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प्रयागराज में गंगापार में शनिवार सुबह एक और दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। थरवई थाना क्षेत्र के खेवराजपुर गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई है। वारदात को अंजाम देने के बाद घर में आगजनी भी की गई।
मृतकों में राम कुमार यादव (55), उसकी पत्नी कुसुम देवी (52), बेटी मनीषा (25), बहू सविता (27) और पौत्री मीनाक्षी (2) शामिल हैं। जबकि एक अन्य पौत्री साक्षी (5) जिंदा मिली है। हत्या किसने और क्यों की इस बारे में फिलहाल कुछ पता नहीं चल सका है। पुलिस अफसर मौके पर हैं जांच पड़ताल जारी है।
दरअसल, शनिवार सुबह थरवई थाना क्षेत्र अंतर्गत खेवराजपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी गंगा पार क्षेत्राधिकारी समेत भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही घटना की सूचना जिलाधिकारी संजय खत्री और एसएसपी प्रयागराज अजय कुमार को भी दे दी गई है। जिलाधिकारी प्रयागराज संजय खत्री व एसएसपी प्रयागराज अजय कुमार मौके पर पहुंचे हैं।
प्रयागराज की घटना पर बसपा सुप्रीमो मायवती ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक ही परिवार के 5 लोगों की निर्मम हत्या की खबर अति-दुःखद, निन्दनीय और चिन्ताजनक है. सरकार घटना की तह में जाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चि करें।
यूपी के प्रयागराज जनपद में अपराध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले शनिवार को भी प्रयागराज में इसी तरह की वारदात हुई थी। जिसमें 5 लोगों की हत्या की गई थी। बता दें कि खागलपुर गांव में भी एक ही परिवार के 5 लोगों की गला काटकर हत्या की गई थी। मरने वालों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, पत्नी और तीन बच्चों के शव बेड पर पड़े मिले थे। उनकी गला काटकर हत्या की गई थी. पति का शव बाथरूम में फंदे से लटका मिला था।
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प्रयागराज में गंगापार में शनिवार सुबह एक और दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। थरवई थाना क्षेत्र के खेवराजपुर गांव में एक ही परिवार के पाँच लोगों की हत्या कर दी गई है। वारदात को अंजाम देने के बाद घर में आगजनी भी की गई। मृतकों में राम कुमार यादव , उसकी पत्नी कुसुम देवी , बेटी मनीषा , बहू सविता और पौत्री मीनाक्षी शामिल हैं। जबकि एक अन्य पौत्री साक्षी जिंदा मिली है। हत्या किसने और क्यों की इस बारे में फिलहाल कुछ पता नहीं चल सका है। पुलिस अफसर मौके पर हैं जांच पड़ताल जारी है। दरअसल, शनिवार सुबह थरवई थाना क्षेत्र अंतर्गत खेवराजपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी गंगा पार क्षेत्राधिकारी समेत भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही घटना की सूचना जिलाधिकारी संजय खत्री और एसएसपी प्रयागराज अजय कुमार को भी दे दी गई है। जिलाधिकारी प्रयागराज संजय खत्री व एसएसपी प्रयागराज अजय कुमार मौके पर पहुंचे हैं। प्रयागराज की घटना पर बसपा सुप्रीमो मायवती ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक ही परिवार के पाँच लोगों की निर्मम हत्या की खबर अति-दुःखद, निन्दनीय और चिन्ताजनक है. सरकार घटना की तह में जाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चि करें। यूपी के प्रयागराज जनपद में अपराध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले शनिवार को भी प्रयागराज में इसी तरह की वारदात हुई थी। जिसमें पाँच लोगों की हत्या की गई थी। बता दें कि खागलपुर गांव में भी एक ही परिवार के पाँच लोगों की गला काटकर हत्या की गई थी। मरने वालों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, पत्नी और तीन बच्चों के शव बेड पर पड़े मिले थे। उनकी गला काटकर हत्या की गई थी. पति का शव बाथरूम में फंदे से लटका मिला था।
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नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केदारनाथ धाम में हैं और वहां एक बार फिर उनकी केदार भक्ति दिख रही है। 6 नवंबर को केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले पीएम मोदी आज सुबह साढ़े सात बजे केदारनाथ में पूजा करने पहुंचे, इसके बाद वो श्री आदि शंकराचार्य समाधि का उद्घाटन करने के लिए गए और वहां पर आदि गुरु की प्रतिमा का अनावरण किया। बता दें कि 2013 की बाढ़ से हुई तबाही के बाद आदि शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने समाधि स्थल का पुनर्निर्माण करने का संकल्प लिया जो अब पूरा हो रहा है। इस प्रतिमा को चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिए केदरनाथ तक पहुंचाया गया है।
- मूर्ति के लिए अलग अलग मूर्तिकारों ने कुल 18 मॉडल दिए थे जिसमें से उस मॉडल का चयन हुआ जो वर्तमान मूर्ति बनी है। पीएमओ ने मॉडल का चयन किया था।
- कर्नाटक के मैसूर के मूर्तिकार अरूण योगीराज ने इस मूर्ति को बनाया है।
- 9 लोगों की टीम ने इस मूर्ति पर काम किया। सितंबर 2020 में मूर्ति बनाने का काम शुरू हुआ था और तकरीबन एक साल लगा।
- सितंबर 2021 में मूर्ति को मैसूर से चिनूक हेलीकॉप्टर के द्वारा उत्तराखंड ले जाया गया।
- कृष्ण शिला (ब्लैक स्टोन) से मूर्ति का निर्माण किया गया। मूर्ति के लिए लगभग 130 टन की एक ही शिला ली गई थी जिसे काट छांटकर मूर्ति बनाया गया।
- मूर्ति का वजन लगभग 35 टन है और ऊंचाई लगभग 12 फीट है।
- मूर्ति पर नारियल पानी का खूब इस्तेमाल किया गया जिससे चमक आए।
- ब्लैक स्टोन पर आग, पानी, बारिश और हवा के थपेड़ों का असर नहीं।
- मूर्तिकार अरूण योगीराज की पांच पीढ़ियां इस कार्य में जुटी हैं। अरूण ने खुद एमबीए किया हुआ हैं लेकिन मूर्ति बनाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल में पांचवीं बार बाबा केदार के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। वो अपने पहले कार्यकाल में 4 बार बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार 3 मई 2017 को केदारनाथ पहुंचे थे, उसी साल पीएम मोदी 20 अक्टूबर को फिर से केदारनाथ धाम पहुंचे थे और उन्होंने केदारनाथ के पुनर्निर्माण के लिए 700 करोड़ रुपये की 5 बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। पीएम 7 नवंबर 2018 को तीसरी बार केदारनाथ पहुंचे थे और पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था। इसके बाद वो चौथी बार 18 मई 2019 को केदारनाथ धाम गए थे। इस दौरान उन्होंने ध्यान गुफा में क़रीब 17 घंटे तक साधना भी की थी।
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नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केदारनाथ धाम में हैं और वहां एक बार फिर उनकी केदार भक्ति दिख रही है। छः नवंबर को केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले पीएम मोदी आज सुबह साढ़े सात बजे केदारनाथ में पूजा करने पहुंचे, इसके बाद वो श्री आदि शंकराचार्य समाधि का उद्घाटन करने के लिए गए और वहां पर आदि गुरु की प्रतिमा का अनावरण किया। बता दें कि दो हज़ार तेरह की बाढ़ से हुई तबाही के बाद आदि शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने समाधि स्थल का पुनर्निर्माण करने का संकल्प लिया जो अब पूरा हो रहा है। इस प्रतिमा को चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिए केदरनाथ तक पहुंचाया गया है। - मूर्ति के लिए अलग अलग मूर्तिकारों ने कुल अट्ठारह मॉडल दिए थे जिसमें से उस मॉडल का चयन हुआ जो वर्तमान मूर्ति बनी है। पीएमओ ने मॉडल का चयन किया था। - कर्नाटक के मैसूर के मूर्तिकार अरूण योगीराज ने इस मूर्ति को बनाया है। - नौ लोगों की टीम ने इस मूर्ति पर काम किया। सितंबर दो हज़ार बीस में मूर्ति बनाने का काम शुरू हुआ था और तकरीबन एक साल लगा। - सितंबर दो हज़ार इक्कीस में मूर्ति को मैसूर से चिनूक हेलीकॉप्टर के द्वारा उत्तराखंड ले जाया गया। - कृष्ण शिला से मूर्ति का निर्माण किया गया। मूर्ति के लिए लगभग एक सौ तीस टन की एक ही शिला ली गई थी जिसे काट छांटकर मूर्ति बनाया गया। - मूर्ति का वजन लगभग पैंतीस टन है और ऊंचाई लगभग बारह फीट है। - मूर्ति पर नारियल पानी का खूब इस्तेमाल किया गया जिससे चमक आए। - ब्लैक स्टोन पर आग, पानी, बारिश और हवा के थपेड़ों का असर नहीं। - मूर्तिकार अरूण योगीराज की पांच पीढ़ियां इस कार्य में जुटी हैं। अरूण ने खुद एमबीए किया हुआ हैं लेकिन मूर्ति बनाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल में पांचवीं बार बाबा केदार के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। वो अपने पहले कार्यकाल में चार बार बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचे थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार तीन मई दो हज़ार सत्रह को केदारनाथ पहुंचे थे, उसी साल पीएम मोदी बीस अक्टूबर को फिर से केदारनाथ धाम पहुंचे थे और उन्होंने केदारनाथ के पुनर्निर्माण के लिए सात सौ करोड़ रुपये की पाँच बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। पीएम सात नवंबर दो हज़ार अट्ठारह को तीसरी बार केदारनाथ पहुंचे थे और पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था। इसके बाद वो चौथी बार अट्ठारह मई दो हज़ार उन्नीस को केदारनाथ धाम गए थे। इस दौरान उन्होंने ध्यान गुफा में क़रीब सत्रह घंटाटे तक साधना भी की थी।
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लखनऊ- सपा सरकार में चल रही खटास अब खुलकर सामने आ गई है। दरअसल आज यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़ा फैसला करते हुए कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है। इस संबंध में अखिलेश यादव ने राज्यपाल राम नाईक को पत्र भेज दिया है। शिवपाल के अलावा बर्खास्त होने वाले मंत्रियों में शादाब फातिमा, नारद राय व ओम प्रकाश हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश के फैसले के बाद शिवपाल यादव सपा सुप्रीमो मुलायम से मिलने के लिए उनके आवास पर गए हैं। उधर, शिवपाल के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी है।
बैठक में शामिल हुए एक विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी पार्टी को कमजोर करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
विधायक के अनुसार बैठक में शिवपाल यादव का नाम नहीं लिया गया, अमर सिंह का नाम लिया गया। वहीं, अलग पार्टी बनाने की कोई चर्चा नहीं हुई। विधायक ने कहा कि समाजवादी पार्टी एक है और एक होकर ही चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 5 कालिदास मार्ग स्थित अपने आवास पर बैठक में ये फैसले लिए। इसमें शिवपाल खेमे के एमएलए व एमएलसी शामिल नहीं हुए थे।
इसके अलावा, सपा मुख्यालय में 24 अक्तूबर को विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, प्रत्याशियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें सपा मुखिया मुलायम सिंह मौजूद रहेंगे।
सपा में मची रार पर हर कोई इसके लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहरा रहा है। विधायकों का कहना है कि सीएम अखिलेश यादव ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि जो लोग अमर सिंह के साथ हैं उन्हें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में अखिलेश ने अपने समर्थकों से राय ली। सभी ने हाथ उठाकर कहा कि आप जो भी फैसला करेंगे, सभी साथ है।
सीएम के शिवपाल को बर्खास्त किए जाने के फैसले से सपा में अभी तक ऊपर से कुछ हद तक शांत नजर आ रहा विवाद अब फिर से उभर आया है।
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लखनऊ- सपा सरकार में चल रही खटास अब खुलकर सामने आ गई है। दरअसल आज यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़ा फैसला करते हुए कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है। इस संबंध में अखिलेश यादव ने राज्यपाल राम नाईक को पत्र भेज दिया है। शिवपाल के अलावा बर्खास्त होने वाले मंत्रियों में शादाब फातिमा, नारद राय व ओम प्रकाश हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश के फैसले के बाद शिवपाल यादव सपा सुप्रीमो मुलायम से मिलने के लिए उनके आवास पर गए हैं। उधर, शिवपाल के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी है। बैठक में शामिल हुए एक विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी पार्टी को कमजोर करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। विधायक के अनुसार बैठक में शिवपाल यादव का नाम नहीं लिया गया, अमर सिंह का नाम लिया गया। वहीं, अलग पार्टी बनाने की कोई चर्चा नहीं हुई। विधायक ने कहा कि समाजवादी पार्टी एक है और एक होकर ही चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पाँच कालिदास मार्ग स्थित अपने आवास पर बैठक में ये फैसले लिए। इसमें शिवपाल खेमे के एमएलए व एमएलसी शामिल नहीं हुए थे। इसके अलावा, सपा मुख्यालय में चौबीस अक्तूबर को विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, प्रत्याशियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें सपा मुखिया मुलायम सिंह मौजूद रहेंगे। सपा में मची रार पर हर कोई इसके लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहरा रहा है। विधायकों का कहना है कि सीएम अखिलेश यादव ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि जो लोग अमर सिंह के साथ हैं उन्हें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में अखिलेश ने अपने समर्थकों से राय ली। सभी ने हाथ उठाकर कहा कि आप जो भी फैसला करेंगे, सभी साथ है। सीएम के शिवपाल को बर्खास्त किए जाने के फैसले से सपा में अभी तक ऊपर से कुछ हद तक शांत नजर आ रहा विवाद अब फिर से उभर आया है।
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Gwalior News: ग्वालियर में बॉयफ्रेंड की शादी से आहत एक युवती ने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी. युवती का शव पुरानी छावनी इलाके में रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था.
ग्वालियर/प्रियांशु यादवः मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि बॉयफ्रेंड के शादी कर लेने से दुखी एक युवती ने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी. युवती का शव एक सप्ताह पहले शहर के पुरानी छावनी इलाके में रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था. शव की पहचान नहीं होने पर शव को डेड हाउस में रखवा दिया गया था. शहर के गिरवाई थाना क्षेत्र के इमली नाका सिकंदर कंपू निवासी 28 वर्षीय युवती ने 13 जून की दोपहर पुरानी छावनी स्थित रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटकर जान दी थी. महिला की लाश मिलने का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई.
युवती का शव मिलने के बाद उसकी शिनाख्ती के प्रयास किए लेकिन पहचान नहीं हुई. पुलिस ने इसकी जानकारी सभी थानों को दी तो गिरवाई से लापता हुई युवती के परिजन पीएम हाउस पहुंचे और उसकी शिनाख्त की. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी तभी युवती के कमरे से उसकी किताब से एक सुसाइड नोट मिला.
युवती ने मरने से पहले सुसाइड नोट लिखा था. जब पुलिस ने पढ़ा तो पता चला कि, मृतका व उसके घर के पास ही रहने वाला दीपक कुशवाह पिछले पांच साल से एक-दूसरे को प्रेम करते थे और शादी का वादा कर वह उसका शोषण कर रहा था. अब उसने दूसरी शादी कर ली है और उसे धोखा दिया है. वह दीपक के अलावा किसी और से शादी नहीं कर सकती, इसलिए जान दे रही है. उसकी मौत का जिम्मेदार सिर्फ दीपक होगा. पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर उसके प्रेमी के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज कर लिया है.
पुलिस ने बताया कि, दीपक कुशवाह की शादी के दो दिन बाद ही युवती ने यह कदम उठाया था. उसे लगता था कि दीपक उससे ही शादी करेगा, लेकिन दीपक ने उसे धोखा दिया जिससे परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली.
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Gwalior News: ग्वालियर में बॉयफ्रेंड की शादी से आहत एक युवती ने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी. युवती का शव पुरानी छावनी इलाके में रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था. ग्वालियर/प्रियांशु यादवः मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि बॉयफ्रेंड के शादी कर लेने से दुखी एक युवती ने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी. युवती का शव एक सप्ताह पहले शहर के पुरानी छावनी इलाके में रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था. शव की पहचान नहीं होने पर शव को डेड हाउस में रखवा दिया गया था. शहर के गिरवाई थाना क्षेत्र के इमली नाका सिकंदर कंपू निवासी अट्ठाईस वर्षीय युवती ने तेरह जून की दोपहर पुरानी छावनी स्थित रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटकर जान दी थी. महिला की लाश मिलने का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई. युवती का शव मिलने के बाद उसकी शिनाख्ती के प्रयास किए लेकिन पहचान नहीं हुई. पुलिस ने इसकी जानकारी सभी थानों को दी तो गिरवाई से लापता हुई युवती के परिजन पीएम हाउस पहुंचे और उसकी शिनाख्त की. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी तभी युवती के कमरे से उसकी किताब से एक सुसाइड नोट मिला. युवती ने मरने से पहले सुसाइड नोट लिखा था. जब पुलिस ने पढ़ा तो पता चला कि, मृतका व उसके घर के पास ही रहने वाला दीपक कुशवाह पिछले पांच साल से एक-दूसरे को प्रेम करते थे और शादी का वादा कर वह उसका शोषण कर रहा था. अब उसने दूसरी शादी कर ली है और उसे धोखा दिया है. वह दीपक के अलावा किसी और से शादी नहीं कर सकती, इसलिए जान दे रही है. उसकी मौत का जिम्मेदार सिर्फ दीपक होगा. पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर उसके प्रेमी के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने बताया कि, दीपक कुशवाह की शादी के दो दिन बाद ही युवती ने यह कदम उठाया था. उसे लगता था कि दीपक उससे ही शादी करेगा, लेकिन दीपक ने उसे धोखा दिया जिससे परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली.
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IMM इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड (ई-स्कूटर) रेंटल सिस्टम के लिए नियम लाता है। यह व्यवस्था दोनों एजेंसियों को शामिल करती है जो किराये की सेवाएं और इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड के उपयोगकर्ता प्रदान करती हैं। निर्देश पर 23 जुलाई को यूकेओएम की बैठक में चर्चा की जाएगी।
इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड (ई-स्कूटर) किराये की प्रणाली के लिए विनियम पेश किए जा रहे हैं, जो इस्तांबुल में उपयोग में बढ़ रहा है। İBB परिवहन विभाग ने इस क्षेत्र में नियमों को निर्धारित करने और प्रदान की गई सेवा के लिए एक कानूनी बुनियादी ढांचा तैयार करने का निर्देश तैयार किया। मसौदा निर्देश, जिसे पर्यावरण और शहरीकरण मंत्रालय के साथ भी साझा किया गया था, यूकेओएम में आयोजित बैठक के परिणामस्वरूप उप-आयोग को भेजा गया था। "इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड शेयरिंग सिस्टम डायरेक्टिव", जो उपसमितियों की राय के अनुसार परिवर्तन करके अंतिम रूप दिया गया है, 23 जुलाई को यूकेओएम बैठक में चर्चा की जाएगी।
आईएमएम परिवहन निदेशालय द्वारा तैयार मसौदा निर्देश को भागीदारी के सिद्धांत के अनुसार कई हितधारकों को प्रस्तुत करके तैयार किया गया था। तदनुसार, एक मसौदा पाठ क्षेत्र में काम कर रही फर्मों, परिवहन विशेषज्ञों शिक्षाविदों और गैर-सरकारी संगठनों को भेजा गया था, और एक वापसी का अनुरोध किया गया था।
निर्देश को एक रोजगार क्षेत्र के रूप में इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड शेयरिंग उद्योग का समर्थन करने और आर एंड डी और घरेलू उत्पादन में योगदान करने और कानूनी अवसंरचना हासिल करने के लिए तैयार किया गया है। निर्देश उपयोगकर्ताओं, ऑपरेटरों और जनता के लिए व्यापक नियम प्रदान करता है। निर्देश, जो कंपनियों के लिए कई सुरक्षा दायित्वों को लाता है, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को मिलने वाली सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
निर्देश के साथ, आईएमएम इस क्षेत्र में सेवा देने वाली कंपनियों को पंजीकरण करके लाइसेंस देगा। निर्देश, जिसमें हर इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड को सभी दिशाओं से दिखाई देने वाली पहचान संख्या होनी चाहिए, उल्लंघन किए गए स्केटबोर्ड उपयोगकर्ताओं का पता लगाने और संबंधित इकाइयों को रिपोर्ट करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करता है।
निर्देश व्यवसाय मालिकों को कई तकनीकी सुविधाओं से लैस करने के लिए बाध्य करता है, जैसे कि स्केटबोर्ड के टिपिंग सेंसर जो वे सेवा करते हैं। टिपिंग सेंसर के लिए धन्यवाद, उन उपयोगकर्ताओं से संपर्क करना अनिवार्य है जिनके साथ तुरंत दुर्घटना हुई है और आपातकालीन सहायता अनुरोध प्राप्त करना है। ऑपरेटर के लिए एक और व्यवस्था चार्जिंग स्टेटस और रेंज जैसे मुद्दों पर उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट जानकारी प्रदान करने के लिए होगी।
अल्कोहल स्केटबोर्डिंग, व्यवहार जो पैदल चलने वालों को खतरे में डालेंगे, और निर्देश जो पार्क को पैदल चलने से रोकते हैं, इसमें उपयोगकर्ताओं को मोबाइल अनुशासन पर प्रशिक्षित करने के लिए ऑपरेटरों का दायित्व भी शामिल है।
निर्देश के साथ, ड्राइविंग संस्कृति को विकसित करने और बसने के लिए एक वर्ष में कम से कम एक बार एक व्यापक सूचना अभियान का अनुरोध किया जाएगा।
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IMM इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड रेंटल सिस्टम के लिए नियम लाता है। यह व्यवस्था दोनों एजेंसियों को शामिल करती है जो किराये की सेवाएं और इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड के उपयोगकर्ता प्रदान करती हैं। निर्देश पर तेईस जुलाई को यूकेओएम की बैठक में चर्चा की जाएगी। इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड किराये की प्रणाली के लिए विनियम पेश किए जा रहे हैं, जो इस्तांबुल में उपयोग में बढ़ रहा है। İBB परिवहन विभाग ने इस क्षेत्र में नियमों को निर्धारित करने और प्रदान की गई सेवा के लिए एक कानूनी बुनियादी ढांचा तैयार करने का निर्देश तैयार किया। मसौदा निर्देश, जिसे पर्यावरण और शहरीकरण मंत्रालय के साथ भी साझा किया गया था, यूकेओएम में आयोजित बैठक के परिणामस्वरूप उप-आयोग को भेजा गया था। "इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड शेयरिंग सिस्टम डायरेक्टिव", जो उपसमितियों की राय के अनुसार परिवर्तन करके अंतिम रूप दिया गया है, तेईस जुलाई को यूकेओएम बैठक में चर्चा की जाएगी। आईएमएम परिवहन निदेशालय द्वारा तैयार मसौदा निर्देश को भागीदारी के सिद्धांत के अनुसार कई हितधारकों को प्रस्तुत करके तैयार किया गया था। तदनुसार, एक मसौदा पाठ क्षेत्र में काम कर रही फर्मों, परिवहन विशेषज्ञों शिक्षाविदों और गैर-सरकारी संगठनों को भेजा गया था, और एक वापसी का अनुरोध किया गया था। निर्देश को एक रोजगार क्षेत्र के रूप में इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड शेयरिंग उद्योग का समर्थन करने और आर एंड डी और घरेलू उत्पादन में योगदान करने और कानूनी अवसंरचना हासिल करने के लिए तैयार किया गया है। निर्देश उपयोगकर्ताओं, ऑपरेटरों और जनता के लिए व्यापक नियम प्रदान करता है। निर्देश, जो कंपनियों के लिए कई सुरक्षा दायित्वों को लाता है, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को मिलने वाली सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। निर्देश के साथ, आईएमएम इस क्षेत्र में सेवा देने वाली कंपनियों को पंजीकरण करके लाइसेंस देगा। निर्देश, जिसमें हर इलेक्ट्रिक स्केटबोर्ड को सभी दिशाओं से दिखाई देने वाली पहचान संख्या होनी चाहिए, उल्लंघन किए गए स्केटबोर्ड उपयोगकर्ताओं का पता लगाने और संबंधित इकाइयों को रिपोर्ट करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करता है। निर्देश व्यवसाय मालिकों को कई तकनीकी सुविधाओं से लैस करने के लिए बाध्य करता है, जैसे कि स्केटबोर्ड के टिपिंग सेंसर जो वे सेवा करते हैं। टिपिंग सेंसर के लिए धन्यवाद, उन उपयोगकर्ताओं से संपर्क करना अनिवार्य है जिनके साथ तुरंत दुर्घटना हुई है और आपातकालीन सहायता अनुरोध प्राप्त करना है। ऑपरेटर के लिए एक और व्यवस्था चार्जिंग स्टेटस और रेंज जैसे मुद्दों पर उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट जानकारी प्रदान करने के लिए होगी। अल्कोहल स्केटबोर्डिंग, व्यवहार जो पैदल चलने वालों को खतरे में डालेंगे, और निर्देश जो पार्क को पैदल चलने से रोकते हैं, इसमें उपयोगकर्ताओं को मोबाइल अनुशासन पर प्रशिक्षित करने के लिए ऑपरेटरों का दायित्व भी शामिल है। निर्देश के साथ, ड्राइविंग संस्कृति को विकसित करने और बसने के लिए एक वर्ष में कम से कम एक बार एक व्यापक सूचना अभियान का अनुरोध किया जाएगा।
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हो जाएगा, यह लगभग नगण्य है। तो ऐसे मामले में प्रबल तापीय प्रतिरोध क्षेत्र 4 द्वारा होगा जिसे मैं अभी दिखाया। इसलिए अन्य सभी क्षेत्र के तापीय प्रतिरोध को नगण्य लेकर, किसी भी समय तापमान का वितरण नीचे की आकृति में दिखाया गया आकार लेता है।
तो यहाँ मोल्ड मेटल इंटरफ़ेस या कास्टिंग सतह का तापमान 8 समय के साथ अचर माना जा सकता है, क्योंकि मोल्ड भी पानी से ठंडा है। इसलिए आपके पास एक पूरी तरह से पानी से ठंढा मोल्ड है, तो जाहिर है कि इस विशेष धातु की सतह का तापमान अचर होगा, तो हम मान लें कि तापमान 08 80 है, और हम हिमांक (freezing point) को 8 मान लेते हैं, जो कि पोरिंग तापमान से अलग नहीं है, तो e = 6 है।
तो यह धातु के हिमांक को इंगित करता है और किसी समय t पर 8(t) ठोसीकरण के गहराई को इंगित करता है जैसा कि आप देख सकते हैं। यह ठोस तरल फ्रंट है और यह आगे dS (t) से बढ़ रहा है और 8 (t) उस शेल की तात्कालिक मोटाई है जो यहां विकसित किया जा रहा है ठोस शेल और प्रक्रिया को एक आयामी ऊष्मा हस्तांतरण (heat transfer) समस्या के रूप में बहुत कम त्रुटि के साथ आदर्श बनाया जा सकता है क्योंकि हमारे पास लगभग एक ऊष्मा अवशोषक (heat sink) है मोल्ड के रूप में क्योंकि यह पानी से ठंडा मोल्ड है और इसलिए ऊष्मा हस्तांतरण आम तौर पर एक आयामी होगा।
अधिकतम तापीय प्रतिरोध जो इस तरल को दिया जाता है हिमांक पर वास्तव में साँचे का ठोस भाग होता है और इसका दूसरा सिरा वास्तव में एक अचर तापमान सतह या अचर कास्टिंग सतह तापमान 8 होता है। तो आइए हम इसे देखते हैं इस तरह की समस्या वास्तव में क्या होती है या कैसे होती है, ठोसीकरण समय का अनुमान क्या होगा ।
(स्लाइड समय 03:57 देखें )
तो आइए हम ठोसीकरण समय का अनुमान लगाते हैं, इसलिए हमें वास्तव में d8 (ts) = 2 मिलता है। हम यहाँ मोल्ड की मोटाई या कास्टिंग मोटाई h के बराबर मानते हैं, इसलिए कास्टिंग के दोनों ओर से ऊष्मा हस्तांतरण होता है इसलिए h/2 वास्तव में एक सतह है जिसके साथ दोनों तरफ से ठोसीकरण आगे बढ़ता है और रुकता है। तो तापमान का
प्रोफ़ाइल रेंज X के भीतर 0 और 8 (1) के बीच 00. (2) होता है। मुझे लगता है
कि पहले इस के बारे में बात की थी जब हमने रेत के सांचे में तापीय चालकता और तापमान वितरण का प्रश्न किया था।
इसलिए मैं यह बताने नहीं जा रहा हूं कि यह समीकरण कैसे आया या आप पहले से ही जानते हैं कि यह एक सिमिलरिटी वैरिएबल विश्लेषण ( similarity variable analysis) और एक आयामी ऊष्मा हस्तांतरण समस्या से आया है जो हमने वास्तव में हल की थी रेत मोल्ड के मामले में । इसलिए इस मामले में मैं सिर्फ उल्लेख करूंगा कि 0 एक इंटेग्रेशन अचर है और हम इसके बारे में परेशान नहीं होंगे क्योंकि अंततः अपने लिए इस मान का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है गणना में, इसलिए यह एक इंटेग्रेशन अचर है यदि आप पूरी प्रक्रिया को याद करते हैं हल करने की, जहां कई ऐसे इंटेग्रल थे जिन्हें का वास्तविक मान का अनुमान लगाने के लिए तैयार किया गया था।
एक Qs मूल रूप से सांचे की तापीय डिफ्यूजीविटी (thermal diffusivity) है जो वास्तव में मोल्ड की तापीय चालकता के प्रति इकाई घनत्व से दी जाती है। तो x = 8 (t) पर 8 = 8
है तो अगर इस मां को समीकरण में डालें तो Of Os है, जो आपको याद = a 2Vast Ocx - Os दिलाता है कि यह कास्टिंग सतह का तापमान है। तो आप यह मान रहे हैं कि मोल्ड पानी से ठंडा होता है और अवशोषक के रूप में कार्य करता है, इसलिए यह वास्तव में बदल नहीं सकता क्योंकि हिमांक और कास्टिंग की सतह का तापमान समान है और 0w और 0, इंटेग्रेशन अचर हैं और इसलिए यह वास्तव में एक अचर 1 है। आइए हम इसे अचर 1 कहते हैं, इसलिए अब हमारे पास है।
(स्लाइड समय 07:20 देखें)
अनुपात 5=1000 के रूप में परिभाषित किया गया है और दूसरे शब्दों में 8 (1) = 25 Var है
है। मान लो x = 8(t) है। तो आगे हम मान लेते हैं कि एक अन्य
और हमारे पास (८) = ^ है। एक बार फिर, हम पाते हैं कि ठोसीकरण की गहराई समय के वर्गमूल के रूप में बदलती है जैसा आप यहां देख सकते हैं। अब ठोसीकरण के समय का पता लगाने के लिए ६ का निर्धारण किया जाना चाहिए, इन दो समीकरणों के साथ।
तो आइए हम ठोस, तरल इंटरफेस में ऊर्जा संतुलन (energy balance) या ऊर्जा प्रवाह की दर पर विचार करें। हमारे पास ks (2)x=8 = Pm LG है। यह है मोल्ड, यह ठोस हिस्सा है और यह मूल रूप से तरल हिस्सा है इसलिए हम इस_x = 8 के बारे में बात कर रहे हैं समय के फलन के रूप में। तो अगर वहाँ एक गहराई है तो ks (24)xs =PL होना चाहिए ।
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हो जाएगा, यह लगभग नगण्य है। तो ऐसे मामले में प्रबल तापीय प्रतिरोध क्षेत्र चार द्वारा होगा जिसे मैं अभी दिखाया। इसलिए अन्य सभी क्षेत्र के तापीय प्रतिरोध को नगण्य लेकर, किसी भी समय तापमान का वितरण नीचे की आकृति में दिखाया गया आकार लेता है। तो यहाँ मोल्ड मेटल इंटरफ़ेस या कास्टिंग सतह का तापमान आठ समय के साथ अचर माना जा सकता है, क्योंकि मोल्ड भी पानी से ठंडा है। इसलिए आपके पास एक पूरी तरह से पानी से ठंढा मोल्ड है, तो जाहिर है कि इस विशेष धातु की सतह का तापमान अचर होगा, तो हम मान लें कि तापमान आठ अस्सी है, और हम हिमांक को आठ मान लेते हैं, जो कि पोरिंग तापमान से अलग नहीं है, तो e = छः है। तो यह धातु के हिमांक को इंगित करता है और किसी समय t पर आठ ठोसीकरण के गहराई को इंगित करता है जैसा कि आप देख सकते हैं। यह ठोस तरल फ्रंट है और यह आगे dS से बढ़ रहा है और आठ उस शेल की तात्कालिक मोटाई है जो यहां विकसित किया जा रहा है ठोस शेल और प्रक्रिया को एक आयामी ऊष्मा हस्तांतरण समस्या के रूप में बहुत कम त्रुटि के साथ आदर्श बनाया जा सकता है क्योंकि हमारे पास लगभग एक ऊष्मा अवशोषक है मोल्ड के रूप में क्योंकि यह पानी से ठंडा मोल्ड है और इसलिए ऊष्मा हस्तांतरण आम तौर पर एक आयामी होगा। अधिकतम तापीय प्रतिरोध जो इस तरल को दिया जाता है हिमांक पर वास्तव में साँचे का ठोस भाग होता है और इसका दूसरा सिरा वास्तव में एक अचर तापमान सतह या अचर कास्टिंग सतह तापमान आठ होता है। तो आइए हम इसे देखते हैं इस तरह की समस्या वास्तव में क्या होती है या कैसे होती है, ठोसीकरण समय का अनुमान क्या होगा । तो आइए हम ठोसीकरण समय का अनुमान लगाते हैं, इसलिए हमें वास्तव में dआठ = दो मिलता है। हम यहाँ मोल्ड की मोटाई या कास्टिंग मोटाई h के बराबर मानते हैं, इसलिए कास्टिंग के दोनों ओर से ऊष्मा हस्तांतरण होता है इसलिए h/दो वास्तव में एक सतह है जिसके साथ दोनों तरफ से ठोसीकरण आगे बढ़ता है और रुकता है। तो तापमान का प्रोफ़ाइल रेंज X के भीतर शून्य और आठ के बीच शून्य. होता है। मुझे लगता है कि पहले इस के बारे में बात की थी जब हमने रेत के सांचे में तापीय चालकता और तापमान वितरण का प्रश्न किया था। इसलिए मैं यह बताने नहीं जा रहा हूं कि यह समीकरण कैसे आया या आप पहले से ही जानते हैं कि यह एक सिमिलरिटी वैरिएबल विश्लेषण और एक आयामी ऊष्मा हस्तांतरण समस्या से आया है जो हमने वास्तव में हल की थी रेत मोल्ड के मामले में । इसलिए इस मामले में मैं सिर्फ उल्लेख करूंगा कि शून्य एक इंटेग्रेशन अचर है और हम इसके बारे में परेशान नहीं होंगे क्योंकि अंततः अपने लिए इस मान का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है गणना में, इसलिए यह एक इंटेग्रेशन अचर है यदि आप पूरी प्रक्रिया को याद करते हैं हल करने की, जहां कई ऐसे इंटेग्रल थे जिन्हें का वास्तविक मान का अनुमान लगाने के लिए तैयार किया गया था। एक Qs मूल रूप से सांचे की तापीय डिफ्यूजीविटी है जो वास्तव में मोल्ड की तापीय चालकता के प्रति इकाई घनत्व से दी जाती है। तो x = आठ पर आठ = आठ है तो अगर इस मां को समीकरण में डालें तो Of Os है, जो आपको याद = a दोVast Ocx - Os दिलाता है कि यह कास्टिंग सतह का तापमान है। तो आप यह मान रहे हैं कि मोल्ड पानी से ठंडा होता है और अवशोषक के रूप में कार्य करता है, इसलिए यह वास्तव में बदल नहीं सकता क्योंकि हिमांक और कास्टिंग की सतह का तापमान समान है और शून्यw और शून्य, इंटेग्रेशन अचर हैं और इसलिए यह वास्तव में एक अचर एक है। आइए हम इसे अचर एक कहते हैं, इसलिए अब हमारे पास है। अनुपात पाँच=एक हज़ार के रूप में परिभाषित किया गया है और दूसरे शब्दों में आठ = पच्चीस Var है है। मान लो x = आठ है। तो आगे हम मान लेते हैं कि एक अन्य और हमारे पास = ^ है। एक बार फिर, हम पाते हैं कि ठोसीकरण की गहराई समय के वर्गमूल के रूप में बदलती है जैसा आप यहां देख सकते हैं। अब ठोसीकरण के समय का पता लगाने के लिए छः का निर्धारण किया जाना चाहिए, इन दो समीकरणों के साथ। तो आइए हम ठोस, तरल इंटरफेस में ऊर्जा संतुलन या ऊर्जा प्रवाह की दर पर विचार करें। हमारे पास ks x=आठ = Pm LG है। यह है मोल्ड, यह ठोस हिस्सा है और यह मूल रूप से तरल हिस्सा है इसलिए हम इस_x = आठ के बारे में बात कर रहे हैं समय के फलन के रूप में। तो अगर वहाँ एक गहराई है तो ks xs =PL होना चाहिए ।
