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GORAKHPUR: किसी को बड़ी गाड़ी रखने का शौक है, तो किसी को घूमने का, किसी को खाना पसंद है, तो किसी को खेलना। मगर इसी शौक को जब जुनून बना लिया जाए, तो वह आपका सिग्नेचर बन जाता है। गोरखपुर में यूं तो शौकीनों की फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन विजय चौक के रहने वाले कनक हरि अग्रवाल इस मामले में बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने शौक के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि इसके जरिए वह मानवता की सेवा करने में भी जुटे हुए हैं। भगवद् गीता के जरिए वह सभी को एक धागे में पिरोने और उन्हें इंसान बनने का संदेश दे रहे हैं। किसी पार्टी या विवाह भी में वह गीता जरूर गिफ्ट करते हैं।
मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले कनक काफी डेवोशनल हैं। उन्हें मानवता की सेवा करने में काफी मजा आता है। उनका बचपन गीता प्रेस में बीता और वहां की किताबें पढ़कर बड़े हुए। अलग पहचान बनाने का शौक उन्हें काफी पहले से ही था, जिसकी वजह से वह ऐसा बढि़या विजिटिंग कार्ड बनवाना चाहते थे, जिसे पाने के बाद लोग उसे संभालकर रखें। कोई पर्स में न रखकर उसे याद करता रहे। इसके लिए वह काफी मंथन करते रहे। एक बार वह संत को गीता प्रेस घुमाने लगे गए, उन्हें वहां छोटी भगवद् गीता दिखाई दी। उन्होंने संत से पूछा कि क्या इसे बतौर विजिटिंग कार्ड लोगों को दे सकते हैं। यह उनके पास हमेशा रहेगा और इसे लोग संभालकर भी रखेंगे।
उन्होंने गीता प्रेस को देने की शुरुआत तो कर दी, लेकिन पहले उन्होंने सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही इसे देना शुरू किया। इस बीच सोशल मीडिया पर गीता प्रेस बंद होने का तगड़ा र्यूमर उड़ा और सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की खबरें वायरल होने लगीं। चूंकि कनक बचपन से गीतार प्रेस से जुड़े हुए थे, इसलिए उन्होंने ठान लिया कि गीता प्रेस बंद नहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने गीता बांटने की रफ्तार बढ़ा दी। वह जिसे देते उसे बताते कि गीता प्रेस बंद नहीं हो रहा है और इससे जुड़ी किताबें आपको मिलती रहेंगी।
कनक की मानें तो उनका टारगेट है कि अगर कोई बाहर से आता है, तो उसे अपने प्रयास से उसे गीता देने का प्रयास करते हैं। गोरखपुर की याद उसके पास रहे। उन्होंने बताया कि चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो, उसको गीता देते हैं। यह किसी व्यक्तिगत धर्म या जाति की नहीं, बल्कि जो खुद को मनुष्य समझता है, भगवत गीता उसकी है। अब तक लगभग 15 हजार लोगों को वह इसे दे चुके हैं। जहां गए, वहां के लैंग्वेज में लोगों देते रहे। इसको पास रखने वाले के पास पॉजिटिव एनर्जी रहती है। उन्होंने बताया कि अब तक श्रीश्रीरविशंकर, मुरारी बापू, योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, राज बब्बर, गोविंदा, अनुराधा पौडवाल, महिमा चौधरी, मालिनी अवस्थी, रवि किशन, नित्य गोपाल दास, मोहन भागवत, सुनील बंसल, सलीम-सुलेमान, शान, शंकर महादेवन, कैलाश खेर, रीता बहुगुणा जोशी, केशव मौर्या, दिनेश शर्मा, अदनान फर्रुख अली शाह आदि को गीता दे चुके हैं।
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GORAKHPUR: किसी को बड़ी गाड़ी रखने का शौक है, तो किसी को घूमने का, किसी को खाना पसंद है, तो किसी को खेलना। मगर इसी शौक को जब जुनून बना लिया जाए, तो वह आपका सिग्नेचर बन जाता है। गोरखपुर में यूं तो शौकीनों की फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन विजय चौक के रहने वाले कनक हरि अग्रवाल इस मामले में बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने शौक के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि इसके जरिए वह मानवता की सेवा करने में भी जुटे हुए हैं। भगवद् गीता के जरिए वह सभी को एक धागे में पिरोने और उन्हें इंसान बनने का संदेश दे रहे हैं। किसी पार्टी या विवाह भी में वह गीता जरूर गिफ्ट करते हैं। मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले कनक काफी डेवोशनल हैं। उन्हें मानवता की सेवा करने में काफी मजा आता है। उनका बचपन गीता प्रेस में बीता और वहां की किताबें पढ़कर बड़े हुए। अलग पहचान बनाने का शौक उन्हें काफी पहले से ही था, जिसकी वजह से वह ऐसा बढि़या विजिटिंग कार्ड बनवाना चाहते थे, जिसे पाने के बाद लोग उसे संभालकर रखें। कोई पर्स में न रखकर उसे याद करता रहे। इसके लिए वह काफी मंथन करते रहे। एक बार वह संत को गीता प्रेस घुमाने लगे गए, उन्हें वहां छोटी भगवद् गीता दिखाई दी। उन्होंने संत से पूछा कि क्या इसे बतौर विजिटिंग कार्ड लोगों को दे सकते हैं। यह उनके पास हमेशा रहेगा और इसे लोग संभालकर भी रखेंगे। उन्होंने गीता प्रेस को देने की शुरुआत तो कर दी, लेकिन पहले उन्होंने सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही इसे देना शुरू किया। इस बीच सोशल मीडिया पर गीता प्रेस बंद होने का तगड़ा र्यूमर उड़ा और सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की खबरें वायरल होने लगीं। चूंकि कनक बचपन से गीतार प्रेस से जुड़े हुए थे, इसलिए उन्होंने ठान लिया कि गीता प्रेस बंद नहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने गीता बांटने की रफ्तार बढ़ा दी। वह जिसे देते उसे बताते कि गीता प्रेस बंद नहीं हो रहा है और इससे जुड़ी किताबें आपको मिलती रहेंगी। कनक की मानें तो उनका टारगेट है कि अगर कोई बाहर से आता है, तो उसे अपने प्रयास से उसे गीता देने का प्रयास करते हैं। गोरखपुर की याद उसके पास रहे। उन्होंने बताया कि चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो, उसको गीता देते हैं। यह किसी व्यक्तिगत धर्म या जाति की नहीं, बल्कि जो खुद को मनुष्य समझता है, भगवत गीता उसकी है। अब तक लगभग पंद्रह हजार लोगों को वह इसे दे चुके हैं। जहां गए, वहां के लैंग्वेज में लोगों देते रहे। इसको पास रखने वाले के पास पॉजिटिव एनर्जी रहती है। उन्होंने बताया कि अब तक श्रीश्रीरविशंकर, मुरारी बापू, योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, राज बब्बर, गोविंदा, अनुराधा पौडवाल, महिमा चौधरी, मालिनी अवस्थी, रवि किशन, नित्य गोपाल दास, मोहन भागवत, सुनील बंसल, सलीम-सुलेमान, शान, शंकर महादेवन, कैलाश खेर, रीता बहुगुणा जोशी, केशव मौर्या, दिनेश शर्मा, अदनान फर्रुख अली शाह आदि को गीता दे चुके हैं।
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विश्व बैंक ने इस बार भारत की आर्थिक विकास दर बढ़ने का अनुमान लगाया है। इस बीच 7. 5 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी का अनुमान है जबकि 2019 व 2020 तक यह बढ़कर 7. 5 प्रतिशत तक पहुँचने के आसार है। विश्व बैंक ने साफ किया है कि भारत में नोटबंदी और जीएसटी से उबरकर विकास दर बढ़ जाएगी। बताते चलें कि यह दर पिछले सत्र में 6. 7 थी जबकि हाल में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार इस दर में वृद्धि बढ़ने की बात कही गई है।
इसमें कृषि क्षेत्र का भी योगदान उल्लेखनीय रहेगा क्योंकि सामान्य मानसून के चलते देश में कृषि उत्पादन बढ़ने से विकास दर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि इस बीच मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक देश में फिर से मानसून सामान्य रहने के आसार है जिससे एक बार फिर से कृषि उत्पादन बढ़ेगा। जाहिर है कि खाद्य उत्पादन से सकल उत्पादन काफी हद तक निर्भर करता है ऐसे में हमारे किसान भाइयों के लिए अच्छी खबर है कि मानसून की अवधि बढ़ने से उन्हें फायदा होगा साथ ही देश के सकल उत्पादन में वृद्धि होगी।
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विश्व बैंक ने इस बार भारत की आर्थिक विकास दर बढ़ने का अनुमान लगाया है। इस बीच सात. पाँच प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी का अनुमान है जबकि दो हज़ार उन्नीस व दो हज़ार बीस तक यह बढ़कर सात. पाँच प्रतिशत तक पहुँचने के आसार है। विश्व बैंक ने साफ किया है कि भारत में नोटबंदी और जीएसटी से उबरकर विकास दर बढ़ जाएगी। बताते चलें कि यह दर पिछले सत्र में छः. सात थी जबकि हाल में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार इस दर में वृद्धि बढ़ने की बात कही गई है। इसमें कृषि क्षेत्र का भी योगदान उल्लेखनीय रहेगा क्योंकि सामान्य मानसून के चलते देश में कृषि उत्पादन बढ़ने से विकास दर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि इस बीच मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक देश में फिर से मानसून सामान्य रहने के आसार है जिससे एक बार फिर से कृषि उत्पादन बढ़ेगा। जाहिर है कि खाद्य उत्पादन से सकल उत्पादन काफी हद तक निर्भर करता है ऐसे में हमारे किसान भाइयों के लिए अच्छी खबर है कि मानसून की अवधि बढ़ने से उन्हें फायदा होगा साथ ही देश के सकल उत्पादन में वृद्धि होगी।
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- #CecSC on EC Appointment: संवैधानिक प्रावधानों से कितना मेल खाता है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर SC का निर्णय?
- #CecCEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अभी कैसे होती है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से क्या बदल गया है ?
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के काम करने के तरीकों को लेकर उनकी काफी सराहना की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसे सीईसी कभी-कभार ही मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बातों में काफी दम है। अपने कार्यकाल में टीएन शेषन ने खुद को देश की जनता का मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया था और शायद पहली बार ऐसा महसूस हुआ था कि संविधान में चुनाव आयोग पूरी तरह से एक स्वतंत्र निकाय है, जिसपर सरकार का कोई जोर नहीं चल सकता। आइए जानते हैं कि टीएन शेषन ने अपने कार्यकाल में वह कौन से चुनाव सुधार किए थे, जिसका मुरीद आज सुप्रीम कोर्ट भी नजर आ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि संविधान ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के 'नाजुक कंधों' पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो खुद को प्रभावित ना होने दे या यह ऐसा व्यक्ति हो जो पूरी तरह से गैर-राजनीति हो। सर्वोच्च अदालत ने यह भी आइडिया दिया है कि 'तटस्थता' की स्थिति बनाए रखने के लिए सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भी शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इसके साथ ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त दिवंगत टीएन शेषन का भी जिक्र कर दिया और कहा कि टीएन शेषन जैसे मजबूत चरित्र वाले कभी-कभार ही होते हैं। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का इस बात पर जोर था कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी हो, ताकि 'सर्वश्रेष्ठ' ही सीईसी बने।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सीईसी कई रह चुके हैं और टीएन शेषन कभी-कभार ही होते हैं। हम नहीं चाहते कि इसे कोई प्रभावित करने की कोशिश करे। तीन व्यक्तियों के नाजुक कंधों पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की गई हैं। सीईसी के पद के लिए हमें सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को खोजना है। सवाल है कि सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को हम कैसे खोजें और सर्वेश्रेष्ठ व्यक्ति को कैसे नियुक्त करें। ' इस बेंच में जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ह्रषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार भी शामिल थे। अगर सामान्य आदमी के तौर पर समझें तो सुप्रीम कोर्ट का कहना इस मायने में पूरी तरह से लाजिमी है कि टीएन शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद से ही चुनाव आयोग सरकार से पूरी तरह से अलग एक स्वतंत्र निकाय के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता हुआ प्रतीत होने लगा है।
टीएन शेषन कौन थे ?
दिवंगत टीएन शेषन या तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त थे। देश के 10वें सीईसी के तौर पर उनकी नियुक्ति 12 दिसंबर, 1990 को हुई थी और उनका कार्यकाल 11 दिसंबर, 1996 यानि पूरे पांच के लिए था। उनका जन्म 15 दिसंबर, 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के कालकाडु में हुआ था। वह 1955 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी थे। 27 मार्च, 1989 से 23 दिसंबर, 1989 तक वह भारत सरकार के कैबिनेट सचिव रहे, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च पद माना जाता है।
भारत में अबतक जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, उसमें टीएन शेषन एकमात्र ऐसे हैं जिनके आने के बाद से चुनाव आयोग के काम करने का पूरा ढर्रा (कम से कम जनता की नजर में) ही बदल गया है। सीईसी के तौर पर शेषन अपने ऐतिसाहिक चुनाव सुधारों के लिए जाने जाते हैं और उनकी वजह से चुनाव आयोग की गरिमा और प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। क्योंकि, 1950 में अपनी स्थापना के बाद से लेकर टीएन शेषन के पदभार ग्रहण करने से पहले तक भारत का चुनाव आयोग एक तरह से चुनाव पर्यवेक्षक के रोल में ही नजर आता था। वह ऐसा समय था, जब मतदाताओं को रिश्वत देना एक सामान्य व्यवस्था बना दी गई थी, लेकिन शेषन ने चुनाव आयोग का वह अधिकार सुनिश्चित करवाया, जो इसे संविधान में दिया गया था।
टीएन शेषन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने के लिए चुनावों के दौरान 150 ऐसी कुप्रथाओं की सूची जारी की, जिसपर चुनाव आयोग की ओर से रोक लगा दी गई। इसमें चुनावों के दौरान शराब का वितरण, वोटरों को रिश्वत देना, दीवारों पर लिखना, चुनाव प्रचार के दौरान अनावश्यक शोर और लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल के अलावा भाषण में धर्म का इस्तेमाल आदि। शेषन ने ही वोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था शुरू करवाई जो कि उस समय असंभव लग रहा था। कुछ राजनीतिक दल तो इसका खुलकर विरोध भी करने पर उतारू थे। यही नहीं, चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता नियमित रूप से और सख्ती के साथ लागू होने शुरू हो गए और चुनाव खर्चों की सीमाएं तय की जाने लगीं। उनसे पहले इस सब पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की मनमानी कायम थी।
टीएन शेषन ने जिस तरह से तत्कालीन केंद्र सरकार के हितों को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ संविधान और चुनाव नियमों का पालन सुनिश्चित करवाना शुरू किया, उसके चलते सरकार के साथ उनका मतभेद शुरू हो गया। शेषन पर लगाम लगाने के लिए 1993 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आर्टिकल 342 (2)[3] के तहत एक अध्यादेश के जरिए सीईसी के अतिरिक्त दो चुनाव आयुक्तों एमएस गिल और जीवीजी कृष्णमूर्ति की नियुक्ति कर दी। शेषन ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और एक या अधिक चुनाव आयुक्त की व्यवस्था को संवैधानिक करार दिया। यही व्यवस्था आज भी चल रही है।
भारत में चुनाव सुधारों को अपने दम पर स्थापित करने की वजह से टीएन शेषन देश में लोकप्रिय तो हो ही चुके थे, उनकी अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि भी कायम हो चुकी थी। देश की चुनाव प्रणाली को स्वच्छ बनाने के लिए 1996 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया। 1997 में टीएन शेषन ने केआर नारायणमूर्ति के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था। 10 नवंबर, 2019 को 86 साल की अवस्था में चेन्नई में उनका निधन हो गया।
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- #CecSC on EC Appointment: संवैधानिक प्रावधानों से कितना मेल खाता है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर SC का निर्णय? - #CecCEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अभी कैसे होती है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से क्या बदल गया है ? सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के काम करने के तरीकों को लेकर उनकी काफी सराहना की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसे सीईसी कभी-कभार ही मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बातों में काफी दम है। अपने कार्यकाल में टीएन शेषन ने खुद को देश की जनता का मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया था और शायद पहली बार ऐसा महसूस हुआ था कि संविधान में चुनाव आयोग पूरी तरह से एक स्वतंत्र निकाय है, जिसपर सरकार का कोई जोर नहीं चल सकता। आइए जानते हैं कि टीएन शेषन ने अपने कार्यकाल में वह कौन से चुनाव सुधार किए थे, जिसका मुरीद आज सुप्रीम कोर्ट भी नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि संविधान ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के 'नाजुक कंधों' पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो खुद को प्रभावित ना होने दे या यह ऐसा व्यक्ति हो जो पूरी तरह से गैर-राजनीति हो। सर्वोच्च अदालत ने यह भी आइडिया दिया है कि 'तटस्थता' की स्थिति बनाए रखने के लिए सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भी शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इसके साथ ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त दिवंगत टीएन शेषन का भी जिक्र कर दिया और कहा कि टीएन शेषन जैसे मजबूत चरित्र वाले कभी-कभार ही होते हैं। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का इस बात पर जोर था कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी हो, ताकि 'सर्वश्रेष्ठ' ही सीईसी बने। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सीईसी कई रह चुके हैं और टीएन शेषन कभी-कभार ही होते हैं। हम नहीं चाहते कि इसे कोई प्रभावित करने की कोशिश करे। तीन व्यक्तियों के नाजुक कंधों पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की गई हैं। सीईसी के पद के लिए हमें सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को खोजना है। सवाल है कि सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को हम कैसे खोजें और सर्वेश्रेष्ठ व्यक्ति को कैसे नियुक्त करें। ' इस बेंच में जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ह्रषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार भी शामिल थे। अगर सामान्य आदमी के तौर पर समझें तो सुप्रीम कोर्ट का कहना इस मायने में पूरी तरह से लाजिमी है कि टीएन शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद से ही चुनाव आयोग सरकार से पूरी तरह से अलग एक स्वतंत्र निकाय के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता हुआ प्रतीत होने लगा है। टीएन शेषन कौन थे ? दिवंगत टीएन शेषन या तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त थे। देश के दसवें सीईसी के तौर पर उनकी नियुक्ति बारह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ नब्बे को हुई थी और उनका कार्यकाल ग्यारह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ छियानवे यानि पूरे पांच के लिए था। उनका जन्म पंद्रह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ बत्तीस को केरल के पलक्कड़ जिले के कालकाडु में हुआ था। वह एक हज़ार नौ सौ पचपन बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी थे। सत्ताईस मार्च, एक हज़ार नौ सौ नवासी से तेईस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ नवासी तक वह भारत सरकार के कैबिनेट सचिव रहे, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च पद माना जाता है। भारत में अबतक जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, उसमें टीएन शेषन एकमात्र ऐसे हैं जिनके आने के बाद से चुनाव आयोग के काम करने का पूरा ढर्रा ही बदल गया है। सीईसी के तौर पर शेषन अपने ऐतिसाहिक चुनाव सुधारों के लिए जाने जाते हैं और उनकी वजह से चुनाव आयोग की गरिमा और प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। क्योंकि, एक हज़ार नौ सौ पचास में अपनी स्थापना के बाद से लेकर टीएन शेषन के पदभार ग्रहण करने से पहले तक भारत का चुनाव आयोग एक तरह से चुनाव पर्यवेक्षक के रोल में ही नजर आता था। वह ऐसा समय था, जब मतदाताओं को रिश्वत देना एक सामान्य व्यवस्था बना दी गई थी, लेकिन शेषन ने चुनाव आयोग का वह अधिकार सुनिश्चित करवाया, जो इसे संविधान में दिया गया था। टीएन शेषन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने के लिए चुनावों के दौरान एक सौ पचास ऐसी कुप्रथाओं की सूची जारी की, जिसपर चुनाव आयोग की ओर से रोक लगा दी गई। इसमें चुनावों के दौरान शराब का वितरण, वोटरों को रिश्वत देना, दीवारों पर लिखना, चुनाव प्रचार के दौरान अनावश्यक शोर और लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल के अलावा भाषण में धर्म का इस्तेमाल आदि। शेषन ने ही वोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था शुरू करवाई जो कि उस समय असंभव लग रहा था। कुछ राजनीतिक दल तो इसका खुलकर विरोध भी करने पर उतारू थे। यही नहीं, चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता नियमित रूप से और सख्ती के साथ लागू होने शुरू हो गए और चुनाव खर्चों की सीमाएं तय की जाने लगीं। उनसे पहले इस सब पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की मनमानी कायम थी। टीएन शेषन ने जिस तरह से तत्कालीन केंद्र सरकार के हितों को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ संविधान और चुनाव नियमों का पालन सुनिश्चित करवाना शुरू किया, उसके चलते सरकार के साथ उनका मतभेद शुरू हो गया। शेषन पर लगाम लगाने के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आर्टिकल तीन सौ बयालीस [तीन] के तहत एक अध्यादेश के जरिए सीईसी के अतिरिक्त दो चुनाव आयुक्तों एमएस गिल और जीवीजी कृष्णमूर्ति की नियुक्ति कर दी। शेषन ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और एक या अधिक चुनाव आयुक्त की व्यवस्था को संवैधानिक करार दिया। यही व्यवस्था आज भी चल रही है। भारत में चुनाव सुधारों को अपने दम पर स्थापित करने की वजह से टीएन शेषन देश में लोकप्रिय तो हो ही चुके थे, उनकी अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि भी कायम हो चुकी थी। देश की चुनाव प्रणाली को स्वच्छ बनाने के लिए एक हज़ार नौ सौ छियानवे में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में टीएन शेषन ने केआर नारायणमूर्ति के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था। दस नवंबर, दो हज़ार उन्नीस को छियासी साल की अवस्था में चेन्नई में उनका निधन हो गया।
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पंचांग के अनुसार, श्री खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन देवउठनी एकादशी भी पड़ती है। आज के दिन श्री खाटू श्याम जी के विधिवत पूजा करने के साथ-साथ विभिन्न तरह के भोग चढ़ाएं जाते हैं। माना जाता है कि श्री खाटूश्याम जी भगवान कृष्ण के कलयुगी अवतार है। राजस्थान के सीकर जिले में श्री खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर स्थापित है। माना जाता है कि यहां पर भगवान के दर्शन करने मात्र से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। जानिए आखिर कौन है श्री खाटूश्याम जी और भगवान श्री कृष्ण ने क्या दिया था वरदान।
कौन है श्री खाटू श्याम जी?
शास्त्रों के अनुसार, श्री खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। वह पांडु पुत्र भीम के पौत्र थे। श्री खाटू श्याम जी काफी शक्तिशाली थे।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब पांडव अपनी जान बचाते हुए एक वन से दूसरे वन घूम रहे थे, तो भीम का सामना हिडिंबा से हुआ। बाद में हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम घटोखा रखा गया। बाद में घटोखा का एक पुत्र हुआ जिसका नाम बर्बरीक रखा गया। यही बर्बरीक आगे चलकर खाटू श्याम कहलाएं।
श्री खाटूश्याम जी की अपार शक्ति और क्षमता देकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। बर्बरीक अपनी शक्ति और क्षमता से हर किसी पर भारी पड़ जाता था। महाभारत के युद्ध के दौरान बर्बरीक ने भी हिस्सा लेने के लिए श्री कृष्ण से कहा। उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा कि वह किसकी तरफ से लड़े, तो श्रीकृष्ण ने कहा कि जो पक्ष हारेगा वह उनकी तरफ से लड़ेगा। लेकिन श्रीकृष्ण युद्ध का परिणाम जानते थे। ऐसे में श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को रोकने के लिए उनके दान की मांग की और उसमें उनका सिर मांग लिया। बर्बरीक ने बिना देर किए अपना सिर उन्हें दान कर दिया। लेकिन बर्बरीक ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की कि वो पूरा महाभारत युद्ध देखना चाहते हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण ने उनके शीश को एक ऊंची पहाड़ी में रख दिया जहां से ह पूरा युद्ध देख पाए। जब पांडव जीत गए तो सब आपस में लड़ने लगे कि आखिर जीत का श्रेय किसे जाए। ऐसे में बर्बरीक ने कहा कि जीत का श्रेय श्रीकृष्ण को जाना चाहिए। बर्बरीक की ये बात सुनकर श्रीकृष्ण काफी खुश हुए और उन्हें कलयुग में खाटू श्याम जी के नाम से पूजे जाने का वरदान दे दिया।
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पंचांग के अनुसार, श्री खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन देवउठनी एकादशी भी पड़ती है। आज के दिन श्री खाटू श्याम जी के विधिवत पूजा करने के साथ-साथ विभिन्न तरह के भोग चढ़ाएं जाते हैं। माना जाता है कि श्री खाटूश्याम जी भगवान कृष्ण के कलयुगी अवतार है। राजस्थान के सीकर जिले में श्री खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर स्थापित है। माना जाता है कि यहां पर भगवान के दर्शन करने मात्र से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। जानिए आखिर कौन है श्री खाटूश्याम जी और भगवान श्री कृष्ण ने क्या दिया था वरदान। कौन है श्री खाटू श्याम जी? शास्त्रों के अनुसार, श्री खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। वह पांडु पुत्र भीम के पौत्र थे। श्री खाटू श्याम जी काफी शक्तिशाली थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब पांडव अपनी जान बचाते हुए एक वन से दूसरे वन घूम रहे थे, तो भीम का सामना हिडिंबा से हुआ। बाद में हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम घटोखा रखा गया। बाद में घटोखा का एक पुत्र हुआ जिसका नाम बर्बरीक रखा गया। यही बर्बरीक आगे चलकर खाटू श्याम कहलाएं। श्री खाटूश्याम जी की अपार शक्ति और क्षमता देकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। बर्बरीक अपनी शक्ति और क्षमता से हर किसी पर भारी पड़ जाता था। महाभारत के युद्ध के दौरान बर्बरीक ने भी हिस्सा लेने के लिए श्री कृष्ण से कहा। उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा कि वह किसकी तरफ से लड़े, तो श्रीकृष्ण ने कहा कि जो पक्ष हारेगा वह उनकी तरफ से लड़ेगा। लेकिन श्रीकृष्ण युद्ध का परिणाम जानते थे। ऐसे में श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को रोकने के लिए उनके दान की मांग की और उसमें उनका सिर मांग लिया। बर्बरीक ने बिना देर किए अपना सिर उन्हें दान कर दिया। लेकिन बर्बरीक ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की कि वो पूरा महाभारत युद्ध देखना चाहते हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण ने उनके शीश को एक ऊंची पहाड़ी में रख दिया जहां से ह पूरा युद्ध देख पाए। जब पांडव जीत गए तो सब आपस में लड़ने लगे कि आखिर जीत का श्रेय किसे जाए। ऐसे में बर्बरीक ने कहा कि जीत का श्रेय श्रीकृष्ण को जाना चाहिए। बर्बरीक की ये बात सुनकर श्रीकृष्ण काफी खुश हुए और उन्हें कलयुग में खाटू श्याम जी के नाम से पूजे जाने का वरदान दे दिया।
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(वाराणसी से पुणे के बीच सीधी विमान सेवा शुरू) ( Image Source : ABP Live )
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के लोगों को बड़ी सौगात मिली है. यूपी में वाराणसी और उसके आसपास के लोगों को एक बड़ी सुविधा मिलनी शुरू हो गई है. वाराणसी से पुणे के बीच सीधी विमान सेवा (Varanasi To Pune Flight) शुरू हो गई है. यह विमान सेवा सप्ताह में हर दिन उपलब्ध रहेगी. यह फ्लाइट सेवा इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) ने शुरू की है. इंडिगो का 6ई 6798 विमान पुणे से 154 यात्रियों को लेकर वाराणसी पहुंचा. इसके बाद यही विमान रात 1. 40 बजे 105 यात्रियों को लेकर वाराणसी से पुणे के लिए रवाना हुआ. इस विमान सेवा से यात्रियों को काफी सुविधा होगी और कुछ घंटों में ही वे इस लंबी दूरी को तय कर पाएंगे.
इंडिगो के इस विमान ने कल यानी 31 मार्च को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली उड़ान भरी. यह सेवा शुरू होने की खुशी यात्रियों के चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी. उनका कहना है कि इससे उन्हें काफी राहत मिली है, क्योंकि ट्रेन से यह दूरी तय करने में काफी समय लग जाता था या फ्लाइट पकड़ने के लिए किसी और शहर में जाना पड़ता था. इसकी वजह से उनका काफी पैसा और समय बर्बाद होता था. पहले उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. वहीं पर्यटक स्थल होने की वजह से वाराणसी आने जाने वाले पर्यटकों को भी इस सेवा से काफी आसानी होगी.
बता दें कि इसके पहले वाराणसी हवाई अड्डे से रात के समय विमानों का संचालन बंद रहता था. रात में 10 बजे के बाद फ्लाइट का संचालन बंद कर दिया जाता था. रात में संचालित होने वाली यह पहली विमान सेवा है. इस वजह से अब रात के समय में भी वहां यात्री दिखाई देंगे और एयरपोर्ट पर चहल-पहल रहेगी. इस सेवा से जहां एक तरफ आवागमन आसान हो जाएगा तो वहीं यह भी हो सकता है कि रात के समय फ्लाइट होने से कम लोग इसमें यात्रा करना चाहें. बता दें कि इसके पहले 28 मार्च को वाराणसी से गोवा के लिए सीधी विमान सेवा शुरू की गई थी.
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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के लोगों को बड़ी सौगात मिली है. यूपी में वाराणसी और उसके आसपास के लोगों को एक बड़ी सुविधा मिलनी शुरू हो गई है. वाराणसी से पुणे के बीच सीधी विमान सेवा शुरू हो गई है. यह विमान सेवा सप्ताह में हर दिन उपलब्ध रहेगी. यह फ्लाइट सेवा इंडिगो एयरलाइंस ने शुरू की है. इंडिगो का छःई छः हज़ार सात सौ अट्ठानवे विमान पुणे से एक सौ चौवन यात्रियों को लेकर वाराणसी पहुंचा. इसके बाद यही विमान रात एक. चालीस बजे एक सौ पाँच यात्रियों को लेकर वाराणसी से पुणे के लिए रवाना हुआ. इस विमान सेवा से यात्रियों को काफी सुविधा होगी और कुछ घंटों में ही वे इस लंबी दूरी को तय कर पाएंगे. इंडिगो के इस विमान ने कल यानी इकतीस मार्च को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली उड़ान भरी. यह सेवा शुरू होने की खुशी यात्रियों के चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी. उनका कहना है कि इससे उन्हें काफी राहत मिली है, क्योंकि ट्रेन से यह दूरी तय करने में काफी समय लग जाता था या फ्लाइट पकड़ने के लिए किसी और शहर में जाना पड़ता था. इसकी वजह से उनका काफी पैसा और समय बर्बाद होता था. पहले उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. वहीं पर्यटक स्थल होने की वजह से वाराणसी आने जाने वाले पर्यटकों को भी इस सेवा से काफी आसानी होगी. बता दें कि इसके पहले वाराणसी हवाई अड्डे से रात के समय विमानों का संचालन बंद रहता था. रात में दस बजे के बाद फ्लाइट का संचालन बंद कर दिया जाता था. रात में संचालित होने वाली यह पहली विमान सेवा है. इस वजह से अब रात के समय में भी वहां यात्री दिखाई देंगे और एयरपोर्ट पर चहल-पहल रहेगी. इस सेवा से जहां एक तरफ आवागमन आसान हो जाएगा तो वहीं यह भी हो सकता है कि रात के समय फ्लाइट होने से कम लोग इसमें यात्रा करना चाहें. बता दें कि इसके पहले अट्ठाईस मार्च को वाराणसी से गोवा के लिए सीधी विमान सेवा शुरू की गई थी.
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बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 (सहकारी सोसायटियों पर यथा लागू) की धारा 35 क के अंतर्गत - निदेश - सीकर अर्बन को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर (राजस्थान)
जनता के सूचनार्थ एतद्वारा अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 56 के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 (सहकारी सोसायटियों पर यथा लागू) की धारा 35 क की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सीकर को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर को कतिपय निदेश जारी किए गए हैं कि दिनांक 9 नवंबर 2018 को कारोबार समाप्ति से, उपर्युक्त बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से लिखित रूप में पूर्वानुमति लिए बिना भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक 26 अक्तूबर 2018 के निदेशों में अधिसूचित सीमा और रीति को छोड़कर, कोई भी ऋण और अग्रिम मंजूर नहीं करेगा या उसका नवीकरण नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा, निधियाँ उधार लेने और नई राशियाँ स्वीकार करने सहित अपने ऊपर कोई देयता नहीं लेगा, कोई भुगतान नहीं करेगा और न ही भुगतान करने के लिए सहमत होगा भले ही, भुगतान उसकी देनदारियों और दायित्वों की चुकौती से या अन्यथा से संबन्धित क्यों न हो, कोई समझौता या इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्ति को न तो बेचेगा, न अंतरित करेगा या अन्यथा रीति से उसका निपटान करेगा। अधिसूचित निदेश की प्रतिलिपि हित रखने वाले जनता के सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक के उपर्युक्त निदेशों में उल्लिखित शर्तों के अधीन प्रत्येक बचत बैंक या चालू खाते में या किसी भी अन्य जमा खाते में कुल शेष में से प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम रू 2,000/- (रूपये दो हजार मात्र) तक की राशि आहरित करने की अनुमति दी गई है।
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निदेश जारी करने का यह अर्थ नहीं लगाया जाये कि रिज़र्व बैंक ने बैंक का लाइसेन्स रद्द कर दिया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक, परिस्थितियों के आधार पर इन निदेशों में संशोधन करने पर विचार कर सकता है।
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बैंककारी विनियमन अधिनियम एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा पैंतीस क के अंतर्गत - निदेश - सीकर अर्बन को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर जनता के सूचनार्थ एतद्वारा अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा छप्पन के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा पैंतीस क की उपधारा के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सीकर को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर को कतिपय निदेश जारी किए गए हैं कि दिनांक नौ नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को कारोबार समाप्ति से, उपर्युक्त बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से लिखित रूप में पूर्वानुमति लिए बिना भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक छब्बीस अक्तूबर दो हज़ार अट्ठारह के निदेशों में अधिसूचित सीमा और रीति को छोड़कर, कोई भी ऋण और अग्रिम मंजूर नहीं करेगा या उसका नवीकरण नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा, निधियाँ उधार लेने और नई राशियाँ स्वीकार करने सहित अपने ऊपर कोई देयता नहीं लेगा, कोई भुगतान नहीं करेगा और न ही भुगतान करने के लिए सहमत होगा भले ही, भुगतान उसकी देनदारियों और दायित्वों की चुकौती से या अन्यथा से संबन्धित क्यों न हो, कोई समझौता या इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्ति को न तो बेचेगा, न अंतरित करेगा या अन्यथा रीति से उसका निपटान करेगा। अधिसूचित निदेश की प्रतिलिपि हित रखने वाले जनता के सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक के उपर्युक्त निदेशों में उल्लिखित शर्तों के अधीन प्रत्येक बचत बैंक या चालू खाते में या किसी भी अन्य जमा खाते में कुल शेष में से प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम रू दो,शून्य/- तक की राशि आहरित करने की अनुमति दी गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निदेश जारी करने का यह अर्थ नहीं लगाया जाये कि रिज़र्व बैंक ने बैंक का लाइसेन्स रद्द कर दिया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक, परिस्थितियों के आधार पर इन निदेशों में संशोधन करने पर विचार कर सकता है।
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इस जीत के बाद सेमीफाइनल मुकाबले में हैदराबाद एफसी का सामना बेंगलुरु एफसी से होगा।
डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट में सोमवार को हुए सेमीफाइनल मुकाबले में इंडियन सुपर लीग चैम्पियन हैदराबाद एफसी ने राजस्थान यूनाइटेड एफसी को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली हैं।
विजेता टीम की ओर से नाइजीरिया के अनुभवी बार्थोलोम्यू ओगबेचे (छठे मिनट) ने पहला गोल करते हुए खाता खोला। जिसके बाद टीम के लिए दूसरा और तीसरा गोल आकाश मिश्रा (45 वें मिनट) और जेवियर सिवेरियो (69 वें मिनट) ने किया।
वहीं राजस्थान टीम की तरफ से उरुग्वे के मार्टिन शावेज ने 29वें मिनट में पेनल्टी को एकमात्र गोल में बदला।
इस जीत के बाद गुरुवार को खेले जाने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में हैदराबाद एफसी का सामना बेंगलुरु एफसी से होगा, जहां दोनों टीमें फाइनल में अपनी जगह बनाने के लिए भिड़ेगी।
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Begin typing your search above and press return to search. इस जीत के बाद सेमीफाइनल मुकाबले में हैदराबाद एफसी का सामना बेंगलुरु एफसी से होगा। डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट में सोमवार को हुए सेमीफाइनल मुकाबले में इंडियन सुपर लीग चैम्पियन हैदराबाद एफसी ने राजस्थान यूनाइटेड एफसी को तीन-एक से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली हैं। विजेता टीम की ओर से नाइजीरिया के अनुभवी बार्थोलोम्यू ओगबेचे ने पहला गोल करते हुए खाता खोला। जिसके बाद टीम के लिए दूसरा और तीसरा गोल आकाश मिश्रा और जेवियर सिवेरियो ने किया। वहीं राजस्थान टीम की तरफ से उरुग्वे के मार्टिन शावेज ने उनतीसवें मिनट में पेनल्टी को एकमात्र गोल में बदला। इस जीत के बाद गुरुवार को खेले जाने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में हैदराबाद एफसी का सामना बेंगलुरु एफसी से होगा, जहां दोनों टीमें फाइनल में अपनी जगह बनाने के लिए भिड़ेगी।
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Kolkata : नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने कहा कि यह सोचना भूल होगी कि 2024 का लोकसभा चुनाव एकतरफा तरीके से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में होगा. उन्होंने कहा कि आगामी आम चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका "साफ तौर पर महत्वपूर्ण होगी. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी में भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने का माद्दा है, लेकिन अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री में भाजपा के प्रति जनता की निराशा की ताकतों को खींचने की क्षमता है.
सेन (90) ने यहां भाषा को दिये विशेष साक्षात्कार में कहा, मुझे लगता है कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण है. मुझे लगता है कि द्रमुक एक महत्वपूर्ण दल है, टीएमसी निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है और समाजवादी पार्टी का भी कुछ प्रभाव है, लेकिन क्या इसे बढ़ाया जा सकता है, यह मुझे नहीं मालूम. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह मानने से इनकार करना एक भूल होगी कि कोई अन्य पार्टी भाजपा का स्थान नहीं ले सकती है, क्योंकि उसने खुद को ऐसी पार्टी के रूप में स्थापित किया है, जिसका शेष देश के मुकाबले हिंदुओं के प्रति झुकाव है. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और जनता दल (यूनाइटेड) समेत कई दलों के नेताओं ने 2024 में लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस को शामिल करते हुए नया गठबंधन बनाने का आह्वान किया है.
उन्होंने जोर दिया है कि द्विध्रुवीय मुकाबले से भाजपा की हार सुनिश्चित होगी. सेन ने कहा, भाजपा ने भारत के दृष्टिकोण को काफी हद तक कम किया है. उसने महज हिंदू भारत और हिंदी भाषी भारत की विचारधारा को काफी मजबूती से उठाकर भारत की समझ को संकीर्ण कर दिया है. अगर आज भारत में भाजपा का कोई विकल्प नहीं पेश किया जाता है, तो यह दुख की बात होगी. उन्होंने कहा, अगर भाजपा मजबूत और शक्तिशाली लगती है, तो उसकी कमजोरियां भी हैं. मुझे लगता है कि अन्य राजनीतिक दल अगर वाकई कोशिश करें, तो एक चर्चा शुरू कर सकते हैं. यह पूछने पर कि क्या बनर्जी देश की अगली प्रधानमंत्री हो सकती हैं, इस पर सेन ने कहा कि उनमें क्षमता है.
उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि उनमें ऐसा करने की क्षमता नहीं है. उनमें साफ तौर पर क्षमता है. दूसरी तरफ, अभी तक यह स्थापित नहीं हुआ है कि ममता एकीकृत तरीके से भाजपा के खिलाफ जनता की निराशा की ताकतों को खींच सकती हैं. सेन ने 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने की कांग्रेस की क्षमता पर संदेह जताया. उन्हें लगता है कि कांग्रेस कमजोर हो गयी है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह इकलौती पार्टी है, जो अखिल भारतीय दृष्टिकोण दे सकती है. उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि कांग्रेस काफी कमजोर हो गयी है और मुझे नहीं पता कि कोई कांग्रेस पर कितना निर्भर रह सकता है. वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस निश्चित तौर पर अखिल भारतीय दृष्टिकोण देती है, जो कोई दूसरी पार्टी नहीं कर सकती. लेकिन, कांग्रेस के भीतर विभाजन है.
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Kolkata : नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने कहा कि यह सोचना भूल होगी कि दो हज़ार चौबीस का लोकसभा चुनाव एकतरफा तरीके से भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होगा. उन्होंने कहा कि आगामी आम चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका "साफ तौर पर महत्वपूर्ण होगी. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी में भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने का माद्दा है, लेकिन अभी यह स्थापित नहीं हुआ है कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री में भाजपा के प्रति जनता की निराशा की ताकतों को खींचने की क्षमता है. सेन ने यहां भाषा को दिये विशेष साक्षात्कार में कहा, मुझे लगता है कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण है. मुझे लगता है कि द्रमुक एक महत्वपूर्ण दल है, टीएमसी निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है और समाजवादी पार्टी का भी कुछ प्रभाव है, लेकिन क्या इसे बढ़ाया जा सकता है, यह मुझे नहीं मालूम. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह मानने से इनकार करना एक भूल होगी कि कोई अन्य पार्टी भाजपा का स्थान नहीं ले सकती है, क्योंकि उसने खुद को ऐसी पार्टी के रूप में स्थापित किया है, जिसका शेष देश के मुकाबले हिंदुओं के प्रति झुकाव है. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और जनता दल समेत कई दलों के नेताओं ने दो हज़ार चौबीस में लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस को शामिल करते हुए नया गठबंधन बनाने का आह्वान किया है. उन्होंने जोर दिया है कि द्विध्रुवीय मुकाबले से भाजपा की हार सुनिश्चित होगी. सेन ने कहा, भाजपा ने भारत के दृष्टिकोण को काफी हद तक कम किया है. उसने महज हिंदू भारत और हिंदी भाषी भारत की विचारधारा को काफी मजबूती से उठाकर भारत की समझ को संकीर्ण कर दिया है. अगर आज भारत में भाजपा का कोई विकल्प नहीं पेश किया जाता है, तो यह दुख की बात होगी. उन्होंने कहा, अगर भाजपा मजबूत और शक्तिशाली लगती है, तो उसकी कमजोरियां भी हैं. मुझे लगता है कि अन्य राजनीतिक दल अगर वाकई कोशिश करें, तो एक चर्चा शुरू कर सकते हैं. यह पूछने पर कि क्या बनर्जी देश की अगली प्रधानमंत्री हो सकती हैं, इस पर सेन ने कहा कि उनमें क्षमता है. उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि उनमें ऐसा करने की क्षमता नहीं है. उनमें साफ तौर पर क्षमता है. दूसरी तरफ, अभी तक यह स्थापित नहीं हुआ है कि ममता एकीकृत तरीके से भाजपा के खिलाफ जनता की निराशा की ताकतों को खींच सकती हैं. सेन ने दो हज़ार चौबीस का लोकसभा चुनाव जीतने की कांग्रेस की क्षमता पर संदेह जताया. उन्हें लगता है कि कांग्रेस कमजोर हो गयी है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह इकलौती पार्टी है, जो अखिल भारतीय दृष्टिकोण दे सकती है. उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि कांग्रेस काफी कमजोर हो गयी है और मुझे नहीं पता कि कोई कांग्रेस पर कितना निर्भर रह सकता है. वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस निश्चित तौर पर अखिल भारतीय दृष्टिकोण देती है, जो कोई दूसरी पार्टी नहीं कर सकती. लेकिन, कांग्रेस के भीतर विभाजन है.
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कार्प, पन्नी में पके हुए - बस स्वादिष्ट!
तो आप अपने परिवार और दोस्तों को परेशान करने के लिए कुछ स्वादिष्ट चाहते हैं। ऐसा लगता है कि कार्प - मछली आम है, लेकिन, कार्प, पन्नी में पके हुए - यह सिर्फ स्वादिष्ट है!
ऐसे ऐपेटाइजिंग डिश को तैयार करने के लिए, कार्प की तरह, पन्नी में पके हुए, हमें ऐसे उत्पादों की आवश्यकता होगीः
- कार्प - 1 किलो 200 ग्राम;
- बड़े बल्गेरियाई काली मिर्च - 1 टुकड़ा;
- Crimean मिठाई प्याज - 1 पीसी।
- मसाले;
जैतून का तेल;
- बड़ा नींबू - 1 टुकड़ा;
- मध्यम आलू - 2 पीसी।
- मध्यम गाजर - 1 पीसी।
हाथ में भी होना चाहिएः
- कांटा।
- Potholder।
- स्पून।
- प्लेट्स।
- Lopatka।
- ओवन।
- कटोरे।
- मेज पर सेवा के लिए डिश।
हम अपने स्वादिष्ट कार्प को पकाते हुए पकाते हैं।
अब आपको एक धनुष तैयार करने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, हम इसे साफ करते हैं, इसे कुल्लाएं और पतली छल्ले में एक तेज चाकू से काट लें। कटा हुआ प्याज हम एक अलग कटोरे पर डाल दिया।
गार्निश में शामिल तीसरा घटक आलू है। आपको इसे साफ करने की आवश्यकता नहीं है। बस इसे अच्छी तरह धो लें और इसे पतली हलकों में काट लें। प्लेट पर सबकुछ रखो।
यह काली मिर्च की बारी थी। यह किसी भी रंग का चयन कर सकता है, इसका स्वाद बदलता नहीं है, आप बस पकवान को एक सुंदर उपस्थिति देते हैं। पिछले सभी उत्पादों की तरह, मिर्च को पानी के नीचे धोया जाना चाहिए और सावधानी से, ताकि नुकसान न पहुंचे, बीज और पूंछ को हटा दें। फिर धो लो हम पतली सर्कल के साथ सब्जी काट के बाद। एक प्लेट पर फैलाओ।
गार्निश का पांचवां हिस्सा अजमोद है। हम इसे धोते हैं, इसे एक तेज चाकू के साथ बोर्ड पर काट लें। अजमोद की एक प्लेट पर पहले से ही नमक और मसाले जोड़ने के लिए आवश्यक है।
महत्वपूर्ण! मुख्य बात यह है कि इसे नमक से अधिक न करें, क्योंकि तब हम मछली को भी नमक देंगे।
जब गार्निश की तैयारी खत्म हो जाती है, तो हम पहले से छिद्रित कार्प लेते हैं और सभी तरफ से मसालों के साथ, और नमक के साथ भी रगड़ते हैं। हम एक घंटे के लिए marin।
हम पतले नींबू काटते हैं।
जब मछली मसालेदार होती है, तो हमारे हिरन लें औरउसकी गाड़ी भरना उसके बाद, नींबू के छल्ले को मछली के अंदर अजमोद में डाल दें। शव में एक तेज पतली चाकू के साथ ऊपर से मछली काट दिया गया है। चीजें एक दूसरे से एक महान दूरी पर बनाई जानी चाहिए।
हम बेकिंग शीट को पन्नी के साथ ढकते हैं और इसे तेल से लुब्रिकेट करते हैं। गार्निश की परतें रखना। पहली परत - आलू, दूसरा - गाजर, तीसरा - प्याज, चौथा मीठा काली मिर्च। हम सब्जियों के शीर्ष पर कार्प्स लगाते हैं। फिर मछली पर, सब्जी गार्निश।
हम सभी सामग्री को उसी फोइल में लपेटते हैं क्योंकि वे बेकिंग ट्रे पर डालते हैं। हम इसे चारों ओर बदल देते हैं ताकि आप किनारों को आसानी से प्रकट कर सकें।
40 के तापमान पर लगभग 40 डिग्री के लिए ओवन और सेंकना गरम करें। हमें मछली मिलती है, पन्नी प्रकट होती है और 5 मिनट तक सेंकना पड़ता है। कार्प हल्के भूरे रंग का होना चाहिए।
खाना पकाने के बाद, साइड डिश और मछली को ठंडा होना चाहिए। फिर हम बेक्ड कार्प को एक डिश में बदल देते हैं, और चारों ओर हम एक सब्जी गार्निश डालते हैं।
लगभग एक ही तकनीक, आप मछली के व्यंजन तैयार कर सकते हैं जैसे "खट्टा क्रीम में पकाया गया कार्प" और "आस्तीन में बेक कार्प"।
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कार्प, पन्नी में पके हुए - बस स्वादिष्ट! तो आप अपने परिवार और दोस्तों को परेशान करने के लिए कुछ स्वादिष्ट चाहते हैं। ऐसा लगता है कि कार्प - मछली आम है, लेकिन, कार्प, पन्नी में पके हुए - यह सिर्फ स्वादिष्ट है! ऐसे ऐपेटाइजिंग डिश को तैयार करने के लिए, कार्प की तरह, पन्नी में पके हुए, हमें ऐसे उत्पादों की आवश्यकता होगीः - कार्प - एक किलो दो सौ ग्राम; - बड़े बल्गेरियाई काली मिर्च - एक टुकड़ा; - Crimean मिठाई प्याज - एक पीसी। - मसाले; जैतून का तेल; - बड़ा नींबू - एक टुकड़ा; - मध्यम आलू - दो पीसी। - मध्यम गाजर - एक पीसी। हाथ में भी होना चाहिएः - कांटा। - Potholder। - स्पून। - प्लेट्स। - Lopatka। - ओवन। - कटोरे। - मेज पर सेवा के लिए डिश। हम अपने स्वादिष्ट कार्प को पकाते हुए पकाते हैं। अब आपको एक धनुष तैयार करने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, हम इसे साफ करते हैं, इसे कुल्लाएं और पतली छल्ले में एक तेज चाकू से काट लें। कटा हुआ प्याज हम एक अलग कटोरे पर डाल दिया। गार्निश में शामिल तीसरा घटक आलू है। आपको इसे साफ करने की आवश्यकता नहीं है। बस इसे अच्छी तरह धो लें और इसे पतली हलकों में काट लें। प्लेट पर सबकुछ रखो। यह काली मिर्च की बारी थी। यह किसी भी रंग का चयन कर सकता है, इसका स्वाद बदलता नहीं है, आप बस पकवान को एक सुंदर उपस्थिति देते हैं। पिछले सभी उत्पादों की तरह, मिर्च को पानी के नीचे धोया जाना चाहिए और सावधानी से, ताकि नुकसान न पहुंचे, बीज और पूंछ को हटा दें। फिर धो लो हम पतली सर्कल के साथ सब्जी काट के बाद। एक प्लेट पर फैलाओ। गार्निश का पांचवां हिस्सा अजमोद है। हम इसे धोते हैं, इसे एक तेज चाकू के साथ बोर्ड पर काट लें। अजमोद की एक प्लेट पर पहले से ही नमक और मसाले जोड़ने के लिए आवश्यक है। महत्वपूर्ण! मुख्य बात यह है कि इसे नमक से अधिक न करें, क्योंकि तब हम मछली को भी नमक देंगे। जब गार्निश की तैयारी खत्म हो जाती है, तो हम पहले से छिद्रित कार्प लेते हैं और सभी तरफ से मसालों के साथ, और नमक के साथ भी रगड़ते हैं। हम एक घंटे के लिए marin। हम पतले नींबू काटते हैं। जब मछली मसालेदार होती है, तो हमारे हिरन लें औरउसकी गाड़ी भरना उसके बाद, नींबू के छल्ले को मछली के अंदर अजमोद में डाल दें। शव में एक तेज पतली चाकू के साथ ऊपर से मछली काट दिया गया है। चीजें एक दूसरे से एक महान दूरी पर बनाई जानी चाहिए। हम बेकिंग शीट को पन्नी के साथ ढकते हैं और इसे तेल से लुब्रिकेट करते हैं। गार्निश की परतें रखना। पहली परत - आलू, दूसरा - गाजर, तीसरा - प्याज, चौथा मीठा काली मिर्च। हम सब्जियों के शीर्ष पर कार्प्स लगाते हैं। फिर मछली पर, सब्जी गार्निश। हम सभी सामग्री को उसी फोइल में लपेटते हैं क्योंकि वे बेकिंग ट्रे पर डालते हैं। हम इसे चारों ओर बदल देते हैं ताकि आप किनारों को आसानी से प्रकट कर सकें। चालीस के तापमान पर लगभग चालीस डिग्री के लिए ओवन और सेंकना गरम करें। हमें मछली मिलती है, पन्नी प्रकट होती है और पाँच मिनट तक सेंकना पड़ता है। कार्प हल्के भूरे रंग का होना चाहिए। खाना पकाने के बाद, साइड डिश और मछली को ठंडा होना चाहिए। फिर हम बेक्ड कार्प को एक डिश में बदल देते हैं, और चारों ओर हम एक सब्जी गार्निश डालते हैं। लगभग एक ही तकनीक, आप मछली के व्यंजन तैयार कर सकते हैं जैसे "खट्टा क्रीम में पकाया गया कार्प" और "आस्तीन में बेक कार्प"।
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आने वाले दिनों में एक नया स्मार्टफोन Realme की ओर से लॉन्च किया जाने वाला है। हालाँकि यह स्मार्टफोन Realme X50 की तरह एक बहुप्रतीक्षित डिवाइस नहीं है, लेकिन इसके बाद भी यह काफी चर्चा में मौजूद है। ऐसा माना जा रहा है कि की ओर से Realme 5i मोबाइल फोन को लॉन्च किया जाने वाला है। इस खबर के लगभग एक महीने पहले ही Realme ने अपने Realme 5, Realme 5 Pro और Realme 5s को लॉन्च किया था। अब इस लिस्ट में यह मोबाइल फोन इन तीन मोबाइल फोंस के बाद चौथा स्मार्टफोन होने वाला है। इस मोबाइल फोन को 6 जनवरी को लॉन्च किया जाने वाला है।
अगर स्पेक्स की बात करें तो लिस्टिंग के अनुसार Realme 5i स्मार्टफोन को एक 6.52-इंच की एक IPS LCD डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जा सकता है, यह एक HD+ रेजोल्यूशन के साथ आयेगा। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको स्नेपड्रैगन 665 प्रोसेसर से लैस हो सकता है, इसके अलावा फोन में आपको 4GB की रैम और 64GB की इंटरनल स्टोरेज मिलने वाली है। फोन को एंड्राइड 9 Pie पर लॉन्च किया जा सकता है, यह कलरOS 6.1 पर काम करने वाला है।
अगर हम Realme 5i मोबाइल फोन की चर्चा करें तो इसमें आपको एक क्वाड-कैमरा सेटअप मिलने वाला है। इस कैमरा में आपको एक 12MP का प्राइमरी कैमरा, इसके अलावा एक 8MP का सेकेंडरी कैमरा उसके अलावा एक 2MP का डेप्थ सेंसर और 2MP का मैक्रो लेंस भी आता है। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको एक 8MP के सेल्फी कैमरा से भी लैस किया गया है। इस मोबाइल फोन में आपको एक 5000mAh क्षमता की बैटरी मिलने वाली है। इसके अलावा इसकी कीमत की अगर बात करें तो यह 4.29 मिलियन VND या लगभग Rs 13,200 की कीमत में लॉन्च किया जा सकता है।
ऐसा भी माना जा रहा है कि इस मोबाइल फोन के साथ एक अन्य मोबाइल फोन को भी लॉन्च किया जाने वाला है। इस मोबाइल फोन का नाम है Realme C3। Realme C3 को IMDA डाटाबेस पर RMX1941 मॉडल नंबर के साथ देखा गया है। यह स्मार्टफोन Realme C2 की जगह लेगा। इस स्मार्टफोन से जुड़ी कोई जानकारी भी सामने नहीं आई है।
Realme C3 की बात करें तो स्मार्टफोन अगला बजट स्मार्टफोन होगा जो C सीरीज़ के तहत आएगा। इस सीरीज़ में Realme C1 और C2 को देखा जा चुका है। रियलमी C2 मोबाइल फोन को 6.1-इंच की ड्यूड्राप नौच के साथ HD+ रेजोल्यूशन की स्क्रीन के साथ लॉन्च किया गया है। मोबाइल फोन को एक ओक्टा-कोर हेलिओ P22 प्रोसेसर के साथ लाया गया है जो 2.0GHz की क्लॉक स्पीड पर काम करता है। इस मोबाइल फोन में आपको एक 4000mAh क्षमता की बैटरी दी गई है।
ऑप्टिक्स के तहत मोबाइल फोन में आपको एक ड्यूल कैमरा सेटअप मिल रहा है, इसमें आपको एक 13MP का प्राइमरी कैमरा और एक 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिल रहा है। इसके अलवा फोन में आपको एक 5MP का सेल्फी कैमरा भी मिल रहा है। इस मोबाइल फोन को ट्रिपल सिम स्लॉट के साथ लॉन्च किया गया है। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको कैमरा के साथ स्लो मोशन फीचर भी मिल रहा है। इसके साथ ही इसमें आपको एक AI फेशियल अनलॉक फीचर भी मिल रहा है।
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आने वाले दिनों में एक नया स्मार्टफोन Realme की ओर से लॉन्च किया जाने वाला है। हालाँकि यह स्मार्टफोन Realme Xपचास की तरह एक बहुप्रतीक्षित डिवाइस नहीं है, लेकिन इसके बाद भी यह काफी चर्चा में मौजूद है। ऐसा माना जा रहा है कि की ओर से Realme पाँचi मोबाइल फोन को लॉन्च किया जाने वाला है। इस खबर के लगभग एक महीने पहले ही Realme ने अपने Realme पाँच, Realme पाँच Pro और Realme पाँच सेकंड को लॉन्च किया था। अब इस लिस्ट में यह मोबाइल फोन इन तीन मोबाइल फोंस के बाद चौथा स्मार्टफोन होने वाला है। इस मोबाइल फोन को छः जनवरी को लॉन्च किया जाने वाला है। अगर स्पेक्स की बात करें तो लिस्टिंग के अनुसार Realme पाँचi स्मार्टफोन को एक छः.बावन-इंच की एक IPS LCD डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जा सकता है, यह एक HD+ रेजोल्यूशन के साथ आयेगा। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको स्नेपड्रैगन छः सौ पैंसठ प्रोसेसर से लैस हो सकता है, इसके अलावा फोन में आपको चारGB की रैम और चौंसठGB की इंटरनल स्टोरेज मिलने वाली है। फोन को एंड्राइड नौ Pie पर लॉन्च किया जा सकता है, यह कलरOS छः.एक पर काम करने वाला है। अगर हम Realme पाँचi मोबाइल फोन की चर्चा करें तो इसमें आपको एक क्वाड-कैमरा सेटअप मिलने वाला है। इस कैमरा में आपको एक बारहMP का प्राइमरी कैमरा, इसके अलावा एक आठMP का सेकेंडरी कैमरा उसके अलावा एक दोMP का डेप्थ सेंसर और दोMP का मैक्रो लेंस भी आता है। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको एक आठMP के सेल्फी कैमरा से भी लैस किया गया है। इस मोबाइल फोन में आपको एक पाँच हज़ारmAh क्षमता की बैटरी मिलने वाली है। इसके अलावा इसकी कीमत की अगर बात करें तो यह चार.उनतीस मिलियन VND या लगभग तेरह रुपया,दो सौ की कीमत में लॉन्च किया जा सकता है। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस मोबाइल फोन के साथ एक अन्य मोबाइल फोन को भी लॉन्च किया जाने वाला है। इस मोबाइल फोन का नाम है Realme Cतीन। Realme Cतीन को IMDA डाटाबेस पर RMXएक हज़ार नौ सौ इकतालीस मॉडल नंबर के साथ देखा गया है। यह स्मार्टफोन Realme Cदो की जगह लेगा। इस स्मार्टफोन से जुड़ी कोई जानकारी भी सामने नहीं आई है। Realme Cतीन की बात करें तो स्मार्टफोन अगला बजट स्मार्टफोन होगा जो C सीरीज़ के तहत आएगा। इस सीरीज़ में Realme Cएक और Cदो को देखा जा चुका है। रियलमी Cदो मोबाइल फोन को छः.एक-इंच की ड्यूड्राप नौच के साथ HD+ रेजोल्यूशन की स्क्रीन के साथ लॉन्च किया गया है। मोबाइल फोन को एक ओक्टा-कोर हेलिओ Pबाईस प्रोसेसर के साथ लाया गया है जो दो.शून्यGHz की क्लॉक स्पीड पर काम करता है। इस मोबाइल फोन में आपको एक चार हज़ारmAh क्षमता की बैटरी दी गई है। ऑप्टिक्स के तहत मोबाइल फोन में आपको एक ड्यूल कैमरा सेटअप मिल रहा है, इसमें आपको एक तेरहMP का प्राइमरी कैमरा और एक दोMP का सेकेंडरी कैमरा मिल रहा है। इसके अलवा फोन में आपको एक पाँचMP का सेल्फी कैमरा भी मिल रहा है। इस मोबाइल फोन को ट्रिपल सिम स्लॉट के साथ लॉन्च किया गया है। इसके अलावा इस मोबाइल फोन में आपको कैमरा के साथ स्लो मोशन फीचर भी मिल रहा है। इसके साथ ही इसमें आपको एक AI फेशियल अनलॉक फीचर भी मिल रहा है।
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यूपी बोर्ड हाईस्कूल में इस बार टॉपर लिस्ट में दूसरे नंबर पर संयुक्त रूप से दो परीक्षार्थी रहे। दोनों को 97।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही छात्रों के सामने एक परेशानी आ जाती है। यह परेशानी है अपने रिजल्ट का पास प्रतिशत यानी पर्सेंटेज निकालने की है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम घोषित किया जा चुका है। इस बार हाई स्कूल में कुल पंजीकृत में से 13,16,487 छात्र पास हुए हैं। वहीं उच्च माध्यमिक की परीक्षा में 27,69,258 बच्चों ने किया था पंजीकरण। हाई स्कूल 89. 76 प्रतिशत पास हुए हैं जबकि उच्च माध्यमिक में 75. 52 प्रतिशत पास हुए।
यूपी बोर्ड 2023 के परिणामों में कक्षा 12वीं में स्टेट टॉपर शुभ चपरा बने हैं तो वहीं कक्षा 10वीं में प्रियांशी सोनी ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से घोषित नतीजों में इस साल छोटे जिलों का दबदबा मेरिट सूची में अधिक रहा है। जबकि बीते वर्षों में मेरिट सूची में छाए रहने वाले बड़े जिले और मंडल मुख्यालय इस बार टॉप-5 मेधावियों की सूची में नदारद से दिखे हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से मंगलवार, 25 अप्रैल को यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। यूपी बोर्ड हाई स्कूल और इंटरमीडिएट रिजल्ट जारी होने के साथ ही टॉपर्स की प्रतिक्रियाएं और अभिलाषाएं भी सामने आ गईं।
UP Board Result Toppers 2023: यूपी बोर्ड नतीजों का मंगलवार, 25 अप्रैल को एलान हुआ। इस साल रिजल्ट में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 89. 78 फीसदी तो इंटरमीडिएट यानी 12वीं में पास प्रतिशत 75. 52 फीसदी रहा है।
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यूपी बोर्ड हाईस्कूल में इस बार टॉपर लिस्ट में दूसरे नंबर पर संयुक्त रूप से दो परीक्षार्थी रहे। दोनों को सत्तानवे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही छात्रों के सामने एक परेशानी आ जाती है। यह परेशानी है अपने रिजल्ट का पास प्रतिशत यानी पर्सेंटेज निकालने की है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा दसवीं और बारहवीं का परिणाम घोषित किया जा चुका है। इस बार हाई स्कूल में कुल पंजीकृत में से तेरह,सोलह,चार सौ सत्तासी छात्र पास हुए हैं। वहीं उच्च माध्यमिक की परीक्षा में सत्ताईस,उनहत्तर,दो सौ अट्ठावन बच्चों ने किया था पंजीकरण। हाई स्कूल नवासी. छिहत्तर प्रतिशत पास हुए हैं जबकि उच्च माध्यमिक में पचहत्तर. बावन प्रतिशत पास हुए। यूपी बोर्ड दो हज़ार तेईस के परिणामों में कक्षा बारहवीं में स्टेट टॉपर शुभ चपरा बने हैं तो वहीं कक्षा दसवीं में प्रियांशी सोनी ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से घोषित नतीजों में इस साल छोटे जिलों का दबदबा मेरिट सूची में अधिक रहा है। जबकि बीते वर्षों में मेरिट सूची में छाए रहने वाले बड़े जिले और मंडल मुख्यालय इस बार टॉप-पाँच मेधावियों की सूची में नदारद से दिखे हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से मंगलवार, पच्चीस अप्रैल को यूपी बोर्ड परीक्षा दो हज़ार तेईस का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। यूपी बोर्ड हाई स्कूल और इंटरमीडिएट रिजल्ट जारी होने के साथ ही टॉपर्स की प्रतिक्रियाएं और अभिलाषाएं भी सामने आ गईं। UP Board Result Toppers दो हज़ार तेईस: यूपी बोर्ड नतीजों का मंगलवार, पच्चीस अप्रैल को एलान हुआ। इस साल रिजल्ट में हाईस्कूल का पास प्रतिशत नवासी. अठहत्तर फीसदी तो इंटरमीडिएट यानी बारहवीं में पास प्रतिशत पचहत्तर. बावन फीसदी रहा है।
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इस्लामिक शरीअत के मुताबिक मुसलमान बंदों एक फर्ज रोज़ा (व्रत रखना) है। इस मुबारक बरकत महीने का आगाज हो चुका है। नमाजे एशा के वक्त तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है। जंगेबदर (बदर के युद्ध) से एक माह और कुछ दिन पूर्व रमजान के रोजों की फर्जियत का हुक्म नाजिल हुआ। तबसे पूरी दुनिया के मुसलमान 29 या 30 दिन के रोज़े रखते हैं। इसमें लोग सूर्य निकलने से पहले से सूर्य डूबने तक किसी भी तरह की चीज खाने-पीने से परहेज करते हैं। यह सिलसिला पूरे माह चलता रहता है।
कुछ असहाब का ख्याल है कि रमज़ान गुनाहों को जला देता है। हजरत सलमान फारसी रजि. से खायत है कि हुजूर साहब ने फरमाया ए लोगों एक अजीमुलमुरत्तब और बरकतों वाला वह महीना आ रहा है, जिसमें एक रात ऐसी है, जो हजार महीनों से अफजल है। इस महीने की रातों में इबादत को अफजल करार देते हुए रमज़ान के रोजे अल्लाह ने फर्ज किए हैं। जिस शख्स ने इस महीने में एक नेकी भी या फर्ज अदा किया, उसका अजरा (बदला) उस सख्त की तरह होगा, जिसने किसी दूसरे महीने में सत्तर फर्ज अदा किए। यह महीना सब्र का है और सब्र का सिला जन्नत हैं।
वह महीना नेकी पहुंचाने का है। इस महीने मोमिन की रोजी में इजाफा किया जाता है। जिस शख्स ने किसी रोजेदार को अफतार कराया, उसके गुनाह (पाप) बख्श दिए गए। उसकी गर्दन अतिशे दोजख (नर्क की आग) से आजाद की जाएगी और रोजेदार के रोजे का सवाब कम किए बगैर अफतार कराने वाले को भी रोजेदार के बराबर का सवाब मिलेगा। सहाबाकराम रजि. ने अर्ज किया हैं यह महीना ऐसा है, इसका पहला हिस्सा रहमत है, दरमियानी (मध्य) मगफिरत है और आखिरी हिस्सा दोजख से आजादी है। माह शैतान कैद कर दिए जाते हैं।
Roza kis karan rkha jata hai???
