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खगड़िया जिले की पुलिस ने 72 घंटे में डबल मर्डर हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली। साथ ही हत्या में साजिशकर्ता सहित चार आरोपितों को हथियार, जिंदा कारतूस व मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक चालक और आरोपितों के बीच पूर्व में झगड़ा हुआ था। । आरोपियों ने बदले की भावना में चालक और उप चालक की निर्मम हत्या किया। पुलिस ने हत्या में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए गोगरी डीएसपी के नेतृत्व में टीम गठित कर सफ़लता हासिल की है।
एसपी अमितेश कुमार ने बताया कि बीते 11 अगस्त को महेशखूंट थाना क्षेत्र के एनएच 31 के गौछारी गांव के पास मरांच बहियार में एक ट्रक के ड्राइवर और खलासी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों मृतक की पहचान ड्राइवर सारण (छपरा) जिले के परसा थाना क्षेत्र स्थित बभनगामा गांव निवासी लक्ष्मण राय के पुत्र सोनेलाल राय और उपचालक रामदयाल सिंह के पुत्र रामबाबू के रूप में हुआ था। दोनों व्यक्ति ट्रक पर कोयले की राख लेकर एनटीपीसी बरौनी से सिलिगुड़ी के लिए निकले थे।
बताया कि थाना में प्राथमिकी दर्ज कर डीएसपी के नेतृत्व में अनुसंधान शुरू कर दी। बताया कि घटनास्थल एवं आसपास का टावर डम्प प्राप्त कर तकनीकी विश्लेषण कर कांड की जांच में जुट गए। वहीं संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई। जिसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उक्त कांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए बताया कि सुदीन कुमार उर्फ पहलवान, मनोज, निलेश कुमार एवं शत्रुघ्न यादव, चारों ट्रक ड्राईवर हैं एवं पूर्व में मृतक ड्राईवर के ही कम्पनी एसएसई लॉजिस्टिक में काम करते थे, जिन्हें कम्पनी द्वारा गलत आचरण के कारण निकाल दिया गया था।
घटना के एक माह पूर्व मृतक सोनेलाल एवं निलेश के बीच मनोज और शत्रुध्न पहलवान के बीच झगड़ा भी हुआ था। ये चारो कम्पनी के मालिक एवं ड्राइवरों को बार-बार यह धमकी देते थे कि बरौनी सिल्लीगुडी रूट में खगड़िया, महेशखुंट एवं गोगरी के ट्रक चालकों द्वारा ही गाडी चलवाया जाय नहीं तो आपकी गाड़ी को इस रूट में चलने नहीं देंगे। इसी विवाद को लेकर घटना को अंजाम दिया गया।
जिसके बाद गोगरी थाना के बथान गॉव के वार्ड 16 निवासी ननदे यादव का पुत्र सोनू कुमार, जयजेराम का पुत्र राहुल कुमार, प्रमोद शर्मा का पुत्र केशव कुमार ,बहादुरपुर बदरपुर गॉव के मणिकांत यादव का पुत्र सुदीन यादव उर्फ पहलवान को एक देशी कट्टा, 4 जिंदा कारतूस एवं 4 मोबाइल बरामद किया है। एसपी ने बताया कि सभी आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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खगड़िया जिले की पुलिस ने बहत्तर घंटाटे में डबल मर्डर हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली। साथ ही हत्या में साजिशकर्ता सहित चार आरोपितों को हथियार, जिंदा कारतूस व मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक चालक और आरोपितों के बीच पूर्व में झगड़ा हुआ था। । आरोपियों ने बदले की भावना में चालक और उप चालक की निर्मम हत्या किया। पुलिस ने हत्या में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए गोगरी डीएसपी के नेतृत्व में टीम गठित कर सफ़लता हासिल की है। एसपी अमितेश कुमार ने बताया कि बीते ग्यारह अगस्त को महेशखूंट थाना क्षेत्र के एनएच इकतीस के गौछारी गांव के पास मरांच बहियार में एक ट्रक के ड्राइवर और खलासी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों मृतक की पहचान ड्राइवर सारण जिले के परसा थाना क्षेत्र स्थित बभनगामा गांव निवासी लक्ष्मण राय के पुत्र सोनेलाल राय और उपचालक रामदयाल सिंह के पुत्र रामबाबू के रूप में हुआ था। दोनों व्यक्ति ट्रक पर कोयले की राख लेकर एनटीपीसी बरौनी से सिलिगुड़ी के लिए निकले थे। बताया कि थाना में प्राथमिकी दर्ज कर डीएसपी के नेतृत्व में अनुसंधान शुरू कर दी। बताया कि घटनास्थल एवं आसपास का टावर डम्प प्राप्त कर तकनीकी विश्लेषण कर कांड की जांच में जुट गए। वहीं संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई। जिसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उक्त कांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए बताया कि सुदीन कुमार उर्फ पहलवान, मनोज, निलेश कुमार एवं शत्रुघ्न यादव, चारों ट्रक ड्राईवर हैं एवं पूर्व में मृतक ड्राईवर के ही कम्पनी एसएसई लॉजिस्टिक में काम करते थे, जिन्हें कम्पनी द्वारा गलत आचरण के कारण निकाल दिया गया था। घटना के एक माह पूर्व मृतक सोनेलाल एवं निलेश के बीच मनोज और शत्रुध्न पहलवान के बीच झगड़ा भी हुआ था। ये चारो कम्पनी के मालिक एवं ड्राइवरों को बार-बार यह धमकी देते थे कि बरौनी सिल्लीगुडी रूट में खगड़िया, महेशखुंट एवं गोगरी के ट्रक चालकों द्वारा ही गाडी चलवाया जाय नहीं तो आपकी गाड़ी को इस रूट में चलने नहीं देंगे। इसी विवाद को लेकर घटना को अंजाम दिया गया। जिसके बाद गोगरी थाना के बथान गॉव के वार्ड सोलह निवासी ननदे यादव का पुत्र सोनू कुमार, जयजेराम का पुत्र राहुल कुमार, प्रमोद शर्मा का पुत्र केशव कुमार ,बहादुरपुर बदरपुर गॉव के मणिकांत यादव का पुत्र सुदीन यादव उर्फ पहलवान को एक देशी कट्टा, चार जिंदा कारतूस एवं चार मोबाइल बरामद किया है। एसपी ने बताया कि सभी आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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हैं कि यह उचित है । पर चम्पारन में पैन खर्चा एकदम अबवाब है। साठी कोठी में बिना
पानी का उचित प्रबन्ध किये ही पैन खर्चा वसूल किया जाता था । कोठियों में भी वह प्रथा जारी थी । प्रायः सभी जगह बीवा पीछे ३ ) रूप में वसूल होते थे । बेतिया के उत्तर भाग में एक चोरवा कोठी है । वहाँ बहुत 'धांगड़' रैयत हैं । नापकर वहाँ जमीन बन्दोबस्त नहीं होती है । एक हल में जितनी जमीन जोती जा सके उसी पर मालगुजारी बैठायी जाती है । इसे 'हलवन्दी' प्रथा कहते हैं । चोतखा कोठी के धांगड़ रैयत हल पीछे ७१) रुपये मालगुजारी दिया करते हैं और उनमे ७ ।। ) रुपये पैन खर्चा लिया जाता था। मधुबनी कोठी में, जिसके मालिक चीतवा के ही मालिक हैं, एक बाँध है जिसे पिपरासी बाँध कहते हैं। कोठी का कहना है कि यह बाँध कोठी के खर्च से बनाया गया था और उसकी मरम्मत में कोठी का खर्चा पड़ता है, इसलिए कोठी पैन खर्चा वसूल करती है । इसके । इसके बनाने में क्या खर्चा पड़ा था मालूम नहीं, पर इसकी मरम्मत में साल में ३०० ) रुपये से अधिक खर्च नहीं पड़ता । इसके बदले कोठी की सालाना आमदनी इस पैन खर्चे और बाँध बेहरी की आमद से केवल ९००० ) रुपये की थी । रैयतों का कहना है कि धांगड़ों ने बाँध बिना मजदूरी के तैयार कर दिया था। इसी प्रकार बेलवा और नरईपुर आदि कोठियों में भी पैन खर्चा वसूल किया जाता था और वहाँ भी यही कहा जाता था कि रैयतों के नफा के लिए पैन बना दिये गये हैं, पर सर्वे सैटलमेंट अफसरों को कहीं पैन मिले ही नहीं और जहाँ मिले भी वहाँ जितने बीघों पर पैन खर्चा वसूल होता था उनमें बहुत ही कम पैन से लाभ उठाते थे । भुमराड़ी कोठी में तो पैन का होना कोठीवाले भी नहीं बताते पर पैन खर्चा वे भी वसूल कर लेते थे ।
एक ओर कोठी की कथा सुन लीजिये । इसका नाम सिकटा है । इसके मालिक मि. थोर्प नामक एक अंगरेज थे । उन्होंने देखा कि पैन खर्चा शायद अबवाब ठहराकर बन्द कर दिया जाय । इसलिए रैयतों से उसके बदले एक ही साथ कुछ वसूल कर लेना ही उन्होंने अक्ल का काम समझा । अतएव उन्होंने ६ वर्षों का पैन खर्चा एक ही साथ वसूल करना चाहा । कुछ रैयतों से वसूल भी कर लिया। कितनों ही ने नहीं दिया। इसी बीच में सर्वे आया और यह पोल खुल गई । इन्हीं मि. थोर्प के जिम्मे बेतिया राज्य के ठेके की मालगुजारी बाकी पड़ गई थी । कोर्ट ऑफ वार्डर्स ने शायद इन्हीं की खैरख्वाही के लिए प्रायः ८०००० ) रुपये जो उनके जिम्मे बाकी थे एकदम माफ कर दिये ।
(२) सलामी, (३) तीन-कठिया और ( ४ ) जोगान - जो अबवाब तीन रुपये बीघा पीछे वसूल किया जाता था वही कहीं सलामी, कहीं तीन-ऋठिया ओर कहीं लगान के नाम से भी मशहूर है । इसका नाम तीन कठिया पड़ना बड़े मार्क की बात है । इससे यह नहीं साबित होता कि चम्पारन के उत्तरी भाग में भी नील बोया जाता था अथवा तीन कठिया प्रथा जारी थी । पर रैयत ऐसा समझते हैं कि जैसे जिले के दक्खिन ओर पूर्व भागों में नील का बोझ उन पर है उसी प्रकार इस अबवाब का बोझ उत्तर-पश्चिम के रैयतों पर है ।
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हैं कि यह उचित है । पर चम्पारन में पैन खर्चा एकदम अबवाब है। साठी कोठी में बिना पानी का उचित प्रबन्ध किये ही पैन खर्चा वसूल किया जाता था । कोठियों में भी वह प्रथा जारी थी । प्रायः सभी जगह बीवा पीछे तीन ) रूप में वसूल होते थे । बेतिया के उत्तर भाग में एक चोरवा कोठी है । वहाँ बहुत 'धांगड़' रैयत हैं । नापकर वहाँ जमीन बन्दोबस्त नहीं होती है । एक हल में जितनी जमीन जोती जा सके उसी पर मालगुजारी बैठायी जाती है । इसे 'हलवन्दी' प्रथा कहते हैं । चोतखा कोठी के धांगड़ रैयत हल पीछे इकहत्तर) रुपये मालगुजारी दिया करते हैं और उनमे सात ।। ) रुपये पैन खर्चा लिया जाता था। मधुबनी कोठी में, जिसके मालिक चीतवा के ही मालिक हैं, एक बाँध है जिसे पिपरासी बाँध कहते हैं। कोठी का कहना है कि यह बाँध कोठी के खर्च से बनाया गया था और उसकी मरम्मत में कोठी का खर्चा पड़ता है, इसलिए कोठी पैन खर्चा वसूल करती है । इसके । इसके बनाने में क्या खर्चा पड़ा था मालूम नहीं, पर इसकी मरम्मत में साल में तीन सौ ) रुपये से अधिक खर्च नहीं पड़ता । इसके बदले कोठी की सालाना आमदनी इस पैन खर्चे और बाँध बेहरी की आमद से केवल नौ हज़ार ) रुपये की थी । रैयतों का कहना है कि धांगड़ों ने बाँध बिना मजदूरी के तैयार कर दिया था। इसी प्रकार बेलवा और नरईपुर आदि कोठियों में भी पैन खर्चा वसूल किया जाता था और वहाँ भी यही कहा जाता था कि रैयतों के नफा के लिए पैन बना दिये गये हैं, पर सर्वे सैटलमेंट अफसरों को कहीं पैन मिले ही नहीं और जहाँ मिले भी वहाँ जितने बीघों पर पैन खर्चा वसूल होता था उनमें बहुत ही कम पैन से लाभ उठाते थे । भुमराड़ी कोठी में तो पैन का होना कोठीवाले भी नहीं बताते पर पैन खर्चा वे भी वसूल कर लेते थे । एक ओर कोठी की कथा सुन लीजिये । इसका नाम सिकटा है । इसके मालिक मि. थोर्प नामक एक अंगरेज थे । उन्होंने देखा कि पैन खर्चा शायद अबवाब ठहराकर बन्द कर दिया जाय । इसलिए रैयतों से उसके बदले एक ही साथ कुछ वसूल कर लेना ही उन्होंने अक्ल का काम समझा । अतएव उन्होंने छः वर्षों का पैन खर्चा एक ही साथ वसूल करना चाहा । कुछ रैयतों से वसूल भी कर लिया। कितनों ही ने नहीं दिया। इसी बीच में सर्वे आया और यह पोल खुल गई । इन्हीं मि. थोर्प के जिम्मे बेतिया राज्य के ठेके की मालगुजारी बाकी पड़ गई थी । कोर्ट ऑफ वार्डर्स ने शायद इन्हीं की खैरख्वाही के लिए प्रायः अस्सी हज़ार ) रुपये जो उनके जिम्मे बाकी थे एकदम माफ कर दिये । सलामी, तीन-कठिया और जोगान - जो अबवाब तीन रुपये बीघा पीछे वसूल किया जाता था वही कहीं सलामी, कहीं तीन-ऋठिया ओर कहीं लगान के नाम से भी मशहूर है । इसका नाम तीन कठिया पड़ना बड़े मार्क की बात है । इससे यह नहीं साबित होता कि चम्पारन के उत्तरी भाग में भी नील बोया जाता था अथवा तीन कठिया प्रथा जारी थी । पर रैयत ऐसा समझते हैं कि जैसे जिले के दक्खिन ओर पूर्व भागों में नील का बोझ उन पर है उसी प्रकार इस अबवाब का बोझ उत्तर-पश्चिम के रैयतों पर है ।
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अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा इराक़ियों के लिए तानाशाह के राज से क़ानून-व्यवस्था के शासन के रास्ते में मील का पत्थर है.
उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन ने जिन लोगों को न्याय से वंचित कर दिया था, उन्हें अब न्याय मिला है.
उल्लेखनीय है कि इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को रविवार को एक अदालत ने 1982 के दुजैल नरसंहार मामले में मौत की सज़ा सुनाई है.
इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति बुश ने माना कि इराक़ को अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन इतिहास में इस दिन को आज़ाद और न्यायसंगत समाज की ओर एक क़दम के रुप में दर्ज किया जाएगा.
चुनाव प्रचार के बीच प्रतिक्रिया देते हुए बुश ने कहा कि यह इराक़ के लोकतंत्र और संवैधानिक सरकार की बड़ी उपलब्धि है.
राष्ट्रपति बुश ने अपनी प्रतिक्रिया के अंत में इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों और उनके परिवारजनों के प्रति कृतज्ञता ज़ाहिर की.
ऐसे समय में जब चुनावों में बुश प्रशासन की इराक़ नीति पर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं सद्दाम हुसैन के फ़ैसले के समय को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है.
इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इन आरोपों को निराधार बताया था कि सद्दाम हुसैन के मामले के फ़ैसले का अमरीकी चुनाव से कोई लेना देना है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि यह कहना कि षडयंत्रपूर्वक ऐसा किया गया है, अनर्गल है.
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अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा इराक़ियों के लिए तानाशाह के राज से क़ानून-व्यवस्था के शासन के रास्ते में मील का पत्थर है. उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन ने जिन लोगों को न्याय से वंचित कर दिया था, उन्हें अब न्याय मिला है. उल्लेखनीय है कि इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को रविवार को एक अदालत ने एक हज़ार नौ सौ बयासी के दुजैल नरसंहार मामले में मौत की सज़ा सुनाई है. इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति बुश ने माना कि इराक़ को अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन इतिहास में इस दिन को आज़ाद और न्यायसंगत समाज की ओर एक क़दम के रुप में दर्ज किया जाएगा. चुनाव प्रचार के बीच प्रतिक्रिया देते हुए बुश ने कहा कि यह इराक़ के लोकतंत्र और संवैधानिक सरकार की बड़ी उपलब्धि है. राष्ट्रपति बुश ने अपनी प्रतिक्रिया के अंत में इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों और उनके परिवारजनों के प्रति कृतज्ञता ज़ाहिर की. ऐसे समय में जब चुनावों में बुश प्रशासन की इराक़ नीति पर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं सद्दाम हुसैन के फ़ैसले के समय को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है. इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इन आरोपों को निराधार बताया था कि सद्दाम हुसैन के मामले के फ़ैसले का अमरीकी चुनाव से कोई लेना देना है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि यह कहना कि षडयंत्रपूर्वक ऐसा किया गया है, अनर्गल है.
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लगा । दुष्टों की मित्रता अच्छी समझी जाने लगी ( अथवा, मित्र ही शठ हुए ) । दान के बदले दान को दानशीलता समझा जाने लगा। न्यायकर्त्ता अपराधियों को दण्ड देने में असमर्थ होकर क्षमाशील हुए । दुर्बल के प्रति उदासीनता दिखाई जाने लगी । बहुत बोलने वाले ही पण्डित कहे जाने लगे । यश पाने की इच्छा से ही लोग धर्म-प्रचार ( अथवा धर्म का सेवन ) करने लगे ।
धनवान् लोगों को ही सज्जन समझा जाने लगा, दूरदेश का जल ही तीर्थ हो गया, केवल जनेऊ पहन लेने से ब्राह्मणत्व माना जाने लगा और संन्यासी का चिह्न ( लक्षण ) दण्डधारण मात्र रह गया ।
धरती कम अनाज पैदा करने लगी, नदी किनारे ( अथवा अपना किनारा ) छोड़कर दूसरे स्थान पर बहने लगी । स्त्रियाँ वेश्याओं जैसी बातचीत में सुख समझने लगीं और उनका अपने पतियों से प्रेम जाता रहा ।
दूसरों के अन्न के लालची ब्राह्मण लोग चण्डालों के घरों में यज्ञ कराने लगे। सधवा स्त्रियाँ ( अथवा विधवा वैधव्य का आचरण त्यागकर ) मनमाना आचरण करने लगीं।
बादलों ने खण्ड वर्षा बरसानी शुरू की, धरती कम अनाज पैदा करने वाली हो गई । राजा लोग प्रजा को ही खाने लगे और प्रजा करों के बोझ से परेशान हो गई । अभागी प्रजा कष्ट से अत्यन्त क्षुब्ध ( दुःखी ) होकर कन्धे पर बोझ और हाथ ( गोद ) में पुत्र लेकर पर्वत और गहन वनों का आश्रय लेने लगी । और भी सुनो शराब, माँस, मूल व फलों का आहार जीवन का आधार हुआ । वे लोग भगवान् श्री कृष्ण की निन्दा करने वाले हो गए । कलियुग के प्रथम चरण में लोगों की यह दशा हुई । कलि के दूसरे चरण में लोग भगवान् ( श्री कृष्ण ) का नाम तक नहीं लेते, तीसरे चरण में वर्णसंकर
संतानों की उत्पत्ति हुई और चौथे चरण में तो सभी वर्ण समाप्त होकर लोग एक ही वर्ण के रह गए। (जाति-पाँति ही कुछ न रही ) । लोग ( सत्कर्म और ) ईश्वर ( की आराधना ) को भी भूल गए । स्वाध्याय, स्वधा, स्वाहा, वषट् तथा ओंकारादि के लुप्त होने पर सभी निराहार देवतागण ब्रह्मा जी की शरण में गए । देवतागण क्षीण, दीन और चिन्ताशील पृथ्वी को आगे करके ब्रह्मलोक में गए। उन्होंने ब्रह्मलोक को वेद ध्वनि से गूंजता हुआ पाया ।
यज्ञ के धुएँ से भरे, मुनिश्रेष्ठों से सेवित, सोने की बनी वेदी में प्रज्ज्वलित दक्षिणाग्नि, यज्ञ के खंभों से सजे हुए और वन के फूलों और फलों से परिपूर्ण उद्यान, जहाँ सरोवर में वायु के झकोरों से चंचल बेलों के बीच फूलों पर बैठे भौंरों ( तथा सारस और हंसों ) द्वारा मधुर स्वर से मानों प्रणाम, आह्वान या सत्कार द्वारा पथिकों का स्वागत किया जा रहा है । वहाँ से शोकाकुल देवतागण अपने स्वामी इन्द्र के साथ अपने कार्य यानी कलि द्वारा पैदा किए अपने दुःखों को बताने (निवेदन करने) के लिए ब्रह्मसदन के अन्दर गए । वहाँ पहुँच कर सब देवताओं ने सनक, सनंदन तथा सनातन आदि सिद्धों द्वारा पदकमल सेवित ( एवं ) सदासन पर विराजमान तीनों लोकों के स्वामी भगवान् ब्रह्मा जी को प्रणाम किया ।"
सूत जी बोले - "ब्रह्म भवन में प्रवेश कर देवतागण ब्रह्मा जी के कहने पर उनके सामने बैठे। फिर कलि के दोष से होने वाली धर्म की हानि का समाचार देवताओं ने आदरपूर्वक ब्रह्मा जी को बताया। दुःखित देवताओं के वचन सुनकर ब्रह्मा जी ने उनसे कहा - 'भगवान् विष्णु को प्रसन्न करके हम तुम्हारी मनोकामना पूरी करेंगे ।' यह कह कर देवताओं
को साथ लेकर ब्रह्मा जी गो-लोकवासी श्री विष्णु भगवान् के पास गए। वहाँ स्तुति कर के देवताओं के मन की कामना उन ( श्री विष्णु भगवान् ) से निवेदित की ।
कमल जैसे नेत्रवाले भगवान् विष्णु देवताओं के दुःख की कथा सुनकर, ब्रह्मा जी से इस प्रकार बोले - 'हे विभो, आपके कहने के अनुसार शम्भल ग्राम नामक स्थान में विष्णुयश के यहाँ सुमति नाम की उनकी पत्नी के गर्भ से मैं जन्म लूँगा। (अर्थात् सुमति मेरी माता होगी । ) हे देव, हम चारों भाई मिल कर कलि का नाश करेंगे । हमारे भाई - बन्धु के रूप में आप देवतागण भी अपने अंश से अवतार लेंगे । हमारी यह प्रिय लक्ष्मी जी सिंहल देश में राजा बृहद्रथ की पत्नी कौमुदी के गर्भ से पद्मा नाम से जन्म लेंगी। मरु और देवापि नामक दो राजाओं को भी मैं पृथ्वी पर स्थापित करूँगा । हे देवतागण, तुम अपने-अपने अंश से पृथ्वी पर जाकर अवतार लो । हे ब्रह्मा जी, मैं फिर सतयुग को लाकर और पहले की ही तरह धर्म की स्थापना करके, कलि रूपी सर्प का नाश कर अपने लोक को यानी वैकुण्ठ को वापस आऊँगा ।'
देवतागण से घिरे हुए ब्रह्मा जी भगवान् विष्णु के ये वचन सुनकर ब्रह्मलोक वापस आ गए और देवतागण वहाँ से स्वर्ग लोक को चले गए।
हे ऋषिगण! अपनी महिमा से महिमान्वित भगवान् विष्णु इस प्रकार स्वयं अवतार लेने को उद्यत हो शम्भल ग्राम में गए । वहाँ विष्णुयश के द्वारा उनकी पत्नी सुमति के गर्भ में भ्रूण रूप में आए गर्भस्थ भगवान् विष्णु के चरण-कमल की सेवा में ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि सब तत्पर थे । यह जानकर कि संसार के स्वामी भगवान् विष्णु ने पृथ्वी पर मानव गर्भ में वास किया है; सभी नदियाँ, समुद्र, पर्वत, लोक, जड़ और चेतन, देवता तथा ऋषि अत्यन्त प्रसन्न हुए। सारे प्राणी विविध
प्रकार से अपने आनन्द को प्रकट करने लगे । पितर लोग आनन्द के मारे नाचने लगे, देवतागण सन्तुष्ट होकर विष्णु भगवान् का यश गाने लगे, गन्धर्व बाजा बजाने लगे और अप्सराएँ नृत्य करने लगीं।
वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान् विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया । माता-पिता अपने पुत्र के जन्म पर अत्यन्त पुलकित हुए। भगवान् कल्कि का जन्म होने पर भगवती महाषष्ठी ने धात्री ( दाई ) का काम किया । अम्बिका देवी ने नाल को काटा, भगवती गंगा ने अपने जल से गर्भ-क्लेद को दूर किया और देवी सावित्री भगवान् के शरीर को नहलाने-धुलाने को उद्यत हुई ।
भगवान् कृष्ण के जन्म की ही तरह, भगवान् अनन्त विष्णु द्वारा कल्कि के रूप में अवतार धारण करने पर भगवती वसुमती ( वसुन्धरा ) सुधा - धार ( दुग्ध - सुधा ) बहाने लगी । माँ भवानी ने ( अथवा मातृकाओं ने ) मांगलिक वचन कहे ( मंगलाचार किया ) । विष्णु भगवान् के चतुर्भुज रूप में शम्भल ग्राम में अवतार लेने की बात जानकर ब्रह्मा जी ने शीघ्र चलने वाले पवन को आज्ञा दी - 'हे पवन ! सूतिका गृह में जा कर तुम विष्णु भगवान् से कहो - हे नाथ! आपकी इस चतुर्भुज मूर्ति का दर्शन तो देवताओं को भी दुर्लभ है । यह विचार कर, हे भगवान् ! इस चतुर्भुज रूप को त्याग कर साधारण मनुष्य-सा रूप धारण कीजिए । '
इस प्रकार ब्रह्मा जी के वचन सुन कर शीतल, सुखद, सुगन्धित पवन ने यत्नपूर्वक शीघ्र ही विष्णु भगवान् से सूतिका गृह में जा कर ब्रह्मा के वचन का निवेदन किया । यह (ब्रह्मा जी का संदेश ) सुनकर कमलनयन भगवान् विष्णु ने उसी समय दो भुजाओं वाला रूप धारण किया । उस समय भगवान् की यह लीला देख कर उनके माता-पिता आश्चर्य से ठगे-से
रह गए । श्री विष्णु भगवान् की माया से मोहित माता-पिता ने अपने मन में यह समझा कि हमने भ्रमवश ही वैसा समझा था; यानी दो भुजा वाले पुत्र को चार भुजा वाला समझा था । इसके बाद शम्भल ग्राम में सभी प्राणी पापों व क्लेश से मुक्त होकर उत्साहपूर्वक अनेक प्रकार के मंगलाचार करने लगे ।
संसार के स्वामी विष्णु जिष्णु (विजयी) भगवान् को पुत्र रूप में पाकर सुमति माता ने, जिस की मनोकामना पूरी हो गई थी, ब्राह्मणों को निमन्त्रित कर सौ गायें दान में दीं । अपने पुत्र विष्णु भगवान् के कल्याण के लिए, शुद्ध चित्त से ( पवित्र हृदय वाले ) पिता विष्णुयश ने ऋक्, यजुः और सामवेद जानने वाले ब्राह्मणों द्वारा उनका नामकरण कराया । उस समय हरि भगवान् का बाल रूप में दर्शन करने के निमित्त परशुराम, कृपाचार्य, व्यास और द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भिक्षुक का रूप धारण कर वहाँ आए । सूर्य के समान प्रभा से भरपूर ईश्वर-स्वरूप उन चार आगन्तुकों को देख कर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ विष्णुयश जी के प्रसन्नता से रोंगटे खड़े हो गए और उन्होंने उन आगन्तुकों की पूजा की । भली-भाँति पूजा किए जाने पर उन महर्षियों ने सुखपूर्वक अपने-अपने आसन पर बैठ कर सर्वमूर्ति हरि भगवान् को श्री विष्णुयश की गोद में बैठे देखा । मुनियों में श्रेष्ठ उन जानकार विद्वानों ने मनुष्य रूप धारण किए हुए उस बालक को नमस्कार करके कलि का नाश करने के लिए कल्कि भगवान् ही पैदा हुए हैं, यह जान लिया । फिर वे संस्कार कर्म कर के और उनका नाम कल्कि प्रसिद्ध कर के प्रसन्नचित्त हो कर चले गए।
इसके उपरान्त माता सुमति के लालन-पालन से कंसशत्रु यानी भगवान् विष्णु शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा की भाँति बढ़ने लगे । श्री कल्कि के जन्म लेने से पहले ही माता-पिता को प्रसन्न करने वाले, गुरु - ब्राह्मणों का हित करने वाले तीन
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लगा । दुष्टों की मित्रता अच्छी समझी जाने लगी । दान के बदले दान को दानशीलता समझा जाने लगा। न्यायकर्त्ता अपराधियों को दण्ड देने में असमर्थ होकर क्षमाशील हुए । दुर्बल के प्रति उदासीनता दिखाई जाने लगी । बहुत बोलने वाले ही पण्डित कहे जाने लगे । यश पाने की इच्छा से ही लोग धर्म-प्रचार करने लगे । धनवान् लोगों को ही सज्जन समझा जाने लगा, दूरदेश का जल ही तीर्थ हो गया, केवल जनेऊ पहन लेने से ब्राह्मणत्व माना जाने लगा और संन्यासी का चिह्न दण्डधारण मात्र रह गया । धरती कम अनाज पैदा करने लगी, नदी किनारे छोड़कर दूसरे स्थान पर बहने लगी । स्त्रियाँ वेश्याओं जैसी बातचीत में सुख समझने लगीं और उनका अपने पतियों से प्रेम जाता रहा । दूसरों के अन्न के लालची ब्राह्मण लोग चण्डालों के घरों में यज्ञ कराने लगे। सधवा स्त्रियाँ मनमाना आचरण करने लगीं। बादलों ने खण्ड वर्षा बरसानी शुरू की, धरती कम अनाज पैदा करने वाली हो गई । राजा लोग प्रजा को ही खाने लगे और प्रजा करों के बोझ से परेशान हो गई । अभागी प्रजा कष्ट से अत्यन्त क्षुब्ध होकर कन्धे पर बोझ और हाथ में पुत्र लेकर पर्वत और गहन वनों का आश्रय लेने लगी । और भी सुनो शराब, माँस, मूल व फलों का आहार जीवन का आधार हुआ । वे लोग भगवान् श्री कृष्ण की निन्दा करने वाले हो गए । कलियुग के प्रथम चरण में लोगों की यह दशा हुई । कलि के दूसरे चरण में लोग भगवान् का नाम तक नहीं लेते, तीसरे चरण में वर्णसंकर संतानों की उत्पत्ति हुई और चौथे चरण में तो सभी वर्ण समाप्त होकर लोग एक ही वर्ण के रह गए। । लोग ईश्वर को भी भूल गए । स्वाध्याय, स्वधा, स्वाहा, वषट् तथा ओंकारादि के लुप्त होने पर सभी निराहार देवतागण ब्रह्मा जी की शरण में गए । देवतागण क्षीण, दीन और चिन्ताशील पृथ्वी को आगे करके ब्रह्मलोक में गए। उन्होंने ब्रह्मलोक को वेद ध्वनि से गूंजता हुआ पाया । यज्ञ के धुएँ से भरे, मुनिश्रेष्ठों से सेवित, सोने की बनी वेदी में प्रज्ज्वलित दक्षिणाग्नि, यज्ञ के खंभों से सजे हुए और वन के फूलों और फलों से परिपूर्ण उद्यान, जहाँ सरोवर में वायु के झकोरों से चंचल बेलों के बीच फूलों पर बैठे भौंरों द्वारा मधुर स्वर से मानों प्रणाम, आह्वान या सत्कार द्वारा पथिकों का स्वागत किया जा रहा है । वहाँ से शोकाकुल देवतागण अपने स्वामी इन्द्र के साथ अपने कार्य यानी कलि द्वारा पैदा किए अपने दुःखों को बताने के लिए ब्रह्मसदन के अन्दर गए । वहाँ पहुँच कर सब देवताओं ने सनक, सनंदन तथा सनातन आदि सिद्धों द्वारा पदकमल सेवित सदासन पर विराजमान तीनों लोकों के स्वामी भगवान् ब्रह्मा जी को प्रणाम किया ।" सूत जी बोले - "ब्रह्म भवन में प्रवेश कर देवतागण ब्रह्मा जी के कहने पर उनके सामने बैठे। फिर कलि के दोष से होने वाली धर्म की हानि का समाचार देवताओं ने आदरपूर्वक ब्रह्मा जी को बताया। दुःखित देवताओं के वचन सुनकर ब्रह्मा जी ने उनसे कहा - 'भगवान् विष्णु को प्रसन्न करके हम तुम्हारी मनोकामना पूरी करेंगे ।' यह कह कर देवताओं को साथ लेकर ब्रह्मा जी गो-लोकवासी श्री विष्णु भगवान् के पास गए। वहाँ स्तुति कर के देवताओं के मन की कामना उन से निवेदित की । कमल जैसे नेत्रवाले भगवान् विष्णु देवताओं के दुःख की कथा सुनकर, ब्रह्मा जी से इस प्रकार बोले - 'हे विभो, आपके कहने के अनुसार शम्भल ग्राम नामक स्थान में विष्णुयश के यहाँ सुमति नाम की उनकी पत्नी के गर्भ से मैं जन्म लूँगा। हे देव, हम चारों भाई मिल कर कलि का नाश करेंगे । हमारे भाई - बन्धु के रूप में आप देवतागण भी अपने अंश से अवतार लेंगे । हमारी यह प्रिय लक्ष्मी जी सिंहल देश में राजा बृहद्रथ की पत्नी कौमुदी के गर्भ से पद्मा नाम से जन्म लेंगी। मरु और देवापि नामक दो राजाओं को भी मैं पृथ्वी पर स्थापित करूँगा । हे देवतागण, तुम अपने-अपने अंश से पृथ्वी पर जाकर अवतार लो । हे ब्रह्मा जी, मैं फिर सतयुग को लाकर और पहले की ही तरह धर्म की स्थापना करके, कलि रूपी सर्प का नाश कर अपने लोक को यानी वैकुण्ठ को वापस आऊँगा ।' देवतागण से घिरे हुए ब्रह्मा जी भगवान् विष्णु के ये वचन सुनकर ब्रह्मलोक वापस आ गए और देवतागण वहाँ से स्वर्ग लोक को चले गए। हे ऋषिगण! अपनी महिमा से महिमान्वित भगवान् विष्णु इस प्रकार स्वयं अवतार लेने को उद्यत हो शम्भल ग्राम में गए । वहाँ विष्णुयश के द्वारा उनकी पत्नी सुमति के गर्भ में भ्रूण रूप में आए गर्भस्थ भगवान् विष्णु के चरण-कमल की सेवा में ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि सब तत्पर थे । यह जानकर कि संसार के स्वामी भगवान् विष्णु ने पृथ्वी पर मानव गर्भ में वास किया है; सभी नदियाँ, समुद्र, पर्वत, लोक, जड़ और चेतन, देवता तथा ऋषि अत्यन्त प्रसन्न हुए। सारे प्राणी विविध प्रकार से अपने आनन्द को प्रकट करने लगे । पितर लोग आनन्द के मारे नाचने लगे, देवतागण सन्तुष्ट होकर विष्णु भगवान् का यश गाने लगे, गन्धर्व बाजा बजाने लगे और अप्सराएँ नृत्य करने लगीं। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान् विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया । माता-पिता अपने पुत्र के जन्म पर अत्यन्त पुलकित हुए। भगवान् कल्कि का जन्म होने पर भगवती महाषष्ठी ने धात्री का काम किया । अम्बिका देवी ने नाल को काटा, भगवती गंगा ने अपने जल से गर्भ-क्लेद को दूर किया और देवी सावित्री भगवान् के शरीर को नहलाने-धुलाने को उद्यत हुई । भगवान् कृष्ण के जन्म की ही तरह, भगवान् अनन्त विष्णु द्वारा कल्कि के रूप में अवतार धारण करने पर भगवती वसुमती सुधा - धार बहाने लगी । माँ भवानी ने मांगलिक वचन कहे । विष्णु भगवान् के चतुर्भुज रूप में शम्भल ग्राम में अवतार लेने की बात जानकर ब्रह्मा जी ने शीघ्र चलने वाले पवन को आज्ञा दी - 'हे पवन ! सूतिका गृह में जा कर तुम विष्णु भगवान् से कहो - हे नाथ! आपकी इस चतुर्भुज मूर्ति का दर्शन तो देवताओं को भी दुर्लभ है । यह विचार कर, हे भगवान् ! इस चतुर्भुज रूप को त्याग कर साधारण मनुष्य-सा रूप धारण कीजिए । ' इस प्रकार ब्रह्मा जी के वचन सुन कर शीतल, सुखद, सुगन्धित पवन ने यत्नपूर्वक शीघ्र ही विष्णु भगवान् से सूतिका गृह में जा कर ब्रह्मा के वचन का निवेदन किया । यह सुनकर कमलनयन भगवान् विष्णु ने उसी समय दो भुजाओं वाला रूप धारण किया । उस समय भगवान् की यह लीला देख कर उनके माता-पिता आश्चर्य से ठगे-से रह गए । श्री विष्णु भगवान् की माया से मोहित माता-पिता ने अपने मन में यह समझा कि हमने भ्रमवश ही वैसा समझा था; यानी दो भुजा वाले पुत्र को चार भुजा वाला समझा था । इसके बाद शम्भल ग्राम में सभी प्राणी पापों व क्लेश से मुक्त होकर उत्साहपूर्वक अनेक प्रकार के मंगलाचार करने लगे । संसार के स्वामी विष्णु जिष्णु भगवान् को पुत्र रूप में पाकर सुमति माता ने, जिस की मनोकामना पूरी हो गई थी, ब्राह्मणों को निमन्त्रित कर सौ गायें दान में दीं । अपने पुत्र विष्णु भगवान् के कल्याण के लिए, शुद्ध चित्त से पिता विष्णुयश ने ऋक्, यजुः और सामवेद जानने वाले ब्राह्मणों द्वारा उनका नामकरण कराया । उस समय हरि भगवान् का बाल रूप में दर्शन करने के निमित्त परशुराम, कृपाचार्य, व्यास और द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भिक्षुक का रूप धारण कर वहाँ आए । सूर्य के समान प्रभा से भरपूर ईश्वर-स्वरूप उन चार आगन्तुकों को देख कर ब्राह्मणों में श्रेष्ठ विष्णुयश जी के प्रसन्नता से रोंगटे खड़े हो गए और उन्होंने उन आगन्तुकों की पूजा की । भली-भाँति पूजा किए जाने पर उन महर्षियों ने सुखपूर्वक अपने-अपने आसन पर बैठ कर सर्वमूर्ति हरि भगवान् को श्री विष्णुयश की गोद में बैठे देखा । मुनियों में श्रेष्ठ उन जानकार विद्वानों ने मनुष्य रूप धारण किए हुए उस बालक को नमस्कार करके कलि का नाश करने के लिए कल्कि भगवान् ही पैदा हुए हैं, यह जान लिया । फिर वे संस्कार कर्म कर के और उनका नाम कल्कि प्रसिद्ध कर के प्रसन्नचित्त हो कर चले गए। इसके उपरान्त माता सुमति के लालन-पालन से कंसशत्रु यानी भगवान् विष्णु शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा की भाँति बढ़ने लगे । श्री कल्कि के जन्म लेने से पहले ही माता-पिता को प्रसन्न करने वाले, गुरु - ब्राह्मणों का हित करने वाले तीन
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बर्मा पवित्र - यह एक अद्भुत सुंदर बिल्ली है,जिसकी उपस्थिति इसके असामान्य के साथ fascinates। किंवदंतियों के अनुसार, यह नस्ल बर्मा से निकलती है। विशिष्ट रंग - यह इस बिल्ली को बाकी के बीच अलग करता है।
और असामान्य रंग कैसे आया? कई किंवदंतियों हैं। उनमें से सभी आप पुनर्विक्रय नहीं करेंगे। अब हम सबसे दिलचस्प बताते हैं। यह कहता है कि पहले एक बौद्ध मंदिर की पीले आंखों वाली सफेद लंबी बालों वाली बिल्लियों द्वारा संरक्षित किया गया था। इस इमारत में देवी की सुनहरा मूर्ति रखी गई थी, जिसकी चमकदार नीली आंखें थीं। एक बार दुर्भाग्य हुआ - लुटेरों ने मंदिर पर हमला किया। उन्होंने सबसे पुराने साधु को मार डाला और मंदिर पर कब्जा कर लिया। जल्द ही, लुटेरों ने एक अजीब आवाज सुनी। चारों ओर देखा, उन्होंने एक भिक्षु से संबंधित एक बिल्ली देखा। वह अपने मालिक के सिर पर खड़ा था और किसी तरह जादूगर रूप से बदल गया। उनके फर कोट ने एक सुनहरा रंग हासिल किया, जबकि मास्टर को छूने वाले पंजे की युक्तियां सफेद बनीं, और उनकी आंखें चमकदार नीली हो गईं।
इस तरह के एक चमत्कार को देखते हुए, मंदिर के रक्षकों ने प्रबंधित कियाअपने आप में ताकत पाएं और लुटेरों को पराजित करें। घटना के बाद, वफादार बिल्ली मालिक के साथ छह दिनों तक रही, और सातवें, दुर्भाग्य से, निधन हो गया। इस घटना के बाद मंदिर में बिल्ली को इतना अद्भुत रंग मिला।
ऐसा माना जाता है कि पवित्र बर्मा की नस्ल थीफ्रांस, 1 9 10 में एक अरबपति एक किट्टी और बिल्ली वितरित करना चाहता था, जिसे उसने पूर्व में खरीदा था। लेकिन बिल्ली यात्रा में नहीं टिकी, और बिल्ली गर्भवती थी। यह उनके शावक हैं जिन्हें नस्ल के पूर्वजों माना जाता है, हालांकि प्रजातियों को तुरंत वापस नहीं लिया गया था, लेकिन केवल फ्रांस के प्रजनकों के काम के परिणामस्वरूप।
पहली बार इस बिल्ली को 1 9 26 में प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया थासाल। उसी नस्ल के मानकों को चालीस वर्षों में अपनाया गया था, साथ ही साथ पवित्र बिरमा को दुनिया भर में मान्यता प्राप्त थी। रूसी संघ के क्षेत्र में, यह प्रजातियां केवल फैलनी शुरू हो रही हैं, इसलिए प्रदर्शनी देखने के लिए यह बेहद दुर्लभ है।
मानक से, नस्ल के प्रतिनिधियों का शरीर घना है,आकार में औसत, थोड़ा बढ़ाया। पूंछ झुका हुआ, पतला, बहुत लंबा नहीं है। पैरों की लंबाई के लिए आनुपातिक फीट, छोटा, पैर दौर। मध्यम आकार के सिर - गोल गाल के साथ। नाक छोटा है, ठोड़ी का उच्चारण किया जाता है। कान ने एक कोण पर थोड़ा सेट किया, छोटा, इंगित किया। गोल आँखें चमकदार नीली हैं।
हल्के बेज टोन का लंबा ऊन, और पीठ पर- स्वर्ण। चेहरे पर, कान, पूंछ और पंजे रंग-नुकीली के निशान की अनुमति है। इसके अलावा दाग अन्य रंग हो सकता है। उदाहरण के लिए, दूध चॉकलेट, गुलाबी ग्रे, काले दालचीनी, क्रीम और गहरे भूरे रंग के रंग। ध्यान दें, यह किटी उज्ज्वल सफेद "दस्ताने" अगले पांव से में पैरों पर है कि जब एक ही रंग के पीछे "spurs" (सफेद तीर के मध्य बछड़ा बैक फुट तक पहुँचते हैं, जरूरी सममित)।
जीवन प्रत्याशा पंद्रह साल है। हालांकि, उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए धन्यवाद, बिल्लियों लंबे जीवन जीते हैं (उदाहरण के लिए, पच्चीस साल)।
अगर हम प्रजनन के बारे में बात करते हैं, तो गर्भावस्था में बात करते हैंऐसी बिल्लियों तक दूसरी नस्लों (लगभग साठ दिनों) तक चलती है। एक कूड़े में, लगभग तीन या चार शावक पैदा होते हैं। ध्यान दें कि बच्चे मां से बहुत जुड़े हुए हैं।
बिल्लियों पवित्र बर्मा की नस्ल अलग हैउल्लेखनीय चरित्र ऐसे purrs जिज्ञासु, मोबाइल हैं। वे बहुत ही चंचल, निविदाएं हैं, जो अपने मालिकों को समर्पित हैं। ध्यान दें कि ये बिल्लियों लोगों से जुड़ी हैं, न कि निवास की जगह पर। बर्मा सामग्री चुनते समय इस सुविधा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ये बिल्लियों पूरी तरह से बच्चों के साथ, सभी परिवार के सदस्यों के साथ मिलते हैं। चूंकि बर्मी बहुत दोस्ताना और मिलनसार हैं, इसलिए वे अन्य जानवरों के साथ मिलते हैं।
इस नस्ल की बिल्लियों केंद्र में होना पसंद करते हैंध्यान, क्योंकि वे एक व्यक्ति के साथ संवाद करने में रुचि रखते हैं। मालिकों के मुताबिक, ये purrs बहुत स्मार्ट हैं, वे हमेशा कुछ नया आते हैं, वे दरवाजे खोल सकते हैं, उपकरणों पर बटन दबा सकते हैं। वे क्या नहीं करेंगे आपकी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते, क्योंकि वे बहुत सटीक हैं। इसके अलावा, नाराज बीमार पवित्र भी कुछ भी खराब नहीं करेगा, क्योंकि यह शांत, संतुलित और विरोधाभासी नहीं है।
कुछ नर्सरी में बिल्ली के बच्चे की बिक्री में लगे हुए हैंइस नस्ल, और उनकी सामग्री को कुछ शर्तों की आवश्यकता है। सही रंग को बनाए रखने के लिए, आपको डाई युक्त आहार भोजन से बाहर निकलना होगा। इसी कारण से, तापमान को उस कमरे में रखना जरूरी है जहां पवित्र बिरख स्थित है, तापमान बीस डिग्री से ऊपर है।
लंबे बालों वाले बर्मी को दो बार कॉम्बेड किया जाना चाहिएएक हफ्ते, और मौत की अवधि में - और भी अक्सर, अन्यथा कॉलर होंगे। आपको हर दिन अपनी आंखें और कान देखना चाहिए। यदि आवश्यकता है, तो आपको उन्हें धोना होगा।
इस नस्ल के प्रतिनिधियों को झुकाव नहीं हैअतिरक्षण, इसलिए वे असीमित मात्रा में भोजन को सुरक्षित रूप से छोड़ सकते हैं। एक पवित्र बर्मा कभी भी इसकी जरूरत से ज्यादा नहीं खाएगा। ऐसी खूबसूरत बिल्ली को खिलाओ, आपको केवल उच्च गुणवत्ता वाले फ़ीड (प्रीमियम) की आवश्यकता होती है, जिसमें बहुत से फाइबर, प्रोटीन और, निश्चित रूप से वसा होता है।
बिल्ली के बच्चे बहुत मोबाइल हैं। इसलिए, यदि आप ऐसे जानवर को शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको खिलौने खरीदना होगा। अन्यथा, बिल्ली के बच्चे उन्हें खुद को खोजने में सक्षम होंगे। उम्र के साथ, playfulness अधिक मध्यम हो जाता है, जिसके बाद आने वाले वर्षों के लिए यह वही रहता है।
हालांकि बिल्ली, जिसमें बिल्ली के बच्चे हैं, भी नहीं हैबच्चों के साथ मज़ा लेने के लिए, गेंद के बाद भागो। बर्मा, ज़ाहिर है, सियामीज़ के रूप में ऐसा "गायक" नहीं है, लेकिन नस्ल के प्रतिनिधि भी अपने विचारों को एक सुन्दर मेयो में व्यक्त करना पसंद करते हैं।
अगर हम इस बिल्ली के स्वास्थ्य के बारे में बात करते हैं, तो यह मजबूत है। ऐसे purrs शायद ही कभी बीमार हो जाते हैं। एक नियम के रूप में, इन बिल्लियों का जन्म भी जटिलताओं के बिना जाता है।
पवित्र बर्मा एक छोटी नस्ल है, यहनस्ल पैदा करना मुश्किल है, इसलिए यदि आप ऐसे बिल्ली के बच्चे को खरीदना चाहते हैं, तो आपको वंशावली जानना होगा। इस बिल्ली में सभी पूर्वजों को जाना जाता है। यहां तक कि यदि आप आत्मा के लिए बिल्ली का बच्चा खरीदना चाहते हैं, तो इसे प्रदर्शित करने का इरादा नहीं है, फिर भी वंशावली के साथ चयन करें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपके पालतू जानवर के पास अच्छा स्वास्थ्य है।
इस तरह के एक बिल्ली का बच्चा खरीदते समय, इस तथ्य के लिए तैयार रहेंआपको खर्च करने की आवश्यकता होगी। और पवित्र बर्मा कितना है? ऐसी बिल्ली के लिए कीमत काफी अधिक है। शुद्धब्रेड बिल्ली के बच्चे के लिए न्यूनतम लागत 25 हजार रूबल है, और प्रदर्शनी के लिए जानवर अधिक महंगी हैं (लगभग 60 हजार)। इतना महंगा क्यों? यह कीमत प्रजनन, बड़ी रखरखाव लागत, और नस्ल की उच्च आवश्यकताओं में कठिनाई द्वारा समझाया गया है। हमारे राज्य में कुछ नस्लों और नर्सरी इतनी महंगी खुशी दे सकती हैं।
रूसी संघ में कुछ नर्सरी हैं, जहां उन्होंने इस नस्ल का प्रजनन किया। लेकिन हम उनमें से कुछ को सूचीबद्ध करते हैं।
उदाहरण के लिए, आप मास्को में एक बिल्ली खरीद सकते हैं। कहाँ वास्तव में? उदाहरण के लिए, «आराधना» - एक अच्छा नर्सरी। पवित्र Birma भी "एलिगेंट" में बेच दिया, तो आप "Aleana" kennel में एक बिल्ली खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि के बारे में चार साल के लिए चारों ओर हो गया है। "Enimalz किंगडम», «लेस Yeux parlant» - यह भी नर्सरी, जो मास्को और मॉस्को क्षेत्र के राज्य क्षेत्र में इस नस्ल के बिल्लियों नस्ल है।
बिल्लियों की इस नस्ल का मुख्य लाभ आकर्षण हैऔर चरित्र। ये purrs संचार पूजा करते हैं। वे स्मार्ट, चंचल और जिज्ञासु हैं। उन्हें प्रशंसा की जानी चाहिए। बिल्लियों हमेशा मालिकों के करीब रहने की कोशिश करते हैं, बच्चों और अन्य जानवरों के साथ अच्छी तरह से मिलता है। एक नियम के रूप में, वे संघर्ष मुक्त हैं।
अगर हम कमियों के बारे में बात करते हैं, तो उनमें कोई दिखाई नहीं दे रहा है। क्या वह minuses आप सामग्री की लागत और जटिलता की गणना कर सकते हैं।
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बर्मा पवित्र - यह एक अद्भुत सुंदर बिल्ली है,जिसकी उपस्थिति इसके असामान्य के साथ fascinates। किंवदंतियों के अनुसार, यह नस्ल बर्मा से निकलती है। विशिष्ट रंग - यह इस बिल्ली को बाकी के बीच अलग करता है। और असामान्य रंग कैसे आया? कई किंवदंतियों हैं। उनमें से सभी आप पुनर्विक्रय नहीं करेंगे। अब हम सबसे दिलचस्प बताते हैं। यह कहता है कि पहले एक बौद्ध मंदिर की पीले आंखों वाली सफेद लंबी बालों वाली बिल्लियों द्वारा संरक्षित किया गया था। इस इमारत में देवी की सुनहरा मूर्ति रखी गई थी, जिसकी चमकदार नीली आंखें थीं। एक बार दुर्भाग्य हुआ - लुटेरों ने मंदिर पर हमला किया। उन्होंने सबसे पुराने साधु को मार डाला और मंदिर पर कब्जा कर लिया। जल्द ही, लुटेरों ने एक अजीब आवाज सुनी। चारों ओर देखा, उन्होंने एक भिक्षु से संबंधित एक बिल्ली देखा। वह अपने मालिक के सिर पर खड़ा था और किसी तरह जादूगर रूप से बदल गया। उनके फर कोट ने एक सुनहरा रंग हासिल किया, जबकि मास्टर को छूने वाले पंजे की युक्तियां सफेद बनीं, और उनकी आंखें चमकदार नीली हो गईं। इस तरह के एक चमत्कार को देखते हुए, मंदिर के रक्षकों ने प्रबंधित कियाअपने आप में ताकत पाएं और लुटेरों को पराजित करें। घटना के बाद, वफादार बिल्ली मालिक के साथ छह दिनों तक रही, और सातवें, दुर्भाग्य से, निधन हो गया। इस घटना के बाद मंदिर में बिल्ली को इतना अद्भुत रंग मिला। ऐसा माना जाता है कि पवित्र बर्मा की नस्ल थीफ्रांस, एक नौ दस में एक अरबपति एक किट्टी और बिल्ली वितरित करना चाहता था, जिसे उसने पूर्व में खरीदा था। लेकिन बिल्ली यात्रा में नहीं टिकी, और बिल्ली गर्भवती थी। यह उनके शावक हैं जिन्हें नस्ल के पूर्वजों माना जाता है, हालांकि प्रजातियों को तुरंत वापस नहीं लिया गया था, लेकिन केवल फ्रांस के प्रजनकों के काम के परिणामस्वरूप। पहली बार इस बिल्ली को एक नौ छब्बीस में प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया थासाल। उसी नस्ल के मानकों को चालीस वर्षों में अपनाया गया था, साथ ही साथ पवित्र बिरमा को दुनिया भर में मान्यता प्राप्त थी। रूसी संघ के क्षेत्र में, यह प्रजातियां केवल फैलनी शुरू हो रही हैं, इसलिए प्रदर्शनी देखने के लिए यह बेहद दुर्लभ है। मानक से, नस्ल के प्रतिनिधियों का शरीर घना है,आकार में औसत, थोड़ा बढ़ाया। पूंछ झुका हुआ, पतला, बहुत लंबा नहीं है। पैरों की लंबाई के लिए आनुपातिक फीट, छोटा, पैर दौर। मध्यम आकार के सिर - गोल गाल के साथ। नाक छोटा है, ठोड़ी का उच्चारण किया जाता है। कान ने एक कोण पर थोड़ा सेट किया, छोटा, इंगित किया। गोल आँखें चमकदार नीली हैं। हल्के बेज टोन का लंबा ऊन, और पीठ पर- स्वर्ण। चेहरे पर, कान, पूंछ और पंजे रंग-नुकीली के निशान की अनुमति है। इसके अलावा दाग अन्य रंग हो सकता है। उदाहरण के लिए, दूध चॉकलेट, गुलाबी ग्रे, काले दालचीनी, क्रीम और गहरे भूरे रंग के रंग। ध्यान दें, यह किटी उज्ज्वल सफेद "दस्ताने" अगले पांव से में पैरों पर है कि जब एक ही रंग के पीछे "spurs" । जीवन प्रत्याशा पंद्रह साल है। हालांकि, उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए धन्यवाद, बिल्लियों लंबे जीवन जीते हैं । अगर हम प्रजनन के बारे में बात करते हैं, तो गर्भावस्था में बात करते हैंऐसी बिल्लियों तक दूसरी नस्लों तक चलती है। एक कूड़े में, लगभग तीन या चार शावक पैदा होते हैं। ध्यान दें कि बच्चे मां से बहुत जुड़े हुए हैं। बिल्लियों पवित्र बर्मा की नस्ल अलग हैउल्लेखनीय चरित्र ऐसे purrs जिज्ञासु, मोबाइल हैं। वे बहुत ही चंचल, निविदाएं हैं, जो अपने मालिकों को समर्पित हैं। ध्यान दें कि ये बिल्लियों लोगों से जुड़ी हैं, न कि निवास की जगह पर। बर्मा सामग्री चुनते समय इस सुविधा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ये बिल्लियों पूरी तरह से बच्चों के साथ, सभी परिवार के सदस्यों के साथ मिलते हैं। चूंकि बर्मी बहुत दोस्ताना और मिलनसार हैं, इसलिए वे अन्य जानवरों के साथ मिलते हैं। इस नस्ल की बिल्लियों केंद्र में होना पसंद करते हैंध्यान, क्योंकि वे एक व्यक्ति के साथ संवाद करने में रुचि रखते हैं। मालिकों के मुताबिक, ये purrs बहुत स्मार्ट हैं, वे हमेशा कुछ नया आते हैं, वे दरवाजे खोल सकते हैं, उपकरणों पर बटन दबा सकते हैं। वे क्या नहीं करेंगे आपकी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते, क्योंकि वे बहुत सटीक हैं। इसके अलावा, नाराज बीमार पवित्र भी कुछ भी खराब नहीं करेगा, क्योंकि यह शांत, संतुलित और विरोधाभासी नहीं है। कुछ नर्सरी में बिल्ली के बच्चे की बिक्री में लगे हुए हैंइस नस्ल, और उनकी सामग्री को कुछ शर्तों की आवश्यकता है। सही रंग को बनाए रखने के लिए, आपको डाई युक्त आहार भोजन से बाहर निकलना होगा। इसी कारण से, तापमान को उस कमरे में रखना जरूरी है जहां पवित्र बिरख स्थित है, तापमान बीस डिग्री से ऊपर है। लंबे बालों वाले बर्मी को दो बार कॉम्बेड किया जाना चाहिएएक हफ्ते, और मौत की अवधि में - और भी अक्सर, अन्यथा कॉलर होंगे। आपको हर दिन अपनी आंखें और कान देखना चाहिए। यदि आवश्यकता है, तो आपको उन्हें धोना होगा। इस नस्ल के प्रतिनिधियों को झुकाव नहीं हैअतिरक्षण, इसलिए वे असीमित मात्रा में भोजन को सुरक्षित रूप से छोड़ सकते हैं। एक पवित्र बर्मा कभी भी इसकी जरूरत से ज्यादा नहीं खाएगा। ऐसी खूबसूरत बिल्ली को खिलाओ, आपको केवल उच्च गुणवत्ता वाले फ़ीड की आवश्यकता होती है, जिसमें बहुत से फाइबर, प्रोटीन और, निश्चित रूप से वसा होता है। बिल्ली के बच्चे बहुत मोबाइल हैं। इसलिए, यदि आप ऐसे जानवर को शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको खिलौने खरीदना होगा। अन्यथा, बिल्ली के बच्चे उन्हें खुद को खोजने में सक्षम होंगे। उम्र के साथ, playfulness अधिक मध्यम हो जाता है, जिसके बाद आने वाले वर्षों के लिए यह वही रहता है। हालांकि बिल्ली, जिसमें बिल्ली के बच्चे हैं, भी नहीं हैबच्चों के साथ मज़ा लेने के लिए, गेंद के बाद भागो। बर्मा, ज़ाहिर है, सियामीज़ के रूप में ऐसा "गायक" नहीं है, लेकिन नस्ल के प्रतिनिधि भी अपने विचारों को एक सुन्दर मेयो में व्यक्त करना पसंद करते हैं। अगर हम इस बिल्ली के स्वास्थ्य के बारे में बात करते हैं, तो यह मजबूत है। ऐसे purrs शायद ही कभी बीमार हो जाते हैं। एक नियम के रूप में, इन बिल्लियों का जन्म भी जटिलताओं के बिना जाता है। पवित्र बर्मा एक छोटी नस्ल है, यहनस्ल पैदा करना मुश्किल है, इसलिए यदि आप ऐसे बिल्ली के बच्चे को खरीदना चाहते हैं, तो आपको वंशावली जानना होगा। इस बिल्ली में सभी पूर्वजों को जाना जाता है। यहां तक कि यदि आप आत्मा के लिए बिल्ली का बच्चा खरीदना चाहते हैं, तो इसे प्रदर्शित करने का इरादा नहीं है, फिर भी वंशावली के साथ चयन करें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपके पालतू जानवर के पास अच्छा स्वास्थ्य है। इस तरह के एक बिल्ली का बच्चा खरीदते समय, इस तथ्य के लिए तैयार रहेंआपको खर्च करने की आवश्यकता होगी। और पवित्र बर्मा कितना है? ऐसी बिल्ली के लिए कीमत काफी अधिक है। शुद्धब्रेड बिल्ली के बच्चे के लिए न्यूनतम लागत पच्चीस हजार रूबल है, और प्रदर्शनी के लिए जानवर अधिक महंगी हैं । इतना महंगा क्यों? यह कीमत प्रजनन, बड़ी रखरखाव लागत, और नस्ल की उच्च आवश्यकताओं में कठिनाई द्वारा समझाया गया है। हमारे राज्य में कुछ नस्लों और नर्सरी इतनी महंगी खुशी दे सकती हैं। रूसी संघ में कुछ नर्सरी हैं, जहां उन्होंने इस नस्ल का प्रजनन किया। लेकिन हम उनमें से कुछ को सूचीबद्ध करते हैं। उदाहरण के लिए, आप मास्को में एक बिल्ली खरीद सकते हैं। कहाँ वास्तव में? उदाहरण के लिए, «आराधना» - एक अच्छा नर्सरी। पवित्र Birma भी "एलिगेंट" में बेच दिया, तो आप "Aleana" kennel में एक बिल्ली खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि के बारे में चार साल के लिए चारों ओर हो गया है। "Enimalz किंगडम», «लेस Yeux parlant» - यह भी नर्सरी, जो मास्को और मॉस्को क्षेत्र के राज्य क्षेत्र में इस नस्ल के बिल्लियों नस्ल है। बिल्लियों की इस नस्ल का मुख्य लाभ आकर्षण हैऔर चरित्र। ये purrs संचार पूजा करते हैं। वे स्मार्ट, चंचल और जिज्ञासु हैं। उन्हें प्रशंसा की जानी चाहिए। बिल्लियों हमेशा मालिकों के करीब रहने की कोशिश करते हैं, बच्चों और अन्य जानवरों के साथ अच्छी तरह से मिलता है। एक नियम के रूप में, वे संघर्ष मुक्त हैं। अगर हम कमियों के बारे में बात करते हैं, तो उनमें कोई दिखाई नहीं दे रहा है। क्या वह minuses आप सामग्री की लागत और जटिलता की गणना कर सकते हैं।
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जयपुर, डेस्क रिपोर्ट। राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (old pension scheme) लागू करने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इस पर कार्य भी शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों (employees) के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा बजट सत्र (Budget session) में की गई थी। जिसके बाद वित्त विभाग (financial department) ने इसके लिए जानकारी उठानी शुरू कर दी गई है। 1 अप्रैल 2022 से रिटायर होने वाली कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम के हिसाब से पेंशन (pension) अदायगी की जाएगी।
वित्त विभाग के अधिकारियों की माने तो जयपुर से लेकर जिलों तक की तैयारियां शुरू कर दी गई है। डाटा कलेक्शन (data collection) का काम शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में 1 अप्रैल से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को पेंशन के रूप में बड़ी राशि दी जाएगी। इससे पहले नई पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों को मूल वेतन और DA की 10 फीसद राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती थी। वहीं पुरानी पेंशन योजना के तहत उसको पेंशन उपलब्ध कराए जाने पर राज्य सरकार पर सालाना ₹19000 करोड़ रूपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।
हालांकि ओल्ड पेंशन योजना में राजस्थान सरकार को ज्यादा भार नहीं झेलना होगा। दरअसल 2004 में उसके बाद सरकारी नौकरी में आए कर्मचारी 2030 के आसपास रिटायर होंगे। ऐसे में 2030 के बाद सालाना अतिरिक्त भार में वृद्धि देखी जाएगी। वही राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम से साल 2030 में दोगुना हो जाएगा। इसके अलावा हर साल 10 फीसद की तेजी से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा।
वहीं राज्य में कर्मचारियों के डाटा कलेक्शन का कार्य शुरू कर दिया गया। बता दें कि नहीं पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों के वेतन से काटे गए एनपीएस और सरकार के योगदान को मिलाकर अब तक कुल ₹25000 करोड़ रुपए बैंक में जमा किए जा चुके हैं। जबकि अन्य जगह निवेश की गई रकम मिलाकर कुल मौजूदा वैल्यू 31000 करोड़ रुपए से ज्यादा की है।
वही राजस्थान सरकार में औसत 30000 कर्मचारी 1 साल में रिटायर होते हैं। राज्य में अब तक चार लाख 60 हजार के करीब पेंशनर्स मौजूद है। जिनमें से एक लाख 50,000 से अधिक फैमिली पेंशनर है। वही एक अप्रैल 2004 से सरकारी सेवा में नियुक्त हुए कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के तहत शामिल किया गया था। न्यू पेंशन स्कीम के तहत 2016 से 22 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों की संख्या 2441 मानी जा रही है। इस साल मार्च तक 726 कर्मचारी के रिटायर होने की संभावना है।
फ़िलहाल पश्चिम बंगाल को छोड़कर, NPS अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। केंद्र ने सरकारी सेवा में शामिल हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नए पेंशन स्कीम की शुरुआत की थी। वहीँ यह स्कीम सशस्त्र बलों को छोड़कर सभी विभागों पर लागू है।
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जयपुर, डेस्क रिपोर्ट। राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इस पर कार्य भी शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा बजट सत्र में की गई थी। जिसके बाद वित्त विभाग ने इसके लिए जानकारी उठानी शुरू कर दी गई है। एक अप्रैल दो हज़ार बाईस से रिटायर होने वाली कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम के हिसाब से पेंशन अदायगी की जाएगी। वित्त विभाग के अधिकारियों की माने तो जयपुर से लेकर जिलों तक की तैयारियां शुरू कर दी गई है। डाटा कलेक्शन का काम शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में एक अप्रैल से रिटायर होने वाले कर्मचारियों को पेंशन के रूप में बड़ी राशि दी जाएगी। इससे पहले नई पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों को मूल वेतन और DA की दस फीसद राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती थी। वहीं पुरानी पेंशन योजना के तहत उसको पेंशन उपलब्ध कराए जाने पर राज्य सरकार पर सालाना उन्नीस हज़ार रुपया करोड़ रूपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। हालांकि ओल्ड पेंशन योजना में राजस्थान सरकार को ज्यादा भार नहीं झेलना होगा। दरअसल दो हज़ार चार में उसके बाद सरकारी नौकरी में आए कर्मचारी दो हज़ार तीस के आसपास रिटायर होंगे। ऐसे में दो हज़ार तीस के बाद सालाना अतिरिक्त भार में वृद्धि देखी जाएगी। वही राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम से साल दो हज़ार तीस में दोगुना हो जाएगा। इसके अलावा हर साल दस फीसद की तेजी से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा। वहीं राज्य में कर्मचारियों के डाटा कलेक्शन का कार्य शुरू कर दिया गया। बता दें कि नहीं पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों के वेतन से काटे गए एनपीएस और सरकार के योगदान को मिलाकर अब तक कुल पच्चीस हज़ार रुपया करोड़ रुपए बैंक में जमा किए जा चुके हैं। जबकि अन्य जगह निवेश की गई रकम मिलाकर कुल मौजूदा वैल्यू इकतीस हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा की है। वही राजस्थान सरकार में औसत तीस हज़ार कर्मचारी एक साल में रिटायर होते हैं। राज्य में अब तक चार लाख साठ हजार के करीब पेंशनर्स मौजूद है। जिनमें से एक लाख पचास,शून्य से अधिक फैमिली पेंशनर है। वही एक अप्रैल दो हज़ार चार से सरकारी सेवा में नियुक्त हुए कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के तहत शामिल किया गया था। न्यू पेंशन स्कीम के तहत दो हज़ार सोलह से बाईस तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों की संख्या दो हज़ार चार सौ इकतालीस मानी जा रही है। इस साल मार्च तक सात सौ छब्बीस कर्मचारी के रिटायर होने की संभावना है। फ़िलहाल पश्चिम बंगाल को छोड़कर, NPS अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। केंद्र ने सरकारी सेवा में शामिल हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नए पेंशन स्कीम की शुरुआत की थी। वहीँ यह स्कीम सशस्त्र बलों को छोड़कर सभी विभागों पर लागू है।
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क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने कुछ विशेष जीव- जंतुओं और पेड़-पौधों को अपने वातावरण के साथ एडजस्ट होने के लिए कुछ विशेषताएं दी है। जिससे ये जीव-जंतु एवं पेड़-पौधे बदलते हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों में अपने आप को ढाल पाते हैं और अपने अस्तित्व को बनाए रखते हैं। बदलती हुई पर्यावरणीय दशा में अपने आपको एडजस्ट करने के लिए पेड़-पौधे एवं जीव-जंतु दो प्रकार की प्रोसेस एप्रोच करते हैं। जिन्हें अनुकूलन (Adaptation) एवं पर्यानुकूलन (Acclimatization) कहा जाता है।
हमने अपने आसपास ऐसे कई जीव-जन्तु और पेड़-पौधे देखें होंगे जो अपने आप को बदलती हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल बना लेते हैं। जैसे -नागफनी (English-Cactus, Boatanical Name- Opantia) बहुत ही Common एक्सांपल है। Cactus mostly डेजर्ट एरिया में रहता है, पानी की कमी को पूरा करने के लिए इस पौधे की पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं जबकि इसका तना, पत्ती का शेप ले लेता है।
इसी प्रकार कंगारु रेट (Kangaroo Rate) के लूप ऑफ हेनले (Loop of Hanley) काफी लंबे होते हैं जिससे कि यूरिन के water loss कम से कम होता है।
परंतु यह अनुकूलन (Adaptation) जल्दी होने वाली क्रिया नहीं है बल्कि यह Long Term Change चेंज है जो कि जेनेटिकली फिक्स (Genetically Fix) होता है।
जब हम पहाड़ पर जाते हैं तो वायुमंडलीय दाब कम होता जाता है जिसके कारण हमें कई प्रकार की लक्षण जैसे- थकान, वोमिटिंग आदि होने लगता है परंतु यदि हम ज्यादा समय तक पहाड़ों रहेंगे तो हमारा शरीर पहाड़ों पर रहने के लिए पर्यानुकूलित (Acclimitize) हो जाएगा। हमारे शरीर में RBC प्रोडक्शन बढ़ जाने के कारण हमारा रंग गोरा दिखाई देगा। हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से बाइंडिंग कैपिसिटी घट जाती है जिसके कारण BREATHING RATE बढ़ जाती है और जब हम पहाड़ से वापस आ जाएंगे तो RBC प्रोडक्शन रेट नॉर्मल हो जाएगा परंतु ये चेंज जेनेटिकली फिक्स (Genetically Fix) नहीं होते।