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टीवी के पॉपुलर शो 'कसौटी जिंदगी की' में अनुराग का किरदार निभाने वाले पार्थ समथान (Parth Samthan) काफी दिनों से अपने म्यूजिक वीडियो 'पहले प्यार का पहला गम' (Pehle Pyaar Ka Pehla Gham) को लेकर चर्चा में बने हुए थे। गुरुवार को ये सॉन्ग रिलीज कर दिया गया है।
बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) में काफी कुछ देखने को मिल रहा है। विकास गुप्ता (Vikas Gupta) ने शो में बतौर चैलेंजर एंट्री की, उसके बाद से ही वो लगातार चर्चाओं में बने हुए हैं। पहले उनकी अर्शी खान से लड़ाई हुई, जिसके बाद उनकी अली गोनी और जैस्मीन भसीन के बीच विवाद हुआ।
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टीवी के पॉपुलर शो 'कसौटी जिंदगी की' में अनुराग का किरदार निभाने वाले पार्थ समथान काफी दिनों से अपने म्यूजिक वीडियो 'पहले प्यार का पहला गम' को लेकर चर्चा में बने हुए थे। गुरुवार को ये सॉन्ग रिलीज कर दिया गया है। बिग बॉस चौदह में काफी कुछ देखने को मिल रहा है। विकास गुप्ता ने शो में बतौर चैलेंजर एंट्री की, उसके बाद से ही वो लगातार चर्चाओं में बने हुए हैं। पहले उनकी अर्शी खान से लड़ाई हुई, जिसके बाद उनकी अली गोनी और जैस्मीन भसीन के बीच विवाद हुआ।
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भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में आपराधिक गतिविधियों के मामलों में तेजी से बढ़त हो रही है, वही इन्हीं गतिविधियों पर लगाम कसते हुए पुलिस द्वारा नियमित कार्रवाई की जा रही हैं। इस बीच अब राजधानी भोपाल की अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर की आड़ में चलाए जा रहे देह व्यापार के अड्डे का पुलिस ने खुलासा किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार चल रहा था, पुलिस ने स्पा सेंटर पर छापा मारा तो संदिग्ध हालत में लड़के लड़कियां पकड़ाए गए। पुलिस की अचानक छापेमारी में लड़के लड़कियों ने भागना शुरु कर दिया लेकिन पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने स्पा सेंटर के मैनेजर को भी पकड़ा है।
दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर में देह व्यापार किया जा रहा है। जिसके बाद पुलिस ने छापा मारने की प्लानिंग की। पुलिस ने कस्टमर बनाकर अपने एक जवान को स्पा सेंटर पर भेजा। अंदर जाकर जवान ने एक हजार रुपए में सौदा तय किया। फिर उसने इशारा करके सेंटर के पास मौजूद टीम को बताया और पुलिस ने रेड मार दी। पुलिस का छापा पड़ते ही स्पा सेंटर में मौजूद युवक-युवतियों में भगदड़ मच गई और वो अपने आप को बचाने के लिए यहां वहां भागने लगे थे।
पुलिस ने स्पा सेंटर के संचालक साईंनाथ कॉलोनी कोलार के रहने वाले गौरव वाधवानी, ग्राहक अभिषेक मिश्रा, सौरभ मिहानी, मितेश लालवानी और राजेन्द्र समेत कई को गिरफ्तार किया है। वही मौके से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है। पकड़ी गई युवतियों में 2 नॉर्थ ईस्ट और एक नेपाल की है। पता चला है कि स्पा सेंटर का मालिक नेपाली लड़कियों को रशियन बताता था। पुलिस होटल को लेकर जानकारियां जुटा रही है।
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भोपाल, मध्यप्रदेश। प्रदेश में आपराधिक गतिविधियों के मामलों में तेजी से बढ़त हो रही है, वही इन्हीं गतिविधियों पर लगाम कसते हुए पुलिस द्वारा नियमित कार्रवाई की जा रही हैं। इस बीच अब राजधानी भोपाल की अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर की आड़ में चलाए जा रहे देह व्यापार के अड्डे का पुलिस ने खुलासा किया है। मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार चल रहा था, पुलिस ने स्पा सेंटर पर छापा मारा तो संदिग्ध हालत में लड़के लड़कियां पकड़ाए गए। पुलिस की अचानक छापेमारी में लड़के लड़कियों ने भागना शुरु कर दिया लेकिन पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने स्पा सेंटर के मैनेजर को भी पकड़ा है। दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि अरेरा कॉलोनी में स्पा सेंटर में देह व्यापार किया जा रहा है। जिसके बाद पुलिस ने छापा मारने की प्लानिंग की। पुलिस ने कस्टमर बनाकर अपने एक जवान को स्पा सेंटर पर भेजा। अंदर जाकर जवान ने एक हजार रुपए में सौदा तय किया। फिर उसने इशारा करके सेंटर के पास मौजूद टीम को बताया और पुलिस ने रेड मार दी। पुलिस का छापा पड़ते ही स्पा सेंटर में मौजूद युवक-युवतियों में भगदड़ मच गई और वो अपने आप को बचाने के लिए यहां वहां भागने लगे थे। पुलिस ने स्पा सेंटर के संचालक साईंनाथ कॉलोनी कोलार के रहने वाले गौरव वाधवानी, ग्राहक अभिषेक मिश्रा, सौरभ मिहानी, मितेश लालवानी और राजेन्द्र समेत कई को गिरफ्तार किया है। वही मौके से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई है। पकड़ी गई युवतियों में दो नॉर्थ ईस्ट और एक नेपाल की है। पता चला है कि स्पा सेंटर का मालिक नेपाली लड़कियों को रशियन बताता था। पुलिस होटल को लेकर जानकारियां जुटा रही है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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आज समाज डिजिटल, पानीपतः
पानीपत। शहर की वधावा राम कॉलोनी में पड़ोस के रहने वाले अपराधिक किस्म के व्यक्ति ने सिलाई सेंटर संचालक व उसके दोस्त पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी। मगर आरोपियों ने वारदात के दौरान 2600 रुपए की नकदी भी लूट ली। मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ लूट, आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में केस दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस को दी शिकायत में राजकुमार ने बताया कि वह राधा एंक्लेव वधावा राम कॉलोनी का रहने वाला है। रविवार शाम 5 बजे वह कॉलोनी में अपने सिलाई सेंटर के बाहर खड़ा था। सेंटर के सामने गोलू वर्मा नाम के शख्स की दुकान व मकान हैं। जो बीच गली में खड़े होकर गाली गलौज कर रहा था व मादक पदार्थ गांजापति बेच रहा था। जिसको राजकुमार ने ऐसा करने से मना किया, इसी बात से आरोपी गोलू तैश में आ गया और उसने राजकुमार के साथ मारपीट शुरू कर दी।
मारपीट के दौरान उसने उसकी 2600 रुपए की नकदी भी लूट ली। राजकुमार ने मामले की शिकायत डायल 112 पर दी। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी मौके से फरार हो गए। रात 8:30 बजे आरोपी 10-15 युवकों के साथ लाठी-डंडों व पिस्तौल से लैस होकर वहां आया। आरोपी ने राजकुमार की तरफ 2 गोलियां भी चलाई। गनीमत रही कि वह बाल-बाल बच गया। आरोपियों में प्रदीप, कुंडू व धीरज भी शामिल थे। बदमाश मौके पर बुलेट बाइक छोड़कर फरार हो गए।
राजकुमार ने बताया कि शाम 5 बजे जब आरोपियों ने उसके साथ झगड़ा किया था, उस दौरान उसके साथ कॉलोनी का ही मनदीप नाम का युवक भी खड़ा था। मनदीप ने इस झगड़े में बीच-बचाव करने का प्रयास किया था। आरोपियों ने उसे भी देख लेने की धमकी दी थी। देर रात करीब 12 बजे आरोपी मनदीप के घर पिछली दीवार पर सीढ़ी लगाकर दाखिल हुए। जैसे ही घर में करीब 12 लोग घुसे, तो घर में मौजूद पालतू कुत्ते ने भोकना शुरू कर दिया। जिससे मनदीप की आंख खुल गई। हड़बड़ाहट में आरोपियों ने उसके घर की दीवार पर गोली दागी। अपने बचाव में मनदीप ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से दो फायर आरोपियों की तरफ किए, मगर दोनों तरफ हुई गोलीबारी में किसी को भी गोली नहीं लगी। पुलिस ने मनदीप के घर से एक खाली खोल बरामद किया है।
राजकुमार का कहना है कि आरोपी अपराधिक प्रवृत्ति के हैं। जिन पर पहले भी लूट समेत कई संगीन आरोपों में मुकदमा दर्ज है। हाल ही में आरोपी गोलू जेल से बाहर आया हैं। उसने कुछ ही समय पहले अपनी सास के साथ मारपीट की थी। जिस दौरान सास को गंभीर चोटे आई थी। अब आरोपी सास से समझौता करने की एवज में राजकुमार से डेढ़ लाख रुपए की मांग करता है। आरोप है कि आरोपी ने कल भी वारदात के दौरान रुपए मांगे थे।
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आज समाज डिजिटल, पानीपतः पानीपत। शहर की वधावा राम कॉलोनी में पड़ोस के रहने वाले अपराधिक किस्म के व्यक्ति ने सिलाई सेंटर संचालक व उसके दोस्त पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी। मगर आरोपियों ने वारदात के दौरान दो हज़ार छः सौ रुपयापए की नकदी भी लूट ली। मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ लूट, आर्म्स एक्ट समेत कई संगीन धाराओं में केस दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में राजकुमार ने बताया कि वह राधा एंक्लेव वधावा राम कॉलोनी का रहने वाला है। रविवार शाम पाँच बजे वह कॉलोनी में अपने सिलाई सेंटर के बाहर खड़ा था। सेंटर के सामने गोलू वर्मा नाम के शख्स की दुकान व मकान हैं। जो बीच गली में खड़े होकर गाली गलौज कर रहा था व मादक पदार्थ गांजापति बेच रहा था। जिसको राजकुमार ने ऐसा करने से मना किया, इसी बात से आरोपी गोलू तैश में आ गया और उसने राजकुमार के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट के दौरान उसने उसकी दो हज़ार छः सौ रुपयापए की नकदी भी लूट ली। राजकुमार ने मामले की शिकायत डायल एक सौ बारह पर दी। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी मौके से फरार हो गए। रात आठ:तीस बजे आरोपी दस-पंद्रह युवकों के साथ लाठी-डंडों व पिस्तौल से लैस होकर वहां आया। आरोपी ने राजकुमार की तरफ दो गोलियां भी चलाई। गनीमत रही कि वह बाल-बाल बच गया। आरोपियों में प्रदीप, कुंडू व धीरज भी शामिल थे। बदमाश मौके पर बुलेट बाइक छोड़कर फरार हो गए। राजकुमार ने बताया कि शाम पाँच बजे जब आरोपियों ने उसके साथ झगड़ा किया था, उस दौरान उसके साथ कॉलोनी का ही मनदीप नाम का युवक भी खड़ा था। मनदीप ने इस झगड़े में बीच-बचाव करने का प्रयास किया था। आरोपियों ने उसे भी देख लेने की धमकी दी थी। देर रात करीब बारह बजे आरोपी मनदीप के घर पिछली दीवार पर सीढ़ी लगाकर दाखिल हुए। जैसे ही घर में करीब बारह लोग घुसे, तो घर में मौजूद पालतू कुत्ते ने भोकना शुरू कर दिया। जिससे मनदीप की आंख खुल गई। हड़बड़ाहट में आरोपियों ने उसके घर की दीवार पर गोली दागी। अपने बचाव में मनदीप ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से दो फायर आरोपियों की तरफ किए, मगर दोनों तरफ हुई गोलीबारी में किसी को भी गोली नहीं लगी। पुलिस ने मनदीप के घर से एक खाली खोल बरामद किया है। राजकुमार का कहना है कि आरोपी अपराधिक प्रवृत्ति के हैं। जिन पर पहले भी लूट समेत कई संगीन आरोपों में मुकदमा दर्ज है। हाल ही में आरोपी गोलू जेल से बाहर आया हैं। उसने कुछ ही समय पहले अपनी सास के साथ मारपीट की थी। जिस दौरान सास को गंभीर चोटे आई थी। अब आरोपी सास से समझौता करने की एवज में राजकुमार से डेढ़ लाख रुपए की मांग करता है। आरोप है कि आरोपी ने कल भी वारदात के दौरान रुपए मांगे थे।
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Priyanka Chopra: प्रियंका और निक सेरोगेट पैरेन्ट्स है। कपल की बेटी जन्म के तुरंत बाद से करीब 100 दिन तक एनआईसीयू में थी।
Priyanka Chopra: बॉलीवुड-हॉलीवुड की खूबसूरत जोड़ी प्रियंका और निक जोनस सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहते हैं। इन दिनों ये जोड़ा अपने पैरेंटहुड को एन्जॉय कर रहा है। इसी साल जनवरी में इस प्यारे से जोड़े ने सरोगेसी के जरिए अपने पहले बच्चे का सुख पाया है। निक और प्रियंका की बच्ची का नाम मालती मैरी चोपड़ा जोनस(Malti Marie Chopra Jonas) है। लेकिन फैंस को कपल ने ये खबर 1 मई को सुनाई थी। उस दौरान एक पोस्ट के जरिए कपल ने बताया था कि एनआईसीयू में 100 दिन बिताने के बाद उनकी प्यारी छोटी सी बेटी घर वापस आ गई है। एनआईसीयू के इस 100 दिन के बारे में अब कपल ने खुलासा किया है।
प्रियंका और निक सेरोगेट पैरेन्ट्स है। कपल की बेटी जन्म के तुरंत बाद से करीब 100 दिन तक एनआईसीयू में थी। ऐसे में एनआईसीयू के बारें इस कपल ने अब खुलासा किया है। उन्होंने ये बताया कि आखिर बेटी के हॉस्पिटल में इतने दिनों तक रहने वाली बात को सोशल मीडिया पर क्यों जाहिर नहीं किया। इसके पीछे आखिर क्या वजह थी।
ऐसे में एक सवाल का जवाब देते हुए निक जोनस ने कहा, "हमने (प्रियंका-निक) अपनी बेबी को लेकर जो कुछ भी सोशल मीडिया पर लिखा था वह हमारी फीलिंग थी। हमने वही लिखा जो हमने महसूस किया। हम आभारी हैं उन लोगों का जिसकी वजह से हम अपनी बेबी को घर लेकर आ पाए थे। उन सभी लोगों को शुक्रिया करता हूं हॉस्पिटल में हमारी इस जर्नी का हिस्सा रहे।
इंटरव्यू में आगे बात करते हुए निक ने कहा कि वे अपने पोस्ट से उन लोगों को धन्यवाद देना चाहते थे। वहीं वो ये भी चाहते थे कि उन लोगों को इस जर्नी के बारे में पता चले जो इसके हिस्सा बने थे। फिर चाहे वो डायबिटीज या कोई और चैलेंज हो जिससे हम गुजरे हैं, आप अकेले नहीं हैं।
आगे निक ने प्रियंका के बारे में बात करते हुए बताया कि वह एक मजबूत मां और परफेक्ट पार्टनर हैं। चाहे कुछ भी हो वह "चट्टान" की तरह साथ रहती हैं। उस समय मजबूती से खड़ी रहीं और वह अभी भी इस जर्नी में ठीक वैसा ही कर रही हैं। जब से बेटी घर आई है हम दोनों उसी के बारे में बात करते रहते हैं। "
मालती के घर आने के बाद मदर्स डे को लेकर निक ने बताया कि फैमिली ने प्रियंका का पहला मदर्स डे मालती के साथ सेलिब्रेट किया। घर में मालती के आने से खुशियां ही खुशियां आ गई हैं।
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Priyanka Chopra: प्रियंका और निक सेरोगेट पैरेन्ट्स है। कपल की बेटी जन्म के तुरंत बाद से करीब एक सौ दिन तक एनआईसीयू में थी। Priyanka Chopra: बॉलीवुड-हॉलीवुड की खूबसूरत जोड़ी प्रियंका और निक जोनस सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहते हैं। इन दिनों ये जोड़ा अपने पैरेंटहुड को एन्जॉय कर रहा है। इसी साल जनवरी में इस प्यारे से जोड़े ने सरोगेसी के जरिए अपने पहले बच्चे का सुख पाया है। निक और प्रियंका की बच्ची का नाम मालती मैरी चोपड़ा जोनस है। लेकिन फैंस को कपल ने ये खबर एक मई को सुनाई थी। उस दौरान एक पोस्ट के जरिए कपल ने बताया था कि एनआईसीयू में एक सौ दिन बिताने के बाद उनकी प्यारी छोटी सी बेटी घर वापस आ गई है। एनआईसीयू के इस एक सौ दिन के बारे में अब कपल ने खुलासा किया है। प्रियंका और निक सेरोगेट पैरेन्ट्स है। कपल की बेटी जन्म के तुरंत बाद से करीब एक सौ दिन तक एनआईसीयू में थी। ऐसे में एनआईसीयू के बारें इस कपल ने अब खुलासा किया है। उन्होंने ये बताया कि आखिर बेटी के हॉस्पिटल में इतने दिनों तक रहने वाली बात को सोशल मीडिया पर क्यों जाहिर नहीं किया। इसके पीछे आखिर क्या वजह थी। ऐसे में एक सवाल का जवाब देते हुए निक जोनस ने कहा, "हमने अपनी बेबी को लेकर जो कुछ भी सोशल मीडिया पर लिखा था वह हमारी फीलिंग थी। हमने वही लिखा जो हमने महसूस किया। हम आभारी हैं उन लोगों का जिसकी वजह से हम अपनी बेबी को घर लेकर आ पाए थे। उन सभी लोगों को शुक्रिया करता हूं हॉस्पिटल में हमारी इस जर्नी का हिस्सा रहे। इंटरव्यू में आगे बात करते हुए निक ने कहा कि वे अपने पोस्ट से उन लोगों को धन्यवाद देना चाहते थे। वहीं वो ये भी चाहते थे कि उन लोगों को इस जर्नी के बारे में पता चले जो इसके हिस्सा बने थे। फिर चाहे वो डायबिटीज या कोई और चैलेंज हो जिससे हम गुजरे हैं, आप अकेले नहीं हैं। आगे निक ने प्रियंका के बारे में बात करते हुए बताया कि वह एक मजबूत मां और परफेक्ट पार्टनर हैं। चाहे कुछ भी हो वह "चट्टान" की तरह साथ रहती हैं। उस समय मजबूती से खड़ी रहीं और वह अभी भी इस जर्नी में ठीक वैसा ही कर रही हैं। जब से बेटी घर आई है हम दोनों उसी के बारे में बात करते रहते हैं। " मालती के घर आने के बाद मदर्स डे को लेकर निक ने बताया कि फैमिली ने प्रियंका का पहला मदर्स डे मालती के साथ सेलिब्रेट किया। घर में मालती के आने से खुशियां ही खुशियां आ गई हैं।
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ग्वालियर में भारतीय जनता पार्टी की महापौर प्रत्याशी सुमन शर्मा द्वारा नामांकन जमा करते समय आदर्श आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया उपाध्यक्ष अजयसिंह यादव ने कहा कि किसी भी प्रत्याशी द्वारा नामांकन जमा कराते समय उम्मीदवार के साथ 3 से अधिक व्यक्ति उपस्थित नहीं रह सकते हैं। लेकिन ग्वालियर में भाजपा द्वारा महापौर प्रत्याशी के लिए नामांकन फार्म जमा कराते समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और भाजपा के अन्य नेताओं सहित करीब एक दर्जन लोग उपस्थित थे। यह आदर्श आचार संहिता का घोर उल्लंघन है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि भाजपा की महापौर प्रत्याशी द्वारा नामांकन जमा कराने के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा स्पष्ट तौर पर खुलकर किये गये आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का प्रकरण दर्ज कर ग्वालियर की भाजपा महापौर प्रत्याशी का नामांकन रद्द किया जाये और इस दौरान वहां उपस्थित तमाम भाजपा नेताओं पर आचार संहिता के उल्लंघन की कार्यवाही की जाये।
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ग्वालियर में भारतीय जनता पार्टी की महापौर प्रत्याशी सुमन शर्मा द्वारा नामांकन जमा करते समय आदर्श आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया उपाध्यक्ष अजयसिंह यादव ने कहा कि किसी भी प्रत्याशी द्वारा नामांकन जमा कराते समय उम्मीदवार के साथ तीन से अधिक व्यक्ति उपस्थित नहीं रह सकते हैं। लेकिन ग्वालियर में भाजपा द्वारा महापौर प्रत्याशी के लिए नामांकन फार्म जमा कराते समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और भाजपा के अन्य नेताओं सहित करीब एक दर्जन लोग उपस्थित थे। यह आदर्श आचार संहिता का घोर उल्लंघन है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि भाजपा की महापौर प्रत्याशी द्वारा नामांकन जमा कराने के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा स्पष्ट तौर पर खुलकर किये गये आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का प्रकरण दर्ज कर ग्वालियर की भाजपा महापौर प्रत्याशी का नामांकन रद्द किया जाये और इस दौरान वहां उपस्थित तमाम भाजपा नेताओं पर आचार संहिता के उल्लंघन की कार्यवाही की जाये।
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बहराइच में पिछले एक सप्ताह से जिला अधिकारी अभय के खिलाफ चल रहा होमगार्ड संघ का विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है। ये प्रदर्शन डीएम ऑफिस के पास बने धरना स्थल पर किया जा रहा था। होमगार्डों का आरोप था कि जिला अधिकारी अभय ने डीएम आवास की सुरक्षा में लगे एक कमांडर समेत 5 होमगार्ड के जवानों को चंदन के दो पेड़ों की चोरी के आरोप में खूब पीटा। जिससे नाराज होमगार्ड संघ जिला अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। हालांकि अब पुलिस के बड़े अधिकारियों ने समझाबूझा कर मामला शांत करा दिया है ।
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बहराइच में पिछले एक सप्ताह से जिला अधिकारी अभय के खिलाफ चल रहा होमगार्ड संघ का विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है। ये प्रदर्शन डीएम ऑफिस के पास बने धरना स्थल पर किया जा रहा था। होमगार्डों का आरोप था कि जिला अधिकारी अभय ने डीएम आवास की सुरक्षा में लगे एक कमांडर समेत पाँच होमगार्ड के जवानों को चंदन के दो पेड़ों की चोरी के आरोप में खूब पीटा। जिससे नाराज होमगार्ड संघ जिला अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। हालांकि अब पुलिस के बड़े अधिकारियों ने समझाबूझा कर मामला शांत करा दिया है ।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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करण की शेयर की गई क्लिप में, पिछले एपिसोड से अलग-अलग सेलेब्स को दिखाया गया। फिल्ममेकर ने कहा, 'कॉफी विद करण सीजन 7 वापस आ गया है . . . इस बार यह बड़ा, बेहतर और अधिक सुंदर होने वाला है। बने रहें। ' वीडियो में सारा अली खान, ऐश्वर्या राय, सलमान खान और आलिया भट्ट भी नजर आ रही हैं।
इससे पहले मई में, करण जौहर ने 'कॉफ़ी विद करण सीजन 7' के सेट से तस्वीरें शेयर की थीं। टॉक शो को सेलेब्स के जोड़े में आने के लिए जाना जाता है। 'कॉफ़ी विद करण सीज़न 6' के लास्ट एपिसोड को लिए, होस्ट ने करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा को इनवाइट किया था, जिनका कथित तौर पर एक-दूसरे के साथ लंबे समय से विवाद था। जबकि 'कॉफी विद करण सीजन 7' में कौन सी हस्तियां एक साथ दिखाई देंगी, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्की कौशल और कटरीना कैफ शो की शोभा बढ़ाएंगे।
करण के शो में रणबीर-आलिया?
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करण की शेयर की गई क्लिप में, पिछले एपिसोड से अलग-अलग सेलेब्स को दिखाया गया। फिल्ममेकर ने कहा, 'कॉफी विद करण सीजन सात वापस आ गया है . . . इस बार यह बड़ा, बेहतर और अधिक सुंदर होने वाला है। बने रहें। ' वीडियो में सारा अली खान, ऐश्वर्या राय, सलमान खान और आलिया भट्ट भी नजर आ रही हैं। इससे पहले मई में, करण जौहर ने 'कॉफ़ी विद करण सीजन सात' के सेट से तस्वीरें शेयर की थीं। टॉक शो को सेलेब्स के जोड़े में आने के लिए जाना जाता है। 'कॉफ़ी विद करण सीज़न छः' के लास्ट एपिसोड को लिए, होस्ट ने करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा को इनवाइट किया था, जिनका कथित तौर पर एक-दूसरे के साथ लंबे समय से विवाद था। जबकि 'कॉफी विद करण सीजन सात' में कौन सी हस्तियां एक साथ दिखाई देंगी, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्की कौशल और कटरीना कैफ शो की शोभा बढ़ाएंगे। करण के शो में रणबीर-आलिया?
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Aquarius Tarot Card Prediction: निजी विषयों में सुधार की स्थिति बनी रहेगी. सक्रियता और संपर्क को बल मिलेगा. महत्वपूर्ण मामले हित में बने रहेंगे. जरूरी कार्य साधने में सफल होंगे और सहजता से आगे बढ़ेंगे.
Aquarius Tarot Card Reading: कुंभ राशि के लिए थ्री आफ वांड्स का कार्ड इस प्रकार के संकेत दे रहा है कि आज का दिन आपको उच्च मनोबल और साहस के साथ महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए प्रेरित करेगा. अपनी सूझबूझ को आगे रखकर फैसले लेंगे और समकक्षों के साथ और सामंजस्य से स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखेंगे. साझीदार और करीबी मददगार होंगे और आर्थिक वाणिज्यिक मामले गति लेंगे.
भूमि भवन के विषय पक्ष में बनेंगे. विविध मामलों में सक्रियता से बनाए रखेंगे और समझौतों को गति मिलेगी. साझीदारी की भावना बल पाएगी और सामूहिक कार्यां मे सहयोग पाएंगे. लेनदेन को आगे बढ़ाएंगे और सहकारिता का भाव बना रहेगा. फोकस रखेंगे और नेतृत्व पर बल देंगे.दिनचर्या नियमित रखेंगे और स्पष्टता से अपना पक्ष रखेंगे.
निजी विषयों में सुधार की स्थिति बनी रहेगी. सक्रियता और संपर्क को बल मिलेगा. महत्वपूर्ण मामले हित में बने रहेंगे. जरूरी कार्य साधने में सफल होंगे और सहजता से आगे बढ़ेंगे. मूल्यवान वस्तुओं में रुचि रहेगी और योजनाएं जाहिर करने से बचेंगे. स्थायित्व पर जोर रखेंगे. हर संभव राह बनाने का भाव रहेगा.
स्थिति सुधारने में सफलता पाएंगे और घनिष्ठ मित्रों का साथ बना रहेगा. निरंतरता बनाए रखेंगे और समय सीमा का ख्याल रखेंगे. अपनो की खूबियों को बढ़ावा देंगे. स्वास्थ्य के प्रति सजगता बनाए रखें. विविध गतिविधियों में सक्रियता रखेंगे और सहज परिणाम अर्जित करेंगे. करीबियों से मेल मुलाकात होगी और मौसमी बीमारियों से सावधान रहें.
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Aquarius Tarot Card Prediction: निजी विषयों में सुधार की स्थिति बनी रहेगी. सक्रियता और संपर्क को बल मिलेगा. महत्वपूर्ण मामले हित में बने रहेंगे. जरूरी कार्य साधने में सफल होंगे और सहजता से आगे बढ़ेंगे. Aquarius Tarot Card Reading: कुंभ राशि के लिए थ्री आफ वांड्स का कार्ड इस प्रकार के संकेत दे रहा है कि आज का दिन आपको उच्च मनोबल और साहस के साथ महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए प्रेरित करेगा. अपनी सूझबूझ को आगे रखकर फैसले लेंगे और समकक्षों के साथ और सामंजस्य से स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखेंगे. साझीदार और करीबी मददगार होंगे और आर्थिक वाणिज्यिक मामले गति लेंगे. भूमि भवन के विषय पक्ष में बनेंगे. विविध मामलों में सक्रियता से बनाए रखेंगे और समझौतों को गति मिलेगी. साझीदारी की भावना बल पाएगी और सामूहिक कार्यां मे सहयोग पाएंगे. लेनदेन को आगे बढ़ाएंगे और सहकारिता का भाव बना रहेगा. फोकस रखेंगे और नेतृत्व पर बल देंगे.दिनचर्या नियमित रखेंगे और स्पष्टता से अपना पक्ष रखेंगे. निजी विषयों में सुधार की स्थिति बनी रहेगी. सक्रियता और संपर्क को बल मिलेगा. महत्वपूर्ण मामले हित में बने रहेंगे. जरूरी कार्य साधने में सफल होंगे और सहजता से आगे बढ़ेंगे. मूल्यवान वस्तुओं में रुचि रहेगी और योजनाएं जाहिर करने से बचेंगे. स्थायित्व पर जोर रखेंगे. हर संभव राह बनाने का भाव रहेगा. स्थिति सुधारने में सफलता पाएंगे और घनिष्ठ मित्रों का साथ बना रहेगा. निरंतरता बनाए रखेंगे और समय सीमा का ख्याल रखेंगे. अपनो की खूबियों को बढ़ावा देंगे. स्वास्थ्य के प्रति सजगता बनाए रखें. विविध गतिविधियों में सक्रियता रखेंगे और सहज परिणाम अर्जित करेंगे. करीबियों से मेल मुलाकात होगी और मौसमी बीमारियों से सावधान रहें.
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इस वीडियो में दीपक श्रीसंथ पर इल्जाम लगाते हुए कह रहे है कि वह इस शो की इज्जत नहीं करते है और ना इस शो के वर्कर्स और कंटेस्टेंट्स की इज्जत करते है। इतना सुनते ही श्रीसंथ तिलमिला उठते है, लेकिन जैसे ही रोहित की बारी आती है श्रीसंथ अपने गुस्से पर काबू ही नहीं कर पाते है। दरअसल रोहित सभी के सामने श्रीसंथ पर इल्जाम लगाते है कि वह अपनी मुंहबोली बहन दीपिका कक्कड़ को गाली दे चुके है।
घर की कैप्टन सुरभि राणा ने इस हफ्ते के लिए दीपिका, जसलीन मथारु, रोमिल चौधरी और दीपक ठाकुर को नॉमिनेट किया है। इसी के साथ मेघा धाड़े को सजा के तौर पर खुद बिग बॉस ने ही इस हफ्ते के लिए नॉमिनेट कर दिया है। इस तरह से कुल मिलाकर इस हफ्ते के लिए 5 सदस्य नॉमिनेट हुए है।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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इस वीडियो में दीपक श्रीसंथ पर इल्जाम लगाते हुए कह रहे है कि वह इस शो की इज्जत नहीं करते है और ना इस शो के वर्कर्स और कंटेस्टेंट्स की इज्जत करते है। इतना सुनते ही श्रीसंथ तिलमिला उठते है, लेकिन जैसे ही रोहित की बारी आती है श्रीसंथ अपने गुस्से पर काबू ही नहीं कर पाते है। दरअसल रोहित सभी के सामने श्रीसंथ पर इल्जाम लगाते है कि वह अपनी मुंहबोली बहन दीपिका कक्कड़ को गाली दे चुके है। घर की कैप्टन सुरभि राणा ने इस हफ्ते के लिए दीपिका, जसलीन मथारु, रोमिल चौधरी और दीपक ठाकुर को नॉमिनेट किया है। इसी के साथ मेघा धाड़े को सजा के तौर पर खुद बिग बॉस ने ही इस हफ्ते के लिए नॉमिनेट कर दिया है। इस तरह से कुल मिलाकर इस हफ्ते के लिए पाँच सदस्य नॉमिनेट हुए है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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रविचंद्रन अश्विन ने एक साथ तोडा कपिल देव और हरभजन सिंह का ये रिकॉर्ड..
स्वास्थ्य केन्द्र से 90 डोज कोरोना वैक्सीन की चोरी, पुलिस में मामला दर्ज..
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रविचंद्रन अश्विन ने एक साथ तोडा कपिल देव और हरभजन सिंह का ये रिकॉर्ड.. स्वास्थ्य केन्द्र से नब्बे डोज कोरोना वैक्सीन की चोरी, पुलिस में मामला दर्ज..
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भौतिकी और गणित एक अवधारणा के बिना नहीं कर सकते हैं"वेक्टर मात्रा"। उसे जानना और पहचानना जरूरी है, साथ ही साथ उसके साथ काम करने में सक्षम होना चाहिए। यह निश्चित रूप से सीखने लायक है, इसलिए भ्रमित न होने और मूर्खतापूर्ण गलतियों को न करने के लिए।
वेक्टर से स्केलर को अलग कैसे करें?
पहले हमेशा एक विशेषता है। यह इसका संख्यात्मक मूल्य है। अधिकांश स्केलर मान सकारात्मक और नकारात्मक दोनों मूल्य ले सकते हैं। उनके उदाहरण बिजली चार्ज, काम, या तापमान हैं। लेकिन ऐसे स्केलर हैं जो नकारात्मक नहीं हो सकते हैं, उदाहरण के लिए, लंबाई और द्रव्यमान।
एक संख्यात्मक मूल्य को छोड़कर वेक्टर मात्रा,जो हमेशा पूर्ण मूल्य में लिया जाता है, भी दिशा द्वारा विशेषता है। इसलिए, इसे ग्राफिकल रूप से दर्शाया जा सकता है, जो कि तीर के रूप में होता है, जिसकी लंबाई एक निश्चित दिशा में निर्देशित मूल्य की परिमाण के बराबर होती है।
लिखते समय, प्रत्येक वेक्टर मात्रा पत्र पर एक तीर चिह्न द्वारा इंगित किया जाता है। यदि हम संख्यात्मक मूल्य के बारे में बात कर रहे हैं, तो तीर लिखा नहीं है या इसे मॉड्यूलो लिया जाता है।
वेक्टरों के साथ अक्सर कौन से कार्यों का प्रदर्शन किया जाता है?
पहला - एक तुलना। वे बराबर हो सकते हैं या नहीं। पहले मामले में, उनके मॉड्यूल एक ही हैं। लेकिन यह एकमात्र शर्त नहीं है। उनके पास समान या विपरीत दिशाएं होनी चाहिए। पहले मामले में, उन्हें बराबर वैक्टर कहा जाना चाहिए। दूसरे में, उनका विरोध किया जाता है। यदि निर्दिष्ट शर्तों में से कम से कम एक नहीं मिला है, तो वेक्टर बराबर नहीं हैं।
फिर अतिरिक्त आता है। यह दो नियमों द्वारा किया जा सकता हैः एक त्रिकोण या समांतरोग्राम। सबसे पहले एक वेक्टर स्थगित करने की आवश्यकता होती है, फिर दूसरा इसके अंत से। इसके परिणाम का परिणाम वह होगा जो पहले की शुरुआत से दूसरे के अंत तक किया जाना चाहिए।
समांतरोग्राम नियम का उपयोग तब किया जा सकता है जबआपको भौतिकी में वेक्टर मात्रा जोड़ने की जरूरत है। पहले नियम के विपरीत, यहां उन्हें एक बिंदु से स्थगित किया जाना चाहिए। फिर उन्हें समांतरोग्राम में पूरा करें। कार्रवाई के नतीजे को एक ही बिंदु से खींचा जाने वाला विकर्ण समानांतर माना जाना चाहिए।
यदि वेक्टर मात्रा को दूसरे से घटाया जाता है, तो उन्हें फिर से एक बिंदु से स्थगित कर दिया जाता है। केवल परिणाम एक वेक्टर होगा जो दूसरे के अंत से पहले के अंत तक जमा होने वाली चीज़ों के साथ मेल खाता है।
भौतिकी में कौन से वैक्टर पढ़ रहे हैं?