रमज़ान के21 वे रोज़े पर कौन सी आयात नाज़िल हुई है और किस साहबी या बुज़ुर्ग का इंतकाल या पैदाइश हुई है।
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इस्लामिक शरीअत के मुताबिक मुसलमान बंदों एक फर्ज रोज़ा है। इस मुबारक बरकत महीने का आगाज हो चुका है। नमाजे एशा के वक्त तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है। जंगेबदर से एक माह और कुछ दिन पूर्व रमजान के रोजों की फर्जियत का हुक्म नाजिल हुआ। तबसे पूरी दुनिया के मुसलमान उनतीस या तीस दिन के रोज़े रखते हैं। इसमें लोग सूर्य निकलने से पहले से सूर्य डूबने तक किसी भी तरह की चीज खाने-पीने से परहेज करते हैं। यह सिलसिला पूरे माह चलता रहता है। कुछ असहाब का ख्याल है कि रमज़ान गुनाहों को जला देता है। हजरत सलमान फारसी रजि. से खायत है कि हुजूर साहब ने फरमाया ए लोगों एक अजीमुलमुरत्तब और बरकतों वाला वह महीना आ रहा है, जिसमें एक रात ऐसी है, जो हजार महीनों से अफजल है। इस महीने की रातों में इबादत को अफजल करार देते हुए रमज़ान के रोजे अल्लाह ने फर्ज किए हैं। जिस शख्स ने इस महीने में एक नेकी भी या फर्ज अदा किया, उसका अजरा उस सख्त की तरह होगा, जिसने किसी दूसरे महीने में सत्तर फर्ज अदा किए। यह महीना सब्र का है और सब्र का सिला जन्नत हैं। वह महीना नेकी पहुंचाने का है। इस महीने मोमिन की रोजी में इजाफा किया जाता है। जिस शख्स ने किसी रोजेदार को अफतार कराया, उसके गुनाह बख्श दिए गए। उसकी गर्दन अतिशे दोजख से आजाद की जाएगी और रोजेदार के रोजे का सवाब कम किए बगैर अफतार कराने वाले को भी रोजेदार के बराबर का सवाब मिलेगा। सहाबाकराम रजि. ने अर्ज किया हैं यह महीना ऐसा है, इसका पहला हिस्सा रहमत है, दरमियानी मगफिरत है और आखिरी हिस्सा दोजख से आजादी है। माह शैतान कैद कर दिए जाते हैं। Roza kis karan rkha jata hai??? रमज़ान केइक्कीस वे रोज़े पर कौन सी आयात नाज़िल हुई है और किस साहबी या बुज़ुर्ग का इंतकाल या पैदाइश हुई है।
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Chandigarh/Alive News: जननायक जनता पार्टी ने अपने संगठन में विस्तार करते हुए राष्ट्रीय, प्रदेश व हलका स्तर पर कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की है। जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह चौटाला, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जेजेपी प्रदेशाध्यक्ष सरदार निशान सिंह व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विचार-विमर्श के बाद 11 पदाधिकारियों की नियुक्तियों की सूची जारी की।
जेजेपी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री अनूप धानक को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी हैं। वहीं जुलाना से पार्टी के विधायक अमरजीत ढांडा को किसान प्रकोष्ठ और दादरी से पूर्व विधायक एवं हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन राजदीप फौगाट को खेल प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया हैं।
जेजेपी राष्ट्रीय सचिव के पद पर जींद निवासी ईश्वर उझानियां, भिवानी निवासी बलदेव घणघस, हिसार निवासी हरफूल खान भट्टी और फरीदाबाद निवासी कृष्ण जाखड़ को नियुक्त किया है। वहीं पलवल निवासी भूदेव शर्मा और राजस्थान से भादरा निवासी एडवोकेट अदरीश खान राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य होंगे।
इनके अलावा पार्टी द्वारा हलका स्तर की नियुक्तियों में नारायणगढ़ हलके में एडवोकेट हरविलास सिंह को ग्रामीण हलका अध्यक्ष व पलवल में भगत सिंह घुघेरा को हलका प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी है।
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Chandigarh/Alive News: जननायक जनता पार्टी ने अपने संगठन में विस्तार करते हुए राष्ट्रीय, प्रदेश व हलका स्तर पर कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की है। जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह चौटाला, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जेजेपी प्रदेशाध्यक्ष सरदार निशान सिंह व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विचार-विमर्श के बाद ग्यारह पदाधिकारियों की नियुक्तियों की सूची जारी की। जेजेपी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री अनूप धानक को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी हैं। वहीं जुलाना से पार्टी के विधायक अमरजीत ढांडा को किसान प्रकोष्ठ और दादरी से पूर्व विधायक एवं हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन राजदीप फौगाट को खेल प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया हैं। जेजेपी राष्ट्रीय सचिव के पद पर जींद निवासी ईश्वर उझानियां, भिवानी निवासी बलदेव घणघस, हिसार निवासी हरफूल खान भट्टी और फरीदाबाद निवासी कृष्ण जाखड़ को नियुक्त किया है। वहीं पलवल निवासी भूदेव शर्मा और राजस्थान से भादरा निवासी एडवोकेट अदरीश खान राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य होंगे। इनके अलावा पार्टी द्वारा हलका स्तर की नियुक्तियों में नारायणगढ़ हलके में एडवोकेट हरविलास सिंह को ग्रामीण हलका अध्यक्ष व पलवल में भगत सिंह घुघेरा को हलका प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी है।
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Ranchi: डीएवी पब्लिक स्कूल हेहल,राँची में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को धारण कर बड़ी धूमधाम से मनाया गया. विद्यालय के प्राचार्य एस के मिश्रा ने बच्चों एवं शिक्षकों के साथ योगाचार्य स्वामी मुक्तरथ जी के मार्गदर्शन में सूर्यनमस्कार, ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तासन एवं शवासन आदि का अभ्यास किया.
विद्यालय के प्राचार्य ने योग का अर्थ बताते हुए कहा कि यह शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है. हमें इसे स्वस्थ एवं निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग एवं प्राणायाम का अभ्यास करते हुए वेदानुकूल जीवन संगच्छध्वं संवदध्वं' के अनुरूप जीना चाहिए. क्योंकि 'योग' कम्युनिटी, इम्युनिटी और यूनिटी सबके लिए अच्छा साधन है.
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Ranchi: डीएवी पब्लिक स्कूल हेहल,राँची में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को धारण कर बड़ी धूमधाम से मनाया गया. विद्यालय के प्राचार्य एस के मिश्रा ने बच्चों एवं शिक्षकों के साथ योगाचार्य स्वामी मुक्तरथ जी के मार्गदर्शन में सूर्यनमस्कार, ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तासन एवं शवासन आदि का अभ्यास किया. विद्यालय के प्राचार्य ने योग का अर्थ बताते हुए कहा कि यह शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है. हमें इसे स्वस्थ एवं निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग एवं प्राणायाम का अभ्यास करते हुए वेदानुकूल जीवन संगच्छध्वं संवदध्वं' के अनुरूप जीना चाहिए. क्योंकि 'योग' कम्युनिटी, इम्युनिटी और यूनिटी सबके लिए अच्छा साधन है.
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MOTIHARI : मोतिहारी डीएम सौरभ जोरवाल द्वारा बुधवार को अरेराज अनुमंडलीय अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। डीएम ने अनुमंडलीय अस्पताल के ओपीडी, एक्सरे कक्ष, दंत विभाग, वाह्य कक्ष, महिला वाह्य रोगी कक्ष, प्रसव कक्ष, लैब, इमरजेंसी रूम, दवा वितरण केन्द्र, अल्ट्रासाउंड, एईएस व जेई वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, सहित अन्य वार्डों का जायजा लिया। साथ ही मरीज व मरीजों के परिजनों से कर्मचारियों द्वारा दिये जा रहे उपचार व सुविधाओं की जानकारी प्राप्त किया। वही अस्पताल उपाधीक्षक डॉ उज्वल कुमार को कई आवश्यक निर्देश दिए।
वही अनुमंडलीय अस्पताल स्थित एएनएम प्रशिक्षण स्कूल के सभागार में डीएम सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में अनुमंडल स्तरीय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक की गई. बैठक में अनुमंडल के सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबन्धक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक व लेखपाल के साथ स्वास्थ्य संबंधित कई बिंदुओं की समीक्षा की गयी. डीएम ने सरकार के स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया. डॉक्टरों को निदेशित किया कि वे स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो तो त्वरित उसका निदान करे .
उन्होंने दवा आदि के बारे में बिंदुवार जानकारी प्राप्त किया. साथ ही चेतावनी दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों को नहीं बक्सा जाएगा. उन्होंने गर्भवती महिलाओं के इलाज पर विशेष ध्यान देने व सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही. सबसे खराब स्थिति वाले हरसिद्धि व पहाड़पुर पीएचसी के प्रभारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों प्रभारी अपनी स्थिति में सुधार लाएं. अन्यथा विभागीय कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जायेगी.
समीक्षा के दौरान अनुमंडल के सभी प्रखंड में अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने को लेकर कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया. एसडीएम संजीव कुमार, डीआरओ शरत शरण चन्द्र शर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी रंजीत राय, अनुमंडलीय अस्पताल उपाधीक्षक कर्नल डॉ. उज्ज्वल प्रताप ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया. मौके पर प्रशिक्षु आईएएस ऋतुराज सिंह, डॉ कमल ज्योति गौरव, एएनएम स्कूल की प्राचार्या सोनी कुमारी, प्रो. रोहित आनंद, सहित कई डाक्टर आदि उपस्थित थे.
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MOTIHARI : मोतिहारी डीएम सौरभ जोरवाल द्वारा बुधवार को अरेराज अनुमंडलीय अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। डीएम ने अनुमंडलीय अस्पताल के ओपीडी, एक्सरे कक्ष, दंत विभाग, वाह्य कक्ष, महिला वाह्य रोगी कक्ष, प्रसव कक्ष, लैब, इमरजेंसी रूम, दवा वितरण केन्द्र, अल्ट्रासाउंड, एईएस व जेई वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, सहित अन्य वार्डों का जायजा लिया। साथ ही मरीज व मरीजों के परिजनों से कर्मचारियों द्वारा दिये जा रहे उपचार व सुविधाओं की जानकारी प्राप्त किया। वही अस्पताल उपाधीक्षक डॉ उज्वल कुमार को कई आवश्यक निर्देश दिए। वही अनुमंडलीय अस्पताल स्थित एएनएम प्रशिक्षण स्कूल के सभागार में डीएम सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में अनुमंडल स्तरीय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक की गई. बैठक में अनुमंडल के सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य प्रबन्धक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक व लेखपाल के साथ स्वास्थ्य संबंधित कई बिंदुओं की समीक्षा की गयी. डीएम ने सरकार के स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया. डॉक्टरों को निदेशित किया कि वे स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी समस्या हो तो त्वरित उसका निदान करे . उन्होंने दवा आदि के बारे में बिंदुवार जानकारी प्राप्त किया. साथ ही चेतावनी दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों को नहीं बक्सा जाएगा. उन्होंने गर्भवती महिलाओं के इलाज पर विशेष ध्यान देने व सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही. सबसे खराब स्थिति वाले हरसिद्धि व पहाड़पुर पीएचसी के प्रभारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों प्रभारी अपनी स्थिति में सुधार लाएं. अन्यथा विभागीय कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जायेगी. समीक्षा के दौरान अनुमंडल के सभी प्रखंड में अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने को लेकर कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया. एसडीएम संजीव कुमार, डीआरओ शरत शरण चन्द्र शर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी रंजीत राय, अनुमंडलीय अस्पताल उपाधीक्षक कर्नल डॉ. उज्ज्वल प्रताप ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया. मौके पर प्रशिक्षु आईएएस ऋतुराज सिंह, डॉ कमल ज्योति गौरव, एएनएम स्कूल की प्राचार्या सोनी कुमारी, प्रो. रोहित आनंद, सहित कई डाक्टर आदि उपस्थित थे.
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बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी इस वैकेंसी में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को 20 अक्टूबर 2022 तक का समय दिया गया है. अप्लाई करने के लिए वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाएं.
बिहार सिविल कोर्ट में नौकरी पाने का शानदार मौका सामने आया है. Bihar Civil Court में ग्रुप सी पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस वैकेंसी के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं. इसमें आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाना होगा. इस वैकेंसी के माध्यम से कुल 7,692 पदों पर भर्तियां की जाएंगी. इसमें आवेदन करने से पहले उम्मीदवार वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन चेक कर लें.
बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी Bihar Group C Job के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी 20 सितंबर 2022 से शुरू हो गई है. इसमें अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को 20 अक्टूबर 2022 तक का समय दिया गया है. इस वैकेंसी के लिए परीक्षा की तारीखों की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है. जो उम्मीदवार इसमें आवेदन करना चाहते हैं वो नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करें.
स्टेप 1- इस वैकेंसी में आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाएं.
स्टेप 2- वेबसाइट की होम पेज पर Recruitment के लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3- इसके बाद Bihar Civil Court Stenographer, Clerk, Peon and Court Reader Recruitment 2022 Online Form के लिंक पर जाएं.
स्टेप 4- अब Apply Now के ऑप्शन पर जाएं.
स्टेप 5- सबसे पहले मोबाइल नंबर और ईमेल से रजिस्ट्रेशन कर लें.
स्टेप 6- रजिस्ट्रेशन के बाद अप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं.
स्टेप 7- आवेदन फॉर्म का प्रिंट जरूर ले लें.
डायरेक्ट लिंक से अप्लाई करने के लिए यहां क्लिक करें.
इस वैकेंसी में अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग योग्यताएं तय की गई हैं. इसमें क्लर्क के पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर की जानकारी होनी चाहिए. वहीं, स्टेनोग्राफर और कोर्ट रीडर के पद पर आवेदन करने के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ स्टेनोग्राफी और कंप्यूटर नॉलेज मांगी गई है.
इसके अलावा चपरासी के पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को 10वीं पास होना अनिवार्य है. अधिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के भी सिर्फ 10वीं पास की योग्यता मान्य होगी. इसमें आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की उम्र 18 साल से अधिक और 37 साल से कम होनी चाहिए. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिफिकेशन देखें.
बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, इस वैकेंसी में उम्मीदवारों का चयन तीन स्तर की परीक्षाओं से होगा. इसमें सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा होगी. इसमें सेलेक्ट होने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा. लास्ट में इंटरव्यू राउंड का आयोजन किया जाएगा. ऑफिशियल नोटिफिकेशन में एग्जाम की डिटेल्स देख सकते हैं.
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बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी इस वैकेंसी में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को बीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस तक का समय दिया गया है. अप्लाई करने के लिए वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाएं. बिहार सिविल कोर्ट में नौकरी पाने का शानदार मौका सामने आया है. Bihar Civil Court में ग्रुप सी पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस वैकेंसी के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं. इसमें आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाना होगा. इस वैकेंसी के माध्यम से कुल सात,छः सौ बानवे पदों पर भर्तियां की जाएंगी. इसमें आवेदन करने से पहले उम्मीदवार वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन चेक कर लें. बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी Bihar Group C Job के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी बीस सितंबर दो हज़ार बाईस से शुरू हो गई है. इसमें अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को बीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस तक का समय दिया गया है. इस वैकेंसी के लिए परीक्षा की तारीखों की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है. जो उम्मीदवार इसमें आवेदन करना चाहते हैं वो नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करें. स्टेप एक- इस वैकेंसी में आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट districts.ecourts.gov.in पर जाएं. स्टेप दो- वेबसाइट की होम पेज पर Recruitment के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप तीन- इसके बाद Bihar Civil Court Stenographer, Clerk, Peon and Court Reader Recruitment दो हज़ार बाईस Online Form के लिंक पर जाएं. स्टेप चार- अब Apply Now के ऑप्शन पर जाएं. स्टेप पाँच- सबसे पहले मोबाइल नंबर और ईमेल से रजिस्ट्रेशन कर लें. स्टेप छः- रजिस्ट्रेशन के बाद अप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. स्टेप सात- आवेदन फॉर्म का प्रिंट जरूर ले लें. डायरेक्ट लिंक से अप्लाई करने के लिए यहां क्लिक करें. इस वैकेंसी में अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग योग्यताएं तय की गई हैं. इसमें क्लर्क के पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर की जानकारी होनी चाहिए. वहीं, स्टेनोग्राफर और कोर्ट रीडर के पद पर आवेदन करने के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ स्टेनोग्राफी और कंप्यूटर नॉलेज मांगी गई है. इसके अलावा चपरासी के पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को दसवीं पास होना अनिवार्य है. अधिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के भी सिर्फ दसवीं पास की योग्यता मान्य होगी. इसमें आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की उम्र अट्ठारह साल से अधिक और सैंतीस साल से कम होनी चाहिए. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिफिकेशन देखें. बिहार सिविल कोर्ट की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, इस वैकेंसी में उम्मीदवारों का चयन तीन स्तर की परीक्षाओं से होगा. इसमें सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा होगी. इसमें सेलेक्ट होने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा. लास्ट में इंटरव्यू राउंड का आयोजन किया जाएगा. ऑफिशियल नोटिफिकेशन में एग्जाम की डिटेल्स देख सकते हैं. और भी करियर की खबरें यहां देखें.
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जयपुर - - - - - चिकित्सा स्वास्थ्य और आबकारी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में सोमवार को व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गयीं। इस अवसर पर सभी जिलों में जनजागरूकता रैलियां, संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन इत्यादि के माध्यम से आमजन को नशे से दूर रहने के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
राज्य नोडल अधिकारी नशा मुक्ति डॉ. रामबाबू जायसवाल ने बताया कि प्रदेशभर में नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित आयोजनों में मंत्रीगण, स्थानीय सांसद व विधायकगण जनप्रनिधिगणों सहित प्रशासनिक अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों, चिकित्सा व आबकारी विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों सहित स्वास्थ्य कार्मिकों ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि जनसमुदाय को नशे से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देकर जीवन में नशे से दूर रहने के संकल्प पत्र भी आमजन से भरवाये गये हैं। नशे की लत से दूर रहने या नशा मुक्ति के लिए व्यक्ति को स्वयं शुरूआत करनी होती है, इसी उद्देश्य से आमजन के साथ मिलकर व्यापक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गयी हैं।
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जयपुर - - - - - चिकित्सा स्वास्थ्य और आबकारी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में सोमवार को व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गयीं। इस अवसर पर सभी जिलों में जनजागरूकता रैलियां, संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन इत्यादि के माध्यम से आमजन को नशे से दूर रहने के संदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। राज्य नोडल अधिकारी नशा मुक्ति डॉ. रामबाबू जायसवाल ने बताया कि प्रदेशभर में नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित आयोजनों में मंत्रीगण, स्थानीय सांसद व विधायकगण जनप्रनिधिगणों सहित प्रशासनिक अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों, चिकित्सा व आबकारी विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों सहित स्वास्थ्य कार्मिकों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि जनसमुदाय को नशे से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देकर जीवन में नशे से दूर रहने के संकल्प पत्र भी आमजन से भरवाये गये हैं। नशे की लत से दूर रहने या नशा मुक्ति के लिए व्यक्ति को स्वयं शुरूआत करनी होती है, इसी उद्देश्य से आमजन के साथ मिलकर व्यापक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गयी हैं।
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24 बडे़ राज्यों में कंपनियों से तेल नहीं खरीदने का अपना विरोध जताया है। गौरतलब है कि पेट्रोलियम कंपनियों और डीलर संघों के बीच कमीशन को लेकर जो समझौता किया गया था उसके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल डीलरों के मार्जिन में प्रत्येक छह माह में संशोधन किया जाना था, लेकिन बीते पांच साल यानी 2017 से इसमें संशोधन नहीं किया गया है।
आज 31 मई को देश के लगभग 70 हजार पेट्रोल-पंप तेल विपणन कंपनियों से पेट्रोल-डीजल नहीं खरीदेंगे। पंप मालिकों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ने के बाद पेट्रोलियम कंपनियां जमकर फायदा ले रही हैं, लेकिन डीलर्स के कमीशन में कोई इजाफा नहीं किया गया है। इस वजह से एक दिन कंपनियों से तेल न खरीदने का निर्णय लिया गया है।
कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को देश के 24 राज्यों के पेट्रोल पंप मालिकों ने यह बड़ा एलान किया था कि बुधवार यानी मई महीने के आखिरी दिन वह अपना विरोध इस तरह से जाहिर करेंगे। इस क्रम में आज करीब 70 हजार पेट्रोल पंप मालिक विरोध कर रहे हैं। हालांकि, पेट्रोल पंपों के टैंक में काफी भंडार रहता है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आने की आशंका नहीं है।
ईंधन डीलर संगठनों ने 24 बडे़ राज्यों में कंपनियों से तेल नहीं खरीदने का अपना विरोध जताया है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम के अलावा उत्तर बंगाल और यूपी, मध्य प्रदेश के भी कई डीलर शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि पेट्रोलियम कंपनियों और डीलर संघों के बीच कमीशन को लेकर जो समझौता किया गया था उसके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल डीलरों के मार्जिन में प्रत्येक छह माह में संशोधन किया जाना था, लेकिन बीते पांच साल यानी 2017 से इसमें संशोधन नहीं किया गया है। ऐसे में अब कमीशन बढ़ाने को लेकर उनकी मांग ने विरोध का रूप अख्तियार कर लिया है।
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चौबीस बडे़ राज्यों में कंपनियों से तेल नहीं खरीदने का अपना विरोध जताया है। गौरतलब है कि पेट्रोलियम कंपनियों और डीलर संघों के बीच कमीशन को लेकर जो समझौता किया गया था उसके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल डीलरों के मार्जिन में प्रत्येक छह माह में संशोधन किया जाना था, लेकिन बीते पांच साल यानी दो हज़ार सत्रह से इसमें संशोधन नहीं किया गया है। आज इकतीस मई को देश के लगभग सत्तर हजार पेट्रोल-पंप तेल विपणन कंपनियों से पेट्रोल-डीजल नहीं खरीदेंगे। पंप मालिकों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ने के बाद पेट्रोलियम कंपनियां जमकर फायदा ले रही हैं, लेकिन डीलर्स के कमीशन में कोई इजाफा नहीं किया गया है। इस वजह से एक दिन कंपनियों से तेल न खरीदने का निर्णय लिया गया है। कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को देश के चौबीस राज्यों के पेट्रोल पंप मालिकों ने यह बड़ा एलान किया था कि बुधवार यानी मई महीने के आखिरी दिन वह अपना विरोध इस तरह से जाहिर करेंगे। इस क्रम में आज करीब सत्तर हजार पेट्रोल पंप मालिक विरोध कर रहे हैं। हालांकि, पेट्रोल पंपों के टैंक में काफी भंडार रहता है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आने की आशंका नहीं है। ईंधन डीलर संगठनों ने चौबीस बडे़ राज्यों में कंपनियों से तेल नहीं खरीदने का अपना विरोध जताया है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम के अलावा उत्तर बंगाल और यूपी, मध्य प्रदेश के भी कई डीलर शामिल हैं। क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि पेट्रोलियम कंपनियों और डीलर संघों के बीच कमीशन को लेकर जो समझौता किया गया था उसके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल डीलरों के मार्जिन में प्रत्येक छह माह में संशोधन किया जाना था, लेकिन बीते पांच साल यानी दो हज़ार सत्रह से इसमें संशोधन नहीं किया गया है। ऐसे में अब कमीशन बढ़ाने को लेकर उनकी मांग ने विरोध का रूप अख्तियार कर लिया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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पेरिटोनियल कैंसर पेट के ऊपरी हिस्से के ऊतकों के पतली परत के अंदर विकसित होता है जो गर्भाशय, ब्लैडर व रेक्टम को प्रभावित करता है।
वैश्विक स्तर पर कैंसर मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 10 मिलियन कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। डब्ल्यूएचओ के नए अनुमानों के अनुसार, भारत में प्रत्येक 10 भारतीयों में से एक को अपने पूरे जीवनकाल में कैंसर विकसित होने की संभावना है और 15 में से एक व्यक्ति की मौत कैंसर के कारण हो सकती है। डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में भारत में कैंसर से संबंधित कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने आए हैंः
कैंसर (Cancer) शरीर में होने वाली एक असामान्य और खतरनाक स्थिति है। कैंसर तब होता है, जब शरीर में कोशिकाएं (Cells) असामान्य रूप से बढ़ने और विभाजित होने लगती हैं। हमारा शरीर खरबों कोशिकाओं से बना है। स्वस्थ कोशिकाएं शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ती और विभाजित होती हैं। कोशिकाओं की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती या क्षतिग्रस्त होती है, ये कोशिकाएं मर भी जाती हैं। इनकी जगह नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। जब किसी को कैंसर होता है, तो कोशिकाएं इस तरह से अपना काम करना बंद कर देती हैं। पुरानी और क्षतिग्रस्त कोशिकाएं मरने की बजाय जीवित रह जाती हैं और जरूरत नहीं होने के बावजूद भी नई कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है। ये ही अतिरिक्त कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ट्यूमर (Tumour) होता है। अधिकतर कैंसर ट्यूमर्स होते हैं, लेकिन ब्लड कैंसर (Blood cancer) में ट्यूमर नहीं होता है। हालांकि, हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है। आमतौर यह आस-पास के ऊतकों (Tissues) में फैलता है। असामान्य और क्षतिग्रस्त कैंसर कोशिकाएं (Cancer cells) शरीर के दूसरे भागों में पहुंचकर नए घातक व मैलिग्नेंट ट्यूमर (malignant tumours) बनाने लगती हैं।
ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer), ओवेरियन कैंसर (ovarian cancer), स्किन कैंसर (skin cancer), लंग कैंसर (Lung cancer), कोलोन कैंसर (Colon cancer), प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer), लिंफोमा (Lymphoma) सहित सौ से अधिक प्रकार के कैंसर होते हैं। इन सभी कैंसर के लक्षण और जांच एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। कैंसर का इलाज मुख्यरूप से कीमोथेरेपी (chemotherapy), रेडिएशन (Radiation) और सर्जरी द्वारा की जाती है।
अचानक वजन कम होना (Unexplained weight loss) : बिना कोई कारण नजर आए यदि आपका वजन तेजी से कम होने लगे, तो यह कैंसर के पहले संकेतों में से एक हो सकता है। अग्न्याशय (pancreas), पेट (Stomach cancer) या फेफड़ों में होने वाले कैंसर (Lung cancer) से पीड़ित लोगों में वजन कम होने की समस्या होती है। हालांकि, अन्य प्रकार के कैंसर से पीड़ित लोगों में भी वजन कम हो सकता है।
अत्यधिक थकान (Extreme fatigue) : सारा दिन थकान महसूस होना भी कैंसर के महत्वपूर्ण लक्षणों में शामिल है। ल्यूकेमिया (Leukemia), कोलन कैंसर (Colon cancer) होने पर थकान अधिक महसूस होती है।
गांठ (Lump) : त्वचा में किसी भी तरह की गांठ या लम्प नजर आए, तो संभवतः यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। स्तन कैंसर, लिम्फ नोड्स, सॉफ्ट ऊतक और अंडकोष (Testicles) में होने वाले कैंसर में आमतौर पर गांठ होते हैं।
त्वचा में बदलाव (Changes in the skin) : यदि आपकी त्वचा का रंग बदलकर पीला, काला या लाल हो गया है, तो ये कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही शरीर के किसी भी हिस्से पर हुए मोल्स या मस्से के रंग और आकार में बदलाव नजर आए, तो इसे नजरअंदाज ना करें। इस बात पर भी गौर करें कि कोई भी घाव ठीक होने में अधिक समय तो नहीं ले रहा है।
तेज दर्द (Accute pain) : तीव्र दर्द आमतौर पर हड्डी या वृषण कैंसर (Bone Cancers Or Testicular Cancer) का शुरुआती लक्षण हो सकता है, जबकि पीठ दर्द कोलोरेक्टल (colorectal), अग्नाशय (pancreatic) या डिम्बग्रंथि के कैंसर (ovarian cancer) के संकेत होते हैं। जिन लोगों को मैलिग्नेंट ब्रेन ट्यूमर होता है, उनमें तेज सिरदर्द होने की शिकायत रहती है।
बाउल मूवमेंट और ब्लैडर फंक्शन में बदलावः कब्ज, दस्त, मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत हो सकते हैं। पेशाब करते समय दर्द के साथ खून आना ब्लैडर (bladder cancer) और प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer) के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
लिम्फ नोड्स में सूजन (Swelling in lymph nodes) : तीन से चार सप्ताह तक ग्रंथियों में सूजन (Swollen glands) बने रहना ठीक नहीं। लिम्फ नोड्स के आकार में वृद्धि भी कैंसर का संकेत होती है।
एनीमिया (Anemia) : एनीमिया होने पर लाल रक्त कोशिका में भारी कमी आ जाती है। यह हेमटोलॉजिकल कैंसर का संकेत (haematological cancers) हो सकता है।
तंबाकू चबाना या सिगरेट पीना (Chewing tobacco or smoking cigarettes) : इन चीजों में मौजूद निकोटीन के सेवन से शरीर के किसी भी अंग में कैंसर हो सकता है। तंबाकू और धूम्रपान करने से आमतौर पर मुंह का कैंसर (Mouth cancer), फेफड़ों का कैंसर (lung cancer), एलिमेंटरी ट्रैक्ट (alimentary tract) और पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic cancer) होने का खतरा बढ़ जाता है।
जीन (Genes) : परिवार में यदि कैंसर होने की हिस्ट्री है, तो इस खतरनाक बीमारी के होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। कैंसर एक दोषपूर्ण जीन के कारण भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर (Breast Cancer), वंशानुगत गैर पॉलीपोसिस कोलोरेक्टल कैंसर (Hereditary Non Polyposis Colorectal Cancer) आदि वंशानुगत (Hereditary) हो सकते हैं।
पर्यावरण में कार्सिनोजेन्स का होना (Carcinogens in the environment) : हम जो कुछ भी खाते या पीते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उनमें कई ऐसे तत्व या पदार्थ मौजूद होते हैं, जो कैंसर होने की जोखिम को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। एज्बेस्टस (Asbestos), बेंजीन (Benzene), आर्सेनिक (Arsenic), निकल (Nickel) जैसे कम्पाउंड फेफड़े के कैंसर (Lung cancer) के अलावा कई अन्य कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाते हैं।
फूड्स (Foods) : आजकल अधिकतर फल और सब्जियां कीटनाशकों से दूषित होते हैं, जिनके सेवन से शरीर पर अवांछनीय प्रभाव पड़ता है। दोबारा गर्म किए गए भोजन, अधिक पके हुए फूड्स, दोबारा गर्म किए गए तेल कार्सिनोजेनिक (Carcinogenic) हो जाते हैं। कल-कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों की वजह से प्रदूषित जल भी काफी नुकसानदायक होता है, क्योंकि इसमें भारी खनिजों (Heavy minerals) की मात्रा अधिक होती है।
वायरस (Virus): हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लिवर कैंसर (Liver cancer) के लिए 50 प्रतिशत तक जिम्मेदार होते हैं, जबकि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papilloma virus) 99. 9% मामलों में सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) होने के लिए जिम्मेदार होता है। साथ ही, रेडिएशन और सन एक्सपोजर भी कैंसर के जोखिम को काफी हद तक बढ़ाते हैं।
अधिकांश कैंसर में ट्यूमर होता है और इन्हें पांच चरणों (Stages) में विभाजित किया जा सकता है। कैंसर के ये सभी स्टेजेज दर्शाते हैं कि आपका कैंसर कितना गंभीर रूप ले चुका है।
स्टेज 0 (Stage 0) : यह दर्शाता है कि आपको कैंसर नहीं है। हालांकि, शरीर में कुछ असामान्य कोशिकाएं मौजूद होती है, जो कैंसर में विकसित हो सकती हैं।
पहला चरण (Stage I) : इस स्टेज में ट्यूमर छोटा होता है और कैंसर कोशिकाएं केवल एक क्षेत्र में फैलती हैं।
दूसरा और तीसरा चरण (Stage II and III) : पहले और दूसरे स्टेज में ट्यूमर का आकार बड़ा हो जाता है और कैंसर कोशिकाएं पास स्थित अंगों और लिम्फ नोड्स में भी फैलने लगती हैं।
चौथा चरण ((Stage IV) : यह कैंसर का आखिरी और बेहद खतरनाक स्टेज होता है, जिसे मेटास्टेटिक कैंसर (metastatic cancer) भी कहते हैं। इस स्टेज में कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में फैलना शुरू कर देता है।
शारीरिक लक्षणों और संकेतों को देखते हुए डॉक्टर कैंसर का पता लगाने की कोशिश करते हैं। आपकी मेडिकल हिस्ट्री को देखने के बाद शारीरिक परीक्षण की जाती है। टेस्ट के लिए मूत्र (Urine), रक्त (Blood) या मल (Stool) का सैंपल लिया जाता है। कैंसर की आशंका होने पर एक्स-रे, कंप्यूटेड टोमोग्रैफी (computed tomography), एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और फाइबर-ऑप्टिक एंडोस्कोपी परीक्षणों से आपको गुजरना पड़ सकता है। इन सभी टूल्स के जरिए डॉक्टर आसानी से ट्यूमर के स्थान और आकार के बारे में जान पाते हैं। किसी को कैंसर है या नहीं इसका पता बायोप्सी (Biopsy) के जरिए आसानी से चल जाता है। बायोप्सी में जांच के लिए ऊतक के नमूने (tissue sample) लिए जाते हैं। यदि बायोप्सी के परिणाम सकारात्मक आते हैं, तो कैंसर के प्रसार का पता लगाने के लिए आगे कई अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं।
डॉक्टर कैंसर के प्रकार, स्थान या अवस्था के आधार पर इलाज का विकल्प (Cancer treatment) तय कर सकता है। आमतौर पर, कैंसर के उपचार में मुख्य रूप से सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट्स शामिल हैं।
सर्जरी (Surgery)
डॉक्टर सर्जरी के जरिए कैंसर के ट्यूमर, ऊतकों, लिम्फ नोड्स या किसी अन्य कैंसर प्रभावित क्षेत्र को हटाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी डॉक्टर बीमारी की गंभीरता का पता लगाने के लिए भी सर्जरी करते हैं। यदि कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में नहीं फैला है, तो सर्जरी इलाज का सबसे अच्छा विकल्प है।
कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
कीमोथेरेपी को कई चरणों में किया जाता है। इस प्रक्रिया में ड्रग्स के जरिए कैंसर कोशिकाओं को खत्म की जाती है। हालांकि, उपचार का यह तरीका किसी-किसी के लिए काफी कष्टदायक होता है। इसके कई साइड एफेक्ट्स भी नजर आते हैं, जिसमें बालों का झड़ना मुख्य रूप से शामिल है। दवाओं को खाने के साथ ही नसो में इंजेक्शन के जरिए भी पहुंचाया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी (Radiation therapy)
रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं पर सीधा असर करता है और उन्हें दोबारा बढ़ने से रोकता है। इस प्रक्रिया में, उच्च ऊर्जा कणों (high-energy particles) या तरंगों (Waves) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की कोशिश की जाती है। कुछ लोगों को इलाज में सिर्फ रेडिएशन थेरेपी तो किसी-किसी को रेडिएशन थेरेपी के साथ सर्जरी और कीमोथेरेपी भी दी जाती है।
इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
इम्यूनोथेरेपी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में सक्षम बनाती है।
हार्मोन थेरेपी (Hormone therapy)
इस थेरेपी का उपयोग उन कैंसर के उपचार के लिए किया जाता है, जो हार्मोन से प्रभावित होते हैं। हार्मोन थेरेपी से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर में काफी हद तक सुधार होता है।
पेरिटोनियल कैंसर पेट के ऊपरी हिस्से के ऊतकों के पतली परत के अंदर विकसित होता है जो गर्भाशय, ब्लैडर व रेक्टम को प्रभावित करता है।
एक शोध में साबित हुआ है कि विटामिन डी हमें कोलन कैंसर के खतरे से भी बचा सकता है।
कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। शुरुआत में पता चलने पर 90 फीसदी कैंसर के मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
इरफान खान, सोनाली बेंद्रे और आयुष्मान खुराना की पत्नी के बाद अब नफीसा भी इस मुश्किल दौर से गुजर रही हैं।
ग्लोबोकैन 2018 की इंडिया फैक्ट शीट के अनुसार, 2012 में 56,000 मामलों से 2018 में होंठ और मुंह के कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर 119,992 हो गई जो इन 6 वर्षों में 11. 4% बढ़ी है।
हाल में जो शोध हुआ है उसमेें यह दावा किया गया है कि दवाओं के उपयोग से सबसे अधिक जो बीमारी होने की संभावना होती है वह लैम लंग डिजीज होती है।
आंकड़ों के मुताबिक, 28 में से किसी एक महिला को लाइफ में कभी न कभी ब्रेस्ट कैंसर होने का अंदेशा रहता है।
आप जो भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर आपके फेफड़ों पर भी होता है। ऐसे में धूम्रपान और गलत खान-पान के कारण फेफड़े बीमार भी हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थय संगठन के एक सर्वे के अनुसार, तकरीबन 7. 6 मिलियन लोगों की मौत लंग कैंसर के कारण होती है।
जो लोग धूम्रपान अधिक करते हैं, उनमें फेफड़े का कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। यदि आप फेफड़ों के कैंसर से बचे रहना चाहते हैं, तो इसमें आपकी मदद करेंगे फल और सब्जियां।
सोनाली ने कहा कि कीमोथेरेपी की वजह से मेरी आंखों में अजीब सी दिक्कतें हो रही हैं और इस वजह से मैं सही तरीके से पढ़ नहीं पा रही हूं।
स्वाद के लिए खाई जाने वाली सुपारी सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। इससे दांत और मसूड़े तो खराब होते ही हैं, साथ ही कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
भारत के अग्रणी स्वास्थ्य बीमा कंपनी रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस ने 2014 में 23% से स्तन कैंसर के दावों में वृद्धि देखी, जो कि कुल कैंसर के दावों में से 2018 में 38% थी। यह आंकड़ा बताता है कि केवल चार वर्षों की अवधि में स्तन कैंसर के दावों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
फ्रिज में रखा हुआ आलू कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है।
कार्यक्रम की थीम रही 'डर से स्वतंत्रता'
नियमित लाइफस्टाइल में कुछ चीजों को शामिल करना, स्तर कैंसर के खतरे को कम कर सकता है।
आलू का रंग अगर बदल जाए तो इसे खाने से बेहतर होगा फेंक देना।
अगर मरीज को पूरी तरह से सुनाई देना बंद हो गया है, तो यह कान के कैंसर का लक्षण हो सकता है।
कैंसर से पीड़ित मरीज को बहुत अधिक सकारात्मकता की जरूरत होती है। उसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक मजबूती की आवश्यकता होती है।
वजन का तेजी से अचानक घटने लगना शरीर में कुछ गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है।
हाल ही में हुए एक शोध की माने तो हाई प्रोटीन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सोया प्रोडक्ट्स ब्रेस्ट कैंसर के कारक के रूप में काम करता है।
महिलाओं का वजन ज्यादा होने या फिर मोटापा का शिकार होने पर 50 साल की उम्र से पहले ही कोलोन कैंसर होने की संभावना होती है।
माँ बनने वाली स्त्री के स्तनों में कई तरह के बदलाव आते हैं। यही कारण है कि ज़्यादातर स्तन कैंसर का पता एडवांस स्टेज में लगता है।
ब्रेस्ट कैंसर इस समय सबसे ज्यादा होने वाले कैंसरों में से एक है। इसको लेकर महिलाओं में जागरूकता की बेहद जरूरत होती है।
प्राथमिक लिवर कैंसर को हेपैटोसेल्युलर कार्सिनोमा (एचसीसी) नाम से भी जाना जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ कुछ महिलाओं के ब्रेस्ट में छोटी-छोटी गांठ बनने लगती हैं। ज्यादातर महिलाएं इसे ब्रेस्ट कैंसर का संकेत समझ लेती हैं जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है।
डायट में कार्बोहाइड्रेड और शुगर की मात्रा अधिक होने से सिर और गले के कैंसर का इलाज करवा चुके मरीजों को दोबारा इस कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
अनुमान है कि वर्ष 2040 तक डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की यह संख्या बढ़कर लगभग 64. 2 करोड़ हो सकती है।
एक रिसर्च के अनुसार स्मोंकिंग छोड़ने के 15 साल बाद भी लंग्स कैंसर होने का खतरा रहता है।
इस सर्वे से ये बात तो स्पष्ट हो जाती है कि अधिक उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना तो है ही इसके साथ उनकी मौत की संभावना भी ज्यादा है।
कैंसर थेरेपी की यह खोज विश्व में सबसे अधिक लोगों के लिए खतरा बने कैंसर के इलाज में नया रास्ता दिखाती है।
भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में एक लाख में से तीस की औसत से इजाफा हो रहा है।
यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 2 पत्ते तुलसी की चबाता है तो वह कई गंभीर रोगों से बचा रह सकता है। इतना ही नहीं तुलसी के सिर्फ 2 पत्तों को नियमित रूप से चबाने से महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से बची रह सकती हैं।
दुनिया भर में कम से कम 10 करोड़ महिलाएं हर दिन हॉर्मोनल गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।
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पेरिटोनियल कैंसर पेट के ऊपरी हिस्से के ऊतकों के पतली परत के अंदर विकसित होता है जो गर्भाशय, ब्लैडर व रेक्टम को प्रभावित करता है। वैश्विक स्तर पर कैंसर मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष दस मिलियन कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। डब्ल्यूएचओ के नए अनुमानों के अनुसार, भारत में प्रत्येक दस भारतीयों में से एक को अपने पूरे जीवनकाल में कैंसर विकसित होने की संभावना है और पंद्रह में से एक व्यक्ति की मौत कैंसर के कारण हो सकती है। डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में भारत में कैंसर से संबंधित कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने आए हैंः कैंसर शरीर में होने वाली एक असामान्य और खतरनाक स्थिति है। कैंसर तब होता है, जब शरीर में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने और विभाजित होने लगती हैं। हमारा शरीर खरबों कोशिकाओं से बना है। स्वस्थ कोशिकाएं शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ती और विभाजित होती हैं। कोशिकाओं की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती या क्षतिग्रस्त होती है, ये कोशिकाएं मर भी जाती हैं। इनकी जगह नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। जब किसी को कैंसर होता है, तो कोशिकाएं इस तरह से अपना काम करना बंद कर देती हैं। पुरानी और क्षतिग्रस्त कोशिकाएं मरने की बजाय जीवित रह जाती हैं और जरूरत नहीं होने के बावजूद भी नई कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है। ये ही अतिरिक्त कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ट्यूमर होता है। अधिकतर कैंसर ट्यूमर्स होते हैं, लेकिन ब्लड कैंसर में ट्यूमर नहीं होता है। हालांकि, हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है। आमतौर यह आस-पास के ऊतकों में फैलता है। असामान्य और क्षतिग्रस्त कैंसर कोशिकाएं शरीर के दूसरे भागों में पहुंचकर नए घातक व मैलिग्नेंट ट्यूमर बनाने लगती हैं। ब्रेस्ट कैंसर , ओवेरियन कैंसर , स्किन कैंसर , लंग कैंसर , कोलोन कैंसर , प्रोस्टेट कैंसर , लिंफोमा सहित सौ से अधिक प्रकार के कैंसर होते हैं। इन सभी कैंसर के लक्षण और जांच एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। कैंसर का इलाज मुख्यरूप से कीमोथेरेपी , रेडिएशन और सर्जरी द्वारा की जाती है। अचानक वजन कम होना : बिना कोई कारण नजर आए यदि आपका वजन तेजी से कम होने लगे, तो यह कैंसर के पहले संकेतों में से एक हो सकता है। अग्न्याशय , पेट या फेफड़ों में होने वाले कैंसर से पीड़ित लोगों में वजन कम होने की समस्या होती है। हालांकि, अन्य प्रकार के कैंसर से पीड़ित लोगों में भी वजन कम हो सकता है। अत्यधिक थकान : सारा दिन थकान महसूस होना भी कैंसर के महत्वपूर्ण लक्षणों में शामिल है। ल्यूकेमिया , कोलन कैंसर होने पर थकान अधिक महसूस होती है। गांठ : त्वचा में किसी भी तरह की गांठ या लम्प नजर आए, तो संभवतः यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। स्तन कैंसर, लिम्फ नोड्स, सॉफ्ट ऊतक और अंडकोष में होने वाले कैंसर में आमतौर पर गांठ होते हैं। त्वचा में बदलाव : यदि आपकी त्वचा का रंग बदलकर पीला, काला या लाल हो गया है, तो ये कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही शरीर के किसी भी हिस्से पर हुए मोल्स या मस्से के रंग और आकार में बदलाव नजर आए, तो इसे नजरअंदाज ना करें। इस बात पर भी गौर करें कि कोई भी घाव ठीक होने में अधिक समय तो नहीं ले रहा है। तेज दर्द : तीव्र दर्द आमतौर पर हड्डी या वृषण कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है, जबकि पीठ दर्द कोलोरेक्टल , अग्नाशय या डिम्बग्रंथि के कैंसर के संकेत होते हैं। जिन लोगों को मैलिग्नेंट ब्रेन ट्यूमर होता है, उनमें तेज सिरदर्द होने की शिकायत रहती है। बाउल मूवमेंट और ब्लैडर फंक्शन में बदलावः कब्ज, दस्त, मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत हो सकते हैं। पेशाब करते समय दर्द के साथ खून आना ब्लैडर और प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। लिम्फ नोड्स में सूजन : तीन से चार सप्ताह तक ग्रंथियों में सूजन बने रहना ठीक नहीं। लिम्फ नोड्स के आकार में वृद्धि भी कैंसर का संकेत होती है। एनीमिया : एनीमिया होने पर लाल रक्त कोशिका में भारी कमी आ जाती है। यह हेमटोलॉजिकल कैंसर का संकेत हो सकता है। तंबाकू चबाना या सिगरेट पीना : इन चीजों में मौजूद निकोटीन के सेवन से शरीर के किसी भी अंग में कैंसर हो सकता है। तंबाकू और धूम्रपान करने से आमतौर पर मुंह का कैंसर , फेफड़ों का कैंसर , एलिमेंटरी ट्रैक्ट और पैंक्रियाटिक कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। जीन : परिवार में यदि कैंसर होने की हिस्ट्री है, तो इस खतरनाक बीमारी के होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। कैंसर एक दोषपूर्ण जीन के कारण भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर , वंशानुगत गैर पॉलीपोसिस कोलोरेक्टल कैंसर आदि वंशानुगत हो सकते हैं। पर्यावरण में कार्सिनोजेन्स का होना : हम जो कुछ भी खाते या पीते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उनमें कई ऐसे तत्व या पदार्थ मौजूद होते हैं, जो कैंसर होने की जोखिम को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। एज्बेस्टस , बेंजीन , आर्सेनिक , निकल जैसे कम्पाउंड फेफड़े के कैंसर के अलावा कई अन्य कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाते हैं। फूड्स : आजकल अधिकतर फल और सब्जियां कीटनाशकों से दूषित होते हैं, जिनके सेवन से शरीर पर अवांछनीय प्रभाव पड़ता है। दोबारा गर्म किए गए भोजन, अधिक पके हुए फूड्स, दोबारा गर्म किए गए तेल कार्सिनोजेनिक हो जाते हैं। कल-कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों की वजह से प्रदूषित जल भी काफी नुकसानदायक होता है, क्योंकि इसमें भारी खनिजों की मात्रा अधिक होती है। वायरस : हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लिवर कैंसर के लिए पचास प्रतिशत तक जिम्मेदार होते हैं, जबकि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस निन्यानवे. नौ% मामलों में सर्वाइकल कैंसर होने के लिए जिम्मेदार होता है। साथ ही, रेडिएशन और सन एक्सपोजर भी कैंसर के जोखिम को काफी हद तक बढ़ाते हैं। अधिकांश कैंसर में ट्यूमर होता है और इन्हें पांच चरणों में विभाजित किया जा सकता है। कैंसर के ये सभी स्टेजेज दर्शाते हैं कि आपका कैंसर कितना गंभीर रूप ले चुका है। स्टेज शून्य : यह दर्शाता है कि आपको कैंसर नहीं है। हालांकि, शरीर में कुछ असामान्य कोशिकाएं मौजूद होती है, जो कैंसर में विकसित हो सकती हैं। पहला चरण : इस स्टेज में ट्यूमर छोटा होता है और कैंसर कोशिकाएं केवल एक क्षेत्र में फैलती हैं। दूसरा और तीसरा चरण : पहले और दूसरे स्टेज में ट्यूमर का आकार बड़ा हो जाता है और कैंसर कोशिकाएं पास स्थित अंगों और लिम्फ नोड्स में भी फैलने लगती हैं। चौथा चरण : यह कैंसर का आखिरी और बेहद खतरनाक स्टेज होता है, जिसे मेटास्टेटिक कैंसर भी कहते हैं। इस स्टेज में कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में फैलना शुरू कर देता है। शारीरिक लक्षणों और संकेतों को देखते हुए डॉक्टर कैंसर का पता लगाने की कोशिश करते हैं। आपकी मेडिकल हिस्ट्री को देखने के बाद शारीरिक परीक्षण की जाती है। टेस्ट के लिए मूत्र , रक्त या मल का सैंपल लिया जाता है। कैंसर की आशंका होने पर एक्स-रे, कंप्यूटेड टोमोग्रैफी , एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और फाइबर-ऑप्टिक एंडोस्कोपी परीक्षणों से आपको गुजरना पड़ सकता है। इन सभी टूल्स के जरिए डॉक्टर आसानी से ट्यूमर के स्थान और आकार के बारे में जान पाते हैं। किसी को कैंसर है या नहीं इसका पता बायोप्सी के जरिए आसानी से चल जाता है। बायोप्सी में जांच के लिए ऊतक के नमूने लिए जाते हैं। यदि बायोप्सी के परिणाम सकारात्मक आते हैं, तो कैंसर के प्रसार का पता लगाने के लिए आगे कई अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं। डॉक्टर कैंसर के प्रकार, स्थान या अवस्था के आधार पर इलाज का विकल्प तय कर सकता है। आमतौर पर, कैंसर के उपचार में मुख्य रूप से सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट्स शामिल हैं। सर्जरी डॉक्टर सर्जरी के जरिए कैंसर के ट्यूमर, ऊतकों, लिम्फ नोड्स या किसी अन्य कैंसर प्रभावित क्षेत्र को हटाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी डॉक्टर बीमारी की गंभीरता का पता लगाने के लिए भी सर्जरी करते हैं। यदि कैंसर शरीर के दूसरे अंगों में नहीं फैला है, तो सर्जरी इलाज का सबसे अच्छा विकल्प है। कीमोथेरेपी कीमोथेरेपी को कई चरणों में किया जाता है। इस प्रक्रिया में ड्रग्स के जरिए कैंसर कोशिकाओं को खत्म की जाती है। हालांकि, उपचार का यह तरीका किसी-किसी के लिए काफी कष्टदायक होता है। इसके कई साइड एफेक्ट्स भी नजर आते हैं, जिसमें बालों का झड़ना मुख्य रूप से शामिल है। दवाओं को खाने के साथ ही नसो में इंजेक्शन के जरिए भी पहुंचाया जाता है। रेडिएशन थेरेपी रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं पर सीधा असर करता है और उन्हें दोबारा बढ़ने से रोकता है। इस प्रक्रिया में, उच्च ऊर्जा कणों या तरंगों का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की कोशिश की जाती है। कुछ लोगों को इलाज में सिर्फ रेडिएशन थेरेपी तो किसी-किसी को रेडिएशन थेरेपी के साथ सर्जरी और कीमोथेरेपी भी दी जाती है। इम्यूनोथेरेपी इम्यूनोथेरेपी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में सक्षम बनाती है। हार्मोन थेरेपी इस थेरेपी का उपयोग उन कैंसर के उपचार के लिए किया जाता है, जो हार्मोन से प्रभावित होते हैं। हार्मोन थेरेपी से स्तन और प्रोस्टेट कैंसर में काफी हद तक सुधार होता है। पेरिटोनियल कैंसर पेट के ऊपरी हिस्से के ऊतकों के पतली परत के अंदर विकसित होता है जो गर्भाशय, ब्लैडर व रेक्टम को प्रभावित करता है। एक शोध में साबित हुआ है कि विटामिन डी हमें कोलन कैंसर के खतरे से भी बचा सकता है। कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। शुरुआत में पता चलने पर नब्बे फीसदी कैंसर के मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इरफान खान, सोनाली बेंद्रे और आयुष्मान खुराना की पत्नी के बाद अब नफीसा भी इस मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। ग्लोबोकैन दो हज़ार अट्ठारह की इंडिया फैक्ट शीट के अनुसार, दो हज़ार बारह में छप्पन,शून्य मामलों से दो हज़ार अट्ठारह में होंठ और मुंह के कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर एक सौ उन्नीस,नौ सौ बानवे हो गई जो इन छः वर्षों में ग्यारह. चार% बढ़ी है। हाल में जो शोध हुआ है उसमेें यह दावा किया गया है कि दवाओं के उपयोग से सबसे अधिक जो बीमारी होने की संभावना होती है वह लैम लंग डिजीज होती है। आंकड़ों के मुताबिक, अट्ठाईस में से किसी एक महिला को लाइफ में कभी न कभी ब्रेस्ट कैंसर होने का अंदेशा रहता है। आप जो भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर आपके फेफड़ों पर भी होता है। ऐसे में धूम्रपान और गलत खान-पान के कारण फेफड़े बीमार भी हो सकते हैं। विश्व स्वास्थय संगठन के एक सर्वे के अनुसार, तकरीबन सात. छः मिलियन लोगों की मौत लंग कैंसर के कारण होती है। जो लोग धूम्रपान अधिक करते हैं, उनमें फेफड़े का कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। यदि आप फेफड़ों के कैंसर से बचे रहना चाहते हैं, तो इसमें आपकी मदद करेंगे फल और सब्जियां। सोनाली ने कहा कि कीमोथेरेपी की वजह से मेरी आंखों में अजीब सी दिक्कतें हो रही हैं और इस वजह से मैं सही तरीके से पढ़ नहीं पा रही हूं। स्वाद के लिए खाई जाने वाली सुपारी सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। इससे दांत और मसूड़े तो खराब होते ही हैं, साथ ही कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। भारत के अग्रणी स्वास्थ्य बीमा कंपनी रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंस ने दो हज़ार चौदह में तेईस% से स्तन कैंसर के दावों में वृद्धि देखी, जो कि कुल कैंसर के दावों में से दो हज़ार अट्ठारह में अड़तीस% थी। यह आंकड़ा बताता है कि केवल चार वर्षों की अवधि में स्तन कैंसर के दावों में पंद्रह प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ्रिज में रखा हुआ आलू कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। कार्यक्रम की थीम रही 'डर से स्वतंत्रता' नियमित लाइफस्टाइल में कुछ चीजों को शामिल करना, स्तर कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। आलू का रंग अगर बदल जाए तो इसे खाने से बेहतर होगा फेंक देना। अगर मरीज को पूरी तरह से सुनाई देना बंद हो गया है, तो यह कान के कैंसर का लक्षण हो सकता है। कैंसर से पीड़ित मरीज को बहुत अधिक सकारात्मकता की जरूरत होती है। उसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक मजबूती की आवश्यकता होती है। वजन का तेजी से अचानक घटने लगना शरीर में कुछ गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। हाल ही में हुए एक शोध की माने तो हाई प्रोटीन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सोया प्रोडक्ट्स ब्रेस्ट कैंसर के कारक के रूप में काम करता है। महिलाओं का वजन ज्यादा होने या फिर मोटापा का शिकार होने पर पचास साल की उम्र से पहले ही कोलोन कैंसर होने की संभावना होती है। माँ बनने वाली स्त्री के स्तनों में कई तरह के बदलाव आते हैं। यही कारण है कि ज़्यादातर स्तन कैंसर का पता एडवांस स्टेज में लगता है। ब्रेस्ट कैंसर इस समय सबसे ज्यादा होने वाले कैंसरों में से एक है। इसको लेकर महिलाओं में जागरूकता की बेहद जरूरत होती है। प्राथमिक लिवर कैंसर को हेपैटोसेल्युलर कार्सिनोमा नाम से भी जाना जाता है। बढ़ती उम्र के साथ कुछ महिलाओं के ब्रेस्ट में छोटी-छोटी गांठ बनने लगती हैं। ज्यादातर महिलाएं इसे ब्रेस्ट कैंसर का संकेत समझ लेती हैं जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि हर गांठ ब्रेस्ट कैंसर नहीं होता है। डायट में कार्बोहाइड्रेड और शुगर की मात्रा अधिक होने से सिर और गले के कैंसर का इलाज करवा चुके मरीजों को दोबारा इस कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अनुमान है कि वर्ष दो हज़ार चालीस तक डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की यह संख्या बढ़कर लगभग चौंसठ. दो करोड़ हो सकती है। एक रिसर्च के अनुसार स्मोंकिंग छोड़ने के पंद्रह साल बाद भी लंग्स कैंसर होने का खतरा रहता है। इस सर्वे से ये बात तो स्पष्ट हो जाती है कि अधिक उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना तो है ही इसके साथ उनकी मौत की संभावना भी ज्यादा है। कैंसर थेरेपी की यह खोज विश्व में सबसे अधिक लोगों के लिए खतरा बने कैंसर के इलाज में नया रास्ता दिखाती है। भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में एक लाख में से तीस की औसत से इजाफा हो रहा है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन दो पत्ते तुलसी की चबाता है तो वह कई गंभीर रोगों से बचा रह सकता है। इतना ही नहीं तुलसी के सिर्फ दो पत्तों को नियमित रूप से चबाने से महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से बची रह सकती हैं। दुनिया भर में कम से कम दस करोड़ महिलाएं हर दिन हॉर्मोनल गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।
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यो तथा एतत्स्थानीय अन्य प्रियजनों या सम्बन्धियोंकी मृत्यु - का स्वप्न है । इसके भी दो भेद है। एक तो वह जिसमे प्रिय सम्पनियोकी मृत्यु साथ दुका उदय नहीं होता और दूसरा वह जिसमे स्वाग्नद्रष्टाको मृत्युचे कारण गहरे शोक्की अनुभूति होती है, यहाँ तक कि नींदमे ऑसू गिरने लगते हैं । दूसरे प्रकारका सप्न ही सामान्य है। पहले प्रकारके स्वप्न रस्तुत कुटुम्नियोकी मृत्युवे सप्त होते ही नहीं । उनका मुख्य तात्पर्य कुछ और ही होता है। स्वजनोंकी मृत्यु किसी और इच्छानी पूर्तिको व्यक्त करने के लिए अवसर मान देती है और इसीलिए इन स्वप्नीमे शोकका उद्भव नहीं होता, क्याकि स्वप्नका आवेग उसकी अव्यक्त सामग्री अर्थात् उन विचारोंके अनुसार होता है जो उसकी तहमे हे न कि उसकी व्यक्त सामग्री अर्थात् उस रुपये अनुसार जो उसे दमनके प्रभाव आर स्वप्नी विशिष्ट कार्यप्रणालीसे प्राप्त हुआ हैं। और सप्नवे प्रत्ययांशकी जो रुपविकृति होती है, आवेग उससे मुक्त रहता है। इसी कारण यद्यपि व्यक्त रूपसे इन स्वप्नांसे अन्धु-चान्वयोंकी मृत्यु ही प्रमुस दिसाई देती है, किन्तु उसके अनुकूल उद्वेग अर्थात् शोक्का अनिर्भाव नहीं होता, क्याकि यह मृत्यु सप्नके मौलिक विचारोंका मुख्य विपय नहीं है, पल्कि उन्हें व्यक्त करनेका साधन मान है। दूसरे प्रकारचे प्नामे मृत्यु ही सप्नके विचारोंका मुख्य विषय होती है। इसलिए उनमे उस मृत्युरे अनुकूल भावोया उदय होता है, यद्यपि अक्सर इस भावके साथ साथ मनो द्वन्द्वात्मक उसाठी प्रतिकूल भाव अर्थात् सतनामृत्यु पर शोक्ने साथ-साथ सुख भी मिला हुआ रहना हूँ, उल्कि यह सुस ही अवेला अव्यक्त चित्तका मूल
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यो तथा एतत्स्थानीय अन्य प्रियजनों या सम्बन्धियोंकी मृत्यु - का स्वप्न है । इसके भी दो भेद है। एक तो वह जिसमे प्रिय सम्पनियोकी मृत्यु साथ दुका उदय नहीं होता और दूसरा वह जिसमे स्वाग्नद्रष्टाको मृत्युचे कारण गहरे शोक्की अनुभूति होती है, यहाँ तक कि नींदमे ऑसू गिरने लगते हैं । दूसरे प्रकारका सप्न ही सामान्य है। पहले प्रकारके स्वप्न रस्तुत कुटुम्नियोकी मृत्युवे सप्त होते ही नहीं । उनका मुख्य तात्पर्य कुछ और ही होता है। स्वजनोंकी मृत्यु किसी और इच्छानी पूर्तिको व्यक्त करने के लिए अवसर मान देती है और इसीलिए इन स्वप्नीमे शोकका उद्भव नहीं होता, क्याकि स्वप्नका आवेग उसकी अव्यक्त सामग्री अर्थात् उन विचारोंके अनुसार होता है जो उसकी तहमे हे न कि उसकी व्यक्त सामग्री अर्थात् उस रुपये अनुसार जो उसे दमनके प्रभाव आर स्वप्नी विशिष्ट कार्यप्रणालीसे प्राप्त हुआ हैं। और सप्नवे प्रत्ययांशकी जो रुपविकृति होती है, आवेग उससे मुक्त रहता है। इसी कारण यद्यपि व्यक्त रूपसे इन स्वप्नांसे अन्धु-चान्वयोंकी मृत्यु ही प्रमुस दिसाई देती है, किन्तु उसके अनुकूल उद्वेग अर्थात् शोक्का अनिर्भाव नहीं होता, क्याकि यह मृत्यु सप्नके मौलिक विचारोंका मुख्य विपय नहीं है, पल्कि उन्हें व्यक्त करनेका साधन मान है। दूसरे प्रकारचे प्नामे मृत्यु ही सप्नके विचारोंका मुख्य विषय होती है। इसलिए उनमे उस मृत्युरे अनुकूल भावोया उदय होता है, यद्यपि अक्सर इस भावके साथ साथ मनो द्वन्द्वात्मक उसाठी प्रतिकूल भाव अर्थात् सतनामृत्यु पर शोक्ने साथ-साथ सुख भी मिला हुआ रहना हूँ, उल्कि यह सुस ही अवेला अव्यक्त चित्तका मूल
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राजस्थान के राजसमंद जिले में कुछ अज्ञात आसामाजिक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया। शरारतियों रात के अंधेर में पत्थर मार बाबा साहिब की उंगलियों को तोड़कर नीचे गिरा दिया। इस घटना का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा है। लोगों में इसको लेकर जमकर आक्रोश है।
राजसमंद (राजस्थान). राजसमंद में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बाबा साहब की मूर्ति को खंडित करने पर ग्राम वासियों में जबरदस्त आक्रोश है, जिसको लेकर ग्राम वासियों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आपको बता दें कि राजस्थान के राजसमंद जिले के रेलमगरा थाना इलाके में स्थित चावंडिया चौराहे पर लगी बाबा साहब की मूर्ति को किसी अज्ञात द्वारा पत्थर मारकर खंडित किया गया है।
गांव के लोगों का कहना है कि रात के समय में बाबा साहब की मूर्ति पर पत्थर मारकर खंडित की गई है, जिसमें बाबा साहब के हाथ की उंगलियां टूट कर नीचे गिर गई है। तो वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है और रेलमगरा थाने में अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ रिपोर्ट दी है।
रिपोर्ट के अंदर लिखा गया है कि यह कृत्य करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। तो वही लोगों को शांत करवाते हुए रेलमगरा थाना पुलिस ने कहा है जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि कुछ दिन पहले ही राजसमंद जिले के श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा स्थापित हुई है। जिसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी टूरिस्ट आ रहे हैं। हर तरफ खुशियों का माहौल है, लोग जश्न मना रहे हैं। वहीं सत मुराबी बापू की कथा सुनने के लिए भी लोगों की भीड़ लग रही है। लेकिन कुछ आसामाजिक तत्वों ने बाबा साहिब की मूर्ति को खंडित कर माहौल खराब करने की कोशिश की है। जिसको लेकर लोगों में जमकर गुस्सा है।
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राजस्थान के राजसमंद जिले में कुछ अज्ञात आसामाजिक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया। शरारतियों रात के अंधेर में पत्थर मार बाबा साहिब की उंगलियों को तोड़कर नीचे गिरा दिया। इस घटना का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा है। लोगों में इसको लेकर जमकर आक्रोश है। राजसमंद . राजसमंद में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बाबा साहब की मूर्ति को खंडित करने पर ग्राम वासियों में जबरदस्त आक्रोश है, जिसको लेकर ग्राम वासियों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आपको बता दें कि राजस्थान के राजसमंद जिले के रेलमगरा थाना इलाके में स्थित चावंडिया चौराहे पर लगी बाबा साहब की मूर्ति को किसी अज्ञात द्वारा पत्थर मारकर खंडित किया गया है। गांव के लोगों का कहना है कि रात के समय में बाबा साहब की मूर्ति पर पत्थर मारकर खंडित की गई है, जिसमें बाबा साहब के हाथ की उंगलियां टूट कर नीचे गिर गई है। तो वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है और रेलमगरा थाने में अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अंदर लिखा गया है कि यह कृत्य करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। तो वही लोगों को शांत करवाते हुए रेलमगरा थाना पुलिस ने कहा है जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही राजसमंद जिले के श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा स्थापित हुई है। जिसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी टूरिस्ट आ रहे हैं। हर तरफ खुशियों का माहौल है, लोग जश्न मना रहे हैं। वहीं सत मुराबी बापू की कथा सुनने के लिए भी लोगों की भीड़ लग रही है। लेकिन कुछ आसामाजिक तत्वों ने बाबा साहिब की मूर्ति को खंडित कर माहौल खराब करने की कोशिश की है। जिसको लेकर लोगों में जमकर गुस्सा है।
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“क्या तरह किसी पे मर मिटेंगे हम
सोचा ना था
इश्क में सरफरोश हो जाएंगे हम
सोचा ना था”
आवारापन था फितरत में कहीं
तुम क्या मिले हमको
हम तेरे बस तेरे हो गए
दिल ये जनता नहीं
तेरी किस बात पर
दुनिया जहान भूल कर
हम तेरे बस तेरे हो गए
बेनूर था हर सिलसिला
तुम क्या मिले आया जलजला
एक सूनपन था फितरत में कहीं
दीवानगी में तेरी
हम तेरे बस तेरे हो गए
दिल ये जनता नहीं
तेरी किस बात पर
दुनिया जहान भूल कर
हम तेरे बस तेरे हो गए…
जाने न हम जाने ना तू
दिल का राब्ता तुझसे है क्यों
बेगनापन था फितरत में कहीं
पर तिश्नगि में तेरी
हम तेरे बस तेरे हो गए
दिल ये जनता नहीं
तेरी किस बात पर
दुनिया जहान भूल कर
हम तेरे बस तेरे हो गए
आवारापन था फितरत में कहीं
तुम क्या मिले हमको
हम तेरे बस तेरे हो गए
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“क्या तरह किसी पे मर मिटेंगे हम सोचा ना था इश्क में सरफरोश हो जाएंगे हम सोचा ना था” आवारापन था फितरत में कहीं तुम क्या मिले हमको हम तेरे बस तेरे हो गए दिल ये जनता नहीं तेरी किस बात पर दुनिया जहान भूल कर हम तेरे बस तेरे हो गए बेनूर था हर सिलसिला तुम क्या मिले आया जलजला एक सूनपन था फितरत में कहीं दीवानगी में तेरी हम तेरे बस तेरे हो गए दिल ये जनता नहीं तेरी किस बात पर दुनिया जहान भूल कर हम तेरे बस तेरे हो गए… जाने न हम जाने ना तू दिल का राब्ता तुझसे है क्यों बेगनापन था फितरत में कहीं पर तिश्नगि में तेरी हम तेरे बस तेरे हो गए दिल ये जनता नहीं तेरी किस बात पर दुनिया जहान भूल कर हम तेरे बस तेरे हो गए आवारापन था फितरत में कहीं तुम क्या मिले हमको हम तेरे बस तेरे हो गए
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आज शनिवार को भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया (बीसीसीआई) की एक बैठक हुई. जिसमे वेस्टइंडीज के संग घरेलू सीरीज की मेजबानी पर चर्चा हुई.