1. What is Adaptation/ अनुकूलन क्या है?
2. What is Acclimatization/ पार्यानुकूलन क्या है ?
3. Spines of Cactus is/नागफनी के कांटे क्या है?
4. Kangaroo Rate Loop of Hanley are/ कंगारु रेट के लूप ऑफ हैनले कैसे होते हैं?
5. On Hills RBC production is/ पहाड़ों पर लाल रक्त कणिका का उत्पादन कैसा होता है?
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क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने कुछ विशेष जीव- जंतुओं और पेड़-पौधों को अपने वातावरण के साथ एडजस्ट होने के लिए कुछ विशेषताएं दी है। जिससे ये जीव-जंतु एवं पेड़-पौधे बदलते हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों में अपने आप को ढाल पाते हैं और अपने अस्तित्व को बनाए रखते हैं। बदलती हुई पर्यावरणीय दशा में अपने आपको एडजस्ट करने के लिए पेड़-पौधे एवं जीव-जंतु दो प्रकार की प्रोसेस एप्रोच करते हैं। जिन्हें अनुकूलन एवं पर्यानुकूलन कहा जाता है। हमने अपने आसपास ऐसे कई जीव-जन्तु और पेड़-पौधे देखें होंगे जो अपने आप को बदलती हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल बना लेते हैं। जैसे -नागफनी बहुत ही Common एक्सांपल है। Cactus mostly डेजर्ट एरिया में रहता है, पानी की कमी को पूरा करने के लिए इस पौधे की पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं जबकि इसका तना, पत्ती का शेप ले लेता है। इसी प्रकार कंगारु रेट के लूप ऑफ हेनले काफी लंबे होते हैं जिससे कि यूरिन के water loss कम से कम होता है। परंतु यह अनुकूलन जल्दी होने वाली क्रिया नहीं है बल्कि यह Long Term Change चेंज है जो कि जेनेटिकली फिक्स होता है। जब हम पहाड़ पर जाते हैं तो वायुमंडलीय दाब कम होता जाता है जिसके कारण हमें कई प्रकार की लक्षण जैसे- थकान, वोमिटिंग आदि होने लगता है परंतु यदि हम ज्यादा समय तक पहाड़ों रहेंगे तो हमारा शरीर पहाड़ों पर रहने के लिए पर्यानुकूलित हो जाएगा। हमारे शरीर में RBC प्रोडक्शन बढ़ जाने के कारण हमारा रंग गोरा दिखाई देगा। हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से बाइंडिंग कैपिसिटी घट जाती है जिसके कारण BREATHING RATE बढ़ जाती है और जब हम पहाड़ से वापस आ जाएंगे तो RBC प्रोडक्शन रेट नॉर्मल हो जाएगा परंतु ये चेंज जेनेटिकली फिक्स नहीं होते। एक. What is Adaptation/ अनुकूलन क्या है? दो. What is Acclimatization/ पार्यानुकूलन क्या है ? तीन. Spines of Cactus is/नागफनी के कांटे क्या है? चार. Kangaroo Rate Loop of Hanley are/ कंगारु रेट के लूप ऑफ हैनले कैसे होते हैं? पाँच. On Hills RBC production is/ पहाड़ों पर लाल रक्त कणिका का उत्पादन कैसा होता है?
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Stock Tips In Hindi: शेयर बाजार मंगलवार को एक बार फिर कारोबार के दौरान रिकार्ड स्तर पर पहुंच गये लेकिन अंत में आईटी, औषधि और बैंक शेयरों में उच्च स्तर पर हुई मुनाफावसूली से बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स में पिछले तीन दिन से जारी तेजी पर विराम लगा और यह 17. 43 अंक यानी 0. 03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,279. 48 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 58,553. 07 अंक के रिकार्ड स्तर तक चला गया था। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 15. 70 अंक यानी 0. 09 प्रतिशत टूटकर 17,362. 10 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह रिकार्ड 17,436. 50 अंक तक चला गया था।
डेली चार्ट पर nifty50 एक इंडिसाइसिव कैंडल बना रहा है। लगातार दूसरे दिन nifty50 में यह ट्रेंड देखा गया है। विश्लेषकों का कहना है कि एडवांस डिक्लाइन रेश्यो अब मंदड़ियों के पक्ष में है और शेयर बाजार में कमजोरी दर्ज की जा सकती है। चार्ट व्यू इंडिया डॉट इन के मजहर मोहम्मद ने कहा कि दो मोमेंटम इंडिकेटर पर Nifty में बिकवाली साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा, "अगर निफ्टी 17287 से नीचे कारोबार करता है तो शेयर बाजार में कमजोरी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद निफ्टी का शुरुआती टारगेट 17200 अंक हो सकता है। "
शेयरखान के गौरव रत्न पारखी ने कहा कि Nifty 50 अब शॉर्ट टर्म कंसोलिडेशन के फेज में प्रवेश कर रहा है और अब निचले स्तर की तरफ बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि निफ्टी का निचला लेवल 17000 के अंक के आसपास हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में निफ्टी के 17000 से 17500 के लेवल के बीच कारोबार करने की संभावना है।
किन शेयरों में आएगी तेजी?
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस या एमएसीडी (MACD) के हिसाब से बुधवार के कारोबार में एनएमडीसी, एचडीएफसी, जिंदल स्टील इंडस्ट्रीज, सेंचुरी प्लाई बोर्ड, अरविंद लिमिटेड, जेके लक्ष्मी सीमेंट, वर्धमान स्पेशल, कमर्शियल इंजीनियर, अंबिका कॉटन, डीसीएम श्रीराम, स्वराज इंजन, हाईटेक कॉरपोरेशन और कल्याणी इन्वेस्टमेंट जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की जा सकती है।
किन शेयरों में कमजोरी के संकेत?
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस एमएसीडी (MACD) के हिसाब से मैक्स हेल्थ केयर, बलरामपुर चीनी, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल, इमामी, बाटा इंडिया, सोलर इंडस्ट्रीज, बजाज होल्डिंग, गोल्डन टोबैको, शीलाफोम, रत्नमणि मेटल और NDR ऑटो कंपोनेंट्स के शेयरों में कमजोरी दर्ज की जा सकती है।
यह भी पढ़ेंः फ्री गिफ्ट या कैशबैक के चक्कर में बैंक अकाउंट हो सकता है खाली, जानिए क्या है वजह?
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Stock Tips In Hindi: शेयर बाजार मंगलवार को एक बार फिर कारोबार के दौरान रिकार्ड स्तर पर पहुंच गये लेकिन अंत में आईटी, औषधि और बैंक शेयरों में उच्च स्तर पर हुई मुनाफावसूली से बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में पिछले तीन दिन से जारी तेजी पर विराम लगा और यह सत्रह. तैंतालीस अंक यानी शून्य. तीन प्रतिशत की गिरावट के साथ अट्ठावन,दो सौ उन्यासी. अड़तालीस अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह अट्ठावन,पाँच सौ तिरेपन. सात अंक के रिकार्ड स्तर तक चला गया था। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी पंद्रह. सत्तर अंक यानी शून्य. नौ प्रतिशत टूटकर सत्रह,तीन सौ बासठ. दस पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह रिकार्ड सत्रह,चार सौ छत्तीस. पचास अंक तक चला गया था। डेली चार्ट पर niftyपचास एक इंडिसाइसिव कैंडल बना रहा है। लगातार दूसरे दिन niftyपचास में यह ट्रेंड देखा गया है। विश्लेषकों का कहना है कि एडवांस डिक्लाइन रेश्यो अब मंदड़ियों के पक्ष में है और शेयर बाजार में कमजोरी दर्ज की जा सकती है। चार्ट व्यू इंडिया डॉट इन के मजहर मोहम्मद ने कहा कि दो मोमेंटम इंडिकेटर पर Nifty में बिकवाली साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा, "अगर निफ्टी सत्रह हज़ार दो सौ सत्तासी से नीचे कारोबार करता है तो शेयर बाजार में कमजोरी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद निफ्टी का शुरुआती टारगेट सत्रह हज़ार दो सौ अंक हो सकता है। " शेयरखान के गौरव रत्न पारखी ने कहा कि Nifty पचास अब शॉर्ट टर्म कंसोलिडेशन के फेज में प्रवेश कर रहा है और अब निचले स्तर की तरफ बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि निफ्टी का निचला लेवल सत्रह हज़ार के अंक के आसपास हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में निफ्टी के सत्रह हज़ार से सत्रह हज़ार पाँच सौ के लेवल के बीच कारोबार करने की संभावना है। किन शेयरों में आएगी तेजी? मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस या एमएसीडी के हिसाब से बुधवार के कारोबार में एनएमडीसी, एचडीएफसी, जिंदल स्टील इंडस्ट्रीज, सेंचुरी प्लाई बोर्ड, अरविंद लिमिटेड, जेके लक्ष्मी सीमेंट, वर्धमान स्पेशल, कमर्शियल इंजीनियर, अंबिका कॉटन, डीसीएम श्रीराम, स्वराज इंजन, हाईटेक कॉरपोरेशन और कल्याणी इन्वेस्टमेंट जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की जा सकती है। किन शेयरों में कमजोरी के संकेत? मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस एमएसीडी के हिसाब से मैक्स हेल्थ केयर, बलरामपुर चीनी, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल, इमामी, बाटा इंडिया, सोलर इंडस्ट्रीज, बजाज होल्डिंग, गोल्डन टोबैको, शीलाफोम, रत्नमणि मेटल और NDR ऑटो कंपोनेंट्स के शेयरों में कमजोरी दर्ज की जा सकती है। यह भी पढ़ेंः फ्री गिफ्ट या कैशबैक के चक्कर में बैंक अकाउंट हो सकता है खाली, जानिए क्या है वजह?
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IPL 2022 के 5वें मुकाबले में Rajasthan Royals ने Sunrisers Hyderabad को हराकर इस टूर्नामेंट में जीत के आगाज की। राजस्थान रॉयल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट के नुकसान पर 210 रन बनाए। राजस्थान के लिए कप्तान संजू सैमसन ने 55 रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद 7 विकेट के नुकसान पर 149 रन ही बना सकी।
सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत अच्छी रही। पहले विकेट के लिए सलामी बल्लेबाजों ने 58 रन बनाए। यशस्वी जैसवाल 20 रन बनाकर चलते बने। उसके कुछ देर बाद बटलर भी 78 के स्कोर पर 35 रन बनाकर चलते बने। उसके बाद देवदत्त और संजू सैमसन ने मिलकर 73 रनों की साझेदारी की। देवदत्त पदिक्कल ने 41 और कप्तान संजू सैमसन ने 55 रन बनाए। इन दोनों के बाद हेटमायर 32 रनों की पारी खेली और टीम को 210 रनों तक पहुंचा दिया। सनराइजर्स हैदराबाद के लिए भुवनेश्वर कुमार ने 2, नटराजन ने 2 और उमरान मालिक ने 2 विकेट लिए।
जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 3 विकेट तो महज 9 रन के स्कोर पर ही गंवा दिया। चौथा विकेट 29 पर और पांचवां 37 रन गंवा दिया। लगातर विकेट गंवाने के बाद टीम संभल नहीं पाई और मुकाबले को बड़े अंतर से हार गई। हैदराबाद के लिए मरक्रम ने 57, सूंदर ने 40 और शेपर्ड ने 24 रन बनाए। उसके अलावा कोई बल्लेबाज दहाई के आंकड़ा तक नहीं पहुंच सका। राजस्थान के लिए युजवेंद्र चहल ने 3, बोल्ट ने 2 और प्रसिद्घ कृष्णा ने 2 विकेट चटकाए।
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IPL दो हज़ार बाईस के पाँचवें मुकाबले में Rajasthan Royals ने Sunrisers Hyderabad को हराकर इस टूर्नामेंट में जीत के आगाज की। राजस्थान रॉयल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए छः विकेट के नुकसान पर दो सौ दस रन बनाए। राजस्थान के लिए कप्तान संजू सैमसन ने पचपन रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद सात विकेट के नुकसान पर एक सौ उनचास रन ही बना सकी। सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत अच्छी रही। पहले विकेट के लिए सलामी बल्लेबाजों ने अट्ठावन रन बनाए। यशस्वी जैसवाल बीस रन बनाकर चलते बने। उसके कुछ देर बाद बटलर भी अठहत्तर के स्कोर पर पैंतीस रन बनाकर चलते बने। उसके बाद देवदत्त और संजू सैमसन ने मिलकर तिहत्तर रनों की साझेदारी की। देवदत्त पदिक्कल ने इकतालीस और कप्तान संजू सैमसन ने पचपन रन बनाए। इन दोनों के बाद हेटमायर बत्तीस रनों की पारी खेली और टीम को दो सौ दस रनों तक पहुंचा दिया। सनराइजर्स हैदराबाद के लिए भुवनेश्वर कुमार ने दो, नटराजन ने दो और उमरान मालिक ने दो विकेट लिए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत अच्छी नहीं रही। तीन विकेट तो महज नौ रन के स्कोर पर ही गंवा दिया। चौथा विकेट उनतीस पर और पांचवां सैंतीस रन गंवा दिया। लगातर विकेट गंवाने के बाद टीम संभल नहीं पाई और मुकाबले को बड़े अंतर से हार गई। हैदराबाद के लिए मरक्रम ने सत्तावन, सूंदर ने चालीस और शेपर्ड ने चौबीस रन बनाए। उसके अलावा कोई बल्लेबाज दहाई के आंकड़ा तक नहीं पहुंच सका। राजस्थान के लिए युजवेंद्र चहल ने तीन, बोल्ट ने दो और प्रसिद्घ कृष्णा ने दो विकेट चटकाए। संबंधित खबरेंः
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं. आवेदन प्रक्रिया 14 नवंबर 2020 से शुरु हो गई है.
इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (IBPS) की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 04 दिसंबर 2020 है.
संस्था का नाम- भारतीय स्टेट बैंक (SBI)/ इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (IBPS)
पद नाम- प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO)
शैक्षणिक योग्यता- उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान/विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की परीक्षा पास की हो.
आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु कम से कम 21 साल और अधिकतम 30 साल होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी.
इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (IBPS) की आधिकारिक वेबसाइट https://ift. tt/32JkuEC पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं.
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भारतीय स्टेट बैंक ने प्रोबेशनरी ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं. आवेदन प्रक्रिया चौदह नवंबर दो हज़ार बीस से शुरु हो गई है. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख चार दिसंबर दो हज़ार बीस है. संस्था का नाम- भारतीय स्टेट बैंक / इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन पद नाम- प्रोबेशनरी ऑफिसर शैक्षणिक योग्यता- उम्मीदवार ने किसी मान्यता प्राप्त संस्थान/विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की परीक्षा पास की हो. आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु कम से कम इक्कीस साल और अधिकतम तीस साल होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी. इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन की आधिकारिक वेबसाइट https://ift. tt/बत्तीसJkuEC पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं.
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हाल ही में प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2022 को आध्यात्मिक नेता श्री अरबिंदो की 150वीं जयंती को चिह्नित करने के लिये 53 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
- परिचयः
- अरबिंदो घोष का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। वह एक योगी, द्रष्टा, दार्शनिक, कवि और भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन्होंने आध्यात्मिक विकास के माध्यम से पृथ्वी पर दिव्य जीवन के दर्शन को प्रतिपादित किया।
- 5 दिसंबर, 1950 को पांडिचेरी में उनका निधन हो गया।
- अरबिंदो घोष का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। वह एक योगी, द्रष्टा, दार्शनिक, कवि और भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन्होंने आध्यात्मिक विकास के माध्यम से पृथ्वी पर दिव्य जीवन के दर्शन को प्रतिपादित किया।
- शिक्षाः
- उनकी शिक्षा दार्जिलिंग के एक क्रिश्चियन कॉन्वेंट स्कूल में शुरू हुई।
- उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, जहाँ वे दो शास्त्रीय और कई आधुनिक यूरोपीय भाषाओं में कुशल हो गए।
- वर्ष 1892 में उन्होंने बड़ौदा (वडोदरा) और कलकत्ता (कोलकाता) में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किया।
- उन्होंने शास्त्रीय संस्कृत सहित योग और भारतीय भाषाओं का अध्ययन शुरू किया।
- भारतीय क्रांतिकारी आंदोलनः
- वर्ष 1902 से 1910 तक उन्होंने भारत को अंग्रेज़ों से मुक्त कराने हेतु संघर्ष में भाग लिया। उनकी राजनीतिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप उन्हें वर्ष 1908 (अलीपुर बम कांड) में कैद कर लिया गया था।
- दो साल बाद वह ब्रिटिश भारत से भाग गए और पांडिचेरी (पुद्दुचेरी) के फ्राँसीसी उपनिवेश में शरण ली, जहाँ उन्होंने अपने पूरे जीवन को एक पूर्ण और आध्यात्मिक रूप से परिवर्तित जीवन के उद्देश्य से अपने "अभिन्न" योग के विकास के हेतु समर्पित कर दिया।
- आध्यात्मिक यात्राः
- पांडिचेरी में उन्होंने आध्यात्मिक साधकों के एक समुदाय की स्थापना की, जिसने वर्ष 1926 में श्री अरबिंदो आश्रम के रूप में आकार लिया।
- उनका मानना था कि पदार्थ, जीवन और मन के मूल सिद्धांतों को स्थलीय विकास के माध्यम से सुपरमाइंड के सिद्धांत द्वारा अनंत और परिमित दो क्षेत्रों के बीच एक मध्यवर्ती शक्ति के रूप में सफल किया जाएगा।
- साहित्यिक कार्यः
- बंदे मातरम नामक एक अंग्रेज़ी अखबार (वर्ष 1905 में)।
- योग के आधार।
- भगवतगीता और उसका संदेश।
- मनुष्य का भविष्य विकास।
- पुनर्जन्म और कर्म।
- सावित्रीः एक किंवदंती और एक प्रतीक।
- आवर ऑफ गॉड।
'चिल्लाई कलां'
40 दिनों की सबसे कठोर सर्दियों की अवधि में से एक, जिसे 'चिल्ले/चिल्लाई कलां' (Chillai Kalan) कहा जाता है, कश्मीर में शुरू हो गई है।
- चिल्लाई कलां के बारे मेंः
- यह हर साल 21 दिसंबर से 29 जनवरी तक कश्मीर में सबसे कठोर सर्दियों की अवधि होती है।
- 'चिल्लाई कलां' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'बड़ी सर्दी'।
- चिल्लाई कलां के बाद 20 दिन की लंबी चिल्लाई खुर्द (छोटी सर्दी) होती है जो 30 जनवरी से 18 (Chillai Baccha) तक होती है और इसके बाद 10 दिनों तक चलने वाली चिल्लाई बच्चा (बेबी कोल्ड) अवधि जो 19 फरवरी से 28 फरवरी तक होती है।
- 40 दिनों की अवधि कश्मीरियों के लिये बहुत कठिनाइयाँ लेकर आती है क्योंकि इस दौरान तापमान में भारी गिरावट आती है, जिससे यहाँ की प्रसिद्ध डल झील सहित जलाशय जम जाते हैं।
- इन 40 दिनों के दौरान बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है और तापमान में काफी गिरावट आती है। घाटी में न्यूनतम तापमान हिमांक बिंदु से नीचे बना होता है।
- कश्मीरियों के दैनिक जीवन पर प्रभावः
- फेरन (कश्मीरी पोशाक) और कांगेर (Kanger) नामक पारंपरिक फायरिंग पॉट का उपयोग बढ़ जाता है।
- तापमान शून्य से नीचे होने के कारण इस दौरान नल की पाइपलाइन में पानी आंशिक रूप से जम जाता है और विश्व प्रसिद्ध डल झील भी जम जाती है।
- कश्मीरी हरिसा (Harissa) के साथ जश्न मनाते हैं जो चावल में मिश्रित सौंफ, इलायची, लौंग एवं नमक जैसे मसालों के स्वाद के साथ पतले मटन से बना पकवान होता है।
- इसके अलावा वे अक्सर सूखी सब्जियों का सेवन करते हैं क्योंकि भारी बर्फबारी के बाद सड़कों के अवरुद्ध होने के कारण ताज़ा सब्जियों की आपूर्ति में कमी आती है।
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हाल ही में प्रधानमंत्री ने पंद्रह अगस्त, दो हज़ार बाईस को आध्यात्मिक नेता श्री अरबिंदो की एक सौ पचासवीं जयंती को चिह्नित करने के लिये तिरेपन सदस्यीय समिति का गठन किया है। - परिचयः - अरबिंदो घोष का जन्म पंद्रह अगस्त, एक हज़ार आठ सौ बहत्तर को कलकत्ता में हुआ था। वह एक योगी, द्रष्टा, दार्शनिक, कवि और भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन्होंने आध्यात्मिक विकास के माध्यम से पृथ्वी पर दिव्य जीवन के दर्शन को प्रतिपादित किया। - पाँच दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ पचास को पांडिचेरी में उनका निधन हो गया। - अरबिंदो घोष का जन्म पंद्रह अगस्त, एक हज़ार आठ सौ बहत्तर को कलकत्ता में हुआ था। वह एक योगी, द्रष्टा, दार्शनिक, कवि और भारतीय राष्ट्रवादी थे जिन्होंने आध्यात्मिक विकास के माध्यम से पृथ्वी पर दिव्य जीवन के दर्शन को प्रतिपादित किया। - शिक्षाः - उनकी शिक्षा दार्जिलिंग के एक क्रिश्चियन कॉन्वेंट स्कूल में शुरू हुई। - उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, जहाँ वे दो शास्त्रीय और कई आधुनिक यूरोपीय भाषाओं में कुशल हो गए। - वर्ष एक हज़ार आठ सौ बानवे में उन्होंने बड़ौदा और कलकत्ता में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। - उन्होंने शास्त्रीय संस्कृत सहित योग और भारतीय भाषाओं का अध्ययन शुरू किया। - भारतीय क्रांतिकारी आंदोलनः - वर्ष एक हज़ार नौ सौ दो से एक हज़ार नौ सौ दस तक उन्होंने भारत को अंग्रेज़ों से मुक्त कराने हेतु संघर्ष में भाग लिया। उनकी राजनीतिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप उन्हें वर्ष एक हज़ार नौ सौ आठ में कैद कर लिया गया था। - दो साल बाद वह ब्रिटिश भारत से भाग गए और पांडिचेरी के फ्राँसीसी उपनिवेश में शरण ली, जहाँ उन्होंने अपने पूरे जीवन को एक पूर्ण और आध्यात्मिक रूप से परिवर्तित जीवन के उद्देश्य से अपने "अभिन्न" योग के विकास के हेतु समर्पित कर दिया। - आध्यात्मिक यात्राः - पांडिचेरी में उन्होंने आध्यात्मिक साधकों के एक समुदाय की स्थापना की, जिसने वर्ष एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में श्री अरबिंदो आश्रम के रूप में आकार लिया। - उनका मानना था कि पदार्थ, जीवन और मन के मूल सिद्धांतों को स्थलीय विकास के माध्यम से सुपरमाइंड के सिद्धांत द्वारा अनंत और परिमित दो क्षेत्रों के बीच एक मध्यवर्ती शक्ति के रूप में सफल किया जाएगा। - साहित्यिक कार्यः - बंदे मातरम नामक एक अंग्रेज़ी अखबार । - योग के आधार। - भगवतगीता और उसका संदेश। - मनुष्य का भविष्य विकास। - पुनर्जन्म और कर्म। - सावित्रीः एक किंवदंती और एक प्रतीक। - आवर ऑफ गॉड। 'चिल्लाई कलां' चालीस दिनों की सबसे कठोर सर्दियों की अवधि में से एक, जिसे 'चिल्ले/चिल्लाई कलां' कहा जाता है, कश्मीर में शुरू हो गई है। - चिल्लाई कलां के बारे मेंः - यह हर साल इक्कीस दिसंबर से उनतीस जनवरी तक कश्मीर में सबसे कठोर सर्दियों की अवधि होती है। - 'चिल्लाई कलां' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'बड़ी सर्दी'। - चिल्लाई कलां के बाद बीस दिन की लंबी चिल्लाई खुर्द होती है जो तीस जनवरी से अट्ठारह तक होती है और इसके बाद दस दिनों तक चलने वाली चिल्लाई बच्चा अवधि जो उन्नीस फरवरी से अट्ठाईस फरवरी तक होती है। - चालीस दिनों की अवधि कश्मीरियों के लिये बहुत कठिनाइयाँ लेकर आती है क्योंकि इस दौरान तापमान में भारी गिरावट आती है, जिससे यहाँ की प्रसिद्ध डल झील सहित जलाशय जम जाते हैं। - इन चालीस दिनों के दौरान बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है और तापमान में काफी गिरावट आती है। घाटी में न्यूनतम तापमान हिमांक बिंदु से नीचे बना होता है। - कश्मीरियों के दैनिक जीवन पर प्रभावः - फेरन और कांगेर नामक पारंपरिक फायरिंग पॉट का उपयोग बढ़ जाता है। - तापमान शून्य से नीचे होने के कारण इस दौरान नल की पाइपलाइन में पानी आंशिक रूप से जम जाता है और विश्व प्रसिद्ध डल झील भी जम जाती है। - कश्मीरी हरिसा के साथ जश्न मनाते हैं जो चावल में मिश्रित सौंफ, इलायची, लौंग एवं नमक जैसे मसालों के स्वाद के साथ पतले मटन से बना पकवान होता है। - इसके अलावा वे अक्सर सूखी सब्जियों का सेवन करते हैं क्योंकि भारी बर्फबारी के बाद सड़कों के अवरुद्ध होने के कारण ताज़ा सब्जियों की आपूर्ति में कमी आती है।
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राजस्थान कांग्रेस में चल रहे सियासी संकट को सुलझाने के लिए कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल जब मंगलवार को जयपुर पहुंचे तो उन्होंने बयानबाजी करने वाले नेताओं के साथ ही मंत्रियों को भी सख्त चेतावनी दी। केसी वेणुगोपाल 4 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करने जा रही भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए राज्य के दौरे पर पहुंचे थे।
जयपुर में उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से अलग-अलग बंद कमरे में बातचीत की और उन्हें कांग्रेस नेतृत्व के संदेश के बारे में भी बताया।
बताना होगा कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों के बीच पिछले ढाई साल से सियासी अदावत चल रही है। कुछ दिन पहले गहलोत के सचिन पायलट के द्वारा साल 2020 में की गई बगावत को गद्दारी का नाम दिए जाने के बाद यह अदावत फिर तेज हो गई है।
हालांकि पार्टी के महासचिव जयराम रमेश अशोक गहलोत की टिप्पणी को अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक बता चुके हैं। जयराम रमेश ने कहा था कि अशोक गहलोत को कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।
कांग्रेस ने इस बात का भी संकेत दिया है कि वह पार्टी के हित में कोई बड़ा फैसला लेने से नहीं चूकेगी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को इंदौर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कहा था कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही कांग्रेस के लिए एसेट हैं।
कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई का कोई असर राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा पर पड़े। पार्टी नेताओं का पूरा ध्यान इस यात्रा को सफल बनाने पर है और क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और यहां अगले साल विधानसभा के चुनाव भी होने हैं, इसलिए पार्टी इस यात्रा को कामयाब देखना चाहती है।
बहरहाल, द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भारत जोड़ो यात्रा की समीक्षा बैठक के दौरान केसी वेणुगोपाल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि पार्टी नेताओं की ओर से किसी भी तरह की और बयानबाजी अब नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री भी इस तरह की बयानबाजी करते हुए पाया गया, तो उसे कैबिनेट से हटाया जा सकता है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह बात सभी के लिए लागू होगी।
कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट राहुल गांधी के साथ-साथ दिखें।
सब कुछ ठीक?
समीक्षा बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के हाथ खड़े कर यह दिखाने की कोशिश की है कि राजस्थान कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक है। यह सभी जानते हैं कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहते हैं लेकिन अशोक गहलोत ने कुछ दिन पहले एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में साफ कर दिया था कि वह किसी भी सूरत में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं करेंगे।
गहलोत समर्थकों ने साल 2020 में की गई बगावत को मुद्दा बना लिया है। सितंबर में जब कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी तब भी गहलोत समर्थक विधायक उस बैठक में नहीं पहुंचे थे और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वालों को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए।
राजस्थान में कांग्रेस के पास 108 विधायक हैं और माना जाता है कि उसमें से लगभग 90 विधायकों का समर्थन अशोक गहलोत के पास है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से कहा था कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के निकल जाने के बाद ही कोई फैसला लेगा।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों और कांग्रेस नेताओं को राजस्थान के संकट के पूरी तरह ख़त्म होने का इंतजार है।
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राजस्थान कांग्रेस में चल रहे सियासी संकट को सुलझाने के लिए कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल जब मंगलवार को जयपुर पहुंचे तो उन्होंने बयानबाजी करने वाले नेताओं के साथ ही मंत्रियों को भी सख्त चेतावनी दी। केसी वेणुगोपाल चार दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करने जा रही भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए राज्य के दौरे पर पहुंचे थे। जयपुर में उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से अलग-अलग बंद कमरे में बातचीत की और उन्हें कांग्रेस नेतृत्व के संदेश के बारे में भी बताया। बताना होगा कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों के बीच पिछले ढाई साल से सियासी अदावत चल रही है। कुछ दिन पहले गहलोत के सचिन पायलट के द्वारा साल दो हज़ार बीस में की गई बगावत को गद्दारी का नाम दिए जाने के बाद यह अदावत फिर तेज हो गई है। हालांकि पार्टी के महासचिव जयराम रमेश अशोक गहलोत की टिप्पणी को अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक बता चुके हैं। जयराम रमेश ने कहा था कि अशोक गहलोत को कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। कांग्रेस ने इस बात का भी संकेत दिया है कि वह पार्टी के हित में कोई बड़ा फैसला लेने से नहीं चूकेगी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को इंदौर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कहा था कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही कांग्रेस के लिए एसेट हैं। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई का कोई असर राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा पर पड़े। पार्टी नेताओं का पूरा ध्यान इस यात्रा को सफल बनाने पर है और क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और यहां अगले साल विधानसभा के चुनाव भी होने हैं, इसलिए पार्टी इस यात्रा को कामयाब देखना चाहती है। बहरहाल, द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भारत जोड़ो यात्रा की समीक्षा बैठक के दौरान केसी वेणुगोपाल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि पार्टी नेताओं की ओर से किसी भी तरह की और बयानबाजी अब नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री भी इस तरह की बयानबाजी करते हुए पाया गया, तो उसे कैबिनेट से हटाया जा सकता है। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह बात सभी के लिए लागू होगी। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट राहुल गांधी के साथ-साथ दिखें। सब कुछ ठीक? समीक्षा बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के हाथ खड़े कर यह दिखाने की कोशिश की है कि राजस्थान कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक है। यह सभी जानते हैं कि पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहते हैं लेकिन अशोक गहलोत ने कुछ दिन पहले एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में साफ कर दिया था कि वह किसी भी सूरत में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं करेंगे। गहलोत समर्थकों ने साल दो हज़ार बीस में की गई बगावत को मुद्दा बना लिया है। सितंबर में जब कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी तब भी गहलोत समर्थक विधायक उस बैठक में नहीं पहुंचे थे और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वालों को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। राजस्थान में कांग्रेस के पास एक सौ आठ विधायक हैं और माना जाता है कि उसमें से लगभग नब्बे विधायकों का समर्थन अशोक गहलोत के पास है। द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से कहा था कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के निकल जाने के बाद ही कोई फैसला लेगा। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों और कांग्रेस नेताओं को राजस्थान के संकट के पूरी तरह ख़त्म होने का इंतजार है।
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आगरा। ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था का मंगलवार रात में जायजा लिया गया। सुरक्षा एजेंसीज के साथ ही साथ एएसआई के अधिकारीगण भी मौजूद रहे। जायजा लेने के लिए रात के अंधेरे में मेहताब बाग का निरीक्षण किया गया। हालांकि इस बारे में जब सीओ ताज सुरक्षा से बात की गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।
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आगरा। ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था का मंगलवार रात में जायजा लिया गया। सुरक्षा एजेंसीज के साथ ही साथ एएसआई के अधिकारीगण भी मौजूद रहे। जायजा लेने के लिए रात के अंधेरे में मेहताब बाग का निरीक्षण किया गया। हालांकि इस बारे में जब सीओ ताज सुरक्षा से बात की गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
निगम एक विशेषाधिकार प्राप्त स्वतन्त्र कानूनी इकाई के रूप में पहचानी जाने वाली अलग संस्था है जिसके पास अपने सदस्यों से पृथक अपने अधिकार और दायित्व हैं। निगमों के कई प्रकार हैं, जिनमे से अधिकतर का उपयोग व्यापार करने के लिए किया जाता है। निगम कॉर्पोरेट कानून का एक उत्पाद हैं और इनके नियम उन प्रबंधकों के हितों को संतुलित करते हैं जो निगम, लेनदारों, शेयरधारकों तथा श्रम का योगदान करने वाले कर्मचारियों का संचालन करते हैं। आधुनिक समय में, निगम तेजी से आर्थिक जीवन का एक प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। निगम की एक महत्वपूर्ण सुविधा सीमित देयता है। अगर एक निगम विफल होता है, तो शेयरधारक सामान्य रूप से केवल अपने निवेश को खोते हैं और कर्मचारी केवल अपनी नौकरी खो देंगे, किन्तु उन में से कोई भी निगम के लेनदारों के ऋणों के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा. विज्ञापन एजेंसी या ऐड एजेंसी ऐसी सेवाओं का व्यापार है जिसमें अपने ग्राहकों के लिए विज्ञापन बनाना, उनका नियोजन करना और संभालना (कभी-कभी प्रचार के दूसरे तरीके) भी शामिल हैं। विज्ञापन एजेंसी ग्राहक से पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है और ग्राहक के उत्पादों या सेवाओं को बेचने के लिए अलग नज़रिया प्रदान करती है। एक एजेंसी अपने ग्राहकों के लिए विपणन, ब्रांड बनाने और बिक्री से जुड़े प्रचार की समग्र रणनीतियों को संभाल सकती है। विशिष्ट विज्ञापन एजेंसियों के ग्राहकों में उद्योग जगत औऱ निगम, लाभ निरपेक्ष संगठन और सरकारी एजेंसियां भी शामिल हैं। विज्ञापन के प्रचार के लिए एजेंसियों को किराये पर भी लिया जा सकता है। .
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यह लेख निगम और विज्ञापन एजेंसी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। निगम एक विशेषाधिकार प्राप्त स्वतन्त्र कानूनी इकाई के रूप में पहचानी जाने वाली अलग संस्था है जिसके पास अपने सदस्यों से पृथक अपने अधिकार और दायित्व हैं। निगमों के कई प्रकार हैं, जिनमे से अधिकतर का उपयोग व्यापार करने के लिए किया जाता है। निगम कॉर्पोरेट कानून का एक उत्पाद हैं और इनके नियम उन प्रबंधकों के हितों को संतुलित करते हैं जो निगम, लेनदारों, शेयरधारकों तथा श्रम का योगदान करने वाले कर्मचारियों का संचालन करते हैं। आधुनिक समय में, निगम तेजी से आर्थिक जीवन का एक प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। निगम की एक महत्वपूर्ण सुविधा सीमित देयता है। अगर एक निगम विफल होता है, तो शेयरधारक सामान्य रूप से केवल अपने निवेश को खोते हैं और कर्मचारी केवल अपनी नौकरी खो देंगे, किन्तु उन में से कोई भी निगम के लेनदारों के ऋणों के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा. विज्ञापन एजेंसी या ऐड एजेंसी ऐसी सेवाओं का व्यापार है जिसमें अपने ग्राहकों के लिए विज्ञापन बनाना, उनका नियोजन करना और संभालना भी शामिल हैं। विज्ञापन एजेंसी ग्राहक से पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है और ग्राहक के उत्पादों या सेवाओं को बेचने के लिए अलग नज़रिया प्रदान करती है। एक एजेंसी अपने ग्राहकों के लिए विपणन, ब्रांड बनाने और बिक्री से जुड़े प्रचार की समग्र रणनीतियों को संभाल सकती है। विशिष्ट विज्ञापन एजेंसियों के ग्राहकों में उद्योग जगत औऱ निगम, लाभ निरपेक्ष संगठन और सरकारी एजेंसियां भी शामिल हैं। विज्ञापन के प्रचार के लिए एजेंसियों को किराये पर भी लिया जा सकता है। . निगम और विज्ञापन एजेंसी आम में शून्य बातें हैं । निगम इकतीस संबंध है और विज्ञापन एजेंसी बीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख निगम और विज्ञापन एजेंसी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील के कोक प्लांट में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. प्लांट में पहले जोरदार धमाका हुआ, उसके बाद आग लग गई. देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया।
झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील के कोक प्लांट में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. प्लांट में पहले जोरदार धमाका हुआ, उसके बाद आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि आग बुझाने के लिए दमकल की 5 गाड़ियों को लगाया गया है। बताया जा रहा है कि प्लांट में गैस कटिंग और वेल्डिंग के दौरान गैस लीक होने से ये हादसा हुआ।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट में लिखा कि जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट में ब्लास्ट होने की खबर मिली है, जिला प्रशासन के अधिकारी टाटा स्टील प्रबंधन के साथ सामंजस्य बनाकर घायलों के त्वरित इलाज हेतु कार्यवाही में जुटे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, विस्फोट इतना भयानक था कि उसकी आवाज दूर-दूर तक सुनी गई। धमाके की आवाज सुनकर लोग दहशत में आ गए। इस घटना में एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिली है। दो अन्य लोगों को भी चोटें आई हैं।
बताया जा रहा है कि कोक प्लांट के बैट्री नंबर पांच, छह व सात के बीच यह धमाका हुआ है। टाटा स्टील ने एक बयान में बताया कि शनिवार सुबह करीब 10. 20 बजे कोक प्लांट की बैटरी नंबर 6 की गैस लाइन में एक धमाका हुआ. अभी बैटरी नंबर 6 को बंद कर दिया गया है।
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झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील के कोक प्लांट में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. प्लांट में पहले जोरदार धमाका हुआ, उसके बाद आग लग गई. देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया। झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील के कोक प्लांट में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. प्लांट में पहले जोरदार धमाका हुआ, उसके बाद आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि आग बुझाने के लिए दमकल की पाँच गाड़ियों को लगाया गया है। बताया जा रहा है कि प्लांट में गैस कटिंग और वेल्डिंग के दौरान गैस लीक होने से ये हादसा हुआ। मुख्यमंत्री ने ट्वीट में लिखा कि जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट में ब्लास्ट होने की खबर मिली है, जिला प्रशासन के अधिकारी टाटा स्टील प्रबंधन के साथ सामंजस्य बनाकर घायलों के त्वरित इलाज हेतु कार्यवाही में जुटे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, विस्फोट इतना भयानक था कि उसकी आवाज दूर-दूर तक सुनी गई। धमाके की आवाज सुनकर लोग दहशत में आ गए। इस घटना में एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिली है। दो अन्य लोगों को भी चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि कोक प्लांट के बैट्री नंबर पांच, छह व सात के बीच यह धमाका हुआ है। टाटा स्टील ने एक बयान में बताया कि शनिवार सुबह करीब दस. बीस बजे कोक प्लांट की बैटरी नंबर छः की गैस लाइन में एक धमाका हुआ. अभी बैटरी नंबर छः को बंद कर दिया गया है।
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रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच बढ़ते विवाद के बाद से स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी बीच भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीयों को निकालने का बड़ा फैसला लिया है।
रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच बढ़ते विवाद के बाद से स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी बीच भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीयों को निकालने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आज भारत-यूक्रेन के बीच तीन उड़ानें संचालित करने का ऐलान किया है। जो यूक्रेन में फंसे छात्रों को लेकर क्रमशः 22, 24 और 26 फरवरी को स्वदेश लौटेगी।
एयर इंडिया (Air India) की पहली फ्लाइट आज एआई-1946 आज रात दिल्ली पहुंचेगी। इसको लेकर विदेश मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी भी जारी की गई है। एडवाइजरी जारी कर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में लगातार बढ़ रहे तनाव और स्थिति की अनिश्चितता को देखते हुए अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था की गई है।
विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा कि खिवा से दिल्ली के लिए 25 फरवरी को सुबह 7 बजे, 27 फरवरी को सुबह 7 बजे और शाम 7. 35 बजे अतिरिक्त उड़ानें संचालित की जाएंगी। फ्लाई दुबई, कतर एयरवेज आदि एयरलाइंस यूक्रेन से दिल्ली के लिए उड़ानें संचालित कर रही हैं।
यात्री अपनी टिकट इन कंपनियों के कार्यालयों के साथ-साथ उनकी वेबसाइटों, कॉल सेंटरों और अधिकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से बुक करा सकते है। विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि उड़ान के विकल्प उपलब्ध होने पर एडवाइजरी को अपडेट किया जाएगा। यूक्रेन में भारतीय राजनयिकों ( Indian Diplomats) के परिवारों को भी दिल्ली लौटने के लिए कहा गया था।
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रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते विवाद के बाद से स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी बीच भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीयों को निकालने का बड़ा फैसला लिया है। रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते विवाद के बाद से स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी बीच भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीयों को निकालने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आज भारत-यूक्रेन के बीच तीन उड़ानें संचालित करने का ऐलान किया है। जो यूक्रेन में फंसे छात्रों को लेकर क्रमशः बाईस, चौबीस और छब्बीस फरवरी को स्वदेश लौटेगी। एयर इंडिया की पहली फ्लाइट आज एआई-एक हज़ार नौ सौ छियालीस आज रात दिल्ली पहुंचेगी। इसको लेकर विदेश मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी भी जारी की गई है। एडवाइजरी जारी कर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में लगातार बढ़ रहे तनाव और स्थिति की अनिश्चितता को देखते हुए अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था की गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि खिवा से दिल्ली के लिए पच्चीस फरवरी को सुबह सात बजे, सत्ताईस फरवरी को सुबह सात बजे और शाम सात. पैंतीस बजे अतिरिक्त उड़ानें संचालित की जाएंगी। फ्लाई दुबई, कतर एयरवेज आदि एयरलाइंस यूक्रेन से दिल्ली के लिए उड़ानें संचालित कर रही हैं। यात्री अपनी टिकट इन कंपनियों के कार्यालयों के साथ-साथ उनकी वेबसाइटों, कॉल सेंटरों और अधिकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से बुक करा सकते है। विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि उड़ान के विकल्प उपलब्ध होने पर एडवाइजरी को अपडेट किया जाएगा। यूक्रेन में भारतीय राजनयिकों के परिवारों को भी दिल्ली लौटने के लिए कहा गया था।
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एक्ट्रेस एली अवराम का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एली हॉट अंदाज में कैटवॉक करती नजर आ रही हैं।
एली को वीडियो में अपने बंधे हुए बालों को बेहद ही स्टाइलिश अंदाज में खोलते हुए कैटवॉक करते हुए देखा गया। लोगों को उनका ये अंदाज काफी पसंद आ रहा है। इस वीडियो ने लोगों का ऐसा दिल जीता कि इसे एक ही दिन में 3 लाख 75 हजार से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है।
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एक्ट्रेस एली अवराम का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एली हॉट अंदाज में कैटवॉक करती नजर आ रही हैं। एली को वीडियो में अपने बंधे हुए बालों को बेहद ही स्टाइलिश अंदाज में खोलते हुए कैटवॉक करते हुए देखा गया। लोगों को उनका ये अंदाज काफी पसंद आ रहा है। इस वीडियो ने लोगों का ऐसा दिल जीता कि इसे एक ही दिन में तीन लाख पचहत्तर हजार से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है।
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अम्बाला शहर, 10 सितंबर (हप्र)
पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिलने और रोजाना आज कल के आश्वासन से परेशान आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों के कारण आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होकर रह गईं। टीबी अस्पताल के सभी 23 आउटसोर्सिंग कर्मी काम काज ठप करके परिसर में धरना देकर नारेबाजी करते रहे। विभाग में 97 कर्मियों को पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिला है।
यहां दरियों पर बैठक कर नारेबाजी कर रहे इन 23 कर्मियों ने बताया कि आज भी उन्होंने सिविल सर्जन के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री से पिछला बकाया वेतन तुरंत दिलवाने की गुहार लगाई है। आरोप है कि आउटसोर्सिंग ठेका भाजपा के एक बहुत बड़े नेता के रिश्तेदार के पास होने के कारण कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई। इन कर्मचारियों का कहना है कि उनका नया ठेका मई 2021 में एमजी सोलंकी नाम कंपनी को दिया गया था। अब इस ठेके को 4 महीने हो गए हैं पर 4 महीने से उन्हें सिर्फ एक ही महीने की सैलरी मिल पाई है शेष 3 महीने की सैलरी अभी लंबित है। वह अपनी सैलरी के लिए अपने इंचार्ज के पास जाते हैं तो वह अपने ठेकेदार को फोन करते हैं साथ ही उन्हें आश्वासन देते हैं कि उन्होंने सारा मामला ऊपर पहुंचा दिया है और कल तक उनकी सैलरी अकाउंट में डल जाएगी। ऐसा पिछले 2 महीने से हो रहा है। इन कर्मचारियों ने बताया कि सैलरी न मिलने की वजह से वे बहुत परेशान हैं। घर के खर्चों का भुगतान न कर पाने से मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने मांग की कि उनकी जितनी भी सैलरी पेंडिंग है वह तुरंत दिलवाई जाये।
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अम्बाला शहर, दस सितंबर पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिलने और रोजाना आज कल के आश्वासन से परेशान आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों के कारण आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होकर रह गईं। टीबी अस्पताल के सभी तेईस आउटसोर्सिंग कर्मी काम काज ठप करके परिसर में धरना देकर नारेबाजी करते रहे। विभाग में सत्तानवे कर्मियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। यहां दरियों पर बैठक कर नारेबाजी कर रहे इन तेईस कर्मियों ने बताया कि आज भी उन्होंने सिविल सर्जन के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री से पिछला बकाया वेतन तुरंत दिलवाने की गुहार लगाई है। आरोप है कि आउटसोर्सिंग ठेका भाजपा के एक बहुत बड़े नेता के रिश्तेदार के पास होने के कारण कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई। इन कर्मचारियों का कहना है कि उनका नया ठेका मई दो हज़ार इक्कीस में एमजी सोलंकी नाम कंपनी को दिया गया था। अब इस ठेके को चार महीने हो गए हैं पर चार महीने से उन्हें सिर्फ एक ही महीने की सैलरी मिल पाई है शेष तीन महीने की सैलरी अभी लंबित है। वह अपनी सैलरी के लिए अपने इंचार्ज के पास जाते हैं तो वह अपने ठेकेदार को फोन करते हैं साथ ही उन्हें आश्वासन देते हैं कि उन्होंने सारा मामला ऊपर पहुंचा दिया है और कल तक उनकी सैलरी अकाउंट में डल जाएगी। ऐसा पिछले दो महीने से हो रहा है। इन कर्मचारियों ने बताया कि सैलरी न मिलने की वजह से वे बहुत परेशान हैं। घर के खर्चों का भुगतान न कर पाने से मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने मांग की कि उनकी जितनी भी सैलरी पेंडिंग है वह तुरंत दिलवाई जाये।
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यूपी के स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को कम्प्यूटर की शिक्षा देने के लिए वर्ल्ड ऑन व्हील शुरू करने की घोषणा की है।
शाह ने इस वैन के लोकार्पण समारोह में यह बात कही। उन्होंने वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा एवं जागरूकता के लिए मोबाइल कम्प्यूटर लैब एक स्कूल से दूसरे स्कूल और एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचकर कम्प्यूटर शिक्षा के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करेगी।
बता दें, यह बस करीब एक करोड़ रुपये लागत से बनकर तैयार हुई हैं। यह आने वाले 4 वर्षों तक मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पहुंचेगी।
यह वाहन हायर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल परिसर में बच्चों को कम्प्यूटर की शिक्षा देगा। चलित कम्प्यूटर लैब में 20 कम्प्यूटर रखे गए हैं। लैब में बिजली की उपलब्धता निरंतर बनाये रखने के लिए बस में सोलर पैनल भी लगाए गए हैं।
इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की भी सुविधा है, जिससे छात्रों को विशेषज्ञों से सीधा जोड़ा सकेगा। मोबाइल वेन के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इस वैन में आधार-कार्ड के पंजीयन और अपग्रेडेशन करवाने की सुविधा भी होगी।
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यूपी के स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को कम्प्यूटर की शिक्षा देने के लिए वर्ल्ड ऑन व्हील शुरू करने की घोषणा की है। शाह ने इस वैन के लोकार्पण समारोह में यह बात कही। उन्होंने वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा एवं जागरूकता के लिए मोबाइल कम्प्यूटर लैब एक स्कूल से दूसरे स्कूल और एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचकर कम्प्यूटर शिक्षा के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करेगी। बता दें, यह बस करीब एक करोड़ रुपये लागत से बनकर तैयार हुई हैं। यह आने वाले चार वर्षों तक मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पहुंचेगी। यह वाहन हायर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल परिसर में बच्चों को कम्प्यूटर की शिक्षा देगा। चलित कम्प्यूटर लैब में बीस कम्प्यूटर रखे गए हैं। लैब में बिजली की उपलब्धता निरंतर बनाये रखने के लिए बस में सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की भी सुविधा है, जिससे छात्रों को विशेषज्ञों से सीधा जोड़ा सकेगा। मोबाइल वेन के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इस वैन में आधार-कार्ड के पंजीयन और अपग्रेडेशन करवाने की सुविधा भी होगी।
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वंधु० ० - प्रासाद में नियुक्त गुप्तचरों ने संवाद दिया है। गंगाद्वार पर शशांक के साथ यशोधवल का परिचय हुआ । कुमार के साथ ही साथ वह गंगाद्वार से ही होकर सभामंडप में गया। यशोधवल अभी जीवित है, पहले तो सम्राट् को इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ । जब यशोधवल ने सभामंडप में प्रवेश किया तब सम्राट स्वयं वेदी से नीचे उतर आए और उन्होंने उसे गले से लगा लिया । सभा में जाकर वृद्ध' यशोधवल ने यह कहा कि मैं अपनी पौत्री के लिए अन्न की भिक्षा माँगने आया हूँ ।
बुद्ध० - ठीक है । सम्राट् के साथ उसकी और क्या क्या बातचीत हुई, कुछ सुना है ?
शक्र० - कुछ भी नहीं। वह सम्राट् के साथ अंतः पुर तक जाता है, पट्टमहादेवी के घर में भोजन करता है, इससे विष देने का भी कोई उपाय नहीं हो सकता । यशोधवल के आने पर एक बार मंत्रणासभा हुई थी, पर वहाँ क्या क्या हुआ, कोई कुछ भी नहीं कह सकता । उस समय स्वयं विनयसेन पहरे पर था ।
बुद्ध० - प्रासाद में रहनेवाले गुप्तचरों की संख्या. दूनी कर दो और आज से जिन भिक्खुओं पर पूरा विश्वास हो, उन्हें छोड़ और किसी को इस काम में मत लेना ।
बंधु०. अब आगे मंत्रणा का क्या उपाय होगा ? मैं देखता हूँ कि मुझे वंगदेश लौट जाना पड़ेगा।
बुद्ध० - क्यों ?
