raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
कुल्लू के रहने वाले सोनू ठाकुर ने अब तक 378 सांपों को जिंदा पकड़कर सैकडों लोगों की जिंदगियां बचाई हैं। सोनू 15 साल की उम्र से ही जहरीले सांपों को पकड़ लोगों की जिंदगियों को बचाता आ रहा है। सोनू की इस बहादुरी के लिए उसे राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। सोनू को यह पुरस्कार दिल्ली के इंद्रप्रस्त नेटवर्क ने राजा राम मोहन रॉय मेमोरियल हॉल में एक समारोह के दौरान दिया गया।
कुल्लू के खोखन के रहने वाला सोनू जहरीले सांपों को पकड़ने के लिए न तो किसी औजार का इस्तेमाल करता है और न ही किसी डंडे का। बता दें कि सोनू नंगे हाथों से ही सांपों को बिना कोई नुक्सान पहुंचाए पकड़ लेता है। कुल्लू में अगर कहीं भी अगर लोगों को सांप से खतरा हो तो बस सोनू को एक फोन करते हैं और सोनू मौके पर पहुंच चुटकियों में सांप को पकड़ लोगों की जान बचाता है।
सोनू का कहना है कि वे अब तक 378 जहरीले सांपों को जिंदा पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुका है। उनकी इस उपलब्धि के लिए इंद्रप्रस्थ नेटवर्क की तरफ से आयोजित समारोह में फॉर्मर केंद्रीय शिक्षा राज्य व परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली के हाथों सम्मानित किया। गौर रहे कि इससे पहले पिछले वर्ष सोनू ठाकुर को रोटरी क्लब द्वारा भी इस कार्य के लिए डीसी कुल्लू के हाथों सम्मानित किया जा चुका है। लिहाजा, पुरस्कार मिलने के बाद उन्हें बधाईयां देने वालों का तांता लगा हुआ है।
|
कुल्लू के रहने वाले सोनू ठाकुर ने अब तक तीन सौ अठहत्तर सांपों को जिंदा पकड़कर सैकडों लोगों की जिंदगियां बचाई हैं। सोनू पंद्रह साल की उम्र से ही जहरीले सांपों को पकड़ लोगों की जिंदगियों को बचाता आ रहा है। सोनू की इस बहादुरी के लिए उसे राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। सोनू को यह पुरस्कार दिल्ली के इंद्रप्रस्त नेटवर्क ने राजा राम मोहन रॉय मेमोरियल हॉल में एक समारोह के दौरान दिया गया। कुल्लू के खोखन के रहने वाला सोनू जहरीले सांपों को पकड़ने के लिए न तो किसी औजार का इस्तेमाल करता है और न ही किसी डंडे का। बता दें कि सोनू नंगे हाथों से ही सांपों को बिना कोई नुक्सान पहुंचाए पकड़ लेता है। कुल्लू में अगर कहीं भी अगर लोगों को सांप से खतरा हो तो बस सोनू को एक फोन करते हैं और सोनू मौके पर पहुंच चुटकियों में सांप को पकड़ लोगों की जान बचाता है। सोनू का कहना है कि वे अब तक तीन सौ अठहत्तर जहरीले सांपों को जिंदा पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुका है। उनकी इस उपलब्धि के लिए इंद्रप्रस्थ नेटवर्क की तरफ से आयोजित समारोह में फॉर्मर केंद्रीय शिक्षा राज्य व परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली के हाथों सम्मानित किया। गौर रहे कि इससे पहले पिछले वर्ष सोनू ठाकुर को रोटरी क्लब द्वारा भी इस कार्य के लिए डीसी कुल्लू के हाथों सम्मानित किया जा चुका है। लिहाजा, पुरस्कार मिलने के बाद उन्हें बधाईयां देने वालों का तांता लगा हुआ है।
|
ब्यास नदी - वेदों में 'आर्जिकिया' और संस्कृत वाड्मय में 'विपाशा' के नाम से वर्णित यह हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध नदी है, जो पीर पंजाल पर्वत शृंखला से रोहतांग के समीप ब्यास कुंड (समुद्रतल से 3978 मीटर) से निकलती है। ब्यास नदी के दो स्रोत हैं-'ब्यास रिखी' और 'ब्यास कुंड'। मनाली-लेह राजमार्ग पर चलते हुए रोहतांग पर्वत शिखर पर सड़क के दाएं किनारे पर एक बड़ी चट्टान है, उसके साथ ही पानी का चश्मा है, जहां से पानी की बारीक धारा नीचे को बहती है। यही ब्यास नदी का मूल स्रोत है जिसे 'ब्यास-रिखी' कहते हैं। ब्यास-रिखी और ब्यास-कुंड के बीच, परंतु दोनों से अधिक ऊंचाई पर इस क्षेत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण सरोवर दुशैहर स्थित है। दुशैहर सरोवर से आता 'राहणी नाला' ब्यास नदी का पहला सहायक नाला है। इन दोनों के संगम के साथ ही पूर्व दिशा से एक और नाला ब्यास के पानी से मिलता है। ब्यास-रिखी, दुशैहर-सर और भृगु-हिमखंड का पानी मार्ग में अनेक छोटे जल प्रपातों का पानी साथ लेकर पहाड़ों से टकराता और शोर मचाता तेज गति से नीचे गिरता हुआ गांव पलवान के निकट किंचित समतल क्षेत्र में पहुंचता है। यहां इसके साथ इसी की तरह पहाड़ों की चोटियों से उछलते, कूदते दो और नाले मिलते हैं-एक सोलंग नाला और दूसरा कारणी नाला। इनमें से सोलंग नाला का स्रोत ब्यास कुंड है। कंगणी नाले का अपना अलग महत्त्व है। इसका स्रोत ऊंचे पर्वत-शिखरों का हिमखंड है, जहां जोगणियां वास करती हैं। कुल्लू जिला में पार्वती, पिन, मलाणा-नाला, सोलंग, मनालसू, फोजल और सर्वरी इसकी सहायक नदियां/खड्डें हैं। ये मंडी जिला में बजौरा से थोड़ा पीछे मिलती हैं। मंडी जिला में ऊहल, ज्यूणी, रमा, बिना, हंसा, तीर्थन, बाखली, सुकेती, पनोडी, सोन और बढेड़ आदि इसकी सहायक खड्डें हैं। कांगड़ा और हमीरपुर जिलों की सीमाओं को यह संधोल-हारसीपत्तन के पास छूती हैं। हमीरपुर में कुणाह और मान तथा कांगडा में बिनवा, न्यूगल, बाण गंगा, बनेर, गज, मनूणी और चक्की आदि इसकी प्रसिद्ध सहायक खड्डें हैं। इनमें पार्वती और ऊहल आदि में अथाह जल-राशि संपन्न हैं। वैदिक काल तक ब्यास नदी का नाम अर्जीकी था ऋग्वैदिक काल 10. 65. 5 गंगा, यमुना, सरस्वती, शुतुद्रि (सतलुज), परूष्णी (रावी), असिक्नी (चिनाब), वितस्ता (झेलम) के साथ अर्जीकी का नाम भी आया है। जिस भू-खंड से अर्जीकी नदी बहती रही है, उसे आर्जीकी कहा गया है।
|
ब्यास नदी - वेदों में 'आर्जिकिया' और संस्कृत वाड्मय में 'विपाशा' के नाम से वर्णित यह हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध नदी है, जो पीर पंजाल पर्वत शृंखला से रोहतांग के समीप ब्यास कुंड से निकलती है। ब्यास नदी के दो स्रोत हैं-'ब्यास रिखी' और 'ब्यास कुंड'। मनाली-लेह राजमार्ग पर चलते हुए रोहतांग पर्वत शिखर पर सड़क के दाएं किनारे पर एक बड़ी चट्टान है, उसके साथ ही पानी का चश्मा है, जहां से पानी की बारीक धारा नीचे को बहती है। यही ब्यास नदी का मूल स्रोत है जिसे 'ब्यास-रिखी' कहते हैं। ब्यास-रिखी और ब्यास-कुंड के बीच, परंतु दोनों से अधिक ऊंचाई पर इस क्षेत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण सरोवर दुशैहर स्थित है। दुशैहर सरोवर से आता 'राहणी नाला' ब्यास नदी का पहला सहायक नाला है। इन दोनों के संगम के साथ ही पूर्व दिशा से एक और नाला ब्यास के पानी से मिलता है। ब्यास-रिखी, दुशैहर-सर और भृगु-हिमखंड का पानी मार्ग में अनेक छोटे जल प्रपातों का पानी साथ लेकर पहाड़ों से टकराता और शोर मचाता तेज गति से नीचे गिरता हुआ गांव पलवान के निकट किंचित समतल क्षेत्र में पहुंचता है। यहां इसके साथ इसी की तरह पहाड़ों की चोटियों से उछलते, कूदते दो और नाले मिलते हैं-एक सोलंग नाला और दूसरा कारणी नाला। इनमें से सोलंग नाला का स्रोत ब्यास कुंड है। कंगणी नाले का अपना अलग महत्त्व है। इसका स्रोत ऊंचे पर्वत-शिखरों का हिमखंड है, जहां जोगणियां वास करती हैं। कुल्लू जिला में पार्वती, पिन, मलाणा-नाला, सोलंग, मनालसू, फोजल और सर्वरी इसकी सहायक नदियां/खड्डें हैं। ये मंडी जिला में बजौरा से थोड़ा पीछे मिलती हैं। मंडी जिला में ऊहल, ज्यूणी, रमा, बिना, हंसा, तीर्थन, बाखली, सुकेती, पनोडी, सोन और बढेड़ आदि इसकी सहायक खड्डें हैं। कांगड़ा और हमीरपुर जिलों की सीमाओं को यह संधोल-हारसीपत्तन के पास छूती हैं। हमीरपुर में कुणाह और मान तथा कांगडा में बिनवा, न्यूगल, बाण गंगा, बनेर, गज, मनूणी और चक्की आदि इसकी प्रसिद्ध सहायक खड्डें हैं। इनमें पार्वती और ऊहल आदि में अथाह जल-राशि संपन्न हैं। वैदिक काल तक ब्यास नदी का नाम अर्जीकी था ऋग्वैदिक काल दस. पैंसठ. पाँच गंगा, यमुना, सरस्वती, शुतुद्रि , परूष्णी , असिक्नी , वितस्ता के साथ अर्जीकी का नाम भी आया है। जिस भू-खंड से अर्जीकी नदी बहती रही है, उसे आर्जीकी कहा गया है।
|
१३, २७ और १२ है। इसके प्रारम्भ में दस श्लोक और अन्त में प्रशस्ति के -रूप में आठ श्लोक हैं। मुख्यरूप से यह ग्रन्थ गद्य में है। इस ग्रन्थ के द्वारा -खरतरगच्छविषयक जानकारी हमें उपलब्ध होती है। इस ग्रन्थ की मुद्रित आवृत्ति में अधिकार के अनुसार विषयानुक्रम दिया गया है । इस प्रकार सौ अधिकारों के बारे में जो जानकारी प्रस्तुत की गई है उसमें से कुछ इस प्रकार है :
'करेमि भते' के बाद ईर्यापथिकी, पर्व के दिन ही पौषध का आचरण, -महावीरखामी के छ कल्याणक, अभयदेवसूरि के गच्छ के रूप में खरतर का उल्लेख, साधुओं के साथ साध्वियों के विहार का निषेध, द्विदलविचार, तरुण स्त्री को मूल प्रतिमा के पूजन का निषेध, श्रावकों को ग्यारह प्रतिमा वहन करने का निषेध, श्रावण अथवा भाद्रपद अधिक हो तो पर्युषण पर्व कत्र करना, सूरि को ही जिन प्रतिमा की प्रतिष्ठा का अधिकार, तिथि की वृद्धि में आय तिथि का स्वीकार, कार्तिक दो हो तो प्रथम कार्तिक में चातुर्मासादिक प्रतिक्रमण, जिन प्रतिमा का पूजन, योगोपधान की विधि, चतुर्थी के दिन पर्युषण, जिनवल्लभ, जिनदत्त एव जिनपति इन सूरियों की सामाचारी, पदस्थों की व्यवस्था, लौंच, अस्वाध्याय, गुरु के स्तूप की प्रतिष्ठा की, श्रावक के प्रतिक्रमण की, पौषध लेने की, दीक्षा देने की और उपधान की विधि, साध्वी को कल्पसूत्र पढने का अधिकार, विंशतिस्थानक तप की और शान्ति की विधि ।
'पडिक्कमणसामायारी ( प्रतिक्रमणसामाचारी ) :
यह जिनवल्लभगणी की जैन महाराष्ट्री में रचित ४० पद्य की कृति है। इसमें प्रतिक्रमण के बारे में विचारणा की गई है। यह सामाचारीशतक ( पत्र १२७ अ-१३८ आ ) में उद्धृत की गई है ।
सामायारी (सामाचारी ) :
जैन महाराष्ट्री में विरचित ३० पर्योों की इस कृति के रचयिता जिनदत्तसूर हैं। यह उपर्युक्त सामाचारीशतक ( पत्र १३८ आ-१३९ आ ) में उद्धृत की गई है। इसमें मूल प्रतिमा की पूजा का स्त्री के लिए निषेध इत्यादि बातें आती हैं ।
१ पोसह विहिपयरण (पौपध विधिप्रकरण ) :
यह भी उपर्युक्त जिनवल्लभगणी की कृति है। इसका साराश पन्द्रह पद्यों मे 'जिनप्रभसूरि ने विहिमग्गप्पवा ( विधिमार्गप्रपा) के पृ० २१ २२ में दिया है
|
तेरह, सत्ताईस और बारह है। इसके प्रारम्भ में दस श्लोक और अन्त में प्रशस्ति के -रूप में आठ श्लोक हैं। मुख्यरूप से यह ग्रन्थ गद्य में है। इस ग्रन्थ के द्वारा -खरतरगच्छविषयक जानकारी हमें उपलब्ध होती है। इस ग्रन्थ की मुद्रित आवृत्ति में अधिकार के अनुसार विषयानुक्रम दिया गया है । इस प्रकार सौ अधिकारों के बारे में जो जानकारी प्रस्तुत की गई है उसमें से कुछ इस प्रकार है : 'करेमि भते' के बाद ईर्यापथिकी, पर्व के दिन ही पौषध का आचरण, -महावीरखामी के छ कल्याणक, अभयदेवसूरि के गच्छ के रूप में खरतर का उल्लेख, साधुओं के साथ साध्वियों के विहार का निषेध, द्विदलविचार, तरुण स्त्री को मूल प्रतिमा के पूजन का निषेध, श्रावकों को ग्यारह प्रतिमा वहन करने का निषेध, श्रावण अथवा भाद्रपद अधिक हो तो पर्युषण पर्व कत्र करना, सूरि को ही जिन प्रतिमा की प्रतिष्ठा का अधिकार, तिथि की वृद्धि में आय तिथि का स्वीकार, कार्तिक दो हो तो प्रथम कार्तिक में चातुर्मासादिक प्रतिक्रमण, जिन प्रतिमा का पूजन, योगोपधान की विधि, चतुर्थी के दिन पर्युषण, जिनवल्लभ, जिनदत्त एव जिनपति इन सूरियों की सामाचारी, पदस्थों की व्यवस्था, लौंच, अस्वाध्याय, गुरु के स्तूप की प्रतिष्ठा की, श्रावक के प्रतिक्रमण की, पौषध लेने की, दीक्षा देने की और उपधान की विधि, साध्वी को कल्पसूत्र पढने का अधिकार, विंशतिस्थानक तप की और शान्ति की विधि । 'पडिक्कमणसामायारी : यह जिनवल्लभगणी की जैन महाराष्ट्री में रचित चालीस पद्य की कृति है। इसमें प्रतिक्रमण के बारे में विचारणा की गई है। यह सामाचारीशतक में उद्धृत की गई है । सामायारी : जैन महाराष्ट्री में विरचित तीस पर्योों की इस कृति के रचयिता जिनदत्तसूर हैं। यह उपर्युक्त सामाचारीशतक में उद्धृत की गई है। इसमें मूल प्रतिमा की पूजा का स्त्री के लिए निषेध इत्यादि बातें आती हैं । एक पोसह विहिपयरण : यह भी उपर्युक्त जिनवल्लभगणी की कृति है। इसका साराश पन्द्रह पद्यों मे 'जिनप्रभसूरि ने विहिमग्गप्पवा के पृशून्य इक्कीस बाईस में दिया है
|
Aligarh एएमयू में काला दिवस मनाने वाले एएमयू छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने पर मंगलवार को हिंदू वादी संगठनों के नेता मंगलवार को एएमयू कूच के लिए शहर में तीन जगह एकत्रित हुए।
अलीगढ़, जागरण संवाददाताः एएमयू में काला दिवस मनाने वाले एएमयू छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने पर मंगलवार को हिंदू वादी संगठनों के नेता मंगलवार को एएमयू कूच के लिए शहर में तीन जगह एकत्रित हुए। पुलिस पहले से ही मुस्तैद थी। पुलिस ने किसी को भी जाने नहीं दिया। इस दौरान नोकझोंक भी हुई। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत भाजयुमो नेता मंगलवार डीएस कालेज और रामलीला मैदान पर पहुंचे।
हिंदूवादियों के एएमयू कूच को देखते हुए पहले से ही दोनों जगह पुलिस छावनी में तब्दील कर दी गईं। भाजयुमो नेताओं के पहुंचने के बाद हिंदूवादियों का भाजयुमो नेता अमित गोस्वामी और सौरभ चौधरी के नेतृत्व में डीएस कालेज और रामलीला मैदान पर इकट्ठा होना शुरू हो गया।
यहां से जब एसपी सिटी कार्यालय और एएमयू कूच के लिए निकलने लगे तो एएसपी पुनीत द्विवेदी, एसीएम प्रथम संजय मिश्रा और इंस्पेक्टर गांधीपार्क ने रोक लिया।
भाजयुमो नेता अमित गोस्वामी और सौरभ चौधरी की पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से जमकर नोंकझोंक हुई। एएमयू कूच करने की जिद पर अड़े रहे। अमित गोस्वामी के अनुसार इसके बाद एसएसपी कलानिधि नैथानी ने सांसद सतीश गौतम से बात की। सांसद ने हमें फोन कर भरोसा दिया कार्रवाई कराई जाएगी।
उनके कहने पर पांच दिन के लिए प्रदर्शन को टाल दिया गया है। यदि जल्द गिरफ्तार नही किया जाता तो संविधान और सनातन के सम्मान में एएमयू कैंपस में जाकर काला दिवस मनाने वाले स्थान पर शौर्य दिवस मनाने को बाध्य होंगे।
इस मौके पर पूर्व एबीवीपी नेता बलदेव चौधरी सीटू, दीपक शर्मा आजाद, पंकज आर्य, आदित्य पंडित, अमित चौधरी, विशाल हिन्दू, अस्वनी पंडित, मोहित चौधरी भी मौजूद रहे।
बजरंग बल के गौरव शर्मा की अगुवाई में काफी संख्या में लोग सासनी गेट स्थित एडी कालोनी विकास पार्क में एकत्रित हुए। सभी ने एएमयू छात्रों पर कार्रवाई की मांग की। यहां सीओ इगलास राघवेंद्र सिंह व सासनी गेट इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने लोगों को समझाया। इसके बाद ही मामला शांत हो सका।
|
Aligarh एएमयू में काला दिवस मनाने वाले एएमयू छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने पर मंगलवार को हिंदू वादी संगठनों के नेता मंगलवार को एएमयू कूच के लिए शहर में तीन जगह एकत्रित हुए। अलीगढ़, जागरण संवाददाताः एएमयू में काला दिवस मनाने वाले एएमयू छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने पर मंगलवार को हिंदू वादी संगठनों के नेता मंगलवार को एएमयू कूच के लिए शहर में तीन जगह एकत्रित हुए। पुलिस पहले से ही मुस्तैद थी। पुलिस ने किसी को भी जाने नहीं दिया। इस दौरान नोकझोंक भी हुई। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत भाजयुमो नेता मंगलवार डीएस कालेज और रामलीला मैदान पर पहुंचे। हिंदूवादियों के एएमयू कूच को देखते हुए पहले से ही दोनों जगह पुलिस छावनी में तब्दील कर दी गईं। भाजयुमो नेताओं के पहुंचने के बाद हिंदूवादियों का भाजयुमो नेता अमित गोस्वामी और सौरभ चौधरी के नेतृत्व में डीएस कालेज और रामलीला मैदान पर इकट्ठा होना शुरू हो गया। यहां से जब एसपी सिटी कार्यालय और एएमयू कूच के लिए निकलने लगे तो एएसपी पुनीत द्विवेदी, एसीएम प्रथम संजय मिश्रा और इंस्पेक्टर गांधीपार्क ने रोक लिया। भाजयुमो नेता अमित गोस्वामी और सौरभ चौधरी की पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से जमकर नोंकझोंक हुई। एएमयू कूच करने की जिद पर अड़े रहे। अमित गोस्वामी के अनुसार इसके बाद एसएसपी कलानिधि नैथानी ने सांसद सतीश गौतम से बात की। सांसद ने हमें फोन कर भरोसा दिया कार्रवाई कराई जाएगी। उनके कहने पर पांच दिन के लिए प्रदर्शन को टाल दिया गया है। यदि जल्द गिरफ्तार नही किया जाता तो संविधान और सनातन के सम्मान में एएमयू कैंपस में जाकर काला दिवस मनाने वाले स्थान पर शौर्य दिवस मनाने को बाध्य होंगे। इस मौके पर पूर्व एबीवीपी नेता बलदेव चौधरी सीटू, दीपक शर्मा आजाद, पंकज आर्य, आदित्य पंडित, अमित चौधरी, विशाल हिन्दू, अस्वनी पंडित, मोहित चौधरी भी मौजूद रहे। बजरंग बल के गौरव शर्मा की अगुवाई में काफी संख्या में लोग सासनी गेट स्थित एडी कालोनी विकास पार्क में एकत्रित हुए। सभी ने एएमयू छात्रों पर कार्रवाई की मांग की। यहां सीओ इगलास राघवेंद्र सिंह व सासनी गेट इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने लोगों को समझाया। इसके बाद ही मामला शांत हो सका।
|
Reliance Jio: देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों में से एक रिलायंस समूह में अगली पीढ़ी को कमान देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने टेलीकॉम यूनिट रिलायंस जियो (Reliance Jio)के बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया है। अब उनकी जगह आकाश अंबानी को रिलायंस जियो के बोर्ड का चेयरमैन (Akash Ambani has been made the chairman of the board of Reliance Jio) बनाया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि आकाश अंबानी ने साल 2014 में रिलायंस जियो के बोर्ड में शामिल हुए थे।
पंकज मोहन पवार 27 जून से कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालेंगे। अगले पांच साल तक पंकज मोहन मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर रहेंगे। एडिशनल डायरेक्टर रामिंदर सिंह गुजराल और के. वी. चौधरी अब स्वतंत्र निदेशकों को तौर पर काम देखेंगे। शेयरधारकों के अप्रूवल के बाद ही यह नियुक्तियां मान्य होंगी। सेबी को दी गई जानकारी के मुताबिक, कंपनी के निदेशक के रूप में मुकेश डी. अंबानी (Mukesh D. Ambani) ने 27 जून, 2022 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चैयरमैन के रूप में आकाश एम. अंबानी (Akash M. Ambani) को Non-Executive Director की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी (Brown University) से अर्थशास्त्र में स्नातक आकाश अंबानी (Akash Ambani) से पहले उनके पिता मुकेश अंबानी कंपनी के चेयरमैन के नाते काम देख रहे थे। मुकेश अंबानी का चेयरमैन पद से उनका इस्तीफा भी बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है। इस नियुक्ति को नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने के तौर पर देखा जा रहा है। मुकेश अंबानी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio Platforms Limited) के चेयरमैन बने रहेंगे। बता दें कि जियो के 4G इको सिस्टम (Jio's 4G ecosystem) को खड़ा करने का श्रेय काफी हद तक आकाश अंबानी को जाता है। 2020 में दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों ने जियो में निवेश किया था, वैश्विक निवेश को भारत लाने में भी आकाश ने खूब मेहनत की थी।
बता दें कि रिलायंस जियो मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी है। Jio Platforms, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी की स्थापना साल 2019 में हुई थी। BSE पर आज रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के शेयर 2,529. 00 रुपये पर बंद हुए हैं, जो कल के बंद भाव से 1. 49 फीसदी ज्यादा है। एनएसई पर यह शेयर1. 50% चढ़कर ₹2530. 00 प्रति शेयर पर बंद हुआ।
|
Reliance Jio: देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों में से एक रिलायंस समूह में अगली पीढ़ी को कमान देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने टेलीकॉम यूनिट रिलायंस जियो के बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया है। अब उनकी जगह आकाश अंबानी को रिलायंस जियो के बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि आकाश अंबानी ने साल दो हज़ार चौदह में रिलायंस जियो के बोर्ड में शामिल हुए थे। पंकज मोहन पवार सत्ताईस जून से कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालेंगे। अगले पांच साल तक पंकज मोहन मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर रहेंगे। एडिशनल डायरेक्टर रामिंदर सिंह गुजराल और के. वी. चौधरी अब स्वतंत्र निदेशकों को तौर पर काम देखेंगे। शेयरधारकों के अप्रूवल के बाद ही यह नियुक्तियां मान्य होंगी। सेबी को दी गई जानकारी के मुताबिक, कंपनी के निदेशक के रूप में मुकेश डी. अंबानी ने सत्ताईस जून, दो हज़ार बाईस से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चैयरमैन के रूप में आकाश एम. अंबानी को Non-Executive Director की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। ब्राउन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक आकाश अंबानी से पहले उनके पिता मुकेश अंबानी कंपनी के चेयरमैन के नाते काम देख रहे थे। मुकेश अंबानी का चेयरमैन पद से उनका इस्तीफा भी बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है। इस नियुक्ति को नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने के तौर पर देखा जा रहा है। मुकेश अंबानी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के चेयरमैन बने रहेंगे। बता दें कि जियो के चारG इको सिस्टम को खड़ा करने का श्रेय काफी हद तक आकाश अंबानी को जाता है। दो हज़ार बीस में दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों ने जियो में निवेश किया था, वैश्विक निवेश को भारत लाने में भी आकाश ने खूब मेहनत की थी। बता दें कि रिलायंस जियो मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी है। Jio Platforms, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी की स्थापना साल दो हज़ार उन्नीस में हुई थी। BSE पर आज रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर दो,पाँच सौ उनतीस. शून्य रुपयापये पर बंद हुए हैं, जो कल के बंद भाव से एक. उनचास फीसदी ज्यादा है। एनएसई पर यह शेयरएक. पचास% चढ़कर दो हज़ार पाँच सौ तीस रुपया. शून्य प्रति शेयर पर बंद हुआ।
|
पुत्र के मिस से नारायण नाम का कीर्तन २१६ यह मन स्थिर नहीं होता, किसी एक वस्तु में टिकता नहीं भटकता रहता है। जैसे बच्चा सम्मुस रसी चमकीली वस्तु को ले दौड़ता है, उस पाकर फिर दूसरी की इच्छा करता हे । यह मन भी गिरगिट का भाँति रङ्ग बढलता है। बाल्यकाल में इसे माता से प्रेम होता है माँ की गोद को छोड़कर कही जाता नहा, वहीं सुख का अनुभव करता है, तनिक बडा हुआ तो ससा साथियों में सेल खिलोनों में प्रेम हो जाता है, दिन भर सेलने में हो उसे सुप मिलता है, सेल के पीछे भोजन विश्राम भी भूल जाता है। उससे भी कुछ वडा हुआ तो पुस्तकी मे प्रेम हो जाता है, दीपक जलाकर रानि रानि भर पढता रहता है, घर वाले मना करते हैं, "इतना मत पढा कर भेया स्वास्थ बिगड जायगा ।" किन्तु वह किसी की सुनता ही नहीं। किशोरावस्था बीतने पर जहाँ युवावस्था ने पदापण किया कि आँखों में मद भर गया, अब तो कारे मूड वाली का जमूडा बन गया । वह जेसे नचाती है नाचता है। उठ रे जमूडे, वेठ रे जमूडे, सो रे जमूडे, जो-जो वह कहती है, वही करता है, उसे आँखो से श्रोभल करने में कष्ट होता है । जहाँ बाल बच्चे हुए कि सब माया मोह उन्हीं मे एकत्रित हो जाता है। शने शने. वृद्धावस्था पदार्पण करने लगती है। काले मुख पर सफेदी आने लगती है । नार हिलने लगती है, कि अब बहुत पियों का सेवन कर लिया अब तो छोडो दाँत एक एक करके नमस्कार करते हुए विदा होते जाते हैं। मुँह पोपला हो जाता है, ऑसों की ज्योति घट जाती है, सभी इन्द्रियो की शक्ति क्षीण हो जाती है, किन्तु एक तृष्णा ही इस वृद्धावस्या म तरुणी हो जाती है अपेक्षाकृत अन्य लोगों के वूढो में अधिक तृष्णा होती है ।
श्रीशुकदेवजी कहते हैं - "राजन् । अब उस बूढे अजामिल का सम्पूर्ण स्नेह उस नारायण पुत्र में आकर घनीभूत हो गया ।
छोटा-सा बड़ा सुन्दर लड़का था । विशाल मस्तक पर लटकती हुई लटूरियों को हिलाता हुआ, जब वह किलकारियाँ भरता हुआ पिता की गोद में दौड़ता, तो अजामिल के रोम-रोम खिल जाते। उसे कसकर छाती से चिपटा लेता । बार-बार मुख चूमता और लारियाँ देते हुए कहता - मेरा बेटा, नारायण-नारायण नारायण । मेरो मुनु नारायण नारायण नारायण नारायण जब भोजन करने बैठता, तव कहता - "आटा, नारायण मम्मा कर लो । एक ग्रास उसे खिलाता एक अपने खाता । पानी पीना होता तो कहता - "आओ बेटा नारायण ! पप्पा पी लो । जब उसको उँगली पकड़कर चलाना सिखाता तब कहता -- 'नारायण वेटा, पाँ-पाँपैयाँ, गुरकी डालियाँ, नारायण की लेउ वलया ।' जब सुलाता तो गोदो लेकर उसके बदन को थपथपाते हुए कहता - "मेरे नारायण को आजारी नोंदरिया, काह्निकटे तेरी मूड़रियाँ ।" उठता तो पुकारता - नारायण नारायण चेटा, जाग गये और गोदी में आओ। अपनी स्त्री से कहता - "ओ सुनती नहीं है, नारायण का मुख धो दे, कुछ खाने को कलेवा दे दे।" इस प्रकार राजन् ! उठते-बैठते सोते-जागते उसका निरन्तर नारायण नाम का कीर्तन होने लगा ।"
इस पर शौनकजी ने कहा - "सूतजी ! आप ये कैसी बातें कर रहे हैं ? वह नारायण नाम का कहाँ कीर्तन करता था, वह तो अपने पुत्र नारायण का नाम लेता था। उसे आप नाम कीर्तन क्यों कहते हैं ?"
सूतजी ने कहा- "महाभाग ! कैसे भी सही, न सही भगवान् के उद्देश्य से, नाम लेता ही था । भगवान् का भी नाम तो नारायण हूँ। एक स्थान पर दो आदमी रघुनन्दन नाम के हैं। कोई दूर से रघुनन्दन पुकारता है, तो चाहे जिस रघुनन्दन को बुलावेः
|
पुत्र के मिस से नारायण नाम का कीर्तन दो सौ सोलह यह मन स्थिर नहीं होता, किसी एक वस्तु में टिकता नहीं भटकता रहता है। जैसे बच्चा सम्मुस रसी चमकीली वस्तु को ले दौड़ता है, उस पाकर फिर दूसरी की इच्छा करता हे । यह मन भी गिरगिट का भाँति रङ्ग बढलता है। बाल्यकाल में इसे माता से प्रेम होता है माँ की गोद को छोड़कर कही जाता नहा, वहीं सुख का अनुभव करता है, तनिक बडा हुआ तो ससा साथियों में सेल खिलोनों में प्रेम हो जाता है, दिन भर सेलने में हो उसे सुप मिलता है, सेल के पीछे भोजन विश्राम भी भूल जाता है। उससे भी कुछ वडा हुआ तो पुस्तकी मे प्रेम हो जाता है, दीपक जलाकर रानि रानि भर पढता रहता है, घर वाले मना करते हैं, "इतना मत पढा कर भेया स्वास्थ बिगड जायगा ।" किन्तु वह किसी की सुनता ही नहीं। किशोरावस्था बीतने पर जहाँ युवावस्था ने पदापण किया कि आँखों में मद भर गया, अब तो कारे मूड वाली का जमूडा बन गया । वह जेसे नचाती है नाचता है। उठ रे जमूडे, वेठ रे जमूडे, सो रे जमूडे, जो-जो वह कहती है, वही करता है, उसे आँखो से श्रोभल करने में कष्ट होता है । जहाँ बाल बच्चे हुए कि सब माया मोह उन्हीं मे एकत्रित हो जाता है। शने शने. वृद्धावस्था पदार्पण करने लगती है। काले मुख पर सफेदी आने लगती है । नार हिलने लगती है, कि अब बहुत पियों का सेवन कर लिया अब तो छोडो दाँत एक एक करके नमस्कार करते हुए विदा होते जाते हैं। मुँह पोपला हो जाता है, ऑसों की ज्योति घट जाती है, सभी इन्द्रियो की शक्ति क्षीण हो जाती है, किन्तु एक तृष्णा ही इस वृद्धावस्या म तरुणी हो जाती है अपेक्षाकृत अन्य लोगों के वूढो में अधिक तृष्णा होती है । श्रीशुकदेवजी कहते हैं - "राजन् । अब उस बूढे अजामिल का सम्पूर्ण स्नेह उस नारायण पुत्र में आकर घनीभूत हो गया । छोटा-सा बड़ा सुन्दर लड़का था । विशाल मस्तक पर लटकती हुई लटूरियों को हिलाता हुआ, जब वह किलकारियाँ भरता हुआ पिता की गोद में दौड़ता, तो अजामिल के रोम-रोम खिल जाते। उसे कसकर छाती से चिपटा लेता । बार-बार मुख चूमता और लारियाँ देते हुए कहता - मेरा बेटा, नारायण-नारायण नारायण । मेरो मुनु नारायण नारायण नारायण नारायण जब भोजन करने बैठता, तव कहता - "आटा, नारायण मम्मा कर लो । एक ग्रास उसे खिलाता एक अपने खाता । पानी पीना होता तो कहता - "आओ बेटा नारायण ! पप्पा पी लो । जब उसको उँगली पकड़कर चलाना सिखाता तब कहता -- 'नारायण वेटा, पाँ-पाँपैयाँ, गुरकी डालियाँ, नारायण की लेउ वलया ।' जब सुलाता तो गोदो लेकर उसके बदन को थपथपाते हुए कहता - "मेरे नारायण को आजारी नोंदरिया, काह्निकटे तेरी मूड़रियाँ ।" उठता तो पुकारता - नारायण नारायण चेटा, जाग गये और गोदी में आओ। अपनी स्त्री से कहता - "ओ सुनती नहीं है, नारायण का मुख धो दे, कुछ खाने को कलेवा दे दे।" इस प्रकार राजन् ! उठते-बैठते सोते-जागते उसका निरन्तर नारायण नाम का कीर्तन होने लगा ।" इस पर शौनकजी ने कहा - "सूतजी ! आप ये कैसी बातें कर रहे हैं ? वह नारायण नाम का कहाँ कीर्तन करता था, वह तो अपने पुत्र नारायण का नाम लेता था। उसे आप नाम कीर्तन क्यों कहते हैं ?" सूतजी ने कहा- "महाभाग ! कैसे भी सही, न सही भगवान् के उद्देश्य से, नाम लेता ही था । भगवान् का भी नाम तो नारायण हूँ। एक स्थान पर दो आदमी रघुनन्दन नाम के हैं। कोई दूर से रघुनन्दन पुकारता है, तो चाहे जिस रघुनन्दन को बुलावेः
|
देश के यशस्वी एवं ऊर्जावान शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल अपनी सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते हैं,कुशल राजनेता होने के साथ डॉ निशंक कलम के भी अच्छे ज्ञाता हैं,और कई कविताओं को समाज हित में लिख चुके हैं,नंदा कैसेट्स ने अभी भी है समय गीत को अपने यूट्यूब चैनल से रिलीज़ किया है जिसमें रमेश पोखरियाल निशंक ने ही आवाज दी है।
इन दिनों डॉ रमेश पोखरियाल देश को नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चाओं में हैं,इसी बीच उनकी बहुत पहले युवाओं को प्रेरित करती कुछ पंक्तियां गीत का रूप ले चुकी हैं जो नंदा कैसट्स ने लांच किया है,गीत के रचनाकार डॉ निशंक है और आवाज भी उन्होंने ही दी है यह गीत युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
यह भी पढ़ेंः अब दर्शक ऑनलाइन देख सकेंगे सुबेरो घाम फिल्म उर्मी नेगी ने की रिलीज़ !
डॉ निशंक युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं और उनके आदर्श भी हैं, समय कितना महत्व पूर्ण होता है इस गीत के माध्यम से युवाओं को सीखने को मिलेगा और मेहनत ही सफलता की जननी होती है ये इस गीत का मुख्य उदेश्य है।
यह भी पढ़ेंः दीवान सिंह पंवार ने गाया बद्री विशाल के रक्षक घंडियाल देव का जागर!
रमेश पोखरियाल 'निशंक' मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं (कविता, उपन्यास, खण्ड काव्य, लघु कहानी, यात्रा साहित्य आदि) में प्रकाशित उनकी कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है।
यह भी पढ़ेंः Kishan Mahipal का घागरा वीडियो रिलीज़ ! डांस और रैप का गजब तालमेल!
यह 'निशंक' के साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं (जर्मन, अंग्रेजी, फ्रैंच, तेलुगु, मलयालम, मराठी आदि) में अनूदित किया जा चुका है। इसके अलावा उनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनके साहित्य पर अब तक कई शिक्षाविद् ( श्यामधर तिवारी, डाॅ0 विनय डबराल, डाॅ0 नगेन्द्र, डाॅ0 सविता मोहन, डाॅ0 नन्द किशोर और डाॅ0 सुधाकर तिवारी) शोध कार्य तथा पी. एचडी. रिपोर्ट लिख चुके हैं।
यह भी पढ़ेंः जब धूम सिंह रावत ने दी नरेंद्र सिंह नेगी की रचना गौं छौं जाणू को आवाज !
अब भी डाॅ0 'निशंक' के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (गढ़वाल विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश, रोहेलखण्ड विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय) में शोध कार्य जारी है।
यह भी पढ़ेंः मैं बजो मुरली वीडियो हुआ रिलीज़ ,संजू सिलोड़ी संग सीमा भारती की जमी जोड़ी !
डॉ निशंक का पहला कविता संग्रह वर्ष 1983 में 'समर्पण' प्रकाशित हुआ। अब तक इनके 10 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 2 पर्यटन ग्रन्थ, 6 बाल साहित्य, 2 व्यक्तित्व विकास समेत कुल 4 दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद dr nishank लेखन जारी है।
यह भी पढ़ेंः किशन महिपाल ने त्रिवेंद्र सरकार पर साधा निशाना। कलाकारों की अनदेखी आखिर कब तक ?
अब तक डाॅ0 'निशंक' की प्रकाशित कृतियां निम्न हैः 1 . रोशनी की एक किरण (1986) 2. बस एक ही इच्छा,(1989),3. क्या नहीं हो सकता (1993)4. भीड़ साक्षी है (1993),5. एक और कहानी (2002)
प्रमुख उपन्यासः 1 मेजर निराला (1997) 2. पहाड़ से ऊंचा (2000),3. बीरा (2008),4. निशान्त (2008)
यह भी पढ़ेंः जय जवान कब ऐला स्वामी घर भैंसी ब्याईं च हरिभजन आकांक्षा का आर्मी गीत रिलीज़ !
|
देश के यशस्वी एवं ऊर्जावान शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल अपनी सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते हैं,कुशल राजनेता होने के साथ डॉ निशंक कलम के भी अच्छे ज्ञाता हैं,और कई कविताओं को समाज हित में लिख चुके हैं,नंदा कैसेट्स ने अभी भी है समय गीत को अपने यूट्यूब चैनल से रिलीज़ किया है जिसमें रमेश पोखरियाल निशंक ने ही आवाज दी है। इन दिनों डॉ रमेश पोखरियाल देश को नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चाओं में हैं,इसी बीच उनकी बहुत पहले युवाओं को प्रेरित करती कुछ पंक्तियां गीत का रूप ले चुकी हैं जो नंदा कैसट्स ने लांच किया है,गीत के रचनाकार डॉ निशंक है और आवाज भी उन्होंने ही दी है यह गीत युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। यह भी पढ़ेंः अब दर्शक ऑनलाइन देख सकेंगे सुबेरो घाम फिल्म उर्मी नेगी ने की रिलीज़ ! डॉ निशंक युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं और उनके आदर्श भी हैं, समय कितना महत्व पूर्ण होता है इस गीत के माध्यम से युवाओं को सीखने को मिलेगा और मेहनत ही सफलता की जननी होती है ये इस गीत का मुख्य उदेश्य है। यह भी पढ़ेंः दीवान सिंह पंवार ने गाया बद्री विशाल के रक्षक घंडियाल देव का जागर! रमेश पोखरियाल 'निशंक' मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं में प्रकाशित उनकी कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है। यह भी पढ़ेंः Kishan Mahipal का घागरा वीडियो रिलीज़ ! डांस और रैप का गजब तालमेल! यह 'निशंक' के साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं में अनूदित किया जा चुका है। इसके अलावा उनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनके साहित्य पर अब तक कई शिक्षाविद् शोध कार्य तथा पी. एचडी. रिपोर्ट लिख चुके हैं। यह भी पढ़ेंः जब धूम सिंह रावत ने दी नरेंद्र सिंह नेगी की रचना गौं छौं जाणू को आवाज ! अब भी डाॅशून्य 'निशंक' के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में शोध कार्य जारी है। यह भी पढ़ेंः मैं बजो मुरली वीडियो हुआ रिलीज़ ,संजू सिलोड़ी संग सीमा भारती की जमी जोड़ी ! डॉ निशंक का पहला कविता संग्रह वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरासी में 'समर्पण' प्रकाशित हुआ। अब तक इनके दस कविता संग्रह, बारह कहानी संग्रह, दस उपन्यास, दो पर्यटन ग्रन्थ, छः बाल साहित्य, दो व्यक्तित्व विकास समेत कुल चार दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद dr nishank लेखन जारी है। यह भी पढ़ेंः किशन महिपाल ने त्रिवेंद्र सरकार पर साधा निशाना। कलाकारों की अनदेखी आखिर कब तक ? अब तक डाॅशून्य 'निशंक' की प्रकाशित कृतियां निम्न हैः एक . रोशनी की एक किरण दो. बस एक ही इच्छा,,तीन. क्या नहीं हो सकता चार. भीड़ साक्षी है ,पाँच. एक और कहानी प्रमुख उपन्यासः एक मेजर निराला दो. पहाड़ से ऊंचा ,तीन. बीरा ,चार. निशान्त यह भी पढ़ेंः जय जवान कब ऐला स्वामी घर भैंसी ब्याईं च हरिभजन आकांक्षा का आर्मी गीत रिलीज़ !
|
नई दिल्लीः
उत्तर प्रदेश (Utter Pradesh) के कानपुर में सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया. सोशल मीडिया पर विकास दुबे के एनकाउंटर पर लोग और बॉलीवुड की हस्तियां रिएक्शन दे रही हैं. बॉलीवुड के फिल्ममेकर हों या एक्ट्रेस सभी इस एंकाउंटर को लेकर ट्वीट कर रहे हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. कोई विकास दुबे (Vikas Dubey) पर फिल्म बनाने की बात कर रहा है तो कोई एनकाउंटर को शर्मनाक बता रहा है.
यह भी पढ़ेंः विकास दुबे की गिरफ्तारी पर अनुभव सिन्हा का आया रिएक्शन, कहा- तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो..
बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) ने भी गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) के एंनकाउंटर पर ट्वीट किया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) ने अपने ट्वीट में लिखा, 'Wow, ये उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी!! और फिर लोग कहते हैं कि बॉलीवुड की कहानियां सच्चाई से बेहद दूर होती हैं.' तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) के इस ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स अपने रिएक्शन दे रहे हैं.
बता दें कि कुख्यात अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह उज्जैन जिले में महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचा था. पुजारी और गार्ड द्वारा पहचाने जाने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. मध्य प्रदेश पुलिस ने कल रात ही विकास दुबे (Vikas Dubey) को उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले किया था. यूपी एसटीएफ की टीम कुख्यात अपराधी विकास को मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर ला रही थी. इस दौरान रास्ते में एसटीएफ की गाड़ी पलट गई. इस गाड़ी में विकास दुबे भी मौजूद था. बताया जा रहा है कि गाड़ी के पलटने के बाद विकास ने मौका देखकर पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की इसी दौरान हुए एनकाउंटर में वह मारा गया है.
|
नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के कानपुर में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया. सोशल मीडिया पर विकास दुबे के एनकाउंटर पर लोग और बॉलीवुड की हस्तियां रिएक्शन दे रही हैं. बॉलीवुड के फिल्ममेकर हों या एक्ट्रेस सभी इस एंकाउंटर को लेकर ट्वीट कर रहे हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. कोई विकास दुबे पर फिल्म बनाने की बात कर रहा है तो कोई एनकाउंटर को शर्मनाक बता रहा है. यह भी पढ़ेंः विकास दुबे की गिरफ्तारी पर अनुभव सिन्हा का आया रिएक्शन, कहा- तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो.. बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने भी गैंगस्टर विकास दुबे के एंनकाउंटर पर ट्वीट किया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. तापसी पन्नू ने अपने ट्वीट में लिखा, 'Wow, ये उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी!! और फिर लोग कहते हैं कि बॉलीवुड की कहानियां सच्चाई से बेहद दूर होती हैं.' तापसी पन्नू के इस ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स अपने रिएक्शन दे रहे हैं. बता दें कि कुख्यात अपराधी विकास दुबे को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह उज्जैन जिले में महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचा था. पुजारी और गार्ड द्वारा पहचाने जाने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. मध्य प्रदेश पुलिस ने कल रात ही विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले किया था. यूपी एसटीएफ की टीम कुख्यात अपराधी विकास को मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर ला रही थी. इस दौरान रास्ते में एसटीएफ की गाड़ी पलट गई. इस गाड़ी में विकास दुबे भी मौजूद था. बताया जा रहा है कि गाड़ी के पलटने के बाद विकास ने मौका देखकर पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की इसी दौरान हुए एनकाउंटर में वह मारा गया है.
|
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर ईडी का शिंकजा कसता जा रहा है। मनी लांड्रिंग मामले में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं अब कोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला भी सुरक्षित रख लिया है। मतलब अब सत्येन्द्र जैन को 18 जून तक जेल में रहना पड़ेगा। वहीं खबरों कि मानें तो सत्येन्द्र जैन ने ईडी से कहा है कि कोरोना की वजह से उनकी याददाश्त चली गई है। इस पर भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने तंज कसा है।
दरअसल ईडी ने कोर्ट को बताया कि 'जब भी जैन से सवाल पूछे जाते हैं तो वो कहते हैं कि उनको कोविड हुआ था, जिसकी वजह से अब उनकी याददाश्त चली गई है। ' ईडी ने बताया कि 'कुछ सवालों के जवाब में उन्होंने याददाश्त चले जाने की बात कही है। ' अब इसी बार भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने लिखा कि 'कोरोना से मेरी याददाश्त चली गई- ED से बोले सत्येंद्र जैन, चिंता ना करो जैन साहब ED ऐसी डॉक्टर है कि सारी याददाश्त एक झटके में याद दिला देगी। ' सोशल मीडिया पर लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
महाशय झा नाम के यूजर ने लिखा कि 'कुछ तो गड़बड़ है, सत्येन्द्र जैन खुद कह रहे हैं कि कोरोना से उनकी याददाश्त चली गई, फिर भी अरविंद केजरीवाल जी उन्हें अब तक मंत्री बना रखे हैं। जबकि ऐसे व्यक्ति को संवैधानिक पद पर बने रहना ही असंवैधानिक है। ' विकास नाम के यूजर ने लिखा कि 'जिसकी याददाश्त चली गई हो, जिसका स्वास्थ्य खराब हो, उसको दिल्ली का स्वास्थ्य मंत्री पद पर बनाये रखकर यह दिल्ली वालों के स्वास्थय के साथ खिलवाड़ नहीं है क्या?
बता दें कि ईडी की तरफ से दावा किया गया है कि ED ने सत्येन्द्र के दिल्ली-गुरुग्राम के करीब 7 ठिकानों पर छापा मारा गया था। करीब 2. 82 करोड़ नगद और 1. 80 किलोग्राम सोने के सिक्के बरामद हुए थे। ये छापेमारी तब हुई थी जब सत्येन्द्र जैन ईडी की हिरासत में थे। ईडी की हिरासत में रहने के दौरान सत्येन्द्र जैन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसके बाद आप नेताओं और समर्थकों ने ईडी हिरासत में सत्येंद्र जैन को यातना देने का आरोप लगाया और उत्पीड़न के लिए बीजेपी की केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
|
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर ईडी का शिंकजा कसता जा रहा है। मनी लांड्रिंग मामले में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं अब कोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला भी सुरक्षित रख लिया है। मतलब अब सत्येन्द्र जैन को अट्ठारह जून तक जेल में रहना पड़ेगा। वहीं खबरों कि मानें तो सत्येन्द्र जैन ने ईडी से कहा है कि कोरोना की वजह से उनकी याददाश्त चली गई है। इस पर भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने तंज कसा है। दरअसल ईडी ने कोर्ट को बताया कि 'जब भी जैन से सवाल पूछे जाते हैं तो वो कहते हैं कि उनको कोविड हुआ था, जिसकी वजह से अब उनकी याददाश्त चली गई है। ' ईडी ने बताया कि 'कुछ सवालों के जवाब में उन्होंने याददाश्त चले जाने की बात कही है। ' अब इसी बार भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने लिखा कि 'कोरोना से मेरी याददाश्त चली गई- ED से बोले सत्येंद्र जैन, चिंता ना करो जैन साहब ED ऐसी डॉक्टर है कि सारी याददाश्त एक झटके में याद दिला देगी। ' सोशल मीडिया पर लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। महाशय झा नाम के यूजर ने लिखा कि 'कुछ तो गड़बड़ है, सत्येन्द्र जैन खुद कह रहे हैं कि कोरोना से उनकी याददाश्त चली गई, फिर भी अरविंद केजरीवाल जी उन्हें अब तक मंत्री बना रखे हैं। जबकि ऐसे व्यक्ति को संवैधानिक पद पर बने रहना ही असंवैधानिक है। ' विकास नाम के यूजर ने लिखा कि 'जिसकी याददाश्त चली गई हो, जिसका स्वास्थ्य खराब हो, उसको दिल्ली का स्वास्थ्य मंत्री पद पर बनाये रखकर यह दिल्ली वालों के स्वास्थय के साथ खिलवाड़ नहीं है क्या? बता दें कि ईडी की तरफ से दावा किया गया है कि ED ने सत्येन्द्र के दिल्ली-गुरुग्राम के करीब सात ठिकानों पर छापा मारा गया था। करीब दो. बयासी करोड़ नगद और एक. अस्सी किलोग्रामग्राम सोने के सिक्के बरामद हुए थे। ये छापेमारी तब हुई थी जब सत्येन्द्र जैन ईडी की हिरासत में थे। ईडी की हिरासत में रहने के दौरान सत्येन्द्र जैन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसके बाद आप नेताओं और समर्थकों ने ईडी हिरासत में सत्येंद्र जैन को यातना देने का आरोप लगाया और उत्पीड़न के लिए बीजेपी की केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
|
कारगिल युद्ध के दौरान 16 हजार फुट ऊंची चौकी नंबर 5203 को मुक्त करवाते समय अपने 14 सैनिकों के साथ शहीदी का जाम पीने वाले अमर शहीद कै. अमोल कालिया का सोमवार को 47वां जन्मदिन नंगल की शिवालिक एवेन्यू कालोनी में बने अमोल कालिया पार्क में मनाया गया। कै. अमोल कालिया मेमोरियल सोसायटी द्वारा उनके पिता सतपाल कालिया के नेतृत्व में मनाए गए अमर शहीद कै. अमोल कालिया के 47वें जन्मदिन के मौके पर सबसे पहले पार्क में लगी अमोल कालिया के प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना व हवन यज्ञ किया गया।
इस मौके पर अमोल कालिया की माता ऊषा कालिया, भाई विंग कमांडर अमन कालिया, हेमा कालिया व भतीजी इशिता कालिया के अलावा पार्षद दीपक नंदा, डा. एसएस बैंस, एसडी सैनी, दर्शन सिंह, सतनाम सत्ता, नमन कालिया, सुमन वशिष्ट, हरिंद्र शर्मा, सुदेश राणा, रजिंद्र हंस व केके सूद सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। जून, 1999 में कैप्टन अमोल कालिया को उनके अन्य 13 साथियों के साथ बटालिक सेक्टर में चौकी नंबर 5203 पर तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और नौ जून को दुश्मन सेना से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गए थे।
|
कारगिल युद्ध के दौरान सोलह हजार फुट ऊंची चौकी नंबर पाँच हज़ार दो सौ तीन को मुक्त करवाते समय अपने चौदह सैनिकों के साथ शहीदी का जाम पीने वाले अमर शहीद कै. अमोल कालिया का सोमवार को सैंतालीसवां जन्मदिन नंगल की शिवालिक एवेन्यू कालोनी में बने अमोल कालिया पार्क में मनाया गया। कै. अमोल कालिया मेमोरियल सोसायटी द्वारा उनके पिता सतपाल कालिया के नेतृत्व में मनाए गए अमर शहीद कै. अमोल कालिया के सैंतालीसवें जन्मदिन के मौके पर सबसे पहले पार्क में लगी अमोल कालिया के प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना व हवन यज्ञ किया गया। इस मौके पर अमोल कालिया की माता ऊषा कालिया, भाई विंग कमांडर अमन कालिया, हेमा कालिया व भतीजी इशिता कालिया के अलावा पार्षद दीपक नंदा, डा. एसएस बैंस, एसडी सैनी, दर्शन सिंह, सतनाम सत्ता, नमन कालिया, सुमन वशिष्ट, हरिंद्र शर्मा, सुदेश राणा, रजिंद्र हंस व केके सूद सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। जून, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में कैप्टन अमोल कालिया को उनके अन्य तेरह साथियों के साथ बटालिक सेक्टर में चौकी नंबर पाँच हज़ार दो सौ तीन पर तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और नौ जून को दुश्मन सेना से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गए थे।
|
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने रविवार (26 जून) को सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनके प्रति राजनीतिक 'विद्वेष' के साथ काम कर रही है और वह उनके उस शासन की विरासत को मिटाने की कोशिश कर रही है, जिसने अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ मैत्री के लक्ष्य के चलते लिट्टे के साथ अलगाववादी युद्ध समाप्त किया था। ग्रामीण क्षेत्र पोलोन्नारूवा में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना की मौजूदा सरकार लिट्टे के साथ चली लड़ाई को समाप्त करने की उनकी विरासत को जनता की यादों से मिटाने की कोशिश कर रही है।
राजपक्षे की सरकार अल्पसंख्यक तमिल एवं मुस्लिम समुदायों के बीच अलोकप्रिय हो गई थी। उन्होंने तय समय से दो साल पहले कराए गए राष्ट्रपति पद के चुनाव में राजपक्षे को हराने के लिए सिरीसेना का साथ दिया था। उनके सत्ता से हटने के बाद, उनके परिवार को कई कथित गलत कार्यों की जांचों का सामना करना पड़ा। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम (लिट्टे) ने एक अलग तमिल देश की मांग को लेकर श्रीलंकाई बलों के साथ युद्ध लड़ा था। 37 साल तक चला यह युद्ध वर्ष 2009 में कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद खत्म हुआ। अधिकार समूहों का दावा है कि सरकारी बलों ने इस युद्ध के अंतिम महीनों में लगभग 40 हजार नागरिकों को मार डाला था।
|
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने रविवार को सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनके प्रति राजनीतिक 'विद्वेष' के साथ काम कर रही है और वह उनके उस शासन की विरासत को मिटाने की कोशिश कर रही है, जिसने अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ मैत्री के लक्ष्य के चलते लिट्टे के साथ अलगाववादी युद्ध समाप्त किया था। ग्रामीण क्षेत्र पोलोन्नारूवा में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना की मौजूदा सरकार लिट्टे के साथ चली लड़ाई को समाप्त करने की उनकी विरासत को जनता की यादों से मिटाने की कोशिश कर रही है। राजपक्षे की सरकार अल्पसंख्यक तमिल एवं मुस्लिम समुदायों के बीच अलोकप्रिय हो गई थी। उन्होंने तय समय से दो साल पहले कराए गए राष्ट्रपति पद के चुनाव में राजपक्षे को हराने के लिए सिरीसेना का साथ दिया था। उनके सत्ता से हटने के बाद, उनके परिवार को कई कथित गलत कार्यों की जांचों का सामना करना पड़ा। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम ने एक अलग तमिल देश की मांग को लेकर श्रीलंकाई बलों के साथ युद्ध लड़ा था। सैंतीस साल तक चला यह युद्ध वर्ष दो हज़ार नौ में कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद खत्म हुआ। अधिकार समूहों का दावा है कि सरकारी बलों ने इस युद्ध के अंतिम महीनों में लगभग चालीस हजार नागरिकों को मार डाला था।
|
उत्तर प्रदेश में गुरुवार को पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। इस चरण में पश्चिम के 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले गए। कुल मिलाकर 60. 17 फ़ीसदी वोटिंग हुई। पिछले चुनाव में यानी 2017 में इन सीटों पर 63. 5 फ़ीसदी वोट पड़े थे।
आम तौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने कहा है कि चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीक़े संपन्न कराया गया है और कहीं से किसी भी तरह की अप्रिय घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। शाम 6 बजे तक रिपोर्ट आई थी कि 57. 79 फ़ीसदी मतदान हुआ था। सबसे ज़्यादा मतदान कैराना (75. 12%) में और सबसे कम साहिबाबाद (45%) में हुआ है। वोटिंग के दौरान कुछ ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें आईं। हालाँकि, चुनाव आयोग का कहना है कि उन्हें तुरंत ठीक कर दिया गया था।
इससे पहले शुरुआती घंटों में वोटिंग की रफ़्तार धीमी रही लेकिन 1 बजे के बाद यह तेज़ हुई है। 9 बजे तक 11 जिलों में 7. 93% मतदान हुआ था जबकि 11 बजे तक यह आंकड़ा 20. 03% था। 1 बजे तक 35. 03% जबकि 3 बजे तक 48. 24% मतदान हुआ था। जिन जिलों में वोटिंग हुई उनमें शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा शामिल हैं।
58 सीटों पर मतदान के लिए 10,853 पोलिंग स्टेशन बनाए गए जबकि पोलिंग बूथों की संख्या 26,027 थी। 58 सीटों के लिए 623 उम्मीदवार मैदान में हैं इनमें से 23 महिलाएं हैं। इन 58 सीटों पर 2. 28 करोड़ मतदाता हैं।
इस चरण में बीजेपी के 9 मंत्रियों की साख दांव पर है। ये मंत्री हैं- मथुरा से विधायक एवं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, शिकारपुर से विधायक एवं वन-पर्यावरण मंत्री अनिल शर्मा, थाना भवन सीट से विधायक एवं गन्ना मंत्री सुरेश राणा, गाजियाबाद से विधायक एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, हस्तिनापुर से विधायक और बाढ़ मंत्री दिनेश खटीक, अतरौली से विधायक और खेल एवं युवा मामलों के मंत्री संदीप सिंह, आगरा कैंट के विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री जी. एस. धर्मेश, मुजफ्फरनगर सदर से विधायक एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल, छाता से विधायक एवं डेयरी मंत्री नारायण चौधरी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बार बीजेपी की राह आसान नहीं दिखती क्योंकि 1 साल तक चले किसान आंदोलन के कारण इस इलाके के सियासी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान साल 2013 के मुजफ्फरनगर के दंगों का बार-बार जिक्र किया है। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद इस इलाके में जबरदस्त सियासी ध्रुवीकरण हुआ था और बीजेपी को लगातार कामयाबी मिलती रही थी लेकिन इस बार सपा-रालोद गठबंधन मजबूत दिखाई दे रहा है।
हालांकि इस इलाके में कांग्रेस, बीएसपी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार भी मैदान में हैं और कई सीटों पर इन्होंने मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। लेकिन फिर भी यह माना जा रहा है कि अधिकतर सीटों पर बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच ही जोरदार भिड़ंत होगी।
यूपी पुलिस की ओर से पीएससी की कई कंपनियां तैनात की गईं। इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों के भी जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया।
पहले चरण में कैराना, मुजफ्फरनगर, सिवालखास, सरधना नोएडा, खुर्जा, पुरकाजी, खतौली, बड़ौत, लोनी, मुरादनगर, धौलाना, हापुड़, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर, अतरौली, मांट, छाता आदि सीटों पर वोटिंग हुई।
|
उत्तर प्रदेश में गुरुवार को पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। इस चरण में पश्चिम के ग्यारह जिलों की अट्ठावन सीटों पर वोट डाले गए। कुल मिलाकर साठ. सत्रह फ़ीसदी वोटिंग हुई। पिछले चुनाव में यानी दो हज़ार सत्रह में इन सीटों पर तिरेसठ. पाँच फ़ीसदी वोट पड़े थे। आम तौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने कहा है कि चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीक़े संपन्न कराया गया है और कहीं से किसी भी तरह की अप्रिय घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। शाम छः बजे तक रिपोर्ट आई थी कि सत्तावन. उन्यासी फ़ीसदी मतदान हुआ था। सबसे ज़्यादा मतदान कैराना में और सबसे कम साहिबाबाद में हुआ है। वोटिंग के दौरान कुछ ईवीएम में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें आईं। हालाँकि, चुनाव आयोग का कहना है कि उन्हें तुरंत ठीक कर दिया गया था। इससे पहले शुरुआती घंटों में वोटिंग की रफ़्तार धीमी रही लेकिन एक बजे के बाद यह तेज़ हुई है। नौ बजे तक ग्यारह जिलों में सात. तिरानवे% मतदान हुआ था जबकि ग्यारह बजे तक यह आंकड़ा बीस. तीन% था। एक बजे तक पैंतीस. तीन% जबकि तीन बजे तक अड़तालीस. चौबीस% मतदान हुआ था। जिन जिलों में वोटिंग हुई उनमें शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा शामिल हैं। अट्ठावन सीटों पर मतदान के लिए दस,आठ सौ तिरेपन पोलिंग स्टेशन बनाए गए जबकि पोलिंग बूथों की संख्या छब्बीस,सत्ताईस थी। अट्ठावन सीटों के लिए छः सौ तेईस उम्मीदवार मैदान में हैं इनमें से तेईस महिलाएं हैं। इन अट्ठावन सीटों पर दो. अट्ठाईस करोड़ मतदाता हैं। इस चरण में बीजेपी के नौ मंत्रियों की साख दांव पर है। ये मंत्री हैं- मथुरा से विधायक एवं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, शिकारपुर से विधायक एवं वन-पर्यावरण मंत्री अनिल शर्मा, थाना भवन सीट से विधायक एवं गन्ना मंत्री सुरेश राणा, गाजियाबाद से विधायक एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, हस्तिनापुर से विधायक और बाढ़ मंत्री दिनेश खटीक, अतरौली से विधायक और खेल एवं युवा मामलों के मंत्री संदीप सिंह, आगरा कैंट के विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री जी. एस. धर्मेश, मुजफ्फरनगर सदर से विधायक एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल, छाता से विधायक एवं डेयरी मंत्री नारायण चौधरी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बार बीजेपी की राह आसान नहीं दिखती क्योंकि एक साल तक चले किसान आंदोलन के कारण इस इलाके के सियासी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान साल दो हज़ार तेरह के मुजफ्फरनगर के दंगों का बार-बार जिक्र किया है। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद इस इलाके में जबरदस्त सियासी ध्रुवीकरण हुआ था और बीजेपी को लगातार कामयाबी मिलती रही थी लेकिन इस बार सपा-रालोद गठबंधन मजबूत दिखाई दे रहा है। हालांकि इस इलाके में कांग्रेस, बीएसपी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार भी मैदान में हैं और कई सीटों पर इन्होंने मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। लेकिन फिर भी यह माना जा रहा है कि अधिकतर सीटों पर बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच ही जोरदार भिड़ंत होगी। यूपी पुलिस की ओर से पीएससी की कई कंपनियां तैनात की गईं। इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों के भी जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया। पहले चरण में कैराना, मुजफ्फरनगर, सिवालखास, सरधना नोएडा, खुर्जा, पुरकाजी, खतौली, बड़ौत, लोनी, मुरादनगर, धौलाना, हापुड़, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर, अतरौली, मांट, छाता आदि सीटों पर वोटिंग हुई।
|
नई दिल्लीः AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एकबार फिर विवादित बयान दिया है। अकबरुद्दीन ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ संसद में कानून बनते हैं। अगर मुसलमान चाहे तो संसद में उनकी भागीदारी बढ सकती है। जिससे हमारे हक में कानून बनेंगे। इस वीडियो में अखलाख और जुनैद की हत्या का जिक्र करते हुए अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या मुसलमान होना गुनाह है। अकबरुद्दीन ने कहा कि मुसलमान अगर उठ जाए तो फिर किसी के रहम और करम की जरूरत नहीं है।
|
नई दिल्लीः AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एकबार फिर विवादित बयान दिया है। अकबरुद्दीन ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ संसद में कानून बनते हैं। अगर मुसलमान चाहे तो संसद में उनकी भागीदारी बढ सकती है। जिससे हमारे हक में कानून बनेंगे। इस वीडियो में अखलाख और जुनैद की हत्या का जिक्र करते हुए अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या मुसलमान होना गुनाह है। अकबरुद्दीन ने कहा कि मुसलमान अगर उठ जाए तो फिर किसी के रहम और करम की जरूरत नहीं है।
|
स्वीडन में स्कूल, रेस्तरां, बार आदि भी बंद नहीं किए गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली. देश में 2 महीने से भी ज्यादा वक्त के बाद 8 जून से रेस्टोरेंट्स खोलने (Restaurants Open Soon) की इज़ाजत मिल गई है. लेकिन अबकी बार जब आप खाना खाने बाहर जाएंगे तो आपको सबकुछ अलग दिखेगा. बैठने की जगह से लेकर किचन तक. इसके लिए बड़े फाइव स्टार रेस्टोरेंट अपनी तैयारी कर भी चुके हैं. लगभग सभी बड़े रेस्टोरेंट ने कॉन्टेक्टलेस (Restaurants Change after Lockdown) या कम से कम कॉन्टेक्ट से साथ खाना परोसने का फैसला लिया है. ROSEATE HOTELS N RESORTS के सीईओ कुश कपूर बताते हैं कि हमने पहली बार यह सिस्टम भारत में लॉन्च किया है. आप अपने मोबाइल से किचन की सारी तस्वीर देख सकते हैं. आप खुद देख सकते हैं कि खाना कैसे बनाया जा रहा है और हाईजिन का कैसे खयाल रखा जा रहा है.
ऑनलाइन ऑर्डर-रेस्टोरेंट में आने के बाद आपको वेटर से ऑर्डर के जिए संपर्क ना करना पड़े इसलिए बड़े रेस्टोरेंट पहले से ही ऑर्डर ले रहे हैं. सभी बड़े रेस्टोरेंट डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा दे रहे हैं . ऑर्डर से लेकर पेमेंट तक सबकुछ आपके मोबाइल पर है .
हाइजिन सभी बड़े रेस्टेरेंट ने अपने यहां हाइजिन के खास प्रोटोकॉल बनाए हैं. खास तौर पर शेफ तो चीफ हाईजिन ऑफिसर भी बनाया गया है. हर कुक और कर्मचारियों के लिए समय समय पर हाथ धोना और मास्क पहनना अनिवार्य है. सिर्फ इतना ही कर्चारियों के बीच आपस में सोशल डिस्टेंसिंग भी रखी गई है.
सीटिंग अरेंजमेंट आपको तमाम बड़े रेस्टेरेंट में अक टेबल छोड़ कर ही जगह मिलेगी. एक टोबल पर दो से ज्यादा लोग भी नहीं बैठ सकेंगे.
मैकडॉनल्डफास्टफूड चेन मैकडॉनल्ड्स एक बार फिर से ग्राहकों के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए तैयार है. वेस्टलाइफ डेवलपमेंट जो पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स का संचालन करती है का कहना है कि इस क्विक सर्विस रेस्टेरेंट चेन मे नए सुरक्षा मानक अपनाए हैं. सिर्फ कर्मचारी ही नहीं ग्राहकों को भी अनिवार्य रूप से थर्मल चेकअप से गुजरना होगा और सोशल डिस्टेंसिंग नॉर्म्स एक प्रमुख विशेषता होगी. चुकि यहां अधिकतर सेल्फ सर्विस होती है इसलिए सेल्फ-ऑर्डरिंग कियोस्क के फ्रंट काउंटर , वॉशरूम के साथ-साथ डाइनिंग क्षेत्र में टेबल और कुर्सी की जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग मार्किंग होगी .
एयरोसिटी के रोजिएट होटल का DEL रेस्टोरेंट- एयरोसिटी मे स्थित रोजिएट होटल के DEL रेस्टोरेंट में आप तभी दाखिल हो सकेंगे अगर आपने पहले से टेबल बुक किया है . इसके लिए एक अलग ऐप भी तैयार किया गया है. यह ऐप आपको टेबल बुक करने और खाना ऑर्डर करने के साथ किचन की लाइव फीड भी देगा.
