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न्यूयॉर्क। अक्सर हमें कुछ ऐसी बाते सुनने को मिलती जिनको सुनने के बाद कानों को विश्वास नहीं होता। ऐसी ही एक खबर हम आपको बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपके होश फाख्ता हो जाएंगे। एक महिला ने दावा किया है कि एलियन ने उससे कई बार दुष्कर्म किया है। महिला का कहना है कि एलियन ने उसे चांद पर ले जाकर दुष्कर्म किया था।
यह महिला अमेरिकी एयरफोर्स के रेडार सिस्टम में ट्रैकिंग ऑफिसर है। महिला ने बताया कि ये सब सालों पहले की कहानी है, जब वो 25 साल की थी। इस महिला ऑफिसर का नाम नाएरा तेरेला आइस्ले है, जिसने अपने उन अनुभवों को बेहद डरावना और कटु बताया है। महिला का दावा है कि एलियन उसे कम से कम 8 से 10 बार चांद पर ले गए और उसके साथ रेप किया। इन एलियनों की शारीरिक बनावट इंसानों जैसी थी, जिनकी पूछें भी थी।
नाएरा तेरेला आइस्ले आगे बताती हैं कि तब वो नवादा के तोनापा टेस्ट रेंज में तैनात थीं। वैसे, उन्हें उस समय के बारे में बहुत कम बातें याद हैं। नाएरा तेरेला आइस्ले ने दावा किया कि सबसे पहले उसे अजीब सी दवा देकर सिक्योरिटी गार्डों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और जमीन के नीचे दबा दिया। जब उसे होश आया तो महिला ने खुद को चांद पर पाया।
फिर एलियन ने उसके साथ बलात्कार किया। महिला ने आगे दावा किया कि एलियंस ने चांद पर उससे काम कराया और अपनी इलेक्ट्रॉनिक मशीनों को भी चलाने का दबाव डाला। इन एलियनों में एक ग्रे रंग का एलियन था। बाद में नाएरा तेरेला ने बताया कि उसे इस बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं क्योंकि एलियंस ने उनकी मेमोरी मिटा दी थी।
लंदन। शराब की लत से परेशान लोगों को तो आपने देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी शराबी कुत्ते को देखा है? कैनाइन अल्कोहल विदड्राल यानि किसी पालतू जानवर की नशे की लत छुडाने के दुर्लभ मामले में ब्रिटेन के एक कुत्ते को नशा मुक्त कराया गया है। शराब की लत के लिए इलाज कराने वाला वह पहला कुत्ता बन गया है।
कुत्ते को शराब की ऐसी लत लगी कि उसका मालिक भी परेशान हो गया। मालिक के साथ ही कुत्ते को भी शराब की लत लग गई थी। न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज के बाद अब दो वर्षीय लैब्राडोर नस्ल के कोको को प्लायमाउथ, डेवोन में वुडसाइड एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट को सौंप दिया गया है।
न्यूजवीक के अनुसार कि कोको नाम के 2 साल के लेब्राडॉर को एक अन्य कुत्ते के साथ एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट को सौंप दिया गया था। एनिमल वेलफेयर चैरिटी के फेसबुक पेज के अनुसार, लाख कोशिशें करने के बाद दूसरे कुत्ते को नहीं बचाया जा सका।
दोनों कुत्तों को ट्रस्ट को उस वक्त सौंपा गया, जब उन्हें दौरे पड़ने लगे। हालांकि, कोको अब पूरी तरह से ठीक होने वाला है। पोस्ट में बताया गया कि कोको गंभीर रूप से बीमार हो रहा था और उसे 24 घंटे देखभाल की जरूरत पड़ती थी।
कोको को दौरे पड़ने लगे। ऐसे में उसे पूरे चार हफ्तों तक बेहोश रखा गया, ताकि उसे बार-बार दौरे ना पड़ें और उसे जल्दी से ठीक किया जा सके।
अब कोको पहले से काफी हद तक ठीक हो चुका है और एक नॉर्मल कुत्ते की तरह बिहेव कर रहा है। सेंक्चुरी के मैनेजर ने बताया कि कोको अब अच्छी तरह से रिकवर कर रहा है।
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न्यूयॉर्क। अक्सर हमें कुछ ऐसी बाते सुनने को मिलती जिनको सुनने के बाद कानों को विश्वास नहीं होता। ऐसी ही एक खबर हम आपको बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपके होश फाख्ता हो जाएंगे। एक महिला ने दावा किया है कि एलियन ने उससे कई बार दुष्कर्म किया है। महिला का कहना है कि एलियन ने उसे चांद पर ले जाकर दुष्कर्म किया था। यह महिला अमेरिकी एयरफोर्स के रेडार सिस्टम में ट्रैकिंग ऑफिसर है। महिला ने बताया कि ये सब सालों पहले की कहानी है, जब वो पच्चीस साल की थी। इस महिला ऑफिसर का नाम नाएरा तेरेला आइस्ले है, जिसने अपने उन अनुभवों को बेहद डरावना और कटु बताया है। महिला का दावा है कि एलियन उसे कम से कम आठ से दस बार चांद पर ले गए और उसके साथ रेप किया। इन एलियनों की शारीरिक बनावट इंसानों जैसी थी, जिनकी पूछें भी थी। नाएरा तेरेला आइस्ले आगे बताती हैं कि तब वो नवादा के तोनापा टेस्ट रेंज में तैनात थीं। वैसे, उन्हें उस समय के बारे में बहुत कम बातें याद हैं। नाएरा तेरेला आइस्ले ने दावा किया कि सबसे पहले उसे अजीब सी दवा देकर सिक्योरिटी गार्डों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और जमीन के नीचे दबा दिया। जब उसे होश आया तो महिला ने खुद को चांद पर पाया। फिर एलियन ने उसके साथ बलात्कार किया। महिला ने आगे दावा किया कि एलियंस ने चांद पर उससे काम कराया और अपनी इलेक्ट्रॉनिक मशीनों को भी चलाने का दबाव डाला। इन एलियनों में एक ग्रे रंग का एलियन था। बाद में नाएरा तेरेला ने बताया कि उसे इस बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं क्योंकि एलियंस ने उनकी मेमोरी मिटा दी थी। लंदन। शराब की लत से परेशान लोगों को तो आपने देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी शराबी कुत्ते को देखा है? कैनाइन अल्कोहल विदड्राल यानि किसी पालतू जानवर की नशे की लत छुडाने के दुर्लभ मामले में ब्रिटेन के एक कुत्ते को नशा मुक्त कराया गया है। शराब की लत के लिए इलाज कराने वाला वह पहला कुत्ता बन गया है। कुत्ते को शराब की ऐसी लत लगी कि उसका मालिक भी परेशान हो गया। मालिक के साथ ही कुत्ते को भी शराब की लत लग गई थी। न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज के बाद अब दो वर्षीय लैब्राडोर नस्ल के कोको को प्लायमाउथ, डेवोन में वुडसाइड एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। न्यूजवीक के अनुसार कि कोको नाम के दो साल के लेब्राडॉर को एक अन्य कुत्ते के साथ एनिमल रेस्क्यू ट्रस्ट को सौंप दिया गया था। एनिमल वेलफेयर चैरिटी के फेसबुक पेज के अनुसार, लाख कोशिशें करने के बाद दूसरे कुत्ते को नहीं बचाया जा सका। दोनों कुत्तों को ट्रस्ट को उस वक्त सौंपा गया, जब उन्हें दौरे पड़ने लगे। हालांकि, कोको अब पूरी तरह से ठीक होने वाला है। पोस्ट में बताया गया कि कोको गंभीर रूप से बीमार हो रहा था और उसे चौबीस घंटाटे देखभाल की जरूरत पड़ती थी। कोको को दौरे पड़ने लगे। ऐसे में उसे पूरे चार हफ्तों तक बेहोश रखा गया, ताकि उसे बार-बार दौरे ना पड़ें और उसे जल्दी से ठीक किया जा सके। अब कोको पहले से काफी हद तक ठीक हो चुका है और एक नॉर्मल कुत्ते की तरह बिहेव कर रहा है। सेंक्चुरी के मैनेजर ने बताया कि कोको अब अच्छी तरह से रिकवर कर रहा है।
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T-4 ने चार शावकों को जन्म दिया है.
मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-4 ने चार शावकों को जन्म दिया है. बाघिन टी-4 अब तक कुल पांच बार मां बन चुकी है और जंगल क्षेत्र में 20 शावकों को जन्म दे चुकी है. पाटदेव नाम से मशहूर इस बाघिन टी-4 को साल 2010 में वर्ल्ड फेमस सुपरमॉम कॉलरवाली बाघिन ने जन्म दिया था. बाघिन टी-4 की मां कॉलर वाली बाघिन के नाम पर सर्वाधिक 29 शावकों को जन्म देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है.
नए साल में जंगल सफारी के दौरान बाघिन अपने 4 नन्हे शावको के साथ नजर आई है और शावक और बाघिन को एक साथ देख कर पर्यटक खासा रोमांचित हो गए. टी-4 अपनी मां वर्ल्ड फेमस कॉलरवाली बाघिन की विरासत को पाटदेव बाघिन आगे बढ़ा रही है और पेंच टाइगर रिजर्व और पूरे प्रदेश में बाघो के कुनबे को बढ़ाने में अपना योगदान दे रही है.
पेंच टाइगर रिजर्व के उप क्षेत्र संचालक रजनीश सिंह ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पाटदेव बाघिन टी-4 के चार नन्हे शावकों के साथ दिखाई दी है. बाघिन की टेरिटरी क्षेत्र का नाम पाटदेव है. इसलिए बाघिन को पाटदेव फीमेल के नाम से भी जाना जाता है. टी-4 बाघिन की उम्र वर्तमान में 12 साल है. जो पूरी तरह स्वस्थ है.
उप क्षेत्र संचालक ने बाघिन के शावकों के जन्म देने के रिकॉर्ड के बारे में बताया कि बाघिन टी-4 ने पेंच के जंगल में पांचवी बार शावकों को जन्म दिया है. इससे पहले इस बाघिन ने साल 2014 से साल 2020 के अंतराल मे कुल चार बार में 16 शावकों को जन्म दिया था.
साल 2014 में बाघिन ने पहली बार चार शावकों को जन्म दिया था, जिसमें से दो नर शावकों की मौत हो गई थी. शेष सभी वयस्क होने तक बाघिन के साथ रहे. इस बाघिन ने पांचवी बार चार शावकों को जन्म दिया है. बाघिन अब तक पांच बार में कुल 20 शावकों को जन्म दे चुकी है.
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YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
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T-चार ने चार शावकों को जन्म दिया है. मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-चार ने चार शावकों को जन्म दिया है. बाघिन टी-चार अब तक कुल पांच बार मां बन चुकी है और जंगल क्षेत्र में बीस शावकों को जन्म दे चुकी है. पाटदेव नाम से मशहूर इस बाघिन टी-चार को साल दो हज़ार दस में वर्ल्ड फेमस सुपरमॉम कॉलरवाली बाघिन ने जन्म दिया था. बाघिन टी-चार की मां कॉलर वाली बाघिन के नाम पर सर्वाधिक उनतीस शावकों को जन्म देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है. नए साल में जंगल सफारी के दौरान बाघिन अपने चार नन्हे शावको के साथ नजर आई है और शावक और बाघिन को एक साथ देख कर पर्यटक खासा रोमांचित हो गए. टी-चार अपनी मां वर्ल्ड फेमस कॉलरवाली बाघिन की विरासत को पाटदेव बाघिन आगे बढ़ा रही है और पेंच टाइगर रिजर्व और पूरे प्रदेश में बाघो के कुनबे को बढ़ाने में अपना योगदान दे रही है. पेंच टाइगर रिजर्व के उप क्षेत्र संचालक रजनीश सिंह ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पाटदेव बाघिन टी-चार के चार नन्हे शावकों के साथ दिखाई दी है. बाघिन की टेरिटरी क्षेत्र का नाम पाटदेव है. इसलिए बाघिन को पाटदेव फीमेल के नाम से भी जाना जाता है. टी-चार बाघिन की उम्र वर्तमान में बारह साल है. जो पूरी तरह स्वस्थ है. उप क्षेत्र संचालक ने बाघिन के शावकों के जन्म देने के रिकॉर्ड के बारे में बताया कि बाघिन टी-चार ने पेंच के जंगल में पांचवी बार शावकों को जन्म दिया है. इससे पहले इस बाघिन ने साल दो हज़ार चौदह से साल दो हज़ार बीस के अंतराल मे कुल चार बार में सोलह शावकों को जन्म दिया था. साल दो हज़ार चौदह में बाघिन ने पहली बार चार शावकों को जन्म दिया था, जिसमें से दो नर शावकों की मौत हो गई थी. शेष सभी वयस्क होने तक बाघिन के साथ रहे. इस बाघिन ने पांचवी बार चार शावकों को जन्म दिया है. बाघिन अब तक पांच बार में कुल बीस शावकों को जन्म दे चुकी है. . YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
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RANCHI: पंडरा पुलिस ने हेसल जमीन विवाद में हुई फायरिंग के मामले में मास्टर माइंड पंकज दयाल सिंह को बुधवार की देर रात गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पंकज दयाल सिंह की गिरफ्तारी रातू थाना क्षेत्र के टेंडर स्थित घर से हुई। इस मामले में पुलिस पहले भी पिस्कामोड़ के मनोज कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पंडरा ओपी प्रभारी हरेंद्र कुमार राय ने बताया कि हेसल जमीन कांड के बाद सभी आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि पंकज दयाल सिंह अपने घर पर है। इसके बाद पुलिस ने उसे घर से गिरफ्तार कर लिया।
गौरतलब हो कि पिस्कामोड़ में 19 एकड़ जमीन पर कब्जा करने के लिए बिल्डर पंकज दयाल सिंह के समर्थक जुट गए थे। वे लोग हरवे-हथियार से लैस थे। इसी बीच वर्षो से उस जमीन पर खेती करते आ रहे प्रेम मुंडा और अन्य लोगों ने कहा कि वे लोग वर्षो से उसके जोतकार रहे हैं। ऐसे में कोई भी जमीन कैसे बेच सकता है या उसकी घेराबंदी कर सकता है?
जमीन पर कब्जा दिलाने वालों में जेल से छूटा एक क्रिमिनल भी शामिल था। उसे गोली भी लगी थी और कई दिनों तक अस्पताल में भी भर्ती रहा था। पंडरा पुलिस उक्त अपराधी और उसके गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। बताया जाता है कि उक्त गिरोह के लोगों को नाक, कान में भी चोट लगी थी। जमीन कब्जा करने गए विकास सिंह को पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है।
जमीन कब्जा करने गए लोगों के पास अवैध हथियार भी थे। हालांकि जब ग्रामीणों ने हल्ला बोला और मारपीट शुरू की तो सभी वहां से भाग निकले। आक्रोशित लोगों ने बीजेपी नेता के घर के समीप खड़े वाहन को इसलिए फूंक डाला कि उनलोगों को किसी ने जानकारी दी थी कि सारी बाइक जमीन कब्जा करने आए लोगों की है। बाद में पता चला कि कुछ लोग वहां पूजा में शामिल होने गए थे, उसी क्रम में उनलोगों ने बाइक बाहर खड़ी कर दी थी, जिसे जला दिया गया था।
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RANCHI: पंडरा पुलिस ने हेसल जमीन विवाद में हुई फायरिंग के मामले में मास्टर माइंड पंकज दयाल सिंह को बुधवार की देर रात गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पंकज दयाल सिंह की गिरफ्तारी रातू थाना क्षेत्र के टेंडर स्थित घर से हुई। इस मामले में पुलिस पहले भी पिस्कामोड़ के मनोज कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पंडरा ओपी प्रभारी हरेंद्र कुमार राय ने बताया कि हेसल जमीन कांड के बाद सभी आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि पंकज दयाल सिंह अपने घर पर है। इसके बाद पुलिस ने उसे घर से गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब हो कि पिस्कामोड़ में उन्नीस एकड़ जमीन पर कब्जा करने के लिए बिल्डर पंकज दयाल सिंह के समर्थक जुट गए थे। वे लोग हरवे-हथियार से लैस थे। इसी बीच वर्षो से उस जमीन पर खेती करते आ रहे प्रेम मुंडा और अन्य लोगों ने कहा कि वे लोग वर्षो से उसके जोतकार रहे हैं। ऐसे में कोई भी जमीन कैसे बेच सकता है या उसकी घेराबंदी कर सकता है? जमीन पर कब्जा दिलाने वालों में जेल से छूटा एक क्रिमिनल भी शामिल था। उसे गोली भी लगी थी और कई दिनों तक अस्पताल में भी भर्ती रहा था। पंडरा पुलिस उक्त अपराधी और उसके गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। बताया जाता है कि उक्त गिरोह के लोगों को नाक, कान में भी चोट लगी थी। जमीन कब्जा करने गए विकास सिंह को पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है। जमीन कब्जा करने गए लोगों के पास अवैध हथियार भी थे। हालांकि जब ग्रामीणों ने हल्ला बोला और मारपीट शुरू की तो सभी वहां से भाग निकले। आक्रोशित लोगों ने बीजेपी नेता के घर के समीप खड़े वाहन को इसलिए फूंक डाला कि उनलोगों को किसी ने जानकारी दी थी कि सारी बाइक जमीन कब्जा करने आए लोगों की है। बाद में पता चला कि कुछ लोग वहां पूजा में शामिल होने गए थे, उसी क्रम में उनलोगों ने बाइक बाहर खड़ी कर दी थी, जिसे जला दिया गया था।
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Patna : अभी अभी राजधानी पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र इलाके से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंगर टोली स्थित पॉपुलर प्लाजा के पास ट्रांसफार्मर में आग लग गई है।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है। ट्रांसफर्मर में लगी इस आग की चपेट में आने से कई वाहन जल गए है।
हालांकि स्थानीय लोगों द्वारा आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी गई है।
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Patna : अभी अभी राजधानी पटना के पीरबहोर थाना क्षेत्र इलाके से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंगर टोली स्थित पॉपुलर प्लाजा के पास ट्रांसफार्मर में आग लग गई है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है। ट्रांसफर्मर में लगी इस आग की चपेट में आने से कई वाहन जल गए है। हालांकि स्थानीय लोगों द्वारा आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी गई है।
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भारतीय आधुनिक शिक्षा - अक्तूबर 1995
16 गृह- कार्य नही देने से शिक्षको को इसे जाचने मे 22 गृहकार्य से बच्चो की परीक्षा मे उपलब्धि पर
समय व्यर्थ नही करना पड़ता इस समय का उपयोग वे अन्य सृजनात्मक कार्यों को करने मे कर सकते है। इस कथन से अभिभावको का मात्र 23 33.33 प्रतिशत किन्तु शिक्षको का 75 प्रतिशत
अच्छा प्रभाव पड़ता है इससे 80 प्रतिशत अभिभावक व 66 66 प्रतिशत शिक्षक सहमत हैं। गृहकार्य देकर बच्चो मे प्राथमिक शिक्षा के लिए निर्धारित उद्देश्यो को ज्यादा अच्छी तरह प्राप्त किया जा सकता है, इस कथन से 70 प्रतिशत अभिभावक सहमत है जबकि शिक्षको का मात्र 3333 प्रतिशत ही सहमत है।
सहमत हैं।
गृह- कार्य नही देने से बच्चो का विकास अधिक अच्छा होता है इससे मात्र 20 प्रतिशत अभिभावक सहमत है जबकि 6666 प्रतिशत शिक्षक इससे सहमत है।
गृह-कार्य नियमित रूप से हर विषय मे दिया जाना चाहिए, इससे 10 प्रतिशत अभिभावक ही सहमत है 90 प्रतिशत नही तथा शिक्षको मे सभी (100 प्रतिशत) इससे असहमत है।
18 गृह कार्य विषयवार कभी-कभी दिया जाना चाहिए इससे 8666 प्रतिशत अभिभावक व 9166 प्रतिशत शिक्षक सहमत है।
19 गृह- कार्य नही दिया जाना चाहिए इससे 1333 प्रतिशत अभिभावक व 25 प्रतिशत शिक्षक ही सहमत है।
20 गृहकार्य मौखिक ही दिया जाना चाहिए, इससे 40 प्रतिशत अभिभावक व 6666 प्रतिशत शिक्षक सहमत हैं।
21 जिन विद्यालयो मे गृह-कार्य नही दिया जाता है उनके छात्र अन्य उन्नत समझे जाने वाले विद्यालयों के छात्रो की बराबरी नही कर सकते है, इससे 16.66 प्रतिशत अभिभावक ही सहमत है 8333 प्रतिशत नही तथा शिक्षको का अधिकाश वर्ग (83.33 प्रतिशत) इससे असहमत है।
प्राप्त परिणामों के आधार पर निष्कर्ष एवं सुझाव
दत्त विश्लेषण के द्वारा जो परिणाम प्राप्त हुए उनसे निष्कर्ष निकलता है कि गृहकार्य देने के संबंध मे अभिभावक शिक्षको की अपेक्षा अधिक इच्छुक है। गृह कार्य कक्षा कार्य का पूरक होता है यह अभिभावको का मत है। शिक्षको ने अधिकाश कथनो पर गृहकार्य के औचित्य को स्वीकार किया है किन्तु नियमित गृह-कार्य देने की प्रवृति को स्वीकार नहीं किया है। गृह-कार्य देने व जावने से शिक्षक की अकादमिक प्रवृत्तियो मे कोई विशेष इजाफा नहीं होता ऐसा इनका मानना है। समाज मे कई नई प्रवृत्तियों का जन्म भी गृह-कार्य द्वारा होता है जैसे ट्यूशन प्रवृत्ति, कोचिग सेन्टर आदि IDD
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भारतीय आधुनिक शिक्षा - अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ पचानवे सोलह गृह- कार्य नही देने से शिक्षको को इसे जाचने मे बाईस गृहकार्य से बच्चो की परीक्षा मे उपलब्धि पर समय व्यर्थ नही करना पड़ता इस समय का उपयोग वे अन्य सृजनात्मक कार्यों को करने मे कर सकते है। इस कथन से अभिभावको का मात्र तेईस तैंतीस.तैंतीस प्रतिशत किन्तु शिक्षको का पचहत्तर प्रतिशत अच्छा प्रभाव पड़ता है इससे अस्सी प्रतिशत अभिभावक व छयासठ छयासठ प्रतिशत शिक्षक सहमत हैं। गृहकार्य देकर बच्चो मे प्राथमिक शिक्षा के लिए निर्धारित उद्देश्यो को ज्यादा अच्छी तरह प्राप्त किया जा सकता है, इस कथन से सत्तर प्रतिशत अभिभावक सहमत है जबकि शिक्षको का मात्र तीन हज़ार तीन सौ तैंतीस प्रतिशत ही सहमत है। सहमत हैं। गृह- कार्य नही देने से बच्चो का विकास अधिक अच्छा होता है इससे मात्र बीस प्रतिशत अभिभावक सहमत है जबकि छः हज़ार छः सौ छयासठ प्रतिशत शिक्षक इससे सहमत है। गृह-कार्य नियमित रूप से हर विषय मे दिया जाना चाहिए, इससे दस प्रतिशत अभिभावक ही सहमत है नब्बे प्रतिशत नही तथा शिक्षको मे सभी इससे असहमत है। अट्ठारह गृह कार्य विषयवार कभी-कभी दिया जाना चाहिए इससे आठ हज़ार छः सौ छयासठ प्रतिशत अभिभावक व नौ हज़ार एक सौ छयासठ प्रतिशत शिक्षक सहमत है। उन्नीस गृह- कार्य नही दिया जाना चाहिए इससे एक हज़ार तीन सौ तैंतीस प्रतिशत अभिभावक व पच्चीस प्रतिशत शिक्षक ही सहमत है। बीस गृहकार्य मौखिक ही दिया जाना चाहिए, इससे चालीस प्रतिशत अभिभावक व छः हज़ार छः सौ छयासठ प्रतिशत शिक्षक सहमत हैं। इक्कीस जिन विद्यालयो मे गृह-कार्य नही दिया जाता है उनके छात्र अन्य उन्नत समझे जाने वाले विद्यालयों के छात्रो की बराबरी नही कर सकते है, इससे सोलह.छयासठ प्रतिशत अभिभावक ही सहमत है आठ हज़ार तीन सौ तैंतीस प्रतिशत नही तथा शिक्षको का अधिकाश वर्ग इससे असहमत है। प्राप्त परिणामों के आधार पर निष्कर्ष एवं सुझाव दत्त विश्लेषण के द्वारा जो परिणाम प्राप्त हुए उनसे निष्कर्ष निकलता है कि गृहकार्य देने के संबंध मे अभिभावक शिक्षको की अपेक्षा अधिक इच्छुक है। गृह कार्य कक्षा कार्य का पूरक होता है यह अभिभावको का मत है। शिक्षको ने अधिकाश कथनो पर गृहकार्य के औचित्य को स्वीकार किया है किन्तु नियमित गृह-कार्य देने की प्रवृति को स्वीकार नहीं किया है। गृह-कार्य देने व जावने से शिक्षक की अकादमिक प्रवृत्तियो मे कोई विशेष इजाफा नहीं होता ऐसा इनका मानना है। समाज मे कई नई प्रवृत्तियों का जन्म भी गृह-कार्य द्वारा होता है जैसे ट्यूशन प्रवृत्ति, कोचिग सेन्टर आदि IDD
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प्रयागराज (ब्यूरो)। एडीजी ने कहा कि माघ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ जवान किसी भी सूरत में गर्म लहजे का प्रयोग नहीं करें। आईजी राकेश सिंह ने कहा कि पुलिस पर मेला को सकुशल व शांति पूर्ण सम्पन्न कराने बड़ा जिम्मा होता है। इस जिम्मेदारी को हर एक जवान पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निर्वहन करे। डीआईजी/एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि मेला आस्था और विश्वास व धर्म का क्षेत्र है। यहां जवान साफ सुधरी वर्दी पहनें। जन सेवा भाव का विचार मन में हमेशा रहें और श्रद्धालुओं से मधुर लहजे में ही बात करें। एसपी मेला डॉ। राजीव नारायण मिश्र ने भी मेला ड्यूटी के तरीके बताएं।
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प्रयागराज । एडीजी ने कहा कि माघ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ जवान किसी भी सूरत में गर्म लहजे का प्रयोग नहीं करें। आईजी राकेश सिंह ने कहा कि पुलिस पर मेला को सकुशल व शांति पूर्ण सम्पन्न कराने बड़ा जिम्मा होता है। इस जिम्मेदारी को हर एक जवान पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निर्वहन करे। डीआईजी/एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि मेला आस्था और विश्वास व धर्म का क्षेत्र है। यहां जवान साफ सुधरी वर्दी पहनें। जन सेवा भाव का विचार मन में हमेशा रहें और श्रद्धालुओं से मधुर लहजे में ही बात करें। एसपी मेला डॉ। राजीव नारायण मिश्र ने भी मेला ड्यूटी के तरीके बताएं।
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टीम इंडिया एशिया कप 2022 (Asia Cup) में अपना अभियान रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ शुरू करेगी। इस मैच को जीतकर भारतीय टीम (Team India) के कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) टूर्नामेंट का आगाज जीत के साथ करना चाहेंगे। यही नहीं पाकिस्तान (Pakistan) के विरुद्ध मुकाबला जीतने पर रोहित कप्तान के तौर पर अपनी रिकॉर्ड बुक में एक और बाद रिकॉर्ड जोड़ लेंगे।
कैप्टन रोहित शर्मा (Rohit Sharma) जब एशिया कप में पाकिस्तान के विरुद्ध मैदान पर कदम रखेंगे, तब उनकी नजरें पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) के बड़े रिकॉर्ड पर होगी।
दरअसल टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा मैच जीतने के मामले में रोहित और सरफराज 29-29 जीत के साथ संयुक्त रूप से सातवें पायदान पर काबिज हैं। रोहित ने 35 टी20I मुकाबलों में से 29 मैच जीते हैं तो वहीं 6 मैच गंवा दिए। जबकि सरफराज अहमद को 37 मैचों में से 29 में जीत मिली। बाकी के 8 मैचों में उनको हार का सामना करना पड़ा।
इस स्थिति में अगर रोहित पाकिस्तान के साथ होना वाला मुकाबला जीत लेते हैं, तब वे 30 जीत के साथ सबसे ज्यादा टी20 जीतने वाले कप्तानों में सरफराज अहमद को पीछे छोड़ देंगे।
पाकिस्तान के खिलाफ मैच जीतने पर रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत की ये टी20 अंतरराष्ट्रीय में 30वीं जीत होगी। विराट कोहली (Virat Kohli) के नेतृत्व में भी भारत ने 30 टी20 जीते हैं। इस प्रकार रोहित कप्तानी के मामले में कोहली की बराबरी कर लेंगे।
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टीम इंडिया एशिया कप दो हज़ार बाईस में अपना अभियान रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ शुरू करेगी। इस मैच को जीतकर भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा टूर्नामेंट का आगाज जीत के साथ करना चाहेंगे। यही नहीं पाकिस्तान के विरुद्ध मुकाबला जीतने पर रोहित कप्तान के तौर पर अपनी रिकॉर्ड बुक में एक और बाद रिकॉर्ड जोड़ लेंगे। कैप्टन रोहित शर्मा जब एशिया कप में पाकिस्तान के विरुद्ध मैदान पर कदम रखेंगे, तब उनकी नजरें पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सरफराज अहमद के बड़े रिकॉर्ड पर होगी। दरअसल टीबीस इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा मैच जीतने के मामले में रोहित और सरफराज उनतीस-उनतीस जीत के साथ संयुक्त रूप से सातवें पायदान पर काबिज हैं। रोहित ने पैंतीस टीबीसI मुकाबलों में से उनतीस मैच जीते हैं तो वहीं छः मैच गंवा दिए। जबकि सरफराज अहमद को सैंतीस मैचों में से उनतीस में जीत मिली। बाकी के आठ मैचों में उनको हार का सामना करना पड़ा। इस स्थिति में अगर रोहित पाकिस्तान के साथ होना वाला मुकाबला जीत लेते हैं, तब वे तीस जीत के साथ सबसे ज्यादा टीबीस जीतने वाले कप्तानों में सरफराज अहमद को पीछे छोड़ देंगे। पाकिस्तान के खिलाफ मैच जीतने पर रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत की ये टीबीस अंतरराष्ट्रीय में तीसवीं जीत होगी। विराट कोहली के नेतृत्व में भी भारत ने तीस टीबीस जीते हैं। इस प्रकार रोहित कप्तानी के मामले में कोहली की बराबरी कर लेंगे।
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इस क्लेश की कमी होने पर भी जो भगवान् ने कहा है कि 'तेषामहं समुद्धर्ता' इसमें परतन्त्रता है। ठीक है, भगवान् ने कहा है कि 'भवामि न चिरात्' बहुत समय नहीं लेता हूँ, लेकिन भगवान् के हिसाब में बहुत समय और थोड़ा समय कितना है, यह हम अपने हिसाब से नहीं समझ सकते हैं! एक लौकिक कथा प्रसिद्ध है। रावण को वरदान देकर ब्रह्माजी वापस गये । वे लघुशंका करके जब निवृत्त हुए तब उन्होंने देखा कि संसार का क्या हाल है। देखते हैं कि रावण मरा हुआ है! रावण ने तो बड़े लम्बे समय तक रहने के लिए वरदान लिया था और हज़ारों साल रहा। परन्तु वे हज़ारों साल ब्रह्माजी के लिए इतना ही समय था जितनी देर में वे लघुशंका कर वापस आये । हम लोगों की एक चतुर्युगी तैंतालिस लाख बीस हज़ार सालों की होती है। ऐसी ही जब हज़ार चतुर्युगी हो जाती हैं तब ब्रह्माजी का एक दिन होता है भगवान् ने तो कह दिया कि - 'भवामि न चिरात् पार्थ' हमारे लाख पचास हज़ार, साल तो उनके लिए चिर हैं ही नहीं। उतने समय में न जाने हम लोग कितनी बार सुख-दुःख भोग लेंगे, कितनी बार जन्म ले लेंगे। इसलिए आचार्य शंकर कहते हैं कि जो कर सकते हैं उनके लिए तो यह स्वतंत्र मार्ग ही ठीक है क्योंकि इसके अन्दर यहीं फल मिलता है यहीं तृप्ति का अनुभव हो जाता है। परन्तु, जैसा भगवान् ने कहा- 'क्लेशो ऽधिकतरंः' संसार के प्रति वैराग्य की तीव्रता - यह अत्यन्त क्लेशदायक है क्योंकि लोगों को तो संसार में आसक्ति ही भरी हुई है। जब तक नाम और रूप में आसक्ति है, नाम और रूप की हमें कुछ भी इच्छा है, तब तक अज्ञान का आवरण हट नहीं सकता। अतः ऐसे लोगों के लिए परतंत्रता होने पर भी कि यह मार्ग उचित ही है ।
वह मार्ग कौन-सा है?भगवान् ने कहा'मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ।।१२-८॥
मन और बुद्धि को भगवान् के दिव्य रूपों में ही लगाओ। जो कुछ भी किया करते हो, उसे परमात्मा की प्रसन्नता के लिए करो । इसमें ऐसा तीव्र वैराग्य तो नहीं चाहिए, फिर भी थोड़ा-बहुत वैराग्य तो चाहिए ही। क्योंकि भगवान् के लिए कर्म करने का अर्थ है कि 'मुझे इसका फल हो', यह इच्छा नहीं । वैराग्य की पूर्णता इसलिए नहीं है कि यह भाव रहता है कि 'फल भगवान् दे तो अच्छा है'। इतना ज़रूर है कि यदि नहीं मिलेगा तब भी सन्तोष कर लेंगे। इसलिए भगवान् ने इस प्रकार के लोगों के लिए कह दिया
है कि यह भी एक तरह का संन्यास है। आचार्य शंकर अपने भाष्य में स्पष्ट करते हैं कि कर्मफल का भी त्याग होने से उसकी प्रशंसा कर दी जाती है । जिस प्रकार से अगस्त्य भी ब्राह्मण थे और हम भी ब्राह्मण हैं। अगस्त्य के अन्दर तो सामर्थ्य थी, उन्होंने समुद्र पी लिया। ब्राह्मणों की उनसे समानता होने से ब्राह्मण की आज भी पूजा होती है। ठीक इसी प्रकार से यद्यपि कर्मफलमात्र का त्याग संन्यास है नहीं लेकिन फिर भी त्याग की समानता होने से भगवान् ने उसकी स्तुति की कि उसे भी संन्यास ही समझो। इसलिए कहा- 'काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः' । काम्य कर्मों का परित्याग करके केवल परमात्मा के द्वारा निर्दिष्ट कर्मों को करना, यह भी संन्यास ही है। कर्मफल का त्याग करने वाला अर्थात् कर्म को परमात्मा को अर्पण करने वाला भी वस्तुतः मोक्ष को ही चाहता है। इसलिए वह भी मुमुक्षु ही है।
भगवान् का शिव रूप साक्षात् मोक्षदायक है। शास्त्रों में कहा है 'ज्ञा इच्छेत् महेश्वरात्'- यह जो तत्त्व-ज्ञान है, यह भगवान् शंकर से ही प्राप्त होता है। भगवान् शंकर की एक मूर्ति ऐसी है जो केवल ज्ञान प्रदान करने के लिए ही प्रकट हुई थी। भगवान् के जो अवतार होते हैं उनमें कोई एक मुख्य प्रयोजन भी होता है। जैसे रामावतार का मुख्य प्रयोजन था - पुरुष कैसी मर्यादा का पालन करे, इसका निरूपण करना । इसलिए उन्हें मर्यादावतार, मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। अवतार के अन्दर कोई एक विशेष वस्तु प्रकट होती है। कृष्णावतार में भगवान् श्रीकृष्ण ने गोपिकाओं के द्वारा प्रेम की जैसी महिमा प्रकट की, वैसी रामावतार में नहीं मिलेगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि रामावतार में इस तरह के दृष्टान्त नहीं मिलेंगे। परन्तु प्रेम की पराकाष्ठा जिसको कहा है- 'ताहि अहीर की छोहरियाँ छछियाँ भरि छाछ पे नाच नचावें',- अर्थात् जिस प्रेमके कारण वे थोड़ी सी छांछ के लालच में नाच कर दिखाते थे वह रामावतार में नहीं मिलेगी। भगवान् पूर्ण हैं। उनमें कोई कमी नहीं है, परन्तु अवतार के प्रयोजनों में कोई एक प्रधान प्रयोजन रहता है जिसको वे व्यक्त करते हैं। ज्ञान देने का जो अवतार है वह भगवान् शंकर का दक्षिणामूर्ति स्वरूप है। साक्षात् ज्ञान देने के लिए ही इस रूप में वे अवतरित हुए।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् ने कहा कि मैंने जब सृष्टि की तब पहले सप्त महर्षि बनाये। उनसे कर्म-मार्ग का प्रवर्तन किया । लेकिन उनसे भी पहले चार- सनक, सनन्दन, सनातन एवं सनत को प्रकट किया। ये निवृत्ति-मार्ग के प्रवर्तकाचार्य हैं । ज्ञान के लिए गुरु के पास जाना आवश्यक है। ब्रह्मा से ही सृष्टि उत्पन्न होती है। जब पहले-पहले उत्पन्न किया, तब ब्रह्माजी ने कहा कि 'शादी-ब्याह करो, बच्चे पैदा हो।' सनत्कुमारों ने कहा
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इस क्लेश की कमी होने पर भी जो भगवान् ने कहा है कि 'तेषामहं समुद्धर्ता' इसमें परतन्त्रता है। ठीक है, भगवान् ने कहा है कि 'भवामि न चिरात्' बहुत समय नहीं लेता हूँ, लेकिन भगवान् के हिसाब में बहुत समय और थोड़ा समय कितना है, यह हम अपने हिसाब से नहीं समझ सकते हैं! एक लौकिक कथा प्रसिद्ध है। रावण को वरदान देकर ब्रह्माजी वापस गये । वे लघुशंका करके जब निवृत्त हुए तब उन्होंने देखा कि संसार का क्या हाल है। देखते हैं कि रावण मरा हुआ है! रावण ने तो बड़े लम्बे समय तक रहने के लिए वरदान लिया था और हज़ारों साल रहा। परन्तु वे हज़ारों साल ब्रह्माजी के लिए इतना ही समय था जितनी देर में वे लघुशंका कर वापस आये । हम लोगों की एक चतुर्युगी तैंतालिस लाख बीस हज़ार सालों की होती है। ऐसी ही जब हज़ार चतुर्युगी हो जाती हैं तब ब्रह्माजी का एक दिन होता है भगवान् ने तो कह दिया कि - 'भवामि न चिरात् पार्थ' हमारे लाख पचास हज़ार, साल तो उनके लिए चिर हैं ही नहीं। उतने समय में न जाने हम लोग कितनी बार सुख-दुःख भोग लेंगे, कितनी बार जन्म ले लेंगे। इसलिए आचार्य शंकर कहते हैं कि जो कर सकते हैं उनके लिए तो यह स्वतंत्र मार्ग ही ठीक है क्योंकि इसके अन्दर यहीं फल मिलता है यहीं तृप्ति का अनुभव हो जाता है। परन्तु, जैसा भगवान् ने कहा- 'क्लेशो ऽधिकतरंः' संसार के प्रति वैराग्य की तीव्रता - यह अत्यन्त क्लेशदायक है क्योंकि लोगों को तो संसार में आसक्ति ही भरी हुई है। जब तक नाम और रूप में आसक्ति है, नाम और रूप की हमें कुछ भी इच्छा है, तब तक अज्ञान का आवरण हट नहीं सकता। अतः ऐसे लोगों के लिए परतंत्रता होने पर भी कि यह मार्ग उचित ही है । वह मार्ग कौन-सा है?भगवान् ने कहा'मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ।।बारह-आठ॥ मन और बुद्धि को भगवान् के दिव्य रूपों में ही लगाओ। जो कुछ भी किया करते हो, उसे परमात्मा की प्रसन्नता के लिए करो । इसमें ऐसा तीव्र वैराग्य तो नहीं चाहिए, फिर भी थोड़ा-बहुत वैराग्य तो चाहिए ही। क्योंकि भगवान् के लिए कर्म करने का अर्थ है कि 'मुझे इसका फल हो', यह इच्छा नहीं । वैराग्य की पूर्णता इसलिए नहीं है कि यह भाव रहता है कि 'फल भगवान् दे तो अच्छा है'। इतना ज़रूर है कि यदि नहीं मिलेगा तब भी सन्तोष कर लेंगे। इसलिए भगवान् ने इस प्रकार के लोगों के लिए कह दिया है कि यह भी एक तरह का संन्यास है। आचार्य शंकर अपने भाष्य में स्पष्ट करते हैं कि कर्मफल का भी त्याग होने से उसकी प्रशंसा कर दी जाती है । जिस प्रकार से अगस्त्य भी ब्राह्मण थे और हम भी ब्राह्मण हैं। अगस्त्य के अन्दर तो सामर्थ्य थी, उन्होंने समुद्र पी लिया। ब्राह्मणों की उनसे समानता होने से ब्राह्मण की आज भी पूजा होती है। ठीक इसी प्रकार से यद्यपि कर्मफलमात्र का त्याग संन्यास है नहीं लेकिन फिर भी त्याग की समानता होने से भगवान् ने उसकी स्तुति की कि उसे भी संन्यास ही समझो। इसलिए कहा- 'काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः' । काम्य कर्मों का परित्याग करके केवल परमात्मा के द्वारा निर्दिष्ट कर्मों को करना, यह भी संन्यास ही है। कर्मफल का त्याग करने वाला अर्थात् कर्म को परमात्मा को अर्पण करने वाला भी वस्तुतः मोक्ष को ही चाहता है। इसलिए वह भी मुमुक्षु ही है। भगवान् का शिव रूप साक्षात् मोक्षदायक है। शास्त्रों में कहा है 'ज्ञा इच्छेत् महेश्वरात्'- यह जो तत्त्व-ज्ञान है, यह भगवान् शंकर से ही प्राप्त होता है। भगवान् शंकर की एक मूर्ति ऐसी है जो केवल ज्ञान प्रदान करने के लिए ही प्रकट हुई थी। भगवान् के जो अवतार होते हैं उनमें कोई एक मुख्य प्रयोजन भी होता है। जैसे रामावतार का मुख्य प्रयोजन था - पुरुष कैसी मर्यादा का पालन करे, इसका निरूपण करना । इसलिए उन्हें मर्यादावतार, मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। अवतार के अन्दर कोई एक विशेष वस्तु प्रकट होती है। कृष्णावतार में भगवान् श्रीकृष्ण ने गोपिकाओं के द्वारा प्रेम की जैसी महिमा प्रकट की, वैसी रामावतार में नहीं मिलेगी। इसका अर्थ यह नहीं है कि रामावतार में इस तरह के दृष्टान्त नहीं मिलेंगे। परन्तु प्रेम की पराकाष्ठा जिसको कहा है- 'ताहि अहीर की छोहरियाँ छछियाँ भरि छाछ पे नाच नचावें',- अर्थात् जिस प्रेमके कारण वे थोड़ी सी छांछ के लालच में नाच कर दिखाते थे वह रामावतार में नहीं मिलेगी। भगवान् पूर्ण हैं। उनमें कोई कमी नहीं है, परन्तु अवतार के प्रयोजनों में कोई एक प्रधान प्रयोजन रहता है जिसको वे व्यक्त करते हैं। ज्ञान देने का जो अवतार है वह भगवान् शंकर का दक्षिणामूर्ति स्वरूप है। साक्षात् ज्ञान देने के लिए ही इस रूप में वे अवतरित हुए। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान् ने कहा कि मैंने जब सृष्टि की तब पहले सप्त महर्षि बनाये। उनसे कर्म-मार्ग का प्रवर्तन किया । लेकिन उनसे भी पहले चार- सनक, सनन्दन, सनातन एवं सनत को प्रकट किया। ये निवृत्ति-मार्ग के प्रवर्तकाचार्य हैं । ज्ञान के लिए गुरु के पास जाना आवश्यक है। ब्रह्मा से ही सृष्टि उत्पन्न होती है। जब पहले-पहले उत्पन्न किया, तब ब्रह्माजी ने कहा कि 'शादी-ब्याह करो, बच्चे पैदा हो।' सनत्कुमारों ने कहा
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मुंबईः रिलायंस एडीए समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी सोमवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए और विदेशी मुद्रा कानून के कथित उल्लंघन से जुड़ी जांच के सिलसिले में अपना बयान दर्ज कराया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
उद्योगपति और उनकी पत्नी टीना अंबानी को इस सप्ताह के अंत में इसी तरह की पूछताछ के लिए फिर से बुलाया गया है।
64 वर्षीय अंबानी ने दक्षिण मुंबई में संघीय एजेंसी के कार्यालय में गवाही दी, जहां वह सुबह करीब 10 बजे पहुंचे और शाम 6 बजे चले गए।
सूत्रों ने कहा कि अंबानी का बयान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) की विभिन्न धाराओं के तहत दायर एक ताजा मामले के हिस्से के रूप में दर्ज किया गया था।
उन्होंने बिना विस्तार से बताया कि दंपति के खिलाफ जांच विदेश में कुछ कथित अघोषित संपत्तियों के कब्जे और धन की आवाजाही से संबंधित है।
अनिल अंबानी 2020 में यस बैंक के प्रमोटर राणा कपूर और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के सामने पेश हुए थे।
पिछले साल अगस्त में, आयकर विभाग ने दो स्विस बैंक खातों में रखे गए 814 करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित धन पर कथित तौर पर 420 करोड़ रुपये की कर चोरी के लिए काला धन विरोधी कानून के तहत अंबानी को नोटिस जारी किया था।
मार्च में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस I-T कारण बताओ नोटिस और जुर्माने की मांग पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
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मुंबईः रिलायंस एडीए समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी सोमवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश हुए और विदेशी मुद्रा कानून के कथित उल्लंघन से जुड़ी जांच के सिलसिले में अपना बयान दर्ज कराया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उद्योगपति और उनकी पत्नी टीना अंबानी को इस सप्ताह के अंत में इसी तरह की पूछताछ के लिए फिर से बुलाया गया है। चौंसठ वर्षीय अंबानी ने दक्षिण मुंबई में संघीय एजेंसी के कार्यालय में गवाही दी, जहां वह सुबह करीब दस बजे पहुंचे और शाम छः बजे चले गए। सूत्रों ने कहा कि अंबानी का बयान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दायर एक ताजा मामले के हिस्से के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने बिना विस्तार से बताया कि दंपति के खिलाफ जांच विदेश में कुछ कथित अघोषित संपत्तियों के कब्जे और धन की आवाजाही से संबंधित है। अनिल अंबानी दो हज़ार बीस में यस बैंक के प्रमोटर राणा कपूर और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के सामने पेश हुए थे। पिछले साल अगस्त में, आयकर विभाग ने दो स्विस बैंक खातों में रखे गए आठ सौ चौदह करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित धन पर कथित तौर पर चार सौ बीस करोड़ रुपये की कर चोरी के लिए काला धन विरोधी कानून के तहत अंबानी को नोटिस जारी किया था। मार्च में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस I-T कारण बताओ नोटिस और जुर्माने की मांग पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
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राजस्थान के कई जिलो में बारिश ने तबाही मचा रखी है। वहीं, मारवाड़ का रेगिस्तान अभी भी बारिश की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। थार के लोगों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सदियों पुराने टोटके करने शुरू कर दिए है। ग्रामीणों और किसानों ने कारेली नाडी पर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सात तरह अनाज को पका कर बाकले बनाकर चारों दिशाओं में इन्द्रदेव को चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से इंद्रदेव प्रसन्न हो जाते हैं और इलाके में अच्छी बारिश होती है।
किसानों और ग्रामीणों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सदियों पुरानी परपंरा तालाब या नाड़ी में जाकर 7 अलग-अलग तरह के अनाज को भगोले में पकाकर बाकले बनाकर चारो दिशाओं में चढ़ाते हैं।
किसान देवीसिंह बताते हैं कि हर साल सावन से पहले अच्छी बारिश हो जाती है लेकिन इस बार तो बारिश बिल्कुल हुई नहीं है अब खेतों में बुवाई से ज्यादा तो गाय और मवेशियों के लिए चारे-पानी का संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। भगवान से एक ही प्रार्थना है कि बारिश कर दे कम से कम गाय और मवेशियों के चारे-पानी की तो व्यवस्था हो जाए।
किसान नारायण राम के बताते हैं कि हमने सभी लोगों से चंदा इकट्ठा किया है इसका चढ़ावा सबसे पहले इंद्र देवता को चढ़ता है उसके बाद हम इसे खाते हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि इंद्र देवता जो रूठ गए हैं वह मान जाए। सावन का तीसरा सोमवार भी सूखा चला गया है लेकिन बारिश होती नहीं दिख रही है।
दरअसल, थार के रेगिस्तान में करीब दो माह पहले एक बारिश हुई थी इसके बाद मानसून बाड़मेर में होने के बावजूद मानसून सक्रिय नहीं हुआ और बारिश नहीं हुई थी। बाड़मेर में लगातार आसमानमें बादलों का डेरा रहा था लेकिन अब वापस गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये है। जुलाई महीने में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आस-पास था जो सावन में अब बढ़कर 40 के आस-पास पहुंच गया है।
करीब 10 लाख हेक्टेयर में बोई खरीफ फसलों के साथ चारे-पानी का संकट भी गहराने लगा है। सावन के पंद्रह दिन सूखे ही बीत गए। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो यह परिस्थितियां पाकिस्तान व पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने एंटी साइक्लोनिक फ्लो की वजह से बारिश नहीं हो रही है और गर्मी बढ़ने लगी है।
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राजस्थान के कई जिलो में बारिश ने तबाही मचा रखी है। वहीं, मारवाड़ का रेगिस्तान अभी भी बारिश की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। थार के लोगों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सदियों पुराने टोटके करने शुरू कर दिए है। ग्रामीणों और किसानों ने कारेली नाडी पर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सात तरह अनाज को पका कर बाकले बनाकर चारों दिशाओं में इन्द्रदेव को चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से इंद्रदेव प्रसन्न हो जाते हैं और इलाके में अच्छी बारिश होती है। किसानों और ग्रामीणों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए सदियों पुरानी परपंरा तालाब या नाड़ी में जाकर सात अलग-अलग तरह के अनाज को भगोले में पकाकर बाकले बनाकर चारो दिशाओं में चढ़ाते हैं। किसान देवीसिंह बताते हैं कि हर साल सावन से पहले अच्छी बारिश हो जाती है लेकिन इस बार तो बारिश बिल्कुल हुई नहीं है अब खेतों में बुवाई से ज्यादा तो गाय और मवेशियों के लिए चारे-पानी का संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। भगवान से एक ही प्रार्थना है कि बारिश कर दे कम से कम गाय और मवेशियों के चारे-पानी की तो व्यवस्था हो जाए। किसान नारायण राम के बताते हैं कि हमने सभी लोगों से चंदा इकट्ठा किया है इसका चढ़ावा सबसे पहले इंद्र देवता को चढ़ता है उसके बाद हम इसे खाते हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि इंद्र देवता जो रूठ गए हैं वह मान जाए। सावन का तीसरा सोमवार भी सूखा चला गया है लेकिन बारिश होती नहीं दिख रही है। दरअसल, थार के रेगिस्तान में करीब दो माह पहले एक बारिश हुई थी इसके बाद मानसून बाड़मेर में होने के बावजूद मानसून सक्रिय नहीं हुआ और बारिश नहीं हुई थी। बाड़मेर में लगातार आसमानमें बादलों का डेरा रहा था लेकिन अब वापस गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये है। जुलाई महीने में तापमान तीस डिग्री सेल्सियस के आस-पास था जो सावन में अब बढ़कर चालीस के आस-पास पहुंच गया है। करीब दस लाख हेक्टेयर में बोई खरीफ फसलों के साथ चारे-पानी का संकट भी गहराने लगा है। सावन के पंद्रह दिन सूखे ही बीत गए। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो यह परिस्थितियां पाकिस्तान व पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने एंटी साइक्लोनिक फ्लो की वजह से बारिश नहीं हो रही है और गर्मी बढ़ने लगी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्लीः हर किसी का सपना होता है कि उसका भविष्य आर्थिक रूप से मजबूत रहे, जिससे बुरे समय में दो रोटियों की दिक्कत महसूस ना हो। अगर आप अपने भविष्य को संपन्न बनाने की सोच रहे हैं तो फिर आज हम आपको एक स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लोगों का दिल जीतने के लिए काफी है।
यह स्कीम एलआईसी की ओर से चलाई जा रही है, जिसमें लोगों को रिकॉर्डतोड़ फायदा मिल रहा है। आप सोच रहे होंगे कि इस स्कीम का नाम क्या है तो यह जानने के लिए हमारी खबर पूरी पढनी होगी। दरअसल, एलआईसी की तरफ से जीवन आनंद पॉलिसी की शुरुआत की गई है, जो हर किसी के दिलों पर राज कर रही है, जिसका फायदा आप लेना चाहते हैं तो फिर देर नहीं करें। इस स्कीम में आपको एक मुश्त तगड़ी रकम मिल रही है।
सरकारी संस्था एलआईसी की धाकड़ स्कीम जीवन आनंद पॉलिसी का आप लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। इसमें आपको पहले छोटा निवेश करने की जरूरत होगी। स्कीम में मिनिमम सम एश्योर्ड 1 लाख रुपये तय किया गया है। इसमें अधिकतम की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
इस स्कीम में हर महीना आपको 1358 रुपये का निवेश करके 25 लाख रुपये का फंड आराम से मिल जाएगा। इससे आप कोई काम भी अटका हुआ काम आराम से कर सकते हैं। अगर आपने तनिक भी स्कीम से जुड़ने में देरी की तो फिर मौका हाथ से निकल जाएगा, जिससे दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
देशभर में अब कई ऐसी धाकड़ कंपनियां हैं, जिनकी स्कीम्स लोगों का दिल जीतने का काम कर रही हैं। जानकारी के लिए बता दें कि आपके पास कोई काम नहीं तो फिर चिंता कतई ना करें और इन जबरदस्त स्कीम्स से जुड़ेकर छप्परफाड़ लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कई स्कीम में मैच्योरिटी पर रिकॉर्डतोड़ रकम दी जा रही है।
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नई दिल्लीः हर किसी का सपना होता है कि उसका भविष्य आर्थिक रूप से मजबूत रहे, जिससे बुरे समय में दो रोटियों की दिक्कत महसूस ना हो। अगर आप अपने भविष्य को संपन्न बनाने की सोच रहे हैं तो फिर आज हम आपको एक स्कीम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लोगों का दिल जीतने के लिए काफी है। यह स्कीम एलआईसी की ओर से चलाई जा रही है, जिसमें लोगों को रिकॉर्डतोड़ फायदा मिल रहा है। आप सोच रहे होंगे कि इस स्कीम का नाम क्या है तो यह जानने के लिए हमारी खबर पूरी पढनी होगी। दरअसल, एलआईसी की तरफ से जीवन आनंद पॉलिसी की शुरुआत की गई है, जो हर किसी के दिलों पर राज कर रही है, जिसका फायदा आप लेना चाहते हैं तो फिर देर नहीं करें। इस स्कीम में आपको एक मुश्त तगड़ी रकम मिल रही है। सरकारी संस्था एलआईसी की धाकड़ स्कीम जीवन आनंद पॉलिसी का आप लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। इसमें आपको पहले छोटा निवेश करने की जरूरत होगी। स्कीम में मिनिमम सम एश्योर्ड एक लाख रुपये तय किया गया है। इसमें अधिकतम की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इस स्कीम में हर महीना आपको एक हज़ार तीन सौ अट्ठावन रुपयापये का निवेश करके पच्चीस लाख रुपये का फंड आराम से मिल जाएगा। इससे आप कोई काम भी अटका हुआ काम आराम से कर सकते हैं। अगर आपने तनिक भी स्कीम से जुड़ने में देरी की तो फिर मौका हाथ से निकल जाएगा, जिससे दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। देशभर में अब कई ऐसी धाकड़ कंपनियां हैं, जिनकी स्कीम्स लोगों का दिल जीतने का काम कर रही हैं। जानकारी के लिए बता दें कि आपके पास कोई काम नहीं तो फिर चिंता कतई ना करें और इन जबरदस्त स्कीम्स से जुड़ेकर छप्परफाड़ लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कई स्कीम में मैच्योरिटी पर रिकॉर्डतोड़ रकम दी जा रही है।
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तत्त्वार्य श्लोक वार्तिके
त्रिषु शब्दकी पराधीनतासे विपरिणत हो गया निकायेषु यह पढ अपने संसर्गी देवाः इस प्रथमान्त बहुवचनके समानाधिकरणपनको कथमपि रक्षित नहीं रख सकता है । इस प्रकार आक्षेप प्रवर्तने पर ग्रन्थकार कहते हैं कि यह तो नहीं कहना । क्योंकि अन्य पदार्थप्रधान या स्वपदार्थप्रधान दोनो प्रकार वृत्ति करनेपर भी कोई दोष नहीं आता है। देखिये, सबसे पहिले अन्य पदार्थको प्रधान रखनेवाली
चार है निकाय जिन्होके " ऐसी बहुव्रीहि समासवृत्ति करनेपर तो निकायेषु यो सप्तमी बहुवचनान्त पदकी अनुवृत्ति की जा सकती है। क्योंकि त्रिषु इस प्रकार सममी बहुवचनान्त पदके कथनकी वैसी सामर्थ्य है । कारण कि नित्य नामकी संख्याका गिनने योग्य संख्येयोंके बिना ठहर जाना असम्भव है निकायोके अतिरिक्त किन्ही अन्य वट, पट, उदासीन पदार्थोका यहा श्रुतज्ञान नहीं किया जा रहा है और उनका प्रकरण भी नहीं है । यहा त्रिपु पदके विशेष्य ढल होने योग्य उन भवनवासी आदि तीन निकायोको ही होना चाहिये । इस प्रकार अर्थकी सामर्थ्यसे सप्तमी बहुवचनान्त बनाकर निकाय शब्दकी अनुवृत्ति कर ली जा सकती है । तथा दूसरी स्त्रपदार्थप्रधान कर्मधारय वृत्तिके करनेपर भी तिस ही कारणसे यानी त्रिषुका श्रवण होनेसे उस निकायेषु की अनुवृत्ति की जा सकती है और कर्मधारय समासमे चतुर शब्दके समान निकायोकी भी प्रधानता हो जानेसे चतुर सख्या नामके विशेषणसे रहित हो रहे केवल निकायोकी अनुवृत्ति हो जाना वटित हो जाता है । इस सूत्रमे कण्ठोक्त की गयी त्रिव सख्या करके निकाया के पुंच्छला हो रही चतुःसंख्याको बाधा युक्त कर दिया जाता है। अत चार संख्या निकायेषुका पीछा छोड देती है। रही यह बात कि देवा. इसके साथ निकायेषुका सामानाविकरण्य बिगड गया, इसपर हमारा यह कहना है कि निकाय ( समुदाय ) और निकायी ( समुदायी ) इनका कथंचित् अभेद हो जानेसे " देवा पीतान्तलेश्याः " यो सामानाधिकरण्य वन जाना तो विरुद्ध नहीं पड़ता है। यानी निकाय और निकाथियोकी भेदविचक्षा करनेपर निकायेषु देवाः यो भेदसूचक सप्तमी विभक्तिको बीचमें लाकर पीतान्तलेश्या के साथ अभेद करते हुये वाक्यसन्दर्भ सुघदित हो जाता है । कोई आपत्ति होनेका प्रसंग नहीं है ।
त्रिनिकायाः पीतान्तलेश्या इति युक्तमिति चेन्न, इष्टविपर्ययमसंगात् । आदित इति वचने त्वत्र सूत्रगौरवमनिवार्य । ततो यथान्यासमेवास्तु ।
लघुता ही को अन्तिमलक्ष्य स्त्रीकार करता हुआ कोई पण्डित आक्षेप करता है आदितस्त्रिषु पीतान्तलेश्या' इतना लम्बा सूत्र नहीं बना कर केवल " त्रिनिकायाः पीतान्तलेश्या इतना छोटा सूत्र बनाना ही समुचित है । भवनवासी, व्यंतर, ज्योतिष्क इन तीन निकायवाले देव पीतपर्यंत लेश्याओंको बार रहे है । यह अभिप्रेत अर्थ प्राप्त हो हो जायगा । ग्रन्थकार कहते हैं कि यह तो नहीं कहना । क्योकि इष्ट अर्थसे विपरीत अर्थकी प्राप्ति हो जानेका प्रसग बन बैठेगा । तीन निकायोंमें भवनवासी, त्र्यतर, वैमानिक, या व्यन्तर, ज्योतिष्क, वैमानिक अथवा भवनवासी, ज्योतिक, वैमानिक, यो इन तीन
तीन निकायम विराज रहे देव यथोचित पीतपर्यंत यानी कृष्ण, नील, कापोत, पीत, लेश्यावाले हैं । यहां प्रकरणमें संक्षेपसे कथन करनेपर तो देवा. इस शब्दका कथन करना नहीं पडा । क्योंकि पूर्वसूत्रसे " देवाः " पदकी अनुवृत्ति होजाती है और सूत्रकारको भवनवासी, व्यंतर, आदि निकायका भी कण्ठोक निरूपण नहीं करना पड़ा। क्योंकि तिस ही कारणसे यानी भवनवासी आदि निकायकी पूर्व सूत्रसे ही अनुवृत्ति होरही है ।
कथमिह निकायेष्वित्यनुवर्तयितुं शक्यं तेषामन्यपदार्थे वृत्तौ सामर्थ्याभावात् । चत्वारश्च ते निकाया चतुर्णिकाया इति स्वपदार्थायामपि वृत्तौ देवा इति सामानाधिकरण्यानुः पपत्तिरिति चेन्न, उभयथापि दोषाभावात् । अन्यपदार्थायां वृत्तौ तावन्निकायेष्विति शक्यमनुवर्तयितुं । त्रिष्विति वचनसामर्थ्यान् त्रित्वसंख्यायाथ संख्येयैर्विना संभवाभावादन्येषामिहाश्रुतत्त्वात् प्रकरणाभावाच त्रिनिकायैरेव तैर्भवितव्यमित्यर्थ सामार्थ्यान्निकायानुवृत्तिः । स्वपदार्थायामपि वृत्तौ तत एव तदनुवृत्तिः प्रधानलाच निकायानां चतुःसंख्याविशेषणरहितानामनुवृत्तिघटनात् त्रित्वसंख्यया चतुःसंख्याया बाधितत्वात् । देवा इति इति सामानाधिकरण्यं तु निकायनिकायिनां कथंचिदभेदान्न विरुध्यते ।
यहा किसी पण्डितका आक्षेप है कि इस दूसरे सूत्रमें त्रिषु शद्धका सामानाधिकरण्य करने के लिये " निकायेषु " ऐसे सप्तमी बहुवचनान्त पदकी अनुवृत्ति करना आवश्यक है। किन्तु पूर्व सूत्र में " निकायाः " ऐसा प्रथमा विभक्तिका बहुवचनान्त पद पड़ा हुआ है । और वह भी " चतुर्नि" कायाः यहा समासवृत्ति द्वारा चतुर शद्वके साथ चुपट रहा है । " पदार्थः पदार्थेनान्चेति नत्वेकदेशेन, एकयोगनिर्दिष्टानां सह वा प्रवृत्तिः सह वा निवृत्तिः " इन नियमोके अनुसार यहा निकायेषु इस प्रकार सप्तमी बहुवचनान्त पदकी भला किस प्रकार अनुवृत्ति की जा सकती है ? क्योकि उन निकायोका अन्य पदार्थको प्रधान माननेवाली बहुव्रीहि नामकी वृत्ति होनेपर स्वतंत्र बने रहनेकी सामर्थ्य नहीं रहती है 1 चत्वारो निकायाः येषा " यो बहुव्रीहि समास करनेपर " समर्थः पदविधिः " के अनुसार दोनो पदोकी सामर्थ्य परस्परमे भिड रही मानी गयी है। भाण्डागार ( खजाना ) मे दो अधिपतियोंके ताले लग चुकनेपर पुनः एक ही अधिपतिको भाण्डागार खोलनेकी सामर्थ्य नहीं रहती है । उसी प्रकार या " चतुर्निकायाः " मे से निकायाः अथवा " अर्थवशात् विभक्तेर्विपरिणामः " इस न्यायसे त्रिपु पदके समभिव्याहार अनुसार निकायेषु पदकी अनुवृत्ति नही की जा सकती है । हा, चार जो वे निकाय यों विग्रह कर बनाये गये चतुर्निकायाः इस शद्वकी स्वपदार्थप्रधाना कर्मधारय समास नामकी वृत्ति मानने पर यद्यपि स्वतंत्र रूपसे समर्थ हो रहे निकाय शब्दकी अनुवृत्ति की जा सकती है, तो भी " देवा ,, इस पदके साथ सामानाधिकरण्य नहीं बन सकता है । क्योकि अनुवृत्त किये गये " निकायाः" शब्दक साथ " देवाः " यह पद चल रहा है । और " पीतान्तळेश्याः " देवपरक है । किन्तु
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तत्त्वार्य श्लोक वार्तिके त्रिषु शब्दकी पराधीनतासे विपरिणत हो गया निकायेषु यह पढ अपने संसर्गी देवाः इस प्रथमान्त बहुवचनके समानाधिकरणपनको कथमपि रक्षित नहीं रख सकता है । इस प्रकार आक्षेप प्रवर्तने पर ग्रन्थकार कहते हैं कि यह तो नहीं कहना । क्योंकि अन्य पदार्थप्रधान या स्वपदार्थप्रधान दोनो प्रकार वृत्ति करनेपर भी कोई दोष नहीं आता है। देखिये, सबसे पहिले अन्य पदार्थको प्रधान रखनेवाली चार है निकाय जिन्होके " ऐसी बहुव्रीहि समासवृत्ति करनेपर तो निकायेषु यो सप्तमी बहुवचनान्त पदकी अनुवृत्ति की जा सकती है। क्योंकि त्रिषु इस प्रकार सममी बहुवचनान्त पदके कथनकी वैसी सामर्थ्य है । कारण कि नित्य नामकी संख्याका गिनने योग्य संख्येयोंके बिना ठहर जाना असम्भव है निकायोके अतिरिक्त किन्ही अन्य वट, पट, उदासीन पदार्थोका यहा श्रुतज्ञान नहीं किया जा रहा है और उनका प्रकरण भी नहीं है । यहा त्रिपु पदके विशेष्य ढल होने योग्य उन भवनवासी आदि तीन निकायोको ही होना चाहिये । इस प्रकार अर्थकी सामर्थ्यसे सप्तमी बहुवचनान्त बनाकर निकाय शब्दकी अनुवृत्ति कर ली जा सकती है । तथा दूसरी स्त्रपदार्थप्रधान कर्मधारय वृत्तिके करनेपर भी तिस ही कारणसे यानी त्रिषुका श्रवण होनेसे उस निकायेषु की अनुवृत्ति की जा सकती है और कर्मधारय समासमे चतुर शब्दके समान निकायोकी भी प्रधानता हो जानेसे चतुर सख्या नामके विशेषणसे रहित हो रहे केवल निकायोकी अनुवृत्ति हो जाना वटित हो जाता है । इस सूत्रमे कण्ठोक्त की गयी त्रिव सख्या करके निकाया के पुंच्छला हो रही चतुःसंख्याको बाधा युक्त कर दिया जाता है। अत चार संख्या निकायेषुका पीछा छोड देती है। रही यह बात कि देवा. इसके साथ निकायेषुका सामानाविकरण्य बिगड गया, इसपर हमारा यह कहना है कि निकाय और निकायी इनका कथंचित् अभेद हो जानेसे " देवा पीतान्तलेश्याः " यो सामानाधिकरण्य वन जाना तो विरुद्ध नहीं पड़ता है। यानी निकाय और निकाथियोकी भेदविचक्षा करनेपर निकायेषु देवाः यो भेदसूचक सप्तमी विभक्तिको बीचमें लाकर पीतान्तलेश्या के साथ अभेद करते हुये वाक्यसन्दर्भ सुघदित हो जाता है । कोई आपत्ति होनेका प्रसंग नहीं है । त्रिनिकायाः पीतान्तलेश्या इति युक्तमिति चेन्न, इष्टविपर्ययमसंगात् । आदित इति वचने त्वत्र सूत्रगौरवमनिवार्य । ततो यथान्यासमेवास्तु । लघुता ही को अन्तिमलक्ष्य स्त्रीकार करता हुआ कोई पण्डित आक्षेप करता है आदितस्त्रिषु पीतान्तलेश्या' इतना लम्बा सूत्र नहीं बना कर केवल " त्रिनिकायाः पीतान्तलेश्या इतना छोटा सूत्र बनाना ही समुचित है । भवनवासी, व्यंतर, ज्योतिष्क इन तीन निकायवाले देव पीतपर्यंत लेश्याओंको बार रहे है । यह अभिप्रेत अर्थ प्राप्त हो हो जायगा । ग्रन्थकार कहते हैं कि यह तो नहीं कहना । क्योकि इष्ट अर्थसे विपरीत अर्थकी प्राप्ति हो जानेका प्रसग बन बैठेगा । तीन निकायोंमें भवनवासी, त्र्यतर, वैमानिक, या व्यन्तर, ज्योतिष्क, वैमानिक अथवा भवनवासी, ज्योतिक, वैमानिक, यो इन तीन तीन निकायम विराज रहे देव यथोचित पीतपर्यंत यानी कृष्ण, नील, कापोत, पीत, लेश्यावाले हैं । यहां प्रकरणमें संक्षेपसे कथन करनेपर तो देवा. इस शब्दका कथन करना नहीं पडा । क्योंकि पूर्वसूत्रसे " देवाः " पदकी अनुवृत्ति होजाती है और सूत्रकारको भवनवासी, व्यंतर, आदि निकायका भी कण्ठोक निरूपण नहीं करना पड़ा। क्योंकि तिस ही कारणसे यानी भवनवासी आदि निकायकी पूर्व सूत्रसे ही अनुवृत्ति होरही है । कथमिह निकायेष्वित्यनुवर्तयितुं शक्यं तेषामन्यपदार्थे वृत्तौ सामर्थ्याभावात् । चत्वारश्च ते निकाया चतुर्णिकाया इति स्वपदार्थायामपि वृत्तौ देवा इति सामानाधिकरण्यानुः पपत्तिरिति चेन्न, उभयथापि दोषाभावात् । अन्यपदार्थायां वृत्तौ तावन्निकायेष्विति शक्यमनुवर्तयितुं । त्रिष्विति वचनसामर्थ्यान् त्रित्वसंख्यायाथ संख्येयैर्विना संभवाभावादन्येषामिहाश्रुतत्त्वात् प्रकरणाभावाच त्रिनिकायैरेव तैर्भवितव्यमित्यर्थ सामार्थ्यान्निकायानुवृत्तिः । स्वपदार्थायामपि वृत्तौ तत एव तदनुवृत्तिः प्रधानलाच निकायानां चतुःसंख्याविशेषणरहितानामनुवृत्तिघटनात् त्रित्वसंख्यया चतुःसंख्याया बाधितत्वात् । देवा इति इति सामानाधिकरण्यं तु निकायनिकायिनां कथंचिदभेदान्न विरुध्यते । यहा किसी पण्डितका आक्षेप है कि इस दूसरे सूत्रमें त्रिषु शद्धका सामानाधिकरण्य करने के लिये " निकायेषु " ऐसे सप्तमी बहुवचनान्त पदकी अनुवृत्ति करना आवश्यक है। किन्तु पूर्व सूत्र में " निकायाः " ऐसा प्रथमा विभक्तिका बहुवचनान्त पद पड़ा हुआ है । और वह भी " चतुर्नि" कायाः यहा समासवृत्ति द्वारा चतुर शद्वके साथ चुपट रहा है । " पदार्थः पदार्थेनान्चेति नत्वेकदेशेन, एकयोगनिर्दिष्टानां सह वा प्रवृत्तिः सह वा निवृत्तिः " इन नियमोके अनुसार यहा निकायेषु इस प्रकार सप्तमी बहुवचनान्त पदकी भला किस प्रकार अनुवृत्ति की जा सकती है ? क्योकि उन निकायोका अन्य पदार्थको प्रधान माननेवाली बहुव्रीहि नामकी वृत्ति होनेपर स्वतंत्र बने रहनेकी सामर्थ्य नहीं रहती है एक चत्वारो निकायाः येषा " यो बहुव्रीहि समास करनेपर " समर्थः पदविधिः " के अनुसार दोनो पदोकी सामर्थ्य परस्परमे भिड रही मानी गयी है। भाण्डागार मे दो अधिपतियोंके ताले लग चुकनेपर पुनः एक ही अधिपतिको भाण्डागार खोलनेकी सामर्थ्य नहीं रहती है । उसी प्रकार या " चतुर्निकायाः " मे से निकायाः अथवा " अर्थवशात् विभक्तेर्विपरिणामः " इस न्यायसे त्रिपु पदके समभिव्याहार अनुसार निकायेषु पदकी अनुवृत्ति नही की जा सकती है । हा, चार जो वे निकाय यों विग्रह कर बनाये गये चतुर्निकायाः इस शद्वकी स्वपदार्थप्रधाना कर्मधारय समास नामकी वृत्ति मानने पर यद्यपि स्वतंत्र रूपसे समर्थ हो रहे निकाय शब्दकी अनुवृत्ति की जा सकती है, तो भी " देवा ,, इस पदके साथ सामानाधिकरण्य नहीं बन सकता है । क्योकि अनुवृत्त किये गये " निकायाः" शब्दक साथ " देवाः " यह पद चल रहा है । और " पीतान्तळेश्याः " देवपरक है । किन्तु
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Garhwa : सीबीआई की टीम ने गढ़वा के रमना प्रखंड मुख्यालय के उप डाकघर में हुए गबन मामले में गढ़वा के दो जगहों पर छापा मारा. रमना उप डाकघर में 2 करोड़ 10 लाख 41 हजार 382 रुपए गबन के मामले की टीम जांच कर रही है.
वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में भवनाथपुर के अरसली निवासी अश्विनी कुमार ठाकुर और रमना के संजय कुमार के आवास पर छापेमारी की गई. टीम ने दोनों के घरों में कई कागजातों को खंगाला. छापेमारी दल में शामिल अधिकारियों ने फिलहाल कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.
बता दें कि रमना उप डाकघर में विभिन्न आवर्ती खातों से अवैध निकासी करने के मामले में सहायक डाक अधीक्षक शंकर कुजूर ने जून 2019 में रमना थाना में डाकपाल कामेश्वर राम, अश्विनी कुमार, मंजीत कुमार और संजय कुमार पर मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया था.
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Garhwa : सीबीआई की टीम ने गढ़वा के रमना प्रखंड मुख्यालय के उप डाकघर में हुए गबन मामले में गढ़वा के दो जगहों पर छापा मारा. रमना उप डाकघर में दो करोड़ दस लाख इकतालीस हजार तीन सौ बयासी रुपयापए गबन के मामले की टीम जांच कर रही है. वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में भवनाथपुर के अरसली निवासी अश्विनी कुमार ठाकुर और रमना के संजय कुमार के आवास पर छापेमारी की गई. टीम ने दोनों के घरों में कई कागजातों को खंगाला. छापेमारी दल में शामिल अधिकारियों ने फिलहाल कुछ भी बताने से इंकार कर दिया. बता दें कि रमना उप डाकघर में विभिन्न आवर्ती खातों से अवैध निकासी करने के मामले में सहायक डाक अधीक्षक शंकर कुजूर ने जून दो हज़ार उन्नीस में रमना थाना में डाकपाल कामेश्वर राम, अश्विनी कुमार, मंजीत कुमार और संजय कुमार पर मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया था.
