए की टीम के लिए खेलते हुए दीपक चाहर ने अपने खेले छः मैचों में सोलह विकेट हासिल किये. उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें भारत की सोलह सदस्यी टीम में जगह दी है और अब वह भारत की अंतिम एकादश में भी शामिल हो गये है.
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अंकारा सिटी काउंसिल (AKK) पूंजीपतियों को 'प्रकोप में एकजुटता के 10 स्वर्णिम नियमों' के साथ महामारी के खिलाफ कहता है।
यह कहते हुए कि उन्होंने राजधानी निवासियों के जीवन को सुविधाजनक बनाने और स्थानीय एकजुटता संस्कृति को बढ़ाने के लिए एक परियोजना तैयार की है, अंकारा नगर परिषद के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष हैल एब्राहिम यिमल्मज़ ने कहा, "हमारे पड़ोसियों के साथ एकजुटता और सहयोग हमें महामारी के खिलाफ मजबूत करेगा और यहां तक कि पोस्टमार्टम के बाद हमारे मानवीय संबंधों के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। ।
"हम अपने नाइटहुड संबंध के साथ पूर्व के प्रभाव का वर्णन करेंगे"
यह व्यक्त करते हुए कि वे अंकारा के सभी लोगों को यह घोषणा करना चाहते हैं कि वे केवल महामारी के खिलाफ एक साथ अभिनय करके मजबूत रह सकते हैं, AKK के अध्यक्ष हालिल imbrahim Yılmaz ने कहा, "जैसा कि राजधानी अंकारा है, हमें लगता है कि हम छह मिलियन पड़ोसियों का एक बड़ा परिवार होगा।"
यह कहते हुए कि दुनिया के सभी देश लंबे ब्रेक के बाद पहली बार एक आम संघर्ष के लिए एक साथ काम कर रहे हैं, यिलमज़ ने निम्नलिखित मूल्यांकन किएः
"हम अपने पड़ोस, अपार्टमेंट, और सदियों के पड़ोसी संबंधों में इस वैश्विक महामारी को समाप्त करेंगे। इस अवधि में, जहाँ हम जिस दौर से गुज़रे हैं, उसकी कठोर परिस्थितियों का गवाह है, हम चाहते हैं कि राजधानियाँ 'यह हमारे साथ न हो कि हम भूखे रहते हैं, जब हम भूखे होते हैं' के सिद्धांत के साथ काम करते हैं और उन लोगों के साथ होते हैं जिन्हें वित्तीय और नैतिक समर्थन की आवश्यकता होती है। अंकारा नगर परिषद के रूप में, हम इस प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करने के लिए 10 गोल्डन नियम लागू करने के लिए पूंजीपतियों को आमंत्रित करते हैं।
AKK कार्यकारी बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ "प्रकोप में एकजुटता के 10 स्वर्णिम नियम", Savaş Zafer inahin की अध्यक्षता में नगर परिषद घटक से बने शिक्षाविदों की एक टीम द्वारा तैयार किए गए हैं, निम्नानुसार सूचीबद्ध हैंः
1. सुनिश्चित करें कि आप एक स्वस्थ मूड और तर्कसंगत सोच में हैं। अधिकारियों द्वारा घोषित वैज्ञानिक आंकड़ों के अलावा, उन सूचनाओं के स्रोतों से दूर रहें जिनसे आप घबराएंगे और अत्यधिक भय पैदा करेंगे। दिन के दौरान महामारी के बाहर हितों के लिए पर्याप्त समय दें और तर्कसंगत रूप से सोचें।
2. आपके द्वारा उठाए जाने वाले प्रत्येक कदम से पहले "सामाजिक दूरी" सुनहरा नियम की समीक्षा करें। सद्भावना और ईमानदारी कभी-कभी लोगों के साथ दूरी रखने के नियम का उल्लंघन कर सकती है, प्रकोप में सबसे महत्वपूर्ण नियम। इससे पहले कि आप यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य न करें कि आप जो करेंगे वह महामारी नहीं फैलाएगा। यदि आप भ्रमित हैं, तो इस मामले पर अधिकारियों की राय लें।
3. अपने अपार्टमेंट, साइट, पड़ोस प्रबंधन और अपने पड़ोसियों से संपर्क करके एकजुटता के बारे में अपनी एकजुटता के बारे में बताएं। ऐसा करते समय, टेलीफोन और डिजिटल संचार साधनों का यथासंभव उपयोग करें। यदि आपको परिणाम नहीं मिलता है, तो निराशा न करें। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके पास एक पड़ोसी के साथ भी एकजुटता हो।
4. संचार की विधि निर्धारित करें जिसमें आप अपार्टमेंट, साइट और पड़ोस के भीतर लगातार और स्वस्थ रूप से संवाद करेंगे। उदाहरण के लिए, आप अपने पड़ोस के भीतर एक स्वयंसेवक आधारित आपातकालीन लाइन बना सकते हैं, सोशल मीडिया और त्वरित संचार समूह बना सकते हैं, और अपार्टमेंट और साइटों में नोटिस बोर्ड का उपयोग कर सकते हैं। अपने पड़ोस / पड़ोस के लिए निर्धारित की जाने वाली संचार विधि की घोषणा करके शुरू करें। संचार विधि के दुरुपयोग और अनावश्यक उपयोग को रोकने के लिए नियमों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करें।
5. अपने स्वयं के परिवार के साथ शुरू करते हुए, अपने पड़ोसियों की स्थिति की समीक्षा करें। विशेष रूप से पुराने लोगों, बच्चों, विकलांग लोगों और युवा लोगों की स्थिति की निगरानी करें। एक कठिन परिस्थिति में लोगों और उनकी जरूरतों की पहचान करने की कोशिश करें। याद रखें, ये ज़रूरतें भौतिक और आध्यात्मिक हो सकती हैं। यदि आवश्यक हो, तो सही आवश्यकताओं के आकलन के लिए अपने पड़ोसियों से संपर्क करें।
6. आपके द्वारा निर्धारित संचार चैनल के माध्यम से अपने पड़ोस में संसाधनों और स्वयंसेवकों को पहचानें। एक महामारी की स्थिति में पड़ोस के मौजूदा संसाधन और स्वैच्छिक कार्यबल बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। आप उन लोगों के लिए एक एकजुटता बजट बना सकते हैं जो आर्थिक रूप से अच्छी तरह से विकसित नहीं हैं और आम जरूरतों को पूरा करने के लिए इमाम दृष्टिकोण विकसित करते हैं। याद रखें, यहां तक कि कॉल करना और कॉल करना भी इस अवधि के दौरान एक बहुत महत्वपूर्ण आवश्यकता हो सकती है।
7. उपलब्ध संसाधनों और स्वयंसेवकों को अपने पड़ोस / पड़ोस में घोषित करें। साझा संसाधनों तक पहुंच होना और स्वयंसेवकों के योगदान के लिए प्रभावी रूप से घोषणा करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि जो लोग डिजिटल उपकरण और विकलांग व्यक्तियों का उपयोग नहीं कर रहे हैं उन्हें विशेष रूप से सूचित किया जाता है।
8. राज्य और स्थानीय सरकारों की सहायता और सहायता तंत्र का पालन करें और उन्हें अपने संचार नेटवर्क पर घोषित करें। सुनिश्चित करें कि आपके पड़ोसियों को ठीक से सूचित किया गया है, विशेष रूप से स्वास्थ्य प्रणाली के उपयोग नियमों पर, प्रकोप समर्थन तक पहुंच।
9. एक समूह बनाएं जो आपके द्वारा एकत्रित की जाने वाली सहायता और अधिकारियों के सहयोग से जरूरत पड़ने पर स्वैच्छिक योगदान देने का निर्णय ले सके। यह अधिकृत व्यक्ति आपका पड़ोस का मुखिया हो सकता है। आपात स्थिति में समय की बर्बादी को रोककर जरूरतमंद लोगों के लिए सही समाधान खोजना महत्वपूर्ण है। आप अपने पड़ोसियों के नुकसान के अनुसार एक प्राथमिकता सूची बना सकते हैं, अगर वहाँ बहुत से लोग ज़रूरतमंद हों।