(रोहन सिंह, संवाददाता, CNBC आवाज़)
.
|
स्वीडन में स्कूल, रेस्तरां, बार आदि भी बंद नहीं किए गए हैं. नई दिल्ली. देश में दो महीने से भी ज्यादा वक्त के बाद आठ जून से रेस्टोरेंट्स खोलने की इज़ाजत मिल गई है. लेकिन अबकी बार जब आप खाना खाने बाहर जाएंगे तो आपको सबकुछ अलग दिखेगा. बैठने की जगह से लेकर किचन तक. इसके लिए बड़े फाइव स्टार रेस्टोरेंट अपनी तैयारी कर भी चुके हैं. लगभग सभी बड़े रेस्टोरेंट ने कॉन्टेक्टलेस या कम से कम कॉन्टेक्ट से साथ खाना परोसने का फैसला लिया है. ROSEATE HOTELS N RESORTS के सीईओ कुश कपूर बताते हैं कि हमने पहली बार यह सिस्टम भारत में लॉन्च किया है. आप अपने मोबाइल से किचन की सारी तस्वीर देख सकते हैं. आप खुद देख सकते हैं कि खाना कैसे बनाया जा रहा है और हाईजिन का कैसे खयाल रखा जा रहा है. ऑनलाइन ऑर्डर-रेस्टोरेंट में आने के बाद आपको वेटर से ऑर्डर के जिए संपर्क ना करना पड़े इसलिए बड़े रेस्टोरेंट पहले से ही ऑर्डर ले रहे हैं. सभी बड़े रेस्टोरेंट डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा दे रहे हैं . ऑर्डर से लेकर पेमेंट तक सबकुछ आपके मोबाइल पर है . हाइजिन सभी बड़े रेस्टेरेंट ने अपने यहां हाइजिन के खास प्रोटोकॉल बनाए हैं. खास तौर पर शेफ तो चीफ हाईजिन ऑफिसर भी बनाया गया है. हर कुक और कर्मचारियों के लिए समय समय पर हाथ धोना और मास्क पहनना अनिवार्य है. सिर्फ इतना ही कर्चारियों के बीच आपस में सोशल डिस्टेंसिंग भी रखी गई है. सीटिंग अरेंजमेंट आपको तमाम बड़े रेस्टेरेंट में अक टेबल छोड़ कर ही जगह मिलेगी. एक टोबल पर दो से ज्यादा लोग भी नहीं बैठ सकेंगे. मैकडॉनल्डफास्टफूड चेन मैकडॉनल्ड्स एक बार फिर से ग्राहकों के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए तैयार है. वेस्टलाइफ डेवलपमेंट जो पश्चिम और दक्षिण भारत में मैकडॉनल्ड्स का संचालन करती है का कहना है कि इस क्विक सर्विस रेस्टेरेंट चेन मे नए सुरक्षा मानक अपनाए हैं. सिर्फ कर्मचारी ही नहीं ग्राहकों को भी अनिवार्य रूप से थर्मल चेकअप से गुजरना होगा और सोशल डिस्टेंसिंग नॉर्म्स एक प्रमुख विशेषता होगी. चुकि यहां अधिकतर सेल्फ सर्विस होती है इसलिए सेल्फ-ऑर्डरिंग कियोस्क के फ्रंट काउंटर , वॉशरूम के साथ-साथ डाइनिंग क्षेत्र में टेबल और कुर्सी की जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग मार्किंग होगी . एयरोसिटी के रोजिएट होटल का DEL रेस्टोरेंट- एयरोसिटी मे स्थित रोजिएट होटल के DEL रेस्टोरेंट में आप तभी दाखिल हो सकेंगे अगर आपने पहले से टेबल बुक किया है . इसके लिए एक अलग ऐप भी तैयार किया गया है. यह ऐप आपको टेबल बुक करने और खाना ऑर्डर करने के साथ किचन की लाइव फीड भी देगा. .
|
जम्मू एवं कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई।
श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस अधिकारी ने बताया, "युवक की पहचान जाहिद राशिद गनई के रूप में की गई है। उसे दरबग गांव के पास गोली लगी। "
उन्होंने बताया, "उसे गोली लगने के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। "
बडगाम जिले के दरबग गांव में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने गांव को चारों ओर से घेर लिया, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई।
मुठभेड़ के दौरान क्षेत्र में प्रदर्शन हुए।
प्रदर्शन कर रहे युवकों ने दरबग गांव से तीन किलोमीटर दूर नागम गांव में अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के जवानों पर पथराव किया।
घटनास्थल के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को रवाना किया गया है। (आईएएनएस)
|
जम्मू एवं कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस अधिकारी ने बताया, "युवक की पहचान जाहिद राशिद गनई के रूप में की गई है। उसे दरबग गांव के पास गोली लगी। " उन्होंने बताया, "उसे गोली लगने के बाद इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। " बडगाम जिले के दरबग गांव में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने गांव को चारों ओर से घेर लिया, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। मुठभेड़ के दौरान क्षेत्र में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन कर रहे युवकों ने दरबग गांव से तीन किलोमीटर दूर नागम गांव में अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के जवानों पर पथराव किया। घटनास्थल के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को रवाना किया गया है।
|
अगर आप उन लोगों में से हैं जो कुछ ही महीनों में कारों से बोर हो जाते हैं, तो उन्हें कार लीज या मंथली सबस्क्रिप्शन पर कार लेनी चाहिए। लीज पर कारें 12 महीने से लेकर 48 महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। वहीं लीज खत्म होने के बाद आप दूसरा व्हीकल चुन सकते हैं, या फिर लीज प्लान को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं कार खऱीदने के बाद कुछ ही महीनों में कार बेचना ज्यादा मुश्किल भरा साबित हो सकता है, वो भी तब जब आपने कार ईएमआई पर ली हो।
कार लीज पर लेने से पहले एक बात जरूर जान लें कि मंथली सबस्क्रिप्शन पर मिलने वाली कारों पर कमर्शियल नंबरप्लेट मिलती है। यानी कि इन पर आपको सफेद बैकग्राउंड पर काले अक्षरों से लिखी नंबर प्लेट नहीं मिलेगी, जो प्राइवेट कारों पर मिलती है। अगर आप रोज दिल्ली से गुड़गांव जाते हैं, तो आपको स्टेट टैक्स चुकाना पड़ेगा। अगर आप ड्राइविंग के शौकीन हैं और अकसर लंबी ट्रिप्स पर जाने का शौक रखते हैं, तो आपको हर बार अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ेगा।
वहीं अगर आपको कार कस्टमाइजेशन का शौक है, जिसे आप अपनी जरूरतों के मुताबिक मॉडिफाई कराते हैं, तो लीज व्हीकल को भूल जाएं। इसकी वजह है कि ज्यादातर लीज कॉन्ट्रैक्ट्स में स्टीरियो सिस्टम या अपनी मर्जी के स्पीकर्स तक नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में कार खरीदना ही बेहतर ऑप्शन है। यहां तक कि आप अपनी मर्जी की लाइट्स, सीट फैब्रिक, अलॉय व्हील्स भी लगवा पाएंगे।
कार लीज पर लेना उनके लिए बेस्ट है, जिनके पास कार खरीदने के लिए डाउनपेमेंट नहीं होती या फिर वे लोग जिनकी ट्रांसफरेबल जॉब होती है और सालभर बाद किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर हो जाता है। वहीं कार खरीदने के लिए आपको डाउनपेमेंट के साथ टैक्स और इंश्योरेंस जैसे दूसरे चार्जेज भी चुकाने पड़ते हैं। इसके मुकाबले लीज पर व्हीकल लेने के लिए आपको केवल एक साल का इंश्योरेंस और मंथली सबस्क्रिप्शन देने पड़ता है, जो हर कार का अलग-अलग होता है। वहीं लीज में कार मैंटिनेंस का भी जंझट नहीं होता, क्योंकि कई कार कंपनियां कार मैंटिनेंस का खर्च खुद वहन करती हैं।
|
अगर आप उन लोगों में से हैं जो कुछ ही महीनों में कारों से बोर हो जाते हैं, तो उन्हें कार लीज या मंथली सबस्क्रिप्शन पर कार लेनी चाहिए। लीज पर कारें बारह महीने से लेकर अड़तालीस महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। वहीं लीज खत्म होने के बाद आप दूसरा व्हीकल चुन सकते हैं, या फिर लीज प्लान को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं कार खऱीदने के बाद कुछ ही महीनों में कार बेचना ज्यादा मुश्किल भरा साबित हो सकता है, वो भी तब जब आपने कार ईएमआई पर ली हो। कार लीज पर लेने से पहले एक बात जरूर जान लें कि मंथली सबस्क्रिप्शन पर मिलने वाली कारों पर कमर्शियल नंबरप्लेट मिलती है। यानी कि इन पर आपको सफेद बैकग्राउंड पर काले अक्षरों से लिखी नंबर प्लेट नहीं मिलेगी, जो प्राइवेट कारों पर मिलती है। अगर आप रोज दिल्ली से गुड़गांव जाते हैं, तो आपको स्टेट टैक्स चुकाना पड़ेगा। अगर आप ड्राइविंग के शौकीन हैं और अकसर लंबी ट्रिप्स पर जाने का शौक रखते हैं, तो आपको हर बार अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ेगा। वहीं अगर आपको कार कस्टमाइजेशन का शौक है, जिसे आप अपनी जरूरतों के मुताबिक मॉडिफाई कराते हैं, तो लीज व्हीकल को भूल जाएं। इसकी वजह है कि ज्यादातर लीज कॉन्ट्रैक्ट्स में स्टीरियो सिस्टम या अपनी मर्जी के स्पीकर्स तक नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में कार खरीदना ही बेहतर ऑप्शन है। यहां तक कि आप अपनी मर्जी की लाइट्स, सीट फैब्रिक, अलॉय व्हील्स भी लगवा पाएंगे। कार लीज पर लेना उनके लिए बेस्ट है, जिनके पास कार खरीदने के लिए डाउनपेमेंट नहीं होती या फिर वे लोग जिनकी ट्रांसफरेबल जॉब होती है और सालभर बाद किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर हो जाता है। वहीं कार खरीदने के लिए आपको डाउनपेमेंट के साथ टैक्स और इंश्योरेंस जैसे दूसरे चार्जेज भी चुकाने पड़ते हैं। इसके मुकाबले लीज पर व्हीकल लेने के लिए आपको केवल एक साल का इंश्योरेंस और मंथली सबस्क्रिप्शन देने पड़ता है, जो हर कार का अलग-अलग होता है। वहीं लीज में कार मैंटिनेंस का भी जंझट नहीं होता, क्योंकि कई कार कंपनियां कार मैंटिनेंस का खर्च खुद वहन करती हैं।
|
बीजिंगः चीन में दो बच्चे पैदा करने के क़ानून के बाद दम्पतियों की लम्बी लाइन अस्पतालों में लगने लगी है. आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, चीन में दूसरे बच्चे के लिए पात्रता प्राप्त कर चुके जोड़ों में से 60 प्रतिशत की उम्र 35 से अधिक है. और इनमें से बहुत से सलाह या सहायता के लिए प्रजनन विशेषज्ञों का दौरा कर रहे हैं.
चिकित्सक लांग वेन, हुबेई प्रांत में वुहान विश्वविद्यालय के रेनमिन अस्पताल की उर्वरा शक्ति केंद्र के लिए काम करते है. अपने पुरुष रोगियों में उन्होंने पाया कि आधे से अधिक शुक्राणु की गुणवत्ता के कारण बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे है.
आमतौर पर 80 से अधिक आगंतुकों को एक दिन में देखा जाने लगा है. उनकी वीर्य जाँच में शुक्राणुओं की मात्रा और गुणवत्ता में कमी पाई गई है. चीन के राज्य परिषद ने मंगलवार को बताया था कि सार्वभौमिक दो बच्चे की नीति लागू करने और नए कानून से परिवार नियोजन सेवाओं में सुधार आएगा.
कैबिनेट स्तर के दस्तावेज़ में दो बच्चों के परिवार के लिए एक समग्र समर्थन प्रणाली की स्थापना का उद्देश्य बताया है जो जनसंख्या और परिवार नियोजन पर देश के कानून में संशोधन को प्रोत्साहित करता है. यह 27 दिसंबर को शीर्ष विधायिका द्वारा अनुमोदित किया गया था.
|
बीजिंगः चीन में दो बच्चे पैदा करने के क़ानून के बाद दम्पतियों की लम्बी लाइन अस्पतालों में लगने लगी है. आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, चीन में दूसरे बच्चे के लिए पात्रता प्राप्त कर चुके जोड़ों में से साठ प्रतिशत की उम्र पैंतीस से अधिक है. और इनमें से बहुत से सलाह या सहायता के लिए प्रजनन विशेषज्ञों का दौरा कर रहे हैं. चिकित्सक लांग वेन, हुबेई प्रांत में वुहान विश्वविद्यालय के रेनमिन अस्पताल की उर्वरा शक्ति केंद्र के लिए काम करते है. अपने पुरुष रोगियों में उन्होंने पाया कि आधे से अधिक शुक्राणु की गुणवत्ता के कारण बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे है. आमतौर पर अस्सी से अधिक आगंतुकों को एक दिन में देखा जाने लगा है. उनकी वीर्य जाँच में शुक्राणुओं की मात्रा और गुणवत्ता में कमी पाई गई है. चीन के राज्य परिषद ने मंगलवार को बताया था कि सार्वभौमिक दो बच्चे की नीति लागू करने और नए कानून से परिवार नियोजन सेवाओं में सुधार आएगा. कैबिनेट स्तर के दस्तावेज़ में दो बच्चों के परिवार के लिए एक समग्र समर्थन प्रणाली की स्थापना का उद्देश्य बताया है जो जनसंख्या और परिवार नियोजन पर देश के कानून में संशोधन को प्रोत्साहित करता है. यह सत्ताईस दिसंबर को शीर्ष विधायिका द्वारा अनुमोदित किया गया था.
|
Guru Gochar: अक्षय तृतीया के दिन शनिवार को देवगुरु बृहस्पति का गोचर होगा। इस दिन गुरु मेष राशि में गोचर करेगा। मेष में सूर्य और राहु पहले से मौजूद होने के कारण कई नए योग बनेंगे जो सभी राशियों पर समान रूप से प्रभाव डालेंगे। यद्यपि कुछ राशियों पर इसका प्रभाव शुभ होगा और कुछ पर अशुभ।
मेष राशि में होने वाली सूर्य, गुरु और राहु की युति वृषभ राशि के लिए बारहवें घर में होगी। ऐसे में आपको अनावश्यक खर्चा करना पड़ सकता है। साथ ही खराब स्वास्थ्य की वजह से भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी नए प्रोजेक्ट में हाथ डालने से पहले उसकी जांच-पड़ताल अवश्य करें, अन्यथा हानि हो सकती है।
सूर्य, गुरु और राहु की मेष में होने वाली त्रिग्रही युति के कारण सिंह राशि को विशेष रूप से संभल कर रहने की आवश्यकता है। वाहन चलाते समय सावधानी रखें, दुर्घटना के योग बन रहे हैं। वैवाहिक जीवन में तनाव रहेगा। कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचना आपके नुकसान को कम करवा सकता है।
मेष राशि में बनने वाला ग्रहण योग और गुरु-चांडाल योग मीन राशि के लिए पारिवारिक समस्याएं लेकर आ रहा है। यदि वे अपने क्रोध पर काबू नहीं करेंगे तो परिस्थितियां हाथ से बाहर जा सकती हैं। प्रोफेशनल लाइफ में भी उतार-चढ़ाव का दौर बना रहेगा। अधिकारियों की नाराजगी के चलते कार्यस्थल पर बेहद दबाव और स्ट्रेस का सामना करना पड़ेगा।
डिस्क्लेमरः यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
|
Guru Gochar: अक्षय तृतीया के दिन शनिवार को देवगुरु बृहस्पति का गोचर होगा। इस दिन गुरु मेष राशि में गोचर करेगा। मेष में सूर्य और राहु पहले से मौजूद होने के कारण कई नए योग बनेंगे जो सभी राशियों पर समान रूप से प्रभाव डालेंगे। यद्यपि कुछ राशियों पर इसका प्रभाव शुभ होगा और कुछ पर अशुभ। मेष राशि में होने वाली सूर्य, गुरु और राहु की युति वृषभ राशि के लिए बारहवें घर में होगी। ऐसे में आपको अनावश्यक खर्चा करना पड़ सकता है। साथ ही खराब स्वास्थ्य की वजह से भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी नए प्रोजेक्ट में हाथ डालने से पहले उसकी जांच-पड़ताल अवश्य करें, अन्यथा हानि हो सकती है। सूर्य, गुरु और राहु की मेष में होने वाली त्रिग्रही युति के कारण सिंह राशि को विशेष रूप से संभल कर रहने की आवश्यकता है। वाहन चलाते समय सावधानी रखें, दुर्घटना के योग बन रहे हैं। वैवाहिक जीवन में तनाव रहेगा। कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचना आपके नुकसान को कम करवा सकता है। मेष राशि में बनने वाला ग्रहण योग और गुरु-चांडाल योग मीन राशि के लिए पारिवारिक समस्याएं लेकर आ रहा है। यदि वे अपने क्रोध पर काबू नहीं करेंगे तो परिस्थितियां हाथ से बाहर जा सकती हैं। प्रोफेशनल लाइफ में भी उतार-चढ़ाव का दौर बना रहेगा। अधिकारियों की नाराजगी के चलते कार्यस्थल पर बेहद दबाव और स्ट्रेस का सामना करना पड़ेगा। डिस्क्लेमरः यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Newsचौबीस इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
|
क्या आप जानते हैं कि आप एथिल अल्कोहल पी सकते हैं?
वफ़ल केक का बना एक केक आसान है!
कुत्ते से चाय गुलाबः अच्छे और बुरे। एक कुत्ते के साथ चाय बनाने के लिए कैसे?
|
क्या आप जानते हैं कि आप एथिल अल्कोहल पी सकते हैं? वफ़ल केक का बना एक केक आसान है! कुत्ते से चाय गुलाबः अच्छे और बुरे। एक कुत्ते के साथ चाय बनाने के लिए कैसे?
|
उत्तराखंड में शुक्रवार को कोविड-19 के 588 नए मरीज मिले, जिससे महामारी से पीड़ितों का आंकड़ा बढ़कर 17,865 हो गया। इसके अलावा 11 मरीजों की संक्रमण से मृत्यु हो गयी।
देहरादूनः कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद भी संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रमुख बंसीधर भगत कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और संपर्क में आने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपनी कोरोना जांच करवा लें।
बंसीधर भगत ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'मेरा कल कोरोना वायरस के लिए परीक्षण किया गया, जिसमें मेरी परीक्षण रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं, पिछले सप्ताह मेरे संपर्क में जो भी आए हैं, वे कृपया परीक्षण करवा लें। आप सभी के आशीर्वाद से पुनः आपके बीच जल्द ही लौटूंगा। '
आपको बता दें, उत्तराखंड में शुक्रवार को कोविड-19 के 588 नए मरीज मिले, जिससे महामारी से पीड़ितों का आंकड़ा बढ़कर 17,865 हो गया। इसके अलावा 11 मरीजों की संक्रमण से मृत्यु हो गयी।
यहां प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, कोरोना वायरस से संक्रमित सर्वाधिक 185 नए मामले देहरादून जिले में मिले जबकि हरिद्वार में 120, उधमसिंह नगर में 72, चमोली में 58 और नैनीताल में 55 मरीज सामने आए। शुक्रवार को कोरोना ने 11 और मरीजों की जान ले ली। आठ मरीजों ने एम्स ऋषिकेश में दम तोड़ा जबकि एक अन्य की मृत्यु दून मेडिकल कॉलेज में हुई। दो अन्य ने हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
अब तक प्रदेश में महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या 239 हो चुकी है। प्रदेश में अब तक कुल 12124 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या 5440 है। प्रदेश में कोविड-19 के 62 मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।
|
उत्तराखंड में शुक्रवार को कोविड-उन्नीस के पाँच सौ अठासी नए मरीज मिले, जिससे महामारी से पीड़ितों का आंकड़ा बढ़कर सत्रह,आठ सौ पैंसठ हो गया। इसके अलावा ग्यारह मरीजों की संक्रमण से मृत्यु हो गयी। देहरादूनः कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद भी संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख बंसीधर भगत कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और संपर्क में आने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपनी कोरोना जांच करवा लें। बंसीधर भगत ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'मेरा कल कोरोना वायरस के लिए परीक्षण किया गया, जिसमें मेरी परीक्षण रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं, पिछले सप्ताह मेरे संपर्क में जो भी आए हैं, वे कृपया परीक्षण करवा लें। आप सभी के आशीर्वाद से पुनः आपके बीच जल्द ही लौटूंगा। ' आपको बता दें, उत्तराखंड में शुक्रवार को कोविड-उन्नीस के पाँच सौ अठासी नए मरीज मिले, जिससे महामारी से पीड़ितों का आंकड़ा बढ़कर सत्रह,आठ सौ पैंसठ हो गया। इसके अलावा ग्यारह मरीजों की संक्रमण से मृत्यु हो गयी। यहां प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, कोरोना वायरस से संक्रमित सर्वाधिक एक सौ पचासी नए मामले देहरादून जिले में मिले जबकि हरिद्वार में एक सौ बीस, उधमसिंह नगर में बहत्तर, चमोली में अट्ठावन और नैनीताल में पचपन मरीज सामने आए। शुक्रवार को कोरोना ने ग्यारह और मरीजों की जान ले ली। आठ मरीजों ने एम्स ऋषिकेश में दम तोड़ा जबकि एक अन्य की मृत्यु दून मेडिकल कॉलेज में हुई। दो अन्य ने हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल में अंतिम सांस ली। अब तक प्रदेश में महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या दो सौ उनतालीस हो चुकी है। प्रदेश में अब तक कुल बारह हज़ार एक सौ चौबीस मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या पाँच हज़ार चार सौ चालीस है। प्रदेश में कोविड-उन्नीस के बासठ मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।
|
पटना। राजधानी पटना में मंगलवार (12 जनवरी) की शाम एयरपोर्ट पर कार्यरत इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार अपराधियों ने रूपेश कुमार पर ताबड़तोड़ 6 राउंड फायरिंग की और फिर हथियार लहराते हुए फरार हो गए। घायल अवस्था में रूपेश कुमार को नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
घटना शास्त्री नगर थाना अंतर्गत पुनाइचाक इलाके में स्थित कुसुम विला अपार्टमेंट की है। खबर के मुताबिक रूपेश कुमार एयरपोर्ट से वापस घर लौट रहे थे। इस दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। इस गोली कांड के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलने के बाद आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची।
मौके पर पहुंचे एसएसपी उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि सवा सात बजे अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच करने में जुट गयी है. बहुत जल्द अपराधी पुलिस के शिकंज में होंगे।
|
पटना। राजधानी पटना में मंगलवार की शाम एयरपोर्ट पर कार्यरत इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार अपराधियों ने रूपेश कुमार पर ताबड़तोड़ छः राउंड फायरिंग की और फिर हथियार लहराते हुए फरार हो गए। घायल अवस्था में रूपेश कुमार को नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना शास्त्री नगर थाना अंतर्गत पुनाइचाक इलाके में स्थित कुसुम विला अपार्टमेंट की है। खबर के मुताबिक रूपेश कुमार एयरपोर्ट से वापस घर लौट रहे थे। इस दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। इस गोली कांड के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलने के बाद आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची। मौके पर पहुंचे एसएसपी उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि सवा सात बजे अज्ञात अपराधियों ने गोली मार दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच करने में जुट गयी है. बहुत जल्द अपराधी पुलिस के शिकंज में होंगे।
|
क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ :
आरयू के हजारों स्टूडेंट्स का छात्रवृति फॉर्म फिल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि जब स्टूडेंट ऑनलाइन फॉर्म को ओपन कर रहे हैं तो वह सस्पेक्टेड बता रहा है। इससे परेशान हजारों स्टूडेंट आरयू के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां भी स्टूडेंट्स को समस्या का सॉल्यूशन नहीं मिल पा रहा है। आरयू से स्टूडेंट्स को समाज कल्याण विभाग की राह दिखाई जा रही है।
यूजी यानि अंडर ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स इन दिनों एग्जाम फॉर्म और छात्रवृति फॉर्म ऑनलाइन फिल कर रहे हैं। इसमें एग्जाम फॉर्म तो स्टूडेंट्स फिल कर पा रहे हैं लेकिन सीबीएसई से इंटरमीडिएट करने वाले स्टूडेंट्स का छात्रवृत्ति फॉर्म फिल नहीं हो रहा है। स्टूडेंट्स जब छात्रवृत्ति फॉर्म फिल करने के लिए वेबसाइट ओपन करते हैं तो सस्पेक्टेड बता रहा है। इससे स्टूडेंट परेशान हैं।
आरयू से समस्या का समाधान नहीं होने पर कई स्टूडेंट्स समाज कल्याण विभाग के पास पहुंच रहे हैं। वहां पर समाज कल्याण अधिकारी भी स्टूडेंट्स को अपना दुखड़ा सुना रहे हैं। समाज कल्याण ऑफिस के कर्मचारी स्टूडेंट्स को बता रहे हैं कि उनके पास अभी सीबीएसई का डाटा ही अबेलवल नहीं हैं। इसी के चलते छात्रवृत्ति फॉर्म फिल नहीं हो पा रहे हैं। जबकि यूपी बोर्ड का डाटा है इसलिए उनके फॉर्म फिल करने में समस्या नहीं आ रही हैं। अफसरों ने इस मामले में सीबीएसई का डाटा मांगा है, डाटा मिलते ही स्टूडेंट्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। अफसरों ने बताया कि डाटा एक-दो दिन में ही मिल जाएगा।
छात्रवृत्ति फॉर्म फिल कर रहा था लेकिन वह सस्पेक्टेड बता रहा है। तीन दिन से परेशान था आरयू पहुंचा वहां पर कोई समाधान नहीं मिला। अब समाज कल्याण जा रहा हूं।
दो दिन से छात्रवृत्ति फॉर्म फिल कर रहा हूं। आरयू से समाज कल्याण ऑफिस पहुंचा। वहां पर बताया कि सीबीएसई के स्टूडेंट्स के साथ प्रॉब्लम आ रही है इसका डाटा मांगा गया है। एक दो दिन में समस्या दूर हो जाएगी।
सीबीएसई के स्टूडेंट्स का डाटा हमारे पास भेजा जाता है, लेकिन इस बार अभी तक डाटा आया नहीं आया है। डाटा मिलते ही स्टूडेंट्स की समस्या का समाधान हो जाएगा।
-स्टूडेंट्स के छात्रवृत्ति फॉर्म फिल करने में समस्या आरयू से नहीं बल्कि समाज कल्याण विभाग से आ रही है। इस बारे में बात की गई तो बताया कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा।
|
क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ : आरयू के हजारों स्टूडेंट्स का छात्रवृति फॉर्म फिल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि जब स्टूडेंट ऑनलाइन फॉर्म को ओपन कर रहे हैं तो वह सस्पेक्टेड बता रहा है। इससे परेशान हजारों स्टूडेंट आरयू के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां भी स्टूडेंट्स को समस्या का सॉल्यूशन नहीं मिल पा रहा है। आरयू से स्टूडेंट्स को समाज कल्याण विभाग की राह दिखाई जा रही है। यूजी यानि अंडर ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स इन दिनों एग्जाम फॉर्म और छात्रवृति फॉर्म ऑनलाइन फिल कर रहे हैं। इसमें एग्जाम फॉर्म तो स्टूडेंट्स फिल कर पा रहे हैं लेकिन सीबीएसई से इंटरमीडिएट करने वाले स्टूडेंट्स का छात्रवृत्ति फॉर्म फिल नहीं हो रहा है। स्टूडेंट्स जब छात्रवृत्ति फॉर्म फिल करने के लिए वेबसाइट ओपन करते हैं तो सस्पेक्टेड बता रहा है। इससे स्टूडेंट परेशान हैं। आरयू से समस्या का समाधान नहीं होने पर कई स्टूडेंट्स समाज कल्याण विभाग के पास पहुंच रहे हैं। वहां पर समाज कल्याण अधिकारी भी स्टूडेंट्स को अपना दुखड़ा सुना रहे हैं। समाज कल्याण ऑफिस के कर्मचारी स्टूडेंट्स को बता रहे हैं कि उनके पास अभी सीबीएसई का डाटा ही अबेलवल नहीं हैं। इसी के चलते छात्रवृत्ति फॉर्म फिल नहीं हो पा रहे हैं। जबकि यूपी बोर्ड का डाटा है इसलिए उनके फॉर्म फिल करने में समस्या नहीं आ रही हैं। अफसरों ने इस मामले में सीबीएसई का डाटा मांगा है, डाटा मिलते ही स्टूडेंट्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। अफसरों ने बताया कि डाटा एक-दो दिन में ही मिल जाएगा। छात्रवृत्ति फॉर्म फिल कर रहा था लेकिन वह सस्पेक्टेड बता रहा है। तीन दिन से परेशान था आरयू पहुंचा वहां पर कोई समाधान नहीं मिला। अब समाज कल्याण जा रहा हूं। दो दिन से छात्रवृत्ति फॉर्म फिल कर रहा हूं। आरयू से समाज कल्याण ऑफिस पहुंचा। वहां पर बताया कि सीबीएसई के स्टूडेंट्स के साथ प्रॉब्लम आ रही है इसका डाटा मांगा गया है। एक दो दिन में समस्या दूर हो जाएगी। सीबीएसई के स्टूडेंट्स का डाटा हमारे पास भेजा जाता है, लेकिन इस बार अभी तक डाटा आया नहीं आया है। डाटा मिलते ही स्टूडेंट्स की समस्या का समाधान हो जाएगा। -स्टूडेंट्स के छात्रवृत्ति फॉर्म फिल करने में समस्या आरयू से नहीं बल्कि समाज कल्याण विभाग से आ रही है। इस बारे में बात की गई तो बताया कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा।
|
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) 2021 की एक उम्मीदवार ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर आरोप लगाया है कि उसकी आवेदन संख्या से जुड़ी OMR शीट में हेराफेरी की गई है। इस पर केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि OMR शीट में कई विसंगतियां हैं। कोर्ट ने इस मामले की जांच NEET परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 8 नवंबर तक पूरी करने का आदेश दिया है।
NEET 2021 की परीक्षा देने वाली याचिकाकर्ता ने केरल हाई कोर्ट के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी OMR शीट में हेराफेरी की गई है और शीट में उनके माता-पिता का नाम नहीं था और उसमें अंगूठे का निशान भी उनका नहीं था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह दावा किया कि उसके सामने जो OMR शीट पेश की गई थी वह वो शीट नहीं थी जिसमें उसने अपने उत्तर दिये थे।
बता दें कि NEET की परीक्षा पिछले महीने 12 सितंबर 2021 को आयोजित की गई थी। इस दौरान निरीक्षक की असावधानी के कारण महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के दो मेडिकल उम्मीदवारों को मिसमैचिंग टेक्स्ट बुकलेट और आंसर शीट मिले थे। ऐसे में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इन दो मेडिकल उम्मीदवारों के लिए NEET परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था।
बता दें इसी मामले को लेकर NTA सुप्रीम कोर्ट गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NTA की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती दी गई थी।
पिछले माह संपन्न हुई NEET 2021 में चीटिंग और पेपर लीक मामले में जयपुर पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें एक उम्मीदवार भी शामिल था, जिसका परिवार कथित तौर पर पेपर सॉल्व कराने के लिए 30 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए सहमत था। इस परीक्षा में कथित पेपर लीक और नकल के आरोप में उम्मीदवार के अलावा केंद्र के प्रभारी समेत सात अन्य को गिरफ्तारी हुई थी।
कब घोषित होंगे NEET परिणाम?
|
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट दो हज़ार इक्कीस की एक उम्मीदवार ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर आरोप लगाया है कि उसकी आवेदन संख्या से जुड़ी OMR शीट में हेराफेरी की गई है। इस पर केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि OMR शीट में कई विसंगतियां हैं। कोर्ट ने इस मामले की जांच NEET परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को आठ नवंबर तक पूरी करने का आदेश दिया है। NEET दो हज़ार इक्कीस की परीक्षा देने वाली याचिकाकर्ता ने केरल हाई कोर्ट के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी OMR शीट में हेराफेरी की गई है और शीट में उनके माता-पिता का नाम नहीं था और उसमें अंगूठे का निशान भी उनका नहीं था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह दावा किया कि उसके सामने जो OMR शीट पेश की गई थी वह वो शीट नहीं थी जिसमें उसने अपने उत्तर दिये थे। बता दें कि NEET की परीक्षा पिछले महीने बारह सितंबर दो हज़ार इक्कीस को आयोजित की गई थी। इस दौरान निरीक्षक की असावधानी के कारण महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के दो मेडिकल उम्मीदवारों को मिसमैचिंग टेक्स्ट बुकलेट और आंसर शीट मिले थे। ऐसे में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी इन दो मेडिकल उम्मीदवारों के लिए NEET परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था। बता दें इसी मामले को लेकर NTA सुप्रीम कोर्ट गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NTA की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती दी गई थी। पिछले माह संपन्न हुई NEET दो हज़ार इक्कीस में चीटिंग और पेपर लीक मामले में जयपुर पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें एक उम्मीदवार भी शामिल था, जिसका परिवार कथित तौर पर पेपर सॉल्व कराने के लिए तीस लाख रुपये का भुगतान करने के लिए सहमत था। इस परीक्षा में कथित पेपर लीक और नकल के आरोप में उम्मीदवार के अलावा केंद्र के प्रभारी समेत सात अन्य को गिरफ्तारी हुई थी। कब घोषित होंगे NEET परिणाम?
|
हॉलीवुड की मशहूर सिंगर टेलर स्विफ्ट का हाल ही में न्यू सांग 'Look What You Made Me Do' रिलीज़ हुआ है. इंटरनेट पर आते ही यह गाना छा गया. इस गाने की चर्चा चारो और हो रही है. गाने में टेलर स्विफ्ट बदले हुए अंदाज में नजर आ रही है. लोगो में इस सांग को लेकर कितनी दीवानगी है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सांग ने यूट्यूब के कई रिकार्ड्स तोड़ दिए है.
जी हाँ. . . सांग 'Look What You Made Me Do' को यूट्यूब पर 24 घंटे के अंदर 4 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा है. इसका मतलब सांग पर हर घंटे 30 लाख व्यूज आये है. इस सांग ने हॉलीवुड के ही सांग 'Gentleman' का रिकॉर्ड भी तोडा है. 'Gentleman' सांग को 24 घंटे के अंदर 3. 6 करोड़ लोगों ने देखा था वही इस सांग को 24 घंटे में 4 करोड़ से ज्यादा लोगो ने देखा है.
बता दे कि पिछले दिनों सिंगर टेलर स्विफ्ट की सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही थी, जिनमे वे एक बाथ टब में नहाते हुई दिख रही थी. वह इस टब में हीरों (Diamonds) से नहाती हुई दिख रही थी. दरअसल उनके एल्बम 'Look What You Made Me Do' में ही उनका ये सीन सिर्फ 5 सेकंड का है. और इस 5 सेकंड के सीन के लिए 67 करोड़ का बाथ टब ख़रीदा गया था.
माता पिता के इस डर के कारण आखिर घर से भाग गयी थी बॉबी!
|
हॉलीवुड की मशहूर सिंगर टेलर स्विफ्ट का हाल ही में न्यू सांग 'Look What You Made Me Do' रिलीज़ हुआ है. इंटरनेट पर आते ही यह गाना छा गया. इस गाने की चर्चा चारो और हो रही है. गाने में टेलर स्विफ्ट बदले हुए अंदाज में नजर आ रही है. लोगो में इस सांग को लेकर कितनी दीवानगी है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस सांग ने यूट्यूब के कई रिकार्ड्स तोड़ दिए है. जी हाँ. . . सांग 'Look What You Made Me Do' को यूट्यूब पर चौबीस घंटाटे के अंदर चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा है. इसका मतलब सांग पर हर घंटे तीस लाख व्यूज आये है. इस सांग ने हॉलीवुड के ही सांग 'Gentleman' का रिकॉर्ड भी तोडा है. 'Gentleman' सांग को चौबीस घंटाटे के अंदर तीन. छः करोड़ लोगों ने देखा था वही इस सांग को चौबीस घंटाटे में चार करोड़ से ज्यादा लोगो ने देखा है. बता दे कि पिछले दिनों सिंगर टेलर स्विफ्ट की सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही थी, जिनमे वे एक बाथ टब में नहाते हुई दिख रही थी. वह इस टब में हीरों से नहाती हुई दिख रही थी. दरअसल उनके एल्बम 'Look What You Made Me Do' में ही उनका ये सीन सिर्फ पाँच सेकंड का है. और इस पाँच सेकंड के सीन के लिए सरसठ करोड़ का बाथ टब ख़रीदा गया था. माता पिता के इस डर के कारण आखिर घर से भाग गयी थी बॉबी!
|
साहित्य जगत के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award) 2019 की घोषणा हो चुकी है। मलयालम कवि अक्कितम अच्युतन नंबूदरी (Akkitham Achuthan Namboothir) को इस वर्ष का पुरस्कार दिया जा रहा है। 55वें ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा के पहले प्रसिद्ध उड़िया लेखिका प्रतिभा राय की अध्यक्षता में निर्णायक मंडल की मीटिंग हुई, जिसमें शमीम हनफी, सुरंजन दास, माधव कौशिक व डाक्टर पुरुषोत्तम बिलिमाले समेत अन्य मेम्बर उपस्थित थे। मीटिंग में लंबी चर्चा के बाद अक्कितम का नाम तय किया गया।
अक्कितम का जन्म 8 मार्च 1926 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था व बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य व कला की ओर थी। कविता के अतिरिक्त अक्कितम ने नाटक व उपन्यास भी लिखे हैं।
उन्होंने 55 किताबें लिखी हैं, जिनमें से 45 कविता संग्रह है। पद्म पुरस्कार से सम्मानित अक्कीथम को सहित्य अकादमी पुरस्कार, केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार (दो बार) मातृभूमि पुरस्कार, वायलर पुरस्कार व कबीर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। (PTI इनपुट)
|
साहित्य जगत के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार दो हज़ार उन्नीस की घोषणा हो चुकी है। मलयालम कवि अक्कितम अच्युतन नंबूदरी को इस वर्ष का पुरस्कार दिया जा रहा है। पचपनवें ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा के पहले प्रसिद्ध उड़िया लेखिका प्रतिभा राय की अध्यक्षता में निर्णायक मंडल की मीटिंग हुई, जिसमें शमीम हनफी, सुरंजन दास, माधव कौशिक व डाक्टर पुरुषोत्तम बिलिमाले समेत अन्य मेम्बर उपस्थित थे। मीटिंग में लंबी चर्चा के बाद अक्कितम का नाम तय किया गया। अक्कितम का जन्म आठ मार्च एक हज़ार नौ सौ छब्बीस को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था व बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य व कला की ओर थी। कविता के अतिरिक्त अक्कितम ने नाटक व उपन्यास भी लिखे हैं। उन्होंने पचपन किताबें लिखी हैं, जिनमें से पैंतालीस कविता संग्रह है। पद्म पुरस्कार से सम्मानित अक्कीथम को सहित्य अकादमी पुरस्कार, केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार मातृभूमि पुरस्कार, वायलर पुरस्कार व कबीर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
|
मास्को : अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए गत सप्ताह साजो-सामान लेकर रवाना हुए रूसी अंतरिक्ष यान प्रोग्रैस एम. 27 एम. के बेकाबू हो जाने के कारण शुक्रवार को धरती पर गिरकर नष्ट होने की आशंका है। रूसी अंतरिक्ष एजैंसी के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। यह मानव रहित यान गत सप्ताह मंगलवार को कजाखस्तान से प्रक्षेपित किया गया था। प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद नियंत्रण कक्ष से इसका संपर्क टूट गया था। वैज्ञानिकों ने इसे निर्धारित पथ पर लाने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही अंतरिक्ष यान जल जाएगा इसलिए इससे धरती पर किसी तरह के जानमाल के नुक्सान का खतरा नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा है कि यान के जले हुए टुकड़े समुद्री क्षेत्र में गिरेंगे। जमीन पर इनके गिरने की आशंका नहीं है। अनियंत्रित होने के बाद से रूसी यान लगातार धरती की ओर वापस आ रहा है। ऐसी संभावना है कि यह यान रूसी समय के अनुसार शुक्रवार को तड़के सवा 1 बजे से साढ़े 11 बजे के बीच धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा।
|
मास्को : अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के लिए गत सप्ताह साजो-सामान लेकर रवाना हुए रूसी अंतरिक्ष यान प्रोग्रैस एम. सत्ताईस एम. के बेकाबू हो जाने के कारण शुक्रवार को धरती पर गिरकर नष्ट होने की आशंका है। रूसी अंतरिक्ष एजैंसी के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है। यह मानव रहित यान गत सप्ताह मंगलवार को कजाखस्तान से प्रक्षेपित किया गया था। प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद नियंत्रण कक्ष से इसका संपर्क टूट गया था। वैज्ञानिकों ने इसे निर्धारित पथ पर लाने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही अंतरिक्ष यान जल जाएगा इसलिए इससे धरती पर किसी तरह के जानमाल के नुक्सान का खतरा नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा है कि यान के जले हुए टुकड़े समुद्री क्षेत्र में गिरेंगे। जमीन पर इनके गिरने की आशंका नहीं है। अनियंत्रित होने के बाद से रूसी यान लगातार धरती की ओर वापस आ रहा है। ऐसी संभावना है कि यह यान रूसी समय के अनुसार शुक्रवार को तड़के सवा एक बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा।
|
मंडी जिला के जलशक्ति डिवीजन सुंदरनगर में विभिन्न पदों पर तैनात 48 आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों को बीते 6 माह से वेतन का भी भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण कर्मचारियों द्वारा अपने परिवारों का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। इसको लेकर कर्मचारियों ने मंगलवार को जलशक्ति विभाग मंडल सुंदरनगर के अधिशाषी अभियंता ई. रजत कुमार गर्ग को एक ज्ञापन भी सौंपा है।
जानकारी देते हुए एचपी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ की सुंदनगर शाखा के अध्यक्ष हरीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2019 में एक प्राईवेट आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से बेलदार, फीटर और पंप ऑपरेटर के पद पर 48 कर्मचारियों को जलशक्ति विभाग मंडल सुंदरनगर के अधीन रखा गया था। आउटसोर्सिंग कंपनी का सरकार के साथ करार 31 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गया है।
कर्मचारियों द्वारा लगभग पौने चार वर्षों तक विभाग में अपनी सेवाएं देने के बाद अब अचानक से मौखिक तौर पर उन्हें नौकरी से बाहर निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अब बिना किसी नियम को अपनाते हुए जल शक्ति विभाग के अधिकारियों द्वारा फोन के माध्यम से नौकरी पर नहीं आने का फरमान सुनाया जा रहा है। कर्मचारियों को बीते 6 माह से वेतन मान का भी भुगतान नहीं हुआ है। हरीश कुमार ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के द्वारा उनका लगातार शोषण किया गया। लेकिन वर्तमान की कांग्रेस सरकार द्वारा 2 माह के भीतर ही उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस प्रकार का शोषण अंग्रेजों के समय में भी लोगों के साथ नहीं हुआ था। कोरोना काल में भी इन कर्मचारियों द्वारा विभाग को सेवाएं दी गई हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से उन्हें जलशक्ति विभाग में ही रखने, 6 घंटे की डयूटी को 8 घंटे करने और वेतमान का भुगतान करने की मांग की है।
बता दें कि जल शक्ति विभाग में आउटसोर्सिंग पर रखे गए बेलदार का मासिक वेतन 3 हजार और फीटर और पंप ऑपरेटर 3500 रूपये हैं। लेकिन बीते 6 माह से इन 48 कर्मचारियों को वेतनमान का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसे कर्मचारियों के परिवारों का जीना दुश्वार हो चुका है।
|
मंडी जिला के जलशक्ति डिवीजन सुंदरनगर में विभिन्न पदों पर तैनात अड़तालीस आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों को बीते छः माह से वेतन का भी भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण कर्मचारियों द्वारा अपने परिवारों का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। इसको लेकर कर्मचारियों ने मंगलवार को जलशक्ति विभाग मंडल सुंदरनगर के अधिशाषी अभियंता ई. रजत कुमार गर्ग को एक ज्ञापन भी सौंपा है। जानकारी देते हुए एचपी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ की सुंदनगर शाखा के अध्यक्ष हरीश कुमार ने कहा कि वर्ष दो हज़ार उन्नीस में एक प्राईवेट आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से बेलदार, फीटर और पंप ऑपरेटर के पद पर अड़तालीस कर्मचारियों को जलशक्ति विभाग मंडल सुंदरनगर के अधीन रखा गया था। आउटसोर्सिंग कंपनी का सरकार के साथ करार इकतीस दिसंबर दो हज़ार बाईस को समाप्त हो गया है। कर्मचारियों द्वारा लगभग पौने चार वर्षों तक विभाग में अपनी सेवाएं देने के बाद अब अचानक से मौखिक तौर पर उन्हें नौकरी से बाहर निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अब बिना किसी नियम को अपनाते हुए जल शक्ति विभाग के अधिकारियों द्वारा फोन के माध्यम से नौकरी पर नहीं आने का फरमान सुनाया जा रहा है। कर्मचारियों को बीते छः माह से वेतन मान का भी भुगतान नहीं हुआ है। हरीश कुमार ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के द्वारा उनका लगातार शोषण किया गया। लेकिन वर्तमान की कांग्रेस सरकार द्वारा दो माह के भीतर ही उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस प्रकार का शोषण अंग्रेजों के समय में भी लोगों के साथ नहीं हुआ था। कोरोना काल में भी इन कर्मचारियों द्वारा विभाग को सेवाएं दी गई हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से उन्हें जलशक्ति विभाग में ही रखने, छः घंटाटे की डयूटी को आठ घंटाटे करने और वेतमान का भुगतान करने की मांग की है। बता दें कि जल शक्ति विभाग में आउटसोर्सिंग पर रखे गए बेलदार का मासिक वेतन तीन हजार और फीटर और पंप ऑपरेटर तीन हज़ार पाँच सौ रूपये हैं। लेकिन बीते छः माह से इन अड़तालीस कर्मचारियों को वेतनमान का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसे कर्मचारियों के परिवारों का जीना दुश्वार हो चुका है।
|
युद्ध, राजनीति, राष्ट्र : 99
निशान लगाती । उस दिन मशहूर ब्रिटिश प्रकाश विक्टर होलाट्स के लेख ने उसका ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद तथा फासिज्म का पर्दाफाश करने वाले जवाहरलाल नेहरू के जोशीले भाषण की लाइपजिग मुकदमे मे विख्यात बल्गारियाई कम्युनिस्ट गेओर्गी दिमीत्रोव के फासिज्मविरोधी भाषणो से तुलना की थी और प्रभावशाली ब्रिटिश समाचारपत्र 'मानचेस्टर गार्डियन' ने नेहरू का लेख प्रकाशित किया- "हम हिन्दुस्तान के वासियों को न फासिज्म और न ही साम्राज्यशाही गवारा है। आज हमे पहले से भी अधिक विश्वास हो गया कि वे एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं और दुनिया में आजादी और शान्ति के लिए खतरा पैदा करते है । हिन्दुस्तान ब्रिटेन की विदेश नीति को ठुकराता है और उसमें भागीदार नही बनेगा । प्रतिक्रियावाद के इस आधारस्तम्भ से हमे बॉधने वाले सूत्र तोड़ने के लिए हम कोई कसर उठा नही रखेगे।..अगर लडाई छिड जाएगी, तो इंग्लैण्ड की जनता उसमे जरूर फॅस जाएगी। ऐसी हालत में ब्रिटिश सरकार, जो फासिस्ट अथवा नाजी हुकूमत के प्रति खुलकर सहानुभूति व्यक्त करती है, लोकतन्त्र और आजादी के ध्येय में किस तरह योग देगी ? जब तक यह सरकार सत्तारूढ रहेगी, इंग्लैण्ड की दहलीज पर फासिज्म मुँह बाए हमेशा खडा रहेगा । "1
इन्दिरा के बहुत व्यस्त होने के बावजूद फीरोज ने मुलाकात के लिए इसरार किया। अपने भावी ससुर के सार्वजनिक भाषणों से वह अत्यधिक प्रभावित हुआ और इन्दिरा को यह बताए बिना नही रह सका । स्थानीय कम्युनिस्टों के बीच फीरोज के कई मित्र थे और उसने बताया कि ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस के नाम, जो उस समय बर्मिघम में हो रही थी, नेहरू के अभिनन्दन सन्देश ने इन लोगों पर कितना प्रभाव डाला ।
"स्पेन तथा चीन मे फासिस्ट आक्रमण युद्ध की विभीषिका ला चुका है, " सन्देश में लिखा हुआ था - " और समूचे महाद्वीप में उसके फैल जाने का खतरा मौजूद है । लोकतन्त्र और प्रगति की शक्तियों को एकजुट होना और इस खतरे का मिलकर मुकाबला करना चाहिए । सोवियत संघ की विदेश नीति विश्व शान्ति का एक सबसे प्रभावशाली तत्त्व है और यदि दूसरे देशो ने उसका समर्थन किया होता, तो विश्व शान्ति सुरक्षित होती, परन्तु ब्रिटिश सरकार दूसरी नीति चला रही है - फासिस्ट आक्रमण को बढावा देकर और आज भी देते हुए वह युद्ध की सम्भावना को निकट ला रही है। भारतीय जनता इस नीति का दृढतापूर्वक विरोध कर रही है। हम हिन्दुस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए फासिज्म के विरुद्ध संघर्ष के प्रति हम बेपरवाह नहीं रह सकते और हमारी सहानुभूति फासिज्मविरोधी शक्तियों के साथ है । " 2
1A Gorev V Zamyanm op cat
100 * इन्दिरा गाँधीः बहुआयामी व्यक्तित्व
फीरोज ने इन्दिरा को बताया कि जहाँ तक उसे मालूम है, ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता जवाहरलाल नेहरू तथा उनके कांग्रेसी समर्थको को फासिज्म एव युद्धविरोधी आन्दोलन में अपने पक्के सहयोगी मानते हैं ।
यूनिवर्सिटी की पढाई इन्दिरा के लिए कठिन नही थी । हॉ, लेक्चरो तथा सेमिनारों मे अक्सर हाजिर न होने की वजह से वह कभी वक्त पर इम्तहान नहीं दे पाती थी और कभी-कभी इम्तहानों में उत्तम मार्क भी नहीं पाती थी, लेकिन यह उसे कम चिन्तित करता था। छात्र समुदाय में अग्रणी रहने की इन्दिरा चेप्टा नही करती थी और न वह प्रथम श्रेणी या 'डिस्टिकशन पाने की इच्छुक थी । पुस्तकीय ज्ञान से अधिक उसे ठोस व्यावहारिक कार्य आकर्षित करता था, लेकिन डिप्लोमा प्राप्त करना भी जरूरी था। पिताजी इस पर आग्रह करते थे और दिवगत मॉ को भी वह वचन दे चुकी थी कि यूनिवर्सिटी की शिक्षा अवश्य पूरी करेंगी।
इन्दिरा उस समय निराश हुई, जब 1988 की गर्मियों में यूनिवर्सिटी परीक्षाओ के कारण उसे अपना मनोरथ पूरा करने--पिता के साथ सघर्षरत स्पेन का भ्रमण करने - से इन्कार करना पड़ा। वह लड़ाई के मैदान में जाकर अपनी आँखो से वहाँ का हाल देखना चाहती थी, क्योंकि वह स्वयं स्पेनी लोकतन्त्रवादियों की लन्दन सहायता समिति की सक्रिय सदस्या थी और स्पेन जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय ब्रिगेडो के स्वयसेवकों की रजिस्ट्री करती थी ।
स्पेन की धरती पर हथियार हाथ में लेकर और फासिज्म के दॉत खट्टे करने का फैसला करने वाले पहले भारतीय स्वयसेवकों में फीरोज भी शामिल था। जब उसने स्पेन जाने का अपना फैसला सुनाया, तो इन्दिरा सहम गई, लेकिन एतराज वह नही कर सकती थी। इसके बाद फीरोज के प्रति इन्दिरा का आदर भाव और अधिक बढ़ गया। लेकिन फीरोज स्पेन नही जा सका। यह उसका कसूर नही था - ब्रिटिश खुफिया विभाग ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और उसे जेल में बन्द करने की धमकी दी।
एक बार पेरिस में हुई मीटिंग में इन्दिरा को यशस्वी स्पेनी महिला दोलोरेस इबारूरी का भाषण सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। यह अविस्मरणीय, अद्भुत दृश्य था। वाक्पटुता, प्रेम और घृणा, विश्वास और अटूट मनोवल, नारीत्व का सौन्दर्य और साहस, दुःख और हर्षोन्माद - इस विलक्षण महिला में इन सभी गुणों का समन्वय हुआ था । वह यो ही तो पसियोनारिया ( भाव-प्रवण ) नाम से नहीं जानी जाती थी । यह नाम सार्थक था, वह महज बोलती नहीं थी, बल्कि अपने विशाल नारी हृदय की ज्वाला से श्रोताओं को प्रेरित भी करती थी ।
इन्दिरा स्पेनी भाषा नहीं जानती थी और न कोई शब्द समझती थी लेकिन वह देखती थी कि उसके सामने जोन ऑफ आर्क जैसी सच्ची जन वीरागना खड़ी है और
|
युद्ध, राजनीति, राष्ट्र : निन्यानवे निशान लगाती । उस दिन मशहूर ब्रिटिश प्रकाश विक्टर होलाट्स के लेख ने उसका ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद तथा फासिज्म का पर्दाफाश करने वाले जवाहरलाल नेहरू के जोशीले भाषण की लाइपजिग मुकदमे मे विख्यात बल्गारियाई कम्युनिस्ट गेओर्गी दिमीत्रोव के फासिज्मविरोधी भाषणो से तुलना की थी और प्रभावशाली ब्रिटिश समाचारपत्र 'मानचेस्टर गार्डियन' ने नेहरू का लेख प्रकाशित किया- "हम हिन्दुस्तान के वासियों को न फासिज्म और न ही साम्राज्यशाही गवारा है। आज हमे पहले से भी अधिक विश्वास हो गया कि वे एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं और दुनिया में आजादी और शान्ति के लिए खतरा पैदा करते है । हिन्दुस्तान ब्रिटेन की विदेश नीति को ठुकराता है और उसमें भागीदार नही बनेगा । प्रतिक्रियावाद के इस आधारस्तम्भ से हमे बॉधने वाले सूत्र तोड़ने के लिए हम कोई कसर उठा नही रखेगे।..अगर लडाई छिड जाएगी, तो इंग्लैण्ड की जनता उसमे जरूर फॅस जाएगी। ऐसी हालत में ब्रिटिश सरकार, जो फासिस्ट अथवा नाजी हुकूमत के प्रति खुलकर सहानुभूति व्यक्त करती है, लोकतन्त्र और आजादी के ध्येय में किस तरह योग देगी ? जब तक यह सरकार सत्तारूढ रहेगी, इंग्लैण्ड की दहलीज पर फासिज्म मुँह बाए हमेशा खडा रहेगा । "एक इन्दिरा के बहुत व्यस्त होने के बावजूद फीरोज ने मुलाकात के लिए इसरार किया। अपने भावी ससुर के सार्वजनिक भाषणों से वह अत्यधिक प्रभावित हुआ और इन्दिरा को यह बताए बिना नही रह सका । स्थानीय कम्युनिस्टों के बीच फीरोज के कई मित्र थे और उसने बताया कि ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस के नाम, जो उस समय बर्मिघम में हो रही थी, नेहरू के अभिनन्दन सन्देश ने इन लोगों पर कितना प्रभाव डाला । "स्पेन तथा चीन मे फासिस्ट आक्रमण युद्ध की विभीषिका ला चुका है, " सन्देश में लिखा हुआ था - " और समूचे महाद्वीप में उसके फैल जाने का खतरा मौजूद है । लोकतन्त्र और प्रगति की शक्तियों को एकजुट होना और इस खतरे का मिलकर मुकाबला करना चाहिए । सोवियत संघ की विदेश नीति विश्व शान्ति का एक सबसे प्रभावशाली तत्त्व है और यदि दूसरे देशो ने उसका समर्थन किया होता, तो विश्व शान्ति सुरक्षित होती, परन्तु ब्रिटिश सरकार दूसरी नीति चला रही है - फासिस्ट आक्रमण को बढावा देकर और आज भी देते हुए वह युद्ध की सम्भावना को निकट ला रही है। भारतीय जनता इस नीति का दृढतापूर्वक विरोध कर रही है। हम हिन्दुस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए फासिज्म के विरुद्ध संघर्ष के प्रति हम बेपरवाह नहीं रह सकते और हमारी सहानुभूति फासिज्मविरोधी शक्तियों के साथ है । " दो एक एम्पीयर Gorev V Zamyanm op cat एक सौ * इन्दिरा गाँधीः बहुआयामी व्यक्तित्व फीरोज ने इन्दिरा को बताया कि जहाँ तक उसे मालूम है, ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता जवाहरलाल नेहरू तथा उनके कांग्रेसी समर्थको को फासिज्म एव युद्धविरोधी आन्दोलन में अपने पक्के सहयोगी मानते हैं । यूनिवर्सिटी की पढाई इन्दिरा के लिए कठिन नही थी । हॉ, लेक्चरो तथा सेमिनारों मे अक्सर हाजिर न होने की वजह से वह कभी वक्त पर इम्तहान नहीं दे पाती थी और कभी-कभी इम्तहानों में उत्तम मार्क भी नहीं पाती थी, लेकिन यह उसे कम चिन्तित करता था। छात्र समुदाय में अग्रणी रहने की इन्दिरा चेप्टा नही करती थी और न वह प्रथम श्रेणी या 'डिस्टिकशन पाने की इच्छुक थी । पुस्तकीय ज्ञान से अधिक उसे ठोस व्यावहारिक कार्य आकर्षित करता था, लेकिन डिप्लोमा प्राप्त करना भी जरूरी था। पिताजी इस पर आग्रह करते थे और दिवगत मॉ को भी वह वचन दे चुकी थी कि यूनिवर्सिटी की शिक्षा अवश्य पूरी करेंगी। इन्दिरा उस समय निराश हुई, जब एक हज़ार नौ सौ अठासी की गर्मियों में यूनिवर्सिटी परीक्षाओ के कारण उसे अपना मनोरथ पूरा करने--पिता के साथ सघर्षरत स्पेन का भ्रमण करने - से इन्कार करना पड़ा। वह लड़ाई के मैदान में जाकर अपनी आँखो से वहाँ का हाल देखना चाहती थी, क्योंकि वह स्वयं स्पेनी लोकतन्त्रवादियों की लन्दन सहायता समिति की सक्रिय सदस्या थी और स्पेन जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय ब्रिगेडो के स्वयसेवकों की रजिस्ट्री करती थी । स्पेन की धरती पर हथियार हाथ में लेकर और फासिज्म के दॉत खट्टे करने का फैसला करने वाले पहले भारतीय स्वयसेवकों में फीरोज भी शामिल था। जब उसने स्पेन जाने का अपना फैसला सुनाया, तो इन्दिरा सहम गई, लेकिन एतराज वह नही कर सकती थी। इसके बाद फीरोज के प्रति इन्दिरा का आदर भाव और अधिक बढ़ गया। लेकिन फीरोज स्पेन नही जा सका। यह उसका कसूर नही था - ब्रिटिश खुफिया विभाग ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और उसे जेल में बन्द करने की धमकी दी। एक बार पेरिस में हुई मीटिंग में इन्दिरा को यशस्वी स्पेनी महिला दोलोरेस इबारूरी का भाषण सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। यह अविस्मरणीय, अद्भुत दृश्य था। वाक्पटुता, प्रेम और घृणा, विश्वास और अटूट मनोवल, नारीत्व का सौन्दर्य और साहस, दुःख और हर्षोन्माद - इस विलक्षण महिला में इन सभी गुणों का समन्वय हुआ था । वह यो ही तो पसियोनारिया नाम से नहीं जानी जाती थी । यह नाम सार्थक था, वह महज बोलती नहीं थी, बल्कि अपने विशाल नारी हृदय की ज्वाला से श्रोताओं को प्रेरित भी करती थी । इन्दिरा स्पेनी भाषा नहीं जानती थी और न कोई शब्द समझती थी लेकिन वह देखती थी कि उसके सामने जोन ऑफ आर्क जैसी सच्ची जन वीरागना खड़ी है और
|
देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों (एलजी) के साथ बैठक की। बता दें कि यह इस तरह की पहली बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और उपराष्ट्रपति ने राज्यपालों से संवाद किया।
देश में कोरोना वायरस संक्रमण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी राज्यों के राज्यपालों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग में राज्यपालों की भूमिका पर चर्चा की और कोविड से जंग में उन्हें राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी। बता दें कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में रोजाना रिकॉर्ड संख्या में कोविड-19 के नए मामले सामने आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि वार्ता के दौरान मोदी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों को सलाह दी कि माइक्रो कंटेनमेंट को लेकर यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक संस्थान राज्य सरकारों के साथ सहज सहयोग कर रही हैं, वह सक्रिय रूप से दखल दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और टीका उत्सव के दौरान टीकाकरण अभियान विस्तृत हुआ और नए टीकाकरण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में कहा कि राज्यपाल कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सभी सामुदायिक संगठनों, राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त शक्ति का उपयोग करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यपालों से कहा कि सरकार टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। टीकाकरण और उपचार के बारे में संदेश फैलाने के साथ-साथ राज्यपाल आयुष से जुड़े उपायों के बारे में भी जागरूकता फैला सकते हैं।
बैठक में मौजूद रहे उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से लड़ने के लिए जांच, नजर रखने और उपचार करने की रणनीति नई ऊर्जा के साथ लागू करने की जरूरत है। डिजिटल माध्यम से हुई इस बैठक में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए राज्यपालों को संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सक्रियता से मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करें और कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मिलकर टीम की तरह काम करें।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों के साथ बैठक की। बता दें कि यह इस तरह की पहली बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और उपराष्ट्रपति ने राज्यपालों से संवाद किया। देश में कोरोना वायरस संक्रमण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी राज्यों के राज्यपालों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ जंग में राज्यपालों की भूमिका पर चर्चा की और कोविड से जंग में उन्हें राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी। बता दें कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में रोजाना रिकॉर्ड संख्या में कोविड-उन्नीस के नए मामले सामने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि वार्ता के दौरान मोदी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों को सलाह दी कि माइक्रो कंटेनमेंट को लेकर यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक संस्थान राज्य सरकारों के साथ सहज सहयोग कर रही हैं, वह सक्रिय रूप से दखल दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और टीका उत्सव के दौरान टीकाकरण अभियान विस्तृत हुआ और नए टीकाकरण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में कहा कि राज्यपाल कोविड-उन्नीस के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कोविड-उन्नीस के खिलाफ लड़ाई में सभी सामुदायिक संगठनों, राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त शक्ति का उपयोग करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यपालों से कहा कि सरकार टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। टीकाकरण और उपचार के बारे में संदेश फैलाने के साथ-साथ राज्यपाल आयुष से जुड़े उपायों के बारे में भी जागरूकता फैला सकते हैं। बैठक में मौजूद रहे उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-उन्नीस से लड़ने के लिए जांच, नजर रखने और उपचार करने की रणनीति नई ऊर्जा के साथ लागू करने की जरूरत है। डिजिटल माध्यम से हुई इस बैठक में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए राज्यपालों को संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सक्रियता से मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करें और कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मिलकर टीम की तरह काम करें। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 62 सीटों पर परिणाम घोषित। आम आदमी पार्टी 56 विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। 6 अन्य पर आगे चल रही है। भाजपा 7 सीटों पर विजयी हुई और 1 अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है।
भारत की संसद से लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार हो रहा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तो पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि दिल्ली में भाजपा की बड़ी हार होने वाली है क्योंकि उसने अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ किया, कश्मीरियों पर 'अत्याचार' किया और नागरिकता को लेकर क़ानून लाया। वहीं भारतोय मीडिया का एक बड़े तबके में भी उत्साह का माहौल है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग़ पूरी तरह छाया रहा। अमानतुल्लाह ख़ान के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं ने धरने पर बैठ कर मीडिया को उलझाए रखा। कॉन्ग्रेस का वोटिंग प्रतिशत धड़ाम से गिरा है और कहा जा रहा है कि ये वोट्स केजरीवाल की पार्टी को ट्रांसफर हुए। मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस की बजाए AAP पर विश्वास जताया, क्योंकि उन्हें भाजपा को हराने से मतलब था।
दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इनके अलावा मुस्तफाबाद, किराड़ी, बाबरपुर और चाँदनी चौक से भी AAP ही आगे चल रही है।
|