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Jharkhand : उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन समाहरणालय सभागार में किया गया। इस दौरान उपायुक्त द्वारा जिला अन्तर्गत चल रहे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए जानकारी दी गई कि देवघर जिले को पर्यटन हब के रूप विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा छः पैरामिटर के तहत इसकी जांच की जायेगी। साथ हीं ऐसे में टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ इस दिशा में कार्य करने का आवश्यक निर्देश दिया।
बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने विभिन्न योजनाओं के साथ कृषि विभाग, आपूर्ति विभाग, समाज कल्याण, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय उच्च पथ, पशुधन योजना, विभिन्न योजनाओं के तहत चल रहे पेंशन योजना, छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री पशुधन योजना, सोना सोबरन धोती सारी योजन, पेट्रोल सब्सिडी योजना, फूलों झानो आशीर्वाद योजना आदि के तहत चल रहे कार्यों की प्रखंडवार समीक्षा करते धीमी गति से चल रहे कार्यों पर रोष प्रकट करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा निर्देश दिया। आगे उन्होंने प्रखंडवार तरीके से आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम के तहत लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि जल्द से जल्द मामलों का निराकरण करते हुए उपायुक्त कार्यालय को प्रगति प्रितिवेदन समर्पित करें। साथ ही बैठक के दौरान उपायुक्त ने कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदनों का सत्यापन करने का निदेश संबंधित अधिकारियों को दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई इस संबंधित की जा सके। बैठक के दौरान उपायुक्त ने जाति, आवासीय एवं दिव्यांग प्रमाण पत्र वितरण के कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कैम्प मोड में कार्य करने का निदेश दिया।
इसके अलावे बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ व पथ प्रमंडल विभाग से जुड़े विभिन्न मामलों की समीक्षा करते हुए भू-अर्जन व भू-हस्तांतरण से जुड़े मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया गया। साथ हीं करौं पेयजलापूर्ति योजना, देवीपुर पेयजलापूर्ति योजना व पालोजोरी पेयजलापूर्ति योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा के अलावा घरों में नल से जलापूर्ति कार्य के तहत किए जा रहे कार्यों को लेकर संबंधित कार्यपालक अभियंता को चल रहे कार्यों को गति देने का निदेश दिया।
■ जिले में गौ पालन को बढ़ावा देने के उदेश्य से उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश....
इसके अलावे बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में गौ पालन को बढ़ावा देने के उदेश्य से बेहतर कार्य योजना तैयार करने का निदेश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया। साथ हीं उन्होंने सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजना को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के सृजन, पशु उत्पादकता में वृद्धि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ीकरण के लिए पशुधन विकास योजना से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ें, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। साथ हीं योजना प्रचार-प्रसार करते हुए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना अंतर्गत गौ पालन, बकरी पालन, सुकर पालन, कुक्कुट पालन एवं बत्तख पालन आदि महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारियों से लोगों को अवगत कराएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग योजना का लाभ ले सके।
आगे उपायुक्त द्वारा जानकारी दी गई कि यह योजना ग्रामीण विकास, कल्याण विभाग तथा कृषि एवं पशुपालन विभाग के कन्वर्जेन्स से झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही है। इसमें सरकार किसानों को पचास से लेकर नब्बे और शत प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। आगे उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ पात्रता रखने वाले योग्य लाभुकों को मिले, इसका विशेष रूप से ध्यान रखें, ताकि पारदर्शिता के साथ एवं सुचारू रूप से मुख्यमंत्री पशुधन योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही उन्होंने इस योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा बकरा विकास योजना, सुकर विकास योजना, बैकयार्ड लेयर कुक्कड़ पालन योजना, ब्रायलर कुक्कड़ पालन योजना एवं बत्तख चूजा वितरण योजना के तहत किये गए कार्याे की वस्तुस्थिति से अवगत हुए।
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Jharkhand : उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन समाहरणालय सभागार में किया गया। इस दौरान उपायुक्त द्वारा जिला अन्तर्गत चल रहे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए जानकारी दी गई कि देवघर जिले को पर्यटन हब के रूप विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा छः पैरामिटर के तहत इसकी जांच की जायेगी। साथ हीं ऐसे में टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ इस दिशा में कार्य करने का आवश्यक निर्देश दिया। बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने विभिन्न योजनाओं के साथ कृषि विभाग, आपूर्ति विभाग, समाज कल्याण, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय उच्च पथ, पशुधन योजना, विभिन्न योजनाओं के तहत चल रहे पेंशन योजना, छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री पशुधन योजना, सोना सोबरन धोती सारी योजन, पेट्रोल सब्सिडी योजना, फूलों झानो आशीर्वाद योजना आदि के तहत चल रहे कार्यों की प्रखंडवार समीक्षा करते धीमी गति से चल रहे कार्यों पर रोष प्रकट करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा निर्देश दिया। आगे उन्होंने प्रखंडवार तरीके से आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम के तहत लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि जल्द से जल्द मामलों का निराकरण करते हुए उपायुक्त कार्यालय को प्रगति प्रितिवेदन समर्पित करें। साथ ही बैठक के दौरान उपायुक्त ने कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदनों का सत्यापन करने का निदेश संबंधित अधिकारियों को दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई इस संबंधित की जा सके। बैठक के दौरान उपायुक्त ने जाति, आवासीय एवं दिव्यांग प्रमाण पत्र वितरण के कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कैम्प मोड में कार्य करने का निदेश दिया। इसके अलावे बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ व पथ प्रमंडल विभाग से जुड़े विभिन्न मामलों की समीक्षा करते हुए भू-अर्जन व भू-हस्तांतरण से जुड़े मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया गया। साथ हीं करौं पेयजलापूर्ति योजना, देवीपुर पेयजलापूर्ति योजना व पालोजोरी पेयजलापूर्ति योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा के अलावा घरों में नल से जलापूर्ति कार्य के तहत किए जा रहे कार्यों को लेकर संबंधित कार्यपालक अभियंता को चल रहे कार्यों को गति देने का निदेश दिया। ■ जिले में गौ पालन को बढ़ावा देने के उदेश्य से उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश.... इसके अलावे बैठक के दौरान उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में गौ पालन को बढ़ावा देने के उदेश्य से बेहतर कार्य योजना तैयार करने का निदेश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया। साथ हीं उन्होंने सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजना को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के सृजन, पशु उत्पादकता में वृद्धि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ीकरण के लिए पशुधन विकास योजना से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ें, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। साथ हीं योजना प्रचार-प्रसार करते हुए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना अंतर्गत गौ पालन, बकरी पालन, सुकर पालन, कुक्कुट पालन एवं बत्तख पालन आदि महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारियों से लोगों को अवगत कराएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग योजना का लाभ ले सके। आगे उपायुक्त द्वारा जानकारी दी गई कि यह योजना ग्रामीण विकास, कल्याण विभाग तथा कृषि एवं पशुपालन विभाग के कन्वर्जेन्स से झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही है। इसमें सरकार किसानों को पचास से लेकर नब्बे और शत प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। आगे उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ पात्रता रखने वाले योग्य लाभुकों को मिले, इसका विशेष रूप से ध्यान रखें, ताकि पारदर्शिता के साथ एवं सुचारू रूप से मुख्यमंत्री पशुधन योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही उन्होंने इस योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा बकरा विकास योजना, सुकर विकास योजना, बैकयार्ड लेयर कुक्कड़ पालन योजना, ब्रायलर कुक्कड़ पालन योजना एवं बत्तख चूजा वितरण योजना के तहत किये गए कार्याे की वस्तुस्थिति से अवगत हुए।
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किसानों के द्वारा बुलाए गए भारत बंद के चलते मेरठ में रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेरठ कैंट, सिटी और परतापुर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कैंट स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।
किसान आंदोलन के चलते कोई भी हंगामा न हो इसलिए सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा मेरठ के सभी स्टेशनों पर स्थित कैश काउंटर पर पर्याप्त कैश का इंतजाम किया गया है। जिससे आंदोलन के कारण अगर ट्रेनें रद्द हुईं तो यात्रियों को फौरन टिकट कैंसिल कर रिफंड दिया जा सके। हालांकि, मेरठ में कोई ट्रेन अभी तक रद्द नहीं हुई है।
किसानों के बुलाए भारत बंद के कारण शहर के अंदर भी जाम के कारण हालात बुरे हैं। हाईवे, बाईपास और टोल पर किसानों ने सुबह से ही जाम लगा रखा है। वाहनों का आवागमन बंद हैं। ऐसे में पुलिस ने शहर के अंदर यातायात डायवर्ट कर दिया है। इस कारण पूरा दिल्ली रोड, बिजली बंबा बाईपास, बेगमपुल, शारदा रोड और बागपत रोड पर जाम लगा हुआ है। लोग परेशान हो रहे हैं।
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किसानों के द्वारा बुलाए गए भारत बंद के चलते मेरठ में रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेरठ कैंट, सिटी और परतापुर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कैंट स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है। किसान आंदोलन के चलते कोई भी हंगामा न हो इसलिए सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा मेरठ के सभी स्टेशनों पर स्थित कैश काउंटर पर पर्याप्त कैश का इंतजाम किया गया है। जिससे आंदोलन के कारण अगर ट्रेनें रद्द हुईं तो यात्रियों को फौरन टिकट कैंसिल कर रिफंड दिया जा सके। हालांकि, मेरठ में कोई ट्रेन अभी तक रद्द नहीं हुई है। किसानों के बुलाए भारत बंद के कारण शहर के अंदर भी जाम के कारण हालात बुरे हैं। हाईवे, बाईपास और टोल पर किसानों ने सुबह से ही जाम लगा रखा है। वाहनों का आवागमन बंद हैं। ऐसे में पुलिस ने शहर के अंदर यातायात डायवर्ट कर दिया है। इस कारण पूरा दिल्ली रोड, बिजली बंबा बाईपास, बेगमपुल, शारदा रोड और बागपत रोड पर जाम लगा हुआ है। लोग परेशान हो रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नूर सुल्तान (कजाकिस्तान), 21 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय पहलवान जितेन्द्र ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शनिवार को यहां जारी विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। जितेन्द्र ने 79 किलोग्राम भारवर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में तुर्की के मुहम्मेत नूरी कोटनोगुलू को 7-1 से करारी शिकस्त दी।
भारतीय पहलवान के लिए मुकाबले का पहला राउंड सामान्य रहा और उसने केवल एक अंक हासिल किया। हालांकि, दूसरे राउंड के अंतिम 90 सेकेंड में जितेन्द्र ने दमदार प्रदर्शन किया और मुकाबला जीत लिया।
क्वार्टर फाइनल में जितेंद्र का सामना स्लोवाकिया के तैमूरज सल्काजानोव से होगा।
इससे पहले, जितेंद्र ने पहले दौर के अपने मैच में मोल्डोवा के घेओरघी पास्कलोव को 7-2 से शिकस्त दी थी।
मैच की शुरुआत भारतीय खिलाड़ी के लिए बेहतरीन रही और उसने सबसे पहले दो अंक हासिल किए। पास्कलोव ने भी वापसी का प्रयास किया, लेकिन पहले राउंड की समाप्ती पर जितेन्द्र 5-2 से आगे रहे।
दूसरे राउंड में भी जितेन्द्र का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने जीत दर्ज की।
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नूर सुल्तान , इक्कीस सितम्बर । भारतीय पहलवान जितेन्द्र ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शनिवार को यहां जारी विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। जितेन्द्र ने उन्यासी किलोग्रामग्राम भारवर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में तुर्की के मुहम्मेत नूरी कोटनोगुलू को सात-एक से करारी शिकस्त दी। भारतीय पहलवान के लिए मुकाबले का पहला राउंड सामान्य रहा और उसने केवल एक अंक हासिल किया। हालांकि, दूसरे राउंड के अंतिम नब्बे सेकेंड में जितेन्द्र ने दमदार प्रदर्शन किया और मुकाबला जीत लिया। क्वार्टर फाइनल में जितेंद्र का सामना स्लोवाकिया के तैमूरज सल्काजानोव से होगा। इससे पहले, जितेंद्र ने पहले दौर के अपने मैच में मोल्डोवा के घेओरघी पास्कलोव को सात-दो से शिकस्त दी थी। मैच की शुरुआत भारतीय खिलाड़ी के लिए बेहतरीन रही और उसने सबसे पहले दो अंक हासिल किए। पास्कलोव ने भी वापसी का प्रयास किया, लेकिन पहले राउंड की समाप्ती पर जितेन्द्र पाँच-दो से आगे रहे। दूसरे राउंड में भी जितेन्द्र का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने जीत दर्ज की।
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सारा नहीं जाता। हम समाज का एक छोटा होता है, और इस समार अपने सामाजिक उत्तरदारियों को संभालने की शिक्षा बाकस्पा जाता क्योंकि उसे प्रत्येक केका पादर करना होता है, जनता सिद्धान्तों में तो उन्हें यही शिक्षा मिलती है। स्कूल परिषद कथा-समितियों वा खून सराद द्वारा स्कूल के दामन में भाग लेने के लिए बालकों को प्रोत्स बुध हित किया जाता है। इस प्रोत्साहन में बालक समझता है कि स्कूल के समा का यह एक राय है, जिनका वह पालन करता है ये उसी के है श्री वे उसी की भलाई के लिये निर्मित किये गये हैं। इस भावना वह उन्हें बिन दिगो विरोध के स्वीकार करता है इस प्रकार मात्मानुशासन जनउन्त्रात्म सिद्धान्तो का परिचायक है और इस प्रकार जनतन्त्रात्मक समाज में विनय की समस्या का स्वत समाधान हुषा करता है ।
जनतन्त्र और शिक्षा
शिक्षा मौर जनतन्त्रात्मक सिद्धान्तों में सम्बन्ध प्रावश्यक शिक्षा के सहारे ही जनतन्त्र का बढ़ना । जनता के सांस्कृतिक विकास मोर शिक्षा पर ध्यान देना ।
जनतन्त्रात्मक व्यावहारिकता और आदर्शवाद
व्यावहारिकता और आदर्शवाद का समावेश । सभी नागरिको को उनके अधिकारी और कर्तव्यों से अवगत करना । मादशों से व्यावहारिक्ता को और सकेत । प्रेरयायुक्त व्यक्तियों को उत्पन्न करना । जीवन उद्योग में कुशलतापूर्वक बर्तना, पर साथ ही जनतन्त्रात्मक गुणो को अपने व्यवहार में अपनाता । जनतन्त्र और शिक्षा योजना
शिक्षा के उद्देश्यों के निर्धारण में प्रत्येक नागरिक के प्रयत्नो का स्वागत करना । शिक्षा के उद्देश्यों के चार वर्गीकरण : १- माध्म-विकास ।
२ -- मानव सम्बन्ध
३- धार्षिक परिपूर्णता । ४-नागरिक उत्तरदायित्व ।
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सारा नहीं जाता। हम समाज का एक छोटा होता है, और इस समार अपने सामाजिक उत्तरदारियों को संभालने की शिक्षा बाकस्पा जाता क्योंकि उसे प्रत्येक केका पादर करना होता है, जनता सिद्धान्तों में तो उन्हें यही शिक्षा मिलती है। स्कूल परिषद कथा-समितियों वा खून सराद द्वारा स्कूल के दामन में भाग लेने के लिए बालकों को प्रोत्स बुध हित किया जाता है। इस प्रोत्साहन में बालक समझता है कि स्कूल के समा का यह एक राय है, जिनका वह पालन करता है ये उसी के है श्री वे उसी की भलाई के लिये निर्मित किये गये हैं। इस भावना वह उन्हें बिन दिगो विरोध के स्वीकार करता है इस प्रकार मात्मानुशासन जनउन्त्रात्म सिद्धान्तो का परिचायक है और इस प्रकार जनतन्त्रात्मक समाज में विनय की समस्या का स्वत समाधान हुषा करता है । जनतन्त्र और शिक्षा शिक्षा मौर जनतन्त्रात्मक सिद्धान्तों में सम्बन्ध प्रावश्यक शिक्षा के सहारे ही जनतन्त्र का बढ़ना । जनता के सांस्कृतिक विकास मोर शिक्षा पर ध्यान देना । जनतन्त्रात्मक व्यावहारिकता और आदर्शवाद व्यावहारिकता और आदर्शवाद का समावेश । सभी नागरिको को उनके अधिकारी और कर्तव्यों से अवगत करना । मादशों से व्यावहारिक्ता को और सकेत । प्रेरयायुक्त व्यक्तियों को उत्पन्न करना । जीवन उद्योग में कुशलतापूर्वक बर्तना, पर साथ ही जनतन्त्रात्मक गुणो को अपने व्यवहार में अपनाता । जनतन्त्र और शिक्षा योजना शिक्षा के उद्देश्यों के निर्धारण में प्रत्येक नागरिक के प्रयत्नो का स्वागत करना । शिक्षा के उद्देश्यों के चार वर्गीकरण : एक- माध्म-विकास । दो -- मानव सम्बन्ध तीन- धार्षिक परिपूर्णता । चार-नागरिक उत्तरदायित्व ।
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बादाम हलवा (badam halwa) बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट (Delicious) होता है, बादाम में प्रोटीन ,कैल्शियम, पोटेशियम और मैगनीशियम भी होता है, इसमें विटामिन E प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, अगर 5 से 6 बादाम रोज़ खाए जाए तो वे एक टोनिक (Tonic) का काम करते है बादाम का हलवा (Badam ka Halwa) जच्चा को भी बनाकर खिलाया जाता है ये बहुत ज्यादा ताकत और ताज़गी देने वाला होता है तो फिर बनाना शुरु करें (badam halwa recipe) बादाम हलवा....
बादाम को पीने के पानी में 5 से 6 घंटे के लिएं भिगो कर रख दें अगर आप जल्दी हलवा बनाना चाहते है तो फिर पानी को गर्म करे और गर्म पानी में बादाम को डाल कर रखे ये 2 से 3 घंटे में ही फूल जाएंगे हैं।
अब भीगे हुएं बादाम के छिलके उतार लें और छिले हुए बादाम (almond milk recipe) को दूध डाल कर मिक्सी में थोड़ा सा दरदरा सा पीस लें।
एक भारे तले की कढ़ाई या नानस्टिक कढ़ाई लें, बादाम का हलवा बनाने के लिए नानस्टिक कढाई ज्यादा अधिक सुविधाजनक होती है।
नानस्टिक कढ़ाई में एक टेबल स्पून घी डाल कर गर्म करे और गरम घी में बादाम का पेस्ट और चीनी डाले मिश्रण को कलछी से बराबर चलाते हुए भूने।
बचे हुए दूध को गर्म करके उसमें केसर डाल कर घोल लें और ये केसर वाला दूध हलवे में मिला कर भूनते रहे अब इसमें एक टेबल स्पून घी भी डाले अगर आप हलवा में कलर डालना चाहें तो फिर एक पिंच कलर भी इसी समय मिला दें।
और हलवे (khas khas ka halwa) को गाड़ा होने तक भूनते रहे आप देखेगे कि बादाम हलवा से बहुत ही अच्छी खुशबु आने लगी है और वह कढ़ाई के किनारों से भी नहीं चिपक रहा है बचा हुआ घी भी हलवा में डाल कर मिला दें बादाम का हलवा बन चुका है अब गैस को बन्द कर दें और हलवे में इचाइची पावडर डाल कर अच्छी तरह से मिला दें।
स्वादिष्ट बादाम का हलवा बनकर तैयार है बादाम के हलवे को एक बाउल में निकाले और गरमागर्म बादाम हलवा सर्व करे और खाएं बादाम का हलवा तो ठंडा भी बहुत स्वादिष्ट लगता है बादाम हलवा (Badam ka Halwa) को फ्रिज में रखकर 6 से 7 दिन तक खा सकते हैं।
इस रेसिपी से जुडा हुआ कोई भी सवाल आप के मन में हो तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में लिखें या अपनी राय दें।
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बादाम हलवा बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होता है, बादाम में प्रोटीन ,कैल्शियम, पोटेशियम और मैगनीशियम भी होता है, इसमें विटामिन E प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, अगर पाँच से छः बादाम रोज़ खाए जाए तो वे एक टोनिक का काम करते है बादाम का हलवा जच्चा को भी बनाकर खिलाया जाता है ये बहुत ज्यादा ताकत और ताज़गी देने वाला होता है तो फिर बनाना शुरु करें बादाम हलवा.... बादाम को पीने के पानी में पाँच से छः घंटाटे के लिएं भिगो कर रख दें अगर आप जल्दी हलवा बनाना चाहते है तो फिर पानी को गर्म करे और गर्म पानी में बादाम को डाल कर रखे ये दो से तीन घंटाटे में ही फूल जाएंगे हैं। अब भीगे हुएं बादाम के छिलके उतार लें और छिले हुए बादाम को दूध डाल कर मिक्सी में थोड़ा सा दरदरा सा पीस लें। एक भारे तले की कढ़ाई या नानस्टिक कढ़ाई लें, बादाम का हलवा बनाने के लिए नानस्टिक कढाई ज्यादा अधिक सुविधाजनक होती है। नानस्टिक कढ़ाई में एक टेबल स्पून घी डाल कर गर्म करे और गरम घी में बादाम का पेस्ट और चीनी डाले मिश्रण को कलछी से बराबर चलाते हुए भूने। बचे हुए दूध को गर्म करके उसमें केसर डाल कर घोल लें और ये केसर वाला दूध हलवे में मिला कर भूनते रहे अब इसमें एक टेबल स्पून घी भी डाले अगर आप हलवा में कलर डालना चाहें तो फिर एक पिंच कलर भी इसी समय मिला दें। और हलवे को गाड़ा होने तक भूनते रहे आप देखेगे कि बादाम हलवा से बहुत ही अच्छी खुशबु आने लगी है और वह कढ़ाई के किनारों से भी नहीं चिपक रहा है बचा हुआ घी भी हलवा में डाल कर मिला दें बादाम का हलवा बन चुका है अब गैस को बन्द कर दें और हलवे में इचाइची पावडर डाल कर अच्छी तरह से मिला दें। स्वादिष्ट बादाम का हलवा बनकर तैयार है बादाम के हलवे को एक बाउल में निकाले और गरमागर्म बादाम हलवा सर्व करे और खाएं बादाम का हलवा तो ठंडा भी बहुत स्वादिष्ट लगता है बादाम हलवा को फ्रिज में रखकर छः से सात दिन तक खा सकते हैं। इस रेसिपी से जुडा हुआ कोई भी सवाल आप के मन में हो तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में लिखें या अपनी राय दें।
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मौनी से एक इंटरव्यू के दौरान पूछा गया था कि क्या वह शादी कब करने वाली हैं? इस पर अदाकारा ने बिना किसी झिझक के कहा 'मैं अपनी पर्सनल लाइफ को पूरी तरह से प्राइवेट रखती हूं। इसलिए आप जब भी मुझसे इस तरह का सवाल करेंगे, तब आपको ऐसा ही जवाब मिलेगा कि मैं जब शादी करूंगी तब पूरी दुनिया को पता चल जाएगा'।
मौनी रॉय तो ऐक्ट्रेस हैं, फिर भी वह इस तरह के सवालों से बच नहीं पाती हैं। वहीं दूसरी ओर आम लड़कियां अपने ही परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और यहां तक कि पड़ोसियों से इस टॉपिक को लेकर परेशान दिखती हैं। आज के जमाने में जब ज्यादा से ज्यादा लड़कियां आत्मनिर्भर और आर्थिक मजबूती पर ध्यान दे रही हैं और अपने आप को साबित करने में लगी हैं, तब भी उन्हें 'शादी कब कर रही हो? ' के सवाल से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
इग्नोर करें या जवाब दें?
लड़कियों के लिए ये स्थिति इतनी आम है कि कई तो इस बात में अच्छे से ट्रेन्ड हो चुकी हैं कि कैसे उन्हें रिश्तेदारों के इस सवाल पर सिर को हां में हिलाते हुए बस इग्नोर मार देना है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो न सिर्फ इस टॉपिक को छेड़ते हैं, बल्कि किलो-किलोभर ज्ञान देना भी शुरू कर देते हैं। उस स्थिति में लड़कियां अक्सर ये सोचती हैं कि, 'इग्नोर किया जाए या फिर जवाब दे दिया जाए? '
'मैं अगर शादी के बगैर भी बच्चा चाहूं, तो मुझे कोई नहीं रोक सकता'
शादी के सवाल पर जिस तरह से मौनी ने बिंदास लेकिन शालीनता से जवाब दिया, वैसा ही तरीका आप भी अपना सकती हैं। किसी को भी दूसरे का बार-बार अपनी पर्सनल लाइफ में दखल देना और उससे जुड़े सवाल पूछे जाना एक हद तक ही बर्दाश्त हो सकता है। जब आपको लगे कि इसकी अति हो रही है, तो उन्हें बिना रूड हुए लेकिन फर्म तरीके से ये साफ कर दें कि ये आपकी जिंदगी है और उनका यूं दखल देना आपको अच्छा नहीं लगता है।
कई बार इस तरह के सवालों के कारण लड़कियां प्रेशर में आ जाती हैं और इसके चलते शादी का फैसला ले लेती हैं। ऐसा करना उन्हीं पर भारी पड़ सकता है। दरअसल, शादी सिर्फ दो लोगों को एक रिश्ते में नहीं बांधती, बल्कि इससे दो परिवार आपस में जुड़ते हैं। ये रिश्ता कई जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं भी साथ लेकर आता है। अगर आपको लगता है कि आप इसके लिए तैयार हैं, तो यकीनन आगे बढ़ने में कोई परेशानी नहीं, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तब शादी जैसा बड़ा फैसला लेने से बचें। नहीं तो, आप न तो हैपी मैरिड लाइफ जी सकेंगी और ना ही अपनी पर्सनल ग्रोथ पर ध्यान दे सकेंगी।
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मौनी से एक इंटरव्यू के दौरान पूछा गया था कि क्या वह शादी कब करने वाली हैं? इस पर अदाकारा ने बिना किसी झिझक के कहा 'मैं अपनी पर्सनल लाइफ को पूरी तरह से प्राइवेट रखती हूं। इसलिए आप जब भी मुझसे इस तरह का सवाल करेंगे, तब आपको ऐसा ही जवाब मिलेगा कि मैं जब शादी करूंगी तब पूरी दुनिया को पता चल जाएगा'। मौनी रॉय तो ऐक्ट्रेस हैं, फिर भी वह इस तरह के सवालों से बच नहीं पाती हैं। वहीं दूसरी ओर आम लड़कियां अपने ही परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों और यहां तक कि पड़ोसियों से इस टॉपिक को लेकर परेशान दिखती हैं। आज के जमाने में जब ज्यादा से ज्यादा लड़कियां आत्मनिर्भर और आर्थिक मजबूती पर ध्यान दे रही हैं और अपने आप को साबित करने में लगी हैं, तब भी उन्हें 'शादी कब कर रही हो? ' के सवाल से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। इग्नोर करें या जवाब दें? लड़कियों के लिए ये स्थिति इतनी आम है कि कई तो इस बात में अच्छे से ट्रेन्ड हो चुकी हैं कि कैसे उन्हें रिश्तेदारों के इस सवाल पर सिर को हां में हिलाते हुए बस इग्नोर मार देना है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो न सिर्फ इस टॉपिक को छेड़ते हैं, बल्कि किलो-किलोभर ज्ञान देना भी शुरू कर देते हैं। उस स्थिति में लड़कियां अक्सर ये सोचती हैं कि, 'इग्नोर किया जाए या फिर जवाब दे दिया जाए? ' 'मैं अगर शादी के बगैर भी बच्चा चाहूं, तो मुझे कोई नहीं रोक सकता' शादी के सवाल पर जिस तरह से मौनी ने बिंदास लेकिन शालीनता से जवाब दिया, वैसा ही तरीका आप भी अपना सकती हैं। किसी को भी दूसरे का बार-बार अपनी पर्सनल लाइफ में दखल देना और उससे जुड़े सवाल पूछे जाना एक हद तक ही बर्दाश्त हो सकता है। जब आपको लगे कि इसकी अति हो रही है, तो उन्हें बिना रूड हुए लेकिन फर्म तरीके से ये साफ कर दें कि ये आपकी जिंदगी है और उनका यूं दखल देना आपको अच्छा नहीं लगता है। कई बार इस तरह के सवालों के कारण लड़कियां प्रेशर में आ जाती हैं और इसके चलते शादी का फैसला ले लेती हैं। ऐसा करना उन्हीं पर भारी पड़ सकता है। दरअसल, शादी सिर्फ दो लोगों को एक रिश्ते में नहीं बांधती, बल्कि इससे दो परिवार आपस में जुड़ते हैं। ये रिश्ता कई जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं भी साथ लेकर आता है। अगर आपको लगता है कि आप इसके लिए तैयार हैं, तो यकीनन आगे बढ़ने में कोई परेशानी नहीं, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तब शादी जैसा बड़ा फैसला लेने से बचें। नहीं तो, आप न तो हैपी मैरिड लाइफ जी सकेंगी और ना ही अपनी पर्सनल ग्रोथ पर ध्यान दे सकेंगी।
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अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर ऐलान किया और कहा कि कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है कि इसके लिए जल्द से जल्द एक्सपर्ट्स का एक पैनल गठित किया जाएगा। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड लंबे समय से भाजपा के मुख्य चुनावी मुद्दों में से एक रहा है। भारतीय जनता पार्टी यूसीसी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। बुधवार को दूसरे कार्यकाल के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि वह एक पारदर्शी सरकार देंगे और राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने समेत चुनाव के दौरान पार्टी द्वारा किए गए सभी वादों को पूरा करेंगे।
12 फरवरी को पुष्कर सिंह धामी ने वादा किया था कि उत्तराखंड में दोबारा सत्ता में आने पर नई सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इस पैनल में कानूनी विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त जज, बुद्धिजीवी और संबंधित अन्य लोग शामिल होंगे। धामी ने उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यह घोषणा की थी। उत्तराखंड में 14 फरवरी को चुनाव संपन्न हुए थे। भाजपा ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में 70 सीटों में से 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर ऐलान किया और कहा कि कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है कि इसके लिए जल्द से जल्द एक्सपर्ट्स का एक पैनल गठित किया जाएगा। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड लंबे समय से भाजपा के मुख्य चुनावी मुद्दों में से एक रहा है। भारतीय जनता पार्टी यूसीसी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। बुधवार को दूसरे कार्यकाल के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि वह एक पारदर्शी सरकार देंगे और राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने समेत चुनाव के दौरान पार्टी द्वारा किए गए सभी वादों को पूरा करेंगे। बारह फरवरी को पुष्कर सिंह धामी ने वादा किया था कि उत्तराखंड में दोबारा सत्ता में आने पर नई सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इस पैनल में कानूनी विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त जज, बुद्धिजीवी और संबंधित अन्य लोग शामिल होंगे। धामी ने उत्तराखंड की सत्तर विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यह घोषणा की थी। उत्तराखंड में चौदह फरवरी को चुनाव संपन्न हुए थे। भाजपा ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सत्तर सीटों में से सैंतालीस सीटों पर जीत दर्ज की थी।
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सतना। मैहर में चुनाव प्रचार के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधवार को सतना पहुंचेंगे। उधर उप्र के ग्राम विकास मंत्री अरबिंद कुमार सिंह सपा प्रत्याशी रामनिवास उर्मलिया के चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे।
कांग्रेस ने भी चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है। 28 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव मैहर आएंगे। सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल नाथ तीन फरवरी को पहुंच रहे हैं। वे वहां दो सभाएं लेंगे।
साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश 29 जनवरी से वहीं डेरा डालेंगे। अजय सिंह से लेकर सईद अहमद, राजमणि पटेल भी प्रचार में जुटे हैं।
मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मांडवी चौहान ने सतना महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष ( ग्रामीण ) शशि मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है।
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सतना। मैहर में चुनाव प्रचार के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधवार को सतना पहुंचेंगे। उधर उप्र के ग्राम विकास मंत्री अरबिंद कुमार सिंह सपा प्रत्याशी रामनिवास उर्मलिया के चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे। कांग्रेस ने भी चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है। अट्ठाईस जनवरी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव मैहर आएंगे। सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल नाथ तीन फरवरी को पहुंच रहे हैं। वे वहां दो सभाएं लेंगे। साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश उनतीस जनवरी से वहीं डेरा डालेंगे। अजय सिंह से लेकर सईद अहमद, राजमणि पटेल भी प्रचार में जुटे हैं। मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मांडवी चौहान ने सतना महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष शशि मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है।
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भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद द्विपक्षीय तनाव के मद्देनजर पाकिस्तान को किसी भी तरह के आतंकी दुस्साहस का सहारा नहीं लेने की चेतावनी दी है।
शुक्रवार को भारतीय वायुसेना ने एक प्रोमोशनल वीडियो जारी किया जिसमें हमारी वायु सेना के हवाई हमले की शक्ति को दिखाया गया। इस वीडियो में पुलवामा आतंकी हमले के बाद गुस्सा जाहिर करते हुए लोगों के क्लिप हैं, वॉर रूम में बैठकर ऑपरेशन की योजना बना रहे अधिकारियों के कुछ शॉट्स और उसके बाद मिराज फाइटर जेट्स के उड़ान भरने की तस्वीरें हैं। आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करते हुए भारतीय वायुसेना के विमानों के भी कुछ क्लिप हैं, साथ ही उन इलाकों की भी कुछ सैटेलाइट तस्वीरें हैं, जिनपर वायुसेना के विमानों ने बमबारी की थी।
वायुसेना प्रमुख ने तुरंत यह स्पष्ट किया कि यह बालाकोट हवाई हमले का वीडियो नहीं था बल्कि वायु सेना दिवस (8 अक्टूबर) का प्रोमोशनल वीडियो था। लेकिन इसके साथ भारतीय वायुसेना प्रमुख ने जो कुछ भी कहा वह पाकिस्तान के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है।
हमें याद रखना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने क्या कहा था। उन्होंने दावा किया था कि भारत ने जिस बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया उससे सिर्फ 8 या 10 पेड़ों को नुकसान पहुंचा था और किसी तरह की कोई क्षति नहीं हुई थी। आज एयरफोर्स ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन बालाकोट को स्मार्ट बमों का उपयोग करके कितने परफेक्शन के साथ अंजाम दिया गया था, जिसमें जैश का बड़ा टेरर कैंप तबाह हो गया था। अब तक पाकिस्तानी सेना ने मीडियाकर्मियों को स्वतंत्र रूप से बालाकोट में नष्ट किए गए आतंकी ठिकाने पर जाने की इजाजत नहीं दी है।
इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह चेतावनी भी दी थी कि धारा 370 खत्म होने के बाद आतंकी समूह भारत के अंदर और हमले कर सकते हैं। इमरान ने कहा था कि भारत के फैसलों की वजह से फिर से पुलवामा जैसा कोई हमला हो सकता है। अब भारतीय वायु सेना प्रमुख ने इसका भी जवाब प्रभावी तौर पर दे दिया है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि अगर ऐसा कोई हमला होता है तो वायुसेना इसका जवाब देने के लिए तैयार है। (रजत शर्मा)
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भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने भारत द्वारा अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को खत्म करने के बाद द्विपक्षीय तनाव के मद्देनजर पाकिस्तान को किसी भी तरह के आतंकी दुस्साहस का सहारा नहीं लेने की चेतावनी दी है। शुक्रवार को भारतीय वायुसेना ने एक प्रोमोशनल वीडियो जारी किया जिसमें हमारी वायु सेना के हवाई हमले की शक्ति को दिखाया गया। इस वीडियो में पुलवामा आतंकी हमले के बाद गुस्सा जाहिर करते हुए लोगों के क्लिप हैं, वॉर रूम में बैठकर ऑपरेशन की योजना बना रहे अधिकारियों के कुछ शॉट्स और उसके बाद मिराज फाइटर जेट्स के उड़ान भरने की तस्वीरें हैं। आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करते हुए भारतीय वायुसेना के विमानों के भी कुछ क्लिप हैं, साथ ही उन इलाकों की भी कुछ सैटेलाइट तस्वीरें हैं, जिनपर वायुसेना के विमानों ने बमबारी की थी। वायुसेना प्रमुख ने तुरंत यह स्पष्ट किया कि यह बालाकोट हवाई हमले का वीडियो नहीं था बल्कि वायु सेना दिवस का प्रोमोशनल वीडियो था। लेकिन इसके साथ भारतीय वायुसेना प्रमुख ने जो कुछ भी कहा वह पाकिस्तान के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। हमें याद रखना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने क्या कहा था। उन्होंने दावा किया था कि भारत ने जिस बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया उससे सिर्फ आठ या दस पेड़ों को नुकसान पहुंचा था और किसी तरह की कोई क्षति नहीं हुई थी। आज एयरफोर्स ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन बालाकोट को स्मार्ट बमों का उपयोग करके कितने परफेक्शन के साथ अंजाम दिया गया था, जिसमें जैश का बड़ा टेरर कैंप तबाह हो गया था। अब तक पाकिस्तानी सेना ने मीडियाकर्मियों को स्वतंत्र रूप से बालाकोट में नष्ट किए गए आतंकी ठिकाने पर जाने की इजाजत नहीं दी है। इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह चेतावनी भी दी थी कि धारा तीन सौ सत्तर खत्म होने के बाद आतंकी समूह भारत के अंदर और हमले कर सकते हैं। इमरान ने कहा था कि भारत के फैसलों की वजह से फिर से पुलवामा जैसा कोई हमला हो सकता है। अब भारतीय वायु सेना प्रमुख ने इसका भी जवाब प्रभावी तौर पर दे दिया है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि अगर ऐसा कोई हमला होता है तो वायुसेना इसका जवाब देने के लिए तैयार है।
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अमर उजाला, सैफई (इटावा) के पूर्व संवाददाता सुघर सिंह ने अमर उजाला, कानपुर के संपादक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके साथ मारपीट की. उनका कहना है कि इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत की लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ है. मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की जांच सीओ नजीराबाद, कानपुर सिटी निहारिका शर्मा कर रही हैं. इस मामले में अमर उजाला, कानपुर के संपादक दिनेश जुयाल का कहना है कि यह बिल्कुल झूठा और बेबुनियाद आरोप है. सुघर के बारे में कई शिकायतें मिली थीं. ब्लैकमेलिंग की भी शिकायत लगातार मिल रही थी. उसे कई बार चेताया गया, इसके बाद भी जब उसकी शिकायतें कम नहीं हुई तो उसे अखबार से निकाल दिया गया. इसके चलते ही वह तमाम तरह के अनर्गल आरोप लगा रहा है.
सुघर सिंह का कहना है कि सैफई क्षेत्र से करीब 13 वर्षों से अमर उजाला का पत्रकार होने और अशोक अग्रवाल का करीबी होने का कारण बाहर का रास्ता दिखाया गया है. सुघर के मुताबिक मेरे साथ कानपुर अमर उजाला के संपादक दिनेश जुयाल ने मारपीट की है. सुघर का कहना है कि वे इटावा, मैनपुरी, औरैया के सपा नेताओं के दम पर चार पेज विज्ञापन सैफई महोत्सव के उदघाटन अवसर पर प्रकाशित कराते थे. सुघर का कहना है कि वे अमर उजाला के चेयरमैन अशोक अग्रवाल के करीबी रहे हैं. इन सम्बंधों से अतुल महेश्वरी व राजुल महेश्वरी भी परिचित थे. जैसे ही अशोक अग्रवाल और अतुल माहेश्वरी में विवाद हुआ तो 2 अप्रैल को कानपुर के संपादक दिनेश जुआल ने फोन करके बुलाया.
सुघर के मुताबिक- "जब 11: 40 बजे मैं दिनेश जुआल से मिलने पहुंचा तो वह बोले कि सैफई से समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिह यादव के खिलाफ 10-15 समाचार बनाकर भेजो, जब मैंने भेजने से मना किया तो संपादक ने गंदी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी. आवाज देकर दो गार्डों को बुला लिया. तीनों लोगों ने मिलकर जमीन पर गिराकर जान से मारने के लिए लात-घूंसों से मारपीट की. मेरी जेब से 1180 रूपये भी छीन लिए, मैं जान बचाने के लिए नीचे सड़के की तरफ भागा तो टाटा विक्टा की टक्कर से मरने से बचा. इस घटना की रिपोर्ट लिखाने जब मैं थाना फजलगंज गया तो थाना का मुंशी रिपोर्ट लिखने को तैयार नहीं हुआ. तब इस मामले की शिकायत मैंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारतीय प्रेस परिषद, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, प्रदेश की मुख्यमंत्री, डीजीपी, डीआईजी कानपुर को पत्र व फैक्स भेजकर की है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद सीओ नजीराबाद निहारिका शर्मा मामले की जांच कर रही हैं. इस मामले में मैंने क्षेत्राधिकारी कार्यालय में ब्यान दर्ज करा दिया है.
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अमर उजाला, सैफई के पूर्व संवाददाता सुघर सिंह ने अमर उजाला, कानपुर के संपादक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके साथ मारपीट की. उनका कहना है कि इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत की लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ है. मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की जांच सीओ नजीराबाद, कानपुर सिटी निहारिका शर्मा कर रही हैं. इस मामले में अमर उजाला, कानपुर के संपादक दिनेश जुयाल का कहना है कि यह बिल्कुल झूठा और बेबुनियाद आरोप है. सुघर के बारे में कई शिकायतें मिली थीं. ब्लैकमेलिंग की भी शिकायत लगातार मिल रही थी. उसे कई बार चेताया गया, इसके बाद भी जब उसकी शिकायतें कम नहीं हुई तो उसे अखबार से निकाल दिया गया. इसके चलते ही वह तमाम तरह के अनर्गल आरोप लगा रहा है. सुघर सिंह का कहना है कि सैफई क्षेत्र से करीब तेरह वर्षों से अमर उजाला का पत्रकार होने और अशोक अग्रवाल का करीबी होने का कारण बाहर का रास्ता दिखाया गया है. सुघर के मुताबिक मेरे साथ कानपुर अमर उजाला के संपादक दिनेश जुयाल ने मारपीट की है. सुघर का कहना है कि वे इटावा, मैनपुरी, औरैया के सपा नेताओं के दम पर चार पेज विज्ञापन सैफई महोत्सव के उदघाटन अवसर पर प्रकाशित कराते थे. सुघर का कहना है कि वे अमर उजाला के चेयरमैन अशोक अग्रवाल के करीबी रहे हैं. इन सम्बंधों से अतुल महेश्वरी व राजुल महेश्वरी भी परिचित थे. जैसे ही अशोक अग्रवाल और अतुल माहेश्वरी में विवाद हुआ तो दो अप्रैल को कानपुर के संपादक दिनेश जुआल ने फोन करके बुलाया. सुघर के मुताबिक- "जब ग्यारह: चालीस बजे मैं दिनेश जुआल से मिलने पहुंचा तो वह बोले कि सैफई से समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिह यादव के खिलाफ दस-पंद्रह समाचार बनाकर भेजो, जब मैंने भेजने से मना किया तो संपादक ने गंदी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी. आवाज देकर दो गार्डों को बुला लिया. तीनों लोगों ने मिलकर जमीन पर गिराकर जान से मारने के लिए लात-घूंसों से मारपीट की. मेरी जेब से एक हज़ार एक सौ अस्सी रूपये भी छीन लिए, मैं जान बचाने के लिए नीचे सड़के की तरफ भागा तो टाटा विक्टा की टक्कर से मरने से बचा. इस घटना की रिपोर्ट लिखाने जब मैं थाना फजलगंज गया तो थाना का मुंशी रिपोर्ट लिखने को तैयार नहीं हुआ. तब इस मामले की शिकायत मैंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारतीय प्रेस परिषद, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, प्रदेश की मुख्यमंत्री, डीजीपी, डीआईजी कानपुर को पत्र व फैक्स भेजकर की है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद सीओ नजीराबाद निहारिका शर्मा मामले की जांच कर रही हैं. इस मामले में मैंने क्षेत्राधिकारी कार्यालय में ब्यान दर्ज करा दिया है.
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मुबई । हालिया फिल्म 'डॉली की डोली' फिल्म से तारीफें बंटोर रहीं सोनम कपूर ने गुरुवार को पहले किरॉक फिल्मफेयर स्टाइल एंड ग्लैमर अवार्ड्स के आधिकारिक लोगो का लोकार्पण किया। इस मौके पर सोनम के साथ फिल्मफेयर के संपादक जितेश पिल्लै और डिएगो इंडिया मार्केटिंग एंड इनोवेशन्स के निदेशक भावेश भी मौजूद थे।
पहला किरॉक फिल्मफेयर ग्लैमर एंड स्टाइल अवार्ड्स यहां 26 फरवरी को ताज लैंड्स एंड में होगा। फिल्मी हस्तियों को इस पुरस्कार की मोस्ट ग्लैमरस स्टार, इमर्जिग फेस ऑफ फैशन, ग्लोबल आइकन ऑफ द ईयर, ट्रैंडसेटर ऑफ द ईयर व कई अन्य श्रेणियों में नामांकित किया जाएगा।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुबई । हालिया फिल्म 'डॉली की डोली' फिल्म से तारीफें बंटोर रहीं सोनम कपूर ने गुरुवार को पहले किरॉक फिल्मफेयर स्टाइल एंड ग्लैमर अवार्ड्स के आधिकारिक लोगो का लोकार्पण किया। इस मौके पर सोनम के साथ फिल्मफेयर के संपादक जितेश पिल्लै और डिएगो इंडिया मार्केटिंग एंड इनोवेशन्स के निदेशक भावेश भी मौजूद थे। पहला किरॉक फिल्मफेयर ग्लैमर एंड स्टाइल अवार्ड्स यहां छब्बीस फरवरी को ताज लैंड्स एंड में होगा। फिल्मी हस्तियों को इस पुरस्कार की मोस्ट ग्लैमरस स्टार, इमर्जिग फेस ऑफ फैशन, ग्लोबल आइकन ऑफ द ईयर, ट्रैंडसेटर ऑफ द ईयर व कई अन्य श्रेणियों में नामांकित किया जाएगा। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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जीवको इस सारी सृष्टिमें तलीसे चोटीतक जाना पड़े। अगर वनस्पति सृष्टिमें कोई पुंजजीव वनके वृक्षोंमें है तो वह आगे जब पशु सृष्टिमं जायगा तो वह नीचेकी पशु कक्षाको उलांघ कर जायगा, अर्थात् वह जन्तुओं और कीड़ों और सर्प छिपकली श्रादिकी योनिमें नहीं जायगा वरन एक साथ वह नीचे दर्जेके दूध पिलानेवाले [ जरायुज ] पशुत्रोंसे प्रारम्भ करेगा। कीड़ों और सर्प आदिकी योनिमें वे पुंजजीव जावेंगे जिन्होंने किसी कारण से वनस्पति सृष्टिको उस कक्षासे छोड़ दिया है कि जो बनके बड़े पेड़ोंसे बहुत नीचेपर है । इसी प्रकार वे पुंजजीव जो पशु सृष्टिमें ऊंचीसे ऊंची कक्षातक पहुंच गये हैं मनुष्य बनकर ठेठ जंगली लोगोंमें जन्म नहीं लेंगे किन्तु कुछ ऊंची कक्षाके लोगोंमें । परन्तु ठेठ जंगली लोगोंमें वे भरती होंगे जिन्होंने पशुसृष्टिको किसी नीची कक्षासे ही छोड़ा है । जीव प्रवाह अपनी शैलीकी शाखाओं को छोड़कर किसी दूसरी शैलीको शाखामें टलकर नहीं जाता है।
२५ - पुंजजीव ईश्वर के सात मंत्रियों अर्थात् लोकपालोंमें से किसी न किसीके जीवप्रवाहसे निकले हैं और अपने अपने निकासके अनुसार उनकी किसी एक कक्षापर या हरएक कक्षापर सात बड़ी बड़ी शैलियां होती हैं । इन शैलियोंका एक दूसरेसे भेद हरएक सृष्टिमें चौड़े चौड़े दिखलाई
जैसे चूहे गिलहरी । ॐ नकथा नं० १ देखो.
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जीवको इस सारी सृष्टिमें तलीसे चोटीतक जाना पड़े। अगर वनस्पति सृष्टिमें कोई पुंजजीव वनके वृक्षोंमें है तो वह आगे जब पशु सृष्टिमं जायगा तो वह नीचेकी पशु कक्षाको उलांघ कर जायगा, अर्थात् वह जन्तुओं और कीड़ों और सर्प छिपकली श्रादिकी योनिमें नहीं जायगा वरन एक साथ वह नीचे दर्जेके दूध पिलानेवाले [ जरायुज ] पशुत्रोंसे प्रारम्भ करेगा। कीड़ों और सर्प आदिकी योनिमें वे पुंजजीव जावेंगे जिन्होंने किसी कारण से वनस्पति सृष्टिको उस कक्षासे छोड़ दिया है कि जो बनके बड़े पेड़ोंसे बहुत नीचेपर है । इसी प्रकार वे पुंजजीव जो पशु सृष्टिमें ऊंचीसे ऊंची कक्षातक पहुंच गये हैं मनुष्य बनकर ठेठ जंगली लोगोंमें जन्म नहीं लेंगे किन्तु कुछ ऊंची कक्षाके लोगोंमें । परन्तु ठेठ जंगली लोगोंमें वे भरती होंगे जिन्होंने पशुसृष्टिको किसी नीची कक्षासे ही छोड़ा है । जीव प्रवाह अपनी शैलीकी शाखाओं को छोड़कर किसी दूसरी शैलीको शाखामें टलकर नहीं जाता है। पच्चीस - पुंजजीव ईश्वर के सात मंत्रियों अर्थात् लोकपालोंमें से किसी न किसीके जीवप्रवाहसे निकले हैं और अपने अपने निकासके अनुसार उनकी किसी एक कक्षापर या हरएक कक्षापर सात बड़ी बड़ी शैलियां होती हैं । इन शैलियोंका एक दूसरेसे भेद हरएक सृष्टिमें चौड़े चौड़े दिखलाई जैसे चूहे गिलहरी । ॐ नकथा नंशून्य एक देखो.
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नयी दिल्लीः टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर ने बॉल टेंपरिंग के मामले में 12 महीने के बैन की सज़ा झेल रहे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर से हमदर्दी दिखाते हुए कहा कि सज़ा कुछ ज़्यादा ही सख़्त है. गंभीर ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दोनों को वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड से बग़ावत करने की सज़ा मिली?
डेहली डेय डेविल्स के कप्तान गंभीर का कहना है कि स्मिथ और वॉर्नर ने वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड के ख़िलाफ़ पुरज़ोर तरीके से आवाज़ उठाई थी और हो सकता है कि उन्हें इसी बात का ख़मियाज़ा भुगतना पड़ रहा है.
गंभीर ने ट्वीट किया- "क्रिकेट भ्रष्टाचार मुक्स होना चाहिए लेकिन लगता है कि सज़ा कड़ी है. स्मिथ और वॉर्नर को वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड से बग़ावत करने की सज़ा मिली? इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भी खिलाड़ियों के पक्ष में आवाज़ उठाई उन्हें प्रशासकों ने उन्हें सज़ा दी है. "
गंभीर ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और लोगों से खिलाड़ियों के परिवार से दूर रहने का आग्रह किया. बेईमान के तमग़े के साथ जीना कहीं ज़्यादा बड़ी सज़ा है.
पूर्व ओपनर ने कहा कि उनकी राय में स्मिथ को बेईमान नहीं कहा जा सकता. उनकी नज़र में वह एक ऐसे कप्तान थे जो जीतने के लिए बेक़रार थे. उनका तरीक़े पर सवाल किया जा सकता है लेकिन उन्हें बेईमान मत कहो.
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नयी दिल्लीः टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर ने बॉल टेंपरिंग के मामले में बारह महीने के बैन की सज़ा झेल रहे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर से हमदर्दी दिखाते हुए कहा कि सज़ा कुछ ज़्यादा ही सख़्त है. गंभीर ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दोनों को वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड से बग़ावत करने की सज़ा मिली? डेहली डेय डेविल्स के कप्तान गंभीर का कहना है कि स्मिथ और वॉर्नर ने वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड के ख़िलाफ़ पुरज़ोर तरीके से आवाज़ उठाई थी और हो सकता है कि उन्हें इसी बात का ख़मियाज़ा भुगतना पड़ रहा है. गंभीर ने ट्वीट किया- "क्रिकेट भ्रष्टाचार मुक्स होना चाहिए लेकिन लगता है कि सज़ा कड़ी है. स्मिथ और वॉर्नर को वेतन में बढ़ौतरी के लिए ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड से बग़ावत करने की सज़ा मिली? इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भी खिलाड़ियों के पक्ष में आवाज़ उठाई उन्हें प्रशासकों ने उन्हें सज़ा दी है. " गंभीर ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और लोगों से खिलाड़ियों के परिवार से दूर रहने का आग्रह किया. बेईमान के तमग़े के साथ जीना कहीं ज़्यादा बड़ी सज़ा है. पूर्व ओपनर ने कहा कि उनकी राय में स्मिथ को बेईमान नहीं कहा जा सकता. उनकी नज़र में वह एक ऐसे कप्तान थे जो जीतने के लिए बेक़रार थे. उनका तरीक़े पर सवाल किया जा सकता है लेकिन उन्हें बेईमान मत कहो.
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Rahul Gandhi: सांसदी जाने के बाद जिन विपक्षी दलों ने किया राहुल को सपोर्ट, देखिए उनके बारे में क्या बोले कांग्रेस नेता. . ?
Rahul Gandhi: राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद विपक्षियों के बीच कोहराम मचा हुआ है। सभी एक सुर से राहुल की सांसदी छीने जाने की निंदा की है और इसे केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया बताया है। यही नहीं, कल राहुल की सांसदी छीने जाने पर संसद भवन के बाहर भी सभी विपक्षी दलों ने मार्च किया और सरकार के इस फैसले की आलोचना की।
नई दिल्ली। सांसदी गंवाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेसवार्ता की और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपनी सदस्यता छीने जाने को केंद्र की मोदी सरकार की प्रतिशोधात्मक राजनीति बताया। राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार विपक्षियों की आवाज कुचलने के लिए तानाशाही रवैया अख्तियार कर चुकी है, लेकिन आपको बताना चाहता हूं कि मैं इन लोगों के आगे झुकने वाला नहीं हूं। मैं केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ लड़ता रहूंगा। प्रेसवार्ता में राहुल ने कहा कि उन्होंने संसद में मोदी सरकार से अडानी को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने सवाल किया था कि रक्षा क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद भी आखिर क्यों सभी अनुबंध अडानी उपक्रम को दे दिए गए।
राहुल ने कहा कि मैंने अडानी और मोदी सरकार के बीच के रिश्ते के बारे में सवाल किया था। राहुल ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से अडानी और इनके बीच रिश्ते प्रगाढ थे और अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए कई बार लोकहित पर भी कठाराघात किया गया है, जो कि निंदनीय है। तो इस तरह से राहुल ने मुख्तलिफ मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उधर, बीजेपी की तरफ से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कांफ्रेंस कर राहुल पर पलटवार किए। रविशंकर ने कहा कि वर्तमान में दोनों ही मां-बेटे (सोनिया-राहुल) भ्रष्टाचार में बेल पर हैं और राहुल की हिमाकत देखिए कि वो प्रधानमंत्री को ही भ्रष्टाचारी बता रहे हैं।
वहीं, राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद विपक्षियों के बीच कोहराम मचा हुआ है। सभी एक सुर से राहुल की सांसदी छीने जाने की निंदा कर रहे हैं और इसे केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया बता रहे है। यही नहीं, कल राहुल की सांसदी छीने जाने पर संसद भवन के बाहर भी सभी विपक्षी दलों ने मार्च किया और सरकार के इस फैसले की आलोचना की। इस पर जब आज प्रेस कांफ्रेंस में राहुल से सवाल किया गया कि आपकी सांसदी जाने के बाद जिन विपक्षी दलों ने आपका साथ दिया, उनके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? , तो इस पर राहुल ने कहा कि,'मैं अपने उन सभी साथियों का साथ देना चाहूंगा, जिन्होंने इस पूरे मसले पर मेरा साथ दिया है। मैं उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। राहुल ने आगे कहा कि,'यह समय है कि हम सभी आगे आकर केंद्र सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ लड़े, क्योंकि मौजूदा सरकार लगातार लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन कर रही है, जिस पर अंकुश लगाने की दिशा में हम सभी विपक्षी दलों को केंद्र के खिलाफ एकजुट होना होगा'।
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Rahul Gandhi: सांसदी जाने के बाद जिन विपक्षी दलों ने किया राहुल को सपोर्ट, देखिए उनके बारे में क्या बोले कांग्रेस नेता. . ? Rahul Gandhi: राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद विपक्षियों के बीच कोहराम मचा हुआ है। सभी एक सुर से राहुल की सांसदी छीने जाने की निंदा की है और इसे केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया बताया है। यही नहीं, कल राहुल की सांसदी छीने जाने पर संसद भवन के बाहर भी सभी विपक्षी दलों ने मार्च किया और सरकार के इस फैसले की आलोचना की। नई दिल्ली। सांसदी गंवाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेसवार्ता की और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपनी सदस्यता छीने जाने को केंद्र की मोदी सरकार की प्रतिशोधात्मक राजनीति बताया। राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार विपक्षियों की आवाज कुचलने के लिए तानाशाही रवैया अख्तियार कर चुकी है, लेकिन आपको बताना चाहता हूं कि मैं इन लोगों के आगे झुकने वाला नहीं हूं। मैं केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ लड़ता रहूंगा। प्रेसवार्ता में राहुल ने कहा कि उन्होंने संसद में मोदी सरकार से अडानी को लेकर सवाल किए थे। उन्होंने सवाल किया था कि रक्षा क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद भी आखिर क्यों सभी अनुबंध अडानी उपक्रम को दे दिए गए। राहुल ने कहा कि मैंने अडानी और मोदी सरकार के बीच के रिश्ते के बारे में सवाल किया था। राहुल ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से अडानी और इनके बीच रिश्ते प्रगाढ थे और अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए कई बार लोकहित पर भी कठाराघात किया गया है, जो कि निंदनीय है। तो इस तरह से राहुल ने मुख्तलिफ मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उधर, बीजेपी की तरफ से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कांफ्रेंस कर राहुल पर पलटवार किए। रविशंकर ने कहा कि वर्तमान में दोनों ही मां-बेटे भ्रष्टाचार में बेल पर हैं और राहुल की हिमाकत देखिए कि वो प्रधानमंत्री को ही भ्रष्टाचारी बता रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद विपक्षियों के बीच कोहराम मचा हुआ है। सभी एक सुर से राहुल की सांसदी छीने जाने की निंदा कर रहे हैं और इसे केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया बता रहे है। यही नहीं, कल राहुल की सांसदी छीने जाने पर संसद भवन के बाहर भी सभी विपक्षी दलों ने मार्च किया और सरकार के इस फैसले की आलोचना की। इस पर जब आज प्रेस कांफ्रेंस में राहुल से सवाल किया गया कि आपकी सांसदी जाने के बाद जिन विपक्षी दलों ने आपका साथ दिया, उनके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? , तो इस पर राहुल ने कहा कि,'मैं अपने उन सभी साथियों का साथ देना चाहूंगा, जिन्होंने इस पूरे मसले पर मेरा साथ दिया है। मैं उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। राहुल ने आगे कहा कि,'यह समय है कि हम सभी आगे आकर केंद्र सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ लड़े, क्योंकि मौजूदा सरकार लगातार लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन कर रही है, जिस पर अंकुश लगाने की दिशा में हम सभी विपक्षी दलों को केंद्र के खिलाफ एकजुट होना होगा'।
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गोवाफेस्ट 2023 के दूसरे दिन 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज' (ZEEL) को 'ब्रॉडकास्टर ऑफ द ईयर' अवॉर्ड से नवाजा गया।
हरियाणा की बीजेपी नेता सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही है। इस मामले में आए दिन कोई न कोई नया खुलासा हो रहा है।
अगले कुछ महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसी सिलसिले में Polstrat-NewsX ने मिलकर प्री-पोल सर्वे में दो राज्यों (गोवा व पंजाब) के लोगों की नब्ज टटोलने की कोशिश की है।
दुष्कर्म के आरोप में घिरे पत्रकार तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई।
यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है।
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गोवाफेस्ट दो हज़ार तेईस के दूसरे दिन 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज' को 'ब्रॉडकास्टर ऑफ द ईयर' अवॉर्ड से नवाजा गया। हरियाणा की बीजेपी नेता सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही है। इस मामले में आए दिन कोई न कोई नया खुलासा हो रहा है। अगले कुछ महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसी सिलसिले में Polstrat-NewsX ने मिलकर प्री-पोल सर्वे में दो राज्यों के लोगों की नब्ज टटोलने की कोशिश की है। दुष्कर्म के आरोप में घिरे पत्रकार तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई। यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है।
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देता है, यह कथन कोरी कल्पना है। वस्तुत मूढ लोग ऐसे ही अज्ञानान्ध नेता के पिछलग्गू बनकर जलस्नान आदि क्रियाओ द्वारा प्राणियों की हिसा करते है ।।१६।।
पापकर्म करने वाले पुरुष के पाप को यदि सचित्त जल दूर कर देता है तो जलजन्तुओ का घात करने वाले मछुए आदि के पापकर्म को जल मिटा देगा और उन्हे भी मुक्ति प्राप्त हो जाएगी, परन्तु ऐसा होता नही है । इसलिए जो ऐसा कहते है कि जलस्पर्श से मुक्ति होती है, वे मिथ्या कहते है ॥१७॥
सन्ध्याकाल और प्रात काल अग्नि का स्पर्श करते हुए जो लोग अग्नि मे होम करने से मोक्ष प्राप्ति होना बताते है, वे भी मिथ्यावादी है, क्योकि यदि इस प्रकार से मोक्ष मिलती हो तो फिर रात-दिन अग्नि-स्पर्श कुकर्मियो को भी मोक्ष मिल जाना चाहिए ॥ १८॥
जलावगाहन से या अग्नि मे होम करने से जो लोग सिद्धिलाभ बताते हैं, उन्होंने इस प्रकार की प्ररूपणा करने वाले शास्त्रो को परीक्षा किये विना ही ऐसे खोटे सिद्धान्त को मान लिया है । वस्तुत इन ऊटपटांग क्रियाओ से मुक्ति नही मिलती है । वस्तुतत्त्व को विना समझे ही आँख मूंद कर चलने वाले वे लोग इन अन्धक्रियाओं द्वारा प्राणिघात करके मोक्षप्राप्ति के बदले ससार प्राप्ति ही करते हैं । अत सम्यक्ज्ञान प्राप्त करके तथा सभी पहलुओ से विचार करके त्रस और स्थावर प्राणियो मे भी सुख की सज्ञा (इच्छा ) जानो और उनकी किसी भी प्रकार से हिंसा मत करो
जलस्पर्श एव अग्निहोत्रादि क्रियाओ से मोक्ष कैसे ? तेरहवी गाथा से लेकर उन्नीसवी गाया तक शास्त्रकार ने जलस्पर्श से, लवणसेवन त्याग से या अग्निहोत्र से मोक्ष मामने वाले मतवादियों की मान्यता को मिथ्या सिद्ध करके उनका निराकरण किया है ।
बात यह है कि प्रात काल जलस्नान करने से समस्त कर्मक्षयरूप मोक्ष प्राप्त होने का कोई तुक नही है । वल्कि सचित्त जल के सेवन से जलकायिक जीवो का तथा उनके आश्रित रहे हुए अनेक त्रसजीवो का उपमर्दन होता है । जोवो की हिंसा से मोक्षप्राप्ति कदापि सम्भव नही है । दूसरी बात यह है कि जल मे आत्मा पर लगे हुए आन्तरिक पापकर्म मल को दूर करने को शक्ति नहीं है, बल्कि वह बाह्यमल को भी पूरी तरह से साफ नहीं कर सकता, फिर आन्तरिक मल को धो डालने की शक्ति उसमे हो ही कैसे सकती है ? वस्तुत आन्तरिक मल का नाश तो भावो की
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देता है, यह कथन कोरी कल्पना है। वस्तुत मूढ लोग ऐसे ही अज्ञानान्ध नेता के पिछलग्गू बनकर जलस्नान आदि क्रियाओ द्वारा प्राणियों की हिसा करते है ।।सोलह।। पापकर्म करने वाले पुरुष के पाप को यदि सचित्त जल दूर कर देता है तो जलजन्तुओ का घात करने वाले मछुए आदि के पापकर्म को जल मिटा देगा और उन्हे भी मुक्ति प्राप्त हो जाएगी, परन्तु ऐसा होता नही है । इसलिए जो ऐसा कहते है कि जलस्पर्श से मुक्ति होती है, वे मिथ्या कहते है ॥सत्रह॥ सन्ध्याकाल और प्रात काल अग्नि का स्पर्श करते हुए जो लोग अग्नि मे होम करने से मोक्ष प्राप्ति होना बताते है, वे भी मिथ्यावादी है, क्योकि यदि इस प्रकार से मोक्ष मिलती हो तो फिर रात-दिन अग्नि-स्पर्श कुकर्मियो को भी मोक्ष मिल जाना चाहिए ॥ अट्ठारह॥ जलावगाहन से या अग्नि मे होम करने से जो लोग सिद्धिलाभ बताते हैं, उन्होंने इस प्रकार की प्ररूपणा करने वाले शास्त्रो को परीक्षा किये विना ही ऐसे खोटे सिद्धान्त को मान लिया है । वस्तुत इन ऊटपटांग क्रियाओ से मुक्ति नही मिलती है । वस्तुतत्त्व को विना समझे ही आँख मूंद कर चलने वाले वे लोग इन अन्धक्रियाओं द्वारा प्राणिघात करके मोक्षप्राप्ति के बदले ससार प्राप्ति ही करते हैं । अत सम्यक्ज्ञान प्राप्त करके तथा सभी पहलुओ से विचार करके त्रस और स्थावर प्राणियो मे भी सुख की सज्ञा जानो और उनकी किसी भी प्रकार से हिंसा मत करो जलस्पर्श एव अग्निहोत्रादि क्रियाओ से मोक्ष कैसे ? तेरहवी गाथा से लेकर उन्नीसवी गाया तक शास्त्रकार ने जलस्पर्श से, लवणसेवन त्याग से या अग्निहोत्र से मोक्ष मामने वाले मतवादियों की मान्यता को मिथ्या सिद्ध करके उनका निराकरण किया है । बात यह है कि प्रात काल जलस्नान करने से समस्त कर्मक्षयरूप मोक्ष प्राप्त होने का कोई तुक नही है । वल्कि सचित्त जल के सेवन से जलकायिक जीवो का तथा उनके आश्रित रहे हुए अनेक त्रसजीवो का उपमर्दन होता है । जोवो की हिंसा से मोक्षप्राप्ति कदापि सम्भव नही है । दूसरी बात यह है कि जल मे आत्मा पर लगे हुए आन्तरिक पापकर्म मल को दूर करने को शक्ति नहीं है, बल्कि वह बाह्यमल को भी पूरी तरह से साफ नहीं कर सकता, फिर आन्तरिक मल को धो डालने की शक्ति उसमे हो ही कैसे सकती है ? वस्तुत आन्तरिक मल का नाश तो भावो की
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113वें दिन की शुरुआत किचन से होती है। अर्चना, टीना से कहती हैं कि दूध खराब हो रहा है और उन्हें सारे पैकेट निकाल देने चाहिए। इसी पर टीना को बुरा लग जाता है। इसके बाद अर्चना कैप्टन निमृत से डस्टबिन को लेकर शिकायत करती हैं। इसके बाद अर्चना और निमृत मस्ती-मजाक करती दिखती हैं। शिव, स्टैन से कहते हैं कि निमृत का बर्ताव बदल रहा है। अब वह भी जिसके साथ मन होगा, बात करेंगे।
अर्चना सड़ा हुआ डस्टबिन साफ करती हैं और सबसे कहती हैं कि घरवाले डस्टबिन साफ रखें और कीड़े न पड़ने दें। इस पर शिव बोलते हैं कि डस्टबिन के कीड़ों का तो ठीक है, लेकिन दिमाग के कीड़ों का क्या करोगे? इसी पर अर्चना और शिव एक-दूसरे को तंज मारने लगते हैं। बाद में अर्चना किचन एरिया में होती हैं और वह अचानक ही जोर-जोर से चिल्लाकर रोने लगती हैं। प्रियंका और टीना भागकर अंदर आती हैं और पूछती हैं कि क्या हुआ। तब अर्चना बताती हैं कि वहां छिपकली है। उधर टॉयलेट के कुछ सामान को लेकर टीना और निमृत के बीच झगड़ा हो जाता है।
सुम्बुल बाथरूम एरिया में निमृत से पूछती हैं कि अब शालीन के पास कोई नहीं है बात करने को? वह बिल्कुल अकेला हो गया है। उधर शालीन अकेले एक कोने में बैठकर अपनेआप में ही बड़बड़ाते रहते हैं। उधर अर्चना, शिव के खिलाफ निमृत के खिलाफ भड़काने की कोशिश करती हैं। वह कहती हैं कि जहां वह और शिव खड़े हों, तो वह उनके बजाय शिव को चुनें। लेकिन जब शिव और निमृत की बात हो तो वह अपनेआप को चुनें। अपने पापा के सपने को न भूलें। बाद में निमृत जाकर सुम्बुल से बात करती हैं और कहती हैं कि शिव जाकर अर्चना और प्रियंका से बात करते हैं और यह उन्हें अच्छा नहीं लगता।
उधर अंग्रेजी बोलने को लेकर अर्चना सबके साथ मस्ती-मजाक करने लगती हैं। लेकिन शिव और शालीन को बुरा लग जाता है और वो उनकी ही क्लास लगाना शुरू कर देते हैं। तब प्रियंका कहती हैं कि अर्चना सिर्फ मजाक कर रही हैं। बाद में रात को एमसी स्टैन और शिव, शालीन के बारे में बात करते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें शालीन को यूं अकेला देखकर बहुत बुरा लग रहा है, दया आ रही है। बाद में शालीन गार्डन एरिया में शिव और स्टैन के पास बैठकर बात करते हैं। शालीन उनसे अर्चना के बारे में बात करते हैं कि वह किस तरह उन्हें ताने मार रही थींं। इसी पर प्रियंका और टीना मिलकर शालीन पर तंज कसती हैं। बाद में प्रियंका, अर्चना को लेकर शालीन से भिड़ जाती हैं। शिव, स्टैन से कहते हैं कि प्रियंका बस शालीन को पोक करके लड़ती है या फिर मंडली पर कमेंट करती हैं। इसके बाद प्रियंका और शालीन के बीच झगड़ा बढ़ जाता है। प्रियंका, शालीन को खूब ताने मारती हैं।
शालीन, शिव से कहते हैं कि प्रियंका जानबूझकर इस तरह से बात कर रही हैं ताकि वह गुस्सा हों और कुछ बोलें। स्टैन बोलते हैं कि प्रियंका, शालीन को उंगली कर रही हैं। शालीन जब वर्कआउट कर रहे होते हैं तो भी प्रियंका उन्हें पोक करने से बाज नहीं आतीं। प्रियंका इस हद तक शालीन का मजाक उड़ाती हैं कि वह शिव और स्टैन के सामने रो पड़ते हैं। वह स्टैन और शिव से कहते हैं कि दोनों उन्हें नॉमिनेट कर दें ताकि वह बाहर चले जाएं। शिव और स्टैन, शालीन को समझाते हैं और उनके साथ बैठते हैं।
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एक सौ तेरहवें दिन की शुरुआत किचन से होती है। अर्चना, टीना से कहती हैं कि दूध खराब हो रहा है और उन्हें सारे पैकेट निकाल देने चाहिए। इसी पर टीना को बुरा लग जाता है। इसके बाद अर्चना कैप्टन निमृत से डस्टबिन को लेकर शिकायत करती हैं। इसके बाद अर्चना और निमृत मस्ती-मजाक करती दिखती हैं। शिव, स्टैन से कहते हैं कि निमृत का बर्ताव बदल रहा है। अब वह भी जिसके साथ मन होगा, बात करेंगे। अर्चना सड़ा हुआ डस्टबिन साफ करती हैं और सबसे कहती हैं कि घरवाले डस्टबिन साफ रखें और कीड़े न पड़ने दें। इस पर शिव बोलते हैं कि डस्टबिन के कीड़ों का तो ठीक है, लेकिन दिमाग के कीड़ों का क्या करोगे? इसी पर अर्चना और शिव एक-दूसरे को तंज मारने लगते हैं। बाद में अर्चना किचन एरिया में होती हैं और वह अचानक ही जोर-जोर से चिल्लाकर रोने लगती हैं। प्रियंका और टीना भागकर अंदर आती हैं और पूछती हैं कि क्या हुआ। तब अर्चना बताती हैं कि वहां छिपकली है। उधर टॉयलेट के कुछ सामान को लेकर टीना और निमृत के बीच झगड़ा हो जाता है। सुम्बुल बाथरूम एरिया में निमृत से पूछती हैं कि अब शालीन के पास कोई नहीं है बात करने को? वह बिल्कुल अकेला हो गया है। उधर शालीन अकेले एक कोने में बैठकर अपनेआप में ही बड़बड़ाते रहते हैं। उधर अर्चना, शिव के खिलाफ निमृत के खिलाफ भड़काने की कोशिश करती हैं। वह कहती हैं कि जहां वह और शिव खड़े हों, तो वह उनके बजाय शिव को चुनें। लेकिन जब शिव और निमृत की बात हो तो वह अपनेआप को चुनें। अपने पापा के सपने को न भूलें। बाद में निमृत जाकर सुम्बुल से बात करती हैं और कहती हैं कि शिव जाकर अर्चना और प्रियंका से बात करते हैं और यह उन्हें अच्छा नहीं लगता। उधर अंग्रेजी बोलने को लेकर अर्चना सबके साथ मस्ती-मजाक करने लगती हैं। लेकिन शिव और शालीन को बुरा लग जाता है और वो उनकी ही क्लास लगाना शुरू कर देते हैं। तब प्रियंका कहती हैं कि अर्चना सिर्फ मजाक कर रही हैं। बाद में रात को एमसी स्टैन और शिव, शालीन के बारे में बात करते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें शालीन को यूं अकेला देखकर बहुत बुरा लग रहा है, दया आ रही है। बाद में शालीन गार्डन एरिया में शिव और स्टैन के पास बैठकर बात करते हैं। शालीन उनसे अर्चना के बारे में बात करते हैं कि वह किस तरह उन्हें ताने मार रही थींं। इसी पर प्रियंका और टीना मिलकर शालीन पर तंज कसती हैं। बाद में प्रियंका, अर्चना को लेकर शालीन से भिड़ जाती हैं। शिव, स्टैन से कहते हैं कि प्रियंका बस शालीन को पोक करके लड़ती है या फिर मंडली पर कमेंट करती हैं। इसके बाद प्रियंका और शालीन के बीच झगड़ा बढ़ जाता है। प्रियंका, शालीन को खूब ताने मारती हैं। शालीन, शिव से कहते हैं कि प्रियंका जानबूझकर इस तरह से बात कर रही हैं ताकि वह गुस्सा हों और कुछ बोलें। स्टैन बोलते हैं कि प्रियंका, शालीन को उंगली कर रही हैं। शालीन जब वर्कआउट कर रहे होते हैं तो भी प्रियंका उन्हें पोक करने से बाज नहीं आतीं। प्रियंका इस हद तक शालीन का मजाक उड़ाती हैं कि वह शिव और स्टैन के सामने रो पड़ते हैं। वह स्टैन और शिव से कहते हैं कि दोनों उन्हें नॉमिनेट कर दें ताकि वह बाहर चले जाएं। शिव और स्टैन, शालीन को समझाते हैं और उनके साथ बैठते हैं।
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- #Madhya-pradeshMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'?