आपकों बता दे, कि इसी मीटिंग में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फरवरी-मार्च में होने वाली 2019 की वनडे और टी-20 सीरीज पर भी चर्चा हुई.
सबसे पहले आपकों बता दे, कि भारतीय वेस्टइंडीज के संग घरेलू सीरीज और ऑस्ट्रेलिया के संग घरेलू सीरीज के लिए जो भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया (बीसीसीआई) मीटिंग हुई थी उस मीटिंग में बीसीसीआई के सचिन अमिताभ चौधरी, सीईओ राहुल जौहरी, महाप्रबंधक सबा करीम व सीएबी के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भाग लिया.
आपकों बता दे, वाह क्रिकेट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस मीटिंग में ऑस्ट्रेलिया के 2019 भारत दौरें के भी मैचों का ऐलान हुआ है.
दिसंबर जनवरी में भारत को ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है, लेकिन इसके बाद फरवरी मार्च में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत के संग वनडे और टी-20 सीरीज खेलने भारत आ सकती है.
आपकों बता दे, कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की टीम फरवरी-मार्च में भारत दौरें पर आएगी और पांच वनडे मैच व दो टी-20 मैचों की सीरीज खेलेगी.
ऑस्ट्रेलिया के संग भारत की घरेलू सीरीज का पहला मैच मोहाली में 24 फरवरी, दूसरा मैच हैदराबाद में 27 फरवरी, तीसरा मैच नागपुर में दो मार्च, चौथा मैच दिल्ली में पांच मार्च और पांचवा मैच रांची में 8 मार्च को खेला जायेगा. दो टी-20 मैचों के लिए विशाखापट्टनम और बेंगलुरु को चुना गया है.
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आज शनिवार को भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया की एक बैठक हुई. जिसमे वेस्टइंडीज के संग घरेलू सीरीज की मेजबानी पर चर्चा हुई. आपकों बता दे, कि इसी मीटिंग में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फरवरी-मार्च में होने वाली दो हज़ार उन्नीस की वनडे और टी-बीस सीरीज पर भी चर्चा हुई. सबसे पहले आपकों बता दे, कि भारतीय वेस्टइंडीज के संग घरेलू सीरीज और ऑस्ट्रेलिया के संग घरेलू सीरीज के लिए जो भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया मीटिंग हुई थी उस मीटिंग में बीसीसीआई के सचिन अमिताभ चौधरी, सीईओ राहुल जौहरी, महाप्रबंधक सबा करीम व सीएबी के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भाग लिया. आपकों बता दे, वाह क्रिकेट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस मीटिंग में ऑस्ट्रेलिया के दो हज़ार उन्नीस भारत दौरें के भी मैचों का ऐलान हुआ है. दिसंबर जनवरी में भारत को ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है, लेकिन इसके बाद फरवरी मार्च में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत के संग वनडे और टी-बीस सीरीज खेलने भारत आ सकती है. आपकों बता दे, कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की टीम फरवरी-मार्च में भारत दौरें पर आएगी और पांच वनडे मैच व दो टी-बीस मैचों की सीरीज खेलेगी. ऑस्ट्रेलिया के संग भारत की घरेलू सीरीज का पहला मैच मोहाली में चौबीस फरवरी, दूसरा मैच हैदराबाद में सत्ताईस फरवरी, तीसरा मैच नागपुर में दो मार्च, चौथा मैच दिल्ली में पांच मार्च और पांचवा मैच रांची में आठ मार्च को खेला जायेगा. दो टी-बीस मैचों के लिए विशाखापट्टनम और बेंगलुरु को चुना गया है.
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इंडिया न्यूज, lucknow: Akhilesh Yadav said: ज्ञानवापी मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझ कर इस तरह के मुद्दे उठाती ताकि मंहगाई और बेरोजगारी जैसे बिंदुओं से लोगों का ध्यान हट जाए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई दर आजादी के बाद सबसे ज्यादा है। भाजपा की केंद्र सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है ऐसे में जानबूझकर इन मुद्दों को उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास इन मुद्दों का पूरा एक कैलेंडर जो कि चुनाव आने तक लगातार उठाए जाते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि देश में सरकारी कंपनियां बेची जा रही हैं। जब भी मंदिर-मस्जिद मुद्दों पर चर्चा होती है हमें नहीं पता होता है कि देश की कौन सी संपत्ति बेची जा रही है।
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इंडिया न्यूज, lucknow: Akhilesh Yadav said: ज्ञानवापी मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझ कर इस तरह के मुद्दे उठाती ताकि मंहगाई और बेरोजगारी जैसे बिंदुओं से लोगों का ध्यान हट जाए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई दर आजादी के बाद सबसे ज्यादा है। भाजपा की केंद्र सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है ऐसे में जानबूझकर इन मुद्दों को उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास इन मुद्दों का पूरा एक कैलेंडर जो कि चुनाव आने तक लगातार उठाए जाते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि देश में सरकारी कंपनियां बेची जा रही हैं। जब भी मंदिर-मस्जिद मुद्दों पर चर्चा होती है हमें नहीं पता होता है कि देश की कौन सी संपत्ति बेची जा रही है।
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IPL 2019: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 12वें सीजन के छह मैच खेले जा चुके हैं। हर मैच के साथ ऑरेंज कैप और पर्पल कैप के लिए खिलाड़ियों में होड़ बढ़ती ही जा रही है। दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइटर राइडर्स और किंग्स इलेवन पंजाब की टीमें दो-दो मैच खेल चुकी हैं, जबकि बाकी टीमें अभी एक-एक ही मैच खेल सकी हैं। छह मैचों के बाद ऑरेंज कैप दावेदारों में रॉबिन उथप्पा और आंद्रे रसेल की एंट्री हुई है, वहीं नीतीश राणा नंबर-1 बन गए हैं।
पर्पल कैप की बात करें तो यहां चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। जबकि आंद्रे रसेल को यहां भी एंट्री मिल गई है। इमरान ताहिर अभी भी नंबर-1 दावेदार बने हुए हैं, जबकि टॉप-5 गेंदबाजों में चार चेन्नई सुपर किंग्स के ही गेंदबाज हैं। आंद्रे रसेल इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आ गए हैं।
बुधवार (28 मार्च) को खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपनी दूसरी जीत दर्ज की, जबकि किंग्स इलेवन पंजाब को पहली हार का सामना करना पड़ा। कोलकाता नाइट राइडर्स ने किंग्स इलेवन पंजाब को 28 रनों से हराया।
ऑरेंज कैप के लिए दावेदार पांच बल्लेबाज (27 मार्च तक हुए मैच के बाद)
पर्पल कैप के लिए दावेदार पांच गेंदबाज (27 मार्च तक हुए मैच के बाद)
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IPL दो हज़ार उन्नीस: इंडियन प्रीमियर लीग के बारहवें सीजन के छह मैच खेले जा चुके हैं। हर मैच के साथ ऑरेंज कैप और पर्पल कैप के लिए खिलाड़ियों में होड़ बढ़ती ही जा रही है। दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइटर राइडर्स और किंग्स इलेवन पंजाब की टीमें दो-दो मैच खेल चुकी हैं, जबकि बाकी टीमें अभी एक-एक ही मैच खेल सकी हैं। छह मैचों के बाद ऑरेंज कैप दावेदारों में रॉबिन उथप्पा और आंद्रे रसेल की एंट्री हुई है, वहीं नीतीश राणा नंबर-एक बन गए हैं। पर्पल कैप की बात करें तो यहां चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। जबकि आंद्रे रसेल को यहां भी एंट्री मिल गई है। इमरान ताहिर अभी भी नंबर-एक दावेदार बने हुए हैं, जबकि टॉप-पाँच गेंदबाजों में चार चेन्नई सुपर किंग्स के ही गेंदबाज हैं। आंद्रे रसेल इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आ गए हैं। बुधवार को खेले गए मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपनी दूसरी जीत दर्ज की, जबकि किंग्स इलेवन पंजाब को पहली हार का सामना करना पड़ा। कोलकाता नाइट राइडर्स ने किंग्स इलेवन पंजाब को अट्ठाईस रनों से हराया। ऑरेंज कैप के लिए दावेदार पांच बल्लेबाज पर्पल कैप के लिए दावेदार पांच गेंदबाज
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भारत में 30 वर्ष पूर्व वर्ष 1991 में, आर्थिक क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू किए गए थे। उस समय देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय स्थिति में पहुंच गई थी। देश में विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 15 दिनों के आयात लायक राशि तक का ही बच गया था। ऐसी स्थिति में देश को सोना गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा की व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस ऐतिहासिक खराब आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए आर्थिक एवं बैंकिंग क्षेत्रों में कई तरह के सुधार कार्यक्रम लागू किए गए थे। कुछ वर्षों तक तो देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रम ठीक गति से चलते रहे परंतु इसके बाद वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक के कुछ वर्षों के दौरान सुधार कार्यक्रम की गति धीमी हो गई थी। वर्ष 2014 के बाद देश में एक बार पुनः आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को गति देने का प्रयास लगातार किया जा रहा है एवं अब तो आर्थिक क्षेत्र में सुधार कार्यक्रमों ने देश में तेज रफ़्तार पकड़ ली है।
पिछले 30 वर्षों के दौरान मुख्यतः 5 क्षेत्रों में विशेष कार्य हुआ था। देश में राजकोषीय घाटे को कम करने के प्रयास लगातार लगभग सभी केंद्र सरकारों द्वारा किए गए हैं परंतु इस कार्य में भी वर्ष 2014 के बाद से गति आई है। वित्तीय वर्ष 1991 में राजकोषीय घाटा, सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत की राशि तक पहुंच गया था। यह वित्तीय वर्ष 2019-20 में 5 प्रतिशत से नीचे ले आया गया था। परंतु, कोरोना महामारी के चलते बहुत ही विशेष परिस्थितियों में, यह वर्ष 2020-21 में 9. 5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे पुनः 3 से 4 प्रतिशत तक नीचे लाने का रोडमैप केंद्र सरकार ने तैयार कर लिया है एवं इन नीतियों पर अमल भी प्रारम्भ हो गया है। इस प्रकार राजकोषीय घाटे को कम करना केंद्र सरकार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि रही है।
दूसरे, देश में लाइसेन्स राज लगभग समाप्त हो गया है। एक तरह से संरक्षणवाद का खात्मा कर व्यापार की नीतियों को उदार बनाया गया है। भारतीय उद्योग जगत में तो अब, "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" की नीतियों में लगातार हो रहे सुधार के कारण हर्ष व्याप्त है। विदेशी निवेशक भी अब इस कारण से भारत में अपना निवेश लगातार बढ़ा रहे हैं।
तीसरे, नरसिम्हन समिति के प्रतिवेदन के अनुसार देश में बैंकिंग क्षेत्र में भी सुधार कार्यकर्मों को लागू किया गया है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा किए गए सुधार कार्यक्रमों को लागू करने के कारण अब न केवल सरकारी क्षेत्र के बैंकों बल्कि निजी क्षेत्र के बैकों में भी गैर निष्पादनकारी आस्तियों का निपटान तेजी से होने लगा है।
चौथे, विदेशों से आयात एवं निर्यात के नियमों को आसान बनाया गया है। साथ ही, विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर आयात कर में भी कमी की गई है। इससे अन्य देशों की नजरों में भारत की साख में सुधार हुआ है। पहले विदेशी व्यापार में हमारा देश संरक्षणवाद की नीतियों पर चलता था।
पांचवां, देश में मौद्रिक नीतियों में भी सुधार कार्यक्रम लागू करते हुए इसे मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ जोड़ दिया गया है। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक एवं केंद्र सरकार राजकोषीय नीति एवं मौद्रिक नीति में तालमेल बिठाते हुए कार्य करते दिखाई दे रहे हैं, जो देश हित में उचित कदम माना जाना चाहिए।
हाल ही के समय में आर्थिक क्षेत्र में तेजी से किए गए सुधार कार्यक्रमों के कारण देश में न केवल आर्थिक विकास की दर तेज हुई है बल्कि रोजगार के भी कई नए अवसर निर्मित हुए हैं। अन्यथा, कल्पना करें वर्ष 1991 के पूर्व की स्थिति की, जब देश में नौजवान केवल सरकारी क्षेत्र में ही नौकरी की तलाश करते नजर आते थे क्योंकि निजी क्षेत्रों में नौकरियों का नितांत अभाव रहता था। अब स्थितियां बहुत बदल गई हैं एवं अब तो निजी क्षेत्र भी रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित करता दिखाई दे रहा है।
भारत में अभी तक हालांकि कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र (स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र एवं पीने का जल, आदि क्षेत्रों सहित) में सुधार कार्यक्रम लगभग नहीं के बराबर लागू किए गए थे, इसलिए देश में आज भी लगभग 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहते हुए हुए अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है एवं गरीबी में अपना जीवन जीने को मजबूर है। दरअसल, इन कारणों से देश में आर्थिक असमानता की दर में भी वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है। परंतु, हाल ही के समय में कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र में लागू किए गए सुधार कार्यक्रमों के कारण एक बड़ा बदलाव देखने में आ रहा है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह एक बहुत अच्छा परिवर्तन है क्योंकि आज भी देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। यदि इस आबादी की आय में वृद्धि होती है तो गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या में भी तेज गति से कमी होना दिखाई देगी। दूसरे, कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के कारण विदेशों में भी भारत की छवि में सुधार हुआ है एवं भारत से कृषि क्षेत्र से निर्यात लगातार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही, भारत में विदेशी निवेश भी लगातार नित नई ऊँचाइया छू रहा है।
हमारे देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने में कुछ राज्य सरकारों का योगदान बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहा है। यदि देश में गरीबी को समूल नष्ट करना है तो राज्य सरकारों को भी अपना योगदान बढ़ाना होगा। आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को मिलकर ही लागू करना होगा। सोशल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पीने का स्वच्छ जल, प्रत्येक परिवार को बिजली की उपलब्धता आदि ऐसी सेवायें हैं जिन्हें राज्य सरकारों को ही उपलब्ध कराना होता है। इन क्षेत्रों में कुछ वर्षों पूर्व तक देश में बहुत अधिक उत्साहजनक कार्य नहीं हुआ था, परंतु वर्ष 2014 से केंद्र सरकार ने इन क्षेत्रों की ओर भी अपना ध्यान देना प्रारम्भ किया है। जैसे एक नए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सके। अभी हाल ही में एक अन्य नए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है ताकि देश में सहकारिता आंदोलन को सफल बनाया जा सके। सोशल क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू कर देश के आर्थिक विकास तो गति दी जा सकती है।
आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह भी होता है कि देश में दक्षता का विकास करते हुए उत्पादकता में सुधार किया जा सके ताकि अंततः सभी क्षेत्रों (कृषि, उद्योग एवं सेवा) में उत्पादन बढ़ सके। वर्ष 1991 में भारत में केवल 26,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का सकल घरेलू उत्पाद होता था जो आज बढ़कर 2 लाख 80,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के आसपास पहुंच गया है एवं अब केंद्र सरकार ने इसे वर्ष 2025 तक 5 लाख करोड़ अमेरिक डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन्हीं कारणों के चलते केंद्र सरकार देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को गति देने का प्रयास कर रही है।
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भारत में तीस वर्ष पूर्व वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में, आर्थिक क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू किए गए थे। उस समय देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय स्थिति में पहुंच गई थी। देश में विदेशी मुद्रा भंडार मात्र पंद्रह दिनों के आयात लायक राशि तक का ही बच गया था। ऐसी स्थिति में देश को सोना गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा की व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस ऐतिहासिक खराब आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए आर्थिक एवं बैंकिंग क्षेत्रों में कई तरह के सुधार कार्यक्रम लागू किए गए थे। कुछ वर्षों तक तो देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रम ठीक गति से चलते रहे परंतु इसके बाद वर्ष दो हज़ार चार से वर्ष दो हज़ार चौदह तक के कुछ वर्षों के दौरान सुधार कार्यक्रम की गति धीमी हो गई थी। वर्ष दो हज़ार चौदह के बाद देश में एक बार पुनः आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को गति देने का प्रयास लगातार किया जा रहा है एवं अब तो आर्थिक क्षेत्र में सुधार कार्यक्रमों ने देश में तेज रफ़्तार पकड़ ली है। पिछले तीस वर्षों के दौरान मुख्यतः पाँच क्षेत्रों में विशेष कार्य हुआ था। देश में राजकोषीय घाटे को कम करने के प्रयास लगातार लगभग सभी केंद्र सरकारों द्वारा किए गए हैं परंतु इस कार्य में भी वर्ष दो हज़ार चौदह के बाद से गति आई है। वित्तीय वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में राजकोषीय घाटा, सकल घरेलू उत्पाद का आठ प्रतिशत की राशि तक पहुंच गया था। यह वित्तीय वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में पाँच प्रतिशत से नीचे ले आया गया था। परंतु, कोरोना महामारी के चलते बहुत ही विशेष परिस्थितियों में, यह वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में नौ. पाँच प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे पुनः तीन से चार प्रतिशत तक नीचे लाने का रोडमैप केंद्र सरकार ने तैयार कर लिया है एवं इन नीतियों पर अमल भी प्रारम्भ हो गया है। इस प्रकार राजकोषीय घाटे को कम करना केंद्र सरकार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि रही है। दूसरे, देश में लाइसेन्स राज लगभग समाप्त हो गया है। एक तरह से संरक्षणवाद का खात्मा कर व्यापार की नीतियों को उदार बनाया गया है। भारतीय उद्योग जगत में तो अब, "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" की नीतियों में लगातार हो रहे सुधार के कारण हर्ष व्याप्त है। विदेशी निवेशक भी अब इस कारण से भारत में अपना निवेश लगातार बढ़ा रहे हैं। तीसरे, नरसिम्हन समिति के प्रतिवेदन के अनुसार देश में बैंकिंग क्षेत्र में भी सुधार कार्यकर्मों को लागू किया गया है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा किए गए सुधार कार्यक्रमों को लागू करने के कारण अब न केवल सरकारी क्षेत्र के बैंकों बल्कि निजी क्षेत्र के बैकों में भी गैर निष्पादनकारी आस्तियों का निपटान तेजी से होने लगा है। चौथे, विदेशों से आयात एवं निर्यात के नियमों को आसान बनाया गया है। साथ ही, विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर आयात कर में भी कमी की गई है। इससे अन्य देशों की नजरों में भारत की साख में सुधार हुआ है। पहले विदेशी व्यापार में हमारा देश संरक्षणवाद की नीतियों पर चलता था। पांचवां, देश में मौद्रिक नीतियों में भी सुधार कार्यक्रम लागू करते हुए इसे मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ जोड़ दिया गया है। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक एवं केंद्र सरकार राजकोषीय नीति एवं मौद्रिक नीति में तालमेल बिठाते हुए कार्य करते दिखाई दे रहे हैं, जो देश हित में उचित कदम माना जाना चाहिए। हाल ही के समय में आर्थिक क्षेत्र में तेजी से किए गए सुधार कार्यक्रमों के कारण देश में न केवल आर्थिक विकास की दर तेज हुई है बल्कि रोजगार के भी कई नए अवसर निर्मित हुए हैं। अन्यथा, कल्पना करें वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पूर्व की स्थिति की, जब देश में नौजवान केवल सरकारी क्षेत्र में ही नौकरी की तलाश करते नजर आते थे क्योंकि निजी क्षेत्रों में नौकरियों का नितांत अभाव रहता था। अब स्थितियां बहुत बदल गई हैं एवं अब तो निजी क्षेत्र भी रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित करता दिखाई दे रहा है। भारत में अभी तक हालांकि कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लगभग नहीं के बराबर लागू किए गए थे, इसलिए देश में आज भी लगभग साठ प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहते हुए हुए अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है एवं गरीबी में अपना जीवन जीने को मजबूर है। दरअसल, इन कारणों से देश में आर्थिक असमानता की दर में भी वृद्धि दृष्टिगोचर हुई है। परंतु, हाल ही के समय में कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र में लागू किए गए सुधार कार्यक्रमों के कारण एक बड़ा बदलाव देखने में आ रहा है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह एक बहुत अच्छा परिवर्तन है क्योंकि आज भी देश की लगभग साठ प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। यदि इस आबादी की आय में वृद्धि होती है तो गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या में भी तेज गति से कमी होना दिखाई देगी। दूसरे, कृषि क्षेत्र एवं सोशल क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के कारण विदेशों में भी भारत की छवि में सुधार हुआ है एवं भारत से कृषि क्षेत्र से निर्यात लगातार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही, भारत में विदेशी निवेश भी लगातार नित नई ऊँचाइया छू रहा है। हमारे देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने में कुछ राज्य सरकारों का योगदान बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहा है। यदि देश में गरीबी को समूल नष्ट करना है तो राज्य सरकारों को भी अपना योगदान बढ़ाना होगा। आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को मिलकर ही लागू करना होगा। सोशल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पीने का स्वच्छ जल, प्रत्येक परिवार को बिजली की उपलब्धता आदि ऐसी सेवायें हैं जिन्हें राज्य सरकारों को ही उपलब्ध कराना होता है। इन क्षेत्रों में कुछ वर्षों पूर्व तक देश में बहुत अधिक उत्साहजनक कार्य नहीं हुआ था, परंतु वर्ष दो हज़ार चौदह से केंद्र सरकार ने इन क्षेत्रों की ओर भी अपना ध्यान देना प्रारम्भ किया है। जैसे एक नए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सके। अभी हाल ही में एक अन्य नए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है ताकि देश में सहकारिता आंदोलन को सफल बनाया जा सके। सोशल क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू कर देश के आर्थिक विकास तो गति दी जा सकती है। आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह भी होता है कि देश में दक्षता का विकास करते हुए उत्पादकता में सुधार किया जा सके ताकि अंततः सभी क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ सके। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में भारत में केवल छब्बीस,शून्य करोड़ अमेरिकी डॉलर का सकल घरेलू उत्पाद होता था जो आज बढ़कर दो लाख अस्सी,शून्य करोड़ अमेरिकी डॉलर के आसपास पहुंच गया है एवं अब केंद्र सरकार ने इसे वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक पाँच लाख करोड़ अमेरिक डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन्हीं कारणों के चलते केंद्र सरकार देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को गति देने का प्रयास कर रही है।
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यह स्मार्टफ़ोन 1GHz क्वाड-कोर प्रोसेसर और 2GB रैम से लैस है. इस स्मार्टफ़ोन में 4GB की इंटरनल स्टोरेज मौजूद है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए 32GB तक बढ़ाया जा सकता है.
मोबाइल निर्माता कंपनी माइक्रोमैक्स ने अपने नए स्मार्टफ़ोन कैनवस जूस 4G (Q461) को कंपनी की वेबसाइट पर लिस्ट किया है. फ़िलहाल साइट पर इस स्मार्टफ़ोन की कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. माइक्रोमैक्स कैनवस जूस 4G हैंडसेट कैनवस जूस 4 का अपग्रेडेड वर्ज़न है.
अगर माइक्रोमैक्स कैनवस जूस 4G (Q461) स्मार्टफ़ोन के फीचर्स के बारे में बात करें तो इसमें 5-इंच की HD IPS डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 720×1280 पिक्सल है. यह स्मार्टफ़ोन 1GHz क्वाड-कोर प्रोसेसर और 2GB रैम से लैस है. इस स्मार्टफ़ोन में 4GB की इंटरनल स्टोरेज मौजूद है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए 32GB तक बढ़ाया जा सकता है.
इसके साथ ही इस स्मार्टफ़ोन में 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा भी मौजूद है. माइक्रोमैक्स कैनवस जूस 4जी स्मार्टफोन डुअल-सिम (जीएसएम+जीएसएम) हैंडसेट है जो एंड्रॉयड 5.1 लॉलीपॉप ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस होगा.
कनेक्टिविटी के लिए माइक्रोमैक्स कैनवस जूस 4G स्मार्टफोन में 3G, वाई-फाई, GPRS/ एज, GPS/ A-GPS, माइक्रो-USB और ब्लूटूथ फीचर्स मौजूद हैं. इस हैंडसेट में 4000mAh की बैटरी दी गई है. कैनवस जूस 4G की बैटरी के बारे में दावा किया गया है कि यह 14 घंटे तक का टॉक टाइम और 450 घंटे तक का स्टैंडबाय टाइम देगी. एक्सेलेरोमीटर, मैगनेटोमीटर, एंबियंट लाइट सेंसर और प्रॉक्सिमिटी सेंसर भी डिवाइस का हिस्सा होंगे.
आपको बता दें कि, कैनवस जूस 4 स्मार्टफ़ोन 3G को सपोर्ट करता है, जबकि अपग्रेडेड वेरिएंट में 4G LTE फ़ीचर है. माइक्रोमैक्स की लिस्टिंग में कहा गया है कैनवस जूस 4G 50 MBPS की अपलोड स्पीड और 150 MBPS की डाउनलोड स्पीड के साथ आएगा.
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यह स्मार्टफ़ोन एकGHz क्वाड-कोर प्रोसेसर और दोGB रैम से लैस है. इस स्मार्टफ़ोन में चारGB की इंटरनल स्टोरेज मौजूद है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए बत्तीसGB तक बढ़ाया जा सकता है. मोबाइल निर्माता कंपनी माइक्रोमैक्स ने अपने नए स्मार्टफ़ोन कैनवस जूस चारG को कंपनी की वेबसाइट पर लिस्ट किया है. फ़िलहाल साइट पर इस स्मार्टफ़ोन की कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. माइक्रोमैक्स कैनवस जूस चारG हैंडसेट कैनवस जूस चार का अपग्रेडेड वर्ज़न है. अगर माइक्रोमैक्स कैनवस जूस चारG स्मार्टफ़ोन के फीचर्स के बारे में बात करें तो इसमें पाँच-इंच की HD IPS डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन सात सौ बीस×एक हज़ार दो सौ अस्सी पिक्सल है. यह स्मार्टफ़ोन एकGHz क्वाड-कोर प्रोसेसर और दोGB रैम से लैस है. इस स्मार्टफ़ोन में चारGB की इंटरनल स्टोरेज मौजूद है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए बत्तीसGB तक बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही इस स्मार्टफ़ोन में आठ मेगापिक्सल का रियर कैमरा और पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट फेसिंग कैमरा भी मौजूद है. माइक्रोमैक्स कैनवस जूस चारजी स्मार्टफोन डुअल-सिम हैंडसेट है जो एंड्रॉयड पाँच.एक लॉलीपॉप ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस होगा. कनेक्टिविटी के लिए माइक्रोमैक्स कैनवस जूस चारG स्मार्टफोन में तीनG, वाई-फाई, GPRS/ एज, GPS/ A-GPS, माइक्रो-USB और ब्लूटूथ फीचर्स मौजूद हैं. इस हैंडसेट में चार हज़ारmAh की बैटरी दी गई है. कैनवस जूस चारG की बैटरी के बारे में दावा किया गया है कि यह चौदह घंटाटे तक का टॉक टाइम और चार सौ पचास घंटाटे तक का स्टैंडबाय टाइम देगी. एक्सेलेरोमीटर, मैगनेटोमीटर, एंबियंट लाइट सेंसर और प्रॉक्सिमिटी सेंसर भी डिवाइस का हिस्सा होंगे. आपको बता दें कि, कैनवस जूस चार स्मार्टफ़ोन तीनG को सपोर्ट करता है, जबकि अपग्रेडेड वेरिएंट में चारG LTE फ़ीचर है. माइक्रोमैक्स की लिस्टिंग में कहा गया है कैनवस जूस चारG पचास MBPS की अपलोड स्पीड और एक सौ पचास MBPS की डाउनलोड स्पीड के साथ आएगा.
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नई दिल्लीः सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि देशभर में हर साल पांच लाख रोड एक्सिडेंट्स में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है.
गडकरी ने प्रश्नकाल में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार रोड एक्सिडेंट्स की संख्या को कम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और सड़कों पर हादसों में मौत के मामलों को रोकने के प्रयास कर रही है. मंत्री ने कहा कि देश में 14268 किलोमीटर सड़क को चार लेन के मार्ग में बदला जा रहा है. यह काम 2019 तक पूरा होगा.
यह भी पढ़ेंः Full Information: ABP एग्जिट पोल- यूपी से BJP के लिए अच्छी खबर लेकिन मायावती हो सकती हैं 'किंगमेकर'
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नई दिल्लीः सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि देशभर में हर साल पांच लाख रोड एक्सिडेंट्स में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है. गडकरी ने प्रश्नकाल में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार रोड एक्सिडेंट्स की संख्या को कम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और सड़कों पर हादसों में मौत के मामलों को रोकने के प्रयास कर रही है. मंत्री ने कहा कि देश में चौदह हज़ार दो सौ अड़सठ किलोग्राममीटर सड़क को चार लेन के मार्ग में बदला जा रहा है. यह काम दो हज़ार उन्नीस तक पूरा होगा. यह भी पढ़ेंः Full Information: ABP एग्जिट पोल- यूपी से BJP के लिए अच्छी खबर लेकिन मायावती हो सकती हैं 'किंगमेकर'
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सिक्किम बना 'मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट'
नई दिल्ली. '67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (67th National Film Awards)' की आज शाम 4 बजे घोषणा होने वाली है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर आज प्रेस कांफ्रेंस के जरिए फिल्म पुरस्कारों की घोषणा करेंगे. नेशनल मीडिया सेंटर में होने वाली इन पुरस्कारों की घोषणा की जानकारी पीआईबी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट के जरिए दी है. इस प्रेस कांफ्रेंस को पीआईबी इंडिया के यूट्यूब पर चैनल पर लाइव भी देखा जा सकता है.
बता दें, साल 2020 पूरी तरह से कोरोना की चपेट में रहा और इस वजह से आज साल 2019 में बनी फिल्मों के लिए ही पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी. कोरोना महामारी की वजह से पिछले साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा नहीं हो पाई थी, जो 3 मई 2020 को होनी थी. इसी वजह 2019 के पुरस्कारों की घोषणा इस बार की जाएगी.
'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' का इंतजार फिल्मी जगत से जुड़े लोगों को काफी बेसब्री से रहता है और आज वह दिन आ चुका है, जब साल 2019 के लिए बेस्ट फिल्म से लेकर बेस्ट एक्टर तक चुने जाएंगे.
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अश्विन से पहले 4 बॉलर्स ने पिता-पुत्र को बनाया शिकार, पाकिस्तानी दिग्गज भी शामिल, कौन था इस कारनामे का सरताज?
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सिक्किम बना 'मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट' नई दिल्ली. 'सरसठवें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ' की आज शाम चार बजे घोषणा होने वाली है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर आज प्रेस कांफ्रेंस के जरिए फिल्म पुरस्कारों की घोषणा करेंगे. नेशनल मीडिया सेंटर में होने वाली इन पुरस्कारों की घोषणा की जानकारी पीआईबी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट के जरिए दी है. इस प्रेस कांफ्रेंस को पीआईबी इंडिया के यूट्यूब पर चैनल पर लाइव भी देखा जा सकता है. बता दें, साल दो हज़ार बीस पूरी तरह से कोरोना की चपेट में रहा और इस वजह से आज साल दो हज़ार उन्नीस में बनी फिल्मों के लिए ही पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी. कोरोना महामारी की वजह से पिछले साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा नहीं हो पाई थी, जो तीन मई दो हज़ार बीस को होनी थी. इसी वजह दो हज़ार उन्नीस के पुरस्कारों की घोषणा इस बार की जाएगी. 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' का इंतजार फिल्मी जगत से जुड़े लोगों को काफी बेसब्री से रहता है और आज वह दिन आ चुका है, जब साल दो हज़ार उन्नीस के लिए बेस्ट फिल्म से लेकर बेस्ट एक्टर तक चुने जाएंगे. . अश्विन से पहले चार बॉलर्स ने पिता-पुत्र को बनाया शिकार, पाकिस्तानी दिग्गज भी शामिल, कौन था इस कारनामे का सरताज?
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ये क्या हो रहा है। प्रियंका की आवाज और सलमान का डांस। पर सलमान प्रियंका से पूछ क्या रहे हैं?
प्रियंका चोपड़ा 'कृष3' का प्रमोशन करने 'बिग बॉस' के घर आईं। इस दौरान ऋतिक उनके साथ नहीं रहे। लेकिन प्रियंका ने सल्लू के साथ खूब रंग जमाया।
शो में आते ही सलमान ने प्रियंका को गले से लगा लिया।
सलमान ने ऋतिक स्टाइल में कृष के गाने पर भी ठुमके लगाए और इस डांस को डॉगी डांस का नाम दिया।
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ये क्या हो रहा है। प्रियंका की आवाज और सलमान का डांस। पर सलमान प्रियंका से पूछ क्या रहे हैं? प्रियंका चोपड़ा 'कृषतीन' का प्रमोशन करने 'बिग बॉस' के घर आईं। इस दौरान ऋतिक उनके साथ नहीं रहे। लेकिन प्रियंका ने सल्लू के साथ खूब रंग जमाया। शो में आते ही सलमान ने प्रियंका को गले से लगा लिया। सलमान ने ऋतिक स्टाइल में कृष के गाने पर भी ठुमके लगाए और इस डांस को डॉगी डांस का नाम दिया।
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Palamu : जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक सोमवार को समाहरणालय के सभागार में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम की अध्यक्षता में हुई. इस दौरान जिले में आम लोगों के लिए चलायी जा रही योजनाओं की समीक्षा की गयी. कुछ योजनाओं की धीमी प्रगति पर सांसद ने नाराजगी व्यक्त कर संबंधित अधिकारी से सवाल-जवाब भी किया. साथ ही पिछली बैठक में लिए गये निर्णयों एवं अनुपालन के विषय पर भी चर्चा की गयी. बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, समेकित बाल विकास योजना, प्रधानमंत्री उज्वला योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का क्रियान्वयन, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं की समीक्षा की गयी. बैठक में जनप्रतिनिधियों ने समीक्षा के दौरान जिले में विभिन्न विभागों द्वारा किये जा रहे कार्यों में आ रही कमियों को भी बताया. इस पर सांसद ने लक्ष्य आधारित कार्यों को समय पर पूर्ण करने का निर्देश दिया.
बैठक में रेहला की प्रमुख ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में चहारदीवारी निर्माण कराने की बात उठायी, वहीं पांकी विधायक ने मनातू में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बच्चियों के लिए शौचालय निर्माण करवाए जाने का मामला उठाया. बैठक में विधायक आलोक चौरसिया ने अपने क्षेत्र अंतर्गत सड़क के शिलान्यास के दौरान विभाग द्वारा जानकारी नहीं दिये जाने का मामला उठाया. इसी तरह पांकी विधायक ने पांकी विधानसभा क्षेत्र के कई पूल-पुलियों के निर्माण में गड़बड़ी किये जाने का मामला उठाया तथा मनरेगा योजनाओं में जांच की मांग की. इसी तरह बैठक में कई प्रमुखों द्वारा पीडीएस डीलर द्वारा समय से राशन नहीं वितरण किये जाने से संबंधित मामला उठाया गया. सांसद ने पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता से कहा कि बारालोटा जलापूर्ति योजना में लाखों खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिला रहा है. इस पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि लीकेज की शिकायत मिली है जिसे ठीक करा दिया जायेगा. वहीं रामगढ़ प्रमुख ने जंगली क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त कराने की बात कही.
बैठक में विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि रामगढ़ के कई टोलों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है. इस पर सांसद द्वारा बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को इसका तत्काल समाधान करने हेतु निर्देश दिया गया. साथ ही जहां बिजली नहीं है वहां तत्काल बिजली पहुंचाने हेतु निर्देशित किया गया. सतबरवा प्रमुख ने अपने कार्यालय में कुर्सी टेबल नहीं होने व बीडीओ द्वारा किसी भी कार्यक्रम की जानकारी नहीं देने की शिकायत की. इसी तरह अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी आवेदन देकर अपनी-अपनी बातें रखीं. बैठक में सांसद के अलावा डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पांकी विधायाक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता, उपायुक्त आंजनेयुलू दोड्डे, उप विकास आयुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक, सभी प्रखंड प्रमुख, महापौर जिला परिषद उपाध्यक्ष, समेत अन्य सभी विधायक के प्रतिनिधि सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.
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Palamu : जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक सोमवार को समाहरणालय के सभागार में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम की अध्यक्षता में हुई. इस दौरान जिले में आम लोगों के लिए चलायी जा रही योजनाओं की समीक्षा की गयी. कुछ योजनाओं की धीमी प्रगति पर सांसद ने नाराजगी व्यक्त कर संबंधित अधिकारी से सवाल-जवाब भी किया. साथ ही पिछली बैठक में लिए गये निर्णयों एवं अनुपालन के विषय पर भी चर्चा की गयी. बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, समेकित बाल विकास योजना, प्रधानमंत्री उज्वला योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का क्रियान्वयन, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं की समीक्षा की गयी. बैठक में जनप्रतिनिधियों ने समीक्षा के दौरान जिले में विभिन्न विभागों द्वारा किये जा रहे कार्यों में आ रही कमियों को भी बताया. इस पर सांसद ने लक्ष्य आधारित कार्यों को समय पर पूर्ण करने का निर्देश दिया. बैठक में रेहला की प्रमुख ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में चहारदीवारी निर्माण कराने की बात उठायी, वहीं पांकी विधायक ने मनातू में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बच्चियों के लिए शौचालय निर्माण करवाए जाने का मामला उठाया. बैठक में विधायक आलोक चौरसिया ने अपने क्षेत्र अंतर्गत सड़क के शिलान्यास के दौरान विभाग द्वारा जानकारी नहीं दिये जाने का मामला उठाया. इसी तरह पांकी विधायक ने पांकी विधानसभा क्षेत्र के कई पूल-पुलियों के निर्माण में गड़बड़ी किये जाने का मामला उठाया तथा मनरेगा योजनाओं में जांच की मांग की. इसी तरह बैठक में कई प्रमुखों द्वारा पीडीएस डीलर द्वारा समय से राशन नहीं वितरण किये जाने से संबंधित मामला उठाया गया. सांसद ने पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता से कहा कि बारालोटा जलापूर्ति योजना में लाखों खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिला रहा है. इस पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि लीकेज की शिकायत मिली है जिसे ठीक करा दिया जायेगा. वहीं रामगढ़ प्रमुख ने जंगली क्षेत्र में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त कराने की बात कही. बैठक में विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि रामगढ़ के कई टोलों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है. इस पर सांसद द्वारा बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को इसका तत्काल समाधान करने हेतु निर्देश दिया गया. साथ ही जहां बिजली नहीं है वहां तत्काल बिजली पहुंचाने हेतु निर्देशित किया गया. सतबरवा प्रमुख ने अपने कार्यालय में कुर्सी टेबल नहीं होने व बीडीओ द्वारा किसी भी कार्यक्रम की जानकारी नहीं देने की शिकायत की. इसी तरह अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी आवेदन देकर अपनी-अपनी बातें रखीं. बैठक में सांसद के अलावा डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पांकी विधायाक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता, उपायुक्त आंजनेयुलू दोड्डे, उप विकास आयुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक, सभी प्रखंड प्रमुख, महापौर जिला परिषद उपाध्यक्ष, समेत अन्य सभी विधायक के प्रतिनिधि सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.
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अहमदाबाद। कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को 76 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी। लिस्ट जारी होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। नाराज कार्यकर्ताओं ने गांधीनगर स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर पुतला जलाया और जमकर तोड़फोड़ की।
कांग्रेस की तीसरी लिस्ट में बनासकांठा के 2 विधायक के नाम भी काटे गए हैं। इन दोंनो ने ही राज्य सभा चुनाव में अहमद पटेल को वोट दिया था। पहले अहमद पटेल को वोट देने वाले सभी 43 विधायकों को फिर से टिकट देने का भरोसा दिया गया था। इस वजह से भी कार्यकर्ताओं में गुस्सा है।
राज्य के दूसरे चरण के चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है। सूत्रों ने बताया कि हंगामे की आशंका के चलते ही लिस्ट देर रात जारी की गई। हालांकि, इसमें पार्टी ने अपने सभी वर्तमान विधायकों को टिकट दिए हैं।
किसी तरह के विरोध को उपजने से रोकने के लिए पार्टी ने फोन पर अपने करीब 50 उम्मीदवारों को सोमवार को नामांकन दाखिल करने के लिए कह दिया था। बता दें कि 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा के लिए दो चरणों में मतदान कराया जाएगा।
पहले चरण का मतदान 9 दिसंबर और दूसरे चरण का मतदान 14 दिसंबर को कराया जाएगा। मतगणना 18 दिसंबर को होगी। पहले चरण में सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात की 89 सीटों पर और दूसरे चरण में मध्य और उत्तर गुजरात की 93 सीटों पर मतदान कराया जाएगा।
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अहमदाबाद। कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को छिहत्तर उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी। लिस्ट जारी होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। नाराज कार्यकर्ताओं ने गांधीनगर स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर पुतला जलाया और जमकर तोड़फोड़ की। कांग्रेस की तीसरी लिस्ट में बनासकांठा के दो विधायक के नाम भी काटे गए हैं। इन दोंनो ने ही राज्य सभा चुनाव में अहमद पटेल को वोट दिया था। पहले अहमद पटेल को वोट देने वाले सभी तैंतालीस विधायकों को फिर से टिकट देने का भरोसा दिया गया था। इस वजह से भी कार्यकर्ताओं में गुस्सा है। राज्य के दूसरे चरण के चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है। सूत्रों ने बताया कि हंगामे की आशंका के चलते ही लिस्ट देर रात जारी की गई। हालांकि, इसमें पार्टी ने अपने सभी वर्तमान विधायकों को टिकट दिए हैं। किसी तरह के विरोध को उपजने से रोकने के लिए पार्टी ने फोन पर अपने करीब पचास उम्मीदवारों को सोमवार को नामांकन दाखिल करने के लिए कह दिया था। बता दें कि एक सौ बयासी सदस्यीय गुजरात विधानसभा के लिए दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान नौ दिसंबर और दूसरे चरण का मतदान चौदह दिसंबर को कराया जाएगा। मतगणना अट्ठारह दिसंबर को होगी। पहले चरण में सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात की नवासी सीटों पर और दूसरे चरण में मध्य और उत्तर गुजरात की तिरानवे सीटों पर मतदान कराया जाएगा।
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बरदाई का वंशज मानते हैं । इनके अन्धे होने के बारे में जो प्रवाद प्रचलित है, वह मिथ्या मालूम होता है । ये जन्म के अन्धे न थे । इन्होंने प्रकृति का, रूप-रंग का, मानव चेष्टाओं का जो वर्णन किया है, वह जन्मान्ध नहीं कर सकता । उदाहरण के लिए नीचे दिए हुए पद में पनिहारिनों की चेष्टाओं का वर्णन बिना सूक्ष्म निरीक्षण के असंभव है :●
नागरि गागरि लिए पनिघट ते घरहिं आवै । ग्रीवा डोलत, लोचन लोलत, हरि के चितहिं चुरावै ॥ ठठकति चलै, मटकि मुँह मोरै, वंकट भौंह चलावै ।
ये महाप्रभु वल्लभाचार्य के सर्व प्रधान शिष्य थे। उन्हीं की आज्ञा से आप ने भागवतपुराण की कथा को पदों में गाया । यह ग्रन्थ - 'सूर-सागर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसकी पद संख्या सवा लाख मानी जाती है, पर अभी तक लगभग ६ हज्जार पद ही मिल सके हैं। इन पदों में भागवत के दशम स्कन्ध की कथा विस्तारपूर्वक कही गई है। शेष स्कन्धों की कथा बहुत संक्षेप से थोड़े से पदों में कह दी गई है ।
सूर-सागर में कृष्ण जन्म से लेकर कृष्ण के मथुरा जाने तक की कथा बहुत विस्तार से गाई गई है। पर पदों के क्रम और विषय को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह ग्रन्थ कथा कहने की प्रवृत्ति से नहीं रचा गया है। कथानक के अनुसार पदों का कम नहीं है । कहीं कहीं वही विषय भिन्न भिन्न पदों में है। भक्ति भाव से प्रेरित होकर जो भाव सुर के हृदय में उठे उन्हीं को उन्होंने पदों में प्रकट किया है ।
प्रत्येक पद स्वतः पूर्ण है । ये पद मुक्तक के रूप में हैं। सभी पद गेय हैं । अतः सूर सागर को हम गीत-काव्य कह सकते हैं ।
तुलसी की अपेक्षा सूर का काव्य क्षेत्र संकुचित है। तुलसी के राम चरित्र में मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति का समावेश है। सूर के कृष्ण चरित्र में यह व्यापकता नहीं । तब भी शृंगार और वात्सल्य रस की रचनाएँ तुलसी की तद्विषयक रचनाओं से बढ़कर हैं ।
इतना स्वाभाविक चित्र अन्यत्र दुर्लभ है । विप्रलंभ शृंगारात्मक गोपी-विरह का वर्णन और उद्धव के प्रति गोपियों की सुन्दर कटूक्लियाँ बहुत ही मर्मस्पर्शिनी हैं । ऐसा रोचक उपालंभ अन्यत्र नहीं मिलता । यह अंश 'भ्रमरगीत' के नाम से प्रसिद्ध है ।
सूरदास ने रामचरित संबन्धी भी कुछ पद रचे हैं। पर वे उसी प्रकार के हैं जैसे तुलसी के कृष्ण-चरित संबन्धी पद, अर्थात् उनमें वह
रोचकता नहीं है जो सूर के
कृष्ण संबन्धी पदों में और तुलसी के रामसंबन्धी पदों में है ।
सूर-सागर की रचना विशुद्ध व्रजभाषा में हुई है और ब्रजभाषा का यह सर्व श्रेष्ठ ग्रन्थ है। इसमें अनेक वैदेशिक शब्द जैसे 'मसकत' ( फ़ा० मशक्कत ), मुद्दकम, "आयो बाज", 'हवस' इत्यादि भी प्रयुक्त हुए हैं । इनके अन्य ग्रन्थ, सूर सारावली, साहित्य-लहरी, व्याहलो (अप्राप्य ) और नल-दमयन्ती (अप्राप्य ) हैं ।
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बरदाई का वंशज मानते हैं । इनके अन्धे होने के बारे में जो प्रवाद प्रचलित है, वह मिथ्या मालूम होता है । ये जन्म के अन्धे न थे । इन्होंने प्रकृति का, रूप-रंग का, मानव चेष्टाओं का जो वर्णन किया है, वह जन्मान्ध नहीं कर सकता । उदाहरण के लिए नीचे दिए हुए पद में पनिहारिनों की चेष्टाओं का वर्णन बिना सूक्ष्म निरीक्षण के असंभव है :● नागरि गागरि लिए पनिघट ते घरहिं आवै । ग्रीवा डोलत, लोचन लोलत, हरि के चितहिं चुरावै ॥ ठठकति चलै, मटकि मुँह मोरै, वंकट भौंह चलावै । ये महाप्रभु वल्लभाचार्य के सर्व प्रधान शिष्य थे। उन्हीं की आज्ञा से आप ने भागवतपुराण की कथा को पदों में गाया । यह ग्रन्थ - 'सूर-सागर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसकी पद संख्या सवा लाख मानी जाती है, पर अभी तक लगभग छः हज्जार पद ही मिल सके हैं। इन पदों में भागवत के दशम स्कन्ध की कथा विस्तारपूर्वक कही गई है। शेष स्कन्धों की कथा बहुत संक्षेप से थोड़े से पदों में कह दी गई है । सूर-सागर में कृष्ण जन्म से लेकर कृष्ण के मथुरा जाने तक की कथा बहुत विस्तार से गाई गई है। पर पदों के क्रम और विषय को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह ग्रन्थ कथा कहने की प्रवृत्ति से नहीं रचा गया है। कथानक के अनुसार पदों का कम नहीं है । कहीं कहीं वही विषय भिन्न भिन्न पदों में है। भक्ति भाव से प्रेरित होकर जो भाव सुर के हृदय में उठे उन्हीं को उन्होंने पदों में प्रकट किया है । प्रत्येक पद स्वतः पूर्ण है । ये पद मुक्तक के रूप में हैं। सभी पद गेय हैं । अतः सूर सागर को हम गीत-काव्य कह सकते हैं । तुलसी की अपेक्षा सूर का काव्य क्षेत्र संकुचित है। तुलसी के राम चरित्र में मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति का समावेश है। सूर के कृष्ण चरित्र में यह व्यापकता नहीं । तब भी शृंगार और वात्सल्य रस की रचनाएँ तुलसी की तद्विषयक रचनाओं से बढ़कर हैं । इतना स्वाभाविक चित्र अन्यत्र दुर्लभ है । विप्रलंभ शृंगारात्मक गोपी-विरह का वर्णन और उद्धव के प्रति गोपियों की सुन्दर कटूक्लियाँ बहुत ही मर्मस्पर्शिनी हैं । ऐसा रोचक उपालंभ अन्यत्र नहीं मिलता । यह अंश 'भ्रमरगीत' के नाम से प्रसिद्ध है । सूरदास ने रामचरित संबन्धी भी कुछ पद रचे हैं। पर वे उसी प्रकार के हैं जैसे तुलसी के कृष्ण-चरित संबन्धी पद, अर्थात् उनमें वह रोचकता नहीं है जो सूर के कृष्ण संबन्धी पदों में और तुलसी के रामसंबन्धी पदों में है । सूर-सागर की रचना विशुद्ध व्रजभाषा में हुई है और ब्रजभाषा का यह सर्व श्रेष्ठ ग्रन्थ है। इसमें अनेक वैदेशिक शब्द जैसे 'मसकत' , मुद्दकम, "आयो बाज", 'हवस' इत्यादि भी प्रयुक्त हुए हैं । इनके अन्य ग्रन्थ, सूर सारावली, साहित्य-लहरी, व्याहलो और नल-दमयन्ती हैं ।
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नई दिल्लीः पाकिस्तान में जासूसी के आरोप भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने पर भारत सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति जाताई गई है। भारत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने पर पाकिस्तान उच्चायुक्त को डीमार्शे जारी किया।
विदेश सचिव ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और कहा कि यदि कानून एवं न्याय के मूल सिद्धांतों का पालन किए बगैर सजा अमल की जाती है तो यह सुनियोजित हत्या का मामला होगा।
जाधव को पिछले साल तीन मार्च को पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बलूचिस्तान से तब गिरफ्तार किया था जब वह ईरान से पाक में दाखिल हुआ था। पाकिस्तान ने जाधव पर देश में विध्वंसक गतिविधियों की साजिश रचने का आरोप लगाया था। भारत ने माना था कि जाधव एक सेवानिवृत्त नौ सेना अधिकारी हैं लेकिन उसने इस आरोप को खारिज किया था कि वह किसी भी तरह भारत सरकार से जुड़े हैं।
इन्हें भी पढ़ेंः
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नई दिल्लीः पाकिस्तान में जासूसी के आरोप भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने पर भारत सरकार की ओर से कड़ी आपत्ति जाताई गई है। भारत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने पर पाकिस्तान उच्चायुक्त को डीमार्शे जारी किया। विदेश सचिव ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और कहा कि यदि कानून एवं न्याय के मूल सिद्धांतों का पालन किए बगैर सजा अमल की जाती है तो यह सुनियोजित हत्या का मामला होगा। जाधव को पिछले साल तीन मार्च को पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बलूचिस्तान से तब गिरफ्तार किया था जब वह ईरान से पाक में दाखिल हुआ था। पाकिस्तान ने जाधव पर देश में विध्वंसक गतिविधियों की साजिश रचने का आरोप लगाया था। भारत ने माना था कि जाधव एक सेवानिवृत्त नौ सेना अधिकारी हैं लेकिन उसने इस आरोप को खारिज किया था कि वह किसी भी तरह भारत सरकार से जुड़े हैं। इन्हें भी पढ़ेंः
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इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस परामर्श केंद्र में पतियों की शिकायतें बढ़ रही हैं. जी हां यहां एक पीड़ित व्यक्ति ने थाने में जाकर पुलिस के सामने जो बताया उससे आपका शरीर कांप उठेगा. उसने पत्र में लिखा साहब! पत्नी कमरा बंद कर बेलन और डंडों से पीटती है. विरोध करो तो बुजुर्ग मां और छोटी बहनों को पीटने पर आमादा हो जाती है. . . ये आरोप यूपी की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी एक युवक ने लगाए हैं. पुलिस परामर्श केंद्र में दिए प्रार्थना पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनकी पत्नी उनके पूरे परिवार को प्रताड़ित कर रही है. वह अकेले ऐसे शख्स नहीं हैं. उनकी तरह कई पुरुषों ने पत्नियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए परामर्श केंद्र का दरवाजा खटखटाया है.
वहीं फैजुल्लागंज के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी शक्की हो चुकी है और पिछले पांच महीने से आए दिन लड़ाई-झगड़ा करती है. एक रात तो उन्हें डंडे से इतना मारा कि उनका हाथ टूट गया. उनका आरोप है कि पत्नी उनके बुजुर्ग पिता को भी खाना नहीं देती. यही नहीं, पुलिस परामर्श केंद्र में काउंसलिंग के वक्त भी वह मारपीट पर आमादा हो जाती है. उसने आरोप लगाया है कि मै खुबसुरत नही हूं इसलिए उसकी पत्नी उससे लड़ाई-झगड़ा करती है.
बल्दीखेड़ा निवासी युवक ने परामर्श केंद्र में की शिकायत में कहा है कि शादी के कुछ दिन बाद से उसकी पत्नी मायके जाकर रहने लगी है. जब उसने पूछा तो पत्नी ने कहा कि तुम खूबसूरत नहीं हो. जब हो जाओगे, तब आऊंगी.
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इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस परामर्श केंद्र में पतियों की शिकायतें बढ़ रही हैं. जी हां यहां एक पीड़ित व्यक्ति ने थाने में जाकर पुलिस के सामने जो बताया उससे आपका शरीर कांप उठेगा. उसने पत्र में लिखा साहब! पत्नी कमरा बंद कर बेलन और डंडों से पीटती है. विरोध करो तो बुजुर्ग मां और छोटी बहनों को पीटने पर आमादा हो जाती है. . . ये आरोप यूपी की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी एक युवक ने लगाए हैं. पुलिस परामर्श केंद्र में दिए प्रार्थना पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनकी पत्नी उनके पूरे परिवार को प्रताड़ित कर रही है. वह अकेले ऐसे शख्स नहीं हैं. उनकी तरह कई पुरुषों ने पत्नियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए परामर्श केंद्र का दरवाजा खटखटाया है. वहीं फैजुल्लागंज के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी पत्नी शक्की हो चुकी है और पिछले पांच महीने से आए दिन लड़ाई-झगड़ा करती है. एक रात तो उन्हें डंडे से इतना मारा कि उनका हाथ टूट गया. उनका आरोप है कि पत्नी उनके बुजुर्ग पिता को भी खाना नहीं देती. यही नहीं, पुलिस परामर्श केंद्र में काउंसलिंग के वक्त भी वह मारपीट पर आमादा हो जाती है. उसने आरोप लगाया है कि मै खुबसुरत नही हूं इसलिए उसकी पत्नी उससे लड़ाई-झगड़ा करती है. बल्दीखेड़ा निवासी युवक ने परामर्श केंद्र में की शिकायत में कहा है कि शादी के कुछ दिन बाद से उसकी पत्नी मायके जाकर रहने लगी है. जब उसने पूछा तो पत्नी ने कहा कि तुम खूबसूरत नहीं हो. जब हो जाओगे, तब आऊंगी.