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बासठ सीटों पर परिणाम घोषित। आम आदमी पार्टी छप्पन विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। छः अन्य पर आगे चल रही है। भाजपा सात सीटों पर विजयी हुई और एक अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है। भारत की संसद से लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार हो रहा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तो पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि दिल्ली में भाजपा की बड़ी हार होने वाली है क्योंकि उसने अनुच्छेद तीन सौ सत्तर से छेड़छाड़ किया, कश्मीरियों पर 'अत्याचार' किया और नागरिकता को लेकर क़ानून लाया। वहीं भारतोय मीडिया का एक बड़े तबके में भी उत्साह का माहौल है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग़ पूरी तरह छाया रहा। अमानतुल्लाह ख़ान के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं ने धरने पर बैठ कर मीडिया को उलझाए रखा। कॉन्ग्रेस का वोटिंग प्रतिशत धड़ाम से गिरा है और कहा जा रहा है कि ये वोट्स केजरीवाल की पार्टी को ट्रांसफर हुए। मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस की बजाए AAP पर विश्वास जताया, क्योंकि उन्हें भाजपा को हराने से मतलब था। दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इनके अलावा मुस्तफाबाद, किराड़ी, बाबरपुर और चाँदनी चौक से भी AAP ही आगे चल रही है।
|
शीघ्रही हृदय बिषे कपट उपज व्यावता है बहरि महापुरुष से किसी ने पूछाया कि सर्व सृष्टि बिषे नीच मनुष्य कौन है तब उन्होंने कहा कि धन के साथ प्रीति करनेवाले अतिनीच हैं क्योंकि नाना प्रकार के रसों को भोगते हैं और अनेकांति के सुन्दर वस्त्र पहिरते हैं और स्त्रियादिकों के रूप के साथ बन्धवान होते हैं और बड़े २ घोड़ों और हाथियों पर आरूढ़ हुआ चाहते हैं ताते उनकी आशा कदाचित् पूर्ण नहीं होती और सर्वथा माया की सामग्री विषे सक्त रहते हैं ताते मायाही को भगवत् की नाई पूजते हैं और जो कुछ किया करते हैं सो मायाही के निमित्त करते हैं इसी कारण से मैं तुमको उपदेश करता हूं कि ऐसे मनुष्यों के साथ कदाचित मिलाप मत करो बहुरि महापुरूप ने यों भी कहा है कि यह माया सही मायाधारियों को अर्पणकरदो क्योंकि जो पुरुष माया के सुख शरीर के निर्वाह से अधिकार करता है वह उसके नाश का हेतु है और वह जानता भी नहीं और योभी कहा है कि यह अज्ञानी मनुष्य सर्वदा योंही कहते हैं कि यह धन मेरा है और सम्पदा मेरी है पर इतना नहीं जानते कि शरीर के आहार और नग्नता के ढांकने से अधिक मेरा क्या है ? ताते इसका अपना धन वही है जो किसी को भगवत् अर्थ देवे तब वह धन परलोक विपे इसका संगी होता है सर्वदा इसी पर किसी ने महापुरुष से पूछा था कि मेरे पास परलोक का तोशा कुछ नहीं ताते में क्या यत्न करूं ? तब महापुरुष ने कहा कि जब कुछ वन का संग्रह रखनाहोवे तब भगवत् अर्थ दे क्योंकि भगवत् अर्थ देना इसका सदा संगी होता है और यों भी कहा है कि इस मनुष्य के ३ मित्र हैं सो एक मित्रता जीवने से उपरान्त कुछ नहीं रहती १ दूसरे मित्र श्मशान पर्यन्त संगी होते हैं २ और तीसरे मित्र परलोक पर्यन्त निर्वाह करते हैं ३ अर्थ यह कि जितनी धनकी सामग्री है तिसकी मित्रता जीवने पर्यन्त है और जितने सम्बन्धी लोग हैं सो शरीर को श्मशान तक पहुँचाते हैं बहुरि इस मनुष्य के जो कर्म हैं सो परलोक पर्यन्त संगी होते हैं और जब यह मनुष्य मृत्यु होजाता है तब और लोग कहने लगते हैं कि इसकी सामग्री पीछे क्या रही है ? और देवता इस प्रकार कहते हैं कि इसने आगे क्या कुछ सेजा है ? इसी पर ईसा महात्मा के संगियों ने पूछा था कि तुम जलपर किस करके सूखे ही चले जाते हो और हमारे विषे ऐसी सामर्थ्य क्यों नहीं है तब उन्होंने कहा कि मैं रुपये और स्वर्ण को
माटी की नाई जानता हूं और तुम इसको उत्तम पदार्थ समझते हो ताते मेरी और तुम्हारी अवस्था विषे इतनाही भेद हैं इसी पर एक वार्ता है कि अबूदरंदा नामी सन्त को किसी भगवत् विमुख ने दुखाया था तब ये कहने लगे कि हे महाराज ! तू इसको अरोगता और बड़ी आयु और बहुत धन दे तात्पर्य यह कि उन्होंने यह सवही दुःख के कारण समझलिये थे क्योंकि जिसको ऐसी सम्पदा प्राप्त होती है तब वह प्रमाद करके परलोक से अचेत होजाता है और उसकी बुद्धि नष्टता को पाती है इसी पर इसनबसरी ने कहा है कि जिस मनुष्य ने रूपे और स्वर्ण को अधिक प्रियतम किया है उसको परलोक विषे भगवत् लज्जावान् करता है और यहियानामी सन्त ने कहा है कि यह सोना और चांदी बिच्छू और सांपों की नाई है ताते जबलंग इसका मन्त्र न जानो तबलग इन का स्पर्श न करो और जब मन्त्र सीखे विना इनपर हाथ डालोगे तब निस्संदेह उनके विष करके मृत्यु होवोगे सो मन्त्र इसका यह है कि प्रथम धनकी उत्पत्ति पाप से रहित होने और धर्म के मार्ग विषे दियाजावे बहुरि जब एक सन्त का शरीर छूटनेलगा तब उनसे एक प्रीतिमान् ने कहा कि तुमने अपनी सन्तान के निमित्त कुछ घन नहीं राखा सो इस वार्ता का कारण क्या है ? तब उन्होंने कहा कि मेरे पुत्रों की जो प्रारब्ध है सो मैंने और किसी को नहीं दीनी और जो और की प्रारब्ध है वह इनको किसी प्रकार प्राप्त नहीं होती और यह वार्ता भी प्रकट है कि जो मेरे पुत्र धर्म के अधिकारी होवेंगे तो भगवतही इनको प्रतिपाल भली प्रकार करेंगे और जो धर्म से हीनहुये तो मुझको इनकी चिन्ता ही कुछ नहीं बहुरि एक और सन्त बड़े धनवान हुये हैं सो सर्वदा अपनी सम्पदा भगवत् अर्थ देते थे तब किसी ने उनसे कहा कि कुछ धन अपनी सन्तान के निमित्त भी राखो तब उन्होंने कहा कि मैं धन को भगवत के निकट अपने निमित्त रखता हूं और पुत्रों की प्रारब्ध करनेवाला भगवत् है बहुरि पहिया नामी सन्त ने कहा है कि मृत्यु के समय धनवान् पुरुष को दो दुःख अवश्यही लगते हैं सो एक तो उसकी सर्वसम्पदा दूर होती है और दूसरे धर्मराज के दण्ड का अधिकारी होता है पर ऐसे जान तू कि यद्यपि यह धन महानिन्ध है तौभी कुछ इस विषे विशेषता कही है क्योंकि यह धनरूपी पदार्थ उपाधि और भलाई दोनों का बीज है इसी पर महापुरुष ने कहा है कि यह धन भी उत्तम पदार्थ है पर
बुद्धिमान् और धर्मात्मा पुरुषों को और यों भी कहा है जब यह मनुष्य अत्यन्त निर्द्धन होता है तब निस्सन्देह महाराज से विमुख होजाता है क्योंकि जब अपने सम्बन्धियों और आपको भूखसंयुक्त अधीन देखता है तब ऐसा जानता है कि भगवत् ने यह कैसी अनीति रची है कि पापी मनुष्यों को धन दिया है और सात्त्विकी मनुष्य ऐसे दुःखित किये हैं कि उनको एक दाम भी हाथ नहीं आता जिस करके भूख का निवारण करें बहुरि ऐसा अनुमान करता है कि जब भगवत् मेरे दुःख को नहीं जानता तब अन्तर्यामी क्योंकर हुआ और जब दुःखी जानता है और दे नहीं सक्का तव पूर्ण समर्थ क्योंकर हुआ और जब समर्थ होकर नहीं देता तब दया और उदारता से हीन जाना जाता है और जब इस निमित्त नहीं देता कि परलोक बिषे सुखी करूंगा तब ऐसे जाना जाता है कि दुःख दिये विना सुख देने को समर्थ नहीं होसक्का ताते प्रसिद्ध है कि निर्द्धन पुरुष क्रोधवान होकर ऐसा भी कहने लगता है कि समय विपरीत हुआ है और लोग अन्धहुये हैं जो अनधिकारियों को पदार्थ और धन देते हैं तात्पर्य यह कि सन्तोष विना यह मनुष्य इस प्रकार भगवत् से विमुख होता है और अपने भले बुरे को पहिचान नहीं सक्का ताते ऐसा पुरुष कोई दुर्लभ होता है जो निर्द्धन होकर भी प्रतीति करके उसही विषे अपनी भलाई जाने पर ऐसे मनुष्य बहुत होते हैं जो निर्द्धनताई विषे व्याकुल होजाते हैं इसी काग्य से भगवद् ने यह धन भी जीव के छिद्रों को छिपानेवाला बनाया है और शरीर के निर्वाहमात्र संग्रह करना सन्तजनों ने भी प्रमाण कहा है ताते प्रसिद्ध हुआ कि इस प्रकार करके यह धन भी केवल निन्द्य नहीं बहुरि इसही धन बिपे एक यह भी लाभ है कि सब जिज्ञासुओं की अभिलाष परलोक के सुख पाने की होती है सो परलोक का सुख तबही प्राप्त होता है जब प्रथम तीन पदार्थ प्राप्तहोवें सो एक तो विद्या और कोमल स्वभाव और इसकी स्थिति मन विषे होती है ? और दूसरा पदार्थ शरीर के विषे पाया जाता है सो वह आरोग्यता और जीवना है २ बहुरि तीसरा पदार्थ शरीर से बाहर पाया जाता है सो वह प्राणों की रक्षा के निमित्त शुद्ध जीविका है ३ पर जब इस पुरुष की श्रद्धा निष्काम होवे तब इन पदार्थों करके परलोक के सुख को पासला है सो जिस पुरुष ने इस प्रकार निश्चय जाना है वह धन को कार्यमात्र अङ्गीकार करता
है और अधिक धन की सामग्री को हलाहल विष की नाई जानता है सो इस वचन का अर्थ यही हैं जो कहा है कि उत्तम पुरुषों को घनभी लाभदायक होता है इसी पर महापुरुप ने कहा है कि जो पुरुष धन को धर्म के निमित्त प्रियतम रखता है वह धर्मही को मियतम रखता है और जो पुरुष अपनी वासना के अनुसार धन को प्रियतम जानता है वह अपनी बासनाही का दास है और उसने इस मनुष्य जन्म के तात्पर्य को नहीं समझा ताते महामूर्ख है इसी पर इब्राहीम सन्तने कहा है कि हे महाराज ! मेरी और मेरे प्रियतमों की प्रेतपूजा से रक्षाकर अर्थ यह कि सोना चांदी तरूप हैं और सबही लोभ संयुक्त इसको पूजते हैं ताते तू मेरे हृदय से इसकी प्रीति को दूरकर (अथ प्रकट करने ला और विघ्न धनके ) ऐसे जान तू कि यह धन सर्प की नाई है अर्थ यह कि जैसे विष और माऐ दोनों सर्पही से उपजते हैं तेसेही धन बिपे भी गुण दोष पाये जाते हैं सो जवलग विष और मणि के स्वरूप को भिन्न २ करके न कहिये तब लग वचनका तात्पर्य परमसिद्ध नहीं होता ताते मैं घनके गुण और दोष मिनर करके कहता हूँ पर घन के लाभ दो प्रकार के प्रसिद्ध हैं सो एक तो संसारी लाभ है कि धनवान् पुरुष जगत् विपे बढ़ाई को पावता है और इत्यादिक अवर जो स्थूल लाभ हैं सोपही प्रसिद्ध हैं बहुरि दूसरे धर्म के मार्ग विषे धन के लाभ हैं सो यह भी तीन हैं एक तो अपने शरीर की जीविका होती हैं और जितने शुभकर्म हैं सो वह शरीर के सम्बन्ध करके सिद्ध होते हैं ताते सर्व शुभ कर्मों का बीज शुद्ध जीविका है पर जब जीविका की चिन्ता रहती है तब उस से भजन और अभ्यास कुछ नहीं होसक्का ताते जब इस पुरुष की मंशा धर्म के मार्ग की होवे तब जीविका का संग्रह रखना भी उसही मार्ग का तोशा होता है इसी पर एक वार्चा है कि सन्त के पास कुछ अनाज निष्पाप व्यवहार का आया था सो वह सन्त उस अनाज की मुष्टि भरकर कहने लगे कि इस शुद्ध जीविका को मैं निरुद्यमियों के भरोसे से विशेष जानता हूं पर इस भेद को सोई पुरुष समझता है जिसको अपने हृदय की शुद्धता और अशुद्धता की बूझ होती है और तवहीं वह जानता है कि शुद्ध जीविका करके इस प्रकार हृदय निःखेद रहता है और और लोगों की आशा दूर होजाती है और भजन-विषे एकाग्रता दृढ़ होती है बहु दूसरा लाभ धर्ममार्ग सम्बन्धी धन का यह है कि और
जीवों को दान देता है तो भी इस पुरुष को भलाई प्राप्त होती है पर धन का देना भी चार प्रकार का है सो प्रथम यह है कि अर्थी और सात्विकी मनुष्यों की पूजा करनी तब उनकी प्रसन्नता करके व्यवहार और परमार्थ के सुख को प्राप्त होता है ? और दूसरा प्रकार देने का यह है कि मित्रों और सम्बन्धियों के साथ भाव करना और सर्व कार्यों विपे उदारचित्त होना सो यह भी धन करके होता है २ बहुरि तीसरा यह कि कितनेही पुरुष इसकी आशा रखते हैं और जव उनको कुछ न देवै तब निन्दा करने लगते हैं जैसे ब्राह्मण व भाटव कवीश्वर होते हैं सो इनको देना भी बड़ा उपकार है क्योंकि वह सब निन्दा करने से छूटते हैं ३ बहुरि चौथा प्रकार यह है कि यह मनुष्य सब किया अपनी ही नहीं करसक्का ताते केते पुरुषों के साथ व्यवहार का सम्बन्ध होता है तब अपनी सेवा करनेवालों को देना भी विशेष है क्योंकि जब यह पुरुष अपनी क्रिया से नि श्चिन्त होता है तब भजन विषे सावधान रहता है और यद्यपि अपने शरीर की किया आपही करनी विशेष है तौभी जिस जिज्ञासु का चित्त अन्तर अभ्यास विषे दृढ होता है तब उसको स्थूब किया का अत्यन्त अधिकार नहीं रहता ४/२ बहुरि तीसरा लाभ धन का धर्ममार्ग सम्बन्धी यह है कि धन करके और भी बड़े २ पुण्यकार्य होते हैं जैसे कूप, ताल और पुलों का बनाना अथवा अभ्यागतों के निमित्त धर्मशाला और ठाकुरद्वारे बनाने सो इत्यादिक पुण्यस्थान ऐसे उत्तम हैं कि इन्हों करके चिरकाल पर्यन्त असंख्यजीवों को सुख होता है पर इनकी सिद्धता भी धन करके होती है (अथ प्रकटकरने विघ्न धन के ) ताते जान तू कि इस धन्न विषे ते विघ्न तो स्थूल हैं और केते ऐसे हैं कि धर्म के मार्ग से विमुख करते हैं सो यह विघ्न भी तीन प्रकारके हैं प्रथम यह जो धन करके भोगों की प्राप्ति और पापक्रिया सुखेन होती हैं सो इस जीव का मन तो आगेही से ऐसा चपल है कि सर्वदा विपयों और पापों की ओर दौड़ता रहता है और जब सन्मानादिक बढ़ाई को पावता है तब शीघ्रही पापों विषे जाय गिरता है और बुद्धि की शुद्धता नष्ट होजाती है बहुरि जब भोगों और पापों से हठ करके आपको बचाया चाहे तो भी बड़ा पुरुषार्थ चाहिये काहे से कि संपदा विषे विरक्त रहना महाकठिन है १ बहुरि दूसरा विघ्न यह है कि यद्यपि धनवान् पुरुष ऐसा विचारवान् होये कि पाप कर्मों से बचायेराखे तौ भों खान पान और वस्त्रादि
|
शीघ्रही हृदय बिषे कपट उपज व्यावता है बहरि महापुरुष से किसी ने पूछाया कि सर्व सृष्टि बिषे नीच मनुष्य कौन है तब उन्होंने कहा कि धन के साथ प्रीति करनेवाले अतिनीच हैं क्योंकि नाना प्रकार के रसों को भोगते हैं और अनेकांति के सुन्दर वस्त्र पहिरते हैं और स्त्रियादिकों के रूप के साथ बन्धवान होते हैं और बड़े दो घोड़ों और हाथियों पर आरूढ़ हुआ चाहते हैं ताते उनकी आशा कदाचित् पूर्ण नहीं होती और सर्वथा माया की सामग्री विषे सक्त रहते हैं ताते मायाही को भगवत् की नाई पूजते हैं और जो कुछ किया करते हैं सो मायाही के निमित्त करते हैं इसी कारण से मैं तुमको उपदेश करता हूं कि ऐसे मनुष्यों के साथ कदाचित मिलाप मत करो बहुरि महापुरूप ने यों भी कहा है कि यह माया सही मायाधारियों को अर्पणकरदो क्योंकि जो पुरुष माया के सुख शरीर के निर्वाह से अधिकार करता है वह उसके नाश का हेतु है और वह जानता भी नहीं और योभी कहा है कि यह अज्ञानी मनुष्य सर्वदा योंही कहते हैं कि यह धन मेरा है और सम्पदा मेरी है पर इतना नहीं जानते कि शरीर के आहार और नग्नता के ढांकने से अधिक मेरा क्या है ? ताते इसका अपना धन वही है जो किसी को भगवत् अर्थ देवे तब वह धन परलोक विपे इसका संगी होता है सर्वदा इसी पर किसी ने महापुरुष से पूछा था कि मेरे पास परलोक का तोशा कुछ नहीं ताते में क्या यत्न करूं ? तब महापुरुष ने कहा कि जब कुछ वन का संग्रह रखनाहोवे तब भगवत् अर्थ दे क्योंकि भगवत् अर्थ देना इसका सदा संगी होता है और यों भी कहा है कि इस मनुष्य के तीन मित्र हैं सो एक मित्रता जीवने से उपरान्त कुछ नहीं रहती एक दूसरे मित्र श्मशान पर्यन्त संगी होते हैं दो और तीसरे मित्र परलोक पर्यन्त निर्वाह करते हैं तीन अर्थ यह कि जितनी धनकी सामग्री है तिसकी मित्रता जीवने पर्यन्त है और जितने सम्बन्धी लोग हैं सो शरीर को श्मशान तक पहुँचाते हैं बहुरि इस मनुष्य के जो कर्म हैं सो परलोक पर्यन्त संगी होते हैं और जब यह मनुष्य मृत्यु होजाता है तब और लोग कहने लगते हैं कि इसकी सामग्री पीछे क्या रही है ? और देवता इस प्रकार कहते हैं कि इसने आगे क्या कुछ सेजा है ? इसी पर ईसा महात्मा के संगियों ने पूछा था कि तुम जलपर किस करके सूखे ही चले जाते हो और हमारे विषे ऐसी सामर्थ्य क्यों नहीं है तब उन्होंने कहा कि मैं रुपये और स्वर्ण को माटी की नाई जानता हूं और तुम इसको उत्तम पदार्थ समझते हो ताते मेरी और तुम्हारी अवस्था विषे इतनाही भेद हैं इसी पर एक वार्ता है कि अबूदरंदा नामी सन्त को किसी भगवत् विमुख ने दुखाया था तब ये कहने लगे कि हे महाराज ! तू इसको अरोगता और बड़ी आयु और बहुत धन दे तात्पर्य यह कि उन्होंने यह सवही दुःख के कारण समझलिये थे क्योंकि जिसको ऐसी सम्पदा प्राप्त होती है तब वह प्रमाद करके परलोक से अचेत होजाता है और उसकी बुद्धि नष्टता को पाती है इसी पर इसनबसरी ने कहा है कि जिस मनुष्य ने रूपे और स्वर्ण को अधिक प्रियतम किया है उसको परलोक विषे भगवत् लज्जावान् करता है और यहियानामी सन्त ने कहा है कि यह सोना और चांदी बिच्छू और सांपों की नाई है ताते जबलंग इसका मन्त्र न जानो तबलग इन का स्पर्श न करो और जब मन्त्र सीखे विना इनपर हाथ डालोगे तब निस्संदेह उनके विष करके मृत्यु होवोगे सो मन्त्र इसका यह है कि प्रथम धनकी उत्पत्ति पाप से रहित होने और धर्म के मार्ग विषे दियाजावे बहुरि जब एक सन्त का शरीर छूटनेलगा तब उनसे एक प्रीतिमान् ने कहा कि तुमने अपनी सन्तान के निमित्त कुछ घन नहीं राखा सो इस वार्ता का कारण क्या है ? तब उन्होंने कहा कि मेरे पुत्रों की जो प्रारब्ध है सो मैंने और किसी को नहीं दीनी और जो और की प्रारब्ध है वह इनको किसी प्रकार प्राप्त नहीं होती और यह वार्ता भी प्रकट है कि जो मेरे पुत्र धर्म के अधिकारी होवेंगे तो भगवतही इनको प्रतिपाल भली प्रकार करेंगे और जो धर्म से हीनहुये तो मुझको इनकी चिन्ता ही कुछ नहीं बहुरि एक और सन्त बड़े धनवान हुये हैं सो सर्वदा अपनी सम्पदा भगवत् अर्थ देते थे तब किसी ने उनसे कहा कि कुछ धन अपनी सन्तान के निमित्त भी राखो तब उन्होंने कहा कि मैं धन को भगवत के निकट अपने निमित्त रखता हूं और पुत्रों की प्रारब्ध करनेवाला भगवत् है बहुरि पहिया नामी सन्त ने कहा है कि मृत्यु के समय धनवान् पुरुष को दो दुःख अवश्यही लगते हैं सो एक तो उसकी सर्वसम्पदा दूर होती है और दूसरे धर्मराज के दण्ड का अधिकारी होता है पर ऐसे जान तू कि यद्यपि यह धन महानिन्ध है तौभी कुछ इस विषे विशेषता कही है क्योंकि यह धनरूपी पदार्थ उपाधि और भलाई दोनों का बीज है इसी पर महापुरुष ने कहा है कि यह धन भी उत्तम पदार्थ है पर बुद्धिमान् और धर्मात्मा पुरुषों को और यों भी कहा है जब यह मनुष्य अत्यन्त निर्द्धन होता है तब निस्सन्देह महाराज से विमुख होजाता है क्योंकि जब अपने सम्बन्धियों और आपको भूखसंयुक्त अधीन देखता है तब ऐसा जानता है कि भगवत् ने यह कैसी अनीति रची है कि पापी मनुष्यों को धन दिया है और सात्त्विकी मनुष्य ऐसे दुःखित किये हैं कि उनको एक दाम भी हाथ नहीं आता जिस करके भूख का निवारण करें बहुरि ऐसा अनुमान करता है कि जब भगवत् मेरे दुःख को नहीं जानता तब अन्तर्यामी क्योंकर हुआ और जब दुःखी जानता है और दे नहीं सक्का तव पूर्ण समर्थ क्योंकर हुआ और जब समर्थ होकर नहीं देता तब दया और उदारता से हीन जाना जाता है और जब इस निमित्त नहीं देता कि परलोक बिषे सुखी करूंगा तब ऐसे जाना जाता है कि दुःख दिये विना सुख देने को समर्थ नहीं होसक्का ताते प्रसिद्ध है कि निर्द्धन पुरुष क्रोधवान होकर ऐसा भी कहने लगता है कि समय विपरीत हुआ है और लोग अन्धहुये हैं जो अनधिकारियों को पदार्थ और धन देते हैं तात्पर्य यह कि सन्तोष विना यह मनुष्य इस प्रकार भगवत् से विमुख होता है और अपने भले बुरे को पहिचान नहीं सक्का ताते ऐसा पुरुष कोई दुर्लभ होता है जो निर्द्धन होकर भी प्रतीति करके उसही विषे अपनी भलाई जाने पर ऐसे मनुष्य बहुत होते हैं जो निर्द्धनताई विषे व्याकुल होजाते हैं इसी काग्य से भगवद् ने यह धन भी जीव के छिद्रों को छिपानेवाला बनाया है और शरीर के निर्वाहमात्र संग्रह करना सन्तजनों ने भी प्रमाण कहा है ताते प्रसिद्ध हुआ कि इस प्रकार करके यह धन भी केवल निन्द्य नहीं बहुरि इसही धन बिपे एक यह भी लाभ है कि सब जिज्ञासुओं की अभिलाष परलोक के सुख पाने की होती है सो परलोक का सुख तबही प्राप्त होता है जब प्रथम तीन पदार्थ प्राप्तहोवें सो एक तो विद्या और कोमल स्वभाव और इसकी स्थिति मन विषे होती है ? और दूसरा पदार्थ शरीर के विषे पाया जाता है सो वह आरोग्यता और जीवना है दो बहुरि तीसरा पदार्थ शरीर से बाहर पाया जाता है सो वह प्राणों की रक्षा के निमित्त शुद्ध जीविका है तीन पर जब इस पुरुष की श्रद्धा निष्काम होवे तब इन पदार्थों करके परलोक के सुख को पासला है सो जिस पुरुष ने इस प्रकार निश्चय जाना है वह धन को कार्यमात्र अङ्गीकार करता है और अधिक धन की सामग्री को हलाहल विष की नाई जानता है सो इस वचन का अर्थ यही हैं जो कहा है कि उत्तम पुरुषों को घनभी लाभदायक होता है इसी पर महापुरुप ने कहा है कि जो पुरुष धन को धर्म के निमित्त प्रियतम रखता है वह धर्मही को मियतम रखता है और जो पुरुष अपनी वासना के अनुसार धन को प्रियतम जानता है वह अपनी बासनाही का दास है और उसने इस मनुष्य जन्म के तात्पर्य को नहीं समझा ताते महामूर्ख है इसी पर इब्राहीम सन्तने कहा है कि हे महाराज ! मेरी और मेरे प्रियतमों की प्रेतपूजा से रक्षाकर अर्थ यह कि सोना चांदी तरूप हैं और सबही लोभ संयुक्त इसको पूजते हैं ताते तू मेरे हृदय से इसकी प्रीति को दूरकर ऐसे जान तू कि यह धन सर्प की नाई है अर्थ यह कि जैसे विष और माऐ दोनों सर्पही से उपजते हैं तेसेही धन बिपे भी गुण दोष पाये जाते हैं सो जवलग विष और मणि के स्वरूप को भिन्न दो करके न कहिये तब लग वचनका तात्पर्य परमसिद्ध नहीं होता ताते मैं घनके गुण और दोष मिनर करके कहता हूँ पर घन के लाभ दो प्रकार के प्रसिद्ध हैं सो एक तो संसारी लाभ है कि धनवान् पुरुष जगत् विपे बढ़ाई को पावता है और इत्यादिक अवर जो स्थूल लाभ हैं सोपही प्रसिद्ध हैं बहुरि दूसरे धर्म के मार्ग विषे धन के लाभ हैं सो यह भी तीन हैं एक तो अपने शरीर की जीविका होती हैं और जितने शुभकर्म हैं सो वह शरीर के सम्बन्ध करके सिद्ध होते हैं ताते सर्व शुभ कर्मों का बीज शुद्ध जीविका है पर जब जीविका की चिन्ता रहती है तब उस से भजन और अभ्यास कुछ नहीं होसक्का ताते जब इस पुरुष की मंशा धर्म के मार्ग की होवे तब जीविका का संग्रह रखना भी उसही मार्ग का तोशा होता है इसी पर एक वार्चा है कि सन्त के पास कुछ अनाज निष्पाप व्यवहार का आया था सो वह सन्त उस अनाज की मुष्टि भरकर कहने लगे कि इस शुद्ध जीविका को मैं निरुद्यमियों के भरोसे से विशेष जानता हूं पर इस भेद को सोई पुरुष समझता है जिसको अपने हृदय की शुद्धता और अशुद्धता की बूझ होती है और तवहीं वह जानता है कि शुद्ध जीविका करके इस प्रकार हृदय निःखेद रहता है और और लोगों की आशा दूर होजाती है और भजन-विषे एकाग्रता दृढ़ होती है बहु दूसरा लाभ धर्ममार्ग सम्बन्धी धन का यह है कि और जीवों को दान देता है तो भी इस पुरुष को भलाई प्राप्त होती है पर धन का देना भी चार प्रकार का है सो प्रथम यह है कि अर्थी और सात्विकी मनुष्यों की पूजा करनी तब उनकी प्रसन्नता करके व्यवहार और परमार्थ के सुख को प्राप्त होता है ? और दूसरा प्रकार देने का यह है कि मित्रों और सम्बन्धियों के साथ भाव करना और सर्व कार्यों विपे उदारचित्त होना सो यह भी धन करके होता है दो बहुरि तीसरा यह कि कितनेही पुरुष इसकी आशा रखते हैं और जव उनको कुछ न देवै तब निन्दा करने लगते हैं जैसे ब्राह्मण व भाटव कवीश्वर होते हैं सो इनको देना भी बड़ा उपकार है क्योंकि वह सब निन्दा करने से छूटते हैं तीन बहुरि चौथा प्रकार यह है कि यह मनुष्य सब किया अपनी ही नहीं करसक्का ताते केते पुरुषों के साथ व्यवहार का सम्बन्ध होता है तब अपनी सेवा करनेवालों को देना भी विशेष है क्योंकि जब यह पुरुष अपनी क्रिया से नि श्चिन्त होता है तब भजन विषे सावधान रहता है और यद्यपि अपने शरीर की किया आपही करनी विशेष है तौभी जिस जिज्ञासु का चित्त अन्तर अभ्यास विषे दृढ होता है तब उसको स्थूब किया का अत्यन्त अधिकार नहीं रहता चार/दो बहुरि तीसरा लाभ धन का धर्ममार्ग सम्बन्धी यह है कि धन करके और भी बड़े दो पुण्यकार्य होते हैं जैसे कूप, ताल और पुलों का बनाना अथवा अभ्यागतों के निमित्त धर्मशाला और ठाकुरद्वारे बनाने सो इत्यादिक पुण्यस्थान ऐसे उत्तम हैं कि इन्हों करके चिरकाल पर्यन्त असंख्यजीवों को सुख होता है पर इनकी सिद्धता भी धन करके होती है ताते जान तू कि इस धन्न विषे ते विघ्न तो स्थूल हैं और केते ऐसे हैं कि धर्म के मार्ग से विमुख करते हैं सो यह विघ्न भी तीन प्रकारके हैं प्रथम यह जो धन करके भोगों की प्राप्ति और पापक्रिया सुखेन होती हैं सो इस जीव का मन तो आगेही से ऐसा चपल है कि सर्वदा विपयों और पापों की ओर दौड़ता रहता है और जब सन्मानादिक बढ़ाई को पावता है तब शीघ्रही पापों विषे जाय गिरता है और बुद्धि की शुद्धता नष्ट होजाती है बहुरि जब भोगों और पापों से हठ करके आपको बचाया चाहे तो भी बड़ा पुरुषार्थ चाहिये काहे से कि संपदा विषे विरक्त रहना महाकठिन है एक बहुरि दूसरा विघ्न यह है कि यद्यपि धनवान् पुरुष ऐसा विचारवान् होये कि पाप कर्मों से बचायेराखे तौ भों खान पान और वस्त्रादि
|
चाँद की तेरहवीं दिन - चांद्र मास की दूसरी तिमाही। वैक्सिंग चंद्रमा पूर्ण चरण के करीब पहुंच। यह अच्छी तरह से किया जा रहा है, मन और प्रदर्शन को प्रभावित करता।
व्हील, एक दुष्चक्र, एक अंगूठी - धारणा है कि सबसे सटीक रूप से 13 वीं चांद्र दिन निर्धारित। दिन की सुविधा से पता चलता है कि यह रचनात्मकता के लिए बहुत अच्छा है। इस दिन पर, आप उस मामले, जो एक लंबे समय में लगी हुई है में नई खोजों बना सकते हैं। तेरहवें एक सामंजस्यपूर्ण निरंतरता और विकास मामलों, जो कल शुरू कर दिया, 12 चांद्र दिन प्रदान करता है। एक ताबीज के रूप में, इस दिन के छल्ले के रूप में सबसे उपयुक्त आइटम नहीं है। यह महत्वपूर्ण है कि शुभंकर बंद हो गया है, तो ऊर्जा के रचनात्मक प्रवाह बर्बाद नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत, एक ही प्रक्षेपवक्र, सफ़ाई के साथ आ जाएगा, सुधार और सुधार। यदि इच्छा शक्ति आंदोलन है, तो एक पुरस्कृत अनुभव है कि आप विकास के एक नए चरण के लिए ले सकता है धीमा करने के लिए, व्यर्थ में नीचे जाना होगा। और सारी पूर्ववर्ती अवधि आगे बढ़ने नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत, वापस चल रहा है। यह 13 वीं है चाँद के दिन। दिन की सुविधा निष्क्रियता पर प्रतिबंध लगाता है।
आज प्रभावी समूह में काम हो सकता है, नई जानकारी को पचाने के लिए और बाद में काम में आने के लिए सुनिश्चित करने के लिए आसान है कि प्राप्त होगा। इस दिन, प्रशिक्षण का एक नया चक्र रखना, उपयोगी जानकारीपूर्ण और पुस्तकों से भरा पढ़ना शुरू करने के लिए अच्छा है।
आप तेरहवीं चंद्र दिन में अपने कर्म सुधार कर सकते हैं। यह धागा और धागे का काम द्वारा सुविधा है। अंटी नोड्स untangling, आप खोल कर्म समुद्री मील पिछली अवधि में अपने भाग्य में गठन किया गया।
Talisman तेरहवीं चंद्र दिन अंगूठी है। इस दिन नए छल्ले और कंगन बंद कर दिया पहनना शुरू करने के लिए उपयोगी है। आप अपनी गर्दन या अन्य सजावट के चारों ओर एक श्रृंखला खरीदने के लिए, एक बंद अंगूठी से मिलकर करना चाहते हैं, तो 12 वीं चांद्र दिन में करते हैं। इस प्रकार, आप हताशा, जड़ता और ठहराव के खिलाफ एक शक्तिशाली अभिभावक पैदा करेगा। गले में एक रिंग में लिंक-अंगूठी, नकारात्मक बाहरी प्रभावों से आप की रक्षा करेगा।
इस दिन पर, आप इस तरह के स्कार्फ और बेल्ट के रूप में सामान खरीद सकते हैं। आप कुछ ऐसी बातें है कि सौहार्दपूर्वक अपने अलमारी में फिट का चयन करने में सक्षम हो जाएगा।
इस दिन पर प्रयास करें अक्सर अंगूठी की याद ताजा की वस्तुओं के साथ संपर्क में आते हैं।
इस दिन आप और आपके प्यार के छल्ले की एक प्रतीकात्मक विनिमय कर देगा, तो समय के साथ आप समान विचारधारा वाले लोगों के सामंजस्य में लगता है के एक महान जोड़ी, मिल बहुत अच्छी तरह से एक दूसरे के पूरक है, और लगता है कि यह विकास और पूर्णता के लिए आवश्यक है जाएगा।
माना जाता है कि एक कंपनी के भीतर फेरबदल के लिए सबसे अच्छा वास्तव में 13 चांद्र दिन अनुकूल है। दिन की सुविधा नए सहयोगियों के साथ अनुबंध में प्रवेश करने की जरूरत नहीं है। इस दिन में सही काम पुराने संबंधों को बढ़ाने के लिए, दोस्ती, गर्वित नहीं बैठकों की स्थापना और आगे और अधिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दिन पर, लंबे समय से चली आ रही भागीदारी के समायोजन के साथ एक बहुत अच्छा सौदा। एक रिश्ता है कि सूट नहीं था, लेकिन अब सबसे अच्छा समय एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए है।
इस दिन ट्रक ड्राइवरों, टैक्सी ड्राइवरों और ड्राइवर के लिए अच्छा है। आज आप उड़ान पर जा सकते हैं - सौभाग्य से जो लोग पहियों पर कर रहे हैं के साथ होगा।
तेरहवीं चंद्र दिन में मध्यम आयु वर्ग के लोगों, एक आम रचनात्मक पेशे से एकजुट शादी करने के लिए सबसे अच्छा है। इस मामले में, शादी दो मजबूत व्यक्तित्व है कि विनाशकारी प्रतिद्वंद्विता खतरा नहीं होगा लिंक करेगा। अक्सर इन जोड़ों सफल रचनात्मक जोड़ी, एक विशेष वातावरण में ज्ञात हो।
प्रोस्थेटिक्स और दंत चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी, मालिश और सेल्युलाईट उपचार 13 चांद्र दिन में बहुत अच्छी तरह से करते हैं। दिन की सुविधा पता चलता है कि जरूरत पेट और अग्न्याशय पर विशेष ध्यान दें करने के लिए। इस दिन में भूख नहीं जाना चाहिए, लेकिन भोजन के लिए पर्याप्त प्रकाश और भी चिकना नहीं होना चाहिए। बेहतर स्मोक्ड सभी को बाहर करने का। आज आप नाई यात्रा कर सकते हैं। 13 चांद्र दिन में बाल कटवाने विशेष रूप से अच्छी तरह से पता चला है। शरीर में पूर्णिमा तक वहाँ ऊर्जा का एक संग्रह, तो सकारात्मक या नकारात्मक है। अपने बालों को समाप्त होता है और posechonnye पर भंगुर है, तो अस्वस्थ ऊर्जा संचित। वह शरीर छोड़ने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। बाल कटवाने के बाद, उस दिन, बाल मोटा और आज्ञाकारी हो जाता है ऐसा करने के लिए, सामान्य स्थिति और मूड में सुधार। आज अपने बालों को डाई करने के लिए हैं, तो रंग, आसानी से और स्वाभाविक रूप से झूठ के रूप में अगर एक नया केश बनाने के लिए, यह एक नये जीवन की शुरुआत हो सकता है और पुराने संबंधों के नवीकरण के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर सकता होगा।
खेल का सवाल है, इस दिन में यह एक साइकिल की सवारी करने के लिए, स्केट और स्केटबोर्डिंग बहुत उपयोगी है। तुम बाहर प्रकृति में नहीं मिल सकता है, तो स्वास्थ्य केंद्र या जिम में जाने के लिए और एक स्थिर बाइक पर बाहर काम करते हैं।
13 चांद्र दिन सपने में देखा भविष्यवाणी है। आज, यह सपने में से किसी को नहीं देखना बेहतर है, के रूप में क्या आप देख पता चलता है कि अपने अतीत की समस्याओं में एक प्रतीकात्मक रूप में होगा हल किया जा करने के लिए रहते हैं। नींद पर विचार करें,, समझने की कोशिश यह किसी भी पिछले घटना के साथ जुड़ा हो सकता है। आप सफल हैं, तो आप अपने विकास को अवरुद्ध में से कुछ से छुटकारा मिल सकता है।
13 वीं चांद्र दिन में पैदा हुआ बचपन से ही लोगों को व्हील वाहनों के प्रति उदासीन नहीं हैं। इस दिन पर पैदा हुए एक बच्चे के लिए, एक सामंजस्यपूर्ण व्यक्तित्व बन गया है, वह निश्चित रूप से संभव के रूप में ज्यादा समय के छल्ले के पिरामिड के साथ खेलने के रूप में आधार पिन पर पहनने के लिए करना चाहिए। यह वांछनीय है जितनी जल्दी हो सके उसे एक साइकिल खरीदने के लिए। जल्दी ही वह पहिया के साथ में महारत हासिल, जितनी जल्दी संभव है कि क्रिएटिव होने के लिए। इन लोगों को अपनी सारी जिंदगी नए ज्ञान प्राप्त करने और पहले से ही प्राप्त कर लिया सुधार करने की कोशिश करेंगे। आपको यह सुनिश्चित करना 13 वीं चांद्र दिन में पैदा हुए अपने बच्चे, स्कूल जाने के लिए खुश है हो सकता है और अनुस्मारक बिना उनके होमवर्क कर सकते हैं।
निकोले और ओल्गा - इस दिन जन्मे लोगों के लिए मुबारक के नाम।
लकी नंबर - जो लोग एक को समाप्त करने या अंकों 0 के बीच में आ गए हैं।
पौधों की हवाई भाग की तीव्रता में वृद्धि लूना में वृद्धि करने के लिए योगदान देता है। फूल, सलाद, खरबूजे, जामुन,: - 13 चांद्र दिन एक समय था जब आप fertilizing पौधों सबसे बड़ी ग्राहक मूल्य है ऐसा कर सकते हैं हिस्सा aboveground है फलों के पेड़ और झाड़ियों। आज यह जैव उर्वरकों के साथ पौधों की जड़ों को खिलाने के लिए संभव है। वे हवाई भाग के विकास पर गहन रूप से छोड़ देंगे।
ये चंद्र दिन, फलों के पेड़ और सजावटी पौधों कलम बांधने का काम पक्ष के लिए के लिए बहुत उपयुक्त है। आज यह रोपण अंकुर और बीज ऐसा करने के लिए संभव है। पौधे जल्दी से विकास करने के लिए जाना।
खैर उस दिन संयंत्र के शीर्ष पर चंद्रमा के इस चरण में के रूप में, कटाई और औषधीय पौधों की कटाई करने के लिए पोषक तत्वों की अधिकतम राशि ध्यान केंद्रित किया है।
क्योंकि इस अवधि में पौधों 13 वें दिन में सबसे तेजी से बढ़ रही हैं, वे बहुतायत से पानी पिलाया जाना चाहिए। , ज़मीन खोदना hoeing और मातम के निराई, किया जा सकता है, उपयोगी पौधों की जड़ों का भी डर नहीं के रूप में इस चरण के लिए उन्हें आराम की अवधि है।
तेरहवीं चंद्र दिन पुष्प दौर की व्यवस्था कर सकते में, स्थापित लॉग-पिट।
इस दिन एक करने के लिए बहुत उपयोगी है फलियां के पकवान और साबुत अनाज। आज, यह रोटी बेक और पेनकेक्स बनाने के लिए सिफारिश की है। दौर रोटी पाव रोटी एक चाकू से काटा नहीं, और हाथ को कुचलने बेहतर है। Bagels, बैगल और सूखी, के रूप में कुकीज़ एक अंगूठी - सभी भविष्य के लिए किया जाएगा। एक पक्षी और एक मछली - इस दिन पर, यह कंकाल युक्त खाद्य पदार्थों को खाने के लिए बेहतर नहीं है। एक व्यंग्य, ऑक्टोपस, समुद्र ककड़ी और अन्य समुद्री भोजन और अकशेरुकी बहुत उपयोगी हो जाएगा।
जादू 13 चांद्र दिन तेज या नुकीली वस्तुओं से निपटने के लिए अनुशंसित नहीं है। वे ऊर्जा के प्रवाह है, जो वस्तुओं एक गोल छेद के साथ चुस्त कर रहे हैं अद्यतन रोक सकता है। गहनता से उन्हें उस दिन का उपयोग कर, आप ब्रह्मांड के कुल ब्रह्मांडीय सद्भाव के बाहर गिर करने के लिए जोखिम।
तेरहवीं चंद्र दिन अटकल प्रथाओं में ऊर्जा की धीमी गति से प्रवाह के कारण प्रभावी नहीं हैं। जाओ उद्देश्य जानकारी सफल नहीं।
|
चाँद की तेरहवीं दिन - चांद्र मास की दूसरी तिमाही। वैक्सिंग चंद्रमा पूर्ण चरण के करीब पहुंच। यह अच्छी तरह से किया जा रहा है, मन और प्रदर्शन को प्रभावित करता। व्हील, एक दुष्चक्र, एक अंगूठी - धारणा है कि सबसे सटीक रूप से तेरह वीं चांद्र दिन निर्धारित। दिन की सुविधा से पता चलता है कि यह रचनात्मकता के लिए बहुत अच्छा है। इस दिन पर, आप उस मामले, जो एक लंबे समय में लगी हुई है में नई खोजों बना सकते हैं। तेरहवें एक सामंजस्यपूर्ण निरंतरता और विकास मामलों, जो कल शुरू कर दिया, बारह चांद्र दिन प्रदान करता है। एक ताबीज के रूप में, इस दिन के छल्ले के रूप में सबसे उपयुक्त आइटम नहीं है। यह महत्वपूर्ण है कि शुभंकर बंद हो गया है, तो ऊर्जा के रचनात्मक प्रवाह बर्बाद नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत, एक ही प्रक्षेपवक्र, सफ़ाई के साथ आ जाएगा, सुधार और सुधार। यदि इच्छा शक्ति आंदोलन है, तो एक पुरस्कृत अनुभव है कि आप विकास के एक नए चरण के लिए ले सकता है धीमा करने के लिए, व्यर्थ में नीचे जाना होगा। और सारी पूर्ववर्ती अवधि आगे बढ़ने नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत, वापस चल रहा है। यह तेरह वीं है चाँद के दिन। दिन की सुविधा निष्क्रियता पर प्रतिबंध लगाता है। आज प्रभावी समूह में काम हो सकता है, नई जानकारी को पचाने के लिए और बाद में काम में आने के लिए सुनिश्चित करने के लिए आसान है कि प्राप्त होगा। इस दिन, प्रशिक्षण का एक नया चक्र रखना, उपयोगी जानकारीपूर्ण और पुस्तकों से भरा पढ़ना शुरू करने के लिए अच्छा है। आप तेरहवीं चंद्र दिन में अपने कर्म सुधार कर सकते हैं। यह धागा और धागे का काम द्वारा सुविधा है। अंटी नोड्स untangling, आप खोल कर्म समुद्री मील पिछली अवधि में अपने भाग्य में गठन किया गया। Talisman तेरहवीं चंद्र दिन अंगूठी है। इस दिन नए छल्ले और कंगन बंद कर दिया पहनना शुरू करने के लिए उपयोगी है। आप अपनी गर्दन या अन्य सजावट के चारों ओर एक श्रृंखला खरीदने के लिए, एक बंद अंगूठी से मिलकर करना चाहते हैं, तो बारह वीं चांद्र दिन में करते हैं। इस प्रकार, आप हताशा, जड़ता और ठहराव के खिलाफ एक शक्तिशाली अभिभावक पैदा करेगा। गले में एक रिंग में लिंक-अंगूठी, नकारात्मक बाहरी प्रभावों से आप की रक्षा करेगा। इस दिन पर, आप इस तरह के स्कार्फ और बेल्ट के रूप में सामान खरीद सकते हैं। आप कुछ ऐसी बातें है कि सौहार्दपूर्वक अपने अलमारी में फिट का चयन करने में सक्षम हो जाएगा। इस दिन पर प्रयास करें अक्सर अंगूठी की याद ताजा की वस्तुओं के साथ संपर्क में आते हैं। इस दिन आप और आपके प्यार के छल्ले की एक प्रतीकात्मक विनिमय कर देगा, तो समय के साथ आप समान विचारधारा वाले लोगों के सामंजस्य में लगता है के एक महान जोड़ी, मिल बहुत अच्छी तरह से एक दूसरे के पूरक है, और लगता है कि यह विकास और पूर्णता के लिए आवश्यक है जाएगा। माना जाता है कि एक कंपनी के भीतर फेरबदल के लिए सबसे अच्छा वास्तव में तेरह चांद्र दिन अनुकूल है। दिन की सुविधा नए सहयोगियों के साथ अनुबंध में प्रवेश करने की जरूरत नहीं है। इस दिन में सही काम पुराने संबंधों को बढ़ाने के लिए, दोस्ती, गर्वित नहीं बैठकों की स्थापना और आगे और अधिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दिन पर, लंबे समय से चली आ रही भागीदारी के समायोजन के साथ एक बहुत अच्छा सौदा। एक रिश्ता है कि सूट नहीं था, लेकिन अब सबसे अच्छा समय एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए है। इस दिन ट्रक ड्राइवरों, टैक्सी ड्राइवरों और ड्राइवर के लिए अच्छा है। आज आप उड़ान पर जा सकते हैं - सौभाग्य से जो लोग पहियों पर कर रहे हैं के साथ होगा। तेरहवीं चंद्र दिन में मध्यम आयु वर्ग के लोगों, एक आम रचनात्मक पेशे से एकजुट शादी करने के लिए सबसे अच्छा है। इस मामले में, शादी दो मजबूत व्यक्तित्व है कि विनाशकारी प्रतिद्वंद्विता खतरा नहीं होगा लिंक करेगा। अक्सर इन जोड़ों सफल रचनात्मक जोड़ी, एक विशेष वातावरण में ज्ञात हो। प्रोस्थेटिक्स और दंत चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी, मालिश और सेल्युलाईट उपचार तेरह चांद्र दिन में बहुत अच्छी तरह से करते हैं। दिन की सुविधा पता चलता है कि जरूरत पेट और अग्न्याशय पर विशेष ध्यान दें करने के लिए। इस दिन में भूख नहीं जाना चाहिए, लेकिन भोजन के लिए पर्याप्त प्रकाश और भी चिकना नहीं होना चाहिए। बेहतर स्मोक्ड सभी को बाहर करने का। आज आप नाई यात्रा कर सकते हैं। तेरह चांद्र दिन में बाल कटवाने विशेष रूप से अच्छी तरह से पता चला है। शरीर में पूर्णिमा तक वहाँ ऊर्जा का एक संग्रह, तो सकारात्मक या नकारात्मक है। अपने बालों को समाप्त होता है और posechonnye पर भंगुर है, तो अस्वस्थ ऊर्जा संचित। वह शरीर छोड़ने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। बाल कटवाने के बाद, उस दिन, बाल मोटा और आज्ञाकारी हो जाता है ऐसा करने के लिए, सामान्य स्थिति और मूड में सुधार। आज अपने बालों को डाई करने के लिए हैं, तो रंग, आसानी से और स्वाभाविक रूप से झूठ के रूप में अगर एक नया केश बनाने के लिए, यह एक नये जीवन की शुरुआत हो सकता है और पुराने संबंधों के नवीकरण के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर सकता होगा। खेल का सवाल है, इस दिन में यह एक साइकिल की सवारी करने के लिए, स्केट और स्केटबोर्डिंग बहुत उपयोगी है। तुम बाहर प्रकृति में नहीं मिल सकता है, तो स्वास्थ्य केंद्र या जिम में जाने के लिए और एक स्थिर बाइक पर बाहर काम करते हैं। तेरह चांद्र दिन सपने में देखा भविष्यवाणी है। आज, यह सपने में से किसी को नहीं देखना बेहतर है, के रूप में क्या आप देख पता चलता है कि अपने अतीत की समस्याओं में एक प्रतीकात्मक रूप में होगा हल किया जा करने के लिए रहते हैं। नींद पर विचार करें,, समझने की कोशिश यह किसी भी पिछले घटना के साथ जुड़ा हो सकता है। आप सफल हैं, तो आप अपने विकास को अवरुद्ध में से कुछ से छुटकारा मिल सकता है। तेरह वीं चांद्र दिन में पैदा हुआ बचपन से ही लोगों को व्हील वाहनों के प्रति उदासीन नहीं हैं। इस दिन पर पैदा हुए एक बच्चे के लिए, एक सामंजस्यपूर्ण व्यक्तित्व बन गया है, वह निश्चित रूप से संभव के रूप में ज्यादा समय के छल्ले के पिरामिड के साथ खेलने के रूप में आधार पिन पर पहनने के लिए करना चाहिए। यह वांछनीय है जितनी जल्दी हो सके उसे एक साइकिल खरीदने के लिए। जल्दी ही वह पहिया के साथ में महारत हासिल, जितनी जल्दी संभव है कि क्रिएटिव होने के लिए। इन लोगों को अपनी सारी जिंदगी नए ज्ञान प्राप्त करने और पहले से ही प्राप्त कर लिया सुधार करने की कोशिश करेंगे। आपको यह सुनिश्चित करना तेरह वीं चांद्र दिन में पैदा हुए अपने बच्चे, स्कूल जाने के लिए खुश है हो सकता है और अनुस्मारक बिना उनके होमवर्क कर सकते हैं। निकोले और ओल्गा - इस दिन जन्मे लोगों के लिए मुबारक के नाम। लकी नंबर - जो लोग एक को समाप्त करने या अंकों शून्य के बीच में आ गए हैं। पौधों की हवाई भाग की तीव्रता में वृद्धि लूना में वृद्धि करने के लिए योगदान देता है। फूल, सलाद, खरबूजे, जामुन,: - तेरह चांद्र दिन एक समय था जब आप fertilizing पौधों सबसे बड़ी ग्राहक मूल्य है ऐसा कर सकते हैं हिस्सा aboveground है फलों के पेड़ और झाड़ियों। आज यह जैव उर्वरकों के साथ पौधों की जड़ों को खिलाने के लिए संभव है। वे हवाई भाग के विकास पर गहन रूप से छोड़ देंगे। ये चंद्र दिन, फलों के पेड़ और सजावटी पौधों कलम बांधने का काम पक्ष के लिए के लिए बहुत उपयुक्त है। आज यह रोपण अंकुर और बीज ऐसा करने के लिए संभव है। पौधे जल्दी से विकास करने के लिए जाना। खैर उस दिन संयंत्र के शीर्ष पर चंद्रमा के इस चरण में के रूप में, कटाई और औषधीय पौधों की कटाई करने के लिए पोषक तत्वों की अधिकतम राशि ध्यान केंद्रित किया है। क्योंकि इस अवधि में पौधों तेरह वें दिन में सबसे तेजी से बढ़ रही हैं, वे बहुतायत से पानी पिलाया जाना चाहिए। , ज़मीन खोदना hoeing और मातम के निराई, किया जा सकता है, उपयोगी पौधों की जड़ों का भी डर नहीं के रूप में इस चरण के लिए उन्हें आराम की अवधि है। तेरहवीं चंद्र दिन पुष्प दौर की व्यवस्था कर सकते में, स्थापित लॉग-पिट। इस दिन एक करने के लिए बहुत उपयोगी है फलियां के पकवान और साबुत अनाज। आज, यह रोटी बेक और पेनकेक्स बनाने के लिए सिफारिश की है। दौर रोटी पाव रोटी एक चाकू से काटा नहीं, और हाथ को कुचलने बेहतर है। Bagels, बैगल और सूखी, के रूप में कुकीज़ एक अंगूठी - सभी भविष्य के लिए किया जाएगा। एक पक्षी और एक मछली - इस दिन पर, यह कंकाल युक्त खाद्य पदार्थों को खाने के लिए बेहतर नहीं है। एक व्यंग्य, ऑक्टोपस, समुद्र ककड़ी और अन्य समुद्री भोजन और अकशेरुकी बहुत उपयोगी हो जाएगा। जादू तेरह चांद्र दिन तेज या नुकीली वस्तुओं से निपटने के लिए अनुशंसित नहीं है। वे ऊर्जा के प्रवाह है, जो वस्तुओं एक गोल छेद के साथ चुस्त कर रहे हैं अद्यतन रोक सकता है। गहनता से उन्हें उस दिन का उपयोग कर, आप ब्रह्मांड के कुल ब्रह्मांडीय सद्भाव के बाहर गिर करने के लिए जोखिम। तेरहवीं चंद्र दिन अटकल प्रथाओं में ऊर्जा की धीमी गति से प्रवाह के कारण प्रभावी नहीं हैं। जाओ उद्देश्य जानकारी सफल नहीं।
|
Guest House Kand: तो मुलायम और मायावती के पीछे की इस दुश्मनी के पीछे की वजह जानने के लिए हमें साल 1992 में जाना होगा, जब मुलयाम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद उन्होंने सूबे में अपनी सरकार बनाने के लिए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मायावती के साथ दोस्ती का बढ़ाया।
नई दिल्ली। सुबह के कुछ 8 बजकर 16 मिनट हो रहे होंगे...एकाएक खबर आती है कि समाजवादी पार्टी के प्रणेता मुलयाम सिंह यादव अब हमारे बीच नहीं रहे...उनका निधन हो गया.... इस खबर के प्रकाश में आने के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ चुकी है... भारतीय राजनीति में हर कोई नेताजी के निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है...मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेताजी के निधन पर प्रदेश में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, तो वहीं दूसरी तरफ बिहार में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। नेताजी की पिछले कुछ दिनों से तबीयत नासाज थी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वे उपचाराधीन थे। हालांकि, इससे पूर्व भी कई मर्तबा उनकी तबीयत नसाज रह चुकी थी, लेकिन इस बार उनकी तबीयत कुछ ऐसी बिगड़ी कि वो हम सभी को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कहकर चले गए। पीएम मोदी से लेकर अमित शाह तक ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। इस बीच उनसे जुड़े कुछ सियासी किस्सों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। इसी कड़ी में इस रिपोर्ट में हम आपको गैस्ट हाउस कांड के उस किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बाद कभी सत्ता के लिए एक-दूसरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले मुलायम और मायावती एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे।
तो मुलायम और मायावती के दुश्मनी के पीछे की वजह जानने के लिए हमें साल 1992 में जाना होगा, जब मुलयाम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद उन्होंने सूबे में अपनी सरकार बनाने के लिए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मायावती के साथ दोस्ती का बढ़ाया। वहीं बसपा प्रमुख ने भी इस दोस्ती के हाथ को सहर्ष स्वीकार कर लिया। जिसके बाद सूबे में सपा और बसपा के गठबंधन से सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने में कामयाब हुए, लेकिन फिर एकाएक कुछ सियासी कारणों की वजह से साल 1995 में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने कदम पीछे खींच लिए जिसका नतीजा यह हुआ कि मुलायम सिंह यादव की सरकार अल्पमत में गई। मुलायम की सीएम कुर्सी खतरे में आ गई। जिसके बाद सपा कार्यकर्ताओं का पारा अपने चरम पर पहुंच गया और उन्होंने मायावती के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया और मोर्चा भी कोई छोटामोटा नहीं, बल्कि ऐसा जिसने मुलायम और मायावती के बीच अदावत पैदा कर दी।
वहीं, मायावती के कदम पीछे खींच लेने के बाद भड़के सपा कार्यकर्ताओं को जैसे ही खबर लगी कि बसपा प्रमुख लखनऊ के गैस्ट हाउस में ठहरीं हुईं हैं, तो सपा कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर जमकर बवाल काटा। बसपा विधायकों के साथ मारपीट की। बसपा कार्यकर्ताओं को जमकर पीटा। यहां तक की मायावती के साथ भी बदतमीजी की गई। उनके लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उनके लिए जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया था और यह सबकुछ सपा कार्यकर्ताओं ने मायावती द्वारा अपने कदम पीछे खींच लेने की वजह से किए थे, जिसके बाद दोनों ही दलों के बीच लंबी सियासी खाई पैदा हो गई। जिसके बाद दोनों ही एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए। सबको लगा कि अब ये दोनों एक-दूसरे के अंतिम क्षण तक दुश्मन ही बने रहेंगे, लेकिन वो कहते हैं ना कि राजनीति में ना कोई किसी का दोस्ता होता है, ना कोई दुश्मन, यहां तो सिर्फ और सिर्फ प्रत्येक व्यक्ति को अवसर के तराजू पर तौला जाता है।
बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा ने एक-दूसरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। दोनों ही दलों ने आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के विजयी रथ को रोकने के लिए गठबंधन की नौका की सवारी करने की फैसला किया था, जिसे जानकर भारतीय राजनीति में सभी के होश फाख्ता हो गए थे, लेकिन फिर इसके बाद सभी ने यह कहकर अपने मन को शांत कर लिया कि राजनीति में ना कोई किसी का दोस्त होता है और ना कोई किसी का दुश्मन होता है।
|
Guest House Kand: तो मुलायम और मायावती के पीछे की इस दुश्मनी के पीछे की वजह जानने के लिए हमें साल एक हज़ार नौ सौ बानवे में जाना होगा, जब मुलयाम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद उन्होंने सूबे में अपनी सरकार बनाने के लिए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मायावती के साथ दोस्ती का बढ़ाया। नई दिल्ली। सुबह के कुछ आठ बजकर सोलह मिनट हो रहे होंगे...एकाएक खबर आती है कि समाजवादी पार्टी के प्रणेता मुलयाम सिंह यादव अब हमारे बीच नहीं रहे...उनका निधन हो गया.... इस खबर के प्रकाश में आने के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ चुकी है... भारतीय राजनीति में हर कोई नेताजी के निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है...मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेताजी के निधन पर प्रदेश में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, तो वहीं दूसरी तरफ बिहार में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। नेताजी की पिछले कुछ दिनों से तबीयत नासाज थी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वे उपचाराधीन थे। हालांकि, इससे पूर्व भी कई मर्तबा उनकी तबीयत नसाज रह चुकी थी, लेकिन इस बार उनकी तबीयत कुछ ऐसी बिगड़ी कि वो हम सभी को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कहकर चले गए। पीएम मोदी से लेकर अमित शाह तक ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। इस बीच उनसे जुड़े कुछ सियासी किस्सों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। इसी कड़ी में इस रिपोर्ट में हम आपको गैस्ट हाउस कांड के उस किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बाद कभी सत्ता के लिए एक-दूसरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले मुलायम और मायावती एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे। तो मुलायम और मायावती के दुश्मनी के पीछे की वजह जानने के लिए हमें साल एक हज़ार नौ सौ बानवे में जाना होगा, जब मुलयाम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद उन्होंने सूबे में अपनी सरकार बनाने के लिए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मायावती के साथ दोस्ती का बढ़ाया। वहीं बसपा प्रमुख ने भी इस दोस्ती के हाथ को सहर्ष स्वीकार कर लिया। जिसके बाद सूबे में सपा और बसपा के गठबंधन से सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने में कामयाब हुए, लेकिन फिर एकाएक कुछ सियासी कारणों की वजह से साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने कदम पीछे खींच लिए जिसका नतीजा यह हुआ कि मुलायम सिंह यादव की सरकार अल्पमत में गई। मुलायम की सीएम कुर्सी खतरे में आ गई। जिसके बाद सपा कार्यकर्ताओं का पारा अपने चरम पर पहुंच गया और उन्होंने मायावती के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया और मोर्चा भी कोई छोटामोटा नहीं, बल्कि ऐसा जिसने मुलायम और मायावती के बीच अदावत पैदा कर दी। वहीं, मायावती के कदम पीछे खींच लेने के बाद भड़के सपा कार्यकर्ताओं को जैसे ही खबर लगी कि बसपा प्रमुख लखनऊ के गैस्ट हाउस में ठहरीं हुईं हैं, तो सपा कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर जमकर बवाल काटा। बसपा विधायकों के साथ मारपीट की। बसपा कार्यकर्ताओं को जमकर पीटा। यहां तक की मायावती के साथ भी बदतमीजी की गई। उनके लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उनके लिए जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया था और यह सबकुछ सपा कार्यकर्ताओं ने मायावती द्वारा अपने कदम पीछे खींच लेने की वजह से किए थे, जिसके बाद दोनों ही दलों के बीच लंबी सियासी खाई पैदा हो गई। जिसके बाद दोनों ही एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए। सबको लगा कि अब ये दोनों एक-दूसरे के अंतिम क्षण तक दुश्मन ही बने रहेंगे, लेकिन वो कहते हैं ना कि राजनीति में ना कोई किसी का दोस्ता होता है, ना कोई दुश्मन, यहां तो सिर्फ और सिर्फ प्रत्येक व्यक्ति को अवसर के तराजू पर तौला जाता है। बता दें कि साल दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा ने एक-दूसरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। दोनों ही दलों ने आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के विजयी रथ को रोकने के लिए गठबंधन की नौका की सवारी करने की फैसला किया था, जिसे जानकर भारतीय राजनीति में सभी के होश फाख्ता हो गए थे, लेकिन फिर इसके बाद सभी ने यह कहकर अपने मन को शांत कर लिया कि राजनीति में ना कोई किसी का दोस्त होता है और ना कोई किसी का दुश्मन होता है।
|
अलावा जो कुछ भी है वह उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है; इसलिए देह की रक्षा करना आवश्यक है। एक दूसरा पहलू यह है कि एक अन्य तरह की सुरक्षा है जो मेरी नहीं है। भविष्य मानो कमोबेश नियत कर दिया गया हो, कुछ ऐसी अलग तरह की सुरक्षा है। कुछ भिन्न प्रकार की सुरक्षा - केवल शरीर की ही नहीं। ऐसे अनूठेपन के साथ उस बालक ने जन्म लिया था - जिन हालात से भी वह गुज़रा उसमें बचे रहने के लिए उसकी सुरक्षा अवश्य की गयी होगी। किसी न किसी तरह, शरीर को जीवित रखने के लिए उसकी सुरक्षा की जाती है। कुछ है, जो इसकी देखभाल करता है; कुछ है, जो इसकी रक्षा करता है। वह क्या है, ऐसा पूछना अंदाज़ा लगाना होगा। मैत्रेय वाली बात कुछ ज़्यादा ही मूर्त और ठोस है, उसमें सहजता की कमी है। लेकिन मैं, इस आवरण के पीछे क्या है, नहीं देख सकता। मैं यह नहीं कर सकता। पुपुल (जयकर) और अन्य भारतीय विद्वानों के आग्रह पर मैंने इसकी कोशिश भी की। मैं कह चुका हूँ कि यह मैत्रेय या बोधिसत्त्व नहीं है। वैसी सुरक्षा कुछ ज़्यादा ही सुनिश्चित, गढ़ी गई लगती है। लेकिन यह सही है कि मैंने हमेशा सुरक्षित महसूस किया है।
यह विश्वास करने की ओर मेरा रुझान हुआ कि 'के' का उपयोग किया जा रहा है; सन् 1922 से ही किसी बाहरी सत्ता द्वारा उनका उपयोग किया गया था। इसका यह अर्थ नहीं था कि वह कोई माध्यम थे। माध्यम में और माध्यम के द्वारा क्या आ रहा है, उन दोनों में फर्क रहता है, जबकि 'के' में और उनके द्वारा जो प्रकट हो रहा था, उसमें अधिकांशतः कोई फर्क नहीं था। जिस तरह स्पंज में पानी समाया रहता है, कुछ वैसा ही संबंध उनकी चेतना और उस अन्य के बीच था। ऐसे भी क्षण आते जब वह पानी सूख जाया करता था और उनको उसी हालत में छोड़ जाया करता था जैसा कि मुझे पहली मुलाकातों में महसूस हुआ था - अनिश्चित, सौम्य, भ्रमित होने की संभावना लिए, शर्मीले, भोले, नम्य, स्नेही, मूर्ख से मूर्ख किस्म के मज़ाक पर हँसने वाले, फिर भी अपने आप में विलक्षण जिन्हें दंभ और हठधर्मिता ने छुआ तक न हो। इसके बावजूद जब मैं उनकी नोटबुक की तरफ दृष्टि डालती हूँ तो पाती एक ऐसी चेतना की अवस्था जो पूर्णतया 'के' की अपनी लगती है और जिसमें उनकी शिक्षा का भरपूर स्रोत नज़र आता है। फिर इस बात को स्वीकार करने में कठिनाई होने लगती है कि उनका उपयोग किया गया है।
साल के ख़त्म होने से पहले 'के' भारत में एक और अतींद्रिय अनुभूति से होकर गुज़रे । 21 फरवरी, 1980 को ओहाय में उन्होंने मेरी को इसका विवरण लिखवाया। उस साल मेरी उनके साथ भारत नहीं गयीं थीं। यहां 'के' स्वयं को अन्य पुरुष में संबोधित करते हुए लिखवाते हैं :
1 नवंबर, 1979 को 'के' ब्रॉकवुड से भारत गए। मद्रास में कुछ दिन बिताने के बाद वह सीधे ऋषि वैली चले गए। काफी लंबे अरसे से वह उस विलक्षण ध्यान की अवस्था में मध्य रात्रि में उठ जाया करते थे। कितने वर्षों से यह अवस्था उनका पीछा कर रही थी। उनके जीवन की यह एक सामान्य बात रही थी। यह ध्यान का कोई सचेतन, संकल्पित प्रयास या कुछ पाने की अचेतन कामना नहीं है। यह बिलकुल
|
अलावा जो कुछ भी है वह उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है; इसलिए देह की रक्षा करना आवश्यक है। एक दूसरा पहलू यह है कि एक अन्य तरह की सुरक्षा है जो मेरी नहीं है। भविष्य मानो कमोबेश नियत कर दिया गया हो, कुछ ऐसी अलग तरह की सुरक्षा है। कुछ भिन्न प्रकार की सुरक्षा - केवल शरीर की ही नहीं। ऐसे अनूठेपन के साथ उस बालक ने जन्म लिया था - जिन हालात से भी वह गुज़रा उसमें बचे रहने के लिए उसकी सुरक्षा अवश्य की गयी होगी। किसी न किसी तरह, शरीर को जीवित रखने के लिए उसकी सुरक्षा की जाती है। कुछ है, जो इसकी देखभाल करता है; कुछ है, जो इसकी रक्षा करता है। वह क्या है, ऐसा पूछना अंदाज़ा लगाना होगा। मैत्रेय वाली बात कुछ ज़्यादा ही मूर्त और ठोस है, उसमें सहजता की कमी है। लेकिन मैं, इस आवरण के पीछे क्या है, नहीं देख सकता। मैं यह नहीं कर सकता। पुपुल और अन्य भारतीय विद्वानों के आग्रह पर मैंने इसकी कोशिश भी की। मैं कह चुका हूँ कि यह मैत्रेय या बोधिसत्त्व नहीं है। वैसी सुरक्षा कुछ ज़्यादा ही सुनिश्चित, गढ़ी गई लगती है। लेकिन यह सही है कि मैंने हमेशा सुरक्षित महसूस किया है। यह विश्वास करने की ओर मेरा रुझान हुआ कि 'के' का उपयोग किया जा रहा है; सन् एक हज़ार नौ सौ बाईस से ही किसी बाहरी सत्ता द्वारा उनका उपयोग किया गया था। इसका यह अर्थ नहीं था कि वह कोई माध्यम थे। माध्यम में और माध्यम के द्वारा क्या आ रहा है, उन दोनों में फर्क रहता है, जबकि 'के' में और उनके द्वारा जो प्रकट हो रहा था, उसमें अधिकांशतः कोई फर्क नहीं था। जिस तरह स्पंज में पानी समाया रहता है, कुछ वैसा ही संबंध उनकी चेतना और उस अन्य के बीच था। ऐसे भी क्षण आते जब वह पानी सूख जाया करता था और उनको उसी हालत में छोड़ जाया करता था जैसा कि मुझे पहली मुलाकातों में महसूस हुआ था - अनिश्चित, सौम्य, भ्रमित होने की संभावना लिए, शर्मीले, भोले, नम्य, स्नेही, मूर्ख से मूर्ख किस्म के मज़ाक पर हँसने वाले, फिर भी अपने आप में विलक्षण जिन्हें दंभ और हठधर्मिता ने छुआ तक न हो। इसके बावजूद जब मैं उनकी नोटबुक की तरफ दृष्टि डालती हूँ तो पाती एक ऐसी चेतना की अवस्था जो पूर्णतया 'के' की अपनी लगती है और जिसमें उनकी शिक्षा का भरपूर स्रोत नज़र आता है। फिर इस बात को स्वीकार करने में कठिनाई होने लगती है कि उनका उपयोग किया गया है। साल के ख़त्म होने से पहले 'के' भारत में एक और अतींद्रिय अनुभूति से होकर गुज़रे । इक्कीस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ अस्सी को ओहाय में उन्होंने मेरी को इसका विवरण लिखवाया। उस साल मेरी उनके साथ भारत नहीं गयीं थीं। यहां 'के' स्वयं को अन्य पुरुष में संबोधित करते हुए लिखवाते हैं : एक नवंबर, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी को 'के' ब्रॉकवुड से भारत गए। मद्रास में कुछ दिन बिताने के बाद वह सीधे ऋषि वैली चले गए। काफी लंबे अरसे से वह उस विलक्षण ध्यान की अवस्था में मध्य रात्रि में उठ जाया करते थे। कितने वर्षों से यह अवस्था उनका पीछा कर रही थी। उनके जीवन की यह एक सामान्य बात रही थी। यह ध्यान का कोई सचेतन, संकल्पित प्रयास या कुछ पाने की अचेतन कामना नहीं है। यह बिलकुल
|
गुजरात सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग ने वैट के रिफंड के लिए ऑन लाइन सेवा शुरु कर दी है।
वाणिज्यिक कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'गुजरात वाणिज्यिक कर विभाग ने वैट रिफंड के लिए ऑनलाइन प्रार्थना पत्रों को स्वीकार होंगे।
अब वैट अदा करने वालों को वैट की आधिकारिक वेबसाइट से फार्म नंबर 306 को भरना पड़ेगा। इसके बाद कारोबारियों को एक पावती रसीद मिलेगी। कारोबारियों को असली कागजात के साथ इस रसीद को वाणिज्यिक कर विभाग में जमा कराने पर तीन दिन के भीतर ही रिफंड मिल जाएगा। '
|
गुजरात सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग ने वैट के रिफंड के लिए ऑन लाइन सेवा शुरु कर दी है। वाणिज्यिक कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'गुजरात वाणिज्यिक कर विभाग ने वैट रिफंड के लिए ऑनलाइन प्रार्थना पत्रों को स्वीकार होंगे। अब वैट अदा करने वालों को वैट की आधिकारिक वेबसाइट से फार्म नंबर तीन सौ छः को भरना पड़ेगा। इसके बाद कारोबारियों को एक पावती रसीद मिलेगी। कारोबारियों को असली कागजात के साथ इस रसीद को वाणिज्यिक कर विभाग में जमा कराने पर तीन दिन के भीतर ही रिफंड मिल जाएगा। '
|
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 15वें सीजन के लिए राजस्थान रॉयल्स (RR) ने श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी लसिथ मलिंगा को अपना गेंदबाजी कोच नियुक्त किया है. मलिंगा प्रथम बार इस लीग में बतौर कोच दिखाई देंगे. इससे पहले वह मुंबई इंडियंस के साथ कई बार अवार्ड जीत चुके हैं. वही हाल ही में 38 वर्ष के मलिंगा ने श्रीलंका के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर श्रीलंका टीम के गेंदबाजी कोच का पद संभाला था. राजस्थान रॉयल्स ने अपने ट्विटर अकाउंट पर यह खबर शेयर की.
वही 2008 के सीजन की विनर टीम राजस्थान रॉयल्स पहले सीजन के बाद निरंतर फाइनल में स्थान बनाने में विफल रही है. प्लेऑफ मुकाबलों तक ही टीम को संतुष्ट रहना पड़ा है, वहीं कुछ सीजन राजस्थान ने अंतिम पायदान तथा 7वें नंबर पर भी ख़त्म किए हैं. राजस्थान ने वर्ष 2021 में सीजन में 5 जीत तथा 9 हार के साथ सातवें नंबर पर ख़त्म किया था. राजस्थान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर मलिंगा का अपने स्टाइल में स्वागत किया.