वे स्केलर के रूप में कई हैं। आप बस याद कर सकते हैं कि भौतिक विज्ञान में वेक्टर मात्रा क्या है। या उन संकेतों को जानें जिनके द्वारा उनकी गणना की जा सकती है। जो पहला विकल्प पसंद करते हैं, ऐसी तालिका उपयोगी है। इसमें मुख्य वेक्टर भौतिक मात्रा शामिल है।
अब इन मूल्यों में से कुछ के बारे में थोड़ा और।
यह वेक्टर मात्रा के उदाहरण देने के लिए इसके साथ शुरू करने लायक है। यह इस तथ्य के कारण है कि यह पहले के बीच अध्ययन किया गया है।
गति को गति की विशेषता के रूप में परिभाषित किया गया है।अंतरिक्ष में शरीर। वह संख्यात्मक मान और दिशा निर्धारित करता है। इसलिए, गति एक वेक्टर मात्रा है। इसके अलावा, यह आमतौर पर प्रकारों में विभाजित होता है। पहला रैखिक वेग है। रेक्टिलाइनर यूनिफॉर्म मोशन पर विचार करते समय इसे पेश किया जाता है। इसी समय, यह शरीर के द्वारा पथ के अनुपात के बराबर हो जाता है जो आंदोलन के समय तक होता है।
जब उपयोग करने के लिए एक ही सूत्र अनुमेय हैअसमान आंदोलन। इसके बाद ही यह औसत दिखाई देगा। इसके अलावा, जो समय अंतराल चुना जाना चाहिए वह यथासंभव छोटा होना चाहिए। जब समय अंतराल शून्य हो जाता है, तो गति मान पहले से ही तात्कालिक है।
यदि मनमानी गति पर विचार किया जाता है, तोहमेशा गति होती है - एक वेक्टर मात्रा। आखिरकार, इसे प्रत्येक वेक्टर के साथ समन्वयित लाइनों को निर्देशित करने वाले घटकों में विघटित होना पड़ता है। इसके अलावा, इसे समय के साथ त्रिज्या वेक्टर के व्युत्पन्न के रूप में परिभाषित किया गया है।
यह प्रभाव की तीव्रता का माप निर्धारित करता है,जो अन्य पिंडों या खेतों से शरीर की ओर मुड़ता है। चूँकि बल एक सदिश राशि है, यह आवश्यक रूप से परिमाण और दिशा में अपना मूल्य रखता है। चूंकि यह शरीर पर कार्य करता है, जिस बिंदु पर बल लगाया जाता है वह भी महत्वपूर्ण है। बल वैक्टर के दृश्य प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए, आप निम्न तालिका का उल्लेख कर सकते हैं।
इसके अलावा एक और वेक्टर मात्रा हैपरिणामी बल। यह एक शरीर पर कार्य करने वाले सभी यांत्रिक बलों के योग के रूप में परिभाषित किया गया है। इसे परिभाषित करने के लिए, त्रिकोण नियम के सिद्धांत के अनुसार अतिरिक्त प्रदर्शन करना आवश्यक है। केवल पिछले एक के अंत से ही वैक्टर को मोड़ने की आवश्यकता होती है। परिणाम वह होगा जो पहले की शुरुआत को अंतिम के अंत से जोड़ता है।
तीसरा मूल्य विस्थापन है।
आंदोलन के दौरान, शरीर एक निश्चित रेखा का वर्णन करता है। इसे प्रक्षेप पथ कहा जाता है। यह लाइन पूरी तरह से अलग हो सकती है। अधिक महत्वपूर्ण इसकी उपस्थिति नहीं है, लेकिन आंदोलन की शुरुआत और अंत का बिंदु। वे एक खंड से जुड़े हुए हैं, जिसे विस्थापन कहा जाता है। यह एक वेक्टर मात्रा भी है। इसके अलावा, यह हमेशा आंदोलन की शुरुआत से उस बिंदु तक निर्देशित होता है जहां आंदोलन को रोक दिया गया था। इसे लैटिन अक्षर r द्वारा निरूपित करें।
यह प्रश्न प्रकट हो सकता हैः "पथ एक वेक्टर मात्रा है?" सामान्य तौर पर, यह कथन सत्य नहीं है। पथ प्रक्षेप पथ की लंबाई के बराबर है और एक विशिष्ट दिशा नहीं है। एक अपवाद उस स्थिति को माना जाता है जब एक दिशा में एक सीधी रेखा के आंदोलन को माना जाता है। तब विस्थापन वेक्टर के मापांक पथ के साथ मूल्य में मेल खाता है, और उनकी दिशा समान है। इसलिए, जब आंदोलन की दिशा को बदलने के बिना एक सीधी रेखा के साथ आंदोलन पर विचार करते हैं, तो मार्ग को वेक्टर मात्रा के उदाहरणों में शामिल किया जा सकता है।
चौथा मूल्य त्वरण है।
यह परिवर्तन की गति की विशेषता है।गति। इसके अलावा, त्वरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों मूल्य हो सकते हैं। रेक्टिलाइनियर गति के मामले में, इसे अधिक गति की ओर निर्देशित किया जाता है। यदि आंदोलन एक घुमावदार प्रक्षेपवक्र के साथ होता है, तो इसका त्वरण वेक्टर दो घटकों में विघटित होता है, जिनमें से एक को त्रिज्या के साथ वक्रता के केंद्र पर निर्देशित किया जाता है।
त्वरण का औसत और तात्कालिक मूल्य आवंटित करें। पहले की गणना उस समय की एक निश्चित अवधि में गति में परिवर्तन के अनुपात के रूप में की जानी चाहिए। जब विचाराधीन समय अंतराल शून्य हो जाता है, तो वे तात्कालिक त्वरण की बात करते हैं।
एक अन्य तरीके से इसे आंदोलन की मात्रा भी कहा जाता है। आवेग वेक्टर मूल्य इस तथ्य के कारण है कि यह सीधे शरीर पर लागू गति और बल से संबंधित है। दोनों के पास दिशा है और अपना आवेग सेट करें।
परिभाषा के अनुसार, बाद वाला द्रव्यमान के उत्पाद के बराबर हैशरीर की गति। एक शरीर के आवेग की अवधारणा का उपयोग करके, आप न्यूटन के प्रसिद्ध कानून को एक अलग तरीके से लिख सकते हैं। यह पता चला है कि गति में परिवर्तन समय की अवधि के लिए बल के उत्पाद के बराबर है।
भौतिकी में, संवेग के संरक्षण के नियम द्वारा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है, जिसमें कहा गया है कि निकायों की एक बंद प्रणाली में इसकी कुल गति स्थिर है।
हम बहुत संक्षेप में सूचीबद्ध हैं कि भौतिकी पाठ्यक्रम में किन मूल्यों (वेक्टर) का अध्ययन किया जाता है।
स्थिति। रेलों पर एक निश्चित प्लेटफार्म है। एक गाड़ी 4 m / s की गति से आ रही है। मंच और कार का द्रव्यमान क्रमशः 10 और 40 टन है। कार प्लेटफार्म से टकराती है, एक स्वचालित युग्मन होता है। प्रभाव के बाद प्लेटफ़ॉर्म कार सिस्टम की गति की गणना करना आवश्यक है।
समाधान सबसे पहले आपको नोटेशन दर्ज करने की आवश्यकता हैः प्रभाव से पहले कार की गति - वी1, युग्मन के बाद प्लेटफॉर्म के साथ वैगन - v, वैगन मास m1, प्लेटफार्मों - एम2। समस्या की स्थिति के अनुसार गति वी के मूल्य का पता लगाना आवश्यक है।
इस तरह के कार्यों को हल करने के लिए नियमों को बातचीत से पहले और बाद में सिस्टम के एक योजनाबद्ध प्रतिनिधित्व की आवश्यकता होती है। एक्सिस ओएक्स उस दिशा में रेल के साथ निर्देशित करने के लिए उचित है जिस दिशा में कार चलती है।
इन शर्तों के तहत, वैगन प्रणाली को बंद माना जा सकता है। यह इस तथ्य से निर्धारित होता है कि बाहरी शक्तियों की उपेक्षा की जा सकती है। गुरुत्वाकर्षण और समर्थन प्रतिक्रियाएं संतुलित हैं, और रेल पर घर्षण को ध्यान में नहीं रखा जाता है।
गति के संरक्षण के कानून के अनुसार, उनके वेक्टरकार और प्लेटफ़ॉर्म के इंटरैक्शन की राशि प्रभाव के बाद अड़चन के लिए कुल के बराबर है। पहले, प्लेटफ़ॉर्म नहीं चला, इसलिए इसकी गति शून्य थी। केवल कार चली गई, इसकी गति एम का उत्पाद है1 और वी1.
चूंकि झटका अपाच्य था, अर्थात् गाड़ीमंच से टकराया, और फिर वह एक ही दिशा में एक साथ रोल करने लगा, सिस्टम के आवेग ने दिशाओं को नहीं बदला। लेकिन इसका अर्थ अलग हो गया है। अर्थात्, प्लेटफ़ॉर्म के साथ कार के द्रव्यमान का योग और वांछित गति।
आप इस समानता को लिख सकते हैंः एम1 * वी1 = (एम1 + मी2) * वी। यह चयनित अक्ष पर नाड़ी वैक्टर के प्रक्षेपण के लिए सही होगा। इससे वांछित गति की गणना करने के लिए आवश्यक समानता को प्राप्त करना आसान हैः v = m1 * वी1 / (एम1 + मी2)।
नियमों के अनुसार द्रव्यमान के लिए मान को टन से किलोग्राम में बदलना आवश्यक है। इसलिए, उन्हें एक सूत्र में प्रतिस्थापित करते समय, आपको पहले ज्ञात मानों को एक हजार से गुणा करना होगा। सरल गणना 0.75 मीटर / सेकंड की संख्या देती है।
उत्तर। एक प्लेटफॉर्म के साथ कार की गति 0.75 मीटर / सेकंड है।
शर्त। एक उड़ान ग्रेनेड की गति 20 मीटर / सेकंड है। वह दो शार्क में टूट जाती है। पहले 1.8 किग्रा का वजन। यह उस दिशा में आगे बढ़ना जारी है जिसमें ग्रेनेड 50 मीटर / सेकंड की गति से उड़ रहा था। दूसरे टुकड़े का द्रव्यमान 1.2 किलोग्राम है। इसकी गति क्या है?
समाधान टुकड़ों के द्रव्यमान को अक्षरों m द्वारा निर्दिष्ट किया जाए1 और एम2। उनकी गति v होगी1 और वी2। ग्रेनेड की प्रारंभिक गति v है। समस्या में आपको v के मूल्य की गणना करने की आवश्यकता है2.
एक बड़ा टुकड़ा जारी रखने के लिएपूरे ग्रेनेड के समान दिशा में आगे बढ़ें, दूसरा विपरीत दिशा में उड़ना चाहिए। यदि हम उस अक्ष की दिशा का चयन करते हैं जो प्रारंभिक आवेग पर था, तो ब्रेक के बाद धुरी के साथ एक बड़ा टुकड़ा उड़ जाता है, और धुरी के खिलाफ एक छोटा टुकड़ा उड़ जाता है।
इस कार्य को कानून का उपयोग करने की अनुमति हैइस तथ्य के कारण गति को बचाएं कि ग्रेनेड तुरंत टूट जाता है। इसलिए, इस तथ्य के बावजूद कि गुरुत्वाकर्षण का बल ग्रेनेड और उसके हिस्सों पर कार्य करता है, इसके पास नाड़ी वेक्टर की दिशा और इसके मूल्य मॉडुलो के साथ बदलने का समय नहीं है।
ग्रेनेड के फटने के बाद नाड़ी के वेक्टर मानों का योग उसके बराबर है जो इससे पहले था। यदि आप अक्ष OX पर प्रक्षेपण में शरीर के आवेग के संरक्षण का नियम लिखते हैं, तो यह इस तरह दिखाई देगाः (एम1 + मी2) * वी = एम1 * वी1 - एम2 * वी2। इसमें से केवल वांछित गति व्यक्त करें। यह सूत्र द्वारा निर्धारित किया जाता हैः वी2 = (एम1 + मी2) * वी - एम1 * वी1) / एम2। संख्यात्मक मान और गणना के प्रतिस्थापन के बाद, 25 मीटर / सेकंड प्राप्त होता है।
उत्तर। एक छोटे टुकड़े की गति 25 मीटर / सेकंड है।
स्थिति। मास एम के मंच पर बंदूक रखी। इससे एक शॉट प्रोजेक्टाइल मास एम है। यह एक कोण α से क्षितिज की गति v (पृथ्वी के सापेक्ष दिया गया) पर उड़ता है। शॉट के बाद प्लेटफॉर्म की गति का मूल्य जानने के लिए आवश्यक है।
निर्णय। इस समस्या में, आप अक्ष OX पर प्रक्षेपण में गति के संरक्षण के कानून का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन केवल उस मामले में जब बाहरी परिणामी बलों का प्रक्षेपण शून्य है।
धुरी OX की दिशा के लिए आपको उस पक्ष को चुनने की आवश्यकता है जहां प्रक्षेप्य उड़ जाएगा, और क्षैतिज रेखा के समानांतर होगा। इस मामले में, गुरुत्वाकर्षण बलों और OX पर समर्थन की प्रतिक्रिया का अनुमान शून्य होगा।
समस्या सामान्य रूप से हल हो जाएगी, क्योंकि ज्ञात मूल्यों के लिए कोई विशिष्ट डेटा नहीं है। उत्तर एक सूत्र है।
शॉट से पहले आवेग प्रणाली शून्य थी,मंच और प्रक्षेप्य अभी भी थे। आवश्यक प्लेटफ़ॉर्म गति को लैटिन अक्षर यू द्वारा इंगित किया जाए। फिर शॉट के बाद इसकी गति को द्रव्यमान और वेग प्रक्षेपण के उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है। चूंकि प्लेटफ़ॉर्म वापस आ जाएगा (ओएक्स अक्ष की दिशा के खिलाफ), आवेग मूल्य एक शून्य से संकेत के साथ होगा।
प्रक्षेप्य की गति इसके द्रव्यमान का उत्पाद हैअक्ष OX पर गति का प्रक्षेपण। इस तथ्य के कारण कि गति को एक कोण पर क्षितिज पर निर्देशित किया गया है, इसका प्रक्षेपण कोण के कोसाइन द्वारा गुणा की गई गति के बराबर है। अक्षर समानता में, यह इस तरह दिखेगाः 0 = - म्यू + एमवी * कॉस α। इसमें से, साधारण परिवर्तनों द्वारा, एक सूत्र-प्रतिक्रिया प्राप्त की जाती हैः u = (mv * cos α) / एम।
उत्तर। मंच की गति सूत्र u = (mv * cos α) / एम से निर्धारित होती है।
स्थिति। नदी की चौड़ाई इसकी पूरी लंबाई के साथ समान है और l के बराबर है, इसके किनारे समानांतर हैं। नदी में पानी के प्रवाह की ज्ञात दर v1 और नाव की अपनी गति वी2। 1)। नाव के धनुष को पार करते समय विपरीत किनारे पर सख्ती से निर्देशित किया जाता है। क्या दूरी यह नीचे की ओर ले जाएगा? 2)। किस कोण पर α को नाव की नाक को निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि यह प्रस्थान के बिंदु के विपरीत लंबवत बैंक तक पहुंच जाए? ऐसे क्रॉसिंग के लिए कितना समय लगता है?
समाधान 1)। नाव की कुल गति दो मात्राओं की सदिश राशि है। उनमें से पहली नदी का प्रवाह है, जिसे बैंकों के साथ निर्देशित किया जाता है। दूसरी नाव की गति है, जो तट से लंबवत है। ड्राइंग में दो समान त्रिकोण प्राप्त होते हैं। पहले नदी की चौड़ाई और नाव के नीचे की दूरी से बनाई जाती है। दूसरा है वेग वैक्टर।
वे निम्नलिखित प्रविष्टि का अर्थ करते हैंः s / l = v1 / वी2। रूपांतरण के बाद, मांगी गई मात्रा के लिए एक सूत्र प्राप्त किया जाता हैः s = l * (v)1 / वी2)।
2)। समस्या के इस संस्करण में, पूर्ण वेग वेक्टर किनारों के लिए लंबवत है। यह सदिश राशि v के बराबर है1 और वी2। कोण की साइन जिसके द्वारा वेग वेक्टर को विचलन करना चाहिए, moduli v के अनुपात के बराबर है1 और वी2। आंदोलन के समय की गणना करने के लिए, गणना की गई कुल गति से नदी की चौड़ाई को विभाजित करना आवश्यक है। बाद के मूल्य की गणना पाइथागोरस प्रमेय द्वारा की जाती है।
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भौतिकी और गणित एक अवधारणा के बिना नहीं कर सकते हैं"वेक्टर मात्रा"। उसे जानना और पहचानना जरूरी है, साथ ही साथ उसके साथ काम करने में सक्षम होना चाहिए। यह निश्चित रूप से सीखने लायक है, इसलिए भ्रमित न होने और मूर्खतापूर्ण गलतियों को न करने के लिए। वेक्टर से स्केलर को अलग कैसे करें? पहले हमेशा एक विशेषता है। यह इसका संख्यात्मक मूल्य है। अधिकांश स्केलर मान सकारात्मक और नकारात्मक दोनों मूल्य ले सकते हैं। उनके उदाहरण बिजली चार्ज, काम, या तापमान हैं। लेकिन ऐसे स्केलर हैं जो नकारात्मक नहीं हो सकते हैं, उदाहरण के लिए, लंबाई और द्रव्यमान। एक संख्यात्मक मूल्य को छोड़कर वेक्टर मात्रा,जो हमेशा पूर्ण मूल्य में लिया जाता है, भी दिशा द्वारा विशेषता है। इसलिए, इसे ग्राफिकल रूप से दर्शाया जा सकता है, जो कि तीर के रूप में होता है, जिसकी लंबाई एक निश्चित दिशा में निर्देशित मूल्य की परिमाण के बराबर होती है। लिखते समय, प्रत्येक वेक्टर मात्रा पत्र पर एक तीर चिह्न द्वारा इंगित किया जाता है। यदि हम संख्यात्मक मूल्य के बारे में बात कर रहे हैं, तो तीर लिखा नहीं है या इसे मॉड्यूलो लिया जाता है। वेक्टरों के साथ अक्सर कौन से कार्यों का प्रदर्शन किया जाता है? पहला - एक तुलना। वे बराबर हो सकते हैं या नहीं। पहले मामले में, उनके मॉड्यूल एक ही हैं। लेकिन यह एकमात्र शर्त नहीं है। उनके पास समान या विपरीत दिशाएं होनी चाहिए। पहले मामले में, उन्हें बराबर वैक्टर कहा जाना चाहिए। दूसरे में, उनका विरोध किया जाता है। यदि निर्दिष्ट शर्तों में से कम से कम एक नहीं मिला है, तो वेक्टर बराबर नहीं हैं। फिर अतिरिक्त आता है। यह दो नियमों द्वारा किया जा सकता हैः एक त्रिकोण या समांतरोग्राम। सबसे पहले एक वेक्टर स्थगित करने की आवश्यकता होती है, फिर दूसरा इसके अंत से। इसके परिणाम का परिणाम वह होगा जो पहले की शुरुआत से दूसरे के अंत तक किया जाना चाहिए। समांतरोग्राम नियम का उपयोग तब किया जा सकता है जबआपको भौतिकी में वेक्टर मात्रा जोड़ने की जरूरत है। पहले नियम के विपरीत, यहां उन्हें एक बिंदु से स्थगित किया जाना चाहिए। फिर उन्हें समांतरोग्राम में पूरा करें। कार्रवाई के नतीजे को एक ही बिंदु से खींचा जाने वाला विकर्ण समानांतर माना जाना चाहिए। यदि वेक्टर मात्रा को दूसरे से घटाया जाता है, तो उन्हें फिर से एक बिंदु से स्थगित कर दिया जाता है। केवल परिणाम एक वेक्टर होगा जो दूसरे के अंत से पहले के अंत तक जमा होने वाली चीज़ों के साथ मेल खाता है। भौतिकी में कौन से वैक्टर पढ़ रहे हैं? वे स्केलर के रूप में कई हैं। आप बस याद कर सकते हैं कि भौतिक विज्ञान में वेक्टर मात्रा क्या है। या उन संकेतों को जानें जिनके द्वारा उनकी गणना की जा सकती है। जो पहला विकल्प पसंद करते हैं, ऐसी तालिका उपयोगी है। इसमें मुख्य वेक्टर भौतिक मात्रा शामिल है। अब इन मूल्यों में से कुछ के बारे में थोड़ा और। यह वेक्टर मात्रा के उदाहरण देने के लिए इसके साथ शुरू करने लायक है। यह इस तथ्य के कारण है कि यह पहले के बीच अध्ययन किया गया है। गति को गति की विशेषता के रूप में परिभाषित किया गया है।अंतरिक्ष में शरीर। वह संख्यात्मक मान और दिशा निर्धारित करता है। इसलिए, गति एक वेक्टर मात्रा है। इसके अलावा, यह आमतौर पर प्रकारों में विभाजित होता है। पहला रैखिक वेग है। रेक्टिलाइनर यूनिफॉर्म मोशन पर विचार करते समय इसे पेश किया जाता है। इसी समय, यह शरीर के द्वारा पथ के अनुपात के बराबर हो जाता है जो आंदोलन के समय तक होता है। जब उपयोग करने के लिए एक ही सूत्र अनुमेय हैअसमान आंदोलन। इसके बाद ही यह औसत दिखाई देगा। इसके अलावा, जो समय अंतराल चुना जाना चाहिए वह यथासंभव छोटा होना चाहिए। जब समय अंतराल शून्य हो जाता है, तो गति मान पहले से ही तात्कालिक है। यदि मनमानी गति पर विचार किया जाता है, तोहमेशा गति होती है - एक वेक्टर मात्रा। आखिरकार, इसे प्रत्येक वेक्टर के साथ समन्वयित लाइनों को निर्देशित करने वाले घटकों में विघटित होना पड़ता है। इसके अलावा, इसे समय के साथ त्रिज्या वेक्टर के व्युत्पन्न के रूप में परिभाषित किया गया है। यह प्रभाव की तीव्रता का माप निर्धारित करता है,जो अन्य पिंडों या खेतों से शरीर की ओर मुड़ता है। चूँकि बल एक सदिश राशि है, यह आवश्यक रूप से परिमाण और दिशा में अपना मूल्य रखता है। चूंकि यह शरीर पर कार्य करता है, जिस बिंदु पर बल लगाया जाता है वह भी महत्वपूर्ण है। बल वैक्टर के दृश्य प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए, आप निम्न तालिका का उल्लेख कर सकते हैं। इसके अलावा एक और वेक्टर मात्रा हैपरिणामी बल। यह एक शरीर पर कार्य करने वाले सभी यांत्रिक बलों के योग के रूप में परिभाषित किया गया है। इसे परिभाषित करने के लिए, त्रिकोण नियम के सिद्धांत के अनुसार अतिरिक्त प्रदर्शन करना आवश्यक है। केवल पिछले एक के अंत से ही वैक्टर को मोड़ने की आवश्यकता होती है। परिणाम वह होगा जो पहले की शुरुआत को अंतिम के अंत से जोड़ता है। तीसरा मूल्य विस्थापन है। आंदोलन के दौरान, शरीर एक निश्चित रेखा का वर्णन करता है। इसे प्रक्षेप पथ कहा जाता है। यह लाइन पूरी तरह से अलग हो सकती है। अधिक महत्वपूर्ण इसकी उपस्थिति नहीं है, लेकिन आंदोलन की शुरुआत और अंत का बिंदु। वे एक खंड से जुड़े हुए हैं, जिसे विस्थापन कहा जाता है। यह एक वेक्टर मात्रा भी है। इसके अलावा, यह हमेशा आंदोलन की शुरुआत से उस बिंदु तक निर्देशित होता है जहां आंदोलन को रोक दिया गया था। इसे लैटिन अक्षर r द्वारा निरूपित करें। यह प्रश्न प्रकट हो सकता हैः "पथ एक वेक्टर मात्रा है?" सामान्य तौर पर, यह कथन सत्य नहीं है। पथ प्रक्षेप पथ की लंबाई के बराबर है और एक विशिष्ट दिशा नहीं है। एक अपवाद उस स्थिति को माना जाता है जब एक दिशा में एक सीधी रेखा के आंदोलन को माना जाता है। तब विस्थापन वेक्टर के मापांक पथ के साथ मूल्य में मेल खाता है, और उनकी दिशा समान है। इसलिए, जब आंदोलन की दिशा को बदलने के बिना एक सीधी रेखा के साथ आंदोलन पर विचार करते हैं, तो मार्ग को वेक्टर मात्रा के उदाहरणों में शामिल किया जा सकता है। चौथा मूल्य त्वरण है। यह परिवर्तन की गति की विशेषता है।गति। इसके अलावा, त्वरण के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों मूल्य हो सकते हैं। रेक्टिलाइनियर गति के मामले में, इसे अधिक गति की ओर निर्देशित किया जाता है। यदि आंदोलन एक घुमावदार प्रक्षेपवक्र के साथ होता है, तो इसका त्वरण वेक्टर दो घटकों में विघटित होता है, जिनमें से एक को त्रिज्या के साथ वक्रता के केंद्र पर निर्देशित किया जाता है। त्वरण का औसत और तात्कालिक मूल्य आवंटित करें। पहले की गणना उस समय की एक निश्चित अवधि में गति में परिवर्तन के अनुपात के रूप में की जानी चाहिए। जब विचाराधीन समय अंतराल शून्य हो जाता है, तो वे तात्कालिक त्वरण की बात करते हैं। एक अन्य तरीके से इसे आंदोलन की मात्रा भी कहा जाता है। आवेग वेक्टर मूल्य इस तथ्य के कारण है कि यह सीधे शरीर पर लागू गति और बल से संबंधित है। दोनों के पास दिशा है और अपना आवेग सेट करें। परिभाषा के अनुसार, बाद वाला द्रव्यमान के उत्पाद के बराबर हैशरीर की गति। एक शरीर के आवेग की अवधारणा का उपयोग करके, आप न्यूटन के प्रसिद्ध कानून को एक अलग तरीके से लिख सकते हैं। यह पता चला है कि गति में परिवर्तन समय की अवधि के लिए बल के उत्पाद के बराबर है। भौतिकी में, संवेग के संरक्षण के नियम द्वारा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है, जिसमें कहा गया है कि निकायों की एक बंद प्रणाली में इसकी कुल गति स्थिर है। हम बहुत संक्षेप में सूचीबद्ध हैं कि भौतिकी पाठ्यक्रम में किन मूल्यों का अध्ययन किया जाता है। स्थिति। रेलों पर एक निश्चित प्लेटफार्म है। एक गाड़ी चार मीटर / s की गति से आ रही है। मंच और कार का द्रव्यमान क्रमशः दस और चालीस टन है। कार प्लेटफार्म से टकराती है, एक स्वचालित युग्मन होता है। प्रभाव के बाद प्लेटफ़ॉर्म कार सिस्टम की गति की गणना करना आवश्यक है। समाधान सबसे पहले आपको नोटेशन दर्ज करने की आवश्यकता हैः प्रभाव से पहले कार की गति - वीएक, युग्मन के बाद प्लेटफॉर्म के साथ वैगन - v, वैगन मास mएक, प्लेटफार्मों - एमदो। समस्या की स्थिति के अनुसार गति वी के मूल्य का पता लगाना आवश्यक है। इस तरह के कार्यों को हल करने के लिए नियमों को बातचीत से पहले और बाद में सिस्टम के एक योजनाबद्ध प्रतिनिधित्व की आवश्यकता होती है। एक्सिस ओएक्स उस दिशा में रेल के साथ निर्देशित करने के लिए उचित है जिस दिशा में कार चलती है। इन शर्तों के तहत, वैगन प्रणाली को बंद माना जा सकता है। यह इस तथ्य से निर्धारित होता है कि बाहरी शक्तियों की उपेक्षा की जा सकती है। गुरुत्वाकर्षण और समर्थन प्रतिक्रियाएं संतुलित हैं, और रेल पर घर्षण को ध्यान में नहीं रखा जाता है। गति के संरक्षण के कानून के अनुसार, उनके वेक्टरकार और प्लेटफ़ॉर्म के इंटरैक्शन की राशि प्रभाव के बाद अड़चन के लिए कुल के बराबर है। पहले, प्लेटफ़ॉर्म नहीं चला, इसलिए इसकी गति शून्य थी। केवल कार चली गई, इसकी गति एम का उत्पाद हैएक और वीएक. चूंकि झटका अपाच्य था, अर्थात् गाड़ीमंच से टकराया, और फिर वह एक ही दिशा में एक साथ रोल करने लगा, सिस्टम के आवेग ने दिशाओं को नहीं बदला। लेकिन इसका अर्थ अलग हो गया है। अर्थात्, प्लेटफ़ॉर्म के साथ कार के द्रव्यमान का योग और वांछित गति। आप इस समानता को लिख सकते हैंः एमएक * वीएक = * वी। यह चयनित अक्ष पर नाड़ी वैक्टर के प्रक्षेपण के लिए सही होगा। इससे वांछित गति की गणना करने के लिए आवश्यक समानता को प्राप्त करना आसान हैः v = mएक * वीएक / । नियमों के अनुसार द्रव्यमान के लिए मान को टन से किलोग्राम में बदलना आवश्यक है। इसलिए, उन्हें एक सूत्र में प्रतिस्थापित करते समय, आपको पहले ज्ञात मानों को एक हजार से गुणा करना होगा। सरल गणना शून्य दशमलव पचहत्तर मीटर / सेकंड की संख्या देती है। उत्तर। एक प्लेटफॉर्म के साथ कार की गति शून्य दशमलव पचहत्तर मीटर / सेकंड है। शर्त। एक उड़ान ग्रेनेड की गति बीस मीटर / सेकंड है। वह दो शार्क में टूट जाती है। पहले एक.आठ किग्रा का वजन। यह उस दिशा में आगे बढ़ना जारी है जिसमें ग्रेनेड पचास मीटर / सेकंड की गति से उड़ रहा था। दूसरे टुकड़े का द्रव्यमान एक दशमलव दो किलोग्रामग्राम है। इसकी गति क्या है? समाधान टुकड़ों के द्रव्यमान को अक्षरों m द्वारा निर्दिष्ट किया जाएएक और एमदो। उनकी गति v होगीएक और वीदो। ग्रेनेड की प्रारंभिक गति v है। समस्या में आपको v के मूल्य की गणना करने की आवश्यकता हैदो. एक बड़ा टुकड़ा जारी रखने के लिएपूरे ग्रेनेड के समान दिशा में आगे बढ़ें, दूसरा विपरीत दिशा में उड़ना चाहिए। यदि हम उस अक्ष की दिशा का चयन करते हैं जो प्रारंभिक आवेग पर था, तो ब्रेक के बाद धुरी के साथ एक बड़ा टुकड़ा उड़ जाता है, और धुरी के खिलाफ एक छोटा टुकड़ा उड़ जाता है। इस कार्य को कानून का उपयोग करने की अनुमति हैइस तथ्य के कारण गति को बचाएं कि ग्रेनेड तुरंत टूट जाता है। इसलिए, इस तथ्य के बावजूद कि गुरुत्वाकर्षण का बल ग्रेनेड और उसके हिस्सों पर कार्य करता है, इसके पास नाड़ी वेक्टर की दिशा और इसके मूल्य मॉडुलो के साथ बदलने का समय नहीं है। ग्रेनेड के फटने के बाद नाड़ी के वेक्टर मानों का योग उसके बराबर है जो इससे पहले था। यदि आप अक्ष OX पर प्रक्षेपण में शरीर के आवेग के संरक्षण का नियम लिखते हैं, तो यह इस तरह दिखाई देगाः * वी = एमएक * वीएक - एमदो * वीदो। इसमें से केवल वांछित गति व्यक्त करें। यह सूत्र द्वारा निर्धारित किया जाता हैः वीदो = * वी - एमएक * वीएक) / एमदो। संख्यात्मक मान और गणना के प्रतिस्थापन के बाद, पच्चीस मीटर / सेकंड प्राप्त होता है। उत्तर। एक छोटे टुकड़े की गति पच्चीस मीटर / सेकंड है। स्थिति। मास एम के मंच पर बंदूक रखी। इससे एक शॉट प्रोजेक्टाइल मास एम है। यह एक कोण α से क्षितिज की गति v पर उड़ता है। शॉट के बाद प्लेटफॉर्म की गति का मूल्य जानने के लिए आवश्यक है। निर्णय। इस समस्या में, आप अक्ष OX पर प्रक्षेपण में गति के संरक्षण के कानून का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन केवल उस मामले में जब बाहरी परिणामी बलों का प्रक्षेपण शून्य है। धुरी OX की दिशा के लिए आपको उस पक्ष को चुनने की आवश्यकता है जहां प्रक्षेप्य उड़ जाएगा, और क्षैतिज रेखा के समानांतर होगा। इस मामले में, गुरुत्वाकर्षण बलों और OX पर समर्थन की प्रतिक्रिया का अनुमान शून्य होगा। समस्या सामान्य रूप से हल हो जाएगी, क्योंकि ज्ञात मूल्यों के लिए कोई विशिष्ट डेटा नहीं है। उत्तर एक सूत्र है। शॉट से पहले आवेग प्रणाली शून्य थी,मंच और प्रक्षेप्य अभी भी थे। आवश्यक प्लेटफ़ॉर्म गति को लैटिन अक्षर यू द्वारा इंगित किया जाए। फिर शॉट के बाद इसकी गति को द्रव्यमान और वेग प्रक्षेपण के उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है। चूंकि प्लेटफ़ॉर्म वापस आ जाएगा , आवेग मूल्य एक शून्य से संकेत के साथ होगा। प्रक्षेप्य की गति इसके द्रव्यमान का उत्पाद हैअक्ष OX पर गति का प्रक्षेपण। इस तथ्य के कारण कि गति को एक कोण पर क्षितिज पर निर्देशित किया गया है, इसका प्रक्षेपण कोण के कोसाइन द्वारा गुणा की गई गति के बराबर है। अक्षर समानता में, यह इस तरह दिखेगाः शून्य = - म्यू + एमवी * कॉस α। इसमें से, साधारण परिवर्तनों द्वारा, एक सूत्र-प्रतिक्रिया प्राप्त की जाती हैः u = / एम। उत्तर। मंच की गति सूत्र u = / एम से निर्धारित होती है। स्थिति। नदी की चौड़ाई इसकी पूरी लंबाई के साथ समान है और l के बराबर है, इसके किनारे समानांतर हैं। नदी में पानी के प्रवाह की ज्ञात दर vएक और नाव की अपनी गति वीदो। एक)। नाव के धनुष को पार करते समय विपरीत किनारे पर सख्ती से निर्देशित किया जाता है। क्या दूरी यह नीचे की ओर ले जाएगा? दो)। किस कोण पर α को नाव की नाक को निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि यह प्रस्थान के बिंदु के विपरीत लंबवत बैंक तक पहुंच जाए? ऐसे क्रॉसिंग के लिए कितना समय लगता है? समाधान एक)। नाव की कुल गति दो मात्राओं की सदिश राशि है। उनमें से पहली नदी का प्रवाह है, जिसे बैंकों के साथ निर्देशित किया जाता है। दूसरी नाव की गति है, जो तट से लंबवत है। ड्राइंग में दो समान त्रिकोण प्राप्त होते हैं। पहले नदी की चौड़ाई और नाव के नीचे की दूरी से बनाई जाती है। दूसरा है वेग वैक्टर। वे निम्नलिखित प्रविष्टि का अर्थ करते हैंः s / l = vएक / वीदो। रूपांतरण के बाद, मांगी गई मात्रा के लिए एक सूत्र प्राप्त किया जाता हैः s = l * एक / वीदो)। दो)। समस्या के इस संस्करण में, पूर्ण वेग वेक्टर किनारों के लिए लंबवत है। यह सदिश राशि v के बराबर हैएक और वीदो। कोण की साइन जिसके द्वारा वेग वेक्टर को विचलन करना चाहिए, moduli v के अनुपात के बराबर हैएक और वीदो। आंदोलन के समय की गणना करने के लिए, गणना की गई कुल गति से नदी की चौड़ाई को विभाजित करना आवश्यक है। बाद के मूल्य की गणना पाइथागोरस प्रमेय द्वारा की जाती है।
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अंग्रेजी व्याकरण में , एक सशर्त खंड एक प्रकार का क्रियात्मक खंड है जो एक परिकल्पना या स्थिति, असली ( तथ्यात्मक ) या कल्पना ( counterfactual ) बताता है। एक वाक्य जिसमें एक या अधिक सशर्त खंड और एक मुख्य खंड (जो स्थिति के परिणाम को व्यक्त करता है) को एक सशर्त वाक्य (जिसे सशर्त निर्माण के रूप में भी जाना जाता है) कहा जाता है।
एक सशर्त खंड अक्सर अधीनस्थ संयोजन द्वारा पेश किया जाता है यदि।
अन्य सशर्त अधीनस्थों में शामिल हैं , भले ही, भले ही, उस शर्त पर , उस स्थिति पर, जब तक , और मामले में । (ध्यान दें कि जब तक एक नकारात्मक अधीनस्थ के रूप में कार्य नहीं करता है। )
सशर्त खंड जटिल वाक्य की शुरुआत में आते हैं, लेकिन (अन्य क्रियात्मक खंडों की तरह) वे अंत में भी आ सकते हैं।
- " अगर हमारे पास कोई सर्दी नहीं थी, वसंत इतना सुखद नहीं होगा; अगर हमें कभी-कभी विपत्ति का स्वाद नहीं होता , तो समृद्धि का स्वागत नहीं होता। " (ऐनी ब्रैडस्ट्रीट, "ध्यान दिव्य और नैतिक")
- "रोमन अपनी कारों को पार्क करते हैं जिस तरह से मैं पार्क करता हूं अगर मैंने अपने गोद में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के बीकर को फेंक दिया था । " (बिल ब्रिसन, न तो यहां न ही वहांः यूरोप में ट्रेवल्स । विलियम मोरो, 1 99 2)
- " यहां तक कि अगर यह घूमता है , भले ही कोई तूफान हो , तो इस अभियान को कुछ भी नहीं हटाएगा। " (जेएफ पावर, "एक पसंदीदा की मौत," 1 9 51)
- "डाइनिंग रूम में चप्पल के पहले स्वाद के बाद, मुझे मूर्खता से विश्वास था कि जब तक मैं टेबल से दूर रहूं तब तक मैं सुरक्षित रहूंगा । " (एड्रियान क्रेस, एलेक्स और आईरिकन जेंटलमैन । वेनस्टीन बुक्स, 2007)
'शर्तें' क्या हैं?