Shatabdi Mahotsav: सतना अमरपाटन के मानसपीठ खजुरी ताल (Khajuri Tal) आश्रम के 100 वर्ष पूरे होने पर 14 से 23 अप्रेल तक शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम मनाया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री समेत देशभर के संत महामंडलेश्वर राम कथा में शामिल होंगे।
शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम में प्रतिदिन श्रीराम महायज्ञ से शुभारंभ होगा, दोहपर में जगदगुरु रामभद्राचार्य की श्रीराम कथा और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आश्रम के रामललाचार्य महराज ने जानकारी दी कि शताब्दी समारोह कार्यक्रम में 10 एकड़ क्षेत्र में होगा जिसमें रोजाना 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भीड़ नियंत्रण और वाहनों के आवागमन की व्यवस्था को प्रशासन ने आश्रम के पदाधिकारियों से चर्चा की।
रामललाचार्य महराज ने जानकारी दी कि गुरु पुरुषोत्तम दास महराज 1918 में अमरपाटन के खजुरीताल आए थे। यहां उन्हें 10 एकड़ में फैले तालाब में हनुमान की मूर्ति होने का स्वप्न आया। भगवान ने स्वप्न में कहा कि मैं इस तालाब के अंदर हूं, मुझे निकालो। तालाब के अंदर से मूर्ति निकाली गई जिसे खजुरीनाथ भगवान के नाम से जाना जाता है। इसके बाद अक्षय तृतीया के दिन 1921 में मूर्ति स्थापना के लिए एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया गया। कोरोना काल के समय ही खजुरीताल आश्रम के स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो चुके थे, लेकिन महामारी के चलते शताब्दी महोत्सव इस वर्ष मनाया जा रहा है।
शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम के अंतिम दिन मानसपीठ खजुरी ताल आश्रम में जगदगुरु स्वामी रामललाचार्य महराज ने गरीब ब्राह्मण परिवार के 101 बच्चों का जनेऊ संस्कार कराने का संकल्प लिया है। 23 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन होने वाले यज्ञोपवित संस्कार के लिए कुछ बच्चे आश्रम पहुंच चुके हैं।
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- #Madhya-pradeshMP मानसून सत्र के पहले दिन अमित शाह का तय हुआ अचानक दौरा, भोपाल की शाम को क्या होगा 'मंगल'? Shatabdi Mahotsav: सतना अमरपाटन के मानसपीठ खजुरी ताल आश्रम के एक सौ वर्ष पूरे होने पर चौदह से तेईस अप्रेल तक शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम मनाया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री समेत देशभर के संत महामंडलेश्वर राम कथा में शामिल होंगे। शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम में प्रतिदिन श्रीराम महायज्ञ से शुभारंभ होगा, दोहपर में जगदगुरु रामभद्राचार्य की श्रीराम कथा और रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आश्रम के रामललाचार्य महराज ने जानकारी दी कि शताब्दी समारोह कार्यक्रम में दस एकड़ क्षेत्र में होगा जिसमें रोजाना दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भीड़ नियंत्रण और वाहनों के आवागमन की व्यवस्था को प्रशासन ने आश्रम के पदाधिकारियों से चर्चा की। रामललाचार्य महराज ने जानकारी दी कि गुरु पुरुषोत्तम दास महराज एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में अमरपाटन के खजुरीताल आए थे। यहां उन्हें दस एकड़ में फैले तालाब में हनुमान की मूर्ति होने का स्वप्न आया। भगवान ने स्वप्न में कहा कि मैं इस तालाब के अंदर हूं, मुझे निकालो। तालाब के अंदर से मूर्ति निकाली गई जिसे खजुरीनाथ भगवान के नाम से जाना जाता है। इसके बाद अक्षय तृतीया के दिन एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में मूर्ति स्थापना के लिए एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया गया। कोरोना काल के समय ही खजुरीताल आश्रम के स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे हो चुके थे, लेकिन महामारी के चलते शताब्दी महोत्सव इस वर्ष मनाया जा रहा है। शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम के अंतिम दिन मानसपीठ खजुरी ताल आश्रम में जगदगुरु स्वामी रामललाचार्य महराज ने गरीब ब्राह्मण परिवार के एक सौ एक बच्चों का जनेऊ संस्कार कराने का संकल्प लिया है। तेईस अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन होने वाले यज्ञोपवित संस्कार के लिए कुछ बच्चे आश्रम पहुंच चुके हैं।
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लड़के ने व्हाट्सएप पर लड़की से मांगी नहाती हुई तस्वीर, पर फोटो देखते ही उड़ गए होश!
गौरतलब है कि आज कल आये दिन महिलाओ के साथ छेड़छाड़ की खबरे सामने आती रहती है. खास कर सोशल मीडिया द्वारा महिलाओ के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के ऐसे कई मामले सामने आ चुके है. बरहलाल इसी लिस्ट में एक और मामला सामने आया है. जी हां सूत्रों के अनुसार एक शख्स ने एक महिला से वॉट्सएप पर उसकी बिना कपड़ो की तस्वीर मांगी थी. ऐसे में महिला ने बिना कुछ सोचे अपनी तस्वीर उस शख्स को भेज दी. मगर तस्वीर देखने के बाद लड़के के होश ही उड़ गए और उसने तुरंत बाय बोल कर वहां से निकल जाना ही सही समझा.
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर तस्वीर को देख कर लड़के के होश क्यों उड़ गए. तो ज्यादा मत सोचिये क्यूकि हम आपको बताते है कि आखिर पूरा मामला क्या है. दरअसल एक शख्स एक महिला से वॉट्सएप पर चैट कर रहा था. इसके बाद महिला ने बताया कि जब वो उस शख्स से चैट कर रही थी, उस दौरान वो बाथ ले रही थी. पहले तो दोनों के बीच नार्मल चैट शुरू हुई. इसके बाद चैट का रुख तब बदला जब लड़की ने कहा कि वो नहा रही है. जिसके चलते उस शख्स ने अपनी किस्मत आजमाने की सोची.
बता दे कि लड़के ने महिला का जवाब आने के बाद उसे तस्वीर भेजने के लिए कहा. ऐसे में युवक को लग रहा था कि महिला अपनी बाथटब वाली तस्वीर भेजेगी. मगर लड़के को जो जवाब मिला उसे देख कर वह हैरान रह गया. गौरतलब है, कि महिला ने उस शख्स को अपनी तस्वीर जरूर भेजी थी, पर तस्वीर देख कर लड़के के होश उड़ गए. दरअसल तस्वीर में पानी महिला के मुँह तक आ रहा था. ऐसे में उसके बाल पानी के कारण आगे आ गए थे. जो बिलकुल मूंछो की तरह ही लग रहे थे. बता दे कि इस तस्वीर को देखते ही लड़के ने तुरंत बाय बोल दिया.
वैसे आपको बता दे कि इस पोस्ट को अब तक दो लाख तेईस हजार से ज्यादा लोग देख चुके है. यहाँ तक कि कई यूजर्स ने इस पोस्ट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया भी दिखाई. वही कुछ लोगो का कहना है, कि उस शख्स को महिला के सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ करनी चाहिए थी. बरहलाल आप खुद ये तस्वीर देखिये और अपनी प्रतिक्रिया बताईये.
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लड़के ने व्हाट्सएप पर लड़की से मांगी नहाती हुई तस्वीर, पर फोटो देखते ही उड़ गए होश! गौरतलब है कि आज कल आये दिन महिलाओ के साथ छेड़छाड़ की खबरे सामने आती रहती है. खास कर सोशल मीडिया द्वारा महिलाओ के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के ऐसे कई मामले सामने आ चुके है. बरहलाल इसी लिस्ट में एक और मामला सामने आया है. जी हां सूत्रों के अनुसार एक शख्स ने एक महिला से वॉट्सएप पर उसकी बिना कपड़ो की तस्वीर मांगी थी. ऐसे में महिला ने बिना कुछ सोचे अपनी तस्वीर उस शख्स को भेज दी. मगर तस्वीर देखने के बाद लड़के के होश ही उड़ गए और उसने तुरंत बाय बोल कर वहां से निकल जाना ही सही समझा. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर तस्वीर को देख कर लड़के के होश क्यों उड़ गए. तो ज्यादा मत सोचिये क्यूकि हम आपको बताते है कि आखिर पूरा मामला क्या है. दरअसल एक शख्स एक महिला से वॉट्सएप पर चैट कर रहा था. इसके बाद महिला ने बताया कि जब वो उस शख्स से चैट कर रही थी, उस दौरान वो बाथ ले रही थी. पहले तो दोनों के बीच नार्मल चैट शुरू हुई. इसके बाद चैट का रुख तब बदला जब लड़की ने कहा कि वो नहा रही है. जिसके चलते उस शख्स ने अपनी किस्मत आजमाने की सोची. बता दे कि लड़के ने महिला का जवाब आने के बाद उसे तस्वीर भेजने के लिए कहा. ऐसे में युवक को लग रहा था कि महिला अपनी बाथटब वाली तस्वीर भेजेगी. मगर लड़के को जो जवाब मिला उसे देख कर वह हैरान रह गया. गौरतलब है, कि महिला ने उस शख्स को अपनी तस्वीर जरूर भेजी थी, पर तस्वीर देख कर लड़के के होश उड़ गए. दरअसल तस्वीर में पानी महिला के मुँह तक आ रहा था. ऐसे में उसके बाल पानी के कारण आगे आ गए थे. जो बिलकुल मूंछो की तरह ही लग रहे थे. बता दे कि इस तस्वीर को देखते ही लड़के ने तुरंत बाय बोल दिया. वैसे आपको बता दे कि इस पोस्ट को अब तक दो लाख तेईस हजार से ज्यादा लोग देख चुके है. यहाँ तक कि कई यूजर्स ने इस पोस्ट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया भी दिखाई. वही कुछ लोगो का कहना है, कि उस शख्स को महिला के सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ करनी चाहिए थी. बरहलाल आप खुद ये तस्वीर देखिये और अपनी प्रतिक्रिया बताईये.
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वॉशिंगटनः कोरोना वायरस (Coronavirus) और उससे बचाव के लिए लागू कड़े उपायों का मजाक उड़ाने वालों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और उनका परिवार सबसे आगे रहा है। हालांकि, अब जब वायरस की रफ्तार नियंत्रण से बाहर हो गई है, तो ट्रंप परिवार को स्थिति की गंभीरता के साथ ही यह भी समझ आ गया है कि नियमों का पालन करने में ही समझदारी है। शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार मास्क पहने नजर आए और अब उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप (Melania Trump) भी मास्क में दिखाई दीं हैं।मेलानिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मैरी एलिजाबेथ हाउस (Mary Elizabeth House) की यात्रा का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह मास्क पहने दिखाई दे रही हैं। अपने ट्वीट में इस यात्रा के बारे में उन्होंने लिखा है, 'मैरी एलिजाबेथ हाउस के कर्मचारियों, माताओं और बच्चों के साथ समय बिताकर अच्छा लगा। यह जानकर खुशी हुई कि मैरी एलिजाबेथ हाउस परिवारों को मजबूत बनाने में मदद करता है, कमजोर महिलाओं एवं उनके बच्चों को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है'।जानकारों की मानें तो ट्रंप परिवार की सोच में आये इस बदलाव के पीछे राजनीतिक फायदा छिपा है। चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहते, जिससे उनकी छवि प्रभावित हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी को नजरंदाज करके उन्होंने रैली आयोजित की थी, जिसके नकारात्मक परिणाम सभी ने देखें, लिहाजा अब वे यह दर्शाना चाहते हैं कि उनके लिए भी नियमों का पालन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आम जनता के लिए। वैसे भी कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
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वॉशिंगटनः कोरोना वायरस और उससे बचाव के लिए लागू कड़े उपायों का मजाक उड़ाने वालों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका परिवार सबसे आगे रहा है। हालांकि, अब जब वायरस की रफ्तार नियंत्रण से बाहर हो गई है, तो ट्रंप परिवार को स्थिति की गंभीरता के साथ ही यह भी समझ आ गया है कि नियमों का पालन करने में ही समझदारी है। शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार मास्क पहने नजर आए और अब उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी मास्क में दिखाई दीं हैं।मेलानिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मैरी एलिजाबेथ हाउस की यात्रा का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह मास्क पहने दिखाई दे रही हैं। अपने ट्वीट में इस यात्रा के बारे में उन्होंने लिखा है, 'मैरी एलिजाबेथ हाउस के कर्मचारियों, माताओं और बच्चों के साथ समय बिताकर अच्छा लगा। यह जानकर खुशी हुई कि मैरी एलिजाबेथ हाउस परिवारों को मजबूत बनाने में मदद करता है, कमजोर महिलाओं एवं उनके बच्चों को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है'।जानकारों की मानें तो ट्रंप परिवार की सोच में आये इस बदलाव के पीछे राजनीतिक फायदा छिपा है। चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहते, जिससे उनकी छवि प्रभावित हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी को नजरंदाज करके उन्होंने रैली आयोजित की थी, जिसके नकारात्मक परिणाम सभी ने देखें, लिहाजा अब वे यह दर्शाना चाहते हैं कि उनके लिए भी नियमों का पालन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आम जनता के लिए। वैसे भी कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
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आज हम आपको फिल्म "दृश्यम" में अजय देवगन के बेटी के किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री की बोल्ड तस्वीरों को दिखाने वाले हैं।
फिल्म "दृश्यम" में अजय देवगन के बेटी के किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री का रियल नाम इशिता दत्ता हैं। इशिता झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली हैं। जो बॉलीवुड फिल्मों के साथ-साथ साउथ फिल्मों में भी अभिनय कर चुकी हैं।
अभिनेत्री इशिता का जन्म जमशेदपुर में 26 अगस्त 1990 को हुआ था। इशिता छोटे पर्दे पर प्रकासित होने वाले धारावाहिक सीरियल में भी अभिनय कर चुकी हैं।
इशिता अपने कैरीयर की सुरुवात तेलुगु फिल्म से की थी। अभिनेत्री इशिता की पहली तेलगु फिल्म "चनाकयुडु" थी। जो 2012 में बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई थी।
वही बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेत्री इशिता की पहली "दृश्यम" थी। जिसमे इनके किरदारों की काफी सराहना की गई।
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आज हम आपको फिल्म "दृश्यम" में अजय देवगन के बेटी के किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री की बोल्ड तस्वीरों को दिखाने वाले हैं। फिल्म "दृश्यम" में अजय देवगन के बेटी के किरदार को निभाने वाली अभिनेत्री का रियल नाम इशिता दत्ता हैं। इशिता झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली हैं। जो बॉलीवुड फिल्मों के साथ-साथ साउथ फिल्मों में भी अभिनय कर चुकी हैं। अभिनेत्री इशिता का जन्म जमशेदपुर में छब्बीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ नब्बे को हुआ था। इशिता छोटे पर्दे पर प्रकासित होने वाले धारावाहिक सीरियल में भी अभिनय कर चुकी हैं। इशिता अपने कैरीयर की सुरुवात तेलुगु फिल्म से की थी। अभिनेत्री इशिता की पहली तेलगु फिल्म "चनाकयुडु" थी। जो दो हज़ार बारह में बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई थी। वही बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेत्री इशिता की पहली "दृश्यम" थी। जिसमे इनके किरदारों की काफी सराहना की गई।
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रीवा जिले के नईगढ़ी थाना अंतर्गत एक किशोरी के साथ दरिंदगी का मामला सामने आया है। सूत्रों की मानें तो पीड़िता अपने भाई के साथ खेत में चारा काटने गई थी। ज्यादा प्यास लगने के कारण भाई पानी लेने चला गया। इसी बीच पड़ोसी युवक की नियत फिसल गई। उसने खेत में ही किशोरी के साथ रेप कर दिया। वारदात के बाद पीड़िता रोते बिलखते हुए घर पहुंची।
परिजनों ने कारण पूछा तो पड़ोसी द्वारा गलत करने की जानकारी दी। दुष्कर्म की कहानी सुन परिजन तुरंत थाने लेकर पहुंचे। वहां महिला पुलिसकर्मी ने बयान लिए। इसके बाद नाबालिग लड़की को मेडिकल चेकअप के लिए भेजा गया है। एमएलसी में रेप की पुष्टि होने पर आईपीसी की धारा 376, 3/4 पास्को एक्ट का अपराध कायम कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
नईगढ़ी थाना प्रभारी उपनिरीक्षक जगदीश सिंह ठाकुर ने बताया कि 26 अक्टूबर को साढे सत्रह वर्षीय किशोरी खेत चारा काटने गई थी। उसके साथ भाई भी गया था। लेकिन पानी लेने घर चला गया। तभी मौका पाकर आरोपी रावेन्द्र कुशवाहा 25 वर्ष दुष्कर्म की वारदात कर दी। पीड़िता के परिजन 27 अक्टूबर की शाम नईगढ़ी थाने रिपोर्ट दर्ज कराने आए थे। महिला अधिकारी के बयान उपरांत प्रकरण दर्ज कर पीड़िता की एमएलसी कराई है।
वारदात के बाद से आरोपी युवक फरार था। ऐसे में साइबर सेल की मदद से रेपिस्ट युवक की तलाश की जा रही थी। काफी मशक्कत व परिजनों पर लगातार दबाव बनाकर 28 अक्टूबर की शाम गिरफ्तार कर नईगढ़ी थाने लगाया गया है। उससे वारदात के संबंध में पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है। अब 29 अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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रीवा जिले के नईगढ़ी थाना अंतर्गत एक किशोरी के साथ दरिंदगी का मामला सामने आया है। सूत्रों की मानें तो पीड़िता अपने भाई के साथ खेत में चारा काटने गई थी। ज्यादा प्यास लगने के कारण भाई पानी लेने चला गया। इसी बीच पड़ोसी युवक की नियत फिसल गई। उसने खेत में ही किशोरी के साथ रेप कर दिया। वारदात के बाद पीड़िता रोते बिलखते हुए घर पहुंची। परिजनों ने कारण पूछा तो पड़ोसी द्वारा गलत करने की जानकारी दी। दुष्कर्म की कहानी सुन परिजन तुरंत थाने लेकर पहुंचे। वहां महिला पुलिसकर्मी ने बयान लिए। इसके बाद नाबालिग लड़की को मेडिकल चेकअप के लिए भेजा गया है। एमएलसी में रेप की पुष्टि होने पर आईपीसी की धारा तीन सौ छिहत्तर, तीन/चार पास्को एक्ट का अपराध कायम कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। नईगढ़ी थाना प्रभारी उपनिरीक्षक जगदीश सिंह ठाकुर ने बताया कि छब्बीस अक्टूबर को साढे सत्रह वर्षीय किशोरी खेत चारा काटने गई थी। उसके साथ भाई भी गया था। लेकिन पानी लेने घर चला गया। तभी मौका पाकर आरोपी रावेन्द्र कुशवाहा पच्चीस वर्ष दुष्कर्म की वारदात कर दी। पीड़िता के परिजन सत्ताईस अक्टूबर की शाम नईगढ़ी थाने रिपोर्ट दर्ज कराने आए थे। महिला अधिकारी के बयान उपरांत प्रकरण दर्ज कर पीड़िता की एमएलसी कराई है। वारदात के बाद से आरोपी युवक फरार था। ऐसे में साइबर सेल की मदद से रेपिस्ट युवक की तलाश की जा रही थी। काफी मशक्कत व परिजनों पर लगातार दबाव बनाकर अट्ठाईस अक्टूबर की शाम गिरफ्तार कर नईगढ़ी थाने लगाया गया है। उससे वारदात के संबंध में पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है। अब उनतीस अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक बार फिर नक्सल साजिश की वजह से CRPF के 3 जवान घायल हो गए। रविवार की सुबह जवान सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान IED ब्लास्ट हुआ जिसकी चपेट में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट और 2 जवान आ गए। घायल जवानों को इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, घटना सुकमा के किस्टाराम थाना इलाके के पलोड़ी कैंप के पास हुई है। जवान सर्चिंग पर थे तभी उन्हें नक्सलियों द्वारा लगाया गया IED मिला। इसे डिफ्यूज करने के दौरान अचानक जोरदार धमाका हो गया।
धमाके के दौरान बम को डिफ्यूज करने वाले जवान घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायल जवानों में CRPF 208 कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट विकास कुमार और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। फिलहाल, CRPF इलाके में सर्च अभियान चला रही है।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक बार फिर नक्सल साजिश की वजह से CRPF के तीन जवान घायल हो गए। रविवार की सुबह जवान सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान IED ब्लास्ट हुआ जिसकी चपेट में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट और दो जवान आ गए। घायल जवानों को इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया है। जानकारी के मुताबिक, घटना सुकमा के किस्टाराम थाना इलाके के पलोड़ी कैंप के पास हुई है। जवान सर्चिंग पर थे तभी उन्हें नक्सलियों द्वारा लगाया गया IED मिला। इसे डिफ्यूज करने के दौरान अचानक जोरदार धमाका हो गया। धमाके के दौरान बम को डिफ्यूज करने वाले जवान घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायल जवानों में CRPF दो सौ आठ कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट विकास कुमार और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। फिलहाल, CRPF इलाके में सर्च अभियान चला रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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गौड़ी माझ महला ४, पद६८
हड रहि न सकड बिनु देखे मेरे प्रीतम
मैं अंतरि बिरह हरि लाइआ जीउ ।। हरि राइआ मेरा सजणु पिनारा गुरु मेले मेरा मनु जीबाईमा जीउ ॥ मेर मनि तनि आसा पूरीआ मेरे गोविंदा
हरि मिलिया मनि बाधाईआ जीउ
वारी मेरे गोविंदा
वारी मेरे पिआरिआ हउ पुषु विटड़िअहु सब वारी जीउ मेरै मनि तनि प्रेमु पिरंभ का मेरे गोविंदा
हरि पूंजी राखु हमारी जीउ । सतिगुरु बिसटु मेलि मेरे गोविंदा हरि मेले करि रैबारी जीउ ॥ हरिनामु बइआ करि पाइआ मेरे गोविंदा
जन नानकु सरणि तुमारी जीउ ॥ ४।।३।।२६।।६७॥
गउड़ी माझ महला ४॥
चोजी मेरे गोविंदा चोजी मेरे पिआरिआ हरि प्रभु मेरा चोजी जीउ ॥
हरि आये कान्हु उपाइवा मेरे गोविदा
हिर आपे गोपी खोजी जोड ॥
पौड़ी राव-बुः पृ १७४
अपने प्रियतम की देखे बिना रह नहीं सकता क्योंकि मेरे अन्तर्गत हरि ने अपना प्रेम ( का तीर) लगा दिया है। हरि राजा जो मेरा जीवित कर दिया है। मेरे मन व तन की (सभी) आशाएँ पूर्ण हुई सज्जन और प्रियतम है, 'उससे' गुरु ने मुझे मिलाकर मेरा मन हैं और हरि से मिलने के कारण मन में बधाईयां मिल रही हैं (अर्थात अब मैं अति प्रसन्न हूँ) ॥३॥
हे मेरे गोबिन्द ! हे मेरे प्यारे ! मैं तुझ पर बलिहारी जाऊ, बलिहारी जाऊँ, (हाँ) मैं तुझ पर सदैव बलिहारी जाऊँ । हे मेरे गोबिन्द ! मेरे मन और तन में तुझ प्रियतम के लिए प्रेम है। हे ॥ हरि ! मेरी श्रद्धा रूपी पूजी की रक्षा करो। हे मेरे गोबिन्द ! मेरे सत्गुरु मध्यस्थ से मिलाप करा दो जो मेरा मार्ग प्रदर्शन करके तुम हरि के साथ मिला दे । हे मेरे गोबिन्द । तेरी दया से मैंने हरिनाम प्राप्त किया है। दास नानक तेरी शरण में आकर पड़ा है ।।४।।३।।२६।।६७॥
"गोबिन्द हरि की विचित्र लीला ।"
हे मेरे गोबिन्द । हे मेरे प्यारे ! तू तीनों कालों में कौतुक न करने वाला है (अर्थात सृष्टि रचयिता, पालनहार तथा सहारक है)। (हाँ) हे मेरे हरि प्रभु जी ! तू कौतुकी है। हे हरि ! हे
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गौड़ी माझ महला चार, पदअड़सठ हड रहि न सकड बिनु देखे मेरे प्रीतम मैं अंतरि बिरह हरि लाइआ जीउ ।। हरि राइआ मेरा सजणु पिनारा गुरु मेले मेरा मनु जीबाईमा जीउ ॥ मेर मनि तनि आसा पूरीआ मेरे गोविंदा हरि मिलिया मनि बाधाईआ जीउ वारी मेरे गोविंदा वारी मेरे पिआरिआ हउ पुषु विटड़िअहु सब वारी जीउ मेरै मनि तनि प्रेमु पिरंभ का मेरे गोविंदा हरि पूंजी राखु हमारी जीउ । सतिगुरु बिसटु मेलि मेरे गोविंदा हरि मेले करि रैबारी जीउ ॥ हरिनामु बइआ करि पाइआ मेरे गोविंदा जन नानकु सरणि तुमारी जीउ ॥ चार।।तीन।।छब्बीस।।सरसठ॥ गउड़ी माझ महला चार॥ चोजी मेरे गोविंदा चोजी मेरे पिआरिआ हरि प्रभु मेरा चोजी जीउ ॥ हरि आये कान्हु उपाइवा मेरे गोविदा हिर आपे गोपी खोजी जोड ॥ पौड़ी राव-बुः पृ एक सौ चौहत्तर अपने प्रियतम की देखे बिना रह नहीं सकता क्योंकि मेरे अन्तर्गत हरि ने अपना प्रेम लगा दिया है। हरि राजा जो मेरा जीवित कर दिया है। मेरे मन व तन की आशाएँ पूर्ण हुई सज्जन और प्रियतम है, 'उससे' गुरु ने मुझे मिलाकर मेरा मन हैं और हरि से मिलने के कारण मन में बधाईयां मिल रही हैं ॥तीन॥ हे मेरे गोबिन्द ! हे मेरे प्यारे ! मैं तुझ पर बलिहारी जाऊ, बलिहारी जाऊँ, मैं तुझ पर सदैव बलिहारी जाऊँ । हे मेरे गोबिन्द ! मेरे मन और तन में तुझ प्रियतम के लिए प्रेम है। हे ॥ हरि ! मेरी श्रद्धा रूपी पूजी की रक्षा करो। हे मेरे गोबिन्द ! मेरे सत्गुरु मध्यस्थ से मिलाप करा दो जो मेरा मार्ग प्रदर्शन करके तुम हरि के साथ मिला दे । हे मेरे गोबिन्द । तेरी दया से मैंने हरिनाम प्राप्त किया है। दास नानक तेरी शरण में आकर पड़ा है ।।चार।।तीन।।छब्बीस।।सरसठ॥ "गोबिन्द हरि की विचित्र लीला ।" हे मेरे गोबिन्द । हे मेरे प्यारे ! तू तीनों कालों में कौतुक न करने वाला है । हे मेरे हरि प्रभु जी ! तू कौतुकी है। हे हरि ! हे
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मणिपुर के कांगपोकपी जिले में गुस्साई भीड़ ने थाने पर हमला कर दिया. Kuki Revolutionary Army के एक काडर की पुलिस हिरासत में मौत के बाद लोगों को गुस्सा भड़का. आरोप को असम राइफल्स के जवानों ने 25 जनवरी को गिरफ्तार किया था और उसे कांगपोकपी पुलिस के हवाले किया गया था. मंगलवार को आरोपी का शव लॉकअप में मिला. पुलिस स्टेशन पर हमले के बाद वहां भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है. मणिपुर सरकार ने हिरासत में मौत की जांच के आदेश दिए हैं.
A police station in Kangpokpi district in Manipur was attacked by an angry mob after Kuki Revolutionary Army (KRA) cadre died in police custody. Sources informed that the KRA cadre, identified as Thangboi Lhouvum, was arrested by the Assam Rifles personnel on Saturday and was reportedly handed over to Kangpokpi police.
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मणिपुर के कांगपोकपी जिले में गुस्साई भीड़ ने थाने पर हमला कर दिया. Kuki Revolutionary Army के एक काडर की पुलिस हिरासत में मौत के बाद लोगों को गुस्सा भड़का. आरोप को असम राइफल्स के जवानों ने पच्चीस जनवरी को गिरफ्तार किया था और उसे कांगपोकपी पुलिस के हवाले किया गया था. मंगलवार को आरोपी का शव लॉकअप में मिला. पुलिस स्टेशन पर हमले के बाद वहां भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है. मणिपुर सरकार ने हिरासत में मौत की जांच के आदेश दिए हैं. A police station in Kangpokpi district in Manipur was attacked by an angry mob after Kuki Revolutionary Army cadre died in police custody. Sources informed that the KRA cadre, identified as Thangboi Lhouvum, was arrested by the Assam Rifles personnel on Saturday and was reportedly handed over to Kangpokpi police.
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उत्तर प्रदेश में गोण्डा जिले के छपिया क्षेत्र में बुधवार को जर्जर दीवार गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र के जमुनहा मजरे में स्थित घर की पुरानी दीवाल गिरने से उसके मलबे मे दबकर दो बच्चियां अंशिका (8) और अनन्या (6) की मृत्यु हो गई।
उन्होनें बताया कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से मलबा हटवाकर बालिकाओं को बाहर निकलवा कर अस्पताल ले जाया गया वहां उपचार के दौरान चिकित्सकों नें दोनो को मृत घोषित कर दिया। हादसे मे घायल हुई अंजलि और मुस्कान का उपचार चल रहा है ।
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उत्तर प्रदेश में गोण्डा जिले के छपिया क्षेत्र में बुधवार को जर्जर दीवार गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र के जमुनहा मजरे में स्थित घर की पुरानी दीवाल गिरने से उसके मलबे मे दबकर दो बच्चियां अंशिका और अनन्या की मृत्यु हो गई। उन्होनें बताया कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से मलबा हटवाकर बालिकाओं को बाहर निकलवा कर अस्पताल ले जाया गया वहां उपचार के दौरान चिकित्सकों नें दोनो को मृत घोषित कर दिया। हादसे मे घायल हुई अंजलि और मुस्कान का उपचार चल रहा है ।
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कुरुक्षेत्र, 1 सितंबर (हप्र)
आज समूचा विश्व पर्यावरण की विकृति से जूझ रहा है। कहीं सुनामी तो कहीं भूकम्प और अब कोविड का प्रकोप है। यह सब पर्यावरण में आये असंतुलन के कारण है। प्रकृति के इस असंतुलन का जिम्मेदार मानव ही है।
यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा श्रीमद्भगवदगीता जन्मस्थली ज्योतिसर में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित गीता संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के प्रणेता प्रसिद्ध विचारक एवं चिंतक केएन गोविन्दाचार्य ने यमुना दर्शन यात्रा एवं प्रकृति केंद्रित विकास पर संवाद यात्रा के ज्योतिसर पहुंचने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये। गीता सवांद कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक ब्रह्मचारियों द्वारा गीताज्ञान यज्ञ से हुआ।
गीताज्ञान यज्ञ में उपस्थित सभी लोगों ने अपने जीवन में प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। गोविन्दाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पर्यावरण के सच्चे हितैषी और संरक्षक थे।
गीता संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि गोविन्दाचार्य द्वारा पर्यावरण एवं प्रकृति केन्द्रित जन चेतना यात्रा आज समय की आवश्यकता है।
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कुरुक्षेत्र, एक सितंबर आज समूचा विश्व पर्यावरण की विकृति से जूझ रहा है। कहीं सुनामी तो कहीं भूकम्प और अब कोविड का प्रकोप है। यह सब पर्यावरण में आये असंतुलन के कारण है। प्रकृति के इस असंतुलन का जिम्मेदार मानव ही है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा श्रीमद्भगवदगीता जन्मस्थली ज्योतिसर में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित गीता संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के प्रणेता प्रसिद्ध विचारक एवं चिंतक केएन गोविन्दाचार्य ने यमुना दर्शन यात्रा एवं प्रकृति केंद्रित विकास पर संवाद यात्रा के ज्योतिसर पहुंचने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये। गीता सवांद कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक ब्रह्मचारियों द्वारा गीताज्ञान यज्ञ से हुआ। गीताज्ञान यज्ञ में उपस्थित सभी लोगों ने अपने जीवन में प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। गोविन्दाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पर्यावरण के सच्चे हितैषी और संरक्षक थे। गीता संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि गोविन्दाचार्य द्वारा पर्यावरण एवं प्रकृति केन्द्रित जन चेतना यात्रा आज समय की आवश्यकता है।
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Coronavirus: पॉर्न इंडस्ट्री को लॉकडाउन के कारण काफी फायदा हो रहा है। जहां लोग लॉकडाउन के वजह से घरों में कैद हैं। वहीं घरों में कैद हुए ज्यादातर लोग पॉर्न साइट पर नजर आ रहे हैं। हर रोज पॉर्न साइट पर लगभग 30 मिलियन लोग आते हैं। जिसमें सबसे ज्यादा इंडियन पोर्न देखी जाती है।
Coronavirus: चीन से शुरू यह खतरनाक वायरस पूरी दुनिया के ज्यादातर देश में फैल चुका है। जिसके चलते कई देशों में लॉकडाउन किया गया है। इससे देशों को काफी नुकसान भी हुआ है। इसी बीच एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है। जहां सभी कंपनियों का काफी नुकसान हो रहा है। वहं दूसरी तरफ पॉर्न इंडस्ट्री को लॉकडाउन के कारण काफी फायदा हो रहा है। जहां लोग लॉकडाउन के वजह से घरों में कैद हैं। वहीं घरों में कैद हुए ज्यादातर लोग पॉर्न साइट पर नजर आ रहे हैं। जिस वजह से पॉर्न वेबसाइट पर 95% ट्रैफिक बढ़ा है।
पॉर्न वेबसाइट की सर्चिंग काफी हो रही है।
आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि लॉकडाउन की वजह से सभी लोग अपने अपने घर में बंद है। जिसके बाद पॉर्न वेबसाइट की सर्चिंग काफी हो रही है। जिस वजह से पॉर्न इंडस्ट्री काफी अच्छी स्थिति में है। वहीं कई पॉर्न वेबसाइट्स क्रिप्टोकरेंसी लेना शुरू कर दिया है।
पॉर्न देखने वाले ज्यादातर लोग भारतीय हैं।
खबरों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान पोर्न वेबसाइट में काफी वृद्धि हुई है। जिसमें पॉर्न देखने वाले ज्यादातर लोग भारतीय हैं। वहीं हर रोज पॉर्न साइट पर लगभग 30 मिलियन लोग आते हैं। जिसमें सबसे ज्यादा इंडियन पोर्न देखी जाती है।
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Coronavirus: पॉर्न इंडस्ट्री को लॉकडाउन के कारण काफी फायदा हो रहा है। जहां लोग लॉकडाउन के वजह से घरों में कैद हैं। वहीं घरों में कैद हुए ज्यादातर लोग पॉर्न साइट पर नजर आ रहे हैं। हर रोज पॉर्न साइट पर लगभग तीस मिलियन लोग आते हैं। जिसमें सबसे ज्यादा इंडियन पोर्न देखी जाती है। Coronavirus: चीन से शुरू यह खतरनाक वायरस पूरी दुनिया के ज्यादातर देश में फैल चुका है। जिसके चलते कई देशों में लॉकडाउन किया गया है। इससे देशों को काफी नुकसान भी हुआ है। इसी बीच एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है। जहां सभी कंपनियों का काफी नुकसान हो रहा है। वहं दूसरी तरफ पॉर्न इंडस्ट्री को लॉकडाउन के कारण काफी फायदा हो रहा है। जहां लोग लॉकडाउन के वजह से घरों में कैद हैं। वहीं घरों में कैद हुए ज्यादातर लोग पॉर्न साइट पर नजर आ रहे हैं। जिस वजह से पॉर्न वेबसाइट पर पचानवे% ट्रैफिक बढ़ा है। पॉर्न वेबसाइट की सर्चिंग काफी हो रही है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि लॉकडाउन की वजह से सभी लोग अपने अपने घर में बंद है। जिसके बाद पॉर्न वेबसाइट की सर्चिंग काफी हो रही है। जिस वजह से पॉर्न इंडस्ट्री काफी अच्छी स्थिति में है। वहीं कई पॉर्न वेबसाइट्स क्रिप्टोकरेंसी लेना शुरू कर दिया है। पॉर्न देखने वाले ज्यादातर लोग भारतीय हैं। खबरों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान पोर्न वेबसाइट में काफी वृद्धि हुई है। जिसमें पॉर्न देखने वाले ज्यादातर लोग भारतीय हैं। वहीं हर रोज पॉर्न साइट पर लगभग तीस मिलियन लोग आते हैं। जिसमें सबसे ज्यादा इंडियन पोर्न देखी जाती है।
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उत्कलीय रंगमंच का अतीत किंचित्
पर अश्विनी बाबू क्षतिग्रस्त हुए। धूर्त कर्मचारियों और सहयोगियों के कारण उनकी क्षति हुई और वह दल ही नष्ट हो गया ।
इसके पश्चात् स्वाधीनता का परवर्ती काल आया । काली बाबू के "भात" का आकर्षण कोई नहीं भूला है। क्या भाषा, क्या स्वरविन्यास, क्या अभिनय की परिपाटी तीन विभागों को साम्यरक्षा सिर्फ वे ही कर सके । इस भाषा के जीवन के मर्मभेद भी उन्हें मालूम है। लेकिन दल नष्ट हो गया है । नारी-शिल्पियों के सहयोग से और नये युग के श्रेष्ठ कलाकारों के अभ्युदय से "अन्नपूर्णा" और "जनता" दोनों धन्य हुए हैं। रोज कृतित्व की आलोचना और समालोचना संवादपत्रों में निकलती है। हमारी तरह प्राचीन रूढ़ियों की आँखों से, तीक्ष्णतर दृष्टि से समालोचक देखते हैं। कुछ मन्तव्य देना निष्प्रयोजन है। रूपसज्जा, नाटक तथा अभिनय की धारा स्वाभाविक हो गई है। इस युग की समस्याओं के अनुसार विषय-वस्तु चलती है । अत्यन्त क्षीण वेग से दृष्टिकोण और चिन्ताघारा बदल जाती है। मुहुर्मुहुः नये के पीछे नये का अवदान आता है। हमें इतना आनन्द आता है कि हमारा स्थान न्यून न होकर ताल सँभाल कर खड़ा है। सौभाग्य है, हमारे बच्चे प्रगति पथ में आगामी शत वर्ष की ज्योति देखते हैं। वे निश्चय ही कृतकर्मी और धन्य होंगे। प्राचीन के लिए कोई रोता नहीं। जो गया सो गया, इसकी कोई चिन्ता नहीं । केवल संस्मरण के लिए दो पुरानी बातें सुनाईं। इसलिए कवि ने कहा है - "पतन अभ्युदय बन्धुर, पंथा युगे युगे धावति यात्री । हे चिरसारथि ! तव रथचक्रे मुखरित है के दिवा रात्रि" ।
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उत्कलीय रंगमंच का अतीत किंचित् पर अश्विनी बाबू क्षतिग्रस्त हुए। धूर्त कर्मचारियों और सहयोगियों के कारण उनकी क्षति हुई और वह दल ही नष्ट हो गया । इसके पश्चात् स्वाधीनता का परवर्ती काल आया । काली बाबू के "भात" का आकर्षण कोई नहीं भूला है। क्या भाषा, क्या स्वरविन्यास, क्या अभिनय की परिपाटी तीन विभागों को साम्यरक्षा सिर्फ वे ही कर सके । इस भाषा के जीवन के मर्मभेद भी उन्हें मालूम है। लेकिन दल नष्ट हो गया है । नारी-शिल्पियों के सहयोग से और नये युग के श्रेष्ठ कलाकारों के अभ्युदय से "अन्नपूर्णा" और "जनता" दोनों धन्य हुए हैं। रोज कृतित्व की आलोचना और समालोचना संवादपत्रों में निकलती है। हमारी तरह प्राचीन रूढ़ियों की आँखों से, तीक्ष्णतर दृष्टि से समालोचक देखते हैं। कुछ मन्तव्य देना निष्प्रयोजन है। रूपसज्जा, नाटक तथा अभिनय की धारा स्वाभाविक हो गई है। इस युग की समस्याओं के अनुसार विषय-वस्तु चलती है । अत्यन्त क्षीण वेग से दृष्टिकोण और चिन्ताघारा बदल जाती है। मुहुर्मुहुः नये के पीछे नये का अवदान आता है। हमें इतना आनन्द आता है कि हमारा स्थान न्यून न होकर ताल सँभाल कर खड़ा है। सौभाग्य है, हमारे बच्चे प्रगति पथ में आगामी शत वर्ष की ज्योति देखते हैं। वे निश्चय ही कृतकर्मी और धन्य होंगे। प्राचीन के लिए कोई रोता नहीं। जो गया सो गया, इसकी कोई चिन्ता नहीं । केवल संस्मरण के लिए दो पुरानी बातें सुनाईं। इसलिए कवि ने कहा है - "पतन अभ्युदय बन्धुर, पंथा युगे युगे धावति यात्री । हे चिरसारथि ! तव रथचक्रे मुखरित है के दिवा रात्रि" । Digitized by PPRACHIN, SOA
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PRAYAGRAJ:
आईटीआई परिसर नैनी में नवनिíमत ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में परमानेंट डीएल का टेस्ट मंगलवार से शुरू हो गया। डीटीआई का उद्घाटन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डा। सियाराम वर्मा ने फीता काटकर किया। इस दौरान संभागीय निरीक्षक बृजेंद्र नाथ चौधरी और संजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। पहले दिन पहुंचे 44 आवेदकों में 8 टेस्ट में फेल हो गए। एआरटीओ प्रशासन की माने तो इस व्यवस्था के शुरू होने से एक्सीडेंट में काफी गिरावट आएगी।
एआरटीओ प्रशासन डा। सियाराम वर्मा ने बताया कि आरटीओ कार्यालय में लिए जाने वाले मैनुअल ड्राइविंग टेस्ट नव-निर्मित ट्रैक पर शुरू हो गया है। नवनिíमत ट्रैक पर आवेदक को अंग्रेजी के आठ के आकार में बने ट्रैक, अप ग्रेडियंट, पाìकग एवं रिवर्स में गाड़ी का परिचालन करना पड़ता है। इन सारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत किया जाता है। अभी फिलहाल परमानेंट लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्द ही अन्य लाइसेंस संबंधित कार्य भी होंगे। बताया कि मंगलवार को 44 आवेदकों ने टेस्ट दिया। जिसमें 12 मोटरसाइकिल एवं 32 एलएलबी के आवेदक थे। कुल 44 आवेदकों में 8 आवेदक टेस्ट में फेल हुए।
टेस्ट में पास होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जा रहा है। कार्यालय में एक आरआई, दो बाबू व एक डाटा इंट्री ऑपरेटर की तैनाती की गई है। जल्द ही अन्य कार्य शुरू होते ही स्टाफ बढ़ा दिया जाएगा।
16 जून से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय में बस, ऑटो, टेम्पो और ई-रिक्शा चालक-परिचालकों का भी वैक्सीनेशन होगा। इसके लिए आरटीओ कार्यालय में बकायदा बूथ बनाया गया है। यहां प्रतिदिन कम से कम सौ कामर्शियल वाहन चालकों और उनके सहयोगियों को टीका लगाने का लक्ष्य है।
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PRAYAGRAJ: आईटीआई परिसर नैनी में नवनिíमत ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में परमानेंट डीएल का टेस्ट मंगलवार से शुरू हो गया। डीटीआई का उद्घाटन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डा। सियाराम वर्मा ने फीता काटकर किया। इस दौरान संभागीय निरीक्षक बृजेंद्र नाथ चौधरी और संजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। पहले दिन पहुंचे चौंतालीस आवेदकों में आठ टेस्ट में फेल हो गए। एआरटीओ प्रशासन की माने तो इस व्यवस्था के शुरू होने से एक्सीडेंट में काफी गिरावट आएगी। एआरटीओ प्रशासन डा। सियाराम वर्मा ने बताया कि आरटीओ कार्यालय में लिए जाने वाले मैनुअल ड्राइविंग टेस्ट नव-निर्मित ट्रैक पर शुरू हो गया है। नवनिíमत ट्रैक पर आवेदक को अंग्रेजी के आठ के आकार में बने ट्रैक, अप ग्रेडियंट, पाìकग एवं रिवर्स में गाड़ी का परिचालन करना पड़ता है। इन सारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत किया जाता है। अभी फिलहाल परमानेंट लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्द ही अन्य लाइसेंस संबंधित कार्य भी होंगे। बताया कि मंगलवार को चौंतालीस आवेदकों ने टेस्ट दिया। जिसमें बारह मोटरसाइकिल एवं बत्तीस एलएलबी के आवेदक थे। कुल चौंतालीस आवेदकों में आठ आवेदक टेस्ट में फेल हुए। टेस्ट में पास होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जा रहा है। कार्यालय में एक आरआई, दो बाबू व एक डाटा इंट्री ऑपरेटर की तैनाती की गई है। जल्द ही अन्य कार्य शुरू होते ही स्टाफ बढ़ा दिया जाएगा। सोलह जून से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय में बस, ऑटो, टेम्पो और ई-रिक्शा चालक-परिचालकों का भी वैक्सीनेशन होगा। इसके लिए आरटीओ कार्यालय में बकायदा बूथ बनाया गया है। यहां प्रतिदिन कम से कम सौ कामर्शियल वाहन चालकों और उनके सहयोगियों को टीका लगाने का लक्ष्य है।
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भारत के तमिलनाडु (Tamil Nadu) से मूल रूप से ताल्लुक रखने वाली कमला हैरिस (Kamala Harris) ने स्वादिष्ट सांबर के साथ इडली (Idli-Sambar) और किसी भी किस्म के टिक्के को अपना पसंदीदा भारतीय भोजन (Indian Food) बताया, तो सोशल मीडिया पर भारतीय व्यंजनों को लेकर अच्छी खासी चर्चा छिड़ गई. लेकिन, जानने की बात यह है कि विदेशों में भारतीय भोजन (Popular Indian Foods) किस तरह पसंद किया जाता है? दुनिया में भारतीय भोजन को पसंद करने की रैकिंग क्या है और कौन से भारतीय व्यंजन भारत के बाहर भी चाव से खाए जाते हैं?
भारत में राज्यों के हिसाब से कई तरह के पकवान लोकप्रिय हैं. वेज भोजन की भी खासी वैरायटी है तो नॉनवेज की भी. जैसे पूरब में माछेर झोल तो पश्चिम में दाल बाटी और उत्तर में छोले भटूरे, तो दक्षिण में इडली या डोसा आदि. अमेरिका चुनाव में उपराष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस से कुछ ही दिन पहले केरल से सांसद शशि थरूर ने भी इडली की पसंद को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा की थी. बहरहाल, आइए जानते हैं कि विदेशों में भारतीय भोजन की लोकप्रियता किस तरह है.
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दुनिया के सबसे ज़्यादा पसंदीदा भोजन?
कौन से देश या संस्कृति का भोजन सबसे ज़्यादा पसंदीदा है? इसका सामान्य जवाब हो सकता है अमेरिका का, लेकिन यह धारणा सही नहीं है. दुनिया में सबसे ज़्यादा चाव इटैलियन भोजन का है. इसके बाद, जापानी, चीनी और चौथे नंबर पर भारतीय भोजन. साल 2019 में अमेरिकी अर्थशास्त्री जोएल वॉल्डफोगेल के रिसर्च पेपर में कहा गया था कि भारतीय भोजन के बाद पांचवे नंबर पर अमेरिकी भोजन पंसद किया जाता है.
इस बारे में एक नहीं, कई रिसर्च और सर्वे समय समय पर होते रहे हैं. पिछले ही साल यूके बेस्ड मार्केट रिसर्च फर्म YouGov ने जो सर्वे कराया था, उसके मुताबिक दुनिया में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय भोजनों की टॉप टेन लिस्ट में भारतीय व्यंजनों का स्थान नौवां था. यह सर्वे 24 देशों में रह रहे करीब 25 हज़ार लोगों से बातचीत पर आधारित था.
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विदेशी भारतीयों की पसंद क्या है?
सर्वे में यह भी खुलासा हुआ था कि भारत से बाहर रह हरे 93 फीसदी भारतीय अपना ही भोजन पसंद करते हैं. लेकिन सिर्फ भारतीय भोजन ही पसंद करते हैं, ऐसा भी नहीं है. इटैलियन, चीनी और अमेरिकन भोजन भी इस समुदाय के बीच लोकप्रिय है. YouGov के सर्वे में यह भी बताया गया था कि भारतीयों में नॉर्वे, फिलीपीन्स, फिनलैंड और पेरू के भोजन में बहुत कम दिलचस्पी देखी जाती है.
विदेशों में पसंद किए जाने वाले व्यंजन?
भारतीय व्यंजनों की जितनी वैरायटी है, उतनी शायद किसी और देश में नहीं है. इसकी बड़ी वजह भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक विविधता है. कई तरह के सर्वे में जो बातें सामने आई हैं, उनके आधार पर वो 10 भारतीय डिशेज़ इस तरह हैं, जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा चाव से खाई जाती हैं.
1. चिकन टिक्का और बटर चिकन (चिकन टिक्का मसाला लाहौर मूल की डिश रही है और बटर चिकन पंजाबी रेसिपी. विदेशों में दोनों ही डिशेज़ न केवल भारतीयों बल्कि अन्य समुदायों में भी बेहद लोकप्रिय हैं. )
2. बिरयानी (नॉनवेज की वैरायटी में हैदराबादी और अवधि बिरयानी दुनिया भर में मकबूल है और यूरोप समेत एशिया के कई देशों के रेस्तरां में सर्व की जाती है. )
3. चाट (पानी पूरी, आलू और छोले चाट की वैरायटी कई देशों में प्रसिद्ध है, लेकिन ब्रिटेन में कई जगह चाट के स्टॉल दिखते हैं. )
4. समोसा (इस व्यंजन का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा और भारत के अलग अलग हिस्सों में यह अलग स्वाद का बनता है. चटनियों के साथ खाए जाने वाले इस स्नैक्स की लोकप्रियता कम नहीं है. )
5. दक्षिण भारतीय व्यंजन (इडली तो फेमस है ही, इसके साथ ही डोसा, उत्तपम और सांबर जैसे व्यंजन भी खासे पसंद किए जाते हैं. सांबर का स्वाद हर दक्षिण भारतीय शहर में अलग और यूनिक हो जाता है. इस क्विज़ीन को कई देशों में पसंद किया जाता है. )
6. कबाब (मुग़लाई परंपरा के इस व्यंजन की अच्छी खासी वैरायटी चर्चित हो चुकी है. उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक इसकी रेसिपीज़ मिलती हैं और विदेशों खासकर यूके में यह बेहद लोकप्रिय है. )
7. नान (यह रोटी जैसी सहयोगी डिश है, जो दाल से लेकर चिकन या मटन या किसी नॉनवेज करी के साथ खायी जाती है. इसके भी कई फ्लेवर मशहूर हैं जैसे बटर नान, गार्लिक नान या मसाला नान आदि)
8. मलाई कोफ्ता (खास तौर से लौकी और कच्चे केले से तैयार होने वाले कोफ्ते रेड, येलो और व्हाइट ग्रेवी के साथ बनाए जाते हैं. यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक इस मूलतः पंजाबी डिश के चर्चे रहे हैं. )
9. पालक पनीर (विशेष शाकाहारी भोजन की बात हो, तो इस रेसिपी से बड़ा सेलिब्रिटी मुश्किल है. लंच या डिनर टेबल पर आप कई देशों में इस डिश को देख सकते हैं. )
10. दाल मखनी (यह भी मूलतः पंजाबी डिश है, जो अमेरिका से लेकर पाकिस्तान तक वेज इंडियन क्विज़ीन में काफी पसंद की जाती है. )
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इनके अलावा, पनीर टिक्का, रोगन जोश, छोले भटूरे/कुल्चे और पुलाव जैसे व्यंजन भी लोकप्रिय हैं. अस्ल में, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इंडियन डिशेज़ की लोकप्रियता वहां बसी भारतीय आबादी पर निर्भर होती है. जैसे कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की तादाद काफी है, तो वहां पंजाबी डिशेज़ सबसे ज़्यादा पसंदीदा हैं.
कहां है इंडियन फूड का सबसे ज़्यादा क्रेज़?
यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जापान, जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय व्यंजनों की वैरायटी काफी मिलती है. भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में तो सांस्कृतिक समानताओं के कारण भोजन संबंधी समानताएं हैं ही. मिडिल ईस्ट की बात करें तो भारत की कई डिशेज़ यहां पसंद की जाती हैं. इसकी बड़ी वजह रही है कि सदियों से यहां खान पान का भी आदान प्रदान होता रहा है. अब भी भारत कई तरह के मसाले और मेवे अरब और फारस से आयात करता है.
आंकड़ों में देखें तो सिंगापुर में 77, मलेशिया में 70, इंडोनेशिया में 49 और वियतनाम 44 फीसदी वो लोग इंडियन फूड पसंद करते हैं, जो कभी इसका ज़ाइका ले चुके हैं. YouGov के सर्वे के अनुसार भारतीय भोजन सबसे कम चीन और थाईलैंड में पसंद किया जाता है, जहां ऐसे क्रमशः 26 और 27 फीसदी लोग ही रुझान रखते हैं. भारतीय भोजन की फैन फॉलोइंग ब्रिटेन में 84, नॉर्वे में 75, फ्रांस में 71 और ऑस्ट्रेलिया में 74 फीसदी है.
अर्थशास्त्री वॉल्डफोगेल की स्टडी में साफ कहा गया कि इटैलियन व्यंजन दुनिया भर में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं. इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से दुनिया के 17 सबसे बड़े देशों में से 10 देशों में 10 फीसदी से ज़्यादा लोग इटैलियन रेस्तरां में भोजन करते हैं. इसी अनुपात में आयात और निर्यात होता है.
ये भी पढ़ें :- 2050 तक भारत के कौन से शहर एक-एक बूंद के लिए तरसेंगे?
जापानी और चीनी भोजन नंबर दो और तीन पर हैं. यानी सबसे बड़े 5 देशों में पांच फीसदी से ज़्यादा लोग जापानी या चीनी रेस्तरां में भोजन करना पसंद करते हैं. इसी तरह, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कम से कम 5 फीसदी आबादी भारतीय रेस्तरां में भोजन करती हैं.
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भारत के तमिलनाडु से मूल रूप से ताल्लुक रखने वाली कमला हैरिस ने स्वादिष्ट सांबर के साथ इडली और किसी भी किस्म के टिक्के को अपना पसंदीदा भारतीय भोजन बताया, तो सोशल मीडिया पर भारतीय व्यंजनों को लेकर अच्छी खासी चर्चा छिड़ गई. लेकिन, जानने की बात यह है कि विदेशों में भारतीय भोजन किस तरह पसंद किया जाता है? दुनिया में भारतीय भोजन को पसंद करने की रैकिंग क्या है और कौन से भारतीय व्यंजन भारत के बाहर भी चाव से खाए जाते हैं? भारत में राज्यों के हिसाब से कई तरह के पकवान लोकप्रिय हैं. वेज भोजन की भी खासी वैरायटी है तो नॉनवेज की भी. जैसे पूरब में माछेर झोल तो पश्चिम में दाल बाटी और उत्तर में छोले भटूरे, तो दक्षिण में इडली या डोसा आदि. अमेरिका चुनाव में उपराष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस से कुछ ही दिन पहले केरल से सांसद शशि थरूर ने भी इडली की पसंद को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा की थी. बहरहाल, आइए जानते हैं कि विदेशों में भारतीय भोजन की लोकप्रियता किस तरह है. ये भी पढ़ें :- क्या है उस इडली की कहानी, जो सोशल मीडिया से लेकर अमेरिका तक चर्चा में है! दुनिया के सबसे ज़्यादा पसंदीदा भोजन? कौन से देश या संस्कृति का भोजन सबसे ज़्यादा पसंदीदा है? इसका सामान्य जवाब हो सकता है अमेरिका का, लेकिन यह धारणा सही नहीं है. दुनिया में सबसे ज़्यादा चाव इटैलियन भोजन का है. इसके बाद, जापानी, चीनी और चौथे नंबर पर भारतीय भोजन. साल दो हज़ार उन्नीस में अमेरिकी अर्थशास्त्री जोएल वॉल्डफोगेल के रिसर्च पेपर में कहा गया था कि भारतीय भोजन के बाद पांचवे नंबर पर अमेरिकी भोजन पंसद किया जाता है. इस बारे में एक नहीं, कई रिसर्च और सर्वे समय समय पर होते रहे हैं. पिछले ही साल यूके बेस्ड मार्केट रिसर्च फर्म YouGov ने जो सर्वे कराया था, उसके मुताबिक दुनिया में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय भोजनों की टॉप टेन लिस्ट में भारतीय व्यंजनों का स्थान नौवां था. यह सर्वे चौबीस देशों में रह रहे करीब पच्चीस हज़ार लोगों से बातचीत पर आधारित था. ये भी पढ़ें :- कैसे होते हैं सैनिकों को बर्फीले मौसम से बचाने वाले स्पेशल कपड़े? विदेशी भारतीयों की पसंद क्या है? सर्वे में यह भी खुलासा हुआ था कि भारत से बाहर रह हरे तिरानवे फीसदी भारतीय अपना ही भोजन पसंद करते हैं. लेकिन सिर्फ भारतीय भोजन ही पसंद करते हैं, ऐसा भी नहीं है. इटैलियन, चीनी और अमेरिकन भोजन भी इस समुदाय के बीच लोकप्रिय है. YouGov के सर्वे में यह भी बताया गया था कि भारतीयों में नॉर्वे, फिलीपीन्स, फिनलैंड और पेरू के भोजन में बहुत कम दिलचस्पी देखी जाती है. विदेशों में पसंद किए जाने वाले व्यंजन? भारतीय व्यंजनों की जितनी वैरायटी है, उतनी शायद किसी और देश में नहीं है. इसकी बड़ी वजह भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक विविधता है. कई तरह के सर्वे में जो बातें सामने आई हैं, उनके आधार पर वो दस भारतीय डिशेज़ इस तरह हैं, जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा चाव से खाई जाती हैं. एक. चिकन टिक्का और बटर चिकन दो. बिरयानी तीन. चाट चार. समोसा पाँच. दक्षिण भारतीय व्यंजन छः. कबाब सात. नान आठ. मलाई कोफ्ता नौ. पालक पनीर दस. दाल मखनी ये भी पढ़ें :- US Election: कितनी अनलिमिटेड पावर होती है अमेरिकी प्रेसीडेंट के पास? इनके अलावा, पनीर टिक्का, रोगन जोश, छोले भटूरे/कुल्चे और पुलाव जैसे व्यंजन भी लोकप्रिय हैं. अस्ल में, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इंडियन डिशेज़ की लोकप्रियता वहां बसी भारतीय आबादी पर निर्भर होती है. जैसे कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की तादाद काफी है, तो वहां पंजाबी डिशेज़ सबसे ज़्यादा पसंदीदा हैं. कहां है इंडियन फूड का सबसे ज़्यादा क्रेज़? यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जापान, जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय व्यंजनों की वैरायटी काफी मिलती है. भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में तो सांस्कृतिक समानताओं के कारण भोजन संबंधी समानताएं हैं ही. मिडिल ईस्ट की बात करें तो भारत की कई डिशेज़ यहां पसंद की जाती हैं. इसकी बड़ी वजह रही है कि सदियों से यहां खान पान का भी आदान प्रदान होता रहा है. अब भी भारत कई तरह के मसाले और मेवे अरब और फारस से आयात करता है. आंकड़ों में देखें तो सिंगापुर में सतहत्तर, मलेशिया में सत्तर, इंडोनेशिया में उनचास और वियतनाम चौंतालीस फीसदी वो लोग इंडियन फूड पसंद करते हैं, जो कभी इसका ज़ाइका ले चुके हैं. YouGov के सर्वे के अनुसार भारतीय भोजन सबसे कम चीन और थाईलैंड में पसंद किया जाता है, जहां ऐसे क्रमशः छब्बीस और सत्ताईस फीसदी लोग ही रुझान रखते हैं. भारतीय भोजन की फैन फॉलोइंग ब्रिटेन में चौरासी, नॉर्वे में पचहत्तर, फ्रांस में इकहत्तर और ऑस्ट्रेलिया में चौहत्तर फीसदी है. अर्थशास्त्री वॉल्डफोगेल की स्टडी में साफ कहा गया कि इटैलियन व्यंजन दुनिया भर में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं. इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था के लिहाज़ से दुनिया के सत्रह सबसे बड़े देशों में से दस देशों में दस फीसदी से ज़्यादा लोग इटैलियन रेस्तरां में भोजन करते हैं. इसी अनुपात में आयात और निर्यात होता है. ये भी पढ़ें :- दो हज़ार पचास तक भारत के कौन से शहर एक-एक बूंद के लिए तरसेंगे? जापानी और चीनी भोजन नंबर दो और तीन पर हैं. यानी सबसे बड़े पाँच देशों में पांच फीसदी से ज़्यादा लोग जापानी या चीनी रेस्तरां में भोजन करना पसंद करते हैं. इसी तरह, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कम से कम पाँच फीसदी आबादी भारतीय रेस्तरां में भोजन करती हैं. .
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पिछले कुछ दिनों से रेवाड़ी नगर परिषद आपसी कलह के कारण अखाड़ा बन चुकी है। अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सोमवार को करीब 15 पार्षदों के पति या फिर प्रतिनिधि रामपुरा हाउस स्थित केन्द्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह के PA रवि यादव से मिलने पहुंचे और अपना दुखड़ा सुनाया। करीब एक घंटा बैठक चली।
सूत्रों के अनुसार, PA के सामने पार्षद पति और उनके बेटों ने नगर परिषद के कर्मचारियों पर उनकी सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। 4 दिन पहले एक क्लर्क और पार्षद पति के बीच हुआ विवाद भी रखा गया। यह सभी लोग नगर परिषद के वाइस चेयरमैन श्याम सुंदर चुघ के नेतृत्व में मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान चेयरमैन पूनम यादव नहीं पहुंची।
दरअसल, नगर परिषद में अधिकारियों और पार्षदों के बीच अकसर तकरार होती रहती है। पिछले कुछ माह से तो स्थिति बिल्कुल बिगड़ी हुई है। पार्षद अधिकारियों पर लगातार अनदेखी के आरोप लगा रहे तो कर्मचारी कई पार्षद और उनके पतियों पर भी आरोप लगा चुके हैं। 4 दिन पहले तो क्लर्क रामरतन और पार्षद पति दीपक सैनी के बीच तीखी बहस हुई थी।
क्लर्क ने पार्षद पति पर महिला कर्मचारियों के सामने गाली-गलौज तक करने का आरोप लगाया था। पार्षद पति ने भी क्लर्क पर कई तरह के आरोप लगाए थे। दोनों तरफ से भाड़ावास गेट पुलिस चौकी में शिकायत भी दर्ज कराई गई। अधिकारियों के हस्ताक्षेप के बाद नगर परिषद में कर्मचारियों ने दिया धरना तो समाप्त कर दिया था, लेकिन पुलिस में दी गई शिकायत पर अभी कोई समाधान नहीं निकला है।
सबसे ज्यादा परेशानी की वजह NDC और प्रॉपर्टी ID है। इन दोनों ही काम को लेकर जमकर सिफारिश की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी और कर्मचारी खूब मनमर्जी कर रहे हैं। यहीं कारण है कि जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों के बीच आए दिन विवाद होना आम बात हो गई है। मार्च माह में ही रेवाड़ी नगर परिषद में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हो चुका है। इसकी गाज ईओ अभय सिंह यादव पर गिर चुकी है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पिछले कुछ दिनों से रेवाड़ी नगर परिषद आपसी कलह के कारण अखाड़ा बन चुकी है। अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सोमवार को करीब पंद्रह पार्षदों के पति या फिर प्रतिनिधि रामपुरा हाउस स्थित केन्द्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह के PA रवि यादव से मिलने पहुंचे और अपना दुखड़ा सुनाया। करीब एक घंटा बैठक चली। सूत्रों के अनुसार, PA के सामने पार्षद पति और उनके बेटों ने नगर परिषद के कर्मचारियों पर उनकी सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। चार दिन पहले एक क्लर्क और पार्षद पति के बीच हुआ विवाद भी रखा गया। यह सभी लोग नगर परिषद के वाइस चेयरमैन श्याम सुंदर चुघ के नेतृत्व में मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान चेयरमैन पूनम यादव नहीं पहुंची। दरअसल, नगर परिषद में अधिकारियों और पार्षदों के बीच अकसर तकरार होती रहती है। पिछले कुछ माह से तो स्थिति बिल्कुल बिगड़ी हुई है। पार्षद अधिकारियों पर लगातार अनदेखी के आरोप लगा रहे तो कर्मचारी कई पार्षद और उनके पतियों पर भी आरोप लगा चुके हैं। चार दिन पहले तो क्लर्क रामरतन और पार्षद पति दीपक सैनी के बीच तीखी बहस हुई थी। क्लर्क ने पार्षद पति पर महिला कर्मचारियों के सामने गाली-गलौज तक करने का आरोप लगाया था। पार्षद पति ने भी क्लर्क पर कई तरह के आरोप लगाए थे। दोनों तरफ से भाड़ावास गेट पुलिस चौकी में शिकायत भी दर्ज कराई गई। अधिकारियों के हस्ताक्षेप के बाद नगर परिषद में कर्मचारियों ने दिया धरना तो समाप्त कर दिया था, लेकिन पुलिस में दी गई शिकायत पर अभी कोई समाधान नहीं निकला है। सबसे ज्यादा परेशानी की वजह NDC और प्रॉपर्टी ID है। इन दोनों ही काम को लेकर जमकर सिफारिश की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी और कर्मचारी खूब मनमर्जी कर रहे हैं। यहीं कारण है कि जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों के बीच आए दिन विवाद होना आम बात हो गई है। मार्च माह में ही रेवाड़ी नगर परिषद में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हो चुका है। इसकी गाज ईओ अभय सिंह यादव पर गिर चुकी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यह एक चलन सा बनता जा रहा है कि ऑस्कर समेत बाफ्टा जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार अब राजनीतिक संदेश देने के मंच भी बनते जा रहे हैं. इस बार 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता जे फीनिक्स (JoaQuin Phoenix) ने बाफ्टा (BAFTA) पुरस्कार देने वाली संस्था ब्रिटिश अकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन पर ही नस्लवाद का आरोप जड़ दिया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न श्रेणियों में नामांकन के दौरान 'लोगों का रंग' देखा जा रहा है. ऐसे में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब जीतने के बावजूद वह ट्रॉफी जीतने में 'दुविधाग्रस्त' महसूस कर रहा हूं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी तरह तमाम अन्य प्रतिभाशाली कलाकार इस मंच तक पहुंचने में नाकाम रहे. सिर्फ एक खास नस्ल का होने के कारण.
ब्रिटिश फिल्मकार सैम मैंडेस की युद्ध आधारित ड्रामा फिल्म '1971' बाफ्टा 2020 में भले ही सात पुरस्कार अपने नाम करने में कामयाब रही, लेकिन अभिनेता जे फीनिक्स का दिल जीतने में नाकाम रही. बाफ्टा में फिल्म 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले फीनिक्स ने फिल्म '1971' के बोलबाले को 'सुनियोजित नस्लवाद' करार दिया. फीनिक्स ने फिल्म जगत पर अश्वेत लोगों का स्वागत ना करने का आरोप लगाया. गौरतलब है कि 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की ट्रॉफी अगर फिनिक्स को मिली है तो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब हॉलीवुड अभिनेत्री रेनी ज़ेल्वेगर ने दिवंगत फिल्म निर्देशक 'जूडी गारलैंड' की बायोपिक 'जूडी' के लिए जीता है.
गौरतलब है कि 'ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन' (बाफ्टा) और 'एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज' (ऑस्कर) के नामांकन की घोषणा के बाद से ही उसके नामांकन में श्वेतों के बोलबाले और विविधता की कमी को लेकर भारी आलोचना की जा रही थी. अभिनय संबंधी श्रेणियों में अश्वेत लोगों के नामांकन की कमी और निर्देशन की श्रेणी में एक भी महिला के ना होने की भी आलोचना की गई.
फीनिक्स ने 'रॉयल एल्बर्ट हॉल' के मंच से कहा, 'चाहते हैं कि उन्हें उनके काम के लिए पहचाना, सराहा और सम्मान दिया जाए. यह खुद अपनी निंदा करने जैसा नहीं है क्योंकि मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है कि मैं भी इस समस्या का हिस्सा हूं. मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ नहीं किया कि मैं जिस सेट पर काम कर रहा हूं वह समावेशी हो... बल्कि मेरा मानना है कि इन सेट का सभी संस्कृतियों का स्वागत करने वाला होना चाहिए. हमें सुनियोजित नस्लवाद समझने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है.'
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यह एक चलन सा बनता जा रहा है कि ऑस्कर समेत बाफ्टा जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार अब राजनीतिक संदेश देने के मंच भी बनते जा रहे हैं. इस बार 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता जे फीनिक्स ने बाफ्टा पुरस्कार देने वाली संस्था ब्रिटिश अकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन पर ही नस्लवाद का आरोप जड़ दिया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न श्रेणियों में नामांकन के दौरान 'लोगों का रंग' देखा जा रहा है. ऐसे में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब जीतने के बावजूद वह ट्रॉफी जीतने में 'दुविधाग्रस्त' महसूस कर रहा हूं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी तरह तमाम अन्य प्रतिभाशाली कलाकार इस मंच तक पहुंचने में नाकाम रहे. सिर्फ एक खास नस्ल का होने के कारण. ब्रिटिश फिल्मकार सैम मैंडेस की युद्ध आधारित ड्रामा फिल्म 'एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर' बाफ्टा दो हज़ार बीस में भले ही सात पुरस्कार अपने नाम करने में कामयाब रही, लेकिन अभिनेता जे फीनिक्स का दिल जीतने में नाकाम रही. बाफ्टा में फिल्म 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले फीनिक्स ने फिल्म 'एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर' के बोलबाले को 'सुनियोजित नस्लवाद' करार दिया. फीनिक्स ने फिल्म जगत पर अश्वेत लोगों का स्वागत ना करने का आरोप लगाया. गौरतलब है कि 'जोकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की ट्रॉफी अगर फिनिक्स को मिली है तो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब हॉलीवुड अभिनेत्री रेनी ज़ेल्वेगर ने दिवंगत फिल्म निर्देशक 'जूडी गारलैंड' की बायोपिक 'जूडी' के लिए जीता है. गौरतलब है कि 'ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन' और 'एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज' के नामांकन की घोषणा के बाद से ही उसके नामांकन में श्वेतों के बोलबाले और विविधता की कमी को लेकर भारी आलोचना की जा रही थी. अभिनय संबंधी श्रेणियों में अश्वेत लोगों के नामांकन की कमी और निर्देशन की श्रेणी में एक भी महिला के ना होने की भी आलोचना की गई. फीनिक्स ने 'रॉयल एल्बर्ट हॉल' के मंच से कहा, 'चाहते हैं कि उन्हें उनके काम के लिए पहचाना, सराहा और सम्मान दिया जाए. यह खुद अपनी निंदा करने जैसा नहीं है क्योंकि मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है कि मैं भी इस समस्या का हिस्सा हूं. मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ नहीं किया कि मैं जिस सेट पर काम कर रहा हूं वह समावेशी हो... बल्कि मेरा मानना है कि इन सेट का सभी संस्कृतियों का स्वागत करने वाला होना चाहिए. हमें सुनियोजित नस्लवाद समझने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है.'