वही लसिथ मलिंगा पहले सीजन से मुंबई इंडियंस के साथ थे, उन्होंने अपना अंतिम लीग मुकाबला वर्ष 2019 में चेन्नई के खिलाफ आखिर में खेला था. इस मुकाबले में भी उन्होंने अपनी गेंदबाजी से चौथी बार मुंबई इंडियंस को अवार्ड जिताया था. प्रथम बार मलिंगा मुंबई इंडियंस से अलग ड्रेसिंग रूम में दिखाई देंगे. राजस्थान के साथ इस समय श्रीलंका के महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले कुमार संगकारा भी बतौर निदेशक ऑफ क्रिकेट उपस्थित हैं. वही इस वर्ष फरवरी में हुए मेगा ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम को बहुत दुरुस्त किया है. इस वक़्त राजस्थान के साथ रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल के साथ तेज गेंदबाजी में ओबेद मैक्कॉय, प्रसिद्ध कृष्णा तथा ट्रेंट बोल्ट जैसे गेंदबाज उपस्थित हैं. राजस्थान की कमान संजू सैमसन संभालेंगे.
|
इंडियन प्रीमियर लीग के पंद्रहवें सीजन के लिए राजस्थान रॉयल्स ने श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी लसिथ मलिंगा को अपना गेंदबाजी कोच नियुक्त किया है. मलिंगा प्रथम बार इस लीग में बतौर कोच दिखाई देंगे. इससे पहले वह मुंबई इंडियंस के साथ कई बार अवार्ड जीत चुके हैं. वही हाल ही में अड़तीस वर्ष के मलिंगा ने श्रीलंका के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर श्रीलंका टीम के गेंदबाजी कोच का पद संभाला था. राजस्थान रॉयल्स ने अपने ट्विटर अकाउंट पर यह खबर शेयर की. वही दो हज़ार आठ के सीजन की विनर टीम राजस्थान रॉयल्स पहले सीजन के बाद निरंतर फाइनल में स्थान बनाने में विफल रही है. प्लेऑफ मुकाबलों तक ही टीम को संतुष्ट रहना पड़ा है, वहीं कुछ सीजन राजस्थान ने अंतिम पायदान तथा सातवें नंबर पर भी ख़त्म किए हैं. राजस्थान ने वर्ष दो हज़ार इक्कीस में सीजन में पाँच जीत तथा नौ हार के साथ सातवें नंबर पर ख़त्म किया था. राजस्थान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर मलिंगा का अपने स्टाइल में स्वागत किया. वही लसिथ मलिंगा पहले सीजन से मुंबई इंडियंस के साथ थे, उन्होंने अपना अंतिम लीग मुकाबला वर्ष दो हज़ार उन्नीस में चेन्नई के खिलाफ आखिर में खेला था. इस मुकाबले में भी उन्होंने अपनी गेंदबाजी से चौथी बार मुंबई इंडियंस को अवार्ड जिताया था. प्रथम बार मलिंगा मुंबई इंडियंस से अलग ड्रेसिंग रूम में दिखाई देंगे. राजस्थान के साथ इस समय श्रीलंका के महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले कुमार संगकारा भी बतौर निदेशक ऑफ क्रिकेट उपस्थित हैं. वही इस वर्ष फरवरी में हुए मेगा ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम को बहुत दुरुस्त किया है. इस वक़्त राजस्थान के साथ रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल के साथ तेज गेंदबाजी में ओबेद मैक्कॉय, प्रसिद्ध कृष्णा तथा ट्रेंट बोल्ट जैसे गेंदबाज उपस्थित हैं. राजस्थान की कमान संजू सैमसन संभालेंगे.
|
किसान गौतम सिंह जम्वाल ने बताया कि प्री मानसून की वर्षा कंडी के किसानों के लिए अहम होती है। इसी समय मक्की की बिजाई होती है जोकि बरसात के दिनों में परवान चढ़ जाती है। अब समय पर मक्की की बिजाई हो पाएगी। नहरी क्षेत्र के किसान भी खुश हैं।
जागरण संवाददाता, जम्मूः पिछले दिनों वर्षा होने के बाद जम्मू के कंडी इलाकों में किसानों ने मक्की की बिजाई की तैयारी शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने बाजरा और चरी की बिजाई भी शुरू कर दी है। कंडी इलाकों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर होती है। मई माह में वर्षा नहीं हुई। ऐसे में खेत सूख गए थे।
वीरवार रात अच्छी वर्षा होने से सूखे खेतों में पर्याप्त नमी आ गई। ऐसे में किसानों ने मक्की और अन्य फसलों की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खेतों में पहले जुताई हो गई थी, वहां अब किसान बिजाई करने लगे हैं। वहीं, जिन खेतों में जुताई नहीं हुई थी, वहां जुताई कर उसे तैयार किया जा रहा है। बारिश होने से कंडी इलाकों में किसान खुश हैं, क्योंकि अब वे समय पर मक्की की बिजाई कर सकेंगे।
बीरपुर के किसान गौतम सिंह जम्वाल ने बताया कि प्री मानसून की वर्षा कंडी के किसानों के लिए अहम होती है। इसी समय मक्की की बिजाई होती है जोकि बरसात के दिनों में परवान चढ़ जाती है। अब समय पर मक्की की बिजाई हो पाएगी। नहरी क्षेत्र के किसान भी खुश हैं। जमीन में अब नमी बढ़ गई है। ऐसे में किसान यहां पर धान की रोपाई के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। धान की पनीरी की रोपाई के लिए और पानी की जरूरत सामान्य धान लगाने का समय आ चुका है।
ऐसे में पानी की जरूरत है। किसान और ज्यादा वर्षा जल्दी ही होने की कामना कर रहे हैं। हालांकि बासमती धान कुछ दिनों बाद ही लगनी है, लेकिन तब तक बरसात भी आ जाएगी। वर्षा का पानी मिलने से खेत खलिहान नम हो गए हैं। नहर के पानी का भी इस्तेमाल होने लगा है।
आरएसपुरा के किसान स्वर्ण सिंह का कहना है कि धान की रोपाई के लिए काफी पानी की जरूरत रहती है। इसलिए प्री मानसून की ओर वर्षा की अभी जरूरत है। वहीं, साग सब्जी के लिए वर्षा अमृत बनकर आई। खेतों से सब्जी निकल नही पा रही थी। लेकिन वर्षा से सब्जियों की फसल को बल मिला है। बागवानी को भी इससे लाभ हुआ है।
|
किसान गौतम सिंह जम्वाल ने बताया कि प्री मानसून की वर्षा कंडी के किसानों के लिए अहम होती है। इसी समय मक्की की बिजाई होती है जोकि बरसात के दिनों में परवान चढ़ जाती है। अब समय पर मक्की की बिजाई हो पाएगी। नहरी क्षेत्र के किसान भी खुश हैं। जागरण संवाददाता, जम्मूः पिछले दिनों वर्षा होने के बाद जम्मू के कंडी इलाकों में किसानों ने मक्की की बिजाई की तैयारी शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने बाजरा और चरी की बिजाई भी शुरू कर दी है। कंडी इलाकों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर होती है। मई माह में वर्षा नहीं हुई। ऐसे में खेत सूख गए थे। वीरवार रात अच्छी वर्षा होने से सूखे खेतों में पर्याप्त नमी आ गई। ऐसे में किसानों ने मक्की और अन्य फसलों की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खेतों में पहले जुताई हो गई थी, वहां अब किसान बिजाई करने लगे हैं। वहीं, जिन खेतों में जुताई नहीं हुई थी, वहां जुताई कर उसे तैयार किया जा रहा है। बारिश होने से कंडी इलाकों में किसान खुश हैं, क्योंकि अब वे समय पर मक्की की बिजाई कर सकेंगे। बीरपुर के किसान गौतम सिंह जम्वाल ने बताया कि प्री मानसून की वर्षा कंडी के किसानों के लिए अहम होती है। इसी समय मक्की की बिजाई होती है जोकि बरसात के दिनों में परवान चढ़ जाती है। अब समय पर मक्की की बिजाई हो पाएगी। नहरी क्षेत्र के किसान भी खुश हैं। जमीन में अब नमी बढ़ गई है। ऐसे में किसान यहां पर धान की रोपाई के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। धान की पनीरी की रोपाई के लिए और पानी की जरूरत सामान्य धान लगाने का समय आ चुका है। ऐसे में पानी की जरूरत है। किसान और ज्यादा वर्षा जल्दी ही होने की कामना कर रहे हैं। हालांकि बासमती धान कुछ दिनों बाद ही लगनी है, लेकिन तब तक बरसात भी आ जाएगी। वर्षा का पानी मिलने से खेत खलिहान नम हो गए हैं। नहर के पानी का भी इस्तेमाल होने लगा है। आरएसपुरा के किसान स्वर्ण सिंह का कहना है कि धान की रोपाई के लिए काफी पानी की जरूरत रहती है। इसलिए प्री मानसून की ओर वर्षा की अभी जरूरत है। वहीं, साग सब्जी के लिए वर्षा अमृत बनकर आई। खेतों से सब्जी निकल नही पा रही थी। लेकिन वर्षा से सब्जियों की फसल को बल मिला है। बागवानी को भी इससे लाभ हुआ है।
|
Garhwa :झारखंड के कई जिलों में जंगली हाथियों ने अपना आतंक मचा रखा है, वहीं गढ़वा जिले के रमकंडा प्रखंड में कई गांवों में इन दिनों हाथी के आंतक से लोग काफी परेशान है. बीती रात जंगली हाथियों का झुंड 2 गांवों में घुस कर जमकर उत्पात मचाया है. 4 घरों समेत कई क्विंटल अनाजों बर्बाद किया है.
हाथियों ने कई घरों को क्षतिग्रस्त किया है वहीं कई क्विंटल धान और मक्के का खा गये है. मिली जानकारी के अनुसार रमकंडा प्रखण्ड के बलिगढ़ पंचायत के तेतरडीह गांव में देर रात हाथियों ने बुधु मांझी के घर पर हमला बोल दिया. घर को पूरी तरह से तोड़ दिया है. इसके साथ ही घर में रखे अनाज जैसे धान , मक्का इत्यादि को भी चट कर गया. जिसे लोगों को काफी नुकसान हुआ है.
पीड़ित किसानों ने बताया कि देर रात हाथियों के झुंड ने एक- एक करके 4 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया. किसी तरह ग्रामीणों के सहयोग से टीन बजाकर एवं टॉर्च लाइट जलाकर गांव से हाथियों के झुंड को भगाया गया. घटना की सूचना मिलते ही पंचायत के मुखिया पति विनोद प्रसाद ने पीड़ित किसानों के घर पहुंचकर मामले की जानकारी ली. वहीं वन विभाग से मुआवजा दिलाने का आश्वासन भी दिया है. इसी तरह पिछले दिनों चार हाथियों के झुंड ने रमकंडा प्रखण्ड के सेमरटाड गांव निवासी अवधेश सिंह,रामलाल राम,विकाश कुमार के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया था. इसके साथ ही बरवा गांव के रुबिला बाखला व रुबित बाखला के खलिहान में रखे करीब 70 बोझा धान खा गया था. वहीं देनवा लकड़ा के खलिहान में दव कर बोरी में रखे गये करीब 10 किवंटल धान पूरी तरह चट कर गये थे.
|
Garhwa :झारखंड के कई जिलों में जंगली हाथियों ने अपना आतंक मचा रखा है, वहीं गढ़वा जिले के रमकंडा प्रखंड में कई गांवों में इन दिनों हाथी के आंतक से लोग काफी परेशान है. बीती रात जंगली हाथियों का झुंड दो गांवों में घुस कर जमकर उत्पात मचाया है. चार घरों समेत कई क्विंटल अनाजों बर्बाद किया है. हाथियों ने कई घरों को क्षतिग्रस्त किया है वहीं कई क्विंटल धान और मक्के का खा गये है. मिली जानकारी के अनुसार रमकंडा प्रखण्ड के बलिगढ़ पंचायत के तेतरडीह गांव में देर रात हाथियों ने बुधु मांझी के घर पर हमला बोल दिया. घर को पूरी तरह से तोड़ दिया है. इसके साथ ही घर में रखे अनाज जैसे धान , मक्का इत्यादि को भी चट कर गया. जिसे लोगों को काफी नुकसान हुआ है. पीड़ित किसानों ने बताया कि देर रात हाथियों के झुंड ने एक- एक करके चार घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया. किसी तरह ग्रामीणों के सहयोग से टीन बजाकर एवं टॉर्च लाइट जलाकर गांव से हाथियों के झुंड को भगाया गया. घटना की सूचना मिलते ही पंचायत के मुखिया पति विनोद प्रसाद ने पीड़ित किसानों के घर पहुंचकर मामले की जानकारी ली. वहीं वन विभाग से मुआवजा दिलाने का आश्वासन भी दिया है. इसी तरह पिछले दिनों चार हाथियों के झुंड ने रमकंडा प्रखण्ड के सेमरटाड गांव निवासी अवधेश सिंह,रामलाल राम,विकाश कुमार के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया था. इसके साथ ही बरवा गांव के रुबिला बाखला व रुबित बाखला के खलिहान में रखे करीब सत्तर बोझा धान खा गया था. वहीं देनवा लकड़ा के खलिहान में दव कर बोरी में रखे गये करीब दस किवंटल धान पूरी तरह चट कर गये थे.
|
बटेर पालन भारत में धीरे-धीरे मुर्गीपालन की तरह एक लोकप्रिय व्यवसाय बनता जा रहा है. कम लागत में बटेर पालन से अच्छी कमाई की जा सकती है. मुर्गी पालन की तुलना में बटेर पालन इसलिए भी आसान है कि मुर्गियों की तुलना में बटेर में संक्रामक रोग कम लगते हैं.
यही वजह है कि यह व्यावसायिक तौर पर उपयोगी होता है. बटेर में मुर्गियों की अपेक्षा बेहद कम बीमारी का प्रकोप लगता है. साथ ही मुर्गे मुर्गियों में लगने वाली बहुत सी बीमारी बटेरों में नहीं पाई जाती है. लेकिन उनके संपर्क में आने से बटेर भी आक्रांत हो सकते हैं. यदि आप बटेर पालन को व्यावसायिक तौर अपनाना चाहते हैं तो उनमें होने वाले प्रमुख रोगों के बारे में और उसकी रोकथाम के उपाय जरूर जानने लें.
अल्सरेटिव इटेराइटिस (Ulcerative)-इसका पूरा नाम अल्सरेटिव इटेराइटिस है यह जीवाणु जनित बीमारी है. इससे बटेर के अंदर अल्सर हो जाता है. इस बीमारी में बटेर अकेले झुककर रहता है. वह झुंड से अलग रहता है. उसके पंख नीचे गिरे रहते हैं. इस बीमारी की रोकथाम के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. यह बीमारी एक बटेर से दूसरे बटेर में पहुंचती है.
कॉक्सीडियोसिस(Coccidiosis)-बटेर को होने वाली यह दूसरी प्रमुख बीमारी है. यह भी खराब रखरखाव के कारण होती है. इस बीमारी में सारे बटेर एक जगह झुण्ड एक जगह एकत्रित रहते हैं. पंख गिराकर रहते हैं. वहीं उनके ड्राफिंगस से खून आता है. इससे बचाव के लिए एमटोलियम पावडर आधा टी-स्पून और एक गैलन पानी में 5 -7 दिनों तक उपयोग करें. हिस्टोमोनियासिस (Histomoniasis)-यह बीमारी एक प्रोटोजोआ के जरिए बटेर में होती है. यह बटेर के लीवर को प्रभावित करती है. इससे बटेर की मृत्यु भी हो जाती है. इससे बचाव के लिए समय-समय परडिवर्मिंग इस्तेमाल करना चाहिए. इस बीमारी में बटेर पीला पड़ जाता है. वहीं पंखें झुकाकर रखते है.
यह खबर भी पढ़ें : मछली पालन के लिए लोन कैसे प्राप्त करें?
अधिक जानकारीः
यदि आप बटेर सम्बंधित किसी बीमारी के बारे जानना चाहते हैं तो यहां संपर्क करें.
|
बटेर पालन भारत में धीरे-धीरे मुर्गीपालन की तरह एक लोकप्रिय व्यवसाय बनता जा रहा है. कम लागत में बटेर पालन से अच्छी कमाई की जा सकती है. मुर्गी पालन की तुलना में बटेर पालन इसलिए भी आसान है कि मुर्गियों की तुलना में बटेर में संक्रामक रोग कम लगते हैं. यही वजह है कि यह व्यावसायिक तौर पर उपयोगी होता है. बटेर में मुर्गियों की अपेक्षा बेहद कम बीमारी का प्रकोप लगता है. साथ ही मुर्गे मुर्गियों में लगने वाली बहुत सी बीमारी बटेरों में नहीं पाई जाती है. लेकिन उनके संपर्क में आने से बटेर भी आक्रांत हो सकते हैं. यदि आप बटेर पालन को व्यावसायिक तौर अपनाना चाहते हैं तो उनमें होने वाले प्रमुख रोगों के बारे में और उसकी रोकथाम के उपाय जरूर जानने लें. अल्सरेटिव इटेराइटिस -इसका पूरा नाम अल्सरेटिव इटेराइटिस है यह जीवाणु जनित बीमारी है. इससे बटेर के अंदर अल्सर हो जाता है. इस बीमारी में बटेर अकेले झुककर रहता है. वह झुंड से अलग रहता है. उसके पंख नीचे गिरे रहते हैं. इस बीमारी की रोकथाम के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. यह बीमारी एक बटेर से दूसरे बटेर में पहुंचती है. कॉक्सीडियोसिस-बटेर को होने वाली यह दूसरी प्रमुख बीमारी है. यह भी खराब रखरखाव के कारण होती है. इस बीमारी में सारे बटेर एक जगह झुण्ड एक जगह एकत्रित रहते हैं. पंख गिराकर रहते हैं. वहीं उनके ड्राफिंगस से खून आता है. इससे बचाव के लिए एमटोलियम पावडर आधा टी-स्पून और एक गैलन पानी में पाँच -सात दिनों तक उपयोग करें. हिस्टोमोनियासिस -यह बीमारी एक प्रोटोजोआ के जरिए बटेर में होती है. यह बटेर के लीवर को प्रभावित करती है. इससे बटेर की मृत्यु भी हो जाती है. इससे बचाव के लिए समय-समय परडिवर्मिंग इस्तेमाल करना चाहिए. इस बीमारी में बटेर पीला पड़ जाता है. वहीं पंखें झुकाकर रखते है. यह खबर भी पढ़ें : मछली पालन के लिए लोन कैसे प्राप्त करें? अधिक जानकारीः यदि आप बटेर सम्बंधित किसी बीमारी के बारे जानना चाहते हैं तो यहां संपर्क करें.
|
कोरोना काल के बाद राजस्थान पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था. इस अभियान के दौरान पता चला की कोरोना काल में 440 फरार बदमाशों की मौत हो गई है. वहीं पुलिस ने इस दौरान 5 हजार से ज्यादा बदमाशों को गिरफ्तार किया.
कोरोना काल के बाद राजस्थान में पुलिस (Rajasthan Police) ने बदमाशों (Gangsters) को पकड़ने के लिए अभियान चलाया है. लेकिन अभियान के दौरान पिछले कुछ दिनों में पता चला है कि कोरोना काल के दौरान 440 बदमाशों की मौत हो चुकी है. अब पुलिस बदमाशों के परिवार वालों से डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) मांग रही है. ताकि उनकी गिरफ्तारी के वारंट (Warrant) को वापस लिया जा सके. जानकारी के अनुसार ज्यादातार बदमाशों की मौत इसी कोरोना काल के दौरान हुई है.
पुलिस मुख्यालय के निर्देशों पर प्रदेशभर में बदमाशों को पकड़ने के लिए पुलिस ने 5 जुलाई से विशेष अभियान चलाया था. पुलिस ने इस अभियान के दौरान 21 दिनों में कुल 5836 फरार बदमाशों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए बदमाशों में से 283 बदमाशों पर पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना स्तर पर नकद इनाम घोषित किया गया था.
इन बदमाशों में से 241 बदमाश ऐसे हैं, जिनको संबंधित थाना पुलिस नहीं पकड़ सकी लेकिन दूसरे थानों की पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया. पुलिस मुख्यालय को जब पता चला कि फरार बदमाशों में से ज्यादातर की मौत हो गई है तो मुख्यालय ने मामले में पूरा जानकारी मांगी. इससे पता चला कि जयपुर पश्चिम में सबसे ज्यादा 51 फरार बदमाशों की मौत हुई है. इसी प्रकार कोटा में 34, जयपुर ईस्ट में 30, जयपुर ग्रामीण में 23, अजमेर में 24 और भरतपुर में 28 लोगों की मौत हुई है.
अभियान के दौरान पुलिस ने बलात्कार और पॉक्सो केसों में फरार चल रहे 197 आरोपियों को पकड़ा है. इनमें से 137 जांच में वंछित थे तो 9 उद्धोषित अपराधी थे. वहीं मॉब लिंचिंग के 4 मामलों से से 2 जांच में वंछित थे और 2 फरार थे. इन चारों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी के साथ मारपीट औऱ सरकार संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में 145 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं अवैध हथियार रखने के करीब 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
ये भी पढ़ेंः
|
कोरोना काल के बाद राजस्थान पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था. इस अभियान के दौरान पता चला की कोरोना काल में चार सौ चालीस फरार बदमाशों की मौत हो गई है. वहीं पुलिस ने इस दौरान पाँच हजार से ज्यादा बदमाशों को गिरफ्तार किया. कोरोना काल के बाद राजस्थान में पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया है. लेकिन अभियान के दौरान पिछले कुछ दिनों में पता चला है कि कोरोना काल के दौरान चार सौ चालीस बदमाशों की मौत हो चुकी है. अब पुलिस बदमाशों के परिवार वालों से डेथ सर्टिफिकेट मांग रही है. ताकि उनकी गिरफ्तारी के वारंट को वापस लिया जा सके. जानकारी के अनुसार ज्यादातार बदमाशों की मौत इसी कोरोना काल के दौरान हुई है. पुलिस मुख्यालय के निर्देशों पर प्रदेशभर में बदमाशों को पकड़ने के लिए पुलिस ने पाँच जुलाई से विशेष अभियान चलाया था. पुलिस ने इस अभियान के दौरान इक्कीस दिनों में कुल पाँच हज़ार आठ सौ छत्तीस फरार बदमाशों को गिरफ्तार किया. पकड़े गए बदमाशों में से दो सौ तिरासी बदमाशों पर पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना स्तर पर नकद इनाम घोषित किया गया था. इन बदमाशों में से दो सौ इकतालीस बदमाश ऐसे हैं, जिनको संबंधित थाना पुलिस नहीं पकड़ सकी लेकिन दूसरे थानों की पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया. पुलिस मुख्यालय को जब पता चला कि फरार बदमाशों में से ज्यादातर की मौत हो गई है तो मुख्यालय ने मामले में पूरा जानकारी मांगी. इससे पता चला कि जयपुर पश्चिम में सबसे ज्यादा इक्यावन फरार बदमाशों की मौत हुई है. इसी प्रकार कोटा में चौंतीस, जयपुर ईस्ट में तीस, जयपुर ग्रामीण में तेईस, अजमेर में चौबीस और भरतपुर में अट्ठाईस लोगों की मौत हुई है. अभियान के दौरान पुलिस ने बलात्कार और पॉक्सो केसों में फरार चल रहे एक सौ सत्तानवे आरोपियों को पकड़ा है. इनमें से एक सौ सैंतीस जांच में वंछित थे तो नौ उद्धोषित अपराधी थे. वहीं मॉब लिंचिंग के चार मामलों से से दो जांच में वंछित थे और दो फरार थे. इन चारों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी के साथ मारपीट औऱ सरकार संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक सौ पैंतालीस लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं अवैध हथियार रखने के करीब अस्सी लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये भी पढ़ेंः
|
अपनी स्किन केयर के लिए हम बहुत से प्रोडक्टस फेस पर लगाते हैं। कईं बार हमारे फेस पर पिंपल्स होते हैं तो हम उसे फोड़ देते हैं लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए और फिर उस स्किन पर दाग पड़ जाते हैं और यह दाग फेस की सारी खूबसरती को खराब कर देते हैं। इन ब्लैक स्पॉट से छुटकारा पाने के लिए आप बहुत से प्रोडेक्टस का भी इस्तेमाल करती होगीं लेकिन यह दाग इतनी जल्दी पीछा नहीं छोड़ते हैं। अगर आप भी अपने फेस पर इन ब्लैक स्पॉट से परेशाने हैं तो आज हम आपको इसके कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिससे आपको जल्द रिज्लट देखने को मिलेंगे।
हल्दी और दूध हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होते हैं और अगर आप अपने ब्लैक स्पॉट से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप भी हल्दी और दूध का यूज कर सकते हैं।
चेहरे पर पड़ने वाले काले धब्बों से छुटाकार पाने के लिए शहद का इ्स्तेमाल भी कर सकते हैं इसके लिए आपको करना बस इतना है कि शहद और पानी को लेना है और उन्हें एक ही मात्रा में डालकर मिला लेना है और फिर इसे अपने चेहरे पर तकरीबन 10 मिनट के लिए लगा लेना है इससे आपको चेहरे के काले धब्बों से आपको जल्द राहत मिलेगी।
चेहरे के लिए स्टीम बहुत जरूरी है और अगर आप के चेहरे पर ब्लैक स्पॉटस है त आपको स्टीम का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इससे न सिर्फ आपके फेस के काले धब्बे दूर होगें बल्कि इससे आपकी स्किन ग्लो भी केरग।
चेहरे के डार्क स्पॉट्स से छुटकारा पाने के लिए चंदन का पाउडर भी बहुत फायदेमंद रहेगा। इसके लिए आपको बस चंदन का पेस्ट बनाना है और अपने चेहरे पर लगाना है।
चेहरे पर काले धब्बों को दूर करने के लिए इलायची भी बड़ी फायदेमंद रहेगी आप इसका प्रयोग गुलाब जल के साथ भी कर सकते हैं।
नोट- यह पैक जब भी सूख जाए इसे साथ में ही धो लें।
चेहरे के दाग को मिटाने के लिए नींबू और पानी भी बहुत फायदेमंद है।
- फिर इसमें कॉटन डिप करें और अपने चेहरे पर उन हिस्सों पर लगाएं जहां काले निशान है।
- इसे लगाने के बाद इसे ऐसे ही छोड़ दें और फिर पानी से मुंह धो लें।
|
अपनी स्किन केयर के लिए हम बहुत से प्रोडक्टस फेस पर लगाते हैं। कईं बार हमारे फेस पर पिंपल्स होते हैं तो हम उसे फोड़ देते हैं लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए और फिर उस स्किन पर दाग पड़ जाते हैं और यह दाग फेस की सारी खूबसरती को खराब कर देते हैं। इन ब्लैक स्पॉट से छुटकारा पाने के लिए आप बहुत से प्रोडेक्टस का भी इस्तेमाल करती होगीं लेकिन यह दाग इतनी जल्दी पीछा नहीं छोड़ते हैं। अगर आप भी अपने फेस पर इन ब्लैक स्पॉट से परेशाने हैं तो आज हम आपको इसके कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिससे आपको जल्द रिज्लट देखने को मिलेंगे। हल्दी और दूध हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होते हैं और अगर आप अपने ब्लैक स्पॉट से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आप भी हल्दी और दूध का यूज कर सकते हैं। चेहरे पर पड़ने वाले काले धब्बों से छुटाकार पाने के लिए शहद का इ्स्तेमाल भी कर सकते हैं इसके लिए आपको करना बस इतना है कि शहद और पानी को लेना है और उन्हें एक ही मात्रा में डालकर मिला लेना है और फिर इसे अपने चेहरे पर तकरीबन दस मिनट के लिए लगा लेना है इससे आपको चेहरे के काले धब्बों से आपको जल्द राहत मिलेगी। चेहरे के लिए स्टीम बहुत जरूरी है और अगर आप के चेहरे पर ब्लैक स्पॉटस है त आपको स्टीम का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इससे न सिर्फ आपके फेस के काले धब्बे दूर होगें बल्कि इससे आपकी स्किन ग्लो भी केरग। चेहरे के डार्क स्पॉट्स से छुटकारा पाने के लिए चंदन का पाउडर भी बहुत फायदेमंद रहेगा। इसके लिए आपको बस चंदन का पेस्ट बनाना है और अपने चेहरे पर लगाना है। चेहरे पर काले धब्बों को दूर करने के लिए इलायची भी बड़ी फायदेमंद रहेगी आप इसका प्रयोग गुलाब जल के साथ भी कर सकते हैं। नोट- यह पैक जब भी सूख जाए इसे साथ में ही धो लें। चेहरे के दाग को मिटाने के लिए नींबू और पानी भी बहुत फायदेमंद है। - फिर इसमें कॉटन डिप करें और अपने चेहरे पर उन हिस्सों पर लगाएं जहां काले निशान है। - इसे लगाने के बाद इसे ऐसे ही छोड़ दें और फिर पानी से मुंह धो लें।
|
हृदय की गति में असामान्यता के कारण कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के विकसित होने का खतरा रहता है। सामान्य रूप से वयस्कों के लिए रेस्टिंग हार्ट रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट तक होती है। इसमें होने वाली कमी या अधिकता, दोनों ही स्थिति गंभीर समस्याओं का संकेत मानी जाती है। हृदय गति का सामान्य से लगातार अधिक बने रहना हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी हृदय की गति में असामान्यता हो सकती है। पोटैशियम की कमी होना ऐसी ही एक समस्या है।
पोटेशियम कई खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। हमारी कोशिकाओं के अंदर द्रव के सामान्य स्तर को बनाए रखने और रक्तचाप को कंट्रोल करने में इसकी भूमिका होती है। इसके अलावा पोटेशियम मांसपेशियों के कॉट्रेक्शन और हार्टरेट को सामान्य बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। आइए जानते हैं कि इसकी कमी में किस प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं, तथा इसकी पूर्ति के लिए क्या किया जाना चाहिए?
आहार में पोटैशियम वाली चीजों की मात्रा कम होने के कारण इसके स्तर में कमी आ सकती है, इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में हाइपोकैलेमिया भी कहते हैं। पोटेशियम ऐसा आवश्यक खनिज है जो शरीर में तरल पदार्थों को नियंत्रित करने, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को ठीक से काम करते रहने में मदद करता है। शरीर में इसकी कमी हो जाने के कारण रक्तचाप और हृदय की गति प्रभावित हो जाती है। समय रहते इस समस्या का उपचार न होने के कारण हृदय पंप करना बंद कर सकता है, जोकि जानलेवा स्थिति मानी जाती है।
आइए जानते हैं कि इस पोषक तत्व की पूर्ति कैसे की जा सकती है?
वयस्कों के लिए प्रतिदिन 1600 से 2000 मिलीग्राम की मात्रा में पोटैशियम की आवश्यकता होती है। कई प्रकार के फलों-सब्जियों से इसे प्राप्त किया जा सकता है। केला, पोटैशियम के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक हैं। एक केले में 451 मिलीग्राम तक पोटैशियम होता है। प्रतिदिन दो-तीन केले आपके दैनिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। यह स्वादिष्ट फल विटामिन-सी, विटामिन-बी6, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है।
शकरकंद भी आसानी से शरीर के लिए आवश्यक पोटैशियम की पूर्ति कर सकता है। 1 कप (328-ग्राम) शकरकंद से पोटैशियम के दैनिक जरूरतों का 16 फीसदी तक प्राप्त किया जा सकता है। शकरकंद वसा में कम होने के साथ, थोड़ी मात्रा में प्रोटीन और जटिल कार्ब्स के साथ फाइबर भी प्रदान करता है। डायबिटीज जैसी स्थितियों को छोड़कर शकरकंद खाना कई मामलों में आपके लिए विशेष लाभकारी है।
नारियल पानी को हाइड्रेटिंग पेय के रूप में जाना जाता है, यह इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने के लिए सबसे अच्छा पेय हो सकता है। नारियल पानी के नियमित सेवन से पोटैशियम के साथ शरीर के लिए मैग्नीशियम, सोडियम और मैंगनीज जैसे अति आवश्यक तत्वों की भी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। नारियल पानी आपको ऊर्जा देने के साथ पोषक तत्वों की पूर्ति करने में काफी कारगर है।
नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
|
हृदय की गति में असामान्यता के कारण कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के विकसित होने का खतरा रहता है। सामान्य रूप से वयस्कों के लिए रेस्टिंग हार्ट रेट साठ से एक सौ बीट प्रति मिनट तक होती है। इसमें होने वाली कमी या अधिकता, दोनों ही स्थिति गंभीर समस्याओं का संकेत मानी जाती है। हृदय गति का सामान्य से लगातार अधिक बने रहना हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी हृदय की गति में असामान्यता हो सकती है। पोटैशियम की कमी होना ऐसी ही एक समस्या है। पोटेशियम कई खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। हमारी कोशिकाओं के अंदर द्रव के सामान्य स्तर को बनाए रखने और रक्तचाप को कंट्रोल करने में इसकी भूमिका होती है। इसके अलावा पोटेशियम मांसपेशियों के कॉट्रेक्शन और हार्टरेट को सामान्य बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। आइए जानते हैं कि इसकी कमी में किस प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं, तथा इसकी पूर्ति के लिए क्या किया जाना चाहिए? आहार में पोटैशियम वाली चीजों की मात्रा कम होने के कारण इसके स्तर में कमी आ सकती है, इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में हाइपोकैलेमिया भी कहते हैं। पोटेशियम ऐसा आवश्यक खनिज है जो शरीर में तरल पदार्थों को नियंत्रित करने, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को ठीक से काम करते रहने में मदद करता है। शरीर में इसकी कमी हो जाने के कारण रक्तचाप और हृदय की गति प्रभावित हो जाती है। समय रहते इस समस्या का उपचार न होने के कारण हृदय पंप करना बंद कर सकता है, जोकि जानलेवा स्थिति मानी जाती है। आइए जानते हैं कि इस पोषक तत्व की पूर्ति कैसे की जा सकती है? वयस्कों के लिए प्रतिदिन एक हज़ार छः सौ से दो हज़ार मिलीग्राम की मात्रा में पोटैशियम की आवश्यकता होती है। कई प्रकार के फलों-सब्जियों से इसे प्राप्त किया जा सकता है। केला, पोटैशियम के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक हैं। एक केले में चार सौ इक्यावन मिलीग्राम तक पोटैशियम होता है। प्रतिदिन दो-तीन केले आपके दैनिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। यह स्वादिष्ट फल विटामिन-सी, विटामिन-बीछः, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है। शकरकंद भी आसानी से शरीर के लिए आवश्यक पोटैशियम की पूर्ति कर सकता है। एक कप शकरकंद से पोटैशियम के दैनिक जरूरतों का सोलह फीसदी तक प्राप्त किया जा सकता है। शकरकंद वसा में कम होने के साथ, थोड़ी मात्रा में प्रोटीन और जटिल कार्ब्स के साथ फाइबर भी प्रदान करता है। डायबिटीज जैसी स्थितियों को छोड़कर शकरकंद खाना कई मामलों में आपके लिए विशेष लाभकारी है। नारियल पानी को हाइड्रेटिंग पेय के रूप में जाना जाता है, यह इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने के लिए सबसे अच्छा पेय हो सकता है। नारियल पानी के नियमित सेवन से पोटैशियम के साथ शरीर के लिए मैग्नीशियम, सोडियम और मैंगनीज जैसे अति आवश्यक तत्वों की भी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। नारियल पानी आपको ऊर्जा देने के साथ पोषक तत्वों की पूर्ति करने में काफी कारगर है। नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
|
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), पुराना नाम प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (MPPEB) द्वारा परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड (Admit card) जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार ऑफिशल वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते है। इसके लिए परीक्षा का आयोजन 17 और 18 अक्टूबर को किया जाएगा। उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड के लिंक यहां उपलब्ध कराई जा रही है।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (पुराना नाम MPPEB) द्वारा प्री, नर्सिंग सिलेक्शन एग्जाम, एडमिट कार्ड 2022 ऑफिसियल वेबसाइट पर उपलब्ध कर दिया गया है। पंजीकृत उम्मीदवार एडमिट कार्ड पोर्टल (peb. mp. gov. in) के माध्यम से जानकारी के साथ लॉग इन कर डाउनलोड कर सकेंगे।
दरअसल प्री नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट 2022 17 और 18 अक्टूबर, 2022 को आयोजित किया जाएगा। प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकृत लोग एमपीपीईबी की आधिकारिक वेबसाइट (http://www. peb. mp. gov. in/) से अपना एमपी पीएनएसटी एडमिट कार्ड 2022 डाउनलोड कर सकते हैं।
- परीक्षा भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, दमोह, सतना, सागर, और रतलाम शहरों में आयोजित होगी।
- प्री नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट 2022 के दो सत्र होंगे, सुबह 9:00 बजे से शुरू होकर 11:00 बजे और दोपहर 2:00 बजे समाप्त होंगे।
- पहली पाली सुबह आठ बजे और दूसरी पाली 11 बजे शुरू होती है।
- परीक्षा तिथि कंप्यूटर आधारित टेस्ट प्रारूप में 02 घंटे की अवधि के साथ 17 और 18 अक्टूबर, 2022 को होगी।
- होम पेज पर जाएं और मुख्य पेज पर अपना एडमिट कार्ड वरीयता चुनें।
- अपना एमपी पीएनएसटी 2022 कॉल लेटर प्राप्त करने के लिए उनके लिंक पर क्लिक करें।
- आपका 2022 का एडमिट कार्ड प्राप्त करने का पेज एक नए टैब में खुलेगा।
- अपने आवेदन संख्या और जन्म तिथि के साथ आवश्यक फ़ील्ड को पूरा करें।
- कैप्चा कैलकुलेशन को ठीक करें।
- एडमिट कार्ड प्रिंट करना चुनें।
- मध्य प्रदेश प्री-नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट 2022 एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट लेना होगा ।
|
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड , पुराना नाम प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार ऑफिशल वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते है। इसके लिए परीक्षा का आयोजन सत्रह और अट्ठारह अक्टूबर को किया जाएगा। उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड के लिंक यहां उपलब्ध कराई जा रही है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा प्री, नर्सिंग सिलेक्शन एग्जाम, एडमिट कार्ड दो हज़ार बाईस ऑफिसियल वेबसाइट पर उपलब्ध कर दिया गया है। पंजीकृत उम्मीदवार एडमिट कार्ड पोर्टल के माध्यम से जानकारी के साथ लॉग इन कर डाउनलोड कर सकेंगे। दरअसल प्री नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट दो हज़ार बाईस सत्रह और अट्ठारह अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को आयोजित किया जाएगा। प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकृत लोग एमपीपीईबी की आधिकारिक वेबसाइट से अपना एमपी पीएनएसटी एडमिट कार्ड दो हज़ार बाईस डाउनलोड कर सकते हैं। - परीक्षा भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, दमोह, सतना, सागर, और रतलाम शहरों में आयोजित होगी। - प्री नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट दो हज़ार बाईस के दो सत्र होंगे, सुबह नौ:शून्य बजे से शुरू होकर ग्यारह:शून्य बजे और दोपहर दो:शून्य बजे समाप्त होंगे। - पहली पाली सुबह आठ बजे और दूसरी पाली ग्यारह बजे शुरू होती है। - परीक्षा तिथि कंप्यूटर आधारित टेस्ट प्रारूप में दो घंटाटे की अवधि के साथ सत्रह और अट्ठारह अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को होगी। - होम पेज पर जाएं और मुख्य पेज पर अपना एडमिट कार्ड वरीयता चुनें। - अपना एमपी पीएनएसटी दो हज़ार बाईस कॉल लेटर प्राप्त करने के लिए उनके लिंक पर क्लिक करें। - आपका दो हज़ार बाईस का एडमिट कार्ड प्राप्त करने का पेज एक नए टैब में खुलेगा। - अपने आवेदन संख्या और जन्म तिथि के साथ आवश्यक फ़ील्ड को पूरा करें। - कैप्चा कैलकुलेशन को ठीक करें। - एडमिट कार्ड प्रिंट करना चुनें। - मध्य प्रदेश प्री-नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट दो हज़ार बाईस एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट लेना होगा ।
|
गाड़ीके खानकी नाई, माया मोहकी बड़ाई छिनहि तजत, छिन भजत बहोरि हौं ॥२॥ बड़ो साई-द्रोही न बराबरी मेरीको कोऊ
नाथकी सपथ किये कहत करोरि हौं । दूरि कीजै द्वारतें लबार लालची प्रपंची
सुधा सों सलिल सूकरी ज्यों गहडोरि हौं ॥३॥ राखिये नीके सुधारि, नीचको डारिये मारि,
दुहूँ ओरकी बिचारि अब न निहोरि हौं । तुलसी कही है साँची रेख बार बार खाँची,
ढील किये नाम-महिमाकी नाव बोरि हौं ॥४॥ भार्थ- हे कृपानिधान ! मैंने जान-पहचानकर भी आपको भुला दिया है और घमण्डके मारे इतना ढीठ हो गया हूँ कि, उलटा आपहीपर दोष मढ़ता हूँ कि आप, शील सिन्धु होकर भी, मुझे अपनाते नहीं हैं)। जिससे प्रीति जोड़नेके लिये बड़े-बड़े योगी यत्न किया करते हैं, उससे ज्यों-त्यों करके कुछ प्रीति जुड़ गयी थी, पर मैं अभागा उसे भी तोड़ बैठा ॥ १ ॥ मुझ सरीखा पापोंका खजाना चौदहों लोकोंमें दूसरा नहीं है, अपनी समझ में मैं खूब ढूँढ़ चुका हूँ । जैसे गाड़ीके पीछे लगा हुआ कुत्ता कभी तो गाड़ीको छोड़कर इधर-उधर भाग जाता है और कभी फिर उसके साथ हो लेता है, वैसे ही मैं क्षणभरमें तो माया-मोहके बड़प्पनको छोड़ बैठता हूँ और दूसरे ही क्षण फिर उसीमें रम जाता हूँ ॥ २ ॥ मैं आपकी करोड़ों शपथ खाकर कह रहा हूँ, कि स्वामीके साथ द्रोह करनेवाला मेरी बराबरीका
|
गाड़ीके खानकी नाई, माया मोहकी बड़ाई छिनहि तजत, छिन भजत बहोरि हौं ॥दो॥ बड़ो साई-द्रोही न बराबरी मेरीको कोऊ नाथकी सपथ किये कहत करोरि हौं । दूरि कीजै द्वारतें लबार लालची प्रपंची सुधा सों सलिल सूकरी ज्यों गहडोरि हौं ॥तीन॥ राखिये नीके सुधारि, नीचको डारिये मारि, दुहूँ ओरकी बिचारि अब न निहोरि हौं । तुलसी कही है साँची रेख बार बार खाँची, ढील किये नाम-महिमाकी नाव बोरि हौं ॥चार॥ भार्थ- हे कृपानिधान ! मैंने जान-पहचानकर भी आपको भुला दिया है और घमण्डके मारे इतना ढीठ हो गया हूँ कि, उलटा आपहीपर दोष मढ़ता हूँ कि आप, शील सिन्धु होकर भी, मुझे अपनाते नहीं हैं)। जिससे प्रीति जोड़नेके लिये बड़े-बड़े योगी यत्न किया करते हैं, उससे ज्यों-त्यों करके कुछ प्रीति जुड़ गयी थी, पर मैं अभागा उसे भी तोड़ बैठा ॥ एक ॥ मुझ सरीखा पापोंका खजाना चौदहों लोकोंमें दूसरा नहीं है, अपनी समझ में मैं खूब ढूँढ़ चुका हूँ । जैसे गाड़ीके पीछे लगा हुआ कुत्ता कभी तो गाड़ीको छोड़कर इधर-उधर भाग जाता है और कभी फिर उसके साथ हो लेता है, वैसे ही मैं क्षणभरमें तो माया-मोहके बड़प्पनको छोड़ बैठता हूँ और दूसरे ही क्षण फिर उसीमें रम जाता हूँ ॥ दो ॥ मैं आपकी करोड़ों शपथ खाकर कह रहा हूँ, कि स्वामीके साथ द्रोह करनेवाला मेरी बराबरीका
|
नीता अंबानी की पार्टी में सैफ अली खान, करीना और करिश्मा कपूर शामिल हुए। इस पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सैफ और करीना करिश्मा को इग्नोर करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो चर्चा में है।
Kareena and Saif trolled (credit pic: social media)
PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ?
Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया'
Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ?
Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
|
नीता अंबानी की पार्टी में सैफ अली खान, करीना और करिश्मा कपूर शामिल हुए। इस पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में सैफ और करीना करिश्मा को इग्नोर करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो चर्चा में है। Kareena and Saif trolled PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
|
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह एक अंग्रेजी अखबार में ट्रंप को लेकर छपी रिपोर्ट है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद इस घटना को स्वीकार कर चुके हैं कि एक व्यक्ति के छींकने के बाद वे अपना दफ्तर छोड़कर भाग निकल गए थे।
नई दिल्लीः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह एक अंग्रेजी अखबार में ट्रंप को लेकर छपी रिपोर्ट है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद इस घटना को स्वीकार कर चुके हैं कि एक व्यक्ति के छींकने के बाद वे अपना दफ्तर छोड़कर भाग निकल गए थे।
कोरोना वैक्सीन पर काम करती महिला डॉक्टर की फोटो(सोशल मीडिया)
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- 'मैं कुछ दिन पहले व्हाइट हाउस में था। ओवल ऑफिस में 10 लोगों के साथ एक बैठक चल रही थी। तभी अचानक से एक आदमी ने छींक दिया। उसे ऐसा करते देख सभी लोग कमरे से बाहर भाग गये।
उसमें मैं भी था। ये वाकया 13 अप्रैल को हुआ था। ये दिन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी दिन ट्रंप सार्वजनिक तौर से लॉकडाउन खोलने के बारे में बातें कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि उनके पास राज्यों में लॉकडाउन हटाने के लिए दबाव बनाने का पूरा अधिकार है।
लाश की फोटो(सोशल मीडिया)
इसका खुलासा एक फेमस जर्नलिस्ट बॉब वूडवार्ड ने बीते दिनों एक शो में अपने टेप के माध्यम से किया। उन्होंने ट्रंप का 18 बार इंटरव्यू किया था। टेप में ट्रंप सबसे पहले वूडवार्ड को बताते हैं कि कोरोना वायरस कितना ज्यादा खतरनाक है।
ट्रंप कहते हैं- 'और बॉब, यह इतनी आसानी से संक्रमण फैलाता है कि आपको भरोसा नहीं होगा। '
बॉब वूडवार्ड वहीं आदमी हैं जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि ट्रंप लोगों की रक्षा करने में असफल रहे। वे लोगों को सच नहीं बता सके।
अमेरिका में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या 67,88,147 से ज्यादा हो चुकी हैं, अब तक 200,197 लोगों की वायरस की वजह से डेथ हुई है।
दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
|
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह एक अंग्रेजी अखबार में ट्रंप को लेकर छपी रिपोर्ट है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद इस घटना को स्वीकार कर चुके हैं कि एक व्यक्ति के छींकने के बाद वे अपना दफ्तर छोड़कर भाग निकल गए थे। नई दिल्लीः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से चर्चा में हैं। इसकी वजह एक अंग्रेजी अखबार में ट्रंप को लेकर छपी रिपोर्ट है। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद इस घटना को स्वीकार कर चुके हैं कि एक व्यक्ति के छींकने के बाद वे अपना दफ्तर छोड़कर भाग निकल गए थे। कोरोना वैक्सीन पर काम करती महिला डॉक्टर की फोटो रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- 'मैं कुछ दिन पहले व्हाइट हाउस में था। ओवल ऑफिस में दस लोगों के साथ एक बैठक चल रही थी। तभी अचानक से एक आदमी ने छींक दिया। उसे ऐसा करते देख सभी लोग कमरे से बाहर भाग गये। उसमें मैं भी था। ये वाकया तेरह अप्रैल को हुआ था। ये दिन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी दिन ट्रंप सार्वजनिक तौर से लॉकडाउन खोलने के बारे में बातें कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि उनके पास राज्यों में लॉकडाउन हटाने के लिए दबाव बनाने का पूरा अधिकार है। लाश की फोटो इसका खुलासा एक फेमस जर्नलिस्ट बॉब वूडवार्ड ने बीते दिनों एक शो में अपने टेप के माध्यम से किया। उन्होंने ट्रंप का अट्ठारह बार इंटरव्यू किया था। टेप में ट्रंप सबसे पहले वूडवार्ड को बताते हैं कि कोरोना वायरस कितना ज्यादा खतरनाक है। ट्रंप कहते हैं- 'और बॉब, यह इतनी आसानी से संक्रमण फैलाता है कि आपको भरोसा नहीं होगा। ' बॉब वूडवार्ड वहीं आदमी हैं जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि ट्रंप लोगों की रक्षा करने में असफल रहे। वे लोगों को सच नहीं बता सके। अमेरिका में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या सरसठ,अठासी,एक सौ सैंतालीस से ज्यादा हो चुकी हैं, अब तक दो सौ,एक सौ सत्तानवे लोगों की वायरस की वजह से डेथ हुई है। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
|
बिहार लोक सेवा आयोग- बीपीएससी (BPSC) 67वां कंबाइंड कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन प्रीलिम्स की पुनः परीक्षा एडमिट कार्ड मंगलवार, 20 सिंतबर को यानी आज जारी करेगी। जिन उम्मीदावारों ने परीक्ष के लिए आवेदन किया था वह उम्मीदवार एडमिट कार्ड जारी होने के बाद बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc. bih. nic. in और onlinebpsc. bihar. gov. in से जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। सबसे पहले परीक्षा कि तिथि 21 सिंतबर की तय की गई थी जिसके एडमिट कार्ड 14 सिंतबर को जारी किए जाना था लेकिन बाद में परीक्षा की तिथि को बदल कर 30 सितंबर 2022 कर दी। परीक्षा का समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच आयोजित की जानी है। जिसका एडमिट कार्ड बीपीएससी ने आज जारी किए जाएगें।
चरण 1 - आधिकारिक वेबसाइट के होम पेज पर आपको नोटिफिकेश बार में एडमिट कार्ड का लिंक दिखाई देगा।
चरण 2 - दिए गए इस लिंक पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा।
चरण 3 - नए खुले इस पेज पर उम्मीदवारों को अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड डाल कर साइन इन करना है।
चरण 4 - साइन करने के बाद आपक बीपीएससी 67वां का एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
चरण 5 - स्क्रीन पर आए एडमिट कार्ड को अब आप डाउनलोड कर सकते हैं। सुरक्षा के लिए एडमिट कार्ड के 2 प्रिंट जरूर लें।
परीक्षार्थीयों को सलाह है कि वह अपने एडमिट कार्ड की प्रिंट कॉपी लेकर परीक्षा के लिए जाएं। मोबाइल में एडमिट कार्ड मान्य नहीं माना जाएगा। साथ ही एडमिट कार्ड पर दी गई सारी जानाकारी को ध्यान से पढ़ लें। 30 सितंबर को परीक्षा का आयोजन दोपहर 12 बजे से 2 बजे किया जाएगा। परीक्षार्थियों को सलाह है कि वह परीक्षा समय से करीब 1 घंटे पहले वह एडमिट कार्ड में दिए गए परीक्षा केंद्र पहुंच जाए। ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना करना न पड़े।
|
बिहार लोक सेवा आयोग- बीपीएससी सरसठवां कंबाइंड कॉम्पिटेटिव एग्जामिनेशन प्रीलिम्स की पुनः परीक्षा एडमिट कार्ड मंगलवार, बीस सिंतबर को यानी आज जारी करेगी। जिन उम्मीदावारों ने परीक्ष के लिए आवेदन किया था वह उम्मीदवार एडमिट कार्ड जारी होने के बाद बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc. bih. nic. in और onlinebpsc. bihar. gov. in से जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। सबसे पहले परीक्षा कि तिथि इक्कीस सिंतबर की तय की गई थी जिसके एडमिट कार्ड चौदह सिंतबर को जारी किए जाना था लेकिन बाद में परीक्षा की तिथि को बदल कर तीस सितंबर दो हज़ार बाईस कर दी। परीक्षा का समय दोपहर बारह बजे से दो बजे के बीच आयोजित की जानी है। जिसका एडमिट कार्ड बीपीएससी ने आज जारी किए जाएगें। चरण एक - आधिकारिक वेबसाइट के होम पेज पर आपको नोटिफिकेश बार में एडमिट कार्ड का लिंक दिखाई देगा। चरण दो - दिए गए इस लिंक पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। चरण तीन - नए खुले इस पेज पर उम्मीदवारों को अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड डाल कर साइन इन करना है। चरण चार - साइन करने के बाद आपक बीपीएससी सरसठवां का एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। चरण पाँच - स्क्रीन पर आए एडमिट कार्ड को अब आप डाउनलोड कर सकते हैं। सुरक्षा के लिए एडमिट कार्ड के दो प्रिंट जरूर लें। परीक्षार्थीयों को सलाह है कि वह अपने एडमिट कार्ड की प्रिंट कॉपी लेकर परीक्षा के लिए जाएं। मोबाइल में एडमिट कार्ड मान्य नहीं माना जाएगा। साथ ही एडमिट कार्ड पर दी गई सारी जानाकारी को ध्यान से पढ़ लें। तीस सितंबर को परीक्षा का आयोजन दोपहर बारह बजे से दो बजे किया जाएगा। परीक्षार्थियों को सलाह है कि वह परीक्षा समय से करीब एक घंटाटे पहले वह एडमिट कार्ड में दिए गए परीक्षा केंद्र पहुंच जाए। ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना करना न पड़े।
|
कटक। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि महेंद्रसिंह धोनी अपने करियर के अंतिम छोर पर हैं लेकिन सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल ने कहा कि पूर्व कप्तान अब भी भारत के लिए मैच विजेता हैं और ड्रेसिंग रूम में प्रेरणादायी बने रहेंगे।
धोनी ने कटक में बीती रात सीरीज के शुरुआती टी-20 में ऊपर चौथे नंबर पर भेजे जाने के बाद 22 गेंद में नाबाद 39 रन बनाए। इसके बाद उन्होंने स्टंप के पीछे चार खिलाड़ियों को आउट किया जिससे भारत ने श्रीलंका पर 93 रन की विशाल जीत दर्ज की।
धेानी ने 272 मैचों में 201 खिलाड़ियों को आउट किया। कामरान अकमल (211 मैचों में 207 खिलाड़ियों को आउट किया) के बाद टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 200 या इससे ज्यादा खिालड़ियों को आउट करने वाले दूसरे विकेटकीपर हैं।
राहुल ने बीती रात मैच के बाद कॉन्फ्रेंस में कहा कि ड्रेसिंग रूम में अब भी वे (धोनी) प्रेरणादायी हैं जैसे वे हमेशा रहे हैं। वे मैच विजेता हैं और वे हमेशा यही बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी फिटनेस अच्छी है और जैसे ही वे बल्लेबाजी करने उतरे, उन्होंने आक्रामकता बरतनी शुरू कर दी।
राहुल 61 रन पर आउट हो गए, धोनी ने फिर फिनिशर की भूमिका शानदार ढंग से निभाते हुए 22 गेंद में नाबाद 39 रन की पारी खेली जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल था जिससे भारत ने तीन विकेट पर 180 रन बनाए। उन्होंने कहा कि पता नहीं आप किस फार्म की बात कर रहे हो, लेकिन हर बार मैं टीवी खोलता हूं या उनके साथ ड्रेसिंग रूम उनके साथ खेलता हूं तो वे हमेशा ही रन बनाते हैं। (भाषा)
|
कटक। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि महेंद्रसिंह धोनी अपने करियर के अंतिम छोर पर हैं लेकिन सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल ने कहा कि पूर्व कप्तान अब भी भारत के लिए मैच विजेता हैं और ड्रेसिंग रूम में प्रेरणादायी बने रहेंगे। धोनी ने कटक में बीती रात सीरीज के शुरुआती टी-बीस में ऊपर चौथे नंबर पर भेजे जाने के बाद बाईस गेंद में नाबाद उनतालीस रन बनाए। इसके बाद उन्होंने स्टंप के पीछे चार खिलाड़ियों को आउट किया जिससे भारत ने श्रीलंका पर तिरानवे रन की विशाल जीत दर्ज की। धेानी ने दो सौ बहत्तर मैचों में दो सौ एक खिलाड़ियों को आउट किया। कामरान अकमल के बाद टी-बीस अंतरराष्ट्रीय मैच में दो सौ या इससे ज्यादा खिालड़ियों को आउट करने वाले दूसरे विकेटकीपर हैं। राहुल ने बीती रात मैच के बाद कॉन्फ्रेंस में कहा कि ड्रेसिंग रूम में अब भी वे प्रेरणादायी हैं जैसे वे हमेशा रहे हैं। वे मैच विजेता हैं और वे हमेशा यही बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी फिटनेस अच्छी है और जैसे ही वे बल्लेबाजी करने उतरे, उन्होंने आक्रामकता बरतनी शुरू कर दी। राहुल इकसठ रन पर आउट हो गए, धोनी ने फिर फिनिशर की भूमिका शानदार ढंग से निभाते हुए बाईस गेंद में नाबाद उनतालीस रन की पारी खेली जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल था जिससे भारत ने तीन विकेट पर एक सौ अस्सी रन बनाए। उन्होंने कहा कि पता नहीं आप किस फार्म की बात कर रहे हो, लेकिन हर बार मैं टीवी खोलता हूं या उनके साथ ड्रेसिंग रूम उनके साथ खेलता हूं तो वे हमेशा ही रन बनाते हैं।
|
Bilaspur Crime News: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरकंडा क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता प्रभारी प्रमिल शर्मा पर चाय दुकान चलाने वाले दो युवकों ने बिजली के तार से पिटाई कर दी। पीछे से हमला करने के कारण अधिकारी संभल नहीं पाए। हालांकि कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। इसकी रिपोर्ट सरकंडा थाने में दर्ज कराई गई है। मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते की टीम इन दिनों लगातार कार्रवाई कर रही है। मंगलवार को सरकंडा थाना क्षेत्र के साइंस कालेज रोड में नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची। दोपहर 12 बजे निगमकर्मी जेसीबी से कब्जा हटा रहे थे। साथ ही गुमटी और ठेलों की जब्ती बनाई जा रही थी। नगर निगम की इस कार्रवाई का कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा सामने खड़े होकर अपनी टीम के साथ अतिक्रमण तोड़वा रहे थे। इसी दौरान अचानक वहां गोल्डी नाम से चाय की दुकान चलाने वाले गोल्डी गुप्ता (25) और भावेश गुप्ता (22) बिजली के तार लेकर पीछे से आए और प्रभारी प्रमिल शर्मा के गले में लपेटकर कस दिया।
अचानक हुए हमले से प्रमिल संभल नहीं पाए। वहां मौजूद निगम के कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। फिर हमलावर युवकों की जमकर पिटाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने दोनों युवक को सरकंडा पुलिस को सुपुर्द कर दिया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित युवकों के खिलाफ धारा 186, 332, 353 व 34 के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपित बहतराई चौक चिंगराजपारा अटल आवास के रहने वाले हैं।
हमले के बाद नगर निगम के अफसरों ने इस घटना की जानकारी सरकंडा पुलिस को दी। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस दोनों युवकों को पकड़ कर थाने ले गई है। वहीं, नगर निगम के अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। जिसके बाद आरोपित दोनों भाई के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
सरकंड़ा के शासकीय ई. राघवेंद्र राव विज्ञान महाविद्यालय(साइंस कालेज) के पास कुछ समय से बाउंड्रीवाल से सटकर लोगों द्वारा गुमटी ठेला के जरिए अतिक्रमण कर लिया गया था। इसके कारण यहां असामाजिक तत्वों का भी जमावड़ा लगा रहता था। इसकी शिकायत कालेज के छात्र-छात्राओं द्वारा निगम कमिश्नर कुणाल दुदावत से की गई थी। निगम कमिश्नर के निर्देश पर अतिक्रमण शाखा ने मंगलवार को ठेले-गुमटी को हटाने पहुंचे थे। इसी तरह लोयला स्कूल रोड में बहतराई चौक के पास भी सड़क पर ठेला गुमटी लगाकर किए गए अतिक्रमण को भी हटाया गया है। इस मार्ग में रखें तकरीबन 15 गुमटियों को हटाया गया है।
अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा के साथ युवकों द्वारा की गई मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया में तेजी से प्रसारित हो गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल पर कैद कर लिया और बाद में उसे इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर दिया। पुलिस ने वीडियो को भी आधार मानकर युवकों के खिलाफ कार्रवाई की है।
शहर की सड़कों पर अतिक्रमण के चलते यातायात में व्यावधान हो रहा है। इसके साथ ही बड़े व्यावसायिक काम्प्लेक्स की पार्किंग को बंद कर अन्य उपयोग में लिया जा रहा है। यातायात की समस्या को देखते हुए पुलिस और अतिक्रमण अमले की टीम संयुक्त कार्रवाई कर रही है। महीनेभर से अमले की कार्रवाई शहर के अलग-अलग क्षेत्र में लगातार की जा रही है।
नगर निगम के अतिक्रमण शाखा प्रमिल शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि नगर निगम की ओर से उन्हें संविदा में नियुक्ति दी गई है। प्रमिल पर इसके पहले भी कई बार हमले हो चुके हैं। कुछ साल पहले ही सत्यम चौक के पास 786 होटल के एक कर्मचारी ने प्रमिल पर गर्म ग्रेवी फेंक दी। शनिचरी और गोल बाजार में भी प्रमिल के साथ मारपीट की घटना हुई है।
अतिक्रमण हटाने के दौरान बेजा कब्जाधारियों ने स्टाफ के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया है। उसके खिलाफ सरकंडा थाना में अपराध दर्ज कराया गया है।
कुणाल दुदावत,आयुक्त नगर निगम बिलासपुर।
|
Bilaspur Crime News: बिलासपुर। सरकंडा क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता प्रभारी प्रमिल शर्मा पर चाय दुकान चलाने वाले दो युवकों ने बिजली के तार से पिटाई कर दी। पीछे से हमला करने के कारण अधिकारी संभल नहीं पाए। हालांकि कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। इसकी रिपोर्ट सरकंडा थाने में दर्ज कराई गई है। मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते की टीम इन दिनों लगातार कार्रवाई कर रही है। मंगलवार को सरकंडा थाना क्षेत्र के साइंस कालेज रोड में नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची। दोपहर बारह बजे निगमकर्मी जेसीबी से कब्जा हटा रहे थे। साथ ही गुमटी और ठेलों की जब्ती बनाई जा रही थी। नगर निगम की इस कार्रवाई का कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा सामने खड़े होकर अपनी टीम के साथ अतिक्रमण तोड़वा रहे थे। इसी दौरान अचानक वहां गोल्डी नाम से चाय की दुकान चलाने वाले गोल्डी गुप्ता और भावेश गुप्ता बिजली के तार लेकर पीछे से आए और प्रभारी प्रमिल शर्मा के गले में लपेटकर कस दिया। अचानक हुए हमले से प्रमिल संभल नहीं पाए। वहां मौजूद निगम के कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। फिर हमलावर युवकों की जमकर पिटाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने दोनों युवक को सरकंडा पुलिस को सुपुर्द कर दिया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित युवकों के खिलाफ धारा एक सौ छियासी, तीन सौ बत्तीस, तीन सौ तिरेपन व चौंतीस के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपित बहतराई चौक चिंगराजपारा अटल आवास के रहने वाले हैं। हमले के बाद नगर निगम के अफसरों ने इस घटना की जानकारी सरकंडा पुलिस को दी। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस दोनों युवकों को पकड़ कर थाने ले गई है। वहीं, नगर निगम के अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। जिसके बाद आरोपित दोनों भाई के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। सरकंड़ा के शासकीय ई. राघवेंद्र राव विज्ञान महाविद्यालय के पास कुछ समय से बाउंड्रीवाल से सटकर लोगों द्वारा गुमटी ठेला के जरिए अतिक्रमण कर लिया गया था। इसके कारण यहां असामाजिक तत्वों का भी जमावड़ा लगा रहता था। इसकी शिकायत कालेज के छात्र-छात्राओं द्वारा निगम कमिश्नर कुणाल दुदावत से की गई थी। निगम कमिश्नर के निर्देश पर अतिक्रमण शाखा ने मंगलवार को ठेले-गुमटी को हटाने पहुंचे थे। इसी तरह लोयला स्कूल रोड में बहतराई चौक के पास भी सड़क पर ठेला गुमटी लगाकर किए गए अतिक्रमण को भी हटाया गया है। इस मार्ग में रखें तकरीबन पंद्रह गुमटियों को हटाया गया है। अतिक्रमण शाखा प्रभारी प्रमिल शर्मा के साथ युवकों द्वारा की गई मारपीट का वीडियो इंटरनेट मीडिया में तेजी से प्रसारित हो गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल पर कैद कर लिया और बाद में उसे इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर दिया। पुलिस ने वीडियो को भी आधार मानकर युवकों के खिलाफ कार्रवाई की है। शहर की सड़कों पर अतिक्रमण के चलते यातायात में व्यावधान हो रहा है। इसके साथ ही बड़े व्यावसायिक काम्प्लेक्स की पार्किंग को बंद कर अन्य उपयोग में लिया जा रहा है। यातायात की समस्या को देखते हुए पुलिस और अतिक्रमण अमले की टीम संयुक्त कार्रवाई कर रही है। महीनेभर से अमले की कार्रवाई शहर के अलग-अलग क्षेत्र में लगातार की जा रही है। नगर निगम के अतिक्रमण शाखा प्रमिल शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि नगर निगम की ओर से उन्हें संविदा में नियुक्ति दी गई है। प्रमिल पर इसके पहले भी कई बार हमले हो चुके हैं। कुछ साल पहले ही सत्यम चौक के पास सात सौ छियासी होटल के एक कर्मचारी ने प्रमिल पर गर्म ग्रेवी फेंक दी। शनिचरी और गोल बाजार में भी प्रमिल के साथ मारपीट की घटना हुई है। अतिक्रमण हटाने के दौरान बेजा कब्जाधारियों ने स्टाफ के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया है। उसके खिलाफ सरकंडा थाना में अपराध दर्ज कराया गया है। कुणाल दुदावत,आयुक्त नगर निगम बिलासपुर।
|
इस्लामाबादः पाकिस्तान ने रविवार को भारतीय उच्चायोग को अपने यहां की जेलों में बंद 471 भारतीय कैदियों की की एक लिस्ट दी है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान जारी कर बताया कि इस लिस्ट को 21 मई 2008 को पाकिस्तान और भारत के बीच कॉन्सुलर एक्सेस एग्रीमेंट के प्रावधानों के मुताबिक दिया गया है। बयान में बताया गया है कि कुल 471 भारतीय कैदियों में से 418 मछुआरे और 53 अन्य कैदियों के नाम हैं।
बयान के मुताबिक, इन कौदियो को पाकिस्तानी जल सीमा में कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से घुस जाने पर गिरफ्तार किया गया था। आपको बता दें कि दोनों देश 21 मई 2008 में हुए समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान को साल में 2 बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपने-अपने देश में बंद पड़ोसी देश के कैदियों की सूची का आदान-प्रदान करना होता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार भी नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग को पाकिस्तानी कैदियों की सूची सौंपेंगी।
आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के संबंध पठानकोट एयरबेस और उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद बिगड़ते चले गए थे। उड़ी हमले का बदला लेने के लिए बाद में भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैम्पों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके अलावा भारतीय नेवी के पूर्व अधिकरी कुरभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बाद भी दोनों देशों के संबंधों में खटास आई है। पाकिस्तान ने जाधव पर जासूसी के आरोप लगाते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई है जबकि भारत ने हमेशा जासूसी के आरोपों से इनकार किया है।
|
इस्लामाबादः पाकिस्तान ने रविवार को भारतीय उच्चायोग को अपने यहां की जेलों में बंद चार सौ इकहत्तर भारतीय कैदियों की की एक लिस्ट दी है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान जारी कर बताया कि इस लिस्ट को इक्कीस मई दो हज़ार आठ को पाकिस्तान और भारत के बीच कॉन्सुलर एक्सेस एग्रीमेंट के प्रावधानों के मुताबिक दिया गया है। बयान में बताया गया है कि कुल चार सौ इकहत्तर भारतीय कैदियों में से चार सौ अट्ठारह मछुआरे और तिरेपन अन्य कैदियों के नाम हैं। बयान के मुताबिक, इन कौदियो को पाकिस्तानी जल सीमा में कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से घुस जाने पर गिरफ्तार किया गया था। आपको बता दें कि दोनों देश इक्कीस मई दो हज़ार आठ में हुए समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान को साल में दो बार एक जनवरी और एक जुलाई को अपने-अपने देश में बंद पड़ोसी देश के कैदियों की सूची का आदान-प्रदान करना होता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार भी नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग को पाकिस्तानी कैदियों की सूची सौंपेंगी। आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के संबंध पठानकोट एयरबेस और उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद बिगड़ते चले गए थे। उड़ी हमले का बदला लेने के लिए बाद में भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैम्पों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके अलावा भारतीय नेवी के पूर्व अधिकरी कुरभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बाद भी दोनों देशों के संबंधों में खटास आई है। पाकिस्तान ने जाधव पर जासूसी के आरोप लगाते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई है जबकि भारत ने हमेशा जासूसी के आरोपों से इनकार किया है।
|
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं पंजाब का कर्ज चुकाना चाहता हूं। आज पंजाब के 23 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि का पैसा जा रहा है।
जालंधर में रैली को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी।
सोमवार को जालंधर में पीएम मोदी ने अपने भाषण के 36 मिनट के दौरान कांग्रेस पर ही निशाना साधा जबकि अकाली दल-बसपा गठबंधन व आम आदमी पार्टी पर कुछ नहीं बोला। दोआबा में अकाली दल-बसपा गठबंधन कांटे की टक्कर दे रहा है और आम आदमी पार्टी कुछ स्थानों पर टक्कर में है। पीएम मोदी ने अपने भाषण के 36 मिनट में कांग्रेस को टारगेट किया।
दोआबा पंजाब की एनआरआईज की बेल्ट है और विदेश में रहने वालों का असर यहां दिख रहा है। विदेश में रहने वाले बच्चे अपने बुजुर्गों से इस बार आप को मौका देने की बात कर रहे हैं। 2017 में दोआबा की 23 सीटों में से 15 कांग्रेस ने जीती थी जबकि अकाली 5 सीटों पर जीते थे। दोआबा में मजबूत रविदासिया समाज का वोट बैंक है और अकाली दल इस बार बसपा के साथ गठबंधन में है। गठबंधन होने टक्कर कांटे की चल रही है। पिछली बार आप ने भी दो सीट दोआबा से जीती थी।
पीएम मोदी ने कांग्रेस के राहुल गांधी को भी निशाने पर लेकर कहा कि उन्होंने 2014 में मेरा हेलीकॉप्टर उड़ने नहीं दिया था। कांग्रेस ने कैप्टन को काम नहीं करने दिया, क्योंकि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर पंजाब को आगे ले जा रहे थे। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने खुद कबूल किया कि कैप्टन सरकार को हम नहीं भारत सरकार चला रही थी। पंजाब में कांग्रेस सरकार को दिल्ली से रिमोट कंट्रोल से एक परिवार चलाता है। वह संविधान की परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि पाप का घड़ा जब भरता है तो फूटता भी है।
कांग्रेस को इसकी सजा मिल रही है। उनकी अपनी ही पार्टी बिखर रही है। कांग्रेस के लोग ही अपने नेताओं की पोल खोल रहे हैं। आपस में लड़ रहे लोग पंजाब को स्थिर सरकार कैसे दे पाएंगे। कांग्रेस के लोग सेना पर सवाल उठाते हैं, पाकिस्तान की सुर में सुर मिलाते हैं। अपने भाषण में मोदी का सारा अटैक कांग्रेस और गांधी खानदान पर रहा। उनहोंने अकाली-बसपा गठबंधन पर बिलकुल चोट नहीं की।
मोदी ने अकाली दल के बारे में सिर्फ इतना कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ। भाजपा का डिप्टी सीएम बनना चाहिए था। मनोरंजन कालिया को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया। इसकी जगह प्रकाश सिंह बादल ने अपने बेटे को बना दिया। हमने पंजाब के हित को देखते हुए इसे मंजूर किया। वहीं आम आदमी पार्टी के बारे में कहा कि गली मोहल्ले में शराब के ठेके खुलवाने के एक्सपर्ट हैं।
पंजाब को इनसे सतर्क रहना होगा। यह पंजाब को नशा माफियाओं के हवाले करना चाहते हैं। पिछली बार दोआबा में कांग्रेस ने 23 में से 15 सीट जीती थी और भाजपा सिर्फ फगवाड़ा की सीट पाई थी। फगवाड़ा से विधायक सोमप्रकाश ने लोकसभा चुनाव लड़े तो उपचुनाव होने के बाद सीट कांग्रेस के बलविंदर सिंह धालीवाल को चली गई। पीएम मोदी ने दोआबा में कांग्रेस पर निशाना साधकर भाजपा नेताओं को ऑक्सीजन दी है।
जालंधर दौरे के दौरान पीएम मोदी ने सोमवार को संत समाज का आशीर्वाद लिया। इसमें महंत गंगा दास, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के अलावा गोपाल नगर उदासीन आश्रम के गद्दीशीन स्वामी शांतानंद भी थे। स्वामी शांतानंद के काफी श्रद्धालु हैं। इसके अलावा स्वामी प्रगटनाथ से भी मुलाकात की।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं पंजाब का कर्ज चुकाना चाहता हूं। आज पंजाब के तेईस लाख से ज्यादा किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि का पैसा जा रहा है। जालंधर में रैली को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी। सोमवार को जालंधर में पीएम मोदी ने अपने भाषण के छत्तीस मिनट के दौरान कांग्रेस पर ही निशाना साधा जबकि अकाली दल-बसपा गठबंधन व आम आदमी पार्टी पर कुछ नहीं बोला। दोआबा में अकाली दल-बसपा गठबंधन कांटे की टक्कर दे रहा है और आम आदमी पार्टी कुछ स्थानों पर टक्कर में है। पीएम मोदी ने अपने भाषण के छत्तीस मिनट में कांग्रेस को टारगेट किया। दोआबा पंजाब की एनआरआईज की बेल्ट है और विदेश में रहने वालों का असर यहां दिख रहा है। विदेश में रहने वाले बच्चे अपने बुजुर्गों से इस बार आप को मौका देने की बात कर रहे हैं। दो हज़ार सत्रह में दोआबा की तेईस सीटों में से पंद्रह कांग्रेस ने जीती थी जबकि अकाली पाँच सीटों पर जीते थे। दोआबा में मजबूत रविदासिया समाज का वोट बैंक है और अकाली दल इस बार बसपा के साथ गठबंधन में है। गठबंधन होने टक्कर कांटे की चल रही है। पिछली बार आप ने भी दो सीट दोआबा से जीती थी। पीएम मोदी ने कांग्रेस के राहुल गांधी को भी निशाने पर लेकर कहा कि उन्होंने दो हज़ार चौदह में मेरा हेलीकॉप्टर उड़ने नहीं दिया था। कांग्रेस ने कैप्टन को काम नहीं करने दिया, क्योंकि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर पंजाब को आगे ले जा रहे थे। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने खुद कबूल किया कि कैप्टन सरकार को हम नहीं भारत सरकार चला रही थी। पंजाब में कांग्रेस सरकार को दिल्ली से रिमोट कंट्रोल से एक परिवार चलाता है। वह संविधान की परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि पाप का घड़ा जब भरता है तो फूटता भी है। कांग्रेस को इसकी सजा मिल रही है। उनकी अपनी ही पार्टी बिखर रही है। कांग्रेस के लोग ही अपने नेताओं की पोल खोल रहे हैं। आपस में लड़ रहे लोग पंजाब को स्थिर सरकार कैसे दे पाएंगे। कांग्रेस के लोग सेना पर सवाल उठाते हैं, पाकिस्तान की सुर में सुर मिलाते हैं। अपने भाषण में मोदी का सारा अटैक कांग्रेस और गांधी खानदान पर रहा। उनहोंने अकाली-बसपा गठबंधन पर बिलकुल चोट नहीं की। मोदी ने अकाली दल के बारे में सिर्फ इतना कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ। भाजपा का डिप्टी सीएम बनना चाहिए था। मनोरंजन कालिया को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया। इसकी जगह प्रकाश सिंह बादल ने अपने बेटे को बना दिया। हमने पंजाब के हित को देखते हुए इसे मंजूर किया। वहीं आम आदमी पार्टी के बारे में कहा कि गली मोहल्ले में शराब के ठेके खुलवाने के एक्सपर्ट हैं। पंजाब को इनसे सतर्क रहना होगा। यह पंजाब को नशा माफियाओं के हवाले करना चाहते हैं। पिछली बार दोआबा में कांग्रेस ने तेईस में से पंद्रह सीट जीती थी और भाजपा सिर्फ फगवाड़ा की सीट पाई थी। फगवाड़ा से विधायक सोमप्रकाश ने लोकसभा चुनाव लड़े तो उपचुनाव होने के बाद सीट कांग्रेस के बलविंदर सिंह धालीवाल को चली गई। पीएम मोदी ने दोआबा में कांग्रेस पर निशाना साधकर भाजपा नेताओं को ऑक्सीजन दी है। जालंधर दौरे के दौरान पीएम मोदी ने सोमवार को संत समाज का आशीर्वाद लिया। इसमें महंत गंगा दास, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के अलावा गोपाल नगर उदासीन आश्रम के गद्दीशीन स्वामी शांतानंद भी थे। स्वामी शांतानंद के काफी श्रद्धालु हैं। इसके अलावा स्वामी प्रगटनाथ से भी मुलाकात की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
207373 फाथिमथ सुहरा टी,
फाथिमाथू शाहना
फाथिमाथुल फिधा
फाथिमाथुल इंसिहा पी.सी.