10. अपने पड़ोसियों के साथ दयालुता और न्याय करने में मदद करें, जो आपके पड़ोसियों के साथ उनके परिणामों को साझा करने और उनकी मदद करने का निर्णय लेते हैं। संकट के समय में, जैसे कि महामारी, लोग बहुत नाजुक हो सकते हैं। सभी सहायता मानव अधिकारों और गोपनीयता के अनुसार की जानी चाहिए। अध्ययन के परिणामों को ऐसी भाषा में घोषित किया जाना चाहिए जो व्यक्ति का नाम दिए बिना, पड़ोस की भावना को मजबूत करेगा।
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अंकारा सिटी काउंसिल पूंजीपतियों को 'प्रकोप में एकजुटता के दस स्वर्णिम नियमों' के साथ महामारी के खिलाफ कहता है। यह कहते हुए कि उन्होंने राजधानी निवासियों के जीवन को सुविधाजनक बनाने और स्थानीय एकजुटता संस्कृति को बढ़ाने के लिए एक परियोजना तैयार की है, अंकारा नगर परिषद के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष हैल एब्राहिम यिमल्मज़ ने कहा, "हमारे पड़ोसियों के साथ एकजुटता और सहयोग हमें महामारी के खिलाफ मजबूत करेगा और यहां तक कि पोस्टमार्टम के बाद हमारे मानवीय संबंधों के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। । "हम अपने नाइटहुड संबंध के साथ पूर्व के प्रभाव का वर्णन करेंगे" यह व्यक्त करते हुए कि वे अंकारा के सभी लोगों को यह घोषणा करना चाहते हैं कि वे केवल महामारी के खिलाफ एक साथ अभिनय करके मजबूत रह सकते हैं, AKK के अध्यक्ष हालिल imbrahim Yılmaz ने कहा, "जैसा कि राजधानी अंकारा है, हमें लगता है कि हम छह मिलियन पड़ोसियों का एक बड़ा परिवार होगा।" यह कहते हुए कि दुनिया के सभी देश लंबे ब्रेक के बाद पहली बार एक आम संघर्ष के लिए एक साथ काम कर रहे हैं, यिलमज़ ने निम्नलिखित मूल्यांकन किएः "हम अपने पड़ोस, अपार्टमेंट, और सदियों के पड़ोसी संबंधों में इस वैश्विक महामारी को समाप्त करेंगे। इस अवधि में, जहाँ हम जिस दौर से गुज़रे हैं, उसकी कठोर परिस्थितियों का गवाह है, हम चाहते हैं कि राजधानियाँ 'यह हमारे साथ न हो कि हम भूखे रहते हैं, जब हम भूखे होते हैं' के सिद्धांत के साथ काम करते हैं और उन लोगों के साथ होते हैं जिन्हें वित्तीय और नैतिक समर्थन की आवश्यकता होती है। अंकारा नगर परिषद के रूप में, हम इस प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करने के लिए दस गोल्डन नियम लागू करने के लिए पूंजीपतियों को आमंत्रित करते हैं। AKK कार्यकारी बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ "प्रकोप में एकजुटता के दस स्वर्णिम नियम", Savaş Zafer inahin की अध्यक्षता में नगर परिषद घटक से बने शिक्षाविदों की एक टीम द्वारा तैयार किए गए हैं, निम्नानुसार सूचीबद्ध हैंः एक. सुनिश्चित करें कि आप एक स्वस्थ मूड और तर्कसंगत सोच में हैं। अधिकारियों द्वारा घोषित वैज्ञानिक आंकड़ों के अलावा, उन सूचनाओं के स्रोतों से दूर रहें जिनसे आप घबराएंगे और अत्यधिक भय पैदा करेंगे। दिन के दौरान महामारी के बाहर हितों के लिए पर्याप्त समय दें और तर्कसंगत रूप से सोचें। दो. आपके द्वारा उठाए जाने वाले प्रत्येक कदम से पहले "सामाजिक दूरी" सुनहरा नियम की समीक्षा करें। सद्भावना और ईमानदारी कभी-कभी लोगों के साथ दूरी रखने के नियम का उल्लंघन कर सकती है, प्रकोप में सबसे महत्वपूर्ण नियम। इससे पहले कि आप यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य न करें कि आप जो करेंगे वह महामारी नहीं फैलाएगा। यदि आप भ्रमित हैं, तो इस मामले पर अधिकारियों की राय लें। तीन. अपने अपार्टमेंट, साइट, पड़ोस प्रबंधन और अपने पड़ोसियों से संपर्क करके एकजुटता के बारे में अपनी एकजुटता के बारे में बताएं। ऐसा करते समय, टेलीफोन और डिजिटल संचार साधनों का यथासंभव उपयोग करें। यदि आपको परिणाम नहीं मिलता है, तो निराशा न करें। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके पास एक पड़ोसी के साथ भी एकजुटता हो। चार. संचार की विधि निर्धारित करें जिसमें आप अपार्टमेंट, साइट और पड़ोस के भीतर लगातार और स्वस्थ रूप से संवाद करेंगे। उदाहरण के लिए, आप अपने पड़ोस के भीतर एक स्वयंसेवक आधारित आपातकालीन लाइन बना सकते हैं, सोशल मीडिया और त्वरित संचार समूह बना सकते हैं, और अपार्टमेंट और साइटों में नोटिस बोर्ड का उपयोग कर सकते हैं। अपने पड़ोस / पड़ोस के लिए निर्धारित की जाने वाली संचार विधि की घोषणा करके शुरू करें। संचार विधि के दुरुपयोग और अनावश्यक उपयोग को रोकने के लिए नियमों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करें। पाँच. अपने स्वयं के परिवार के साथ शुरू करते हुए, अपने पड़ोसियों की स्थिति की समीक्षा करें। विशेष रूप से पुराने लोगों, बच्चों, विकलांग लोगों और युवा लोगों की स्थिति की निगरानी करें। एक कठिन परिस्थिति में लोगों और उनकी जरूरतों की पहचान करने की कोशिश करें। याद रखें, ये ज़रूरतें भौतिक और आध्यात्मिक हो सकती हैं। यदि आवश्यक हो, तो सही आवश्यकताओं के आकलन के लिए अपने पड़ोसियों से संपर्क करें। छः. आपके द्वारा निर्धारित संचार चैनल के माध्यम से अपने पड़ोस में संसाधनों और स्वयंसेवकों को पहचानें। एक महामारी की स्थिति में पड़ोस के मौजूदा संसाधन और स्वैच्छिक कार्यबल बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। आप उन लोगों के लिए एक एकजुटता बजट बना सकते हैं जो आर्थिक रूप से अच्छी तरह से विकसित नहीं हैं और आम जरूरतों को पूरा करने के लिए इमाम दृष्टिकोण विकसित करते हैं। याद रखें, यहां तक कि कॉल करना और कॉल करना भी इस अवधि के दौरान एक बहुत महत्वपूर्ण आवश्यकता हो सकती है। सात. उपलब्ध संसाधनों और स्वयंसेवकों को अपने पड़ोस / पड़ोस में घोषित करें। साझा संसाधनों तक पहुंच होना और स्वयंसेवकों के योगदान के लिए प्रभावी रूप से घोषणा करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि जो लोग डिजिटल उपकरण और विकलांग व्यक्तियों का उपयोग नहीं कर रहे हैं उन्हें विशेष रूप से सूचित किया जाता है। आठ. राज्य और स्थानीय सरकारों की सहायता और सहायता तंत्र का पालन करें और उन्हें अपने संचार नेटवर्क पर घोषित करें। सुनिश्चित करें कि आपके पड़ोसियों को ठीक से सूचित किया गया है, विशेष रूप से स्वास्थ्य प्रणाली के उपयोग नियमों पर, प्रकोप समर्थन तक पहुंच। नौ. एक समूह बनाएं जो आपके द्वारा एकत्रित की जाने वाली सहायता और अधिकारियों के सहयोग से जरूरत पड़ने पर स्वैच्छिक योगदान देने का निर्णय ले सके। यह अधिकृत व्यक्ति आपका पड़ोस का मुखिया हो सकता है। आपात स्थिति में समय की बर्बादी को रोककर जरूरतमंद लोगों के लिए सही समाधान खोजना महत्वपूर्ण है। आप अपने पड़ोसियों के नुकसान के अनुसार एक प्राथमिकता सूची बना सकते हैं, अगर वहाँ बहुत से लोग ज़रूरतमंद हों। दस. अपने पड़ोसियों के साथ दयालुता और न्याय करने में मदद करें, जो आपके पड़ोसियों के साथ उनके परिणामों को साझा करने और उनकी मदद करने का निर्णय लेते हैं। संकट के समय में, जैसे कि महामारी, लोग बहुत नाजुक हो सकते हैं। सभी सहायता मानव अधिकारों और गोपनीयता के अनुसार की जानी चाहिए। अध्ययन के परिणामों को ऐसी भाषा में घोषित किया जाना चाहिए जो व्यक्ति का नाम दिए बिना, पड़ोस की भावना को मजबूत करेगा।