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सहसवान, संवाददाता।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता हाफिज इरफान के नेतृत्व में एक बेदारी ए मिल्लत कान्फ्रेंस, शैक्षिक जागरूकता एवं नशा विरोधी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि बतौर सेक्रेटरी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी ने संबोधित किया। कार्यक्रम में नीट परीक्षा पास करने वालों को भी सम्मानित किया गया।
महफिल का आगाज कुरआने करीम की तिलावत के साथ हजरत कारी फरीदुजज्मा ने किया। कुराने पाक की तिलावत के बाद हम्द पाक हाफिज जाहिर अली ने और नाते रसूल सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम कारी राहत अली ने पढ़ी। जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र यादव ने मौलाना यासीन अली उस्मानी का चांदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। हाफिज इरफान ने चेयरमैन मीर हादी अली उर्फ बाबर मियां और उनके भाई मीर हैदर अली के हाथों से मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी को मौलाना कुतुबुद्दीन ब्रह्मचारी अवार्ड पेश किया। हाफिज इरफान ने हजरत कुतुबुद्दीन ब्रह्मचारी रहमतुल्लाह अलेह कि मुक्तसर सवाने हयात बयान करते हुए कहा के 1350 ई. सहसवान में विसाल फरमाया।
मजार काजी मोहल्ला जामा मस्जिद के बराबर है। मौलाना डॉ. यासीन उस्मानी ने कहा कि हमें हर सूरत बेदार रहने की जरूरत है। नौजवानों में नशे की लत देखने को मिल रही है, जो कि गलत है। नशा बर्बादी की जड़ है। जो लोग नशा करते हैं, वह छोड़ दें। मीर हादी अली बाबर मियां ने कहा कि बच्चों को दीनी तालीम हासिल कराएं। डॉ. शकील अंसारी ने कहा कि खानकाओं ने हमें अदब तहजीब मोहब्बत और भाईचारे का दरस दिया, हमें खानकाओं से सबक हासिल करना चाहिए। मोहम्मद इस्लाम, कारी तौसीफ, मुशर्रफ, अंसार हुसैन, कमर जमशेद, हाफिज रफीक, हमीदुद्दीन, इरफान, अजमल हुसैन, अब्दुल हादी, मुनाजिर हुसैन, इल्यास राजू, मुशाहिद हुसैन, मुकर्रम अंसारी, आरिफ, अनीसुर्रहमान, असलम, मुशर्रफ, शाहिद, मौलाना कलीम, मुशाहिद, कलीम, दुर्वेश यादव, बिल्ला यादव, गुलफाम यादव, मनोज माहेश्वरी, शैलेंद्र माहेश्वरी, राजीव मौजूद थे।
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सहसवान, संवाददाता। पूर्व जिला पंचायत सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता हाफिज इरफान के नेतृत्व में एक बेदारी ए मिल्लत कान्फ्रेंस, शैक्षिक जागरूकता एवं नशा विरोधी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि बतौर सेक्रेटरी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी ने संबोधित किया। कार्यक्रम में नीट परीक्षा पास करने वालों को भी सम्मानित किया गया। महफिल का आगाज कुरआने करीम की तिलावत के साथ हजरत कारी फरीदुजज्मा ने किया। कुराने पाक की तिलावत के बाद हम्द पाक हाफिज जाहिर अली ने और नाते रसूल सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम कारी राहत अली ने पढ़ी। जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र यादव ने मौलाना यासीन अली उस्मानी का चांदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। हाफिज इरफान ने चेयरमैन मीर हादी अली उर्फ बाबर मियां और उनके भाई मीर हैदर अली के हाथों से मौलाना डॉ. यासीन अली उस्मानी को मौलाना कुतुबुद्दीन ब्रह्मचारी अवार्ड पेश किया। हाफिज इरफान ने हजरत कुतुबुद्दीन ब्रह्मचारी रहमतुल्लाह अलेह कि मुक्तसर सवाने हयात बयान करते हुए कहा के एक हज़ार तीन सौ पचास ई. सहसवान में विसाल फरमाया। मजार काजी मोहल्ला जामा मस्जिद के बराबर है। मौलाना डॉ. यासीन उस्मानी ने कहा कि हमें हर सूरत बेदार रहने की जरूरत है। नौजवानों में नशे की लत देखने को मिल रही है, जो कि गलत है। नशा बर्बादी की जड़ है। जो लोग नशा करते हैं, वह छोड़ दें। मीर हादी अली बाबर मियां ने कहा कि बच्चों को दीनी तालीम हासिल कराएं। डॉ. शकील अंसारी ने कहा कि खानकाओं ने हमें अदब तहजीब मोहब्बत और भाईचारे का दरस दिया, हमें खानकाओं से सबक हासिल करना चाहिए। मोहम्मद इस्लाम, कारी तौसीफ, मुशर्रफ, अंसार हुसैन, कमर जमशेद, हाफिज रफीक, हमीदुद्दीन, इरफान, अजमल हुसैन, अब्दुल हादी, मुनाजिर हुसैन, इल्यास राजू, मुशाहिद हुसैन, मुकर्रम अंसारी, आरिफ, अनीसुर्रहमान, असलम, मुशर्रफ, शाहिद, मौलाना कलीम, मुशाहिद, कलीम, दुर्वेश यादव, बिल्ला यादव, गुलफाम यादव, मनोज माहेश्वरी, शैलेंद्र माहेश्वरी, राजीव मौजूद थे।
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"पेशेवर या अन्य विशेष प्रशिक्षण और आधिकारिक स्थिति की परवाह किए बिना, आवश्यक रक्षा का अधिकार सभी व्यक्तियों द्वारा समान रूप से आनंद लिया जाता है। यह अधिकार एक व्यक्ति का है, भले ही सामाजिक रूप से खतरनाक अतिक्रमण से बचने या अन्य व्यक्तियों या अधिकारियों से मदद लेने का अवसर हो। रूसी संघ का आपराधिक कोड। अनुच्छेद 37, अनुच्छेद 2। "
"डर निर्दयता है। वह दिखाता है कि यह या वह व्यक्ति क्या हैः वह नहीं जो वह चाहता है, लेकिन वह वास्तव में क्या है। "
जनवरी के 2010 में, रूस में 345,6 हजार अपराध दर्ज किए गए थे। सभी रिकॉर्ड किए गए अपराधों में से लगभग आधे अन्य द्वारा चोरी किए गए हैंः चोरी - 156,9 हजार, डकैती - 45,3 हजार, डकैती - 6,1 हजार। हर दूसरी चोरी, हर सत्रहवीं डकैती और हर तेरहवीं डकैती घर में अवैध प्रवेश से जुड़ी थी। परिसर या अन्य भंडारण।
यहाँ इस तरह के एक दिलचस्प आंकड़ा है। इसका मतलब यह है कि आज रूस में कोई भी आपराधिक अपराधी से सुरक्षित नहीं हैः न तो मंत्री, न छात्र, न ही बाजार में कोई विक्रेता। जैसा कि आप जानते हैं कि डूबते हुए लोगों का उद्धार खुद डूबते हुए लोगों का काम है। तो, हम खुद को बांधे रखेंगे।
पहला और सबसे महत्वपूर्ण हथियार आप हैं। यदि आप आत्मरक्षा के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार हैं, पर्याप्त प्रशिक्षित हैं, और आपके पास हाथ से निपटने के कौशल हैं, तो आपको हथियारों की आवश्यकता नहीं हो सकती है। अन्यथा, अपने बटुए की क्षमताओं का मूल्यांकन करें और निम्न सूची का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें।
हाथापाई का मुकाबला करने की प्रभावशीलता के बावजूद, उन्हें सिनेमा स्कम के लिए छोड़ देना बेहतर है। यदि आप अपनी जेब में इस तरह की चीज को ले जाने का फैसला करते हैं, तो पुलिस के साथ परेशानी के लिए तैयार रहें। हमारे देश में शॉक-क्रशिंग कार्रवाई के हाथापाई हथियार संचलन और उपयोग के लिए निषिद्ध हैं।
उसी कारण से, आप, दुर्भाग्य से, एक और बहुत ही दिलचस्प हथियार का उपयोग करने में सक्षम नहीं होंगे, अर्थात्, एक दूरबीन बैटन। एक रेडियो रिसीवर से एंटीना के सिद्धांत से जुड़े तीन या चार उंगली-मोटी स्टील खंडों की कल्पना करें। एक धातु की गेंद आमतौर पर टिप पर स्थित होती है। जब मुड़ा हुआ है, तो ऐसा बैटन फाउंटेन पेन से अधिक लंबा नहीं है। और बैकस्विंग पर, यह तुरंत सामने आता है और कुशल हाथों में एक बहुत ही दुर्जेय हथियार बन जाता है। यह आत्मरक्षा का एक बहुत अच्छा साधन है, लेकिन एक सम्मानजनक नागरिक के पास नहीं है। लेकिन आप एक टेलीस्कोपिक बैटन से लैस अपराधी में भाग सकते हैं। यह हमारे जीवन का विरोधाभास है।
एक और मुश्किल बात है, लेकिन इसके लिए एक विशेष दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 1977 वर्ष में, अपनी खुद की कराटे शैली के संस्थापक, मास्टर ताकायुकी कुबोता ने आत्म-रक्षा का एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी साधन का आविष्कार किया।
कुबोटन, या जैसा कि इसे "छोटा बैटन" भी कहा जाता है, 150 मिमी लंबे और 15-20 मिमी व्यास तक की प्लास्टिक, धातु या रबर की एक छोटी छड़ होती है, जिसकी सतह पर उंगलियों के लिए रिंग प्रोट्रूशियन्स या गटर होते हैं। यह हड़ताली बिंदुओं और कैप्चरिंग के लिए अभिप्रेत है। कुबोटन को अक्सर किचेन के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस तरह के संयोजन में, कुबोटन का उपयोग बहुत संवेदनशील बोनर्स को लागू करने के लिए किया जा सकता है, और कुंजी के साथ - दुश्मन के शरीर के खुले हिस्सों पर हमलों को काटने के लिए।
हमारे सहित, कुछ देशों में, कानून प्रवर्तन अधिकारी कुबोटन पर तिरछी नज़र डालते हैं, लगभग इसे चाकूओं से लैस करते हैं। लेकिन ऐसा कोई भी मार्कर खोजें जो पर्याप्त मोटा हो या एक फाउंटेन पेन - यहाँ आपका "कुबोटन" है। चाल यह है कि, पहली नज़र में, पूरी तरह से शांतिपूर्ण चीजें एक कुबोटन के रूप में कार्य कर सकती हैं।
उदाहरण के लिए, विश्व प्रसिद्ध कंपनी मैगलाइट से एक मिनीमैग टॉर्च। इसमें एक मजबूत एल्यूमीनियम का मामला है और, अपनी प्रत्यक्ष जिम्मेदारियों के अलावा, एक सड़क संघर्ष में एक अच्छी मदद हो सकती है। इसे खरीदना किसी भी बड़े सुपरमार्केट या विशेष दुकानों में कोई समस्या नहीं है। 600-700 रूबल के क्षेत्र में लागत।
वैसे, मैगलाइट डी-सीरीज़ और सी-सीरीज़ के फ्लैशलाइट्स पर ध्यान दें - इनका उपयोग बैटन के बजाय अमेरिकी पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
यदि आप एक एस्थेट हैं और एक वास्तविक ब्रांडेड कुबोटन चाहते हैं, लेकिन कानून के साथ समस्याओं की तलाश नहीं कर रहे हैं, तो स्ट्रीमलाइट ने विशेष रूप से आपके लिए एक उपयोगी चीज जारी की है, या, जैसा कि कहने के लिए प्रथागत है, बैटोनलाइट नामक एक उपकरण।
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"पेशेवर या अन्य विशेष प्रशिक्षण और आधिकारिक स्थिति की परवाह किए बिना, आवश्यक रक्षा का अधिकार सभी व्यक्तियों द्वारा समान रूप से आनंद लिया जाता है। यह अधिकार एक व्यक्ति का है, भले ही सामाजिक रूप से खतरनाक अतिक्रमण से बचने या अन्य व्यक्तियों या अधिकारियों से मदद लेने का अवसर हो। रूसी संघ का आपराधिक कोड। अनुच्छेद सैंतीस, अनुच्छेद दो। " "डर निर्दयता है। वह दिखाता है कि यह या वह व्यक्ति क्या हैः वह नहीं जो वह चाहता है, लेकिन वह वास्तव में क्या है। " जनवरी के दो हज़ार दस में, रूस में तीन सौ पैंतालीस,छः हजार अपराध दर्ज किए गए थे। सभी रिकॉर्ड किए गए अपराधों में से लगभग आधे अन्य द्वारा चोरी किए गए हैंः चोरी - एक सौ छप्पन,नौ हजार, डकैती - पैंतालीस,तीन हजार, डकैती - छः,एक हजार। हर दूसरी चोरी, हर सत्रहवीं डकैती और हर तेरहवीं डकैती घर में अवैध प्रवेश से जुड़ी थी। परिसर या अन्य भंडारण। यहाँ इस तरह के एक दिलचस्प आंकड़ा है। इसका मतलब यह है कि आज रूस में कोई भी आपराधिक अपराधी से सुरक्षित नहीं हैः न तो मंत्री, न छात्र, न ही बाजार में कोई विक्रेता। जैसा कि आप जानते हैं कि डूबते हुए लोगों का उद्धार खुद डूबते हुए लोगों का काम है। तो, हम खुद को बांधे रखेंगे। पहला और सबसे महत्वपूर्ण हथियार आप हैं। यदि आप आत्मरक्षा के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार हैं, पर्याप्त प्रशिक्षित हैं, और आपके पास हाथ से निपटने के कौशल हैं, तो आपको हथियारों की आवश्यकता नहीं हो सकती है। अन्यथा, अपने बटुए की क्षमताओं का मूल्यांकन करें और निम्न सूची का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। हाथापाई का मुकाबला करने की प्रभावशीलता के बावजूद, उन्हें सिनेमा स्कम के लिए छोड़ देना बेहतर है। यदि आप अपनी जेब में इस तरह की चीज को ले जाने का फैसला करते हैं, तो पुलिस के साथ परेशानी के लिए तैयार रहें। हमारे देश में शॉक-क्रशिंग कार्रवाई के हाथापाई हथियार संचलन और उपयोग के लिए निषिद्ध हैं। उसी कारण से, आप, दुर्भाग्य से, एक और बहुत ही दिलचस्प हथियार का उपयोग करने में सक्षम नहीं होंगे, अर्थात्, एक दूरबीन बैटन। एक रेडियो रिसीवर से एंटीना के सिद्धांत से जुड़े तीन या चार उंगली-मोटी स्टील खंडों की कल्पना करें। एक धातु की गेंद आमतौर पर टिप पर स्थित होती है। जब मुड़ा हुआ है, तो ऐसा बैटन फाउंटेन पेन से अधिक लंबा नहीं है। और बैकस्विंग पर, यह तुरंत सामने आता है और कुशल हाथों में एक बहुत ही दुर्जेय हथियार बन जाता है। यह आत्मरक्षा का एक बहुत अच्छा साधन है, लेकिन एक सम्मानजनक नागरिक के पास नहीं है। लेकिन आप एक टेलीस्कोपिक बैटन से लैस अपराधी में भाग सकते हैं। यह हमारे जीवन का विरोधाभास है। एक और मुश्किल बात है, लेकिन इसके लिए एक विशेष दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर वर्ष में, अपनी खुद की कराटे शैली के संस्थापक, मास्टर ताकायुकी कुबोता ने आत्म-रक्षा का एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी साधन का आविष्कार किया। कुबोटन, या जैसा कि इसे "छोटा बैटन" भी कहा जाता है, एक सौ पचास मिमी लंबे और पंद्रह-बीस मिमी व्यास तक की प्लास्टिक, धातु या रबर की एक छोटी छड़ होती है, जिसकी सतह पर उंगलियों के लिए रिंग प्रोट्रूशियन्स या गटर होते हैं। यह हड़ताली बिंदुओं और कैप्चरिंग के लिए अभिप्रेत है। कुबोटन को अक्सर किचेन के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस तरह के संयोजन में, कुबोटन का उपयोग बहुत संवेदनशील बोनर्स को लागू करने के लिए किया जा सकता है, और कुंजी के साथ - दुश्मन के शरीर के खुले हिस्सों पर हमलों को काटने के लिए। हमारे सहित, कुछ देशों में, कानून प्रवर्तन अधिकारी कुबोटन पर तिरछी नज़र डालते हैं, लगभग इसे चाकूओं से लैस करते हैं। लेकिन ऐसा कोई भी मार्कर खोजें जो पर्याप्त मोटा हो या एक फाउंटेन पेन - यहाँ आपका "कुबोटन" है। चाल यह है कि, पहली नज़र में, पूरी तरह से शांतिपूर्ण चीजें एक कुबोटन के रूप में कार्य कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, विश्व प्रसिद्ध कंपनी मैगलाइट से एक मिनीमैग टॉर्च। इसमें एक मजबूत एल्यूमीनियम का मामला है और, अपनी प्रत्यक्ष जिम्मेदारियों के अलावा, एक सड़क संघर्ष में एक अच्छी मदद हो सकती है। इसे खरीदना किसी भी बड़े सुपरमार्केट या विशेष दुकानों में कोई समस्या नहीं है। छः सौ-सात सौ रूबल के क्षेत्र में लागत। वैसे, मैगलाइट डी-सीरीज़ और सी-सीरीज़ के फ्लैशलाइट्स पर ध्यान दें - इनका उपयोग बैटन के बजाय अमेरिकी पुलिस अधिकारियों द्वारा किया जाता है। यदि आप एक एस्थेट हैं और एक वास्तविक ब्रांडेड कुबोटन चाहते हैं, लेकिन कानून के साथ समस्याओं की तलाश नहीं कर रहे हैं, तो स्ट्रीमलाइट ने विशेष रूप से आपके लिए एक उपयोगी चीज जारी की है, या, जैसा कि कहने के लिए प्रथागत है, बैटोनलाइट नामक एक उपकरण।
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एनबीटी न्यूज, फरीदाबाद : गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के नारों के बीच उद्योग मंत्री विपुल गोयल व सैंकड़ों की संख्या में भक्तों ने सोमवार को गणपति बप्पा को विदाई दी। उद्योग मंत्री के सेक्टर- 16 स्थित घर पर 5 दिन तक चले गणपति उत्सव में अंतिम दिन कई राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी विपुल गोयल के घर गणपति उत्सव में पहुंची और उन्होंने विदाई से पहले गणपति की आरती की। स्मृति ईरानी ने सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की। इसके अलावा डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और हरियाणा सरकार में मंत्री बनवारी लाल और विधायक सीमा त्रिखा भी गणपति बप्पा के दर्शन करने पहुंचे। विसर्जन से पहले गणपति की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमे भक्तों ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया और ढोल-नगाड़ों पर श्रद्धालुओं ने डांस किया।
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एनबीटी न्यूज, फरीदाबाद : गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के नारों के बीच उद्योग मंत्री विपुल गोयल व सैंकड़ों की संख्या में भक्तों ने सोमवार को गणपति बप्पा को विदाई दी। उद्योग मंत्री के सेक्टर- सोलह स्थित घर पर पाँच दिन तक चले गणपति उत्सव में अंतिम दिन कई राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी विपुल गोयल के घर गणपति उत्सव में पहुंची और उन्होंने विदाई से पहले गणपति की आरती की। स्मृति ईरानी ने सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की। इसके अलावा डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और हरियाणा सरकार में मंत्री बनवारी लाल और विधायक सीमा त्रिखा भी गणपति बप्पा के दर्शन करने पहुंचे। विसर्जन से पहले गणपति की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमे भक्तों ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया और ढोल-नगाड़ों पर श्रद्धालुओं ने डांस किया।
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मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की सगाई आनंद पीरामल से हो गई है.
इटली के लेक कोमो से इंगेजमेंट का पहला वीडियो सामने आ गया है. वीडियो में कई बड़ी हस्तियां नजर आ रही है, साथ ही आप यह भी देख सकते हैं कि ईशा और आनंद कितने खुश दिखाई दे रहे हैं.
वीडियो में आप देख सकते हैं कि इटली के लेक कोमो जैसे खूबसूरत जगह पर दोनों कपल के परिवार मौजूद हैं. नीता अंबानी भी नीता अंबानी भी दिखाई दे रही हैं. नीता के अलावा कोकिला बेन अंबानी भी दिखाई दे रही हैं. बॉलीवुड से सोनम कपूर, आनंद आहूजा आनंद आहूजा, अनिल कपूर मनीष मल्होत्रा, प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस भी मौजूद हैं.
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मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की सगाई आनंद पीरामल से हो गई है. इटली के लेक कोमो से इंगेजमेंट का पहला वीडियो सामने आ गया है. वीडियो में कई बड़ी हस्तियां नजर आ रही है, साथ ही आप यह भी देख सकते हैं कि ईशा और आनंद कितने खुश दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में आप देख सकते हैं कि इटली के लेक कोमो जैसे खूबसूरत जगह पर दोनों कपल के परिवार मौजूद हैं. नीता अंबानी भी नीता अंबानी भी दिखाई दे रही हैं. नीता के अलावा कोकिला बेन अंबानी भी दिखाई दे रही हैं. बॉलीवुड से सोनम कपूर, आनंद आहूजा आनंद आहूजा, अनिल कपूर मनीष मल्होत्रा, प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस भी मौजूद हैं.
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अपने बेहतरीन अभिनय के जरिए लोगों के बीच अपनी खास पहचान बना चुके अभिनेता राजकुमार राव इन दिनों बेहद उत्साहित है. बता दे कि, राजकुमार को हाल ही में हुए 63वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में दो फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से नवाजा गया. राजकुमार को फिल्म ट्रैप्ड के लिए क्रिटिक अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर (मेल) का और फिल्म 'बरेली की बर्फी' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला.
गौरतलब है कि, पहले भी राजकुमार की फिल्म 'न्यूटन' ऑस्कर की टॉप लिस्ट में शामिल हो चुकी है और फिल्म को बेस्ट क्रिटिक फिल्म का अवॉर्ड मिला. जिसके चलते राजकुमार ने ट्विटर के जरिये अपनी ख़ुशी जाहिर की है. राजकुमार ने एक पिक्चर पोस्ट की जिसमें वो उनके दोनों अवॉर्ड्स के साथ नज़र आ रहे हैं. तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि, "आपके प्यार, प्रोत्साहन और साथ के लिए सभी को धन्यवाद, मां आपको और आप सभी लोगों का शुक्रिया, आपका प्यार मुझे आगे बढ़ाता है और मुझे कठिन काम करने के लिए प्रेरणा देता है. "
बता दे कि, राजकुमार ने अपने करियर में सिटिलाइट, डॉली की डोली, हमारी अधूरी कहानी, न्यूटन, शादी में जरूर आना, जैसे कई सुपरहिट फिल्मों के जरिये अपने बेहतरीन अभिनय का लोहा मनवा लिया है. राजकुमार फ़िल्मी जगत में अपनी एक अलग पहचान रखते है. राजकुमार ने अपने करियर की शुरूआत फिल्म 'लव, सेक्स और धोखा' की थी.
'पैडमैन' और 'अय्यारी' से डरकर भागे 'सोनू, टीटू और स्वीटी'
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अपने बेहतरीन अभिनय के जरिए लोगों के बीच अपनी खास पहचान बना चुके अभिनेता राजकुमार राव इन दिनों बेहद उत्साहित है. बता दे कि, राजकुमार को हाल ही में हुए तिरेसठवें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में दो फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से नवाजा गया. राजकुमार को फिल्म ट्रैप्ड के लिए क्रिटिक अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर का और फिल्म 'बरेली की बर्फी' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला. गौरतलब है कि, पहले भी राजकुमार की फिल्म 'न्यूटन' ऑस्कर की टॉप लिस्ट में शामिल हो चुकी है और फिल्म को बेस्ट क्रिटिक फिल्म का अवॉर्ड मिला. जिसके चलते राजकुमार ने ट्विटर के जरिये अपनी ख़ुशी जाहिर की है. राजकुमार ने एक पिक्चर पोस्ट की जिसमें वो उनके दोनों अवॉर्ड्स के साथ नज़र आ रहे हैं. तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि, "आपके प्यार, प्रोत्साहन और साथ के लिए सभी को धन्यवाद, मां आपको और आप सभी लोगों का शुक्रिया, आपका प्यार मुझे आगे बढ़ाता है और मुझे कठिन काम करने के लिए प्रेरणा देता है. " बता दे कि, राजकुमार ने अपने करियर में सिटिलाइट, डॉली की डोली, हमारी अधूरी कहानी, न्यूटन, शादी में जरूर आना, जैसे कई सुपरहिट फिल्मों के जरिये अपने बेहतरीन अभिनय का लोहा मनवा लिया है. राजकुमार फ़िल्मी जगत में अपनी एक अलग पहचान रखते है. राजकुमार ने अपने करियर की शुरूआत फिल्म 'लव, सेक्स और धोखा' की थी. 'पैडमैन' और 'अय्यारी' से डरकर भागे 'सोनू, टीटू और स्वीटी'
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बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने अपने बर्थडे के अवसर पर निर्माता जैकी भगनानी के साथ अपने रिलेशनशिप पर मुहर लगा दी है। अपने 31वें जन्मदिन पर रकुल प्रीत ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है। जैकी ने भी अपने रिश्ते को लेकर एक पोस्ट किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि रकुल उनकी पूरी दुनिया हैं।
रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी के रिलेशनशिप पर बॉलीवुड के कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। आयुष्मान खुराना, सोफी चौधरी, राशि खन्ना, टाइगर श्रॉफ, जैकलिन फर्नांडीज आदि एक्टर्स ने दोनों को रिलेशनशिप के लिए शुभकामनाएं और बधाइयां दी हैं। रकुल प्रीत सिंह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर ज्यादा बात नहीं करती हैं। कई बार उनसे उनके अफेयर को लेकर सवाल किए गए लेकिन उन्होंने कभी इस पर बात नहीं की।
रकुल प्रीत सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। इसके बाद उन्होंने कन्नड़ और तमिल फिल्मों में काम किया। साल 2014 में फिल्म यारियां से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया। रकुल की आने वाली कुछ फ़िल्में हैं- डॉक्टर जी, मेडे, अटैक, इंडियन 2।
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बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने अपने बर्थडे के अवसर पर निर्माता जैकी भगनानी के साथ अपने रिलेशनशिप पर मुहर लगा दी है। अपने इकतीसवें जन्मदिन पर रकुल प्रीत ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है। जैकी ने भी अपने रिश्ते को लेकर एक पोस्ट किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि रकुल उनकी पूरी दुनिया हैं। रकुल प्रीत सिंह और जैकी भगनानी के रिलेशनशिप पर बॉलीवुड के कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। आयुष्मान खुराना, सोफी चौधरी, राशि खन्ना, टाइगर श्रॉफ, जैकलिन फर्नांडीज आदि एक्टर्स ने दोनों को रिलेशनशिप के लिए शुभकामनाएं और बधाइयां दी हैं। रकुल प्रीत सिंह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर ज्यादा बात नहीं करती हैं। कई बार उनसे उनके अफेयर को लेकर सवाल किए गए लेकिन उन्होंने कभी इस पर बात नहीं की। रकुल प्रीत सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। इसके बाद उन्होंने कन्नड़ और तमिल फिल्मों में काम किया। साल दो हज़ार चौदह में फिल्म यारियां से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया। रकुल की आने वाली कुछ फ़िल्में हैं- डॉक्टर जी, मेडे, अटैक, इंडियन दो।
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ऊर्ध्व दिशा को छोड़कर शेष नौ दिशाओं में घनोदधि वातवलय से लगी हुई हैं, परन्तु प्राठवीं पृथ्वी दशों दिशाओं में ही वातवलय को छूती है ।२४। सौधर्म युगल के विमान घनस्वरूप जल के ऊपर तथा माहेन्द्र व सनत्कुमार कल्प के विमान पवन के ऊपर स्थित हैं । २०६। ब्रह्मादि चार कल्प जल व वायु दोनों के ऊपर, तथा प्रान्त प्राणत आदि शेष विमान शुद्ध आकाश तल में स्थित हैं । २०७
४. वातवलयों का विस्तार
ति. प./१/२७०-२८१ जोयणवीससहस्सां बहलंतम्मारुदाण पत्तेक्कं । श्रट्ठाखिदीणं हेलो तले उवरि जाव इगिरज्जू । ।२७०। सगपण चउजोयणयं सत्तमणारयम्मि पुहविपणधीए । पंचचउतियामाणं तिरीयखेत्तस्स पणिधीए । २७१। सगपंचचउसमाणा पणिधीए होति बम्हकप्पस्स । पणचउतिय जोयणया उर्वरिमलीयस्स यंतम्मि ।२७२ । कोसदु गमेक्ककोसं किंचूणेक्कं च लोयसिह्रम्मि। ऊणपमाणं दंडा चउस्सया पंचवोस जुदा ।
तीसं इगिदालदलं कोसा तियभाजिदा य उणवणया । सत्तमखिदिपणिधीए वम्हजुदे बाउबहुलत्तं ।२८० । दो छब्बास भागवभहियो कोसो कमेण बाउघणं । लोयउवरिम्मि एवं लोय विभायम्मि पण्णतं । २८१ । १ = दृष्टि न. १ आठ पृथ्वियों के
इसी क्षेत्र में लघु का घनफल तीन से गुणित और पैंतीस से भाजित लोक प्रमाण तथा यवक्षेत्र का घनफल चौदह से भाजित लोक प्रमाण है।
रा. अधोलोक संबंधी कुल दूष्य क्षेत्र का घनफल । एक गिरिकटक क्षेत्र का घनफल चौरासी से भाजित लोक प्रमाण है । इसको अड़तालीस से गुणा करने पर कूल गिरिकटक क्षेत्र का घनफल होता है । ३४३÷८४४१३ एक गिरिकटक का घ. फ. ४ ६३ X ४५ = १९६ सम्पूर्ण गिरि का
नांचे लोक के तल भाग से एक राजू की ऊँचाई तक इन वायु मण्डलों में से प्रत्येक की मोटाई २०,००० योजन प्रमाण है। ।२७०। सातवे नरक में पृथ्वियों के पार्श्व भाग में कम से इन तीनों वातवलयों की मोटाई ७, ५ औौर ४ तथा इसके ऊपर तियंग्लाक (मर्यलोक) के पार्श्वभाग में ५, ४ र ३ योजन प्रमाण है । २७१ । इसके आगे तीनों वायुओं की मोटाई ब्रह्म स्वर्ग के पार्श्व भाग में कम से ७, ५ र ४ योजन प्रमाग, तथा ऊर्ध्व लोक के अन्त में (पाश्र्व भाग में) ५, ४ र ३ योजन प्रमाण है । २७२ । लोक के शिखर पर (पाश्र्व भाग में) उक्त तीनों वातवलयों का वाहल्य क्रमशः २ कोस, १ कोस और कुछ कम १ कोस है । यहां कुछ कम का प्रमाण २४२५ धनुष समझना चाहिये । २७३ । ( शिखर पर प्रत्येक को मोटाई २०, ००० योजन है - दे. मोक्ष / १ / ७ ) (त्रि. सा. / १२४-१२६) १ दृष्टि नं० २ - सातवीं पृथ्वी और ब्रह्म युगल के पार्श्वभाग में तोनों वायुओं की मोटाई क्रम से ३०, ४१/२ और ४६/३ कोस हैं ।।२८०० लोक शिखर पर तीनों वातवलयों की मोटाई श्रम से १३, १३ ओर ११३ कोस प्रमाण है । ऐसा लोक विभाग में कहा गया है । २८१११ - विशेष दे. चित्र सं. १ ।
५. लोक के आठ रुचक प्रदेश
रा. वा./१/२०/१२/७६/१३ मेरुप्रतिष्ठावज्रडूयंपट लान्तरुचकस स्थिता अष्टावकाश प्रदेशलोकमध्यम् । == मेरु
इस प्रकार आठ भेद रूप इस अधोलोक का वर्णन किया जा चुका है। यहाँ से आठ प्रकार के ऊर्ध्वं लोक का निरूपण करते हैं ।
सामान्य ऊर्ध्वलोक का घनफल सात से भाजित ग्रोर तीन से गुणित लोक के प्रमाण अर्थात् एक सौ सैतालोस राजु मात्र है । ३४१ ÷ ७ ×३= १४७ रा० सामान्य ऊर्ध्व लोक का
घनफल ।
द्वितीय ऊर्ध्वायत चतुरस्र क्षेत्र में वेध और भुजा जग श्रेणी प्रमाण, तथा कोटि तीन राजुमात्र है । ७४७४ ३ = १४७ ऊ० आयत क्षेत्र का घनफल ।
तीसरे तिर्यगायत चतुरस्त्र क्षेत्र में भुजा और कोटि श्रेणी प्रमाण, तथा वेध तीन राजु मात्र है । बहुत से यवों युक्त मुरज क्षेत्र में वह क्षेत्र यव थोर मुरज रूप होता है। इसमें से यत्र
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ऊर्ध्व दिशा को छोड़कर शेष नौ दिशाओं में घनोदधि वातवलय से लगी हुई हैं, परन्तु प्राठवीं पृथ्वी दशों दिशाओं में ही वातवलय को छूती है ।चौबीस। सौधर्म युगल के विमान घनस्वरूप जल के ऊपर तथा माहेन्द्र व सनत्कुमार कल्प के विमान पवन के ऊपर स्थित हैं । दो सौ छः। ब्रह्मादि चार कल्प जल व वायु दोनों के ऊपर, तथा प्रान्त प्राणत आदि शेष विमान शुद्ध आकाश तल में स्थित हैं । दो सौ सात चार. वातवलयों का विस्तार ति. प./एक/दो सौ सत्तर-दो सौ इक्यासी जोयणवीससहस्सां बहलंतम्मारुदाण पत्तेक्कं । श्रट्ठाखिदीणं हेलो तले उवरि जाव इगिरज्जू । ।दो सौ सत्तर। सगपण चउजोयणयं सत्तमणारयम्मि पुहविपणधीए । पंचचउतियामाणं तिरीयखेत्तस्स पणिधीए । दो सौ इकहत्तर। सगपंचचउसमाणा पणिधीए होति बम्हकप्पस्स । पणचउतिय जोयणया उर्वरिमलीयस्स यंतम्मि ।दो सौ बहत्तर । कोसदु गमेक्ककोसं किंचूणेक्कं च लोयसिह्रम्मि। ऊणपमाणं दंडा चउस्सया पंचवोस जुदा । तीसं इगिदालदलं कोसा तियभाजिदा य उणवणया । सत्तमखिदिपणिधीए वम्हजुदे बाउबहुलत्तं ।दो सौ अस्सी । दो छब्बास भागवभहियो कोसो कमेण बाउघणं । लोयउवरिम्मि एवं लोय विभायम्मि पण्णतं । दो सौ इक्यासी । एक = दृष्टि न. एक आठ पृथ्वियों के इसी क्षेत्र में लघु का घनफल तीन से गुणित और पैंतीस से भाजित लोक प्रमाण तथा यवक्षेत्र का घनफल चौदह से भाजित लोक प्रमाण है। रा. अधोलोक संबंधी कुल दूष्य क्षेत्र का घनफल । एक गिरिकटक क्षेत्र का घनफल चौरासी से भाजित लोक प्रमाण है । इसको अड़तालीस से गुणा करने पर कूल गिरिकटक क्षेत्र का घनफल होता है । तीन सौ तैंतालीस÷चौरासी हज़ार चार सौ तेरह एक गिरिकटक का घ. फ. चार तिरेसठ X पैंतालीस = एक सौ छियानवे सम्पूर्ण गिरि का नांचे लोक के तल भाग से एक राजू की ऊँचाई तक इन वायु मण्डलों में से प्रत्येक की मोटाई बीस,शून्य योजन प्रमाण है। ।दो सौ सत्तर। सातवे नरक में पृथ्वियों के पार्श्व भाग में कम से इन तीनों वातवलयों की मोटाई सात, पाँच औौर चार तथा इसके ऊपर तियंग्लाक के पार्श्वभाग में पाँच, चार र तीन योजन प्रमाण है । दो सौ इकहत्तर । इसके आगे तीनों वायुओं की मोटाई ब्रह्म स्वर्ग के पार्श्व भाग में कम से सात, पाँच र चार योजन प्रमाग, तथा ऊर्ध्व लोक के अन्त में पाँच, चार र तीन योजन प्रमाण है । दो सौ बहत्तर । लोक के शिखर पर उक्त तीनों वातवलयों का वाहल्य क्रमशः दो कोस, एक कोस और कुछ कम एक कोस है । यहां कुछ कम का प्रमाण दो हज़ार चार सौ पच्चीस धनुष समझना चाहिये । दो सौ तिहत्तर । एक दृष्टि नंशून्य दो - सातवीं पृथ्वी और ब्रह्म युगल के पार्श्वभाग में तोनों वायुओं की मोटाई क्रम से तीस, इकतालीस/दो और छियालीस/तीन कोस हैं ।।दो हज़ार आठ सौ लोक शिखर पर तीनों वातवलयों की मोटाई श्रम से तेरह, तेरह ओर एक सौ तेरह कोस प्रमाण है । ऐसा लोक विभाग में कहा गया है । अट्ठाईस हज़ार एक सौ ग्यारह - विशेष दे. चित्र सं. एक । पाँच. लोक के आठ रुचक प्रदेश रा. वा./एक बीस बारह/छिहत्तर/तेरह मेरुप्रतिष्ठावज्रडूयंपट लान्तरुचकस स्थिता अष्टावकाश प्रदेशलोकमध्यम् । == मेरु इस प्रकार आठ भेद रूप इस अधोलोक का वर्णन किया जा चुका है। यहाँ से आठ प्रकार के ऊर्ध्वं लोक का निरूपण करते हैं । सामान्य ऊर्ध्वलोक का घनफल सात से भाजित ग्रोर तीन से गुणित लोक के प्रमाण अर्थात् एक सौ सैतालोस राजु मात्र है । तीन सौ इकतालीस ÷ सात ×तीन= एक सौ सैंतालीस राशून्य सामान्य ऊर्ध्व लोक का घनफल । द्वितीय ऊर्ध्वायत चतुरस्र क्षेत्र में वेध और भुजा जग श्रेणी प्रमाण, तथा कोटि तीन राजुमात्र है । सात हज़ार चार सौ चौहत्तर तीन = एक सौ सैंतालीस ऊशून्य आयत क्षेत्र का घनफल । तीसरे तिर्यगायत चतुरस्त्र क्षेत्र में भुजा और कोटि श्रेणी प्रमाण, तथा वेध तीन राजु मात्र है । बहुत से यवों युक्त मुरज क्षेत्र में वह क्षेत्र यव थोर मुरज रूप होता है। इसमें से यत्र
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कौन है वो पक्षी?
दुनिया की सबसे बड़ी उड़ने वाली पक्षी का नाम है अलबाट्रोस। अगर आप इन पक्षियों की तलाश में निकलेंगे तो आपको यह महासागरों के क्षेत्रों में मिलेंगी। इन पक्षियों की संख्या बेहद कम है, बल्कि यह विलुप्ति के कगार पर आ गई हैं। अल्बाट्रॉस पृथ्वी पर सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में से एक है। इनके पंखों की चौड़ाई करीब तीन मीटर तक होती है। वे अपने पंखों को एक बार भी फड़फड़ाए बिना मीलों तक का सफर कर सकते हैं।
अल्बाट्रॉस मुख्य रूप से स्क्वीड खाते हैं। इसके साथ ही क्रिल और मछली भी खाते हैं। वहीं अल्बाट्रॉस खारा पानी पीते हैं। वे अपने सिर आकाश में फैलाते हैं, अपने पंख उठाते हैं और अपनी चोंच रगड़ते हैं। ज्यादातर अल्बाट्रॉस दक्षिणी गोलार्ध के महासागरों के ऊपर रहते हैं और इस पक्षी की आंखे भूरी होती हैं।
अलबाट्रोस एक ऐसा पक्षी है जो काफी लंबे समय तक जिंदा रहता हैं। रिसर्च के अनुसार ये पक्षी इस पृथ्वी पर मौजूद सभी पक्षियों में सबसे ज्यादा दिनों तक जिंदा रहने वाला पक्षी हैं। इस प्रजाति की एक चिड़िया 68 साल तक जिंदा रही थी। इस दौरान उसने कई चूज़ों को जन्म दिया था।
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कौन है वो पक्षी? दुनिया की सबसे बड़ी उड़ने वाली पक्षी का नाम है अलबाट्रोस। अगर आप इन पक्षियों की तलाश में निकलेंगे तो आपको यह महासागरों के क्षेत्रों में मिलेंगी। इन पक्षियों की संख्या बेहद कम है, बल्कि यह विलुप्ति के कगार पर आ गई हैं। अल्बाट्रॉस पृथ्वी पर सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में से एक है। इनके पंखों की चौड़ाई करीब तीन मीटर तक होती है। वे अपने पंखों को एक बार भी फड़फड़ाए बिना मीलों तक का सफर कर सकते हैं। अल्बाट्रॉस मुख्य रूप से स्क्वीड खाते हैं। इसके साथ ही क्रिल और मछली भी खाते हैं। वहीं अल्बाट्रॉस खारा पानी पीते हैं। वे अपने सिर आकाश में फैलाते हैं, अपने पंख उठाते हैं और अपनी चोंच रगड़ते हैं। ज्यादातर अल्बाट्रॉस दक्षिणी गोलार्ध के महासागरों के ऊपर रहते हैं और इस पक्षी की आंखे भूरी होती हैं। अलबाट्रोस एक ऐसा पक्षी है जो काफी लंबे समय तक जिंदा रहता हैं। रिसर्च के अनुसार ये पक्षी इस पृथ्वी पर मौजूद सभी पक्षियों में सबसे ज्यादा दिनों तक जिंदा रहने वाला पक्षी हैं। इस प्रजाति की एक चिड़िया अड़सठ साल तक जिंदा रही थी। इस दौरान उसने कई चूज़ों को जन्म दिया था।
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पोनी, एक ऐसा जानवर जिसका स्वरूप घोड़े जैसा होता है, लेकिन आकार छोटा होता है.
इस बीच एक ऐसे पोनी पर नज़र गई, जो बेहद छोटा है. ये कुत्ते का साइज़ है, लेकिन बेहद खूबसूरत है.
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पोनी, एक ऐसा जानवर जिसका स्वरूप घोड़े जैसा होता है, लेकिन आकार छोटा होता है. इस बीच एक ऐसे पोनी पर नज़र गई, जो बेहद छोटा है. ये कुत्ते का साइज़ है, लेकिन बेहद खूबसूरत है.
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कड़ाके की सर्दी में आंदोलन कर रहे हैं किसान।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को एक माह हो चुका है। दिन-रात किसान दिल्ली से सटी विभिन्न सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसानों के इस शांत आंदोलन की 'ताकत' भी लगातार बढ़ती जा रही है। सर्दी की परवाह किए बिना हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से किसानों के जत्थे रसद के साथ लगातार धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं।
मुख्य मार्गों पर अभी भी किसानों से भरीं ट्रैक्टर-ट्रालियां किसान आंदोलन संबंधी पंजाबी गीत तेज आवाज में लगाकर दिल्ली सीमाओं की ओर बढ़ रही हैं। किसान अपनी 'गांधीगीरी' से सरकार को झुकाना चाहते हैं, लेकिन किसानों की लगातार बढ़ती जा रही संख्या से केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। सरकार को इस बात की आशंका है कि दिल्ली सीमाओं पर बढ़ती जा रही किसानों की संख्या भविष्य में कोई आफत न बन जाए।
हरियाणा में दिल्ली से सटी सीमाओं पर बैठे किसानों में सबसे ज्यादा संख्या पंजाब और हरियाणा के किसानों की है। इस संख्या को अब धीरे-धीरे और बढ़ाया जा रहा है, ताकि अपनी मांगें मनवाने के लिए किसान संगठन केंद्र पर दबाव बना सकें। इसके लिए हरियाणा और पंजाब के गांवों में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने अभियान को और तेज कर दिया गया है। अभियान के तहत किसान संगठनों की टोलियां गांव-दर-गांव जाकर किसान परिवारों को यह बता रही हैं कि आखिरकार कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन क्यों जरूरी है, क्यों हर किसान परिवार में से एक शख्स का आंदोलन में भाग लेना जरूरी है।
गांवों में अब भी बहुत से किसान परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक इस आंदोलन से किनारा किया हुआ है। ऐसे परिवारों की संख्या दोनों सूबों में से हरियाणा में ज्यादा है। इस वजह से किसान संगठनों के सदस्यों की टोलियां उन्हीं किसान परिवारों पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, जो अभी आंदोलन से दूर हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि गांवों में किसानों को जागरूक कर उन्हें आंदोलन के लिए एकजुट करने का काम अभी तक जारी है। गांवों में इस आंदोलन को ग्रामीणों का बहुत ज्यादा सहयोग मिल रहा है, लेकिन हम अपना आंदोलन पूरी तरह शांतिप्रिय ढंग से ही आगे बढ़ाएंगे।
आंदोलन के बीच हरियाणा के 18 लाख किसानों को 360 करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी गई है। यह राशि उनके खाते में जमा करवा दी गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सुशासन दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सातवीं किस्त किसानों के खातों में जारी करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। राज्य में अब तक इस योजना के तहत 2225. 30 करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा कराए जा चुके हैं। इस कार्यक्रम के दौरान फतेहाबाद के किसान हरि सिंह ने प्रधानमंत्री से छोटी जोत पर अनुभव साझा किए। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए बागवानी पर जोर देने का आग्रह किया।
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कड़ाके की सर्दी में आंदोलन कर रहे हैं किसान। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को एक माह हो चुका है। दिन-रात किसान दिल्ली से सटी विभिन्न सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसानों के इस शांत आंदोलन की 'ताकत' भी लगातार बढ़ती जा रही है। सर्दी की परवाह किए बिना हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से किसानों के जत्थे रसद के साथ लगातार धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं। मुख्य मार्गों पर अभी भी किसानों से भरीं ट्रैक्टर-ट्रालियां किसान आंदोलन संबंधी पंजाबी गीत तेज आवाज में लगाकर दिल्ली सीमाओं की ओर बढ़ रही हैं। किसान अपनी 'गांधीगीरी' से सरकार को झुकाना चाहते हैं, लेकिन किसानों की लगातार बढ़ती जा रही संख्या से केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। सरकार को इस बात की आशंका है कि दिल्ली सीमाओं पर बढ़ती जा रही किसानों की संख्या भविष्य में कोई आफत न बन जाए। हरियाणा में दिल्ली से सटी सीमाओं पर बैठे किसानों में सबसे ज्यादा संख्या पंजाब और हरियाणा के किसानों की है। इस संख्या को अब धीरे-धीरे और बढ़ाया जा रहा है, ताकि अपनी मांगें मनवाने के लिए किसान संगठन केंद्र पर दबाव बना सकें। इसके लिए हरियाणा और पंजाब के गांवों में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने अभियान को और तेज कर दिया गया है। अभियान के तहत किसान संगठनों की टोलियां गांव-दर-गांव जाकर किसान परिवारों को यह बता रही हैं कि आखिरकार कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन क्यों जरूरी है, क्यों हर किसान परिवार में से एक शख्स का आंदोलन में भाग लेना जरूरी है। गांवों में अब भी बहुत से किसान परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक इस आंदोलन से किनारा किया हुआ है। ऐसे परिवारों की संख्या दोनों सूबों में से हरियाणा में ज्यादा है। इस वजह से किसान संगठनों के सदस्यों की टोलियां उन्हीं किसान परिवारों पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, जो अभी आंदोलन से दूर हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि गांवों में किसानों को जागरूक कर उन्हें आंदोलन के लिए एकजुट करने का काम अभी तक जारी है। गांवों में इस आंदोलन को ग्रामीणों का बहुत ज्यादा सहयोग मिल रहा है, लेकिन हम अपना आंदोलन पूरी तरह शांतिप्रिय ढंग से ही आगे बढ़ाएंगे। आंदोलन के बीच हरियाणा के अट्ठारह लाख किसानों को तीन सौ साठ करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी गई है। यह राशि उनके खाते में जमा करवा दी गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सुशासन दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सातवीं किस्त किसानों के खातों में जारी करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। राज्य में अब तक इस योजना के तहत दो हज़ार दो सौ पच्चीस. तीस करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा कराए जा चुके हैं। इस कार्यक्रम के दौरान फतेहाबाद के किसान हरि सिंह ने प्रधानमंत्री से छोटी जोत पर अनुभव साझा किए। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए बागवानी पर जोर देने का आग्रह किया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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करना है यानी यथायोग्य व्यक्ति के साथ यथास्थान व्यवहार रखते हुए स्व-पर के विकास का ध्यान रखना है और मान-अपमान की भाषा मे कभी नही सोचना है।
सम्यग्ज्ञान / मिथ्याज्ञान
जो वस्तु जिस समय, जिस रूप मे रही हुई है, उसे उस समय, उस अपेक्षा से उस रूप मे जानना-मानना 'सम्यग्ज्ञान' है। इससे विपरीत यानी जो वस्तु जिस समय, जिस रूप मे नही है, उस अपेक्षा से उसे उस समय, उस रूप में जानना या मानना 'मिथ्याज्ञान' है।
जैसा वेश हो
जिस समय जैसा वेश हो, उस समय उसी के अनुरूप कार्य एव व्यवहार होना चाहिये और जिस समय जैसा कार्य किया जाता हो, उस समय उसी कार्य मे मन, वचन और काया का एकाकार होना जरूरी है ।
स्वयं का उत्तरदायित्व स्वय पर है, दूसरो पर नही। दूसरे सहायक बन सकते है, लेकिन कब? जबकि हम स्वयं अपने कर्त्तव्य-पालन में तत्पर हो तव ।
बाधक नहीं, साधक
विचार-शक्ति का सदुपयोग करने वाला सोचना है कि मुझे आपत्ति में डालने वाला कोई नही है। जो मेरी उन्नति में बाधक दिखता है, वह वाधक नही, साधक है।
पेडो की अन्धाधुन्ध कटाई से वायुमण्डल में गदगी बढ़ रही है और प्राणवायु की कमी हो रही है। वनस्पति के जीवों की इस हिंसा से पृथ्वीकाय के जीवो की हिंसा हो रही है, क्योंकि अधिकाधिक कृषि भूमि अपनी उर्वरा शक्ति को कर वजड होती जा रही है, जिसका सीधा बुरा प्रभाव मनुष्य एवं अन्य प्राणियों की जीवन रक्षा पर अन्नाभाव के कारण पड़ रहा है।
अहिंसा का शासन
शासन-रहितना के अभिप्राय उन शानन से है, जो शासन शोषण-या-हिमा से युक्त हो, जिसमे विचार-स्वातन्त्र्य का दमन नहीं किया जाता है। शामन इन्सानियत से वचित रखने वाला नहीं हो, बलिप्रेम या कासन हो तो अवश्य हो। इसके विना प्रगति नभव नहीं है।
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करना है यानी यथायोग्य व्यक्ति के साथ यथास्थान व्यवहार रखते हुए स्व-पर के विकास का ध्यान रखना है और मान-अपमान की भाषा मे कभी नही सोचना है। सम्यग्ज्ञान / मिथ्याज्ञान जो वस्तु जिस समय, जिस रूप मे रही हुई है, उसे उस समय, उस अपेक्षा से उस रूप मे जानना-मानना 'सम्यग्ज्ञान' है। इससे विपरीत यानी जो वस्तु जिस समय, जिस रूप मे नही है, उस अपेक्षा से उसे उस समय, उस रूप में जानना या मानना 'मिथ्याज्ञान' है। जैसा वेश हो जिस समय जैसा वेश हो, उस समय उसी के अनुरूप कार्य एव व्यवहार होना चाहिये और जिस समय जैसा कार्य किया जाता हो, उस समय उसी कार्य मे मन, वचन और काया का एकाकार होना जरूरी है । स्वयं का उत्तरदायित्व स्वय पर है, दूसरो पर नही। दूसरे सहायक बन सकते है, लेकिन कब? जबकि हम स्वयं अपने कर्त्तव्य-पालन में तत्पर हो तव । बाधक नहीं, साधक विचार-शक्ति का सदुपयोग करने वाला सोचना है कि मुझे आपत्ति में डालने वाला कोई नही है। जो मेरी उन्नति में बाधक दिखता है, वह वाधक नही, साधक है। पेडो की अन्धाधुन्ध कटाई से वायुमण्डल में गदगी बढ़ रही है और प्राणवायु की कमी हो रही है। वनस्पति के जीवों की इस हिंसा से पृथ्वीकाय के जीवो की हिंसा हो रही है, क्योंकि अधिकाधिक कृषि भूमि अपनी उर्वरा शक्ति को कर वजड होती जा रही है, जिसका सीधा बुरा प्रभाव मनुष्य एवं अन्य प्राणियों की जीवन रक्षा पर अन्नाभाव के कारण पड़ रहा है। अहिंसा का शासन शासन-रहितना के अभिप्राय उन शानन से है, जो शासन शोषण-या-हिमा से युक्त हो, जिसमे विचार-स्वातन्त्र्य का दमन नहीं किया जाता है। शामन इन्सानियत से वचित रखने वाला नहीं हो, बलिप्रेम या कासन हो तो अवश्य हो। इसके विना प्रगति नभव नहीं है।
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माउंटेन बाइक एपिटोम हैएक उत्पाद में अविश्वसनीय स्वतंत्रता और शक्ति। इस ब्रांड की बाइक की उपस्थिति क्लासिक और आधुनिक को जोड़ती है। इस कंपनी के वाहनों के प्रशंसक बड़ी संख्या में ग्राहक हैं जिन्होंने उच्चतम गुणवत्ता वाले उत्पादों, उपयोगकर्ताओं के लिए अविश्वसनीय आराम और विविध अनुप्रयोगों की संभावना की सराहना की है।
कंपनी का ऐतिहासिक जन्मस्थान दक्षिण हैऑस्ट्रिया, जिसमें सबसे महत्वाकांक्षी घरेलू स्की रिसॉर्ट स्थित है, अर्थात् स्की वेल्ट। यह भूमि न केवल अपने अद्भुत परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी विशाल ऊंचाई के लिए भी है, 800 से 2500 मीटर तक। सुंदर प्रकृति के लिए धन्यवाद, यह क्षेत्र न केवल स्कीइंग का आनंद लेने के लिए, बल्कि गर्मियों में साइकिल की सवारी करने की अनुमति देता है।
2012 कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष था। यह इस अवधि के दौरान था कि ट्रेडमार्क की स्थापना की गई थी, जिसके ब्रांड में वेल्ट साइकिल और सहायक उपकरण थे।
बैठक करते समय मुख्य प्रश्नवेल्ट बाइक ट्रेडमार्क के साथ - निर्माता कौन है? एक संपूर्ण उत्तर देने के लिए, कंपनी के भौगोलिक घटक को समझना आवश्यक है। ब्रांड का मुख्य कार्यालय ऑस्ट्रिया में ब्रांड के जन्मस्थान में स्थित है। उत्पाद की गुणवत्ता के लिए नियामक अधिकारियों सहित उत्पादन सुविधाएं, चीन में स्थित हैं। उत्पादन प्रक्रियाओं की इस एकाग्रता के कारण, कंपनी के संसाधन सबसे आदर्श तरीके से वितरित किए जाते हैं, जो आपको उत्कृष्ट गुणवत्ता और उपलब्धता को पूरी तरह से संयोजित करने की अनुमति देता है। इस ब्रांड के माल की प्रचलित मात्रा रूसी बाजार पर केंद्रित है।
गतिविधि का मुख्य और अपरिवर्तनीय लेथमोटिफब्रांड निम्नलिखित नारा हैः "हम इसे जीवन में लाते हैं, खरीदार गति में सेट होता है। वेल्ट सक्रिय जीवन के लिए प्रतिबद्ध है, जो आंदोलन है। "
- एमटीवी - वेल्ट बाइक, जो किसी भी मिट्टी पर फिटनेस, क्रॉस-कंट्री और सभी प्रकार की यात्राओं के लिए डिज़ाइन की गई है।
- ब्रांड की साइकिलों का शहरी संस्करण डामर पटरियों और बिना पार्क किए गए रास्तों पर चलने के लिए बनाया गया है।
- इन वाहनों की महिलाओं की लाइनएक सार्वभौमिक विन्यास और स्टाइलिश डिजाइन में प्रस्तुत किया गया। पार्क की स्थिति में और शहर की रूपरेखा में किसी भी मिट्टी पर अंतिम सवारी के लिए इरादा।
- किशोर बाइक लाइन तकनीकी विशेषताओं और उपस्थिति सहित वयस्क मॉडल के सभी गुणों को जोड़ती है।
- बच्चों की इस ब्रांड की साइकिल की श्रेणी हैसुरक्षा के उच्चतम स्तर, हल्के डिजाइन और उत्कृष्ट कार्यक्षमता है। इस प्रकार के वाहन लड़कियों और लड़कों दोनों पर केंद्रित होते हैं। इस उत्पाद के उज्ज्वल डिजाइन के लिए धन्यवाद, कोई भी बच्चा साथियों के बीच ध्यान के केंद्र में महसूस करेगा।
- स्वतंत्रता रेखा सबसे अधिक में से एक हैइस ब्रांड के उत्पादों की लोकप्रिय किस्में। इस व्याख्या में बाइक वेल्ट अविश्वसनीय आराम, क्लासिक डिजाइन और उत्कृष्ट गतिशीलता को जोड़ती है।
यूनिवर्सल बाइक वेल्ट एडलवाइस हैइस ऑस्ट्रियाई निर्माता के वाहनों की महिला लाइन का सबसे प्रमुख प्रतिनिधि। साइकिल ब्रेक सिस्टम एक डिस्क है, जिसे यांत्रिक नियंत्रण द्वारा सक्रिय किया जाता है।
साइकिल की सीट यात्री प्रदान करता हैयात्रा के दौरान आराम। निलंबन कांटा के लिए धन्यवाद, हाथों के जोड़ों पर भार जितना संभव हो उतना कम होगा। उत्पाद डिजाइन काफी स्टाइलिश और उज्ज्वल है। चरणों की उपस्थिति के कारण, मालिक समय की न्यूनतम हानि के साथ अप्रत्याशित और आपातकालीन स्टॉप बना सकता है।
इसी तरह के उत्पादों के बीच अग्रणी पदों परविश्व बाजार आत्मविश्वास से रिज मॉडल को पकड़े हुए है। वे एक अच्छे सेट और उच्च-गुणवत्ता वाले असेंबली में अवतार लेते हैं। एक नियम के रूप में, इस तरह के वाहन को दोहरे रिम्स पर छब्बीसवें आकार के पहियों में पेश किया जाता है और यह 21 वीं गति से सुसज्जित है। सस्पेंशन कांटा और हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक सिस्टम, वेल्ट माउंटेन बाइक को मालिक के लिए बहुत विश्वसनीय और आरामदायक बनाते हैं।
सबसे पहले यह ध्यान दिया जाना चाहिए किलड़कियों और लड़कों के लिए इस श्रेणी की साइकिलें दो व्याख्याओं में प्रस्तुत की जाती हैं। इन दो प्रकार के वाहनों के बीच मुख्य अंतर विशेषता रंग और रंग पैलेट है।
इस वाहन का पहला प्रकारलड़कों पर ध्यान केंद्रित किया और अधिक संयमित शैली में बनाया। बाइक के पहियों का आकार 20 इंच है। दोहरे रिम के कारण, उत्तरार्द्ध प्रभाव प्रतिरोध और कर्ब के लिए काफी प्रतिरोधी हैं। जटिल फ्रेम प्रोफाइल इस वाहन को ऑपरेशन के दौरान बच्चे के लिए उच्चतम विश्वसनीयता, लपट और सुरक्षा प्रदान करता है। स्टीयरिंग सिस्टम साइकिल के वयस्क मॉडल के लिए एक पूर्ण सादृश्य है। इस लाइन के प्रत्येक उत्पाद में एक कार्यात्मक फुटबोर्ड है। साइकिल की सीट में एक संरचनात्मक, काफी आरामदायक आकार है, जो मालिक को शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना लंबी यात्राएं करने की अनुमति देता है।
बच्चों की साइकिल का दूसरा मॉडल उन्मुख हैविशेष रूप से 6 से 8 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए। उज्ज्वल डिजाइन और मजबूत एल्यूमीनियम फ्रेम के लिए धन्यवाद, युवा राजकुमारियां न केवल सुरक्षित होंगी, बल्कि साथियों का भी ध्यान केंद्रित करेंगी। साइकिल की सवारी करने के लिए सीखने की सुविधा के लिए, निर्माता आरामदायक पंख और एक कदम प्रदान करता है। बच्चे के लिए इस वाहन पर सात गति और निलंबन कांटा की सवारी के कारण, एक आकर्षक साहसिक कार्य होगा, जो क्षितिज को विकसित करेगा, साथ ही साथ शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करेगा।
लोकप्रिय ब्रांड वेल्ट की साइकिल की लागतइन उत्पादों की उच्चतम गुणवत्ता के साथ काफी सस्ती और पूरी तरह से सुसंगत है। इस वाहन के लिए मूल्य सीमा, कॉन्फ़िगरेशन, उद्देश्य और कार्यक्षमता के आधार पर 19,536 से 41,766 रूबल तक भिन्न होती है, जो लोकतंत्र को इंगित करता है।
समीक्षाओं के अनुसार, आकर्षक बाहरी के अलावाएक तरह से, इस दो-पहिया वाहन के बहुत सारे फायदे हैं जिन्हें केवल सवारी करते समय ही सराहा जा सकता है। बाइक का मूल विशेषाधिकार एक परेशानी मुक्त ब्रेक प्रणाली है जो असंभव कर सकता है। इसका रहस्य डिस्क ब्रेक की यांत्रिक प्रणाली और स्ट्रोक को अवरुद्ध करने की संभावना में निहित है। फ़्रेम की सामग्री की गुणवत्ता के कारण यात्री की ओर से बहुत प्रयास किए बिना उस पर माल परिवहन की संभावना है।
लोकप्रियता का एक संकेतक और तेजस्वी हैउपस्थिति जो इसे मालिक और आसपास की बाइक के लिए आकर्षक बनाती है। स्पोर्ट्स ड्राइविंग और प्रकृति में चलने के प्रशंसकों के बीच इस दो-पहिया वाहन की समीक्षा केवल सकारात्मक और सकारात्मक है, क्योंकि यह बाइक कई लोगों को स्वास्थ्य हासिल करने और बाहरी डेटा को बेहतर बनाने में मदद करती है।
समीक्षाओं के अनुसार, इसका मतलब हैआंदोलन किसी भी स्थिति में एक सच्चा वफादार सहायक है। मुख्य लाभों में - न केवल एक आकर्षक कीमत, बल्कि कार्यक्षमता भी। इसकी सहजता के कारण, यहां तक कि सबसे नाजुक महिला भी समस्याओं के बिना उसे उठा पाएगी। चरम ड्राइविंग के प्रशंसक बार-बार एक विश्वसनीय ब्रेकिंग सिस्टम में मदद करते हैं, जो परेशानी से मुक्त है और काफी कम समय में रोकने में मदद करता है। उपयोगकर्ताओं के अनुसार, यह बाइक उत्कृष्ट गुणवत्ता और सस्ती कीमतों का प्रतीक है, जो खेल के लिए सही साथी पाने के लिए काफी कम राशि की अनुमति देता है।
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माउंटेन बाइक एपिटोम हैएक उत्पाद में अविश्वसनीय स्वतंत्रता और शक्ति। इस ब्रांड की बाइक की उपस्थिति क्लासिक और आधुनिक को जोड़ती है। इस कंपनी के वाहनों के प्रशंसक बड़ी संख्या में ग्राहक हैं जिन्होंने उच्चतम गुणवत्ता वाले उत्पादों, उपयोगकर्ताओं के लिए अविश्वसनीय आराम और विविध अनुप्रयोगों की संभावना की सराहना की है। कंपनी का ऐतिहासिक जन्मस्थान दक्षिण हैऑस्ट्रिया, जिसमें सबसे महत्वाकांक्षी घरेलू स्की रिसॉर्ट स्थित है, अर्थात् स्की वेल्ट। यह भूमि न केवल अपने अद्भुत परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी विशाल ऊंचाई के लिए भी है, आठ सौ से दो हज़ार पाँच सौ मीटर तक। सुंदर प्रकृति के लिए धन्यवाद, यह क्षेत्र न केवल स्कीइंग का आनंद लेने के लिए, बल्कि गर्मियों में साइकिल की सवारी करने की अनुमति देता है। दो हज़ार बारह कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष था। यह इस अवधि के दौरान था कि ट्रेडमार्क की स्थापना की गई थी, जिसके ब्रांड में वेल्ट साइकिल और सहायक उपकरण थे। बैठक करते समय मुख्य प्रश्नवेल्ट बाइक ट्रेडमार्क के साथ - निर्माता कौन है? एक संपूर्ण उत्तर देने के लिए, कंपनी के भौगोलिक घटक को समझना आवश्यक है। ब्रांड का मुख्य कार्यालय ऑस्ट्रिया में ब्रांड के जन्मस्थान में स्थित है। उत्पाद की गुणवत्ता के लिए नियामक अधिकारियों सहित उत्पादन सुविधाएं, चीन में स्थित हैं। उत्पादन प्रक्रियाओं की इस एकाग्रता के कारण, कंपनी के संसाधन सबसे आदर्श तरीके से वितरित किए जाते हैं, जो आपको उत्कृष्ट गुणवत्ता और उपलब्धता को पूरी तरह से संयोजित करने की अनुमति देता है। इस ब्रांड के माल की प्रचलित मात्रा रूसी बाजार पर केंद्रित है। गतिविधि का मुख्य और अपरिवर्तनीय लेथमोटिफब्रांड निम्नलिखित नारा हैः "हम इसे जीवन में लाते हैं, खरीदार गति में सेट होता है। वेल्ट सक्रिय जीवन के लिए प्रतिबद्ध है, जो आंदोलन है। " - एमटीवी - वेल्ट बाइक, जो किसी भी मिट्टी पर फिटनेस, क्रॉस-कंट्री और सभी प्रकार की यात्राओं के लिए डिज़ाइन की गई है। - ब्रांड की साइकिलों का शहरी संस्करण डामर पटरियों और बिना पार्क किए गए रास्तों पर चलने के लिए बनाया गया है। - इन वाहनों की महिलाओं की लाइनएक सार्वभौमिक विन्यास और स्टाइलिश डिजाइन में प्रस्तुत किया गया। पार्क की स्थिति में और शहर की रूपरेखा में किसी भी मिट्टी पर अंतिम सवारी के लिए इरादा। - किशोर बाइक लाइन तकनीकी विशेषताओं और उपस्थिति सहित वयस्क मॉडल के सभी गुणों को जोड़ती है। - बच्चों की इस ब्रांड की साइकिल की श्रेणी हैसुरक्षा के उच्चतम स्तर, हल्के डिजाइन और उत्कृष्ट कार्यक्षमता है। इस प्रकार के वाहन लड़कियों और लड़कों दोनों पर केंद्रित होते हैं। इस उत्पाद के उज्ज्वल डिजाइन के लिए धन्यवाद, कोई भी बच्चा साथियों के बीच ध्यान के केंद्र में महसूस करेगा। - स्वतंत्रता रेखा सबसे अधिक में से एक हैइस ब्रांड के उत्पादों की लोकप्रिय किस्में। इस व्याख्या में बाइक वेल्ट अविश्वसनीय आराम, क्लासिक डिजाइन और उत्कृष्ट गतिशीलता को जोड़ती है। यूनिवर्सल बाइक वेल्ट एडलवाइस हैइस ऑस्ट्रियाई निर्माता के वाहनों की महिला लाइन का सबसे प्रमुख प्रतिनिधि। साइकिल ब्रेक सिस्टम एक डिस्क है, जिसे यांत्रिक नियंत्रण द्वारा सक्रिय किया जाता है। साइकिल की सीट यात्री प्रदान करता हैयात्रा के दौरान आराम। निलंबन कांटा के लिए धन्यवाद, हाथों के जोड़ों पर भार जितना संभव हो उतना कम होगा। उत्पाद डिजाइन काफी स्टाइलिश और उज्ज्वल है। चरणों की उपस्थिति के कारण, मालिक समय की न्यूनतम हानि के साथ अप्रत्याशित और आपातकालीन स्टॉप बना सकता है। इसी तरह के उत्पादों के बीच अग्रणी पदों परविश्व बाजार आत्मविश्वास से रिज मॉडल को पकड़े हुए है। वे एक अच्छे सेट और उच्च-गुणवत्ता वाले असेंबली में अवतार लेते हैं। एक नियम के रूप में, इस तरह के वाहन को दोहरे रिम्स पर छब्बीसवें आकार के पहियों में पेश किया जाता है और यह इक्कीस वीं गति से सुसज्जित है। सस्पेंशन कांटा और हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक सिस्टम, वेल्ट माउंटेन बाइक को मालिक के लिए बहुत विश्वसनीय और आरामदायक बनाते हैं। सबसे पहले यह ध्यान दिया जाना चाहिए किलड़कियों और लड़कों के लिए इस श्रेणी की साइकिलें दो व्याख्याओं में प्रस्तुत की जाती हैं। इन दो प्रकार के वाहनों के बीच मुख्य अंतर विशेषता रंग और रंग पैलेट है। इस वाहन का पहला प्रकारलड़कों पर ध्यान केंद्रित किया और अधिक संयमित शैली में बनाया। बाइक के पहियों का आकार बीस इंच है। दोहरे रिम के कारण, उत्तरार्द्ध प्रभाव प्रतिरोध और कर्ब के लिए काफी प्रतिरोधी हैं। जटिल फ्रेम प्रोफाइल इस वाहन को ऑपरेशन के दौरान बच्चे के लिए उच्चतम विश्वसनीयता, लपट और सुरक्षा प्रदान करता है। स्टीयरिंग सिस्टम साइकिल के वयस्क मॉडल के लिए एक पूर्ण सादृश्य है। इस लाइन के प्रत्येक उत्पाद में एक कार्यात्मक फुटबोर्ड है। साइकिल की सीट में एक संरचनात्मक, काफी आरामदायक आकार है, जो मालिक को शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना लंबी यात्राएं करने की अनुमति देता है। बच्चों की साइकिल का दूसरा मॉडल उन्मुख हैविशेष रूप से छः से आठ वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए। उज्ज्वल डिजाइन और मजबूत एल्यूमीनियम फ्रेम के लिए धन्यवाद, युवा राजकुमारियां न केवल सुरक्षित होंगी, बल्कि साथियों का भी ध्यान केंद्रित करेंगी। साइकिल की सवारी करने के लिए सीखने की सुविधा के लिए, निर्माता आरामदायक पंख और एक कदम प्रदान करता है। बच्चे के लिए इस वाहन पर सात गति और निलंबन कांटा की सवारी के कारण, एक आकर्षक साहसिक कार्य होगा, जो क्षितिज को विकसित करेगा, साथ ही साथ शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करेगा। लोकप्रिय ब्रांड वेल्ट की साइकिल की लागतइन उत्पादों की उच्चतम गुणवत्ता के साथ काफी सस्ती और पूरी तरह से सुसंगत है। इस वाहन के लिए मूल्य सीमा, कॉन्फ़िगरेशन, उद्देश्य और कार्यक्षमता के आधार पर उन्नीस,पाँच सौ छत्तीस से इकतालीस,सात सौ छयासठ रूबल तक भिन्न होती है, जो लोकतंत्र को इंगित करता है। समीक्षाओं के अनुसार, आकर्षक बाहरी के अलावाएक तरह से, इस दो-पहिया वाहन के बहुत सारे फायदे हैं जिन्हें केवल सवारी करते समय ही सराहा जा सकता है। बाइक का मूल विशेषाधिकार एक परेशानी मुक्त ब्रेक प्रणाली है जो असंभव कर सकता है। इसका रहस्य डिस्क ब्रेक की यांत्रिक प्रणाली और स्ट्रोक को अवरुद्ध करने की संभावना में निहित है। फ़्रेम की सामग्री की गुणवत्ता के कारण यात्री की ओर से बहुत प्रयास किए बिना उस पर माल परिवहन की संभावना है। लोकप्रियता का एक संकेतक और तेजस्वी हैउपस्थिति जो इसे मालिक और आसपास की बाइक के लिए आकर्षक बनाती है। स्पोर्ट्स ड्राइविंग और प्रकृति में चलने के प्रशंसकों के बीच इस दो-पहिया वाहन की समीक्षा केवल सकारात्मक और सकारात्मक है, क्योंकि यह बाइक कई लोगों को स्वास्थ्य हासिल करने और बाहरी डेटा को बेहतर बनाने में मदद करती है। समीक्षाओं के अनुसार, इसका मतलब हैआंदोलन किसी भी स्थिति में एक सच्चा वफादार सहायक है। मुख्य लाभों में - न केवल एक आकर्षक कीमत, बल्कि कार्यक्षमता भी। इसकी सहजता के कारण, यहां तक कि सबसे नाजुक महिला भी समस्याओं के बिना उसे उठा पाएगी। चरम ड्राइविंग के प्रशंसक बार-बार एक विश्वसनीय ब्रेकिंग सिस्टम में मदद करते हैं, जो परेशानी से मुक्त है और काफी कम समय में रोकने में मदद करता है। उपयोगकर्ताओं के अनुसार, यह बाइक उत्कृष्ट गुणवत्ता और सस्ती कीमतों का प्रतीक है, जो खेल के लिए सही साथी पाने के लिए काफी कम राशि की अनुमति देता है।
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ईरान के साथ फ़ुटसाल मुक़ाबले में भारी पराजय के बाद सऊदी अरब ने नेशनल फ़ुटसाल टीम ही भंग कर दी।
सऊदी अरब की नेशनल फ़ुटसाल टीम का मुक़ाबला ईरान की फ़ुटसाल टीम से हुआ जिसमें सऊदी अरब की टीम 15-1 से हार गई। इस पराजय का सऊदी अरब के स्पोर्ट्स अधिकारियों को इतना सदमा हुआ कि उन्होंने तानाशाही क़दम उठाते हुए फ़ुटसाल टीम को ही भंग कर दिया।
ईरानी छात्रों की समाचार एजेंसी ईसना की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के स्पोर्ट्स अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में ईरान की फ़ुटसाल टीम के खेल की तारीफ़ की और लिखा कि ईरान की टीम के शानदार प्रदर्शन और 15-1 से उसकी जीत का नतीजा यह निकला कि सऊदी अरब की नेशनल फ़ुटसासल टीम ही भंग कर दी गई।
हाल ही में दोनों टीमों का मुक़ाबला हुआ था जिसमें सऊदी अरब की टीम को भारी पराजय का मुंह देखना पड़ा था।
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ईरान के साथ फ़ुटसाल मुक़ाबले में भारी पराजय के बाद सऊदी अरब ने नेशनल फ़ुटसाल टीम ही भंग कर दी। सऊदी अरब की नेशनल फ़ुटसाल टीम का मुक़ाबला ईरान की फ़ुटसाल टीम से हुआ जिसमें सऊदी अरब की टीम पंद्रह-एक से हार गई। इस पराजय का सऊदी अरब के स्पोर्ट्स अधिकारियों को इतना सदमा हुआ कि उन्होंने तानाशाही क़दम उठाते हुए फ़ुटसाल टीम को ही भंग कर दिया। ईरानी छात्रों की समाचार एजेंसी ईसना की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के स्पोर्ट्स अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में ईरान की फ़ुटसाल टीम के खेल की तारीफ़ की और लिखा कि ईरान की टीम के शानदार प्रदर्शन और पंद्रह-एक से उसकी जीत का नतीजा यह निकला कि सऊदी अरब की नेशनल फ़ुटसासल टीम ही भंग कर दी गई। हाल ही में दोनों टीमों का मुक़ाबला हुआ था जिसमें सऊदी अरब की टीम को भारी पराजय का मुंह देखना पड़ा था।
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नई दिल्लीः 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अरुणाचल प्रदेश में बड़ी कामयाबी मिली है. इस पूर्वोत्तर प्रदेश में भाजपा ने चुनाव लड़े बगैर ही दो सीटों पर कब्जा जमा लिया है. 11 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले ही इन सीटों पर दर्ज हुई जीत को भाजपा के लिए एक बड़ी बढ़त के रूप में देखा जा रहा है.
दरअसल, अरुणाचल प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. आलो सीट पर सर केंटो जिनी और याचुली सीट से इंजीनियर ताबा तेदीर ने जीत का परचम लहराया है. अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी मतदान होना है. पहले चरण में 11 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 25 मार्च थी. नामांकन के अंतिम दिन आलो सीट पर सर केंटो जिनी और याचुली विधानसभा सीट से इंजीनियर ताबा तेदीर के सामने कोई भी वैध प्रत्याशी नहीं था.
निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, नामांकन तारीख निकलने के बाद सामने आया कि इन दोनों ही प्रत्याशियों के सामने कोई भी वैध उम्मीदवार नहीं था. बताया जा रहा है कि दोनों ही सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने गलत नामांकन पत्र दायर किया था. इससे भाजपा के इन प्रतयषीयों की जीत चुनाव से पहले ही निश्चित हो गई.
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नई दिल्लीः दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को अरुणाचल प्रदेश में बड़ी कामयाबी मिली है. इस पूर्वोत्तर प्रदेश में भाजपा ने चुनाव लड़े बगैर ही दो सीटों पर कब्जा जमा लिया है. ग्यारह अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले ही इन सीटों पर दर्ज हुई जीत को भाजपा के लिए एक बड़ी बढ़त के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, अरुणाचल प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. आलो सीट पर सर केंटो जिनी और याचुली सीट से इंजीनियर ताबा तेदीर ने जीत का परचम लहराया है. अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी मतदान होना है. पहले चरण में ग्यारह अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन की अंतिम तिथि पच्चीस मार्च थी. नामांकन के अंतिम दिन आलो सीट पर सर केंटो जिनी और याचुली विधानसभा सीट से इंजीनियर ताबा तेदीर के सामने कोई भी वैध प्रत्याशी नहीं था. निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, नामांकन तारीख निकलने के बाद सामने आया कि इन दोनों ही प्रत्याशियों के सामने कोई भी वैध उम्मीदवार नहीं था. बताया जा रहा है कि दोनों ही सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने गलत नामांकन पत्र दायर किया था. इससे भाजपा के इन प्रतयषीयों की जीत चुनाव से पहले ही निश्चित हो गई.
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हाल ही में UPSC द्वारा COVID-19 को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा-2020 के लिए नई तिथि 4 अक्टूबर, 2020 की घोषणा की गयी है। ऐसे में इन 100 दिनों का सदुपयोग सही दिशा में करना अति महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसको देखते हुए IASBABA टीम द्वारा इष्टतम लाभ प्राप्त करने के लिए 10 जून 2020 से इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान-2020 लांच किया गया है, जिससे एक बार पुनः परीक्षा से संबंधित संपूर्ण पाठ्यक्रम का समुचित रिवीज़न किया जा सके।
इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान (IRP) 2020 के महत्वपूर्ण तथ्यः
- IRP 2020 एक निःशुल्क पहल है, जिसे आपको अगले 100 दिनों के लिए केंद्रित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है!
- कार्यक्रम 10 जून 2020 से आरंभ होगा। यह सप्ताह में 6 दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होगा - आप इस समय का उपयोग रिवीज़न और वैकल्पिक विषय के लिए कर सकते हैं।
- इसमें आपकी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों की तैयारी शामिल हैं।
- प्रतिदिन आधार पर - प्रारंभिक परीक्षा - 5 करंट अफेयर्स संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न, 10 स्टेटिक भाग जैसे इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थशास्त्र एवं पर्यावरण आदि संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे।
- प्रतिदिन आधार पर - मुख्य परीक्षा - TLP - 3 प्रश्न मुख्य परीक्षा संबंधी GS1, GS2, GS3 को कवर करते हुए पोस्ट किया जाएगा। इन 3 प्रश्नों में से 2 स्टेटिक भाग से और 1 करंट अफेयर्स से होंगे।
- GS 4 (नीतिशास्त्र) और निबंध पर विशेष जोर - प्रत्येक सप्ताह (शुक्रवार को) 3 प्रश्न पोस्ट किए जाएंगे। इसमें 2 नैतिकता सिद्धांत एवं 1 प्रश्न केस स्टडी पर आधारित होंगे।
- प्रत्येक शनिवार को 4 निबंध दिए जाएंगे (इसमें 2 सामान्य थीम आधारित और 2 दार्शनिक विषय पर आधारित होंगे)
- हिंदी माध्यम में प्रश्न शाम 5 बजे (5 PM) अपलोड किए जाएंगे।
- गोल्डन राइस चावल की किस्मों का सामूहिक नाम है जिसे विकासशील देशों में विटामिन ए की कमी का मुकाबला करने के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता हैं।
- गोल्डन राइस बनाने के लिए, वैज्ञानिकों ने मक्का के बीटा-कैरोटीन जीन से चावल के पौधों को संशोधित किया था। इसलिए चावल के पौधों में उच्च नारंगी रंग का वर्णक उत्पन्न होने लगा है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.3) अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
- IRRI एक स्वतंत्र, लाभ-कारी, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.5) निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही रूप से मेल खाता है / हैः
Q.6) एक ही खेत में एक के बाद एक अलग-अलग फसलें उगाकर फसल का चक्रिकरण / सस्य आवर्तन (Crop rotation) किया जाता है। निम्नलिखित में से कौन से फसल रोटेशन के लाभ हैं?
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः
Q.7) निम्नलिखित में से कौन सा कथन जैविक कृषि के संबंध में सही है / हैं?
- जैविक कृषि से तात्पर्य है कि कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किए बिना कृषि के लिए पारंपरिक तरीकों का उपयोग करना।
- जैविक कृषि पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम उपज पैदा करती है।
- यह मृदा की जैविक गतिविधि को प्रोत्साहित करके मृदा की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः
Q.8) बाजरा/ मोटे अनाज (Millets) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- बाजरा कम अवधि (3-4 महीने) के मौसम में उगाए जाने वाली गर्म मौसम की घास हैं, जिसे उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहाँ चावल और गेहूं जैसी मुख्य फसलें सफलतापूर्वक नहीं उगाई जा सकती हैं।
- कर्नाटक भारत का सर्वोच्च बाजरा उत्पादक राज्य है।
- बाजरे की खेती कम उपजाऊ भूमि, पहाड़ी, आदिवासी और वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.9) गेहूं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- यह समशीतोष्ण क्षेत्र और सुदूर उत्तर के ठंडे इलाकों में उगाया जा सकता है, यहां तक कि इसे 60 डिग्री उत्तरी अक्षांश से आगे भी उगाया जाता है।
- मिट्टी की दोमट या क्ले बनावट, अच्छी संरचना और मध्यम जल धारण क्षमता वाली मृदा गेहूँ की खेती के लिए आदर्श होती है।
- इसकी खेती समुद्र तल से 3300 मीटर की उंचाई पर की जा सकती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.10) काली मृदा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- अधिकांश काली मृदा के लिए मूल सामग्री ज्वालामुखी चट्टानें हैं जिनका निर्माण दक्कन के पठार में हुआ है।
- काली मृदा में नमी की अत्यधिक मात्रा पायी जाती है।
- ये मृदा कपास की फसल, तंबाकू, अरंडी, सूरजमुखी और बाजरे के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.1) फिशिंग कैट (Fishing Cat) के बारे में निम्नलिखित कथन पर विचार करें।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.3) भारत में, ऐसफेट, ट्रायजोफोस, थियामेथोक्साम, कार्बेन्डाजिम, ट्राईसाइक्लोजोल, बुप्रोफेजिन, कार्बोफ्यूरॉन, प्रोपिकोनाजोल और थायोफिनेट मिथाइल के उपयोग को संदेह से देखा जाता है। इन रसायनों का उपयोग किया जाता है?