बंधु० - मैं ही यशोधवल के पुत्र की हत्या करनेवाली हूँ, इस बात का पता उसे बिना लगे न रहेगा। मंदिर के भीतर निरस्त्र पाकर बकरे की तरह मैंने उसके पुत्र को काटा है । जहाँ यह बात उसने सुनी कि वह न जाने क्या क्या कर डालेगा । यशोधवल कैसा विकट मनुष्य है,
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वंधुशून्य शून्य - प्रासाद में नियुक्त गुप्तचरों ने संवाद दिया है। गंगाद्वार पर शशांक के साथ यशोधवल का परिचय हुआ । कुमार के साथ ही साथ वह गंगाद्वार से ही होकर सभामंडप में गया। यशोधवल अभी जीवित है, पहले तो सम्राट् को इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ । जब यशोधवल ने सभामंडप में प्रवेश किया तब सम्राट स्वयं वेदी से नीचे उतर आए और उन्होंने उसे गले से लगा लिया । सभा में जाकर वृद्ध' यशोधवल ने यह कहा कि मैं अपनी पौत्री के लिए अन्न की भिक्षा माँगने आया हूँ । बुद्धशून्य - ठीक है । सम्राट् के साथ उसकी और क्या क्या बातचीत हुई, कुछ सुना है ? शक्रशून्य - कुछ भी नहीं। वह सम्राट् के साथ अंतः पुर तक जाता है, पट्टमहादेवी के घर में भोजन करता है, इससे विष देने का भी कोई उपाय नहीं हो सकता । यशोधवल के आने पर एक बार मंत्रणासभा हुई थी, पर वहाँ क्या क्या हुआ, कोई कुछ भी नहीं कह सकता । उस समय स्वयं विनयसेन पहरे पर था । बुद्धशून्य - प्रासाद में रहनेवाले गुप्तचरों की संख्या. दूनी कर दो और आज से जिन भिक्खुओं पर पूरा विश्वास हो, उन्हें छोड़ और किसी को इस काम में मत लेना । बंधुशून्य. अब आगे मंत्रणा का क्या उपाय होगा ? मैं देखता हूँ कि मुझे वंगदेश लौट जाना पड़ेगा। बुद्धशून्य - क्यों ? बंधुशून्य - मैं ही यशोधवल के पुत्र की हत्या करनेवाली हूँ, इस बात का पता उसे बिना लगे न रहेगा। मंदिर के भीतर निरस्त्र पाकर बकरे की तरह मैंने उसके पुत्र को काटा है । जहाँ यह बात उसने सुनी कि वह न जाने क्या क्या कर डालेगा । यशोधवल कैसा विकट मनुष्य है,
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मुंबईः केंद्रीय चुनाव आयोग (Central Election Commission) ने शिवसेना (Shiv Sena) पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट (Chief Minister Eknath Shinde Faction) को देने का फैसला किया है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिंदे की टीम दादर स्थित सेना भवन (Sena Bhavan) पर भी दावा ठोकेगी। हालांकि शिंदे समर्थक विधायक संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) ने खुलासा किया है कि वे लोग सेना भवन पर दावा नहीं ठोकेंगे।
उन्होंने कहा कि सेना भवन हम सब के लिए मंदिर के समान है। इस भवन में सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कई मीटिंग की है। ऐस में यह हमारे लिए कोई प्रॉपर्टी नहीं है, बल्कि मंदिर हैं और मंदिर को अधिकार में नहीं लिया जाता है। हम लोग इस पर कोई दावा ठोकने वाले नहीं हैं।
शिरसाट ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी शिवसेना ही असली शिवसेना है। उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने जिस हिंदुत्व की विचारधारा के साथ पार्टी का गठन किया था। हम उसी विचारधारा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। शिरसाट ने कहा कि आज की शिवसेना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और किसी और नेता की नहीं है, बल्कि यह सेना प्रमुख बाल ठाकरे की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बना कर शिवसेना अपने हिंदुत्व के रास्ते से भटक गई थी, लेकिन अब सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अब इस पर आगे बढ़ रहे हैं।
औरंगाबाद से शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने दावा किया है कि हमारी तरफ से बजट सत्र के लिए जो व्हिप जारी किया जाएगा, वह ठाकरे गुट के विधायकों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि अगर ठाकरे गुट के विधायकों ने इसका पालन नहीं किया तो उनकी विधायकी जा सकती है। शिरसाट ने कहा कि व्हिप का पालन न करने पर ठाकरे गुट के विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटक जाएगी। चुनाव आयोग के फैसले के बाद एकनाथ शिंदे को शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह मिल गया है। जानकारों का कहना है कि आगामी बजट सत्र के लिए शिंदे गुट की तरफ से भरत गोगावले द्वारा जारी व्हिप सेना विधायक आदित्य ठाकरे समेत बाकी विधायकों पर भी लागू होगा। ठाकरे गुट के साथ फिलहाल 14 विधायक हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पेंच से निकलने के लिए ठाकरे गुट का चाल चलती है। उधर, शिवसेना सांसद कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि ठाकरे गुट के 10 और विधायक टूटेंगे।
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मुंबईः केंद्रीय चुनाव आयोग ने शिवसेना पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को देने का फैसला किया है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिंदे की टीम दादर स्थित सेना भवन पर भी दावा ठोकेगी। हालांकि शिंदे समर्थक विधायक संजय शिरसाट ने खुलासा किया है कि वे लोग सेना भवन पर दावा नहीं ठोकेंगे। उन्होंने कहा कि सेना भवन हम सब के लिए मंदिर के समान है। इस भवन में सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कई मीटिंग की है। ऐस में यह हमारे लिए कोई प्रॉपर्टी नहीं है, बल्कि मंदिर हैं और मंदिर को अधिकार में नहीं लिया जाता है। हम लोग इस पर कोई दावा ठोकने वाले नहीं हैं। शिरसाट ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी शिवसेना ही असली शिवसेना है। उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने जिस हिंदुत्व की विचारधारा के साथ पार्टी का गठन किया था। हम उसी विचारधारा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। शिरसाट ने कहा कि आज की शिवसेना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और किसी और नेता की नहीं है, बल्कि यह सेना प्रमुख बाल ठाकरे की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बना कर शिवसेना अपने हिंदुत्व के रास्ते से भटक गई थी, लेकिन अब सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अब इस पर आगे बढ़ रहे हैं। औरंगाबाद से शिवसेना विधायक संजय शिरसाट ने दावा किया है कि हमारी तरफ से बजट सत्र के लिए जो व्हिप जारी किया जाएगा, वह ठाकरे गुट के विधायकों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि अगर ठाकरे गुट के विधायकों ने इसका पालन नहीं किया तो उनकी विधायकी जा सकती है। शिरसाट ने कहा कि व्हिप का पालन न करने पर ठाकरे गुट के विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटक जाएगी। चुनाव आयोग के फैसले के बाद एकनाथ शिंदे को शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह मिल गया है। जानकारों का कहना है कि आगामी बजट सत्र के लिए शिंदे गुट की तरफ से भरत गोगावले द्वारा जारी व्हिप सेना विधायक आदित्य ठाकरे समेत बाकी विधायकों पर भी लागू होगा। ठाकरे गुट के साथ फिलहाल चौदह विधायक हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पेंच से निकलने के लिए ठाकरे गुट का चाल चलती है। उधर, शिवसेना सांसद कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि ठाकरे गुट के दस और विधायक टूटेंगे।
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कुरुक्षेत्र में टीम को सूचना मिली थी कि झांसा की रहने वाली महिला द्वारा हरियाणा के साथ लगते राज्यों में ले जाकर अवैध रुप से लिंग जांच करवाई जा रही है।
कुरुक्षेत्र पुलिस ने भ्रूण लिंग जांच करने के आरोप में सुखविन्द्र कौर वासी झांसा व बबीता वासी अजराना कलां हाल झांसा को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्ण गोयल ने बताया कि डा. ऋषि, दन्त चिकित्सक सीएचसी बाबैन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जिला समुचित अधिकारी कम सिविल सर्जन, कुरूक्षेत्र को गुप्त रूप से सूचना मिली थी कि झांसा की रहने वाली महिला द्वारा हरियाणा के साथ लगते राज्यों में ले जाकर अवैध रुप से लिंग जांच करवाई जा रही है।
सूचना पर जिला समुचित अधिकारी कम सिविल सर्जन कुरूक्षेत्र द्वारा टीम का गठन किया गया। टीम ने दलाल सुखविन्द्र कौर वासी झांसा, कुरूक्षेत्र से फोन पर सम्पर्क करवाया और भ्रूण लिंग की जांच करवाने के लिए बातचीत की। इसके बाद दलाल ने 32 हजार रुपये में भ्रूण लिंग की जांच करवाने की बातचीत तय कर ली। उसके बाद स्वास्थय विभाग द्वारा आरोपी दलाल सुखविन्द्र कौर वासी झांसा के पास एक नकली ग्राहक भेज कर भ्रूण लिंग जांच करवाने की बात तय की गई। उसने डिकाय को 9 मई को करीब सुबह 6. 30 बजे झांसा बस अड्डा पर बुलाया। डील के अनुसार डिकाय ने दलाल को 32 हजार रुपये दे दिए।
उसके बाद सुखविन्द्र कौर, डिकाय और एक अन्य महिला बबीता वासी अजराना कलां हाल झांसा डिकाय की गाडी में बैठकर वापिस कुरूक्षेत्र की तरफ चल दिए। टीम भी डिकाय वाले वाहन का पीछा कर रही थी। उसके बाद सुखविन्द्र कौर के कहे अनुसार वह कुरूक्षेत्र से रादौर होते हुए कलानौर से आगे कुछ दूरी पर स्थित टोल प्लाजा यूपी पहुंचे। जहां पर भीड़ होने के कारण उनकी गाड़ी टीम की आंखों से ओझल हो गई। जिस बारे टीम ने वापिस झांसा आकर थाना झांसा प्रभारी को सूचित किया । थाना झांसा प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह के मार्गनिर्देश में सहायक उप निरीक्षक राजेन्द्र कुमार, महिला हवलदार मीना व हवलदार अजय कुमार की टीम ने सलपानी चौक पर नाकाबंदी करके चेकिंग करनी शुरू की। कुछ देर बाद सलपानी चौक पर डिकाय, सुखविन्द्र कौर एव बबीता की गाड़ी आई। जिसको पुलिस टीम ने रोककर उसमें बैठी महिलाओं को काबू करके उनके नाम पता पूछे। जिन्होंने अपने नाम सुखविन्द्र कौर और बबीता वासीयान झांसा बताया। इसके बाद दोनोंं महिलाओं का काबू कर लिया।
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कुरुक्षेत्र में टीम को सूचना मिली थी कि झांसा की रहने वाली महिला द्वारा हरियाणा के साथ लगते राज्यों में ले जाकर अवैध रुप से लिंग जांच करवाई जा रही है। कुरुक्षेत्र पुलिस ने भ्रूण लिंग जांच करने के आरोप में सुखविन्द्र कौर वासी झांसा व बबीता वासी अजराना कलां हाल झांसा को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्ण गोयल ने बताया कि डा. ऋषि, दन्त चिकित्सक सीएचसी बाबैन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जिला समुचित अधिकारी कम सिविल सर्जन, कुरूक्षेत्र को गुप्त रूप से सूचना मिली थी कि झांसा की रहने वाली महिला द्वारा हरियाणा के साथ लगते राज्यों में ले जाकर अवैध रुप से लिंग जांच करवाई जा रही है। सूचना पर जिला समुचित अधिकारी कम सिविल सर्जन कुरूक्षेत्र द्वारा टीम का गठन किया गया। टीम ने दलाल सुखविन्द्र कौर वासी झांसा, कुरूक्षेत्र से फोन पर सम्पर्क करवाया और भ्रूण लिंग की जांच करवाने के लिए बातचीत की। इसके बाद दलाल ने बत्तीस हजार रुपये में भ्रूण लिंग की जांच करवाने की बातचीत तय कर ली। उसके बाद स्वास्थय विभाग द्वारा आरोपी दलाल सुखविन्द्र कौर वासी झांसा के पास एक नकली ग्राहक भेज कर भ्रूण लिंग जांच करवाने की बात तय की गई। उसने डिकाय को नौ मई को करीब सुबह छः. तीस बजे झांसा बस अड्डा पर बुलाया। डील के अनुसार डिकाय ने दलाल को बत्तीस हजार रुपये दे दिए। उसके बाद सुखविन्द्र कौर, डिकाय और एक अन्य महिला बबीता वासी अजराना कलां हाल झांसा डिकाय की गाडी में बैठकर वापिस कुरूक्षेत्र की तरफ चल दिए। टीम भी डिकाय वाले वाहन का पीछा कर रही थी। उसके बाद सुखविन्द्र कौर के कहे अनुसार वह कुरूक्षेत्र से रादौर होते हुए कलानौर से आगे कुछ दूरी पर स्थित टोल प्लाजा यूपी पहुंचे। जहां पर भीड़ होने के कारण उनकी गाड़ी टीम की आंखों से ओझल हो गई। जिस बारे टीम ने वापिस झांसा आकर थाना झांसा प्रभारी को सूचित किया । थाना झांसा प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह के मार्गनिर्देश में सहायक उप निरीक्षक राजेन्द्र कुमार, महिला हवलदार मीना व हवलदार अजय कुमार की टीम ने सलपानी चौक पर नाकाबंदी करके चेकिंग करनी शुरू की। कुछ देर बाद सलपानी चौक पर डिकाय, सुखविन्द्र कौर एव बबीता की गाड़ी आई। जिसको पुलिस टीम ने रोककर उसमें बैठी महिलाओं को काबू करके उनके नाम पता पूछे। जिन्होंने अपने नाम सुखविन्द्र कौर और बबीता वासीयान झांसा बताया। इसके बाद दोनोंं महिलाओं का काबू कर लिया।
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मंत्री ने कहा कि स्क्रैच से निर्मित पहले Tu-160M विमान का रोलआउट 2020 वर्ष के अंत में होगा। उनके अनुसार, रणनीतिकारों के पहले धारावाहिक बैच का निर्माण कार्य चल रहा है, नए रणनीतिक हमलावरों 10 के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध के अनुसार। नए Tu-160М के निर्माण के साथ, Tu-160 लड़ाकू विमान का गहन आधुनिकीकरण चल रहा है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा हो जाएगा, लेकिन वाहनों की सही तारीख और संख्या के नाम से इनकार कर दिया।
बातचीत में, रूसी वायु सेना के साथ सेवा कर रहे अन्य विमानों से संबंधित विषयों को भी छुआ गया। मंटुरोव के अनुसार, पहले गहरे आधुनिकीकरण वाले रणनीतिक बॉम्बर Tu-95MSM का परीक्षण इस साल शुरू होगा, और साथ ही साथ सभी लड़ाकू टीयू- 95MS के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ एक अनुबंध समाप्त करने की योजना है।
गहन आधुनिकीकरण Tu-22М3М लंबी दूरी के बमवर्षक के बारे में, मंत्री ने समझाया कि पहला प्रोटोटाइप कारखाने के उड़ान परीक्षणों में था, और साल के अंत तक दूसरा भी शामिल हो जाएगा। रक्षा मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से राज्य परीक्षणों की योजना अगले साल की तीसरी तिमाही के लिए बनाई गई है। वर्तमान में, Tu-22М3М के स्तर को पूरा करने के लिए Tu-22М3 लड़ाकू ड्रिल के आधुनिकीकरण के लिए सैन्य विभाग के साथ एक अनुबंध तैयार किया जा रहा है।
इसके अलावा, मंत्री के अनुसार, एक लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी विमान बनाने का काम चल रहा है, जो भविष्य में Tu-142 और IL-38 की जगह लेगा। अंतिम विकल्प इस वर्ष के अंत से पहले किया जाएगा।
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मंत्री ने कहा कि स्क्रैच से निर्मित पहले Tu-एक सौ साठM विमान का रोलआउट दो हज़ार बीस वर्ष के अंत में होगा। उनके अनुसार, रणनीतिकारों के पहले धारावाहिक बैच का निर्माण कार्य चल रहा है, नए रणनीतिक हमलावरों दस के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध के अनुसार। नए Tu-एक सौ साठМ के निर्माण के साथ, Tu-एक सौ साठ लड़ाकू विमान का गहन आधुनिकीकरण चल रहा है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा हो जाएगा, लेकिन वाहनों की सही तारीख और संख्या के नाम से इनकार कर दिया। बातचीत में, रूसी वायु सेना के साथ सेवा कर रहे अन्य विमानों से संबंधित विषयों को भी छुआ गया। मंटुरोव के अनुसार, पहले गहरे आधुनिकीकरण वाले रणनीतिक बॉम्बर Tu-पचानवेMSM का परीक्षण इस साल शुरू होगा, और साथ ही साथ सभी लड़ाकू टीयू- पचानवेMS के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ एक अनुबंध समाप्त करने की योजना है। गहन आधुनिकीकरण Tu-बाईसМतीनМ लंबी दूरी के बमवर्षक के बारे में, मंत्री ने समझाया कि पहला प्रोटोटाइप कारखाने के उड़ान परीक्षणों में था, और साल के अंत तक दूसरा भी शामिल हो जाएगा। रक्षा मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से राज्य परीक्षणों की योजना अगले साल की तीसरी तिमाही के लिए बनाई गई है। वर्तमान में, Tu-बाईसМतीनМ के स्तर को पूरा करने के लिए Tu-बाईसМतीन लड़ाकू ड्रिल के आधुनिकीकरण के लिए सैन्य विभाग के साथ एक अनुबंध तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, मंत्री के अनुसार, एक लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी विमान बनाने का काम चल रहा है, जो भविष्य में Tu-एक सौ बयालीस और IL-अड़तीस की जगह लेगा। अंतिम विकल्प इस वर्ष के अंत से पहले किया जाएगा।
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स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास निकोलसन रोड पर एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई है। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की सूचना है, अब तक आठ लोगों को निकाला जा चुका है। घटनास्थल पर एक दर्जन से ज्यादा एम्बुलेंस, कई पीसीआर व दमकल की कई गाड़ियां मौजूद हैं। राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
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स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास निकोलसन रोड पर एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई है। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की सूचना है, अब तक आठ लोगों को निकाला जा चुका है। घटनास्थल पर एक दर्जन से ज्यादा एम्बुलेंस, कई पीसीआर व दमकल की कई गाड़ियां मौजूद हैं। राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
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शिमलाः हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. कैबिनेट बैठक में नाइट कर्फ्यू हटाने का फैसला लिया गया है. हिमाचल में कोरोना संक्रमण कम होने के चलते ये फैसला लिया गया है.
आपको बता दें कि अचानक से कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में दो मंत्री बिक्रम सिंह और राकेश पठानिया शामिल नहीं हुए थे. इस बैठक में ठेकेदारों की मांगों पर भी चर्ची की गई है.
प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया है कि आउटडोर इंडोर में क्षमता के 50 फ़ीसदी लोग जमा हो सकेंगे। वह क्षमता 1000 लोगों की भी हो सकती है. 2000 की भी हो सकती है. आज से ही प्रदेश में सभी तरह के निर्माण कार्य शुरू होंगे. ठेकेदारों की हड़ताल भी खत्म हो गई है.
हिमाचल में ठेकेदारों ने माइनिंग के नियमों में सरलीकरण और टैक्स के अतिरिक्त बोझ जैसी कई विसंगतियों को लेकर नाराजी थी. इसे लेकर करीब 10 दिनों से विरोध कर रहे थे.
बर्फ़बारी में ठेकेदारी ने बर्फ हटाने और सड़कों की मरम्मत का भी विरोध किया था, जिसके चलते कई दिनों तक नसड़कों से बर्फ नहीं हटाई गई थी. मशीनें और मजदूर दोनों पर लगाई थी रोक. आज सरकार के निणर्य के बाद तुरंत प्रभाव से काम पर लौटेंगे ठेकेदार.
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शिमलाः हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. कैबिनेट बैठक में नाइट कर्फ्यू हटाने का फैसला लिया गया है. हिमाचल में कोरोना संक्रमण कम होने के चलते ये फैसला लिया गया है. आपको बता दें कि अचानक से कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में दो मंत्री बिक्रम सिंह और राकेश पठानिया शामिल नहीं हुए थे. इस बैठक में ठेकेदारों की मांगों पर भी चर्ची की गई है. प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया है कि आउटडोर इंडोर में क्षमता के पचास फ़ीसदी लोग जमा हो सकेंगे। वह क्षमता एक हज़ार लोगों की भी हो सकती है. दो हज़ार की भी हो सकती है. आज से ही प्रदेश में सभी तरह के निर्माण कार्य शुरू होंगे. ठेकेदारों की हड़ताल भी खत्म हो गई है. हिमाचल में ठेकेदारों ने माइनिंग के नियमों में सरलीकरण और टैक्स के अतिरिक्त बोझ जैसी कई विसंगतियों को लेकर नाराजी थी. इसे लेकर करीब दस दिनों से विरोध कर रहे थे. बर्फ़बारी में ठेकेदारी ने बर्फ हटाने और सड़कों की मरम्मत का भी विरोध किया था, जिसके चलते कई दिनों तक नसड़कों से बर्फ नहीं हटाई गई थी. मशीनें और मजदूर दोनों पर लगाई थी रोक. आज सरकार के निणर्य के बाद तुरंत प्रभाव से काम पर लौटेंगे ठेकेदार.
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उत्तर प्रदेश के झांसी (Jhansi) में कथित लव जिहाद (Love Jihad) मामले में पीड़िता युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई. मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने कब्र में दफन उसके शव को खोदकर बाहर निकाला है. पुलिस को अब शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है. बता दें कि अफरोज बेगम (Afroz Begum) बनी नीलम अहिरवार (Neelam Ahirwar) ने कुछ दिनों पहले जहर खा लिया था. उसकी झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मामले में पीड़िता के पिता ने आरोपी और उसके परिजनों पर लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया हैं.
दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन इलाके की रहने वाली नीलम अहिरवार को चार साल पहले छतरपुर जिले के सिविल लाइन क्षेत्र के रहने वाले तब्बू उर्फ तालिब खान बहला फुसलाकर भगा ले गया था. इस वक्त नीलम नाबालिग थी. पुलिस ने तालिब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लड़की को बरामद कर लिया था. पुलिस ने नीलम को सौंपना चाहा लेकिन बेटी के कृत्य से झुब्ध पिता किशोरीलाल ने उसे अपनाने से मना कर दिया. इसके बाद लड़की कुछ दिन आश्रय गृह में रही और वहां से निकलने के बाद तब्बू उर्फ तालिब के साथ रहने लगी. तालिब ने नीलम से निकाह कर लिया और उसका नाम बदलकर अफरोज बेगम रख दिया.
जुलाई 2021 के पहले सप्ताह में किशोरी लाल ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायती पत्र देकर बताया कि उनकी बेटी ने उन्हें फोन कर बताया है कि ससुरालीजन उसे प्रताड़ित कर रहे हैं. उससे जबरन कलमा फढ़वाया जा रहा है, और मांस खाने को मजबूर किया जा रहा है. पिता के मुताबिक लड़की खुद को बचाने की गुहार लगा रही थी. जब पिता ने बेटी के ससुराल जाकर उससे मिलना चाहा तो ससुरालीजनों ने उसे मिलने नहीं दिया और वापस भगा दिया.
इसके बाद 6 जुलाई को नीलम उर्फ अफरोज ने छतरपुर में जहर खा लिया था. गंभीर हालत में नीलम अहिरवार को ससुराल वालों ने इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया था. इलाज के दौरान नीलम उर्फ अफरोज की मौत हो गई थी. ससुरालवालों ने इसके बाद उसके शव को पुलिस को बिना सूचना दिए झांसी के प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक कब्रिस्तान में दफना दिया था. नीलम के पिता ने मामले में ससुरालवालों पर बेटी को जहर देकर हत्या करने की शिकायत मध्य प्रदेश की छतरपुर पुलिस से की थी. इसके बाद छतरपुर पुलिस ने झांसी पुलिस और जिला प्रशासन से सम्पर्क कर नीलम उर्फ अफरोज के शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराये जाने की बात की. झांसी जिला प्रशासन की अनुमति के बाद अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट, छतरपुर पुलिस की मौजूदगी में नीलम अहिरवार का शव कब्र से निकाला.
इस मामले में छतरपुर पुलिस के सीओ लोकेंद्र सिंह का कहना है कि मृतका के पिता की तहरीर के आधार पर झांसी जिला प्रशासन से संपर्क करके अफरोज उर्फ नीलम का शव कब्र खोदकर पोस्टमार्टम के लिए बाहर निकाला गया है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद जो भी कारण सामने आएगा, उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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उत्तर प्रदेश के झांसी में कथित लव जिहाद मामले में पीड़िता युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई. मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने कब्र में दफन उसके शव को खोदकर बाहर निकाला है. पुलिस को अब शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है. बता दें कि अफरोज बेगम बनी नीलम अहिरवार ने कुछ दिनों पहले जहर खा लिया था. उसकी झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मामले में पीड़िता के पिता ने आरोपी और उसके परिजनों पर लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया हैं. दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन इलाके की रहने वाली नीलम अहिरवार को चार साल पहले छतरपुर जिले के सिविल लाइन क्षेत्र के रहने वाले तब्बू उर्फ तालिब खान बहला फुसलाकर भगा ले गया था. इस वक्त नीलम नाबालिग थी. पुलिस ने तालिब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लड़की को बरामद कर लिया था. पुलिस ने नीलम को सौंपना चाहा लेकिन बेटी के कृत्य से झुब्ध पिता किशोरीलाल ने उसे अपनाने से मना कर दिया. इसके बाद लड़की कुछ दिन आश्रय गृह में रही और वहां से निकलने के बाद तब्बू उर्फ तालिब के साथ रहने लगी. तालिब ने नीलम से निकाह कर लिया और उसका नाम बदलकर अफरोज बेगम रख दिया. जुलाई दो हज़ार इक्कीस के पहले सप्ताह में किशोरी लाल ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायती पत्र देकर बताया कि उनकी बेटी ने उन्हें फोन कर बताया है कि ससुरालीजन उसे प्रताड़ित कर रहे हैं. उससे जबरन कलमा फढ़वाया जा रहा है, और मांस खाने को मजबूर किया जा रहा है. पिता के मुताबिक लड़की खुद को बचाने की गुहार लगा रही थी. जब पिता ने बेटी के ससुराल जाकर उससे मिलना चाहा तो ससुरालीजनों ने उसे मिलने नहीं दिया और वापस भगा दिया. इसके बाद छः जुलाई को नीलम उर्फ अफरोज ने छतरपुर में जहर खा लिया था. गंभीर हालत में नीलम अहिरवार को ससुराल वालों ने इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया था. इलाज के दौरान नीलम उर्फ अफरोज की मौत हो गई थी. ससुरालवालों ने इसके बाद उसके शव को पुलिस को बिना सूचना दिए झांसी के प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक कब्रिस्तान में दफना दिया था. नीलम के पिता ने मामले में ससुरालवालों पर बेटी को जहर देकर हत्या करने की शिकायत मध्य प्रदेश की छतरपुर पुलिस से की थी. इसके बाद छतरपुर पुलिस ने झांसी पुलिस और जिला प्रशासन से सम्पर्क कर नीलम उर्फ अफरोज के शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराये जाने की बात की. झांसी जिला प्रशासन की अनुमति के बाद अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट, छतरपुर पुलिस की मौजूदगी में नीलम अहिरवार का शव कब्र से निकाला. इस मामले में छतरपुर पुलिस के सीओ लोकेंद्र सिंह का कहना है कि मृतका के पिता की तहरीर के आधार पर झांसी जिला प्रशासन से संपर्क करके अफरोज उर्फ नीलम का शव कब्र खोदकर पोस्टमार्टम के लिए बाहर निकाला गया है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद जो भी कारण सामने आएगा, उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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Ladli Bahna Yojna: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता वाली लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार आने वाले पांच साल में 61 हजार 890 करोड़ रुपये खर्च करेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसका खाका खींच लिया है।
पहले साल योजना पर 10 हजार 166 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में योजना के लिए आठ हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। पांच मार्च अपने जन्म दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान योजना का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यहां राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें सवा लाख महिलाओं को बुलाया जा रहा है।
विभाग ने योजना पर पांच साल में खर्च होने वाली राशि का पूर्वानुमान लगाया है। पहले साल जो रुपये खर्च होंगे, उसमें महिला सम्मेलन और प्रचार प्रसार की राशि भी शामिल है। इस पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, दूसरे साल में प्रचार-प्रसार, सम्मेलनों पर राशि खर्च नहीं होगी, पर महिलाओं की संख्या बढ़ने से राशि बढ़ जाएगी। विभाग का अनुमान है कि प्रत्येक साल साढ़े तीन लाख महिलाओं की संख्या बढ़ेगी।
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Ladli Bahna Yojna: भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता वाली लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार आने वाले पांच साल में इकसठ हजार आठ सौ नब्बे करोड़ रुपये खर्च करेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसका खाका खींच लिया है। पहले साल योजना पर दस हजार एक सौ छयासठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के बजट में योजना के लिए आठ हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। पांच मार्च अपने जन्म दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान योजना का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यहां राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें सवा लाख महिलाओं को बुलाया जा रहा है। विभाग ने योजना पर पांच साल में खर्च होने वाली राशि का पूर्वानुमान लगाया है। पहले साल जो रुपये खर्च होंगे, उसमें महिला सम्मेलन और प्रचार प्रसार की राशि भी शामिल है। इस पर करीब एक सौ पचास करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि, दूसरे साल में प्रचार-प्रसार, सम्मेलनों पर राशि खर्च नहीं होगी, पर महिलाओं की संख्या बढ़ने से राशि बढ़ जाएगी। विभाग का अनुमान है कि प्रत्येक साल साढ़े तीन लाख महिलाओं की संख्या बढ़ेगी।
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टीम इंडिया के स्टार ऑफ स्पिनर और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए आर अश्विन ने कीवी स्पिनर एजाज पटेल के लिए ट्विटर से एक खास डिमांड की है। मुंबई में जन्मे एजाज पटेल ने वानखेड़े स्टेडियम पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 10 विकेट लिए। एजाज ऐसा करने वाले दुनिया के महज तीसरे गेंदबाज हैं और अश्विन ने ट्विटर से कहा कि ऐसा कारनामा करने वाले खिलाड़ी का ट्विटर अकाउंट कम से कम वेरिफाइड जरूर होना चाहिए। भारत ने वानखेड़े टेस्ट 372 रनों से अपने नाम कर सीरीज पर 1-0 से कब्जा किया।
अश्विन ने ट्विटर वेरिफाइड और एजाज पटेल दोनों को टैग करते हुए ट्वीट किया, 'डियर वेरिफाइड ट्विटर, एक पारी में दस विकेट लेने वाला शख्स कम से कम वेरिफाइड अकाउंट का हकदार है। ' एजाज पटेल ने पहली पारी में 10 और दूसरी पारी में चार विकेट लिए। वहीं अश्विन ने मुंबई टेस्ट की दोनों पारियों में चार-चार विकेट लिए। यह दौरा एजाज के लिए बहुत यादगार रहा। कानपुर टेस्ट में उन्होंने रचिन रविंद्र के साथ मिलकर न्यूजीलैंड को हार से बचाया था और मुंबई टेस्ट में परफेक्ट 10 लेने वाले दुनिया के तीसरे गेंदबाज बने।
कानपुर टेस्ट ड्रॉ होने के बाद टीम इंडिया ने मुंबई टेस्ट चौथे दिन पहले सेशन में ही अपने नाम कर लिया। भारत ने पहली पारी में 325 रन बनाए, जवाब में कीवी टीम महज 62 रनों पर ही सिमट गई। भारत ने कीवी टीम को फॉलोऑन नहीं देने का फैसला लिया और दूसरी पारी सात विकेट पर 276 रनों पर घोषित कर दी। न्यूजीलैंड को जीत के लिए 540 का असंभव सा लक्ष्य मिला, जिसके जवाब में कीवी टीम महज 167 रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत की टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से यह अभी तक की सबसे बड़ी जीत है।
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टीम इंडिया के स्टार ऑफ स्पिनर और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए आर अश्विन ने कीवी स्पिनर एजाज पटेल के लिए ट्विटर से एक खास डिमांड की है। मुंबई में जन्मे एजाज पटेल ने वानखेड़े स्टेडियम पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में दस विकेट लिए। एजाज ऐसा करने वाले दुनिया के महज तीसरे गेंदबाज हैं और अश्विन ने ट्विटर से कहा कि ऐसा कारनामा करने वाले खिलाड़ी का ट्विटर अकाउंट कम से कम वेरिफाइड जरूर होना चाहिए। भारत ने वानखेड़े टेस्ट तीन सौ बहत्तर रनों से अपने नाम कर सीरीज पर एक-शून्य से कब्जा किया। अश्विन ने ट्विटर वेरिफाइड और एजाज पटेल दोनों को टैग करते हुए ट्वीट किया, 'डियर वेरिफाइड ट्विटर, एक पारी में दस विकेट लेने वाला शख्स कम से कम वेरिफाइड अकाउंट का हकदार है। ' एजाज पटेल ने पहली पारी में दस और दूसरी पारी में चार विकेट लिए। वहीं अश्विन ने मुंबई टेस्ट की दोनों पारियों में चार-चार विकेट लिए। यह दौरा एजाज के लिए बहुत यादगार रहा। कानपुर टेस्ट में उन्होंने रचिन रविंद्र के साथ मिलकर न्यूजीलैंड को हार से बचाया था और मुंबई टेस्ट में परफेक्ट दस लेने वाले दुनिया के तीसरे गेंदबाज बने। कानपुर टेस्ट ड्रॉ होने के बाद टीम इंडिया ने मुंबई टेस्ट चौथे दिन पहले सेशन में ही अपने नाम कर लिया। भारत ने पहली पारी में तीन सौ पच्चीस रन बनाए, जवाब में कीवी टीम महज बासठ रनों पर ही सिमट गई। भारत ने कीवी टीम को फॉलोऑन नहीं देने का फैसला लिया और दूसरी पारी सात विकेट पर दो सौ छिहत्तर रनों पर घोषित कर दी। न्यूजीलैंड को जीत के लिए पाँच सौ चालीस का असंभव सा लक्ष्य मिला, जिसके जवाब में कीवी टीम महज एक सौ सरसठ रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत की टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से यह अभी तक की सबसे बड़ी जीत है।
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दिल्ली में सीएए के विरोध में पिछले चार दिन से जबरदस्त हिंसा हो रही है। इस हिंसा को लेकर राजनीतिक पार्टियां एक के बाद एक अपना बयान दे रही हैं, अब हरियाणा से भाजपा के मंत्री रणजीत चौटाला ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, दंगे तो हते रहे हैं, पहले भी होते रहे हैं। जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, तब भी पूरी दिल्ली जलती रही, ये तो जिंदगी का हिस्सा है।
रणजीत सिंह हरियाणा सरकार में बिजली मंत्री हैं। वो हरियाणा के पूर्व सीएम चौधरी देवीलाल के पुत्रा और ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई हैं। दिल्ली हिंसा को लेकर दिए गए उन इस बयान की काफी निंदा हो रही है।
बताते चले कि, दिल्ली की हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायलल हैं। इस हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए सख्त टिप्पणियां की हैं।
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दिल्ली में सीएए के विरोध में पिछले चार दिन से जबरदस्त हिंसा हो रही है। इस हिंसा को लेकर राजनीतिक पार्टियां एक के बाद एक अपना बयान दे रही हैं, अब हरियाणा से भाजपा के मंत्री रणजीत चौटाला ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि, दंगे तो हते रहे हैं, पहले भी होते रहे हैं। जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, तब भी पूरी दिल्ली जलती रही, ये तो जिंदगी का हिस्सा है। रणजीत सिंह हरियाणा सरकार में बिजली मंत्री हैं। वो हरियाणा के पूर्व सीएम चौधरी देवीलाल के पुत्रा और ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई हैं। दिल्ली हिंसा को लेकर दिए गए उन इस बयान की काफी निंदा हो रही है। बताते चले कि, दिल्ली की हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर बत्तीस हो गई है, जबकि दो सौ पचास से ज्यादा लोग घायलल हैं। इस हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए सख्त टिप्पणियां की हैं।
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भाई वीरेंद्र ने कहा कि महागठबंधन की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रही है। इस पर पत्रकारों ने पूछा कि जब पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह किसानों के हित में सवाल उठाने लगे तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया?
बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि जब वो विधायक थे तब कुछ नहीं बोले लेकिन मंत्री बनते ही सरकार के खिलाफ बोलने लगे। कैमूर के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को पहुंचे भाई वीरेंद्र पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
भाई वीरेंद्र ने कहा कि महागठबंधन की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रही है। इस पर पत्रकारों ने पूछा कि जब पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह किसानों के हित में सवाल उठाने लगे तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया गया? उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहता। जब विधायक थे तो आप कोई सवाल नहीं उठा रहे थे। मंत्रीमंडल में शामिल होते ही कौन सा सवाल उठाना शुरू कर दिए। यह सवाल तो मुख्यमंत्री से मिलकर भी कर सकते थे। लेकिन, कहीं न कही लगता है कि लोग दिशाहीन हो गए हैं और दिशा से भटकने का यह कारण है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोई किसी से जबरदस्ती इस्तीफा नहीं लेता है। जो स्वेच्छा से देते हैं, मंत्रीमंडल उसे स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि सरकार में रहकर किसी को सरकार के विरुद्ध नहीं बोलना चाहिए। मर्यादा में हमको भी रहना है और सरकार के मंत्री को भी। अगर मर्यादा को पार कीजिएगा तो अपने आप विदा हो जना पड़ेगा।
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भाई वीरेंद्र ने कहा कि महागठबंधन की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रही है। इस पर पत्रकारों ने पूछा कि जब पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह किसानों के हित में सवाल उठाने लगे तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया? बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि जब वो विधायक थे तब कुछ नहीं बोले लेकिन मंत्री बनते ही सरकार के खिलाफ बोलने लगे। कैमूर के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को पहुंचे भाई वीरेंद्र पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। भाई वीरेंद्र ने कहा कि महागठबंधन की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रही है। इस पर पत्रकारों ने पूछा कि जब पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह किसानों के हित में सवाल उठाने लगे तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया गया? उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहता। जब विधायक थे तो आप कोई सवाल नहीं उठा रहे थे। मंत्रीमंडल में शामिल होते ही कौन सा सवाल उठाना शुरू कर दिए। यह सवाल तो मुख्यमंत्री से मिलकर भी कर सकते थे। लेकिन, कहीं न कही लगता है कि लोग दिशाहीन हो गए हैं और दिशा से भटकने का यह कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई किसी से जबरदस्ती इस्तीफा नहीं लेता है। जो स्वेच्छा से देते हैं, मंत्रीमंडल उसे स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि सरकार में रहकर किसी को सरकार के विरुद्ध नहीं बोलना चाहिए। मर्यादा में हमको भी रहना है और सरकार के मंत्री को भी। अगर मर्यादा को पार कीजिएगा तो अपने आप विदा हो जना पड़ेगा।
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कश्मीर पर 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कबायलियों को आगे कर हमला किया था. उस हमले की बरसी से एक दिन पहले श्रीनगर में ऐसे होर्डिंग्स लगे दिखे जिन पर 22 अक्टूबर को 'ब्लैक डे' बताया गया है. ये उस दिन के खौफ को याद दिलाता है जब पाकिस्तानी सेना के समर्थन के साथ कबायलियों ने हमला किया, जो इस क्षेत्र में संघर्ष और उथल-पुथल की शुरुआत का आधार बना.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि हमले की बरसी को 'ब्लैक डे के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है जिससे कि दुनिया को ये याद दिलाया जा सके कि पाकिस्तान किस तरह से इस क्षेत्र में अशांति, हिंसा और आतंकवाद के लिए जिम्मेदार रहा है.
22 अक्टूबर 1947 को, पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया. ये अवैध कब्जा ही बड़े सैन्य संघर्ष का कारण बना. उस वक्त तक जम्मू-कश्मीर अलग रियासत थी. कबायली हमलावरों की बर्बरता को देखते हुए रियासत के महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से मदद की अपील की थी.
जिसके बाद 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना को कार्रवाई के लिए भेजा गया था. इस दिन भारतीय सैनिक श्रीनगर एयरफील्ड पर उतरे. इसके बाद भारतीय सैनिकों ने पाक समर्थित कबायलियों को खदेड़ने के लिए लड़ाई लड़ी.
तभी से नियंत्रण रेखा (एलओसी) कश्मीर को दो भागों में बांटने वाली वस्तुतः सीमा है, कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में है जिसे पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता है.
एलओसी पर सैन्य झड़पें जारी हैं. पाकिस्तान लगातार एलओसी से आतंकवादियों को कश्मीर की मुख्य जमीन पर भेजने की कोशिशें करता रहता है जिनका भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से मुहंतोड़ जवाब दिया जाता रहा है.
पिछले साल 5 अगस्त को, भारत ने संसद में एक कानून के माध्यम से जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त कर दिया. इनके तहत जम्मू और कश्मीर के कामकाज के लिए भी विशेष प्रावधान थे. संशोधन के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य जिसमें लद्दाख भी शामिल था, दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल गया- जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख.
इस कदम का पाकिस्तान ने विरोध किया लेकिन भारत ने इस विरोध को देश का आंतरिक मामला बताते हुए खारिज कर दिया.
क्या हुआ था 22 से 27 अक्टूबर तक उस साल?
पाकिस्तान सेना के निर्देश पर कबायलियों को भारतीय सेना के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया गया था. पाकिस्तानी सेना ने इन्हें रसद, हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराया. इनकी कमान पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने संभाल रखी थी.
हमलावरों के समूह अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़े. छह समूह मुजफ्फराबाद से श्रीनगर जाने वाली मुख्य सड़क पर डोमेल, उरी और बारामुला के रास्ते निकले. इनका मंसूबा एयरोड्रम पर कब्जा करने के साथ बनिहाल दर्रे तक आगे बढ़ना था. हमलावरों के दो समूह हाजीपीर दर्रे से सीधे गुलमर्ग की ओर गए.
इसी तरह टिथवाल से नास्ताचुन दर्रे के रास्ते सोपोर, हंदवाड़ा और बांदीपुर पर कब्जा करने के लिए हमलावर आगे बढ़े. पीर पंजाल रेंज के दक्षिण में पुंछ, भिंबर और रावलकोट क्षेत्र में हमले किए गए, जिनका लक्ष्य जम्मू पर कब्जा करना था.
26 अक्टूबर को, हमलावर बारामूला शहर तक पहुंच गए. ये स्थानीय लोगों पर अत्याचार करते हुए श्रीनगर की ओर बढ़ रहे थे. आखिर में जब महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से अपील की तो जम्मू और कश्मीर का भारत में औपचारिक विलय हुआ. फिर भारतीय सेना ने क्षेत्र को पाकिस्तानी हमलावरों से मुक्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू की.
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कश्मीर पर बाईस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को पाकिस्तान ने कबायलियों को आगे कर हमला किया था. उस हमले की बरसी से एक दिन पहले श्रीनगर में ऐसे होर्डिंग्स लगे दिखे जिन पर बाईस अक्टूबर को 'ब्लैक डे' बताया गया है. ये उस दिन के खौफ को याद दिलाता है जब पाकिस्तानी सेना के समर्थन के साथ कबायलियों ने हमला किया, जो इस क्षेत्र में संघर्ष और उथल-पुथल की शुरुआत का आधार बना. सरकारी सूत्रों ने बताया कि हमले की बरसी को 'ब्लैक डे के तौर पर मनाने का फैसला किया गया है जिससे कि दुनिया को ये याद दिलाया जा सके कि पाकिस्तान किस तरह से इस क्षेत्र में अशांति, हिंसा और आतंकवाद के लिए जिम्मेदार रहा है. बाईस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को, पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया. ये अवैध कब्जा ही बड़े सैन्य संघर्ष का कारण बना. उस वक्त तक जम्मू-कश्मीर अलग रियासत थी. कबायली हमलावरों की बर्बरता को देखते हुए रियासत के महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से मदद की अपील की थी. जिसके बाद सत्ताईस अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को भारतीय सेना को कार्रवाई के लिए भेजा गया था. इस दिन भारतीय सैनिक श्रीनगर एयरफील्ड पर उतरे. इसके बाद भारतीय सैनिकों ने पाक समर्थित कबायलियों को खदेड़ने के लिए लड़ाई लड़ी. तभी से नियंत्रण रेखा कश्मीर को दो भागों में बांटने वाली वस्तुतः सीमा है, कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में है जिसे पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता है. एलओसी पर सैन्य झड़पें जारी हैं. पाकिस्तान लगातार एलओसी से आतंकवादियों को कश्मीर की मुख्य जमीन पर भेजने की कोशिशें करता रहता है जिनका भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से मुहंतोड़ जवाब दिया जाता रहा है. पिछले साल पाँच अगस्त को, भारत ने संसद में एक कानून के माध्यम से जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस एम्पीयर को समाप्त कर दिया. इनके तहत जम्मू और कश्मीर के कामकाज के लिए भी विशेष प्रावधान थे. संशोधन के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य जिसमें लद्दाख भी शामिल था, दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल गया- जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख. इस कदम का पाकिस्तान ने विरोध किया लेकिन भारत ने इस विरोध को देश का आंतरिक मामला बताते हुए खारिज कर दिया. क्या हुआ था बाईस से सत्ताईस अक्टूबर तक उस साल? पाकिस्तान सेना के निर्देश पर कबायलियों को भारतीय सेना के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया गया था. पाकिस्तानी सेना ने इन्हें रसद, हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराया. इनकी कमान पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने संभाल रखी थी. हमलावरों के समूह अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़े. छह समूह मुजफ्फराबाद से श्रीनगर जाने वाली मुख्य सड़क पर डोमेल, उरी और बारामुला के रास्ते निकले. इनका मंसूबा एयरोड्रम पर कब्जा करने के साथ बनिहाल दर्रे तक आगे बढ़ना था. हमलावरों के दो समूह हाजीपीर दर्रे से सीधे गुलमर्ग की ओर गए. इसी तरह टिथवाल से नास्ताचुन दर्रे के रास्ते सोपोर, हंदवाड़ा और बांदीपुर पर कब्जा करने के लिए हमलावर आगे बढ़े. पीर पंजाल रेंज के दक्षिण में पुंछ, भिंबर और रावलकोट क्षेत्र में हमले किए गए, जिनका लक्ष्य जम्मू पर कब्जा करना था. छब्बीस अक्टूबर को, हमलावर बारामूला शहर तक पहुंच गए. ये स्थानीय लोगों पर अत्याचार करते हुए श्रीनगर की ओर बढ़ रहे थे. आखिर में जब महाराजा हरि सिंह ने भारत सरकार से अपील की तो जम्मू और कश्मीर का भारत में औपचारिक विलय हुआ. फिर भारतीय सेना ने क्षेत्र को पाकिस्तानी हमलावरों से मुक्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू की.
