raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
- 19 min ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! - 1 hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं रहीं बार बार फिक्स! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? Pics: 'भाग मिल्खा भाग' में फरहान की बॉडी सुपर! राकेश ओमपकाश मेहरा की फिल्म भाग मिल्खा भाग के वीडियो ने यू ट्यूब पर धमाका कर दिया है। अब तक करीबन तीन लाख से ऊपर लोगों ने इस वीडियो को देखा और पसंद किया है। वीडियो को ट्विटर और फेसबुक पर फिल्म के ऑफिशयल पेज पर पोस्ट किया गया था। फिल्म में फरहान अख्तर और सोनम कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई है। ये फिल्म इंडियन एथिलीट मिल्खा सिंह पर बनी है जो की फ्लाइंग सिख के नाम से भी मशहूर था। भाग मिल्खा भाग में फरहान ने मिल्खा का किरदार निभाया है। राकेश ओमप्रकाश का कहना है "ये फिल्म किसी स्पोर्ट या फिर ट्रॉफी या फिर मेडल पर बेस्ड नहीं है। ये फिल्म एथिलीट मिल्खा सिंह के अंदर की आग की है। मैं मिल्खा सिंह की ये आग ये जुनून को पूरी दुनिया में फैलाना चाहता हूं और चाहता हूं कि लोग उनसे प्रेरणा लें। " फरहान अख्तर की बॉडी फिल्म में काफी फिट और सुपर कूल लगी है ऐसा कहना है ट्विटर यूजर्स का। फरहान की फिल्म भाग मिल्खा भाग का ट्रेलर हाल ही में फरहान की रिलीज हुई फिल्म तलाश के दौरान दिखाया जा रहा है। लोगों को ये ट्रेलर भी काफी उम्दा लग रहा है। ट्विटर यूजर्स का कहना है कि भाग मिल्खा भाग में फरहान ने मिल्खा सिहं के कैरेक्टर के साथ पूरा न्या किया है और फिल्म को देखकर ऐसा लग रहा है कि फिल्म जरुर हिट होगी। आइये दिखाते हैं भाग मिल्खा भाग में फरहान के बारे में लोगों का क्या कहना है। Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू ने तोड़े पुराने सारे रिकॉर्ड, रिलीज के 24 घंटों में ही बनाई टॉप पर जगह!
- उन्नीस मिनट ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली! - एक hr ago ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं रहीं बार बार फिक्स! Don't Miss! - Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? Pics: 'भाग मिल्खा भाग' में फरहान की बॉडी सुपर! राकेश ओमपकाश मेहरा की फिल्म भाग मिल्खा भाग के वीडियो ने यू ट्यूब पर धमाका कर दिया है। अब तक करीबन तीन लाख से ऊपर लोगों ने इस वीडियो को देखा और पसंद किया है। वीडियो को ट्विटर और फेसबुक पर फिल्म के ऑफिशयल पेज पर पोस्ट किया गया था। फिल्म में फरहान अख्तर और सोनम कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई है। ये फिल्म इंडियन एथिलीट मिल्खा सिंह पर बनी है जो की फ्लाइंग सिख के नाम से भी मशहूर था। भाग मिल्खा भाग में फरहान ने मिल्खा का किरदार निभाया है। राकेश ओमप्रकाश का कहना है "ये फिल्म किसी स्पोर्ट या फिर ट्रॉफी या फिर मेडल पर बेस्ड नहीं है। ये फिल्म एथिलीट मिल्खा सिंह के अंदर की आग की है। मैं मिल्खा सिंह की ये आग ये जुनून को पूरी दुनिया में फैलाना चाहता हूं और चाहता हूं कि लोग उनसे प्रेरणा लें। " फरहान अख्तर की बॉडी फिल्म में काफी फिट और सुपर कूल लगी है ऐसा कहना है ट्विटर यूजर्स का। फरहान की फिल्म भाग मिल्खा भाग का ट्रेलर हाल ही में फरहान की रिलीज हुई फिल्म तलाश के दौरान दिखाया जा रहा है। लोगों को ये ट्रेलर भी काफी उम्दा लग रहा है। ट्विटर यूजर्स का कहना है कि भाग मिल्खा भाग में फरहान ने मिल्खा सिहं के कैरेक्टर के साथ पूरा न्या किया है और फिल्म को देखकर ऐसा लग रहा है कि फिल्म जरुर हिट होगी। आइये दिखाते हैं भाग मिल्खा भाग में फरहान के बारे में लोगों का क्या कहना है। Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू ने तोड़े पुराने सारे रिकॉर्ड, रिलीज के चौबीस घंटाटों में ही बनाई टॉप पर जगह!
9 जनवरी, 2022 को आर्मी रोइंग नोड, पुणे में संपन्न हुई 39वीं सीनियर और 23वीं ओपन स्प्रिंट नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश राज्य रोइंग अकादमी के खिलाड़ियों ने 1 स्वर्ण, 4 रजत और 2 काँस्य सहित कुल सात पदक अर्जित किये। - अकादमी की खिलाड़ी खुशप्रीत कौर ने महिला एकल स्कल स्पर्धा में एक स्वर्ण और एक रजत पदक अर्जित किया। - रुक्मणी डांगी और ज्योति कुशवाहा की जोड़ी ने महिला कॉक्सलेस जोड़ी स्पर्धा में दो रजत पदक जीते। - पुरुषों की कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी मेहुल कृष्णानी, अजय सिंह, रोहित सेंधव और सोहेल ने रजत पदक अर्जित किया। - मंगल सिंह और तरुण डांगी की जोड़ी ने मेंस डबल स्कल इवेंट में काँस्य पदक जीता। मंगल सिंह और मोनिका भदौरिया की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स स्कल इवेंट में काँस्य पदक अर्जित किया।
नौ जनवरी, दो हज़ार बाईस को आर्मी रोइंग नोड, पुणे में संपन्न हुई उनतालीसवीं सीनियर और तेईसवीं ओपन स्प्रिंट नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश राज्य रोइंग अकादमी के खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण, चार रजत और दो काँस्य सहित कुल सात पदक अर्जित किये। - अकादमी की खिलाड़ी खुशप्रीत कौर ने महिला एकल स्कल स्पर्धा में एक स्वर्ण और एक रजत पदक अर्जित किया। - रुक्मणी डांगी और ज्योति कुशवाहा की जोड़ी ने महिला कॉक्सलेस जोड़ी स्पर्धा में दो रजत पदक जीते। - पुरुषों की कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी मेहुल कृष्णानी, अजय सिंह, रोहित सेंधव और सोहेल ने रजत पदक अर्जित किया। - मंगल सिंह और तरुण डांगी की जोड़ी ने मेंस डबल स्कल इवेंट में काँस्य पदक जीता। मंगल सिंह और मोनिका भदौरिया की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स स्कल इवेंट में काँस्य पदक अर्जित किया।
देखो विचार मन और इन्द्रियों के ताई। है गुणों का सब प्रत्यक्ष गुणी का नाहीं ॥ फिर गुणों के पीछे गुणी को ऐसे पावे। इस आत्मयुक्त मन से प्रत्यक्ष किया जावे ॥ ऐसेही सृष्टि में भाई, हम विशेष रचना पाई। गुण ज्ञान आदि लख सारा, हुआ ईश्वर सिद्ध हमारा ॥ ले दूसरा भी दृष्टान्त, इस के उपरान्त सुन होके शान्त, इधर कर कान ले, यह शिक्षा उर भरने में । ईश्वर० ।।२।। जिस समय जीव किसी कर्म मे मन लाता है। फिर उसी समय प्रमाण प्रत्यक्ष आता है } हो अशुभ कर्म तो भय शंका लज्जा आवे । शुभ हो तो हर्षित अंग मोद दरशावे ॥ भय अभय जो दे दिखलाई, है ब्रह्मकी ओर से भाई । मत जीव की ओर से जानो, यह सत्य कथन पहँचानो । जीव है स्वतन्त्र, तभी करे, पीछे दुख भरे, इसी से डरे, मित्र पहँचान ले, नहीं क्या हासिल डरने में । ईश्वर के० ॥३॥ प्रमाण तीसग प्रत्यक्ष यह पाना हर काम नियम अनुकूल नज़र आता है । बनना व बिगड़ना सभी नियम से होता । कर विचार मन की क्यो नहीं शंका खोता॥ देखो सृष्टि में भाई । ये अटल नियम दिखलाई ॥ ज्यो माली बाग़ लगावे। कहीं फ़र्क ज़रा नहि आवे ॥
देखो विचार मन और इन्द्रियों के ताई। है गुणों का सब प्रत्यक्ष गुणी का नाहीं ॥ फिर गुणों के पीछे गुणी को ऐसे पावे। इस आत्मयुक्त मन से प्रत्यक्ष किया जावे ॥ ऐसेही सृष्टि में भाई, हम विशेष रचना पाई। गुण ज्ञान आदि लख सारा, हुआ ईश्वर सिद्ध हमारा ॥ ले दूसरा भी दृष्टान्त, इस के उपरान्त सुन होके शान्त, इधर कर कान ले, यह शिक्षा उर भरने में । ईश्वरशून्य ।।दो।। जिस समय जीव किसी कर्म मे मन लाता है। फिर उसी समय प्रमाण प्रत्यक्ष आता है } हो अशुभ कर्म तो भय शंका लज्जा आवे । शुभ हो तो हर्षित अंग मोद दरशावे ॥ भय अभय जो दे दिखलाई, है ब्रह्मकी ओर से भाई । मत जीव की ओर से जानो, यह सत्य कथन पहँचानो । जीव है स्वतन्त्र, तभी करे, पीछे दुख भरे, इसी से डरे, मित्र पहँचान ले, नहीं क्या हासिल डरने में । ईश्वर केशून्य ॥तीन॥ प्रमाण तीसग प्रत्यक्ष यह पाना हर काम नियम अनुकूल नज़र आता है । बनना व बिगड़ना सभी नियम से होता । कर विचार मन की क्यो नहीं शंका खोता॥ देखो सृष्टि में भाई । ये अटल नियम दिखलाई ॥ ज्यो माली बाग़ लगावे। कहीं फ़र्क ज़रा नहि आवे ॥
कॉमेडियन कपिल शर्मा की किस्मत चमक गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कपिल शर्मा के हाथ एकता कपूर की फिल्म लगी है। इस फिल्म का नाम 'द क्रू' है। बता दें, इस फिल्म में कपिल शर्मा के अलावा करीना कपूर खान, तबू और कृति सेनन जैसी बड़ी एक्ट्रेसेस मुख्य भूमिका निभाने वाली हैं। बता दें, फिल्म 'द क्रू' को एकता कपूर और रिया कपूर मिलकर प्रोड्यूस करे रहे हैं। वहीं, राजेश कृष्णा इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं। फिल्म के स्टार कास्ट के वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना को आखिरी बार 'लाल सिंह चड्ढा' में देखा गया था। वह 'द क्रू' के साथ-साथ नेटफ्लिक्स की फिल्म 'डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' के लिए भी काम कर रही हैं। कृति सेनन जल्द ही प्रभास और सैफ अली खान के साथ 'आदिपुरुष' में दिखाई देंगी। वहीं तब्बू, अजय देवगन के साथ 'औरों में कहां दम था' में व्यस्त हैं। इसके साथ ही दिलजीत दोसांझ भी इस फिल्म में नजर आने वाले हैं। पिंकविला को फिल्म से जुड़े सूत्र ने इस बात की जानकारी दी है। सूत्र ने बताया, "कपिल, फिल्म 'द क्रू' में एक अनोखी भूमिका निभाने वाले हैं। टीम उनके आने से बेहद उत्साहित है। वह जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे। ' बता दें, कृति सेनन ने पिछले महीने फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी। वहीं, करीना कपूर खान कुछ दिन पहले ही टीम में शामिल हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हफ्ते से, तब्बू भी फिल्म की शूटिंग शुरू कर देंगी।
कॉमेडियन कपिल शर्मा की किस्मत चमक गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कपिल शर्मा के हाथ एकता कपूर की फिल्म लगी है। इस फिल्म का नाम 'द क्रू' है। बता दें, इस फिल्म में कपिल शर्मा के अलावा करीना कपूर खान, तबू और कृति सेनन जैसी बड़ी एक्ट्रेसेस मुख्य भूमिका निभाने वाली हैं। बता दें, फिल्म 'द क्रू' को एकता कपूर और रिया कपूर मिलकर प्रोड्यूस करे रहे हैं। वहीं, राजेश कृष्णा इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं। फिल्म के स्टार कास्ट के वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना को आखिरी बार 'लाल सिंह चड्ढा' में देखा गया था। वह 'द क्रू' के साथ-साथ नेटफ्लिक्स की फिल्म 'डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' के लिए भी काम कर रही हैं। कृति सेनन जल्द ही प्रभास और सैफ अली खान के साथ 'आदिपुरुष' में दिखाई देंगी। वहीं तब्बू, अजय देवगन के साथ 'औरों में कहां दम था' में व्यस्त हैं। इसके साथ ही दिलजीत दोसांझ भी इस फिल्म में नजर आने वाले हैं। पिंकविला को फिल्म से जुड़े सूत्र ने इस बात की जानकारी दी है। सूत्र ने बताया, "कपिल, फिल्म 'द क्रू' में एक अनोखी भूमिका निभाने वाले हैं। टीम उनके आने से बेहद उत्साहित है। वह जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे। ' बता दें, कृति सेनन ने पिछले महीने फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी। वहीं, करीना कपूर खान कुछ दिन पहले ही टीम में शामिल हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हफ्ते से, तब्बू भी फिल्म की शूटिंग शुरू कर देंगी।
धनबाद न्यूज़ः वासेपुर के कुख्यात प्रिंस खान के अर्थतंत्र पर धनबाद पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक किया है. ताबड़तोड़ छापेमारी कर एक महिला समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का दावा है कि प्रिंस खान के लिए रंगदारी का पैसा उठाने से लेकर पैसे खपाने के लिए जो सिस्टम बना कर रखा गया था, उसको तोड़ने में पुलिस कामयाब रही है. एसएसपी संजीव कुमार ने प्रेस वार्ता में इसका खुलासा किया. उन्होंने बताया कि धनबाद में कुछ सफेदपोश लोगों ने प्रिंस खान गैंग के रंगदारी का पैसा अपने कारोबार में लगा रखा है. एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के इस्तेमाल किए गए विभिन्न बैंक खातों की गहनता से छानबीन की गई. इसमें पता चला कि इन संदिग्ध अकाउंट में पिछले तीन माह में लगभग एक करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ है. इन लोगों ने कुल 90 अकाउंट में पैसे भेजे हैं. 300 बार ट्रांजैक्शन किया गया है. एसएसपी ने बताया कि सभी अकाउंट को फ्रीज करा दिया गया है जबकि और कई अकाउंट अभी खंगाले जा रहे हैं. चार्टर्ड अकाउंटेंट की तरह बना रखा था सिस्टम एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार सभी लोगों की इस सिस्टम में अलग-अलग भूमिका थी. इस सिस्टम का सद्दाब अंसारी उर्फ सद्दाम किंगपीन था. नरगिस बानो पूरे सिस्टम की देखरेख करती थी. एसएससी ने बताया कि सीएसपी के माध्यम से रंगदारी से उठाए गए पैसों का ट्रांजैक्शन किया गया है. गिरोह में शामिल शाहिद, सद्दाम और खुर्शीद का काम था कि जिन लोगों को धमकी दी गई, उन्हें दोबारा फोन करके फॉलोअप करना, उससे रंगदारी का पैसा उठाना, पैसा उठाकर दूसरी टीम को सौंप देना. इस टीम में खुर्शीद आलम, नरगिस बानो, सिराज अंसारी उर्फ छोटू, बाबर मजीद अंसारी, अमन कुमार वर्मा और संतोष कुमार गोस्वामी का काम था कि विभिन्न बैंक खातों, यूपीआई व सीएसपी के माध्यम से पैसे को जगह तक पहुंचाना. साथ ही इस टीम का काम रंगदारी के पैसों को जमीन, मेडिकल सहित अन्य व्यवसाय में खपाना भी था. सीएसपी के माध्यम से पैसे भेजने वालों को मोटा कमिशन मिलता था. ट्टा, चार गोली, एक रजिस्टर, जिसमें रंगदारी के पैसों का विवरण है. कई ट्रांजैक्शन की स्लिप और य्एक लाख रुपए नकद बरामद किया गया है. डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर अरविंद कुमार बिन्हा, केंदुआडीह थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार सिंह, बैंक मोड़ थाना प्रभारी प्रभात रंजन पांडेय, मुनीडीह ओपी प्रभारी सालो शालो हेम्ब्रम, राजगंज थाना प्रभारी आलोक कुमार सिंह, भूली ओपी प्रभारी रोशन बाड़ा, गोंदूडीह ओपी प्रभारी कुंदन कुमार, जोगता थाना प्रभारी दीपक कुमार झा, बरोरा थाना प्रभारी नंदू पाल, पुलिस अवर निरीक्षक चंदन कुमार तिवारी, भरत भूषण पटेल, घनश्याम गंझू थे. केंदुआडीह कादरी नगर इमामबाड़ा निवासी सद्दाब अंसारी उर्फ सद्दाम, उसकी पत्नी नरगिस बानो, कलाली बागान गली नंबर 8 निवासी शाहिद, कमर मखदुमी रोड नई मस्जिद के पास रहने वाले सद्दाम, लाला टोला आरा मोड़ के रहने वाले खुर्शीद आलम, यहिया नगर बाइपास रोड भूली के सिराज अंसारी उर्फ छोटू, केंदुआडीह चार नंबर के बाबर अहमद खान, पुटकी तीन नंबर के मजीद अंसारी, केंदुआडीह पूल न्यू सब्जी मंडी के अमन कुमार वर्मा, केंदुआडीह बाजार निवासी संतोष कुमार गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्हें लाने के लिए कैदी ले जाने वाले बड़े कैदी वाहन का इस्तेमाल किया गया.
धनबाद न्यूज़ः वासेपुर के कुख्यात प्रिंस खान के अर्थतंत्र पर धनबाद पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक किया है. ताबड़तोड़ छापेमारी कर एक महिला समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का दावा है कि प्रिंस खान के लिए रंगदारी का पैसा उठाने से लेकर पैसे खपाने के लिए जो सिस्टम बना कर रखा गया था, उसको तोड़ने में पुलिस कामयाब रही है. एसएसपी संजीव कुमार ने प्रेस वार्ता में इसका खुलासा किया. उन्होंने बताया कि धनबाद में कुछ सफेदपोश लोगों ने प्रिंस खान गैंग के रंगदारी का पैसा अपने कारोबार में लगा रखा है. एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के इस्तेमाल किए गए विभिन्न बैंक खातों की गहनता से छानबीन की गई. इसमें पता चला कि इन संदिग्ध अकाउंट में पिछले तीन माह में लगभग एक करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ है. इन लोगों ने कुल नब्बे अकाउंट में पैसे भेजे हैं. तीन सौ बार ट्रांजैक्शन किया गया है. एसएसपी ने बताया कि सभी अकाउंट को फ्रीज करा दिया गया है जबकि और कई अकाउंट अभी खंगाले जा रहे हैं. चार्टर्ड अकाउंटेंट की तरह बना रखा था सिस्टम एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार सभी लोगों की इस सिस्टम में अलग-अलग भूमिका थी. इस सिस्टम का सद्दाब अंसारी उर्फ सद्दाम किंगपीन था. नरगिस बानो पूरे सिस्टम की देखरेख करती थी. एसएससी ने बताया कि सीएसपी के माध्यम से रंगदारी से उठाए गए पैसों का ट्रांजैक्शन किया गया है. गिरोह में शामिल शाहिद, सद्दाम और खुर्शीद का काम था कि जिन लोगों को धमकी दी गई, उन्हें दोबारा फोन करके फॉलोअप करना, उससे रंगदारी का पैसा उठाना, पैसा उठाकर दूसरी टीम को सौंप देना. इस टीम में खुर्शीद आलम, नरगिस बानो, सिराज अंसारी उर्फ छोटू, बाबर मजीद अंसारी, अमन कुमार वर्मा और संतोष कुमार गोस्वामी का काम था कि विभिन्न बैंक खातों, यूपीआई व सीएसपी के माध्यम से पैसे को जगह तक पहुंचाना. साथ ही इस टीम का काम रंगदारी के पैसों को जमीन, मेडिकल सहित अन्य व्यवसाय में खपाना भी था. सीएसपी के माध्यम से पैसे भेजने वालों को मोटा कमिशन मिलता था. ट्टा, चार गोली, एक रजिस्टर, जिसमें रंगदारी के पैसों का विवरण है. कई ट्रांजैक्शन की स्लिप और य्एक लाख रुपए नकद बरामद किया गया है. डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर अरविंद कुमार बिन्हा, केंदुआडीह थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार सिंह, बैंक मोड़ थाना प्रभारी प्रभात रंजन पांडेय, मुनीडीह ओपी प्रभारी सालो शालो हेम्ब्रम, राजगंज थाना प्रभारी आलोक कुमार सिंह, भूली ओपी प्रभारी रोशन बाड़ा, गोंदूडीह ओपी प्रभारी कुंदन कुमार, जोगता थाना प्रभारी दीपक कुमार झा, बरोरा थाना प्रभारी नंदू पाल, पुलिस अवर निरीक्षक चंदन कुमार तिवारी, भरत भूषण पटेल, घनश्याम गंझू थे. केंदुआडीह कादरी नगर इमामबाड़ा निवासी सद्दाब अंसारी उर्फ सद्दाम, उसकी पत्नी नरगिस बानो, कलाली बागान गली नंबर आठ निवासी शाहिद, कमर मखदुमी रोड नई मस्जिद के पास रहने वाले सद्दाम, लाला टोला आरा मोड़ के रहने वाले खुर्शीद आलम, यहिया नगर बाइपास रोड भूली के सिराज अंसारी उर्फ छोटू, केंदुआडीह चार नंबर के बाबर अहमद खान, पुटकी तीन नंबर के मजीद अंसारी, केंदुआडीह पूल न्यू सब्जी मंडी के अमन कुमार वर्मा, केंदुआडीह बाजार निवासी संतोष कुमार गोस्वामी को गिरफ्तार किया गया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्हें लाने के लिए कैदी ले जाने वाले बड़े कैदी वाहन का इस्तेमाल किया गया.
सिंघू सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में उनकी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को गोली मारने और गड़बड़ी पैदा करने के लिए एक साजिश रची गई है। आंदोलनकारी किसानों द्वारा 18 महीने के लिए नए कृषि कानूनों को टाले रखने की केंद्र की पेशकश को खारिज कर दिया है और चार किसान नेताओं को मारने का खुलासा कर मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। सिंघू सीमा पर कई किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन "निरर्थक" होगा यदि वे अब वापस मुड़ते हैं। जबकि गणतंत्र दिवस पर ट्रैकटर रैली के लिए उनके साथ जुड़ने की कतार में हजारों और हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार हरियाणा के अंबाला के एक किसान जंग सिंह (73), जो विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सिंघू सीमा पर थे, ने स्वीकार किया कि "सरकार के कानून को ठंडे बस्ते में रखने की पेशकश निश्चित रूप से हमारे लिए एक जीत है", उन्होंने कहा कि हम जब तक कानूनों को निरस्त नहीं किया जाता है, तब तक कहीं भी नहीं जाएंगे . . . भले ही हमें कुछ महीनों तक और यहां रहना पड़े। सिंह के बच्चे और पोते भी अब विरोध स्थल पर हैं, ने कहा कि उनके पास अपने खेतों की देखभाल करने के लिए मददगार हैं। भारतीय किसान संघ से संबद्ध, जंग सिंह ने कहा कि उनके जिले के कई और किसान 26 जनवरी को मार्च का हिस्सा बनने के लिए अपने घरों को छोड़ रहे हैं। अंबाला के हर्ष गिल (18) ने कहा, "हम लिखित गारंटी के बिना वापस नहीं जा सकते कि कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। " जबकि कुछ ने कहा कि वे समय-समय पर अपने खेतों में जाते हैं, लगभग सभी ने कहा कि वे विरोध करना बंद नहीं करेंगे। (फोटो- सोशल मीडिया) गिल ने कहा, "ठंड से लड़ने के लिए, हम सूखे मेवे और पिन्नी खाते रहते हैं जो हमें गर्म रखते हैं। कपड़े धोने की सेवा के रूप में हमारे कपड़े धोए जा रहे हैं। हम रात को अच्छी नींद लेते हैं। जब तक हमारी सभी माँगें पूरी नहीं होंगी, हम यह धरना क्यों छोड़ेंगे? " पंजाब के होशियारपुर के एक किसान हरमिंदर सिंह (38) जो दोआबा किसान संघर्ष समिति से जुड़े हैं, ने कहा कि सरकार को कानूनों को रद्द करने की जरूरत है। अब घर लौटने का कोई मतलब नहीं है। " हरमिंदर ने कहा कि उसके 21 सदस्यीय परिवार के चार लोग विरोध स्थल पर हैं, उसकी पत्नी और बच्चे सप्ताहांत पर आते हैं। गाजीपुर में, उत्तर प्रदेश के रामपुर के किसान हसीब अहमद (40), जो भारतीय किसान यूनियन से जुड़े हैं, ने कहा, "सरकार ने सोचा था कि हम वापस चले जाएंगे। लेकिन उसके बिलकुल विपरीत अब हम 26 जनवरी को दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं। "इस बीच सिंघू सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में उनकी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को गोली मारने और गड़बड़ी पैदा करने के लिए एक साजिश रची गई है। (फोटो- सोशल मीडिया) अपने दावे के समर्थन में शुक्रवार रात एक संवाददाता सम्मेलन में, किसान नेताओं ने एक व्यक्ति को प्रस्तुत किया, जिसने दावा किया था कि उसके साथियों को कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के रूप में रैली में शामिल होने को कहा गया था ताकि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान यदि चीजें नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं तो भीड़ को तितर-बितर करने में सहयोग करें। उन्होंने कथित रूप से योजना में शामिल पुलिस अधिकारियों के नाम भी लिए। किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने यह भी कहा कि उनके अन्य साथियों के साथ नकाबपोश व्यक्ति को धमकी दी गई है कि यदि वे किसी भी जानकारी को लीक करते हैं तो उनके परिवार के सदस्यों को मार दिया जाएगा। किसान नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने सिंघू सीमा पर प्रदर्शन स्थल से उस व्यक्ति को पकड़ा। बाद में उन्हें हरियाणा पुलिस को सौंप दिया गया और पूछताछ के लिए कुंडली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हालांकि इस बीच, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें किसी भी नकाबपोश व्यक्ति की जानकारी नहीं है, न ही अब तक इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। हजारों किसान, जिनमें ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं, पिछले साल 28 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी के कई सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
सिंघू सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि छब्बीस जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में उनकी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को गोली मारने और गड़बड़ी पैदा करने के लिए एक साजिश रची गई है। आंदोलनकारी किसानों द्वारा अट्ठारह महीने के लिए नए कृषि कानूनों को टाले रखने की केंद्र की पेशकश को खारिज कर दिया है और चार किसान नेताओं को मारने का खुलासा कर मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। सिंघू सीमा पर कई किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन "निरर्थक" होगा यदि वे अब वापस मुड़ते हैं। जबकि गणतंत्र दिवस पर ट्रैकटर रैली के लिए उनके साथ जुड़ने की कतार में हजारों और हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार हरियाणा के अंबाला के एक किसान जंग सिंह , जो विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सिंघू सीमा पर थे, ने स्वीकार किया कि "सरकार के कानून को ठंडे बस्ते में रखने की पेशकश निश्चित रूप से हमारे लिए एक जीत है", उन्होंने कहा कि हम जब तक कानूनों को निरस्त नहीं किया जाता है, तब तक कहीं भी नहीं जाएंगे . . . भले ही हमें कुछ महीनों तक और यहां रहना पड़े। सिंह के बच्चे और पोते भी अब विरोध स्थल पर हैं, ने कहा कि उनके पास अपने खेतों की देखभाल करने के लिए मददगार हैं। भारतीय किसान संघ से संबद्ध, जंग सिंह ने कहा कि उनके जिले के कई और किसान छब्बीस जनवरी को मार्च का हिस्सा बनने के लिए अपने घरों को छोड़ रहे हैं। अंबाला के हर्ष गिल ने कहा, "हम लिखित गारंटी के बिना वापस नहीं जा सकते कि कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। " जबकि कुछ ने कहा कि वे समय-समय पर अपने खेतों में जाते हैं, लगभग सभी ने कहा कि वे विरोध करना बंद नहीं करेंगे। गिल ने कहा, "ठंड से लड़ने के लिए, हम सूखे मेवे और पिन्नी खाते रहते हैं जो हमें गर्म रखते हैं। कपड़े धोने की सेवा के रूप में हमारे कपड़े धोए जा रहे हैं। हम रात को अच्छी नींद लेते हैं। जब तक हमारी सभी माँगें पूरी नहीं होंगी, हम यह धरना क्यों छोड़ेंगे? " पंजाब के होशियारपुर के एक किसान हरमिंदर सिंह जो दोआबा किसान संघर्ष समिति से जुड़े हैं, ने कहा कि सरकार को कानूनों को रद्द करने की जरूरत है। अब घर लौटने का कोई मतलब नहीं है। " हरमिंदर ने कहा कि उसके इक्कीस सदस्यीय परिवार के चार लोग विरोध स्थल पर हैं, उसकी पत्नी और बच्चे सप्ताहांत पर आते हैं। गाजीपुर में, उत्तर प्रदेश के रामपुर के किसान हसीब अहमद , जो भारतीय किसान यूनियन से जुड़े हैं, ने कहा, "सरकार ने सोचा था कि हम वापस चले जाएंगे। लेकिन उसके बिलकुल विपरीत अब हम छब्बीस जनवरी को दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं। "इस बीच सिंघू सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि छब्बीस जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में उनकी प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को गोली मारने और गड़बड़ी पैदा करने के लिए एक साजिश रची गई है। अपने दावे के समर्थन में शुक्रवार रात एक संवाददाता सम्मेलन में, किसान नेताओं ने एक व्यक्ति को प्रस्तुत किया, जिसने दावा किया था कि उसके साथियों को कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के रूप में रैली में शामिल होने को कहा गया था ताकि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान यदि चीजें नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं तो भीड़ को तितर-बितर करने में सहयोग करें। उन्होंने कथित रूप से योजना में शामिल पुलिस अधिकारियों के नाम भी लिए। किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने यह भी कहा कि उनके अन्य साथियों के साथ नकाबपोश व्यक्ति को धमकी दी गई है कि यदि वे किसी भी जानकारी को लीक करते हैं तो उनके परिवार के सदस्यों को मार दिया जाएगा। किसान नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने सिंघू सीमा पर प्रदर्शन स्थल से उस व्यक्ति को पकड़ा। बाद में उन्हें हरियाणा पुलिस को सौंप दिया गया और पूछताछ के लिए कुंडली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हालांकि इस बीच, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें किसी भी नकाबपोश व्यक्ति की जानकारी नहीं है, न ही अब तक इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। हजारों किसान, जिनमें ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं, पिछले साल अट्ठाईस नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी के कई सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं। दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
नयी दिल्ली, सात सितंबर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की एक बहु-विषयक टीम झारखंड के दौरे पर है जहां वह मिशन की प्रगति और कार्यान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के अलावा जमीनी स्तर पर स्थिति का अवलोकन करेगी एवं राज्य की टीम के साथ बातचीत करेगी । जल शक्ति मंत्रालय के बयान के अनुसार, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की यह टीम झारखंड के चार जिलों रांची, धनबाद, खूंटी और हजारीबाग का दौरा 6 से 9 सितंबर के बीच कर रही है। इसमें कहा गया है कि झारखंड राज्य की योजना 2023-24 तक सभी परिवारों को शत प्रतिशत नल से घर को पानी के कनेक्शन (एफएचटीसी) से जोड़ने की है। राज्य के 59. 24 लाख ग्रामीण परिवारों में से 8. 60 लाख (14. 5%) परिवारों को नल से जल कनेक्शन प्राप्त है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, 15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन की शुरूआत के समय झारखंड में केवल 3. 45 लाख (5. 85%) ग्रामीण परिवारों को नल से जल की आपूर्ति हो रही थी। पिछले 24 महीनों में, राज्य में 5. 15 लाख परिवारों (8. 7%) को नल से जल कनेक्शन प्रदान किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण परिवारों में नल से जल आपूर्ति प्रदान करने वाली राष्ट्रीय औसत में हुई 23% बढ़ोत्तरी की तुलना में झारखंड में यह प्रगति बहुत ही धीमी रही है। मंत्रालय के अनुसार, राज्य को 2020-21 के दौरान 572. 24 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया, लेकिन यह केवल 143. 06 करोड़ रुपये ही प्राप्त कर सका और ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति के कार्यान्वयन की रफ्तार धीमी होने के कारण 429. 18 करोड़ रुपये उसे वापस करने पड़े। बयान के अनुसार, 2024 तक हर घर नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्य को सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य के लिए केंद्रीय आवंटन को चार गुना बढ़ाकर 2,479. 88 करोड़ रुपये कर दिया है। इस बढ़े हुए केंद्रीय आवंटन और राज्य के 2,617. 81 करोड़ रुपये के बराबरी के योगदान के साथ, झारखंड राज्य को 2021-22 में जल आपूर्ति कार्यों के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 5,235. 62 करोड़ रुपये का परिव्यय उपलब्ध है। जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस बात पर बल दिया है कि लक्ष्य की प्राप्ति समयबद्ध रूप से करने के लिए सभी गांवों में नल से जल कनेक्शन प्रदान करने का काम शुरू किया जाना चाहिए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, सात सितंबर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की एक बहु-विषयक टीम झारखंड के दौरे पर है जहां वह मिशन की प्रगति और कार्यान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के अलावा जमीनी स्तर पर स्थिति का अवलोकन करेगी एवं राज्य की टीम के साथ बातचीत करेगी । जल शक्ति मंत्रालय के बयान के अनुसार, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की यह टीम झारखंड के चार जिलों रांची, धनबाद, खूंटी और हजारीबाग का दौरा छः से नौ सितंबर के बीच कर रही है। इसमें कहा गया है कि झारखंड राज्य की योजना दो हज़ार तेईस-चौबीस तक सभी परिवारों को शत प्रतिशत नल से घर को पानी के कनेक्शन से जोड़ने की है। राज्य के उनसठ. चौबीस लाख ग्रामीण परिवारों में से आठ. साठ लाख परिवारों को नल से जल कनेक्शन प्राप्त है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, पंद्रह अगस्त, दो हज़ार उन्नीस को जल जीवन मिशन की शुरूआत के समय झारखंड में केवल तीन. पैंतालीस लाख ग्रामीण परिवारों को नल से जल की आपूर्ति हो रही थी। पिछले चौबीस महीनों में, राज्य में पाँच. पंद्रह लाख परिवारों को नल से जल कनेक्शन प्रदान किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण परिवारों में नल से जल आपूर्ति प्रदान करने वाली राष्ट्रीय औसत में हुई तेईस% बढ़ोत्तरी की तुलना में झारखंड में यह प्रगति बहुत ही धीमी रही है। मंत्रालय के अनुसार, राज्य को दो हज़ार बीस-इक्कीस के दौरान पाँच सौ बहत्तर. चौबीस करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया, लेकिन यह केवल एक सौ तैंतालीस. छः करोड़ रुपये ही प्राप्त कर सका और ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति के कार्यान्वयन की रफ्तार धीमी होने के कारण चार सौ उनतीस. अट्ठारह करोड़ रुपये उसे वापस करने पड़े। बयान के अनुसार, दो हज़ार चौबीस तक हर घर नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्य को सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य के लिए केंद्रीय आवंटन को चार गुना बढ़ाकर दो,चार सौ उन्यासी. अठासी करोड़ रुपये कर दिया है। इस बढ़े हुए केंद्रीय आवंटन और राज्य के दो,छः सौ सत्रह. इक्यासी करोड़ रुपये के बराबरी के योगदान के साथ, झारखंड राज्य को दो हज़ार इक्कीस-बाईस में जल आपूर्ति कार्यों के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत पाँच,दो सौ पैंतीस. बासठ करोड़ रुपये का परिव्यय उपलब्ध है। जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस बात पर बल दिया है कि लक्ष्य की प्राप्ति समयबद्ध रूप से करने के लिए सभी गांवों में नल से जल कनेक्शन प्रदान करने का काम शुरू किया जाना चाहिए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
लालू प्रसाद को दिल्ली AIIMS से डिस्चार्ज कर दिया गया है. इसके बाद वह अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती के सरकारी आवास पर चले गए हैं. पटना में गिरने और कंधे में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें AIIMS में भर्ती कराया गया था. शुक्रवार को लालू प्रसाद को दिल्ली AIIMS से डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद लालू प्रसाद अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती के सरकारी बंगले पर पहुंच गए हैं. सिंगापुर में रहने वाली लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्या ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. रोहिणी ने ट्वीट किया है Welcome back home papa जमाना करता है उनसे प्यार, लाखों लोगों के दिलों पे जो किया करते हैं राज. इसके साथ ही रोहिणी ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और मीसा भारती की बेटी के साथ लालू प्रसाद की कई फोटो सोशल मीडिया पर साझा की है. तस्वीरों में लालू प्रसाद पहले से स्वस्थ्य दिख रहे हैं. लालू प्रसाद पटना में राबड़ी आवास में गिर गए थे. जिसके बाद उनके कंधे में फ्रैक्चर हो गया था. तब लालू प्रसाद को पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां स्वास्थ्य में ज्यादा सुधार नहीं होने के बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था. जहां दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चल रहा था. एम्स में डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती कराया था. तब उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने बताया था कंधे की हड्डी टूटने से लालू यादव का शरीर लॉक हो गया है. इससे शरीर में मूवमेंट भी नहीं हो रहा है. लालू प्रसाद की पहले से किडनी में आई खराबी की वजह से भी स्वास्थ्य की परेशानियां ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रेटिनिन लेवल में उतार-चढ़ाव देखा गया था. इसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद समर्थकों के साथ ही दिग्गज सियासी नेताओं ने उनके जल्द स्वास्थ होने की कामना की थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस्वी यादव को फोन कर उनका हालचाल जाना था और उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की थी. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोनकर उनका हाल चाल जाना था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लालू प्रसाद से मिलने AIIMS पहुंचे थे. लालू प्रसाद की तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब सीएम नीतीश कुमार भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे. मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा था कि लालू प्रसाद उनके पुराने मित्र हैं, उनसे उनका पुराना संबंध है. वह जल्द उनके ठीक होने की कामना करते हैं. इसके साथ ही नीतीश कुमार ने ऐलान किया था लालू प्रसाद का इलाज बिहार सरकार की तरफ से कराया जाएगा.
लालू प्रसाद को दिल्ली AIIMS से डिस्चार्ज कर दिया गया है. इसके बाद वह अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती के सरकारी आवास पर चले गए हैं. पटना में गिरने और कंधे में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें AIIMS में भर्ती कराया गया था. शुक्रवार को लालू प्रसाद को दिल्ली AIIMS से डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद लालू प्रसाद अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती के सरकारी बंगले पर पहुंच गए हैं. सिंगापुर में रहने वाली लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्या ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. रोहिणी ने ट्वीट किया है Welcome back home papa जमाना करता है उनसे प्यार, लाखों लोगों के दिलों पे जो किया करते हैं राज. इसके साथ ही रोहिणी ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और मीसा भारती की बेटी के साथ लालू प्रसाद की कई फोटो सोशल मीडिया पर साझा की है. तस्वीरों में लालू प्रसाद पहले से स्वस्थ्य दिख रहे हैं. लालू प्रसाद पटना में राबड़ी आवास में गिर गए थे. जिसके बाद उनके कंधे में फ्रैक्चर हो गया था. तब लालू प्रसाद को पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां स्वास्थ्य में ज्यादा सुधार नहीं होने के बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था. जहां दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चल रहा था. एम्स में डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती कराया था. तब उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने बताया था कंधे की हड्डी टूटने से लालू यादव का शरीर लॉक हो गया है. इससे शरीर में मूवमेंट भी नहीं हो रहा है. लालू प्रसाद की पहले से किडनी में आई खराबी की वजह से भी स्वास्थ्य की परेशानियां ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रेटिनिन लेवल में उतार-चढ़ाव देखा गया था. इसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद समर्थकों के साथ ही दिग्गज सियासी नेताओं ने उनके जल्द स्वास्थ होने की कामना की थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस्वी यादव को फोन कर उनका हालचाल जाना था और उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की थी. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोनकर उनका हाल चाल जाना था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लालू प्रसाद से मिलने AIIMS पहुंचे थे. लालू प्रसाद की तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब सीएम नीतीश कुमार भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे. मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा था कि लालू प्रसाद उनके पुराने मित्र हैं, उनसे उनका पुराना संबंध है. वह जल्द उनके ठीक होने की कामना करते हैं. इसके साथ ही नीतीश कुमार ने ऐलान किया था लालू प्रसाद का इलाज बिहार सरकार की तरफ से कराया जाएगा.
PRAYAGRAJ: गांधीजी की 150वीं जयंती पर उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र में चार दिवसीय कार्यक्रम कृतज्ञ नमन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रपिता को दिल से याद किया गया। एक से चार अक्टूबर तक चलने वाले नमन समारोह में गांधी जी के जीवन पर आधारित कई प्रोग्राम्स हुए। इस मौके पर एनसीजेडसीसी के पूर्व निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने सभी गेस्ट्स और चीफ गेस्ट का वेलकम किया। व्याख्यान के वक्ता रहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो। हेरम्ब चतुर्वेदी ने महात्मा गांधी एवं स्वतंत्रता आन्दोलन विषय पर अपने व्याख्यान के दौरान विस्तृत प्रकाश डाला। कल्चरल प्रोग्राम्स का शुभारंभ नई दिल्ली की विधि शर्मा ने गांधी जी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' गाकर किया। दूसरी प्रस्तुती सिंजिनी कुलकर्णी महात्मा गांधी पर आधारित एकल नृत्य संरचना की प्रस्तुति की।
PRAYAGRAJ: गांधीजी की एक सौ पचासवीं जयंती पर उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र में चार दिवसीय कार्यक्रम कृतज्ञ नमन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रपिता को दिल से याद किया गया। एक से चार अक्टूबर तक चलने वाले नमन समारोह में गांधी जी के जीवन पर आधारित कई प्रोग्राम्स हुए। इस मौके पर एनसीजेडसीसी के पूर्व निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने सभी गेस्ट्स और चीफ गेस्ट का वेलकम किया। व्याख्यान के वक्ता रहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो। हेरम्ब चतुर्वेदी ने महात्मा गांधी एवं स्वतंत्रता आन्दोलन विषय पर अपने व्याख्यान के दौरान विस्तृत प्रकाश डाला। कल्चरल प्रोग्राम्स का शुभारंभ नई दिल्ली की विधि शर्मा ने गांधी जी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए' गाकर किया। दूसरी प्रस्तुती सिंजिनी कुलकर्णी महात्मा गांधी पर आधारित एकल नृत्य संरचना की प्रस्तुति की।
गाजियाबादः देर रात जिले के मसूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत दोहरे मर्डर से हडकम्प मच गया. घटना की जानकरी मिलते ही जिले के आला अधिकारी घटना स्थल की और दौड़ पड़े. उसके बाद देर घटना का खुलासा हुआ. जिले के थाना मसूरी क्षेत्र में हुई घटना के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नथानी द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए घटनास्थल पर जाकर मौका मुआयना कर पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए ढांढस बंधाया व मौके पर ही परिजनों, आसपास व मोहल्ले के लोगों तत्परता से घटना के बारे में सभी पहलुओं की जानकारी करते हुए घटना के अनावरण हेतु मौके पर ही पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पुलिस अधीक्षक अपराध ,क्षेत्राधिकारी सदर, नगर, प्रथम एवं द्वितीय के लिए नेतृत्व में 5 टीमें गठित कर तत्काल घटना के अनावरण व आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु कड़े निर्देश जारी किए. एसएसपी द्वारा तत्काल अस्पताल पहुंचकर घायलों का हलचल जाना व पीड़ित के परिवारजनों से मुलाकात कर उनको सांत्वना देते हुए अस्पताल प्रबंधन से वार्ता करते हुए घायलों का प्राथमिकता के आधार पर हरसंभव/ समुचित इलाज करने हेतु वार्ता की गई. इसी क्रम में एसएसपी द्वारा गठित टीमों द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मैनुअल इंटेलिजेंस, बयान व पूछताछ, भौतिक व परिस्थिति जन्य साक्ष्य, अन्य संकलित किए गए साक्ष्यों के आधार पर घटना कारित करने वाले मुख्य अभियुक्त सोनू को मुठभेड़ के दौरान और परिवार की रिश्तेदार महिला उमा को घटना के चंद घंटों में गिरफ्तार कर घटना का सफल अनावरण किया है. अभियुक्त उमा पीड़ित परिवार की पूर्व परिचित रिश्तेदार हरीश की पत्नी है एवं सोनू उनका परिचित पड़ोसी है. अभियुक्त गण के कब्जे से एक अदद पिस्टल ,तमंचा,घर से लूटे गए सोने/ चांदी के जेवरात और नकदी घटना के समय पहने हुए कपड़े, मोबाइल फोन बरामद हुए. अभियुक्त गणों द्वारा अपने आर्थिक भौतिक लाभ हेतु घटना कारित करना कबूल किया है. अभियुक्तों की शिनाख्त व पुष्टि घटना की चश्मदीद गवाह वादी की घायल पुत्री गौरी द्वारा अपने बयान में की है.
गाजियाबादः देर रात जिले के मसूरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत दोहरे मर्डर से हडकम्प मच गया. घटना की जानकरी मिलते ही जिले के आला अधिकारी घटना स्थल की और दौड़ पड़े. उसके बाद देर घटना का खुलासा हुआ. जिले के थाना मसूरी क्षेत्र में हुई घटना के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नथानी द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए घटनास्थल पर जाकर मौका मुआयना कर पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए ढांढस बंधाया व मौके पर ही परिजनों, आसपास व मोहल्ले के लोगों तत्परता से घटना के बारे में सभी पहलुओं की जानकारी करते हुए घटना के अनावरण हेतु मौके पर ही पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पुलिस अधीक्षक अपराध ,क्षेत्राधिकारी सदर, नगर, प्रथम एवं द्वितीय के लिए नेतृत्व में पाँच टीमें गठित कर तत्काल घटना के अनावरण व आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु कड़े निर्देश जारी किए. एसएसपी द्वारा तत्काल अस्पताल पहुंचकर घायलों का हलचल जाना व पीड़ित के परिवारजनों से मुलाकात कर उनको सांत्वना देते हुए अस्पताल प्रबंधन से वार्ता करते हुए घायलों का प्राथमिकता के आधार पर हरसंभव/ समुचित इलाज करने हेतु वार्ता की गई. इसी क्रम में एसएसपी द्वारा गठित टीमों द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मैनुअल इंटेलिजेंस, बयान व पूछताछ, भौतिक व परिस्थिति जन्य साक्ष्य, अन्य संकलित किए गए साक्ष्यों के आधार पर घटना कारित करने वाले मुख्य अभियुक्त सोनू को मुठभेड़ के दौरान और परिवार की रिश्तेदार महिला उमा को घटना के चंद घंटों में गिरफ्तार कर घटना का सफल अनावरण किया है. अभियुक्त उमा पीड़ित परिवार की पूर्व परिचित रिश्तेदार हरीश की पत्नी है एवं सोनू उनका परिचित पड़ोसी है. अभियुक्त गण के कब्जे से एक अदद पिस्टल ,तमंचा,घर से लूटे गए सोने/ चांदी के जेवरात और नकदी घटना के समय पहने हुए कपड़े, मोबाइल फोन बरामद हुए. अभियुक्त गणों द्वारा अपने आर्थिक भौतिक लाभ हेतु घटना कारित करना कबूल किया है. अभियुक्तों की शिनाख्त व पुष्टि घटना की चश्मदीद गवाह वादी की घायल पुत्री गौरी द्वारा अपने बयान में की है.
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन उछाल दिखा, असर आज कई शहरों में जारी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिख रहा है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज सुबह जारी पेट्रोल-डीजल के खुदरा रेट में यूपी के कई शहरों में बदलाव किया है, लेकिन दिल्ली-मुंबई जैसे देश के चारों महानगरों में तेल कीमतें आज भी स्थिर बनी हुई हैं. आज सुबह गौतमबुद्ध नगर जिले (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में पेट्रोल 24 पैसे महंगा होकर 97 रुपये लीटर और डीजल 21 पैसे बढ़कर 90. 14 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. - नोएडा में पेट्रोल 97 रुपये और डीजल 90. 14 रुपये प्रति लीटर हो गया है. - पटना में पेट्रोल 107. 24 रुपये और डीजल 94. 04 रुपये प्रति लीटर हो गया है. - लखनऊ में पेट्रोल 96. 44 रुपये और डीजल 89. 64 रुपये प्रति लीटर हो गया है. हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. सुबह 6 बजे से ही नए रेट लागू हो जाते हैं. पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, वैट और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाता है. यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल के दाम इतने अधिक दिखाई देते हैं.
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन उछाल दिखा, असर आज कई शहरों में जारी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिख रहा है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज सुबह जारी पेट्रोल-डीजल के खुदरा रेट में यूपी के कई शहरों में बदलाव किया है, लेकिन दिल्ली-मुंबई जैसे देश के चारों महानगरों में तेल कीमतें आज भी स्थिर बनी हुई हैं. आज सुबह गौतमबुद्ध नगर जिले में पेट्रोल चौबीस पैसे महंगा होकर सत्तानवे रुपयापये लीटर और डीजल इक्कीस पैसे बढ़कर नब्बे. चौदह रुपयापये प्रति लीटर बिक रहा है. - नोएडा में पेट्रोल सत्तानवे रुपयापये और डीजल नब्बे. चौदह रुपयापये प्रति लीटर हो गया है. - पटना में पेट्रोल एक सौ सात. चौबीस रुपयापये और डीजल चौरानवे. चार रुपयापये प्रति लीटर हो गया है. - लखनऊ में पेट्रोल छियानवे. चौंतालीस रुपयापये और डीजल नवासी. चौंसठ रुपयापये प्रति लीटर हो गया है. हर दिन सुबह छः बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. सुबह छः बजे से ही नए रेट लागू हो जाते हैं. पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन, वैट और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाता है. यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल के दाम इतने अधिक दिखाई देते हैं.
कथावाचक जया किशोरी ने कम उम्र में शोहरत हासिल की है. उन्हें लोग मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर पहचानते हैं. जया किशोरी बहुत ही मधुर स्वर में भजन गाती हैं. जया ने पहली बार 10 साल की उम्र में सुंदरकांड का पाठ किया था. उनकी सादगी देखकर लोग उन्हें देवी का अवतार मानते हैं. बचपन से ही जया का रुझान आध्यात्म की ओर था. जया किशोरी भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त हैं. यह देखकर ही उनके गुरु ने उन्हें 'किशोरी जी' की उपाधि दी. वह हर साल खाटू श्याम जी के मंदिर में दर्शन करने जाती हैं. जया किशोरी युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों में भी पॉपुलर हैं.
कथावाचक जया किशोरी ने कम उम्र में शोहरत हासिल की है. उन्हें लोग मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर पहचानते हैं. जया किशोरी बहुत ही मधुर स्वर में भजन गाती हैं. जया ने पहली बार दस साल की उम्र में सुंदरकांड का पाठ किया था. उनकी सादगी देखकर लोग उन्हें देवी का अवतार मानते हैं. बचपन से ही जया का रुझान आध्यात्म की ओर था. जया किशोरी भगवान श्री कृष्ण की परम भक्त हैं. यह देखकर ही उनके गुरु ने उन्हें 'किशोरी जी' की उपाधि दी. वह हर साल खाटू श्याम जी के मंदिर में दर्शन करने जाती हैं. जया किशोरी युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों में भी पॉपुलर हैं.
शहीदी दिवस पर पढ़िए पाकिस्तान का एक क़िस्सा.. जब भगत सिंह की शहादत के इतने साल बाद कोई उन्हें बेगुनाह साबित कराने के लिए कोर्ट पहुंचा था, लाहौर। एक अंग्रेज पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह को फांसी पर लटकाने के 86 साल बाद उन्हें बेगुनाह साबित करने के लिए एक पाकिस्तानी वकील लाहौर उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने मंगलवार अर्जी देकर याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया। लाहौर हाई कोर्ट की बेंच ने फरवरी में चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कुरैशी की याचिका पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच का गठन किया जाए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। कुरैशी लाहौर में भगत सिंह ममोरियल फाउंडेशन चलाते हैं। याचिका में कुरैशी ने कहा था कि भगत सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बंटवारे से पहले के हिंदुस्तान की आजादी के लिए संघर्ष किया था। ये भी पढ़ें- भगत सिंह का लेख - मैं नास्तिक क्यों हूं ? याचिका में अदालत से फिर से विचार करने के सिद्धांतों का पालन करते हुए भगत सिंह की सजा रद्द करने और सरकार को उन्हें राजकीय सम्मान देने का आदेश देने की मांग की गयी है। भगत सिंह को 23 साल की उम्र में ब्रिटिश शासकों ने 23 मार्च 1931 को फांसी पर चढ़ा दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने ब्रिटेन की औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ साजिश रची थी। इस सिलसिले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सैंडर्स की कथित तौर पर हत्या करने का मामला दर्ज किया गया था। कुरैशी ने कहा, "भगत सिंह मामले पर जल्द सुनवाई के लिए मैंने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मैंने रजिस्ट्रार से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई की तारीख तय करें और उम्मीद है कि इस महीने मामले पर सुनवाई होगी।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पत्र लिखकर शादमन चौक (लाहौर के मुख्य हिस्से) पर भगत सिंह की प्रतिमा लगाने की मांग की गई है जहां उन्हें उनके दो साथियों के साथ फांसी पर लटकाया गया था।
शहीदी दिवस पर पढ़िए पाकिस्तान का एक क़िस्सा.. जब भगत सिंह की शहादत के इतने साल बाद कोई उन्हें बेगुनाह साबित कराने के लिए कोर्ट पहुंचा था, लाहौर। एक अंग्रेज पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह को फांसी पर लटकाने के छियासी साल बाद उन्हें बेगुनाह साबित करने के लिए एक पाकिस्तानी वकील लाहौर उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने मंगलवार अर्जी देकर याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया। लाहौर हाई कोर्ट की बेंच ने फरवरी में चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कुरैशी की याचिका पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच का गठन किया जाए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी। कुरैशी लाहौर में भगत सिंह ममोरियल फाउंडेशन चलाते हैं। याचिका में कुरैशी ने कहा था कि भगत सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बंटवारे से पहले के हिंदुस्तान की आजादी के लिए संघर्ष किया था। ये भी पढ़ें- भगत सिंह का लेख - मैं नास्तिक क्यों हूं ? याचिका में अदालत से फिर से विचार करने के सिद्धांतों का पालन करते हुए भगत सिंह की सजा रद्द करने और सरकार को उन्हें राजकीय सम्मान देने का आदेश देने की मांग की गयी है। भगत सिंह को तेईस साल की उम्र में ब्रिटिश शासकों ने तेईस मार्च एक हज़ार नौ सौ इकतीस को फांसी पर चढ़ा दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने ब्रिटेन की औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ साजिश रची थी। इस सिलसिले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सैंडर्स की कथित तौर पर हत्या करने का मामला दर्ज किया गया था। कुरैशी ने कहा, "भगत सिंह मामले पर जल्द सुनवाई के लिए मैंने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मैंने रजिस्ट्रार से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई की तारीख तय करें और उम्मीद है कि इस महीने मामले पर सुनवाई होगी।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पत्र लिखकर शादमन चौक पर भगत सिंह की प्रतिमा लगाने की मांग की गई है जहां उन्हें उनके दो साथियों के साथ फांसी पर लटकाया गया था।
Kiriburu (Shailesh Singh) : सेलकर्मियों के लिये सेल प्रबंधन ने नया वेतन पुनरीक्षण का आदेश जारी किया है. इस आदेश से खदानों में कार्य करने वाले सेलकर्मी नाराज हैं. वे इसे सेल की स्टील प्लांटों के कर्मचारियों के हित में बता रहे हैं. वहीं, इस संबंध में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरू के महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने कहा कि वेरिएबल पर्क्स और अलाउंस पर एमओयू के तहत 26. 5 फीसदी भुगतान करने की बातें हुई थी, लेकिन 25 फीसदी कम्पल्सरी भुगतान करने का ही आदेश जारी हुआ है, न की 26. 5 फीसदी भुगतान का. मैक्सिमम लिमिट में 26. 5 फीसदी रखा गया है. साथ ही खदान कर्मियों को एनर्जी अलाउंस मिलता था, वह भी नहीं दिया जा रहा है. कैफिटेरिया अप्रोच के तहत शिक्षा भत्ता भी नहीं मिल रहा है. यह एनजेसीएस नेताओं की अनदेखी का एक और उदाहरण सामने आया है. उन्होंने कहा कि खदान क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों के बच्चे जो बाहर रह कर पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें न तो होस्टल सब्सिडी दी जा रही है और न ही एजुकेशन अलाउंस. खदान क्षेत्र में भी न शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल है न स्वास्थ्य के लिए अच्छा अस्पताल. खदान क्षेत्र से 100-200 किमी तक कोई सुविधा नहीं है. सयंत्रों के जरूरत के अनुसार एमओयू बना और लागू किया गया है, जिसे खदान कर्मियों के ऊपर लाद दिया गया है. संयंत्रों और खदानों की स्थिती भौगोलिक दृष्टि कोण से बहुत ही भिन्न है. इसे सेल प्रबंधन और एनजेसीएस के श्रमिक संगठनों के सदस्यों ने पुनः नजर अंदाज कर दिया है. इस के पीछे एनजेसीएस की बैठक में खदानों की प्रतिनिधित्व न होना है. उन्होंने कहा कि सिर्फ खदान कर्मियों को छोड़ कर अधिकारी वर्गों को एजुकेशन, होस्टल, एनर्जी सभी सुविधा कैफिटेरिया अप्रोच के तहत खदानों मे कार्यरत अधिकारियों को उपरोक्त सभी अलाउंस देने का प्रावधान किया गया है. ऊपर से दासा की कोई चर्चा नहीं है, जो उपरोक्त अलाउंस से बाहर है. अभी पर्क्स जो मिल रहा है उसमें भी लोचा है 26. 5 फीसदी की जगह 25 फीसदी ही मिल रही है. लेकिन एनजेसीएस के सभी श्रमिक संगठनों के सदस्य चुप हैं. इंक्रीमेंट में भी 3 फीसदी की जगह 2. 5 फीसदी दिया जा रहा है. इसमें पीपी का खात्मा होगा ऐसा संदेह है. नए वेतन पुनरीक्षण इंप्लीमेंट के पश्चात विसंगतियों को कैसे और कौन दूर करेगा पता नहीं. झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरू इस विसंगतियों का विरोध करता है और विसंगतियों को दूर करने तथा एजुकेशन, एनर्जी और होस्टल सब्सिडी खदान कर्मियों को मिले इसकी मांग करता है.
Kiriburu : सेलकर्मियों के लिये सेल प्रबंधन ने नया वेतन पुनरीक्षण का आदेश जारी किया है. इस आदेश से खदानों में कार्य करने वाले सेलकर्मी नाराज हैं. वे इसे सेल की स्टील प्लांटों के कर्मचारियों के हित में बता रहे हैं. वहीं, इस संबंध में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरू के महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने कहा कि वेरिएबल पर्क्स और अलाउंस पर एमओयू के तहत छब्बीस. पाँच फीसदी भुगतान करने की बातें हुई थी, लेकिन पच्चीस फीसदी कम्पल्सरी भुगतान करने का ही आदेश जारी हुआ है, न की छब्बीस. पाँच फीसदी भुगतान का. मैक्सिमम लिमिट में छब्बीस. पाँच फीसदी रखा गया है. साथ ही खदान कर्मियों को एनर्जी अलाउंस मिलता था, वह भी नहीं दिया जा रहा है. कैफिटेरिया अप्रोच के तहत शिक्षा भत्ता भी नहीं मिल रहा है. यह एनजेसीएस नेताओं की अनदेखी का एक और उदाहरण सामने आया है. उन्होंने कहा कि खदान क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों के बच्चे जो बाहर रह कर पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें न तो होस्टल सब्सिडी दी जा रही है और न ही एजुकेशन अलाउंस. खदान क्षेत्र में भी न शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल है न स्वास्थ्य के लिए अच्छा अस्पताल. खदान क्षेत्र से एक सौ-दो सौ किमी तक कोई सुविधा नहीं है. सयंत्रों के जरूरत के अनुसार एमओयू बना और लागू किया गया है, जिसे खदान कर्मियों के ऊपर लाद दिया गया है. संयंत्रों और खदानों की स्थिती भौगोलिक दृष्टि कोण से बहुत ही भिन्न है. इसे सेल प्रबंधन और एनजेसीएस के श्रमिक संगठनों के सदस्यों ने पुनः नजर अंदाज कर दिया है. इस के पीछे एनजेसीएस की बैठक में खदानों की प्रतिनिधित्व न होना है. उन्होंने कहा कि सिर्फ खदान कर्मियों को छोड़ कर अधिकारी वर्गों को एजुकेशन, होस्टल, एनर्जी सभी सुविधा कैफिटेरिया अप्रोच के तहत खदानों मे कार्यरत अधिकारियों को उपरोक्त सभी अलाउंस देने का प्रावधान किया गया है. ऊपर से दासा की कोई चर्चा नहीं है, जो उपरोक्त अलाउंस से बाहर है. अभी पर्क्स जो मिल रहा है उसमें भी लोचा है छब्बीस. पाँच फीसदी की जगह पच्चीस फीसदी ही मिल रही है. लेकिन एनजेसीएस के सभी श्रमिक संगठनों के सदस्य चुप हैं. इंक्रीमेंट में भी तीन फीसदी की जगह दो. पाँच फीसदी दिया जा रहा है. इसमें पीपी का खात्मा होगा ऐसा संदेह है. नए वेतन पुनरीक्षण इंप्लीमेंट के पश्चात विसंगतियों को कैसे और कौन दूर करेगा पता नहीं. झारखंड मजदूर संघर्ष संघ किरीबुरू इस विसंगतियों का विरोध करता है और विसंगतियों को दूर करने तथा एजुकेशन, एनर्जी और होस्टल सब्सिडी खदान कर्मियों को मिले इसकी मांग करता है.