Q.4) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- संविधान के भाग X में अनुच्छेद 244 अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों के रूप में निर्दिष्ट कुछ क्षेत्रों के लिए प्रशासन की एक विशेष प्रणाली की परिकल्पना करता है।
- संविधान की पांचवीं अनुसूची सभी राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
Q.5) छठी अनुसूची के तहत गठित जिला और क्षेत्रीय परिषदों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः
- जिला और क्षेत्रीय परिषदों को राज्यपाल के अनुमोदन के अधीन उनके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के लिए सभी मामलों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।
- एक स्वायत्त जिले में जिला परिषद में 30 सदस्य होते हैं और वे वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
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हाल ही में UPSC द्वारा COVID-उन्नीस को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा-दो हज़ार बीस के लिए नई तिथि चार अक्टूबर, दो हज़ार बीस की घोषणा की गयी है। ऐसे में इन एक सौ दिनों का सदुपयोग सही दिशा में करना अति महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसको देखते हुए IASBABA टीम द्वारा इष्टतम लाभ प्राप्त करने के लिए दस जून दो हज़ार बीस से इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान-दो हज़ार बीस लांच किया गया है, जिससे एक बार पुनः परीक्षा से संबंधित संपूर्ण पाठ्यक्रम का समुचित रिवीज़न किया जा सके। इंटीग्रेटेड रिवीज़न प्लान दो हज़ार बीस के महत्वपूर्ण तथ्यः - IRP दो हज़ार बीस एक निःशुल्क पहल है, जिसे आपको अगले एक सौ दिनों के लिए केंद्रित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है! - कार्यक्रम दस जून दो हज़ार बीस से आरंभ होगा। यह सप्ताह में छः दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होगा - आप इस समय का उपयोग रिवीज़न और वैकल्पिक विषय के लिए कर सकते हैं। - इसमें आपकी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों की तैयारी शामिल हैं। - प्रतिदिन आधार पर - प्रारंभिक परीक्षा - पाँच करंट अफेयर्स संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न, दस स्टेटिक भाग जैसे इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, अर्थशास्त्र एवं पर्यावरण आदि संबंधी बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। - प्रतिदिन आधार पर - मुख्य परीक्षा - TLP - तीन प्रश्न मुख्य परीक्षा संबंधी GSएक, GSदो, GSतीन को कवर करते हुए पोस्ट किया जाएगा। इन तीन प्रश्नों में से दो स्टेटिक भाग से और एक करंट अफेयर्स से होंगे। - GS चार और निबंध पर विशेष जोर - प्रत्येक सप्ताह तीन प्रश्न पोस्ट किए जाएंगे। इसमें दो नैतिकता सिद्धांत एवं एक प्रश्न केस स्टडी पर आधारित होंगे। - प्रत्येक शनिवार को चार निबंध दिए जाएंगे - हिंदी माध्यम में प्रश्न शाम पाँच बजे अपलोड किए जाएंगे। - गोल्डन राइस चावल की किस्मों का सामूहिक नाम है जिसे विकासशील देशों में विटामिन ए की कमी का मुकाबला करने के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता हैं। - गोल्डन राइस बनाने के लिए, वैज्ञानिकों ने मक्का के बीटा-कैरोटीन जीन से चावल के पौधों को संशोधित किया था। इसलिए चावल के पौधों में उच्च नारंगी रंग का वर्णक उत्पन्न होने लगा है। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.तीन) अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। - IRRI एक स्वतंत्र, लाभ-कारी, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान है। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.पाँच) निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही रूप से मेल खाता है / हैः Q.छः) एक ही खेत में एक के बाद एक अलग-अलग फसलें उगाकर फसल का चक्रिकरण / सस्य आवर्तन किया जाता है। निम्नलिखित में से कौन से फसल रोटेशन के लाभ हैं? नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः Q.सात) निम्नलिखित में से कौन सा कथन जैविक कृषि के संबंध में सही है / हैं? - जैविक कृषि से तात्पर्य है कि कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किए बिना कृषि के लिए पारंपरिक तरीकों का उपयोग करना। - जैविक कृषि पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम उपज पैदा करती है। - यह मृदा की जैविक गतिविधि को प्रोत्साहित करके मृदा की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनेंः Q.आठ) बाजरा/ मोटे अनाज के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - बाजरा कम अवधि के मौसम में उगाए जाने वाली गर्म मौसम की घास हैं, जिसे उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहाँ चावल और गेहूं जैसी मुख्य फसलें सफलतापूर्वक नहीं उगाई जा सकती हैं। - कर्नाटक भारत का सर्वोच्च बाजरा उत्पादक राज्य है। - बाजरे की खेती कम उपजाऊ भूमि, पहाड़ी, आदिवासी और वर्षा आधारित क्षेत्रों में की जाती है। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.नौ) गेहूं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - यह समशीतोष्ण क्षेत्र और सुदूर उत्तर के ठंडे इलाकों में उगाया जा सकता है, यहां तक कि इसे साठ डिग्री उत्तरी अक्षांश से आगे भी उगाया जाता है। - मिट्टी की दोमट या क्ले बनावट, अच्छी संरचना और मध्यम जल धारण क्षमता वाली मृदा गेहूँ की खेती के लिए आदर्श होती है। - इसकी खेती समुद्र तल से तीन हज़ार तीन सौ मीटर की उंचाई पर की जा सकती है। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.दस) काली मृदा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - अधिकांश काली मृदा के लिए मूल सामग्री ज्वालामुखी चट्टानें हैं जिनका निर्माण दक्कन के पठार में हुआ है। - काली मृदा में नमी की अत्यधिक मात्रा पायी जाती है। - ये मृदा कपास की फसल, तंबाकू, अरंडी, सूरजमुखी और बाजरे के लिए सबसे उपयुक्त हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.एक) फिशिंग कैट के बारे में निम्नलिखित कथन पर विचार करें। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.तीन) भारत में, ऐसफेट, ट्रायजोफोस, थियामेथोक्साम, कार्बेन्डाजिम, ट्राईसाइक्लोजोल, बुप्रोफेजिन, कार्बोफ्यूरॉन, प्रोपिकोनाजोल और थायोफिनेट मिथाइल के उपयोग को संदेह से देखा जाता है। इन रसायनों का उपयोग किया जाता है? Q.चार) निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - संविधान के भाग X में अनुच्छेद दो सौ चौंतालीस अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों के रूप में निर्दिष्ट कुछ क्षेत्रों के लिए प्रशासन की एक विशेष प्रणाली की परिकल्पना करता है। - संविधान की पांचवीं अनुसूची सभी राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं? Q.पाँच) छठी अनुसूची के तहत गठित जिला और क्षेत्रीय परिषदों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंः - जिला और क्षेत्रीय परिषदों को राज्यपाल के अनुमोदन के अधीन उनके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के लिए सभी मामलों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है। - एक स्वायत्त जिले में जिला परिषद में तीस सदस्य होते हैं और वे वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाते हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन सा सही है / हैं?
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लखनऊ. पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की 95th जयंती के मौके पर बुधवार को लखनऊ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि हमें विरासत में कई समस्याएं मिलीं, लेकिन हमने उनमें से कई समस्याओं का निस्तारण किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी समस्याओं को विरासत में नहीं देगी. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने आर्टिकल 370 और नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 की समस्या का समाधान आसानी से कर दिया. इतना ही राम जन्मभूमि का भी फैसला भी शांतिपूर्ण हुआ. आजादी के बाद से शोषित, वंचित शरणार्थियों को नागरिकता देकर उनका सम्मान भी किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अटलजी कहते थे सुशासन से ही चुनौतियों का सामना किया जा सकता है और विकास किया जा सकता है. इसी सुशासन की राह पर चलते हुए हमारी सरकार ने सभी चुनौतियों का सामना कर रही है और सबका साथ, सबका विकास के संकल्प पर अग्रसर है. हमने लटकाने वाली चुनौतियों को भी दूर किया है.
इस मौके पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें. कुछ लोगों ने बहकावे में आकर हिंसक प्रदर्शन किया. हिंसक प्रदर्शन करने वालों से पीएम मोदी ने पूछा वे बताएं क्या उन्होंने सही किया? जिस सार्वजनिक संपत्ति को उन्होंने तोड़ा क्या वो उनके परिवार के काम नहीं आती? इस तरह अफवाहों पर हिंसा करने से उनका खुद का ही नुकसान है. देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं पाने का हक है लेकिन उनका संरक्षण करना भी उनकी जिम्मेदारी है.
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज दिल्ली में अटल भूजल योजना का शुभारंभ किया. 6 हजार करोड़ रुपये की इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश सहित देश के 7 राज्यों में भूजल के स्तर को सुधारने के लिए काम किया जाएगा. आज सुशासन दिवस के दिन, यूपी का शासन जिस भवन से चलता है, वहां अटल जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया है. उनकी ये भव्य प्रतिमा, लोक भवन में कार्य करने वाले लोगों को सुशासन की, लोकसेवा की प्रेरणा देगी. "
उन्होंने कहा, "अटल जी को समर्पित अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया है. लखनऊ बरसों तक अटल जी की कर्म भूमि रही और वहां आकर शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े संस्थान का शिलान्यास करना जिसको भी अवसर मिलेगा वो जीवन में इसे अपना सौभाग्य मानेगा. मेरे लिए भी आज से सौभाग्य के पल हैं. "
पीएम मोदी ने कहा, "अटल जी कहते थे कि जीवन को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता, उसको समग्रता में देखना होगा. यही बात सरकार के लिए भी सत्य है, सुशासन के लिए भी सत्य है. सुशासन भी तब तक संभव नहीं है, जब तक हम समस्याओं को संपूर्णता में, समग्रता में नहीं सोचेंगे.
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लखनऊ. पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की पचानवेth जयंती के मौके पर बुधवार को लखनऊ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें विरासत में कई समस्याएं मिलीं, लेकिन हमने उनमें से कई समस्याओं का निस्तारण किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी समस्याओं को विरासत में नहीं देगी. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर और नागरिकता संशोधन कानून का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आर्टिकल तीन सौ सत्तर की समस्या का समाधान आसानी से कर दिया. इतना ही राम जन्मभूमि का भी फैसला भी शांतिपूर्ण हुआ. आजादी के बाद से शोषित, वंचित शरणार्थियों को नागरिकता देकर उनका सम्मान भी किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि अटलजी कहते थे सुशासन से ही चुनौतियों का सामना किया जा सकता है और विकास किया जा सकता है. इसी सुशासन की राह पर चलते हुए हमारी सरकार ने सभी चुनौतियों का सामना कर रही है और सबका साथ, सबका विकास के संकल्प पर अग्रसर है. हमने लटकाने वाली चुनौतियों को भी दूर किया है. इस मौके पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें. कुछ लोगों ने बहकावे में आकर हिंसक प्रदर्शन किया. हिंसक प्रदर्शन करने वालों से पीएम मोदी ने पूछा वे बताएं क्या उन्होंने सही किया? जिस सार्वजनिक संपत्ति को उन्होंने तोड़ा क्या वो उनके परिवार के काम नहीं आती? इस तरह अफवाहों पर हिंसा करने से उनका खुद का ही नुकसान है. देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं पाने का हक है लेकिन उनका संरक्षण करना भी उनकी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने कहा, "आज दिल्ली में अटल भूजल योजना का शुभारंभ किया. छः हजार करोड़ रुपये की इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश सहित देश के सात राज्यों में भूजल के स्तर को सुधारने के लिए काम किया जाएगा. आज सुशासन दिवस के दिन, यूपी का शासन जिस भवन से चलता है, वहां अटल जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया है. उनकी ये भव्य प्रतिमा, लोक भवन में कार्य करने वाले लोगों को सुशासन की, लोकसेवा की प्रेरणा देगी. " उन्होंने कहा, "अटल जी को समर्पित अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया है. लखनऊ बरसों तक अटल जी की कर्म भूमि रही और वहां आकर शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े संस्थान का शिलान्यास करना जिसको भी अवसर मिलेगा वो जीवन में इसे अपना सौभाग्य मानेगा. मेरे लिए भी आज से सौभाग्य के पल हैं. " पीएम मोदी ने कहा, "अटल जी कहते थे कि जीवन को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता, उसको समग्रता में देखना होगा. यही बात सरकार के लिए भी सत्य है, सुशासन के लिए भी सत्य है. सुशासन भी तब तक संभव नहीं है, जब तक हम समस्याओं को संपूर्णता में, समग्रता में नहीं सोचेंगे. ये भी पढ़ेंः .
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- Travel भक्ति की अनुठी कहानी सुनाता है कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कहां से आते हैं मंदिर में इतने शिवलिंग?
जब आप कोई बहुत इम्पोर्टेन्ट काम काम कर रहे हों और नेट काफी स्लो हो जाए तो आपको बेहद गुस्सा आता होगा। लेकिन अब आपको परेशान होने की या गुस्सा होने की कोई जरुरत नहीं है। विंडोज 7 और विंडोज 8 में आप ऐसे बढ़ा सकते हैं नेट की स्पीड। स्लाइडर में दिए गए ये आसान ट्रिक्स अपनाएं और देखिए आपका इंटरनेट फिर से दौड़ने लगेगा. .
इसके बाद आपके सामने एक टैब ओपन होगा। उसमें Computer configurathion पर क्लिक करें।
इसके बाद Administrative templates पर क्लिक करें। Administrative templates पर क्लिक करने के बाद Network पर क्लिक करें।
इसके बाद आपके सामने कई ऑप्शन्स होंगे जिसमें से आपको Qos Packet Scheduler को सिलेक्ट करना है।
इस स्टेप को दोहराने से आपके इंटरनेट की स्पीड बढ़ जाएगी।
अब Limits reservable bandwidth पर क्लिक करें। इसके बाद नया टैब ओपन होगा जिसमें 3 ऑप्शन्स दिए गए हैं इसमें से आपको Disabled को सिलेक्ट करना है।
इसके बाद इसी टैब में सबसे नीचे Apply का ऑप्शन दिया गया है। इसपर क्लिक करके OK पर क्लिक करें।
Start मेन्यू में जाएं। इसके बाद Command Prompt में जाकर। Run As Administrative को सिलेक्ट करें।
netsh interface tcp set global autotuning=disabled टाइप करें।
इसके बाद OK कर दें। अगर आपने सही कमांड टाइप किया है तो यह काम करेगा। इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के आसान स्टेप्स आपके लिए हेल्पफुल हो सकते हैं।
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चिंतपूर्णी - जिला कांगड़ा के अंतर्गत चिंतपूर्णी बस अड्डा में दुकानों के आगे बस अड्डा के ठेकेदार द्वारा दीवार लगाने पर दुकानदारों ने बस अड्डा में रोष प्रदर्शन किया। शनिवार सुबह जब बस अड्डा में दुकानों के आगे दीवार का कार्य शुरू किया तो दुकानदार भड़क उठे। बस अड्डा में एक सौ से अधिक लोगों ने एकत्रित होकर ठेकेदार की लेबर को दीवार लगाने से हटा दिया। स्थित तनावपूर्ण देख लेबर ने दीवार का काम बंद कर दिया। दोपहर बाद ंिचंतपूर्णी क्षेत्र के विधायक कुलदीप कुमार मौके पर पहुंचे व लोगों की बात सुनी व ठेकेदार से फोन पर बात कर मामला शांत करवाया। कुलदीप कुमार ने कहा कि किसी भी दुकानदार से अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण न हो इसके लिए रविवार को ठेकेदार और दुकानदार बैठकर स्थिति को सुलझाने का प्रयास करें। इस मौके पर सलोचना देवी, प्रधान सुषमा शर्मा, राकेश समनोल सहित स्थानीय दुकानदार अनिल कुमार, वेद प्रकाश, संजीव शर्मा, विशाल, राकेश, राजू, सुभाष, योगराज कृष्ण, अमित, रिंपी, रामरोट दिलभाग सहित अन्य उपस्थित रहे।
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चिंतपूर्णी - जिला कांगड़ा के अंतर्गत चिंतपूर्णी बस अड्डा में दुकानों के आगे बस अड्डा के ठेकेदार द्वारा दीवार लगाने पर दुकानदारों ने बस अड्डा में रोष प्रदर्शन किया। शनिवार सुबह जब बस अड्डा में दुकानों के आगे दीवार का कार्य शुरू किया तो दुकानदार भड़क उठे। बस अड्डा में एक सौ से अधिक लोगों ने एकत्रित होकर ठेकेदार की लेबर को दीवार लगाने से हटा दिया। स्थित तनावपूर्ण देख लेबर ने दीवार का काम बंद कर दिया। दोपहर बाद ंिचंतपूर्णी क्षेत्र के विधायक कुलदीप कुमार मौके पर पहुंचे व लोगों की बात सुनी व ठेकेदार से फोन पर बात कर मामला शांत करवाया। कुलदीप कुमार ने कहा कि किसी भी दुकानदार से अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण न हो इसके लिए रविवार को ठेकेदार और दुकानदार बैठकर स्थिति को सुलझाने का प्रयास करें। इस मौके पर सलोचना देवी, प्रधान सुषमा शर्मा, राकेश समनोल सहित स्थानीय दुकानदार अनिल कुमार, वेद प्रकाश, संजीव शर्मा, विशाल, राकेश, राजू, सुभाष, योगराज कृष्ण, अमित, रिंपी, रामरोट दिलभाग सहित अन्य उपस्थित रहे।
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ऊना - शस्त्र झंडा दिवस के मौके पर उपायुक्त ऊना विकास लाबरू को उपनिदेशक जिला सैनिक कल्याण ऊना मेजर (सेवानिवृत)रघवीर सिंह ने झंडी लगाकर इसका शुभारंभ किया। इसके उपरांत जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित सभी जजों, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुखदेव सिंह, सहायक आयुक्त संजीव कुमार के अतिरिक्त डीएसपी एवं तहसीलदार ऊना सहित जिला के अन्य अधिकारियों को भी झंडी लगाई गई तथा उनके द्वारा अपनी श्रद्धा अनुसार दान की गई राशि को दानपात्र में एकत्रित किया गया। इस संबंध में उपनिदेशक सैनिक कल्याण मेजर रघवीर सिंह ने बताया कि सशस्त्र झंडा दिवस प्रतिवर्ष सात दिसंबर को मनाया जाता है, जबकि हिमाचल प्रदेश में इसे 31 दिसंबर तक मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस उपलक्ष्य में एकत्रित की गई धनराशि को अति निर्धन पूर्व सैनिकों, विधवाओं, विकलांग सैनिकों तथा उनके आश्रितों को बतौर वित्तीय सहायता के रूप में वितरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह एक बहुत ही पुण्य का कार्य है, जिसमें जिला के सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर भाग ले कर झंडा दिवस के उपलक्ष्य में दिल खोलकर दान देना चाहिए, ताकि उनके द्वारा दान में दी गई यह राशि निर्धन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों इत्यादि के कल्याण में खर्च की जा सके।
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ऊना - शस्त्र झंडा दिवस के मौके पर उपायुक्त ऊना विकास लाबरू को उपनिदेशक जिला सैनिक कल्याण ऊना मेजर रघवीर सिंह ने झंडी लगाकर इसका शुभारंभ किया। इसके उपरांत जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित सभी जजों, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुखदेव सिंह, सहायक आयुक्त संजीव कुमार के अतिरिक्त डीएसपी एवं तहसीलदार ऊना सहित जिला के अन्य अधिकारियों को भी झंडी लगाई गई तथा उनके द्वारा अपनी श्रद्धा अनुसार दान की गई राशि को दानपात्र में एकत्रित किया गया। इस संबंध में उपनिदेशक सैनिक कल्याण मेजर रघवीर सिंह ने बताया कि सशस्त्र झंडा दिवस प्रतिवर्ष सात दिसंबर को मनाया जाता है, जबकि हिमाचल प्रदेश में इसे इकतीस दिसंबर तक मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस उपलक्ष्य में एकत्रित की गई धनराशि को अति निर्धन पूर्व सैनिकों, विधवाओं, विकलांग सैनिकों तथा उनके आश्रितों को बतौर वित्तीय सहायता के रूप में वितरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह एक बहुत ही पुण्य का कार्य है, जिसमें जिला के सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर भाग ले कर झंडा दिवस के उपलक्ष्य में दिल खोलकर दान देना चाहिए, ताकि उनके द्वारा दान में दी गई यह राशि निर्धन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों इत्यादि के कल्याण में खर्च की जा सके।
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कौने चित्त पहुएन ? क्या इन जलाशायों को आपस दिगम्बर लोग ही मिल-मिलाकर खोद लिया करते हैं, या वे ही ऊपर कहें हुए शूद लोग उन्हें खोदा करते हैं ? सच्ची वात हो, सो कह दीजिए । उत्तर देते समय जरा कैंपिये नहीं । यदि भ्रमचारी जी । जो शूद्रादि आप के जलाशयों को खोढते है, तो फिर उन मे नहाने, तथा उन का पानी पीने पर तो, आप शूद्रों से भी गये बीते ठहर जाते हैं, या नही ? क्योंकि, यह तो आप ही के शास्त्रों का नुस्खा है, उन्हीं की यह अनोखी सूझ है। हमारा तो इस मे तनिक भी हाथ नहीं ।
(५) आगे चलते चलिये । उसी " त्रिवर्णिकाचार नामक ग्रन्थ के पृष्ठ ६८ पर लिखा है, कि, अंगुली मे ताँबे का छल्ला पहनने वाला मनुष्य पवित्र होता है। आपके इस सिद्धान्तानुसार, यह तो स्वत सिद्ध हो गया, सिद्ध हो गया, कि जितने भी
दिगम्बर भाई, अपने हाथों की
अँगुलियों मे, चॉदी तथा सोने
की अंगूठियाँ पहनते है, वे सब-के-सत्र पवित्र है। अरे भ्रमचारी जी । जिन के कारण से तुम, तुम बने हुए हो, उन्हीं गृहस्थियों को क्यों अपवित्र ठहराते हो ?
भ्रमचारी जी । यहीं ठिठक न रहिये । जरा, आगे क़दम धरते ही चलिये । आप के उसी ऊपर वाले धर्म-प्रन्थ के पृष्ठ ६६ पर, पापों से पिंड छुडाने का एक बडा ही अनुप उपाय सुझाया गया है । वाह-वाह । क्या कहना । आप के, दिगम्बर दिमाग और दकियानूसी दिल वाले नगे गुरुओं ने
अपने शारों का मंथन फरके, क्या ही सुन्दर शोष बूँद निकाली है। कि-गोड करने वाला, सभा चोरी आदि सब पापों का करने वाला पुरुप दिन भगवान् के भरण-परिव सन्कापन करने से सब पापों
से मुक्त हो जाता है। पाठको वन वो जेस और नर्क माहि से मुखि पाने का क्या दी और सामान पा भाप के शात्रों में लिखा है। भ्रमवारी जी ! म यो- Danda of dalaneta sre committed in the dark 'ममात् जगत् में जितने भी अन्याय और अत्याचार के काम है सब के सब धंधेरे दी में किये जाते हैं, इस माद-नियम पे भीतर ही मीवर मयंकर पाप निमपि करते असे माइये, और उघर, गयन-अप करते रहिये जिस से, स पूर्णपसे भी भाप चुप चाप सुहाते रहें। बाद रे स्वायम्मकार के उसको । न्य को भरने स्वार्य-साधन केहि तुमने क्यायाम किया और क्या-क्या करोगे तुम्ह अपूर्ण सम है। जरा, अपना यह उपाय भारत सरकार को भी तो तुम योग दिया। जिससे मर्यकर पाप के करने वाले सब के सब फ राधियों को शत-श्री पास में सरकार रिहा कर दिया करे। यू नाना प्रकार केनों के शासन तथा मठ मसि के कानूनों की रचना से सरकार बषे ा
(६) भ्रमवारी जी आपसी परम पावन (१) शास्त्र के दूस १४१ वे पर पर स्त्रियों को आकर्षित या मादित करने
का तो खूत्र ही अच्छा मन्त्र बताया है । हमें विश्वास है, कि तब तो आपके नगे गुरु इस अजीब मोहन मन्त्र को काम में लाकर, परदाराओं को मोहित तथा आकर्षित करते ही होंगे ! क्योंकि यह तो आपके यहाँ आपके परम पावन धर्म-शास्त्र ही.. की है। अतः प्राण रहते तो आप इसका उल्लंघन कदापि कर ही नहीं सकते। भ्रमचारी जी । भला हो आपके उन शास्त्रकारों और शास्त्र का ! भ्रमचारी जी ! "बड़े भाग मानुष-तन पावा।" कभी भाग्य ने जोर मारा तो कोई-न-कोई झूठन-झाटन आपको भी एक न एक दिन मिल ही जावेगा । उस दिन उस वहती गंगा में हाथ धोने से कदापि न चूकिये । आपके शास्त्रों के अनुसार आपकी पावन करणी ( १ ) से तो,
पूर्ण परिचित हैं ही। फिर परलोक मे इस गंगा स्नान का सौभाग्य आपको मिले न मिले ! "धन्य भूमि वन पन्थ पहारा ! जहॅ-जहॅ नाथ पाँव तुम धारा 11" धन्य है आपके ऐसे भ्रमभरे ब्रह्मचर्य को ! और शत-शत चार धन्य है आपके कचन और कामिनी के त्यागी, नामधारी ऐसे नग्न गुरुओं को !!
(७) आपके पावन धर्म शास्त्र (?) पर चढ़े हुए ढोल की पोल को कहाँ तक खोलें। जरा ही आगे और सटकिये। आपके इसी धर्म - रसिक ग्रन्थ के पृष्ठ १४२ पर, स्त्री-पुरुष की एकता मे विद्रोह मचा देने वाला तरीका भी क्या ही मजेदार लिख दिया है । यही नहीं, किसी को रोगी, या दुखी बनाना हो तो इन चातों के भी अनुभूत तथा परिक्षित योग वहाँ बता दिये गये हैं।
भ्रमणारी जी । धन्य है आपके ऐसे धर्म-शाा (१) मानव-समाज को दुखी और रोगी तक बनाने के अनुभूत प्रोमोगों का दिग्दर्शन कराया गया हो । हा हुन्छ । ऐसे प्रयोगों की मीमांसा करने वाले बैनरत्र (1) पर भू मू !! हि' ! । हि ।। एक-जोबस और सौ मही, बरम् इचारों बार मिस्कार । विक्कार !! पिक्कार !!!
पाठको भ्रमचारी जी का पैर भय करा देहा-मेड़ा पड़ रहा है। अब मेही भ्रमचारी की, मील के शातिर ममते-भ्रमते बीकानेर पहुंचते हैं। और वे बीकानेर निवासी गणपविभाजी कीकृत "सम्पपरीक्षा कारण देते हैं। मगर न हो इस पुस्तक का स्थानकासी है और म यह पुस्तक ही स्थानकवासियों को माम्प है। पोथो कई समय-असमय, महावीर के सम्बन्ध में अंट-सेट लिखा और सिख देते हैं, तो धनकी सारी जिम्मेदारी नहीं पर तो है। इस माते, "सम्ब परीचा" के रस का मोश और दो ही क्या विचारणाम् पाठक स्वयं सोच-समझ से। रही पाव भय भ्रमचारी जी की ! जिन्होंने उसे स्थानकवासियों की मान्यता का प्रम्य मोहुए भी व्यवरम स्थानकवासियों के सिर कन् बसेका दिया है। श्वना दी करके वे चुप हो रहते वो ठीक था। पर नहीं वो उसका प्रमाण तक के सामने पेश कर दिया है। इस भी हो पर है यह सब अयुक्ति पुक्ति, अमामाणिक और अनुमान के सिरों पर
हुआ । भ्रमचारी जी की यह कितनी अक्षम्य धृष्टता है ! पाठको क्यों नहीं शीघ्र-से-शीघ्र ऐसे भ्रमित बुद्धि के भ्रमचारी जी का फैलाये हुए दूषित वातावरण को शुद्ध बनाने का भरसक प्रयत्न आप करते हैं ? चेविये, समाज की अचेवन अमराव भी कुछ स्वाँस ले रही है ।
एक ही नाम-ठाम के अनेक व्यक्ति जगत् मे हुए; होते हैं, और होते रहेंगे। यह तो कभी सम्भव नहीं, कि यदि इस घराधाम पर किसी व्यक्ति का नाम रेवती हो तो अपने नाम का एकाधिकारनामा (Monopoly) बस उसी ने लिखा लिया हो। हम और आप सभी देखते तथा सुनते हैं, कि एक ही नाम के अनेकों व्यक्ति यहाँ पहले भी थे और आज भी हैं। तब सुन्दरलाल जी ! क्या दुनिया में एक तुम्हीं सुन्दरलालजी हो ? क्या तुम्हारे सिवाय संसार में सुन्दरलाल जी नाम का अन्य कोई व्यक्ति है ही नहीं ? अरे भ्रमचारी जी ! ऐसी बात न तो है ही, और न कभी हो ही सकती है। परन्तु हाँ, इतना तो हम भी मानने को तैयार हैं; कि यदि एक सुन्दरलाल व्यभिचारी है, तो दूसरा कोई माँसाहारी । फिर तीसरा सुन्दरलाल कोई चोर, कठोर और मुँह चोर है, तो चौथा कोई सुन्दरलाल सढ़े हुए दिमाग और दकियानूसी विचार वाला है। यों नाम के एक होने पर भी व्यक्ति सब अलग-अलग हैं । उन के
रूप और काम, तथा गुण और स्वभाव, सभी, मिल मिन हैं। अमचारी जी । अहम
हो सिद्धान्तों को कर लें, तुम दुनियाभर में, जैसे एक माम का केवल एक ही व्यक्ति समते हो मैसा हम भी मामले, व यो तुम्हारे ही बचन, अनुमान और प्रमाण से, फिर दुनिया भर में तुम जैसा केवल एक दी म्हरहुआ। और इस नाते व तो नामी, कामी, व्यभिचारी, मौस-भक्षक, चोर, डा आदि सभी दुगु यों के पिटारे तुम्ही ठहरे (बदि यह बात तुम्हें माम्य है, तब या "मौर्म सम्मति लक्षणम् "के न्याय से उपयुक सारे गुणों (१) के मूर्तिमा भौतुम हो ही और कदाचित् वद कथम तुम्हे अन्वीकार है, दो फिर मगबाम् महावीर का श्रीपमि दान देने वाली रेवती जो मेहिया गाँव की रहने वाली है, उसकी तुझमा केवल नाम के नातेदांग-सूत्रष्ट १६२ पर बत राजद की हवा मांसाहारिणी और पारि रवती के साथ करना तुम्हारी हिमालय जैसीमर्यकर मूल नहीं और क्या हो सकता है ? भ्रमचारी जी भ्रम को भाड़-मुहार । कर परे फैको सास्त्रों का मनन और विचारपूर्वक अन्यम करो। कभी वक्रिमानूसी विचार तुम्हारा दूर हो पायेगा। भाई भ्रमचारी जी मेडिया गाँव की रहने बाली रेवती और राजगृह निवासिमी रेवती दोनों पकू-पृथक् लिज भी और दोनों के
आचरण, गुण स्वभाव आदि भी सत्र भिन्नभिन्न थे ।
भ्रमचारी जी ! कई व्यक्ति संसार में ऐसे हो सकते हैं, जिनके केवल नाम आपके नंगे गुरुओं से मिलते-जुलते हो परन्तु उनमे से कोई तो मांसाहारी हो और कोई डाकू कोई व्यभिचारी और कोई दुराचारी हो और कोई मदकची तथा कोई गॅजेड़ी भँगेड़ी हो । तो क्या केवल उनके नाम के नाते ये सब के सब आरोप आपके नंगे गुरुओं पर भी लग सकते है ? भ्रमचारी जी ! क्या इस बात को मानने के लिये तुम उतारू हो ? यदि नहीं तो फिर मेढिया गाँव की रहने वाली रेवती की तुलना केवल नाम मात्र एक होने से राजगृह की रहनेवाली रेवती के साथ करना तुम्हारी नादानीपन का नमूना नहीं तो और क्या हो सकता है ?
भ्रमचारी जी (१) उपासक दशाग मे वर्णिता रेवती राजगृह मे रहनेवाले महाशतक जी की स्त्री परतन्त्र है । और ( २ ) भगवती जी सूत्र मे वर्णन की हुई रेवती मेढियाग्राम की रहनेवाली स्त्री स्वतन्त्र अर्थात् एक गृह स्वामिनी है । ये दोनों स्त्रियाँ जो भी नाम से एक ही थीं; पर ग्राम और काम दोनों से पृथक्पृथक् थीं । उपासक-दशाग-सूत्र मे जिस रेवती का वर्णन आता है, वह एक माँसाहारिणी, क्रूरा, कुलटा, हिंसा परायणा और अधर्मरता नारी है। इसके विपरीत जिस रेवती का वर्णन भगवती जी सूत्र मे आता है, वह सर्वज्ञ, भगवान् महावीर के अमल कोमल चरणों मे भक्ति-भाव रखने वाली, सिंहा अरणगार को दान देने वाली और एक धर्म-परायणा नारी है। इन में से
उपासक दशांग सूत्र की रेवती मर करके म गामी बनी है।और भगवती की सूत्र वाली रेववी अपनी मीन लीला समाप्त करके में सिपारी है। प्रमाण के रूप में इन दोनों के विषय में सूत्र पाठ निम्न शिवि हैवसा र गाहाइसी अंतोसचररस सवा हिस्सा घमिमूया भट्ट दुबह वसट्टा कालामाचे कालं किडचा इमीस श्ययभार पुरवीर सो नरम व्यसोई वासह
ठिइपसु नेरश्पस मरइपचार वरणा" पास ८२७ । ""वपक्ष वीप रेवतीर गाहाबविग्री तेर्स इम्पस बाबा सी भयगारे पहिलाभिए साये याउप निबद्ध बदा विजयस्त बाग जम्मी ती गव्हानवियीय ।"
भ्रमचारी जी । कोष-सरीय माग्जार
आदि का अर्ज एक नहीं परम भनेको बार बनस्पति सिद्ध कर दिया गया है, के लिये देवा(१) ५० की महाराज
चित्रित 'साम
प्रदीप (२) रावादमामी 4 श्री रस्म श्री महाराज द्वारा मिचरित 'रेवतीरान-मोचमा (1) पं० मिश्रीलाल जी महाराज प्रम्बर-मत समीर (४) मुनि श्रीचन्द जी महाराज भय मशीय 'सस्मासस्य सीमांसा आदि में पदों का धर्म रूप से बनस्पति के अर्थ में सिद्ध करके दि दिया गया है। वह सम दो मुकने पर भी सूखी ए
न्या मतसिंहजी सुन्दरलालजी जैसे दक्कियानूसी विचारों के लोगों के द्वारा बीसियों बार हिर- फिर कर अपनी-अपनी रचनाओं मे, इसी बात का रोना 'अन्धा मुर्गा चक्की के इर्द-गिर्द' वाली कहावत का घरितार्थ करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। इस पी से हुए को पीसने मे न जाने हुन लोगों को मज्रा कौन सा मिलता है ! मजा ? अजी मज्जा मज्जा तो कुछ नहीं, इन के पास दूसरी कोई चर्चा ही नहीं । इन अड़ियल दिमागों के पास और कुछ कहने सुनने की कोई ताकत ही नहीं फिर वे और कुछ कहें तो भी क्या ?
जरा आँखें खोल कर देखना सीखो । भ्रमचारी जी ! शास्त्रों मे एक ही नाम के यत्र-तत्र अनेकों व्यक्ति अपनी शुभ तथा अशुभ क्रियाओं के द्वारा स्वर्ग या अपवर्ग और स्थानों में अपनी-अपनी करणी के अनुसार गये हैं। केवल नाम साम्य होजाने मात्र ही से उनकी क्रियाएँ समान कैसे हो सकती हैं ? कदापि नहीं। अजी व्यवहार ज्ञान से शून्य भ्रमघारी जी । 'अॅगुली' इस शब्द के समान होने पर भी, एक ही हाथ की सब अँगुलियाँ तक जब रूप और काम में समान नहीं होतीं, नहीं हो सकतीं और न होना ही युक्तियुक्ति तथा प्रामाणिकता का प्रमाण हैं, तब दूर के दो व्यक्तियों की बातें तो चलावे ही कौन ? और क्यों ? भ्रमचारी जी ! यदि 'कृष्ण' नामक किसी एक भील को जो हिंसा-रत, असत्यवादी, चोर, व्यभिचारी और मद्यपी है, केवल नाम-भर की समानता के कारण, 'श्रीकृष्णचन्द्र' मान कर महत्व आप देने लगे, तो लोग आपकी
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कौने चित्त पहुएन ? क्या इन जलाशायों को आपस दिगम्बर लोग ही मिल-मिलाकर खोद लिया करते हैं, या वे ही ऊपर कहें हुए शूद लोग उन्हें खोदा करते हैं ? सच्ची वात हो, सो कह दीजिए । उत्तर देते समय जरा कैंपिये नहीं । यदि भ्रमचारी जी । जो शूद्रादि आप के जलाशयों को खोढते है, तो फिर उन मे नहाने, तथा उन का पानी पीने पर तो, आप शूद्रों से भी गये बीते ठहर जाते हैं, या नही ? क्योंकि, यह तो आप ही के शास्त्रों का नुस्खा है, उन्हीं की यह अनोखी सूझ है। हमारा तो इस मे तनिक भी हाथ नहीं । आगे चलते चलिये । उसी " त्रिवर्णिकाचार नामक ग्रन्थ के पृष्ठ अड़सठ पर लिखा है, कि, अंगुली मे ताँबे का छल्ला पहनने वाला मनुष्य पवित्र होता है। आपके इस सिद्धान्तानुसार, यह तो स्वत सिद्ध हो गया, सिद्ध हो गया, कि जितने भी दिगम्बर भाई, अपने हाथों की अँगुलियों मे, चॉदी तथा सोने की अंगूठियाँ पहनते है, वे सब-के-सत्र पवित्र है। अरे भ्रमचारी जी । जिन के कारण से तुम, तुम बने हुए हो, उन्हीं गृहस्थियों को क्यों अपवित्र ठहराते हो ? भ्रमचारी जी । यहीं ठिठक न रहिये । जरा, आगे क़दम धरते ही चलिये । आप के उसी ऊपर वाले धर्म-प्रन्थ के पृष्ठ छयासठ पर, पापों से पिंड छुडाने का एक बडा ही अनुप उपाय सुझाया गया है । वाह-वाह । क्या कहना । आप के, दिगम्बर दिमाग और दकियानूसी दिल वाले नगे गुरुओं ने अपने शारों का मंथन फरके, क्या ही सुन्दर शोष बूँद निकाली है। कि-गोड करने वाला, सभा चोरी आदि सब पापों का करने वाला पुरुप दिन भगवान् के भरण-परिव सन्कापन करने से सब पापों से मुक्त हो जाता है। पाठको वन वो जेस और नर्क माहि से मुखि पाने का क्या दी और सामान पा भाप के शात्रों में लिखा है। भ्रमवारी जी ! म यो- Danda of dalaneta sre committed in the dark 'ममात् जगत् में जितने भी अन्याय और अत्याचार के काम है सब के सब धंधेरे दी में किये जाते हैं, इस माद-नियम पे भीतर ही मीवर मयंकर पाप निमपि करते असे माइये, और उघर, गयन-अप करते रहिये जिस से, स पूर्णपसे भी भाप चुप चाप सुहाते रहें। बाद रे स्वायम्मकार के उसको । न्य को भरने स्वार्य-साधन केहि तुमने क्यायाम किया और क्या-क्या करोगे तुम्ह अपूर्ण सम है। जरा, अपना यह उपाय भारत सरकार को भी तो तुम योग दिया। जिससे मर्यकर पाप के करने वाले सब के सब फ राधियों को शत-श्री पास में सरकार रिहा कर दिया करे। यू नाना प्रकार केनों के शासन तथा मठ मसि के कानूनों की रचना से सरकार बषे ा भ्रमवारी जी आपसी परम पावन शास्त्र के दूस एक सौ इकतालीस वे पर पर स्त्रियों को आकर्षित या मादित करने का तो खूत्र ही अच्छा मन्त्र बताया है । हमें विश्वास है, कि तब तो आपके नगे गुरु इस अजीब मोहन मन्त्र को काम में लाकर, परदाराओं को मोहित तथा आकर्षित करते ही होंगे ! क्योंकि यह तो आपके यहाँ आपके परम पावन धर्म-शास्त्र ही.. की है। अतः प्राण रहते तो आप इसका उल्लंघन कदापि कर ही नहीं सकते। भ्रमचारी जी । भला हो आपके उन शास्त्रकारों और शास्त्र का ! भ्रमचारी जी ! "बड़े भाग मानुष-तन पावा।" कभी भाग्य ने जोर मारा तो कोई-न-कोई झूठन-झाटन आपको भी एक न एक दिन मिल ही जावेगा । उस दिन उस वहती गंगा में हाथ धोने से कदापि न चूकिये । आपके शास्त्रों के अनुसार आपकी पावन करणी से तो, पूर्ण परिचित हैं ही। फिर परलोक मे इस गंगा स्नान का सौभाग्य आपको मिले न मिले ! "धन्य भूमि वन पन्थ पहारा ! जहॅ-जहॅ नाथ पाँव तुम धारा ग्यारह" धन्य है आपके ऐसे भ्रमभरे ब्रह्मचर्य को ! और शत-शत चार धन्य है आपके कचन और कामिनी के त्यागी, नामधारी ऐसे नग्न गुरुओं को !! आपके पावन धर्म शास्त्र पर चढ़े हुए ढोल की पोल को कहाँ तक खोलें। जरा ही आगे और सटकिये। आपके इसी धर्म - रसिक ग्रन्थ के पृष्ठ एक सौ बयालीस पर, स्त्री-पुरुष की एकता मे विद्रोह मचा देने वाला तरीका भी क्या ही मजेदार लिख दिया है । यही नहीं, किसी को रोगी, या दुखी बनाना हो तो इन चातों के भी अनुभूत तथा परिक्षित योग वहाँ बता दिये गये हैं। भ्रमणारी जी । धन्य है आपके ऐसे धर्म-शाा मानव-समाज को दुखी और रोगी तक बनाने के अनुभूत प्रोमोगों का दिग्दर्शन कराया गया हो । हा हुन्छ । ऐसे प्रयोगों की मीमांसा करने वाले बैनरत्र पर भू मू !! हि' ! । हि ।। एक-जोबस और सौ मही, बरम् इचारों बार मिस्कार । विक्कार !! पिक्कार !!! पाठको भ्रमचारी जी का पैर भय करा देहा-मेड़ा पड़ रहा है। अब मेही भ्रमचारी की, मील के शातिर ममते-भ्रमते बीकानेर पहुंचते हैं। और वे बीकानेर निवासी गणपविभाजी कीकृत "सम्पपरीक्षा कारण देते हैं। मगर न हो इस पुस्तक का स्थानकासी है और म यह पुस्तक ही स्थानकवासियों को माम्प है। पोथो कई समय-असमय, महावीर के सम्बन्ध में अंट-सेट लिखा और सिख देते हैं, तो धनकी सारी जिम्मेदारी नहीं पर तो है। इस माते, "सम्ब परीचा" के रस का मोश और दो ही क्या विचारणाम् पाठक स्वयं सोच-समझ से। रही पाव भय भ्रमचारी जी की ! जिन्होंने उसे स्थानकवासियों की मान्यता का प्रम्य मोहुए भी व्यवरम स्थानकवासियों के सिर कन् बसेका दिया है। श्वना दी करके वे चुप हो रहते वो ठीक था। पर नहीं वो उसका प्रमाण तक के सामने पेश कर दिया है। इस भी हो पर है यह सब अयुक्ति पुक्ति, अमामाणिक और अनुमान के सिरों पर हुआ । भ्रमचारी जी की यह कितनी अक्षम्य धृष्टता है ! पाठको क्यों नहीं शीघ्र-से-शीघ्र ऐसे भ्रमित बुद्धि के भ्रमचारी जी का फैलाये हुए दूषित वातावरण को शुद्ध बनाने का भरसक प्रयत्न आप करते हैं ? चेविये, समाज की अचेवन अमराव भी कुछ स्वाँस ले रही है । एक ही नाम-ठाम के अनेक व्यक्ति जगत् मे हुए; होते हैं, और होते रहेंगे। यह तो कभी सम्भव नहीं, कि यदि इस घराधाम पर किसी व्यक्ति का नाम रेवती हो तो अपने नाम का एकाधिकारनामा बस उसी ने लिखा लिया हो। हम और आप सभी देखते तथा सुनते हैं, कि एक ही नाम के अनेकों व्यक्ति यहाँ पहले भी थे और आज भी हैं। तब सुन्दरलाल जी ! क्या दुनिया में एक तुम्हीं सुन्दरलालजी हो ? क्या तुम्हारे सिवाय संसार में सुन्दरलाल जी नाम का अन्य कोई व्यक्ति है ही नहीं ? अरे भ्रमचारी जी ! ऐसी बात न तो है ही, और न कभी हो ही सकती है। परन्तु हाँ, इतना तो हम भी मानने को तैयार हैं; कि यदि एक सुन्दरलाल व्यभिचारी है, तो दूसरा कोई माँसाहारी । फिर तीसरा सुन्दरलाल कोई चोर, कठोर और मुँह चोर है, तो चौथा कोई सुन्दरलाल सढ़े हुए दिमाग और दकियानूसी विचार वाला है। यों नाम के एक होने पर भी व्यक्ति सब अलग-अलग हैं । उन के रूप और काम, तथा गुण और स्वभाव, सभी, मिल मिन हैं। अमचारी जी । अहम हो सिद्धान्तों को कर लें, तुम दुनियाभर में, जैसे एक माम का केवल एक ही व्यक्ति समते हो मैसा हम भी मामले, व यो तुम्हारे ही बचन, अनुमान और प्रमाण से, फिर दुनिया भर में तुम जैसा केवल एक दी म्हरहुआ। और इस नाते व तो नामी, कामी, व्यभिचारी, मौस-भक्षक, चोर, डा आदि सभी दुगु यों के पिटारे तुम्ही ठहरे के मूर्तिमा भौतुम हो ही और कदाचित् वद कथम तुम्हे अन्वीकार है, दो फिर मगबाम् महावीर का श्रीपमि दान देने वाली रेवती जो मेहिया गाँव की रहने वाली है, उसकी तुझमा केवल नाम के नातेदांग-सूत्रष्ट एक सौ बासठ पर बत राजद की हवा मांसाहारिणी और पारि रवती के साथ करना तुम्हारी हिमालय जैसीमर्यकर मूल नहीं और क्या हो सकता है ? भ्रमचारी जी भ्रम को भाड़-मुहार । कर परे फैको सास्त्रों का मनन और विचारपूर्वक अन्यम करो। कभी वक्रिमानूसी विचार तुम्हारा दूर हो पायेगा। भाई भ्रमचारी जी मेडिया गाँव की रहने बाली रेवती और राजगृह निवासिमी रेवती दोनों पकू-पृथक् लिज भी और दोनों के आचरण, गुण स्वभाव आदि भी सत्र भिन्नभिन्न थे । भ्रमचारी जी ! कई व्यक्ति संसार में ऐसे हो सकते हैं, जिनके केवल नाम आपके नंगे गुरुओं से मिलते-जुलते हो परन्तु उनमे से कोई तो मांसाहारी हो और कोई डाकू कोई व्यभिचारी और कोई दुराचारी हो और कोई मदकची तथा कोई गॅजेड़ी भँगेड़ी हो । तो क्या केवल उनके नाम के नाते ये सब के सब आरोप आपके नंगे गुरुओं पर भी लग सकते है ? भ्रमचारी जी ! क्या इस बात को मानने के लिये तुम उतारू हो ? यदि नहीं तो फिर मेढिया गाँव की रहने वाली रेवती की तुलना केवल नाम मात्र एक होने से राजगृह की रहनेवाली रेवती के साथ करना तुम्हारी नादानीपन का नमूना नहीं तो और क्या हो सकता है ? भ्रमचारी जी उपासक दशाग मे वर्णिता रेवती राजगृह मे रहनेवाले महाशतक जी की स्त्री परतन्त्र है । और भगवती जी सूत्र मे वर्णन की हुई रेवती मेढियाग्राम की रहनेवाली स्त्री स्वतन्त्र अर्थात् एक गृह स्वामिनी है । ये दोनों स्त्रियाँ जो भी नाम से एक ही थीं; पर ग्राम और काम दोनों से पृथक्पृथक् थीं । उपासक-दशाग-सूत्र मे जिस रेवती का वर्णन आता है, वह एक माँसाहारिणी, क्रूरा, कुलटा, हिंसा परायणा और अधर्मरता नारी है। इसके विपरीत जिस रेवती का वर्णन भगवती जी सूत्र मे आता है, वह सर्वज्ञ, भगवान् महावीर के अमल कोमल चरणों मे भक्ति-भाव रखने वाली, सिंहा अरणगार को दान देने वाली और एक धर्म-परायणा नारी है। इन में से उपासक दशांग सूत्र की रेवती मर करके म गामी बनी है।और भगवती की सूत्र वाली रेववी अपनी मीन लीला समाप्त करके में सिपारी है। प्रमाण के रूप में इन दोनों के विषय में सूत्र पाठ निम्न शिवि हैवसा र गाहाइसी अंतोसचररस सवा हिस्सा घमिमूया भट्ट दुबह वसट्टा कालामाचे कालं किडचा इमीस श्ययभार पुरवीर सो नरम व्यसोई वासह ठिइपसु नेरश्पस मरइपचार वरणा" पास आठ सौ सत्ताईस । ""वपक्ष वीप रेवतीर गाहाबविग्री तेर्स इम्पस बाबा सी भयगारे पहिलाभिए साये याउप निबद्ध बदा विजयस्त बाग जम्मी ती गव्हानवियीय ।" भ्रमचारी जी । कोष-सरीय माग्जार आदि का अर्ज एक नहीं परम भनेको बार बनस्पति सिद्ध कर दिया गया है, के लिये देवा पचास की महाराज चित्रित 'साम प्रदीप रावादमामी चार श्री रस्म श्री महाराज द्वारा मिचरित 'रेवतीरान-मोचमा पंशून्य मिश्रीलाल जी महाराज प्रम्बर-मत समीर मुनि श्रीचन्द जी महाराज भय मशीय 'सस्मासस्य सीमांसा आदि में पदों का धर्म रूप से बनस्पति के अर्थ में सिद्ध करके दि दिया गया है। वह सम दो मुकने पर भी सूखी ए न्या मतसिंहजी सुन्दरलालजी जैसे दक्कियानूसी विचारों के लोगों के द्वारा बीसियों बार हिर- फिर कर अपनी-अपनी रचनाओं मे, इसी बात का रोना 'अन्धा मुर्गा चक्की के इर्द-गिर्द' वाली कहावत का घरितार्थ करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। इस पी से हुए को पीसने मे न जाने हुन लोगों को मज्रा कौन सा मिलता है ! मजा ? अजी मज्जा मज्जा तो कुछ नहीं, इन के पास दूसरी कोई चर्चा ही नहीं । इन अड़ियल दिमागों के पास और कुछ कहने सुनने की कोई ताकत ही नहीं फिर वे और कुछ कहें तो भी क्या ? जरा आँखें खोल कर देखना सीखो । भ्रमचारी जी ! शास्त्रों मे एक ही नाम के यत्र-तत्र अनेकों व्यक्ति अपनी शुभ तथा अशुभ क्रियाओं के द्वारा स्वर्ग या अपवर्ग और स्थानों में अपनी-अपनी करणी के अनुसार गये हैं। केवल नाम साम्य होजाने मात्र ही से उनकी क्रियाएँ समान कैसे हो सकती हैं ? कदापि नहीं। अजी व्यवहार ज्ञान से शून्य भ्रमघारी जी । 'अॅगुली' इस शब्द के समान होने पर भी, एक ही हाथ की सब अँगुलियाँ तक जब रूप और काम में समान नहीं होतीं, नहीं हो सकतीं और न होना ही युक्तियुक्ति तथा प्रामाणिकता का प्रमाण हैं, तब दूर के दो व्यक्तियों की बातें तो चलावे ही कौन ? और क्यों ? भ्रमचारी जी ! यदि 'कृष्ण' नामक किसी एक भील को जो हिंसा-रत, असत्यवादी, चोर, व्यभिचारी और मद्यपी है, केवल नाम-भर की समानता के कारण, 'श्रीकृष्णचन्द्र' मान कर महत्व आप देने लगे, तो लोग आपकी
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उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी जिले की गोला गोकर्णनाथ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है. समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया. सपा ने पूर्व विधायक विनय तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. 6 सितंबर को बीजेपी विधायक अरविंद गिरि की लखनऊ में मीटिंग में जाते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. इनके निधन के बाद से सीट खाली हो गई थी. .
वहीं अरविंद गिरि इस सीट से 5 बार विधायक रहे, जिसके चलते उनके परिवार से किसी के चुनाव लड़ने की संभावना है. अरविंद गिरि की पत्नी सुधा गिरि नगर पालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं और उसके भाई की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष थीं. अरविंद गिरि को एक बेटा और दो बेटियां हैं. बेटियों की शादी हो चुकी हैं और बेटा आर्मी में कैप्टन है. ऐसे में उनकी पत्नी ही चुनाव लड़ने की दावेदारी कर सकती है. हालांकि सियासी गलियारे में उनके अमन गिरि के नाम की भी चर्चा तेज है.
मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार को बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवारों के पैनल के साथ आगामी निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर बैठक हुई थी. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में उपचुनाव के लिए दावेदारों का पैनल तैयार किया गया है. अब इस पैनल को केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा जाएगा.
इस साल हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद गिरि के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने विनय तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अरविंद गिरी गिरी ने अपने प्रतिद्वंदी सपा के विनय तिवारी को 29,294 वोट से हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी. अरविंद गिरी को 1,26,534 वोट मिले थे, जबकि विनय तिवारी को 97,240 वोट मिले थे.
केंद्रीय चुनाव आयोग छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. आयोग के नोटिफिकेशन के तहत इन सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होगा और 6 नवंबर को मतगणना होगी. ये उपचुनाव महाराष्ट्र के अंधेरी ईस्ट, बिहार के मोकामा और गोपालगंज, हरियाणा के आदमपुर, तेलंगाना के मुनुगोडे, उत्तर प्रदेश के गोला गोकर्णनाथ और ओडिशा के धामनगर विधानसभा क्षेत्र में होंगे.
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उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी जिले की गोला गोकर्णनाथ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है. समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया. सपा ने पूर्व विधायक विनय तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. छः सितंबर को बीजेपी विधायक अरविंद गिरि की लखनऊ में मीटिंग में जाते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. इनके निधन के बाद से सीट खाली हो गई थी. . वहीं अरविंद गिरि इस सीट से पाँच बार विधायक रहे, जिसके चलते उनके परिवार से किसी के चुनाव लड़ने की संभावना है. अरविंद गिरि की पत्नी सुधा गिरि नगर पालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं और उसके भाई की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष थीं. अरविंद गिरि को एक बेटा और दो बेटियां हैं. बेटियों की शादी हो चुकी हैं और बेटा आर्मी में कैप्टन है. ऐसे में उनकी पत्नी ही चुनाव लड़ने की दावेदारी कर सकती है. हालांकि सियासी गलियारे में उनके अमन गिरि के नाम की भी चर्चा तेज है. मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार को बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवारों के पैनल के साथ आगामी निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर बैठक हुई थी. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में उपचुनाव के लिए दावेदारों का पैनल तैयार किया गया है. अब इस पैनल को केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा जाएगा. इस साल हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद गिरि के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने विनय तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अरविंद गिरी गिरी ने अपने प्रतिद्वंदी सपा के विनय तिवारी को उनतीस,दो सौ चौरानवे वोट से हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी. अरविंद गिरी को एक,छब्बीस,पाँच सौ चौंतीस वोट मिले थे, जबकि विनय तिवारी को सत्तानवे,दो सौ चालीस वोट मिले थे. केंद्रीय चुनाव आयोग छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. आयोग के नोटिफिकेशन के तहत इन सीटों पर तीन नवंबर को मतदान होगा और छः नवंबर को मतगणना होगी. ये उपचुनाव महाराष्ट्र के अंधेरी ईस्ट, बिहार के मोकामा और गोपालगंज, हरियाणा के आदमपुर, तेलंगाना के मुनुगोडे, उत्तर प्रदेश के गोला गोकर्णनाथ और ओडिशा के धामनगर विधानसभा क्षेत्र में होंगे.
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जेमा नाम पड़ता है। यह मिन्धको पवित्र भावमें गायत्री जपरूप उपासना करने पर वाध्य है। यह नियम वर्णवयमें चिरटिनमे चनता है । इसका कोई ठिकाना महो, कोन समयको किस महात्माने प्रथमत' यद निगम चलाया। प्रत्येक वटिक मन्त्रका कोई न कोई ऋपि होता है। किमी किसी पइतिकारके मतमें वेदमन्त्र अनादि होते भी जो सर्वप्रथम जिम मन्त्र द्वारा कोई काय करके चरिताय हुया, अपने मन्त्रका ऋऋषि कहलाया। गायलोमन्त्रके ऋषि विश्वामित्र है। इस स्थल पर उनके मतानुसार कहना पडेगा कि विश्वामि भने ही सबसे पहले उसको जप करके सिद्धि पायो । वेदके टोकाकार मायणाचार्य ने ऋग वेदमाव की भूमिकामें लिखा है कि युगान्तको इतिहासादिके माथ समस्त वेद हो जाता। ऋपियोंके उनको
माप्तिके लिये तपस्या करने पर ईश्वर अनुग्रहमे फिर निकल आता है। इस प्रकार वेद पुनर्वार प्रकाशित होता है। युगान्तको वेद अन्तर्हित होने पर जो ऋषि सर्व प्रथम उसको पाता, उसका हो ऋषि कहलाता है। (१) अतएव सायणके मतानुसार भी मयमे पहले न सही, इसी युगमे पहले पहल विश्वामित्र ने दी गायत्री मन्त्र पाया था उसके जप करनेको प्रणालोको चलाया था ।
गायत्री मन्चके प्रतिपाद्य भर्यात् गायती मन्त्र द्वारा वर्णित होनेवाले हो इसको देवता है और इसमे उन्हीं उपामना की जाती है। उपनिषद् मतमे गायत्री रूप उपाधिधारी ब्रह्म ही उसके प्रतिपाद्य है। गायत्रीमे उम्की उदामना होती है। सभी वेदिक उपामनार्थमि गायवीको उपासना श्रेष्ठ है । (बन्दाग्या सर १११९११) गायत्रोश पर्य१ जो सविटदेव हमारा कर्म ( पसंन्द्रिय अयया धर्मादि विषय बुद्धि ) प्रेरण करते हम उन्हीं मर्या मायामो, अगत्खदा, परमेश्वर, मघर्क मेवनीय, भविद्या तथा सत् कार्यनाशक घोर परब्रम्वरूप ज्योतिको चिन्ता करते है ।
२ पविया पर तत् कार्यनागक उन ज्योतियोगिता करते, जो हमारो कर्म या धर्मादि विषय बुधनाते रहते हैं ।
३ जो मविता सूर्यदेव हम लोगोंका समस्त कर्म में प्रेरण किया करते, हम उन्हें जगत्मसविता द्योतमान् सूर्यदेवके सबको प्रत्यक्ष, उपास्य तथा पापनाशक तेजो मण्डलके ध्यान में रहते है ।
४ वा भर्ग शब्दका अर्थ है । जो सविता हमारी घोशक्तिको प्रेरण करते, हमें उन्हो मवितादेवके प्रमादसे प्रशसनीय प्रवादिरूप फल मिलते है।
( ऋ० १६१०१० माध्य, साम उत्तर १०१ माषा ) ५ द्योतमान प्रेरक अन्तर्गमी, विज्ञानानन्दम्भाव हिरवा श्रादित्यरूप उपाधिमेरो ब्रह्मके प्रार्थनीय, पाप तथा समारवन्धननाशक तेजको चिन्ता करते हैं । वह सविता हमागे बुद्धि सहकर्मानुष्ठानको प्रेरण करते है । (यडिता (२५मोधर)
हमको छोड करके गायत्रीको और भी अनेक प्रकार व्याख्या सुन पड़ती है। कोई कानीपत, कोई विष्णु और कोई शिवपक्षमें भी उसको व्याग्या करता है।
गायनी उपामनाप्रणालो-मनुके मतानुसार गायत्री मन्त्रमे दोचित होनेमे उपासक पुनर्जन्म पाता है। एम जन्ममें आचार्य पिता और सावित्री हो माता है। गायत्री ओर तत्प्रतिपाद्य ब्राह्मी प्रभेदचिन्तामे उपामना करनी
है। याउकाके मतमें माय ॐ चोर व्याति ( भूर्भुवम्व ) योग करके गायत्री उपामना करनी चाहिये। विष्णुधर्मोत्तर में लिखा है कि पञ्चकर्म न्द्रिय, पञ्चज्ञानेन्द्रिय पञ्चविषय, पञ्चभूत, मन, बुद्धि पात्मा घोर माति २४ पदार्थोंको गायतीके चतुर्विगति अत्तरोंमें यथा क्रम चिन्ता करते हैं। श्रग्नि, वायु मूर्य, विद्युत् यम, घरुण, सहास, पजना, इन्द्र, गन्धर्ष, पृषा मंत्रावरुण, त्वष्टा, धामय, मारुत मोम अद्विग विदेष, विनो कुमार, प्रजापति, सर्वदेष, रुद्र ब्रह्मा घोर विष्णु यया क्रम गायतीमय २४ असरॉक अधिपति है। कामको इनको चिन्ता करनी पड़ती है। मनको ईश्वर भाषना धरते हैं ।
की गायीका विषय इस प्रकार निखा हैपटादव पित्यार्मि मेममा प्रधान मोम/मागे सशासपुराण, पुरातमे धर्मशाल और धर्मशास्तमे वेद घड़ा होता है। येदेनि फिर उप पट्ट
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जेमा नाम पड़ता है। यह मिन्धको पवित्र भावमें गायत्री जपरूप उपासना करने पर वाध्य है। यह नियम वर्णवयमें चिरटिनमे चनता है । इसका कोई ठिकाना महो, कोन समयको किस महात्माने प्रथमत' यद निगम चलाया। प्रत्येक वटिक मन्त्रका कोई न कोई ऋपि होता है। किमी किसी पइतिकारके मतमें वेदमन्त्र अनादि होते भी जो सर्वप्रथम जिम मन्त्र द्वारा कोई काय करके चरिताय हुया, अपने मन्त्रका ऋऋषि कहलाया। गायलोमन्त्रके ऋषि विश्वामित्र है। इस स्थल पर उनके मतानुसार कहना पडेगा कि विश्वामि भने ही सबसे पहले उसको जप करके सिद्धि पायो । वेदके टोकाकार मायणाचार्य ने ऋग वेदमाव की भूमिकामें लिखा है कि युगान्तको इतिहासादिके माथ समस्त वेद हो जाता। ऋपियोंके उनको माप्तिके लिये तपस्या करने पर ईश्वर अनुग्रहमे फिर निकल आता है। इस प्रकार वेद पुनर्वार प्रकाशित होता है। युगान्तको वेद अन्तर्हित होने पर जो ऋषि सर्व प्रथम उसको पाता, उसका हो ऋषि कहलाता है। अतएव सायणके मतानुसार भी मयमे पहले न सही, इसी युगमे पहले पहल विश्वामित्र ने दी गायत्री मन्त्र पाया था उसके जप करनेको प्रणालोको चलाया था । गायत्री मन्चके प्रतिपाद्य भर्यात् गायती मन्त्र द्वारा वर्णित होनेवाले हो इसको देवता है और इसमे उन्हीं उपामना की जाती है। उपनिषद् मतमे गायत्री रूप उपाधिधारी ब्रह्म ही उसके प्रतिपाद्य है। गायत्रीमे उम्की उदामना होती है। सभी वेदिक उपामनार्थमि गायवीको उपासना श्रेष्ठ है । गायत्रोश पर्यएक जो सविटदेव हमारा कर्म प्रेरण करते हम उन्हीं मर्या मायामो, अगत्खदा, परमेश्वर, मघर्क मेवनीय, भविद्या तथा सत् कार्यनाशक घोर परब्रम्वरूप ज्योतिको चिन्ता करते है । दो पविया पर तत् कार्यनागक उन ज्योतियोगिता करते, जो हमारो कर्म या धर्मादि विषय बुधनाते रहते हैं । तीन जो मविता सूर्यदेव हम लोगोंका समस्त कर्म में प्रेरण किया करते, हम उन्हें जगत्मसविता द्योतमान् सूर्यदेवके सबको प्रत्यक्ष, उपास्य तथा पापनाशक तेजो मण्डलके ध्यान में रहते है । चार वा भर्ग शब्दका अर्थ है । जो सविता हमारी घोशक्तिको प्रेरण करते, हमें उन्हो मवितादेवके प्रमादसे प्रशसनीय प्रवादिरूप फल मिलते है। पाँच द्योतमान प्रेरक अन्तर्गमी, विज्ञानानन्दम्भाव हिरवा श्रादित्यरूप उपाधिमेरो ब्रह्मके प्रार्थनीय, पाप तथा समारवन्धननाशक तेजको चिन्ता करते हैं । वह सविता हमागे बुद्धि सहकर्मानुष्ठानको प्रेरण करते है । हमको छोड करके गायत्रीको और भी अनेक प्रकार व्याख्या सुन पड़ती है। कोई कानीपत, कोई विष्णु और कोई शिवपक्षमें भी उसको व्याग्या करता है। गायनी उपामनाप्रणालो-मनुके मतानुसार गायत्री मन्त्रमे दोचित होनेमे उपासक पुनर्जन्म पाता है। एम जन्ममें आचार्य पिता और सावित्री हो माता है। गायत्री ओर तत्प्रतिपाद्य ब्राह्मी प्रभेदचिन्तामे उपामना करनी है। याउकाके मतमें माय ॐ चोर व्याति योग करके गायत्री उपामना करनी चाहिये। विष्णुधर्मोत्तर में लिखा है कि पञ्चकर्म न्द्रिय, पञ्चज्ञानेन्द्रिय पञ्चविषय, पञ्चभूत, मन, बुद्धि पात्मा घोर माति चौबीस पदार्थोंको गायतीके चतुर्विगति अत्तरोंमें यथा क्रम चिन्ता करते हैं। श्रग्नि, वायु मूर्य, विद्युत् यम, घरुण, सहास, पजना, इन्द्र, गन्धर्ष, पृषा मंत्रावरुण, त्वष्टा, धामय, मारुत मोम अद्विग विदेष, विनो कुमार, प्रजापति, सर्वदेष, रुद्र ब्रह्मा घोर विष्णु यया क्रम गायतीमय चौबीस असरॉक अधिपति है। कामको इनको चिन्ता करनी पड़ती है। मनको ईश्वर भाषना धरते हैं । की गायीका विषय इस प्रकार निखा हैपटादव पित्यार्मि मेममा प्रधान मोम/मागे सशासपुराण, पुरातमे धर्मशाल और धर्मशास्तमे वेद घड़ा होता है। येदेनि फिर उप पट्ट
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पुलिस ने बताया कि इस संबंध में फौजी अजीत की तरफ से बाइक सवार शेरा, अनिल गुर्जर और उसके अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।
थानाधिकारी रामकिशन ने बताया कि फौजी की दर्ज शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि घायल अजीत बीती रात जब वह एक प्रॉपर्टी की दुकान के पास से निकल रहा था तभी उस पर बाइक सवार शेरा, अनिल गुर्जर और उसके अन्य साथियों ने गोलीबारी की। एक गोली उसके हाथ में और दूसरी उसकी जांघ में लगी।
उन्होंने बताया कि सूचना पर घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस दल ने वहां से 12 खाली शराब की बोतले बरामद की हैं।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। घायल फौजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
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पुलिस ने बताया कि इस संबंध में फौजी अजीत की तरफ से बाइक सवार शेरा, अनिल गुर्जर और उसके अन्य साथियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। थानाधिकारी रामकिशन ने बताया कि फौजी की दर्ज शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ सात के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि घायल अजीत बीती रात जब वह एक प्रॉपर्टी की दुकान के पास से निकल रहा था तभी उस पर बाइक सवार शेरा, अनिल गुर्जर और उसके अन्य साथियों ने गोलीबारी की। एक गोली उसके हाथ में और दूसरी उसकी जांघ में लगी। उन्होंने बताया कि सूचना पर घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस दल ने वहां से बारह खाली शराब की बोतले बरामद की हैं। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। घायल फौजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
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गुजरात के दाहोद में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भारी सुरक्षा के बीच शनिवार को एक मस्जिद को गिरा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन रोड पर भगिनी समाज के पास स्थित नगीना मस्जिद को दो बुलडोजरों ने सुबह करीब 4. 30 बजे शांतिपूर्ण माहौल के बीच गिराया है। हालांकि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से 450 पुलिस कर्मियों के अलावा, दाहोद प्रांत के अधिकारी, दाहोद नगर पालिका के मुख्य अधिकारी, दो पुलिस उपाधीक्षक, 20 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक राज्य रिजर्व पुलिस बल इकाई को तैनात किया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मस्जिद कमेटी को शुक्रवार तक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था। हालांकि मस्जिद कमेटी निर्धारित समय तक कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रही और इसके बाद यह कार्रवाई की गयी है। फिलहाल मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया है।
दाहोद के पुलिस अधीक्षक ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने जमीन के रिकॉर्ड पेश करने के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा था। प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। लेकिन शुक्रवार को मस्जिद कमेटी ने जो रिकॉर्ड पेश किए वे ठीक नहीं थे।
शुक्रवार शाम को मस्जिद के सदस्यों के साथ उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, प्रांत अधिकारी, नगर पालिका के मुख्य अधिकारी और डीएसपी ने एक बैठक की थी जहां ट्रस्ट के सदस्यों ने मस्जिद को खाली करने का विकल्प दिए जाने पर परिसर को खाली करने पर सहमति व्यक्त की थी। प्रशासन ने बताया कि हमें मस्जिद में प्रवेश नहीं करना पड़ा क्योंकि उन्होंने पहले ही इसे खाली कर दिया था, फिलहाल तैनाती बनी रहेगी लेकिन हमें किसी परेशानी की आशंका नहीं है क्योंकि समुदाय के सदस्यों ने किसी तरह का विरोध नहीं जताया है।
मस्जिद कमेटी की ओर से क्या कहा गया?
गुजरात उच्च न्यायालय में चल रही गर्मी की छुट्टियों के रहते याचिका दर्ज की जानी बाकी है। ट्रस्ट अदालत का दरवाजा खटखटाएगा कि विध्वंस के बाद अब यथास्थिति बनाए रखी जाए क्योंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति थी और इस तरह की कार्रवाई के लिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी की भी जरूरत होती है।
नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय को बताया था कि मस्जिद वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जाती है। इसमें कहा गया था कि मस्जिद 1926 से ट्रस्ट की भूमि के एक हिस्से में खड़ी थी जो 1953 में पंजीकृत थी। ट्रस्ट ने अदालत को यह भी बताया कि कुछ दुकानें हैं जिन्हें अब ध्वस्त कर दिया गया है भूमि के अन्य हिस्सों पर मौजूद हैं, इन्हें वर्षों से ट्रस्ट और वक्फ द्वारा किराए पर दिया जाता है।
ट्रस्ट ने कोर्ट को बताया था कि गुजरात नगर पालिका अधिनियम के तहत मस्जिद के पास कथित रूप से अतिक्रमण करने वाली दुकानों को नोटिस जारी किया गया था जिन्हें 15 मई को ध्वस्त कर दिया गया था। इस दौरान आसपास की ऐसी और भी दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया जिन्हें लेकर नोटिस तक नहीं दिया गया था।
नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट के मुताबिक मस्जिद के विध्वंस के लिए ट्रस्ट को कोई आधिकारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया था उन्हें अधिकारियों द्वारा केवल अनौपचारिक रूप से सूचित किया गया था कि धार्मिक पुस्तकों, कुरान और अन्य श्रद्धेय लेखों को मस्जिद से हटा सकते हैं। शुक्रवार 19/05/2023 तक शुक्रवार शाम की नमाज़ के बाद मस्जिद को गिरा दिया जाएगा ट्रस्ट ने आगे कहा कि ट्रस्ट ने आगे कहा कि मस्जिद संरक्षित है और इसे ध्वस्त नहीं किया जा सकता है, ऐसा करना विशेष रूप से पूजा के स्थान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों का उलंघन है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति है इसलिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। हालांकि जिला कलेक्टर हर्षित गोसावी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।
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गुजरात के दाहोद में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भारी सुरक्षा के बीच शनिवार को एक मस्जिद को गिरा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन रोड पर भगिनी समाज के पास स्थित नगीना मस्जिद को दो बुलडोजरों ने सुबह करीब चार. तीस बजे शांतिपूर्ण माहौल के बीच गिराया है। हालांकि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से चार सौ पचास पुलिस कर्मियों के अलावा, दाहोद प्रांत के अधिकारी, दाहोद नगर पालिका के मुख्य अधिकारी, दो पुलिस उपाधीक्षक, बीस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक राज्य रिजर्व पुलिस बल इकाई को तैनात किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मस्जिद कमेटी को शुक्रवार तक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था। हालांकि मस्जिद कमेटी निर्धारित समय तक कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रही और इसके बाद यह कार्रवाई की गयी है। फिलहाल मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया है। दाहोद के पुलिस अधीक्षक ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने जमीन के रिकॉर्ड पेश करने के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा था। प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। लेकिन शुक्रवार को मस्जिद कमेटी ने जो रिकॉर्ड पेश किए वे ठीक नहीं थे। शुक्रवार शाम को मस्जिद के सदस्यों के साथ उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, प्रांत अधिकारी, नगर पालिका के मुख्य अधिकारी और डीएसपी ने एक बैठक की थी जहां ट्रस्ट के सदस्यों ने मस्जिद को खाली करने का विकल्प दिए जाने पर परिसर को खाली करने पर सहमति व्यक्त की थी। प्रशासन ने बताया कि हमें मस्जिद में प्रवेश नहीं करना पड़ा क्योंकि उन्होंने पहले ही इसे खाली कर दिया था, फिलहाल तैनाती बनी रहेगी लेकिन हमें किसी परेशानी की आशंका नहीं है क्योंकि समुदाय के सदस्यों ने किसी तरह का विरोध नहीं जताया है। मस्जिद कमेटी की ओर से क्या कहा गया? गुजरात उच्च न्यायालय में चल रही गर्मी की छुट्टियों के रहते याचिका दर्ज की जानी बाकी है। ट्रस्ट अदालत का दरवाजा खटखटाएगा कि विध्वंस के बाद अब यथास्थिति बनाए रखी जाए क्योंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति थी और इस तरह की कार्रवाई के लिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी की भी जरूरत होती है। नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय को बताया था कि मस्जिद वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जाती है। इसमें कहा गया था कि मस्जिद एक हज़ार नौ सौ छब्बीस से ट्रस्ट की भूमि के एक हिस्से में खड़ी थी जो एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में पंजीकृत थी। ट्रस्ट ने अदालत को यह भी बताया कि कुछ दुकानें हैं जिन्हें अब ध्वस्त कर दिया गया है भूमि के अन्य हिस्सों पर मौजूद हैं, इन्हें वर्षों से ट्रस्ट और वक्फ द्वारा किराए पर दिया जाता है। ट्रस्ट ने कोर्ट को बताया था कि गुजरात नगर पालिका अधिनियम के तहत मस्जिद के पास कथित रूप से अतिक्रमण करने वाली दुकानों को नोटिस जारी किया गया था जिन्हें पंद्रह मई को ध्वस्त कर दिया गया था। इस दौरान आसपास की ऐसी और भी दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया जिन्हें लेकर नोटिस तक नहीं दिया गया था। नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट के मुताबिक मस्जिद के विध्वंस के लिए ट्रस्ट को कोई आधिकारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया था उन्हें अधिकारियों द्वारा केवल अनौपचारिक रूप से सूचित किया गया था कि धार्मिक पुस्तकों, कुरान और अन्य श्रद्धेय लेखों को मस्जिद से हटा सकते हैं। शुक्रवार उन्नीस मई दो हज़ार तेईस तक शुक्रवार शाम की नमाज़ के बाद मस्जिद को गिरा दिया जाएगा ट्रस्ट ने आगे कहा कि ट्रस्ट ने आगे कहा कि मस्जिद संरक्षित है और इसे ध्वस्त नहीं किया जा सकता है, ऐसा करना विशेष रूप से पूजा के स्थान अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के प्रावधानों का उलंघन है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति है इसलिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। हालांकि जिला कलेक्टर हर्षित गोसावी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।
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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए सिंतबर में चुनाव होने वाला है। वहीं, अध्यक्ष पद को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। बता दें कि इस बार कांग्रेस बड़े बदलाव के मूड दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से कांग्रेस की कमान संभालने की पेशकश की। हालांकि अभी इस पर अशोक गहलोत ने कोई पुष्टि नहीं की है।
बता दें कि अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि, "ये बात मैं मीडिया से सुन रहा हूं. मैं इस बारे में कुछ भी नहीं जानता हूं. आलाकमान की तरफ से जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है, मैं उसे पूरा कर रहा हूं. दरअसल, गहलोत ने हाल ही में कहा था कि राहुल गांधी को पार्टी की बागडोर संभाल लेनी चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो पार्टी के नेता और कार्यकर्ता में निराशा हो जाएंगे.