कार्टर, कैम्ब्रिज अंग्रेजी का व्याकरण । कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, 2006)
"सशर्त खंड परंपरागत रूप से एक वाक्य की शुरुआत में रखा गया है, लेकिन आपको ऐसा करने के लिए कहीं और एक सशर्त खंड लगाने के लिए स्वतंत्र महसूस करना चाहिए यदि ऐसा करने से प्रावधान पढ़ने में आसान हो जाता है। अब सशर्त खंड जितना अधिक होगा, प्रावधान यह होगा कि प्रावधान वाक्य के सामने सशर्त खंड की बजाय मैट्रिक्स खंड के साथ और अधिक पठनीय होगा। यदि दोनों सशर्त खंड और मैट्रिक्स खंड में एक से अधिक तत्व होते हैं, तो आप उन्हें दो वाक्यों के रूप में व्यक्त करने से बेहतर होंगे। " (केनेथ ए एडम्स, कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग के लिए स्टाइल का एक मैनुअल । अमेरिकन बार एसोसिएशन, 2004)
सशर्त वाक्य के छह मुख्य प्रकार हैं :
- उदाहरण के लिए, तापमान बढ़ने पर तरल और वाष्प के बीच संतुलन परेशान होता है ।
(सामान्य नियम, या प्रकृति का कानूनः यह हमेशा होता है। )
- यदि आप इस खेल के बारे में सोचना शुरू करते हैं, तो यह आपको पागल कर देगा।
(खुली भविष्य की स्थितिः यह हो सकता है या नहीं भी हो सकता है। )
- लेकिन अगर आप वास्तव में मालिबू बीच में रहना चाहते थे, तो आप वहां होंगे।
(संभावित भविष्य की स्थितिः शायद यह नहीं होगा। )
- अगर मैं आप थे, तो मैं खुद ही सम्मेलन केंद्र में जाऊंगा और किसी को सुरक्षा में देखने को कहूंगा।
(असंभव भविष्य की स्थितिः यह कभी नहीं हो सकता है। )
- उसने कहा , "अगर मैंने निर्णय लिया था तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। "
(असंभव पिछली हालतः ऐसा नहीं हुआ। )
- अगर वह तीन दिन और तीन रातों तक काम कर रहा था तो वह अब पहनने वाले सूट में था।
(अज्ञात पिछली हालतः हम तथ्यों को नहीं जानते हैं। )
(जॉन सेली, शिक्षकों के लिए व्याकरण । ऑक्सपेकर, 2007)
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अंग्रेजी व्याकरण में , एक सशर्त खंड एक प्रकार का क्रियात्मक खंड है जो एक परिकल्पना या स्थिति, असली या कल्पना बताता है। एक वाक्य जिसमें एक या अधिक सशर्त खंड और एक मुख्य खंड को एक सशर्त वाक्य कहा जाता है। एक सशर्त खंड अक्सर अधीनस्थ संयोजन द्वारा पेश किया जाता है यदि। अन्य सशर्त अधीनस्थों में शामिल हैं , भले ही, भले ही, उस शर्त पर , उस स्थिति पर, जब तक , और मामले में । सशर्त खंड जटिल वाक्य की शुरुआत में आते हैं, लेकिन वे अंत में भी आ सकते हैं। - " अगर हमारे पास कोई सर्दी नहीं थी, वसंत इतना सुखद नहीं होगा; अगर हमें कभी-कभी विपत्ति का स्वाद नहीं होता , तो समृद्धि का स्वागत नहीं होता। " - "रोमन अपनी कारों को पार्क करते हैं जिस तरह से मैं पार्क करता हूं अगर मैंने अपने गोद में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के बीकर को फेंक दिया था । " - " यहां तक कि अगर यह घूमता है , भले ही कोई तूफान हो , तो इस अभियान को कुछ भी नहीं हटाएगा। " - "डाइनिंग रूम में चप्पल के पहले स्वाद के बाद, मुझे मूर्खता से विश्वास था कि जब तक मैं टेबल से दूर रहूं तब तक मैं सुरक्षित रहूंगा । " 'शर्तें' क्या हैं? कार्टर, कैम्ब्रिज अंग्रेजी का व्याकरण । कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, दो हज़ार छः) "सशर्त खंड परंपरागत रूप से एक वाक्य की शुरुआत में रखा गया है, लेकिन आपको ऐसा करने के लिए कहीं और एक सशर्त खंड लगाने के लिए स्वतंत्र महसूस करना चाहिए यदि ऐसा करने से प्रावधान पढ़ने में आसान हो जाता है। अब सशर्त खंड जितना अधिक होगा, प्रावधान यह होगा कि प्रावधान वाक्य के सामने सशर्त खंड की बजाय मैट्रिक्स खंड के साथ और अधिक पठनीय होगा। यदि दोनों सशर्त खंड और मैट्रिक्स खंड में एक से अधिक तत्व होते हैं, तो आप उन्हें दो वाक्यों के रूप में व्यक्त करने से बेहतर होंगे। " सशर्त वाक्य के छह मुख्य प्रकार हैं : - उदाहरण के लिए, तापमान बढ़ने पर तरल और वाष्प के बीच संतुलन परेशान होता है । - यदि आप इस खेल के बारे में सोचना शुरू करते हैं, तो यह आपको पागल कर देगा। - लेकिन अगर आप वास्तव में मालिबू बीच में रहना चाहते थे, तो आप वहां होंगे। - अगर मैं आप थे, तो मैं खुद ही सम्मेलन केंद्र में जाऊंगा और किसी को सुरक्षा में देखने को कहूंगा। - उसने कहा , "अगर मैंने निर्णय लिया था तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। " - अगर वह तीन दिन और तीन रातों तक काम कर रहा था तो वह अब पहनने वाले सूट में था।
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बाड़मेर जिले की सदर पुलिस ने एक दर्जन चोरी का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से चुराए गए माल की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। पूछताछ में आरोपियों ने शिव-गूंगा सहित अलग-अलग जगह से चोरियां करना कबूल किया है।
दरअसल, कुर्जा फांटा गांव में फैक्ट्री मालिक गणेश भाटी ने 1 नवंबर को रिपोर्ट दी थी। इसके अनुसार 28 नंबवर की रात को चारों ने फैक्ट्री से ट्रांसफॉर्मर, पानी की मोटर, लकड़ी की पलाइयां, तांबे की केबल चोरी करके लग गए। रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज करके चोर की तलाश शुरू की। थाना स्तर पर हेड कॉस्टेबल मेहराराम की एक टीम बनाई। टीम ने अलग-अलग संदिग्ध पर नजर रखी गई।
सदर थानाधिकारी अनिल कुमार के मुताबिक चोरों की तलाश करने के दौरान संदिग्ध बाबुनाथ पुत्र पारसनाथ निवासी मेघवालों की बस्ती, बाड़मेर आगौर, भुटाराम पुत्र चैनाराम निवासी महाबार, मूलाराम पुत्र पदमाराम निवासी धांधपुरा, उडंखा, गुणेशाराम पुत्र वीराराम निवासी महाबार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपियों ने 28 नंवबर की रात को कुर्जा फांटा फैक्ट्री से चोरी करना कबूल किया। चारों चोरों को गिरफ्तार पूछताछ की गई। चोरों ने कुर्जा फांटा के पास बंद पड़े क्रेशर से कुछ लोहे का सामान, लोहरटी हाईट टावर पर लगा तांबा, दरूड़ा गांव के क्रेशर से 11 टायर की रिंगो, शिव-गूंगा के आसपास एक कंपनी से तांबा चोरी करना स्वीकार किया है।
सदर पुलिस के एसआई जाकिर अली, हैड कांस्टेबल मेहाराम, दुर्गाराम, कांस्टेबल हंसराम, विरेंद्र चौधरी, नरसिंगाराम, आसुराम व शिव रतन की टीम ने कार्रवाई करते हुए चार चोरों को गिरफ्तार कर एक दर्जन चोरी का खुलासा किया है।
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बाड़मेर जिले की सदर पुलिस ने एक दर्जन चोरी का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से चुराए गए माल की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। पूछताछ में आरोपियों ने शिव-गूंगा सहित अलग-अलग जगह से चोरियां करना कबूल किया है। दरअसल, कुर्जा फांटा गांव में फैक्ट्री मालिक गणेश भाटी ने एक नवंबर को रिपोर्ट दी थी। इसके अनुसार अट्ठाईस नंबवर की रात को चारों ने फैक्ट्री से ट्रांसफॉर्मर, पानी की मोटर, लकड़ी की पलाइयां, तांबे की केबल चोरी करके लग गए। रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज करके चोर की तलाश शुरू की। थाना स्तर पर हेड कॉस्टेबल मेहराराम की एक टीम बनाई। टीम ने अलग-अलग संदिग्ध पर नजर रखी गई। सदर थानाधिकारी अनिल कुमार के मुताबिक चोरों की तलाश करने के दौरान संदिग्ध बाबुनाथ पुत्र पारसनाथ निवासी मेघवालों की बस्ती, बाड़मेर आगौर, भुटाराम पुत्र चैनाराम निवासी महाबार, मूलाराम पुत्र पदमाराम निवासी धांधपुरा, उडंखा, गुणेशाराम पुत्र वीराराम निवासी महाबार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपियों ने अट्ठाईस नंवबर की रात को कुर्जा फांटा फैक्ट्री से चोरी करना कबूल किया। चारों चोरों को गिरफ्तार पूछताछ की गई। चोरों ने कुर्जा फांटा के पास बंद पड़े क्रेशर से कुछ लोहे का सामान, लोहरटी हाईट टावर पर लगा तांबा, दरूड़ा गांव के क्रेशर से ग्यारह टायर की रिंगो, शिव-गूंगा के आसपास एक कंपनी से तांबा चोरी करना स्वीकार किया है। सदर पुलिस के एसआई जाकिर अली, हैड कांस्टेबल मेहाराम, दुर्गाराम, कांस्टेबल हंसराम, विरेंद्र चौधरी, नरसिंगाराम, आसुराम व शिव रतन की टीम ने कार्रवाई करते हुए चार चोरों को गिरफ्तार कर एक दर्जन चोरी का खुलासा किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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भुवनेश्वर. अपराध नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई के तर्ज पर अब ओडिशा में बुल्डोजर चलने लगा है. नशीले पदार्थों के तस्करों और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए राजधानी भुवनेश्वर स्थित मंचेश्वर पुलिस ने भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अधिकारियों की मौजूदगी में आज एक ड्रग माफिया की एक महलनुमा इमारत को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. बल्डोजर ने राजधानी के कलाराहंगा क्षेत्र के इंजणा में 1. 5 एकड़ की सरकारी जमीन पर बने ड्रग लॉर्ड कृष्ण चंद्र नाथ उर्फ पक्का की बिल्डिंग को गिरा दिया. अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराने की प्रक्रिया नाथ की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई. नाथ के खिलाफ 7 मामले हैं. इसमें मंचेश्वर थाने में 4, इंफोसिटी थाने में 2 और चंद्रशेखरपुर थाने में एक मामला दर्ज है. वह ब्राउन शुगर का कारोबार करता था और आदतन अपराधी है.
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भुवनेश्वर. अपराध नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई के तर्ज पर अब ओडिशा में बुल्डोजर चलने लगा है. नशीले पदार्थों के तस्करों और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए राजधानी भुवनेश्वर स्थित मंचेश्वर पुलिस ने भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मौजूदगी में आज एक ड्रग माफिया की एक महलनुमा इमारत को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. बल्डोजर ने राजधानी के कलाराहंगा क्षेत्र के इंजणा में एक. पाँच एकड़ की सरकारी जमीन पर बने ड्रग लॉर्ड कृष्ण चंद्र नाथ उर्फ पक्का की बिल्डिंग को गिरा दिया. अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराने की प्रक्रिया नाथ की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई. नाथ के खिलाफ सात मामले हैं. इसमें मंचेश्वर थाने में चार, इंफोसिटी थाने में दो और चंद्रशेखरपुर थाने में एक मामला दर्ज है. वह ब्राउन शुगर का कारोबार करता था और आदतन अपराधी है.
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धमतरी। नगरी ब्लाक के ग्राम गेदरा के नवीन कन्या आश्रम में सेंधमारी कर चोर कम्प्यूटर, लैपटाप, अन्य डिवाइस सहित 1. 29 लाख के सामान ले गया। चोर ने कम्प्यूटर लैब के सीसीटीवी कैमरातक नहीं छोड़ा।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार चोरी की घटना 21 अप्रैल से 13 मई के बीच की है। अज्ञात चोरी आश्रम के कम्प्यूटर कक्ष का ताला तोड़कर अंदर घुसा।
इसके बाद तीन नग सीसीटीवी कैमरा, चार नग कम्यूटर मानिटर, कीबोर्ड, माउस, एक नग कम्यूटर सेट, नेटवर्किंग इंटरनेट सिस्टम, साउंड सिस्टम सहित कुल एक लाख 29 हजार रुपये के सामान चोरी कर ले गया। आश्रम की अधीक्षिका रामेश्वरी साक्षी ने 16 मई को दुगली थाना पहुंचकर चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई दुगली पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
आशंका जताई जा रही है कि चोर गांव का या आसपास के गांव का हो सकता है। गर्मी की छुट्टी होने के कारण कम्प्यूटर लैब बंद है। यहां कोई आता-जाता नहीं है, यह बात चोर अच्छे से जानता था।
बिरेझर चौकी क्षेत्र के ग्राम ग्राम अंवरी के शीतला मंदिर तालाब के पास वृद्ध को पकड़कर पुलिस ने 16 पौवा शराब बरामद की।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 मई को पुलिस को मुखबिर से अवैध शराब बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने छापा मारा और आरोपित गीताराम नगारची 65 वर्ष निवासी अंवरी को पकड़ा।
तलाशी लेने पर उसके कब्जे से बोरी में रखी 16 पौवा देशी मसाला शराब बरामद हुई। जब्त शराब की कीमत 1760 रुपये आंकी गई है। बिक्री रकम 240 रुपये भी जब्त किया गया।
धमतरी। कुरुद थाना क्षेत्र के ग्राम नारी के ढाबा के सामने पुलिस ने आरोपित मुकेश रात्रे 27 वर्ष निवासी ग्राम नारी को पकड़कर उसके कब्जे से 12 पौवा देसी मसाला शराब बरामद की।
पुलिस ने बताया कि 16 मई को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली की आरोपित अपने ढाबा के पास अवैध रूप से शराब बेच रहा है। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आरोपित को पकड़ लिया।
उसके कब्जे से प्लास्टिक बोरी में रखा 12 पौवा देसी मसाला शराब मात्रा दो लीटर कीमत 1320 रुपये एवं बिक्री रकम 150 रुपये को जब्त किया। आरोपित के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
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धमतरी। नगरी ब्लाक के ग्राम गेदरा के नवीन कन्या आश्रम में सेंधमारी कर चोर कम्प्यूटर, लैपटाप, अन्य डिवाइस सहित एक. उनतीस लाख के सामान ले गया। चोर ने कम्प्यूटर लैब के सीसीटीवी कैमरातक नहीं छोड़ा। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार चोरी की घटना इक्कीस अप्रैल से तेरह मई के बीच की है। अज्ञात चोरी आश्रम के कम्प्यूटर कक्ष का ताला तोड़कर अंदर घुसा। इसके बाद तीन नग सीसीटीवी कैमरा, चार नग कम्यूटर मानिटर, कीबोर्ड, माउस, एक नग कम्यूटर सेट, नेटवर्किंग इंटरनेट सिस्टम, साउंड सिस्टम सहित कुल एक लाख उनतीस हजार रुपये के सामान चोरी कर ले गया। आश्रम की अधीक्षिका रामेश्वरी साक्षी ने सोलह मई को दुगली थाना पहुंचकर चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई दुगली पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। आशंका जताई जा रही है कि चोर गांव का या आसपास के गांव का हो सकता है। गर्मी की छुट्टी होने के कारण कम्प्यूटर लैब बंद है। यहां कोई आता-जाता नहीं है, यह बात चोर अच्छे से जानता था। बिरेझर चौकी क्षेत्र के ग्राम ग्राम अंवरी के शीतला मंदिर तालाब के पास वृद्ध को पकड़कर पुलिस ने सोलह पौवा शराब बरामद की। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोलह मई को पुलिस को मुखबिर से अवैध शराब बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने छापा मारा और आरोपित गीताराम नगारची पैंसठ वर्ष निवासी अंवरी को पकड़ा। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से बोरी में रखी सोलह पौवा देशी मसाला शराब बरामद हुई। जब्त शराब की कीमत एक हज़ार सात सौ साठ रुपयापये आंकी गई है। बिक्री रकम दो सौ चालीस रुपयापये भी जब्त किया गया। धमतरी। कुरुद थाना क्षेत्र के ग्राम नारी के ढाबा के सामने पुलिस ने आरोपित मुकेश रात्रे सत्ताईस वर्ष निवासी ग्राम नारी को पकड़कर उसके कब्जे से बारह पौवा देसी मसाला शराब बरामद की। पुलिस ने बताया कि सोलह मई को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली की आरोपित अपने ढाबा के पास अवैध रूप से शराब बेच रहा है। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आरोपित को पकड़ लिया। उसके कब्जे से प्लास्टिक बोरी में रखा बारह पौवा देसी मसाला शराब मात्रा दो लीटर कीमत एक हज़ार तीन सौ बीस रुपयापये एवं बिक्री रकम एक सौ पचास रुपयापये को जब्त किया। आरोपित के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
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Aaj Ka Rashifal : आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए आज क्या कह रहे हैं आपके सितारे ?
Yoga: कभी उमस. . कभी बरसात से क्या टूटने-झड़ने लगे हैं आपके बाल ?
अजीत डोभाल ने दिया बड़ा बयान, 'भारत में सबके लिए समान अवसर, किसी धर्म को खतरा नहीं'
भारत की नकल पाकिस्तान को पड़ी भारी, जानिए क्यों रूसी तेल खरीदना पड़ गया घाटे का सौदा?
चीन के विदेश मंत्री बीमार, दो सप्ताह से नहीं दिखे! आसियान की बैठक में अब कौन लेगा हिस्सा?
Mission Impossible: क्या टॉम क्रूज की ये फिल्म तोड़ पाएगी 'अवतार 2' का रिकॉर्ड!
2 साल से बाहर, वेस्टइंडीज दौरे पर भी नहीं मिली जगह, टीम इंडिया में कैसे होगी इस खिलाड़ी की वापसी?
Vastu Tips: आज ही अपनी कार में रखें ये चीजें, टल जाएगी अचानक होने वाली कोई दुर्घटना!
Explainer: पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा में 18 की मौत, आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच सजा कौन पा रहा?
भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का आज निधन हो गया। जिससे देशभर में शोक देखने को मिल रहा है। दुनिया उन्हें नम आंखों से विदा कर रही है।
16 दिसम्बर 1941 को रेडियो के लिए पहली बार लताजी ने दो गीत गाए थे। यह फोटो उन्होंने खुद शेयर की थी।
यह भारत रत्न लता मंगेशकर के जवां दिनों की तस्वीर है। इस फोटो को उन्होंने दीवाली के मौके पर अपने फैंस के लिए शेयर किया था।
दिवंगत लता मंगेशकर और दिलीप कुमार का रिश्ता काफी गहरा था। लताजी दिलीप कुमार को अपना भाई मानती थीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही लता मंगेशकर के संबंध काफी गहरे रहे हैं। पीएम मोदी के आहवान पर उन्होंने ये दीप जलाया था।
शायद यह बात बहुत कम लोगों को पता हो लेकिन सुर कोकिला लता मंगेशकर को डॉग से लगाव था। ये उनके गुड्डू और बुड्डू थे।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर और दिवंगत एक्टर ऋषि कपूर के बीच अच्छा रिश्ता रहा। लताजी को ऋषि कपूर की एक्टिंग पसंद थी।
देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी लताजी की मुलाकात होती थी। इंदिरा को सुर कोकिला के गीत भी बेहद पसंद थे।
बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा और लताजी के बीच भी काफी गहरा रिश्ता था।
एक बार लता मंगेशकर के गाने को सुन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भावुक हो उठे थे।
भारत की नकल पाकिस्तान को पड़ी भारी, जानिए क्यों रूसी तेल खरीदना पड़ गया घाटे का सौदा?
2 साल से बाहर, वेस्टइंडीज दौरे पर भी नहीं मिली जगह, टीम इंडिया में कैसे होगी इस खिलाड़ी की वापसी?
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विजयवाड़ाः अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (एआईडीडब्ल्यूए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पीके श्रीमति ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भारत के लिए अस्वीकार्य है, जहां कई धर्मों और जातीय समूहों के विविध लोगों के साथ 140 करोड़ की आबादी है।
उन्होंने कहा कि एआईडीडब्ल्यूए भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तावित यूसीसी के कार्यान्वयन का कड़ा विरोध करती है। गुरुवार को यहां एमबीवीके भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए एआईडीडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि यूसीसी के विरोध में 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी को भारत जैसे देश में लागू नहीं किया जा सकता है और कहा कि एआईडीडब्ल्यूए स्पष्ट रूप से यूसीसी का विरोध करती है और देश भर में एआईडीडब्ल्यूए के नेता और पदाधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगे।
श्रीमती ने आगे कहा, "विधि आयोग ने पहले स्पष्ट रूप से कहा है कि यूसीसी भारत के लिए न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है। "
एआईडीडब्ल्यूए नेता ने कहा कि विधि आयोग ने विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में सुधार और बहुलता के प्रति सहिष्णुता की सिफारिश की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार फासीवादी नियमों को लागू करने और लोगों के अधिकारों को दबाने के लिए फासीवादी कानून लाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से आदिवासी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि एआईडीडब्ल्यूए ने व्यक्तिगत कानूनों में सुधार के बारे में कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति को लिखा है। उन्होंने AIDWA पदाधिकारियों, महिला संगठनों, नागरिक समाज संगठनों और आम लोगों से UCC का विरोध करने और विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की है।
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विजयवाड़ाः अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष पीके श्रीमति ने कहा है कि समान नागरिक संहिता भारत के लिए अस्वीकार्य है, जहां कई धर्मों और जातीय समूहों के विविध लोगों के साथ एक सौ चालीस करोड़ की आबादी है। उन्होंने कहा कि एआईडीडब्ल्यूए भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तावित यूसीसी के कार्यान्वयन का कड़ा विरोध करती है। गुरुवार को यहां एमबीवीके भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए एआईडीडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि यूसीसी के विरोध में पाँच अक्टूबर को नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी को भारत जैसे देश में लागू नहीं किया जा सकता है और कहा कि एआईडीडब्ल्यूए स्पष्ट रूप से यूसीसी का विरोध करती है और देश भर में एआईडीडब्ल्यूए के नेता और पदाधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगे। श्रीमती ने आगे कहा, "विधि आयोग ने पहले स्पष्ट रूप से कहा है कि यूसीसी भारत के लिए न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है। " एआईडीडब्ल्यूए नेता ने कहा कि विधि आयोग ने विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में सुधार और बहुलता के प्रति सहिष्णुता की सिफारिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार फासीवादी नियमों को लागू करने और लोगों के अधिकारों को दबाने के लिए फासीवादी कानून लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से आदिवासी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि एआईडीडब्ल्यूए ने व्यक्तिगत कानूनों में सुधार के बारे में कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति को लिखा है। उन्होंने AIDWA पदाधिकारियों, महिला संगठनों, नागरिक समाज संगठनों और आम लोगों से UCC का विरोध करने और विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की है।
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Dil Kahi Ka Lyrics in Hindi, Composed, Written & Performed by Dino James.
" Dil Kahi Ka" is the song" .
Dil Kahi Ka Lyrics (हिंदी)
Dil Kahi Ka Lyrics (English / Translation)
Dil Kahi Ka Song meta information regarding the creative artists involved in this video.
Watch the Dil Kahi Ka video.
Song Credits:
Music Produced by Saurabh Lokhande (Chef Solow)
Video credits:
डिनो जेम्स ने गीत के बोल लिखे हैं।
इस गाने को डिनो जेम्स ने गाया है।
वीडियो का निर्देशन हिमांशु त्यागी ने किया है।
इस वीडियो सॉन्ग में डिनो जेम्स नजर आ रहे हैं.
संगीत सौरभ लोखंडे ने दिया है।
यह गाना 'दिल कही का' का है।
यह गीत 10 अक्टूबर 2020 को डिनो जेम्स म्यूजिक कंपनी तहत जारी किया गया था।
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Dil Kahi Ka Lyrics in Hindi, Composed, Written & Performed by Dino James. " Dil Kahi Ka" is the song" . Dil Kahi Ka Lyrics Dil Kahi Ka Lyrics Dil Kahi Ka Song meta information regarding the creative artists involved in this video. Watch the Dil Kahi Ka video. Song Credits: Music Produced by Saurabh Lokhande Video credits: डिनो जेम्स ने गीत के बोल लिखे हैं। इस गाने को डिनो जेम्स ने गाया है। वीडियो का निर्देशन हिमांशु त्यागी ने किया है। इस वीडियो सॉन्ग में डिनो जेम्स नजर आ रहे हैं. संगीत सौरभ लोखंडे ने दिया है। यह गाना 'दिल कही का' का है। यह गीत दस अक्टूबर दो हज़ार बीस को डिनो जेम्स म्यूजिक कंपनी तहत जारी किया गया था।
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खूंटीः जरियागढ़ थाना क्षेत्र से 30 अक्टूबर को चोरी हुई स्कॉर्पियो को पुलिस ने लोहरदगा जिले के किस्को थाना के बानपुर बंजारी डैम के पास 31 अक्टूबर की रात को बरामद कर लिया।
इस संबंध में एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि मामले की गुंभीरता को देखते हुए तोरपा के अनुमंडल पदाधिकारी ओम प्रकाश तिवारी और इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया।
टीम ने तकनीकी अनुसंधान में आये तथ्यों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर छापेमारी करते हुए बंजारी डैम के पास चोरी गयह स्कॉर्पियो को बरामद कर लिया।
इस मामले में पुलिस ने दो आरोपितों किस्को थाना के नवाडीह निवासी नैयर इकबाल अंसारी और हुदागा निवासी हबीबुल्लाह अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।
एसपी ने बताया कि आरोपितों ने स्कॉर्पियो की पहचान छिपाने के लिए से उसका रंग सिल्वर से ब्लैक कर दिया था।
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खूंटीः जरियागढ़ थाना क्षेत्र से तीस अक्टूबर को चोरी हुई स्कॉर्पियो को पुलिस ने लोहरदगा जिले के किस्को थाना के बानपुर बंजारी डैम के पास इकतीस अक्टूबर की रात को बरामद कर लिया। इस संबंध में एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि मामले की गुंभीरता को देखते हुए तोरपा के अनुमंडल पदाधिकारी ओम प्रकाश तिवारी और इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी अनुसंधान में आये तथ्यों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर छापेमारी करते हुए बंजारी डैम के पास चोरी गयह स्कॉर्पियो को बरामद कर लिया। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपितों किस्को थाना के नवाडीह निवासी नैयर इकबाल अंसारी और हुदागा निवासी हबीबुल्लाह अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि आरोपितों ने स्कॉर्पियो की पहचान छिपाने के लिए से उसका रंग सिल्वर से ब्लैक कर दिया था।
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शादी हर लड़की के लिए एक खूबसूरत सपने की तरह होता है। लेकिन शादी करना तो आसान है ,लेकिन शादी निभाना या शादी से जुड़े धर्म निभाना बेहद मुश्किल होते हैं। शादी के बाद हर लड़की को ससुराल में रहने के बाद कुछ बातों का पछतावा तो जरूर होता है। भले ही आपकी शादी अपनी पंसद से हुई हो लेकिन जब एक ही छत के नीचे सबके साथ रहना पड़े तब चीजें समझ आती हैं। इस स्थिति में लड़कियों को अपने घर यानि मायके के ऐशो-आराम की याद आती है और वह मन ही मन कई बार शादी को लेकर पछतावा भी करती हैंं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे वह बातें जिनका शादी के बाद हर लड़की को पछतावा होता है।
हर इसांन को आजादी बेहद प्यारी होती है। लेकिन शादी के बाद कहीं न कहीं लड़कियों की आजादी कम हो जाती है। लड़कियां जिस तरह से अपने माइका यानि घर में रहती हैं, वैसा रहन-सहन उन्हें ससुराल में नहीं मिल पाता है। उन्हें हर छोटी-बड़ी बात के लिए अपने पति या ससुराल वालो से पूछना पड़ता है , जबकि माइके में वह अपनी इच्छानुसार चीजें करती है। बार-बार पूछने के कारण कई बार बात लड़ाई तक पहुंच जाती है। इस स्थिति में लड़कियां हमेशा यही बात सोचती हैं कि अगर उन्होनें शादी न की होती तो ही अच्छा था।
शादी के बाद अक्सर कई बार करियर बनाने में कई दिक्कते आती हैं। क्योंकि शादी के पहले लड़की जहां चाहें , जब चाहे काम कर सकती है। लेकिन शादी के ससुराल वाले या तो जॉब नही करने देते हैं या फिर कोई शर्त रख देते हैं। ऐसे में करियर पर फोकस कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
जो लड़कियां थोड़ी आलसी या कामचोर होती हैं , उन्हें ससुराल में जाकर कामकाज के मामले में काफी मुश्किलें आती हैं। क्योंकि ससुराल में जाकर उन्हें पूरा घर संभाला होता है , और अगर परिवार बड़ा हो तो काम और भी ज्यादा हो जाता है। अपने घर यानि मायके में भले ही लड़कियां काम के लिए झट से मना कर देती हैं ,लेकिन ससुराल में काम के लिए मना कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में लड़कियों को यह महसूस होता है कि काश उन्होनें शादी नहीं की होती तो अच्छा होता।
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शादी हर लड़की के लिए एक खूबसूरत सपने की तरह होता है। लेकिन शादी करना तो आसान है ,लेकिन शादी निभाना या शादी से जुड़े धर्म निभाना बेहद मुश्किल होते हैं। शादी के बाद हर लड़की को ससुराल में रहने के बाद कुछ बातों का पछतावा तो जरूर होता है। भले ही आपकी शादी अपनी पंसद से हुई हो लेकिन जब एक ही छत के नीचे सबके साथ रहना पड़े तब चीजें समझ आती हैं। इस स्थिति में लड़कियों को अपने घर यानि मायके के ऐशो-आराम की याद आती है और वह मन ही मन कई बार शादी को लेकर पछतावा भी करती हैंं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे वह बातें जिनका शादी के बाद हर लड़की को पछतावा होता है। हर इसांन को आजादी बेहद प्यारी होती है। लेकिन शादी के बाद कहीं न कहीं लड़कियों की आजादी कम हो जाती है। लड़कियां जिस तरह से अपने माइका यानि घर में रहती हैं, वैसा रहन-सहन उन्हें ससुराल में नहीं मिल पाता है। उन्हें हर छोटी-बड़ी बात के लिए अपने पति या ससुराल वालो से पूछना पड़ता है , जबकि माइके में वह अपनी इच्छानुसार चीजें करती है। बार-बार पूछने के कारण कई बार बात लड़ाई तक पहुंच जाती है। इस स्थिति में लड़कियां हमेशा यही बात सोचती हैं कि अगर उन्होनें शादी न की होती तो ही अच्छा था। शादी के बाद अक्सर कई बार करियर बनाने में कई दिक्कते आती हैं। क्योंकि शादी के पहले लड़की जहां चाहें , जब चाहे काम कर सकती है। लेकिन शादी के ससुराल वाले या तो जॉब नही करने देते हैं या फिर कोई शर्त रख देते हैं। ऐसे में करियर पर फोकस कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। जो लड़कियां थोड़ी आलसी या कामचोर होती हैं , उन्हें ससुराल में जाकर कामकाज के मामले में काफी मुश्किलें आती हैं। क्योंकि ससुराल में जाकर उन्हें पूरा घर संभाला होता है , और अगर परिवार बड़ा हो तो काम और भी ज्यादा हो जाता है। अपने घर यानि मायके में भले ही लड़कियां काम के लिए झट से मना कर देती हैं ,लेकिन ससुराल में काम के लिए मना कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में लड़कियों को यह महसूस होता है कि काश उन्होनें शादी नहीं की होती तो अच्छा होता।
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Thursday March 11, 2021,
दुनिया भर के हिंदू समुदाय के लिए सबसे महान और सबसे पवित्र दिनों में से एक है महाशिवरात्रि। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह दिन भगवान शिव, विनाश के देवता को समर्पित है।
इसी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर भोले बाबा के भक्त उपवास (व्रत) रखते हैं। इस दिन लोग शिव मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा आराधना करते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।
न्यूज़ चैनल आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योतिषविदों के मुताबिक, 101 साल बाद इस त्योहार पर एक विशेष संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग, सिद्धियोग और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग आने से त्योहार का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इन शुभ संयोगों के बीच महाशिवरात्रि पर पूजा बेहद कल्याणकारी मानी जा रही है।
शिवरात्रि, शिव और शक्ति का अभिसरण है - जिसका अर्थ है दुनिया को संतुलित करने वाली मर्दाना और स्त्री ऊर्जा। द्रिक पंचांग के अनुसार, दक्षिण में, माघ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि, महाशिवरात्रि के रूप में जानी जाती है, उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन महीने में मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में जाना जाता है। यह त्योहार एक ही दिन मनाया जाता है।
इस साल महा शिवरात्रि 11 मार्च को मनाई जाएगी, जो कि गुरुवार है। चतुर्दशी तिथि 11 मार्च को दोपहर 02.39 बजे से शुरू होकर 12 मार्च को दोपहर 03.02 बजे तक रहेगी।
द्रिक पंचांग में उल्लेख है कि पूजा से एक दिन पहले, भक्त केवल एक समय भोजन करते हैं। और शिवरात्रि के दिन - सुबह की रस्में खत्म करने के बाद - वे पूरे दिन के उपवास का पालन करने की प्रतिज्ञा करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अगले दिन तक कुछ भी नहीं खा सकते हैं। उपवास न केवल प्रभु का आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है, बल्कि आत्मनिर्णय के लिए भी किया जाता है।
शिवरात्रि के दिन, भक्तों को पूजा करने से पहले शाम को दूसरा स्नान करना चाहिए। शिव पूजा रात में की जानी चाहिए, और भक्त स्नान के बाद अगले दिन उपवास तोड़ सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें इसे सूर्योदय के बीच और चर्तुदशी तिथि के अंत से पहले, पर्क पंचांग के अनुसार तोड़ना चाहिए।
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Thursday March ग्यारह, दो हज़ार इक्कीस, दुनिया भर के हिंदू समुदाय के लिए सबसे महान और सबसे पवित्र दिनों में से एक है महाशिवरात्रि। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह दिन भगवान शिव, विनाश के देवता को समर्पित है। इसी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर भोले बाबा के भक्त उपवास रखते हैं। इस दिन लोग शिव मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा आराधना करते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। न्यूज़ चैनल आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योतिषविदों के मुताबिक, एक सौ एक साल बाद इस त्योहार पर एक विशेष संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग, सिद्धियोग और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग आने से त्योहार का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इन शुभ संयोगों के बीच महाशिवरात्रि पर पूजा बेहद कल्याणकारी मानी जा रही है। शिवरात्रि, शिव और शक्ति का अभिसरण है - जिसका अर्थ है दुनिया को संतुलित करने वाली मर्दाना और स्त्री ऊर्जा। द्रिक पंचांग के अनुसार, दक्षिण में, माघ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि, महाशिवरात्रि के रूप में जानी जाती है, उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन महीने में मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में जाना जाता है। यह त्योहार एक ही दिन मनाया जाता है। इस साल महा शिवरात्रि ग्यारह मार्च को मनाई जाएगी, जो कि गुरुवार है। चतुर्दशी तिथि ग्यारह मार्च को दोपहर दो.उनतालीस बजे से शुरू होकर बारह मार्च को दोपहर तीन.दो बजे तक रहेगी। द्रिक पंचांग में उल्लेख है कि पूजा से एक दिन पहले, भक्त केवल एक समय भोजन करते हैं। और शिवरात्रि के दिन - सुबह की रस्में खत्म करने के बाद - वे पूरे दिन के उपवास का पालन करने की प्रतिज्ञा करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अगले दिन तक कुछ भी नहीं खा सकते हैं। उपवास न केवल प्रभु का आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है, बल्कि आत्मनिर्णय के लिए भी किया जाता है। शिवरात्रि के दिन, भक्तों को पूजा करने से पहले शाम को दूसरा स्नान करना चाहिए। शिव पूजा रात में की जानी चाहिए, और भक्त स्नान के बाद अगले दिन उपवास तोड़ सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें इसे सूर्योदय के बीच और चर्तुदशी तिथि के अंत से पहले, पर्क पंचांग के अनुसार तोड़ना चाहिए।
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वरिष्ठ बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघभन सिन्हा ने महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम नहीं करना अपने करियर की सबसे बड़ी भूल में से एक बताया है।
उन्होंने यहां चल रहे 41वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला के दौरान चौथे कोलकाता साहित्य समारोह के दौरान यह बात कही। गौतम घोष के निर्देशन में 1987 में बांगला फिल्म अंतर्जली जात्रा में काम कर चुके सिन्हा ने इस मौके पर यह भी बताया कि उन्हें सत्यजीत रे के निर्देशन में काम करने का मौका भी मिला था।
सिन्हा ने कहा, बहुत कम लोगों को पता है कि मैं माणिकदा के साथ एक फिल्म करने वाला था लेकिन यह नहीं हो पाया। उस फिल्म में सौमित्र चटर्जी दूसरे अभिनेता होने वाले थे। युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को कभी भी अपना व्यक्तित्व और मौलिकता नहीं त्यागना चाहिए।
उन्होंने कहा, मुझे क्षेत्रीय फिल्मों में खूब कॉपी किया गया है। मेरे स्टाइल और हाव-भाव क ी खूब नकल की गई है लेकिन मैंने कभी भी किसी की नकल नहीं की। इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में खुद को साबित करना चाहिए और यही मेरी आत्मकथा एनीथिंग बट खामोश का संदेश है।
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वरिष्ठ बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघभन सिन्हा ने महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम नहीं करना अपने करियर की सबसे बड़ी भूल में से एक बताया है। उन्होंने यहां चल रहे इकतालीसवें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला के दौरान चौथे कोलकाता साहित्य समारोह के दौरान यह बात कही। गौतम घोष के निर्देशन में एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में बांगला फिल्म अंतर्जली जात्रा में काम कर चुके सिन्हा ने इस मौके पर यह भी बताया कि उन्हें सत्यजीत रे के निर्देशन में काम करने का मौका भी मिला था। सिन्हा ने कहा, बहुत कम लोगों को पता है कि मैं माणिकदा के साथ एक फिल्म करने वाला था लेकिन यह नहीं हो पाया। उस फिल्म में सौमित्र चटर्जी दूसरे अभिनेता होने वाले थे। युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को कभी भी अपना व्यक्तित्व और मौलिकता नहीं त्यागना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे क्षेत्रीय फिल्मों में खूब कॉपी किया गया है। मेरे स्टाइल और हाव-भाव क ी खूब नकल की गई है लेकिन मैंने कभी भी किसी की नकल नहीं की। इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में खुद को साबित करना चाहिए और यही मेरी आत्मकथा एनीथिंग बट खामोश का संदेश है।
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9 इस वक्तव्य के पूरा होते ही प्रेरितों के देखते-देखते मसीह येशु स्वर्ग में स्वीकार कर लिए गए तथा एक बादल ने उन्हें उनकी दृष्टि से ओझल कर दिया.
12 तब वे उस पहाड़ी से, जिसे ज़ैतून पर्वत भी कहा जाता है, येरूशालेम लौट गए. यह स्थान येरूशालेम से शब्बाथ के लिए ठहराई हुई दूरी पर है. 13 नगर में पहुँच कर वे ऊपर के कमरे में इकट्ठा हो गए, जहाँ वे रह रहे थे. वहाँ पेतरॉस, योहन, याक़ोब, आन्द्रेयास, फ़िलिप्पॉस, थोमॉस, बारथोलोमेयॉस, मत्तियाह, हलफ़ेयॉस के पुत्र याक़ोब, शिमोन ज़ेलोतेस तथा याक़ोब के पुत्र यहूदाह उपस्थित थे. 14 ये सभी वहाँ नियमित रूप से सच्चाई के साथ एक मन होकर, मसीह येशु की माता मरियम, उनके भाइयों तथा अन्य स्त्रियों के साथ प्रार्थना के लिए इकट्ठा होने लगे.
15 तब एक दिन, जब लगभग एक सौ बीस विश्वासी इकट्ठा थे, पेतरॉस उनके बीच खड़े होकर कहने लगे, 16 "प्रियजन, मसीह येशु को पकड़वाने के लिए अगुवा यहूदाह, के विषय में दाविद के माध्यम से पवित्रात्मा के द्वारा कहा गया पवित्रशास्त्र का वचन पूरा होना ज़रूरी था. 17 वह हम में से एक तथा सेवा के कार्य में सहभागी था." 18 अधर्म की कमाई से उसने भूमि मोल ली. वहाँ वह सिर के बल ऐसा गिरा कि उसका पेट फट गया तथा उसकी सारी आंतें बाहर बिखर गईं. 19 सारे येरूशालेम में यह समाचार फैल गया. यही कारण है कि वह भूमि अब उन्हीं की भाषा में हकलदमा अर्थात् लहू-भूमि के नाम से बदनाम हो गई है.