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India Women beat Sri Lanka Women: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने महिला एशिया कप में अपने अभियान की विजयी शुरूआत की है। जेमिमा रॉड्रिग्ज और दयालन हेमलता के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 41 रन से मात दी। रॉड्रिग्ज को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी?
पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता'
Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद !
क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान?
Sakshi Murder Case: साक्षी के दोस्त झबरू का चौंकाने वाला दावा !
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India Women beat Sri Lanka Women: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने महिला एशिया कप में अपने अभियान की विजयी शुरूआत की है। जेमिमा रॉड्रिग्ज और दयालन हेमलता के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को इकतालीस रन से मात दी। रॉड्रिग्ज को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी? पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता' Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद ! क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान? Sakshi Murder Case: साक्षी के दोस्त झबरू का चौंकाने वाला दावा !
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ब्रह्मपुरा थाने के चांदनी चौक पर बुधवार को जमीन विवाद में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। एक-दूसरे पर लाठी-डंडे और हॉकी स्टिक से हमला कर दिया। इसमें दोनों पक्ष से छह लोग जख्मी हो गए हैं। एक पक्ष ने जमीन कब्जाने आए पक्ष की दो गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने गाड़ियों को जब्त कर लिया है। तलाशी लेने पर शराब की बोतल, हॉकी स्टिक, पिस्टल की मैगजीन, 11 कारतूस, एक दर्जन से अधिक एटीएम कार्ड और कुछ नकदी भी मिले हैं।
जब्त गाड़ियों में एक पर पुलिस लिखा है और पुलिस का लोगो भी चिपका है। गाड़ी से कई तस्वीरें भी मिली हैं। तस्वीरों में दिख रहा एक शख्स पुलिस वर्दी में है। इस संबंध में एक पक्ष के बैरिया निवासी अशोक कुमार यादव ने ब्रह्मपुरा थाने में आवेदन दिया है। वहीं थानेदार अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि छानबीन की जा रही है। इस संबंध में कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है।
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ब्रह्मपुरा थाने के चांदनी चौक पर बुधवार को जमीन विवाद में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। एक-दूसरे पर लाठी-डंडे और हॉकी स्टिक से हमला कर दिया। इसमें दोनों पक्ष से छह लोग जख्मी हो गए हैं। एक पक्ष ने जमीन कब्जाने आए पक्ष की दो गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने गाड़ियों को जब्त कर लिया है। तलाशी लेने पर शराब की बोतल, हॉकी स्टिक, पिस्टल की मैगजीन, ग्यारह कारतूस, एक दर्जन से अधिक एटीएम कार्ड और कुछ नकदी भी मिले हैं। जब्त गाड़ियों में एक पर पुलिस लिखा है और पुलिस का लोगो भी चिपका है। गाड़ी से कई तस्वीरें भी मिली हैं। तस्वीरों में दिख रहा एक शख्स पुलिस वर्दी में है। इस संबंध में एक पक्ष के बैरिया निवासी अशोक कुमार यादव ने ब्रह्मपुरा थाने में आवेदन दिया है। वहीं थानेदार अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि छानबीन की जा रही है। इस संबंध में कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है।
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ऑशविट्ज़ मौत शिविर में क्रूर स्टाफ डॉक्टर डॉ। जोसेफ मेनगेले ने 1 9 7 9 में अपनी मृत्यु से पहले भी एक निश्चित पौराणिक गुणवत्ता हासिल की। असहाय कैदियों पर उनके भयानक प्रयोग दुःस्वप्न की चीजें हैं और उन्हें कुछ लोगों में से एक माना जाता है आधु िनक इ ितहास। दक्षिण अमेरिका में इस कुख्यात नाजी डॉक्टर ने दशकों तक कब्जा कर लिया, केवल बढ़ती पौराणिक कथाओं में जोड़ा गया। इतिहास के लिए जाने वाले मुड़ वाले आदमी के बारे में सच्चाई क्या है "मृत्यु का परी? "
जोसेफ के पिता कार्ल एक उद्योगपति थे जिनकी कंपनी ने कृषि मशीनरी का उत्पादन किया था। कंपनी ने सफलता प्राप्त की और मेनवेले परिवार को पूर्ववर्ती जर्मनी में अच्छी तरह से माना जाता था। बाद में, जब जोसेफ दौड़ रहा था, कार्ल का पैसा, प्रतिष्ठा, और प्रभाव जर्मनी से अपने बेटे से बचने और अर्जेंटीना में खुद को स्थापित करने में बहुत मदद करेगा।
जोसेफ ने 1 9 35 में म्यूनिख विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वह केवल 24 वर्ष का था। उन्होंने उस समय जर्मनी के कुछ प्रमुख चिकित्सा दिमागों के साथ जेनेटिक्स में काम करके इसका पालन किया, और उन्होंने सम्मान के साथ एक दूसरा, चिकित्सा डॉक्टरेट अर्जित किया 1 9 38. उन्होंने आनुवंशिक गुणों जैसे कि क्लेफ्ट पैलेट्स और जुड़वां बच्चों के साथ उनके आकर्षण का अध्ययन किया क्योंकि प्रयोग विषयों पहले से ही बढ़ रहे थे।