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नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस में कोरोना वायरस से एक और मौत हो गई है। सीलमपुर थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर कर्मबीर की कोरोना से आर्मी अस्पताल में मौत हो गई है। सब इंस्पेक्टर कर्मबीर 56 साल के थे और वे डायबटीज के भी मरीज थे। तबियत बिगड़ने के बाद इन्हें 2 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां आज इनकी मौत हो गई। कर्मबीर की पत्नी, एक बेटा और एक बेटी भी कोरोना से संक्रमित हैं लेकिन इन लोगों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है।
आपको बता दें कि कोरोना वायरस से अब तक दिल्ली पुलिस में 4 लोगों की मौत हो चुकी है। सब इंस्पेक्टर कर्मबीर से पहले जहांगीरपुरी, सेंट्रल क्राइम ब्रांच और भरत नगर थाने में तैनात तीन पुलिसकर्मियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। आज सीलमपुर में तैनात सब इंस्पेक्टर कोरोना के शिकार हुए और इनकी मौत हो गई।
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नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस में कोरोना वायरस से एक और मौत हो गई है। सीलमपुर थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर कर्मबीर की कोरोना से आर्मी अस्पताल में मौत हो गई है। सब इंस्पेक्टर कर्मबीर छप्पन साल के थे और वे डायबटीज के भी मरीज थे। तबियत बिगड़ने के बाद इन्हें दो जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां आज इनकी मौत हो गई। कर्मबीर की पत्नी, एक बेटा और एक बेटी भी कोरोना से संक्रमित हैं लेकिन इन लोगों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है। आपको बता दें कि कोरोना वायरस से अब तक दिल्ली पुलिस में चार लोगों की मौत हो चुकी है। सब इंस्पेक्टर कर्मबीर से पहले जहांगीरपुरी, सेंट्रल क्राइम ब्रांच और भरत नगर थाने में तैनात तीन पुलिसकर्मियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। आज सीलमपुर में तैनात सब इंस्पेक्टर कोरोना के शिकार हुए और इनकी मौत हो गई।
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- पांच राज्यों के चुनाव में सबसे बड़ा दांव भारतीय जनता पार्टी का है। क्योंकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है।
- तीसरे मोर्चे का भविष्य और ममता-शरद पवार और केसीआर की उम्मीदें भी नतीजों पर टिकी हैं।
- नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर के लिए यह चुनाव बेहद अहम है।
Assembly Elections 2022: अब वो घड़ी बेहद नजदीक है, जब 5 राज्यों के चुनावी नतीजों से भारतीय राजनीति की अगले दो साल की दिशा तय होने वाली है। 10 मार्च को उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से यह तय होगा कि भाजपा मजबूत होती है, या फिर विपक्ष को 2024 के लिए नई संजीवनी मिलेगी। क्योंकि इसी के आधार पर अगले दो साल में कई राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आएंगे।
पांच राज्यों के चुनाव में सबसे बड़ा दांव भारतीय जनता पार्टी का है। क्योंकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। ऐसे में उसके लिए इन राज्यों में फिर से जीत हासिल करना बेहद जरूरी है। उसमें भी उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि अगर पार्टी इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उसके लिए 2024 में (लोकसभा चुनाव) बेहद आत्मविश्वास के साथ लड़ना आसान होगा। वहीं अगर पार्टी खराब प्रदर्शन करती है, तो उसके लिए एनडीए कुनबे को बचाकर रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
इन 5 राज्यों में कांग्रेस के लिए पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सत्ता में फिर से वापसी की चुनौती है। अगर वह जीतती है तो राहुल गांधी के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी और भाजपा के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई में कांग्रेस, स्थिति मजबूती से रख सकेगी। और अगर हार होती है तो कांग्रेस से दूरी बना रहे राजनीतिक दलों के लिए 2024 में कांग्रेस के बिना गठबंधन बनाने का रास्ता मिल जाएगा। साथ ही पार्टी का कई बड़े नेता साथ छोड़ सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब का चुनाव बेहद अहम है। अगर वह सरकार बनाती है तो राष्ट्रीय राजनीति में उसका कद बढ़ेगा। और वह 2024 के लिए विपक्षी दल उसे नकार नहीं सकेंगे।
समाजवादी पार्टी अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता से दूर कर देती है तो अखिलेश यादव का कद, ममता बनर्जी की तरह राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ जाएगा। और वह 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य की अगुआई करते दिखेंगे। जिसका उन्हें 2024 की लड़ाई में फायदा मिलेगा। लेकिन अगर हार होगी तो यह संदेश भी जाएगा कि उनमें चुनाव जीतकर सरकार बनाने की क्षमता नहीं है।
इन चुनावों में बसपा प्रमुख मायावती और उनकी पार्टी की साख भी दांव पर है। अगर पार्टी खराब प्रदर्शन करती है तो मायावती के राजनीतिक करियर पर सवाल उठने लगेंगे। और दलित राजनीति के नए नेतृत्व की बात भी उठेगी। लेकिन अगर वह 2017 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठाने वालों के मुंह बंद हो जाएंगे।
इसी तरह पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। क्योंकि नतीजों से यह तय हो जाएगा कि राज्य की राजनीति में इन तीनों की प्रासंगिकता कितनी कायम रहेगी।
देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव, जुलाई 2022 में होना है। और 5 राज्यों के नतीजों से राज्यसभा के सीटों से लेकर विधानसभा सीटों पर सीधा असर होगा। जिनका राष्ट्रपति चुनाव में असर दिखेगा। अगर भाजपा इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो उसके लिए अपने उम्मीदवार को जिताना कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। इसके अलावा अगस्त तक 65 से ज्यादा सीटों पर राज्यसभा के चुनाव होने वाले हैं। अगर भाजपा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो वह राज्य सभा में अपनी संख्या मजबूत करेगी। लेकिन अगर उसका 2017 के मुकाबले प्रदर्शन खराब रहता है तो उसके लिए राज्यसभा का समीकरण थोड़ा मुश्किल हो जाएगा।
पिछले कुछ महीनों से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर टीआरएस प्रमुख कें. चंद्रशेखर राव लगातार तीसरे मोर्चे की कवायद कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि गैर भाजपाई दलों को एक-जुट कर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जाय। इस कवायद में वह कांग्रेस के बिना विकल्प बनने की तलाश में भी हैं। अगर 5 राज्यों के चुनावी नतीजे भाजपा के खिलाफ जाते हैं, तो तीसरे मोर्चे को संजीवनी मिलेगी और कई राजनीतिक दल उनके साथ जुट सकते हैं।
जिस तरह 5 राज्यों के चुनाव को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून को वापस लेने का फैसला किया, वह ब्रांड मोदी के लिए झटका था। क्योंकि नरेंद्र मोदी की छवि आर्थिक सुधारों के लिए सख्त कदम उठाने के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में अगर नतीजे भाजपा के लिए अनुकूल आते हैं, तो आने वाले वाले दिनों में श्रम सुधार से लेकर जीएसटी कर ढांचे में कई अहम सुधार किए जा सकते हैं। लेकिन अगर भाजपा को हार मिलती है, तो नए आर्थिक सुधारों जैसे नेशनल मोनेटजाइजेशन पाइपलाइन आदि की रफ्तार भी धीमी हो सकती है।
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- पांच राज्यों के चुनाव में सबसे बड़ा दांव भारतीय जनता पार्टी का है। क्योंकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। - तीसरे मोर्चे का भविष्य और ममता-शरद पवार और केसीआर की उम्मीदें भी नतीजों पर टिकी हैं। - नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। Assembly Elections दो हज़ार बाईस: अब वो घड़ी बेहद नजदीक है, जब पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों से भारतीय राजनीति की अगले दो साल की दिशा तय होने वाली है। दस मार्च को उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से यह तय होगा कि भाजपा मजबूत होती है, या फिर विपक्ष को दो हज़ार चौबीस के लिए नई संजीवनी मिलेगी। क्योंकि इसी के आधार पर अगले दो साल में कई राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आएंगे। पांच राज्यों के चुनाव में सबसे बड़ा दांव भारतीय जनता पार्टी का है। क्योंकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। ऐसे में उसके लिए इन राज्यों में फिर से जीत हासिल करना बेहद जरूरी है। उसमें भी उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि अगर पार्टी इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उसके लिए दो हज़ार चौबीस में बेहद आत्मविश्वास के साथ लड़ना आसान होगा। वहीं अगर पार्टी खराब प्रदर्शन करती है, तो उसके लिए एनडीए कुनबे को बचाकर रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इन पाँच राज्यों में कांग्रेस के लिए पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सत्ता में फिर से वापसी की चुनौती है। अगर वह जीतती है तो राहुल गांधी के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी और भाजपा के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई में कांग्रेस, स्थिति मजबूती से रख सकेगी। और अगर हार होती है तो कांग्रेस से दूरी बना रहे राजनीतिक दलों के लिए दो हज़ार चौबीस में कांग्रेस के बिना गठबंधन बनाने का रास्ता मिल जाएगा। साथ ही पार्टी का कई बड़े नेता साथ छोड़ सकते हैं। आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब का चुनाव बेहद अहम है। अगर वह सरकार बनाती है तो राष्ट्रीय राजनीति में उसका कद बढ़ेगा। और वह दो हज़ार चौबीस के लिए विपक्षी दल उसे नकार नहीं सकेंगे। समाजवादी पार्टी अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता से दूर कर देती है तो अखिलेश यादव का कद, ममता बनर्जी की तरह राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ जाएगा। और वह अस्सी लोकसभा सीटों वाले राज्य की अगुआई करते दिखेंगे। जिसका उन्हें दो हज़ार चौबीस की लड़ाई में फायदा मिलेगा। लेकिन अगर हार होगी तो यह संदेश भी जाएगा कि उनमें चुनाव जीतकर सरकार बनाने की क्षमता नहीं है। इन चुनावों में बसपा प्रमुख मायावती और उनकी पार्टी की साख भी दांव पर है। अगर पार्टी खराब प्रदर्शन करती है तो मायावती के राजनीतिक करियर पर सवाल उठने लगेंगे। और दलित राजनीति के नए नेतृत्व की बात भी उठेगी। लेकिन अगर वह दो हज़ार सत्रह के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठाने वालों के मुंह बंद हो जाएंगे। इसी तरह पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। क्योंकि नतीजों से यह तय हो जाएगा कि राज्य की राजनीति में इन तीनों की प्रासंगिकता कितनी कायम रहेगी। देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव, जुलाई दो हज़ार बाईस में होना है। और पाँच राज्यों के नतीजों से राज्यसभा के सीटों से लेकर विधानसभा सीटों पर सीधा असर होगा। जिनका राष्ट्रपति चुनाव में असर दिखेगा। अगर भाजपा इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो उसके लिए अपने उम्मीदवार को जिताना कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। इसके अलावा अगस्त तक पैंसठ से ज्यादा सीटों पर राज्यसभा के चुनाव होने वाले हैं। अगर भाजपा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो वह राज्य सभा में अपनी संख्या मजबूत करेगी। लेकिन अगर उसका दो हज़ार सत्रह के मुकाबले प्रदर्शन खराब रहता है तो उसके लिए राज्यसभा का समीकरण थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। पिछले कुछ महीनों से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर टीआरएस प्रमुख कें. चंद्रशेखर राव लगातार तीसरे मोर्चे की कवायद कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि गैर भाजपाई दलों को एक-जुट कर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जाय। इस कवायद में वह कांग्रेस के बिना विकल्प बनने की तलाश में भी हैं। अगर पाँच राज्यों के चुनावी नतीजे भाजपा के खिलाफ जाते हैं, तो तीसरे मोर्चे को संजीवनी मिलेगी और कई राजनीतिक दल उनके साथ जुट सकते हैं। जिस तरह पाँच राज्यों के चुनाव को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून को वापस लेने का फैसला किया, वह ब्रांड मोदी के लिए झटका था। क्योंकि नरेंद्र मोदी की छवि आर्थिक सुधारों के लिए सख्त कदम उठाने के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में अगर नतीजे भाजपा के लिए अनुकूल आते हैं, तो आने वाले वाले दिनों में श्रम सुधार से लेकर जीएसटी कर ढांचे में कई अहम सुधार किए जा सकते हैं। लेकिन अगर भाजपा को हार मिलती है, तो नए आर्थिक सुधारों जैसे नेशनल मोनेटजाइजेशन पाइपलाइन आदि की रफ्तार भी धीमी हो सकती है।
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अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान जहां एक ओर दुनिया के सामने महिलाओं को अधिकार देने की बात कहकर अपनी बदली हुई छवि सामने रख रहा है, वहीं दूसरी और अपने शासन की मजबूती के लिए पिछले शासन में अमेरिका की मदद करने वालों को घर-घर जाकर अपना निशाना बना रहा है। हालात यह है कि तालिबान राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (NDS), सेना के दुभाषियों और अफगानी कर्मचारियों को खात्मे के लिए गेस्टापो (खूफिया पुलिस) की भूमिका निभा रहा है।
बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा करते हुए देश में नया शासन लागू करने की घोषणा की थी। उसके बाद बुधवार को उसने ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना एक उदार चेहरा दिखाने की कोशिश की। इसमें प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि वह महिलाओं को शरिया कानून के हिसाब से काम करने और आजादी का अधिकार देंगे। महिलाएं उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकेंगी।
तालिबान ने छवि बदलने के दावों के बीच अफगानी जनता पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। वह न केवल पिछले शासन से जुड़े लोगों का चुन-चुन कर खात्मा कर रहा है, बल्कि अपने लड़ाकों के जरिए महिला और बच्चों पर भी हमला कर रहा है। मंगलवार को जहां उसने बुर्का नहीं पहनने पर तखर प्रांत में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी, वहीं अफगानिस्तान छोड़कर जाने का प्रयास करने वालों पर भी हमला किया जा रहा है।
तालिबान के लड़ाके अब अपनी मजबूती के लिए विरोधियों को भी मौत के घाट उतारने लगे हैं। बुधवार को जलालाबाद में कुछ लोगों ने अफगानिस्तान का झंडा लहराकर विरोध जुलूस निकाला तो लड़ाकों ने भीड़ पर फायरिंग कर दी। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई तथा एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। इसी तरह शुक्रवार को भी तालिबान ने पूर्वी शहर असदाबाद में विरोध कर रही भीड़ पर गोलिया बरसा दी। इसमें कई लोगों की मौत हो गई।
तालिबान ने अपने शरिया कानून को सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए राजधानी काबुल में संचालित सभी ब्यूटी पार्लरों को बंद कद दिया है। इतना ही नहीं उसने महिलाओं के चेहरे वाले होर्डिंग और विज्ञापनों पर भी काखिल पोत दी है।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद करने और पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी से जुड़े लोगों को सार्वजनिक रूप से गोली मारने के लिए अब तालिबान ने घर-घर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया है। इसमें खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह से जुड़े लोगों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बता दें कि सालेह वर्तमान में अहमद मसूद के साथ पंजशीर घाटी से तालिबान के खिलाफ प्रतिरोध का नेतृत्व कर रहे हैं।
तालिबान का राजनीतिक चेहरा ब्रिटेन और पाकिस्तान के इशारे पर अमेरिका के साथ एक मान्यता के बदले मिली-जुली सरकार बनाने के समझौते पर बातचीत करने का प्रयास कर रहा है। बता दें कि चीन, रूस और ईरान जैसे अमेरिका के विरोधी देश पहले से ही काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद बाइडन प्रशासन की करारी शिकस्त का आनंद ले रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि ये देश तालिबान सरकार को जल्द ही मान्यता भी देंगे।
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अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान जहां एक ओर दुनिया के सामने महिलाओं को अधिकार देने की बात कहकर अपनी बदली हुई छवि सामने रख रहा है, वहीं दूसरी और अपने शासन की मजबूती के लिए पिछले शासन में अमेरिका की मदद करने वालों को घर-घर जाकर अपना निशाना बना रहा है। हालात यह है कि तालिबान राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय , सेना के दुभाषियों और अफगानी कर्मचारियों को खात्मे के लिए गेस्टापो की भूमिका निभा रहा है। बता दें कि तालिबान ने पंद्रह अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा करते हुए देश में नया शासन लागू करने की घोषणा की थी। उसके बाद बुधवार को उसने ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना एक उदार चेहरा दिखाने की कोशिश की। इसमें प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि वह महिलाओं को शरिया कानून के हिसाब से काम करने और आजादी का अधिकार देंगे। महिलाएं उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकेंगी। तालिबान ने छवि बदलने के दावों के बीच अफगानी जनता पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। वह न केवल पिछले शासन से जुड़े लोगों का चुन-चुन कर खात्मा कर रहा है, बल्कि अपने लड़ाकों के जरिए महिला और बच्चों पर भी हमला कर रहा है। मंगलवार को जहां उसने बुर्का नहीं पहनने पर तखर प्रांत में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी, वहीं अफगानिस्तान छोड़कर जाने का प्रयास करने वालों पर भी हमला किया जा रहा है। तालिबान के लड़ाके अब अपनी मजबूती के लिए विरोधियों को भी मौत के घाट उतारने लगे हैं। बुधवार को जलालाबाद में कुछ लोगों ने अफगानिस्तान का झंडा लहराकर विरोध जुलूस निकाला तो लड़ाकों ने भीड़ पर फायरिंग कर दी। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई तथा एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। इसी तरह शुक्रवार को भी तालिबान ने पूर्वी शहर असदाबाद में विरोध कर रही भीड़ पर गोलिया बरसा दी। इसमें कई लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने अपने शरिया कानून को सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए राजधानी काबुल में संचालित सभी ब्यूटी पार्लरों को बंद कद दिया है। इतना ही नहीं उसने महिलाओं के चेहरे वाले होर्डिंग और विज्ञापनों पर भी काखिल पोत दी है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद करने और पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी से जुड़े लोगों को सार्वजनिक रूप से गोली मारने के लिए अब तालिबान ने घर-घर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया है। इसमें खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह से जुड़े लोगों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बता दें कि सालेह वर्तमान में अहमद मसूद के साथ पंजशीर घाटी से तालिबान के खिलाफ प्रतिरोध का नेतृत्व कर रहे हैं। तालिबान का राजनीतिक चेहरा ब्रिटेन और पाकिस्तान के इशारे पर अमेरिका के साथ एक मान्यता के बदले मिली-जुली सरकार बनाने के समझौते पर बातचीत करने का प्रयास कर रहा है। बता दें कि चीन, रूस और ईरान जैसे अमेरिका के विरोधी देश पहले से ही काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद बाइडन प्रशासन की करारी शिकस्त का आनंद ले रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि ये देश तालिबान सरकार को जल्द ही मान्यता भी देंगे।
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दक्षिण 24 परगना : माकपा के ग्राम पंचायत सदस्य का अपहरण कर लेने का आरोप तृणमूल नेताओं पर लगा है। अपहृत ग्राम पंचायत सदस्य का नाम रेणुका नाइया है जो कि माकपा संचालित राधाकांतपुर ग्राम पंचायत की सदस्य है। मिली जानकारी के अनुसार रेणुका ग्राम पंचायत की सदस्य के साथ ही आशा भी कर्मी है। शनिवार की सुबह कुछ लोग घर पर दवा मांगने के बहाने से आये थे और उनमें से ही कुछ महिलाओं ने बंदूक और बम दिखाकर उसका अपहरण कर लिया। उसे एक ऑटो में बैठाकर अभियुक्त अपने साथ ले गए। इस घटना से बाद से इलाके में उत्तेजना बरकरार है। घटना के विरोध में माकपा समर्थक व कर्मियों ने जयनाल कृष्णचंद्रपुर रोड जामकर विरोध-प्रदर्शन किया। इससे इलाके में जाम की समस्या हो गई। राधाकांतापुर ग्राम पंचायत में 14 सदस्य हैं जिसमें से माकपा के 9 सदस्य , एसयूसीआई के 2 सदस्य, और तृणमूल के 3 सदस्य हैं। यह ग्राम पंचायत ही जिले में माकपा के हाथ में है। माकपा के पूर्व मंत्री कांति गांगुली ने अपहरण का आरोप तृणमूल नेताओं पर लगाया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेता ग्राम पंचायत को दखल करने के उद्देश्य से माकपा सदस्य का अपहरण कर ले गये हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पंचायत के उप प्रधान सहित चार माकपा समर्थकों का अपहरण कर लिये जाने कि घटना घटी थी। वहीं तृणमूल नेताओं ने अपहरण के आरोपों को निराधार बताया है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि माकपा झूठी अफवाह फैला कर प्रचार में आने के लिए कहानी रच रही है। सुंदरवन पुलिस के एसपी भास्कर मुखर्जी ने बताया कि घटना को लेकर थाने में शिकायत दर्ज होने पर जांच की जाएगी।
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दक्षिण चौबीस परगना : माकपा के ग्राम पंचायत सदस्य का अपहरण कर लेने का आरोप तृणमूल नेताओं पर लगा है। अपहृत ग्राम पंचायत सदस्य का नाम रेणुका नाइया है जो कि माकपा संचालित राधाकांतपुर ग्राम पंचायत की सदस्य है। मिली जानकारी के अनुसार रेणुका ग्राम पंचायत की सदस्य के साथ ही आशा भी कर्मी है। शनिवार की सुबह कुछ लोग घर पर दवा मांगने के बहाने से आये थे और उनमें से ही कुछ महिलाओं ने बंदूक और बम दिखाकर उसका अपहरण कर लिया। उसे एक ऑटो में बैठाकर अभियुक्त अपने साथ ले गए। इस घटना से बाद से इलाके में उत्तेजना बरकरार है। घटना के विरोध में माकपा समर्थक व कर्मियों ने जयनाल कृष्णचंद्रपुर रोड जामकर विरोध-प्रदर्शन किया। इससे इलाके में जाम की समस्या हो गई। राधाकांतापुर ग्राम पंचायत में चौदह सदस्य हैं जिसमें से माकपा के नौ सदस्य , एसयूसीआई के दो सदस्य, और तृणमूल के तीन सदस्य हैं। यह ग्राम पंचायत ही जिले में माकपा के हाथ में है। माकपा के पूर्व मंत्री कांति गांगुली ने अपहरण का आरोप तृणमूल नेताओं पर लगाया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल नेता ग्राम पंचायत को दखल करने के उद्देश्य से माकपा सदस्य का अपहरण कर ले गये हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पंचायत के उप प्रधान सहित चार माकपा समर्थकों का अपहरण कर लिये जाने कि घटना घटी थी। वहीं तृणमूल नेताओं ने अपहरण के आरोपों को निराधार बताया है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि माकपा झूठी अफवाह फैला कर प्रचार में आने के लिए कहानी रच रही है। सुंदरवन पुलिस के एसपी भास्कर मुखर्जी ने बताया कि घटना को लेकर थाने में शिकायत दर्ज होने पर जांच की जाएगी।
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फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर साथ ही कुम्भ राशि में पंचग्रही योग के कारण बहुत ही शुभ माना जा रहा है।
भारत कई शहर में सूर्यग्रहण का नजारा नजर आएगा। यह खग्रास सूर्यग्रहण सुबह 5 बजकर 42 मिनट लेकर 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
ग्रहण के समय न तो किसी भगवान की मूर्ति को छूना चाहिए, साथ ही सोना, भोजन करना और बनना आदि को त्याग देना चाहिए।
जब ग्रहण शुरू हो उससे पहले भोजन ग्रहण कर ले साथ ही दूध, दही और खाने के चीजों में दूर्वा या फिर तुलसी के पत्तों को डाल दें। जिससे इन वस्तुओं को ग्रहण का असर न पड़े। जब ग्रहण समाप्त हो जाए तो घर की शुद्धि के साथ-साथ स्वयं स्नान करें और जरुरतमंदों को दान-दक्षिणा देना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि जब ग्रहण हो तो उस समय भजन-कीर्तन, गुरु मंत्र का जाप, पूजा-पाठ आदि करना चाहिए। जिससे आध्यात्म बल मिले। साथ ही ग्रहण का असर कम हो।
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फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर साथ ही कुम्भ राशि में पंचग्रही योग के कारण बहुत ही शुभ माना जा रहा है। भारत कई शहर में सूर्यग्रहण का नजारा नजर आएगा। यह खग्रास सूर्यग्रहण सुबह पाँच बजकर बयालीस मिनट लेकर छः बजकर अड़तालीस मिनट तक रहेगा। ग्रहण के समय न तो किसी भगवान की मूर्ति को छूना चाहिए, साथ ही सोना, भोजन करना और बनना आदि को त्याग देना चाहिए। जब ग्रहण शुरू हो उससे पहले भोजन ग्रहण कर ले साथ ही दूध, दही और खाने के चीजों में दूर्वा या फिर तुलसी के पत्तों को डाल दें। जिससे इन वस्तुओं को ग्रहण का असर न पड़े। जब ग्रहण समाप्त हो जाए तो घर की शुद्धि के साथ-साथ स्वयं स्नान करें और जरुरतमंदों को दान-दक्षिणा देना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि जब ग्रहण हो तो उस समय भजन-कीर्तन, गुरु मंत्र का जाप, पूजा-पाठ आदि करना चाहिए। जिससे आध्यात्म बल मिले। साथ ही ग्रहण का असर कम हो।
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मुद्रा का वर्गीकरण -
( आकार के यदि अनेक टुकड़े कर दिये जाये, तब इनका मूल्य एव-सा होना चाहिये । इसी तरह यदि हम इन टुकड़ों को गलावर मिला दे, तब इस ठोस वस्तु मे भी एकरुपता होनी चाहिये तथा इसका मूल्य भी टुकड़ों के सम्मिलित मूल्य के बरावर होना चाहिये । द्रव्य-पदार्थ से एकरूपता होने पर हो यह सम्भव हो सकेगा कि मुद्रा की सभी इकाइयां सभी प्रकार से एक समान हो सकेगी और तय मुद्रा की किसी इवाई को लेनेदेने से किसी भी प्रकार की लाभ-हानि नहीं हो सकेगी। पशु, लोहा व गेहूं आदि वस्तुओ में एकरूपता का गुण नही पाया जाता है जिससे ये अच्छे द्रव्य-पदार्थ नहीं है । परन्तु सोने-चादी के टुकड़ो में एकरूपता का गुण पाया जाता है । (ए) प्रविनाशिता या टिकाऊपन (Indestructibility or Durability) :- मुद्रा-वस्तु टिकाऊ होनी चाहिये । यदि मुद्रा नाशवान (Perishable) वस्तु की बनाई जायेगी, तब ऐसी मुद्रा अघं का संचय ( Store of Value) का कार्य नहीं कर सकेगी क्योंकि नाशवान वस्तु कtart मुद्रा का शीघ्र ही मूल्य नष्ट हो जाता है। अतः मुद्रा द्वारा क्रयशक्ति (Purchasing Power) के समय का वायं तभी सफलतापूर्वक किया जा सकेगा जबकि मुद्रा में टिकाऊपन होता है । पशु, दूध आदि वस्तुए इस दृष्टिघोण से मुद्रा वस्तु के रूप में अनुपयुक्त है । सोने-चांदी मे ग्रविनाशिता का गुण होने से इनके बने faset मे Tens ) भी शोध नहीं होने पाती जिससे ये धातुएं अच्छे द्रव्य-पदार्थ हैं । (vi) ( परिचयता या सुजेयता (Cognisibility ) :- द्रव्य-पदार्थ ऐसा होना चाहिये जिसके बने ) सिक्के आसानी से बिना किसी विशेष प्रयत्न के पहचाने जा सकें तथा जिसके बने सिक्को में घोलेवाजी की भी बहुत कम सम्भावना होती है। सोने-चादी के सिक्को में सुज्ञेयता अथवा परिचयशीलता था गुण भी पाया जाता है। आज क तथा पत्र- मुद्रा का निर्माण करते समय परिचयता के गुरण को बनाये रखने का विशेष प्रयत्न किया जाता है । (iii) तरलता या ढलाऊपन या शोघ्रद्रवता या शोघ्रघनता (Malleability ) :- द्रव्य वस्तु ऐसो होनी चाहिये कि इसे आसानी से गला कर विभी भी रूप व प्राधार तथा वजन के सिक्के बाते जा सके और सिक्कों पर किसी भी प्रकार कर अक्षर अथवा चिन्ह सुगमता से बनाया जा सके और विशेषता यह भी हो कि ऐसा करने पर वस्तु के मूल्य में किसी भी प्रकार की पमी नहीं होने पाये। इसलिये द्रव्य पदार्थ न तो बहुत मुलायम और न बहुत बड़ा हो होना चाहिये । होरा व नाच इस दृष्टिकोण से मच्छे द्रव्य पदार्थ नहीं है क्योंकि इनमे मुडकीनापन (Brinle) होता है और इनके समान रूप के सिक्के नही दल सकते । (viii) मूल्य को स्थिरता (Siability of Value) :- द्रव्य पदार्थ मे मूल्य की स्थिरता भी रहनी चाहिये । इसका कारण स्पष्ट हूँ । द्रव्य मूल्य के मापक, स्थगित भुगतानो वा भाधार तथा प्रभं के संचयना मुख्यत. पार्य करता है। यदि द्रव्यमा मूल्य स्वयं शीघ्रता से घटता बढ़ता रहता है, तब यह उहायक नही पर मर्केगा। यदि किसी ऋण के भुगतान से पूर्व हो द्रव्य के मूल्य में परिवर्तन हो जाता है, तब ऋण लेने या देने वाले में से किसी एक को हानि वश्य उठानी पड़ेगी। द्रव्य-पदार्थ के मुत्य मे घटस्ट होने का एक प्रभाव
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मुद्रा का वर्गीकरण - प्रविनाशिता या टिकाऊपन :- मुद्रा-वस्तु टिकाऊ होनी चाहिये । यदि मुद्रा नाशवान वस्तु की बनाई जायेगी, तब ऐसी मुद्रा अघं का संचय का कार्य नहीं कर सकेगी क्योंकि नाशवान वस्तु कtart मुद्रा का शीघ्र ही मूल्य नष्ट हो जाता है। अतः मुद्रा द्वारा क्रयशक्ति के समय का वायं तभी सफलतापूर्वक किया जा सकेगा जबकि मुद्रा में टिकाऊपन होता है । पशु, दूध आदि वस्तुए इस दृष्टिघोण से मुद्रा वस्तु के रूप में अनुपयुक्त है । सोने-चांदी मे ग्रविनाशिता का गुण होने से इनके बने faset मे Tens ) भी शोध नहीं होने पाती जिससे ये धातुएं अच्छे द्रव्य-पदार्थ हैं । :- द्रव्य-पदार्थ ऐसा होना चाहिये जिसके बने ) सिक्के आसानी से बिना किसी विशेष प्रयत्न के पहचाने जा सकें तथा जिसके बने सिक्को में घोलेवाजी की भी बहुत कम सम्भावना होती है। सोने-चादी के सिक्को में सुज्ञेयता अथवा परिचयशीलता था गुण भी पाया जाता है। आज क तथा पत्र- मुद्रा का निर्माण करते समय परिचयता के गुरण को बनाये रखने का विशेष प्रयत्न किया जाता है । तरलता या ढलाऊपन या शोघ्रद्रवता या शोघ्रघनता :- द्रव्य वस्तु ऐसो होनी चाहिये कि इसे आसानी से गला कर विभी भी रूप व प्राधार तथा वजन के सिक्के बाते जा सके और सिक्कों पर किसी भी प्रकार कर अक्षर अथवा चिन्ह सुगमता से बनाया जा सके और विशेषता यह भी हो कि ऐसा करने पर वस्तु के मूल्य में किसी भी प्रकार की पमी नहीं होने पाये। इसलिये द्रव्य पदार्थ न तो बहुत मुलायम और न बहुत बड़ा हो होना चाहिये । होरा व नाच इस दृष्टिकोण से मच्छे द्रव्य पदार्थ नहीं है क्योंकि इनमे मुडकीनापन होता है और इनके समान रूप के सिक्के नही दल सकते । मूल्य को स्थिरता :- द्रव्य पदार्थ मे मूल्य की स्थिरता भी रहनी चाहिये । इसका कारण स्पष्ट हूँ । द्रव्य मूल्य के मापक, स्थगित भुगतानो वा भाधार तथा प्रभं के संचयना मुख्यत. पार्य करता है। यदि द्रव्यमा मूल्य स्वयं शीघ्रता से घटता बढ़ता रहता है, तब यह उहायक नही पर मर्केगा। यदि किसी ऋण के भुगतान से पूर्व हो द्रव्य के मूल्य में परिवर्तन हो जाता है, तब ऋण लेने या देने वाले में से किसी एक को हानि वश्य उठानी पड़ेगी। द्रव्य-पदार्थ के मुत्य मे घटस्ट होने का एक प्रभाव
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Weight Loss Without Exercise: परफेक्ट फिगर तो हर कोई पाना चाहता है, लेकिन एक्सरसाइज करना बहुत ही मुश्किल लगता है। बहुत से लोग ऐसे हैं, जो बैली फैट से परेशान हैं, लेकिन उन्हें एक्सरसाइज करने में भी आसल आता है। बढ़ा हुआ पेट आपकी पर्सनैलिटी को खराब कर सकता है। कई बार इससे परेशान होकर लोग जोश में आकर बिना तैयारी के एक्सरसाइज करने लगते हैं औऱ रोजाना इसे फॉलो ना करने की वजह से फिर शरीर में तेज दर्द की शिकायत हो जाती है।
एक्सरसाइज को अपने डेली रूटीन में शामिल करना सभी के लिए आसान बात नहीं है। आपके इसी आलस की वजह से आपका फैट और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में कम उम्र में ही तोंद बाहर आ जाए, तो दोस्त भी मजाक उड़ाने लगते हैं।
अपनी फेवरेट ड्रेस तक में फिट होना मुश्किल हो जाता है। आपको भी अपने बैली फैट को कम करना है और एक्सरसाइज करने से डर लगता है, तो आपके अपने रूटिन में 5 चीजों को आज ही शामिल करना चाहिए।
ज्यादातर लोगों को एक्सरसाइज करने में आलस आता है। क्योंकि इसके लिए शरीर को काफी फ्लेक्सिबल बनाना पड़ता है। ऐसे में आपको वॉकिंग वर्कआउट करना चाहिए। इसे करना बहुत ही आसान होता है। इससे भी आप अपना एक्सट्रा फैट बर्न कर सकते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च कहती है कि रोजाना केवल 30 मिनट वॉक करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है। मेटाबॉलिज्म रेट अच्छा होने से वजन को तेजी के साथ कम करने में मदद मिलती है।
बचपन में रस्सी तो जरूर कूदी होगी। अगर आपको वर्कआउट और एक्सरसाइज करना बोझ लगता है, तो आपको कुछ नहीं करना है। केवल रोजाना रस्सी कूदनी है। रोजाना केवल 10 मिनट भी रस्सी कूदने से आप काफी कैलोरिज बर्न कर सकेंगी। इससे आपको आपके बढ़े हुए पेट से बहुत जल्दी राहत मिल सकेगी। आप बहुत जल्द फैट टू फिट हो जाएंगी।
आप ये सोच रहे हैं कि आखिर गाना सुनते हुए दौड़ने से क्या मतलब है, तो आपको बता दें कि ये बहुत ही फायदेमंद है। ये साइंटिफिक फैक्ट है कि गाना आपको मोटिवेट करता है और आप और ज्यादा दौड़ लगाते हैं। ऐसे में आप घर पर रहकर ही सूडो रनिंग कर सकती हैं। इसके अलावा आप गाने सुनते हुए ट्रेडमिल, सड़क या पार्क में दौड़ लगा सकते हैं। दौड़ शुरु करने से पहले कोई भी ऐसा गाना लगाएं, जो आपको बहुत ही पसंद हो और उसे सुनकर आपका कॉन्फिडेंस बढ़ जाता हो।
बैली फैट को तेजी से कम करने के लिए प्लैंक बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है। ये एक साथ आपकी बॉडी की कई मसल्स को टारगेट करता है। प्लैंक का पूरा वर्कआउट रूटीन आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है।
आपको सुनकर ये किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन ये सच है। अगर आप किसी तरह की एक्सरसाइज करना पसंद नहीं करते हैं, तो आपको खडे रहना चाहिए। रोजाना केवल 1 घंटे अपने मन को शांत करके खड़े रहें। रोजाना एक घंटा खड़े रहने की आदत से भी आप वेट लॉस कर सकते हैं। इससे आपकी बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। बहुत ज्यादा बैठे रहने से भी वजन बढ़ने लगता है।
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Weight Loss Without Exercise: परफेक्ट फिगर तो हर कोई पाना चाहता है, लेकिन एक्सरसाइज करना बहुत ही मुश्किल लगता है। बहुत से लोग ऐसे हैं, जो बैली फैट से परेशान हैं, लेकिन उन्हें एक्सरसाइज करने में भी आसल आता है। बढ़ा हुआ पेट आपकी पर्सनैलिटी को खराब कर सकता है। कई बार इससे परेशान होकर लोग जोश में आकर बिना तैयारी के एक्सरसाइज करने लगते हैं औऱ रोजाना इसे फॉलो ना करने की वजह से फिर शरीर में तेज दर्द की शिकायत हो जाती है। एक्सरसाइज को अपने डेली रूटीन में शामिल करना सभी के लिए आसान बात नहीं है। आपके इसी आलस की वजह से आपका फैट और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में कम उम्र में ही तोंद बाहर आ जाए, तो दोस्त भी मजाक उड़ाने लगते हैं। अपनी फेवरेट ड्रेस तक में फिट होना मुश्किल हो जाता है। आपको भी अपने बैली फैट को कम करना है और एक्सरसाइज करने से डर लगता है, तो आपके अपने रूटिन में पाँच चीजों को आज ही शामिल करना चाहिए। ज्यादातर लोगों को एक्सरसाइज करने में आलस आता है। क्योंकि इसके लिए शरीर को काफी फ्लेक्सिबल बनाना पड़ता है। ऐसे में आपको वॉकिंग वर्कआउट करना चाहिए। इसे करना बहुत ही आसान होता है। इससे भी आप अपना एक्सट्रा फैट बर्न कर सकते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च कहती है कि रोजाना केवल तीस मिनट वॉक करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है। मेटाबॉलिज्म रेट अच्छा होने से वजन को तेजी के साथ कम करने में मदद मिलती है। बचपन में रस्सी तो जरूर कूदी होगी। अगर आपको वर्कआउट और एक्सरसाइज करना बोझ लगता है, तो आपको कुछ नहीं करना है। केवल रोजाना रस्सी कूदनी है। रोजाना केवल दस मिनट भी रस्सी कूदने से आप काफी कैलोरिज बर्न कर सकेंगी। इससे आपको आपके बढ़े हुए पेट से बहुत जल्दी राहत मिल सकेगी। आप बहुत जल्द फैट टू फिट हो जाएंगी। आप ये सोच रहे हैं कि आखिर गाना सुनते हुए दौड़ने से क्या मतलब है, तो आपको बता दें कि ये बहुत ही फायदेमंद है। ये साइंटिफिक फैक्ट है कि गाना आपको मोटिवेट करता है और आप और ज्यादा दौड़ लगाते हैं। ऐसे में आप घर पर रहकर ही सूडो रनिंग कर सकती हैं। इसके अलावा आप गाने सुनते हुए ट्रेडमिल, सड़क या पार्क में दौड़ लगा सकते हैं। दौड़ शुरु करने से पहले कोई भी ऐसा गाना लगाएं, जो आपको बहुत ही पसंद हो और उसे सुनकर आपका कॉन्फिडेंस बढ़ जाता हो। बैली फैट को तेजी से कम करने के लिए प्लैंक बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है। ये एक साथ आपकी बॉडी की कई मसल्स को टारगेट करता है। प्लैंक का पूरा वर्कआउट रूटीन आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। आपको सुनकर ये किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन ये सच है। अगर आप किसी तरह की एक्सरसाइज करना पसंद नहीं करते हैं, तो आपको खडे रहना चाहिए। रोजाना केवल एक घंटाटे अपने मन को शांत करके खड़े रहें। रोजाना एक घंटा खड़े रहने की आदत से भी आप वेट लॉस कर सकते हैं। इससे आपकी बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। बहुत ज्यादा बैठे रहने से भी वजन बढ़ने लगता है।
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नई दिल्लीः सलमान खान की फिल्म 'ट्यूबलाइट' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कम प्रदर्शन कर रही है। फिल्म की रिलीज को 5 दिन हो गए हैं लेकिन अब तक फिल्म 100 करोड़ का भी आंकड़ा नहीं पार कर पाई है। सलमान खान की फिल्में 3 दिन में आसानी से 100 करोड़ की कमाई कर लेती हैं, लेकिन इस बार किस्मत ने सलमान का साथ नहीं दिया, फिल्म की कमाई की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।
ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करके 5वें दिन की कमाई बताई है। फिल्म ने पांचवे दिन 12 करोड़ का बिजनेस किया है। अब तक फिल्म ने कुल 95. 86 करोड़ की कमाई कर ली है।
ट्यूबलाइट ने पहले दिन 21 करोड़ 15 लाख का बिजनेस किया था। दूसरे दिन फिल्म ने 21 करोड़ 17 लाख का कारोबार किया। तीसरे दिन रविवार को फिल्म ने 22. 45 करोड़ का कारोबार किया, वहीं ईद वाले दिन सलमान की फिल्म ने 19 करोड़ 9 लाख का बिजनेस किया था।
यानी सलमान की फिल्म ने एक भी दिन 30 करोड़ का आंकड़ा पार नहीं किया, ये अपने आप में बेहद चौंकाने वाला है।
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नई दिल्लीः सलमान खान की फिल्म 'ट्यूबलाइट' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कम प्रदर्शन कर रही है। फिल्म की रिलीज को पाँच दिन हो गए हैं लेकिन अब तक फिल्म एक सौ करोड़ का भी आंकड़ा नहीं पार कर पाई है। सलमान खान की फिल्में तीन दिन में आसानी से एक सौ करोड़ की कमाई कर लेती हैं, लेकिन इस बार किस्मत ने सलमान का साथ नहीं दिया, फिल्म की कमाई की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करके पाँचवें दिन की कमाई बताई है। फिल्म ने पांचवे दिन बारह करोड़ का बिजनेस किया है। अब तक फिल्म ने कुल पचानवे. छियासी करोड़ की कमाई कर ली है। ट्यूबलाइट ने पहले दिन इक्कीस करोड़ पंद्रह लाख का बिजनेस किया था। दूसरे दिन फिल्म ने इक्कीस करोड़ सत्रह लाख का कारोबार किया। तीसरे दिन रविवार को फिल्म ने बाईस. पैंतालीस करोड़ का कारोबार किया, वहीं ईद वाले दिन सलमान की फिल्म ने उन्नीस करोड़ नौ लाख का बिजनेस किया था। यानी सलमान की फिल्म ने एक भी दिन तीस करोड़ का आंकड़ा पार नहीं किया, ये अपने आप में बेहद चौंकाने वाला है।
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लोक सभा सामान्य निर्वाचन-2019 के प्रथम चरण में निर्वाचन के लिए अब तक कुल 146 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। इसमें 123 नामांकन आज दाखिल किए गए। इनमें सहारनपुर में 16, कैराना में 10, मुजफ्फरनगर में 20, बिजनौर में 15, मेरठ में 13, बागपत में 12, गाजियाबाद में 20 व गौतमबुद्धनगर में 17 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल. वेंकटेश्वर लू ने जानकारी देते हुए बताया कि दूसरे चरण में कुल 43 नामांकन दाखिल हुए। इसमें आज कुल 40 नामांकन दाखिल किए गए। आज हुए नामांकन में नगीना (बिजनौर) से 4, अमरोहा (अमरोहा) से 3, बुलन्दशहर (बुलन्दशहर) से 5, अलीगढ़ (अलीगढ़) से 6, हाथरस (हाथरस) से 5, मथुरा (मथुरा) से 6, आगरा सुरक्षित (आगरा) से 4 तथा फतेहपुर सीकरी (आगरा) से 7 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है।
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लोक सभा सामान्य निर्वाचन-दो हज़ार उन्नीस के प्रथम चरण में निर्वाचन के लिए अब तक कुल एक सौ छियालीस प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। इसमें एक सौ तेईस नामांकन आज दाखिल किए गए। इनमें सहारनपुर में सोलह, कैराना में दस, मुजफ्फरनगर में बीस, बिजनौर में पंद्रह, मेरठ में तेरह, बागपत में बारह, गाजियाबाद में बीस व गौतमबुद्धनगर में सत्रह प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल. वेंकटेश्वर लू ने जानकारी देते हुए बताया कि दूसरे चरण में कुल तैंतालीस नामांकन दाखिल हुए। इसमें आज कुल चालीस नामांकन दाखिल किए गए। आज हुए नामांकन में नगीना से चार, अमरोहा से तीन, बुलन्दशहर से पाँच, अलीगढ़ से छः, हाथरस से पाँच, मथुरा से छः, आगरा सुरक्षित से चार तथा फतेहपुर सीकरी से सात प्रत्याशियों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पांपोर सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों ने दो आतंकी को मार गिराया गया है। जबकि एक आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं, गोली लगने से घायल हुए एक नागरिक की मौत हो गई है, जबकि एक घायल का इलाज चल रहा है। घटनास्थल से गोला-बारूद बरामद किया गया है। इसी के साथ इलाके की छानबीन की जा रही है।
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दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पांपोर सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों ने दो आतंकी को मार गिराया गया है। जबकि एक आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं, गोली लगने से घायल हुए एक नागरिक की मौत हो गई है, जबकि एक घायल का इलाज चल रहा है। घटनास्थल से गोला-बारूद बरामद किया गया है। इसी के साथ इलाके की छानबीन की जा रही है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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संस्कार बराबर हमारे आत्मपटल पर अंकित होते जा रहे हैं। हमारी आत्मा उन सब की संगृहीत संहिता है। हमारे पिछले कितने जन्मों के कर्म-संस्कार के बीज हमारी आत्मा में एकत्र हैं - यह नहीं बतलाया जा सकता । सैकड़ों जन्मों का हो सकता है और हजारों जन्मों का भी हो सकता है।
क्या कर रहे हैं आप ? कल भी वही किया । आज भी वही किया । कल भी वही करियेगा । वही क्रोध, वही झगड़ा, वही लोभ, वही मोह, वही सब-का-सब वही । इसीलिए तो जीवन में इतनी ऊब है । होगी ही ऊब । क्योंकि आपके जीवन में कुछ नया होता ही नहीं कि अपने जीवन के इतिहास के पृष्ठों को पलटें। अपने जीवन में झाँक कर देखें । क्या किया है आपने ? अपने जीवन में नया कुछ भी नहीं किया है। एक ही बात को दुहराते हैं आप बार-बार । पुनरुक्त होता गया है आपका जीवन पुनरुक्त दोष से भरे हैं आप और आप के सारे कर्म । इसी को भारतीय मनीषियों ने 'आवागमन' कहा है। पिछले जन्म में वही, इस जन्म में वही और अगले जन्म में भी वही । भूत, भविष्य, वर्तमान - तीनों काल में वही सब कुछ । कुछ भी नया नहीं । वही कामवासना, वही क्रोध-घृणा, वही प्रेम, वही मित्रता, वही शत्रुता, वही धन कमाना, शादी करना, बाल-बच्चे पैदा करना, वही नौकरी, वही मकान बनाना, वही दम्भ, अहंकार और फिर सब कुछ वही करके संसार से एक दिन चल देना। बच्चों को ताश का महल बनाते हुए देखा होगा आपने। बच्चे काफी मनोयोग से बनाते हैं उसे । लेकिन हवा का झोंका लगा कि वह गिरा । गिरने के बाद बच्चे फिर उसी लगन से और उसी मनोयोग से बनाने लग जाते हैं, ताश का महल । उसी प्रकार नया जन्म लेकर आप भी सब कुछ वही करने लग जाते हैं, जिन्हें आपने पिछले जन्म में किया था । इसी को कहते हैं - 'संसार' । संसार का अर्थ है 'चक्र' यानि पहिया, जो एक ही धूरी पर बराबर घूमता रहता है ।
आप सोचते हैं कि बुरे कर्म अच्छे कर्म से नष्ट हो जाते हैं। पाप नष्ट हो जाते हैं पुण्य से । आपका यह सोचना भारी भ्रम है। भारी गलती है । बुरा कर्म और उसका फल अपने स्थान पर है और अच्छा कर्म और उसका फल अपने स्थान पर है। पाप और पुण्य भी अपने-अपने स्थान पर हैं । किसी से किसी का मतलब नहीं । बुरे कर्मों को अच्छे कर्मों से तथा पाप को पुण्य से कभी भी नष्ट नहीं किया जा सकता । बुरे कर्म बने रहेंगे, अच्छे कर्म और एकत्र हो जायेंगे। बस इतना ही होगा। पाप बना रहेगा। पुण्य अवश्य बढ़ जायेंगे ।
कर्म से कर्म नहीं कटता । वह कटता है अकर्म से । कर्म से कर्म और भी
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संस्कार बराबर हमारे आत्मपटल पर अंकित होते जा रहे हैं। हमारी आत्मा उन सब की संगृहीत संहिता है। हमारे पिछले कितने जन्मों के कर्म-संस्कार के बीज हमारी आत्मा में एकत्र हैं - यह नहीं बतलाया जा सकता । सैकड़ों जन्मों का हो सकता है और हजारों जन्मों का भी हो सकता है। क्या कर रहे हैं आप ? कल भी वही किया । आज भी वही किया । कल भी वही करियेगा । वही क्रोध, वही झगड़ा, वही लोभ, वही मोह, वही सब-का-सब वही । इसीलिए तो जीवन में इतनी ऊब है । होगी ही ऊब । क्योंकि आपके जीवन में कुछ नया होता ही नहीं कि अपने जीवन के इतिहास के पृष्ठों को पलटें। अपने जीवन में झाँक कर देखें । क्या किया है आपने ? अपने जीवन में नया कुछ भी नहीं किया है। एक ही बात को दुहराते हैं आप बार-बार । पुनरुक्त होता गया है आपका जीवन पुनरुक्त दोष से भरे हैं आप और आप के सारे कर्म । इसी को भारतीय मनीषियों ने 'आवागमन' कहा है। पिछले जन्म में वही, इस जन्म में वही और अगले जन्म में भी वही । भूत, भविष्य, वर्तमान - तीनों काल में वही सब कुछ । कुछ भी नया नहीं । वही कामवासना, वही क्रोध-घृणा, वही प्रेम, वही मित्रता, वही शत्रुता, वही धन कमाना, शादी करना, बाल-बच्चे पैदा करना, वही नौकरी, वही मकान बनाना, वही दम्भ, अहंकार और फिर सब कुछ वही करके संसार से एक दिन चल देना। बच्चों को ताश का महल बनाते हुए देखा होगा आपने। बच्चे काफी मनोयोग से बनाते हैं उसे । लेकिन हवा का झोंका लगा कि वह गिरा । गिरने के बाद बच्चे फिर उसी लगन से और उसी मनोयोग से बनाने लग जाते हैं, ताश का महल । उसी प्रकार नया जन्म लेकर आप भी सब कुछ वही करने लग जाते हैं, जिन्हें आपने पिछले जन्म में किया था । इसी को कहते हैं - 'संसार' । संसार का अर्थ है 'चक्र' यानि पहिया, जो एक ही धूरी पर बराबर घूमता रहता है । आप सोचते हैं कि बुरे कर्म अच्छे कर्म से नष्ट हो जाते हैं। पाप नष्ट हो जाते हैं पुण्य से । आपका यह सोचना भारी भ्रम है। भारी गलती है । बुरा कर्म और उसका फल अपने स्थान पर है और अच्छा कर्म और उसका फल अपने स्थान पर है। पाप और पुण्य भी अपने-अपने स्थान पर हैं । किसी से किसी का मतलब नहीं । बुरे कर्मों को अच्छे कर्मों से तथा पाप को पुण्य से कभी भी नष्ट नहीं किया जा सकता । बुरे कर्म बने रहेंगे, अच्छे कर्म और एकत्र हो जायेंगे। बस इतना ही होगा। पाप बना रहेगा। पुण्य अवश्य बढ़ जायेंगे । कर्म से कर्म नहीं कटता । वह कटता है अकर्म से । कर्म से कर्म और भी
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सिरोही जिले के मंडार थानाधिकारी अशोक सिंह को 4 लाख रुपए की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है। थानाधिकारी के साथ 1 वकील और 1 दलाल भी पकड़ा गया है। आरोपियों ने पीड़ित से रेप के मामले में मदद करने और मामले को हल्का करने की एवज में 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। इस दौरान सौदा 5 लाख रुपए में तय हुआ था, जिसमें से 1 लाख रुपए मंगलवार को 1 व्यक्ति लेकर चला गया था। रेवदर के पास एक होटल में बुधवार को बाकी 4 लाख रुपए लेते थानाधिकारी समेत 3 लोगों को जालोर और जोधपुर एसीबी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
जालोर एसीबी के ASP महावीर सिंह राणावत ने बताया कि पीड़ित मुकेश प्रजापत ने उनको शिकायत दी थी। उसने शिकायत में बताया कि उसके खिलाफ गुजरात की एक महिला ने मंडार थाने में केस दर्ज कराया था। इस रेप केस में मदद करने और मामले को हल्का करने की एवज में मंडार थाना प्रभारी एसआई अशोक सिंह चारण, एडवोकेट अभिमन्यु सिंह और दलाल अनिल सिंह के जरिए 10 लाख रुपए मांगकर परेशान कर रहे हैं। इस पर एसीबी की टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया। इस दौरान सौदा 5 लाख रुपए में तय हुआ और इसमें से 1 लाख रुपए मंगलवार को ही एक व्यक्ति ले गया, जबकि 4 लाख रुपए बुधवार को देना तय हुआ। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने ट्रैप का प्लान बनाया।
राणावत ने बताया कि प्लान के अनुसार बुधवार सुबह पीड़ित 4 लाख रुपए लेकर आरोपियों को देने गया। इस दौरान उसने एडवोकेट और दलाल को 4 लाख रुपए देकर एसीबी को इशारा कर दिया। इस पर टीम ने दोनों आरोपियों को 4 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार कर लिया। वहीं जोधपुर एसीबी की टीम ने मंडार थाने से अशोक सिंह को हिरासत में ले लिया और सभी को लेकर सिरोही पहुंची, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
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सिरोही जिले के मंडार थानाधिकारी अशोक सिंह को चार लाख रुपए की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है। थानाधिकारी के साथ एक वकील और एक दलाल भी पकड़ा गया है। आरोपियों ने पीड़ित से रेप के मामले में मदद करने और मामले को हल्का करने की एवज में दस लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। इस दौरान सौदा पाँच लाख रुपए में तय हुआ था, जिसमें से एक लाख रुपए मंगलवार को एक व्यक्ति लेकर चला गया था। रेवदर के पास एक होटल में बुधवार को बाकी चार लाख रुपए लेते थानाधिकारी समेत तीन लोगों को जालोर और जोधपुर एसीबी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। जालोर एसीबी के ASP महावीर सिंह राणावत ने बताया कि पीड़ित मुकेश प्रजापत ने उनको शिकायत दी थी। उसने शिकायत में बताया कि उसके खिलाफ गुजरात की एक महिला ने मंडार थाने में केस दर्ज कराया था। इस रेप केस में मदद करने और मामले को हल्का करने की एवज में मंडार थाना प्रभारी एसआई अशोक सिंह चारण, एडवोकेट अभिमन्यु सिंह और दलाल अनिल सिंह के जरिए दस लाख रुपए मांगकर परेशान कर रहे हैं। इस पर एसीबी की टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया। इस दौरान सौदा पाँच लाख रुपए में तय हुआ और इसमें से एक लाख रुपए मंगलवार को ही एक व्यक्ति ले गया, जबकि चार लाख रुपए बुधवार को देना तय हुआ। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने ट्रैप का प्लान बनाया। राणावत ने बताया कि प्लान के अनुसार बुधवार सुबह पीड़ित चार लाख रुपए लेकर आरोपियों को देने गया। इस दौरान उसने एडवोकेट और दलाल को चार लाख रुपए देकर एसीबी को इशारा कर दिया। इस पर टीम ने दोनों आरोपियों को चार लाख रुपए के साथ गिरफ्तार कर लिया। वहीं जोधपुर एसीबी की टीम ने मंडार थाने से अशोक सिंह को हिरासत में ले लिया और सभी को लेकर सिरोही पहुंची, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अभिनेता सलमान खान इंडस्ट्री के चहेते सितारों में शुमार हैं। प्रशंसक सलमान खान पर जान छिड़कते हैं। अभिनय और फिल्मों से अलग सलमान खान सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहते हैं और आए दिन पोस्ट शेयर करते नजर आते हैं। सलमान खान का हालिया पोस्ट वायरल हो रहा है। इसमें वह अपने फैंस से दुआ करने को कहते नजर आ रहे हैं।
सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउट से एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें वह फैंस से दुआ करने की अपील कर रहे हैं। सलमान का कहना है कि कल पता नहीं क्या हो? दुआ करो। अगर, यह सुनकर आप भाईजान को लेकर चिंतित हो उठे हैं तो बता दें कि परेशान होने की जरूरत नहीं है। सबकुछ ठीक है। सलमान खान ने यह पोस्ट आज होने वाले फिल्मफेयर अवॉर्ड को लेकर किया है।
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अभिनेता सलमान खान इंडस्ट्री के चहेते सितारों में शुमार हैं। प्रशंसक सलमान खान पर जान छिड़कते हैं। अभिनय और फिल्मों से अलग सलमान खान सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहते हैं और आए दिन पोस्ट शेयर करते नजर आते हैं। सलमान खान का हालिया पोस्ट वायरल हो रहा है। इसमें वह अपने फैंस से दुआ करने को कहते नजर आ रहे हैं। सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउट से एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें वह फैंस से दुआ करने की अपील कर रहे हैं। सलमान का कहना है कि कल पता नहीं क्या हो? दुआ करो। अगर, यह सुनकर आप भाईजान को लेकर चिंतित हो उठे हैं तो बता दें कि परेशान होने की जरूरत नहीं है। सबकुछ ठीक है। सलमान खान ने यह पोस्ट आज होने वाले फिल्मफेयर अवॉर्ड को लेकर किया है।
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Posted On:
लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) मार्क चतुर्थ श्रेणी केआठवें और अंतिम जहाज इंडियन नेवल लैंडिंग क्राफ्ट युटिलिटी (एलसीयू) एल-58 को दिनांक 18 मार्च, 2021 को पोर्ट ब्लेयर, अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूहमें भारतीय नौसेना में कमीशन प्रदान किया गया । इस कार्यक्रम के लिएकमांडर-इन-चीफ, अंडमान एंड निकोबार कमांड (CINCAN) लेफ्टिनेंट जनरल मनोजपांडे मुख्य अतिथि तथा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) के निदेशक सेवानिवृत नौसेना अधिकारी रीयर एडमिरल विपिन कुमारसक्सेना उपस्थित थे।
कमांडर कृष्ण के यादव ने जहाज के पहले कमांडिंग ऑफिसर के रूपमें कमीशनिंग वारंट पढ़ा । इस जहाज में पांच अधिकारियों और 50 नाविकों कीएक उत्साहित टीम तैनात है । जीआरएसई, कोलकाता द्वारा स्वदेश में डिजाइन औरनिर्मित जहाज की कमीशनिंग ने युद्धपोत डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र मेंदेश के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की उपलब्धि में एक औरअध्याय जोड़ दिया है।
एलसीयू 58 एक उभयचर जहाज है जो अपने चालक दल के अलावा 160 सैनिकों को ले जा सकता है । 900 टन की भारवहन क्षमता के साथ यह जहाजविभिन्न प्रकार के लड़ाकू वाहनों जैसे मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी), बीएमएसपी, बख्तरबंद वाहन और ट्रक आदि ले जाने में सक्षम है । जहाज की लंबाई 63 मीटर है और इसमें दो एमटीए 4000 सीरीज इंजन लगे हैं जो जहाज को 15 नॉट (28 किमी प्रति घंटे) तक की गति से पहुंचाने में सक्षम हैं । इस जहाज मेंदुश्मन के रडार ट्रांसमिशन को भेदने में सक्षम आत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिकसपोर्ट मेज़र लगा है, साथ ही अत्याधुनिक एकीकृत ब्रिज प्रणाली (आईबीएस) औरएक परिष्कृत एकीकृत प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीएमएस) लगा है जो किक्रमशः जहाज के नौवहन व मशीनरी उपकरणों की एकल स्टेशन निगरानी की सुविधाप्रदान करता है । जहाज के मुख्य आयुध में दो स्वदेश निर्मित 30 मिमी सीआरएन 91 गन शामिल हैं जो एक स्थिर ऑप्ट्रॉनिक पेडस्टल (एसओपी) द्वारा नियंत्रितकी जाती हैं- जो कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा निर्मितएक इलेक्ट्रॉनिक डे-नाइट डायरेक्टर साइट है । इसके अतिरिक्त जहाज में हवा, सतह और उप-पारंपरिक खतरों को बेअसर करने के लिए छह मशीनगन पोस्ट भी लगे हैं।
एलसीयू 58 पोर्ट ब्लेयर पर रखा जाएगा तथा इसे अंडमान औरनिकोबार समूह, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में समुद्र तट, खोज और बचाव, आपदा राहत, तटीय गश्ती और निगरानी अभियानों जैसी विभिन्न भूमिकाओं मेंतैनात किया जाएगा।
यह अंडमान निकोबार कमान के आदर्श वाक्य 'विक्ट्री थ्रो जॉइंटनेस/ संयुक्तताके माध्यम से जीत' को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना की गतिशीलता, पहुंच औरलचीलेपन को बढ़ाएगा।
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Posted On: लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी मार्क चतुर्थ श्रेणी केआठवें और अंतिम जहाज इंडियन नेवल लैंडिंग क्राफ्ट युटिलिटी एल-अट्ठावन को दिनांक अट्ठारह मार्च, दो हज़ार इक्कीस को पोर्ट ब्लेयर, अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूहमें भारतीय नौसेना में कमीशन प्रदान किया गया । इस कार्यक्रम के लिएकमांडर-इन-चीफ, अंडमान एंड निकोबार कमांड लेफ्टिनेंट जनरल मनोजपांडे मुख्य अतिथि तथा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड के निदेशक सेवानिवृत नौसेना अधिकारी रीयर एडमिरल विपिन कुमारसक्सेना उपस्थित थे। कमांडर कृष्ण के यादव ने जहाज के पहले कमांडिंग ऑफिसर के रूपमें कमीशनिंग वारंट पढ़ा । इस जहाज में पांच अधिकारियों और पचास नाविकों कीएक उत्साहित टीम तैनात है । जीआरएसई, कोलकाता द्वारा स्वदेश में डिजाइन औरनिर्मित जहाज की कमीशनिंग ने युद्धपोत डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र मेंदेश के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की उपलब्धि में एक औरअध्याय जोड़ दिया है। एलसीयू अट्ठावन एक उभयचर जहाज है जो अपने चालक दल के अलावा एक सौ साठ सैनिकों को ले जा सकता है । नौ सौ टन की भारवहन क्षमता के साथ यह जहाजविभिन्न प्रकार के लड़ाकू वाहनों जैसे मुख्य युद्धक टैंक , बीएमएसपी, बख्तरबंद वाहन और ट्रक आदि ले जाने में सक्षम है । जहाज की लंबाई तिरेसठ मीटर है और इसमें दो एमटीए चार हज़ार सीरीज इंजन लगे हैं जो जहाज को पंद्रह नॉट तक की गति से पहुंचाने में सक्षम हैं । इस जहाज मेंदुश्मन के रडार ट्रांसमिशन को भेदने में सक्षम आत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिकसपोर्ट मेज़र लगा है, साथ ही अत्याधुनिक एकीकृत ब्रिज प्रणाली औरएक परिष्कृत एकीकृत प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम लगा है जो किक्रमशः जहाज के नौवहन व मशीनरी उपकरणों की एकल स्टेशन निगरानी की सुविधाप्रदान करता है । जहाज के मुख्य आयुध में दो स्वदेश निर्मित तीस मिमी सीआरएन इक्यानवे गन शामिल हैं जो एक स्थिर ऑप्ट्रॉनिक पेडस्टल द्वारा नियंत्रितकी जाती हैं- जो कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मितएक इलेक्ट्रॉनिक डे-नाइट डायरेक्टर साइट है । इसके अतिरिक्त जहाज में हवा, सतह और उप-पारंपरिक खतरों को बेअसर करने के लिए छह मशीनगन पोस्ट भी लगे हैं। एलसीयू अट्ठावन पोर्ट ब्लेयर पर रखा जाएगा तथा इसे अंडमान औरनिकोबार समूह, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में समुद्र तट, खोज और बचाव, आपदा राहत, तटीय गश्ती और निगरानी अभियानों जैसी विभिन्न भूमिकाओं मेंतैनात किया जाएगा। यह अंडमान निकोबार कमान के आदर्श वाक्य 'विक्ट्री थ्रो जॉइंटनेस/ संयुक्तताके माध्यम से जीत' को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना की गतिशीलता, पहुंच औरलचीलेपन को बढ़ाएगा।
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यह कहना गलत नहीं होगा कि मेंस्ट्रुअल कप महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लेकिन इसे साफ रखना भी बेहद जरूरी होता है।
इस बात से तो हम सभी वाकिफ हैं कि महिलाओं को हर महीने पीरियड्स होते हैं। लेकिन इन दिनों के दौरान होने वाले दर्द, कपड़ों पर लगने वाले दाग की समस्या सबसे ज्यादा होती है। पहले के समय में महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन धीरे-धीरे समय में बदलाव आया और फिर इजात हुआ पैड। हालांकि, पैड ने महिलाओं की समस्या को काफी हद तक दूर तो किया लेकिन इसके इस्तेमाल से भी कपड़े में खून के दाग लगने का डर हमेशा बना रहता था। इसके अलावा कई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के होने का भी खतरा रहता है।
लेकिन कहते हैं न आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। महिलाओं की इस समस्या को और कम करने के लिएमेंस्ट्रुअल कप का आविष्कार हुआ। यह कप काफी किफायती होते हैं। मेंस्ट्रुअल कप के इस्तेमाल से महिलाएं कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से भी बच सकती हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात मेंस्ट्रुअल कप का सही तरीके से इस्तेमाल करना और कप की अच्छे से सफाई करना। अगर आपमेंस्ट्रुअल कप को सही तरीके से साफ नहीं करती हैं तो इससे यह जल्दी खराब हो सकता है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आज हम आपकोमेंस्ट्रुअल कप को साफ करने से लेकर स्टोर करने तक का तरीका बताएंगे। चलिए जानते हैंमेंस्ट्रुअल कप को साफ करने का तरीका।
मेंस्ट्रुअल कप क्या होता है?
जैसा कि कुछ हद तक इसके नाम से पता चलता है मेंस्ट्रुअल कप रियूजेबल फेमिनिन हाइजीन प्रोडक्ट है। यह कप रबर और सिलिकॉन से बना होता है, जो फनल की शेप का होता है। इसका इस्तेमाल पीरियड्स के दौरान किया जाता है।
- मेंस्ट्रुअल कप पैड और टैम्पोन की तुलना में अधिक ब्लड फ्लो होल्ड करता है।
- मेंस्ट्रुअल कप के इस्तेमाल से आप टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसी खतरनाक बीमारी से बच सकती हैं।
- मेंस्ट्रुअल कप लंबे समय तक चलते हैं। इसका इस्तेमाल आप साफ करने के बाद कई बार कर सकती हैं। मेंस्ट्रुअलकप ईको-फ्रेंडली भी होते हैं।
मेंस्ट्रुअल कप को कैसे स्टोर करें?