26 संबंधोंः चित्तौड़गढ़, झुन्झुनू, नाहरगढ़ दुर्ग, नागौर, बालसमंद झील, बीकानेर, भरतपुर, मेहरानगढ़, रामबाग महल, राजस्थान, लक्ष्मणगढ़ दुर्ग, लेक पैलेस, शिव निवास पैलेस, शेखावत, सिटी पैलेस, उदयपुर, संग्रहालय, सीकर, हवामहल, होटल, जयपुर, जल महल, जैसलमेर, जैसलमेर दुर्ग, जोधपुर, उदयपुर, उम्मैद भवन पैलेस। पद्मिनी महल का तैलचित्र चित्तौड़गढ़ राजस्थान का एक शहर है। यह शूरवीरों का शहर है जो पहाड़ी पर बने दुर्ग के लिए प्रसिद्ध है। चित्तौड़गढ़ की प्राचीनता का पता लगाना कठिन कार्य है, किन्तु माना जाता है कि महाभारत काल में महाबली भीम ने अमरत्व के रहस्यों को समझने के लिए इस स्थान का दौरा किया और एक पंडित को अपना गुरु बनाया, किन्तु समस्त प्रक्रिया को पूरी करने से पहले अधीर होकर वे अपना लक्ष्य नहीं पा सके और प्रचण्ड गुस्से में आकर उसने अपना पाँव जोर से जमीन पर मारा, जिससे वहाँ पानी का स्रोत फूट पड़ा, पानी के इस कुण्ड को भीम-ताल कहा जाता है; बाद में यह स्थान मौर्य अथवा मूरी राजपूतों के अधीन आ गया, इसमें भिन्न-भिन्न राय हैं कि यह मेवाड़ शासकों के अधीन कब आया, किन्तु राजधानी को उदयपुर ले जाने से पहले 1568 तक चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी रहा। यहाँ पर रोड वंशी राजपूतों ने बहुत समय राज किया। यह माना जाता है गुलिया वंशी बप्पा रावल ने 8वीं शताब्दी के मध्य में अंतिम सोलंकी राजकुमारी से विवाह करने पर चित्तौढ़ को दहेज के एक भाग के रूप में प्राप्त किया था, बाद में उसके वंशजों ने मेवाड़ पर शासन किया जो 16वीं शताब्दी तक गुजरात से अजमेर तक फैल चुका था। अजमेर से खण्डवा जाने वाली ट्रेन के द्वारा रास्ते के बीच स्थित चित्तौरगढ़ जंक्शन से करीब २ मील उत्तर-पूर्व की ओर एक अलग पहाड़ी पर भारत का गौरव राजपूताने का सुप्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ का किला बना हुआ है। समुद्र तल से १३३८ फीट ऊँची भूमि पर स्थित ५०० फीट ऊँची एक विशाल (ह्वेल मछ्ली) आकार में, पहाड़ी पर निर्मित्त यह दुर्ग लगभग ३ मील लम्बा और आधे मील तक चौड़ा है। पहाड़ी का घेरा करीब ८ मील का है तथा यह कुल ६०९ एकड़ भूमि पर बसा है। चित्तौड़गढ़, वह वीरभूमि है जिसने समूचे भारत के सम्मुख शौर्य, देशभक्ति एवम् बलिदान का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। यहाँ के असंख्य राजपूत वीरों ने अपने देश तथा धर्म की रक्षा के लिए असिधारारुपी तीर्थ में स्नान किया। वहीं राजपूत वीरांगनाओं ने कई अवसर पर अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने बाल-बच्चों सहित जौहर की अग्नि में प्रवेश कर आदर्श उपस्थित किये। इन स्वाभिमानी देशप्रेमी योद्धाओं से भरी पड़ी यह भूमि पूरे भारत वर्ष के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर रह गयी है। यहाँ का कण-कण हममें देशप्रेम की लहर पैदा करता है। यहाँ की हर एक इमारतें हमें एकता का संकेत देती हैं। . भारत के राजस्थान प्रान्त में झुन्झुनू नगर के संस्थापक जुझारसिंह नेहरा की मूर्ती झुन्झुनू राजस्थान राज्य में एक शहर और जिला है। इतिहासकारों के अनुसार झुंझुनू को कब और किसने बसाया, इसका स्पष्ट विवरण नही मिलता है। उनके अनुसार पांचवी-छठी शताब्दी में गुर्जर काल में झुंझुनू बसाया गया था। आठवीं शताब्दी में चौहान शासकों के काल का अध्ययन करते हैं तो उसमे झुंझुनू के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है। डॉ. नाहरगढ़ का किला जयपुर को घेरे हुए अरावली पर्वतमाला के ऊपर बना हुआ है। आरावली की पर्वत श्रृंखला के छोर पर आमेर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस किले को सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने सन १७३४ में बनवाया था। यहाँ एक किंवदंती है कि कोई एक नाहर सिंह नामके राजपूत की प्रेतात्मा वहां भटका करती थी। किले के निर्माण में व्यावधान भी उपस्थित किया करती थी। अतः तांत्रिकों से सलाह ली गयी और उस किले को उस प्रेतात्मा के नाम पर नाहरगढ़ रखने से प्रेतबाधा दूर हो गयी थी। १९ वीं शताब्दी में सवाई राम सिंह और सवाई माधो सिंह के द्वारा भी किले के अन्दर भवनों का निर्माण कराया गया था जिनकी हालत ठीक ठाक है जब कि पुराने निर्माण जीर्ण शीर्ण हो चले हैं। यहाँ के राजा सवाई राम सिंह के नौ रानियों के लिए अलग अलग आवास खंड बनवाए गए हैं जो सबसे सुन्दर भी हैं। इनमे शौच आदि के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गयी थी। किले के पश्चिम भाग में "पड़ाव" नामका एक रेस्तरां भी है जहाँ खान पान की पूरी व्यवस्र्था है। यहाँ से सूर्यास्त बहुत ही सुन्दर दिखता है। . नागौर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह नागौर जिला मुख्यालय है। नागौर राजस्थान का एक छोटा सा शहर है। ऐतिहासिक रूप से भी यह जगह काफी महत्वपूर्ण है। नागौर बलबन की जागीर थी जिसे शेरशाह सूरी ने 1542 ने जीत लिया था। इसके अलावा महान मुगल सम्राट अकबर ने यहां मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस मस्जिद का नाम अकबरी जामा मस्जिद है। यह मस्जिद शहर के बीचों बीच दड़ा मोहल्ला गिनाणी तालाब के पास स्थित है। इस मस्जिद के दो ऊंचे मीनार गुंबद मुगलकालीन निर्माण कला के गवाह हैं। इसके अलावा गिनाणी तालाब की उत्तरी दिशा की तरफ ही आलिशान दरगाह बनी हुई है। इस दरगाह को हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह शरीफ कहा जाता है। इस दरगाह में ख्वाजा गरीब नवाज हजरत मइनुद्दीन चिश्ती के खास खलीफा हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी की मजार शरीफ है। नागौर विशेष रूप में प्रत्येक वर्ष लगने वाले पशु मेले के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इस मेले में हर साल काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके अतिरिक्त यहां कई महत्वपूर्ण मंदिर और स्मारक भी है। . बालसमंद झील जोधपुर-मंडोर मार्ग पर जोधपुर से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित एक झील है। इसका निर्माण सन् ११५९ में बलक राव परिहार ने किया था। . बीकानेर राजस्थान राज्य का एक शहर है। बीकानेर राज्य का पुराना नाम जांगल देश था। इसके उत्तर में कुरु और मद्र देश थे, इसलिए महाभारत में जांगल नाम कहीं अकेला और कहीं कुरु और मद्र देशों के साथ जुड़ा हुआ मिलता है। बीकानेर के राजा जंगल देश के स्वामी होने के कारण अब तक "जंगल धर बादशाह' कहलाते हैं। बीकानेर राज्य तथा जोधपुर का उत्तरी भाग जांगल देश था राव बीका द्वारा १४८५ में इस शहर की स्थापना की गई। ऐसा कहा जाता है कि नेरा नामक व्यक्ति गड़रिया था, जब राव बीका ने नेरा से एक शुभ जगह के बारे में पूछा तो उसने इस जगह के बारे में एक जवाब दिया उसने कहा की इस जगह पर मेरी एक भेड़ का मेमना ३ दिन तक भेड़ के साथ ७ सियारों के बीच एकला रहा और सियारों ने भेड़ और उसके बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुचायां और उसने इस बात के साथ एक शर्त रख दी की उसके नाम को नगर के नाम के साथ जोड़ा जाए। इसी कारण इसका नाम बीका+नेर, बीकानेर पड़ा। अक्षय तृतीया के यह दिन आज भी बीकानेर के लोग पतंग उड़ाकर स्मरण करते हैं। बीकानेर का इतिहास अन्य रियासतों की तरह राजाओं का इतिहास है। ने नवीन बीकानेर रेल नहर व अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं से समृद्ध किया। बीकानेर की भुजिया मिठाई व जिप्सम तथा क्ले आज भी पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। यहां सभी धर्मों व जातियों के लोग शांति व सौहार्द्र के साथ रहते हैं यह यहां की दूसरी महत्वपूर्ण विशिष्टता है। यदि इतिहास की बात चल रही हो तो इटली के टैसीटोरी का नाम भी बीकानेर से बहुत प्रेम से जुड़ा हुआ है। बीकानेर शहर के ५ द्वार आज भी आंतरिक नगर की परंपरा से जीवित जुड़े हैं। कोटगेट, जस्सूसरगेट, नत्थूसरगेट, गोगागेट व शीतलागेट इनके नाम हैं। बीकानेर की भौगोलिक स्तिथि ७३ डिग्री पूर्वी अक्षांस २८.०१ उत्तरी देशंतार पर स्थित है। समुद्र तल से ऊंचाई सामान्य रूप से २४३मीटर अथवा ७९७ फीट है . भरतपुर राजस्थान का एक प्रमुख शहर होने के साथ-साथ देश का सबसे प्रसिद्ध पक्षी उद्यान भी है। 29 वर्ग कि॰मी॰ में फैला यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है। भरतपुर शहर की बात की जाए तो इसकी स्थापना जाट शासक राजा सूरजमल ने की थी और यह अपने समय में जाटों का गढ़ हुआ करता था। यहाँ के मंदिर, महल व किले जाटों के कला कौशल की गवाही देते हैं। राष्ट्रीय उद्यान के अलावा भी देखने के लिए यहाँ अनेक जगह हैं इसका नामकरण राम के भाई भरत के नाम पर किया गया है। लक्ष्मण इस राज परिवार के कुलदेव माने गये हैं। इसके पूर्व यह जगह सोगडिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था जिसको महाराजा सूरजमल ने जीता और 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली . मेहरानगढ़ दुर्गचामुंडा माता मंदिर मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है। यह किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की २४ संतानों मे से एक थे। वे जोधपुर के पंद्रहवें शासक बने। शासन की बागडोर सम्भालने के एक साल बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है। उन्होने अपने तत्कालीन किले से ९ किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर नया किला बनाने का विचार प्रस्तुत किया। इस पहाड़ी को भोर चिडिया के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहाँ काफ़ी पक्षी रहते थे। राव जोधा ने १२ मई १४५९ को इस पहाडी पर किले की नीव डाली महाराज जसवंत सिंह (१६३८-७८) ने इसे पूरा किया। मूल रूप से किले के सात द्वार (पोल) (आठवाँ द्वार गुप्त है) हैं। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। अन्य द्वारों में शामिल जयपोल द्वार का निर्माण १८०६ में महाराज मान सिंह ने अपनी जयपुर और बीकानेर पर विजय प्राप्ति के बाद करवाया था। फतेह पोल अथवा विजय द्वार का निर्माण महाराज अजीत सिंह ने मुगलों पर अपनी विजय की स्मृति में करवाया था। राव जोधा को चामुँडा माता मे अथाह श्रद्धा थी। चामुंडा जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है। राव जोधा ने १४६० मे मेहरानगढ किले के समीप चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। मंदिर के द्वार आम जनता के लिए भी खोले गए थे। चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी थी और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मेहरानगढ दुर्ग की नींव में ज्योतिषी गणपत दत्त के ज्योतिषीय परामर्श पर ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (तदनुसार, 12 मई 1459 ई) वार शनिवार को राजाराम मेघवाल को जीवित ही गाड़ दिया गया। राजाराम के सहर्ष किये हुए आत्म त्याग एवम स्वामी-भक्ति की एवज में राव जोधाजी राठोड़ ने उनके वंशजो को मेहरानगढ दुर्ग के पास सूरसागर में कुछ भूमि भी दी (पट्टा सहित), जो आज भी राजबाग के नाम से प्रसिद्ध हैं। होली के त्यौहार पर मेघवालों की गेर को किले में गाजे बाजे के साथ जाने का अधिकार हैं जो अन्य किसी जाति को नही है। राजाराम का जन्म कड़ेला गौत्र में केसर देवी की कोख से हुआ तथा पिता का नाम मोहणसी था। . रामबाग महल राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एक महल है लेकिन वर्तमान में यह एक होटल है। यह पहले जयपुर के महाराजा का घर था। . राजस्थान भारत गणराज्य का क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश, उत्तर में पंजाब (भारत), उत्तर-पूर्व में उत्तरप्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग कि॰मी॰ (132139 वर्ग मील) है। 2011 की गणना के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर 66.11% हैं। जयपुर राज्य की राजधानी है। भौगोलिक विशेषताओं में पश्चिम में थार मरुस्थल और घग्गर नदी का अंतिम छोर है। विश्व की पुरातन श्रेणियों में प्रमुख अरावली श्रेणी राजस्थान की एक मात्र पर्वत श्रेणी है, जो कि पर्यटन का केन्द्र है, माउंट आबू और विश्वविख्यात दिलवाड़ा मंदिर सम्मिलित करती है। पूर्वी राजस्थान में दो बाघ अभयारण्य, रणथम्भौर एवं सरिस्का हैं और भरतपुर के समीप केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जो सुदूर साइबेरिया से आने वाले सारसों और बड़ी संख्या में स्थानीय प्रजाति के अनेकानेक पक्षियों के संरक्षित-आवास के रूप में विकसित किया गया है। . लक्ष्मणगढ़ दुर्ग (अंग्रेजीःLaxmangarh Fort) बहुत पुराना पहाड़ी दुर्ग है यह राजस्थान के सीकर ज़िले के लक्ष्मणगढ़ गाँव में स्थित है। लक्ष्मणगढ़ दुर्ग सीकर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका निर्माण लक्ष्मणसिंह तथा सीकर के राव राजा ने 1805 में करवाया था इसके अलावा 1805 में इन्होंने लक्ष्मणगढ़ गाँव की भी स्थापना की थी। . लेक पैलेस जिसे कि पहले जग निवास के नाम से जाना जाता था, ८३ कमरों तथा सुइट्स का एक होटल है जिसका निर्माण सफ़ेद पत्थर से हुआ है। यह चार एकड़ के एक नैसर्गिक आधार पर पिछोरा झील में उदयपुर राजस्थान में जग निवास द्वीप पर बना हुआ है। होटल अपने अतिथियों के लिए एक स्पीड बोट की सुविधा प्रदान करता है जो कि अतिथियों को शहर से होटल तक पहुंचाती है। अपनी विशिष्ट स्तिथि के कारण इस होटल को भारत तथा दुनिया के सबसे अधिक रोमांटिक होटल के रूप में चिन्हित किया गया है। . शिव निवास पैलेस उदयपुर के महाराणा का पूर्व निवास है। अत्यंत ही खुबसुरत दिखने वाला यह महल पिछोला झील के तट पर बसा है। यह सिटी पैलेस, उदयपुर के दक्षिण में बसा हुआ एवं इसपर काम की शुरुआत महाराणा सज्जन शम्भू सिंह (१८८७-१८८४) के द्वारा की गयी थी। जिसका समापन उनके उत्तराधिकारी महाराणा फतेह सिंह के २०वी सदी के आरम्भ में किया गया। अपने अतिथिशाला के दिनों में इसकी भव्यता देखते बनती थी एवं इसने कई पार्टिया आयोजित होती थी। इन शाही दावतों में विश्व के महत्वपूर्ण व्यक्ति सम्मिलत होते थे, जिसमे यूनाइटेड किंगडम के जॉर्ज व् एवं प्रिंस ऑफ़ वेल्स एडवर्ड्स भी थे। १९५५ में जब भागवत सिंह मेवाड़ के राजा बने, तब उस समय इसको भव्यता को बनाये रखना शाही परिवार के लिए ये काफी मुश्किल सिद्ध हो रहा था। शाही परिवार के स्वामित्व में उस समय कई महल थे एवं उन सबकी भी भव्यता को कायम रखने में काफी परेशानी हो रही थी। उसी दौरान उन्होंने लेक पैलेस को उन्होंने होटल में परिवर्तित किया था जो अच्छी आय का माध्यम बन रहा था। इसको देखते हुए उन्होंने शिव निवास एवं फ़तेह प्रकाश पैलेस को विलासिता (लक्ज़री) होटल में बदलने का निर्णय लिया १९८२ में ४ वर्षों के लम्बी मेहनत के बाद शिव निवास पैलेस को होटल के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया। शुरू से ही इसकी भव्यता लोगों को आकर्षित करती थी इसलिए जब इसे होटल के तौर पर खोला गया तब इसकी लोकप्रियता बढ़ने में ज्यादा दिन नहीं लगे। यहाँ पर रुकना एक राजसी अहसास के जैसा हैं और इतिहास के उन पलो में लौटना है। जब यहाँ राजा या रानी रहा करते थे, यही बात व्यक्ति को यहाँ वापस लौटने के लिए मजबूर करती है। इन सबके बाद पिछोला झील के तट पर बसा होना इसकी खूबसुरती में चार चाँद लगाता हैं। . शेखावत (क्षत्रिय) राजपूत वंश की एक शाखा है देशी राज्यों के भारतीय संघ में विलय से पूर्व मनोहरपुर,शाहपुरा, खंडेला,सीकर, खेतडी,बिसाऊ,गढ़ गंगियासर,सुरजगढ़,नवलगढ़, खोटिया मंडावा, मुकन्दगढ़, दांता,खुड,खाचरियाबास, दूंद्लोद, अलसीसर,मलसिसर,रानोली आदि प्रभाव शाली ठिकाने शेखावतों के अधिकार में थे जो शेखावाटी नाम से प्रशिद्ध है। . सिटी पैलेस की स्थापना १६वीं शताब्दी में आरम्भ हुई। इसे स्थापित करने का विचार एक संत ने राजा उदयसिंह द्वितीय को दिया था। इस प्रकार यह परिसर ४०० वर्षों में बने भवनों का समूह है। यह एक भव्य परिसर है। इसे बनाने में २२ राजाओं का योगदान था। इस परिसर में प्रवेश के लिए टिकट लगता है। बादी पॉल से टिकट लेकर आप इस परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। परिसर में प्रवेश करते ही आपको भव्य त्रिपोलिया गेट' दिखेगा। इसमें सात आर्क हैं। ये आर्क उन सात स्मवरणोत्सैवों का प्रतीक हैं जब राजा को सोने और चांदी से तौला गया था तथा उनके वजन के बराबर सोना-चांदी को गरीबों में बांट दिया गया था। इसके सामने की दीवार 'अगद' कहलाती है। यहां पर हाथियों की लड़ाई का खेल होता था। इस परिसर में एक जगदीश मंदिर भी है। इसी परिसर का एक भाग सिटी पैलेस संग्रहालय है। इसे अब सरकारी संग्रहालय घोषित कर दिया गया है। वर्तमान में शम्भूक निवास राजपरिवार का निवास स्थानन है। इससे आगे दक्षिण दिशा में 'फतह प्रकाश भ्ावन' तथा 'शिव निवास भवन' है। वर्तमान में दोनों को होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। . फ्रांस के लूव्र संग्रहालय में स्कूल के विद्यार्थी। लंदन में प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय टर्की के इस्तांबूल नगर में तोपकी संग्रहालय। संग्रहालय एक ऐसा संस्थान है है जो समाज की सेवा और विकास के लिए जनसामान्य के लिए खोला जाता है और इसमें मानव और पर्यावरण की विरासतों के संरक्षण के लिए उनका संग्रह, शोध, प्रचार या प्रदर्शन किया जाता है जिसका उपयोग शिक्षा, अध्ययन और मनोरंजन के लिए होता है। . सीकर भारत के राजस्थान का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह शहर शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। सीकर एक एतिहासिक शहर है जहाँ पर कई हवेलियां (बड़े घर जो कि मुग़लकालीन वास्तुकला द्वारा बनाए गए हैं) है जो कि मुख्य पर्यटक आकर्षण हैं। . हवामहल हवा महल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन 1798 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी 'राजमुकुट' की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ता द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी अद्वितीय पांच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें ९५३ बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं। इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े "पर्दा प्रथा" का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें। इसके अतिरिक्त, "वेंचुरी प्रभाव" के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठंडी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज़ गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है। चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है। . होटल एक इमारत है जिसमें कमरे होते हैं तथा कमरे किराये पर दिए जाते हैं। होटल में कई सुविधाएँ और हो सकती हैं। उनमें से भोजन की व्यवस्था, कसरत की व्यवस्था (जिम), तैराकी की व्यवस्था (स्वीमिंग पूल), दावतों, कॉन्फ़्रेन्सों के लिए अलग स्थान की व्यवस्था, आदि शामिल हैं। श्रेणीःव्यापार श्रेणीःआतिथ्य उद्योग * श्रेणीःप्रकारानुसार स्थापत्य. जयपुर जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है, भारत में राजस्थान राज्य की राजधानी है। आमेर के तौर पर यह जयपुर नाम से प्रसिद्ध प्राचीन रजवाड़े की भी राजधानी रहा है। इस शहर की स्थापना १७२८ में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने की थी। जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है जो यहाँ के स्थापत्य की खूबी है। १८७६ में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से आच्छादित करवा दिया था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार जयपुर भारत का दसवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर है। राजा जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा। जयपुर भारत के टूरिस्ट सर्किट गोल्डन ट्रायंगल (India's Golden Triangle) का हिस्सा भी है। इस गोल्डन ट्रायंगल में दिल्ली,आगरा और जयपुर आते हैं भारत के मानचित्र में उनकी स्थिति अर्थात लोकेशन को देखने पर यह एक त्रिभुज (Triangle) का आकार लेते हैं। इस कारण इन्हें भारत का स्वर्णिम त्रिभुज इंडियन गोल्डन ट्रायंगल कहते हैं। भारत की राजधानी दिल्ली से जयपुर की दूरी 280 किलोमीटर है। शहर चारों ओर से दीवारों और परकोटों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रवेश के लिए सात दरवाजे हैं। बाद में एक और द्वार भी बना जो 'न्यू गेट' कहलाया। पूरा शहर करीब छह भागों में बँटा है और यह १११ फुट (३४ मी.) चौड़ी सड़कों से विभाजित है। पाँच भाग मध्य प्रासाद भाग को पूर्वी, दक्षिणी एवं पश्चिमी ओर से घेरे हुए हैं और छठा भाग एकदम पूर्व में स्थित है। प्रासाद भाग में हवा महल परिसर, व्यवस्थित उद्यान एवं एक छोटी झील हैं। पुराने शह के उत्तर-पश्चिमी ओर पहाड़ी पर नाहरगढ़ दुर्ग शहर के मुकुट के समान दिखता है। इसके अलावा यहां मध्य भाग में ही सवाई जयसिंह द्वारा बनावायी गईं वेधशाला, जंतर मंतर, जयपुर भी हैं। जयपुर को आधुनिक शहरी योजनाकारों द्वारा सबसे नियोजित और व्यवस्थित शहरों में से गिना जाता है। देश के सबसे प्रतिभाशाली वास्तुकारों में इस शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य का नाम सम्मान से लिया जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस पर कछवाहा समुदाय के राजपूत शासकों का शासन था। १९वीं सदी में इस शहर का विस्तार शुरु हुआ तब इसकी जनसंख्या १,६०,००० थी जो अब बढ़ कर २००१ के आंकड़ों के अनुसार २३,३४,३१९ और २०१२ के बाद ३५ लाख हो चुकी है। यहाँ के मुख्य उद्योगों में धातु, संगमरमर, वस्त्र-छपाई, हस्त-कला, रत्न व आभूषण का आयात-निर्यात तथा पर्यटन-उद्योग आदि शामिल हैं। जयपुर को भारत का पेरिस भी कहा जाता है। इस शहर के वास्तु के बारे में कहा जाता है कि शहर को सूत से नाप लीजिये, नाप-जोख में एक बाल के बराबर भी फ़र्क नहीं मिलेगा। . जलमहल राजस्थान (भारत) की राजधानी जयपुर के मानसागर झील के मध्य स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक महल है। अरावली पहाडिय़ों के गर्भ में स्थित यह महल झील के बीचों बीच होने के कारण 'आई बॉल' भी कहा जाता है। इसे 'रोमांटिक महल' के नाम से भी जाना जाता था। जयसिंह द्वारा निर्मित यह महल मध्यकालीन महलों की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्त दुमंजिला और वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है। जलमहल अब पक्षी अभ्यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। यहाँ की नर्सरी में 1 लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं जहाँ राजस्थान के सबसे ऊँचे पेड़ पाए जाते हैं। . जैसलमेर भारत के राजस्थान प्रांत का एक शहर है। भारत के सुदूर पश्चिम में स्थित धार के मरुस्थल में जैसलमेर की स्थापना भारतीय इतिहास के मध्यकाल के प्रारंभ में ११७८ ई. के लगभग यदुवंशी भाटी के वंशज रावल-जैसल द्वारा की गई थी। रावल जैसल के वंशजों ने यहाँ भारत के गणतंत्र में परिवर्तन होने तक बिना वंश क्रम को भंग किए हुए ७७० वर्ष सतत शासन किया, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटना है। जैसलमेर राज्य ने भारत के इतिहास के कई कालों को देखा व सहा है। सल्तनत काल के लगभग ३०० वर्ष के इतिहास में गुजरता हुआ यह राज्य मुगल साम्राज्य में भी लगभग ३०० वर्षों तक अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम रहा। भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना से लेकर समाप्ति तक भी इस राज्य ने अपने वंश गौरव व महत्व को यथावत रखा। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात यह भारतीय गणतंत्र में विलीन हो गया। भारतीय गणतंत्र के विलीनकरण के समय इसका भौगोलिक क्षेत्रफल १६,०६२ वर्ग मील के विस्तृत भू-भाग पर फैला हुआ था। रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों में स्थित होने के कारण यहाँ की जनसंख्या बींसवीं सदी के प्रारंभ में मात्र ७६,२५५ थी। जैसलमेर जिले का भू-भाग प्राचीन काल में 'माडधरा' अथवा 'वल्लभमण्डल' के नाम से प्रसिद्ध था। महाभारत के युद्ध के बाद बड़ी संख्या में यादव इस ओर अग्रसर हुए व यहां आ कर बस गये। यहां अनेक सुंदर हवेलियां और जैन मंदिरों के समूह हैं जो 12वीं से 15वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। . जैसलमेर दुर्ग स्थापत्य कला की दृष्टि से उच्चकोटि की विशुद्ध स्थानीय दुर्ग रचना है। ये दुर्ग २५० फीट तिकोनाकार पहाडी पर स्थित है। इस पहाडी की लंबाई १५० फीट व चौडाई ७५० फीट है। रावल जैसल ने अपनी स्वतंत्र राजधानी स्थापित की थी। स्थानीय स्रोतों के अनुसार इस दुर्ग का निर्माण ११५६ ई. में प्रारंभ हुआ था। परंतु समकालीन साक्ष्यों के अध्ययन से पता चलता है कि इसका निर्माण कार्य ११७८ ई. के लगभग प्रारंभ हुआ था। ५ वर्ष के अल्प निर्माण कार्य के उपरांत रावल जैसल की मृत्यु हो गयी, इसके द्वारा प्रारंभ कराए गए निमार्ण कार्य को उसके उत्तराधिकारी शालीवाहन द्वारा जारी रखकर दुर्ग को मूर्त रूप दिया गया। रावल जैसल व शालीवाहन द्वारा कराए गए कार्यो का कोई अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिलता है। मात्र ख्यातों व तवारीखों से वर्णन मिलता है। . जोधपुर भारत के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसकी जनसंख्या १० लाख के पार हो जाने के बाद इसे राजस्थान का दूसरा "महानगर " घोषित कर दिया गया था। यह यहां के ऐतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की इसी नाम की राजधानी भी हुआ करता था। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। वर्ष पर्यन्त चमकते सूर्य वाले मौसम के कारण इसे "सूर्य नगरी" भी कहा जाता है। यहां स्थित मेहरानगढ़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे "नीली नगरी" के नाम से भी जाना जाता था। यहां के पुराने शहर का अधिकांश भाग इस दुर्ग को घेरे हुए बसा है, जिसकी प्रहरी दीवार में कई द्वार बने हुए हैं, हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस दीवार के बाहर भी नगर का वृहत प्रसार हुआ है। जोधपुर की भौगोलिक स्थिति राजस्थान के भौगोलिक केन्द्र के निकट ही है, जिसके कारण ये नगर पर्यटकों के लिये राज्य भर में भ्रमण के लिये उपयुक्त आधार केन्द्र का कार्य करता है। वर्ष २०१४ के विश्व के अति विशेष आवास स्थानों (मोस्ट एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी प्लेसेज़ ऑफ़ द वर्ल्ड) की सूची में प्रथम स्थान पाया था। एक तमिल फ़िल्म, आई, जो कि अब तक की भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फ़िल्मशोगी, की शूटिंग भी यहां हुई थी। . उदयपुर राजस्थान का एक नगर एवं पर्यटन स्थल है जो अपने इतिहास, संस्कृति एवम् अपने अाकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे सन् 1559 में महाराणा उदय सिंह ने स्थापित किया था। अपनी झीलों के कारण यह शहर 'झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर शहर सिसोदिया राजवंश द्वारा शासित मेवाड़ की राजधानी रहा है। . उम्मैद भवन पैलेस उम्मैद भवन पैलेस राजस्थान के जोधपुर ज़िले में स्थित एक महल है। यह दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक है। यह ताज होटल का ही एक अंग है। इसका नाम महाराजा उम्मैद सिंह के पौत्र ने दिया था जो वर्तमान में मालिक है। अभी वर्तमान समय में इस पैलेस में ३४७ कमरे है। इस उम्मैद भवन पैलेस को चित्तर पैलेस के नाम से भी पहले जाना जाता था जब इसका निर्माण कार्य चालू था। यह पैलेस १९४३ में बनकर तैयार हुआ था। .
छब्बीस संबंधोंः चित्तौड़गढ़, झुन्झुनू, नाहरगढ़ दुर्ग, नागौर, बालसमंद झील, बीकानेर, भरतपुर, मेहरानगढ़, रामबाग महल, राजस्थान, लक्ष्मणगढ़ दुर्ग, लेक पैलेस, शिव निवास पैलेस, शेखावत, सिटी पैलेस, उदयपुर, संग्रहालय, सीकर, हवामहल, होटल, जयपुर, जल महल, जैसलमेर, जैसलमेर दुर्ग, जोधपुर, उदयपुर, उम्मैद भवन पैलेस। पद्मिनी महल का तैलचित्र चित्तौड़गढ़ राजस्थान का एक शहर है। यह शूरवीरों का शहर है जो पहाड़ी पर बने दुर्ग के लिए प्रसिद्ध है। चित्तौड़गढ़ की प्राचीनता का पता लगाना कठिन कार्य है, किन्तु माना जाता है कि महाभारत काल में महाबली भीम ने अमरत्व के रहस्यों को समझने के लिए इस स्थान का दौरा किया और एक पंडित को अपना गुरु बनाया, किन्तु समस्त प्रक्रिया को पूरी करने से पहले अधीर होकर वे अपना लक्ष्य नहीं पा सके और प्रचण्ड गुस्से में आकर उसने अपना पाँव जोर से जमीन पर मारा, जिससे वहाँ पानी का स्रोत फूट पड़ा, पानी के इस कुण्ड को भीम-ताल कहा जाता है; बाद में यह स्थान मौर्य अथवा मूरी राजपूतों के अधीन आ गया, इसमें भिन्न-भिन्न राय हैं कि यह मेवाड़ शासकों के अधीन कब आया, किन्तु राजधानी को उदयपुर ले जाने से पहले एक हज़ार पाँच सौ अड़सठ तक चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी रहा। यहाँ पर रोड वंशी राजपूतों ने बहुत समय राज किया। यह माना जाता है गुलिया वंशी बप्पा रावल ने आठवीं शताब्दी के मध्य में अंतिम सोलंकी राजकुमारी से विवाह करने पर चित्तौढ़ को दहेज के एक भाग के रूप में प्राप्त किया था, बाद में उसके वंशजों ने मेवाड़ पर शासन किया जो सोलहवीं शताब्दी तक गुजरात से अजमेर तक फैल चुका था। अजमेर से खण्डवा जाने वाली ट्रेन के द्वारा रास्ते के बीच स्थित चित्तौरगढ़ जंक्शन से करीब दो मील उत्तर-पूर्व की ओर एक अलग पहाड़ी पर भारत का गौरव राजपूताने का सुप्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ का किला बना हुआ है। समुद्र तल से एक हज़ार तीन सौ अड़तीस फीट ऊँची भूमि पर स्थित पाँच सौ फीट ऊँची एक विशाल आकार में, पहाड़ी पर निर्मित्त यह दुर्ग लगभग तीन मील लम्बा और आधे मील तक चौड़ा है। पहाड़ी का घेरा करीब आठ मील का है तथा यह कुल छः सौ नौ एकड़ भूमि पर बसा है। चित्तौड़गढ़, वह वीरभूमि है जिसने समूचे भारत के सम्मुख शौर्य, देशभक्ति एवम् बलिदान का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। यहाँ के असंख्य राजपूत वीरों ने अपने देश तथा धर्म की रक्षा के लिए असिधारारुपी तीर्थ में स्नान किया। वहीं राजपूत वीरांगनाओं ने कई अवसर पर अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने बाल-बच्चों सहित जौहर की अग्नि में प्रवेश कर आदर्श उपस्थित किये। इन स्वाभिमानी देशप्रेमी योद्धाओं से भरी पड़ी यह भूमि पूरे भारत वर्ष के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर रह गयी है। यहाँ का कण-कण हममें देशप्रेम की लहर पैदा करता है। यहाँ की हर एक इमारतें हमें एकता का संकेत देती हैं। . भारत के राजस्थान प्रान्त में झुन्झुनू नगर के संस्थापक जुझारसिंह नेहरा की मूर्ती झुन्झुनू राजस्थान राज्य में एक शहर और जिला है। इतिहासकारों के अनुसार झुंझुनू को कब और किसने बसाया, इसका स्पष्ट विवरण नही मिलता है। उनके अनुसार पांचवी-छठी शताब्दी में गुर्जर काल में झुंझुनू बसाया गया था। आठवीं शताब्दी में चौहान शासकों के काल का अध्ययन करते हैं तो उसमे झुंझुनू के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है। डॉ. नाहरगढ़ का किला जयपुर को घेरे हुए अरावली पर्वतमाला के ऊपर बना हुआ है। आरावली की पर्वत श्रृंखला के छोर पर आमेर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस किले को सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने सन एक हज़ार सात सौ चौंतीस में बनवाया था। यहाँ एक किंवदंती है कि कोई एक नाहर सिंह नामके राजपूत की प्रेतात्मा वहां भटका करती थी। किले के निर्माण में व्यावधान भी उपस्थित किया करती थी। अतः तांत्रिकों से सलाह ली गयी और उस किले को उस प्रेतात्मा के नाम पर नाहरगढ़ रखने से प्रेतबाधा दूर हो गयी थी। उन्नीस वीं शताब्दी में सवाई राम सिंह और सवाई माधो सिंह के द्वारा भी किले के अन्दर भवनों का निर्माण कराया गया था जिनकी हालत ठीक ठाक है जब कि पुराने निर्माण जीर्ण शीर्ण हो चले हैं। यहाँ के राजा सवाई राम सिंह के नौ रानियों के लिए अलग अलग आवास खंड बनवाए गए हैं जो सबसे सुन्दर भी हैं। इनमे शौच आदि के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गयी थी। किले के पश्चिम भाग में "पड़ाव" नामका एक रेस्तरां भी है जहाँ खान पान की पूरी व्यवस्र्था है। यहाँ से सूर्यास्त बहुत ही सुन्दर दिखता है। . नागौर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह नागौर जिला मुख्यालय है। नागौर राजस्थान का एक छोटा सा शहर है। ऐतिहासिक रूप से भी यह जगह काफी महत्वपूर्ण है। नागौर बलबन की जागीर थी जिसे शेरशाह सूरी ने एक हज़ार पाँच सौ बयालीस ने जीत लिया था। इसके अलावा महान मुगल सम्राट अकबर ने यहां मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस मस्जिद का नाम अकबरी जामा मस्जिद है। यह मस्जिद शहर के बीचों बीच दड़ा मोहल्ला गिनाणी तालाब के पास स्थित है। इस मस्जिद के दो ऊंचे मीनार गुंबद मुगलकालीन निर्माण कला के गवाह हैं। इसके अलावा गिनाणी तालाब की उत्तरी दिशा की तरफ ही आलिशान दरगाह बनी हुई है। इस दरगाह को हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह शरीफ कहा जाता है। इस दरगाह में ख्वाजा गरीब नवाज हजरत मइनुद्दीन चिश्ती के खास खलीफा हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी की मजार शरीफ है। नागौर विशेष रूप में प्रत्येक वर्ष लगने वाले पशु मेले के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इस मेले में हर साल काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके अतिरिक्त यहां कई महत्वपूर्ण मंदिर और स्मारक भी है। . बालसमंद झील जोधपुर-मंडोर मार्ग पर जोधपुर से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित एक झील है। इसका निर्माण सन् एक हज़ार एक सौ उनसठ में बलक राव परिहार ने किया था। . बीकानेर राजस्थान राज्य का एक शहर है। बीकानेर राज्य का पुराना नाम जांगल देश था। इसके उत्तर में कुरु और मद्र देश थे, इसलिए महाभारत में जांगल नाम कहीं अकेला और कहीं कुरु और मद्र देशों के साथ जुड़ा हुआ मिलता है। बीकानेर के राजा जंगल देश के स्वामी होने के कारण अब तक "जंगल धर बादशाह' कहलाते हैं। बीकानेर राज्य तथा जोधपुर का उत्तरी भाग जांगल देश था राव बीका द्वारा एक हज़ार चार सौ पचासी में इस शहर की स्थापना की गई। ऐसा कहा जाता है कि नेरा नामक व्यक्ति गड़रिया था, जब राव बीका ने नेरा से एक शुभ जगह के बारे में पूछा तो उसने इस जगह के बारे में एक जवाब दिया उसने कहा की इस जगह पर मेरी एक भेड़ का मेमना तीन दिन तक भेड़ के साथ सात सियारों के बीच एकला रहा और सियारों ने भेड़ और उसके बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुचायां और उसने इस बात के साथ एक शर्त रख दी की उसके नाम को नगर के नाम के साथ जोड़ा जाए। इसी कारण इसका नाम बीका+नेर, बीकानेर पड़ा। अक्षय तृतीया के यह दिन आज भी बीकानेर के लोग पतंग उड़ाकर स्मरण करते हैं। बीकानेर का इतिहास अन्य रियासतों की तरह राजाओं का इतिहास है। ने नवीन बीकानेर रेल नहर व अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं से समृद्ध किया। बीकानेर की भुजिया मिठाई व जिप्सम तथा क्ले आज भी पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। यहां सभी धर्मों व जातियों के लोग शांति व सौहार्द्र के साथ रहते हैं यह यहां की दूसरी महत्वपूर्ण विशिष्टता है। यदि इतिहास की बात चल रही हो तो इटली के टैसीटोरी का नाम भी बीकानेर से बहुत प्रेम से जुड़ा हुआ है। बीकानेर शहर के पाँच द्वार आज भी आंतरिक नगर की परंपरा से जीवित जुड़े हैं। कोटगेट, जस्सूसरगेट, नत्थूसरगेट, गोगागेट व शीतलागेट इनके नाम हैं। बीकानेर की भौगोलिक स्तिथि तिहत्तर डिग्री पूर्वी अक्षांस अट्ठाईस.एक उत्तरी देशंतार पर स्थित है। समुद्र तल से ऊंचाई सामान्य रूप से दो सौ तैंतालीस मीटर अथवा सात सौ सत्तानवे फीट है . भरतपुर राजस्थान का एक प्रमुख शहर होने के साथ-साथ देश का सबसे प्रसिद्ध पक्षी उद्यान भी है। उनतीस वर्ग कि॰मी॰ में फैला यह उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थान प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा है। भरतपुर शहर की बात की जाए तो इसकी स्थापना जाट शासक राजा सूरजमल ने की थी और यह अपने समय में जाटों का गढ़ हुआ करता था। यहाँ के मंदिर, महल व किले जाटों के कला कौशल की गवाही देते हैं। राष्ट्रीय उद्यान के अलावा भी देखने के लिए यहाँ अनेक जगह हैं इसका नामकरण राम के भाई भरत के नाम पर किया गया है। लक्ष्मण इस राज परिवार के कुलदेव माने गये हैं। इसके पूर्व यह जगह सोगडिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था जिसको महाराजा सूरजमल ने जीता और एक हज़ार सात सौ तैंतीस में भरतपुर नगर की नींव डाली . मेहरानगढ़ दुर्गचामुंडा माता मंदिर मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है। पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से एक सौ पच्चीस मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है। यह किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की चौबीस संतानों मे से एक थे। वे जोधपुर के पंद्रहवें शासक बने। शासन की बागडोर सम्भालने के एक साल बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है। उन्होने अपने तत्कालीन किले से नौ किलोग्राममीटर दूर एक पहाड़ी पर नया किला बनाने का विचार प्रस्तुत किया। इस पहाड़ी को भोर चिडिया के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहाँ काफ़ी पक्षी रहते थे। राव जोधा ने बारह मई एक हज़ार चार सौ उनसठ को इस पहाडी पर किले की नीव डाली महाराज जसवंत सिंह ने इसे पूरा किया। मूल रूप से किले के सात द्वार हैं। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। अन्य द्वारों में शामिल जयपोल द्वार का निर्माण एक हज़ार आठ सौ छः में महाराज मान सिंह ने अपनी जयपुर और बीकानेर पर विजय प्राप्ति के बाद करवाया था। फतेह पोल अथवा विजय द्वार का निर्माण महाराज अजीत सिंह ने मुगलों पर अपनी विजय की स्मृति में करवाया था। राव जोधा को चामुँडा माता मे अथाह श्रद्धा थी। चामुंडा जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है। राव जोधा ने एक हज़ार चार सौ साठ मे मेहरानगढ किले के समीप चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। मंदिर के द्वार आम जनता के लिए भी खोले गए थे। चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी थी और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मेहरानगढ दुर्ग की नींव में ज्योतिषी गणपत दत्त के ज्योतिषीय परामर्श पर ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी वार शनिवार को राजाराम मेघवाल को जीवित ही गाड़ दिया गया। राजाराम के सहर्ष किये हुए आत्म त्याग एवम स्वामी-भक्ति की एवज में राव जोधाजी राठोड़ ने उनके वंशजो को मेहरानगढ दुर्ग के पास सूरसागर में कुछ भूमि भी दी , जो आज भी राजबाग के नाम से प्रसिद्ध हैं। होली के त्यौहार पर मेघवालों की गेर को किले में गाजे बाजे के साथ जाने का अधिकार हैं जो अन्य किसी जाति को नही है। राजाराम का जन्म कड़ेला गौत्र में केसर देवी की कोख से हुआ तथा पिता का नाम मोहणसी था। . रामबाग महल राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एक महल है लेकिन वर्तमान में यह एक होटल है। यह पहले जयपुर के महाराजा का घर था। . राजस्थान भारत गणराज्य का क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण-पश्चिम में गुजरात, दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश, उत्तर में पंजाब , उत्तर-पूर्व में उत्तरप्रदेश और हरियाणा है। राज्य का क्षेत्रफल तीन,बयालीस,दो सौ उनतालीस वर्ग कि॰मी॰ है। दो हज़ार ग्यारह की गणना के अनुसार राजस्थान की साक्षरता दर छयासठ.ग्यारह% हैं। जयपुर राज्य की राजधानी है। भौगोलिक विशेषताओं में पश्चिम में थार मरुस्थल और घग्गर नदी का अंतिम छोर है। विश्व की पुरातन श्रेणियों में प्रमुख अरावली श्रेणी राजस्थान की एक मात्र पर्वत श्रेणी है, जो कि पर्यटन का केन्द्र है, माउंट आबू और विश्वविख्यात दिलवाड़ा मंदिर सम्मिलित करती है। पूर्वी राजस्थान में दो बाघ अभयारण्य, रणथम्भौर एवं सरिस्का हैं और भरतपुर के समीप केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जो सुदूर साइबेरिया से आने वाले सारसों और बड़ी संख्या में स्थानीय प्रजाति के अनेकानेक पक्षियों के संरक्षित-आवास के रूप में विकसित किया गया है। . लक्ष्मणगढ़ दुर्ग बहुत पुराना पहाड़ी दुर्ग है यह राजस्थान के सीकर ज़िले के लक्ष्मणगढ़ गाँव में स्थित है। लक्ष्मणगढ़ दुर्ग सीकर से तीस किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। इसका निर्माण लक्ष्मणसिंह तथा सीकर के राव राजा ने एक हज़ार आठ सौ पाँच में करवाया था इसके अलावा एक हज़ार आठ सौ पाँच में इन्होंने लक्ष्मणगढ़ गाँव की भी स्थापना की थी। . लेक पैलेस जिसे कि पहले जग निवास के नाम से जाना जाता था, तिरासी कमरों तथा सुइट्स का एक होटल है जिसका निर्माण सफ़ेद पत्थर से हुआ है। यह चार एकड़ के एक नैसर्गिक आधार पर पिछोरा झील में उदयपुर राजस्थान में जग निवास द्वीप पर बना हुआ है। होटल अपने अतिथियों के लिए एक स्पीड बोट की सुविधा प्रदान करता है जो कि अतिथियों को शहर से होटल तक पहुंचाती है। अपनी विशिष्ट स्तिथि के कारण इस होटल को भारत तथा दुनिया के सबसे अधिक रोमांटिक होटल के रूप में चिन्हित किया गया है। . शिव निवास पैलेस उदयपुर के महाराणा का पूर्व निवास है। अत्यंत ही खुबसुरत दिखने वाला यह महल पिछोला झील के तट पर बसा है। यह सिटी पैलेस, उदयपुर के दक्षिण में बसा हुआ एवं इसपर काम की शुरुआत महाराणा सज्जन शम्भू सिंह के द्वारा की गयी थी। जिसका समापन उनके उत्तराधिकारी महाराणा फतेह सिंह के बीसवी सदी के आरम्भ में किया गया। अपने अतिथिशाला के दिनों में इसकी भव्यता देखते बनती थी एवं इसने कई पार्टिया आयोजित होती थी। इन शाही दावतों में विश्व के महत्वपूर्ण व्यक्ति सम्मिलत होते थे, जिसमे यूनाइटेड किंगडम के जॉर्ज व् एवं प्रिंस ऑफ़ वेल्स एडवर्ड्स भी थे। एक हज़ार नौ सौ पचपन में जब भागवत सिंह मेवाड़ के राजा बने, तब उस समय इसको भव्यता को बनाये रखना शाही परिवार के लिए ये काफी मुश्किल सिद्ध हो रहा था। शाही परिवार के स्वामित्व में उस समय कई महल थे एवं उन सबकी भी भव्यता को कायम रखने में काफी परेशानी हो रही थी। उसी दौरान उन्होंने लेक पैलेस को उन्होंने होटल में परिवर्तित किया था जो अच्छी आय का माध्यम बन रहा था। इसको देखते हुए उन्होंने शिव निवास एवं फ़तेह प्रकाश पैलेस को विलासिता होटल में बदलने का निर्णय लिया एक हज़ार नौ सौ बयासी में चार वर्षों के लम्बी मेहनत के बाद शिव निवास पैलेस को होटल के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया। शुरू से ही इसकी भव्यता लोगों को आकर्षित करती थी इसलिए जब इसे होटल के तौर पर खोला गया तब इसकी लोकप्रियता बढ़ने में ज्यादा दिन नहीं लगे। यहाँ पर रुकना एक राजसी अहसास के जैसा हैं और इतिहास के उन पलो में लौटना है। जब यहाँ राजा या रानी रहा करते थे, यही बात व्यक्ति को यहाँ वापस लौटने के लिए मजबूर करती है। इन सबके बाद पिछोला झील के तट पर बसा होना इसकी खूबसुरती में चार चाँद लगाता हैं। . शेखावत राजपूत वंश की एक शाखा है देशी राज्यों के भारतीय संघ में विलय से पूर्व मनोहरपुर,शाहपुरा, खंडेला,सीकर, खेतडी,बिसाऊ,गढ़ गंगियासर,सुरजगढ़,नवलगढ़, खोटिया मंडावा, मुकन्दगढ़, दांता,खुड,खाचरियाबास, दूंद्लोद, अलसीसर,मलसिसर,रानोली आदि प्रभाव शाली ठिकाने शेखावतों के अधिकार में थे जो शेखावाटी नाम से प्रशिद्ध है। . सिटी पैलेस की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में आरम्भ हुई। इसे स्थापित करने का विचार एक संत ने राजा उदयसिंह द्वितीय को दिया था। इस प्रकार यह परिसर चार सौ वर्षों में बने भवनों का समूह है। यह एक भव्य परिसर है। इसे बनाने में बाईस राजाओं का योगदान था। इस परिसर में प्रवेश के लिए टिकट लगता है। बादी पॉल से टिकट लेकर आप इस परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। परिसर में प्रवेश करते ही आपको भव्य त्रिपोलिया गेट' दिखेगा। इसमें सात आर्क हैं। ये आर्क उन सात स्मवरणोत्सैवों का प्रतीक हैं जब राजा को सोने और चांदी से तौला गया था तथा उनके वजन के बराबर सोना-चांदी को गरीबों में बांट दिया गया था। इसके सामने की दीवार 'अगद' कहलाती है। यहां पर हाथियों की लड़ाई का खेल होता था। इस परिसर में एक जगदीश मंदिर भी है। इसी परिसर का एक भाग सिटी पैलेस संग्रहालय है। इसे अब सरकारी संग्रहालय घोषित कर दिया गया है। वर्तमान में शम्भूक निवास राजपरिवार का निवास स्थानन है। इससे आगे दक्षिण दिशा में 'फतह प्रकाश भ्ावन' तथा 'शिव निवास भवन' है। वर्तमान में दोनों को होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। . फ्रांस के लूव्र संग्रहालय में स्कूल के विद्यार्थी। लंदन में प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय टर्की के इस्तांबूल नगर में तोपकी संग्रहालय। संग्रहालय एक ऐसा संस्थान है है जो समाज की सेवा और विकास के लिए जनसामान्य के लिए खोला जाता है और इसमें मानव और पर्यावरण की विरासतों के संरक्षण के लिए उनका संग्रह, शोध, प्रचार या प्रदर्शन किया जाता है जिसका उपयोग शिक्षा, अध्ययन और मनोरंजन के लिए होता है। . सीकर भारत के राजस्थान का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। यह शहर शेखावाटी के नाम से जाना जाता है। सीकर एक एतिहासिक शहर है जहाँ पर कई हवेलियां है जो कि मुख्य पर्यटक आकर्षण हैं। . हवामहल हवा महल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी-महल है। इसे सन एक हज़ार सात सौ अट्ठानवे में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था और इसे किसी 'राजमुकुट' की तरह वास्तुकार लाल चंद उस्ता द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी अद्वितीय पांच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें नौ सौ तिरेपन बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं। इन खिडकियों को जालीदार बनाने के पीछे मूल भावना यह थी कि बिना किसी की निगाह पड़े "पर्दा प्रथा" का सख्ती से पालन करतीं राजघराने की महिलायें इन खिडकियों से महल के नीचे सडकों के समारोह व गलियारों में होने वाली रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों का अवलोकन कर सकें। इसके अतिरिक्त, "वेंचुरी प्रभाव" के कारण इन जटिल संरचना वाले जालीदार झरोखों से सदा ठंडी हवा, महल के भीतर आती रहती है, जिसके कारण तेज़ गर्मी में भी महल सदा वातानुकूलित सा ही रहता है। चूने, लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित यह महल जयपुर के व्यापारिक केंद्र के हृदयस्थल में मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सिटी पैलेस का ही हिस्सा है और ज़नाना कक्ष या महिला कक्ष तक फैला हुआ है। सुबह-सुबह सूर्य की सुनहरी रोशनी में इसे दमकते हुए देखना एक अनूठा एहसास देता है। . होटल एक इमारत है जिसमें कमरे होते हैं तथा कमरे किराये पर दिए जाते हैं। होटल में कई सुविधाएँ और हो सकती हैं। उनमें से भोजन की व्यवस्था, कसरत की व्यवस्था , तैराकी की व्यवस्था , दावतों, कॉन्फ़्रेन्सों के लिए अलग स्थान की व्यवस्था, आदि शामिल हैं। श्रेणीःव्यापार श्रेणीःआतिथ्य उद्योग * श्रेणीःप्रकारानुसार स्थापत्य. जयपुर जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है, भारत में राजस्थान राज्य की राजधानी है। आमेर के तौर पर यह जयपुर नाम से प्रसिद्ध प्राचीन रजवाड़े की भी राजधानी रहा है। इस शहर की स्थापना एक हज़ार सात सौ अट्ठाईस में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने की थी। जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है जो यहाँ के स्थापत्य की खूबी है। एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में तत्कालीन महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से आच्छादित करवा दिया था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है। दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार जयपुर भारत का दसवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर है। राजा जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा। जयपुर भारत के टूरिस्ट सर्किट गोल्डन ट्रायंगल का हिस्सा भी है। इस गोल्डन ट्रायंगल में दिल्ली,आगरा और जयपुर आते हैं भारत के मानचित्र में उनकी स्थिति अर्थात लोकेशन को देखने पर यह एक त्रिभुज का आकार लेते हैं। इस कारण इन्हें भारत का स्वर्णिम त्रिभुज इंडियन गोल्डन ट्रायंगल कहते हैं। भारत की राजधानी दिल्ली से जयपुर की दूरी दो सौ अस्सी किलोग्राममीटर है। शहर चारों ओर से दीवारों और परकोटों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रवेश के लिए सात दरवाजे हैं। बाद में एक और द्वार भी बना जो 'न्यू गेट' कहलाया। पूरा शहर करीब छह भागों में बँटा है और यह एक सौ ग्यारह फुट चौड़ी सड़कों से विभाजित है। पाँच भाग मध्य प्रासाद भाग को पूर्वी, दक्षिणी एवं पश्चिमी ओर से घेरे हुए हैं और छठा भाग एकदम पूर्व में स्थित है। प्रासाद भाग में हवा महल परिसर, व्यवस्थित उद्यान एवं एक छोटी झील हैं। पुराने शह के उत्तर-पश्चिमी ओर पहाड़ी पर नाहरगढ़ दुर्ग शहर के मुकुट के समान दिखता है। इसके अलावा यहां मध्य भाग में ही सवाई जयसिंह द्वारा बनावायी गईं वेधशाला, जंतर मंतर, जयपुर भी हैं। जयपुर को आधुनिक शहरी योजनाकारों द्वारा सबसे नियोजित और व्यवस्थित शहरों में से गिना जाता है। देश के सबसे प्रतिभाशाली वास्तुकारों में इस शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य का नाम सम्मान से लिया जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस पर कछवाहा समुदाय के राजपूत शासकों का शासन था। उन्नीसवीं सदी में इस शहर का विस्तार शुरु हुआ तब इसकी जनसंख्या एक,साठ,शून्य थी जो अब बढ़ कर दो हज़ार एक के आंकड़ों के अनुसार तेईस,चौंतीस,तीन सौ उन्नीस और दो हज़ार बारह के बाद पैंतीस लाख हो चुकी है। यहाँ के मुख्य उद्योगों में धातु, संगमरमर, वस्त्र-छपाई, हस्त-कला, रत्न व आभूषण का आयात-निर्यात तथा पर्यटन-उद्योग आदि शामिल हैं। जयपुर को भारत का पेरिस भी कहा जाता है। इस शहर के वास्तु के बारे में कहा जाता है कि शहर को सूत से नाप लीजिये, नाप-जोख में एक बाल के बराबर भी फ़र्क नहीं मिलेगा। . जलमहल राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसागर झील के मध्य स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक महल है। अरावली पहाडिय़ों के गर्भ में स्थित यह महल झील के बीचों बीच होने के कारण 'आई बॉल' भी कहा जाता है। इसे 'रोमांटिक महल' के नाम से भी जाना जाता था। जयसिंह द्वारा निर्मित यह महल मध्यकालीन महलों की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्त दुमंजिला और वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है। जलमहल अब पक्षी अभ्यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। यहाँ की नर्सरी में एक लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं जहाँ राजस्थान के सबसे ऊँचे पेड़ पाए जाते हैं। . जैसलमेर भारत के राजस्थान प्रांत का एक शहर है। भारत के सुदूर पश्चिम में स्थित धार के मरुस्थल में जैसलमेर की स्थापना भारतीय इतिहास के मध्यकाल के प्रारंभ में एक हज़ार एक सौ अठहत्तर ई. के लगभग यदुवंशी भाटी के वंशज रावल-जैसल द्वारा की गई थी। रावल जैसल के वंशजों ने यहाँ भारत के गणतंत्र में परिवर्तन होने तक बिना वंश क्रम को भंग किए हुए सात सौ सत्तर वर्ष सतत शासन किया, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटना है। जैसलमेर राज्य ने भारत के इतिहास के कई कालों को देखा व सहा है। सल्तनत काल के लगभग तीन सौ वर्ष के इतिहास में गुजरता हुआ यह राज्य मुगल साम्राज्य में भी लगभग तीन सौ वर्षों तक अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम रहा। भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना से लेकर समाप्ति तक भी इस राज्य ने अपने वंश गौरव व महत्व को यथावत रखा। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात यह भारतीय गणतंत्र में विलीन हो गया। भारतीय गणतंत्र के विलीनकरण के समय इसका भौगोलिक क्षेत्रफल सोलह,बासठ वर्ग मील के विस्तृत भू-भाग पर फैला हुआ था। रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों में स्थित होने के कारण यहाँ की जनसंख्या बींसवीं सदी के प्रारंभ में मात्र छिहत्तर,दो सौ पचपन थी। जैसलमेर जिले का भू-भाग प्राचीन काल में 'माडधरा' अथवा 'वल्लभमण्डल' के नाम से प्रसिद्ध था। महाभारत के युद्ध के बाद बड़ी संख्या में यादव इस ओर अग्रसर हुए व यहां आ कर बस गये। यहां अनेक सुंदर हवेलियां और जैन मंदिरों के समूह हैं जो बारहवीं से पंद्रहवीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। . जैसलमेर दुर्ग स्थापत्य कला की दृष्टि से उच्चकोटि की विशुद्ध स्थानीय दुर्ग रचना है। ये दुर्ग दो सौ पचास फीट तिकोनाकार पहाडी पर स्थित है। इस पहाडी की लंबाई एक सौ पचास फीट व चौडाई सात सौ पचास फीट है। रावल जैसल ने अपनी स्वतंत्र राजधानी स्थापित की थी। स्थानीय स्रोतों के अनुसार इस दुर्ग का निर्माण एक हज़ार एक सौ छप्पन ई. में प्रारंभ हुआ था। परंतु समकालीन साक्ष्यों के अध्ययन से पता चलता है कि इसका निर्माण कार्य एक हज़ार एक सौ अठहत्तर ई. के लगभग प्रारंभ हुआ था। पाँच वर्ष के अल्प निर्माण कार्य के उपरांत रावल जैसल की मृत्यु हो गयी, इसके द्वारा प्रारंभ कराए गए निमार्ण कार्य को उसके उत्तराधिकारी शालीवाहन द्वारा जारी रखकर दुर्ग को मूर्त रूप दिया गया। रावल जैसल व शालीवाहन द्वारा कराए गए कार्यो का कोई अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिलता है। मात्र ख्यातों व तवारीखों से वर्णन मिलता है। . जोधपुर भारत के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है। इसकी जनसंख्या दस लाख के पार हो जाने के बाद इसे राजस्थान का दूसरा "महानगर " घोषित कर दिया गया था। यह यहां के ऐतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की इसी नाम की राजधानी भी हुआ करता था। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। वर्ष पर्यन्त चमकते सूर्य वाले मौसम के कारण इसे "सूर्य नगरी" भी कहा जाता है। यहां स्थित मेहरानगढ़ दुर्ग को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे "नीली नगरी" के नाम से भी जाना जाता था। यहां के पुराने शहर का अधिकांश भाग इस दुर्ग को घेरे हुए बसा है, जिसकी प्रहरी दीवार में कई द्वार बने हुए हैं, हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस दीवार के बाहर भी नगर का वृहत प्रसार हुआ है। जोधपुर की भौगोलिक स्थिति राजस्थान के भौगोलिक केन्द्र के निकट ही है, जिसके कारण ये नगर पर्यटकों के लिये राज्य भर में भ्रमण के लिये उपयुक्त आधार केन्द्र का कार्य करता है। वर्ष दो हज़ार चौदह के विश्व के अति विशेष आवास स्थानों की सूची में प्रथम स्थान पाया था। एक तमिल फ़िल्म, आई, जो कि अब तक की भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फ़िल्मशोगी, की शूटिंग भी यहां हुई थी। . उदयपुर राजस्थान का एक नगर एवं पर्यटन स्थल है जो अपने इतिहास, संस्कृति एवम् अपने अाकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे सन् एक हज़ार पाँच सौ उनसठ में महाराणा उदय सिंह ने स्थापित किया था। अपनी झीलों के कारण यह शहर 'झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर शहर सिसोदिया राजवंश द्वारा शासित मेवाड़ की राजधानी रहा है। . उम्मैद भवन पैलेस उम्मैद भवन पैलेस राजस्थान के जोधपुर ज़िले में स्थित एक महल है। यह दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक है। यह ताज होटल का ही एक अंग है। इसका नाम महाराजा उम्मैद सिंह के पौत्र ने दिया था जो वर्तमान में मालिक है। अभी वर्तमान समय में इस पैलेस में तीन सौ सैंतालीस कमरे है। इस उम्मैद भवन पैलेस को चित्तर पैलेस के नाम से भी पहले जाना जाता था जब इसका निर्माण कार्य चालू था। यह पैलेस एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में बनकर तैयार हुआ था। .
रायबरेली। राजधानी लखनऊ में हिंदू समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड को लेकर विकासखंड बछरावां के थुलेडी गांव के ग्राम प्रधान के नेतृत्व में कई दर्जन लोगों ने निंदा की है। इस मौके पर ग्राम प्रधान राजू रायनी ने कहा कि कमलेश तिवारी हत्याकांड में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि कानून अपना काम कर रहा था फिर भी कमलेश तिवारी की हत्या की गई है। वह बहुत ही घृणित और निंदनीय कार्य है। इस मौके पर ग्राम प्रधान राजू रायनी, क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय शुक्ला, दिलीप पाठक, गोलू रायनी, साकिर कुरेशी, आरिफ खान, आफताब अंसारी, जावेद खान, मेराज अंसारी, मटरू रायनी, फुजैल मंसूरी, कायफ रायनी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने कमलेश तिवारी हत्याकांड की निंदा की है।
रायबरेली। राजधानी लखनऊ में हिंदू समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड को लेकर विकासखंड बछरावां के थुलेडी गांव के ग्राम प्रधान के नेतृत्व में कई दर्जन लोगों ने निंदा की है। इस मौके पर ग्राम प्रधान राजू रायनी ने कहा कि कमलेश तिवारी हत्याकांड में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि कानून अपना काम कर रहा था फिर भी कमलेश तिवारी की हत्या की गई है। वह बहुत ही घृणित और निंदनीय कार्य है। इस मौके पर ग्राम प्रधान राजू रायनी, क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय शुक्ला, दिलीप पाठक, गोलू रायनी, साकिर कुरेशी, आरिफ खान, आफताब अंसारी, जावेद खान, मेराज अंसारी, मटरू रायनी, फुजैल मंसूरी, कायफ रायनी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने कमलेश तिवारी हत्याकांड की निंदा की है।
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर तीन अलग-अलग जगहों पर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन (Drones) दिखाई दिये। भारतीय सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग किये जाने के बाद ये गायब हो गए। ये संदिग्ध ड्रोन सांबा जिले के बारी-ब्राह्मण, चिलाद्या और गगवाल इलाकों में गुरुवार रात एक ही समय पर दिखाई दिये। जिन इलाकों में संदिग्ध ड्रोन को मंडराते देखा गया, वे संवेदनशील सुरक्षा संस्थानों वाले क्षेत्र हैं। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, बारी-ब्राह्मण, चिलाद्या और गगवाल क्षेत्रों में गुरुवार रात करीब 8 बजे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन (Drones) देखे गए। पहले से ही अलर्ट सुरक्षाबलों ने फौरन मोर्चा संभाल लिया। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने चिलाद्या में सरहद पार लौट रहे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन पर फायरिंग भी की। वहीं दो अन्य ड्रोन बारी ब्राह्मणा और गगवाल में जम्मू-पठानकोट हाइवे पर संवेदनशील सुरक्षा संस्थानों पर मंडराने के बाद आसमान से गायब हो गए। जम्मू के सांबा जिले में तीन अलग-अलग जगहों पर एक ही समय में फिर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन (Drones) देखे गए हैं, जबकि अभी 23 जुलाई को ही पुलिस ने सीमावर्ती कनचक इलाके में 5 किलो IED सामग्री ले जा रहे एक ड्रोन को मार गिराया था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाक स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद इन ड्रोनों के जरिये जम्मू में भीड़-भाड़ वाली जगह पर विस्फोट करना चाहता था। गौरतलह है कि इससे पहले भारतीय वायुसेना के जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर 27 जून को दो ड्रोन (Drones) से हमला किया गया था, जिसमें भी पाकिस्तान स्थित आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। हालांकि सुरक्षाबलों की सतर्कता की वजह से आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाए। जांच में पाया गया कि जम्मू एयरफोर्स स्टेशन की छत पर विस्फोट में जिस विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था, उस पर हस्ताक्षर से इसे बनाने में पाकिस्तान के आयुध कारखाने की भूमिका साफ तौर पर सामने आई थी। इस मामले की जांच NIA कर रही है।
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर तीन अलग-अलग जगहों पर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन दिखाई दिये। भारतीय सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग किये जाने के बाद ये गायब हो गए। ये संदिग्ध ड्रोन सांबा जिले के बारी-ब्राह्मण, चिलाद्या और गगवाल इलाकों में गुरुवार रात एक ही समय पर दिखाई दिये। जिन इलाकों में संदिग्ध ड्रोन को मंडराते देखा गया, वे संवेदनशील सुरक्षा संस्थानों वाले क्षेत्र हैं। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, बारी-ब्राह्मण, चिलाद्या और गगवाल क्षेत्रों में गुरुवार रात करीब आठ बजे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। पहले से ही अलर्ट सुरक्षाबलों ने फौरन मोर्चा संभाल लिया। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने चिलाद्या में सरहद पार लौट रहे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन पर फायरिंग भी की। वहीं दो अन्य ड्रोन बारी ब्राह्मणा और गगवाल में जम्मू-पठानकोट हाइवे पर संवेदनशील सुरक्षा संस्थानों पर मंडराने के बाद आसमान से गायब हो गए। जम्मू के सांबा जिले में तीन अलग-अलग जगहों पर एक ही समय में फिर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं, जबकि अभी तेईस जुलाई को ही पुलिस ने सीमावर्ती कनचक इलाके में पाँच किलो IED सामग्री ले जा रहे एक ड्रोन को मार गिराया था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाक स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद इन ड्रोनों के जरिये जम्मू में भीड़-भाड़ वाली जगह पर विस्फोट करना चाहता था। गौरतलह है कि इससे पहले भारतीय वायुसेना के जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर सत्ताईस जून को दो ड्रोन से हमला किया गया था, जिसमें भी पाकिस्तान स्थित आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। हालांकि सुरक्षाबलों की सतर्कता की वजह से आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाए। जांच में पाया गया कि जम्मू एयरफोर्स स्टेशन की छत पर विस्फोट में जिस विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ था, उस पर हस्ताक्षर से इसे बनाने में पाकिस्तान के आयुध कारखाने की भूमिका साफ तौर पर सामने आई थी। इस मामले की जांच NIA कर रही है।
भीरामहूर्त शरणं प्रपद्ये महत्वका ऐसा प्रभाव जिसके कारण उपद्रवी या विरोधी शान्त रहें' प्रताप कहलाता है। श्रीहनुमानजीके कार्योने लंकाभर पर आतंक छा दिया था कि जिसका दूत ऐसा है वह स्वामी न जाने कितना बलवान् होगा । यथा- 'जासु दूत बल वरनि न जाई । तेहि आयें पुर कवन भलाई । ५।३६।३।', 'तुलसी विलोकि अकुलानी जातुधानी कहैं चित्रहूँके कपिसाँ निसाचरु न लागिहैं ।', 'तुलसी सयाने जातुधानपछिताने कहैं 'जाको ऐसो दूत सो तो साहेबु अवैन ।', 'समुझि तुलसीस कपि कर्म बैरु बसत गढ़ बँक लंकेस नायक अद्भुत लंक नहिं खात कोउ भात रॉथ्यो ।' (क०५/१४,६६४ । रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण भ प्रभाव देख सत्रस्त थे । यथा - 'उठ्यो मेघनाद सबिषाद कहै रावनो । वेग जित्यो मारुत प्रताप मारतंड कोटि । क०५शहा', 'बार बार प्रचार हनुमाना । निकट न आव मरमु सो जाना । ६।२०।४।' (मेघनाद), 'ततोऽन्यत्र गतो भीत्या रावणो (अ० रा० ६।११।१२।' - ( रावल एक बार के घूँ सेसे एक मुहूर्त मूर्च्छित होकर जब सचेत हुआ, तब हनुमान्जीने उसे फिर ललकारा कि सेसे तेरे प्राण लेलूंगा । रावण भयभीत होकर अन्यत्र चला गया )। कुम्भकर्णपर भी प्रभाव पड़ा, यह उसके "हैं दससोस मनुज रघुनायक । जाके हनुमानसे पायक । ६।६२।३।', इन वचनोसे स्पष्ट है । और युद्धभूमिमें तो प्रत्यक्ष प्रभाव देख भय खा गया था । सुग्रीचपर चलाये हुये उसके शूलको हनुमानजीने अपनघुटनोंमे लगाकर तोड़ डाला, यह देख वह भयसे थर्रा उठा, - 'वभूवाथ परित्रस्तो राक्षसो विमुखोऽभवत्' । उसके मुँहपर उदासी छा गई । ( वा० ६।६७/६५ ) । इसके पूर्व हनुमान्जीके वॅसेका प्रभाव देख ही चुका था । यथा - 'मेदाईगात्रो रुविरावसिकः । वा० ६६६७७१८१', 'परयो धरनि व्याकुल सिर धुन्यो । ६।६४१७', 'कुंभकरन आइ रह्यो पाइसी । क० ६।४३।। द्रोणाचलको पल भर में ले आने और मेघनाद तथा रावणके यज्ञ-विध्वंससे इन दोनोंका वध नितान्त सुलभ होगया।'एहि बीच कपिन्ह बिधंसकृत मख देखि मन महुँ हारई । चलेउ निसाचर क्रुद्ध होइ त्यागि जिवनकै आ६८४॥ भय होने पर बल फिर काम नहीं करता; उत्साह नहीं रह जाता । हतोत्साह होनेसे शत्रुको उसका पराजय सुगम होजाता है । श्रीहनु - मान्जीके प्रभावशाली कार्य कुम्भकर्णादिके शीघ्र और सहज हो नाशके साधन हुए । विनय पद २५ के 'दसकंठ घटक वारिदनाद-कदनकारन' से इस भावकी पुष्टि भी होती है । अतः उनके प्रतापको प्रचंड उपमादी । अलको 'प्रबल' कहा, क्योंकि इनका प्रभाव प्रलयकालीन महासागर, संवर्तक अग्नि एवं लोकसंहारी कालके समान है। -( वा० ५/३६ । ४८ में महर्षि अगस्त्यका यह कथन है ) । ४ - 'त्रिकाल न त्रिलोक महावल भो' - यह अनुमान द्वापरके अन्त में भीष्मजीने प्रकट किया है। त्रेतायुग में महर्षि अगस्त्यके वाक्य हैं कि संसार में पराक्रम, उत्तम बल आदि इनसे बढ़कर कोई नहीं । भोष्मजीके समय तक एक पूरा युग बीत गया और परशुरामसे लोहा लेनेवाले भीष्म स्वयं महान् बली हैं । इन्होने भी कोई ऐसा बलवान् नहीं देखा । त्रेता के समय द्वापर भविष्य है । अतः उतने भविष्यकी परीक्षा से आगे भविष्य का अनुमान करके 'त्रिकाल' में न होना कहा । - इससे 'महाबल की सीमा' जनाया । जाम्बवान्ने भी इनके चल, बुद्धि, तेज एवं धैर्यको सबसे बढ़कर कहा है - विशिष्टं सर्वभुतेषु' (वा० ४। ६६।७)।
भीरामहूर्त शरणं प्रपद्ये महत्वका ऐसा प्रभाव जिसके कारण उपद्रवी या विरोधी शान्त रहें' प्रताप कहलाता है। श्रीहनुमानजीके कार्योने लंकाभर पर आतंक छा दिया था कि जिसका दूत ऐसा है वह स्वामी न जाने कितना बलवान् होगा । यथा- 'जासु दूत बल वरनि न जाई । तेहि आयें पुर कवन भलाई । पाँच।छत्तीस।तीन।', 'तुलसी विलोकि अकुलानी जातुधानी कहैं चित्रहूँके कपिसाँ निसाचरु न लागिहैं ।', 'तुलसी सयाने जातुधानपछिताने कहैं 'जाको ऐसो दूत सो तो साहेबु अवैन ।', 'समुझि तुलसीस कपि कर्म बैरु बसत गढ़ बँक लंकेस नायक अद्भुत लंक नहिं खात कोउ भात रॉथ्यो ।' , 'ततोऽन्यत्र गतो भीत्या रावणो । कुम्भकर्णपर भी प्रभाव पड़ा, यह उसके "हैं दससोस मनुज रघुनायक । जाके हनुमानसे पायक । छः।बासठ।तीन।', इन वचनोसे स्पष्ट है । और युद्धभूमिमें तो प्रत्यक्ष प्रभाव देख भय खा गया था । सुग्रीचपर चलाये हुये उसके शूलको हनुमानजीने अपनघुटनोंमे लगाकर तोड़ डाला, यह देख वह भयसे थर्रा उठा, - 'वभूवाथ परित्रस्तो राक्षसो विमुखोऽभवत्' । उसके मुँहपर उदासी छा गई । । इसके पूर्व हनुमान्जीके वॅसेका प्रभाव देख ही चुका था । यथा - 'मेदाईगात्रो रुविरावसिकः । वाशून्य छः करोड़ छयासठ लाख सतहत्तर हज़ार एक सौ इक्यासी', 'परयो धरनि व्याकुल सिर धुन्यो । छः।छः हज़ार चार सौ सत्रह', 'कुंभकरन आइ रह्यो पाइसी । कशून्य छः।तैंतालीस।। द्रोणाचलको पल भर में ले आने और मेघनाद तथा रावणके यज्ञ-विध्वंससे इन दोनोंका वध नितान्त सुलभ होगया।'एहि बीच कपिन्ह बिधंसकृत मख देखि मन महुँ हारई । चलेउ निसाचर क्रुद्ध होइ त्यागि जिवनकै आछः सौ चौरासी॥ भय होने पर बल फिर काम नहीं करता; उत्साह नहीं रह जाता । हतोत्साह होनेसे शत्रुको उसका पराजय सुगम होजाता है । श्रीहनु - मान्जीके प्रभावशाली कार्य कुम्भकर्णादिके शीघ्र और सहज हो नाशके साधन हुए । विनय पद पच्चीस के 'दसकंठ घटक वारिदनाद-कदनकारन' से इस भावकी पुष्टि भी होती है । अतः उनके प्रतापको प्रचंड उपमादी । अलको 'प्रबल' कहा, क्योंकि इनका प्रभाव प्रलयकालीन महासागर, संवर्तक अग्नि एवं लोकसंहारी कालके समान है। - । चार - 'त्रिकाल न त्रिलोक महावल भो' - यह अनुमान द्वापरके अन्त में भीष्मजीने प्रकट किया है। त्रेतायुग में महर्षि अगस्त्यके वाक्य हैं कि संसार में पराक्रम, उत्तम बल आदि इनसे बढ़कर कोई नहीं । भोष्मजीके समय तक एक पूरा युग बीत गया और परशुरामसे लोहा लेनेवाले भीष्म स्वयं महान् बली हैं । इन्होने भी कोई ऐसा बलवान् नहीं देखा । त्रेता के समय द्वापर भविष्य है । अतः उतने भविष्यकी परीक्षा से आगे भविष्य का अनुमान करके 'त्रिकाल' में न होना कहा । - इससे 'महाबल की सीमा' जनाया । जाम्बवान्ने भी इनके चल, बुद्धि, तेज एवं धैर्यको सबसे बढ़कर कहा है - विशिष्टं सर्वभुतेषु' ।
मल्टीबैगर शेयर (प्रतीकात्मक तस्वीर) Multibagger Stocks: शेयर मार्केट (Share Market) में निवेश को बेहद रिस्की माना जाता है, लेकिन अगर आप सही जगह पर पैसे निवेश करते हैं तो आपको तगड़ा रिटर्न मिल सकता है. वॉल और फ्लोर टाइल्स बनाने वाली कंपनी सोमानी सिरामिक्स (Somany Ceramics) देश की जानीमानी कंपनियों में शामिल है. इस कंपनी ने अपने निवेशकों को लॉग टर्म में बहुत अच्छा रिटर्न दिया है. पिछले कुछ वक्त में इस कंपनी के शेयर्स में भले ही 43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है अगर लिस्टिंग से अब तक की बात करें तो यह मल्टीबैगर स्टॉक (Multibagger Stock) साबित हुआ है. मनी कंट्रोल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस शेयर में आगे आने वाले दिनों में 40 फीसदी तक के जबरदस्त तेजी देखी जा सकती है. कंपनी ने अपने रिटेल, प्रोडक्ट आदि सभी चीजों पर लगातार काम कर रही है. ऐसे में आने वाले वक्त में इसका असर शेयर के प्राइस पर पड़ने की संभावना है. इसके साथ ही जीवन की तिमाही में इसके रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन में 20 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण निवेशकों इस कंपनी की तरफ पॉजिटिव निगाह से देख रहे हैं. सोमानी सिरामिक्स शेयर्स (Somany Ceramics Share Price) की बात करें तो साल 2009 में यह शेयर केवल 8. 40 पर था. वहीं 13 साल के बाद यह फिलहाल 528. 70 रुपये पर है. ऐसे में इसमें अब 63 गुना की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अगर आपने उस समय अगर 2 लाख रुपये का निवेश किया तो यह अब 1. 26 करोड़ रुपये का फंड बन चुका है. वहीं पिछले एक साल की बात करें तो यह नवंबर 2021 में 952. 45 रुपये पर था जो जून 2022 में 46 फीसदी गिरावट तक पहुंच गया है. जून 2022 में यह 512. 50 रुपये तक पहुंच गया था. 11 नवंबर 2022 को यह थोड़ा मजबूत होने के बाद 582 पर पहुंच चुका है. ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) ने हाल ही में यह बताया है कि आने वाले वक्त में सोमानी सिरामिक्स शेयर्स के प्राइस में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है. ऐसे में ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर के टारगेट प्राइस को 740 रुपये रखा है. ऐसे में आने वाले वक्त में इसके प्राइस में जबरदस्त तेजी की उम्मीद जताई जा रही है. डिस्क्लेमरः (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive. com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है. )
मल्टीबैगर शेयर Multibagger Stocks: शेयर मार्केट में निवेश को बेहद रिस्की माना जाता है, लेकिन अगर आप सही जगह पर पैसे निवेश करते हैं तो आपको तगड़ा रिटर्न मिल सकता है. वॉल और फ्लोर टाइल्स बनाने वाली कंपनी सोमानी सिरामिक्स देश की जानीमानी कंपनियों में शामिल है. इस कंपनी ने अपने निवेशकों को लॉग टर्म में बहुत अच्छा रिटर्न दिया है. पिछले कुछ वक्त में इस कंपनी के शेयर्स में भले ही तैंतालीस फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है अगर लिस्टिंग से अब तक की बात करें तो यह मल्टीबैगर स्टॉक साबित हुआ है. मनी कंट्रोल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस शेयर में आगे आने वाले दिनों में चालीस फीसदी तक के जबरदस्त तेजी देखी जा सकती है. कंपनी ने अपने रिटेल, प्रोडक्ट आदि सभी चीजों पर लगातार काम कर रही है. ऐसे में आने वाले वक्त में इसका असर शेयर के प्राइस पर पड़ने की संभावना है. इसके साथ ही जीवन की तिमाही में इसके रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन में बीस फीसदी की बढ़ोतरी के कारण निवेशकों इस कंपनी की तरफ पॉजिटिव निगाह से देख रहे हैं. सोमानी सिरामिक्स शेयर्स की बात करें तो साल दो हज़ार नौ में यह शेयर केवल आठ. चालीस पर था. वहीं तेरह साल के बाद यह फिलहाल पाँच सौ अट्ठाईस. सत्तर रुपयापये पर है. ऐसे में इसमें अब तिरेसठ गुना की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अगर आपने उस समय अगर दो लाख रुपये का निवेश किया तो यह अब एक. छब्बीस करोड़ रुपये का फंड बन चुका है. वहीं पिछले एक साल की बात करें तो यह नवंबर दो हज़ार इक्कीस में नौ सौ बावन. पैंतालीस रुपयापये पर था जो जून दो हज़ार बाईस में छियालीस फीसदी गिरावट तक पहुंच गया है. जून दो हज़ार बाईस में यह पाँच सौ बारह. पचास रुपयापये तक पहुंच गया था. ग्यारह नवंबर दो हज़ार बाईस को यह थोड़ा मजबूत होने के बाद पाँच सौ बयासी पर पहुंच चुका है. ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने हाल ही में यह बताया है कि आने वाले वक्त में सोमानी सिरामिक्स शेयर्स के प्राइस में चालीस फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है. ऐसे में ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर के टारगेट प्राइस को सात सौ चालीस रुपयापये रखा है. ऐसे में आने वाले वक्त में इसके प्राइस में जबरदस्त तेजी की उम्मीद जताई जा रही है. डिस्क्लेमरः
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Midaz की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Midaz की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष) ।बच्चे(2 से 12 वर्ष) ।शिशु(1 महीने से 2 वर्ष) क्या Midaz का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनको Midaz लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो आपके शरीर पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। क्या Midaz का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? बच्चों को अपना दूध पिलाने वाली स्त्रियों पर Midaz का जो भी बुरा प्रभाव होता है, वो शरीर पर बहुत कम होता है। Midaz का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Midaz का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Midaz का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Midaz आप ले सकते हैं। इसका विपरीत असर आपके लीवर पर बहुत कम पड़ता है। क्या ह्रदय पर Midaz का प्रभाव पड़ता है? कुछ मामलों में Midaz हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा। क्या Midaz आदत या लत बन सकती है? आपको Midaz खाने की आदत लग सकती है। इसलिए इसको खाने से पहले डॉक्टरी सलाह लें। क्या Midaz को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Midaz लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Midaz को लेना सुरखित है? इसकी अधिक मात्रा को न लें। डॉक्टर ने जितनी मात्रा बताई है उतनी मात्रा को ही खाएं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Midaz इस्तेमाल की जा सकती है? यह कहना सही होगा कि Midaz को लेने से दिमाग में उत्पन्न होने वाले विकार ठीक हो जाते हैं। क्या Midaz को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने की कई चीजों में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जिनके साथ यदि आप Midaz को लें तो इससे दवा का असर अपने निर्धारित समय के बाद से ही होना शुरू होता है। जब Midaz ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब और Midaz से आपके शरीर में कई तरह के गंभीर प्रभाव होते हैं। इससे बचने के लिए आपको डॉक्टर से सलाह लेनी होगी। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Nayzilam® (midazolam) US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; - Hypnovel® (midazolam)
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Midaz की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Midaz की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था ।बच्चे ।शिशु क्या Midaz का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनको Midaz लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो आपके शरीर पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। क्या Midaz का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? बच्चों को अपना दूध पिलाने वाली स्त्रियों पर Midaz का जो भी बुरा प्रभाव होता है, वो शरीर पर बहुत कम होता है। Midaz का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Midaz का हानिकारक प्रभाव बहुत कम है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के भी ले सकते हैं। Midaz का जिगर पर क्या असर होता है? Midaz आप ले सकते हैं। इसका विपरीत असर आपके लीवर पर बहुत कम पड़ता है। क्या ह्रदय पर Midaz का प्रभाव पड़ता है? कुछ मामलों में Midaz हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा। क्या Midaz आदत या लत बन सकती है? आपको Midaz खाने की आदत लग सकती है। इसलिए इसको खाने से पहले डॉक्टरी सलाह लें। क्या Midaz को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Midaz लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Midaz को लेना सुरखित है? इसकी अधिक मात्रा को न लें। डॉक्टर ने जितनी मात्रा बताई है उतनी मात्रा को ही खाएं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Midaz इस्तेमाल की जा सकती है? यह कहना सही होगा कि Midaz को लेने से दिमाग में उत्पन्न होने वाले विकार ठीक हो जाते हैं। क्या Midaz को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने की कई चीजों में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जिनके साथ यदि आप Midaz को लें तो इससे दवा का असर अपने निर्धारित समय के बाद से ही होना शुरू होता है। जब Midaz ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब और Midaz से आपके शरीर में कई तरह के गंभीर प्रभाव होते हैं। इससे बचने के लिए आपको डॉक्टर से सलाह लेनी होगी। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Nayzilam® US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; - Hypnovel®
नगर निगम शिमला को चार महीने के बाद प्रशासक तो मिल गया, लेकिन उसके दो दिन के बाद ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। कोड ऑफ कंडक्ट लग जाने के कारण नगर निगम शिमला के तहत शहर के होने वाले नए विकास कार्य तो नहीं हो पाएंगे, लेकिन रूटीन के कामकाज प्रभावित नहीं होंगे। भाजपा शासित नगर निगम का कार्यकाल 18 जून को पूरा हो गया था। इसके बाद चुनाव करवाने की तैयारी थी। सरकार ने शहर में वार्डों का पुनर्सीमांकन करते हुए 34 की जगह 41 वार्ड बनाए, लेकिन नाभा और समरहिल वार्ड के पुनर्सीमांकन का मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इसके चलते चुनाव आयोग ने नगर निगम शिमला के चुनाव नहीं करवाए। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने जिला में विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में चुनाव प्रक्रिया पूर्ण करने का आह्वान किया तथा चुनावों में निजी टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी। वह रोजाना हॉल में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक ले रहे थे। उन्होंने बताया कि विपक्ष विधानसभा चुनाव कराने के लिए वीडियो निगरानी टीमों कंट्रोल रूम व उडऩदस्तों का गठन कर दिया गया है और राजनीतिक दल सी विजील ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। उन्होंने बताया कि नामांकन प्रक्रिया 25 अक्तूबर से शुरू होगी और स्क्रूटनिंग 27 अक्तूबर व नाम वापस लेने की तिथि 29 अक्तूबर निर्धारित की गई है। जिला में 1044 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और मतदान 12 नवंबर को होगा तथा मतगणना आठ दिसंबर को होगी। उन्होंने बताया कि उम्मीदवार को चुनाव लडऩे के लिए सीमा 40 लाख रुपए तय की गई है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था राहुल चौहान ने बैठक का संचालन किया और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के संशय दूर किए। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त शिवम प्रताप सिंह अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल सचिन कंवल, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। नए विकास कार्यों पर पाबंदी लग गई है। स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अब सरकारी काम हो सकेंगे। केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद चुनाव विभाग ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर दिया है। प्रदेश में स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से ही अब सरकारी कामकाज सिरे चढ़ेंगे। इस कमेटी में दो अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इसमें उन विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को शामिल किया गया है। जिनके विभागों के प्रपोजल मंजूरी के लिए भेजे जाने हैं और प्रधान सचिव जीएडी समिति के सदस्य होंगे। चुनाव आयोग या चुनाव विभाग से मंजूरी लेने से पहले यह समिति उन प्रस्तावों का एग्जामिन करेगी जिन्हें चुनाव विभाग या चुनाव आयोग को मंजूरी के लिए भेजा जाना है। समिति केवल उन्हीं प्रस्तावों को आगे भेजेगी जो बहुत जरूरी होंगे। स्क्रीनिंग कमेटी से अप्रूवल लेने के बाद ही प्रस्ताव आगे भेजे जाएंगे। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लगने के बाद काम प्रभावित ना हो इसे ध्यान में रखते हुए यह स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई है। बेहद जरूरी काम के लिए यह स्क्रीनिंग कमेटी प्रस्ताव को आगे भेज कर उसकी परमिशन लेगी ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा ना हो।
नगर निगम शिमला को चार महीने के बाद प्रशासक तो मिल गया, लेकिन उसके दो दिन के बाद ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। कोड ऑफ कंडक्ट लग जाने के कारण नगर निगम शिमला के तहत शहर के होने वाले नए विकास कार्य तो नहीं हो पाएंगे, लेकिन रूटीन के कामकाज प्रभावित नहीं होंगे। भाजपा शासित नगर निगम का कार्यकाल अट्ठारह जून को पूरा हो गया था। इसके बाद चुनाव करवाने की तैयारी थी। सरकार ने शहर में वार्डों का पुनर्सीमांकन करते हुए चौंतीस की जगह इकतालीस वार्ड बनाए, लेकिन नाभा और समरहिल वार्ड के पुनर्सीमांकन का मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इसके चलते चुनाव आयोग ने नगर निगम शिमला के चुनाव नहीं करवाए। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने जिला में विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में चुनाव प्रक्रिया पूर्ण करने का आह्वान किया तथा चुनावों में निजी टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी। वह रोजाना हॉल में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक ले रहे थे। उन्होंने बताया कि विपक्ष विधानसभा चुनाव कराने के लिए वीडियो निगरानी टीमों कंट्रोल रूम व उडऩदस्तों का गठन कर दिया गया है और राजनीतिक दल सी विजील ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है। उन्होंने बताया कि नामांकन प्रक्रिया पच्चीस अक्तूबर से शुरू होगी और स्क्रूटनिंग सत्ताईस अक्तूबर व नाम वापस लेने की तिथि उनतीस अक्तूबर निर्धारित की गई है। जिला में एक हज़ार चौंतालीस मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और मतदान बारह नवंबर को होगा तथा मतगणना आठ दिसंबर को होगी। उन्होंने बताया कि उम्मीदवार को चुनाव लडऩे के लिए सीमा चालीस लाख रुपए तय की गई है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था राहुल चौहान ने बैठक का संचालन किया और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के संशय दूर किए। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त शिवम प्रताप सिंह अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल सचिन कंवल, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। नए विकास कार्यों पर पाबंदी लग गई है। स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अब सरकारी काम हो सकेंगे। केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद चुनाव विभाग ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर दिया है। प्रदेश में स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से ही अब सरकारी कामकाज सिरे चढ़ेंगे। इस कमेटी में दो अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इसमें उन विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को शामिल किया गया है। जिनके विभागों के प्रपोजल मंजूरी के लिए भेजे जाने हैं और प्रधान सचिव जीएडी समिति के सदस्य होंगे। चुनाव आयोग या चुनाव विभाग से मंजूरी लेने से पहले यह समिति उन प्रस्तावों का एग्जामिन करेगी जिन्हें चुनाव विभाग या चुनाव आयोग को मंजूरी के लिए भेजा जाना है। समिति केवल उन्हीं प्रस्तावों को आगे भेजेगी जो बहुत जरूरी होंगे। स्क्रीनिंग कमेटी से अप्रूवल लेने के बाद ही प्रस्ताव आगे भेजे जाएंगे। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लगने के बाद काम प्रभावित ना हो इसे ध्यान में रखते हुए यह स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई है। बेहद जरूरी काम के लिए यह स्क्रीनिंग कमेटी प्रस्ताव को आगे भेज कर उसकी परमिशन लेगी ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा ना हो।
Don't Miss! सलमान के एक्शन को पीछे छोड़ पाएगा शाहरुख का रोमांस! दूसरी तरफ शाहरुख खान कैटरीना कैफ के साथ अपनी बेनाम फिल्म की शूटिंग के लिए लद्दाख की वादियों में दिन रात एक किये हुए हैं। लेकिन शाहरुख के मन में कहीं ना कहीं सलमान की फिल्म एक था टाईगर की सफलता को देखकर एक डर जरूर है कि कहीं शाहरुख की ये रोमांटिक फिल्म सलमान के एक्शन के आगे फीकी ना पड़ जाए। देखा जाए तो पिछले कुछ सालों से सलमान ने ही बॉक्स ऑफिस पर अपना राज बना रखा है लेकिन इसके बावजूद दोनों खानों के बीच एक कोल्ड वार तो चल ही रही है। शाहरुख जो की अपने रोमांस के लिए हमेशा से ही मशहूर रहे हैं इस बार भी अपने रोमांस का जादू लेकर दीवाली पर आने वाले हैं लेकिन शाहरुख के इस रोमांस से पहले ही सलमान खान ने अपने एक्शन से शाहरुख के सामने एक कड़ी चुनौती रख दी है। हालांकि दोनों फिल्में एक था टाईगर और शाहरुख की बेनाम फिल्म यशराज बैनर द्वारा बनाई गई है लेकिन इसके बावजूद दोनों एक्टरों के बीच एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ कभी खत्म नहीं हो सकती। दूसरी तरफ कैटरीना की शाहरुख के साथ ये पहली फिल्म है सलमान के लिए जो लकी चार्म रही हैं वो शाहरुख के लिए लकी रहेंगी या नहीं ये सोचने वाली बात है। दोनों कलाकारों ने एक दूसरे की फिल्म की सफलता की कामना तो कर दी लेकिन इन शुभकामनाओं में कितनी सच्चाई है ये दोनों कलाकार ही जानते हैं। फिल्हाल तो शाहरुख की किंग खान की कुर्सी काफी मुश्किल में नज़र आ रही है। जिस तरह भगवान इंद्र अपनी कुर्सी बचाने के लिए हमेशा परेशान रहते थे उसी तरह इस वक्त बॉलीवुड के किंग खान परेशान हैं। खैर शाहरुख आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है अगर सलमान खान बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं तो आप किंग खान हैं आपके फैन्स को आपसे कोई नहीं छीन सकता। सो डोन्ट वरी।
Don't Miss! सलमान के एक्शन को पीछे छोड़ पाएगा शाहरुख का रोमांस! दूसरी तरफ शाहरुख खान कैटरीना कैफ के साथ अपनी बेनाम फिल्म की शूटिंग के लिए लद्दाख की वादियों में दिन रात एक किये हुए हैं। लेकिन शाहरुख के मन में कहीं ना कहीं सलमान की फिल्म एक था टाईगर की सफलता को देखकर एक डर जरूर है कि कहीं शाहरुख की ये रोमांटिक फिल्म सलमान के एक्शन के आगे फीकी ना पड़ जाए। देखा जाए तो पिछले कुछ सालों से सलमान ने ही बॉक्स ऑफिस पर अपना राज बना रखा है लेकिन इसके बावजूद दोनों खानों के बीच एक कोल्ड वार तो चल ही रही है। शाहरुख जो की अपने रोमांस के लिए हमेशा से ही मशहूर रहे हैं इस बार भी अपने रोमांस का जादू लेकर दीवाली पर आने वाले हैं लेकिन शाहरुख के इस रोमांस से पहले ही सलमान खान ने अपने एक्शन से शाहरुख के सामने एक कड़ी चुनौती रख दी है। हालांकि दोनों फिल्में एक था टाईगर और शाहरुख की बेनाम फिल्म यशराज बैनर द्वारा बनाई गई है लेकिन इसके बावजूद दोनों एक्टरों के बीच एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ कभी खत्म नहीं हो सकती। दूसरी तरफ कैटरीना की शाहरुख के साथ ये पहली फिल्म है सलमान के लिए जो लकी चार्म रही हैं वो शाहरुख के लिए लकी रहेंगी या नहीं ये सोचने वाली बात है। दोनों कलाकारों ने एक दूसरे की फिल्म की सफलता की कामना तो कर दी लेकिन इन शुभकामनाओं में कितनी सच्चाई है ये दोनों कलाकार ही जानते हैं। फिल्हाल तो शाहरुख की किंग खान की कुर्सी काफी मुश्किल में नज़र आ रही है। जिस तरह भगवान इंद्र अपनी कुर्सी बचाने के लिए हमेशा परेशान रहते थे उसी तरह इस वक्त बॉलीवुड के किंग खान परेशान हैं। खैर शाहरुख आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है अगर सलमान खान बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं तो आप किंग खान हैं आपके फैन्स को आपसे कोई नहीं छीन सकता। सो डोन्ट वरी।
सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज करते हुए कहा है कि सरकारी आवास सेवारत अधिकारियों के लिए है, न कि सेवानिवृत्त लोगों के लिए। आश्रय के अधिकार का मतलब सरकारी आवास का अधिकार नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक सेवानिवृत्त लोक सेवक को अनिश्चित काल के लिए ऐसे परिसर को बनाए रखने की अनुमति देने के निर्देश को देखते हुए, बिना किसी नीति के राज्य की उदारता का वितरण है। केंद्र द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और सेवानिवृत्त खुफिया ब्यूरो अधिकारी, एक कश्मीरी प्रवासी को परिसर के खाली भौतिक कब्जे को या उससे पहले सौंपने का निर्देश दिया। 31 अक्टूबर 2021। पीठ ने केंद्र को 15 नवंबर, 2021 तक उच्च न्यायालयों के आदेशों के आधार पर सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया, जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी आवास में हैं। अधिकारी, जिसे फरीदाबाद स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां उसे एक सरकारी आवास आवंटित किया गया था, ने 31 अक्टूबर, 2006 को सेवा से सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर ली थी। उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के जुलाई 2011 के आदेश के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने अपने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ एक याचिका को खारिज कर दिया था। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि सेवानिवृत्त अधिकारी के लिए अपने राज्य में वापस जाना संभव नहीं है, जिसके कारण बेदखली के आदेश को स्थगित रखा जाएगा। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि अधिकारी उसे फरीदाबाद में मामूली लाइसेंस शुल्क पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के लिए स्वतंत्र हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज करते हुए कहा है कि सरकारी आवास सेवारत अधिकारियों के लिए है, न कि सेवानिवृत्त लोगों के लिए। आश्रय के अधिकार का मतलब सरकारी आवास का अधिकार नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक सेवानिवृत्त लोक सेवक को अनिश्चित काल के लिए ऐसे परिसर को बनाए रखने की अनुमति देने के निर्देश को देखते हुए, बिना किसी नीति के राज्य की उदारता का वितरण है। केंद्र द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और सेवानिवृत्त खुफिया ब्यूरो अधिकारी, एक कश्मीरी प्रवासी को परिसर के खाली भौतिक कब्जे को या उससे पहले सौंपने का निर्देश दिया। इकतीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस। पीठ ने केंद्र को पंद्रह नवंबर, दो हज़ार इक्कीस तक उच्च न्यायालयों के आदेशों के आधार पर सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया, जो अपनी सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी आवास में हैं। अधिकारी, जिसे फरीदाबाद स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां उसे एक सरकारी आवास आवंटित किया गया था, ने इकतीस अक्टूबर, दो हज़ार छः को सेवा से सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर ली थी। उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के जुलाई दो हज़ार ग्यारह के आदेश के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने अपने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ एक याचिका को खारिज कर दिया था। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि सेवानिवृत्त अधिकारी के लिए अपने राज्य में वापस जाना संभव नहीं है, जिसके कारण बेदखली के आदेश को स्थगित रखा जाएगा। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि अधिकारी उसे फरीदाबाद में मामूली लाइसेंस शुल्क पर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के लिए स्वतंत्र हैं।
पूरी दुनिया में आज अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। देश के दुर्गम इलाकों में तैनात सेना और विभिन्न आर्मड फोर्सज के जवानों भी योग किया। आइए आपको दिखात हैं ऐसी ही कुछ हैरान कर देनी वाली तस्वीरें।
पूरी दुनिया में आज अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। देश के दुर्गम इलाकों में तैनात सेना और विभिन्न आर्मड फोर्सज के जवानों भी योग किया। आइए आपको दिखात हैं ऐसी ही कुछ हैरान कर देनी वाली तस्वीरें।
Bermo: तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट के कंप्रेसर हाउस में मंगलवार को आग लगने की घटना के बाद बिजली उत्पादन ठप्प हो गया. आग लगने की घटना पावर प्लांट के कंप्रेशर हाउस में अपराहन बारह बजे घटी. आग लगने से कई कंप्रेशर मशीनें और इलेक्ट्रिकल्स डिवाइस पूरी तरह से खाक होकर बर्बाद हो गये. पावर प्लांट स्थित दमकल विभाग के कर्मियों के एक घंटे के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया जा सका. मशीनों व उपकरणों के क्षतिग्रस्त हो जाने से पावर प्लांट से बिजली उत्पादन पूरी तरह से ठप्प हो गयी है. जानकारी के मुताबिक पावर प्लांट का कंप्रेशर हाउस दो पार्ट में है. आग लगने की घटना के बाद से एक हिस्सा लगभग पूरी जल गयी है. प्रबंधन फिलहाल बिजली उत्पादन को बहाल करने के लिए कोशिश शुरू कर दी है. पावर प्लांट के महाप्रबंधक सनातन सिंह ने कहा कि फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है. आग लगने से हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है.