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नंदुरबार जिले में लाल मिर्च का उत्पादन घटा तो बढ़ने लगा दाम, फिर भी क्यों परेशान हैं किसान?
महाराष्ट्र के नंदुरबार बाजार को मिर्च हब के रूप में जाना जाता है. लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और लागत में वृद्धि की वजह से इसकी खेती फायदे का सौदा साबित नहीं हो रही है.
महाराष्ट्र में प्रकृति की मार सभी फसलों पर पड़ी है. सब्जियों की खेती को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. प्रदेश में मिर्च उत्पादन का मुख्य केंद्र माने जाने वाले नंदुरबार जिले में इसका रकबा भी पिछले पांच साल से घटते उत्पादन के कारण सिकुड़ गया है. इस समय स्थानीय मंडियों में 3,000 क्विंटल मिर्च की आवक है. इस समय लाल मिर्च की कीमत 2,000 रुपये से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. नंदुरबार जिले में मिर्च का उत्पादन घट रहा हैं. इसलिए भाव बढ़ रहा हैं. बाजार में मौसमी मिर्च की आवक शुरू हो गई है.
हालांकि, इस साल राजस्व हर साल की तुलना में कम रहने की उम्मीद है. इस बार अधिक नुकसान होने के कारण किसान मिर्च की खेती करने से कतरा रहे हैं. इसलिए राज्य के किसान अब मिर्च की जगह गन्ना ,केला और पपीता जैसी नकदी फसलों की खेती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
नंदुरबार बाजार को मिर्च के डिपो के रूप में जाना जाता है. यहां की मिर्च विदेशों में भी प्रसिद्ध है. जिले में विभिन्न प्रकार की मिर्च उगाई जाती है. जिले में हर साल दस हजार एकड़ से अधिक पौधे लगाए जाते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में मिर्च खेती के क्षेत्र में गिरावट आई है. गुजरात सीमा से भी किसान जिले में मिर्च बेचने के लिए लाते हैं. स्थानीय मिर्च उत्पादन के कारण निजी मिर्च प्रसंस्करण उद्योग भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गए हैं.
प्राकृतिक असंतुलन, अधिक वर्षा और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण मिर्च का उत्पादन किसानों के लिए पहले जैसा फायदे का सौदा नहीं है. इससे पिछले पांच साल में किसानों को भारी नुकसान हुआ है. यही असर मिर्च की खेती पर भी हो रहा है. जो किसान 10 से 50 एकड़ में ही काली मिर्च की खेती करते थे वह अब घटकर एक से 20 एकड़ में रह गए हैं. किसान अब मिर्च की जगह गन्ना ,केला और पपीता जैसी नकदी फसलों की ओर रुख कर चुके हैं.
महाराष्ट्र में कृषि के जानकारों का कहना है कि इस समय बाजारों में वीएनआर, जरेला, फपड़ा और अन्य प्रकार की मिर्च का आना शुरू हो गया है. तो वहीं मंडी समिति में करीब ढाई से तीन हजार क्विंटल मिर्च बिक्री के लिए आ रही है. मिर्च का भाव 2,000 रुपये से 2600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है. किसानों का कहना है कि जब तक इसकी उत्पादन लागत कम नहीं होगी तब इसकी खेती फायदे का सौदा नहीं होगी.
ये भी पढ़ेंः Onion Price: एक सप्ताह बाद बाजार में आ जाएगा अर्ली खरीफ सीजन का प्याज, क्या कम होंगे दाम?
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नंदुरबार जिले में लाल मिर्च का उत्पादन घटा तो बढ़ने लगा दाम, फिर भी क्यों परेशान हैं किसान? महाराष्ट्र के नंदुरबार बाजार को मिर्च हब के रूप में जाना जाता है. लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और लागत में वृद्धि की वजह से इसकी खेती फायदे का सौदा साबित नहीं हो रही है. महाराष्ट्र में प्रकृति की मार सभी फसलों पर पड़ी है. सब्जियों की खेती को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. प्रदेश में मिर्च उत्पादन का मुख्य केंद्र माने जाने वाले नंदुरबार जिले में इसका रकबा भी पिछले पांच साल से घटते उत्पादन के कारण सिकुड़ गया है. इस समय स्थानीय मंडियों में तीन,शून्य क्विंटल मिर्च की आवक है. इस समय लाल मिर्च की कीमत दो,शून्य रुपयापये से दो,पाँच सौ रुपयापये प्रति क्विंटल हो गई है. नंदुरबार जिले में मिर्च का उत्पादन घट रहा हैं. इसलिए भाव बढ़ रहा हैं. बाजार में मौसमी मिर्च की आवक शुरू हो गई है. हालांकि, इस साल राजस्व हर साल की तुलना में कम रहने की उम्मीद है. इस बार अधिक नुकसान होने के कारण किसान मिर्च की खेती करने से कतरा रहे हैं. इसलिए राज्य के किसान अब मिर्च की जगह गन्ना ,केला और पपीता जैसी नकदी फसलों की खेती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. नंदुरबार बाजार को मिर्च के डिपो के रूप में जाना जाता है. यहां की मिर्च विदेशों में भी प्रसिद्ध है. जिले में विभिन्न प्रकार की मिर्च उगाई जाती है. जिले में हर साल दस हजार एकड़ से अधिक पौधे लगाए जाते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में मिर्च खेती के क्षेत्र में गिरावट आई है. गुजरात सीमा से भी किसान जिले में मिर्च बेचने के लिए लाते हैं. स्थानीय मिर्च उत्पादन के कारण निजी मिर्च प्रसंस्करण उद्योग भी बड़े पैमाने पर शुरू हो गए हैं. प्राकृतिक असंतुलन, अधिक वर्षा और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण मिर्च का उत्पादन किसानों के लिए पहले जैसा फायदे का सौदा नहीं है. इससे पिछले पांच साल में किसानों को भारी नुकसान हुआ है. यही असर मिर्च की खेती पर भी हो रहा है. जो किसान दस से पचास एकड़ में ही काली मिर्च की खेती करते थे वह अब घटकर एक से बीस एकड़ में रह गए हैं. किसान अब मिर्च की जगह गन्ना ,केला और पपीता जैसी नकदी फसलों की ओर रुख कर चुके हैं. महाराष्ट्र में कृषि के जानकारों का कहना है कि इस समय बाजारों में वीएनआर, जरेला, फपड़ा और अन्य प्रकार की मिर्च का आना शुरू हो गया है. तो वहीं मंडी समिति में करीब ढाई से तीन हजार क्विंटल मिर्च बिक्री के लिए आ रही है. मिर्च का भाव दो,शून्य रुपयापये से दो हज़ार छः सौ रुपयापये प्रति क्विंटल के बीच है. किसानों का कहना है कि जब तक इसकी उत्पादन लागत कम नहीं होगी तब इसकी खेती फायदे का सौदा नहीं होगी. ये भी पढ़ेंः Onion Price: एक सप्ताह बाद बाजार में आ जाएगा अर्ली खरीफ सीजन का प्याज, क्या कम होंगे दाम?
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नयी दिल्ली, 26 फरवरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की वर्षगांठ पर शुक्रवार को भारतीय वायु सेना के जांबाजों की वीरता को सलाम किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा सर्वोपरि है।
भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने 26 फरवरी 2019 को नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करते हुए पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आंतकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान शहीद हो गये थे, जिसके कुछ दिनों बाद वायु सेना ने बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर एयर स्ट्राइक किये थे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, छब्बीस फरवरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की वर्षगांठ पर शुक्रवार को भारतीय वायु सेना के जांबाजों की वीरता को सलाम किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने छब्बीस फरवरी दो हज़ार उन्नीस को नियंत्रण रेखा पार करते हुए पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आंतकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया था। उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में चौदह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को हुए आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के चालीस जवान शहीद हो गये थे, जिसके कुछ दिनों बाद वायु सेना ने बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर एयर स्ट्राइक किये थे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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कश्मीर का मामला इन दिनों तूल पकड़ रहा है, खासतौर पर जबसे कुख्यात आतंकी बुरहान वानी को सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराया गया। एक महीने से भी ज्यादा हो गया है और कश्मीर अभी भी अशांत बना हुआ है। केंद्र और राज्य सरकारें दोनों स्थिति को सामान्य बनाने हेतु भरसक यत्न कर रही हैं। कोशिश यह की जा रही है कि विभिन्न पक्षों के बीच वार्ता द्वारा कोई समाधान निकाला जाए।
जैसा कि होता है ऐसे उलझे हुए मामलों में प्रायः सत्तारुढ़ दल अपनी पूर्ववर्ती सरकार पर दोषारोपण करते हुए कहता है कि समस्या हम पर थोपी गई है। समय रहते अगर पुरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए होते और जिहादी-अलगाववादी गतिविधियों पर लगाम कसी होती तो आज कश्मीर में हालात इतने बिगड़े हुए न होते।
कहने की आवश्यकता नहीं कि कश्मीर में जब-जब सरकार बदलती है, लगभग यही आरोप सरकारें एक-दूसरे पर लगाती आई हैं। सत्ता में रहने या सत्ता हासिल करने के लिए ये आरोप-प्रत्यारोप कश्मीर की राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।
इसी तरह का एक आरोप 1990 में कश्मीर के हुक्मरानों द्वारा गवर्नर जगमोहन पर लगाया गया था कि कश्मीर से पंडितों के विस्थापन में जगमोहन की विशेष भूमिका रही है। हालांकि इस आक्षेप का न तो कोई प्रमाण था और न कोई दस्तावेज, मगर फिर भी इस आरोप को तब मीडिया ने खूब उछाला था।
कहने का तात्पर्य यह है कि राजनीति में रहने के लिए, अपनी राजनीति चमकाने के लिए या फिर जैसे-तैसे खबरों में छाए रहने के लिए आरोप गढ़ना-मढ़ना अब हमारी राजनीति का चलन हो गया। जिन्होंने जगमोहन की पुस्तक 'माय फ्रोजेन टरबुलंस इन कश्मीर' पढ़ी हो, वे बता सकते हैं कि पंडित वादी से पलायन करने को क्यों मजबूर हुए थे?
जगमोहन ने तो सीमित साधनों और विपरीत परिस्थितियों के चलते घाटी में विकराल रूप लेती आतंककारी घटनाओं को खूब रोकना चाहा था, मगर उस समय के स्थानीय प्रशासन और केंद्र की उदासीनता की वजह से स्थिति बिगड़ती चली गई थी। जब आतंकियों द्वारा निर्दोष पंडितों को मौत के घाट उतारने का सिलसिला बढ़ता चला गया तो जान बचाने का एक ही रास्ता रह गया था उनके पास और वह था घरबार छोड़कर भाग जाना।
लगभग 26 साल हो गए हैं पंडितों को बेघर हुए। इनके बेघर होने पर आज तक न तो कोई जांच-आयोग ही बैठा, न कोई स्टिंग ऑपरेशन ही हुआ और न ही संसद में या संसद के बाहर इनकी त्रासद स्थिति पर कोई बहसबाजी ही हुई।
इसके विपरीत 'आजादी चाहने' वाले अलगाववादियों और जिहादियों/ जुनूनियों को सत्ता-पक्ष और मानवाधिकार के सरपरस्तों ने हमेशा सहानुभूति की नजर से ही देखा। पहले भी यही हो रहा था और आज भी यही हो रहा है।
काश! अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की तरह कश्मीरी पंडितों का भी अपना कोई वोट-बैंक होता तो आज स्थिति दूसरी ही होती!
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कश्मीर का मामला इन दिनों तूल पकड़ रहा है, खासतौर पर जबसे कुख्यात आतंकी बुरहान वानी को सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराया गया। एक महीने से भी ज्यादा हो गया है और कश्मीर अभी भी अशांत बना हुआ है। केंद्र और राज्य सरकारें दोनों स्थिति को सामान्य बनाने हेतु भरसक यत्न कर रही हैं। कोशिश यह की जा रही है कि विभिन्न पक्षों के बीच वार्ता द्वारा कोई समाधान निकाला जाए। जैसा कि होता है ऐसे उलझे हुए मामलों में प्रायः सत्तारुढ़ दल अपनी पूर्ववर्ती सरकार पर दोषारोपण करते हुए कहता है कि समस्या हम पर थोपी गई है। समय रहते अगर पुरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए होते और जिहादी-अलगाववादी गतिविधियों पर लगाम कसी होती तो आज कश्मीर में हालात इतने बिगड़े हुए न होते। कहने की आवश्यकता नहीं कि कश्मीर में जब-जब सरकार बदलती है, लगभग यही आरोप सरकारें एक-दूसरे पर लगाती आई हैं। सत्ता में रहने या सत्ता हासिल करने के लिए ये आरोप-प्रत्यारोप कश्मीर की राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। इसी तरह का एक आरोप एक हज़ार नौ सौ नब्बे में कश्मीर के हुक्मरानों द्वारा गवर्नर जगमोहन पर लगाया गया था कि कश्मीर से पंडितों के विस्थापन में जगमोहन की विशेष भूमिका रही है। हालांकि इस आक्षेप का न तो कोई प्रमाण था और न कोई दस्तावेज, मगर फिर भी इस आरोप को तब मीडिया ने खूब उछाला था। कहने का तात्पर्य यह है कि राजनीति में रहने के लिए, अपनी राजनीति चमकाने के लिए या फिर जैसे-तैसे खबरों में छाए रहने के लिए आरोप गढ़ना-मढ़ना अब हमारी राजनीति का चलन हो गया। जिन्होंने जगमोहन की पुस्तक 'माय फ्रोजेन टरबुलंस इन कश्मीर' पढ़ी हो, वे बता सकते हैं कि पंडित वादी से पलायन करने को क्यों मजबूर हुए थे? जगमोहन ने तो सीमित साधनों और विपरीत परिस्थितियों के चलते घाटी में विकराल रूप लेती आतंककारी घटनाओं को खूब रोकना चाहा था, मगर उस समय के स्थानीय प्रशासन और केंद्र की उदासीनता की वजह से स्थिति बिगड़ती चली गई थी। जब आतंकियों द्वारा निर्दोष पंडितों को मौत के घाट उतारने का सिलसिला बढ़ता चला गया तो जान बचाने का एक ही रास्ता रह गया था उनके पास और वह था घरबार छोड़कर भाग जाना। लगभग छब्बीस साल हो गए हैं पंडितों को बेघर हुए। इनके बेघर होने पर आज तक न तो कोई जांच-आयोग ही बैठा, न कोई स्टिंग ऑपरेशन ही हुआ और न ही संसद में या संसद के बाहर इनकी त्रासद स्थिति पर कोई बहसबाजी ही हुई। इसके विपरीत 'आजादी चाहने' वाले अलगाववादियों और जिहादियों/ जुनूनियों को सत्ता-पक्ष और मानवाधिकार के सरपरस्तों ने हमेशा सहानुभूति की नजर से ही देखा। पहले भी यही हो रहा था और आज भी यही हो रहा है। काश! अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की तरह कश्मीरी पंडितों का भी अपना कोई वोट-बैंक होता तो आज स्थिति दूसरी ही होती!
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नई दिल्लीः अरविंद केजरीवाल को सर्वसम्मति से आम आदमी पार्टी के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. बुधवार को केजरीवाल के आवास पर आप के नवनिर्वाचित विधायकों की बुलाई बैठक में इसपर मुहर लगाई गई. इस बैठक में मनीष सिसोदिया ने अरविंद केजरीवाल को विधायक दल का नेता चुनने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया.
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पंकज गुप्ता मीटिंग के ऑबजर्वर थे. सबने एक मत से अरविंद केजरीवाल को विधायक दल का नेता चुना. केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने के प्रस्ताव का आप के सभी विधायकों ने एकमत से समर्थन किया.
केजरीवाल के शपथ ग्रहण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई अन्य गैर-बीजेपी शासित राज्यों के सीएम के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
बता दें कि मंगलवार को आए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को जबरदस्त जीत हासिल हुई है. दिल्ली की 70 सीटों में से उसने 62 पर अपना कब्जा जमाया है. वहीं बीजेपी को महज आठ सीटों पर ही जीत नसीब हुई. पिछली बार की तरह इस बार भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला. आप को कुल पड़े वोटों का 53. 6 प्रतिशत शेयर मिला जबकि बीजेपी को 38. 5 फीसदी मत पड़े. कांग्रेस के हिस्से में महज 4. 26 प्रतिशत वोट शेयर रहा.
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नई दिल्लीः अरविंद केजरीवाल को सर्वसम्मति से आम आदमी पार्टी के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. बुधवार को केजरीवाल के आवास पर आप के नवनिर्वाचित विधायकों की बुलाई बैठक में इसपर मुहर लगाई गई. इस बैठक में मनीष सिसोदिया ने अरविंद केजरीवाल को विधायक दल का नेता चुनने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पंकज गुप्ता मीटिंग के ऑबजर्वर थे. सबने एक मत से अरविंद केजरीवाल को विधायक दल का नेता चुना. केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने के प्रस्ताव का आप के सभी विधायकों ने एकमत से समर्थन किया. केजरीवाल के शपथ ग्रहण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई अन्य गैर-बीजेपी शासित राज्यों के सीएम के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. बता दें कि मंगलवार को आए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को जबरदस्त जीत हासिल हुई है. दिल्ली की सत्तर सीटों में से उसने बासठ पर अपना कब्जा जमाया है. वहीं बीजेपी को महज आठ सीटों पर ही जीत नसीब हुई. पिछली बार की तरह इस बार भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला. आप को कुल पड़े वोटों का तिरेपन. छः प्रतिशत शेयर मिला जबकि बीजेपी को अड़तीस. पाँच फीसदी मत पड़े. कांग्रेस के हिस्से में महज चार. छब्बीस प्रतिशत वोट शेयर रहा. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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हा हा हा हा, आदरणीय लक्ष्मण जी, आप गंभीर माहौल को भी हल्का बना देने की काबिलियत रखते हैं, मैंने अक्सरहा आपके कम्मेंट्स पढकर खुद को हल्का महसूस किया है क्यूंकि साथ में आपकी मासूम सी तशरीह (व्याख्या) अंदर कहीं गुदीगुदी सी पैदा कर देती है!
बहुत खूब आदरणीय राज नवदावी जी भले जलाती हो खुद को, इस तरह यादो में,
इक नदी ही तो है समन्दर नहीं,
आदरणीया सीमाजी, आपकी शुभकामनाओं का शुक्रिया; आपकी सुंदर पंक्तियों ने जैसे दो कदम रखे, तो मैं भी रवां हो गया तखय्युल की राह!
आदरणीया राजेश जी, आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया. क्या बात है, दाद भी उसी रदीफोकाफिये में! एक बार फिर से शुक्रिया!
Dear Ajay Bhai, thanks for reading my couplets and liking them. This encourages me in an unbounded way and also gives me pleasure of sharing. Regards! आपकी तहसीन का बहुत बहुत शुक्रिया!
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हा हा हा हा, आदरणीय लक्ष्मण जी, आप गंभीर माहौल को भी हल्का बना देने की काबिलियत रखते हैं, मैंने अक्सरहा आपके कम्मेंट्स पढकर खुद को हल्का महसूस किया है क्यूंकि साथ में आपकी मासूम सी तशरीह अंदर कहीं गुदीगुदी सी पैदा कर देती है! बहुत खूब आदरणीय राज नवदावी जी भले जलाती हो खुद को, इस तरह यादो में, इक नदी ही तो है समन्दर नहीं, आदरणीया सीमाजी, आपकी शुभकामनाओं का शुक्रिया; आपकी सुंदर पंक्तियों ने जैसे दो कदम रखे, तो मैं भी रवां हो गया तखय्युल की राह! आदरणीया राजेश जी, आपकी हौसलाअफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया. क्या बात है, दाद भी उसी रदीफोकाफिये में! एक बार फिर से शुक्रिया! Dear Ajay Bhai, thanks for reading my couplets and liking them. This encourages me in an unbounded way and also gives me pleasure of sharing. Regards! आपकी तहसीन का बहुत बहुत शुक्रिया!
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प्रशांत किशोर ने दिल्ली हिंसा को लेकर भी नीतीश से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक भी शब्द नहीं कहना भी गलत था. दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों की संख्या बढकर अब 46 हो गई है. इसके अलावा, सैंकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं.
जदयू से निष्कासित पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर ट्वीट कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में 200 सीट जीतने का दावा किया गया, लेकिन यह नहीं बताया कि 15 साल के 'सुशासन' के बावजूद बिहार आज भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य क्यों हैं? साथ ही उन्होंने दिल्ली हिंसा को लेकर भी मुख्यमंत्री पर हमला बोला है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक शब्द भी नहीं बोलना भी गलत था.
प्रशांत ने ट्वीट में लिखा है कि "पटना में जदयू के कार्यकर्ताओं की "भारी भीड़" को सम्बोधित करते हुए नीतीश कुमार ने 200 सीटें जीतने का दावा किया लेकिन ये नहीं बताया कि 15 साल के उनके "सुशासन" के बावजूद बिहार आज भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य क्यों हैं? प्रशांत किशोर जदयू में रहते हुए भी सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर रहे और यही वजह रही कि पार्टी विरोधी बयानों के कारण उन्हें जदयू से निकाल दिया गया. इसके बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि उनके और नीतीश कुमार के बीच किन वजहों से मतभेद थे. प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के बारे मेंकहा था कि नीतीश कुमार ने उन्हें बेटे की तरह रखा. उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, लेकिन मैं फिर भी उनका सम्मान करता हूं. हमारे बीच विचारधारा की लडाई है. मेरा मानना है कि बापू और गोडसे की विचारधारा एक साथ नहीं चल सकती.
प्रशांत किशोर ने दिल्ली हिंसा को लेकर भी नीतीश से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक भी शब्द नहीं कहना भी गलत था. दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों की संख्या बढकर अब 46 हो गई है. इसके अलावा, सैंकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं. यहां बता दें कि रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्मदिन था और साथ ही पटना के गांधी मैदान में जदयू के द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था. इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ ही लड़ेंगे और 200 से ज्यादा सीटें जीतेंगे. बताया जाता है कि जदयू से निकाले जाने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 'बात बिहार की' कार्यक्रम की शुरुआत करने की बात कही थी. अब वे होली के बाद कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे. हालांकि, इस संबंध में अभी तक उन्होंने तिथि की घोषणा नहीं की गई है. उल्लेखनीय है कि उन्होंने करीब 10 लाख लोगों को मुहिम से जोड़ने का दावा किया था. साथ ही कहा था कि अभी उनके साथ करीब सवा लाख सक्रिय सदस्य हैं.
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प्रशांत किशोर ने दिल्ली हिंसा को लेकर भी नीतीश से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक भी शब्द नहीं कहना भी गलत था. दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों की संख्या बढकर अब छियालीस हो गई है. इसके अलावा, सैंकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं. जदयू से निष्कासित पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर ट्वीट कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में दो सौ सीट जीतने का दावा किया गया, लेकिन यह नहीं बताया कि पंद्रह साल के 'सुशासन' के बावजूद बिहार आज भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य क्यों हैं? साथ ही उन्होंने दिल्ली हिंसा को लेकर भी मुख्यमंत्री पर हमला बोला है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक शब्द भी नहीं बोलना भी गलत था. प्रशांत ने ट्वीट में लिखा है कि "पटना में जदयू के कार्यकर्ताओं की "भारी भीड़" को सम्बोधित करते हुए नीतीश कुमार ने दो सौ सीटें जीतने का दावा किया लेकिन ये नहीं बताया कि पंद्रह साल के उनके "सुशासन" के बावजूद बिहार आज भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य क्यों हैं? प्रशांत किशोर जदयू में रहते हुए भी सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर रहे और यही वजह रही कि पार्टी विरोधी बयानों के कारण उन्हें जदयू से निकाल दिया गया. इसके बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि उनके और नीतीश कुमार के बीच किन वजहों से मतभेद थे. प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के बारे मेंकहा था कि नीतीश कुमार ने उन्हें बेटे की तरह रखा. उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, लेकिन मैं फिर भी उनका सम्मान करता हूं. हमारे बीच विचारधारा की लडाई है. मेरा मानना है कि बापू और गोडसे की विचारधारा एक साथ नहीं चल सकती. प्रशांत किशोर ने दिल्ली हिंसा को लेकर भी नीतीश से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि दिल्ली हिंसा पर आपकी ओर से एक भी शब्द नहीं कहना भी गलत था. दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वालों की संख्या बढकर अब छियालीस हो गई है. इसके अलावा, सैंकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं. यहां बता दें कि रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्मदिन था और साथ ही पटना के गांधी मैदान में जदयू के द्वारा कार्यकर्ता सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था. इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ ही लड़ेंगे और दो सौ से ज्यादा सीटें जीतेंगे. बताया जाता है कि जदयू से निकाले जाने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 'बात बिहार की' कार्यक्रम की शुरुआत करने की बात कही थी. अब वे होली के बाद कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे. हालांकि, इस संबंध में अभी तक उन्होंने तिथि की घोषणा नहीं की गई है. उल्लेखनीय है कि उन्होंने करीब दस लाख लोगों को मुहिम से जोड़ने का दावा किया था. साथ ही कहा था कि अभी उनके साथ करीब सवा लाख सक्रिय सदस्य हैं.
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मोहम्मद शमी ने इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में शानदार प्रदर्शन किया है. खास तौर पर नई गेंद से उनका खेल लाजवाब रहा है. वह अपनी टीम को शुरुआत में ही विकेट दिलवाते हैं. इससे सामने वाली टीम पर दबाव बढ़ जाता है. पावरप्ले में अपने प्रदर्शन के लिए वह प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीत चुके हैं. सोमवार, 15 मई को भी उन्होंने कमाल का खेल दिखाया. सीजन में अपने कुल विकेटों की संख्या उन्होंने 23 तक पहुंचा दी है. उन्होंने पावरप्ले में 15 विकेट ले लिए हैं.
शमी इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उनके सिर पर पर्पल कैप हैं. शमी के नाम कुल 23 विकेट हैं. शमी अच्छी लय में दिख रहे हैं. शमी ने सनराइजर्स हैदराबाद पर अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा की. शमी ने चार विकेट हासिल किए. मैदान पर तो शमी ने कमाल किया ही, मैच के बाद उन्होंने पूर्व कोच वि शास्त्री के साथ बातचीत में भी खूब मजेदार कॉमेंट किया.
शमी ने कहा कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम का विकेट सीम और मूवमेंट को सपॉर्ट करता है. खास तौर पर शुरुआत में मैं सिर्फ सही एरिया में गेंद को पिच करने की कोशिश कर रहा था. मैं टाइट लाइन पर गेंद फेंक रहा था और चाहता था कि बल्लेबाजों ज्यादा से ज्यादा खेलें.
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मोहम्मद शमी ने इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस में शानदार प्रदर्शन किया है. खास तौर पर नई गेंद से उनका खेल लाजवाब रहा है. वह अपनी टीम को शुरुआत में ही विकेट दिलवाते हैं. इससे सामने वाली टीम पर दबाव बढ़ जाता है. पावरप्ले में अपने प्रदर्शन के लिए वह प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीत चुके हैं. सोमवार, पंद्रह मई को भी उन्होंने कमाल का खेल दिखाया. सीजन में अपने कुल विकेटों की संख्या उन्होंने तेईस तक पहुंचा दी है. उन्होंने पावरप्ले में पंद्रह विकेट ले लिए हैं. शमी इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. उनके सिर पर पर्पल कैप हैं. शमी के नाम कुल तेईस विकेट हैं. शमी अच्छी लय में दिख रहे हैं. शमी ने सनराइजर्स हैदराबाद पर अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा की. शमी ने चार विकेट हासिल किए. मैदान पर तो शमी ने कमाल किया ही, मैच के बाद उन्होंने पूर्व कोच वि शास्त्री के साथ बातचीत में भी खूब मजेदार कॉमेंट किया. शमी ने कहा कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम का विकेट सीम और मूवमेंट को सपॉर्ट करता है. खास तौर पर शुरुआत में मैं सिर्फ सही एरिया में गेंद को पिच करने की कोशिश कर रहा था. मैं टाइट लाइन पर गेंद फेंक रहा था और चाहता था कि बल्लेबाजों ज्यादा से ज्यादा खेलें.
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करीब 5 महीने तक टीबी से जंग लड़ने वाली सलमान खान की को-स्टार पूजा डडवाल अब मौत के मुंह से वापस लौट चुकी हैं। जी हां, सलमान के साथ काम कर चुकीं ये एक्ट्रेस अब पहले से काफी बेहतर हालत में हैं। जिसका पूरा क्रेडिट सलमान खान को जाता है। खुद पूजा ने सलमान को थैंक्यू कहा है और ये माना है कि सलमान की मदद की वजह से ही वो वापस जिंदगी की तरफ लौटीं हैं। पूजा ने सलमान खान की फिल्म'वीरगति' में काम किया था, वो फिल्म में सलमान के जीजा अतुल अग्निहोत्री के अपोजिट दिखी थीं।
(पूजा ने ऐसे मांगी थी मदद-देखें वीडियो)
बता दें कि मंगलवार को पूजा को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है और अब उनकी स्थिति में भी सुधार आ रहा है। मुंबई से पूजा गोवा जा चुकी हैं। डॉक्टर्स ने उन्हें एक महीने तक और दवाइयां लेने की सलाह दी है।
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करीब पाँच महीने तक टीबी से जंग लड़ने वाली सलमान खान की को-स्टार पूजा डडवाल अब मौत के मुंह से वापस लौट चुकी हैं। जी हां, सलमान के साथ काम कर चुकीं ये एक्ट्रेस अब पहले से काफी बेहतर हालत में हैं। जिसका पूरा क्रेडिट सलमान खान को जाता है। खुद पूजा ने सलमान को थैंक्यू कहा है और ये माना है कि सलमान की मदद की वजह से ही वो वापस जिंदगी की तरफ लौटीं हैं। पूजा ने सलमान खान की फिल्म'वीरगति' में काम किया था, वो फिल्म में सलमान के जीजा अतुल अग्निहोत्री के अपोजिट दिखी थीं। बता दें कि मंगलवार को पूजा को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है और अब उनकी स्थिति में भी सुधार आ रहा है। मुंबई से पूजा गोवा जा चुकी हैं। डॉक्टर्स ने उन्हें एक महीने तक और दवाइयां लेने की सलाह दी है।
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रामनगर। बाढ़ विभाग की चल रही परियोजनाओं को देखने डी एम के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम पंहुची। वहां चल रहे सिंचाई विभाग बाढ़ द्वारा कराए जा रहे कार्य को परखा। टीम ने कहा कि डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
रामनगर तहसील के करमुल्लापुर,अहाता, पर्वतपुर ,घौखरिया आदि स्थानों पर बाँध व कटान से सुरक्षा का कार्य अंतिम दौर मे है। बरसात शुरु हो गई है इसलिए कार्य को पूरा करना जरूरी है। डीएम के निर्देश पर पीओ डूडा,अधिसाशी अभियंता बाढ़ व अधिशाशी अभियंता सिंचाई ने गांवों में जाकर सभी परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान पर्वतपुर की परियोजना पूरी पाई गई। बंधे पर मिट्टी भी पड़ी हुई थी। अहाता के पास काम चल रहा था। करमुल्लापुर के पास दो परियोजनाओं में भी काम चल रहा था। घौखरिया में 95 फीसदी कार्य हो चुका है।
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रामनगर। बाढ़ विभाग की चल रही परियोजनाओं को देखने डी एम के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम पंहुची। वहां चल रहे सिंचाई विभाग बाढ़ द्वारा कराए जा रहे कार्य को परखा। टीम ने कहा कि डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी। रामनगर तहसील के करमुल्लापुर,अहाता, पर्वतपुर ,घौखरिया आदि स्थानों पर बाँध व कटान से सुरक्षा का कार्य अंतिम दौर मे है। बरसात शुरु हो गई है इसलिए कार्य को पूरा करना जरूरी है। डीएम के निर्देश पर पीओ डूडा,अधिसाशी अभियंता बाढ़ व अधिशाशी अभियंता सिंचाई ने गांवों में जाकर सभी परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान पर्वतपुर की परियोजना पूरी पाई गई। बंधे पर मिट्टी भी पड़ी हुई थी। अहाता के पास काम चल रहा था। करमुल्लापुर के पास दो परियोजनाओं में भी काम चल रहा था। घौखरिया में पचानवे फीसदी कार्य हो चुका है।
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मुजफ्फरनगर। शहर में एक गिफ्ट सेंटर में भीषण आग लगने का मामला सामने आया है। सदर बाजार में पारस गिफ्ट सेंटर की दुकान में अचानक आग लग गई। आग के चलते गिफ्ट सेंटर में रखा सामान जलकर खाक हो गया। पड़ोसी दुकानदारों ने रात में आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन नाकाम रहे।
सूचना पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने आग बुझाई। लेकिन तब तक दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान जल चुका था। दमकल विभाग आग के कारणों की जांच कर रहा है। हालांकि दुकानदार को आशंका है कि आग शार्ट सर्किट के कारण लगी। दुकान मालिक सचिन जैन द्वारा बताया कि उपचार के लिए डॉक्टर को दिखाने के लिए हॉस्पिटल गया हुआ था। अचानक ही मार्केट के दुकानदारों का उसे फोन आया कि उसकी दुकान में आग लग गई। जिस पर वह तुरंत ही दुकान की चाबी लेकर सदर बाजार पहुंचा। जहां पर वह आग के दृश्य को देखकर हैरान रह गया। दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया है।
पीड़ित गिफ्ट सेंटर मालिक पारस जैन ने बताया कि ईद को लेकर उनके द्वारा दुकान में काफी सामान रखा हुआ था। जो कि सभी जलकर राख हो गया है। आशंका है कि दुकान में आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। आग पर काबू पाने में दुकानदारों ने भी फायर ब्रिगडे विभाग की मदद की।
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मुजफ्फरनगर। शहर में एक गिफ्ट सेंटर में भीषण आग लगने का मामला सामने आया है। सदर बाजार में पारस गिफ्ट सेंटर की दुकान में अचानक आग लग गई। आग के चलते गिफ्ट सेंटर में रखा सामान जलकर खाक हो गया। पड़ोसी दुकानदारों ने रात में आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन नाकाम रहे। सूचना पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने आग बुझाई। लेकिन तब तक दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान जल चुका था। दमकल विभाग आग के कारणों की जांच कर रहा है। हालांकि दुकानदार को आशंका है कि आग शार्ट सर्किट के कारण लगी। दुकान मालिक सचिन जैन द्वारा बताया कि उपचार के लिए डॉक्टर को दिखाने के लिए हॉस्पिटल गया हुआ था। अचानक ही मार्केट के दुकानदारों का उसे फोन आया कि उसकी दुकान में आग लग गई। जिस पर वह तुरंत ही दुकान की चाबी लेकर सदर बाजार पहुंचा। जहां पर वह आग के दृश्य को देखकर हैरान रह गया। दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया है। पीड़ित गिफ्ट सेंटर मालिक पारस जैन ने बताया कि ईद को लेकर उनके द्वारा दुकान में काफी सामान रखा हुआ था। जो कि सभी जलकर राख हो गया है। आशंका है कि दुकान में आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। आग पर काबू पाने में दुकानदारों ने भी फायर ब्रिगडे विभाग की मदद की।
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वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक, (तोशिबा की एक सहायक कंपनी), संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सेवा कर रही है, जो 7 बिलियन डॉलर के करीब के नुकसान के कारण दिवालिया घोषित की जाएगी . . . ।
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वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक, , संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सेवा कर रही है, जो सात बिलियन डॉलर के करीब के नुकसान के कारण दिवालिया घोषित की जाएगी . . . ।
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- Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स!
1. ग्लीसरीन और शहद- 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच ग्लीसरीन ले कर अच्छी प्रकार से मिलाएं और अपने चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। इसके बाद स्किन को 15-20 मिनट के बाद धो लें। इससे त्वचा ग्लो करेगी और अंदर से हाइड्रेट रहेगी।
2. ग्लीसरीन और केला- 1 चम्मच ग्लीसरीन औ 3 चम्मच पिसा हुआ केला ले कर अपने चेहरे पर लगाएं। इसके बाद चेहरे को 20-25 मिनट के बाद धो लें। केले में मिलने वाले मिनरल से त्वचा को पोषण मिलेगा साथ ही त्वचा के दाग-धब्बे भी कम दिखने लगेगे।
3. ग्लीसरीन और ओट- 4 चम्मच ओट को मिक्सर में पीस लीजिये। अब उसमें 2 चम्मच ग्लीसरीन मिलाइये। यह एक प्रकार का फेशियल स्क्रब का कार्य करेगा। इसे आपको केवल एंटी क्लाक डायरेक्शन में लगाना है और 15 मिनट तक ऐसा करने के बाद आप देखेगी कि आपकी त्वचा साफ हो गइ होगी। साथ ही डेड स्किन और ब्लैक हेड मिट गए होंगे।
4. ग्लीसरीन, अंडा और नींबू- 1 चम्मच ग्लीसरीन, 1 अंडा और 4 चम्मच नींबू का रस ले कर मिक्स करें। इसे चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट के बाद पानी से धो लें। यह चेहरे का एक नेचुरल मास्क है जिससे चेहरे टोन होता है और गोरा बनता है।
5. क्ले और ग्लीसरीन- प्रभावशाली लुक पाने के लिये 1 चम्मच क्ले और 2 चम्मच ग्लीसरीन का मिलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। 15 मिनट के बाद इस पैक को धो लें। यह पैक गोरा बनाने के अलावा स्किन को कोमल तथा स्मूथ बनाएगी।
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- Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! एक. ग्लीसरीन और शहद- एक चम्मच शहद और एक चम्मच ग्लीसरीन ले कर अच्छी प्रकार से मिलाएं और अपने चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। इसके बाद स्किन को पंद्रह-बीस मिनट के बाद धो लें। इससे त्वचा ग्लो करेगी और अंदर से हाइड्रेट रहेगी। दो. ग्लीसरीन और केला- एक चम्मच ग्लीसरीन औ तीन चम्मच पिसा हुआ केला ले कर अपने चेहरे पर लगाएं। इसके बाद चेहरे को बीस-पच्चीस मिनट के बाद धो लें। केले में मिलने वाले मिनरल से त्वचा को पोषण मिलेगा साथ ही त्वचा के दाग-धब्बे भी कम दिखने लगेगे। तीन. ग्लीसरीन और ओट- चार चम्मच ओट को मिक्सर में पीस लीजिये। अब उसमें दो चम्मच ग्लीसरीन मिलाइये। यह एक प्रकार का फेशियल स्क्रब का कार्य करेगा। इसे आपको केवल एंटी क्लाक डायरेक्शन में लगाना है और पंद्रह मिनट तक ऐसा करने के बाद आप देखेगी कि आपकी त्वचा साफ हो गइ होगी। साथ ही डेड स्किन और ब्लैक हेड मिट गए होंगे। चार. ग्लीसरीन, अंडा और नींबू- एक चम्मच ग्लीसरीन, एक अंडा और चार चम्मच नींबू का रस ले कर मिक्स करें। इसे चेहरे पर लगाएं और दस-पंद्रह मिनट के बाद पानी से धो लें। यह चेहरे का एक नेचुरल मास्क है जिससे चेहरे टोन होता है और गोरा बनता है। पाँच. क्ले और ग्लीसरीन- प्रभावशाली लुक पाने के लिये एक चम्मच क्ले और दो चम्मच ग्लीसरीन का मिलाएं और चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। पंद्रह मिनट के बाद इस पैक को धो लें। यह पैक गोरा बनाने के अलावा स्किन को कोमल तथा स्मूथ बनाएगी।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटिल। आज सुबह से अब तक देश प्रदेश में कई बड़ी घटनाएं घटी हैं। अगर आप से भी मिस हो गई हैं अभी तक की ये Top खबरें तो पढ़ें हमारा क्विक न्यूज सेग्मेंट।
देशभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर लगातार जारी है। भारत (India) में कोरोना से 76,49,158 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
वायु प्रदूषण (Air Pollution) वैसे तो हर व्यक्ति के लिए खतरनाक है, लेकिन नवजात शिशुओं को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। वो बच्चा जिसका इस वायु प्रदूषण को बढ़ाने में कोई हाथ नहीं होता इसकी वजह से अपनी जान गंवा देता है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार (Delhi Govt) के स्कूलों में क्रांतिकारी बदलाव के चलते जेईई मेंस (JEE Main) में 443 और एनआईटी (NEET) में 569 बच्चों ने सफलता हासिल की है।
दुनिया भर में कोरोना वायरस (CoronaVirus) ने अब भयंकार रूप ले लिया है। इसका कहर हर दिन बढ़ता जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो रहे हैं।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटिल। आज सुबह से अब तक देश प्रदेश में कई बड़ी घटनाएं घटी हैं। अगर आप से भी मिस हो गई हैं अभी तक की ये Top खबरें तो पढ़ें हमारा क्विक न्यूज सेग्मेंट। देशभर में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। भारत में कोरोना से छिहत्तर,उनचास,एक सौ अट्ठावन लोग संक्रमित हो चुके हैं। वायु प्रदूषण वैसे तो हर व्यक्ति के लिए खतरनाक है, लेकिन नवजात शिशुओं को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। वो बच्चा जिसका इस वायु प्रदूषण को बढ़ाने में कोई हाथ नहीं होता इसकी वजह से अपनी जान गंवा देता है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में क्रांतिकारी बदलाव के चलते जेईई मेंस में चार सौ तैंतालीस और एनआईटी में पाँच सौ उनहत्तर बच्चों ने सफलता हासिल की है। दुनिया भर में कोरोना वायरस ने अब भयंकार रूप ले लिया है। इसका कहर हर दिन बढ़ता जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो रहे हैं।
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भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार में आज पांच मंत्रियों के नाम शामिल हो गए। राजभवन में आयोजित एक सादा समारोह में भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल एवं सुश्री मीणा सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक नेता तुलसीराम सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
विधायक कमल पटेल पहले भी मंत्री रह चुके हैं। कमल पटेल हरदा से विधायक हैं। ये पूर्व सीएम उमा भारती के करीबी हैं। पिछली सरकार में इन्हे मंत्री नहीं बनाया गया था। इनके बेटे की कथित आपराधिक गतिविधियों के कारण इन्हे काफी नुक्सान हुआ था।
मानपुर से 5 बार विधायक रहीं मीना सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली हैं। बीजेपी ने जो टॉस्क फोर्स बनाई थी, उसमें भी मीना सिंह शामिल थी। पार्टी की आदिवासी चेहरा हैं। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की करीबी हैं।
यहां याद दिला दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में तुलसीराम सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में दोनों नेता विधायक नहीं है।
भूपेंद्र सिंह तो शपथ के लिए भोपाल पहुंच भी गए थेटीम शिवराज के गठन में इस बार पूरी तरह से दिल्ली की चली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मुहर के बाद ही कैबिनेट का विस्तार हुआ है। आखिरी वक्त बीजेपी के दो बड़े नेताओं का नाम चल रहा था, जिसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह शामिल हैं। बाद में दिल्ली से साफ कर दिया गया कि अभी टीम छोटी ही रहेगी। भूपेंद्र सिंह तो शपथ के लिए भोपाल पहुंच भी गए थे। पार्टी से हरी झंडी नहीं मिली तो वह वापस सागर चले गए।
Madhya Pradesh: BJP leaders Narottam Mishra, Kamal Patel, Meena Singh, Tulsi Silawat and Govind Singh Rajput took oath as ministers, at the state cabinet expansion ceremony in Bhopal today.
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भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार में आज पांच मंत्रियों के नाम शामिल हो गए। राजभवन में आयोजित एक सादा समारोह में भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल एवं सुश्री मीणा सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक नेता तुलसीराम सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत ने भी मंत्री पद की शपथ ली। विधायक कमल पटेल पहले भी मंत्री रह चुके हैं। कमल पटेल हरदा से विधायक हैं। ये पूर्व सीएम उमा भारती के करीबी हैं। पिछली सरकार में इन्हे मंत्री नहीं बनाया गया था। इनके बेटे की कथित आपराधिक गतिविधियों के कारण इन्हे काफी नुक्सान हुआ था। मानपुर से पाँच बार विधायक रहीं मीना सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली हैं। बीजेपी ने जो टॉस्क फोर्स बनाई थी, उसमें भी मीना सिंह शामिल थी। पार्टी की आदिवासी चेहरा हैं। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की करीबी हैं। यहां याद दिला दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में तुलसीराम सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में दोनों नेता विधायक नहीं है। भूपेंद्र सिंह तो शपथ के लिए भोपाल पहुंच भी गए थेटीम शिवराज के गठन में इस बार पूरी तरह से दिल्ली की चली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मुहर के बाद ही कैबिनेट का विस्तार हुआ है। आखिरी वक्त बीजेपी के दो बड़े नेताओं का नाम चल रहा था, जिसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह शामिल हैं। बाद में दिल्ली से साफ कर दिया गया कि अभी टीम छोटी ही रहेगी। भूपेंद्र सिंह तो शपथ के लिए भोपाल पहुंच भी गए थे। पार्टी से हरी झंडी नहीं मिली तो वह वापस सागर चले गए। Madhya Pradesh: BJP leaders Narottam Mishra, Kamal Patel, Meena Singh, Tulsi Silawat and Govind Singh Rajput took oath as ministers, at the state cabinet expansion ceremony in Bhopal today.
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प्रजापतेर्मुखोद्भूतो होरातन्त्रे यथोदितम् । तद्विदो गणनाभिज्ञा अन्यविप्राः प्रचक्षते ॥८१ गंगाहीनो हतो देशो विप्रहीना यथा क्रिया । होराज्ञप्तिविहीनो यो देशोऽसौ विप्लवप्लवः ॥ ८२ अप्रदीपा यथा रात्रिरनादित्यं यथा नः । तथाऽसांवत्सरो राजा भ्रमत्यन्ध इवाध्वनि ॥८३ स्थापयेद्धर्मतो विप्रं भावयेत्कर्मवृद्धये । मश्रुयुक्तो द्विजः पूज्यः सूर्यो विप्रस्तु श्मश्रुलः ।।८४ प्रत्यक्प्रदर्शनात्पुण्यं त्रिदिनं कल्मषापहम् । दर्शने तात्यविप्रस्य सूर्यं दृष्ट्वा विशुध्यति ॥८५ न व्रात्यत्वं सूर्यविप्रे पूजयेद्यज्ञसिद्धये । ज्योतिर्वेदरयाधिकारः सूर्यविप्रस्य वै द्विजाः ॥८६ जातिभेदाअ चत्दारो भोजकः कथकस्तथा । शिवविप्रः सूर्यविनश्चतुर्थः परिपठ्यते ॥ ८७ कथको मध्यमस्तेषां सूर्यविप्रायोत्तमः । शिवलिङ्गार्चनरतः' शिवविप्रस्तु निन्दितः ॥ ८८ सूर्यविप्रस्य विप्रस्य वैद्यस्य च नृपस्य च । प्रवासयेदक्षतेन । प्रवासवेदक्षतेन सपुत्रपशुबान्धवः ॥ अवध्यः सर्वलोकेषु राजा राज्येन पालयेत्
वसुभिर्वस्त्रगन्धाद्यैर्माल्यैश्च विविधैरपि । देशचक्रविदः पूज्या होराचक्रविदः पराः ॥ ९०
तथा होरा-तंत्र में कही गयी समस्त बातों के वेत्ता को जो अन्य ब्राह्मण है, गणक (ज्योतिषी ) कहा गया है । ८१। गंगाहीन देश उसी प्रकार नष्ट है, जिस प्रकार ब्राह्मण के बिना सम्पन्न की हुई कोई क्रिया और होरा का विशिष्ट विद्वान जिस प्रदेश में नहीं है, वह विप्लवों से सदैव आच्छन्न रहता है । ८२ । जिस प्रकार बिना दीपक की रात्रि, एवं सूर्य हीन आकाश सुशोभित नहीं होता, उसी भाँति संवत्सर ( वर्ष ) हीन राजा भी मार्ग में अन्ध के समान इधर उधर भटकता रहता है ।८३ । धर्मतः ब्राह्मणों की स्थिति करके अपने कर्म के वृद्ध्यर्थ उन्हें सम्मान प्रदर्शित करे, श्मश्रु (दाढ़ी) युक्त द्विज की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि दाढ़ी युक्त ही ब्राह्मण सूर्य का स्वरूप बताया गया है । ८४। दिन के अवसान समय में उनके दर्शन मात्र से पुण्य होता है, यदि वैसा ही दर्शन तीन दिन तक होता रहे तो उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । व्रात्य (जाति च्युत अथवा समयपर यज्ञोपवीत संस्कार न हुआ हो) ऐसे ब्राह्मण के दर्शन हो जाने में सूर्य के देखने ही पर वह विशुद्ध होता है ।८५॥ सूर्य-विप्र (दाढ़ी वाला ब्राह्मण) कभी पतित नही होता है, यज्ञ की सफलता के लिए उसकी पूजा अवश्य करनी चाहिए । द्विजवृन्द ! सूर्य-विप्र ही ज्योतिष शास्त्र, के अधिकारी कहे गये हैं । ८६ । भोजक, कथक, शिव विप्र, और सूर्यविप्र, यही चार प्रकार के उनमें जाति भेद भी बताये गये हैं ।८७। इनमें कथक मध्यम, सूर्य विप्र सर्वश्रेष्ठ एवं शिवलिंग की अर्चा में अनुरक्त होने के नाते शिव-विप्र निंदित कहा गया है । ८८ । सूर्य-विप्र, ब्राह्मण, वैद्य, एवं राजा की विदेश यात्रा में अक्षत द्वारा मांगलिक पूजा होनी चाहिए । तथा वहाँ के राजा का सहयोग इस प्रकार प्राप्त होना चाहिए जिससे उन्हें किसी प्रकार के कष्ट का अनुभव न करना पड़े। उनके पुत्र, पशु और बन्धु गण सभी समस्त लोकों में अवध्य है, तथा राजा अपने राज्य द्वारा उनका पालन पोषण करता रहे ।८९ । धन, वस्त्र, गंध, माल्य आदि अनेक भाँति के उपकरणों द्वारा देश चक्र वेत्ता (समस्त देशों के भली भाँति ज्ञाता), की पूजा करनी चाहिए, होरा चक्र के विद्वान् की पूजा तो परमावश्यक है, एवं सूर्य-चक्र वेत्ता की भी अवहेलना किसी
१. जीविकाय इति शेषः । २. शेषषष्ठी।
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प्रजापतेर्मुखोद्भूतो होरातन्त्रे यथोदितम् । तद्विदो गणनाभिज्ञा अन्यविप्राः प्रचक्षते ॥इक्यासी गंगाहीनो हतो देशो विप्रहीना यथा क्रिया । होराज्ञप्तिविहीनो यो देशोऽसौ विप्लवप्लवः ॥ बयासी अप्रदीपा यथा रात्रिरनादित्यं यथा नः । तथाऽसांवत्सरो राजा भ्रमत्यन्ध इवाध्वनि ॥तिरासी स्थापयेद्धर्मतो विप्रं भावयेत्कर्मवृद्धये । मश्रुयुक्तो द्विजः पूज्यः सूर्यो विप्रस्तु श्मश्रुलः ।।चौरासी प्रत्यक्प्रदर्शनात्पुण्यं त्रिदिनं कल्मषापहम् । दर्शने तात्यविप्रस्य सूर्यं दृष्ट्वा विशुध्यति ॥पचासी न व्रात्यत्वं सूर्यविप्रे पूजयेद्यज्ञसिद्धये । ज्योतिर्वेदरयाधिकारः सूर्यविप्रस्य वै द्विजाः ॥छियासी जातिभेदाअ चत्दारो भोजकः कथकस्तथा । शिवविप्रः सूर्यविनश्चतुर्थः परिपठ्यते ॥ सत्तासी कथको मध्यमस्तेषां सूर्यविप्रायोत्तमः । शिवलिङ्गार्चनरतः' शिवविप्रस्तु निन्दितः ॥ अठासी सूर्यविप्रस्य विप्रस्य वैद्यस्य च नृपस्य च । प्रवासयेदक्षतेन । प्रवासवेदक्षतेन सपुत्रपशुबान्धवः ॥ अवध्यः सर्वलोकेषु राजा राज्येन पालयेत् वसुभिर्वस्त्रगन्धाद्यैर्माल्यैश्च विविधैरपि । देशचक्रविदः पूज्या होराचक्रविदः पराः ॥ नब्बे तथा होरा-तंत्र में कही गयी समस्त बातों के वेत्ता को जो अन्य ब्राह्मण है, गणक कहा गया है । इक्यासी। गंगाहीन देश उसी प्रकार नष्ट है, जिस प्रकार ब्राह्मण के बिना सम्पन्न की हुई कोई क्रिया और होरा का विशिष्ट विद्वान जिस प्रदेश में नहीं है, वह विप्लवों से सदैव आच्छन्न रहता है । बयासी । जिस प्रकार बिना दीपक की रात्रि, एवं सूर्य हीन आकाश सुशोभित नहीं होता, उसी भाँति संवत्सर हीन राजा भी मार्ग में अन्ध के समान इधर उधर भटकता रहता है ।तिरासी । धर्मतः ब्राह्मणों की स्थिति करके अपने कर्म के वृद्ध्यर्थ उन्हें सम्मान प्रदर्शित करे, श्मश्रु युक्त द्विज की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि दाढ़ी युक्त ही ब्राह्मण सूर्य का स्वरूप बताया गया है । चौरासी। दिन के अवसान समय में उनके दर्शन मात्र से पुण्य होता है, यदि वैसा ही दर्शन तीन दिन तक होता रहे तो उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । व्रात्य ऐसे ब्राह्मण के दर्शन हो जाने में सूर्य के देखने ही पर वह विशुद्ध होता है ।पचासी॥ सूर्य-विप्र कभी पतित नही होता है, यज्ञ की सफलता के लिए उसकी पूजा अवश्य करनी चाहिए । द्विजवृन्द ! सूर्य-विप्र ही ज्योतिष शास्त्र, के अधिकारी कहे गये हैं । छियासी । भोजक, कथक, शिव विप्र, और सूर्यविप्र, यही चार प्रकार के उनमें जाति भेद भी बताये गये हैं ।सत्तासी। इनमें कथक मध्यम, सूर्य विप्र सर्वश्रेष्ठ एवं शिवलिंग की अर्चा में अनुरक्त होने के नाते शिव-विप्र निंदित कहा गया है । अठासी । सूर्य-विप्र, ब्राह्मण, वैद्य, एवं राजा की विदेश यात्रा में अक्षत द्वारा मांगलिक पूजा होनी चाहिए । तथा वहाँ के राजा का सहयोग इस प्रकार प्राप्त होना चाहिए जिससे उन्हें किसी प्रकार के कष्ट का अनुभव न करना पड़े। उनके पुत्र, पशु और बन्धु गण सभी समस्त लोकों में अवध्य है, तथा राजा अपने राज्य द्वारा उनका पालन पोषण करता रहे ।नवासी । धन, वस्त्र, गंध, माल्य आदि अनेक भाँति के उपकरणों द्वारा देश चक्र वेत्ता , की पूजा करनी चाहिए, होरा चक्र के विद्वान् की पूजा तो परमावश्यक है, एवं सूर्य-चक्र वेत्ता की भी अवहेलना किसी एक. जीविकाय इति शेषः । दो. शेषषष्ठी।
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सब भाइयों में छोटे थे । मधुसूदन के पीछे दो भाई और हुए; परन्तु वे पाँच वर्ष के भीतर ही मर गये । उनके और कोई बहन-भाई नहीं हुए । जिस समय मधुसूदन का जन्म हुआ, उस समय दत्त-वंश विशेष सौभाग्यशाली था । चार भाइयों में सबसे छोटे राजनारायण के मधुसूदन ही एक पुत्र थे । अतएव बड़े ही लाड़ प्यार से इनका पालन होता था । जो कुछ ये कहते थे वहीं होता था और जो कुछ ये माँगते थे वही मिलता था । यदि ये कोई बुरा काम भी करते अथवा करना चाहते थे तो भी कोई कुछ न कहता था । मधुसूदन की उच्छुहलता का आरम्भ यहीं से--- उनकी शैशवावस्था ही से हुआ।
मधुसूदन सात वर्ष के थे जब उनके पिता ने कलकत्ते की सदर-दीवानी अदालत में वकालत करना आरम्भ किया । मधुसूदन ने सहृदयता और बुद्धिमत्ता आदिक गुण अपने पिता की प्रकृति से और सरलता, उदारता, प्रेमपरायणता आदि अपनी माता की प्रकृति से सोखे । उनके माता-पिता बढ़े दानशील थे । दुःखित और दरिद्वियों के लिए वे सदा मुक्त हस्त रहते थे । यह गुण उनसे उनके पुत्र ने भी सीखा। मधुसूदन जब कभी, किसी को कुछ देते थे तब गिन कर न देते थे । हाथ में जितने रुपये-पैसे आ जाते, उतने सत्र, विना गिने, वे दे ढालते थे ।
राजनारायण बाबू मधुसूदन को अपने साथ कलकत्ते नहीं ले गये । उन्हें वे घर ही पर छोड़ गये । वहाँ, अर्थात् लागरोंढ़ी की ग्राम-पाठशाला में मधुसूदन बढ़े प्रेम से पढ़ने लगे। धनियों के लड़के प्रायः पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगाते; परन्तु मधुसूदन में यह बात न थी। वे बढ़े परिश्रम, बढ़े प्रेम और बढ़े मनोयोग से विद्याध्ययन करते ये। उनकी माता ने विवाह के अनन्तर लिखना-पढ़ना सीखा था ।
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सब भाइयों में छोटे थे । मधुसूदन के पीछे दो भाई और हुए; परन्तु वे पाँच वर्ष के भीतर ही मर गये । उनके और कोई बहन-भाई नहीं हुए । जिस समय मधुसूदन का जन्म हुआ, उस समय दत्त-वंश विशेष सौभाग्यशाली था । चार भाइयों में सबसे छोटे राजनारायण के मधुसूदन ही एक पुत्र थे । अतएव बड़े ही लाड़ प्यार से इनका पालन होता था । जो कुछ ये कहते थे वहीं होता था और जो कुछ ये माँगते थे वही मिलता था । यदि ये कोई बुरा काम भी करते अथवा करना चाहते थे तो भी कोई कुछ न कहता था । मधुसूदन की उच्छुहलता का आरम्भ यहीं से--- उनकी शैशवावस्था ही से हुआ। मधुसूदन सात वर्ष के थे जब उनके पिता ने कलकत्ते की सदर-दीवानी अदालत में वकालत करना आरम्भ किया । मधुसूदन ने सहृदयता और बुद्धिमत्ता आदिक गुण अपने पिता की प्रकृति से और सरलता, उदारता, प्रेमपरायणता आदि अपनी माता की प्रकृति से सोखे । उनके माता-पिता बढ़े दानशील थे । दुःखित और दरिद्वियों के लिए वे सदा मुक्त हस्त रहते थे । यह गुण उनसे उनके पुत्र ने भी सीखा। मधुसूदन जब कभी, किसी को कुछ देते थे तब गिन कर न देते थे । हाथ में जितने रुपये-पैसे आ जाते, उतने सत्र, विना गिने, वे दे ढालते थे । राजनारायण बाबू मधुसूदन को अपने साथ कलकत्ते नहीं ले गये । उन्हें वे घर ही पर छोड़ गये । वहाँ, अर्थात् लागरोंढ़ी की ग्राम-पाठशाला में मधुसूदन बढ़े प्रेम से पढ़ने लगे। धनियों के लड़के प्रायः पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगाते; परन्तु मधुसूदन में यह बात न थी। वे बढ़े परिश्रम, बढ़े प्रेम और बढ़े मनोयोग से विद्याध्ययन करते ये। उनकी माता ने विवाह के अनन्तर लिखना-पढ़ना सीखा था ।
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अगर आप भी हैं घूमने के शौक़ीन और ट्रैवलिंग करते समय उल्टियों को लेकर हैं परेशान तो ये खबर आपके लिए है। कई लोग यात्रा करते समय उल्टियां (Vomiting) और सिरदर्द (Headache) की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके कारण सफर का सारा आनंद खराब हो जाता है। इसकी वजह से वो बस या गाड़ी में सफर करने से भी डरते हैं। अगर यह सब दिक्क्तें आपके साथ भी हो रही हैं और ऐसे में यहां बताये घरेलू नुस्खे अपनाते हैं तो आपको इनसे छुटकारा मिल सकता है।
अदरक से मिलेगा आरामः यदि सफर में आपका सिरदर्द होता है या आपको बार- बार उल्टियां होती हैं तो अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखने से आराम मिल सकता है, इसके आलावा यदि आपका जी मचलता है तो अदरक की चाय पी सकते हैं। यह उपाय आपको उल्टी तथा सिरदर्द की समस्या से आसानी से छुटकारा दिला देता है।
पुदीना भी दिलाएगा राहतः सफर पर निकलने से पहले अपने रुमाल में मिंट ऑइल की कुछ बूंदे छिड़क लें और इसे सफर के दौरान सूंघते रहे। इसके आलावा चाहें तो आप पुदीने की चाय भी सकते हैं। ऐसा करने से भी आपको सफर के दौरान सिरदर्द तथा उल्टी की समस्या से राहत मिलेगी।
खानपान का रखें विशेष ध्यानः यात्रा पर निकलने से पहले तेल वाली चीजों को खाने से बचें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आप खाली पेट यात्रा तो नहीं कर रहे हैं। खाली पेट रहने से गैस की समस्या हो सकती है इसके बाद आपको सिरदर्द और उलटियों की समस्या हो सकती है। यात्रा के दौरान बस या कार में खिड़कियों के पास ही बैठें, ताज़ी हवा के चलते आपको सिरदर्द तथा उल्टी जैसी समस्याएं नहीं होगीं। ध्यान रहे की यात्रा के दौरान मिर्च मसाले वाली चीजों से दूर रहें। ऐसा खाना पचने में समय लगाता है जिस वजह से सफर के दौरान दिक्कत आती है।
किताबों को कहें नाः यात्रा के दौरान किताब पढ़ने या मोबाइल लैपटॉप इस्तेमाल करते समय चक्कर आ सकता है, जिसकी वजह से भी आपका सिरदर्द हो सकता है। सफर के दौरान ये यह सब नहीं करने से भी आपको उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
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अगर आप भी हैं घूमने के शौक़ीन और ट्रैवलिंग करते समय उल्टियों को लेकर हैं परेशान तो ये खबर आपके लिए है। कई लोग यात्रा करते समय उल्टियां और सिरदर्द की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके कारण सफर का सारा आनंद खराब हो जाता है। इसकी वजह से वो बस या गाड़ी में सफर करने से भी डरते हैं। अगर यह सब दिक्क्तें आपके साथ भी हो रही हैं और ऐसे में यहां बताये घरेलू नुस्खे अपनाते हैं तो आपको इनसे छुटकारा मिल सकता है। अदरक से मिलेगा आरामः यदि सफर में आपका सिरदर्द होता है या आपको बार- बार उल्टियां होती हैं तो अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखने से आराम मिल सकता है, इसके आलावा यदि आपका जी मचलता है तो अदरक की चाय पी सकते हैं। यह उपाय आपको उल्टी तथा सिरदर्द की समस्या से आसानी से छुटकारा दिला देता है। पुदीना भी दिलाएगा राहतः सफर पर निकलने से पहले अपने रुमाल में मिंट ऑइल की कुछ बूंदे छिड़क लें और इसे सफर के दौरान सूंघते रहे। इसके आलावा चाहें तो आप पुदीने की चाय भी सकते हैं। ऐसा करने से भी आपको सफर के दौरान सिरदर्द तथा उल्टी की समस्या से राहत मिलेगी। खानपान का रखें विशेष ध्यानः यात्रा पर निकलने से पहले तेल वाली चीजों को खाने से बचें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आप खाली पेट यात्रा तो नहीं कर रहे हैं। खाली पेट रहने से गैस की समस्या हो सकती है इसके बाद आपको सिरदर्द और उलटियों की समस्या हो सकती है। यात्रा के दौरान बस या कार में खिड़कियों के पास ही बैठें, ताज़ी हवा के चलते आपको सिरदर्द तथा उल्टी जैसी समस्याएं नहीं होगीं। ध्यान रहे की यात्रा के दौरान मिर्च मसाले वाली चीजों से दूर रहें। ऐसा खाना पचने में समय लगाता है जिस वजह से सफर के दौरान दिक्कत आती है। किताबों को कहें नाः यात्रा के दौरान किताब पढ़ने या मोबाइल लैपटॉप इस्तेमाल करते समय चक्कर आ सकता है, जिसकी वजह से भी आपका सिरदर्द हो सकता है। सफर के दौरान ये यह सब नहीं करने से भी आपको उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि सरकार के सफल राजनयिक प्रयासों के कारण विश्व में भारत को न केवल नया सम्मान मिला है, बल्कि विदेश में बसे भारतीयों में अपनी सुरक्षा के प्रति भरोसा भी जगा है।
बजट सत्र की शुरुआत पर संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति ने कहा कि मानवता की सेवा भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है, चाहे नेपाल में भूकंप हो या श्रीलंका में बाढ़ की आपदा, या मालदीव में पेयजल का संकट- इन्हीं मूल्यों के कारण भारत सहायता का हाथ बढ़ाने वाले देशों में अग्रणी रहा है।
उन्होंने कहा कि आज विश्व के किसी भी कोने में बसे भारतीयों को यह भरोसा है कि वे कहीं भी संकट में पड़ेंगे तो उनकी सरकार उन्हें सुरक्षित निकालकर स्वदेश वापस ले आएगी। वर्ष 2014 के बाद से विदेश में संकट में फंसे 90,000 से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल के वर्षों में भारत की कूटनीतिक सफलताओं का खाका पेश करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के सफल राजनयिक प्रयासों के कारण विश्व में भारत को एक नया सम्मान प्राप्त हुआ है। कोविंद ने इस सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद तथा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मिले प्रतिनिधित्व का उल्लेख भी किया।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में शामिल होने के पश्चात भारत को इस वर्ष वासेनार व्यवस्था तथा ऑस्ट्रेलियाई समूह में भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह सफलता लंबी जद्दोजहद और लंबे इंतजार के बाद मिली है, जो सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। (वार्ता)
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि सरकार के सफल राजनयिक प्रयासों के कारण विश्व में भारत को न केवल नया सम्मान मिला है, बल्कि विदेश में बसे भारतीयों में अपनी सुरक्षा के प्रति भरोसा भी जगा है। बजट सत्र की शुरुआत पर संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति ने कहा कि मानवता की सेवा भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है, चाहे नेपाल में भूकंप हो या श्रीलंका में बाढ़ की आपदा, या मालदीव में पेयजल का संकट- इन्हीं मूल्यों के कारण भारत सहायता का हाथ बढ़ाने वाले देशों में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के किसी भी कोने में बसे भारतीयों को यह भरोसा है कि वे कहीं भी संकट में पड़ेंगे तो उनकी सरकार उन्हें सुरक्षित निकालकर स्वदेश वापस ले आएगी। वर्ष दो हज़ार चौदह के बाद से विदेश में संकट में फंसे नब्बे,शून्य से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल के वर्षों में भारत की कूटनीतिक सफलताओं का खाका पेश करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के सफल राजनयिक प्रयासों के कारण विश्व में भारत को एक नया सम्मान प्राप्त हुआ है। कोविंद ने इस सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद तथा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मिले प्रतिनिधित्व का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में शामिल होने के पश्चात भारत को इस वर्ष वासेनार व्यवस्था तथा ऑस्ट्रेलियाई समूह में भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह सफलता लंबी जद्दोजहद और लंबे इंतजार के बाद मिली है, जो सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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जो पानी बचाएगा वो आज का महापुरुष कहलाएगा. . स्कूली बच्चों को परियों के देश और जादूगर की कहानी सुनाने वाली नानी अब पानी बचाने का संदेश दे रही है। शहर के पब्लिक स्कूलों में इन दिनों कठपुतली छात्रों को पानी बचाने का संदेश दे रही है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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जो पानी बचाएगा वो आज का महापुरुष कहलाएगा. . स्कूली बच्चों को परियों के देश और जादूगर की कहानी सुनाने वाली नानी अब पानी बचाने का संदेश दे रही है। शहर के पब्लिक स्कूलों में इन दिनों कठपुतली छात्रों को पानी बचाने का संदेश दे रही है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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नई दिल्ली, दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की परेशानियां लगता है समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि यह विवादास्पद संस्था अब अपने संविधान के नियमों के कारण अपने सीनियर कोच केपी भास्कर को वेतन नहीं दे सकती है। डीडीसीए के करेंट अकाउंट में अभी 15 लाख रुपए है जबकि उसे अपने कर्मचारियों को 50 लाख रुपए के लगभग धनराशि देनी है।
भास्कर को 23 लाख रुपए के वेतन पर दिल्ली की सीनियर टीम का कोच नियुक्त किया गया था लेकिन अब उन्हें पता चला कि वह डीडीसीए के मतदान का अधिकार रखने वाले सदस्य हैं। डीडीसीए कंपनियों के पंजीयक के तहत पंजीकृत है इसलिए एक सदस्य वित्तीय लाभ का हकदार नहीं होता है। डीडीसीए के कोषाध्यक्ष रविंदर मनचंदा ने कहा, हमें पता चला है कि केपी भास्कर संघ के सदस्य हैं।
संघ के सदस्य को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है। हमने भास्कर के वेतन का कम से कम कुछ हिस्सा भुगतान करने के लिये आरओसी को लिखा है। मनचंदा से पूछा गया कि क्या डीडीसीए ने नियुक्ति के समय भास्कर की सदस्यता के बारे में पता नहीं किया उन्होंने कहा कि यह बताना दिल्ली के इस पूर्व बल्लेबाज की जिम्मेदारी थी। भास्कर के पूर्ववर्ती कोच विजय दहिया को वेतन मिलता था क्योंकि वह डीडीसीए के सदस्य नहीं थे। इसी तरह की समस्या 2013-14 में संजीव शर्मा की कोच के रूप में नियुक्ति पर आयी थी क्योंकि यह पूर्व तेज गेंदबाज संघ का सदस्य था।
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नई दिल्ली, दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की परेशानियां लगता है समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि यह विवादास्पद संस्था अब अपने संविधान के नियमों के कारण अपने सीनियर कोच केपी भास्कर को वेतन नहीं दे सकती है। डीडीसीए के करेंट अकाउंट में अभी पंद्रह लाख रुपए है जबकि उसे अपने कर्मचारियों को पचास लाख रुपए के लगभग धनराशि देनी है। भास्कर को तेईस लाख रुपए के वेतन पर दिल्ली की सीनियर टीम का कोच नियुक्त किया गया था लेकिन अब उन्हें पता चला कि वह डीडीसीए के मतदान का अधिकार रखने वाले सदस्य हैं। डीडीसीए कंपनियों के पंजीयक के तहत पंजीकृत है इसलिए एक सदस्य वित्तीय लाभ का हकदार नहीं होता है। डीडीसीए के कोषाध्यक्ष रविंदर मनचंदा ने कहा, हमें पता चला है कि केपी भास्कर संघ के सदस्य हैं। संघ के सदस्य को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है। हमने भास्कर के वेतन का कम से कम कुछ हिस्सा भुगतान करने के लिये आरओसी को लिखा है। मनचंदा से पूछा गया कि क्या डीडीसीए ने नियुक्ति के समय भास्कर की सदस्यता के बारे में पता नहीं किया उन्होंने कहा कि यह बताना दिल्ली के इस पूर्व बल्लेबाज की जिम्मेदारी थी। भास्कर के पूर्ववर्ती कोच विजय दहिया को वेतन मिलता था क्योंकि वह डीडीसीए के सदस्य नहीं थे। इसी तरह की समस्या दो हज़ार तेरह-चौदह में संजीव शर्मा की कोच के रूप में नियुक्ति पर आयी थी क्योंकि यह पूर्व तेज गेंदबाज संघ का सदस्य था।
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- 9 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
- 9 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . "
Don't Miss!