मेनगेले एक समर्पित नाजी था और उसी समय एसएस में शामिल हो गया जब उसने अपनी मेडिकल डिग्री अर्जित की। जब द्वितीय विश्व युद्ध टूट गया, तो उसे सोवियत से लड़ने के लिए एक अधिकारी के रूप में पूर्वी मोर्चे पर भेजा गया। उन्होंने 1 9 41 में यूक्रेन में युद्ध में बहादुरी के लिए आयरन क्रॉस द्वितीय श्रेणी अर्जित की। 1 9 42 में, उन्होंने दो जर्मन सैनिकों को जलती हुई टैंक से बचाया। इस कार्रवाई ने उन्हें आयरन क्रॉस फर्स्ट क्लास और कुछ अन्य पदक अर्जित किए। कार्रवाई में घायल, उन्हें सक्रिय कर्तव्य के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया और जर्मनी वापस भेज दिया गया। अधिक "
मेनगेले की एक आम गलतफहमी यह है कि वह ऑशविट्ज़ मौत शिविर का प्रभारी था। यह मामला नहीं है। वह वास्तव में वहां सौंपा गया कई एसएस डॉक्टरों में से एक था। हालांकि, वहां स्वायत्तता का एक बड़ा सौदा था, हालांकि, वह आनुवंशिकी और बीमारियों का अध्ययन करने के लिए सरकार द्वारा दिए गए अनुदान के तहत काम कर रहा था। एक युद्ध नायक और प्रतिष्ठित अकादमिक के रूप में उनकी स्थिति ने उन्हें अन्य डॉक्टरों द्वारा साझा नहीं किया गया एक कद भी दिया। जब यह सब एक साथ रखा गया था, तो मेनगेले के पास अपने घृणित प्रयोगों को पूरा करने के लिए स्वतंत्रता थी क्योंकि वह फिट बैठता था।
ऑशविट्ज़ में , मेनगेले को यहूदी कैदियों पर अपने प्रयोग करने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी गई थी, जो सभी को मरने के लिए तैयार किया गया था। उनके कट्टरपंथी प्रयोग कुख्यात और बेवकूफ़ थे और पूरी तरह से अपने दायरे में अमानवीय थे। उन्होंने कैदियों की आंखों में डाई इंजेक्शन डालने के लिए देखा कि क्या वह अपना रंग बदल सकता है। उन्होंने जानबूझकर अपने प्रगति को दस्तावेज करने के लिए भयानक बीमारियों से कैद संक्रमित किया। उन्होंने कैदियों में गैसोलीन जैसे पदार्थों को इंजेक्शन दिया, प्रक्रिया को देखने के लिए उन्हें दर्दनाक मौत की निंदा की। उन्हें जुड़वाओं के सेट पर प्रयोग करना पसंद आया और उन्हें हमेशा आने वाली ट्रेन कारों से अलग कर दिया गया, उन्हें गैस कक्षों में तत्काल मौत से बचाया गया, लेकिन उन्हें कुछ भाग्य में भाग्य के लिए रखा गया, जो कि कुछ मामलों में बहुत खराब था। अधिक "
ऑशविट्ज़ में डॉक्टरों के अधिक घृणित कर्तव्यों में से एक आने वाली ट्रेनों को पूरा करने के लिए प्लेटफार्मों पर खड़ा था। वहां, डॉक्टर आने वाले यहूदियों को उन लोगों में विभाजित करेंगे जो श्रमिक गिरोह बनाएंगे और जो तुरंत मौत कक्षों में आगे बढ़ेंगे। ऑशविट्ज़ के अधिकांश डॉक्टरों ने इस कर्तव्य से नफरत की और कुछ को ऐसा करने के लिए नशे में भी जाना पड़ा। जोसेफ मेनगेले नहीं। सभी खातों से, उन्होंने इसका आनंद लिया, अपनी सर्वश्रेष्ठ वर्दी डालने और यहां तक कि ट्रेनों की बैठक भी की जब उन्हें ऐसा करने के लिए निर्धारित नहीं किया गया था। अपने अच्छे दिखने, स्नैपी वर्दी और इस भयानक काम के स्पष्ट आनंद के कारण, उन्हें "मृत्यु का परी" नाम दिया गया।
1 9 45 में, सोवियत पूर्व की तरफ चले गए, यह स्पष्ट हो गया कि जर्मन हार जाएंगे। 27 जनवरी, 1 9 45 को ऑशविट्ज़ को मुक्त कर दिया गया था, डॉ। मेनगेले और अन्य एसएस अधिकारी लंबे समय से चले गए थे। उन्होंने थोड़ी देर के लिए जर्मनी में छुपाया, एक अनुमानित नाम के तहत खेत मजदूर के रूप में काम ढूंढना। अधिकतर वांछित युद्ध अपराधियों की सूचियों पर उनका नाम दिखने से बहुत पहले नहीं था और 1 9 4 9 में उन्होंने अर्जेंटीना में अपने कई साथी नाज़ियों का पालन करने का फैसला किया। उन्हें अर्जेंटीना एजेंटों के संपर्क में रखा गया, जिन्होंने उन्हें आवश्यक कागजात और परमिट के साथ सहायता दी। अधिक "
मेनगेले को अर्जेंटीना में गर्मजोशी से स्वागत मिला। कई पूर्व नाज़ियों और पुराने दोस्त वहां थे, और जुआन डोमिंगो पेरोन शासन उनके लिए अनुकूल था। Mengele भी एक से अधिक अवसर पर राष्ट्रपति पेरोन से मुलाकात की। जोसेफ के पिता कार्ल के पास अर्जेंटीना में व्यावसायिक संपर्क थे, और जोसेफ ने पाया कि उनके पिता की प्रतिष्ठा उनके ऊपर थोड़ी देर रुक गई थी (उनके पिता के पैसे को चोट नहीं पहुंची थी)। वह उच्च सर्कल में चले गए और हालांकि वह अक्सर एक अनुमानित नाम का इस्तेमाल करते थे, अर्जेंटीना जर्मन समुदाय में हर कोई जानता था कि वह कौन था। पेरोन को छोड़ने के बाद ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी कि जोसेफ को भूमिगत वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
सबसे कुख्यात नाज़ियों में से अधिकांश मित्र राष्ट्रों द्वारा कब्जा कर लिया गया था और नूर्नबर्ग परीक्षणों में कोशिश की गई थी। कई मध्य-स्तर के नाज़ियों से बच निकला और उनके साथ कुछ गंभीर युद्ध अपराधियों ने भाग लिया। युद्ध के बाद, यहूदी नाजी शिकारी ने उन्हें न्याय में लाने के लिए इन पुरुषों को ट्रैक करना शुरू कर दिया। 1 9 50 तक, दो नाजी शिकारी की इच्छा सूची के शीर्ष पर दो नाम थेः मेनगेले और एडॉल्फ ईचमान , नौकरशाह जिन्होंने अपनी मृत्यु के लिए लाखों लोगों को भेजने की रसद की निगरानी की थी। ईचमान को 1 9 60 में मोसाद एजेंटों की एक टीम ने ब्यूनस आयर्स स्ट्रीट से छीन लिया था। टीम सक्रिय रूप से मेनगेले की भी तलाश कर रही थी। एक बार इचमान की कोशिश की और फांसी की गई, मेनगेले सबसे ज्यादा वांछित पूर्व नाजी के रूप में अकेले खड़े हो गए।
क्योंकि इस हत्यारे नाजी ने इतने लंबे समय तक कब्जा कर लिया था, उसके चारों ओर एक किंवदंती बढ़ी। अर्जेंटीना से पेरू तक हर जगह पुष्टिकरण मेनगेले दृश्यों और असंतुष्ट लोगों के साथ गुजरने वाले कई निर्दोष पुरुषों को परेशान या पूछताछ की गई थी। कुछ के मुताबिक, वह पूर्व नाजी सहयोगियों और अंगरक्षकों से घिरे राष्ट्रपति अल्फ्रेडो स्ट्रोसेनर की सुरक्षा के तहत पैराग्वे में एक जंगल प्रयोगशाला में छिपा रहा था, जो मास्टर रेस के बारे में अपने विचार को पूरा करता था।
सच पूरी तरह से अलग था। वह अपने अंतिम वर्षों में गरीबी में रहते थे, पैराग्वे और ब्राजील में घूमते थे, अलग परिवारों के साथ रहते थे जहां उन्होंने अक्सर अपनी कट्टरपंथी प्रकृति के कारण अपना स्वागत किया था। उन्हें अपने परिवार और नाज़ी मित्रों के सदैव घटने वाले सर्कल की मदद मिली थी। वह पागल हो गया, आश्वस्त था कि इजरायल अपने निशान पर गर्म थे, और तनाव ने उनके स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित किया। वह अकेला, कड़वा आदमी था जिसका दिल अभी भी घृणा से भर गया था। 1 9 7 9 में ब्राजील में एक तैराकी दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