- ज्यादातर मेंस्ट्रुअल कप को स्टोर करने के लिए इसके साथ बैग या पाउच दिया जाता है।
- लेकिन अगर आपके पास बैग या पाउच नहीं है, तो आप किसी भी ब्रिदेब्ल बैग का इस्तेमाल मेंस्ट्रुअलकप को स्टोर करने के लिए कर सकती हैं।
- मेंस्ट्रुअल कप वाले पाउच को कोल्ड और ड्राई वाली जगह पर रखें। ताकि यह आपके नेक्स्ट यूज के लिए पहले से ही सूखा हुआ हो।
- आपको हमेशा 6-12 घंटे के बीच में मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करना चाहिए। यह ब्लड फ्लो पर भी निर्भर करता है। हैवी ब्लड फ्लो में आपको जल्दी मेंस्ट्रुअल कप को हटाना चाहिए। (पीरियड्स के दौरान ये हेल्दी फूड्स खाएं)
- मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करने से पहले आपको हमेशा अपने हाथों को अच्छे से धोना चाहिए। क्योंकि हमारे हाथों में बैक्टीरिया होते हैं,यही कारण है कि आपको साफ हाथ से ही मेंस्ट्रुअल कप को हटाना चाहिए। लेकिन अगर आपके पास हाथ धोने के लिए पानी और साबुन नहीं है तो इस स्थिती में आप एंटीबैक्टीरियल वैट वाइप्स से हाथों को साफ कर सकती हैं। नॉन सेंटेड एंटीबैक्टीरियल वैट वाइप्स ही चुनें।
- वजाइनासे कप रिमूव करने के लिए स्क्वीज करें। सक्शन सील को तोड़ने के बाद मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करना आसान होता है। साइड्स को पिंच करने के बाद कप को कप को नीचे की ओर और बाहर खींचे। इस बात का ध्यान रखें कि हर ब्रांड के मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करने का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए आपको मेंस्ट्रुअल कप पर लिखे इंस्ट्रक्शन के अनुसार ही कप को रिमूव करना चाहिए।
- मेंस्ट्रुअल कप से ब्लड को टॉयलेट में फेंके। मेंस्ट्रुअल कप से ब्लड को टॉयलेट में डालकर फ्लश कर दें। अगर आप बाथरूम में है या शावर ले रही हैं तो यह और भी अच्छी बात है। क्योंकि बाथरूम में आप आसानी से कप को खाली कर सकती है, धो सकती हैं और दोबारा इस्तेमाल कर सकती हैं।
हर बार यूज करने के बाद कप को धोना बेहद जरूरी है। भले ही यह सिलीकॉन से बना हो, लेकिन फिर भी आपको इसे टाइम टू टाइम क्लीन करना चाहिए। गंदे मेंस्ट्रुअल कप से आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। गंदे कप के इस्तेमाल से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। (क्या है पीरियड से जुड़ा डिसऑर्डर हाइपोएस्ट्रोजेनिज्म, जानेंं)
मेंस्ट्रुअल कप को बहते पानी के नीचे डालें और फिर अनसेंटेड साबुन को कप पर अच्छे से लगा लें। इसके बाद कप को अच्छे से पानी से धो लें। अंसेटेंड साबुन का ही इस्तेमाल करें क्योंकि फ्रेगरेंस वाले साबुन से आपकी स्किन में इरिटेशन हो सकती है। कई ब्रांड मेंस्ट्रुअल कप को धोने के लिए स्पेशल क्लींजिंग फॉर्मूला भी बेचते हैं।
हर बार यह संभव नहीं होता है कि आप मेंस्ट्रुअल कप धो सकें। ऐसे में आपको अनसेंटेड फेमिनिन वाइप्स का पैकेट अपने पास रखना चाहिए। आप अनसेंटेड फेमिनिन वाइप्स को किसी भी मेडिकल स्टोर से आसानी से खरीद सकती हैं।
अगर आपके पास मेंस्ट्रुअल कप को धोने के लिए न ही पानी है और न ही वाइप्स तो इस स्थिती में आप टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कर सकती हैं। बस मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करें और टॉयलेट पेपर की मदद से अच्छे से पोंछ लें। टॉयलेट पेपर की जगह आप चाहें तो पेपर टॉवल का भी उपयोग कर सकती हैं।
- मेंस्ट्रुअल कप को 2-3 मिनट के लिए गर्म पानी में भिगने के लिए रख दें। इससे कप के अंदर मौजूद सारी गंदगी बाहर निकल जाएगी। इसके बाद मेंस्ट्रुअल कप को स्क्रब करें।
- साफ टूथब्रश की मदद से मेंस्ट्रुअल कप में जमे किसी भी गंदगी को हटा लें। चलते हुए गरम पानी में ही कप को धोएं। इससे आसानी से कप साफ हो जाएगा। मेंस्ट्रुअल कप को साफ करने के लिए आप जिस टूथब्रश का इस्तेमाल करेंगे, उसका इस्तेमाल अन्य चीजों पर न करें। इसके बाद अनसेंटेड सोप से कप को अच्छे से साफ कर लें।
- एक बड़ा बर्तन लें और उसमें पानी को भर दें। इसके बाद उसमें मेंस्ट्रुअल कप डाल दें। पानी ज्यादा होना चाहिए ताकि कप नीचे बर्तन पर न लगे।
- अब पानी को उबलने के लिए गैस पर रख दें। करीब 5-10 मिनट तक मेंस्ट्रुअल कप को गरम पानी में उबाल लें। ज्यादा देर कप को उबालने से यह पिघल सकता है।
- इसके बाद कप को किसी साफ कपड़े या पेपर टॉवल से पोंछ लें।
- लीजिए अब आपका मेंस्ट्रुअल कप एकदम साफ हो चुका है। मेंस्ट्रुअल को किसी बैग या पाउच में रख दें।
तो ये थीमेंस्ट्रुअल कप से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें और कप को साफ करने का तरीका। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा, हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़े रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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यह कहना गलत नहीं होगा कि मेंस्ट्रुअल कप महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लेकिन इसे साफ रखना भी बेहद जरूरी होता है। इस बात से तो हम सभी वाकिफ हैं कि महिलाओं को हर महीने पीरियड्स होते हैं। लेकिन इन दिनों के दौरान होने वाले दर्द, कपड़ों पर लगने वाले दाग की समस्या सबसे ज्यादा होती है। पहले के समय में महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन धीरे-धीरे समय में बदलाव आया और फिर इजात हुआ पैड। हालांकि, पैड ने महिलाओं की समस्या को काफी हद तक दूर तो किया लेकिन इसके इस्तेमाल से भी कपड़े में खून के दाग लगने का डर हमेशा बना रहता था। इसके अलावा कई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के होने का भी खतरा रहता है। लेकिन कहते हैं न आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। महिलाओं की इस समस्या को और कम करने के लिएमेंस्ट्रुअल कप का आविष्कार हुआ। यह कप काफी किफायती होते हैं। मेंस्ट्रुअल कप के इस्तेमाल से महिलाएं कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से भी बच सकती हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात मेंस्ट्रुअल कप का सही तरीके से इस्तेमाल करना और कप की अच्छे से सफाई करना। अगर आपमेंस्ट्रुअल कप को सही तरीके से साफ नहीं करती हैं तो इससे यह जल्दी खराब हो सकता है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आज हम आपकोमेंस्ट्रुअल कप को साफ करने से लेकर स्टोर करने तक का तरीका बताएंगे। चलिए जानते हैंमेंस्ट्रुअल कप को साफ करने का तरीका। मेंस्ट्रुअल कप क्या होता है? जैसा कि कुछ हद तक इसके नाम से पता चलता है मेंस्ट्रुअल कप रियूजेबल फेमिनिन हाइजीन प्रोडक्ट है। यह कप रबर और सिलिकॉन से बना होता है, जो फनल की शेप का होता है। इसका इस्तेमाल पीरियड्स के दौरान किया जाता है। - मेंस्ट्रुअल कप पैड और टैम्पोन की तुलना में अधिक ब्लड फ्लो होल्ड करता है। - मेंस्ट्रुअल कप के इस्तेमाल से आप टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसी खतरनाक बीमारी से बच सकती हैं। - मेंस्ट्रुअल कप लंबे समय तक चलते हैं। इसका इस्तेमाल आप साफ करने के बाद कई बार कर सकती हैं। मेंस्ट्रुअलकप ईको-फ्रेंडली भी होते हैं। मेंस्ट्रुअल कप को कैसे स्टोर करें? - ज्यादातर मेंस्ट्रुअल कप को स्टोर करने के लिए इसके साथ बैग या पाउच दिया जाता है। - लेकिन अगर आपके पास बैग या पाउच नहीं है, तो आप किसी भी ब्रिदेब्ल बैग का इस्तेमाल मेंस्ट्रुअलकप को स्टोर करने के लिए कर सकती हैं। - मेंस्ट्रुअल कप वाले पाउच को कोल्ड और ड्राई वाली जगह पर रखें। ताकि यह आपके नेक्स्ट यूज के लिए पहले से ही सूखा हुआ हो। - आपको हमेशा छः-बारह घंटाटे के बीच में मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करना चाहिए। यह ब्लड फ्लो पर भी निर्भर करता है। हैवी ब्लड फ्लो में आपको जल्दी मेंस्ट्रुअल कप को हटाना चाहिए। - मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करने से पहले आपको हमेशा अपने हाथों को अच्छे से धोना चाहिए। क्योंकि हमारे हाथों में बैक्टीरिया होते हैं,यही कारण है कि आपको साफ हाथ से ही मेंस्ट्रुअल कप को हटाना चाहिए। लेकिन अगर आपके पास हाथ धोने के लिए पानी और साबुन नहीं है तो इस स्थिती में आप एंटीबैक्टीरियल वैट वाइप्स से हाथों को साफ कर सकती हैं। नॉन सेंटेड एंटीबैक्टीरियल वैट वाइप्स ही चुनें। - वजाइनासे कप रिमूव करने के लिए स्क्वीज करें। सक्शन सील को तोड़ने के बाद मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करना आसान होता है। साइड्स को पिंच करने के बाद कप को कप को नीचे की ओर और बाहर खींचे। इस बात का ध्यान रखें कि हर ब्रांड के मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करने का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए आपको मेंस्ट्रुअल कप पर लिखे इंस्ट्रक्शन के अनुसार ही कप को रिमूव करना चाहिए। - मेंस्ट्रुअल कप से ब्लड को टॉयलेट में फेंके। मेंस्ट्रुअल कप से ब्लड को टॉयलेट में डालकर फ्लश कर दें। अगर आप बाथरूम में है या शावर ले रही हैं तो यह और भी अच्छी बात है। क्योंकि बाथरूम में आप आसानी से कप को खाली कर सकती है, धो सकती हैं और दोबारा इस्तेमाल कर सकती हैं। हर बार यूज करने के बाद कप को धोना बेहद जरूरी है। भले ही यह सिलीकॉन से बना हो, लेकिन फिर भी आपको इसे टाइम टू टाइम क्लीन करना चाहिए। गंदे मेंस्ट्रुअल कप से आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। गंदे कप के इस्तेमाल से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। मेंस्ट्रुअल कप को बहते पानी के नीचे डालें और फिर अनसेंटेड साबुन को कप पर अच्छे से लगा लें। इसके बाद कप को अच्छे से पानी से धो लें। अंसेटेंड साबुन का ही इस्तेमाल करें क्योंकि फ्रेगरेंस वाले साबुन से आपकी स्किन में इरिटेशन हो सकती है। कई ब्रांड मेंस्ट्रुअल कप को धोने के लिए स्पेशल क्लींजिंग फॉर्मूला भी बेचते हैं। हर बार यह संभव नहीं होता है कि आप मेंस्ट्रुअल कप धो सकें। ऐसे में आपको अनसेंटेड फेमिनिन वाइप्स का पैकेट अपने पास रखना चाहिए। आप अनसेंटेड फेमिनिन वाइप्स को किसी भी मेडिकल स्टोर से आसानी से खरीद सकती हैं। अगर आपके पास मेंस्ट्रुअल कप को धोने के लिए न ही पानी है और न ही वाइप्स तो इस स्थिती में आप टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कर सकती हैं। बस मेंस्ट्रुअल कप को रिमूव करें और टॉयलेट पेपर की मदद से अच्छे से पोंछ लें। टॉयलेट पेपर की जगह आप चाहें तो पेपर टॉवल का भी उपयोग कर सकती हैं। - मेंस्ट्रुअल कप को दो-तीन मिनट के लिए गर्म पानी में भिगने के लिए रख दें। इससे कप के अंदर मौजूद सारी गंदगी बाहर निकल जाएगी। इसके बाद मेंस्ट्रुअल कप को स्क्रब करें। - साफ टूथब्रश की मदद से मेंस्ट्रुअल कप में जमे किसी भी गंदगी को हटा लें। चलते हुए गरम पानी में ही कप को धोएं। इससे आसानी से कप साफ हो जाएगा। मेंस्ट्रुअल कप को साफ करने के लिए आप जिस टूथब्रश का इस्तेमाल करेंगे, उसका इस्तेमाल अन्य चीजों पर न करें। इसके बाद अनसेंटेड सोप से कप को अच्छे से साफ कर लें। - एक बड़ा बर्तन लें और उसमें पानी को भर दें। इसके बाद उसमें मेंस्ट्रुअल कप डाल दें। पानी ज्यादा होना चाहिए ताकि कप नीचे बर्तन पर न लगे। - अब पानी को उबलने के लिए गैस पर रख दें। करीब पाँच-दस मिनट तक मेंस्ट्रुअल कप को गरम पानी में उबाल लें। ज्यादा देर कप को उबालने से यह पिघल सकता है। - इसके बाद कप को किसी साफ कपड़े या पेपर टॉवल से पोंछ लें। - लीजिए अब आपका मेंस्ट्रुअल कप एकदम साफ हो चुका है। मेंस्ट्रुअल को किसी बैग या पाउच में रख दें। तो ये थीमेंस्ट्रुअल कप से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें और कप को साफ करने का तरीका। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा, हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़े रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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लक्षणः
- इस बीमारी का सबसे पहला लक्षण तो यही है कि सेक्स गतिविधि के बिना भी महिलाएं उत्तेजित रहती हैं।
- महिला चाहती भी नहीं होंगी, लेकिन उसे कामोत्तेजना रहेगी।
- अगर कोई महिला दिन में कई बार सेक्स भी कर लेगी, तो भी आपको कामोत्तेजना रहती है।
- इस बीमारी में एक महिला कई घंटों या कई हफ्तों तक कामोत्तेजना में रहने लगती है।
- डॉक्टर्स के अनुसार, इस तरह की बीमारी महिलाओं में नसों में जलन के कारण हो सकती है। नसों में इतनी जलन होती है कि यह जलन महिलाओं के यौनांगों तक पहुंच जाती है। ऐसे में महिलाओं इस तरह की बीमारी की शिकार हो सकती है।
- इसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि जब महिलाओं की रीढ़ की हड्डी के एकदम निचले भाग में चोट लग जाए, तो भी महिलाओं को ऐसी समस्या हो सकती है।
- इस बीमारी का इलाज संभव है। तंत्रिका को ठीक करके या सिस्ट हटाकर डॉक्टर इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं। बस, आपको एक ऐसे डॉक्टर को ही दिखाना चाहिए जिसे इस बीमारी के बारे में पूरा पता हो। इस बीमारी को पहचानना आसान काम नहीं होता। बहुत-सी महिलाओं को इस तरह की बीमारी होती है, लेकिन वह खुलकर इसका जिक्र नहीं कर पातीं।
- बहुत-सी महिलाओं को यह बीमारी लगती ही नहीं है। उन्हें लगता है कि सिर्फ यह सामान्य उत्तेजना है, और कुछ नहीं। या फिर बहुत सी महिलाओं को इस बीमारी से तकलीफ ज्यादा होने लगती है, तो भी वह शर्म के मारे डॉक्टर के पास नहीं जातीं; जिससे कि उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
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लक्षणः - इस बीमारी का सबसे पहला लक्षण तो यही है कि सेक्स गतिविधि के बिना भी महिलाएं उत्तेजित रहती हैं। - महिला चाहती भी नहीं होंगी, लेकिन उसे कामोत्तेजना रहेगी। - अगर कोई महिला दिन में कई बार सेक्स भी कर लेगी, तो भी आपको कामोत्तेजना रहती है। - इस बीमारी में एक महिला कई घंटों या कई हफ्तों तक कामोत्तेजना में रहने लगती है। - डॉक्टर्स के अनुसार, इस तरह की बीमारी महिलाओं में नसों में जलन के कारण हो सकती है। नसों में इतनी जलन होती है कि यह जलन महिलाओं के यौनांगों तक पहुंच जाती है। ऐसे में महिलाओं इस तरह की बीमारी की शिकार हो सकती है। - इसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि जब महिलाओं की रीढ़ की हड्डी के एकदम निचले भाग में चोट लग जाए, तो भी महिलाओं को ऐसी समस्या हो सकती है। - इस बीमारी का इलाज संभव है। तंत्रिका को ठीक करके या सिस्ट हटाकर डॉक्टर इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं। बस, आपको एक ऐसे डॉक्टर को ही दिखाना चाहिए जिसे इस बीमारी के बारे में पूरा पता हो। इस बीमारी को पहचानना आसान काम नहीं होता। बहुत-सी महिलाओं को इस तरह की बीमारी होती है, लेकिन वह खुलकर इसका जिक्र नहीं कर पातीं। - बहुत-सी महिलाओं को यह बीमारी लगती ही नहीं है। उन्हें लगता है कि सिर्फ यह सामान्य उत्तेजना है, और कुछ नहीं। या फिर बहुत सी महिलाओं को इस बीमारी से तकलीफ ज्यादा होने लगती है, तो भी वह शर्म के मारे डॉक्टर के पास नहीं जातीं; जिससे कि उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
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नई दिल्लीः
इन दिनों सोशल मीडिया बॉलीवुड सितारों के पुरानी फोटो को लेकर ट्रेंड कर रहा है। अब बॉलीवुड के छोटे नवाब सैफ अली खान और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह की शादी की फोटो वायरल हो रही है।
जी हां, लोग फोटो में अमृता सिंह के नथनी यानि नोज रिंग के साइज को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल ये तस्वीर उनके शादी के दौरान हुई फोटोशूट की है, जिसमें सैफ अली खान और अमृता सिंह साथ दिख रहे हैं।
ट्विटर पर किसी ने अमृता के नोज रिंग को अपने जीवन से भी बड़ा बताते हुए लिख रहे हैं, तो कोई अपने फ्रेंड सर्किल से बड़ा बता रहे हैं। कहने का मतलब है कि लोग अमृता के नोज रिंग को किसी भी चीज से तुलना कर उसे मुद्दा बना रहे हैं।
हद तो तब हो गई, जब एक ने ट्वीट कर लिखा कि अमृता की नोज रिंग उनकी रोटी से भी बड़ी है।
लोग ट्विटर पर भले ही अमृता की नोज रिंग को लेकर मजाक बना रहे हों, लेकिन उनकी यह प्यारी तस्वीर तो आपको भी पसन्द आयी होगी। आपको बता दें कि सैफ अली खान और अमृता सिंह 1991 से 2004 तक एक- दूसरे के साथ रहे।
सैफ अली खान ने 2012 में करीना कपूर से शादी कर ली थी। दिलचस्प बात यह है कि सैफ और अमृता की बेटी सारा अली खान जल्द ही बॉलीवुड में एंट्री करने वाली है।
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नई दिल्लीः इन दिनों सोशल मीडिया बॉलीवुड सितारों के पुरानी फोटो को लेकर ट्रेंड कर रहा है। अब बॉलीवुड के छोटे नवाब सैफ अली खान और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह की शादी की फोटो वायरल हो रही है। जी हां, लोग फोटो में अमृता सिंह के नथनी यानि नोज रिंग के साइज को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल ये तस्वीर उनके शादी के दौरान हुई फोटोशूट की है, जिसमें सैफ अली खान और अमृता सिंह साथ दिख रहे हैं। ट्विटर पर किसी ने अमृता के नोज रिंग को अपने जीवन से भी बड़ा बताते हुए लिख रहे हैं, तो कोई अपने फ्रेंड सर्किल से बड़ा बता रहे हैं। कहने का मतलब है कि लोग अमृता के नोज रिंग को किसी भी चीज से तुलना कर उसे मुद्दा बना रहे हैं। हद तो तब हो गई, जब एक ने ट्वीट कर लिखा कि अमृता की नोज रिंग उनकी रोटी से भी बड़ी है। लोग ट्विटर पर भले ही अमृता की नोज रिंग को लेकर मजाक बना रहे हों, लेकिन उनकी यह प्यारी तस्वीर तो आपको भी पसन्द आयी होगी। आपको बता दें कि सैफ अली खान और अमृता सिंह एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से दो हज़ार चार तक एक- दूसरे के साथ रहे। सैफ अली खान ने दो हज़ार बारह में करीना कपूर से शादी कर ली थी। दिलचस्प बात यह है कि सैफ और अमृता की बेटी सारा अली खान जल्द ही बॉलीवुड में एंट्री करने वाली है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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रायबरेली। डलमऊ-फतेहपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अंबेडकर गंगा पुल पर आज प्रातः तीन बजे फतेहपुर की तरफ जा रहे गेहूं से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए नीचे जा गिरा। इस दौरान ट्रक चालक व खलासी गंभीर रूप से घायल हो गए सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को डलमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जहां पर चिकित्सक ने दोनों युवकों की हालत नाजुक होता देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां पर इलाज के दौरान दोनों भाइयों की मौत हो गई।
प्रतापगढ़ जिले के काजीपुर थाना लालगंज अजारा निवासी इरशाद (30) व नौशाद (28) पुत्र मोहम्मद अली ट्रक संख्या जीजे 18 एटी 8812 मे गेहूं लादकर आज प्रातः काल तीन बजे फतेहपुर जा रहे थे। तभी डलमऊ अंबेडकर पुल पर ट्रक अनियंत्रित होने की वजह से पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए नीचे जा गिरा। जिससे दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची डलमऊ पुलिस ने हादसे में घायल दोनों भाइयों को सीएससी में भर्ती कराया जहां पर चिकित्सक रोहित कुमार चौरसिया ने दो लोगों की हालत नाजुक होता देख कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां पर इलाज के दौरान दोनों सगे भाइयों की मौत हो गई है। इस संबंध में कोतवाली प्रभारी मणि शंकर तिवारी ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया गया है।
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रायबरेली। डलमऊ-फतेहपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अंबेडकर गंगा पुल पर आज प्रातः तीन बजे फतेहपुर की तरफ जा रहे गेहूं से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए नीचे जा गिरा। इस दौरान ट्रक चालक व खलासी गंभीर रूप से घायल हो गए सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को डलमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जहां पर चिकित्सक ने दोनों युवकों की हालत नाजुक होता देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां पर इलाज के दौरान दोनों भाइयों की मौत हो गई। प्रतापगढ़ जिले के काजीपुर थाना लालगंज अजारा निवासी इरशाद व नौशाद पुत्र मोहम्मद अली ट्रक संख्या जीजे अट्ठारह एटी आठ हज़ार आठ सौ बारह मे गेहूं लादकर आज प्रातः काल तीन बजे फतेहपुर जा रहे थे। तभी डलमऊ अंबेडकर पुल पर ट्रक अनियंत्रित होने की वजह से पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए नीचे जा गिरा। जिससे दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची डलमऊ पुलिस ने हादसे में घायल दोनों भाइयों को सीएससी में भर्ती कराया जहां पर चिकित्सक रोहित कुमार चौरसिया ने दो लोगों की हालत नाजुक होता देख कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां पर इलाज के दौरान दोनों सगे भाइयों की मौत हो गई है। इस संबंध में कोतवाली प्रभारी मणि शंकर तिवारी ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया गया है।
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'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' और उसके मालिक
स्व० हेमचन्द्र मोदी
[यह लेख बहुत ही सुन्दर और रोचक है । 'पिता-पुत्र' के सम्बन्ध के होते हुए भी लेखक ने कहीं अपने को सत्य से बहकने नही दिया है। इसमें सर्वत्र हेमचन्द्र जी की पैनी वृद्धि की छाप है । जान पडता है कि सत्य के राजमार्ग पर चलने की उनकी एक आदत सी बन गई थी । विशेष घटनाओ का उल्लेख करते हुए उनके पीछे जो सामान्य सत्य है उसकी ओर इस लेख में कई स्थानों पर बहुमूल्य सुझाव दिये गए है । हर्ष की बात है कि श्री नाथूराम जी का ऐसी सद्विवेकिनी शैली से लिखा हुआ चरित्र उपलब्ध हो सका । स्व० हेमचन्द्र के सिवा सम्भवत इस कार्य को कोई दूसरा इतने अच्छे ढग से पूरा न उतार सकता था । - वासुदेवशरण अग्रवाल ]
वम्बई का हिन्दी प्रन्थ - रत्नाकर कार्यालय' हिन्दी में एक ऐसी प्रकाशन संस्था रही है, जिसने लोगो का बहुत-कुछ ध्यान आकर्षित किया है । इसके वारे में ज्यादा जानने के लिए लोग उत्सुक भी रहे है, पर इस विज्ञापनवाजी के ज़माने में न जाने क्यो इसके सचालक हमेशा आत्म-विज्ञापन की ओर इस तरह उपेक्षा दिखलाते रहे है कि लोगो की उत्सुकता खुराक के प्रभाव में अभिज्ञता के रूप मे नही पलट पाई । कोशिश करने पर लोग इसके बारे मे इसके नाम के अलावा इतना ही जान पाये है कि इसके मालिक श्री नाथूराम प्रेमी नामक कोई व्यक्ति विशेष है। हाँ, कोई आठ-दस साल पहले व्यक्तिगत चिट्ठियो मे सवाल पर सवाल पूछकर पूज्य प० वनारसीदासजी चतुर्वेदी कुछ जानकारी पा गये थे, जिसे उन्होने 'विशाल भारत' में छाप दिया था। पर इसके द्वारा लोगो की उत्सुकता वढी थी, घटी नही थी ।
मैं पिताजी को न जाने कब से 'दादा' कहता आया हूँ और मेरी देखादेखी निकट परिचय मे आने वाले हिन्दी के बहुत से लेखक भी उन्हे 'दादा' कहने और पत्रो मे लिखने लगे है । 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' के साथ वे इस तरह मश्लिष्ट है कि जो लोग थोडे भी परिचय में आये है, वे दोनो में भेद नही कर पाते। इतना ही नहीं, मेरा कई साल का अनुभव है कि वे स्वय भी अपने आपको चेप्टा करने पर भी 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' से अलग नहीं कर पाते । अपने कार्य से इतना अधिक एकात्म्य दुनिया में बहुत कम लोग अनुभव करते है। यह एकात्म्य यहाँ तक रहा है कि कभीकभी मुझे यह भासने लगता है कि जिस पितृ-स्नेह का मै हकदार था, उसका एक बहुत बडा हिस्सा इमने चुरा लिया है औौर मुझे याद है कि मेरी स्वर्गीया माँ भी अनेक बार इसमें अपनी मौत का दर्शन करती रही है, परन्तु मेरे निकट 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' कोई चीज़ नही है । मेरे निकट तो वस मेरे दादा है। मै यहाँ अपने दादा का ही परिचय दूंगा, क्योकि मेरे लिए वे ही सव कुछ है । मेरे निकट 'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' है तो केवल उनके एक प्रतीक के रूप मे । मुझे • विश्वास है कि पाठक भी जड 'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' की अपेक्षा चेतन 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' को ही जानने के लिए ज्यादा उत्सुक होगे ।
पर इसका मतलब यह नहीं है कि दादा मुझे चाहते नही है या मेरी माता के प्रति उनका व्यवहार उचित नही था। सच पूछो तो दादा मेरी माँ को चाहने नहीं थे, उनकी भक्ति करते थे । जब वे किसी चीज़ के लिए कहती थी तब वह माँग उन्हे इतनी तुच्छ प्रतीत होती थी कि उनके ख्याल से उन जेसी देवी को शोभा न देती थी। उन्होने इस बात का ख्याल नही किया कि एक देवी के शरीर में भी मनुष्य का हृदय रह सकता है। उनकी मृत्यु के आठ साल वाद आज भी जब वे उनका स्मरण करते है तब उनका हृदय दुख से भर उठता है। आप कहेगे, "यह तुमने अच्छा झगडा लगाया । 'हिन्दी -ग्रन्थ - रत्नाकर' मे तुम्हारी माँ का क्या सम्वन्ध ?" पर मेरा विश्वास है कि दादा ने जो
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'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' और उसके मालिक स्वशून्य हेमचन्द्र मोदी [यह लेख बहुत ही सुन्दर और रोचक है । 'पिता-पुत्र' के सम्बन्ध के होते हुए भी लेखक ने कहीं अपने को सत्य से बहकने नही दिया है। इसमें सर्वत्र हेमचन्द्र जी की पैनी वृद्धि की छाप है । जान पडता है कि सत्य के राजमार्ग पर चलने की उनकी एक आदत सी बन गई थी । विशेष घटनाओ का उल्लेख करते हुए उनके पीछे जो सामान्य सत्य है उसकी ओर इस लेख में कई स्थानों पर बहुमूल्य सुझाव दिये गए है । हर्ष की बात है कि श्री नाथूराम जी का ऐसी सद्विवेकिनी शैली से लिखा हुआ चरित्र उपलब्ध हो सका । स्वशून्य हेमचन्द्र के सिवा सम्भवत इस कार्य को कोई दूसरा इतने अच्छे ढग से पूरा न उतार सकता था । - वासुदेवशरण अग्रवाल ] वम्बई का हिन्दी प्रन्थ - रत्नाकर कार्यालय' हिन्दी में एक ऐसी प्रकाशन संस्था रही है, जिसने लोगो का बहुत-कुछ ध्यान आकर्षित किया है । इसके वारे में ज्यादा जानने के लिए लोग उत्सुक भी रहे है, पर इस विज्ञापनवाजी के ज़माने में न जाने क्यो इसके सचालक हमेशा आत्म-विज्ञापन की ओर इस तरह उपेक्षा दिखलाते रहे है कि लोगो की उत्सुकता खुराक के प्रभाव में अभिज्ञता के रूप मे नही पलट पाई । कोशिश करने पर लोग इसके बारे मे इसके नाम के अलावा इतना ही जान पाये है कि इसके मालिक श्री नाथूराम प्रेमी नामक कोई व्यक्ति विशेष है। हाँ, कोई आठ-दस साल पहले व्यक्तिगत चिट्ठियो मे सवाल पर सवाल पूछकर पूज्य पशून्य वनारसीदासजी चतुर्वेदी कुछ जानकारी पा गये थे, जिसे उन्होने 'विशाल भारत' में छाप दिया था। पर इसके द्वारा लोगो की उत्सुकता वढी थी, घटी नही थी । मैं पिताजी को न जाने कब से 'दादा' कहता आया हूँ और मेरी देखादेखी निकट परिचय मे आने वाले हिन्दी के बहुत से लेखक भी उन्हे 'दादा' कहने और पत्रो मे लिखने लगे है । 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' के साथ वे इस तरह मश्लिष्ट है कि जो लोग थोडे भी परिचय में आये है, वे दोनो में भेद नही कर पाते। इतना ही नहीं, मेरा कई साल का अनुभव है कि वे स्वय भी अपने आपको चेप्टा करने पर भी 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' से अलग नहीं कर पाते । अपने कार्य से इतना अधिक एकात्म्य दुनिया में बहुत कम लोग अनुभव करते है। यह एकात्म्य यहाँ तक रहा है कि कभीकभी मुझे यह भासने लगता है कि जिस पितृ-स्नेह का मै हकदार था, उसका एक बहुत बडा हिस्सा इमने चुरा लिया है औौर मुझे याद है कि मेरी स्वर्गीया माँ भी अनेक बार इसमें अपनी मौत का दर्शन करती रही है, परन्तु मेरे निकट 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' कोई चीज़ नही है । मेरे निकट तो वस मेरे दादा है। मै यहाँ अपने दादा का ही परिचय दूंगा, क्योकि मेरे लिए वे ही सव कुछ है । मेरे निकट 'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' है तो केवल उनके एक प्रतीक के रूप मे । मुझे • विश्वास है कि पाठक भी जड 'हिन्दी-ग्रन्थ - रत्नाकर' की अपेक्षा चेतन 'हिन्दी-ग्रन्थ- रत्नाकर' को ही जानने के लिए ज्यादा उत्सुक होगे । पर इसका मतलब यह नहीं है कि दादा मुझे चाहते नही है या मेरी माता के प्रति उनका व्यवहार उचित नही था। सच पूछो तो दादा मेरी माँ को चाहने नहीं थे, उनकी भक्ति करते थे । जब वे किसी चीज़ के लिए कहती थी तब वह माँग उन्हे इतनी तुच्छ प्रतीत होती थी कि उनके ख्याल से उन जेसी देवी को शोभा न देती थी। उन्होने इस बात का ख्याल नही किया कि एक देवी के शरीर में भी मनुष्य का हृदय रह सकता है। उनकी मृत्यु के आठ साल वाद आज भी जब वे उनका स्मरण करते है तब उनका हृदय दुख से भर उठता है। आप कहेगे, "यह तुमने अच्छा झगडा लगाया । 'हिन्दी -ग्रन्थ - रत्नाकर' मे तुम्हारी माँ का क्या सम्वन्ध ?" पर मेरा विश्वास है कि दादा ने जो
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सलमान के एक काॅल से जब इस टीवी एक्टर की बढ़ गई थी सैलरी, जानिए पूरा कहानी..
सलमान खान काफी दरियादिल इंसान हैं तो यह सभी जानते हैं। अभी तक उन्होंने बाॅलीवुड में कई स्टारों की मदद की है। जिसकी सभी ने सराहना भी की है। ऐसे ही बार सलमान ने एक टीवी स्टार की एक फोन काॅल करके सैलरी बढ़वाई थी। जिसकी जानकारी खुद एक्टर ने सार्वजनिक किया था।
खबरों की माने तो यह टीवी स्टार कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ निगम है। सिद्धार्थ ने बताया कि एक समय में कर्जत में अशोका सीरियल की शूटिंग कर रहा था। उस दौरान सलमान भी अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए वहां पहुंचे थे। वह बताते कि हम दोनों एक ही जिम सेंटर में वर्कआउट करते थे। एक दिन सलमान भाई ने मुझसे मेरी सैलरी के बारे में पूछा।
जब मैं अपनी डेली की सैलरी बताया तो वह पूरी तरह से दंग रह गए। उन्होंने कहा कि इतनी कम सैलरी। सिद्धार्थ निगम ने बताया कि आगे सलमान ने किसी से फोन काॅल में बात की। इसके बाद मेरी सैलरी में बढ़ोत्तरी हो गई। सिद्धार्थ ने कहा कि ऐसा लगभग सालभर बाद सीरियल में काम करने के बाद हुआ था।
सैफ के बेटे को शाहरुख की बेटी के लिए नहीं रहा गया...कर डाला कुछ ऐसा काम....
बताते चले कि सिद्धार्थ निगम टीवी जगत के पाॅपुलर एक्टर हैं। वह अब तक अलादीन, अशोका, चन्द्रादिनी जैसे सीरियल में एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वह सोशल मीडिया में काफी पाॅपुलर है। उनके इंस्ताग्राम में लगभग 70 लाख फालोवर हैं। जहां वह आए दिन एक्टिव रहते हैं और अपनी एक्टिविटी शेयर करते हुए रहते हैं। सिद्धार्थ के सोशल मीडिया एकाउंट में खास बात यह है कि वह महज 128 लोगों को ही फालों करते हैं। जिसमें बाॅलीवुड के कई दिग्गत सितारें शामिल हैं।
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सलमान के एक काॅल से जब इस टीवी एक्टर की बढ़ गई थी सैलरी, जानिए पूरा कहानी.. सलमान खान काफी दरियादिल इंसान हैं तो यह सभी जानते हैं। अभी तक उन्होंने बाॅलीवुड में कई स्टारों की मदद की है। जिसकी सभी ने सराहना भी की है। ऐसे ही बार सलमान ने एक टीवी स्टार की एक फोन काॅल करके सैलरी बढ़वाई थी। जिसकी जानकारी खुद एक्टर ने सार्वजनिक किया था। खबरों की माने तो यह टीवी स्टार कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ निगम है। सिद्धार्थ ने बताया कि एक समय में कर्जत में अशोका सीरियल की शूटिंग कर रहा था। उस दौरान सलमान भी अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए वहां पहुंचे थे। वह बताते कि हम दोनों एक ही जिम सेंटर में वर्कआउट करते थे। एक दिन सलमान भाई ने मुझसे मेरी सैलरी के बारे में पूछा। जब मैं अपनी डेली की सैलरी बताया तो वह पूरी तरह से दंग रह गए। उन्होंने कहा कि इतनी कम सैलरी। सिद्धार्थ निगम ने बताया कि आगे सलमान ने किसी से फोन काॅल में बात की। इसके बाद मेरी सैलरी में बढ़ोत्तरी हो गई। सिद्धार्थ ने कहा कि ऐसा लगभग सालभर बाद सीरियल में काम करने के बाद हुआ था। सैफ के बेटे को शाहरुख की बेटी के लिए नहीं रहा गया...कर डाला कुछ ऐसा काम.... बताते चले कि सिद्धार्थ निगम टीवी जगत के पाॅपुलर एक्टर हैं। वह अब तक अलादीन, अशोका, चन्द्रादिनी जैसे सीरियल में एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वह सोशल मीडिया में काफी पाॅपुलर है। उनके इंस्ताग्राम में लगभग सत्तर लाख फालोवर हैं। जहां वह आए दिन एक्टिव रहते हैं और अपनी एक्टिविटी शेयर करते हुए रहते हैं। सिद्धार्थ के सोशल मीडिया एकाउंट में खास बात यह है कि वह महज एक सौ अट्ठाईस लोगों को ही फालों करते हैं। जिसमें बाॅलीवुड के कई दिग्गत सितारें शामिल हैं।
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सतना/राजनीतिक संवाददाता। सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह सांसद हैं, यहां लंबे समय से भाजपा का राज है, इस सीट पर आखिरी बार 1991 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह संसद पहुंचे थे। सतना जिला ऐतिहासिक रूप से बघेलखंड क्षेत्र में आता है। इस पर रीवा राजघराने का शासन था। बौद्ध धर्म की किताब और महाभारत में भी इसका उल्लेख है। इस संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं। साल 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी, उसके बाद साल 1971 में भारतीय जन संघ और 1977 में ये सीट भारतीय लोकदल ने जीती थी, साल 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस का राज रहा, साल 1989 के चुनाव में पहली बार यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। 1991 के चुनाव में यहां अर्जुन सिंह विजयी हुए थे और उसके बाद यहां पर कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है।
साल 1996 के चुनाव में बसपा ने पहली बार यहां विजय हासिल की थी इसके बाद साल 1998 में यहां भाजपा की वापसी हुई और तब से लेकर अब तक केवल यहां भाजपा का ही राज है। भाजपा के रामानंद सिंह यहां पर दो बार सांसद रहे तो वहीं साल 2004 से यहां भाजपा के कद्दावर नेता गणेश सिंह सांसद हैं।
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोस में उनकी उपस्थिति 87 प्रतिशत रही। और इस दौरान उन्होंने 145 डिबेट में हिस्सा लिया और 346 प्रश्न पूछे। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर सपा थी। 57 साल के गणेश सिंह 2014 का लोस चुनाव जीतकर तीसरी बार सांसद बने। उन्होंने निर्भया फंड, पीएम उज्जवला योजना, मेक इन इंडिया प्रोग्राम, नौकरी में आरक्षण जैसे मामलों पर सवाल किया है।
कांग्रेस अब यहां दोबारा कब्जा जमाने के प्लान पर काम तेज कर दिया है, कभी देश के दिग्गज अर्जुन सिंह के कब्जे वाली इस सीट पर बीते डेढ़ दशक से भाजपा का भगवा लहरा रहा है। लोकसभा चुनावों की तैयारी तेज है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार भले ही कांग्रेस ने बनाई है, लेकिन विंध्य इलाके में भाजपा ने उसे करारी मात दी है। विंध्य इलाके की सबसे अहम सीट सतना, जो सीमेंट हब के लिए मशहूर है। लेकिन यहां की राजनीतिक हललच हमेशा से प्रदेश और देश के लिए चर्चित रही है, कभी यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया था, लेकिन अब यहां के राजनीतिक समीकरण कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के अनुकूल है और भाजपा यहां लगातार तीन पर बार से कब्जा जमाए हुए है।
भाजपा का इस सीट पर खासा प्रभाव है और यहीं कारण है कि बीएसपी ने भाजपा और कांग्रेस के पहले यहां से अपना प्रत्याशी अच्छे लाल कुशवाहा को घोषित कर दिया है। वहीं विधानसभा चुनाव की तरह सांसद के खिलाफ भी इस बार स्थानीय नाराजगी साफ दिख रही है।
♦ 1998- भाजपा ने वापसी की और अब ये सीट उसके के कब्जे में है।
♦ सतना की मतदाता संख्या संख्या 14,47,395 है।
♦ इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,06175 है।
♦ जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6,41220 है।
♦ ब्राहम्ण मतदाता 3 लाख 24 हजार हैं।
♦ क्षत्रिय मतदाता 1 लाख 11 हजार हैं।
♦ पटेल मतदाता 1 लाख 23 हजार हैं।
♦ कुशवाहा मतदाता 1 लाख 13 हजार हैं।
♦ वैश्य मतदाता 65 हजार हैं।
♦ अनुसूचित जाति के 1 लाख 47 हजार मतदाता हैं।
♦ अनुसूचित जन जाति के 1 लाख 37 हजार मतदाता हैं।
♦ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 37 हजार है।
इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का भी अच्छा खासा प्रभाव है। बसपा इस लोकसभा सीट पर एक बार जीत का स्वाद चख चुकी है, वहीं 2009 के चुनाव में बसपा इस सीट पर दूसरे स्थान पर थी। सतना लोकसभा सीट पर 6 बार भाजपा को, 4 बार कांग्रेस को, 1 बार बसपा को और 1 बार भारतीय जनसंघ को जीत मिल चुकी है। २०१४ के पहले चुनाव यानी 2009 में भी गणेश सिंह को जीत मिली थी। तब उन्होंने बसपा के सुखलाल कुशवाहा को हराया था। गणेश सिंह को इस चुनाव में 1 लाख 94 हजार 624 मत मिले थे तो वहीं सुखलाल कुशवाहा को 1 लाख 90 हजार 206 मत मिले थे।
सतना लोकसभा सीट पर 6 बार भाजपा, 4 बार कांग्रेस, 1 बार बसपा और 1 बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की है। सतना लोकसभा में आने वाली सात विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गणेश सिंह ने अर्जुन सिंह के बेटे व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अजय सिंह को हराया था। इस चुनाव में गणेश सिंह को 3 लाख 75 हजार 288 मत मिले थे, वहीं कांग्रेस के अजय सिंह को 3 लाख 66 हजार 600 मत मिले थे। अजय सिंह की 8 हजार 688 मतों के अंतर से हार हुई थी। इस बार भी अजय सिंह इस सीट से दावेदार हैं, हालांकि विधानसभा चुनाव में हार झेल चुके अजय सिंह का कहना है पार्टी जहां से टिकट देगी वो चुनाव लड़ेंगे।
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सतना/राजनीतिक संवाददाता। सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह सांसद हैं, यहां लंबे समय से भाजपा का राज है, इस सीट पर आखिरी बार एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह संसद पहुंचे थे। सतना जिला ऐतिहासिक रूप से बघेलखंड क्षेत्र में आता है। इस पर रीवा राजघराने का शासन था। बौद्ध धर्म की किताब और महाभारत में भी इसका उल्लेख है। इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं। साल एक हज़ार नौ सौ सरसठ के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी, उसके बाद साल एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारतीय जन संघ और एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में ये सीट भारतीय लोकदल ने जीती थी, साल एक हज़ार नौ सौ अस्सी और एक हज़ार नौ सौ चौरासी में यहां कांग्रेस का राज रहा, साल एक हज़ार नौ सौ नवासी के चुनाव में पहली बार यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के चुनाव में यहां अर्जुन सिंह विजयी हुए थे और उसके बाद यहां पर कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है। साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे के चुनाव में बसपा ने पहली बार यहां विजय हासिल की थी इसके बाद साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में यहां भाजपा की वापसी हुई और तब से लेकर अब तक केवल यहां भाजपा का ही राज है। भाजपा के रामानंद सिंह यहां पर दो बार सांसद रहे तो वहीं साल दो हज़ार चार से यहां भाजपा के कद्दावर नेता गणेश सिंह सांसद हैं। दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पाँच सालों के दौरान लोस में उनकी उपस्थिति सत्तासी प्रतिशत रही। और इस दौरान उन्होंने एक सौ पैंतालीस डिबेट में हिस्सा लिया और तीन सौ छियालीस प्रश्न पूछे। साल दो हज़ार चौदह के चुनाव में इस सीट पर नंबर दो पर कांग्रेस, नंबर तीन पर बसपा और नंबर चार पर सपा थी। सत्तावन साल के गणेश सिंह दो हज़ार चौदह का लोस चुनाव जीतकर तीसरी बार सांसद बने। उन्होंने निर्भया फंड, पीएम उज्जवला योजना, मेक इन इंडिया प्रोग्राम, नौकरी में आरक्षण जैसे मामलों पर सवाल किया है। कांग्रेस अब यहां दोबारा कब्जा जमाने के प्लान पर काम तेज कर दिया है, कभी देश के दिग्गज अर्जुन सिंह के कब्जे वाली इस सीट पर बीते डेढ़ दशक से भाजपा का भगवा लहरा रहा है। लोकसभा चुनावों की तैयारी तेज है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार भले ही कांग्रेस ने बनाई है, लेकिन विंध्य इलाके में भाजपा ने उसे करारी मात दी है। विंध्य इलाके की सबसे अहम सीट सतना, जो सीमेंट हब के लिए मशहूर है। लेकिन यहां की राजनीतिक हललच हमेशा से प्रदेश और देश के लिए चर्चित रही है, कभी यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया था, लेकिन अब यहां के राजनीतिक समीकरण कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के अनुकूल है और भाजपा यहां लगातार तीन पर बार से कब्जा जमाए हुए है। भाजपा का इस सीट पर खासा प्रभाव है और यहीं कारण है कि बीएसपी ने भाजपा और कांग्रेस के पहले यहां से अपना प्रत्याशी अच्छे लाल कुशवाहा को घोषित कर दिया है। वहीं विधानसभा चुनाव की तरह सांसद के खिलाफ भी इस बार स्थानीय नाराजगी साफ दिख रही है। ♦ एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे- भाजपा ने वापसी की और अब ये सीट उसके के कब्जे में है। ♦ सतना की मतदाता संख्या संख्या चौदह,सैंतालीस,तीन सौ पचानवे है। ♦ इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या आठ,छः हज़ार एक सौ पचहत्तर है। ♦ जबकि महिला मतदाताओं की संख्या छः,इकतालीस हज़ार दो सौ बीस है। ♦ ब्राहम्ण मतदाता तीन लाख चौबीस हजार हैं। ♦ क्षत्रिय मतदाता एक लाख ग्यारह हजार हैं। ♦ पटेल मतदाता एक लाख तेईस हजार हैं। ♦ कुशवाहा मतदाता एक लाख तेरह हजार हैं। ♦ वैश्य मतदाता पैंसठ हजार हैं। ♦ अनुसूचित जाति के एक लाख सैंतालीस हजार मतदाता हैं। ♦ अनुसूचित जन जाति के एक लाख सैंतीस हजार मतदाता हैं। ♦ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सैंतीस हजार है। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का भी अच्छा खासा प्रभाव है। बसपा इस लोकसभा सीट पर एक बार जीत का स्वाद चख चुकी है, वहीं दो हज़ार नौ के चुनाव में बसपा इस सीट पर दूसरे स्थान पर थी। सतना लोकसभा सीट पर छः बार भाजपा को, चार बार कांग्रेस को, एक बार बसपा को और एक बार भारतीय जनसंघ को जीत मिल चुकी है। दो हज़ार चौदह के पहले चुनाव यानी दो हज़ार नौ में भी गणेश सिंह को जीत मिली थी। तब उन्होंने बसपा के सुखलाल कुशवाहा को हराया था। गणेश सिंह को इस चुनाव में एक लाख चौरानवे हजार छः सौ चौबीस मत मिले थे तो वहीं सुखलाल कुशवाहा को एक लाख नब्बे हजार दो सौ छः मत मिले थे। सतना लोकसभा सीट पर छः बार भाजपा, चार बार कांग्रेस, एक बार बसपा और एक बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की है। सतना लोकसभा में आने वाली सात विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है। दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में भाजपा के गणेश सिंह ने अर्जुन सिंह के बेटे व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अजय सिंह को हराया था। इस चुनाव में गणेश सिंह को तीन लाख पचहत्तर हजार दो सौ अठासी मत मिले थे, वहीं कांग्रेस के अजय सिंह को तीन लाख छयासठ हजार छः सौ मत मिले थे। अजय सिंह की आठ हजार छः सौ अठासी मतों के अंतर से हार हुई थी। इस बार भी अजय सिंह इस सीट से दावेदार हैं, हालांकि विधानसभा चुनाव में हार झेल चुके अजय सिंह का कहना है पार्टी जहां से टिकट देगी वो चुनाव लड़ेंगे।
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रिकी पॉन्टिंग की टीम के कप्तान बने विराट कोहली.
मेलबर्न. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग (Ricky Ponting) ने सोमवार को भारतीय कप्तान विराट कोहली को दशक की ऑल स्टार टेस्ट टीम का कप्तान चुना. उनकी इस टीम में इंग्लैंड के चार खिलाड़ी शामिल हैं. पिछले दस साल के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गयी पॉन्टिंग की टीम में कोहली (Virat Kohli) के अलावा कोई अन्य भारतीय शामिल नहीं है. कोहली अभी आईसीसी टेस्ट और वनडे की बल्लेबाजी रैंकिंग में टॉप पर हैं.
इंग्लैंड के जिन खिलाड़ियों को पॉन्टिंग (Ricky Ponting) की टीम में जगह मिली है, उनमें आलराउंडर बेन स्टोक्स, सलामी बल्लेबाज एलिस्टेयर कुक, तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड और जेम्स एंडरसन शामिल हैं. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में उन्होंने स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर के साथ ही स्पिनर नाथन लायन को टीम में रखा है.
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रिकी पॉन्टिंग की टीम के कप्तान बने विराट कोहली. मेलबर्न. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने सोमवार को भारतीय कप्तान विराट कोहली को दशक की ऑल स्टार टेस्ट टीम का कप्तान चुना. उनकी इस टीम में इंग्लैंड के चार खिलाड़ी शामिल हैं. पिछले दस साल के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गयी पॉन्टिंग की टीम में कोहली के अलावा कोई अन्य भारतीय शामिल नहीं है. कोहली अभी आईसीसी टेस्ट और वनडे की बल्लेबाजी रैंकिंग में टॉप पर हैं. इंग्लैंड के जिन खिलाड़ियों को पॉन्टिंग की टीम में जगह मिली है, उनमें आलराउंडर बेन स्टोक्स, सलामी बल्लेबाज एलिस्टेयर कुक, तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड और जेम्स एंडरसन शामिल हैं. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में उन्होंने स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर के साथ ही स्पिनर नाथन लायन को टीम में रखा है. .
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मिजोरम में 11 साल की बच्ची ने बहादुरी की मिसाल कायम की है। उसने अपनी हिम्मत और साहस से एक बच्ची को अपहरणकर्ता के चंगुल से छुड़ा लिया। एक महिला ने मानव तस्करी के लिए इस बच्ची का अपहरण किया था।
उत्तरी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) एल. खिआंगते ने यहां बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। बुधवार रात को अहृपत बच्ची को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि 11 साल की कैरोलिन मालस्वामटलुआंगी सोमवार शाम पूर्वी आइजोल के जुंग्तुई इलाके में अपने घर के पास सहेलियों के साथ खेल रही थी तभी एक अनजान बच्ची भी उनके साथ खेलने लगी। उस वक्त मालस्वामटलुआंगी ने उस बच्ची पर उतना ध्यान नहीं दिया लेकिन अगले दिन सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उसी बच्ची की तलाश में उसके इलाके में आए और मालस्वामटलुआंगी से लापता बच्ची का फोटो दिखाकर पूछा तो उसने इस बच्ची को देखने की बात कही।
खिआंगते ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने मालस्वामटलुआंगी से कहा कि अगर उसे यह बच्ची फिर से दिखे तो वह पुलिस को सूचित करे। इसके बाद मालस्वामटलुआंगी खुद ही अपने इलाके में अपहृत बच्ची की तलाश में जुट गई और उसने एक महिला के घर में बच्ची का पता लगा लिया। यह बच्ची, जोनुनसांगिन फनाई (31) के घर पर थी जिसने उसका अपहरण कर लिया था।
उन्होंने बताया कि मौका भांप कर मालस्वामटलुआंगी ने बच्ची को अपनी पीठ पर लादा और अपने घर की ओर दौड़ पड़ी। लेकिन महिला ने उसे देख लिया और रुकने को कहा तथा ऐसा नहीं करने पर पथराव करने की धमकी भी दी। लेकिन मालस्वामटलुआंगी सीधे अपने घर जा कर ही रुकी और पूरी कहानी अपने माता-पिता को सुनाई। इसके बाद, उसके माता-पिता ने पुलिस को सूचित किया और फनाई को गिरफ्तार कर लिया गया। खिआंगते ने बताया कि फनाई ने दक्षिण मिजोरम के लुंगलेई जिले के एक गांव से रविवार को बच्ची का अपहरण किया था और उसे आइजोल ले आई थी। स्थानीय अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मिजोरम में ग्यारह साल की बच्ची ने बहादुरी की मिसाल कायम की है। उसने अपनी हिम्मत और साहस से एक बच्ची को अपहरणकर्ता के चंगुल से छुड़ा लिया। एक महिला ने मानव तस्करी के लिए इस बच्ची का अपहरण किया था। उत्तरी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक एल. खिआंगते ने यहां बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। बुधवार रात को अहृपत बच्ची को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि ग्यारह साल की कैरोलिन मालस्वामटलुआंगी सोमवार शाम पूर्वी आइजोल के जुंग्तुई इलाके में अपने घर के पास सहेलियों के साथ खेल रही थी तभी एक अनजान बच्ची भी उनके साथ खेलने लगी। उस वक्त मालस्वामटलुआंगी ने उस बच्ची पर उतना ध्यान नहीं दिया लेकिन अगले दिन सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उसी बच्ची की तलाश में उसके इलाके में आए और मालस्वामटलुआंगी से लापता बच्ची का फोटो दिखाकर पूछा तो उसने इस बच्ची को देखने की बात कही। खिआंगते ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने मालस्वामटलुआंगी से कहा कि अगर उसे यह बच्ची फिर से दिखे तो वह पुलिस को सूचित करे। इसके बाद मालस्वामटलुआंगी खुद ही अपने इलाके में अपहृत बच्ची की तलाश में जुट गई और उसने एक महिला के घर में बच्ची का पता लगा लिया। यह बच्ची, जोनुनसांगिन फनाई के घर पर थी जिसने उसका अपहरण कर लिया था। उन्होंने बताया कि मौका भांप कर मालस्वामटलुआंगी ने बच्ची को अपनी पीठ पर लादा और अपने घर की ओर दौड़ पड़ी। लेकिन महिला ने उसे देख लिया और रुकने को कहा तथा ऐसा नहीं करने पर पथराव करने की धमकी भी दी। लेकिन मालस्वामटलुआंगी सीधे अपने घर जा कर ही रुकी और पूरी कहानी अपने माता-पिता को सुनाई। इसके बाद, उसके माता-पिता ने पुलिस को सूचित किया और फनाई को गिरफ्तार कर लिया गया। खिआंगते ने बताया कि फनाई ने दक्षिण मिजोरम के लुंगलेई जिले के एक गांव से रविवार को बच्ची का अपहरण किया था और उसे आइजोल ले आई थी। स्थानीय अदालत ने आरोपी को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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९८ / जैन तत्त्वविद्या
इस पर्वत की पूर्वादि दिशाओं में से प्रत्येक में चार कूट है। पूर्व व पश्चिम दिशा वाले कूटों की अग्रभूमि में द्वीप के अधिपति देवो के दो कूट हैं। इन दोनो कूटों के अभ्यन्तर भागों में चारों दिशाओं में एक-एक जिनकूट है। मतान्तर की अपेक्षा उनके उत्तर व दक्षिण भागों में एक-एक जिनकूट है।
रुचकवर द्वीप
तेरहवाँ द्वीप रुचकवर नाम का है। उसमें बीचोबीच रुचकवर नाम का कुण्डलाकार पर्वत है। इस पर्वत पर कुल ४४ कूट हैं। पूर्वादि प्रत्येक दिशा में आठ-आठ कूट हैं, जिन पर दिक्कुमारि देवियों रहती हैं, जो भगवान् के जन्म कल्याणक के अवसर पर माता की सेवा में उपस्थित रहती हैं। पूर्वाद दिशाओं वाली आठ-आठ देवियाँ क्रम से झारी, दर्पण, छत्र व चॅवर धारण करती हैं। इन कूटों के अभ्यन्तर भाग में चारों दिशाओं में चार महाकूट है तथा इनकी भी अभ्यन्तर दिशाओ में चार अन्य कूट हैं। जिन पर दिशाएँ स्वच्छ करनेवाली तथा भगवान् का जातकर्म करनेवाली देवियाँ रहती हैं। इनके अभ्यन्तर भाग में चार सिद्धकूट हैं। किन्ही आचार्यों के अनुसार विदिशाओं में भी चार सिद्धकूट हैं। 'लोक विनिश्चय' के अनुसार पूर्वादि चार दिशाओं में एक-एक करके चार कूट है, जिन पर दिग्गजेन्द्र रहते है। इन चारों के अभ्यन्तर भाग में चार दिशाओ में आठ कूट है, जिन पर उपर्युक्त माता की सेवा करनेवाली ३२ दिक्कुमारियाँ रहती है। उनके बीच की विदिशाओं में दो दो करके आठ कूट है, जिन पर भगवान् का जातकर्म करनेवाली आठ महत्तरियाँ रहती है। इनके अभ्यन्तर भाग में पुन. पूर्वाद दिशाओं में चार कूट है, जिन पर दिशाएँ निर्मल करनेवाली देवियाँ रहती है। इनके अभ्यन्तर भाग में चार सिद्धकूट है।
स्वयंभूरमण द्वीप और समुद्र
अन्तिम द्वीप स्वयभूरमण है। इसके मध्य में कुण्डलाकार स्वयंप्रभ पर्वत है। इस पर्वत के अभ्यन्तर भाग में जघन्य भोगभूमि है। वहाँ मात्र एकेन्द्रिय और सज्ञी पचंन्द्रिय तिर्यञ्च पाये जाते हैं। उसके परभाग से लेकर अन्तिम स्वयंभूरमण सागर के अन्तिम किनारे तक कर्मभूमि है, वहाँ सब प्रकार के तिर्यञ्च पाये जाते हैं ।
ऊर्ध्वलोक में वैमानिक देवों और सिद्धों का निवास है। देवों का प्रकरण होने के कारण यहाँ भवनवासी, व्यन्तर और ज्योतिष्क देवों का भी निरूपण किया गया है।
देवों का स्वरूप
देवाश्चतुर्णिकायाः ।।२९।। देवों के चार निकाय हैं ।। २९ ।।
समूह विशेष या जाति को निकाय कहते हैं। देवों के चार प्रमुख निकाय हैं- भवनवासी, व्यन्तर, ज्योतिष्क ओर वैमानिक। देव एक गति है जिसमे रहनेवाले प्राणी प्रायः सुखशील होते है। वे नाना द्वीपों, वनों, पर्वतों की चोटियों आदि में विहार करते रहते हैं। देवों के पास अपने शरीर को छोटा-बड़ा आदि बनाने की विशेष क्षमता होती है।
भवनवासी देव
भवनवासिनो दसविधाः ।।३०।। भवनवासी देव दस प्रकार के हैं ।।३०।।
भवनों में निवास करनेवाले देवों को भवनवासी देव कहते हैं। इनके दस भेद हैं- असुरकुमार, नामकुमार, विद्युत्कुमार, सुपर्णकुमार, अग्निकुमार, वातकुमार, स्तनितकुमार, उदधिकुमार, द्वीपकुमार, और दिक्कुमार ।
इन्हें अधिकतर कुमारो के समान वेशभूषा, क्रीड़ा और हास - विलास आदि रुचिकर लगते हैं, इसलिए ये कुमार कहलाते है। इनमें से असुरकुमारों के भवन रत्नप्रभा पृथ्वी के पङ्क भाग में हैं और शेष नौ प्रकार के भवनवासियों के भवन खरपृथ्वी भाग के ऊपर और नीचे के एक-एक हजार योजन को छोड़कर मध्य में हैं।
मुकुट-चिह्न- दसों प्रकार के भवनवासी देवों के मुकुटों पर अलगअलग चिह्न रहते हैं। इन्हीं चिह्नों से उनकी अलग-अलग जाति पहचानी जाती
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अट्ठानवे / जैन तत्त्वविद्या इस पर्वत की पूर्वादि दिशाओं में से प्रत्येक में चार कूट है। पूर्व व पश्चिम दिशा वाले कूटों की अग्रभूमि में द्वीप के अधिपति देवो के दो कूट हैं। इन दोनो कूटों के अभ्यन्तर भागों में चारों दिशाओं में एक-एक जिनकूट है। मतान्तर की अपेक्षा उनके उत्तर व दक्षिण भागों में एक-एक जिनकूट है। रुचकवर द्वीप तेरहवाँ द्वीप रुचकवर नाम का है। उसमें बीचोबीच रुचकवर नाम का कुण्डलाकार पर्वत है। इस पर्वत पर कुल चौंतालीस कूट हैं। पूर्वादि प्रत्येक दिशा में आठ-आठ कूट हैं, जिन पर दिक्कुमारि देवियों रहती हैं, जो भगवान् के जन्म कल्याणक के अवसर पर माता की सेवा में उपस्थित रहती हैं। पूर्वाद दिशाओं वाली आठ-आठ देवियाँ क्रम से झारी, दर्पण, छत्र व चॅवर धारण करती हैं। इन कूटों के अभ्यन्तर भाग में चारों दिशाओं में चार महाकूट है तथा इनकी भी अभ्यन्तर दिशाओ में चार अन्य कूट हैं। जिन पर दिशाएँ स्वच्छ करनेवाली तथा भगवान् का जातकर्म करनेवाली देवियाँ रहती हैं। इनके अभ्यन्तर भाग में चार सिद्धकूट हैं। किन्ही आचार्यों के अनुसार विदिशाओं में भी चार सिद्धकूट हैं। 'लोक विनिश्चय' के अनुसार पूर्वादि चार दिशाओं में एक-एक करके चार कूट है, जिन पर दिग्गजेन्द्र रहते है। इन चारों के अभ्यन्तर भाग में चार दिशाओ में आठ कूट है, जिन पर उपर्युक्त माता की सेवा करनेवाली बत्तीस दिक्कुमारियाँ रहती है। उनके बीच की विदिशाओं में दो दो करके आठ कूट है, जिन पर भगवान् का जातकर्म करनेवाली आठ महत्तरियाँ रहती है। इनके अभ्यन्तर भाग में पुन. पूर्वाद दिशाओं में चार कूट है, जिन पर दिशाएँ निर्मल करनेवाली देवियाँ रहती है। इनके अभ्यन्तर भाग में चार सिद्धकूट है। स्वयंभूरमण द्वीप और समुद्र अन्तिम द्वीप स्वयभूरमण है। इसके मध्य में कुण्डलाकार स्वयंप्रभ पर्वत है। इस पर्वत के अभ्यन्तर भाग में जघन्य भोगभूमि है। वहाँ मात्र एकेन्द्रिय और सज्ञी पचंन्द्रिय तिर्यञ्च पाये जाते हैं। उसके परभाग से लेकर अन्तिम स्वयंभूरमण सागर के अन्तिम किनारे तक कर्मभूमि है, वहाँ सब प्रकार के तिर्यञ्च पाये जाते हैं । ऊर्ध्वलोक में वैमानिक देवों और सिद्धों का निवास है। देवों का प्रकरण होने के कारण यहाँ भवनवासी, व्यन्तर और ज्योतिष्क देवों का भी निरूपण किया गया है। देवों का स्वरूप देवाश्चतुर्णिकायाः ।।उनतीस।। देवों के चार निकाय हैं ।। उनतीस ।। समूह विशेष या जाति को निकाय कहते हैं। देवों के चार प्रमुख निकाय हैं- भवनवासी, व्यन्तर, ज्योतिष्क ओर वैमानिक। देव एक गति है जिसमे रहनेवाले प्राणी प्रायः सुखशील होते है। वे नाना द्वीपों, वनों, पर्वतों की चोटियों आदि में विहार करते रहते हैं। देवों के पास अपने शरीर को छोटा-बड़ा आदि बनाने की विशेष क्षमता होती है। भवनवासी देव भवनवासिनो दसविधाः ।।तीस।। भवनवासी देव दस प्रकार के हैं ।।तीस।। भवनों में निवास करनेवाले देवों को भवनवासी देव कहते हैं। इनके दस भेद हैं- असुरकुमार, नामकुमार, विद्युत्कुमार, सुपर्णकुमार, अग्निकुमार, वातकुमार, स्तनितकुमार, उदधिकुमार, द्वीपकुमार, और दिक्कुमार । इन्हें अधिकतर कुमारो के समान वेशभूषा, क्रीड़ा और हास - विलास आदि रुचिकर लगते हैं, इसलिए ये कुमार कहलाते है। इनमें से असुरकुमारों के भवन रत्नप्रभा पृथ्वी के पङ्क भाग में हैं और शेष नौ प्रकार के भवनवासियों के भवन खरपृथ्वी भाग के ऊपर और नीचे के एक-एक हजार योजन को छोड़कर मध्य में हैं। मुकुट-चिह्न- दसों प्रकार के भवनवासी देवों के मुकुटों पर अलगअलग चिह्न रहते हैं। इन्हीं चिह्नों से उनकी अलग-अलग जाति पहचानी जाती
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नागपुर. महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Udhhav Thackeray) ने सोमवार को राज्य विधान परिषद में कहा कि केंद्र सरकार को 'कर्नाटक के कब्जे वाले महाराष्ट्र के क्षेत्रों' को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए। महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद पर उच्च सदन में अपनी बात रखते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता ने कहा कि यह केवल भाषा और सीमा का नहीं, बल्कि 'मानवता' का मामला है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में कई पीढ़ियों से मराठी भाषी लोग रह रहे हैं और उनकी जीवनशैली तथा भाषा मराठी है। ठाकरे ने कहा कि जब तक मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, "कर्नाटक के कब्जे वाले महाराष्ट्र के क्षेत्रों को केंद्र सरकार को केंद्रशासित क्षेत्र" घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) ने इस मुद्दे पर एक भी शब्द कहा है।
इस दौरान विधान परिषद की अतिथि दीर्घा में राज्यसभा सदस्य और उद्धव नीत शिवसेना के नेता संजय राउत बैठे थे। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद 1957 से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद है। महाराष्ट्र पूर्ववर्ती बंबई प्रेसीडेंसी का भाग रहे बेलगावी पर दावा करता है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में मराठी भाषी लोग रहते हैं। वह कर्नाटक के 800 से ज्यादा मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है। लेकिन कर्नाटक का कहना है कि सीमांकन, राज्य पुनर्गठन कानून और 1967 की महाजन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भाषाई आधार पर किया गया था, जो अंतिम है।
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नागपुर. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को राज्य विधान परिषद में कहा कि केंद्र सरकार को 'कर्नाटक के कब्जे वाले महाराष्ट्र के क्षेत्रों' को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए। महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद पर उच्च सदन में अपनी बात रखते हुए शिवसेना के नेता ने कहा कि यह केवल भाषा और सीमा का नहीं, बल्कि 'मानवता' का मामला है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में कई पीढ़ियों से मराठी भाषी लोग रह रहे हैं और उनकी जीवनशैली तथा भाषा मराठी है। ठाकरे ने कहा कि जब तक मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, "कर्नाटक के कब्जे वाले महाराष्ट्र के क्षेत्रों को केंद्र सरकार को केंद्रशासित क्षेत्र" घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर एक भी शब्द कहा है। इस दौरान विधान परिषद की अतिथि दीर्घा में राज्यसभा सदस्य और उद्धव नीत शिवसेना के नेता संजय राउत बैठे थे। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद एक हज़ार नौ सौ सत्तावन से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद है। महाराष्ट्र पूर्ववर्ती बंबई प्रेसीडेंसी का भाग रहे बेलगावी पर दावा करता है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में मराठी भाषी लोग रहते हैं। वह कर्नाटक के आठ सौ से ज्यादा मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है। लेकिन कर्नाटक का कहना है कि सीमांकन, राज्य पुनर्गठन कानून और एक हज़ार नौ सौ सरसठ की महाजन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भाषाई आधार पर किया गया था, जो अंतिम है।
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यह भी सुनें या पढ़ेंः गुजरात में बैठे अतीक अहमद ने कैसे रची यूपी दहलाने की साजिश? मनीष जी, उमेश पाल अपहरण केस का फैसला 17 साल बाद आया, जबकि पिछले महीने ही उनकी सरेआम हत्या भी कर दी गई। उसमें भी अतीक अहमद ही मुख्य आरोपी है। तो क्या था ये 17 साल पुराना मामला और उम्रकैद की सजा सुनाते हुए क्या कहा है कोर्ट ने?
Umesh Pal Hatyakand: यूपी में कानून व्यवस्था को लेकर क्यों मचा शोर?
जी, आपको बता दें कि उमेश पाल की पिछले महीने 24 फरवरी को धूमनगंज, प्रयागराज में हत्या कर दी गई थी। वह बसपा के पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या में मुख्य गवाह थे। 28 फरवरी 2006 को इनका अपहरण कर लिया गया था। आज का फैसला इसी अपहरण के मामले में आया है। दरअसल, ये मामला इतना चर्चित था, उसके बावजूद उमेश पाल लगातार अपहरण को लेकर शिकायतें दर्ज कराते रहे, थाने में दौड़ते रहे लेकिन उनकी एफआईआर तक दर्ज नहीं हो रही थी। जब बीएसपी की सरकार बनी तब 5 जुलाई 2007 में इस मामले की एफआईआर दर्ज हुई। अतीक का प्रयागराज में और सरकार में इतना दबदबा था कि इस पूरे मामले की एफआईआर ही दर्ज नहीं हो रही थी। आज इलाहाबाद में एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट ने इनको सजा सुनाई है, हालांकि इस पूरे मामले में 11 आरोपी बनाए गए थे। लेकिन इनमें सजा सिर्फ तीन को हुई है जिसमें माफिया अतीक अहमद, उनके वकील खान सोलत अनीस और शूटर है दिनेश पासी उनको सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। और क्षतिपूर्ति के रूप में एक-एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना अलग से लगाया गया है। यह उमेश पाल के परिवार को दिया जाएगा। इन सब मामले में पुलिस ने उनके भाई अशरफ को भी कोर्ट में पेश किया था। लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले इसलिए बरी कर दिया गया है। चूंकि अतीक अहमद पहले से ही हिरासत में थे, बाकी जो दो हैं खान सोलत अनीस और दिनेश पासी को तत्काल हिरासत में ले लिया गया है। यह मानिए कि जब से अतीक अपराध की दुनिया में है, तब से यह पहला मामला है, करीब 43-44 साल हो गए। 1979-80 में अतीक के ऊपर पहला केस दर्ज हुआ था। तब से 100 से ज्यादा मुकदमे हैं। तब से यह पहला मामला है जिसमें उसे सजा हुई है। बहुत बड़ी बात है कि 101 मामले दर्ज हैं, 44 साल बाद पहली बार किसी मामले में सजा हुई है तो कितना महत्वपूर्ण है ये? क्या बाकी अपराधियों के लिए एक बड़ा संदेश देता है ये फैसला? क्या अपराध पर लगाम लग पाएगी इससे?
पे 100 मुकदमें थे और करीब 50 से ज्यादा मुकदमें अब भी हैं। 50 मामलों में या तो कहीं न कहीं गवाह नहीं आए, या साक्ष्य नहीं जुटे या कोर्ट ने उसके खिलाफ गवाही नहीं दी तो उन सब मामलों में बरी हो चुका है। और 12 मुकदमें तो ऐसे हैं जिनमें मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन उसमें ट्रायल तक नहीं शुरू नहीं हो पाया। और 6 मुकदमों में पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट तक लगा दी है। एक मामले में तो पुलिस ने ही बता दिया कि अतीक को गलत नामजद किया गया है। तो इस पूरे मामले से देख सकते हैं कि अतीक का खौफ कितना था।
अगर थोड़ा पीछे चलें तो 25 जनवरी 2005 को जब बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या हुई थी और उमेश पाल ही अकेले ऐसे थे जो मुकर नहीं रहे थे। वो इस पर अड़े हुए थे कि हम अतीक को सजा दिलवा के रहेंगे। वह प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में जा रहे थे मोटरसाइकिल से, तभी 2006 में 28 फरवरी को उनका अपहरण कर लिया गया। और उनको इतना टॉर्चर किया गया, इतना मारा-पीटा गया कि जब उसके कैद से छूटे तो बोलने की स्थिति नहीं थे। और उसके बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकते रहे, पुलिस थाने जाते रहे। वहां के तमाम आला अफसरों से मिलकर शिकायत की लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। जुलाई 2007 में एफआईआर दर्ज हुई। तो अतीक का खौफ इतना है। ये भी माना जाता है कि पुलिस में भी उसके लोग हैं। आप इससे मान सकते हैं कि 100 मुकदमों में 50 मुकदमें ऐसे हैं जो जिसमें ढीली पैरवी के चलते कुछ हुआ ही नहीं।
तमाम मामलों में न तो गवाह मिले, न साक्ष्य जिसकी वजह से वह दोषमुक्त हो गया। पुलिस खुद जिसमें कह रही हो कि अतीक तो इसमें था ही नहीं, तो इतना खौफ था। उसकी इतनी पूरी सेटिंग कह सकते हैं, तो जाहिर सी बात है कि इस पूरे खौफ, दबदबा को यह सजा खत्म करेगी। पहली बार सजा होना, इससे पुलिस का इकबाल होता है। अगर ये बात सामने आएगी कि कोर्ट सजा भी देती है और सजा से उनको आगे मुश्किलें आ सकती हैं, तो लोगों के मन में इससे पुलिस के प्रति, कोर्ट के प्रति इकबाल बुलंद होगा। आपने अतीक अहमद के खौफ की बात की। खौफ अतीक अहमद के अंदर भी दिखा जब सजा के बाद यूपी की जेल के बजाए उसने साबरमती जेल वापस भेजने की गुजारिश की। तो यूपी की जेल में क्यों नहीं रहना चाहता वह? और साबरमती जेल में किस मामले में बंद है?