Bermo: तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट के कंप्रेसर हाउस में मंगलवार को आग लगने की घटना के बाद बिजली उत्पादन ठप्प हो गया. आग लगने की घटना पावर प्लांट के कंप्रेशर हाउस में अपराहन बारह बजे घटी. आग लगने से कई कंप्रेशर मशीनें और इलेक्ट्रिकल्स डिवाइस पूरी तरह से खाक होकर बर्बाद हो गये. पावर प्लांट स्थित दमकल विभाग के कर्मियों के एक घंटे के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया जा सका. मशीनों व उपकरणों के क्षतिग्रस्त हो जाने से पावर प्लांट से बिजली उत्पादन पूरी तरह से ठप्प हो गयी है. जानकारी के मुताबिक पावर प्लांट का कंप्रेशर हाउस दो पार्ट में है. आग लगने की घटना के बाद से एक हिस्सा लगभग पूरी जल गयी है. प्रबंधन फिलहाल बिजली उत्पादन को बहाल करने के लिए कोशिश शुरू कर दी है. पावर प्लांट के महाप्रबंधक सनातन सिंह ने कहा कि फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है. आग लगने से हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है.
सब नदी पार कर दूसरे किनारे पहुँचे । इसके बाद एक बोला कि नदी में कोई डूबा तो नहीं? कोई खो तो नहीं गया? हम दस आदमी रवाना हुए थे, उनको गिन लो। गणना करने पर दस की संख्या पूरी नहीं होती, नौ ही होते हैं। एक के बाद एक इस प्रकार सबने गणना की, किन्तु नौ ही संख्या हुई! यह देखकर सब रोने लगे और कहने लगे कि हम दस निकले थे उसमें से एक कम हो गया। दूसरे लोग पूछते हैं कि कौन डूब गया। इस पर वे कहते हैं कि मुझे खबर नहीं पड़ती। यहाँ तो सब दिखाई देते हैं, किन्तु गिनने पर एक कम होता है। उस रास्ते से एक सन्त जा रहे थे। सन्त ने गिनकर देखा, तो संख्या पूरी थी। बात यह हुई कि कम पढ़े-लिखे वे लोग गणना में अपने को शामिल नहीं करते थे। इस कारण दस की संख्या पूरी नहीं होती थी । वह दसवाँ मिल गया। वह मिला ही था अथवा नदी में डूबा हुआ मिला? वास्तव में दसवाँ कहीं गया नहीं था, वह उनके मण्डल में ही था। वह अज्ञान के कारण दिखाई नहीं देता था। उसी प्रकार हम में मिले हुए या हमारे अन्दर निवास करने वाले परमात्मा ही हमें मिलते हैं। इस प्रकार वे सबसे मिले ही होते हैं। वासना रूपी अज्ञान अथवा माया का पर्दा होने के कारण जीव को ईश्वर का अनुभव नहीं होता। शरीर को वस्त्र और आत्मा को वासना ढँकती है। जिस प्रकार सामान्य बादल सूर्य को ढँकता उसी प्रकार वासना परमात्मा को ढँकती है। परमात्मा सर्वत्र है, किन्तु उसका दर्शन नहीं होता। प्रभु ने वस्त्रहरण द्वारा वासना का पर्दा दूर किया है। ज़प करने से, तप करने से, सत्कर्म करने से इन्द्रियों में से काम निकलता है, किन्तु बुद्धि में स्थित काम सद्गुरु दूर करते हैं। सद्गुरु परमात्मा के दर्शन कराते हैं। इसलिए क्या वह दूर देश में किसी स्थल पर रहने वाले परमात्मा का दर्शन कराते हैं? वास्तव में ईश्वर तो जीव के साथ ही होता है, किन्तु माया के पर्दे के कारण उस जीव को ईश्वर का अनुभव नहीं होता। सद्गुरु माया का आवरण दूर करते हैं। सद्गुरु भी भगवान् हैं। मनुष्य चाहे ज्ञानी हो या बुद्धिमान हो ? किन्तु बुद्धि से काम नहीं निकलता। जब कोई महापुरुष कृपा करता है, तभी काम निकलता है और तभी जीवात्मा को परमात्मा का अनुभव होता है। प्रभु ने गोपियों का वासना रूपी पर्दा दूर किया है और गोपियों से कहा है, "यह तुम्हारा आखिरी जन्म है। तुम शरद पूर्णिमा की रात्रि को मिलना। फिर तुम्हें जन्म लेने का अवसर नहीं आयगा । " गोपियों की संख्या अधिक है, किन्तु उनमें सबको रास में प्रवेश नहीं मिला है। जिसका अन्तिम जन्म है, जिसकी वासना का पर्दा प्रभु ने दूर किया है और जिस जीव को परमात्मा ने अपनाया है, वही जीव रास में जाता है । यह लीला दिव्य है, मधुर है । भागवत के टीकाकार श्रीधर स्वामी ने अपनी टीका में लिखा है कि भागवत परमहंसों की संहिता है। परमहंस निवृत्ति प्रधान होते हैं। निवृत्ति धर्म का एक फल है- आत्मा और परमात्मा का मिलन है। श्री श्रीधर स्वामी ने रासलीला को काम - विजय लीला या मदन-मानभंग लीला कहा है। रासलीला श्रीकृष्ण का काम विजय है। ब्रह्मादि देवों का पराभव करने से कामदेव का अभिमान बहुत बढ़ गया है। वह अपने को ईश्वर समझने लगा हैं काम का नाम ही महारथी है। अनेक देवों बढ़ और ऋषियों को मारने से जिस कामदेव का अभिमान बढ़ गया है, वह श्रीकृष्ण से युद्ध करने आया है। कामदेव कहता है कि मैं इस बात को भूला नहीं हूँ, यह मुझे याद है कि आपने रामावतार में मुझे हराया है। रामावतार में कामदेव ने अनेक बार ऐसा अवसर उपस्थित किया है, जिससे रामजी की आँख में अथवा उनके मन में विकार उत्पन्न हो, किन्तु वे तो निष्काम हैं, कामदेव ने कहा कि रामावतार में मेरी हार तो हुई, किन्तु मेरे मन में सन्देह रह गया है। रामावतार में आपका नियम था कि किसी स्त्री का स्पर्श न करूँगा, प्रत्येक स्त्री में मातृभाव रखूँगा। आपने मर्यादा में रहकर मुझे हराया । वास्तव में मर्यादा का बन्धन ईश्वर के लिए नहीं है । वह जीव के लिए है। आपको सब ईश्वर मानते हैं। इसलिए आपको बन्धन में रहने की क्या आवश्यकता है? श्रीकृष्ण ने कहा कि भाई, तेरी क्या इच्छा है? कामदेव ने कहा, "मेरी इच्छा है कि शरद ऋतु हो, पूर्णिमा हो, मध्यरात्रि का समय हो उस समय किसी स्त्री को स्पर्श न कर उसमें मातृ - भाव रखने की मर्यादा आप न रखिये। उस समय आप स्त्रियों के साथ क्रीड़ा कीजिए और मैं आकाश में रहकर बाण मारूँ। यदि आपके मन में विकार पैदा हो, तो मैं ईश्वर होऊँगा । उस समय आप निष्काम रूप ईश्वर नहीं माने जाएँगे। काम की मार खाने वाला जीव है और जो काम की मार नहीं खाता, वह ईश्वर है । प्रभु ने कहा कि मैं यह शर्त मानने को तैयार हूँ। प्रभु इसीलिए शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि को गोपियों के साथ क्रीड़ा करते हैं। कामदेव आकाश में खड़ा है और श्रीकृष्ण को बांण मारता है। श्रीकृष्ण के चरण में गंगाजी है, और भगवान् शिवजी के माथे पर भी गंगाजी हैं। शिवजी और श्रीकृष्ण ज्ञान-स्वरूप हैं। उनका काम क्या बिगाड़ सकता है? काम अनेक प्रयत्न करने पर भी श्रीकृष्ण को अपने आधीन नहीं बना सका। इसलिए उसे विश्वास हो गया कि श्रीकृष्ण भगवान् हैं। वह अब श्रीकृष्ण की शरण में आया है। श्रीकृष्ण ने मदन का पराभव किया। इसलिए उनका नाम मदनमोहन पड़ गया। मदन का अर्थ है काम । अर्थात् काम से ही काम का नाश करना । महापुरुष लौकिक काम को अलौकिक काम से मारते हैं। मुझे किसी मनुष्य से नहीं मिलना है, केवल परमात्मा से मिलना है और उनके साथ एकाकार होना है ऐसी प्रस्तावना कर चुकने के बाद आगे कथा आरम्भ होती है। प्रभु ने गोपियों से कहा था, "तुम्हारा यह अन्तिम जन्म है। मैं तुमसे शरद पूर्णिमा की रात को मिलूँगा।" शुकदेवजी महाराज को समाज के सामने रासलीला की कथा कहने में थोड़ा संकोच हुआ। वे विचारने लगे कि मैं रासलीला की कथा कहूँ या नहीं। क्योंकि समाज में सब अधिकारी जीव नहीं होते। उन्होंने रांधाजी का स्मरण किया। क्योंकि वे पूर्वजन्म में राधाजी की निकुँज के शुक (तोता) थे। निकुँज में गोपियों के साथ परमात्मा क्रीड़ा करते हैं। शुकदेवजी सारे दिन श्रीराधे-राधे कहते हैं। यह सुनकर श्रीराधाजी ने हाथ उठाकर तोते को अपनी ओर बुलाया। तोता आकर राधाजी के चरणों की वन्दना करता है। वे उसे उठाकर अपने हाथ में लेती हैं। तोता फिर श्रीराधे-राधे-राधे बोलने लगा। राधा ने कहा कि अब तू 'राधे-राधे' न कहकर 'कृष्ण-कृष्ण' कह। राधेति मा वद-कृष्ण-कृष्ण बोल । इस प्रकार राधाजी तोते को समझा रही हैं। उसी समय श्रीकृष्ण वहाँ आ जाते हैं। राधाजी ने उनसे कहा कि यह तोता कितना मधुर बोल रहा है ! और उसे उनके हाथ में दे दिया। इस प्रकार राधाजी ने शुकदेवजी का ब्रह्म के साथ प्रत्यक्ष सम्बन्ध कराया है। इसलिए शुकदेवजी की सद्गुरु श्रीराधाजी हैं। राधाजी ही सद्गुरु हैं। इसलिए उन्होंने भागवत में उनका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया है। सद्गुरु का मन से स्मरण कर 'सद्गुरु देव की जय' का उच्चारण करना चाहिए। उनका नाम नहीं लेना चाहिए। मर्यादा का भंग नहीं करना चाहिए। यदि पत्नी अपने पति का नाम स्पष्ट रूप से ले, तो पति की आयु घटती है, ऐसा शास्त्रों में वर्णन आता है। इसीलिए श्रीराधाजी का नाम भागवत में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। उनका नाम गुप्त रीति से दो-तीन स्थानों पर लिया गया है। क्योंकि शुकदेवजी को सभा में उनका नाम लेने में संकोच होता है। वे विचार करते हैं कि रासलीला की कथा सुनाऊँ या नहीं सुनाऊँ? उन्होंने राधाजी का स्मरण किया। राधाजी ने कहा, "बेटा, तू कथा सुना किन्तु कथा विवेक से सुनाना । भगवानपि ता रात्रीः परिपूर्ण आनन्दमय श्रीकृष्ण को कोई सुख भोगने की इच्छा ही नहीं होती। प्रभु ने यह लीला गोपियों को परमानन्द देने के लिए की है और योगमाया का आश्रय लिया है। भगवान् ने आज क्रीड़ा करने की इच्छा की है, बाँसुरी बजाई है, गोपियों को बुलाया है। बाँसुरी की ध्वनि गोपियों के कान में पड़ती है। गोपियाँ परमात्मा से मिलने की तीव्र भावना लेकर दौड़ पड़ती हैं। तुमको चाहिए कि भगवान से मिलने के लिए दौड़ते-दौड़ते नहीं तो रोज थोड़ा चलते-चलते अवश्य जाओ। ऐसा निश्चय करो कि इस जन्म में मुझे उनके दर्शन करने हैं, उनके चरणों तक पहुँचना है। धीरे-धीरे भक्ति बढ़ाना, संयम बढ़ाना है। उस समय गोपियाँ जो काम कर रही थीं, उसे छोड़कर दौड़ पड़ती हैं?
सब नदी पार कर दूसरे किनारे पहुँचे । इसके बाद एक बोला कि नदी में कोई डूबा तो नहीं? कोई खो तो नहीं गया? हम दस आदमी रवाना हुए थे, उनको गिन लो। गणना करने पर दस की संख्या पूरी नहीं होती, नौ ही होते हैं। एक के बाद एक इस प्रकार सबने गणना की, किन्तु नौ ही संख्या हुई! यह देखकर सब रोने लगे और कहने लगे कि हम दस निकले थे उसमें से एक कम हो गया। दूसरे लोग पूछते हैं कि कौन डूब गया। इस पर वे कहते हैं कि मुझे खबर नहीं पड़ती। यहाँ तो सब दिखाई देते हैं, किन्तु गिनने पर एक कम होता है। उस रास्ते से एक सन्त जा रहे थे। सन्त ने गिनकर देखा, तो संख्या पूरी थी। बात यह हुई कि कम पढ़े-लिखे वे लोग गणना में अपने को शामिल नहीं करते थे। इस कारण दस की संख्या पूरी नहीं होती थी । वह दसवाँ मिल गया। वह मिला ही था अथवा नदी में डूबा हुआ मिला? वास्तव में दसवाँ कहीं गया नहीं था, वह उनके मण्डल में ही था। वह अज्ञान के कारण दिखाई नहीं देता था। उसी प्रकार हम में मिले हुए या हमारे अन्दर निवास करने वाले परमात्मा ही हमें मिलते हैं। इस प्रकार वे सबसे मिले ही होते हैं। वासना रूपी अज्ञान अथवा माया का पर्दा होने के कारण जीव को ईश्वर का अनुभव नहीं होता। शरीर को वस्त्र और आत्मा को वासना ढँकती है। जिस प्रकार सामान्य बादल सूर्य को ढँकता उसी प्रकार वासना परमात्मा को ढँकती है। परमात्मा सर्वत्र है, किन्तु उसका दर्शन नहीं होता। प्रभु ने वस्त्रहरण द्वारा वासना का पर्दा दूर किया है। ज़प करने से, तप करने से, सत्कर्म करने से इन्द्रियों में से काम निकलता है, किन्तु बुद्धि में स्थित काम सद्गुरु दूर करते हैं। सद्गुरु परमात्मा के दर्शन कराते हैं। इसलिए क्या वह दूर देश में किसी स्थल पर रहने वाले परमात्मा का दर्शन कराते हैं? वास्तव में ईश्वर तो जीव के साथ ही होता है, किन्तु माया के पर्दे के कारण उस जीव को ईश्वर का अनुभव नहीं होता। सद्गुरु माया का आवरण दूर करते हैं। सद्गुरु भी भगवान् हैं। मनुष्य चाहे ज्ञानी हो या बुद्धिमान हो ? किन्तु बुद्धि से काम नहीं निकलता। जब कोई महापुरुष कृपा करता है, तभी काम निकलता है और तभी जीवात्मा को परमात्मा का अनुभव होता है। प्रभु ने गोपियों का वासना रूपी पर्दा दूर किया है और गोपियों से कहा है, "यह तुम्हारा आखिरी जन्म है। तुम शरद पूर्णिमा की रात्रि को मिलना। फिर तुम्हें जन्म लेने का अवसर नहीं आयगा । " गोपियों की संख्या अधिक है, किन्तु उनमें सबको रास में प्रवेश नहीं मिला है। जिसका अन्तिम जन्म है, जिसकी वासना का पर्दा प्रभु ने दूर किया है और जिस जीव को परमात्मा ने अपनाया है, वही जीव रास में जाता है । यह लीला दिव्य है, मधुर है । भागवत के टीकाकार श्रीधर स्वामी ने अपनी टीका में लिखा है कि भागवत परमहंसों की संहिता है। परमहंस निवृत्ति प्रधान होते हैं। निवृत्ति धर्म का एक फल है- आत्मा और परमात्मा का मिलन है। श्री श्रीधर स्वामी ने रासलीला को काम - विजय लीला या मदन-मानभंग लीला कहा है। रासलीला श्रीकृष्ण का काम विजय है। ब्रह्मादि देवों का पराभव करने से कामदेव का अभिमान बहुत बढ़ गया है। वह अपने को ईश्वर समझने लगा हैं काम का नाम ही महारथी है। अनेक देवों बढ़ और ऋषियों को मारने से जिस कामदेव का अभिमान बढ़ गया है, वह श्रीकृष्ण से युद्ध करने आया है। कामदेव कहता है कि मैं इस बात को भूला नहीं हूँ, यह मुझे याद है कि आपने रामावतार में मुझे हराया है। रामावतार में कामदेव ने अनेक बार ऐसा अवसर उपस्थित किया है, जिससे रामजी की आँख में अथवा उनके मन में विकार उत्पन्न हो, किन्तु वे तो निष्काम हैं, कामदेव ने कहा कि रामावतार में मेरी हार तो हुई, किन्तु मेरे मन में सन्देह रह गया है। रामावतार में आपका नियम था कि किसी स्त्री का स्पर्श न करूँगा, प्रत्येक स्त्री में मातृभाव रखूँगा। आपने मर्यादा में रहकर मुझे हराया । वास्तव में मर्यादा का बन्धन ईश्वर के लिए नहीं है । वह जीव के लिए है। आपको सब ईश्वर मानते हैं। इसलिए आपको बन्धन में रहने की क्या आवश्यकता है? श्रीकृष्ण ने कहा कि भाई, तेरी क्या इच्छा है? कामदेव ने कहा, "मेरी इच्छा है कि शरद ऋतु हो, पूर्णिमा हो, मध्यरात्रि का समय हो उस समय किसी स्त्री को स्पर्श न कर उसमें मातृ - भाव रखने की मर्यादा आप न रखिये। उस समय आप स्त्रियों के साथ क्रीड़ा कीजिए और मैं आकाश में रहकर बाण मारूँ। यदि आपके मन में विकार पैदा हो, तो मैं ईश्वर होऊँगा । उस समय आप निष्काम रूप ईश्वर नहीं माने जाएँगे। काम की मार खाने वाला जीव है और जो काम की मार नहीं खाता, वह ईश्वर है । प्रभु ने कहा कि मैं यह शर्त मानने को तैयार हूँ। प्रभु इसीलिए शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि को गोपियों के साथ क्रीड़ा करते हैं। कामदेव आकाश में खड़ा है और श्रीकृष्ण को बांण मारता है। श्रीकृष्ण के चरण में गंगाजी है, और भगवान् शिवजी के माथे पर भी गंगाजी हैं। शिवजी और श्रीकृष्ण ज्ञान-स्वरूप हैं। उनका काम क्या बिगाड़ सकता है? काम अनेक प्रयत्न करने पर भी श्रीकृष्ण को अपने आधीन नहीं बना सका। इसलिए उसे विश्वास हो गया कि श्रीकृष्ण भगवान् हैं। वह अब श्रीकृष्ण की शरण में आया है। श्रीकृष्ण ने मदन का पराभव किया। इसलिए उनका नाम मदनमोहन पड़ गया। मदन का अर्थ है काम । अर्थात् काम से ही काम का नाश करना । महापुरुष लौकिक काम को अलौकिक काम से मारते हैं। मुझे किसी मनुष्य से नहीं मिलना है, केवल परमात्मा से मिलना है और उनके साथ एकाकार होना है ऐसी प्रस्तावना कर चुकने के बाद आगे कथा आरम्भ होती है। प्रभु ने गोपियों से कहा था, "तुम्हारा यह अन्तिम जन्म है। मैं तुमसे शरद पूर्णिमा की रात को मिलूँगा।" शुकदेवजी महाराज को समाज के सामने रासलीला की कथा कहने में थोड़ा संकोच हुआ। वे विचारने लगे कि मैं रासलीला की कथा कहूँ या नहीं। क्योंकि समाज में सब अधिकारी जीव नहीं होते। उन्होंने रांधाजी का स्मरण किया। क्योंकि वे पूर्वजन्म में राधाजी की निकुँज के शुक थे। निकुँज में गोपियों के साथ परमात्मा क्रीड़ा करते हैं। शुकदेवजी सारे दिन श्रीराधे-राधे कहते हैं। यह सुनकर श्रीराधाजी ने हाथ उठाकर तोते को अपनी ओर बुलाया। तोता आकर राधाजी के चरणों की वन्दना करता है। वे उसे उठाकर अपने हाथ में लेती हैं। तोता फिर श्रीराधे-राधे-राधे बोलने लगा। राधा ने कहा कि अब तू 'राधे-राधे' न कहकर 'कृष्ण-कृष्ण' कह। राधेति मा वद-कृष्ण-कृष्ण बोल । इस प्रकार राधाजी तोते को समझा रही हैं। उसी समय श्रीकृष्ण वहाँ आ जाते हैं। राधाजी ने उनसे कहा कि यह तोता कितना मधुर बोल रहा है ! और उसे उनके हाथ में दे दिया। इस प्रकार राधाजी ने शुकदेवजी का ब्रह्म के साथ प्रत्यक्ष सम्बन्ध कराया है। इसलिए शुकदेवजी की सद्गुरु श्रीराधाजी हैं। राधाजी ही सद्गुरु हैं। इसलिए उन्होंने भागवत में उनका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया है। सद्गुरु का मन से स्मरण कर 'सद्गुरु देव की जय' का उच्चारण करना चाहिए। उनका नाम नहीं लेना चाहिए। मर्यादा का भंग नहीं करना चाहिए। यदि पत्नी अपने पति का नाम स्पष्ट रूप से ले, तो पति की आयु घटती है, ऐसा शास्त्रों में वर्णन आता है। इसीलिए श्रीराधाजी का नाम भागवत में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। उनका नाम गुप्त रीति से दो-तीन स्थानों पर लिया गया है। क्योंकि शुकदेवजी को सभा में उनका नाम लेने में संकोच होता है। वे विचार करते हैं कि रासलीला की कथा सुनाऊँ या नहीं सुनाऊँ? उन्होंने राधाजी का स्मरण किया। राधाजी ने कहा, "बेटा, तू कथा सुना किन्तु कथा विवेक से सुनाना । भगवानपि ता रात्रीः परिपूर्ण आनन्दमय श्रीकृष्ण को कोई सुख भोगने की इच्छा ही नहीं होती। प्रभु ने यह लीला गोपियों को परमानन्द देने के लिए की है और योगमाया का आश्रय लिया है। भगवान् ने आज क्रीड़ा करने की इच्छा की है, बाँसुरी बजाई है, गोपियों को बुलाया है। बाँसुरी की ध्वनि गोपियों के कान में पड़ती है। गोपियाँ परमात्मा से मिलने की तीव्र भावना लेकर दौड़ पड़ती हैं। तुमको चाहिए कि भगवान से मिलने के लिए दौड़ते-दौड़ते नहीं तो रोज थोड़ा चलते-चलते अवश्य जाओ। ऐसा निश्चय करो कि इस जन्म में मुझे उनके दर्शन करने हैं, उनके चरणों तक पहुँचना है। धीरे-धीरे भक्ति बढ़ाना, संयम बढ़ाना है। उस समय गोपियाँ जो काम कर रही थीं, उसे छोड़कर दौड़ पड़ती हैं?
सोशल मीडिया के इस जमाने में स्टार किड्स डेब्यू से पहले ही मीडिया और फैंस के बीच छाए रहते हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक सुंदर स्टार किड से मिलाने जा रहे हैं। इनकी खूबसूरती देख आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी। इनका नाम अंजिनी धवन (Anjini Dhawan) है। वह बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन की भतीजी हैं। वरुण रिश्ते में उनके चाचा लगते हैं। हालांकि वह सगे चाचा नहीं है। दरअसल अंजिनी के पिता सिद्धार्थ धवन वरुण के कजिन हैं। वह भी फिल्मों में एक्टिंग कर चुके हैं। हालांकि वह कई फिल्में करने के बावजूद फ्लॉप रहे। वहीं अंजिनी के दादा अनिल धवन भी फिल्म इंडस्ट्री में जाने माने अभिनेता रहे हैं। अंजिनी धवन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। यहां इंस्टाग्राम पर तो उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग है। वे अक्सर फैंस के साथ अपनी निजी और बोल्ड तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इनका इंस्टाग्राम अकाउंट देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितनी ग्लैमरस और स्टाइलिश हैं। अंजिनी धवन कैमरे के सामने काफी फ़्रेंडली हैं। वह ऐसी-ऐसी कातिलाना अदाएं देती है कि हर कोई दंग रह जाता है। उनकी सुंदरता देखते ही बनती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अंजिनी अपने चाचा वरुण धवन की फिल्म में काम भी कर चुकी हैं। हालांकि वह ऑन कैमरा नजर नहीं आई। बल्कि उन्होंने कैमरे के पीछे बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। यह फिल्म वरुण धवन और सारा अली खान की कूली नंबर 1 थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि अंजिनी धवन जल्द बॉलीवुड में डेब्यू कर सकती हैं। वह बीते 4 अप्रैल को 23 साल की हो गई। वह खुद को बेहद फिट और स्लिम रखती हैं। वह अपना फिगर फ्लॉन्ट करने में कोई शर्म नहीं रखती हैं। अंजिनी का ड्रेसिंग सेंस भी काफी अच्छा है। वह हमेशा एक से बढ़कर एक फैशन में रहती हैं। वह जान्हवी कपूर की बहन खुशी कपूर की खास दोस्त भी हैं। दोनों के बीच काफी अच्छा बॉन्ड देखने को मिलता है। अंजिनी की खूबसूरती देख यही लगता है कि यदि वह बॉलीवुड में डेब्यू करती हैं तो बाकी स्टार किड्स की छुट्टी कर देंगी। अंजिनी के निजी शौक की बात करें तो उन्हें पेंटिंग करना, फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, घूमना फिरना, खाना बनाना, कुत्तों को खिलाना और डांस करना बड़ा पसंद है। उन्हें टैटू का भी शौक है। उन्होंने अपनी लेफ्ट हैंड की रिंग फिंगर पर एक हार्ट बना रखा है। अंजिनी का एक भाई भी है जिसका नाम करण धवन है। उनकी मां का नाम रीना धवन है। वैसे आपको वरुण धवन की भतीजी कैसी लगी? अपने विचार कमेंट कर जरूर बताएं।
सोशल मीडिया के इस जमाने में स्टार किड्स डेब्यू से पहले ही मीडिया और फैंस के बीच छाए रहते हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक सुंदर स्टार किड से मिलाने जा रहे हैं। इनकी खूबसूरती देख आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी। इनका नाम अंजिनी धवन है। वह बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन की भतीजी हैं। वरुण रिश्ते में उनके चाचा लगते हैं। हालांकि वह सगे चाचा नहीं है। दरअसल अंजिनी के पिता सिद्धार्थ धवन वरुण के कजिन हैं। वह भी फिल्मों में एक्टिंग कर चुके हैं। हालांकि वह कई फिल्में करने के बावजूद फ्लॉप रहे। वहीं अंजिनी के दादा अनिल धवन भी फिल्म इंडस्ट्री में जाने माने अभिनेता रहे हैं। अंजिनी धवन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। यहां इंस्टाग्राम पर तो उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग है। वे अक्सर फैंस के साथ अपनी निजी और बोल्ड तस्वीरें साझा करती रहती हैं। इनका इंस्टाग्राम अकाउंट देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितनी ग्लैमरस और स्टाइलिश हैं। अंजिनी धवन कैमरे के सामने काफी फ़्रेंडली हैं। वह ऐसी-ऐसी कातिलाना अदाएं देती है कि हर कोई दंग रह जाता है। उनकी सुंदरता देखते ही बनती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अंजिनी अपने चाचा वरुण धवन की फिल्म में काम भी कर चुकी हैं। हालांकि वह ऑन कैमरा नजर नहीं आई। बल्कि उन्होंने कैमरे के पीछे बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। यह फिल्म वरुण धवन और सारा अली खान की कूली नंबर एक थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि अंजिनी धवन जल्द बॉलीवुड में डेब्यू कर सकती हैं। वह बीते चार अप्रैल को तेईस साल की हो गई। वह खुद को बेहद फिट और स्लिम रखती हैं। वह अपना फिगर फ्लॉन्ट करने में कोई शर्म नहीं रखती हैं। अंजिनी का ड्रेसिंग सेंस भी काफी अच्छा है। वह हमेशा एक से बढ़कर एक फैशन में रहती हैं। वह जान्हवी कपूर की बहन खुशी कपूर की खास दोस्त भी हैं। दोनों के बीच काफी अच्छा बॉन्ड देखने को मिलता है। अंजिनी की खूबसूरती देख यही लगता है कि यदि वह बॉलीवुड में डेब्यू करती हैं तो बाकी स्टार किड्स की छुट्टी कर देंगी। अंजिनी के निजी शौक की बात करें तो उन्हें पेंटिंग करना, फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, घूमना फिरना, खाना बनाना, कुत्तों को खिलाना और डांस करना बड़ा पसंद है। उन्हें टैटू का भी शौक है। उन्होंने अपनी लेफ्ट हैंड की रिंग फिंगर पर एक हार्ट बना रखा है। अंजिनी का एक भाई भी है जिसका नाम करण धवन है। उनकी मां का नाम रीना धवन है। वैसे आपको वरुण धवन की भतीजी कैसी लगी? अपने विचार कमेंट कर जरूर बताएं।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों संग समीक्षा बैठक की। इस दौरान डीएम, एसएसपी, और पुलिस कमिश्नर को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जनता की सुनवाई का निस्तारण तत्काल किया जाए। IGRS और CM हेल्पलाइन के तहत आने वाली शिकायतों की जन-सुनवाई में किसी भी तरीके की कोई लापरवाही न बरती जाए। लापरवाही करने वाले जिले के अधिकारियों और जिले के SP पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएम योगी ने जनसुनवाई में मौजूद न रहने वाले 31 डीएम व 24 एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इसके लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता के लिए चलाई जा रही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उन तक पहुंचाया जाए। इसके लिए हर सप्ताह जिले में मीटिंग कर हर कल्याणकारी योजना की जानकारी ग्राम स्तर तक दी जाए। शुद्ध पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था हर जिले में सुनिश्चित की जाए। डेंगू के बढ़ते मामले को देखते हुए एंटी लार्वा छिड़काव और फागिंग और सैनिटाइजेशन जैसी व्यवस्थाओं को निरंतर जारी रखा जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बैठक में सख्त निर्देश दिए हैं कि हर थाने, तहसील व ग्राम स्तर के ब्लाकों पर जाकर अफसर इंस्पेक्शन करें। हर सप्ताह तहसीलों का सरप्राइज इंस्पेक्शन करें। धान क्रय केंद्रों की संख्या और मानव संसाधन बढ़ाए जाएं। गो आश्रय स्थलों में साफ-सफाई और चारे की व्यवस्था कराई जाए। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत हर जिले में हजार लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों संग समीक्षा बैठक की। इस दौरान डीएम, एसएसपी, और पुलिस कमिश्नर को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जनता की सुनवाई का निस्तारण तत्काल किया जाए। IGRS और CM हेल्पलाइन के तहत आने वाली शिकायतों की जन-सुनवाई में किसी भी तरीके की कोई लापरवाही न बरती जाए। लापरवाही करने वाले जिले के अधिकारियों और जिले के SP पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएम योगी ने जनसुनवाई में मौजूद न रहने वाले इकतीस डीएम व चौबीस एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इसके लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता के लिए चलाई जा रही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उन तक पहुंचाया जाए। इसके लिए हर सप्ताह जिले में मीटिंग कर हर कल्याणकारी योजना की जानकारी ग्राम स्तर तक दी जाए। शुद्ध पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था हर जिले में सुनिश्चित की जाए। डेंगू के बढ़ते मामले को देखते हुए एंटी लार्वा छिड़काव और फागिंग और सैनिटाइजेशन जैसी व्यवस्थाओं को निरंतर जारी रखा जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बैठक में सख्त निर्देश दिए हैं कि हर थाने, तहसील व ग्राम स्तर के ब्लाकों पर जाकर अफसर इंस्पेक्शन करें। हर सप्ताह तहसीलों का सरप्राइज इंस्पेक्शन करें। धान क्रय केंद्रों की संख्या और मानव संसाधन बढ़ाए जाएं। गो आश्रय स्थलों में साफ-सफाई और चारे की व्यवस्था कराई जाए। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत हर जिले में हजार लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
48 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि एक ही समय में दो लोगों के साथ प्रेम संबंध में होना संभव है. वहीं 46 प्रतिशत का मानना है कि आप जिसके साथ प्यार में हैं उसके साथ धोखा कर सकते हैं. शायद यही वजह है कि भारतीयों को जब अपने साथी के किसी और के साथ संबंध में होने की जानकारी मिलती है वह उसे आसानी से माफ कर देते हैं. सात प्रतिशत भारतीय बिना कुछ सोचे-समझे अपने साथी को माफ कर देते हैं. वहीं 40 प्रतिशत भारतीय हालात सामान्य होने पर साथी को माफी दे देते हैं. इसी तरह 69 प्रतिशत चाहते हैं कि उनका साथी उन्हें माफ कर दे. यह शोध 25 से 50 साल के 1,525 व्यक्तियों पर किया गया है. जो दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद में रहते हैं. ग्लीडेन अप्रैल 2017 में भारत आया. पिछले साल तक देश में उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या आठ लाख हो चुकी थी. 2018 में उच्चतम न्यायालय के व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से हटाने के बाद एप की मेंबरशिप में इजाफा हुआ है. सर्वे का कहना है कि भारत में प्रति 1,000 दंपत्तियों में से 13 का ही तलाक होता है. सर्वे के अनुसार भारत में आज भी 90 प्रतिशत शादी परिवार द्वारा तय की जाती हैं. वहीं केवल पांच प्रतिशत लोग प्रेम विवाह करते हैं. सर्वे में 49 प्रतिशत शादीशुदा भारतीयों ने इस बात को स्वीकार किया कि वे अपने साथी के अलावा किसी और के साथ अंतरंग संबंध में रहे हैं. वहीं 10 में से पांच 47 प्रतिशत पहले से ही कैजुअल सेक्स या फिर 46 प्रतिशत वन नाइट स्टैंड में लिप्त हैं. लगभग 55 प्रतिशत शादीशुदा भारतीय अपने जीवनसाथी के साथ कम से कम एक बार धोखा जरूर करते हैं. यह खुलासा भारत की पहली एक्ट्रामैरिटल डेटिंग एप ग्लीडेन में हुआ है. जिसके अनुसार धोखा देने के मामले में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. 56 प्रतिशत महिलाओं ने अपने साथी को धोखा देने की बात स्वीकारी है.
अड़तालीस प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि एक ही समय में दो लोगों के साथ प्रेम संबंध में होना संभव है. वहीं छियालीस प्रतिशत का मानना है कि आप जिसके साथ प्यार में हैं उसके साथ धोखा कर सकते हैं. शायद यही वजह है कि भारतीयों को जब अपने साथी के किसी और के साथ संबंध में होने की जानकारी मिलती है वह उसे आसानी से माफ कर देते हैं. सात प्रतिशत भारतीय बिना कुछ सोचे-समझे अपने साथी को माफ कर देते हैं. वहीं चालीस प्रतिशत भारतीय हालात सामान्य होने पर साथी को माफी दे देते हैं. इसी तरह उनहत्तर प्रतिशत चाहते हैं कि उनका साथी उन्हें माफ कर दे. यह शोध पच्चीस से पचास साल के एक,पाँच सौ पच्चीस व्यक्तियों पर किया गया है. जो दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद में रहते हैं. ग्लीडेन अप्रैल दो हज़ार सत्रह में भारत आया. पिछले साल तक देश में उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या आठ लाख हो चुकी थी. दो हज़ार अट्ठारह में उच्चतम न्यायालय के व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से हटाने के बाद एप की मेंबरशिप में इजाफा हुआ है. सर्वे का कहना है कि भारत में प्रति एक,शून्य दंपत्तियों में से तेरह का ही तलाक होता है. सर्वे के अनुसार भारत में आज भी नब्बे प्रतिशत शादी परिवार द्वारा तय की जाती हैं. वहीं केवल पांच प्रतिशत लोग प्रेम विवाह करते हैं. सर्वे में उनचास प्रतिशत शादीशुदा भारतीयों ने इस बात को स्वीकार किया कि वे अपने साथी के अलावा किसी और के साथ अंतरंग संबंध में रहे हैं. वहीं दस में से पांच सैंतालीस प्रतिशत पहले से ही कैजुअल सेक्स या फिर छियालीस प्रतिशत वन नाइट स्टैंड में लिप्त हैं. लगभग पचपन प्रतिशत शादीशुदा भारतीय अपने जीवनसाथी के साथ कम से कम एक बार धोखा जरूर करते हैं. यह खुलासा भारत की पहली एक्ट्रामैरिटल डेटिंग एप ग्लीडेन में हुआ है. जिसके अनुसार धोखा देने के मामले में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. छप्पन प्रतिशत महिलाओं ने अपने साथी को धोखा देने की बात स्वीकारी है.
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को फार्मा कंपनी फाइजर को सरकार के प्रतिबंध से अंतरिम राहत प्रदान की है। इस राहत के बाद कंपनी अब अपने लोकप्रिय कफ सीरप कोरेक्स की बिक्री अंतिम आदेश के आने तक जारी रख सकती है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह कंपनी के खिलाफ आक्रामक कदम न उठाए। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी। जस्टिस राजीव सहाय ने कहा कि कंपनी पिछले 25 सालों से कफ सीरप बेच रही है इस आधार पर उसे अंतरिम राहत दी जाती है। कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी कर कहा है कि विशेषज्ञ समिति ने देशभर में जिन 300 दवाओं के प्रतिबंध की सिफारिश की थी उनकी जाचं के लिए क्या कदम उठाए गए उसकी स्टेटस रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष पेश करे। फाइजर ने सरकार के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि अधिसूचना जारी करने से पहले न तो उसे कोई नोटिस दिया गया और न कोई सुनवाई हुई। इससे पहले सरकार ने क्लोफेनिरामाइन मेलिएट और कोडीन सीरप के निश्चित मात्रा में मिश्रण पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर 10 मार्च से इस मिश्रण वाली सभी दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। फाइजर ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि सरकार ने 10 मार्च 2016 को जारी नोटिफिकेशन में क्लोफेनिरामाइन मेलिएट और कोडीन सीरप के निश्चित मात्रा में मिश्रण की बिक्री और सप्लाई पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। फाइजर ने कहा, इसके मद्देनजर कंपनी ने कोरेक्स का विनिर्माण और इसकी बिक्री तुरंत प्रभाव से बंद कर दी है। फाइजर ने कहा कि कोरेक्स भारत में स्थापित प्रभावोत्पादकता और सुरक्षा मानदंडों का पालन करता है और कंपनी अपने पास उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रही है।
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को फार्मा कंपनी फाइजर को सरकार के प्रतिबंध से अंतरिम राहत प्रदान की है। इस राहत के बाद कंपनी अब अपने लोकप्रिय कफ सीरप कोरेक्स की बिक्री अंतिम आदेश के आने तक जारी रख सकती है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह कंपनी के खिलाफ आक्रामक कदम न उठाए। इस मामले पर अगली सुनवाई इक्कीस मार्च को होगी। जस्टिस राजीव सहाय ने कहा कि कंपनी पिछले पच्चीस सालों से कफ सीरप बेच रही है इस आधार पर उसे अंतरिम राहत दी जाती है। कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी कर कहा है कि विशेषज्ञ समिति ने देशभर में जिन तीन सौ दवाओं के प्रतिबंध की सिफारिश की थी उनकी जाचं के लिए क्या कदम उठाए गए उसकी स्टेटस रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष पेश करे। फाइजर ने सरकार के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि अधिसूचना जारी करने से पहले न तो उसे कोई नोटिस दिया गया और न कोई सुनवाई हुई। इससे पहले सरकार ने क्लोफेनिरामाइन मेलिएट और कोडीन सीरप के निश्चित मात्रा में मिश्रण पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर दस मार्च से इस मिश्रण वाली सभी दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। फाइजर ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि सरकार ने दस मार्च दो हज़ार सोलह को जारी नोटिफिकेशन में क्लोफेनिरामाइन मेलिएट और कोडीन सीरप के निश्चित मात्रा में मिश्रण की बिक्री और सप्लाई पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। फाइजर ने कहा, इसके मद्देनजर कंपनी ने कोरेक्स का विनिर्माण और इसकी बिक्री तुरंत प्रभाव से बंद कर दी है। फाइजर ने कहा कि कोरेक्स भारत में स्थापित प्रभावोत्पादकता और सुरक्षा मानदंडों का पालन करता है और कंपनी अपने पास उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रही है।
तुर्की में एक माह में दूसरी बार कुदरत ने कहर ढाया है। उत्तरी काला सागर क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है। सालों बाद तुर्की में ऐसी बाढ़ आई है। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
तुर्की में एक माह में दूसरी बार कुदरत ने कहर ढाया है। उत्तरी काला सागर क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। अब तक चौंतालीस लोगों की मौत हो चुकी है। सालों बाद तुर्की में ऐसी बाढ़ आई है। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
हाल ही में रिलीज हुई अपनी फिल्म 'बदनाम गली' में 'सरोगेट' का किरदार निभाने वाली अदाकारा पत्रलेखा का मानना है कि 'सेरोगेसी' (किराये की कोख) के बारे में समाज में मौजूद धारणा को खत्म करना जरूरी है। अदाकारा ने कहा कि 'बदनाम गली' के निर्माता चाहते थे कि सरल एवं सहज तरीके से 'सेरोगेसी' के विषय को उठाया जाए। पत्रलेखा ने कहा, 'यह (सेरोगेसी) अभी भी बहुत ही वर्जनाएं हैं। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं महसूस करती हूं कि यह बहुत बड़ी बात है और मैं इसे सकारात्मक रूप में देखती हूं। मैं कुछ ऐसे लोगों को जानती हूं जिन्होंने सेरोगेसी का रास्ता अपनाया और वे खुश हैं। ' उन्होंने कहा, 'फिल्म निर्माता समाज के बारे में कुछ प्रासंगिक और मुनासिब सवालों को उठा रहे हैं. . . ' 'न्यूटन' और 'मुन्नाभाई' फिल्मों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सिनेमा सबसे अच्छा जरिया है। फिल्म 'बदनाम गली' का जी5 पर शुक्रवार को प्रीमियर किया गया' पत्रलेखा ने कहा कि इसे वेब पर रिलीज करने का फैसला निर्माताओं का था और वह इसका सम्मान करती है। To paint is to create a life and to act is to live a life and I love doing both.
हाल ही में रिलीज हुई अपनी फिल्म 'बदनाम गली' में 'सरोगेट' का किरदार निभाने वाली अदाकारा पत्रलेखा का मानना है कि 'सेरोगेसी' के बारे में समाज में मौजूद धारणा को खत्म करना जरूरी है। अदाकारा ने कहा कि 'बदनाम गली' के निर्माता चाहते थे कि सरल एवं सहज तरीके से 'सेरोगेसी' के विषय को उठाया जाए। पत्रलेखा ने कहा, 'यह अभी भी बहुत ही वर्जनाएं हैं। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं महसूस करती हूं कि यह बहुत बड़ी बात है और मैं इसे सकारात्मक रूप में देखती हूं। मैं कुछ ऐसे लोगों को जानती हूं जिन्होंने सेरोगेसी का रास्ता अपनाया और वे खुश हैं। ' उन्होंने कहा, 'फिल्म निर्माता समाज के बारे में कुछ प्रासंगिक और मुनासिब सवालों को उठा रहे हैं. . . ' 'न्यूटन' और 'मुन्नाभाई' फिल्मों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सिनेमा सबसे अच्छा जरिया है। फिल्म 'बदनाम गली' का जीपाँच पर शुक्रवार को प्रीमियर किया गया' पत्रलेखा ने कहा कि इसे वेब पर रिलीज करने का फैसला निर्माताओं का था और वह इसका सम्मान करती है। To paint is to create a life and to act is to live a life and I love doing both.
भारतीय टीम को अपने शानदार प्रदर्शन से दो विश्व कप जीताने वाले सिक्सर किंग युवराज सिंह को ग्वालियर के आईटीएम विश्वविधालय से एक बहुत ही खास सम्मान मिला है. दरअसल युवराज सिंह को ग्वालियर के आईटीएम विश्वविधालय ने गुरुवार को 'दर्शनशास्त्र के डॉक्टरेट की मानद् (पीएचडी एच. सी ) की उपाधि से सम्मानित किया है. भारतीय टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह को यह खास सम्मान क्रिकेट के मैदान में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाने और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निजात पाने के बाद दुसरें कैंसर पीड़ितों के लिए काम करने की वजह से मिला है. आपको बता दे, कि युवराज सिंह के साथ-साथ इस खास सम्मान से डॉ. ए. एस. कुमार, गोविन्द निहलानी फिल्म जगत), डॉ अशोक वाजपेयी (कविता), रजत शर्मा (मिडिया), डॉ. आर. ए माशलेकर (विज्ञान एवं प्रोधोगिकी) और अरुणा रॉय (समाजिक कार्य) को भी इस उपाधि से नवाजा गया है. आपको बता दे, कि वर्तमान में युवराज सिंह क्रिकेट खेलने के अलावा सिंह समाजिक कार्य भी कर रहे है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद 2012 में बाम्बे ट्रस्ट अधिनियम 1950 के तहत उन्होंने 'यू वी केन' संस्था की शुरूआत की थी. इस संस्था ला लक्ष्य कैंसर पीड़ित लोगो की मदद करना और इस बीमारी से लड़ने ले लिए प्रेरित करना है. इसके साथ ही युवराज सिंह इस संस्था के लिए वित्तीय सहायता से भी धन जुटाते है. भारतीय टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह फिलहाल भारतीय टीम से बाहर चल रहे है. युवराज सिंह वर्तमान में भारतीय टीम में वापसी करने के लिए ट्रेनिंग कर रहे है और अपनी फिटनेस पर जमकर काम कर रहे है.
भारतीय टीम को अपने शानदार प्रदर्शन से दो विश्व कप जीताने वाले सिक्सर किंग युवराज सिंह को ग्वालियर के आईटीएम विश्वविधालय से एक बहुत ही खास सम्मान मिला है. दरअसल युवराज सिंह को ग्वालियर के आईटीएम विश्वविधालय ने गुरुवार को 'दर्शनशास्त्र के डॉक्टरेट की मानद् की उपाधि से सम्मानित किया है. भारतीय टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह को यह खास सम्मान क्रिकेट के मैदान में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाने और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निजात पाने के बाद दुसरें कैंसर पीड़ितों के लिए काम करने की वजह से मिला है. आपको बता दे, कि युवराज सिंह के साथ-साथ इस खास सम्मान से डॉ. ए. एस. कुमार, गोविन्द निहलानी फिल्म जगत), डॉ अशोक वाजपेयी , रजत शर्मा , डॉ. आर. ए माशलेकर और अरुणा रॉय को भी इस उपाधि से नवाजा गया है. आपको बता दे, कि वर्तमान में युवराज सिंह क्रिकेट खेलने के अलावा सिंह समाजिक कार्य भी कर रहे है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद दो हज़ार बारह में बाम्बे ट्रस्ट अधिनियम एक हज़ार नौ सौ पचास के तहत उन्होंने 'यू वी केन' संस्था की शुरूआत की थी. इस संस्था ला लक्ष्य कैंसर पीड़ित लोगो की मदद करना और इस बीमारी से लड़ने ले लिए प्रेरित करना है. इसके साथ ही युवराज सिंह इस संस्था के लिए वित्तीय सहायता से भी धन जुटाते है. भारतीय टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह फिलहाल भारतीय टीम से बाहर चल रहे है. युवराज सिंह वर्तमान में भारतीय टीम में वापसी करने के लिए ट्रेनिंग कर रहे है और अपनी फिटनेस पर जमकर काम कर रहे है.
जहां आवेदक ने ऐसी वर्तमान संपत्ति कय की है जिसका विद्युत संयोजन विच्छेदित कर दिया गया है तो यह आवेदक का कर्तव्य होगा कि वह यह सत्यापित करे कि पूर्व स्वामी ने अनुज्ञापी को सभी देय राशियों का भुगतान कर दिया है तथा उससे "अदेयता, प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है। यदि सम्पत्ति कय करने से पहले पूर्व स्वामी द्वारा ऐसा अदेयता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है तो नया स्वामी, ऐसे प्रमाण पत्र हेतु अनुज्ञापी के संबंधित अधिकारी से सम्पर्क कर सकता है। अनुज्ञापी ऐसे निवेदन की प्राप्ति स्वीकार करेगा तथा या तो वह सम्पत्ति पर बकाया देय धनराशि, यदि कुछ है, लिखित में सूचित करेगा या ऐसे आवेदन की तिथि से एक माह के भीतर "अदेयता" प्रमाण पत्र जारी करेगा। यदि अनुज्ञापी इस समय के भीतर बकाया देय धनराशि की सूचना नहीं देता है या "अदेयता प्रमाण पत्र" जारी नहीं करता तो पूर्व स्वामी को बकाया देय धनराशि के आधार पर, परिक्षेत्र में नये संयोजन को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे परिस्थिति में अनुज्ञापी को विधि के उपबन्धों के अधीन, पूर्व उपभोक्ता से देय धनराशि वसूल करनी होगी। (3) जहां कोई सम्पत्ति विधिसंगत रूप से उप-विभाजित की गई है तो पूर्व अविभाजित सम्पत्ति पर विद्युत के उपभोग हेतु बकाया देय धनराशि, यदि कुछ है, तो वह ऐसी उपविभाजित सम्पत्ति के क्षेत्र के आधार पर यथानुपातिक रूप से विभाजित की जायेगी। ऐसे उप विभाजित परिक्षेत्र के किसी भाग हेतु नवीन संयोजन विधिसंगत रूप में विभाजित ऐसे परिक्षेत्र पर लागू बकाया देय धनराशि का भाग, आवेदक द्वारा अदा कर दिये जाने के पश्चात ही दिया जायेगा। एक अनुज्ञापी, केवल इस आधार पर कि ऐसे परिक्षेत्र के अन्य भाग (गों) की देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, किसी आवेदक को संयोजन हेतु इनकार नहीं करेगा, ना ही अनुज्ञापी, ऐसे आवेदकों से अन्य भाग (गों) के पिछले भुगतान किये गये बिलों का रिकार्ड मांगेगा। (4) सम्पूर्ण परिक्षेत्र या भवन के गिराये जाने व पुननिर्माण के मामले में वर्तमान संस्थापन वापस सौंप दिया जायेगा तथा अनुबंध समाप्त कर दिया जायेगा। मीटर तथा सेवा लाईन को हटा दिया जायेगा तथा पुराने परिक्षेत्र पर सभी देय धनराशियों के भुगतान के पश्चात, पुनर्निर्मित भवन हेतु एक नवीन संयोजन लिया जायेगा। ऐसे मामलों में निर्माण के उद्देश्य हेतु, वर्तमान संयोजन में से अस्थायी विद्युत सेवा की अनुमति नहीं दी जायेगी। एक नये उपभोक्ता को संयोजन, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (मीटरों का संस्थापन व परिचालन) विनियम, 2006 के उपबन्धों के अनुसार केवल सही विद्युत मीटर के साथ ही प्रदान किया जायेगा तथा उक्त विनियम में निर्धारित किये अनुसार ही इसकी संस्थापना की जायेगी। 4 kW तक के भार हेतु आवेदन के मामले में (a) यदि परिक्षेत्र अनुज्ञापी के वर्तमान 3 फेज़ एल.टी. वितरण मेन से 40 मीटर से अधिक दूरी पर है. अनुज्ञापी, केवल 3 फेज़ वायर एल.टी. वितरण मेन निर्मित करने हेतु वर्तमान एल.टी. वितरण मेन को विस्तारित करेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के 5565 अतिरिक्त, ऐसा संयोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए, विनियम 5 (10) की सारिणी 1 के अनुसार एल.टी. वितरण मेन में मानकीय प्रभारों का भी भुगतान करना होगा, सिवाय, वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10000 से कम आबादी वाले उन ग्रामीण पर्वतीय गांवों के, जहां अनुज्ञापी इन गांवों में ऐसा संयोजन प्रदान करने के लिये सिंगल फेज़ एल.टी. वितरण मेन निर्मित कर पूर्वोक्त 3 फेज़ एल.टी. वितरण मेन विस्तारित कर सकता है। (b) यदि परिक्षेत्र अनुज्ञापी के वर्तमान सिंगल फेज़ या टू फेज़ एल.टी. वितरण मेन से 40 मीटर से अधिक की दूरी पर हैः वर्तमान एल.टी. वितरण मेन का विस्तार, अनुज्ञापी द्वारा सिंगल फेज़ या 2 फेज़ एल. टी. वितरण मेन निर्मित किया जायेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के अतिरिक्त, ऐसा संजोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए, विनियम 5 (10) की सारिणी 1 अनुसार एल. टी. वितरण मेन के मानकीय प्रभारों का भी भुगतान करना होगा। (7) 4kW से अधिक और 25 kW तक के भार हेतु आवेदन के मामले मेंः यदि वर्तमान एल.टी. वितरण मेन सिंगल फेज़ या 2 फेज़ का है तो अनुज्ञापी, ऐसा संजोजन जारी किये जाने के लिये स्वयं की लागत पर 3 फेज़ 5 वायर एल.टी. वितरण मेन द्वारा ऐसे एल.टी. वितरण मेन का आवश्यक परिवर्तन करवायेगा यदि परिक्षेत्र, अनुज्ञापी के वर्तमान 3 फेज़ एल. टी. वितरण मेन से 40 मीटर से अधिक दूरी पर है तो अनुज्ञापी, 3 फेज़ 5 वायर एल.टी. वितरण मेन निर्मित कर विस्तारण करेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के अतिरिक्त, ऐसा संयोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए विनियम 5 (10) की सारिणी 2 के अनुसार मानकीय प्रभारों का भुगतान करना होगा। 25 kW से अधिक भार हेतु आवेदन के मामले में, संयोजन केवल HVDS के माध्यम से जारी किया जायेगा तथा आवेदक को विनियम 5 (10) की सारिणी 3 के अनुसार मानकीय प्रभारों का भुगतान करना होगा।
जहां आवेदक ने ऐसी वर्तमान संपत्ति कय की है जिसका विद्युत संयोजन विच्छेदित कर दिया गया है तो यह आवेदक का कर्तव्य होगा कि वह यह सत्यापित करे कि पूर्व स्वामी ने अनुज्ञापी को सभी देय राशियों का भुगतान कर दिया है तथा उससे "अदेयता, प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है। यदि सम्पत्ति कय करने से पहले पूर्व स्वामी द्वारा ऐसा अदेयता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है तो नया स्वामी, ऐसे प्रमाण पत्र हेतु अनुज्ञापी के संबंधित अधिकारी से सम्पर्क कर सकता है। अनुज्ञापी ऐसे निवेदन की प्राप्ति स्वीकार करेगा तथा या तो वह सम्पत्ति पर बकाया देय धनराशि, यदि कुछ है, लिखित में सूचित करेगा या ऐसे आवेदन की तिथि से एक माह के भीतर "अदेयता" प्रमाण पत्र जारी करेगा। यदि अनुज्ञापी इस समय के भीतर बकाया देय धनराशि की सूचना नहीं देता है या "अदेयता प्रमाण पत्र" जारी नहीं करता तो पूर्व स्वामी को बकाया देय धनराशि के आधार पर, परिक्षेत्र में नये संयोजन को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे परिस्थिति में अनुज्ञापी को विधि के उपबन्धों के अधीन, पूर्व उपभोक्ता से देय धनराशि वसूल करनी होगी। जहां कोई सम्पत्ति विधिसंगत रूप से उप-विभाजित की गई है तो पूर्व अविभाजित सम्पत्ति पर विद्युत के उपभोग हेतु बकाया देय धनराशि, यदि कुछ है, तो वह ऐसी उपविभाजित सम्पत्ति के क्षेत्र के आधार पर यथानुपातिक रूप से विभाजित की जायेगी। ऐसे उप विभाजित परिक्षेत्र के किसी भाग हेतु नवीन संयोजन विधिसंगत रूप में विभाजित ऐसे परिक्षेत्र पर लागू बकाया देय धनराशि का भाग, आवेदक द्वारा अदा कर दिये जाने के पश्चात ही दिया जायेगा। एक अनुज्ञापी, केवल इस आधार पर कि ऐसे परिक्षेत्र के अन्य भाग की देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, किसी आवेदक को संयोजन हेतु इनकार नहीं करेगा, ना ही अनुज्ञापी, ऐसे आवेदकों से अन्य भाग के पिछले भुगतान किये गये बिलों का रिकार्ड मांगेगा। सम्पूर्ण परिक्षेत्र या भवन के गिराये जाने व पुननिर्माण के मामले में वर्तमान संस्थापन वापस सौंप दिया जायेगा तथा अनुबंध समाप्त कर दिया जायेगा। मीटर तथा सेवा लाईन को हटा दिया जायेगा तथा पुराने परिक्षेत्र पर सभी देय धनराशियों के भुगतान के पश्चात, पुनर्निर्मित भवन हेतु एक नवीन संयोजन लिया जायेगा। ऐसे मामलों में निर्माण के उद्देश्य हेतु, वर्तमान संयोजन में से अस्थायी विद्युत सेवा की अनुमति नहीं दी जायेगी। एक नये उपभोक्ता को संयोजन, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम, दो हज़ार छः के उपबन्धों के अनुसार केवल सही विद्युत मीटर के साथ ही प्रदान किया जायेगा तथा उक्त विनियम में निर्धारित किये अनुसार ही इसकी संस्थापना की जायेगी। चार किलोवाट तक के भार हेतु आवेदन के मामले में यदि परिक्षेत्र अनुज्ञापी के वर्तमान तीन फेज़ एल.टी. वितरण मेन से चालीस मीटर से अधिक दूरी पर है. अनुज्ञापी, केवल तीन फेज़ वायर एल.टी. वितरण मेन निर्मित करने हेतु वर्तमान एल.टी. वितरण मेन को विस्तारित करेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के पाँच हज़ार पाँच सौ पैंसठ अतिरिक्त, ऐसा संयोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए, विनियम पाँच की सारिणी एक के अनुसार एल.टी. वितरण मेन में मानकीय प्रभारों का भी भुगतान करना होगा, सिवाय, वर्ष दो हज़ार ग्यारह की जनगणना के अनुसार दस हज़ार से कम आबादी वाले उन ग्रामीण पर्वतीय गांवों के, जहां अनुज्ञापी इन गांवों में ऐसा संयोजन प्रदान करने के लिये सिंगल फेज़ एल.टी. वितरण मेन निर्मित कर पूर्वोक्त तीन फेज़ एल.टी. वितरण मेन विस्तारित कर सकता है। यदि परिक्षेत्र अनुज्ञापी के वर्तमान सिंगल फेज़ या टू फेज़ एल.टी. वितरण मेन से चालीस मीटर से अधिक की दूरी पर हैः वर्तमान एल.टी. वितरण मेन का विस्तार, अनुज्ञापी द्वारा सिंगल फेज़ या दो फेज़ एल. टी. वितरण मेन निर्मित किया जायेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के अतिरिक्त, ऐसा संजोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए, विनियम पाँच की सारिणी एक अनुसार एल. टी. वितरण मेन के मानकीय प्रभारों का भी भुगतान करना होगा। चार किलोवाट से अधिक और पच्चीस किलोवाट तक के भार हेतु आवेदन के मामले मेंः यदि वर्तमान एल.टी. वितरण मेन सिंगल फेज़ या दो फेज़ का है तो अनुज्ञापी, ऐसा संजोजन जारी किये जाने के लिये स्वयं की लागत पर तीन फेज़ पाँच वायर एल.टी. वितरण मेन द्वारा ऐसे एल.टी. वितरण मेन का आवश्यक परिवर्तन करवायेगा यदि परिक्षेत्र, अनुज्ञापी के वर्तमान तीन फेज़ एल. टी. वितरण मेन से चालीस मीटर से अधिक दूरी पर है तो अनुज्ञापी, तीन फेज़ पाँच वायर एल.टी. वितरण मेन निर्मित कर विस्तारण करेगा तथा आवेदक को स्थिर सेवा लाईन प्रभारों के अतिरिक्त, ऐसा संयोजन जारी करने के लिये आवश्यक लाईन की लम्बाई पर निर्भर करते हुए विनियम पाँच की सारिणी दो के अनुसार मानकीय प्रभारों का भुगतान करना होगा। पच्चीस किलोवाट से अधिक भार हेतु आवेदन के मामले में, संयोजन केवल HVDS के माध्यम से जारी किया जायेगा तथा आवेदक को विनियम पाँच की सारिणी तीन के अनुसार मानकीय प्रभारों का भुगतान करना होगा।
मुताणं-मोअणाणं-जो पुक्त है और दूसरोको मुक्ति दिलानेवाले हैं, उनको । सव्वन्नूर्ण सव्वदरिसीर्ण-सर्वझोंको, सर्वदर्शियोंको । सिवमयलमरुयमणंतमक्खय. मव्वाबाहमपुणरावित्तिशिव, अचल, अरुज, अनन्त, अक्षय, अव्याबाध और अपुन रावृत्ति । शिव - उपद्रवोसे रहित । अयल - स्थिर । अरुय - व्याधि और वेदनासे रहित । अर्णत अन्त - रहित । अक्खय क्षयरहित । अव्याचाह-कर्मजन्य पीडाओसे रहित । अप्पुणरावित्ति - जहाँ जानेको बाद वापस आना नहीं रहता ऐसा । अर्थ-सङ्कलना५२ । सिद्धिगइ-मामधेयं - सिद्धिगति नामवाले । ठाणं-स्थानको । संपत्ताण-प्राप्त किये हुओंको । नमो नमस्कार हो । जिणाणं-जिनोंको । जिअ भयाणं-भय जीतनेवालोंको ।. जे-जो। अ-और । अईआ सिद्धा-भूतकालमें सिद्ध हुए हैं। भविस्संति-होंगे । ( अ ) णागए काले- भविष्यकालमें । संपइ - वर्तमानकालमें । अ-तथा । वट्टमाणा- वर्तमान । सब्वे सबको । तिविहेण - मन, वचन और कायासे वंदामि - मैं वन्दन करता हूँ। नमस्कार हो अरिहन्त भगवन्तोंको ॥ १ ॥ जो श्रुतधर्मकी आदि करनेवाले हैं, चतुर्विध श्रमणसङ्घरूपी तीर्थकी स्थापना करनेवाले हैं और स्वयं बोध प्राप्त किए हुए हैं ॥ २ ॥ जो पुरुषों में ज्ञानादि गुणोंसे उत्तम हैं, सिंह-समान निर्भय हैं, उत्तम श्वेत कमलके समान निर्लेप हैं, तथा सात प्रकारकी ईतियाँ दूर करने में गन्धहस्ती सदृश प्रभावशाली हैं ॥ ३ ॥ जो लोकमें उत्तम हैं, लोकके नाथ हैं, लोकके हितकारी हैं, लोकके प्रदीप हैं, और लोकमें प्रकाश करनेवाले हैं ॥ ४ ॥ जो अभय देनेवाले हैं, श्रद्धारूपी नेत्रोंका दान करनेवाले हैं, मार्ग दिखानेवाले हैं, शरण देनेवाले हैं और बोधिबीजका लाभ देनेवाले हैं ॥ ५ ॥ जो धर्मको समझानेवाले हैं, धर्मकी देशना देनेवाले हैं, धर्मके सच्चे स्वामी हैं, धर्मरूपी रथको चलाने में निष्णात सारथि हैं तथा चार गतिका नाश करनेवाले धर्मचक्रके प्रवर्त्तक चक्रवर्ती हैं ॥ ६ ॥ जो नष्ट न हो ऐसे केवलज्ञान एवं केवलदर्शनको धारण करनेवाले हैं तथा छद्मस्थतासे-अपूर्णतासे रहित हैं ॥ ७ ॥ जो स्वयं जिन बने हुए हैं और दूसरोंको भी जिन बनानेवाले हैं, जो संसार समुद्रसे पार होगये हैं और दूसरोंको भी पार पहुँचाने - वाले हैं; जो स्वयं बुद्ध हैं तथा दूसरोंको भी बोध देनेवाले हैं; जो मुक्त हैं तथा दूसरोंको मुक्ति दिलानेवाले हैं ॥ ८ ॥ जो सर्वज्ञ और सर्वदर्शी हैं तथा शिव, स्थिर, व्याधि और वेदनासे रहित, अनन्त, अक्षय, अन्याबाध और अपुनरावृत्ति अर्थात् जहाँ जानेके बाद संसारमें वापस आना नहीं रहता, ऐसे सिद्धिगति नामक स्थानको प्राप्त किये हुए हैं उन जिनोंको-भय जीतनेवालोंको नमस्कार हो ॥ ९ ॥
मुताणं-मोअणाणं-जो पुक्त है और दूसरोको मुक्ति दिलानेवाले हैं, उनको । सव्वन्नूर्ण सव्वदरिसीर्ण-सर्वझोंको, सर्वदर्शियोंको । सिवमयलमरुयमणंतमक्खय. मव्वाबाहमपुणरावित्तिशिव, अचल, अरुज, अनन्त, अक्षय, अव्याबाध और अपुन रावृत्ति । शिव - उपद्रवोसे रहित । अयल - स्थिर । अरुय - व्याधि और वेदनासे रहित । अर्णत अन्त - रहित । अक्खय क्षयरहित । अव्याचाह-कर्मजन्य पीडाओसे रहित । अप्पुणरावित्ति - जहाँ जानेको बाद वापस आना नहीं रहता ऐसा । अर्थ-सङ्कलनाबावन । सिद्धिगइ-मामधेयं - सिद्धिगति नामवाले । ठाणं-स्थानको । संपत्ताण-प्राप्त किये हुओंको । नमो नमस्कार हो । जिणाणं-जिनोंको । जिअ भयाणं-भय जीतनेवालोंको ।. जे-जो। अ-और । अईआ सिद्धा-भूतकालमें सिद्ध हुए हैं। भविस्संति-होंगे । णागए काले- भविष्यकालमें । संपइ - वर्तमानकालमें । अ-तथा । वट्टमाणा- वर्तमान । सब्वे सबको । तिविहेण - मन, वचन और कायासे वंदामि - मैं वन्दन करता हूँ। नमस्कार हो अरिहन्त भगवन्तोंको ॥ एक ॥ जो श्रुतधर्मकी आदि करनेवाले हैं, चतुर्विध श्रमणसङ्घरूपी तीर्थकी स्थापना करनेवाले हैं और स्वयं बोध प्राप्त किए हुए हैं ॥ दो ॥ जो पुरुषों में ज्ञानादि गुणोंसे उत्तम हैं, सिंह-समान निर्भय हैं, उत्तम श्वेत कमलके समान निर्लेप हैं, तथा सात प्रकारकी ईतियाँ दूर करने में गन्धहस्ती सदृश प्रभावशाली हैं ॥ तीन ॥ जो लोकमें उत्तम हैं, लोकके नाथ हैं, लोकके हितकारी हैं, लोकके प्रदीप हैं, और लोकमें प्रकाश करनेवाले हैं ॥ चार ॥ जो अभय देनेवाले हैं, श्रद्धारूपी नेत्रोंका दान करनेवाले हैं, मार्ग दिखानेवाले हैं, शरण देनेवाले हैं और बोधिबीजका लाभ देनेवाले हैं ॥ पाँच ॥ जो धर्मको समझानेवाले हैं, धर्मकी देशना देनेवाले हैं, धर्मके सच्चे स्वामी हैं, धर्मरूपी रथको चलाने में निष्णात सारथि हैं तथा चार गतिका नाश करनेवाले धर्मचक्रके प्रवर्त्तक चक्रवर्ती हैं ॥ छः ॥ जो नष्ट न हो ऐसे केवलज्ञान एवं केवलदर्शनको धारण करनेवाले हैं तथा छद्मस्थतासे-अपूर्णतासे रहित हैं ॥ सात ॥ जो स्वयं जिन बने हुए हैं और दूसरोंको भी जिन बनानेवाले हैं, जो संसार समुद्रसे पार होगये हैं और दूसरोंको भी पार पहुँचाने - वाले हैं; जो स्वयं बुद्ध हैं तथा दूसरोंको भी बोध देनेवाले हैं; जो मुक्त हैं तथा दूसरोंको मुक्ति दिलानेवाले हैं ॥ आठ ॥ जो सर्वज्ञ और सर्वदर्शी हैं तथा शिव, स्थिर, व्याधि और वेदनासे रहित, अनन्त, अक्षय, अन्याबाध और अपुनरावृत्ति अर्थात् जहाँ जानेके बाद संसारमें वापस आना नहीं रहता, ऐसे सिद्धिगति नामक स्थानको प्राप्त किये हुए हैं उन जिनोंको-भय जीतनेवालोंको नमस्कार हो ॥ नौ ॥
The Punjab Entertainments Duty Bill और यह जरूरी है। पहले जो बिल था उस में loopholes थे, ऐसी गुन्जायशें 'थों कि जिस से अजून मैंट का टैक्स लिया जाए मगर उसे पूरा दिया न जाए। इस बिल के जरिए वह दूर कर दिए गए हैं और इस को मजदूरों पर बोझ और उन से बेइन्साफी करते हैं । यह बात मेरी समझ में नहीं आती। मौलवी साहिब का तजरुबा होगा कि सिनेमा वाले गवर्नमेंट को Entertainment tax नहीं देते और दूसरे तरीकों से बीच में ही निगल जाते हैं और गवर्नमेंट के पास नहीं पहुंचने देते। फिर कहा कि 200 रुपये का एक बड़ा जुर्माना लगा दिया है । Minister साहिब ने बजा तौर पर फरमाया है कि यह जरूरी नहीं कि 200 रुपये का जुर्माना किया जायेगा । अगर कोई management का या कोई दूसरा श्रादमी पकड़ा जायेगा जिस ने पांचवी या दसवीं बार ऐसा जुर्म किया हो तो उस को 200 रुपया जुमोंना ज्यादा नहीं । मगर दूसरी हालत में 10 रुपये या 5 रुपये भी किया जा सकता है । यह कोई नामुनासिब जुर्माना नहीं । इस लिये मौलवी साहिब को मालूम होना चाहिये कि 200 रुपये में कोई डरने वाली बात नहीं है । और जहां तक बिल के general अतूल की बात है उस में मैं समझता हूं कि मौलवी साहिब को कोई इतरा, ज नहीं और वह इस के हक में हैं । इन अलफाज के साथ मैं House से कहूंगा कि हमें इस Bill को पास कर देना चाहिये । प्रोफैसर मोता सिंह आनन्दपुरी (आदमपुर) : स्पीकर साहिब इस बिल के अन्दर एक खास loophole जो मुझे नजर आता है, थगर्चे इसके aims and objects में लिखा गया है कि इस बिल के जो loopholes थे उन को दूर करने के लिये यह बिल लाया गया है, वह यह है Proprietors of entertainment houses indulge in many malpractices.... तो यह जो malpractices हैं, उनके लिये clause 12 में Commissioner को यह ताकत दो जायेगी कि वह entertainment proceedings की propriety और legality को देखने के लिए अगर कोई report करे या खुद अपनी ही मर्जी से उनको मंगवाये तो उस पर action लिया जायेगा । यह ठीक है कि यह उस को legality और propriety की बात है। हिसाब किताब के documents देख्ने जायेंगे मगर उसमें moral side के मुतअल्लिक कुछ नहीं कहा गया Entertainment की एक immoral side भी होती है खास कर prostitutes वगैरा भी इस में आती हैं। ज़रूरी था कि इस löophole को दूर कर दिया जाता । और यह provision कर दिया जाता इस के moral aspect को कायम करने के लिये कि कोई entertainment ऐसी न हो जो prostitution की encouragement करने वाली हो और immorality को बढ़ाने वाली हो । यह ची.ज Minister साहित्र से रह गई है अगर इधर भी ध्यान देते तो अच्छा था । Digitized by; Punjab Vichan Sabha Digitized by; ਸ਼ਰੱਮ ਮੰਤਰੀ (ਚੌਧਰੀ ਸੁੰਦਰ ਸਿੰਘ) : ਸਪੀਕਰ ਸਾਹਿਬ ! ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਨੇ ਜੋ Sub-Inspector ਬਾਰੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਉਹ ਮੈਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਦੱਸ ਚੁਕਾ ਹਾਂ। ਜਿਥੋਂ ਤਕ ਇਸ ਬਿਲ ਦਾ ਤਅੱਲਕ ਹੈ ਅਸੀਂ ਕੋਈ entertainment tax ਵਧਾਇਆ ਨਹੀਂ। ਸਰਕਾਰੀ ਟੈਕਸ ਦਾ evasion ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਚੋਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਇਹ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ । ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਇਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਸ਼ੱਕ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਇਸਨੂੰ ਅਸਾਂ Good faith ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਨੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਗਰੀਬ ਲੋਕਾਂ ਤੇ ਇਸਦਾ ਅਸਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਮਗਰ ਜੋ ਆਦਮੀ cinema ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਉਸਦੇ ਪਾਸ ਪੈਸਾ ਹੈ ਅਤੇ ਗਰੀਬ ਨੂੰ ਤਾਂ ਰੋਟੀ ਖਾਣ ਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀ ਜਿਸਦੀ ਆਦਤ ਬਣ ਜਾਵੇਗੀ ਉਸ ਲਈ ਇਹ measure ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਕਈ ਲੋਕ ਅਜਿਹੇ ਹਨ ਕਿ ਰੋਟੀ ਨਾਂ ਵੀ ਹੋਵੇ ਸਿਨਮੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਨਾਲ morale ਨਹੀਂ ਵਧਦਾ। ਸਰਦਾਰ ਮੋਤਾ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ morale ਵਾਲੀ side ਨੂੰ ਵੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਕ ਅਸੀਂ ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ । ਹਾਲਤ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ allotment ਹੋਈ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਬਾਅਦ cancel ਹੋ ਗਈ ਤਾਂ ਉਹ ਜਾਂਦੇ ਹੋਏ ਤਖਤੇ, ਬਾਰੀਆਂ ਆਦਿ ਲੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਹਾਲਤ ਤਾਂ ਹੈ ਕੀ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ? ਸਾਡਾ ਦਿਲ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਕਿ ਸਖਤ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣਾਈਏ। ਅਸੀਂ ਵੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਕਾਨੂੰਨ ਬਨਣ ਕਿ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਮੌਰੇਲ ਵਧੇ । ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਮੋਤਾ ਸਿੰਘ : morale ਨਹੀਂ moral ਸ਼ਰੱਮ ਮੰਤਰੀ : ਜੀ ਹਾਂ, morals ਨੂੰ, ਚਾਲ ਚਲਣ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਉਚਿਆਂ ਕਰਾਂਗੇ । development ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ, rural uplift ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ ਅਤੇ ਦਿਹਾਤੀਆਂ ਦੀ ਤਾਲੀਮ ਲਈ ਰੁਪਏ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਟੈਕਸ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਇਸ ਬਿਲ ਰਾਹੀਂ ਜਾ ਲੱਖਾਂ ਰੁਪਏ ਦੇ ਘਾਟੇ ਨੂੰ ਰੋਕਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। Mr. Speaker Question isThat the Punjab Entertainments Duty Bill, as amended, be passed. The motion was carried.