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
रेस 3 से पहले सलमान खान, 150 करोड़ का 10 तगड़ा झटका shock !
बात जब भी सलमान खान की होती है तब बॅाक्स आॅफिस हो या टीवी टीआरपी रिकॅार्ड तोड़ कमाई होना तो तय है। यही वजह है कि टीवी इंडस्ट्री के सबसे चहिते होस्ट होने के साथ साल 2018 उनकी झोली में एक शो से करोड़ों की मोटी कमाई भी लेकर आया है।
सलमान खान जल्द ही दस का दम के नए सीजन से जून के पहले वीक में आगाज करने जा रहे हैं। एक वेबसाइट ने दावा किया है कि सलमान इस शो के लिए मोटी रकम ले रहे हैं।
ऐसी खबर है कि इस शो के केवल 26 एपिसोड होंगे। इन 26 एपिसोड के लिए सलमान खान की फीस पूरे 150 करोड़ रखी गई है। पिछले साल के मुकाबले सलमान की यह फीस काफी हाई है।
बिग बॅास 11 के एक एपिसोड के लिए सलमान ने 11 करोड़ की फीस ली थी। इतना ही नहीं इस बार केबीसी की तरह दस का दम की भी प्राइज मनी को बढ़ाया गया है।
दस का दम के विजेता को 1 करोड़ तक जीतने का मौका मिल सकता है। गौरतलब है कि इस फीस के साथ सलमान टीवी के सबसे कमाऊ होस्ट बन गए हैं।
सलमान के साथ यहां देखिए 2017-2018 के सबसे कमाऊ टीवी स्टार की सैलेरी की पूरी जानकारी. . . एक घंटे के एपिसोड की इनकी कमाई आपके आंखें खोल देंगी. .
जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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- नौ hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - नौ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? रेस तीन से पहले सलमान खान, एक सौ पचास करोड़ का दस तगड़ा झटका shock ! बात जब भी सलमान खान की होती है तब बॅाक्स आॅफिस हो या टीवी टीआरपी रिकॅार्ड तोड़ कमाई होना तो तय है। यही वजह है कि टीवी इंडस्ट्री के सबसे चहिते होस्ट होने के साथ साल दो हज़ार अट्ठारह उनकी झोली में एक शो से करोड़ों की मोटी कमाई भी लेकर आया है। सलमान खान जल्द ही दस का दम के नए सीजन से जून के पहले वीक में आगाज करने जा रहे हैं। एक वेबसाइट ने दावा किया है कि सलमान इस शो के लिए मोटी रकम ले रहे हैं। ऐसी खबर है कि इस शो के केवल छब्बीस एपिसोड होंगे। इन छब्बीस एपिसोड के लिए सलमान खान की फीस पूरे एक सौ पचास करोड़ रखी गई है। पिछले साल के मुकाबले सलमान की यह फीस काफी हाई है। बिग बॅास ग्यारह के एक एपिसोड के लिए सलमान ने ग्यारह करोड़ की फीस ली थी। इतना ही नहीं इस बार केबीसी की तरह दस का दम की भी प्राइज मनी को बढ़ाया गया है। दस का दम के विजेता को एक करोड़ तक जीतने का मौका मिल सकता है। गौरतलब है कि इस फीस के साथ सलमान टीवी के सबसे कमाऊ होस्ट बन गए हैं। सलमान के साथ यहां देखिए दो हज़ार सत्रह-दो हज़ार अट्ठारह के सबसे कमाऊ टीवी स्टार की सैलेरी की पूरी जानकारी. . . एक घंटे के एपिसोड की इनकी कमाई आपके आंखें खोल देंगी. . जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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मसौढ़ी (पटना). बढ़ी खबर मसौढ़ी से आ रही है। यहां दिनदहाड़े घात लगाकर बैठे अपराधियों ने युवक को गोली मार दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गयया। इसके बाद युवक को मसौढ़ी के अनुमंडल अस्पताल में भर्ती किया गया है। डॉक्टर ने प्राथिमिकी इलाज के बाद युवक को पटना के पीएमसीएच में रेफर कर दिया है।
वहीं घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना किया। साथ ही पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। बताया जा रहा है कि दो कि संख्या में अपराधियों ने वारदात को अंजाम दिया। युवक की पहचान मसौढ़ी के पटेल नगर निवासी आशुतोष कुमार के रूप में हुई है।
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मसौढ़ी . बढ़ी खबर मसौढ़ी से आ रही है। यहां दिनदहाड़े घात लगाकर बैठे अपराधियों ने युवक को गोली मार दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गयया। इसके बाद युवक को मसौढ़ी के अनुमंडल अस्पताल में भर्ती किया गया है। डॉक्टर ने प्राथिमिकी इलाज के बाद युवक को पटना के पीएमसीएच में रेफर कर दिया है। वहीं घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना किया। साथ ही पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। बताया जा रहा है कि दो कि संख्या में अपराधियों ने वारदात को अंजाम दिया। युवक की पहचान मसौढ़ी के पटेल नगर निवासी आशुतोष कुमार के रूप में हुई है।
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कोलकाता : सावन का महीना शिव जी को समर्पित है। सावन के पावन महीने में भगवान शिव की उपासना की जाती है। सावन के महीने में व्रत रखने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती है। कहा जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन के महीने की शुरुआत श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस साल सावन का महीना बहुत ही खास होने वाला है। इस बार सावन का महीना दो महीने का होने वाला है। इस हिसाब से इस बार सावन के महीने में 8 सोमवार पड़ेंगे।
इस बार सावन आरंभ होने की तिथि 4 जुलाई है, जबकि सावन का समापन 31 अगस्त, गुरुवार के दिन होगा। इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना के लिए कुल 58 दिन मिलेंगे। यह शुभ संयोग 19 साल बाद बन रहा है। इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक सावन अधिकमास रहने वाला है। इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक मलमास रहेगा, यानी इस बार सावन में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी।
कैसे करें पूजा?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर किसी शिव मंदिर की ओर प्रस्थान करें। शिवजी की पूजा करते समय विशेष ध्यान रखें। पूजा के लिए जल हमेशा अपने दाहिने हाथ से ही चढ़ाएं। भगवान शिव का जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय मंत्र' का जाप करें। भोले बाबा को अक्षत, सफेद फूल, सफेद चंदन, भांग, धतूरा अर्पित करें। मंदिर में बैठकर सावन के सोमवार के दिन सोमवार व्रत की कथा अवश्य पढ़ें। भगवान शिव को प्रसाद के रूप में घी और चीनी का भोग लगाएं। मंदिर के अंदर ही शिव जी का ध्यान करें।
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कोलकाता : सावन का महीना शिव जी को समर्पित है। सावन के पावन महीने में भगवान शिव की उपासना की जाती है। सावन के महीने में व्रत रखने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती है। कहा जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन के महीने की शुरुआत श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस साल सावन का महीना बहुत ही खास होने वाला है। इस बार सावन का महीना दो महीने का होने वाला है। इस हिसाब से इस बार सावन के महीने में आठ सोमवार पड़ेंगे। इस बार सावन आरंभ होने की तिथि चार जुलाई है, जबकि सावन का समापन इकतीस अगस्त, गुरुवार के दिन होगा। इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना के लिए कुल अट्ठावन दिन मिलेंगे। यह शुभ संयोग उन्नीस साल बाद बन रहा है। इस बार अट्ठारह जुलाई से सोलह अगस्त तक सावन अधिकमास रहने वाला है। इस बार अट्ठारह जुलाई से सोलह अगस्त तक मलमास रहेगा, यानी इस बार सावन में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी। कैसे करें पूजा? इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर किसी शिव मंदिर की ओर प्रस्थान करें। शिवजी की पूजा करते समय विशेष ध्यान रखें। पूजा के लिए जल हमेशा अपने दाहिने हाथ से ही चढ़ाएं। भगवान शिव का जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय मंत्र' का जाप करें। भोले बाबा को अक्षत, सफेद फूल, सफेद चंदन, भांग, धतूरा अर्पित करें। मंदिर में बैठकर सावन के सोमवार के दिन सोमवार व्रत की कथा अवश्य पढ़ें। भगवान शिव को प्रसाद के रूप में घी और चीनी का भोग लगाएं। मंदिर के अंदर ही शिव जी का ध्यान करें।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बीजेपी विधायक नारायण चंदेल ने जांजगीर चांपा जिले में राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक 49 निर्माण में विलंब का मामला उठाया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बीजेपी विधायक नारायण चंदेल ने जांजगीर चांपा जिले में राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक 49 निर्माण में विलंब का मामला उठाया। इसके लिए की गई भू अर्जन की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि इसके लेकर दो अलग- अलग जानकारी दी जा रही है। उन्होंने इसकी जांच करने और इसके लिए समिति गठित करने की मांग की। पूर्व सीएम अजीत जोगी ने भी इस मामले को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि निर्माण में देरी हो रही है। इसको लेकर कम्पनी पर जुर्माना क्यों नहीं किया जा है।
जिसके बाद लोकनिर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बताया कि इसके लिए न जांच की जरूरत है और न समिति के गठन की। इसके बाद भी अगर कोई शिकायत मिलती ही तो जांच कराई जाएगी। भू अर्जन की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिसके बाद अध्यक्ष ने लोकनिर्माण मंत्री से कहा कि आप सड़क निर्माण का निरक्षण करने प्रदेश का भ्रमण कर रहे। जांजगीर चांपा का भ्रमण करते समय नारायण चंदेल को भी साथ ले जाएं ।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बीजेपी विधायक नारायण चंदेल ने जांजगीर चांपा जिले में राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक उनचास निर्माण में विलंब का मामला उठाया। रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बीजेपी विधायक नारायण चंदेल ने जांजगीर चांपा जिले में राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक उनचास निर्माण में विलंब का मामला उठाया। इसके लिए की गई भू अर्जन की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि इसके लेकर दो अलग- अलग जानकारी दी जा रही है। उन्होंने इसकी जांच करने और इसके लिए समिति गठित करने की मांग की। पूर्व सीएम अजीत जोगी ने भी इस मामले को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि निर्माण में देरी हो रही है। इसको लेकर कम्पनी पर जुर्माना क्यों नहीं किया जा है। जिसके बाद लोकनिर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने बताया कि इसके लिए न जांच की जरूरत है और न समिति के गठन की। इसके बाद भी अगर कोई शिकायत मिलती ही तो जांच कराई जाएगी। भू अर्जन की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिसके बाद अध्यक्ष ने लोकनिर्माण मंत्री से कहा कि आप सड़क निर्माण का निरक्षण करने प्रदेश का भ्रमण कर रहे। जांजगीर चांपा का भ्रमण करते समय नारायण चंदेल को भी साथ ले जाएं ।
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Tim Paine to Undergo Neck Surgery: आगामी ऐशज सीरीज से पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम के टेस्ट कप्तान टिम पेन सर्जरी कराने जा रहे हैं. पेन लंबे समय से गर्दन के दर्द से परेशान हैं. इसी के मद्देनजर मंगलवार को उनके गले की छोटी सी सर्जरी होनी है. माना जा रहा है कि पेन एशेज सीरीज से पहले पूरी तरह से फिट हो जाएंगे.
टिम पेन का मानना है कि मंगलवार को सर्जरी के बाद वो सितंबर के अंत तक शारीरिक गतिविधि फिर से शुरू कर देंगे. इसके बाद अगर आगे भी सब कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर के अंत तक वो प्रैक्टिस भी शुरू कर सकते हैं. टिम पेन की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को साल की शुरुआत में अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने मात दी थी. इसके बाद से पेन को हटाने की भी मांग उठने लगी थी.
बताया जा रहा है कि टिम पेन की इस सर्जरी का मकसद 'उनकी गर्दन की नस' की परेशानी को ठीक करना है. इस दर्द के कारण वह तस्मानिया के साथ सत्र पूर्व अभ्यास नहीं कर सके थे.
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Tim Paine to Undergo Neck Surgery: आगामी ऐशज सीरीज से पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम के टेस्ट कप्तान टिम पेन सर्जरी कराने जा रहे हैं. पेन लंबे समय से गर्दन के दर्द से परेशान हैं. इसी के मद्देनजर मंगलवार को उनके गले की छोटी सी सर्जरी होनी है. माना जा रहा है कि पेन एशेज सीरीज से पहले पूरी तरह से फिट हो जाएंगे. टिम पेन का मानना है कि मंगलवार को सर्जरी के बाद वो सितंबर के अंत तक शारीरिक गतिविधि फिर से शुरू कर देंगे. इसके बाद अगर आगे भी सब कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर के अंत तक वो प्रैक्टिस भी शुरू कर सकते हैं. टिम पेन की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को साल की शुरुआत में अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने मात दी थी. इसके बाद से पेन को हटाने की भी मांग उठने लगी थी. बताया जा रहा है कि टिम पेन की इस सर्जरी का मकसद 'उनकी गर्दन की नस' की परेशानी को ठीक करना है. इस दर्द के कारण वह तस्मानिया के साथ सत्र पूर्व अभ्यास नहीं कर सके थे.
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CTET 2023 Exam : सीटेट परीक्षा का शेड्यूल जारी हो गया है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी एग्जाम डेट ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं।
CTET 2023 Exam Date: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) 2023 परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। जिसके मुताबिक CTET 2023 परीक्षा का 17वां चरण रविवार, 20 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। सीबीएसई सीटीईटी परीक्षा ऑफलाइन, पेन-एंड-पेपर (ओएमआर) मोड में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का विस्तृत नोटिफिकेशन छात्र ऑफिशियल वेबसाइट ctet. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं।
एग्जाम का फुल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- इस साल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पंजीकरण प्रक्रिया 27 अप्रैल से शुरू हुई और 26 मई को समाप्त हुई। ऑनलाइन आवेदन सुधार विंडो 29 मई से 2 जून तक खुली थी। 20 अगस्त को परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हिसाब से एडमिट कार्ड 1 अगस्त या फिर जुलाई के आखिरी सप्ताह में जारी किया जा सकता है।
सीटेट में दो पेपर होंगे। पहला पेपर उनके लिए होगा तो पहली से 5वीं तक पढ़ाने के लिए आवेदन करते हैं। वहीं, दूसरा पेपर सीनियर सेकेंड्री क्लासेज में पढ़ाने के लिए आयोजित किया जाएगा। आपको बता दें कि सीटेट परीक्षा पास करनी उन अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होती है जो केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में निकलने वाली टीचर भर्ती के लिए आवेदन करते हैं।
CTET 2023 जून की परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक होगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगी। CTET परीक्षा का पेपर पूरी तरह से बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) पर आधारित होगा। प्रत्येक प्रश्न के चार वैकल्पिक ऑप्शन दिए जाएंगे। जिनमें अभ्यर्थियों को सही उत्तर पर क्लिक करना होगा।
सीटेट का एडमिट कार्ड ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड - सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। - इसके बाद एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें। - पर्सनल डिटेल्स दर्ज करके सबमिट करें। - एडमिट कार्ड सामने होगा। - एडमिट कार्ड की एक प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें।
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CTET दो हज़ार तेईस Exam : सीटेट परीक्षा का शेड्यूल जारी हो गया है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी एग्जाम डेट ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं। CTET दो हज़ार तेईस Exam Date: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा दो हज़ार तेईस परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। जिसके मुताबिक CTET दो हज़ार तेईस परीक्षा का सत्रहवां चरण रविवार, बीस अगस्त को आयोजित किया जाएगा। सीबीएसई सीटीईटी परीक्षा ऑफलाइन, पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का विस्तृत नोटिफिकेशन छात्र ऑफिशियल वेबसाइट ctet. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं। एग्जाम का फुल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- इस साल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पंजीकरण प्रक्रिया सत्ताईस अप्रैल से शुरू हुई और छब्बीस मई को समाप्त हुई। ऑनलाइन आवेदन सुधार विंडो उनतीस मई से दो जून तक खुली थी। बीस अगस्त को परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हिसाब से एडमिट कार्ड एक अगस्त या फिर जुलाई के आखिरी सप्ताह में जारी किया जा सकता है। सीटेट में दो पेपर होंगे। पहला पेपर उनके लिए होगा तो पहली से पाँचवीं तक पढ़ाने के लिए आवेदन करते हैं। वहीं, दूसरा पेपर सीनियर सेकेंड्री क्लासेज में पढ़ाने के लिए आयोजित किया जाएगा। आपको बता दें कि सीटेट परीक्षा पास करनी उन अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होती है जो केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में निकलने वाली टीचर भर्ती के लिए आवेदन करते हैं। CTET दो हज़ार तेईस जून की परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। पहली शिफ्ट सुबह नौ:तीस बजे से दोपहर बारह:शून्य बजे तक होगी, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर दो:तीस बजे से शाम पाँच:शून्य बजे तक चलेगी। CTET परीक्षा का पेपर पूरी तरह से बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होगा। प्रत्येक प्रश्न के चार वैकल्पिक ऑप्शन दिए जाएंगे। जिनमें अभ्यर्थियों को सही उत्तर पर क्लिक करना होगा। सीटेट का एडमिट कार्ड ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड - सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। - इसके बाद एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें। - पर्सनल डिटेल्स दर्ज करके सबमिट करें। - एडमिट कार्ड सामने होगा। - एडमिट कार्ड की एक प्रति डाउनलोड कर अपने पास रख लें।
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ओबीसी जातियों की लिस्टिंग का अधिकार राज्यों को देने वाला बिल बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। विपक्ष ने भी इस बिल के पक्ष में वोटिंग की, अब राज्य अपने यहां ओबीसी जातियों की लिस्ट खुद तैयार कर पाएंगे।
नई दिल्ली राज्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातियों की पहचान करने और सूची बनाने का अधिकार बहाल करने वाला 'संविधान (127वां संशोधन ) विधेयक, 2021' बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। इसके बाद बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही राज्य अपने यहां ओबीसी जातियों की लिस्ट खुद तैयार करा सकेंगे। इसके लिए राज्यों को केंद्र पर नहीं निर्भर रहना होगा।
सरकार को विपक्ष का मिला साथ लोकसभा में बिल यह बिल पहले ही पास हो चुका है, अब राज्यसभा से भी यह पास हो गया। विपक्षी दलों ने इस बिल पर सरकार का समर्थन करने की बात कही थी, जिसके बाद इस संशोधन विधेयक का पास होना तय माना जा रहा था। राज्यसभा में इस बिल पर शांति से चर्चा हुई और इस विपक्षी सदस्यों ने कोई हंगामा नहीं किया। मॉनसून सत्र में यह दूसरी बार है जब इस उच्च सदन में चर्चा के दौरान हंगामा नहीं हुआ।
राज्यों को मिलेगा ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार केंद्र सरकार जो संशोधन विधेयक लेकर आई है, उसमें प्रावधान है कि राज्य सरकारें अब अपने यहां ओबीसी की लिस्ट तैयार कर सकेंगी। यानी अब राज्यों को किसी जाति को ओबीसी में शामिल करने के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना होगा। इसका मतलब है कि अब राज्य सरकारें अपने यहां किसी जाति को ओबीसी समुदाय में शामिल कर पाएगी।
सिंघवी ने केंद्र पर जातीय जनगणना से दूर भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'आप जातीय जनगणना से दूर क्यों भाग रहे हैं? क्यों कतरा रहे हैं? बिहार के मुख्यमंत्री और ओडिशा के मुख्यमंत्री भी इसके पक्ष में हैं। कल तो आपकी एक सांसद ने भी इसके समर्थन में बात कही है। फिर सरकार चुप क्यों बैठी है। सरकार ने अभी तक स्पष्ट क्यों नहीं किया। आप नहीं करना चाहते तो भी कह दीजिए। '
वोट दा मामला है! ना-ना करते आज OBC बिल पर मोदी सरकार को दिल क्यों दे बैठा विपक्ष? देवेगौड़ा बोले- अब महिला आरक्षण पर विचार का समय चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना सदस्य संजय राउत ने इसे ऐतिहासिक और क्रांतिकारी विधेयक करार दियाष उन्होंने कहा कि इससे राज्यों को अधिक अधिकार मिल सकेंगे तथा वे आरक्षण देने के लिए अपनी सूची तैयार कर सकेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री एवं जेडीएस के नेता एच डी देवेगौड़ा ने विधेयक की सराहना करते हुए कहा पिछले सत्र में प्रधानमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी। सरकार को महिला आरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए। यह समय की मांग है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पेश किया बिल उच्च सदन में यह विधेयक चर्चा करने और पारित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पेश किया। उन्होंने प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों का, इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करने के लिए सहमति बनाने को लेकर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से , देश भर में कुल ओबीसी आबादी में करीब बीस फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले 671 समुदायों के लिए मददगार होगा।
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ओबीसी जातियों की लिस्टिंग का अधिकार राज्यों को देने वाला बिल बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। विपक्ष ने भी इस बिल के पक्ष में वोटिंग की, अब राज्य अपने यहां ओबीसी जातियों की लिस्ट खुद तैयार कर पाएंगे। नई दिल्ली राज्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों की पहचान करने और सूची बनाने का अधिकार बहाल करने वाला 'संविधान विधेयक, दो हज़ार इक्कीस' बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। इसके बाद बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही राज्य अपने यहां ओबीसी जातियों की लिस्ट खुद तैयार करा सकेंगे। इसके लिए राज्यों को केंद्र पर नहीं निर्भर रहना होगा। सरकार को विपक्ष का मिला साथ लोकसभा में बिल यह बिल पहले ही पास हो चुका है, अब राज्यसभा से भी यह पास हो गया। विपक्षी दलों ने इस बिल पर सरकार का समर्थन करने की बात कही थी, जिसके बाद इस संशोधन विधेयक का पास होना तय माना जा रहा था। राज्यसभा में इस बिल पर शांति से चर्चा हुई और इस विपक्षी सदस्यों ने कोई हंगामा नहीं किया। मॉनसून सत्र में यह दूसरी बार है जब इस उच्च सदन में चर्चा के दौरान हंगामा नहीं हुआ। राज्यों को मिलेगा ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार केंद्र सरकार जो संशोधन विधेयक लेकर आई है, उसमें प्रावधान है कि राज्य सरकारें अब अपने यहां ओबीसी की लिस्ट तैयार कर सकेंगी। यानी अब राज्यों को किसी जाति को ओबीसी में शामिल करने के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना होगा। इसका मतलब है कि अब राज्य सरकारें अपने यहां किसी जाति को ओबीसी समुदाय में शामिल कर पाएगी। सिंघवी ने केंद्र पर जातीय जनगणना से दूर भागने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'आप जातीय जनगणना से दूर क्यों भाग रहे हैं? क्यों कतरा रहे हैं? बिहार के मुख्यमंत्री और ओडिशा के मुख्यमंत्री भी इसके पक्ष में हैं। कल तो आपकी एक सांसद ने भी इसके समर्थन में बात कही है। फिर सरकार चुप क्यों बैठी है। सरकार ने अभी तक स्पष्ट क्यों नहीं किया। आप नहीं करना चाहते तो भी कह दीजिए। ' वोट दा मामला है! ना-ना करते आज OBC बिल पर मोदी सरकार को दिल क्यों दे बैठा विपक्ष? देवेगौड़ा बोले- अब महिला आरक्षण पर विचार का समय चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना सदस्य संजय राउत ने इसे ऐतिहासिक और क्रांतिकारी विधेयक करार दियाष उन्होंने कहा कि इससे राज्यों को अधिक अधिकार मिल सकेंगे तथा वे आरक्षण देने के लिए अपनी सूची तैयार कर सकेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री एवं जेडीएस के नेता एच डी देवेगौड़ा ने विधेयक की सराहना करते हुए कहा पिछले सत्र में प्रधानमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी। सरकार को महिला आरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए। यह समय की मांग है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पेश किया बिल उच्च सदन में यह विधेयक चर्चा करने और पारित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पेश किया। उन्होंने प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों का, इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करने के लिए सहमति बनाने को लेकर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से , देश भर में कुल ओबीसी आबादी में करीब बीस फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले छः सौ इकहत्तर समुदायों के लिए मददगार होगा।
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में फस जाते हैं और परमशिव के अनुग्रह से ही फिर उनकी इस बन्धन से मुक्ति होती है। इस स्थल पर शैव सिद्धान्त में काम के सिद्धान्त का भी समावेश कर दिया गया है । इसा आत्मानुप्राणित स्थूलतत्त्व मय जगत् में ही मानव मोक्ष प्राप्ति का प्रयास करता है और उसका यह प्रयास कर्म के सिद्धान्त से नियमित होता है । अतः इस भौतिक जगत् की सृष्टि के पीछे एक महान् नैतिक और आध्यात्मिक उद्देश्य है तथा इसको केवल माया नहीं समझा जा सकता । का कर्मवन्धन ही पाप है और परमशिव की दया तथा अनुग्रह से ही इस वन्धन से मुक्ति मिलती है । जब यह वन्धन हट जाता है तब आत्मा विमुक्त हो जाता है और आवागमन के चक्कर से छूट कर संपूर्ण रूप से शिवनमान हो उन्हीं के सान्निध्य में जाकर परमानन्द को प्राप्त होता है । आत्मा का शिव से तादात्म्य नहीं होता, अपितु वह उनके समक्ष एक आदर्श अवस्था में रहता है और परमशिव का प्रकाश उसे ज्योतिर्मय बनाये रखता है। यह शैव सिद्धान्त और विशुद्ध त का तीसरा प्रमुख भेद है। क्योंकि विशुद्ध के अनुसार मोक्ष प्राप्ति होने पर जीवात्मा परमात्मा अथवा ब्रह्म में पूर्णतया विलीन हो जाता है और उसका अपना कोई अलग अस्तित्व नहीं
रह जाता ।
ये ही शैव सिद्धान्त की मौलिक मान्यताएं हैं, जिनका निरूपण गम ग्रन्थों में किया गया है। इसके बाद इनमें कोई वड़ा परिवर्तन नहीं हुआ । अपरकालीन सभी दार्शनिकों ने इनको स्वीकार किया और इनका कार्य अधिकतर इन्हीं सिद्धान्तों का विस्तृत विवेचन करना रहता था । इस प्रकार का विवेचन मुख्यतः दक्षिण में हुआ, जो छठी शताब्दी के पश्चात् शैव-धर्म का प्रधान केन्द्र बन गया तथा इस समय से बाद के लगभग सभी शैव विद्वान दाक्षिणात्य ही थे। इनमें सबसे प्रसिद्ध सातवीं शताब्दी में 'अपर' और 'मणिक्कवासगर' हुए हैं। दोनों शैव सिद्धान्त में पारंगत थे और उसके महान् प्रचारक थे। इन दोनों ही नेगमों को अपने प्रामाणिक शास्त्र माना और कहीं भी उनके सिद्धान्तों के प्रतिकूल नहीं गये ।
शैत्र सिद्धान्त के प्रचार का काम इन दो संतों के बाद अनेक अन्य विद्वानों ने भी किया होगा, यद्यपि वे इतने प्रसिद्ध नहीं हैं। फिर नवीं शताब्दी में शंकराचार्य हुए, और जब उन्होंने विशुद्ध का प्रचार करना प्रारम्भ किया तथा अपनी विद्वत्ता, प्रखर बुद्धि और शास्त्रार्थ कौशल से सव मतों के विद्वानों को एक के बाद एक परास्त करने लगे, तब शैत्र सिद्धान्त के लिए एक कठिन समस्या उत्पन्न हो गई । शंकराचार्य स्वयं शैत्र थे, और जब उन्होंने ही विशुद्ध का समर्थन किया, जो आगमिक सिद्धान्तों के प्रतिकूल था, तब शैव दार्शनिक एक विचित्र दुविधा में पड़ गये । इन लोगों ने शंकर के प्रति कैसा रवैया रखा, इसका हमें उपलब्ध अभिलेखों से ठीक-ठीक पता नहीं चलता। उन्होंने शंकर के मुख्य सिद्धान्तों के विरोध तो विद्यारण्य ने एक शैव सिद्धान्ती का उल्लेख भी किया है जिसने सिद्धान्त पर आक्षेप किया था । परन्तु सामान्य रूप से ऐसा जान पड़ता है कि शैव सिद्धान्तियों ने शंकर को कभी सीधी चुनौती नहीं दी। इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि शंकर के
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में फस जाते हैं और परमशिव के अनुग्रह से ही फिर उनकी इस बन्धन से मुक्ति होती है। इस स्थल पर शैव सिद्धान्त में काम के सिद्धान्त का भी समावेश कर दिया गया है । इसा आत्मानुप्राणित स्थूलतत्त्व मय जगत् में ही मानव मोक्ष प्राप्ति का प्रयास करता है और उसका यह प्रयास कर्म के सिद्धान्त से नियमित होता है । अतः इस भौतिक जगत् की सृष्टि के पीछे एक महान् नैतिक और आध्यात्मिक उद्देश्य है तथा इसको केवल माया नहीं समझा जा सकता । का कर्मवन्धन ही पाप है और परमशिव की दया तथा अनुग्रह से ही इस वन्धन से मुक्ति मिलती है । जब यह वन्धन हट जाता है तब आत्मा विमुक्त हो जाता है और आवागमन के चक्कर से छूट कर संपूर्ण रूप से शिवनमान हो उन्हीं के सान्निध्य में जाकर परमानन्द को प्राप्त होता है । आत्मा का शिव से तादात्म्य नहीं होता, अपितु वह उनके समक्ष एक आदर्श अवस्था में रहता है और परमशिव का प्रकाश उसे ज्योतिर्मय बनाये रखता है। यह शैव सिद्धान्त और विशुद्ध त का तीसरा प्रमुख भेद है। क्योंकि विशुद्ध के अनुसार मोक्ष प्राप्ति होने पर जीवात्मा परमात्मा अथवा ब्रह्म में पूर्णतया विलीन हो जाता है और उसका अपना कोई अलग अस्तित्व नहीं रह जाता । ये ही शैव सिद्धान्त की मौलिक मान्यताएं हैं, जिनका निरूपण गम ग्रन्थों में किया गया है। इसके बाद इनमें कोई वड़ा परिवर्तन नहीं हुआ । अपरकालीन सभी दार्शनिकों ने इनको स्वीकार किया और इनका कार्य अधिकतर इन्हीं सिद्धान्तों का विस्तृत विवेचन करना रहता था । इस प्रकार का विवेचन मुख्यतः दक्षिण में हुआ, जो छठी शताब्दी के पश्चात् शैव-धर्म का प्रधान केन्द्र बन गया तथा इस समय से बाद के लगभग सभी शैव विद्वान दाक्षिणात्य ही थे। इनमें सबसे प्रसिद्ध सातवीं शताब्दी में 'अपर' और 'मणिक्कवासगर' हुए हैं। दोनों शैव सिद्धान्त में पारंगत थे और उसके महान् प्रचारक थे। इन दोनों ही नेगमों को अपने प्रामाणिक शास्त्र माना और कहीं भी उनके सिद्धान्तों के प्रतिकूल नहीं गये । शैत्र सिद्धान्त के प्रचार का काम इन दो संतों के बाद अनेक अन्य विद्वानों ने भी किया होगा, यद्यपि वे इतने प्रसिद्ध नहीं हैं। फिर नवीं शताब्दी में शंकराचार्य हुए, और जब उन्होंने विशुद्ध का प्रचार करना प्रारम्भ किया तथा अपनी विद्वत्ता, प्रखर बुद्धि और शास्त्रार्थ कौशल से सव मतों के विद्वानों को एक के बाद एक परास्त करने लगे, तब शैत्र सिद्धान्त के लिए एक कठिन समस्या उत्पन्न हो गई । शंकराचार्य स्वयं शैत्र थे, और जब उन्होंने ही विशुद्ध का समर्थन किया, जो आगमिक सिद्धान्तों के प्रतिकूल था, तब शैव दार्शनिक एक विचित्र दुविधा में पड़ गये । इन लोगों ने शंकर के प्रति कैसा रवैया रखा, इसका हमें उपलब्ध अभिलेखों से ठीक-ठीक पता नहीं चलता। उन्होंने शंकर के मुख्य सिद्धान्तों के विरोध तो विद्यारण्य ने एक शैव सिद्धान्ती का उल्लेख भी किया है जिसने सिद्धान्त पर आक्षेप किया था । परन्तु सामान्य रूप से ऐसा जान पड़ता है कि शैव सिद्धान्तियों ने शंकर को कभी सीधी चुनौती नहीं दी। इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि शंकर के
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पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया है. बतौर मुख्य सचिव उनका कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन चार दिन पहले ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था. लेकिन अब शुक्रवार को केंद्र सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुला लिया है. अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है.
केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अलपन बंदोपाध्याय को अब केंद्र में नई जिम्मेदारी दी जाएगी. उन्हें 31 मई की सुबह 10 बजे से पहले रिपोर्ट करना है. केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार से उन्हें जल्द से जल्द रिलीव करने का अनुरोध किया है.
इससे पहले बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल चार दिन पहले ही यानी 24 मई को तीन महीने बढ़ाने के आदेश दिए थे. बतौर मुख्य सचिव बंदोपाध्याय का कार्यकाल इसी महीने के आखिर में खत्म हो रहा था.
बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का फैसला ऐसे वक्त लिया गया है जब कुछ घंटों पहले ही यास तूफान में हुए नुकसान को लेकर हुई रिव्यू मीटिंग में ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक बार फिर टकराव देखने को मिला था. ममता बनर्जी इस मीटिंग में आधे घंटे देरी से पहुंची थीं. उनके साथ अलपन बंदोपाध्याय भी थे.
अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी अफसर माना जाता है. बंदोपाध्याय 1987 बैच के आईएएस अफसर हैं. वो हावड़ा समेत कई जिलों के डीएम भी रह चुके हैं. उन्हें पिछले साल सितंबर में राजीव सिन्हा के रिटायर्ड होने के बाद पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था.
इस मामले पर टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने कहा, "क्या आजादी के बाद से ऐसा कभी हुआ है? किसी राज्य के मुख्य सचिव के केंद्र में जबरन नियुक्ति. कितना नीचे गिरेगी मोदी-शाह की बीजेपी? ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि बंगाल के लोगों ने दोनों को अपमानित किया और भारी बहुमत के साथ ममता बनर्जी को चुना. "
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पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया है. बतौर मुख्य सचिव उनका कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन चार दिन पहले ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था. लेकिन अब शुक्रवार को केंद्र सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुला लिया है. अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है. केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अलपन बंदोपाध्याय को अब केंद्र में नई जिम्मेदारी दी जाएगी. उन्हें इकतीस मई की सुबह दस बजे से पहले रिपोर्ट करना है. केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार से उन्हें जल्द से जल्द रिलीव करने का अनुरोध किया है. इससे पहले बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल चार दिन पहले ही यानी चौबीस मई को तीन महीने बढ़ाने के आदेश दिए थे. बतौर मुख्य सचिव बंदोपाध्याय का कार्यकाल इसी महीने के आखिर में खत्म हो रहा था. बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का फैसला ऐसे वक्त लिया गया है जब कुछ घंटों पहले ही यास तूफान में हुए नुकसान को लेकर हुई रिव्यू मीटिंग में ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक बार फिर टकराव देखने को मिला था. ममता बनर्जी इस मीटिंग में आधे घंटे देरी से पहुंची थीं. उनके साथ अलपन बंदोपाध्याय भी थे. अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी अफसर माना जाता है. बंदोपाध्याय एक हज़ार नौ सौ सत्तासी बैच के आईएएस अफसर हैं. वो हावड़ा समेत कई जिलों के डीएम भी रह चुके हैं. उन्हें पिछले साल सितंबर में राजीव सिन्हा के रिटायर्ड होने के बाद पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था. इस मामले पर टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने कहा, "क्या आजादी के बाद से ऐसा कभी हुआ है? किसी राज्य के मुख्य सचिव के केंद्र में जबरन नियुक्ति. कितना नीचे गिरेगी मोदी-शाह की बीजेपी? ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि बंगाल के लोगों ने दोनों को अपमानित किया और भारी बहुमत के साथ ममता बनर्जी को चुना. "
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सपा सांसद के रूप में कुं. रेवती रमण सिंह ने वर्ष 2011 से संसद में नियम 193 के तहत दो बार हिमालयी क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियाँ तत्काल बंद करने, अविरल गंगा, उत्तराखंड में बनाये जा रहे अंधाधुंध बाँध और गंगा की सफाई के मुद्दे को उठाया था और इस पर साढ़े चार घंटे तक चर्चा भी हुई थी। कई प्रदेशों के सांसदों ने गंगा को बचाने के समर्थन में अपनी बातें कही भी। राज्यसभा में मार्च 21 में भी राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सदन में शून्य काल में गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए विकास के नाम पर गंगा और हिमालय का निर्मम दोहन पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं पर न तो केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने न ही वर्तमान भाजपा सरकार ने इस पर ध्यान दिया जिसके परिणामस्वरूप आज जोशी मठ के साथ ही पूरा उत्तराखंड धंसने के कगार पर पहुँच गया है।
राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सदन में शून्य काल में गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस महती सभा के माध्यम से सरकार का ध्यान गंगा और उसका हिमालयी भू-भाग जोकि भारत की आत्मा, सनातन संस्कृति का उद्गम रहा है, के संबंध में आकर्षित करता हूँ। यह सर्वोच्च तीर्थ है जहां सदियों से आध्यात्मिक विकास की यात्रा के लिए हम जाते रहे हैं। लेकिन आज विकास के नाम पर गंगा और हिमालय का निर्मम दोहन कर, इन पावन और दिव्य हिमालयी तीर्थों को पर्यटन, शोर-शराबे और बाजार के रूप में बदला जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप इसके पर्यावरण पर गंभीर दुष्परिणाम हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 60% जल-श्रोत सूखने की कगार पर हैं। गंगा के क्षेत्र में औसत से 3 गुना अधिक मिट्टी का कटाव हो रहा है। जलवायु परिवर्तन का खतरा हिमालय पर वैसे ही मंडरा रहा है। सांसद ने कहा कि हमने 2013 केदारनाथ की आपदा देखी, फिर 2021 में ऋषि गंगा की प्रलय देखी। फिर भी सरकार गंगा और हिमालय को विनष्ट करने पर आमादा है।
उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी धाराओं पर 7 बांधों के निर्माण की संस्तुति हाल ही में केंद्र ने की, और भी 24 अन्य बांधों पर केंद्र ने चुप्पी साध रखी है। सांसद ने सदन में कहा कि 'चार-धामों' को 'चार-दामों' में बदलने की होड़ जारी है। लाखों हिमालयी पेड़ देवदार, बाँझ, बुरांश, चीड़, कैल, पदम् आदि निर्मम रूप से चारधाम सड़क परियोजना के चौडीकरण में काट दिए गए। इसके चलते 200 से ऊपर भूस्खलन संवेदी ज़ोन पूरे चारधाम मार्ग पर सक्रिय हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सड़क की चौड़ाई का मानक ठीक करने को कहा तो केंद्र ने रक्षा-मंत्रालय को ढाल बनाकर इस हानिकारक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया, जब हिमालय टूट कर गिरेगा तो कैसे सेना बॉर्डर तक पहुँच पाएगी। हम यह भूल गए कि स्थायी/स्थिर हिमालय हमारी पहली सुरक्षा-ढाल है। हम हिमालय को ही आज अपूरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इतने में ही चारधाम को हम नहीं बक्श रहे। सुनने में आ रहा है कि चारधाम को अब रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। यह सब हिमालयी घाटियों की धारण- क्षमता वहन क्षमता के विचार को दरकिनार कर अंधाधुंध किया जा रहा है। सब वैज्ञानिक चेतावनियों और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे और संकेतों को नजरअंदाज कर, यह आत्मघाती कदम हम तेजी से बढ़ा रहे हैं। यदि हिमालय न रहा, यदि गंगा न बची तो फिर हम कौन से देश की बात करेंगे। हमारी सभ्यता, संस्कृति और पहचान की कीमत पर हम कौन सा विकास कर लेंगे।
कुंवर रेवती रमण सिंह ने कहा कि हिमनद क्षेत्रों में कार्बन फुटप्रिंट बढ़ रहा है और इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन और ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिमनदों का विनाश हुआ है। गंगा और हिमालय न केवल अमूल्य पर्यावरणीय संसाधन अपितु हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक राष्ट्रीय धरोहर भी हैं। इनसे व्यावसायिक खिलवाड़ तुरंत बंद होना चाहिए। गंगा के क्षेत्र में पेड़ों/जंगलों का कटान तत्काल रोका जाना चाहिए।
जून 2013 में ऋषिगंगा और केदारनाथ की हाल की बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पिछले महीने चमोली क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग मारे गए थे और ऋषिगंगा बाढ़ में लगभग 200 लोग मारे गए थे और अभी भी कई शवों का पता नहीं चल पाया है।
इसके पूर्व लोकसभा में वर्ष 2011 में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा था कि आज गंगा को पूरी तरह से विनष्ट करने का एक षडयंत्र चल रहा है। इस षडयंत्र का नतीजा यह होगा कि 50 करोड़ की आबादी जो गंगा पर गजर-बसर करती है, गंगा के किनारे जो लोग चार प्रदेशों में निवास करते हैं, उनका जीवन-यापन खत्म हो जाएगा। गंगा के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री जी ने सन् 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया था। आज सन् 2011 खत्म होने वाला है लेकिन संभवतः एक बैठक भी नहीं हुई है। गंगा के संरक्षण के लिए कोई कानून भी नहीं बनाया गया है। मुझे अफ़सोस है कि प्रधानमंत्री उसके अध्यक्ष हैं, लेकिन उनको समय नहीं मिल रहा है कि एक बैठक रखें और यह देखें कि गंगा की क्या दुदर्शा हो रही है।
उन्होंने कहा था कि सवाल यह है क गंगा बचेगी कि नहीं, उसका अस्तित्व बचेगा कि नहीं बचेगा? केवल गंगा ही नहीं हमारी जितनी भी नदिया हैं चाहे यमुना हो या अन्य सहायक नदियां जो वहां से निकलती हैं, सब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका अस्तित्व दो तरह से खतरे में पड़ गया है। एक तो कार्बनडाई अक्साईड की वजह से ग्लेशियर हर साल 20 मीटर खिसक रहे हैं। दूसरा, हमने बांधों की श्रंखला बनाई है, पहले वहां पर तीन बांध बनाए गए थे।
उन्होंने कहा किजब टिहरी बांध बनाया गया तो यह कहा गया कि इससे 2400 मेगावाट बिजली मिलेगी और डेढ़ लाख हैक्टेअर भूमिं की सिंचाई होगी। आज वास्तविकता यह है कि टिहरी से मात्र 400 मेगावाट बिजली मिल रही है और सिंचाई केवल कागजों में नाममात्र की हो रही है।इससे बिहार तक सिंचाई होनी थी।
उन्होंने कहा कि पटना में गंगा का बहुत बड़ा पाट था, बनारस में बहुत बड़ा पाट था, इलाहाबाद में गंगा अविरल तरीके से बहती थी, लेकिन आज वह नाले के रूप में बह रही है। कानपुर आदि जितने भी शहर हैं, पटना बता दिया, गंगासागर तक जाते-जाते गंगा की स्थिति यह हो जाती है कि मल-मूत्र से गंदा पानी ही गंगासागर में जाता है। गंगा का शुद्ध जल वहां जाता ही नहीं है।
कुंवर रेवती रमण ने कहा कि इतना ही नहीं, दो बांध और बनाये गये, एक बांध हरिद्वार में बनाया गया और एक नरौरा में बनाया गया। उसके बाद एक बांध मनेरी भाली में और बना दिया गया। इतने पर ही उत्तराखंड की सरकार को संतोष नहीं हुआ। जो गंगा की प्रमुख सहयोगी नदियां हैं, केदारनाथ धाम से निकलने वाली नदियां हैं, मंदाकिनी के ऊपर उत्तराखंड की सरकार के द्वारा इतने बांध बनाये जा रहे हैं कि 115 किलोमीटर तक, जहां से मंदाकिनी बहती है, वह पूरा का पूरा क्षेत्र समाप्त हो गया है।
जो गंगा अविरल धारा से बहती थी, उसमें तमाम औषधि गुण, तमाम उसमें इस तरह के पदार्थ आते थे, जीव-जन्तु उसमें पलते थे, उन सबको समाप्त करने का काम कर दिया है। ऐसा लगता है कि गंगा कहीं दिखाई ही नहीं पड़ेगी। केदारनाथ धाम से मंदाकिनी नदी पर पूरी की पूरी बांध की श्रृंखला बनायी गयी। वहां के लोगों के विरोध करने के बावजूद भी वह बनता ही जा रही है।
राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण तो गठित किया गया, लेकिन इसे कानूनी दर्जा अभी तक नहीं दिया गया है। विकास के नाम पर बिजली बनाने के लिए, गंगा के साथ-साथ हिमालय का भी अस्तित्व समाप्त होने वाला है। हिमालय चार-पांच सिस्मिक जोन पर बसा हुआ है, कच्चा पहाड़ है और कभी भी वह टूट जाये। एक बार मदन मोहन मालवीय जी ने कहा था, जब अंग्रेज बांध बनाने लगे तो मदन मोहन मालवीय जी इलाहाबाद से आये और उन्होंने कहा कि हम आमरण अनशन करेंगे, अंग्रेजों ने बंद कर दिया। आज हमारी ही सरकार जो अपने आपको धर्म का रक्षक कहती है, आज उसी पार्टी की सरकार गंगा को विनष्ट रही है, हिमालय को विनष्ट कर रही है।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि इतना उसे विनष्ट करने की तैयारी हो रही है कि एक दिन ऐसा आयेगा कि अगर टिहरी का बांध टूटा तो वहां से लेकर पूरे इलाहाबाद तक जलमग्न हो जायेगा। एक भी आदमी नहीं बचेगा। क्या कभी सरकार ने इस संबंध में सोचा है? कभी भारत सरकार ने इस पर विचार किया है? खाली आपने मज़ाक बना दिया।
रेवती रमण सिंह ने कहा कि लोहारी, नाग, पाला मनेरी, और भैरव घाटी के बांधों को निरस्त किया गया लेकिन अभी 150 बांधों का काम चल रहा है। अभी 550 बांधों को चिह्नित किया गया है कि इन पर और काम चलेगा। बिजली कितनी मिल रही है? यदि ये सब परियोजनाएँ तैयार हो जाएँ तो पूरे देश को जो बिजली मिलती है, उसका एक प्रतिशत बिजली ही मिलेगी। मैं भारत सरकार से कहना चाहता हूँ कि तत्काल इसका काम रुकवा दीजिए। अगर आपको गंगा को बचाना है, आपको अलकनंदा को बचाना है, आपको मंदाकिनी को बचाना है तो मेरा आपसे आग्रह है कि तत्काल इस काम को रुकवा दीजिए और गंगा की अविरल धारा को बहने दीजिए, गंगा में जल प्रवाह होने दीजिए और चारों तरफ से जो गंदगी और मल-मूत्र गंगा में जा रहा है, इसको रोकने का काम करने का भी यहाँ से प्रयास होना चाहिए।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)
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सपा सांसद के रूप में कुं. रेवती रमण सिंह ने वर्ष दो हज़ार ग्यारह से संसद में नियम एक सौ तिरानवे के तहत दो बार हिमालयी क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियाँ तत्काल बंद करने, अविरल गंगा, उत्तराखंड में बनाये जा रहे अंधाधुंध बाँध और गंगा की सफाई के मुद्दे को उठाया था और इस पर साढ़े चार घंटे तक चर्चा भी हुई थी। कई प्रदेशों के सांसदों ने गंगा को बचाने के समर्थन में अपनी बातें कही भी। राज्यसभा में मार्च इक्कीस में भी राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सदन में शून्य काल में गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए विकास के नाम पर गंगा और हिमालय का निर्मम दोहन पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं पर न तो केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने न ही वर्तमान भाजपा सरकार ने इस पर ध्यान दिया जिसके परिणामस्वरूप आज जोशी मठ के साथ ही पूरा उत्तराखंड धंसने के कगार पर पहुँच गया है। राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने सदन में शून्य काल में गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस महती सभा के माध्यम से सरकार का ध्यान गंगा और उसका हिमालयी भू-भाग जोकि भारत की आत्मा, सनातन संस्कृति का उद्गम रहा है, के संबंध में आकर्षित करता हूँ। यह सर्वोच्च तीर्थ है जहां सदियों से आध्यात्मिक विकास की यात्रा के लिए हम जाते रहे हैं। लेकिन आज विकास के नाम पर गंगा और हिमालय का निर्मम दोहन कर, इन पावन और दिव्य हिमालयी तीर्थों को पर्यटन, शोर-शराबे और बाजार के रूप में बदला जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप इसके पर्यावरण पर गंभीर दुष्परिणाम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि साठ% जल-श्रोत सूखने की कगार पर हैं। गंगा के क्षेत्र में औसत से तीन गुना अधिक मिट्टी का कटाव हो रहा है। जलवायु परिवर्तन का खतरा हिमालय पर वैसे ही मंडरा रहा है। सांसद ने कहा कि हमने दो हज़ार तेरह केदारनाथ की आपदा देखी, फिर दो हज़ार इक्कीस में ऋषि गंगा की प्रलय देखी। फिर भी सरकार गंगा और हिमालय को विनष्ट करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी धाराओं पर सात बांधों के निर्माण की संस्तुति हाल ही में केंद्र ने की, और भी चौबीस अन्य बांधों पर केंद्र ने चुप्पी साध रखी है। सांसद ने सदन में कहा कि 'चार-धामों' को 'चार-दामों' में बदलने की होड़ जारी है। लाखों हिमालयी पेड़ देवदार, बाँझ, बुरांश, चीड़, कैल, पदम् आदि निर्मम रूप से चारधाम सड़क परियोजना के चौडीकरण में काट दिए गए। इसके चलते दो सौ से ऊपर भूस्खलन संवेदी ज़ोन पूरे चारधाम मार्ग पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सड़क की चौड़ाई का मानक ठीक करने को कहा तो केंद्र ने रक्षा-मंत्रालय को ढाल बनाकर इस हानिकारक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया, जब हिमालय टूट कर गिरेगा तो कैसे सेना बॉर्डर तक पहुँच पाएगी। हम यह भूल गए कि स्थायी/स्थिर हिमालय हमारी पहली सुरक्षा-ढाल है। हम हिमालय को ही आज अपूरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतने में ही चारधाम को हम नहीं बक्श रहे। सुनने में आ रहा है कि चारधाम को अब रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। यह सब हिमालयी घाटियों की धारण- क्षमता वहन क्षमता के विचार को दरकिनार कर अंधाधुंध किया जा रहा है। सब वैज्ञानिक चेतावनियों और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे और संकेतों को नजरअंदाज कर, यह आत्मघाती कदम हम तेजी से बढ़ा रहे हैं। यदि हिमालय न रहा, यदि गंगा न बची तो फिर हम कौन से देश की बात करेंगे। हमारी सभ्यता, संस्कृति और पहचान की कीमत पर हम कौन सा विकास कर लेंगे। कुंवर रेवती रमण सिंह ने कहा कि हिमनद क्षेत्रों में कार्बन फुटप्रिंट बढ़ रहा है और इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन और ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिमनदों का विनाश हुआ है। गंगा और हिमालय न केवल अमूल्य पर्यावरणीय संसाधन अपितु हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक राष्ट्रीय धरोहर भी हैं। इनसे व्यावसायिक खिलवाड़ तुरंत बंद होना चाहिए। गंगा के क्षेत्र में पेड़ों/जंगलों का कटान तत्काल रोका जाना चाहिए। जून दो हज़ार तेरह में ऋषिगंगा और केदारनाथ की हाल की बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पिछले महीने चमोली क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग मारे गए थे और ऋषिगंगा बाढ़ में लगभग दो सौ लोग मारे गए थे और अभी भी कई शवों का पता नहीं चल पाया है। इसके पूर्व लोकसभा में वर्ष दो हज़ार ग्यारह में इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा था कि आज गंगा को पूरी तरह से विनष्ट करने का एक षडयंत्र चल रहा है। इस षडयंत्र का नतीजा यह होगा कि पचास करोड़ की आबादी जो गंगा पर गजर-बसर करती है, गंगा के किनारे जो लोग चार प्रदेशों में निवास करते हैं, उनका जीवन-यापन खत्म हो जाएगा। गंगा के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री जी ने सन् दो हज़ार आठ में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया था। आज सन् दो हज़ार ग्यारह खत्म होने वाला है लेकिन संभवतः एक बैठक भी नहीं हुई है। गंगा के संरक्षण के लिए कोई कानून भी नहीं बनाया गया है। मुझे अफ़सोस है कि प्रधानमंत्री उसके अध्यक्ष हैं, लेकिन उनको समय नहीं मिल रहा है कि एक बैठक रखें और यह देखें कि गंगा की क्या दुदर्शा हो रही है। उन्होंने कहा था कि सवाल यह है क गंगा बचेगी कि नहीं, उसका अस्तित्व बचेगा कि नहीं बचेगा? केवल गंगा ही नहीं हमारी जितनी भी नदिया हैं चाहे यमुना हो या अन्य सहायक नदियां जो वहां से निकलती हैं, सब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका अस्तित्व दो तरह से खतरे में पड़ गया है। एक तो कार्बनडाई अक्साईड की वजह से ग्लेशियर हर साल बीस मीटर खिसक रहे हैं। दूसरा, हमने बांधों की श्रंखला बनाई है, पहले वहां पर तीन बांध बनाए गए थे। उन्होंने कहा किजब टिहरी बांध बनाया गया तो यह कहा गया कि इससे दो हज़ार चार सौ मेगावाट बिजली मिलेगी और डेढ़ लाख हैक्टेअर भूमिं की सिंचाई होगी। आज वास्तविकता यह है कि टिहरी से मात्र चार सौ मेगावाट बिजली मिल रही है और सिंचाई केवल कागजों में नाममात्र की हो रही है।इससे बिहार तक सिंचाई होनी थी। उन्होंने कहा कि पटना में गंगा का बहुत बड़ा पाट था, बनारस में बहुत बड़ा पाट था, इलाहाबाद में गंगा अविरल तरीके से बहती थी, लेकिन आज वह नाले के रूप में बह रही है। कानपुर आदि जितने भी शहर हैं, पटना बता दिया, गंगासागर तक जाते-जाते गंगा की स्थिति यह हो जाती है कि मल-मूत्र से गंदा पानी ही गंगासागर में जाता है। गंगा का शुद्ध जल वहां जाता ही नहीं है। कुंवर रेवती रमण ने कहा कि इतना ही नहीं, दो बांध और बनाये गये, एक बांध हरिद्वार में बनाया गया और एक नरौरा में बनाया गया। उसके बाद एक बांध मनेरी भाली में और बना दिया गया। इतने पर ही उत्तराखंड की सरकार को संतोष नहीं हुआ। जो गंगा की प्रमुख सहयोगी नदियां हैं, केदारनाथ धाम से निकलने वाली नदियां हैं, मंदाकिनी के ऊपर उत्तराखंड की सरकार के द्वारा इतने बांध बनाये जा रहे हैं कि एक सौ पंद्रह किलोग्राममीटर तक, जहां से मंदाकिनी बहती है, वह पूरा का पूरा क्षेत्र समाप्त हो गया है। जो गंगा अविरल धारा से बहती थी, उसमें तमाम औषधि गुण, तमाम उसमें इस तरह के पदार्थ आते थे, जीव-जन्तु उसमें पलते थे, उन सबको समाप्त करने का काम कर दिया है। ऐसा लगता है कि गंगा कहीं दिखाई ही नहीं पड़ेगी। केदारनाथ धाम से मंदाकिनी नदी पर पूरी की पूरी बांध की श्रृंखला बनायी गयी। वहां के लोगों के विरोध करने के बावजूद भी वह बनता ही जा रही है। राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण तो गठित किया गया, लेकिन इसे कानूनी दर्जा अभी तक नहीं दिया गया है। विकास के नाम पर बिजली बनाने के लिए, गंगा के साथ-साथ हिमालय का भी अस्तित्व समाप्त होने वाला है। हिमालय चार-पांच सिस्मिक जोन पर बसा हुआ है, कच्चा पहाड़ है और कभी भी वह टूट जाये। एक बार मदन मोहन मालवीय जी ने कहा था, जब अंग्रेज बांध बनाने लगे तो मदन मोहन मालवीय जी इलाहाबाद से आये और उन्होंने कहा कि हम आमरण अनशन करेंगे, अंग्रेजों ने बंद कर दिया। आज हमारी ही सरकार जो अपने आपको धर्म का रक्षक कहती है, आज उसी पार्टी की सरकार गंगा को विनष्ट रही है, हिमालय को विनष्ट कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इतना उसे विनष्ट करने की तैयारी हो रही है कि एक दिन ऐसा आयेगा कि अगर टिहरी का बांध टूटा तो वहां से लेकर पूरे इलाहाबाद तक जलमग्न हो जायेगा। एक भी आदमी नहीं बचेगा। क्या कभी सरकार ने इस संबंध में सोचा है? कभी भारत सरकार ने इस पर विचार किया है? खाली आपने मज़ाक बना दिया। रेवती रमण सिंह ने कहा कि लोहारी, नाग, पाला मनेरी, और भैरव घाटी के बांधों को निरस्त किया गया लेकिन अभी एक सौ पचास बांधों का काम चल रहा है। अभी पाँच सौ पचास बांधों को चिह्नित किया गया है कि इन पर और काम चलेगा। बिजली कितनी मिल रही है? यदि ये सब परियोजनाएँ तैयार हो जाएँ तो पूरे देश को जो बिजली मिलती है, उसका एक प्रतिशत बिजली ही मिलेगी। मैं भारत सरकार से कहना चाहता हूँ कि तत्काल इसका काम रुकवा दीजिए। अगर आपको गंगा को बचाना है, आपको अलकनंदा को बचाना है, आपको मंदाकिनी को बचाना है तो मेरा आपसे आग्रह है कि तत्काल इस काम को रुकवा दीजिए और गंगा की अविरल धारा को बहने दीजिए, गंगा में जल प्रवाह होने दीजिए और चारों तरफ से जो गंदगी और मल-मूत्र गंगा में जा रहा है, इसको रोकने का काम करने का भी यहाँ से प्रयास होना चाहिए।
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बैंकिंग क्षेत्र की अपनी योजना पर आगे बढ़ते हुये अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कैपिटल ने आज जापान के सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक (एसएमटीबी) को रणनीतिक भागीदार बनाया है। रिलायंस समूह के प्रस्तावित बैंकिंग उद्यम समेत दोनों विभिन्न व्यावसायों में सहयोग करेंगे।