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ऑशविट्ज़ मौत शिविर में क्रूर स्टाफ डॉक्टर डॉ। जोसेफ मेनगेले ने एक नौ सात नौ में अपनी मृत्यु से पहले भी एक निश्चित पौराणिक गुणवत्ता हासिल की। असहाय कैदियों पर उनके भयानक प्रयोग दुःस्वप्न की चीजें हैं और उन्हें कुछ लोगों में से एक माना जाता है आधु िनक इ ितहास। दक्षिण अमेरिका में इस कुख्यात नाजी डॉक्टर ने दशकों तक कब्जा कर लिया, केवल बढ़ती पौराणिक कथाओं में जोड़ा गया। इतिहास के लिए जाने वाले मुड़ वाले आदमी के बारे में सच्चाई क्या है "मृत्यु का परी? " जोसेफ के पिता कार्ल एक उद्योगपति थे जिनकी कंपनी ने कृषि मशीनरी का उत्पादन किया था। कंपनी ने सफलता प्राप्त की और मेनवेले परिवार को पूर्ववर्ती जर्मनी में अच्छी तरह से माना जाता था। बाद में, जब जोसेफ दौड़ रहा था, कार्ल का पैसा, प्रतिष्ठा, और प्रभाव जर्मनी से अपने बेटे से बचने और अर्जेंटीना में खुद को स्थापित करने में बहुत मदद करेगा। जोसेफ ने एक नौ पैंतीस में म्यूनिख विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। वह केवल चौबीस वर्ष का था। उन्होंने उस समय जर्मनी के कुछ प्रमुख चिकित्सा दिमागों के साथ जेनेटिक्स में काम करके इसका पालन किया, और उन्होंने सम्मान के साथ एक दूसरा, चिकित्सा डॉक्टरेट अर्जित किया एक नौ अड़तीस. उन्होंने आनुवंशिक गुणों जैसे कि क्लेफ्ट पैलेट्स और जुड़वां बच्चों के साथ उनके आकर्षण का अध्ययन किया क्योंकि प्रयोग विषयों पहले से ही बढ़ रहे थे। मेनगेले एक समर्पित नाजी था और उसी समय एसएस में शामिल हो गया जब उसने अपनी मेडिकल डिग्री अर्जित की। जब द्वितीय विश्व युद्ध टूट गया, तो उसे सोवियत से लड़ने के लिए एक अधिकारी के रूप में पूर्वी मोर्चे पर भेजा गया। उन्होंने एक नौ इकतालीस में यूक्रेन में युद्ध में बहादुरी के लिए आयरन क्रॉस द्वितीय श्रेणी अर्जित की। एक नौ बयालीस में, उन्होंने दो जर्मन सैनिकों को जलती हुई टैंक से बचाया। इस कार्रवाई ने उन्हें आयरन क्रॉस फर्स्ट क्लास और कुछ अन्य पदक अर्जित किए। कार्रवाई में घायल, उन्हें सक्रिय कर्तव्य के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया और जर्मनी वापस भेज दिया गया। अधिक " मेनगेले की एक आम गलतफहमी यह है कि वह ऑशविट्ज़ मौत शिविर का प्रभारी था। यह मामला नहीं है। वह वास्तव में वहां सौंपा गया कई एसएस डॉक्टरों में से एक था। हालांकि, वहां स्वायत्तता का एक बड़ा सौदा था, हालांकि, वह आनुवंशिकी और बीमारियों का अध्ययन करने के लिए सरकार द्वारा दिए गए अनुदान के तहत काम कर रहा था। एक युद्ध नायक और प्रतिष्ठित अकादमिक के रूप में उनकी स्थिति ने उन्हें अन्य डॉक्टरों द्वारा साझा नहीं किया गया एक कद भी दिया। जब यह सब एक साथ रखा गया था, तो मेनगेले के पास अपने घृणित प्रयोगों को पूरा करने के लिए स्वतंत्रता थी क्योंकि वह फिट बैठता था। ऑशविट्ज़ में , मेनगेले को यहूदी कैदियों पर अपने प्रयोग करने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी गई थी, जो सभी को मरने के लिए तैयार किया गया था। उनके कट्टरपंथी प्रयोग कुख्यात और बेवकूफ़ थे और पूरी तरह से अपने दायरे में अमानवीय थे। उन्होंने कैदियों की आंखों में डाई इंजेक्शन डालने के लिए देखा कि क्या वह अपना रंग बदल सकता है। उन्होंने जानबूझकर अपने प्रगति को दस्तावेज करने के लिए भयानक बीमारियों से कैद संक्रमित किया। उन्होंने कैदियों में गैसोलीन जैसे पदार्थों को इंजेक्शन दिया, प्रक्रिया को देखने के लिए उन्हें दर्दनाक मौत की निंदा की। उन्हें जुड़वाओं के सेट पर प्रयोग करना पसंद आया और उन्हें हमेशा आने वाली ट्रेन कारों से अलग कर दिया गया, उन्हें गैस कक्षों में तत्काल मौत से बचाया गया, लेकिन उन्हें कुछ भाग्य में भाग्य के लिए रखा गया, जो कि कुछ मामलों में बहुत खराब था। अधिक " ऑशविट्ज़ में डॉक्टरों के अधिक घृणित कर्तव्यों में से एक आने वाली ट्रेनों को पूरा करने के लिए प्लेटफार्मों पर खड़ा था। वहां, डॉक्टर आने वाले यहूदियों को उन लोगों में विभाजित करेंगे जो श्रमिक गिरोह बनाएंगे और जो तुरंत मौत कक्षों में आगे बढ़ेंगे। ऑशविट्ज़ के अधिकांश डॉक्टरों ने इस कर्तव्य से नफरत की और कुछ को ऐसा करने के लिए नशे में भी जाना पड़ा। जोसेफ मेनगेले नहीं। सभी खातों से, उन्होंने इसका आनंद लिया, अपनी सर्वश्रेष्ठ वर्दी डालने और यहां तक कि ट्रेनों की बैठक भी की जब उन्हें ऐसा करने के लिए निर्धारित नहीं किया गया था। अपने अच्छे दिखने, स्नैपी वर्दी और इस भयानक काम के स्पष्ट आनंद के कारण, उन्हें "मृत्यु का परी" नाम दिया गया। एक नौ पैंतालीस में, सोवियत पूर्व की तरफ चले गए, यह स्पष्ट हो गया कि जर्मन हार जाएंगे। सत्ताईस जनवरी, एक नौ पैंतालीस को ऑशविट्ज़ को मुक्त कर दिया गया था, डॉ। मेनगेले और अन्य एसएस अधिकारी लंबे समय से चले गए थे। उन्होंने थोड़ी देर के लिए जर्मनी में छुपाया, एक अनुमानित नाम के तहत खेत मजदूर के रूप में काम ढूंढना। अधिकतर वांछित युद्ध अपराधियों की सूचियों पर उनका नाम दिखने से बहुत पहले नहीं था और एक नौ चार नौ में उन्होंने अर्जेंटीना में अपने कई साथी नाज़ियों का पालन करने का फैसला किया। उन्हें अर्जेंटीना एजेंटों के संपर्क में रखा गया, जिन्होंने उन्हें आवश्यक कागजात और परमिट के साथ सहायता दी। अधिक " मेनगेले को अर्जेंटीना में गर्मजोशी से स्वागत मिला। कई पूर्व नाज़ियों और पुराने दोस्त वहां थे, और जुआन डोमिंगो पेरोन शासन उनके लिए अनुकूल था। Mengele भी एक से अधिक अवसर पर राष्ट्रपति पेरोन से मुलाकात की। जोसेफ के पिता कार्ल के पास अर्जेंटीना में व्यावसायिक संपर्क थे, और जोसेफ ने पाया कि उनके पिता की प्रतिष्ठा उनके ऊपर थोड़ी देर रुक गई थी । वह उच्च सर्कल में चले गए और हालांकि वह अक्सर एक अनुमानित नाम का इस्तेमाल करते थे, अर्जेंटीना जर्मन समुदाय में हर कोई जानता था कि वह कौन था। पेरोन को छोड़ने के बाद ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी कि जोसेफ को भूमिगत वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। सबसे कुख्यात नाज़ियों में से अधिकांश मित्र राष्ट्रों द्वारा कब्जा कर लिया गया था और नूर्नबर्ग परीक्षणों में कोशिश की गई थी। कई मध्य-स्तर के नाज़ियों से बच निकला और उनके साथ कुछ गंभीर युद्ध अपराधियों ने भाग लिया। युद्ध के बाद, यहूदी नाजी शिकारी ने उन्हें न्याय में लाने के लिए इन पुरुषों को ट्रैक करना शुरू कर दिया। एक