फातिमाथुल मुहसिना बीवी सी.वी.
फातिमाथुल शामला पी.वी.
फातिमा नुदरत
फेबा साजू
फेबिन जॉर्ज
फेबिना पी.
फेबिना एन.के.
फेबिना पी.टी.
फेबिना टी.
फेबना एस.
207387 फेमिना थदाथिल
अब्दुल्ला टी.
काजुगिल पीडिकायिल
अब्दुल सलाम पी. के.
मोहम्मद अशरफ
श्री अबसार
साजू के पॉल
वार्कय के. जे.
अहमद पी.
मोहम्मद एन. के.
अब्दु पी.टी.
सुलेमान टी.
अब्दुल रशीद
अब्दुल कदर
थ्रास्सेरी (हाउस), कोडास्सेरी, चेम्बरास्सेरी पी०ओ०, पंडिक्कड (वाया), जिला - मलप्पुरम, केरल
काजुगिल पीडिकायिल हाउस, वालायमकुलम पी0ओ0, कोक्कुर, जिला - मलप्पुरम, केरल
थैफ (हाउस), सी.पी. रोड, पन्नीयान्नूर पी०ओ०, पराल जिला - कन्नूर, केरल
साखीनास, सी०पी० वार्ड, जिला- कान्नूर, केरल
पुथियोट्टील हाउस, वाल्लियड पी0ओ0, विल्लियाप्पल्ली वाया, जिला- कोडिकोड़, केरल
पुथुवीहिल हाउस, थेक्कुम्मूरी पी०ओ० पुलिस लेन, तिरूर, जिला - मलप्पुरम, केरल
हाउस 278, लेन - 14, जाकिर नगर, दिल्ली- 110025
कोट्टाराथुम्यालिल, मुलथुरूथी पी०ओ०, जिला- एर्नाकुलम, केरल
कुज़िमाक्कल (हाउस), नेल्लीकुट्टी पी0ओ0, चेम्पेरी (वाया), जिला - कान्नूर, केरल
पाराम्मल हाउस, पोमुडुम पी०ओ०, वैलाथुर, कावनाडुचोला, जिला - मलप्पुरम, केरल
नेचिक्कादेन (हाउस), पलक्केलवेट्टा पी०ओ०, जिला- मलप्पुरम, केरल
पल्लीक्कात्तुथोडी हाउस, चेरूकोडे, चथंगोत्तुपुरम पी०ओ०, वंडोर (वाया), जिला- मलप्पुरम, केरल
थरिपायिल (हाउस), थिरूथियाद, वाजायूर पी०ओ०, रामानाट्टुकारा (वाया), जिला- मलप्पुरम, केरल
ड्रीम की, टी.सी. 69/421 (1), पयाट्टिकुप्पम रोड, कमलेश्वरम, मानाकौड पी०ओ०, जिला- तिरूवनंतपुरम, केरल
थदाथििल हाउस, माम्मालिप्पाडी, एदारिकोडे पी०ओ०, जिला- मलप्पुरम, केरल
बीएचएसडी / 5702
|
दो लाख सात हज़ार तीन सौ तिहत्तर फाथिमथ सुहरा टी, फाथिमाथू शाहना फाथिमाथुल फिधा फाथिमाथुल इंसिहा पी.सी. फातिमाथुल मुहसिना बीवी सी.वी. फातिमाथुल शामला पी.वी. फातिमा नुदरत फेबा साजू फेबिन जॉर्ज फेबिना पी. फेबिना एन.के. फेबिना पी.टी. फेबिना टी. फेबना एस. दो लाख सात हज़ार तीन सौ सत्तासी फेमिना थदाथिल अब्दुल्ला टी. काजुगिल पीडिकायिल अब्दुल सलाम पी. के. मोहम्मद अशरफ श्री अबसार साजू के पॉल वार्कय के. जे. अहमद पी. मोहम्मद एन. के. अब्दु पी.टी. सुलेमान टी. अब्दुल रशीद अब्दुल कदर थ्रास्सेरी , कोडास्सेरी, चेम्बरास्सेरी पीशून्यओशून्य, पंडिक्कड , जिला - मलप्पुरम, केरल काजुगिल पीडिकायिल हाउस, वालायमकुलम पीशून्यओशून्य, कोक्कुर, जिला - मलप्पुरम, केरल थैफ , सी.पी. रोड, पन्नीयान्नूर पीशून्यओशून्य, पराल जिला - कन्नूर, केरल साखीनास, सीशून्यपीशून्य वार्ड, जिला- कान्नूर, केरल पुथियोट्टील हाउस, वाल्लियड पीशून्यओशून्य, विल्लियाप्पल्ली वाया, जिला- कोडिकोड़, केरल पुथुवीहिल हाउस, थेक्कुम्मूरी पीशून्यओशून्य पुलिस लेन, तिरूर, जिला - मलप्पुरम, केरल हाउस दो सौ अठहत्तर, लेन - चौदह, जाकिर नगर, दिल्ली- एक लाख दस हज़ार पच्चीस कोट्टाराथुम्यालिल, मुलथुरूथी पीशून्यओशून्य, जिला- एर्नाकुलम, केरल कुज़िमाक्कल , नेल्लीकुट्टी पीशून्यओशून्य, चेम्पेरी , जिला - कान्नूर, केरल पाराम्मल हाउस, पोमुडुम पीशून्यओशून्य, वैलाथुर, कावनाडुचोला, जिला - मलप्पुरम, केरल नेचिक्कादेन , पलक्केलवेट्टा पीशून्यओशून्य, जिला- मलप्पुरम, केरल पल्लीक्कात्तुथोडी हाउस, चेरूकोडे, चथंगोत्तुपुरम पीशून्यओशून्य, वंडोर , जिला- मलप्पुरम, केरल थरिपायिल , थिरूथियाद, वाजायूर पीशून्यओशून्य, रामानाट्टुकारा , जिला- मलप्पुरम, केरल ड्रीम की, टी.सी. उनहत्तर/चार सौ इक्कीस , पयाट्टिकुप्पम रोड, कमलेश्वरम, मानाकौड पीशून्यओशून्य, जिला- तिरूवनंतपुरम, केरल थदाथििल हाउस, माम्मालिप्पाडी, एदारिकोडे पीशून्यओशून्य, जिला- मलप्पुरम, केरल बीएचएसडी / पाँच हज़ार सात सौ दो
|
नई दिल्ली- 2023 के आखिरी में राजस्थान समेत चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। जिसको लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है इस बीच कांग्रेस पार्टी भी पूरी तरीके से चुनाव मैदान में है। और जीत का दावा करती हुई नजर आ रही इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान और मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ को लेकर बड़ा दावा किया है। नीचे खबर में जानिए कि मुख्यमंत्री की तरफ से क्या दावा किया गया और किस तरीके की चीजों का जिक्र किया गया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। जहां पर उन्होंने बड़ा दावा कर दिया है। अभी दो दिन पहले राजस्थान अपने एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगोन कहा था कि राजस्थान में बहुत गरीबी मुकाबला होगा। लेकिन इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने पार्टी की जीत को सुनिश्चित बताया और कहा कि कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव मैदान में है। और इस बार बड़ी जीत सुनिश्चित करेंगे।
यही नहीं उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए भी बड़ा बयान दिया उन्होंने कहा कि जिस तरीके से एक बार फिर से कांग्रेस सरकार रिपीट होने जा रही है। यह राजस्थान की जनता का प्यार है। उन्होंने आगे कहा कि हमें चुनौती दी गई और हम इसे स्वीकार करते हैं। हम उन्हें दिखा देंगे। की पार्टी की जीत में राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से कितना आगे निकल जाएगा।
अनुसार आपको बता दे की कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था। कांग्रेस निश्चित रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत रही शायद व तेलंगाना में भी जीत दर्ज करेगी। और राजस्थान को लेकर उन्होंने कहा कि राजस्थान में बेहद करीबी मुकाबला हो सकता है। उन्होंने और आगे कहा था। कि पार्टी को पूरा भरोसा है। कि वह विजय की ओर बढ़ रही राहुल ने पार्टी की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली में एक सम्मेलन में कहा था। मैं कहूंगा कि अभी हम संभवत तेलंगाना जीत रहे हम निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश जीत रहे हैं हम निश्चित तौर पर छत्तीसगढ़ पर काबिज चुने जा रहे है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे बयान देते हुए कहा कि जो मुकदमा मुझ पर चल रहा है। अगर गरीब जमा कर्ताओं को उनका पैसा मिल जाएगा तो वह जेल जाने के लिए पूरी तरह से हम तैयार हैं। गहलोत ने कहा कि इससे पहले शेखावत पर घोटाले में शामिल होने का आरोप है।
- बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
|
नई दिल्ली- दो हज़ार तेईस के आखिरी में राजस्थान समेत चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। जिसको लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है इस बीच कांग्रेस पार्टी भी पूरी तरीके से चुनाव मैदान में है। और जीत का दावा करती हुई नजर आ रही इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान और मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ को लेकर बड़ा दावा किया है। नीचे खबर में जानिए कि मुख्यमंत्री की तरफ से क्या दावा किया गया और किस तरीके की चीजों का जिक्र किया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। जहां पर उन्होंने बड़ा दावा कर दिया है। अभी दो दिन पहले राजस्थान अपने एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगोन कहा था कि राजस्थान में बहुत गरीबी मुकाबला होगा। लेकिन इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने पार्टी की जीत को सुनिश्चित बताया और कहा कि कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव मैदान में है। और इस बार बड़ी जीत सुनिश्चित करेंगे। यही नहीं उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए भी बड़ा बयान दिया उन्होंने कहा कि जिस तरीके से एक बार फिर से कांग्रेस सरकार रिपीट होने जा रही है। यह राजस्थान की जनता का प्यार है। उन्होंने आगे कहा कि हमें चुनौती दी गई और हम इसे स्वीकार करते हैं। हम उन्हें दिखा देंगे। की पार्टी की जीत में राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से कितना आगे निकल जाएगा। अनुसार आपको बता दे की कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था। कांग्रेस निश्चित रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत रही शायद व तेलंगाना में भी जीत दर्ज करेगी। और राजस्थान को लेकर उन्होंने कहा कि राजस्थान में बेहद करीबी मुकाबला हो सकता है। उन्होंने और आगे कहा था। कि पार्टी को पूरा भरोसा है। कि वह विजय की ओर बढ़ रही राहुल ने पार्टी की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली में एक सम्मेलन में कहा था। मैं कहूंगा कि अभी हम संभवत तेलंगाना जीत रहे हम निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश जीत रहे हैं हम निश्चित तौर पर छत्तीसगढ़ पर काबिज चुने जा रहे है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे बयान देते हुए कहा कि जो मुकदमा मुझ पर चल रहा है। अगर गरीब जमा कर्ताओं को उनका पैसा मिल जाएगा तो वह जेल जाने के लिए पूरी तरह से हम तैयार हैं। गहलोत ने कहा कि इससे पहले शेखावत पर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। - बेहद सस्ते में मिल रहा है सबसे यूनीक फोन, Flipkart या Amazon जानिए कहां से शॉपिंग करना है फायदेमंद?
|
रमेश पहाड़िया, नाहनः
Teachers met MP Suresh Kashyap Regarding Demands: हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ जिला सिरमौर का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षकों एवं गैर शिक्षकों की ज्वलंत और महत्वपूर्ण मांगों को लेकर सांसद शिमला लोकसभा क्षेत्र सुरेश कश्यप, विधायक नाहन विधानसभा क्षेत्र डॉ. राजीव बिंदल, उप शिक्षा निदेशक उच्चतर जिला सिरमौर कर्म चंद धीमान एवं उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा गुर जीवन से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने माननीयों और उप शिक्षा निदेशक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को महासंघ का आग्रह पत्र प्रेषित किया और विस्तार से सभी मांगों पर चर्चा की। इनमें से मुख्य रूप से पहली जनवरी, 2004 से पूर्व की पुरानी पेंशन योजना को हर कर्मचारी और जनकल्याण में बहाल करने का आग्रह सरकार से किया गया। साथ ही छठे वेतन आयोग की अधिसूचना के अंतर्गत की गई सिफारिशों की समीक्षा करते हुए पंजाब के समान इनिशियल स्टार्ट देना, राइडर को समाप्त करना, 4. 9. 14 की एसीपी का लाभ वंचित वर्ग को भी जारी करना, वर्तमान ग्रेड पे पर कर्मचारी के इनिशियल वेतन को फिक्स करना, 2555 एसएमसी अध्यापकों को नियमित करना,
कंप्यूटर शिक्षकों को तर्कसंगत नीति बनाकर विभाग में समायोजित करना, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए तर्कसंगत नीति बनाकर विभाग में समायोजित करना, डीपीई को प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा का पदनाम देना, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में वाइस प्रिंसिपल के पद सृजित कर वित्तीय लाभ भी देना, माध्यमिक विद्यालयों में मुख्याध्यापक और लिपिक के पद सृजित कर नियुक्ति करना, केंद्र प्राथमिक विद्यालय के स्तर पर एक लिपिक का पद सृजित करना, प्राथमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था करना,
पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में नर्सरी अध्यापकों की नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही करना, जेबीटी अथवा डीएलएड की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करना, मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती प्रक्रिया पूरी करवाना, नए प्रोन्नत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डीपीई और प्रवक्ता आईपी दोनों के पद सृजित कर पदोन्नति या कमीशन द्वारा भरवाना तथा माध्यमिक विद्यालयों में पीईटी, डीएम,उर्दू, पंजाबी आदि भाषाओं के पद सृजित कर भरवाना और सभी को टीजीटी का दर्जा देना आदि मुख्य हैं।
वेतन वृद्धि से वंचित मुख्य शिक्षकों को वेतन वृद्धि जारी जारी करना आदि 32 मुख्य मांगे शामिल है। शिष्टमंडल में हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष विजय कंवर, जिला महामंत्री माम राज चौधरी, उपाध्यक्ष टीजीटी संवर्ग बृज भूषण, उपाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संवर्ग श्याम लाल, उपाध्यक्ष महिला संवर्ग कांता राणा, जिला कार्यालय सचिव ओंकार शर्मा, सचिव टीजीटी संवर्ग कर्म चंद आदि मौजूद रहे।
|
रमेश पहाड़िया, नाहनः Teachers met MP Suresh Kashyap Regarding Demands: हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ जिला सिरमौर का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षकों एवं गैर शिक्षकों की ज्वलंत और महत्वपूर्ण मांगों को लेकर सांसद शिमला लोकसभा क्षेत्र सुरेश कश्यप, विधायक नाहन विधानसभा क्षेत्र डॉ. राजीव बिंदल, उप शिक्षा निदेशक उच्चतर जिला सिरमौर कर्म चंद धीमान एवं उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा गुर जीवन से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने माननीयों और उप शिक्षा निदेशक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को महासंघ का आग्रह पत्र प्रेषित किया और विस्तार से सभी मांगों पर चर्चा की। इनमें से मुख्य रूप से पहली जनवरी, दो हज़ार चार से पूर्व की पुरानी पेंशन योजना को हर कर्मचारी और जनकल्याण में बहाल करने का आग्रह सरकार से किया गया। साथ ही छठे वेतन आयोग की अधिसूचना के अंतर्गत की गई सिफारिशों की समीक्षा करते हुए पंजाब के समान इनिशियल स्टार्ट देना, राइडर को समाप्त करना, चार. नौ. चौदह की एसीपी का लाभ वंचित वर्ग को भी जारी करना, वर्तमान ग्रेड पे पर कर्मचारी के इनिशियल वेतन को फिक्स करना, दो हज़ार पाँच सौ पचपन एसएमसी अध्यापकों को नियमित करना, कंप्यूटर शिक्षकों को तर्कसंगत नीति बनाकर विभाग में समायोजित करना, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए तर्कसंगत नीति बनाकर विभाग में समायोजित करना, डीपीई को प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा का पदनाम देना, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में वाइस प्रिंसिपल के पद सृजित कर वित्तीय लाभ भी देना, माध्यमिक विद्यालयों में मुख्याध्यापक और लिपिक के पद सृजित कर नियुक्ति करना, केंद्र प्राथमिक विद्यालय के स्तर पर एक लिपिक का पद सृजित करना, प्राथमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था करना, पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में नर्सरी अध्यापकों की नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार ही करना, जेबीटी अथवा डीएलएड की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करना, मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती प्रक्रिया पूरी करवाना, नए प्रोन्नत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डीपीई और प्रवक्ता आईपी दोनों के पद सृजित कर पदोन्नति या कमीशन द्वारा भरवाना तथा माध्यमिक विद्यालयों में पीईटी, डीएम,उर्दू, पंजाबी आदि भाषाओं के पद सृजित कर भरवाना और सभी को टीजीटी का दर्जा देना आदि मुख्य हैं। वेतन वृद्धि से वंचित मुख्य शिक्षकों को वेतन वृद्धि जारी जारी करना आदि बत्तीस मुख्य मांगे शामिल है। शिष्टमंडल में हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष विजय कंवर, जिला महामंत्री माम राज चौधरी, उपाध्यक्ष टीजीटी संवर्ग बृज भूषण, उपाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संवर्ग श्याम लाल, उपाध्यक्ष महिला संवर्ग कांता राणा, जिला कार्यालय सचिव ओंकार शर्मा, सचिव टीजीटी संवर्ग कर्म चंद आदि मौजूद रहे।
|
PATNA: सीएम नीतीश कुमार सरयू राय के लिए चुनाव प्रचार करने झारखंड नहीं जायेंगे। खुद मुख्यमंत्री ने इस चर्चा पर विराम लगा दिया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने सरयू राय के समर्थन का ऐलान कियाा था . ललन सिंह के बयान के बाद चर्चा तेज हो गई थी कि सरयु राय के चुनाव प्रचार में सीएम नीतीश आ सकते हैं। बता दें कि सरयु राय सीएम नीतीश के अच्छे मित्रों में से एक हैं। इस बार वे बीजेपी से अलग होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। वे इस बार झाारखंंड के सीएम रघुवर दास के खिलाफ हीं जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
इस तरह की खबरों पर विराम लगाते हुए नीतीश ने कहा कि नहीं, वहां मेरी जरूरत नहीं है। पटना में कृषि विभाग के कार्यक्रम के बाद मीडिया के सवालों का जबाब देते हुए उन्होंने कहा कि वहां मेरी जरूरत नही है। सीएम ने सिर्फ इतना ही कहा और गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए। पत्रकारों के और किसी भी सवाल का जवाब नही दिया।
सांसद ललन सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि पार्टी सरयू राय को समर्थन देगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो सीएम नीतीश भी चुनाव प्रचार में आ सकते हैं।
|
PATNA: सीएम नीतीश कुमार सरयू राय के लिए चुनाव प्रचार करने झारखंड नहीं जायेंगे। खुद मुख्यमंत्री ने इस चर्चा पर विराम लगा दिया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने सरयू राय के समर्थन का ऐलान कियाा था . ललन सिंह के बयान के बाद चर्चा तेज हो गई थी कि सरयु राय के चुनाव प्रचार में सीएम नीतीश आ सकते हैं। बता दें कि सरयु राय सीएम नीतीश के अच्छे मित्रों में से एक हैं। इस बार वे बीजेपी से अलग होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। वे इस बार झाारखंंड के सीएम रघुवर दास के खिलाफ हीं जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इस तरह की खबरों पर विराम लगाते हुए नीतीश ने कहा कि नहीं, वहां मेरी जरूरत नहीं है। पटना में कृषि विभाग के कार्यक्रम के बाद मीडिया के सवालों का जबाब देते हुए उन्होंने कहा कि वहां मेरी जरूरत नही है। सीएम ने सिर्फ इतना ही कहा और गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए। पत्रकारों के और किसी भी सवाल का जवाब नही दिया। सांसद ललन सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि पार्टी सरयू राय को समर्थन देगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो सीएम नीतीश भी चुनाव प्रचार में आ सकते हैं।
|
२७४ :: अनेकान्तवाद का समीक्षात्मक अध्ययन ]
ज्ञान होता है। धूम-ज्ञान से अग्नि का ज्ञान होता है। यहाँ इन्द्रियसन्निकर्षादि प्रत्यक्ष प्रमाण है । उसका फल धूम-ज्ञान है । धूम-ज्ञान वह्नि- ज्ञान की अपेक्षा से अनुमान प्रमाण है, वह्निज्ञान तो अनुमान का फल है । इस प्रकार धूम के ज्ञान में प्रत्यक्ष प्रमाण की फलता और अनुमान की प्रमाणता- इस प्रकार उभयरूपता मानते हैं । यह अनेकान्त दृष्टि ही है ।
इन दर्शनों के मत में चाय का कप या धूपदानी या सिगरेट एक अवयवी है। उनका पकड़ा जाने वाला हिस्सा ठंडा तथा दूसरा हिस्सा गरम देखा जाता है । यद्यपि चाय के कप, धूपदानी या सिगरेट में अवयव भेद माना जा सकता है, परन्तु कप, धूपदानी, सिगरेट नाम का अवयवी तो एक ही है, और उसी कपरूपी, धूपदानीरूपी या सिगरेटरूपी अवयवी में परस्पर विरुद्ध शीत एवं उष्ण स्पर्श दोनों ही पाये जाते हैं । परस्परविरुद्ध धर्मवान् होना अनेकान्तवाद ही है । वैशेषिक दर्शन का ही यह सिद्धान्त है कि एक ही पट आदि में विभिन्न भाग में चलत्व, अचलत्व, रक्तत्व, अरक्तत्व, आवृतत्व, अनावृतत्व आदि अनेक विरुद्ध धर्मों के उपलब्ध होने पर भी विरोध नहीं माना जाता । यह भी अनेकान्त दृष्टि की ही मुद्रा है ।
इनके मत में नित्य ईश्वर में जगत् के निर्माण की इच्छा तथा जगत् संहार करने की इच्छा, रजोगुण और तमोगुण रूप स्वभाव तथा अनेक सात्त्विक भावों का मानना स्पष्ट ही परस्पर विरुद्ध है । यह अनेकान्त दृष्टि से ही संभव है ।
एक ही ईश्वर को पृथिवी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, दिशा, काल रूप अष्टमूर्ति मानना अनेकान्तवाद का ही रूप है।
एक ही आँवले में कमलगोटा की अपेक्षा महत्त्व - बड़ापन, तथा बिल्वफल की अपेक्षा से अणुत्व - छोटापन मानना अनेकान्तात्मकता का ही संपोषण है ।
सांठे को समिधू की अपेक्षा से बड़ा और बाँस की अपेक्षा से छोटा मानते हैं। देवदत्त में अपने पिता की अपेक्षा से परत्व और पुत्र की अपेक्षा से अपरत्व माना जाता है । इस प्रकार विरोधी धर्मा को एक में मानना अनेकान्तवाद ही है ।
हेमचंद्राचार्य लिखते हैं -
[ चतुर्थ अध्याय :: २७५
'इच्छन् प्रधानं सत्त्वाद्यै विरुद्वेग म्फितं गुणंः
सांख्यः संख्यावतां मुख्यो नानेकान्तं प्रतिक्षिपेत् । १
सांख्य दर्शन के मत में प्रकृति को सत्त्व, रज और तम - इन तीन परस्पर विरुद्ध गुणवाली माना जाता है । परस्पर विरुद्ध गुणों का समावेश एक ही प्रकृति में मानना स्पष्ट अनेकान्त दृष्टि का समर्थन है ।
इस दर्शन में 'सत्कार्यवाद' माना जाता है । इस मत में सब कार्य सदा ही सत्रूप है । यहाँ यह प्रश्न उपस्थित होता है कि यदि घट पट आदि कार्य अपनी उत्पत्ति से पूर्व भी सत् रूप ही हैं, तो फिर उनको उत्पन्न करने के लिये प्रयत्न क्यों करना पड़ता है ? इसका उत्तर वहाँ यही दिया जाता है कि सब कार्य अपने-अपने कारण में अव्यक्त अर्थात् अप्रकट सूक्ष्म दशा में रहते हैं । उन्हें व्यक्त अर्थात् प्रकट दशा में लाने के लिये यत्न करना पड़ता है । अब यहाँ प्रश्न उपस्थित होता है कि वे व्यक्त या अव्यक्त दशायें उन पदार्थों से भिन्न हैं या अभिन्न ? यदि अभिन्न मानेंगे तो वे अवस्थाएं भी पदार्थों के समान पहले से ही थीं, फिर उनके लिये प्रयत्न क्यों ? यदि भिन्न मानी गईं तो अवस्थाएँ असत् ही पैदा होती हैं - यह मान लेने पर 'सब पदार्थ सदा सत् रूप ही हैं' यह अपना सिद्धान्त कट जाता है । इसलिये विवश होकर उन्हें अनेकान्तवाद ही बलात् मानना पड़ता है कि अवस्थाएँ द्रव्य आदि पदार्थों से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी ।
सांख्योगदर्शन वस्तु को नित्यानित्य उभय मानता है । धर्मी के भेद न रहने पर भी निमित्त के भेद से भिन्न धर्मी में भिन्न व्यवहार होते हैं । यहाँ धर्मी से मतलब है द्रव्य और निमित्त का मतलब है पर्याय या धर्म । जिस प्रकार एकत्व बोधक अंश शून्य द्वय युक्त होने से याने दो शून्य की अपेक्षानिमित्त से सौ, एक शून्य से युक्त होने पर एक शून्य के निमित्त से दश, तथा शून्य रहित होने से एक संख्या होती है । अथवा जिस प्रकार एक ही स्त्री अपेक्षा भेद से स्त्री, माता, पुत्री एवं बहिन (पति, पुत्र, पिता, भाई की अपेक्षा
१. वीतराग स्तोत्र ८ प्रकाश १० श्लोक ।
|
दो सौ चौहत्तर :: अनेकान्तवाद का समीक्षात्मक अध्ययन ] ज्ञान होता है। धूम-ज्ञान से अग्नि का ज्ञान होता है। यहाँ इन्द्रियसन्निकर्षादि प्रत्यक्ष प्रमाण है । उसका फल धूम-ज्ञान है । धूम-ज्ञान वह्नि- ज्ञान की अपेक्षा से अनुमान प्रमाण है, वह्निज्ञान तो अनुमान का फल है । इस प्रकार धूम के ज्ञान में प्रत्यक्ष प्रमाण की फलता और अनुमान की प्रमाणता- इस प्रकार उभयरूपता मानते हैं । यह अनेकान्त दृष्टि ही है । इन दर्शनों के मत में चाय का कप या धूपदानी या सिगरेट एक अवयवी है। उनका पकड़ा जाने वाला हिस्सा ठंडा तथा दूसरा हिस्सा गरम देखा जाता है । यद्यपि चाय के कप, धूपदानी या सिगरेट में अवयव भेद माना जा सकता है, परन्तु कप, धूपदानी, सिगरेट नाम का अवयवी तो एक ही है, और उसी कपरूपी, धूपदानीरूपी या सिगरेटरूपी अवयवी में परस्पर विरुद्ध शीत एवं उष्ण स्पर्श दोनों ही पाये जाते हैं । परस्परविरुद्ध धर्मवान् होना अनेकान्तवाद ही है । वैशेषिक दर्शन का ही यह सिद्धान्त है कि एक ही पट आदि में विभिन्न भाग में चलत्व, अचलत्व, रक्तत्व, अरक्तत्व, आवृतत्व, अनावृतत्व आदि अनेक विरुद्ध धर्मों के उपलब्ध होने पर भी विरोध नहीं माना जाता । यह भी अनेकान्त दृष्टि की ही मुद्रा है । इनके मत में नित्य ईश्वर में जगत् के निर्माण की इच्छा तथा जगत् संहार करने की इच्छा, रजोगुण और तमोगुण रूप स्वभाव तथा अनेक सात्त्विक भावों का मानना स्पष्ट ही परस्पर विरुद्ध है । यह अनेकान्त दृष्टि से ही संभव है । एक ही ईश्वर को पृथिवी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, दिशा, काल रूप अष्टमूर्ति मानना अनेकान्तवाद का ही रूप है। एक ही आँवले में कमलगोटा की अपेक्षा महत्त्व - बड़ापन, तथा बिल्वफल की अपेक्षा से अणुत्व - छोटापन मानना अनेकान्तात्मकता का ही संपोषण है । सांठे को समिधू की अपेक्षा से बड़ा और बाँस की अपेक्षा से छोटा मानते हैं। देवदत्त में अपने पिता की अपेक्षा से परत्व और पुत्र की अपेक्षा से अपरत्व माना जाता है । इस प्रकार विरोधी धर्मा को एक में मानना अनेकान्तवाद ही है । हेमचंद्राचार्य लिखते हैं - [ चतुर्थ अध्याय :: दो सौ पचहत्तर 'इच्छन् प्रधानं सत्त्वाद्यै विरुद्वेग म्फितं गुणंः सांख्यः संख्यावतां मुख्यो नानेकान्तं प्रतिक्षिपेत् । एक सांख्य दर्शन के मत में प्रकृति को सत्त्व, रज और तम - इन तीन परस्पर विरुद्ध गुणवाली माना जाता है । परस्पर विरुद्ध गुणों का समावेश एक ही प्रकृति में मानना स्पष्ट अनेकान्त दृष्टि का समर्थन है । इस दर्शन में 'सत्कार्यवाद' माना जाता है । इस मत में सब कार्य सदा ही सत्रूप है । यहाँ यह प्रश्न उपस्थित होता है कि यदि घट पट आदि कार्य अपनी उत्पत्ति से पूर्व भी सत् रूप ही हैं, तो फिर उनको उत्पन्न करने के लिये प्रयत्न क्यों करना पड़ता है ? इसका उत्तर वहाँ यही दिया जाता है कि सब कार्य अपने-अपने कारण में अव्यक्त अर्थात् अप्रकट सूक्ष्म दशा में रहते हैं । उन्हें व्यक्त अर्थात् प्रकट दशा में लाने के लिये यत्न करना पड़ता है । अब यहाँ प्रश्न उपस्थित होता है कि वे व्यक्त या अव्यक्त दशायें उन पदार्थों से भिन्न हैं या अभिन्न ? यदि अभिन्न मानेंगे तो वे अवस्थाएं भी पदार्थों के समान पहले से ही थीं, फिर उनके लिये प्रयत्न क्यों ? यदि भिन्न मानी गईं तो अवस्थाएँ असत् ही पैदा होती हैं - यह मान लेने पर 'सब पदार्थ सदा सत् रूप ही हैं' यह अपना सिद्धान्त कट जाता है । इसलिये विवश होकर उन्हें अनेकान्तवाद ही बलात् मानना पड़ता है कि अवस्थाएँ द्रव्य आदि पदार्थों से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी । सांख्योगदर्शन वस्तु को नित्यानित्य उभय मानता है । धर्मी के भेद न रहने पर भी निमित्त के भेद से भिन्न धर्मी में भिन्न व्यवहार होते हैं । यहाँ धर्मी से मतलब है द्रव्य और निमित्त का मतलब है पर्याय या धर्म । जिस प्रकार एकत्व बोधक अंश शून्य द्वय युक्त होने से याने दो शून्य की अपेक्षानिमित्त से सौ, एक शून्य से युक्त होने पर एक शून्य के निमित्त से दश, तथा शून्य रहित होने से एक संख्या होती है । अथवा जिस प्रकार एक ही स्त्री अपेक्षा भेद से स्त्री, माता, पुत्री एवं बहिन (पति, पुत्र, पिता, भाई की अपेक्षा एक. वीतराग स्तोत्र आठ प्रकाश दस श्लोक ।
|
गोभी चावल जैसे कुछ अनाज सहित कई उत्पादों के साथ अच्छी तरह से मिश्रण करती है। चावल के साथ stewed गोभी तैयार करें , यह आसान है, यह पकवान एक सप्ताह के मेनू के लिए एकदम सही है। इसके अलावा शाकाहारियों द्वारा विशेष रूप से इसकी सराहना की जाएगी।
सामग्रीः
- सफेद गोभी - 1 छोटा कांटा;
- चावल - 5-8 बड़ा चम्मच। चम्मच;
- प्याज - 2 पीसी।
- गाजर - 1 टुकड़ा;
- टमाटर का पेस्ट - 2 बड़ा चम्मच। चम्मच;
- बे पत्तियों, काली मिर्च, लौंग - स्वाद के लिए;
- नमक;
- विभिन्न हिरण (अजमोद, डिल, तुलसी, तारगोन);
- लहसुन - 2-3 wedges;
- वनस्पति तेल - 5 चम्मच (मांसाहारी सूअर का मांस smaltse पर पका सकते हैं - भी स्वादिष्ट और संतोषजनक बाहर निकलता है)।
एक कढ़ाई में वनस्पति तेल पर छिद्रित प्याज और गाजर कटे हुए और हल्के से बचाए जाते हैं। स्वाद और स्वाद को बेहतर बनाने के लिए थोड़ा पानी, बे पत्ती और सूखे मसाले जोड़ें। हम ढक्कन के नीचे आधा तैयार गोभी बुझ जाएगा। समय-समय पर एक स्पुतुला या चम्मच के साथ हलचल।
कढ़ाई चावल को कढ़ाई में जोड़ें (चावल डालने के लिए चावल डालना और 5-8 मिनट के बाद पानी निकालना बेहतर है)। सभी मिश्रण और थोड़ा सा। चावल तैयार होने तक हम इसे स्क्वैश करेंगे। कबूतर में कुछ तरल होना चाहिए (अगर वह, हम जोड़ देंगे)। अब आप टमाटर का पेस्ट डाल सकते हैं। हम लगभग 3-5 मिनट तक पकाएंगे। चावल के साथ तैयार स्ट्यूड गोभी प्लेटों पर फैला हुआ है और कटा हुआ जड़ी बूटियों और लहसुन के साथ मौसम की सेवा करने से पहले। एक गर्म रूप में बेहतर सेवा।
एक अन्य खाना पकाने के विकल्प में, आप कढ़ाई में प्याज, गाजर और गोभी काट सकते हैं, और प्रक्रिया के अंत में टमाटर के पेस्ट के साथ चावल को अलग से पकाया जाता है, फिर 3 मिनट के भीतर बुझ जाता है।
वनस्पति तेल का उपयोग कर खाना पकाने के रूप में चावल के साथ छिद्रित गोभी की कैलोरी सामग्री बहुत कम है। इस बीच, चावल एक आसानी से पचाने योग्य उत्पाद है, गोभी में बहुत सारे पोषक तत्व और फाइबर होते हैं, टमाटर एंटीऑक्सीडेंट जोड़ देगा। तो खुशी से पकाएं और स्वास्थ्य पर खाएं।
चावल के साथ स्ट्यूड सायरक्राट ताजा के रूप में उसी तरह तैयार किया जाता है, केवल पहले इसे धोया जाना चाहिए और पांच मिनट के लिए एक कोलंडर को फेंक दिया जाना चाहिए।
इस पकवान को और अधिक रोचक बनाने के लिए, आप व्यक्तिगत रूप से या संयोजनों में विभिन्न प्रकार के गोभी का उपयोग कर सकते हैं। इन मामलों में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पेकिंग और सेवॉय गोभी तेज, ब्रोकोली और लाल धीमी, और कोहलबरी सफेद सिर की तुलना में बहुत धीमी है। इसलिए बुकमार्क और गर्मी उपचार के समय को अलग से समायोजित किया जाना चाहिए, हालांकि, काफी सरल है।
|
गोभी चावल जैसे कुछ अनाज सहित कई उत्पादों के साथ अच्छी तरह से मिश्रण करती है। चावल के साथ stewed गोभी तैयार करें , यह आसान है, यह पकवान एक सप्ताह के मेनू के लिए एकदम सही है। इसके अलावा शाकाहारियों द्वारा विशेष रूप से इसकी सराहना की जाएगी। सामग्रीः - सफेद गोभी - एक छोटा कांटा; - चावल - पाँच-आठ बड़ा चम्मच। चम्मच; - प्याज - दो पीसी। - गाजर - एक टुकड़ा; - टमाटर का पेस्ट - दो बड़ा चम्मच। चम्मच; - बे पत्तियों, काली मिर्च, लौंग - स्वाद के लिए; - नमक; - विभिन्न हिरण ; - लहसुन - दो-तीन wedges; - वनस्पति तेल - पाँच चम्मच । एक कढ़ाई में वनस्पति तेल पर छिद्रित प्याज और गाजर कटे हुए और हल्के से बचाए जाते हैं। स्वाद और स्वाद को बेहतर बनाने के लिए थोड़ा पानी, बे पत्ती और सूखे मसाले जोड़ें। हम ढक्कन के नीचे आधा तैयार गोभी बुझ जाएगा। समय-समय पर एक स्पुतुला या चम्मच के साथ हलचल। कढ़ाई चावल को कढ़ाई में जोड़ें । सभी मिश्रण और थोड़ा सा। चावल तैयार होने तक हम इसे स्क्वैश करेंगे। कबूतर में कुछ तरल होना चाहिए । अब आप टमाटर का पेस्ट डाल सकते हैं। हम लगभग तीन-पाँच मिनट तक पकाएंगे। चावल के साथ तैयार स्ट्यूड गोभी प्लेटों पर फैला हुआ है और कटा हुआ जड़ी बूटियों और लहसुन के साथ मौसम की सेवा करने से पहले। एक गर्म रूप में बेहतर सेवा। एक अन्य खाना पकाने के विकल्प में, आप कढ़ाई में प्याज, गाजर और गोभी काट सकते हैं, और प्रक्रिया के अंत में टमाटर के पेस्ट के साथ चावल को अलग से पकाया जाता है, फिर तीन मिनट के भीतर बुझ जाता है। वनस्पति तेल का उपयोग कर खाना पकाने के रूप में चावल के साथ छिद्रित गोभी की कैलोरी सामग्री बहुत कम है। इस बीच, चावल एक आसानी से पचाने योग्य उत्पाद है, गोभी में बहुत सारे पोषक तत्व और फाइबर होते हैं, टमाटर एंटीऑक्सीडेंट जोड़ देगा। तो खुशी से पकाएं और स्वास्थ्य पर खाएं। चावल के साथ स्ट्यूड सायरक्राट ताजा के रूप में उसी तरह तैयार किया जाता है, केवल पहले इसे धोया जाना चाहिए और पांच मिनट के लिए एक कोलंडर को फेंक दिया जाना चाहिए। इस पकवान को और अधिक रोचक बनाने के लिए, आप व्यक्तिगत रूप से या संयोजनों में विभिन्न प्रकार के गोभी का उपयोग कर सकते हैं। इन मामलों में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पेकिंग और सेवॉय गोभी तेज, ब्रोकोली और लाल धीमी, और कोहलबरी सफेद सिर की तुलना में बहुत धीमी है। इसलिए बुकमार्क और गर्मी उपचार के समय को अलग से समायोजित किया जाना चाहिए, हालांकि, काफी सरल है।
|
दिल्ली के बाहरी इलाके में एक साल तक चले किसान आंदोलन की सियासी फसल अब सामने आ गई है। किसान आंदोलन के मुख्य चेहरे रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने शनिवार को राजनीतिक दल का ऐलान किया है। इस पार्टी का नाम संयुक्त संघर्ष पार्टी रखा गया है। किसान नेता चढूनी ने शनिवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।
भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि उनकी पार्टी पंजाब का चुनाव पूरे जोश के साथ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष पार्टी 2022 का पंजाब चुनाव सभी सीटों पर लड़ेगी।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज ज्यादातर राजनीतिक दलों पर पैसे वाले लोगों का कब्जा है। देश में पूंजीवाद लगातार बढ़ रहा है, अमीर और गरीब के बीच एक बड़ी खाई पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि पैसे वाले लोग गरीबों के लिए नीतियां बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर होगी और धर्मनिरपेक्ष होगी। चढूनी ने कहा कि यह सभी धर्मों, सभी जातियों की पार्टी होगी। इस पार्टी में ग्रामीण, शहरी, मजदूर, किसान, रेहड़ी-पटरी वाले, लोग शामिल होंगे।
संयुक्त संघर्ष पार्टी साल भर के किसान आंदोलन के बाद अस्तित्व में आने वाली पहली राजनीतिक पार्टी है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने वर्षों से आंदोलन किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस ले लिया।
बता दें कि गुरनाम सिंह चढूनी संयुक्त किसान मोर्चा की 5 सदस्यीय समिति का हिस्सा थे, जिसे कृषि कानूनों पर मोदी सरकार के साथ बातचीत करने का अधिकार मोर्चा ने दिया था। इस समिति में युद्धवीर सिंह, अशोक धवले, बलबीर सिंह राजेवाल और शिव कुमार कक्का शामिल थे।
|
दिल्ली के बाहरी इलाके में एक साल तक चले किसान आंदोलन की सियासी फसल अब सामने आ गई है। किसान आंदोलन के मुख्य चेहरे रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने शनिवार को राजनीतिक दल का ऐलान किया है। इस पार्टी का नाम संयुक्त संघर्ष पार्टी रखा गया है। किसान नेता चढूनी ने शनिवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि उनकी पार्टी पंजाब का चुनाव पूरे जोश के साथ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त संघर्ष पार्टी दो हज़ार बाईस का पंजाब चुनाव सभी सीटों पर लड़ेगी। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज ज्यादातर राजनीतिक दलों पर पैसे वाले लोगों का कब्जा है। देश में पूंजीवाद लगातार बढ़ रहा है, अमीर और गरीब के बीच एक बड़ी खाई पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि पैसे वाले लोग गरीबों के लिए नीतियां बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर होगी और धर्मनिरपेक्ष होगी। चढूनी ने कहा कि यह सभी धर्मों, सभी जातियों की पार्टी होगी। इस पार्टी में ग्रामीण, शहरी, मजदूर, किसान, रेहड़ी-पटरी वाले, लोग शामिल होंगे। संयुक्त संघर्ष पार्टी साल भर के किसान आंदोलन के बाद अस्तित्व में आने वाली पहली राजनीतिक पार्टी है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने वर्षों से आंदोलन किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस ले लिया। बता दें कि गुरनाम सिंह चढूनी संयुक्त किसान मोर्चा की पाँच सदस्यीय समिति का हिस्सा थे, जिसे कृषि कानूनों पर मोदी सरकार के साथ बातचीत करने का अधिकार मोर्चा ने दिया था। इस समिति में युद्धवीर सिंह, अशोक धवले, बलबीर सिंह राजेवाल और शिव कुमार कक्का शामिल थे।
|
Smartphone Tips: अगर आपके स्मार्टफोन में भी कई बार No Sim Card Error लिखा आता है तो यहां जानें कि आप इसे कैसे ठीक कर सकते हैं और ये क्यों लिखा आता है.
No Sim Card Error: आज के समय में स्मार्टफोन हम सभी की लाइफ का हिस्सा बन गया है. जैसे-जैसे भारत में डिजिटलाइजेशन हो रहा है स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. फिर चाहें ऑनलाइन शॉपिंग करना हो, पढ़ाई करनी हो या ऑफिस का काम करना हो, हर छोटे-बड़े काम में स्मार्टफोन ही इस्तेमाल किया जाता हैं. कई बार हम इमरजेंसी की सिच्युएशन में होते हैं जिसमें हमें किसी को जल्द से जल्द कॉल करना होता है तो फोन में No Sim Card Error लिखा आता है. ऐसे में हम परेशान हो जाते हैं कि क्या करें कैसे इस दिक्कत को ठीक करें. आपकी इस परेशानी को देखते हुए आज हम यहां आपको बताएंगे कि फोन में नो सिम कार्ड एरर क्यों लिखा आता है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है.
सिम कार्ड करें सेटः अगर आपके स्मार्टफोन में भी नो सिम कार्ड एरर लिखा आता है तो हो सकता है कि आपके सिम कार्ड स्लॉट में दिकक्त हो ऐसे में हो सकता है कि सिम अपनी जगह पर ठीक से फिक्स नहीं हुई हो.
सिम कार्ड हो सकता है डैमेजः कई बार ऐसा हो सकता है कि आपकी सिम के लंबे समय से फोन में लगे होने के कारण से इसमें काफी ज्यादा डस्ट जमा हो गया हो. ऐसे में आपकी सिम डैमेज भी हो जाती है. इसके लिए आपको अपना सिम कार्ड फोन से निकालक चेक कर लेना चाहिए.
नए फोन में सिम सपोर्टः ज्यादातर मामलों में नो सिम कार्ड एरर इसलिए आता है कि आपके नए फोन में सिम सपोर्ट नहीं कर पा रही हो. उदाहरण के लिए बात करें तो जैसे अगर आपका फोन 5जी है तो भी वो अपग्रेडेड सिम को ही सपोर्ट करता है. ऐसे में अगर आपकी सिम अपग्रेडेड नहीं है तो आपके फोन में नो सिम कार्ड एरर लिखा आ सकता है. इसके लिए आपको जरूरत है कि आप अपनी सिम को अपग्रेड करा लें.
फोन में ग्लिच या सॉफ्टवेयर में दिक्कतः कई बार होता है कि आपके फोन के सॉफ्टवेयर में या कनेक्टिविटी के तहत कोई ग्लिच हो. ऐसे में आपने फोन की सेटिंग में जाकर इस ग्लिच को ठीक करलें.
|
Smartphone Tips: अगर आपके स्मार्टफोन में भी कई बार No Sim Card Error लिखा आता है तो यहां जानें कि आप इसे कैसे ठीक कर सकते हैं और ये क्यों लिखा आता है. No Sim Card Error: आज के समय में स्मार्टफोन हम सभी की लाइफ का हिस्सा बन गया है. जैसे-जैसे भारत में डिजिटलाइजेशन हो रहा है स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. फिर चाहें ऑनलाइन शॉपिंग करना हो, पढ़ाई करनी हो या ऑफिस का काम करना हो, हर छोटे-बड़े काम में स्मार्टफोन ही इस्तेमाल किया जाता हैं. कई बार हम इमरजेंसी की सिच्युएशन में होते हैं जिसमें हमें किसी को जल्द से जल्द कॉल करना होता है तो फोन में No Sim Card Error लिखा आता है. ऐसे में हम परेशान हो जाते हैं कि क्या करें कैसे इस दिक्कत को ठीक करें. आपकी इस परेशानी को देखते हुए आज हम यहां आपको बताएंगे कि फोन में नो सिम कार्ड एरर क्यों लिखा आता है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है. सिम कार्ड करें सेटः अगर आपके स्मार्टफोन में भी नो सिम कार्ड एरर लिखा आता है तो हो सकता है कि आपके सिम कार्ड स्लॉट में दिकक्त हो ऐसे में हो सकता है कि सिम अपनी जगह पर ठीक से फिक्स नहीं हुई हो. सिम कार्ड हो सकता है डैमेजः कई बार ऐसा हो सकता है कि आपकी सिम के लंबे समय से फोन में लगे होने के कारण से इसमें काफी ज्यादा डस्ट जमा हो गया हो. ऐसे में आपकी सिम डैमेज भी हो जाती है. इसके लिए आपको अपना सिम कार्ड फोन से निकालक चेक कर लेना चाहिए. नए फोन में सिम सपोर्टः ज्यादातर मामलों में नो सिम कार्ड एरर इसलिए आता है कि आपके नए फोन में सिम सपोर्ट नहीं कर पा रही हो. उदाहरण के लिए बात करें तो जैसे अगर आपका फोन पाँचजी है तो भी वो अपग्रेडेड सिम को ही सपोर्ट करता है. ऐसे में अगर आपकी सिम अपग्रेडेड नहीं है तो आपके फोन में नो सिम कार्ड एरर लिखा आ सकता है. इसके लिए आपको जरूरत है कि आप अपनी सिम को अपग्रेड करा लें. फोन में ग्लिच या सॉफ्टवेयर में दिक्कतः कई बार होता है कि आपके फोन के सॉफ्टवेयर में या कनेक्टिविटी के तहत कोई ग्लिच हो. ऐसे में आपने फोन की सेटिंग में जाकर इस ग्लिच को ठीक करलें.
|
कन्या - पार्टनर से आपको शुभ समाचार भी मिल सकते है। आने वाले दिन आपके बहेद खास रहेगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
वृश्चिक - राजनीति के क्षेत्र में आपकी रुचि अधिक बढ़ेगी। आपको अपने घर में सबसे ज्यादा बड़े भाई और जीवनसाथी का सपोर्ट मिलेगा।
मिथुन - समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रोफेशनल लाइफ में फायदा ही फायदा हो सकता है। परिवार और मित्रों के सहयोग के कारण मन में प्रसन्नता रहेगी।
वृषभ - हर समस्याओं को पार करते हुए आप सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले हैं। आप जितना ही गरीब तथा कमजोर लोगों की मदद करेंगे।
धनु- शनिदेव की कृपा इन पर बरसेंगी। रुके हुए काम तेजी से बना शुरू होंगे। पार्टनर से आपको शुभ समाचार भी मिल सकते है।
|
कन्या - पार्टनर से आपको शुभ समाचार भी मिल सकते है। आने वाले दिन आपके बहेद खास रहेगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। वृश्चिक - राजनीति के क्षेत्र में आपकी रुचि अधिक बढ़ेगी। आपको अपने घर में सबसे ज्यादा बड़े भाई और जीवनसाथी का सपोर्ट मिलेगा। मिथुन - समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रोफेशनल लाइफ में फायदा ही फायदा हो सकता है। परिवार और मित्रों के सहयोग के कारण मन में प्रसन्नता रहेगी। वृषभ - हर समस्याओं को पार करते हुए आप सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले हैं। आप जितना ही गरीब तथा कमजोर लोगों की मदद करेंगे। धनु- शनिदेव की कृपा इन पर बरसेंगी। रुके हुए काम तेजी से बना शुरू होंगे। पार्टनर से आपको शुभ समाचार भी मिल सकते है।
|
कुल्लू - जिला कुल्लू के वामतट पर सटी खराहल घाटी की सड़क बदहाली के आंसू बहा रही है। यह सड़क धार्मिक स्थल बिजली महादेव सहित घाटी की पांच पंचायतों को जोड़ती है। सड़क की हालत खस्ता होने से घाटी के लोगों में रोष पनपता जा रहा है। हैरानी की बात है कि रामशिला स्थित शांगरीबाग के पास काफी समय पहले सड़क का डंगा गिरा हुआ है। डंगा गिरने से वाहन चालकों को काफी दिक्कतें आ रही हैँ। लोगों ने इसकी शिकायत लोक निर्माण विभाग को भी दी है, लेकिन विभाग सुध नहीं ले रहा है, जिससे लोगों में विभाग के प्रति रोष है। भाजपा के मीडिया प्रभारी व घाटी निवासी कुलदीप नैयर ने कहा कि पिछले कुछ समय पहले जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खराहल घाटी का दौरा किया था तो विभाग ने आनन-फानन में यहां पर साइन बोर्ड स्थापित किए, लेकिन इसके बाद विभाग चुपी साधे बैठा हुआ है। उन्होंने बताया कि सड़क काफी तंग होने से इस स्थान पर कभी भी हादसा होने की आशंका बनी हुई है। घाटीवासियों दुनी चंद, ग्राम पंचायत तलोगी के उपप्रधान अनिल राणा, मदन कुमार, तिलक राज ने कहा कि खराहल घाटी की समस्याआें को लेकर भाजपा ने जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान समस्या का जल्द हल करने के लिए विभाग व प्रशासन की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन विभाग ने अभी तक डंगे की मरम्मत करने के लिए कदम नहीं उठाए हैं। भाजपा के मीडिया प्रभारी ने कहा कि विभाग ने जल्द शांगरीबाग में क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत नहीं की तो भाजपा विभाग के कार्यालय का घेराव करने से भी गुरेज नहीं करेगी। उधर, लोनिवि के सहायक अभियंता केके शर्मा ने कहा कि सड़क के डंगे को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। औपचारिकता पूरी होते ही सड़क में डंगे का काम शुरू कर दिया जाएगा।
|
कुल्लू - जिला कुल्लू के वामतट पर सटी खराहल घाटी की सड़क बदहाली के आंसू बहा रही है। यह सड़क धार्मिक स्थल बिजली महादेव सहित घाटी की पांच पंचायतों को जोड़ती है। सड़क की हालत खस्ता होने से घाटी के लोगों में रोष पनपता जा रहा है। हैरानी की बात है कि रामशिला स्थित शांगरीबाग के पास काफी समय पहले सड़क का डंगा गिरा हुआ है। डंगा गिरने से वाहन चालकों को काफी दिक्कतें आ रही हैँ। लोगों ने इसकी शिकायत लोक निर्माण विभाग को भी दी है, लेकिन विभाग सुध नहीं ले रहा है, जिससे लोगों में विभाग के प्रति रोष है। भाजपा के मीडिया प्रभारी व घाटी निवासी कुलदीप नैयर ने कहा कि पिछले कुछ समय पहले जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खराहल घाटी का दौरा किया था तो विभाग ने आनन-फानन में यहां पर साइन बोर्ड स्थापित किए, लेकिन इसके बाद विभाग चुपी साधे बैठा हुआ है। उन्होंने बताया कि सड़क काफी तंग होने से इस स्थान पर कभी भी हादसा होने की आशंका बनी हुई है। घाटीवासियों दुनी चंद, ग्राम पंचायत तलोगी के उपप्रधान अनिल राणा, मदन कुमार, तिलक राज ने कहा कि खराहल घाटी की समस्याआें को लेकर भाजपा ने जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान समस्या का जल्द हल करने के लिए विभाग व प्रशासन की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन विभाग ने अभी तक डंगे की मरम्मत करने के लिए कदम नहीं उठाए हैं। भाजपा के मीडिया प्रभारी ने कहा कि विभाग ने जल्द शांगरीबाग में क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत नहीं की तो भाजपा विभाग के कार्यालय का घेराव करने से भी गुरेज नहीं करेगी। उधर, लोनिवि के सहायक अभियंता केके शर्मा ने कहा कि सड़क के डंगे को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। औपचारिकता पूरी होते ही सड़क में डंगे का काम शुरू कर दिया जाएगा।
|
कुनी सिस्टम का हिस्सा ब्रुकलिन कॉलेज, एक चुनिंदा स्कूल है। आवेदन करने वालों में से केवल एक-तिहाई ही हर साल स्वीकार किए जाते हैं। छात्रों को एसएटी या अधिनियम से स्कोर में भेजना होगा और अधिकांश लोग जो एसएटी स्कोर में आवेदन करते हैं। छात्र CUNY वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करते हैं, और यह इंगित कर सकते हैं कि वे कौन से शाखा स्कूल आवेदन कर रहे हैं। हर साल ब्रुकलिन कॉलेज में लगभग 20,000 छात्र आवेदन करते हैं; जिन लोगों को भर्ती कराया जाता है, वे आमतौर पर परीक्षण स्कोर और औसत से ग्रेड होते हैं, बहिष्कृत गतिविधियों में भाग लेते हैं, और कुछ काम या स्वयंसेवकों का अनुभव होता है।
क्या आप अंदर आ जाएंगे?
प्रवेश डेटा (2016)
ब्रुलीन कॉलेज, कुनी का हिस्सा है, ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में 26-एकड़ परिसर में एक आकर्षक वृक्षारोपण है। कॉलेज में उदार कला और विज्ञान में मजबूत कार्यक्रम हैं जिन्होंने इसे प्रतिष्ठित फाई बीटा कप्पा ऑनर सोसाइटी का एक अध्याय अर्जित किया है। इस सार्वजनिक विश्वविद्यालय की कम शैक्षिक शक्तियों के साथ मिलकर कम ट्यूशन इसे देश के सर्वोत्तम शैक्षिक मूल्यों में अक्सर रैंक बनाता है। 14 से 1 पर, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के बहुमत की तुलना में कॉलेज में एक बेहतर छात्र / संकाय अनुपात है। ब्रुकलिन की समृद्धि और विविधता को दर्शाते हुए, कॉलेज का छात्र निकाय जातीय रूप से विविध है।
नामांकन (2016)
- कुल नामांकनः 17,580 (14,406 स्नातक)
लागत (2016 - 17)
- शिक्षण और शुल्कः $ 6,838 (इन-स्टेट); $ 13,948 (राज्य के बाहर)
- किताबेंः $ 1,364 ( इतना क्यों? )
- कुल लागतः $ 27,217 (राज्य में); $ 34,327 (राज्य के बाहर)
ब्रुकलिन कॉलेज वित्तीय सहायता (2015 - 16)
- आपके लिए कौन सा प्रमुख सही है? Cappex में मुफ्त "माई करियर और मेजर क्विज़" लेने के लिए साइन अप करें।
|
कुनी सिस्टम का हिस्सा ब्रुकलिन कॉलेज, एक चुनिंदा स्कूल है। आवेदन करने वालों में से केवल एक-तिहाई ही हर साल स्वीकार किए जाते हैं। छात्रों को एसएटी या अधिनियम से स्कोर में भेजना होगा और अधिकांश लोग जो एसएटी स्कोर में आवेदन करते हैं। छात्र CUNY वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करते हैं, और यह इंगित कर सकते हैं कि वे कौन से शाखा स्कूल आवेदन कर रहे हैं। हर साल ब्रुकलिन कॉलेज में लगभग बीस,शून्य छात्र आवेदन करते हैं; जिन लोगों को भर्ती कराया जाता है, वे आमतौर पर परीक्षण स्कोर और औसत से ग्रेड होते हैं, बहिष्कृत गतिविधियों में भाग लेते हैं, और कुछ काम या स्वयंसेवकों का अनुभव होता है। क्या आप अंदर आ जाएंगे? प्रवेश डेटा ब्रुलीन कॉलेज, कुनी का हिस्सा है, ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में छब्बीस-एकड़ परिसर में एक आकर्षक वृक्षारोपण है। कॉलेज में उदार कला और विज्ञान में मजबूत कार्यक्रम हैं जिन्होंने इसे प्रतिष्ठित फाई बीटा कप्पा ऑनर सोसाइटी का एक अध्याय अर्जित किया है। इस सार्वजनिक विश्वविद्यालय की कम शैक्षिक शक्तियों के साथ मिलकर कम ट्यूशन इसे देश के सर्वोत्तम शैक्षिक मूल्यों में अक्सर रैंक बनाता है। चौदह से एक पर, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों के बहुमत की तुलना में कॉलेज में एक बेहतर छात्र / संकाय अनुपात है। ब्रुकलिन की समृद्धि और विविधता को दर्शाते हुए, कॉलेज का छात्र निकाय जातीय रूप से विविध है। नामांकन - कुल नामांकनः सत्रह,पाँच सौ अस्सी लागत - शिक्षण और शुल्कः छः डॉलर,आठ सौ अड़तीस ; तेरह डॉलर,नौ सौ अड़तालीस - किताबेंः एक डॉलर,तीन सौ चौंसठ - कुल लागतः सत्ताईस डॉलर,दो सौ सत्रह ; चौंतीस डॉलर,तीन सौ सत्ताईस ब्रुकलिन कॉलेज वित्तीय सहायता - आपके लिए कौन सा प्रमुख सही है? Cappex में मुफ्त "माई करियर और मेजर क्विज़" लेने के लिए साइन अप करें।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
गुना(निप्र)। अज्ञात व्यक्ति द्वारा एक युवति के मोबाईल पर अश्लील मैसेज करने का मामला प्रकाश में आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी पीएस विष्ट ने कोतवाली थाने को मामला दर्ज करते हुए आरोपी को तत्काल कार गिरफ्तार करने. . . madhya pradeshWed, 12 Mar 2014 11:33 PM (IST)
बीते दिनों क्षेत्र के एक कालेज की छात्रा और उसके सहपाठी युवक के लापता होने और उसके बाद इलाहाबाद से उनकी बरामदगी के बाद खुले राज में पुलिस को चौंकाने वाली बात सामने आई थी। युवती द्वारा पुलिस को बताया गया कि उसके मोबाइल पर. . . madhya pradeshTue, 11 Mar 2014 11:55 PM (IST)
महिला सेल ने एमबीए की छात्रा की शिकायत पर उसे परेशान करने वाले सीए के छात्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी छात्रा को फोन करके परेशान करता था। फोन नहीं उठाने पर अश्लील मैसेज करता था। जब छात्रा पुलिस में शिकायत. . . chhattisgarhFri, 07 Mar 2014 12:50 AM (IST)
कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के और लड़की की दोस्ती एक दूसरे अज्ञात लड़के को इतनी नागवार गुजरी कि वह उन दोनों को न केवल मोबाइल फोन पर धमकियां देने लगा बल्कि अश्लील मैसेज भी करने लगा। यही नहीं उसने सारी हदें पार कर लड़की के फेसबुक आ. . . madhya pradeshWed, 05 Mar 2014 05:41 PM (IST)
बच्चे के स्कूल पहुंचते ही पेरेंट्स को मिलेगा मैसेज!