जापान के सबसे बड़ी वित्तीय संस्थान, एसएमटीबी की कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति 1,800 अरब डॉलर है। दोनों कंपनियों के बीच व्यापक दीर्घकालिक रणनीतिक गठजोड़ की शुरुआत के तौर पर सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक 371 करोड़ रुपए में रिलायंस कैपिटल की 2. 77 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगा।
एसएमटीबी और रिलायंस कैपिटल जो कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत रिलायंस समूह की वित्तीय शाखा है, अपने ग्राहकों को समाधान प्रदान करने के लिए भी सहयोग करेंगे जिसमें भारत और जापान में विलय एवं अधिग्रहण के अवसर शामिल हैं। दोनों कंपनियां अपने नेटवर्कों के जरिए संबद्ध वित्तीय उत्पादों के वितरण में एक दूसरे को सहयोग करेंगी।
जापानी वित्तीय क्षेत्र में रिलायंस की यह दूसरी बड़ी भागदारी है। इससे पहले रिलायंस कैपिटल ने जापानी वित्तीय कंपनी निप्पॉन लाइफ के साथ अपने जीवन बीमा और म्यूचुअल फंड कंपनियों की हिस्सेदारी बेची है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल की जापान यात्रा के बाद सरकार द्वारा जापान के साथ व्यावसायिक रिश्तों को काफी महत्व दिया जा रहा है। रिलायंस समूह की ताजा पहल इस बात को ध्यान में रखते हुये की गई है।
दोनों कंपनियों के बीच हुये समझौते के अनुसार एसएमटीबी शुरू में रिलायंस कैपिटल में 2. 77 प्रतिशत हिस्सेदारी 371 करोड़ रुपए में खरीदेगा। जिसमें एक साल की बंधक अवधि होगी और यह हिस्सेदारी तरजीही आवंटन के जरिए दी जाएगी। यह निवेश 530 रुपए प्रति शेयर की दर पर होगा।
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बैंकिंग क्षेत्र की अपनी योजना पर आगे बढ़ते हुये अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कैपिटल ने आज जापान के सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक को रणनीतिक भागीदार बनाया है। रिलायंस समूह के प्रस्तावित बैंकिंग उद्यम समेत दोनों विभिन्न व्यावसायों में सहयोग करेंगे। जापान के सबसे बड़ी वित्तीय संस्थान, एसएमटीबी की कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति एक,आठ सौ अरब डॉलर है। दोनों कंपनियों के बीच व्यापक दीर्घकालिक रणनीतिक गठजोड़ की शुरुआत के तौर पर सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक तीन सौ इकहत्तर करोड़ रुपए में रिलायंस कैपिटल की दो. सतहत्तर प्रतिशत हिस्सेदारी लेगा। एसएमटीबी और रिलायंस कैपिटल जो कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत रिलायंस समूह की वित्तीय शाखा है, अपने ग्राहकों को समाधान प्रदान करने के लिए भी सहयोग करेंगे जिसमें भारत और जापान में विलय एवं अधिग्रहण के अवसर शामिल हैं। दोनों कंपनियां अपने नेटवर्कों के जरिए संबद्ध वित्तीय उत्पादों के वितरण में एक दूसरे को सहयोग करेंगी। जापानी वित्तीय क्षेत्र में रिलायंस की यह दूसरी बड़ी भागदारी है। इससे पहले रिलायंस कैपिटल ने जापानी वित्तीय कंपनी निप्पॉन लाइफ के साथ अपने जीवन बीमा और म्यूचुअल फंड कंपनियों की हिस्सेदारी बेची है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल की जापान यात्रा के बाद सरकार द्वारा जापान के साथ व्यावसायिक रिश्तों को काफी महत्व दिया जा रहा है। रिलायंस समूह की ताजा पहल इस बात को ध्यान में रखते हुये की गई है। दोनों कंपनियों के बीच हुये समझौते के अनुसार एसएमटीबी शुरू में रिलायंस कैपिटल में दो. सतहत्तर प्रतिशत हिस्सेदारी तीन सौ इकहत्तर करोड़ रुपए में खरीदेगा। जिसमें एक साल की बंधक अवधि होगी और यह हिस्सेदारी तरजीही आवंटन के जरिए दी जाएगी। यह निवेश पाँच सौ तीस रुपयापए प्रति शेयर की दर पर होगा।
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योगी सरकार हर कामगार/श्रमिक को बीमा की सुरक्षा देने जा रही है। प्रदेश में एक जनपद के कामगार व श्रमिक को दूसरे जनपद में रोजगार मिलने पर सरकार उनकी आवासीय व्यवस्था भी करेगी।
सरकार ने पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार की एजेंसियां एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (एचएलएल) और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से अधिकृत एजेंसियों, निर्माताओं / आपूर्तिकर्ताओं से पीपीई खरीद रही है।
केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को राज्य सरकारों से अपील कर कहा है कि वह रेलवे को और अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अनुमति प्रदान करें।
बलबीर सिंह सीनियर 1948 के लंदन ओलंपिक, 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक और 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे। मेलबर्न ओलंपिक में बलबीर सिंह सीनियर ने भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया था।
क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक तबलीगी जमात में मौलाना साद के अलावा इन पांचों आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मरकज से जुड़ा कोई भी फैसला हो, मौलाना साद इनको उसमें जरूर शामिल करता था।
देश में कोरोनावायरस और लॉकडाउन के चलते हवाई यात्रा बंद थी। लेकिन लॉकडाउन के चौथे चरण में कुछ रियायत दी गई हैं, जिनमें घरेलू उड़ानों को मंजूरी मिल गई है। सोमवार को ईद के मौके पर पहली फ्लाइट उड़ी।
चीफ जस्टिस ने कहा कि डीजीसीए के महानिदेशक और एयर इंडिया अगर जरूरी समझते हैं तो नियमों छूट ले सकते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट को इंटरनेशनल फ्लाइट्स के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए अलग आदेश जारी करने को कहा है।
शिकायत के मुताबिक ऑनलाइन ई पास सरकारी वेबसाइट पर जो आवेदन किये गये थे, उन्हें अफसर की संस्तुति के लिए लॉगइन पासवर्ड कॉपी किया गया था।
24 मई की रात 12 बजे रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया और लिखा, 'रात के 12 बज चुके है और 5 घंटे बाद भी हमारे पास महाराष्ट्र सरकार से कल की 125 ट्रेनों की डिटेल्स और पैसेंजर लिस्टें नही आयी है। मैंने अधिकारियों को आदेश दिया है, फिर भी प्रतीक्षा करे और तैयारियां जारी रखे। '
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योगी सरकार हर कामगार/श्रमिक को बीमा की सुरक्षा देने जा रही है। प्रदेश में एक जनपद के कामगार व श्रमिक को दूसरे जनपद में रोजगार मिलने पर सरकार उनकी आवासीय व्यवस्था भी करेगी। सरकार ने पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार की एजेंसियां एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से अधिकृत एजेंसियों, निर्माताओं / आपूर्तिकर्ताओं से पीपीई खरीद रही है। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को राज्य सरकारों से अपील कर कहा है कि वह रेलवे को और अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अनुमति प्रदान करें। बलबीर सिंह सीनियर एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के लंदन ओलंपिक, एक हज़ार नौ सौ बावन के हेलसिंकी ओलंपिक और एक हज़ार नौ सौ छप्पन के मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे। मेलबर्न ओलंपिक में बलबीर सिंह सीनियर ने भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया था। क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक तबलीगी जमात में मौलाना साद के अलावा इन पांचों आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मरकज से जुड़ा कोई भी फैसला हो, मौलाना साद इनको उसमें जरूर शामिल करता था। देश में कोरोनावायरस और लॉकडाउन के चलते हवाई यात्रा बंद थी। लेकिन लॉकडाउन के चौथे चरण में कुछ रियायत दी गई हैं, जिनमें घरेलू उड़ानों को मंजूरी मिल गई है। सोमवार को ईद के मौके पर पहली फ्लाइट उड़ी। चीफ जस्टिस ने कहा कि डीजीसीए के महानिदेशक और एयर इंडिया अगर जरूरी समझते हैं तो नियमों छूट ले सकते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट को इंटरनेशनल फ्लाइट्स के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए अलग आदेश जारी करने को कहा है। शिकायत के मुताबिक ऑनलाइन ई पास सरकारी वेबसाइट पर जो आवेदन किये गये थे, उन्हें अफसर की संस्तुति के लिए लॉगइन पासवर्ड कॉपी किया गया था। चौबीस मई की रात बारह बजे रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया और लिखा, 'रात के बारह बज चुके है और पाँच घंटाटे बाद भी हमारे पास महाराष्ट्र सरकार से कल की एक सौ पच्चीस ट्रेनों की डिटेल्स और पैसेंजर लिस्टें नही आयी है। मैंने अधिकारियों को आदेश दिया है, फिर भी प्रतीक्षा करे और तैयारियां जारी रखे। '
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पुरी से रंजन दास की रिपोर्ट।
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा के व्यक्तिगत सहायक चित रंजन पलाई की संदिग्ध मौत की घटना की जांच कर रही है पूरी पुलिस । इस जांच मे मृतक के परिजन जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। घटना को तीन दिन बीत चुके हैं लेकिन मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है. मौत का सही कारण स्पष्ट नहीं था। मृतक चित्तरंजन पलाई के l बड़ी पापा,ओर अपनी बहनआज पुरी एसपी से मुलाकात की और घटना की उचित जांच की मांग की और एसपी से इसे क्राइम ब्रांच को सौंपने की मांग की. मृतक के परिजनों के साथ राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा ने भी मांग की. इस बीच, पुरी के एसपी ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है।
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पुरी से रंजन दास की रिपोर्ट। राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा के व्यक्तिगत सहायक चित रंजन पलाई की संदिग्ध मौत की घटना की जांच कर रही है पूरी पुलिस । इस जांच मे मृतक के परिजन जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। घटना को तीन दिन बीत चुके हैं लेकिन मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है. मौत का सही कारण स्पष्ट नहीं था। मृतक चित्तरंजन पलाई के l बड़ी पापा,ओर अपनी बहनआज पुरी एसपी से मुलाकात की और घटना की उचित जांच की मांग की और एसपी से इसे क्राइम ब्रांच को सौंपने की मांग की. मृतक के परिजनों के साथ राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा ने भी मांग की. इस बीच, पुरी के एसपी ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है।
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Delhi Coronavirus: आज स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले कोविड वार्ड में कार्यरत दीप चंद के परिवार को एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। वे खुद उनके परिवार से मिलकर उनका हाल चाल जाना।
Delhi Coronavirus दिल्ली में कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की दूसरी लहर में कई लोगों की जान चली गई। जिसमें कई कोरोना योद्धा ने भी लोगों की जान बचाते-बचाते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जिसके बाद दिल्ली सरकार कोरोना काल में ड्यूटी पर जान गंवाने वाले योद्धाओं के परिजनों को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देती है। इस क्रम में आज स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Health Minister Satyendra Jain) ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले कोविड वार्ड (Covid Ward) में कार्यरत दीप चंद (Deep Chand) के परिवार को एक करोड़ रुपये (One Crore Rupees) का चेक सौंपा।
वे खुद उनके परिवार से मिलकर उनका हाल चाल जाना। श्री दीप चंद जी कोविड वार्ड में कार्यरत थे। महज 48 साल की उम्र में कोरोना से उनका निधन हो गया। आज परिवार से मिला और दिल्ली सरकार की तरफ से ₹1 करोड़ की सम्मान राशि प्रदान की। इस कठिन समय में दिल्ली सरकार परिवार के साथ खड़ी है।
आपको बता दें कि दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 523 नए मामले आए जबकि संक्रमण के कारण 50 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक संक्रमण दर (कुल जांचे गए नमूनों में संक्रमण पाए जाने का प्रतिशत) 0. 68 प्रतिशत रही। नवीनतम स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक शुक्रवार को हुई मौतों के साथ दिल्ली में महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 24,497 हो गई है।
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Delhi Coronavirus: आज स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले कोविड वार्ड में कार्यरत दीप चंद के परिवार को एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। वे खुद उनके परिवार से मिलकर उनका हाल चाल जाना। Delhi Coronavirus दिल्ली में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में कई लोगों की जान चली गई। जिसमें कई कोरोना योद्धा ने भी लोगों की जान बचाते-बचाते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जिसके बाद दिल्ली सरकार कोरोना काल में ड्यूटी पर जान गंवाने वाले योद्धाओं के परिजनों को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देती है। इस क्रम में आज स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले कोविड वार्ड में कार्यरत दीप चंद के परिवार को एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। वे खुद उनके परिवार से मिलकर उनका हाल चाल जाना। श्री दीप चंद जी कोविड वार्ड में कार्यरत थे। महज अड़तालीस साल की उम्र में कोरोना से उनका निधन हो गया। आज परिवार से मिला और दिल्ली सरकार की तरफ से एक रुपया करोड़ की सम्मान राशि प्रदान की। इस कठिन समय में दिल्ली सरकार परिवार के साथ खड़ी है। आपको बता दें कि दिल्ली में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के पाँच सौ तेईस नए मामले आए जबकि संक्रमण के कारण पचास लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक संक्रमण दर शून्य. अड़सठ प्रतिशत रही। नवीनतम स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक शुक्रवार को हुई मौतों के साथ दिल्ली में महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर चौबीस,चार सौ सत्तानवे हो गई है।
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Faridabad/ Alive News : जब सत्ता गलत हाथों में चली जाती है तो जनता को दुखी होना ही पडता है। भाजपा नेताओं की अनुभवहीनता और जनविरोधी नीतियों के चलते हरियाणा में जन जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने उक्त विचार गांव हरफली में सरपंच निरंजन सिंह द्वारा अपने दादा चौ. भगवान शाह की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए।
उन्होंने कहा भाजपा सरकार के मंत्री कहते कुछ और करते कुछ और हैं, सरकार अनुभवहीन लोग चला रहे हैं। इसलिए जनता को बिजली, पानी, सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड रहा है। उन्होने कहा प्रदेश की जनता भाजपा के जुमलों और खोखली बातों से दुुखी होकर कांग्रेस के सुशासन को याद कर रही है। समारोह के आयोजक सरपंच निरंजन सिंह और उनके परिवार ने डॉ. अशोक तंवर का भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर डॉ. तंवर का जिला कांग्रेसीे नेताओं ने भी स्वागत किया। समारोह में पूर्व विधायक आनंद कौशिक, किसान नेता सत्यवीर डागर, राजेन्द्र शर्मा, बलजीत कौशिक, राकेश भडाना, अनीषपाल, चौ. घीसाराम, सुरेन्द्र सरपंच, जाजरू से रोहताश चौहान, प्रकाश बौद्ध, रामचंद्र, रामशरण, शेर मौहम्मद, नानक सिंह, हुकमचंद नम्बरदार, एडवोकेट राजेश अहलावत सहित सैकडों लोग मौजूद थे।
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Faridabad/ Alive News : जब सत्ता गलत हाथों में चली जाती है तो जनता को दुखी होना ही पडता है। भाजपा नेताओं की अनुभवहीनता और जनविरोधी नीतियों के चलते हरियाणा में जन जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने उक्त विचार गांव हरफली में सरपंच निरंजन सिंह द्वारा अपने दादा चौ. भगवान शाह की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा भाजपा सरकार के मंत्री कहते कुछ और करते कुछ और हैं, सरकार अनुभवहीन लोग चला रहे हैं। इसलिए जनता को बिजली, पानी, सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड रहा है। उन्होने कहा प्रदेश की जनता भाजपा के जुमलों और खोखली बातों से दुुखी होकर कांग्रेस के सुशासन को याद कर रही है। समारोह के आयोजक सरपंच निरंजन सिंह और उनके परिवार ने डॉ. अशोक तंवर का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. तंवर का जिला कांग्रेसीे नेताओं ने भी स्वागत किया। समारोह में पूर्व विधायक आनंद कौशिक, किसान नेता सत्यवीर डागर, राजेन्द्र शर्मा, बलजीत कौशिक, राकेश भडाना, अनीषपाल, चौ. घीसाराम, सुरेन्द्र सरपंच, जाजरू से रोहताश चौहान, प्रकाश बौद्ध, रामचंद्र, रामशरण, शेर मौहम्मद, नानक सिंह, हुकमचंद नम्बरदार, एडवोकेट राजेश अहलावत सहित सैकडों लोग मौजूद थे।
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कोलकाकात। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रदेश प्रमुख सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया पर कथित बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने की चूक के लिए शुक्रवार को माफी मांगी ली। मजूमदार ने साफ किया कि उनके ट्विटर अकाउंट को संभालने वाली टीम से यह गलती हुई थी और जैसे ही यह उनके संज्ञान में आया, उन्होंने फौरन सुनिश्चित किया कि ट्वीट डिलीट किया जाए।
दक्षिण दिनाजपुर जिले के बारोमाश इलाके में बृहस्पतिवार की रात को एक आदिवासी महिला का शव मिला था। मजूमदार ने सरकार पर हमला करते हुए शव का फोटो ट्वीट किया था और उसकी पहचान जाहिर कर दी थी तथा कहा था कि उसकी बलात्कार के बाद हत्या की गई है।
उनके ट्विटर अकाउंट पर इस बार महिला की धुंधली तस्वीर पोस्ट की गई है। प्रदेश भाजपा प्रमुख की उनकी असंवेदनशीलता को लेकर आलोचना करते हुए,तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु शेखर रे ने कहा, सुकांत मजूमदार ने जो किया है वह निंदनीय है। जांच चल रही है और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने पहचान जाहिर की है।
यह दिखाता है कि भाजपा नेता कितने लापरवाह हैं। मजूमदार ने दिन के दौरान राज्य की महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की।
उन्होंनेबीरभूम के तारापीठ मंदिर में दर्शन के बाद कहा, "राज्य भर में जिस तरह से बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे साबित होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकी है।
जिस राज्य में एक महिला मुख्यमंत्री हैं, वहां हमारी मां-बहनें सुरक्षित नहीं हैं तो यह यह शर्मनाक है। " शाम को उन्होंने दक्षिण दिनाजपुर जिले में आदिवासी महिला के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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कोलकाकात। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रदेश प्रमुख सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया पर कथित बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने की चूक के लिए शुक्रवार को माफी मांगी ली। मजूमदार ने साफ किया कि उनके ट्विटर अकाउंट को संभालने वाली टीम से यह गलती हुई थी और जैसे ही यह उनके संज्ञान में आया, उन्होंने फौरन सुनिश्चित किया कि ट्वीट डिलीट किया जाए। दक्षिण दिनाजपुर जिले के बारोमाश इलाके में बृहस्पतिवार की रात को एक आदिवासी महिला का शव मिला था। मजूमदार ने सरकार पर हमला करते हुए शव का फोटो ट्वीट किया था और उसकी पहचान जाहिर कर दी थी तथा कहा था कि उसकी बलात्कार के बाद हत्या की गई है। उनके ट्विटर अकाउंट पर इस बार महिला की धुंधली तस्वीर पोस्ट की गई है। प्रदेश भाजपा प्रमुख की उनकी असंवेदनशीलता को लेकर आलोचना करते हुए,तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु शेखर रे ने कहा, सुकांत मजूमदार ने जो किया है वह निंदनीय है। जांच चल रही है और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने पहचान जाहिर की है। यह दिखाता है कि भाजपा नेता कितने लापरवाह हैं। मजूमदार ने दिन के दौरान राज्य की महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की। उन्होंनेबीरभूम के तारापीठ मंदिर में दर्शन के बाद कहा, "राज्य भर में जिस तरह से बलात्कार और अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे साबित होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकी है। जिस राज्य में एक महिला मुख्यमंत्री हैं, वहां हमारी मां-बहनें सुरक्षित नहीं हैं तो यह यह शर्मनाक है। " शाम को उन्होंने दक्षिण दिनाजपुर जिले में आदिवासी महिला के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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फेस्टिवल के समय में अगर आप कुछ खास तरह की रेसिपी अपने घर पर ट्राई करना चाहती हैं तो नीचे दिए गए टिप्स को यूज कर सकती हैं.
डौलर कबाब वेज कबाब की ही तरह से होता है. इस को काले चने की जगह पर सफेद चने से तैयार किया जाता है.
सामग्री :
1/2 कप सफेद चना, 2 चम्मच चने की दाल भीगी हुई. पानी में भीगी हुई 2 ब्रैड स्लाइस, 1/2 कप मैदा, 1 इंच दालचीनी, 3-4 लौंग, 2 लहसुन बारीक कटे हुए, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, नमक स्वादानुसार, 1 छोटा चम्मच काली मिर्च, तेल जरूरत के अनुसार, 1/4 कप दूध.
विधि :
सब से पहले चने की दाल, चना, लौंग, काली मिर्च, अदरक, दालचीनी, लहसुन और 2 कप पानी डाल कर उबालें. जब यह ठंडा हो जाए तो इसे मिक्सी में पीस लें. इस के साथ ही ब्रैड भी पीस लें. एक कटोरे में 2 चम्मच दूध और उस में मैदा मिला कर गाढ़ा घोल तैयार कर लें. इस के बाद कबाब के मिश्रण से टिक्कियां बना लें. टिक्कियां सीधी न बना कर डिजाइनदार बनाएं. अब इन में दूध और मैदे के मिश्रण को हलका सा लगाएं और इन को तवे पर सेंकें. दोनों साइड ब्राउन होने तक हलका फ्राई करें. प्लेट में पुदीने की पत्तियां, हरी मिर्च, कटी प्याज, हरा धनिया और कटे टमाटर के साथ सजा कर सर्व करें.
सामग्री :
2-3 बेसन के लड्डू, 5-6 मोतीचूर के लड्डू, 1 बड़ा चम्मच बारीक पिसे मेवे, आवश्यकतानुसार देसी घी.
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फेस्टिवल के समय में अगर आप कुछ खास तरह की रेसिपी अपने घर पर ट्राई करना चाहती हैं तो नीचे दिए गए टिप्स को यूज कर सकती हैं. डौलर कबाब वेज कबाब की ही तरह से होता है. इस को काले चने की जगह पर सफेद चने से तैयार किया जाता है. सामग्री : एक/दो कप सफेद चना, दो चम्मच चने की दाल भीगी हुई. पानी में भीगी हुई दो ब्रैड स्लाइस, एक/दो कप मैदा, एक इंच दालचीनी, तीन-चार लौंग, दो लहसुन बारीक कटे हुए, एक छोटा टुकड़ा अदरक, नमक स्वादानुसार, एक छोटा चम्मच काली मिर्च, तेल जरूरत के अनुसार, एक/चार कप दूध. विधि : सब से पहले चने की दाल, चना, लौंग, काली मिर्च, अदरक, दालचीनी, लहसुन और दो कप पानी डाल कर उबालें. जब यह ठंडा हो जाए तो इसे मिक्सी में पीस लें. इस के साथ ही ब्रैड भी पीस लें. एक कटोरे में दो चम्मच दूध और उस में मैदा मिला कर गाढ़ा घोल तैयार कर लें. इस के बाद कबाब के मिश्रण से टिक्कियां बना लें. टिक्कियां सीधी न बना कर डिजाइनदार बनाएं. अब इन में दूध और मैदे के मिश्रण को हलका सा लगाएं और इन को तवे पर सेंकें. दोनों साइड ब्राउन होने तक हलका फ्राई करें. प्लेट में पुदीने की पत्तियां, हरी मिर्च, कटी प्याज, हरा धनिया और कटे टमाटर के साथ सजा कर सर्व करें. सामग्री : दो-तीन बेसन के लड्डू, पाँच-छः मोतीचूर के लड्डू, एक बड़ा चम्मच बारीक पिसे मेवे, आवश्यकतानुसार देसी घी.
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महारल - ग्राम पंचायत बड़ाग्राम के गांव पुनाड़ी में चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। मंगलवार रात के समय चोरों ने घर से एक ट्रंक चुरा लिया। उसमें रखी सोने की अंगूठी, दो चांदी के छोटे कंगन व दो हजार की राशि को निकालकर चोर ट्रंक को घर से कुछ दूरी पर फेंक गए। इसकी शिकायत पुलिस चौकी दियोटसिद्ध में की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बड़ाग्राम के गांव पुनाड़ी में मंगलवार रात चोरों ने दो घरों के ताले तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। ग्राम पंचायत जमली के निवासी अमर सिंह के घर रात को चोरों ने घर के ताले तोड़कर कुछ नकदी व गहनों पर हाथ साफ किया है। मंगलवार रात परिवार के सदस्य ऊपरी मंजिल में सोए हुए थे तथा अमर सिंह की बहू निचली मंजिल में सो रही थी, जिस कमरे में बहू सो रही थी उसके साथ वाले कमरे के ताले चोरों ने तोड़कर कमरे के अंदर रखे ट्रंक आदि को उठाकर ले गए। चोरों ने करीब 50 मीटर दूर ट्रंक को तोड़ा और उसमें से एक सोने की अंगूठी, चांदी के छोटे कंगन व दो हजार की राशि निकाल कर ट्रंक को वहीं छोड़कर भाग गए। वहीं, पुनाड़ी गांव के निवासी कर्म सिंह के घर के ताले भी पिछली रात को ही शातिरों ने तोड़े हैं। गनीमत रही कि कर्म सिंह के घर पर कोई नहीं रहता है और कपड़ों के सिवाय मकान के अंदर कुछ नहीं रखा हुआ था। इससे चोरों के हाथ कुछ नहीं लग पाया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इससे पहले भी 12 जून, 2016 को रविवार की रात कर्म सिंह के घर चोरी की घटना पेश आ चुकी है। इसमें लगभग 90 हजार के गहनों पर शातिरों ने हाथ साफ किया था। एक ही रात में हुई इन दोनों चोरी की वारदातों की खबर मिलते ही दियोटसिद्ध प्रभारी डीके शर्मा के नेतृत्व में पुलिस कर्मियों ने घटना स्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि शिकायत पर मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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महारल - ग्राम पंचायत बड़ाग्राम के गांव पुनाड़ी में चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। मंगलवार रात के समय चोरों ने घर से एक ट्रंक चुरा लिया। उसमें रखी सोने की अंगूठी, दो चांदी के छोटे कंगन व दो हजार की राशि को निकालकर चोर ट्रंक को घर से कुछ दूरी पर फेंक गए। इसकी शिकायत पुलिस चौकी दियोटसिद्ध में की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बड़ाग्राम के गांव पुनाड़ी में मंगलवार रात चोरों ने दो घरों के ताले तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। ग्राम पंचायत जमली के निवासी अमर सिंह के घर रात को चोरों ने घर के ताले तोड़कर कुछ नकदी व गहनों पर हाथ साफ किया है। मंगलवार रात परिवार के सदस्य ऊपरी मंजिल में सोए हुए थे तथा अमर सिंह की बहू निचली मंजिल में सो रही थी, जिस कमरे में बहू सो रही थी उसके साथ वाले कमरे के ताले चोरों ने तोड़कर कमरे के अंदर रखे ट्रंक आदि को उठाकर ले गए। चोरों ने करीब पचास मीटर दूर ट्रंक को तोड़ा और उसमें से एक सोने की अंगूठी, चांदी के छोटे कंगन व दो हजार की राशि निकाल कर ट्रंक को वहीं छोड़कर भाग गए। वहीं, पुनाड़ी गांव के निवासी कर्म सिंह के घर के ताले भी पिछली रात को ही शातिरों ने तोड़े हैं। गनीमत रही कि कर्म सिंह के घर पर कोई नहीं रहता है और कपड़ों के सिवाय मकान के अंदर कुछ नहीं रखा हुआ था। इससे चोरों के हाथ कुछ नहीं लग पाया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इससे पहले भी बारह जून, दो हज़ार सोलह को रविवार की रात कर्म सिंह के घर चोरी की घटना पेश आ चुकी है। इसमें लगभग नब्बे हजार के गहनों पर शातिरों ने हाथ साफ किया था। एक ही रात में हुई इन दोनों चोरी की वारदातों की खबर मिलते ही दियोटसिद्ध प्रभारी डीके शर्मा के नेतृत्व में पुलिस कर्मियों ने घटना स्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि शिकायत पर मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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रूसी के युद्ध सामग्रियों के लिए पानी और प्रवेश में उतरनानए जहाज के बेड़े हमेशा एक घटना होती है। अधिक से अधिक विस्थापन, विविध हथियार प्रणालियों और प्रभावशाली समुद्री यात्रा योग्यता, उज्जवल प्रकाश डाला समारोह मीडिया। 2014 में, नौसेना दिवस का उत्सव दो नए इकाइयों के रक्षा विभाग के आत्मसमर्पण के लिए समय पर आया था जो कि कैस्पियन फ्लाइटला को मजबूत करता है। परियोजना 21,631 "Buyan-एम", के छोटे मिसाइल जहाज, प्राचीन रूसी शहरों "Uglich में" और "ग्रैड Sviyazhsk", पहली नजर में के नाम की उपाधि मिली, परमाणु जहाज़ और मिसाइल पनडुब्बियों के रूप में ऐसी श्रद्धा को प्रेरित नहीं करती। लेकिन रूस की रक्षा क्षमता में उनकी भूमिका की अभी तक सराहना की जानी है।
परियोजना "खरीन-एम" मूल रूप से एक प्रकार के रूप में कल्पना की गई थीजहाज महासागरीय विस्तार के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन बंद समुद्र में संचालन के लिए। यह आज खुला स्रोतों से जाना जाता है, लेकिन यह जहाज के विशेषज्ञ के लिए स्पष्ट है कि 950 टन के काफी कम पक्षों के साथ विस्थापन और एक छोटे से मसौदा पानी में तैरने का मतलब पांच अंकों से अधिक की उत्तेजना के साथ तैरता नहीं है। रूसी संघ के तटों को धोने वाले बंद समुद्र, केवल तीनः कैस्पियन, काले और आज़ोव। पिछले दो जल निकायों, जिस तरह से, ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू में एक अपेक्षाकृत छोटे हित का प्रतिनिधित्व किया। यूक्रेन में प्रसिद्ध घटनाओं की शुरुआत के बाद, हाल ही में, काला सागर बेसिन में नाटो देशों के बेड़े की गतिविधि में वृद्धि देखी गई है।
कैस्पियन सागर के लिए, फूस के लिए,क्षेत्र में समुद्री स्थिति की स्थिरता के लिए जिम्मेदार, निश्चित रूप से अद्यतन और मजबूत करने की आवश्यकता है। यह इस परिचालन क्षेत्र के लिए था कि परियोजना 21631 "शिपैन-एम" के जहाजों का उद्देश्य था। इसी समय, पूरी तरह तटीय राज्यों को संभावित दुश्मन नहीं माना जाता था। कजाखस्तान गणराज्य रूस का रणनीतिक साझीदार है और एक अनुकूल विदेश नीति का आयोजन करता है। फिलहाल, अज़रबैजान (भी शत्रुतापूर्ण नहीं) वास्तव में कोई नौसैनिक क्षमताओं नहीं है। तुर्कमेनिस्तान रूसी संघ में उपकरण खरीदता है और स्वतंत्र विदेशी नीति रेखा का पीछा करते हुए रक्षा क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार और आर्थिक संबंधों और सहयोग में दिलचस्पी लेता है। इन देशों, जो सोवियत संघ के ऐतिहासिक रूप से हाल के पूर्व गणराज्यों में थे, हमारी सीमाओं के लिए सुरक्षा खतरों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। केवल ईरान ही रहता है। यह इस्लामी राज्य आर्थिक अलगाव में है, और महान उत्तरी पड़ोसी के खिलाफ आक्रामक प्रयासों पर संदेह करना मुश्किल है। जैसा कि वे कहते हैं, उनकी परवाह पर्याप्त हैं।
यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कोई नहीं हैकैस्पियन क्षेत्र में रूस के लिए क्षेत्रीय खतरे तो हमें परियोजना 21631 के छोटे रॉकेट जहाज की आवश्यकता क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, अपने हथियार प्रणालियों की विशेषताओं, समुद्री डाटा और डिजाइन की विशेषताओं का अध्ययन करना आवश्यक है।
एक परियोजना बनाया गया था और एक जहाज तातारस्तान में बनाया गया था उन्हें संयंत्र दें एएम गॉर्की ज़ेलनोडोलस्क के गौरवशाली वोल्गा शहर में है। पहले से ही अपने आप में, यह तथ्य मात्रा बोलती है। पोत के पतले उसे न केवल समुद्र के किनारे पर चलने की अनुमति देता है, बल्कि नदियों की नीली धमनियों के साथ आसानी से यात्रा करता है, पूरे देश को उत्तर से दक्षिण तक और पश्चिम से लेकर पूर्व तक पहुंच जाता है। सैद्धांतिक रूप से नदी के फ्लाटिलाओं की रक्षा के लिए मूल्य, उन्हें महान देशभक्ति युद्ध के दौरान लड़ने का मौका था, लेकिन तब से सैन्य सिद्धांत में गंभीर बदलाव आया है। आरटीडी प्रोजेक्ट 21631 "बाययन-एम" एक मॉनिटर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त नहीं है (वास्तव में एक अस्थायी तोपखाना बैटरी, पैदल सेना का समर्थन करने के लिए डिजाइन किए गए जहाजों का एक वर्ग) इस बारे में, और काफी विनम्र तोप शस्त्रागारः सिर्फ दो सौ मिलीमीटर बंदूकें इसके अलावा, द्वीपों के बीच नदी के किनारों के कार्यों के लिए, गोपनीयता को बनाए रखने के लिए इस तरह के गंभीर उपाय आवश्यक नहीं हैं, और गति बहुत बड़ी है (25 समुद्री मील)। और मुख्य रूप से समुद्री चरित्र के पक्ष में, मिसाइल हथियारों की संरचना वाकई बोलती है। परियोजना 21631 के खरीदें-एम जहाजों के नदी नेविगेशन की क्षमता इन मुकाबला इकाइयों के हस्तांतरण के लिए सैन्य संभावनाओं के लगभग किसी भी थिएटर की संभावना के लिए व्यापक संभावनाएं रखती है। आवश्यकता के मामले में, बिल्कुल।
मुकाबला उपयोग की त्रिज्या अपेक्षाकृत छोटी है। स्वायत्तता दस दिन है। छोटे मिसाइल जहाज परियोजना 21,631 ऑफ़लाइन दो से अधिक नहीं और एक आधा हजार मील की दूरी पर पाल नहीं सकते हैं। पहले ही उल्लेख किया 100 मिमी "यूनिवर्सल" उपकरण (A-190m) इसके अलावा, पर बोर्ड स्थापना तोपखाने बनती प्रतिनिधित्व "डुओ" पीछे, दो स्तंभ पुस्तक टिकी हुई है MTPU मशीनगन क्षमता 14.5 मिमी और तीन तेजी से 7.62mm चड्डी द्वारा।
शिप-जनशित वायु रक्षा के साधन दो प्रतिष्ठान हैं"झुकाव", आधार पर - जमीन बलों और प्रभावी विरोधी विमान मिसाइल प्रणाली "इग्ला" में व्यापक है। बड़े पैमाने पर हवाई हमले को दूर करने के लिए, यह हथियार पर्याप्त नहीं हो सकता है, यह हमला विमान और हमले के हेलीकाप्टरों से निपटने के लिए बनाया गया है। मुख्य शर्त अन्य तकनीकों पर बनाई गई है, जो कि हवाई हमले से बचने की अनुमति देती है, लेकिन बाद में इस बारे में ज्यादा जानकारी देती है।
प्रोजेक्ट एमएमआर 21631 "बैदान-एम" को आयोजित करने के लिए बनाया गया थाएक संभावित दुश्मन के जहाजों और तटीय कुर्सियां पर मिसाइल आग। इस प्रयोजन के लिए, इसकी मुख्य हथियार, जो कुल मिलाकर यूकेएससी (यूनिवर्सल शिप बर्न फायरिंग कॉम्प्लेक्स) है, इसका उद्देश्य है। और सुपरसोनिक ( "गोमेद" 3M55) - आवास आठ शाफ्ट, जिनमें से सबसोनिक के रूप में खड़ी मिसाइल प्रक्षेपण (3M14, विरोधी 91RT विरोधी 3M54, एक वर्ग "भूमि की सतह") हो सकता है सकते हैं। इस प्रकार, एक बहुत ही मामूली पैमाने और छोटे चालक दल (के बारे में 35 लोगों), छोटी मिसाइल क्रूजर पर "Buyan-एम" परियोजना 21,631 समुद्री प्रयोजनों बहुत अधिक टन भार के लिए बहुत खतरनाक विरोधियों हो सकता है।
जटिल "कैलिबर", एक मंच जिसके लिए कर सकते हैंपरियोजना 21,631 के एक रॉकेट जहाजों हो जाते हैं, यह मुकाबला रोजगार की दूरी के साथ क्रूज मिसाइल, 2600 किमी के बराबर के साथ सुसज्जित है। देखने का भौगोलिक दृष्टि से, इसका मतलब है कि "गोमेद" कैस्पियन और काला सागरों के जल में स्थित अंक से शुरू की, सैद्धांतिक रूप से खाड़ी के भीतर लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं, लाल सागर और भूमध्य सागर, और अन्य Metachem कहा की यूरेशियाई नक्शा परिधि में उल्लिखित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्वेज नहर सहित त्रिज्या,।
परंपरागत रूप से, कोर्वेट्स, जो की कक्षा मेंप्रोजेक्ट 21631 (कोड "खरीन-एम"), एक रणनीतिक लिंक के लड़ाकू इकाइयों माना जाता है। "सिविया सिटी" और "यूग्लिच" के शस्त्रागारों के लक्षण, वर्तमान में कैस्पियन फ्लोटिला के साथ सेवा में, उनकी रणनीतिक प्रकृति पर ध्यान नहीं देते हैं।
एक आधुनिक छोटे रॉकेट जहाज की रूपरेखा मेंइसकी उच्च गति, पानी जेट और अपेक्षाकृत छोटे आयाम (74 मीटर) के साथ मिलकर, यह उम्मीद करने के लिए आधार प्रदान करता है कि विभिन्न जहाजों से संतृप्त पानी में इसे खोजने में आसान नहीं होगा। रडार स्क्रीन पर, मछली पकड़ने वाली शिविर या यहां तक कि एक बड़ी नौका से खरीदना-एम प्रोजेक्ट 21631 को अलग करना मुश्किल है। इसके अलावा, वह, रूस में बनाए गए सभी युद्धपोतों की तरह, संभावित प्रतिद्वंद्वियों के विनाश के लिए संचार प्रणालियों और रडार सिस्टम को अक्षम करने में सक्षम इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशरों से सुसज्जित है। उच्च आवृत्ति विकिरण कोटिंग्स और झुका हुआ सिल्हूट विमानों को अवशोषित करने से इस तेज और गतिशील जहाज को शक्तिशाली मिसाइल हथियारों के साथ खोजने की संभावना कम हो जाती है।
निर्माण की प्रक्रिया में या चल रहे परीक्षण अबपाँच जहाजों "Buyan-एम" परियोजना 21631. इस "महान Ustyug" है "Vishny Volochek," "सेरपुखोव", "अखरोट-Zuevo" और "ग्रीन Dol" रह। मूल रूप से वे कैस्पियन सागर में सेवा के लिए लक्षित कर रहे थे, लेकिन यह तेजी से काला सागर बेसिन के क्षेत्र में भू-राजनीतिक चित्र के अंतिम वर्ष में बदल दिया गया है इन इरादों की समीक्षा करने के रूसी नौसेना की कमान प्रेरित किया। "सेरपुखोव" और "ग्रीन Dol" सेवस्तोपोल करने के लिए भेजा जाएगा। काला सागर बेड़े नौसेना बलों इकाइयों के नवीनतम पुनःपूर्ति, तथाकथित "नाटो की खदान व्यापक समूह" एक काफी बल का गठन करने का विरोध करने के लिए सक्षम की जरूरत है। बेशक, सैन्य संघर्ष के मामले में क्रीमिया असुरक्षित नहीं रहेगा, और उसके कवर की वर्तमान स्थिति की सुविधा 'बॉल' और 'Bastion ", बोस्फोरस स्ट्रेट अप करने के लिए पूरे क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए सक्षम प्रदान करेगा, लेकिन दुनिया की विश्वसनीय आपूर्ति के लिए आवश्यक सैन्य इकाइयों की निरंतर उपस्थिति और उनकी क्षमताओं का प्रदर्शन। मुख्य बोझ इस कार्य फ्रिगेट "एडमिरल Grigorovich," "एडमिरल एस्सेन" और आर सी "मास्को पर गिर जाएगी", लेकिन यह भी "Buyan" पर्याप्त काम करते हैं।
नौसेनाओं और समुद्री युद्धों के इतिहास से विचारशीलनीतियाँ कोई सार्वभौमिक हथियार Godea सभी अवसरों के लिए देखते हैं कि निष्कर्ष निकाला जा सकता और संघर्ष के सभी स्थितियों के तहत सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए सक्षम है। कुछ स्थितियों में, हम शक्तिशाली जहाज़ और युद्धपोतों बड़े, तीसरा सबसे कारगर साधन में विमान वाहक यौगिकों के बिना अन्य ऐसा नहीं में की जरूरत है केवल एक पनडुब्बी हो सकता है। मोबाइल मिसाइल जहाजों के हमारे अशांत युग में "Buyan-एम" परियोजना 21,631 भी, नौसेना खेमे में अपनी जगह है इसके तट के पास के क्षेत्र में रूस के हितों की रक्षा, लेकिन लंबी अवधि के दृश्य के साथ।
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रूसी के युद्ध सामग्रियों के लिए पानी और प्रवेश में उतरनानए जहाज के बेड़े हमेशा एक घटना होती है। अधिक से अधिक विस्थापन, विविध हथियार प्रणालियों और प्रभावशाली समुद्री यात्रा योग्यता, उज्जवल प्रकाश डाला समारोह मीडिया। दो हज़ार चौदह में, नौसेना दिवस का उत्सव दो नए इकाइयों के रक्षा विभाग के आत्मसमर्पण के लिए समय पर आया था जो कि कैस्पियन फ्लाइटला को मजबूत करता है। परियोजना इक्कीस,छः सौ इकतीस "Buyan-एम", के छोटे मिसाइल जहाज, प्राचीन रूसी शहरों "Uglich में" और "ग्रैड Sviyazhsk", पहली नजर में के नाम की उपाधि मिली, परमाणु जहाज़ और मिसाइल पनडुब्बियों के रूप में ऐसी श्रद्धा को प्रेरित नहीं करती। लेकिन रूस की रक्षा क्षमता में उनकी भूमिका की अभी तक सराहना की जानी है। परियोजना "खरीन-एम" मूल रूप से एक प्रकार के रूप में कल्पना की गई थीजहाज महासागरीय विस्तार के लिए नहीं बनाया गया है, लेकिन बंद समुद्र में संचालन के लिए। यह आज खुला स्रोतों से जाना जाता है, लेकिन यह जहाज के विशेषज्ञ के लिए स्पष्ट है कि नौ सौ पचास टन के काफी कम पक्षों के साथ विस्थापन और एक छोटे से मसौदा पानी में तैरने का मतलब पांच अंकों से अधिक की उत्तेजना के साथ तैरता नहीं है। रूसी संघ के तटों को धोने वाले बंद समुद्र, केवल तीनः कैस्पियन, काले और आज़ोव। पिछले दो जल निकायों, जिस तरह से, ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू में एक अपेक्षाकृत छोटे हित का प्रतिनिधित्व किया। यूक्रेन में प्रसिद्ध घटनाओं की शुरुआत के बाद, हाल ही में, काला सागर बेसिन में नाटो देशों के बेड़े की गतिविधि में वृद्धि देखी गई है। कैस्पियन सागर के लिए, फूस के लिए,क्षेत्र में समुद्री स्थिति की स्थिरता के लिए जिम्मेदार, निश्चित रूप से अद्यतन और मजबूत करने की आवश्यकता है। यह इस परिचालन क्षेत्र के लिए था कि परियोजना इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस "शिपैन-एम" के जहाजों का उद्देश्य था। इसी समय, पूरी तरह तटीय राज्यों को संभावित दुश्मन नहीं माना जाता था। कजाखस्तान गणराज्य रूस का रणनीतिक साझीदार है और एक अनुकूल विदेश नीति का आयोजन करता है। फिलहाल, अज़रबैजान वास्तव में कोई नौसैनिक क्षमताओं नहीं है। तुर्कमेनिस्तान रूसी संघ में उपकरण खरीदता है और स्वतंत्र विदेशी नीति रेखा का पीछा करते हुए रक्षा क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार और आर्थिक संबंधों और सहयोग में दिलचस्पी लेता है। इन देशों, जो सोवियत संघ के ऐतिहासिक रूप से हाल के पूर्व गणराज्यों में थे, हमारी सीमाओं के लिए सुरक्षा खतरों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। केवल ईरान ही रहता है। यह इस्लामी राज्य आर्थिक अलगाव में है, और महान उत्तरी पड़ोसी के खिलाफ आक्रामक प्रयासों पर संदेह करना मुश्किल है। जैसा कि वे कहते हैं, उनकी परवाह पर्याप्त हैं। यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कोई नहीं हैकैस्पियन क्षेत्र में रूस के लिए क्षेत्रीय खतरे तो हमें परियोजना इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस के छोटे रॉकेट जहाज की आवश्यकता क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, अपने हथियार प्रणालियों की विशेषताओं, समुद्री डाटा और डिजाइन की विशेषताओं का अध्ययन करना आवश्यक है। एक परियोजना बनाया गया था और एक जहाज तातारस्तान में बनाया गया था उन्हें संयंत्र दें एएम गॉर्की ज़ेलनोडोलस्क के गौरवशाली वोल्गा शहर में है। पहले से ही अपने आप में, यह तथ्य मात्रा बोलती है। पोत के पतले उसे न केवल समुद्र के किनारे पर चलने की अनुमति देता है, बल्कि नदियों की नीली धमनियों के साथ आसानी से यात्रा करता है, पूरे देश को उत्तर से दक्षिण तक और पश्चिम से लेकर पूर्व तक पहुंच जाता है। सैद्धांतिक रूप से नदी के फ्लाटिलाओं की रक्षा के लिए मूल्य, उन्हें महान देशभक्ति युद्ध के दौरान लड़ने का मौका था, लेकिन तब से सैन्य सिद्धांत में गंभीर बदलाव आया है। आरटीडी प्रोजेक्ट इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस "बाययन-एम" एक मॉनिटर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त नहीं है इस बारे में, और काफी विनम्र तोप शस्त्रागारः सिर्फ दो सौ मिलीमीटर बंदूकें इसके अलावा, द्वीपों के बीच नदी के किनारों के कार्यों के लिए, गोपनीयता को बनाए रखने के लिए इस तरह के गंभीर उपाय आवश्यक नहीं हैं, और गति बहुत बड़ी है । और मुख्य रूप से समुद्री चरित्र के पक्ष में, मिसाइल हथियारों की संरचना वाकई बोलती है। परियोजना इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस के खरीदें-एम जहाजों के नदी नेविगेशन की क्षमता इन मुकाबला इकाइयों के हस्तांतरण के लिए सैन्य संभावनाओं के लगभग किसी भी थिएटर की संभावना के लिए व्यापक संभावनाएं रखती है। आवश्यकता के मामले में, बिल्कुल। मुकाबला उपयोग की त्रिज्या अपेक्षाकृत छोटी है। स्वायत्तता दस दिन है। छोटे मिसाइल जहाज परियोजना इक्कीस,छः सौ इकतीस ऑफ़लाइन दो से अधिक नहीं और एक आधा हजार मील की दूरी पर पाल नहीं सकते हैं। पहले ही उल्लेख किया एक सौ मिमी "यूनिवर्सल" उपकरण इसके अलावा, पर बोर्ड स्थापना तोपखाने बनती प्रतिनिधित्व "डुओ" पीछे, दो स्तंभ पुस्तक टिकी हुई है MTPU मशीनगन क्षमता चौदह.पाँच मिमी और तीन तेजी से सात दशमलव बासठ मिलीमीटर चड्डी द्वारा। शिप-जनशित वायु रक्षा के साधन दो प्रतिष्ठान हैं"झुकाव", आधार पर - जमीन बलों और प्रभावी विरोधी विमान मिसाइल प्रणाली "इग्ला" में व्यापक है। बड़े पैमाने पर हवाई हमले को दूर करने के लिए, यह हथियार पर्याप्त नहीं हो सकता है, यह हमला विमान और हमले के हेलीकाप्टरों से निपटने के लिए बनाया गया है। मुख्य शर्त अन्य तकनीकों पर बनाई गई है, जो कि हवाई हमले से बचने की अनुमति देती है, लेकिन बाद में इस बारे में ज्यादा जानकारी देती है। प्रोजेक्ट एमएमआर इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस "बैदान-एम" को आयोजित करने के लिए बनाया गया थाएक संभावित दुश्मन के जहाजों और तटीय कुर्सियां पर मिसाइल आग। इस प्रयोजन के लिए, इसकी मुख्य हथियार, जो कुल मिलाकर यूकेएससी है, इसका उद्देश्य है। और सुपरसोनिक - आवास आठ शाफ्ट, जिनमें से सबसोनिक के रूप में खड़ी मिसाइल प्रक्षेपण हो सकता है सकते हैं। इस प्रकार, एक बहुत ही मामूली पैमाने और छोटे चालक दल , छोटी मिसाइल क्रूजर पर "Buyan-एम" परियोजना इक्कीस,छः सौ इकतीस समुद्री प्रयोजनों बहुत अधिक टन भार के लिए बहुत खतरनाक विरोधियों हो सकता है। जटिल "कैलिबर", एक मंच जिसके लिए कर सकते हैंपरियोजना इक्कीस,छः सौ इकतीस के एक रॉकेट जहाजों हो जाते हैं, यह मुकाबला रोजगार की दूरी के साथ क्रूज मिसाइल, दो हज़ार छः सौ किमी के बराबर के साथ सुसज्जित है। देखने का भौगोलिक दृष्टि से, इसका मतलब है कि "गोमेद" कैस्पियन और काला सागरों के जल में स्थित अंक से शुरू की, सैद्धांतिक रूप से खाड़ी के भीतर लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं, लाल सागर और भूमध्य सागर, और अन्य Metachem कहा की यूरेशियाई नक्शा परिधि में उल्लिखित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्वेज नहर सहित त्रिज्या,। परंपरागत रूप से, कोर्वेट्स, जो की कक्षा मेंप्रोजेक्ट इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस , एक रणनीतिक लिंक के लड़ाकू इकाइयों माना जाता है। "सिविया सिटी" और "यूग्लिच" के शस्त्रागारों के लक्षण, वर्तमान में कैस्पियन फ्लोटिला के साथ सेवा में, उनकी रणनीतिक प्रकृति पर ध्यान नहीं देते हैं। एक आधुनिक छोटे रॉकेट जहाज की रूपरेखा मेंइसकी उच्च गति, पानी जेट और अपेक्षाकृत छोटे आयाम के साथ मिलकर, यह उम्मीद करने के लिए आधार प्रदान करता है कि विभिन्न जहाजों से संतृप्त पानी में इसे खोजने में आसान नहीं होगा। रडार स्क्रीन पर, मछली पकड़ने वाली शिविर या यहां तक कि एक बड़ी नौका से खरीदना-एम प्रोजेक्ट इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस को अलग करना मुश्किल है। इसके अलावा, वह, रूस में बनाए गए सभी युद्धपोतों की तरह, संभावित प्रतिद्वंद्वियों के विनाश के लिए संचार प्रणालियों और रडार सिस्टम को अक्षम करने में सक्षम इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशरों से सुसज्जित है। उच्च आवृत्ति विकिरण कोटिंग्स और झुका हुआ सिल्हूट विमानों को अवशोषित करने से इस तेज और गतिशील जहाज को शक्तिशाली मिसाइल हथियारों के साथ खोजने की संभावना कम हो जाती है। निर्माण की प्रक्रिया में या चल रहे परीक्षण अबपाँच जहाजों "Buyan-एम" परियोजना इक्कीस हज़ार छः सौ इकतीस. इस "महान Ustyug" है "Vishny Volochek," "सेरपुखोव", "अखरोट-Zuevo" और "ग्रीन Dol" रह। मूल रूप से वे कैस्पियन सागर में सेवा के लिए लक्षित कर रहे थे, लेकिन यह तेजी से काला सागर बेसिन के क्षेत्र में भू-राजनीतिक चित्र के अंतिम वर्ष में बदल दिया गया है इन इरादों की समीक्षा करने के रूसी नौसेना की कमान प्रेरित किया। "सेरपुखोव" और "ग्रीन Dol" सेवस्तोपोल करने के लिए भेजा जाएगा। काला सागर बेड़े नौसेना बलों इकाइयों के नवीनतम पुनःपूर्ति, तथाकथित "नाटो की खदान व्यापक समूह" एक काफी बल का गठन करने का विरोध करने के लिए सक्षम की जरूरत है। बेशक, सैन्य संघर्ष के मामले में क्रीमिया असुरक्षित नहीं रहेगा, और उसके कवर की वर्तमान स्थिति की सुविधा 'बॉल' और 'Bastion ", बोस्फोरस स्ट्रेट अप करने के लिए पूरे क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए सक्षम प्रदान करेगा, लेकिन दुनिया की विश्वसनीय आपूर्ति के लिए आवश्यक सैन्य इकाइयों की निरंतर उपस्थिति और उनकी क्षमताओं का प्रदर्शन। मुख्य बोझ इस कार्य फ्रिगेट "एडमिरल Grigorovich," "एडमिरल एस्सेन" और आर सी "मास्को पर गिर जाएगी", लेकिन यह भी "Buyan" पर्याप्त काम करते हैं। नौसेनाओं और समुद्री युद्धों के इतिहास से विचारशीलनीतियाँ कोई सार्वभौमिक हथियार Godea सभी अवसरों के लिए देखते हैं कि निष्कर्ष निकाला जा सकता और संघर्ष के सभी स्थितियों के तहत सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए सक्षम है। कुछ स्थितियों में, हम शक्तिशाली जहाज़ और युद्धपोतों बड़े, तीसरा सबसे कारगर साधन में विमान वाहक यौगिकों के बिना अन्य ऐसा नहीं में की जरूरत है केवल एक पनडुब्बी हो सकता है। मोबाइल मिसाइल जहाजों के हमारे अशांत युग में "Buyan-एम" परियोजना इक्कीस,छः सौ इकतीस भी, नौसेना खेमे में अपनी जगह है इसके तट के पास के क्षेत्र में रूस के हितों की रक्षा, लेकिन लंबी अवधि के दृश्य के साथ।
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वैदिक धर्म ।
यज्ञों के रूप ।
[ वर्ष ६
(ले० - श्री० पं० अभय देवशर्माजी वेदाचार्य )
इस यज्ञकी व्याख्या पढ़ने से पूर्व पाठकों को इस प्रतिनिधि सभाये यज्ञ है। राष्ट्रीय सभासमितियां यज्ञ बातसे परिचय प्राप्त कर लेना आवश्यक है कि यह है । मेवा समितियां पवित्र यज्ञ हैं। दलितोद्वार सभा संगठनरूप यज्ञ हमारे सामने किन किन रूपोंमें आता यज्ञ है। सम्मेलन और सभाओंका प्रत्येक अधिवेशन हैं और इस परिचय को पानेके लिये पाठको को यज्ञ है। व्यापार संगठन (जो कि गरीबांका नाश नहीं अपने मनसे यज्ञविषयक अन्य मत्र अशुद्ध संस्कार करता ) यज्ञ है। प्राचीन भारत के एक पेशवालों के निकाल डालने चाहिये । अभतिक 'यज्ञ' शब्द सुनने ये संगठन यज्ञ होते थे। एक गृहस्थ परिवार यज्ञ है। से या तो हमें हवन अग्निहोत्र का ध्यान आता है। तात्पर्य यह कि सब छोटे बड़े संगठन जो कि कल्याण या किन्हीं कथाओं में सुने अज्ञात गांमेध, नरमेध, के लिए किए गए है यज्ञ हैं। इन में हमारी यज्ञभावना होनी अश्वमेध, राजसूय, पुत्रेष्टि आदिका अपना अपना । चाहिये । यदि हम इनमें महत्त्व देखेंगे और इन यज्ञों मनःकल्पित चित्र सामने आजाता है। पर मै जानता का अनुष्ठान करेंगे तभी हम इस योग्य भी होंगे कि हूं कि अब इतने विवेचन के बाद आपके सामने यज्ञ । हमारे शास्त्रों जो अन्य सूक्ष्म यज्ञ प्रतिपादिन हैं शब्द किसी 'मंगठित मनुष्य समुदाय द्वारा किये । उन्हें भी समझ सकें। इस लिए हमें ऐसा अभ्यास जाने हुए शुभ कार्य का ही चित्र आने लगे, अधिक डालना चाहिये कि हम इन उपर्युक्त संगठनों में यज्ञसे अधिक अपने नैयिक पवित्र व्यक्तिक तंत्र्यों को दृष्टेि रखें । येही रूप है जिन रूपों में कि यज्ञ प्रतिभी यज्ञाडग होने के कारण आप यज्ञ कह सकते हैं। दिन हमारे सामने रहता है। इन्हीं यज्ञों का ठीक परन्तु इसके अतिरिक्त और सब यज्ञावश्यक कल्पनायें । तरह करना हमारा पाईला कर्तव्य है। इन्हीं को पूरा अपने मन से निकाल दीजिये । तभी आप यज्ञको करने से हमारा कल्याण हो सकता है। और इन्हें यथार्थरूप में स्नझ सकेंगे । इस प्रकार समाज का विना पूरा किये हम आगे नहीं बढ़ सकते । इसके चातुर्वर्ण्य और आश्रम व्यवस्था का संगठन एक लिए हमें यह पता लग जाना चाहिये कि ये उपर्युक महायज्ञ है । राष्ट्र एक यज्ञ है। स्वराज्य मंगठन । संगठन यज्ञ हैं और येही अवश्य कर्तव्य यज्ञ हैं। ( Governmint ) एक यज्ञ होता है। संग्राम-बुराई यह तो लिखने की आवश्यकता नहीं कि प्रत्येक के नाश के लिये किया गया संग्राम यज्ञ है। वर्त प्रकार का संगठन ( अर्थात् अशुभ के लिये किया गया मान समय में भारत में राष्ट्रीय महासभा (Natioual । मंगठन भी ) यज्ञ नहीं होता। यह बात आगे Chugress ) एक यज्ञ है । आर्य समाज एक उच्च । विस्तार से लिखी जायगी, पर यहां इतना संकेत कर यज्ञ है। गुरुकुल आदि शिक्षा संस्थायें यज्ञ हैं। हमारी देना आवश्यक है कि पर पीडन के लिए, गरीबों को
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वैदिक धर्म । यज्ञों के रूप । [ वर्ष छः इस यज्ञकी व्याख्या पढ़ने से पूर्व पाठकों को इस प्रतिनिधि सभाये यज्ञ है। राष्ट्रीय सभासमितियां यज्ञ बातसे परिचय प्राप्त कर लेना आवश्यक है कि यह है । मेवा समितियां पवित्र यज्ञ हैं। दलितोद्वार सभा संगठनरूप यज्ञ हमारे सामने किन किन रूपोंमें आता यज्ञ है। सम्मेलन और सभाओंका प्रत्येक अधिवेशन हैं और इस परिचय को पानेके लिये पाठको को यज्ञ है। व्यापार संगठन यज्ञ है। प्राचीन भारत के एक पेशवालों के निकाल डालने चाहिये । अभतिक 'यज्ञ' शब्द सुनने ये संगठन यज्ञ होते थे। एक गृहस्थ परिवार यज्ञ है। से या तो हमें हवन अग्निहोत्र का ध्यान आता है। तात्पर्य यह कि सब छोटे बड़े संगठन जो कि कल्याण या किन्हीं कथाओं में सुने अज्ञात गांमेध, नरमेध, के लिए किए गए है यज्ञ हैं। इन में हमारी यज्ञभावना होनी अश्वमेध, राजसूय, पुत्रेष्टि आदिका अपना अपना । चाहिये । यदि हम इनमें महत्त्व देखेंगे और इन यज्ञों मनःकल्पित चित्र सामने आजाता है। पर मै जानता का अनुष्ठान करेंगे तभी हम इस योग्य भी होंगे कि हूं कि अब इतने विवेचन के बाद आपके सामने यज्ञ । हमारे शास्त्रों जो अन्य सूक्ष्म यज्ञ प्रतिपादिन हैं शब्द किसी 'मंगठित मनुष्य समुदाय द्वारा किये । उन्हें भी समझ सकें। इस लिए हमें ऐसा अभ्यास जाने हुए शुभ कार्य का ही चित्र आने लगे, अधिक डालना चाहिये कि हम इन उपर्युक्त संगठनों में यज्ञसे अधिक अपने नैयिक पवित्र व्यक्तिक तंत्र्यों को दृष्टेि रखें । येही रूप है जिन रूपों में कि यज्ञ प्रतिभी यज्ञाडग होने के कारण आप यज्ञ कह सकते हैं। दिन हमारे सामने रहता है। इन्हीं यज्ञों का ठीक परन्तु इसके अतिरिक्त और सब यज्ञावश्यक कल्पनायें । तरह करना हमारा पाईला कर्तव्य है। इन्हीं को पूरा अपने मन से निकाल दीजिये । तभी आप यज्ञको करने से हमारा कल्याण हो सकता है। और इन्हें यथार्थरूप में स्नझ सकेंगे । इस प्रकार समाज का विना पूरा किये हम आगे नहीं बढ़ सकते । इसके चातुर्वर्ण्य और आश्रम व्यवस्था का संगठन एक लिए हमें यह पता लग जाना चाहिये कि ये उपर्युक महायज्ञ है । राष्ट्र एक यज्ञ है। स्वराज्य मंगठन । संगठन यज्ञ हैं और येही अवश्य कर्तव्य यज्ञ हैं। एक यज्ञ होता है। संग्राम-बुराई यह तो लिखने की आवश्यकता नहीं कि प्रत्येक के नाश के लिये किया गया संग्राम यज्ञ है। वर्त प्रकार का संगठन यज्ञ नहीं होता। यह बात आगे Chugress ) एक यज्ञ है । आर्य समाज एक उच्च । विस्तार से लिखी जायगी, पर यहां इतना संकेत कर यज्ञ है। गुरुकुल आदि शिक्षा संस्थायें यज्ञ हैं। हमारी देना आवश्यक है कि पर पीडन के लिए, गरीबों को
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दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) ने लव जिहाद को तमाशा बताया है और कहा है कि जब उनकी मां ने पत्नी रत्ना पाठक (Ratna Pathak Shah) का धर्म परिवर्तन के लिए कहा था तो उन्होंने ये जवाब दिया था।
इन दिनों देश में लव जिहाद का मुद्दा फिर से उफान पर है। हाल ही में मध्य प्रदेश में लव जिहाद विरोधी कानून 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020' बनाया गया और इसके बाद कई और राज्यों में भी 'लव जिहाद' जैसे मामलों को लेकर सवाल उठे। अब बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने देश में हिंदू-मुस्लिम विवादों के मामले बढ़ने को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने जन अभियान, कारवां-ए-मोहब्बत को दिए एक इंटरव्यू में पूरे मामले पर अपनी राय रखी। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अनसुना किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के तमाशे को लेकर जिस तरह लोगों को बांटा जा रहा है। उससे मैं खासा नाराज हूं। जिन लोगों ने ये शब्द गढ़ा है, उन्हें जिहाद शब्द का मतलब भी नहीं पता होगा।'
उन्होंने आगे कहा कि कोई इतना मूर्ख कैसे हो सकता है, ये सोच ले कि भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या हिंदुओं से अधिक हो जाएगी। इसके साथ ही नसीरुद्दीन शाह ने अपनी शादी को लेकर भी एक किस्सा लोगों के साथ शेयर किया। नसीरुद्दीन शाह ने साल 1982 में एक्ट्रेस रत्ना पाठक (Ratna Pathak Shah) से शादी की थी। जब वे रत्ना से शादी करने जा रहे थे तो नसीर की मां ने पूछा था कि क्या वे अपनी बीवी का धर्म परिवर्तन करवाना चाहेंगे? इसके जवाब में नसीरुद्दीन शाह ने 'ना' कहा था।
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'मेरी मां कम पढ़ी-लिखी और रुढ़िवादी परिवार से आती हैं। वे हज भी गईं और दिन में पांच बार नमाज पढ़ती हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि जो बातें हमने तुम्हें बचपन से सिखाईं, वे अचानक कैसे बदल गईं?' नसीरुद्दीन ने अपनी मां को साफ कह दिया था कि उनकी पत्नी रत्ना पाठक शादी के बाद अपना धर्म हरगिज नहीं बदलेंगी। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? आपको क्या लगता है कि लव जिहाद कुछ होता है या नहीं? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।