वहीं, इससे पहले सीएम गहलोत ने कहा था कि, "पार्टी में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के समर्थन में सबकी एकतरफा राय है. देशभर में कांग्रेसियों की भावनाओं को समझते हुए राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष पद स्वीकार कर लेना चाहिए. इसी के साथ गहलोत ने कहा कि अगर राहुल पार्टी के अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो इससे कांग्रेसजन निराश हों जाएंगे.
उन्होंने कहा कि, "कांग्रेस के पार्टी के अगर राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो इससे देश में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा आ जाएगी. बहुत से लोग घर बैठ जाएंगे और हम लोगों को तकलीफ होगी. इसे देखते हुए उनको पूरे देश के, आम कांग्रेसजनों की भावनाओं को समझते हुए यह पद स्वीकार कर लेना चाहिए.
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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए सिंतबर में चुनाव होने वाला है। वहीं, अध्यक्ष पद को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। बता दें कि इस बार कांग्रेस बड़े बदलाव के मूड दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से कांग्रेस की कमान संभालने की पेशकश की। हालांकि अभी इस पर अशोक गहलोत ने कोई पुष्टि नहीं की है। बता दें कि अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि, "ये बात मैं मीडिया से सुन रहा हूं. मैं इस बारे में कुछ भी नहीं जानता हूं. आलाकमान की तरफ से जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है, मैं उसे पूरा कर रहा हूं. दरअसल, गहलोत ने हाल ही में कहा था कि राहुल गांधी को पार्टी की बागडोर संभाल लेनी चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो पार्टी के नेता और कार्यकर्ता में निराशा हो जाएंगे. वहीं, इससे पहले सीएम गहलोत ने कहा था कि, "पार्टी में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के समर्थन में सबकी एकतरफा राय है. देशभर में कांग्रेसियों की भावनाओं को समझते हुए राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष पद स्वीकार कर लेना चाहिए. इसी के साथ गहलोत ने कहा कि अगर राहुल पार्टी के अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो इससे कांग्रेसजन निराश हों जाएंगे. उन्होंने कहा कि, "कांग्रेस के पार्टी के अगर राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो इससे देश में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा आ जाएगी. बहुत से लोग घर बैठ जाएंगे और हम लोगों को तकलीफ होगी. इसे देखते हुए उनको पूरे देश के, आम कांग्रेसजनों की भावनाओं को समझते हुए यह पद स्वीकार कर लेना चाहिए.
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भोपाल। कहने को तो जेपी अस्पताल प्रदेश के लिए मॉडल है, लेकिन हालत यह है कि यहां पर करीब 20 विशेषज्ञों को हर दिन एक हजार से 1200 मरीज देखना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अस्पताल में विशेषज्ञों के 48 में से 23 पद खाली हैं।
भोपाल। कहने को तो जेपी अस्पताल प्रदेश के लिए मॉडल है, लेकिन हालत यह है कि यहां पर करीब 20 विशेषज्ञों को हर दिन एक हजार से 1200 मरीज देखना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अस्पताल में विशेषज्ञों के 48 में से 23 पद खाली हैं। पदस्थ 27 में से कुछ काल ड्यूटी की वजह से अवकाश पर रहते हैं तो कुछ अन्य तरह के अवकाश पर। ऐसे में हर दिन ड्यूटी पर करीब 20 विशेषज्ञ ही होते हैं। कई विभागों में तो एक विशेषज्ञ ही ओपीडी में किसी-किसी दिन रहते हैं। ऐसे में उन्हें 100 से ज्यादा मरीज देखना होता है। सबसे ज्यादा दिक्कत शिशु रोग और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आती है। ओेपीडी के अलावा भर्ती मरीजों को देखने का दबाव चिकित्सकों पर रहता है। तनाव के कारण डाक्टर-नर्स और मरीज एवं उनके स्वजन के बीच विवाद की स्थिति बनती है।
2011 में जेपी अस्पताल के लिए डाक्टरों के नए सिरे से पद स्वीकृत किए गए थे। उस समय अस्पताल में 42 विशेषज्ञ काम कर रहे थे। अब विशेषज्ञों की संख्या घटकर 27 रह गई है। जो डाक्टर सेवानिवृत हो रहे हैं उनकी जगह किसी नए चिकित्सक की पदस्थापना नहीं की जा रही है। इस वजह से विशेषज्ञों पर दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। अस्पताल की ओपीडी 1200 से 1500 के बीच रहती है। विशेषज्ञों के पास सभी मरीज नहीं पहुंचते, इसलिए दिक्कत नहीं होती।
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भोपाल। कहने को तो जेपी अस्पताल प्रदेश के लिए मॉडल है, लेकिन हालत यह है कि यहां पर करीब बीस विशेषज्ञों को हर दिन एक हजार से एक हज़ार दो सौ मरीज देखना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अस्पताल में विशेषज्ञों के अड़तालीस में से तेईस पद खाली हैं। भोपाल। कहने को तो जेपी अस्पताल प्रदेश के लिए मॉडल है, लेकिन हालत यह है कि यहां पर करीब बीस विशेषज्ञों को हर दिन एक हजार से एक हज़ार दो सौ मरीज देखना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अस्पताल में विशेषज्ञों के अड़तालीस में से तेईस पद खाली हैं। पदस्थ सत्ताईस में से कुछ काल ड्यूटी की वजह से अवकाश पर रहते हैं तो कुछ अन्य तरह के अवकाश पर। ऐसे में हर दिन ड्यूटी पर करीब बीस विशेषज्ञ ही होते हैं। कई विभागों में तो एक विशेषज्ञ ही ओपीडी में किसी-किसी दिन रहते हैं। ऐसे में उन्हें एक सौ से ज्यादा मरीज देखना होता है। सबसे ज्यादा दिक्कत शिशु रोग और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आती है। ओेपीडी के अलावा भर्ती मरीजों को देखने का दबाव चिकित्सकों पर रहता है। तनाव के कारण डाक्टर-नर्स और मरीज एवं उनके स्वजन के बीच विवाद की स्थिति बनती है। दो हज़ार ग्यारह में जेपी अस्पताल के लिए डाक्टरों के नए सिरे से पद स्वीकृत किए गए थे। उस समय अस्पताल में बयालीस विशेषज्ञ काम कर रहे थे। अब विशेषज्ञों की संख्या घटकर सत्ताईस रह गई है। जो डाक्टर सेवानिवृत हो रहे हैं उनकी जगह किसी नए चिकित्सक की पदस्थापना नहीं की जा रही है। इस वजह से विशेषज्ञों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। अस्पताल की ओपीडी एक हज़ार दो सौ से एक हज़ार पाँच सौ के बीच रहती है। विशेषज्ञों के पास सभी मरीज नहीं पहुंचते, इसलिए दिक्कत नहीं होती।
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Ranchi: राजधानी रांची में डेवलपमेंट के नाम पर कई काम चल रहे हैं कहीं पानी की पाइपलाइन बिछाई जा रही है तो कहीं घरेलू गैस की. कुछ इलाकों में अंडरग्राउंड केबल बिछाने का भी काम चल रहा है. इन कार्यों के लिये जगह-जगह खुदाई की गई है. लेकिन खुदाई करने के बाद इन गड्ढों को भरने के नाम पर केवल आईवॉश कर दिया जा रहा है. बारिश के मौसम में ये गड्ढे दुर्घटना का सबब बना हुआ है. इसका अंदाजा शायद काम करने वाली एजेंसियों को नहीं है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि इन गड्ढों को भरेगा कौन.
सिटी में विकास के नाम पर हजारों गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए. कई जगहों पर मिट्टी डालकर सिर्फ खानापूर्ति कर दी गई. अब बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर जा रहा है. जिससे पता ही नहीं चल पाता कि उस जगह गड्ढा है या पक्की सड़क. इस चक्कर में लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं.
गैस पाइपलाइन बिछाने का काम कई इलाकों में एजेंसी काम कर रही है. मुख्य पाइपलाइन के अलावा घरों में कनेक्शन देने के लिए भी पाइप बिछाए जा रहे हैं. इसके लिए हर दस फीट की दूरी पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है. पाइप का कनेक्शन करने के बाद इन गड्ढों मे केवल मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है.
रांची नगर निगम ने सिटी में अंडरग्राउंड डस्टिबन लगाने का जिम्मा जोंटा कंपनी को दिया है. जिसके लिए शहर के कई इलाकों को चिन्हित कर वहां पर गड्ढा खोद दिया गया. अब एजेंसी के काम करने की रफ्तार बहुत धीमी है. इस वजह से खोदे गए गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं.
एक्सपर्ट्स की मानें तो शहर में किसी भी तरह के काम के लिए नगर निगम और संबंधित विभागों से परमिशन लेनी होती है. वहीं इस शर्त पर काम करने का आर्डर दिया जाता है कि वे काम करने के बाद उस जगह को पहले की तरह दुरुस्त कर देंगे. वहीं किसी भी हाल में उन्हें काम करने के बाद अधूरा नहीं छोड़ना है. इसके बावजूद शहर में गड्ढों की भरमार देखने को मिल रही है. वहीं एजेंसियां गड्ढों को भरकर अपनी ड्यूटी पूरी कर भाग जाती है.
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Ranchi: राजधानी रांची में डेवलपमेंट के नाम पर कई काम चल रहे हैं कहीं पानी की पाइपलाइन बिछाई जा रही है तो कहीं घरेलू गैस की. कुछ इलाकों में अंडरग्राउंड केबल बिछाने का भी काम चल रहा है. इन कार्यों के लिये जगह-जगह खुदाई की गई है. लेकिन खुदाई करने के बाद इन गड्ढों को भरने के नाम पर केवल आईवॉश कर दिया जा रहा है. बारिश के मौसम में ये गड्ढे दुर्घटना का सबब बना हुआ है. इसका अंदाजा शायद काम करने वाली एजेंसियों को नहीं है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि इन गड्ढों को भरेगा कौन. सिटी में विकास के नाम पर हजारों गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए. कई जगहों पर मिट्टी डालकर सिर्फ खानापूर्ति कर दी गई. अब बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर जा रहा है. जिससे पता ही नहीं चल पाता कि उस जगह गड्ढा है या पक्की सड़क. इस चक्कर में लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं. गैस पाइपलाइन बिछाने का काम कई इलाकों में एजेंसी काम कर रही है. मुख्य पाइपलाइन के अलावा घरों में कनेक्शन देने के लिए भी पाइप बिछाए जा रहे हैं. इसके लिए हर दस फीट की दूरी पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है. पाइप का कनेक्शन करने के बाद इन गड्ढों मे केवल मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है. रांची नगर निगम ने सिटी में अंडरग्राउंड डस्टिबन लगाने का जिम्मा जोंटा कंपनी को दिया है. जिसके लिए शहर के कई इलाकों को चिन्हित कर वहां पर गड्ढा खोद दिया गया. अब एजेंसी के काम करने की रफ्तार बहुत धीमी है. इस वजह से खोदे गए गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो शहर में किसी भी तरह के काम के लिए नगर निगम और संबंधित विभागों से परमिशन लेनी होती है. वहीं इस शर्त पर काम करने का आर्डर दिया जाता है कि वे काम करने के बाद उस जगह को पहले की तरह दुरुस्त कर देंगे. वहीं किसी भी हाल में उन्हें काम करने के बाद अधूरा नहीं छोड़ना है. इसके बावजूद शहर में गड्ढों की भरमार देखने को मिल रही है. वहीं एजेंसियां गड्ढों को भरकर अपनी ड्यूटी पूरी कर भाग जाती है.
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चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन इस समय एनसीए में ट्रेनिंग कर रहे हैं और आज उन्होंने खलील अहमद और कुलदीप यादव के साथ एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वह एक्सरसाइज करने के साथ-साथ भांगड़ा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। धवन ने खुद सोशल मीडियो पर ये वीडियो पोस्ट किया है।
धवन ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा "देसी बॉयज़एसएस! वर्कआउट और डांसिंग एक खूबसूरत एहसास है। यह इतना मज़ेदार बनाता है! आप सभी के लिए एक अच्छा सप्ताहांत हो! "
इससे पहले धवन ईशांत शर्मा और हार्दिक पांड्या के साथ भी रिहैब में मस्ती करते हुए दिखाई दिए थे। उन्होंने इसका भी वीडियो अपने अकाउंट पर पोस्ट किया था और लिखा था "कौन कहता है कि रीहैब बोरिंग होता है। यहां के हम सिकंदर। "
तब कलाई की चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज खलील अहमद ने इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा था, "एक और शख्स जल्द ही आपके साथ जुड़ने वाला है। "
धवन को ऑस्ट्रेलियाई सीरीज के दौरान कंधे में चोट लग गई थी। वहीं ईशांत रणजी ट्रॉफी मैच खेलते हुए चोटिल हो गए थे। ईशांत ने तो न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में वापसी कर ली, लेकिन पांड्या अभी तक फिट नहीं हो पाए हैं। उम्मीद है साउथ अफ्रीका के खिलाफ धवन और पांड्या टीम में वापसी कर लेंगे।
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चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन इस समय एनसीए में ट्रेनिंग कर रहे हैं और आज उन्होंने खलील अहमद और कुलदीप यादव के साथ एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वह एक्सरसाइज करने के साथ-साथ भांगड़ा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। धवन ने खुद सोशल मीडियो पर ये वीडियो पोस्ट किया है। धवन ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा "देसी बॉयज़एसएस! वर्कआउट और डांसिंग एक खूबसूरत एहसास है। यह इतना मज़ेदार बनाता है! आप सभी के लिए एक अच्छा सप्ताहांत हो! " इससे पहले धवन ईशांत शर्मा और हार्दिक पांड्या के साथ भी रिहैब में मस्ती करते हुए दिखाई दिए थे। उन्होंने इसका भी वीडियो अपने अकाउंट पर पोस्ट किया था और लिखा था "कौन कहता है कि रीहैब बोरिंग होता है। यहां के हम सिकंदर। " तब कलाई की चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज खलील अहमद ने इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा था, "एक और शख्स जल्द ही आपके साथ जुड़ने वाला है। " धवन को ऑस्ट्रेलियाई सीरीज के दौरान कंधे में चोट लग गई थी। वहीं ईशांत रणजी ट्रॉफी मैच खेलते हुए चोटिल हो गए थे। ईशांत ने तो न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में वापसी कर ली, लेकिन पांड्या अभी तक फिट नहीं हो पाए हैं। उम्मीद है साउथ अफ्रीका के खिलाफ धवन और पांड्या टीम में वापसी कर लेंगे।
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अगर आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए फंड नहीं तो आप पीएम मुद्रा लोन स्कीम के जरिए लोन ले सकते हैं. प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर आप बैंक से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी और कोरोना संकट में नौकरी की अनिश्चितता के बीच में हर कोई चाहता कि वह अपना कोई बिजनस करे, जिससे उसकी अच्छी खासी कमाई हो. अगर आप चाहते हैं कि आपका अपना बिजनेस हो तो हम आपको एक शानदार आइडिया बताने जा रहे हैं, जहां आप 4 लाख रुपये लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि इस बिजनेस को कोई भी शुरू कर सकता है.
हम बात कर रहे हैं बिंदी बनाने के बिजनेस की. भारतीय महिलाएं बिंदी का चुनाव अपने गहनों और कपड़ों को ध्यान में रखकर करती हैं. इसलिए आपको प्रत्येक घर में एक रंग की बिंदी के पैकेट ही नहीं, बल्कि कई रंगों और डिजाइनर बिंदी के पैकेट देखने को मिलेंगे. इस बिजनेस को शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मांग हमेशा बरकरार रहेगी, क्योंकि महिलाएं अपने साजो श्रृंगार के सामान पर खर्च करने कोई कमी नहीं बरतती हैं और बिंदी इसी का एक हिस्सा है. ऐसे में बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का यह बिजनेस आइडिया बेहतर साबित हो सकता है. आइए बताते हैं इसके बारे में सबकुछ.
खादी व ग्रामोद्योग कमीशन (केवीआईसी) ने ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर एक प्रोजेक्ट तैयार किया है. इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर कुल खर्च 4,00,000 रुपये आएगा. अगर आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए फंड नहीं तो आप पीएम मुद्रा लोन स्कीम के जरिए लोन ले सकते हैं. प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर आप बैंक से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन तैयार की गई प्रोजेक्ट प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदी बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको बहुत अधिक जमीन की जरूरत नहीं होती क्योंकि इस काम में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और उपकरण को लगाने और उनसे काम निकलवाने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है. यह बिजनेस 500×300 वर्ग फुट जगह में शुरू हो जाएगा. आपके पास जमीन नहीं है तो आप इसे किराये पर ले सकते हैं. बिल्डिंग शेड बनाने पर कुल 1,50,000 रुपये की लागत आएगी.
बिंदी का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको कई तरह के मशीनों की जरूरत होगी. जिनमें बॉटल कैप सिलिंग मशीन, फिल्टरिंग यूनिट, स्टोरेज टैंक आदि. इन मशीनों की खरीद पर करीब 1,00,000 रुपये खर्च होंगे. साथ ही, 1,50,000 रुपए वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी. इस तहर कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट 4,00,000 लाख रुपए हो गई.
केवीआईसी की रिपोर्ट के मुताबिक, आप एक साल में 600,000 रुपये मूल्य की बिंदी का उत्पादन कर सकते हैं. इसके रॉ मेटेरियल पर 2,60,500 रुपये, लेबल और पैकेजिंग मेटेरियल पर 50,000 रुपये, वेज पर 1,50,000 लाख रुपये, सैलरी पर 48,000 रुपये, प्रशासनिक खर्च पर 15,000 रुपये, ओवरहेड्स पर 14,500 रुपये, विविध व्यय पर 7,500 रुपये, डेप्रिसिएशन पर 17,500 रुपये, इंश्योरेंस पर 2,500 रुपये खर्च होंगे.
कैपिटल एक्सपेंडिचर लोन पर 32,500 रुपये और वर्किंग कैपिटल लोन के ब्याज पर 19,500 रुपये खर्च होंगे. इसका मतलब ब्याज पर सालाना 52,000 रुपये खर्च होंगे.
अगर आप 100 फीसदी कैपिसिटी का उपयोग कर प्रोडक्शन करते हैं तो सालाना प्रोडक्शन 6,00,000 लाख रुपये का होगा. प्रोजेक्टेड सेल्स कॉस्ट 7,50,000 रुपये होगी. ग्रॉस सरप्लस 1,50,000 रुपये होगी. अनुमानित नेट सरप्लस 1,32,000 रुपये. यानी आपकी हर महीने की कमाई 11,000 रुपये होगी.
केवीआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये आंकड़े केवल सांकेतिक हैं और ये अलग-अलग जगहों पर बदल सकते हैं. अगर आप बिल्डिंग बनाने पर खर्च न करके इसे किराये पर लेते हैं तो आपका प्रोजेक्ट कॉस्ट घट जाएगा. पूंजीगत व्यय पर ब्याज भी कम हो जाएंगे और आपका मुनाफा बढ़ जाएगा.
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अगर आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए फंड नहीं तो आप पीएम मुद्रा लोन स्कीम के जरिए लोन ले सकते हैं. प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर आप बैंक से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी और कोरोना संकट में नौकरी की अनिश्चितता के बीच में हर कोई चाहता कि वह अपना कोई बिजनस करे, जिससे उसकी अच्छी खासी कमाई हो. अगर आप चाहते हैं कि आपका अपना बिजनेस हो तो हम आपको एक शानदार आइडिया बताने जा रहे हैं, जहां आप चार लाख रुपये लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि इस बिजनेस को कोई भी शुरू कर सकता है. हम बात कर रहे हैं बिंदी बनाने के बिजनेस की. भारतीय महिलाएं बिंदी का चुनाव अपने गहनों और कपड़ों को ध्यान में रखकर करती हैं. इसलिए आपको प्रत्येक घर में एक रंग की बिंदी के पैकेट ही नहीं, बल्कि कई रंगों और डिजाइनर बिंदी के पैकेट देखने को मिलेंगे. इस बिजनेस को शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मांग हमेशा बरकरार रहेगी, क्योंकि महिलाएं अपने साजो श्रृंगार के सामान पर खर्च करने कोई कमी नहीं बरतती हैं और बिंदी इसी का एक हिस्सा है. ऐसे में बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का यह बिजनेस आइडिया बेहतर साबित हो सकता है. आइए बताते हैं इसके बारे में सबकुछ. खादी व ग्रामोद्योग कमीशन ने ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर एक प्रोजेक्ट तैयार किया है. इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर कुल खर्च चार,शून्य,शून्य रुपयापये आएगा. अगर आपके पास बिजनेस शुरू करने के लिए फंड नहीं तो आप पीएम मुद्रा लोन स्कीम के जरिए लोन ले सकते हैं. प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर आप बैंक से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन तैयार की गई प्रोजेक्ट प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदी बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको बहुत अधिक जमीन की जरूरत नहीं होती क्योंकि इस काम में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और उपकरण को लगाने और उनसे काम निकलवाने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है. यह बिजनेस पाँच सौ×तीन सौ वर्ग फुट जगह में शुरू हो जाएगा. आपके पास जमीन नहीं है तो आप इसे किराये पर ले सकते हैं. बिल्डिंग शेड बनाने पर कुल एक,पचास,शून्य रुपयापये की लागत आएगी. बिंदी का बिजनेस शुरू करने के लिए आपको कई तरह के मशीनों की जरूरत होगी. जिनमें बॉटल कैप सिलिंग मशीन, फिल्टरिंग यूनिट, स्टोरेज टैंक आदि. इन मशीनों की खरीद पर करीब एक,शून्य,शून्य रुपयापये खर्च होंगे. साथ ही, एक,पचास,शून्य रुपयापए वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी. इस तहर कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट चार,शून्य,शून्य लाख रुपए हो गई. केवीआईसी की रिपोर्ट के मुताबिक, आप एक साल में छः सौ,शून्य रुपयापये मूल्य की बिंदी का उत्पादन कर सकते हैं. इसके रॉ मेटेरियल पर दो,साठ,पाँच सौ रुपयापये, लेबल और पैकेजिंग मेटेरियल पर पचास,शून्य रुपयापये, वेज पर एक,पचास,शून्य लाख रुपये, सैलरी पर अड़तालीस,शून्य रुपयापये, प्रशासनिक खर्च पर पंद्रह,शून्य रुपयापये, ओवरहेड्स पर चौदह,पाँच सौ रुपयापये, विविध व्यय पर सात,पाँच सौ रुपयापये, डेप्रिसिएशन पर सत्रह,पाँच सौ रुपयापये, इंश्योरेंस पर दो,पाँच सौ रुपयापये खर्च होंगे. कैपिटल एक्सपेंडिचर लोन पर बत्तीस,पाँच सौ रुपयापये और वर्किंग कैपिटल लोन के ब्याज पर उन्नीस,पाँच सौ रुपयापये खर्च होंगे. इसका मतलब ब्याज पर सालाना बावन,शून्य रुपयापये खर्च होंगे. अगर आप एक सौ फीसदी कैपिसिटी का उपयोग कर प्रोडक्शन करते हैं तो सालाना प्रोडक्शन छः,शून्य,शून्य लाख रुपये का होगा. प्रोजेक्टेड सेल्स कॉस्ट सात,पचास,शून्य रुपयापये होगी. ग्रॉस सरप्लस एक,पचास,शून्य रुपयापये होगी. अनुमानित नेट सरप्लस एक,बत्तीस,शून्य रुपयापये. यानी आपकी हर महीने की कमाई ग्यारह,शून्य रुपयापये होगी. केवीआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये आंकड़े केवल सांकेतिक हैं और ये अलग-अलग जगहों पर बदल सकते हैं. अगर आप बिल्डिंग बनाने पर खर्च न करके इसे किराये पर लेते हैं तो आपका प्रोजेक्ट कॉस्ट घट जाएगा. पूंजीगत व्यय पर ब्याज भी कम हो जाएंगे और आपका मुनाफा बढ़ जाएगा.
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गुना में प्रेमी के साथ भागी विवाहिता के भाइयों ने प्रेमी की मां की घर में घुसकर हत्या कर दी। पति के साथ अशोकनगर काम से गई पत्नी वहीं से प्रेमी के साथ भाग गई। महिला के भाई उसके प्रेमी का घर खोजते हुए पहुंचे। वहां उसका प्रेमी तो नहीं मिला, लेकिन उसकी मां मिल गई। भाइयों ने चारपाई की पाटी से मार-मार कर उसकी मां की हत्या कर दी। पुलिस ने देर रात ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
शहर से 15 किमी दूर धमनार गांव की रहने वाली युवती की शादी आरोन इलाके के कुल्हाड़ी गांव में हुई थी। महिला का आरोन के ही रहने वाले एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। एक दिन पहले ही युवती अपने पति के साथ अशोकनगर गई हुई थी। उसने प्रेमी गोलू ओझा को भी अशोकनगर बुला लिया। वहां से वह पति को चकमा देकर प्रेमी संग भाग गई।
पति ने युवती के भाइयों को इसकी जानकारी दी। युवती के भाई उसके प्रेमी के घर का पता जानते थे। रविवार देर रात उसके भाई प्रेमी के घर पहुंच गए। वहां उन्हें युवती का प्रेमी तो नहीं मिला, लेकिन उसकी मां मिल गई। उसके भाइयों ने मां से बेटे के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह नहीं जानती कि बेटा कहां है। इस बात से युवती के भाई आगबबूला हो गए। उन्होंने चारपाई की पाटी उठाई और महिला के सिर पर वार कर दिए। महिला अमर बाई (45) के सिर में गंभीर चोट आने से मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना लगते ही आरोन पुलिस मौके पर पहुंची। सुराग मिलने पर देर रात ही दबिश देकर पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। युवती के दो भाई पुलिस गिरफ्त में आ गए। पकड़े गए आरोपियों में दीपक उर्फ कल्ला पुत्र चंदेल सिंह ओझा और उसका भाई लालू ओझा शामिल है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को धमनार से गिरफ्तार कर लिया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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गुना में प्रेमी के साथ भागी विवाहिता के भाइयों ने प्रेमी की मां की घर में घुसकर हत्या कर दी। पति के साथ अशोकनगर काम से गई पत्नी वहीं से प्रेमी के साथ भाग गई। महिला के भाई उसके प्रेमी का घर खोजते हुए पहुंचे। वहां उसका प्रेमी तो नहीं मिला, लेकिन उसकी मां मिल गई। भाइयों ने चारपाई की पाटी से मार-मार कर उसकी मां की हत्या कर दी। पुलिस ने देर रात ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। शहर से पंद्रह किमी दूर धमनार गांव की रहने वाली युवती की शादी आरोन इलाके के कुल्हाड़ी गांव में हुई थी। महिला का आरोन के ही रहने वाले एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। एक दिन पहले ही युवती अपने पति के साथ अशोकनगर गई हुई थी। उसने प्रेमी गोलू ओझा को भी अशोकनगर बुला लिया। वहां से वह पति को चकमा देकर प्रेमी संग भाग गई। पति ने युवती के भाइयों को इसकी जानकारी दी। युवती के भाई उसके प्रेमी के घर का पता जानते थे। रविवार देर रात उसके भाई प्रेमी के घर पहुंच गए। वहां उन्हें युवती का प्रेमी तो नहीं मिला, लेकिन उसकी मां मिल गई। उसके भाइयों ने मां से बेटे के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह नहीं जानती कि बेटा कहां है। इस बात से युवती के भाई आगबबूला हो गए। उन्होंने चारपाई की पाटी उठाई और महिला के सिर पर वार कर दिए। महिला अमर बाई के सिर में गंभीर चोट आने से मौके पर ही मौत हो गई। सूचना लगते ही आरोन पुलिस मौके पर पहुंची। सुराग मिलने पर देर रात ही दबिश देकर पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। युवती के दो भाई पुलिस गिरफ्त में आ गए। पकड़े गए आरोपियों में दीपक उर्फ कल्ला पुत्र चंदेल सिंह ओझा और उसका भाई लालू ओझा शामिल है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को धमनार से गिरफ्तार कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यह बात प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश का सबसे पहला घोटाला 40-50 के दशक में जीप घोटाले से 80 के दशक के अगुस्टा वेस्टलैंड, सबमरीन घोटाला, जैसे कई घोटाले सामने आए हैं। उनका काम रुपए बनाना और भारतीय सेना का मनोबल गिराना रह गया है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हमारी सरकार को सौभाग्य मिला है कि 40 साल से अटकी हुई वन रैंक वन पेंशन की मांग को हमने पूरा कर दिया। पूर्व की सरकार ने इसके लिए महज 500 करोड़ रुपए दिए थे, जो एक मजाक के समान थी।
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यह बात प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि देश का सबसे पहला घोटाला चालीस-पचास के दशक में जीप घोटाले से अस्सी के दशक के अगुस्टा वेस्टलैंड, सबमरीन घोटाला, जैसे कई घोटाले सामने आए हैं। उनका काम रुपए बनाना और भारतीय सेना का मनोबल गिराना रह गया है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हमारी सरकार को सौभाग्य मिला है कि चालीस साल से अटकी हुई वन रैंक वन पेंशन की मांग को हमने पूरा कर दिया। पूर्व की सरकार ने इसके लिए महज पाँच सौ करोड़ रुपए दिए थे, जो एक मजाक के समान थी।
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मैड्रिड, 15 मार्च (एपी) रीयाल मैड्रिड और मैनचेस्टर सिटी जैसे धुरंधर मंगलवार और बुधवार को यहां होने वाले चैम्पियंस लीग फुटबॉल के अंतिम 16 के बाकी मैचों में जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से उतरेंगे ।
रीयाल मैड्रिड का सामना अटलांटा से होगा जिसे उसने पहले चरण में 1 . 0 से हराया था । चोट के कारण बाहर रहे करीम बेंजीमा फिर से फॉर्म में है जिससे रीयाल मैड्रिड का आक्रमण मजबूत होगा । बेंजीमा ने वापसी के बाद दो मैचों में तीन गोल किये हैं । उनके अलावा कप्तान सर्जियो रामोस भी इस मैच के लिये उपलब्ध होंगे ।
मैनचेस्टर सिटी की टक्कर बोरूशिया मोंशेंग्लाबाख से होगी जिसे उसने पहले चरण में 2 . 0 से मात दी थी । ग्लाबाख को फरवरी से अब तक सभी छह मैचों में पराजय का सामना करना पड़ा है और उसके कोच मार्को रोस अगले सत्र में बोरूशिया डॉर्टमंड से जुड़ने जा रहे हैं ।
पहले चरण की ही तरह यह मैच ब्रिटेन की बजाय हंगरी में खेला जायेगा । सिटी प्रीमियर लीग में 14 अंक की बढत बनाये हुए है लिहाजा पहली बार चैम्पियंस लीग खिताब जीतने पर फोकस कर सकती है ।
पिछले यूरोपीय चैम्पियन बायर्न म्युनिख का सामना लाजियो से होगा । पहले चरण में 4 . 1 से जीत के बाद उसका अंतिम आठ में पहुंचना लगभग तय है । फीफा के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर राबर्ट लेवांडोवस्की पर अच्छे प्रदर्शन का दारोमदार होगा जो बुडेस्लिगा के तीन मैचों में छह गोल कर चुके हैं ।
वहीं चेलसी की टीम एटलेटिको मैड्रिड से भिड़ेगी और यह किसी प्रीमियर लीग टीम का इकलौता मैच है जो इंग्लैंड में हो रहा है । जर्मन टीमें मैनचेस्टर या लिवरपूल यात्रा नहीं कर सकी लेकिन एटलेटिको को वापसी पर मैड्रिड में पृथकवास में रहने की जरूरत नहीं है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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मैड्रिड, पंद्रह मार्च रीयाल मैड्रिड और मैनचेस्टर सिटी जैसे धुरंधर मंगलवार और बुधवार को यहां होने वाले चैम्पियंस लीग फुटबॉल के अंतिम सोलह के बाकी मैचों में जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से उतरेंगे । रीयाल मैड्रिड का सामना अटलांटा से होगा जिसे उसने पहले चरण में एक . शून्य से हराया था । चोट के कारण बाहर रहे करीम बेंजीमा फिर से फॉर्म में है जिससे रीयाल मैड्रिड का आक्रमण मजबूत होगा । बेंजीमा ने वापसी के बाद दो मैचों में तीन गोल किये हैं । उनके अलावा कप्तान सर्जियो रामोस भी इस मैच के लिये उपलब्ध होंगे । मैनचेस्टर सिटी की टक्कर बोरूशिया मोंशेंग्लाबाख से होगी जिसे उसने पहले चरण में दो . शून्य से मात दी थी । ग्लाबाख को फरवरी से अब तक सभी छह मैचों में पराजय का सामना करना पड़ा है और उसके कोच मार्को रोस अगले सत्र में बोरूशिया डॉर्टमंड से जुड़ने जा रहे हैं । पहले चरण की ही तरह यह मैच ब्रिटेन की बजाय हंगरी में खेला जायेगा । सिटी प्रीमियर लीग में चौदह अंक की बढत बनाये हुए है लिहाजा पहली बार चैम्पियंस लीग खिताब जीतने पर फोकस कर सकती है । पिछले यूरोपीय चैम्पियन बायर्न म्युनिख का सामना लाजियो से होगा । पहले चरण में चार . एक से जीत के बाद उसका अंतिम आठ में पहुंचना लगभग तय है । फीफा के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर राबर्ट लेवांडोवस्की पर अच्छे प्रदर्शन का दारोमदार होगा जो बुडेस्लिगा के तीन मैचों में छह गोल कर चुके हैं । वहीं चेलसी की टीम एटलेटिको मैड्रिड से भिड़ेगी और यह किसी प्रीमियर लीग टीम का इकलौता मैच है जो इंग्लैंड में हो रहा है । जर्मन टीमें मैनचेस्टर या लिवरपूल यात्रा नहीं कर सकी लेकिन एटलेटिको को वापसी पर मैड्रिड में पृथकवास में रहने की जरूरत नहीं है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह आज एकदिवसीय दौरे पर मुरादाबाद पहुंचे डीजीपी ओपी सिंह ने मुरादाबाद पहुंचकर पुलिस लाइन में नारी उत्थान केंद्र का उद्घाटन किया। DGP ने बताया इस नारी नारी उत्थान केंद्र में महिला अपराधों से जुड़े विषयों की काउंसलिंग के साथ ही महिलाओं को जागरूक भी किया जाएगा।
डीजीपी ने महिलाओं की काउंसलिंग के लिए मुरादाबाद में बनाये गये नारी उत्थान केंद्र की तारीफ करते हुए पूरे प्रदेश में नारी उत्थान केंद्र बनाने की बात कही। मुरादाबाद के एसएसपी के इस कदम की सराहना की वहीँ डीजीपी उत्तर प्रदेश ने पुलिस के जनता के साथ पेश आने वाले सख्त रवय्ये पर नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा की पुलिस को अपने सख्त रवय्ये में तब्दीली लानी चाहिए और इसके लिय हम स्पेशल ट्रेनिंग करा रहे हैं जिससे पुलिसकर्मियों के व्यवहार में नरमी आ सके।
उन्होंने पुलिस विभाग में करप्शन करने वालो को भी सख्त हिदायत दी उन्होंने कहा की यदि कोई करप्शन में लिप्त पाया गया तो उसे बक्शा नही जायेगा। उसे सजा मिलेगी जिस तरह ४० पुलिसकर्मियों को सजा दी जा चुकी है इसी तरह अगर कोई अच्छा काम करेगा तो टॉप ऑफ द मन्थ चुना जायेगा वहीँ पुलिस विभाग में आने वाले समय में एक लाख पदों पर भर्ती करने की बात भी कहीं। डीजीपी ने UP 100 के काम करने में बदलाव और कम समय में घटना पर पहुँचने की बात कहीं। वहीँ मोब्ल्यन्चिंग पर भी सख्त एक्शन लेने और पुलिस कर्मियों को हाईटेक करने के टेक्नोलोजी के इस्तमाल करने पर जोर दिया।
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उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह आज एकदिवसीय दौरे पर मुरादाबाद पहुंचे डीजीपी ओपी सिंह ने मुरादाबाद पहुंचकर पुलिस लाइन में नारी उत्थान केंद्र का उद्घाटन किया। DGP ने बताया इस नारी नारी उत्थान केंद्र में महिला अपराधों से जुड़े विषयों की काउंसलिंग के साथ ही महिलाओं को जागरूक भी किया जाएगा। डीजीपी ने महिलाओं की काउंसलिंग के लिए मुरादाबाद में बनाये गये नारी उत्थान केंद्र की तारीफ करते हुए पूरे प्रदेश में नारी उत्थान केंद्र बनाने की बात कही। मुरादाबाद के एसएसपी के इस कदम की सराहना की वहीँ डीजीपी उत्तर प्रदेश ने पुलिस के जनता के साथ पेश आने वाले सख्त रवय्ये पर नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा की पुलिस को अपने सख्त रवय्ये में तब्दीली लानी चाहिए और इसके लिय हम स्पेशल ट्रेनिंग करा रहे हैं जिससे पुलिसकर्मियों के व्यवहार में नरमी आ सके। उन्होंने पुलिस विभाग में करप्शन करने वालो को भी सख्त हिदायत दी उन्होंने कहा की यदि कोई करप्शन में लिप्त पाया गया तो उसे बक्शा नही जायेगा। उसे सजा मिलेगी जिस तरह चालीस पुलिसकर्मियों को सजा दी जा चुकी है इसी तरह अगर कोई अच्छा काम करेगा तो टॉप ऑफ द मन्थ चुना जायेगा वहीँ पुलिस विभाग में आने वाले समय में एक लाख पदों पर भर्ती करने की बात भी कहीं। डीजीपी ने UP एक सौ के काम करने में बदलाव और कम समय में घटना पर पहुँचने की बात कहीं। वहीँ मोब्ल्यन्चिंग पर भी सख्त एक्शन लेने और पुलिस कर्मियों को हाईटेक करने के टेक्नोलोजी के इस्तमाल करने पर जोर दिया।
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झुंझुनू, झुंझुनू की पोक्सो कोर्ट ने बुधवार को पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित को घटना के 26 दिन के भीतर फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह का कृत्य तो कोई पशु भी बच्चे के साथ नहीं करता है। कोर्ट ने इन वारदातों के पीछे नशा और पोर्नोग्राफी को कारण मानते हुए सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए लिखने का फैसला लिया है।
पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश जैन ने सजा सुनाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान तुम्हारे अंदर एक बार भी पश्चाताप नहीं देखा। अगर तुम पश्चाताप करते तो हो सकता था तुम्हारी सजा दूसरी होती। विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि इस मामले में आरोपित को मंगलवार को न्यायालय ने दोष सिद्ध करने के बाद व्यक्तिगत सुनने के लिए भी बुलाया था। इस दौरान भी आरोपित के मन और चेहरे पर पश्चाताप का कोई भाव नहीं था। इसलिए न्यायालय ने मामले में कोई नरमी नहीं बरती। पत्रावली पर आए साक्ष्य और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए फांसी की सजा दी गई।
पोक्सो कोर्ट झुंझुनू के विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि कोर्ट ने आरोपित से यह भी कहा है कि वह अपने जीवन को सुधारना चाहता या फिर अपराध के प्रति पश्चाताप के लिए तैयार है। कहीं सुधरने की मन में हो तो वह अच्छा व्यवहार रखे। साथ ही जेल प्रबंधन को कहा है कि अपराधी को धार्मिक और मोटिवेशनल किताबें उपलब्ध करवाएं जो इसे समाज में स्थापित करने में सहायक साबित हों। आरोपित ने व्यक्तिगत सुनवाई में न्यायालय से कहा कि अपराध का कारण नशा था लेकिन आरोपित की इस दलील को कोर्ट ने इसलिए नहीं माना क्योंकि उसने घटना के बाद करीब 40 किलोमीटर स्कूटी चलाई है और बच्ची को चॉकलेट व चिप्स भी दिलवाई है। ऐसे में वह सेंस में था। कोर्ट में आरोपित ने यह भी स्वीकारा कि वह नशे के अलावा पोर्न वीडियो देखता था जिसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने नशे को युवाओं से दूर रखने तथा पोर्न वीडियोज पर कंट्रोल करने के लिए सरकार को लिखने का फैसला भी लिया है।
मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना 19 फरवरी को राजस्थान में झुंझुनू जिले के पिलानी थाने के तहत श्योराणों की ढाणी की है जहां शाम को पांच साल की मासूम खेत में अपने भाई-बहनों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान एक स्कूटी पर आरोपित सुनील कुमार (20) आया और मासूम का अपहरण कर ले गया था। अपहरण के तुरंत बाद ही मासूम के भाई-बहनों ने आरोपित का पीछा भी किया था लेकिन वे उसे नहीं पकड़ पाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देशन पर पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी की। इस बीच रात करीब 8 बजे मासूम गाड़ाखेड़ा गांव में लहूलुहान स्थिति में मिली थी। इसके बाद गाड़ाखेड़ा चौकी प्रभारी शेरसिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और मासूम को अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे जयपुर रेफर किया गया था।
घटना के पांच घंटे बाद ही पुलिस ने शाहपुर निवासी आरोपित सुनील को गिरफ्तार कर लिया था। जांच अधिकारी चिड़ावा पुलिस उपाधीक्षक सुरेश शर्मा ने आरोपित के खिलाफ 9वें दिन ही चालान पेश कर दिया था। तब से मामले की नियमित सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने फैसला भी सिर्फ 26 दिन में सुना दिया। इस मामले में 40 से अधिक गवाह जुटाए और साथ ही करीब 250 दस्तावेज बतौर सबूत रखे। पुलिस ने इस मामले में रोजाना 12 से 13 घंटे काम किया और 10 दिन में ही चालान पेश कर दिया था। पॉक्सो एक्ट लागू होने के बाद मासूम से रेप को फांसी का झुंझुनू जिले का यह दूसरा मामला है। इससे पूर्व तीन साल पहले ऐसे ही एक मामले में आरोपित विनोद कुमार को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
कोर्ट के फैसले के बाद बच्ची के पिता ने कहा कि आज हमारी बेटी को न्याय मिला है। घटना के बाद से ही वह डरी, सहमी रहती है। उनकी बेटी को जिंदगी भर का दर्द मिला है जिसकी पीड़ा कोई कम नहीं कर सकता है। झुंझुनू पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने कहा कि इस फैसले से इस तरह के समाज के कांटों को कड़ा संदेश जाएगा कि बुराई का अंत बुरा ही होता है। उन्होंने मामले में जांच अधिकारी चिड़ावा पुलिस उपाधीक्षक सुरेश शर्मा और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस टीम ने महज 9 दिन में चालान पेश कर नया रिकॉर्ड बनाया।
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झुंझुनू, झुंझुनू की पोक्सो कोर्ट ने बुधवार को पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपित को घटना के छब्बीस दिन के भीतर फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह का कृत्य तो कोई पशु भी बच्चे के साथ नहीं करता है। कोर्ट ने इन वारदातों के पीछे नशा और पोर्नोग्राफी को कारण मानते हुए सरकार को इस दिशा में कदम उठाने के लिए लिखने का फैसला लिया है। पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश जैन ने सजा सुनाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान तुम्हारे अंदर एक बार भी पश्चाताप नहीं देखा। अगर तुम पश्चाताप करते तो हो सकता था तुम्हारी सजा दूसरी होती। विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि इस मामले में आरोपित को मंगलवार को न्यायालय ने दोष सिद्ध करने के बाद व्यक्तिगत सुनने के लिए भी बुलाया था। इस दौरान भी आरोपित के मन और चेहरे पर पश्चाताप का कोई भाव नहीं था। इसलिए न्यायालय ने मामले में कोई नरमी नहीं बरती। पत्रावली पर आए साक्ष्य और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए फांसी की सजा दी गई। पोक्सो कोर्ट झुंझुनू के विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि कोर्ट ने आरोपित से यह भी कहा है कि वह अपने जीवन को सुधारना चाहता या फिर अपराध के प्रति पश्चाताप के लिए तैयार है। कहीं सुधरने की मन में हो तो वह अच्छा व्यवहार रखे। साथ ही जेल प्रबंधन को कहा है कि अपराधी को धार्मिक और मोटिवेशनल किताबें उपलब्ध करवाएं जो इसे समाज में स्थापित करने में सहायक साबित हों। आरोपित ने व्यक्तिगत सुनवाई में न्यायालय से कहा कि अपराध का कारण नशा था लेकिन आरोपित की इस दलील को कोर्ट ने इसलिए नहीं माना क्योंकि उसने घटना के बाद करीब चालीस किलोग्राममीटर स्कूटी चलाई है और बच्ची को चॉकलेट व चिप्स भी दिलवाई है। ऐसे में वह सेंस में था। कोर्ट में आरोपित ने यह भी स्वीकारा कि वह नशे के अलावा पोर्न वीडियो देखता था जिसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने नशे को युवाओं से दूर रखने तथा पोर्न वीडियोज पर कंट्रोल करने के लिए सरकार को लिखने का फैसला भी लिया है। मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना उन्नीस फरवरी को राजस्थान में झुंझुनू जिले के पिलानी थाने के तहत श्योराणों की ढाणी की है जहां शाम को पांच साल की मासूम खेत में अपने भाई-बहनों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान एक स्कूटी पर आरोपित सुनील कुमार आया और मासूम का अपहरण कर ले गया था। अपहरण के तुरंत बाद ही मासूम के भाई-बहनों ने आरोपित का पीछा भी किया था लेकिन वे उसे नहीं पकड़ पाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देशन पर पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी की। इस बीच रात करीब आठ बजे मासूम गाड़ाखेड़ा गांव में लहूलुहान स्थिति में मिली थी। इसके बाद गाड़ाखेड़ा चौकी प्रभारी शेरसिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और मासूम को अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे जयपुर रेफर किया गया था। घटना के पांच घंटे बाद ही पुलिस ने शाहपुर निवासी आरोपित सुनील को गिरफ्तार कर लिया था। जांच अधिकारी चिड़ावा पुलिस उपाधीक्षक सुरेश शर्मा ने आरोपित के खिलाफ नौवें दिन ही चालान पेश कर दिया था। तब से मामले की नियमित सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने फैसला भी सिर्फ छब्बीस दिन में सुना दिया। इस मामले में चालीस से अधिक गवाह जुटाए और साथ ही करीब दो सौ पचास दस्तावेज बतौर सबूत रखे। पुलिस ने इस मामले में रोजाना बारह से तेरह घंटाटे काम किया और दस दिन में ही चालान पेश कर दिया था। पॉक्सो एक्ट लागू होने के बाद मासूम से रेप को फांसी का झुंझुनू जिले का यह दूसरा मामला है। इससे पूर्व तीन साल पहले ऐसे ही एक मामले में आरोपित विनोद कुमार को फांसी की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद बच्ची के पिता ने कहा कि आज हमारी बेटी को न्याय मिला है। घटना के बाद से ही वह डरी, सहमी रहती है। उनकी बेटी को जिंदगी भर का दर्द मिला है जिसकी पीड़ा कोई कम नहीं कर सकता है। झुंझुनू पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने कहा कि इस फैसले से इस तरह के समाज के कांटों को कड़ा संदेश जाएगा कि बुराई का अंत बुरा ही होता है। उन्होंने मामले में जांच अधिकारी चिड़ावा पुलिस उपाधीक्षक सुरेश शर्मा और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस टीम ने महज नौ दिन में चालान पेश कर नया रिकॉर्ड बनाया।
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देव टोला के समीप ब्रेकर पर टकराई दोनों बाइक : आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे पर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के देव टोला गांव स्थित न्यू टोल टैक्स के समीप सोमवार की शाम दो बाइक की आपसी भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक पर देवर-भाभी समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें एक ने मौके पर, दूसरे ने इलाज के लिए पटना ले जाने एवं तीसरे ने आरा सदर अस्पताल लाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
जबकि बाइक सवार दो जख्मियों का इलाज जगदीशपुर अनुमंडलीय एवं एक का आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। घटना को लेकर लोगों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में करवाया। जानकारी के अनुसार मृतकों में बक्सर जिला के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के गड़हता खुर्द गांव निवासी विकास कुमार की 30 वर्षीया पत्नी दामिनी देवी,उनका छोटा भाई सोनू कुमार प्रसाद एवं पीरो थाना क्षेत्र के हसवाडीह गांव निवासी उनके साढु का लड़का संजय कुमार शामिल है।
जबकि जख्मियों में उनका पुत्र आर्यन कुमार, पीरो थाना क्षेत्र के निवासी व उनके साढु मनीष प्रसाद का 5 वर्षीय पुत्र संजय कुमार एवं 28 वर्षीया पत्नी नंदनी कुमारी शामिल है। इधर मृतका दामिनी देवी के पति विकास कुमार ने बताया कि आयर थाना क्षेत्र के बलिगांव गांव उनके ससुराल में उनके सास का आज श्राद्ध कर्म था। जिसमे सभी लोग शामिल हुए थे। सोमवार की दोपहर जब एक बाइक पर उनकी पत्नी दामिनी देवी,उनका भाई सोनू कुमार प्रसाद,उनका पुत्र आर्यन कुमार व उनके साढु का लड़का संजय कुमार सवार थे और उनका भाई सोनू कुमार प्रसाद बाइक चला रहा था।
जबकि दूसरे बाइक पर उनकी साढु की पत्नी नंदनी देवी,उनका पुत्र संजय कुमार,उनका चचेरा भाई धुरान प्रसाद एवं उनके पिता सुदामा प्रसाद सवार थे और उनका चचेरा भाई धुरान बाइक चला रहा था। जब सभी लोग दो बाइक पर सवार वापस अपने अपने घर लौट रहे थे। उसी दौरान स्थानीय थाना क्षेत्र के देव टोला गांव स्थित न्यू टॉल टैक्स के समीप अचानक ब्रेकर आ गया। जहां ब्रेक लगाने क्रम में दोनों की बाइक अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गई।
जिससे सभी बाइक से गिर पड़े। जिसमे एक बाइक पर सवार उनकी पत्नी दामिनी देवी,छोटा भाई सोनू कुमार प्रसाद एवं दूसरे बाइक पर सवार उनके साढु का लड़का संजय कुमार की मौत हो गई। जबकि उनके भाई के बाइक पर बैठे उनका पुत्र आर्यन कुमार व उनके साढु का लड़का मंटू कुमार एवं दूसरे बाइक पर सवार उनकी साढु की पत्नी नंदनी देवी जख्मी हो गए। जिसके बाद जख्मियों में उनके पुत्र आर्यन कुमार व साढु का लड़का मंटू कुमार का इलाज जगदीशपुर अनुमंडलीय अस्पताल में एवं उनकी साढु की पत्नी नंदिनी देवी का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है।
जिसमे मृतका दामिनी देवी का जगदीशपुर थाना पुलिस एवं मृतक सोनू कुमार प्रसाद एवं मृत बालक संजय कुमार का पोस्टमार्टम टाउन थाना पुलिस द्वारा कराया गया। घटना के बाद मृतकों के घर में कोहराम मच गया है घटी इस घटना के बाद मृतकों के परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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देव टोला के समीप ब्रेकर पर टकराई दोनों बाइक : आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे पर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के देव टोला गांव स्थित न्यू टोल टैक्स के समीप सोमवार की शाम दो बाइक की आपसी भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक पर देवर-भाभी समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें एक ने मौके पर, दूसरे ने इलाज के लिए पटना ले जाने एवं तीसरे ने आरा सदर अस्पताल लाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जबकि बाइक सवार दो जख्मियों का इलाज जगदीशपुर अनुमंडलीय एवं एक का आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। घटना को लेकर लोगों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में करवाया। जानकारी के अनुसार मृतकों में बक्सर जिला के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के गड़हता खुर्द गांव निवासी विकास कुमार की तीस वर्षीया पत्नी दामिनी देवी,उनका छोटा भाई सोनू कुमार प्रसाद एवं पीरो थाना क्षेत्र के हसवाडीह गांव निवासी उनके साढु का लड़का संजय कुमार शामिल है। जबकि जख्मियों में उनका पुत्र आर्यन कुमार, पीरो थाना क्षेत्र के निवासी व उनके साढु मनीष प्रसाद का पाँच वर्षीय पुत्र संजय कुमार एवं अट्ठाईस वर्षीया पत्नी नंदनी कुमारी शामिल है। इधर मृतका दामिनी देवी के पति विकास कुमार ने बताया कि आयर थाना क्षेत्र के बलिगांव गांव उनके ससुराल में उनके सास का आज श्राद्ध कर्म था। जिसमे सभी लोग शामिल हुए थे। सोमवार की दोपहर जब एक बाइक पर उनकी पत्नी दामिनी देवी,उनका भाई सोनू कुमार प्रसाद,उनका पुत्र आर्यन कुमार व उनके साढु का लड़का संजय कुमार सवार थे और उनका भाई सोनू कुमार प्रसाद बाइक चला रहा था। जबकि दूसरे बाइक पर उनकी साढु की पत्नी नंदनी देवी,उनका पुत्र संजय कुमार,उनका चचेरा भाई धुरान प्रसाद एवं उनके पिता सुदामा प्रसाद सवार थे और उनका चचेरा भाई धुरान बाइक चला रहा था। जब सभी लोग दो बाइक पर सवार वापस अपने अपने घर लौट रहे थे। उसी दौरान स्थानीय थाना क्षेत्र के देव टोला गांव स्थित न्यू टॉल टैक्स के समीप अचानक ब्रेकर आ गया। जहां ब्रेक लगाने क्रम में दोनों की बाइक अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गई। जिससे सभी बाइक से गिर पड़े। जिसमे एक बाइक पर सवार उनकी पत्नी दामिनी देवी,छोटा भाई सोनू कुमार प्रसाद एवं दूसरे बाइक पर सवार उनके साढु का लड़का संजय कुमार की मौत हो गई। जबकि उनके भाई के बाइक पर बैठे उनका पुत्र आर्यन कुमार व उनके साढु का लड़का मंटू कुमार एवं दूसरे बाइक पर सवार उनकी साढु की पत्नी नंदनी देवी जख्मी हो गए। जिसके बाद जख्मियों में उनके पुत्र आर्यन कुमार व साढु का लड़का मंटू कुमार का इलाज जगदीशपुर अनुमंडलीय अस्पताल में एवं उनकी साढु की पत्नी नंदिनी देवी का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। जिसमे मृतका दामिनी देवी का जगदीशपुर थाना पुलिस एवं मृतक सोनू कुमार प्रसाद एवं मृत बालक संजय कुमार का पोस्टमार्टम टाउन थाना पुलिस द्वारा कराया गया। घटना के बाद मृतकों के घर में कोहराम मच गया है घटी इस घटना के बाद मृतकों के परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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ध्यान दें कार मालिकों निसान मार्च 1992 में दिखाई दिया और तुरंत अपनी सेना प्रशंसकों की भर्ती के लिए शुरू कर दिया। सबसे पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि "निसान मार्ज" - "निसान माइक्रा" है, जो यूरोपीय उपभोक्ता के लिए विकसित किया गया था का एक जापानी संस्करण है। अनुभवी कार मालिकों के हलकों में "मार्ज" अपने यूरोपीय चचेरे भाई की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। रूस में, कार दो दशकों के लिए लोकप्रिय है। विन्यास और जापानी "Marja" के संशोधन को बदलें, लेकिन यह हमेशा मांग में है। 2002 में, "निसान मार्ज" एक गंभीर उन्नयन था और यहां तक कि बेहतर है। हालांकि, के बाद कि उत्पादन बंद किया गया था। लेकिन इन कारों के लिए पर्याप्त उत्पादन किया गया था, और वे अभी भी अक्सर रूस सड़कों पर पाए जाते हैं।
कारों में फार्म बहुत अलग-अलग हैं, और इसलिए कुछ भी साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए। यह इतना सर्वांगीण है, कि यह कोनों के बिना कार का नाम था। तथ्य यह है कि मॉडल एक छोटे से अतिशयोक्तिपूर्ण है और बड़े दौर हेडलाइट्स है, क्या यह छोटी कारों के बीच में सेट है। बाद उन्नयन की दुकान में काफी वृद्धि हुई है और अब और भी विशाल है। इसके अलावा, शरीर एक छोटे से बड़े। नई "मार्ज" "जैव डिजाइन" का इस्तेमाल किया उच्च गुणवत्ता और महंगी सामग्री अपने उपकरणों के साथ वाहनों में जाना जाता है, लेकिन वह एक लागत प्रभावी मॉडल बना हुआ है। उनके असामान्य उपस्थिति और गुणवत्ता संकेतक इस कार खरीद, मुख्य रूप से कमजोर लिंग के प्रतिनिधिः विशेष रूप से रूसी महिलाओं की तरह गिर गए हैं। रूस में, "मार्गी" यह भी एक उज्ज्वल गुलाबी रंग और फूल पाया जा सकता है।
सबसे पहले यह कहा जाना चाहिए कि निसान मार्च - हैचबैक, जिसमें पांच द्वार हैं और एक कक्षा बी एक विश्वव्यापी प्रतिष्ठा के साथ अपने जापानी कंपनी का उत्पादन होता है है - "। निसान" लेकिन जैसे-जैसे निसान मार्च (K11) 1992 में रूस के बाजार पर दिखाई दिया, अब तक, वहाँ झोल को तीन दरवाजे खेल संस्करण हैं। और वे आज के "निसान मार्ज" के विपरीत काफी हैं, क्योंकि उन्नत करने के लिए हैचबैक उन गोल आकृति और "Marja" से बहुत अलग हैं, जिसके लिए हम आदी हैं था। इस कार में पांच सीटों की संख्या, कार केबिन बहुत विशाल है और एक साधारण सेडान के आयामों से हीन कोई रास्ता नहीं में है। पीछे यात्रियों के लिए एक बड़ी जगह नहीं है। एक ड्राइवर और सभी विशाल पर सह चालक।
आयाम निसान मार्च मामूली है, हालांकि अधिक वर्षों में परिवर्तन एक छोटा सा बड़ा हो गया। 1660 मिमी, मशीन ऊंचाई 1525 मिमी तक पहुँच जाता है - तो, यह कार की लंबाई 3715 मिमी, चौड़ाई है। इस तरह के साथ आयाम कार आसानी से शहरी सड़क में और ट्रैक पर और सो पड़ोस, जो निश्चित रूप से शहरों के निवासियों को खुश नहीं कर सकते हैं के आंगन में अपनी जगह पाता है। आधुनिक शहरों की सड़कों अभिभूत कर रहे हैं और इस तरह के "मार्ज" के रूप में manoeuvrable छोटी कारों वे बहुत सहज महसूस करते हैं। किसी भी शहरी पार्किंग पर यह अपनी जगह मिल जाएगा।
व्हीलबेस, एक्सल आगे और पीछे के पहियों के बीच की दूरी यानी, हैचबैक 2430 मिमी है। लेकिन अगर prosmatirivat जानकारी निसान मार्च, समीक्षा का कहना है कि जमीन 135 मिमी, यह रूसी सड़कों के लिए पर्याप्त नहीं है। चूंकि हमारे गज की दूरी पर अप को पार किया और प्रतिबंध नीचे, ऐसे वातावरण में पार्किंग nevyskogo निकासी मुश्किल है। इसके अलावा, रूसी सर्दियों, जब बर्फ हर जगह है, यहां तक कि सड़क के स्तर का नहीं बल्कि जल्दी से बड़ा हो जाता है पर की शर्तों, "Marjah" भी अपनी कम जमीन के साथ हस्तक्षेप। लेकिन अगर रोजमर्रा की मोटर यात्री मार्ग चिकनी सड़कों के साथ चलता है, यह डराने नहीं किया।
मात्रा निसान मार्च सामान कम्पार्टमेंट की एक अपेक्षाकृत छोटे आकार के साथ अधिक से अधिक, कि तह पीछे सीटों के साथ है, पर 584 लीटर है, और की एक न्यूनतम के साथ - 230 लीटर। मुझे कहना पड़ेगा कि काफी एक बहुत कुछ है एक छोटी कार के लिए। सामान्य तौर पर, "निसान मार्ज" में दिखाई दे रहा, भूल है कि इस तरह के एक परंपरागत सेडान में के रूप में क्योंकि केबिन पूर्ण छत की ऊंचाई और पैर के लिए दूरी एक मामूली कॉम्पैक्ट कार है।
इंजन है कि निसान मार्च को ustanvlivayutsya, बहुत अलग विशेषताएं हैं। हैचबैक में घुड़सवार के इंजन 1. 0, 1. 3 और 1. 4 लीटर और डीजल अवतार 1. 5 लीटर। इंजन निसान मार्च के रूप में इस इकाई की शक्ति छोटा है - प्रति सेकंड 5600 क्रांतियों पर केवल 65 अश्वशक्ति। इसके अलावा "मार्ज" स्थापित गैस उपकरण पर है, लेकिन इस सवाल का बहुत अलग है और वाहन के मालिक की ओर से कुछ प्रयास की आवश्यकता है।
"निसान मार्ज" पांच कदम के लिए पारेषण, perdnyaya निलंबन के साथ सुसज्जित है आघात अवशोषक, रियर मरोड़ बार। इस हैचबैक पर ड्राइव केवल एक सामने है। अधिकतम गति है कि निसान मार्च को विकसित करने में सक्षम है, 154 किमी / घंटा के बराबर है, और यह लगभग पंद्रह सेकंड के लिए प्राप्त कर रहा है, इतनी तेजी से इस कार नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसकी स्पष्ट लाभ ईंधन की अर्थव्यवस्था है। शहरी क्षेत्रों में यह 7. 1 लीटर और राजमार्ग पर 5. 1 लीटर है। इस प्रकार, मिश्रित चक्र 5. 8 के बारे में लीटर तक बाहर आता है, और यह vyrazhennnye प्रदर्शन कार है। इस हैचबैक के लिए ईंधन केवल 95 ग्रेड जापानी इंजन में अन्य प्रजातियों को भरने के लिए अनुशंसित नहीं हैं फिट बैठता है। "Marja" पर ईंधन टैंक की मात्रा छोटा है - केवल 45 लीटर, और इसकी कुल सब मुश्किल से 940 किलो तक पहुँचता है।
14 इंच के पहियों और आकर्षक गोल आकार "निसान मार्ज" के लिए धन्यवाद एक महिला कार के रूप में ख्याति हासिल कर ली है। अगर हम निसान मार्च के बारे में जानकारी को देखो, उपस्थिति और ईंधन की अर्थव्यवस्था के बारे में समीक्षा प्रशंसा करते नहीं थकते होगा। इसके अलावा एक हैचबैक कार मालिकों की गतिशीलता की तरह। आलोचना पारंपरिक रूप से कम निकासी और कम है इंजन शक्ति, लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह बेजोड़ है। यह विशेष रूप से सच नौसिखिए चालकों है। उच्च शक्ति उन्हें अनावश्यक परेशानी हो सकती है।
सामान्य तौर पर, मुझे लगता है कि कहना होगा विशेषताएं निसान मार्च वे कहते हैं कि इस कॉम्पैक्ट हैचबैक अच्छी तरह से शहरी वातावरण में प्रयोग के लिए अनुकूल है। हालांकि उत्पादन 2002 में बंद किया गया था, आज तक यह अक्सर रूस सड़कों पर पाया जा सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि "निसान मार्ज" आसान हैंडलिंग और अर्थव्यवस्था की वजह से महिलाओं के साथ अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय है लायक है। लेकिन शायद निष्पक्ष सेक्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक कार की आकर्षक उपस्थिति है। रूसी बाजार के लिए, अर्थव्यवस्था के स्थिरीकरण के बावजूद, यह अभी भी मुख्य सूचक बचत है। इसलिए, निसान मार्च अपनी क्षमता की वजह से रूस ड्राइवरों के शौकीन।
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ध्यान दें कार मालिकों निसान मार्च एक हज़ार नौ सौ बानवे में दिखाई दिया और तुरंत अपनी सेना प्रशंसकों की भर्ती के लिए शुरू कर दिया। सबसे पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि "निसान मार्ज" - "निसान माइक्रा" है, जो यूरोपीय उपभोक्ता के लिए विकसित किया गया था का एक जापानी संस्करण है। अनुभवी कार मालिकों के हलकों में "मार्ज" अपने यूरोपीय चचेरे भाई की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। रूस में, कार दो दशकों के लिए लोकप्रिय है। विन्यास और जापानी "Marja" के संशोधन को बदलें, लेकिन यह हमेशा मांग में है। दो हज़ार दो में, "निसान मार्ज" एक गंभीर उन्नयन था और यहां तक कि बेहतर है। हालांकि, के बाद कि उत्पादन बंद किया गया था। लेकिन इन कारों के लिए पर्याप्त उत्पादन किया गया था, और वे अभी भी अक्सर रूस सड़कों पर पाए जाते हैं। कारों में फार्म बहुत अलग-अलग हैं, और इसलिए कुछ भी साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए। यह इतना सर्वांगीण है, कि यह कोनों के बिना कार का नाम था। तथ्य यह है कि मॉडल एक छोटे से अतिशयोक्तिपूर्ण है और बड़े दौर हेडलाइट्स है, क्या यह छोटी कारों के बीच में सेट है। बाद उन्नयन की दुकान में काफी वृद्धि हुई है और अब और भी विशाल है। इसके अलावा, शरीर एक छोटे से बड़े। नई "मार्ज" "जैव डिजाइन" का इस्तेमाल किया उच्च गुणवत्ता और महंगी सामग्री अपने उपकरणों के साथ वाहनों में जाना जाता है, लेकिन वह एक लागत प्रभावी मॉडल बना हुआ है। उनके असामान्य उपस्थिति और गुणवत्ता संकेतक इस कार खरीद, मुख्य रूप से कमजोर लिंग के प्रतिनिधिः विशेष रूप से रूसी महिलाओं की तरह गिर गए हैं। रूस में, "मार्गी" यह भी एक उज्ज्वल गुलाबी रंग और फूल पाया जा सकता है। सबसे पहले यह कहा जाना चाहिए कि निसान मार्च - हैचबैक, जिसमें पांच द्वार हैं और एक कक्षा बी एक विश्वव्यापी प्रतिष्ठा के साथ अपने जापानी कंपनी का उत्पादन होता है है - "। निसान" लेकिन जैसे-जैसे निसान मार्च एक हज़ार नौ सौ बानवे में रूस के बाजार पर दिखाई दिया, अब तक, वहाँ झोल को तीन दरवाजे खेल संस्करण हैं। और वे आज के "निसान मार्ज" के विपरीत काफी हैं, क्योंकि उन्नत करने के लिए हैचबैक उन गोल आकृति और "Marja" से बहुत अलग हैं, जिसके लिए हम आदी हैं था। इस कार में पांच सीटों की संख्या, कार केबिन बहुत विशाल है और एक साधारण सेडान के आयामों से हीन कोई रास्ता नहीं में है। पीछे यात्रियों के लिए एक बड़ी जगह नहीं है। एक ड्राइवर और सभी विशाल पर सह चालक। आयाम निसान मार्च मामूली है, हालांकि अधिक वर्षों में परिवर्तन एक छोटा सा बड़ा हो गया। एक हज़ार छः सौ साठ मिमी, मशीन ऊंचाई एक हज़ार पाँच सौ पच्चीस मिमी तक पहुँच जाता है - तो, यह कार की लंबाई तीन हज़ार सात सौ पंद्रह मिमी, चौड़ाई है। इस तरह के साथ आयाम कार आसानी से शहरी सड़क में और ट्रैक पर और सो पड़ोस, जो निश्चित रूप से शहरों के निवासियों को खुश नहीं कर सकते हैं के आंगन में अपनी जगह पाता है। आधुनिक शहरों की सड़कों अभिभूत कर रहे हैं और इस तरह के "मार्ज" के रूप में manoeuvrable छोटी कारों वे बहुत सहज महसूस करते हैं। किसी भी शहरी पार्किंग पर यह अपनी जगह मिल जाएगा। व्हीलबेस, एक्सल आगे और पीछे के पहियों के बीच की दूरी यानी, हैचबैक दो हज़ार चार सौ तीस मिमी है। लेकिन अगर prosmatirivat जानकारी निसान मार्च, समीक्षा का कहना है कि जमीन एक सौ पैंतीस मिमी, यह रूसी सड़कों के लिए पर्याप्त नहीं है। चूंकि हमारे गज की दूरी पर अप को पार किया और प्रतिबंध नीचे, ऐसे वातावरण में पार्किंग nevyskogo निकासी मुश्किल है। इसके अलावा, रूसी सर्दियों, जब बर्फ हर जगह है, यहां तक कि सड़क के स्तर का नहीं बल्कि जल्दी से बड़ा हो जाता है पर की शर्तों, "Marjah" भी अपनी कम जमीन के साथ हस्तक्षेप। लेकिन अगर रोजमर्रा की मोटर यात्री मार्ग चिकनी सड़कों के साथ चलता है, यह डराने नहीं किया। मात्रा निसान मार्च सामान कम्पार्टमेंट की एक अपेक्षाकृत छोटे आकार के साथ अधिक से अधिक, कि तह पीछे सीटों के साथ है, पर पाँच सौ चौरासी लीटरटर है, और की एक न्यूनतम के साथ - दो सौ तीस लीटरटर। मुझे कहना पड़ेगा कि काफी एक बहुत कुछ है एक छोटी कार के लिए। सामान्य तौर पर, "निसान मार्ज" में दिखाई दे रहा, भूल है कि इस तरह के एक परंपरागत सेडान में के रूप में क्योंकि केबिन पूर्ण छत की ऊंचाई और पैर के लिए दूरी एक मामूली कॉम्पैक्ट कार है। इंजन है कि निसान मार्च को ustanvlivayutsya, बहुत अलग विशेषताएं हैं। हैचबैक में घुड़सवार के इंजन एक. शून्य, एक. तीन और एक. चार लीटरटर और डीजल अवतार एक. पाँच लीटरटर। इंजन निसान मार्च के रूप में इस इकाई की शक्ति छोटा है - प्रति सेकंड पाँच हज़ार छः सौ क्रांतियों पर केवल पैंसठ अश्वशक्ति। इसके अलावा "मार्ज" स्थापित गैस उपकरण पर है, लेकिन इस सवाल का बहुत अलग है और वाहन के मालिक की ओर से कुछ प्रयास की आवश्यकता है। "निसान मार्ज" पांच कदम के लिए पारेषण, perdnyaya निलंबन के साथ सुसज्जित है आघात अवशोषक, रियर मरोड़ बार। इस हैचबैक पर ड्राइव केवल एक सामने है। अधिकतम गति है कि निसान मार्च को विकसित करने में सक्षम है, एक सौ चौवन किमी / घंटा के बराबर है, और यह लगभग पंद्रह सेकंड के लिए प्राप्त कर रहा है, इतनी तेजी से इस कार नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसकी स्पष्ट लाभ ईंधन की अर्थव्यवस्था है। शहरी क्षेत्रों में यह सात. एक लीटरटर और राजमार्ग पर पाँच. एक लीटरटर है। इस प्रकार, मिश्रित चक्र पाँच. आठ के बारे में लीटर तक बाहर आता है, और यह vyrazhennnye प्रदर्शन कार है। इस हैचबैक के लिए ईंधन केवल पचानवे ग्रेड जापानी इंजन में अन्य प्रजातियों को भरने के लिए अनुशंसित नहीं हैं फिट बैठता है। "Marja" पर ईंधन टैंक की मात्रा छोटा है - केवल पैंतालीस लीटरटर, और इसकी कुल सब मुश्किल से नौ सौ चालीस किलो तक पहुँचता है। चौदह इंच के पहियों और आकर्षक गोल आकार "निसान मार्ज" के लिए धन्यवाद एक महिला कार के रूप में ख्याति हासिल कर ली है। अगर हम निसान मार्च के बारे में जानकारी को देखो, उपस्थिति और ईंधन की अर्थव्यवस्था के बारे में समीक्षा प्रशंसा करते नहीं थकते होगा। इसके अलावा एक हैचबैक कार मालिकों की गतिशीलता की तरह। आलोचना पारंपरिक रूप से कम निकासी और कम है इंजन शक्ति, लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह बेजोड़ है। यह विशेष रूप से सच नौसिखिए चालकों है। उच्च शक्ति उन्हें अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सामान्य तौर पर, मुझे लगता है कि कहना होगा विशेषताएं निसान मार्च वे कहते हैं कि इस कॉम्पैक्ट हैचबैक अच्छी तरह से शहरी वातावरण में प्रयोग के लिए अनुकूल है। हालांकि उत्पादन दो हज़ार दो में बंद किया गया था, आज तक यह अक्सर रूस सड़कों पर पाया जा सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि "निसान मार्ज" आसान हैंडलिंग और अर्थव्यवस्था की वजह से महिलाओं के साथ अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय है लायक है। लेकिन शायद निष्पक्ष सेक्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक कार की आकर्षक उपस्थिति है। रूसी बाजार के लिए, अर्थव्यवस्था के स्थिरीकरण के बावजूद, यह अभी भी मुख्य सूचक बचत है। इसलिए, निसान मार्च अपनी क्षमता की वजह से रूस ड्राइवरों के शौकीन।
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New Delhi/Alive News: आज देश सुभद्रा कुमारी चौहान की 117वीं जयंती मना रहा है। सुभद्रा कुमारी चौहान को गूगल ने डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है। इंडियन एक्टिविस्ट और राइटर की जयंती के मौके पर डूडल ने एक साड़ी में कलम और कागज के साथ बैठी सुभद्रा कुमारी चौहान को दिखाया है। सुभद्रा कुमारी चौहान पुरुष वर्चस्व वाले युग के दौरान अपनी शाख जमाने वाली महिलाओं में से एक थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान एक लेखिका, एक्टिविस्ट, स्वतंत्रता सेनानी भी थीं।
डूडल पर क्लिक करने पर सुभद्रा कुमारी चौहान से जुड़ा वेब पेज खुल रहा है। आपको बता दें कि सर्च इंजन गूगल हर खास मौके पर डूडल बनाता है। इस डूडल में सुभद्रा कुमारी चौहान साड़ी पहने कलम और कागज के साथ नजर आ रही हैं। इस डूडल को न्यूजीलैंड की गेस्ट आर्टिस्ट प्रभा माल्या ने बनाया है। उनकी राष्ट्रवादी कविता झांसी की रानी को व्यापक रूप से हिंदी साहित्य में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली कविताओं में से एक माना जाता है.