फ्लेग-स्कूल बसों में जीपीएस व स्पीड गवर्नर सिस्टम लगाने की सीबीएसई ने की पहल -सीबीएसई स्कूलों में सड़madhya pradeshTue, 04 Mar 2014 01:36 AM (IST)
रायगढ़ (निप्र)। आगामी 1 मार्च से बोर्ड परीक्षा का महाकुंभ शुरू हो जाएगा। जिले में इस इस साल 10 -12 वीं मिलाकर 41 हजार 536 छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। खास बात यह है कि नकल पर नकेल के लिए कलेक्टर द्वारा 8 टीम का गठन क. . . chhattisgarhTue, 25 Feb 2014 11:16 AM (IST)
एक रिसर्च सेंटर प्रभारी के बैंक खाते से सऊदी अरब की वेबसाइट से रुपए निकाल लिए गए, उन्हें मैसेज से इसका पता चला। madhya pradeshTue, 25 Feb 2014 08:08 AM (IST)
गजेन्द्र विश्वकर्मा. आईनेक्स्ट. इंदौर वॉट्सएप को फेसबुक द्वारा खरीदने के पांच दिन बाद मैसेज भेजनmadhya pradeshTue, 25 Feb 2014 02:57 AM (IST)
इटारसी। पिछले दिनों होशंगाबाद में हुई चोरियों के मामले में मिले अलर्ट मैसेज के बाद पुलिस ने शुक्रवार रात नौ बजे शहर के विभिन्न होटल एवं लॉज में रूके मुसाफिरों का रिकार्ड जांचा। जांच पड़ताल के दौरान शहर की एक लॉज से कुछ स. . . madhya pradeshSat, 22 Feb 2014 03:00 AM (IST)
इंदौर। अन्नापूर्णा इलाके में रहने वाली युवतियों को वाट्सअप पर अश्लील वीडियो और मैसेज भेजने वाले खाmadhya pradeshSat, 15 Feb 2014 02:57 AM (IST)
|
गुना। अज्ञात व्यक्ति द्वारा एक युवति के मोबाईल पर अश्लील मैसेज करने का मामला प्रकाश में आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी पीएस विष्ट ने कोतवाली थाने को मामला दर्ज करते हुए आरोपी को तत्काल कार गिरफ्तार करने. . . madhya pradeshWed, बारह मार्च दो हज़ार चौदह ग्यारह:तैंतीस PM बीते दिनों क्षेत्र के एक कालेज की छात्रा और उसके सहपाठी युवक के लापता होने और उसके बाद इलाहाबाद से उनकी बरामदगी के बाद खुले राज में पुलिस को चौंकाने वाली बात सामने आई थी। युवती द्वारा पुलिस को बताया गया कि उसके मोबाइल पर. . . madhya pradeshTue, ग्यारह मार्च दो हज़ार चौदह ग्यारह:पचपन PM महिला सेल ने एमबीए की छात्रा की शिकायत पर उसे परेशान करने वाले सीए के छात्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी छात्रा को फोन करके परेशान करता था। फोन नहीं उठाने पर अश्लील मैसेज करता था। जब छात्रा पुलिस में शिकायत. . . chhattisgarhFri, सात मार्च दो हज़ार चौदह बारह:पचास AM कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के और लड़की की दोस्ती एक दूसरे अज्ञात लड़के को इतनी नागवार गुजरी कि वह उन दोनों को न केवल मोबाइल फोन पर धमकियां देने लगा बल्कि अश्लील मैसेज भी करने लगा। यही नहीं उसने सारी हदें पार कर लड़की के फेसबुक आ. . . madhya pradeshWed, पाँच मार्च दो हज़ार चौदह पाँच:इकतालीस PM बच्चे के स्कूल पहुंचते ही पेरेंट्स को मिलेगा मैसेज! फ्लेग-स्कूल बसों में जीपीएस व स्पीड गवर्नर सिस्टम लगाने की सीबीएसई ने की पहल -सीबीएसई स्कूलों में सड़madhya pradeshTue, चार मार्च दो हज़ार चौदह एक:छत्तीस AM रायगढ़ । आगामी एक मार्च से बोर्ड परीक्षा का महाकुंभ शुरू हो जाएगा। जिले में इस इस साल दस -बारह वीं मिलाकर इकतालीस हजार पाँच सौ छत्तीस छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। खास बात यह है कि नकल पर नकेल के लिए कलेक्टर द्वारा आठ टीम का गठन क. . . chhattisgarhTue, पच्चीस फ़रवरी दो हज़ार चौदह ग्यारह:सोलह AM एक रिसर्च सेंटर प्रभारी के बैंक खाते से सऊदी अरब की वेबसाइट से रुपए निकाल लिए गए, उन्हें मैसेज से इसका पता चला। madhya pradeshTue, पच्चीस फ़रवरी दो हज़ार चौदह आठ:आठ AM गजेन्द्र विश्वकर्मा. आईनेक्स्ट. इंदौर वॉट्सएप को फेसबुक द्वारा खरीदने के पांच दिन बाद मैसेज भेजनmadhya pradeshTue, पच्चीस फ़रवरी दो हज़ार चौदह दो:सत्तावन AM इटारसी। पिछले दिनों होशंगाबाद में हुई चोरियों के मामले में मिले अलर्ट मैसेज के बाद पुलिस ने शुक्रवार रात नौ बजे शहर के विभिन्न होटल एवं लॉज में रूके मुसाफिरों का रिकार्ड जांचा। जांच पड़ताल के दौरान शहर की एक लॉज से कुछ स. . . madhya pradeshSat, बाईस फ़रवरी दो हज़ार चौदह तीन:शून्य AM इंदौर। अन्नापूर्णा इलाके में रहने वाली युवतियों को वाट्सअप पर अश्लील वीडियो और मैसेज भेजने वाले खाmadhya pradeshSat, पंद्रह फ़रवरी दो हज़ार चौदह दो:सत्तावन AM
|
शिमला - स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिला की 150 पंचायतों में वर्ष 2017-18 में 22 करोड़ 81 लाख रुपए विभिन्न शैल्फों पर खर्च किए जाएंगे। जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने विभिन्न विकास खंडों की पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिला की सभी पंचायतों में कूड़ा- कचरा के भंडारण, दूषित जल की निकासी की व्यवस्था, सीवरेज प्रणाली, जलाशयों के निर्माण व उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग शौचालय निर्माण कार्य को गुणवत्ता के आधार पर करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट, जीरो वेस्ट सेंटरों तथा कचरा एकत्रीकरण गड्ढे व कूड़े-कचरे के सही निष्पादन की व्यापक व्यवस्था करने पर बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के प्रति ग्राम पंचायतों व स्कूलों को प्रेरित करने का कार्य जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए शौचालयों का निर्माण, रखरखाव व कूड़े-कचरे का निष्पादन अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों में सरकारी भूमि की अनुपलब्धता के कारण शौचालय निर्माण व उसके रखरखाव में बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने इन क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों से सहयोग की अपील की। अतिरिक्त उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने संबद्ध विभागों के अधिकारियों से जिला में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे कार्यों में और अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नीरज मित्तल, अनुभाग अधिकारी, जिला ग्रामीण एवं विकास प्राधिकरण विकास जसरोटिया, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जिला के विभिन्न खंड विकास अधिकारी उपस्थित थे।
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
शिमला - स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिला की एक सौ पचास पंचायतों में वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में बाईस करोड़ इक्यासी लाख रुपए विभिन्न शैल्फों पर खर्च किए जाएंगे। जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने विभिन्न विकास खंडों की पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिला की सभी पंचायतों में कूड़ा- कचरा के भंडारण, दूषित जल की निकासी की व्यवस्था, सीवरेज प्रणाली, जलाशयों के निर्माण व उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग शौचालय निर्माण कार्य को गुणवत्ता के आधार पर करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान गांवों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट, जीरो वेस्ट सेंटरों तथा कचरा एकत्रीकरण गड्ढे व कूड़े-कचरे के सही निष्पादन की व्यापक व्यवस्था करने पर बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के प्रति ग्राम पंचायतों व स्कूलों को प्रेरित करने का कार्य जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए शौचालयों का निर्माण, रखरखाव व कूड़े-कचरे का निष्पादन अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों में सरकारी भूमि की अनुपलब्धता के कारण शौचालय निर्माण व उसके रखरखाव में बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने इन क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों से सहयोग की अपील की। अतिरिक्त उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने संबद्ध विभागों के अधिकारियों से जिला में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे कार्यों में और अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नीरज मित्तल, अनुभाग अधिकारी, जिला ग्रामीण एवं विकास प्राधिकरण विकास जसरोटिया, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जिला के विभिन्न खंड विकास अधिकारी उपस्थित थे। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
|
रील लाइफ हीरो जो 2020 में बने रियल लाइफ हीरो!
इन 3 नाम वाले लोगों को कभी नहीं मिलता सच्चा प्यार!
इस वजह से अपने पार्टनर से बेवफाई करने पर मजबूर हो जाती हैं लडकियाँ!
श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा महत्व, जानिए. .
में हैं तो. .
जानें लहसुन वाली चाय के क्या हैं फायदे. .
बनना हो अगर फैशन क्वीन, तो पढें इसे. .
5 टिप्सः अब हमेशा रहो खूबसूरत . . .
क्या प्यार सही में अंधा होता है !
पूजा हेगडे का इतना हॉट अवतार देखते ही रह जाएंगे आप!
क्या आपका बॉयफ्रेंड आपके काबिल है या नहीं?
2017 का सबसे बडा सवाल. . . कंगना, अनुष्का और सोनाक्षी कौन बनेंगी पहले दुल्हन?
पूजा हेगडे बनीं दुल्हन मगर किसकी?
जैकलिन का ये अंदाज देखकर दंग रहे जाएंगे आप!
6 जगहें जहाँ आपको मिल सकता है आपका जीवनसाथी!
महिलाओं के 6 राज करेंगे हैरान!
जानें किस राशि की लडकी का दिल जितना है आसान!
फिल्म नीरजा के प्रमोशन्स में सोनम का हॉट अवतार!
आखिर क्यों अच्छे रिश्तो आ जाती है दरार?
रोमांस लगे बोरिंंग तो क्या किया जाए! !
प्यार की खुमारी में भी होती हैं, Mistake !
कितना मैच्योर है आपका जीवन साथी!
सेक्स कैसे रखता है फिट और हैल्दी!
शादीशुदा Life में कितना फायदेमंद है Sex!
जिंदगी के लिए कितना फायदेमंद है सेक्स!
क्यों बदल गए रोमांटिक लाइफ के मायने!
|
रील लाइफ हीरो जो दो हज़ार बीस में बने रियल लाइफ हीरो! इन तीन नाम वाले लोगों को कभी नहीं मिलता सच्चा प्यार! इस वजह से अपने पार्टनर से बेवफाई करने पर मजबूर हो जाती हैं लडकियाँ! श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा महत्व, जानिए. . में हैं तो. . जानें लहसुन वाली चाय के क्या हैं फायदे. . बनना हो अगर फैशन क्वीन, तो पढें इसे. . पाँच टिप्सः अब हमेशा रहो खूबसूरत . . . क्या प्यार सही में अंधा होता है ! पूजा हेगडे का इतना हॉट अवतार देखते ही रह जाएंगे आप! क्या आपका बॉयफ्रेंड आपके काबिल है या नहीं? दो हज़ार सत्रह का सबसे बडा सवाल. . . कंगना, अनुष्का और सोनाक्षी कौन बनेंगी पहले दुल्हन? पूजा हेगडे बनीं दुल्हन मगर किसकी? जैकलिन का ये अंदाज देखकर दंग रहे जाएंगे आप! छः जगहें जहाँ आपको मिल सकता है आपका जीवनसाथी! महिलाओं के छः राज करेंगे हैरान! जानें किस राशि की लडकी का दिल जितना है आसान! फिल्म नीरजा के प्रमोशन्स में सोनम का हॉट अवतार! आखिर क्यों अच्छे रिश्तो आ जाती है दरार? रोमांस लगे बोरिंंग तो क्या किया जाए! ! प्यार की खुमारी में भी होती हैं, Mistake ! कितना मैच्योर है आपका जीवन साथी! सेक्स कैसे रखता है फिट और हैल्दी! शादीशुदा Life में कितना फायदेमंद है Sex! जिंदगी के लिए कितना फायदेमंद है सेक्स! क्यों बदल गए रोमांटिक लाइफ के मायने!
|
टिक जिसे आम भाषा में पिस्सू या गिलोड़ कहते हैं को हटाने का हर किसी का अपना अलग तरीका है। आम धारणा के विपरीत, टिक के पास माचिस जलाने या पेट्रोलियम जेली (वैसेलिन) लगा के उसका दम घुटाने से या नेल पोलिश से ज़हर देने से टिक और भी गहरा छेद कर के अंदर चला जाता है। जबकि जो सही तरीका है वो सबसे आसान भी है : इसे अपनी चमड़ी से बाहर खींचिए। टिक को निकालने के लिए नीचे दिए गए उपायों को अपनाए और कुछ ही पल में टिक गुज़री हुई बात हो जाएगी।
1. टिक का मुँह ढूँढे.
अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे की इसका मुँह आपकी चमड़ी में घुसा हुआ होगा और बाकि शरीर चमड़ी के ऊपर ऐसे ही टिका होगा।
2. टिक को चिमटी से जितना हो सके त्वचा के पास से पकड़ें.
टिक को कस कर पकड़ने के लिए मोटी धार की बजाए पतली नोक वाली चिमटी का प्रयोग करें।
आपकी उँगलियों से कोशिश ना करें। इससे आप टिक को ठीक से पकड़ नहीं पाएंगे।
सुनिश्चित करें कि आप टिक का सिर पकड़ें। चिमटी को जितना हो सके टिक के मुँह के पास ले जाएं।
टिक के शरीर को ना पकड़ें। इससे वो उसकी लार या खून आपकी त्वचा में छोड़ सकता है और इससे किसी बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है।
3. मजबूती और तेजी से बाहर की तरफ खींचें.
इससे टिक आपकी त्वचा से उसका मुँह छुड़ा लेगा। बाहर खींचते समय चिमटी को हिलाए डुलाए नहीं, ना ही इसे मोड़े या झटका दें वरना टिक के मुँह का कुछ हिस्सा टूटकर आपकी चमड़ी में ही रह जायेगा। जैसे आप कभी बाल तोड़ते है वैसे ही पिस्सू को बाहर खींचने पर त्वचा का ऊपर उभरना स्वाभाविक है।
अगर मुँह का कुछ हिस्सा चमड़ी में लगा रह जाता है तो उसे चिमटी से निकालने की कोशिश करें। अगर वो चमड़ी में अंदर धस गया है तो त्वचा को प्राकृतिक रूप से भरने दें परन्तु बराबर ध्यान रखें की कोई संक्रमण ना हो।
4. साबुन और गर्म पानी से धोएं.
आप रबिंग एलकोहॉल (स्पिरिट) या हाइड्रोजन पेरोक्साइड या आयोडीन भी लगा सकते हैं। दंश और आपके हाथ दोनों को अच्छे से साफ़ करें।
5. अगर टिक को निकालने में मुश्किल हो रही है तो डॉक्टर को दिखाएं.
कुछ टिक इतने छोटे होते हैं की इन सब सामान्य तरीकों से उन्हें निकलना मुश्किल होता है। डॉक्टर आपके लिए टिक निकाल देंगे।
6. कुछ लम्बाई का फ्लॉस काटें.
कोई पतला बिना वैक्स वाला फ्लॉस या दूसरा पतला धागा चुनें। अगर आपके पास चिमटी नहीं है तो इससे भी काम चल जायेगा।
7. टिक के सिर के चारों ओर से फंदा डालें.
धागा त्वचा के जीतनी पास हो सके रखें।
8. सिर के चारो ओर फंदे को कसें.
धागे को ठीक से कसने के लिए दोनों हाथों का प्रयोग करें।
9. धागे के दोनों सिरों को धीरे लेकिन स्थिरता से ऊपर की ओर खिंचें.
इससे टिक का मुँह चमड़ी में से निकल जाएगा।
10. साबुन और गर्म पानी से धोएं.
दंश और आपके हाथों को अच्छे से साफ़ करें। टिक जनित बिमारियों और संक्रमण को रोकने के लिए आप रबिंग एलकोहॉल, हाइड्रोजन पेरोक्साइड या आयोडीन का प्रयोग भी कर सकते हैं।
11. कार्ड के किनारे पर कैंची से V आकार काटें.
ये टिक को पकड़ने जितना बड़ा होना चाहिए पर इतना बड़ा भी नहीं की टिक इसमें आकर फिसल जाए।
12. क्रेडिट कार्ड को टिक के सिर की तरफ सरकाएं.
V-कट को टिक के सिर की तरफ रखके कार्ड को टिक और आपकी त्वचा के बीच सरकाएं।
13. टिक के पीछे वाले हिस्से को उसके स्थान पर गट्ठा पकड़े.
14. क्रेडिट कार्ड को टिक के सिर के नीचे आपकी त्वचा पर सरकाएं.
कुछ कोशिशों के बाद टिक पूरा बहार आजाएगा।
15. टिक को पूरी तरह खत्म करें.
टिक को निकालने के बाद भी संभवतया वो ज़िंदा हो। इसे रब्बिंग एलकोहॉल में डूबा कर टॉयलेट में फ्लश कर दें ताकि ये दोबारा आपके या आपके परिवारजनों के ना चिपक जाएं।
16. टेस्टिंग के लिए टिक को सहेजें.
अगर आपके क्षेत्र के टिक लाइम बीमारी फैलाते है तो आप इस टिक को सहेज कर जाँच के लिए भेज सकते हैं। इसे प्लास्टिक बैग में बंद करके फ्रीज़र में रख दें। टिक का परीक्षण करने वाली लैब ढूंढे और टिक जमा कराने के निर्देशों का पालन करें। and follow instructions for properly submitting the tick.
17. लक्षणों के लिए घाव की जगह जांचें.
टिक निकालने के बाद के दिनों में दंश वाली जगह पर देखें कि कहीं लाइम रोग या टिक-जनित अन्य बीमारी के लक्षण तो नहीं हैं। आपको आपके डॉक्टर को बताना चाहिए कि आपने टिक को कब देखा, कब निकाला और उसके बाद क्या क्या लक्षण दिखे। अगर आपको निम्नलिखित लक्षण पैदा होते दिख रहे है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें :
बुखार या ठंड लगना। ये टिक-जनित बीमारियों का आम लक्षण है।
सिरदर्द या मांसपेशियों में दर्द।
स्पष्ठ बुल्स आई रेश (चक्कते)। ये लाइम रोग और सदर्न टिक-एसोसिएटेड रेश इलनेस (STARI) के लक्षण है। इसमें टिक के काटने की जगह पर लाल चक्कते पड़ जाते हैं जो बैल की आंख की तरह दिखते हैं।
किसी भी अन्य तरह के चक्कते। रॉकी माउंटेन स्पॉटेड बुख़ार (RMSF) जो की टिक द्वारा ही फैलता है में भी चक्कते पड़ते हैं पर वो बैल की आंख की तरह नहीं दिखते।
|
टिक जिसे आम भाषा में पिस्सू या गिलोड़ कहते हैं को हटाने का हर किसी का अपना अलग तरीका है। आम धारणा के विपरीत, टिक के पास माचिस जलाने या पेट्रोलियम जेली लगा के उसका दम घुटाने से या नेल पोलिश से ज़हर देने से टिक और भी गहरा छेद कर के अंदर चला जाता है। जबकि जो सही तरीका है वो सबसे आसान भी है : इसे अपनी चमड़ी से बाहर खींचिए। टिक को निकालने के लिए नीचे दिए गए उपायों को अपनाए और कुछ ही पल में टिक गुज़री हुई बात हो जाएगी। एक. टिक का मुँह ढूँढे. अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे की इसका मुँह आपकी चमड़ी में घुसा हुआ होगा और बाकि शरीर चमड़ी के ऊपर ऐसे ही टिका होगा। दो. टिक को चिमटी से जितना हो सके त्वचा के पास से पकड़ें. टिक को कस कर पकड़ने के लिए मोटी धार की बजाए पतली नोक वाली चिमटी का प्रयोग करें। आपकी उँगलियों से कोशिश ना करें। इससे आप टिक को ठीक से पकड़ नहीं पाएंगे। सुनिश्चित करें कि आप टिक का सिर पकड़ें। चिमटी को जितना हो सके टिक के मुँह के पास ले जाएं। टिक के शरीर को ना पकड़ें। इससे वो उसकी लार या खून आपकी त्वचा में छोड़ सकता है और इससे किसी बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है। तीन. मजबूती और तेजी से बाहर की तरफ खींचें. इससे टिक आपकी त्वचा से उसका मुँह छुड़ा लेगा। बाहर खींचते समय चिमटी को हिलाए डुलाए नहीं, ना ही इसे मोड़े या झटका दें वरना टिक के मुँह का कुछ हिस्सा टूटकर आपकी चमड़ी में ही रह जायेगा। जैसे आप कभी बाल तोड़ते है वैसे ही पिस्सू को बाहर खींचने पर त्वचा का ऊपर उभरना स्वाभाविक है। अगर मुँह का कुछ हिस्सा चमड़ी में लगा रह जाता है तो उसे चिमटी से निकालने की कोशिश करें। अगर वो चमड़ी में अंदर धस गया है तो त्वचा को प्राकृतिक रूप से भरने दें परन्तु बराबर ध्यान रखें की कोई संक्रमण ना हो। चार. साबुन और गर्म पानी से धोएं. आप रबिंग एलकोहॉल या हाइड्रोजन पेरोक्साइड या आयोडीन भी लगा सकते हैं। दंश और आपके हाथ दोनों को अच्छे से साफ़ करें। पाँच. अगर टिक को निकालने में मुश्किल हो रही है तो डॉक्टर को दिखाएं. कुछ टिक इतने छोटे होते हैं की इन सब सामान्य तरीकों से उन्हें निकलना मुश्किल होता है। डॉक्टर आपके लिए टिक निकाल देंगे। छः. कुछ लम्बाई का फ्लॉस काटें. कोई पतला बिना वैक्स वाला फ्लॉस या दूसरा पतला धागा चुनें। अगर आपके पास चिमटी नहीं है तो इससे भी काम चल जायेगा। सात. टिक के सिर के चारों ओर से फंदा डालें. धागा त्वचा के जीतनी पास हो सके रखें। आठ. सिर के चारो ओर फंदे को कसें. धागे को ठीक से कसने के लिए दोनों हाथों का प्रयोग करें। नौ. धागे के दोनों सिरों को धीरे लेकिन स्थिरता से ऊपर की ओर खिंचें. इससे टिक का मुँह चमड़ी में से निकल जाएगा। दस. साबुन और गर्म पानी से धोएं. दंश और आपके हाथों को अच्छे से साफ़ करें। टिक जनित बिमारियों और संक्रमण को रोकने के लिए आप रबिंग एलकोहॉल, हाइड्रोजन पेरोक्साइड या आयोडीन का प्रयोग भी कर सकते हैं। ग्यारह. कार्ड के किनारे पर कैंची से V आकार काटें. ये टिक को पकड़ने जितना बड़ा होना चाहिए पर इतना बड़ा भी नहीं की टिक इसमें आकर फिसल जाए। बारह. क्रेडिट कार्ड को टिक के सिर की तरफ सरकाएं. V-कट को टिक के सिर की तरफ रखके कार्ड को टिक और आपकी त्वचा के बीच सरकाएं। तेरह. टिक के पीछे वाले हिस्से को उसके स्थान पर गट्ठा पकड़े. चौदह. क्रेडिट कार्ड को टिक के सिर के नीचे आपकी त्वचा पर सरकाएं. कुछ कोशिशों के बाद टिक पूरा बहार आजाएगा। पंद्रह. टिक को पूरी तरह खत्म करें. टिक को निकालने के बाद भी संभवतया वो ज़िंदा हो। इसे रब्बिंग एलकोहॉल में डूबा कर टॉयलेट में फ्लश कर दें ताकि ये दोबारा आपके या आपके परिवारजनों के ना चिपक जाएं। सोलह. टेस्टिंग के लिए टिक को सहेजें. अगर आपके क्षेत्र के टिक लाइम बीमारी फैलाते है तो आप इस टिक को सहेज कर जाँच के लिए भेज सकते हैं। इसे प्लास्टिक बैग में बंद करके फ्रीज़र में रख दें। टिक का परीक्षण करने वाली लैब ढूंढे और टिक जमा कराने के निर्देशों का पालन करें। and follow instructions for properly submitting the tick. सत्रह. लक्षणों के लिए घाव की जगह जांचें. टिक निकालने के बाद के दिनों में दंश वाली जगह पर देखें कि कहीं लाइम रोग या टिक-जनित अन्य बीमारी के लक्षण तो नहीं हैं। आपको आपके डॉक्टर को बताना चाहिए कि आपने टिक को कब देखा, कब निकाला और उसके बाद क्या क्या लक्षण दिखे। अगर आपको निम्नलिखित लक्षण पैदा होते दिख रहे है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें : बुखार या ठंड लगना। ये टिक-जनित बीमारियों का आम लक्षण है। सिरदर्द या मांसपेशियों में दर्द। स्पष्ठ बुल्स आई रेश । ये लाइम रोग और सदर्न टिक-एसोसिएटेड रेश इलनेस के लक्षण है। इसमें टिक के काटने की जगह पर लाल चक्कते पड़ जाते हैं जो बैल की आंख की तरह दिखते हैं। किसी भी अन्य तरह के चक्कते। रॉकी माउंटेन स्पॉटेड बुख़ार जो की टिक द्वारा ही फैलता है में भी चक्कते पड़ते हैं पर वो बैल की आंख की तरह नहीं दिखते।
|
ढाकाः बांग्लादेश में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को चित्तगोंग शहर में देश के दूसरे बड़े हवाई अड्डे से 38 किलोग्राम वजन के सोने के बिस्कुट बरामद किए हैं। यह जानकारी सीमा शुल्क खुफिया विभाग के अधिकारियों ने दी। अधिकारी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया, "हमें शाह अमानत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक शौचालय से 228 सोने के बिस्कुट मिले। "
अधिकारी ने बताया कि बाद में दुबई से चिटगांव आए एक यात्री के पास 37 और सोने के बिस्कुट बरामद हुए।
अधिकारियों ने बताया, "इन सोने के बिस्कुटों की कीमत लगभग 16. 2 करोड़ टका (लगभग 20 लाख डॉलर) है। "
|
ढाकाः बांग्लादेश में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को चित्तगोंग शहर में देश के दूसरे बड़े हवाई अड्डे से अड़तीस किलोग्रामग्राम वजन के सोने के बिस्कुट बरामद किए हैं। यह जानकारी सीमा शुल्क खुफिया विभाग के अधिकारियों ने दी। अधिकारी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया, "हमें शाह अमानत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक शौचालय से दो सौ अट्ठाईस सोने के बिस्कुट मिले। " अधिकारी ने बताया कि बाद में दुबई से चिटगांव आए एक यात्री के पास सैंतीस और सोने के बिस्कुट बरामद हुए। अधिकारियों ने बताया, "इन सोने के बिस्कुटों की कीमत लगभग सोलह. दो करोड़ टका है। "
|
सलमान खान इन दिनों 'भारत' से ज्यादा अपने होम प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'नोकबुक' को प्रमोट कर रहे हैं । इस फिल्म से सलमान जहीर इकबाल और प्रनूतन को हिंदी फिल्मों में लॉन्च कर रहे हैं । हाल ही में सलमान एक प्रमोशनल ईवेंट में पहुंचे । यहां उन्होंने कहा कि जहीर और प्रनूतन बहुत टैलेंटेड हैं इसलिए वो उन्हें लॉन्च कर रहे हैं ।
इसी ईवेंट में सलमान से पूछा गया कि क्या वह किसी डेटिंग ऐप पर हैं तो उन्होंने कहा कि वह किसी भी ऐप पर नहीं हैं और न ही होंगे । सलमान को बताया गया कि प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में एक डेटिंग ऐप लॉन्च किया है । इस पर सलमान खान ने प्रियंका की खिंचाई कर दी ।
उन्होंने कहा कि अरे, अब उन्हें इस ऐप की क्या जरूरत है । मजाकिया अंदाज में सलमान कहते हैं कि उसकी शादी तो हो गई है । फिर वह डेटिंग ऐप क्यों लॉन्च कर रही है । सलमान की इस बात पर वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे । बता दें कि प्रियंका चोपड़ा सलमान के साथ फिल्म 'भारत' में काम करने वाली थीं ।
शूटिंग शुरू होने के दो दिन पहले ही प्रियंका ने फिल्म छोड़ने का फैसला ले लिया । प्रियंका ने यह कहकर फिल्म छोड़ी थी कि उन्हें शादी करनी है । सलमान ने उनकी बात समझी और फिर 'भारत' में कटरीना कैफ को कास्ट किया गया। हालांकि सलमान, प्रियंका के इस कदम से काफी नाराज थे । सलमान खान की फिल्म 'भारत' ईद के मौके पर रिलीज होगी ।
फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान खान ने मीडिया से बात करते हुए वेब सीरीज पर भी चर्चा की । खबर थी कि सलामन खान को वेब सीरीज ऑफर हुई है । इस पर सलमान खान ने बताया, 'वो जब भी वेब पर कदम रखेंगे तो पारिवारिक कंटेंट बनाएंगे। वेब सीरीज अच्छी हैं लेकिन यह थोड़ी साफ-सुथरी होनी चाहिए। मुझे वेब पर चलने वाली बकवास चीजें पसंद नहीं हैं। '
|
सलमान खान इन दिनों 'भारत' से ज्यादा अपने होम प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'नोकबुक' को प्रमोट कर रहे हैं । इस फिल्म से सलमान जहीर इकबाल और प्रनूतन को हिंदी फिल्मों में लॉन्च कर रहे हैं । हाल ही में सलमान एक प्रमोशनल ईवेंट में पहुंचे । यहां उन्होंने कहा कि जहीर और प्रनूतन बहुत टैलेंटेड हैं इसलिए वो उन्हें लॉन्च कर रहे हैं । इसी ईवेंट में सलमान से पूछा गया कि क्या वह किसी डेटिंग ऐप पर हैं तो उन्होंने कहा कि वह किसी भी ऐप पर नहीं हैं और न ही होंगे । सलमान को बताया गया कि प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में एक डेटिंग ऐप लॉन्च किया है । इस पर सलमान खान ने प्रियंका की खिंचाई कर दी । उन्होंने कहा कि अरे, अब उन्हें इस ऐप की क्या जरूरत है । मजाकिया अंदाज में सलमान कहते हैं कि उसकी शादी तो हो गई है । फिर वह डेटिंग ऐप क्यों लॉन्च कर रही है । सलमान की इस बात पर वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे । बता दें कि प्रियंका चोपड़ा सलमान के साथ फिल्म 'भारत' में काम करने वाली थीं । शूटिंग शुरू होने के दो दिन पहले ही प्रियंका ने फिल्म छोड़ने का फैसला ले लिया । प्रियंका ने यह कहकर फिल्म छोड़ी थी कि उन्हें शादी करनी है । सलमान ने उनकी बात समझी और फिर 'भारत' में कटरीना कैफ को कास्ट किया गया। हालांकि सलमान, प्रियंका के इस कदम से काफी नाराज थे । सलमान खान की फिल्म 'भारत' ईद के मौके पर रिलीज होगी । फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान खान ने मीडिया से बात करते हुए वेब सीरीज पर भी चर्चा की । खबर थी कि सलामन खान को वेब सीरीज ऑफर हुई है । इस पर सलमान खान ने बताया, 'वो जब भी वेब पर कदम रखेंगे तो पारिवारिक कंटेंट बनाएंगे। वेब सीरीज अच्छी हैं लेकिन यह थोड़ी साफ-सुथरी होनी चाहिए। मुझे वेब पर चलने वाली बकवास चीजें पसंद नहीं हैं। '
|
सियासी समीकरणों में पिछड़ जाने के बाद अब पाकिस्तान की इमरान खान सरकार की लगभग सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिक गई हैं। सोमवार को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दल बदल से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 63 (ए) की व्याख्या के लिए अर्जी दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए एक खास बेंच बनाने का का फैसला किया है।
लेकिन सोमवार को पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अटा बंदियाल ने जो कहा, उसे इमरान खान सरकार के लिए एक झटका समझा गया। जस्टिस बंदियाल ने संकेत दिया कि प्रेंसिडेशियल रेफरेंस के रूप में दायर सरकारी याचिका पर फैसला आने तक मतदान प्रक्रिया को नहीं रोका जाएगा। उन्होंने कहा- अदालत को अभी तक ऐसा नहीं लगता कि नेशनल असेंबली की कार्यवाही में उसे हस्तक्षेप करना चाहिए।
इस मामले से पाकिस्तान के राजनीतिक दलों की उम्मीद किस हद तक जुड़ी हुई है, इसका संकेत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिला। मामले की सुनवाई के समय पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता शाहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भी कोर्ट रूम में मौजूद थे।
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
|
सियासी समीकरणों में पिछड़ जाने के बाद अब पाकिस्तान की इमरान खान सरकार की लगभग सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिक गई हैं। सोमवार को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दल बदल से जुड़े संविधान के अनुच्छेद तिरेसठ की व्याख्या के लिए अर्जी दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए एक खास बेंच बनाने का का फैसला किया है। लेकिन सोमवार को पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अटा बंदियाल ने जो कहा, उसे इमरान खान सरकार के लिए एक झटका समझा गया। जस्टिस बंदियाल ने संकेत दिया कि प्रेंसिडेशियल रेफरेंस के रूप में दायर सरकारी याचिका पर फैसला आने तक मतदान प्रक्रिया को नहीं रोका जाएगा। उन्होंने कहा- अदालत को अभी तक ऐसा नहीं लगता कि नेशनल असेंबली की कार्यवाही में उसे हस्तक्षेप करना चाहिए। इस मामले से पाकिस्तान के राजनीतिक दलों की उम्मीद किस हद तक जुड़ी हुई है, इसका संकेत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिला। मामले की सुनवाई के समय पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता शाहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भी कोर्ट रूम में मौजूद थे। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
|
मध्य प्रदेश के सागर जिले में आपसी विवाद के चलते मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाए गए धन प्रसाद अहिरवार की उपचार के दौरान गुरुवार को दिल्ली में मौत हो गई। धन प्रसाद की मौत पर मुख्यमंत्री ने शोक जताया है, वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने शासन-प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि मोती नगर थाना क्षेत्र में बालाजी मंदिर के पास स्थित अयोध्या बस्ती प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने आवास में रहने वाले धन प्रसाद अहिरवार (24) पर आपसी विवाद के चलते कुछ लोगों ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।
धन प्रसाद को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे उपचार के लिए भोपाल और फिर दिल्ली भेजा गया। उसकी गुरुवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।
धन प्रसाद को जिंदा जलाने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी एक समुदाय के बताए जाते हैं।
|
मध्य प्रदेश के सागर जिले में आपसी विवाद के चलते मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाए गए धन प्रसाद अहिरवार की उपचार के दौरान गुरुवार को दिल्ली में मौत हो गई। धन प्रसाद की मौत पर मुख्यमंत्री ने शोक जताया है, वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने शासन-प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि मोती नगर थाना क्षेत्र में बालाजी मंदिर के पास स्थित अयोध्या बस्ती प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने आवास में रहने वाले धन प्रसाद अहिरवार पर आपसी विवाद के चलते कुछ लोगों ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। धन प्रसाद को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे उपचार के लिए भोपाल और फिर दिल्ली भेजा गया। उसकी गुरुवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। धन प्रसाद को जिंदा जलाने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी एक समुदाय के बताए जाते हैं।
|
गेम फोन ब्रांड रेड डेविल्स ने 4 जुलाई को घोषणा कीनई रेड डेविल्स 7 एस श्रृंखला लॉन्च 11 जुलाई को आयोजित की जाएगीनए फोन का आधिकारिक रेंडरिंग भी जारी किया गया है, जिसमें रेड डेविल्स 7S प्रो किंग्किंग सिल्वरविंग संस्करण का डिज़ाइन दिखाया गया है।
रेंडरिंग से पता चलता है कि रेड डेविल्स 7 एस प्रो का समग्र आईडी डिजाइन मूल रूप से पिछले 7 प्रो के समान है। इसमें एक अंडर-स्क्रीन कैमरा भी है। फ्रंट पैनल में सिल्वर पारदर्शी बैक कवर के साथ फ्यूचर साइंस फिक्शन डिज़ाइन भी है। आरजीबी प्रकाश व्यवस्था का समर्थन करने वाला एक शीतलन प्रशंसक भी उपलब्ध है।
इस मॉडल का कॉन्फ़िगरेशन मूल रूप से रेड डेविल्स 7 प्रो के समान है, सिवाय इसके कि चिप्स अलग हैं। यह 1080 × 2400 के रिज़ॉल्यूशन और 120 हर्ट्ज की अधिकतम स्क्रीन रिफ्रेश दर के साथ 6.8 इंच की यूडीसी फुल स्क्रीन का उपयोग करता है। यह 60/90/120 हर्ट्ज समायोजन और 960 हर्ट्ज पर मल्टी-चार्ज सैंपलिंग दरों का भी समर्थन करता है।
रेड डेविल्स 7 प्रो LPDDR5 + UFS3.1 के "पूर्ण रक्त" संस्करण से लैस है। इसमें एक बड़ी 5000mAh बैटरी है और 165W GaN चार्जर के साथ मानक है। कंपनी का कहना है कि चार्जर 15 मिनट में 100% भर सकता है।
रेड डेविल्स 7Pro 64MP मुख्य कैमरा + 2MP मैक्रो + 8MP वाइड-एंगल थ्री-कैमरा रियर और 16MP अंडर-स्क्रीन फ्रंट कैमरा से लैस है।
इसके अलावा, रेड डेविल्स 7 प्रो एक स्वतंत्र गेम चिप "रेड कोर 1" से लैस है, जो ध्वनि, प्रकाश, कंपन और स्पर्श के चार-इन-वन नियंत्रण का एहसास कर सकता है। यह एक उत्कृष्ट हैंडलिंग अनुभव के साथ गेमर्स प्रदान करने के लिए दोहरी वक्ताओं और दोहरी एक्स-अक्ष मोटर्स से लैस है।
|
गेम फोन ब्रांड रेड डेविल्स ने चार जुलाई को घोषणा कीनई रेड डेविल्स सात एस श्रृंखला लॉन्च ग्यारह जुलाई को आयोजित की जाएगीनए फोन का आधिकारिक रेंडरिंग भी जारी किया गया है, जिसमें रेड डेविल्स सातS प्रो किंग्किंग सिल्वरविंग संस्करण का डिज़ाइन दिखाया गया है। रेंडरिंग से पता चलता है कि रेड डेविल्स सात एस प्रो का समग्र आईडी डिजाइन मूल रूप से पिछले सात प्रो के समान है। इसमें एक अंडर-स्क्रीन कैमरा भी है। फ्रंट पैनल में सिल्वर पारदर्शी बैक कवर के साथ फ्यूचर साइंस फिक्शन डिज़ाइन भी है। आरजीबी प्रकाश व्यवस्था का समर्थन करने वाला एक शीतलन प्रशंसक भी उपलब्ध है। इस मॉडल का कॉन्फ़िगरेशन मूल रूप से रेड डेविल्स सात प्रो के समान है, सिवाय इसके कि चिप्स अलग हैं। यह एक हज़ार अस्सी × दो हज़ार चार सौ के रिज़ॉल्यूशन और एक सौ बीस हर्ट्ज की अधिकतम स्क्रीन रिफ्रेश दर के साथ छः.आठ इंच की यूडीसी फुल स्क्रीन का उपयोग करता है। यह साठ नब्बे एक सौ बीस हर्ट्ज समायोजन और नौ सौ साठ हर्ट्ज पर मल्टी-चार्ज सैंपलिंग दरों का भी समर्थन करता है। रेड डेविल्स सात प्रो LPDDRपाँच + UFSतीन.एक के "पूर्ण रक्त" संस्करण से लैस है। इसमें एक बड़ी पाँच हज़ारmAh बैटरी है और एक सौ पैंसठ वाट GaN चार्जर के साथ मानक है। कंपनी का कहना है कि चार्जर पंद्रह मिनट में एक सौ% भर सकता है। रेड डेविल्स सातPro चौंसठMP मुख्य कैमरा + दोMP मैक्रो + आठMP वाइड-एंगल थ्री-कैमरा रियर और सोलहMP अंडर-स्क्रीन फ्रंट कैमरा से लैस है। इसके अलावा, रेड डेविल्स सात प्रो एक स्वतंत्र गेम चिप "रेड कोर एक" से लैस है, जो ध्वनि, प्रकाश, कंपन और स्पर्श के चार-इन-वन नियंत्रण का एहसास कर सकता है। यह एक उत्कृष्ट हैंडलिंग अनुभव के साथ गेमर्स प्रदान करने के लिए दोहरी वक्ताओं और दोहरी एक्स-अक्ष मोटर्स से लैस है।
|
Chandra Grahan Timing in UP: आज साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो ग्रहण एक खगोलीय घटना है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में इसे अशुभ माना जाता है। आज पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
लखनऊः आज साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण (UP Chandra Grahan Time) लगने जा रहा है। यह रात 8 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 2 मिनट पर खत्म होगा। इस तरह यह कुल 4 घंटे 14 मिनट तक रहेगा। लेकिन यह चंद्र ग्रहण (UP Chandra Grahan) भारत में नहीं दिखाई देगा। आज होने वाला चंद्रग्रहण एशिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्वी यूरोप के कुछ भागों में दिखाई देगा।
आज से पंद्रह दिन पहले 20 अप्रैल को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगा था। उसके बाद से यह साल का दूसरा ग्रहण है। वैसे तो इसकी हिंदू धर्म में धार्मिक मान्यता है। इसके साथ कई कर्मकांड जुडे़ हैं लेकिन शुद्ध वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह एक ऐसी आकाशीय घटना है जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के पारस्परिक स्थिति पर निर्भर है। Chandra Grahan In Uttarakhand: साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू, चंद्र ग्रहण पर बन रहा महासंयोग चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। ऐसी स्थिति में जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है तो चंद्रमा का वह भाग नहीं दिखाई देता। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की अलग-अलग दूरी और अंतरिक्ष में उनकी स्थिति के हिसाब से चंद्र ग्रहण भी पूर्ण और आंशिक होते हैं। जब पृथ्वी की छाया पूरे चंद्रमा को ढंक लेती है तो वह पूर्ण चंद्रग्रहण कहलाता है। लेकिन आज पूर्ण नहीं आंशिक चंद्रग्रहण है।
|
Chandra Grahan Timing in UP: आज साल दो हज़ार तेईस का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो ग्रहण एक खगोलीय घटना है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में इसे अशुभ माना जाता है। आज पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। लखनऊः आज साल दो हज़ार तेईस का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह रात आठ बजकर चौंतालीस मिनट से शुरू होकर रात एक बजकर दो मिनट पर खत्म होगा। इस तरह यह कुल चार घंटाटे चौदह मिनट तक रहेगा। लेकिन यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। आज होने वाला चंद्रग्रहण एशिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्वी यूरोप के कुछ भागों में दिखाई देगा। आज से पंद्रह दिन पहले बीस अप्रैल को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगा था। उसके बाद से यह साल का दूसरा ग्रहण है। वैसे तो इसकी हिंदू धर्म में धार्मिक मान्यता है। इसके साथ कई कर्मकांड जुडे़ हैं लेकिन शुद्ध वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह एक ऐसी आकाशीय घटना है जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के पारस्परिक स्थिति पर निर्भर है। Chandra Grahan In Uttarakhand: साल का पहला चंद्र ग्रहण शुरू, चंद्र ग्रहण पर बन रहा महासंयोग चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। ऐसी स्थिति में जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है तो चंद्रमा का वह भाग नहीं दिखाई देता। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की अलग-अलग दूरी और अंतरिक्ष में उनकी स्थिति के हिसाब से चंद्र ग्रहण भी पूर्ण और आंशिक होते हैं। जब पृथ्वी की छाया पूरे चंद्रमा को ढंक लेती है तो वह पूर्ण चंद्रग्रहण कहलाता है। लेकिन आज पूर्ण नहीं आंशिक चंद्रग्रहण है।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
गगरेट - गगरेट पुलिस द्वारा जिस्मफरोशी के धंधे का डंगोह गांव में किया गया पर्दाफाश इस तिलिस्मी दुनिया का एक अंश मात्र है। दरअसल उपमंडल अंब में स्थित कई होटल भी जिस्म बेचने के इस कारोबार के प्रमुख अड्डों के रूप में उभरे हैं। एक सुनियोजित तरीके से इन तथाकथित जिस्म का व्यापार करने के अड्डों में पंजाब से युवतियों को बुलाकर उन्हें जिस्मफरोशी के धंधे में धकेला जा रहा है। हालांकि आम जनता जानती है कि किस होटल में यह धंधा फलफूल रहा है लेकिन पुलिस अभी इससे अनभिज्ञ है। यही वजह है कि इन नेटवर्क को संचालित करने वाले संचालकों के चेहरे से अभी शराफत का मुखौटा नहीं उतर पाया है। गगरेट पुलिस द्वारा डंगोह गांव में पकड़े गए जिस्मफरोशी के धंधे से प्रबुद्ध जनता भी हैरान हो गई कि किस तरह चांदी कूटने के चक्कर में देवभूमि को कलंकित किया जा रहा है। जिस्मफरोशी की इस काल कोठरी की काली दीवारों को फांद कर अगर देखा जाए तो यह धंधा यहां चरम पर है और शनिवार व रविवार को कुछ चुनिंदा होटलों में पैसे के दम पर जमकर जिस्म का व्यापार हो रहा है। बड़े ही सुनियोजित तरीके से यहां पंजाब से युवतियों को बुलाया जाता है और ऊंचे दाम पर यहां जिस्म की बोली लगाई जा रही है। हालांकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार अगर अठारह साल से अधिक आयु वर्ग के युवक व युवतियां अपनी मर्जी से एक साथ ठहरे हैं तो उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता, इसी का लाभ उठाकर इस धंधे को खूब चमकाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो होटल संचालक यहां जिस्म की नुमाइश लगाकर खुद रेट तय करते हैं और इस तय रेट में ही कमरे का किराया भी शामिल होता है। जिस्मफरोशी के धंधे में धकेली गई युवतियों को तो नाममात्र ही पैसा दिया जाता है। जबकि चोखी कमाई इस धंधे के मास्टरमाइंड ही कर रहे हैं। अहम बात यह है कि इसके लिए नियम भी दांव पर लगा दिए जाते हैं। न तो यहां आने वाले लोगों के पहचान-पत्र लिए जाते हैं और न ही उनकी पुख्ता एंट्री की जाती है। यहां तक कि जिस्म के खरीददारों को फोन कर सूचित किया जाता है कि युवितयां अवेलेवल हैं। अगर पुलिस इस धंधे को अंजाम दे रहे होटलों पर पैनी नजर रखे तो जिस्मफरोशी के एक और बड़े धंधे का पर्दाफाश हो सकता है। उधर, डीएसपी मनोज जम्वाल का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी कोई पुख्ता जानकारी है तो वह पुलिस के साथ सांझा करे। सूचना देने वाली की पहचान गुप्त रखी जाएगी और इस धंधे को अंजाम देने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे।
|
गगरेट - गगरेट पुलिस द्वारा जिस्मफरोशी के धंधे का डंगोह गांव में किया गया पर्दाफाश इस तिलिस्मी दुनिया का एक अंश मात्र है। दरअसल उपमंडल अंब में स्थित कई होटल भी जिस्म बेचने के इस कारोबार के प्रमुख अड्डों के रूप में उभरे हैं। एक सुनियोजित तरीके से इन तथाकथित जिस्म का व्यापार करने के अड्डों में पंजाब से युवतियों को बुलाकर उन्हें जिस्मफरोशी के धंधे में धकेला जा रहा है। हालांकि आम जनता जानती है कि किस होटल में यह धंधा फलफूल रहा है लेकिन पुलिस अभी इससे अनभिज्ञ है। यही वजह है कि इन नेटवर्क को संचालित करने वाले संचालकों के चेहरे से अभी शराफत का मुखौटा नहीं उतर पाया है। गगरेट पुलिस द्वारा डंगोह गांव में पकड़े गए जिस्मफरोशी के धंधे से प्रबुद्ध जनता भी हैरान हो गई कि किस तरह चांदी कूटने के चक्कर में देवभूमि को कलंकित किया जा रहा है। जिस्मफरोशी की इस काल कोठरी की काली दीवारों को फांद कर अगर देखा जाए तो यह धंधा यहां चरम पर है और शनिवार व रविवार को कुछ चुनिंदा होटलों में पैसे के दम पर जमकर जिस्म का व्यापार हो रहा है। बड़े ही सुनियोजित तरीके से यहां पंजाब से युवतियों को बुलाया जाता है और ऊंचे दाम पर यहां जिस्म की बोली लगाई जा रही है। हालांकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार अगर अठारह साल से अधिक आयु वर्ग के युवक व युवतियां अपनी मर्जी से एक साथ ठहरे हैं तो उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता, इसी का लाभ उठाकर इस धंधे को खूब चमकाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो होटल संचालक यहां जिस्म की नुमाइश लगाकर खुद रेट तय करते हैं और इस तय रेट में ही कमरे का किराया भी शामिल होता है। जिस्मफरोशी के धंधे में धकेली गई युवतियों को तो नाममात्र ही पैसा दिया जाता है। जबकि चोखी कमाई इस धंधे के मास्टरमाइंड ही कर रहे हैं। अहम बात यह है कि इसके लिए नियम भी दांव पर लगा दिए जाते हैं। न तो यहां आने वाले लोगों के पहचान-पत्र लिए जाते हैं और न ही उनकी पुख्ता एंट्री की जाती है। यहां तक कि जिस्म के खरीददारों को फोन कर सूचित किया जाता है कि युवितयां अवेलेवल हैं। अगर पुलिस इस धंधे को अंजाम दे रहे होटलों पर पैनी नजर रखे तो जिस्मफरोशी के एक और बड़े धंधे का पर्दाफाश हो सकता है। उधर, डीएसपी मनोज जम्वाल का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी कोई पुख्ता जानकारी है तो वह पुलिस के साथ सांझा करे। सूचना देने वाली की पहचान गुप्त रखी जाएगी और इस धंधे को अंजाम देने वाले किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे।
|
इस वर्ष के बजट में अधिक वृद्धि की उम्मीद अवश्य थी पर पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में देखें तो 7050 करोड़ रुपए से कम होकर इस वर्ष का बजट अनुमान मात्र 7000 करोड़ रुपए रह गया है।
गर्मी की दस्तक होने के साथ ही देश के अनेक गांवों में गंभीर पेयजल संकट के समाचार मिलने आरंभ हो गए है। इस संदर्भ में एक बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण पेयजल को एक उच्च प्राथमिकता मानने के बारे में व्यापक सहमति है, तो फिर ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध करवाने में केंद्रीय सरकार कंजूसी क्यों दिखा रही है।
गांवों की प्यास बुझाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख कार्यक्रम का नाम है राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम। इस कार्यक्रम के लिए केन्द्रीय सरकार के बजट में होने वाले आवंटन को हम यदि देखें तो स्पष्ट होता है कि इसमें महत्त्वपूर्ण कमी आई है। यह तालिका में दिखाया गया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के लिए केन्द्रीय बजट में वास्तविक खर्च या आवंटनः
इस तालिका से स्पष्ट है कि वर्ष 2012-13 में इस कार्यक्रम के लिए 10,490 करोड़ रुपए खर्च हुआ था जबकि वर्ष 2018-19 के बजट में मात्र 7,000 करोड़ रुपए का आवंटन है।
मुख्य गिरावट वर्ष 2015-16 में आई। इसकी एक वजह यह बताई जाती है कि 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार अधिक धनराशि राज्य सरकारों को दी गई। पर इतनी ऊंची प्राथमिकता के कार्यक्रम में इतनी बड़ी कमी नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि नई स्थिति को संभालने में वक्त लगता है। राज्य सरकारों का आवंटन इतना भी नहीं बढ़ा कि वे इतने बड़े झटके को संभाल सकें।
उसके बाद भी जो अगले दो वर्षों में वृद्धि की गई वह मामूली सी ही थी व उससे पहले हुई क्षति की भरपाई नहीं हो सकी।
इस वर्ष के बजट में अधिक वृद्धि की उम्मीद अवश्य थी पर पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में देखें तो 7050 करोड़ रुपए से कम होकर इस वर्ष का बजट अनुमान मात्र 7000 करोड़ रुपए रह गया है। यदि मंहगाई के असर को भी देखा जाए तो यह कमी और भी अधिक नजर आएगी।
वर्ष 2012-13 की तुलना में गिरावट को देखें तो यह बड़ी गिरावट है, पर यदि इसे महंगाई का असर हटाकर देखा जाए तो गिरावट और भी बड़ी है।
इस पृष्ठभूमि में हमें यह समझना होगा कि देश के बहुत से गांवों से गंभीर जल संकट के समाचार पिछले कुछ वर्षों में क्यों बढ़ते रहे हैं। निश्चय ही इसके व्यापक पर्यावरणीय कारण भी हैं पर साथ में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न होना भी एक बड़ी समस्या रहा है।
अतः अब यह समय आ गया है कि शीघ्र ही सरकार को इस क्षेत्र के संदर्भ में कदम उठाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम स्वयं जरूरी संसाधनों के अभाव में प्यासा न रह जाए।
|
इस वर्ष के बजट में अधिक वृद्धि की उम्मीद अवश्य थी पर पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में देखें तो सात हज़ार पचास करोड़ रुपए से कम होकर इस वर्ष का बजट अनुमान मात्र सात हज़ार करोड़ रुपए रह गया है। गर्मी की दस्तक होने के साथ ही देश के अनेक गांवों में गंभीर पेयजल संकट के समाचार मिलने आरंभ हो गए है। इस संदर्भ में एक बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीण पेयजल को एक उच्च प्राथमिकता मानने के बारे में व्यापक सहमति है, तो फिर ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध करवाने में केंद्रीय सरकार कंजूसी क्यों दिखा रही है। गांवों की प्यास बुझाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख कार्यक्रम का नाम है राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम। इस कार्यक्रम के लिए केन्द्रीय सरकार के बजट में होने वाले आवंटन को हम यदि देखें तो स्पष्ट होता है कि इसमें महत्त्वपूर्ण कमी आई है। यह तालिका में दिखाया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के लिए केन्द्रीय बजट में वास्तविक खर्च या आवंटनः इस तालिका से स्पष्ट है कि वर्ष दो हज़ार बारह-तेरह में इस कार्यक्रम के लिए दस,चार सौ नब्बे करोड़ रुपए खर्च हुआ था जबकि वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के बजट में मात्र सात,शून्य करोड़ रुपए का आवंटन है। मुख्य गिरावट वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में आई। इसकी एक वजह यह बताई जाती है कि चौदह वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार अधिक धनराशि राज्य सरकारों को दी गई। पर इतनी ऊंची प्राथमिकता के कार्यक्रम में इतनी बड़ी कमी नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि नई स्थिति को संभालने में वक्त लगता है। राज्य सरकारों का आवंटन इतना भी नहीं बढ़ा कि वे इतने बड़े झटके को संभाल सकें। उसके बाद भी जो अगले दो वर्षों में वृद्धि की गई वह मामूली सी ही थी व उससे पहले हुई क्षति की भरपाई नहीं हो सकी। इस वर्ष के बजट में अधिक वृद्धि की उम्मीद अवश्य थी पर पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में देखें तो सात हज़ार पचास करोड़ रुपए से कम होकर इस वर्ष का बजट अनुमान मात्र सात हज़ार करोड़ रुपए रह गया है। यदि मंहगाई के असर को भी देखा जाए तो यह कमी और भी अधिक नजर आएगी। वर्ष दो हज़ार बारह-तेरह की तुलना में गिरावट को देखें तो यह बड़ी गिरावट है, पर यदि इसे महंगाई का असर हटाकर देखा जाए तो गिरावट और भी बड़ी है। इस पृष्ठभूमि में हमें यह समझना होगा कि देश के बहुत से गांवों से गंभीर जल संकट के समाचार पिछले कुछ वर्षों में क्यों बढ़ते रहे हैं। निश्चय ही इसके व्यापक पर्यावरणीय कारण भी हैं पर साथ में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न होना भी एक बड़ी समस्या रहा है। अतः अब यह समय आ गया है कि शीघ्र ही सरकार को इस क्षेत्र के संदर्भ में कदम उठाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम स्वयं जरूरी संसाधनों के अभाव में प्यासा न रह जाए।
|
WPL 2023: वुमेन प्रीमियर लीग के 11वें मुकाबले में आरसीबी को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आखिरी ओवर में 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी की टीम ने 150 रन बोर्ड पर लगाए थे। जवाब में दिल्ली की टीम ने आखिरी ओवर की 2 गेंद रहते हुए टारगेट चेज कर दिया। इसी के साथ आरसीबी की नॉकआउट में पहुंचने की आस भी एकदम खत्म हो चुकी है।
शिखा पांडे की धारदार गेंदबाजी के बाद बल्लेबाजों के उम्दा प्रदर्शन से दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को आरसीबी हरा दिया। आरसीबी की यह पांच मैचों में पांचवीं हार है। इस जीत से दिल्ली की टीम के मुंबई इंडियंस के समान 8 अंक हो गए हैं लेकिन मुंबई की टीम बेहतर रन रेट के कारण शीर्ष पर है। बैंगलोर के 151 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की टीम ने मारिजान केप (32 गेंद में नाबाद 32, तीन चौके, एक छक्का) और जेस जोनासेन (15 गेंद में नाबाद 29, चार चौके, एक छक्का) के बीच पांचवें विकेट की 45 रन की अटूट साझेदारी से 19. 4 ओवर में चार विकेट पर 154 रन बनाकर जीत दर्ज की। दिल्ली के लिए एलिस कैप्से (38) और जेमिमा रोड्रिग्स (30) ने भी उपयोगी पारियां खेली।
आरसीबी ने एलिस पैरी (52 गेंद में नाबाद 67, पांच छक्के, चार छक्के) के अर्धशतक और रिचा घोष (16 गेंद में 37 रन, तीन छक्के, तीन चौके) के साथ चौथे विकेट की उनकी 74 रन की तेजतर्रार साझेदारी से चार विकेट पर 150 रन बनाए थे। इन दोनों की पारियों से आरसीबी की टीम अंतिम छह ओवर में 82 रन जोड़ने में सफल रही। लक्ष्य का पीछा करने उतरे दिल्ली ने दूसरी ही गेंद पर शेफाली वर्मा (00) का विकेट गंवा दिया जिन्हें मेगन शुट (24 रन पर एक विकेट) ने बोल्ड किया। एलिस कैप्से (38) ने शुट पर चौके से खाता खोला और फिर रेणुका सिंह के दो ओवर में चार चौके मारे।
कैप्से ने प्रीति बोस (12 रन पर एक विकेट) का स्वागत तीन चौकों के साथ किया लेकिन इसी ओवर में बाउंड्री पर पैरी को कैच बैठी। उन्होंने 24 गेंद का सामना करते हुए 8 चौके मारे। दिल्ली की टीम ने पावरप्ले में दो विकेट पर 52 रन बनाए। कप्तान मेग लेनिंग (15) ने इसके बाद जेमिमा के साथ पारी को आगे बढ़ाया। पारी का आगाज करने उतरी लेनिंग ने 8वें ओवर में 14वीं गेंद पर श्रेयंका पर अपनी पहली बाउंड्री लगाई। वह हालांकि लेग स्पिनर शोभना आशा (27 रन पर दो विकेट) की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में लांग ऑफ पर हीथर नाइट को आसान कैच दे बैठी।
|
WPL दो हज़ार तेईस: वुमेन प्रीमियर लीग के ग्यारहवें मुकाबले में आरसीबी को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आखिरी ओवर में छः विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी की टीम ने एक सौ पचास रन बोर्ड पर लगाए थे। जवाब में दिल्ली की टीम ने आखिरी ओवर की दो गेंद रहते हुए टारगेट चेज कर दिया। इसी के साथ आरसीबी की नॉकआउट में पहुंचने की आस भी एकदम खत्म हो चुकी है। शिखा पांडे की धारदार गेंदबाजी के बाद बल्लेबाजों के उम्दा प्रदर्शन से दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को आरसीबी हरा दिया। आरसीबी की यह पांच मैचों में पांचवीं हार है। इस जीत से दिल्ली की टीम के मुंबई इंडियंस के समान आठ अंक हो गए हैं लेकिन मुंबई की टीम बेहतर रन रेट के कारण शीर्ष पर है। बैंगलोर के एक सौ इक्यावन रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की टीम ने मारिजान केप और जेस जोनासेन के बीच पांचवें विकेट की पैंतालीस रन की अटूट साझेदारी से उन्नीस. चार ओवर में चार विकेट पर एक सौ चौवन रन बनाकर जीत दर्ज की। दिल्ली के लिए एलिस कैप्से और जेमिमा रोड्रिग्स ने भी उपयोगी पारियां खेली। आरसीबी ने एलिस पैरी के अर्धशतक और रिचा घोष के साथ चौथे विकेट की उनकी चौहत्तर रन की तेजतर्रार साझेदारी से चार विकेट पर एक सौ पचास रन बनाए थे। इन दोनों की पारियों से आरसीबी की टीम अंतिम छह ओवर में बयासी रन जोड़ने में सफल रही। लक्ष्य का पीछा करने उतरे दिल्ली ने दूसरी ही गेंद पर शेफाली वर्मा का विकेट गंवा दिया जिन्हें मेगन शुट ने बोल्ड किया। एलिस कैप्से ने शुट पर चौके से खाता खोला और फिर रेणुका सिंह के दो ओवर में चार चौके मारे। कैप्से ने प्रीति बोस का स्वागत तीन चौकों के साथ किया लेकिन इसी ओवर में बाउंड्री पर पैरी को कैच बैठी। उन्होंने चौबीस गेंद का सामना करते हुए आठ चौके मारे। दिल्ली की टीम ने पावरप्ले में दो विकेट पर बावन रन बनाए। कप्तान मेग लेनिंग ने इसके बाद जेमिमा के साथ पारी को आगे बढ़ाया। पारी का आगाज करने उतरी लेनिंग ने आठवें ओवर में चौदहवीं गेंद पर श्रेयंका पर अपनी पहली बाउंड्री लगाई। वह हालांकि लेग स्पिनर शोभना आशा की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में लांग ऑफ पर हीथर नाइट को आसान कैच दे बैठी।
|
शील के माहम हो ही नहीं सकता । जिन मनुष्यो मे शील और दया है, उनमे साहम पहले ही विद्यमान रहता है । यदि गार्ग्य शीलवान न होता तो भयभीत होकर साप पर हमला कर बैठता और संभवत उनकी हत्या भी कर देता । लेकिन भयभंत नही हुआ कारण कि उसमे माहस तो था ही, इसीलिए शोल भी था । शीलवान होने के कारण ही अपनी शक्ति को उसने सहन करने में व्यवस्थित किया ।
जागा, और पास ही एक झाडी में अपने बिल की ओर चला गया । गार्ग्य उठा तो महर्षि बोधायन ने उसे गले से लगाते हुए कहा - गार्ग्य एक दिन तुम्हारे शील की चर्चा विश्व के कोने-कोने मे सुगध की तरह फैल जायेगी । एक विषधर जीव के साथ भी तुम्हारा यह मानवीय व्यवहार प्रकट करता है कि तुम मानव के प्रति निश्चय ही और दयावान रहोगे ।'
pada baya
शिष्यो ने बात सुनी तो श्राश्चर्य से उनकी ओर देखने लगे । एक शिष्य मैत्रायरिग ने तो पूछ ही लिया - "यह तो साहस का कार्य था भगवन् ! आप गार्ग्य के साहस की प्रशसा क्यो नही करते ? इसके शील व दया का प्रश्न ही नही उठता ।
महर्षि ने मैत्रायरिण को समझाते हुए कहा - "वत्स,
शील के साहस हो ही नहीं सकता । जिन मनुष्यो मे शील और दया है, उनमे साहस पहले ही विद्यमान रहता है । यदि गार्ग्य शीलवान न होता तो भयभीत होकर सांप पर हमला कर बैठता और संभवत उसकी हत्या भी कर देता । लेकिन भयभीत नही हुआ कारण कि उसमे साहस तो था ही, इसीलिए शोल भी था । शीलवान होने के कारण ही अपनी शक्ति को उसने सहन करने में व्यवस्थित किया । - ११६ देवाली, उदयपुर -३१३००१
व्यसन मुक्तिः
सुबह का भूला ● श्री कृष्णमोहन जोशी
किसी समय अवन्तिकापुरी मे एक राजा शासन करता था । नाम था, 'शीलनिधि । किन्तु नाम बडो और दर्शन खोटे वाली बात है । उसमे शील का नितान्त अभाव था । सभी प्रकार के व्यसन उसमे घर किये हुए थे । शिकार का बडा शौक था महीने मे लगभग १५ दिन वह शिकार के लिए इधर-उधर जगलो मे भटकता रहता । र तो और, साथ में उसका लवाजमा भी रहता जिसमे कई नर्तकिया रहती । शाम को थका हारा राजा शराब पीता तथा नर्तकियों के नृत्य का प्रानन्द लेता था । शेष १५ दिन वह शिकार मे मारे गये पशुप्रो का । मास खाता था तथा राजमहल मे वेश्याओ के रग मे डूबा रहता । सुरापन के दौर चलते । इस प्रकार वह व्यसनो से घिरा हुआ था ।
किन्तु जब विपत्ति आती है तो कह कर नही प्राती । हुआ यो कि एक दिन नगर के मध्य से साधुओ की एक टोली गुजर रही थी जिसमे कुछ साध्वियां भी थी । राजा महल की खिड़की से देख रहा था । अचानक एक सुन्दर साध्वी पर उसकी नजर पड़ी और वह कामातुर हो उठा । उसने अपने सैनिको द्वारा उसे लिया और दुर्व्यवहार करने का प्रयत्न किया । साध्वी तपोबल युक्त थी । महल मे बुला उसने राजा को शाप दिया कि एक महीने के भीतर-भीतर तुम्हारा राजपाट छीन जाएगा और वहा से चली गई ।
कुछ दिनों बाद दिपावली आई । राजा का प्रारब्ध देखिये । राजा ने आडोस पाडोस के सामतो तथा पाडौसी राजाओ को आमन्त्रित किया । दीपावली के दिन राजा व सभी आमन्त्रित व्यक्ति जुआ खेलने लगे । शराब के नशे मे उसने अपना राजपाट दाव पर लगा दिया
तथा पासे उल्टे पडने से वह हार गया । इस प्रकार उस साध्वी का शाप रग लाया और वहा का राज्य रामसिंह ने, जो कि जुए मे जीता था, सभाल लिया । राजा को दीपावली के दूसरे दिन राजपाट छोडकर निकलना पडा किन्तु उसके मन का मैल अभी भी मिटा नही था । श्रादते अभी भी वही थी अतः वह उन आवश्यकताओं की पूर्ति न होने से वडा दुखी रहने लगा ।
एक दिन वह राजमहल में चोरी करने के इरादे से घुसा किन्तु इस कला में निपुण न होने ने पहरेदारो द्वारा पकड लिया गया व राजा के सामने पेश किया गया किन्तु भूतपूर्व राजा होने के कारण उसे यातना नही दी गयी अपितु देश निकाला देकर छोड दिया गया भूखा-प्यासा, भटकता हुआ राजा दूसरे राज्य मे पहुचा । रास्ते के काटो से उसके कपड़ तार-तार हो चुके थे । वह दूसरे राज्य मे मजदूरी करके जीवन-यापन करने लगा । यहा का राजा दुर्जन सिंह
था । नाम भले ही दुर्जन सिंह हो, पर था वह गुणों की खान । उसके राज्य में सभी सुखी थे । कही चोरी या डाका नही पड़ता था । उसके राज्य में प्रजा भी धार्मिक स्वभाव वाली थी । कहा भी गया है "यथा राजा तथा प्रजा ।"
दिन बीतते गये शील निधि के मन का मैल धुलने लगा । वह धर्म में रूचि लेने लगा । तभी पर्युषण पर्व आाया । सारे नगर में उन दिनों काफी चहल-पहल रहती थी । लोग स्थानक-उपाश्रम जाते थे और धर्म श्रवण करते थे उन दिनों वहां जैन साधुओं का सघ आया हुआ था । उसमें साधु थे । ये साधु प्रतिदिन व्याख्यान देते थे । धार्मिक भाव उदय होने से शीलनिधि भी व्याख्यान सुनने जाने लगा । उसने क्षमा, मार्दव, आर्जव, सयम, तप, त्याग, ब्रह्मचर्य आदि पर व्याख्यान सुने उसे ऐसा लगा कि अब तक जो जिंदगी व्यतीत हुई, वह व्यर्थ चली गई । हो, घोर दुर्भाग्य है, ऐसा सोचकर वह पछताने लगा । श्रौर उस दिन उसने जैन धर्म अंगीकार कर लिया क्योकि जैन धर्म के गुणो से वह बहुत प्रभावित हुआ था ।
अब वह प्रतिदिन धर्मं श्रवरण करता तथा धर्मं को अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करता । वह प्राध्यात्म की प्रतिमूर्ति बन चुका था । इधर श्रवंतिकापुरी में महामंत्री और शीलनिधि की रानी ने मिलकर जो राजा रामसिंह वहा शासन कर रहा था, उसे भगा दिया तथा अपने राज्य को स्वतंत्र करा लिया । राज्य स्वतंत्र होते ही महामंत्री ने चारो ओर दूत दौड़ा दिये और दूतो द्वारा भूतपूर्व राजा शीलनिधि की खोज प्रारंभ हुई जो कि धर्म का ही प्रभाव था । दूत घूमते-घामते दुर्जन सिंह के राज्य में भी प्राये । उस समय शीलनिधि व्याख्यान सुन रहा था । व्याख्यान समाप्त होने पर दूतो ने उससे चलने का आग्रह किया किन्तु राजा शीलनिधि तो नश्वर राज्य से भी एक वडी सम्पत्ति प्राप्त कर चुका था, धर्म की सम्पत्ति । मौर जिस व्यक्ति के पास यह सम्पत्ति होती है, उसे छोटी-मोटी सम्पत्ति की परवाह नही होती है । खैर...