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दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने लव जिहाद को तमाशा बताया है और कहा है कि जब उनकी मां ने पत्नी रत्ना पाठक का धर्म परिवर्तन के लिए कहा था तो उन्होंने ये जवाब दिया था। इन दिनों देश में लव जिहाद का मुद्दा फिर से उफान पर है। हाल ही में मध्य प्रदेश में लव जिहाद विरोधी कानून 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक दो हज़ार बीस' बनाया गया और इसके बाद कई और राज्यों में भी 'लव जिहाद' जैसे मामलों को लेकर सवाल उठे। अब बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने देश में हिंदू-मुस्लिम विवादों के मामले बढ़ने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने जन अभियान, कारवां-ए-मोहब्बत को दिए एक इंटरव्यू में पूरे मामले पर अपनी राय रखी। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अनसुना किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के तमाशे को लेकर जिस तरह लोगों को बांटा जा रहा है। उससे मैं खासा नाराज हूं। जिन लोगों ने ये शब्द गढ़ा है, उन्हें जिहाद शब्द का मतलब भी नहीं पता होगा।' उन्होंने आगे कहा कि कोई इतना मूर्ख कैसे हो सकता है, ये सोच ले कि भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या हिंदुओं से अधिक हो जाएगी। इसके साथ ही नसीरुद्दीन शाह ने अपनी शादी को लेकर भी एक किस्सा लोगों के साथ शेयर किया। नसीरुद्दीन शाह ने साल एक हज़ार नौ सौ बयासी में एक्ट्रेस रत्ना पाठक से शादी की थी। जब वे रत्ना से शादी करने जा रहे थे तो नसीर की मां ने पूछा था कि क्या वे अपनी बीवी का धर्म परिवर्तन करवाना चाहेंगे? इसके जवाब में नसीरुद्दीन शाह ने 'ना' कहा था। नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'मेरी मां कम पढ़ी-लिखी और रुढ़िवादी परिवार से आती हैं। वे हज भी गईं और दिन में पांच बार नमाज पढ़ती हैं। उन्होंने मुझसे कहा था कि जो बातें हमने तुम्हें बचपन से सिखाईं, वे अचानक कैसे बदल गईं?' नसीरुद्दीन ने अपनी मां को साफ कह दिया था कि उनकी पत्नी रत्ना पाठक शादी के बाद अपना धर्म हरगिज नहीं बदलेंगी। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? आपको क्या लगता है कि लव जिहाद कुछ होता है या नहीं? हमें कमेंट करके जरूर बताइए। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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आक्रमण कर दिया और उसे परास्त कर इस बात पर वाव्य कर दिया कि वह उसकी सेना में आ जाय । इसके पश्चात् वह काबुल की ओर बढ़ा । मार्ग में अनेक जातियाँ व कवीले, जिन्हें कि खुसरो शाह पीछे छोड़ गया था, उसके साथ मिल गए । २ इन मुग़ल सैनिकों के आने से बाबर की शक्ति और भी बढ़ गई । उत्तुर शहर से चलकर बावर ने करा-बाग़ की जक सराय नामक चरागाह में प्रवेश किया । 3 इससे पूर्व की वह काबुल में प्रवेश करे, उसने मुग़लों की लूट मार करने वाली आदत पर नियंत्रण रखने तथा उन्हें अनुशासन में रखने की आवश्यकता समझी । वह यह नहीं चाहता था कि उसके मैनिक काबुल की जनता को लूटे और सताएं । अतएव उसने उन्हें इस संबंध में सचेत किया और आदेश भी दिए। इसके बावजूद भी खुसरो शाह के सैनिकों ने अनेक लोगों को लूटा और सताया। उन्हें वश में करने के लिए बावर ने सईदीन अली, जो कि हज़ारा जाति का सरदार था, के साथियों में से एक को, जबरदस्ती तेल के घड़े को छीनने के अभियोग पर मौत के घाट उतार दिया । इसके इस कठोर व्यवहार को देख कर अन्य लोग सहम गए और उन्होंने लूट मार करना वन्द कर दिया ।
काबुल के निकट पहुँच कर वावर ने आक्रमण करने की योजना बनाई । योजना बनाते समय उसने अपने अमीरों से परामर्श भी लिया । सैय्यद युसुफ तथा उसके कुछ साथियों ने उसे सुझाव दिया कि शरद् ऋऋतु लभग़ान में रहकर व्यतीत करले और समय आने पर वह वहीं से काबुल के ऊपर आक्रमण करें । किन्तु वाक़ी चाग़नियानी ने उनकी बात का खण्डन करते हुए बाबर को तुरन्त कावुल पर आक्रमण करने का सुझाव दिया । उसने दो बातें कहीं, एक यह कि यदि इसी समय कावुल पर आक्रमण कर दिया गया तो मुक़ीम वेग को इतना समय न मिल सकेगा कि वह दुर्ग की रक्षा की व्यवस्था कर सके । दूसरे, यदि आक्रमण करने में देर की गई तो सम्भव है कि कवीलों के विभिन्न सरदार अपने स्वार्थ को सीवा करने के लिए शिविर
१. वीवर नामा ( अनु० ) भाग १, पृ० १६६ । २. वावर नामा ( अनु० ) भाग १, पृ० १६६-७ । ३. काबुल के पश्चिम में १२ या १५ भील दूर स्थित ४. वावर नामा ( अनु० ) भाग १, पृ० १६६ ।
१५५ में गड़बड़ी न पैदा कर दें या कहीं विद्रोह न कर बैठें। बावर ने वाक़ी चगनियानी के सुझाव को मान लिया और वह आक सराय नामक चरागाह से चल कर आबा कुरुक में उतरा ।'
आवा कुरुक में वावर के पास उसकी माँ तथा सैनिकों के वे परिवार जिन्हें कि अज़र में पीछे छोड़ दिया गया था, शीरीम तग़ाई के साथ आ गए। आबा कुरुक से वाबर आगे बढ़ा और उसने चालाक नामक चरागाह में पड़ाव डाला । यहाँ यह निश्चय किया गया कि कावुल का अवरोध किया जाय । अतएव दूसरे दिन आगे बढ़कर कावुल को घेर लिया गया और सेना को विभिन्न भागों में विभाजित कर अवरोध को सफल बनाने का प्रयास किया गया । सेना के मुख्य भाग को साथ लेकर वावर ने कुले वायज़ीद के मकबरे और हैदर तक़ी के उद्यान के बीच में स्थान लिया, जहांगीर मिर्ज़ा ने सेना के दाहिने भाग का नेतृत्व करते हुए चारबाग़ में मोर्चा स्थापित किया, नासिर मिर्ज़ा ने सेना के बाएँ भाग का नेतृत्व सभांला कुतुलुग़ कदम के मकबरे के पास चरागाह में मोर्चा स्थापित किया। अपनी सेनाओं को ठीक करके वाबर ने मुक़ीम वेग के पास दूत भेज कर यह कहलवाया कि वह दुर्ग को समर्पित कर दे । कुछ समय तक उसने कोई भी उत्तर न दिया और टाल मटोल करता रहा । उसे आशा थी कि उसका पिता उसके सहायतार्थ सैनिक को अवश्य भेजेगा । जब उसने देखा कि किसी ओर से सहायता नहीं आ पा रही है, तो उसने दुर्ग को समर्पित कर दिया। मुक़ीम वेग और उसके परिवार को सुरक्षित कन्चार पहुँचवा दिया गया। इस प्रकार रवीउल आखिर ६१० हि० : अक्टूबर-नवम्बर १५०४ ई० के अन्तिम दस दिनों में बिना किसी युद्ध के काबुल, ग़जनी तथा उसके अधीनस्थ सभी स्थान वावर के हाथों में
आ गए ।
१. वावर नामा ( अनु०.), भाग १, पृ० १६७ ।
२. बावर नामा ( अनु० ), भाग १, पृ० १६७; रिजवी, "मुग़ल कालीन भारत" (बावर), पृ० ११ ।
३. वावर नामा ( अनु० ) भाग १,१०, १६८-६६; अकबर नामा ( अनु० ) भाग १, पृ० २२८; अहसान - उत-तवारीख (अनु० ) भाग २, पृ० ३६-३७; हवीव उस सियर, भाग, ३ खण्ड, ३, ५० ३१०; "नफ़ायसुल-माआसीर", रिजवी,
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आक्रमण कर दिया और उसे परास्त कर इस बात पर वाव्य कर दिया कि वह उसकी सेना में आ जाय । इसके पश्चात् वह काबुल की ओर बढ़ा । मार्ग में अनेक जातियाँ व कवीले, जिन्हें कि खुसरो शाह पीछे छोड़ गया था, उसके साथ मिल गए । दो इन मुग़ल सैनिकों के आने से बाबर की शक्ति और भी बढ़ गई । उत्तुर शहर से चलकर बावर ने करा-बाग़ की जक सराय नामक चरागाह में प्रवेश किया । तीन इससे पूर्व की वह काबुल में प्रवेश करे, उसने मुग़लों की लूट मार करने वाली आदत पर नियंत्रण रखने तथा उन्हें अनुशासन में रखने की आवश्यकता समझी । वह यह नहीं चाहता था कि उसके मैनिक काबुल की जनता को लूटे और सताएं । अतएव उसने उन्हें इस संबंध में सचेत किया और आदेश भी दिए। इसके बावजूद भी खुसरो शाह के सैनिकों ने अनेक लोगों को लूटा और सताया। उन्हें वश में करने के लिए बावर ने सईदीन अली, जो कि हज़ारा जाति का सरदार था, के साथियों में से एक को, जबरदस्ती तेल के घड़े को छीनने के अभियोग पर मौत के घाट उतार दिया । इसके इस कठोर व्यवहार को देख कर अन्य लोग सहम गए और उन्होंने लूट मार करना वन्द कर दिया । काबुल के निकट पहुँच कर वावर ने आक्रमण करने की योजना बनाई । योजना बनाते समय उसने अपने अमीरों से परामर्श भी लिया । सैय्यद युसुफ तथा उसके कुछ साथियों ने उसे सुझाव दिया कि शरद् ऋऋतु लभग़ान में रहकर व्यतीत करले और समय आने पर वह वहीं से काबुल के ऊपर आक्रमण करें । किन्तु वाक़ी चाग़नियानी ने उनकी बात का खण्डन करते हुए बाबर को तुरन्त कावुल पर आक्रमण करने का सुझाव दिया । उसने दो बातें कहीं, एक यह कि यदि इसी समय कावुल पर आक्रमण कर दिया गया तो मुक़ीम वेग को इतना समय न मिल सकेगा कि वह दुर्ग की रक्षा की व्यवस्था कर सके । दूसरे, यदि आक्रमण करने में देर की गई तो सम्भव है कि कवीलों के विभिन्न सरदार अपने स्वार्थ को सीवा करने के लिए शिविर एक. वीवर नामा भाग एक, पृशून्य एक सौ छयासठ । दो. वावर नामा भाग एक, पृशून्य एक सौ छयासठ-सात । तीन. काबुल के पश्चिम में बारह या पंद्रह भील दूर स्थित चार. वावर नामा भाग एक, पृशून्य एक सौ छयासठ । एक सौ पचपन में गड़बड़ी न पैदा कर दें या कहीं विद्रोह न कर बैठें। बावर ने वाक़ी चगनियानी के सुझाव को मान लिया और वह आक सराय नामक चरागाह से चल कर आबा कुरुक में उतरा ।' आवा कुरुक में वावर के पास उसकी माँ तथा सैनिकों के वे परिवार जिन्हें कि अज़र में पीछे छोड़ दिया गया था, शीरीम तग़ाई के साथ आ गए। आबा कुरुक से वाबर आगे बढ़ा और उसने चालाक नामक चरागाह में पड़ाव डाला । यहाँ यह निश्चय किया गया कि कावुल का अवरोध किया जाय । अतएव दूसरे दिन आगे बढ़कर कावुल को घेर लिया गया और सेना को विभिन्न भागों में विभाजित कर अवरोध को सफल बनाने का प्रयास किया गया । सेना के मुख्य भाग को साथ लेकर वावर ने कुले वायज़ीद के मकबरे और हैदर तक़ी के उद्यान के बीच में स्थान लिया, जहांगीर मिर्ज़ा ने सेना के दाहिने भाग का नेतृत्व करते हुए चारबाग़ में मोर्चा स्थापित किया, नासिर मिर्ज़ा ने सेना के बाएँ भाग का नेतृत्व सभांला कुतुलुग़ कदम के मकबरे के पास चरागाह में मोर्चा स्थापित किया। अपनी सेनाओं को ठीक करके वाबर ने मुक़ीम वेग के पास दूत भेज कर यह कहलवाया कि वह दुर्ग को समर्पित कर दे । कुछ समय तक उसने कोई भी उत्तर न दिया और टाल मटोल करता रहा । उसे आशा थी कि उसका पिता उसके सहायतार्थ सैनिक को अवश्य भेजेगा । जब उसने देखा कि किसी ओर से सहायता नहीं आ पा रही है, तो उसने दुर्ग को समर्पित कर दिया। मुक़ीम वेग और उसके परिवार को सुरक्षित कन्चार पहुँचवा दिया गया। इस प्रकार रवीउल आखिर छः सौ दस हिशून्य : अक्टूबर-नवम्बर एक हज़ार पाँच सौ चार ईशून्य के अन्तिम दस दिनों में बिना किसी युद्ध के काबुल, ग़जनी तथा उसके अधीनस्थ सभी स्थान वावर के हाथों में आ गए । एक. वावर नामा , भाग एक, पृशून्य एक सौ सरसठ । दो. बावर नामा , भाग एक, पृशून्य एक सौ सरसठ; रिजवी, "मुग़ल कालीन भारत" , पृशून्य ग्यारह । तीन. वावर नामा भाग एक,दस, एक सौ अड़सठ-छयासठ; अकबर नामा भाग एक, पृशून्य दो सौ अट्ठाईस; अहसान - उत-तवारीख भाग दो, पृशून्य छत्तीस-सैंतीस; हवीव उस सियर, भाग, तीन खण्ड, तीन, पचास तीन सौ दस; "नफ़ायसुल-माआसीर", रिजवी,
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इंडियन टी-20 लीग का 12वां सीजन राजस्थान के लिए बहुत बुरा गुजर रहा है। दिग्गजों से भरी होने और स्टीव स्मिथ की वापसी के बावजूद टीम ने शनिवार से पहले तक खेले गए 8 मुकाबलों में मात्र 2 में जीत दर्ज की है। अंक तालिका में टीम फिलहाल 7वें पायदान पर है। टीम की कप्तानी भी रहाणे की जगह स्टीव स्मिथ को दे दी गई है। टीम फिलहाल प्ले-ऑफ की दौड़ से बाहर होते दिख रही है।
शनिवार को मुंबई के खिलाफ अहम मुकाबले से पहले राजस्थान को बड़ा झटका लगा जब बटलर प्लेइंग XI में नहीं थे। कप्तान स्मिथ ने जानकारी देते हुए बताया कि 'बटलर वापस इंग्लैंड चले गए हैं और वो नहीं खेलेंगे'।
दरअसल बटलर पिता बनने वाले हैं और अपने पहले बच्चे की खुशी को अपनी पत्नी के साथ मनाने के लिए वो घर वापस चले गए हैं। वो कुछ समय अपनी पत्नी और परिवार के साथ मनाएंगे।
उनके वापस लौटने की उम्मीदें भी कम हैं क्योंकि उन्हें इंग्लैंड की तरफ से वर्ल्ड कप खेलना है जिसके लिए वो टीम के साथ प्रैक्टिस में जुड़ेंगे।
राजस्थान की तरफ से खेलते हुए जोस बटलर ने 8 मैचों में 38. 87 की औसत और 151. 70 की स्ट्राइक रेट से 311 रन बनाए हैं। बटलर ने इस दौरान तीन अर्धशतक भी लगाए हैं।
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इंडियन टी-बीस लीटरग का बारहवां सीजन राजस्थान के लिए बहुत बुरा गुजर रहा है। दिग्गजों से भरी होने और स्टीव स्मिथ की वापसी के बावजूद टीम ने शनिवार से पहले तक खेले गए आठ मुकाबलों में मात्र दो में जीत दर्ज की है। अंक तालिका में टीम फिलहाल सातवें पायदान पर है। टीम की कप्तानी भी रहाणे की जगह स्टीव स्मिथ को दे दी गई है। टीम फिलहाल प्ले-ऑफ की दौड़ से बाहर होते दिख रही है। शनिवार को मुंबई के खिलाफ अहम मुकाबले से पहले राजस्थान को बड़ा झटका लगा जब बटलर प्लेइंग XI में नहीं थे। कप्तान स्मिथ ने जानकारी देते हुए बताया कि 'बटलर वापस इंग्लैंड चले गए हैं और वो नहीं खेलेंगे'। दरअसल बटलर पिता बनने वाले हैं और अपने पहले बच्चे की खुशी को अपनी पत्नी के साथ मनाने के लिए वो घर वापस चले गए हैं। वो कुछ समय अपनी पत्नी और परिवार के साथ मनाएंगे। उनके वापस लौटने की उम्मीदें भी कम हैं क्योंकि उन्हें इंग्लैंड की तरफ से वर्ल्ड कप खेलना है जिसके लिए वो टीम के साथ प्रैक्टिस में जुड़ेंगे। राजस्थान की तरफ से खेलते हुए जोस बटलर ने आठ मैचों में अड़तीस. सत्तासी की औसत और एक सौ इक्यावन. सत्तर की स्ट्राइक रेट से तीन सौ ग्यारह रन बनाए हैं। बटलर ने इस दौरान तीन अर्धशतक भी लगाए हैं।
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हाथरस की बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही. पुलिस ने देर रात उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन उसकी चिता बुधवार दोपहर तक जल रही थी. चिता से धुएं की हल्की-हल्की लकीरें दोपहर 1 बजे तक उठ रही थीं.
हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार घोर विवादों के साये में रहा था. परिवारवालों को आरोप है कि पुलिस ने उनकी बेटी को अंतिम बार देखने भी नहीं दिया और दिल्ली से दो घंटे में शव हाथरस उनके गांव पहुंचा. जिसके बाद देर रात तकरीबन ढाई बजे रात पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया.
इस बीच लड़की के परिवारवालों ने चिता से अस्थियां चुनने से इनकार कर दिया है. बुधवार दोपहर तक लड़की के परिवारवालों ने उसकी अस्थियां नहीं चुनी थीं. परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक वे यहां से अस्थियां नहीं चुनेंगे.
बता दें कि जहां लड़की का अंतिम संस्कार किया गया है वहां से लड़की का घर मात्र 200 मीटर की दूरी पर है. इसके बावजूद पुलिस जब दिल्ली से लड़की का शव लेकर आई तो पुलिस ने लड़की के घर के सामने एंबुलेंस नहीं रोकी. आरोप है कि लड़की के परिवार वाले बेटी का चेहरा आखिरी बार देखने के लिए पुलिस से मिन्नतें करते रहे, गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी.
आखिर अपनी बेबसी देखकर इस परिवार ने रात को खुद को ही अपने घर में बंद कर लिया. हालांकि पुलिस का दावा है कि अंतिम संस्कार परिवारवालों की सहमति से हुआ और अंतिम संस्कार के दौरान उसके रिश्तेदार भी मौजूद थे.
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हाथरस की बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही. पुलिस ने देर रात उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया. लेकिन उसकी चिता बुधवार दोपहर तक जल रही थी. चिता से धुएं की हल्की-हल्की लकीरें दोपहर एक बजे तक उठ रही थीं. हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार घोर विवादों के साये में रहा था. परिवारवालों को आरोप है कि पुलिस ने उनकी बेटी को अंतिम बार देखने भी नहीं दिया और दिल्ली से दो घंटे में शव हाथरस उनके गांव पहुंचा. जिसके बाद देर रात तकरीबन ढाई बजे रात पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया. इस बीच लड़की के परिवारवालों ने चिता से अस्थियां चुनने से इनकार कर दिया है. बुधवार दोपहर तक लड़की के परिवारवालों ने उसकी अस्थियां नहीं चुनी थीं. परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक वे यहां से अस्थियां नहीं चुनेंगे. बता दें कि जहां लड़की का अंतिम संस्कार किया गया है वहां से लड़की का घर मात्र दो सौ मीटर की दूरी पर है. इसके बावजूद पुलिस जब दिल्ली से लड़की का शव लेकर आई तो पुलिस ने लड़की के घर के सामने एंबुलेंस नहीं रोकी. आरोप है कि लड़की के परिवार वाले बेटी का चेहरा आखिरी बार देखने के लिए पुलिस से मिन्नतें करते रहे, गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी. आखिर अपनी बेबसी देखकर इस परिवार ने रात को खुद को ही अपने घर में बंद कर लिया. हालांकि पुलिस का दावा है कि अंतिम संस्कार परिवारवालों की सहमति से हुआ और अंतिम संस्कार के दौरान उसके रिश्तेदार भी मौजूद थे.
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यह स्पष्ट है कि सूडान में लाल सागर में रूसी सैन्य अड्डा बनाने का निर्णय व्लादिमीर पुतिन द्वारा सर्वोच्च कमांडर के रूप में किया जाएगा, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से उन कारणों को नहीं देखता कि रूस सूडानी पक्ष की पेशकश को अस्वीकार कर सकता है, यदि कोई हो। इस क्षेत्र में हमारे आधार पर हमारे देश की सैन्य उपस्थिति, मेरी राय में, विशेष रूप से स्थिर भूमिका निभाएगी- заявил Клинцевич в интервью РИА Новости.
सोची में नवंबर 23 को याद करते हुए, रूस और सूडान के नेताओं के बीच बातचीत हुई, जिसके दौरान सूडान के राष्ट्रपति उमर अल बशीर ने विशेष रूप से सैन्य-तकनीकी सहयोग और एक सैन्य आधार के बारे में सवाल उठाए।
हम लाल सागर की स्थिति से भी चिंतित हैं। हमारा मानना है कि इन मुद्दों में अमेरिकी हस्तक्षेप भी एक समस्या है। और हम लाल सागर में ठिकानों के उपयोग के संदर्भ में इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहेंगे- उमर अल बशीर ने कहा।
बाद में, सूडानी नेता ने स्पष्ट किया कि, वार्ता के दौरान, उन्होंने वास्तव में लाल सागर पर एक सैन्य अड्डा बनाने की संभावना पर चर्चा की थी, पहले रूस के राष्ट्रपति के साथ, और फिर रक्षा मंत्री के साथ।
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यह स्पष्ट है कि सूडान में लाल सागर में रूसी सैन्य अड्डा बनाने का निर्णय व्लादिमीर पुतिन द्वारा सर्वोच्च कमांडर के रूप में किया जाएगा, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से उन कारणों को नहीं देखता कि रूस सूडानी पक्ष की पेशकश को अस्वीकार कर सकता है, यदि कोई हो। इस क्षेत्र में हमारे आधार पर हमारे देश की सैन्य उपस्थिति, मेरी राय में, विशेष रूप से स्थिर भूमिका निभाएगी- заявил Клинцевич в интервью РИА Новости. सोची में नवंबर तेईस को याद करते हुए, रूस और सूडान के नेताओं के बीच बातचीत हुई, जिसके दौरान सूडान के राष्ट्रपति उमर अल बशीर ने विशेष रूप से सैन्य-तकनीकी सहयोग और एक सैन्य आधार के बारे में सवाल उठाए। हम लाल सागर की स्थिति से भी चिंतित हैं। हमारा मानना है कि इन मुद्दों में अमेरिकी हस्तक्षेप भी एक समस्या है। और हम लाल सागर में ठिकानों के उपयोग के संदर्भ में इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहेंगे- उमर अल बशीर ने कहा। बाद में, सूडानी नेता ने स्पष्ट किया कि, वार्ता के दौरान, उन्होंने वास्तव में लाल सागर पर एक सैन्य अड्डा बनाने की संभावना पर चर्चा की थी, पहले रूस के राष्ट्रपति के साथ, और फिर रक्षा मंत्री के साथ।
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मालाओं में तथा अन्य प्रकारले शास्त्रप्रकाशका विराट आयोजन किया गया है। इस खजातिहितकर और स्वधर्म उन्नतिकारी अति धार्मिक कार्य्य में राजा महाराजाओसे लेकर साधारण सद्गृहस्थतक निम्न लिखित प्रकार से सहायक बनकर अपना कल्याण और देशका कल्याण कर सकते हैं । (क) ग्रंथमालाका स्थायी ग्राहक बनकर । (ख) भारतधर्म सिण्डि केटका शेयर खरीदकर । (ग) उसके डिवेञ्चर खरीदकर । (घ) सिण्डिकेटके पेट्रन बनकर । (ङ) और सिण्डिकेटके एजेन्ट वनकर । इन सबके विस्तारित समाचार "गवर्निंग डाइरेक्टर भारत धर्म सिण्डिकेट लिमिटेड, स्टेशन रोड, बनारस" इस पतेपर मिल सकेगा
विना मृल्य धर्माप्रचार, पुण्य, यश और भरपूर आर्थिक लाभकी नयी योजना ।
ऊपर लिखित कार्यको चलाने और उसके सहायतार्थ यन्त्रालय (प्रेस) को सर्वाङ्गपूर्ण बनाने के लिये एक लाख रुपयेशा डिवेश्वर दस वर्ष के लिये निकालनेका सिण्डिकेट के सञ्चालकोंने निश्चय किया है। डिवेञ्चरपर ६) साढ़े छः रुपया सैकड़ा सूद हरलाल वरावर मिलेगा और डिवेश्चर खरोदनेके समयसे दस वर्ष के बाद यह रुपया वापस दे दिया जायगा। डिवेञ्चरके लेनेमें देशके छोटे बड़े सब हिन्दू हाथ बंटा सफे, इसलिये डिवेञ्चर लेनेवालोंके लिये अनेक सुविधाएं रखी गई हैं। (क) प्रत्येक डिवेञ्चर सौ सौ रुपयेका होगा जिसपर सालमें साढ़े ६।।) रुपया सूद मिलेगा। (ख) कमसे कम हजार रुपये के डिवेञ्चर खरीदनेवाले सज्जन इसके संरक्षक अर्थात् पेट्रन कहलायेंगे। (ग) डिवेञ्चर खरीदने वालोंको पुस्तकें कुछ सुभीते के साथ मिलेंगी और उनके घर में
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मालाओं में तथा अन्य प्रकारले शास्त्रप्रकाशका विराट आयोजन किया गया है। इस खजातिहितकर और स्वधर्म उन्नतिकारी अति धार्मिक कार्य्य में राजा महाराजाओसे लेकर साधारण सद्गृहस्थतक निम्न लिखित प्रकार से सहायक बनकर अपना कल्याण और देशका कल्याण कर सकते हैं । ग्रंथमालाका स्थायी ग्राहक बनकर । भारतधर्म सिण्डि केटका शेयर खरीदकर । उसके डिवेञ्चर खरीदकर । सिण्डिकेटके पेट्रन बनकर । और सिण्डिकेटके एजेन्ट वनकर । इन सबके विस्तारित समाचार "गवर्निंग डाइरेक्टर भारत धर्म सिण्डिकेट लिमिटेड, स्टेशन रोड, बनारस" इस पतेपर मिल सकेगा विना मृल्य धर्माप्रचार, पुण्य, यश और भरपूर आर्थिक लाभकी नयी योजना । ऊपर लिखित कार्यको चलाने और उसके सहायतार्थ यन्त्रालय को सर्वाङ्गपूर्ण बनाने के लिये एक लाख रुपयेशा डिवेश्वर दस वर्ष के लिये निकालनेका सिण्डिकेट के सञ्चालकोंने निश्चय किया है। डिवेञ्चरपर छः) साढ़े छः रुपया सैकड़ा सूद हरलाल वरावर मिलेगा और डिवेश्चर खरोदनेके समयसे दस वर्ष के बाद यह रुपया वापस दे दिया जायगा। डिवेञ्चरके लेनेमें देशके छोटे बड़े सब हिन्दू हाथ बंटा सफे, इसलिये डिवेञ्चर लेनेवालोंके लिये अनेक सुविधाएं रखी गई हैं। प्रत्येक डिवेञ्चर सौ सौ रुपयेका होगा जिसपर सालमें साढ़े छः।।) रुपया सूद मिलेगा। कमसे कम हजार रुपये के डिवेञ्चर खरीदनेवाले सज्जन इसके संरक्षक अर्थात् पेट्रन कहलायेंगे। डिवेञ्चर खरीदने वालोंको पुस्तकें कुछ सुभीते के साथ मिलेंगी और उनके घर में
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पण्डित ही नहीं है । कई कई कथाओं में तो यहाँ तक भी लिखा मिलता है कि सिद्धसेन अपने पेट पर एक पाटा बांधा हुआ रखता था। पूछने पर कहता था कि मुझे डर है कि कहीं विद्या से मेरा पेट फट न जाय । पंडित जी एक हाथ में कुदाल और एक हाथ में निसरणी भी रखते थे पूछने पर कहते थे कि यदि कोई वादी आकाश में चला जाय तो इस निसरणी से उसकी टांग पकड़ ले आऊँ और पाताल में चला जाय तो इस कुदाल से पृथ्वी खोद कर उसकी चोटी पकड़ कर खींच लाऊँ । यह गर्व की चर्म सीमा थी इतना होने पर भी एक प्रतिज्ञा उसने ऐसी भी कर ली थी कि जिसके साथ में शास्त्रार्थ करूँ और मध्यस्थ लोग कह दें कि सिद्धसेन हार गया तो मैं जीतने वाले का शिष्य बन जाऊँगा इत्यादि
एक समय जंगल में इधर से तो आचार्य वृद्धवादी आ रहे थे उधर सिद्धसेन जा रहा था दोनों की थे भेंट हुई। सिद्धसेन ने कहा जैन सेबड़ा ! मेरे साथ शास्त्रार्थ करेगा ? वृद्धवादीसूरि ने कहा हाँ । सिद्धसेन ने कहा तब कीजिये शास्त्रार्थ वृद्धवादीसूरि ने कहा यहाँ जंगल में कैसे शास्त्रार्थ किया जाय । कारण यहाँ हार जीत का निर्णय करने वाला मध्यस्थ नहीं है अतः किसी राज सभा में चलो कि वहाँ राजा एवं पण्डितों के समक्ष शास्त्रार्थ किया जाय जिससे जय पराजय का फ़ैसला मिले । सिद्धसेन ने कहा मेरा तो पेट फटा जाता है यहाँ ही शास्त्रार्थ करें । यह जंगल के गोपाल हैं इनको मध्यस्थ रख लीजिये ये दोनों के संवादसुन कर हार जीत का निर्णय कर देंगे। सिद्धसेन का आग्रह देख आचार्य वृद्धवादी ने स्वीकार कर लिया और गोपालों को बुला कर मध्यस्थ मुकर्रर कर दिये ।
पहिले सिद्धसेन ने अपनी पण्डिवाई का परिचय करवाता हुआ संस्कृत में इस प्रकार का कथन किया कि मिसको श्रषरण कर देवता भी प्रसन्न हो जाय पर मध्यस्थ तो थे गोपाल । वे विचारे संस्कृत भाषा में क्या समझें उनको तो उल्टा खराब ही लगा । गोपालों ने कहा कि तुम ठहर जाओ, कुछ पढ़े तो नहीं और व्यर्थ ही वकवाद करते हो । अब इन वृढे बाबा को बोलने दो । अतः समय के जानकार प्राचार्य वृद्धवादी बोलने लगे । उनके ओघा तो कमर पर बँधा हुआ ही था और शरीर को घुमाते हुए गोपालों की भाषा में गोपालों के गीत की राग में उच्चेस्वर से गाने लगे किः"नवि मारी नवि चोरीई परदारा गमन न कीजीडूं थोड़ा थोड दीजई, त टगि माग सग्गि जाइइ ॥ १ ॥ गाय भैसि जिम नियुचरइ तिमतिम दूध दुरणो भर तिमतिम गोवला मनि ठरई, छाछि देयतां तेड करई ॥२॥ गुलस्युं चावइ तील तंडली, वड़े वजाइ बाँसली पहिरण ओढणि हुइ' धावली गोवाला मन पुगी रली ॥३॥ मोटा जोटा मिल्या पिंढार, माहो माहि करिये विचार महीपी दूझणी सरजी भली, दीइ दावोटा पुगी रली ।।४।। वन माहि गोवला राज, इन्द तणि घरि परवा न आज भमर मिस दूझीवली सोल, सुखि समाधि हुई रंगरोल ॥५॥
आचार्य वृद्धवादी सूरि ]
वाटर भरीउ दहीने घोल, जीमणो कर लेई घेसि बोल । इणि परेइ मुँडो मैलावउ करई, स्वर्ग तणी बातज विसरहूं ॥६॥ हडहडाटन विक्री जेघणु मर्म्स न बोली जे कहे तणु कुडी साखी न दीजे आल, ए तुम्ह धर्म्म कहुँ गोवाल ॥७॥ अरडस विच्छु नवि मारई मारतओ पण उघार कुड कपट थी मन वारीइ इणि परइ आप कारज सारई ॥८॥ वचन नव कीजई कही तणु यह बात साची भणु कीज़ई जीव दयानु जतन, सावय कुल चिंतमणि रतन ॥६॥ वृद्धवादी के इस गीत (उपदेश) को सुन कर गोपाल बरावर झगये और उन को बड़ी मा.
गोवालिया उठ्या गहगही, हरखित ताली देता सही भलो यही ज गरडो डोकरउं, नही भणियों येहीज छोकरउ ॥१॥ भट्ट जे बोल्यो भूत पल्लाप, फोड्या कान विधोयो आप । जीत्यो गरड़ो हरयो तु हल्ल, पाये लागी करइ ए गुरमल्ल ।। २ ।। प्रबन्धकार लिखता है कि गोपालों के सामने सिद्धसेन ने कहा कि संसार में कोई सवंश नहीं उत्तर में श्राचार्य वृद्धवादी ने गोपालों से पूछा कि तुमने सर्वज्ञ देखा है ? गोपालों ने उत्तर दिया कि नगर मंदिर में सर्वज्ञ वीतराग बैठा है। जिसको हम लोगों ने प्रत्यक्ष देखा है और सब लोग उसको सर्व ईश्वर कहते हैं। यह बात सत्य है फिर यह पण्डित झूठ क्यों बोलता है इत्यादि गोपाल ने वृद्धवादी सध्या और सिद्धसेन को झूठा कह कर फैसला दे दिया।
बस, फिर तो था ही क्या ! सत्यवादी सिद्धसेन ने गुरु महाराज के चरणों में शिर ठाकर कि हे पूज्यवर ! आप कृपा करके मुझे अपना शिष्य बनाइये कारण मैंने पहिले से ही ऐसी प्रतिज्ञा को कि में जिससे हार जाऊं उसका शिष्य वन नाऊ । सूरीजी ने कहा सिद्धसेन तू वास्तव में पंडित है पर है तो समयज्ञपने की है । यदि तू जैन दीक्षा लेनी चाहता है तो बहुत अच्छा है पर यदि इच्छा हो अभी किसी राज सभा में चल कर विद्वान पण्डितों के समक्ष शास्त्रार्थ कर फिर वक्षं जयग निर्णय हो जायगा । सिद्धसेन ने कहा नहीं प्रभो ! निर्णय तो यहां हो गया है और मुझे पूर्ण है गया है कि आपके सामने में कुछ भी नहीं है। आप मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण कर के अपना शि जैन दीक्षा लेने के बाद वर्त्तमान जैन साहित्य का अध्ययन कर लिया । श्राचार्यल सूरिजी ने विधि विधान से सिद्धसेन को दीक्षा देकर उसका नाम कुमुदचन्द्र रख दिया। मुनि से जानकुमुदचन्द्र को श्राचार्य विभूषित कर उनका प्रसिद्ध नाम सिद्धार साधुओं को साथ देकर अलग विहार करवा दिया। अचार्य सिद्धसैनदि की शानसभा यहाँ से दुबके नाम से प्रसिद्ध हो गये ।
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पण्डित ही नहीं है । कई कई कथाओं में तो यहाँ तक भी लिखा मिलता है कि सिद्धसेन अपने पेट पर एक पाटा बांधा हुआ रखता था। पूछने पर कहता था कि मुझे डर है कि कहीं विद्या से मेरा पेट फट न जाय । पंडित जी एक हाथ में कुदाल और एक हाथ में निसरणी भी रखते थे पूछने पर कहते थे कि यदि कोई वादी आकाश में चला जाय तो इस निसरणी से उसकी टांग पकड़ ले आऊँ और पाताल में चला जाय तो इस कुदाल से पृथ्वी खोद कर उसकी चोटी पकड़ कर खींच लाऊँ । यह गर्व की चर्म सीमा थी इतना होने पर भी एक प्रतिज्ञा उसने ऐसी भी कर ली थी कि जिसके साथ में शास्त्रार्थ करूँ और मध्यस्थ लोग कह दें कि सिद्धसेन हार गया तो मैं जीतने वाले का शिष्य बन जाऊँगा इत्यादि एक समय जंगल में इधर से तो आचार्य वृद्धवादी आ रहे थे उधर सिद्धसेन जा रहा था दोनों की थे भेंट हुई। सिद्धसेन ने कहा जैन सेबड़ा ! मेरे साथ शास्त्रार्थ करेगा ? वृद्धवादीसूरि ने कहा हाँ । सिद्धसेन ने कहा तब कीजिये शास्त्रार्थ वृद्धवादीसूरि ने कहा यहाँ जंगल में कैसे शास्त्रार्थ किया जाय । कारण यहाँ हार जीत का निर्णय करने वाला मध्यस्थ नहीं है अतः किसी राज सभा में चलो कि वहाँ राजा एवं पण्डितों के समक्ष शास्त्रार्थ किया जाय जिससे जय पराजय का फ़ैसला मिले । सिद्धसेन ने कहा मेरा तो पेट फटा जाता है यहाँ ही शास्त्रार्थ करें । यह जंगल के गोपाल हैं इनको मध्यस्थ रख लीजिये ये दोनों के संवादसुन कर हार जीत का निर्णय कर देंगे। सिद्धसेन का आग्रह देख आचार्य वृद्धवादी ने स्वीकार कर लिया और गोपालों को बुला कर मध्यस्थ मुकर्रर कर दिये । पहिले सिद्धसेन ने अपनी पण्डिवाई का परिचय करवाता हुआ संस्कृत में इस प्रकार का कथन किया कि मिसको श्रषरण कर देवता भी प्रसन्न हो जाय पर मध्यस्थ तो थे गोपाल । वे विचारे संस्कृत भाषा में क्या समझें उनको तो उल्टा खराब ही लगा । गोपालों ने कहा कि तुम ठहर जाओ, कुछ पढ़े तो नहीं और व्यर्थ ही वकवाद करते हो । अब इन वृढे बाबा को बोलने दो । अतः समय के जानकार प्राचार्य वृद्धवादी बोलने लगे । उनके ओघा तो कमर पर बँधा हुआ ही था और शरीर को घुमाते हुए गोपालों की भाषा में गोपालों के गीत की राग में उच्चेस्वर से गाने लगे किः"नवि मारी नवि चोरीई परदारा गमन न कीजीडूं थोड़ा थोड दीजई, त टगि माग सग्गि जाइइ ॥ एक ॥ गाय भैसि जिम नियुचरइ तिमतिम दूध दुरणो भर तिमतिम गोवला मनि ठरई, छाछि देयतां तेड करई ॥दो॥ गुलस्युं चावइ तील तंडली, वड़े वजाइ बाँसली पहिरण ओढणि हुइ' धावली गोवाला मन पुगी रली ॥तीन॥ मोटा जोटा मिल्या पिंढार, माहो माहि करिये विचार महीपी दूझणी सरजी भली, दीइ दावोटा पुगी रली ।।चार।। वन माहि गोवला राज, इन्द तणि घरि परवा न आज भमर मिस दूझीवली सोल, सुखि समाधि हुई रंगरोल ॥पाँच॥ आचार्य वृद्धवादी सूरि ] वाटर भरीउ दहीने घोल, जीमणो कर लेई घेसि बोल । इणि परेइ मुँडो मैलावउ करई, स्वर्ग तणी बातज विसरहूं ॥छः॥ हडहडाटन विक्री जेघणु मर्म्स न बोली जे कहे तणु कुडी साखी न दीजे आल, ए तुम्ह धर्म्म कहुँ गोवाल ॥सात॥ अरडस विच्छु नवि मारई मारतओ पण उघार कुड कपट थी मन वारीइ इणि परइ आप कारज सारई ॥आठ॥ वचन नव कीजई कही तणु यह बात साची भणु कीज़ई जीव दयानु जतन, सावय कुल चिंतमणि रतन ॥छः॥ वृद्धवादी के इस गीत को सुन कर गोपाल बरावर झगये और उन को बड़ी मा. गोवालिया उठ्या गहगही, हरखित ताली देता सही भलो यही ज गरडो डोकरउं, नही भणियों येहीज छोकरउ ॥एक॥ भट्ट जे बोल्यो भूत पल्लाप, फोड्या कान विधोयो आप । जीत्यो गरड़ो हरयो तु हल्ल, पाये लागी करइ ए गुरमल्ल ।। दो ।। प्रबन्धकार लिखता है कि गोपालों के सामने सिद्धसेन ने कहा कि संसार में कोई सवंश नहीं उत्तर में श्राचार्य वृद्धवादी ने गोपालों से पूछा कि तुमने सर्वज्ञ देखा है ? गोपालों ने उत्तर दिया कि नगर मंदिर में सर्वज्ञ वीतराग बैठा है। जिसको हम लोगों ने प्रत्यक्ष देखा है और सब लोग उसको सर्व ईश्वर कहते हैं। यह बात सत्य है फिर यह पण्डित झूठ क्यों बोलता है इत्यादि गोपाल ने वृद्धवादी सध्या और सिद्धसेन को झूठा कह कर फैसला दे दिया। बस, फिर तो था ही क्या ! सत्यवादी सिद्धसेन ने गुरु महाराज के चरणों में शिर ठाकर कि हे पूज्यवर ! आप कृपा करके मुझे अपना शिष्य बनाइये कारण मैंने पहिले से ही ऐसी प्रतिज्ञा को कि में जिससे हार जाऊं उसका शिष्य वन नाऊ । सूरीजी ने कहा सिद्धसेन तू वास्तव में पंडित है पर है तो समयज्ञपने की है । यदि तू जैन दीक्षा लेनी चाहता है तो बहुत अच्छा है पर यदि इच्छा हो अभी किसी राज सभा में चल कर विद्वान पण्डितों के समक्ष शास्त्रार्थ कर फिर वक्षं जयग निर्णय हो जायगा । सिद्धसेन ने कहा नहीं प्रभो ! निर्णय तो यहां हो गया है और मुझे पूर्ण है गया है कि आपके सामने में कुछ भी नहीं है। आप मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण कर के अपना शि जैन दीक्षा लेने के बाद वर्त्तमान जैन साहित्य का अध्ययन कर लिया । श्राचार्यल सूरिजी ने विधि विधान से सिद्धसेन को दीक्षा देकर उसका नाम कुमुदचन्द्र रख दिया। मुनि से जानकुमुदचन्द्र को श्राचार्य विभूषित कर उनका प्रसिद्ध नाम सिद्धार साधुओं को साथ देकर अलग विहार करवा दिया। अचार्य सिद्धसैनदि की शानसभा यहाँ से दुबके नाम से प्रसिद्ध हो गये ।
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पुलिस ने बुधवार को बताया कि मृतक का नाम दलीप उर्फ कुणाल है जिसे शरीर पर कई गोलियां लगीं और पोस्टमार्टम के बाद यह पता चल पाएगा कि उसे कितनी गोलियां मारी गई थीं।
पुलिस ने कहा कि घटना मंगलवार देर रात को हुई थी और सूचना बत्रा अस्पताल से मिली थी जहां दलीप को गोली लगने के बाद ले जाया गया था।
उन्होंने कहा कि दलीप को अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद आरोपी भाग निकले और दुकान के मालिक को घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
पुलिस ने बताया कि मृतक दलीप शहर के मदनगीर का निवासी था और हत्या तथा लूटपाट समेत सात मामलों में संलिप्त रहा था।
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पुलिस ने बुधवार को बताया कि मृतक का नाम दलीप उर्फ कुणाल है जिसे शरीर पर कई गोलियां लगीं और पोस्टमार्टम के बाद यह पता चल पाएगा कि उसे कितनी गोलियां मारी गई थीं। पुलिस ने कहा कि घटना मंगलवार देर रात को हुई थी और सूचना बत्रा अस्पताल से मिली थी जहां दलीप को गोली लगने के बाद ले जाया गया था। उन्होंने कहा कि दलीप को अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि घटना के बाद आरोपी भाग निकले और दुकान के मालिक को घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि मृतक दलीप शहर के मदनगीर का निवासी था और हत्या तथा लूटपाट समेत सात मामलों में संलिप्त रहा था।
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रविवार के दिन स्नान के बाद उगते सूरज को जल देना बहुत ही शुभ होता है। सूर्य देव को जल देने के बाद धन की देवी मां लक्ष्मी की भी पूजा भी करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से सूर्य देव के साथ-साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है।
वहीं यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो आपको रविवार के दिन मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलानी चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी होती है। साथ ही सूर्य देव की कृपा से जातक के जीवन में आ रही तमाम तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, रोजाना सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए, लेकिन यदि आप रोजाना नहीं कर सकते तो कम से कम रविवार के दिन जरूर करें। ऐसा करने से मान सम्मान में वृद्धि होती है।
वहीं यदि आप नौकरी और कारोबार में तरक्की चाहते हैं, तो रविवार के दिन बहते हुए जल में गुड़ और चावल को मिश्रित करके प्रवाहित कर दें। ज्योतिष के अनुसार ऐसा करने से सूर्य देव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
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रविवार के दिन स्नान के बाद उगते सूरज को जल देना बहुत ही शुभ होता है। सूर्य देव को जल देने के बाद धन की देवी मां लक्ष्मी की भी पूजा भी करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से सूर्य देव के साथ-साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है। वहीं यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो आपको रविवार के दिन मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलानी चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी होती है। साथ ही सूर्य देव की कृपा से जातक के जीवन में आ रही तमाम तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार, रोजाना सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए, लेकिन यदि आप रोजाना नहीं कर सकते तो कम से कम रविवार के दिन जरूर करें। ऐसा करने से मान सम्मान में वृद्धि होती है। वहीं यदि आप नौकरी और कारोबार में तरक्की चाहते हैं, तो रविवार के दिन बहते हुए जल में गुड़ और चावल को मिश्रित करके प्रवाहित कर दें। ज्योतिष के अनुसार ऐसा करने से सूर्य देव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
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नयी दिल्ली, 28 सितंबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि डेटा की निजता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल तरीके से भुगतान करने वाले भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में ग्राहकों के ब्योरे को सुरक्षित रखने की जरूरत है।
गया है। वर्ष 2020 में यह चार लाख करोड़ रुपये और 2019 में दो लाख करोड़ रुपये था।
सीतारमण ने 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट-2021' को संबोधित करते हुए कहा कि डेटा की निजता ऐसी चीज है जो काफी महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे पर काफी भिन्न विचार हो सकते हैं। लेकिन निजता का सम्मान जरूरी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में फिनटेक की स्वीकार्यता की दर 87 प्रतिशत है, जबकि इसका वैश्विक औसत 64 प्रतिशत का है।
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि भारत डिजिटल गतिविधियों, डिजिटल भुगतान के लिए प्रमुख गंतव्य है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, अट्ठाईस सितंबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि डेटा की निजता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल तरीके से भुगतान करने वाले भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में ग्राहकों के ब्योरे को सुरक्षित रखने की जरूरत है। गया है। वर्ष दो हज़ार बीस में यह चार लाख करोड़ रुपये और दो हज़ार उन्नीस में दो लाख करोड़ रुपये था। सीतारमण ने 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट-दो हज़ार इक्कीस' को संबोधित करते हुए कहा कि डेटा की निजता ऐसी चीज है जो काफी महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे पर काफी भिन्न विचार हो सकते हैं। लेकिन निजता का सम्मान जरूरी है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में फिनटेक की स्वीकार्यता की दर सत्तासी प्रतिशत है, जबकि इसका वैश्विक औसत चौंसठ प्रतिशत का है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि भारत डिजिटल गतिविधियों, डिजिटल भुगतान के लिए प्रमुख गंतव्य है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतार दी. देश में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि कोविड से अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. वहीं कई लोग अस्पतालों में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं. देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. कई लोग ऑक्सीजन, एंबुलेंस और दवाई जैसी बुनियादी चीजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर एक डॉक्टर की तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें वह पीपीई किट उतारने के बाद पसीने से तरबतर नजर आ रहे हैं.
सोशल मीडिया पर डॉक्टर की ये फोटो अब खूब सुर्खियां बटोर रही है. यह तस्वीर डॉक्टर सोहिल ने बुधवार, 28 अप्रैल को ट्विटर पर लोगों के साथ साझा की. इस तस्वीर को शेयर करते हुए उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा, 'मुझे गर्व है कि देश के लिए मैं कुछ कर रहा हूं. ' अब ये फोटो इंटरनेट की दुनिया में तेजी से पॉपुलर हो रही है. इस पोस्ट में दो फोटो शेयर की गई है. एक में डॉक्टर सोहिल पीपीई किट में नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी तस्वीर पीपीई किट उतारने के बाद की है जिसमें वो पसीने से भीगे हुए नजर आ रहे हैं.
इस फोटो को जैसे ही सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वैसे ही लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करानी शुरू कर दी. डॉक्टर सोहिल की इस तस्वीर को न्यूज लिखे जाने तक 43 हजार से अधिक लाइक्स और 5 हजार से ज्यादा री-ट्वीट मिल चुके हैं. कोरोना महामारी के इस बुरे दौर में डॉक्टर्स और कोरोना वॉरियर्स लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. इसलिए उन्हें देश का हर नागरिक सलाम ठोक रहा है.
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भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतार दी. देश में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि कोविड से अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. वहीं कई लोग अस्पतालों में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं. देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. कई लोग ऑक्सीजन, एंबुलेंस और दवाई जैसी बुनियादी चीजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर एक डॉक्टर की तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें वह पीपीई किट उतारने के बाद पसीने से तरबतर नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर डॉक्टर की ये फोटो अब खूब सुर्खियां बटोर रही है. यह तस्वीर डॉक्टर सोहिल ने बुधवार, अट्ठाईस अप्रैल को ट्विटर पर लोगों के साथ साझा की. इस तस्वीर को शेयर करते हुए उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा, 'मुझे गर्व है कि देश के लिए मैं कुछ कर रहा हूं. ' अब ये फोटो इंटरनेट की दुनिया में तेजी से पॉपुलर हो रही है. इस पोस्ट में दो फोटो शेयर की गई है. एक में डॉक्टर सोहिल पीपीई किट में नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी तस्वीर पीपीई किट उतारने के बाद की है जिसमें वो पसीने से भीगे हुए नजर आ रहे हैं. इस फोटो को जैसे ही सोशल मीडिया पर शेयर किया गया वैसे ही लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करानी शुरू कर दी. डॉक्टर सोहिल की इस तस्वीर को न्यूज लिखे जाने तक तैंतालीस हजार से अधिक लाइक्स और पाँच हजार से ज्यादा री-ट्वीट मिल चुके हैं. कोरोना महामारी के इस बुरे दौर में डॉक्टर्स और कोरोना वॉरियर्स लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. इसलिए उन्हें देश का हर नागरिक सलाम ठोक रहा है.
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लंदन. ब्रिटेन (Britain) की कंजरवेटिव पार्टी के नेता ऋषि सुनक (Rishi Sunak) यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) के नए प्रधानमंत्री बने। उनके नाम की आधिकारिक घोषणा हो गई है। वह 28 अक्टूबर को शपथ ग्रहण करेंगे। जबकि, 29 को मंत्रिमंडल का गठन हो सकता है। इस बीच सुनक ने कहा, यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। मैं ब्रिटेन की जनता के लिए दिन-रात काम करूंगा।
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लंदन. ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के नेता ऋषि सुनक यूनाइटेड किंगडम के नए प्रधानमंत्री बने। उनके नाम की आधिकारिक घोषणा हो गई है। वह अट्ठाईस अक्टूबर को शपथ ग्रहण करेंगे। जबकि, उनतीस को मंत्रिमंडल का गठन हो सकता है। इस बीच सुनक ने कहा, यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। मैं ब्रिटेन की जनता के लिए दिन-रात काम करूंगा।
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अब कंपनी ने अपने दो लोकप्रिय हैंडसेट रेडमी नोट 5 और रेडमी नोट 5 प्रो के लिए इस पॉलिसी को बदल दिया है।
अब कंपनी ने अपने दो लोकप्रिय हैंडसेट रेडमी नोट 5 और रेडमी नोट 5 प्रो के लिए इस पॉलिसी को बदल दिया है।
मुकेश अंबानी के लिए अच्छी खबरों के आने का सिलसिला जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मुकेश अंबानी एशिया के सबसे धनी इंसान बन गए हैं।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में 24. 82 करोड़ डॉलर घटकर 405. 81 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी के बावजूद आई है।
अब रिलायंस ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसके समाने एप्पल भी बौना नज़र आ रहा है। दर असल अब दुनिया में तहलका मचाया है उस ऑपरेटिंग सिस्टम ने जिस पर जियो फोन चलता है।
चीन की दिग्गज स्मार्टफोन कंपनी ओप्पो ने इसी हफ्ते अपना नया फोन ओप्पो फाइंड एक्स लॉन्च कर धमाल मचा दिया है।
आइए जानते हैं चार्जिंग के दौरान होने वाली उन गलतियों के बारे में जो आपका फोन और आपका जीवन खराब कर सकती हैं।
चीन की प्रमुख स्मार्टफोन कंपनी वीवो 19 जुलाई को भारत में अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Vivo Nex लॉन्च करने जा रही है। आपको बता दें कि कंपनी ने पिछले महीने चीन में Vivo Nex सिरीज के तहत दो फोन Nex A और Nex S को लॉन्च किया था।
मध्यप्रदेश सरकार छतरपुर जिले की बंदर हीरा खदान को अगले एक-दो महीने में नीलाम करने की तैयारी कर रही है। इस खदान में 60,000 करोड़ रुपए मूल्य का हीरा भंडार होने का अनुमान है।
देश का निर्यात जून महीने में 17. 57 प्रतिशत बढ़कर 27. 7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं कच्चे तेल का आयात महंगा होने से व्यापार घाटा साढ़े तीन साल से अधिक के उच्चस्तर 16. 6 अरब डॉलर हो गया।
चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में अपना नया बजट स्मार्टफोन पेश किया है। ओप्पो ए3एस नामक इस स्मार्टफोन की कीमत भारत में 10,990 रुपए है।
देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी Infosys का चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शुद्ध मुनाफा 3. 7 प्रतिशत बढ़कर 3,612 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की पहली तिमाही में कंपनी को 3,483 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था।
अमेरिका के एक शीर्ष उद्योगपति जॉन चैंबर्स का मानना है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद यदि नरेंद्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने का मौका नहीं मिलता है तो भारत के प्रभावशाली विकास और समावेशी वृद्धि के लिए यह जोखिम भरा होगा।
फर्नीचर बनाने वाली स्वीडन की दिग्गज कंपनी आइकिया ने हैदराबाद में अपने पहले स्टोर के उद्घाटन की तारीख को लगभग 20 दिन के लिए टाल दिया है।
कमजोर वैश्विक रुख तथा स्थानीय आभूषण विनिर्माताओं की मांग घटने से दिल्ली सर्राफा बाजार में आज सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट का रुख रहा। सोना 95 रुपए और टूटकर 31,115 रुपए प्रति दस ग्राम पर आ गया।
रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर परामर्शदाता कंपनी आरईपीएल ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से करीब 19 करोड़ रुपये जुटाये हैं और इसका उपयोग विभिन्न ठेकों को शुरू करने में किया जाएगा।
जापान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सोनी ने अपना फ्लैगशिप स्मार्टफोन सोनी Xperia XA2 Plus से पर्दा उठा दिया है। कंपनी ने इस फोन को लंदन में लॉन्च किया है।
स्वदेशी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी इंटेक्स टेक्नोलॉजीज ने गुरुवार को दो फुल व्यू स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं, जिनका आस्पेक्ट रेश्यो 18:9 है और इनकी कीमत 4,649 रुपए से शुरू होती है।
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने जियो इंस्टीट्यूट को भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साहसिक राजनेता बताया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने टाटा-मिस्त्री विवाद में कहा कि एक कार्यकारी चेयरमैन के पास सर्वाधिकार नहीं होता है और वह ऐसा नहीं सोच सकता है कि बहुलांश शेयरधारक तथा निदेशक मंडल उसका आदेश मानने के लिए तैयार है।
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अब कंपनी ने अपने दो लोकप्रिय हैंडसेट रेडमी नोट पाँच और रेडमी नोट पाँच प्रो के लिए इस पॉलिसी को बदल दिया है। अब कंपनी ने अपने दो लोकप्रिय हैंडसेट रेडमी नोट पाँच और रेडमी नोट पाँच प्रो के लिए इस पॉलिसी को बदल दिया है। मुकेश अंबानी के लिए अच्छी खबरों के आने का सिलसिला जारी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार मुकेश अंबानी एशिया के सबसे धनी इंसान बन गए हैं। देश का विदेशी मुद्रा भंडार छह जुलाई को समाप्त सप्ताह में चौबीस. बयासी करोड़ डॉलर घटकर चार सौ पाँच. इक्यासी अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी के बावजूद आई है। अब रिलायंस ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसके समाने एप्पल भी बौना नज़र आ रहा है। दर असल अब दुनिया में तहलका मचाया है उस ऑपरेटिंग सिस्टम ने जिस पर जियो फोन चलता है। चीन की दिग्गज स्मार्टफोन कंपनी ओप्पो ने इसी हफ्ते अपना नया फोन ओप्पो फाइंड एक्स लॉन्च कर धमाल मचा दिया है। आइए जानते हैं चार्जिंग के दौरान होने वाली उन गलतियों के बारे में जो आपका फोन और आपका जीवन खराब कर सकती हैं। चीन की प्रमुख स्मार्टफोन कंपनी वीवो उन्नीस जुलाई को भारत में अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Vivo Nex लॉन्च करने जा रही है। आपको बता दें कि कंपनी ने पिछले महीने चीन में Vivo Nex सिरीज के तहत दो फोन Nex A और Nex S को लॉन्च किया था। मध्यप्रदेश सरकार छतरपुर जिले की बंदर हीरा खदान को अगले एक-दो महीने में नीलाम करने की तैयारी कर रही है। इस खदान में साठ,शून्य करोड़ रुपए मूल्य का हीरा भंडार होने का अनुमान है। देश का निर्यात जून महीने में सत्रह. सत्तावन प्रतिशत बढ़कर सत्ताईस. सात अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं कच्चे तेल का आयात महंगा होने से व्यापार घाटा साढ़े तीन साल से अधिक के उच्चस्तर सोलह. छः अरब डॉलर हो गया। चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में अपना नया बजट स्मार्टफोन पेश किया है। ओप्पो एतीनएस नामक इस स्मार्टफोन की कीमत भारत में दस,नौ सौ नब्बे रुपयापए है। देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी Infosys का चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शुद्ध मुनाफा तीन. सात प्रतिशत बढ़कर तीन,छः सौ बारह करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की पहली तिमाही में कंपनी को तीन,चार सौ तिरासी करोड़ रुपए का लाभ हुआ था। अमेरिका के एक शीर्ष उद्योगपति जॉन चैंबर्स का मानना है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद यदि नरेंद्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने का मौका नहीं मिलता है तो भारत के प्रभावशाली विकास और समावेशी वृद्धि के लिए यह जोखिम भरा होगा। फर्नीचर बनाने वाली स्वीडन की दिग्गज कंपनी आइकिया ने हैदराबाद में अपने पहले स्टोर के उद्घाटन की तारीख को लगभग बीस दिन के लिए टाल दिया है। कमजोर वैश्विक रुख तथा स्थानीय आभूषण विनिर्माताओं की मांग घटने से दिल्ली सर्राफा बाजार में आज सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट का रुख रहा। सोना पचानवे रुपयापए और टूटकर इकतीस,एक सौ पंद्रह रुपयापए प्रति दस ग्राम पर आ गया। रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर परामर्शदाता कंपनी आरईपीएल ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से करीब उन्नीस करोड़ रुपये जुटाये हैं और इसका उपयोग विभिन्न ठेकों को शुरू करने में किया जाएगा। जापान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सोनी ने अपना फ्लैगशिप स्मार्टफोन सोनी Xperia XAदो Plus से पर्दा उठा दिया है। कंपनी ने इस फोन को लंदन में लॉन्च किया है। स्वदेशी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी इंटेक्स टेक्नोलॉजीज ने गुरुवार को दो फुल व्यू स्मार्टफोन लॉन्च किए हैं, जिनका आस्पेक्ट रेश्यो अट्ठारह:नौ है और इनकी कीमत चार,छः सौ उनचास रुपयापए से शुरू होती है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने जियो इंस्टीट्यूट को भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साहसिक राजनेता बताया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने टाटा-मिस्त्री विवाद में कहा कि एक कार्यकारी चेयरमैन के पास सर्वाधिकार नहीं होता है और वह ऐसा नहीं सोच सकता है कि बहुलांश शेयरधारक तथा निदेशक मंडल उसका आदेश मानने के लिए तैयार है।
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नई दिल्ली कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से देश में कोरोना की तीसरी लहर का आना लगभग तय हो गया है।
एजेंसियां - वाशिंगटन अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को सफलतापूर्वक लांच कर दिया है। इस काम में यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने नासा की मदद की है। जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप हबल टेलिस्कोप की जगह लेगा। अंतरिक्ष में तैनात होने वाली यह आंखें ब्रह्मांड की सुदूर गहराइयों में मौजूद आकाशगंगाओं,
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नई दिल्ली कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से देश में कोरोना की तीसरी लहर का आना लगभग तय हो गया है। एजेंसियां - वाशिंगटन अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप को सफलतापूर्वक लांच कर दिया है। इस काम में यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने नासा की मदद की है। जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप हबल टेलिस्कोप की जगह लेगा। अंतरिक्ष में तैनात होने वाली यह आंखें ब्रह्मांड की सुदूर गहराइयों में मौजूद आकाशगंगाओं,
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खरगोश प्रत्येक शिकारी की सबसे इच्छित ट्राफियां है। हमारे अक्षांश में इस बड़े पैमाने पर जंगली जानवर को ट्रैक करने और शूटिंग करने की बहुत प्रक्रिया बहुत खुशी लेती है और थकाऊ शौक के बाद ठीक से ताज़ा होना चाहिए इन उद्देश्यों के लिए, एक पहाड़ी खरगोश बेहतर अनुकूल है। अपने साथी देशवासियों की तुलना में, निचले स्थान में रहने वाले, दलदली जगहों पर, वह अपने स्वाद के गुणों के लिए अनुकूल है। यह भी माना जाता है कि खरगोश का मांस सफेद मछली से बेहतर है भोजन में खपत के लिए, एक युवा पशु को गोली मारना वांछनीय है। इस तरह की शिकार के बाद पकाया जा सकता है सबसे अच्छा पकवान, एक खरगोश क्रीम में बादाम है हम सभी पाक रहस्यों को प्रकट करेंगे, और आपको कुछ वैकल्पिक व्यंजनों भी बताएंगे।
खट्टे क्रीम में एक खरगोश की ताज़ी चीज काफी आसानी से पकायी जा सकती है। पकाने की विधि और कुछ अतिरेक शामिल नहीं है, केवल मुख्य उत्पादों। इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः
- एक खरगोश का मांस;
- प्याज (तीन से अधिक सिर);
- खट्टा क्रीम का एक गिलास (200-250 ग्राम);
- थोड़ा सा वनस्पति तेल;
- साग;
- नमक।
खाना पकाने शुरू करने से पहले, आपको जानवर के शव को तैयार करना होगा। बेहतर अभी भी कुछ घंटों के लिए सिरका (1 गिलास) के साथ पानी (1 लीटर) में मांस छोड़ दें। इसके बाद, छोटे टुकड़ों में खरगोश काट कर, इसे पका हुआ ट्रे पर डालकर नमक जोड़ें। तो छिड़क प्याज के छल्ले और कटा हुआ जड़ी बूटियों के साथ शीर्ष। फ्राइंग के लिए तेल जोड़ें और ओवन में पाक ट्रे डाल दें। सेंकना जब तक मांस एक हल्के सुनहरा परत के साथ कवर किया जाता है। अब खरगोश निकालने के लिए तैयार है। मांस को गहरी सॉस पैन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। खट्टा क्रीम को रस के साथ मिश्रित किया जाना चाहिए, जो फ्राइंग के बाद पका रही चादर पर बने रहे। जिसके परिणामस्वरूप सॉस मांस पर डाला जाना चाहिए हरे, कम गर्मी पर खट्टा क्रीम में stewed, आधे घंटे में तैयार हो जाएगा। बोन एपेटिट!