सुभद्रा राष्ट्रीय चेतना की एक सजग लेखिका रही हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान ने 88 कविताएं और 46 लघु कथाएं लिखीं। 1923 में सुभद्रा कुमारी चौहान ने भारत की पहली महिला सत्याग्रही की टीम का नेतृत्व किया। सुभद्रा कुमारी चौहान एक कवियित्री होने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थीं। वो देश की पहली महिला सत्याग्रही थीं। भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कविताओं से लोगों में जोश भरने का काम किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और कई बार जेल भी गईं।
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म आज ही के दिन 1904 में निहालपुर गांव में हुआ था। वह घोड़ा गाड़ी में बैठकर रोज स्कूल जाती थीं और इस दौरान भी लगातार लिखती रहती थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान की पहली कविता सिर्फ नौ साल की उम्र में प्रकाशित हो गई थी। उनका परिवार शुरू से ही राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित था। सुभद्रा को बचपन से ही ऐसे संस्कार मिले और वे आंदोलनों की ओर मुड़ गईं. सुभद्रा के परिवार में चार बहनें और दो भाई थे।
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New Delhi/Alive News: आज देश सुभद्रा कुमारी चौहान की एक सौ सत्रहवीं जयंती मना रहा है। सुभद्रा कुमारी चौहान को गूगल ने डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है। इंडियन एक्टिविस्ट और राइटर की जयंती के मौके पर डूडल ने एक साड़ी में कलम और कागज के साथ बैठी सुभद्रा कुमारी चौहान को दिखाया है। सुभद्रा कुमारी चौहान पुरुष वर्चस्व वाले युग के दौरान अपनी शाख जमाने वाली महिलाओं में से एक थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान एक लेखिका, एक्टिविस्ट, स्वतंत्रता सेनानी भी थीं। डूडल पर क्लिक करने पर सुभद्रा कुमारी चौहान से जुड़ा वेब पेज खुल रहा है। आपको बता दें कि सर्च इंजन गूगल हर खास मौके पर डूडल बनाता है। इस डूडल में सुभद्रा कुमारी चौहान साड़ी पहने कलम और कागज के साथ नजर आ रही हैं। इस डूडल को न्यूजीलैंड की गेस्ट आर्टिस्ट प्रभा माल्या ने बनाया है। उनकी राष्ट्रवादी कविता झांसी की रानी को व्यापक रूप से हिंदी साहित्य में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली कविताओं में से एक माना जाता है. सुभद्रा राष्ट्रीय चेतना की एक सजग लेखिका रही हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान ने अठासी कविताएं और छियालीस लघु कथाएं लिखीं। एक हज़ार नौ सौ तेईस में सुभद्रा कुमारी चौहान ने भारत की पहली महिला सत्याग्रही की टीम का नेतृत्व किया। सुभद्रा कुमारी चौहान एक कवियित्री होने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थीं। वो देश की पहली महिला सत्याग्रही थीं। भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन में सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कविताओं से लोगों में जोश भरने का काम किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और कई बार जेल भी गईं। सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म आज ही के दिन एक हज़ार नौ सौ चार में निहालपुर गांव में हुआ था। वह घोड़ा गाड़ी में बैठकर रोज स्कूल जाती थीं और इस दौरान भी लगातार लिखती रहती थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान की पहली कविता सिर्फ नौ साल की उम्र में प्रकाशित हो गई थी। उनका परिवार शुरू से ही राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित था। सुभद्रा को बचपन से ही ऐसे संस्कार मिले और वे आंदोलनों की ओर मुड़ गईं. सुभद्रा के परिवार में चार बहनें और दो भाई थे।
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प्रदेश की बिजली कंपनियों की ओर से पावर कारपोरेशन ने बीती रात विद्युत नियामक आयोग में ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) का प्रस्ताव दाखिल कर दिया। इसे जनवरी से मार्च 2023 के चौथे क्वार्टर के लिए 61 पैसे प्रति यूनिट के आधार पर श्रेणीवार दाखिल किया गया है। कारपोरेशन के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की स्थिति में अलग-अलग श्रेणीवार 28 पैसे से 1.09 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली महंगी हो जाएगी। उपभोक्ता परिषद ने विरोध में लोक महत्व प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया है।
नियामक आयोग ने पूर्व में बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। अब ईंधन अधिभार के नाम पर बिजली दरों में बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पावर कारपोरेशन की तरफ से दाखिल प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि ईंधन अधिभार लगाने के लिए नियामक आयोग ने जून 2020 में एक कानून बनाया था। कारपोरेशन ने कानून के विपरीत प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रयास आयोग की अवमानना है। उन्होंने कहा यदि कानून के तहत प्रस्ताव दाखिल किया जाता तो 30 पैसा प्रति यूनिट के आधार पर लाभ मिलता लेकिन बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर भार डलवाने के लिए प्रयासरत हैं। राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 33122 करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में किस आधार पर प्रस्ताव दाखिल कर दिया गया। इसे खारिज किया जाना चाहिए।
उपभोक्ता बढ़ोतरी (यूनिट)
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प्रदेश की बिजली कंपनियों की ओर से पावर कारपोरेशन ने बीती रात विद्युत नियामक आयोग में ईंधन अधिभार का प्रस्ताव दाखिल कर दिया। इसे जनवरी से मार्च दो हज़ार तेईस के चौथे क्वार्टर के लिए इकसठ पैसे प्रति यूनिट के आधार पर श्रेणीवार दाखिल किया गया है। कारपोरेशन के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की स्थिति में अलग-अलग श्रेणीवार अट्ठाईस पैसे से एक दशमलव नौ रुपयापये प्रति यूनिट तक बिजली महंगी हो जाएगी। उपभोक्ता परिषद ने विरोध में लोक महत्व प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया है। नियामक आयोग ने पूर्व में बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। अब ईंधन अधिभार के नाम पर बिजली दरों में बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पावर कारपोरेशन की तरफ से दाखिल प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि ईंधन अधिभार लगाने के लिए नियामक आयोग ने जून दो हज़ार बीस में एक कानून बनाया था। कारपोरेशन ने कानून के विपरीत प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रयास आयोग की अवमानना है। उन्होंने कहा यदि कानून के तहत प्रस्ताव दाखिल किया जाता तो तीस पैसा प्रति यूनिट के आधार पर लाभ मिलता लेकिन बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर भार डलवाने के लिए प्रयासरत हैं। राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर तैंतीस हज़ार एक सौ बाईस करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में किस आधार पर प्रस्ताव दाखिल कर दिया गया। इसे खारिज किया जाना चाहिए। उपभोक्ता बढ़ोतरी
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नयी दिल्लीः
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को डीयू के कुलपति योगेश सिंह को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा पूरी तरह या आंशिक रूप से वित्त पोषित 28 कॉलेजों में से कुछ में स्थायी संकाय के लिए निर्धारित साक्षात्कार रद्द करने के लिए कहा।
मंत्री ने पत्र में आरोप लगाया कि नियुक्तियां सरकार की सहमति के बिना की जा रही हैं और इस तरह के फैसले राज्य सरकार पर वित्तीय प्रभाव डालते हैं।
"जीएनसीटीडी द्वारा वित्त पोषित 28 कॉलेजों में से कुछ में स्थायी पदों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। मैं महत्वपूर्ण शिक्षण पदों को भरने के लिए साक्षात्कार आयोजित करने के महत्व को समझता हूं लेकिन इन कॉलेजों के लिए लिया गया कोई भी वित्तीय निर्णय जीएनसीटीडी पर भी वित्तीय प्रभाव डालता है। इसलिए, अनुसूचित साक्षात्कार को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए," पत्र पढ़ा।
पत्र में श्री सिसोदिया ने योगेश सिंह को यह भी निर्देश दिया कि वे पूर्ण शासी निकाय की मंजूरी के बिना कोई वित्तीय निर्णय न लें, जिसमें जीएनसीटीडी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो।
"शिक्षण पदों को भरने के महत्व के आलोक में, 28 GNCTD कॉलेजों में शासी निकायों के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। कॉलेजों में स्थायी पदों के लिए भर्ती सहित वित्तीय निहितार्थ वाले किसी भी निर्णय को एक से अनुमोदन के बाद लिया जाना चाहिए। पूरी तरह से कार्य शासी निकाय," उन्होंने कहा।
(हेडलाइन को छोड़कर, यह कहानी NDTV के कर्मचारियों द्वारा संपादित नहीं की गई है और एक सिंडिकेट फीड से प्रकाशित हुई है। )
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नयी दिल्लीः दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को डीयू के कुलपति योगेश सिंह को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा पूरी तरह या आंशिक रूप से वित्त पोषित अट्ठाईस कॉलेजों में से कुछ में स्थायी संकाय के लिए निर्धारित साक्षात्कार रद्द करने के लिए कहा। मंत्री ने पत्र में आरोप लगाया कि नियुक्तियां सरकार की सहमति के बिना की जा रही हैं और इस तरह के फैसले राज्य सरकार पर वित्तीय प्रभाव डालते हैं। "जीएनसीटीडी द्वारा वित्त पोषित अट्ठाईस कॉलेजों में से कुछ में स्थायी पदों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। मैं महत्वपूर्ण शिक्षण पदों को भरने के लिए साक्षात्कार आयोजित करने के महत्व को समझता हूं लेकिन इन कॉलेजों के लिए लिया गया कोई भी वित्तीय निर्णय जीएनसीटीडी पर भी वित्तीय प्रभाव डालता है। इसलिए, अनुसूचित साक्षात्कार को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए," पत्र पढ़ा। पत्र में श्री सिसोदिया ने योगेश सिंह को यह भी निर्देश दिया कि वे पूर्ण शासी निकाय की मंजूरी के बिना कोई वित्तीय निर्णय न लें, जिसमें जीएनसीटीडी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हो। "शिक्षण पदों को भरने के महत्व के आलोक में, अट्ठाईस GNCTD कॉलेजों में शासी निकायों के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। कॉलेजों में स्थायी पदों के लिए भर्ती सहित वित्तीय निहितार्थ वाले किसी भी निर्णय को एक से अनुमोदन के बाद लिया जाना चाहिए। पूरी तरह से कार्य शासी निकाय," उन्होंने कहा।
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बोकारो ःझारखंडः, (भाषा)। बोकारो स्थित भलमारा के जंगलों में आज माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई एक मु"भेड़ के दौरान गोली लगने से एक ग्रामीण की मौत हो गयी। पुलिस अधीक्षक कुलदीप द्विवेदी ने यहां संवाददाताओं से कहा, बोकारो जिले में स्थित भलमारा के जंगलों में माओवादियों के साथ आज हुई एक मु"भेड़ के दौरान गोली लगने से दशरथ मल्हार नाम के ग्रामीण की मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि शव बरामद कर लिया गया है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। माओवादी नेता किशनजी की बरसी के मौके पर प्रतिबंधित भाकपा ःमाओवादीः संग"न `शहादत सप्ताह' मना रहा है। इसे देखते हुए चलाए गए एक नक्सल विरोधी अभियान के दौरान यह मु"भेड़ हुई। पुलिस ने बताया कि ग्रामीण की मौत के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक जगन्नाथ महतो और उनके समर्थकों ने दुमरी-फुसरो सड़क पर यातायात बाधित कर दिया।
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बोकारो ःझारखंडः, । बोकारो स्थित भलमारा के जंगलों में आज माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई एक मु"भेड़ के दौरान गोली लगने से एक ग्रामीण की मौत हो गयी। पुलिस अधीक्षक कुलदीप द्विवेदी ने यहां संवाददाताओं से कहा, बोकारो जिले में स्थित भलमारा के जंगलों में माओवादियों के साथ आज हुई एक मु"भेड़ के दौरान गोली लगने से दशरथ मल्हार नाम के ग्रामीण की मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि शव बरामद कर लिया गया है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। माओवादी नेता किशनजी की बरसी के मौके पर प्रतिबंधित भाकपा ःमाओवादीः संग"न `शहादत सप्ताह' मना रहा है। इसे देखते हुए चलाए गए एक नक्सल विरोधी अभियान के दौरान यह मु"भेड़ हुई। पुलिस ने बताया कि ग्रामीण की मौत के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक जगन्नाथ महतो और उनके समर्थकों ने दुमरी-फुसरो सड़क पर यातायात बाधित कर दिया।
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रायपुर, राज्य ब्यूरो। Chhattisgarh Budget 2021: विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट पर मंगलवार से सामान्य चर्चा शुरू हुई। विपक्ष की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सदन में चर्चा शुरू की। इसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने भाषण के दौरान कर्ज को लेकर एक-दूसरे पर तीखा हमला किया।
भाजपा ने सरकार पर दैनिक खर्च और उपहार बांटने के लिए कर्ज लेने का आरोप लगाया। इस पर कांग्रेस की तरफ से पलटवार हुआ। सत्तारुढ़ पार्टी के विधायकों ने न केवल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार बल्कि मौजूदा केंद्र सरकार के कर्ज के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि आपकी सरकार में कर्ज लेकर घी पीने का काम होता था।
कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा 2003 में सत्ता में आई तब राज्य में 37 फीसद गरीबी थी। 15 साल तक भाजपा की सरकार कर्ज लेकर कंबल ओढ़कर घी पीती रही और प्रदेश में गरीबी 39. 9 फीसद तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से हमारा 18,500 करोड़ रुपये नहीं मिला है। यह पैसे मिल जाते तो हमारी सरकार को कर्ज लेना नहीं पड़ता।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने अब तक अपनी जीडीपी का केवल 20. 5 फीसद कर्ज लिया है, जबकि उत्तर प्रदेश का यह आंकड़ा 30 और एमपी में 24 फीसद तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने तो जीडीपी का 90 फीसद कर्ज ले लिया है। अब तो उन्हें कोई कर्ज देने तैयार नहीं है।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह स्थिति आ गई है कि राज्य सरकार को दैनिक खर्च, वेतन और उपहार बांटने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का पूंजीगत व्यय घट रहा है, इससे प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बजट गोपनीय होता है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में जो बातें मुख्यमंत्री ने कही वही सब बजट में है। बजट में पारदर्शिता का अभाव, पुरानी योजनाओं और घोषणाओं को फिर से शामिल करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के लिए पिछले साल ही सरकार ने बजट प्रविधान किया था। इस बार बजट में शामिल करने से पहले सरकार को यह भी बताना था कि उस पर हाई कोर्ट का स्टे है। उन्होंने कहा कि नरवा, गरुवा, घुरुआ, बाड़ी योजना से लेकर गोधन योजना केंद्र सरकार के पैसे से चल रहा है। इसको भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए था। उन्होंने बजट को केवल दुर्ग संभाग का बजट बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन नहीं है, यह केवल राजनीतिक बजट है।
भाजपा के नारायण चंदेल ने कहा कि इस बजट में कहने लायक कुछ भी नहीं है। दीया तो है, लेकिन तेल नहीं है वैसे ही योजनाओं का नाम तो है, लेकिन बजट नहीं है। सवा दो साल में सरकार 36 हजार करोड़ के कर्ज से लद गई है। भाजपा के सौरभ सिंह ने कहा कि राज्य को 60 फीसद पैसा केंद्र सरकार से आ रहा है, लेकिन राज्य सरकार अपना राजस्व बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार यहां सरकारी जमीन बेच रही है और केंद्र सरकार एलआइसी का आइपीओ ला रही है तो विरोध कर रहे हैं।
भाजपा की रंजना साहू ने कहा कि बजट में केवल शब्द है। धरातल पर खाली है। इस सरकार ने कर्ज लेने का काम किया है वही बहुत बड़ा काम है। जीडीपी दर में कमी आई है। यह चिंता का विषय है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। प्रति व्यक्ति आय में कमी आई है, क्योंकि इस सरकार के कार्यकाल में एक भी उद्योग नहीं लगा है।
कांग्रेस के शैलेष पांडे ने कहा कि इस बजट में किसान और गांव के साथ अंतिम व्यक्ति तक का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के विकास का मतलब केवल भवन बनाना है, लेकिन हमारी सरकार आम लोगों की जेब में पैसा पहुंचा रही है। कांग्रेस के ही देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा के बजट की मूल भावना कमीशन होता था और बजट का आवंटन नहीं बंदरबांट होता था। पहले बजट ससुर, दामाद और बेटे के लिए बनता था। अब किसानांे के लिए बन रहा है।
कांग्रेस के संतराम नेताम ने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि पहले बस्तर विकास प्राधिकरण के कामों में पक्षपात होता था। डीएमएफ का दुरुपयोग होता था, लेकिन हमारी सरकार बनने के बाद से ऐसा नहीं हो रहा है। जनप्रतिनिधियों की राय से काम हो रहा है। कांग्रेस की डा. लक्ष्मी धु्रव ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें राजकोषीय घाटा को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है। इसमें मुख्यमंत्री के समग्र विकास की परिकल्पना नजर आ रही है। प्रकाश नायक ने तेलघानी बोर्ड समेत तीन बोर्ड के गठन के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की आत्मा गांवों में बसती है। इस बजट में गांव और किसान को फायदा होगा। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का अवसर मिलेगा। कांग्रेस की अनिता शर्मा ने बजट को किसान हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट में महिला और कन्याओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता दिखती है।
जकांछ विधायक देवव्रत सिंह ने सरकार और बजट की सराहना करते हुए कहा कि 'हाईट" से समग्र विकास की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार की ही उपलब्धि है कि कोरोनाकाल, केंद्र से जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिलने जैसे विपरीत परिस्थति में भी छत्तीसगढ़ समावेशी विकास के माडल के रूप में खड़ा है। यह मुख्यमंत्री के दृढ़ इच्छा शक्ति है। जकांछ के प्रमोद शर्मा ने भी बजट की सराहना की। वहीं, बसपा की इंदू बंजारे ने कहा कि सरकार प्रदेश में अच्छी शिक्षा का दावा कर रही है, लेकिन आज भी कई स्कूल भवनविहीन है तो कई के भवन जर्जर हो गए हैं। उन्होंने स्कूल भवनों को बनवाने की मांग की।
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रायपुर, राज्य ब्यूरो। Chhattisgarh Budget दो हज़ार इक्कीस: विधानसभा में वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट पर मंगलवार से सामान्य चर्चा शुरू हुई। विपक्ष की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सदन में चर्चा शुरू की। इसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने भाषण के दौरान कर्ज को लेकर एक-दूसरे पर तीखा हमला किया। भाजपा ने सरकार पर दैनिक खर्च और उपहार बांटने के लिए कर्ज लेने का आरोप लगाया। इस पर कांग्रेस की तरफ से पलटवार हुआ। सत्तारुढ़ पार्टी के विधायकों ने न केवल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार बल्कि मौजूदा केंद्र सरकार के कर्ज के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि आपकी सरकार में कर्ज लेकर घी पीने का काम होता था। कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा दो हज़ार तीन में सत्ता में आई तब राज्य में सैंतीस फीसद गरीबी थी। पंद्रह साल तक भाजपा की सरकार कर्ज लेकर कंबल ओढ़कर घी पीती रही और प्रदेश में गरीबी उनतालीस. नौ फीसद तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से हमारा अट्ठारह,पाँच सौ करोड़ रुपये नहीं मिला है। यह पैसे मिल जाते तो हमारी सरकार को कर्ज लेना नहीं पड़ता। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने अब तक अपनी जीडीपी का केवल बीस. पाँच फीसद कर्ज लिया है, जबकि उत्तर प्रदेश का यह आंकड़ा तीस और एमपी में चौबीस फीसद तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने तो जीडीपी का नब्बे फीसद कर्ज ले लिया है। अब तो उन्हें कोई कर्ज देने तैयार नहीं है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह स्थिति आ गई है कि राज्य सरकार को दैनिक खर्च, वेतन और उपहार बांटने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का पूंजीगत व्यय घट रहा है, इससे प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बजट गोपनीय होता है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में जो बातें मुख्यमंत्री ने कही वही सब बजट में है। बजट में पारदर्शिता का अभाव, पुरानी योजनाओं और घोषणाओं को फिर से शामिल करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के लिए पिछले साल ही सरकार ने बजट प्रविधान किया था। इस बार बजट में शामिल करने से पहले सरकार को यह भी बताना था कि उस पर हाई कोर्ट का स्टे है। उन्होंने कहा कि नरवा, गरुवा, घुरुआ, बाड़ी योजना से लेकर गोधन योजना केंद्र सरकार के पैसे से चल रहा है। इसको भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए था। उन्होंने बजट को केवल दुर्ग संभाग का बजट बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन नहीं है, यह केवल राजनीतिक बजट है। भाजपा के नारायण चंदेल ने कहा कि इस बजट में कहने लायक कुछ भी नहीं है। दीया तो है, लेकिन तेल नहीं है वैसे ही योजनाओं का नाम तो है, लेकिन बजट नहीं है। सवा दो साल में सरकार छत्तीस हजार करोड़ के कर्ज से लद गई है। भाजपा के सौरभ सिंह ने कहा कि राज्य को साठ फीसद पैसा केंद्र सरकार से आ रहा है, लेकिन राज्य सरकार अपना राजस्व बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार यहां सरकारी जमीन बेच रही है और केंद्र सरकार एलआइसी का आइपीओ ला रही है तो विरोध कर रहे हैं। भाजपा की रंजना साहू ने कहा कि बजट में केवल शब्द है। धरातल पर खाली है। इस सरकार ने कर्ज लेने का काम किया है वही बहुत बड़ा काम है। जीडीपी दर में कमी आई है। यह चिंता का विषय है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। प्रति व्यक्ति आय में कमी आई है, क्योंकि इस सरकार के कार्यकाल में एक भी उद्योग नहीं लगा है। कांग्रेस के शैलेष पांडे ने कहा कि इस बजट में किसान और गांव के साथ अंतिम व्यक्ति तक का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के विकास का मतलब केवल भवन बनाना है, लेकिन हमारी सरकार आम लोगों की जेब में पैसा पहुंचा रही है। कांग्रेस के ही देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा के बजट की मूल भावना कमीशन होता था और बजट का आवंटन नहीं बंदरबांट होता था। पहले बजट ससुर, दामाद और बेटे के लिए बनता था। अब किसानांे के लिए बन रहा है। कांग्रेस के संतराम नेताम ने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि पहले बस्तर विकास प्राधिकरण के कामों में पक्षपात होता था। डीएमएफ का दुरुपयोग होता था, लेकिन हमारी सरकार बनने के बाद से ऐसा नहीं हो रहा है। जनप्रतिनिधियों की राय से काम हो रहा है। कांग्रेस की डा. लक्ष्मी धु्रव ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें राजकोषीय घाटा को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है। इसमें मुख्यमंत्री के समग्र विकास की परिकल्पना नजर आ रही है। प्रकाश नायक ने तेलघानी बोर्ड समेत तीन बोर्ड के गठन के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की आत्मा गांवों में बसती है। इस बजट में गांव और किसान को फायदा होगा। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का अवसर मिलेगा। कांग्रेस की अनिता शर्मा ने बजट को किसान हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट में महिला और कन्याओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता दिखती है। जकांछ विधायक देवव्रत सिंह ने सरकार और बजट की सराहना करते हुए कहा कि 'हाईट" से समग्र विकास की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार की ही उपलब्धि है कि कोरोनाकाल, केंद्र से जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिलने जैसे विपरीत परिस्थति में भी छत्तीसगढ़ समावेशी विकास के माडल के रूप में खड़ा है। यह मुख्यमंत्री के दृढ़ इच्छा शक्ति है। जकांछ के प्रमोद शर्मा ने भी बजट की सराहना की। वहीं, बसपा की इंदू बंजारे ने कहा कि सरकार प्रदेश में अच्छी शिक्षा का दावा कर रही है, लेकिन आज भी कई स्कूल भवनविहीन है तो कई के भवन जर्जर हो गए हैं। उन्होंने स्कूल भवनों को बनवाने की मांग की।
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सरकाघाट - पशुपालन विभाग व बिजली बोर्ड के मजदूरों को आठ व 10 वर्ष की दैनिक सेवा पूर्ण होने पर पक्का करने के आदेश हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने दिए हैं। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वीके शर्मा ने मंडी सर्किट के दौरान विशन दास (जुकैण) सरकाघाट, नरैण सिंह (डारट जलपेहर) जोगिंद्रनगर को आठ वर्ष तथा दस वर्ष की दैनिक सेवा पूर्ण होने पर सभी लाभों के साथ पक्का करने के आदेश पशुपालन विभाग व बिजली बोर्ड को दिए। गौरतलब है प्रार्थियों ने उनकी याचिका अपने वकील के माध्यम से इसलिए दायर की थी, क्योंकि विभाग व बोर्ड उन्हें आठ व दस वर्ष की दैनिक सेवा के उपरांत भी पक्का नहीं कर रहा था। इस पर ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार उन्हें आठ व दस वर्ष की सेवा के उपरांत नियमित करने के आदेश दिए तथा तीन महीने के भीतर सभी लाभों के साथ प्रार्थियों को बकाया राशि अदा करने के भी आदेश दिए। गौर हो कि विशन दास 1996 से पशुपालन विभाग में दैनिक भोगी था तथा नरैण सिंह 1989 से बिजली वोर्ड में दैनिकभोगी था।
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सरकाघाट - पशुपालन विभाग व बिजली बोर्ड के मजदूरों को आठ व दस वर्ष की दैनिक सेवा पूर्ण होने पर पक्का करने के आदेश हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने दिए हैं। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वीके शर्मा ने मंडी सर्किट के दौरान विशन दास सरकाघाट, नरैण सिंह जोगिंद्रनगर को आठ वर्ष तथा दस वर्ष की दैनिक सेवा पूर्ण होने पर सभी लाभों के साथ पक्का करने के आदेश पशुपालन विभाग व बिजली बोर्ड को दिए। गौरतलब है प्रार्थियों ने उनकी याचिका अपने वकील के माध्यम से इसलिए दायर की थी, क्योंकि विभाग व बोर्ड उन्हें आठ व दस वर्ष की दैनिक सेवा के उपरांत भी पक्का नहीं कर रहा था। इस पर ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार उन्हें आठ व दस वर्ष की सेवा के उपरांत नियमित करने के आदेश दिए तथा तीन महीने के भीतर सभी लाभों के साथ प्रार्थियों को बकाया राशि अदा करने के भी आदेश दिए। गौर हो कि विशन दास एक हज़ार नौ सौ छियानवे से पशुपालन विभाग में दैनिक भोगी था तथा नरैण सिंह एक हज़ार नौ सौ नवासी से बिजली वोर्ड में दैनिकभोगी था।
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CSBC Prohibition Constable admit card 2022 बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे उसमे दिए गए सभी दिशा-निर्देशोंं को ध्यान से पढ़ लें और उसके अनुुरुप ही सेंटर पर पहुंचे।
नई दिल्ली, एजुकेशन डेस्क। CSBC Prohibition Constable admit card 2022: बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र रिलीज हो चुके हैं। सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल (Central Selection Board of Constable) ने 16 अक्टूबर को आयोजित होने वाली सीएसबीसी प्रोहिबिशन कांस्टेबल परीक्षा के लिए हॉल टिकट आधिकारिक वेबसाइट csbc. bih. nic. in पर रिलीज किए हैं। अब ऐसे में, जो भी कैंडिडेट्स इस परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं, वे सीएसबीसी की आधिकारिक साइट पर जाकर प्रवेश पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं।
आधिकारिक सूचना के अनुसार, सीएसबीसी बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल की परीक्षा सिंगल शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा सुबह 10 से 12 बजे तक होगी। उम्मीदवारों को परीक्षा 9 बजे परीक्षा के लिए रिपोर्ट करना होगा। उम्मीदवार समय का विशेष ध्यान रखें।
सीएसबीसी बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए कैंडिडेट्स को सबसे पहले सीएसबीसी की आधिकारिक साइट csbc. bih. nic. in पर जाना होगा। इसके बाद, होम पेज पर उपलब्ध CSBC CSBC Prohibition Constable admit card एडमिट कार्ड 2022 लिंक पर क्लिक करें। अब लॉगिन विवरण दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। एडमिट कार्ड चेक करें और पेज डाउनलोड करें। आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
एडमिट कार्ड के साथ-साथ उम्मीदवारों को इस बात का ध्यान देना होगा कि उन्हें फोटो पहचान पत्र लेकर आना होगा। उम्मीदवारों को ड्राइविंग लाइसेंस, वोटरआईडी, आधार कार्ड सहित कोई डॉक्यूमेंट्स को लेकर आना होगा। उम्मीदवार ध्यान दें कि बिना किसी फोटोआईडी प्रूफ के एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिलना मुश्किल हो जाएगी, इसलिए इस बात का ध्यान रखें। बता दें कि बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल के 76 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
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CSBC Prohibition Constable admit card दो हज़ार बाईस बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे उसमे दिए गए सभी दिशा-निर्देशोंं को ध्यान से पढ़ लें और उसके अनुुरुप ही सेंटर पर पहुंचे। नई दिल्ली, एजुकेशन डेस्क। CSBC Prohibition Constable admit card दो हज़ार बाईस: बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र रिलीज हो चुके हैं। सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल ने सोलह अक्टूबर को आयोजित होने वाली सीएसबीसी प्रोहिबिशन कांस्टेबल परीक्षा के लिए हॉल टिकट आधिकारिक वेबसाइट csbc. bih. nic. in पर रिलीज किए हैं। अब ऐसे में, जो भी कैंडिडेट्स इस परीक्षा के लिए उपस्थित हुए हैं, वे सीएसबीसी की आधिकारिक साइट पर जाकर प्रवेश पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं। आधिकारिक सूचना के अनुसार, सीएसबीसी बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल की परीक्षा सिंगल शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा सुबह दस से बारह बजे तक होगी। उम्मीदवारों को परीक्षा नौ बजे परीक्षा के लिए रिपोर्ट करना होगा। उम्मीदवार समय का विशेष ध्यान रखें। सीएसबीसी बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए कैंडिडेट्स को सबसे पहले सीएसबीसी की आधिकारिक साइट csbc. bih. nic. in पर जाना होगा। इसके बाद, होम पेज पर उपलब्ध CSBC CSBC Prohibition Constable admit card एडमिट कार्ड दो हज़ार बाईस लिंक पर क्लिक करें। अब लॉगिन विवरण दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। एडमिट कार्ड चेक करें और पेज डाउनलोड करें। आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें। एडमिट कार्ड के साथ-साथ उम्मीदवारों को इस बात का ध्यान देना होगा कि उन्हें फोटो पहचान पत्र लेकर आना होगा। उम्मीदवारों को ड्राइविंग लाइसेंस, वोटरआईडी, आधार कार्ड सहित कोई डॉक्यूमेंट्स को लेकर आना होगा। उम्मीदवार ध्यान दें कि बिना किसी फोटोआईडी प्रूफ के एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिलना मुश्किल हो जाएगी, इसलिए इस बात का ध्यान रखें। बता दें कि बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कांस्टेबल के छिहत्तर पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
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राजभवन में आयोजित एक समारोह में शपथ लेने वालों में ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत सिंह बादल, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और राणा गुरजीत सिंह शामिल थे। रजिया सुल्ताना, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशु, रणदीप सिंह नाभा, राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और गुरकीरत सिंह कोटली ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री समेत कुल 18 विधायक मंत्रिपरिषद में शामिल हो सकते हैं।
अमरिंदर सिंह के त्यागपत्र के बाद चन्नी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उपमुख्यमंत्री चुने गए सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी ने सोमवार को शपथ ली थी।
इससे पहले, राज्य के कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह को शामिल किए जाने के खिलाफ पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि वह "भ्रष्ट और दागी" हैं।
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राजभवन में आयोजित एक समारोह में शपथ लेने वालों में ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत सिंह बादल, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और राणा गुरजीत सिंह शामिल थे। रजिया सुल्ताना, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशु, रणदीप सिंह नाभा, राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और गुरकीरत सिंह कोटली ने भी मंत्री पद की शपथ ली। पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री समेत कुल अट्ठारह विधायक मंत्रिपरिषद में शामिल हो सकते हैं। अमरिंदर सिंह के त्यागपत्र के बाद चन्नी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उपमुख्यमंत्री चुने गए सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी ने सोमवार को शपथ ली थी। इससे पहले, राज्य के कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह को शामिल किए जाने के खिलाफ पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि वह "भ्रष्ट और दागी" हैं।
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12 अप्रैल 1796 मोंटेनोटे की लड़ाई में डिवीजनल जनरल नेपोलियन बोनापार्ट था, जिसने अपनी पहली बड़ी लड़ाई जीत हासिल की। उस समय, भविष्य का फ्रांसीसी सम्राट 27 वर्ष का था। 1796 - 1797 का इतालवी अभियान नेपोलियन बोनापार्ट के लिए अपने जीवन में काफी बड़े पैमाने पर पहला सैन्य अभियान था।
नेपोलियन ने इतालवी अभियान का सपना देखा, पेरिस गैरीसन के कमांडर होने के नाते, उन्होंने निदेशालय लजार कार्नोट के एक सदस्य के साथ मिलकर इटली के एक अभियान की योजना बनाई। डायरेक्टरी की ओर से, कारनोट इतालवी सेना के कमांडर जनरल शायर को एक योजना भेजता है। लेकिन Scherer ने अपना आपा खो दिया, ऊपर से अभियान की योजना पर थोपा नहीं जाना चाहता थाः "इसे उसी के द्वारा चलाया जाए जिसने इसकी रचना की थी। " इसमें वह पकड़ा गया - सामान्य इस्तीफा। 2 मार्च 1796, कार्नोट के सुझाव पर, नेपोलियन को इतालवी सेना का कमांडर नियुक्त किया गया था। उनका सपना सच हो गया, जनरल को अपने स्टार का मौका मिला। 11 मार्च वह सैनिकों के पास गया। 27 मार्च वह नीस में आ गया, वहाँ इतालवी सेना का मुख्य मुख्यालय था। शेरर ने अपने सैनिकों को आत्मसमर्पण किया और आज तक लायाः 106 हजार लोग सेना में थे, लेकिन वास्तव में 38 हजार थे, जिनमें से 8 हजार नाइस और तटीय क्षेत्र के गैरीसन थे। इस प्रकार, अभियान 25-30 हजार लोगों से अधिक नहीं ले सकता है। शेष सैनिक "मृत आत्माएं" थे - मर गए, निर्जन, अस्पतालों में लेट गए, या कब्जा कर लिया गया। उदाहरण के लिए, सेना में दो घुड़सवार डिवीजन थे - उन दोनों में केवल एक्सएनयूएमएक्स हजार कृपाण थे। इसके अलावा, सेना को बारूद, भोजन, गोला-बारूद के साथ खराब आपूर्ति की गई थी, लंबे समय तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया था, कुछ तोपखाने थे - केवल एक्सएनयूएमएक्स बंदूकें। इतालवी थिएटर के ऑपरेशन में दुश्मन सेना ने 2,5 बंदूकों के साथ 30 हजार लोगों को गिना। ऑस्ट्रो-सार्डिनियन सेना की कमान समर फील्ड मार्शल ब्यूलियू 80 द्वारा की गई थी।
डायरेक्टरी की योजना के अनुसार, युद्ध में मुख्य भूमिका दो सेनाओं द्वारा जर्दन और मोरो की कमान के तहत निभाई जानी थी, जो दक्षिणी जर्मनी में संचालित थे। वे ऑस्ट्रियाई सैनिकों को हराने और वियना के लिए मार्ग प्रशस्त करने वाले थे। इतालवी सेना को एक सहायक भूमिका निभानी थी - दुश्मन की सेना को हटाने के लिए। लेकिन नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने काम को एक अलग रोशनी में देखा। 1794 में पहले से ही, उसने पहले से ही इटली में एक आक्रामक कार्रवाई योजना के कई प्रकारों को तैयार किया था, जिसने भविष्य के थिएटर के संचालन के नक्शे का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया था। उनकी योजना आम तौर पर सरल थी। इटली में फ्रांसीसी दो बलों द्वारा विरोध किया गया थाः ऑस्ट्रियाई सेना और पीडमोंट के राजा की सेना। नेपोलियन पीडमोंट की सेना को हराना चाहता था, और फिर ऑस्ट्रियाई, दुश्मनों को अलग-अलग मारता था। योजना के कार्यान्वयन में कठिनाई थी। दुश्मन ज्यादा मजबूत था। जीतने के लिए, अपने स्वयं के हाथों में रणनीतिक पहल को जब्त करने के लिए, गति और गतिशीलता में दुश्मन को पार करना आवश्यक था। यह नेपोलियन का आविष्कार नहीं था, इस रणनीति का इस्तेमाल रिपब्लिकन फ्रांस की अन्य सेनाओं द्वारा किया गया था। तो क्या अलेक्जेंडर सुवोरोव ने।
जीत के रास्ते में, नेपोलियन को अन्य बाधाओं को पार करना पड़ा। इतालवी सेना (Augereau, Massena, La Harpe, और Seryurye) के अनुभवी सैन्य जनरलों के लिए वह एक ऊपरवाला था जिसे विदेशी सेनाओं के साथ युद्ध का कोई अनुभव नहीं था। विद्रोही फ्रांसीसी के दमन के लिए नेपोलियन ने धन्यवाद दिया। सेना में आने से पहले ही, उन्हें कई आक्रामक उपनाम दिए गए थेः "कोर्सेनिक सिनट्यूएर", "दालान से सैन्य", "जनरल वन्देमियर" और इसके बाद। इसके अलावा, ट्रस्ट को जीतना पड़ा और अधिकारियों, सैनिकों को। यह काम, सैन्य सफलता से ही हो सकता है।
5 अप्रैल, सेना ने मार्च किया। नेपोलियन बोनापार्ट ने मैरीटाइम एल्प्स के तटीय किनारे के साथ सबसे छोटा, यद्यपि खतरनाक मार्ग चुना। सड़क संकरी थी और पूरी तरह से समुद्र से बह गई थी। इस निर्णय ने पर्वत श्रृंखला को बायपास करने और आंदोलन को तेज करने की अनुमति दी। सेना से आगे, एक ग्रे मार्चिंग वर्दी में, स्वयं कमांडर था। उसके बगल में, मंद कपड़ों में भी, कमिश्नर सालिकेती थे। नेपोलियन की गणना सही थी, चार दिनों के बाद यात्रा का सबसे खतरनाक हिस्सा खत्म हो गया था। 9 अप्रैल, फ्रांसीसी सेना ने इटली में प्रवेश किया। ऑस्ट्रो-पीडमोंट सैनिकों की कमान ने फ्रांसीसी को इस तरह की अशिष्टता पर निर्णय लेने की अनुमति नहीं दी।
फ्रांसीसी सेना ने उत्तरी इटली पर पीडमोंटेस और ऑस्ट्रियाई लोगों की सेना को हटाने के लिए आक्रमण किया। यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य था - छोटा, भूखा, ढीला, कम से कम तोपखाने और गोला-बारूद के साथ, फ्रांसीसी सेना दुश्मन के सभी बलों के साथ सामान्य लड़ाई का सामना नहीं कर सकती थी। रिच लोम्बार्डी, सफलता के साथ नेपोलियन को एक और युद्ध के लिए संसाधन दे सकता था। ऑस्ट्रिया के साथ गठबंधन तोड़ने के लिए पिडमॉन्ट को मजबूर करने के लिए ट्यूरिन और मिलान पर कब्जा करना आवश्यक था। केवल जीत ही फ्रांसीसी सेना को विनाश से बचा सकती थी।
दुश्मन की सेना के अलगाव की योजना को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहा। चेरोनी की कमान के तहत फ्रांसीसी ब्रिगेड जेनोआ (2 बंदूकों के साथ लगभग 8 हजार लोग) में स्थानांतरित हो गई। ऑस्ट्रियाई कमांडर ब्यूलियू ने चेरोनी के कुछ हिस्सों को तोड़ने का फैसला किया, फ्रांसीसी सेनाओं को जेनोआ से दूर फेंक दिया और फिर नेपोलियन की मुख्य सेनाओं पर हमला करने के लिए एलेसेंड्रिया से बलों को फिर से इकट्ठा किया। चेरोनी की सेनाओं के खिलाफ, जनरल अर्जेंटीना (4,5 हजार लोगों) का विभाजन 12 बंदूकों के साथ भेजा गया था। ब्यूलियू में 20 हजार लोगों के पास 40 बंदूकें थीं।
10 अप्रैल ऑस्ट्रियन जनरल अर्जेंटीना ने अपने डिवीजन के साथ "नाइट माउंटेन" (मॉन्टेनोट) के गांव से संपर्क किया और फ्रांसीसी स्थिति पर हमला किया। उन्हें सवोना पर कब्जा करने और सवोना सड़क (वह समुद्र के किनारे चल रहा था) को काटने का काम था, जिसके कारण जेनोआ की सरहद पार हो गई थी। फ्रांसीसी ने रक्षा के लिए तैयार कियाः चेरोनी ब्रिगेड के कर्नल रामपॉन की टुकड़ी ने तीन रेडब्यूट तैयार किए। स्काउट्स ने समय पर ऑस्ट्रियाई आंदोलन की सूचना दी और फ्रांसीसी युद्ध के लिए तैयार हुए। दोपहर 11 के आसपास, ऑस्ट्रियाई लोगों ने फ्रांसीसी की उन्नत गश्ती को खारिज कर दिया और किलेबंदी को जब्त करने की कोशिश की। फ्रांसीसी ने बहुत साहस दिखाया और तीन ऑस्ट्रियाई हमलों को ठुकरा दिया। अर्जेंटीना ने अपने सैनिकों को फिर से इकट्ठा करने और अगले दिन हमले को दोहराने के लिए अपनी सेना को वापस ले लिया - तीन तरफ से हड़ताली और पीछे से।
इस समय, ब्यूलियू ने जेनोआ में अपनी इकाइयों का नेतृत्व किया और वोल्त्री कैसल में चेरोनी की ब्रिगेड पर हमला किया। चेरोनी ने पूरे दिन वापस लड़ाई की, फिर माउंट फोरच में प्रवेश किया। एक मजबूत स्थिति ने दुश्मन की बेहतर ताकतों को शामिल करने में मदद की। अप्रैल 11 के अंत तक, चेरोनी सेवानिवृत्त हो गए और लागरप डिवीजन के साथ जुड़ गए। उसी समय, लैगर्प ने कर्नल रैम्पन की टुकड़ी को मजबूत किया, जो अपने मोर्चों के पीछे रक्षा की दूसरी पंक्ति तैनात कर रहा था।
नेपोलियन ने अप्रैल 12 की रात मस्सेना और ऑग्रेउ डिवीजनों के कैडिबोन पास के माध्यम से बिताई। सुबह में, फ्रांसीसी सेनाएं मॉन्टेनोटो के पीछे थीं - ऑस्ट्रियाई डिवीजन को घेर लिया गया था। सामने से, रैम्पोन टुकड़ी के सैनिक हमले पर चले गए, और डिवीजनों ऑरगेरेउ और मासेना ने फ्लैंक और रियर को मारा। विभाजन पूरी तरह से कुचल दिया गया था। ऑस्ट्रियाई लोगों ने 1 हजार लोगों को खो दिया और 2 हजार कैदियों, 5 तोपों और 4 बैनर पर कब्जा कर लिया गया। फ्रांसीसी ने एक्सएनयूएमएक्स लोगों को मार डाला और घायल कर दिया।
यह इतालवी अभियान की पहली जीत थी और सेना के कमांडर के रूप में नेपोलियन की पहली सफलता थी। नेपोलियन बोनापार्ट ने बाद में कहाः "हमारा वंश मॉन्टेनोट से आता है। " फ्रांसीसी गणराज्य के भूखे, चीर-फाड़ करने वाले सैनिकों ने एक शक्तिशाली दुश्मन को हरा दिया। यह जीत महान मनोवैज्ञानिक महत्व की थी। फ्रांसीसी खुद पर और अपने कमांडर में विश्वास करते थे। ब्यूलियू ने अपनी सेनाओं को वापस लेना शुरू कर दिया। नेपोलियन पीडमोंटेस सेना पर मुख्य हमले का निर्देशन कर सकता था।
ऑस्ट्रियाई कमान आश्चर्यचकित थी, लेकिन कुल मिलाकर उन्हें लगा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी। लेकिन ऑस्ट्रियाई लोगों ने मिसकॉल किया। दो दिन बाद, अप्रैल 14 पर, मिल्सीमो की लड़ाई में, नेपोलियन ने पीडमोंटेस सेना पर हमला कर दिया। 15 झंडे, 30 बंदूकें, 6 ths कैदियों को पकड़ लिया गया। ऑस्ट्रियाई और पीडमोंट सेनाओं को अलग कर दिया गया था, मिलान और ट्यूरिन के लिए रास्ता खुला था। मोंडोवी की लड़ाई में एक्सएनयूएमएक्स अप्रैल को फ्रांसीसी सेना ने इटालियंस पर एक और गंभीर हार का सामना किया। 22 अप्रैल पीडमोंट ने फ्रेंच के लिए अनुकूल शर्तों पर एक हस्ताक्षर किए। वास्तव में, फ्रांसीसी पिडमॉन्ट और जेनोआ के स्वामी बन गए।
अभियान की सफलता, सबसे ऊपर, नेपोलियन के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना की गति और गतिशीलता। ऑस्ट्रो-पीडमोंटिस कमान ने दुश्मन से आक्रामक अभियानों की इतनी गति की उम्मीद नहीं की थी। गति ने नेपोलियन को अपने हाथों में पहल रखने और अपनी इच्छा, दुश्मन पर लड़ाई की शर्तों को लागू करने की अनुमति दी।
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बारह अप्रैल एक हज़ार सात सौ छियानवे मोंटेनोटे की लड़ाई में डिवीजनल जनरल नेपोलियन बोनापार्ट था, जिसने अपनी पहली बड़ी लड़ाई जीत हासिल की। उस समय, भविष्य का फ्रांसीसी सम्राट सत्ताईस वर्ष का था। एक हज़ार सात सौ छियानवे - एक हज़ार सात सौ सत्तानवे का इतालवी अभियान नेपोलियन बोनापार्ट के लिए अपने जीवन में काफी बड़े पैमाने पर पहला सैन्य अभियान था। नेपोलियन ने इतालवी अभियान का सपना देखा, पेरिस गैरीसन के कमांडर होने के नाते, उन्होंने निदेशालय लजार कार्नोट के एक सदस्य के साथ मिलकर इटली के एक अभियान की योजना बनाई। डायरेक्टरी की ओर से, कारनोट इतालवी सेना के कमांडर जनरल शायर को एक योजना भेजता है। लेकिन Scherer ने अपना आपा खो दिया, ऊपर से अभियान की योजना पर थोपा नहीं जाना चाहता थाः "इसे उसी के द्वारा चलाया जाए जिसने इसकी रचना की थी। " इसमें वह पकड़ा गया - सामान्य इस्तीफा। दो मार्च एक हज़ार सात सौ छियानवे, कार्नोट के सुझाव पर, नेपोलियन को इतालवी सेना का कमांडर नियुक्त किया गया था। उनका सपना सच हो गया, जनरल को अपने स्टार का मौका मिला। ग्यारह मार्च वह सैनिकों के पास गया। सत्ताईस मार्च वह नीस में आ गया, वहाँ इतालवी सेना का मुख्य मुख्यालय था। शेरर ने अपने सैनिकों को आत्मसमर्पण किया और आज तक लायाः एक सौ छः हजार लोग सेना में थे, लेकिन वास्तव में अड़तीस हजार थे, जिनमें से आठ हजार नाइस और तटीय क्षेत्र के गैरीसन थे। इस प्रकार, अभियान पच्चीस-तीस हजार लोगों से अधिक नहीं ले सकता है। शेष सैनिक "मृत आत्माएं" थे - मर गए, निर्जन, अस्पतालों में लेट गए, या कब्जा कर लिया गया। उदाहरण के लिए, सेना में दो घुड़सवार डिवीजन थे - उन दोनों में केवल एक्सएनयूएमएक्स हजार कृपाण थे। इसके अलावा, सेना को बारूद, भोजन, गोला-बारूद के साथ खराब आपूर्ति की गई थी, लंबे समय तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया था, कुछ तोपखाने थे - केवल एक्सएनयूएमएक्स बंदूकें। इतालवी थिएटर के ऑपरेशन में दुश्मन सेना ने दो,पाँच बंदूकों के साथ तीस हजार लोगों को गिना। ऑस्ट्रो-सार्डिनियन सेना की कमान समर फील्ड मार्शल ब्यूलियू अस्सी द्वारा की गई थी। डायरेक्टरी की योजना के अनुसार, युद्ध में मुख्य भूमिका दो सेनाओं द्वारा जर्दन और मोरो की कमान के तहत निभाई जानी थी, जो दक्षिणी जर्मनी में संचालित थे। वे ऑस्ट्रियाई सैनिकों को हराने और वियना के लिए मार्ग प्रशस्त करने वाले थे। इतालवी सेना को एक सहायक भूमिका निभानी थी - दुश्मन की सेना को हटाने के लिए। लेकिन नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने काम को एक अलग रोशनी में देखा। एक हज़ार सात सौ चौरानवे में पहले से ही, उसने पहले से ही इटली में एक आक्रामक कार्रवाई योजना के कई प्रकारों को तैयार किया था, जिसने भविष्य के थिएटर के संचालन के नक्शे का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया था। उनकी योजना आम तौर पर सरल थी। इटली में फ्रांसीसी दो बलों द्वारा विरोध किया गया थाः ऑस्ट्रियाई सेना और पीडमोंट के राजा की सेना। नेपोलियन पीडमोंट की सेना को हराना चाहता था, और फिर ऑस्ट्रियाई, दुश्मनों को अलग-अलग मारता था। योजना के कार्यान्वयन में कठिनाई थी। दुश्मन ज्यादा मजबूत था। जीतने के लिए, अपने स्वयं के हाथों में रणनीतिक पहल को जब्त करने के लिए, गति और गतिशीलता में दुश्मन को पार करना आवश्यक था। यह नेपोलियन का आविष्कार नहीं था, इस रणनीति का इस्तेमाल रिपब्लिकन फ्रांस की अन्य सेनाओं द्वारा किया गया था। तो क्या अलेक्जेंडर सुवोरोव ने। जीत के रास्ते में, नेपोलियन को अन्य बाधाओं को पार करना पड़ा। इतालवी सेना के अनुभवी सैन्य जनरलों के लिए वह एक ऊपरवाला था जिसे विदेशी सेनाओं के साथ युद्ध का कोई अनुभव नहीं था। विद्रोही फ्रांसीसी के दमन के लिए नेपोलियन ने धन्यवाद दिया। सेना में आने से पहले ही, उन्हें कई आक्रामक उपनाम दिए गए थेः "कोर्सेनिक सिनट्यूएर", "दालान से सैन्य", "जनरल वन्देमियर" और इसके बाद। इसके अलावा, ट्रस्ट को जीतना पड़ा और अधिकारियों, सैनिकों को। यह काम, सैन्य सफलता से ही हो सकता है। पाँच अप्रैल, सेना ने मार्च किया। नेपोलियन बोनापार्ट ने मैरीटाइम एल्प्स के तटीय किनारे के साथ सबसे छोटा, यद्यपि खतरनाक मार्ग चुना। सड़क संकरी थी और पूरी तरह से समुद्र से बह गई थी। इस निर्णय ने पर्वत श्रृंखला को बायपास करने और आंदोलन को तेज करने की अनुमति दी। सेना से आगे, एक ग्रे मार्चिंग वर्दी में, स्वयं कमांडर था। उसके बगल में, मंद कपड़ों में भी, कमिश्नर सालिकेती थे। नेपोलियन की गणना सही थी, चार दिनों के बाद यात्रा का सबसे खतरनाक हिस्सा खत्म हो गया था। नौ अप्रैल, फ्रांसीसी सेना ने इटली में प्रवेश किया। ऑस्ट्रो-पीडमोंट सैनिकों की कमान ने फ्रांसीसी को इस तरह की अशिष्टता पर निर्णय लेने की अनुमति नहीं दी। फ्रांसीसी सेना ने उत्तरी इटली पर पीडमोंटेस और ऑस्ट्रियाई लोगों की सेना को हटाने के लिए आक्रमण किया। यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य था - छोटा, भूखा, ढीला, कम से कम तोपखाने और गोला-बारूद के साथ, फ्रांसीसी सेना दुश्मन के सभी बलों के साथ सामान्य लड़ाई का सामना नहीं कर सकती थी। रिच लोम्बार्डी, सफलता के साथ नेपोलियन को एक और युद्ध के लिए संसाधन दे सकता था। ऑस्ट्रिया के साथ गठबंधन तोड़ने के लिए पिडमॉन्ट को मजबूर करने के लिए ट्यूरिन और मिलान पर कब्जा करना आवश्यक था। केवल जीत ही फ्रांसीसी सेना को विनाश से बचा सकती थी। दुश्मन की सेना के अलगाव की योजना को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहा। चेरोनी की कमान के तहत फ्रांसीसी ब्रिगेड जेनोआ में स्थानांतरित हो गई। ऑस्ट्रियाई कमांडर ब्यूलियू ने चेरोनी के कुछ हिस्सों को तोड़ने का फैसला किया, फ्रांसीसी सेनाओं को जेनोआ से दूर फेंक दिया और फिर नेपोलियन की मुख्य सेनाओं पर हमला करने के लिए एलेसेंड्रिया से बलों को फिर से इकट्ठा किया। चेरोनी की सेनाओं के खिलाफ, जनरल अर्जेंटीना का विभाजन बारह बंदूकों के साथ भेजा गया था। ब्यूलियू में बीस हजार लोगों के पास चालीस बंदूकें थीं। दस अप्रैल ऑस्ट्रियन जनरल अर्जेंटीना ने अपने डिवीजन के साथ "नाइट माउंटेन" के गांव से संपर्क किया और फ्रांसीसी स्थिति पर हमला किया। उन्हें सवोना पर कब्जा करने और सवोना सड़क को काटने का काम था, जिसके कारण जेनोआ की सरहद पार हो गई थी। फ्रांसीसी ने रक्षा के लिए तैयार कियाः चेरोनी ब्रिगेड के कर्नल रामपॉन की टुकड़ी ने तीन रेडब्यूट तैयार किए। स्काउट्स ने समय पर ऑस्ट्रियाई आंदोलन की सूचना दी और फ्रांसीसी युद्ध के लिए तैयार हुए। दोपहर ग्यारह के आसपास, ऑस्ट्रियाई लोगों ने फ्रांसीसी की उन्नत गश्ती को खारिज कर दिया और किलेबंदी को जब्त करने की कोशिश की। फ्रांसीसी ने बहुत साहस दिखाया और तीन ऑस्ट्रियाई हमलों को ठुकरा दिया। अर्जेंटीना ने अपने सैनिकों को फिर से इकट्ठा करने और अगले दिन हमले को दोहराने के लिए अपनी सेना को वापस ले लिया - तीन तरफ से हड़ताली और पीछे से। इस समय, ब्यूलियू ने जेनोआ में अपनी इकाइयों का नेतृत्व किया और वोल्त्री कैसल में चेरोनी की ब्रिगेड पर हमला किया। चेरोनी ने पूरे दिन वापस लड़ाई की, फिर माउंट फोरच में प्रवेश किया। एक मजबूत स्थिति ने दुश्मन की बेहतर ताकतों को शामिल करने में मदद की। अप्रैल ग्यारह के अंत तक, चेरोनी सेवानिवृत्त हो गए और लागरप डिवीजन के साथ जुड़ गए। उसी समय, लैगर्प ने कर्नल रैम्पन की टुकड़ी को मजबूत किया, जो अपने मोर्चों के पीछे रक्षा की दूसरी पंक्ति तैनात कर रहा था। नेपोलियन ने अप्रैल बारह की रात मस्सेना और ऑग्रेउ डिवीजनों के कैडिबोन पास के माध्यम से बिताई। सुबह में, फ्रांसीसी सेनाएं मॉन्टेनोटो के पीछे थीं - ऑस्ट्रियाई डिवीजन को घेर लिया गया था। सामने से, रैम्पोन टुकड़ी के सैनिक हमले पर चले गए, और डिवीजनों ऑरगेरेउ और मासेना ने फ्लैंक और रियर को मारा। विभाजन पूरी तरह से कुचल दिया गया था। ऑस्ट्रियाई लोगों ने एक हजार लोगों को खो दिया और दो हजार कैदियों, पाँच तोपों और चार बैनर पर कब्जा कर लिया गया। फ्रांसीसी ने एक्सएनयूएमएक्स लोगों को मार डाला और घायल कर दिया। यह इतालवी अभियान की पहली जीत थी और सेना के कमांडर के रूप में नेपोलियन की पहली सफलता थी। नेपोलियन बोनापार्ट ने बाद में कहाः "हमारा वंश मॉन्टेनोट से आता है। " फ्रांसीसी गणराज्य के भूखे, चीर-फाड़ करने वाले सैनिकों ने एक शक्तिशाली दुश्मन को हरा दिया। यह जीत महान मनोवैज्ञानिक महत्व की थी। फ्रांसीसी खुद पर और अपने कमांडर में विश्वास करते थे। ब्यूलियू ने अपनी सेनाओं को वापस लेना शुरू कर दिया। नेपोलियन पीडमोंटेस सेना पर मुख्य हमले का निर्देशन कर सकता था। ऑस्ट्रियाई कमान आश्चर्यचकित थी, लेकिन कुल मिलाकर उन्हें लगा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी। लेकिन ऑस्ट्रियाई लोगों ने मिसकॉल किया। दो दिन बाद, अप्रैल चौदह पर, मिल्सीमो की लड़ाई में, नेपोलियन ने पीडमोंटेस सेना पर हमला कर दिया। पंद्रह झंडे, तीस बंदूकें, छः ths कैदियों को पकड़ लिया गया। ऑस्ट्रियाई और पीडमोंट सेनाओं को अलग कर दिया गया था, मिलान और ट्यूरिन के लिए रास्ता खुला था। मोंडोवी की लड़ाई में एक्सएनयूएमएक्स अप्रैल को फ्रांसीसी सेना ने इटालियंस पर एक और गंभीर हार का सामना किया। बाईस अप्रैल पीडमोंट ने फ्रेंच के लिए अनुकूल शर्तों पर एक हस्ताक्षर किए। वास्तव में, फ्रांसीसी पिडमॉन्ट और जेनोआ के स्वामी बन गए। अभियान की सफलता, सबसे ऊपर, नेपोलियन के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना की गति और गतिशीलता। ऑस्ट्रो-पीडमोंटिस कमान ने दुश्मन से आक्रामक अभियानों की इतनी गति की उम्मीद नहीं की थी। गति ने नेपोलियन को अपने हाथों में पहल रखने और अपनी इच्छा, दुश्मन पर लड़ाई की शर्तों को लागू करने की अनुमति दी।
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पंजाब एफसी ने सोमवार को गुरु नानक स्टेडियम में खेले गए आई-लीग के 13वें सीजन के एक मुकाबले में इंडियन ऐरोज को 1-0 से हरा दिया। विजेता टीम के लिए अतिरिक्त खिलाड़ी दीपांडा डिक्का ने 80वें मिनट में गोल किया।
अपने पिछले मैच में मौजूदा विजेता चेन्नई एफसी को मात देने वाली पंजाब एफसी टीम ने अच्छी शुरुआत की और घरेलू मैदान का फायदा उठाना चाहा। टीम मिलकर काफी प्रयास भी कर रही थी जिन्हें ऐरोज का डिफेंस साफ तौर पर नकारे जा रहा था। ऐरोज के डिफेंस से जेसन हार्ट और सर्जियो बारबोजा जूनियर काफी परेशान हो गए थे क्योंकि काफी प्रयासों के बाद भी वह गोल नहीं कर पाए थे।
पहले हाफ के अंतिम मिनट में अचानक से रोमांच आया। 45वें मिनट में पंजाब को फ्रीकिक मिली जिस पर गोल होने की उम्मीद जगी। संजू प्रधान ने यह फ्रीकिक ली लेकिन सीधे ऐरोज के गोलकीपर सामिक मित्रा के हाथों में गेंद के भेज दिया।
वहीं, दूसरा हाफ कुछ अलग तरीके से शुरू हुआ। 56वें मिनट में काल्विन लोबो बारबोजा के शॉट पर हेडर लेने गए। उन्होंने हेडर लिया जिसमे इतना दम नहीं था कि वह गोलपोस्ट में जा सके।
एक घंटे की समाप्ति के करीब पंजाब ने डिक्का को मैदान पर उतारा। डिक्का के लिए हार्ट ने मैदान छोड़ा। कैमरून के इस खिलाड़ी के आने के बाद ही मैदान पर जोश देखा जा सकता था।
77वें मिनट में संजू प्रधान ने डिक्का के पास पर बेहतरीन क्रॉस लिया लेकिन मित्रा ने बेहतरीन बचाव करते हुए पंजाब को गोल नहीं करने दिया। मित्रा हालांकि 80वें मिनट में डिक्का को गोल करने से रोक नहीं सके।
इस बार डिक्का ने समय रहते जगह बना गेंद को नेट में भेज पंजाब का खाता खोला। मेजबान खेमे के साथ-साथ दर्शकों में भी जोश भर गया। इसके बाद हालांकि ऐरोज ने बराबरी के कई प्रयास किए जो विफल रहे और उसे हार स्वीकार करनी पड़ी।
पंजाब एफसी की यह लगातार दूसरी जीत है। यान लॉ की यह टीम अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है जबकि ऐरोज को अब तक एक भी जीत नहीं मिली है। यह टीम नीचे से दूसरे स्थान पर है।
डिक्का को शानदार सुपर सब डिस्प्ले के लिए हीरो ऑफ द मैच चुना गया।
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पंजाब एफसी ने सोमवार को गुरु नानक स्टेडियम में खेले गए आई-लीग के तेरहवें सीजन के एक मुकाबले में इंडियन ऐरोज को एक-शून्य से हरा दिया। विजेता टीम के लिए अतिरिक्त खिलाड़ी दीपांडा डिक्का ने अस्सीवें मिनट में गोल किया। अपने पिछले मैच में मौजूदा विजेता चेन्नई एफसी को मात देने वाली पंजाब एफसी टीम ने अच्छी शुरुआत की और घरेलू मैदान का फायदा उठाना चाहा। टीम मिलकर काफी प्रयास भी कर रही थी जिन्हें ऐरोज का डिफेंस साफ तौर पर नकारे जा रहा था। ऐरोज के डिफेंस से जेसन हार्ट और सर्जियो बारबोजा जूनियर काफी परेशान हो गए थे क्योंकि काफी प्रयासों के बाद भी वह गोल नहीं कर पाए थे। पहले हाफ के अंतिम मिनट में अचानक से रोमांच आया। पैंतालीसवें मिनट में पंजाब को फ्रीकिक मिली जिस पर गोल होने की उम्मीद जगी। संजू प्रधान ने यह फ्रीकिक ली लेकिन सीधे ऐरोज के गोलकीपर सामिक मित्रा के हाथों में गेंद के भेज दिया। वहीं, दूसरा हाफ कुछ अलग तरीके से शुरू हुआ। छप्पनवें मिनट में काल्विन लोबो बारबोजा के शॉट पर हेडर लेने गए। उन्होंने हेडर लिया जिसमे इतना दम नहीं था कि वह गोलपोस्ट में जा सके। एक घंटे की समाप्ति के करीब पंजाब ने डिक्का को मैदान पर उतारा। डिक्का के लिए हार्ट ने मैदान छोड़ा। कैमरून के इस खिलाड़ी के आने के बाद ही मैदान पर जोश देखा जा सकता था। सतहत्तरवें मिनट में संजू प्रधान ने डिक्का के पास पर बेहतरीन क्रॉस लिया लेकिन मित्रा ने बेहतरीन बचाव करते हुए पंजाब को गोल नहीं करने दिया। मित्रा हालांकि अस्सीवें मिनट में डिक्का को गोल करने से रोक नहीं सके। इस बार डिक्का ने समय रहते जगह बना गेंद को नेट में भेज पंजाब का खाता खोला। मेजबान खेमे के साथ-साथ दर्शकों में भी जोश भर गया। इसके बाद हालांकि ऐरोज ने बराबरी के कई प्रयास किए जो विफल रहे और उसे हार स्वीकार करनी पड़ी। पंजाब एफसी की यह लगातार दूसरी जीत है। यान लॉ की यह टीम अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है जबकि ऐरोज को अब तक एक भी जीत नहीं मिली है। यह टीम नीचे से दूसरे स्थान पर है। डिक्का को शानदार सुपर सब डिस्प्ले के लिए हीरो ऑफ द मैच चुना गया।
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ला प्रदालत की वाय पद्धति
मे आय । लाक्प्रदालत वा संस्थात्मक ढाचा मजबूत न होने के कारण दूर गाव के लोगा का विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय लोकभदालत मे आना पडता है क्याकि ग्राम स्तर पर इसका सगठन अभो भी कमजार है। यही कारण है कि कभी कभी लोकप्रदालत की बैठक की तारीख प्राप्त करन मे वादी प्रतिवादी को कठिनाई होती है। यह कठिनाई मध्यक्ष को व्यस्तता के कारण भी हो सकती है। यह स्थिति एक व्यक्ति के लोकअदालत पर अधिक प्रभाव के कारण भी उत्पन हुई मानी जा सकती है I
( 4 ) लोक्प्रदालत को प्रक्रिया में प्रध्यक्ष, मनी पच एवं सभा का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। उक्त संगठनात्मक इकाइयो द्वारा याय बाय किया जाता है । अध्यक्ष इस बात का प्रयास करता है कि निर्णय पच द्वारा सभा की सहमति से किया जाय। पचो को इस बात की छूट रहती है कि वे भी खुलकर अपनी राय व्यक्त करें। अभिव्यक्ति को इस स्वतंत्रता का प्रभाव यह भी पड़ता देखा गया कि यदाकदा विवाद के निर्णय में कठिनाई होती है और मामले की सुनवाई अगली बैठक के लिए स्थगित हो जाती है। यह भी देखने में आया कि कई बार पचो को राय म काफी भिनता रही या कभी कभी पच तटस्थता की भूमिका का निर्वाह न कर सके ।
(5) सामायतौर पर कार्य पद्धति म दो प्रकार को कमिया और देखन मे थायी (1) सगठनात्मक (2) प्रात्मक सुगठन में श्रव्यक्ष
के प्रभाव एव महत्त्वपूर्ण भूमिका के कारण इसकी अन्य इकाइया (मत्रो पच सभा) की भूमिका कभी-कभी गौण हो जाती है। यह प्रश्न लोकप्रदालत ने सस्थात्मक स्वरूप से भी जुड़ा हुमा है जो इसके स्थायित्व के प्रति शका प्रकट करता है । प्रक्रिया सम्बन्धी कमियो में मुख्य बात सामुदायिक निर्णय की प्रनिया के स्पष्ट चित्र का प्रभाव है । प्रभो तक लोकप्रदालत वह स्वरूप विकसित नहीं कर पायी है जिसस सामुदायिक निर्णय की प्रतिया सहज म चल सके । पचो को एक राय होने की वठिनाई व्यक्तिगत स्वार्थ से मुक्ति सभा द्वारा विवाद के बारे में शोघ्र निर्णय पर पहुंचने को कठिनाई आदि भी यदा कदा सामने प्राती रहती है ।
श्री हरिवल्लभ परीख के साथ चर्चा व प्राधार पर
प्रो० उपेद्र बक्षी एव डा० एल०एम० सिधवी लोव मालत एट रगपुर ए प्रोलिमिनरी स्टडी दिल्ली विश्वविद्याय दिल्ली 1974
The element of public participation in the traditional system of informal dispute handling was thus compara tively minimal Dr Upendra Baxi (7bid ) page 20, Delhi University, Delhi 1974
देखें टी०बी० नायक उपरोक्त पष्ठ 230।
The drinking ceremony follows the headman s address Now you need not quarrel any further You will now drink together and from now you are friends
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ला प्रदालत की वाय पद्धति मे आय । लाक्प्रदालत वा संस्थात्मक ढाचा मजबूत न होने के कारण दूर गाव के लोगा का विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय लोकभदालत मे आना पडता है क्याकि ग्राम स्तर पर इसका सगठन अभो भी कमजार है। यही कारण है कि कभी कभी लोकप्रदालत की बैठक की तारीख प्राप्त करन मे वादी प्रतिवादी को कठिनाई होती है। यह कठिनाई मध्यक्ष को व्यस्तता के कारण भी हो सकती है। यह स्थिति एक व्यक्ति के लोकअदालत पर अधिक प्रभाव के कारण भी उत्पन हुई मानी जा सकती है I लोक्प्रदालत को प्रक्रिया में प्रध्यक्ष, मनी पच एवं सभा का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। उक्त संगठनात्मक इकाइयो द्वारा याय बाय किया जाता है । अध्यक्ष इस बात का प्रयास करता है कि निर्णय पच द्वारा सभा की सहमति से किया जाय। पचो को इस बात की छूट रहती है कि वे भी खुलकर अपनी राय व्यक्त करें। अभिव्यक्ति को इस स्वतंत्रता का प्रभाव यह भी पड़ता देखा गया कि यदाकदा विवाद के निर्णय में कठिनाई होती है और मामले की सुनवाई अगली बैठक के लिए स्थगित हो जाती है। यह भी देखने में आया कि कई बार पचो को राय म काफी भिनता रही या कभी कभी पच तटस्थता की भूमिका का निर्वाह न कर सके । सामायतौर पर कार्य पद्धति म दो प्रकार को कमिया और देखन मे थायी सगठनात्मक प्रात्मक सुगठन में श्रव्यक्ष के प्रभाव एव महत्त्वपूर्ण भूमिका के कारण इसकी अन्य इकाइया की भूमिका कभी-कभी गौण हो जाती है। यह प्रश्न लोकप्रदालत ने सस्थात्मक स्वरूप से भी जुड़ा हुमा है जो इसके स्थायित्व के प्रति शका प्रकट करता है । प्रक्रिया सम्बन्धी कमियो में मुख्य बात सामुदायिक निर्णय की प्रनिया के स्पष्ट चित्र का प्रभाव है । प्रभो तक लोकप्रदालत वह स्वरूप विकसित नहीं कर पायी है जिसस सामुदायिक निर्णय की प्रतिया सहज म चल सके । पचो को एक राय होने की वठिनाई व्यक्तिगत स्वार्थ से मुक्ति सभा द्वारा विवाद के बारे में शोघ्र निर्णय पर पहुंचने को कठिनाई आदि भी यदा कदा सामने प्राती रहती है । श्री हरिवल्लभ परीख के साथ चर्चा व प्राधार पर प्रोशून्य उपेद्र बक्षी एव डाशून्य एलशून्यएमशून्य सिधवी लोव मालत एट रगपुर ए प्रोलिमिनरी स्टडी दिल्ली विश्वविद्याय दिल्ली एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर The element of public participation in the traditional system of informal dispute handling was thus compara tively minimal Dr Upendra Baxi page बीस, Delhi University, Delhi एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर देखें टीशून्यबीशून्य नायक उपरोक्त पष्ठ दो सौ तीस। The drinking ceremony follows the headman s address Now you need not quarrel any further You will now drink together and from now you are friends
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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) घोटाले में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ मंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्थ चटर्जी को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने एसएससी घोटाले से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में आज चटर्जी को उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास से गिरफ्तार किया।
उल्लेखनीय है कि जब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के गैर-शिक्षण और शिक्षण कर्मचारियों के पदों पर विवादास्पद भर्तियां की गई थीं, उस समय चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे।
ईडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कोलकाता के नकटला इलाके में चटर्जी के घर पर 27 घंटे की लंबी छापेमारी के दौरान वह इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों ने चटर्जी से उनकी एक करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी को लेकर भी सवाल पूछे, जिसका वह संतोषजनकर जवाब नहीं दे सके। ईडी ने अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में ले लिया है।
तृणमूल कांग्रेस के ताकतवर महासचिव एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वासपात्र चटर्जी को अब मेडिकल परीक्षण के लिए जोका के ईएसआई अस्पताल ले जाया गया है। 2006 से 2011 तक राज्य में विपक्ष के नेता रहे एवं पांच बार के विधायक चटर्जी ने कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित अस्पताल के बाहर कार से उतरने के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
इससे पहले करीब 10 बजे गिरफ्तारी के बाद चटर्जी को केंद्रीय बलों के साथ एक काफिले के साथ ले जाया गया। ईडी ने वाणिज्य, उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री चटर्जी के आवास और राज्य के विभिन्न हिस्सों में उनके करीबी सहयोगियों तथा रिश्तेदारों के ठिकानों पर शुक्रवार सुबह छापेमारी शुरू हुई थी।
ईडी ने शुक्रवार रात को अर्पिता मुखर्जी के आवासीय परिसर से लगभग 20 करोड़ रुपए नकद बरामद करने का दावा किया था। ईडी के कम से कम नौ अधिकारियों ने घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच के तहत चटर्जी के घर पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान चटर्जी के वकील भी उनके आवास पर मौजूद थे।
ईडी ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में चटर्जी के कई सहयोगियों और उनके दामाद कल्याणमय भट्टाचार्य सहित उनके करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
ईडी के अधिकारियों ने उत्तर बंगाल में कूचबिहार जिले के मेखलीगंज में शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी के आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा ईडी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के आवास और कई मौजूदा तथा पूर्व अधिकारियों के परिसरों पर घोटाले से उनके कथित संबंधों को लेकर छापे मारे।
ईडी के अनुसार भारी मात्रा में नकदी बरामद करने के अलावा अर्पिता मुखर्जी के पास से 20 मोबाइल फोन भी बरामद किए, जिसका उद्देश्य और उपयोग पता लगाया जा रहा है। ईडी ने शुक्रवार रात मीडिया को बताया कि कैश काउंटिंग मशीन के जरिए बरामद रुपयों की गिनती के लिए सर्च टीम बैंक अधिकारियों की मदद ले रही है।
ईडी ने कहा कि इसके अलावा घोटाले से जुड़े व्यक्तियों के विभिन्न परिसरों से कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड, संदिग्ध कंपनियों का विवरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विदेशी मुद्रा और सोना भी बरामद किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अप्रैल में कई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए समूह सी और डी कर्मचारियों, नौवीं-बारहवीं कक्षा के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती घोटाले की जांच करने का निर्देश दिया था।
ईडी ने कहा कि ईडी गैर-शिक्षण कर्मचारियों (ग्रुप सी एंड डी), कक्षा IX-XII के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की अवैध नियुक्ति से जुड़े मामलों की धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत जांच कर रही है। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) चटर्जी और अधिकारी से पूछताछ कर चुकी है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार योग्यता सूची की अनदेखी करके रोजगार हासिल करने को लेकर अधिकारी की पुत्री को स्कूल शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही, उन्हें अपनी नौकरी से प्राप्त पूरा वेतन वापस करने के लिए कहा गया था और उसे स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।
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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय ने स्कूल सेवा आयोग घोटाले में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ मंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्थ चटर्जी को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। ईडी ने एसएससी घोटाले से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में आज चटर्जी को उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास से गिरफ्तार किया। उल्लेखनीय है कि जब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के गैर-शिक्षण और शिक्षण कर्मचारियों के पदों पर विवादास्पद भर्तियां की गई थीं, उस समय चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे। ईडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कोलकाता के नकटला इलाके में चटर्जी के घर पर सत्ताईस घंटाटे की लंबी छापेमारी के दौरान वह इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों ने चटर्जी से उनकी एक करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी को लेकर भी सवाल पूछे, जिसका वह संतोषजनकर जवाब नहीं दे सके। ईडी ने अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस के ताकतवर महासचिव एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वासपात्र चटर्जी को अब मेडिकल परीक्षण के लिए जोका के ईएसआई अस्पताल ले जाया गया है। दो हज़ार छः से दो हज़ार ग्यारह तक राज्य में विपक्ष के नेता रहे एवं पांच बार के विधायक चटर्जी ने कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित अस्पताल के बाहर कार से उतरने के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। इससे पहले करीब दस बजे गिरफ्तारी के बाद चटर्जी को केंद्रीय बलों के साथ एक काफिले के साथ ले जाया गया। ईडी ने वाणिज्य, उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री चटर्जी के आवास और राज्य के विभिन्न हिस्सों में उनके करीबी सहयोगियों तथा रिश्तेदारों के ठिकानों पर शुक्रवार सुबह छापेमारी शुरू हुई थी। ईडी ने शुक्रवार रात को अर्पिता मुखर्जी के आवासीय परिसर से लगभग बीस करोड़ रुपए नकद बरामद करने का दावा किया था। ईडी के कम से कम नौ अधिकारियों ने घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच के तहत चटर्जी के घर पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान चटर्जी के वकील भी उनके आवास पर मौजूद थे। ईडी ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में चटर्जी के कई सहयोगियों और उनके दामाद कल्याणमय भट्टाचार्य सहित उनके करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ईडी के अधिकारियों ने उत्तर बंगाल में कूचबिहार जिले के मेखलीगंज में शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी के आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा ईडी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के आवास और कई मौजूदा तथा पूर्व अधिकारियों के परिसरों पर घोटाले से उनके कथित संबंधों को लेकर छापे मारे। ईडी के अनुसार भारी मात्रा में नकदी बरामद करने के अलावा अर्पिता मुखर्जी के पास से बीस मोबाइल फोन भी बरामद किए, जिसका उद्देश्य और उपयोग पता लगाया जा रहा है। ईडी ने शुक्रवार रात मीडिया को बताया कि कैश काउंटिंग मशीन के जरिए बरामद रुपयों की गिनती के लिए सर्च टीम बैंक अधिकारियों की मदद ले रही है। ईडी ने कहा कि इसके अलावा घोटाले से जुड़े व्यक्तियों के विभिन्न परिसरों से कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड, संदिग्ध कंपनियों का विवरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विदेशी मुद्रा और सोना भी बरामद किया गया है। उल्लेखनीय है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अप्रैल में कई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए समूह सी और डी कर्मचारियों, नौवीं-बारहवीं कक्षा के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती घोटाले की जांच करने का निर्देश दिया था। ईडी ने कहा कि ईडी गैर-शिक्षण कर्मचारियों , कक्षा IX-XII के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की अवैध नियुक्ति से जुड़े मामलों की धन शोधन निवारण अधिनियम दो हज़ार दो के तहत जांच कर रही है। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो चटर्जी और अधिकारी से पूछताछ कर चुकी है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार योग्यता सूची की अनदेखी करके रोजगार हासिल करने को लेकर अधिकारी की पुत्री को स्कूल शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही, उन्हें अपनी नौकरी से प्राप्त पूरा वेतन वापस करने के लिए कहा गया था और उसे स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।
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भाव्यं समाज-- भारतवर्ष के तुल्य २ केन्द्रोनें मजमेर भी आये समाजव एक मुख्य केन्द्र है। इस समाजने भारतवर्ष सामाजिक और राजनैतिक जीवनने जो जीवन और उन्नति पैदा की है इसके सम्बन्ध कुछ भी लिखना दव्यंक दीपक दिलाना है। वहांपर आयं सनाजकी तरफ्ते एक हाई स्कूल, एक विशाल लायम री, एक बड़ा पेस और एक स्ताहिक पत्र चल रहा है। नायं समाजके कार्य फत्ताओंमें रायसाहब हरविलासजी शारदा । श्रीयुन चांदूकरणजी शारदा, धोलूलालजी वकील वैद्य रामचन्द्रजी शर्मा इलादि सजनोंक नाम विशेष उल्लेखनीय है ।
ऑल इंडिया फांसी-असहयोग जानें अजमेरकी कांग्रेस कमेटी बड़े जोर मॉल शोरके साथ कार्य कर रही थी, नगर नेताओंके पारस्परिक मतभेदते इस समय बह मृतकव होरही है।
इनके अतिरिक्त और भी कई सार्वजनिक संस्थाएं अजमेरनें चल रही है। उन सबका वर्णने यहां होता असम्भव है।
शहरकी बस्ती और म्यूनिसिपल कमेटी
ढंगले बसा हुआ है। इसकी इमारतें जितनी सुन्दर और विशाल है इसकी घाट उतनी ही गन्दी और विचपिच है। छोटी २ पांकी दो गढ़ियें अव्यवस्थित नकान और सङ्कीर्ण बसावट स्वास्थ्यको दृष्टि से बहुत लगव है। केवल मात्र कैसरगंजकी दली साफ, बिरली और शुद्ध वायुयुक्त है।
शहरकी सवईके लिये शहर में न्यूनिलियत कार्पोरेशन स्थापित है। इसके मेन्यरोंका चुनाव पब्लिक में से होता है। फिर भी यह कहने अत्युक्ति नहीं कि सफाईका प्रबन्ध करनेमें यह विभाग प्रायः असफल रहा है। नजमेरकी गलियां वैसे ही छोटी २ है। शुद्ध वायुका जाना उनमें वैसे हो दूसर रहता है। फिर उनमें चारों ओर नैटा, कूड़ा फरफट पड़ा रहनेकी वजहते बड़ी बवू और गन्दगी फैडो हुई रहती हैं, इनकी सफाईके लिये यहाँ पर मेला गाड़ियोंको व्यवस्था है। ये मैला गाड़ियां क्या है साक्षाव नरक है। इनके आस पात सौ सौ गज तक बदबूका साम्राज्य द्वाया रहता है। जियर होकर ये निकल जाती हैं उधरके लेगोंकी बचूके मारे मानवें शामत आ जाती है । गरनी के दिनोंमें जब पानोका अकाल हो जाता है तब और भी दुर्दशा होती है। म्यूनिसिपोल्टोको इन ओर अवर ध्यान देना चाहिये ।
फैक्टूज एण्ड इण्डस्ट्रांग
( न्यू रिंग एण्ड ट्रेड अजमेर- इस कपनीनें हैरड लूम पर कपड़ा बुना जाता है। इस ३६ करते हैं।
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भाव्यं समाज-- भारतवर्ष के तुल्य दो केन्द्रोनें मजमेर भी आये समाजव एक मुख्य केन्द्र है। इस समाजने भारतवर्ष सामाजिक और राजनैतिक जीवनने जो जीवन और उन्नति पैदा की है इसके सम्बन्ध कुछ भी लिखना दव्यंक दीपक दिलाना है। वहांपर आयं सनाजकी तरफ्ते एक हाई स्कूल, एक विशाल लायम री, एक बड़ा पेस और एक स्ताहिक पत्र चल रहा है। नायं समाजके कार्य फत्ताओंमें रायसाहब हरविलासजी शारदा । श्रीयुन चांदूकरणजी शारदा, धोलूलालजी वकील वैद्य रामचन्द्रजी शर्मा इलादि सजनोंक नाम विशेष उल्लेखनीय है । ऑल इंडिया फांसी-असहयोग जानें अजमेरकी कांग्रेस कमेटी बड़े जोर मॉल शोरके साथ कार्य कर रही थी, नगर नेताओंके पारस्परिक मतभेदते इस समय बह मृतकव होरही है। इनके अतिरिक्त और भी कई सार्वजनिक संस्थाएं अजमेरनें चल रही है। उन सबका वर्णने यहां होता असम्भव है। शहरकी बस्ती और म्यूनिसिपल कमेटी ढंगले बसा हुआ है। इसकी इमारतें जितनी सुन्दर और विशाल है इसकी घाट उतनी ही गन्दी और विचपिच है। छोटी दो पांकी दो गढ़ियें अव्यवस्थित नकान और सङ्कीर्ण बसावट स्वास्थ्यको दृष्टि से बहुत लगव है। केवल मात्र कैसरगंजकी दली साफ, बिरली और शुद्ध वायुयुक्त है। शहरकी सवईके लिये शहर में न्यूनिलियत कार्पोरेशन स्थापित है। इसके मेन्यरोंका चुनाव पब्लिक में से होता है। फिर भी यह कहने अत्युक्ति नहीं कि सफाईका प्रबन्ध करनेमें यह विभाग प्रायः असफल रहा है। नजमेरकी गलियां वैसे ही छोटी दो है। शुद्ध वायुका जाना उनमें वैसे हो दूसर रहता है। फिर उनमें चारों ओर नैटा, कूड़ा फरफट पड़ा रहनेकी वजहते बड़ी बवू और गन्दगी फैडो हुई रहती हैं, इनकी सफाईके लिये यहाँ पर मेला गाड़ियोंको व्यवस्था है। ये मैला गाड़ियां क्या है साक्षाव नरक है। इनके आस पात सौ सौ गज तक बदबूका साम्राज्य द्वाया रहता है। जियर होकर ये निकल जाती हैं उधरके लेगोंकी बचूके मारे मानवें शामत आ जाती है । गरनी के दिनोंमें जब पानोका अकाल हो जाता है तब और भी दुर्दशा होती है। म्यूनिसिपोल्टोको इन ओर अवर ध्यान देना चाहिये । फैक्टूज एण्ड इण्डस्ट्रांग ( न्यू रिंग एण्ड ट्रेड अजमेर- इस कपनीनें हैरड लूम पर कपड़ा बुना जाता है। इस छत्तीस करते हैं।
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सारे विश्व की औरतों के पुरुष व्यवस्था के कारण दुःख के सामांतर कारण हैं सिर्फ़ परिस्थितियां भिन्न हैं. इसी बात को प्रमाणित करने में लगी थीं सुप्रसिद्ध लेखिका रमणिका गुप्ता जी ने रमणिका फ़ाउंडेशन परियोजना के तहत कहानी श्रंखला से. उन्होंने बहुत कठिन व्रत का संकल्प किया था -चालीस भाषाओ की स्त्री विमर्श की लेखिकाओ ने जो औरत के जीवन के दर्द को इंगित किया है उसे वह अनुवादित करके हिन्दी में प्रकाशित करके एक दस्तावेज तैयार कर रही थीं कि पुरुष व्यवस्था की आँखें उस दर्द को देख पाये व इसको बदलने की कोशिश करे जो आरंभ तो हो चुकी है. हिन्दी के तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं. अन्य भाषाओं के "हाशिये उलांघती औरत 'के हिन्दी अनुवाद में गुजराती लेखिकाओ की कहानियों के अनुवाद ने मुझे किंचित अश्चर्य चकित कर दिया है क्योंकि इसमे गुजराती औरत की वह तस्वीर दिखाई नहीं दे रही जो मैं सन् 1976 से गुजरात में रहने के कारण देखती आ रही हूँ.