20 "भजन में वर्णन हैः
"'उसकी भूमि उजाड़ हो जाए;
तथा यह भी,
23 इसलिए दो नाम सुझाए गएः योसेफ़ जिसे बारसब्बास के नाम से जाना जाता है, जिसका उपनाम था जस्तुस तथा दूसरा व्यक्ति मत्तियाह. 24 तब उन्होंने यह प्रार्थना की, "हे मनों को जाँचने वाले प्रभु, हम पर यह साफ़ कीजिए कि इन दोनों में से आपने किसे चुना है 25 कि वह इस सेवा के कार्य और प्रेरितों की वह खाली जगह ले, जिससे मुक्त होकर यहूदाह अपने ठहराए हुए स्थान पर चला गया." 26 तब उन्होंने चिट डालें और मत मत्तियाह के पक्ष में पड़े, इसलिए वह ग्यारह प्रेरितों में सम्मिलित कर लिया गया.
New Testament, Saral Hindi Bible (नए करार, सरल हिन्दी बाइबल) Copyright © 1978, 2009, 2016 by Biblica, Inc.® All rights reserved worldwide.
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नौ इस वक्तव्य के पूरा होते ही प्रेरितों के देखते-देखते मसीह येशु स्वर्ग में स्वीकार कर लिए गए तथा एक बादल ने उन्हें उनकी दृष्टि से ओझल कर दिया. बारह तब वे उस पहाड़ी से, जिसे ज़ैतून पर्वत भी कहा जाता है, येरूशालेम लौट गए. यह स्थान येरूशालेम से शब्बाथ के लिए ठहराई हुई दूरी पर है. तेरह नगर में पहुँच कर वे ऊपर के कमरे में इकट्ठा हो गए, जहाँ वे रह रहे थे. वहाँ पेतरॉस, योहन, याक़ोब, आन्द्रेयास, फ़िलिप्पॉस, थोमॉस, बारथोलोमेयॉस, मत्तियाह, हलफ़ेयॉस के पुत्र याक़ोब, शिमोन ज़ेलोतेस तथा याक़ोब के पुत्र यहूदाह उपस्थित थे. चौदह ये सभी वहाँ नियमित रूप से सच्चाई के साथ एक मन होकर, मसीह येशु की माता मरियम, उनके भाइयों तथा अन्य स्त्रियों के साथ प्रार्थना के लिए इकट्ठा होने लगे. पंद्रह तब एक दिन, जब लगभग एक सौ बीस विश्वासी इकट्ठा थे, पेतरॉस उनके बीच खड़े होकर कहने लगे, सोलह "प्रियजन, मसीह येशु को पकड़वाने के लिए अगुवा यहूदाह, के विषय में दाविद के माध्यम से पवित्रात्मा के द्वारा कहा गया पवित्रशास्त्र का वचन पूरा होना ज़रूरी था. सत्रह वह हम में से एक तथा सेवा के कार्य में सहभागी था." अट्ठारह अधर्म की कमाई से उसने भूमि मोल ली. वहाँ वह सिर के बल ऐसा गिरा कि उसका पेट फट गया तथा उसकी सारी आंतें बाहर बिखर गईं. उन्नीस सारे येरूशालेम में यह समाचार फैल गया. यही कारण है कि वह भूमि अब उन्हीं की भाषा में हकलदमा अर्थात् लहू-भूमि के नाम से बदनाम हो गई है. बीस "भजन में वर्णन हैः "'उसकी भूमि उजाड़ हो जाए; तथा यह भी, तेईस इसलिए दो नाम सुझाए गएः योसेफ़ जिसे बारसब्बास के नाम से जाना जाता है, जिसका उपनाम था जस्तुस तथा दूसरा व्यक्ति मत्तियाह. चौबीस तब उन्होंने यह प्रार्थना की, "हे मनों को जाँचने वाले प्रभु, हम पर यह साफ़ कीजिए कि इन दोनों में से आपने किसे चुना है पच्चीस कि वह इस सेवा के कार्य और प्रेरितों की वह खाली जगह ले, जिससे मुक्त होकर यहूदाह अपने ठहराए हुए स्थान पर चला गया." छब्बीस तब उन्होंने चिट डालें और मत मत्तियाह के पक्ष में पड़े, इसलिए वह ग्यारह प्रेरितों में सम्मिलित कर लिया गया. New Testament, Saral Hindi Bible Copyright © एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर, दो हज़ार नौ, दो हज़ार सोलह by Biblica, Inc.® All rights reserved worldwide.
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इजमिर महानगर पालिका के मेयर Tunç Soyer, व्हाइट वैगन के लिए कार्रवाई की, जिसे अलसांकक स्टेशन के सामने हटा दिया गया था। राष्ट्रपति सोयर ने व्हाइट वैगन के लिए कुल्टुरपार्क की पेशकश की।
मुस्तफा केमल अतातुर्क द्वारा 1926 से 1937 तक की अपनी घरेलू यात्राओं में इस्तेमाल किए गए "व्हाइट वैगन" और मौसम के हालात से प्रभावित नहीं होने और एक स्वस्थ यात्रा का माहौल बनाने के लिए mirzmir Alsancak Station के सामने के खुले इलाके में गए।
इजमिर महानगर पालिका के मेयर Tunç Soyerवैगन पर कार्रवाई की, जो चर्चा का विषय रहा। मेयर सोयर ने कहा, "इज़मिर के मेट्रोपॉलिटन मेयर के रूप में, मैंने TCDD के तीसरे क्षेत्रीय निदेशालय से "आधिकारिक" अनुरोध किया। मैंने कहा कि हमें अतातुर्क की सफेद गाड़ी दे दो। महानगर इसके रखरखाव और संरक्षण का कार्य करेगा। मैंने कुल्तूरपार्क को इसके ऐतिहासिक मिशन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना। यह घूमने और घूमने के लिए सबसे सुविधाजनक जगह है... इसके अलावा, वैगन के चारों ओर स्थायी सुरक्षा होगी। आज 3 दिन हो गए हैं, जब से मैंने लेख भेजा है। कोई आवाज नहीं है। लेकिन मैं आशान्वित हूं, जब सफेद वैगन प्रदर्शित करने की बात आती है तो कुल्तूरपार्क सही जगह है। हम इस मुद्दे पर जोर दे रहे हैं।" (अवलोकन)
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इजमिर महानगर पालिका के मेयर Tunç Soyer, व्हाइट वैगन के लिए कार्रवाई की, जिसे अलसांकक स्टेशन के सामने हटा दिया गया था। राष्ट्रपति सोयर ने व्हाइट वैगन के लिए कुल्टुरपार्क की पेशकश की। मुस्तफा केमल अतातुर्क द्वारा एक हज़ार नौ सौ छब्बीस से एक हज़ार नौ सौ सैंतीस तक की अपनी घरेलू यात्राओं में इस्तेमाल किए गए "व्हाइट वैगन" और मौसम के हालात से प्रभावित नहीं होने और एक स्वस्थ यात्रा का माहौल बनाने के लिए mirzmir Alsancak Station के सामने के खुले इलाके में गए। इजमिर महानगर पालिका के मेयर Tunç Soyerवैगन पर कार्रवाई की, जो चर्चा का विषय रहा। मेयर सोयर ने कहा, "इज़मिर के मेट्रोपॉलिटन मेयर के रूप में, मैंने TCDD के तीसरे क्षेत्रीय निदेशालय से "आधिकारिक" अनुरोध किया। मैंने कहा कि हमें अतातुर्क की सफेद गाड़ी दे दो। महानगर इसके रखरखाव और संरक्षण का कार्य करेगा। मैंने कुल्तूरपार्क को इसके ऐतिहासिक मिशन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना। यह घूमने और घूमने के लिए सबसे सुविधाजनक जगह है... इसके अलावा, वैगन के चारों ओर स्थायी सुरक्षा होगी। आज तीन दिन हो गए हैं, जब से मैंने लेख भेजा है। कोई आवाज नहीं है। लेकिन मैं आशान्वित हूं, जब सफेद वैगन प्रदर्शित करने की बात आती है तो कुल्तूरपार्क सही जगह है। हम इस मुद्दे पर जोर दे रहे हैं।"
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- Bhojpuri Cinema । Written by: नंदन सिंह ।गुरुवार जनवरी 7, 2021 07:48 PM ISTपवन सिंह (Pawan Singh) के बर्थडे में दिनेशलाल यादव निरहुआ (Nirahua), यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे (Amrapali Dubey), सुपर स्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) जैसे सितारे शामिल हुए.
- Bhojpuri Cinema । Written by: प्रतिभा गौड़ ।सोमवार जुलाई 20, 2020 02:54 PM ISTBhojpuri Gana: भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी (Kajal Raghwani) आज अपना 30वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं. इस मौके पर काजल को फैन्स के साथ-साथ सेलेब्रिटीज भी खूब बधाई दे रहे हैं. एक्ट्रेस लगातार अपने फैन्स द्वारा दी जा रही बधाइयों को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर कर रही हैं.
- Bhojpuri Cinema । Written by: नंदन सिंह ।शनिवार मार्च 16, 2019 01:31 PM ISTBhojpuri Cinema: इस गाने में खेसारी लाल यादव (Khesari Lal yadav) और काजल राघवानी (Kajal Raghwani) की जोड़ी ने धमाल मचा दिया है. इस गाने को देखने का सिलसिला अभी जारी है.
- Bhojpuri Cinema । Written by: अल्केश कुशवाहा ।रविवार जनवरी 13, 2019 12:47 PM ISTभोजपुरी सिनेमा के तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके बर्थडे पर शिरकत की. आम्रपाली दुबे 11 जनवरी 2019 को 32 साल की हो गईं. उन्होंने अपने बर्थडे में को-स्टार्स दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal Yadav) उर्फ निरहुआ (Nirahua), खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav), प्रवेश लाल, अक्षरा सिंह (Akshara Singh) समेत कई भोजपुरी हस्तियों को इनवाइट किया था.
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- Bhojpuri Cinema । Written by: नंदन सिंह ।गुरुवार जनवरी सात, दो हज़ार इक्कीस सात:अड़तालीस PM ISTपवन सिंह के बर्थडे में दिनेशलाल यादव निरहुआ , यूट्यूब क्वीन आम्रपाली दुबे , सुपर स्टार खेसारी लाल यादव जैसे सितारे शामिल हुए. - Bhojpuri Cinema । Written by: प्रतिभा गौड़ ।सोमवार जुलाई बीस, दो हज़ार बीस दो:चौवन PM ISTBhojpuri Gana: भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी आज अपना तीसवां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं. इस मौके पर काजल को फैन्स के साथ-साथ सेलेब्रिटीज भी खूब बधाई दे रहे हैं. एक्ट्रेस लगातार अपने फैन्स द्वारा दी जा रही बधाइयों को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर कर रही हैं. - Bhojpuri Cinema । Written by: नंदन सिंह ।शनिवार मार्च सोलह, दो हज़ार उन्नीस एक:इकतीस PM ISTBhojpuri Cinema: इस गाने में खेसारी लाल यादव और काजल राघवानी की जोड़ी ने धमाल मचा दिया है. इस गाने को देखने का सिलसिला अभी जारी है. - Bhojpuri Cinema । Written by: अल्केश कुशवाहा ।रविवार जनवरी तेरह, दो हज़ार उन्नीस बारह:सैंतालीस PM ISTभोजपुरी सिनेमा के तमाम बड़ी हस्तियों ने उनके बर्थडे पर शिरकत की. आम्रपाली दुबे ग्यारह जनवरी दो हज़ार उन्नीस को बत्तीस साल की हो गईं. उन्होंने अपने बर्थडे में को-स्टार्स दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ , खेसारी लाल यादव , प्रवेश लाल, अक्षरा सिंह समेत कई भोजपुरी हस्तियों को इनवाइट किया था.
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पणजी, 15 जुलाई (आईएएनएस)। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने रविवार को कहा कि प्रौद्योगिकी कुछ खामिया साथ लेकर आती है, जैसे कि फर्जी खबरें, जो कि नुकसानदेह हैं।
पर्रिकर ने यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा, आज हमारे पास हर जगह प्रौद्योगिकी है। इसकी कुछ खामियां भी हैं, जैसे फर्जी खबरें। इसमें ऐसी खबरें हैं, जो कहती हैं कि सेल कनेक्टिविटी मानव के लिए खतरनाक है। इसका नतीजा है कि लोग सेल फोन तो चाहते हैं, लेकिन इसका टॉवर अपने गांव में नहीं चाहते।
मुख्यमंत्री ने कहा, लोगों को महसूस करना चाहिए कि फर्जी खबरों से ज्यादा नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि गोवा सरकार दिसंबर से पूरी तरह से डिजिटल लेन-देन की तैयारी कर रही है।
पर्रिकर ने कहा, हम भुगतान को पूरी तरह से ऑनलाइन कर रहे हैं, चाहे यह आरटीजीएस या अन्य साधन हो। अब हमने फैसला किया है कि हमारे सभी लेनदेन डिजिटल किए जाएंगे। हम इसे सितंबर तक करने की कोशिश में हैं, लेकिन यह दिसंबर तक जा सकता है।
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पणजी, पंद्रह जुलाई । गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने रविवार को कहा कि प्रौद्योगिकी कुछ खामिया साथ लेकर आती है, जैसे कि फर्जी खबरें, जो कि नुकसानदेह हैं। पर्रिकर ने यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा, आज हमारे पास हर जगह प्रौद्योगिकी है। इसकी कुछ खामियां भी हैं, जैसे फर्जी खबरें। इसमें ऐसी खबरें हैं, जो कहती हैं कि सेल कनेक्टिविटी मानव के लिए खतरनाक है। इसका नतीजा है कि लोग सेल फोन तो चाहते हैं, लेकिन इसका टॉवर अपने गांव में नहीं चाहते। मुख्यमंत्री ने कहा, लोगों को महसूस करना चाहिए कि फर्जी खबरों से ज्यादा नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि गोवा सरकार दिसंबर से पूरी तरह से डिजिटल लेन-देन की तैयारी कर रही है। पर्रिकर ने कहा, हम भुगतान को पूरी तरह से ऑनलाइन कर रहे हैं, चाहे यह आरटीजीएस या अन्य साधन हो। अब हमने फैसला किया है कि हमारे सभी लेनदेन डिजिटल किए जाएंगे। हम इसे सितंबर तक करने की कोशिश में हैं, लेकिन यह दिसंबर तक जा सकता है।
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करण जौहर अपने चैट शो 'कॉफी विद करण' में सेलेब्स के राज खोलते हैं।
शहनाज गिल 'देसी वाइब्स विद शहनाज' में स्टार्स के साथ खूब गपशप करती हैं।
करीना कपूर का चैट शो 'वाट वूमेन वान्ट' भी काफी फेमस है।
सिमी ग्रेवाल अपने चैट शो Rendezvous विद सिमी ग्रेवाल भी काफी फेमस है।
मलाइका अरोड़ा का टॉक शो 'मूविंग इन विद मलाइका' भी काफी फेमस हुआ था।
शिल्पा शेट्टी के टॉक शो 'शेप ऑफ यू' में सेलेब्स अपनी फिटनेस और मेंटल हेल्थ को लेकर बात करते हैं।
अरबाज खान का टॉक शो 'पिंच' भी काफी पॉपुलर हुआ था।
अमिताभ बच्चन अपने चैट शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में जनरल नॉलेज के सवाल पूछते हैं।
सलमान खान का शो 'बिग बॉस' भी काफी पॉपुलर है।
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करण जौहर अपने चैट शो 'कॉफी विद करण' में सेलेब्स के राज खोलते हैं। शहनाज गिल 'देसी वाइब्स विद शहनाज' में स्टार्स के साथ खूब गपशप करती हैं। करीना कपूर का चैट शो 'वाट वूमेन वान्ट' भी काफी फेमस है। सिमी ग्रेवाल अपने चैट शो Rendezvous विद सिमी ग्रेवाल भी काफी फेमस है। मलाइका अरोड़ा का टॉक शो 'मूविंग इन विद मलाइका' भी काफी फेमस हुआ था। शिल्पा शेट्टी के टॉक शो 'शेप ऑफ यू' में सेलेब्स अपनी फिटनेस और मेंटल हेल्थ को लेकर बात करते हैं। अरबाज खान का टॉक शो 'पिंच' भी काफी पॉपुलर हुआ था। अमिताभ बच्चन अपने चैट शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में जनरल नॉलेज के सवाल पूछते हैं। सलमान खान का शो 'बिग बॉस' भी काफी पॉपुलर है। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
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Gujarat: शताब्दी समारोह को लेकर अहमदाबाद में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। यह आयोजन बीएपीएस की ओर से अहमदाबाद के एसपी रिंग रोड पर 600 एकड़ में किया गया है। 15 दिसंबर 2022 से 15 जनवरी 2023 तक चलनेवाले महोत्सव में प्रमुख स्वामी महाराज नगर बनाया गया है।
नई दिल्ली। स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी शताब्दी महोत्सव का गुजरात के अहमदाबाद में भव्य आयोजन किया गया है। आगामी 1 महीने तक चलने वाले इस महोत्सव का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 दिसंबर को उदघाटन करेंगे। इस महोत्सव में देश-विदेशी से संत-महंतों समेत वीवीआईपी लोग अहमदाबाद के अतिथि बनेंगे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दुनियाभर से हरिभक्त अहमदाबाद में आ रहे हैं। खासकर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड समेत देशों में रहने वाले और स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रति आस्था रखने वाले लोगों का अहमदाबाद में आगमन शुरू हो गया है। 14 दिसंबर को उदघाटन के बाद 15 दिसंबर से कोई भी व्यक्ति प्रमुख स्वामी नगर में बगैर किसी शुल्क के प्रवेश कर सकेगा। महोत्सव में कई आकर्षण हैं जो जीवन निर्माण की प्रेरणा और लोगों को नैतिक-आध्यात्मिक जीवन का अवसर प्रदान करते हैं।
शताब्दी समारोह को लेकर अहमदाबाद में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। यह आयोजन बीएपीएस की ओर से अहमदाबाद के एसपी रिंग रोड पर 600 एकड़ में किया गया है। 15 दिसंबर 2022 से 15 जनवरी 2023 तक चलनेवाले महोत्सव में प्रमुख स्वामी महाराज नगर बनाया गया है। जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज की 30 फूट ऊंची मूर्ति बनाई गई है। नगर के भीतर अक्षरधाम मंदिर की झांकी भी तैयार की गई है ।
महोत्सव में बाल नगरी भी बनाई गई है जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज के जीवन चरित्र के दर्शन होंगे। इस बालनगरी का संचालन 6 से 7 हजार बच्चे करेंगे। प्रमुख स्वामी नगर में कुल दो सभा गृह बनाए गए है। जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज सभा गृह और नारायण सभा गृह शामिल है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 15 दिसंबर को नारायण सभा गृह का उदघाटन करेंगे। सभा गृह में 21 परिषद 14 प्रोफेशनल और 7 एकेडेमिक परिषदें होंगी। प्रमुख स्वामी महाराज नगर में अत्याधुनिक टेक्नोलोजी का भरपूर उपयोग किया गया है।
15 जनवरी को इसके समापन समारोह में पीएम मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व अन्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। 600 एकड़ में बने प्रमुख स्वामी महाराजनगर को 80 हजार स्वयंसेवकों और हजारों संतों ने कई महीनों की मेहनत से तैयार किया है। 250 से ज्यादा किसान और बिल्डरों ने इस समारोह के लिए अपनी जमीन को निःस्वार्थ उपलब्ध कराया है।
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Gujarat: शताब्दी समारोह को लेकर अहमदाबाद में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। यह आयोजन बीएपीएस की ओर से अहमदाबाद के एसपी रिंग रोड पर छः सौ एकड़ में किया गया है। पंद्रह दिसंबर दो हज़ार बाईस से पंद्रह जनवरी दो हज़ार तेईस तक चलनेवाले महोत्सव में प्रमुख स्वामी महाराज नगर बनाया गया है। नई दिल्ली। स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी शताब्दी महोत्सव का गुजरात के अहमदाबाद में भव्य आयोजन किया गया है। आगामी एक महीने तक चलने वाले इस महोत्सव का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौदह दिसंबर को उदघाटन करेंगे। इस महोत्सव में देश-विदेशी से संत-महंतों समेत वीवीआईपी लोग अहमदाबाद के अतिथि बनेंगे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दुनियाभर से हरिभक्त अहमदाबाद में आ रहे हैं। खासकर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड समेत देशों में रहने वाले और स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रति आस्था रखने वाले लोगों का अहमदाबाद में आगमन शुरू हो गया है। चौदह दिसंबर को उदघाटन के बाद पंद्रह दिसंबर से कोई भी व्यक्ति प्रमुख स्वामी नगर में बगैर किसी शुल्क के प्रवेश कर सकेगा। महोत्सव में कई आकर्षण हैं जो जीवन निर्माण की प्रेरणा और लोगों को नैतिक-आध्यात्मिक जीवन का अवसर प्रदान करते हैं। शताब्दी समारोह को लेकर अहमदाबाद में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। यह आयोजन बीएपीएस की ओर से अहमदाबाद के एसपी रिंग रोड पर छः सौ एकड़ में किया गया है। पंद्रह दिसंबर दो हज़ार बाईस से पंद्रह जनवरी दो हज़ार तेईस तक चलनेवाले महोत्सव में प्रमुख स्वामी महाराज नगर बनाया गया है। जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज की तीस फूट ऊंची मूर्ति बनाई गई है। नगर के भीतर अक्षरधाम मंदिर की झांकी भी तैयार की गई है । महोत्सव में बाल नगरी भी बनाई गई है जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज के जीवन चरित्र के दर्शन होंगे। इस बालनगरी का संचालन छः से सात हजार बच्चे करेंगे। प्रमुख स्वामी नगर में कुल दो सभा गृह बनाए गए है। जिसमें प्रमुख स्वामी महाराज सभा गृह और नारायण सभा गृह शामिल है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंद्रह दिसंबर को नारायण सभा गृह का उदघाटन करेंगे। सभा गृह में इक्कीस परिषद चौदह प्रोफेशनल और सात एकेडेमिक परिषदें होंगी। प्रमुख स्वामी महाराज नगर में अत्याधुनिक टेक्नोलोजी का भरपूर उपयोग किया गया है। पंद्रह जनवरी को इसके समापन समारोह में पीएम मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व अन्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। छः सौ एकड़ में बने प्रमुख स्वामी महाराजनगर को अस्सी हजार स्वयंसेवकों और हजारों संतों ने कई महीनों की मेहनत से तैयार किया है। दो सौ पचास से ज्यादा किसान और बिल्डरों ने इस समारोह के लिए अपनी जमीन को निःस्वार्थ उपलब्ध कराया है।
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फर्रुखाबाद में पति के साथ बाइक से जा रही महिला काली नदी पुल के पास किसी तरह बाइक से गिर पड़ी। तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार रोडवेज की अनुबंधित बस महिला को कुचलते हुए निकली गई। इससे महिला की मौत हो गई। पुलिस ने बस को पकड़ लिया। चालक भाग गया।
जनपद फिरोजाबाद थाना फरहया के गांव धर्मपुर निवासी राजेश कुमार नोएडा में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। वह रविवार को फर्रुखाबाद अपनी पत्नी शशि देवी(32) को दवा दिलाने गए थे। वहां से दवा लेने के बाद वह मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव पट्टी खुर्द में रुक गए थे।
सोमवार शाम करीब चार बजे वह बाइक से अपनी पत्नी शशि के साथ वापस घर जा रहे थे। राजेश हेलमेट लगाए थे। तभी इटावा-बरेली हाईवे पर गांव मदनपुर से आगे काली नदी पुल से करीब दो सौ मीटर पहले शशि किसी तरह बाइक से गिर पड़ीं। तभी सामने से आ रही रोडवेज से अनुबंधित फर्रुखाबाद डिपो की बस शशि को कुचलते हुए निकल गई।
शशि की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सकवाई के पास बस को पकड़ लिया, लेकिन उसका चालक भाग गया। सूचना पर शशि व राजेश के परिजन आ गए। इससे वहां चीत्कार मच गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।
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फर्रुखाबाद में पति के साथ बाइक से जा रही महिला काली नदी पुल के पास किसी तरह बाइक से गिर पड़ी। तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार रोडवेज की अनुबंधित बस महिला को कुचलते हुए निकली गई। इससे महिला की मौत हो गई। पुलिस ने बस को पकड़ लिया। चालक भाग गया। जनपद फिरोजाबाद थाना फरहया के गांव धर्मपुर निवासी राजेश कुमार नोएडा में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। वह रविवार को फर्रुखाबाद अपनी पत्नी शशि देवी को दवा दिलाने गए थे। वहां से दवा लेने के बाद वह मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव पट्टी खुर्द में रुक गए थे। सोमवार शाम करीब चार बजे वह बाइक से अपनी पत्नी शशि के साथ वापस घर जा रहे थे। राजेश हेलमेट लगाए थे। तभी इटावा-बरेली हाईवे पर गांव मदनपुर से आगे काली नदी पुल से करीब दो सौ मीटर पहले शशि किसी तरह बाइक से गिर पड़ीं। तभी सामने से आ रही रोडवेज से अनुबंधित फर्रुखाबाद डिपो की बस शशि को कुचलते हुए निकल गई। शशि की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सकवाई के पास बस को पकड़ लिया, लेकिन उसका चालक भाग गया। सूचना पर शशि व राजेश के परिजन आ गए। इससे वहां चीत्कार मच गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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IPL 2023 : चेन्नई ने सोमवार खेले गए मैच में को लखनऊ को 12 रन से हराया. (Gautam Gambhir/Instagram)
नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स से मिले 217 रन के टारगेट के जवाब में लखनऊ सुपर जायंट्स के ओपनर कायल मेयर्स ने कप्तान केएल राहुल के साथ मिलकर टीम को तूफानी शुरुआत दी. मेयर्स की आतिशी बैटिंग से टीम ने महज 5. 3 ओवर में 79 रन बना लिए. इस स्कोर पर कायल मेयर्स के आउट होते ही लखनऊ ने एक के बाद एक विकेट गंवाए. आखिर में टीम लक्ष्य से 12 रन दूर रह गई. कायल मेयर्स की शॉट पर लाजवाब हो रहे एलएसजी के मेंटर गौतम गंभीर के चेहेरे के हाव-भाव मैच के आखिरी ओवरों में पूरी तरह बदल चुके थे.
ईंट का जवाब पत्थर से देने में माहिर टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर का बल्ला मैदान में जितना बोलता था, उतनी ही तेज उनकी जुबान भी चलती है. गंभीर उन खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल रहे हैं, जिन्हें स्लेजिंग करना पसंद है. पाकिस्तानी हो या ऑस्ट्रेलिया, लगभग हर टीम गौतम गंभीर के बैट के साथ ही उनकी जुबान की धार देख चुकी है. एक इंटरव्यू में लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर गौतम गंभीर ने स्लेजिंग को लेकर कई खुलासे किए.
गौतम गंभीर ने बताया कि हरभजन सिंह भी स्लेजिंग बहुत आगे रहते थे. गौतम के मुताबिक, पंजाबी में स्लेजिंग करने का अपना ही मजा है. पंजाबी में एक दो शब्दों में ही स्लेजिंग पूरी हो जाती है, उसके बाद समझ नहीं आता कि कौन से वर्ड बोलें. पंजाबी में स्लेजिंग के वो शब्द इतने हैवी होते हैं कि उसके बाद कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. गौतम गंभीर ने आगे कहा कि यूं तो उन्होंने कई खिलाड़ियों को स्लेज किया पर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट लेग स्पिनर रहे शेन वॉर्न को स्लेज करने का आनंद ही कुछ और होता था.