राजा ने दूतो को यह कह कर लौटा दिया कि उसे श्रव
राज्य की कोई आवश्यकता नहीं है क्योकि वह सबसे बड़ा राज्य प्राप्त कर चुका है, धर्म का राज्य । दूत चले गये । किन्तु फिर उसने सोचा कि भूतपूर्व राजा होने के नाते मेरा राज्य के प्रति कुछ कर्त्तव्य है । मुझे राज्य को विधिवत् पुत्र के हाथो सौप और पुत्र का राज्याभिषेक कर फिर तप मार्ग का आलबन लेना चाहिये । प्रत। वह राज्य की प्रोर चल पडा ।
राजा के पुनः आने पर राज्य में खुशी की लहर छा गई । उस रात सारे नगर में खूब रोशनी हुई क्योकि राजा भी एक नई रोशनी प्राप्त कर चुका था । सारे नगर मे घी के दिये जलाये गये । दूसरे दिन राजा ने मुहुर्त निकलवाया अक्षय तृतीया के ही दिन राजकुमार का विवाह भी दुर्जन सिंह की पुत्री के साथ हो गया ।
राजा के सभी कर्त्तव्य पूरे हो चुके थे, अत वह तप के लिए जाने लगा । रानी भी उसके साथ चली गयी । वे दोनो श्रध्यात्मसाधना के लिए जा रहे थे । एक नये मार्ग पर
और एक नये सूरज के साथ एक नवीन युग का उदय हो रहा था। सच ही कहा है- सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नही कहते ।
- ४/८८५ हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान ) ३१३००१
|
शील के माहम हो ही नहीं सकता । जिन मनुष्यो मे शील और दया है, उनमे साहम पहले ही विद्यमान रहता है । यदि गार्ग्य शीलवान न होता तो भयभीत होकर साप पर हमला कर बैठता और संभवत उनकी हत्या भी कर देता । लेकिन भयभंत नही हुआ कारण कि उसमे माहस तो था ही, इसीलिए शोल भी था । शीलवान होने के कारण ही अपनी शक्ति को उसने सहन करने में व्यवस्थित किया । जागा, और पास ही एक झाडी में अपने बिल की ओर चला गया । गार्ग्य उठा तो महर्षि बोधायन ने उसे गले से लगाते हुए कहा - गार्ग्य एक दिन तुम्हारे शील की चर्चा विश्व के कोने-कोने मे सुगध की तरह फैल जायेगी । एक विषधर जीव के साथ भी तुम्हारा यह मानवीय व्यवहार प्रकट करता है कि तुम मानव के प्रति निश्चय ही और दयावान रहोगे ।' pada baya शिष्यो ने बात सुनी तो श्राश्चर्य से उनकी ओर देखने लगे । एक शिष्य मैत्रायरिग ने तो पूछ ही लिया - "यह तो साहस का कार्य था भगवन् ! आप गार्ग्य के साहस की प्रशसा क्यो नही करते ? इसके शील व दया का प्रश्न ही नही उठता । महर्षि ने मैत्रायरिण को समझाते हुए कहा - "वत्स, शील के साहस हो ही नहीं सकता । जिन मनुष्यो मे शील और दया है, उनमे साहस पहले ही विद्यमान रहता है । यदि गार्ग्य शीलवान न होता तो भयभीत होकर सांप पर हमला कर बैठता और संभवत उसकी हत्या भी कर देता । लेकिन भयभीत नही हुआ कारण कि उसमे साहस तो था ही, इसीलिए शोल भी था । शीलवान होने के कारण ही अपनी शक्ति को उसने सहन करने में व्यवस्थित किया । - एक सौ सोलह देवाली, उदयपुर -तीन लाख तेरह हज़ार एक व्यसन मुक्तिः सुबह का भूला ● श्री कृष्णमोहन जोशी किसी समय अवन्तिकापुरी मे एक राजा शासन करता था । नाम था, 'शीलनिधि । किन्तु नाम बडो और दर्शन खोटे वाली बात है । उसमे शील का नितान्त अभाव था । सभी प्रकार के व्यसन उसमे घर किये हुए थे । शिकार का बडा शौक था महीने मे लगभग पंद्रह दिन वह शिकार के लिए इधर-उधर जगलो मे भटकता रहता । र तो और, साथ में उसका लवाजमा भी रहता जिसमे कई नर्तकिया रहती । शाम को थका हारा राजा शराब पीता तथा नर्तकियों के नृत्य का प्रानन्द लेता था । शेष पंद्रह दिन वह शिकार मे मारे गये पशुप्रो का । मास खाता था तथा राजमहल मे वेश्याओ के रग मे डूबा रहता । सुरापन के दौर चलते । इस प्रकार वह व्यसनो से घिरा हुआ था । किन्तु जब विपत्ति आती है तो कह कर नही प्राती । हुआ यो कि एक दिन नगर के मध्य से साधुओ की एक टोली गुजर रही थी जिसमे कुछ साध्वियां भी थी । राजा महल की खिड़की से देख रहा था । अचानक एक सुन्दर साध्वी पर उसकी नजर पड़ी और वह कामातुर हो उठा । उसने अपने सैनिको द्वारा उसे लिया और दुर्व्यवहार करने का प्रयत्न किया । साध्वी तपोबल युक्त थी । महल मे बुला उसने राजा को शाप दिया कि एक महीने के भीतर-भीतर तुम्हारा राजपाट छीन जाएगा और वहा से चली गई । कुछ दिनों बाद दिपावली आई । राजा का प्रारब्ध देखिये । राजा ने आडोस पाडोस के सामतो तथा पाडौसी राजाओ को आमन्त्रित किया । दीपावली के दिन राजा व सभी आमन्त्रित व्यक्ति जुआ खेलने लगे । शराब के नशे मे उसने अपना राजपाट दाव पर लगा दिया तथा पासे उल्टे पडने से वह हार गया । इस प्रकार उस साध्वी का शाप रग लाया और वहा का राज्य रामसिंह ने, जो कि जुए मे जीता था, सभाल लिया । राजा को दीपावली के दूसरे दिन राजपाट छोडकर निकलना पडा किन्तु उसके मन का मैल अभी भी मिटा नही था । श्रादते अभी भी वही थी अतः वह उन आवश्यकताओं की पूर्ति न होने से वडा दुखी रहने लगा । एक दिन वह राजमहल में चोरी करने के इरादे से घुसा किन्तु इस कला में निपुण न होने ने पहरेदारो द्वारा पकड लिया गया व राजा के सामने पेश किया गया किन्तु भूतपूर्व राजा होने के कारण उसे यातना नही दी गयी अपितु देश निकाला देकर छोड दिया गया भूखा-प्यासा, भटकता हुआ राजा दूसरे राज्य मे पहुचा । रास्ते के काटो से उसके कपड़ तार-तार हो चुके थे । वह दूसरे राज्य मे मजदूरी करके जीवन-यापन करने लगा । यहा का राजा दुर्जन सिंह था । नाम भले ही दुर्जन सिंह हो, पर था वह गुणों की खान । उसके राज्य में सभी सुखी थे । कही चोरी या डाका नही पड़ता था । उसके राज्य में प्रजा भी धार्मिक स्वभाव वाली थी । कहा भी गया है "यथा राजा तथा प्रजा ।" दिन बीतते गये शील निधि के मन का मैल धुलने लगा । वह धर्म में रूचि लेने लगा । तभी पर्युषण पर्व आाया । सारे नगर में उन दिनों काफी चहल-पहल रहती थी । लोग स्थानक-उपाश्रम जाते थे और धर्म श्रवण करते थे उन दिनों वहां जैन साधुओं का सघ आया हुआ था । उसमें साधु थे । ये साधु प्रतिदिन व्याख्यान देते थे । धार्मिक भाव उदय होने से शीलनिधि भी व्याख्यान सुनने जाने लगा । उसने क्षमा, मार्दव, आर्जव, सयम, तप, त्याग, ब्रह्मचर्य आदि पर व्याख्यान सुने उसे ऐसा लगा कि अब तक जो जिंदगी व्यतीत हुई, वह व्यर्थ चली गई । हो, घोर दुर्भाग्य है, ऐसा सोचकर वह पछताने लगा । श्रौर उस दिन उसने जैन धर्म अंगीकार कर लिया क्योकि जैन धर्म के गुणो से वह बहुत प्रभावित हुआ था । अब वह प्रतिदिन धर्मं श्रवरण करता तथा धर्मं को अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करता । वह प्राध्यात्म की प्रतिमूर्ति बन चुका था । इधर श्रवंतिकापुरी में महामंत्री और शीलनिधि की रानी ने मिलकर जो राजा रामसिंह वहा शासन कर रहा था, उसे भगा दिया तथा अपने राज्य को स्वतंत्र करा लिया । राज्य स्वतंत्र होते ही महामंत्री ने चारो ओर दूत दौड़ा दिये और दूतो द्वारा भूतपूर्व राजा शीलनिधि की खोज प्रारंभ हुई जो कि धर्म का ही प्रभाव था । दूत घूमते-घामते दुर्जन सिंह के राज्य में भी प्राये । उस समय शीलनिधि व्याख्यान सुन रहा था । व्याख्यान समाप्त होने पर दूतो ने उससे चलने का आग्रह किया किन्तु राजा शीलनिधि तो नश्वर राज्य से भी एक वडी सम्पत्ति प्राप्त कर चुका था, धर्म की सम्पत्ति । मौर जिस व्यक्ति के पास यह सम्पत्ति होती है, उसे छोटी-मोटी सम्पत्ति की परवाह नही होती है । खैर... राजा ने दूतो को यह कह कर लौटा दिया कि उसे श्रव राज्य की कोई आवश्यकता नहीं है क्योकि वह सबसे बड़ा राज्य प्राप्त कर चुका है, धर्म का राज्य । दूत चले गये । किन्तु फिर उसने सोचा कि भूतपूर्व राजा होने के नाते मेरा राज्य के प्रति कुछ कर्त्तव्य है । मुझे राज्य को विधिवत् पुत्र के हाथो सौप और पुत्र का राज्याभिषेक कर फिर तप मार्ग का आलबन लेना चाहिये । प्रत। वह राज्य की प्रोर चल पडा । राजा के पुनः आने पर राज्य में खुशी की लहर छा गई । उस रात सारे नगर में खूब रोशनी हुई क्योकि राजा भी एक नई रोशनी प्राप्त कर चुका था । सारे नगर मे घी के दिये जलाये गये । दूसरे दिन राजा ने मुहुर्त निकलवाया अक्षय तृतीया के ही दिन राजकुमार का विवाह भी दुर्जन सिंह की पुत्री के साथ हो गया । राजा के सभी कर्त्तव्य पूरे हो चुके थे, अत वह तप के लिए जाने लगा । रानी भी उसके साथ चली गयी । वे दोनो श्रध्यात्मसाधना के लिए जा रहे थे । एक नये मार्ग पर और एक नये सूरज के साथ एक नवीन युग का उदय हो रहा था। सच ही कहा है- सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नही कहते । - चार/आठ सौ पचासी हिरण मगरी, उदयपुर तीन लाख तेरह हज़ार एक
|
"आयुष्मान भारत के दो स्तंभों के बीच त्रुटिहीन एकीकरण होना महत्वपूर्ण है"
बैठक में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'धोखाधड़ी और धन के दुरूपयोग को रोकने और इसमें कमी लाने के लिए कड़े नियंत्रण और संतुलन के उपाय किए जाएंगे' तथा योजना के लाभ गलत हाथों में पड़ने के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा लक्षित समूह के एसईसीसी 2011 पर आधारित होने के कारण भले ही अनेक समूह इस योजना के दायरे से बाहर छूट गए हों। उन्होंने कहा, 'हमें इस योजना को और ज्यादा समावेशी बनाने के लिए सर्वेक्षण में छूट गए पात्र परिवारों को शामिल करने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है।' डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एनएचए की टीम को सर्वोच्च प्राथमिकताएं निर्धारित करनी चाहिए, जिनसे पहुंच और योजना का उपयोग ज्यादा व्यापक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह योजना देश के हरेक पात्र और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस योजना की प्रगति और 13 सितंबर, 2019 को इसकी शुरूआत से लेकर छोटी सी अवधि में किये गए कार्यों की सराहना की। डॉ. हर्षवर्धन ने संभावित चुनौतियों और समयबद्धरूप से उनके समाधान खोजने के लिए एक कार्यबल के गठन के बारे में विचार-विमर्श करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों को पात्रता, इस योजना के लाभ उठाने के तरीकों के बारे में आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचीबद्ध अस्पतालों में देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रयास किये जाने चाहिएं। हमें मौजूदा केंद्रीय और राज्य योजना के साथ-साथ इस योजना को शामिल करने के लिए सभी अच्छे अस्पतालों को पैनल में शामिल करने के लिए प्रयास करने चाहिए।
डॉ. हर्षवर्धन ने यह भी निर्देश दिया कि पीएमजेएवाई के तहत विशेषरूप से टायर2 और टायर 3 शहरों में सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रमुख 200 अस्पतालों के न्यूनतम दो-तिहाई अस्पताल पीएमजेएवाई के तहत सूचीबद्ध हों।
36 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में से 32 ने पीएमजेएवाई कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों ने इस योजना का कार्यान्वयन शुरू कर दिया है। शेष राज्यों - दिल्ली, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को इस योजना में शामिल करने के लिए विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे अपने-अपने राज्यों के लोगों के लिए इस योजना के लाभ शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मौजूदा राज्य योजना के साथ इस योजना के समावेशन के माध्यम से एकल योजना अपनाने में पूरी सहायता करने का आश्वासन दिया है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्रों (एचडब्ल्यूसी) की समीक्षा करते समय विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अमल में लाए जा रहे सर्वोत्तम तौर-तरीकों या पद्धतियों को देश भर में अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर ऐसे 'जन आंदोलन/सामाजिक आंदोलन एम्बेस्डर' को तैयार करने की जरूरत है जिन्हें प्रणाली की अच्छी समझ हो और जिनमें देश के लिए काम करने की पूरी लगन हो क्योंकि यही लोग आगे चलकर समूचे समुदाय को प्रेरित करेंगे और सभी स्तरों पर स्वास्थ्य प्रणालियों के एकीकरण की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने देश में एचडब्ल्यूसी के विस्तारीकरण की दिशा में हो रही प्रगति में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने इन केन्द्रों में लोगों को मुहैया कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की उच्च गुणवत्ता को बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) सुश्री प्रीति सूदन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सीईओ श्री इंदु भूषण तथा मंत्रालय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
|
"आयुष्मान भारत के दो स्तंभों के बीच त्रुटिहीन एकीकरण होना महत्वपूर्ण है" बैठक में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'धोखाधड़ी और धन के दुरूपयोग को रोकने और इसमें कमी लाने के लिए कड़े नियंत्रण और संतुलन के उपाय किए जाएंगे' तथा योजना के लाभ गलत हाथों में पड़ने के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा लक्षित समूह के एसईसीसी दो हज़ार ग्यारह पर आधारित होने के कारण भले ही अनेक समूह इस योजना के दायरे से बाहर छूट गए हों। उन्होंने कहा, 'हमें इस योजना को और ज्यादा समावेशी बनाने के लिए सर्वेक्षण में छूट गए पात्र परिवारों को शामिल करने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है।' डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एनएचए की टीम को सर्वोच्च प्राथमिकताएं निर्धारित करनी चाहिए, जिनसे पहुंच और योजना का उपयोग ज्यादा व्यापक बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह योजना देश के हरेक पात्र और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस योजना की प्रगति और तेरह सितंबर, दो हज़ार उन्नीस को इसकी शुरूआत से लेकर छोटी सी अवधि में किये गए कार्यों की सराहना की। डॉ. हर्षवर्धन ने संभावित चुनौतियों और समयबद्धरूप से उनके समाधान खोजने के लिए एक कार्यबल के गठन के बारे में विचार-विमर्श करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों को पात्रता, इस योजना के लाभ उठाने के तरीकों के बारे में आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सूचीबद्ध अस्पतालों में देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रयास किये जाने चाहिएं। हमें मौजूदा केंद्रीय और राज्य योजना के साथ-साथ इस योजना को शामिल करने के लिए सभी अच्छे अस्पतालों को पैनल में शामिल करने के लिए प्रयास करने चाहिए। डॉ. हर्षवर्धन ने यह भी निर्देश दिया कि पीएमजेएवाई के तहत विशेषरूप से टायरदो और टायर तीन शहरों में सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रमुख दो सौ अस्पतालों के न्यूनतम दो-तिहाई अस्पताल पीएमजेएवाई के तहत सूचीबद्ध हों। छत्तीस राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में से बत्तीस ने पीएमजेएवाई कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों ने इस योजना का कार्यान्वयन शुरू कर दिया है। शेष राज्यों - दिल्ली, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को इस योजना में शामिल करने के लिए विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उनसे अपने-अपने राज्यों के लोगों के लिए इस योजना के लाभ शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मौजूदा राज्य योजना के साथ इस योजना के समावेशन के माध्यम से एकल योजना अपनाने में पूरी सहायता करने का आश्वासन दिया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्रों की समीक्षा करते समय विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अमल में लाए जा रहे सर्वोत्तम तौर-तरीकों या पद्धतियों को देश भर में अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर ऐसे 'जन आंदोलन/सामाजिक आंदोलन एम्बेस्डर' को तैयार करने की जरूरत है जिन्हें प्रणाली की अच्छी समझ हो और जिनमें देश के लिए काम करने की पूरी लगन हो क्योंकि यही लोग आगे चलकर समूचे समुदाय को प्रेरित करेंगे और सभी स्तरों पर स्वास्थ्य प्रणालियों के एकीकरण की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने देश में एचडब्ल्यूसी के विस्तारीकरण की दिशा में हो रही प्रगति में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने इन केन्द्रों में लोगों को मुहैया कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की उच्च गुणवत्ता को बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया। समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, सचिव सुश्री प्रीति सूदन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ श्री इंदु भूषण तथा मंत्रालय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
|
'फिर कॉफ़ी पिला रहे हैं करण जौहर'
निर्माता-निर्देशक करण जौहर की गरमा गरम कॉफ़ी की चुस्कियों का लुत्फ़ उठाने के लिए बॉलीवुड का हर बड़ा सितारा तैयार हो जाता है.
फिर चाहे गरम कॉफ़ी की चुस्कियों से कई सितारों का मुँह ही क्यों ना जल गया हो.
यही वजह है कि करण फिर से तैयार हैं नए सीज़न 5 के साथ.
करण की कॉफ़ी के इस सीज़न के पहले मेहमान हैं शाहरुख़ खान और आलिया भट्ट.
पिछले चार सीज़ंस में करण के सवालों के जवाब देकर तमाम सितारे सुर्खियां बटोर चुके हैं.
वहीं कुछ विवाद भी सामने आए. तो आइए आपको करण की कॉफ़ी से जुड़े पांच विवादों से रूबरू करवाते हैं.
सलमान खान - करण की कॉफ़ी पीने पहुंचे सलमान खान ने करण के वर्जिनिटी पर पूछे एक सवाल पर मस्ती भरे अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा था, "मैं बिल्कुल वर्जिन हूं और मैं बिल्कुल अकेले सोना पसंद करता हूं. " सलमान का ये बयान महीनों तक सुर्ख़ियों में रहा था.
आलिया भट्ट - करण की कॉफ़ी पीने पहुंची आलिया भट्ट से करण ने जनरल नॉलेज के सवाल पूछ लिए जिसका सही जवाब आलिया भट्ट नहीं दे पाईं और शो के बाद सोशल मीडिया पर भी आलिया के सामान्य ज्ञान को लेकर खूब मजाक उड़ाया गया था.
करण की गरम कॉफ़ी से जली आलिया के ज़ख्म आज भी हरे हो जातें हैं जब उनसे कोई सामान्य ज्ञान का कोई सवाल पूछ लेता है.
आमिर खान - लगातार कई बुलावे के बाद चौथे सीज़न में करण की कॉफ़ी पीने पहुंचे आमिर खान से जब करण ने पूछा कि आपको इस शो के लिए कई बार न्योता भेजने के बाद भी आप क्यों नहीं आए.
आमिर ने करण के इस सवाल का जवाब साफ़-साफ़ देते हुए कहा था कि मैं पहले तुम्हें पसंद नहीं करता था इसलिए शो में आने से मना किया था.
करीना कपूर और रनबीर कपूर - जब कॉफ़ी विद करण में करीना और रणबीर पहुंचे तो बहन करीना ने रणबीर की खूब खिंचाई की थी.
यही नहीं शो के रैपिड फायर राउंड में करण ने जब करीना से पूछा कि अगर वो किसी के साथ समलैंगिक रिश्ता बनाना चाहेंगी तो वो कौन होगी.
करण के इस सवाल के जवाब में करीना ने कहा था कि वो समलैंगिक रिश्ता सिर्फ़ अपनी 'भाभी' कटरीना कैफ़ के साथ ही बनाना चाहेंगी.
साथ ही ये भी बता दिया था कि जब रणबीर और कटरीना की शादी होगी तो किन गानों पर जमकर नाचेंगीं.
सोनम कपूर और दीपिका पादुकोण - करण के शो में पहुंची सोनम और दीपिका ने रणबीर कपूर को लेकर कई ताने मारे थे.
इन तानों से सबसे ज़्यादा नाराज़ हुए ऋषि कपूर ने ट्विटर के ज़रिए सोनम और दीपिका के प्रति कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए अपनी भड़ास निकाली थी.
अब शाहरुख़ और आलिया भट्ट के साथ करण विद कॉफ़ी सीज़न 5 का पहला एपिसोड चर्चा में बना हुआ है.
वजह है करण ने शाहरुख़ से एक सवाल उनकी बेटी सुहाना के बारे में पूछ लिया कि अगर आपकी बेटी को कोई किस करने की कोशिश करता है तो आप क्या करेंगे.
शाहरुख़ ने जवाब में कहा की वो सामने वाले के होंठ मसल देंगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
|
'फिर कॉफ़ी पिला रहे हैं करण जौहर' निर्माता-निर्देशक करण जौहर की गरमा गरम कॉफ़ी की चुस्कियों का लुत्फ़ उठाने के लिए बॉलीवुड का हर बड़ा सितारा तैयार हो जाता है. फिर चाहे गरम कॉफ़ी की चुस्कियों से कई सितारों का मुँह ही क्यों ना जल गया हो. यही वजह है कि करण फिर से तैयार हैं नए सीज़न पाँच के साथ. करण की कॉफ़ी के इस सीज़न के पहले मेहमान हैं शाहरुख़ खान और आलिया भट्ट. पिछले चार सीज़ंस में करण के सवालों के जवाब देकर तमाम सितारे सुर्खियां बटोर चुके हैं. वहीं कुछ विवाद भी सामने आए. तो आइए आपको करण की कॉफ़ी से जुड़े पांच विवादों से रूबरू करवाते हैं. सलमान खान - करण की कॉफ़ी पीने पहुंचे सलमान खान ने करण के वर्जिनिटी पर पूछे एक सवाल पर मस्ती भरे अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा था, "मैं बिल्कुल वर्जिन हूं और मैं बिल्कुल अकेले सोना पसंद करता हूं. " सलमान का ये बयान महीनों तक सुर्ख़ियों में रहा था. आलिया भट्ट - करण की कॉफ़ी पीने पहुंची आलिया भट्ट से करण ने जनरल नॉलेज के सवाल पूछ लिए जिसका सही जवाब आलिया भट्ट नहीं दे पाईं और शो के बाद सोशल मीडिया पर भी आलिया के सामान्य ज्ञान को लेकर खूब मजाक उड़ाया गया था. करण की गरम कॉफ़ी से जली आलिया के ज़ख्म आज भी हरे हो जातें हैं जब उनसे कोई सामान्य ज्ञान का कोई सवाल पूछ लेता है. आमिर खान - लगातार कई बुलावे के बाद चौथे सीज़न में करण की कॉफ़ी पीने पहुंचे आमिर खान से जब करण ने पूछा कि आपको इस शो के लिए कई बार न्योता भेजने के बाद भी आप क्यों नहीं आए. आमिर ने करण के इस सवाल का जवाब साफ़-साफ़ देते हुए कहा था कि मैं पहले तुम्हें पसंद नहीं करता था इसलिए शो में आने से मना किया था. करीना कपूर और रनबीर कपूर - जब कॉफ़ी विद करण में करीना और रणबीर पहुंचे तो बहन करीना ने रणबीर की खूब खिंचाई की थी. यही नहीं शो के रैपिड फायर राउंड में करण ने जब करीना से पूछा कि अगर वो किसी के साथ समलैंगिक रिश्ता बनाना चाहेंगी तो वो कौन होगी. करण के इस सवाल के जवाब में करीना ने कहा था कि वो समलैंगिक रिश्ता सिर्फ़ अपनी 'भाभी' कटरीना कैफ़ के साथ ही बनाना चाहेंगी. साथ ही ये भी बता दिया था कि जब रणबीर और कटरीना की शादी होगी तो किन गानों पर जमकर नाचेंगीं. सोनम कपूर और दीपिका पादुकोण - करण के शो में पहुंची सोनम और दीपिका ने रणबीर कपूर को लेकर कई ताने मारे थे. इन तानों से सबसे ज़्यादा नाराज़ हुए ऋषि कपूर ने ट्विटर के ज़रिए सोनम और दीपिका के प्रति कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए अपनी भड़ास निकाली थी. अब शाहरुख़ और आलिया भट्ट के साथ करण विद कॉफ़ी सीज़न पाँच का पहला एपिसोड चर्चा में बना हुआ है. वजह है करण ने शाहरुख़ से एक सवाल उनकी बेटी सुहाना के बारे में पूछ लिया कि अगर आपकी बेटी को कोई किस करने की कोशिश करता है तो आप क्या करेंगे. शाहरुख़ ने जवाब में कहा की वो सामने वाले के होंठ मसल देंगे.
|
हिलीवुड लाइव।
हिलीवुड न्यूज ने दर्शकों की भारी डिमांड पर 'सोंग आॅफ द वीक' निकालने का निर्णय लिया है। जिसमें हमने इस सप्ताह रिलीज हुए उन गीतों का जिक्र किया है जिसमेें हमने व्यूज के आधार पर टाॅप 5 सोंग को चुना है यानि कि वो गाने जिन्होंने इस सप्ताह धमाल मचाया है तो आइये जानते हैं इनके बारे में।
इस श्रेणी में 5वें न0 पर है 'तेरा पाउणा' गीत आपको बता दें इस प्यूजिक वीडियो गीत में युवी नेगी व दिव्या नेगी मुख्य किरदार निभा रहे है और इस गीत में अभी तक 62 हजार से भी उपर व्यूज आ चुके हैं।
इस श्रेणी में चैथे स्थान पर हैं 'दिल तोडिग्ये' भाग-2 इस गीत को राकेश पंवार ने गाया है और इसमें अभिनय माही सुरियाल और दिव्या नेगी ने किया है तथा इस पर अभी तक 63 हजार के करीब व्यूज आ चुके हैं।
चलिए इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए बात करते हैं इस श्रेणी में तीसरे न. पर आये गीत की, तीसरे न. पर है 'नन्दु मामा की स्याली' जिसे गुंजन डंगवाल ने गाया है और इसमें मुकेश शर्मा घनसेला, अभिषेक भट्ट, नेहा महरोत्रा व परिचय ने मुख्य भूमिका में काम किया है और इस पर लगभग एक लाख चैदह हजार के आस-पास व्यूज आ चुके हैं।
चलिए आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं इस श्रेेणी में आये दूसरे न0 पर आये गाने की, दूसरे न. पर है 'छप्पे छुणक्याली' जिस पर लगभग एक लाख चैंतीस हजार के लगभग व्यूज आ चुके हैं। इस गाने में दीपू जुयाल व प्रीती लिंगवाल ने अभिनय किया है।
इसी श्रेणी में प्रथम स्थान पर जो गीत है वो है 'तमासू बुढ़डी कु' इस गीत पर अभी तक दो लाख बारह हजार से उपर व्यूज आ चुके हैं तथा इसमें पीयूष रतूड़ी व कामना रांगड़ जो कि बाल कलाकार हैं ने अभिनय किया है। उम्मीद है आपको ये वीडियो जरूर पसंद आयी होगी।
अगर आप इन गीतों के बारे में और डिटेल से जानना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट www. hillywoodnews. in पर विजिट कर सकते हो।
|
हिलीवुड लाइव। हिलीवुड न्यूज ने दर्शकों की भारी डिमांड पर 'सोंग आॅफ द वीक' निकालने का निर्णय लिया है। जिसमें हमने इस सप्ताह रिलीज हुए उन गीतों का जिक्र किया है जिसमेें हमने व्यूज के आधार पर टाॅप पाँच सोंग को चुना है यानि कि वो गाने जिन्होंने इस सप्ताह धमाल मचाया है तो आइये जानते हैं इनके बारे में। इस श्रेणी में पाँचवें नशून्य पर है 'तेरा पाउणा' गीत आपको बता दें इस प्यूजिक वीडियो गीत में युवी नेगी व दिव्या नेगी मुख्य किरदार निभा रहे है और इस गीत में अभी तक बासठ हजार से भी उपर व्यूज आ चुके हैं। इस श्रेणी में चैथे स्थान पर हैं 'दिल तोडिग्ये' भाग-दो इस गीत को राकेश पंवार ने गाया है और इसमें अभिनय माही सुरियाल और दिव्या नेगी ने किया है तथा इस पर अभी तक तिरेसठ हजार के करीब व्यूज आ चुके हैं। चलिए इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए बात करते हैं इस श्रेणी में तीसरे न. पर आये गीत की, तीसरे न. पर है 'नन्दु मामा की स्याली' जिसे गुंजन डंगवाल ने गाया है और इसमें मुकेश शर्मा घनसेला, अभिषेक भट्ट, नेहा महरोत्रा व परिचय ने मुख्य भूमिका में काम किया है और इस पर लगभग एक लाख चैदह हजार के आस-पास व्यूज आ चुके हैं। चलिए आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं इस श्रेेणी में आये दूसरे नशून्य पर आये गाने की, दूसरे न. पर है 'छप्पे छुणक्याली' जिस पर लगभग एक लाख चैंतीस हजार के लगभग व्यूज आ चुके हैं। इस गाने में दीपू जुयाल व प्रीती लिंगवाल ने अभिनय किया है। इसी श्रेणी में प्रथम स्थान पर जो गीत है वो है 'तमासू बुढ़डी कु' इस गीत पर अभी तक दो लाख बारह हजार से उपर व्यूज आ चुके हैं तथा इसमें पीयूष रतूड़ी व कामना रांगड़ जो कि बाल कलाकार हैं ने अभिनय किया है। उम्मीद है आपको ये वीडियो जरूर पसंद आयी होगी। अगर आप इन गीतों के बारे में और डिटेल से जानना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट www. hillywoodnews. in पर विजिट कर सकते हो।
|
Lucknow News: आयकर विभाग गैंगस्टर-राजनेता मुख्तार अंसारी के एक कथित सहयोगी से बेनामी संपत्ति के मामले में पूर्व विधायक के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि यहां स्थित आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति रोधी इकाई गणेश दत्त मिश्रा का बयान दर्ज कर रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे गाजीपुर से पकड़कर कर आयकर अधिकारियों को सौंपा था। करीब 56 वर्षीय मिश्रा को 20 जून को आयकर विभाग के निर्देश पर गाज़ीपुर पुलिस ने हिरासत में लिया था।
सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग अंसारी की कथित बेनामी संपत्ति के संबंध में मिश्रा का बयान दर्ज करेगा और उसके बाद उसे जाने की अनुमति देगा। लखनऊ में विभाग की बेनामी संपत्ति जांच इकाई ने बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत अप्रैल में एक अनंतिम आदेश जारी होने के बाद, गाजीपुर जिले में 'सदर तहसील के अंतर्गत मौजा कपूरपुर एनजेडए' में स्थित लगभग 12 करोड़ रुपए की एक संपत्ति को इसी साल मई में कुर्क किया था। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बेनामीदार (जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति है) की पहचान गणेश दत्त मिश्रा के रूप में की गई, जो अंसारी का एक कथित सहयोगी और पड़ोसी था, जबकि "लाभार्थी मालिक" अंसारी था।
बेनामी का अर्थ है 'कोई नाम नहीं' या 'बिना नाम ' और ऐसी संपत्तियां वे हैं जिनमें वास्तविक लाभार्थी वह नहीं है जिसके नाम पर संपत्ति खरीदी गई है। ग़ाज़ीपुर में इस भूमि की कुर्की "पैंथर" नामक एक ऑपरेशन के तहत अंसारी और उसके सहयोगियों के खिलाफ कर विभाग द्वारा की गई "व्यापक" कार्रवाई का हिस्सा है। आयकर विभाग के सूत्रों ने पहले कहा था कि वे अंसारी की लगभग 22 और कथित बेनामी संपत्तियों को कुर्क करने पर काम कर रहे हैं, जिनकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। गौरतलब है कि अंसारी पर विभिन्न राज्यों में 61 आपराधिक मामले हैं, जिनमें से छह में उसे अब दोषी ठहराया जा चुका है। अंसारी को इस महीने की शुरुआत में वाराणसी की एक अदालत ने 30 साल से अधिक समय पहले कांग्रेस नेता के भाई अवधेश राय की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
|
Lucknow News: आयकर विभाग गैंगस्टर-राजनेता मुख्तार अंसारी के एक कथित सहयोगी से बेनामी संपत्ति के मामले में पूर्व विधायक के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि यहां स्थित आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति रोधी इकाई गणेश दत्त मिश्रा का बयान दर्ज कर रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे गाजीपुर से पकड़कर कर आयकर अधिकारियों को सौंपा था। करीब छप्पन वर्षीय मिश्रा को बीस जून को आयकर विभाग के निर्देश पर गाज़ीपुर पुलिस ने हिरासत में लिया था। सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग अंसारी की कथित बेनामी संपत्ति के संबंध में मिश्रा का बयान दर्ज करेगा और उसके बाद उसे जाने की अनुमति देगा। लखनऊ में विभाग की बेनामी संपत्ति जांच इकाई ने बेनामी लेनदेन संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत अप्रैल में एक अनंतिम आदेश जारी होने के बाद, गाजीपुर जिले में 'सदर तहसील के अंतर्गत मौजा कपूरपुर एनजेडए' में स्थित लगभग बारह करोड़ रुपए की एक संपत्ति को इसी साल मई में कुर्क किया था। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बेनामीदार की पहचान गणेश दत्त मिश्रा के रूप में की गई, जो अंसारी का एक कथित सहयोगी और पड़ोसी था, जबकि "लाभार्थी मालिक" अंसारी था। बेनामी का अर्थ है 'कोई नाम नहीं' या 'बिना नाम ' और ऐसी संपत्तियां वे हैं जिनमें वास्तविक लाभार्थी वह नहीं है जिसके नाम पर संपत्ति खरीदी गई है। ग़ाज़ीपुर में इस भूमि की कुर्की "पैंथर" नामक एक ऑपरेशन के तहत अंसारी और उसके सहयोगियों के खिलाफ कर विभाग द्वारा की गई "व्यापक" कार्रवाई का हिस्सा है। आयकर विभाग के सूत्रों ने पहले कहा था कि वे अंसारी की लगभग बाईस और कथित बेनामी संपत्तियों को कुर्क करने पर काम कर रहे हैं, जिनकी बाजार कीमत एक सौ करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। गौरतलब है कि अंसारी पर विभिन्न राज्यों में इकसठ आपराधिक मामले हैं, जिनमें से छह में उसे अब दोषी ठहराया जा चुका है। अंसारी को इस महीने की शुरुआत में वाराणसी की एक अदालत ने तीस साल से अधिक समय पहले कांग्रेस नेता के भाई अवधेश राय की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
|
आईआईआरएस देहरादून के वैज्ञानिकों ने जुलाई 2020 से मार्च 2022 के बीच जोशीमठ और आसपास के करीब छह किलोमीटर क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरों (Joshimath Satellite Image) का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकला था। इसमें दावा किया गया था कि जोशीमठ हर साल 6. 62 सेमी. की दर से नीचे की ओर धंस रहा है। इसकी सैटेलाइट तस्वीर भी जारी की गई है। आईआईआरएस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें जोशीमठ के थ्री-डी बदलावों को दिखाया गया है। वीडियो में दर्शाया गया है कि भू-धंसाव केवल जोशीमठ शहर में ही नहीं हो रहा है, पूरी घाटी ही इसकी चपेट में है। हालांकि राज्य सरकार के उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट के अनुसार ये जो रिपोर्ट जारी हुई है, उसे उनके संस्थान को शेयर नहीं किया गया है। ऐसे में बिना इसके मापने के तरीके को जाने, निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी।
इसरो की रिपोर्ट में क्या हैISRO के नैशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते 12 दिन में जोशीमठ की जमीन 5. 4 सेंटीमीटर धंसी है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जोशीमठ शहर 27 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच 5. 4 सेंटीमीटर नीचे धंसा है। 12 दिनों के अंदर शहर 5. 4 सेंटीमीटर नीचे चला गया। रिपोर्ट यह भी बताती है कि मिट्टी धंसने से जोशीमठ में आर्मी हेलीपैड और नरसिंह मंदिर भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार धंसाव का केंद्र 2,180 मीटर की ऊंचाई पर जोशीमठ-औली रोड के पास स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से नवंबर 2022 के बीच के 7 महीने की अवधि में जोशीमठ 9 सेंटीमीटर तक धंसा था।
मुख्य बिंदू- सैटेलाइट तस्वीरों में आर्मी हेलीपैड, नरसिंह मंदिर सहित सेंट्रल जोशीमठ में धंसाव दिख रहा है।
- सबसे ज्यादा धंसाव जोशीमठ-औली रोड के पास 2,180 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है।
- इसे वैज्ञानिक धंसाव का क्राउन नाम से पुकारते हैं।
- अलकनंदा नदी के ठीक ऊपर बसा जोशीमठ का निचला हिस्सा भी धंस रहा है।
|
आईआईआरएस देहरादून के वैज्ञानिकों ने जुलाई दो हज़ार बीस से मार्च दो हज़ार बाईस के बीच जोशीमठ और आसपास के करीब छह किलोमीटर क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकला था। इसमें दावा किया गया था कि जोशीमठ हर साल छः. बासठ सेमी. की दर से नीचे की ओर धंस रहा है। इसकी सैटेलाइट तस्वीर भी जारी की गई है। आईआईआरएस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें जोशीमठ के थ्री-डी बदलावों को दिखाया गया है। वीडियो में दर्शाया गया है कि भू-धंसाव केवल जोशीमठ शहर में ही नहीं हो रहा है, पूरी घाटी ही इसकी चपेट में है। हालांकि राज्य सरकार के उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट के अनुसार ये जो रिपोर्ट जारी हुई है, उसे उनके संस्थान को शेयर नहीं किया गया है। ऐसे में बिना इसके मापने के तरीके को जाने, निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी। इसरो की रिपोर्ट में क्या हैISRO के नैशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते बारह दिन में जोशीमठ की जमीन पाँच. चार सेंटीमीटर धंसी है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जोशीमठ शहर सत्ताईस दिसंबर से आठ जनवरी के बीच पाँच. चार सेंटीमीटर नीचे धंसा है। बारह दिनों के अंदर शहर पाँच. चार सेंटीमीटर नीचे चला गया। रिपोर्ट यह भी बताती है कि मिट्टी धंसने से जोशीमठ में आर्मी हेलीपैड और नरसिंह मंदिर भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार धंसाव का केंद्र दो,एक सौ अस्सी मीटर की ऊंचाई पर जोशीमठ-औली रोड के पास स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से नवंबर दो हज़ार बाईस के बीच के सात महीने की अवधि में जोशीमठ नौ सेंटीमीटर तक धंसा था। मुख्य बिंदू- सैटेलाइट तस्वीरों में आर्मी हेलीपैड, नरसिंह मंदिर सहित सेंट्रल जोशीमठ में धंसाव दिख रहा है। - सबसे ज्यादा धंसाव जोशीमठ-औली रोड के पास दो,एक सौ अस्सी मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है। - इसे वैज्ञानिक धंसाव का क्राउन नाम से पुकारते हैं। - अलकनंदा नदी के ठीक ऊपर बसा जोशीमठ का निचला हिस्सा भी धंस रहा है।
|
ने सुलतान को अपने पुत्र शिहाबुद्दीन को सिहासन का उत्तराधिकारी मनोनीत करने के लिए प्रेरित किया। ऐसी परिस्थितियों में राजाज्ञा का निरादर होने लगा और साम्राज्य के सीमावर्ती प्रदेशों में उपद्रव होने लगे। गुजरात में विद्रोह उठ खड़ा हुआ और इसके दमन के लिए भेजे गये कमालुद्दीन गर्म का वध कर दिया गया। चित्तौड़ के राजपूतों ने दिल्ली की अधीनता ठुकरा दी और वहाँ से मुसलमान सेना को निकाल भगाया। राजा रामचन्द्र के दामाद ने देवगिरि में विद्रोह का झंडा उठाया और अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी । इन विद्रोहों के समाचारों ने सुलतान के दुःखों को और भी बढ़ा दिया । मुसलमान इतिहासकार के शब्दों में, "हमेशा की तरह ऐश्वर्य अस्थायी सिद्ध हुआ और विधाता ने उसके विनाश के लिए शस्त्र खींच लिया।" अपने जीवन भर के कार्य को अपनी आँखों के सामने समाप्त होते देखकर यह शक्तिशाली शासक 'क्रोध में अपना ही मांस नोचने लगा ।' काफूर की कुमन्त्रणाओं में आकर वह अपने विश्वासी सरदारों एवं कर्मचारियों को एक एक कर दूर कर चुका था। घातक रोग से पीड़ित सुलतान अपनी सत्ता के तिरस्कार के समाचारों को पाकर द्रुत गति से मृत्यु की ओर बढ़ने लगा और २ जनवरी १३१६ ई० को उसने सदा के लिए आँखें मूंद ली । उसको जाम-ए-मस्जिद के सामने कद्रवासी कर दिया गया ।
अलाउद्दीन के कार्यों का मूल्यांकन-अलाउद्दीन के शासन को मुसलमानशासन की निरंकुशता का चरम युग कहा जाता है। वह स्वभाव से निर्दयी एवं दुराग्रही था । उसने अपनी नीति में वाधक धर्म-सम्मत तथा परम्परागत विधि-विधानों का तिरस्कार कर दिया था। उसकी भ्रातृ-भाव अथवा रक्त-संबंध को कुछ भी चिंता न रहती थी और दण्ड देने में वह कोई भेद-भाव न रखता था । दृढ़ निश्चय, लोगों पर प्रभाव जमाने की क्षमता तथा शासन-तन्त्र को सुव्यवस्थित बनाने के कठोर संकल्प के कारण वह अपने समय की समस्याओं का समाधान करने में सफल हुआ । जो भी साधन उसको उपलब्ध हो सके उनको लेकर वह अपने लक्ष्य की ओर दृढ़तापूर्वक बढ़ता गया। उसकी द्विमुसी राजनीति में नैतिकता एवं धार्मिक यादेशों के लिए कोई स्थान न था। प्रत्येक विजय के साथ उसकी अधि कार-तृष्णा बढ़ती ही गई और वह इतना शक्तिशाली बन गया कि अल्पकाल में ही उसने उपद्रवी सामंतों का बलपूर्वक दमन कर दिया। उसमें जन्मजात सेनानायक तथा शासक के गुण विद्यमान थे -- इन गुणो का ऐसा संयोग मध्यकालीन इतिहास में दुर्लभ ही है। उसने उन संकटों को भली भांति समझ लिया था जो उस समय समाज को पीड़ित कर रहे थे और चारों
सिलजी सैनिक शासन तंत्र का उद्भव और उत्कर्ष
ओर विखरी शक्ति को एकत्र कर उसने जन हित के लिए प्रयास किया, यद्यपि ऐसा करने में उसका उद्देश्य अपने प्रधान लक्ष्य सैनिक गौरव एवं महत्त्व प्राप्ति को बल देना ही था, उसको अपने सैनिकों का निश्छल विश्वास प्राप्त था और इस्लाम के प्रसार में उसके उत्कट उत्साह से प्रभावित होकर उसके अनुयायी उसके झंडे के नीचे रहते हुए 'विधर्मियों से लड़ने के अमिट उत्साह से ओतप्रोत हो जाते थे । सार्वजनिक शासक को व्यवस्था में उसने बहुत सूझ-बूझ और मौलिकता का प्रदर्शन किया और अपनी व्यपार सामर्थ्य के कारण वह अति पदाधिकारियों के आचरण पर स्वयं अपनी आँख रखने में सफल हुआ । परन्तु उसके द्वारा स्थापित व्यवस्था में स्थायित्व प्रदान करनेवाले तत्त्वों का अभाव था, वह जनता की प्रारंभिक आवश्यकताओं की पूर्ति से आगे न बढ़ा, किन्तु यह उसका दोप न था, वह संकुचित प्रवृत्तियाँ जो उस काल के स्वभावानुरूप उसमें भी आ गई थीं, उसकी प्रगति में बाधक बन गईं। परन्तु बाजार का नियन्त्रण कर उसने जनता के अभावों एवं दुःखों को कम करने के लिए बहुत कुछ किया और नैपोलियन के समान अल्प मूल्य में सुलभ रोटी में उसकी राजनीति का सर्वोच्च नियामक सूत्र मिल गया । वह प्रथम मुसलमान शासक था जो धर्म-विहित शासन पद्धति के समर्थकों की कट्टरता की अवहेलना करने का साहस कर सका और हेवेल महोदय ने ठोक विवेचन किया है कि यद्यपि उसके व्यक्तित्व में निरंकुश तुर्क- शासकों को सो अदम्य बर्बरता छाई हुई थी, परन्तु उसकी नीति एवं व्यवहार में कुछ सीमा तक विकास की उस प्रक्रिया का भी आभास मिलता है जिसके द्वारा भारतीय मुसलमान भारत को अपनी आध्यात्मिक भूमि मानने लगे तथा जिससे भारत में इस्लाम एक महान् विश्व'घर्म की ज्योतिर्मय अभिव्यक्ति का रूप धारण कर सका।
|
ने सुलतान को अपने पुत्र शिहाबुद्दीन को सिहासन का उत्तराधिकारी मनोनीत करने के लिए प्रेरित किया। ऐसी परिस्थितियों में राजाज्ञा का निरादर होने लगा और साम्राज्य के सीमावर्ती प्रदेशों में उपद्रव होने लगे। गुजरात में विद्रोह उठ खड़ा हुआ और इसके दमन के लिए भेजे गये कमालुद्दीन गर्म का वध कर दिया गया। चित्तौड़ के राजपूतों ने दिल्ली की अधीनता ठुकरा दी और वहाँ से मुसलमान सेना को निकाल भगाया। राजा रामचन्द्र के दामाद ने देवगिरि में विद्रोह का झंडा उठाया और अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी । इन विद्रोहों के समाचारों ने सुलतान के दुःखों को और भी बढ़ा दिया । मुसलमान इतिहासकार के शब्दों में, "हमेशा की तरह ऐश्वर्य अस्थायी सिद्ध हुआ और विधाता ने उसके विनाश के लिए शस्त्र खींच लिया।" अपने जीवन भर के कार्य को अपनी आँखों के सामने समाप्त होते देखकर यह शक्तिशाली शासक 'क्रोध में अपना ही मांस नोचने लगा ।' काफूर की कुमन्त्रणाओं में आकर वह अपने विश्वासी सरदारों एवं कर्मचारियों को एक एक कर दूर कर चुका था। घातक रोग से पीड़ित सुलतान अपनी सत्ता के तिरस्कार के समाचारों को पाकर द्रुत गति से मृत्यु की ओर बढ़ने लगा और दो जनवरी एक हज़ार तीन सौ सोलह ईशून्य को उसने सदा के लिए आँखें मूंद ली । उसको जाम-ए-मस्जिद के सामने कद्रवासी कर दिया गया । अलाउद्दीन के कार्यों का मूल्यांकन-अलाउद्दीन के शासन को मुसलमानशासन की निरंकुशता का चरम युग कहा जाता है। वह स्वभाव से निर्दयी एवं दुराग्रही था । उसने अपनी नीति में वाधक धर्म-सम्मत तथा परम्परागत विधि-विधानों का तिरस्कार कर दिया था। उसकी भ्रातृ-भाव अथवा रक्त-संबंध को कुछ भी चिंता न रहती थी और दण्ड देने में वह कोई भेद-भाव न रखता था । दृढ़ निश्चय, लोगों पर प्रभाव जमाने की क्षमता तथा शासन-तन्त्र को सुव्यवस्थित बनाने के कठोर संकल्प के कारण वह अपने समय की समस्याओं का समाधान करने में सफल हुआ । जो भी साधन उसको उपलब्ध हो सके उनको लेकर वह अपने लक्ष्य की ओर दृढ़तापूर्वक बढ़ता गया। उसकी द्विमुसी राजनीति में नैतिकता एवं धार्मिक यादेशों के लिए कोई स्थान न था। प्रत्येक विजय के साथ उसकी अधि कार-तृष्णा बढ़ती ही गई और वह इतना शक्तिशाली बन गया कि अल्पकाल में ही उसने उपद्रवी सामंतों का बलपूर्वक दमन कर दिया। उसमें जन्मजात सेनानायक तथा शासक के गुण विद्यमान थे -- इन गुणो का ऐसा संयोग मध्यकालीन इतिहास में दुर्लभ ही है। उसने उन संकटों को भली भांति समझ लिया था जो उस समय समाज को पीड़ित कर रहे थे और चारों सिलजी सैनिक शासन तंत्र का उद्भव और उत्कर्ष ओर विखरी शक्ति को एकत्र कर उसने जन हित के लिए प्रयास किया, यद्यपि ऐसा करने में उसका उद्देश्य अपने प्रधान लक्ष्य सैनिक गौरव एवं महत्त्व प्राप्ति को बल देना ही था, उसको अपने सैनिकों का निश्छल विश्वास प्राप्त था और इस्लाम के प्रसार में उसके उत्कट उत्साह से प्रभावित होकर उसके अनुयायी उसके झंडे के नीचे रहते हुए 'विधर्मियों से लड़ने के अमिट उत्साह से ओतप्रोत हो जाते थे । सार्वजनिक शासक को व्यवस्था में उसने बहुत सूझ-बूझ और मौलिकता का प्रदर्शन किया और अपनी व्यपार सामर्थ्य के कारण वह अति पदाधिकारियों के आचरण पर स्वयं अपनी आँख रखने में सफल हुआ । परन्तु उसके द्वारा स्थापित व्यवस्था में स्थायित्व प्रदान करनेवाले तत्त्वों का अभाव था, वह जनता की प्रारंभिक आवश्यकताओं की पूर्ति से आगे न बढ़ा, किन्तु यह उसका दोप न था, वह संकुचित प्रवृत्तियाँ जो उस काल के स्वभावानुरूप उसमें भी आ गई थीं, उसकी प्रगति में बाधक बन गईं। परन्तु बाजार का नियन्त्रण कर उसने जनता के अभावों एवं दुःखों को कम करने के लिए बहुत कुछ किया और नैपोलियन के समान अल्प मूल्य में सुलभ रोटी में उसकी राजनीति का सर्वोच्च नियामक सूत्र मिल गया । वह प्रथम मुसलमान शासक था जो धर्म-विहित शासन पद्धति के समर्थकों की कट्टरता की अवहेलना करने का साहस कर सका और हेवेल महोदय ने ठोक विवेचन किया है कि यद्यपि उसके व्यक्तित्व में निरंकुश तुर्क- शासकों को सो अदम्य बर्बरता छाई हुई थी, परन्तु उसकी नीति एवं व्यवहार में कुछ सीमा तक विकास की उस प्रक्रिया का भी आभास मिलता है जिसके द्वारा भारतीय मुसलमान भारत को अपनी आध्यात्मिक भूमि मानने लगे तथा जिससे भारत में इस्लाम एक महान् विश्व'घर्म की ज्योतिर्मय अभिव्यक्ति का रूप धारण कर सका।
|
ईरान इस समय कई तरह की ऐसी चुनौतियों से जूझ रहा है जो पर्यावरण से जुड़ी हैं. इनमें बढ़ती गर्मी, प्रदूषण, बाढ़ और झीलों का सूख जाना शामिल है. ईरान का खुजेस्तान प्रांत जहां पर तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, वहां पर पानी की कमी से हाल बेहाल हैं.
ईरान दुनिया का वो देश है जो अमेरिका से लेकर भारत तक को तेल की सप्लाई करता है. यहां तेल के कुंए तो भरे हुए हैं मगर पानी के कुंए सूखते जा रहे हैं. जो लोग कहते थे कि दुनिया में तीसरा युद्ध पानी के लिए होगा, ईरान में अब यह बात सच होने लगी है. यहां पर पानी का संकट इतना बढ़ गया है कि लोग विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं और पानी के लिए गोलियां खाने को मजबूर हैं. जानिए ईरान का यह संकट क्यों बाकी देशों के लिए डरावना है और क्यों यह देश इतने बड़े संकट की तरफ बढ़ चला है.
ईरान में विशेषज्ञों ने पिछले कई सालों से दिन पर दिन खराब होती स्थिति की तरफ ध्यान दिलाया था. इस वर्ष अप्रैल में ईरान के मौसम वैज्ञानिकों ने कहा था कि देश में असाधारण स्तर का सूखा पड़ने और बारिश में भयंकर कमी होने वाली है. ईरान का खुजेस्तान प्रांत जहां पर तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, वहां पर पानी की कमी से हाल बेहाल हैं. यहां पर पानी की कमी के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
खुजेस्तान प्रांत में काफी लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ है. हालात इतने बिगड़ गए कि यहां कि नागरिक विरोध प्रदर्शन के लिए उतर आए और नारे लगाने लगे 'हम प्यासे हैं.' अमेरिका की स्टुटगार्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की मानें तो खुजेस्तान में कभी पानी की जरा भी कमी नहीं थी. इसकी वजह थी यहां की करुन नदी जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था, मगर अब यह नदी सूखती जा रही है.
सैटेलाइट तस्वीरों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में नदी में पानी का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है. साल 2019 में जब बाढ़ आई थी तो इसके पानी में तेजी से इजाफा हुआ था. ईरान के कई बड़े बांधों में अभी पानी काफी कम है और लगातार पानी छोड़ने की मांग उठ रही है ताकि धान उगाने वाले किसानों और जानवर पालने वाले लोगों की मुश्किलें हल की जा सकें.
ईरान इस समय कई तरह की ऐसी चुनौतियों से जूझ रहा है जो पर्यावरण से जुड़ी हैं. इनमें बढ़ती गर्मी, प्रदूषण, बाढ़ और झीलों का सूख जाना शामिल है. ईरान की ऊर्जा मंत्रालय की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, ईरान की मुख्य नदी बेसिन में सितंबर 2020 और जुलाई 2021 के बीच हुई बारिश इसी दौरान पिछले साल हुई बारिश के मुकाबले में काफी कम थी.
इन आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च में हुई बारिश की पिछले 40 सालों के औसत से तुलना की गई है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया अरविन के सेंटर फोर हाइड्रोमेट्रोलॉजी के अनुसार, साल 2021 के पहले तीन महीने उस औसत से काफी कम थे.
ईरान में साल 1983 के बाद इस साल का जनवरी महीना सबसे सूखा था. इसके बाद मार्च में भी यही हालात रहे. पिछले वर्ष नवंबर में थोड़ी बरसात हुई लेकिन अक्टूबर बीते 40 सालों में सबसे अधिक सूखा रहा. यूनाइटेड नेशंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अनाज की एक-तिहाई खेती की भूमि के लिए सिंचाई की जरूरत है. इसलिए बारिश न होना महंगा साबित हो सकता है.
येल यूनिवर्सिटी में काम कर रहे और ईरानी पर्यावरण विभाग के पूर्व उप-प्रमुख कावेह मदनी ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि यहां पर जलवायु परिवर्तन और सूखा, पानी की कमी की सबसे बड़ी वजह है. मगर यह समस्या दशकों से जड़ें जमा रही थीं, जिनमें बुरा प्रबंधन, खराब पर्यावरण व्यवस्था, दूरदर्शिता की कमी और पहले से इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं होना शामिल है. साल 2015 में एक पर्यावरण विशेषज्ञ ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने पानी के संकट का हल नहीं तलाशा तो फिर लाखों लोग देश को छोड़कर जा सकते हैं.
|
ईरान इस समय कई तरह की ऐसी चुनौतियों से जूझ रहा है जो पर्यावरण से जुड़ी हैं. इनमें बढ़ती गर्मी, प्रदूषण, बाढ़ और झीलों का सूख जाना शामिल है. ईरान का खुजेस्तान प्रांत जहां पर तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, वहां पर पानी की कमी से हाल बेहाल हैं. ईरान दुनिया का वो देश है जो अमेरिका से लेकर भारत तक को तेल की सप्लाई करता है. यहां तेल के कुंए तो भरे हुए हैं मगर पानी के कुंए सूखते जा रहे हैं. जो लोग कहते थे कि दुनिया में तीसरा युद्ध पानी के लिए होगा, ईरान में अब यह बात सच होने लगी है. यहां पर पानी का संकट इतना बढ़ गया है कि लोग विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं और पानी के लिए गोलियां खाने को मजबूर हैं. जानिए ईरान का यह संकट क्यों बाकी देशों के लिए डरावना है और क्यों यह देश इतने बड़े संकट की तरफ बढ़ चला है. ईरान में विशेषज्ञों ने पिछले कई सालों से दिन पर दिन खराब होती स्थिति की तरफ ध्यान दिलाया था. इस वर्ष अप्रैल में ईरान के मौसम वैज्ञानिकों ने कहा था कि देश में असाधारण स्तर का सूखा पड़ने और बारिश में भयंकर कमी होने वाली है. ईरान का खुजेस्तान प्रांत जहां पर तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, वहां पर पानी की कमी से हाल बेहाल हैं. यहां पर पानी की कमी के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं. खुजेस्तान प्रांत में काफी लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ है. हालात इतने बिगड़ गए कि यहां कि नागरिक विरोध प्रदर्शन के लिए उतर आए और नारे लगाने लगे 'हम प्यासे हैं.' अमेरिका की स्टुटगार्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की मानें तो खुजेस्तान में कभी पानी की जरा भी कमी नहीं थी. इसकी वजह थी यहां की करुन नदी जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था, मगर अब यह नदी सूखती जा रही है. सैटेलाइट तस्वीरों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में नदी में पानी का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है. साल दो हज़ार उन्नीस में जब बाढ़ आई थी तो इसके पानी में तेजी से इजाफा हुआ था. ईरान के कई बड़े बांधों में अभी पानी काफी कम है और लगातार पानी छोड़ने की मांग उठ रही है ताकि धान उगाने वाले किसानों और जानवर पालने वाले लोगों की मुश्किलें हल की जा सकें. ईरान इस समय कई तरह की ऐसी चुनौतियों से जूझ रहा है जो पर्यावरण से जुड़ी हैं. इनमें बढ़ती गर्मी, प्रदूषण, बाढ़ और झीलों का सूख जाना शामिल है. ईरान की ऊर्जा मंत्रालय की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, ईरान की मुख्य नदी बेसिन में सितंबर दो हज़ार बीस और जुलाई दो हज़ार इक्कीस के बीच हुई बारिश इसी दौरान पिछले साल हुई बारिश के मुकाबले में काफी कम थी. इन आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च में हुई बारिश की पिछले चालीस सालों के औसत से तुलना की गई है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया अरविन के सेंटर फोर हाइड्रोमेट्रोलॉजी के अनुसार, साल दो हज़ार इक्कीस के पहले तीन महीने उस औसत से काफी कम थे. ईरान में साल एक हज़ार नौ सौ तिरासी के बाद इस साल का जनवरी महीना सबसे सूखा था. इसके बाद मार्च में भी यही हालात रहे. पिछले वर्ष नवंबर में थोड़ी बरसात हुई लेकिन अक्टूबर बीते चालीस सालों में सबसे अधिक सूखा रहा. यूनाइटेड नेशंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अनाज की एक-तिहाई खेती की भूमि के लिए सिंचाई की जरूरत है. इसलिए बारिश न होना महंगा साबित हो सकता है. येल यूनिवर्सिटी में काम कर रहे और ईरानी पर्यावरण विभाग के पूर्व उप-प्रमुख कावेह मदनी ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि यहां पर जलवायु परिवर्तन और सूखा, पानी की कमी की सबसे बड़ी वजह है. मगर यह समस्या दशकों से जड़ें जमा रही थीं, जिनमें बुरा प्रबंधन, खराब पर्यावरण व्यवस्था, दूरदर्शिता की कमी और पहले से इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं होना शामिल है. साल दो हज़ार पंद्रह में एक पर्यावरण विशेषज्ञ ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने पानी के संकट का हल नहीं तलाशा तो फिर लाखों लोग देश को छोड़कर जा सकते हैं.
|
वित्तीय अनियमितता के आरोप में गौचर नगर पालिका, वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश!