नौ पचास तक, दो नाजी शिकारी की इच्छा सूची के शीर्ष पर दो नाम थेः मेनगेले और एडॉल्फ ईचमान , नौकरशाह जिन्होंने अपनी मृत्यु के लिए लाखों लोगों को भेजने की रसद की निगरानी की थी। ईचमान को एक नौ साठ में मोसाद एजेंटों की एक टीम ने ब्यूनस आयर्स स्ट्रीट से छीन लिया था। टीम सक्रिय रूप से मेनगेले की भी तलाश कर रही थी। एक बार इचमान की कोशिश की और फांसी की गई, मेनगेले सबसे ज्यादा वांछित पूर्व नाजी के रूप में अकेले खड़े हो गए। क्योंकि इस हत्यारे नाजी ने इतने लंबे समय तक कब्जा कर लिया था, उसके चारों ओर एक किंवदंती बढ़ी। अर्जेंटीना से पेरू तक हर जगह पुष्टिकरण मेनगेले दृश्यों और असंतुष्ट लोगों के साथ गुजरने वाले कई निर्दोष पुरुषों को परेशान या पूछताछ की गई थी। कुछ के मुताबिक, वह पूर्व नाजी सहयोगियों और अंगरक्षकों से घिरे राष्ट्रपति अल्फ्रेडो स्ट्रोसेनर की सुरक्षा के तहत पैराग्वे में एक जंगल प्रयोगशाला में छिपा रहा था, जो मास्टर रेस के बारे में अपने विचार को पूरा करता था। सच पूरी तरह से अलग था। वह अपने अंतिम वर्षों में गरीबी में रहते थे, पैराग्वे और ब्राजील में घूमते थे, अलग परिवारों के साथ रहते थे जहां उन्होंने अक्सर अपनी कट्टरपंथी प्रकृति के कारण अपना स्वागत किया था। उन्हें अपने परिवार और नाज़ी मित्रों के सदैव घटने वाले सर्कल की मदद मिली थी। वह पागल हो गया, आश्वस्त था कि इजरायल अपने निशान पर गर्म थे, और तनाव ने उनके स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित किया। वह अकेला, कड़वा आदमी था जिसका दिल अभी भी घृणा से भर गया था। एक नौ सात नौ में ब्राजील में एक तैराकी दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
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क्रिकेटर और राजनेता सिद्द के दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी।
राबिया इस समय फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही हैं।
अपने पापा की तरह ही राबिया पार्टी का शौक रखती हैं।
हालांकि वो लाइम लाइट से दूर रहती हैं।
लेकिन इन दिनों राबिया की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वाइरल हो रही हैं जिसमें वो काफी ग्लैमरस दिख रही हैं।
'जब मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सिद्दू के लिए बोला क्यूट झूठ'
'जब मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सिद्दू के लिए बोला क्यूट झूठ'
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क्रिकेटर और राजनेता सिद्द के दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी। राबिया इस समय फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही हैं। अपने पापा की तरह ही राबिया पार्टी का शौक रखती हैं। हालांकि वो लाइम लाइट से दूर रहती हैं। लेकिन इन दिनों राबिया की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वाइरल हो रही हैं जिसमें वो काफी ग्लैमरस दिख रही हैं। 'जब मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सिद्दू के लिए बोला क्यूट झूठ' 'जब मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सिद्दू के लिए बोला क्यूट झूठ'
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भोपाल। खेल युवा कल्याण एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने कहा है कि राज्य सरकार आने वाले समय में 6000 से अधिक प्रोफेसर के पदों की पूर्ति करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उच्च शिक्षा विभाग लगभग 200 महाविद्यालयों के उन्नयन के लिए 3000 करोड़ रु का व्यय करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि उज्जैन संभाग के 26 महाविद्यालय भी इस उन्नयन में शामिल है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने यह बात आज उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेश में खेल का वातावरण बनाने के भरसक प्रयास किए जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी और विजेता खिलाड़ियों को 1 करोड़ से लेकर 5 करोड़ तक के पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ खिलाड़ियों को अब राज्य सरकार द्वितीय श्रेणी के पदों पर भर्ती करेगी।
मध्यप्रदेश का जो खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल पर पार्टिसिपेट करेगा, उसको राज्य शासन एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगा। इसी तरह इंटरनेशनल खेल में स्वर्ण पदक पाने वाले को 5 करोड़, रजत पदक लाने वाले को 3 करोड़ तथा कांस्य पदक लाने वाले को 2 करोड़ रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने यह बात आज उज्जैन के महानन्दा नगर स्थित एरिना में आयोजित विशिष्ट खेल अभिनन्दन कार्यक्रम में कही।
खेल मंत्री ने आगे कहा कि तीन नेशनल खेलने वाले खिलाड़ियों को शासकीय नौकरी प्रदान की जायेगी। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी नेशनल खेल खेलेगा, उसको पांच लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया जायेगा। खेल मंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न खेलों से जुड़े बच्चों को खेल किट भेंट किये। इस अवसर पर विधायक श्री रामलाल मालवीय, श्री दिलीप गुर्जर, श्री मुरली मोरवाल मौजूद थे।
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भोपाल। खेल युवा कल्याण एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने कहा है कि राज्य सरकार आने वाले समय में छः हज़ार से अधिक प्रोफेसर के पदों की पूर्ति करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उच्च शिक्षा विभाग लगभग दो सौ महाविद्यालयों के उन्नयन के लिए तीन हज़ार करोड़ रु का व्यय करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि उज्जैन संभाग के छब्बीस महाविद्यालय भी इस उन्नयन में शामिल है। उच्च शिक्षा मंत्री ने यह बात आज उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेश में खेल का वातावरण बनाने के भरसक प्रयास किए जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी और विजेता खिलाड़ियों को एक करोड़ से लेकर पाँच करोड़ तक के पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ खिलाड़ियों को अब राज्य सरकार द्वितीय श्रेणी के पदों पर भर्ती करेगी। मध्यप्रदेश का जो खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल पर पार्टिसिपेट करेगा, उसको राज्य शासन एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगा। इसी तरह इंटरनेशनल खेल में स्वर्ण पदक पाने वाले को पाँच करोड़, रजत पदक लाने वाले को तीन करोड़ तथा कांस्य पदक लाने वाले को दो करोड़ रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने यह बात आज उज्जैन के महानन्दा नगर स्थित एरिना में आयोजित विशिष्ट खेल अभिनन्दन कार्यक्रम में कही। खेल मंत्री ने आगे कहा कि तीन नेशनल खेलने वाले खिलाड़ियों को शासकीय नौकरी प्रदान की जायेगी। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी नेशनल खेल खेलेगा, उसको पांच लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया जायेगा। खेल मंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न खेलों से जुड़े बच्चों को खेल किट भेंट किये। इस अवसर पर विधायक श्री रामलाल मालवीय, श्री दिलीप गुर्जर, श्री मुरली मोरवाल मौजूद थे।