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'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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IPL दो हज़ार तेईस : चेन्नई ने सोमवार खेले गए मैच में को लखनऊ को बारह रन से हराया. नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स से मिले दो सौ सत्रह रन के टारगेट के जवाब में लखनऊ सुपर जायंट्स के ओपनर कायल मेयर्स ने कप्तान केएल राहुल के साथ मिलकर टीम को तूफानी शुरुआत दी. मेयर्स की आतिशी बैटिंग से टीम ने महज पाँच. तीन ओवर में उन्यासी रन बना लिए. इस स्कोर पर कायल मेयर्स के आउट होते ही लखनऊ ने एक के बाद एक विकेट गंवाए. आखिर में टीम लक्ष्य से बारह रन दूर रह गई. कायल मेयर्स की शॉट पर लाजवाब हो रहे एलएसजी के मेंटर गौतम गंभीर के चेहेरे के हाव-भाव मैच के आखिरी ओवरों में पूरी तरह बदल चुके थे. ईंट का जवाब पत्थर से देने में माहिर टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर का बल्ला मैदान में जितना बोलता था, उतनी ही तेज उनकी जुबान भी चलती है. गंभीर उन खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल रहे हैं, जिन्हें स्लेजिंग करना पसंद है. पाकिस्तानी हो या ऑस्ट्रेलिया, लगभग हर टीम गौतम गंभीर के बैट के साथ ही उनकी जुबान की धार देख चुकी है. एक इंटरव्यू में लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर गौतम गंभीर ने स्लेजिंग को लेकर कई खुलासे किए. गौतम गंभीर ने बताया कि हरभजन सिंह भी स्लेजिंग बहुत आगे रहते थे. गौतम के मुताबिक, पंजाबी में स्लेजिंग करने का अपना ही मजा है. पंजाबी में एक दो शब्दों में ही स्लेजिंग पूरी हो जाती है, उसके बाद समझ नहीं आता कि कौन से वर्ड बोलें. पंजाबी में स्लेजिंग के वो शब्द इतने हैवी होते हैं कि उसके बाद कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. गौतम गंभीर ने आगे कहा कि यूं तो उन्होंने कई खिलाड़ियों को स्लेज किया पर ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट लेग स्पिनर रहे शेन वॉर्न को स्लेज करने का आनंद ही कुछ और होता था. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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भारत ही नहीं विश्व में चाहे छोटा बड़ा कोई भी देश क्यों नहीं हो दूरदर्शिता के अभाव में कई बार वो मुकाम हासिल नहीं कर पाता जो उसे चाहिए।
लेकिन अगर लम्बी सोच के साथ काम किया जाए तो देश की जनता ही देश को विकासशील से विकसित बना सकती है। समय के सदुपयोग से देश का भला किया जा सकता है।
जब देश का हर नागरिक देश में काम आने वाली वस्तुओं को यही तैयार कर बाज़ार में भेजेगा तभी मेक इन इंडिया का सपना पूरा हो पायेगा।
जो विकसित देश है वो आत्मनिर्भर है और अपने ही देश में सभी वस्तुएँ बना लेते है। लेकिन ऐसा नहीं है की वो हमेशा से विकसित थे।
दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी पुरे तरीके से बर्बाद हो गया था जिसके बाद उसने निर्णय लिया कि अब वो खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा। नतीजा आज सबके सामने है।
मोदी जी ने राहत पैकज दे दिया है और अब समय आ गया है कि देश के 130 करोड़ नागरिक मोदी जी की महत्वकांशा को पूरा कर उनका साथ दे और देश आत्मनिर्भर बने।
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भारत ही नहीं विश्व में चाहे छोटा बड़ा कोई भी देश क्यों नहीं हो दूरदर्शिता के अभाव में कई बार वो मुकाम हासिल नहीं कर पाता जो उसे चाहिए। लेकिन अगर लम्बी सोच के साथ काम किया जाए तो देश की जनता ही देश को विकासशील से विकसित बना सकती है। समय के सदुपयोग से देश का भला किया जा सकता है। जब देश का हर नागरिक देश में काम आने वाली वस्तुओं को यही तैयार कर बाज़ार में भेजेगा तभी मेक इन इंडिया का सपना पूरा हो पायेगा। जो विकसित देश है वो आत्मनिर्भर है और अपने ही देश में सभी वस्तुएँ बना लेते है। लेकिन ऐसा नहीं है की वो हमेशा से विकसित थे। दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी पुरे तरीके से बर्बाद हो गया था जिसके बाद उसने निर्णय लिया कि अब वो खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा। नतीजा आज सबके सामने है। मोदी जी ने राहत पैकज दे दिया है और अब समय आ गया है कि देश के एक सौ तीस करोड़ नागरिक मोदी जी की महत्वकांशा को पूरा कर उनका साथ दे और देश आत्मनिर्भर बने।
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{"smallUrl":"https:\/\/www4मूल्यांकन करें कि क्या आप जिम्मेदारियों को नजरअंदाज कर रहे हैंः नशे का आदी व्यक्ति स्कूल में उपस्थिति, काम, परिवार या अन्य कर्तव्य जैसे लॉन्ड्री, घर के काम, कार का रखरखाव, बिल का भुगतान इत्यादि को नजरअंदाज कर सकता है। नशे के आदी व्यक्ति का जीवन नशे के आसपास ही सिमट कर रह जाता है, नशा करना, उसके प्रभाव से उभरना और अधिक ड्रग्स लेना, यही उसकी दिनचर्या बन जाती है।[४] X रिसर्च सोर्स लत का कोई रचनात्मक या प्रयोगात्मक उपयोग नहीं होता है। यह एक अनिवार्यता है जिसका हस्तक्षेप इसे अंत तक लाने के लिए जरूरी होता है।
- लिखें कि कितनी बार अक्सर आप काम और स्कूल के लिए लेट होते हैं। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति आप कितनी सजग प्रतिक्रिया देते हैं।
- इस बारे में विचार करें कि लत के कारण आप पर वित्तीय प्रभाव पड़ता है या नहीं। लिखें कि हर दिन, सप्ताह, माह और साल में आप इस पर कितना खर्च करते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www6स्वीकार करें यदि आप दूसरों से झूठ बोल या कुछ चोरी कर रहे हैंः अन्य लोगों खासतौर पर सबसे करीबी परिजन और दोस्तों से झूठ बोलना या कुछ चुराना। ड्रग के पैसे चुकाने के लिए कीमती सामान चुराकर बेचना नशे के आदी व्यक्ति के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। लत के कारण ना सिर्फ आपके शरीर पर गलत असर पड़ता है, बल्कि सोच भी बदल जाती है और वो दूसरों का सामान चुराने को भी तैयार हो सकता है।
- झूठ बोलना नशे के अलग-अलग प्रकार पर निर्भर है, जो इसे लेने वाले लोग महसूस करते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www8ड्रग आपके जीवन पर किस तरह प्रभाव डाल रहा है, इसके बात के प्रति ईमानदारी बरतेंः भले ही इसका असर स्कूल, काम, लीगल सिस्टम, पारिवारिक जीवन, रिश्तों और स्वास्थ्य पर पड़ रहा हो, आदी व्यक्ति ड्रग का उपयोग जारी रखते हैं। ज्यादातर लोगों को गिरफ्तार हो जाने से झटका लगता है और वे अपने जीवन के बारे में पुनः विचार करने लगते हैं। लेकिन नशा या शराब के आदी व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों को भुला देते हैं या ये यादें उनके दिमाग में हल्की पड़ जाती हैं और वे फिर से नशे की ओर लौट जाते हैं।
- आप DUI (नशे की हालत में ड्राइव करने) या नियंत्रित पदार्थ के उपयोग के चलते गिरफ्तार किये जा सकते हैं।
- आपके रिश्ते परेशानी में पड़ सकते हैं या असफल हो सकते हैं। अगर आप नशे के आदी हैं, तो परिजन या दोस्त आपके पास नहीं रहना चाहते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www1डॉक्टर की मदद लेंः ऐसे डॉक्टर की मदद लें जो रासायनिक लत को छुड़ाने में विशेषज्ञ हो। पेशेवर विशेषज्ञ आपको ख़ास ड्रग एडिक्शन के संबंध में उपचार विकल्पों के बारे में सलाह दे सकता है।
{"smallUrl":"https:\/\/www3परामर्शदाता की तलाश शुरू करेंः रसायन की लत पर केन्द्रित कई अन्य ट्रीटमेंट प्रोग्राम की तरह सफल उपचार में एकल और समूह परामर्श शामिल होता है। संज्ञानातम्क व्यवहारिक थैरेपी (CBT) से आपके विचार के तरीके को समझने में मदद मिल सकती है, जो आपको ड्रग उपयोग के चक्र में पड़ने से रोकता है।
- ड्रग एडिक्शन काउंसलिंग में विशेषज्ञ परामर्शदाता खोजने के लिए अपने डॉक्टर या पुनर्वास सुविधा का लाभ लें।
{"smallUrl":"https:\/\/www1अपने दिन की योजना बनाएंः पुरानी आदतों को पीछे छोड़ने के लिए आपको अपने दिन का हर घंटा प्लान करना होगा। इससे आपको नया रूटीन बनाने में मदद मिलेगी, जिसमें ड्रग शामिल नहीं होगा। ऐसा रूटीन बनायें, जिसमे आप छोटे-छोटे लक्ष्य पूरे करना चाहते हों, जैसे स्कूल पूरा करना, परिवार बनाना या काम पर जाना। आपको हेल्दी रुचियाँ बनानी होंगी, जो ना सिर्फ आपको ड्रग की आदत से दूर रखेंगी, बल्कि आपके जीवन के लक्ष्यों को भी पूरा करने में मदद मिलेगी।
{"smallUrl":"https:\/\/www3खुद के प्रति ईमानदार रहेंः पुरानी आदतों को तोड़ने का एक और हिस्सा खुद की प्रतिबद्धता के साथ ईमानदारी से पेश आना भी है। जहाँ भी आप जाएँ, जो भी आप कहें उसमें ईमानदारी होनी चाहिए। ड्रग उपयोग से जुड़े लोग और जगह आपको दुबारा अपनी और खींचेगी। इसमें सफल होने के लिए अच्छी योजना और सख्त ईमानदारी जरूरी है।
- उदाहरण के लिए, अपने आप से ऐसे किसी स्थान पर जाने के लिए ना कहें जहाँ आप अपनी शक्ति को आजमाना चाहते हों। यह ना सोचें कि किसी व्यक्ति को वह जगह दिखाएं जहाँ आप ड्रग लेते थे, ये अच्छी बात है। खुद को वापस ड्रग के उपयोग की ओर ले जाने के लिए ये सिर्फ तरीके या युक्तियाँ हैं। पीड़ित व्यक्ति को इन तरकीबों में ना पड़ने दें।
{"smallUrl":"https:\/\/www5अपने आसपास सहयोग करने वाले लोगों को रखेंः अपने पास ऐसे लोगों को रखें, जो ड्रग की लत को छुड़ाने में आपकी मदद कर पायें। ख्याल रखने वाले परिजन और दोस्त आपको स्वस्थ बनाने में आपकी मदद करना चाहते हैं।
- ऐसे लोग चुनें जो ड्रग या शराब नहीं पीते हों, ताकि आप स्वयं को आकर्षित करने वाली स्थिति में डालने से बचा पायें।
{"smallUrl":"https:\/\/www2पोषण विशेषज्ञ की मदद लेंः अपने आसपास या अपने देश के हॉस्पिटल में उपलब्ध पोषण विशेषज्ञ की सेवाओं की सहायता लें। अपने शरीर को वापस पुरानी अवस्था में लाने के लिए अच्छा खाना-पीना बेहतर हो सकता है। इससे ड्रग के उपयोग के कारण शरीर को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है।
{"smallUrl":"https:\/\/www4मेडिटेशन आजमायेंः तनाव को प्रबंधित करने और श्वास व बॉडी अवेयरनेस पर फोकस करने के लिए मेडिटेशन अच्छा तरीका हो सकता है। ड्रग या शराब के उपयोग की इच्छा से निपटने के लिए खुद को शांत रखने हेतु मेडिटेशन अच्छा तरीका है।
- 10-15 मिनट बैठने के लिए आरामदायक और शांति वाली जगह खोजें।
- अपनी सांस पर फोकस करें और सांस को गहराई तक व तेजी से अंदर खींचें।
- आपके दिमाग से विचार आते-जाते रहते हैं, उन्हें बिना किसी निर्णय के गुजर जाने दें। वापस अपनी सांस पर ध्यान केन्द्रित करें।
{"smallUrl":"https:\/\/www6परामर्शदाता से संपर्क करेंः सपोर्ट की जरूरत रहने तक काउंसलिंग जारी रखें। समस्याओं को दूर करने के लिए आप अपने परिवार को भी साथ लेकर जा सकते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www2अपने लक्ष्यों की एक सूची बनाएंः वे लक्ष्य लिखें जो आप पूरा करना चाहते हों। ये छोटी बातें हो सकती हैं, जैसे रोज नहाना और पोषणयुक्त खाना-पीना। आप बड़े लक्ष्य भी बना सकते हैं, जैसे काम खोजना या डेंटिस्ट के पास जाना।
- हर सप्ताह इन लक्ष्यों की प्रगति का ट्रैक रखें। छोटे छोटे लक्ष्य प्राप्ति को भी नोट करें। आप सुधार और प्रगति को होता देखेंगे, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
{"smallUrl":"https:\/\/www4ड्रग और शराब में लिप्त लोगों और जगहों से दूर रहेंः ऐसी जगहों पर ना जाएँ जहाँ आप ड्रग लेते या उसका उपयोग करते हों। ऐसे लोगों की संगत ना करें जो शराब पीते हों। इससे आपको लत छोड़ने में मदद मिलेगी।
- कई ऐसी जगह हैं, जहाँ से आपकी ड्रग या ड्रिंक की आदतें नहीं जुड़ी होंगी। आप नई हॉबी भी बना सकते हैं, जैसे रॉक क्लाइम्बिंग, बुनाई, हाइकिंग या गार्डनिंग।
{"smallUrl":"https:\/\/www6नया जीवन बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंः खराब समय बीत जाने के बाद आपका शरीर और दिमाग नशा छोड़ने के बारे में ज्यादा समय तक नहीं सोचेगा। फिर अपना समय नया जीवन बनाने में लगाएं, जैसा आप चाहते हों। जिन लोगों से आप प्रेम करते हैं, उनके साथ रिश्ते को बेहतर बनाएं, अपनी जॉब में खूब मेहनत करें, खुद को हॉबी में शामिल कर लें और पुराने समय के अच्छे दिन वापस जियें।
- इस दौरान आपको अपने सपोर्ट ग्रुप और थैरेपिस्ट से लगातार मिलते रहना चाहिए। ड्रग छोड़ने की प्रक्रिया तुरंत पूर नहीं होने वाली, इसलिए काम बेहतर होने लगने पर खुद को ठीक घोषित ना करें।
- किसी ताकतवर एडिक्शन से उभरने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है। मादक पदार्थों के सेवन से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति से खुद को निकालने के लिए किसी पेशेवर की मदद लें।
- अगर आप अपने ड्रग की आदत के लिए डॉक्टर को खोजते हैं, तो यह विवरण मेडिकल रिकॉर्ड में नजर आ सकता है। कुछ स्थितियों में इस तरह का विवरण गैर-कानूनी हो सकता है। यह भविष्य में जॉब या बीमा के लिए मुश्किल की वजह बन सकता है। प्रतिबंधित ड्रग का इस्तेमाल जारी रखने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। अगर आप अवैध प्रकटीकरण के दोषी हैं, तो वकील के मदद लें।
- ड्रग की लत छोड़ना खतरनाक और जीवनघाती भी हो सकता है। डेटोक्सिंग/रसायन मुक्त होने से पहले मेडिकल प्रोफेशनल की राय अवश्य लें।
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{"smallUrl":"https:\/\/wwwचारमूल्यांकन करें कि क्या आप जिम्मेदारियों को नजरअंदाज कर रहे हैंः नशे का आदी व्यक्ति स्कूल में उपस्थिति, काम, परिवार या अन्य कर्तव्य जैसे लॉन्ड्री, घर के काम, कार का रखरखाव, बिल का भुगतान इत्यादि को नजरअंदाज कर सकता है। नशे के आदी व्यक्ति का जीवन नशे के आसपास ही सिमट कर रह जाता है, नशा करना, उसके प्रभाव से उभरना और अधिक ड्रग्स लेना, यही उसकी दिनचर्या बन जाती है।[चार] X रिसर्च सोर्स लत का कोई रचनात्मक या प्रयोगात्मक उपयोग नहीं होता है। यह एक अनिवार्यता है जिसका हस्तक्षेप इसे अंत तक लाने के लिए जरूरी होता है। - लिखें कि कितनी बार अक्सर आप काम और स्कूल के लिए लेट होते हैं। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति आप कितनी सजग प्रतिक्रिया देते हैं। - इस बारे में विचार करें कि लत के कारण आप पर वित्तीय प्रभाव पड़ता है या नहीं। लिखें कि हर दिन, सप्ताह, माह और साल में आप इस पर कितना खर्च करते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःस्वीकार करें यदि आप दूसरों से झूठ बोल या कुछ चोरी कर रहे हैंः अन्य लोगों खासतौर पर सबसे करीबी परिजन और दोस्तों से झूठ बोलना या कुछ चुराना। ड्रग के पैसे चुकाने के लिए कीमती सामान चुराकर बेचना नशे के आदी व्यक्ति के लिए कोई असामान्य बात नहीं है। लत के कारण ना सिर्फ आपके शरीर पर गलत असर पड़ता है, बल्कि सोच भी बदल जाती है और वो दूसरों का सामान चुराने को भी तैयार हो सकता है। - झूठ बोलना नशे के अलग-अलग प्रकार पर निर्भर है, जो इसे लेने वाले लोग महसूस करते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwआठड्रग आपके जीवन पर किस तरह प्रभाव डाल रहा है, इसके बात के प्रति ईमानदारी बरतेंः भले ही इसका असर स्कूल, काम, लीगल सिस्टम, पारिवारिक जीवन, रिश्तों और स्वास्थ्य पर पड़ रहा हो, आदी व्यक्ति ड्रग का उपयोग जारी रखते हैं। ज्यादातर लोगों को गिरफ्तार हो जाने से झटका लगता है और वे अपने जीवन के बारे में पुनः विचार करने लगते हैं। लेकिन नशा या शराब के आदी व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों को भुला देते हैं या ये यादें उनके दिमाग में हल्की पड़ जाती हैं और वे फिर से नशे की ओर लौट जाते हैं। - आप DUI या नियंत्रित पदार्थ के उपयोग के चलते गिरफ्तार किये जा सकते हैं। - आपके रिश्ते परेशानी में पड़ सकते हैं या असफल हो सकते हैं। अगर आप नशे के आदी हैं, तो परिजन या दोस्त आपके पास नहीं रहना चाहते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकडॉक्टर की मदद लेंः ऐसे डॉक्टर की मदद लें जो रासायनिक लत को छुड़ाने में विशेषज्ञ हो। पेशेवर विशेषज्ञ आपको ख़ास ड्रग एडिक्शन के संबंध में उपचार विकल्पों के बारे में सलाह दे सकता है। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनपरामर्शदाता की तलाश शुरू करेंः रसायन की लत पर केन्द्रित कई अन्य ट्रीटमेंट प्रोग्राम की तरह सफल उपचार में एकल और समूह परामर्श शामिल होता है। संज्ञानातम्क व्यवहारिक थैरेपी से आपके विचार के तरीके को समझने में मदद मिल सकती है, जो आपको ड्रग उपयोग के चक्र में पड़ने से रोकता है। - ड्रग एडिक्शन काउंसलिंग में विशेषज्ञ परामर्शदाता खोजने के लिए अपने डॉक्टर या पुनर्वास सुविधा का लाभ लें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकअपने दिन की योजना बनाएंः पुरानी आदतों को पीछे छोड़ने के लिए आपको अपने दिन का हर घंटा प्लान करना होगा। इससे आपको नया रूटीन बनाने में मदद मिलेगी, जिसमें ड्रग शामिल नहीं होगा। ऐसा रूटीन बनायें, जिसमे आप छोटे-छोटे लक्ष्य पूरे करना चाहते हों, जैसे स्कूल पूरा करना, परिवार बनाना या काम पर जाना। आपको हेल्दी रुचियाँ बनानी होंगी, जो ना सिर्फ आपको ड्रग की आदत से दूर रखेंगी, बल्कि आपके जीवन के लक्ष्यों को भी पूरा करने में मदद मिलेगी। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनखुद के प्रति ईमानदार रहेंः पुरानी आदतों को तोड़ने का एक और हिस्सा खुद की प्रतिबद्धता के साथ ईमानदारी से पेश आना भी है। जहाँ भी आप जाएँ, जो भी आप कहें उसमें ईमानदारी होनी चाहिए। ड्रग उपयोग से जुड़े लोग और जगह आपको दुबारा अपनी और खींचेगी। इसमें सफल होने के लिए अच्छी योजना और सख्त ईमानदारी जरूरी है। - उदाहरण के लिए, अपने आप से ऐसे किसी स्थान पर जाने के लिए ना कहें जहाँ आप अपनी शक्ति को आजमाना चाहते हों। यह ना सोचें कि किसी व्यक्ति को वह जगह दिखाएं जहाँ आप ड्रग लेते थे, ये अच्छी बात है। खुद को वापस ड्रग के उपयोग की ओर ले जाने के लिए ये सिर्फ तरीके या युक्तियाँ हैं। पीड़ित व्यक्ति को इन तरकीबों में ना पड़ने दें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwपाँचअपने आसपास सहयोग करने वाले लोगों को रखेंः अपने पास ऐसे लोगों को रखें, जो ड्रग की लत को छुड़ाने में आपकी मदद कर पायें। ख्याल रखने वाले परिजन और दोस्त आपको स्वस्थ बनाने में आपकी मदद करना चाहते हैं। - ऐसे लोग चुनें जो ड्रग या शराब नहीं पीते हों, ताकि आप स्वयं को आकर्षित करने वाली स्थिति में डालने से बचा पायें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोपोषण विशेषज्ञ की मदद लेंः अपने आसपास या अपने देश के हॉस्पिटल में उपलब्ध पोषण विशेषज्ञ की सेवाओं की सहायता लें। अपने शरीर को वापस पुरानी अवस्था में लाने के लिए अच्छा खाना-पीना बेहतर हो सकता है। इससे ड्रग के उपयोग के कारण शरीर को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारमेडिटेशन आजमायेंः तनाव को प्रबंधित करने और श्वास व बॉडी अवेयरनेस पर फोकस करने के लिए मेडिटेशन अच्छा तरीका हो सकता है। ड्रग या शराब के उपयोग की इच्छा से निपटने के लिए खुद को शांत रखने हेतु मेडिटेशन अच्छा तरीका है। - दस-पंद्रह मिनट बैठने के लिए आरामदायक और शांति वाली जगह खोजें। - अपनी सांस पर फोकस करें और सांस को गहराई तक व तेजी से अंदर खींचें। - आपके दिमाग से विचार आते-जाते रहते हैं, उन्हें बिना किसी निर्णय के गुजर जाने दें। वापस अपनी सांस पर ध्यान केन्द्रित करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःपरामर्शदाता से संपर्क करेंः सपोर्ट की जरूरत रहने तक काउंसलिंग जारी रखें। समस्याओं को दूर करने के लिए आप अपने परिवार को भी साथ लेकर जा सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोअपने लक्ष्यों की एक सूची बनाएंः वे लक्ष्य लिखें जो आप पूरा करना चाहते हों। ये छोटी बातें हो सकती हैं, जैसे रोज नहाना और पोषणयुक्त खाना-पीना। आप बड़े लक्ष्य भी बना सकते हैं, जैसे काम खोजना या डेंटिस्ट के पास जाना। - हर सप्ताह इन लक्ष्यों की प्रगति का ट्रैक रखें। छोटे छोटे लक्ष्य प्राप्ति को भी नोट करें। आप सुधार और प्रगति को होता देखेंगे, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारड्रग और शराब में लिप्त लोगों और जगहों से दूर रहेंः ऐसी जगहों पर ना जाएँ जहाँ आप ड्रग लेते या उसका उपयोग करते हों। ऐसे लोगों की संगत ना करें जो शराब पीते हों। इससे आपको लत छोड़ने में मदद मिलेगी। - कई ऐसी जगह हैं, जहाँ से आपकी ड्रग या ड्रिंक की आदतें नहीं जुड़ी होंगी। आप नई हॉबी भी बना सकते हैं, जैसे रॉक क्लाइम्बिंग, बुनाई, हाइकिंग या गार्डनिंग। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःनया जीवन बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंः खराब समय बीत जाने के बाद आपका शरीर और दिमाग नशा छोड़ने के बारे में ज्यादा समय तक नहीं सोचेगा। फिर अपना समय नया जीवन बनाने में लगाएं, जैसा आप चाहते हों। जिन लोगों से आप प्रेम करते हैं, उनके साथ रिश्ते को बेहतर बनाएं, अपनी जॉब में खूब मेहनत करें, खुद को हॉबी में शामिल कर लें और पुराने समय के अच्छे दिन वापस जियें। - इस दौरान आपको अपने सपोर्ट ग्रुप और थैरेपिस्ट से लगातार मिलते रहना चाहिए। ड्रग छोड़ने की प्रक्रिया तुरंत पूर नहीं होने वाली, इसलिए काम बेहतर होने लगने पर खुद को ठीक घोषित ना करें। - किसी ताकतवर एडिक्शन से उभरने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है। मादक पदार्थों के सेवन से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति से खुद को निकालने के लिए किसी पेशेवर की मदद लें। - अगर आप अपने ड्रग की आदत के लिए डॉक्टर को खोजते हैं, तो यह विवरण मेडिकल रिकॉर्ड में नजर आ सकता है। कुछ स्थितियों में इस तरह का विवरण गैर-कानूनी हो सकता है। यह भविष्य में जॉब या बीमा के लिए मुश्किल की वजह बन सकता है। प्रतिबंधित ड्रग का इस्तेमाल जारी रखने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। अगर आप अवैध प्रकटीकरण के दोषी हैं, तो वकील के मदद लें। - ड्रग की लत छोड़ना खतरनाक और जीवनघाती भी हो सकता है। डेटोक्सिंग/रसायन मुक्त होने से पहले मेडिकल प्रोफेशनल की राय अवश्य लें।
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Coronavirus Lockdown in India HIGHLIGHTS: देश में कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना यहां लाखों लोग पॉज़िटिव पाये जा रहे हैं, वहीं हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसके चलते अब ज्यादातर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में मजबूरन लॉकडाउन और आंशिक बंदी में घिरे हैं। अब तक कुल 15 राज्य और यूटी ऐसे हैं, जहां पूर्ण लॉकडाउन लग चुका है। वहीं, बाकी में भी आंशिक बंदी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे नया है। यहां शासन के आदेश के मुताबिक अब आंशिक लॉकडाउन 17 मई तक जारी रहेगा। पहले इसे 10 मई (सोमवार) सुबह 7 बजे खत्म होना था। बता दें कि यह चौथी बार है, जब यूपी सरकार ने आंशिक बंदी का फैसला किया है। इससे पहले योगी सरकार ने वीकेंड लॉकडाउन के साथ सोमवार की बंदी, फिर गुरुवार तक और इसके बाद 10 मई तक राज्य में आंशिक लॉकडाउन का ऐलान किया था।
इस बीच भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 4 लाख 3 हजार 738 केस मिले हैं। यह लगातार चौथा दिन है, जब कोरोना के चार लाख से ज्यादा मामले मिले हैं। वहीं, देश में 4092 मौतें हुई हैं। इसी के साथ भारत में अब तक कोरोना से कुल 2. 42 लाख की मौत हो चुकी है, जबकि कुल 2. 22 करोड़ केस आ चुके हैं।
भारत में फिलहाल सक्रिय केसों की संख्या 37 लाख 36 हजार के पास है। इस बीच एक सुकून देने वाली बात यह है कि पिछले एक दिन में अस्पतालों से 3 लाख 86 हजार मरीज डिस्चार्ज किए गए हैं। यानी ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी अब तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते उपचाराधीन मरीजों का आंकड़ा तेजी से नीचे आने की उम्मीद है।
इस बीच मेडिकल जर्नल लांसेट ने कोरोना से निपटने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को लेकर तीखी आलोचना की है। पत्रिका में जो संपादकीय छापा है, उसमें कहा गया है कि सरकार कोरोना महामारी से निपटने से ज्यादा आलोचनाओं को दबाने में लगी हुई दिखी। पीएम मोदी की संकट के समय खुली चर्चा और आलोचना को दबाने की यह कोशिश अक्षम्य हैं।
लांसेट ने कहा है कि 1 अगस्त तक भारत में 10 लाख मौतें हो सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो इस राष्ट्रीय आपदा के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार होगी। भारत को कोविड-19 पर नियंत्रण हासिल करने में शुरुआत में सफलता मिली थी। लेकिन अप्रैल तक भारत सरकार की कोविड-19 टास्कफोर्स की महीनों से बैठक ही नहीं हुई थी। जर्नल में आगे कहा गया है कि भारत की कोरोना से आगे की लड़ाई की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी गलती कितना मानती है।
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Coronavirus Lockdown in India HIGHLIGHTS: देश में कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना यहां लाखों लोग पॉज़िटिव पाये जा रहे हैं, वहीं हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसके चलते अब ज्यादातर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में मजबूरन लॉकडाउन और आंशिक बंदी में घिरे हैं। अब तक कुल पंद्रह राज्य और यूटी ऐसे हैं, जहां पूर्ण लॉकडाउन लग चुका है। वहीं, बाकी में भी आंशिक बंदी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे नया है। यहां शासन के आदेश के मुताबिक अब आंशिक लॉकडाउन सत्रह मई तक जारी रहेगा। पहले इसे दस मई सुबह सात बजे खत्म होना था। बता दें कि यह चौथी बार है, जब यूपी सरकार ने आंशिक बंदी का फैसला किया है। इससे पहले योगी सरकार ने वीकेंड लॉकडाउन के साथ सोमवार की बंदी, फिर गुरुवार तक और इसके बाद दस मई तक राज्य में आंशिक लॉकडाउन का ऐलान किया था। इस बीच भारत में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के चार लाख तीन हजार सात सौ अड़तीस केस मिले हैं। यह लगातार चौथा दिन है, जब कोरोना के चार लाख से ज्यादा मामले मिले हैं। वहीं, देश में चार हज़ार बानवे मौतें हुई हैं। इसी के साथ भारत में अब तक कोरोना से कुल दो. बयालीस लाख की मौत हो चुकी है, जबकि कुल दो. बाईस करोड़ केस आ चुके हैं। भारत में फिलहाल सक्रिय केसों की संख्या सैंतीस लाख छत्तीस हजार के पास है। इस बीच एक सुकून देने वाली बात यह है कि पिछले एक दिन में अस्पतालों से तीन लाख छियासी हजार मरीज डिस्चार्ज किए गए हैं। यानी ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी अब तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते उपचाराधीन मरीजों का आंकड़ा तेजी से नीचे आने की उम्मीद है। इस बीच मेडिकल जर्नल लांसेट ने कोरोना से निपटने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को लेकर तीखी आलोचना की है। पत्रिका में जो संपादकीय छापा है, उसमें कहा गया है कि सरकार कोरोना महामारी से निपटने से ज्यादा आलोचनाओं को दबाने में लगी हुई दिखी। पीएम मोदी की संकट के समय खुली चर्चा और आलोचना को दबाने की यह कोशिश अक्षम्य हैं। लांसेट ने कहा है कि एक अगस्त तक भारत में दस लाख मौतें हो सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो इस राष्ट्रीय आपदा के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार होगी। भारत को कोविड-उन्नीस पर नियंत्रण हासिल करने में शुरुआत में सफलता मिली थी। लेकिन अप्रैल तक भारत सरकार की कोविड-उन्नीस टास्कफोर्स की महीनों से बैठक ही नहीं हुई थी। जर्नल में आगे कहा गया है कि भारत की कोरोना से आगे की लड़ाई की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी गलती कितना मानती है।
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दुनिया के कई ऐसे मुस्लिम राष्ट्र हैं, जहां पर हिजाब पहनना कानून रूप से अनिवार्य है, इतना ही नहीं यहां पर महिलाएं ढीले कपड़े भी पहनकर बाहर नहीं निकल सकते है।
ईरान में हिजाब पहनना या चेहरा ढकना महिलाओं के लिए अनिवार्य है। इतना ही नहीं यहां पर इस कानून का पालन न करने पर सजा का भी प्रावधान है। दरअसल, 1979 में हुई इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया। उस समय कानून के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। ईरान में घर से बाहर निकलने पर महिलाओं हिजाब पहनना जरूरी है। इतना ही नहीं महिलाओं को ढीले कपड़े पहन पर भी रोक है। ईरान में कई महिलाओं के साथ हिजाब पहनने और न पहनने के कारण भेदभाव किया गया। इतना ही नहीं कई महिलाओं ने शोषण और शर्मिंदगी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली।
अन्य मुस्लिम देशों की तरह, अफगानिस्तान ने भी महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है। लेकिन जब से तालिबानी सरकार ने यहां पर सत्ता में आई है, इस रूल को कठोर कर दिया है,हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला को इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि उसने बुर्का नहीं पहना था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सार्वजनिक स्थान पर बिना सिर ढके घूमने के लिए एक महिला को मौत के घाट उतार दिया गया।
खाड़ी देश इराक में भी हिजाब पहनना अनिवार्य है, लेकिन ईरान जैसे सख्त रूल यहां पर लागू नहीं है, हालांकि कुछ ही ऐसे शहर हैं, जहां पर हिजाब को लेकर सख्त रूल है, इनमें नजफ और कर्बला जैसे शहर शामिल हैं। इराक में आमतौर पर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं अबाया पहनती हैं।
यह भी पढ़ें-हिजाब पर पॉलिटिक्सः कर्नाटक BJP ने राहुल गांधी से पूछा-कांग्रेस शासित राज्यों में अनिवार्य क्यों नहीं करते?
अधिकतर इस्लामी देशों की तरह, सऊदी अरब ने भी महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसके लिए सऊदी अरब ने कानून भी पारित किया है, इसके तहत जब महिलाआएं बाहर तो उनके लिए हिजाब पहनना जरूरी है, इतना ही नहीं बाहर जाने पर शालीन और उचित कपड़े ही पहनने की अनुमति है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है,
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दुनिया के कई ऐसे मुस्लिम राष्ट्र हैं, जहां पर हिजाब पहनना कानून रूप से अनिवार्य है, इतना ही नहीं यहां पर महिलाएं ढीले कपड़े भी पहनकर बाहर नहीं निकल सकते है। ईरान में हिजाब पहनना या चेहरा ढकना महिलाओं के लिए अनिवार्य है। इतना ही नहीं यहां पर इस कानून का पालन न करने पर सजा का भी प्रावधान है। दरअसल, एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में हुई इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया। उस समय कानून के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। ईरान में घर से बाहर निकलने पर महिलाओं हिजाब पहनना जरूरी है। इतना ही नहीं महिलाओं को ढीले कपड़े पहन पर भी रोक है। ईरान में कई महिलाओं के साथ हिजाब पहनने और न पहनने के कारण भेदभाव किया गया। इतना ही नहीं कई महिलाओं ने शोषण और शर्मिंदगी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली। अन्य मुस्लिम देशों की तरह, अफगानिस्तान ने भी महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है। लेकिन जब से तालिबानी सरकार ने यहां पर सत्ता में आई है, इस रूल को कठोर कर दिया है,हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला को इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि उसने बुर्का नहीं पहना था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सार्वजनिक स्थान पर बिना सिर ढके घूमने के लिए एक महिला को मौत के घाट उतार दिया गया। खाड़ी देश इराक में भी हिजाब पहनना अनिवार्य है, लेकिन ईरान जैसे सख्त रूल यहां पर लागू नहीं है, हालांकि कुछ ही ऐसे शहर हैं, जहां पर हिजाब को लेकर सख्त रूल है, इनमें नजफ और कर्बला जैसे शहर शामिल हैं। इराक में आमतौर पर सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं अबाया पहनती हैं। यह भी पढ़ें-हिजाब पर पॉलिटिक्सः कर्नाटक BJP ने राहुल गांधी से पूछा-कांग्रेस शासित राज्यों में अनिवार्य क्यों नहीं करते? अधिकतर इस्लामी देशों की तरह, सऊदी अरब ने भी महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसके लिए सऊदी अरब ने कानून भी पारित किया है, इसके तहत जब महिलाआएं बाहर तो उनके लिए हिजाब पहनना जरूरी है, इतना ही नहीं बाहर जाने पर शालीन और उचित कपड़े ही पहनने की अनुमति है। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है,
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India Alliance :- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को इंडिया गठबंधन की तीसरी बैठक के दौरान सहयोगियों से सत्तारूढ़ पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिक हमलों के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने बताया कि इंडिया गठबंधन की बढ़ती ताकत से सरकार परेशान है। उन्होंने देश में हेट क्राइम्स में वृद्धि के लिए भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा। इसके साथ राज्यों को नियंत्रण में रखने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। बैठक के दूसरे दिन इंडिया ब्लॉक के नेताओं को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पटना और बेंगलुरु में हमारी दोनों बैठकों की सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में न सिर्फ हम पर हमला बोला है, हमारे प्यारे देश के नाम की तुलना आतंकवादी संगठन और गुलामी के प्रतीक से की।
उन्होंने कहा कि हमें इस सरकार की प्रतिशोध की राजनीति के कारण आने वाले महीनों में और अधिक हमलों, अधिक छापेमारी और गिरफ्तारियों के लिए तैयार रहना चाहिए। कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि जितना अधिक इंडिया गठबंधन मजबूत होगा उतना ही अधिक भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग करेगी। उन्होंने महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों और झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ में हाल की घटनाओं का भी उदाहरण दिया। खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हमारे समाज का हर वर्ग - चाहे वह किसान, युवा, महिलाएं, हाशिए पर रहने वाले लोग, मध्यम वर्ग, बुद्धिजीवी, गैर सरकारी संगठन और पत्रकार हो - सभी भाजपा के सत्तावादी कुशासन के शिकार हैं। हमारी तरफ 140 करोड़ भारतीय अपने दुखों को दूर करने की आशा के साथ देख रहे हैं।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर पलटवार करते हुए खड़गे ने कहा, "भाजपा और आरएसएस ने पिछले नौ वर्षों में जो सांप्रदायिक जहर फैलाया है, वह अब निर्दोष ट्रेन यात्रियों और निर्दोष स्कूली बच्चों के खिलाफ हेट क्राइम्स के रूप में देखा जा रहा है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जब देश के एक हिस्से में भयानक बलात्कार में शामिल लोगों को रिहा किया जाता है और सम्मानित किया जाता है, तो दूसरे हिस्से में भयानक अपराधों और नग्न महिलाओं की परेड को बढ़ावा मिलता है। मोदी जी के भारत में कारगिल युद्ध के एक वीर की पत्नी को भी नहीं बख्शा जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष ट्रेन में आरपीएफ कांस्टेबल के चार लोगों की हत्या करने, मणिपुर में महिलाओं की नग्न परेड, बिलकिस बानो बलात्कार के आरोपी की रिहाई का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने मध्य प्रदेश की घटना का जिक्र करते हुए कहा, "यह हाशिये पर पड़े लोगों के प्रति भाजपा सरकार की उदासीनता है, जिसके कारण उनके नेता गरीब आदिवासियों और दलितों पर पेशाब करते हैं। दोषियों को खुलेआम घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है। सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्यों को नियंत्रण में रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्यों को कर राजस्व के उनके हिस्से से वंचित किया जा रहा है। विपक्ष शासित राज्यों को मनरेगा का बकाया नहीं दिया जा रहा है। वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार विशेष अनुदान और राज्य विशिष्ट अनुदान जारी नहीं किए जाते हैं। इन्वेस्टर्स को इन्वेस्टमेंट और परियोजनाओं को विपक्ष शासित राज्यों की जगह भाजपा सरकार वाले राज्यों में ले जाने के लिए मजबूर किया जाता है।
खड़गे ने सवाल किया कि उन्होंने (राहुल गांधी) मॉरीशस स्थित कंपनी से राउंड ट्रिपिंग के आरोपों और अपारदर्शी निवेश की रिपोर्ट की जेपीसी जांच की मांग की। यह समझ से बाहर है कि प्रधानमंत्री इस मामले (अडानी केस) की जांच क्यों नहीं करा रहे हैं? खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंसियों और संस्थानों पर पूर्ण नियंत्रण चाहती है - वह ईडी प्रमुख, सीबीआई निदेशक, चुनाव आयुक्तों, यहां तक कि देश भर की अदालतों के न्यायाधीशों की नियुक्ति को नियंत्रित करने पर अड़ी हुई है। खड़गे के मुताबिक तीन बैठकों के दौरान इंडिया गठबंधन ने एक संयुक्त मोर्चे के रूप में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार को सफलतापूर्वक जवाबदेह बनाया है। हमारी ताकत सरकार को परेशान करती है।
यही कारण है कि इसने संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया है, हमारे सांसदों को मामूली बात पर निलंबित कर दिया है। हमारे खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव दायर किया, हमारे माइक बंद कर दिए, कैमरों को हमारे विरोध-प्रदर्शन को कवर करने की अनुमति नहीं दी, संसद टीवी पर हमारे भाषणों को खुलेआम सेंसर कर दिया। खड़गे ने खासतौर पर जिक्र किया, "चंद्रयान 3 और इसरो के हमारे वैज्ञानिकों की सफलता, नीरज चोपड़ा और शतरंज के जादूगर प्रगनानंद जैसे खिलाड़ियों की सफलता हम सभी को गौरवान्वित करती है। मैं अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उन सभी को उनकी सफलता पर बधाई देना चाहता हूं। (आईएएनएस)
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India Alliance :- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को इंडिया गठबंधन की तीसरी बैठक के दौरान सहयोगियों से सत्तारूढ़ पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिक हमलों के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने बताया कि इंडिया गठबंधन की बढ़ती ताकत से सरकार परेशान है। उन्होंने देश में हेट क्राइम्स में वृद्धि के लिए भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा। इसके साथ राज्यों को नियंत्रण में रखने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। बैठक के दूसरे दिन इंडिया ब्लॉक के नेताओं को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पटना और बेंगलुरु में हमारी दोनों बैठकों की सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में न सिर्फ हम पर हमला बोला है, हमारे प्यारे देश के नाम की तुलना आतंकवादी संगठन और गुलामी के प्रतीक से की। उन्होंने कहा कि हमें इस सरकार की प्रतिशोध की राजनीति के कारण आने वाले महीनों में और अधिक हमलों, अधिक छापेमारी और गिरफ्तारियों के लिए तैयार रहना चाहिए। कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि जितना अधिक इंडिया गठबंधन मजबूत होगा उतना ही अधिक भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग करेगी। उन्होंने महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों और झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ में हाल की घटनाओं का भी उदाहरण दिया। खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हमारे समाज का हर वर्ग - चाहे वह किसान, युवा, महिलाएं, हाशिए पर रहने वाले लोग, मध्यम वर्ग, बुद्धिजीवी, गैर सरकारी संगठन और पत्रकार हो - सभी भाजपा के सत्तावादी कुशासन के शिकार हैं। हमारी तरफ एक सौ चालीस करोड़ भारतीय अपने दुखों को दूर करने की आशा के साथ देख रहे हैं। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर पलटवार करते हुए खड़गे ने कहा, "भाजपा और आरएसएस ने पिछले नौ वर्षों में जो सांप्रदायिक जहर फैलाया है, वह अब निर्दोष ट्रेन यात्रियों और निर्दोष स्कूली बच्चों के खिलाफ हेट क्राइम्स के रूप में देखा जा रहा है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जब देश के एक हिस्से में भयानक बलात्कार में शामिल लोगों को रिहा किया जाता है और सम्मानित किया जाता है, तो दूसरे हिस्से में भयानक अपराधों और नग्न महिलाओं की परेड को बढ़ावा मिलता है। मोदी जी के भारत में कारगिल युद्ध के एक वीर की पत्नी को भी नहीं बख्शा जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष ट्रेन में आरपीएफ कांस्टेबल के चार लोगों की हत्या करने, मणिपुर में महिलाओं की नग्न परेड, बिलकिस बानो बलात्कार के आरोपी की रिहाई का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने मध्य प्रदेश की घटना का जिक्र करते हुए कहा, "यह हाशिये पर पड़े लोगों के प्रति भाजपा सरकार की उदासीनता है, जिसके कारण उनके नेता गरीब आदिवासियों और दलितों पर पेशाब करते हैं। दोषियों को खुलेआम घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है। सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राज्यों को नियंत्रण में रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्यों को कर राजस्व के उनके हिस्से से वंचित किया जा रहा है। विपक्ष शासित राज्यों को मनरेगा का बकाया नहीं दिया जा रहा है। वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार विशेष अनुदान और राज्य विशिष्ट अनुदान जारी नहीं किए जाते हैं। इन्वेस्टर्स को इन्वेस्टमेंट और परियोजनाओं को विपक्ष शासित राज्यों की जगह भाजपा सरकार वाले राज्यों में ले जाने के लिए मजबूर किया जाता है। खड़गे ने सवाल किया कि उन्होंने मॉरीशस स्थित कंपनी से राउंड ट्रिपिंग के आरोपों और अपारदर्शी निवेश की रिपोर्ट की जेपीसी जांच की मांग की। यह समझ से बाहर है कि प्रधानमंत्री इस मामले की जांच क्यों नहीं करा रहे हैं? खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंसियों और संस्थानों पर पूर्ण नियंत्रण चाहती है - वह ईडी प्रमुख, सीबीआई निदेशक, चुनाव आयुक्तों, यहां तक कि देश भर की अदालतों के न्यायाधीशों की नियुक्ति को नियंत्रित करने पर अड़ी हुई है। खड़गे के मुताबिक तीन बैठकों के दौरान इंडिया गठबंधन ने एक संयुक्त मोर्चे के रूप में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार को सफलतापूर्वक जवाबदेह बनाया है। हमारी ताकत सरकार को परेशान करती है। यही कारण है कि इसने संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया है, हमारे सांसदों को मामूली बात पर निलंबित कर दिया है। हमारे खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव दायर किया, हमारे माइक बंद कर दिए, कैमरों को हमारे विरोध-प्रदर्शन को कवर करने की अनुमति नहीं दी, संसद टीवी पर हमारे भाषणों को खुलेआम सेंसर कर दिया। खड़गे ने खासतौर पर जिक्र किया, "चंद्रयान तीन और इसरो के हमारे वैज्ञानिकों की सफलता, नीरज चोपड़ा और शतरंज के जादूगर प्रगनानंद जैसे खिलाड़ियों की सफलता हम सभी को गौरवान्वित करती है। मैं अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उन सभी को उनकी सफलता पर बधाई देना चाहता हूं।
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नई दिल्ली/दि. १८- देशभर के गन्ना किसानों के लिए बुधवार को राहत की खबर आ सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक में वर्ष २०२०-२१ के लिए गन्ना की खरीद मूल्य में बढोत्तरी का फैसला हो सकता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खरीद मूल्य में १० रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की संभावना है. बढ़ोतरी के बाद खरीद मूल्य २८५ रुपए प्रति क्विंटल हो सकता है. २०१९-२० में २०१८-१९ की तुलना में खरीद मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया था. गन्ने की खरीद मूल्य को फेयर एंड रिमेयूनेरेटीव प्राइज के तौर पर घोषित किया जाता है. चीनी वर्ष हर वर्ष १ अक्टूबर से शुरू होकर अगले साल ३० सितंबर तक चलता है. पिछले साल खरीद मूल्य में बढ़ोतरी नहीं किए जाने का किसानों ने विरोध किया था. एफआरपी वो मूल्य होता है जिस दर पर चीनी मिल किसानों से गन्ना खरीदते हैं. सरकार फिलहाल चीनी की न्यूनतम विक्रय मूल्य को बढाने का फैसला टाल सकती है. न्यूनतम विक्रय मूल्य को ३१ रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर ३३ रुपए प्रति किलो करने की सिफारिश की गई थी. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जीओएम की बैठक में इस पर सहमति तो बन गई थी लेकिन अंतिम फैसला कैबिनेट पर छोड. दिया गया था. न्यूनतम विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी से खुले बाजार में चीनी का दाम बढ जाता है. और सरकार कोरोना काल में चीनी जैसे आम उपयोग में आने वाले सामान की कीमत में बढ़ोतरी का जोखिम नहीं लेना चाहती. चीनी मिलें सरकार से लगातार न्यूनतम विक्रय मूल्य बढाने की मांग कर रही हैं.