अब दूसरे विकल्प पर विचार करें। लहसुन - मांस के लिए एक आदर्श मसाला, यह एक रसीला स्वाद और तीक्ष्णता देता है आवश्यक सामग्री की सूची मेंः
- हरे (वजन के बारे में 2 किलो);
- एक बड़ी गाजर;
- प्याज की एक ही संख्या;
- 3 लौंग लहसुन;
- फैटी खट्टा क्रीम का आधा लीटर;
कदम से कदम हम तैयारी के एक और संभव संस्करण का वर्णन करेंगे। कई लोग इन जानवरों के मांस के सूखापन और कठोरता के बारे में शिकायत करते हैं। यदि आपका लक्ष्य स्वादिष्ट और मुलायम सता है, तो खट्टे क्रीम में बादा डाले जाते हैं, तो नुस्खा किसी भी वसा वाले उत्पाद के साथ अलग-अलग होना चाहिए, उदाहरण के लिए, चरबी।
शुरू करने के लिए, मांस के टुकड़े बेकन के साथ भरवां होना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आपको लगभग 100 ग्राम वसा की आवश्यकता होती है। फिर मांस को काली मिर्च, नमक जोड़ने, खट्टा क्रीम (1 गिलास) जोड़ने चाहिए। अब आपको आधा पकाए जाने तक ओवन में मांस पकाने का एक अभ्यस्त तरीका चाहिए।
अब हम खरगोश को बुझाना शुरू कर देंगे। ऐसा करने के लिए, मांस को एक गहरी कटोरी में डालकर, यह शोरबा (लगभग 2 गिलास) पर डालें, अधिक खट्टा क्रीम (1 कांच) जोड़ें और पैन को धीमी गति से लगा दें, जहां तक हम काम नहीं करते हैं।
लेकिन यह सब नहीं है पैन में, मक्खन (लगभग 50 ग्राम) पिघलता है, इसमें 2 बड़े चम्मच जोड़ें। एल। आटा, मिश्रण अच्छी तरह से। फिर शोरबा जिसमें मांस का पकवान किया गया था जोड़ें, और कुछ मिनट के लिए जिसके परिणामस्वरूप द्रव्यमान उबाल लें। इस सॉस को सब्ज़ के टुकड़ों के साथ सॉसपैशन में जोड़ा जाना चाहिए, फिर से बर्तन आग में डाल दें और स्टोव को बंद करें जब तरल एक फोड़ा पर लाया जाए।
अब आप डिब्बे को बीट या सेम के साथ सजाने और मेज पर काम कर सकते हैं।
एक समान पकवान तैयार करने के लिए, आपको इसकी आवश्यकता होगीः
- खरगोश;
- 4 लौंग लहसुन;
- सूखे फल के आधे गिलास से थोड़ा सा;
- फैटी खट्टा क्रीम का आधा लीटर;
- 2 बड़े प्याज के सिर;
- एक बड़ी गाजर;
- मसाले ( प्रोवेन्स जड़ी-बूटियों, दौनी, काली मिर्च पर ध्यान देना बेहतर है);
- नमक।
सबसे पहले, मांस लहसुन के साथ पोंछते हुए और जड़ी बूटियों और थोड़ा वनस्पति तेल जोड़ने के बाद मसालेदार होना चाहिए। Prunes उबलते पानी के साथ डाला जाना चाहिए, ताकि यह सूख जाता है। एक गहरे कंटेनर में, कटा सब्जियों को हल्के से कुचल दें, फिर उन्हें सूखे फल जोड़ें। अब यह हरे का कड़ाही कड़ाही में झुका हुआ था। पहले थोड़ा तलना केवल मांस पर चलो, और फिर आपको पैन और सब्जियों को सब्जियों के साथ जोड़ना होगा।
खरगोश को एक घंटे के लिए गरम किया जाना चाहिए, इसे पतला खट्टा क्रीम के साथ पूर्व पानी देना चाहिए। उंगलियों चाटना!
प्राईस केवल मिठास नहीं हैं, जो मांस के साथ मिलती हैं। आप एक खरगोश बना सकते हैं, सेब के साथ खट्टा क्रीम में बाँक। यहां कोई विशेष पाक रहस्य नहीं है। आप उपरोक्त किसी भी नुस्खा को ले जा सकते हैं और मिठाई किस्मों के सेब के साथ इसे सही कर सकते हैं। यह केवल ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बर्तन के नीचे आप पहले कुचल फल बाहर रखना चाहिए, और फिर मांस और अन्य सामग्री।
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खरगोश प्रत्येक शिकारी की सबसे इच्छित ट्राफियां है। हमारे अक्षांश में इस बड़े पैमाने पर जंगली जानवर को ट्रैक करने और शूटिंग करने की बहुत प्रक्रिया बहुत खुशी लेती है और थकाऊ शौक के बाद ठीक से ताज़ा होना चाहिए इन उद्देश्यों के लिए, एक पहाड़ी खरगोश बेहतर अनुकूल है। अपने साथी देशवासियों की तुलना में, निचले स्थान में रहने वाले, दलदली जगहों पर, वह अपने स्वाद के गुणों के लिए अनुकूल है। यह भी माना जाता है कि खरगोश का मांस सफेद मछली से बेहतर है भोजन में खपत के लिए, एक युवा पशु को गोली मारना वांछनीय है। इस तरह की शिकार के बाद पकाया जा सकता है सबसे अच्छा पकवान, एक खरगोश क्रीम में बादाम है हम सभी पाक रहस्यों को प्रकट करेंगे, और आपको कुछ वैकल्पिक व्यंजनों भी बताएंगे। खट्टे क्रीम में एक खरगोश की ताज़ी चीज काफी आसानी से पकायी जा सकती है। पकाने की विधि और कुछ अतिरेक शामिल नहीं है, केवल मुख्य उत्पादों। इसलिए, हमें इसकी आवश्यकता हैः - एक खरगोश का मांस; - प्याज ; - खट्टा क्रीम का एक गिलास ; - थोड़ा सा वनस्पति तेल; - साग; - नमक। खाना पकाने शुरू करने से पहले, आपको जानवर के शव को तैयार करना होगा। बेहतर अभी भी कुछ घंटों के लिए सिरका के साथ पानी में मांस छोड़ दें। इसके बाद, छोटे टुकड़ों में खरगोश काट कर, इसे पका हुआ ट्रे पर डालकर नमक जोड़ें। तो छिड़क प्याज के छल्ले और कटा हुआ जड़ी बूटियों के साथ शीर्ष। फ्राइंग के लिए तेल जोड़ें और ओवन में पाक ट्रे डाल दें। सेंकना जब तक मांस एक हल्के सुनहरा परत के साथ कवर किया जाता है। अब खरगोश निकालने के लिए तैयार है। मांस को गहरी सॉस पैन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। खट्टा क्रीम को रस के साथ मिश्रित किया जाना चाहिए, जो फ्राइंग के बाद पका रही चादर पर बने रहे। जिसके परिणामस्वरूप सॉस मांस पर डाला जाना चाहिए हरे, कम गर्मी पर खट्टा क्रीम में stewed, आधे घंटे में तैयार हो जाएगा। बोन एपेटिट! अब दूसरे विकल्प पर विचार करें। लहसुन - मांस के लिए एक आदर्श मसाला, यह एक रसीला स्वाद और तीक्ष्णता देता है आवश्यक सामग्री की सूची मेंः - हरे ; - एक बड़ी गाजर; - प्याज की एक ही संख्या; - तीन लौंग लहसुन; - फैटी खट्टा क्रीम का आधा लीटर; कदम से कदम हम तैयारी के एक और संभव संस्करण का वर्णन करेंगे। कई लोग इन जानवरों के मांस के सूखापन और कठोरता के बारे में शिकायत करते हैं। यदि आपका लक्ष्य स्वादिष्ट और मुलायम सता है, तो खट्टे क्रीम में बादा डाले जाते हैं, तो नुस्खा किसी भी वसा वाले उत्पाद के साथ अलग-अलग होना चाहिए, उदाहरण के लिए, चरबी। शुरू करने के लिए, मांस के टुकड़े बेकन के साथ भरवां होना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आपको लगभग एक सौ ग्राम वसा की आवश्यकता होती है। फिर मांस को काली मिर्च, नमक जोड़ने, खट्टा क्रीम जोड़ने चाहिए। अब आपको आधा पकाए जाने तक ओवन में मांस पकाने का एक अभ्यस्त तरीका चाहिए। अब हम खरगोश को बुझाना शुरू कर देंगे। ऐसा करने के लिए, मांस को एक गहरी कटोरी में डालकर, यह शोरबा पर डालें, अधिक खट्टा क्रीम जोड़ें और पैन को धीमी गति से लगा दें, जहां तक हम काम नहीं करते हैं। लेकिन यह सब नहीं है पैन में, मक्खन पिघलता है, इसमें दो बड़े चम्मच जोड़ें। एल। आटा, मिश्रण अच्छी तरह से। फिर शोरबा जिसमें मांस का पकवान किया गया था जोड़ें, और कुछ मिनट के लिए जिसके परिणामस्वरूप द्रव्यमान उबाल लें। इस सॉस को सब्ज़ के टुकड़ों के साथ सॉसपैशन में जोड़ा जाना चाहिए, फिर से बर्तन आग में डाल दें और स्टोव को बंद करें जब तरल एक फोड़ा पर लाया जाए। अब आप डिब्बे को बीट या सेम के साथ सजाने और मेज पर काम कर सकते हैं। एक समान पकवान तैयार करने के लिए, आपको इसकी आवश्यकता होगीः - खरगोश; - चार लौंग लहसुन; - सूखे फल के आधे गिलास से थोड़ा सा; - फैटी खट्टा क्रीम का आधा लीटर; - दो बड़े प्याज के सिर; - एक बड़ी गाजर; - मसाले ; - नमक। सबसे पहले, मांस लहसुन के साथ पोंछते हुए और जड़ी बूटियों और थोड़ा वनस्पति तेल जोड़ने के बाद मसालेदार होना चाहिए। Prunes उबलते पानी के साथ डाला जाना चाहिए, ताकि यह सूख जाता है। एक गहरे कंटेनर में, कटा सब्जियों को हल्के से कुचल दें, फिर उन्हें सूखे फल जोड़ें। अब यह हरे का कड़ाही कड़ाही में झुका हुआ था। पहले थोड़ा तलना केवल मांस पर चलो, और फिर आपको पैन और सब्जियों को सब्जियों के साथ जोड़ना होगा। खरगोश को एक घंटे के लिए गरम किया जाना चाहिए, इसे पतला खट्टा क्रीम के साथ पूर्व पानी देना चाहिए। उंगलियों चाटना! प्राईस केवल मिठास नहीं हैं, जो मांस के साथ मिलती हैं। आप एक खरगोश बना सकते हैं, सेब के साथ खट्टा क्रीम में बाँक। यहां कोई विशेष पाक रहस्य नहीं है। आप उपरोक्त किसी भी नुस्खा को ले जा सकते हैं और मिठाई किस्मों के सेब के साथ इसे सही कर सकते हैं। यह केवल ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बर्तन के नीचे आप पहले कुचल फल बाहर रखना चाहिए, और फिर मांस और अन्य सामग्री।
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डोनाल्ड ट्रंप के दोवसीय भारत दौरे से पहले वाइट हाउस ने पाकिस्तान को लेकर एक बयान दिया है। अमेरिका ने कहा है कि आतंकवाद और बातचीत सा-साथ नहीं चल सकते हैं। दरअसल, भारत हमेसा से पाक को यही कहता आया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं, अब यही सुर मिलाते हुए अमेरिका ने भी बोला है।
वाइट हाउस ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को लेकर कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत तभी सफल होगी जब पाकिस्तान अपने देश में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई करे।
राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप का 24 और 25 फरवरी को अहमदाबाद और नई दिल्ली जाने का कार्यक्रम है। आगरा जाने का कार्यक्रम भी संभावित है। उनके साथ 12 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी होगा। वाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि, हमारा हमेशा से मानना है कि दोनों देशों (भारत और पाक) के बीच किसी भी सफल बतचीत की नींव पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि, मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप दोनों देशों से नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ ऐसी कार्रवाई या बयानों से बचने का अनुरोध करेंगे जो क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप के दोवसीय भारत दौरे से पहले वाइट हाउस ने पाकिस्तान को लेकर एक बयान दिया है। अमेरिका ने कहा है कि आतंकवाद और बातचीत सा-साथ नहीं चल सकते हैं। दरअसल, भारत हमेसा से पाक को यही कहता आया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं, अब यही सुर मिलाते हुए अमेरिका ने भी बोला है। वाइट हाउस ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने को लेकर कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत तभी सफल होगी जब पाकिस्तान अपने देश में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई करे। राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप का चौबीस और पच्चीस फरवरी को अहमदाबाद और नई दिल्ली जाने का कार्यक्रम है। आगरा जाने का कार्यक्रम भी संभावित है। उनके साथ बारह सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी होगा। वाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि, हमारा हमेशा से मानना है कि दोनों देशों के बीच किसी भी सफल बतचीत की नींव पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में आतंकवादियों और चरमपंथियों पर कार्रवाई पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि, मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप दोनों देशों से नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ ऐसी कार्रवाई या बयानों से बचने का अनुरोध करेंगे जो क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं।
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आंकड़ों की मानें तो दुनियाभर में 8,360 लाख से भी ज्यादा बच्चों पर परजीवी संक्रमण होने का खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1 से 14 साल के 2,410 लाख भारतीय बच्चों में पेट में कीड़े होने का जोखिम है। इसे सॉइल ट्रांसमिटिड हेल्मिंथ्स भी कहते हैं।
इस दिन 1 से 19 साल के बच्चों को सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी में काम करने वाले लोगों से पेट के कीड़ों के लिए ट्रीटमेंट मिलती है। सबसे पहली बार यह दिवस फरवरी 2015 में मनाया गया था और 11 राज्यों में 8. 9 करोड़ बच्चों को कीड़े मारने की गोली खिलाई थी। इस बार इस कार्यक्रम की सफलता की दर 85 पर्सेंट थी और इसके बाद फरवरी 2016 में 88 पर्सेंट, अगस्त 2016 में 77 पर्सेंट और फरवरी एवं अगस्त 2017 में 88 पर्सेंट रही।
साल 2018 तक 26. 68 करोड़ बच्चों को एल्बेंडाजोल दी गई थी और 1 से 19 साल के 114 करोड़ से ज्यादा बच्चों को 2015 तक एल्बेंडाजोल दी जा चुकी थी।
ये कीड़े आंतों में रहते हैं और आप जो भी खाते हैं, उसका सारा पोषण खुद चूस लेते हैं। बार-बार कीड़े होने पर व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है, उसमें खून की कमी हो सकती है और उसका विकास भी प्रभावित हो सकता है।
ये परजीवी गंदी जगहों पर संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने पर शरीर में घुस जाते हैं। मिट्टी में मल होने पर ये परजीवी वहां उगने वाले खाद्य पदार्थों में घुस जाते हैं।
बच्चों को पेट में कीड़े होने से बचाने के लिए, उन्हें खाना खाने से पहले और बाद में हाथ धोना सिखाएं। टॉयलेट में बच्चों को चप्पल पहनकर जाना सिखाएं और खुले में शौच करने से मना करें।
हमेशा साफ पानी पिएं और अच्छे से पका हुआ खाना खाएं, कच्ची चीजें खाने से बचें और सब्जियों एवं फलों को खाने से पहले धो लें। सलाद के लिए सब्जियों को धोने में विशेष सावधानी रखें।
कीड़ों की वजह से एनीमिया और कुपोषण हो सकता है जिसका बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। कुपोषित और एनीमिया वाले बच्चे का वजन भी कम हो सकता है और उसका विकास रूक सकता है। ज्यादा संक्रमण होने पर बच्चा हमेशा बीमारी रहता है और थकान महसूस करता है। उसे पढ़ाई करने या स्कूल जाने में भी दिक्कत होती है।
कीड़ों के इलाज के लिए सरकार एल्बेंडाजोज की सलाह देती है। 2 से 19 साल के बच्चों को इसकी 400 मिलीग्राम की एक खुराक और 1 से 2 साल के बच्चों को 200 मिलीग्राम की आधी गोली देनी चाहिए।
शरीर से कीड़़ों को खत्म करने के लिए आयुर्वेदिक इलाज भी मौजूद हैं। अजवाइन, काली मिर्च, हींग, काला नमक, सौंठ, अदरक, हल्दी कीड़े मारने के लिए अच्छी होती है।
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आंकड़ों की मानें तो दुनियाभर में आठ,तीन सौ साठ लाख से भी ज्यादा बच्चों पर परजीवी संक्रमण होने का खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक से चौदह साल के दो,चार सौ दस लाख भारतीय बच्चों में पेट में कीड़े होने का जोखिम है। इसे सॉइल ट्रांसमिटिड हेल्मिंथ्स भी कहते हैं। इस दिन एक से उन्नीस साल के बच्चों को सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी में काम करने वाले लोगों से पेट के कीड़ों के लिए ट्रीटमेंट मिलती है। सबसे पहली बार यह दिवस फरवरी दो हज़ार पंद्रह में मनाया गया था और ग्यारह राज्यों में आठ. नौ करोड़ बच्चों को कीड़े मारने की गोली खिलाई थी। इस बार इस कार्यक्रम की सफलता की दर पचासी पर्सेंट थी और इसके बाद फरवरी दो हज़ार सोलह में अठासी पर्सेंट, अगस्त दो हज़ार सोलह में सतहत्तर पर्सेंट और फरवरी एवं अगस्त दो हज़ार सत्रह में अठासी पर्सेंट रही। साल दो हज़ार अट्ठारह तक छब्बीस. अड़सठ करोड़ बच्चों को एल्बेंडाजोल दी गई थी और एक से उन्नीस साल के एक सौ चौदह करोड़ से ज्यादा बच्चों को दो हज़ार पंद्रह तक एल्बेंडाजोल दी जा चुकी थी। ये कीड़े आंतों में रहते हैं और आप जो भी खाते हैं, उसका सारा पोषण खुद चूस लेते हैं। बार-बार कीड़े होने पर व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है, उसमें खून की कमी हो सकती है और उसका विकास भी प्रभावित हो सकता है। ये परजीवी गंदी जगहों पर संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने पर शरीर में घुस जाते हैं। मिट्टी में मल होने पर ये परजीवी वहां उगने वाले खाद्य पदार्थों में घुस जाते हैं। बच्चों को पेट में कीड़े होने से बचाने के लिए, उन्हें खाना खाने से पहले और बाद में हाथ धोना सिखाएं। टॉयलेट में बच्चों को चप्पल पहनकर जाना सिखाएं और खुले में शौच करने से मना करें। हमेशा साफ पानी पिएं और अच्छे से पका हुआ खाना खाएं, कच्ची चीजें खाने से बचें और सब्जियों एवं फलों को खाने से पहले धो लें। सलाद के लिए सब्जियों को धोने में विशेष सावधानी रखें। कीड़ों की वजह से एनीमिया और कुपोषण हो सकता है जिसका बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। कुपोषित और एनीमिया वाले बच्चे का वजन भी कम हो सकता है और उसका विकास रूक सकता है। ज्यादा संक्रमण होने पर बच्चा हमेशा बीमारी रहता है और थकान महसूस करता है। उसे पढ़ाई करने या स्कूल जाने में भी दिक्कत होती है। कीड़ों के इलाज के लिए सरकार एल्बेंडाजोज की सलाह देती है। दो से उन्नीस साल के बच्चों को इसकी चार सौ मिलीग्राम की एक खुराक और एक से दो साल के बच्चों को दो सौ मिलीग्राम की आधी गोली देनी चाहिए। शरीर से कीड़़ों को खत्म करने के लिए आयुर्वेदिक इलाज भी मौजूद हैं। अजवाइन, काली मिर्च, हींग, काला नमक, सौंठ, अदरक, हल्दी कीड़े मारने के लिए अच्छी होती है।
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Anushka Sharma ने Virat Kohli संग शेयर कीं अनसीन फोटोज, बताया कैसे बीते शादी के पांच साल!
Anushka Sharma And Virat Kohli 5th Wedding Anniversary: बॉलीवुड कपल विराट और अनुष्का ने 11 दिसंबर 2017 को इटली में ड्रीमी वेडिंग की थी। अनुष्का ने अब कुछ फोटोज शेयर कर लिखा, 'इन प्यारी फोटोज को पोस्ट करने के लिए इससे बेहतर दिन क्या हो सकता है, हमें सेलिब्रेट करने के लिए, माय लव। '
Optical Illusion: 7 सेकंड में खोजना है Look, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'रॉबिनहुड'
Opinion India Ka : Atique ज़िंदा होता. . . तो भी खजाना नहीं बच पाता !
News Ki Pathshala । Sushant Sinha । रेसलर्स की जंग 2024 में Modi के खिलाफ इस्तेमाल ?
वो मस्जिद जो टूटती तो है पर दिखाई नहीं देती !
News Ki Pathshala । Sushant Sinha । अब मोदी का इंडिया चीन को घर में घुसकर मारेगा ?
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Anushka Sharma ने Virat Kohli संग शेयर कीं अनसीन फोटोज, बताया कैसे बीते शादी के पांच साल! Anushka Sharma And Virat Kohli पाँचth Wedding Anniversary: बॉलीवुड कपल विराट और अनुष्का ने ग्यारह दिसंबर दो हज़ार सत्रह को इटली में ड्रीमी वेडिंग की थी। अनुष्का ने अब कुछ फोटोज शेयर कर लिखा, 'इन प्यारी फोटोज को पोस्ट करने के लिए इससे बेहतर दिन क्या हो सकता है, हमें सेलिब्रेट करने के लिए, माय लव। ' Optical Illusion: सात सेकंड में खोजना है Look, ढूंढ लिया तो कहलाएंगे 'रॉबिनहुड' Opinion India Ka : Atique ज़िंदा होता. . . तो भी खजाना नहीं बच पाता ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । रेसलर्स की जंग दो हज़ार चौबीस में Modi के खिलाफ इस्तेमाल ? वो मस्जिद जो टूटती तो है पर दिखाई नहीं देती ! News Ki Pathshala । Sushant Sinha । अब मोदी का इंडिया चीन को घर में घुसकर मारेगा ?
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यूपी के कानपुर शहर में इस समय हैसियत अाैर शराब काे लेकर मारामारी मची हुई है। हालात इतने बिगड़ गए कि इसके लिए मुख्यमंत्री काे दखल देना पड़ा अाखिर मामला भी उस विभाग का है जाे राजस्व देने में सबसे अागे रहता है।
कानपुर कलक्ट्रेट और तहसीलों में इस समय हैसियत प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मारामारी मची है। शराब की दुकानों के लिए आवेदन में जरूरी होने के कारण हैसियत प्रमाणपत्र की मांग एकदम से बढ़ गई है। दस दिन में 979 आवेदन आए हैं। इनमें से अभी तक सिर्फ 225 ही जारी हो सके हैं। शराब की दुकानों के लिए 19 से 26 तक ही आवेदन कर सकते हैं।
शराब की दुकानों के लिए आवेदन करने वाले लोगों की भीड़ कलक्ट्रेट और सदर तहसील में लग रही है। नजारत में आवेदन जमा हो रहे हैं। इसके बाद संबंधित तहसील को भेजे जाते हैं। ज्यादातर आवेदन सदर तहसील के ही हैं। चल और अचल संपत्ति का आकंलन कर वैल्युअर अपनी रिपोर्ट लगाता है।
इसके बाद नायब तहसीलदार, तहसीलदार और फिर एसडीएम के साइन होते हैं। इसके बाद एडीएम फाइनेंस और फिर आखिर में जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से हैसियत प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है जल्द से जल्द हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया है।
आवेदकों को वैल्युअर की लिस्ट भी दी जा रही है जिससे वह जल्द उनसे अपनी संपत्ति का आकंलन करा सके। मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि शराब दुकानों के लिए आवेदन की तारीख से पहले हैसियत प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाएं। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. आदर्श सिंह ने जिलाधिकारी को इस बारे में पत्र लिखा है।
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यूपी के कानपुर शहर में इस समय हैसियत अाैर शराब काे लेकर मारामारी मची हुई है। हालात इतने बिगड़ गए कि इसके लिए मुख्यमंत्री काे दखल देना पड़ा अाखिर मामला भी उस विभाग का है जाे राजस्व देने में सबसे अागे रहता है। कानपुर कलक्ट्रेट और तहसीलों में इस समय हैसियत प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मारामारी मची है। शराब की दुकानों के लिए आवेदन में जरूरी होने के कारण हैसियत प्रमाणपत्र की मांग एकदम से बढ़ गई है। दस दिन में नौ सौ उन्यासी आवेदन आए हैं। इनमें से अभी तक सिर्फ दो सौ पच्चीस ही जारी हो सके हैं। शराब की दुकानों के लिए उन्नीस से छब्बीस तक ही आवेदन कर सकते हैं। शराब की दुकानों के लिए आवेदन करने वाले लोगों की भीड़ कलक्ट्रेट और सदर तहसील में लग रही है। नजारत में आवेदन जमा हो रहे हैं। इसके बाद संबंधित तहसील को भेजे जाते हैं। ज्यादातर आवेदन सदर तहसील के ही हैं। चल और अचल संपत्ति का आकंलन कर वैल्युअर अपनी रिपोर्ट लगाता है। इसके बाद नायब तहसीलदार, तहसीलदार और फिर एसडीएम के साइन होते हैं। इसके बाद एडीएम फाइनेंस और फिर आखिर में जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से हैसियत प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है जल्द से जल्द हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया है। आवेदकों को वैल्युअर की लिस्ट भी दी जा रही है जिससे वह जल्द उनसे अपनी संपत्ति का आकंलन करा सके। मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि शराब दुकानों के लिए आवेदन की तारीख से पहले हैसियत प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाएं। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. आदर्श सिंह ने जिलाधिकारी को इस बारे में पत्र लिखा है।
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आज मैं आपके साथ गेहूं के आटे से ब्राउनी बनाना बताउंगी। जो हेल्दी ब्राउनी रेसिपी भी है। ये बहुत ही डिलीशियस बनती हैं। अब आप बिना मैदे के भी ब्राउनी बनाकर खा सकते हैं और वो भी बहुत आसानी से।
ब्राउनी बनाने के लिए सबसे पहले डार्क चॉकलेट को डबल बोइलिंग मेथड से मेल्ट कर ले। एक पैन में गर्म पानी करके इसके ऊपर एक कांच का बाउल रखकर इसमें बटर और डार्क चॉकलेट डालकर चम्मच से कंटिन्यू स्टर करते हुए तब तक मिक्स करते रहे। जब तक चॉकलेट और बटर मेल्ट नही हो जाती हैं। (पैन में पानी इतना होना चाहिए जो बाउल की तली को टच नही करे वरना चॉकलेट ख़राब हो जाएँगी)
उसके बाद बाउल को पैन से हटाकर मेल्टेड चॉकलेट को दूसरे बाउल में कर ले। अब बाउल के ऊपर बारीक छन्नी रखकर इसमें गेहूं का आटा, पिसी हुई चीनी,बेकिंग सोडा, बेकिंग पाउडर और कोको पाउडर डालकर इन चीज़ों को छान ले।
फिर छन्नी को हटा ले और सारी चीज़ों को स्पेचुला की हेल्प से मिक्स करे। आपको स्पेचुला से सब चीज़ों को पहले फोल्ड फिर बीच में एक कट लगाते हुए मिक्स करना हैं। उसके बाद स्मूद बेटर बनाने के लिए इसमें दूध डालकर इसी तरह से मिक्स करते हुए बेटर बनाना हैं।
बेटर जब रेडी हो जाएँ, तब इसमें कटे हुए बादाम डालकर मिक्स कर ले। फिर एक पैन में स्टैंड रखकर इसको मीडियम आंच पर 5 से 7 मिनट ढककर प्रीहीट होने के लिए रख दे। उसके बाद एक मोल्ड को ऑइल से ग्रीस करके इसमें बटर पेपर रखकर इसको भी ग्रीस कर ले।
फिर बेटर को मोल्ड में डालकर बारीक कटे हुए बादाम से सजा ले और बेटर को टेप कर ले। फिर प्रीहीट पैन में स्टैंड के ऊपर मोल्ड को रखकर पैन को ढक दे और मीडियम टू लो आंच पर बेटर को 30 से 35 मिनट बेक कर ले।
बीच में आप एक बार बेटर में टूथपिक डालकर चेक ज़रूर कर ले। अगर बेटर टूथपिक पर चिपक रहा हैं, तो अभी ब्राउनी को और बेक होने दे। अगर टूथपिक पर बेटर नही चिपकता हैं, तो ब्राउनी बन चुकी हैं। फिर गैस को बंद करके मोल्ड को पैन से निकाल ले।
ब्राउनी को ठंडा होने के बाद मोल्ड से ब्राउनी को निकालकर नाइफ से पीस में काट ले। आपकी आटे से डिलीशियस ब्राउनी बनकर रेडी हैं। जो बहुत ही मज़े की बनती हैं।
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आज मैं आपके साथ गेहूं के आटे से ब्राउनी बनाना बताउंगी। जो हेल्दी ब्राउनी रेसिपी भी है। ये बहुत ही डिलीशियस बनती हैं। अब आप बिना मैदे के भी ब्राउनी बनाकर खा सकते हैं और वो भी बहुत आसानी से। ब्राउनी बनाने के लिए सबसे पहले डार्क चॉकलेट को डबल बोइलिंग मेथड से मेल्ट कर ले। एक पैन में गर्म पानी करके इसके ऊपर एक कांच का बाउल रखकर इसमें बटर और डार्क चॉकलेट डालकर चम्मच से कंटिन्यू स्टर करते हुए तब तक मिक्स करते रहे। जब तक चॉकलेट और बटर मेल्ट नही हो जाती हैं। उसके बाद बाउल को पैन से हटाकर मेल्टेड चॉकलेट को दूसरे बाउल में कर ले। अब बाउल के ऊपर बारीक छन्नी रखकर इसमें गेहूं का आटा, पिसी हुई चीनी,बेकिंग सोडा, बेकिंग पाउडर और कोको पाउडर डालकर इन चीज़ों को छान ले। फिर छन्नी को हटा ले और सारी चीज़ों को स्पेचुला की हेल्प से मिक्स करे। आपको स्पेचुला से सब चीज़ों को पहले फोल्ड फिर बीच में एक कट लगाते हुए मिक्स करना हैं। उसके बाद स्मूद बेटर बनाने के लिए इसमें दूध डालकर इसी तरह से मिक्स करते हुए बेटर बनाना हैं। बेटर जब रेडी हो जाएँ, तब इसमें कटे हुए बादाम डालकर मिक्स कर ले। फिर एक पैन में स्टैंड रखकर इसको मीडियम आंच पर पाँच से सात मिनट ढककर प्रीहीट होने के लिए रख दे। उसके बाद एक मोल्ड को ऑइल से ग्रीस करके इसमें बटर पेपर रखकर इसको भी ग्रीस कर ले। फिर बेटर को मोल्ड में डालकर बारीक कटे हुए बादाम से सजा ले और बेटर को टेप कर ले। फिर प्रीहीट पैन में स्टैंड के ऊपर मोल्ड को रखकर पैन को ढक दे और मीडियम टू लो आंच पर बेटर को तीस से पैंतीस मिनट बेक कर ले। बीच में आप एक बार बेटर में टूथपिक डालकर चेक ज़रूर कर ले। अगर बेटर टूथपिक पर चिपक रहा हैं, तो अभी ब्राउनी को और बेक होने दे। अगर टूथपिक पर बेटर नही चिपकता हैं, तो ब्राउनी बन चुकी हैं। फिर गैस को बंद करके मोल्ड को पैन से निकाल ले। ब्राउनी को ठंडा होने के बाद मोल्ड से ब्राउनी को निकालकर नाइफ से पीस में काट ले। आपकी आटे से डिलीशियस ब्राउनी बनकर रेडी हैं। जो बहुत ही मज़े की बनती हैं।
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एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि हर किसी को यह चाहिए कि वे रात में हल्का भोजन किया करें और देर रात के खाने से बचा करें। उनके अनुसार, इस तरीके से भोजन करने से हमारी रात की नींद प्रभावित होती है जिससे हमारे सेहत पर भी असर पड़ता है।
Health Tips: आमतौर पर बहुत से लोग ऐसे है जो रात में फल खाना बहुत पसंद करते है और फल के बीना उनका डिनर अधूरा रहता है। लेकिन क्या आप जानते है कि एक अच्छी और गहरी नींद के लिए आपका फल खाना सही नहीं है। जानकार कहते है कि कुछ फल ऐसे हैं जिन्हें रात में खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि ये उस समय आपको फायदा कम नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते है।
ऐसे में आइए यह जानने की कोशिश करते है कि वे कौन-कौन से फल है जिन्हें रात में डिनर के बाद नहीं खाना चाहिए। यही नहीं हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर रात में यह फल खाने से क्यों मना किया जाता है और इसके क्या नुकसान है।
एक्सपर्ट्स की माने तो लोगों को रात में ज्यादा पानी वाले फलों से दूर रहना चाहिए। उन्हें ऐसे फलों का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, फल जैसे तरबूज और खीरा के रात में सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि इन्हें खाने से आपको ज्यादा पेशाब लग सकती है और इससे रात में आपकी नींद खराब हो सकती है। ये आपके नींद की गुणवता को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि पानी वाले फलों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
जिस तरीके से ज्यादा पानी वाले फलों से दूर रहने की सलाह दी जाती है उसी तरीके से लोगों को केला के सेवन से परहेज करने को कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रात में इस फल के सेवन से आपकी समस्या बढ़ सकती है। दिन में खाने के लिए और वर्कआउट के लिए यह फल बहुत ही सही है लेकिन रात में डिनर के बाद या इससे पहले इस फल को खाने से बचें।
जानकार कहते है कि रात में खाना खाने के पहले या बाद में अगर कोई इसे खाता है तो इससे ठंड लग सकती है और इस कारण उसके लगे में बलगम तैयार हो सकता है। उनके अनुसार, इससे आपको अपच भी हो सकती है।
कई लोग रात में सेब जैसे फल को नहीं खाते है और इसके पीछे वे अलग ही तर्क देते है। लेकिन बहुत हद तक यह सच भी है कि रात में डिनर के बाद ऊपर बताए गए फलों के साथ सेब को भी नहीं खाना चाहिए। जानकारों का कहना है कि रात में अगर आप सेब खाते है तो यह जल्दी आपके पेट में पचता नहीं है जिससे आप में अपच की समस्या होती है। ऐसे में यह फल अपच के साथ आप में एसिडिटी की समस्या भी पैदा करती है।
लोगों को मसालेदार फूड्स से भी परहेज करनी की सलाह दी जाती है। रात में डिनर से पहले या फिर बाद में अगर कोई मसालेदार फूड्स का सेवन करता है तो इससे उसे अपच और सीने में जलन की समस्या बढ़ सकती है। बताया जाता है कि इन फूड्स में एक यौगिक कैप्साइसिन पाया जाता है जिसके कारण आपके शरीर का तापमान बढ़ सकता है और इससे आपकी नींद नहीं आ सकती है या अगर सो गए है तो इस कारण आपकी आंख खुल भी सकती है।
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Lokmat Hindi News इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले या इसके बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए डॉक्टरों से जरूर संपर्क करें। )
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एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि हर किसी को यह चाहिए कि वे रात में हल्का भोजन किया करें और देर रात के खाने से बचा करें। उनके अनुसार, इस तरीके से भोजन करने से हमारी रात की नींद प्रभावित होती है जिससे हमारे सेहत पर भी असर पड़ता है। Health Tips: आमतौर पर बहुत से लोग ऐसे है जो रात में फल खाना बहुत पसंद करते है और फल के बीना उनका डिनर अधूरा रहता है। लेकिन क्या आप जानते है कि एक अच्छी और गहरी नींद के लिए आपका फल खाना सही नहीं है। जानकार कहते है कि कुछ फल ऐसे हैं जिन्हें रात में खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि ये उस समय आपको फायदा कम नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते है। ऐसे में आइए यह जानने की कोशिश करते है कि वे कौन-कौन से फल है जिन्हें रात में डिनर के बाद नहीं खाना चाहिए। यही नहीं हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर रात में यह फल खाने से क्यों मना किया जाता है और इसके क्या नुकसान है। एक्सपर्ट्स की माने तो लोगों को रात में ज्यादा पानी वाले फलों से दूर रहना चाहिए। उन्हें ऐसे फलों का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, फल जैसे तरबूज और खीरा के रात में सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि इन्हें खाने से आपको ज्यादा पेशाब लग सकती है और इससे रात में आपकी नींद खराब हो सकती है। ये आपके नींद की गुणवता को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि पानी वाले फलों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। जिस तरीके से ज्यादा पानी वाले फलों से दूर रहने की सलाह दी जाती है उसी तरीके से लोगों को केला के सेवन से परहेज करने को कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि रात में इस फल के सेवन से आपकी समस्या बढ़ सकती है। दिन में खाने के लिए और वर्कआउट के लिए यह फल बहुत ही सही है लेकिन रात में डिनर के बाद या इससे पहले इस फल को खाने से बचें। जानकार कहते है कि रात में खाना खाने के पहले या बाद में अगर कोई इसे खाता है तो इससे ठंड लग सकती है और इस कारण उसके लगे में बलगम तैयार हो सकता है। उनके अनुसार, इससे आपको अपच भी हो सकती है। कई लोग रात में सेब जैसे फल को नहीं खाते है और इसके पीछे वे अलग ही तर्क देते है। लेकिन बहुत हद तक यह सच भी है कि रात में डिनर के बाद ऊपर बताए गए फलों के साथ सेब को भी नहीं खाना चाहिए। जानकारों का कहना है कि रात में अगर आप सेब खाते है तो यह जल्दी आपके पेट में पचता नहीं है जिससे आप में अपच की समस्या होती है। ऐसे में यह फल अपच के साथ आप में एसिडिटी की समस्या भी पैदा करती है। लोगों को मसालेदार फूड्स से भी परहेज करनी की सलाह दी जाती है। रात में डिनर से पहले या फिर बाद में अगर कोई मसालेदार फूड्स का सेवन करता है तो इससे उसे अपच और सीने में जलन की समस्या बढ़ सकती है। बताया जाता है कि इन फूड्स में एक यौगिक कैप्साइसिन पाया जाता है जिसके कारण आपके शरीर का तापमान बढ़ सकता है और इससे आपकी नींद नहीं आ सकती है या अगर सो गए है तो इस कारण आपकी आंख खुल भी सकती है।
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इराक़ में हमलावरों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है. दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 33 लोग मारे गए हैं.
पुलिस का कहना है कि इराक़ में सेना की वर्दी में आए एक आत्मघाती हमलावर के हमले में 25 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए.
यह धमाका सेना की कैंटीन में हुआ जिसे इराक़ी सैनिक इस्तेमाल करते थे. यह हमला बग़दाद से 60 किलोमीटर दूर ख़ालिस शहर में हुआ.
पिछले चार दिनों में सेना की वर्दी पहन कर होनेवाला यह चौथा हमला था.
इसके कुछ घंटे बाद दक्षिण बग़दाद में पुलिस के एक दल पर एक आत्मघाती कार हमला हुआ जिसमें आठ लोग मारे गए.
इसके पहले शनिवार को पुलिस के एक पूर्व कमांडर ने अपनी ही यूनिट के तीन लोगों की हत्या कर दी थी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि इराक़ी सेना में चरमपंथियों ने घुसपैठ कर ली है.
जबकि दूसरी ओर इराक़ी सेना अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान तेज़ कर रही है.
इसके पहले चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए गठित विशेष सैनिक इकाई के मुख्यालय में हुए आत्मघाती हमले में कई सैनिक मारे गए थे.
आत्मघाती हमलावर ने वूल्फ़ ब्रिगेड पुलिस कमांडो के मुख्यालय के अंदर धमाका किया था.
इस हमलावर ने भी पुलिस की पोशाक पहन रखी थी.
अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी चरमपंथी हमले की योजना बना रहे हैं.
छह हफ्ते पहले इराक़ में नई सरकार के गठन के बाद से अबतक की हिंसा में 900 लोग मारे जा चुके हैं.
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इराक़ में हमलावरों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है. दो अलग-अलग हमलों में कम से कम तैंतीस लोग मारे गए हैं. पुलिस का कहना है कि इराक़ में सेना की वर्दी में आए एक आत्मघाती हमलावर के हमले में पच्चीस लोगों की मौत हो गई और तीस से अधिक घायल हो गए. यह धमाका सेना की कैंटीन में हुआ जिसे इराक़ी सैनिक इस्तेमाल करते थे. यह हमला बग़दाद से साठ किलोग्राममीटर दूर ख़ालिस शहर में हुआ. पिछले चार दिनों में सेना की वर्दी पहन कर होनेवाला यह चौथा हमला था. इसके कुछ घंटे बाद दक्षिण बग़दाद में पुलिस के एक दल पर एक आत्मघाती कार हमला हुआ जिसमें आठ लोग मारे गए. इसके पहले शनिवार को पुलिस के एक पूर्व कमांडर ने अपनी ही यूनिट के तीन लोगों की हत्या कर दी थी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि इराक़ी सेना में चरमपंथियों ने घुसपैठ कर ली है. जबकि दूसरी ओर इराक़ी सेना अलगाववादियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान तेज़ कर रही है. इसके पहले चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए गठित विशेष सैनिक इकाई के मुख्यालय में हुए आत्मघाती हमले में कई सैनिक मारे गए थे. आत्मघाती हमलावर ने वूल्फ़ ब्रिगेड पुलिस कमांडो के मुख्यालय के अंदर धमाका किया था. इस हमलावर ने भी पुलिस की पोशाक पहन रखी थी. अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी चरमपंथी हमले की योजना बना रहे हैं. छह हफ्ते पहले इराक़ में नई सरकार के गठन के बाद से अबतक की हिंसा में नौ सौ लोग मारे जा चुके हैं.
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90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण में जिन 18 सीटों पर चुनाव होने हैं वो नक्सल प्रभावित हैं। पहले चरण में 12 नवंबर और दूसरे चरण में शेष 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा।
रायपुर, 10 अक्टूबरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार को सुरक्षा अधिकारियों का मजमा लगा रहा। पड़ोसी राज्य तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक महेंद्र रेड्डी समेत कई आलाधिकारी भी पहुंचे। मुद्दा एक ही था। चुनाव के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कैसे हो?
पुलिस ऑफिसर मेस में हुई इस मीटिंग में नक्सल डीजी, बस्तर आईजी और 7 जिलों के एसपी भी सम्मिलित हुए। चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल ऑपरेशन को लेकर विमर्श किया गया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित इलाकों में आते हैं। जहां नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने हैं।
90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण में जिन 18 सीटों पर चुनाव होने हैं वो नक्सल प्रभावित हैं। पहले चरण में 12 नवंबर और दूसरे चरण में शेष 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा।
दूसरी तरफ तेलंगाना राज्य भी नक्सल प्रभावित माना जाता है। ऐसे में बुधवार को हुई पुलिस अधिकारियों की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इस मीटिंग में नक्सल प्रभावित इलाकों में कोई बड़ी और अप्रिय घटना से निपटने के लिए रणनीति पर विचार किया गया।
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नब्बे विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण में जिन अट्ठारह सीटों पर चुनाव होने हैं वो नक्सल प्रभावित हैं। पहले चरण में बारह नवंबर और दूसरे चरण में शेष बहत्तर सीटों के लिए बीस नवंबर को मतदान होगा। रायपुर, दस अक्टूबरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार को सुरक्षा अधिकारियों का मजमा लगा रहा। पड़ोसी राज्य तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक महेंद्र रेड्डी समेत कई आलाधिकारी भी पहुंचे। मुद्दा एक ही था। चुनाव के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कैसे हो? पुलिस ऑफिसर मेस में हुई इस मीटिंग में नक्सल डीजी, बस्तर आईजी और सात जिलों के एसपी भी सम्मिलित हुए। चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल ऑपरेशन को लेकर विमर्श किया गया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ हिस्से नक्सल प्रभावित इलाकों में आते हैं। जहां नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने हैं। नब्बे विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण में जिन अट्ठारह सीटों पर चुनाव होने हैं वो नक्सल प्रभावित हैं। पहले चरण में बारह नवंबर और दूसरे चरण में शेष बहत्तर सीटों के लिए बीस नवंबर को मतदान होगा। दूसरी तरफ तेलंगाना राज्य भी नक्सल प्रभावित माना जाता है। ऐसे में बुधवार को हुई पुलिस अधिकारियों की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इस मीटिंग में नक्सल प्रभावित इलाकों में कोई बड़ी और अप्रिय घटना से निपटने के लिए रणनीति पर विचार किया गया।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सात मार्च से शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल अनुसूईया उइके के अभिभाषण से होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 9 मार्च को साल 2022-23 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, सदन की कार्यवाही में अब हर साल 58 पेड़ बचेंगे। वहीं पर्यावरण में करीब 10 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होगा।
डॉ. चरणदास महंत विधानसभा में इस सत्र से शुरू हुई सवाल-जवाब की ऑनलाइन प्रणाली के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने बताया, लेस पेपर प्रणाली के प्रभाव पर उन्होंने IIT खड़गपुर के पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग से एक अध्ययन कराया है। उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट आ गई है। इसके मुताबिक पिछले आठ सालों में विधायकों ने 36 हजार 650 सवाल लगाए हैं। यानी औसतन हर साल 4 हजार 550 सवाल पूछे गए हैं। प्रश्न पूछने से उसका उत्तर आने के प्रत्येक चरण में करीब 100 पेज का उपयोग संभावित है। ऐसे में सालाना चार लाख 55 हजार पेज खर्च होते हैं। अगर यह खर्च रुकता है तो करीब 2. 2 टन कागज की बचत होगी। इसकी वजह से हर साल 9. 68 टन लकड़ी या 58 पेड़ कटने से बच जाएंगे। कागज बनाने की प्रक्रिया में लगने वाले एक लाख लीटर पानी की बचत होगी। वहीं इतनी बिजली बच जाएगी जितनी 73 घरेलू रेफ्रीजरेटर को एक साल तक चलाने के लिए काफी है। IIT के अध्ययन में बताया गया है, इस पूरी प्रक्रिया से हर साल 9. 9 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। दूसरे पर्यावरणीय प्रभावों की भी बारीक जानकारी इस अध्ययन में दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, पहली बार ही 90% सवाल ऑनलाइन ही मिले हैं।
विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक, विधानसभा के जरिए विभागों से लिखित सवाल पूछते हैं। इसके लिए एक तय प्रारूप में सवाल लिखकर देने होते हैं। विधानसभा इन प्रश्नों को छांटकर संबंधित विभाग को जवाब के लिए भेजती है। वहां से जवाब आने के बाद इनको छापा जाता है। इस साल से यह प्रक्रिया बदल दी गई है। विधायकों से ऑनलाइन सवाल मंगाए गए। सवाल छांटने के बाद विधानसभा ने ऑनलाइन ही उसे विभागों को भेज दिया। विभाग ने ऑनलाइन ही उसका जवाब भेज दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया, सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। उसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल साल 2021-22 का तीसरा अनुपूरक बजट रखेंगे। इस अनुपूरक बजट पर चर्चा और पारण 8 मार्च को होगा। 8 मार्च को ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा प्रस्तावित है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बताया, इस बार विधायकों ने एक हजार 682 सवाल पूछे हैं। इनमें से 854 को तारांकित श्रेणी में रखा गया है। 828 सवाल अतारांकित श्रेणी में डाले गए हैं। अब तक ध्यानाकर्षण की 114 सूचनाएं मिल चुकी हैं। 10 प्रस्ताव काम रोककर तुरंत चर्चा की मांग के हैं। वहीं अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा की मांग वाली चार सूचनाएं भी विधानसभा सचिवालय पहुंची हैं। विधायकों ने 7 अशासकीय संकल्प की सूचना भी भेजी है।
बजट सत्र को छोटा रखने से जुड़े एक सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, अधिकतर विधायकों की ड्यूटी विधानसभा चुनावों में लगी थी। इसी वजह से सत्र को छोटा रखा गया है। इससे पहले उन्होंने कहा था, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। वहां विधायकों की व्यस्तता की वजह से सत्र फरवरी से शुरू होने की जगह मार्च में होगा। डॉ. महंत ने यह भी फिर दोहराया है कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए वे दावेदारी नहीं करेंगे।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सात मार्च से शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल अनुसूईया उइके के अभिभाषण से होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नौ मार्च को साल दो हज़ार बाईस-तेईस का वार्षिक बजट पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, सदन की कार्यवाही में अब हर साल अट्ठावन पेड़ बचेंगे। वहीं पर्यावरण में करीब दस टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होगा। डॉ. चरणदास महंत विधानसभा में इस सत्र से शुरू हुई सवाल-जवाब की ऑनलाइन प्रणाली के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने बताया, लेस पेपर प्रणाली के प्रभाव पर उन्होंने IIT खड़गपुर के पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग से एक अध्ययन कराया है। उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट आ गई है। इसके मुताबिक पिछले आठ सालों में विधायकों ने छत्तीस हजार छः सौ पचास सवाल लगाए हैं। यानी औसतन हर साल चार हजार पाँच सौ पचास सवाल पूछे गए हैं। प्रश्न पूछने से उसका उत्तर आने के प्रत्येक चरण में करीब एक सौ पेज का उपयोग संभावित है। ऐसे में सालाना चार लाख पचपन हजार पेज खर्च होते हैं। अगर यह खर्च रुकता है तो करीब दो. दो टन कागज की बचत होगी। इसकी वजह से हर साल नौ. अड़सठ टन लकड़ी या अट्ठावन पेड़ कटने से बच जाएंगे। कागज बनाने की प्रक्रिया में लगने वाले एक लाख लीटर पानी की बचत होगी। वहीं इतनी बिजली बच जाएगी जितनी तिहत्तर घरेलू रेफ्रीजरेटर को एक साल तक चलाने के लिए काफी है। IIT के अध्ययन में बताया गया है, इस पूरी प्रक्रिया से हर साल नौ. नौ टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। दूसरे पर्यावरणीय प्रभावों की भी बारीक जानकारी इस अध्ययन में दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, पहली बार ही नब्बे% सवाल ऑनलाइन ही मिले हैं। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक, विधानसभा के जरिए विभागों से लिखित सवाल पूछते हैं। इसके लिए एक तय प्रारूप में सवाल लिखकर देने होते हैं। विधानसभा इन प्रश्नों को छांटकर संबंधित विभाग को जवाब के लिए भेजती है। वहां से जवाब आने के बाद इनको छापा जाता है। इस साल से यह प्रक्रिया बदल दी गई है। विधायकों से ऑनलाइन सवाल मंगाए गए। सवाल छांटने के बाद विधानसभा ने ऑनलाइन ही उसे विभागों को भेज दिया। विभाग ने ऑनलाइन ही उसका जवाब भेज दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया, सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। उसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल साल दो हज़ार इक्कीस-बाईस का तीसरा अनुपूरक बजट रखेंगे। इस अनुपूरक बजट पर चर्चा और पारण आठ मार्च को होगा। आठ मार्च को ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा प्रस्तावित है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बताया, इस बार विधायकों ने एक हजार छः सौ बयासी सवाल पूछे हैं। इनमें से आठ सौ चौवन को तारांकित श्रेणी में रखा गया है। आठ सौ अट्ठाईस सवाल अतारांकित श्रेणी में डाले गए हैं। अब तक ध्यानाकर्षण की एक सौ चौदह सूचनाएं मिल चुकी हैं। दस प्रस्ताव काम रोककर तुरंत चर्चा की मांग के हैं। वहीं अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा की मांग वाली चार सूचनाएं भी विधानसभा सचिवालय पहुंची हैं। विधायकों ने सात अशासकीय संकल्प की सूचना भी भेजी है। बजट सत्र को छोटा रखने से जुड़े एक सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, अधिकतर विधायकों की ड्यूटी विधानसभा चुनावों में लगी थी। इसी वजह से सत्र को छोटा रखा गया है। इससे पहले उन्होंने कहा था, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। वहां विधायकों की व्यस्तता की वजह से सत्र फरवरी से शुरू होने की जगह मार्च में होगा। डॉ. महंत ने यह भी फिर दोहराया है कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए वे दावेदारी नहीं करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हरियाणा के एजुकेशन विभाग के बाद अब स्किल डिवेलपमेंट व इंडस्ट्रीयल ट्रेनिंग विभाग के कर्मचारी भी अब अपनी पसंद की जगह ट्रांसफर करवा सकेंगे। इसके लिए एक पॉलिसी तैयार हो गई है जो एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। अब नए अकैडमिक ईयर 2018-19 में सभी ट्रांसफर ऑनलाइन होंगे।
यह जानकारी विभाग के मंत्री विपुल गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि विभाग में फील्ड अधिकारियों व कर्मचारियों के कुल 6288 स्वीकृत पद हैं जिनमें से पहली कैटिगरी के तहत 55 पद, दूसरी कैटिगरी में 187 और तीसरी कैटिगरी के 6046 पद शामिल हैं। इन पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुविधा के लिए ही ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की गई है और इसका सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस नीति बारे नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।
गोयल ने बताया कि विभाग हर साल 10 अप्रैल से 30 अप्रैल तक किसी भी आईटीआई में नए ट्रेड शुरू करने या समाप्त करने बारे जानकारी को भी अंतिम रूप दे रहा है। इसके बाद एक से 31 मई तक पदों की रिक्तियों बारे अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और एक से 15 जून तक ट्रांसफर के इच्छुक कर्मचारी अपनी पसंद के स्टेशन का ऑनलाइन चुनाव कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि ट्रांसफर के योग्य कर्मचारियों के हर साल शैक्षणिक सत्र के अंत में 15 जुलाई को ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए जाएंगे तथा उनको 15 दिन के अंदर नए स्टेशन पर ज्वाइनिंग करनी होगी। स्थानांतरण आदेश एक अगस्त से मान्य होंगे।
मंत्री ने बताया कि ट्रांसफर के लिए कर्मचारी का एक स्टेशन पर सामान्य कार्यकाल 5 साल का माना जाएगा परंतु तीन साल पूरे होने पर वह कर्मचारी खाली पद व म्यूचवल आधार पर ट्रांसफर के लिए एप्लाई कर सकेगा। जिस कर्मचारी की रिटायरमेंट में एक साल बचा है, उसका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। प्रशासकीय आधार या उस कर्मचारी के स्वयं के अनुरोध पर ही ट्रांसफर हो सकेगा। इसके अलावा किसी कर्मचारी के खिलाफ दुर्वव्यवहार की वाजिब शिकायत, न्यायिक जांच या खराब परीक्षा परिणाम के मामले में प्रशासकीय आधार पर कभी कर्मचारी का ट्रांसफर या जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के ट्रांसफर में कर्मचारी की उम्र, दंपत्ति, विधवा, विशिष्टजन या गंभीर बीमारी को ध्यान में रखकर उनको वरियता दी जाएगी। इसके लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं। कुल अंक 80 होंगे जिनमें सबसे ज्यादा अंक लेने वाले को ट्रांसफर में में अधिमान दिया जाएगा।
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हरियाणा के एजुकेशन विभाग के बाद अब स्किल डिवेलपमेंट व इंडस्ट्रीयल ट्रेनिंग विभाग के कर्मचारी भी अब अपनी पसंद की जगह ट्रांसफर करवा सकेंगे। इसके लिए एक पॉलिसी तैयार हो गई है जो एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। अब नए अकैडमिक ईयर दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में सभी ट्रांसफर ऑनलाइन होंगे। यह जानकारी विभाग के मंत्री विपुल गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि विभाग में फील्ड अधिकारियों व कर्मचारियों के कुल छः हज़ार दो सौ अठासी स्वीकृत पद हैं जिनमें से पहली कैटिगरी के तहत पचपन पद, दूसरी कैटिगरी में एक सौ सत्तासी और तीसरी कैटिगरी के छः हज़ार छियालीस पद शामिल हैं। इन पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों की सुविधा के लिए ही ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की गई है और इसका सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस नीति बारे नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। गोयल ने बताया कि विभाग हर साल दस अप्रैल से तीस अप्रैल तक किसी भी आईटीआई में नए ट्रेड शुरू करने या समाप्त करने बारे जानकारी को भी अंतिम रूप दे रहा है। इसके बाद एक से इकतीस मई तक पदों की रिक्तियों बारे अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और एक से पंद्रह जून तक ट्रांसफर के इच्छुक कर्मचारी अपनी पसंद के स्टेशन का ऑनलाइन चुनाव कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि ट्रांसफर के योग्य कर्मचारियों के हर साल शैक्षणिक सत्र के अंत में पंद्रह जुलाई को ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए जाएंगे तथा उनको पंद्रह दिन के अंदर नए स्टेशन पर ज्वाइनिंग करनी होगी। स्थानांतरण आदेश एक अगस्त से मान्य होंगे। मंत्री ने बताया कि ट्रांसफर के लिए कर्मचारी का एक स्टेशन पर सामान्य कार्यकाल पाँच साल का माना जाएगा परंतु तीन साल पूरे होने पर वह कर्मचारी खाली पद व म्यूचवल आधार पर ट्रांसफर के लिए एप्लाई कर सकेगा। जिस कर्मचारी की रिटायरमेंट में एक साल बचा है, उसका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। प्रशासकीय आधार या उस कर्मचारी के स्वयं के अनुरोध पर ही ट्रांसफर हो सकेगा। इसके अलावा किसी कर्मचारी के खिलाफ दुर्वव्यवहार की वाजिब शिकायत, न्यायिक जांच या खराब परीक्षा परिणाम के मामले में प्रशासकीय आधार पर कभी कर्मचारी का ट्रांसफर या जा सकता है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के ट्रांसफर में कर्मचारी की उम्र, दंपत्ति, विधवा, विशिष्टजन या गंभीर बीमारी को ध्यान में रखकर उनको वरियता दी जाएगी। इसके लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं। कुल अंक अस्सी होंगे जिनमें सबसे ज्यादा अंक लेने वाले को ट्रांसफर में में अधिमान दिया जाएगा।
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