इस खंड में आदरणीय रमणिका जी, अर्चना जी, किरण जी व प्रज्ञा जी ने इन गुजराती कहानियों का विश्लेषण व प्रबुद्ध आंकलन कर ही दिया है. मैं क्योंकि यूपी से आकर यहाँ बसी हूँ व अपनी स्वतंत्र पत्रकारिता के कारण मैंने जो गुज्रराती विशिष्ट महिलाये देखी हैं व अब तो मेरी पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है "वदोदरा नी नार "तो मैं उन्हें ध्यान में रखते हुए अपने विचार इन कहानियों के विषय में सामने रख्नना चाह्ती हूँ.
तब मैं आगरा में 'धर्मयुग'में कुन्दनिका कापड़िया की कहानियों व उपन्यास के हिंदी अनुवाद पढ़ती थी. मेरे मस्तिष्क में उंनकी कहानी "न्याय 'एक अमिट छाप छोड़ गई थी या कहिये गुजरात से निकला एक नारीवादी संदेश था कि औरत क्योंकि घर में अपनी उर्जा खर्च करती है तो पुरुष की कमाई के आधे हिस्से पर उसका ह्क बनता है. आज इतने बरस गुज़र जाने के बाद भी ये लड़़ाई औरत जीत नहीं पाई है हालाँकि 'न्याय 'की नायिका जब घर छोड़ती है तो पति की कमाई में से आधा पैसा लेकर बाहर निकलती है व कानून भी यही कहता है. गुजरात की कुछ पूर्व की एक तस्वीर दिखाती हूँ. उस सभाग्रह में अहमदाबाद दूरदर्शन गिरनार का एक कार्यक्रम था " बेटी बचाओ ". देश के सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले नगर में दर्शकों से एक सवाल पूछा गया कि स्त्री पुरुष बराबर हैं क्या ? विश्वास मानिये खचाखच भरे हॉल में सन्नाटा छा गया. सिर्फ़ दस पन्द्रह हाथ उठे होंगे.
मुझे भी इस अंक के दिल्ली में विमोचन के समय किसी का वक्तव्य ' युद्धरत आम आदमी' में पढ़कर आश्चर्य हुआ था कि गुजराती कहानियों में वह नारी चेतना नहीं है. जो चेतना गुजराती औरत के जीवन के हिस्से का अंश है. गुजरात की स्त्री धर्म हो या समाज सेवा या संगीत व न्रत्य कला ये, राष्ट्रीय स्तर या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना चुकी है. मैं स्त्रियों को बड़े बड़े अपने बूते पर कार्यालय स्थापित किए हुए देख चुकी हूँ. कुछ महिला मंडल स्त्री संस्थाओ के करोड़ों के टर्नओवर देख चुकी हूँ. तो पता नहीं क्यो विश्व के दायरे फलांगती स्त्री प्रगति साहित्य में क्यों नहीं बड़े परचम लहरा पाई है?. इस संग्रह में वह भव्य व विशिष्ट गुजराती महिला गायब है जो समाज के एक हिस्से [उदाहरण लें तो अनेक ग्रामों की सह्कारी महिला दूध देरी को संचालित करती महिला या किसी के घर में घुस आए साँप को पकड़ने जा सकती है बतौर समाज सेवा] को प्रभावित करती है. मैं इस बात से ये परिणाम निकाल रही हूँ कि गुजरात में भी औरत की स्थिति लगभग वही है जो अन्य प्रदेशों में है क्योंकि लेखिका सुधा अरोड़ा ने एक स्त्री संस्थाओं के सम्मेलन में शामिल होने के बाद कहा था कि गुजरात से सबसे अधिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी.
प्रथम अखिल भारतीय महिला परिषद की स्थापना पूना में सन् 1927में हुई थी जिसमे वड़ोदरा में महारानी चिमनाबाई भी सम्मिलित हुई थी. उन्होंने वड़ोदरा यानि गुजरात में सन् 1928 में अखिल भारतीय महिला परिषद की स्थापना की थी. इसका ही प्रभाव है कि यहाँ अनेक स्त्री संस्थाये काम कर रही है. पुरुष व्यवस्था से लड़ती, भिड़ती कभी सफ़ल होती, कभी विफ़ल होती एन. जी. ओ'ज़ की भूमिका है -जो इन अंकों में शामिल नहीं है. हाँ, और प्रदेशों के मुकाबले कुछ अधिक प्रगतिशील परिवार हैं जो अपनी बेटियों को मौका दे रहे हैं. हिंदी -खंड -२ में मेरी कहानी 'रिले रेस 'इसी विषय पर है, हो सकता है मैं इन नारी संस्थाओं के बतौर पत्रकार सम्पर्क में रहीं हूँ ये भी एक कारण हो। आपको जानकर आश्चर्य होगा बहुत से कार्यालय अपने यहाँ उत्तर भारत की लड़कियों को काम देना पसंद करते हैं क्योंकि वे मेहनती होती हैं.
हर इमारत में एक आम औरत माता की चौकी बिठाने में व भजन मंडली में व्यस्त रह्ती है. इसलिए भी 'पिंजरे की मैंना '[सरोज पाथक], 'दुविधा'[भारती र. दवे]नई सुबह [सुहास ओझा], 'दहलीज़ से '[निर्झरी मेह्ता], चालीस प्लस आथ [चंदाबेन श्रीमाली] 'हुकुम की रानी '[जसुमती परमार ], मंगल सूत्र [बिन्दु भट्ट], उल्ते फेरे [भारती राने], 'देवता आदमी '[जयश्री जोशी], 'मैं अहिलया '[रीता त्रिवेदी], न्याय [कुंदनिका कापदिया ], 'न्यूज़ रूम '[पन्ना त्रिवेदी] नहीं मैं नौकरी नहीं करूंगी '[ज्योति थानकी], 'नाम रसिक मेहता'[वर्शा अदालजा] यानी कहानियाँ दाम्पत्य जीवन पर आधारित है. यहाँ के समाज में तलाक यानि कि' छुट्टा छेड़ा 'होना एक सहज बात है, वही बात नब्बे प्रतिशत कहानियों में चित्रित है. इस अंक का सबसे बड़ा द्वन्द है कि औरत अपनी माँ के घर में 'पराया धन' होती है व ससुराल में दूसरे घर की बेटी. इन दोनों के बीच उसका जीवन झूलता रहता है. हिन्दी भाषी प्रदेशों की तरह आम लड़की पोस्ट गेजुएशन करने को बाध्य नहीं है क्योंकि मध्यम श्रेणी के रोजगार यहाँ उपलब्ध हैं. शायद ये भी एक कारण हो सकता है बहुत जुझारू औरतें बहुत बड़े मानदंड स्थापित कर रही है, सृजन से ना जुड़कर.
मैं जो कहना चाह रही हूँ वह अब स्पष्ट है क्यों रमणिका जी की आवाज़ पर सारे देश के कोने कोने की स्त्री वो कथायें हिंदी में अनुवादित करके तमाम दूसरी औरतो को प्रोत्साहित कर रही है कि देखो !हाशिये सही बात के लिए ऎसे उलांघे जाते हैं.
'पिंजरे की मैना " यानि कोठी में धान 'शैली की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ कहानी है. डॉ. नीरा देसाई [जिनके प्रयासो से विश्वविद्ध्यालय में नारी शोध केन्द्र की स्थापना हुई थी ] ने सन 1952 में शोध करके ये पाया था कि घर स्त्री के लिए पिंजरे जैसे है, उसी बात की तस्दीक करती है ये कहानी. एक स्त्री किस तरह पति के अनैतिक समबंधो को ढोने, के लिये मजबूर की जाती है तब एक पिंजरे से निकल कर अस्पताल में हिस्टीरिया की मरीज़ हो दूसरे पिंजरे में उसे कैद कर दिया जाता है. इन्ही सोने के पिंजरों में मन प्राण तड़फड़ाने के कारण औरत निरंतर हाशिये उलांघ रही है.
शैली की दृष्टि से दूसरे नम्बर पर कहानी आती है "नाम नयना रसिक मेहता "जिसमे सच में हाशिये उलांघती स्त्री दृढ़प्रतिज्ञ है कि अपराधी चाहे पति हो या सास क़ानून की नज़र से बच नहीं पाये, चाहे ये निर्णय उसे कँटीले रास्ते तक ले जाए. इसमे तो स्त्री शादी के सात साल बाद विद्रोह करती है लेकिन समाज का सच ये है कि सालों साल वह मुंह बंद करके हर ज़ुल्म बर्दाश्त करती है कि शायद उसकी स्थिति सुधर जाए. अपनी संतानों का मुंह देखते हुए जिये जाती है. कोई कह सकता है कि घरेलु हिंसा अधिनियम -2006 बन गया है लेकिन भारत के समाज का स्त्री पर शिकंजा तो एसा कसा है कि कुछ जज तक फरियाद सुनने को तैयार नहीं होते. वे कहते है, 'जो स्त्री अपने पति के साथ नहीं रहना चाह्ती उसे कोर्ट से धकके देकर बाहर निकाल दो. " मैं ये गुजरात की घटना ही बता रही हूँ .
यही भय औरत को आतंकित किए रहता है जो पति के किसी दूसरी औरत के प्रेम में पड़ जाने पर भी औलाद के कारण उसे छोड़ने की बात नहीं सोच पाती., चुप समझौता करती जाती है लेकिन वह प्रेमिका अपने प्रेमी की जालसाजी को सूँघकर यानि कि वह दो औरतों के साथ का मज़ा लेना चाह रहा है, उसे छोड़ देने का साहस करती है. 'दुविधा 'आज की इस बात को बखूबी रेखांकित करती है कि 'वर्क प्लेस 'पर स्त्री पुरुषों की मुलाकात होती है, कभी सम्बन्ध बन जाते है तो सोचना औरत को है कि वह सबकी व खासकर अपनी भलाई के विषय में सोचकर कदम उठाये.
'खड़ी फ़सल -सन् 1047 से पहले ' में सुहास ओझा की 'नई सुबह 'में जैसे खूबसूरती से चित्रण है दुनिया के कारोबार में व्यस्त दुनिया की नजर उस औरत पर नहीं पड़ी है जिसके बलबूते इस सृष्टि का संचालन हो रहा है. वह् पुरुष सता के पीछे मुड़ी तुड़ी निढाल पड़ी है. ये वाक्य मैंने चुने हैं सुहास ओझा की कहानी "नई सुबह 'से ---------' यही भाव लगभग हर पुरुष के चेहरे पर दिखाई देता है--- माथा अभिमान से ऊँचा --दबे हुए होठों पर दृढ़ता ---स्थिर आँखों में निडरता --- ----यही है पुरुष सत्ता का चेहरा एक ग्रीस योद्धा की मूर्ति की मानिंद. 'लेकिन हठी रमणिका जी इसी कहानी की जानकी की मानसिकता की तरह इस मूर्ति के पीछॆ ढीली ढाली पड़ी स्त्री छवि को सामने ले आने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है उस योद्धा के पीछॆ छिपी निढाल औरत की मूर्ति को एक अदना सी सेविका जानकी झाड़पोंछ कर सामने रख देती है जो बात मालिक को कतई पसंद नहीं आती. चालीस भाषाओं की रचनाकारों को प्रेरित कर रही है कब तक वे पीछॆ अपनी भूमिका छिपाये पड़ी रहेंगी --- ज़रा हाशिये उलांघ कर तो दिखाये.
' नई पौध ' की दो कहानियाँ मेरे ख़्याल से बहुत सशक्त प्रतीक कहनिया है. मुबीना जी कुरैशी ने 'कल्पना के सपने 'में वह जो भी दरवाज़ा खोलती है उसे पुरुष सत्ता का चेहरा दिखे देता है लेकिन हाशिये उलाघते हुए पुरुष सत्ता की ताश की चालों में अपना दरवाज़ा खोल लिया है. इस संग्रह की अलग हटकर बहुत सांकेतिक भाषा में नारी चेतना की बात करती हैं, ये खूबसूरत दो कहानियाँ, ज़रूरत है उसे सामने लाने की.
जयश्री जोशी की 'देवता आदमी' कम से कम भारत के उन अधिकांश देवता पतियों की, सो कोल्ड 'थोरो जेंटलमैंन 'की पोल खोलती है जिनसे पत्नियों को किस किस तरह का अत्याचार सहना पड़ता है. कितनी हैं जो हशिया उलांघ पाती हैं ?
हिमांशी शैलत से बहुत उम्मीदे थी किंतु उन्होंने व सम्पादिका ने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी जो उनकी कहानी 'जस-का-तस'को चुन लिया क्योंकि यहाँ हाशिये उलांघने का अर्थ है पुरुष सत्ता की लक्ष्मण रेखाओ के पार जाना जहाँ पर स्त्री का शोषण हो रहा है लेकिन ये तो माँ की देहरी बद्ल जाने की कहानी है. यामिनी गौरांग व्यास 'जीवनदान 'में स्त्री जीवन को बहुमूल्य साबित करने का प्रयास किया गया है.
निर्झरी मेहता की कहानी 'दहलीज़ से 'मेरे लिए सुखद आश्चर्य है क्योंकि वड़ोदरा के अरविंद आश्रम के लोन में या 'अभिव्यक्ति 'में अस्मिता की गोष्ठियों का हमारा लम्बा साथ रहा है. उन्हें मैं एक अच्छी कवयित्री के रुप में जानती हूँ इसलिए मुझे उनकी इस परिपक्व कहानी ने प्रभावित किया है व चौंकाया भीं है. . ये भीं एक प्रतीक कथा ही है कि जब भीं कोई स्त्री देह पर वार करता है तो समाज को उस स्त्री की मर्मान्तक पीड़ा रह्ती, वह उसी के जीवन में शूल बिछाने का काम करता चलता है. इसमें स्त्रियों की हिस्सेदारी भीं बढ़ चढ़ कर होती है. गुजराती समाज बहुत प्रगतिशील है, इस भ्रम को ये कहानी तोड़ती है. यदि ऎसा ना होता तो यहाँ भी इतनी स्त्री संस्थाये काम ना कर रही होती.
ये तीन चार मिनट का आघात था. रेप में पन्द्रह बीस मिनट के आघात पर भीं स्त्री सहानुभूति कहाँ पाती है.? एक लड़की का प्रतिरोध बलात्कारी पर आतंक बनकर टूट पड़ता है हास्यदा पंड्या की कहानी 'दरी 'में. ये महीन बुनावट से रची बहुत सशक्त रचना है. शायद ये संदेश देती है कि समाज जब साथ नहीं देता तो स्त्री क्यो ना अपने फैसले करे ? तभी बिन्दु भट्ट की 'मंगल सूत्र 'की नायिका भारती राणे की नायिका के साथ 'उलटे फेरें 'लेती नजर आती हैं.
'शमिक आप क्या कहेंगे ?"में इला आरब मेहता ने एक कामकाजी स्त्री के द्वंद को बखूबी रचा है जो अपने बॉस से परेशान है. वह् कश्मकश में है कि अपने पति को ये बात बताये या ना बताये. अंत में एक सशक्त स्त्री की तरह निर्णय लेती है कि वह् अपनी समस्या स्वयं हल करेगी. ये कहानी पति पत्नी संबंधों की एक गिरह को खोलती है कि किस तरह एक पति नौकरी जाने के डर से पत्नी को ग़लत राय दे सकता है, निर्णय तो स्वयं ही लेना चाहिये. 'जसुमति परमार की ऐसी ही है 'हुकुम की रानी ' जो पति के ग़लत हुकुम का प्रतिरोध करना जानती है. वही 'न्यूज रूम "की नायिका का अपने अत्याचारी पति का कत्ल दिल दहला देता है. हालाँकि ये कोई नई घटना नहीं है और ना ही हाशिये उलांघना ऐसी प्रेरणा देने का पक्षधर है. पन्ना त्रिवेदी की ये कहानी नई पौध जैसी भाषा की ताजगी लिए हुए है.
एक आम धारणा है कि पुरुश स्त्री को उसके यौवन के परिप्रेक्ष्य में देखता है. उस पर रौब ग़ालिब करता रहता है कि ' जो साठा, वो पाठा '. चंदाबेन श्री माली की कहानी "चालीस प्लस आठ 'में स्त्री उम्र के, इस दृष्टिकोण के हाशिये उलांघती नजर आती है जैसा कि आजकल लेख पड़ने को मिल रहे हैं साठ वर्ष की उम्र में चटख रंग कपड़े क्यों ना पहने जाए ? एक आम औरत हमेशा समय का रोना रोती है कि उसे अपने लिए समय नहीं मिलता लेकिन जो हाशिये उलांघ रही है उसके लिए इस कहानी से कुछ वाक्य ले रही हूँ, "समय को चुरा चुराकर उसने खूब पढ़ लिख कर, चिंतन मनन करके अपनी जीवन बेल को सींचा है -ज़िदगी को खुशहाल और सुखद बनाया है -दिल में आकाश छूने की तमन्ना है ".
यही प्रेरणा रमणिका जी की प्रेरणा से हर कोने व हर भाषा की स्त्री अपनी कलम से दे रही है. 'ज्योति थांनकी की 'मैं नौकरी नहीं करूँगी 'व स्मिता के. पारिख की 'मेरी दुलारी 'की नायिकाये नौकरी नहीं करना चाहती-ये कोई गलत बात नहीं है भारत में अनेक महिलाये अपने बच्चो को पालपोस कर किसी व्यवसाय को अपनाती है लेकिन जो कुछ ना करना चाहे उनके लिए प्रेरणादायक है चंदाबेन के उपरोक्त शब्द.
'दरी '[हस्यदा पंड्या] की लड़की अपने बलात्कार का प्रयास करने वाले व पिता के हत्यारे से अच्छी तरह बदला लेती है.
गुजरात की महिला पुलिस सेल का कहना है कि गुजरात में कुछ लड़कियों की ये प्रवृत्ति है कि वे दोस्ती किसी से करतीं हैं शादी किसी से. शादी होते ही तलाक माँगने लगती है, "खुराकी [भरणपोषण]लेवी छे ". छुट्टा छेड़ा'व 'खुराकी लेवी छे 'ये यहाँ प्रचलित शब्द हैं. ये हाशिये उलांघती औरत बिलकुल जड़ से गायब है गुजराती कहानियों में.
मैं ये बात अपनी एक बात से प्रमाणित भी कर रही हूँ मैंने नौवें दशक के आरम्भ में' फ्रेंडशिप कॉन्ट्रेक्ट'[मैंत्रीकरार] पर भी 'धर्मयुग' के लिए सर्वे किया था. ये तय है कि अहमदाबाद के वकीलों ने ये रास्ता ढूंढ़ा था कि एक पुरुष एक औरत को अपने पास सिर्फ़ 100 रुपये के स्टैंप पेपर पर मित्रता का करार करके अपने घर में रख सकता है लेकिन उसकी और कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी. जब बच्चे पैदा हो गए तो औरतो ने भरण पोषण के लिए शोर मचाया तब ये सरकार ने बैन कर दिया गया. अब पुरुषों का पक्ष सुनिये, उन्होंने ये बताया था कि स्त्री अपनी मर्ज़ी से हमारे पास रहने आती थी लेकिन एक दो वर्ष बाद हम से 2-3 लाख रूपया वसूलना चाहती थी. तो हमने ये रास्ता खोजा कि हम प्रमाणित कर सकें कि वह् अपनी मर्ज़ी से हमार साथ रह रही है. तो कहाँ है वह्गुजरात की हाशिये उलांघती औरत जो आठवें दशक के अंत में या उससे पहले से बिना शादी किए लिव इन रिलेशनशिप में रह्ती चली आ रही है ?
[' नई पौध ' की दो कहानियाँ मेरे ख़्याल से बहुत सशक्त प्रतीक कहनिया है. 'न्यूज रूम'[पन्ना त्रिवेदी ]. लेखिका ने बखूबी चित्रित किया है कि किस तरह से अमानुशिक पुरुष हिंसा करने पर मजबूर कर देते हैं. किन यातनाओं से गुजरती है औरत जब ये किसी हिंसा का निर्णय लेती है. नायिका अपने पति के शिकंजे से तंग आकर उसकी हत्या कर देती है बहुत अच्छी तरह बुनी गई है ये कहानियाँ लेकिन पन्ना त्रिवेदी की नायिका की तरह हाशिये उलांघने के लिए ये मिशन नहीं है जबकि हम देखते हैं समाज में ये सब हो रहा है.
मुबीना जी कुरैशी ने 'कल्पना के सपने 'में वह जो भी दरवाज़ा खोलती है उसे पुरुष सत्ता का चेहरा दिखे देता है लेकिन हाशिये उलाघते हुए पुरुष सत्ता की ताश की चालों में अपना दरवाज़ा खोल लिया है. इस संग्रह की अलग हटकर बहुत सांकेतिक भाषा में नारी चेतना की बात करती हैं, ये खूबसूरत दो कहानियाँ, ज़रूरत है उसे सामने लाने की.
औरत कैसी यातना से गुज़र कर कोई' ब्रूटल' प्रतिक्रिया करती है ये ताज़ातरीन ईरान की रेहाना ज़ब्बारी के वक्तव्य से जाना जा सकता है जिसे एक खुफिया एजेंट के कत्ल के इल्ज़ाम में फाँसी लगी थी. उनके अपने माता पिता को लिखे अन्तिम पत्र की पंक्तियों का ये सार हैं जिनसे औरत होने की सजा की तकलीफों की चीखे उफनी पड़ रही है, "यदि मैंने उसे नहीं मारा होता तो पुलिस को कही मेरी लाश पड़ी मिलती. और पुलिस तुम्हे मेरी लाश को पहचानने के लिए लाती और तुम्हे मालुम होता कि कत्ल से पहले मेरा बलात्कार भी हुआ था. मेरा कातिल कभी भी पकड़ा नहीं जाता. "दुनिया भर के संगठन रेहाना को बचा नहीं पाये. उसने अपने लिए इंसाफ के लिए इसी तरह हाशिया लांघा. अपने पत्र में अपना हौसले का इज़हार किया कि वह् खुदा की अदालत में बलात्कारी, जज, पुलिस --सब पर मुकदमा चलायेगी.
स्त्रियों की अधिकतर हत्या की जाती है जिसे आत्महत्या का रुप दिया जाता है या उन्हें आत्महत्या करने को मजबूर किया जाता है. सब प्रदेशों में दहेज की समस्या तो है लेकिन यहाँ इसका सबसे बड़ा कारण है विवाहेतर सम्बन्ध. इन वर्षो में प्रगति ये हुई है कि इस त्रिकोण में एक की हत्या कर दी जाती है. तो ये समस्या भी इस अंक में नहीं नजर आती. गुजरात कॉरपोरेट्स का हब है, तो वो एज़ेक्यूटिव औरत नजर नहीं आती जो पुरुषशासित दुनिया के हाशिये उलांघ रही है.
गुजरात एक धन दौलत व त्योहारो की श्रंखला में रंगारंग मे आकंठ डूबा राज्य है. होटल में खाने व घूमने का यहाँ बहुत रिवाज है. पर्यटन स्थलों पर सबसे अधिक गुजराती या बंगाली नजर आते है. लेखन एक नितांत की साधना है, शायद इसी जीवन शैली के कारण यहाँ की बहुत सी स्त्रियां वह साधना नहीं कर पा रही. शायद यही कारण है कि 'नई पौध' में सिर्फ़ दो कहानीकारो की दखलअदाज़ी है. मेरे ये परिणाम सिर्फ़ इस अंक को देखकर है ना कि समस्त गुजराती स्त्री साहित्य के बारे में.
महिला दिवस ८ मार्च सन २०१८ में जूही मेले में भाग लेने का मौका मिला था तो वहां गुजराती लेखिकाओं के वक्तव्य को सुनकर थोड़ी ग़लतफ़हमी टूटी थी कि गुजराती महिलायें भी विविध विषयों पर लिख रहीं हैं लेकिन फिर भी तेज़ तर्रार, उन्मुक्त गुजरात की स्त्री अभी भी गुजराती साहित्य में कुछ गायब है।
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सारे विश्व की औरतों के पुरुष व्यवस्था के कारण दुःख के सामांतर कारण हैं सिर्फ़ परिस्थितियां भिन्न हैं. इसी बात को प्रमाणित करने में लगी थीं सुप्रसिद्ध लेखिका रमणिका गुप्ता जी ने रमणिका फ़ाउंडेशन परियोजना के तहत कहानी श्रंखला से. उन्होंने बहुत कठिन व्रत का संकल्प किया था -चालीस भाषाओ की स्त्री विमर्श की लेखिकाओ ने जो औरत के जीवन के दर्द को इंगित किया है उसे वह अनुवादित करके हिन्दी में प्रकाशित करके एक दस्तावेज तैयार कर रही थीं कि पुरुष व्यवस्था की आँखें उस दर्द को देख पाये व इसको बदलने की कोशिश करे जो आरंभ तो हो चुकी है. हिन्दी के तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं. अन्य भाषाओं के "हाशिये उलांघती औरत 'के हिन्दी अनुवाद में गुजराती लेखिकाओ की कहानियों के अनुवाद ने मुझे किंचित अश्चर्य चकित कर दिया है क्योंकि इसमे गुजराती औरत की वह तस्वीर दिखाई नहीं दे रही जो मैं सन् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर से गुजरात में रहने के कारण देखती आ रही हूँ. इस खंड में आदरणीय रमणिका जी, अर्चना जी, किरण जी व प्रज्ञा जी ने इन गुजराती कहानियों का विश्लेषण व प्रबुद्ध आंकलन कर ही दिया है. मैं क्योंकि यूपी से आकर यहाँ बसी हूँ व अपनी स्वतंत्र पत्रकारिता के कारण मैंने जो गुज्रराती विशिष्ट महिलाये देखी हैं व अब तो मेरी पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है "वदोदरा नी नार "तो मैं उन्हें ध्यान में रखते हुए अपने विचार इन कहानियों के विषय में सामने रख्नना चाह्ती हूँ. तब मैं आगरा में 'धर्मयुग'में कुन्दनिका कापड़िया की कहानियों व उपन्यास के हिंदी अनुवाद पढ़ती थी. मेरे मस्तिष्क में उंनकी कहानी "न्याय 'एक अमिट छाप छोड़ गई थी या कहिये गुजरात से निकला एक नारीवादी संदेश था कि औरत क्योंकि घर में अपनी उर्जा खर्च करती है तो पुरुष की कमाई के आधे हिस्से पर उसका ह्क बनता है. आज इतने बरस गुज़र जाने के बाद भी ये लड़़ाई औरत जीत नहीं पाई है हालाँकि 'न्याय 'की नायिका जब घर छोड़ती है तो पति की कमाई में से आधा पैसा लेकर बाहर निकलती है व कानून भी यही कहता है. गुजरात की कुछ पूर्व की एक तस्वीर दिखाती हूँ. उस सभाग्रह में अहमदाबाद दूरदर्शन गिरनार का एक कार्यक्रम था " बेटी बचाओ ". देश के सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले नगर में दर्शकों से एक सवाल पूछा गया कि स्त्री पुरुष बराबर हैं क्या ? विश्वास मानिये खचाखच भरे हॉल में सन्नाटा छा गया. सिर्फ़ दस पन्द्रह हाथ उठे होंगे. मुझे भी इस अंक के दिल्ली में विमोचन के समय किसी का वक्तव्य ' युद्धरत आम आदमी' में पढ़कर आश्चर्य हुआ था कि गुजराती कहानियों में वह नारी चेतना नहीं है. जो चेतना गुजराती औरत के जीवन के हिस्से का अंश है. गुजरात की स्त्री धर्म हो या समाज सेवा या संगीत व न्रत्य कला ये, राष्ट्रीय स्तर या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना चुकी है. मैं स्त्रियों को बड़े बड़े अपने बूते पर कार्यालय स्थापित किए हुए देख चुकी हूँ. कुछ महिला मंडल स्त्री संस्थाओ के करोड़ों के टर्नओवर देख चुकी हूँ. तो पता नहीं क्यो विश्व के दायरे फलांगती स्त्री प्रगति साहित्य में क्यों नहीं बड़े परचम लहरा पाई है?. इस संग्रह में वह भव्य व विशिष्ट गुजराती महिला गायब है जो समाज के एक हिस्से [उदाहरण लें तो अनेक ग्रामों की सह्कारी महिला दूध देरी को संचालित करती महिला या किसी के घर में घुस आए साँप को पकड़ने जा सकती है बतौर समाज सेवा] को प्रभावित करती है. मैं इस बात से ये परिणाम निकाल रही हूँ कि गुजरात में भी औरत की स्थिति लगभग वही है जो अन्य प्रदेशों में है क्योंकि लेखिका सुधा अरोड़ा ने एक स्त्री संस्थाओं के सम्मेलन में शामिल होने के बाद कहा था कि गुजरात से सबसे अधिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी. प्रथम अखिल भारतीय महिला परिषद की स्थापना पूना में सन् एक हज़ार नौ सौ सत्ताईसमें हुई थी जिसमे वड़ोदरा में महारानी चिमनाबाई भी सम्मिलित हुई थी. उन्होंने वड़ोदरा यानि गुजरात में सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में अखिल भारतीय महिला परिषद की स्थापना की थी. इसका ही प्रभाव है कि यहाँ अनेक स्त्री संस्थाये काम कर रही है. पुरुष व्यवस्था से लड़ती, भिड़ती कभी सफ़ल होती, कभी विफ़ल होती एन. जी. ओ'ज़ की भूमिका है -जो इन अंकों में शामिल नहीं है. हाँ, और प्रदेशों के मुकाबले कुछ अधिक प्रगतिशील परिवार हैं जो अपनी बेटियों को मौका दे रहे हैं. हिंदी -खंड -दो में मेरी कहानी 'रिले रेस 'इसी विषय पर है, हो सकता है मैं इन नारी संस्थाओं के बतौर पत्रकार सम्पर्क में रहीं हूँ ये भी एक कारण हो। आपको जानकर आश्चर्य होगा बहुत से कार्यालय अपने यहाँ उत्तर भारत की लड़कियों को काम देना पसंद करते हैं क्योंकि वे मेहनती होती हैं. हर इमारत में एक आम औरत माता की चौकी बिठाने में व भजन मंडली में व्यस्त रह्ती है. इसलिए भी 'पिंजरे की मैंना '[सरोज पाथक], 'दुविधा'[भारती र. दवे]नई सुबह [सुहास ओझा], 'दहलीज़ से '[निर्झरी मेह्ता], चालीस प्लस आथ [चंदाबेन श्रीमाली] 'हुकुम की रानी '[जसुमती परमार ], मंगल सूत्र [बिन्दु भट्ट], उल्ते फेरे [भारती राने], 'देवता आदमी '[जयश्री जोशी], 'मैं अहिलया '[रीता त्रिवेदी], न्याय [कुंदनिका कापदिया ], 'न्यूज़ रूम '[पन्ना त्रिवेदी] नहीं मैं नौकरी नहीं करूंगी '[ज्योति थानकी], 'नाम रसिक मेहता'[वर्शा अदालजा] यानी कहानियाँ दाम्पत्य जीवन पर आधारित है. यहाँ के समाज में तलाक यानि कि' छुट्टा छेड़ा 'होना एक सहज बात है, वही बात नब्बे प्रतिशत कहानियों में चित्रित है. इस अंक का सबसे बड़ा द्वन्द है कि औरत अपनी माँ के घर में 'पराया धन' होती है व ससुराल में दूसरे घर की बेटी. इन दोनों के बीच उसका जीवन झूलता रहता है. हिन्दी भाषी प्रदेशों की तरह आम लड़की पोस्ट गेजुएशन करने को बाध्य नहीं है क्योंकि मध्यम श्रेणी के रोजगार यहाँ उपलब्ध हैं. शायद ये भी एक कारण हो सकता है बहुत जुझारू औरतें बहुत बड़े मानदंड स्थापित कर रही है, सृजन से ना जुड़कर. मैं जो कहना चाह रही हूँ वह अब स्पष्ट है क्यों रमणिका जी की आवाज़ पर सारे देश के कोने कोने की स्त्री वो कथायें हिंदी में अनुवादित करके तमाम दूसरी औरतो को प्रोत्साहित कर रही है कि देखो !हाशिये सही बात के लिए ऎसे उलांघे जाते हैं. 'पिंजरे की मैना " यानि कोठी में धान 'शैली की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ कहानी है. डॉ. नीरा देसाई [जिनके प्रयासो से विश्वविद्ध्यालय में नारी शोध केन्द्र की स्थापना हुई थी ] ने सन एक हज़ार नौ सौ बावन में शोध करके ये पाया था कि घर स्त्री के लिए पिंजरे जैसे है, उसी बात की तस्दीक करती है ये कहानी. एक स्त्री किस तरह पति के अनैतिक समबंधो को ढोने, के लिये मजबूर की जाती है तब एक पिंजरे से निकल कर अस्पताल में हिस्टीरिया की मरीज़ हो दूसरे पिंजरे में उसे कैद कर दिया जाता है. इन्ही सोने के पिंजरों में मन प्राण तड़फड़ाने के कारण औरत निरंतर हाशिये उलांघ रही है. शैली की दृष्टि से दूसरे नम्बर पर कहानी आती है "नाम नयना रसिक मेहता "जिसमे सच में हाशिये उलांघती स्त्री दृढ़प्रतिज्ञ है कि अपराधी चाहे पति हो या सास क़ानून की नज़र से बच नहीं पाये, चाहे ये निर्णय उसे कँटीले रास्ते तक ले जाए. इसमे तो स्त्री शादी के सात साल बाद विद्रोह करती है लेकिन समाज का सच ये है कि सालों साल वह मुंह बंद करके हर ज़ुल्म बर्दाश्त करती है कि शायद उसकी स्थिति सुधर जाए. अपनी संतानों का मुंह देखते हुए जिये जाती है. कोई कह सकता है कि घरेलु हिंसा अधिनियम -दो हज़ार छः बन गया है लेकिन भारत के समाज का स्त्री पर शिकंजा तो एसा कसा है कि कुछ जज तक फरियाद सुनने को तैयार नहीं होते. वे कहते है, 'जो स्त्री अपने पति के साथ नहीं रहना चाह्ती उसे कोर्ट से धकके देकर बाहर निकाल दो. " मैं ये गुजरात की घटना ही बता रही हूँ . यही भय औरत को आतंकित किए रहता है जो पति के किसी दूसरी औरत के प्रेम में पड़ जाने पर भी औलाद के कारण उसे छोड़ने की बात नहीं सोच पाती., चुप समझौता करती जाती है लेकिन वह प्रेमिका अपने प्रेमी की जालसाजी को सूँघकर यानि कि वह दो औरतों के साथ का मज़ा लेना चाह रहा है, उसे छोड़ देने का साहस करती है. 'दुविधा 'आज की इस बात को बखूबी रेखांकित करती है कि 'वर्क प्लेस 'पर स्त्री पुरुषों की मुलाकात होती है, कभी सम्बन्ध बन जाते है तो सोचना औरत को है कि वह सबकी व खासकर अपनी भलाई के विषय में सोचकर कदम उठाये. 'खड़ी फ़सल -सन् एक हज़ार सैंतालीस से पहले ' में सुहास ओझा की 'नई सुबह 'में जैसे खूबसूरती से चित्रण है दुनिया के कारोबार में व्यस्त दुनिया की नजर उस औरत पर नहीं पड़ी है जिसके बलबूते इस सृष्टि का संचालन हो रहा है. वह् पुरुष सता के पीछे मुड़ी तुड़ी निढाल पड़ी है. ये वाक्य मैंने चुने हैं सुहास ओझा की कहानी "नई सुबह 'से ---------' यही भाव लगभग हर पुरुष के चेहरे पर दिखाई देता है--- माथा अभिमान से ऊँचा --दबे हुए होठों पर दृढ़ता ---स्थिर आँखों में निडरता --- ----यही है पुरुष सत्ता का चेहरा एक ग्रीस योद्धा की मूर्ति की मानिंद. 'लेकिन हठी रमणिका जी इसी कहानी की जानकी की मानसिकता की तरह इस मूर्ति के पीछॆ ढीली ढाली पड़ी स्त्री छवि को सामने ले आने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है उस योद्धा के पीछॆ छिपी निढाल औरत की मूर्ति को एक अदना सी सेविका जानकी झाड़पोंछ कर सामने रख देती है जो बात मालिक को कतई पसंद नहीं आती. चालीस भाषाओं की रचनाकारों को प्रेरित कर रही है कब तक वे पीछॆ अपनी भूमिका छिपाये पड़ी रहेंगी --- ज़रा हाशिये उलांघ कर तो दिखाये. ' नई पौध ' की दो कहानियाँ मेरे ख़्याल से बहुत सशक्त प्रतीक कहनिया है. मुबीना जी कुरैशी ने 'कल्पना के सपने 'में वह जो भी दरवाज़ा खोलती है उसे पुरुष सत्ता का चेहरा दिखे देता है लेकिन हाशिये उलाघते हुए पुरुष सत्ता की ताश की चालों में अपना दरवाज़ा खोल लिया है. इस संग्रह की अलग हटकर बहुत सांकेतिक भाषा में नारी चेतना की बात करती हैं, ये खूबसूरत दो कहानियाँ, ज़रूरत है उसे सामने लाने की. जयश्री जोशी की 'देवता आदमी' कम से कम भारत के उन अधिकांश देवता पतियों की, सो कोल्ड 'थोरो जेंटलमैंन 'की पोल खोलती है जिनसे पत्नियों को किस किस तरह का अत्याचार सहना पड़ता है. कितनी हैं जो हशिया उलांघ पाती हैं ? हिमांशी शैलत से बहुत उम्मीदे थी किंतु उन्होंने व सम्पादिका ने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी जो उनकी कहानी 'जस-का-तस'को चुन लिया क्योंकि यहाँ हाशिये उलांघने का अर्थ है पुरुष सत्ता की लक्ष्मण रेखाओ के पार जाना जहाँ पर स्त्री का शोषण हो रहा है लेकिन ये तो माँ की देहरी बद्ल जाने की कहानी है. यामिनी गौरांग व्यास 'जीवनदान 'में स्त्री जीवन को बहुमूल्य साबित करने का प्रयास किया गया है. निर्झरी मेहता की कहानी 'दहलीज़ से 'मेरे लिए सुखद आश्चर्य है क्योंकि वड़ोदरा के अरविंद आश्रम के लोन में या 'अभिव्यक्ति 'में अस्मिता की गोष्ठियों का हमारा लम्बा साथ रहा है. उन्हें मैं एक अच्छी कवयित्री के रुप में जानती हूँ इसलिए मुझे उनकी इस परिपक्व कहानी ने प्रभावित किया है व चौंकाया भीं है. . ये भीं एक प्रतीक कथा ही है कि जब भीं कोई स्त्री देह पर वार करता है तो समाज को उस स्त्री की मर्मान्तक पीड़ा रह्ती, वह उसी के जीवन में शूल बिछाने का काम करता चलता है. इसमें स्त्रियों की हिस्सेदारी भीं बढ़ चढ़ कर होती है. गुजराती समाज बहुत प्रगतिशील है, इस भ्रम को ये कहानी तोड़ती है. यदि ऎसा ना होता तो यहाँ भी इतनी स्त्री संस्थाये काम ना कर रही होती. ये तीन चार मिनट का आघात था. रेप में पन्द्रह बीस मिनट के आघात पर भीं स्त्री सहानुभूति कहाँ पाती है.? एक लड़की का प्रतिरोध बलात्कारी पर आतंक बनकर टूट पड़ता है हास्यदा पंड्या की कहानी 'दरी 'में. ये महीन बुनावट से रची बहुत सशक्त रचना है. शायद ये संदेश देती है कि समाज जब साथ नहीं देता तो स्त्री क्यो ना अपने फैसले करे ? तभी बिन्दु भट्ट की 'मंगल सूत्र 'की नायिका भारती राणे की नायिका के साथ 'उलटे फेरें 'लेती नजर आती हैं. 'शमिक आप क्या कहेंगे ?"में इला आरब मेहता ने एक कामकाजी स्त्री के द्वंद को बखूबी रचा है जो अपने बॉस से परेशान है. वह् कश्मकश में है कि अपने पति को ये बात बताये या ना बताये. अंत में एक सशक्त स्त्री की तरह निर्णय लेती है कि वह् अपनी समस्या स्वयं हल करेगी. ये कहानी पति पत्नी संबंधों की एक गिरह को खोलती है कि किस तरह एक पति नौकरी जाने के डर से पत्नी को ग़लत राय दे सकता है, निर्णय तो स्वयं ही लेना चाहिये. 'जसुमति परमार की ऐसी ही है 'हुकुम की रानी ' जो पति के ग़लत हुकुम का प्रतिरोध करना जानती है. वही 'न्यूज रूम "की नायिका का अपने अत्याचारी पति का कत्ल दिल दहला देता है. हालाँकि ये कोई नई घटना नहीं है और ना ही हाशिये उलांघना ऐसी प्रेरणा देने का पक्षधर है. पन्ना त्रिवेदी की ये कहानी नई पौध जैसी भाषा की ताजगी लिए हुए है. एक आम धारणा है कि पुरुश स्त्री को उसके यौवन के परिप्रेक्ष्य में देखता है. उस पर रौब ग़ालिब करता रहता है कि ' जो साठा, वो पाठा '. चंदाबेन श्री माली की कहानी "चालीस प्लस आठ 'में स्त्री उम्र के, इस दृष्टिकोण के हाशिये उलांघती नजर आती है जैसा कि आजकल लेख पड़ने को मिल रहे हैं साठ वर्ष की उम्र में चटख रंग कपड़े क्यों ना पहने जाए ? एक आम औरत हमेशा समय का रोना रोती है कि उसे अपने लिए समय नहीं मिलता लेकिन जो हाशिये उलांघ रही है उसके लिए इस कहानी से कुछ वाक्य ले रही हूँ, "समय को चुरा चुराकर उसने खूब पढ़ लिख कर, चिंतन मनन करके अपनी जीवन बेल को सींचा है -ज़िदगी को खुशहाल और सुखद बनाया है -दिल में आकाश छूने की तमन्ना है ". यही प्रेरणा रमणिका जी की प्रेरणा से हर कोने व हर भाषा की स्त्री अपनी कलम से दे रही है. 'ज्योति थांनकी की 'मैं नौकरी नहीं करूँगी 'व स्मिता के. पारिख की 'मेरी दुलारी 'की नायिकाये नौकरी नहीं करना चाहती-ये कोई गलत बात नहीं है भारत में अनेक महिलाये अपने बच्चो को पालपोस कर किसी व्यवसाय को अपनाती है लेकिन जो कुछ ना करना चाहे उनके लिए प्रेरणादायक है चंदाबेन के उपरोक्त शब्द. 'दरी '[हस्यदा पंड्या] की लड़की अपने बलात्कार का प्रयास करने वाले व पिता के हत्यारे से अच्छी तरह बदला लेती है. गुजरात की महिला पुलिस सेल का कहना है कि गुजरात में कुछ लड़कियों की ये प्रवृत्ति है कि वे दोस्ती किसी से करतीं हैं शादी किसी से. शादी होते ही तलाक माँगने लगती है, "खुराकी [भरणपोषण]लेवी छे ". छुट्टा छेड़ा'व 'खुराकी लेवी छे 'ये यहाँ प्रचलित शब्द हैं. ये हाशिये उलांघती औरत बिलकुल जड़ से गायब है गुजराती कहानियों में. मैं ये बात अपनी एक बात से प्रमाणित भी कर रही हूँ मैंने नौवें दशक के आरम्भ में' फ्रेंडशिप कॉन्ट्रेक्ट'[मैंत्रीकरार] पर भी 'धर्मयुग' के लिए सर्वे किया था. ये तय है कि अहमदाबाद के वकीलों ने ये रास्ता ढूंढ़ा था कि एक पुरुष एक औरत को अपने पास सिर्फ़ एक सौ रुपयापये के स्टैंप पेपर पर मित्रता का करार करके अपने घर में रख सकता है लेकिन उसकी और कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी. जब बच्चे पैदा हो गए तो औरतो ने भरण पोषण के लिए शोर मचाया तब ये सरकार ने बैन कर दिया गया. अब पुरुषों का पक्ष सुनिये, उन्होंने ये बताया था कि स्त्री अपनी मर्ज़ी से हमारे पास रहने आती थी लेकिन एक दो वर्ष बाद हम से दो-तीन लाख रूपया वसूलना चाहती थी. तो हमने ये रास्ता खोजा कि हम प्रमाणित कर सकें कि वह् अपनी मर्ज़ी से हमार साथ रह रही है. तो कहाँ है वह्गुजरात की हाशिये उलांघती औरत जो आठवें दशक के अंत में या उससे पहले से बिना शादी किए लिव इन रिलेशनशिप में रह्ती चली आ रही है ? [' नई पौध ' की दो कहानियाँ मेरे ख़्याल से बहुत सशक्त प्रतीक कहनिया है. 'न्यूज रूम'[पन्ना त्रिवेदी ]. लेखिका ने बखूबी चित्रित किया है कि किस तरह से अमानुशिक पुरुष हिंसा करने पर मजबूर कर देते हैं. किन यातनाओं से गुजरती है औरत जब ये किसी हिंसा का निर्णय लेती है. नायिका अपने पति के शिकंजे से तंग आकर उसकी हत्या कर देती है बहुत अच्छी तरह बुनी गई है ये कहानियाँ लेकिन पन्ना त्रिवेदी की नायिका की तरह हाशिये उलांघने के लिए ये मिशन नहीं है जबकि हम देखते हैं समाज में ये सब हो रहा है. मुबीना जी कुरैशी ने 'कल्पना के सपने 'में वह जो भी दरवाज़ा खोलती है उसे पुरुष सत्ता का चेहरा दिखे देता है लेकिन हाशिये उलाघते हुए पुरुष सत्ता की ताश की चालों में अपना दरवाज़ा खोल लिया है. इस संग्रह की अलग हटकर बहुत सांकेतिक भाषा में नारी चेतना की बात करती हैं, ये खूबसूरत दो कहानियाँ, ज़रूरत है उसे सामने लाने की. औरत कैसी यातना से गुज़र कर कोई' ब्रूटल' प्रतिक्रिया करती है ये ताज़ातरीन ईरान की रेहाना ज़ब्बारी के वक्तव्य से जाना जा सकता है जिसे एक खुफिया एजेंट के कत्ल के इल्ज़ाम में फाँसी लगी थी. उनके अपने माता पिता को लिखे अन्तिम पत्र की पंक्तियों का ये सार हैं जिनसे औरत होने की सजा की तकलीफों की चीखे उफनी पड़ रही है, "यदि मैंने उसे नहीं मारा होता तो पुलिस को कही मेरी लाश पड़ी मिलती. और पुलिस तुम्हे मेरी लाश को पहचानने के लिए लाती और तुम्हे मालुम होता कि कत्ल से पहले मेरा बलात्कार भी हुआ था. मेरा कातिल कभी भी पकड़ा नहीं जाता. "दुनिया भर के संगठन रेहाना को बचा नहीं पाये. उसने अपने लिए इंसाफ के लिए इसी तरह हाशिया लांघा. अपने पत्र में अपना हौसले का इज़हार किया कि वह् खुदा की अदालत में बलात्कारी, जज, पुलिस --सब पर मुकदमा चलायेगी. स्त्रियों की अधिकतर हत्या की जाती है जिसे आत्महत्या का रुप दिया जाता है या उन्हें आत्महत्या करने को मजबूर किया जाता है. सब प्रदेशों में दहेज की समस्या तो है लेकिन यहाँ इसका सबसे बड़ा कारण है विवाहेतर सम्बन्ध. इन वर्षो में प्रगति ये हुई है कि इस त्रिकोण में एक की हत्या कर दी जाती है. तो ये समस्या भी इस अंक में नहीं नजर आती. गुजरात कॉरपोरेट्स का हब है, तो वो एज़ेक्यूटिव औरत नजर नहीं आती जो पुरुषशासित दुनिया के हाशिये उलांघ रही है. गुजरात एक धन दौलत व त्योहारो की श्रंखला में रंगारंग मे आकंठ डूबा राज्य है. होटल में खाने व घूमने का यहाँ बहुत रिवाज है. पर्यटन स्थलों पर सबसे अधिक गुजराती या बंगाली नजर आते है. लेखन एक नितांत की साधना है, शायद इसी जीवन शैली के कारण यहाँ की बहुत सी स्त्रियां वह साधना नहीं कर पा रही. शायद यही कारण है कि 'नई पौध' में सिर्फ़ दो कहानीकारो की दखलअदाज़ी है. मेरे ये परिणाम सिर्फ़ इस अंक को देखकर है ना कि समस्त गुजराती स्त्री साहित्य के बारे में. महिला दिवस आठ मार्च सन दो हज़ार अट्ठारह में जूही मेले में भाग लेने का मौका मिला था तो वहां गुजराती लेखिकाओं के वक्तव्य को सुनकर थोड़ी ग़लतफ़हमी टूटी थी कि गुजराती महिलायें भी विविध विषयों पर लिख रहीं हैं लेकिन फिर भी तेज़ तर्रार, उन्मुक्त गुजरात की स्त्री अभी भी गुजराती साहित्य में कुछ गायब है।
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दिन पहर गत क गत एक पैर से खड़ी रहलिन । लड़किन के मीसच घसव, नहवाइव धोआइब से लेके हसहन क गोड़ दबावै, धोती कचारै क सब काम करलिन और का मजाल कि तनिको असायँ । इहाँ तनी सा एक दिन आपन धोती कचारै के कहलो "तवन मजुन्नियाँ काटै दउडल !
इन सब भूमिकाओं का संकेत मेरी पत्नोजी समझ जाती थीं और चाचीजी के पैर दबाने बैठ जाती थीं। मेरी श्रीमतीजी में यह एक विलक्षण गुण है कि वे 'सेवा' को अपना धर्म समझती हैं । ग्रेजुएट नहीं हैं, फिर भो सातवें आठवें तक को शिक्षा पाई ही है । सवेरे से शाम तक फिरिहरी को भाँति काम किया करती हैं । सात सात बच्चों को सम्हालना इन्हों का काम है। ऊपर से चाचीजी को सेवा का भार इनपर आ पड़ा। मैं बल्कि ऊब जाता था । पर ये बिना घबड़ाये प्रसन्नतापूर्वक काम-धाम सम्हाले थीं। वैद्यजी का काढ़ा कड़वा था । इसलिए बिल्कुल लिया ही नहीं गया । हकीमजी की चटनियाँ मोठी थीं जिससे एक एक बार में मात्राऍ खाई गई। इस 'अति' का परिणाम यह हुआ कि रोग बढ़ने लगा ओर अब चाचोजो ने पैर दबवाने को मात्रा बढ़ा दी । मैं यह सब देख- सुनकर, बेहद भल्लाता था, पर पत्नीजी मुझे समझा-बुझाकर शान्त कर देती थीं ।
एक दिन दफ्तर से यह चर्चा छिड़ी कि लखनऊ के एक नेचुरोपैथ ( प्राकृतिक चिकित्सक ) हमारे नगर में पधारे हैं। बड़े बड़े असाध्य या दुःसाध्य रोगी उनको चिकित्सा से अच्छे हो रहे हैं । सचमुच प्राकृतिक चिकित्सा का सिद्धान्त बड़ा हो वैज्ञानिक है । दवा-दारू से रोग बढ़ने के सिवा घटता नहीं। इस पद्धति में तो केवल प्रकृति का सहारा लेना पड़ता है। थोड़ा 'डायट' ठोक करना पड़ता है। कुछ विशेष प्रतिक्रियाएं करनी पड़ती हैं ।
मेरे मन में भी आया कि एक बार चाचीजो को इन डाक्टर
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दिन पहर गत क गत एक पैर से खड़ी रहलिन । लड़किन के मीसच घसव, नहवाइव धोआइब से लेके हसहन क गोड़ दबावै, धोती कचारै क सब काम करलिन और का मजाल कि तनिको असायँ । इहाँ तनी सा एक दिन आपन धोती कचारै के कहलो "तवन मजुन्नियाँ काटै दउडल ! इन सब भूमिकाओं का संकेत मेरी पत्नोजी समझ जाती थीं और चाचीजी के पैर दबाने बैठ जाती थीं। मेरी श्रीमतीजी में यह एक विलक्षण गुण है कि वे 'सेवा' को अपना धर्म समझती हैं । ग्रेजुएट नहीं हैं, फिर भो सातवें आठवें तक को शिक्षा पाई ही है । सवेरे से शाम तक फिरिहरी को भाँति काम किया करती हैं । सात सात बच्चों को सम्हालना इन्हों का काम है। ऊपर से चाचीजी को सेवा का भार इनपर आ पड़ा। मैं बल्कि ऊब जाता था । पर ये बिना घबड़ाये प्रसन्नतापूर्वक काम-धाम सम्हाले थीं। वैद्यजी का काढ़ा कड़वा था । इसलिए बिल्कुल लिया ही नहीं गया । हकीमजी की चटनियाँ मोठी थीं जिससे एक एक बार में मात्राऍ खाई गई। इस 'अति' का परिणाम यह हुआ कि रोग बढ़ने लगा ओर अब चाचोजो ने पैर दबवाने को मात्रा बढ़ा दी । मैं यह सब देख- सुनकर, बेहद भल्लाता था, पर पत्नीजी मुझे समझा-बुझाकर शान्त कर देती थीं । एक दिन दफ्तर से यह चर्चा छिड़ी कि लखनऊ के एक नेचुरोपैथ हमारे नगर में पधारे हैं। बड़े बड़े असाध्य या दुःसाध्य रोगी उनको चिकित्सा से अच्छे हो रहे हैं । सचमुच प्राकृतिक चिकित्सा का सिद्धान्त बड़ा हो वैज्ञानिक है । दवा-दारू से रोग बढ़ने के सिवा घटता नहीं। इस पद्धति में तो केवल प्रकृति का सहारा लेना पड़ता है। थोड़ा 'डायट' ठोक करना पड़ता है। कुछ विशेष प्रतिक्रियाएं करनी पड़ती हैं । मेरे मन में भी आया कि एक बार चाचीजो को इन डाक्टर
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DRDO CEPTAM 10 Recruitment 2022: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) वरिष्ठ तकनीकी सहायक-बी (एसटीए-बी) और तकनीशियन-ए (टेक-ए) के पदों के लिए सीईपीटीएएम -10 / डीआरटीसी की आवेदन प्रक्रिया शुक्रवार, 23 सितंबर को समाप्त हो चुकी है। हालांकि, पंजीकृत उम्मीदवारों के पास अभी भी रिक्त पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का मौका है।
सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट drdo. gov. in पर जाएं।
होम पेज पर, "करिअर" टैब पर क्लिक करें।
CEPTAM-10/DRTC के तहत ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने के लिए क्लिक करें।
उम्मीदवार अपने पंजीकृत आईडी से लॉग इन करें और आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें।
अब अपना पूरा विवरण भरें, शुल्क का भुगतान करें और फॉर्म जमा कर दें।
उम्मीदवार भविष्य के संदर्भ के लिए आवेदन फॉर्म का एक प्रिंट आउट ले लें।
वरिष्ठ तकनीकी सहायक-बी (एसटीए-बी)
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
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DRDO CEPTAM दस Recruitment दो हज़ार बाईस: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन वरिष्ठ तकनीकी सहायक-बी और तकनीशियन-ए के पदों के लिए सीईपीटीएएम -दस / डीआरटीसी की आवेदन प्रक्रिया शुक्रवार, तेईस सितंबर को समाप्त हो चुकी है। हालांकि, पंजीकृत उम्मीदवारों के पास अभी भी रिक्त पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का मौका है। सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट drdo. gov. in पर जाएं। होम पेज पर, "करिअर" टैब पर क्लिक करें। CEPTAM-दस/DRTC के तहत ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने के लिए क्लिक करें। उम्मीदवार अपने पंजीकृत आईडी से लॉग इन करें और आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें। अब अपना पूरा विवरण भरें, शुल्क का भुगतान करें और फॉर्म जमा कर दें। उम्मीदवार भविष्य के संदर्भ के लिए आवेदन फॉर्म का एक प्रिंट आउट ले लें। वरिष्ठ तकनीकी सहायक-बी रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
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पीपल्दा कस्बे में हाड़ौती की ऐतिहासिक ढाई कड़ी हाड़ौती भाषा मे रामलीला का स्थानीय लोगो द्वारा मंचन किया जाता है। इस रामलीला में कई विशेषता है कि ग्रामीण मंचन के दौरान भगवान को दोहे सुनाते है और पूरी रामचरित मानस के दोहे हाड़ौती भाषा मे ही बोले जाते है।
ग्रामीण बताते है कि करीब दो सौ वर्ष पूर्व पीपल्दा के ब्राह्मण भट्ट परिवार के रामनाथ भट्ट काशी में अध्ययन करने गए थे। वह अध्ययन करके लौटे और रामचरित ग्रन्थ का हाड़ौती भाषा मे अनुवाद कर दोहे को ढाई कड़ी में लिखे। जिसके बाद पीपल्दा में भगवान रघुनाथ मंदिर में भगवान को सुनाने के लिए भगवान की प्रतिमा को सुनाया। जब उन्होंने इस अनुवाद किये ग्रन्थ को लोगो को सुनाया तो लोगो को पसंद आया और उस समय के रियासत में चैत्र के नवरात्रे में इसका रामलीला के रूप में मंचन शुरू हुआ जिसमें भगवान की प्रतिमा को बाहर लाया जाता है और मंचन करने वाले भगवान की प्रतिमा को यह सुनाई जाती है। वही इसमें कई विशेषताएं है इसमें मंचन सभी पुरुष करते है वही राम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान का पात्र ब्राह्मण या वैष्णव ही करते है।
पीपल्दा में इस ढाई कड़ी की रामलीला का मंचन हुआ तो इसकी ख्याति दूर दूर तक हुई। इस दौरान अंता के पास पाटून्दा से कुछ विद्वान रामलीला मंचन के दौरान आए तो उन्होंने यहां के दोहे को लिखा और यहां के बाद पाटून्दा में इसका मंचन शुरू हुआ।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पीपल्दा कस्बे में हाड़ौती की ऐतिहासिक ढाई कड़ी हाड़ौती भाषा मे रामलीला का स्थानीय लोगो द्वारा मंचन किया जाता है। इस रामलीला में कई विशेषता है कि ग्रामीण मंचन के दौरान भगवान को दोहे सुनाते है और पूरी रामचरित मानस के दोहे हाड़ौती भाषा मे ही बोले जाते है। ग्रामीण बताते है कि करीब दो सौ वर्ष पूर्व पीपल्दा के ब्राह्मण भट्ट परिवार के रामनाथ भट्ट काशी में अध्ययन करने गए थे। वह अध्ययन करके लौटे और रामचरित ग्रन्थ का हाड़ौती भाषा मे अनुवाद कर दोहे को ढाई कड़ी में लिखे। जिसके बाद पीपल्दा में भगवान रघुनाथ मंदिर में भगवान को सुनाने के लिए भगवान की प्रतिमा को सुनाया। जब उन्होंने इस अनुवाद किये ग्रन्थ को लोगो को सुनाया तो लोगो को पसंद आया और उस समय के रियासत में चैत्र के नवरात्रे में इसका रामलीला के रूप में मंचन शुरू हुआ जिसमें भगवान की प्रतिमा को बाहर लाया जाता है और मंचन करने वाले भगवान की प्रतिमा को यह सुनाई जाती है। वही इसमें कई विशेषताएं है इसमें मंचन सभी पुरुष करते है वही राम, सीता, लक्ष्मण व हनुमान का पात्र ब्राह्मण या वैष्णव ही करते है। पीपल्दा में इस ढाई कड़ी की रामलीला का मंचन हुआ तो इसकी ख्याति दूर दूर तक हुई। इस दौरान अंता के पास पाटून्दा से कुछ विद्वान रामलीला मंचन के दौरान आए तो उन्होंने यहां के दोहे को लिखा और यहां के बाद पाटून्दा में इसका मंचन शुरू हुआ। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री प्रविन्द जगन्नाथ जी, मॉरीशस के वरिष्ठ मंत्री व गणमान्य व्यक्ति, विशिष्ट अतिथिगण, मित्रों - नमस्कार ! बॉन्जोर !
मैं मॉरीशस के सभी मित्रों को शुभकामनाएं देता हूँ।
हमारे देशों के लिए यह एक विशेष अवसर है। हमारे साझे इतिहास, विरासत और सहयोग का यह एक नया अध्याय है। बहुत समय नहीं बीता है, जब मॉरीशस ने इंडियन ओशन आईलैंड गेम्स की मेजबानी की थी और इस प्रतिस्पर्धा में गौरव प्राप्त किया था।
दोनों देश दुर्गा पूजा का उत्सव मना रहे हैं और जल्द ही दीपावली भी मनाएंगे। ऐसे समय में मेट्रो परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन और भी आनंद प्रदान करेगा।
मेट्रो, स्वच्छ और कुशल परिवहन सुविधा है तथा इससे समय की बचत भी होती है। यह परियोजना आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन में भी योगदान देगी।
आधुनिक ईएनटी अस्पताल दूसरी परियोजना है जिसका आज उद्घाटन हुआ है। यह अस्पताल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करेगा। अस्पताल का भवन ऊर्जा दक्षता से युक्त है और यह पेपरलैस सुविधाओं का विकल्प प्रदान करेगा।
ये दोनों परियोजनाएं मॉरीशस के लोगों को सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये दोनों परियोजनाएं मॉरीशस के विकास के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
इन परियोजनाओँ के लिए हजारों श्रमिकों ने दिन-रात व धूप-बारिश में कठिन मेहनत की है।
पिछली शताब्धियों से अलग आज हम अपने लोगों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य कर रहे हैं।
मैं प्रधानमंत्री श्री प्रविन्द जगन्नाथ के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करता हूँ, जिन्होंने मॉरीशस के लिए आधुनिक ढांचागत संरचना और सेवाओं की परिकल्पना की है। मैं उन्हें और मॉरीशस की सरकार को उनके सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूँ जिनकी वजह से ये परियोजनाएं समय पर पूरी हुई हैं।
हमें इस बात का गौरव है कि भारत ने जनहित की उक्त तथा अन्य परियोजनाओं के लिए मॉरीशस के साथ सहयोग किया है। पिछले वर्ष एक संयुक्त परियोजना के तहत बच्चों ई-टैबलेट वितरित किये गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के नये भवन और एक हजार आवासों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि प्रधानमंत्री श्री जगन्नाथ के सुझावों के अनुरूप भारत एक रिनल यूनिट, मेडिक्लीनिक्स और एरिया हेल्थ सेंटरों के निर्माण में सहयोग दे रहा है।
भारत और मॉरीशस दोनों ही जीवंत लोकतंत्र के उदाहरण है जो लोगों की समृद्धि और विश्व में शांति के लिए प्रतिबद्ध है।
इस वर्ष प्रधानमंत्री श्री जगन्नाथ अब तक के सबसे बड़े प्रवासी भारतीय दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में और मेरी सरकार के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे।
मॉरीशस की स्वतंत्रता के 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर हमारे राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर मॉरीशस ने उनकी स्मृति को श्रद्धांजलि दी तथा उनके साथ जुड़े विशेष संबंधों को याद किया।
हिंद महासागर भारत और मॉरीशस के मध्य एक पुल का काम करता है। समुद्री अर्थव्यवस्था हमारे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
समुद्री अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और आपदा जोखिम राहत के सभी आयामों में सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) का विजन हमें साथ कार्य करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।
मैं मॉरीशस की सरकार को आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए धन्यवाद देता हूँ।
एक महीने के अंदर विश्व विरासत स्थल - अप्रवासी घाट पर अप्रसावी दिवस का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन हमारे बहादुर पूर्वजों के सफल संघर्ष को रेखांकित करेगा।
इस संघर्ष से मॉरीशस को इस सदी में मीठे फल प्राप्त हुए हैं।
हम मॉरीशस के लोगों की शानदार भावना को सलाम करते हैं।
भारत और मॉरीशस की मैत्री अमर रहे।
धन्यवाद, बहुत-बहुत धन्यवाद ।
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मॉरीशस गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री प्रविन्द जगन्नाथ जी, मॉरीशस के वरिष्ठ मंत्री व गणमान्य व्यक्ति, विशिष्ट अतिथिगण, मित्रों - नमस्कार ! बॉन्जोर ! मैं मॉरीशस के सभी मित्रों को शुभकामनाएं देता हूँ। हमारे देशों के लिए यह एक विशेष अवसर है। हमारे साझे इतिहास, विरासत और सहयोग का यह एक नया अध्याय है। बहुत समय नहीं बीता है, जब मॉरीशस ने इंडियन ओशन आईलैंड गेम्स की मेजबानी की थी और इस प्रतिस्पर्धा में गौरव प्राप्त किया था। दोनों देश दुर्गा पूजा का उत्सव मना रहे हैं और जल्द ही दीपावली भी मनाएंगे। ऐसे समय में मेट्रो परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन और भी आनंद प्रदान करेगा। मेट्रो, स्वच्छ और कुशल परिवहन सुविधा है तथा इससे समय की बचत भी होती है। यह परियोजना आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन में भी योगदान देगी। आधुनिक ईएनटी अस्पताल दूसरी परियोजना है जिसका आज उद्घाटन हुआ है। यह अस्पताल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करेगा। अस्पताल का भवन ऊर्जा दक्षता से युक्त है और यह पेपरलैस सुविधाओं का विकल्प प्रदान करेगा। ये दोनों परियोजनाएं मॉरीशस के लोगों को सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये दोनों परियोजनाएं मॉरीशस के विकास के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इन परियोजनाओँ के लिए हजारों श्रमिकों ने दिन-रात व धूप-बारिश में कठिन मेहनत की है। पिछली शताब्धियों से अलग आज हम अपने लोगों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य कर रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री श्री प्रविन्द जगन्नाथ के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करता हूँ, जिन्होंने मॉरीशस के लिए आधुनिक ढांचागत संरचना और सेवाओं की परिकल्पना की है। मैं उन्हें और मॉरीशस की सरकार को उनके सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूँ जिनकी वजह से ये परियोजनाएं समय पर पूरी हुई हैं। हमें इस बात का गौरव है कि भारत ने जनहित की उक्त तथा अन्य परियोजनाओं के लिए मॉरीशस के साथ सहयोग किया है। पिछले वर्ष एक संयुक्त परियोजना के तहत बच्चों ई-टैबलेट वितरित किये गए थे। सुप्रीम कोर्ट के नये भवन और एक हजार आवासों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि प्रधानमंत्री श्री जगन्नाथ के सुझावों के अनुरूप भारत एक रिनल यूनिट, मेडिक्लीनिक्स और एरिया हेल्थ सेंटरों के निर्माण में सहयोग दे रहा है। भारत और मॉरीशस दोनों ही जीवंत लोकतंत्र के उदाहरण है जो लोगों की समृद्धि और विश्व में शांति के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष प्रधानमंत्री श्री जगन्नाथ अब तक के सबसे बड़े प्रवासी भारतीय दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में और मेरी सरकार के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। मॉरीशस की स्वतंत्रता के पचासवीं वर्षगांठ के अवसर पर हमारे राष्ट्रपति को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती के अवसर पर मॉरीशस ने उनकी स्मृति को श्रद्धांजलि दी तथा उनके साथ जुड़े विशेष संबंधों को याद किया। हिंद महासागर भारत और मॉरीशस के मध्य एक पुल का काम करता है। समुद्री अर्थव्यवस्था हमारे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। समुद्री अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और आपदा जोखिम राहत के सभी आयामों में सागर का विजन हमें साथ कार्य करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा। मैं मॉरीशस की सरकार को आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए धन्यवाद देता हूँ। एक महीने के अंदर विश्व विरासत स्थल - अप्रवासी घाट पर अप्रसावी दिवस का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन हमारे बहादुर पूर्वजों के सफल संघर्ष को रेखांकित करेगा। इस संघर्ष से मॉरीशस को इस सदी में मीठे फल प्राप्त हुए हैं। हम मॉरीशस के लोगों की शानदार भावना को सलाम करते हैं। भारत और मॉरीशस की मैत्री अमर रहे। धन्यवाद, बहुत-बहुत धन्यवाद ।
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