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मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन।
पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर कारन।
या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।
रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग़ तड़ाग निहारौं।
सेस गनेस महेस दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावै।
नारद से सुक व्यास रहे, पचिहारे तू पुनि पार न पावैं।
धुरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।
वा छबि को रसखान बिलोकत, वारत काम कला निधि कोटी।
कानन दै अँगुरी रहिहौं, जबही मुरली धुनि मंद बजैहै।
टेरी कहाँ सिगरे ब्रजलोगनि, काल्हि कोई कितनो समझैहै।
मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मै हियरा उमह्यो री।
अब तौ रसखान सनेह लग्यौ, कौउ एक कह्यो कोउ लाख कह्यो री।
और सो रंग रह्यो न रह्यो, इक रंग रंगीले सो रंग रह्यो री।
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मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन। पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर कारन। या लकुटी अरु कामरिया पर, राज तिहूँ पुर को तजि डारौं। रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग़ तड़ाग निहारौं। सेस गनेस महेस दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावै। नारद से सुक व्यास रहे, पचिहारे तू पुनि पार न पावैं। धुरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी। वा छबि को रसखान बिलोकत, वारत काम कला निधि कोटी। कानन दै अँगुरी रहिहौं, जबही मुरली धुनि मंद बजैहै। टेरी कहाँ सिगरे ब्रजलोगनि, काल्हि कोई कितनो समझैहै। मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मै हियरा उमह्यो री। अब तौ रसखान सनेह लग्यौ, कौउ एक कह्यो कोउ लाख कह्यो री। और सो रंग रह्यो न रह्यो, इक रंग रंगीले सो रंग रह्यो री।
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भारत, अमेरिका और कई विश्व ताकतें इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच एक स्वतंत्र, मुक्त व संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही हैं। चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान भी स्थापित किए हैं। क्वात्रा शहर की आधिकारिक यात्रा पर है। वह रविवार रात न्यूयॉर्क से वाशिंगटन पहुंचे।
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भारत, अमेरिका और कई विश्व ताकतें इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच एक स्वतंत्र, मुक्त व संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही हैं। चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान भी स्थापित किए हैं। क्वात्रा शहर की आधिकारिक यात्रा पर है। वह रविवार रात न्यूयॉर्क से वाशिंगटन पहुंचे।
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दिसंबर में सर्दी ने कोरोना से ज्यादा जानें लीं। पिछले 31 दिन यानी 1 से 31 दिसंबर तक जिले में ब्रेन और हार्ट अटैक से 113 की माैत हाे गई।
इनमें से जेएएच के कार्डियोलॉजी, बीआईएमआर, सिम्स हॉस्पिटल और रतन ज्योति डालमिया हार्ट सेंटर हार्ट अटैक से 52 लोगों ने दम ताेड़ा ताे जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग, केडीजे हॉस्पिटल, बीआईएमआर और सिम्स में ब्रेन हेमरेज से 61 मरीज की मौत हुई।
जबकि काेराेना से इस अवधि में 25 लाेगाें की जान गई। सर्दी के कारण आए अटैक से जो मौतें हुईं उनकी संख्या पिछले नौ महीने में कोरोना से सर्वाधिक जानें लेने वाले सितंबर से भी ज्यादा है। सितंबर में काेराेना के कारण 104 लाेगाें ने दम ताेड़ा था।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दिसंबर में सर्दी ने कोरोना से ज्यादा जानें लीं। पिछले इकतीस दिन यानी एक से इकतीस दिसंबर तक जिले में ब्रेन और हार्ट अटैक से एक सौ तेरह की माैत हाे गई। इनमें से जेएएच के कार्डियोलॉजी, बीआईएमआर, सिम्स हॉस्पिटल और रतन ज्योति डालमिया हार्ट सेंटर हार्ट अटैक से बावन लोगों ने दम ताेड़ा ताे जेएएच के न्यूरोलॉजी विभाग, केडीजे हॉस्पिटल, बीआईएमआर और सिम्स में ब्रेन हेमरेज से इकसठ मरीज की मौत हुई। जबकि काेराेना से इस अवधि में पच्चीस लाेगाें की जान गई। सर्दी के कारण आए अटैक से जो मौतें हुईं उनकी संख्या पिछले नौ महीने में कोरोना से सर्वाधिक जानें लेने वाले सितंबर से भी ज्यादा है। सितंबर में काेराेना के कारण एक सौ चार लाेगाें ने दम ताेड़ा था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कैराना। केंद्र सरकार देश में किसानों के लिए कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट के दावे के बीच हरियाणा प्रशासन द्वारा यूपी के किसानों का गेहूं बॉर्डर पर रोके जाने के बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा प्रदर्शन किया। इस दौरान भाकियू व पुलिस के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई। हंगामे के बाद अनाज से भरे वाहनों की हरियाणा में एंट्री कराई गई।
हरियाणा प्रशासन द्वारा यूपी के किसानों का गेहूं एक बार फिर बॉर्डर पर रोक दिया गया। अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियों की यमुना ब्रिज पर लाइन लग गई। जानकारी मिलने के बाद भाकियू जिलाध्यक्ष कालेंद्र मालिक के नेतृत्व में भाकियू कार्यकर्ता बॉर्डर पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जाते ही यूपी के किसानों को अपने - अपने ट्रैक्टर निकालने को कहा जिसके बाद मौके पर मौजूद हरियाणा पुलिस के नरेश कुमार, गुरनाम सिंह, सुधीर, दीपक कुमार व सतेंद्र नाम के पुलिसकर्मियों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस व भाकियू कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई।