वित्तीय अनियमितता के आरोप में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से गौचर नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, शासन स्तर पर अभी तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। यही नहीं संबंधित अधिकारी भी इस संबंध में कुछ बताने से कतरा रहे हैं, जबकि जांच टीम की ओर से अभी रिपोर्ट नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है।
देहरादूनः वित्तीय अनियमितता के आरोप में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से गौचर नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, शासन स्तर पर अभी तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। यही नहीं संबंधित अधिकारी भी इस संबंध में कुछ बताने से कतरा रहे हैं, जबकि जांच टीम की ओर से अभी रिपोर्ट नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा है कि मेरे संज्ञान में वित्तीय अनियमितता की बात आई तो जिलाधिकारी चमोली से मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में पाया कि पालिका अध्यक्ष ने टेण्डरों में मानकों की अनदेखी की और अपने चेहतों को काम दिए गए। यही नहीं कार्य की गुणवत्ता भी निम्न श्रेणी की पाई गई।
नगर पालिका गौचर के अध्यक्ष मुकेश नेगी का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, आदेश मिलने पर कोर्ट की शरण ली जाएगी। जानकारी के अनुसार पालिकाध्यक्ष के विरुद्ध एक शिकायत शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से की गई थी। मंत्री का कहना है कि जांच जिलाधिकारी चमोली से कराई गई। जबकि कहा ये भी जा रहा है कि मंत्री के आदेश पर पालिका द्वारा प्रीक्योरमेंट एक्ट के तहत किए कार्य की जांच लोनिवि गौचर को सौंपी गई है और लोनिवि व तहसील प्रशासन के स्तर पर गतिमान है। लेकिन इस बीच पालिका अध्यक्ष के अधिकार सीज करने की बात आई है। हालांकि इस संबंध में कोई भी अधिकारी कहने से बच रहा है।
शहरी विकास विभाग के अपर सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है कि फाइल ऊपरी स्तर पर गई हुई है। इस मामले में बताना कुछ भी संभव नहीं है। डीएम चमोली आशीष जोशी ने भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। नगर पालिका गौचर के ईओ राधेश्याम छाछर ने भी अनभिज्ञता जाहिर की है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता केएस राणा के अनुसार अभी तक शिकायत के आधार पर की गई जांच में कुछ भी गलत नहीं पाया गया है। तहसीलदार की रिपोर्ट आने के बाद ही जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
|
वित्तीय अनियमितता के आरोप में गौचर नगर पालिका, वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश! वित्तीय अनियमितता के आरोप में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से गौचर नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, शासन स्तर पर अभी तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। यही नहीं संबंधित अधिकारी भी इस संबंध में कुछ बताने से कतरा रहे हैं, जबकि जांच टीम की ओर से अभी रिपोर्ट नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है। देहरादूनः वित्तीय अनियमितता के आरोप में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से गौचर नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज करने के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, शासन स्तर पर अभी तक इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। यही नहीं संबंधित अधिकारी भी इस संबंध में कुछ बताने से कतरा रहे हैं, जबकि जांच टीम की ओर से अभी रिपोर्ट नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा है कि मेरे संज्ञान में वित्तीय अनियमितता की बात आई तो जिलाधिकारी चमोली से मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में पाया कि पालिका अध्यक्ष ने टेण्डरों में मानकों की अनदेखी की और अपने चेहतों को काम दिए गए। यही नहीं कार्य की गुणवत्ता भी निम्न श्रेणी की पाई गई। नगर पालिका गौचर के अध्यक्ष मुकेश नेगी का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, आदेश मिलने पर कोर्ट की शरण ली जाएगी। जानकारी के अनुसार पालिकाध्यक्ष के विरुद्ध एक शिकायत शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से की गई थी। मंत्री का कहना है कि जांच जिलाधिकारी चमोली से कराई गई। जबकि कहा ये भी जा रहा है कि मंत्री के आदेश पर पालिका द्वारा प्रीक्योरमेंट एक्ट के तहत किए कार्य की जांच लोनिवि गौचर को सौंपी गई है और लोनिवि व तहसील प्रशासन के स्तर पर गतिमान है। लेकिन इस बीच पालिका अध्यक्ष के अधिकार सीज करने की बात आई है। हालांकि इस संबंध में कोई भी अधिकारी कहने से बच रहा है। शहरी विकास विभाग के अपर सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है कि फाइल ऊपरी स्तर पर गई हुई है। इस मामले में बताना कुछ भी संभव नहीं है। डीएम चमोली आशीष जोशी ने भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। नगर पालिका गौचर के ईओ राधेश्याम छाछर ने भी अनभिज्ञता जाहिर की है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता केएस राणा के अनुसार अभी तक शिकायत के आधार पर की गई जांच में कुछ भी गलत नहीं पाया गया है। तहसीलदार की रिपोर्ट आने के बाद ही जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
|
बिग बॉस के सीजन 11 में इस सप्ताह आउट हुई अर्शी खान दो साल पहले अचानक सुर्खियों में आई थी, जब उसने राधे मां पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दे दी थी। अर्शी का आरोप था कि राधे मां का बिजनेस हेड उन्हें कई बार सेक्स रैकेट में शामिल होने का ऑफर दे चुका है।
अरशी खाने ने पुलिस में दी शिकायत में कहा था कि राधे मां की ओर से उसे फोन पर धमकी मिल रही है। उसकी जान का खतरा है। अरशी ने खाने पुलिस को दी शिकायत में यह भी कहा राधे मां वेश्यावृत्ति का धंधा चलाती है। उसने कहा कि राधे मां के एक एजेंट ने उससे संपर्क कर काम दिलाने की बात कही है।
गौरतलब है कि अर्शी खान अफगानिस्तान में पैदा हुईं। चार साल की उम्र में वह भारत आईं। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई भोपाल में पूरी की। इसके बाद अभिनय में कैरियर बनाने मुंबई चली गईं। मुंबई में समय-समय पर उन्हें कई तरह के काम मिलते रहे। भोपाल के नामी लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
फतवे के विरोध में आर्शी ने विवादित ट्वीट किया था। उसने लिखा था, 'मैं शाहिद अफ्रीदी के साथ सो चुकी हूं, मेरे लिए किसी के साथ हमविस्तर होने के लिए मीडिया की अनुमति लेना जरूरी नहीं है। जबकि लखनऊ में एक भोजपुरी फिल्म प्रोड्यूसर को थप्पड़ भी मार चुकी हैं। प्रोड्यूसर उसे गलत तरीके से छुने की कोशिश कर रहा था।
|
बिग बॉस के सीजन ग्यारह में इस सप्ताह आउट हुई अर्शी खान दो साल पहले अचानक सुर्खियों में आई थी, जब उसने राधे मां पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दे दी थी। अर्शी का आरोप था कि राधे मां का बिजनेस हेड उन्हें कई बार सेक्स रैकेट में शामिल होने का ऑफर दे चुका है। अरशी खाने ने पुलिस में दी शिकायत में कहा था कि राधे मां की ओर से उसे फोन पर धमकी मिल रही है। उसकी जान का खतरा है। अरशी ने खाने पुलिस को दी शिकायत में यह भी कहा राधे मां वेश्यावृत्ति का धंधा चलाती है। उसने कहा कि राधे मां के एक एजेंट ने उससे संपर्क कर काम दिलाने की बात कही है। गौरतलब है कि अर्शी खान अफगानिस्तान में पैदा हुईं। चार साल की उम्र में वह भारत आईं। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई भोपाल में पूरी की। इसके बाद अभिनय में कैरियर बनाने मुंबई चली गईं। मुंबई में समय-समय पर उन्हें कई तरह के काम मिलते रहे। भोपाल के नामी लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। फतवे के विरोध में आर्शी ने विवादित ट्वीट किया था। उसने लिखा था, 'मैं शाहिद अफ्रीदी के साथ सो चुकी हूं, मेरे लिए किसी के साथ हमविस्तर होने के लिए मीडिया की अनुमति लेना जरूरी नहीं है। जबकि लखनऊ में एक भोजपुरी फिल्म प्रोड्यूसर को थप्पड़ भी मार चुकी हैं। प्रोड्यूसर उसे गलत तरीके से छुने की कोशिश कर रहा था।
|
नई दिल्लीः एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि आईटी मंत्रालय ने अपनी वास्तविकता साबित करने के लिए प्रतिबंधित वेबसाइटों और ऐप्स को 48 घंटे का समय दिया है।
मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है क्योंकि उनके व्यवसाय वास्तविक नहीं थे।
"अगर वे वास्तविक थे तो कोई प्रतिबंध क्यों होगा? उन पर कार्रवाई की गई है, "मंत्रालय के अधिकारी ने कहा।
सरकार ने पिछले हफ्ते सट्टेबाजी, जुआ और अनधिकृत ऋण सेवाओं में शामिल होने के लिए चीनी सहित विदेशी संस्थाओं द्वारा संचालित 232 ऐप को ब्लॉक करने का आदेश दिया था।
"उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए नियम के तहत 48 घंटे का समय दिया गया है। उनके प्रेजेंटेशन के आधार पर फैसला लिया जाएगा। यह अभी चल रहा है, "एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।
फिनटेक फर्म लेज़ीपे, इंडियाबुल्स होम लोन और किश्त अवरुद्ध वेबसाइटों की सूची में शामिल हैं।
सूची के अनुसार, MeitY ने Lazypay. in को ब्लॉक करने के आदेश जारी किए, जो डच निवेश फर्म Prosus की सहायक कंपनी है।
वेबसाइट www. indiabullshomeloans. com हाउसिंग फाइनेंस कंपनी इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा संचालित है, जबकि Kissht. com आरबीआई-पंजीकृत एनबीएफसी ONEMi टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित है।
ब्लॉक सूची में शामिल अन्य वेबसाइटों में buddyloan. com, Cashtm. in, kreditbee. en. aptoide. com, Faircent. com, true-balance. en. uptodown. com, और mpokket. en. aptoide. com शामिल हैं।
फिनटेक फर्म mPokket ने कहा कि इसका प्रतिरूपण करने वाले एक ऐप को सरकार द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है और इसका ब्लॉक किए गए प्लेटफॉर्म से कोई संबंध नहीं है।
"इस सप्ताह MeiTY द्वारा जारी सूची में डोमेन, mpokket. en. aptoide. com, प्रतिरूपण का एक स्पष्ट उदाहरण है और इसका mPokket के साथ कोई संबंध नहीं है। Aptoide एक तृतीय-पक्ष ऐप स्टोर है जिसके साथ हमारी कोई आधिकारिक या अनौपचारिक साझेदारी नहीं है," mPokket ने एक बयान में कहा।
|
नई दिल्लीः एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि आईटी मंत्रालय ने अपनी वास्तविकता साबित करने के लिए प्रतिबंधित वेबसाइटों और ऐप्स को अड़तालीस घंटाटे का समय दिया है। मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है क्योंकि उनके व्यवसाय वास्तविक नहीं थे। "अगर वे वास्तविक थे तो कोई प्रतिबंध क्यों होगा? उन पर कार्रवाई की गई है, "मंत्रालय के अधिकारी ने कहा। सरकार ने पिछले हफ्ते सट्टेबाजी, जुआ और अनधिकृत ऋण सेवाओं में शामिल होने के लिए चीनी सहित विदेशी संस्थाओं द्वारा संचालित दो सौ बत्तीस ऐप को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। "उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए नियम के तहत अड़तालीस घंटाटे का समय दिया गया है। उनके प्रेजेंटेशन के आधार पर फैसला लिया जाएगा। यह अभी चल रहा है, "एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। फिनटेक फर्म लेज़ीपे, इंडियाबुल्स होम लोन और किश्त अवरुद्ध वेबसाइटों की सूची में शामिल हैं। सूची के अनुसार, MeitY ने Lazypay. in को ब्लॉक करने के आदेश जारी किए, जो डच निवेश फर्म Prosus की सहायक कंपनी है। वेबसाइट www. indiabullshomeloans. com हाउसिंग फाइनेंस कंपनी इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा संचालित है, जबकि Kissht. com आरबीआई-पंजीकृत एनबीएफसी ONEMi टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित है। ब्लॉक सूची में शामिल अन्य वेबसाइटों में buddyloan. com, Cashtm. in, kreditbee. en. aptoide. com, Faircent. com, true-balance. en. uptodown. com, और mpokket. en. aptoide. com शामिल हैं। फिनटेक फर्म mPokket ने कहा कि इसका प्रतिरूपण करने वाले एक ऐप को सरकार द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है और इसका ब्लॉक किए गए प्लेटफॉर्म से कोई संबंध नहीं है। "इस सप्ताह MeiTY द्वारा जारी सूची में डोमेन, mpokket. en. aptoide. com, प्रतिरूपण का एक स्पष्ट उदाहरण है और इसका mPokket के साथ कोई संबंध नहीं है। Aptoide एक तृतीय-पक्ष ऐप स्टोर है जिसके साथ हमारी कोई आधिकारिक या अनौपचारिक साझेदारी नहीं है," mPokket ने एक बयान में कहा।
|
रिचर्ड एक डिप्टी कमिश्नर है। वह तमस का एक पात्र है। साहनी जी ने रिचर्ड के माध्यम से यह बताया कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जो समाज में भ्रष्टाचार फैला रहे हैं। आजादी से पूर्व अंग्रेजो की एक स्पष्ट नीति थी कि पहले हिन्दुस्तान के लोग देश के नाम पर एक जुट होकर उनसे लड़ने के लिए आमादा हो, उन्हें आपस में ही लड़ा भिड़ाकर उनकी जुझारु शक्तियों को कुंठित कर दिया जाए और जब लडभिड़ कर वे थक जाएँ तो उन्हें शान्ति और व्यवस्था के नाम पर अपनी व्यवस्थापक भूमिका के चमत्कार से चकाचौंध कर दिया जाए। बख्शीजी से जब यह स्थिति नहीं देखी गई, तब उन्होंने कह ही दिया"फिसाद करवानेवाला भी अंग्रेज, फिसाद रोकनेवाला भी अंग्रेज, भूखों मारनेवाला भी अंग्रेज, रोटी देनेवाला भी अंग्रेज, घर से बेघर करने वाला भी अंग्रेज, घरों में बसानेवाला भी अंग्रेज।"७
तमस में ऐसे अनेक पात्र हैं जो देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं जैसे बख्शीजी, जरनैल आदि कुछ ऐसे स्वार्थी पात्र भी हैं जो ऊपर से तो देश के शुभ चिंतक दिखते हैं, लेकिन जब देश पर विपत्ति के बादल मंडराते हैं, तब वह चूहे की तरह भाग जाते हैं जैसे मेहता शंकर आदि । ऐसे ही चित्र मय्यादास की माड़ी में देखने को मिलते है। मच्यादास की साड़ी में सिक्ख अमलदारी के उखड़ते हुए पाँव और अंग्रेजी हुकूमत की बढ़ती शक्ति का चित्रण है। भीष्म जी ने ऐसे कई चित्र उभारे हैं, जो इस शक्ति के विरोध में देश की खातिर अपने सिद्धान्तों पर दृढ़ता से टिके हैं, जो जबकि कुछ टूटकर पाला बदल लेते हैं। इन दोनों के अलावा भी कुछ ऐसे है जो शुरू से इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि इस बदलते परिवेश में हमारी भूमिका क्या होगी? भले ही राजा अमीरचंद और मय्यादास अस्तांचल के सूरज हो, लेकिन अपनी निष्टा और स्वाधीनता के लिए भूलकर भी पाला नहीं बदलते। जबकि मलिक मंसाराम समय के साथ विदेशी सामानों का एजेंट बन जाता है। दीवान धनपत सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए खालसा फौज के पतियों की तरह शुरु से अंग्रेजों के साथ मजबूत करता है, परन्तु वहीं कुंतो का हीरालाल सब कुछ लुटाकर देश की आज़ादी प्राप्त करता है। वह साम्राज्यवादी ताकतों के सामने प्रताडनाओं के बाबजूद नहीं झुकता है। इसी तरह विकट स्थितियों से घिरा मय्यादास की गाड़ी का लेखराज दीवान घनपत के सामने नहीं झुकता । अंततः उसे धनपत के इशारे पर अंग्रेजी हुकूमत लापता
'नौसिखुआ' एक ऐसे नवयुवक सिक्ख की कहानी है। जिसने अपने गुरुमहाराज गुरु तेग बहादुर के प्रति गुरुभक्ति दिखाई है। स्वतन्त्रता के बाद लिखी गई ऐसी अनेक कहानियाँ जैसे 'अमृतसर आ गया' वाङ्चू जिसमें राजनैतिक परिदृश्य के चित्र देखने को मिलते हैं।
भीष्मजी ने अपने नाट्य साहित्य में राजनीतिक परिदृश्य का सुन्दर चित्र उभारा है। उन्होंने समाज के सामने ऐसे दृश्य उपस्थित किए कि एक राजा अपने यश की खातिर बेटी का परित्याग कर उसे पर पुरुष के हाथ में सौंप देता है जिसका चित्रण उनके 'माधवी' नाटक के राजा ययाति में देखने को मिलता है। उन्होंने ऐसे अत्याचारी राजाओं का वर्णन किया जो समाज के श्रेष्ठ पुरुषों को बिना कसूर के दण्ड देते हैं। कभी वे उनकी आँखें निकलवा देते तो कभी उसे बाहर कर देते हैं।
'हानूश' नाटक का नायक हानूश' और 'कबिरा खड़ा बजार में' कबीर ऐसे प्रताड़ित पात्र हैं। समाज में जातीय विद्वेष हर जगह देखने को मिलता है। श्रेष्ठ जाति के लोग छोटी जाति के लोगों का
|
रिचर्ड एक डिप्टी कमिश्नर है। वह तमस का एक पात्र है। साहनी जी ने रिचर्ड के माध्यम से यह बताया कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जो समाज में भ्रष्टाचार फैला रहे हैं। आजादी से पूर्व अंग्रेजो की एक स्पष्ट नीति थी कि पहले हिन्दुस्तान के लोग देश के नाम पर एक जुट होकर उनसे लड़ने के लिए आमादा हो, उन्हें आपस में ही लड़ा भिड़ाकर उनकी जुझारु शक्तियों को कुंठित कर दिया जाए और जब लडभिड़ कर वे थक जाएँ तो उन्हें शान्ति और व्यवस्था के नाम पर अपनी व्यवस्थापक भूमिका के चमत्कार से चकाचौंध कर दिया जाए। बख्शीजी से जब यह स्थिति नहीं देखी गई, तब उन्होंने कह ही दिया"फिसाद करवानेवाला भी अंग्रेज, फिसाद रोकनेवाला भी अंग्रेज, भूखों मारनेवाला भी अंग्रेज, रोटी देनेवाला भी अंग्रेज, घर से बेघर करने वाला भी अंग्रेज, घरों में बसानेवाला भी अंग्रेज।"सात तमस में ऐसे अनेक पात्र हैं जो देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं जैसे बख्शीजी, जरनैल आदि कुछ ऐसे स्वार्थी पात्र भी हैं जो ऊपर से तो देश के शुभ चिंतक दिखते हैं, लेकिन जब देश पर विपत्ति के बादल मंडराते हैं, तब वह चूहे की तरह भाग जाते हैं जैसे मेहता शंकर आदि । ऐसे ही चित्र मय्यादास की माड़ी में देखने को मिलते है। मच्यादास की साड़ी में सिक्ख अमलदारी के उखड़ते हुए पाँव और अंग्रेजी हुकूमत की बढ़ती शक्ति का चित्रण है। भीष्म जी ने ऐसे कई चित्र उभारे हैं, जो इस शक्ति के विरोध में देश की खातिर अपने सिद्धान्तों पर दृढ़ता से टिके हैं, जो जबकि कुछ टूटकर पाला बदल लेते हैं। इन दोनों के अलावा भी कुछ ऐसे है जो शुरू से इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि इस बदलते परिवेश में हमारी भूमिका क्या होगी? भले ही राजा अमीरचंद और मय्यादास अस्तांचल के सूरज हो, लेकिन अपनी निष्टा और स्वाधीनता के लिए भूलकर भी पाला नहीं बदलते। जबकि मलिक मंसाराम समय के साथ विदेशी सामानों का एजेंट बन जाता है। दीवान धनपत सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए खालसा फौज के पतियों की तरह शुरु से अंग्रेजों के साथ मजबूत करता है, परन्तु वहीं कुंतो का हीरालाल सब कुछ लुटाकर देश की आज़ादी प्राप्त करता है। वह साम्राज्यवादी ताकतों के सामने प्रताडनाओं के बाबजूद नहीं झुकता है। इसी तरह विकट स्थितियों से घिरा मय्यादास की गाड़ी का लेखराज दीवान घनपत के सामने नहीं झुकता । अंततः उसे धनपत के इशारे पर अंग्रेजी हुकूमत लापता 'नौसिखुआ' एक ऐसे नवयुवक सिक्ख की कहानी है। जिसने अपने गुरुमहाराज गुरु तेग बहादुर के प्रति गुरुभक्ति दिखाई है। स्वतन्त्रता के बाद लिखी गई ऐसी अनेक कहानियाँ जैसे 'अमृतसर आ गया' वाङ्चू जिसमें राजनैतिक परिदृश्य के चित्र देखने को मिलते हैं। भीष्मजी ने अपने नाट्य साहित्य में राजनीतिक परिदृश्य का सुन्दर चित्र उभारा है। उन्होंने समाज के सामने ऐसे दृश्य उपस्थित किए कि एक राजा अपने यश की खातिर बेटी का परित्याग कर उसे पर पुरुष के हाथ में सौंप देता है जिसका चित्रण उनके 'माधवी' नाटक के राजा ययाति में देखने को मिलता है। उन्होंने ऐसे अत्याचारी राजाओं का वर्णन किया जो समाज के श्रेष्ठ पुरुषों को बिना कसूर के दण्ड देते हैं। कभी वे उनकी आँखें निकलवा देते तो कभी उसे बाहर कर देते हैं। 'हानूश' नाटक का नायक हानूश' और 'कबिरा खड़ा बजार में' कबीर ऐसे प्रताड़ित पात्र हैं। समाज में जातीय विद्वेष हर जगह देखने को मिलता है। श्रेष्ठ जाति के लोग छोटी जाति के लोगों का
|
Posted On:
पिछले पांच वर्षों के दौरान सभी श्रेणियों के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में भी 42 % वृद्धि हुई है जो आज तक सर्वाधिक है। केन्द्रीय वित्त, कॉरपोरेट मामले, रेल और कोयला मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज संसद में अंतरिम बजट 2019-20 पेश करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने की प्रकिया ने रोजगार के अवसरों का विस्तार किया है जो कि ईपीएफओ की सदस्यता में भी दिखता है। दो सालों में लगभग 2 करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ है जिससे अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने का संकेत मिलता है।
श्री पीयूष गोयल ने कहा कि 7 वें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया है और न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को और उदार किया गया है। सरकार ने एनपीएस में अपने योगदान को बढ़ाकर 10% से 14% कर दिया है। ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को रुपये 10 लाख से बढ़ाकर रुपये 20 लाख किया गया है। ईएसआईसी की सुरक्षा पात्रता सीमा भी रुपये 15,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर रुपये 21,000 प्रतिमाह कर दी गई है। सभी श्रमिकों के न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह 1,000 रुपये तय की गई है। सर्विस के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में ईपीएफओ द्वारा राशि 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये तक सुनिश्चित की गई है। आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के कार्मिकों के मानदेय में लगभग 50 % की वृद्धि हुई है।
|
Posted On: पिछले पांच वर्षों के दौरान सभी श्रेणियों के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में भी बयालीस % वृद्धि हुई है जो आज तक सर्वाधिक है। केन्द्रीय वित्त, कॉरपोरेट मामले, रेल और कोयला मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज संसद में अंतरिम बजट दो हज़ार उन्नीस-बीस पेश करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने की प्रकिया ने रोजगार के अवसरों का विस्तार किया है जो कि ईपीएफओ की सदस्यता में भी दिखता है। दो सालों में लगभग दो करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ है जिससे अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने का संकेत मिलता है। श्री पीयूष गोयल ने कहा कि सात वें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया है और न्यू पेंशन स्कीम को और उदार किया गया है। सरकार ने एनपीएस में अपने योगदान को बढ़ाकर दस% से चौदह% कर दिया है। ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को दस रुपया लाख से बढ़ाकर बीस रुपया लाख किया गया है। ईएसआईसी की सुरक्षा पात्रता सीमा भी पंद्रह रुपया,शून्य प्रतिमाह से बढ़ाकर इक्कीस रुपया,शून्य प्रतिमाह कर दी गई है। सभी श्रमिकों के न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह एक,शून्य रुपयापये तय की गई है। सर्विस के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में ईपीएफओ द्वारा राशि दो.पाँच लाख रुपये से बढ़ाकर छः लाख रुपये तक सुनिश्चित की गई है। आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के कार्मिकों के मानदेय में लगभग पचास % की वृद्धि हुई है।
|
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लोगों को बड़ी राहत देते हुए लंबे समय से लंबित जालंधर-आदमपुर-होशियारपुर सड़क का निर्माण कार्य आज शुरू कर दिया और इस परियोजना की लागत 13. 74 करोड़ रुपये होगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के लोगों के लिए आज का दिन 'ऐतिहासिक दिन' है क्योंकि इस परियोजना के पूरा होने से लोगों को काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को पूरा करना राज्य सरकार की मुख्य प्राथमिकता है क्योंकि इससे जालंधर शहर से होशियारपुर जाने वाले लोगों और माता चिंतापूर्णी के पवित्र तीर्थस्थल के दर्शन करने जाने वालों और अन्य स्थानों पर जाने वाले राहगीरों को बड़ी सुविधा मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में व्यापार और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस सड़क का शुरू होना राज्य सरकार की जनता से किए गए वादों को पूरा करने के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि जालंधर से नए सांसद सुशील कुमार रिंकू का शपथ ग्रहण होना बाकी है, लेकिन सड़क का काम शुरू हो चुका है। भगवंत मान ने कहा कि सितंबर तक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए अपना वादा पूरा किया है।
|
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लोगों को बड़ी राहत देते हुए लंबे समय से लंबित जालंधर-आदमपुर-होशियारपुर सड़क का निर्माण कार्य आज शुरू कर दिया और इस परियोजना की लागत तेरह. चौहत्तर करोड़ रुपये होगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के लोगों के लिए आज का दिन 'ऐतिहासिक दिन' है क्योंकि इस परियोजना के पूरा होने से लोगों को काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को पूरा करना राज्य सरकार की मुख्य प्राथमिकता है क्योंकि इससे जालंधर शहर से होशियारपुर जाने वाले लोगों और माता चिंतापूर्णी के पवित्र तीर्थस्थल के दर्शन करने जाने वालों और अन्य स्थानों पर जाने वाले राहगीरों को बड़ी सुविधा मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में व्यापार और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस सड़क का शुरू होना राज्य सरकार की जनता से किए गए वादों को पूरा करने के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हालांकि जालंधर से नए सांसद सुशील कुमार रिंकू का शपथ ग्रहण होना बाकी है, लेकिन सड़क का काम शुरू हो चुका है। भगवंत मान ने कहा कि सितंबर तक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए अपना वादा पूरा किया है।
|
लिबर्टी शिप की उत्पत्ति 1 9 40 में अंग्रेजों द्वारा प्रस्तावित एक डिजाइन के लिए खोजी जा सकती है। युद्ध के नुकसान को बदलने की मांग करते हुए, ब्रिटिशों ने महासागर वर्ग के 60 स्टीमर के लिए अमेरिकी शिपयार्ड के साथ अनुबंध किए। ये स्टीमर एक साधारण डिजाइन के थे और इसमें एक कोयले से निकाले गए 2,500 अश्वशक्ति भाप इंजन भाप इंजन शामिल थे। जबकि कोयले से निकाले गए पारस्परिक भाप इंजन अप्रचलित थे, यह विश्वसनीय था और ब्रिटेन में कोयले की बड़ी आपूर्ति थी।
जबकि ब्रिटिश जहाजों का निर्माण किया जा रहा था, अमेरिकी समुद्री आयोग ने डिजाइन की जांच की और तट और गति निर्माण को कम करने के लिए बदलाव किए।
इस संशोधित डिजाइन को ईसी 2-एस-सी 1 वर्गीकृत किया गया था और इसमें तेल से निकाले गए बॉयलर शामिल थे। जहाज के पदनाम का प्रतिनिधित्व किया गयाः आपातकालीन निर्माण (ईसी), पानी की रेखा (2), भाप संचालित (एस), और डिजाइन (सी 1) पर 400 से 450 फीट की लंबाई। मूल ब्रिटिश डिजाइन में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन वेल्डेड सीम के साथ अधिकतर रिवेटिंग को प्रतिस्थापित करना था। एक नया अभ्यास, वेल्डिंग के उपयोग ने श्रम लागत में कमी आई और कम कुशल श्रमिकों की आवश्यकता थी। पांच माल ढुलाई रखने के लिए, लिबर्टी शिप का उद्देश्य 10,000 लम्बाई टन (10,200 टन) का माल लेना था। डेक घरों के बीच और पूर्व में विशेषता है, प्रत्येक जहाज में लगभग 40 नाविकों का दल था। रक्षा के लिए, प्रत्येक जहाज ने डेक हाउस के बाद एक 4 "डेक बंदूक लगाई। द्वितीय विश्व युद्ध के रूप में अतिरिक्त एंटी-एयरक्राफ्ट रक्षा को जोड़ा गया।
एक मानक डिजाइन का उपयोग कर बड़े पैमाने पर जहाजों का उत्पादन करने का प्रयास प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फिलाडेल्फिया, पीए में आपातकालीन बेड़े निगम के होग द्वीप शिपयार्ड में किया गया था। इन जहाजों के दौरान, उस संघर्ष को प्रभावित करने के लिए बहुत देर हो गई, सीखने वाले पाठों ने लिबर्टी शिप कार्यक्रम के लिए टेम्पलेट प्रदान किया।
होग आइलैंडर्स के साथ, लिबर्टी शिप्स के सादे दिखने से शुरुआत में खराब सार्वजनिक छवि हुई। इसका मुकाबला करने के लिए, समुद्री आयोग ने 27 सितंबर, 1 9 41 को "लिबर्टी फ्लीट डे" के रूप में संबोधित किया और पहले 14 जहाजों को लॉन्च किया। प्रक्षेपण समारोह में अपने भाषण में, प्रेसी। फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने पैट्रिक हेनरी के प्रसिद्ध भाषण का हवाला दिया और कहा कि जहाज यूरोप को स्वतंत्रता लाएंगे।
1 9 41 की शुरुआत में, अमेरिकी समुद्री आयोग ने लिबर्टी डिजाइन के 260 जहाजों के लिए आदेश दिया था। इनमें से 60 ब्रिटेन के लिए थे। मार्च में लैंड-लीज कार्यक्रम के कार्यान्वयन के साथ, दोगुनी से अधिक आदेश। इस निर्माण कार्यक्रम की मांगों को पूरा करने के लिए, दोनों तटों और मेक्सिको की खाड़ी में नए गज की स्थापना की गई। अगले चार वर्षों में, अमेरिकी शिपयार्ड 2,751 लिबर्टी जहाजों का उत्पादन करेंगे। सेवा में प्रवेश करने वाला पहला जहाज एसएस पैट्रिक हेनरी था जो 30 दिसंबर, 1 9 41 को पूरा हुआ था। डिजाइन का अंतिम जहाज एसएस अल्बर्ट एम बो था जो 30 अक्टूबर, 1 9 45 को पोर्टलैंड, एमई न्यू इंग्लैंड शिप बिल्डिंग में समाप्त हुआ था। हालांकि लिबर्टी जहाजों युद्ध के दौरान बनाया गया था, एक उत्तराधिकारी वर्ग, विजय जहाज, 1 9 43 में उत्पादन में प्रवेश किया।
लिबर्टी जहाजों का बहुमत (1,552) वेस्ट कोस्ट पर बने नए गज से आया और हेनरी जे द्वारा संचालित।
कैसर। बे ब्रिज और हूवर बांध के निर्माण के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है, कैसर ने नई जहाज निर्माण तकनीकों का नेतृत्व किया। रिचमंड, सीए और नॉर्थवेस्ट में तीन में चार गज की दूरी पर, कैसर ने लिबर्टी जहाजों के प्रीफैब्रिकेटिंग और बड़े पैमाने पर उत्पादन के तरीकों का विकास किया। घटक पूरे अमेरिका में बनाए गए थे और शिपयार्ड में पहुंचे जहां जहाजों को रिकॉर्ड समय में इकट्ठा किया जा सकता था। युद्ध के दौरान, एक लिबरटी शिप को कैसर यार्ड में लगभग दो सप्ताह में बनाया जा सकता था। नवंबर 1 9 42 में, कैसर के रिचमंड गज में से एक ने लिबर्टी शिप ( रॉबर्ट ई। पेरी ) को 4 दिनों में, 15 घंटे, और 2 9 मिनट प्रचार स्टंट के रूप में बनाया। राष्ट्रीय स्तर पर, औसत निर्माण समय 42 दिन था और 1 9 43 तक, तीन लिबर्टी जहाजों को हर दिन पूरा किया जा रहा था।
स्पीड जिस पर लिबर्टी जहाजों का निर्माण किया जा सकता था, अमेरिका ने जर्मन यू-नौकाओं की तुलना में तेजी से कार्गो जहाजों का निर्माण करने की अनुमति दी।
यह, यू-नौकाओं के खिलाफ सहयोगी सैन्य सफलताओं के साथ, यह सुनिश्चित किया कि यूरोप में ब्रिटेन और सहयोगी सेनाएं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अच्छी तरह से आपूर्ति की गईं। लिबर्टी जहाजों ने सभी सिनेमाघरों में भेदभाव किया। युद्ध के दौरान, अमेरिकी नौसेना सशस्त्र गार्ड द्वारा प्रदान की गई बंदूक दल के साथ, लिबर्टी शिप अमेरिकी मर्चेंट मरीन के सदस्य थे। लिबर्टी शिप की उल्लेखनीय उपलब्धियों में से 27 सितंबर, 1 9 42 को जर्मन राइडर स्टियर को डूबने वाले एसएस स्टीफन हॉपकिंस थे ।
शुरुआत में पिछले पांच सालों से डिजाइन किया गया था, कई लिबर्टी जहाजों ने 1 9 70 के दशक में समुद्री डाकू को जारी रखा। इसके अलावा, लिबर्टी कार्यक्रम में नियोजित शिप बिल्डिंग तकनीकों में से कई उद्योग भर में मानक अभ्यास बन गए हैं और आज भी इसका उपयोग किया जाता है। ग्लैमरस नहीं होने पर, लिबर्टी शिप सहयोगी युद्ध के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। मोर्चे पर शिपिंग की स्थिर धारा बनाए रखने के दौरान युद्ध की तुलना में तेज गति से मर्चेंट शिपिंग बनाने की क्षमता युद्ध जीतने की कुंजीों में से एक थी।
- लंबाईः 441 फीट 6 इंच।
- बीमः 56 फीट 10. 75 इंच।
|
लिबर्टी शिप की उत्पत्ति एक नौ चालीस में अंग्रेजों द्वारा प्रस्तावित एक डिजाइन के लिए खोजी जा सकती है। युद्ध के नुकसान को बदलने की मांग करते हुए, ब्रिटिशों ने महासागर वर्ग के साठ स्टीमर के लिए अमेरिकी शिपयार्ड के साथ अनुबंध किए। ये स्टीमर एक साधारण डिजाइन के थे और इसमें एक कोयले से निकाले गए दो,पाँच सौ अश्वशक्ति भाप इंजन भाप इंजन शामिल थे। जबकि कोयले से निकाले गए पारस्परिक भाप इंजन अप्रचलित थे, यह विश्वसनीय था और ब्रिटेन में कोयले की बड़ी आपूर्ति थी। जबकि ब्रिटिश जहाजों का निर्माण किया जा रहा था, अमेरिकी समुद्री आयोग ने डिजाइन की जांच की और तट और गति निर्माण को कम करने के लिए बदलाव किए। इस संशोधित डिजाइन को ईसी दो-एस-सी एक वर्गीकृत किया गया था और इसमें तेल से निकाले गए बॉयलर शामिल थे। जहाज के पदनाम का प्रतिनिधित्व किया गयाः आपातकालीन निर्माण , पानी की रेखा , भाप संचालित , और डिजाइन पर चार सौ से चार सौ पचास फीट की लंबाई। मूल ब्रिटिश डिजाइन में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन वेल्डेड सीम के साथ अधिकतर रिवेटिंग को प्रतिस्थापित करना था। एक नया अभ्यास, वेल्डिंग के उपयोग ने श्रम लागत में कमी आई और कम कुशल श्रमिकों की आवश्यकता थी। पांच माल ढुलाई रखने के लिए, लिबर्टी शिप का उद्देश्य दस,शून्य लम्बाई टन का माल लेना था। डेक घरों के बीच और पूर्व में विशेषता है, प्रत्येक जहाज में लगभग चालीस नाविकों का दल था। रक्षा के लिए, प्रत्येक जहाज ने डेक हाउस के बाद एक चार "डेक बंदूक लगाई। द्वितीय विश्व युद्ध के रूप में अतिरिक्त एंटी-एयरक्राफ्ट रक्षा को जोड़ा गया। एक मानक डिजाइन का उपयोग कर बड़े पैमाने पर जहाजों का उत्पादन करने का प्रयास प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फिलाडेल्फिया, पीए में आपातकालीन बेड़े निगम के होग द्वीप शिपयार्ड में किया गया था। इन जहाजों के दौरान, उस संघर्ष को प्रभावित करने के लिए बहुत देर हो गई, सीखने वाले पाठों ने लिबर्टी शिप कार्यक्रम के लिए टेम्पलेट प्रदान किया। होग आइलैंडर्स के साथ, लिबर्टी शिप्स के सादे दिखने से शुरुआत में खराब सार्वजनिक छवि हुई। इसका मुकाबला करने के लिए, समुद्री आयोग ने सत्ताईस सितंबर, एक नौ इकतालीस को "लिबर्टी फ्लीट डे" के रूप में संबोधित किया और पहले चौदह जहाजों को लॉन्च किया। प्रक्षेपण समारोह में अपने भाषण में, प्रेसी। फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने पैट्रिक हेनरी के प्रसिद्ध भाषण का हवाला दिया और कहा कि जहाज यूरोप को स्वतंत्रता लाएंगे। एक नौ इकतालीस की शुरुआत में, अमेरिकी समुद्री आयोग ने लिबर्टी डिजाइन के दो सौ साठ जहाजों के लिए आदेश दिया था। इनमें से साठ ब्रिटेन के लिए थे। मार्च में लैंड-लीज कार्यक्रम के कार्यान्वयन के साथ, दोगुनी से अधिक आदेश। इस निर्माण कार्यक्रम की मांगों को पूरा करने के लिए, दोनों तटों और मेक्सिको की खाड़ी में नए गज की स्थापना की गई। अगले चार वर्षों में, अमेरिकी शिपयार्ड दो,सात सौ इक्यावन लिबर्टी जहाजों का उत्पादन करेंगे। सेवा में प्रवेश करने वाला पहला जहाज एसएस पैट्रिक हेनरी था जो तीस दिसंबर, एक नौ इकतालीस को पूरा हुआ था। डिजाइन का अंतिम जहाज एसएस अल्बर्ट एम बो था जो तीस अक्टूबर, एक नौ पैंतालीस को पोर्टलैंड, एमई न्यू इंग्लैंड शिप बिल्डिंग में समाप्त हुआ था। हालांकि लिबर्टी जहाजों युद्ध के दौरान बनाया गया था, एक उत्तराधिकारी वर्ग, विजय जहाज, एक नौ तैंतालीस में उत्पादन में प्रवेश किया। लिबर्टी जहाजों का बहुमत वेस्ट कोस्ट पर बने नए गज से आया और हेनरी जे द्वारा संचालित। कैसर। बे ब्रिज और हूवर बांध के निर्माण के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है, कैसर ने नई जहाज निर्माण तकनीकों का नेतृत्व किया। रिचमंड, सीए और नॉर्थवेस्ट में तीन में चार गज की दूरी पर, कैसर ने लिबर्टी जहाजों के प्रीफैब्रिकेटिंग और बड़े पैमाने पर उत्पादन के तरीकों का विकास किया। घटक पूरे अमेरिका में बनाए गए थे और शिपयार्ड में पहुंचे जहां जहाजों को रिकॉर्ड समय में इकट्ठा किया जा सकता था। युद्ध के दौरान, एक लिबरटी शिप को कैसर यार्ड में लगभग दो सप्ताह में बनाया जा सकता था। नवंबर एक नौ बयालीस में, कैसर के रिचमंड गज में से एक ने लिबर्टी शिप को चार दिनों में, पंद्रह घंटाटे, और दो नौ मिनट प्रचार स्टंट के रूप में बनाया। राष्ट्रीय स्तर पर, औसत निर्माण समय बयालीस दिन था और एक नौ तैंतालीस तक, तीन लिबर्टी जहाजों को हर दिन पूरा किया जा रहा था। स्पीड जिस पर लिबर्टी जहाजों का निर्माण किया जा सकता था, अमेरिका ने जर्मन यू-नौकाओं की तुलना में तेजी से कार्गो जहाजों का निर्माण करने की अनुमति दी। यह, यू-नौकाओं के खिलाफ सहयोगी सैन्य सफलताओं के साथ, यह सुनिश्चित किया कि यूरोप में ब्रिटेन और सहयोगी सेनाएं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अच्छी तरह से आपूर्ति की गईं। लिबर्टी जहाजों ने सभी सिनेमाघरों में भेदभाव किया। युद्ध के दौरान, अमेरिकी नौसेना सशस्त्र गार्ड द्वारा प्रदान की गई बंदूक दल के साथ, लिबर्टी शिप अमेरिकी मर्चेंट मरीन के सदस्य थे। लिबर्टी शिप की उल्लेखनीय उपलब्धियों में से सत्ताईस सितंबर, एक नौ बयालीस को जर्मन राइडर स्टियर को डूबने वाले एसएस स्टीफन हॉपकिंस थे । शुरुआत में पिछले पांच सालों से डिजाइन किया गया था, कई लिबर्टी जहाजों ने एक नौ सत्तर के दशक में समुद्री डाकू को जारी रखा। इसके अलावा, लिबर्टी कार्यक्रम में नियोजित शिप बिल्डिंग तकनीकों में से कई उद्योग भर में मानक अभ्यास बन गए हैं और आज भी इसका उपयोग किया जाता है। ग्लैमरस नहीं होने पर, लिबर्टी शिप सहयोगी युद्ध के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। मोर्चे पर शिपिंग की स्थिर धारा बनाए रखने के दौरान युद्ध की तुलना में तेज गति से मर्चेंट शिपिंग बनाने की क्षमता युद्ध जीतने की कुंजीों में से एक थी। - लंबाईः चार सौ इकतालीस फीट छः इंच। - बीमः छप्पन फीट दस. पचहत्तर इंच।
|
क्या आपने कभी सोचा था कि एक संघीय कार्यक्रम या एजेंसी कैसे आ रही है? या फिर वे हर साल एक लड़ाई क्यों करते हैं कि उन्हें अपने परिचालन के लिए करदाता पैसे मिलना चाहिए?
जवाब संघीय प्राधिकरण प्रक्रिया में है।
एक प्राधिकरण को कानून के एक टुकड़े के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सरकार के अनुसार "एक या अधिक संघीय एजेंसियों या कार्यक्रमों को स्थापित या जारी रखता है"। एक प्राधिकरण बिल जो कानून बन जाता है या तो एक नई एजेंसी या प्रोग्राम बनाता है और उसके बाद करदाता पैसे द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।
एक प्राधिकरण बिल आम तौर पर सेट करता है कि उन एजेंसियों और कार्यक्रमों को कितना पैसा मिलता है, और उन्हें पैसे कैसे खर्च करना चाहिए।
प्राधिकरण बिल स्थायी और अस्थायी दोनों कार्यक्रम बना सकते हैं। स्थायी कार्यक्रमों के उदाहरण सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा हैं, जिन्हें अक्सर एंटाइटेलमेंट प्रोग्राम के रूप में जाना जाता है। अन्य कार्यक्रम जो स्थायी आधार पर सांविधिक रूप से प्रदान नहीं किए जाते हैं उन्हें विनियमन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में सालाना या हर कुछ वर्षों में वित्त पोषित किया जाता है।
इसलिए संघीय कार्यक्रमों और एजेंसियों का निर्माण प्राधिकरण प्रक्रिया के माध्यम से होता है। और उन कार्यक्रमों और एजेंसियों का अस्तित्व विनियमन प्रक्रिया के माध्यम से कायम रखा जाता है ।
प्राधिकरण प्रक्रिया और विनियमन प्रक्रिया पर नजदीकी नजर डालें।
कांग्रेस और राष्ट्रपति प्राधिकरण प्रक्रिया के माध्यम से कार्यक्रम स्थापित करते हैं। विशिष्ट विषय क्षेत्रों पर क्षेत्राधिकार के साथ कांग्रेस समितियां कानून लिखती हैं।
"प्राधिकरण" शब्द का उपयोग किया जाता है क्योंकि इस प्रकार का कानून संघीय बजट से धन के व्यय को अधिकृत करता है।
एक प्राधिकरण निर्दिष्ट कर सकता है कि किसी कार्यक्रम पर कितना पैसा खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन यह वास्तव में पैसे को अलग नहीं करता है। करदाता पैसे का आवंटन विनियमन प्रक्रिया के दौरान होता है।
कई कार्यक्रम एक निश्चित समय के लिए अधिकृत हैं। समितियों को यह निर्धारित करने से पहले कार्यक्रमों की समीक्षा करना चाहिए कि वे कितनी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और क्या उन्हें वित्त पोषण प्राप्त करना जारी रखना चाहिए।
कांग्रेस ने कभी-कभी उन्हें वित्त पोषित किए बिना कार्यक्रम बनाए हैं। सबसे उच्च प्रोफ़ाइल उदाहरणों में से एक में, जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान पारित शिक्षा बिल " नो चाइल्ड लेफ्ट बैहिंड " शिक्षा प्राधिकरण बिल था जिसने देश के स्कूलों में सुधार के लिए कई कार्यक्रम स्थापित किए। हालांकि, यह नहीं कहा गया कि संघीय सरकार निश्चित रूप से कार्यक्रमों पर पैसे खर्च करेगी।
औबर्न विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक पॉल जॉनसन लिखते हैं, "एक प्राधिकरण बिल गारंटी के बजाय विनियमन के लिए एक आवश्यक 'शिकार लाइसेंस' की तरह है। " "एक अनधिकृत कार्यक्रम के लिए कोई विनियमन नहीं किया जा सकता है, लेकिन यहां तक कि एक अधिकृत कार्यक्रम भी मर सकता है या धन के पर्याप्त बड़े विनियमन की कमी के लिए अपने सभी असाइन किए गए कार्यों को करने में असमर्थ हो सकता है। "
विनियमन बिलों में, कांग्रेस और राष्ट्रपति अगले वित्त वर्ष के दौरान संघीय कार्यक्रमों पर खर्च किए जाने वाले धन की राशि बताते हैं।
"आम तौर पर, विनियमन प्रक्रिया बजट के विवेकाधीन हिस्से को संबोधित करती है - राष्ट्रीय रक्षा से खाद्य सुरक्षा तक लेकर शिक्षा तक संघीय कर्मचारी वेतन तक खर्च, लेकिन अनिवार्य खर्च, जैसे मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी, जो फॉर्मूला के अनुसार स्वचालित रूप से खर्च किया जाता है, "एक जिम्मेदार संघीय बजट के लिए समिति कहते हैं।
कांग्रेस के प्रत्येक घर में 12 विनियमन उप-समितियां हैं। वे व्यापक विषय क्षेत्रों में विभाजित हैं और प्रत्येक वार्षिक विनियमन उपाय लिखता है।
सदन और सीनेट में 12 विनियमन उपसमूह हैंः
कभी-कभी प्रोग्राम को विनियमन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक धनराशि नहीं मिलती है, भले ही उन्हें अधिकृत किया गया हो।
शायद सबसे चमकदार उदाहरण में, " नो चाइल्ड लेफ्ट बैहिंड " शिक्षा कानून के आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस और बुश प्रशासन ने प्राधिकरण प्रक्रिया में कार्यक्रम तैयार किया था, लेकिन उन्होंने विनियमन प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें कभी भी वित्त पोषित करने की पर्याप्त मांग नहीं की थी।
कांग्रेस और राष्ट्रपति के लिए एक कार्यक्रम को अधिकृत करना संभव है लेकिन इसके लिए धन के साथ पालन नहीं करना संभव है।
प्राधिकरण और विनियमन प्रक्रिया के साथ कुछ समस्याएं हैं।
सबसे पहले, कांग्रेस कई कार्यक्रमों की समीक्षा और पुनः प्राधिकरण में विफल रही है। लेकिन यह उन कार्यक्रमों की अवधि समाप्त होने नहीं दिया है। सदन और सीनेट बस अपने नियमों को छोड़ देते हैं और कार्यक्रमों के लिए पैसे अलग करते हैं।
दूसरा, प्राधिकरणों और विनियमन के बीच का अंतर ज्यादातर मतदाताओं को भ्रमित करता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि यदि संघीय सरकार द्वारा एक कार्यक्रम बनाया जाता है तो इसे भी वित्त पोषित किया जाता है। यह गलत है।
|
क्या आपने कभी सोचा था कि एक संघीय कार्यक्रम या एजेंसी कैसे आ रही है? या फिर वे हर साल एक लड़ाई क्यों करते हैं कि उन्हें अपने परिचालन के लिए करदाता पैसे मिलना चाहिए? जवाब संघीय प्राधिकरण प्रक्रिया में है। एक प्राधिकरण को कानून के एक टुकड़े के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सरकार के अनुसार "एक या अधिक संघीय एजेंसियों या कार्यक्रमों को स्थापित या जारी रखता है"। एक प्राधिकरण बिल जो कानून बन जाता है या तो एक नई एजेंसी या प्रोग्राम बनाता है और उसके बाद करदाता पैसे द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। एक प्राधिकरण बिल आम तौर पर सेट करता है कि उन एजेंसियों और कार्यक्रमों को कितना पैसा मिलता है, और उन्हें पैसे कैसे खर्च करना चाहिए। प्राधिकरण बिल स्थायी और अस्थायी दोनों कार्यक्रम बना सकते हैं। स्थायी कार्यक्रमों के उदाहरण सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा हैं, जिन्हें अक्सर एंटाइटेलमेंट प्रोग्राम के रूप में जाना जाता है। अन्य कार्यक्रम जो स्थायी आधार पर सांविधिक रूप से प्रदान नहीं किए जाते हैं उन्हें विनियमन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में सालाना या हर कुछ वर्षों में वित्त पोषित किया जाता है। इसलिए संघीय कार्यक्रमों और एजेंसियों का निर्माण प्राधिकरण प्रक्रिया के माध्यम से होता है। और उन कार्यक्रमों और एजेंसियों का अस्तित्व विनियमन प्रक्रिया के माध्यम से कायम रखा जाता है । प्राधिकरण प्रक्रिया और विनियमन प्रक्रिया पर नजदीकी नजर डालें। कांग्रेस और राष्ट्रपति प्राधिकरण प्रक्रिया के माध्यम से कार्यक्रम स्थापित करते हैं। विशिष्ट विषय क्षेत्रों पर क्षेत्राधिकार के साथ कांग्रेस समितियां कानून लिखती हैं। "प्राधिकरण" शब्द का उपयोग किया जाता है क्योंकि इस प्रकार का कानून संघीय बजट से धन के व्यय को अधिकृत करता है। एक प्राधिकरण निर्दिष्ट कर सकता है कि किसी कार्यक्रम पर कितना पैसा खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन यह वास्तव में पैसे को अलग नहीं करता है। करदाता पैसे का आवंटन विनियमन प्रक्रिया के दौरान होता है। कई कार्यक्रम एक निश्चित समय के लिए अधिकृत हैं। समितियों को यह निर्धारित करने से पहले कार्यक्रमों की समीक्षा करना चाहिए कि वे कितनी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और क्या उन्हें वित्त पोषण प्राप्त करना जारी रखना चाहिए। कांग्रेस ने कभी-कभी उन्हें वित्त पोषित किए बिना कार्यक्रम बनाए हैं। सबसे उच्च प्रोफ़ाइल उदाहरणों में से एक में, जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान पारित शिक्षा बिल " नो चाइल्ड लेफ्ट बैहिंड " शिक्षा प्राधिकरण बिल था जिसने देश के स्कूलों में सुधार के लिए कई कार्यक्रम स्थापित किए। हालांकि, यह नहीं कहा गया कि संघीय सरकार निश्चित रूप से कार्यक्रमों पर पैसे खर्च करेगी। औबर्न विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक पॉल जॉनसन लिखते हैं, "एक प्राधिकरण बिल गारंटी के बजाय विनियमन के लिए एक आवश्यक 'शिकार लाइसेंस' की तरह है। " "एक अनधिकृत कार्यक्रम के लिए कोई विनियमन नहीं किया जा सकता है, लेकिन यहां तक कि एक अधिकृत कार्यक्रम भी मर सकता है या धन के पर्याप्त बड़े विनियमन की कमी के लिए अपने सभी असाइन किए गए कार्यों को करने में असमर्थ हो सकता है। " विनियमन बिलों में, कांग्रेस और राष्ट्रपति अगले वित्त वर्ष के दौरान संघीय कार्यक्रमों पर खर्च किए जाने वाले धन की राशि बताते हैं। "आम तौर पर, विनियमन प्रक्रिया बजट के विवेकाधीन हिस्से को संबोधित करती है - राष्ट्रीय रक्षा से खाद्य सुरक्षा तक लेकर शिक्षा तक संघीय कर्मचारी वेतन तक खर्च, लेकिन अनिवार्य खर्च, जैसे मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी, जो फॉर्मूला के अनुसार स्वचालित रूप से खर्च किया जाता है, "एक जिम्मेदार संघीय बजट के लिए समिति कहते हैं। कांग्रेस के प्रत्येक घर में बारह विनियमन उप-समितियां हैं। वे व्यापक विषय क्षेत्रों में विभाजित हैं और प्रत्येक वार्षिक विनियमन उपाय लिखता है। सदन और सीनेट में बारह विनियमन उपसमूह हैंः कभी-कभी प्रोग्राम को विनियमन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक धनराशि नहीं मिलती है, भले ही उन्हें अधिकृत किया गया हो। शायद सबसे चमकदार उदाहरण में, " नो चाइल्ड लेफ्ट बैहिंड " शिक्षा कानून के आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस और बुश प्रशासन ने प्राधिकरण प्रक्रिया में कार्यक्रम तैयार किया था, लेकिन उन्होंने विनियमन प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें कभी भी वित्त पोषित करने की पर्याप्त मांग नहीं की थी। कांग्रेस और राष्ट्रपति के लिए एक कार्यक्रम को अधिकृत करना संभव है लेकिन इसके लिए धन के साथ पालन नहीं करना संभव है। प्राधिकरण और विनियमन प्रक्रिया के साथ कुछ समस्याएं हैं। सबसे पहले, कांग्रेस कई कार्यक्रमों की समीक्षा और पुनः प्राधिकरण में विफल रही है। लेकिन यह उन कार्यक्रमों की अवधि समाप्त होने नहीं दिया है। सदन और सीनेट बस अपने नियमों को छोड़ देते हैं और कार्यक्रमों के लिए पैसे अलग करते हैं। दूसरा, प्राधिकरणों और विनियमन के बीच का अंतर ज्यादातर मतदाताओं को भ्रमित करता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि यदि संघीय सरकार द्वारा एक कार्यक्रम बनाया जाता है तो इसे भी वित्त पोषित किया जाता है। यह गलत है।
|
बेकार होगा । जो समाज, जो युग, मनुष्य का मूल्य रूपयों के अंक से औकता है, घन हो जहाँ मान का मापदण्ड है, वहीं इन्होंने लेखक को ऊंचे आसन पर बैठाया है। वैसे मृगांक बहुत नामी लेखक नही है । समा-समिति, संगीत सम्मेलनों या नाटकों में उद्घाटन करने या प्रधान अतिथि होने के निमन्त्रण उसे नही मिलते । एक प्राचीन तथा प्रख्यात लेखक ने, जिन्हें उससे स्नेह है, और जो ऐसे आसनों को शोभा बढ़ाते हैं, यानी जनप्रियता के कारण करना पड़ता है, एक बार उसे अपने अनुभव सुनाये थे । कहा था उन्होंने, 'एक बार ऐसे ही एक फंकप्रशन मे प्रधान अतिथि होकर गया । कुश्ती का अखाड़ा था, वारवेल पैरललबार आादि का भी इन्तजाम था । मतलब यह कि वे लोग वर्जिश आदि करते रहे होगे । यकायक चारो तरफ बड़ी दौड़-धूप शुरू हुई । हुआ क्या ? सभापति की सवारी आई है। तीन-चार राशन दुकानों के मालिक हैं । वह तो हुई बाहर के दिसावे को बात । अन्दरूनी बात कुछ और है । इन लड़कों को सब कुछ पता है और वे हमेशा उनके नाम के आगे 'स' मे 'आ' की मात्रा जोडा करते हैं । लेकिन यहां उन्होंने ढेर सारा चन्दा दिया है। क्या इज्जत है उनकी ! सवने उन्हे घेर-घार कर स्टेज पर पहुँचाया। क्षण-क्षण में कैमरे का फ्लैश झलकने लगा। में वेचारा डायस के नीचे एक कोने में बैठा था। शायद यकायक किसी को मेरी याद आई ।
'आइये सर ।
'बडी तकलीफ से उठ खड़ा हुआ । फूलो का एक हार भी मिला मुझे । मगर अन्तर यह था कि समापति जी की माला उन्ही की तरह भारी भरकम और मेरी वाली दुबली-पतलो उसके बाद व्याख्यान । मैंने दो चार वाक्यों में समाप्त किया । सभापतिजी के लिखित व्याख्यान को किसी और ने पढ़ कर सुनाया । कारण तो समझ हो रहे होंगे। क्यो ?"
मृगांक ने पूछा 'फिर ?"
'उसके बाद बिदाई। वे तो अपनी भडकोली गाड़ी में सवार हो कर चले गये। इघर मेरी टेक्सो का कही पता नही । लेने जाये भो कौन ? तब तक संगीतकारो का गाना आरम्भ हो चुका था। कार्यकर्तागरण उन्हो को आवभगत में लगे थे। मैं श्रोताओं के आसन पर आ बैठा था। एक के बाद एक संगीत सुनता रहा, कह भी क्या सकता था ? वे मगर अपना-अपना प्रोग्राम खतम करते और चल देते । तब मुझे क्या लग रहा था बताऊँ ? काले चाजारी को जो सम्मान मिला वह मुझे न मिला, नही सही। इतनी तकदीर वाले तो विरले ही होते है । लेकिन अगर कोशिश करता तो क्या मैं उस किस्म के दो चार 'आ तथाकथित 'रवीन्द्र संगीत' नहीं सीख सकता था ? इज्जत मिलती अ भुहरवन्द मोटा-सा लिफाफा भी मिलता । एक क्षीगुकाय रजन
|
बेकार होगा । जो समाज, जो युग, मनुष्य का मूल्य रूपयों के अंक से औकता है, घन हो जहाँ मान का मापदण्ड है, वहीं इन्होंने लेखक को ऊंचे आसन पर बैठाया है। वैसे मृगांक बहुत नामी लेखक नही है । समा-समिति, संगीत सम्मेलनों या नाटकों में उद्घाटन करने या प्रधान अतिथि होने के निमन्त्रण उसे नही मिलते । एक प्राचीन तथा प्रख्यात लेखक ने, जिन्हें उससे स्नेह है, और जो ऐसे आसनों को शोभा बढ़ाते हैं, यानी जनप्रियता के कारण करना पड़ता है, एक बार उसे अपने अनुभव सुनाये थे । कहा था उन्होंने, 'एक बार ऐसे ही एक फंकप्रशन मे प्रधान अतिथि होकर गया । कुश्ती का अखाड़ा था, वारवेल पैरललबार आादि का भी इन्तजाम था । मतलब यह कि वे लोग वर्जिश आदि करते रहे होगे । यकायक चारो तरफ बड़ी दौड़-धूप शुरू हुई । हुआ क्या ? सभापति की सवारी आई है। तीन-चार राशन दुकानों के मालिक हैं । वह तो हुई बाहर के दिसावे को बात । अन्दरूनी बात कुछ और है । इन लड़कों को सब कुछ पता है और वे हमेशा उनके नाम के आगे 'स' मे 'आ' की मात्रा जोडा करते हैं । लेकिन यहां उन्होंने ढेर सारा चन्दा दिया है। क्या इज्जत है उनकी ! सवने उन्हे घेर-घार कर स्टेज पर पहुँचाया। क्षण-क्षण में कैमरे का फ्लैश झलकने लगा। में वेचारा डायस के नीचे एक कोने में बैठा था। शायद यकायक किसी को मेरी याद आई । 'आइये सर । 'बडी तकलीफ से उठ खड़ा हुआ । फूलो का एक हार भी मिला मुझे । मगर अन्तर यह था कि समापति जी की माला उन्ही की तरह भारी भरकम और मेरी वाली दुबली-पतलो उसके बाद व्याख्यान । मैंने दो चार वाक्यों में समाप्त किया । सभापतिजी के लिखित व्याख्यान को किसी और ने पढ़ कर सुनाया । कारण तो समझ हो रहे होंगे। क्यो ?" मृगांक ने पूछा 'फिर ?" 'उसके बाद बिदाई। वे तो अपनी भडकोली गाड़ी में सवार हो कर चले गये। इघर मेरी टेक्सो का कही पता नही । लेने जाये भो कौन ? तब तक संगीतकारो का गाना आरम्भ हो चुका था। कार्यकर्तागरण उन्हो को आवभगत में लगे थे। मैं श्रोताओं के आसन पर आ बैठा था। एक के बाद एक संगीत सुनता रहा, कह भी क्या सकता था ? वे मगर अपना-अपना प्रोग्राम खतम करते और चल देते । तब मुझे क्या लग रहा था बताऊँ ? काले चाजारी को जो सम्मान मिला वह मुझे न मिला, नही सही। इतनी तकदीर वाले तो विरले ही होते है । लेकिन अगर कोशिश करता तो क्या मैं उस किस्म के दो चार 'आ तथाकथित 'रवीन्द्र संगीत' नहीं सीख सकता था ? इज्जत मिलती अ भुहरवन्द मोटा-सा लिफाफा भी मिलता । एक क्षीगुकाय रजन
|
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि सरकारी राजस्व के लिए पेट्रोल और डीजल पर कर लगाया जाना जरूरी है। चिदंबरम ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर हम पेट्रोल पर कर नहीं लगाते हैं, तो हमें दूसरे सामानों पर कर लगाना पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि हाल के कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर में कमी आई है। मंत्री ने कहा कि पहले, पेट्रोल और डीजल पर इसलिए कर लगना चाहिए, क्योंकि सरकार को राजस्व की जरूरत है। दूसरे, कई राज्य केंद्रीय कर की अपेक्षा इन पर अधिक कर लगाते हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले कर में कमी आई है। मार्च 2007 में प्रति लीटर पेट्रोल पर 14. 66 रुपये कर लगता था, जो सितंबर 2012 में 9. 48 रुपये रह गया। डीजल पर लगने वाला कर मार्च 2007 में 4. 69 रुपये प्रति लीटर था, जो सितंबर 2012 में 3. 56 रुपये रह गया। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रकाश जावड़ेकर ने वित्त मंत्री को विवेक का उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि सरकार को पेट्रोल पर कर कम करना चाहिए, क्योंकि इसकी कीमत काफी अधिक हो गई है।
|
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि सरकारी राजस्व के लिए पेट्रोल और डीजल पर कर लगाया जाना जरूरी है। चिदंबरम ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर हम पेट्रोल पर कर नहीं लगाते हैं, तो हमें दूसरे सामानों पर कर लगाना पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि हाल के कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर में कमी आई है। मंत्री ने कहा कि पहले, पेट्रोल और डीजल पर इसलिए कर लगना चाहिए, क्योंकि सरकार को राजस्व की जरूरत है। दूसरे, कई राज्य केंद्रीय कर की अपेक्षा इन पर अधिक कर लगाते हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले कर में कमी आई है। मार्च दो हज़ार सात में प्रति लीटर पेट्रोल पर चौदह. छयासठ रुपयापये कर लगता था, जो सितंबर दो हज़ार बारह में नौ. अड़तालीस रुपयापये रह गया। डीजल पर लगने वाला कर मार्च दो हज़ार सात में चार. उनहत्तर रुपयापये प्रति लीटर था, जो सितंबर दो हज़ार बारह में तीन. छप्पन रुपयापये रह गया। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रकाश जावड़ेकर ने वित्त मंत्री को विवेक का उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि सरकार को पेट्रोल पर कर कम करना चाहिए, क्योंकि इसकी कीमत काफी अधिक हो गई है।
|
प्रयागराज (ब्यूरो)। 44 डिग्री पारा लोगों का पेट खराब कर रहा है। भीषण गर्मी की वजह से लोगों को बदहजमी, अपच, पेट दर्द और उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें हो रही हैं। इसकी वजह से अस्पतालों की ओपीडी में लंबी लाइनें लगी हुई हैं। रोजाना नए मरीज दस्तक दे रहे हैं। डॉक्टर्स भी लोगों को गर्मी में लापरवाही करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। बावजूद इसके मरीजों की संख्या कम होने का नाम नही ले रही है।
गर्मी में पेट के इंफेक्शन के चांसेज बढ़ जाते हैं। कभी बासी या गंदा भोजन करने से तो कभी लू लग जाने की वजह से पेट दर्द होने लगता है। बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन होने से लोगों को ठीक होने मे पांच से सात दिन का समय आसानी से लग जा रहा है। रविवार को एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी में सुषमा, युवराज, नफीस, धर्मेंद्र और गुलाबो पहुचे थे। इन सभी को पेट की समस्या थी। कईयों ने बताया कि तीन दिन से परेशानी हो रही है। घरेलु नुस्खों से फायदा नही होने पर अब डॉक्टर को दिखाने आए हैं।
एसआरएन, बेली और काल्विन अस्पताल की ओपीडी में पेट के रोगियों की संख्या पिछले एक माह में दो से ढाई गुना तक बढ़ गई है। पूर्व में रोजाना दस से पंद्रह मरीज आते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 50 से 60 हो गई है। इसमें सभी उम्र के मरीज शामिल हैं। दूसरी ओर चिकल्ड्रेन अस्पताल में इस समय रोजाना 20 से 25 बच्चे पेट की समस्या से ग्रसित आ रहे हैं। इनमे ंसे तीस फीसदी मरीजों को भर्ती करना पडता है।
- पुरुषो को रोजाना 3. 7 लीटर और महिलाओं को कम से कम 2. 7 लीटर पानी पीना चाहिए।
- नींबू का रस, पानी और बेकिंग सोडा मिलाकर पीना चाहिए।
- मट्ठा, दही और ठंडे पेय पदार्थों का यूज करें।
- धूप में निकलते समय शरीर को सूती कपड़े से ढंकें।
- सात से आठ घंटे पुराना भोजन मत करें। भरपेट भोजन करने से बचें।
बेली अस्पताल के दवा स्टोर के फार्मासिस्ट बताते हैं कि इस सीजन में पेट दर्द की दवाओं की खपत बढ़ गई है। डॉक्टर के पर्चे पर पेट दर्द के साथ गैस, बदहजमी और इंफेक्शने से बचाव के लिए एंटी बायटिक भी खूब लिखी जा रही हैं। पांच दिन कम से कम दवा करने की हिदायत दी जा रही है। मरीजों की संख्या अधिक होने से दवाओं की खपत भी बढ़ गई है।
गर्मी बहुत अधिक पड़ रही है। जरा सी लापरवाही से पेट खराब हो रहा है। पिछले सप्ताह मुझे भी समस्या का सामना करना पड़ा था। डॉक्टर ने कहा कि ताजा और सुपाच्य भोजन करिए। मैंने दूसरों को भी इस बारे में जानकारी दी है।
कई दोस्तों का पेट इस गर्मी में खराब हो रहा है। तापमान इस समय बहुत अधिक है। पेट दर्द और अपच होना आम बात हो गई है। मेरा कहना है कि अधिक धूप में निकलने से बचना चाहिए। खासकर बच्चों का ध्यान रखना चाहिए।
अस्पताल की ओपीडी में पेट के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। खासकर खानपान में लापरवाही से दिक्कतें पैदा हो रही है। कई मरीजों को भर्ती भी करना पड़ रहा है। पानी की शुद्धता की जांच करना भी जरूरी है।
|
प्रयागराज । चौंतालीस डिग्री पारा लोगों का पेट खराब कर रहा है। भीषण गर्मी की वजह से लोगों को बदहजमी, अपच, पेट दर्द और उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें हो रही हैं। इसकी वजह से अस्पतालों की ओपीडी में लंबी लाइनें लगी हुई हैं। रोजाना नए मरीज दस्तक दे रहे हैं। डॉक्टर्स भी लोगों को गर्मी में लापरवाही करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। बावजूद इसके मरीजों की संख्या कम होने का नाम नही ले रही है। गर्मी में पेट के इंफेक्शन के चांसेज बढ़ जाते हैं। कभी बासी या गंदा भोजन करने से तो कभी लू लग जाने की वजह से पेट दर्द होने लगता है। बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन होने से लोगों को ठीक होने मे पांच से सात दिन का समय आसानी से लग जा रहा है। रविवार को एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी में सुषमा, युवराज, नफीस, धर्मेंद्र और गुलाबो पहुचे थे। इन सभी को पेट की समस्या थी। कईयों ने बताया कि तीन दिन से परेशानी हो रही है। घरेलु नुस्खों से फायदा नही होने पर अब डॉक्टर को दिखाने आए हैं। एसआरएन, बेली और काल्विन अस्पताल की ओपीडी में पेट के रोगियों की संख्या पिछले एक माह में दो से ढाई गुना तक बढ़ गई है। पूर्व में रोजाना दस से पंद्रह मरीज आते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर पचास से साठ हो गई है। इसमें सभी उम्र के मरीज शामिल हैं। दूसरी ओर चिकल्ड्रेन अस्पताल में इस समय रोजाना बीस से पच्चीस बच्चे पेट की समस्या से ग्रसित आ रहे हैं। इनमे ंसे तीस फीसदी मरीजों को भर्ती करना पडता है। - पुरुषो को रोजाना तीन. सात लीटरटर और महिलाओं को कम से कम दो. सात लीटरटर पानी पीना चाहिए। - नींबू का रस, पानी और बेकिंग सोडा मिलाकर पीना चाहिए। - मट्ठा, दही और ठंडे पेय पदार्थों का यूज करें। - धूप में निकलते समय शरीर को सूती कपड़े से ढंकें। - सात से आठ घंटे पुराना भोजन मत करें। भरपेट भोजन करने से बचें। बेली अस्पताल के दवा स्टोर के फार्मासिस्ट बताते हैं कि इस सीजन में पेट दर्द की दवाओं की खपत बढ़ गई है। डॉक्टर के पर्चे पर पेट दर्द के साथ गैस, बदहजमी और इंफेक्शने से बचाव के लिए एंटी बायटिक भी खूब लिखी जा रही हैं। पांच दिन कम से कम दवा करने की हिदायत दी जा रही है। मरीजों की संख्या अधिक होने से दवाओं की खपत भी बढ़ गई है। गर्मी बहुत अधिक पड़ रही है। जरा सी लापरवाही से पेट खराब हो रहा है। पिछले सप्ताह मुझे भी समस्या का सामना करना पड़ा था। डॉक्टर ने कहा कि ताजा और सुपाच्य भोजन करिए। मैंने दूसरों को भी इस बारे में जानकारी दी है। कई दोस्तों का पेट इस गर्मी में खराब हो रहा है। तापमान इस समय बहुत अधिक है। पेट दर्द और अपच होना आम बात हो गई है। मेरा कहना है कि अधिक धूप में निकलने से बचना चाहिए। खासकर बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। अस्पताल की ओपीडी में पेट के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। खासकर खानपान में लापरवाही से दिक्कतें पैदा हो रही है। कई मरीजों को भर्ती भी करना पड़ रहा है। पानी की शुद्धता की जांच करना भी जरूरी है।
|
नई दिल्लीः कोरोनावायरस (Coronavirus) से लड़ाई के बीच भारत और पाकिस्तानी क्रिकेटरों के बीच जुबानी जंग भी चल रही है. पहले शोएब अख्तर और कपिल देव (Kapil Dev) के बीच ऐसा देखने को मिला. फिर कपिल देव के पक्ष में सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) उतर आए. उन्होंने एक ऐसी बात कही, जो उनकी नजर में मुश्किल थी. अब इस पर शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) ने एक बार फिर पलटवार किया है.
भारत और पाकिस्तान क्रिकेट के मैदान पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं. हालांकि, इन दोनों टीमों के बीच करीब 10 साल से द्विपक्षीय सीरीज नहीं हुई है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और पूर्व क्रिकेटरों की ओर से समय-समय पर ऐसी सीरीज कराने की मांग होती रही है. पिछले दिनों शोएब अख्तर ने यह मांग की. उन्होंने तब कहा कि कोरोनावायरस से लड़ने के लिए फंड की जरूरत है. ऐसे में भारत-पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की द्विपक्षीय सीरीज कराई जा सकती है. इससे मिले पैसों से कोरोना पीड़ितों की मदद की जा सकती है.
शोएब अख्तर के इस प्रस्ताव का जवाब सबसे पहले कपिल देव ने दिया. उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस से लड़ाई में सबसे जरूरी बात यह है कि लोगों की सुरक्षा और सेहत का ख्याल रखा जाए. अभी पैसों की जरूरत नहीं है. इस मामले में शोएब ने भी जवाब दिया और फिर शाहिद अफरीदी भी इस जुबानी जंग में कूद पड़े.
Well Sunny bhai, we did have a snowfall in Lahore last year :)
.
|
नई दिल्लीः कोरोनावायरस से लड़ाई के बीच भारत और पाकिस्तानी क्रिकेटरों के बीच जुबानी जंग भी चल रही है. पहले शोएब अख्तर और कपिल देव के बीच ऐसा देखने को मिला. फिर कपिल देव के पक्ष में सुनील गावस्कर उतर आए. उन्होंने एक ऐसी बात कही, जो उनकी नजर में मुश्किल थी. अब इस पर शोएब अख्तर ने एक बार फिर पलटवार किया है. भारत और पाकिस्तान क्रिकेट के मैदान पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं. हालांकि, इन दोनों टीमों के बीच करीब दस साल से द्विपक्षीय सीरीज नहीं हुई है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और पूर्व क्रिकेटरों की ओर से समय-समय पर ऐसी सीरीज कराने की मांग होती रही है. पिछले दिनों शोएब अख्तर ने यह मांग की. उन्होंने तब कहा कि कोरोनावायरस से लड़ने के लिए फंड की जरूरत है. ऐसे में भारत-पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की द्विपक्षीय सीरीज कराई जा सकती है. इससे मिले पैसों से कोरोना पीड़ितों की मदद की जा सकती है. शोएब अख्तर के इस प्रस्ताव का जवाब सबसे पहले कपिल देव ने दिया. उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस से लड़ाई में सबसे जरूरी बात यह है कि लोगों की सुरक्षा और सेहत का ख्याल रखा जाए. अभी पैसों की जरूरत नहीं है. इस मामले में शोएब ने भी जवाब दिया और फिर शाहिद अफरीदी भी इस जुबानी जंग में कूद पड़े. Well Sunny bhai, we did have a snowfall in Lahore last year :) .
|
इस भाग में विश्व में मछली के पिंजरा पालन के बारे में अधिक जानकारी दी गई है।
इस भाग में पिंजरों में मछली पालन को उस प्रदेश के भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।
इस भाग में खारे जल में सीबास मछली के पिंजरे पालन की जानकारी दी गई है।
इस भाग में पिंजरों में बायोफाउलिंग नियंत्रण और शाकाहारी मछलीपालन की जानकारी दी गई है।
इस भाग में मछुआरों की आय किस तरह से बढ़ाई जाए उसके बारे में जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ में भारत में तिलापिया के उत्तरदायी पालन के लिए दिशानिर्देश से संबन्धित जानकारी दी गयी है।
इस भाग में एकीकृत चावल-चिंगट-पख मछली द्वारा परंपरागत पोक्काली चावल खेती के पुनर्नवीकरण की जानकारी दी गई है।
इस लेख में किस प्रकार जलाशय में पेन एवं केज कल्चर के द्वारा मछली पालन किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गयी है।
इस भाग में मछलीपालन के लिए तालाब स्थल का चयन के बारे में जानकारी दी गई है।
|
इस भाग में विश्व में मछली के पिंजरा पालन के बारे में अधिक जानकारी दी गई है। इस भाग में पिंजरों में मछली पालन को उस प्रदेश के भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। इस भाग में खारे जल में सीबास मछली के पिंजरे पालन की जानकारी दी गई है। इस भाग में पिंजरों में बायोफाउलिंग नियंत्रण और शाकाहारी मछलीपालन की जानकारी दी गई है। इस भाग में मछुआरों की आय किस तरह से बढ़ाई जाए उसके बारे में जानकारी दी गई है। इस पृष्ठ में भारत में तिलापिया के उत्तरदायी पालन के लिए दिशानिर्देश से संबन्धित जानकारी दी गयी है। इस भाग में एकीकृत चावल-चिंगट-पख मछली द्वारा परंपरागत पोक्काली चावल खेती के पुनर्नवीकरण की जानकारी दी गई है। इस लेख में किस प्रकार जलाशय में पेन एवं केज कल्चर के द्वारा मछली पालन किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी गयी है। इस भाग में मछलीपालन के लिए तालाब स्थल का चयन के बारे में जानकारी दी गई है।
|
मिजार्पुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अनुराग पटेल ने शनिवार को एक यू-टर्न लिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जाने के लिए स्वतंत्र हैं क्योंकि उन्हें न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है।
डीएम ने शुक्रवार रात प्रियंका को 50 हजार रुपये का निजी बॉन्ड देने को कहा, ताकि वह वहां से जा सकें।
सोनभद्र में बुधवार को भूमि विवाद को लेकर हुई झड़पों में दस लोग मारे गए थे। प्रियंका पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से मिलना चाहतीं थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोका दिया और वह विरोध दर्ज कराने के लिए धरने पर बैठ गईं।
जिसके बाद शनिवार सुबह प्रियंका पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से मिलीं, जो उनसे मिलने के लिए चुनार के गेस्ट हाउस में आए।
उन्होंने पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। प्रियंका ने वादा किया कि वह जल्द वापस लौटेंगी।
सोनभद्र जाने की इच्छा रखने वाले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने वाराणसी के हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया था। तृणमूल कांग्रेस के तीन सदस्य दल को भी हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया।
|
मिजार्पुर के जिला मजिस्ट्रेट अनुराग पटेल ने शनिवार को एक यू-टर्न लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जाने के लिए स्वतंत्र हैं क्योंकि उन्हें न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। डीएम ने शुक्रवार रात प्रियंका को पचास हजार रुपये का निजी बॉन्ड देने को कहा, ताकि वह वहां से जा सकें। सोनभद्र में बुधवार को भूमि विवाद को लेकर हुई झड़पों में दस लोग मारे गए थे। प्रियंका पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से मिलना चाहतीं थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोका दिया और वह विरोध दर्ज कराने के लिए धरने पर बैठ गईं। जिसके बाद शनिवार सुबह प्रियंका पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से मिलीं, जो उनसे मिलने के लिए चुनार के गेस्ट हाउस में आए। उन्होंने पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। प्रियंका ने वादा किया कि वह जल्द वापस लौटेंगी। सोनभद्र जाने की इच्छा रखने वाले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने वाराणसी के हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया था। तृणमूल कांग्रेस के तीन सदस्य दल को भी हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया।
|
पटना : बिहार चुनाव में एनडीए की जीत हुई है। उसके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा मौजूद है। चुनाव से पहले घोषित मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार का चेहरा भी उसके पास है लेकिन चुनाव नतीजों ने एनडीए के मुख्यमंत्री को लेकर बहस तेज हुई है। दरअसल, मंगलवार को आए चुनाव नतीजों में एनडीए में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 74 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी उभरी है जबकि जद-यू को 43 सीटें मिली हैं। चूंकि नीतीश एनडीए की तरफ से सीएम पद के लिए घोषित उम्मीदवार हैं लेकिन कम सीटें आने की वजह से अब जद-यू खुले तौर पर मुख्यमंत्री पद पर अपने दावे को लेकर हिचक रही है।
नीतीश कुमार ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पद पर फैसला एनडीए की बैठक में होगा। जाहिर है कि नीतीश पर नैतिक दबाव होगा तभी उन्होंने यह बयान दिया। चुनाव नतीजा आने क बाद शुक्रवार को पहली बार एनडीए के सभी चार दलों भाजपा, जदयू, वीआईपी और हम की बैठक होने जा रही है। समझा जाता है कि इस बैठक में विधायक दल के नेता एवं सीएम पद के लिए चेहरे का चुनाव होगा। चुनाव में एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार सीएम पद का चेहरा रहे हैं, ऐसे में उनका यह बयान कि सीएम पद पर फैसला एनडीए लेगा,अटकलों को जन्म देता है।
मीडिया ने नीतीश से मुख्यमंत्री पद को लेकर जब सवाल किया तो उन्होंने, 'मैंने सीएम पद को लेकर कोई दावा नहीं किया है। मुख्यमंत्री पद पर फैसला एनडीए केरगा। ' नीतीश ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। हम अभी चुनाव नतीजों का विश्लेषण कर रहे हैं। एनडीए के सभी चारों दल शुक्रवार को बैठक करेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबले में विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर कब्जा कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया जबकि महागठबंधन के खाते में 110 सीटें आईं। भाजपा की 74 और जदयू की 43 सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझेदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को चार सीट मिलीं। वहीं, विपक्षी महागठबंधन में राजद को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। राजग से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरी चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी एक सीट पर ही जीत हासिल कर सकी है।
|
पटना : बिहार चुनाव में एनडीए की जीत हुई है। उसके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा मौजूद है। चुनाव से पहले घोषित मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार का चेहरा भी उसके पास है लेकिन चुनाव नतीजों ने एनडीए के मुख्यमंत्री को लेकर बहस तेज हुई है। दरअसल, मंगलवार को आए चुनाव नतीजों में एनडीए में शामिल भारतीय जनता पार्टी चौहत्तर सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी उभरी है जबकि जद-यू को तैंतालीस सीटें मिली हैं। चूंकि नीतीश एनडीए की तरफ से सीएम पद के लिए घोषित उम्मीदवार हैं लेकिन कम सीटें आने की वजह से अब जद-यू खुले तौर पर मुख्यमंत्री पद पर अपने दावे को लेकर हिचक रही है। नीतीश कुमार ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पद पर फैसला एनडीए की बैठक में होगा। जाहिर है कि नीतीश पर नैतिक दबाव होगा तभी उन्होंने यह बयान दिया। चुनाव नतीजा आने क बाद शुक्रवार को पहली बार एनडीए के सभी चार दलों भाजपा, जदयू, वीआईपी और हम की बैठक होने जा रही है। समझा जाता है कि इस बैठक में विधायक दल के नेता एवं सीएम पद के लिए चेहरे का चुनाव होगा। चुनाव में एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार सीएम पद का चेहरा रहे हैं, ऐसे में उनका यह बयान कि सीएम पद पर फैसला एनडीए लेगा,अटकलों को जन्म देता है। मीडिया ने नीतीश से मुख्यमंत्री पद को लेकर जब सवाल किया तो उन्होंने, 'मैंने सीएम पद को लेकर कोई दावा नहीं किया है। मुख्यमंत्री पद पर फैसला एनडीए केरगा। ' नीतीश ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। हम अभी चुनाव नतीजों का विश्लेषण कर रहे हैं। एनडीए के सभी चारों दल शुक्रवार को बैठक करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबले में विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने दो सौ तैंतालीस सीटों में से एक सौ पच्चीस सीटों पर कब्जा कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया जबकि महागठबंधन के खाते में एक सौ दस सीटें आईं। भाजपा की चौहत्तर और जदयू की तैंतालीस सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझेदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी को चार सीट मिलीं। वहीं, विपक्षी महागठबंधन में राजद को पचहत्तर, कांग्रेस को उन्नीस, भाकपा माले को बारह और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। राजग से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरी चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी एक सीट पर ही जीत हासिल कर सकी है।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.