The Punjab Entertainments Duty Bill और यह जरूरी है। पहले जो बिल था उस में loopholes थे, ऐसी गुन्जायशें 'थों कि जिस से अजून मैंट का टैक्स लिया जाए मगर उसे पूरा दिया न जाए। इस बिल के जरिए वह दूर कर दिए गए हैं और इस को मजदूरों पर बोझ और उन से बेइन्साफी करते हैं । यह बात मेरी समझ में नहीं आती। मौलवी साहिब का तजरुबा होगा कि सिनेमा वाले गवर्नमेंट को Entertainment tax नहीं देते और दूसरे तरीकों से बीच में ही निगल जाते हैं और गवर्नमेंट के पास नहीं पहुंचने देते। फिर कहा कि दो सौ रुपयापये का एक बड़ा जुर्माना लगा दिया है । Minister साहिब ने बजा तौर पर फरमाया है कि यह जरूरी नहीं कि दो सौ रुपयापये का जुर्माना किया जायेगा । अगर कोई management का या कोई दूसरा श्रादमी पकड़ा जायेगा जिस ने पांचवी या दसवीं बार ऐसा जुर्म किया हो तो उस को दो सौ रुपयापया जुमोंना ज्यादा नहीं । मगर दूसरी हालत में दस रुपयापये या पाँच रुपयापये भी किया जा सकता है । यह कोई नामुनासिब जुर्माना नहीं । इस लिये मौलवी साहिब को मालूम होना चाहिये कि दो सौ रुपयापये में कोई डरने वाली बात नहीं है । और जहां तक बिल के general अतूल की बात है उस में मैं समझता हूं कि मौलवी साहिब को कोई इतरा, ज नहीं और वह इस के हक में हैं । इन अलफाज के साथ मैं House से कहूंगा कि हमें इस Bill को पास कर देना चाहिये । प्रोफैसर मोता सिंह आनन्दपुरी : स्पीकर साहिब इस बिल के अन्दर एक खास loophole जो मुझे नजर आता है, थगर्चे इसके aims and objects में लिखा गया है कि इस बिल के जो loopholes थे उन को दूर करने के लिये यह बिल लाया गया है, वह यह है Proprietors of entertainment houses indulge in many malpractices.... तो यह जो malpractices हैं, उनके लिये clause बारह में Commissioner को यह ताकत दो जायेगी कि वह entertainment proceedings की propriety और legality को देखने के लिए अगर कोई report करे या खुद अपनी ही मर्जी से उनको मंगवाये तो उस पर action लिया जायेगा । यह ठीक है कि यह उस को legality और propriety की बात है। हिसाब किताब के documents देख्ने जायेंगे मगर उसमें moral side के मुतअल्लिक कुछ नहीं कहा गया Entertainment की एक immoral side भी होती है खास कर prostitutes वगैरा भी इस में आती हैं। ज़रूरी था कि इस löophole को दूर कर दिया जाता । और यह provision कर दिया जाता इस के moral aspect को कायम करने के लिये कि कोई entertainment ऐसी न हो जो prostitution की encouragement करने वाली हो और immorality को बढ़ाने वाली हो । यह ची.ज Minister साहित्र से रह गई है अगर इधर भी ध्यान देते तो अच्छा था । Digitized by; Punjab Vichan Sabha Digitized by; ਸ਼ਰੱਮ ਮੰਤਰੀ : ਸਪੀਕਰ ਸਾਹਿਬ ! ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਨੇ ਜੋ Sub-Inspector ਬਾਰੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਉਹ ਮੈਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਦੱਸ ਚੁਕਾ ਹਾਂ। ਜਿਥੋਂ ਤਕ ਇਸ ਬਿਲ ਦਾ ਤਅੱਲਕ ਹੈ ਅਸੀਂ ਕੋਈ entertainment tax ਵਧਾਇਆ ਨਹੀਂ। ਸਰਕਾਰੀ ਟੈਕਸ ਦਾ evasion ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਚੋਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਇਹ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ । ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਇਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਸ਼ੱਕ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਇਸਨੂੰ ਅਸਾਂ Good faith ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਮੌਲਵੀ ਸਾਹਿਬ ਨੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਗਰੀਬ ਲੋਕਾਂ ਤੇ ਇਸਦਾ ਅਸਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਮਗਰ ਜੋ ਆਦਮੀ cinema ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਉਸਦੇ ਪਾਸ ਪੈਸਾ ਹੈ ਅਤੇ ਗਰੀਬ ਨੂੰ ਤਾਂ ਰੋਟੀ ਖਾਣ ਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੀ ਜਿਸਦੀ ਆਦਤ ਬਣ ਜਾਵੇਗੀ ਉਸ ਲਈ ਇਹ measure ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ । ਕਈ ਲੋਕ ਅਜਿਹੇ ਹਨ ਕਿ ਰੋਟੀ ਨਾਂ ਵੀ ਹੋਵੇ ਸਿਨਮੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਨਾਲ morale ਨਹੀਂ ਵਧਦਾ। ਸਰਦਾਰ ਮੋਤਾ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ morale ਵਾਲੀ side ਨੂੰ ਵੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਕ ਅਸੀਂ ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ । ਹਾਲਤ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ allotment ਹੋਈ ਅਤੇ ਉਸਦੇ ਬਾਅਦ cancel ਹੋ ਗਈ ਤਾਂ ਉਹ ਜਾਂਦੇ ਹੋਏ ਤਖਤੇ, ਬਾਰੀਆਂ ਆਦਿ ਲੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ । ਇਹ ਹਾਲਤ ਤਾਂ ਹੈ ਕੀ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ? ਸਾਡਾ ਦਿਲ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਕਿ ਸਖਤ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣਾਈਏ। ਅਸੀਂ ਵੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਕਾਨੂੰਨ ਬਨਣ ਕਿ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਮੌਰੇਲ ਵਧੇ । ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਮੋਤਾ ਸਿੰਘ : morale ਨਹੀਂ moral ਸ਼ਰੱਮ ਮੰਤਰੀ : ਜੀ ਹਾਂ, morals ਨੂੰ, ਚਾਲ ਚਲਣ ਅਤੇ ਆਦਰਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਉਚਿਆਂ ਕਰਾਂਗੇ । development ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ, rural uplift ਦੇ ਕੰਮ ਲਈ ਅਤੇ ਦਿਹਾਤੀਆਂ ਦੀ ਤਾਲੀਮ ਲਈ ਰੁਪਏ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਇਸ ਕਰਕੇ ਇਹ ਟੈਕਸ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਇਸ ਬਿਲ ਰਾਹੀਂ ਜਾ ਲੱਖਾਂ ਰੁਪਏ ਦੇ ਘਾਟੇ ਨੂੰ ਰੋਕਿਆ ਜਾਵੇਗਾ। Mr. Speaker Question isThat the Punjab Entertainments Duty Bill, as amended, be passed. The motion was carried.
नई दिल्ली। "क्या कूल है हम"के प्रोडयूसर और डायरेक्टर को गिरफ्तार किए जाने की मांग की जा रही है। कांग्रेस सांसद शांताराम नाइक ने शुक्रवार को राज्यसभा में शून्य काल के दौरान यह मांग की। नाइक ने फिल्म के एक सीन पर आपत्ति जताई। इस सीन में एक पादरी को दो कुत्तों की शादी करते हुए दिखाया गया है। नाइक का कहना है कि इस सीन से ईसाई समुदाय की भावनाएं आहत हुई है। नाइक ने कहा कि फिल्म में अश्लील संवादों और दृश्यों की भरमार है। फ्रीडम ऑफ स्पीच के अधिकार से किसी को इस बात का लाइसेंस नहीं मिल जाता कि वह दूसरों की भावनाओं के साथ खेलें। खासतौर पर लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ। कॉमेडी हर समाज का एक हिस्सा है लेकिन कॉमेडी को पेश करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। कांग्रेसी सांसद ने फिल्म के प्रोडयूसर और डायरेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए और 298 के तहत कार्रवाई की मांग की। नाइक ने कहा कि 295 ए संज्ञेय अपराध है। इसलिए पुलिस मशीनरी का यह कर्तव्य है कि वह कार्रवाई करे और दोषियों को गिरफ्तार करे। नाइक ने मांग की है कि सिनेमेटोग्राफी एक्ट में संशोधन होना चाहिए। सरकार को सेंसर बोर्ड के फैसलों की समीक्षा करने का अधिकार मिलना चाहिए। गौरतलब है कि मुंबई और गोवा के ईसाई समूह फिल्म का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों ने फिल्म डायरेक्टर एकता कपूर के खिलाफ मुंबई पुलिस को शिकायत की थी। समुदाय के लोग सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी से भी मिले थे और उन्हें पूरा मामला बताया था। सोनी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मामले की जांच कराई जाएगी तथा उचित कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस सांसद संजय निरूपम ने भी विरोध करने वालों ईसाई समूहों का समर्थन किया था। निरूपम ने अंबिका सोनी को पत्र लिखकर मांग की थी कि सेंसर बोर्ड को नोटिस जारी किया जाए।
नई दिल्ली। "क्या कूल है हम"के प्रोडयूसर और डायरेक्टर को गिरफ्तार किए जाने की मांग की जा रही है। कांग्रेस सांसद शांताराम नाइक ने शुक्रवार को राज्यसभा में शून्य काल के दौरान यह मांग की। नाइक ने फिल्म के एक सीन पर आपत्ति जताई। इस सीन में एक पादरी को दो कुत्तों की शादी करते हुए दिखाया गया है। नाइक का कहना है कि इस सीन से ईसाई समुदाय की भावनाएं आहत हुई है। नाइक ने कहा कि फिल्म में अश्लील संवादों और दृश्यों की भरमार है। फ्रीडम ऑफ स्पीच के अधिकार से किसी को इस बात का लाइसेंस नहीं मिल जाता कि वह दूसरों की भावनाओं के साथ खेलें। खासतौर पर लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ। कॉमेडी हर समाज का एक हिस्सा है लेकिन कॉमेडी को पेश करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। कांग्रेसी सांसद ने फिल्म के प्रोडयूसर और डायरेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा दो सौ पचानवे ए और दो सौ अट्ठानवे के तहत कार्रवाई की मांग की। नाइक ने कहा कि दो सौ पचानवे ए संज्ञेय अपराध है। इसलिए पुलिस मशीनरी का यह कर्तव्य है कि वह कार्रवाई करे और दोषियों को गिरफ्तार करे। नाइक ने मांग की है कि सिनेमेटोग्राफी एक्ट में संशोधन होना चाहिए। सरकार को सेंसर बोर्ड के फैसलों की समीक्षा करने का अधिकार मिलना चाहिए। गौरतलब है कि मुंबई और गोवा के ईसाई समूह फिल्म का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों ने फिल्म डायरेक्टर एकता कपूर के खिलाफ मुंबई पुलिस को शिकायत की थी। समुदाय के लोग सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी से भी मिले थे और उन्हें पूरा मामला बताया था। सोनी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि मामले की जांच कराई जाएगी तथा उचित कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस सांसद संजय निरूपम ने भी विरोध करने वालों ईसाई समूहों का समर्थन किया था। निरूपम ने अंबिका सोनी को पत्र लिखकर मांग की थी कि सेंसर बोर्ड को नोटिस जारी किया जाए।
ड्यूटी से अपने आवास पर लौट रहे सैनिक की रास्ते में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। सैनिक के निधन का समाचार सुन कर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। थाना मगोर्रा के गांव नगला भूरिया निवासी अनिल कुंतल (32 वर्ष) पुत्र श्रीचंद सिंह भारतीय सेना में आर्टिलरी रेजिमेंट में कार्यरत था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
ड्यूटी से अपने आवास पर लौट रहे सैनिक की रास्ते में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। सैनिक के निधन का समाचार सुन कर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। थाना मगोर्रा के गांव नगला भूरिया निवासी अनिल कुंतल पुत्र श्रीचंद सिंह भारतीय सेना में आर्टिलरी रेजिमेंट में कार्यरत था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
आखिर इजरायिली हमले पर इतनी हाय तौबा क्यों? क्योंकि जिस देश को अपनी जमीं, भाषा व स्वतंत्रता हजारों वर्षों क़े संघर्ष क़े बाद मिली हो उसे अपनी स्वतंत्रता स्वयंप्रभुता की रक्षा से कैसे रोका जा सकता है। इजराईल आजादी क़े २४ घंटे भी बीत नहीं पाए थे कि इस्लामिक देशों ने उस पर हमला कर दिया, उन्होंने केवल अपनी सुरक्षा ही नहीं किया जिस भूमि में कुछ पैदा नहीं होता था उसे उपजाऊ ही नहीं बनाया बल्कि उसे वैभवशाली शक्तिसपन्न देश बनाने क़ा गौरव प्राप्त किया। इस्राईल ने कहा कि हमारी सीमा में युद्ध नहीं होना चाहिए अपनी तरफ से उसने कोई हमला नहीं किया यदि फिलिस्तीन को शांति चाहिए तो उसे इजराईल क़े विरुद्ध आतंकवाद बंद करना होगा, फिलिस्तीन इस समय दुनिया में आतंकवाद की नर्सरी क़े समान है जिसमें दुनिया क़े तमाम देशों क़े आतंकवादी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। जब इजराईल ने यह चेतावनी दी थी कि फिलिस्तीन को कोई सहायता नहीं भेजी जनि चाहिए तो कोई तो कारण अवश्य होगा, यह उसी प्रकार है जैसे अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद क़े विरोध क़े लिए सहायता प्रदान करता है लेकिन वह उसे भारत क़े विरुद्ध आतंकवाद क़े लिए उपयोग करता है। मिडिया क़े अनुसार शान्ति मिशन पर जाने वालों क़े पास हथियार बरामद हुए हैं, तो यह कैसा शांति मिशन है। संयुक्त राष्ट्र संघ को इजरायिली कार्यवाही पर बड़ी चिंता है तो उसकी जाँच होनी चाहिए लेकिन आज जो वैश्विक आतंकवाद मुस्लिम देश व इस्लाम क़े नाम पर चलाये जा रहे हैं उसके बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ क़ा क्या कहना है। कश्मीर घटी में एक भी हिन्दू नहीं बचा है भारत में ऐसे सकडों पाकेट्स जैन जहाँ हिन्दू घर छोड़ने को मजबूर है! उसके बारे में यूएन क़ा क्या कहना है। इजरायिली जनता और भारतीय जनता की एक ही समस्या है लेकिन भारत की सेकुलर सरकार को इजराईल पसंद नहीं क्योंकि भारत में मुस्लिम समुदाय की निष्ठा भारत में नहीं केवल इस्लाम में है। जिन मुस्लिमों की निष्ठा भारत में है उनका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, इसलिए भारत सरकार देश हित को किनारे रखकर एवं सेकुलर क़े नाम पर हिन्दू और भारत विरोध पर आतुर रहती है। फिलिस्तीनियों व पाकिस्तानियों को सहायता करना आतंकवादियों को सहायता करने जैसा ही है, प्रत्येक देश को अपने देश की सुरक्षा करने क़ा अधिकार है इस नाते इजराईल ने जो कुछ किया है वही उपयुक्त है जिसकी निंदा नहीं होनी चाहिए। यह तो इजराईल जाँच करे कि शांति सहायता मिशन किस उद्देश्य को लेकर गाजापट्टी जा रहा था जनहानि से तो दुखी होना स्वाभाविक है लेकिन जो मानवाधिकार कार्यकर्ता आतंकवादियों क़े पक्ष में लगातार बयान देते हैं उनकी सुरक्षा की बात करते हैं आखिर उनका क्या दावा है इस पर भी विचार होना चाहिए कहीं ये सभी आतंकवादियों क़े पोषक तो नहीं। यहूदियों ने अपने परिश्रम से अपने राष्ट्र क़ा निर्माण किया है। पूरे देश की जनता सैनिक है और सम्पूर्ण विश्व क़ा अग्रणी देशों में है उसे अपनी सुरक्षा क़ा पूरा अधिकार है। भारत को भी उसी क़े समान सोचना चाहिए और भारत विरोधी आतंकवादी कैम्प जो पाकिस्तान में चल रहे हैं उस पर हमला कर समाप्त कर देना चाहिए। फिलिस्तीन कोई देश नहीं यह तो सम्पूर्ण इस्लामिक देशों क़े इजराईल क़े विरुद्ध आतंकवादी छावनी मात्र है जिसे पूरे अरब देश सहित सभी इस्लामिक देशों की सहायता प्राप्त है यदि ये इस्लामिक देश शांति चाहते तो फिलिस्तीनियों को जमीन उपलब्ध कराकर उसके समृद्धि क़ा रास्ता खोल सकते हैं, इस्लाम क़े प्रेम मोहब्बत को बाँट सकते हैं लेकिन इस्लाम में तो प्रेम क़ा स्थान हिंसा ने ले रखा है इसलिए विश्व मानवता को बचने वालों को ठीक से विचार करना होगा केवल इजराईल पर हाय तौबा मचने से काम नहीं चलेगा।
आखिर इजरायिली हमले पर इतनी हाय तौबा क्यों? क्योंकि जिस देश को अपनी जमीं, भाषा व स्वतंत्रता हजारों वर्षों क़े संघर्ष क़े बाद मिली हो उसे अपनी स्वतंत्रता स्वयंप्रभुता की रक्षा से कैसे रोका जा सकता है। इजराईल आजादी क़े चौबीस घंटाटे भी बीत नहीं पाए थे कि इस्लामिक देशों ने उस पर हमला कर दिया, उन्होंने केवल अपनी सुरक्षा ही नहीं किया जिस भूमि में कुछ पैदा नहीं होता था उसे उपजाऊ ही नहीं बनाया बल्कि उसे वैभवशाली शक्तिसपन्न देश बनाने क़ा गौरव प्राप्त किया। इस्राईल ने कहा कि हमारी सीमा में युद्ध नहीं होना चाहिए अपनी तरफ से उसने कोई हमला नहीं किया यदि फिलिस्तीन को शांति चाहिए तो उसे इजराईल क़े विरुद्ध आतंकवाद बंद करना होगा, फिलिस्तीन इस समय दुनिया में आतंकवाद की नर्सरी क़े समान है जिसमें दुनिया क़े तमाम देशों क़े आतंकवादी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। जब इजराईल ने यह चेतावनी दी थी कि फिलिस्तीन को कोई सहायता नहीं भेजी जनि चाहिए तो कोई तो कारण अवश्य होगा, यह उसी प्रकार है जैसे अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद क़े विरोध क़े लिए सहायता प्रदान करता है लेकिन वह उसे भारत क़े विरुद्ध आतंकवाद क़े लिए उपयोग करता है। मिडिया क़े अनुसार शान्ति मिशन पर जाने वालों क़े पास हथियार बरामद हुए हैं, तो यह कैसा शांति मिशन है। संयुक्त राष्ट्र संघ को इजरायिली कार्यवाही पर बड़ी चिंता है तो उसकी जाँच होनी चाहिए लेकिन आज जो वैश्विक आतंकवाद मुस्लिम देश व इस्लाम क़े नाम पर चलाये जा रहे हैं उसके बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ क़ा क्या कहना है। कश्मीर घटी में एक भी हिन्दू नहीं बचा है भारत में ऐसे सकडों पाकेट्स जैन जहाँ हिन्दू घर छोड़ने को मजबूर है! उसके बारे में यूएन क़ा क्या कहना है। इजरायिली जनता और भारतीय जनता की एक ही समस्या है लेकिन भारत की सेकुलर सरकार को इजराईल पसंद नहीं क्योंकि भारत में मुस्लिम समुदाय की निष्ठा भारत में नहीं केवल इस्लाम में है। जिन मुस्लिमों की निष्ठा भारत में है उनका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, इसलिए भारत सरकार देश हित को किनारे रखकर एवं सेकुलर क़े नाम पर हिन्दू और भारत विरोध पर आतुर रहती है। फिलिस्तीनियों व पाकिस्तानियों को सहायता करना आतंकवादियों को सहायता करने जैसा ही है, प्रत्येक देश को अपने देश की सुरक्षा करने क़ा अधिकार है इस नाते इजराईल ने जो कुछ किया है वही उपयुक्त है जिसकी निंदा नहीं होनी चाहिए। यह तो इजराईल जाँच करे कि शांति सहायता मिशन किस उद्देश्य को लेकर गाजापट्टी जा रहा था जनहानि से तो दुखी होना स्वाभाविक है लेकिन जो मानवाधिकार कार्यकर्ता आतंकवादियों क़े पक्ष में लगातार बयान देते हैं उनकी सुरक्षा की बात करते हैं आखिर उनका क्या दावा है इस पर भी विचार होना चाहिए कहीं ये सभी आतंकवादियों क़े पोषक तो नहीं। यहूदियों ने अपने परिश्रम से अपने राष्ट्र क़ा निर्माण किया है। पूरे देश की जनता सैनिक है और सम्पूर्ण विश्व क़ा अग्रणी देशों में है उसे अपनी सुरक्षा क़ा पूरा अधिकार है। भारत को भी उसी क़े समान सोचना चाहिए और भारत विरोधी आतंकवादी कैम्प जो पाकिस्तान में चल रहे हैं उस पर हमला कर समाप्त कर देना चाहिए। फिलिस्तीन कोई देश नहीं यह तो सम्पूर्ण इस्लामिक देशों क़े इजराईल क़े विरुद्ध आतंकवादी छावनी मात्र है जिसे पूरे अरब देश सहित सभी इस्लामिक देशों की सहायता प्राप्त है यदि ये इस्लामिक देश शांति चाहते तो फिलिस्तीनियों को जमीन उपलब्ध कराकर उसके समृद्धि क़ा रास्ता खोल सकते हैं, इस्लाम क़े प्रेम मोहब्बत को बाँट सकते हैं लेकिन इस्लाम में तो प्रेम क़ा स्थान हिंसा ने ले रखा है इसलिए विश्व मानवता को बचने वालों को ठीक से विचार करना होगा केवल इजराईल पर हाय तौबा मचने से काम नहीं चलेगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Pataakha Movie Song Hello Hello out: इस जबरदस्त गाने में मलाइका ने डांस मुव्स काफी दमदार है जो आपको झूमने पर मजबूर कर देंगे। गाने में मलाइका ब्लैक कलर के घाघरा-चोली में नजर आ रही हैं, जिसमें वो कहर ढ़ा रही हैं। मुंबई, 5 सितम्बरः बॉलीवुड की 'मुन्नी' मलाइका अरोड़ा एक बार फिर बड़े परदे पर धूम मचने वापस आ गई हैं। फिल्म 'पटाखा' से सिल्वर स्क्रीन पर वापसी कर रही मलाइका का आइटम सॉन्ग 'हैलो-हैलो' रिलीज हो चुका है। फिल्म पटाखा के इस गाने को मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखे हैं। वहीं इस गाने को अपने संगीत से सजाया है म्यूजिक डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने। गाने को 'हैलो-हैलो' गाने को गायिका रेखा भारद्वाज ने गाया है। इस जबरदस्त गाने में मलाइका ने डांस मुव्स काफी दमदार है जो आपको झूमने पर मजबूर कर देंगे। गाने में मलाइका ब्लैक कलर के घाघरा-चोली में नजर आ रही हैं, जिसमें वो कहर ढ़ा रही हैं। बता दें कि मलाइका ने अपने सिने करियर के दौरान कई आइटम नंबर किए हैं जिनमें 'छैय्या छैय्या', 'होठ रसीले', 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'अनारकली डिस्को चली' जैसी कई बॉलीवुड हिट्स हैं। अंतिम बार बड़े परदे मलाइका फिल्म 'डॉली की डोली' में आइटम नंबर में दिखाई दी थीं। फिल्म 'पटाखा' की कहानी दो सगी बहनों की है जो एक-दूसरे के खून की प्यासी हैं और आपस में खूब लड़ाई-झगड़ा करती हैं। फिल्म में 'दंगल गर्ल' सान्या मल्होत्रा और टीवी एक्ट्रेस राधिका मदान बहनों के किरदार में नजर आने वाली हैं। 'पटाखा' में सुनील ग्रोवर भी मुख्य भूमिका में हैं। बता दें कि डायरेक्टर विशाल भारद्वाज अपनी फिल्म 'पटाखा' को पहले 'छुरियां' नाम से रिलीज करने वाले थे, लेकिन बाद में इसका नाम बदल दिया गया। इस फिल्म में सुनील ग्रोवर के अलावा, सान्या मल्होत्रा, राधिका मदान और विजय राज लीड रोल में नजर आएंगे। ये फिल्म 28 सितंबर को रिलीज हो रही है।
Pataakha Movie Song Hello Hello out: इस जबरदस्त गाने में मलाइका ने डांस मुव्स काफी दमदार है जो आपको झूमने पर मजबूर कर देंगे। गाने में मलाइका ब्लैक कलर के घाघरा-चोली में नजर आ रही हैं, जिसमें वो कहर ढ़ा रही हैं। मुंबई, पाँच सितम्बरः बॉलीवुड की 'मुन्नी' मलाइका अरोड़ा एक बार फिर बड़े परदे पर धूम मचने वापस आ गई हैं। फिल्म 'पटाखा' से सिल्वर स्क्रीन पर वापसी कर रही मलाइका का आइटम सॉन्ग 'हैलो-हैलो' रिलीज हो चुका है। फिल्म पटाखा के इस गाने को मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखे हैं। वहीं इस गाने को अपने संगीत से सजाया है म्यूजिक डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने। गाने को 'हैलो-हैलो' गाने को गायिका रेखा भारद्वाज ने गाया है। इस जबरदस्त गाने में मलाइका ने डांस मुव्स काफी दमदार है जो आपको झूमने पर मजबूर कर देंगे। गाने में मलाइका ब्लैक कलर के घाघरा-चोली में नजर आ रही हैं, जिसमें वो कहर ढ़ा रही हैं। बता दें कि मलाइका ने अपने सिने करियर के दौरान कई आइटम नंबर किए हैं जिनमें 'छैय्या छैय्या', 'होठ रसीले', 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'अनारकली डिस्को चली' जैसी कई बॉलीवुड हिट्स हैं। अंतिम बार बड़े परदे मलाइका फिल्म 'डॉली की डोली' में आइटम नंबर में दिखाई दी थीं। फिल्म 'पटाखा' की कहानी दो सगी बहनों की है जो एक-दूसरे के खून की प्यासी हैं और आपस में खूब लड़ाई-झगड़ा करती हैं। फिल्म में 'दंगल गर्ल' सान्या मल्होत्रा और टीवी एक्ट्रेस राधिका मदान बहनों के किरदार में नजर आने वाली हैं। 'पटाखा' में सुनील ग्रोवर भी मुख्य भूमिका में हैं। बता दें कि डायरेक्टर विशाल भारद्वाज अपनी फिल्म 'पटाखा' को पहले 'छुरियां' नाम से रिलीज करने वाले थे, लेकिन बाद में इसका नाम बदल दिया गया। इस फिल्म में सुनील ग्रोवर के अलावा, सान्या मल्होत्रा, राधिका मदान और विजय राज लीड रोल में नजर आएंगे। ये फिल्म अट्ठाईस सितंबर को रिलीज हो रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में सात हफ्तों में पहली बार सोमवार को कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या 1,000 से कम रही। वहीं, एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि रोजाना संक्रमण के घटते मामलों के मद्देनजर लगता है कि दिल्ली कोविड-19 के शीर्ष स्तर को छू चुकी है। हालांकि, उन्होंने महामारी से निपटने के प्रयासों में किसी भी तरह की ढिलाई को लेकर आगाह किया। इस बीच, मामलों में कमी के लिए आप तथा भाजपा में श्रेय लेने की होड़ लग गयी। आप ने नए मामलों में आ रही कमी के लिए 'केजरीवाल मॉडल' को श्रेय दिया वहीं भाजपा ने कहा कि दिल्ली सरकार के तहत स्थिति बेकाबू होने के बाद केंद्र ने इसे 'नियंत्रित' किया। एक स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में सोमवार को कोरोना वायरस के 954 नए मामले दर्ज किए गए। परीक्षणों की संख्या भी कम रही। वहीं, ताजा बुलेटिन के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से 35 और मरीजों की मौत हो गयी और इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 3,663 हो गयी। वहीं कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,23,747 हो गयी। नगर में संक्रमित लोगों की संख्या में भी पिछले सप्ताह से लगातार गिरावट आ रही है। यहां अभी 15,166 लोग संक्रमित हैं जो 44 दिनों में सबसे कम है। मरीजों के स्वस्थ होने की दर लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच गयी। एक जून के बाद यह पहला मौका है जब 24 घंटे में 1,000 से कम नए मामले सामने आए। पिछले नौ दिनों से नए मामलों की संख्या 1,000-2,000 के बीच रही है। दिल्ली में 23 जून को सबसे अधिक 3,947 नए मामले सामने आए थ। नगर में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या 696 बनी हुयी है। कोविड-19 रोगियों के लिए 15,475 बेड में से 11,958 बेड खाली हैं वहीं कोविड देखभाल केंद्र में 9,454 बेड में से 7,289 बेड खाली हैं। आप ने महामारी पर काबू का श्रेय अपनी सरकार को दिया। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नीत दिल्ली सरकार ने इस लड़ाई को सफलतापूर्वक लड़ा है। सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर इस लड़ाई का नेतृत्व किया। डॉक्टर, नर्स, स्वच्छता कर्मी, पुलिस अधिकारी और अन्य कार्यकर्ता इस लड़ाई में एक साथ थे। उन्होंने कहा कि कोविड से लड़ाई का केजरीवाल मॉडल अब हमारे देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में चर्चा में है। सिंह पर निशाना साधते हुए दिल्ली भाजपा के महासचिव राजेश भाटिया ने कहा कि आप दिल्ली में अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रही है। भाटिया ने कहा, 'अब वे कह रहे हैं कि सामुदायिक प्रसार हो रहा है, अगर ऐसा है तो वे इसे रोकने के लिए क्या कर रहे थे। कोविड स्थिति दिल्ली सरकार के हाथ से निकल गई थी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस पर नियंत्रण में लाया गया। ' इस बीच दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोविड-19 से स्वस्थ होने के बाद सोमवार को काम फिर से शुरू कर दिया। Delhi News in Hindi (दिल्ली न्यूज़), Times now के हिंदी न्यूज़ वेबसाइट -Times Now Navbharat पर। साथ ही और भी Hindi News (हिंदी समाचार) के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें।
राष्ट्रीय राजधानी में सात हफ्तों में पहली बार सोमवार को कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या एक,शून्य से कम रही। वहीं, एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि रोजाना संक्रमण के घटते मामलों के मद्देनजर लगता है कि दिल्ली कोविड-उन्नीस के शीर्ष स्तर को छू चुकी है। हालांकि, उन्होंने महामारी से निपटने के प्रयासों में किसी भी तरह की ढिलाई को लेकर आगाह किया। इस बीच, मामलों में कमी के लिए आप तथा भाजपा में श्रेय लेने की होड़ लग गयी। आप ने नए मामलों में आ रही कमी के लिए 'केजरीवाल मॉडल' को श्रेय दिया वहीं भाजपा ने कहा कि दिल्ली सरकार के तहत स्थिति बेकाबू होने के बाद केंद्र ने इसे 'नियंत्रित' किया। एक स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में सोमवार को कोरोना वायरस के नौ सौ चौवन नए मामले दर्ज किए गए। परीक्षणों की संख्या भी कम रही। वहीं, ताजा बुलेटिन के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से पैंतीस और मरीजों की मौत हो गयी और इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर तीन,छः सौ तिरेसठ हो गयी। वहीं कुल मामलों की संख्या बढ़कर एक,तेईस,सात सौ सैंतालीस हो गयी। नगर में संक्रमित लोगों की संख्या में भी पिछले सप्ताह से लगातार गिरावट आ रही है। यहां अभी पंद्रह,एक सौ छयासठ लोग संक्रमित हैं जो चौंतालीस दिनों में सबसे कम है। मरीजों के स्वस्थ होने की दर लगभग पचासी प्रतिशत तक पहुंच गयी। एक जून के बाद यह पहला मौका है जब चौबीस घंटाटे में एक,शून्य से कम नए मामले सामने आए। पिछले नौ दिनों से नए मामलों की संख्या एक,शून्य-दो,शून्य के बीच रही है। दिल्ली में तेईस जून को सबसे अधिक तीन,नौ सौ सैंतालीस नए मामले सामने आए थ। नगर में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या छः सौ छियानवे बनी हुयी है। कोविड-उन्नीस रोगियों के लिए पंद्रह,चार सौ पचहत्तर बेड में से ग्यारह,नौ सौ अट्ठावन बेड खाली हैं वहीं कोविड देखभाल केंद्र में नौ,चार सौ चौवन बेड में से सात,दो सौ नवासी बेड खाली हैं। आप ने महामारी पर काबू का श्रेय अपनी सरकार को दिया। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नीत दिल्ली सरकार ने इस लड़ाई को सफलतापूर्वक लड़ा है। सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर इस लड़ाई का नेतृत्व किया। डॉक्टर, नर्स, स्वच्छता कर्मी, पुलिस अधिकारी और अन्य कार्यकर्ता इस लड़ाई में एक साथ थे। उन्होंने कहा कि कोविड से लड़ाई का केजरीवाल मॉडल अब हमारे देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में चर्चा में है। सिंह पर निशाना साधते हुए दिल्ली भाजपा के महासचिव राजेश भाटिया ने कहा कि आप दिल्ली में अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रही है। भाटिया ने कहा, 'अब वे कह रहे हैं कि सामुदायिक प्रसार हो रहा है, अगर ऐसा है तो वे इसे रोकने के लिए क्या कर रहे थे। कोविड स्थिति दिल्ली सरकार के हाथ से निकल गई थी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस पर नियंत्रण में लाया गया। ' इस बीच दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोविड-उन्नीस से स्वस्थ होने के बाद सोमवार को काम फिर से शुरू कर दिया। Delhi News in Hindi , Times now के हिंदी न्यूज़ वेबसाइट -Times Now Navbharat पर। साथ ही और भी Hindi News के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें।
Pradosh Vrat 2022: प्रदोष व्रत पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना भोले शंकर का झेलना पड़ेगा गुस्सा! - प्रदोष व्रत कर रही महिलाएं इस बात का ख्याल रखें कि आप भोलेनाथ की पूजा तो करें लेकिन भूलकर भी इस दिन शिवलिंग को न छूएं। इससे मां पार्वती नाराज हो जाती हैं। - शिवलिंग पर कभी भी आपको हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। हल्दी को महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में पूजा करते हुए गलती से भी शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। - प्रदोष व्रत कर रहे भक्त इस बात का ख्याल रखें कि काले रंग के कपड़े आपको नहीं पहनने हैं। आप इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहन सकते हैं। आप इस दिन सफेद रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं। - भगवान शिव की पूजा में कभी भी आपको केतकी के फूल, तुलसी की पत्तियां, नारियल का पानी, शंख का जल, कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे भोलेनाथ का गुस्सा आपको झेलना पड़ सकता है। - जो लोग प्रदोष व्रत रख रहे हैं तो उन्हें बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, लहसुन, प्याज, नॉनवेज या शराब करने से बचना चाहिए।
Pradosh Vrat दो हज़ार बाईस: प्रदोष व्रत पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना भोले शंकर का झेलना पड़ेगा गुस्सा! - प्रदोष व्रत कर रही महिलाएं इस बात का ख्याल रखें कि आप भोलेनाथ की पूजा तो करें लेकिन भूलकर भी इस दिन शिवलिंग को न छूएं। इससे मां पार्वती नाराज हो जाती हैं। - शिवलिंग पर कभी भी आपको हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। हल्दी को महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में पूजा करते हुए गलती से भी शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। - प्रदोष व्रत कर रहे भक्त इस बात का ख्याल रखें कि काले रंग के कपड़े आपको नहीं पहनने हैं। आप इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहन सकते हैं। आप इस दिन सफेद रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं। - भगवान शिव की पूजा में कभी भी आपको केतकी के फूल, तुलसी की पत्तियां, नारियल का पानी, शंख का जल, कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे भोलेनाथ का गुस्सा आपको झेलना पड़ सकता है। - जो लोग प्रदोष व्रत रख रहे हैं तो उन्हें बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, लहसुन, प्याज, नॉनवेज या शराब करने से बचना चाहिए।
मुंबईः हाल ही में अनिल अंबानी ने टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। अब रिलायंस कम्युनिकेशंस के कर्जदाताओं ने कंपनी से अनिल अंबानी और चार अन्य अधिकारीयों के इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है। कर्जदाताओं ने अंबानी को दिवाला एवं ऋणशोधन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है। BSE में दी गई फाइलिंग में RCOM ने कहा था कि उसके कर्जदाताओं की समिति (COC) की मीटिंग 20 नवंबर को हुई थी। इसमें कहा गया था कि, 'समिति ने सर्वसम्मति से कहा कि इस्तीफों को मंजूर नहीं किया जा सकता है। ' कंपनी द्वारा जारी तिमाही नतीजों के मुताबिक, कंपनी को 30 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ था, जो कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा नुकसान है। इसके बाद ही कंपनी ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अनिल अंबानी के अतिरिक्त छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने अपने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को त्यागपत्र दिया था। वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को अपने पद से इस्तीफा दिया था। अब कर्जदाताओं द्वारा ये इस्तीफे नामंजूर कर दिए गए हैं।
मुंबईः हाल ही में अनिल अंबानी ने टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। अब रिलायंस कम्युनिकेशंस के कर्जदाताओं ने कंपनी से अनिल अंबानी और चार अन्य अधिकारीयों के इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है। कर्जदाताओं ने अंबानी को दिवाला एवं ऋणशोधन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है। BSE में दी गई फाइलिंग में RCOM ने कहा था कि उसके कर्जदाताओं की समिति की मीटिंग बीस नवंबर को हुई थी। इसमें कहा गया था कि, 'समिति ने सर्वसम्मति से कहा कि इस्तीफों को मंजूर नहीं किया जा सकता है। ' कंपनी द्वारा जारी तिमाही नतीजों के मुताबिक, कंपनी को तीस हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ था, जो कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा नुकसान है। इसके बाद ही कंपनी ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अनिल अंबानी के अतिरिक्त छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने अपने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने पंद्रह नवंबर को त्यागपत्र दिया था। वहीं रायना कारानी ने चौदह नवंबर और सुरेश रंगाचर ने तेरह नवंबर को अपने पद से इस्तीफा दिया था। अब कर्जदाताओं द्वारा ये इस्तीफे नामंजूर कर दिए गए हैं।
बच्चे पैदा करने को किराये की कोख का प्रचलन बढ़ने के बाद उत्तराखंड में धामी सरकार अब सरोगेसी ऐक्ट तैयार करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया गया है। यह प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। विदित है कि अब काफी लोग बच्चे पैदा करने के लिए सरोगेसी की मदद लेते हैं। इसमें किसी अन्य महिला की सहमति से किराये की कोख के जरिए बच्चे पैदा किए जाते हैं। हालांकि इसके लिए उत्तराखंड में अभी तक कोई नियम नहीं है। इस वजह से कई बार लोग धोखाधड़ी और अन्य कई तरह की परेशानियों में फंस जाते हैं। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर सरोगेसी ऐक्ट तैयार करने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस ऐक्ट में केंद्रीय नियमों के साथ राज्य की ओर से भी कुछ प्रस्ताव रखे जाएंगे। जिससे भविष्य में सरोगेसी के दौरान नियमों और कायदे कानूनों का पालन संभव हो सके। स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि सरोगेसी ऐक्ट के लिए प्रस्ताव बनाने का काम शुरू हो गया है। इसे जल्द अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए लाया जाएगा। जानकार बाते हैं कि सरोगेसी (किराये की कोख से बच्चा पैदा करना) के लिए सख्त कानून की जरूरत इसलिए है क्योंकि इसमें कमजोर महिला के शोषण का खतरा रहता है। इसके साथ ही इस प्रक्रिया में स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक जोखिम होते हैं। जिस तेजी से समाज में सरोगेसी बढ़ रही है उसे देखते हुए अब इसके लिए सशक्त कानून की जरूरत महसूस हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया और उसके बाद कई बार आपसी विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है जिससे परेशानी खड़ी होने का खतरा रहता है। नैतिक विषय होने की वजह से भी इसमें सख्त कानून की जरूरत पड़ रही है।
बच्चे पैदा करने को किराये की कोख का प्रचलन बढ़ने के बाद उत्तराखंड में धामी सरकार अब सरोगेसी ऐक्ट तैयार करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया गया है। यह प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। विदित है कि अब काफी लोग बच्चे पैदा करने के लिए सरोगेसी की मदद लेते हैं। इसमें किसी अन्य महिला की सहमति से किराये की कोख के जरिए बच्चे पैदा किए जाते हैं। हालांकि इसके लिए उत्तराखंड में अभी तक कोई नियम नहीं है। इस वजह से कई बार लोग धोखाधड़ी और अन्य कई तरह की परेशानियों में फंस जाते हैं। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर सरोगेसी ऐक्ट तैयार करने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस ऐक्ट में केंद्रीय नियमों के साथ राज्य की ओर से भी कुछ प्रस्ताव रखे जाएंगे। जिससे भविष्य में सरोगेसी के दौरान नियमों और कायदे कानूनों का पालन संभव हो सके। स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि सरोगेसी ऐक्ट के लिए प्रस्ताव बनाने का काम शुरू हो गया है। इसे जल्द अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए लाया जाएगा। जानकार बाते हैं कि सरोगेसी के लिए सख्त कानून की जरूरत इसलिए है क्योंकि इसमें कमजोर महिला के शोषण का खतरा रहता है। इसके साथ ही इस प्रक्रिया में स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक जोखिम होते हैं। जिस तेजी से समाज में सरोगेसी बढ़ रही है उसे देखते हुए अब इसके लिए सशक्त कानून की जरूरत महसूस हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया और उसके बाद कई बार आपसी विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है जिससे परेशानी खड़ी होने का खतरा रहता है। नैतिक विषय होने की वजह से भी इसमें सख्त कानून की जरूरत पड़ रही है।
शरद पवार ने गुरुवार को कहा कि एनसीपी पर पूरी तरह से उनका हक है. वो ही पार्टी के अध्यक्ष हैं. गुरुवार को बागी विधायकों और नेताओं को NCP से निष्काशित कर दिया गया. रेलव का दिल्ली की 2 मस्जिदों को नोटिस, 15 दिनों में अवैध कब्जा हटा लें, वरना. .
शरद पवार ने गुरुवार को कहा कि एनसीपी पर पूरी तरह से उनका हक है. वो ही पार्टी के अध्यक्ष हैं. गुरुवार को बागी विधायकों और नेताओं को NCP से निष्काशित कर दिया गया. रेलव का दिल्ली की दो मस्जिदों को नोटिस, पंद्रह दिनों में अवैध कब्जा हटा लें, वरना. .
कोलकाताः पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई भीषण हिंसा और रक्तपात के लिए राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने 'राम, श्याम और वाम' को जिम्मेवार करार दिया है। उन्होंने 'राम, श्याम और वाम' के जरिए भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दलों पर हमला बोला है। सीएम बनर्जी ने कहा कि, 'मेरा कोई अपराध हो तो जनता मुझे सजा दे सकती है। लेकिन मैं यह कहनी चाहती हूँ कि जनता ने मुझे आशीर्वाद दिया। हम महात्मा गाँधी, सुभाषचंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद जैसे लोगों के अनुयायी हैं। ' उन्होंने आगे कहा कि, 'मैं हिंसा का समर्थन नहीं करती, ना ही नफरत एवं हिंसा की सियासत करती हूँ। मुझे यह कहते हुए बेहद दुख हो रहा है कि राम, श्याम और वाम ने मिलकर चुनाव में बाधा डालने के लिए हिंसा की। ' ममता बनर्जी ने आगे कहा कि ये हिंसा राज्य के कुछ ही इलाकों में हुई हैं। 70 हजार बूथों में से केवल 60 बूथों पर हिंसा हुई। इस हिंसा के लिए उन्होंने भाजपा को दोषी ठहराते हुए कहा कि भाजपा को राजनीति छोड़ देनी चाहिए। सीएम ममता ने कहा कि, 'लोकतंत्र की हत्या करने वालों को सियासत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मैं लंबे समय तक चुप रही, मगर मेरे सब्र की भी एक सीमा है। सत्ताधारी भाजपा ने फर्जी प्रोपगेंडा फैलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। ' सीएम ममता ने बंगाल में हुई हिंसा की जाँच के लिए पुलिस को भी खुली छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस पता लगाएगी कि इस हिंसा के पीछे कौन है। उन्होंने दावा किया कि, मारे गए लोगों में सबसे अधिक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता हैं। ममता ने हिंसा में जान गँवाने वाले लोगों के परिवार वालों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि हिंसा में 19 लोगों की मौत हुई है और उनके परिजनों को सरकार 2-2 लाख रुपए मुआवजा देगी। इसके साथ ही, परिवार के एक सदस्य को स्पेशल होमगार्ड की नौकरी दी जाएगी। वहीं, पंचायत चुनाव में मिली प्रचंड जीत पर सीएम ममता ने लोगों को बधाई भी दी। राज्य चुनाव आयोग (SEC) के बुधवार की शाम बजे तक के आँकड़ों के अनुसर, TMC ने 63,229 ग्राम पंचायत सीटों में से 34,901 पर जीत हासिल कर ली है, जबकि अन्य 613 पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। बता दें कि, बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा का पुराना इतिहास रहा है, ये तब भी होती थी, जब वहां CPM का शासन था, जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) वहां अपनीं जड़ें जमानें की कोशिश कर रही थी और भाजपा का कोई नामोनिशान नहीं था। बीते दिनों बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा के डर से 133 लोगों ने पलायन कर पड़ोसी राज्य असम में शरण ली है, इनमे से अधिकतर भाजपा-कांग्रेस और लेफ्ट के कार्यकर्ता हैं। वहीं, BSF के के DIG सुरजीत सिंह गुलेरिया ने कहा था कि मतदान के दौरान संवेदनशील बूथों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उन्होंने बंगाल चुनाव आयोग से ऐसे इलाकों की सूची मांगी थी, जहाँ हिंसा भड़कने की आशंका हो, लेकिन उन्हें वो सूची नहीं दी गई। बता दें कि इसके पहले विधानसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा के शिकार हुए हज़ारों लोगों ने असम में जाकर शरण ली थी, जिसमे अधिकतर भाजपा कार्यकर्ता थे। इसे लेकर राज्य की सियासत में काफी हंगामा मचा था। यहाँ तक कि, सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई थी कि, बंगाल चुनाव के दौरान 1 लाख लोगों ने पलायन किया है। रामनवमी पर बंगाल में हुई हिंसा और शोभायात्रा पर हुए हमलों पर केंद्र की फैक्ट फाइंडिंग टीम बंगाल पहुंची थी, लेकिन उन्हें पीड़ितों से मिलने ही नहीं दिया गया। जिसके बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने NIA को जांच सौंपी थी, लेकिन NIA ने अदालत को बताया था कि, बंगाल सरकार और पुलिस उन्हें हिंसा से संबंधित दस्तावेज और जानकारी ही नहीं दे रही है, जिससे जांच अटकी हुई है। इस तरह ये मामला भी ठंडे बास्ते में चला गया था, हालाँकि हाई कोर्ट ने खुद यह स्वीकार किया था कि, शोभायात्रा पर हमला एक सुनियोजित साजिश थी और ईंट-पत्थर पहले ही छतों पर जमा कर लिए गए थे। वहीं, इस हिंसा के लिए भी सीएम ममता बनर्जी ने विरोधी दलों को ही दोष दिया था। 'वरिष्ठ मंत्रियों को हटा सकती है BJP', NCP को मिल सकते हैं 4 मंत्री पद!
कोलकाताः पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई भीषण हिंसा और रक्तपात के लिए राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने 'राम, श्याम और वाम' को जिम्मेवार करार दिया है। उन्होंने 'राम, श्याम और वाम' के जरिए भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दलों पर हमला बोला है। सीएम बनर्जी ने कहा कि, 'मेरा कोई अपराध हो तो जनता मुझे सजा दे सकती है। लेकिन मैं यह कहनी चाहती हूँ कि जनता ने मुझे आशीर्वाद दिया। हम महात्मा गाँधी, सुभाषचंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद जैसे लोगों के अनुयायी हैं। ' उन्होंने आगे कहा कि, 'मैं हिंसा का समर्थन नहीं करती, ना ही नफरत एवं हिंसा की सियासत करती हूँ। मुझे यह कहते हुए बेहद दुख हो रहा है कि राम, श्याम और वाम ने मिलकर चुनाव में बाधा डालने के लिए हिंसा की। ' ममता बनर्जी ने आगे कहा कि ये हिंसा राज्य के कुछ ही इलाकों में हुई हैं। सत्तर हजार बूथों में से केवल साठ बूथों पर हिंसा हुई। इस हिंसा के लिए उन्होंने भाजपा को दोषी ठहराते हुए कहा कि भाजपा को राजनीति छोड़ देनी चाहिए। सीएम ममता ने कहा कि, 'लोकतंत्र की हत्या करने वालों को सियासत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मैं लंबे समय तक चुप रही, मगर मेरे सब्र की भी एक सीमा है। सत्ताधारी भाजपा ने फर्जी प्रोपगेंडा फैलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। ' सीएम ममता ने बंगाल में हुई हिंसा की जाँच के लिए पुलिस को भी खुली छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस पता लगाएगी कि इस हिंसा के पीछे कौन है। उन्होंने दावा किया कि, मारे गए लोगों में सबसे अधिक तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। ममता ने हिंसा में जान गँवाने वाले लोगों के परिवार वालों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि हिंसा में उन्नीस लोगों की मौत हुई है और उनके परिजनों को सरकार दो-दो लाख रुपए मुआवजा देगी। इसके साथ ही, परिवार के एक सदस्य को स्पेशल होमगार्ड की नौकरी दी जाएगी। वहीं, पंचायत चुनाव में मिली प्रचंड जीत पर सीएम ममता ने लोगों को बधाई भी दी। राज्य चुनाव आयोग के बुधवार की शाम बजे तक के आँकड़ों के अनुसर, TMC ने तिरेसठ,दो सौ उनतीस ग्राम पंचायत सीटों में से चौंतीस,नौ सौ एक पर जीत हासिल कर ली है, जबकि अन्य छः सौ तेरह पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। बता दें कि, बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा का पुराना इतिहास रहा है, ये तब भी होती थी, जब वहां CPM का शासन था, जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस वहां अपनीं जड़ें जमानें की कोशिश कर रही थी और भाजपा का कोई नामोनिशान नहीं था। बीते दिनों बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा के डर से एक सौ तैंतीस लोगों ने पलायन कर पड़ोसी राज्य असम में शरण ली है, इनमे से अधिकतर भाजपा-कांग्रेस और लेफ्ट के कार्यकर्ता हैं। वहीं, BSF के के DIG सुरजीत सिंह गुलेरिया ने कहा था कि मतदान के दौरान संवेदनशील बूथों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उन्होंने बंगाल चुनाव आयोग से ऐसे इलाकों की सूची मांगी थी, जहाँ हिंसा भड़कने की आशंका हो, लेकिन उन्हें वो सूची नहीं दी गई। बता दें कि इसके पहले विधानसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा के शिकार हुए हज़ारों लोगों ने असम में जाकर शरण ली थी, जिसमे अधिकतर भाजपा कार्यकर्ता थे। इसे लेकर राज्य की सियासत में काफी हंगामा मचा था। यहाँ तक कि, सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई थी कि, बंगाल चुनाव के दौरान एक लाख लोगों ने पलायन किया है। रामनवमी पर बंगाल में हुई हिंसा और शोभायात्रा पर हुए हमलों पर केंद्र की फैक्ट फाइंडिंग टीम बंगाल पहुंची थी, लेकिन उन्हें पीड़ितों से मिलने ही नहीं दिया गया। जिसके बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने NIA को जांच सौंपी थी, लेकिन NIA ने अदालत को बताया था कि, बंगाल सरकार और पुलिस उन्हें हिंसा से संबंधित दस्तावेज और जानकारी ही नहीं दे रही है, जिससे जांच अटकी हुई है। इस तरह ये मामला भी ठंडे बास्ते में चला गया था, हालाँकि हाई कोर्ट ने खुद यह स्वीकार किया था कि, शोभायात्रा पर हमला एक सुनियोजित साजिश थी और ईंट-पत्थर पहले ही छतों पर जमा कर लिए गए थे। वहीं, इस हिंसा के लिए भी सीएम ममता बनर्जी ने विरोधी दलों को ही दोष दिया था। 'वरिष्ठ मंत्रियों को हटा सकती है BJP', NCP को मिल सकते हैं चार मंत्री पद!
Weekly Love Horoscope 28 November-4 December: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हमारे सौर मंडल में कुल 9 ग्रह हैं, ये सभी हमारे जीवन के किसी न किसी क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। कोई पर्सनल लाइफ को तो कोई लव लाइफ को। मेष साप्ताहिक लव राशिफल (Aries weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि प्रेम में पड़े इस राशि के लोग इस समय काफी भावुक हो सकते हैं और अपने साथी के सामने अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। आपका प्रेमी भी आपकी भावनाओं की कद्र करेगा और आपको दिलासा देता हुआ नजर आएगा। इस समय आपके प्रेम जीवन में अनुकूल बदलाव आने के पूरे आसार हैं। जो नवविवाहित लोगों काफी समय से अपने दांपत्य जीवन को विस्तार देने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें इस दौरान किसी नन्हें मेहमान के आने की खुशखबरी मिलेगी। यह खबर आप दोनों को एक दूसरे के करीब आने का मौका देगी। वृषभ साप्ताहिक लव राशिफल (Taurus weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि प्रिय के साथ कहीं बाहर जाने की योजना अचानक रद्द होने से आप दुखी हो सकते हैं। क्योंकि मुमकिन है कि कार्यक्षेत्र से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम अचानक प्रेमी के हाथ लग जाए, जिससे वह कहीं घूमने जाने से मना कर दें। हालांकि आपको इससे नीचे उतरे बिना अपने प्रेमी का मनोबल बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके अलावा इस सप्ताह आप अपने जीवनसाथी का जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे महत्वपूर्ण दिन भूल सकते हैं। जिससे जीवनसाथी के साथ आपका विवाद हो सकता है। हालांकि उन्हें कोई खूबसूरत तोहफा या सरप्राइज देकर आप उनके गुस्से को शांत करने और अंत में सबकुछ ठीक करने में भी सफल रहेंगे। मिथुन साप्ताहिक लव राशिफल (Gemini weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि अगर आप अपने प्रेमी के साथ 'डेट' पर जा रहे हैं तो उस दौरान आपको ज्यादा फोन के इस्तेमाल से बचना होगा। नहीं तो इससे न सिर्फ पार्टनर को बुरा लग सकता है बल्कि इस बात को लेकर आप दोनों के बीच बड़ा विवाद होने की भी संभावना है। ऐसे में जब आप अपने प्रेमी के साथ हों तो आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप फोन का इस्तेमाल न करें। इस सप्ताह के मध्य में काम और अन्य ज़िम्मेदारियों का बोझ आपको सामान्य से थोड़ा अधिक व्यस्त बना सकता है। ऐसे में अचानक आपकी व्यस्त दिनचर्या के कारण आपका जीवनसाथी आप पर शक कर सकता है। हालाँकि, जब आप अंत में उसे अपनी दुविधाओं के बारे में बताएंगे, तो वह आपको समझेगा और आपको गले लगाएगा। कर्क साप्ताहिक लव राशिफल (Cancer weekly love horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह अगर आप किसी से प्यार करते हैं और फिर भी अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं तो आपका यह एकतरफा लगाव आपकी खुशियों को खत्म कर सकता है। क्योंकि हो सकता है कि इस दौरान आपके सामने कुछ ऐसा आ जाए जिससे आपका दिल टूट जाए। जीवनसाथी की अजीब हरकतों के कारण इस सप्ताह आप उन पर शक कर सकते हैं। इस वजह से आप अपने वैवाहिक जीवन में सही तालमेल बिठाने में भी काफी दिक्कत महसूस करेंगे। सिंह साप्ताहिक लव राशिफल (Leo weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि यदि आप वास्तव में किसी से प्रेम करते हैं तो इस सप्ताह आप अपने प्रेमी के साथ प्रेम विवाह करने का निर्णय ले सकते हैं। इस दौरान आपके रिश्ते और मजबूत होंगे। इस सप्ताह मुमकिन है कि शुरुआत में आपको अपने जीवन साथी से उम्मीद से कम अटेंशन, प्यार और रोमांस मिले। लेकिन सप्ताह के मध्य के बाद स्थितियां बेहतर होती नजर आएंगी। उस समय आपको लगेगा कि वह आपके काम में ही व्यस्त था, जिसके बाद आप दोनों के बीच प्यार और बढ़ेगा। कन्या साप्ताहिक लव राशिफल (Virgo weekly love horoscope) गणेशजी कहते हैं दिल से इस सप्ताह आप अपने पार्टनर को खुश करने की कोशिश करते हुए नजर आ सकते हैं। यदि आप दोनों के बीच में किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से दूरियां थी तो वह इस दौरान दूर हो सकती है। प्यार की गाड़ी पटरी पर लौटेगी और आप फिर से प्यार के रंग में रंगे नजर आएंगे। आप सामान्य से कहीं अधिक आकर्षित महसूस कर सकते हैं। ऐसे में आपको उनके लिए कुछ खास काम करने की जरूरत होगी। इसके लिए आप उन्हें कोई गिफ्ट दे सकते हैं या फिर बाहर खाने पर ले जाते हुए उन्हें सरप्राइज देकर उनका दिल भी जीत सकते हैं। तुला साप्ताहिक लव राशिफल (Libra weekly love horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह आपको महसूस होगा कि आप अपने प्रेमी को खुश करने के लिए अपनी इच्छा के विरुद्ध कई काम कर रहे हैं। इसलिए अपने इस स्वभाव को सुधारते हुए आपको प्रेम संबंधों में गुलाम की तरह व्यवहार करने से बचना होगा। इस सप्ताह घरेलू कामकाज की अधिकता आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां ला सकती है। इस दौरान आपको लगेगा कि आप अपने वैवाहिक जीवन का असली सुख नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में आप भी छोटी-छोटी बातों पर अपने पार्टनर पर गुस्सा होते हुए नजर आएंगे। लेकिन जैसे ही आपको अपने जीवनसाथी की व्यस्तता की असल वजह का पता चलेगा, आपका गुस्सैल स्वभाव नरम पड़ जाएगा और आप अपने पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक ट्रिप पर जाने का प्लान बनाएंगे। वृश्चिक साप्ताहिक लव राशिफल (Scorpio weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह के मध्य में आपकी प्रगति होगी और आपका प्रेमी दिल की गहराई से आपकी प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं पाएगा। इस दौरान आप दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब आने के कई खूबसूरत मौके भी मिलेंगे। जिसका फायदा उठाकर आप दोनों खुद को एक दूसरे की बाहों में पाएंगे। इस सप्ताह आपके जीवन साथी का मिजाज सामान्य से काफी खुशनुमा रहेगा। इस वजह से इस बात के योग बन रहे हैं कि आपको अपने पार्टनर से कोई तोहफा या किसी तरह का सरप्राइज मिल सकता है। धनु साप्ताहिक लव राशिफल (Sagittarius weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह आपकी उन्नति होगी, जिससे आपके प्रेमी आपकी जमकर तारीफ करने और दिल से आपकी सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस दौरान आप दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब आने के कई खूबसूरत मौके भी मिलेंगे। जिसका फायदा उठाकर आप दोनों खुद को एक दूसरे की बाहों में पाएंगे। आपके जीवन साथी का वह बेहतरीन पहलू आपके सामने प्रदर्शित होगा, जिसकी आप लंबे समय से इच्छा कर रहे थे। इस दौरान आपको अपने पार्टनर से प्यार और रोमांस तो मिलेगा ही, साथ ही आप उनके साथ उन पुराने दिनों को भी फिर से जिएंगे, जब आपकी नई-नई शादी हुई थी। मकर साप्ताहिक लव राशिफल (Capricorn weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि यदि आप अभी तक अविवाहित हैं और सच्चे प्रेमी की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो इस सप्ताह किसी मित्र या घनिष्ठ मित्र की मदद से आपको किसी खास व्यक्ति से मिलने का अवसर प्राप्त होगा, जो पहली बार में ही आपके प्रेम में पड़ जाएगा। बैठक। वहीं उन्हें देखकर आपको भी एहसास होगा कि आखिरकार आपका लंबा इंतजार खत्म हुआ. नवविवाहितों की बात करें तो इस सप्ताह आप अपना परिवार नियोजन करने का मन बना सकते हैं। हालाँकि, इसके बारे में सोचने से पहले, आपको अपने साथी को अपनी इच्छा के बारे में बताना होगा। कुंभ साप्ताहिक लव राशिफल (Aquarius weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह यदि आप अपने प्रिय को अपने परिजनों से मिलाने की सोच रहे हैं तो अभी से ऐसा करने से बचना चाहिए। मुमकिन है इस दौरान माता-पिता से आपको अपने प्रेमी के बारे में अनुकूल समाचार सुनने को न मिले। आप महसूस कर सकते हैं कि आपके वैवाहिक संबंधों की डोर खुरदुरी है और आप इन परस्पर विरोधी स्थितियों को अपने मन में अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ साझा कर सकते हैं। लेकिन आपको यह समझना होगा कि अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में दूसरों को बताकर बेशक आप खुद को सांत्वना देते हैं, लेकिन इससे आपका पार्टनर आपसे दूर हो सकता है। मीन साप्ताहिक लव राशिफल (Pisces weekly love Horoscope) गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह प्रेम संबंधों के चलते किसी सामाजिक कार्यक्रम में जाने का कार्यक्रम टाल सकते हैं। हालांकि आपको ऐसा कुछ भी करने से बचना होगा, क्योंकि ऐसा करने से आप समाज के कई सम्मानित लोगों से मिलने का एक अच्छा अवसर खो सकते हैं। ऐसी कई स्थितियाँ उत्पन्न होंगी जब आप अपने वैवाहिक जीवन में स्थिरता की तलाश करते हुए नज़र आएंगे। उस दौरान आप तमाम कोशिशों के बाद भी जीवन में स्थिरता नहीं ला पाएंगे और तब मुमकिन है कि आप परेशान होकर अपना सारा गुस्सा अपने जीवन साथी पर निकालें। Shani Meen Rashifal 2023: नुकसान-खराब सेहत, शनि की साढ़ेसाती 2023 में करेगी मीन वालों को परेशान, कैसा होगा असर? Shani Kumbh Rashifal 2023: हताशा-निराशा और मुसीबतें, शनि की साढ़ेसाती में बीतेगा साल 2023? Shani Makar Rashifal 2023: उतरती साढ़ेसाती से फायदा होगा-नुकसान भी, कैसा रहेगा ये साल आपके लिए?
Weekly Love Horoscope अट्ठाईस नवंबरember-चार दिसंबरember: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हमारे सौर मंडल में कुल नौ ग्रह हैं, ये सभी हमारे जीवन के किसी न किसी क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। कोई पर्सनल लाइफ को तो कोई लव लाइफ को। मेष साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि प्रेम में पड़े इस राशि के लोग इस समय काफी भावुक हो सकते हैं और अपने साथी के सामने अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। आपका प्रेमी भी आपकी भावनाओं की कद्र करेगा और आपको दिलासा देता हुआ नजर आएगा। इस समय आपके प्रेम जीवन में अनुकूल बदलाव आने के पूरे आसार हैं। जो नवविवाहित लोगों काफी समय से अपने दांपत्य जीवन को विस्तार देने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें इस दौरान किसी नन्हें मेहमान के आने की खुशखबरी मिलेगी। यह खबर आप दोनों को एक दूसरे के करीब आने का मौका देगी। वृषभ साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि प्रिय के साथ कहीं बाहर जाने की योजना अचानक रद्द होने से आप दुखी हो सकते हैं। क्योंकि मुमकिन है कि कार्यक्षेत्र से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम अचानक प्रेमी के हाथ लग जाए, जिससे वह कहीं घूमने जाने से मना कर दें। हालांकि आपको इससे नीचे उतरे बिना अपने प्रेमी का मनोबल बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके अलावा इस सप्ताह आप अपने जीवनसाथी का जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे महत्वपूर्ण दिन भूल सकते हैं। जिससे जीवनसाथी के साथ आपका विवाद हो सकता है। हालांकि उन्हें कोई खूबसूरत तोहफा या सरप्राइज देकर आप उनके गुस्से को शांत करने और अंत में सबकुछ ठीक करने में भी सफल रहेंगे। मिथुन साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि अगर आप अपने प्रेमी के साथ 'डेट' पर जा रहे हैं तो उस दौरान आपको ज्यादा फोन के इस्तेमाल से बचना होगा। नहीं तो इससे न सिर्फ पार्टनर को बुरा लग सकता है बल्कि इस बात को लेकर आप दोनों के बीच बड़ा विवाद होने की भी संभावना है। ऐसे में जब आप अपने प्रेमी के साथ हों तो आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप फोन का इस्तेमाल न करें। इस सप्ताह के मध्य में काम और अन्य ज़िम्मेदारियों का बोझ आपको सामान्य से थोड़ा अधिक व्यस्त बना सकता है। ऐसे में अचानक आपकी व्यस्त दिनचर्या के कारण आपका जीवनसाथी आप पर शक कर सकता है। हालाँकि, जब आप अंत में उसे अपनी दुविधाओं के बारे में बताएंगे, तो वह आपको समझेगा और आपको गले लगाएगा। कर्क साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह अगर आप किसी से प्यार करते हैं और फिर भी अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं तो आपका यह एकतरफा लगाव आपकी खुशियों को खत्म कर सकता है। क्योंकि हो सकता है कि इस दौरान आपके सामने कुछ ऐसा आ जाए जिससे आपका दिल टूट जाए। जीवनसाथी की अजीब हरकतों के कारण इस सप्ताह आप उन पर शक कर सकते हैं। इस वजह से आप अपने वैवाहिक जीवन में सही तालमेल बिठाने में भी काफी दिक्कत महसूस करेंगे। सिंह साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि यदि आप वास्तव में किसी से प्रेम करते हैं तो इस सप्ताह आप अपने प्रेमी के साथ प्रेम विवाह करने का निर्णय ले सकते हैं। इस दौरान आपके रिश्ते और मजबूत होंगे। इस सप्ताह मुमकिन है कि शुरुआत में आपको अपने जीवन साथी से उम्मीद से कम अटेंशन, प्यार और रोमांस मिले। लेकिन सप्ताह के मध्य के बाद स्थितियां बेहतर होती नजर आएंगी। उस समय आपको लगेगा कि वह आपके काम में ही व्यस्त था, जिसके बाद आप दोनों के बीच प्यार और बढ़ेगा। कन्या साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं दिल से इस सप्ताह आप अपने पार्टनर को खुश करने की कोशिश करते हुए नजर आ सकते हैं। यदि आप दोनों के बीच में किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से दूरियां थी तो वह इस दौरान दूर हो सकती है। प्यार की गाड़ी पटरी पर लौटेगी और आप फिर से प्यार के रंग में रंगे नजर आएंगे। आप सामान्य से कहीं अधिक आकर्षित महसूस कर सकते हैं। ऐसे में आपको उनके लिए कुछ खास काम करने की जरूरत होगी। इसके लिए आप उन्हें कोई गिफ्ट दे सकते हैं या फिर बाहर खाने पर ले जाते हुए उन्हें सरप्राइज देकर उनका दिल भी जीत सकते हैं। तुला साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह आपको महसूस होगा कि आप अपने प्रेमी को खुश करने के लिए अपनी इच्छा के विरुद्ध कई काम कर रहे हैं। इसलिए अपने इस स्वभाव को सुधारते हुए आपको प्रेम संबंधों में गुलाम की तरह व्यवहार करने से बचना होगा। इस सप्ताह घरेलू कामकाज की अधिकता आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां ला सकती है। इस दौरान आपको लगेगा कि आप अपने वैवाहिक जीवन का असली सुख नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में आप भी छोटी-छोटी बातों पर अपने पार्टनर पर गुस्सा होते हुए नजर आएंगे। लेकिन जैसे ही आपको अपने जीवनसाथी की व्यस्तता की असल वजह का पता चलेगा, आपका गुस्सैल स्वभाव नरम पड़ जाएगा और आप अपने पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक ट्रिप पर जाने का प्लान बनाएंगे। वृश्चिक साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह के मध्य में आपकी प्रगति होगी और आपका प्रेमी दिल की गहराई से आपकी प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं पाएगा। इस दौरान आप दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब आने के कई खूबसूरत मौके भी मिलेंगे। जिसका फायदा उठाकर आप दोनों खुद को एक दूसरे की बाहों में पाएंगे। इस सप्ताह आपके जीवन साथी का मिजाज सामान्य से काफी खुशनुमा रहेगा। इस वजह से इस बात के योग बन रहे हैं कि आपको अपने पार्टनर से कोई तोहफा या किसी तरह का सरप्राइज मिल सकता है। धनु साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह आपकी उन्नति होगी, जिससे आपके प्रेमी आपकी जमकर तारीफ करने और दिल से आपकी सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस दौरान आप दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब आने के कई खूबसूरत मौके भी मिलेंगे। जिसका फायदा उठाकर आप दोनों खुद को एक दूसरे की बाहों में पाएंगे। आपके जीवन साथी का वह बेहतरीन पहलू आपके सामने प्रदर्शित होगा, जिसकी आप लंबे समय से इच्छा कर रहे थे। इस दौरान आपको अपने पार्टनर से प्यार और रोमांस तो मिलेगा ही, साथ ही आप उनके साथ उन पुराने दिनों को भी फिर से जिएंगे, जब आपकी नई-नई शादी हुई थी। मकर साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि यदि आप अभी तक अविवाहित हैं और सच्चे प्रेमी की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो इस सप्ताह किसी मित्र या घनिष्ठ मित्र की मदद से आपको किसी खास व्यक्ति से मिलने का अवसर प्राप्त होगा, जो पहली बार में ही आपके प्रेम में पड़ जाएगा। बैठक। वहीं उन्हें देखकर आपको भी एहसास होगा कि आखिरकार आपका लंबा इंतजार खत्म हुआ. नवविवाहितों की बात करें तो इस सप्ताह आप अपना परिवार नियोजन करने का मन बना सकते हैं। हालाँकि, इसके बारे में सोचने से पहले, आपको अपने साथी को अपनी इच्छा के बारे में बताना होगा। कुंभ साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह यदि आप अपने प्रिय को अपने परिजनों से मिलाने की सोच रहे हैं तो अभी से ऐसा करने से बचना चाहिए। मुमकिन है इस दौरान माता-पिता से आपको अपने प्रेमी के बारे में अनुकूल समाचार सुनने को न मिले। आप महसूस कर सकते हैं कि आपके वैवाहिक संबंधों की डोर खुरदुरी है और आप इन परस्पर विरोधी स्थितियों को अपने मन में अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ साझा कर सकते हैं। लेकिन आपको यह समझना होगा कि अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में दूसरों को बताकर बेशक आप खुद को सांत्वना देते हैं, लेकिन इससे आपका पार्टनर आपसे दूर हो सकता है। मीन साप्ताहिक लव राशिफल गणेशजी कहते हैं कि इस सप्ताह प्रेम संबंधों के चलते किसी सामाजिक कार्यक्रम में जाने का कार्यक्रम टाल सकते हैं। हालांकि आपको ऐसा कुछ भी करने से बचना होगा, क्योंकि ऐसा करने से आप समाज के कई सम्मानित लोगों से मिलने का एक अच्छा अवसर खो सकते हैं। ऐसी कई स्थितियाँ उत्पन्न होंगी जब आप अपने वैवाहिक जीवन में स्थिरता की तलाश करते हुए नज़र आएंगे। उस दौरान आप तमाम कोशिशों के बाद भी जीवन में स्थिरता नहीं ला पाएंगे और तब मुमकिन है कि आप परेशान होकर अपना सारा गुस्सा अपने जीवन साथी पर निकालें। Shani Meen Rashifal दो हज़ार तेईस: नुकसान-खराब सेहत, शनि की साढ़ेसाती दो हज़ार तेईस में करेगी मीन वालों को परेशान, कैसा होगा असर? Shani Kumbh Rashifal दो हज़ार तेईस: हताशा-निराशा और मुसीबतें, शनि की साढ़ेसाती में बीतेगा साल दो हज़ार तेईस? Shani Makar Rashifal दो हज़ार तेईस: उतरती साढ़ेसाती से फायदा होगा-नुकसान भी, कैसा रहेगा ये साल आपके लिए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं. पीएम मोदी यहां कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, साथ ही सोलर पार्क की आधारशिला रखेंगे. पीएम मोदी का ये दौरा इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां वो किसानों से मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कच्छ के कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए हैं. अब से कुछ देर में पीएम कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं. पीएम मोदी यहां कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, साथ ही सोलर पार्क की आधारशिला रखेंगे. पीएम मोदी का ये दौरा इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां वो किसानों से मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कच्छ के कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए हैं. अब से कुछ देर में पीएम कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे.