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नई दिल्ली/दि. अट्ठारह- देशभर के गन्ना किसानों के लिए बुधवार को राहत की खबर आ सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की बैठक में वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए गन्ना की खरीद मूल्य में बढोत्तरी का फैसला हो सकता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खरीद मूल्य में दस रुपयापए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की संभावना है. बढ़ोतरी के बाद खरीद मूल्य दो सौ पचासी रुपयापए प्रति क्विंटल हो सकता है. दो हज़ार उन्नीस-बीस में दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस की तुलना में खरीद मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया था. गन्ने की खरीद मूल्य को फेयर एंड रिमेयूनेरेटीव प्राइज के तौर पर घोषित किया जाता है. चीनी वर्ष हर वर्ष एक अक्टूबर से शुरू होकर अगले साल तीस सितंबर तक चलता है. पिछले साल खरीद मूल्य में बढ़ोतरी नहीं किए जाने का किसानों ने विरोध किया था. एफआरपी वो मूल्य होता है जिस दर पर चीनी मिल किसानों से गन्ना खरीदते हैं. सरकार फिलहाल चीनी की न्यूनतम विक्रय मूल्य को बढाने का फैसला टाल सकती है. न्यूनतम विक्रय मूल्य को इकतीस रुपयापए प्रति किलो से बढ़ाकर तैंतीस रुपयापए प्रति किलो करने की सिफारिश की गई थी. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जीओएम की बैठक में इस पर सहमति तो बन गई थी लेकिन अंतिम फैसला कैबिनेट पर छोड. दिया गया था. न्यूनतम विक्रय मूल्य में बढ़ोतरी से खुले बाजार में चीनी का दाम बढ जाता है. और सरकार कोरोना काल में चीनी जैसे आम उपयोग में आने वाले सामान की कीमत में बढ़ोतरी का जोखिम नहीं लेना चाहती. चीनी मिलें सरकार से लगातार न्यूनतम विक्रय मूल्य बढाने की मांग कर रही हैं.
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राजस्थान के बीकानेर में (Bikaner) रेलवे ग्राउंड के सामने चाकूबाजी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. एक आरोपी का नाम समीर नादसा है, जबकि दूसरा आरोपी नाबालिग है. उसकी पहचान पुलिस ने सार्वजनिक नहीं की है. पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान घायल हुए मधुसुदन की आंतों को सबसे ज्यादा नुकसान नाबालिग के द्वारा किए गए हमले में ही हुआ था.
घायल का इलाज अस्पताल में जारी है. बीकानेर एसपी योगेश यादव ने चाकूबाजी के आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी दी है. साथ ही उन्होंने कहा आरोपियों में एक हिंदू भी है. यह धार्मिक मामला नहीं है और न ही लड़की से छेड़खानी होने जैसे कोई बात सामने आई है. यह केवल व्यक्तिगत झगड़े का मामला है. फिर भी हम मामले की जांच कर रहे हैं.
वहीं, चाकू मारने के आरोपी समीर नादसा ने पुलिस को बताया है कि छेड़छेड़ किए जाने के आरोप गलत हैं. उसने किसी से छेड़छाड़ नहीं की है. गौरतलब है कि बुधवार शाम को समुदाय विशेष के लड़कों ने रेलवे ग्राउंड के बाहर गंगानगर निवासी मधुसुदन मोदी को चाकू मार दिया था.
इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. पीबीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में उसका इलाज किया जा रहा है. आरोप है कि समीर सहित उसके दोस्त डांडिया कार्यक्रम में मौजूद लड़कियों से छेड़खानी कर रहे थे. मधुसुदन ने लड़कों को ऐसा करने से रोका था और धक्का देकर बाहर जाने की बोला था.
इसके बाद समीर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मधुसूदन पर चाकू से हमला कर दिया था. चाकू से वार से उसकी आंतों में गंभीर घाव हो गया था. हमले के बाद लहुलुहान हालत में मधुसुदन को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
घायल मधुसुदन के पिता ने बेटे पर हमला करने वालों के नाम पुलिस को बताए थे. उन्होंने कहा था कि शाहरुख, समीर और जुबेर ने उनके बेटे को चाकू मारा था. साथ ही उन्होंने बेटे का इलाज करने में देरी किए जाने का इल्जाम भी डॉक्टरों पर लगाया था.
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राजस्थान के बीकानेर में रेलवे ग्राउंड के सामने चाकूबाजी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. एक आरोपी का नाम समीर नादसा है, जबकि दूसरा आरोपी नाबालिग है. उसकी पहचान पुलिस ने सार्वजनिक नहीं की है. पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान घायल हुए मधुसुदन की आंतों को सबसे ज्यादा नुकसान नाबालिग के द्वारा किए गए हमले में ही हुआ था. घायल का इलाज अस्पताल में जारी है. बीकानेर एसपी योगेश यादव ने चाकूबाजी के आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी दी है. साथ ही उन्होंने कहा आरोपियों में एक हिंदू भी है. यह धार्मिक मामला नहीं है और न ही लड़की से छेड़खानी होने जैसे कोई बात सामने आई है. यह केवल व्यक्तिगत झगड़े का मामला है. फिर भी हम मामले की जांच कर रहे हैं. वहीं, चाकू मारने के आरोपी समीर नादसा ने पुलिस को बताया है कि छेड़छेड़ किए जाने के आरोप गलत हैं. उसने किसी से छेड़छाड़ नहीं की है. गौरतलब है कि बुधवार शाम को समुदाय विशेष के लड़कों ने रेलवे ग्राउंड के बाहर गंगानगर निवासी मधुसुदन मोदी को चाकू मार दिया था. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. पीबीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में उसका इलाज किया जा रहा है. आरोप है कि समीर सहित उसके दोस्त डांडिया कार्यक्रम में मौजूद लड़कियों से छेड़खानी कर रहे थे. मधुसुदन ने लड़कों को ऐसा करने से रोका था और धक्का देकर बाहर जाने की बोला था. इसके बाद समीर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मधुसूदन पर चाकू से हमला कर दिया था. चाकू से वार से उसकी आंतों में गंभीर घाव हो गया था. हमले के बाद लहुलुहान हालत में मधुसुदन को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. घायल मधुसुदन के पिता ने बेटे पर हमला करने वालों के नाम पुलिस को बताए थे. उन्होंने कहा था कि शाहरुख, समीर और जुबेर ने उनके बेटे को चाकू मारा था. साथ ही उन्होंने बेटे का इलाज करने में देरी किए जाने का इल्जाम भी डॉक्टरों पर लगाया था.
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N4N DESK : सीसीटीवी कैमरे की बदौलत एक घर में चोरी की घटना होने से बच गयी। घटना कानपुर के श्यामनगर की है। जहाँ में सोमवार देर रात एक बंद में घर में चोर घुस गए। हालाँकि घर का मालिक इस समय अमेरिका में रहता हैं। इसकी वजह से घर की सुरक्षा के उन्होंने सीसीटीवी लगवा रखा है। अमेरिका में बैठे उन्होंने जैसे ही फुटेज में जैसे ही देखा कि चोर घुस रहे हैं तो फोन पर पुलिस को जानकारी दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घर को चारों तरफ से घेर लिया तो चोरों ने गोली चला दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की तो एक गोली चोर के पैर पर लग गई।
दरअसल कानपुर के श्यामनगर के रहने वाले विजय अवस्थी इस समय अमेरिका में हैं। जिस समय चोर घर में घुसे अमेरिका में उस समय दिन था, लिहाजा विजय अवस्थी अपने मोबाइल पर अपने घर को देख रहे थे। उसी दौरान उनको घर में चोरी की वारदात करते चोर नजर आ गए, जिसकी सूचना उन्होंने तुरंत कानपुर पुलिस तक पहुंचाई।
सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और मकान को घेर लिया। इसी दौरान पुलिस को देखकर चोर घर से भागने लगे। हालाँकि पानी की टंकी के पास एक चोर से पुलिस की मुठभेड़ हो गई। जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली चोर को लग गई। घायल बदमाश हमीरपुर का रहने वाला है, जिसे हैलट में भर्ती कराया गया है।
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NचारN DESK : सीसीटीवी कैमरे की बदौलत एक घर में चोरी की घटना होने से बच गयी। घटना कानपुर के श्यामनगर की है। जहाँ में सोमवार देर रात एक बंद में घर में चोर घुस गए। हालाँकि घर का मालिक इस समय अमेरिका में रहता हैं। इसकी वजह से घर की सुरक्षा के उन्होंने सीसीटीवी लगवा रखा है। अमेरिका में बैठे उन्होंने जैसे ही फुटेज में जैसे ही देखा कि चोर घुस रहे हैं तो फोन पर पुलिस को जानकारी दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घर को चारों तरफ से घेर लिया तो चोरों ने गोली चला दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की तो एक गोली चोर के पैर पर लग गई। दरअसल कानपुर के श्यामनगर के रहने वाले विजय अवस्थी इस समय अमेरिका में हैं। जिस समय चोर घर में घुसे अमेरिका में उस समय दिन था, लिहाजा विजय अवस्थी अपने मोबाइल पर अपने घर को देख रहे थे। उसी दौरान उनको घर में चोरी की वारदात करते चोर नजर आ गए, जिसकी सूचना उन्होंने तुरंत कानपुर पुलिस तक पहुंचाई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और मकान को घेर लिया। इसी दौरान पुलिस को देखकर चोर घर से भागने लगे। हालाँकि पानी की टंकी के पास एक चोर से पुलिस की मुठभेड़ हो गई। जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली चोर को लग गई। घायल बदमाश हमीरपुर का रहने वाला है, जिसे हैलट में भर्ती कराया गया है।
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कुवैत सिटी (कुवैत), 19 अक्टूबर (वार्ता) भारत ने एएफसी अंडर-20 एशियाई कप (AFC Under-20 Asian Cup) क्वालीफिकेशन में अपने अभियान का समापन कुवैत के ऊपर 2-1 की जीत के साथ किया है। अली सबाह अल-सलेम स्टेडियम (Ali Sabah Al-Salem Stadium) पर मंगलवार को खेले गये मुकाबले में भारत के गोल टाइसन सिंह (आठवां मिनट) और गुरकीरत सिंह (77वां मिनट) ने किये। मेज़बान टीम का गोल सालेह अलमहताब (73वां मिनट) ने जमाया। इस जीत के साथ भारत ने एएफसी अंडर-20 एशियाई कप उज़बेकिस्तान 2023 के ग्रुप-एच में ऑस्ट्रेलिया और इराक के बाद तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
भारत ने मुकाबले की दमदार शुरुआत करते हुए कप्तान टाइसन के गोल की बदौलत शुरुआती बढ़त बना ली। इसके बाद दोनों टीमों ने कई प्रयास किये लेकिन पहले हाफ में गोल नहीं कर सकीं।
दूसरे हाफ में कुवैत आक्रामकता के साथ पिच पर उतरी। मुकाबले के समापन में जब 20 मिनट बाकी थे तब कप्तान सालेह ने एक फ्री-किक को गोल में तब्दील करके मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया। कुवैत की बढ़त केवल तीन मिनट की रही और भारत ने 77वें मिनट में गुरकीरत के गोल से मैच जीत लिया।
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कुवैत सिटी , उन्नीस अक्टूबर भारत ने एएफसी अंडर-बीस एशियाई कप क्वालीफिकेशन में अपने अभियान का समापन कुवैत के ऊपर दो-एक की जीत के साथ किया है। अली सबाह अल-सलेम स्टेडियम पर मंगलवार को खेले गये मुकाबले में भारत के गोल टाइसन सिंह और गुरकीरत सिंह ने किये। मेज़बान टीम का गोल सालेह अलमहताब ने जमाया। इस जीत के साथ भारत ने एएफसी अंडर-बीस एशियाई कप उज़बेकिस्तान दो हज़ार तेईस के ग्रुप-एच में ऑस्ट्रेलिया और इराक के बाद तीसरा स्थान हासिल कर लिया। भारत ने मुकाबले की दमदार शुरुआत करते हुए कप्तान टाइसन के गोल की बदौलत शुरुआती बढ़त बना ली। इसके बाद दोनों टीमों ने कई प्रयास किये लेकिन पहले हाफ में गोल नहीं कर सकीं। दूसरे हाफ में कुवैत आक्रामकता के साथ पिच पर उतरी। मुकाबले के समापन में जब बीस मिनट बाकी थे तब कप्तान सालेह ने एक फ्री-किक को गोल में तब्दील करके मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया। कुवैत की बढ़त केवल तीन मिनट की रही और भारत ने सतहत्तरवें मिनट में गुरकीरत के गोल से मैच जीत लिया।
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चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- मद्रास के रसायन विज्ञान विभाग में एकल माता और महिला वैज्ञानिक डॉ ई. पून्गुझली को हरित प्रौद्योगिकी विधि के जरिए औषधीय रूप से महत्वपूर्ण बेंजो[बी] थियोफीन नामक एक कंपाउंड को विकसित करने के लिए एक पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह कंपाउंड दवाओं की एक श्रृंखला जैसे कि रालोक्सिफेन (ऑस्टियोपोरोसिस में उपयोग), जिल्यूटन (अस्थमा में उपयोग) व सेरटाकोंजोल (फंगलरोधी दवा) मौजूद है। इसके अलावा 2-सब्स्टूटेड बेंजो[बी]थियोफीन का एक-चरण संश्लेषण कंपाउंड के खतरनाक औद्योगिक उत्पादन को प्रतिस्थापित कर सकता है।
मौजूदा उपलब्ध कंपाउंड संश्लेषण विधियां जैसे कि फ्रीडेल-क्राफ्ट एसाइलेशन, मर्केप्टो एसिटेट रिएक्शन, सब्सक्वेंट एडिशन और ऑक्सीडेशन (ऑक्सीकरण) आदि के माध्यम से अच्छे से लेकर उत्कृष्ट स्तर तक का उत्पादन होता है, लेकिन ये सब पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं। इसके अलावा इनमें उच्चतम तापमान का उपयोग होता है। वहीं, इसके नुकसान के रूप में एक अप्रिय गंध के साथ सल्फर का उत्सर्जन और महंगी शुरुआती सामग्री आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विस्फोट के जोखिम को देखते हुए इस प्रक्रिया के तहत बंद नली में रिएक्शन को पूरा किया जाता है और इसमें जरूरी ओएलईडी प्रकाश के उपयोग से इसकी लागत बढ़ जाती है। चूंकि, इसके लिए जरूरी धातु उत्प्रेरक अपनी प्रकृति में विषैले होते हैं, इसलिए इसमें शामिल विभिन्न चरणों पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता होती है।
डॉ. पून्गुझली ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध शुरुआती सामग्री को जल के माध्यम और कमरे के तापमान पर खुली हवा के वातावरण में कॉपर एसीटेट व टेट्रा ब्यूटाइल अमोनियम क्लोराइड उत्प्रेरक प्रणाली की उपस्थिति में औषधीय रूप से महत्वपूर्ण 2-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन में स्थानांतरित करने में सफल रही हैं। उन्होंने भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की महिला वैज्ञानिक योजना (डब्ल्यूओएस-ए) कार्यक्रम के तहत यह काम किया है।
नई विधि में माध्यम के तौर पर जल का उपयोग, कमरे का तापमान, गंधहीन जैंथेट, खुले वातावरण का उपयोग, व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सस्ती शुरुआती सामग्री और उत्प्रेरक को एक-पॉट विधि से फ्री हैंडलिंग शामिल हैं। इसने 2-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन को अच्छे से उत्कृष्ट उत्पादन स्तर के लिए फर्निश किया है।
डॉ. ई. पून्गुझली और प्रो. जी. सेकर ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध 2-आयोडोबेंजाल्डिहाइड, फेनासिल ब्रोमाइड और जैंथेट सल्फर स्रोत को कॉपर एसीटेट और टेट्रा ब्यूटाइल अमोनियम क्लोराइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में 2-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन को फर्निश करने के लिए कमरे के तापमान पर जल में उपचारित किया। इसमें निर्मित उप-उत्पाद थिओलेट के उपयोग का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा बाकी सहायक उत्पादों को उनके विलेयता गुणों का उपयोग करके फिर से प्राप्त किया जा सकता है और शुद्ध किए जाने के बाद इसका फिर से उपयोग किया जा सकता है। नई विधि विस्फोट के जोखिम व प्रक्रिया की लागत को कम करती है और इसमें शामिल जहरीले और खतरनाक तरीकों से बचाती है।
इस प्रणाली के पीछे के विज्ञान पर डॉ पून्गुझली ने विस्तार से बताया कि चूंकि इसमें प्रयुक्त माध्यम जल है, इसलिए कार्बनिक विलायक की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा इससे कोई वायु प्रदूषण भी नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा कमरे के तापमान से ऊर्जा की बचत होती है व व्यावसायिक रूप से उपलब्ध शुरुआती सामग्री को औषधीय रूप से जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक्स में सीधे वन-पॉट विधि से स्थानांतरित करने के चलते कार्यबल, ऊर्जा और स्थान की बचत होती है। वहीं, उप उत्पाद थायोलेट का उपयोग प्रक्रियाधीन है। एक ही समय पर दूसरी सहायक उत्पादों (केएल- पौटेशियम आयोडाइड और केबीआर- पौटेशियम ब्रोमाइड) और उत्प्रेरक (कॉपर एसीटेट और टेट्रा ब्यूटाइल अमोनियम क्लोराइड) को एक ही रिएक्शन और विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए फिर से प्राप्त और उपयोग किया जा सकता है।
डॉ. पून्गुझली ने कहा, "मेरे परिवार ने मुझे खतरनाक विधि को बदलने के लिए हरित प्रौद्योगिकी का आविष्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया था। डीएसटी की सहायता से जब मैंने अपना शोध कैरियर शुरू किया, तो मैंने प्रोफेसर जी. सेकर व प्रोफेसर रमेश एल गार्डास की मदद से हरित प्रणाली तैयार की और औषधीय रूप से महत्वपूर्ण कंपाउंड को संश्लेषित करने में सफल रही।
पेटेंट विवरणः
इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉ. ई पून्गुझली (epoonguzhali8[at]gmail[dot]com) से संपर्क किया जा सकता है।
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Posted On: चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- मद्रास के रसायन विज्ञान विभाग में एकल माता और महिला वैज्ञानिक डॉ ई. पून्गुझली को हरित प्रौद्योगिकी विधि के जरिए औषधीय रूप से महत्वपूर्ण बेंजो[बी] थियोफीन नामक एक कंपाउंड को विकसित करने के लिए एक पेटेंट प्रदान किया गया है। यह कंपाउंड दवाओं की एक श्रृंखला जैसे कि रालोक्सिफेन , जिल्यूटन व सेरटाकोंजोल मौजूद है। इसके अलावा दो-सब्स्टूटेड बेंजो[बी]थियोफीन का एक-चरण संश्लेषण कंपाउंड के खतरनाक औद्योगिक उत्पादन को प्रतिस्थापित कर सकता है। मौजूदा उपलब्ध कंपाउंड संश्लेषण विधियां जैसे कि फ्रीडेल-क्राफ्ट एसाइलेशन, मर्केप्टो एसिटेट रिएक्शन, सब्सक्वेंट एडिशन और ऑक्सीडेशन आदि के माध्यम से अच्छे से लेकर उत्कृष्ट स्तर तक का उत्पादन होता है, लेकिन ये सब पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं। इसके अलावा इनमें उच्चतम तापमान का उपयोग होता है। वहीं, इसके नुकसान के रूप में एक अप्रिय गंध के साथ सल्फर का उत्सर्जन और महंगी शुरुआती सामग्री आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विस्फोट के जोखिम को देखते हुए इस प्रक्रिया के तहत बंद नली में रिएक्शन को पूरा किया जाता है और इसमें जरूरी ओएलईडी प्रकाश के उपयोग से इसकी लागत बढ़ जाती है। चूंकि, इसके लिए जरूरी धातु उत्प्रेरक अपनी प्रकृति में विषैले होते हैं, इसलिए इसमें शामिल विभिन्न चरणों पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता होती है। डॉ. पून्गुझली ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध शुरुआती सामग्री को जल के माध्यम और कमरे के तापमान पर खुली हवा के वातावरण में कॉपर एसीटेट व टेट्रा ब्यूटाइल अमोनियम क्लोराइड उत्प्रेरक प्रणाली की उपस्थिति में औषधीय रूप से महत्वपूर्ण दो-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन में स्थानांतरित करने में सफल रही हैं। उन्होंने भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की महिला वैज्ञानिक योजना कार्यक्रम के तहत यह काम किया है। नई विधि में माध्यम के तौर पर जल का उपयोग, कमरे का तापमान, गंधहीन जैंथेट, खुले वातावरण का उपयोग, व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सस्ती शुरुआती सामग्री और उत्प्रेरक को एक-पॉट विधि से फ्री हैंडलिंग शामिल हैं। इसने दो-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन को अच्छे से उत्कृष्ट उत्पादन स्तर के लिए फर्निश किया है। डॉ. ई. पून्गुझली और प्रो. जी. सेकर ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध दो-आयोडोबेंजाल्डिहाइड, फेनासिल ब्रोमाइड और जैंथेट सल्फर स्रोत को कॉपर एसीटेट और टेट्रा ब्यूटाइल अमोनियम क्लोराइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में दो-एसाइलबेन्जो[बी]थियोफीन को फर्निश करने के लिए कमरे के तापमान पर जल में उपचारित किया। इसमें निर्मित उप-उत्पाद थिओलेट के उपयोग का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा बाकी सहायक उत्पादों को उनके विलेयता गुणों का उपयोग करके फिर से प्राप्त किया जा सकता है और शुद्ध किए जाने के बाद इसका फिर से उपयोग किया जा सकता है। नई विधि विस्फोट के जोखिम व प्रक्रिया की लागत को कम करती है और इसमें शामिल जहरीले और खतरनाक तरीकों से बचाती है। इस प्रणाली के पीछे के विज्ञान पर डॉ पून्गुझली ने विस्तार से बताया कि चूंकि इसमें प्रयुक्त माध्यम जल है, इसलिए कार्बनिक विलायक की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा इससे कोई वायु प्रदूषण भी नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा कमरे के तापमान से ऊर्जा की बचत होती है व व्यावसायिक रूप से उपलब्ध शुरुआती सामग्री को औषधीय रूप से जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक्स में सीधे वन-पॉट विधि से स्थानांतरित करने के चलते कार्यबल, ऊर्जा और स्थान की बचत होती है। वहीं, उप उत्पाद थायोलेट का उपयोग प्रक्रियाधीन है। एक ही समय पर दूसरी सहायक उत्पादों और उत्प्रेरक को एक ही रिएक्शन और विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए फिर से प्राप्त और उपयोग किया जा सकता है। डॉ. पून्गुझली ने कहा, "मेरे परिवार ने मुझे खतरनाक विधि को बदलने के लिए हरित प्रौद्योगिकी का आविष्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया था। डीएसटी की सहायता से जब मैंने अपना शोध कैरियर शुरू किया, तो मैंने प्रोफेसर जी. सेकर व प्रोफेसर रमेश एल गार्डास की मदद से हरित प्रणाली तैयार की और औषधीय रूप से महत्वपूर्ण कंपाउंड को संश्लेषित करने में सफल रही। पेटेंट विवरणः इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉ. ई पून्गुझली से संपर्क किया जा सकता है।
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वरुण धवन (Varun Dhawan) ने अपनी पत्नी नताशा (Natasha Dalal) और अपने पेट के साथ अपनी तस्वीरों को शेयर किया है. जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.
एक्टर ने अपनी पत्नी नताशा और अपने पेट जोई के साथ अपनी तस्वीरों को शेयर किया है. इन तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है कि 'जोई पप्पी पॉवर' जोई एक्टर के नए पेट का नाम है. इसके साथ ही उन्होंने अपने नए पेट की तस्वीर को भी साझा किया है. एक्टर का ये पेट बहुत क्यूट है. वरुण धवन के फैंस भी इस नए पेट की खूब तारीफ कर रहे हैं. वहीं बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स ने भी एक्टर के पेट को पसंद किया है. जहां अदा शर्मा ने एक्टर के पेट की तारीफ करते हुए लिखा है कि "सो क्यूट", वहीं पूजा हेगड़े ने लिखा है 'जोई'. हाल ही में एक्टर ने अपने फैंस से पूछा था कि वो अपने इस पेट का क्या नाम रखे. लेकिन अब उन्होंने अपने इस पेट का नाम रख लिया है.
वरुण धवन की फिल्मों की बात करें तो एक्टर इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों की शूटिंग की तैयारी भी कर रहे हैं. जहां वो डेली जिम में अपना पसीना बहा रहे हैं. हाल ही में उनकी फिल्म 'कुली नंबर 1' रिलीज हुई थी. लेकिन एक्टर की ये फिल्म ज्यादा हिट नहीं हुई. जिसके बाद वो अपनी अगली फिल्म 'भेड़िया' और 'जुग जुग जीयो' की शूटिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. आपको बता दें, महामारी के चलते इन दिनों फिल्मों की शूटिंग शुरू होने में अभी कुछ वक्त है. जैसी ही फिल्मों की शूटिंग मुंबई में शुरू होती है वो फिर से शूटिंग शेड्यूल पर लौट जाएंगे. लेकिन एक्टर जब तक अपने घर पर हैं वो परिवार के साथ अच्छा समय बिताना चाहते हैं.
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वरुण धवन ने अपनी पत्नी नताशा और अपने पेट के साथ अपनी तस्वीरों को शेयर किया है. जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. एक्टर ने अपनी पत्नी नताशा और अपने पेट जोई के साथ अपनी तस्वीरों को शेयर किया है. इन तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा है कि 'जोई पप्पी पॉवर' जोई एक्टर के नए पेट का नाम है. इसके साथ ही उन्होंने अपने नए पेट की तस्वीर को भी साझा किया है. एक्टर का ये पेट बहुत क्यूट है. वरुण धवन के फैंस भी इस नए पेट की खूब तारीफ कर रहे हैं. वहीं बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स ने भी एक्टर के पेट को पसंद किया है. जहां अदा शर्मा ने एक्टर के पेट की तारीफ करते हुए लिखा है कि "सो क्यूट", वहीं पूजा हेगड़े ने लिखा है 'जोई'. हाल ही में एक्टर ने अपने फैंस से पूछा था कि वो अपने इस पेट का क्या नाम रखे. लेकिन अब उन्होंने अपने इस पेट का नाम रख लिया है. वरुण धवन की फिल्मों की बात करें तो एक्टर इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों की शूटिंग की तैयारी भी कर रहे हैं. जहां वो डेली जिम में अपना पसीना बहा रहे हैं. हाल ही में उनकी फिल्म 'कुली नंबर एक' रिलीज हुई थी. लेकिन एक्टर की ये फिल्म ज्यादा हिट नहीं हुई. जिसके बाद वो अपनी अगली फिल्म 'भेड़िया' और 'जुग जुग जीयो' की शूटिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. आपको बता दें, महामारी के चलते इन दिनों फिल्मों की शूटिंग शुरू होने में अभी कुछ वक्त है. जैसी ही फिल्मों की शूटिंग मुंबई में शुरू होती है वो फिर से शूटिंग शेड्यूल पर लौट जाएंगे. लेकिन एक्टर जब तक अपने घर पर हैं वो परिवार के साथ अच्छा समय बिताना चाहते हैं.
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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने केंद्र में सात साल का कार्यकाल पूरा किया है। इस मौके पर भले ही औपचारिक तौर पर सरकार और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़े आयोजन नहीं किए गए हों लेकिन हर तरह से यह बताने की कोशिश की जा रही है कि मोदी सरकार ने सात साल में वह सब कर दिखाया है जो पहले की सरकारों ने 70 साल में नहीं किया था। जबकि सच्चाई यह है कि इस वक्त देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है।
2020 में कोविड-19 की वजह से शुरू हुई परेशानियां खत्म भी नहीं हुई थीं कि इस साल भारत में इस बीमारी की दूसरी लहर आ गई। इस बीमारी ने इस बार बहुत लोगों की जान ली। बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में उफान के बावजूद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों को कुछ समय के लिए टालने की कोशिश नहीं की। बल्कि कहा जाए तो चुनाव आयोग की मदद लेकर केंद्र सरकार ने पूरे देश और बंगाल में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच चुनाव कराया और इस बीमारी को बढ़ाने में एक तरह से अपना योगदान दिया। इसकी वजह से कोरोना के मामले तो बढ़े ही लेकिन साथ ही साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा को बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ा।
2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं और तब से लेकर अभी तक के सात साल में इतने कमजोर और लाचार वे कभी नहीं दिखे। उनकी सरकार को समझ ही नहीं आ रहा है कि इस संकट से निकलने के लिए आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। स्वास्थ्य सुविधाओं के सही प्रबंधन के बजाय सरकार का पूरा जोर अब भी अपनी छवि प्रबंधन और मीडिया प्रबंधन पर ही है। यह स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि मोदी सरकार अपने अब तक के सात साल के कार्यकाल में अपने लिए सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है।
दरअसल, पिछले साल की सर्दियों में शुरू हुए किसान आंदोलन ने मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती पेश की थी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की इस बात को लेकर आलोचना होने लगी कि किसानों का देश कहे जाने वाले भारत में किसानों के हकों और हितों की ही अनदेखी की जा रही है और किसानों पर कॉरपोरेट घरानों को तरजीह दी जा रही है।
लेकिन केंद्र सरकार और भाजपा को यह लगा कि अगर वह पश्चिम बंगाल का चुनाव जीत लेगी तो फिर से यह बात वह हर तरफ कह पाएगी कि किसान आंदोलन को जनता का समर्थन हासिल नहीं है और यही वजह है कि भाजपा को लोग लगातार जिता रहे हैं। पश्चिम बंगाल में जीत से भाजपा को होने वाले कई राजनीतिक फायदों में एक बड़ा फायदा यह भी था। पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए इतना अधिक महत्वपूर्ण था कि न सिर्फ कोरोना वायरस के खतरों को नजरअंदाज करके चुनाव कराए गए और रैलियां कराई गईं बल्कि भाजपा ने अपने तमाम बड़े नेताओं और अपना पूरा संसाधन इस चुनाव में झोंक दिया था। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पूरे राज्य में कई रैलियां कीं। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने इतनी बड़ी और संसाधन संपन्न पार्टी को पटखनी दे दी।
करारी हार के बाद अब भी भाजपा यह स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है कि वह चुनाव हार गई है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल सरकार को प्रशासनिक से लेकर और भी कई स्तर पर परेशान करने की कोशिश लगातार केंद्र सरकार की ओर से हो रही है। भाजपा चुनी हुई सरकार का जो तर्क केंद्र में अपने हर काम को सही ठहराने के लिए देती है, वही तर्क बंगाल के मामले में वह भूल जाती है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार की कई वजहों में एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'दीदी ओ दीदी' वाला बयान बन गया। नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में यह बात कही और बार-बार दोहराई, वह हर किसी को एक महिला के लिए अपमानजनक लगी। पश्चिम बंगाल में हर जाति-धर्म की महिला को यह बात अपमानजनक लगी। यही वजह थी कि पूरे प्रदेश में महिलाओं ने ममता बनर्जी का साथ दिया। ऐसी भी बातें सामने आई हैं कि कुछ परिवार के पुरुषों ने किसी और पार्टी को वोट दिया लेकिन महिलाओं ने ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया।
पश्चिम बंगाल में इतनी बुरी तरह से हारना भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ा झटका था। एक तरफ बंगाल में हार हुई तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार की लापरवाही की वजह से कोरोना वायरस की दूसरी लहर लगातार बढ़ती गई। भारत में बहुत कम परिवार ऐसे बचे होंगे जिस परिवार का कोई न कोई सदस्य इस बार कोरोना वायरस की वजह से बीमार नहीं हुआ हो। इसे दूसरे ढंग से भी कह सकते हैं कि कोविड-19 की वजह से देश में करीब-करीब हर परिवार को इस बार अपनी जान सांसत में लगी। भले ही घर पर रहकर और दवा खाकर लोग इस बीमारी से ठीक हो रहे हों लेकिन यह बीमारी ऐसी है कि होने के बाद न सिर्फ बीमार व्यक्ति की बल्कि उसके परिवार और जानने वालों को तब तक चिंता बनी रहती है जब तक उसकी रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए।
वहीं बहुत बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी। देश भर के श्मशानों से जो तस्वीरें आईं, उससे यह बात साबित हो रही थी कि सरकार मौत के आंकड़ों को सही ढंग से लोगों के सामने नहीं रख रही है। मोदी सरकार के मंत्रियों ने इन तस्वीरों को प्रकाशित और प्रसारित करने वाले मीडिया संस्थानों पर लगातार हमले किए। सरकार ने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों और ऑक्सीजन की मांग करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करके अपने विरोध को दबाने की कोशिश की।
लेकिन इस सबके बावजूद नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लेकर आम लोगों का गुस्सा चरम पर है। लोगों को यह लगने लगा है कि इस बीमारी से जो स्थिति पैदा हुई है, उसका बेहतर प्रबंधन मोदी सरकार कर सकती थी। लोग यह भी समझ रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता आम लोगों की जान नहीं है बल्कि उनके लिए चुनाव में जीत लोगों की जान से अधिक प्यारी है। यही वजह थी कि कोरोना की दूसरी लहर में उफान के बीच उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव कराया।
नरेंद्र मोदी को लेकर गुस्से की लहर सिर्फ आम लोगों में नहीं है बल्कि हर मसले पर उनका समर्थन करने वाले भक्त वर्ग में भी है। क्योंकि ऐसे बहुत सारे लोगों के किसी न किसी परिजन या करीबी की जान इस बार सरकार के कुप्रबंधन की वजह से गई है। हर मामले में नरेंद्र मोदी का साथ देने वाले भाजपा के मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं में भी नरेंद्र मोदी को लेकर नाराजगी तेजी से बढ़ी है।
संघ में नेतृत्व के स्तर पर भी नरेंद्र मोदी को लेकर पहले की तरह उत्साह नहीं है। ऐसे लोग भी अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार कर रहे हैं कि इस संकट का प्रबंधन बेहतर ढंग से नरेंद्र मोदी सरकार कर सकती थी और बहुत सारे लोगों को मरने से बचाया जा सकता था। अभी यह कहना तो जल्दबाजी होगी कि संघ के अंदर नरेंद्र मोदी के विकल्प की तलाश शुरू हो गई है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि संघ के अंदर नरेंद्र मोदी की स्थिति सात साल में इतनी कमजोर कभी नहीं थी। यही स्थिति आम लोगों के बीच भी है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)
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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने केंद्र में सात साल का कार्यकाल पूरा किया है। इस मौके पर भले ही औपचारिक तौर पर सरकार और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़े आयोजन नहीं किए गए हों लेकिन हर तरह से यह बताने की कोशिश की जा रही है कि मोदी सरकार ने सात साल में वह सब कर दिखाया है जो पहले की सरकारों ने सत्तर साल में नहीं किया था। जबकि सच्चाई यह है कि इस वक्त देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है। दो हज़ार बीस में कोविड-उन्नीस की वजह से शुरू हुई परेशानियां खत्म भी नहीं हुई थीं कि इस साल भारत में इस बीमारी की दूसरी लहर आ गई। इस बीमारी ने इस बार बहुत लोगों की जान ली। बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में उफान के बावजूद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों को कुछ समय के लिए टालने की कोशिश नहीं की। बल्कि कहा जाए तो चुनाव आयोग की मदद लेकर केंद्र सरकार ने पूरे देश और बंगाल में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच चुनाव कराया और इस बीमारी को बढ़ाने में एक तरह से अपना योगदान दिया। इसकी वजह से कोरोना के मामले तो बढ़े ही लेकिन साथ ही साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा को बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ा। दो हज़ार चौदह में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं और तब से लेकर अभी तक के सात साल में इतने कमजोर और लाचार वे कभी नहीं दिखे। उनकी सरकार को समझ ही नहीं आ रहा है कि इस संकट से निकलने के लिए आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। स्वास्थ्य सुविधाओं के सही प्रबंधन के बजाय सरकार का पूरा जोर अब भी अपनी छवि प्रबंधन और मीडिया प्रबंधन पर ही है। यह स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि मोदी सरकार अपने अब तक के सात साल के कार्यकाल में अपने लिए सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। दरअसल, पिछले साल की सर्दियों में शुरू हुए किसान आंदोलन ने मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती पेश की थी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की इस बात को लेकर आलोचना होने लगी कि किसानों का देश कहे जाने वाले भारत में किसानों के हकों और हितों की ही अनदेखी की जा रही है और किसानों पर कॉरपोरेट घरानों को तरजीह दी जा रही है। लेकिन केंद्र सरकार और भाजपा को यह लगा कि अगर वह पश्चिम बंगाल का चुनाव जीत लेगी तो फिर से यह बात वह हर तरफ कह पाएगी कि किसान आंदोलन को जनता का समर्थन हासिल नहीं है और यही वजह है कि भाजपा को लोग लगातार जिता रहे हैं। पश्चिम बंगाल में जीत से भाजपा को होने वाले कई राजनीतिक फायदों में एक बड़ा फायदा यह भी था। पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए इतना अधिक महत्वपूर्ण था कि न सिर्फ कोरोना वायरस के खतरों को नजरअंदाज करके चुनाव कराए गए और रैलियां कराई गईं बल्कि भाजपा ने अपने तमाम बड़े नेताओं और अपना पूरा संसाधन इस चुनाव में झोंक दिया था। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पूरे राज्य में कई रैलियां कीं। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने इतनी बड़ी और संसाधन संपन्न पार्टी को पटखनी दे दी। करारी हार के बाद अब भी भाजपा यह स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है कि वह चुनाव हार गई है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल सरकार को प्रशासनिक से लेकर और भी कई स्तर पर परेशान करने की कोशिश लगातार केंद्र सरकार की ओर से हो रही है। भाजपा चुनी हुई सरकार का जो तर्क केंद्र में अपने हर काम को सही ठहराने के लिए देती है, वही तर्क बंगाल के मामले में वह भूल जाती है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार की कई वजहों में एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'दीदी ओ दीदी' वाला बयान बन गया। नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में यह बात कही और बार-बार दोहराई, वह हर किसी को एक महिला के लिए अपमानजनक लगी। पश्चिम बंगाल में हर जाति-धर्म की महिला को यह बात अपमानजनक लगी। यही वजह थी कि पूरे प्रदेश में महिलाओं ने ममता बनर्जी का साथ दिया। ऐसी भी बातें सामने आई हैं कि कुछ परिवार के पुरुषों ने किसी और पार्टी को वोट दिया लेकिन महिलाओं ने ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया। पश्चिम बंगाल में इतनी बुरी तरह से हारना भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ा झटका था। एक तरफ बंगाल में हार हुई तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार की लापरवाही की वजह से कोरोना वायरस की दूसरी लहर लगातार बढ़ती गई। भारत में बहुत कम परिवार ऐसे बचे होंगे जिस परिवार का कोई न कोई सदस्य इस बार कोरोना वायरस की वजह से बीमार नहीं हुआ हो। इसे दूसरे ढंग से भी कह सकते हैं कि कोविड-उन्नीस की वजह से देश में करीब-करीब हर परिवार को इस बार अपनी जान सांसत में लगी। भले ही घर पर रहकर और दवा खाकर लोग इस बीमारी से ठीक हो रहे हों लेकिन यह बीमारी ऐसी है कि होने के बाद न सिर्फ बीमार व्यक्ति की बल्कि उसके परिवार और जानने वालों को तब तक चिंता बनी रहती है जब तक उसकी रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए। वहीं बहुत बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी। देश भर के श्मशानों से जो तस्वीरें आईं, उससे यह बात साबित हो रही थी कि सरकार मौत के आंकड़ों को सही ढंग से लोगों के सामने नहीं रख रही है। मोदी सरकार के मंत्रियों ने इन तस्वीरों को प्रकाशित और प्रसारित करने वाले मीडिया संस्थानों पर लगातार हमले किए। सरकार ने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों और ऑक्सीजन की मांग करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करके अपने विरोध को दबाने की कोशिश की। लेकिन इस सबके बावजूद नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लेकर आम लोगों का गुस्सा चरम पर है। लोगों को यह लगने लगा है कि इस बीमारी से जो स्थिति पैदा हुई है, उसका बेहतर प्रबंधन मोदी सरकार कर सकती थी। लोग यह भी समझ रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता आम लोगों की जान नहीं है बल्कि उनके लिए चुनाव में जीत लोगों की जान से अधिक प्यारी है। यही वजह थी कि कोरोना की दूसरी लहर में उफान के बीच उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव कराया। नरेंद्र मोदी को लेकर गुस्से की लहर सिर्फ आम लोगों में नहीं है बल्कि हर मसले पर उनका समर्थन करने वाले भक्त वर्ग में भी है। क्योंकि ऐसे बहुत सारे लोगों के किसी न किसी परिजन या करीबी की जान इस बार सरकार के कुप्रबंधन की वजह से गई है। हर मामले में नरेंद्र मोदी का साथ देने वाले भाजपा के मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं में भी नरेंद्र मोदी को लेकर नाराजगी तेजी से बढ़ी है। संघ में नेतृत्व के स्तर पर भी नरेंद्र मोदी को लेकर पहले की तरह उत्साह नहीं है। ऐसे लोग भी अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार कर रहे हैं कि इस संकट का प्रबंधन बेहतर ढंग से नरेंद्र मोदी सरकार कर सकती थी और बहुत सारे लोगों को मरने से बचाया जा सकता था। अभी यह कहना तो जल्दबाजी होगी कि संघ के अंदर नरेंद्र मोदी के विकल्प की तलाश शुरू हो गई है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि संघ के अंदर नरेंद्र मोदी की स्थिति सात साल में इतनी कमजोर कभी नहीं थी। यही स्थिति आम लोगों के बीच भी है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त 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पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढोत्तरी परेशान क्यों नहीं होती सरकार !