देखिए, एक किस्सा है जो पुराना है थोड़ा। 26 दिसंबर 2018 को को लखनऊ में रियल एस्टेट के व्यवसायी मोहित जायसवाल का किडनैप कर लिया गया। किडनैपिंग करने के बाद उनको कहीं ऐसी जगह नहीं ले जाया गया जो किसी बदमाश का अड्डा हो या मकान हो। उसको सीधे देवरिया जेल ले जाया गया, जहां पर अतीक अहमद बंद था। मोहित ने पुलिस वालों को खुद बताया कि अतीक और उसके साथियों ने मारा-पीटा, उनको धमकाया और करीब 45 करोड़ की प्रॉपर्टी अपने नाम लिखवा लिया। उसके बाद ये मामला इतना चर्चित हो गया, उसके बाद उसको बरेली जेल ट्रांसफर कर दिया गया। लोकसभा चुनाव नजदीक था तो बरेली जेल प्रशासन ने यह कहकर मना कर दिया कि अतीक अहमद बड़ा माफिया है, बड़ा गुंडा है इसको हम नहीं रखेंगे। इसके बाद चुनाव का हवाला देकर उसको नैनी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। चूंकि ये पूरा मामला चर्चित हो चुका था तो 2019 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले दो ऑर्डर दिए। एक, सीबीआई जांच की जाए इस पूरे मामले की और उन्होंने कहा कि अतीक अहमद को उत्तर प्रदेश से बाहर किसी जेल में शिफ्ट किया जाए।
दरअसल, कोर्ट का और लोगों का मानना था कि अतीक अहमद का जेलों में सिक्का चलता है। जैसे आपने देखा कि वह देवरिया जेल में है और एक रियल एस्टेट व्यवसायी को किडनैप करके वहां ले जाया गया और वहां उसको मारा-पीटा गया। उसके बाद जून 2019 में उसको अहमदाबाद के साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया। साबरमती जेल में वह अपने आपको थोड़ा सुरक्षित महसूस कर रहा है क्योंकि उसके तमाम साथी उमेश पाल हत्याकांड के बाद गायब हैं। कहीं छिप गए हैं। अब उसका नेटवर्क लगभग-लगभग ध्वस्त हो चुका है। तो उसको डर है कि जेल में कुछ भी हो सकता है क्योंकि उसने लोगों से केवल दुश्मनी ही मोल ली है तो जेलों में उसके तमाम दुश्मन भी मौजूद हैं। इसलिए उसने मांग कि है कि उसे साबरमती जेल शिफ्ट कर दिया जाए। और उमेश पाल अपहरण केस में तो उसे सजा हो गई लेकिन अब उमेश पाल की हत्या भी पिछले महीने कर दी गई। उसमें भी वह आरोपी है। वो मामला अभी अब चलेगा। उमेश पाल के परिवार वालों की अगर बात की जाए, तो क्या वो इस फैसले से संतुष्ट हैं? क्या कहना है उनका?
उमेश पाल के परिवार वाले इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी पत्नी जयापाल और उनकी मां शांति देवी, दोनों से हमारी बात हुई। दोनों की आंखें नम थीं। पत्नी तो रोने लगी। और उनका ये कहना है कि कम से कम फांसी की सजा मिलनी थी। उस मामले में वे आगे की पैरवी करेंगे। वे भी किसी से डर नहीं रहे हैं। उमेश पाल का पूरा परिवार ये चाहता है कि उनके साथ पूरा न्याय हो। आजीवन कारावास की सजा को वो बिलकुल भी नहीं मानते हैं। हालांकि अब कोर्ट ने सजा दी है तो आगे जो होगा वह कानूनी रूप से होगा लेकिन जब उमेश पाल की मां ने मीडिया से कहा कि मेरा बेटा शेर था। उसे धमकाया गया, किडनैपिंग की गई, मारपीट की गई और अंततः उसको मार दिया गया। लेकिन वो पीछे नहीं हटा। तो उसके परिवार वाले भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वो फांसी से कम की सजा पर बिलकुल भी पीछे नहीं हट रहे हैं। जी, एक बड़ा माफिया जिसका यूपी में खौफ था उसे कोर्ट ने सख्त सजा सुनाई है उम्रकैद की। देखना होगा, इससे क्या संदेश जाता है। क्या यूपी में अपराध पर लगाम लगेगी इससे? बहुत-बहुत शुक्रिया मनीष श्रीवास्तव जी आपका।
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यह भी सुनें या पढ़ेंः गुजरात में बैठे अतीक अहमद ने कैसे रची यूपी दहलाने की साजिश? मनीष जी, उमेश पाल अपहरण केस का फैसला सत्रह साल बाद आया, जबकि पिछले महीने ही उनकी सरेआम हत्या भी कर दी गई। उसमें भी अतीक अहमद ही मुख्य आरोपी है। तो क्या था ये सत्रह साल पुराना मामला और उम्रकैद की सजा सुनाते हुए क्या कहा है कोर्ट ने? Umesh Pal Hatyakand: यूपी में कानून व्यवस्था को लेकर क्यों मचा शोर? जी, आपको बता दें कि उमेश पाल की पिछले महीने चौबीस फरवरी को धूमनगंज, प्रयागराज में हत्या कर दी गई थी। वह बसपा के पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या में मुख्य गवाह थे। अट्ठाईस फरवरी दो हज़ार छः को इनका अपहरण कर लिया गया था। आज का फैसला इसी अपहरण के मामले में आया है। दरअसल, ये मामला इतना चर्चित था, उसके बावजूद उमेश पाल लगातार अपहरण को लेकर शिकायतें दर्ज कराते रहे, थाने में दौड़ते रहे लेकिन उनकी एफआईआर तक दर्ज नहीं हो रही थी। जब बीएसपी की सरकार बनी तब पाँच जुलाई दो हज़ार सात में इस मामले की एफआईआर दर्ज हुई। अतीक का प्रयागराज में और सरकार में इतना दबदबा था कि इस पूरे मामले की एफआईआर ही दर्ज नहीं हो रही थी। आज इलाहाबाद में एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट ने इनको सजा सुनाई है, हालांकि इस पूरे मामले में ग्यारह आरोपी बनाए गए थे। लेकिन इनमें सजा सिर्फ तीन को हुई है जिसमें माफिया अतीक अहमद, उनके वकील खान सोलत अनीस और शूटर है दिनेश पासी उनको सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। और क्षतिपूर्ति के रूप में एक-एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना अलग से लगाया गया है। यह उमेश पाल के परिवार को दिया जाएगा। इन सब मामले में पुलिस ने उनके भाई अशरफ को भी कोर्ट में पेश किया था। लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले इसलिए बरी कर दिया गया है। चूंकि अतीक अहमद पहले से ही हिरासत में थे, बाकी जो दो हैं खान सोलत अनीस और दिनेश पासी को तत्काल हिरासत में ले लिया गया है। यह मानिए कि जब से अतीक अपराध की दुनिया में है, तब से यह पहला मामला है, करीब तैंतालीस-चौंतालीस साल हो गए। एक हज़ार नौ सौ उन्यासी-अस्सी में अतीक के ऊपर पहला केस दर्ज हुआ था। तब से एक सौ से ज्यादा मुकदमे हैं। तब से यह पहला मामला है जिसमें उसे सजा हुई है। बहुत बड़ी बात है कि एक सौ एक मामले दर्ज हैं, चौंतालीस साल बाद पहली बार किसी मामले में सजा हुई है तो कितना महत्वपूर्ण है ये? क्या बाकी अपराधियों के लिए एक बड़ा संदेश देता है ये फैसला? क्या अपराध पर लगाम लग पाएगी इससे? पे एक सौ मुकदमें थे और करीब पचास से ज्यादा मुकदमें अब भी हैं। पचास मामलों में या तो कहीं न कहीं गवाह नहीं आए, या साक्ष्य नहीं जुटे या कोर्ट ने उसके खिलाफ गवाही नहीं दी तो उन सब मामलों में बरी हो चुका है। और बारह मुकदमें तो ऐसे हैं जिनमें मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन उसमें ट्रायल तक नहीं शुरू नहीं हो पाया। और छः मुकदमों में पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट तक लगा दी है। एक मामले में तो पुलिस ने ही बता दिया कि अतीक को गलत नामजद किया गया है। तो इस पूरे मामले से देख सकते हैं कि अतीक का खौफ कितना था। अगर थोड़ा पीछे चलें तो पच्चीस जनवरी दो हज़ार पाँच को जब बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या हुई थी और उमेश पाल ही अकेले ऐसे थे जो मुकर नहीं रहे थे। वो इस पर अड़े हुए थे कि हम अतीक को सजा दिलवा के रहेंगे। वह प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में जा रहे थे मोटरसाइकिल से, तभी दो हज़ार छः में अट्ठाईस फरवरी को उनका अपहरण कर लिया गया। और उनको इतना टॉर्चर किया गया, इतना मारा-पीटा गया कि जब उसके कैद से छूटे तो बोलने की स्थिति नहीं थे। और उसके बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकते रहे, पुलिस थाने जाते रहे। वहां के तमाम आला अफसरों से मिलकर शिकायत की लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। जुलाई दो हज़ार सात में एफआईआर दर्ज हुई। तो अतीक का खौफ इतना है। ये भी माना जाता है कि पुलिस में भी उसके लोग हैं। आप इससे मान सकते हैं कि एक सौ मुकदमों में पचास मुकदमें ऐसे हैं जो जिसमें ढीली पैरवी के चलते कुछ हुआ ही नहीं। तमाम मामलों में न तो गवाह मिले, न साक्ष्य जिसकी वजह से वह दोषमुक्त हो गया। पुलिस खुद जिसमें कह रही हो कि अतीक तो इसमें था ही नहीं, तो इतना खौफ था। उसकी इतनी पूरी सेटिंग कह सकते हैं, तो जाहिर सी बात है कि इस पूरे खौफ, दबदबा को यह सजा खत्म करेगी। पहली बार सजा होना, इससे पुलिस का इकबाल होता है। अगर ये बात सामने आएगी कि कोर्ट सजा भी देती है और सजा से उनको आगे मुश्किलें आ सकती हैं, तो लोगों के मन में इससे पुलिस के प्रति, कोर्ट के प्रति इकबाल बुलंद होगा। आपने अतीक अहमद के खौफ की बात की। खौफ अतीक अहमद के अंदर भी दिखा जब सजा के बाद यूपी की जेल के बजाए उसने साबरमती जेल वापस भेजने की गुजारिश की। तो यूपी की जेल में क्यों नहीं रहना चाहता वह? और साबरमती जेल में किस मामले में बंद है? देखिए, एक किस्सा है जो पुराना है थोड़ा। छब्बीस दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह को को लखनऊ में रियल एस्टेट के व्यवसायी मोहित जायसवाल का किडनैप कर लिया गया। किडनैपिंग करने के बाद उनको कहीं ऐसी जगह नहीं ले जाया गया जो किसी बदमाश का अड्डा हो या मकान हो। उसको सीधे देवरिया जेल ले जाया गया, जहां पर अतीक अहमद बंद था। मोहित ने पुलिस वालों को खुद बताया कि अतीक और उसके साथियों ने मारा-पीटा, उनको धमकाया और करीब पैंतालीस करोड़ की प्रॉपर्टी अपने नाम लिखवा लिया। उसके बाद ये मामला इतना चर्चित हो गया, उसके बाद उसको बरेली जेल ट्रांसफर कर दिया गया। लोकसभा चुनाव नजदीक था तो बरेली जेल प्रशासन ने यह कहकर मना कर दिया कि अतीक अहमद बड़ा माफिया है, बड़ा गुंडा है इसको हम नहीं रखेंगे। इसके बाद चुनाव का हवाला देकर उसको नैनी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। चूंकि ये पूरा मामला चर्चित हो चुका था तो दो हज़ार उन्नीस में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले दो ऑर्डर दिए। एक, सीबीआई जांच की जाए इस पूरे मामले की और उन्होंने कहा कि अतीक अहमद को उत्तर प्रदेश से बाहर किसी जेल में शिफ्ट किया जाए। दरअसल, कोर्ट का और लोगों का मानना था कि अतीक अहमद का जेलों में सिक्का चलता है। जैसे आपने देखा कि वह देवरिया जेल में है और एक रियल एस्टेट व्यवसायी को किडनैप करके वहां ले जाया गया और वहां उसको मारा-पीटा गया। उसके बाद जून दो हज़ार उन्नीस में उसको अहमदाबाद के साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया। साबरमती जेल में वह अपने आपको थोड़ा सुरक्षित महसूस कर रहा है क्योंकि उसके तमाम साथी उमेश पाल हत्याकांड के बाद गायब हैं। कहीं छिप गए हैं। अब उसका नेटवर्क लगभग-लगभग ध्वस्त हो चुका है। तो उसको डर है कि जेल में कुछ भी हो सकता है क्योंकि उसने लोगों से केवल दुश्मनी ही मोल ली है तो जेलों में उसके तमाम दुश्मन भी मौजूद हैं। इसलिए उसने मांग कि है कि उसे साबरमती जेल शिफ्ट कर दिया जाए। और उमेश पाल अपहरण केस में तो उसे सजा हो गई लेकिन अब उमेश पाल की हत्या भी पिछले महीने कर दी गई। उसमें भी वह आरोपी है। वो मामला अभी अब चलेगा। उमेश पाल के परिवार वालों की अगर बात की जाए, तो क्या वो इस फैसले से संतुष्ट हैं? क्या कहना है उनका? उमेश पाल के परिवार वाले इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी पत्नी जयापाल और उनकी मां शांति देवी, दोनों से हमारी बात हुई। दोनों की आंखें नम थीं। पत्नी तो रोने लगी। और उनका ये कहना है कि कम से कम फांसी की सजा मिलनी थी। उस मामले में वे आगे की पैरवी करेंगे। वे भी किसी से डर नहीं रहे हैं। उमेश पाल का पूरा परिवार ये चाहता है कि उनके साथ पूरा न्याय हो। आजीवन कारावास की सजा को वो बिलकुल भी नहीं मानते हैं। हालांकि अब कोर्ट ने सजा दी है तो आगे जो होगा वह कानूनी रूप से होगा लेकिन जब उमेश पाल की मां ने मीडिया से कहा कि मेरा बेटा शेर था। उसे धमकाया गया, किडनैपिंग की गई, मारपीट की गई और अंततः उसको मार दिया गया। लेकिन वो पीछे नहीं हटा। तो उसके परिवार वाले भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वो फांसी से कम की सजा पर बिलकुल भी पीछे नहीं हट रहे हैं। जी, एक बड़ा माफिया जिसका यूपी में खौफ था उसे कोर्ट ने सख्त सजा सुनाई है उम्रकैद की। देखना होगा, इससे क्या संदेश जाता है। क्या यूपी में अपराध पर लगाम लगेगी इससे? बहुत-बहुत शुक्रिया मनीष श्रीवास्तव जी आपका।
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एनबीटी, लखनऊ : किडजी भास्कर एजुकेशन का 11वां वार्षिकोत्सव शनिवार को संगीत नाट्य अकेडमी में आयोजित किया गया। इस मौके पर प्राइमरी और प्री-प्राइमरी के बच्चों ने बाल शोषण पर एक नाटक पेश कर बाल अधिकारों के प्रति आवाज उठाई। इसी क्रम में बच्चों ने सोलर सिस्टम पर एक लेक्चर भी दिया। इसके साथ ही बच्चों ने बाल-गीत जंगल में जानवर खेलते हैं, हम इंडिया वाले. . . समेत कई गानों पर डांस परफॉर्मेंस दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा रहे।
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एनबीटी, लखनऊ : किडजी भास्कर एजुकेशन का ग्यारहवां वार्षिकोत्सव शनिवार को संगीत नाट्य अकेडमी में आयोजित किया गया। इस मौके पर प्राइमरी और प्री-प्राइमरी के बच्चों ने बाल शोषण पर एक नाटक पेश कर बाल अधिकारों के प्रति आवाज उठाई। इसी क्रम में बच्चों ने सोलर सिस्टम पर एक लेक्चर भी दिया। इसके साथ ही बच्चों ने बाल-गीत जंगल में जानवर खेलते हैं, हम इंडिया वाले. . . समेत कई गानों पर डांस परफॉर्मेंस दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा रहे।
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राममंदिर को लेकर रामभक्तों में काफी उत्साह है। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। प्राचीन किलों व नदियों पर बनने वाले बड़े बांधों की शैली में तैयार हो रही राम मंदिर नींव की ऊपरी सतह का क्षेत्रफल नीचे की सतह से 35 हजार चार सौ वर्ग फीट कम होगा। इसे परत दर परत एक निश्चित पैमाने के आधार पर कम किया जा रहा है। नींव फिलिंग का कार्य पूरा होने के बाद यह शंक्वाकार दिखेगी। जब नींव की अंतिम लेयर ढल कर पूरी होगी तो इसकी ऊपरी सतह 84 हजार छह सौ वर्ग फीट की ही बचेगी। इसी आधार पर ही तराशे गए पत्थर बिछाए जाएंगे और फिर उसके ऊपर मंदिर आकार लेगा। इन पत्थरों को 12 से 15 फीट ऊंचाई तक लगाया जाना है।
मंदिर की नींव की निचली सतह एक लाख 20 हजार क्षेत्रफल में है। इस सतह की लम्बाई चार सौ फीट तथा चौड़ाई तीन सौ फीट थी, जो ऊपरी सतह तक आते आते 360 फीट लम्बी तथा 235 फीट ही बचेगी। इससे पहले निचली सतह के संपूर्ण क्षेत्रफल में 36 फीट नीचे तक खोदाई कर मलबा निकाला गया। फिर पूरे क्षेत्र में नींव फिलिंग का कार्य शुरू किया गया। अब तक 32 लेयर ढाली जा चुकी हैं। कुल 44-45 लेयर ढाली जानी है। एक लेयर 12 इंच मोटी है, इस पर बाइब्रो रोलर चला कर इसको दो इंच दबाया जाता है। इस तरह एक लेयर की मोटाई दस इंच ही बचती है।
नींव की ढलाई में पत्थर की गिट्टी व पाउडर, कोयले की राख, सीमेंट का निर्धारित अनुपात मिला कर इसी मैटीरियल से नींव की ढलाई की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरागत निर्माण की शैली में नींव की निचली सतह ऊपरी सतह से हमेशा ही अधिक होती है। इससे नींव हमेशा मजबूत होती है और बनने वाला भवन कालजयी होता है। गौरतलब है नींव खोदाई के दौरान निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व अधिकारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, हालांकि देश के विशेषज्ञों ने इन परेशानियों का हल ढूंढा और राममंदिर निर्माण कार्य निर्बाध गति से किया जा रहा है।
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राममंदिर को लेकर रामभक्तों में काफी उत्साह है। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। प्राचीन किलों व नदियों पर बनने वाले बड़े बांधों की शैली में तैयार हो रही राम मंदिर नींव की ऊपरी सतह का क्षेत्रफल नीचे की सतह से पैंतीस हजार चार सौ वर्ग फीट कम होगा। इसे परत दर परत एक निश्चित पैमाने के आधार पर कम किया जा रहा है। नींव फिलिंग का कार्य पूरा होने के बाद यह शंक्वाकार दिखेगी। जब नींव की अंतिम लेयर ढल कर पूरी होगी तो इसकी ऊपरी सतह चौरासी हजार छह सौ वर्ग फीट की ही बचेगी। इसी आधार पर ही तराशे गए पत्थर बिछाए जाएंगे और फिर उसके ऊपर मंदिर आकार लेगा। इन पत्थरों को बारह से पंद्रह फीट ऊंचाई तक लगाया जाना है। मंदिर की नींव की निचली सतह एक लाख बीस हजार क्षेत्रफल में है। इस सतह की लम्बाई चार सौ फीट तथा चौड़ाई तीन सौ फीट थी, जो ऊपरी सतह तक आते आते तीन सौ साठ फीट लम्बी तथा दो सौ पैंतीस फीट ही बचेगी। इससे पहले निचली सतह के संपूर्ण क्षेत्रफल में छत्तीस फीट नीचे तक खोदाई कर मलबा निकाला गया। फिर पूरे क्षेत्र में नींव फिलिंग का कार्य शुरू किया गया। अब तक बत्तीस लेयर ढाली जा चुकी हैं। कुल चौंतालीस-पैंतालीस लेयर ढाली जानी है। एक लेयर बारह इंच मोटी है, इस पर बाइब्रो रोलर चला कर इसको दो इंच दबाया जाता है। इस तरह एक लेयर की मोटाई दस इंच ही बचती है। नींव की ढलाई में पत्थर की गिट्टी व पाउडर, कोयले की राख, सीमेंट का निर्धारित अनुपात मिला कर इसी मैटीरियल से नींव की ढलाई की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरागत निर्माण की शैली में नींव की निचली सतह ऊपरी सतह से हमेशा ही अधिक होती है। इससे नींव हमेशा मजबूत होती है और बनने वाला भवन कालजयी होता है। गौरतलब है नींव खोदाई के दौरान निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व अधिकारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, हालांकि देश के विशेषज्ञों ने इन परेशानियों का हल ढूंढा और राममंदिर निर्माण कार्य निर्बाध गति से किया जा रहा है।
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।पायल (Paayal)
कन्या राशि के पायल नाम की लड़कियाँ बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। मान्यता है कि कन्या राशि के आराध्य देव कुबेर जी होते हैं। इस राशि के पायल नाम की लड़कियाँ पेट और आंतों की बीमारियों से परेशान रहते हैं। कन्या राशि के पायल नाम की लड़कियाँ कब्ज और अल्सर से पीड़ित हो सकते हैं। इस राशि के पायल नाम की लड़कियाँ अपेन्डिसाइटिस और यौन रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। इन पायल नाम की लड़कियों में सहनशीलता, दयालुता और हंसमुख स्वभाव देखने को मिलता है। इन पायल नाम की लड़कियों का मस्तिष्क शांत नहीं रह पाता।
पायल नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि पायल नाम का अर्थ पायल होता है। पायल होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक पायल नाम के लोगों में भी दिखती है। पायल नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि पायल नाम का मतलब पायल होता है और इस अर्थ का प्रभाव पायल नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को पायल देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार पायल नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि पायल नाम का अर्थ पायल है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे पायल नाम की राशि, पायल का लकी नंबर व इस नाम के पायल के बारे में संक्षेप में बताया है।
पायल नाम की लड़कियां बुध ग्रह के अधीन आती हैं और इनका शुभ अंक 5 होता है। 5 अंक वाली पायल नाम की लड़कियां अनुशासनहीन होती हैं लेकिन ये बिना किसी योजना के ही सफल हो जाती हैं। पायल नाम की 5 अंक से संबंधित लड़कियां अपना लक्ष्य स्वयं बनाती हैं और अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। पायल नाम के महिलाएं रोचक होती हैं। दूसरों की तुलना में इनकी मानसिक शक्ति तीव्र होती है। इस अंक वाली पायल नाम की लड़कियां ज्ञान प्राप्ति के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। पायल नाम की लड़कियां कुछ भी नया करने या सोचने में हिचकिचाते नहीं हैं और जो भी करना है उसे पूरे जोश के साथ करती हैं।
जिन लड़कियों का नाम पायल है, उनकी राशि कन्या होती है। पायल नाम की लड़कियों को अव्यवस्थित चीजें पसंद नहीं है, उन्हें सभी चीजों को सही जगह पर रखना पसंद होता है। पायल नाम की महिलाएं दोहरे व्यक्तित्व की होती हैं और ये कई बार अलग-अलग तरीके से पेश आती हैं। इस राशि से जुड़ी पायल नाम की महिलाओं में अच्छे संगीतकार व लेखक बनने के गुण होते हैं। इतना ही नहीं ये मीडिया व संचार क्षेत्रों में भी सफल होती हैं। पायल नाम की महिलाओं को जिस चीज की इच्छा हो जाती है, वे उसे धीरे-धीरे पा ही लेती हैं। पायल नाम की महिलाओं /लड़कियों को अलग-अलग प्रकार के और चमकीले रंग के कपड़े पहनना पसंद करती हैं।
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।पायल कन्या राशि के पायल नाम की लड़कियाँ बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। मान्यता है कि कन्या राशि के आराध्य देव कुबेर जी होते हैं। इस राशि के पायल नाम की लड़कियाँ पेट और आंतों की बीमारियों से परेशान रहते हैं। कन्या राशि के पायल नाम की लड़कियाँ कब्ज और अल्सर से पीड़ित हो सकते हैं। इस राशि के पायल नाम की लड़कियाँ अपेन्डिसाइटिस और यौन रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। इन पायल नाम की लड़कियों में सहनशीलता, दयालुता और हंसमुख स्वभाव देखने को मिलता है। इन पायल नाम की लड़कियों का मस्तिष्क शांत नहीं रह पाता। पायल नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि पायल नाम का अर्थ पायल होता है। पायल होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक पायल नाम के लोगों में भी दिखती है। पायल नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि पायल नाम का मतलब पायल होता है और इस अर्थ का प्रभाव पायल नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को पायल देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार पायल नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि पायल नाम का अर्थ पायल है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे पायल नाम की राशि, पायल का लकी नंबर व इस नाम के पायल के बारे में संक्षेप में बताया है। पायल नाम की लड़कियां बुध ग्रह के अधीन आती हैं और इनका शुभ अंक पाँच होता है। पाँच अंक वाली पायल नाम की लड़कियां अनुशासनहीन होती हैं लेकिन ये बिना किसी योजना के ही सफल हो जाती हैं। पायल नाम की पाँच अंक से संबंधित लड़कियां अपना लक्ष्य स्वयं बनाती हैं और अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। पायल नाम के महिलाएं रोचक होती हैं। दूसरों की तुलना में इनकी मानसिक शक्ति तीव्र होती है। इस अंक वाली पायल नाम की लड़कियां ज्ञान प्राप्ति के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। पायल नाम की लड़कियां कुछ भी नया करने या सोचने में हिचकिचाते नहीं हैं और जो भी करना है उसे पूरे जोश के साथ करती हैं। जिन लड़कियों का नाम पायल है, उनकी राशि कन्या होती है। पायल नाम की लड़कियों को अव्यवस्थित चीजें पसंद नहीं है, उन्हें सभी चीजों को सही जगह पर रखना पसंद होता है। पायल नाम की महिलाएं दोहरे व्यक्तित्व की होती हैं और ये कई बार अलग-अलग तरीके से पेश आती हैं। इस राशि से जुड़ी पायल नाम की महिलाओं में अच्छे संगीतकार व लेखक बनने के गुण होते हैं। इतना ही नहीं ये मीडिया व संचार क्षेत्रों में भी सफल होती हैं। पायल नाम की महिलाओं को जिस चीज की इच्छा हो जाती है, वे उसे धीरे-धीरे पा ही लेती हैं। पायल नाम की महिलाओं /लड़कियों को अलग-अलग प्रकार के और चमकीले रंग के कपड़े पहनना पसंद करती हैं।
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जानिए क्या कहा मेघवाल नेबीजेपी के सीनियर विधायक कैलाश मेघवाल ने सदन में कहा कि प्रदेश के दक्षिणी राजस्थान में 'भील-स्थान' की मांग उठ रही है। भीलस्थान की मांग राजस्थान को खंडित करने की मांग है। यहां नक्सलवाद के बीज बोए जा रहे हैं। इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये मांग दक्षिणी राजस्थान ही नहीं उठी, लेकिन अब इसकी पहुंच विधानसभा तक भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश रंग रगीले राजस्थान का एक हिस्सा क्यों हमसे अलग होना चाहता है। यह सोचने का विषय है।
उन्होंने कहा कि बंगाल में नक्सलवाद से कितना खून खराबा हुआ? यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। मेघवाल ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान में भी अब तो नक्सलवाद के बीज पहुंच चुके हैं और आदिवासियों में असंतोष बढ़ रहा है। इस असंतोष के कारण दक्षिणी राजस्थान में माओवाद के बीज भी पनपने लगे हैं।
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जानिए क्या कहा मेघवाल नेबीजेपी के सीनियर विधायक कैलाश मेघवाल ने सदन में कहा कि प्रदेश के दक्षिणी राजस्थान में 'भील-स्थान' की मांग उठ रही है। भीलस्थान की मांग राजस्थान को खंडित करने की मांग है। यहां नक्सलवाद के बीज बोए जा रहे हैं। इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये मांग दक्षिणी राजस्थान ही नहीं उठी, लेकिन अब इसकी पहुंच विधानसभा तक भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश रंग रगीले राजस्थान का एक हिस्सा क्यों हमसे अलग होना चाहता है। यह सोचने का विषय है। उन्होंने कहा कि बंगाल में नक्सलवाद से कितना खून खराबा हुआ? यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। मेघवाल ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान में भी अब तो नक्सलवाद के बीज पहुंच चुके हैं और आदिवासियों में असंतोष बढ़ रहा है। इस असंतोष के कारण दक्षिणी राजस्थान में माओवाद के बीज भी पनपने लगे हैं।
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धनबाद पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से शहर के कई लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसा कर, उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है.
कोयला नगर धनबाद के लोयाबाद थाना की पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से शहर के कई लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसा कर, उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह की सरगना सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें 3 महिला और 1 पुरुष शामिल है. पुलिस ने आरोपियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब इस गिरोह के लोग एक युवक को ब्लैकमेल कर 20 हजार ऐंठने की कोशिश कर रहे थे. सभी को धनबाद जिले के लोयाबाद थाना की पुलिस ने रंगे हाथों रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया है.
धनबाद पुलिस ने एक महिला को कुछ दिनों पहले गिरफ्तार कर ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल भेजा था. उसी महिला की निशानदेही पर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग करने वाली गैंग की सरगना उषा देवी सहित तीन लोगों को लोयाबाद थाना क्षेत्र के घर से गिरफ्तार किया गया है.
ब्लैकमेलिंग गैंग का शिकार बने सुदामडीह निवासी एक युवक ने लोयाबाद थाने में इन महिलाओं के खिलाफ ब्लैकमेलिंग करके रुपए एंठने की शिकायत की थी. उसी युवक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लेडी सरगना उषा देवी और उनके तीन साथियों को गिरफ्तार किया. चारों के खिलाफ थाने में 77 / 2020 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
वहीं पुलिस अब ब्लैकमेलिंग गैंग की सरगना उषा देवी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि अब तक गिरोह के लोगों ने कितनों को अपना शिकार बनाया है , और इस गिरोह के तार किन-किन जिलों और किन किन राज्यों तक फैले हुए हैं.
बता दें कि धनबाद जिले के ही वासेपुर के रहने वाले हैं प्रोफेसर को भी इसी तरह से झांसे में लेकर ब्लैकमेलिंग कर 4 लाख ठग लिए थे, हालांकि समाज के लोकलाज की वजह से उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी. अमूमन ऐसा देखा गया है कि देश के कई अन्य राज्यों में भी वीडियो कॉल के बहाने महिलाओ द्वारा अश्लील तस्वीरें दिखाकर बाद में ब्लैकमेलिंग करके पैसे ऐंठने के कई मामले प्रकाश में आए हैं. इस गैंग के शिकार युवा से लेकर बुजुर्ग तक बने हैं.
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धनबाद पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से शहर के कई लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसा कर, उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. कोयला नगर धनबाद के लोयाबाद थाना की पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से शहर के कई लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसा कर, उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह की सरगना सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें तीन महिला और एक पुरुष शामिल है. पुलिस ने आरोपियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब इस गिरोह के लोग एक युवक को ब्लैकमेल कर बीस हजार ऐंठने की कोशिश कर रहे थे. सभी को धनबाद जिले के लोयाबाद थाना की पुलिस ने रंगे हाथों रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया है. धनबाद पुलिस ने एक महिला को कुछ दिनों पहले गिरफ्तार कर ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल भेजा था. उसी महिला की निशानदेही पर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग करने वाली गैंग की सरगना उषा देवी सहित तीन लोगों को लोयाबाद थाना क्षेत्र के घर से गिरफ्तार किया गया है. ब्लैकमेलिंग गैंग का शिकार बने सुदामडीह निवासी एक युवक ने लोयाबाद थाने में इन महिलाओं के खिलाफ ब्लैकमेलिंग करके रुपए एंठने की शिकायत की थी. उसी युवक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लेडी सरगना उषा देवी और उनके तीन साथियों को गिरफ्तार किया. चारों के खिलाफ थाने में सतहत्तर / दो हज़ार बीस के तहत मामला दर्ज किया गया है. वहीं पुलिस अब ब्लैकमेलिंग गैंग की सरगना उषा देवी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि अब तक गिरोह के लोगों ने कितनों को अपना शिकार बनाया है , और इस गिरोह के तार किन-किन जिलों और किन किन राज्यों तक फैले हुए हैं. बता दें कि धनबाद जिले के ही वासेपुर के रहने वाले हैं प्रोफेसर को भी इसी तरह से झांसे में लेकर ब्लैकमेलिंग कर चार लाख ठग लिए थे, हालांकि समाज के लोकलाज की वजह से उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी. अमूमन ऐसा देखा गया है कि देश के कई अन्य राज्यों में भी वीडियो कॉल के बहाने महिलाओ द्वारा अश्लील तस्वीरें दिखाकर बाद में ब्लैकमेलिंग करके पैसे ऐंठने के कई मामले प्रकाश में आए हैं. इस गैंग के शिकार युवा से लेकर बुजुर्ग तक बने हैं.
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सदागि। अंत [कम्महि० कम्मरिण०] । सादावेदणीयजस० - उच्चागोढ़ जह० हिदि० संखेज्जाणि वाससदाणि । अंतोमु० आबा० । [[आवाध० कम्महि० कम्मणि ०] । चदुसंज० जह० हिदि० सोलस वस्साणि । अंतोमु● आवा० । [[आवाधृ० कम्महि० कम्परिण०] । पुरिसवेद० जह० हिदि० अह वस्साणि । अंतो० ब० [आबकम्महि० कम्मणि ०] । सेसाणि पंचि। दियभंगो । त्रु सवेद● पंचरण ० - चदुदंसणा० - सादावे० - चदुसंज० - पुरिस० - जसगि उच्चागो०- पंचंतरा० इत्थिवेदभंगो । सेसं मूलोघं । अगद• मूलोघं ।
O५८. कोधे पंचणा०-चदुदंसणाः - पंचंतरा० जह० द्विदि० संखेज्जणि वासाणि । अंत । [कम्म० कम्मणि०] । सादावे० जसगि०-उच्चागो● जह० द्विदि० संखेज्जाणि वासस० । अंतो० आवा० । [आवाधृ० कम्महि कम्मणि ०] चदुसंज० जह० हिदि० वे मासं । ०० । [आबाधू० कम्महि० कम्मरिण ०]। माग पंचणा०-चदुदंसणा० - पचंतरा० जह० द्विदि० वासपुधत्तं । अंतो० आवा । [आवाधू० कम्महि० कम्मणि ०] । सादावे० - जसगि०उच्चागो० जह० द्विदि० संखेज्जाणि वासारिण । [[अंतो० आबा० [आवाधू० कम्महि० कम्मणि ०] । तिरिय संज० जह० हिदि० मासो । अंतोमु०
अन्तरायका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है । अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधा न्यून कर्मस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्चगोसे त्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। चार संज्वलनोंका जघन्य स्थितिबन्ध सोलह वर्ष है । [अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आयाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। पुरुषवेदका जघन्य स्थितिबन्ध आठ वर्ष है। अन्तमु हुर्त प्रमाण आबाधा है, और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। तथा शेष प्रकृतियोंका भङ्ग पञ्चेन्द्रियोंके समान है। नपुंसक वेदवाले जीवोंमें पचि ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण, साता वेदनीय, चार संज्वलन, पुरुषवेद, यशः कीर्ति, उच्चगोत्र और पांच अन्तरायका भङ्ग स्त्रोवेदी जीवोंके समान है। तथा शेष प्रकृतियाँका भङ्ग मूलोधके समान है। अपगतवेदी जीवोंमें अपनी सब प्रकृतियोंका भङ्ग मूलोधके समान है।
५८. क्रोध कषायवाले जीवोंमें पांच ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण और पांच अन्तराय का जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातवर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है ब न्यून कर्मस्थतिप्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्चगोत्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। चार संज्वलनका जघन्य स्थितिबन्ध दो महीना है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और श्राबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। मान कषायवाले जीवमें पांच ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण और पांच अन्तरायका जघन्य स्थितिबन्ध वर्षपृथक्त्वप्रमाण है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आवाधा है और आबाधासे न्यून कमँस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्च गोत्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। तीन
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सदागि। अंत [कम्महिशून्य कम्मरिणशून्य] । सादावेदणीयजसशून्य - उच्चागोढ़ जहशून्य हिदिशून्य संखेज्जाणि वाससदाणि । अंतोमुशून्य आबाशून्य । [[आवाधशून्य कम्महिशून्य कम्मणि शून्य] । चदुसंजशून्य जहशून्य हिदिशून्य सोलस वस्साणि । अंतोमु● आवाशून्य । [[आवाधृशून्य कम्महिशून्य कम्परिणशून्य] । पुरिसवेदशून्य जहशून्य हिदिशून्य अह वस्साणि । अंतोशून्य बशून्य [आबकम्महिशून्य कम्मणि शून्य] । सेसाणि पंचि। दियभंगो । त्रु सवेद● पंचरण शून्य - चदुदंसणाशून्य - सादावेशून्य - चदुसंजशून्य - पुरिसशून्य - जसगि उच्चागोशून्य- पंचंतराशून्य इत्थिवेदभंगो । सेसं मूलोघं । अगद• मूलोघं । Oअट्ठावन. कोधे पंचणाशून्य-चदुदंसणाः - पंचंतराशून्य जहशून्य द्विदिशून्य संखेज्जणि वासाणि । अंत । [कम्मशून्य कम्मणिशून्य] । सादावेशून्य जसगिशून्य-उच्चागो● जहशून्य द्विदिशून्य संखेज्जाणि वाससशून्य । अंतोशून्य आवाशून्य । [आवाधृशून्य कम्महि कम्मणि शून्य] चदुसंजशून्य जहशून्य हिदिशून्य वे मासं । शून्य । [आबाधूशून्य कम्महिशून्य कम्मरिण शून्य]। माग पंचणाशून्य-चदुदंसणाशून्य - पचंतराशून्य जहशून्य द्विदिशून्य वासपुधत्तं । अंतोशून्य आवा । [आवाधूशून्य कम्महिशून्य कम्मणि शून्य] । सादावेशून्य - जसगिशून्यउच्चागोशून्य जहशून्य द्विदिशून्य संखेज्जाणि वासारिण । [[अंतोशून्य आबाशून्य [आवाधूशून्य कम्महिशून्य कम्मणि शून्य] । तिरिय संजशून्य जहशून्य हिदिशून्य मासो । अंतोमुशून्य अन्तरायका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है । अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधा न्यून कर्मस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्चगोसे त्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। चार संज्वलनोंका जघन्य स्थितिबन्ध सोलह वर्ष है । [अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आयाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। पुरुषवेदका जघन्य स्थितिबन्ध आठ वर्ष है। अन्तमु हुर्त प्रमाण आबाधा है, और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। तथा शेष प्रकृतियोंका भङ्ग पञ्चेन्द्रियोंके समान है। नपुंसक वेदवाले जीवोंमें पचि ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण, साता वेदनीय, चार संज्वलन, पुरुषवेद, यशः कीर्ति, उच्चगोत्र और पांच अन्तरायका भङ्ग स्त्रोवेदी जीवोंके समान है। तथा शेष प्रकृतियाँका भङ्ग मूलोधके समान है। अपगतवेदी जीवोंमें अपनी सब प्रकृतियोंका भङ्ग मूलोधके समान है। अट्ठावन. क्रोध कषायवाले जीवोंमें पांच ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण और पांच अन्तराय का जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातवर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है ब न्यून कर्मस्थतिप्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्चगोत्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। चार संज्वलनका जघन्य स्थितिबन्ध दो महीना है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और श्राबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। मान कषायवाले जीवमें पांच ज्ञानावरण, चार दर्शनावरण और पांच अन्तरायका जघन्य स्थितिबन्ध वर्षपृथक्त्वप्रमाण है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आवाधा है और आबाधासे न्यून कमँस्थिति प्रमाण कर्मनिषेक है। साता वेदनीय, यशः कीर्ति और उच्च गोत्रका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यात सौ वर्ष है। अन्तर्मुहूर्त प्रमाण आबाधा है और आबाधासे न्यून कर्मस्थितिप्रमाण कर्मनिषेक है। तीन
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चंडीगढ़-कैंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व जल शक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। शिक्षा जीवन की एक ऐसी पूंजी है, जिससे हर समस्या का हल किया जा सकता है। वह रविवार को अंबाला शहर के पीकेआर जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस मौके पर उनके साथ अंबाला शहर के विधायक असीम गोयल भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने इस अवसर पर बीएड और एमएड की छात्राओं को डिग्रियां भी वितरित की। श्री कटारिया ने इस मौके पर छात्राओं को जीवन में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि जो लक्ष्य उन्होंने जीवन में सोच रखा हैए उस पर वह कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ें, निश्चय ही उन्हें सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बल पर हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम हरियाणा से शुरू किया था और हरियाणा ने उसमें बेहतर कार्य किया है।
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चंडीगढ़-कैंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व जल शक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। शिक्षा जीवन की एक ऐसी पूंजी है, जिससे हर समस्या का हल किया जा सकता है। वह रविवार को अंबाला शहर के पीकेआर जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इस मौके पर उनके साथ अंबाला शहर के विधायक असीम गोयल भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने इस अवसर पर बीएड और एमएड की छात्राओं को डिग्रियां भी वितरित की। श्री कटारिया ने इस मौके पर छात्राओं को जीवन में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि जो लक्ष्य उन्होंने जीवन में सोच रखा हैए उस पर वह कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ें, निश्चय ही उन्हें सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बल पर हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम हरियाणा से शुरू किया था और हरियाणा ने उसमें बेहतर कार्य किया है।
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मिनिषा को हो गया प्यार!
मुंबई, (एजेंसी)। मिनिषा लांबा और मुकुल देओरा की नजदीकियों के इन दिनों बॉलीवुड में चर्चा है। मिनिषा की फिल्म 'भेजा फाय2' के मुकुल निर्माता हैं। 'हम तुम और शबाना' फिल्म भी उन्होंने ही रिलीज की है। सूत्रों के बीच बात दोस्ती से आगे बढ़ चुकी है। दोनों पार्टियों में जिस तरीके से मिलते हैं वो कुछ और ही बयां करता है। गौरतलब है कि मिनिषा लांबा उन अभिनेत्रियों में से हैं जिनका ध्यान अपने काम पर ही होता है। रोमांस को लेकर वे कभी भी गॉसिप का हिस्सा नहीं बनी। इसलिए जब उनका नाम मुकुल से जोड़ा जा रहा है तो इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। फिलहाल मिनिषा और मुकुल दोनों ने ही इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।
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मिनिषा को हो गया प्यार! मुंबई, । मिनिषा लांबा और मुकुल देओरा की नजदीकियों के इन दिनों बॉलीवुड में चर्चा है। मिनिषा की फिल्म 'भेजा फायदो' के मुकुल निर्माता हैं। 'हम तुम और शबाना' फिल्म भी उन्होंने ही रिलीज की है। सूत्रों के बीच बात दोस्ती से आगे बढ़ चुकी है। दोनों पार्टियों में जिस तरीके से मिलते हैं वो कुछ और ही बयां करता है। गौरतलब है कि मिनिषा लांबा उन अभिनेत्रियों में से हैं जिनका ध्यान अपने काम पर ही होता है। रोमांस को लेकर वे कभी भी गॉसिप का हिस्सा नहीं बनी। इसलिए जब उनका नाम मुकुल से जोड़ा जा रहा है तो इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। फिलहाल मिनिषा और मुकुल दोनों ने ही इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।
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RANCHI: कहीं छोटे-छोटे बच्चे बिलख रहे हैं, तो कहीं बूढ़ी में तीखी धूप में तपते हुए सिसक रही है। वहीं, असहाय पिता परिवार की बर्बादी में जितना हो सके घर का सामान बचाने में जुटे हैं। सबका एक ही दर्द है कि हमारा आशियाना उजाड़ दिया। छोटे-छोटे बच्चों, बूढ़ी मां और पूरे परिवार को लेकर अब कहां जाएंगे। यह नजारा रविवार को कांके डैम साइड इलाके में दिखा, जहां जिला प्रशासन के निर्देश पर एन्क्रोचमेंट कर बनाए गए ब्8 घरों पर बुलडोजर चला और सभी देखते-देखते ढाह दिए गए। अभियान का नेतृत्व हेहल सीओ अनिल सिंह, बड़गाई सीओ बिनोद प्रजापति और कांके सीओ प्रभात भूषण कर रहे थे।
यह अभियान सुबह साढ़े नौ बजे ही शुरू हो गया था, प्रशासन के लोग सुबह से ही पांच जेसीबी मशीन लाकर डैम साइड एरिया में पहुंच गए थे। उनको देखते ही लोग उनके सामने पहुंच गए और आग्रह करने लगे की उनको थोड़ा समय दिया जाए, लेकिन प्रशासन के लोगों ने एक न सुनी। उन्होंने निर्देश दिया कि ऊपर से आदेश है। इसको तोड़ना ही है और देखते देखते सभी के सामने घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। शाम पांच बजे तक अभियान चला।
हालांकि यहां पर सबसे अधिक लोगों ने एसबेस्टस का घर बना रखा था, लेकिन कुछ घर कंक्रीट से भी बने हुए थे, जेसीबी मशीन पहुंचते ही बहुत सारे लोग अपने घर का एस्बेस्टेस हटाकर ले जाने लगे। वहीं, कई घर एस्बेस्टस सहित तोड़ दिए गए। हालांकि अभियान एक दिन पहले से चलने के कारण बहुत सारे लोगों ने अपने घर का सामान हटा दिया था वहीं, कई लोगों ने सामान नहीं हटाया था।
दो दिनों से चल रहे अभियान के तहत प्रशासन की ओर से करीब भ्0 एकड़ एरिया को इंक्रोचमेंट से मुक्त करा लिया गया है। कांके डैम साइड में करीब ख्म्ख् एकड़ एरिया एक्वाइर किया गया था, लेकिन इस पर खाली पड़ी जगह पर लोगों ने एन्क्रोचमेंट कर रखा था। हालांकि यहां करीब ख् साल से पांच साल पहले से ही लोगों ने एन्क्रोचमेंट कर रखा था, जिसे जिला प्रशासन ने खाली कराया।
जिला प्रशासन के निर्देश पर कांके डैम साइड के हेसल मोजा से दो दिनो से इंक्रोचमेंट अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को ब्8 घरों को तोड़ा गया है। अभियान आज भी चलाया जाएगा।
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RANCHI: कहीं छोटे-छोटे बच्चे बिलख रहे हैं, तो कहीं बूढ़ी में तीखी धूप में तपते हुए सिसक रही है। वहीं, असहाय पिता परिवार की बर्बादी में जितना हो सके घर का सामान बचाने में जुटे हैं। सबका एक ही दर्द है कि हमारा आशियाना उजाड़ दिया। छोटे-छोटे बच्चों, बूढ़ी मां और पूरे परिवार को लेकर अब कहां जाएंगे। यह नजारा रविवार को कांके डैम साइड इलाके में दिखा, जहां जिला प्रशासन के निर्देश पर एन्क्रोचमेंट कर बनाए गए ब्आठ घरों पर बुलडोजर चला और सभी देखते-देखते ढाह दिए गए। अभियान का नेतृत्व हेहल सीओ अनिल सिंह, बड़गाई सीओ बिनोद प्रजापति और कांके सीओ प्रभात भूषण कर रहे थे। यह अभियान सुबह साढ़े नौ बजे ही शुरू हो गया था, प्रशासन के लोग सुबह से ही पांच जेसीबी मशीन लाकर डैम साइड एरिया में पहुंच गए थे। उनको देखते ही लोग उनके सामने पहुंच गए और आग्रह करने लगे की उनको थोड़ा समय दिया जाए, लेकिन प्रशासन के लोगों ने एक न सुनी। उन्होंने निर्देश दिया कि ऊपर से आदेश है। इसको तोड़ना ही है और देखते देखते सभी के सामने घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। शाम पांच बजे तक अभियान चला। हालांकि यहां पर सबसे अधिक लोगों ने एसबेस्टस का घर बना रखा था, लेकिन कुछ घर कंक्रीट से भी बने हुए थे, जेसीबी मशीन पहुंचते ही बहुत सारे लोग अपने घर का एस्बेस्टेस हटाकर ले जाने लगे। वहीं, कई घर एस्बेस्टस सहित तोड़ दिए गए। हालांकि अभियान एक दिन पहले से चलने के कारण बहुत सारे लोगों ने अपने घर का सामान हटा दिया था वहीं, कई लोगों ने सामान नहीं हटाया था। दो दिनों से चल रहे अभियान के तहत प्रशासन की ओर से करीब भ्शून्य एकड़ एरिया को इंक्रोचमेंट से मुक्त करा लिया गया है। कांके डैम साइड में करीब ख्म्ख् एकड़ एरिया एक्वाइर किया गया था, लेकिन इस पर खाली पड़ी जगह पर लोगों ने एन्क्रोचमेंट कर रखा था। हालांकि यहां करीब ख् साल से पांच साल पहले से ही लोगों ने एन्क्रोचमेंट कर रखा था, जिसे जिला प्रशासन ने खाली कराया। जिला प्रशासन के निर्देश पर कांके डैम साइड के हेसल मोजा से दो दिनो से इंक्रोचमेंट अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को ब्आठ घरों को तोड़ा गया है। अभियान आज भी चलाया जाएगा।
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Born on 17 Jan 1973 (Age 50)
नितेश पाण्डेय एक भारतीय टीवी/फिल्म कलाकार है।
नितेश पाण्डेय 17 जनवरी 1973 में कुमाऊं, उत्तराखंड में हुआ था।
नितेश की शादी वर्ष 1998 अश्वनी कलेस्कर से हुई थी, हालांकि वर्ष 2002 में दोनों ने तलाक ले लिया। नीतेश ने बाद में अर्पिता पाण्डेय से शादी कर ली।
नीतेश पाण्डेय ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1995 में टीवी शो तेजस से की थी, इसके बाद वह कई टीवी शो में नजर आये, जिनमे साया, मंजिले अपनी अपनी, हम लड़कियां, कुछ तो लोग कहेंगे, प्यार का दर्द है मीठा-मीठा प्यारा प्यारा, एक रिश्ता साझेदारी का आदि शामिल हैं।
टीवी करियर के साथ नीतेश ने कई हिंदी फिल्मों में बतौर सहायक कलाकार काम किया है, मेरे यार की शादी, मदारी, शादी के साइड इफेक्ट्स, दबंग 2, खोसला का घोसला, रंगून आदि शामिल हैं।
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Born on सत्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर नितेश पाण्डेय एक भारतीय टीवी/फिल्म कलाकार है। नितेश पाण्डेय सत्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में कुमाऊं, उत्तराखंड में हुआ था। नितेश की शादी वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे अश्वनी कलेस्कर से हुई थी, हालांकि वर्ष दो हज़ार दो में दोनों ने तलाक ले लिया। नीतेश ने बाद में अर्पिता पाण्डेय से शादी कर ली। नीतेश पाण्डेय ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे में टीवी शो तेजस से की थी, इसके बाद वह कई टीवी शो में नजर आये, जिनमे साया, मंजिले अपनी अपनी, हम लड़कियां, कुछ तो लोग कहेंगे, प्यार का दर्द है मीठा-मीठा प्यारा प्यारा, एक रिश्ता साझेदारी का आदि शामिल हैं। टीवी करियर के साथ नीतेश ने कई हिंदी फिल्मों में बतौर सहायक कलाकार काम किया है, मेरे यार की शादी, मदारी, शादी के साइड इफेक्ट्स, दबंग दो, खोसला का घोसला, रंगून आदि शामिल हैं।
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मुंबई इंडियंस के आलराउंडर खिलाड़ी किरोन पोलार्ड ने कल किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ 83 रन की पारी खेली। जिसकी बदौलत टीम 3 विकेट से मैच जीतने में कामयाब हुई। अनियमित कप्तान किरोन पोलार्ड ने कहा लक्ष्य के सफल पीछा करने की कुंजी शांति थी औऱ काफी दबाव में एकत्र की गई थी।
पोलार्ड, जो कल रोहित शर्मा की अनुपस्थिती में कप्तानी कर रहे थे, उन्होने अपनी पारी में 10 गगनचुंबी छक्के और 3 चौके लगाए जिसकी बदौलत टीम मैच जीतने में कामयाब रही।
आखिरी ओवर के शुरुआत में आउट होने के बाद, अल्जारी जोसेफ ने 15 रन की नाबाद पारी खेल मुंबई इंडियंस को आखिरी ओवर में मैच जितवाया।
पोलार्ड क्रिज पर तब आए थे जब टीम का स्कोर 8 ओवर में 56 रन था और सूर्यकुमार अपना विकेट गंवा बैठे थे।
198 का पीछा करते हुए जीत हासिल करना मुश्किल हो सकता है और पोलार्ड ने कहा कि यह विचार है हमने छोड़ दिया था और यह सोचा था कि किंग्स इलेवन के दो गेंदबाजों को निशाना बनाया जाए।
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मुंबई इंडियंस के आलराउंडर खिलाड़ी किरोन पोलार्ड ने कल किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ तिरासी रन की पारी खेली। जिसकी बदौलत टीम तीन विकेट से मैच जीतने में कामयाब हुई। अनियमित कप्तान किरोन पोलार्ड ने कहा लक्ष्य के सफल पीछा करने की कुंजी शांति थी औऱ काफी दबाव में एकत्र की गई थी। पोलार्ड, जो कल रोहित शर्मा की अनुपस्थिती में कप्तानी कर रहे थे, उन्होने अपनी पारी में दस गगनचुंबी छक्के और तीन चौके लगाए जिसकी बदौलत टीम मैच जीतने में कामयाब रही। आखिरी ओवर के शुरुआत में आउट होने के बाद, अल्जारी जोसेफ ने पंद्रह रन की नाबाद पारी खेल मुंबई इंडियंस को आखिरी ओवर में मैच जितवाया। पोलार्ड क्रिज पर तब आए थे जब टीम का स्कोर आठ ओवर में छप्पन रन था और सूर्यकुमार अपना विकेट गंवा बैठे थे। एक सौ अट्ठानवे का पीछा करते हुए जीत हासिल करना मुश्किल हो सकता है और पोलार्ड ने कहा कि यह विचार है हमने छोड़ दिया था और यह सोचा था कि किंग्स इलेवन के दो गेंदबाजों को निशाना बनाया जाए।
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स्वास्थ्य संबंधी अनेक परेशानियाॅं प्रशांत भूषण को तनावग्रस्त करेंगी। कुछ निकट रिश्तेदार गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। विरोधियों से खतरा है। संभव है कि चोरी की वजह से प्रशांत भूषण को नुकसान हो। शत्रु की किसी गतिविधी की वजह से चोट लगने का भी डर है। प्रशांत भूषण के कार्यस्थल पर प्रशांत भूषण के विरोधियों को प्रशासनिक सहयोग मिलने की वजह से प्रशांत भूषण मानसिक यंत्रणा के शिकार हो सकते हैं।
किसी संस्थान के प्रमुख व्यक्ति के प्रशांत भूषण सम्पर्क में आयेंगे। औरों के प्रति जनकल्याण की भावना से काम करने की प्रवृति होगी। किसी नयी सृजनात्मक उपलब्धि के कारण प्रशांत भूषण को मान्यता मिल सकती है। वैसे इस अवधि में प्रशांत भूषण की प्रतिष्ठा बढेंगी और सम्मान में इजाफा होगा। प्रशांत भूषण अति सम्मानीय व्यक्ति समझे जायेंगे। यात्रा का बहुत महत्व होगा। प्रशांत भूषण की धर्म एवम् अध्यात्म की ओर झुकने की प्रवृति में भावनात्मक गहराई का समावेश होगा। पारिवारिक जीवन हर्षोल्लास से सम्पन्न रहेगा। परिवार में कोई मंगल कृत्य होगा। इस अवधि का पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करें।
इस अवधि में प्रशांत भूषण का सौजन्यता पूर्ण व्यवहार रहेगा और प्रशांत भूषण मनमुटाव से बचेंगे। एक आनन्द दायक यात्रा की प्रबल संभावना है। स्त्री वर्ग का भी साथ रहेगा। संगति व अन्य ललित कलाओं सुगध एवम् सौन्दर्यपूर्ण वस्तुओं की ओर प्रशांत भूषण का झुकाव रहेगा। अपने व्यवसाय और व्यापार में प्रशांत भूषण बहुत अच्छा काम करेंगे। अपने प्रयत्नों से आय वृव्दि प्राप्त करेंगे। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। छोटी मोटी बीमारियां हो सकती हैं। प्रशांत भूषण का मिलनसार स्वभाव होगा और कई लोगों के सम्पर्क में आयेंगे।
अचानक समस्यायें खड़ी हो सकतीं हैं। संबंधियों से व्यवहार अच्छा रखें नहीं तो बेवजह झगड़े होंगे। स्वास्थ्य का ख्याल रखें। लम्बी अवधि के लिये बीमार रहने की आशंका रहेगी। अनैतिक कार्यों में प्रवृती न होईये तथा सन्देहास्पद सौदों से बचें। महत्वपूर्ण कागजों पर दस्तखत करने से पहले कागज अच्छी तरह पढें।
विद्वान एवम् पढ़े लिखे लोगों से सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। विदेशियों से संबंध सफलदायक रहेंगे। लम्बी यात्राओं की भी संभावना है। धार्मिक कृत्य करने की प्रवृति रहेगी। सुखी जीवन बितायेंगे। मां बाप से संबंध अति मधुर रहेंगे।
बड़े बूढों से सहयोग प्राप्त करेंगे। सुदूर स्थलों तक की गई लम्बी यात्राएं सफलदायक सिद्ध होंगी। आमदनी बढ़ेगी और आय के नये स्त्रोत प्राप्त होंगे। यद्यापि खर्चे भी बढेंगे लेकिन आमदनी से अधिक नहीं होंगे। सट्टे के द्वारा आय होने की भी संभावना है। इस समय का पूरा सदुपयोग करें।
अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा प्रशांत भूषण किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। प्रशांत भूषण के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी प्रशांत भूषण को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। प्रशांत भूषण का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और प्रशांत भूषण की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा प्रशांत भूषण को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये।
इस अवधि में प्रशांत भूषण के क्रियाकलाप प्रशंसा के हकदार होंगे और प्रशांत भूषण प्रचुर सम्मान प्राप्त करेंगे। प्रशांत भूषण का आत्मविश्वास बढा चढ़ा रहेगा। प्रशांत भूषण का सामाजिक क्षेत्र बढ़ेगा। छोटी यात्राएं सफलदायक रहेंगी। पारिवारिक उत्थान के लिये प्रशांत भूषण कुछ महत्वपूर्ण कार्य करना चाहेंगे। अगर प्रशांत भूषण शादी शुदा हैं तो वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। सहयोगियों और भागीदारों से खूब पटेगी। किसी बुजुर्ग से प्रशांत भूषण सहारा प्राप्तकरेंगे। छोटे मोटे रोगों के उभरने की भी संभावना है।
प्रशांत भूषण के हर काम में अड़चनें आएगी और देरी होगी। कभी कभी असुरक्षा की भावना से आक्रान्त रहेंगें। काम का बोझ बहुत रहेगा और फालतू के कामों में भी प्रशांत भूषण फंसे रह सकते हैं। प्रशांत भूषण का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखद नहीं रहेगा। रिश्तेदारों के स्वास्थ्य के कारण प्रशांत भूषण चिन्तित रह सकते हैं। भागीदारों या सहयोगियों की लापरवाही के कारण प्रशांत भूषण को धक्का पहुंच सकता है। वैसे इस अवधि का आखिरी हिस्सा प्रशांत भूषण को कुछ राहत देगा। आशावादी होना निराशावादी होने से सदैव अच्छा है।
प्रयत्नों के बावजूद असफलता प्रशांत भूषण को निराश करेगी। प्रशांत भूषण को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि काम का बोझ बहुत रहेगा। छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ने की संभावना है। बेकार के व अमहत्वपूर्ण कामों में प्रशांत भूषण अपनी शक्ति और समय व्यय करेंगे। जल्दी धन कमाने की अपनी प्रवृति पर अंकुश लगायें। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण कुछ काम प्रशांत भूषण नहीं कर पायेंगे। पारिवारिक जीवन में तनावग्रस्त रहेंगे। वैसे इस अवधि में गूढ़ एवं परामनोवैाानिक अनुभव प्रशांत भूषण को प्राप्त होंगे। बेकार की यात्राओं से बचें।