Ahmedabad Serial Blast: 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने शनिवार को समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। Ahmedabad Blast Case: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट ( Ahmedabad Serial Blast ) केस के फैसले पर कहा कि हम हाईकोर्ट जाएंगे। Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद में 2008 के सीरियल बम धमाका मामले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को सभी 49 दोषियों को सजा सुनाई है। 49 दोषियों में से 38 को मौत की सजा और 11 को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। Ahmedabad Bomb Blast Case: 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में 49 दोषियों के खिलाफ आज विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में 49 दोषियों में से 38 को मौत की सजा दी है।
Ahmedabad Serial Blast: दो हज़ार आठ अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शनिवार को समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। Ahmedabad Blast Case: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दो हज़ार आठ के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस के फैसले पर कहा कि हम हाईकोर्ट जाएंगे। Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद में दो हज़ार आठ के सीरियल बम धमाका मामले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को सभी उनचास दोषियों को सजा सुनाई है। उनचास दोषियों में से अड़तीस को मौत की सजा और ग्यारह को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। Ahmedabad Bomb Blast Case: दो हज़ार आठ के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में उनचास दोषियों के खिलाफ आज विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में उनचास दोषियों में से अड़तीस को मौत की सजा दी है।
पटनाः बिहार की अविवाहित छात्राओं के लिए सुनहरा मौका है। उनके खाते में जल्द ही 25 से 50 हजार तक रुपए आ सकते हैं। जी हां, बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना शुरू की है, जिसके तहत अविवाहित इंटर पास और ग्रेजुएट छात्राओं के खाते में प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। योजना के तहत इंटर पास अविवाहित छात्राओं को 25 हजार और ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को 50 हजार रुपये सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। यह पैसे सीधे खाते में ही भेजे जाएंगे। इस योजना का लाभ बिहार की 5 लाख से ज्यादा छात्राओं को मिलेगा। शिक्षा विभाग ने इस योजना के लिए सभी जिलों को 400 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए बिहार की बेटियों को समय रहते आवेदन करना होगा। 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' का सीधा फायदा इंटर और ग्रेजुएशन करने वाली लाखों अविवाहित छात्राओं को मिलेगा। हालांकि, इसके लिए छात्राओं को कुछ जरूरी कदम भी उठाने होंगे। सबसे पहले लाभार्थी को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए इस लिंक http://edudbt. bih. nic. in/ पर जाना होगा। यहां योजना से जुड़े तीन लिंक मिलेंगे। इसमें शुरू के दो लिंक रजिस्ट्रेशन और लॉग इन के लिए हैं। वहीं तीसरा लिंक विश्वविद्यालय और विभाग के लिए है। नीतीश कुमार सरकार के इस फैसले लाखों की संख्या में इंटर और ग्रेजुएट परीक्षा देने वाली अविवाहित छात्राओं को फायदा मिलेगा। राशि का भुगतान जल्दी हो इसके लिए शिक्षा विभाग ने 400 करोड़ रुपये सभी जिलों को जारी कर दिया है। इस बार करीब 4 लाख 12 हजार से ज्यादा इंटर पास अविवाहित लड़कियों को 25-25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा। वहीं 1 लाख 24 हजार ग्रेजुएट छात्राओं को भी 50-50 हजार रुपये की राशि भुगतान प्रदेश सरकार करेगी। कैंडिडेट शुरू के दो लिंक में से किसी एक पर क्लिक करके फिर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इस दौरान जो भी जानकारी मांगी गई है वो सबकुछ भरना होगा। पूरा फॉर्म भरने के बाद आप इसे सबमिट कर दीजिए। फॉर्म भरने के संबंध में पूरी प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइट पर बताई गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद आप को जल्द ही इसका फायदा मिल जाएगा। 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' में रजिस्ट्रेशन के दौरान रेजिडेंस सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट की पासबुक, 12th और ग्रेजुएशन, जिसके लिए अप्लाई कर रहे उसकी मार्कशीट और पासपोर्ट साइज की फोटो चाहिए।
पटनाः बिहार की अविवाहित छात्राओं के लिए सुनहरा मौका है। उनके खाते में जल्द ही पच्चीस से पचास हजार तक रुपए आ सकते हैं। जी हां, बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना शुरू की है, जिसके तहत अविवाहित इंटर पास और ग्रेजुएट छात्राओं के खाते में प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। योजना के तहत इंटर पास अविवाहित छात्राओं को पच्चीस हजार और ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को पचास हजार रुपये सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। यह पैसे सीधे खाते में ही भेजे जाएंगे। इस योजना का लाभ बिहार की पाँच लाख से ज्यादा छात्राओं को मिलेगा। शिक्षा विभाग ने इस योजना के लिए सभी जिलों को चार सौ करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए बिहार की बेटियों को समय रहते आवेदन करना होगा। 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' का सीधा फायदा इंटर और ग्रेजुएशन करने वाली लाखों अविवाहित छात्राओं को मिलेगा। हालांकि, इसके लिए छात्राओं को कुछ जरूरी कदम भी उठाने होंगे। सबसे पहले लाभार्थी को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए इस लिंक http://edudbt. bih. nic. in/ पर जाना होगा। यहां योजना से जुड़े तीन लिंक मिलेंगे। इसमें शुरू के दो लिंक रजिस्ट्रेशन और लॉग इन के लिए हैं। वहीं तीसरा लिंक विश्वविद्यालय और विभाग के लिए है। नीतीश कुमार सरकार के इस फैसले लाखों की संख्या में इंटर और ग्रेजुएट परीक्षा देने वाली अविवाहित छात्राओं को फायदा मिलेगा। राशि का भुगतान जल्दी हो इसके लिए शिक्षा विभाग ने चार सौ करोड़ रुपये सभी जिलों को जारी कर दिया है। इस बार करीब चार लाख बारह हजार से ज्यादा इंटर पास अविवाहित लड़कियों को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा। वहीं एक लाख चौबीस हजार ग्रेजुएट छात्राओं को भी पचास-पचास हजार रुपये की राशि भुगतान प्रदेश सरकार करेगी। कैंडिडेट शुरू के दो लिंक में से किसी एक पर क्लिक करके फिर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इस दौरान जो भी जानकारी मांगी गई है वो सबकुछ भरना होगा। पूरा फॉर्म भरने के बाद आप इसे सबमिट कर दीजिए। फॉर्म भरने के संबंध में पूरी प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइट पर बताई गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद आप को जल्द ही इसका फायदा मिल जाएगा। 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' में रजिस्ट्रेशन के दौरान रेजिडेंस सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट की पासबुक, बारहth और ग्रेजुएशन, जिसके लिए अप्लाई कर रहे उसकी मार्कशीट और पासपोर्ट साइज की फोटो चाहिए।
महाराज चतुरसिंह आनंद को भवन सुख शान्ति को सदन वहशान्त रस सागर की बंध हाय टूटिंगों । प्रेम को पुजारी सहचारी हरि दांसन हरि दांसन को, ज्ञान को व्योपारी हाय जान उठिगो । प्रजा प्रति पारक धारक सद धर्म और क्षत्रिन सुधारक हाय ! हम तें बिछूटिगो । चातुर की मृत्यु सुन जान्यो यह निश्चय ही, मेदपाट भाषा हु को भाग्य हाय फूटिंगो ।। १ ।। भावार्थः- सुख, शांति और आनंद का वह धाम था। हाय आज शान्त - रस सिंधु का बांध टूट गया ! प्रेम का पुजारी, हरिभक्तों का पहयोगी और ज्ञान का व्यापारी हाय ! न जाने किस और उठ चला ! प्रजा का प्रति पालन करने वाला, सत्य धर्म को धारण-ग्रहण करने वाला, और क्षत्रिय समाज का सुधारक भला हमसे बिछुड़ गया। ( महाराज ) चतुरसिंहजी का स्वर्गवास सुन कर हमने तो निश्चय ही यह जान लिया कि आज मेदपाट की ( मेवाड़ी ) भाषा का भाग्य फूट गया । [ रचयिताः- डूंगरसिंह भाटी, मोही ] समभयो अजुन एक । अरजुन बनत अनेक ।। १ ।। कृष्ण कठिन गीता कही, चित दे सुणता चतुर सू भावार्थः - भगवान श्री कृष्ण ने जो कठिन गीता कही उसे एक अजुन समझ सका । लेकिन, उसे ही ध्यान पूर्वक चतुरसिंहजी से सुनकर अनेक अर्जुन बन जाते । [ रचयिताः- उमाशंकर द्विवेदी, उदयपुर, ] जसवन्त राव होलकर हिंदवाणी हलको थयाँ, तुरकां रह्यो न तंत । अंगरेज उच्छकियों, जो खमियों जसवन्त ।। १ ।। भावार्थः- हा ! जसवन्तराव होल्कर क्या चल बसा, हिन्दू निर्बल होगये मुसलमानों में तंत ही नहीं रह गया और अंगरेज तो हर्ष पुलकित हो उत्सव मनाने लग गये । धरा सेस धड़ हड़ें, पड़ भंगाणं प्रथम्मी । मेर गयण डगमगै, नई हिंदवाण अनम्मी ।। च्यार चक्क मॅचक्क, होय दुनियांग हँकारू । पातसाह नू ग्ह्या, दिली छोडे दांय वारू । औरंग रंग कीधा इसा, थानक देव उथापिया। तो विना जसा दजसिंह तरण, सोह गयातन संकिया ॥१॥ भावार्थः- पृथ्वी ही क्या शेषनाग तक प्रकम्पित है, मेरु पर्वत हिल उठा है, संसार में हाहाकार है. आकाश क्षुब्ध है, चारों दिशायें भौंचक्की हैं। हिन्दुस्तान में जो अनन थे वे नतमस्तक हो गये हैं, प्राचीन राजस्थानी मौत देवस्थान गिराये जा रहे हैं और सब राजा महाराजा भयत्रस्त हो गये हैं। हे गजसिंह के जसवन्त ! तेरे बिना औरंगजेब ने इस प्रकार उत्पात मचा रक्खा है । जिका ढाल जोधाण, दिली सू आडी देता । वाही ढाल आमेर, राव ही ओल रहता ।। हाडां गाँडां हेक, श्री दीवारण सहेता । जसांण, देव पण आडौं देता ।। हरम लूट लूटे हसम, सरम पाड़ सुरतास री । जसराज गयाँ गजसिंघ रौ, हेक ढाल हिंढ़वाण री ।।२।। दिल्ली से आक्रमण होने पर जो जोधपुर की ढाल था, जिस ढाल की ट में श्री दीवारण ( मेवाड़ के स्वामी ) सहित हाडे, गौड़ और बीकानेर व जैसलमेर के राव रहा करते थे। यही क्यां, जिस ढाल की समय आ पड़ने पर देवता तक ओट लेते थे, वह हिन्दुस्तान की ढाल स्वरूप जसवन्तसिंह - जिसने बादशाह का हरम व हशम लूट कर उसका मानमर्दन कर दिया था, आज संसार से चला गया । प्रथीनूर पालटे, सत्त छोडियों सुभट्ट । औरंगदल ऊलटे, गाह देवल कर घट्ट ।। गऊ विप्र गल कटे, गैण सह बल घट्ट ! मन्न गाढ मल बटे, चरत असमान विछुट्टो !! पोह जसा जेम सम पट्ट वे, जुध जीपै कृष्ण ज़बर्ट ।
महाराज चतुरसिंह आनंद को भवन सुख शान्ति को सदन वहशान्त रस सागर की बंध हाय टूटिंगों । प्रेम को पुजारी सहचारी हरि दांसन हरि दांसन को, ज्ञान को व्योपारी हाय जान उठिगो । प्रजा प्रति पारक धारक सद धर्म और क्षत्रिन सुधारक हाय ! हम तें बिछूटिगो । चातुर की मृत्यु सुन जान्यो यह निश्चय ही, मेदपाट भाषा हु को भाग्य हाय फूटिंगो ।। एक ।। भावार्थः- सुख, शांति और आनंद का वह धाम था। हाय आज शान्त - रस सिंधु का बांध टूट गया ! प्रेम का पुजारी, हरिभक्तों का पहयोगी और ज्ञान का व्यापारी हाय ! न जाने किस और उठ चला ! प्रजा का प्रति पालन करने वाला, सत्य धर्म को धारण-ग्रहण करने वाला, और क्षत्रिय समाज का सुधारक भला हमसे बिछुड़ गया। चतुरसिंहजी का स्वर्गवास सुन कर हमने तो निश्चय ही यह जान लिया कि आज मेदपाट की भाषा का भाग्य फूट गया । [ रचयिताः- डूंगरसिंह भाटी, मोही ] समभयो अजुन एक । अरजुन बनत अनेक ।। एक ।। कृष्ण कठिन गीता कही, चित दे सुणता चतुर सू भावार्थः - भगवान श्री कृष्ण ने जो कठिन गीता कही उसे एक अजुन समझ सका । लेकिन, उसे ही ध्यान पूर्वक चतुरसिंहजी से सुनकर अनेक अर्जुन बन जाते । [ रचयिताः- उमाशंकर द्विवेदी, उदयपुर, ] जसवन्त राव होलकर हिंदवाणी हलको थयाँ, तुरकां रह्यो न तंत । अंगरेज उच्छकियों, जो खमियों जसवन्त ।। एक ।। भावार्थः- हा ! जसवन्तराव होल्कर क्या चल बसा, हिन्दू निर्बल होगये मुसलमानों में तंत ही नहीं रह गया और अंगरेज तो हर्ष पुलकित हो उत्सव मनाने लग गये । धरा सेस धड़ हड़ें, पड़ भंगाणं प्रथम्मी । मेर गयण डगमगै, नई हिंदवाण अनम्मी ।। च्यार चक्क मॅचक्क, होय दुनियांग हँकारू । पातसाह नू ग्ह्या, दिली छोडे दांय वारू । औरंग रंग कीधा इसा, थानक देव उथापिया। तो विना जसा दजसिंह तरण, सोह गयातन संकिया ॥एक॥ भावार्थः- पृथ्वी ही क्या शेषनाग तक प्रकम्पित है, मेरु पर्वत हिल उठा है, संसार में हाहाकार है. आकाश क्षुब्ध है, चारों दिशायें भौंचक्की हैं। हिन्दुस्तान में जो अनन थे वे नतमस्तक हो गये हैं, प्राचीन राजस्थानी मौत देवस्थान गिराये जा रहे हैं और सब राजा महाराजा भयत्रस्त हो गये हैं। हे गजसिंह के जसवन्त ! तेरे बिना औरंगजेब ने इस प्रकार उत्पात मचा रक्खा है । जिका ढाल जोधाण, दिली सू आडी देता । वाही ढाल आमेर, राव ही ओल रहता ।। हाडां गाँडां हेक, श्री दीवारण सहेता । जसांण, देव पण आडौं देता ।। हरम लूट लूटे हसम, सरम पाड़ सुरतास री । जसराज गयाँ गजसिंघ रौ, हेक ढाल हिंढ़वाण री ।।दो।। दिल्ली से आक्रमण होने पर जो जोधपुर की ढाल था, जिस ढाल की ट में श्री दीवारण सहित हाडे, गौड़ और बीकानेर व जैसलमेर के राव रहा करते थे। यही क्यां, जिस ढाल की समय आ पड़ने पर देवता तक ओट लेते थे, वह हिन्दुस्तान की ढाल स्वरूप जसवन्तसिंह - जिसने बादशाह का हरम व हशम लूट कर उसका मानमर्दन कर दिया था, आज संसार से चला गया । प्रथीनूर पालटे, सत्त छोडियों सुभट्ट । औरंगदल ऊलटे, गाह देवल कर घट्ट ।। गऊ विप्र गल कटे, गैण सह बल घट्ट ! मन्न गाढ मल बटे, चरत असमान विछुट्टो !! पोह जसा जेम सम पट्ट वे, जुध जीपै कृष्ण ज़बर्ट ।
डबराल मुख्यतः भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में रहने वाले गढ़वाली समुदाय के सारस्वत ब्राह्मण हैं। इस समुदाय के लोग कुमाऊँ में भी पाए जाते हैं। अपनी परम्पराओं के अनुसार, वे ऋषि भारद्वाज के वंशज हैं जो कि शैव सम्प्रदाय के अनुयायी हैं, भगवान शिव को अपना ईष्ट आराध्य मानते हैं। पण्डित शिव प्रसाद डबराल की प्रसिद्ध पुस्तक उत्तराखण्ड का इतिहास के अनुसार डबराल मूल रूप से पश्चिमी भारत क्षेत्र के महाराष्ट्र राज्य के निवासी थे। जहाँ से वे १४ वीं शताब्दी में इस्लामी आक्रमण के परिणाम स्वरूप उत्तर में हिमालय की ओर पलायन कर गए। जैसा कि अन्य स्रोतों के में वर्णित है, सन् १३७६ ईस्वी में महाराष्ट्र से रघुनाथ एवं विश्वनाथ नामक दो ब्राह्मण भाई महाराष्ट्र से आकर सर्वप्रथम पौड़ी गढ़वाल ज़िले के पर्वतीय गाँव डाबर में बसे जो कि वर्तमान में उत्तराखण्ड के लैंसडाउन नगर के निकट है, इसी कारण इन्हें डबराल उपनाम मिला। आधुनिक डबराल इन्हीं के वंशज माने जाते हैं। . 0 संबंधों।
डबराल मुख्यतः भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में रहने वाले गढ़वाली समुदाय के सारस्वत ब्राह्मण हैं। इस समुदाय के लोग कुमाऊँ में भी पाए जाते हैं। अपनी परम्पराओं के अनुसार, वे ऋषि भारद्वाज के वंशज हैं जो कि शैव सम्प्रदाय के अनुयायी हैं, भगवान शिव को अपना ईष्ट आराध्य मानते हैं। पण्डित शिव प्रसाद डबराल की प्रसिद्ध पुस्तक उत्तराखण्ड का इतिहास के अनुसार डबराल मूल रूप से पश्चिमी भारत क्षेत्र के महाराष्ट्र राज्य के निवासी थे। जहाँ से वे चौदह वीं शताब्दी में इस्लामी आक्रमण के परिणाम स्वरूप उत्तर में हिमालय की ओर पलायन कर गए। जैसा कि अन्य स्रोतों के में वर्णित है, सन् एक हज़ार तीन सौ छिहत्तर ईस्वी में महाराष्ट्र से रघुनाथ एवं विश्वनाथ नामक दो ब्राह्मण भाई महाराष्ट्र से आकर सर्वप्रथम पौड़ी गढ़वाल ज़िले के पर्वतीय गाँव डाबर में बसे जो कि वर्तमान में उत्तराखण्ड के लैंसडाउन नगर के निकट है, इसी कारण इन्हें डबराल उपनाम मिला। आधुनिक डबराल इन्हीं के वंशज माने जाते हैं। . शून्य संबंधों।
Saraikela/Kharsawan : छऊ नृत्य कला केंद्र खरसावां में आयोजित सम्मान समारोह में चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि कला की ना कोई सीमा होती है ना इसे धर्म के दायरे में समेटा जा सकता है. इस संस्था के कलाकारों ने आज खरसावां शैली छऊ नृत्य को जो ऊंचाइयां प्रदान की है वह प्रशंसनीय है. विधायक ने खरसावां शैली छऊ नृत्य की उपेक्षा पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संपूर्ण कोल्हान क्षेत्र में विख्यात इस नृत्य शैली को अब तक वह स्थान नहीं मिल पाया है जिसका वह हकदार है. उन्होंने कहा कि सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां, कुचाई, पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर, सोनुवा, बंदगांव, मनोहरपुर और चाईबासा सहित कई स्थानों में खरसावां शैली छऊ नृत्य का प्रदर्शन होता है. उरांव ने कोल्हान यूनिवर्सिटी के सिलेबस में खरसावां शैली छऊ को शामिल नहीं करने पर आश्चर्य प्रकट किया. उन्होंने इस मामले को एक जनवरी को शहीद दिवस के अवसर मुख्यमंत्री के सामने रखने और खरसावां के स्थानीय विधायक दशरथ गागराई के साथ-साथ कोल्हान के अन्य विधायकों के साथ विधानसभा सत्र में उठाने का आश्वासन दिया. सम्मान समारोह में उन्होंने सभी कलाकारों को सम्मानित किया. मौके पर राहुल आदित्य, दीपक प्रधान, कमल कृष्ण साहू, पिनाकी रंजन, बसंत कुमार गंतायत, जितेन घोड़ाई, नयन नायक, सुदीप घोड़ाई, लखींद्र नायक, मोहम्मद रमजान, कमल महतो, नित्या शंकर नंदा, धिरतु लोहार, कांतों मछुआ, दयाल लेट, सूरज हेम्ब्रम, अनूप रविदास, लक्ष्मण, संतोष, करण, ज्योति मोदक, भूमि केसरी, सुलोचना महंती, एंजेल केसरी, शीतल सोय सहित 35 कलाकार उपस्थित थे.
Saraikela/Kharsawan : छऊ नृत्य कला केंद्र खरसावां में आयोजित सम्मान समारोह में चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि कला की ना कोई सीमा होती है ना इसे धर्म के दायरे में समेटा जा सकता है. इस संस्था के कलाकारों ने आज खरसावां शैली छऊ नृत्य को जो ऊंचाइयां प्रदान की है वह प्रशंसनीय है. विधायक ने खरसावां शैली छऊ नृत्य की उपेक्षा पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संपूर्ण कोल्हान क्षेत्र में विख्यात इस नृत्य शैली को अब तक वह स्थान नहीं मिल पाया है जिसका वह हकदार है. उन्होंने कहा कि सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां, कुचाई, पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर, सोनुवा, बंदगांव, मनोहरपुर और चाईबासा सहित कई स्थानों में खरसावां शैली छऊ नृत्य का प्रदर्शन होता है. उरांव ने कोल्हान यूनिवर्सिटी के सिलेबस में खरसावां शैली छऊ को शामिल नहीं करने पर आश्चर्य प्रकट किया. उन्होंने इस मामले को एक जनवरी को शहीद दिवस के अवसर मुख्यमंत्री के सामने रखने और खरसावां के स्थानीय विधायक दशरथ गागराई के साथ-साथ कोल्हान के अन्य विधायकों के साथ विधानसभा सत्र में उठाने का आश्वासन दिया. सम्मान समारोह में उन्होंने सभी कलाकारों को सम्मानित किया. मौके पर राहुल आदित्य, दीपक प्रधान, कमल कृष्ण साहू, पिनाकी रंजन, बसंत कुमार गंतायत, जितेन घोड़ाई, नयन नायक, सुदीप घोड़ाई, लखींद्र नायक, मोहम्मद रमजान, कमल महतो, नित्या शंकर नंदा, धिरतु लोहार, कांतों मछुआ, दयाल लेट, सूरज हेम्ब्रम, अनूप रविदास, लक्ष्मण, संतोष, करण, ज्योति मोदक, भूमि केसरी, सुलोचना महंती, एंजेल केसरी, शीतल सोय सहित पैंतीस कलाकार उपस्थित थे.
रांचीः झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोमवार को ट्वीट किया है। ट्वीट कर उन्होंने कहा है कि आप सभी के सहयोग से राज्य में तेजी से संक्रमण घट रहा है और लोग स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा रिकवरी दर 87 प्रतिशत हो गया है। 36,540 एक्टिव केस रह गए हैं। मृत्यु संख्या में भी कमी आई है। उन्होंने कहा है कि इसी प्रकार सहयोग करने से हम जल्द कोरोना से मुक्ति पाएंगे। इसलिए घर पर रहें, सुरक्षित रहें।
रांचीः झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोमवार को ट्वीट किया है। ट्वीट कर उन्होंने कहा है कि आप सभी के सहयोग से राज्य में तेजी से संक्रमण घट रहा है और लोग स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा रिकवरी दर सत्तासी प्रतिशत हो गया है। छत्तीस,पाँच सौ चालीस एक्टिव केस रह गए हैं। मृत्यु संख्या में भी कमी आई है। उन्होंने कहा है कि इसी प्रकार सहयोग करने से हम जल्द कोरोना से मुक्ति पाएंगे। इसलिए घर पर रहें, सुरक्षित रहें।
विग्नेश शिवन ने मलेशिया से नई फोटोज शेयर की हैं। इन फोटोज में विग्नेश शिवन संग नयनतारा भी नजर आईं। विग्नेश शिवन और विग्नेश शिवन इन तस्वीरों में रोमांटिक अंदाज में दिखाई दिए। विग्नेश शिवन और नयनतारा की इस तस्वीर को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। विग्नेश शिवन और नयनतारा इस तस्वीर में कूल लुक में नजर आए। विग्नेश शिवन और नयनतारा का नया लुक लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। फैंस को पसंद आईं विग्नेश शिवन और नयनतारा की ये फोटोज। विग्नेश शिवन अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल से नयनतारा संग तस्वीरें शेयर करते रहते हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
विग्नेश शिवन ने मलेशिया से नई फोटोज शेयर की हैं। इन फोटोज में विग्नेश शिवन संग नयनतारा भी नजर आईं। विग्नेश शिवन और विग्नेश शिवन इन तस्वीरों में रोमांटिक अंदाज में दिखाई दिए। विग्नेश शिवन और नयनतारा की इस तस्वीर को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। विग्नेश शिवन और नयनतारा इस तस्वीर में कूल लुक में नजर आए। विग्नेश शिवन और नयनतारा का नया लुक लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। फैंस को पसंद आईं विग्नेश शिवन और नयनतारा की ये फोटोज। विग्नेश शिवन अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल से नयनतारा संग तस्वीरें शेयर करते रहते हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
एक लोकप्रिय फर्म द्वारा उत्पादित आइपॉड खिलाड़ियोंइलेक्ट्रॉनिक्स "ऐप्पल", - इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो भरोसेमंद हैं लेकिन, जैसा कि किसी भी नई तकनीक के साथ, उनके ऑपरेशन में कठिनाइयां होती हैं। उनसे बचने के लिए, यह जानने के लिए उपयोगी है कि आइपॉड कैसे रिबूट करना है, इस मामले में किस तरह के एल्गोरिदम क्रियाओं का होना चाहिए। उपयोगकर्ता एक आइपॉड चेहरा खरीदते हैंमें कि जब एक कंप्यूटर से जुड़ा हुआ है और एक "सुरक्षित शटडाउन" का जवाब नहीं देता तो उनका डिवाइस लटका हुआ है अक्सर, इन कठिनाइयों को रिबूट द्वारा हटा दिया जाता है। कभी-कभी इसे अपरिहार्य उपयोगिताओं से ऑपरेटिंग सिस्टम को मुक्त करने के लिए बस सिफारिश की जाती है जिनका उपयोग नहीं किया जाता है। वायरस के लिए इसे जांचना सुनिश्चित करें इन सभी चरणों का पूरा होने के बाद, डिवाइस को कमाने चाहिए। लेकिन ऐसा होता है कि यह रोड़ा बिल्कुल आइपॉड को रिबूट करना है। फिर आपको विशेष कार्यक्रमों का सहारा लेना चाहिए। उदाहरण के लिए, "Xenoid v2.0" या "Kreyfast_1.1", जो इंटरनेट पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं। विभिन्न विकल्प तलाशने, "आइपॉड रिबूट कैसे करें"क्लासिक ", आप कंपनी" एप्पल "से विशेषज्ञों की सलाह का उपयोग कर सकते हैं, जो ऑपरेटिंग सिस्टम" Windows XP "," Vista "या" Windows 7 "के लिए" iTunes 10.0.1 "इंस्टॉल करने की सलाह देते हैं। उपयोगकर्ता अक्सर में समस्याओं की सूचना देते हैंकाम "आइपॉड क्लासिक", जो कंप्यूटर द्वारा पहचाना नहीं जा सकता है, पटरियों को छोड़ें और गाने नहीं खेलें। ऐसे मामलों में, कुछ फाइलों को मिटाने और कंप्यूटर से उन्हें फिर से लिखने की सलाह देते हैं। प्लेबैक की गुणवत्ता एक ही समय में ग्रस्त नहीं होगी। अगर एक "आइपॉड टच" है तो ऐसी ही कठिनाइयां नहीं पैदा होंगी लेकिन यहां भी यह विशेष सेटिंग्स के बिना नहीं करता है ताकि डिवाइस के गलत संचालन से बच सकें। वहाँ एक और समस्या है जो आपको आइपॉड रीसेट करने के बारे में आश्चर्य करती है। यह तब होता है जब यह OS "Windows" में प्रदर्शित होता है, लेकिन यह प्रोग्राम "iTunes" नहीं देखता है समस्याओं को हल करने के लिए, आपको सहायक शुरू करने और सूची से अपने आइपॉड का चयन करने की आवश्यकता है। उसमें "स्थानीय सेटिंग" नामक फ़ोल्डर पर डबल-क्लिक करें - टेम्पम्स और संदर्भ मेनू में "हटाएं" चुनें। विंडो में पुष्टि करने के लिए, "हाँ" बटन पर क्लिक करें। अपने आईपॉड को रीसेट करने का तरीका जानने के लिए,नीचे दी गई युक्तियों का पालन करना पर्याप्त है। सबसे पहले आपको अपने कंप्यूटर पर "आईट्यून्स" (नवीनतम संस्करण) प्रोग्राम स्थापित करने और आईपॉड कनेक्ट करने की आवश्यकता है। "स्टार्ट" मेनू "मेरा कंप्यूटर" ढूंढें और ड्राइव सी का चयन करें। उस पर, "उपयोगकर्ता" नामक फ़ोल्डर ढूंढें और खोलें। उपयोगकर्ता नाम के साथ फ़ोल्डर को डबल-क्लिक करें। यदि ऐपडाटा नामक फ़ोल्डर कंप्यूटर द्वारा प्रदर्शित नहीं होता है, तो "व्यवस्थित करें" मेनू में, "फ़ोल्डर गुण" का चयन करें और "छुपी हुई फ़ाइलें और फ़ोल्डर्स दिखाएं" बॉक्स को चेक करें। "ठीक" पर क्लिक करें। अब ऐपडाटा और स्थानीय फ़ोल्डर्स खोलने का समय है। Temp फ़ोल्डर पर, दायां माउस बटन क्लिक करें और मेनू में "हटाएं" का चयन करें, पुष्टि करने के लिए "हां" दबाएं। उसके बाद, आप कंप्यूटर को पुनरारंभ कर सकते हैं। अगर आपको पता लगाना चाहिए कि कैसेजब यह लटकता है या कंप्यूटर द्वारा पहचाना नहीं जाता है, तो आइपॉड स्पर्श को रीसेट करने के लिए, इन चरणों का पालन करेंः डिवाइस सॉफ़्टवेयर को अपडेट करने के लिए, आईट्यून्स प्रोग्राम का उपयोग करें। आइपॉड को रीबूट करने के लिए, आपको "स्लीप / वेक" बटन दबाकर इसे बंद करना होगा। लाल स्लाइडर प्रकट होता है। जब आप इस स्लाइडर पर अपनी उंगली ले जाते हैं, तो आइपॉड बंद हो जाता है। आप उसी बटन के साथ डिवाइस चालू कर सकते हैं, इसे तब तक रखें जब तक कि ऐप्पल लोगो दिखाई न दे।
एक लोकप्रिय फर्म द्वारा उत्पादित आइपॉड खिलाड़ियोंइलेक्ट्रॉनिक्स "ऐप्पल", - इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो भरोसेमंद हैं लेकिन, जैसा कि किसी भी नई तकनीक के साथ, उनके ऑपरेशन में कठिनाइयां होती हैं। उनसे बचने के लिए, यह जानने के लिए उपयोगी है कि आइपॉड कैसे रिबूट करना है, इस मामले में किस तरह के एल्गोरिदम क्रियाओं का होना चाहिए। उपयोगकर्ता एक आइपॉड चेहरा खरीदते हैंमें कि जब एक कंप्यूटर से जुड़ा हुआ है और एक "सुरक्षित शटडाउन" का जवाब नहीं देता तो उनका डिवाइस लटका हुआ है अक्सर, इन कठिनाइयों को रिबूट द्वारा हटा दिया जाता है। कभी-कभी इसे अपरिहार्य उपयोगिताओं से ऑपरेटिंग सिस्टम को मुक्त करने के लिए बस सिफारिश की जाती है जिनका उपयोग नहीं किया जाता है। वायरस के लिए इसे जांचना सुनिश्चित करें इन सभी चरणों का पूरा होने के बाद, डिवाइस को कमाने चाहिए। लेकिन ऐसा होता है कि यह रोड़ा बिल्कुल आइपॉड को रिबूट करना है। फिर आपको विशेष कार्यक्रमों का सहारा लेना चाहिए। उदाहरण के लिए, "Xenoid vदो.शून्य" या "Kreyfast_एक.एक", जो इंटरनेट पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं। विभिन्न विकल्प तलाशने, "आइपॉड रिबूट कैसे करें"क्लासिक ", आप कंपनी" एप्पल "से विशेषज्ञों की सलाह का उपयोग कर सकते हैं, जो ऑपरेटिंग सिस्टम" Windows XP "," Vista "या" Windows सात "के लिए" iTunes दस.शून्य.एक "इंस्टॉल करने की सलाह देते हैं। उपयोगकर्ता अक्सर में समस्याओं की सूचना देते हैंकाम "आइपॉड क्लासिक", जो कंप्यूटर द्वारा पहचाना नहीं जा सकता है, पटरियों को छोड़ें और गाने नहीं खेलें। ऐसे मामलों में, कुछ फाइलों को मिटाने और कंप्यूटर से उन्हें फिर से लिखने की सलाह देते हैं। प्लेबैक की गुणवत्ता एक ही समय में ग्रस्त नहीं होगी। अगर एक "आइपॉड टच" है तो ऐसी ही कठिनाइयां नहीं पैदा होंगी लेकिन यहां भी यह विशेष सेटिंग्स के बिना नहीं करता है ताकि डिवाइस के गलत संचालन से बच सकें। वहाँ एक और समस्या है जो आपको आइपॉड रीसेट करने के बारे में आश्चर्य करती है। यह तब होता है जब यह OS "Windows" में प्रदर्शित होता है, लेकिन यह प्रोग्राम "iTunes" नहीं देखता है समस्याओं को हल करने के लिए, आपको सहायक शुरू करने और सूची से अपने आइपॉड का चयन करने की आवश्यकता है। उसमें "स्थानीय सेटिंग" नामक फ़ोल्डर पर डबल-क्लिक करें - टेम्पम्स और संदर्भ मेनू में "हटाएं" चुनें। विंडो में पुष्टि करने के लिए, "हाँ" बटन पर क्लिक करें। अपने आईपॉड को रीसेट करने का तरीका जानने के लिए,नीचे दी गई युक्तियों का पालन करना पर्याप्त है। सबसे पहले आपको अपने कंप्यूटर पर "आईट्यून्स" प्रोग्राम स्थापित करने और आईपॉड कनेक्ट करने की आवश्यकता है। "स्टार्ट" मेनू "मेरा कंप्यूटर" ढूंढें और ड्राइव सी का चयन करें। उस पर, "उपयोगकर्ता" नामक फ़ोल्डर ढूंढें और खोलें। उपयोगकर्ता नाम के साथ फ़ोल्डर को डबल-क्लिक करें। यदि ऐपडाटा नामक फ़ोल्डर कंप्यूटर द्वारा प्रदर्शित नहीं होता है, तो "व्यवस्थित करें" मेनू में, "फ़ोल्डर गुण" का चयन करें और "छुपी हुई फ़ाइलें और फ़ोल्डर्स दिखाएं" बॉक्स को चेक करें। "ठीक" पर क्लिक करें। अब ऐपडाटा और स्थानीय फ़ोल्डर्स खोलने का समय है। Temp फ़ोल्डर पर, दायां माउस बटन क्लिक करें और मेनू में "हटाएं" का चयन करें, पुष्टि करने के लिए "हां" दबाएं। उसके बाद, आप कंप्यूटर को पुनरारंभ कर सकते हैं। अगर आपको पता लगाना चाहिए कि कैसेजब यह लटकता है या कंप्यूटर द्वारा पहचाना नहीं जाता है, तो आइपॉड स्पर्श को रीसेट करने के लिए, इन चरणों का पालन करेंः डिवाइस सॉफ़्टवेयर को अपडेट करने के लिए, आईट्यून्स प्रोग्राम का उपयोग करें। आइपॉड को रीबूट करने के लिए, आपको "स्लीप / वेक" बटन दबाकर इसे बंद करना होगा। लाल स्लाइडर प्रकट होता है। जब आप इस स्लाइडर पर अपनी उंगली ले जाते हैं, तो आइपॉड बंद हो जाता है। आप उसी बटन के साथ डिवाइस चालू कर सकते हैं, इसे तब तक रखें जब तक कि ऐप्पल लोगो दिखाई न दे।
मीनांबाल वीणा बजाने में देवी सरस्वती के समान थी । जब कभी वह पुरसेवाक्कम में हमारे घर पर आती, छत वाले कमरे को उसके उपयोग के लिए खाली कर देते थे । चांदनी राता में आठ बजे ही भोजन कर लिया जाना । नौ बजे से आधी रात तक वह अपने कमरे में वीणा बजाती रहनी । कमरे से सटे बाहरी पंडाल में उसके पिनाजी रावबहादुर सुंदरराजुलू नायुड़ खाट पर लेटे, थोड़ी देर तक वीणावादन सुनतं, फिर खरर्टि लेने लगते । मगर महाशय अपने खर्टि से वीणा की मधुर ध्वनि को दबाते न थे । धीमे खर्टि ही लेने । बाहरी आंगन में एक और मैं अकेले अपना ब्रह्मचारी-बिछौना बिछाये पड़ा रहता । वीणावादन समाप्त होने तक मेरी पलकें इमली की गोंद लगाने पर भी बंद न होनी । मीनांबाल के कमरे में उसके साथ मेरी जो बहन रन्नम् लेटा करती थी जल्दी ही सो जाती । नीचे मां, बड़े भाई, भाभी सब निद्रामग्न हो जाते । मेरी भाभी पेट में अन्न का निवाला पडते ही, हाथ धोने-धोने झपकियां लेने लगती । बीच-बीच में बच्चों के रोने की आवाजें आती । बड़े भाई रेवेन्यू बोर्ड के दफ्तर में नौकरी करते थे । उनको चार साल में एक बार दफ्तर में दस रुपये का, और घर में दो बच्चों का प्रमोशन मिलना था । ऋतु । चांदनी रात । अर्धरात्रि की बेला । सारा पुरसेवाक्कम गहरी नींद में था। केवल दो प्राणियों की आंखों में नींद नहीं । एक तो में, दूसरी वह । मीना गंधर्व स्त्रियों की सी वोगा बजाती थी । देखने में भी अप्सरा सी लगती । उम्र का मोलहवां वर्ष था। अनावश्यक राम कहानी क्यों बढ़ाऊं कामदेव ने अपने तेज बाण में मेरे प्राण वींधकर उसके हाथों में सौंप दिये। ओह! क्या कहूं ! उसका अलौकिक संगीत चाहे कितनी देर सुनते रहे दिल न अघाता । उसका मुखारविंद नित्य - निन्य नवविकसित सा लगना । उसके पिताजी रावबहादुर सुंदरराजुजू नायुडू मेरी मां के दूर के भाई लगते थे। तंजाऊर तथा अन्य कई जिलों में बहुत दिनों तक पुलिस इंसपेक्टर की हैसियत से सरकार की बड़ी सेवा की जिसके फलस्वरूप रावबहादुर की उपाधि प्राप्त की । स्वदेशी आंदोलन के शुरू होने से पहले ही वे नौकरी से अवकाश प्राप्त कर चुके थे। मेरे कहने का मतलब यह है कि असल में उनको प्राप्त उपाधि, स्वदेशी आंदोलन में भाग लेते कुछ नेताओं पर झूटमूठ की रिपोर्ट लिखकर पायी उपाधि नहीं थी, सचमुच कड़ी मेहनत का फल था । बचपन से ही उनकी यही इच्छा रही कि मीनांबाल की शादी मुझसे करा दें लेकिन इसे पूरा करने में कई विघ्न पड़े । उनमें अधिकांश का कारण मैं था । सोलह वर्ष की आयु तक मैंने मद्रास क्रिस्चियन कालेज में शिक्षा पायी । वैदिक कान से लेकर आज तक भारत देश के ऋषि-मुनिगण निरे मूर्ख थे । अर्जुन, कालिदास, शंकराचार्य, शिवाजी, रामदास, कबीरदास, तथा उनके पहले व बाद के कल तक जो महान रहे, वे मूर्ख थे । भारत के निवासियों के हृदय में जिस भक्ति की पालते आ रहे थे वह सब बर्बरता पूर्ण मूढ़ भक्ति है । हेय और तुच्छ है । अंग्रेजों के ऐसे महान सत्य मेरे दिल में अंकित हो गये । मगर ईसाई पादरी एक विचित्र जीव थे। हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति के प्रति श्रद्धा रखना मूढ़ता है, अज्ञान है ऐसा निर्धारित करने के साथ साथ युवकों के मन में यह प्रभाव छोड़ देते हैं कि जिस ईसाई धर्म का गुणगान कर रहे हैं वह भी आखिर मूढ़ भक्ति ही है। धर्म संबंधी बातों को विस्तार से लिखकर मैं पाठकों को सिर दर्द पैदा करना नहीं चाहता। संक्षेप में इतना कहा जा सकता है कि मैंने अपने धर्म के आचार-विचारों से विरक्त होकर 'ज्ञान स्नान' नहीं किया; ब्रह्मसमाजी बन गया । कुछ दिनों के उपरांत पढ़ाई छोड़ दी । घर में किसी से बताये बिना कलकत्ता चला गया, और वहां ब्रह्मसमाजी बनने की शिक्षा ली । कुछ महीने उनकी पाठशाला में पढ़ना रहा । असल में मेरा उद्देश्य ब्रह्मसमाज का उपदेशक बनना था । कलकत्ते से पंजाब व हिंदुस्तान के अन्य प्रदेशों की यात्रा करता हुआ आखिर मद्राम आ पहुंचा। मेरे हिंदू धर्म को त्यागने की बात पर मेरी जाति वालों ने मुझे कई प्रकार के कष्ट दिये लेकिन मैं निराश न हुआ उलटे मेरी मानसिक दृढ़ता पहले से ज्यादा बढ़ती गयी । मेरे पिताजी - उनका नाम दुभाषी- रामचंद्र नायुडू था । वे केवल बाहरी वेशभूषा व रहन-सहन में आम लोगों के आचार-विचारों का अनुकरण करने थे, मगर दिन में ब्रह्मसमाज के प्रति श्रद्धा रखते थे इसलिए मुझे परमात्मा के प्रति भक्ति करने, आत्मविश्वास व श्रद्धा से उपनिषदों का अध्ययन करते देख मन ही मन आनंदित हुए । मगर प्रकट में ऐसे पेश आय मानां मुझ पर नाराज हों । मेरे रिश्तेदारों की बातों में आकर मुझे कोई कष्ट भी न दिया में ऐसा प्रबंध कर रखा था कि मुझे पहले से अधिक सुविधाएं मिले । मगर न जाने क्यों बड़े भाई ने मेरे प्रति बेहद घृणा प्रदर्शित की । मैं पंजाबियों जैसा साफा बाध लता था। पंद्रह रुपये वेतन पाने वाले गुमाश्ताओं के कुंबकोणम ढंग का साफा, जिसमें न सौंदर्य हो. न गंभीरता, मैं नहीं पहना करना । इस पर भी भैया नाराज हो जाते । "राजपत्रु वीड़ दोंगा विधवा तललो महा आंडवरमुळ पगड़ी वीडिकी" (बड़ा राजपूत टहरा सान्ना ठाट की पगड़ी देखो सर पर !) ऐसी गालियां दिया करते । इसी बीच एक दिन वायुरोग के कारण मेरे पिताजी की अचानक मृत्यु हो गयी । उनका अंतिम संस्कार, ब्रह्मसमाजी ढंग से कराने की मेरी इच्छा थी । मेरे भाई हिंदू धर्म के आचार अनुष्ठानों का अनुकरण करना चाहते थे। इस पर गरमागरम विवाद व चर्चाएं हुईं। लाख मध्यस्थती और वीचबचाव के बाद श्मशान में उसने अपनी इच्छानुसार अंत्येष्टि क्रियाएं की और बाद में मैन अपन सिद्धांतो के अनुसार एक ब्रह्मसमाजी गुरु की मदद लेकर विधिवत् क्रियाएं संपन्न कीं। इन सब बातों ने मुझे अपने मामाजी रावबहादुर सुंदरराजुलू नायुडू की दृष्टि में गिरा दिया । परिणामस्वरूप विवाह होने में विलंब होता रहा । लेकिन वे दिल से यही चाहते थे कि किसी तरह मेरा सुधार करके, अपनी बेटी की शादी मुझ से करा दें । वसंत ऋतु । पूर्णिमा का चांद । अर्धरात्रि की बेला । सारा पुरसैवाक्कम निद्रामग्न था । केवल दो प्राणी जागृत थे । एक मैं, दूसरी मीना । शीतल मंद बयार चल रही थी । छत पर मीना के कमरे से वीणा की मधुर ध्वनि आ रही थी । लेकिन हमेशा की तरह खर्राट की आवाज सुनाई न पड़ी । मामाजी शहर में नहीं थे । गांव गये हुए थे । मैं तो आंगन में अपनी खाट पर बैठा था। मेरे दिल में दो ज्वालामुखी परस्पर द्वंद्व युद्ध कर रहे थं । इनमें एक था प्रेम, दूसरा वह जो आपको बाद में मालूम होगा । वीणा वादन एकाएक रुक गया । थोड़ी देर में मुझे लगा कि कोई मरे पीछे आ खड़ा है । मुड़कर देखा तो मीना खड़ी थी । पहली बार हमारा एकांत मिलन हो रहा था, इसलिए हमारे प्रेम संलाप का लंबा-चौड़ा वर्णन होगा, पाठक ऐसी आशा न करें । कई बार हम एकांत में मिले थे । मीना खाट पर आ बैठी । मैंने धीरे से कहा "मीना ! आज मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं ।" वह बोली, "मैं जानती हूं ।" "क्या है बनाओ तो सही ।" "आप ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने वाले हैं ?" क्यों किसलिए ' तुमसे किसने कहा ?" उसने कहा "वंदेमातरम् ।" मीना की प्रखर बुद्धि से मैं परिचित था । इसलिए उसके मुंह से ऐसी बातें सुनकर आश्चर्य न हुआ । मैने कहा- "हो मीना ! अब ब्रह्मचारियों को ही देश की रक्षा का भार ! उठाना है। इस महान देश का अब पतन हो गया है । सर्वोच्च हिमालय पर्वतमाला की जगह पर कंटीली झाड़ियों और विषैले जंतुओं से भरा घोर वनप्रदेश छा गया सा लगता है। लगता है, अर्जुन के भव्य राजमहल में चमगादड़ों का राज चल रहा है । ब्रह्मचारी ही इसका उद्धार कर सकेंगे। बोंबली राजा का पुत्र या राजा सर रामस्वामी मुदलियार का बेटा न होकर हम जैसे साधारण परिवार के लोग शादी कर लें तो अकालपीड़ित इस देश में दम घुट जायंगा । 'गोरैया के सिर पर ताड़ का फल' की तरह, इन गीदडों के झुंड के एक युवक के सिर पर परिवार का बोझ डानते वक्त उसका प्राण मुंह को आ जाता है। उसकी छोटी-मांटी अभिलाषाओं एवं लक्ष्यों को पूरा करना भी उसके लिए भगीरथ प्रयत्न सा हो जाता है । ऐसी हालत में देशसेवा का कार्य और कर्त्तव्य वे कैसे निभायेंगे ? उसकी चिंता कैसे करेंगे हमें ब्रह्मचारी चाहिए। आत्मज्ञानी लोग चाहिए । सांसारिक सुख भोगों की चाह न रखनेवाले निःस्वार्थ सेवी चाहिए । यह स्वदेशी आंदालेन कोई लौकिक कार्य नहीं। यह एक पुनीत धर्म है । जो इसकी दीक्षा लेता है उसमें, कर्मयोगी की निस्पृहता, तेजस, वीर्य तथा पौरुप आदि विशिष्ट गुणों की आवश्यकता है । चाहता हूं, मैं भी उस व्रत की
मीनांबाल वीणा बजाने में देवी सरस्वती के समान थी । जब कभी वह पुरसेवाक्कम में हमारे घर पर आती, छत वाले कमरे को उसके उपयोग के लिए खाली कर देते थे । चांदनी राता में आठ बजे ही भोजन कर लिया जाना । नौ बजे से आधी रात तक वह अपने कमरे में वीणा बजाती रहनी । कमरे से सटे बाहरी पंडाल में उसके पिनाजी रावबहादुर सुंदरराजुलू नायुड़ खाट पर लेटे, थोड़ी देर तक वीणावादन सुनतं, फिर खरर्टि लेने लगते । मगर महाशय अपने खर्टि से वीणा की मधुर ध्वनि को दबाते न थे । धीमे खर्टि ही लेने । बाहरी आंगन में एक और मैं अकेले अपना ब्रह्मचारी-बिछौना बिछाये पड़ा रहता । वीणावादन समाप्त होने तक मेरी पलकें इमली की गोंद लगाने पर भी बंद न होनी । मीनांबाल के कमरे में उसके साथ मेरी जो बहन रन्नम् लेटा करती थी जल्दी ही सो जाती । नीचे मां, बड़े भाई, भाभी सब निद्रामग्न हो जाते । मेरी भाभी पेट में अन्न का निवाला पडते ही, हाथ धोने-धोने झपकियां लेने लगती । बीच-बीच में बच्चों के रोने की आवाजें आती । बड़े भाई रेवेन्यू बोर्ड के दफ्तर में नौकरी करते थे । उनको चार साल में एक बार दफ्तर में दस रुपये का, और घर में दो बच्चों का प्रमोशन मिलना था । ऋतु । चांदनी रात । अर्धरात्रि की बेला । सारा पुरसेवाक्कम गहरी नींद में था। केवल दो प्राणियों की आंखों में नींद नहीं । एक तो में, दूसरी वह । मीना गंधर्व स्त्रियों की सी वोगा बजाती थी । देखने में भी अप्सरा सी लगती । उम्र का मोलहवां वर्ष था। अनावश्यक राम कहानी क्यों बढ़ाऊं कामदेव ने अपने तेज बाण में मेरे प्राण वींधकर उसके हाथों में सौंप दिये। ओह! क्या कहूं ! उसका अलौकिक संगीत चाहे कितनी देर सुनते रहे दिल न अघाता । उसका मुखारविंद नित्य - निन्य नवविकसित सा लगना । उसके पिताजी रावबहादुर सुंदरराजुजू नायुडू मेरी मां के दूर के भाई लगते थे। तंजाऊर तथा अन्य कई जिलों में बहुत दिनों तक पुलिस इंसपेक्टर की हैसियत से सरकार की बड़ी सेवा की जिसके फलस्वरूप रावबहादुर की उपाधि प्राप्त की । स्वदेशी आंदोलन के शुरू होने से पहले ही वे नौकरी से अवकाश प्राप्त कर चुके थे। मेरे कहने का मतलब यह है कि असल में उनको प्राप्त उपाधि, स्वदेशी आंदोलन में भाग लेते कुछ नेताओं पर झूटमूठ की रिपोर्ट लिखकर पायी उपाधि नहीं थी, सचमुच कड़ी मेहनत का फल था । बचपन से ही उनकी यही इच्छा रही कि मीनांबाल की शादी मुझसे करा दें लेकिन इसे पूरा करने में कई विघ्न पड़े । उनमें अधिकांश का कारण मैं था । सोलह वर्ष की आयु तक मैंने मद्रास क्रिस्चियन कालेज में शिक्षा पायी । वैदिक कान से लेकर आज तक भारत देश के ऋषि-मुनिगण निरे मूर्ख थे । अर्जुन, कालिदास, शंकराचार्य, शिवाजी, रामदास, कबीरदास, तथा उनके पहले व बाद के कल तक जो महान रहे, वे मूर्ख थे । भारत के निवासियों के हृदय में जिस भक्ति की पालते आ रहे थे वह सब बर्बरता पूर्ण मूढ़ भक्ति है । हेय और तुच्छ है । अंग्रेजों के ऐसे महान सत्य मेरे दिल में अंकित हो गये । मगर ईसाई पादरी एक विचित्र जीव थे। हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति के प्रति श्रद्धा रखना मूढ़ता है, अज्ञान है ऐसा निर्धारित करने के साथ साथ युवकों के मन में यह प्रभाव छोड़ देते हैं कि जिस ईसाई धर्म का गुणगान कर रहे हैं वह भी आखिर मूढ़ भक्ति ही है। धर्म संबंधी बातों को विस्तार से लिखकर मैं पाठकों को सिर दर्द पैदा करना नहीं चाहता। संक्षेप में इतना कहा जा सकता है कि मैंने अपने धर्म के आचार-विचारों से विरक्त होकर 'ज्ञान स्नान' नहीं किया; ब्रह्मसमाजी बन गया । कुछ दिनों के उपरांत पढ़ाई छोड़ दी । घर में किसी से बताये बिना कलकत्ता चला गया, और वहां ब्रह्मसमाजी बनने की शिक्षा ली । कुछ महीने उनकी पाठशाला में पढ़ना रहा । असल में मेरा उद्देश्य ब्रह्मसमाज का उपदेशक बनना था । कलकत्ते से पंजाब व हिंदुस्तान के अन्य प्रदेशों की यात्रा करता हुआ आखिर मद्राम आ पहुंचा। मेरे हिंदू धर्म को त्यागने की बात पर मेरी जाति वालों ने मुझे कई प्रकार के कष्ट दिये लेकिन मैं निराश न हुआ उलटे मेरी मानसिक दृढ़ता पहले से ज्यादा बढ़ती गयी । मेरे पिताजी - उनका नाम दुभाषी- रामचंद्र नायुडू था । वे केवल बाहरी वेशभूषा व रहन-सहन में आम लोगों के आचार-विचारों का अनुकरण करने थे, मगर दिन में ब्रह्मसमाज के प्रति श्रद्धा रखते थे इसलिए मुझे परमात्मा के प्रति भक्ति करने, आत्मविश्वास व श्रद्धा से उपनिषदों का अध्ययन करते देख मन ही मन आनंदित हुए । मगर प्रकट में ऐसे पेश आय मानां मुझ पर नाराज हों । मेरे रिश्तेदारों की बातों में आकर मुझे कोई कष्ट भी न दिया में ऐसा प्रबंध कर रखा था कि मुझे पहले से अधिक सुविधाएं मिले । मगर न जाने क्यों बड़े भाई ने मेरे प्रति बेहद घृणा प्रदर्शित की । मैं पंजाबियों जैसा साफा बाध लता था। पंद्रह रुपये वेतन पाने वाले गुमाश्ताओं के कुंबकोणम ढंग का साफा, जिसमें न सौंदर्य हो. न गंभीरता, मैं नहीं पहना करना । इस पर भी भैया नाराज हो जाते । "राजपत्रु वीड़ दोंगा विधवा तललो महा आंडवरमुळ पगड़ी वीडिकी" ऐसी गालियां दिया करते । इसी बीच एक दिन वायुरोग के कारण मेरे पिताजी की अचानक मृत्यु हो गयी । उनका अंतिम संस्कार, ब्रह्मसमाजी ढंग से कराने की मेरी इच्छा थी । मेरे भाई हिंदू धर्म के आचार अनुष्ठानों का अनुकरण करना चाहते थे। इस पर गरमागरम विवाद व चर्चाएं हुईं। लाख मध्यस्थती और वीचबचाव के बाद श्मशान में उसने अपनी इच्छानुसार अंत्येष्टि क्रियाएं की और बाद में मैन अपन सिद्धांतो के अनुसार एक ब्रह्मसमाजी गुरु की मदद लेकर विधिवत् क्रियाएं संपन्न कीं। इन सब बातों ने मुझे अपने मामाजी रावबहादुर सुंदरराजुलू नायुडू की दृष्टि में गिरा दिया । परिणामस्वरूप विवाह होने में विलंब होता रहा । लेकिन वे दिल से यही चाहते थे कि किसी तरह मेरा सुधार करके, अपनी बेटी की शादी मुझ से करा दें । वसंत ऋतु । पूर्णिमा का चांद । अर्धरात्रि की बेला । सारा पुरसैवाक्कम निद्रामग्न था । केवल दो प्राणी जागृत थे । एक मैं, दूसरी मीना । शीतल मंद बयार चल रही थी । छत पर मीना के कमरे से वीणा की मधुर ध्वनि आ रही थी । लेकिन हमेशा की तरह खर्राट की आवाज सुनाई न पड़ी । मामाजी शहर में नहीं थे । गांव गये हुए थे । मैं तो आंगन में अपनी खाट पर बैठा था। मेरे दिल में दो ज्वालामुखी परस्पर द्वंद्व युद्ध कर रहे थं । इनमें एक था प्रेम, दूसरा वह जो आपको बाद में मालूम होगा । वीणा वादन एकाएक रुक गया । थोड़ी देर में मुझे लगा कि कोई मरे पीछे आ खड़ा है । मुड़कर देखा तो मीना खड़ी थी । पहली बार हमारा एकांत मिलन हो रहा था, इसलिए हमारे प्रेम संलाप का लंबा-चौड़ा वर्णन होगा, पाठक ऐसी आशा न करें । कई बार हम एकांत में मिले थे । मीना खाट पर आ बैठी । मैंने धीरे से कहा "मीना ! आज मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं ।" वह बोली, "मैं जानती हूं ।" "क्या है बनाओ तो सही ।" "आप ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने वाले हैं ?" क्यों किसलिए ' तुमसे किसने कहा ?" उसने कहा "वंदेमातरम् ।" मीना की प्रखर बुद्धि से मैं परिचित था । इसलिए उसके मुंह से ऐसी बातें सुनकर आश्चर्य न हुआ । मैने कहा- "हो मीना ! अब ब्रह्मचारियों को ही देश की रक्षा का भार ! उठाना है। इस महान देश का अब पतन हो गया है । सर्वोच्च हिमालय पर्वतमाला की जगह पर कंटीली झाड़ियों और विषैले जंतुओं से भरा घोर वनप्रदेश छा गया सा लगता है। लगता है, अर्जुन के भव्य राजमहल में चमगादड़ों का राज चल रहा है । ब्रह्मचारी ही इसका उद्धार कर सकेंगे। बोंबली राजा का पुत्र या राजा सर रामस्वामी मुदलियार का बेटा न होकर हम जैसे साधारण परिवार के लोग शादी कर लें तो अकालपीड़ित इस देश में दम घुट जायंगा । 'गोरैया के सिर पर ताड़ का फल' की तरह, इन गीदडों के झुंड के एक युवक के सिर पर परिवार का बोझ डानते वक्त उसका प्राण मुंह को आ जाता है। उसकी छोटी-मांटी अभिलाषाओं एवं लक्ष्यों को पूरा करना भी उसके लिए भगीरथ प्रयत्न सा हो जाता है । ऐसी हालत में देशसेवा का कार्य और कर्त्तव्य वे कैसे निभायेंगे ? उसकी चिंता कैसे करेंगे हमें ब्रह्मचारी चाहिए। आत्मज्ञानी लोग चाहिए । सांसारिक सुख भोगों की चाह न रखनेवाले निःस्वार्थ सेवी चाहिए । यह स्वदेशी आंदालेन कोई लौकिक कार्य नहीं। यह एक पुनीत धर्म है । जो इसकी दीक्षा लेता है उसमें, कर्मयोगी की निस्पृहता, तेजस, वीर्य तथा पौरुप आदि विशिष्ट गुणों की आवश्यकता है । चाहता हूं, मैं भी उस व्रत की
करवाचौथ पर महिला ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा. मगर, फैमिली कोर्ट से बाहर निकलते ही उसने महिला के साथ मारपीट कर दी. जवाब में महिला ने भी पति को पीटा. बाद में इसमें दोनों के परिजन भी शामिल हो गए. मामला मध्य प्रदेश के हरदा का है. मौके पर मौजूद किसी ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को पकड़कर थाने ले आई. पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुवार शाम को हुई. महिला रेणुका कहार का अपने पति के साथ लंबे समय विवाद चल रहा है. फैमली कोर्ट ने करवा चौथ पर दोनों को समझाइश देकर समझौता कराने की कोशिश की थी. मगर, कोर्ट से बाहर निकलते ही पति और पत्नी में मारपीट हो गई और इस लड़ाई में दोनों के परिजन भी कूद पड़े. कोर्ट के बाहर अशांति फैलाने के आरोप में महिला के पति आरोपी राहुल और उसके परिजन के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 4 साल पहले महेंद्र गांव के रहने वाले राहुल से हुई थी. महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसके साथ मारपीट की जा रही है. इस बात को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है. गुरुवार को मामले की पेशी थी और फैमली कोर्ट में दोनों पक्षों को शांत रहने की समझाइश दी जा रही थी. महिला ने बताया कि उसे उम्मीद थी कि समझौता हो जाएगा और वह अपने पति के साथ रहेगी. इसके लिए करवा चौथ का व्रत भी रखा था. पेशी के बाद पति और उसके परिजनों द्वारा मारपीट की गई. इससे वो काफी दुखी है. अब वो पुलिस से न्याय की गुहार लगा रही है. इस मामले पर थाना प्रभारी राकेश गौर ने बताया, "बार एसोसिएशन से फोन आया था कि कोर्ट के सामने झगड़ा हो रहा है. तत्काल पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया और 151 के तहत मामला दर्ज किया गया. मामला न्यायालय के बाहर हुआ इसकी चलते पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया. "
करवाचौथ पर महिला ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा. मगर, फैमिली कोर्ट से बाहर निकलते ही उसने महिला के साथ मारपीट कर दी. जवाब में महिला ने भी पति को पीटा. बाद में इसमें दोनों के परिजन भी शामिल हो गए. मामला मध्य प्रदेश के हरदा का है. मौके पर मौजूद किसी ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को पकड़कर थाने ले आई. पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुवार शाम को हुई. महिला रेणुका कहार का अपने पति के साथ लंबे समय विवाद चल रहा है. फैमली कोर्ट ने करवा चौथ पर दोनों को समझाइश देकर समझौता कराने की कोशिश की थी. मगर, कोर्ट से बाहर निकलते ही पति और पत्नी में मारपीट हो गई और इस लड़ाई में दोनों के परिजन भी कूद पड़े. कोर्ट के बाहर अशांति फैलाने के आरोप में महिला के पति आरोपी राहुल और उसके परिजन के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी चार साल पहले महेंद्र गांव के रहने वाले राहुल से हुई थी. महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसके साथ मारपीट की जा रही है. इस बात को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है. गुरुवार को मामले की पेशी थी और फैमली कोर्ट में दोनों पक्षों को शांत रहने की समझाइश दी जा रही थी. महिला ने बताया कि उसे उम्मीद थी कि समझौता हो जाएगा और वह अपने पति के साथ रहेगी. इसके लिए करवा चौथ का व्रत भी रखा था. पेशी के बाद पति और उसके परिजनों द्वारा मारपीट की गई. इससे वो काफी दुखी है. अब वो पुलिस से न्याय की गुहार लगा रही है. इस मामले पर थाना प्रभारी राकेश गौर ने बताया, "बार एसोसिएशन से फोन आया था कि कोर्ट के सामने झगड़ा हो रहा है. तत्काल पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया और एक सौ इक्यावन के तहत मामला दर्ज किया गया. मामला न्यायालय के बाहर हुआ इसकी चलते पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया. "
A subscription to JoVE is required to view this content. You will only be able to see the first 2 minutes. The JoVE video player is compatible with HTML5 and Adobe Flash. Older browsers that do not support HTML5 and the H.264 video codec will still use a Flash-based video player. We recommend downloading the newest version of Flash here, but we support all versions 10 and above. If that doesn't help, please let us know. Please note that all translations are automatically generated. यहां प्रस्तुत प्रोटोकॉल माउस दिल के सिनोट्रियल नोड (एसएएन) और एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (एवीएन) क्षेत्र से कार्डियक निवासी मैक्रोफेज के अलगाव के लिए एक चरण-दर-चरण दृष्टिकोण प्रदान करता है। हम विशेष रूप से माउस में साइनस और एवी नोड से फ्लोरेसेंस-सक्रिय सेल सॉर्टिंग द्वारा कार्डियक निवासी माइक्रोफेज के माइक्रोडिसेक्शन और बाद में अलगाव के लिए एक प्रोटोकॉल का वर्णन करते हैं। साइनस और वी नोड के सटीक माइक्रोडिसेक्शन के साथ, चुंबकीय और प्रतिदीप्ति-सक्रिय सेल सॉर्टिंग के संयोजन के बाद, हम विशेष रूप से उच्च शुद्धता पर साइनस और वी नोड से निवासी मैक्रोफेज को अलग करने में सक्षम हैं। हृदय में अलग-अलग क्षेत्रों से कार्डियक निवासी मैक्रोफेज की पहचान और अलगाव उनके फेनोटाइप और कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी पर उनके क्षेत्र-विशिष्ट प्रभाव का आगे अध्ययन करने की अनुमति देता है। दिल को अलग करने के बाद, एक विच्छेदन माइक्रोस्कोप के तहत बर्फ ठंडे एक बार पीबीएस के साथ विच्छेदन डिश में सूक्ष्म विच्छेदन प्रक्रियाओं का प्रदर्शन करें। हृदय के बाएं-दाएं और पूर्ववर्ती-पीछे निर्धारित करने के लिए महाधमनी, फुफ्फुसीय धमनी, कोरोनरी साइनस और बाएं या दाएं वेंट्रिकल जैसे हृदय शारीरिक स्थलों का उपयोग करें। अभिविन्यास निर्धारित होने के बाद, पीछे की बड़ी नसों को उजागर करने के लिए डिश के निचले हिस्से में सामने वाले के साथ दिल को रखें। वेंट्रिकल्स के बहुमत को हटाने के लिए वेंट्रिकल्स और एट्रिया के बीच नाली के साथ काटें। एट्रियल भाग रखें। एलवी मुक्त दीवार और एलएए के शेष भाग के माध्यम से पिन डालकर विच्छेदन डिश में हृदय को ठीक करें। शेष आरवी मुक्त दीवार को ट्राइकसपिड वाल्व और बेहतर वेना कावा के माध्यम से ऊपर की ओर काटें। आरए और आरवी को दूर करें और आरए गुहा इंटरकैवल क्षेत्र और एट्रियल सेप्टम को उजागर करने के लिए आरएए को पिन करें। सैन के सूक्ष्म विच्छेदन के लिए, सैन नमूना प्राप्त करने के लिए इंटरकैवल क्षेत्र को अलग करने के लिए क्रिस्टा टर्मिनलिस के समानांतर इंटरट्रियल सेप्टम के साथ दिल को काटें। नमूने को बर्फ पर एक खाली 1.5 मिलीलीटर माइक्रोसेंट्रीफ्यूज ट्यूब में रखें। एवीएन के सूक्ष्म विच्छेदन के लिए, इंटरएट्रियल सेप्टम और इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम से सटे ऊतक के माध्यम से हृदय के शेष हिस्सों को पिन करें ताकि इंटरट्रियल सेप्टम के दाहिने एट्रियल पक्ष का सामना किया जा सके। कोच के त्रिकोण के लिए एंडोकार्डियल सतह पर दाएं आलिंद को देखें जो ट्राइकसपिड वाल्व के सेप्टल पत्रक की हिंज रेखा से और पीछे की ओर टोडारो के कण्डरा से घिरा होगा। कोरोनरी साइनस का छिद्र आधार पर देखा जाता है। स्केलपेल के साथ सैन और एवीएन ऊतक कीमा करें। फिर प्रत्येक नमूने में ताजा तैयार पाचन बफर के 500 माइक्रोलीटर जोड़ें और माइक्रोसेंट्रीफ्यूज ट्यूब की दीवार से सभी कीमा ऊतक धो लें। नमूने को पचाने और एक भंवर मशीन पर ऊतक को समरूप बनाने में मदद करने के लिए धीरे से पिपेट। पाचन के बाद, ऊतक निलंबन को 40 माइक्रोमीटर सेल छन्नी के माध्यम से पारित करके एक ताजा 15 मिलीलीटर सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में स्थानांतरित करें। पाचन को रोकने के लिए अतिरिक्त पांच मिलीलीटर सेल सॉर्टिंग बफर के साथ सेल स्ट्रेनर को कुल्ला करें। सतह पर तैरने वाले को हटा दें। सेल छंटाई बफर के 90 माइक्रोलीटर के साथ सेल पेलेट को फिर से निलंबित करने के बाद, 15 मिलीलीटर सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में सेल निलंबन में प्रति 10 मिलियन कुल कोशिकाओं में सीडी 45 माइक्रोबीड्स के 10 माइक्रोलीटर जोड़ें। नमूने को अच्छी तरह से मिलाएं। माइक्रोबीड्स और एंटीबॉडी मिश्रण के साथ सेल निलंबन को इनक्यूबेट करने के समय के दौरान, चुंबकीय स्तंभ को एक उपयुक्त चुंबकीय विभाजक से जोड़कर और फिर चुंबकीय स्तंभ के नीचे एक संग्रह ट्यूब रखकर चुंबकीय पृथक्करण सेट तैयार करें। स्तंभ के शीर्ष पर जोड़े गए सेल सॉर्टिंग बफर के 500 माइक्रोलीटर के साथ कुल्ला करके चुंबकीय कॉलम तैयार करें और बफर को गुजरने की अनुमति दें। सेल सस्पेंशन को तुरंत कॉलम पर लागू करें, हवा के बुलबुले से बचें, जबकि सेल सॉर्टिंग बफर गुजर रहा है। कॉलम को सेल सॉर्टिंग बफर के 500 माइक्रोलीटर के साथ तीन बार धोएं। कॉलम पर एक मिलीलीटर सेल सॉर्टिंग बफर जोड़ें। चुंबकीय विभाजक से स्तंभ निकालें और इसे एक नई संग्रह ट्यूब पर रखें। चुंबकीय रूप से लेबल कोशिकाओं वाले प्रवाह-थ्रू को प्राप्त करने के लिए कॉलम के साथ आपूर्ति किए गए प्लंजर को दृढ़ता से लागू करके कॉलम को तुरंत फ्लश करें। बिना दाग वाले नमूने और मुआवजा ट्यूबों को लागू करने के बाद, अक्ष की उचित स्थिति में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों चोटियों को संरेखित करने के लिए प्रत्येक चैनल के वोल्टेज को समायोजित करें। व्यवहार्यता मार्कर के रूप में DAPI का उपयोग करके पाठ पांडुलिपि में वर्णित गेटिंग रणनीति सेट करें। यह पुष्टि करने के लिए फ्लो साइटोमेट्री चार्ट की जांच करें कि चार्ट पर रुचि की सेल आबादी ठीक से दिखाई गई है। बाद के प्रयोगों की आवश्यकता के आधार पर क्रमबद्ध कोशिकाओं को मध्यम या बफर में एकत्र करें। एक सही विच्छेदन की पुष्टि करने के लिए, सैन और एवीएन की पहचान इम्यूनोफ्लोरोसेंट और मैसन के ट्राइक्रोम स्टेनिंग का उपयोग करके की गई थी। सैन और एवीएन में एचसीएन 4 सकारात्मक चालन प्रणाली कोशिकाओं के इम्यूनोफ्लोरोसेंट धुंधलापन, साथ ही साथ मैसन के सैन और एवीएन के ट्राइक्रोम धुंधलापन यहां दिखाया गया है। निवासी कार्डियक मैक्रोफेज की सेल सॉर्टिंग के लिए गेटिंग रणनीति ने वाई-अक्ष बनाम एक्स-अक्ष के आगे के स्कैटर क्षेत्र में डबल्स के बहिष्करण द्वारा मोनोन्यूक्लियर कोशिकाओं की पहचान करने में मदद की। DAPI द्वारा मृत कोशिकाओं को बाहर रखा गया था। सीडी 45 पॉजिटिव ल्यूकोसाइट्स के लिए लाइव कोशिकाओं को गेट किया गया था, फिर सीडी 11 बी पॉजिटिव माइलॉयड कोशिकाओं के लिए। कार्डियक मैक्रोफेज की पहचान एफ 4/80 और सीडी 64 दोनों की अभिव्यक्ति से की गई थी, फिर लिम्फोसाइट एंटीजन छह अभिव्यक्ति द्वारा स्तरीकृत किया गया था। ब्राइटफील्ड माइक्रोस्कोपी के तहत ताजा क्रमबद्ध कोशिकाओं को देखा गया था। फ्लोरोफोरे पीई चैनल के तहत देखे जाने पर कोशिकाएं सीडी 45 के लिए सकारात्मक थीं। जब फ्लोरोफोरे एपीसी आकार के सात चैनल के तहत देखा गया, तो क्रमबद्ध कोशिकाओं के एक ही दृश्य ने सीडी 11 बी सकारात्मक कोशिकाओं को दिखाया। फ्लोरोफोरे पीई आकार सात चैनल का उपयोग एफ 4/80 सकारात्मक फेनोटाइप की पहचान करने के लिए किया गया था। और ट्रिपल पॉजिटिव कोशिकाओं को कार्डियक निवासी मैक्रोफेज के रूप में पहचाना गया था। छह दिनों तक मध्यम में संवर्धित पृथक कार्डियक मैक्रोफेज को सफेद तीर के साथ इंगित किया जाता है, जबकि काले तीर मृत कोशिकाओं का संकेत देते हैं। क्रमबद्ध मैक्रोफेज का उपयोग आगे के कार्यात्मक अध्ययनों जैसे पैच क्लैंप प्रयोगों या अभिव्यक्ति अध्ययन जैसे आरएनए अनुक्रमण या प्रोटिओमिक अध्ययन के लिए किया जा सकता है।
A subscription to JoVE is required to view this content. You will only be able to see the first दो minutes. The JoVE video player is compatible with HTMLपाँच and Adobe Flash. Older browsers that do not support HTMLपाँच and the H.दो सौ चौंसठ video codec will still use a Flash-based video player. We recommend downloading the newest version of Flash here, but we support all versions दस and above. If that doesn't help, please let us know. Please note that all translations are automatically generated. यहां प्रस्तुत प्रोटोकॉल माउस दिल के सिनोट्रियल नोड और एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड क्षेत्र से कार्डियक निवासी मैक्रोफेज के अलगाव के लिए एक चरण-दर-चरण दृष्टिकोण प्रदान करता है। हम विशेष रूप से माउस में साइनस और एवी नोड से फ्लोरेसेंस-सक्रिय सेल सॉर्टिंग द्वारा कार्डियक निवासी माइक्रोफेज के माइक्रोडिसेक्शन और बाद में अलगाव के लिए एक प्रोटोकॉल का वर्णन करते हैं। साइनस और वी नोड के सटीक माइक्रोडिसेक्शन के साथ, चुंबकीय और प्रतिदीप्ति-सक्रिय सेल सॉर्टिंग के संयोजन के बाद, हम विशेष रूप से उच्च शुद्धता पर साइनस और वी नोड से निवासी मैक्रोफेज को अलग करने में सक्षम हैं। हृदय में अलग-अलग क्षेत्रों से कार्डियक निवासी मैक्रोफेज की पहचान और अलगाव उनके फेनोटाइप और कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी पर उनके क्षेत्र-विशिष्ट प्रभाव का आगे अध्ययन करने की अनुमति देता है। दिल को अलग करने के बाद, एक विच्छेदन माइक्रोस्कोप के तहत बर्फ ठंडे एक बार पीबीएस के साथ विच्छेदन डिश में सूक्ष्म विच्छेदन प्रक्रियाओं का प्रदर्शन करें। हृदय के बाएं-दाएं और पूर्ववर्ती-पीछे निर्धारित करने के लिए महाधमनी, फुफ्फुसीय धमनी, कोरोनरी साइनस और बाएं या दाएं वेंट्रिकल जैसे हृदय शारीरिक स्थलों का उपयोग करें। अभिविन्यास निर्धारित होने के बाद, पीछे की बड़ी नसों को उजागर करने के लिए डिश के निचले हिस्से में सामने वाले के साथ दिल को रखें। वेंट्रिकल्स के बहुमत को हटाने के लिए वेंट्रिकल्स और एट्रिया के बीच नाली के साथ काटें। एट्रियल भाग रखें। एलवी मुक्त दीवार और एलएए के शेष भाग के माध्यम से पिन डालकर विच्छेदन डिश में हृदय को ठीक करें। शेष आरवी मुक्त दीवार को ट्राइकसपिड वाल्व और बेहतर वेना कावा के माध्यम से ऊपर की ओर काटें। आरए और आरवी को दूर करें और आरए गुहा इंटरकैवल क्षेत्र और एट्रियल सेप्टम को उजागर करने के लिए आरएए को पिन करें। सैन के सूक्ष्म विच्छेदन के लिए, सैन नमूना प्राप्त करने के लिए इंटरकैवल क्षेत्र को अलग करने के लिए क्रिस्टा टर्मिनलिस के समानांतर इंटरट्रियल सेप्टम के साथ दिल को काटें। नमूने को बर्फ पर एक खाली एक दशमलव पाँच मिलीलीटर माइक्रोसेंट्रीफ्यूज ट्यूब में रखें। एवीएन के सूक्ष्म विच्छेदन के लिए, इंटरएट्रियल सेप्टम और इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम से सटे ऊतक के माध्यम से हृदय के शेष हिस्सों को पिन करें ताकि इंटरट्रियल सेप्टम के दाहिने एट्रियल पक्ष का सामना किया जा सके। कोच के त्रिकोण के लिए एंडोकार्डियल सतह पर दाएं आलिंद को देखें जो ट्राइकसपिड वाल्व के सेप्टल पत्रक की हिंज रेखा से और पीछे की ओर टोडारो के कण्डरा से घिरा होगा। कोरोनरी साइनस का छिद्र आधार पर देखा जाता है। स्केलपेल के साथ सैन और एवीएन ऊतक कीमा करें। फिर प्रत्येक नमूने में ताजा तैयार पाचन बफर के पाँच सौ माइक्रोलीटर जोड़ें और माइक्रोसेंट्रीफ्यूज ट्यूब की दीवार से सभी कीमा ऊतक धो लें। नमूने को पचाने और एक भंवर मशीन पर ऊतक को समरूप बनाने में मदद करने के लिए धीरे से पिपेट। पाचन के बाद, ऊतक निलंबन को चालीस माइक्रोमीटर सेल छन्नी के माध्यम से पारित करके एक ताजा पंद्रह मिलीलीटर सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में स्थानांतरित करें। पाचन को रोकने के लिए अतिरिक्त पांच मिलीलीटर सेल सॉर्टिंग बफर के साथ सेल स्ट्रेनर को कुल्ला करें। सतह पर तैरने वाले को हटा दें। सेल छंटाई बफर के नब्बे माइक्रोलीटर के साथ सेल पेलेट को फिर से निलंबित करने के बाद, पंद्रह मिलीलीटर सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में सेल निलंबन में प्रति दस मिलियन कुल कोशिकाओं में सीडी पैंतालीस माइक्रोबीड्स के दस माइक्रोलीटर जोड़ें। नमूने को अच्छी तरह से मिलाएं। माइक्रोबीड्स और एंटीबॉडी मिश्रण के साथ सेल निलंबन को इनक्यूबेट करने के समय के दौरान, चुंबकीय स्तंभ को एक उपयुक्त चुंबकीय विभाजक से जोड़कर और फिर चुंबकीय स्तंभ के नीचे एक संग्रह ट्यूब रखकर चुंबकीय पृथक्करण सेट तैयार करें। स्तंभ के शीर्ष पर जोड़े गए सेल सॉर्टिंग बफर के पाँच सौ माइक्रोलीटर के साथ कुल्ला करके चुंबकीय कॉलम तैयार करें और बफर को गुजरने की अनुमति दें। सेल सस्पेंशन को तुरंत कॉलम पर लागू करें, हवा के बुलबुले से बचें, जबकि सेल सॉर्टिंग बफर गुजर रहा है। कॉलम को सेल सॉर्टिंग बफर के पाँच सौ माइक्रोलीटर के साथ तीन बार धोएं। कॉलम पर एक मिलीलीटर सेल सॉर्टिंग बफर जोड़ें। चुंबकीय विभाजक से स्तंभ निकालें और इसे एक नई संग्रह ट्यूब पर रखें। चुंबकीय रूप से लेबल कोशिकाओं वाले प्रवाह-थ्रू को प्राप्त करने के लिए कॉलम के साथ आपूर्ति किए गए प्लंजर को दृढ़ता से लागू करके कॉलम को तुरंत फ्लश करें। बिना दाग वाले नमूने और मुआवजा ट्यूबों को लागू करने के बाद, अक्ष की उचित स्थिति में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों चोटियों को संरेखित करने के लिए प्रत्येक चैनल के वोल्टेज को समायोजित करें। व्यवहार्यता मार्कर के रूप में DAPI का उपयोग करके पाठ पांडुलिपि में वर्णित गेटिंग रणनीति सेट करें। यह पुष्टि करने के लिए फ्लो साइटोमेट्री चार्ट की जांच करें कि चार्ट पर रुचि की सेल आबादी ठीक से दिखाई गई है। बाद के प्रयोगों की आवश्यकता के आधार पर क्रमबद्ध कोशिकाओं को मध्यम या बफर में एकत्र करें। एक सही विच्छेदन की पुष्टि करने के लिए, सैन और एवीएन की पहचान इम्यूनोफ्लोरोसेंट और मैसन के ट्राइक्रोम स्टेनिंग का उपयोग करके की गई थी। सैन और एवीएन में एचसीएन चार सकारात्मक चालन प्रणाली कोशिकाओं के इम्यूनोफ्लोरोसेंट धुंधलापन, साथ ही साथ मैसन के सैन और एवीएन के ट्राइक्रोम धुंधलापन यहां दिखाया गया है। निवासी कार्डियक मैक्रोफेज की सेल सॉर्टिंग के लिए गेटिंग रणनीति ने वाई-अक्ष बनाम एक्स-अक्ष के आगे के स्कैटर क्षेत्र में डबल्स के बहिष्करण द्वारा मोनोन्यूक्लियर कोशिकाओं की पहचान करने में मदद की। DAPI द्वारा मृत कोशिकाओं को बाहर रखा गया था। सीडी पैंतालीस पॉजिटिव ल्यूकोसाइट्स के लिए लाइव कोशिकाओं को गेट किया गया था, फिर सीडी ग्यारह बी पॉजिटिव माइलॉयड कोशिकाओं के लिए। कार्डियक मैक्रोफेज की पहचान एफ चार/अस्सी और सीडी चौंसठ दोनों की अभिव्यक्ति से की गई थी, फिर लिम्फोसाइट एंटीजन छह अभिव्यक्ति द्वारा स्तरीकृत किया गया था। ब्राइटफील्ड माइक्रोस्कोपी के तहत ताजा क्रमबद्ध कोशिकाओं को देखा गया था। फ्लोरोफोरे पीई चैनल के तहत देखे जाने पर कोशिकाएं सीडी पैंतालीस के लिए सकारात्मक थीं। जब फ्लोरोफोरे एपीसी आकार के सात चैनल के तहत देखा गया, तो क्रमबद्ध कोशिकाओं के एक ही दृश्य ने सीडी ग्यारह बी सकारात्मक कोशिकाओं को दिखाया। फ्लोरोफोरे पीई आकार सात चैनल का उपयोग एफ चार/अस्सी सकारात्मक फेनोटाइप की पहचान करने के लिए किया गया था। और ट्रिपल पॉजिटिव कोशिकाओं को कार्डियक निवासी मैक्रोफेज के रूप में पहचाना गया था। छह दिनों तक मध्यम में संवर्धित पृथक कार्डियक मैक्रोफेज को सफेद तीर के साथ इंगित किया जाता है, जबकि काले तीर मृत कोशिकाओं का संकेत देते हैं। क्रमबद्ध मैक्रोफेज का उपयोग आगे के कार्यात्मक अध्ययनों जैसे पैच क्लैंप प्रयोगों या अभिव्यक्ति अध्ययन जैसे आरएनए अनुक्रमण या प्रोटिओमिक अध्ययन के लिए किया जा सकता है।
परफेक्ट लुक के लिए लडकियां कुछ भी कर सकती है. वो उनकी आउटफिट्स से लेकर मेकअप तक हर चीज़ पर पूरा ध्यान देती है लेकिन अगर आपका हेयर स्टाइल सही न हो तो ये आपका पूरा लुक खराब करने के लिए बहुत है. आज हम आपको कुछ ऐसे अलग-अलग हेयर स्टाइल बताएंगे, जिन्हें आप आसानी से बना सकती है. 1-अगर आप साड़ी पाने जा रहे और आप मैच्योर दिखना चाहती है. इसके लिए आप साइड चीर निकाल कर जुडा भी कर सकती है. आप अपने बालों में गजरा भी लगा सकती है. ऐसे में आपका लुक पूरी तरह से कम्पलीट लगेगा. 2-अगर आप वेर्स्टन कपड़े पाने जा रही है तो इसमे आप अपने बालों को स्ट्रेट कर के साइड पफ भी बना सकती है. ऐसे में आपका लुक स्टाइलिश लगेगा. 3-आप पार्टी में कुछ खास दिखना चाहती है तो ऐसे मेें आप बीच में से च़ीर निकाल के पिछे सिंपल जुडा कर सकती है और इसके साथ आप बड़े इयर रिंग्स भी पा सकती है. 5-आप अगर सिंपल लुक रखना चाहती है तो ऐसे में आप बालों को कर्ल करके साइड में फलॉवर पिनअप भी कर सकती है. ऐसे मे आप बेहद खूबसूरत दिखेगी. 6-माथापटृी आजकल बहुत चलन में है अगर आप वैडिंग में कुछ खास और अलग नज़र आना चाहती है तो ऐसे में आप बीच में से चीर निकाल कर जुडा करके आगे माथापटृी लगा सकती है. 7-अगर आपके बाल छोटे हे तो ऐसे में आप बाल स्ट्रेट करके खुलें छोड़ दे.