मामला उस समय तूल पकड़ गया, जब हरियाणा पुलिस ने भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की और अन्नदाताओं के अनाज से भरे वाहनों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें उनके वाहनों की लाइटें टूट गईं। लाठी चार्ज के बाद किसानों व भाकियू कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया और उन्होंने हरियाणा प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए, जिसके बाद हरियाणा पुलिस बैकफुट पर आ गई और किसानों के वाहनों को हरियाणा में एंट्री कराई।
भाकियू जिलाध्यक्ष कालेंद्र मलिक ने कहा कि दो दिनों से हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर पर यूपी के किसानों का गेहूं रोक रखा है। पूर्व में भी भाकियू द्वारा बॉर्डर से किसानों का गेहूं निकलवाया गया था। उन्होंने कहा कि यूपी प्रशासन कभी भी यूपी में आने वाले हरियाणा के किसानों के गन्ने की एंट्री बंद नहीं करता, तो फिर यूपी के किसानों की फसलों को क्यों रोका जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि किसान पूरे देश में कहीं भी अपनी फसलें बेच सकता है, तो फिर हरियाणा प्रशासन की यह तानाशाही क्यों ?
उन्होंने आगे कहा कि जब यूपी के किसानों ने आढ़तियों से पेशगी रकम ले रखी है तो फिर फसल किसे बेचेंगे। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष ऋषिपाल, नगर अध्यक्ष चौधरी इनाम , ब्लॉक महासचिव अफजल, मण्डल महासचिव चौधरी अब्बास, तहसील अध्यक्ष जहांगीर चौहान, जिला मीडिया प्रभारी नवाब अली, जिला उपाध्यक्ष शुभम जागलान, जिला सचिव सूरज, ब्लॉक महासचिव अल्ताफ व जिला महासचिव चौधरी तसव्वर आदि मौजूद रहे।
बॉर्डर पर अनाज से भरे वाहनों को निकालने के लिए भाकियू व पुलिस में उस समय तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई, जब एक पुलिसकर्मी ने अनाज से भरे किसानों के वाहनों पर लाठियां बरसाकर उनकी लाइटें तोड़ दीं, जिसके बाद भाकियू कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया। उनका कहना था कि बॉर्डर पर यूपी के किसानों का गेहूं रोकने का लिखित में आदेश दिखाओ। बार-बार कहने के बाजवूद भी हरियाणा पुलिस कोई लिखित आदेश नहीं दिखा पाई। इतना जरूर कहा कि डीसी से बात कर लें, जिसके बाद ही यूपी के किसानों का गेहूं हरियाणा भेजा जाएगा।
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कैराना। केंद्र सरकार देश में किसानों के लिए कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट के दावे के बीच हरियाणा प्रशासन द्वारा यूपी के किसानों का गेहूं बॉर्डर पर रोके जाने के बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा प्रदर्शन किया। इस दौरान भाकियू व पुलिस के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई। हंगामे के बाद अनाज से भरे वाहनों की हरियाणा में एंट्री कराई गई। हरियाणा प्रशासन द्वारा यूपी के किसानों का गेहूं एक बार फिर बॉर्डर पर रोक दिया गया। अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियों की यमुना ब्रिज पर लाइन लग गई। जानकारी मिलने के बाद भाकियू जिलाध्यक्ष कालेंद्र मालिक के नेतृत्व में भाकियू कार्यकर्ता बॉर्डर पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जाते ही यूपी के किसानों को अपने - अपने ट्रैक्टर निकालने को कहा जिसके बाद मौके पर मौजूद हरियाणा पुलिस के नरेश कुमार, गुरनाम सिंह, सुधीर, दीपक कुमार व सतेंद्र नाम के पुलिसकर्मियों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस व भाकियू कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई। मामला उस समय तूल पकड़ गया, जब हरियाणा पुलिस ने भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की और अन्नदाताओं के अनाज से भरे वाहनों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें उनके वाहनों की लाइटें टूट गईं। लाठी चार्ज के बाद किसानों व भाकियू कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया और उन्होंने हरियाणा प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए, जिसके बाद हरियाणा पुलिस बैकफुट पर आ गई और किसानों के वाहनों को हरियाणा में एंट्री कराई। भाकियू जिलाध्यक्ष कालेंद्र मलिक ने कहा कि दो दिनों से हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर पर यूपी के किसानों का गेहूं रोक रखा है। पूर्व में भी भाकियू द्वारा बॉर्डर से किसानों का गेहूं निकलवाया गया था। उन्होंने कहा कि यूपी प्रशासन कभी भी यूपी में आने वाले हरियाणा के किसानों के गन्ने की एंट्री बंद नहीं करता, तो फिर यूपी के किसानों की फसलों को क्यों रोका जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि किसान पूरे देश में कहीं भी अपनी फसलें बेच सकता है, तो फिर हरियाणा प्रशासन की यह तानाशाही क्यों ? उन्होंने आगे कहा कि जब यूपी के किसानों ने आढ़तियों से पेशगी रकम ले रखी है तो फिर फसल किसे बेचेंगे। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष ऋषिपाल, नगर अध्यक्ष चौधरी इनाम , ब्लॉक महासचिव अफजल, मण्डल महासचिव चौधरी अब्बास, तहसील अध्यक्ष जहांगीर चौहान, जिला मीडिया प्रभारी नवाब अली, जिला उपाध्यक्ष शुभम जागलान, जिला सचिव सूरज, ब्लॉक महासचिव अल्ताफ व जिला महासचिव चौधरी तसव्वर आदि मौजूद रहे। बॉर्डर पर अनाज से भरे वाहनों को निकालने के लिए भाकियू व पुलिस में उस समय तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई, जब एक पुलिसकर्मी ने अनाज से भरे किसानों के वाहनों पर लाठियां बरसाकर उनकी लाइटें तोड़ दीं, जिसके बाद भाकियू कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया। उनका कहना था कि बॉर्डर पर यूपी के किसानों का गेहूं रोकने का लिखित में आदेश दिखाओ। बार-बार कहने के बाजवूद भी हरियाणा पुलिस कोई लिखित आदेश नहीं दिखा पाई। इतना जरूर कहा कि डीसी से बात कर लें, जिसके बाद ही यूपी के किसानों का गेहूं हरियाणा भेजा जाएगा।
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