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स्वास्थ्य संबंधी अनेक परेशानियाॅं प्रशांत भूषण को तनावग्रस्त करेंगी। कुछ निकट रिश्तेदार गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। विरोधियों से खतरा है। संभव है कि चोरी की वजह से प्रशांत भूषण को नुकसान हो। शत्रु की किसी गतिविधी की वजह से चोट लगने का भी डर है। प्रशांत भूषण के कार्यस्थल पर प्रशांत भूषण के विरोधियों को प्रशासनिक सहयोग मिलने की वजह से प्रशांत भूषण मानसिक यंत्रणा के शिकार हो सकते हैं। किसी संस्थान के प्रमुख व्यक्ति के प्रशांत भूषण सम्पर्क में आयेंगे। औरों के प्रति जनकल्याण की भावना से काम करने की प्रवृति होगी। किसी नयी सृजनात्मक उपलब्धि के कारण प्रशांत भूषण को मान्यता मिल सकती है। वैसे इस अवधि में प्रशांत भूषण की प्रतिष्ठा बढेंगी और सम्मान में इजाफा होगा। प्रशांत भूषण अति सम्मानीय व्यक्ति समझे जायेंगे। यात्रा का बहुत महत्व होगा। प्रशांत भूषण की धर्म एवम् अध्यात्म की ओर झुकने की प्रवृति में भावनात्मक गहराई का समावेश होगा। पारिवारिक जीवन हर्षोल्लास से सम्पन्न रहेगा। परिवार में कोई मंगल कृत्य होगा। इस अवधि का पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करें। इस अवधि में प्रशांत भूषण का सौजन्यता पूर्ण व्यवहार रहेगा और प्रशांत भूषण मनमुटाव से बचेंगे। एक आनन्द दायक यात्रा की प्रबल संभावना है। स्त्री वर्ग का भी साथ रहेगा। संगति व अन्य ललित कलाओं सुगध एवम् सौन्दर्यपूर्ण वस्तुओं की ओर प्रशांत भूषण का झुकाव रहेगा। अपने व्यवसाय और व्यापार में प्रशांत भूषण बहुत अच्छा काम करेंगे। अपने प्रयत्नों से आय वृव्दि प्राप्त करेंगे। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। छोटी मोटी बीमारियां हो सकती हैं। प्रशांत भूषण का मिलनसार स्वभाव होगा और कई लोगों के सम्पर्क में आयेंगे। अचानक समस्यायें खड़ी हो सकतीं हैं। संबंधियों से व्यवहार अच्छा रखें नहीं तो बेवजह झगड़े होंगे। स्वास्थ्य का ख्याल रखें। लम्बी अवधि के लिये बीमार रहने की आशंका रहेगी। अनैतिक कार्यों में प्रवृती न होईये तथा सन्देहास्पद सौदों से बचें। महत्वपूर्ण कागजों पर दस्तखत करने से पहले कागज अच्छी तरह पढें। विद्वान एवम् पढ़े लिखे लोगों से सम्मान व प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे। विदेशियों से संबंध सफलदायक रहेंगे। लम्बी यात्राओं की भी संभावना है। धार्मिक कृत्य करने की प्रवृति रहेगी। सुखी जीवन बितायेंगे। मां बाप से संबंध अति मधुर रहेंगे। बड़े बूढों से सहयोग प्राप्त करेंगे। सुदूर स्थलों तक की गई लम्बी यात्राएं सफलदायक सिद्ध होंगी। आमदनी बढ़ेगी और आय के नये स्त्रोत प्राप्त होंगे। यद्यापि खर्चे भी बढेंगे लेकिन आमदनी से अधिक नहीं होंगे। सट्टे के द्वारा आय होने की भी संभावना है। इस समय का पूरा सदुपयोग करें। अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा प्रशांत भूषण किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। प्रशांत भूषण के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी प्रशांत भूषण को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। प्रशांत भूषण का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और प्रशांत भूषण की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा प्रशांत भूषण को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये। इस अवधि में प्रशांत भूषण के क्रियाकलाप प्रशंसा के हकदार होंगे और प्रशांत भूषण प्रचुर सम्मान प्राप्त करेंगे। प्रशांत भूषण का आत्मविश्वास बढा चढ़ा रहेगा। प्रशांत भूषण का सामाजिक क्षेत्र बढ़ेगा। छोटी यात्राएं सफलदायक रहेंगी। पारिवारिक उत्थान के लिये प्रशांत भूषण कुछ महत्वपूर्ण कार्य करना चाहेंगे। अगर प्रशांत भूषण शादी शुदा हैं तो वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। सहयोगियों और भागीदारों से खूब पटेगी। किसी बुजुर्ग से प्रशांत भूषण सहारा प्राप्तकरेंगे। छोटे मोटे रोगों के उभरने की भी संभावना है। प्रशांत भूषण के हर काम में अड़चनें आएगी और देरी होगी। कभी कभी असुरक्षा की भावना से आक्रान्त रहेंगें। काम का बोझ बहुत रहेगा और फालतू के कामों में भी प्रशांत भूषण फंसे रह सकते हैं। प्रशांत भूषण का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहेगा। पारिवारिक जीवन सुखद नहीं रहेगा। रिश्तेदारों के स्वास्थ्य के कारण प्रशांत भूषण चिन्तित रह सकते हैं। भागीदारों या सहयोगियों की लापरवाही के कारण प्रशांत भूषण को धक्का पहुंच सकता है। वैसे इस अवधि का आखिरी हिस्सा प्रशांत भूषण को कुछ राहत देगा। आशावादी होना निराशावादी होने से सदैव अच्छा है। प्रयत्नों के बावजूद असफलता प्रशांत भूषण को निराश करेगी। प्रशांत भूषण को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि काम का बोझ बहुत रहेगा। छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ने की संभावना है। बेकार के व अमहत्वपूर्ण कामों में प्रशांत भूषण अपनी शक्ति और समय व्यय करेंगे। जल्दी धन कमाने की अपनी प्रवृति पर अंकुश लगायें। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण कुछ काम प्रशांत भूषण नहीं कर पायेंगे। पारिवारिक जीवन में तनावग्रस्त रहेंगे। वैसे इस अवधि में गूढ़ एवं परामनोवैाानिक अनुभव प्रशांत भूषण को प्राप्त होंगे। बेकार की यात्राओं से बचें।
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अगर आप किसी काम को लेकर प्रशासनिक कॉम्पलेक्स में जा रहे हैं तो वहां पीने वाला पानी साथ में ले जाना मत भूलिए।
चंडीगढ़ में ड्रोन उड़ाने पर सख्त रोक लगाई है। मिली जानकारी के अनुसार शहर में 24 जून को वी. आई. पी. मूवमेंट के चलते नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।
एन. आई. ए. ने आतंकवादियों और गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने की कोशिश में है।
खाद्य एवं सिविल सप्लाई विभाग के निदेशक द्वारा जारी एक पत्र में विभाग से संबंधित सभी जिलों के कंट्रोलरों को निर्देश जारी किए गए हैं।
नगर निगम जालंधर के चुनाव करीब 2 माह बाद होने जा रहे हैं जिसके लिए पूरे शहर को 85 वार्डों में बांट दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस इमारत को धरोहर बनाने में केन्द्र सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि लगभग साढ़े 8 करोड़ किसानों को के. वाई. सी. के बाद हम योजना की किस्त देने की स्थिति में आ गए हैं।
पूर्व आई. जी. ने अपनी मनघड़ंत कहानी मजबूत करने के लिए नकली गवाह तैयार किए।
चंडीगढ़ शहर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
महानगर में लूट का एक बड़ा मामला सामने आया है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दयानंद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के योग विभाग ने दो स्थानों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया।
नंगल इलाके में चोरियों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंडीगढ़ का दौरा करने जा रहे हैं।
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अगर आप किसी काम को लेकर प्रशासनिक कॉम्पलेक्स में जा रहे हैं तो वहां पीने वाला पानी साथ में ले जाना मत भूलिए। चंडीगढ़ में ड्रोन उड़ाने पर सख्त रोक लगाई है। मिली जानकारी के अनुसार शहर में चौबीस जून को वी. आई. पी. मूवमेंट के चलते नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। एन. आई. ए. ने आतंकवादियों और गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने की कोशिश में है। खाद्य एवं सिविल सप्लाई विभाग के निदेशक द्वारा जारी एक पत्र में विभाग से संबंधित सभी जिलों के कंट्रोलरों को निर्देश जारी किए गए हैं। नगर निगम जालंधर के चुनाव करीब दो माह बाद होने जा रहे हैं जिसके लिए पूरे शहर को पचासी वार्डों में बांट दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस इमारत को धरोहर बनाने में केन्द्र सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि लगभग साढ़े आठ करोड़ किसानों को के. वाई. सी. के बाद हम योजना की किस्त देने की स्थिति में आ गए हैं। पूर्व आई. जी. ने अपनी मनघड़ंत कहानी मजबूत करने के लिए नकली गवाह तैयार किए। चंडीगढ़ शहर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। महानगर में लूट का एक बड़ा मामला सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दयानंद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के योग विभाग ने दो स्थानों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया। नंगल इलाके में चोरियों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंडीगढ़ का दौरा करने जा रहे हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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पूरण कौर हरियाणा की रहने वाली महिला हैं। गरीब हैं। पति भी मेहनत-मजदूरी करने वाले हैं। लेकिन आमदनी इतनी ही कि घर चल जाता है किसी तरह से। सीमित आय के इस परिवार में किसी को सर्जरी/ऑपरेशन की जरूरत पड़ जाए तो सोचिए कहाँ जाएगा परिवार! पूरण कौर के साथ भी ऐसा ही हुआ। लेकिन उन्हें दिक्कत नहीं हुई। कारण है 'आयुष्मान भारत योजना'।
वीडियो में आप सुन सकते हैं कि कैसे एक परिवार अपनी आपबीती बता रहा है। वो बता रहा है कि कैसे 'आयुष्मान भारत योजना' से उसकी जिंदगी बदल गई। वीडियो से यह भी स्पष्ट है कि आम आदमी को दलगत राजनीति से कोई मतलब नहीं है। और यह भी कि कैसे मोदी सरकार की योजनाओं से आम आदमी को लाभ हुआ है जबकि कॉन्ग्रेस ने वादों के अलावा कुछ नहीं किया।
यह दोनों उदाहरण उस प्रचलित कहावत के मिथक को तोड़ता है कि केंद्र से चला एक रुपया गरीब तक पहुँचते-पहुँचते 10 पैसा रह जाता है। आम आदमी के हितों और उसके कल्याण के लिए चलाई जा रही 'आयुष्मान भारत' जैसी केंद्रीय योजनाएँ न सिर्फ चलाई जा रही है, बल्कि आम आदमी तक पहुँचाई भी जा रही है।
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पूरण कौर हरियाणा की रहने वाली महिला हैं। गरीब हैं। पति भी मेहनत-मजदूरी करने वाले हैं। लेकिन आमदनी इतनी ही कि घर चल जाता है किसी तरह से। सीमित आय के इस परिवार में किसी को सर्जरी/ऑपरेशन की जरूरत पड़ जाए तो सोचिए कहाँ जाएगा परिवार! पूरण कौर के साथ भी ऐसा ही हुआ। लेकिन उन्हें दिक्कत नहीं हुई। कारण है 'आयुष्मान भारत योजना'। वीडियो में आप सुन सकते हैं कि कैसे एक परिवार अपनी आपबीती बता रहा है। वो बता रहा है कि कैसे 'आयुष्मान भारत योजना' से उसकी जिंदगी बदल गई। वीडियो से यह भी स्पष्ट है कि आम आदमी को दलगत राजनीति से कोई मतलब नहीं है। और यह भी कि कैसे मोदी सरकार की योजनाओं से आम आदमी को लाभ हुआ है जबकि कॉन्ग्रेस ने वादों के अलावा कुछ नहीं किया। यह दोनों उदाहरण उस प्रचलित कहावत के मिथक को तोड़ता है कि केंद्र से चला एक रुपया गरीब तक पहुँचते-पहुँचते दस पैसा रह जाता है। आम आदमी के हितों और उसके कल्याण के लिए चलाई जा रही 'आयुष्मान भारत' जैसी केंद्रीय योजनाएँ न सिर्फ चलाई जा रही है, बल्कि आम आदमी तक पहुँचाई भी जा रही है।
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शार्क टैंक इंडिया सीजन 2 का आगाज हो चुका है। शो में अशनीर ग्रोवर की जगह कारदेखो के को-फाउंडर अमित जैन ने ली है। शार्क टैंक इंडिया 2 का पहला एपिसोड देखने के बाद दर्शकों अशनीर ग्रोवर की कमी खलने लगी है। इसलिये दर्शक उन्हें शो में वापस लाने की मांग कर रहे हैं।
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शार्क टैंक इंडिया सीजन दो का आगाज हो चुका है। शो में अशनीर ग्रोवर की जगह कारदेखो के को-फाउंडर अमित जैन ने ली है। शार्क टैंक इंडिया दो का पहला एपिसोड देखने के बाद दर्शकों अशनीर ग्रोवर की कमी खलने लगी है। इसलिये दर्शक उन्हें शो में वापस लाने की मांग कर रहे हैं।
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भारत सरकार ने चार देशों से सेब, नाशपाती और इसी प्रजाति के पौधों के आयात पर नई बंदिशें लगा दी हैं। ये बंदिशें बुल्गारिया, स्पेन, नीदरलैंड और यूके से पौधों के आयात पर लगाई गई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को इन देशों के पौधों के माध्यम से लगभग तीन दर्जन नई बीमारियों और कीटों के भारत आने की आशंका है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विदेशों से आधुनिक किस्मों के पौधों का आयात किया जा रहा है। अब संबंधित देशों से आयात किए जा रहे पौधों के अधिसूचित रोगों से मुक्त होने पर ही उन्हें भारत लाया जा सकेगा। रोगों से मुक्त पौधों का प्रमाणपत्र साथ लाना जरूरी होगा।
नई अधिसूचना के मुताबिक बुल्गारिया से एप्पल राइट माइट, ग्रीष्म फ ल टोरटिक्स, साफलाइज, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, रेस्पबेरी बीटल, मेडिटेरानियन फ्रूट फ्लाई, कामन स्नैल, यूरोपियन पीयर स्केल, फायरब्लाइट, जैसे कुल 24 रोग और कीट भारत आ सकते हैं। स्पेन से समर फ्रूट टोरटिक्स, सावफलयाज, रेसावेरी बीटल, मेडिटेरिनियन फ्रूट फ्लाई, कॉमन स्नेल, कॉडलिंग मॉथ आदि 23 रोग और कीट भारत आ सकते हैं।
यूके से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, एमेटास्टेजिया ग्लाबरेटा, ग्रेट ब्राउंन ट्विस्ट मोथ, ब्लास्टो बेसिस डेकोलोरेला, कोडलिंग मोथ, मुस्कुलाना आदि 11 कीट और रोग हमारे देश में प्रवेश कर सकते हैं। नीदरलैंड से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, बोट्रीटिस सिनेरिया, कोडलिंग मोथ, हर्लिक्यून लेडीबर्ड, वुड मोथ, ब्राउन मोथ, कॉमन क्वैकर, पेनसिलियम एक्सपेंसम, नाशपाती का काला धब्बा 17 रोग या कीट भारत आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इन रोगों और कीटों से मुक्त पौधों का ही आयात करने की अधिसूचना जारी की है।
'ऐसी बंदिशें जरूरी हैं। तभी हमारे देश में सेब, नाशपाती और इस प्रजाति के फलों से संबंधित फसलें अधिसूचित विदेशी रोगों और कीटों से बच पाएगी। देश में विदेशों से अनुसंधान और उत्पादन दोनों ही उद्देश्य से पौधों का आयात किया जाता है, मगर ये हिमाचल जैसे राज्य में बीमारियां लाकर यहां सेब के बगीचों को तबाह भी कर सकते हैं। - डा. विजय सिंह ठाकुर, कुलपति डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि।
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भारत सरकार ने चार देशों से सेब, नाशपाती और इसी प्रजाति के पौधों के आयात पर नई बंदिशें लगा दी हैं। ये बंदिशें बुल्गारिया, स्पेन, नीदरलैंड और यूके से पौधों के आयात पर लगाई गई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को इन देशों के पौधों के माध्यम से लगभग तीन दर्जन नई बीमारियों और कीटों के भारत आने की आशंका है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विदेशों से आधुनिक किस्मों के पौधों का आयात किया जा रहा है। अब संबंधित देशों से आयात किए जा रहे पौधों के अधिसूचित रोगों से मुक्त होने पर ही उन्हें भारत लाया जा सकेगा। रोगों से मुक्त पौधों का प्रमाणपत्र साथ लाना जरूरी होगा। नई अधिसूचना के मुताबिक बुल्गारिया से एप्पल राइट माइट, ग्रीष्म फ ल टोरटिक्स, साफलाइज, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, रेस्पबेरी बीटल, मेडिटेरानियन फ्रूट फ्लाई, कामन स्नैल, यूरोपियन पीयर स्केल, फायरब्लाइट, जैसे कुल चौबीस रोग और कीट भारत आ सकते हैं। स्पेन से समर फ्रूट टोरटिक्स, सावफलयाज, रेसावेरी बीटल, मेडिटेरिनियन फ्रूट फ्लाई, कॉमन स्नेल, कॉडलिंग मॉथ आदि तेईस रोग और कीट भारत आ सकते हैं। यूके से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, एमेटास्टेजिया ग्लाबरेटा, ग्रेट ब्राउंन ट्विस्ट मोथ, ब्लास्टो बेसिस डेकोलोरेला, कोडलिंग मोथ, मुस्कुलाना आदि ग्यारह कीट और रोग हमारे देश में प्रवेश कर सकते हैं। नीदरलैंड से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, बोट्रीटिस सिनेरिया, कोडलिंग मोथ, हर्लिक्यून लेडीबर्ड, वुड मोथ, ब्राउन मोथ, कॉमन क्वैकर, पेनसिलियम एक्सपेंसम, नाशपाती का काला धब्बा सत्रह रोग या कीट भारत आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इन रोगों और कीटों से मुक्त पौधों का ही आयात करने की अधिसूचना जारी की है। 'ऐसी बंदिशें जरूरी हैं। तभी हमारे देश में सेब, नाशपाती और इस प्रजाति के फलों से संबंधित फसलें अधिसूचित विदेशी रोगों और कीटों से बच पाएगी। देश में विदेशों से अनुसंधान और उत्पादन दोनों ही उद्देश्य से पौधों का आयात किया जाता है, मगर ये हिमाचल जैसे राज्य में बीमारियां लाकर यहां सेब के बगीचों को तबाह भी कर सकते हैं। - डा. विजय सिंह ठाकुर, कुलपति डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि।
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मुंबई। शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' की कमाई बॉक्स ऑफिस पर थमने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए 17 करोड़ का कलेक्शन किया।
इसी के साथ फिल्म ने अब तक 163 करोड़ की कमाई कर ली है। फिल्म को लेकर लोगों की दीवानगी साफतौर पर देखी जा सकती है। बता दें कि कबीर सिंह तेलुगू फिल्म अर्जुन रेड्डी का हिंदी रीमेक है।
अर्जुन रेड्डी ने अभिनेता विजय देवरकोंडा को रातोंरात स्टार बना दिया था। अर्जुन रेड्डी की तरह ही कबीर सिंह भी लोगों पर जादू चलाने में कामयाब रही है।
कबीर सिंह एक मेडिकल स्टूडेंट की कहानी है, जो अपनी प्रेमिका से अलग होकर बर्बादी के रास्ते पर निकल पड़ता है। इस दौरान उसे शराब और नशे की बुरी लत लग जाती है।
जहां इस फिल्म को जनता और फैंस से खूब प्यार मिल रहा है वहीं फिल्म आलोचकों ने इस फिल्म को मिक्स रिएक्शन दिया है. फिल्म में दिखाए कई सीन्स पर जमकर विवाद भी हो रहा है।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुंबई। शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' की कमाई बॉक्स ऑफिस पर थमने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए सत्रह करोड़ का कलेक्शन किया। इसी के साथ फिल्म ने अब तक एक सौ तिरेसठ करोड़ की कमाई कर ली है। फिल्म को लेकर लोगों की दीवानगी साफतौर पर देखी जा सकती है। बता दें कि कबीर सिंह तेलुगू फिल्म अर्जुन रेड्डी का हिंदी रीमेक है। अर्जुन रेड्डी ने अभिनेता विजय देवरकोंडा को रातोंरात स्टार बना दिया था। अर्जुन रेड्डी की तरह ही कबीर सिंह भी लोगों पर जादू चलाने में कामयाब रही है। कबीर सिंह एक मेडिकल स्टूडेंट की कहानी है, जो अपनी प्रेमिका से अलग होकर बर्बादी के रास्ते पर निकल पड़ता है। इस दौरान उसे शराब और नशे की बुरी लत लग जाती है। जहां इस फिल्म को जनता और फैंस से खूब प्यार मिल रहा है वहीं फिल्म आलोचकों ने इस फिल्म को मिक्स रिएक्शन दिया है. फिल्म में दिखाए कई सीन्स पर जमकर विवाद भी हो रहा है। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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कि मुख्यमंत्री उन्होंने बनाया या वही मुख्यमंत्री बने रहेंगे उनके लिए काफी अपमानजनक था. हालांकि राजद नेता यह भी मानते हैं कि नीतीश ने कई बार लालू यादव के नजदीकी लोगों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन लालू यादव ने शायद इस बात का आकलन नहीं किया कि नीतीश भाजपा के साथ कुछ घंटों में सरकार का गठन कर लेंगे. नीतीश ने राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के उस बयान पर कि नीतीश परिस्थितियों के नेता हैं पर लालू यादव की चुप्पी पर भी काफी नाराज हुए थे, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने सिवान यात्रा में एक सभा में कहा कि शहाबुद्दीन ने सही कहा था.
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कि मुख्यमंत्री उन्होंने बनाया या वही मुख्यमंत्री बने रहेंगे उनके लिए काफी अपमानजनक था. हालांकि राजद नेता यह भी मानते हैं कि नीतीश ने कई बार लालू यादव के नजदीकी लोगों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन लालू यादव ने शायद इस बात का आकलन नहीं किया कि नीतीश भाजपा के साथ कुछ घंटों में सरकार का गठन कर लेंगे. नीतीश ने राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के उस बयान पर कि नीतीश परिस्थितियों के नेता हैं पर लालू यादव की चुप्पी पर भी काफी नाराज हुए थे, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने सिवान यात्रा में एक सभा में कहा कि शहाबुद्दीन ने सही कहा था.
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पंजाब के जालंधर जिले में कानून व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर ने दफ्तरों और पुलिस लाइन में बैठे अतिरिक्त कर्मचारियों को थानों में तबदील कर दिया है। इनमें सब इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही रैंक के अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। पिछले दिनों जालंधर शहर में आपराधिक गतिविधियां बढ़ जाने पर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह तूर ने कहा था कि लाइन और दफ्तरों में बैठे स्टाफ में कटौती की जाएगी। उन्हें शहर की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा।
अब उसी घोषणा का नतीजा सामने आया है। पुलिस कमिश्नर ने 31 पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों को दफ्तरों और लाइन से निकाल कर थानों में भेजा है। जालंधर में पिछले कुछ माह से क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ गया है। हालांकि नए कमिश्नर ने आते ही इस पर नकेल डालने की पूरी कोशिश की है। स्नैचिंग लूट चोरी और फायरिंग की घटनाएं, जो एकदम बढ़ गई थीं, अब धीरे-धीरे इनमें काफी कमी आई है। कई मामलों में आरोपी पकड़े भी गए हैं और चोरी के मामले भी ट्रेस किए किए गए हैं।
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पंजाब के जालंधर जिले में कानून व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर ने दफ्तरों और पुलिस लाइन में बैठे अतिरिक्त कर्मचारियों को थानों में तबदील कर दिया है। इनमें सब इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही रैंक के अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। पिछले दिनों जालंधर शहर में आपराधिक गतिविधियां बढ़ जाने पर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह तूर ने कहा था कि लाइन और दफ्तरों में बैठे स्टाफ में कटौती की जाएगी। उन्हें शहर की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा। अब उसी घोषणा का नतीजा सामने आया है। पुलिस कमिश्नर ने इकतीस पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों को दफ्तरों और लाइन से निकाल कर थानों में भेजा है। जालंधर में पिछले कुछ माह से क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ गया है। हालांकि नए कमिश्नर ने आते ही इस पर नकेल डालने की पूरी कोशिश की है। स्नैचिंग लूट चोरी और फायरिंग की घटनाएं, जो एकदम बढ़ गई थीं, अब धीरे-धीरे इनमें काफी कमी आई है। कई मामलों में आरोपी पकड़े भी गए हैं और चोरी के मामले भी ट्रेस किए किए गए हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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छत्तीसगढ़ के बालोद में शादी की खुशियां चंद घंटों में ही मातम में बदल गईं। परिवार वाले बेटा-बहू की आवभगत के लिए इंतजार कर रहे थे, लेकिन दूल्हे की मौत की खबर आ गई। शादी के बाद दुल्हन को विदा कराकर लौट रहे युवक के सीने में दर्द हुआ और उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अगले ही दिन बहन की शादी थी। इस घटना के बाद पूरा परिवार और गांव सदमे में है। मामला लाटाबोड़ गांव का है।
बालोद-दुर्ग मार्ग पर स्थित ग्राम लाटाबोड़ निवासी बंशीलाल साहू के बेटे छगनलाल साहू (26) की शनिवार को शादी थी। उसकी बारात धमतरी के ग्राम कुर्रा में पदुमलाल साहू के घर गई थी। सारी रस्में धूमधाम से पूरी हुईं। शादी के बाद बहू को विदा कराकर सभी खुशी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक छगनलाल के सीने में दर्द होने लगा। इस पर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
छगनलाल अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। चार बहनों में उसकी मझली बहन की भी रविवार को शादी थी। ग्राम धनेली निवासी टिकेश्वर बारात लेकर आने वाले थे। मां सहित घर के सभी लोग नई बहू के साथ अगले दिन बारात के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे, तभी यह घटना हो गई। वहीं बहन ने भी शादी से मना करते हुए अपनी बारात लौटा दी। वहीं नई दुल्हन के भविष्य को देखते हुए उसे घर लाने की जगह मायके वापस भेज दिया।
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छत्तीसगढ़ के बालोद में शादी की खुशियां चंद घंटों में ही मातम में बदल गईं। परिवार वाले बेटा-बहू की आवभगत के लिए इंतजार कर रहे थे, लेकिन दूल्हे की मौत की खबर आ गई। शादी के बाद दुल्हन को विदा कराकर लौट रहे युवक के सीने में दर्द हुआ और उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अगले ही दिन बहन की शादी थी। इस घटना के बाद पूरा परिवार और गांव सदमे में है। मामला लाटाबोड़ गांव का है। बालोद-दुर्ग मार्ग पर स्थित ग्राम लाटाबोड़ निवासी बंशीलाल साहू के बेटे छगनलाल साहू की शनिवार को शादी थी। उसकी बारात धमतरी के ग्राम कुर्रा में पदुमलाल साहू के घर गई थी। सारी रस्में धूमधाम से पूरी हुईं। शादी के बाद बहू को विदा कराकर सभी खुशी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक छगनलाल के सीने में दर्द होने लगा। इस पर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। छगनलाल अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। चार बहनों में उसकी मझली बहन की भी रविवार को शादी थी। ग्राम धनेली निवासी टिकेश्वर बारात लेकर आने वाले थे। मां सहित घर के सभी लोग नई बहू के साथ अगले दिन बारात के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे, तभी यह घटना हो गई। वहीं बहन ने भी शादी से मना करते हुए अपनी बारात लौटा दी। वहीं नई दुल्हन के भविष्य को देखते हुए उसे घर लाने की जगह मायके वापस भेज दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सोलो हीरो के तौर पर एक हिट फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे अभिनेता अक्षय कुमार की सारी उम्मीदें अब अपनी अगली फिल्म 'राम सेतु' पर टिकी हैं। फिल्म के ट्रेलर को हालांकि यूट्यूब पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, लेकिन इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यूए प्रमाणपत्र दे दिया है। जानकारी के मुताबिक फिल्म के कुछ संवादों पर आपत्ति करने के बाद इनमें बदलाव सुझाने के अलावा सेंसर बोर्ड ने फिल्म की शुरुआत में दिखाए गए अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) की अवधि भी बढ़ाने का निर्देश दिया है। इस बीच मुंबई में फिल्म का एक गाना अक्षय कुमार ने अपने प्रशंसकों के बीच लॉन्च किया।
गुरुवार को मुंबई अपनी फिल्म के गाने को सिनेमा हॉल में उपस्थित लोगों के बीच गाने से पहले अक्षय कुमार ने मंच पर अपने जूते भी उतारे लेकिन इस गाने में प्रयुक्त सुंदरकांड के 57वें दोहे के गलत उच्चारण पर कार्यक्रम में उपस्थिति लोगों ने ही आपत्ति जता दी। अक्षय कुमार ने ये गाना शुरू करने से पहले इसके गायक को भी मंच पर बुलाने को कहा लेकिन कार्यक्रम आयोजकों ने फिल्म के गाने की इस लॉन्चिंग में शायद पूरा फोकस अक्षय कुमार पर ही रखा और गायक व संगीतकार विक्रम मोंटरोस को बुलाया ही नहीं।
गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस में लंका जाने के लिए समुद्र से रास्ता मांग रहे भगवान श्रीराम के क्रोधित होने के प्रसंग का दोहा है, 'विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होई न प्रीति। । ' जबकि फिल्म 'राम सेतु' के नए गाने में संगीतकार और गायक विक्रम मोंटरोस ने 'जलधि' की बजाय बार बार 'जलधी' का उच्चारण किया है। इस कार्यक्रम का आयोजन अक्षय कुमार का प्रचार प्रसार देखने वाली कंपनी हाइप ने फिल्म 'राम सेतु' की हाइप बनाने के लिए ही किया लेकिन फिल्म के ट्रेलर से बनी हाइप पर इस गाने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता दिख रहा है।
Don 3: शाहरुख की 'डॉन' को 16 साल पूरे, फरहान ने साझा किया पोस्ट, यूजर्स बोले- 'हमें तो डॉन 3 का इंतजार है'
फिल्म 'राम सेतु' दिवाली के अगले दिन रिलीज हो रही है। अक्षय कुमार की फिल्म 'सूर्यवंशी' के बाद रिलीज पिछली सारी फिल्में 'बच्चन पांडे', 'सम्राट पृथ्वीराज' और 'रक्षा बंधन' बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही हैं और इस बीच उनकी दो फिल्में 'अतरंगी रे' और 'कठपुतली' वितरक न मिलने के चलते सीधे ओटीटी पर रिलीज हो चुकी हैं। उनकी आने वाली फिल्मों में इमरान हाशमी के साथ 'सेल्फी', टाइगर श्रॉफ के साथ 'बड़े मियां छोटे मियां', 'ओ माय गॉड 2' 'कैप्सूल गिल' और अभिनेता सूर्या की फिल्म 'सूराराई पोट्रू' की रीमेक शामिल हैं।
अमेजन कंपनी की वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस अमेजन प्राइम वीडियो ने फिल्म 'राम सेतु' के साथ भारतीय सिनेमा के निर्माण में कदम रखा है। फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी भी फिल्म 'राम सेतु' से क्रिएटिव प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़े हुए हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया। फिल्म के संवाद अभिषेक और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने मिलकर लिखे हैं। फिल्म में नुसरत भरुचा और जैकलीन फर्नांडीज के अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेता सत्य देव की भी अहम भूमिका है। इस फिल्म को हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगू में भी रिलीज किया जा रहा है।
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सोलो हीरो के तौर पर एक हिट फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे अभिनेता अक्षय कुमार की सारी उम्मीदें अब अपनी अगली फिल्म 'राम सेतु' पर टिकी हैं। फिल्म के ट्रेलर को हालांकि यूट्यूब पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, लेकिन इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यूए प्रमाणपत्र दे दिया है। जानकारी के मुताबिक फिल्म के कुछ संवादों पर आपत्ति करने के बाद इनमें बदलाव सुझाने के अलावा सेंसर बोर्ड ने फिल्म की शुरुआत में दिखाए गए अस्वीकरण की अवधि भी बढ़ाने का निर्देश दिया है। इस बीच मुंबई में फिल्म का एक गाना अक्षय कुमार ने अपने प्रशंसकों के बीच लॉन्च किया। गुरुवार को मुंबई अपनी फिल्म के गाने को सिनेमा हॉल में उपस्थित लोगों के बीच गाने से पहले अक्षय कुमार ने मंच पर अपने जूते भी उतारे लेकिन इस गाने में प्रयुक्त सुंदरकांड के सत्तावनवें दोहे के गलत उच्चारण पर कार्यक्रम में उपस्थिति लोगों ने ही आपत्ति जता दी। अक्षय कुमार ने ये गाना शुरू करने से पहले इसके गायक को भी मंच पर बुलाने को कहा लेकिन कार्यक्रम आयोजकों ने फिल्म के गाने की इस लॉन्चिंग में शायद पूरा फोकस अक्षय कुमार पर ही रखा और गायक व संगीतकार विक्रम मोंटरोस को बुलाया ही नहीं। गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस में लंका जाने के लिए समुद्र से रास्ता मांग रहे भगवान श्रीराम के क्रोधित होने के प्रसंग का दोहा है, 'विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होई न प्रीति। । ' जबकि फिल्म 'राम सेतु' के नए गाने में संगीतकार और गायक विक्रम मोंटरोस ने 'जलधि' की बजाय बार बार 'जलधी' का उच्चारण किया है। इस कार्यक्रम का आयोजन अक्षय कुमार का प्रचार प्रसार देखने वाली कंपनी हाइप ने फिल्म 'राम सेतु' की हाइप बनाने के लिए ही किया लेकिन फिल्म के ट्रेलर से बनी हाइप पर इस गाने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता दिख रहा है। Don तीन: शाहरुख की 'डॉन' को सोलह साल पूरे, फरहान ने साझा किया पोस्ट, यूजर्स बोले- 'हमें तो डॉन तीन का इंतजार है' फिल्म 'राम सेतु' दिवाली के अगले दिन रिलीज हो रही है। अक्षय कुमार की फिल्म 'सूर्यवंशी' के बाद रिलीज पिछली सारी फिल्में 'बच्चन पांडे', 'सम्राट पृथ्वीराज' और 'रक्षा बंधन' बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही हैं और इस बीच उनकी दो फिल्में 'अतरंगी रे' और 'कठपुतली' वितरक न मिलने के चलते सीधे ओटीटी पर रिलीज हो चुकी हैं। उनकी आने वाली फिल्मों में इमरान हाशमी के साथ 'सेल्फी', टाइगर श्रॉफ के साथ 'बड़े मियां छोटे मियां', 'ओ माय गॉड दो' 'कैप्सूल गिल' और अभिनेता सूर्या की फिल्म 'सूराराई पोट्रू' की रीमेक शामिल हैं। अमेजन कंपनी की वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस अमेजन प्राइम वीडियो ने फिल्म 'राम सेतु' के साथ भारतीय सिनेमा के निर्माण में कदम रखा है। फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी भी फिल्म 'राम सेतु' से क्रिएटिव प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़े हुए हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया। फिल्म के संवाद अभिषेक और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने मिलकर लिखे हैं। फिल्म में नुसरत भरुचा और जैकलीन फर्नांडीज के अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेता सत्य देव की भी अहम भूमिका है। इस फिल्म को हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगू में भी रिलीज किया जा रहा है।
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गलवान में हुई हिंसा और लद्दाख में चीन की घुसपैठ के बाद उसका नाम लेने तक से कतराती रही मोदी सरकार को शायद अंदाजा नहीं है कि ड्रैगन कितनी तेज़ी से भारत की सीमा के पास निर्माण कर रहा है। ताज़ा जानकारी यह है कि भारत-चीन और भूटान के बॉर्डर जहां पर मिलते हैं, वहां से 5 किमी दूर ही चीन ने कम से कम तीन गांव बसा लिए हैं। यह अरूणाचल प्रदेश का पश्चिमी इलाक़ा है, जहां चीन लगातार इस तरह की हरक़तें कर रहा है।
पिछले महीने ही यह ख़बर आई थी कि चीन ने भूटान की सीमा के क़रीब ढाई किलोमीटर अंदर एक गांव बसा लिया है और 9 किमी. अंदर तक सड़क बना ली है। इस बात की जानकारी चीन के सरकारी मीडिया सीजीटीएन के एक वरिष्ठ प्रोड्यूसर शेन शिवेई ने गांव की कई तसवीरें पोस्ट करके दी थी। उन्होंने तसवीरों के साथ लिखा था कि हमारे पास स्थायी रूप से नवस्थापित पंगड़ा गांव के निवासी हैं। हंगामा होने के बाद शेन शिवेई ने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया था।
बम ला पास में हुए इस निर्माण को लेकर चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने इस साल अगस्त में एक रिपोर्ट छापी थी और इसमें कहा गया था कि अरूणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक निर्माण का काम किया जा रहा है। यहां पर बने नए घरों में पानी, बिजली और इंटरनेट की भी सुविधा है। यहां पर स्थित कोना नाम के इलाक़े की भारत के साथ 213 किमी. की सीमा लगती है। यहां से 960 परिवारों के 3,222 लोगों को हटाने की योजना है।
चीन अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है। विस्तारवाद की मंशा के कारण ही तिब्बत और ताइवान पर कब्जा करके बैठा चीन लगातार भारत की सीमाओं में अशांति के हालात बनाने की कोशिश कर रहा है। गलवान हिंसा के बाद से अब तक कई दौर की सैन्य, राजनीतिक वार्ताओं के बाद भी वह लद्दाख से लौटने के लिए तैयार नहीं दिखता, हालांकि वह इसका भरोसा ज़रूर देता है। रक्षा मामलों के जानकार कहते हैं कि उसकी बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
विस्तारवाद की इसी मंशा के कारण चीन ने गलवान घाटी, पैंगॉन्ग त्सो, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक, फाइव फिंगर्स में घुसपैठ की और एलओसी को बदलने की कोशिश की। यही काम वह चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान में भी कर रहा है और बलोचिस्तान और पीओके में उसके द्वारा किए जा रहे निर्माण के कारण वहां के बाशिंदे इमरान सरकार और उसका विरोध कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ महीने पहले लद्दाख में जवानों को संबोधित करते हुए विस्तारवाद को लेकर चीन पर निशाना साधा था। चीन और भारत के बीच विवाद का मुख्य कारण चीन का सीमांत इलाक़ों में लगातार ढांचागत काम करते रहना भी है। इसके जवाब में भारत ने भी सीमाई इलाक़ों में बेहतर सड़कें और जवानों के लिए ज़रूरी सुविधाओं का विस्तार किया है।
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गलवान में हुई हिंसा और लद्दाख में चीन की घुसपैठ के बाद उसका नाम लेने तक से कतराती रही मोदी सरकार को शायद अंदाजा नहीं है कि ड्रैगन कितनी तेज़ी से भारत की सीमा के पास निर्माण कर रहा है। ताज़ा जानकारी यह है कि भारत-चीन और भूटान के बॉर्डर जहां पर मिलते हैं, वहां से पाँच किमी दूर ही चीन ने कम से कम तीन गांव बसा लिए हैं। यह अरूणाचल प्रदेश का पश्चिमी इलाक़ा है, जहां चीन लगातार इस तरह की हरक़तें कर रहा है। पिछले महीने ही यह ख़बर आई थी कि चीन ने भूटान की सीमा के क़रीब ढाई किलोमीटर अंदर एक गांव बसा लिया है और नौ किमी. अंदर तक सड़क बना ली है। इस बात की जानकारी चीन के सरकारी मीडिया सीजीटीएन के एक वरिष्ठ प्रोड्यूसर शेन शिवेई ने गांव की कई तसवीरें पोस्ट करके दी थी। उन्होंने तसवीरों के साथ लिखा था कि हमारे पास स्थायी रूप से नवस्थापित पंगड़ा गांव के निवासी हैं। हंगामा होने के बाद शेन शिवेई ने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया था। बम ला पास में हुए इस निर्माण को लेकर चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने इस साल अगस्त में एक रिपोर्ट छापी थी और इसमें कहा गया था कि अरूणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक निर्माण का काम किया जा रहा है। यहां पर बने नए घरों में पानी, बिजली और इंटरनेट की भी सुविधा है। यहां पर स्थित कोना नाम के इलाक़े की भारत के साथ दो सौ तेरह किमी. की सीमा लगती है। यहां से नौ सौ साठ परिवारों के तीन,दो सौ बाईस लोगों को हटाने की योजना है। चीन अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है। विस्तारवाद की मंशा के कारण ही तिब्बत और ताइवान पर कब्जा करके बैठा चीन लगातार भारत की सीमाओं में अशांति के हालात बनाने की कोशिश कर रहा है। गलवान हिंसा के बाद से अब तक कई दौर की सैन्य, राजनीतिक वार्ताओं के बाद भी वह लद्दाख से लौटने के लिए तैयार नहीं दिखता, हालांकि वह इसका भरोसा ज़रूर देता है। रक्षा मामलों के जानकार कहते हैं कि उसकी बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। विस्तारवाद की इसी मंशा के कारण चीन ने गलवान घाटी, पैंगॉन्ग त्सो, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक, फाइव फिंगर्स में घुसपैठ की और एलओसी को बदलने की कोशिश की। यही काम वह चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान में भी कर रहा है और बलोचिस्तान और पीओके में उसके द्वारा किए जा रहे निर्माण के कारण वहां के बाशिंदे इमरान सरकार और उसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ महीने पहले लद्दाख में जवानों को संबोधित करते हुए विस्तारवाद को लेकर चीन पर निशाना साधा था। चीन और भारत के बीच विवाद का मुख्य कारण चीन का सीमांत इलाक़ों में लगातार ढांचागत काम करते रहना भी है। इसके जवाब में भारत ने भी सीमाई इलाक़ों में बेहतर सड़कें और जवानों के लिए ज़रूरी सुविधाओं का विस्तार किया है।
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RRB Group D Result for PET Exam: आरआरबी ग्रुप डी रिजल्ट 2022 पीईटी परीक्षा के लिए जारी कर दिया गया है। रेलवे भर्ती बोर्ड ग्रुप डी पीईटी परिणाम आरआरसी की संबंधित वेबसाइट और rrbcdg. gov. in पर जारी किया गया है। पीईटी क्लियर करने वाले उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन राउंड के लिए बुलाया जाएगा।
RRB Group D PET Result : रेलवे भर्ती बोर्ड, आरआरबी ग्रुप डी रिजल्ट 2022 के पीईटी दौर का परिणाम जारी कर दिया गया है। आरआरबी ग्रुप डी पीईटी रिजल्ट आरआरसी की संबंधित वेबसाइट पर जारी किया गया है। पीईटी के लिए उपस्थित हुए उम्मीदवार अपना रिजल्ट पीडीएफ आधिकारिक वेबसाइटों जैसे - rrbcdg. gov. in से चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। यहां दिए गए रिजल्ट को डाउनलोड करने के लिए डायरेक्ट लिंक और स्टेप्स को उम्मीदवार चेक कर सकते हैं।
आरआरबी पीईटी 2022 परीक्षा सीबीटी स्टेज को पास करने वाले उम्मीदवारों के लिए आयोजित की गई थी। जोनल रेलवे के संबंधित रेलवे भर्ती सेल (आरआरसी) की ओर से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के लिए पीईटी आयोजित किया जाता है। अब जिन उम्मीदवारों ने पीईटी पास कर लिया है, उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन राउंड के लिए बुलाया जाएगा।
आरआरबी के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, 'डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (डीवी) प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाएगा और कार्यक्रम वेबसाइट पर पब्लिश किया जाएगा। डीवी के लिए निर्धारित उम्मीदवारों को आरआरबी वेबसाइट से अपना ई कॉल लेटर डाउनलोड करने के लिए एक ईमेल और एसएमएस आएगा। '
आरआरबी ग्रुप डी पीईटी रिजल्ट तक पहुंचने का तरीका जानने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स चेक कर सकते हैं।
- आधिकारिक वेबसाइट rrbcdg. gov. in पर जाएं।
- दिखाई देने वाले होम पेज पर, आरआरबी ग्रुपो डी रिजल्ट लिंक को क्लिक करें।
- एक नई पीडीएफ फाइल खुलेगी।
- अपना रोल नंबर जांचें और पीडीएफ को सेव करें।
- आवश्यकतानुसार प्रिंटआउट निकाल लें।
ट्रेंडिंगः
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RRB Group D Result for PET Exam: आरआरबी ग्रुप डी रिजल्ट दो हज़ार बाईस पीईटी परीक्षा के लिए जारी कर दिया गया है। रेलवे भर्ती बोर्ड ग्रुप डी पीईटी परिणाम आरआरसी की संबंधित वेबसाइट और rrbcdg. gov. in पर जारी किया गया है। पीईटी क्लियर करने वाले उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन राउंड के लिए बुलाया जाएगा। RRB Group D PET Result : रेलवे भर्ती बोर्ड, आरआरबी ग्रुप डी रिजल्ट दो हज़ार बाईस के पीईटी दौर का परिणाम जारी कर दिया गया है। आरआरबी ग्रुप डी पीईटी रिजल्ट आरआरसी की संबंधित वेबसाइट पर जारी किया गया है। पीईटी के लिए उपस्थित हुए उम्मीदवार अपना रिजल्ट पीडीएफ आधिकारिक वेबसाइटों जैसे - rrbcdg. gov. in से चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। यहां दिए गए रिजल्ट को डाउनलोड करने के लिए डायरेक्ट लिंक और स्टेप्स को उम्मीदवार चेक कर सकते हैं। आरआरबी पीईटी दो हज़ार बाईस परीक्षा सीबीटी स्टेज को पास करने वाले उम्मीदवारों के लिए आयोजित की गई थी। जोनल रेलवे के संबंधित रेलवे भर्ती सेल की ओर से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के लिए पीईटी आयोजित किया जाता है। अब जिन उम्मीदवारों ने पीईटी पास कर लिया है, उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन राउंड के लिए बुलाया जाएगा। आरआरबी के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, 'डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाएगा और कार्यक्रम वेबसाइट पर पब्लिश किया जाएगा। डीवी के लिए निर्धारित उम्मीदवारों को आरआरबी वेबसाइट से अपना ई कॉल लेटर डाउनलोड करने के लिए एक ईमेल और एसएमएस आएगा। ' आरआरबी ग्रुप डी पीईटी रिजल्ट तक पहुंचने का तरीका जानने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स चेक कर सकते हैं। - आधिकारिक वेबसाइट rrbcdg. gov. in पर जाएं। - दिखाई देने वाले होम पेज पर, आरआरबी ग्रुपो डी रिजल्ट लिंक को क्लिक करें। - एक नई पीडीएफ फाइल खुलेगी। - अपना रोल नंबर जांचें और पीडीएफ को सेव करें। - आवश्यकतानुसार प्रिंटआउट निकाल लें। ट्रेंडिंगः
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फरीदाबाद : एसआरएस समूह अपनी रिटेल चैन एसआरएस वैल्यू बाजार का नया स्टोर फरीदाबाद सैक्टर-87 में शुरू करने जा रहा है, सुबह 11 बजे इस स्टोर का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। वैल्यू बाजार स्टोर में ग्राहकों को खाद्य और राशन, होम केयर, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, पर्सनल केयर, क्रॉकरी, घरेलू उपकरण, ऐसेसरीज और अन्य सामान उपलब्ध होगा जिससे ग्राहकों की पसंद की ज्यादातर चीजें उनको एक ही छत के नीचे मिल जाएंगी।
एसआरएस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील जिंदल ने कहा फरीदाबाद में नया वैल्यू बाजार स्टोर खोलकर और एक अन्य लक्ष्य हासिल कर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं हर उस व्यक्ति के प्रति आभारी हूं जो लगातार हमें अलग-अलग रणनीति के साथ स्वीकार कर रहा है।
मैं हमारे कर्मचारियों को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि हम उनके कठिन परिश्रम और समर्पण से ही इस मुकाम पर हैं। एसआरएस वैल्यू बाजार समूह की रिटेल इकाई है जो एफएमसीजी उत्पादों का कारोबार करती है। इस कारोबारी समूह की अगुवाई स्वनिर्मित उद्यमी डॉ. अनिल जिंदल कर रहे हैं।
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फरीदाबाद : एसआरएस समूह अपनी रिटेल चैन एसआरएस वैल्यू बाजार का नया स्टोर फरीदाबाद सैक्टर-सत्तासी में शुरू करने जा रहा है, सुबह ग्यारह बजे इस स्टोर का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। वैल्यू बाजार स्टोर में ग्राहकों को खाद्य और राशन, होम केयर, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, पर्सनल केयर, क्रॉकरी, घरेलू उपकरण, ऐसेसरीज और अन्य सामान उपलब्ध होगा जिससे ग्राहकों की पसंद की ज्यादातर चीजें उनको एक ही छत के नीचे मिल जाएंगी। एसआरएस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील जिंदल ने कहा फरीदाबाद में नया वैल्यू बाजार स्टोर खोलकर और एक अन्य लक्ष्य हासिल कर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं हर उस व्यक्ति के प्रति आभारी हूं जो लगातार हमें अलग-अलग रणनीति के साथ स्वीकार कर रहा है। मैं हमारे कर्मचारियों को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि हम उनके कठिन परिश्रम और समर्पण से ही इस मुकाम पर हैं। एसआरएस वैल्यू बाजार समूह की रिटेल इकाई है जो एफएमसीजी उत्पादों का कारोबार करती है। इस कारोबारी समूह की अगुवाई स्वनिर्मित उद्यमी डॉ. अनिल जिंदल कर रहे हैं।
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'शीतल पेयों में कीटनाशक और अधिक'
भारत की एक जानी मानी ग़ैरसरकारी संस्था का कहना है कि कई शीतल पेयों में अब भी कीटनाशकों की भारी मात्रा मौजूद है और ये मात्रा पहले की तुलना में अधिक हैं.
विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने एक अध्ययन के आधार पर ये आरोप लगाए हैं.
सीएसई ने तीन साल पहले एक सर्वेक्षण करके शीतल पेयों में ज़हरीले कीटनाशक होने की बात कही थी और अब सीएसई का कहना है कि ये मात्रा पहले की तुलना में और अधिक है.
उल्लेखनीय है कि सीएसई के आरोपों के बाद काफी बहस हुई थी और जाँच के लिए संसदीय समिति का भी गठन किया गया था.
सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण ने बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शीतल पेय की बड़ी कंपनियां अभी भी स्वच्छता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि इन पेयों में भारी मात्रा में कीटनाशक अभी भी मौजूद हैं.
सीएसई की मांग है कि इसके लिए मानक बनाए जाएं. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है.
उधर भारतीय शीतल पेय निर्माता एसोसिएशन (इस्डमा) ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है, "शीतल पेय बिल्कुल सुरक्षित हैं. भारत में जो भी शीतल पेय बनते हैं उनमें अंतरराष्ट्रीय मानकों और राष्ट्रीय नियामकों का सख़्ती से पालन किया जाता है. "
सीएसई की नई रिपोर्ट के अनुसार शीतल पेयों के 11 ब्रांडों के 57 नमूनों में से सभी में तीन से छह कीटनाशक मिले.
इनमें से एक कीटनाशक लिनडेन की मात्रा तय मानक (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) से 54 प्रतिशत अधिक पाई गई है जबकि कोलकाता से लिए गए एक नमूने में यह मात्रा 140 प्रतिशत अधिक मिली.
मुंबई से लिए गए कोका कोला के एक नमूने में क्लोरपायरिफोस की मात्रा 200 प्रतिशत अधिक देखी गई.
भारत में प्रतिबंधित हेप्टाक्लोर की मात्रा 71 प्रतिशत मिली जो तय मानकों से चार प्रतिशत अधिक है.
कुल मिलाकर जहाँ कोका कोला में औसतन कीटनाशकों की 30 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जाती है जबकि पेप्सी में 27 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जा रही है.
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने मानक बना दिए हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की है और सीएसई का कहना है कि मानकों के बनने और अधिसूचना जारी करने के बीच में बड़ी कंपनियों का दबाव आ गया है.
सीएसई ने यह आरोप ऐसे दिन लगाया है जब राज्य सभा में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और मानदंडों से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा हो रही है.
"शीतलपेयों में कीटनाशकों की रिपोर्ट सही"
पेप्सी ने की कोक वालों की 'मदद'
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'शीतल पेयों में कीटनाशक और अधिक' भारत की एक जानी मानी ग़ैरसरकारी संस्था का कहना है कि कई शीतल पेयों में अब भी कीटनाशकों की भारी मात्रा मौजूद है और ये मात्रा पहले की तुलना में अधिक हैं. विज्ञान और पर्यावरण केंद्र ने एक अध्ययन के आधार पर ये आरोप लगाए हैं. सीएसई ने तीन साल पहले एक सर्वेक्षण करके शीतल पेयों में ज़हरीले कीटनाशक होने की बात कही थी और अब सीएसई का कहना है कि ये मात्रा पहले की तुलना में और अधिक है. उल्लेखनीय है कि सीएसई के आरोपों के बाद काफी बहस हुई थी और जाँच के लिए संसदीय समिति का भी गठन किया गया था. सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण ने बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शीतल पेय की बड़ी कंपनियां अभी भी स्वच्छता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इन पेयों में भारी मात्रा में कीटनाशक अभी भी मौजूद हैं. सीएसई की मांग है कि इसके लिए मानक बनाए जाएं. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है. उधर भारतीय शीतल पेय निर्माता एसोसिएशन ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है, "शीतल पेय बिल्कुल सुरक्षित हैं. भारत में जो भी शीतल पेय बनते हैं उनमें अंतरराष्ट्रीय मानकों और राष्ट्रीय नियामकों का सख़्ती से पालन किया जाता है. " सीएसई की नई रिपोर्ट के अनुसार शीतल पेयों के ग्यारह ब्रांडों के सत्तावन नमूनों में से सभी में तीन से छह कीटनाशक मिले. इनमें से एक कीटनाशक लिनडेन की मात्रा तय मानक से चौवन प्रतिशत अधिक पाई गई है जबकि कोलकाता से लिए गए एक नमूने में यह मात्रा एक सौ चालीस प्रतिशत अधिक मिली. मुंबई से लिए गए कोका कोला के एक नमूने में क्लोरपायरिफोस की मात्रा दो सौ प्रतिशत अधिक देखी गई. भारत में प्रतिबंधित हेप्टाक्लोर की मात्रा इकहत्तर प्रतिशत मिली जो तय मानकों से चार प्रतिशत अधिक है. कुल मिलाकर जहाँ कोका कोला में औसतन कीटनाशकों की तीस प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जाती है जबकि पेप्सी में सत्ताईस प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जा रही है. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने मानक बना दिए हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की है और सीएसई का कहना है कि मानकों के बनने और अधिसूचना जारी करने के बीच में बड़ी कंपनियों का दबाव आ गया है. सीएसई ने यह आरोप ऐसे दिन लगाया है जब राज्य सभा में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और मानदंडों से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा हो रही है. "शीतलपेयों में कीटनाशकों की रिपोर्ट सही" पेप्सी ने की कोक वालों की 'मदद'
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यह तो हम सभी जानते हैं कि दूध हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन शायद आप इस बात से अंजान होंगे कि अगर इसका सेवन गलत चीजों के साथ हो जाये तो यह हमारे लिए जहर का काम करते है। दूध के साथ हम जिन चीजें का सेवन करते हैं इन सब का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। बहुत सारे लोग इस बात से अंजान हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दूध के साथ आपको किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
-दूध के साथ दही कभी नहीं खानी चाहिए। इन्हें साथ खाने से एसिडिटी, गैस और उल्टी की समस्या हो सकती है। दही खाने के करीब एक से डेढ़ घंटे बाद दूध पीना चाहिए।
-उड़द की दाल के साथ कभी भी दूध का सेवन ना करें। यह हमारी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।
-दूध पीने के पहले और बाद में या फिर साथ में कुछ फल नहीं खाने चाहिए। अगर आप इसके साथ संतरा, अन्नास जैसे खट्टे फल का सेवन करते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इनका साथ में सेवन करने से खाना सही से नहीं पचता और उल्टी की संभावना रहती है।
-दूध के साथ जामुन, मूली, मछली आदि भी नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह चीजें दूध के साथ विपरित प्रभाव देती हैं। दूध के साथ इन चीजों का सेवन करने से त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।
-दूध के साथ नमक या करेला का सेवन बिलकुल नहीं लेना चाहिए। यह भी हमारी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
-कई लोग नाश्ते में दूध के साथ ब्रेड-बटर लेते हैं लेकिन दूध अपने आप में पूरा आहार है। इन सब चीजों का साथ में सेवन करने से पेट में भारीपन महसूस होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट की अधिक मात्रा एक-साथ नहीं लेनी चाहिए। इसलिए दूध को अकेले लेना ही बेहतर है।
-रात को सोने से तीन घंटे पहले दूध पीएं तो ज्यादा हितकारी होता है. रात को ज्यादा गरम दूध पीने से जहर का काम करता है।
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यह तो हम सभी जानते हैं कि दूध हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन शायद आप इस बात से अंजान होंगे कि अगर इसका सेवन गलत चीजों के साथ हो जाये तो यह हमारे लिए जहर का काम करते है। दूध के साथ हम जिन चीजें का सेवन करते हैं इन सब का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। बहुत सारे लोग इस बात से अंजान हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दूध के साथ आपको किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। -दूध के साथ दही कभी नहीं खानी चाहिए। इन्हें साथ खाने से एसिडिटी, गैस और उल्टी की समस्या हो सकती है। दही खाने के करीब एक से डेढ़ घंटे बाद दूध पीना चाहिए। -उड़द की दाल के साथ कभी भी दूध का सेवन ना करें। यह हमारी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है। -दूध पीने के पहले और बाद में या फिर साथ में कुछ फल नहीं खाने चाहिए। अगर आप इसके साथ संतरा, अन्नास जैसे खट्टे फल का सेवन करते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इनका साथ में सेवन करने से खाना सही से नहीं पचता और उल्टी की संभावना रहती है। -दूध के साथ जामुन, मूली, मछली आदि भी नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह चीजें दूध के साथ विपरित प्रभाव देती हैं। दूध के साथ इन चीजों का सेवन करने से त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। -दूध के साथ नमक या करेला का सेवन बिलकुल नहीं लेना चाहिए। यह भी हमारी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। -कई लोग नाश्ते में दूध के साथ ब्रेड-बटर लेते हैं लेकिन दूध अपने आप में पूरा आहार है। इन सब चीजों का साथ में सेवन करने से पेट में भारीपन महसूस होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट की अधिक मात्रा एक-साथ नहीं लेनी चाहिए। इसलिए दूध को अकेले लेना ही बेहतर है। -रात को सोने से तीन घंटे पहले दूध पीएं तो ज्यादा हितकारी होता है. रात को ज्यादा गरम दूध पीने से जहर का काम करता है।
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मेरे अध्यात्मिक अनुभव !
प्रिय मित्र अश्विनी जी एवं मिश्रा जी ! सबसे पहले मैं बहुत बहुत आभार प्रकट करना चाहता हूँ कि आप लोंगों ने दौड़-भाग के इस दौर में मेरे ब्लॉग/पिछली पोस्ट (चिंतामुक्त, निरोगी व् आनंदपूर्ण जीवन जियें! ) पर पर इतना समय दिया। निसंदेह मुझसे कही अधिक समय अपने इस पर टिप्पणियां देने में व्यतीत किया है । कभी कभी मुझे इस बात से जलन होती कि आपमें कितनी अधिक उर्जा है, मैं तो थोडा ही लिख कर ऊब महसूस करता हूँ । आपने चर्च, पोप पादरियों के विषय में जितने भी आरोप लगायें है उन पर मैं कोई प्रत्युत्तर नहीं दूंगा, लेकिन मैं यह जरूर कहूँगा कि जितना आपने लिखा है उससे कहीं घृणित कार्य इसाई धर्माधिकारियों ने किये हैं । लेकिन मित्र अपने मेरे ब्लॉग पर उनकी चर्चा क्यों की ? किस धर्म में धर्माधिकारियों पर यौन शोषण के आरोप नहीं लगे ? आपने मेरे लिए एक टिप्पणी की है " .... . आप का क्रोधित एवं उन्मादित होना स्वाभाविक ही है....... . " मित्रों ! आपने बार बार इसाई धर्म के धर्माधिकारियों व् मदर टेरेसा पर भी नकारात्मक टिप्पणियां की हैं, लेकिन मित्र मैंने पलट कर किसी भी हिन्दू धर्माधिकारी के विरुद्ध कुछ कहा ? फिर आप मुझे क्रोधित एवं उन्मादित क्यों कहते है ? मित्र(अश्विनी जी) आप ने लिखा है ......................... . मेरे परम स्नेही मित्र डेनियल जी ,,,मे तो इस बात को लेकर चिंतित हूँ की ईसाई धर्म बच भी पायेगा या नही,क्योंकि आपके ईसाईयत के घर वेटिकन में ही लोग ईसाई धर्म से विमुख होकर हिन्दू धर्म एवं जीवन शैली अपना रहें आपने इसाई धर्म की चिंता की यह जानकर अच्छा लगा । लेकिन मित्र मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं क्योंकि प्रभु यीशु इसकी चिंता स्वयं ही करेंगे । मेरा जीवन दर्शन है कि किसी बात की चिंता मत करो (लेकिन चिंतन ज़रूर करो ) आप लोंगों को याद ही होगा कि मैं रेकी का अभ्यासी हूँ । रेकी के पाँच नियमो में से एक है "आज के दिन मैं चिंता नहीं करूँगा" मित्र मैं चिंता से परे हूँ .......... क्रोधित व् उन्मादित होना अब मेरा स्वभाव नहीं रहा...................... , कोई कितना भी अपमानजनक कहता रहे ...................... . ,कोई फर्क नहीं पड़ता,............................ . क्योंकि अब मन में अहंकार नहीं रह गया है ..................द्वेषभावना के लिए अब कोई स्थान नहीं ..................................... मैंने क्रोध पर किसी सीमा तक नियंत्रण कर लिया है,......................... . अपनी चिंताएं प्रभु पर डाल कर मैं स्वयं चिंता मुक्त हो गया हूँ ............. .