परफेक्ट लुक के लिए लडकियां कुछ भी कर सकती है. वो उनकी आउटफिट्स से लेकर मेकअप तक हर चीज़ पर पूरा ध्यान देती है लेकिन अगर आपका हेयर स्टाइल सही न हो तो ये आपका पूरा लुक खराब करने के लिए बहुत है. आज हम आपको कुछ ऐसे अलग-अलग हेयर स्टाइल बताएंगे, जिन्हें आप आसानी से बना सकती है. एक-अगर आप साड़ी पाने जा रहे और आप मैच्योर दिखना चाहती है. इसके लिए आप साइड चीर निकाल कर जुडा भी कर सकती है. आप अपने बालों में गजरा भी लगा सकती है. ऐसे में आपका लुक पूरी तरह से कम्पलीट लगेगा. दो-अगर आप वेर्स्टन कपड़े पाने जा रही है तो इसमे आप अपने बालों को स्ट्रेट कर के साइड पफ भी बना सकती है. ऐसे में आपका लुक स्टाइलिश लगेगा. तीन-आप पार्टी में कुछ खास दिखना चाहती है तो ऐसे मेें आप बीच में से च़ीर निकाल के पिछे सिंपल जुडा कर सकती है और इसके साथ आप बड़े इयर रिंग्स भी पा सकती है. पाँच-आप अगर सिंपल लुक रखना चाहती है तो ऐसे में आप बालों को कर्ल करके साइड में फलॉवर पिनअप भी कर सकती है. ऐसे मे आप बेहद खूबसूरत दिखेगी. छः-माथापटृी आजकल बहुत चलन में है अगर आप वैडिंग में कुछ खास और अलग नज़र आना चाहती है तो ऐसे में आप बीच में से चीर निकाल कर जुडा करके आगे माथापटृी लगा सकती है. सात-अगर आपके बाल छोटे हे तो ऐसे में आप बाल स्ट्रेट करके खुलें छोड़ दे.
नई दिल्ली, अप्रैल 17। देश में अमीर होने का मतलब आमतौर पर करोड़पति होना ही माना जाता है। ऐसे में अगर ऐसे शेयर के बारे में पता चले कि उसने केवल एक बार के निवेश को ही 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का बना दिया है, तो यह अच्छी जानकारी हो सकती है। शेयर बाजार में एक से बढ़कर एक मल्टीबैगर शेयर हैं। बस जरूरत होती है, इनको सही समय पर छांट कर इनमें निवेश करने की। हम आज आपको ऐसे ही एक शेयर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने एक बार के निवेश को केवल 6 साल में ही करोड़ रुपये से ज्यादा का कर दिया है। आमतौर पर कई बार छोटी छोटी कंपनियां मल्टीबैगर साबित होती हैं। लेकिन अदाणी ग्रुप एक बड़ा ग्रुप है। ऐसे में इस ग्रुप का एक मजबूत शेयर मल्टीबैगर साबित हुआ है। इस शेयर नाम है अदानी ट्रांसमिशन लिमिटेड। इस शेयर ने निवेशकों को 6 साल में ही अमीर बना दिया है। यह शेयर वास्तव में मल्टीबैगर साबित हुआ है। बीते एक साल में अदानी ट्रांसमिशन का शेयर एक ऐसा ही शेयर है, जिसने 175 फीसदी का रिटर्न दिया है। वहीं बीते 6 साल में इस शेयर का रेट 35 रुपये से बढ़कर 2690 रुपये पर आ गया है। इस प्रकार इस शेयर ने बीते 6 साल में करीब 7700 फीसदी की तेजी दर्ज की है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर प्राइस की हिस्ट्री पर अगर नजर डालें तो पिछले 1 महीने में भी यह मल्टीबैगर शेयर ही रहा है। इस दौरान यह 2305 रुपये से बढ़कर 2690 रुपये के स्तर पर आ गया है। इस दौरान इा शेयर ने करीब 17 फीसदी की तेजी दर्ज की है। वहीं 1 साल के दौरान यह शेयर 1730 रुपये से बढ़कर 2690 रुपये के स्तर पर आया है। इस प्रकार से 1 साल के दौरान करीब 56 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। इसके अलावा अगर बीते 6 महीने में देखा जाए तो अदानी ट्रांसमिशन के शेयर का रेट 1748 रुपये से बढ़कर 2690 रुपये हो गया है। इस प्रकार से करीब 54 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। इसके अलावा अगर पिछले 5 साल में देखा जाए तो यह शेयर 85 रुपये के रेट से बढ़कर 2690 रुपये के स्तर पर आ गया है। इस प्रकार से बीते 5 साल के दौरान इस स्टॉक ने करीब 3070 फीसदी का रिटर्न दिया है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर ने बीते 6 साल के दौरान बहुत ही अच्छा रिटर्न दिया है। इस दौरान इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब 78 गुना कर दिया है। इस दौरान अदानी ट्रांसमिशन का शेयर 34. 70 रुपये के स्तर से बढ़कर 2690 रुपये के स्तर पर आ गया है। इस दौरान अगर किसी ने इस शेयर में 1. 50 लाख् रुपये का निवेश किया होगा तो उसकी वैल्यू इस वक्त करीब सवा करोड़ रुपये होगी। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर ने लम्बे समय के अलावा शार्ट टर्म में भी अच्छा फायदा कराया है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर के रेट पर अगर नजर डाली जाए तो 1 महीने पहले 1 लाख रुपये का निवेश अब करीब 1. 17 लाख रुपये हो चुका है। वहीं इस साल यानी जनवरी में किया गया 1 लाख रुपये का निवेश अब 1. 56 लाख रुपये हो चुका है। इसी तरह अगर 6 महीने में देखा जाए तो इस शेयर ने 1 लाख रुपये को बढ़ाकर 1. 54 लाख रुपये कर दिया है। वहीं 1 साल पहले 1 लाख रुपये का निवेश किया गया होगा तो वह बढ़कर 2. 75 लाख रुपये हो चुका है। वहीं अगर 5 साल पहले इस शेयर में 1 लाख रुपये का निवेश किया जाता तो वह आज करीब 31. 75 लाख रुपये हो गया होता।
नई दिल्ली, अप्रैल सत्रह। देश में अमीर होने का मतलब आमतौर पर करोड़पति होना ही माना जाता है। ऐसे में अगर ऐसे शेयर के बारे में पता चले कि उसने केवल एक बार के निवेश को ही एक करोड़ रुपये से ज्यादा का बना दिया है, तो यह अच्छी जानकारी हो सकती है। शेयर बाजार में एक से बढ़कर एक मल्टीबैगर शेयर हैं। बस जरूरत होती है, इनको सही समय पर छांट कर इनमें निवेश करने की। हम आज आपको ऐसे ही एक शेयर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने एक बार के निवेश को केवल छः साल में ही करोड़ रुपये से ज्यादा का कर दिया है। आमतौर पर कई बार छोटी छोटी कंपनियां मल्टीबैगर साबित होती हैं। लेकिन अदाणी ग्रुप एक बड़ा ग्रुप है। ऐसे में इस ग्रुप का एक मजबूत शेयर मल्टीबैगर साबित हुआ है। इस शेयर नाम है अदानी ट्रांसमिशन लिमिटेड। इस शेयर ने निवेशकों को छः साल में ही अमीर बना दिया है। यह शेयर वास्तव में मल्टीबैगर साबित हुआ है। बीते एक साल में अदानी ट्रांसमिशन का शेयर एक ऐसा ही शेयर है, जिसने एक सौ पचहत्तर फीसदी का रिटर्न दिया है। वहीं बीते छः साल में इस शेयर का रेट पैंतीस रुपयापये से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये पर आ गया है। इस प्रकार इस शेयर ने बीते छः साल में करीब सात हज़ार सात सौ फीसदी की तेजी दर्ज की है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर प्राइस की हिस्ट्री पर अगर नजर डालें तो पिछले एक महीने में भी यह मल्टीबैगर शेयर ही रहा है। इस दौरान यह दो हज़ार तीन सौ पाँच रुपयापये से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये के स्तर पर आ गया है। इस दौरान इा शेयर ने करीब सत्रह फीसदी की तेजी दर्ज की है। वहीं एक साल के दौरान यह शेयर एक हज़ार सात सौ तीस रुपयापये से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये के स्तर पर आया है। इस प्रकार से एक साल के दौरान करीब छप्पन फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। इसके अलावा अगर बीते छः महीने में देखा जाए तो अदानी ट्रांसमिशन के शेयर का रेट एक हज़ार सात सौ अड़तालीस रुपयापये से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये हो गया है। इस प्रकार से करीब चौवन फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। इसके अलावा अगर पिछले पाँच साल में देखा जाए तो यह शेयर पचासी रुपयापये के रेट से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये के स्तर पर आ गया है। इस प्रकार से बीते पाँच साल के दौरान इस स्टॉक ने करीब तीन हज़ार सत्तर फीसदी का रिटर्न दिया है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर ने बीते छः साल के दौरान बहुत ही अच्छा रिटर्न दिया है। इस दौरान इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब अठहत्तर गुना कर दिया है। इस दौरान अदानी ट्रांसमिशन का शेयर चौंतीस. सत्तर रुपयापये के स्तर से बढ़कर दो हज़ार छः सौ नब्बे रुपयापये के स्तर पर आ गया है। इस दौरान अगर किसी ने इस शेयर में एक. पचास लाख् रुपये का निवेश किया होगा तो उसकी वैल्यू इस वक्त करीब सवा करोड़ रुपये होगी। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर ने लम्बे समय के अलावा शार्ट टर्म में भी अच्छा फायदा कराया है। अदानी ट्रांसमिशन के शेयर के रेट पर अगर नजर डाली जाए तो एक महीने पहले एक लाख रुपये का निवेश अब करीब एक. सत्रह लाख रुपये हो चुका है। वहीं इस साल यानी जनवरी में किया गया एक लाख रुपये का निवेश अब एक. छप्पन लाख रुपये हो चुका है। इसी तरह अगर छः महीने में देखा जाए तो इस शेयर ने एक लाख रुपये को बढ़ाकर एक. चौवन लाख रुपये कर दिया है। वहीं एक साल पहले एक लाख रुपये का निवेश किया गया होगा तो वह बढ़कर दो. पचहत्तर लाख रुपये हो चुका है। वहीं अगर पाँच साल पहले इस शेयर में एक लाख रुपये का निवेश किया जाता तो वह आज करीब इकतीस. पचहत्तर लाख रुपये हो गया होता।
औराई के विधायक दीनानाथ भास्कर ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के नारे पर ही सवाल उठा दिया है। उक्त नारे को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह सब सिर्फ हवा में चल रहा है। विधायक की टिप्पणी आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया। टिप्पणी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो पीएम के नारे को लेकर हुई टिप्पणी से जिला संगठन नाराज है। हुआ यूं कि शनिवार को वीएनजीआईसी में कमल संदेश बाइक रैली में मंच पर स्थान न मिलने से विधायक काफी आहत हुए। अमर उजाला से बातचीत में औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ने टिप्पणी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पीएम और सीएम के मिशन को भटकाना चाहते हैं। एक सोची समझी साजिश उनके साथ हो रही है। दीनानाथ भास्कर बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और बसपा ने इन्हें कई प्रदेशों का प्रभारी भी बनाया था। 2014 भाजपा का दामन थाम लिया है और भदोही की औराई सीट से विधायक चुने गए।
औराई के विधायक दीनानाथ भास्कर ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के नारे पर ही सवाल उठा दिया है। उक्त नारे को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह सब सिर्फ हवा में चल रहा है। विधायक की टिप्पणी आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उबाल आ गया। टिप्पणी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो पीएम के नारे को लेकर हुई टिप्पणी से जिला संगठन नाराज है। हुआ यूं कि शनिवार को वीएनजीआईसी में कमल संदेश बाइक रैली में मंच पर स्थान न मिलने से विधायक काफी आहत हुए। अमर उजाला से बातचीत में औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ने टिप्पणी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पीएम और सीएम के मिशन को भटकाना चाहते हैं। एक सोची समझी साजिश उनके साथ हो रही है। दीनानाथ भास्कर बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और बसपा ने इन्हें कई प्रदेशों का प्रभारी भी बनाया था। दो हज़ार चौदह भाजपा का दामन थाम लिया है और भदोही की औराई सीट से विधायक चुने गए।
जिसके कान काम नहीं देते अर्थात जो वधिर है, वह शब्दों का उपभोग नहीं कर सकता। नेत्रन्द्रियहीन पुरुप रूप का सुख अनुभव नहीं कर सकता। जिसकी ब्राणशक्ति नष्ट हो गई है, बह गंध के सुख से वंचित हो जाता है। इसी प्रकार रसना और स्पर्शन इन्द्रिय की कुण्ठता वाला रस और स्पर्श के आनन्द से वंचित हो जाता है। अगर इन्द्रियां दुरुस्त हों और भोग्य पदार्थ न हों तो भी सांसारिक पदार्थ सुन नहीं दे सकते । भोग्य पदार्थों को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को रात दिन पसीना बहाना पड़ता है। कठिन से कठिन श्रम करना पड़ता है, देश विदेश में भटकना पड़ता है और कभी कभी अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़ती है । इतनी सारी मुसीबतें झेलने के पश्चात् भी कभी भोग्य पदार्थ मिलते हैं, कभी नहीं भी मिलते । पुण्य सहायक हुआ તો मिल जाते हैं, न हुआ तो केवल श्रम करना ही पल्ले पड़ता है । भोगोपभोग के पदार्थ कदाचित् प्राप्त हो जाते हैं तो सदा स्थायी नहीं रहते । पर पदार्थों का संयोग कभी स्थायी हो ही नहीं सकता। कोई कारण मिलता है और उन पदार्थों का वियोग हो जाता है । जब वियोग होता है तो इतना दुःख होता है, जितना संयोग के समय में सुख नहीं हुआ था । कभी कभी तो मनुष्य अत्यन्त कठोर परिश्रम से प्राप्त भोगों को भोग भी. नहीं पाता और वे नष्ट हो जाते हैं । उस समय उसके चित्त में कितना संताप होता है, यह बात या तो वह मनुष्य जानता है या केवली भगवान् ही जानते हैं । मान लीजिए कि मनुष्य का पुण्य प्रवल था और उसने भोग पदार्थों को भोग भी लिया, तो भी भोग के फलस्वरूप होने वाले कर्मचंध से वह नहीं बच सकता । इस प्रकार विचार करने से स्पष्ट हो जाता है कि संस्कार फा सुख वास्तविक सुख है ही नहीं। जो जीव वास्तविक सुख के स्वाद से परिचित हैं। वे ही उस सुखाभास को सुख मानते हैं । ज्ञानी जन स्पष्ट समझते हैं कि ऐसा सुख वस्तुतः दुःख है क्योंकि वह दुःख का कारण है। फिर भी कदाचित् उसे विकृत सुख मान लिया जाय तो भी उसकी मात्रा दुःखों की तुलना में नगण्य है । बड़े ही पाश्चर्य की बात है कि अज्ञानी जीव दुःख के कारण की भ्रान्तिवश सुख समझ लेते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए इतने उत्कंठित एवं प्रयत्नशील हो जाते हैं कि उनका प्राप्त थोड़ा बहुत सुख भी मिट्टी में मिल जाता है। ज्ञानी पुरुषों का अनुभव है कि - संयोगमूला जीवेन प्राप्ता दुःखपरम्परा । अर्थात् - संसारी जीवों को लगातार जो दुःख झेलने पड़ रहे हैं, उनका मूल कारण पर पदार्थों का सयोग है । इन बाह्य पदार्थों के संयोग के कारण ही जीव दुःखी हो रहे हैं । अतएव ज्यों ज्यों वाह्य पदार्थों का संयोग और ममत्व घटता चला जाता है, त्यों त्यों सुख की वृद्धि होती रहती है अन्त में जब शरीर तक का संयोग छूट जाता है तब सम्पूर्ण और वास्तविक सुख प्राप्त होता है र यह ज्ञानियों का महत्वपूर्ण अनुभव है। इस अनुभव के प्रकाश में जो देखते हैं और पर पदार्थों की ममता को हटाते हैं, वही सच्चे सुख के भागी होते हैं । भरत महाराज चक्रवर्ती थे, विशाल से विशाल जो साम्रा. ज्य कोई भी मनुष्य पा सकता है, वह उन्हें प्राप्त था । विश्व के सर्वोत्कृष्ट वैभव के वे अधिपति थे । हजारों देवता उनके सेवक थे । दुनियां की कोई भी वस्तु उन्हें दर्लभ नहीं था। पांचों इन्द्रियों के भोग सुलभ थे । हजारों रानियां थीं । बड़े २ सम्राट् उनकी कृपादृष्टि पाकर अपने का धन्य समझते थे। लेकिन कौन-सी प्रेरणा उनके मन में उत्पन्न हुई कि उस दुर्लभ वैभव को ठुकराकर वे अकिंचन अनगार बन गये ? समस्त धन, जन और वैभव के संयोग से अगर सुख मिलता होता तो वे उसका परिहार क्यों करते ? भाइयों ! या तो यह मानो कि भरतजी नादान थे या फिर यह स्वीकार करो कि उनके मार्गों पर न चलने वाले आप लोग नादान हैं। आप अपनी नादानी को स्वीकार करेंगे, यह मैं जानता हूं, क्योंकि वीतराग भगवान् की वाणी पर आपकी श्रद्धा है। चाहे उसके अनुसार अपना व्यवहार न बना सकें, फिर भी उस पर श्रद्धा रखते हैं। यह भी बड़े सौभाग्य की बात है । श्रद्धा दृढ़ रही तो एक दिन आऐगा कि आप में उसके अनुसार करने की शक्ति प्रकट हो जाय । श्रद्धावान् जीव कभी न कभी अपना कल्याण कर ही लेता है। ऐसा समझकर श्रद्धा को सुदृढ़ रक्खो और तदनुसार आचरण करने का प्रत्यन करो । महाराज भरत चक्रवर्ती की भावना चढ़ती ही गई, चढ़ती
जिसके कान काम नहीं देते अर्थात जो वधिर है, वह शब्दों का उपभोग नहीं कर सकता। नेत्रन्द्रियहीन पुरुप रूप का सुख अनुभव नहीं कर सकता। जिसकी ब्राणशक्ति नष्ट हो गई है, बह गंध के सुख से वंचित हो जाता है। इसी प्रकार रसना और स्पर्शन इन्द्रिय की कुण्ठता वाला रस और स्पर्श के आनन्द से वंचित हो जाता है। अगर इन्द्रियां दुरुस्त हों और भोग्य पदार्थ न हों तो भी सांसारिक पदार्थ सुन नहीं दे सकते । भोग्य पदार्थों को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को रात दिन पसीना बहाना पड़ता है। कठिन से कठिन श्रम करना पड़ता है, देश विदेश में भटकना पड़ता है और कभी कभी अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़ती है । इतनी सारी मुसीबतें झेलने के पश्चात् भी कभी भोग्य पदार्थ मिलते हैं, कभी नहीं भी मिलते । पुण्य सहायक हुआ તો मिल जाते हैं, न हुआ तो केवल श्रम करना ही पल्ले पड़ता है । भोगोपभोग के पदार्थ कदाचित् प्राप्त हो जाते हैं तो सदा स्थायी नहीं रहते । पर पदार्थों का संयोग कभी स्थायी हो ही नहीं सकता। कोई कारण मिलता है और उन पदार्थों का वियोग हो जाता है । जब वियोग होता है तो इतना दुःख होता है, जितना संयोग के समय में सुख नहीं हुआ था । कभी कभी तो मनुष्य अत्यन्त कठोर परिश्रम से प्राप्त भोगों को भोग भी. नहीं पाता और वे नष्ट हो जाते हैं । उस समय उसके चित्त में कितना संताप होता है, यह बात या तो वह मनुष्य जानता है या केवली भगवान् ही जानते हैं । मान लीजिए कि मनुष्य का पुण्य प्रवल था और उसने भोग पदार्थों को भोग भी लिया, तो भी भोग के फलस्वरूप होने वाले कर्मचंध से वह नहीं बच सकता । इस प्रकार विचार करने से स्पष्ट हो जाता है कि संस्कार फा सुख वास्तविक सुख है ही नहीं। जो जीव वास्तविक सुख के स्वाद से परिचित हैं। वे ही उस सुखाभास को सुख मानते हैं । ज्ञानी जन स्पष्ट समझते हैं कि ऐसा सुख वस्तुतः दुःख है क्योंकि वह दुःख का कारण है। फिर भी कदाचित् उसे विकृत सुख मान लिया जाय तो भी उसकी मात्रा दुःखों की तुलना में नगण्य है । बड़े ही पाश्चर्य की बात है कि अज्ञानी जीव दुःख के कारण की भ्रान्तिवश सुख समझ लेते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए इतने उत्कंठित एवं प्रयत्नशील हो जाते हैं कि उनका प्राप्त थोड़ा बहुत सुख भी मिट्टी में मिल जाता है। ज्ञानी पुरुषों का अनुभव है कि - संयोगमूला जीवेन प्राप्ता दुःखपरम्परा । अर्थात् - संसारी जीवों को लगातार जो दुःख झेलने पड़ रहे हैं, उनका मूल कारण पर पदार्थों का सयोग है । इन बाह्य पदार्थों के संयोग के कारण ही जीव दुःखी हो रहे हैं । अतएव ज्यों ज्यों वाह्य पदार्थों का संयोग और ममत्व घटता चला जाता है, त्यों त्यों सुख की वृद्धि होती रहती है अन्त में जब शरीर तक का संयोग छूट जाता है तब सम्पूर्ण और वास्तविक सुख प्राप्त होता है र यह ज्ञानियों का महत्वपूर्ण अनुभव है। इस अनुभव के प्रकाश में जो देखते हैं और पर पदार्थों की ममता को हटाते हैं, वही सच्चे सुख के भागी होते हैं । भरत महाराज चक्रवर्ती थे, विशाल से विशाल जो साम्रा. ज्य कोई भी मनुष्य पा सकता है, वह उन्हें प्राप्त था । विश्व के सर्वोत्कृष्ट वैभव के वे अधिपति थे । हजारों देवता उनके सेवक थे । दुनियां की कोई भी वस्तु उन्हें दर्लभ नहीं था। पांचों इन्द्रियों के भोग सुलभ थे । हजारों रानियां थीं । बड़े दो सम्राट् उनकी कृपादृष्टि पाकर अपने का धन्य समझते थे। लेकिन कौन-सी प्रेरणा उनके मन में उत्पन्न हुई कि उस दुर्लभ वैभव को ठुकराकर वे अकिंचन अनगार बन गये ? समस्त धन, जन और वैभव के संयोग से अगर सुख मिलता होता तो वे उसका परिहार क्यों करते ? भाइयों ! या तो यह मानो कि भरतजी नादान थे या फिर यह स्वीकार करो कि उनके मार्गों पर न चलने वाले आप लोग नादान हैं। आप अपनी नादानी को स्वीकार करेंगे, यह मैं जानता हूं, क्योंकि वीतराग भगवान् की वाणी पर आपकी श्रद्धा है। चाहे उसके अनुसार अपना व्यवहार न बना सकें, फिर भी उस पर श्रद्धा रखते हैं। यह भी बड़े सौभाग्य की बात है । श्रद्धा दृढ़ रही तो एक दिन आऐगा कि आप में उसके अनुसार करने की शक्ति प्रकट हो जाय । श्रद्धावान् जीव कभी न कभी अपना कल्याण कर ही लेता है। ऐसा समझकर श्रद्धा को सुदृढ़ रक्खो और तदनुसार आचरण करने का प्रत्यन करो । महाराज भरत चक्रवर्ती की भावना चढ़ती ही गई, चढ़ती
रायपुर। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में देशभर में सबसे ज्यादा शासकीय अस्पतालों को पंजीकृत करने वालों में छत्तीसगढ़ अव्वल राज्य बन गया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से महिलाओं को उपचार देने के मामले में भी राज्य देश में सबसे आगे दो श्रेणियों में रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार मिला है। 26 सितंबर को दिल्ली में आयोजित आरोग्य मंथन के आयोजन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर दो पुरस्कार मिले हैं। राज्य में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से उपचारित कुल हितग्राहियों में से 58 फीसदी महिलाओं को उपचार दिलाया है। छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। छत्तीसगढ़ महिलाओं को इतनी बड़ी संख्या में योजना के माध्यम से उपचार देने वाला देश का इकलौता राज्य है। इसके लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा आयुष्मान उत्कृष्ठता पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन में छत्तीसगढ़ ने नौ हजार से ज्यादा शासकीय अस्पतालों का पंजीयन कर लिया है। इसके लिये भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर आयुष्मान उत्कृष्टता पुरूस्कार प्रदान किया गया। छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग आर प्रसन्ना, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह, उप संचालक राज्य नोडल एजेंसी डॉ. श्रीकांत राजिमवाले ने यह पुरस्कार केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया के हाथों ग्रहण किया। नई दिल्ली स्थित अशोका होटल में दो दिवसीय आरोग्य मंथन 2022 का आयोजन हुआ। आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड निर्मित किये जाने है। जिसके जरिये मरीज के जांच संबंधित सारे दस्तावेज ऑनलाईन उपलब्ध रहेंगे। कार्ड के माध्यम से इन दस्तावेजों को किसी भी अस्पताल के चिकित्सक देख सकेंगे। साथ ही अपने मोबाइल पर मरीज खुद भी अपनी जांच संबंधित सभी दस्तावेज देख सकेगा। मरीज को दस्तावेजी औपचारिकताओं से ये इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड निजात दिला देगा। इस दिशा में छत्तीसगढ़ तेजी से काम कर रहा है। जिसके सकारात्मक परिणाम राज्य के निवासियों को बहुत जल्द नजर आने लगेंगे। छत्तीसगढ़ को पिछले वर्ष भी राष्ट्रीय स्तर पर चार श्रेणियों में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। छत्तीसगढ़ अपनी यह उपलब्धि लगातार कायम किये हुये है। राष्ट्रीय स्तर पर पिछले वर्ष छः श्रेणियां तय की गई थी, जिनमें से चार में छत्तीसगढ़ ने अपनी धाक कायम कर दिखाई थी। यह सिलसिला अब तक जारी है।
रायपुर। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में देशभर में सबसे ज्यादा शासकीय अस्पतालों को पंजीकृत करने वालों में छत्तीसगढ़ अव्वल राज्य बन गया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से महिलाओं को उपचार देने के मामले में भी राज्य देश में सबसे आगे दो श्रेणियों में रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार मिला है। छब्बीस सितंबर को दिल्ली में आयोजित आरोग्य मंथन के आयोजन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर दो पुरस्कार मिले हैं। राज्य में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से उपचारित कुल हितग्राहियों में से अट्ठावन फीसदी महिलाओं को उपचार दिलाया है। छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। छत्तीसगढ़ महिलाओं को इतनी बड़ी संख्या में योजना के माध्यम से उपचार देने वाला देश का इकलौता राज्य है। इसके लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा आयुष्मान उत्कृष्ठता पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन में छत्तीसगढ़ ने नौ हजार से ज्यादा शासकीय अस्पतालों का पंजीयन कर लिया है। इसके लिये भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर आयुष्मान उत्कृष्टता पुरूस्कार प्रदान किया गया। छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग आर प्रसन्ना, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह, उप संचालक राज्य नोडल एजेंसी डॉ. श्रीकांत राजिमवाले ने यह पुरस्कार केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया के हाथों ग्रहण किया। नई दिल्ली स्थित अशोका होटल में दो दिवसीय आरोग्य मंथन दो हज़ार बाईस का आयोजन हुआ। आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड निर्मित किये जाने है। जिसके जरिये मरीज के जांच संबंधित सारे दस्तावेज ऑनलाईन उपलब्ध रहेंगे। कार्ड के माध्यम से इन दस्तावेजों को किसी भी अस्पताल के चिकित्सक देख सकेंगे। साथ ही अपने मोबाइल पर मरीज खुद भी अपनी जांच संबंधित सभी दस्तावेज देख सकेगा। मरीज को दस्तावेजी औपचारिकताओं से ये इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड निजात दिला देगा। इस दिशा में छत्तीसगढ़ तेजी से काम कर रहा है। जिसके सकारात्मक परिणाम राज्य के निवासियों को बहुत जल्द नजर आने लगेंगे। छत्तीसगढ़ को पिछले वर्ष भी राष्ट्रीय स्तर पर चार श्रेणियों में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। छत्तीसगढ़ अपनी यह उपलब्धि लगातार कायम किये हुये है। राष्ट्रीय स्तर पर पिछले वर्ष छः श्रेणियां तय की गई थी, जिनमें से चार में छत्तीसगढ़ ने अपनी धाक कायम कर दिखाई थी। यह सिलसिला अब तक जारी है।
भारतीय स्मार्टफोन कंपनी माइक्रोमेक्स का शानदार यू युफोरिया फोन मंगलवार को आॅनलाइन शाॅपिंग साइट अमेजन पर बिक्री के लिए जारी करेगी। ग्राहक यह फोन बिना किसी रजिस्ट्रेशन के खरीद सकेंगे। कंपनी की आेर से जारी एक बयान के मुताबिक सेल में एक लाख फोन जारी किए जाएंगे। माइक्रोमेक्स यू यूफोरिया पूरी तरह से भारत में डिजाइन कर बनाया गया है। यह एकमात्र फोन है जो इतनी कम कीमत में मैटल फ्रेम में उपलब्ध है। जानिए इसके खास फीचर्स के बारे मेंः 5 इंच एचडी IPS डिस्प्ले विथ-कोर्निंग ग्लास, 3 प्रोटेक्शन Cyanogen OS12, बेस्ड एंड्राइड लॉलीपॉप कैमरा, रियर 8MP फ्रंट, 5 MP-प्रोसेसर 64 बिट, 1. 2 GHz qualcomm स्नैपड्रैगन, 410 सीपीयू इसकी कीमत है 6999 रूपये.
भारतीय स्मार्टफोन कंपनी माइक्रोमेक्स का शानदार यू युफोरिया फोन मंगलवार को आॅनलाइन शाॅपिंग साइट अमेजन पर बिक्री के लिए जारी करेगी। ग्राहक यह फोन बिना किसी रजिस्ट्रेशन के खरीद सकेंगे। कंपनी की आेर से जारी एक बयान के मुताबिक सेल में एक लाख फोन जारी किए जाएंगे। माइक्रोमेक्स यू यूफोरिया पूरी तरह से भारत में डिजाइन कर बनाया गया है। यह एकमात्र फोन है जो इतनी कम कीमत में मैटल फ्रेम में उपलब्ध है। जानिए इसके खास फीचर्स के बारे मेंः पाँच इंच एचडी IPS डिस्प्ले विथ-कोर्निंग ग्लास, तीन प्रोटेक्शन Cyanogen OSबारह, बेस्ड एंड्राइड लॉलीपॉप कैमरा, रियर आठMP फ्रंट, पाँच MP-प्रोसेसर चौंसठ बिट, एक. दो GHz qualcomm स्नैपड्रैगन, चार सौ दस सीपीयू इसकी कीमत है छः हज़ार नौ सौ निन्यानवे रूपये.
टीवी एक्टर एजाज़ खान ने बिग बॉस के दौरान बताया था कि वो सेक्सुअल हैरेसमेंट का शिकार हो चुके हैं. हालांकि एक्टर ने ये तो नहीं बताया था कि उनके साथ क्या हुआ है. लेकिन ये जरूर कहा था कि उन्हें 'टच' से दिक्कत है, ये बताते हुए एजाज़ थोड़ा भावुक हो गए थे. टीवी की जानीमीनी एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता उर्फ 'बबीता जी' ने भी सेक्सुअल हैरेसमेंट को लेकर अपना दर्द बयां किया था. मीटू मूमेंट के दौरान एक्ट्रेस ने बताया था कि, जब वो छोटी थीं तब पड़ोस के एक अंकल उनके साथ गंदी हरकत करते थे और किसी को ना बताने की धमकी देते थे. इसके अलावा भी एक्ट्रेस कई बार ऐसे हैरेसमेंट का शिकार हो चुकी हैं. एक्ट्रेस ने बताया था कि, टीनेज के दौरान हॉस्पिटल में एक शख्स ने उन्हें गलत तरह से छुआ था. एक्ट्रेस के ट्यूशन टीचर ने उनके साथ गंदी हरकत थी. टीवी की जानीमानी एक्ट्रेस कविता कौशक ने बिग बॉस 14 में एक टास्क के दौरान बताया था कि उनके मैथ्स टीचर ने ही उनके साथ गंदी हरकत की थी. एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में अपनी मां को बताया तो उन्होंने बेटी की बात पर यकीन नहीं किया. 'इस प्यार को क्या नाम दूं' फेम एक्ट्रेस श्रेनू पारेख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बात का खुलासा किया था कि 'बचपन में जब वो अपने नानाजी के साथ उनके घर जा रही थीं तब बस में जगह कम होने की वजह से उनके नानाजी ने उन्हें एक अंकल की गोदी में बैठा दिया था. एक्ट्रेस ने बताया कि उस दौरान उस शख्स ने श्रेनू के साथ गंदी हरकत की थी. हालांकि उस वक्त वो बच्ची थीं इसलिए वो अपने नानाजी को कुछ नहीं बता पाईं'. कृष्णा अभिषेक की बहन और टीवी एक्ट्रेस आरती सिंह ने बिग बॉस में खुलासा किया था कि उनके नौकर ने उनके साथ रेप करने की कोशिश की थी. तब किसी तरह से एक्ट्रेस अपनी जान बचाकर भागी थीं.
टीवी एक्टर एजाज़ खान ने बिग बॉस के दौरान बताया था कि वो सेक्सुअल हैरेसमेंट का शिकार हो चुके हैं. हालांकि एक्टर ने ये तो नहीं बताया था कि उनके साथ क्या हुआ है. लेकिन ये जरूर कहा था कि उन्हें 'टच' से दिक्कत है, ये बताते हुए एजाज़ थोड़ा भावुक हो गए थे. टीवी की जानीमीनी एक्ट्रेस मुनमुन दत्ता उर्फ 'बबीता जी' ने भी सेक्सुअल हैरेसमेंट को लेकर अपना दर्द बयां किया था. मीटू मूमेंट के दौरान एक्ट्रेस ने बताया था कि, जब वो छोटी थीं तब पड़ोस के एक अंकल उनके साथ गंदी हरकत करते थे और किसी को ना बताने की धमकी देते थे. इसके अलावा भी एक्ट्रेस कई बार ऐसे हैरेसमेंट का शिकार हो चुकी हैं. एक्ट्रेस ने बताया था कि, टीनेज के दौरान हॉस्पिटल में एक शख्स ने उन्हें गलत तरह से छुआ था. एक्ट्रेस के ट्यूशन टीचर ने उनके साथ गंदी हरकत थी. टीवी की जानीमानी एक्ट्रेस कविता कौशक ने बिग बॉस चौदह में एक टास्क के दौरान बताया था कि उनके मैथ्स टीचर ने ही उनके साथ गंदी हरकत की थी. एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में अपनी मां को बताया तो उन्होंने बेटी की बात पर यकीन नहीं किया. 'इस प्यार को क्या नाम दूं' फेम एक्ट्रेस श्रेनू पारेख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बात का खुलासा किया था कि 'बचपन में जब वो अपने नानाजी के साथ उनके घर जा रही थीं तब बस में जगह कम होने की वजह से उनके नानाजी ने उन्हें एक अंकल की गोदी में बैठा दिया था. एक्ट्रेस ने बताया कि उस दौरान उस शख्स ने श्रेनू के साथ गंदी हरकत की थी. हालांकि उस वक्त वो बच्ची थीं इसलिए वो अपने नानाजी को कुछ नहीं बता पाईं'. कृष्णा अभिषेक की बहन और टीवी एक्ट्रेस आरती सिंह ने बिग बॉस में खुलासा किया था कि उनके नौकर ने उनके साथ रेप करने की कोशिश की थी. तब किसी तरह से एक्ट्रेस अपनी जान बचाकर भागी थीं.
नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा लाए गए भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में विपक्षी एकता प्रदर्शित करने के लिए 13 विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पद यात्रा की और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। संसद परिसर में स्थापित गांधी प्रतिमा से इस पदयात्रा की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और जनतादल यू के अध्यक्ष शरद यादव ने की। उनके साथ इस पदयात्रा में राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल,राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह, वीरप्पा मोइली, जयराम रमेश, आनंद शर्मा,कमल नाथ,अंबिका सोनी, कुमारी शैलजा, शशि थरूर, राजीव शुक्ला, मोती लाल बोरा, एके एंटनी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मधुसूदन मिस्त्री, रेणुका चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और जया बच्चन, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, राकंपा के तारिक अनवर, द्रमुक की कनी मोझी, राजद के प्रेम चंद गुप्ता के कुछ अन्य दलों के नेता भी इस पदयात्रा में शामिल हुए। पदयात्रा में शामिल नेतागण भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में नारे लगाए और कुछ ने तख्तियां भी ले रखी थी। इन पर "देश का किसान अन्नदाता, जमीन हमारी माता" लिखा हुआ था। इसके पूर्व कांग्रेस की ब्रीफिंग में रीता बहुगुणा ने इस पद यात्रा पर दिल्ली पुलिस द्वारा पूर्व में पाबंदी लगाए जाने की निंदा करते हुए इसे पुलिस राज की संज्ञा दी थी। उन्होंने कहा था कि यह पदयात्रा हरहालत में निकाली जाएगी। बहुगुणा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र में गुजरात माडल लागू कर अपने विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं जो किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा लाए गए भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में विपक्षी एकता प्रदर्शित करने के लिए तेरह विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पद यात्रा की और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। संसद परिसर में स्थापित गांधी प्रतिमा से इस पदयात्रा की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और जनतादल यू के अध्यक्ष शरद यादव ने की। उनके साथ इस पदयात्रा में राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल,राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह, वीरप्पा मोइली, जयराम रमेश, आनंद शर्मा,कमल नाथ,अंबिका सोनी, कुमारी शैलजा, शशि थरूर, राजीव शुक्ला, मोती लाल बोरा, एके एंटनी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मधुसूदन मिस्त्री, रेणुका चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और जया बच्चन, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, राकंपा के तारिक अनवर, द्रमुक की कनी मोझी, राजद के प्रेम चंद गुप्ता के कुछ अन्य दलों के नेता भी इस पदयात्रा में शामिल हुए। पदयात्रा में शामिल नेतागण भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में नारे लगाए और कुछ ने तख्तियां भी ले रखी थी। इन पर "देश का किसान अन्नदाता, जमीन हमारी माता" लिखा हुआ था। इसके पूर्व कांग्रेस की ब्रीफिंग में रीता बहुगुणा ने इस पद यात्रा पर दिल्ली पुलिस द्वारा पूर्व में पाबंदी लगाए जाने की निंदा करते हुए इसे पुलिस राज की संज्ञा दी थी। उन्होंने कहा था कि यह पदयात्रा हरहालत में निकाली जाएगी। बहुगुणा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र में गुजरात माडल लागू कर अपने विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं जो किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुरादाबादः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बब्बर शेर को देखकर मैदान छोड़ गए, कांग्रेस के राज बब्बर, इस किस्म के कमेंट सोशल मीडिया पर कर भाजपा समर्थक जहां कांग्रेस का मखौल उड़ा रहे हैं वहीं भाजपा की जीत पक्की होने का दावा कर रहा हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट पर होली के दिन अचानक एक ओर भाजपा के आलाकमान ने सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का टिकट पक्का कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राज बब्बर की तरफ से चुनाव नहीं लड़ने की चर्चाएं आम होने लगी थी। आखिरकार कांग्रेस ने राज बब्बर को मुरादाबाद लोकसभा सीट से हटा लिया है, इसके बाद तो सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों के ताबड़तोड़ कमेंट आने लगे हैं। एक समर्थक ने चुटकी लेते हुए कमेंट किया है कि- असल बब्बर शेर के आने पर राज बब्बर मैदान छोड़ गए। एक अन्य यूज़र अजय प्रताप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि, 'हीरो की एंट्री होते ही, गद्दार भाग लिया। ' आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान होने के साथ ही राजनितिक पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं, वहीं सियासी दलों के समर्थक भी सोशल मीडिया पर ताबड़तोड़ कमैंट्स करने में लगे हुए हैं।
मुरादाबादः भारतीय जनता पार्टी के बब्बर शेर को देखकर मैदान छोड़ गए, कांग्रेस के राज बब्बर, इस किस्म के कमेंट सोशल मीडिया पर कर भाजपा समर्थक जहां कांग्रेस का मखौल उड़ा रहे हैं वहीं भाजपा की जीत पक्की होने का दावा कर रहा हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट पर होली के दिन अचानक एक ओर भाजपा के आलाकमान ने सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का टिकट पक्का कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राज बब्बर की तरफ से चुनाव नहीं लड़ने की चर्चाएं आम होने लगी थी। आखिरकार कांग्रेस ने राज बब्बर को मुरादाबाद लोकसभा सीट से हटा लिया है, इसके बाद तो सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों के ताबड़तोड़ कमेंट आने लगे हैं। एक समर्थक ने चुटकी लेते हुए कमेंट किया है कि- असल बब्बर शेर के आने पर राज बब्बर मैदान छोड़ गए। एक अन्य यूज़र अजय प्रताप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि, 'हीरो की एंट्री होते ही, गद्दार भाग लिया। ' आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान होने के साथ ही राजनितिक पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं, वहीं सियासी दलों के समर्थक भी सोशल मीडिया पर ताबड़तोड़ कमैंट्स करने में लगे हुए हैं।
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप मामले में चारों दोषियों सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। चारों मुजरिमों में से एक पवन कुमार गुप्ता ने फांसी की सजा से बचने के लिए खुद को वारदात के समय नाबालिग बताया था। उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि वह निर्भया गैंगरेप के समय नाबालिग था। यह दावा सोमवार को अस्वीकार कर दिया कि 2012 में अपराध के वक्त वह नाबालिग था। उसके साथ नाबालिग अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया गया। हालांकि न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भान और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने पवन कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। पवन ने उसके नाबालिग होने का दावा ठुकराने के उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को चारों दोषियों-विनय शर्मा, मुकेश कुमार, अक्षय कुमार सिंह और पवन की मौत की सजा पर एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी देना का नया डेथ वारंट जारी किया है।
नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप मामले में चारों दोषियों सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। चारों मुजरिमों में से एक पवन कुमार गुप्ता ने फांसी की सजा से बचने के लिए खुद को वारदात के समय नाबालिग बताया था। उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि वह निर्भया गैंगरेप के समय नाबालिग था। यह दावा सोमवार को अस्वीकार कर दिया कि दो हज़ार बारह में अपराध के वक्त वह नाबालिग था। उसके साथ नाबालिग अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया गया। हालांकि न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भान और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने पवन कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। पवन ने उसके नाबालिग होने का दावा ठुकराने के उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को चारों दोषियों-विनय शर्मा, मुकेश कुमार, अक्षय कुमार सिंह और पवन की मौत की सजा पर एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी देना का नया डेथ वारंट जारी किया है।
लखनऊ राज्य की सरकारें अब मनमाने तरीके से आईएएस अफसरों को राज्यों में सालों-साल तक नहीं रोक पाएंगी। अधिकतम सात साल की सेवा पूरी करने वालों को उनके मूल कॉडर वाले राज्यों को वापस भेजना होगा। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में राज्यों को निर्देश भेजा है। राज्यों में प्रतिनियुक्ति पाने के लिए आईएएस अफसर को उस राज्य का मूल निवासी होना चाहिए। इसके आधार पर वह डीओपीटी से अपने राज्य में जाने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए दोनों राज्यों का सहमति पत्र होना चाहिए। इसके आधार पर डीओपीटी फैसला करता है। डीओपीटी की अनुमति के बाद संबंधित आईएएस को राज्यों में प्रतिनियुक्ति पर तय अवधि के लिए भेजा जाता है। इसके बाद भी कुछ आईएएस सालों-साल अपने मूल कॉडर वाले राज्यों में वापस नहीं जाते हैं। केंद्रीय कार्मिक विभाग (डीओपीटी) की व्यवस्था के मुताबिक कोई भी आईएएस दूसरे राज्यों में अधिकतम सात साल तक ही रह सकता है। इसके बाद भी दूसरे राज्यों में जाने वाले अफसर जल्द वापस आना नहीं चाहते हैं। इसलिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राज्यों से आईएएस अफसर नहीं जा पाते हैं। डीओपीटी ने हाल ही में इस संबंध में राज्यों को निर्देश भेजा है कि तय समय सीमा पूरी करने वाले आईएएस अफसरों को उनके मूल कॉडर वाले राज्यों में भेजा जाए।
लखनऊ राज्य की सरकारें अब मनमाने तरीके से आईएएस अफसरों को राज्यों में सालों-साल तक नहीं रोक पाएंगी। अधिकतम सात साल की सेवा पूरी करने वालों को उनके मूल कॉडर वाले राज्यों को वापस भेजना होगा। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में राज्यों को निर्देश भेजा है। राज्यों में प्रतिनियुक्ति पाने के लिए आईएएस अफसर को उस राज्य का मूल निवासी होना चाहिए। इसके आधार पर वह डीओपीटी से अपने राज्य में जाने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए दोनों राज्यों का सहमति पत्र होना चाहिए। इसके आधार पर डीओपीटी फैसला करता है। डीओपीटी की अनुमति के बाद संबंधित आईएएस को राज्यों में प्रतिनियुक्ति पर तय अवधि के लिए भेजा जाता है। इसके बाद भी कुछ आईएएस सालों-साल अपने मूल कॉडर वाले राज्यों में वापस नहीं जाते हैं। केंद्रीय कार्मिक विभाग की व्यवस्था के मुताबिक कोई भी आईएएस दूसरे राज्यों में अधिकतम सात साल तक ही रह सकता है। इसके बाद भी दूसरे राज्यों में जाने वाले अफसर जल्द वापस आना नहीं चाहते हैं। इसलिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राज्यों से आईएएस अफसर नहीं जा पाते हैं। डीओपीटी ने हाल ही में इस संबंध में राज्यों को निर्देश भेजा है कि तय समय सीमा पूरी करने वाले आईएएस अफसरों को उनके मूल कॉडर वाले राज्यों में भेजा जाए।
बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव दो दिनों पहले ही पिता बने हैं। बेटी का नाम कात्यायनी है। यह नाम दादा लालू यादव ने रखा है। नवजात बच्ची के घर आने पर उसका ग्रैंड वेलकम किया गया। बुआ रोहिणी आचार्या ने इसकी तस्वीरें साझा की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा- तू जानी जाएगी उनके नाम से, दुनिया जिन्हें पूजती है भक्ति भाव से। 27 मार्च को तेजस्वी यादव पिता बने। उन्होंने खुद ट्वीट कर ये खुशखबरी साझा की थी। बता दें कि दिसंबर 2021 में तेजस्वी और राजश्री की शादी हुई थी। यह शादी दिल्ली में अचानक की गई थी। दोनों एक-दूसरे को पहले से अच्छी तरह जानते थे। राजश्री यादव ने चैत्र नवरात्र की षष्ठी को बेटी को जन्म दिया। इस दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरुप की पूजा होती है। दादा लालू प्रसाद ने देवी के इसी स्वरुप पर अपनी पोती का नाम 'कात्यायनी' रखा है। लैंड फॉर जॉब्स केस में पिछले 1 महीने से लालू परिवार संकट में है। पहले मामले को लेकर ED ने दिल्ली से लेकर पटना तक छापे। फिर लालू, राबड़ी और मीसा से पूछताछ। हालांकि लालू, राबड़ी को इस केस में जमानत मिल गई है, लेकिन ये फौरी राहत ही है। इसके बाद तेजस्वी को भी CBI ने समन भेजा। CBI के समन के खिलाफ कोर्ट भी गए थे, ताकि CBI पूछताछ ना करे। हालांकि, तेजस्वी को राहत नहीं मिली थी। इसके बाद शनिवार को लैंड फॉर जॉब्स केस में तेजस्वी यादव से 8 घंटे पूछताछ की। वहीं ED ने मीसा भारती से 7 घंटे पूछताछ की। सोमवार को बेटी के जन्म से लालू परिवार में खुशी का माहौल है। लैंड फॉर जॉब्स स्कैम मामले में बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव से CBI ऑफिस में करीब 8 घंटे पूछताछ चली। पूछताछ के बाद तेजस्वी यादव मुस्कुराते हुए निकले और लालू यादव से मिलने गए। डिप्टी CM से दो राउंड में सवाल-जवाब हुए। पहले राउंड में तीन घंटे तक पूछताछ हुई थी। इधर, लालू की बेटी मीसा भारती से ED ने पूछताछ की है। मीसा से ED की पूछताछ भी खत्म हो गई है। दो शिफ्टों में सात घंटे पूछताछ की है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी दिल्ली पहुंच गई है। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने कहा कि हम लोगों को न्यायालय पर भरोसा है। पूछताछ में पूरा सहयोग कर रहे हैं। मुझे न्याय मिलने का पूरा भरोसा है। रेलवे में लैंड फॉर जॉब्स यानी जमीन के बदले नौकरी देने के कथित भ्रष्टाचार के केस में लालू परिवार को बड़ी राहत मिली है। RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती को जमानत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 50 हजार के निजी मुचलके पर तीनों को जमानत दी है। इस मामले में अब 29 मार्च को अगली सुनवाई होगी। देश के 14 राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार पर ईडी व सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इन दलों का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए इन एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारी व जमानत के मामलों में कोर्ट गाइडलाइन तय करे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर 5 अप्रैल को सुनवाई करेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव दो दिनों पहले ही पिता बने हैं। बेटी का नाम कात्यायनी है। यह नाम दादा लालू यादव ने रखा है। नवजात बच्ची के घर आने पर उसका ग्रैंड वेलकम किया गया। बुआ रोहिणी आचार्या ने इसकी तस्वीरें साझा की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा- तू जानी जाएगी उनके नाम से, दुनिया जिन्हें पूजती है भक्ति भाव से। सत्ताईस मार्च को तेजस्वी यादव पिता बने। उन्होंने खुद ट्वीट कर ये खुशखबरी साझा की थी। बता दें कि दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में तेजस्वी और राजश्री की शादी हुई थी। यह शादी दिल्ली में अचानक की गई थी। दोनों एक-दूसरे को पहले से अच्छी तरह जानते थे। राजश्री यादव ने चैत्र नवरात्र की षष्ठी को बेटी को जन्म दिया। इस दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरुप की पूजा होती है। दादा लालू प्रसाद ने देवी के इसी स्वरुप पर अपनी पोती का नाम 'कात्यायनी' रखा है। लैंड फॉर जॉब्स केस में पिछले एक महीने से लालू परिवार संकट में है। पहले मामले को लेकर ED ने दिल्ली से लेकर पटना तक छापे। फिर लालू, राबड़ी और मीसा से पूछताछ। हालांकि लालू, राबड़ी को इस केस में जमानत मिल गई है, लेकिन ये फौरी राहत ही है। इसके बाद तेजस्वी को भी CBI ने समन भेजा। CBI के समन के खिलाफ कोर्ट भी गए थे, ताकि CBI पूछताछ ना करे। हालांकि, तेजस्वी को राहत नहीं मिली थी। इसके बाद शनिवार को लैंड फॉर जॉब्स केस में तेजस्वी यादव से आठ घंटाटे पूछताछ की। वहीं ED ने मीसा भारती से सात घंटाटे पूछताछ की। सोमवार को बेटी के जन्म से लालू परिवार में खुशी का माहौल है। लैंड फॉर जॉब्स स्कैम मामले में बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव से CBI ऑफिस में करीब आठ घंटाटे पूछताछ चली। पूछताछ के बाद तेजस्वी यादव मुस्कुराते हुए निकले और लालू यादव से मिलने गए। डिप्टी CM से दो राउंड में सवाल-जवाब हुए। पहले राउंड में तीन घंटे तक पूछताछ हुई थी। इधर, लालू की बेटी मीसा भारती से ED ने पूछताछ की है। मीसा से ED की पूछताछ भी खत्म हो गई है। दो शिफ्टों में सात घंटे पूछताछ की है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी दिल्ली पहुंच गई है। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने कहा कि हम लोगों को न्यायालय पर भरोसा है। पूछताछ में पूरा सहयोग कर रहे हैं। मुझे न्याय मिलने का पूरा भरोसा है। रेलवे में लैंड फॉर जॉब्स यानी जमीन के बदले नौकरी देने के कथित भ्रष्टाचार के केस में लालू परिवार को बड़ी राहत मिली है। RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती को जमानत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पचास हजार के निजी मुचलके पर तीनों को जमानत दी है। इस मामले में अब उनतीस मार्च को अगली सुनवाई होगी। देश के चौदह राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र सरकार पर ईडी व सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इन दलों का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए इन एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारी व जमानत के मामलों में कोर्ट गाइडलाइन तय करे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर पाँच अप्रैल को सुनवाई करेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सिंह : संतान संबंधी कुछ दायित्वों के प्रति मन में चिंता संभव. पारिवारिक जरूरतों की पूर्ति में साधनाभाव से मन में चिंता होगी. वाक्यपटुता व मधुर वाणी से संबंधों में प्रभावशाली बनेंगे. जरूरी कार्य समय से करें.
सिंह : संतान संबंधी कुछ दायित्वों के प्रति मन में चिंता संभव. पारिवारिक जरूरतों की पूर्ति में साधनाभाव से मन में चिंता होगी. वाक्यपटुता व मधुर वाणी से संबंधों में प्रभावशाली बनेंगे. जरूरी कार्य समय से करें.
ओवैसी ने गुरुवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपनी गाड़ी पर गोलियां चलने की घटना के बाद Z श्रेणी की सुरक्षा देने की सरकार की पेशकश को शुक्रवार को ठुकरा दिया. जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि इस घटना के बाद राज्य सरकार गंभीरता से कार्रवाई कर रही है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की कार पर हुई फायरिंग की घटना पर आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) संसद (Parliament) के दोनों सदनों में बयान देंगे. अमित शाह सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे लोकसभा और राज्यसभा में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे. इतना ही नहीं, दोनों सदनों को महान गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के सम्मान में एक घंटे के लिए स्थगित कर दिया जाएगा. सुर साम्राज्ञी मंगेशकर का रविवार को निधन हो गया था. ओवैसी की कार पर मेरठ के एक टोल प्लाजा पर तीन-चार राउंड फायरिंग हुई. एक बयान में ओवैसी ने बताया कि वह पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के सिलसिले में कार्यक्रम में भाग लेकर मेरठ (Meerut) की तरफ से लौट रहे थे, तभी राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के हापुड़-गाजियाबाद खंड पर छिजारसी टोल प्लाजा के पास शाम करीब छह बजे उनकी कार पर गोली चलाई गई. हालांकि इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ. उन्होंने लोकसभा (Lok Sabha) में दावा किया कि दो लोगों ने रैकी की थी और उन्हें पता था कि वह मेरठ की तरफ से आ रहे हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ओवैसी की कार पर गोलियां चलने की घटना के बाद केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ओवैसी को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कमांडो के घेरे वाली 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया. हालांकि AIMIM सांसद ने कहा, 'वह छह फुट के फासले से चार-चार गोली चलने से डरकर खोमाश बैठने वाले नहीं हैं.' उन्होंने कहा कि हमलावर किसकी किताबें पढ़कर इतने कट्टर हुए. अगर इस तरह की कट्टरता जारी रही तो दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता और आतंकवाद बढ़ेगा.' बता दें कि ओवैसी की कार पर गोली चलाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
ओवैसी ने गुरुवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपनी गाड़ी पर गोलियां चलने की घटना के बाद Z श्रेणी की सुरक्षा देने की सरकार की पेशकश को शुक्रवार को ठुकरा दिया. जिसके जवाब में सरकार ने कहा कि इस घटना के बाद राज्य सरकार गंभीरता से कार्रवाई कर रही है. उत्तर प्रदेश में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर हुई फायरिंग की घटना पर आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों में बयान देंगे. अमित शाह सोमवार सुबह करीब ग्यारह.तीस बजे लोकसभा और राज्यसभा में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे. इतना ही नहीं, दोनों सदनों को महान गायिका लता मंगेशकर के सम्मान में एक घंटे के लिए स्थगित कर दिया जाएगा. सुर साम्राज्ञी मंगेशकर का रविवार को निधन हो गया था. ओवैसी की कार पर मेरठ के एक टोल प्लाजा पर तीन-चार राउंड फायरिंग हुई. एक बयान में ओवैसी ने बताया कि वह पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के सिलसिले में कार्यक्रम में भाग लेकर मेरठ की तरफ से लौट रहे थे, तभी राष्ट्रीय राजमार्ग चौबीस के हापुड़-गाजियाबाद खंड पर छिजारसी टोल प्लाजा के पास शाम करीब छह बजे उनकी कार पर गोली चलाई गई. हालांकि इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ. उन्होंने लोकसभा में दावा किया कि दो लोगों ने रैकी की थी और उन्हें पता था कि वह मेरठ की तरफ से आ रहे हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ओवैसी की कार पर गोलियां चलने की घटना के बाद केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ओवैसी को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के कमांडो के घेरे वाली 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया. हालांकि AIMIM सांसद ने कहा, 'वह छह फुट के फासले से चार-चार गोली चलने से डरकर खोमाश बैठने वाले नहीं हैं.' उन्होंने कहा कि हमलावर किसकी किताबें पढ़कर इतने कट्टर हुए. अगर इस तरह की कट्टरता जारी रही तो दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता और आतंकवाद बढ़ेगा.' बता दें कि ओवैसी की कार पर गोली चलाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भूकंप से धरती हिल गई है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आज सुबह 10:31 बजे रिक्टर स्केल पर 4. 0 की तीव्रता वाला भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इसकी जानकारी दी है। मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर संभाग में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। जैसे ही लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए सभी अपनी जान बचाने के लिए अपने घरों और दफ्तरों से बाहर आकर खड़े हो गए। भूकंप के झटकों के बाद लोग सहम गए। लोग घबराकर अपने- अपने घरों से बाहर निकले गए, डर और भय का माहौल बन गया। बता दें कि छत्तीसगढ़ में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4. 1 मापी गई है। वहीं मध्यप्रदेश के ग्वालियर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, ग्वालियर में 28 किमी दक्षिण पूर्व में आज सुबह 10:31 बजे भूकंप के झटके लगे। बीते मंगलवार को राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में भूकंप के तेज झटके लगे थे। झटके महसूस होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान के कई क्षेत्रों में मंगलवार (21 मार्च) को रात करीब सवा दस बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप से धरती कई सेकेंड तक लगातार कांपती रही। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6. 6 रही। जानकारी के मुताबिक इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का फैजाबाद क्षेत्र रहा। This website uses cookies.