आज कल के जीवन में जरा जरा सी बात पर तनाव ग्रस्त हो जाना एक सामान्य बात हो गई है आप लोंगों की टिप्पणियों से प्रमाणित हो जाता है .......................................................... . मैंने अपने आप को कैसे बदला ........................................... . प्रभु यीशु की कृपा से...................................................................... ध्यान व् चिंतन के साथ । .....................जिस विधि से मैंने यह सब किया उसे अन्य लोगों के साथ बाँटना चाहता हूँ । लेकिन जिनकी कृपा से यह उपलब्धि मिली उन्हें कैसे भूल जाऊं ? अपनी ध्यान पद्धति में प्रभु यीशु के प्रेम, क्षमा, बलिदान व् अनुग्रह के प्रतीक क्रूस का प्रयोग करता हूँ जो मार्ग मेरा जाना पहचाना है । अपने मित्रों को भी उसी मार्ग से ले जाना पड़ेगा नहीं तो रास्ता भटकने का डर लगा रहेगा । यद्यपि आप जानते ही हैं कि मैं स्वयं गायत्री मन्त्र आदि का साधक रहा हूँ । आप यह भी जानते हैं क्रूस का ध्यान करने से या प्रभु यीशु से प्रार्थना करने से कोई धर्मांतरण नहीं होता, लेकिन आपने मुझे इसाई मिशनरी बता दिया.............................. मित्रों एक दिन शायद आप मुझे समझ सकें । ................................................................................................................ इस बात की आशा ज़रूर है !
हम सभी लोग ......................... चिंतामुक्त, निरोगी व् आनंदपूर्णजीवन जी सकें इस शुभकामना के साथ ।
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मेरे अध्यात्मिक अनुभव ! प्रिय मित्र अश्विनी जी एवं मिश्रा जी ! सबसे पहले मैं बहुत बहुत आभार प्रकट करना चाहता हूँ कि आप लोंगों ने दौड़-भाग के इस दौर में मेरे ब्लॉग/पिछली पोस्ट पर पर इतना समय दिया। निसंदेह मुझसे कही अधिक समय अपने इस पर टिप्पणियां देने में व्यतीत किया है । कभी कभी मुझे इस बात से जलन होती कि आपमें कितनी अधिक उर्जा है, मैं तो थोडा ही लिख कर ऊब महसूस करता हूँ । आपने चर्च, पोप पादरियों के विषय में जितने भी आरोप लगायें है उन पर मैं कोई प्रत्युत्तर नहीं दूंगा, लेकिन मैं यह जरूर कहूँगा कि जितना आपने लिखा है उससे कहीं घृणित कार्य इसाई धर्माधिकारियों ने किये हैं । लेकिन मित्र अपने मेरे ब्लॉग पर उनकी चर्चा क्यों की ? किस धर्म में धर्माधिकारियों पर यौन शोषण के आरोप नहीं लगे ? आपने मेरे लिए एक टिप्पणी की है " .... . आप का क्रोधित एवं उन्मादित होना स्वाभाविक ही है....... . " मित्रों ! आपने बार बार इसाई धर्म के धर्माधिकारियों व् मदर टेरेसा पर भी नकारात्मक टिप्पणियां की हैं, लेकिन मित्र मैंने पलट कर किसी भी हिन्दू धर्माधिकारी के विरुद्ध कुछ कहा ? फिर आप मुझे क्रोधित एवं उन्मादित क्यों कहते है ? मित्र आप ने लिखा है ......................... . मेरे परम स्नेही मित्र डेनियल जी ,,,मे तो इस बात को लेकर चिंतित हूँ की ईसाई धर्म बच भी पायेगा या नही,क्योंकि आपके ईसाईयत के घर वेटिकन में ही लोग ईसाई धर्म से विमुख होकर हिन्दू धर्म एवं जीवन शैली अपना रहें आपने इसाई धर्म की चिंता की यह जानकर अच्छा लगा । लेकिन मित्र मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं क्योंकि प्रभु यीशु इसकी चिंता स्वयं ही करेंगे । मेरा जीवन दर्शन है कि किसी बात की चिंता मत करो आप लोंगों को याद ही होगा कि मैं रेकी का अभ्यासी हूँ । रेकी के पाँच नियमो में से एक है "आज के दिन मैं चिंता नहीं करूँगा" मित्र मैं चिंता से परे हूँ .......... क्रोधित व् उन्मादित होना अब मेरा स्वभाव नहीं रहा...................... , कोई कितना भी अपमानजनक कहता रहे ...................... . ,कोई फर्क नहीं पड़ता,............................ . क्योंकि अब मन में अहंकार नहीं रह गया है ..................द्वेषभावना के लिए अब कोई स्थान नहीं ..................................... मैंने क्रोध पर किसी सीमा तक नियंत्रण कर लिया है,......................... . अपनी चिंताएं प्रभु पर डाल कर मैं स्वयं चिंता मुक्त हो गया हूँ ............. . आज कल के जीवन में जरा जरा सी बात पर तनाव ग्रस्त हो जाना एक सामान्य बात हो गई है आप लोंगों की टिप्पणियों से प्रमाणित हो जाता है .......................................................... . मैंने अपने आप को कैसे बदला ........................................... . प्रभु यीशु की कृपा से...................................................................... ध्यान व् चिंतन के साथ । .....................जिस विधि से मैंने यह सब किया उसे अन्य लोगों के साथ बाँटना चाहता हूँ । लेकिन जिनकी कृपा से यह उपलब्धि मिली उन्हें कैसे भूल जाऊं ? अपनी ध्यान पद्धति में प्रभु यीशु के प्रेम, क्षमा, बलिदान व् अनुग्रह के प्रतीक क्रूस का प्रयोग करता हूँ जो मार्ग मेरा जाना पहचाना है । अपने मित्रों को भी उसी मार्ग से ले जाना पड़ेगा नहीं तो रास्ता भटकने का डर लगा रहेगा । यद्यपि आप जानते ही हैं कि मैं स्वयं गायत्री मन्त्र आदि का साधक रहा हूँ । आप यह भी जानते हैं क्रूस का ध्यान करने से या प्रभु यीशु से प्रार्थना करने से कोई धर्मांतरण नहीं होता, लेकिन आपने मुझे इसाई मिशनरी बता दिया.............................. मित्रों एक दिन शायद आप मुझे समझ सकें । ................................................................................................................ इस बात की आशा ज़रूर है ! हम सभी लोग ......................... चिंतामुक्त, निरोगी व् आनंदपूर्णजीवन जी सकें इस शुभकामना के साथ ।
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गाजियाबाद के SP ग्रामीण ईरज राजा ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि नोटिस ट्विटर इंडिया के हेड को भेजा गया है. एक हफ्ते में जांच में शामिल होने के लिए बोला गया है. डिटेल शेयर करने के लिए जल्दी से जल्दी बोला गया है. सिर्फ अभी ट्विटर को ही नोटिस भेजा गया है. बाकी लोगों के लिए चीजें वेरीफाई किया जा रहा है.
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गाजियाबाद के SP ग्रामीण ईरज राजा ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि नोटिस ट्विटर इंडिया के हेड को भेजा गया है. एक हफ्ते में जांच में शामिल होने के लिए बोला गया है. डिटेल शेयर करने के लिए जल्दी से जल्दी बोला गया है. सिर्फ अभी ट्विटर को ही नोटिस भेजा गया है. बाकी लोगों के लिए चीजें वेरीफाई किया जा रहा है.
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वस्तुतः प्रत्येक देश के घर में फायरप्लेस हैं,ओवन, चिमनी, हीटिंग के लिए बॉयलर, कॉलम और अन्य डिवाइस। उनका मुख्य कार्य दहन उत्पादों के साथ संतृप्त हवा को अवशोषित करना है। लेकिन ऐसे डिवाइसों के लिए पूरी तरह से काम करने के लिए कौन सा बारीकियों को जानने की ज़रूरत है? इस सवाल का एक स्पष्ट उत्तर है - एक गुणात्मक और ठीक से इकट्ठे चिमनी। इस मानदंड का महत्व न केवल वायु शुद्धिकरण पर उत्पादक काम में है, बल्कि पूरी अग्नि सुरक्षा के साथ पूर्ण गर्मी प्रदान करने में भी है।
फायरप्लेस के लिए चिमनी क्या है? यह पाइप का एक सेट है जिसमें एक अंत एक हीटिंग डिवाइस से जुड़ा है, और दूसरा सड़क से जुड़ा हुआ है। इसकी स्थापना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसमें कुछ ज्ञान और व्यावसायिकता की आवश्यकता होती है। चिमनी ईंट, स्टेनलेस स्टील, मिट्टी के पात्र, बहुलक सामग्री से बना जा सकता है। इन प्रकारों में से प्रत्येक के पास इसके फायदे, नुकसान, और संस्थापन सुविधाएं भी हैं। बेशक, सही विकल्प बनाने के लिए पेशेवर सलाह लेने में बेहतर है हालांकि, उपकरण चिमनी के कुछ विचारों के लिए, हम सबसे आम प्रजातियों के संक्षिप्त विवरण को नीचे देते हैं।
वेंट चैनलों का सबसे लोकप्रिय प्रकार- पत्थर चिमनी वे एक ही प्रणाली में सभी वेंटिलेशन शाफ्ट और राइजर के संयोजन के साथ, घर के निर्माण के चरण में तैयार किए गए हैं। अक्सर, इस डिजाइन की चिमनी और फायरप्लेस की स्थापना पूर्ण शरीर वाली लाल ईंट से की जाती है। इसमें सभी आवश्यक गुण और कुछ तकनीकी विशेषताएं हैं।
घर में स्थापित कोई भी भारी डिवाइस,नींव के एक विशेष सुदृढीकरण की आवश्यकता होती है, साथ ही असर वाली दीवारों पर लगाव में भी। इसलिए, ईंट निर्माण एक जटिल विकल्प नहीं है, जिसमें यह आवश्यक है कि भार, कर्षण और अन्य संकेतकों को सही ढंग से गिना जाए। यहां तक कि सबसे छोटी गलती को मानते हुए, परिणाम भयावह हो सकते हैं इसलिए, कुछ नियमों को पढ़ने के लिए सिफारिश की जाती है, जो सामान्य गलतियों से बचने, चिमनी के लिए चिमनी बनाने की बुनियादी बारीकियों को प्रकट करते हैं।
स्टेनलेस स्टील से बने पाइप्स विभिन्न आकारों में उत्पादित होते हैंऔर व्यास। उनके डिजाइन सेट, कुछ तत्वों से एकत्रित किया गया है। ऐसी सामग्री ही गर्मी बरकरार नहीं रखती है, हालांकि, थर्मल इन्सुलेशन काफी अच्छा है। कभी-कभी संयुक्त मॉडल होते हैं, जिनमें से जटिल स्टेनलेस स्टील पाइप और सिरेमिक होते हैं। अक्सर वे मुख्य संरचना के अंदर स्थापना के लिए हैं।
उपयोग कर फायरप्लेस और चिमनी की स्थापनासिरेमिक पाइप कंक्रीट से बने छोटे वजन के विशिष्ट ब्लॉक द्वारा बनाए जाते हैं। उनकी ऊंचाई और आयाम काफी अलग हैं, इसलिए सबसे उपयुक्त पैरामीटर ढूंढना मुश्किल नहीं होगा। सीधे बिछाने में एक विशिष्ट प्रणाली नहीं होती है, इसे अलग-अलग रूपों में रखा जा सकता है, हालांकि, इस तरह के काम को पूरा करने के लिए लंबवत मजबूती का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है, जो विश्वसनीयता और ताकत का समग्र डिजाइन प्रदान करेगी। इसके अलावा, थर्मल इन्सुलेशन के बिछाने के बारे में किसी को भी नहीं भूलना चाहिए, इस उपयोग के लिए असंगत सामग्री। निर्माता पाइप व्यक्तिगत आकार और आकार दे सकते हैं, यह सबसे उपयुक्त विकल्प के चयन को बहुत सुविधाजनक बनाता है।
इन संरचनाओं के नुकसान पूरी तरह से महत्वहीन हैं, लेकिन अभी भी हैंः
स्टोव, फायरप्लेस और चिमनी की स्थापना, तापमान जिसमें 250 से अधिक नहीं है0, एक नए का उपयोग कर उत्पादन किया जा सकता हैनिर्माण सामग्री - बहुलक। ऐसी संरचनाएं लचीले, हल्के, भरोसेमंद और टिकाऊ हैं। उनकी स्थापना के लिए, नए वेंटिलेशन नलिकाओं को पूरा करने की आवश्यकता नहीं है, इसे पुरानी खानों में स्थापित किया जा सकता है।
एक गुणवत्ता चिमनी स्थापित करने के लिए, आपको अनुभवी स्वामी की सलाह से परिचित होना चाहिए।
एक अपार्टमेंट इमारत में एक फायरप्लेस स्थापित करने का फैसला किया, यह आवश्यक हैपूरे सिस्टम की जटिलता को समझें। इस तरह के काम को पेशेवरों को सौंपना बेहतर है, क्योंकि प्रक्रिया स्वयं ही श्रमिक है, इसके लिए सटीक गणना और उचित आवेदन की आवश्यकता होगी। यदि ऐसी डिवाइस के निर्माण की स्थापना, जिसमें कई तत्व शामिल हैं, गलतियों को करने के लिए, इससे घातक परिणाम भी हो सकते हैं।
स्थापना प्रौद्योगिकी पर विचार करें।
चूंकि फायरप्लेस के लिए चिमनी सीधे खुली आग से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे बनाए रखने के दौरान अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है। वे चिमनी की स्थापना पर भी लागू होते हैं।
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वस्तुतः प्रत्येक देश के घर में फायरप्लेस हैं,ओवन, चिमनी, हीटिंग के लिए बॉयलर, कॉलम और अन्य डिवाइस। उनका मुख्य कार्य दहन उत्पादों के साथ संतृप्त हवा को अवशोषित करना है। लेकिन ऐसे डिवाइसों के लिए पूरी तरह से काम करने के लिए कौन सा बारीकियों को जानने की ज़रूरत है? इस सवाल का एक स्पष्ट उत्तर है - एक गुणात्मक और ठीक से इकट्ठे चिमनी। इस मानदंड का महत्व न केवल वायु शुद्धिकरण पर उत्पादक काम में है, बल्कि पूरी अग्नि सुरक्षा के साथ पूर्ण गर्मी प्रदान करने में भी है। फायरप्लेस के लिए चिमनी क्या है? यह पाइप का एक सेट है जिसमें एक अंत एक हीटिंग डिवाइस से जुड़ा है, और दूसरा सड़क से जुड़ा हुआ है। इसकी स्थापना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसमें कुछ ज्ञान और व्यावसायिकता की आवश्यकता होती है। चिमनी ईंट, स्टेनलेस स्टील, मिट्टी के पात्र, बहुलक सामग्री से बना जा सकता है। इन प्रकारों में से प्रत्येक के पास इसके फायदे, नुकसान, और संस्थापन सुविधाएं भी हैं। बेशक, सही विकल्प बनाने के लिए पेशेवर सलाह लेने में बेहतर है हालांकि, उपकरण चिमनी के कुछ विचारों के लिए, हम सबसे आम प्रजातियों के संक्षिप्त विवरण को नीचे देते हैं। वेंट चैनलों का सबसे लोकप्रिय प्रकार- पत्थर चिमनी वे एक ही प्रणाली में सभी वेंटिलेशन शाफ्ट और राइजर के संयोजन के साथ, घर के निर्माण के चरण में तैयार किए गए हैं। अक्सर, इस डिजाइन की चिमनी और फायरप्लेस की स्थापना पूर्ण शरीर वाली लाल ईंट से की जाती है। इसमें सभी आवश्यक गुण और कुछ तकनीकी विशेषताएं हैं। घर में स्थापित कोई भी भारी डिवाइस,नींव के एक विशेष सुदृढीकरण की आवश्यकता होती है, साथ ही असर वाली दीवारों पर लगाव में भी। इसलिए, ईंट निर्माण एक जटिल विकल्प नहीं है, जिसमें यह आवश्यक है कि भार, कर्षण और अन्य संकेतकों को सही ढंग से गिना जाए। यहां तक कि सबसे छोटी गलती को मानते हुए, परिणाम भयावह हो सकते हैं इसलिए, कुछ नियमों को पढ़ने के लिए सिफारिश की जाती है, जो सामान्य गलतियों से बचने, चिमनी के लिए चिमनी बनाने की बुनियादी बारीकियों को प्रकट करते हैं। स्टेनलेस स्टील से बने पाइप्स विभिन्न आकारों में उत्पादित होते हैंऔर व्यास। उनके डिजाइन सेट, कुछ तत्वों से एकत्रित किया गया है। ऐसी सामग्री ही गर्मी बरकरार नहीं रखती है, हालांकि, थर्मल इन्सुलेशन काफी अच्छा है। कभी-कभी संयुक्त मॉडल होते हैं, जिनमें से जटिल स्टेनलेस स्टील पाइप और सिरेमिक होते हैं। अक्सर वे मुख्य संरचना के अंदर स्थापना के लिए हैं। उपयोग कर फायरप्लेस और चिमनी की स्थापनासिरेमिक पाइप कंक्रीट से बने छोटे वजन के विशिष्ट ब्लॉक द्वारा बनाए जाते हैं। उनकी ऊंचाई और आयाम काफी अलग हैं, इसलिए सबसे उपयुक्त पैरामीटर ढूंढना मुश्किल नहीं होगा। सीधे बिछाने में एक विशिष्ट प्रणाली नहीं होती है, इसे अलग-अलग रूपों में रखा जा सकता है, हालांकि, इस तरह के काम को पूरा करने के लिए लंबवत मजबूती का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है, जो विश्वसनीयता और ताकत का समग्र डिजाइन प्रदान करेगी। इसके अलावा, थर्मल इन्सुलेशन के बिछाने के बारे में किसी को भी नहीं भूलना चाहिए, इस उपयोग के लिए असंगत सामग्री। निर्माता पाइप व्यक्तिगत आकार और आकार दे सकते हैं, यह सबसे उपयुक्त विकल्प के चयन को बहुत सुविधाजनक बनाता है। इन संरचनाओं के नुकसान पूरी तरह से महत्वहीन हैं, लेकिन अभी भी हैंः स्टोव, फायरप्लेस और चिमनी की स्थापना, तापमान जिसमें दो सौ पचास से अधिक नहीं हैशून्य, एक नए का उपयोग कर उत्पादन किया जा सकता हैनिर्माण सामग्री - बहुलक। ऐसी संरचनाएं लचीले, हल्के, भरोसेमंद और टिकाऊ हैं। उनकी स्थापना के लिए, नए वेंटिलेशन नलिकाओं को पूरा करने की आवश्यकता नहीं है, इसे पुरानी खानों में स्थापित किया जा सकता है। एक गुणवत्ता चिमनी स्थापित करने के लिए, आपको अनुभवी स्वामी की सलाह से परिचित होना चाहिए। एक अपार्टमेंट इमारत में एक फायरप्लेस स्थापित करने का फैसला किया, यह आवश्यक हैपूरे सिस्टम की जटिलता को समझें। इस तरह के काम को पेशेवरों को सौंपना बेहतर है, क्योंकि प्रक्रिया स्वयं ही श्रमिक है, इसके लिए सटीक गणना और उचित आवेदन की आवश्यकता होगी। यदि ऐसी डिवाइस के निर्माण की स्थापना, जिसमें कई तत्व शामिल हैं, गलतियों को करने के लिए, इससे घातक परिणाम भी हो सकते हैं। स्थापना प्रौद्योगिकी पर विचार करें। चूंकि फायरप्लेस के लिए चिमनी सीधे खुली आग से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे बनाए रखने के दौरान अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है। वे चिमनी की स्थापना पर भी लागू होते हैं।
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International Women's Day के खास मौके के लिए बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे का नया फैशन फोटोशूट वायरल हो रहा है। ये फोटोशूट कैंसर की जंग लड़ने के बाद उनका पहला फोटोशूट है।
International Women's Day के खास मौके के लिए बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने एक फैशन फोटोशूट करवाया है। ये फोटोशूट कैंसर की जंग लड़ने के बाद उनका पहला फोटोशूट है, जिसमें उनके बाल छोटे हैं, चेहरे पर कोई मेकअप नहीं है और त्वचा के स्कार्स को भी उन्होंने छुपाने की कोशिश नहीं की है। इस तरह का फोटोशूट एक बोल्ड फोटोशूट ही है क्योंकि एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी के लिए उसके लुक्स बेहद मायने रखते हैं। उनके फैंस उनकी खूबसूरती के कायल होते हैं। सोनाली बेंद्रे के बालों की बात करें तो उनका हर फैन उनसे बालों की खूबसूरती के सीक्रेट जरूर जानना चाहता था।
कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान बाल झड़ जाते हैं हालांकि बाल उसी तरह से दोबारा हेल्दी उगते हैं लेकिन इन बालों को लंबा होने में समय लगता है। सोनाली बेंद्रे के लिए भी यू तो खुद को इस तरह देखना आसान नहीं था लेकिन जब फैमिली और फ्रेंड्स का स्पोर्ट मिले तो कुछ मुश्किल भी नहीं होता।
सोनाली बेंद्रे ने न्यूयॉर्क में कैंसर ट्रीटमेंट करवाया था। कैंसर के इलाज के दौरान सोनाली के साथ ना सिर्फ उनके पति गोल्डी बहल और उनकी बहन हमेशा साथ में नज़र आए बल्कि उसकी कुछ खास दोस्त भी उनसे मिलने कई बार न्यूयॉर्क पहुंची।
सोनाली बेंद्रे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है। इसके साथ सोनाली ने लिखा है, यह आइडिया बचकाना था। बिना बाल का सिर, कोई मेकअप नहीं और स्कार, ये वोग के नॉर्म नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अब यही मेरा नया नॉर्मल है। मैं मानती हूं मेरे कुछ डर थे लेकिन इनसे बात करते मेरी शंकाएं दूर हो गईं। मैं सबको एक सलाह दूंगी कि सभी लोग अपना नया नॉर्मल ढूंढें। आप आजाद महसूस करेंगे। '
फैशन मैगज़ीन वोग के लिए सोनाली बेंद्रे ने ये फोटोशूट करवाया है। सोनाली की स्माइल ही उनका मेकअप है। हेयरस्टाइल की बात करें तो हेयरबैंड से उन्होंने इसे और भी ट्रेंडी लुक दिया है। बॉलीवुड सेलिब्रिटी आम लोगों के लिए किसी ना किसी रूप में इंस्पीरेशन होते हैं। ऐसे में सोनाली का ये फोटोशूट भी कैंसर से लड़ रही महिलाओं को एक पॉज़िटिव मैसेज जरूर देगा।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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International Women's Day के खास मौके के लिए बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे का नया फैशन फोटोशूट वायरल हो रहा है। ये फोटोशूट कैंसर की जंग लड़ने के बाद उनका पहला फोटोशूट है। International Women's Day के खास मौके के लिए बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने एक फैशन फोटोशूट करवाया है। ये फोटोशूट कैंसर की जंग लड़ने के बाद उनका पहला फोटोशूट है, जिसमें उनके बाल छोटे हैं, चेहरे पर कोई मेकअप नहीं है और त्वचा के स्कार्स को भी उन्होंने छुपाने की कोशिश नहीं की है। इस तरह का फोटोशूट एक बोल्ड फोटोशूट ही है क्योंकि एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी के लिए उसके लुक्स बेहद मायने रखते हैं। उनके फैंस उनकी खूबसूरती के कायल होते हैं। सोनाली बेंद्रे के बालों की बात करें तो उनका हर फैन उनसे बालों की खूबसूरती के सीक्रेट जरूर जानना चाहता था। कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान बाल झड़ जाते हैं हालांकि बाल उसी तरह से दोबारा हेल्दी उगते हैं लेकिन इन बालों को लंबा होने में समय लगता है। सोनाली बेंद्रे के लिए भी यू तो खुद को इस तरह देखना आसान नहीं था लेकिन जब फैमिली और फ्रेंड्स का स्पोर्ट मिले तो कुछ मुश्किल भी नहीं होता। सोनाली बेंद्रे ने न्यूयॉर्क में कैंसर ट्रीटमेंट करवाया था। कैंसर के इलाज के दौरान सोनाली के साथ ना सिर्फ उनके पति गोल्डी बहल और उनकी बहन हमेशा साथ में नज़र आए बल्कि उसकी कुछ खास दोस्त भी उनसे मिलने कई बार न्यूयॉर्क पहुंची। सोनाली बेंद्रे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है। इसके साथ सोनाली ने लिखा है, यह आइडिया बचकाना था। बिना बाल का सिर, कोई मेकअप नहीं और स्कार, ये वोग के नॉर्म नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अब यही मेरा नया नॉर्मल है। मैं मानती हूं मेरे कुछ डर थे लेकिन इनसे बात करते मेरी शंकाएं दूर हो गईं। मैं सबको एक सलाह दूंगी कि सभी लोग अपना नया नॉर्मल ढूंढें। आप आजाद महसूस करेंगे। ' फैशन मैगज़ीन वोग के लिए सोनाली बेंद्रे ने ये फोटोशूट करवाया है। सोनाली की स्माइल ही उनका मेकअप है। हेयरस्टाइल की बात करें तो हेयरबैंड से उन्होंने इसे और भी ट्रेंडी लुक दिया है। बॉलीवुड सेलिब्रिटी आम लोगों के लिए किसी ना किसी रूप में इंस्पीरेशन होते हैं। ऐसे में सोनाली का ये फोटोशूट भी कैंसर से लड़ रही महिलाओं को एक पॉज़िटिव मैसेज जरूर देगा। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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Quick links:
देश में कोविड-19 रोधी टीके की अब तक 106.79 करोड़ से अधिक खुराक दी गई है जिनमें सोमवार को अपराह्न सात बजे तक 47 लाख से ज्यादा खुराक दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने कहा कि देर रात अंतिम रिपोर्ट मिलने के साथ टीकाकरण की संख्या बढ़ने की संभावना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि अबतक भारत की 78 प्रतिशत आबादी को कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक दी गई है, जबकि 38 प्रतिशत योग्य लोगों को दोनों खुराक मिल चुकी है।
देश भर में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू किया गया था, जिसमें पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया गया था। अग्रिम मोर्चे के कर्मियों का टीकाकरण दो फरवरी से शुरू हुआ था। टीकाकरण के अगले चरण में एक मार्च से वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 45 साल से ज्यादा के लोगों को टीके की खुराक देने की शुरुआत की गई। एक मई से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के टीकाकरण की शुरुआत हुई।
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Quick links: देश में कोविड-उन्नीस रोधी टीके की अब तक एक सौ छः.उन्यासी करोड़ से अधिक खुराक दी गई है जिनमें सोमवार को अपराह्न सात बजे तक सैंतालीस लाख से ज्यादा खुराक दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि देर रात अंतिम रिपोर्ट मिलने के साथ टीकाकरण की संख्या बढ़ने की संभावना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि अबतक भारत की अठहत्तर प्रतिशत आबादी को कोविड-उन्नीस रोधी टीके की पहली खुराक दी गई है, जबकि अड़तीस प्रतिशत योग्य लोगों को दोनों खुराक मिल चुकी है। देश भर में टीकाकरण अभियान सोलह जनवरी को शुरू किया गया था, जिसमें पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया गया था। अग्रिम मोर्चे के कर्मियों का टीकाकरण दो फरवरी से शुरू हुआ था। टीकाकरण के अगले चरण में एक मार्च से वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पैंतालीस साल से ज्यादा के लोगों को टीके की खुराक देने की शुरुआत की गई। एक मई से अट्ठारह साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के टीकाकरण की शुरुआत हुई।
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मंगलवार के कारोबार में भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट से उबर नहीं सके। आज के कारोबार में सेंसेक्स 188 अंक की गिरावट के बाद 40967 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 63 अंक की गिरावट के साथ 12056 के स्तर पर बंद हुआ। पिछले दो दिनों के दौरान सेंसेक्स में 646 अंक की गिरावट देखने को मिली है। आज की गिरावट के लिए कमजोर विदेशी संकेत के साथ रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी मुख्य वजह रही।
चीन में कोरोना वायरस का असर बढ़ने की आशंका से मेटल सेक्टर में आज भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी पर मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला सेक्टर रहा। मेटल इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुआ। साथ ही सरकारी बैंकों में आज भी गिरावट जारी रही, इंडेक्स 0. 6 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। सोमवार को हरे निशान में बंद होने वाला फार्मा सेक्टर आज अपनी बढ़त कायम नहीं रख सका। इंडेक्स मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। छोटे और मझौले शेयरों में आज गिरावट देखने को मिली। मिडकैप इंडेक्स 0. 3 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0. 1 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स में शामिल शेयरो में सबसे ज्यादा बढ़त एचडीएफसी में रही। मुनाफे में 4 गुना ग्रोथ दर्ज करने के बाद आज स्टॉक में खरीदारी देखने को मिली है। एचडीएफसी 1. 5 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं उम्मीद से कमजोर नतीजों के बाद मारुति का शेयर करीब 2 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज 2. 3 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 1. 5 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।
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मंगलवार के कारोबार में भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट से उबर नहीं सके। आज के कारोबार में सेंसेक्स एक सौ अठासी अंक की गिरावट के बाद चालीस हज़ार नौ सौ सरसठ के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी तिरेसठ अंक की गिरावट के साथ बारह हज़ार छप्पन के स्तर पर बंद हुआ। पिछले दो दिनों के दौरान सेंसेक्स में छः सौ छियालीस अंक की गिरावट देखने को मिली है। आज की गिरावट के लिए कमजोर विदेशी संकेत के साथ रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी मुख्य वजह रही। चीन में कोरोना वायरस का असर बढ़ने की आशंका से मेटल सेक्टर में आज भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी पर मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला सेक्टर रहा। मेटल इंडेक्स दो फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुआ। साथ ही सरकारी बैंकों में आज भी गिरावट जारी रही, इंडेक्स शून्य. छः फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। सोमवार को हरे निशान में बंद होने वाला फार्मा सेक्टर आज अपनी बढ़त कायम नहीं रख सका। इंडेक्स मंगलवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। छोटे और मझौले शेयरों में आज गिरावट देखने को मिली। मिडकैप इंडेक्स शून्य. तीन फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स शून्य. एक फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल शेयरो में सबसे ज्यादा बढ़त एचडीएफसी में रही। मुनाफे में चार गुना ग्रोथ दर्ज करने के बाद आज स्टॉक में खरीदारी देखने को मिली है। एचडीएफसी एक. पाँच फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं उम्मीद से कमजोर नतीजों के बाद मारुति का शेयर करीब दो फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज दो. तीन फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक एक. पाँच फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा इलाके में रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी से गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने 18 घंटे में मामले का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। लखनऊ (ग्रामीण) पुलिस ने मंडियाव इलाके में बंधक बनाई गई किशोरी को भी मुक्त करा लिया है।
लखनऊ ग्रामीण के इटौंजा थाना क्षेत्र में रहने वाली 14 साल की एक किशोरी रविवार सुबह किसी बात पर अपनी मां से झगड़कर घर से निकल गई। कुछ देर पैदल चलने के बाद उसे एक ई-रिक्शा वाला इकरामुद्दीन मिला जो समझ गया कि किशोरी घर से नाराज़ होकर निकली है। आरोप है कि किशोरी को खाना खिलाने और बाद में नौकरी दिलाने के नाम पर इकरामुद्दीन मंडियाव इलाके के एक कमरे में ले गया, जहां उसने अन्य दोस्तों शकील उर्फ़ छोटू, उत्तम शर्मा, मोहम्मद नफ़ीस, नूर मोहम्मद उर्फ पुन्नू, रीतेश यादव उर्फ भोला को भी बुला लिया। सबने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों ने नाबालिग के साथ मारपीट भी की। बच्ची के परिजनों ने काफी देर तलाशने के बाद इटौंजा थाने एफआईआर दर्ज कराई।
एसपी ग्रामीण हृदयेश कुमार ने बताया कि मुकदमा दर्ज होते ही लखनऊ ग्रामीण की पुलिस ने रास्ते में कई जगह की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई जिसमें ई-रिक्शा चालक के साथ किशोरी दिख गई। इसी फुटेज के आधार पर ई-रिक्शा चालक को तलाशा गया।
ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने किशोरी का बयान दर्ज कर मेडिकल के लिए भेजा और गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा इलाके में रहने वाली चौदह वर्षीय किशोरी से गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने अट्ठारह घंटाटे में मामले का खुलासा करते हुए छः आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। लखनऊ पुलिस ने मंडियाव इलाके में बंधक बनाई गई किशोरी को भी मुक्त करा लिया है। लखनऊ ग्रामीण के इटौंजा थाना क्षेत्र में रहने वाली चौदह साल की एक किशोरी रविवार सुबह किसी बात पर अपनी मां से झगड़कर घर से निकल गई। कुछ देर पैदल चलने के बाद उसे एक ई-रिक्शा वाला इकरामुद्दीन मिला जो समझ गया कि किशोरी घर से नाराज़ होकर निकली है। आरोप है कि किशोरी को खाना खिलाने और बाद में नौकरी दिलाने के नाम पर इकरामुद्दीन मंडियाव इलाके के एक कमरे में ले गया, जहां उसने अन्य दोस्तों शकील उर्फ़ छोटू, उत्तम शर्मा, मोहम्मद नफ़ीस, नूर मोहम्मद उर्फ पुन्नू, रीतेश यादव उर्फ भोला को भी बुला लिया। सबने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों ने नाबालिग के साथ मारपीट भी की। बच्ची के परिजनों ने काफी देर तलाशने के बाद इटौंजा थाने एफआईआर दर्ज कराई। एसपी ग्रामीण हृदयेश कुमार ने बताया कि मुकदमा दर्ज होते ही लखनऊ ग्रामीण की पुलिस ने रास्ते में कई जगह की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई जिसमें ई-रिक्शा चालक के साथ किशोरी दिख गई। इसी फुटेज के आधार पर ई-रिक्शा चालक को तलाशा गया। ई-रिक्शा चालक इकरामुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने किशोरी का बयान दर्ज कर मेडिकल के लिए भेजा और गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
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कीव । रूसी सेना के आक्रमण से अपने देश यूक्रेन को बचाने के लिए पिछले 40 दिन से जूझ रहे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी सेना के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे न्याय के कटघरे में लाने की अपील की। जेलेंस्की ने यह भावुक अपील संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए रूस के निष्कासन की मांग की है। जेलेंस्की ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है और इसकी प्रणाली में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। सुरक्षा परिषद में सभी क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
जेलेंस्की ने रूसी सेना की यूक्रेन के बुचा बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की तुलना इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन द्वारा की गई हिंसा से की है। उन्होंने युद्ध के मद्देनजर रूसी अपराधों के लिए जवाबदेही की मांग की।
जेलेंस्की ने कहा कि अगर कोई विकल्प नहीं है तो अगला विकल्प खुद को पूरी तरह से भंग कर देगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, क्या आप संयुक्त राष्ट्र को बंद करने के लिए तैयार हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून निष्प्रभावी हो गया है। यदि आपका उत्तर नहीं है तो आपको तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
जेलेंस्की ने यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर बूचा शहर में नागरिकों के खिलाफ रूसी सैनिकों द्वारा किए गए अत्याचारों की एक प्रस्तुति दी और मृत शव सहित कई बच्चे दिखाते हुए ग्राफिक वीडियो प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ उनकी खुशी के लिए वे अपने अपार्टमेंट घरों में मारे गए, हथगोले से उड़ाए गए, नागरिकों को सड़क के बीच में अपनी कारों में बैठकर टैंकों से कुचल दिया गया। उन्होंने अंगों को काट दिया, उनका गला काट दिया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं का उनके बच्चों के सामने रेप किया गया और हत्या कर दी गई। उनकी जीभ खींच ली गई क्योंकि हमलावरों ने वह नहीं सुना, जो वे उनसे सुनना चाहते थे। इसलिए यह आइएस जैसे अन्य आतंकवादियों से अलग नहीं है, जिन्होंने कुछ क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और यहां यह सब कुछ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक सदस्य द्वारा किया जाता है।
जेलेंस्की ने मंगलवार को बूचा का दौरा किया। उन्होंने कहा कि बूचा में जो हुआ वह अक्षम्य है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन के पास रूस के साथ बातचीत करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। युद्ध अब छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि युद्ध की बिगड़ती स्थिति को लेकर भारत चिंतित है। उन्होंने एक बार फिर सैन्य कार्रवाई को तत्काल समाप्त करने के भारत के पक्ष को दोहराया है। यूक्रेन के बुका शहर में मारे गए आम लोगों की हत्याओं को भारत ने चिंता का विषय बताया है। साथ ही तिरुमूर्ति ने एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन भी किया है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और क्षेत्रीय अखंडता और राज्यों की संप्रभुता के सम्मान पर टिकी हुई है।
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कीव । रूसी सेना के आक्रमण से अपने देश यूक्रेन को बचाने के लिए पिछले चालीस दिन से जूझ रहे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी सेना के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे न्याय के कटघरे में लाने की अपील की। जेलेंस्की ने यह भावुक अपील संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए रूस के निष्कासन की मांग की है। जेलेंस्की ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है और इसकी प्रणाली में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। सुरक्षा परिषद में सभी क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जेलेंस्की ने रूसी सेना की यूक्रेन के बुचा बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की तुलना इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन द्वारा की गई हिंसा से की है। उन्होंने युद्ध के मद्देनजर रूसी अपराधों के लिए जवाबदेही की मांग की। जेलेंस्की ने कहा कि अगर कोई विकल्प नहीं है तो अगला विकल्प खुद को पूरी तरह से भंग कर देगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, क्या आप संयुक्त राष्ट्र को बंद करने के लिए तैयार हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून निष्प्रभावी हो गया है। यदि आपका उत्तर नहीं है तो आपको तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता है। जेलेंस्की ने यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर बूचा शहर में नागरिकों के खिलाफ रूसी सैनिकों द्वारा किए गए अत्याचारों की एक प्रस्तुति दी और मृत शव सहित कई बच्चे दिखाते हुए ग्राफिक वीडियो प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ उनकी खुशी के लिए वे अपने अपार्टमेंट घरों में मारे गए, हथगोले से उड़ाए गए, नागरिकों को सड़क के बीच में अपनी कारों में बैठकर टैंकों से कुचल दिया गया। उन्होंने अंगों को काट दिया, उनका गला काट दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का उनके बच्चों के सामने रेप किया गया और हत्या कर दी गई। उनकी जीभ खींच ली गई क्योंकि हमलावरों ने वह नहीं सुना, जो वे उनसे सुनना चाहते थे। इसलिए यह आइएस जैसे अन्य आतंकवादियों से अलग नहीं है, जिन्होंने कुछ क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और यहां यह सब कुछ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक सदस्य द्वारा किया जाता है। जेलेंस्की ने मंगलवार को बूचा का दौरा किया। उन्होंने कहा कि बूचा में जो हुआ वह अक्षम्य है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए यूक्रेन के पास रूस के साथ बातचीत करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। युद्ध अब छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि युद्ध की बिगड़ती स्थिति को लेकर भारत चिंतित है। उन्होंने एक बार फिर सैन्य कार्रवाई को तत्काल समाप्त करने के भारत के पक्ष को दोहराया है। यूक्रेन के बुका शहर में मारे गए आम लोगों की हत्याओं को भारत ने चिंता का विषय बताया है। साथ ही तिरुमूर्ति ने एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन भी किया है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और क्षेत्रीय अखंडता और राज्यों की संप्रभुता के सम्मान पर टिकी हुई है।
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अगर आपकी गर्दन पर फैट ज्यादा है, तो आप योग के द्वारा उसे कम कर सकती हैं। इसके लिए सीधे खड़े हो जाएं। कंधों को बिना हिलाए दाएं और फिर बाएं मोड़ें। ऐसा लगभग 10 बार करें। इसी तरह सिर को पहले आगे की तरफ और फिर पीछे की तरफ ले जाएं। इसमें ठोढ़ी, सीने को छूनी चाहिए। इसे तीन बार करें। गर्दन का फैट कम करने के लिए यह सबसे अच्छी एक्सरसाइज है।
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अगर आपकी गर्दन पर फैट ज्यादा है, तो आप योग के द्वारा उसे कम कर सकती हैं। इसके लिए सीधे खड़े हो जाएं। कंधों को बिना हिलाए दाएं और फिर बाएं मोड़ें। ऐसा लगभग दस बार करें। इसी तरह सिर को पहले आगे की तरफ और फिर पीछे की तरफ ले जाएं। इसमें ठोढ़ी, सीने को छूनी चाहिए। इसे तीन बार करें। गर्दन का फैट कम करने के लिए यह सबसे अच्छी एक्सरसाइज है।
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कांगड़ा के जिला मुख्यालय धर्मशाला में सत्ताधारी दल भाजपा में बड़ी फूट सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी ने ही नामांकन भरने के अंतिम दिन समर्थकों व बैंड बाजों सहित नोमीनेशन भर दिया। इतना ही नहीं टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा जनजातीय मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन सिंह नैहरिया ने भी अपने समर्थकों सहित कचहरी चौक में सभा कर नोमिनेशन कर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोंक दी है। ऐसे में जनता चर्चा कर रही है कि यहां भाजपा बुुरी तरह से बिखर गई है।
बीजेपी की हालत ऐसी है कि न तो कोई मंडल को संभालने वाला है न ही पार्टी पदाधिकारियों को पार्टी के पुराने कार्यकर्ता व पदाधिकारी भी कुछ विपिन नैहरिया के साथ दिखे तो कुछ मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी के साथ खड़े दिखे। भाजपा में ओबीसी और जनजातीय वोटरों का ध्रुवीकरण कांग्रेस की राहें आसान करने वाला हो सकता है। पूर्व में दोनों ही समुदाय संगठित थे और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता रहा है। लेकिन इस वार प्रत्याशी बदलने के बाद पार्टी को संभालने के लिए वरिष्ठ नेताओं का आभाव साफ नजर आया, जिसका असर यह है कि कार्यकर्ता अपनी अपनी राह पर चल पड़े हैं। नोमिनेशन भरने के अंतिम दिन का माहौल देख कर सभी हैरत में थे। एक तरफ अनिल चौधरी कंधों पर सवार होकर जा रहे थे तो दूसरी ओर विपिन नैहरिया के समर्थक नारे लगा रहे थे। जबकि भाजपा ने राकेश चौधरी को अपनी प्रत्याशी बनाया हुआ है। इससे पहले विधायक विशाल नैहरिया के समर्थक भी विरोध स्वरूप नारे लगाते रहे। हालांकि विशाल नैहरिया इस सारी सियासी तस्वीर से गायव दिख रहे हैं। भाजपा की आपसी फूट से विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ता खूब मजे ले रहे हैं। विपक्ष के कार्यकर्ता भाजपा के हालात पर खूब चुटकियां ले रहे हैं।
उधर भाजपा के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण नाग का कहना है कि टिकट मांगना सबका अधिकार है और जब हाईकमान या प्रदेश नेतृत्व निर्णय ले लेता है, उस निर्णय के साथ सभी कार्यकर्ताओं को चलना चाहिए। जिन भी पार्टी के पदाधिकारियों ने नामांकन भरे हैं उनसे बातचीत चल रही है है सबकुछ जल्द ठीक हो जाएगा।
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कांगड़ा के जिला मुख्यालय धर्मशाला में सत्ताधारी दल भाजपा में बड़ी फूट सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी ने ही नामांकन भरने के अंतिम दिन समर्थकों व बैंड बाजों सहित नोमीनेशन भर दिया। इतना ही नहीं टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा जनजातीय मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन सिंह नैहरिया ने भी अपने समर्थकों सहित कचहरी चौक में सभा कर नोमिनेशन कर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोंक दी है। ऐसे में जनता चर्चा कर रही है कि यहां भाजपा बुुरी तरह से बिखर गई है। बीजेपी की हालत ऐसी है कि न तो कोई मंडल को संभालने वाला है न ही पार्टी पदाधिकारियों को पार्टी के पुराने कार्यकर्ता व पदाधिकारी भी कुछ विपिन नैहरिया के साथ दिखे तो कुछ मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी के साथ खड़े दिखे। भाजपा में ओबीसी और जनजातीय वोटरों का ध्रुवीकरण कांग्रेस की राहें आसान करने वाला हो सकता है। पूर्व में दोनों ही समुदाय संगठित थे और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता रहा है। लेकिन इस वार प्रत्याशी बदलने के बाद पार्टी को संभालने के लिए वरिष्ठ नेताओं का आभाव साफ नजर आया, जिसका असर यह है कि कार्यकर्ता अपनी अपनी राह पर चल पड़े हैं। नोमिनेशन भरने के अंतिम दिन का माहौल देख कर सभी हैरत में थे। एक तरफ अनिल चौधरी कंधों पर सवार होकर जा रहे थे तो दूसरी ओर विपिन नैहरिया के समर्थक नारे लगा रहे थे। जबकि भाजपा ने राकेश चौधरी को अपनी प्रत्याशी बनाया हुआ है। इससे पहले विधायक विशाल नैहरिया के समर्थक भी विरोध स्वरूप नारे लगाते रहे। हालांकि विशाल नैहरिया इस सारी सियासी तस्वीर से गायव दिख रहे हैं। भाजपा की आपसी फूट से विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ता खूब मजे ले रहे हैं। विपक्ष के कार्यकर्ता भाजपा के हालात पर खूब चुटकियां ले रहे हैं। उधर भाजपा के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण नाग का कहना है कि टिकट मांगना सबका अधिकार है और जब हाईकमान या प्रदेश नेतृत्व निर्णय ले लेता है, उस निर्णय के साथ सभी कार्यकर्ताओं को चलना चाहिए। जिन भी पार्टी के पदाधिकारियों ने नामांकन भरे हैं उनसे बातचीत चल रही है है सबकुछ जल्द ठीक हो जाएगा।
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गाजीपुर जनपद के 1238 ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2022-2023 की कार्य योजना ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने के लिए निदेशक पंचायत राज की ओर से आदेश जारी होने के बाद जिला प्रशासन ने पंचायत सचिवों के साथ ही संबंधित विभाग को इस बाबत अलर्ट किया है। डेटा 31 मई तक ही अपलोड किया जाना है। ऐसा नही करने की सूरत में पंचायत सचिवों की सैलरी रोक दी जाएगी। इस बाबत मुहम्मदाबाद तहसील के तहत कार्यरत ग्राम सचिवों को भी गंभीरता से इस बाबत कार्य करने की हिदायत दी गयी है।
ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत गांवों में कराए जाने वाले विकास से जुड़े निर्माण कार्यों मसलन नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग और अन्य कार्यों की तैयार की गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट को ई-ग्राम स्वरोज पोर्टल पर अपलोड करने का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों में बैठक आयोजित कर योजना बनाए जाने के बाद अक्सर ऐसा देखा जा रहा है कि योजना को मानकों के अनुरूप संबंधित पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा रहा है।
कार्ययोजना अपलोड नहीं होने की सूरत में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले बजट में शासन की ओर से बजट में कटौती भी किया जा सकता है। निदेशक पंचायत राज की ओर से पत्र जारी होने के बाद संबंधित विभाग अलर्ट मोड़ में है। इसके लिए सचिवों को निर्देशित कर दिया गया है कि सभी लोग जल्द से जल्द रिपोर्ट अपलोड कर दें। इसके बाद भी इस कार्य में उदासीनता बरते जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं।
प्रशासन ने सचिवों को चेताया है कि निर्धारित समय में कार्ययोजना अपलोड नहीं हुई तो शासन स्तर से बजट में कटौती की जा सकती है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों के साथ सहायक विकास अधिकारियों को भी जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए लगातार दिशा निर्देश जारी किया जा रहा है।
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गाजीपुर जनपद के एक हज़ार दो सौ अड़तीस ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष दो हज़ार बाईस-दो हज़ार तेईस की कार्य योजना ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने के लिए निदेशक पंचायत राज की ओर से आदेश जारी होने के बाद जिला प्रशासन ने पंचायत सचिवों के साथ ही संबंधित विभाग को इस बाबत अलर्ट किया है। डेटा इकतीस मई तक ही अपलोड किया जाना है। ऐसा नही करने की सूरत में पंचायत सचिवों की सैलरी रोक दी जाएगी। इस बाबत मुहम्मदाबाद तहसील के तहत कार्यरत ग्राम सचिवों को भी गंभीरता से इस बाबत कार्य करने की हिदायत दी गयी है। ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत गांवों में कराए जाने वाले विकास से जुड़े निर्माण कार्यों मसलन नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग और अन्य कार्यों की तैयार की गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट को ई-ग्राम स्वरोज पोर्टल पर अपलोड करने का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों में बैठक आयोजित कर योजना बनाए जाने के बाद अक्सर ऐसा देखा जा रहा है कि योजना को मानकों के अनुरूप संबंधित पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा रहा है। कार्ययोजना अपलोड नहीं होने की सूरत में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले बजट में शासन की ओर से बजट में कटौती भी किया जा सकता है। निदेशक पंचायत राज की ओर से पत्र जारी होने के बाद संबंधित विभाग अलर्ट मोड़ में है। इसके लिए सचिवों को निर्देशित कर दिया गया है कि सभी लोग जल्द से जल्द रिपोर्ट अपलोड कर दें। इसके बाद भी इस कार्य में उदासीनता बरते जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। प्रशासन ने सचिवों को चेताया है कि निर्धारित समय में कार्ययोजना अपलोड नहीं हुई तो शासन स्तर से बजट में कटौती की जा सकती है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों के साथ सहायक विकास अधिकारियों को भी जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए लगातार दिशा निर्देश जारी किया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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1 पर तीतुस तेरे खात्तर योए सही सै के तू बिश्वासियाँ ताहीं वोए सीखा जो सच्ची शिक्षा कै मुताबिक हो। 2 यानी के बूढ़े माणस शान्त गम्भीर अर संयमी हो, अर उनका बिश्वास, प्यार अर धीरज पक्का हो। 3 इस ढाळ बूढ़ी बिरबानियाँ का बरताव इसा हो के परमेसवर नै महिमा मिलै, वे लाच्छण लगाण आळी अर पियक्कड़ न्ही हो, पर आच्छी बात सिखाण आळी हो। 4 जवान बिरबानियाँ नै तीतुस तै न्ही बल्के बूढ़ी बिरबानियाँ तै निर्देश पाणा चाहिए, ताके वो उन ताहीं सीखा सकै किस तरियां अपणे धणी अर बाळकां तै प्यार करै। 5 अर वे मन पै काब्बू राक्खण आळी, पतिव्रता, घर का कामकाज सम्भाळण आळी, भली अर अपणे-अपणे धणी कै प्रति बिश्वास लायक हो, ताके कोए परमेसवर के वचन की बुराई ना कर सकै। 6 इसे तरियां जवान माणसां नै भी समझाया कर, के वे खराई तै चाल्लण आळे हो। 7 हरेक काम म्ह तू अपणे आच्छे बरताव तै दुसरयां खात्तर एक मिसाल बण जा, जिब तू बिश्वासियाँ ताहीं परमेसवर के बारें म्ह सिखावै सै, तो उन ताहीं आच्छे मकसद तै सीखा, अर इसा सीखा ताके लोग तेरा आदर कर सकै। 8 तेरी शिक्षाओं म्ह हमेशा सच्चाई हो, जिसकी आलोचना ना हो सकै, जिसतै बिरोधी नै म्हारै म्ह कोए दोष लगाण का मौक्का ना मिलै अर वो खुद पै शर्मिन्दा हो जावै। 9 नौकरां नै समझा के अपणे-अपणे माल्लिक कै कह्ये म्ह रहवै, अर सारी बात्तां म्ह उसनै राज्जी राक्खै, अर उल्ट कै जवाब ना दे। 10 चोरी चलाकी ना करो, अर हमेशा यो दिक्खै के वो बिश्वास लायक सै, अर थारे आच्छे सुभाव नै देखकै, वे भी म्हारे उद्धारकर्ता परमेसवर की शिक्षा ताहीं सुणणा चाहवैगें। 11 परमेसवर नै अपणा अनुग्रह इस बात म्ह जाहिर करया के उसनै मसीह यीशु ताहीं म्हारा उद्धारकर्ता बणाकै भेज दिया, ताके हरेक माणस बचाए जा सकै। 12 अपणी दया के कारण परमेसवर म्हारे ताहीं सिखावै सै, के हम उन तरिक्कां तै बरताव करणा बन्द कर द्या, जो उस ताहीं खुश न्ही कर सकदे, अर इसी लालसा ना राक्खा जिसी अबिश्वासी लोग राक्खै सै, पर बुध्दिमानी अर धार्मिकता तै बरताव करां, अर इसा बरताव करा जो परमेसवर नै पसन्द हो, जिब तक हम दुनिया म्ह रहवां। 13 हम इस तरिक्कें तै बरताव करा, जिसा के हम उस अदभुत दिन की बाट देखदे हो, जिसकी हम आस राक्खां सां, यो वो दिन सै जिब यीशु मसीह जो म्हारा परमेसवर अर उद्धारकर्ता सै बड़ी महिमा म्ह इस दुनिया म्ह बोहड़ के आवैगा। 14 इस मसीह यीशु नै अपणे-आप ताहीं म्हारे पापां खात्तर बलिदान कर दिया, ताके हम सारे पापां तै आजाद हो जावां, अर म्हारे ताहीं शुद्ध करया ताके हम उसके अपणे खास माणस बण जावां, जो भले काम करण की बड़ी इच्छा राक्खै सै। 15 पूरे अधिकार कै गैल इन सारी बात्तां की शिक्षा देते होए लोग्गां नै समझा अर उत्साहित करदा रह, अर कोए तन्नै तुच्छ न्ही जाणण पावै।
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एक पर तीतुस तेरे खात्तर योए सही सै के तू बिश्वासियाँ ताहीं वोए सीखा जो सच्ची शिक्षा कै मुताबिक हो। दो यानी के बूढ़े माणस शान्त गम्भीर अर संयमी हो, अर उनका बिश्वास, प्यार अर धीरज पक्का हो। तीन इस ढाळ बूढ़ी बिरबानियाँ का बरताव इसा हो के परमेसवर नै महिमा मिलै, वे लाच्छण लगाण आळी अर पियक्कड़ न्ही हो, पर आच्छी बात सिखाण आळी हो। चार जवान बिरबानियाँ नै तीतुस तै न्ही बल्के बूढ़ी बिरबानियाँ तै निर्देश पाणा चाहिए, ताके वो उन ताहीं सीखा सकै किस तरियां अपणे धणी अर बाळकां तै प्यार करै। पाँच अर वे मन पै काब्बू राक्खण आळी, पतिव्रता, घर का कामकाज सम्भाळण आळी, भली अर अपणे-अपणे धणी कै प्रति बिश्वास लायक हो, ताके कोए परमेसवर के वचन की बुराई ना कर सकै। छः इसे तरियां जवान माणसां नै भी समझाया कर, के वे खराई तै चाल्लण आळे हो। सात हरेक काम म्ह तू अपणे आच्छे बरताव तै दुसरयां खात्तर एक मिसाल बण जा, जिब तू बिश्वासियाँ ताहीं परमेसवर के बारें म्ह सिखावै सै, तो उन ताहीं आच्छे मकसद तै सीखा, अर इसा सीखा ताके लोग तेरा आदर कर सकै। आठ तेरी शिक्षाओं म्ह हमेशा सच्चाई हो, जिसकी आलोचना ना हो सकै, जिसतै बिरोधी नै म्हारै म्ह कोए दोष लगाण का मौक्का ना मिलै अर वो खुद पै शर्मिन्दा हो जावै। नौ नौकरां नै समझा के अपणे-अपणे माल्लिक कै कह्ये म्ह रहवै, अर सारी बात्तां म्ह उसनै राज्जी राक्खै, अर उल्ट कै जवाब ना दे। दस चोरी चलाकी ना करो, अर हमेशा यो दिक्खै के वो बिश्वास लायक सै, अर थारे आच्छे सुभाव नै देखकै, वे भी म्हारे उद्धारकर्ता परमेसवर की शिक्षा ताहीं सुणणा चाहवैगें। ग्यारह परमेसवर नै अपणा अनुग्रह इस बात म्ह जाहिर करया के उसनै मसीह यीशु ताहीं म्हारा उद्धारकर्ता बणाकै भेज दिया, ताके हरेक माणस बचाए जा सकै। बारह अपणी दया के कारण परमेसवर म्हारे ताहीं सिखावै सै, के हम उन तरिक्कां तै बरताव करणा बन्द कर द्या, जो उस ताहीं खुश न्ही कर सकदे, अर इसी लालसा ना राक्खा जिसी अबिश्वासी लोग राक्खै सै, पर बुध्दिमानी अर धार्मिकता तै बरताव करां, अर इसा बरताव करा जो परमेसवर नै पसन्द हो, जिब तक हम दुनिया म्ह रहवां। तेरह हम इस तरिक्कें तै बरताव करा, जिसा के हम उस अदभुत दिन की बाट देखदे हो, जिसकी हम आस राक्खां सां, यो वो दिन सै जिब यीशु मसीह जो म्हारा परमेसवर अर उद्धारकर्ता सै बड़ी महिमा म्ह इस दुनिया म्ह बोहड़ के आवैगा। चौदह इस मसीह यीशु नै अपणे-आप ताहीं म्हारे पापां खात्तर बलिदान कर दिया, ताके हम सारे पापां तै आजाद हो जावां, अर म्हारे ताहीं शुद्ध करया ताके हम उसके अपणे खास माणस बण जावां, जो भले काम करण की बड़ी इच्छा राक्खै सै। पंद्रह पूरे अधिकार कै गैल इन सारी बात्तां की शिक्षा देते होए लोग्गां नै समझा अर उत्साहित करदा रह, अर कोए तन्नै तुच्छ न्ही जाणण पावै।
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सैकड़ों अपराधियों ने रूसी अधिकारियों, सार्वजनिक चैंबर और मानवाधिकार संगठनों को अपनी अपीलें भेजीं, जिसमें उन्होंने एवगेनिया वासिलीवा के सौम्य वाक्य पर आक्रोश व्यक्त किया, जिन्हें केवल 5 साल के लिए आधा अरब रूबल चोरी करने के लिए मिला, चैनल की रिपोर्ट RT "इज़वेस्टिया" के संदर्भ में।
"लोग लिखते हैं कि उन्हें मोबाइल फोन की चोरी के लिए 2-3 साल की कैद मिली और कई किलोग्राम निकेल, और वसीलीव - 5 अरब रूबल की चोरी के लिए 0,5 साल"- अखबार की रिपोर्ट।
सार्वजनिक चैम्बर ने कहा कि वे लगातार दोषियों की शिकायतें सुनते हैं "अदालत ने उनके मामलों और रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी के मामले पर विचार करते हुए दोहरे मानदंड लागू किए हैं। "
FSIN पब्लिक काउंसिल दिमित्री गेलोचिन के एक सदस्य ने कहाः "जब हम स्वतंत्रता से वंचित होने के स्थानों में (वाक्य से पहले) पहुंचे, तो हमसे सबसे पहले यह सवाल पूछा गया थाः हम यहां मामूली उल्लंघन के लिए क्यों बैठे हैं, और वे वासलीवा को निलंबित सजा देना चाहते हैं? "
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सैकड़ों अपराधियों ने रूसी अधिकारियों, सार्वजनिक चैंबर और मानवाधिकार संगठनों को अपनी अपीलें भेजीं, जिसमें उन्होंने एवगेनिया वासिलीवा के सौम्य वाक्य पर आक्रोश व्यक्त किया, जिन्हें केवल पाँच साल के लिए आधा अरब रूबल चोरी करने के लिए मिला, चैनल की रिपोर्ट RT "इज़वेस्टिया" के संदर्भ में। "लोग लिखते हैं कि उन्हें मोबाइल फोन की चोरी के लिए दो-तीन साल की कैद मिली और कई किलोग्राम निकेल, और वसीलीव - पाँच अरब रूबल की चोरी के लिए शून्य,पाँच साल"- अखबार की रिपोर्ट। सार्वजनिक चैम्बर ने कहा कि वे लगातार दोषियों की शिकायतें सुनते हैं "अदालत ने उनके मामलों और रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी के मामले पर विचार करते हुए दोहरे मानदंड लागू किए हैं। " FSIN पब्लिक काउंसिल दिमित्री गेलोचिन के एक सदस्य ने कहाः "जब हम स्वतंत्रता से वंचित होने के स्थानों में पहुंचे, तो हमसे सबसे पहले यह सवाल पूछा गया थाः हम यहां मामूली उल्लंघन के लिए क्यों बैठे हैं, और वे वासलीवा को निलंबित सजा देना चाहते हैं? "
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नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद (babri masjid) मामले में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड (shia Central waqf board) ने भी अपना दावा किया था. इस दावे के साथ ही शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद (ayodhya dispute) में नया पक्ष बनकर सामने आया था. इस संबंध में बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका भी दाखिल की थी. लेकिन आज (09 नवंबर) अयोध्या विवाद पर बड़े फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए उसकी याचिका (Pitition) खारिज कर दी है.
शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दावा करते हुए बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने कहा था कि साक्ष्यों के आधार पर बाबरी मस्जिद शिया वक्फ के अधीन है. यह बात अलग है कि पिछले 71 बरस में शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से इस पर दावा नहीं किया गया. उन्होंने कहा था कि मस्जिद मीर बाकी (बाबरी मस्जिद) शिया वक्फ के तहत आती है.
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नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद मामले में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी अपना दावा किया था. इस दावे के साथ ही शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में नया पक्ष बनकर सामने आया था. इस संबंध में बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी. लेकिन आज अयोध्या विवाद पर बड़े फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है. शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दावा करते हुए बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने कहा था कि साक्ष्यों के आधार पर बाबरी मस्जिद शिया वक्फ के अधीन है. यह बात अलग है कि पिछले इकहत्तर बरस में शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से इस पर दावा नहीं किया गया. उन्होंने कहा था कि मस्जिद मीर बाकी शिया वक्फ के तहत आती है. .
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