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भूकंप से धरती हिल गई है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आज सुबह दस:इकतीस बजे रिक्टर स्केल पर चार. शून्य की तीव्रता वाला भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इसकी जानकारी दी है। मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर संभाग में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। जैसे ही लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए सभी अपनी जान बचाने के लिए अपने घरों और दफ्तरों से बाहर आकर खड़े हो गए। भूकंप के झटकों के बाद लोग सहम गए। लोग घबराकर अपने- अपने घरों से बाहर निकले गए, डर और भय का माहौल बन गया। बता दें कि छत्तीसगढ़ में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर चार. एक मापी गई है। वहीं मध्यप्रदेश के ग्वालियर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, ग्वालियर में अट्ठाईस किमी दक्षिण पूर्व में आज सुबह दस:इकतीस बजे भूकंप के झटके लगे। बीते मंगलवार को राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में भूकंप के तेज झटके लगे थे। झटके महसूस होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान के कई क्षेत्रों में मंगलवार को रात करीब सवा दस बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप से धरती कई सेकेंड तक लगातार कांपती रही। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता छः. छः रही। जानकारी के मुताबिक इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का फैजाबाद क्षेत्र रहा। This website uses cookies.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अर्थशास्त्र, कौटिल्य या चाणक्य (चौथी शती ईसापूर्व) द्वारा रचित संस्कृत का एक ग्रन्थ है। इसमें राज्यव्यवस्था, कृषि, न्याय एवं राजनीति आदि के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। अपने तरह का (राज्य-प्रबन्धन विषयक) यह प्राचीनतम ग्रन्थ है। इसकी शैली उपदेशात्मक और सलाहात्मक (instructional) है। यह प्राचीन भारतीय राजनीति का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसके रचनाकार का व्यक्तिनाम विष्णुगुप्त, गोत्रनाम कौटिल्य (कुटिल से व्युत्पत्र) और स्थानीय नाम चाणक्य (पिता का नाम चणक होने से) था। अर्थशास्त्र (15.431) में लेखक का स्पष्ट कथन हैः चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य (321-298 ई.पू.) के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यतः सूत्रशैली में लिखा हुआ है और संस्कृत के सूत्रसाहित्य के काल और परंपरा में रखा जा सकता है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने में सरल एवं कौटिल्य द्वारा उन शब्दों में रचा गया है जिनका अर्थ सुनिश्चित हो चुका है। (अर्थशास्त्र, 15.6)' अर्थशास्त्र में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति, तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। इस विषय के जितने ग्रंथ अभी तक उपलब्ध हैं उनमें से वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण यह सबसे अधिक मूल्यवान् है। इस शास्त्र के प्रकाश में न केवल धर्म, अर्थ और काम का प्रणयन और पालन होता है अपितु अधर्म, अनर्थ तथा अवांछनीय का शमन भी होता है (अर्थशास्त्र, 15.431)। इस ग्रंथ की महत्ता को देखते हुए कई विद्वानों ने इसके पाठ, भाषांतर, व्याख्या और विवेचन पर बड़े परिश्रम के साथ बहुमूल्य कार्य किया है। शाम शास्त्री और गणपति शास्त्री का उल्लेख किया जा चुका है। इनके अतिरिक्त यूरोपीय विद्वानों में हर्मान जाकोबी (ऑन दि अथॉरिटी ऑव कौटिलीय, इं.ए., 1918), ए. हिलेब्रांड्ट, डॉ॰ जॉली, प्रो॰ए.बी. जर्मनी के फ्रैंकफुर्त में डश-बैंक बैंक (Bank) उस वित्तीय संस्था को कहते हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने के हेतु इन संस्थाओं में जमा करते और आवश्यकतानुसार समय समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिंग व्यवस्था एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है। राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अन्य काम भी करते हैं जैसे, सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषणादि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना, अपने ग्राहकों के लिए उनके चेकों का संग्रहण करना, व्यापारिक बिलों की कटौती करना, एजेंसी का काम करना, गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना देना। अतः बैंक केवल मुद्रा का लेन देन ही नहीं करते वरन् साख का व्यवहार भी करते हैं। इसीलिए बैंक को साख का सृजनकर्ता भी कहा जाता है। बैंक देश की बिखरी और निठल्ली संपत्ति को केंद्रित करके देश में उत्पादन के कार्यों में लगाते हैं जिससे पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और उत्पादन की प्रगति में सहायता मिलती है। भारतीय बैंकिग कंपनी कानून, १९४९ के अंतर्गत बैंक की परिभाषा निम्न शब्दों में दी गई हैंः एक ही बैंक के लिए व्यापार, वाणिज्य, उद्योग तथा कृषि की समुचित वित्तव्यवस्था करना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य होता है। अतएव विशिष्ट कार्यों के लिए अलग अलग बैंक स्थापित किए जाते हैं जैसे व्यापारिक बैंक, कृषि बैंक, औद्योगिक बैंक, विदेशी विनिमय बैंक तथा बचत बैंक। इन सब प्रकार के बैंकों को नियमपूर्वक चलाने तथा उनमें पारस्परिक तालमेल बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक होता है जो देश भर की बैंकिंग व्यवस्था का संचालन करता है। समय के साथ कई अन्य वित्तीय गतिविधियाँ जुड़ गईं। उदाहरण के लिए बैंक वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण खिलाडी हैं और निवेश फंड जैसे वित्तीय सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। कुछ देशों (जैसे जर्मनी) में बैंक औद्योगिक निगमों के प्राथमिक मालिक हैं, जबकि अन्य देशों (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका) में बैंक गैर वित्तीय कंपनियों स्वक्मित्व से निषिद्ध रहे हैं। जापान में बैंक को आमतौर पर पार शेयर होल्डिंग इकाई (ज़ाइबत्सू) के रूप में पहचाना जाता है। फ़्रांस में अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को बिमा सेवा प्रदान करते हैं। . अर्थशास्त्र (ग्रन्थ) और बैंक आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): चाणक्य, अर्थशास्त्र। चाणक्य (अनुमानतः ईसापूर्व 375 - ईसापूर्व 283) चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे 'कौटिल्य' नाम से भी विख्यात हैं। उन्होने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है। मुद्राराक्षस के अनुसार इनका असली नाम 'विष्णुगुप्त' था। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों तथा कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथों में तो चाणक्य का नाम आया ही है, बौद्ध ग्रंथो में भी इसकी कथा बराबर मिलती है। बुद्धघोष की बनाई हुई विनयपिटक की टीका तथा महानाम स्थविर रचित महावंश की टीका में चाणक्य का वृत्तांत दिया हुआ है। चाणक्य तक्षशिला (एक नगर जो रावलपिंडी के पास था) के निवासी थे। इनके जीवन की घटनाओं का विशेष संबंध मौर्य चंद्रगुप्त की राज्यप्राप्ति से है। ये उस समय के एक प्रसिद्ध विद्वान थे, इसमें कोई संदेह नहीं। कहते हैं कि चाणक्य राजसी ठाट-बाट से दूर एक छोटी सी कुटिया में रहते थे। उनके नाम पर एक धारावाहिक भी बना था जो दूरदर्शन पर 1990 के दशक में दिखाया जाता था। . ---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (सन २०१४) अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसेः- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो. अर्थशास्त्र (ग्रन्थ) 47 संबंध है और बैंक 51 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 2.04% है = 2 / (47 + 51)। यह लेख अर्थशास्त्र (ग्रन्थ) और बैंक के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अर्थशास्त्र, कौटिल्य या चाणक्य द्वारा रचित संस्कृत का एक ग्रन्थ है। इसमें राज्यव्यवस्था, कृषि, न्याय एवं राजनीति आदि के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। अपने तरह का यह प्राचीनतम ग्रन्थ है। इसकी शैली उपदेशात्मक और सलाहात्मक है। यह प्राचीन भारतीय राजनीति का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसके रचनाकार का व्यक्तिनाम विष्णुगुप्त, गोत्रनाम कौटिल्य और स्थानीय नाम चाणक्य था। अर्थशास्त्र में लेखक का स्पष्ट कथन हैः चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यतः सूत्रशैली में लिखा हुआ है और संस्कृत के सूत्रसाहित्य के काल और परंपरा में रखा जा सकता है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने में सरल एवं कौटिल्य द्वारा उन शब्दों में रचा गया है जिनका अर्थ सुनिश्चित हो चुका है। ' अर्थशास्त्र में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति, तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। इस विषय के जितने ग्रंथ अभी तक उपलब्ध हैं उनमें से वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण यह सबसे अधिक मूल्यवान् है। इस शास्त्र के प्रकाश में न केवल धर्म, अर्थ और काम का प्रणयन और पालन होता है अपितु अधर्म, अनर्थ तथा अवांछनीय का शमन भी होता है । इस ग्रंथ की महत्ता को देखते हुए कई विद्वानों ने इसके पाठ, भाषांतर, व्याख्या और विवेचन पर बड़े परिश्रम के साथ बहुमूल्य कार्य किया है। शाम शास्त्री और गणपति शास्त्री का उल्लेख किया जा चुका है। इनके अतिरिक्त यूरोपीय विद्वानों में हर्मान जाकोबी , ए. हिलेब्रांड्ट, डॉ॰ जॉली, प्रो॰ए.बी. जर्मनी के फ्रैंकफुर्त में डश-बैंक बैंक उस वित्तीय संस्था को कहते हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने के हेतु इन संस्थाओं में जमा करते और आवश्यकतानुसार समय समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिंग व्यवस्था एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है। राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अन्य काम भी करते हैं जैसे, सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषणादि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना, अपने ग्राहकों के लिए उनके चेकों का संग्रहण करना, व्यापारिक बिलों की कटौती करना, एजेंसी का काम करना, गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना देना। अतः बैंक केवल मुद्रा का लेन देन ही नहीं करते वरन् साख का व्यवहार भी करते हैं। इसीलिए बैंक को साख का सृजनकर्ता भी कहा जाता है। बैंक देश की बिखरी और निठल्ली संपत्ति को केंद्रित करके देश में उत्पादन के कार्यों में लगाते हैं जिससे पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और उत्पादन की प्रगति में सहायता मिलती है। भारतीय बैंकिग कंपनी कानून, एक हज़ार नौ सौ उनचास के अंतर्गत बैंक की परिभाषा निम्न शब्दों में दी गई हैंः एक ही बैंक के लिए व्यापार, वाणिज्य, उद्योग तथा कृषि की समुचित वित्तव्यवस्था करना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य होता है। अतएव विशिष्ट कार्यों के लिए अलग अलग बैंक स्थापित किए जाते हैं जैसे व्यापारिक बैंक, कृषि बैंक, औद्योगिक बैंक, विदेशी विनिमय बैंक तथा बचत बैंक। इन सब प्रकार के बैंकों को नियमपूर्वक चलाने तथा उनमें पारस्परिक तालमेल बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक होता है जो देश भर की बैंकिंग व्यवस्था का संचालन करता है। समय के साथ कई अन्य वित्तीय गतिविधियाँ जुड़ गईं। उदाहरण के लिए बैंक वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण खिलाडी हैं और निवेश फंड जैसे वित्तीय सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। कुछ देशों में बैंक औद्योगिक निगमों के प्राथमिक मालिक हैं, जबकि अन्य देशों में बैंक गैर वित्तीय कंपनियों स्वक्मित्व से निषिद्ध रहे हैं। जापान में बैंक को आमतौर पर पार शेयर होल्डिंग इकाई के रूप में पहचाना जाता है। फ़्रांस में अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को बिमा सेवा प्रदान करते हैं। . अर्थशास्त्र और बैंक आम में दो बातें हैं : चाणक्य, अर्थशास्त्र। चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे 'कौटिल्य' नाम से भी विख्यात हैं। उन्होने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है। मुद्राराक्षस के अनुसार इनका असली नाम 'विष्णुगुप्त' था। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों तथा कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथों में तो चाणक्य का नाम आया ही है, बौद्ध ग्रंथो में भी इसकी कथा बराबर मिलती है। बुद्धघोष की बनाई हुई विनयपिटक की टीका तथा महानाम स्थविर रचित महावंश की टीका में चाणक्य का वृत्तांत दिया हुआ है। चाणक्य तक्षशिला के निवासी थे। इनके जीवन की घटनाओं का विशेष संबंध मौर्य चंद्रगुप्त की राज्यप्राप्ति से है। ये उस समय के एक प्रसिद्ध विद्वान थे, इसमें कोई संदेह नहीं। कहते हैं कि चाणक्य राजसी ठाट-बाट से दूर एक छोटी सी कुटिया में रहते थे। उनके नाम पर एक धारावाहिक भी बना था जो दूरदर्शन पर एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में दिखाया जाता था। . ---- विश्व के विभिन्न देशों की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। 'अर्थशास्त्र' शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है - 'धन का अध्ययन'। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कायों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थशास्त्र का प्रयोग यह समझने के लिये भी किया जाता है कि अर्थव्यवस्था किस तरह से कार्य करती है और समाज में विभिन्न वर्गों का आर्थिक सम्बन्ध कैसा है। अर्थशास्त्रीय विवेचना का प्रयोग समाज से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसेः- अपराध, शिक्षा, परिवार, स्वास्थ्य, कानून, राजनीति, धर्म, सामाजिक संस्थान और युद्ध इत्यदि। प्रो. अर्थशास्त्र सैंतालीस संबंध है और बैंक इक्यावन है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक दो.चार% है = दो / । यह लेख अर्थशास्त्र और बैंक के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
वृन्दावनलाल वर्मा • समीक्षा और साहित्य ously the two most powerful " फ्रेंच कविता भी इसके लिए प्रसिद्ध है । प्रेम जिसे शाश्वत् स्वीकार किया जाता रहा है वह वीसवी शताब्दी के पूर्वार्द्ध में सामयिक समस्या भी बन चुका था । प्रेम के अस्तित्व के अभाव में भारतवासी मनुष्य के मूल्य को नही अनुभव कर सकते थे, सगठन और शक्ति एव दृढता का स्वप्न नही देख सकते थे । इन समस्त समवेत अभावो की पूर्ति था प्रेम । उस युग में प्रेम के विशद और भव्य रूप दर्शन का मै यही कारण समझता हू । सभी नेताओ ने चाहे वे राजनीतिज हो या साहित्यक इसी आराधना का व्रत लिया । छायावादियों ने भी इस देवता की प्राण प्रतिष्ठा की, परंतु व्यष्टि की सीमावद्धता के कारण वे श्लाघनीय नही हो सके । दूसरी ओर प्रेमचंद ने जहा ययार्थ, कटु छवियो को, तथा निम्न स्तर के लोगो की निर्धनता ओर दैन्य तथा अभिजात वर्ग तथा जमीदारो के अत्याचारों को चित्रित कर एक सवाद दिया, वहा वर्मा जी ने ऐतिहासिक उपन्यासो के माध्यम से मुख्यत ओज एव वीरतत्व के प्रस्फुरण का प्रयास किया, लेकिन शिवम् के सयमित और मर्यादित रूप की सदा रक्षा की । इनी मर्यादेत साहित्य सृजन के परिणामस्वरूप वर्मा जी हिंदी के आदर्शवादी कलाकारो की श्रेणी में परिगणित किये जाते है । सत्य ही है - "Poetry clothes its thought through in the imagery of sense-perception, and expresses it through a speech that has been chiefly framed for the empirical world " जब मनुष्य यथार्थं सत्य या मानव दृढ प्रगति सचरण के दृष्टिकोण से सचालित भावभूमि उपस्थित करता है तो वह ओज को विस्मरण नहीं कर पाता । वह प्रेरणा. परक, जीवत तत्वों को सुदरतापूर्वक सजा देता है । वर्मा जी के ऐतिहासिक उपन्यासो के साथ भी यह सत्य सतुलित रूप में दर्शनीय है । ओज की परिभाषा देते हुए हमारे शास्त्रकारो ने कहा है -- "जिस काव्य रचना के श्रवण से मन में तेज उत्पन्न होता है, उसे ओज गुण कहने है । '3 निश्चय ही ओज तत्व चित्त में आवेग उत्पन्न करता है, उससे स्फूति, वीरता, उत्साह का जागरण होता है । वीर, रौद्र आदि रसो में इसकी विवृत्ति मुख्यत होती है । उक्त तत्व के निर्वाह के लिए कविता में तो कठोर वर्गों के प्रयोग की भी व्यवस्था है । रवि बाबू ने भी नवजागरण निमित्त, हृदय में उद्दाम वेग और दुर्जेय शक्ति के अमित तेज का चतुर्दिक प्रसार आवश्यक समझ, युवको के लिए प्रेरण मयो वाणी स्वरित की थीउठे वीर आजि नव जीवनेर प्राते नवीन आशार खड्ग तीमार हाते १ वर्मा जी ने स्वय लिखा है - " जैसे-जैसे अध्ययन, अवलोकन और मनन करता गया, मेरा निश्चय दृढ होता गया कि आधुनिक समस्याओं का समावेश उपन्यासों में अवश्य होना चाहिए और में अपना हन न देकर पाठकों को सुझाव मात्र दे दूँ ।" (साहित्य - सदेश, अक १ -२, १९५६ ) । २ Sir H Hadow - "Collected Essays " Wordsworth ने भी इसी प्रकार कहा है - "Every great poet is a teacher I wish to be either considered as a teacher or as nothing at all " ३. सेठ कन्हैयालाल पोद्दार-काव्य कल्पद्र म ( प्रथम भाग), पृ० ३४३ ।
वृन्दावनलाल वर्मा • समीक्षा और साहित्य ously the two most powerful " फ्रेंच कविता भी इसके लिए प्रसिद्ध है । प्रेम जिसे शाश्वत् स्वीकार किया जाता रहा है वह वीसवी शताब्दी के पूर्वार्द्ध में सामयिक समस्या भी बन चुका था । प्रेम के अस्तित्व के अभाव में भारतवासी मनुष्य के मूल्य को नही अनुभव कर सकते थे, सगठन और शक्ति एव दृढता का स्वप्न नही देख सकते थे । इन समस्त समवेत अभावो की पूर्ति था प्रेम । उस युग में प्रेम के विशद और भव्य रूप दर्शन का मै यही कारण समझता हू । सभी नेताओ ने चाहे वे राजनीतिज हो या साहित्यक इसी आराधना का व्रत लिया । छायावादियों ने भी इस देवता की प्राण प्रतिष्ठा की, परंतु व्यष्टि की सीमावद्धता के कारण वे श्लाघनीय नही हो सके । दूसरी ओर प्रेमचंद ने जहा ययार्थ, कटु छवियो को, तथा निम्न स्तर के लोगो की निर्धनता ओर दैन्य तथा अभिजात वर्ग तथा जमीदारो के अत्याचारों को चित्रित कर एक सवाद दिया, वहा वर्मा जी ने ऐतिहासिक उपन्यासो के माध्यम से मुख्यत ओज एव वीरतत्व के प्रस्फुरण का प्रयास किया, लेकिन शिवम् के सयमित और मर्यादित रूप की सदा रक्षा की । इनी मर्यादेत साहित्य सृजन के परिणामस्वरूप वर्मा जी हिंदी के आदर्शवादी कलाकारो की श्रेणी में परिगणित किये जाते है । सत्य ही है - "Poetry clothes its thought through in the imagery of sense-perception, and expresses it through a speech that has been chiefly framed for the empirical world " जब मनुष्य यथार्थं सत्य या मानव दृढ प्रगति सचरण के दृष्टिकोण से सचालित भावभूमि उपस्थित करता है तो वह ओज को विस्मरण नहीं कर पाता । वह प्रेरणा. परक, जीवत तत्वों को सुदरतापूर्वक सजा देता है । वर्मा जी के ऐतिहासिक उपन्यासो के साथ भी यह सत्य सतुलित रूप में दर्शनीय है । ओज की परिभाषा देते हुए हमारे शास्त्रकारो ने कहा है -- "जिस काव्य रचना के श्रवण से मन में तेज उत्पन्न होता है, उसे ओज गुण कहने है । 'तीन निश्चय ही ओज तत्व चित्त में आवेग उत्पन्न करता है, उससे स्फूति, वीरता, उत्साह का जागरण होता है । वीर, रौद्र आदि रसो में इसकी विवृत्ति मुख्यत होती है । उक्त तत्व के निर्वाह के लिए कविता में तो कठोर वर्गों के प्रयोग की भी व्यवस्था है । रवि बाबू ने भी नवजागरण निमित्त, हृदय में उद्दाम वेग और दुर्जेय शक्ति के अमित तेज का चतुर्दिक प्रसार आवश्यक समझ, युवको के लिए प्रेरण मयो वाणी स्वरित की थीउठे वीर आजि नव जीवनेर प्राते नवीन आशार खड्ग तीमार हाते एक वर्मा जी ने स्वय लिखा है - " जैसे-जैसे अध्ययन, अवलोकन और मनन करता गया, मेरा निश्चय दृढ होता गया कि आधुनिक समस्याओं का समावेश उपन्यासों में अवश्य होना चाहिए और में अपना हन न देकर पाठकों को सुझाव मात्र दे दूँ ।" । दो Sir H Hadow - "Collected Essays " Wordsworth ने भी इसी प्रकार कहा है - "Every great poet is a teacher I wish to be either considered as a teacher or as nothing at all " तीन. सेठ कन्हैयालाल पोद्दार-काव्य कल्पद्र म , पृशून्य तीन सौ तैंतालीस ।
मेरठ के लिसाड़ीगेट में बुधवार दोपहर को दो मंजिला मकान अचानक भरभरा कर गिर गया। हालांकि हादसे में किसी को कोई चोट नहीं लगी। बताया गया कि आज सुबह चार बजे के करीब मकान की निचली दीवार खिसक गई थी। इसके कुछ ही घंटे बाद मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान के आसपास मौजूद तीन दुकानें भी धराशायी हो गईं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मेरठ के लिसाड़ीगेट में बुधवार दोपहर को दो मंजिला मकान अचानक भरभरा कर गिर गया। हालांकि हादसे में किसी को कोई चोट नहीं लगी। बताया गया कि आज सुबह चार बजे के करीब मकान की निचली दीवार खिसक गई थी। इसके कुछ ही घंटे बाद मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान के आसपास मौजूद तीन दुकानें भी धराशायी हो गईं। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
याचिका में कहा गया है कि 6 जून 2022 को पीड़ित महिला की नियुक्ति महिला के गृहरक्षक के रूप में लातेहार मंडल कारागार में अनुबंध के आधार पर हुई थी. इसी दौरान जेल में कार्यरत जमादार सोमरा भगत ने 18 जुलाई 2022 को उसके साथ छेड़खानी की थी. इसकी शिकायत उसने लातेहार मंडल कारागार के जेलर से शिकायत की थी. उसके अगले दिन ही यानी 19 जुलाई को उसे नौकरी से निकाल दिया गया. जिसके बाद उसने लातेहार डीसी, एसपी, राज्य महिला आयोग के पास इसकी शिकायत की थी. बाद में डीएसपी कार्यालय से एक चिट्ठी भेजी गयी थी जिसमें कहा गया था प्रशासनिक कारणों से उन्हें हटाया गया है, उन पर कुछ आरोप लगे हैं. प्रार्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि वर्कप्लेस पर उसके साथ यौन प्रताड़ना की घटना हुई है, कार्यस्थल पर उसके मौलिक अधिकार का हनन हुआ है. यौन प्रताड़ना को लेकर हर एक जगह एक कमेटी बनती है. लेकिन उन्हें बिना नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया. इसलिए उनकी नौकरी उन्हें वापस दिलायी जाये.
याचिका में कहा गया है कि छः जून दो हज़ार बाईस को पीड़ित महिला की नियुक्ति महिला के गृहरक्षक के रूप में लातेहार मंडल कारागार में अनुबंध के आधार पर हुई थी. इसी दौरान जेल में कार्यरत जमादार सोमरा भगत ने अट्ठारह जुलाई दो हज़ार बाईस को उसके साथ छेड़खानी की थी. इसकी शिकायत उसने लातेहार मंडल कारागार के जेलर से शिकायत की थी. उसके अगले दिन ही यानी उन्नीस जुलाई को उसे नौकरी से निकाल दिया गया. जिसके बाद उसने लातेहार डीसी, एसपी, राज्य महिला आयोग के पास इसकी शिकायत की थी. बाद में डीएसपी कार्यालय से एक चिट्ठी भेजी गयी थी जिसमें कहा गया था प्रशासनिक कारणों से उन्हें हटाया गया है, उन पर कुछ आरोप लगे हैं. प्रार्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि वर्कप्लेस पर उसके साथ यौन प्रताड़ना की घटना हुई है, कार्यस्थल पर उसके मौलिक अधिकार का हनन हुआ है. यौन प्रताड़ना को लेकर हर एक जगह एक कमेटी बनती है. लेकिन उन्हें बिना नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया. इसलिए उनकी नौकरी उन्हें वापस दिलायी जाये.
नई दिल्लीः बहुविवाह और निकाह-हलाला पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. AIMPLB ने सर्वोच्च न्यायालय में उस जनहित याचिका का विरोध किया है, जिसमें बहुविवाह और निकाह-हलाला पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की गई है. AIMPLB ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि बहुविवाह और अन्य प्रथाओं पर पहले ही फैसला सुनाया जा चुका है. AIMPLB की तरफ से दाखिल अपनी याचिका में यह भी कहा गया कि धार्मिक प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका उस शख्स द्वारा दायर नहीं की जा सकती, जो उस धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है. मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए AIMPLB सहित कई मुस्लिम संगठन मौजूद हैं. शीर्ष अदालत ने पिछले महीने 2 दिसंबर को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित बहुविवाह प्रथा और हलाला के विरुद्ध दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा था कि हम सर्दियों की छुट्टियों के बाद मामले को देखेंगे. ये मामला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संविधान पीठ को भेज दिया गया है. भाजपा नेता और पेशे से वकील अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले में अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की थी. याचिका में हलाला और पॉलीगेमी (बहुविवाह) को दुष्कर्म जैसा अपराध घोषित करने की मांग की गई है, जबकि बहुविवाह को संगीन अपराध घोषित करने की मांग की गई है.
नई दिल्लीः बहुविवाह और निकाह-हलाला पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. AIMPLB ने सर्वोच्च न्यायालय में उस जनहित याचिका का विरोध किया है, जिसमें बहुविवाह और निकाह-हलाला पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की गई है. AIMPLB ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि बहुविवाह और अन्य प्रथाओं पर पहले ही फैसला सुनाया जा चुका है. AIMPLB की तरफ से दाखिल अपनी याचिका में यह भी कहा गया कि धार्मिक प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका उस शख्स द्वारा दायर नहीं की जा सकती, जो उस धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है. मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए AIMPLB सहित कई मुस्लिम संगठन मौजूद हैं. शीर्ष अदालत ने पिछले महीने दो दिसंबर को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित बहुविवाह प्रथा और हलाला के विरुद्ध दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा था कि हम सर्दियों की छुट्टियों के बाद मामले को देखेंगे. ये मामला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से संविधान पीठ को भेज दिया गया है. भाजपा नेता और पेशे से वकील अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले में अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की थी. याचिका में हलाला और पॉलीगेमी को दुष्कर्म जैसा अपराध घोषित करने की मांग की गई है, जबकि बहुविवाह को संगीन अपराध घोषित करने की मांग की गई है.
Posted On: 'कलम नो कार्निवल' के इस भव्य आयोजन के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें। नवभारत साहित्य मंदिर' ने हर वर्ष अहमदाबाद में पुस्तक मेले की जो परंपरा शुरू की है, ये समय के साथ और ज्यादा समृद्ध होती जा रही है। इसके जरिए गुजरात के साहित्य और ज्ञान का विस्तार तो हो ही रहा है, साथ ही नए युवा साहित्यकारों, लेखकों को भी एक मंच मिल रहा है। मैं इस समृद्ध परंपरा के लिए 'नवभारत साहित्य मंदिर' और उससे जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देता हूँ। विशेष रूप से महेंद्र भाई, रोनक भाई, उनको भी शुभकामनायें देता हूँ, जिनके प्रयासों से इस पुस्तक मेले का लाभ गुजरात के लोगों को मिल रहा है। 'कलम नो कार्निवल' गुजराती भाषा के साथ-साथ, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की किताबों का भी एक बड़ा सम्मेलन है। इस आयोजन का जो उद्देश्य आप लोगों ने रखा है, 'वांचे गुजरात, वांचनने वधावे गुजरात', ये भी अपने-आप में बहुत ही प्रासंगिक है। जब मैं गुजरात में आप सबके बीच काम कर रहा था, तब गुजरात ने भी 'वांचे गुजरात' अभियान शुरू किया था। आज 'कलम नो कार्निवल' जैसे अभियान गुजरात के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। पुस्तक और ग्रंथ, ये दोनों हमारी विद्या उपासना के मूल तत्व हैं। गुजरात में पुस्तकालयों की तो बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे वडोदरा के महाराजा सयाजीराव जी ने अपने क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में प्रम्रुख स्थानों पर पुस्तकालयों की स्थापना की थी। मेरा जन्म उस गांव में हुआ था जहां बहुत अच्छी लायब्रेरी रही मेरे गांव वाडनगर में। गोंडल के महाराजा भगवत सिंह जी ने 'भगवत गोमंडल' जैसा विशाल शब्दकोश दिया। मैं तो कभी-कभी सोचता हूं, कभी लोग मुझे कहते हैं कि भई मैं जब गुजरात में था तो परिवारों में बड़ी चर्चा होती थी बच्चों के नाम को ले करके और फिर वो किताबें ढूंढते थे कि बच्चों के नाम क्या रखें। तो एक बार मेरे सामने किसी ने विषय रखा, मैंने कहा आप 'भगवत गोमंडल' देख लीजिए, इतने गुजराती शब्द मिलेंगे आपको उसमें से आपके बच्चों के लिए नाम के लिए अनुकूल चीज मिल जाएगी। और वाकई इतने reference, इतने अर्थ, ये समृद्ध परपंरा हमारे पास है। ठीक उसी तरह वीर कवि नर्मद ने 'नर्म कोष' का संपादन किया। और ये परंपरा हमारे केका शास्त्री जी तक चली। केका शास्त्री जी, जो 100 साल से भी ज्यादा समय हमारे बीच रहे, उन्होंने भी इस क्षेत्र में बहुत योगदान दिया। पुस्तकों, लेखकों, साहित्य रचना के विषय में गुजरात का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है। मैं चाहूँगा कि ऐसे पुस्तक मेले गुजरात के हर कोने में जन-जन तक, हर युवा तक पहुंचे, ताकि उन्हें इस इतिहास का भी पता चले और उन्हें नई प्रेरणा भी मिले। इस वर्ष ये पुस्तक मेला एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अमृत महोत्सव का एक आयाम ये भी है कि हम हमारी आजादी की लड़ाई के इतिहास को कैसे पुनर्जीवित करें। हमारी भावी पीढ़ी को ये हम कैसे सुपुर्द करें। आजादी के लड़ाई के जो भूले-बिसरे अध्याय हैं, उनके गौरव को हम देश के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और आप सबके प्रयास से ये संभव भी है। 'कलम नो कार्निवल' जैसे आयोजन देश के इस अभियान को गति दे सकते हैं। पुस्तक मेले में आजादी की लड़ाई से जुड़ी किताबों को विशेष महत्व दिया जा सकता है, ऐसे लेखकों को एक मजबूत मंच दिया जा सकता है। मुझे विश्वास है, ये आयोजन इस दिशा में एक सकारात्मक माध्यम साबित होगा। शास्त्र सुचिन्तित पुनि पुनि देखिअ। अर्थात्, शास्त्रों को, ग्रन्थों और पुस्तकों का बार-बार अध्ययन करते रहना चाहिए, तभी वो प्रभावी और उपयोगी रहते हैं। ये बात इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि आज इंटरनेट के जमाने में ये सोच हावी होती जा रही है कि जब जरूरत होगी तो इंटरनेट की मदद ले लेंगे। तकनीक हमारे लिए निःसन्देह जानकारी का एक महत्वपूर्ण जरिया है, लेकिन वो किताबों को, किताबों के अध्ययन को रिप्लेस करने का एक तरीका नहीं है। जब जानकारी हमारे दिमाग में होती है, तो दिमाग उस जानकारी को गहराई से process करता है, उससे जुड़े हुए नए आयाम हमारे दिमाग में आते हैं। अब मैं एक छोटा-सा आपको काम देता हूं। हम सबने नरसी मेहता के द्वारा रचित 'वैष्णव जन तो तै ने रे कहिए' कितनी ही बार सुना होगा, कितनी ही बार बोला होगा। एक काम कीजिए, आप उसको लिखित रूप में अपने सामने ले करके बैठिए और सोचिए कि इस रचना में वर्तमान के संदर्भ में क्या-क्या है। कौन-सी बातें अनुकूल हैं। मैं विश्वास से कहता हूं कि जिस वैष्णव जन को आपने हजारों बार सुना है, लिखित रूप में अपने सामने ले करके जब सोचना शुरू करोगे, वर्तमान के संदर्भ में समझने का प्रयास करोगे, उसमें से भी आपको नए सैंकड़ों अर्थ हर बार मिलते जाएंगे। ये ताकत होती है और इसलिए पुस्तक का हमारे पास होना, हमारे साथ होना, हमारे सामने होना, वो नए-नए इनोवेशन के लिए, नए-नए अनुसंधान के लिए सोचने के, तर्क-वितर्क को गहराई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ी ताकत देता है। इसलिए, बदलते समय के साथ किताबों की, किताबों को पढ़ने की हमारी आदत बनी रहे, ये बहुत जरूरी है। फिर किताबें चाहें फ़िज़िकल फॉर्म में हो या डिजिटल फॉर्म में! मैं मानता हूँ, इस तरह के आयोजन युवाओं में किताबों के लिए जरूरी आकर्षण पैदा करने में, उनकी अहमियत को समझाने में भी बड़ी भूमिका अदा करेंगे। मैं ये भी कहना चाहूंगा और जब आज गुजरात के लोगों के साथ बैठ कर बात कर रहा हुं तब कभी हमने सोचा है की हम नया घर बना रहें हो तब आर्किटेक के साथ बहुत सारी चर्चा करते हैं। यहां आप डाईनिंग रूम बनाना, यहां ड्रोईंग रूम बनाना, कभी कभी कोई ये भी कहता है की यहां पूजा घर बनाएगा, कुछ लोग इससे भी आगे बढ कर कहते है की मेरे कपडें रखने के लिए व्यवस्था यहां करना, लेकिन मेरी आपसे बिनती है की कभी नया मकान बनाते वक्त, हम क्या हमारे आर्किटेक को ऐसा कहते है की भाई, एक एसी जगह बनाना, जहां हमारा पुस्तकों का भंडार रह सके। मैं भी पुस्तको के भंडारवाली जगह पर जाउं, मेरे बच्चों को ले जाउं, आदत डालुं, मेरे घर का एक कोना ऐसा हो, जो पुस्तकों के लिए विशेष रुप से सजाया गया हो। हम ऐसा नहीं कहते हैं। आपको पता होगा की मैं गुजरात में एक आग्रह बहुत करता था, कोई भी कार्यक्रम हो मैं कहता था मंच पर, भाई, बुके नहीं बुक दिजिए, क्योंकी 100-200 रूपए का बुके ले आएं उसका आयुष्य भी बहुत कम होता है। मैं ऐसा कहता की बुक ले आईएं, मुझे पता था उसकी वजह से किताबों की बिक्री भी बढे, प्रकाशको, लेखको को आर्थिक मदद भी चाहिए कि नहीं। हम कई बार किताब खरीदते ही नहीं है। सही में किताब खरीदना भी एक समाज सेवा है। क्योंकी इस प्रकार के कार्यो के साथ समर्पित जो जीवन है उस जीवनो के लिए हमारा सहयोग स्वाभाविक होना चाहिए। आज किताब खरीदने की आदत डालनी चाहिए। किताब के रखरखाव की, रखने की आदत डालनी चाहिए और मैंने अनेक लोगों को गुजरात में देखा था वो लोग घर घर जाकर किताबें देते और बिनती करते की ये किताब पढना और खरीदने जैसा लगे तो खरीदना नहीं तो मुझे वापिस कर देना। ऐसे बहुत सारे लोग हमने देखें है। मुझे याद है हमारे भावनगर में एक सज्जन किताब की परब चलाते थे। इस प्रकार के कार्यो बहुत सारे लोग करते रहे है। लेकिन हमारी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए की हम परिवार में, और हमारे यहां तो कहते हैना, सरस्वति ये लुप्त है, गुप्त है। विज्ञान से अलग साहित्यिक कार्यक्रमो में मैं अलग तर्क देता हुं। और ये साहित्यवाली दुनिया का तर्क है। ये सरस्वति तो ज्ञान की देवी है। वह लुप्त है, गुप्त है इसका मतलब ये हुआ की ये सरस्वति बीता हुआ कल, आज और भविष्य तीनों को लुप्त अवस्था में जोडती रहती हैं। ये सरस्वति किताबों के माध्यम से इतिहास को, वर्तमान को और उज्जवल भविष्य को जोडने का कार्य करतीं हैं। इसिलिए किताबों के मेले के महात्म्य को समजें, हमारे परिवार के साथ जाना चाहिए, किताबों के मेले में तो परिवार के साथ जाना चाहिए। और किताब को हाथ लगाकर देखें तो लगेगा की अच्छा ये भी है यहां, इसके पर भी विचार किया गया है, अनेक चीजो उपलब्ध होती है। इसलिए मेरे अपेक्षा है मेरे सभी गुजरात के भाईओ-बहनों से की बहुत पढें बहुत विचार करें। और बहुत मंथन करें, आनेवाली पीढियों को बहुत कुछ दें। और गुजरात के जो मूर्धन्य साहित्यकारों है उनके प्रति हमारी एक आदरांजलि भी होगी, शब्द के जो साधकों है, सरस्वति के जो पुजारी है, उन्हें भी इस मेले में हमारी सक्रिय भागीदारी एक प्रकार से आदरांजलि बनेगी। मेरी आप सब को बहुत बहुत शुभकामनाएं है, फिर एक बार विचार को, वाचक को सबको आदरपूर्वक नमन कर के मेरी बात पूर्ण कर रहा हुं। इसी भावना के साथ, आप सभी को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनायें। Read this release in:
Posted On: 'कलम नो कार्निवल' के इस भव्य आयोजन के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें। नवभारत साहित्य मंदिर' ने हर वर्ष अहमदाबाद में पुस्तक मेले की जो परंपरा शुरू की है, ये समय के साथ और ज्यादा समृद्ध होती जा रही है। इसके जरिए गुजरात के साहित्य और ज्ञान का विस्तार तो हो ही रहा है, साथ ही नए युवा साहित्यकारों, लेखकों को भी एक मंच मिल रहा है। मैं इस समृद्ध परंपरा के लिए 'नवभारत साहित्य मंदिर' और उससे जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देता हूँ। विशेष रूप से महेंद्र भाई, रोनक भाई, उनको भी शुभकामनायें देता हूँ, जिनके प्रयासों से इस पुस्तक मेले का लाभ गुजरात के लोगों को मिल रहा है। 'कलम नो कार्निवल' गुजराती भाषा के साथ-साथ, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की किताबों का भी एक बड़ा सम्मेलन है। इस आयोजन का जो उद्देश्य आप लोगों ने रखा है, 'वांचे गुजरात, वांचनने वधावे गुजरात', ये भी अपने-आप में बहुत ही प्रासंगिक है। जब मैं गुजरात में आप सबके बीच काम कर रहा था, तब गुजरात ने भी 'वांचे गुजरात' अभियान शुरू किया था। आज 'कलम नो कार्निवल' जैसे अभियान गुजरात के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। पुस्तक और ग्रंथ, ये दोनों हमारी विद्या उपासना के मूल तत्व हैं। गुजरात में पुस्तकालयों की तो बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे वडोदरा के महाराजा सयाजीराव जी ने अपने क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में प्रम्रुख स्थानों पर पुस्तकालयों की स्थापना की थी। मेरा जन्म उस गांव में हुआ था जहां बहुत अच्छी लायब्रेरी रही मेरे गांव वाडनगर में। गोंडल के महाराजा भगवत सिंह जी ने 'भगवत गोमंडल' जैसा विशाल शब्दकोश दिया। मैं तो कभी-कभी सोचता हूं, कभी लोग मुझे कहते हैं कि भई मैं जब गुजरात में था तो परिवारों में बड़ी चर्चा होती थी बच्चों के नाम को ले करके और फिर वो किताबें ढूंढते थे कि बच्चों के नाम क्या रखें। तो एक बार मेरे सामने किसी ने विषय रखा, मैंने कहा आप 'भगवत गोमंडल' देख लीजिए, इतने गुजराती शब्द मिलेंगे आपको उसमें से आपके बच्चों के लिए नाम के लिए अनुकूल चीज मिल जाएगी। और वाकई इतने reference, इतने अर्थ, ये समृद्ध परपंरा हमारे पास है। ठीक उसी तरह वीर कवि नर्मद ने 'नर्म कोष' का संपादन किया। और ये परंपरा हमारे केका शास्त्री जी तक चली। केका शास्त्री जी, जो एक सौ साल से भी ज्यादा समय हमारे बीच रहे, उन्होंने भी इस क्षेत्र में बहुत योगदान दिया। पुस्तकों, लेखकों, साहित्य रचना के विषय में गुजरात का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है। मैं चाहूँगा कि ऐसे पुस्तक मेले गुजरात के हर कोने में जन-जन तक, हर युवा तक पहुंचे, ताकि उन्हें इस इतिहास का भी पता चले और उन्हें नई प्रेरणा भी मिले। इस वर्ष ये पुस्तक मेला एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अमृत महोत्सव का एक आयाम ये भी है कि हम हमारी आजादी की लड़ाई के इतिहास को कैसे पुनर्जीवित करें। हमारी भावी पीढ़ी को ये हम कैसे सुपुर्द करें। आजादी के लड़ाई के जो भूले-बिसरे अध्याय हैं, उनके गौरव को हम देश के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और आप सबके प्रयास से ये संभव भी है। 'कलम नो कार्निवल' जैसे आयोजन देश के इस अभियान को गति दे सकते हैं। पुस्तक मेले में आजादी की लड़ाई से जुड़ी किताबों को विशेष महत्व दिया जा सकता है, ऐसे लेखकों को एक मजबूत मंच दिया जा सकता है। मुझे विश्वास है, ये आयोजन इस दिशा में एक सकारात्मक माध्यम साबित होगा। शास्त्र सुचिन्तित पुनि पुनि देखिअ। अर्थात्, शास्त्रों को, ग्रन्थों और पुस्तकों का बार-बार अध्ययन करते रहना चाहिए, तभी वो प्रभावी और उपयोगी रहते हैं। ये बात इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि आज इंटरनेट के जमाने में ये सोच हावी होती जा रही है कि जब जरूरत होगी तो इंटरनेट की मदद ले लेंगे। तकनीक हमारे लिए निःसन्देह जानकारी का एक महत्वपूर्ण जरिया है, लेकिन वो किताबों को, किताबों के अध्ययन को रिप्लेस करने का एक तरीका नहीं है। जब जानकारी हमारे दिमाग में होती है, तो दिमाग उस जानकारी को गहराई से process करता है, उससे जुड़े हुए नए आयाम हमारे दिमाग में आते हैं। अब मैं एक छोटा-सा आपको काम देता हूं। हम सबने नरसी मेहता के द्वारा रचित 'वैष्णव जन तो तै ने रे कहिए' कितनी ही बार सुना होगा, कितनी ही बार बोला होगा। एक काम कीजिए, आप उसको लिखित रूप में अपने सामने ले करके बैठिए और सोचिए कि इस रचना में वर्तमान के संदर्भ में क्या-क्या है। कौन-सी बातें अनुकूल हैं। मैं विश्वास से कहता हूं कि जिस वैष्णव जन को आपने हजारों बार सुना है, लिखित रूप में अपने सामने ले करके जब सोचना शुरू करोगे, वर्तमान के संदर्भ में समझने का प्रयास करोगे, उसमें से भी आपको नए सैंकड़ों अर्थ हर बार मिलते जाएंगे। ये ताकत होती है और इसलिए पुस्तक का हमारे पास होना, हमारे साथ होना, हमारे सामने होना, वो नए-नए इनोवेशन के लिए, नए-नए अनुसंधान के लिए सोचने के, तर्क-वितर्क को गहराई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ी ताकत देता है। इसलिए, बदलते समय के साथ किताबों की, किताबों को पढ़ने की हमारी आदत बनी रहे, ये बहुत जरूरी है। फिर किताबें चाहें फ़िज़िकल फॉर्म में हो या डिजिटल फॉर्म में! मैं मानता हूँ, इस तरह के आयोजन युवाओं में किताबों के लिए जरूरी आकर्षण पैदा करने में, उनकी अहमियत को समझाने में भी बड़ी भूमिका अदा करेंगे। मैं ये भी कहना चाहूंगा और जब आज गुजरात के लोगों के साथ बैठ कर बात कर रहा हुं तब कभी हमने सोचा है की हम नया घर बना रहें हो तब आर्किटेक के साथ बहुत सारी चर्चा करते हैं। यहां आप डाईनिंग रूम बनाना, यहां ड्रोईंग रूम बनाना, कभी कभी कोई ये भी कहता है की यहां पूजा घर बनाएगा, कुछ लोग इससे भी आगे बढ कर कहते है की मेरे कपडें रखने के लिए व्यवस्था यहां करना, लेकिन मेरी आपसे बिनती है की कभी नया मकान बनाते वक्त, हम क्या हमारे आर्किटेक को ऐसा कहते है की भाई, एक एसी जगह बनाना, जहां हमारा पुस्तकों का भंडार रह सके। मैं भी पुस्तको के भंडारवाली जगह पर जाउं, मेरे बच्चों को ले जाउं, आदत डालुं, मेरे घर का एक कोना ऐसा हो, जो पुस्तकों के लिए विशेष रुप से सजाया गया हो। हम ऐसा नहीं कहते हैं। आपको पता होगा की मैं गुजरात में एक आग्रह बहुत करता था, कोई भी कार्यक्रम हो मैं कहता था मंच पर, भाई, बुके नहीं बुक दिजिए, क्योंकी एक सौ-दो सौ रूपए का बुके ले आएं उसका आयुष्य भी बहुत कम होता है। मैं ऐसा कहता की बुक ले आईएं, मुझे पता था उसकी वजह से किताबों की बिक्री भी बढे, प्रकाशको, लेखको को आर्थिक मदद भी चाहिए कि नहीं। हम कई बार किताब खरीदते ही नहीं है। सही में किताब खरीदना भी एक समाज सेवा है। क्योंकी इस प्रकार के कार्यो के साथ समर्पित जो जीवन है उस जीवनो के लिए हमारा सहयोग स्वाभाविक होना चाहिए। आज किताब खरीदने की आदत डालनी चाहिए। किताब के रखरखाव की, रखने की आदत डालनी चाहिए और मैंने अनेक लोगों को गुजरात में देखा था वो लोग घर घर जाकर किताबें देते और बिनती करते की ये किताब पढना और खरीदने जैसा लगे तो खरीदना नहीं तो मुझे वापिस कर देना। ऐसे बहुत सारे लोग हमने देखें है। मुझे याद है हमारे भावनगर में एक सज्जन किताब की परब चलाते थे। इस प्रकार के कार्यो बहुत सारे लोग करते रहे है। लेकिन हमारी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए की हम परिवार में, और हमारे यहां तो कहते हैना, सरस्वति ये लुप्त है, गुप्त है। विज्ञान से अलग साहित्यिक कार्यक्रमो में मैं अलग तर्क देता हुं। और ये साहित्यवाली दुनिया का तर्क है। ये सरस्वति तो ज्ञान की देवी है। वह लुप्त है, गुप्त है इसका मतलब ये हुआ की ये सरस्वति बीता हुआ कल, आज और भविष्य तीनों को लुप्त अवस्था में जोडती रहती हैं। ये सरस्वति किताबों के माध्यम से इतिहास को, वर्तमान को और उज्जवल भविष्य को जोडने का कार्य करतीं हैं। इसिलिए किताबों के मेले के महात्म्य को समजें, हमारे परिवार के साथ जाना चाहिए, किताबों के मेले में तो परिवार के साथ जाना चाहिए। और किताब को हाथ लगाकर देखें तो लगेगा की अच्छा ये भी है यहां, इसके पर भी विचार किया गया है, अनेक चीजो उपलब्ध होती है। इसलिए मेरे अपेक्षा है मेरे सभी गुजरात के भाईओ-बहनों से की बहुत पढें बहुत विचार करें। और बहुत मंथन करें, आनेवाली पीढियों को बहुत कुछ दें। और गुजरात के जो मूर्धन्य साहित्यकारों है उनके प्रति हमारी एक आदरांजलि भी होगी, शब्द के जो साधकों है, सरस्वति के जो पुजारी है, उन्हें भी इस मेले में हमारी सक्रिय भागीदारी एक प्रकार से आदरांजलि बनेगी। मेरी आप सब को बहुत बहुत शुभकामनाएं है, फिर एक बार विचार को, वाचक को सबको आदरपूर्वक नमन कर के मेरी बात पूर्ण कर रहा हुं। इसी भावना के साथ, आप सभी को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनायें। Read this release in:
उपर्युक्त विषय पर हमारे दिनांक 28 मार्च 2014 के दिशानिर्देश डीपीएसएस सीओ पीडी सं.2074/02.14.006 /2013-14 का संदर्भ लें। 2. समीक्षा करने पर यह पाया गया है कि, दिनांक 28 मार्च 2014 के दिशानिर्देशों के अनुबंध के पैरा 7.4 (को-ब्रांडेड प्रीपेड भुगतान लिखत) को संशोधन के पश्चात निम्नलिखित अनुसार पढ़ा जाएः प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने के लिए अधिकृत /अनुमोदित सभी व्यक्तियों को ऐसे लिखतों को वित्तीय संस्था का नाम / सरकारी संगठन इत्यादि जिनके ग्राहकों / लाभार्थियों के लिए ऐसे सह ब्रांडेड लिखत जारी किए जाते हैं के नाम/लोगो के साथ सह-ब्रांड करने की अनुमति दी जाती है। जारीकर्ता का नाम भुगतान लिखत पर प्रमुखता से स्पष्ट होना चाहिए। ऐसे सह ब्रांडेड प्रीपेड लिखतों को जारी करने के इच्छुक बैंक/ एनबीएफसी / अन्य व्यक्ति भारतीय रिजर्व बैंक से एक बार प्राप्त किया जाने वाला अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं। प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने के लिए अधिकृत /अनुमोदित सभी व्यक्तियों को ऐसे लिखतों को वित्तीय संस्था का नाम / सरकारी संगठन इत्यादि जिनके ग्राहकों / लाभार्थियों के लिए ऐसे को- ब्रांडेड लिखत जारी किए जाते हैं के नाम/लोगो के साथ को-ब्रांड करने की अनुमति दी जाती है। जारीकर्ता का नाम भुगतान लिखत पर प्रमुखता से स्पष्ट होना चाहिए। ऐसे को-ब्रांडेड प्रीपेड लिखतों को जारी करने के इच्छुक एनबीएफसी / अन्य व्यक्ति भारतीय रिजर्व बैंक से एक बार प्राप्त किया जाने वाला अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं। तथापि, बैंकों को रुपया मूल्यवर्ग के को-ब्रांडेड प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने की साधारण अनुमति दी गई है बशर्ते कि वे दिनांक 12 दिसंबर 2012 के परिपत्र आरबीआई/2012-13/325 डीबीओडी.सं.एफ़एसडी.बीसी. 67/ 24.01.019/ 2012-13 का अनुपालन करें। 3. हितधारकों को सूचित किया जाता है कि वे उपर्युक्त संशोधन को ध्यान में रखें। प्रीपेड भुगतान लिखतों के संबंध में संशोधित समेकित नीतिगत दिशानिर्देश अनुबंध में दिये गए हैं। (विजय चुग)
उपर्युक्त विषय पर हमारे दिनांक अट्ठाईस मार्च दो हज़ार चौदह के दिशानिर्देश डीपीएसएस सीओ पीडी सं.दो हज़ार चौहत्तर/दो.चौदह.छः /दो हज़ार तेरह-चौदह का संदर्भ लें। दो. समीक्षा करने पर यह पाया गया है कि, दिनांक अट्ठाईस मार्च दो हज़ार चौदह के दिशानिर्देशों के अनुबंध के पैरा सात.चार को संशोधन के पश्चात निम्नलिखित अनुसार पढ़ा जाएः प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने के लिए अधिकृत /अनुमोदित सभी व्यक्तियों को ऐसे लिखतों को वित्तीय संस्था का नाम / सरकारी संगठन इत्यादि जिनके ग्राहकों / लाभार्थियों के लिए ऐसे सह ब्रांडेड लिखत जारी किए जाते हैं के नाम/लोगो के साथ सह-ब्रांड करने की अनुमति दी जाती है। जारीकर्ता का नाम भुगतान लिखत पर प्रमुखता से स्पष्ट होना चाहिए। ऐसे सह ब्रांडेड प्रीपेड लिखतों को जारी करने के इच्छुक बैंक/ एनबीएफसी / अन्य व्यक्ति भारतीय रिजर्व बैंक से एक बार प्राप्त किया जाने वाला अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं। प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने के लिए अधिकृत /अनुमोदित सभी व्यक्तियों को ऐसे लिखतों को वित्तीय संस्था का नाम / सरकारी संगठन इत्यादि जिनके ग्राहकों / लाभार्थियों के लिए ऐसे को- ब्रांडेड लिखत जारी किए जाते हैं के नाम/लोगो के साथ को-ब्रांड करने की अनुमति दी जाती है। जारीकर्ता का नाम भुगतान लिखत पर प्रमुखता से स्पष्ट होना चाहिए। ऐसे को-ब्रांडेड प्रीपेड लिखतों को जारी करने के इच्छुक एनबीएफसी / अन्य व्यक्ति भारतीय रिजर्व बैंक से एक बार प्राप्त किया जाने वाला अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं। तथापि, बैंकों को रुपया मूल्यवर्ग के को-ब्रांडेड प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करने की साधारण अनुमति दी गई है बशर्ते कि वे दिनांक बारह दिसंबर दो हज़ार बारह के परिपत्र आरबीआई/बत्तीस तेरह दो हज़ार बारहपाँच डीबीओडी.सं.एफ़एसडी.बीसी. सरसठ/ चौबीस.एक.उन्नीस/ दो हज़ार बारह-तेरह का अनुपालन करें। तीन. हितधारकों को सूचित किया जाता है कि वे उपर्युक्त संशोधन को ध्यान में रखें। प्रीपेड भुगतान लिखतों के संबंध में संशोधित समेकित नीतिगत दिशानिर्देश अनुबंध में दिये गए हैं।
तेल कंपनियां 10 रुपये प्रति लीटर के मुनाफे पर पेट्रोल बेच रही हैं। तेल कंपनियां ना केवल पिछले घाटे की भरपाई कर रही हैं बल्कि डीजल की बिक्री में उन्हें अभी 6. 5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। नई दिल्ली, पीटीआई। तेल कंपनियां 10 रुपये प्रति लीटर के मुनाफे पर पेट्रोल बेच रही हैं, लेकिन इसके बावजूद तेल की खुदरा कीमतों में कमी नहीं की जा रही है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह यह है कि कंपनियां ना केवल पिछले घाटे की भरपाई कर रही हैं बल्कि डीजल की बिक्री में उन्हें अभी 6. 5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इंडियन आयल कारपोरेशन (आइओसी), भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन (एचपीसीएल) ने पिछले 15 महीनों से लागत के अनुरूप पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा नहीं किया है। आइसीआइसीआइ सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक 24 जून, 2022 को समाप्त सप्ताह में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 17. 4 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 27. 7 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। हालांकि कंपनियों को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर का लाभ होने का अनुमान है जबकि डीजल पर उन्हें अभी भी 6. 5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। यह भी पढ़ें- Petrol Diesel Price Today: कच्चे तेल की कीमत में फिर आया उछाल, पेट्रोल-डीजल की कीमत में हुआ बदलाव? तीनों तेल कंपनियों ने छह अप्रैल, 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। हालांकि इस बीच कच्चे तेल की कीमतें 102. 97 डालर प्रति बैरल से बढ़कर जून में 116. 01 डालर प्रति बैरल तक चढ़ीं और इस महीने गिरकर 78. 09 डालर प्रति बैरल पर आ गईं।
तेल कंपनियां दस रुपयापये प्रति लीटर के मुनाफे पर पेट्रोल बेच रही हैं। तेल कंपनियां ना केवल पिछले घाटे की भरपाई कर रही हैं बल्कि डीजल की बिक्री में उन्हें अभी छः. पाँच रुपयापये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। नई दिल्ली, पीटीआई। तेल कंपनियां दस रुपयापये प्रति लीटर के मुनाफे पर पेट्रोल बेच रही हैं, लेकिन इसके बावजूद तेल की खुदरा कीमतों में कमी नहीं की जा रही है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह यह है कि कंपनियां ना केवल पिछले घाटे की भरपाई कर रही हैं बल्कि डीजल की बिक्री में उन्हें अभी छः. पाँच रुपयापये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इंडियन आयल कारपोरेशन , भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन ने पिछले पंद्रह महीनों से लागत के अनुरूप पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा नहीं किया है। आइसीआइसीआइ सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक चौबीस जून, दो हज़ार बाईस को समाप्त सप्ताह में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर सत्रह. चार रुपयापये प्रति लीटर और डीजल पर सत्ताईस. सात रुपयापये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। हालांकि कंपनियों को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में पेट्रोल पर दस रुपयापये प्रति लीटर का लाभ होने का अनुमान है जबकि डीजल पर उन्हें अभी भी छः. पाँच रुपयापये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। यह भी पढ़ें- Petrol Diesel Price Today: कच्चे तेल की कीमत में फिर आया उछाल, पेट्रोल-डीजल की कीमत में हुआ बदलाव? तीनों तेल कंपनियों ने छह अप्रैल, दो हज़ार बाईस से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। हालांकि इस बीच कच्चे तेल की कीमतें एक सौ दो. सत्तानवे डालर प्रति बैरल से बढ़कर जून में एक सौ सोलह. एक डालर प्रति बैरल तक चढ़ीं और इस महीने गिरकर अठहत्तर. नौ डालर प्रति बैरल पर आ गईं।
अलीराजपुर। कलेक्टर शेखर वर्मा ने एक अनोखी पहल ने जिलेवासियों की मुश्किलें आसान कर दी हैं। यह सब जिला स्तर पर शुरू की गई जनश्रुति हेल्पलाइन के माध्यम से संभव हुआ है। कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाईन की तर्ज पर जनश्रुति हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। जो आज इतनी सफल हो चुकी है कि 6 माह में 15 हजार से भी ज्यादा शिकायतें हेल्पलाइन पर दर्ज हुई हैं। इनमें से 80 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण भी कर दिया गया है। अब कलेक्टर ने इस सफलता को देखते हुए एसएमएस सुविधा शुरू की है, जिसमें एसएमएस से भी जनता अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती है। स्थानीय लोगों की मानें तो अलीराजपुर जिले का नाम सुनकर कई अधिकारी यहां पोस्टिंग कराने से मना कर देते हैं, लेकिन कलेक्टर वर्मा ने उन सबको पीछे छोड़ते हुए एक संदेश दिया है। कलेक्टर शेखर वर्मा का कहना है कि 6 माह पहले जनश्रुति के नाम से एक हेल्पलाइन शुरू कि गई थी, जिसमें एक नम्बर जारी किया था। इस नंबर पर पर जिलेवासी सीधे कलेक्टर से संवाद और शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इस हल्पलाइन से लोग इतने जुड़े कि 6 माह में 15 हजार से भी ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं और ज्यादातर शिकायतों का निराकरण भी कर दिया गया। अब कलेक्टर एसएमएस की नई पहल शुरू कर रहे हैं। जिस किसी को भी अपनी शिकायत दर्ज करवाना हो, तो वो 09713689866 पर एसएमएस कर सकता है और जल्द से जल्द उसकी शिकायत का निराकरण किया जाएगा।
अलीराजपुर। कलेक्टर शेखर वर्मा ने एक अनोखी पहल ने जिलेवासियों की मुश्किलें आसान कर दी हैं। यह सब जिला स्तर पर शुरू की गई जनश्रुति हेल्पलाइन के माध्यम से संभव हुआ है। कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाईन की तर्ज पर जनश्रुति हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। जो आज इतनी सफल हो चुकी है कि छः माह में पंद्रह हजार से भी ज्यादा शिकायतें हेल्पलाइन पर दर्ज हुई हैं। इनमें से अस्सी प्रतिशत शिकायतों का निराकरण भी कर दिया गया है। अब कलेक्टर ने इस सफलता को देखते हुए एसएमएस सुविधा शुरू की है, जिसमें एसएमएस से भी जनता अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती है। स्थानीय लोगों की मानें तो अलीराजपुर जिले का नाम सुनकर कई अधिकारी यहां पोस्टिंग कराने से मना कर देते हैं, लेकिन कलेक्टर वर्मा ने उन सबको पीछे छोड़ते हुए एक संदेश दिया है। कलेक्टर शेखर वर्मा का कहना है कि छः माह पहले जनश्रुति के नाम से एक हेल्पलाइन शुरू कि गई थी, जिसमें एक नम्बर जारी किया था। इस नंबर पर पर जिलेवासी सीधे कलेक्टर से संवाद और शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इस हल्पलाइन से लोग इतने जुड़े कि छः माह में पंद्रह हजार से भी ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं और ज्यादातर शिकायतों का निराकरण भी कर दिया गया। अब कलेक्टर एसएमएस की नई पहल शुरू कर रहे हैं। जिस किसी को भी अपनी शिकायत दर्ज करवाना हो, तो वो नौ सात एक तीन छः आठ नौ आठ छः छः पर एसएमएस कर सकता है और जल्द से जल्द उसकी शिकायत का निराकरण किया जाएगा।
Patna : बिहार की राजनीति माहौल इन दिनों आरजेडी को लेकर गर्म होती दिख रही है. आरजेडी के अंदर शुरू हुई विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रही है. तेजप्रताप लगातार बगावत कर रहे है. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कहने के बाद दोनों ओर से बयानबाजी शुरू हो गयी है. तेजस्वी ने तेजप्रताप को सलाह दिया की बड़ी की बात माननी चाहिए. जिसे नाराज होकर तेजप्रताप ने भी कहा कि बिहार में बाढ़ आया हुआ है. ऐसे में लोगों की मदद करने के बजाय तेजस्वी दिल्ली क्यों चले गये है. तेजप्रताप ने जगदानन्द सिंह को महाभारत का शिशुपाल तो तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव को दुर्योधन बता डाला. तेज प्रताप ने कहा कि बिहार में लोग बाढ़ से डूब रहे हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घूमने का काम तेजस्वी को करना चाहिए. घूमने का काम किया भी है लेकिन संजय यादव भड़काकर दिल्ली लेकर चला गया है. संजय यादव जनता से दूर कर रहे हैं. बिहार से बाहर क्यों लेकर गए. तेजस्वी नेता प्रतिपक्ष हैं. हम मिले भी हैं. ऐसा तो कोई बात नहीं हुआ था. संजय यादव का अपना घर-बार नहीं है, अपने बाल बच्चों को देखें. आगे कहते हुए तेजप्रताप ने कहा कि मैं जल्द ही दिल्ली जाउंगा और उनसे बात करूंगा. जब तक जगदानंद को नहीं हटा लेता तब तक मैं सांस नहीं लूंगा. तेजप्रताप ने कहा कि मैं अपनी बात को तेजस्वी बता रहा था. तब इसके सलाहकार संजय यादव तेजस्वी को लेकर चला गया. संजय दुर्योधन की भूमिका में है. तेजस्वी यादव सुनेंगे मेरी बात को. उन्हे सीएम बनना है. अपने पक्ष में उनको ले लेंगे. वह अभी बच्चे हैं. बता दें कि दूसरी ओर तेजस्वी यादव पार्टी को बचाने और पार्टी में अनुशासन की बात कर रहे हैं, तो तेजप्रताप इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं. रक्षाबंधन के दिन दोनों भाइयों का फैसला परिवार के बीच होना है. तेजप्रताप की दलील होगी कि तेजस्वी दूसरों के खातिर अपने सगे भाई को खुद से दूर कर रहे हैं.
Patna : बिहार की राजनीति माहौल इन दिनों आरजेडी को लेकर गर्म होती दिख रही है. आरजेडी के अंदर शुरू हुई विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रही है. तेजप्रताप लगातार बगावत कर रहे है. आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कहने के बाद दोनों ओर से बयानबाजी शुरू हो गयी है. तेजस्वी ने तेजप्रताप को सलाह दिया की बड़ी की बात माननी चाहिए. जिसे नाराज होकर तेजप्रताप ने भी कहा कि बिहार में बाढ़ आया हुआ है. ऐसे में लोगों की मदद करने के बजाय तेजस्वी दिल्ली क्यों चले गये है. तेजप्रताप ने जगदानन्द सिंह को महाभारत का शिशुपाल तो तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव को दुर्योधन बता डाला. तेज प्रताप ने कहा कि बिहार में लोग बाढ़ से डूब रहे हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घूमने का काम तेजस्वी को करना चाहिए. घूमने का काम किया भी है लेकिन संजय यादव भड़काकर दिल्ली लेकर चला गया है. संजय यादव जनता से दूर कर रहे हैं. बिहार से बाहर क्यों लेकर गए. तेजस्वी नेता प्रतिपक्ष हैं. हम मिले भी हैं. ऐसा तो कोई बात नहीं हुआ था. संजय यादव का अपना घर-बार नहीं है, अपने बाल बच्चों को देखें. आगे कहते हुए तेजप्रताप ने कहा कि मैं जल्द ही दिल्ली जाउंगा और उनसे बात करूंगा. जब तक जगदानंद को नहीं हटा लेता तब तक मैं सांस नहीं लूंगा. तेजप्रताप ने कहा कि मैं अपनी बात को तेजस्वी बता रहा था. तब इसके सलाहकार संजय यादव तेजस्वी को लेकर चला गया. संजय दुर्योधन की भूमिका में है. तेजस्वी यादव सुनेंगे मेरी बात को. उन्हे सीएम बनना है. अपने पक्ष में उनको ले लेंगे. वह अभी बच्चे हैं. बता दें कि दूसरी ओर तेजस्वी यादव पार्टी को बचाने और पार्टी में अनुशासन की बात कर रहे हैं, तो तेजप्रताप इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं. रक्षाबंधन के दिन दोनों भाइयों का फैसला परिवार के बीच होना है. तेजप्रताप की दलील होगी कि तेजस्वी दूसरों के खातिर अपने सगे भाई को खुद से दूर कर रहे हैं.
पंजाब के लुधियाना में आज कैबिनेट मंत्री ब्रहम शंकर जिंपा पहुंचे। वह हंबड़ा रोड पर सब-रजिस्ट्रार (पश्चमी) आए। मंत्री जिंपा ने तहसील अधिकारियों और कर्मचारियों से बैठक की। जिंपा के साथ शहर के समस्त विधायक भी मौजूद रहे। जिंपा ने तहसील का निरीक्षण भी किया। बता दें कि पिछले लंबे समय से शिकायतें सरकार को मिल रही हैं कि तहसीलों में भ्रष्टाचार अभी भी चर्म पर है। इस पर अब लगातार मंत्री तहसीलों का दौरा कर रहे हैं। मंत्री के शहर में आने की खबर पहले ही तहसीलों तक पहुंच गई थी। वहीं जो रोजाना रजिस्ट्रियां आदि करवाने वाले एजेंट थे वह सुबह से ही गायब रहे। बता दें कि भ्रष्टाचार सिर्फ पश्चमी तहसील में ही नहीं बल्कि पूर्वी, केन्द्रीय और गिल में भी फैल रखा है। सूत्रों के मुताबिक सरेआम एजेंट फाइलों के नंबर लगवाते हैं और कर्मचारियों की मिलीभगत से जाली NOC तक लगाकर भी रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। जानकारी देते हुए मंत्री जिंपा ने कहा उन्होंने समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों से कह दिया है कि भ्रष्टाचार सहन नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति की शिकायत मिलती है तो तुरंत जांच होगी। व्यक्ति के आरोपी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। जिंपा ने कहा कि NOC शुरू करने के मामले में लोकल बाडी से बैठकें चल रही है। जल्द समाधान होगा। जो लोग जाली NOC लगा रहे है उनकी जांच करवाई जाएगी। बता दें वहीं कुछ कलोनाइजरों ने धरना मंत्री जिंपा और आम आदमी पार्ट के खिलाफ लगाया। कलोनाइजरों का कहना था कि NOC खोली जाए। कलोनाइजरों ने कहा जो काटी गई NOC है उस पर रजिस्ट्रियां नहीं हो रही। नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्ट को हार का मुंह देखना पड़ेगा। इस बार प्रापर्टी कारोबारियों का काम इतना ठप्प हो गया है कि अब वह काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर हो चुके है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब के लुधियाना में आज कैबिनेट मंत्री ब्रहम शंकर जिंपा पहुंचे। वह हंबड़ा रोड पर सब-रजिस्ट्रार आए। मंत्री जिंपा ने तहसील अधिकारियों और कर्मचारियों से बैठक की। जिंपा के साथ शहर के समस्त विधायक भी मौजूद रहे। जिंपा ने तहसील का निरीक्षण भी किया। बता दें कि पिछले लंबे समय से शिकायतें सरकार को मिल रही हैं कि तहसीलों में भ्रष्टाचार अभी भी चर्म पर है। इस पर अब लगातार मंत्री तहसीलों का दौरा कर रहे हैं। मंत्री के शहर में आने की खबर पहले ही तहसीलों तक पहुंच गई थी। वहीं जो रोजाना रजिस्ट्रियां आदि करवाने वाले एजेंट थे वह सुबह से ही गायब रहे। बता दें कि भ्रष्टाचार सिर्फ पश्चमी तहसील में ही नहीं बल्कि पूर्वी, केन्द्रीय और गिल में भी फैल रखा है। सूत्रों के मुताबिक सरेआम एजेंट फाइलों के नंबर लगवाते हैं और कर्मचारियों की मिलीभगत से जाली NOC तक लगाकर भी रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। जानकारी देते हुए मंत्री जिंपा ने कहा उन्होंने समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों से कह दिया है कि भ्रष्टाचार सहन नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति की शिकायत मिलती है तो तुरंत जांच होगी। व्यक्ति के आरोपी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। जिंपा ने कहा कि NOC शुरू करने के मामले में लोकल बाडी से बैठकें चल रही है। जल्द समाधान होगा। जो लोग जाली NOC लगा रहे है उनकी जांच करवाई जाएगी। बता दें वहीं कुछ कलोनाइजरों ने धरना मंत्री जिंपा और आम आदमी पार्ट के खिलाफ लगाया। कलोनाइजरों का कहना था कि NOC खोली जाए। कलोनाइजरों ने कहा जो काटी गई NOC है उस पर रजिस्ट्रियां नहीं हो रही। नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्ट को हार का मुंह देखना पड़ेगा। इस बार प्रापर्टी कारोबारियों का काम इतना ठप्प हो गया है कि अब वह काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर हो चुके है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अमरावती, 17 अप्रैल तिरुपति (सु) लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव में करीब 60-64 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, विपक्षी दलों ने व्यापाक पैमाने पर फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए उपचुनाव रद्द करने की मांग की। निर्वाचन आयोग ने फर्जी मतदान को लेकर दावे सुने लेकिन अपना रुख नहीं रखा। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के विजयानंद ने इससे पहले एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने चित्तूर और एसपीएस नेल्लोर जिलों के जिलाधिकारियों को फर्जी मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। तिरुपति लोकसभा क्षेत्र चित्तूर और एसपीएस नेल्लोर जिलों में फैला हुआ है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डी जी सवांग ने हालांकि एक बयान में दावा किया कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में जारी रही और हर किसी ने अपने मताधिकार का "निडरतापूर्वक" इस्तेमाल किया। विपक्षी दलों ने पुलिस महानिदेशक की बयान को लेकर आलोचना की और कहा कि इससे मुख्यमंत्री के प्रति उनकी निष्ठा ही प्रतिबिंबित होती है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि मतदान शनिवार सुबह सात बजे शुरू हुआ और पहले दो घंटे में केवल 7. 8 प्रतिशत ही मतदान हुआ। अगले दो घंटे में यह बढ़कर 17. 39 प्रतिशत और शाम पांच बजे तक 54. 99 प्रतिशत हो गया तथा बाद में यह बढ़कर 60 से 64 प्रतिशत तक पहुंच गया। अंतिम मतदान प्रतिशत बाद में आने की उम्मीद है। विपक्षी दलों-तेलुगू देशम, भाजपा, जनसेना और कांग्रेस ने यह आरोप लगाते हुए उपचुनाव तत्काल रद्द करने की मांग की कि सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस ने व्यापक पैमाने पर फर्जी मतदान कराया, विशेष तौर पर मंदिर नगर तिरुपति में। तेदेपा और भाजपा के उम्मीदवारों पानाबाका लक्ष्मी और के रत्न प्रभा ने खुद उन कुछ फर्जी मतदाताओं को पकड़ा और उन्हें पुलिस को सौंप दिया जो तिरुपति के कुछ मतदान केंद्रों में फर्जी मतदाता पहचान पत्र लिए हुए थे। तिरुपति की पूर्व विधायक सुगनम्मा ने तिरुपति शहर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने यह प्रदर्शन तब किया जब एक बस को रोका गया जिसमें कथित तौर पर अन्य मंडलों के कई फर्जी मतदाता थे और उनसे कई फर्जी पहचान पत्र जब्त किए गए। कांग्रेस उम्मीदवार चिन्ता मोहन ने भी आरोप लगाया कि वाईएसआरसी अन्य स्थानों से हजारों लोगों को तिरुपति में फर्जी वोट डालने के लिए लेकर आई। राज्य के पंचायती राज मंत्री पी आर सी रेड्डी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि वाईएसआरसी को ऐसी युक्ति अपनाने की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी की इस उपचुनाव में जीत निश्चित है। उन्होंने दावा किया कि बसों में जिन्हें रोका गया, वे वास्तव में "तीर्थयात्री और पर्यटक" थे जो वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन करने आए थे। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि इन लोगों ने बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र क्यों लिए हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भी लिखा और "तिरुपति में बाहरी लोगों की आमद" और फर्जी मतदान को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने उन्हें एक और पत्र लिखा जिसमें मांग की गई कि वाईएसआर कांग्रेस द्वारा किए गए "उल्लंघनों" के मद्देनजर तिरुपति में नए सिरे से मतदान कराने का आदेश दिया जाए। वाईएसआरसी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद एन सुरेश के नेतृत्व में यहां सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में तेदेपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तेदेपा महासचिव वरला रमैया ने बाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक अर्जी देकर वाईएसआरसी द्वारा किए गए "उल्लंघनों" को सूचीबद्ध किया और अपने दावों के समर्थन में वीडियो फुटेज प्रस्तुत की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
अमरावती, सत्रह अप्रैल तिरुपति लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव में करीब साठ-चौंसठ प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, विपक्षी दलों ने व्यापाक पैमाने पर फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए उपचुनाव रद्द करने की मांग की। निर्वाचन आयोग ने फर्जी मतदान को लेकर दावे सुने लेकिन अपना रुख नहीं रखा। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के विजयानंद ने इससे पहले एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने चित्तूर और एसपीएस नेल्लोर जिलों के जिलाधिकारियों को फर्जी मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। तिरुपति लोकसभा क्षेत्र चित्तूर और एसपीएस नेल्लोर जिलों में फैला हुआ है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डी जी सवांग ने हालांकि एक बयान में दावा किया कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में जारी रही और हर किसी ने अपने मताधिकार का "निडरतापूर्वक" इस्तेमाल किया। विपक्षी दलों ने पुलिस महानिदेशक की बयान को लेकर आलोचना की और कहा कि इससे मुख्यमंत्री के प्रति उनकी निष्ठा ही प्रतिबिंबित होती है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि मतदान शनिवार सुबह सात बजे शुरू हुआ और पहले दो घंटे में केवल सात. आठ प्रतिशत ही मतदान हुआ। अगले दो घंटे में यह बढ़कर सत्रह. उनतालीस प्रतिशत और शाम पांच बजे तक चौवन. निन्यानवे प्रतिशत हो गया तथा बाद में यह बढ़कर साठ से चौंसठ प्रतिशत तक पहुंच गया। अंतिम मतदान प्रतिशत बाद में आने की उम्मीद है। विपक्षी दलों-तेलुगू देशम, भाजपा, जनसेना और कांग्रेस ने यह आरोप लगाते हुए उपचुनाव तत्काल रद्द करने की मांग की कि सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस ने व्यापक पैमाने पर फर्जी मतदान कराया, विशेष तौर पर मंदिर नगर तिरुपति में। तेदेपा और भाजपा के उम्मीदवारों पानाबाका लक्ष्मी और के रत्न प्रभा ने खुद उन कुछ फर्जी मतदाताओं को पकड़ा और उन्हें पुलिस को सौंप दिया जो तिरुपति के कुछ मतदान केंद्रों में फर्जी मतदाता पहचान पत्र लिए हुए थे। तिरुपति की पूर्व विधायक सुगनम्मा ने तिरुपति शहर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने यह प्रदर्शन तब किया जब एक बस को रोका गया जिसमें कथित तौर पर अन्य मंडलों के कई फर्जी मतदाता थे और उनसे कई फर्जी पहचान पत्र जब्त किए गए। कांग्रेस उम्मीदवार चिन्ता मोहन ने भी आरोप लगाया कि वाईएसआरसी अन्य स्थानों से हजारों लोगों को तिरुपति में फर्जी वोट डालने के लिए लेकर आई। राज्य के पंचायती राज मंत्री पी आर सी रेड्डी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि वाईएसआरसी को ऐसी युक्ति अपनाने की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी की इस उपचुनाव में जीत निश्चित है। उन्होंने दावा किया कि बसों में जिन्हें रोका गया, वे वास्तव में "तीर्थयात्री और पर्यटक" थे जो वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन करने आए थे। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि इन लोगों ने बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र क्यों लिए हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भी लिखा और "तिरुपति में बाहरी लोगों की आमद" और फर्जी मतदान को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने उन्हें एक और पत्र लिखा जिसमें मांग की गई कि वाईएसआर कांग्रेस द्वारा किए गए "उल्लंघनों" के मद्देनजर तिरुपति में नए सिरे से मतदान कराने का आदेश दिया जाए। वाईएसआरसी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद एन सुरेश के नेतृत्व में यहां सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में तेदेपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तेदेपा महासचिव वरला रमैया ने बाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक अर्जी देकर वाईएसआरसी द्वारा किए गए "उल्लंघनों" को सूचीबद्ध किया और अपने दावों के समर्थन में वीडियो फुटेज प्रस्तुत की। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
अपनी कंपनी के लिए सही कार्ड की पहचान कैसे करेंएक छोटा सा व्यवसाय चलाते समय , प्रत्येक व्यवसाय के मालिक के पास क्रेडिट कार्ड होना आवश्यक होता है जिसे व्यवसाय यात्रा लागत, कर्मचारियों के खर्चों के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक उपयोगिताओं का भुगतान करने के लिए भी उपयोग कर सकता है। एक छोटे से व्यवसाय का उपयोग करने वाले क्रेडिट कार्ड के प्रकार पर निर्णय लेने से पहले, व्यापार मालिक के लिए कुछ कारकों पर विचार करना और विचार करना महत्वपूर्ण है। इनमें कार्ड की वार्षिक शुल्क शामिल है; ब्याज दरें कार्ड शुल्क और बोनस प्रत्येक कार्ड जारीकर्ता प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका व्यवसाय यात्रा लागत पर बहुत अधिक नकद खर्च करता है, तो अपने आप को एक व्यापार कार्ड प्राप्त करना एक अच्छा विचार होगा जो यात्रा बोनस देता है। यदि आप वास्तव में कार्यालय उपकरण खरीदने पर अधिक पैसा खर्च करते हैं, तो सबसे अच्छा कार्ड जारीकर्ता वह होगा जो आपको क्रेडिट कार्ड पर नकद वापस बोनस देता है। इसका मतलब यह है कि किसी दिए गए क्रेडिट कार्ड के लिए किसी भी व्यवसाय स्वामी को पंजीकृत होने से पहले, यात्रा लागत, आपूर्ति के साथ-साथ इनाम अंक के मामले में व्यवसाय कितना खर्च करता है, इस पर पूरी तरह से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। ऐसे कार्ड हैं जो विशेष रूप से क्रेडिट समझदार छोटे व्यवसाय मालिकों को व्यावसायिक खर्चों के भुगतान की बात करते समय लिफ्ट देने के लिए हैं क्योंकि उनमें से अधिकतर वार्षिक शुल्क, कम ब्याज दरें नहीं हैं और विभिन्न प्रकार के पुरस्कार हैं जो छोटे व्यवसाय मालिक आनंद ले सकते हैं । छोटे व्यवसायों के लिए शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ व्यापार क्रेडिट कार्ड पर एक त्वरित नज़र डालें। यह छोटे व्यापार मालिकों के लिए एक आदर्श कार्ड है। यह अमेरिकन एक्सप्रेस द्वारा पेश किया जाता है और इसमें कोई वार्षिक शुल्क नहीं लगाया जाता है। सबसे पहले, यह क्रेडिट कार्ड आपको विभिन्न प्रकार के बोनस देता है जो छोटे व्यवसाय मालिकों की सभी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। यदि पहले तीन महीनों में एक उद्यमी $ 5,000 खर्च करता है, तो आपको स्वचालित रूप से $ 200 स्टेटमेंट क्रेडिट बोनस मिलता है। यदि आप आगे बढ़ते हैं और अगले छह महीनों में $ 10,000 खर्च करते हैं, तो आप फिर से $ 200 के लिए कथन क्रेडिट के रूप में अर्हता प्राप्त करते हैं जो $ 400 तक जोड़ता है। इसके शीर्ष पर, कार्डधारक को प्रति वर्ष अधिकतम $ 50,000 तक खरीद पर 5 प्रतिशत वापस मिल जाता है, हालांकि यह केवल यूएस में लागू होता है। यह कार्ड छोटे व्यवसाय कार्डधारक को 3 प्रतिशत की एक निश्चित श्रेणी चुनने का विशेषाधिकार भी देता है जिसकी प्रति वर्ष $ 50,000 की सीमा है। इस श्रेणी में यात्रा, किराये, विज्ञापन, शिपिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर, रेस्तरां और गैस स्टेशन शामिल हैं। $ 50,000 की सीमा तक पहुंचने के बाद, 5 प्रतिशत और 3 प्रतिशत दोनों में कार्डधारक व्यवसाय की सभी खरीदों में 1 प्रतिशत असीमित नकदी का आनंद लेते हैं। बोनस के अलावा, सिम्प्लीकैश में कोई भी वार्षिक शुल्क भुगतान नहीं है, पहले 9 महीनों के लिए सभी खरीद पर 0 प्रतिशत एपीआर दर और खरीद सुरक्षा योजना जो खरीद के 90 दिनों के भीतर चोरी किए गए सामानों के लिए आपको प्रतिपूर्ति करती है। छोटे व्यवसाय मालिकों को चेस इंक क्रेडिट कार्ड रखने का एक तरीका मिलना चाहिए ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने कारोबार को आसानी से चला सकें । सबसे पहले, साइन अप करने और $ 3,000 अमरीकी डालर खर्च करने के बाद, आपको $ 300 नकद वापस बोनस मिलता है। उसी नोट पर, यदि आप जिस दिन पंजीकरण करते हैं और अपने कार्ड का उपयोग करते हैं, तो आप सालाना 25,000 डॉलर तक की सभी कार्यालय आपूर्ति और संचार खरीद के लिए 5 प्रतिशत नकद वापस बोनस के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं। वैकल्पिक रूप से, आपको एक वर्ष में $ 25,000 की सीमा तक कार्ड का उपयोग करके 2 प्रतिशत गैस स्टेशन के साथ-साथ रेस्तरां खरीद भी मिलती है। जब आप एक वर्ष में $ 25,000 की सीमा तक पहुंचते हैं, तो किसी भी खरीद में 1 प्रतिशत नकदी वापस भी होती है जिसे व्यवसाय स्वामी खरीद श्रेणी के बावजूद बनाता है। कार्ड धारक एक वर्ष में भुगतान करने वाली कोई वार्षिक शुल्क नहीं है। हालांकि, धन हस्तांतरण की कुल राशि का 5 प्रतिशत खर्च होता है जबकि विदेशी लेनदेन की कुल लेनदेन का 3 प्रतिशत खर्च होता है। व्यापार मालिक $ 20 से शुरू होने वाले सभी कथन क्रेडिट के लिए संचित नकद वापस भी रिडीम कर सकता है। आप अपनी नकद वापस हवाई यात्रा व्यय में भी बदल सकते हैं और यह व्यवसाय मालिकों के लिए एक जैकपॉट है जो यात्रा पर अपने अधिकांश पैसे और समय व्यतीत करते हैं। अंत में, यह एक प्रारंभिक 0 प्रतिशत एपीआर के साथ आता है जो पहले 12 महीनों के लिए बाजार में मौजूदा दरों के आधार पर एपीआर बदलता है। क्या आप एक छोटे से व्यवसाय स्वामी हैं जो लगातार यात्री बनते हैं? यह सबसे अच्छे व्यापार क्रेडिट कार्डों में से एक है जो आपको निकट भविष्य में देखना चाहिए। जब भी आप यात्रा पर $ 1 खर्च करते हैं, तो आप 2 बोनस अंक अर्जित करते हैं और कहीं भी $ 1 खर्च किए जाते हैं, फिर भी आप 1 अंक अर्जित करते हैं। जब वार्षिक बोनस की बात आती है, तो आप 30 प्रतिशत वार्षिक सालगिरह बोनस के हकदार होते हैं। साइन अप करने और पहले तीन महीनों में $ 3,000 खर्च करने के बाद, आपको $ 10,000 सदस्यता इनाम अंक के साथ पुरस्कृत किया जाएगा। कोई वार्षिक शुल्क नहीं है जिसे सदस्य को भुगतान करना आवश्यक है। इसके अलावा, जब भी आप अमेरिका में खरीद में 2,000 डॉलर खर्च करते हैं, तो आपको 10 एक्स अंक मिलते हैं। जब अतिरिक्त लाभों की बात आती है, तो यह कार्ड आपको अन्य एयरलाइंस के साथ-साथ जेटब्लू और हिल्टन होटल जैसे होटल प्रोग्रामों को कई अन्य लोगों के बीच स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है। यह कार्ड छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए सबसे उपयुक्त है जो यात्रा के साथ-साथ होटल श्रृंखलाओं में अपने अधिकांश खर्च खर्च करते हैं। यह व्यवसायों के लिए एक आदर्श कार्ड है जो क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके अपने अधिकांश वित्त या खर्च खर्च करते हैं। बहुत विशिष्ट होने के लिए, यह उन व्यवसायों के लिए है जो क्रेडिट कार्ड पर $ 10,000 से अधिक खर्च करते हैं। यह कार्ड सभी खरीदारियों पर असीमित 2 प्रतिशत कैश बैक बोनस के साथ आता है। यदि कार्ड धारक पहले तीन महीनों में $ 4,500 से अधिक खर्च करता है, तो धारक, इस मामले में, आप छोटे व्यवसाय के मालिक को $ 500 नकद बोनस मिलता है। एक और कारण यह है कि आपको इस कार्ड की तलाश क्यों करनी चाहिए यह तथ्य है कि इसमें कोई विदेशी लेनदेन शुल्क नहीं है। यह सबसे अच्छे साधारण क्रेडिट कार्डों में से एक है जो छोटे व्यवसाय मालिकों के पास होना चाहिए। अमेरिकन एक्सप्रेस से बिजनेस प्लैटिनम कार्ड (ओपन) यद्यपि इस व्यवसाय क्रेडिट कार्ड को कार्डधारक को सालाना 450 डॉलर का भुगतान करने की आवश्यकता होती है, फिर भी आश्चर्यजनक पुरस्कार होते हैं जब तक कि वार्षिक शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता है। आरंभ करने के लिए, पहले तीन महीनों के भीतर, यदि आप कार्यालय खरीद करते समय लगभग $ 10,000 खर्च करते हैं, तो आपको 50,000 सदस्यता इनाम अंक मिलते हैं। इसी अवधि के भीतर अतिरिक्त $ 10,000 खर्च करने के बाद आपको अतिरिक्त 25,000 अंक भी मिलते हैं। किसी भी समय $ 5,000 से कम की गई सभी खरीदारियों के लिए, आपको खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के लिए एक बिंदु मिलता है। जब भी आप अपनी चुनी हुई एयरलाइन के माध्यम से यात्रा करते हैं तो 50 प्रतिशत यात्रा बोनस भी होता है। आप अपने व्यवसाय चलाने के दौरान आपके द्वारा पारित एयरलाइन यात्रा व्यय के सभी या हिस्से को पूरा करने के लिए सदस्यता बिंदुओं का उपयोग करने में सक्षम होंगे। यह पसंदीदा क्रेडिट कार्डों में से एक है जो अधिकतर व्यक्तियों को फिट करते हैं जो व्यय की लंबी लाइन के बिना छोटे व्यवसाय चलाते हैं। यह छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए एक आदर्श कार्ड है जो ज्यादातर समय-समय पर या नियमित आधार पर यात्रा करते हैं। सबसे पहले, यदि आप स्टारवुड पुरस्कार गुणों में भाग लेकर एक डॉलर खर्च करते हैं, तो आप अपने आप को 2-सितारा अंक अर्जित कर सकते हैं। कार्ड के माध्यम से की गई सभी अन्य खरीदारियां कार्ड धारक को खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के लिए 1 बिंदु देती हैं। उन खरीदारियों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है जिन पर आपको पैसे खर्च करना है। जब अंक जमा होते हैं, तो आप उन्हें स्टारवुड होटल में एक रात के लिए रिडीम कर सकते हैं। यदि नहीं, तो आप अभी भी अपने संचित अंक कार्ड द्वारा पेश किए गए यात्रा कार्यक्रमों में स्थानांतरित कर सकते हैं। यदि आप एक ही स्थानांतरण लेनदेन में 20,000 से अधिक अंक स्थानांतरित करते हैं, तो आप स्वयं को 5,000-सितारा बिंदु बोनस प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर, यदि आप पहले तीन महीनों में $ 5,000 से अधिक खर्च करते हैं, तो आप 25,000-स्टार अंक अर्जित करते हैं। इसके अलावा, कोई प्रारंभिक एपीआर नहीं है और पहले वर्ष के बाद $ 95 का वार्षिक शुल्क माफ कर दिया गया है। इन सभी लाभों से पता चलता है कि यह क्रेडिट कार्ड छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए आदर्श है जो अक्सर यात्रा करना पसंद करते हैं और साथ ही साथ जो आस-पास के शहरों में जाना पसंद करते हैं और व्यवसाय यात्रा पर आवास की आवश्यकता होती है। जब आप इस छोटे से व्यवसाय क्रेडिट कार्ड के लिए साइन अप करते हैं और पहले तीन महीनों में कम से कम $ 3,000 खर्च करते हैं, तो आपको खुद को $ 200 बोनस नकद कमाई जाती है। जब वार्षिक शुल्क की बात आती है, तो यह क्रेडिट कार्ड बिल्कुल मुफ़्त है। इसके शीर्ष पर, इसका कोई विदेशी लेनदेन शुल्क या यहां तक कि शेष राशि हस्तांतरण शुल्क भी नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक आकर्षक पर्क बनाता है जो छोटे व्यवसाय चलाते हैं। हालांकि, देर से भुगतान आपको $ 39 खर्च होंगे। पंजीकरण के पहले नौ महीनों के लिए, आप किसी भी खरीद एपीआर के लिए भुगतान नहीं करेंगे। परिचय एपीआर अवधि खत्म हो जाने के बाद, खरीद एपीआर दर 13 प्रतिशत और 21 प्रतिशत के बीच अलग-अलग होगी, हालांकि यह मौजूदा बाजार दरों के साथ-साथ आपकी क्रेडिट योग्यता पर भी निर्भर करेगी। ये सभी विशेषाधिकार और बोनस जो इस व्यवसाय क्रेडिट कार्ड के साथ आता है, यह आपके लिए यह सौदा करता है। यह एक और क्रेडिट कार्ड है जो कि किसी भी प्रकार का छोटा व्यवसाय चलाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यद्यपि इसमें साइनअप बोनस नहीं है, लेकिन यह 200 डॉलर प्रति लेनदेन तक सभी गैस और सेलुलर लेनदेन पर असीमित 3 प्रतिशत नकदी वापस कमाता है। इसके ऊपर जोड़ने के लिए, कार्यालय आपूर्ति खरीद 3 प्रतिशत नकदी वापस कमाते हैं। दूसरी तरफ, आपको अन्य सभी खरीदों पर 1 प्रतिशत नकद वापस भी मिलती है। हर साल, कार्ड धारक को $ 250 तक 25 प्रतिशत कैश बैक बोनस भी मिलता है और यह साल के नकद पुरस्कारों पर निर्भर करता है। साथ ही, बैंक कार्ड का उपयोग करने वाले पहले 9 महीनों के लिए कोई भी खरीद एपीआर नहीं लेता है। अन्य प्रकार के क्रेडिट कार्ड की तरह, एपीआर दर समय के साथ बदलती है और यह अत्यधिक बाजार में मौजूदा एपीआर दर पर निर्भर करती है। एक छोटे से व्यवसाय के रूप में, आपको स्वचालित रूप से एक कार्ड की आवश्यकता होती है जो आपको बोनस और पुरस्कारों की एक बड़ी संख्या देता है। जब आप साइन अप करते हैं और पहले तीन महीनों में कम से कम $ 3,000 खर्च करते हैं, तो आपको अविश्वसनीय 20,000 बोनस मील मिलते हैं। खरीद पर खर्च किए गए हर डॉलर के लिए, आप 1. 5 बोनस मील कमाते हैं। जब मील काफी मात्रा में जमा हो जाते हैं, तो आप उन्हें हवाई यात्रा से जुड़े खर्चों के लिए रिडीम कर सकते हैं। इसके अलावा, कार्ड की कोई वार्षिक शुल्क नहीं है और न ही यह विदेशी हस्तांतरण शुल्क या शेष राशि हस्तांतरण शुल्क के साथ आता है। हालांकि, किसी भी देर से भुगतान $ 39 का जुर्माना आकर्षित करता है। दूसरी ओर, पहले नौ महीनों के लिए कोई खरीद एपीआर दर नहीं है। अनुग्रह अवधि खत्म हो जाने के बाद, एपीआर दर 13 प्रतिशत और 21 प्रतिशत के बीच निर्धारित की जाएगी, हालांकि यह ज्यादातर उस बाजार पर निर्भर करती है जो वर्तमान में बाजार में प्रचलित है। एक छोटा व्यवसाय चलाते समय , यह स्पष्ट है कि आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आपके खर्च बहुत कम हैं। यह आपके व्यवसाय को बढ़ाने का मौका देगा क्योंकि अधिकांश नकदी प्रवाह व्यापार में रहेगा। यह सुनिश्चित करने के तरीकों में से एक यह है कि आप एक व्यापार क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं जो आपको विभिन्न प्रकार के पुरस्कार और बोनस देता है। एक अच्छा व्यापार क्रेडिट कार्ड आपको नकद वापस बोनस, यात्रा बोनस के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने के तरीके पर आजादी देने में सक्षम होना चाहिए। यहां सूचीबद्ध कार्ड छोटे व्यापार मालिकों की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार में छोटे व्यापार मालिकों के लिए सबसे अच्छे व्यापार क्रेडिट कार्ड में से हैं। इसलिए, यदि आपके ऊपर उपरोक्त कार्डों में से कोई एक नहीं है, तो अनुसंधान के लिए समय लें और जितनी जल्दी हो सके एक के लिए आवेदन करें।
अपनी कंपनी के लिए सही कार्ड की पहचान कैसे करेंएक छोटा सा व्यवसाय चलाते समय , प्रत्येक व्यवसाय के मालिक के पास क्रेडिट कार्ड होना आवश्यक होता है जिसे व्यवसाय यात्रा लागत, कर्मचारियों के खर्चों के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक उपयोगिताओं का भुगतान करने के लिए भी उपयोग कर सकता है। एक छोटे से व्यवसाय का उपयोग करने वाले क्रेडिट कार्ड के प्रकार पर निर्णय लेने से पहले, व्यापार मालिक के लिए कुछ कारकों पर विचार करना और विचार करना महत्वपूर्ण है। इनमें कार्ड की वार्षिक शुल्क शामिल है; ब्याज दरें कार्ड शुल्क और बोनस प्रत्येक कार्ड जारीकर्ता प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका व्यवसाय यात्रा लागत पर बहुत अधिक नकद खर्च करता है, तो अपने आप को एक व्यापार कार्ड प्राप्त करना एक अच्छा विचार होगा जो यात्रा बोनस देता है। यदि आप वास्तव में कार्यालय उपकरण खरीदने पर अधिक पैसा खर्च करते हैं, तो सबसे अच्छा कार्ड जारीकर्ता वह होगा जो आपको क्रेडिट कार्ड पर नकद वापस बोनस देता है। इसका मतलब यह है कि किसी दिए गए क्रेडिट कार्ड के लिए किसी भी व्यवसाय स्वामी को पंजीकृत होने से पहले, यात्रा लागत, आपूर्ति के साथ-साथ इनाम अंक के मामले में व्यवसाय कितना खर्च करता है, इस पर पूरी तरह से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। ऐसे कार्ड हैं जो विशेष रूप से क्रेडिट समझदार छोटे व्यवसाय मालिकों को व्यावसायिक खर्चों के भुगतान की बात करते समय लिफ्ट देने के लिए हैं क्योंकि उनमें से अधिकतर वार्षिक शुल्क, कम ब्याज दरें नहीं हैं और विभिन्न प्रकार के पुरस्कार हैं जो छोटे व्यवसाय मालिक आनंद ले सकते हैं । छोटे व्यवसायों के लिए शीर्ष दस सर्वश्रेष्ठ व्यापार क्रेडिट कार्ड पर एक त्वरित नज़र डालें। यह छोटे व्यापार मालिकों के लिए एक आदर्श कार्ड है। यह अमेरिकन एक्सप्रेस द्वारा पेश किया जाता है और इसमें कोई वार्षिक शुल्क नहीं लगाया जाता है। सबसे पहले, यह क्रेडिट कार्ड आपको विभिन्न प्रकार के बोनस देता है जो छोटे व्यवसाय मालिकों की सभी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। यदि पहले तीन महीनों में एक उद्यमी पाँच डॉलर,शून्य खर्च करता है, तो आपको स्वचालित रूप से दो सौ डॉलर स्टेटमेंट क्रेडिट बोनस मिलता है। यदि आप आगे बढ़ते हैं और अगले छह महीनों में दस डॉलर,शून्य खर्च करते हैं, तो आप फिर से दो सौ डॉलर के लिए कथन क्रेडिट के रूप में अर्हता प्राप्त करते हैं जो चार सौ डॉलर तक जोड़ता है। इसके शीर्ष पर, कार्डधारक को प्रति वर्ष अधिकतम पचास डॉलर,शून्य तक खरीद पर पाँच प्रतिशत वापस मिल जाता है, हालांकि यह केवल यूएस में लागू होता है। यह कार्ड छोटे व्यवसाय कार्डधारक को तीन प्रतिशत की एक निश्चित श्रेणी चुनने का विशेषाधिकार भी देता है जिसकी प्रति वर्ष पचास डॉलर,शून्य की सीमा है। इस श्रेणी में यात्रा, किराये, विज्ञापन, शिपिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर, रेस्तरां और गैस स्टेशन शामिल हैं। पचास डॉलर,शून्य की सीमा तक पहुंचने के बाद, पाँच प्रतिशत और तीन प्रतिशत दोनों में कार्डधारक व्यवसाय की सभी खरीदों में एक प्रतिशत असीमित नकदी का आनंद लेते हैं। बोनस के अलावा, सिम्प्लीकैश में कोई भी वार्षिक शुल्क भुगतान नहीं है, पहले नौ महीनों के लिए सभी खरीद पर शून्य प्रतिशत एपीआर दर और खरीद सुरक्षा योजना जो खरीद के नब्बे दिनों के भीतर चोरी किए गए सामानों के लिए आपको प्रतिपूर्ति करती है। छोटे व्यवसाय मालिकों को चेस इंक क्रेडिट कार्ड रखने का एक तरीका मिलना चाहिए ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने कारोबार को आसानी से चला सकें । सबसे पहले, साइन अप करने और तीन डॉलर,शून्य अमरीकी डालर खर्च करने के बाद, आपको तीन सौ डॉलर नकद वापस बोनस मिलता है। उसी नोट पर, यदि आप जिस दिन पंजीकरण करते हैं और अपने कार्ड का उपयोग करते हैं, तो आप सालाना पच्चीस,शून्य डॉलर तक की सभी कार्यालय आपूर्ति और संचार खरीद के लिए पाँच प्रतिशत नकद वापस बोनस के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं। वैकल्पिक रूप से, आपको एक वर्ष में पच्चीस डॉलर,शून्य की सीमा तक कार्ड का उपयोग करके दो प्रतिशत गैस स्टेशन के साथ-साथ रेस्तरां खरीद भी मिलती है। जब आप एक वर्ष में पच्चीस डॉलर,शून्य की सीमा तक पहुंचते हैं, तो किसी भी खरीद में एक प्रतिशत नकदी वापस भी होती है जिसे व्यवसाय स्वामी खरीद श्रेणी के बावजूद बनाता है। कार्ड धारक एक वर्ष में भुगतान करने वाली कोई वार्षिक शुल्क नहीं है। हालांकि, धन हस्तांतरण की कुल राशि का पाँच प्रतिशत खर्च होता है जबकि विदेशी लेनदेन की कुल लेनदेन का तीन प्रतिशत खर्च होता है। व्यापार मालिक बीस डॉलर से शुरू होने वाले सभी कथन क्रेडिट के लिए संचित नकद वापस भी रिडीम कर सकता है। आप अपनी नकद वापस हवाई यात्रा व्यय में भी बदल सकते हैं और यह व्यवसाय मालिकों के लिए एक जैकपॉट है जो यात्रा पर अपने अधिकांश पैसे और समय व्यतीत करते हैं। अंत में, यह एक प्रारंभिक शून्य प्रतिशत एपीआर के साथ आता है जो पहले बारह महीनों के लिए बाजार में मौजूदा दरों के आधार पर एपीआर बदलता है। क्या आप एक छोटे से व्यवसाय स्वामी हैं जो लगातार यात्री बनते हैं? यह सबसे अच्छे व्यापार क्रेडिट कार्डों में से एक है जो आपको निकट भविष्य में देखना चाहिए। जब भी आप यात्रा पर एक डॉलर खर्च करते हैं, तो आप दो बोनस अंक अर्जित करते हैं और कहीं भी एक डॉलर खर्च किए जाते हैं, फिर भी आप एक अंक अर्जित करते हैं। जब वार्षिक बोनस की बात आती है, तो आप तीस प्रतिशत वार्षिक सालगिरह बोनस के हकदार होते हैं। साइन अप करने और पहले तीन महीनों में तीन डॉलर,शून्य खर्च करने के बाद, आपको दस डॉलर,शून्य सदस्यता इनाम अंक के साथ पुरस्कृत किया जाएगा। कोई वार्षिक शुल्क नहीं है जिसे सदस्य को भुगतान करना आवश्यक है। इसके अलावा, जब भी आप अमेरिका में खरीद में दो,शून्य डॉलर खर्च करते हैं, तो आपको दस एक्स अंक मिलते हैं। जब अतिरिक्त लाभों की बात आती है, तो यह कार्ड आपको अन्य एयरलाइंस के साथ-साथ जेटब्लू और हिल्टन होटल जैसे होटल प्रोग्रामों को कई अन्य लोगों के बीच स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है। यह कार्ड छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए सबसे उपयुक्त है जो यात्रा के साथ-साथ होटल श्रृंखलाओं में अपने अधिकांश खर्च खर्च करते हैं। यह व्यवसायों के लिए एक आदर्श कार्ड है जो क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके अपने अधिकांश वित्त या खर्च खर्च करते हैं। बहुत विशिष्ट होने के लिए, यह उन व्यवसायों के लिए है जो क्रेडिट कार्ड पर दस डॉलर,शून्य से अधिक खर्च करते हैं। यह कार्ड सभी खरीदारियों पर असीमित दो प्रतिशत कैश बैक बोनस के साथ आता है। यदि कार्ड धारक पहले तीन महीनों में चार डॉलर,पाँच सौ से अधिक खर्च करता है, तो धारक, इस मामले में, आप छोटे व्यवसाय के मालिक को पाँच सौ डॉलर नकद बोनस मिलता है। एक और कारण यह है कि आपको इस कार्ड की तलाश क्यों करनी चाहिए यह तथ्य है कि इसमें कोई विदेशी लेनदेन शुल्क नहीं है। यह सबसे अच्छे साधारण क्रेडिट कार्डों में से एक है जो छोटे व्यवसाय मालिकों के पास होना चाहिए। अमेरिकन एक्सप्रेस से बिजनेस प्लैटिनम कार्ड यद्यपि इस व्यवसाय क्रेडिट कार्ड को कार्डधारक को सालाना चार सौ पचास डॉलर का भुगतान करने की आवश्यकता होती है, फिर भी आश्चर्यजनक पुरस्कार होते हैं जब तक कि वार्षिक शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता है। आरंभ करने के लिए, पहले तीन महीनों के भीतर, यदि आप कार्यालय खरीद करते समय लगभग दस डॉलर,शून्य खर्च करते हैं, तो आपको पचास,शून्य सदस्यता इनाम अंक मिलते हैं। इसी अवधि के भीतर अतिरिक्त दस डॉलर,शून्य खर्च करने के बाद आपको अतिरिक्त पच्चीस,शून्य अंक भी मिलते हैं। किसी भी समय पाँच डॉलर,शून्य से कम की गई सभी खरीदारियों के लिए, आपको खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के लिए एक बिंदु मिलता है। जब भी आप अपनी चुनी हुई एयरलाइन के माध्यम से यात्रा करते हैं तो पचास प्रतिशत यात्रा बोनस भी होता है। आप अपने व्यवसाय चलाने के दौरान आपके द्वारा पारित एयरलाइन यात्रा व्यय के सभी या हिस्से को पूरा करने के लिए सदस्यता बिंदुओं का उपयोग करने में सक्षम होंगे। यह पसंदीदा क्रेडिट कार्डों में से एक है जो अधिकतर व्यक्तियों को फिट करते हैं जो व्यय की लंबी लाइन के बिना छोटे व्यवसाय चलाते हैं। यह छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए एक आदर्श कार्ड है जो ज्यादातर समय-समय पर या नियमित आधार पर यात्रा करते हैं। सबसे पहले, यदि आप स्टारवुड पुरस्कार गुणों में भाग लेकर एक डॉलर खर्च करते हैं, तो आप अपने आप को दो-सितारा अंक अर्जित कर सकते हैं। कार्ड के माध्यम से की गई सभी अन्य खरीदारियां कार्ड धारक को खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर के लिए एक बिंदु देती हैं। उन खरीदारियों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है जिन पर आपको पैसे खर्च करना है। जब अंक जमा होते हैं, तो आप उन्हें स्टारवुड होटल में एक रात के लिए रिडीम कर सकते हैं। यदि नहीं, तो आप अभी भी अपने संचित अंक कार्ड द्वारा पेश किए गए यात्रा कार्यक्रमों में स्थानांतरित कर सकते हैं। यदि आप एक ही स्थानांतरण लेनदेन में बीस,शून्य से अधिक अंक स्थानांतरित करते हैं, तो आप स्वयं को पाँच,शून्य-सितारा बिंदु बोनस प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर, यदि आप पहले तीन महीनों में पाँच डॉलर,शून्य से अधिक खर्च करते हैं, तो आप पच्चीस,शून्य-स्टार अंक अर्जित करते हैं। इसके अलावा, कोई प्रारंभिक एपीआर नहीं है और पहले वर्ष के बाद पचानवे डॉलर का वार्षिक शुल्क माफ कर दिया गया है। इन सभी लाभों से पता चलता है कि यह क्रेडिट कार्ड छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए आदर्श है जो अक्सर यात्रा करना पसंद करते हैं और साथ ही साथ जो आस-पास के शहरों में जाना पसंद करते हैं और व्यवसाय यात्रा पर आवास की आवश्यकता होती है। जब आप इस छोटे से व्यवसाय क्रेडिट कार्ड के लिए साइन अप करते हैं और पहले तीन महीनों में कम से कम तीन डॉलर,शून्य खर्च करते हैं, तो आपको खुद को दो सौ डॉलर बोनस नकद कमाई जाती है। जब वार्षिक शुल्क की बात आती है, तो यह क्रेडिट कार्ड बिल्कुल मुफ़्त है। इसके शीर्ष पर, इसका कोई विदेशी लेनदेन शुल्क या यहां तक कि शेष राशि हस्तांतरण शुल्क भी नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक आकर्षक पर्क बनाता है जो छोटे व्यवसाय चलाते हैं। हालांकि, देर से भुगतान आपको उनतालीस डॉलर खर्च होंगे। पंजीकरण के पहले नौ महीनों के लिए, आप किसी भी खरीद एपीआर के लिए भुगतान नहीं करेंगे। परिचय एपीआर अवधि खत्म हो जाने के बाद, खरीद एपीआर दर तेरह प्रतिशत और इक्कीस प्रतिशत के बीच अलग-अलग होगी, हालांकि यह मौजूदा बाजार दरों के साथ-साथ आपकी क्रेडिट योग्यता पर भी निर्भर करेगी। ये सभी विशेषाधिकार और बोनस जो इस व्यवसाय क्रेडिट कार्ड के साथ आता है, यह आपके लिए यह सौदा करता है। यह एक और क्रेडिट कार्ड है जो कि किसी भी प्रकार का छोटा व्यवसाय चलाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यद्यपि इसमें साइनअप बोनस नहीं है, लेकिन यह दो सौ डॉलर प्रति लेनदेन तक सभी गैस और सेलुलर लेनदेन पर असीमित तीन प्रतिशत नकदी वापस कमाता है। इसके ऊपर जोड़ने के लिए, कार्यालय आपूर्ति खरीद तीन प्रतिशत नकदी वापस कमाते हैं। दूसरी तरफ, आपको अन्य सभी खरीदों पर एक प्रतिशत नकद वापस भी मिलती है। हर साल, कार्ड धारक को दो सौ पचास डॉलर तक पच्चीस प्रतिशत कैश बैक बोनस भी मिलता है और यह साल के नकद पुरस्कारों पर निर्भर करता है। साथ ही, बैंक कार्ड का उपयोग करने वाले पहले नौ महीनों के लिए कोई भी खरीद एपीआर नहीं लेता है। अन्य प्रकार के क्रेडिट कार्ड की तरह, एपीआर दर समय के साथ बदलती है और यह अत्यधिक बाजार में मौजूदा एपीआर दर पर निर्भर करती है। एक छोटे से व्यवसाय के रूप में, आपको स्वचालित रूप से एक कार्ड की आवश्यकता होती है जो आपको बोनस और पुरस्कारों की एक बड़ी संख्या देता है। जब आप साइन अप करते हैं और पहले तीन महीनों में कम से कम तीन डॉलर,शून्य खर्च करते हैं, तो आपको अविश्वसनीय बीस,शून्य बोनस मील मिलते हैं। खरीद पर खर्च किए गए हर डॉलर के लिए, आप एक. पाँच बोनस मील कमाते हैं। जब मील काफी मात्रा में जमा हो जाते हैं, तो आप उन्हें हवाई यात्रा से जुड़े खर्चों के लिए रिडीम कर सकते हैं। इसके अलावा, कार्ड की कोई वार्षिक शुल्क नहीं है और न ही यह विदेशी हस्तांतरण शुल्क या शेष राशि हस्तांतरण शुल्क के साथ आता है। हालांकि, किसी भी देर से भुगतान उनतालीस डॉलर का जुर्माना आकर्षित करता है। दूसरी ओर, पहले नौ महीनों के लिए कोई खरीद एपीआर दर नहीं है। अनुग्रह अवधि खत्म हो जाने के बाद, एपीआर दर तेरह प्रतिशत और इक्कीस प्रतिशत के बीच निर्धारित की जाएगी, हालांकि यह ज्यादातर उस बाजार पर निर्भर करती है जो वर्तमान में बाजार में प्रचलित है। एक छोटा व्यवसाय चलाते समय , यह स्पष्ट है कि आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आपके खर्च बहुत कम हैं। यह आपके व्यवसाय को बढ़ाने का मौका देगा क्योंकि अधिकांश नकदी प्रवाह व्यापार में रहेगा। यह सुनिश्चित करने के तरीकों में से एक यह है कि आप एक व्यापार क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं जो आपको विभिन्न प्रकार के पुरस्कार और बोनस देता है। एक अच्छा व्यापार क्रेडिट कार्ड आपको नकद वापस बोनस, यात्रा बोनस के साथ-साथ क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने के तरीके पर आजादी देने में सक्षम होना चाहिए। यहां सूचीबद्ध कार्ड छोटे व्यापार मालिकों की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार में छोटे व्यापार मालिकों के लिए सबसे अच्छे व्यापार क्रेडिट कार्ड में से हैं। इसलिए, यदि आपके ऊपर उपरोक्त कार्डों में से कोई एक नहीं है, तो अनुसंधान के लिए समय लें और जितनी जल्दी हो सके एक के लिए आवेदन करें।
Patiala Crime राजपुरा में एक पोर्टल संचालक ने आत्महत्या कर ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद किया है। साथ ही मरने से पहले पोर्टल संचालक ने एक वीडियो भी बनाई जिसमें वह रोकर अपना दुखा बयां कर रहा है। जागरण संवाददाता, राजपुरा। Patiala Crime: राजपुरा में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक पोर्टल संचालक ने जहरीला पदार्थ निगल कर आत्महत्या कर ली। उसका शव रायपुरा के शिवाजी पार्क में एक बेंच पर पड़ा मिला। वहीं मरने से पहले मृतक ने एक वीडियो भी बनाई थी, जिसमें उसने पूर्व कांग्रेसी विधायक हरदयाल कंबोज और उनके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएचओ सिटी राजपुरा राकेश शर्मा ने बताया कि आत्महत्या करने से पहले रमेश शर्मा ने एक सुसाइड नोट छोड़ा और वीडियो भी बनाई है। वीडियो और सुसाइड नोट में रमेश शर्मा ने पूर्व कांग्रेसी विधायक हरदयाल कंबोज, उनके पुत्र मिलटी कंबोज, अवतार सिंह, संजीव गर्ग और कपूर फैमिली को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। रमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक कंबोज के सहयोग से उसकी दुकान पर कब्जा किया गया। उसके खिलाफ कई गलत केस दर्ज करवा कर उसे आत्महत्या के लिए विवश किया जा रहा है। वहीं मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज और उनके पुत्र मिलटी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। धारा 306 आइपीसी के तहत यह मामला दर्ज हुआ है। फिलहाल अभी तक इस मामले में किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज ने सभी आरोपों को नकराते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। बता दें कि, हरदयाल कंबोज कांग्रेस की तरफ से राजपुरा से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनके पुत्र भी पंजाब यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी रहे हैं।
Patiala Crime राजपुरा में एक पोर्टल संचालक ने आत्महत्या कर ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद किया है। साथ ही मरने से पहले पोर्टल संचालक ने एक वीडियो भी बनाई जिसमें वह रोकर अपना दुखा बयां कर रहा है। जागरण संवाददाता, राजपुरा। Patiala Crime: राजपुरा में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक पोर्टल संचालक ने जहरीला पदार्थ निगल कर आत्महत्या कर ली। उसका शव रायपुरा के शिवाजी पार्क में एक बेंच पर पड़ा मिला। वहीं मरने से पहले मृतक ने एक वीडियो भी बनाई थी, जिसमें उसने पूर्व कांग्रेसी विधायक हरदयाल कंबोज और उनके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएचओ सिटी राजपुरा राकेश शर्मा ने बताया कि आत्महत्या करने से पहले रमेश शर्मा ने एक सुसाइड नोट छोड़ा और वीडियो भी बनाई है। वीडियो और सुसाइड नोट में रमेश शर्मा ने पूर्व कांग्रेसी विधायक हरदयाल कंबोज, उनके पुत्र मिलटी कंबोज, अवतार सिंह, संजीव गर्ग और कपूर फैमिली को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। रमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक कंबोज के सहयोग से उसकी दुकान पर कब्जा किया गया। उसके खिलाफ कई गलत केस दर्ज करवा कर उसे आत्महत्या के लिए विवश किया जा रहा है। वहीं मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज और उनके पुत्र मिलटी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। धारा तीन सौ छः आइपीसी के तहत यह मामला दर्ज हुआ है। फिलहाल अभी तक इस मामले में किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज ने सभी आरोपों को नकराते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। बता दें कि, हरदयाल कंबोज कांग्रेस की तरफ से राजपुरा से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनके पुत्र भी पंजाब यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी रहे हैं।
उत्तरी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के नियंत्रण वाले ठिकानों पर हवाई हमले किए गए हैं. सेना और एलटीटीई के बीच संघर्षविराम की निगरानी कर रहे अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के मुताबिक हमले में पाँच लोग मारे गए हैं. अंतरराष्ट्रीय निगरानी समिति को किलिनोच्ची में एक अस्पताल के निकट पाँच लोगों के शव मिले. निरीक्षकों का कहना है कि ये आम नागरिक थे जो वायुसेना की बमबारी के शिकार बन गए. ये हमले विद्रोहियों के साथ पिछले हफ़्ते शांति वार्ता टूट जाने के बाद पहली बार किए गए हैं. दोनों पक्ष जाफ़ना को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली सड़क के मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाए. निगरानी समिति के प्रवक्ता हेलन ओलास्डोट्टिर ने बताया कि बम हमले में अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया था लेकिन इसे नुकसान पहुँचा है. उन्होंने कहा कि दो बम गिराए गए थे. एक अस्पताल से कुछ दूर स्थित मकान पर गिरा. मारे गए पाँच लोगों में दो बच्चे शामिल हैं. प्रवक्ता का कहना है, "पहली नज़र में लगता है कि मारे गए सभी लोग आम नागरिक थे लेकिन हम इसकी पुष्टि का इंतज़ार कर रहे हैं. " एलटीटीई ने इसे 'सरकारी आतंकवाद' का नमूना बताते हुए कहा है कि मारे गए लोग एक ही परिवार के सदस्य थे. देश के पूर्वोत्तर हिस्से में दोनों पक्षों के बीच पिछले चार दिनों से गोलीबारी हो रही है. बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
उत्तरी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के नियंत्रण वाले ठिकानों पर हवाई हमले किए गए हैं. सेना और एलटीटीई के बीच संघर्षविराम की निगरानी कर रहे अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के मुताबिक हमले में पाँच लोग मारे गए हैं. अंतरराष्ट्रीय निगरानी समिति को किलिनोच्ची में एक अस्पताल के निकट पाँच लोगों के शव मिले. निरीक्षकों का कहना है कि ये आम नागरिक थे जो वायुसेना की बमबारी के शिकार बन गए. ये हमले विद्रोहियों के साथ पिछले हफ़्ते शांति वार्ता टूट जाने के बाद पहली बार किए गए हैं. दोनों पक्ष जाफ़ना को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली सड़क के मुद्दे पर सहमत नहीं हो पाए. निगरानी समिति के प्रवक्ता हेलन ओलास्डोट्टिर ने बताया कि बम हमले में अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया था लेकिन इसे नुकसान पहुँचा है. उन्होंने कहा कि दो बम गिराए गए थे. एक अस्पताल से कुछ दूर स्थित मकान पर गिरा. मारे गए पाँच लोगों में दो बच्चे शामिल हैं. प्रवक्ता का कहना है, "पहली नज़र में लगता है कि मारे गए सभी लोग आम नागरिक थे लेकिन हम इसकी पुष्टि का इंतज़ार कर रहे हैं. " एलटीटीई ने इसे 'सरकारी आतंकवाद' का नमूना बताते हुए कहा है कि मारे गए लोग एक ही परिवार के सदस्य थे. देश के पूर्वोत्तर हिस्से में दोनों पक्षों के बीच पिछले चार दिनों से गोलीबारी हो रही है. बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने एनबीटी ऑनलाइन से विशेष बातचीत में कहा कि संभवतः ठंड लगने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी है। उन्होंने बताया कि जेएमएम का 4 फरवरी को धनबाद में 51वां स्थापना दिवस समारोह था। देर शाम तक आयोजित सभा में शामिल होकर रांची लौटने के बाद वे कुछ असहज महसूस कर रहे थे। जिसके बाद घर में उनका इलाज कर रहे डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। फिलहाल उनकी तबीयत स्थिर है। चिंता की कोई बात नहीं है। शिबू सोरेन के मेदांता अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी रूटीन जांच की गई। जांच के लिए उनके ब्लड सैंपल लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर आगे की ट्रीटमेंट करेंगे। जेएमएम प्रमुख का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि शिबू सोरेन को पहले से ही किडनी की समस्या है। गुरुवार को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। जिसके बाद एहतियातन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ताकि सभी तरह की जांच हो सके। डॉक्टरों के मुताबिक ऑक्सीजन लगने के बाद शिबू सोरेन की हालत ठीक है। शिबू सोरेन के छाती का सीटी स्कैन भी किया गया है, जिसमें थोड़ा पानी निकला है। यह कोशिश की जा रही है कि पानी ये किसी प्रकार का लंग्स में इंफेक्शन न हो। बताया जा रहा है कि सभी तरह की जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें बाहर भेजने पर भी विचार किया जा सकता है।
जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने एनबीटी ऑनलाइन से विशेष बातचीत में कहा कि संभवतः ठंड लगने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी है। उन्होंने बताया कि जेएमएम का चार फरवरी को धनबाद में इक्यावनवां स्थापना दिवस समारोह था। देर शाम तक आयोजित सभा में शामिल होकर रांची लौटने के बाद वे कुछ असहज महसूस कर रहे थे। जिसके बाद घर में उनका इलाज कर रहे डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। फिलहाल उनकी तबीयत स्थिर है। चिंता की कोई बात नहीं है। शिबू सोरेन के मेदांता अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी रूटीन जांच की गई। जांच के लिए उनके ब्लड सैंपल लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर आगे की ट्रीटमेंट करेंगे। जेएमएम प्रमुख का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि शिबू सोरेन को पहले से ही किडनी की समस्या है। गुरुवार को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। जिसके बाद एहतियातन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ताकि सभी तरह की जांच हो सके। डॉक्टरों के मुताबिक ऑक्सीजन लगने के बाद शिबू सोरेन की हालत ठीक है। शिबू सोरेन के छाती का सीटी स्कैन भी किया गया है, जिसमें थोड़ा पानी निकला है। यह कोशिश की जा रही है कि पानी ये किसी प्रकार का लंग्स में इंफेक्शन न हो। बताया जा रहा है कि सभी तरह की जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें बाहर भेजने पर भी विचार किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'सामाजिक सशक्तिकरण और सेवा भाव से जुड़े डॉ. वालिया के महान कार्य और उनके विचार देशवासियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।'
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'सामाजिक सशक्तिकरण और सेवा भाव से जुड़े डॉ. वालिया के महान कार्य और उनके विचार देशवासियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।'
Jawahar Lal Nehru Death Anniversary: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आज 57वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। Jawahar Lal Nehru Death Anniversary: भारत के पहले प्रधानमंत्री (First Prime Minister of India) पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की आज 57वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। आज ही के दिन सन यानी 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ने से इनकी मृत्यु हुई थी। पंडित जवाहर लाल नेहरू के जीवन के अलग-अलग पहलुओं की चर्चा होती रहती है। यहां तक की कुछ फर्जी वॉट्सऐप मैसेज और डिजिटल अफवाह बताते हैं कि जवाहर लाल नेहरू मुसलमान थे, वे अपने आपको दुर्घटनावश हिंदू बताते थे। तो चलिए आज इन अफवाहों से अलग जरा ईश्वर और धर्म के बारे में जवाहर लाल नेहरू के विचार जानते हैं। साथ ही यह भी जाना जाए कि हिंदू धर्म और खुद की धार्मिकता को लेकर नेहरू के क्या विचार थे। लेकिन सबसे पहले उनके जन्म और शुरुआती जीवन के बारे में जान लेते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित थे। मोती लाल नेहरू सारस्वत कौल ब्राह्मण समुदाय से थे। स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू, जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थीं। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियां थी। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पर रहकर निजी शिक्षकों से प्राप्त की। इसके बाद 15 साल की उम्र में वे इंग्लैंड चले गए। जवाहर लाल नेहरू ने दुनिया के कुछ बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज से पूरी की थी। इसके बाद लॉ की शिक्षा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। नेहरू लिखते हैं, "भले ही कोई अपने को नास्तिक कहता हो, जैसा कि चार्वाक था। फिर भी कोई यह नहीं कह सकता कि वह हिंदू नहीं रहा। हिंदू धर्म अपनी संतानों को उनके न चाहते हुए भी पकड़ रखता है। मैं एक ब्राह्मण पैदा हुआ और मालूम होता है कि ब्राह्मण ही रहूंगा, फिर मैं धर्म और सामाजिक रीति रिवाज के बारे में कुछ भी कहता और करता रहूं। हिंदुस्तानी दुनिया के लिए मैं पंडित हूं चाहे मैं उपाधि को नापसंद ही करूं। " दरअसल धर्म और खासकर हिंदू धर्म को लेकर नेहरू के विचार खासे उदार थे। वे महात्मा गांधी की उसी धार्मिक दृष्टि से प्रेरणा लेते थे जो कहती थी कि इतने विशाल देश को धर्म को किराने रखकर नहीं चलाया जा सकता। उनके लिए धर्म का मतलब एक निजी आध्यात्मिकता थी। हां, वे इसके राजनैतिक इस्तेमाल के खिलाफ जीवन भर डटे रहे। इसके अलावा नेहरू ने बेटी इंदिरा को लिखे खत में बताया है कि पहले के जमाने में लोग भगवान से बहुत डरते थे और इसलिए वह उन्हें भेंट देकर, खासकर खाना पहुंचा कर, हर तरह की रिश्वत देने की कोशिश करते रहते थे। देवताओं को खुश करने के लिए वे मर्दों-औरतों का बलिदान करते, यहां तक कि अपने ही बच्चों को मार कर देवताओं को चढ़ा देते। यही बड़ी भयानक बात मालूम होती है लेकिन डरा हुआ आदमी जो कुछ कर बैठे, थोड़ा है। "मजहब पहले डर के रूप में आया और जो बात डर से की जाए बुरी है। तुम्हें मालूम है कि मजहब हमें बहुत सी अच्छी-अच्छी बातें सिखाता है। जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम दुनिया के मज़हबों का हाल पढ़ोगी और तुम्हें मालूम होगा कि मजहब के नाम पर क्या-क्या अच्छी और बुरी बातें की गई हैं। यहां हमें सिर्फ यह देखना है कि मजहब का खयाल कैसे पैदा हुआ और क्यों बढ़ा, लेकिन चाहे वह जिस तरह बढ़ा हो, हम आज भी लोगों को मजहब के नाम पर एक दूसरे से लड़ते और सिर फोड़ते देखते हैं। बहुत-से आदमियों के लिए मजहब आज भी वैसी ही डरावनी चीज है। वह अपना वक्त फर्जी देवताओं को खुश करने के लिए मंदिरों में पूजा, चढ़ावा और जानवरों की कुर्बानी करने में खर्च करते हैं। "
Jawahar Lal Nehru Death Anniversary: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आज सत्तावनवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। Jawahar Lal Nehru Death Anniversary: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आज सत्तावनवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। आज ही के दिन सन यानी सत्ताईस मई एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में दिल का दौरा पड़ने से इनकी मृत्यु हुई थी। पंडित जवाहर लाल नेहरू के जीवन के अलग-अलग पहलुओं की चर्चा होती रहती है। यहां तक की कुछ फर्जी वॉट्सऐप मैसेज और डिजिटल अफवाह बताते हैं कि जवाहर लाल नेहरू मुसलमान थे, वे अपने आपको दुर्घटनावश हिंदू बताते थे। तो चलिए आज इन अफवाहों से अलग जरा ईश्वर और धर्म के बारे में जवाहर लाल नेहरू के विचार जानते हैं। साथ ही यह भी जाना जाए कि हिंदू धर्म और खुद की धार्मिकता को लेकर नेहरू के क्या विचार थे। लेकिन सबसे पहले उनके जन्म और शुरुआती जीवन के बारे में जान लेते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म चौदह नवंबर एक हज़ार आठ सौ नवासी को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित थे। मोती लाल नेहरू सारस्वत कौल ब्राह्मण समुदाय से थे। स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू, जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थीं। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियां थी। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पर रहकर निजी शिक्षकों से प्राप्त की। इसके बाद पंद्रह साल की उम्र में वे इंग्लैंड चले गए। जवाहर लाल नेहरू ने दुनिया के कुछ बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज से पूरी की थी। इसके बाद लॉ की शिक्षा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। नेहरू लिखते हैं, "भले ही कोई अपने को नास्तिक कहता हो, जैसा कि चार्वाक था। फिर भी कोई यह नहीं कह सकता कि वह हिंदू नहीं रहा। हिंदू धर्म अपनी संतानों को उनके न चाहते हुए भी पकड़ रखता है। मैं एक ब्राह्मण पैदा हुआ और मालूम होता है कि ब्राह्मण ही रहूंगा, फिर मैं धर्म और सामाजिक रीति रिवाज के बारे में कुछ भी कहता और करता रहूं। हिंदुस्तानी दुनिया के लिए मैं पंडित हूं चाहे मैं उपाधि को नापसंद ही करूं। " दरअसल धर्म और खासकर हिंदू धर्म को लेकर नेहरू के विचार खासे उदार थे। वे महात्मा गांधी की उसी धार्मिक दृष्टि से प्रेरणा लेते थे जो कहती थी कि इतने विशाल देश को धर्म को किराने रखकर नहीं चलाया जा सकता। उनके लिए धर्म का मतलब एक निजी आध्यात्मिकता थी। हां, वे इसके राजनैतिक इस्तेमाल के खिलाफ जीवन भर डटे रहे। इसके अलावा नेहरू ने बेटी इंदिरा को लिखे खत में बताया है कि पहले के जमाने में लोग भगवान से बहुत डरते थे और इसलिए वह उन्हें भेंट देकर, खासकर खाना पहुंचा कर, हर तरह की रिश्वत देने की कोशिश करते रहते थे। देवताओं को खुश करने के लिए वे मर्दों-औरतों का बलिदान करते, यहां तक कि अपने ही बच्चों को मार कर देवताओं को चढ़ा देते। यही बड़ी भयानक बात मालूम होती है लेकिन डरा हुआ आदमी जो कुछ कर बैठे, थोड़ा है। "मजहब पहले डर के रूप में आया और जो बात डर से की जाए बुरी है। तुम्हें मालूम है कि मजहब हमें बहुत सी अच्छी-अच्छी बातें सिखाता है। जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम दुनिया के मज़हबों का हाल पढ़ोगी और तुम्हें मालूम होगा कि मजहब के नाम पर क्या-क्या अच्छी और बुरी बातें की गई हैं। यहां हमें सिर्फ यह देखना है कि मजहब का खयाल कैसे पैदा हुआ और क्यों बढ़ा, लेकिन चाहे वह जिस तरह बढ़ा हो, हम आज भी लोगों को मजहब के नाम पर एक दूसरे से लड़ते और सिर फोड़ते देखते हैं। बहुत-से आदमियों के लिए मजहब आज भी वैसी ही डरावनी चीज है। वह अपना वक्त फर्जी देवताओं को खुश करने के लिए मंदिरों में पूजा, चढ़ावा और जानवरों की कुर्बानी करने में खर्च करते हैं। "
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शनिवार को लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन एक मजेदार वाकया हुआ। इंग्लैंड की दूसरी पारी में 43वां ओवर ट्रेंट बोल्ट कर रहे थे। जो रूट स्ट्राइक पर थे। उन्होंने गेंद को मिड-विकेट की ओर खेला और तेजी से सिंगल लेने के लिए कॉल दिया। स्टोक्स दौड़े, लेकिन जब उन्होंने फील्डर को अपनी दाईं ओर ड्राइव लगाते हुए देखा तो उन्हें वापस भागना पड़ा। फील्डर ने थ्रो मारा और गेंद स्टोक्स के बल्ले पर लगकर मिड ऑफ की तरफ चली गई। उन्होंने तुरंत हाथ उठाकर माफी मांगी। रूट ने भी हाथ उठाकर उनकी नकल उतारी। इस घटना से साल 2019 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मैच की यादें ताजा हो गईं। लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैंच में ठीक ऐसा ही वाक्या हुआ था। इंग्लैंड को अंतिम तीन गेंदों में 9 रनों की जरूरत थी, तब मार्टिन गुप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बल्ले को छूकर बाउंड्री चली गई थी। इंग्लैंड को 2 रन के बजाय 6 रन मिला था। इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। सुपर ओवर भी टाई रहने के बाद बाउंड्री अधिक लगाने की वजह से मेजबान टीम ने बाजी मार ली थी। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने न्यूजीलैंड के मजे लिए। लॉर्ड्स टेस्ट की दूसरी पारी में स्टोक्स 54 रन बनाकर आउट हुए। इंग्लैंड ने 69 रन के स्कोर तक चार विकेट गंवा दिया था, लेकिन स्टोक्स और रूट के बीच पांचवें विकेट के लिए 90 रनों की साझेदारी ने टीम को संभाला। अब इंग्लैंड को जीत के लिए 61 रनों की जरूरत है। रूट 77 और बेन फोक्स 9 रन बनाकर क्रीज पर हैं। न्यूजीलैंड के लिए काइल जैमीसन ने चार जबकि ट्रेंट बोल्ट ने एक विकेट लिए। इससे पहले इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लॉर्ड्स मैदान पर न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में 34 रन के अंदर छह विकेट झटक कर गेंदबाजों की मददगार पिच पर जीत की अपनी उम्मीदें कायम रखी। पहली पारी में 132 रन बनाने वाले न्यूजीलैंड की दूसरी पारी 285 रन पर सिमटी। इंग्लैंड ने तीसरे दिन नई गेंद लेने के बाद मैच पर दबदबा बनाना शुरू किया और शुरुआती 90 मिनट के खेल के दौरान बचे हुए विकेट झटक लिए। इस सत्र में न्यूजीलैंड की टीम 49 रन ही बना सकी।
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शनिवार को लॉर्ड्स टेस्ट के तीसरे दिन एक मजेदार वाकया हुआ। इंग्लैंड की दूसरी पारी में तैंतालीसवां ओवर ट्रेंट बोल्ट कर रहे थे। जो रूट स्ट्राइक पर थे। उन्होंने गेंद को मिड-विकेट की ओर खेला और तेजी से सिंगल लेने के लिए कॉल दिया। स्टोक्स दौड़े, लेकिन जब उन्होंने फील्डर को अपनी दाईं ओर ड्राइव लगाते हुए देखा तो उन्हें वापस भागना पड़ा। फील्डर ने थ्रो मारा और गेंद स्टोक्स के बल्ले पर लगकर मिड ऑफ की तरफ चली गई। उन्होंने तुरंत हाथ उठाकर माफी मांगी। रूट ने भी हाथ उठाकर उनकी नकल उतारी। इस घटना से साल दो हज़ार उन्नीस क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मैच की यादें ताजा हो गईं। लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैंच में ठीक ऐसा ही वाक्या हुआ था। इंग्लैंड को अंतिम तीन गेंदों में नौ रनों की जरूरत थी, तब मार्टिन गुप्टिल का थ्रो स्टोक्स के बल्ले को छूकर बाउंड्री चली गई थी। इंग्लैंड को दो रन के बजाय छः रन मिला था। इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। सुपर ओवर भी टाई रहने के बाद बाउंड्री अधिक लगाने की वजह से मेजबान टीम ने बाजी मार ली थी। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने न्यूजीलैंड के मजे लिए। लॉर्ड्स टेस्ट की दूसरी पारी में स्टोक्स चौवन रन बनाकर आउट हुए। इंग्लैंड ने उनहत्तर रन के स्कोर तक चार विकेट गंवा दिया था, लेकिन स्टोक्स और रूट के बीच पांचवें विकेट के लिए नब्बे रनों की साझेदारी ने टीम को संभाला। अब इंग्लैंड को जीत के लिए इकसठ रनों की जरूरत है। रूट सतहत्तर और बेन फोक्स नौ रन बनाकर क्रीज पर हैं। न्यूजीलैंड के लिए काइल जैमीसन ने चार जबकि ट्रेंट बोल्ट ने एक विकेट लिए। इससे पहले इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लॉर्ड्स मैदान पर न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में चौंतीस रन के अंदर छह विकेट झटक कर गेंदबाजों की मददगार पिच पर जीत की अपनी उम्मीदें कायम रखी। पहली पारी में एक सौ बत्तीस रन बनाने वाले न्यूजीलैंड की दूसरी पारी दो सौ पचासी रन पर सिमटी। इंग्लैंड ने तीसरे दिन नई गेंद लेने के बाद मैच पर दबदबा बनाना शुरू किया और शुरुआती नब्बे मिनट के खेल के दौरान बचे हुए विकेट झटक लिए। इस सत्र में न्यूजीलैंड की टीम उनचास रन ही बना सकी।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन तैयार करने में लगे हैं। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के फेज में चल रही है। इस बीच रूस ने कोरोना की पहली वैक्सीन तैयार कर लेने का दावा किया है। रूस के सेचेनोव यूनिवर्सिटी का दावा है कि दुनिया की सबसे पहली कोरोना वैक्सीन के सभी चरणों के ट्रायल पूरे कर लिए गए हैं और इंसानों पर भी इसका ट्रायल सफल रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो इस वैक्सीन को बाजार में सितंबर तक उपलब्ध करा दिया जाएगा। आइए जानते हैं रूस के इन दावों के बारे मेंः - रूस का दावा है कि कोरोना की वैक्सीन तैयार करने वह सबसे आगे निकल रही है। इस वैक्सीन का नाम Gam-COVID-Vac Lyo रखा गया है। रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इंसानों पर इस वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। वैक्सीन के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसे इंसानों को एक बार लगाने पर लंबे समय तक इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी। - सेचनोव यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी ट्रॉपिकल एंड वेक्टर-बॉर्न डिसीज के निदेशक एलेक्जेंडर लुकाशेव का कहना है, हमारा लक्ष्य इंसानों को कोरोना वायरस से सुरक्षा देने के लिए सफलतापूर्वक कोरोना की वैक्सीन तैयार करना था। उनके मुताबिक, सुरक्षा के लिहाज से वैक्सीन की सारी जांच की जा चुकी है। यदि सारी जरूरी अनुमतियां मिल जाती है तो यह वैक्सीन सितंबर तक बाजार में उपलब्ध होगी। - वैक्सीन तैयार करने वालों में शामिल एलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने रूस के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक अखबार क्रासन्या जवेजदा से कहा है कि पहले और दूसरे चरण का वैक्सीन ट्रायल पूरा हो गया है। यह कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाएगी और उसे लंबे समय तक बरकरार रखेगी। गिंट्सबर्ग का दावा है कि वैक्सीन अगले दो साल तक इंसानों को कोरोना से बचाएगी। - सेचनोव यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक वदिम तरासोव के मुताबिक, इस वैक्सीन को गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने तैयार किया है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, पहले चरण में 18 स्वयंसेवक शामिल हुए थे। वहीं, दूसरे चरण में 20 स्वयंसेवकों को वैक्सीन दी गई थी।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन तैयार करने में लगे हैं। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के फेज में चल रही है। इस बीच रूस ने कोरोना की पहली वैक्सीन तैयार कर लेने का दावा किया है। रूस के सेचेनोव यूनिवर्सिटी का दावा है कि दुनिया की सबसे पहली कोरोना वैक्सीन के सभी चरणों के ट्रायल पूरे कर लिए गए हैं और इंसानों पर भी इसका ट्रायल सफल रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो इस वैक्सीन को बाजार में सितंबर तक उपलब्ध करा दिया जाएगा। आइए जानते हैं रूस के इन दावों के बारे मेंः - रूस का दावा है कि कोरोना की वैक्सीन तैयार करने वह सबसे आगे निकल रही है। इस वैक्सीन का नाम Gam-COVID-Vac Lyo रखा गया है। रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इंसानों पर इस वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। वैक्सीन के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसे इंसानों को एक बार लगाने पर लंबे समय तक इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी। - सेचनोव यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी ट्रॉपिकल एंड वेक्टर-बॉर्न डिसीज के निदेशक एलेक्जेंडर लुकाशेव का कहना है, हमारा लक्ष्य इंसानों को कोरोना वायरस से सुरक्षा देने के लिए सफलतापूर्वक कोरोना की वैक्सीन तैयार करना था। उनके मुताबिक, सुरक्षा के लिहाज से वैक्सीन की सारी जांच की जा चुकी है। यदि सारी जरूरी अनुमतियां मिल जाती है तो यह वैक्सीन सितंबर तक बाजार में उपलब्ध होगी। - वैक्सीन तैयार करने वालों में शामिल एलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने रूस के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक अखबार क्रासन्या जवेजदा से कहा है कि पहले और दूसरे चरण का वैक्सीन ट्रायल पूरा हो गया है। यह कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाएगी और उसे लंबे समय तक बरकरार रखेगी। गिंट्सबर्ग का दावा है कि वैक्सीन अगले दो साल तक इंसानों को कोरोना से बचाएगी। - सेचनोव यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक वदिम तरासोव के मुताबिक, इस वैक्सीन को गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने तैयार किया है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, पहले चरण में अट्ठारह स्वयंसेवक शामिल हुए थे। वहीं, दूसरे चरण में बीस स्वयंसेवकों को वैक्सीन दी गई थी।
रामपुर बुशहर - रामपुर में अंबर बरस रहा है और राजपुरा गांव के बाशिंदे पेयजल को तरस रहे हैं। आलम यह है कि करीब सात दिन से ग्रामीणों के घरों के नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। राजपुरा गांव के ईश्वर दास कायथ, रविंद्र कायथ, शेर सिंह कायथ और हेमराज का कहना है कि आईपीएच विभाग की लापरवाही और स्थानीय पंचायत की नाकामी के कारण उन्हें भारी पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। विभाग की नाकामी के कारण गांव में पेयजल सप्लाई की सही व्यवस्था न होने के चलते गांव में पेयजल संकट गहराया है। उन्होंने कहा कि विभाग के आलाधिकारियों को मौके पर आकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए, ताकि उन्हें भी पता चल सके कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को पेयजल के लिए कैसे तरसना पड़ता है। लंकड़ावीर कल्याण समिति के सचिव राकेश चोहान ने कहा कि राजपुरा गांव में पेयजल किल्लत की समस्या कोई नई नहीं है। गांव में पेयजल की विकट स्थिति सदियों पुरानी है। समिति ने कहा कि आईपीएच विभाग और स्थानीय पंचायत को ग्रामीणों की इस अहम समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। समिति ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जल्द ही पेयजल किल्लत को दूर नहीं किया गया तो ग्रामीणों को लामबंद कर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। ईश्वर दास कायथ सहित अन्य लोगों का कहना है कि विभाग पानी का बिल तो थमा देता है, लेकिन पेयजल मुहैया करवाना शायद भूल जाता है। महकमे को सिर्फ बिल से मतलब है और ग्रामीणों को चाहे पेयजल मिले या न मिले। ग्रामीण जैसे-तैसे अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी मुहैया कर रहा है, लेकिन यदि जल्द ही पेयजल की समस्या को दूर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों को सारे काम छोड़कर सिर्फ पानी ही मुहैया करना पड़ेगा। उन्होंने विभाग से समय रहते पानी की समस्या को दूर करने की फरियाद लगाई है।
रामपुर बुशहर - रामपुर में अंबर बरस रहा है और राजपुरा गांव के बाशिंदे पेयजल को तरस रहे हैं। आलम यह है कि करीब सात दिन से ग्रामीणों के घरों के नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। राजपुरा गांव के ईश्वर दास कायथ, रविंद्र कायथ, शेर सिंह कायथ और हेमराज का कहना है कि आईपीएच विभाग की लापरवाही और स्थानीय पंचायत की नाकामी के कारण उन्हें भारी पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। विभाग की नाकामी के कारण गांव में पेयजल सप्लाई की सही व्यवस्था न होने के चलते गांव में पेयजल संकट गहराया है। उन्होंने कहा कि विभाग के आलाधिकारियों को मौके पर आकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए, ताकि उन्हें भी पता चल सके कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को पेयजल के लिए कैसे तरसना पड़ता है। लंकड़ावीर कल्याण समिति के सचिव राकेश चोहान ने कहा कि राजपुरा गांव में पेयजल किल्लत की समस्या कोई नई नहीं है। गांव में पेयजल की विकट स्थिति सदियों पुरानी है। समिति ने कहा कि आईपीएच विभाग और स्थानीय पंचायत को ग्रामीणों की इस अहम समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। समिति ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जल्द ही पेयजल किल्लत को दूर नहीं किया गया तो ग्रामीणों को लामबंद कर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। ईश्वर दास कायथ सहित अन्य लोगों का कहना है कि विभाग पानी का बिल तो थमा देता है, लेकिन पेयजल मुहैया करवाना शायद भूल जाता है। महकमे को सिर्फ बिल से मतलब है और ग्रामीणों को चाहे पेयजल मिले या न मिले। ग्रामीण जैसे-तैसे अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी मुहैया कर रहा है, लेकिन यदि जल्द ही पेयजल की समस्या को दूर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों को सारे काम छोड़कर सिर्फ पानी ही मुहैया करना पड़ेगा। उन्होंने विभाग से समय रहते पानी की समस्या को दूर करने की फरियाद लगाई है।
बानसूर में घरों से पानी की मोटर चोरी करने वाले एक आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। आरोपी युवक घरों के बाहर से पानी की मोटर को चोरी कर बाजार में बेच देते थे। पुलिस आरोपी युवक से अन्य साथियों की पूछताछ कर रही है। पिछले दिनों बानसूर कस्बे में घरों से पानी की मोटर चोरी होने का मामला सामने आ रहा था। जिसको लेकर कस्बे वासियों ने पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया था। जानकारी के अनुसार आरोपी अपने साथी के साथ बानसूर के गांव दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटरों को बेच रहा था। इसी दौरान दुकानदार ने पूछताछ की तो आरोपी सकपका गया और वहां लोगों ने आरोपी युवक को पकड़ लिया। जबकि उसका एक साथी फरार हो गया। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस के हवाले कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि रात को कई घरों के बाहर से पानी की मोटरें चोरी करते हैं। आज दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटर बेच रहा था। आरोपी ने अपना नाम मनु बताया है और भूपसेडा का रहने वाला है। अनिल सिंघल ने बताया कि पिछले दिनों लाटा के मोहल्ले से घर के बाहर रखी 5 मोटर चोरी हों गई थी। जिसको लेकर पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया गया था। आरोपी युवक आज दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटर बेच रहा था। इसी दौरान वहां के ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों ने मनु निवासी भूपसेडा को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं उसका एक साथी मौका पाकर फरार हो गया। पुलिस आरोपी से उसके अन्य साथियों की पूछताछ कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बानसूर में घरों से पानी की मोटर चोरी करने वाले एक आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। आरोपी युवक घरों के बाहर से पानी की मोटर को चोरी कर बाजार में बेच देते थे। पुलिस आरोपी युवक से अन्य साथियों की पूछताछ कर रही है। पिछले दिनों बानसूर कस्बे में घरों से पानी की मोटर चोरी होने का मामला सामने आ रहा था। जिसको लेकर कस्बे वासियों ने पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया था। जानकारी के अनुसार आरोपी अपने साथी के साथ बानसूर के गांव दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटरों को बेच रहा था। इसी दौरान दुकानदार ने पूछताछ की तो आरोपी सकपका गया और वहां लोगों ने आरोपी युवक को पकड़ लिया। जबकि उसका एक साथी फरार हो गया। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस के हवाले कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि रात को कई घरों के बाहर से पानी की मोटरें चोरी करते हैं। आज दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटर बेच रहा था। आरोपी ने अपना नाम मनु बताया है और भूपसेडा का रहने वाला है। अनिल सिंघल ने बताया कि पिछले दिनों लाटा के मोहल्ले से घर के बाहर रखी पाँच मोटर चोरी हों गई थी। जिसको लेकर पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया गया था। आरोपी युवक आज दांतली पहाड़ी में चोरी की मोटर बेच रहा था। इसी दौरान वहां के ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों ने मनु निवासी भूपसेडा को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं उसका एक साथी मौका पाकर फरार हो गया। पुलिस आरोपी से उसके अन्य साथियों की पूछताछ कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
iOS 16 बीटा 1 फर्स्ट इंप्रेशनः iPhones को जल्द मिलने वाले हैं 5 शानदार फीचर्स। इस बीटा वर्जन में कई नए फीचर्स मिलेंगे। iPhone 13 सीरीज के स्मार्टफोन्स में बेहतर सिनेमैटिक मोड मिलेगा। iOS 16 बीटा 1 फर्स्ट इंप्रेशनः आईफोन्स को जल्द ही 5 शानदार फीचर्स मिलने वाले हैं। अभी के लिए यह फीचर केवल ऐप डेवलपर्स के लिए उपलब्ध हैं। इनका सितंबर या अक्टूबर के अंत में iPhone 14 के लॉन्च के बाद पेश किया जाना तय लग रहा है। Apple ने पिछले महीने अपने WWDC इवेंट के दौरान iOS 16 को पहले ही उजागर कर दिया था, लेकिन अभी iPhone 13 मिनी पर OS डाउनलोड किया गया है। इस नए बीटा वर्जन में कई नए फीचर्स भी आपको मिलेंगे जो इसे खास बनाते हैं। आइए जानते है क्या खासियत है इस नए बीटा वर्जन में। इस साल, ऐप्पल आईफोन की लॉक स्क्रीन को रीफ्रेश कर रहा है। आपको iPhone की लॉक स्क्रीन पर widgets मिलने वाले हैं, इस सुविधा का उपयोग करने के लिए, लॉक स्क्रीन को देर तक दबाएं और कस्टमाइज करें। इस नए फीचर में घड़ी के फ़ॉन्ट और रंग को भी बदला जा सकता हैं। इसके अलावा, यूजर्स वॉलपेपर को बदल सकते है इसके लिए दाईं ओर एक 'प्लस' आइकन है। इसमें एक लाइव ट्रैकिंग सुविधा भी है जो बहुत कम ऐप्स के साथ काम करती है। उदाहरण के लिए, स्क्रीन पर टाइमर देख सकते हैं। इसी प्रकार, iPhones यूजर्स को उनके लॉक स्क्रीन वॉलपेपर पर फ़िल्टर लागू करने देगा। iOS 16 में नोटिफिकेशन सीधे लॉक स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। यूजर्स को नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप करके एक्सेस मिल सकता है। अब आप पूछ सकते हैं कि फीचर की क्या जरूरत है? सबसे पहले, यह समझना जरुरी है कि स्मार्टफोन बड़े हो रहे हैं, और नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप करना मुश्किल हो सकता है। अनलॉक होने पर अब भी iPhone स्वाइप करके नोटिफिकेशन दिखाना जारी रखेगा। जो यूजर्स नोटिफिकेशन छिपाना चाहते हैं तो सेटिंग में जाकर इसको बदल सकते हैं। कैमरे की बात की जाए तो, जब आप अभी कैमरा खोलते हैं, तो आपको सबसे पहले प्राइमरी कैमरा और अल्ट्रा-वाइड कैमरा के लिए दो बटन दिखाई देंगे। पहले एक बटन होता था अब इसको टैप करने पर आपको स्विच करने का ऑपशन मिलता है। इसमें दाईं ओर, फिल्टर के लिए एक बटन मिलता है। इसमें आईओएस 16 नए फिल्टर नहीं दे रहा है, लेकिन वह एक नया इंटरफेस दे रहा है। Apple का कीबोर्ड Google के Gboard जितना सहज नहीं है। लेकिन ऐप्पल कम से कम डिक्टेशन फीचर में सुधार तो कर रहा है। जो भाषा को टेक्स्ट में बदल सकता है। जैसा कि हमने बताया है कि, iOS 16 अभी भी बग से भरा हुआ है, और कीबोर्ड में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। आईफोन प्राइवेसी को लेकर बहुत से वादे करता है, इसी के साथ इसने ऐप ट्रैकिंग डेटा और वीपीएन जैसी कुछ उपयोगी सुविधाओं की पेशकश की हैं। इसमें लॉकडाउन मोड जैसी एक नई सुविधा दी गई है। साथ ही इसे पेगासस जैसे स्पाइवेयर से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
iOS सोलह बीटा एक फर्स्ट इंप्रेशनः iPhones को जल्द मिलने वाले हैं पाँच शानदार फीचर्स। इस बीटा वर्जन में कई नए फीचर्स मिलेंगे। iPhone तेरह सीरीज के स्मार्टफोन्स में बेहतर सिनेमैटिक मोड मिलेगा। iOS सोलह बीटा एक फर्स्ट इंप्रेशनः आईफोन्स को जल्द ही पाँच शानदार फीचर्स मिलने वाले हैं। अभी के लिए यह फीचर केवल ऐप डेवलपर्स के लिए उपलब्ध हैं। इनका सितंबर या अक्टूबर के अंत में iPhone चौदह के लॉन्च के बाद पेश किया जाना तय लग रहा है। Apple ने पिछले महीने अपने WWDC इवेंट के दौरान iOS सोलह को पहले ही उजागर कर दिया था, लेकिन अभी iPhone तेरह मिनी पर OS डाउनलोड किया गया है। इस नए बीटा वर्जन में कई नए फीचर्स भी आपको मिलेंगे जो इसे खास बनाते हैं। आइए जानते है क्या खासियत है इस नए बीटा वर्जन में। इस साल, ऐप्पल आईफोन की लॉक स्क्रीन को रीफ्रेश कर रहा है। आपको iPhone की लॉक स्क्रीन पर widgets मिलने वाले हैं, इस सुविधा का उपयोग करने के लिए, लॉक स्क्रीन को देर तक दबाएं और कस्टमाइज करें। इस नए फीचर में घड़ी के फ़ॉन्ट और रंग को भी बदला जा सकता हैं। इसके अलावा, यूजर्स वॉलपेपर को बदल सकते है इसके लिए दाईं ओर एक 'प्लस' आइकन है। इसमें एक लाइव ट्रैकिंग सुविधा भी है जो बहुत कम ऐप्स के साथ काम करती है। उदाहरण के लिए, स्क्रीन पर टाइमर देख सकते हैं। इसी प्रकार, iPhones यूजर्स को उनके लॉक स्क्रीन वॉलपेपर पर फ़िल्टर लागू करने देगा। iOS सोलह में नोटिफिकेशन सीधे लॉक स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। यूजर्स को नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप करके एक्सेस मिल सकता है। अब आप पूछ सकते हैं कि फीचर की क्या जरूरत है? सबसे पहले, यह समझना जरुरी है कि स्मार्टफोन बड़े हो रहे हैं, और नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप करना मुश्किल हो सकता है। अनलॉक होने पर अब भी iPhone स्वाइप करके नोटिफिकेशन दिखाना जारी रखेगा। जो यूजर्स नोटिफिकेशन छिपाना चाहते हैं तो सेटिंग में जाकर इसको बदल सकते हैं। कैमरे की बात की जाए तो, जब आप अभी कैमरा खोलते हैं, तो आपको सबसे पहले प्राइमरी कैमरा और अल्ट्रा-वाइड कैमरा के लिए दो बटन दिखाई देंगे। पहले एक बटन होता था अब इसको टैप करने पर आपको स्विच करने का ऑपशन मिलता है। इसमें दाईं ओर, फिल्टर के लिए एक बटन मिलता है। इसमें आईओएस सोलह नए फिल्टर नहीं दे रहा है, लेकिन वह एक नया इंटरफेस दे रहा है। Apple का कीबोर्ड Google के Gboard जितना सहज नहीं है। लेकिन ऐप्पल कम से कम डिक्टेशन फीचर में सुधार तो कर रहा है। जो भाषा को टेक्स्ट में बदल सकता है। जैसा कि हमने बताया है कि, iOS सोलह अभी भी बग से भरा हुआ है, और कीबोर्ड में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। आईफोन प्राइवेसी को लेकर बहुत से वादे करता है, इसी के साथ इसने ऐप ट्रैकिंग डेटा और वीपीएन जैसी कुछ उपयोगी सुविधाओं की पेशकश की हैं। इसमें लॉकडाउन मोड जैसी एक नई सुविधा दी गई है। साथ ही इसे पेगासस जैसे स्पाइवेयर से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
ओबामा का जिक्र करने से नहीं भूले - दिल्ली चुनाव में मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत का भी जिक्र छेड़ा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया का हर देश भारत आना चाहता है। ओबामा पर भी लोग विवाद कर रहे हैं। अगर ओबामा आते और सिर्फ कार्यक्रम में शरीक होकर नमस्ते कर के चले जाते तो हमारे विरोधियों ने हमारे बाल नोंच लिए होते। तब कोई नहीं पूछता कि दिल्ली के चुनाव में ओबामा को लेकर मोदी को गाली क्यों दे रहे हो। आज विश्वभर में भारत की जय-जयकार हो रही है। देश के विकास का क्रेडिट दिल्ली को देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपने हमें बहुमत दिया जिसके कारण दुनिया का कोई भी दिग्गज जब मोदी से आंखें मिलाता है तो उसे मोदी नहीं सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखते हैं।
ओबामा का जिक्र करने से नहीं भूले - दिल्ली चुनाव में मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत का भी जिक्र छेड़ा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया का हर देश भारत आना चाहता है। ओबामा पर भी लोग विवाद कर रहे हैं। अगर ओबामा आते और सिर्फ कार्यक्रम में शरीक होकर नमस्ते कर के चले जाते तो हमारे विरोधियों ने हमारे बाल नोंच लिए होते। तब कोई नहीं पूछता कि दिल्ली के चुनाव में ओबामा को लेकर मोदी को गाली क्यों दे रहे हो। आज विश्वभर में भारत की जय-जयकार हो रही है। देश के विकास का क्रेडिट दिल्ली को देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपने हमें बहुमत दिया जिसके कारण दुनिया का कोई भी दिग्गज जब मोदी से आंखें मिलाता है तो उसे मोदी नहीं सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखते हैं।
सीकर। राज्य सरकार के आदेशानुसार सभी सात लाख कर्मचारियों को अपनी एसएसओ आईडी बनानी पडेगी तथा अप्रेल माह की दुर्घटना बीमा की कटौती उसी आईडी से होगी, उसका प्रिन्ट निकालकर, आहरण वितरण अधिकारी को 20 अप्रेल तक जमा करना होगा तभी अप्रेल माह का वेतन मिल पायेगा। इस आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने एसएसओ आईडी बनाने की कयावद शुरू कर दी, लेकिन इसमे एसएसओ को आधार से लिंक करने का प्रावधान हैं, आधार से लिंक करते ही सिस्टम द्वारा ओटीपी नम्बर मोबाइल पर आता हैं जो मोबाइल नम्बर आधार बनाते समय अगर लिखवाया गया है, अधिकांशतः आधार पर मोबाइल नम्बर नहीं लिखा गया या वो नंबर बदल गया तो आईडी नहीं बन रही। अधिकांश कर्मचारी ई मित्र पर आधार के साथ मोबाइल नं जुडवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। मोबाइल जुडवाने के तीन दिन में आधार डाटा अपडेट हो रहा, उसके बाद आईडी बन पा रही है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ( एकीकृत) के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने मांग की है कि सरकार द्वारा सात दिवस के शोर्ट नोटिस पर ये आईडी बनाने के आदेश जारी किये जिससे कर्मचारी परेशान हो रहे है, इसकी समय सीमा को बढानी चाहीये तथा अप्रैल माह की दुर्घटना बीमा की कटौती पूर्व की भांति करें, जिससे अप्रैल का वेतन समय पर मिल सके। सरकार द्वारा केन्द्रीय सहायता मे शिक्षकों डालने से अभी तक मार्च का वेतन ही नही मिल पाया ऐसे में अप्रैल महिने मे भी वेतन मिलने की सम्भावना कम ही लग रही हैं। जिलाध्यक्ष भंवर सिंह ने बताया कि इस संबंध में प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन दिया जिसमें इस समस्या का समाधान करने की मांग की गई। प्रतिनिधि मण्डल में शशिभूषण शर्मा, विपिन प्रकाश शर्मा, अजंनी कुमार, विरेन्द्र बहादुर सिंह, पवन शर्मा, ललित मोहन शर्मा, सुरेन्द्र सिंह, प्रशान्त सिहं आदि पदाधिकारी सम्मिलित थे।
सीकर। राज्य सरकार के आदेशानुसार सभी सात लाख कर्मचारियों को अपनी एसएसओ आईडी बनानी पडेगी तथा अप्रेल माह की दुर्घटना बीमा की कटौती उसी आईडी से होगी, उसका प्रिन्ट निकालकर, आहरण वितरण अधिकारी को बीस अप्रेल तक जमा करना होगा तभी अप्रेल माह का वेतन मिल पायेगा। इस आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने एसएसओ आईडी बनाने की कयावद शुरू कर दी, लेकिन इसमे एसएसओ को आधार से लिंक करने का प्रावधान हैं, आधार से लिंक करते ही सिस्टम द्वारा ओटीपी नम्बर मोबाइल पर आता हैं जो मोबाइल नम्बर आधार बनाते समय अगर लिखवाया गया है, अधिकांशतः आधार पर मोबाइल नम्बर नहीं लिखा गया या वो नंबर बदल गया तो आईडी नहीं बन रही। अधिकांश कर्मचारी ई मित्र पर आधार के साथ मोबाइल नं जुडवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। मोबाइल जुडवाने के तीन दिन में आधार डाटा अपडेट हो रहा, उसके बाद आईडी बन पा रही है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने मांग की है कि सरकार द्वारा सात दिवस के शोर्ट नोटिस पर ये आईडी बनाने के आदेश जारी किये जिससे कर्मचारी परेशान हो रहे है, इसकी समय सीमा को बढानी चाहीये तथा अप्रैल माह की दुर्घटना बीमा की कटौती पूर्व की भांति करें, जिससे अप्रैल का वेतन समय पर मिल सके। सरकार द्वारा केन्द्रीय सहायता मे शिक्षकों डालने से अभी तक मार्च का वेतन ही नही मिल पाया ऐसे में अप्रैल महिने मे भी वेतन मिलने की सम्भावना कम ही लग रही हैं। जिलाध्यक्ष भंवर सिंह ने बताया कि इस संबंध में प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन दिया जिसमें इस समस्या का समाधान करने की मांग की गई। प्रतिनिधि मण्डल में शशिभूषण शर्मा, विपिन प्रकाश शर्मा, अजंनी कुमार, विरेन्द्र बहादुर सिंह, पवन शर्मा, ललित मोहन शर्मा, सुरेन्द्र सिंह, प्रशान्त सिहं आदि पदाधिकारी सम्मिलित थे।