माल्या ने पीएम मोदी पर निशाना साधा, मांगी गारंटी !
पाक पीएम की बेटी ने नरेंद्र मोदी को क्यों कहा शुक्रिया ?
मोदी की रैली की यह दो घटनाएं सोशल मीडिया पर वायरल !
नोटबंदीः क्या विरोध या आलोचना देशद्रोह है?
नोट बैन पर सलमान खान, ऐश्वर्या राय का मोदी को मैसेज !
शत्रुघ्न सिन्हा पीएम मोदी की पाक नीति की आलोचना पर भड़के !
कपिल शर्मा ने पूछा- मोदी जी ये हैं आपके अच्छे दिन ?
मोदी बताएं गौरक्षा के गोरखधंधे का जिम्मेदार कौन?
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लॉक डाउन में भी लोगों के अंदर वैक्सीन लगवाने को उत्साह दिखाई दिया। सरकार के वैक्सीन सेंटर को खुला रखने और वैक्सीन लगवाने जाने वालों को छूट देने के फैसले के कारण लोग यहां पहुंचक र वैक्सीन लगवाने पहुंचते रहे। सुबह 11 बजे स. . . madhya pradeshSun, 11 Apr 2021 04:03 AM (IST)
एक वर्ष बाद फिर से कोरोना की वजह से जिले में लॉक डाउन लगा। शनिवार को लॉकडाउन के पहले दिन शहरी क्षेत्र की दैनिक गतिविधियां पूरी तरह से थमी नजर आई। सड़कों पर आवागमन कम था जरूरी कार्य वह लोग घर से बाहर निकले। madhya pradeshSun, 11 Apr 2021 04:03 AM (IST)
जिला प्रशासन सख्ती से कोरोना चेन को तोड़ने के लिए लॉक डाउन लगाने में लगा है। कोरोना में लॉकडाउन का उल्लंघन महंगा पड़ सकता है। यदि ऐसा किया तो ओपन जेल आपका इंतजार कर रही है। लॉकडाउन अवधि में कोविड-19 प्रोटोकॉल्स फॉलो ना कर. . . madhya pradeshSun, 11 Apr 2021 04:02 AM (IST)
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को रोकने शहर व जिले में सोमवार सुबह 6 बजे तक टोटल लॉक डाउन लगा दिया गया है। शुक्रवार को दिन में ही ज्यादातर व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शाम 6 बज. . . madhya pradeshSat, 10 Apr 2021 08:42 PM (IST)
सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। लॉक डाउन के चलते शनिवार को जिले के सभी वैक्सीनेशन केंद्रों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले के कई केंद्रों में वैक्सीन खत्म होने के कारण लोगों के लिए परेशान होना पड़ा, लेकिन अधिकारियों द्वारा वैक्. . . madhya pradeshSat, 10 Apr 2021 06:19 PM (IST)
जावर। नगर में शुक्रवार को कोरोना वायरस से बचाव में मुख्यमंत्री के द्वारा दिए गए आदेश पर जिला कलेक्टर के आदेश के बाद शासन, प्रशासन द्वारा नगर के सभी बाजार शाम 6 बजे पुरी तरह बंद करवा दिए गए। इसके पूर्व नगर परिषद द्वारा मु. . . madhya pradeshFri, 09 Apr 2021 09:12 PM (IST)
बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में कोरोना अब बेकाबू स्थिति में पहुंच गया है। शुक्रवार को 96 नए मरीज मिलने के साथ ही जिले में अब तक 5339 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं जबकि 86 की जान भी चली गई है। संक्रमण को रोकने के. . . madhya pradeshFri, 09 Apr 2021 06:31 PM (IST)
शहर में भी प्रदेश के अन्य शहरों की तरह अब प्रतिदिन गुरुवार रात से कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई है, दिन में बाजार खुले रहेंगे। रात को 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू रहेगा। इसके अलावा प्रत्येक शुक्रवार की शाम से लेकर सो. . . madhya pradeshThu, 08 Apr 2021 08:42 PM (IST)
बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि जिले में कोरोना का संक्रमण अब बेकाबू हो रहा है। बुधवार को सारणी के एक कोरोना मरीज की मौत के साथ ही जिले में अब तक 85 लोगों की जान जा चुकी है। 68 नए मरीज मिलने के साथ ही कुल मरीजों की संख्या 5160. . . madhya pradeshWed, 07 Apr 2021 07:32 PM (IST)
Lockdown in Betul: बैतूल जिले के खेड़ीसांवलीगढ़ गांव में 1 अप्रैल से लगातार जारी है ग्रामीणों का लॉकडाउन। गलियों में लकड़ियों के सहारे कर दी नाकाबंदी। madhya pradeshWed, 07 Apr 2021 03:26 PM (IST)
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लॉक डाउन में भी लोगों के अंदर वैक्सीन लगवाने को उत्साह दिखाई दिया। सरकार के वैक्सीन सेंटर को खुला रखने और वैक्सीन लगवाने जाने वालों को छूट देने के फैसले के कारण लोग यहां पहुंचक र वैक्सीन लगवाने पहुंचते रहे। सुबह ग्यारह बजे स. . . madhya pradeshSun, ग्यारह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस चार:तीन AM एक वर्ष बाद फिर से कोरोना की वजह से जिले में लॉक डाउन लगा। शनिवार को लॉकडाउन के पहले दिन शहरी क्षेत्र की दैनिक गतिविधियां पूरी तरह से थमी नजर आई। सड़कों पर आवागमन कम था जरूरी कार्य वह लोग घर से बाहर निकले। madhya pradeshSun, ग्यारह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस चार:तीन AM जिला प्रशासन सख्ती से कोरोना चेन को तोड़ने के लिए लॉक डाउन लगाने में लगा है। कोरोना में लॉकडाउन का उल्लंघन महंगा पड़ सकता है। यदि ऐसा किया तो ओपन जेल आपका इंतजार कर रही है। लॉकडाउन अवधि में कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल्स फॉलो ना कर. . . madhya pradeshSun, ग्यारह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस चार:दो AM वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को रोकने शहर व जिले में सोमवार सुबह छः बजे तक टोटल लॉक डाउन लगा दिया गया है। शुक्रवार को दिन में ही ज्यादातर व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शाम छः बज. . . madhya pradeshSat, दस अप्रैल दो हज़ार इक्कीस आठ:बयालीस PM सागर। लॉक डाउन के चलते शनिवार को जिले के सभी वैक्सीनेशन केंद्रों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले के कई केंद्रों में वैक्सीन खत्म होने के कारण लोगों के लिए परेशान होना पड़ा, लेकिन अधिकारियों द्वारा वैक्. . . madhya pradeshSat, दस अप्रैल दो हज़ार इक्कीस छः:उन्नीस PM जावर। नगर में शुक्रवार को कोरोना वायरस से बचाव में मुख्यमंत्री के द्वारा दिए गए आदेश पर जिला कलेक्टर के आदेश के बाद शासन, प्रशासन द्वारा नगर के सभी बाजार शाम छः बजे पुरी तरह बंद करवा दिए गए। इसके पूर्व नगर परिषद द्वारा मु. . . madhya pradeshFri, नौ अप्रैल दो हज़ार इक्कीस नौ:बारह PM बैतूल । जिले में कोरोना अब बेकाबू स्थिति में पहुंच गया है। शुक्रवार को छियानवे नए मरीज मिलने के साथ ही जिले में अब तक पाँच हज़ार तीन सौ उनतालीस लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं जबकि छियासी की जान भी चली गई है। संक्रमण को रोकने के. . . madhya pradeshFri, नौ अप्रैल दो हज़ार इक्कीस छः:इकतीस PM शहर में भी प्रदेश के अन्य शहरों की तरह अब प्रतिदिन गुरुवार रात से कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई है, दिन में बाजार खुले रहेंगे। रात को दस बजे से लेकर सुबह छः बजे तक कर्फ्यू रहेगा। इसके अलावा प्रत्येक शुक्रवार की शाम से लेकर सो. . . madhya pradeshThu, आठ अप्रैल दो हज़ार इक्कीस आठ:बयालीस PM बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि जिले में कोरोना का संक्रमण अब बेकाबू हो रहा है। बुधवार को सारणी के एक कोरोना मरीज की मौत के साथ ही जिले में अब तक पचासी लोगों की जान जा चुकी है। अड़सठ नए मरीज मिलने के साथ ही कुल मरीजों की संख्या पाँच हज़ार एक सौ साठ. . . madhya pradeshWed, सात अप्रैल दो हज़ार इक्कीस सात:बत्तीस PM Lockdown in Betul: बैतूल जिले के खेड़ीसांवलीगढ़ गांव में एक अप्रैल से लगातार जारी है ग्रामीणों का लॉकडाउन। गलियों में लकड़ियों के सहारे कर दी नाकाबंदी। madhya pradeshWed, सात अप्रैल दो हज़ार इक्कीस तीन:छब्बीस PM
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हमारा देश - समाज विविधताओं का देश है। यह विविधता विभिन्न स्तरों एवं स्वरूपों में देखी और समझी जा सकती है। मसलन भाषा,संस्कृति, लोक बोलियां, पहनावे,खान - पान आदि। वैसी ही विविधता हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी नजर आती है। यही कारण है कि हमें देश के विभिन्न राज्यों की विविधता अपनी ओर खींचती है। हम उसके मोहपाश से दूर नहीं जा पाते। हमारी भाषायी और सांस्कृतिक विविधता ही वह जादू है जिसके अप्रत्यक्ष डोर से बंधे होते हैं। हमें इसी समाज में विविध भाषायी छटाओं का आनंद भी मिलता है जहां 'पैले जाणा', 'कछुओ नाहि' 'दूर नइखे, नियरे बा हो', 'पाणी पी लो' 'रोट्टी खाणी है' आदि को भी सुन सकते हैं। भाषायी विविधता एक किस्म से हमारी भाषायी विविधतापूर्ण संस्कृति की पहचान भी कराती है। यदि हम इस विविधता के उत्सव को भाषायी विविधता की परिधि में सीमित कर के विमर्शर् कर सकें तो वह एक दिलचस्प होगा। जहां हमारी पाठ्यपुस्तकें, पाठ्यक्रम, पाठ्यचर्याएं भाषायी विविधता की वकालत करती हैं वहीं कक्षायी स्थिति का अवलोकन करें तो वह विविधता एक या दो भाषा में सिमट कर रह जाती है। यहां हमारी भाषायी विविधता और सैद्धांतिक स्थापनाएं पीछे रह जाती हैं जब हम बच्चों को मानक भाषा की ओर हांक देते हैं। जबकि राष्टीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2000 और 2005 बड़ी ही शिद्दत से भाषायी विविधता की वकालत करती है। यहां तक कि कोठारी आयोग की सिफारिशें भी भाषायी विविधता की अस्मिता को संरक्षित करने की बात करती नजर आती है। लेकिन सवाल फिर वहीं खड़ा नजर आता है कि तो क्या वजह है कि कक्षा - स्कूल में वह बच्चों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। यहां पर भाषायी वर्चस्व और भाषा का बाजारीय दबाव नजर आता है जो काफी हद तक भाषायी चरित्र और जरूरतों को तय करता है। स्कूली स्तर पर भाषा के चुनाव में हमें रोजगारोन्मुख भाषा के दबदबा दिखाई देती है।
हमारी स्कूली भाषा और समाज में बरती जाने वाली भाषा के बीच एक अस्पष्ट और कई बार साफ फांक नजर आती है। यदि हमने स्कूली भाषा और समाज में इस्तमाल की जाने वाली भाषा के अंतर को नहीं पाटा तो वह इन्हीं इदो वर्गाें में टंगी भाषा मिलेगी। बच्चों भी इन्हीं दो पोल पर टंगी भाषायी रस्सी पर करतब करते मिलेंगे। हमें बड़ी ही सावधानी से बच्चों को भाषायी विविधता के स्वाद भी चखाने हैं। इसमें एक बड़ी दिक्कत यह आती है कि एक ओर भाषा के शुद्धतावादी जिसे मानकीकृत भाषा के प्रति अधिक राग है वे हमेशा ही मानक भाषा की सिफारिश करते हैं। वे मानते हैं कि विभिन्न बोलियां, उप भाषाएं मूलतः मानक भाषा को खराब करती हैं। यही स्थापनाएं शिक्षकों में भी संचारित होती हैं। कई कार्यशालाओं में ऐसे प्रश्नों से रू ब रू होने का मौका मिला है जिसमें शिक्षक कहते मिले हैं कि बोलियां तो भाषा को खत्म कर देंगे, बोलियां हमारी शुद्ध भाषा को गंदला कर देंगी। सचूपछा जाए तो उनकी इस चिंता का निराकरण भाषावैज्ञानिकों, शिक्षाविद्ों को करना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बनी रहे। क्याेंकि शिक्षक स्वयं भ्रम में होगा तो वह यह तय कर पाने में असमर्थ होगा कि उसे कक्षा और समाज की विभिन्न भाषाओं के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित करे।
भाषायी विविधता का उत्सव स्कूलों और कॉलेज स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता है। इन कार्यशालाओं और उत्सवों में विभिन्न भाषा - बोलियों के रचनाकारों को आमंत्रित करना होगा ताकि जो अभिव्यक्तियां, लोकोक्तियां, मुहावरे हमारी मानक भाषा से गायब हो चुकी हैं उन्हीं भाषा की मुख्यधारा में लाई जा सके। बच्चों और बड़ों के भाषायी भूगोल से जिन शब्दों, अभिव्यक्तियों को बाहर कर दिया गया या हो चुके हैं उन्हें दुबारा परिधि में लाना होगा। गौरतलब है कि आज नागर समाज के बीच से विविध भाषा संपदा तकरीबन खत्म सी हो गई है। हमारी मातृभाषाएं भी इस दौड़ में पिछड़ रही है। जब कभी मातृभाषा का इस्तमाल करना होता है तब सच्चे,कोमल शब्दों को बड़ी मुश्किल से याद करना पड़ता है। यह स्थिति बच्चों के साथ ही बड़ों की भी है।
भारतीय भाषाओं में छपने वाले साहित्य में विविधता को देखें तो हमें कई छटाएं मिलेंगी जो मानक भाषा से नदारत हो चुकी हैं। हमें साहित्य के माध्यम से भारतीस भाषाओं और बोलियों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। अन्यथा वह समय दूर नहीं है जब हमारी हजारों बोलियां और गैर मानक भाषाएं अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ेंगी। कई मर्तबा तो ऐसा भी हुआ है कि हम अपनी मातृभाषा को मानक भाषा के आगे छुपा देते हैं। जबकि हमारी बोलियां, भाषायी विविधता हमारे अभिव्यक्ति को सुदृढ़ ही करती हैं। लेकिन हमें अपनी बोली,भाषा के इस्तमाल करने में कहीं शर्म और हीनता महसूस होती है जो गैर मानक भाषा के लिए हानिकारक है।
देश भर में भाषोत्सव का आयोजन हा जिससे क्षेत्रीय और मानक भाषा के बीच की दूरी को कम की जा सके। यूं तो साहित्योत्सव का आयोजन लिटरेचर फेस्टीवल के नाम से शुरू हो चुका है। लेकिन उस आयोजन में एक ख़्ाास भाषा का वर्चस्व साफ देखा और महसूस किया जा सकता है। क्योंकि उस मंच पर बोलियों,उप बोलियों और गैर मानक भाषा को खेदर दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर कॉलेजों और विश्वविद्यालों के हिन्दी विभाग एवं राज्य स्तरीय संस्कृति और भाषा विभाग इस किस्म के भाषोत्सव को प्रोत्साहित कर सकते हैं। यहां राजनीति इच्छा शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी। क्योंकि विभागीय आर्थ्िाक सीमाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि हर अकादमिक सत्र के लिए आर्थिक सहायकता राशि का प्रावधान होता ही है। इसी के तहत विभिन्न गोष्ठियों और सम्मेलनों का आयोजन विभाग करते हैं। उन्हीं मदों में भाषोत्सव नाम कुछ और भी सोचा जा सकता है लेकिन हमें इसे करने की आवश्यकता है। यदि हम भाषायी विविधता का उत्सव मनाना चाहते हैं तो। क्योंकि अकादमिक भूगोल से बहुत तेजी से भाषायी वैविध्यता खत्म हो रही है। इसका एक प्रमाण उच्च शैक्षिक संस्थानों में होने वाले भाषायी शोधों को देख का अनुमान लगाया जा सकता है। जितने शोध मानक भाषा में होते हैं क्या उसका एक छोटा सा हिस्सा भी बोलियों और गैर मानकीकृत भाषा की झोली में आती है। विचारणीय मसला है कि हमें शोधों की संख्या और उसकी गुणवत्ता बढ़ानी होगी। यहां एक सवाल पैदा होता है कि गैर मानकीकृत भाषा जिसमें हजारों बोलियां शिामल हैं उस बोली के आधिकारिक ज्ञाता एवं विद्वान ही नहीं हैं जो उसका मूल्यांकन और मार्गदर्शन कर पाएं तो ऐसे में शोध को मार्गदर्शन कौन करेगा। कहते हैं हिन्दी साहित्य में अवधी, बज्झिका, ब्रज, मैथिली, गढ़वाली, कुम्हौनी आदि बोलियों - भाषाओं के विद्वान जाते रहे। जो स्थान खाली हुआ उसे भरने वाला अब कोई नहीं बचा।
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हमारा देश - समाज विविधताओं का देश है। यह विविधता विभिन्न स्तरों एवं स्वरूपों में देखी और समझी जा सकती है। मसलन भाषा,संस्कृति, लोक बोलियां, पहनावे,खान - पान आदि। वैसी ही विविधता हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी नजर आती है। यही कारण है कि हमें देश के विभिन्न राज्यों की विविधता अपनी ओर खींचती है। हम उसके मोहपाश से दूर नहीं जा पाते। हमारी भाषायी और सांस्कृतिक विविधता ही वह जादू है जिसके अप्रत्यक्ष डोर से बंधे होते हैं। हमें इसी समाज में विविध भाषायी छटाओं का आनंद भी मिलता है जहां 'पैले जाणा', 'कछुओ नाहि' 'दूर नइखे, नियरे बा हो', 'पाणी पी लो' 'रोट्टी खाणी है' आदि को भी सुन सकते हैं। भाषायी विविधता एक किस्म से हमारी भाषायी विविधतापूर्ण संस्कृति की पहचान भी कराती है। यदि हम इस विविधता के उत्सव को भाषायी विविधता की परिधि में सीमित कर के विमर्शर् कर सकें तो वह एक दिलचस्प होगा। जहां हमारी पाठ्यपुस्तकें, पाठ्यक्रम, पाठ्यचर्याएं भाषायी विविधता की वकालत करती हैं वहीं कक्षायी स्थिति का अवलोकन करें तो वह विविधता एक या दो भाषा में सिमट कर रह जाती है। यहां हमारी भाषायी विविधता और सैद्धांतिक स्थापनाएं पीछे रह जाती हैं जब हम बच्चों को मानक भाषा की ओर हांक देते हैं। जबकि राष्टीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा दो हज़ार और दो हज़ार पाँच बड़ी ही शिद्दत से भाषायी विविधता की वकालत करती है। यहां तक कि कोठारी आयोग की सिफारिशें भी भाषायी विविधता की अस्मिता को संरक्षित करने की बात करती नजर आती है। लेकिन सवाल फिर वहीं खड़ा नजर आता है कि तो क्या वजह है कि कक्षा - स्कूल में वह बच्चों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। यहां पर भाषायी वर्चस्व और भाषा का बाजारीय दबाव नजर आता है जो काफी हद तक भाषायी चरित्र और जरूरतों को तय करता है। स्कूली स्तर पर भाषा के चुनाव में हमें रोजगारोन्मुख भाषा के दबदबा दिखाई देती है। हमारी स्कूली भाषा और समाज में बरती जाने वाली भाषा के बीच एक अस्पष्ट और कई बार साफ फांक नजर आती है। यदि हमने स्कूली भाषा और समाज में इस्तमाल की जाने वाली भाषा के अंतर को नहीं पाटा तो वह इन्हीं इदो वर्गाें में टंगी भाषा मिलेगी। बच्चों भी इन्हीं दो पोल पर टंगी भाषायी रस्सी पर करतब करते मिलेंगे। हमें बड़ी ही सावधानी से बच्चों को भाषायी विविधता के स्वाद भी चखाने हैं। इसमें एक बड़ी दिक्कत यह आती है कि एक ओर भाषा के शुद्धतावादी जिसे मानकीकृत भाषा के प्रति अधिक राग है वे हमेशा ही मानक भाषा की सिफारिश करते हैं। वे मानते हैं कि विभिन्न बोलियां, उप भाषाएं मूलतः मानक भाषा को खराब करती हैं। यही स्थापनाएं शिक्षकों में भी संचारित होती हैं। कई कार्यशालाओं में ऐसे प्रश्नों से रू ब रू होने का मौका मिला है जिसमें शिक्षक कहते मिले हैं कि बोलियां तो भाषा को खत्म कर देंगे, बोलियां हमारी शुद्ध भाषा को गंदला कर देंगी। सचूपछा जाए तो उनकी इस चिंता का निराकरण भाषावैज्ञानिकों, शिक्षाविद्ों को करना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न बनी रहे। क्याेंकि शिक्षक स्वयं भ्रम में होगा तो वह यह तय कर पाने में असमर्थ होगा कि उसे कक्षा और समाज की विभिन्न भाषाओं के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित करे। भाषायी विविधता का उत्सव स्कूलों और कॉलेज स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता है। इन कार्यशालाओं और उत्सवों में विभिन्न भाषा - बोलियों के रचनाकारों को आमंत्रित करना होगा ताकि जो अभिव्यक्तियां, लोकोक्तियां, मुहावरे हमारी मानक भाषा से गायब हो चुकी हैं उन्हीं भाषा की मुख्यधारा में लाई जा सके। बच्चों और बड़ों के भाषायी भूगोल से जिन शब्दों, अभिव्यक्तियों को बाहर कर दिया गया या हो चुके हैं उन्हें दुबारा परिधि में लाना होगा। गौरतलब है कि आज नागर समाज के बीच से विविध भाषा संपदा तकरीबन खत्म सी हो गई है। हमारी मातृभाषाएं भी इस दौड़ में पिछड़ रही है। जब कभी मातृभाषा का इस्तमाल करना होता है तब सच्चे,कोमल शब्दों को बड़ी मुश्किल से याद करना पड़ता है। यह स्थिति बच्चों के साथ ही बड़ों की भी है। भारतीय भाषाओं में छपने वाले साहित्य में विविधता को देखें तो हमें कई छटाएं मिलेंगी जो मानक भाषा से नदारत हो चुकी हैं। हमें साहित्य के माध्यम से भारतीस भाषाओं और बोलियों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। अन्यथा वह समय दूर नहीं है जब हमारी हजारों बोलियां और गैर मानक भाषाएं अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ेंगी। कई मर्तबा तो ऐसा भी हुआ है कि हम अपनी मातृभाषा को मानक भाषा के आगे छुपा देते हैं। जबकि हमारी बोलियां, भाषायी विविधता हमारे अभिव्यक्ति को सुदृढ़ ही करती हैं। लेकिन हमें अपनी बोली,भाषा के इस्तमाल करने में कहीं शर्म और हीनता महसूस होती है जो गैर मानक भाषा के लिए हानिकारक है। देश भर में भाषोत्सव का आयोजन हा जिससे क्षेत्रीय और मानक भाषा के बीच की दूरी को कम की जा सके। यूं तो साहित्योत्सव का आयोजन लिटरेचर फेस्टीवल के नाम से शुरू हो चुका है। लेकिन उस आयोजन में एक ख़्ाास भाषा का वर्चस्व साफ देखा और महसूस किया जा सकता है। क्योंकि उस मंच पर बोलियों,उप बोलियों और गैर मानक भाषा को खेदर दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर कॉलेजों और विश्वविद्यालों के हिन्दी विभाग एवं राज्य स्तरीय संस्कृति और भाषा विभाग इस किस्म के भाषोत्सव को प्रोत्साहित कर सकते हैं। यहां राजनीति इच्छा शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी। क्योंकि विभागीय आर्थ्िाक सीमाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि हर अकादमिक सत्र के लिए आर्थिक सहायकता राशि का प्रावधान होता ही है। इसी के तहत विभिन्न गोष्ठियों और सम्मेलनों का आयोजन विभाग करते हैं। उन्हीं मदों में भाषोत्सव नाम कुछ और भी सोचा जा सकता है लेकिन हमें इसे करने की आवश्यकता है। यदि हम भाषायी विविधता का उत्सव मनाना चाहते हैं तो। क्योंकि अकादमिक भूगोल से बहुत तेजी से भाषायी वैविध्यता खत्म हो रही है। इसका एक प्रमाण उच्च शैक्षिक संस्थानों में होने वाले भाषायी शोधों को देख का अनुमान लगाया जा सकता है। जितने शोध मानक भाषा में होते हैं क्या उसका एक छोटा सा हिस्सा भी बोलियों और गैर मानकीकृत भाषा की झोली में आती है। विचारणीय मसला है कि हमें शोधों की संख्या और उसकी गुणवत्ता बढ़ानी होगी। यहां एक सवाल पैदा होता है कि गैर मानकीकृत भाषा जिसमें हजारों बोलियां शिामल हैं उस बोली के आधिकारिक ज्ञाता एवं विद्वान ही नहीं हैं जो उसका मूल्यांकन और मार्गदर्शन कर पाएं तो ऐसे में शोध को मार्गदर्शन कौन करेगा। कहते हैं हिन्दी साहित्य में अवधी, बज्झिका, ब्रज, मैथिली, गढ़वाली, कुम्हौनी आदि बोलियों - भाषाओं के विद्वान जाते रहे। जो स्थान खाली हुआ उसे भरने वाला अब कोई नहीं बचा।
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रीवा (REWA LOCAL NEWS) पर्यटन संस्कृति एवं अध्यात्म विभाग की मंत्री ऊषा सिंह ठाकुर ने आज 50 लाख रूपये की लागत से पुर्वाफाल में स्वीकृत विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल में सेफ्टी रेलिंग बनेगी, पाथवे का निर्माण होगा, गजीबों, स्टोन डस्टबिन, स्टोन बेंचेस तथा विजिटर्स प्लेटफार्म का निर्माण किया जायेगा। पर्यटन मंत्री ने स्थानीय विद्यायक की मांग पर पुर्वाफाल के सौन्दर्यीकरण के लिये 1.50 करोड़ रूपये स्वीकृत करने का आश्वासन दिया।
मंत्री सुश्री ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर पुर्वाफाल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण के हर संभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल सौन्दर्यीकरण के चरम पर जायेगा। यह बसामन मामा की धरती पर प्राकृतिक वरदान के रूप में दृश्यमान होगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकास से रोजगार की अपार संभावनायें हैं। बसामन मामा ने अपने प्राणों की आहुति पर्यावरण के लिये दी। उन्होंने पीपल के वृक्ष की रक्षा के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग किया।
हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी अपने जन्म दिवस, विवाह दिवस, वरिष्ठजनों की पुण्य तिथियों पर इतने फलदार पौधों का रोपण करें कि हमारी यह धरती हरी-भरी हो जाय। पर्यटन मंत्री सुश्री ठाकुर ने बसामन मामा में गौवंश वन विहार की स्थापना में पूर्व मंत्री एवं विधायक राजेन्द्र शुक्ल के अपरमित प्रयत्नों के लिये हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष देश की आजादी का 75वें वर्ष के दौरान हम सब अपने देश की आजादी के लिये अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों को याद करें तथा आने वाली पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने की सीख दें।
पर्यटन मंत्री ने बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का किया अवलोकनः- पर्यटन मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर ने अपने प्रवास के दौरान बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि अगर आपकों कोई बीमारी है या कोई कष्ट है तो आप गायों की अनवरत सेवा करें इससे शीघ्र ही इस कष्टों से निवारण होगा बताया गया कि बसामन मामा गौवंश वन्य अभ्यारण्य में 4 हजार गायों को रखा गया है। अभ्यारण्य में जैविक खाद, कीटनाशक एवं फिनायल का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। आगे चलकर गौवंश वन्य विहार में 10 हजार गाये रखे जाने की योजना है। गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये यह मील का पत्थर साबित होगा।
पर्यटन मंत्री ने बसामन मामा मंदिर में की पूजा अर्चनाः- पर्यटन मंत्री सुश्री ठाकुर ने बसामन मामा मंदिर में पूजा अर्चना की और कहा कि बसामन मामा के आदर्शों पर चलकर हमें पौधरोपण कर पेड़ बनने तक उसकी सुरक्षा करनी चाहिये।
विधायक के.पी. त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि सेमरिया क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिये वे कृत संकल्पित है। बसामन मामा की पवित्र भूमि में प्रकृति के अनुपम उपहार के रूप में मिले पुर्वाफाल की प्राकृतिक सौन्दर्य को बढ़ाने तथा पर्यटकों की सुविधा को बढ़ाने के लिये विधायक निधि से 50 लाख रूपये की निधि पर्यटन विकास निगम को उपलब्ध कराया है।
उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल के सौन्दर्यीकरण को और बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे पर्यटक आये और इस अनुपम सौन्दर्य का अवलोकन करें। उन्होंने मंत्री से 1.50 करोड़ रूपये की कार्ययोजना स्वीकृत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सेमरिया में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिये माइक्रो एरिगेशन प्लान बनाया जा रहा है। इससे 32 ग्रामों में सिचाई होगी।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य शिवकली नट, अनिल पाण्डेय, जनपद सदस्य अनूप पाण्डेय, हेमराज पाण्डेय, चन्द्रमणि मिश्रा, एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री, पर्यटन विभाग के कार्यपालन यंत्री डीएस परिहार, दामोदर प्रसाद पाठक, उत्कर्ष पटेल, जयराम अग्निहोत्री, श्रीमती ज्योति त्रिपाठी, कृष्णा सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित रहे।
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रीवा पर्यटन संस्कृति एवं अध्यात्म विभाग की मंत्री ऊषा सिंह ठाकुर ने आज पचास लाख रूपये की लागत से पुर्वाफाल में स्वीकृत विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल में सेफ्टी रेलिंग बनेगी, पाथवे का निर्माण होगा, गजीबों, स्टोन डस्टबिन, स्टोन बेंचेस तथा विजिटर्स प्लेटफार्म का निर्माण किया जायेगा। पर्यटन मंत्री ने स्थानीय विद्यायक की मांग पर पुर्वाफाल के सौन्दर्यीकरण के लिये एक.पचास करोड़ रूपये स्वीकृत करने का आश्वासन दिया। मंत्री सुश्री ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर पुर्वाफाल के विकास एवं सौन्दर्यीकरण के हर संभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल सौन्दर्यीकरण के चरम पर जायेगा। यह बसामन मामा की धरती पर प्राकृतिक वरदान के रूप में दृश्यमान होगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकास से रोजगार की अपार संभावनायें हैं। बसामन मामा ने अपने प्राणों की आहुति पर्यावरण के लिये दी। उन्होंने पीपल के वृक्ष की रक्षा के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी अपने जन्म दिवस, विवाह दिवस, वरिष्ठजनों की पुण्य तिथियों पर इतने फलदार पौधों का रोपण करें कि हमारी यह धरती हरी-भरी हो जाय। पर्यटन मंत्री सुश्री ठाकुर ने बसामन मामा में गौवंश वन विहार की स्थापना में पूर्व मंत्री एवं विधायक राजेन्द्र शुक्ल के अपरमित प्रयत्नों के लिये हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष देश की आजादी का पचहत्तरवें वर्ष के दौरान हम सब अपने देश की आजादी के लिये अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों को याद करें तथा आने वाली पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने की सीख दें। पर्यटन मंत्री ने बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का किया अवलोकनः- पर्यटन मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर ने अपने प्रवास के दौरान बसामन मामा गौवंश वन्य विहार का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि अगर आपकों कोई बीमारी है या कोई कष्ट है तो आप गायों की अनवरत सेवा करें इससे शीघ्र ही इस कष्टों से निवारण होगा बताया गया कि बसामन मामा गौवंश वन्य अभ्यारण्य में चार हजार गायों को रखा गया है। अभ्यारण्य में जैविक खाद, कीटनाशक एवं फिनायल का निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। आगे चलकर गौवंश वन्य विहार में दस हजार गाये रखे जाने की योजना है। गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये यह मील का पत्थर साबित होगा। पर्यटन मंत्री ने बसामन मामा मंदिर में की पूजा अर्चनाः- पर्यटन मंत्री सुश्री ठाकुर ने बसामन मामा मंदिर में पूजा अर्चना की और कहा कि बसामन मामा के आदर्शों पर चलकर हमें पौधरोपण कर पेड़ बनने तक उसकी सुरक्षा करनी चाहिये। विधायक के.पी. त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि सेमरिया क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिये वे कृत संकल्पित है। बसामन मामा की पवित्र भूमि में प्रकृति के अनुपम उपहार के रूप में मिले पुर्वाफाल की प्राकृतिक सौन्दर्य को बढ़ाने तथा पर्यटकों की सुविधा को बढ़ाने के लिये विधायक निधि से पचास लाख रूपये की निधि पर्यटन विकास निगम को उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि पुर्वाफाल के सौन्दर्यीकरण को और बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे पर्यटक आये और इस अनुपम सौन्दर्य का अवलोकन करें। उन्होंने मंत्री से एक.पचास करोड़ रूपये की कार्ययोजना स्वीकृत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सेमरिया में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिये माइक्रो एरिगेशन प्लान बनाया जा रहा है। इससे बत्तीस ग्रामों में सिचाई होगी। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य शिवकली नट, अनिल पाण्डेय, जनपद सदस्य अनूप पाण्डेय, हेमराज पाण्डेय, चन्द्रमणि मिश्रा, एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री, पर्यटन विभाग के कार्यपालन यंत्री डीएस परिहार, दामोदर प्रसाद पाठक, उत्कर्ष पटेल, जयराम अग्निहोत्री, श्रीमती ज्योति त्रिपाठी, कृष्णा सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित रहे।
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पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नोटिस मध्य क्षेत्र कार्यालय के विशेष क्षेत्रीय अधिकारी राजीव सिंह के नाम से भेजे गए थे लेकिन ऐसा कोई पद या व्यक्ति था ही नहीं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
दिल्ली में कथित तौर पर खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी और वकील बताकर कई लोगों से पैसे की उगाही करने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने रविवार को बताया कि गिरफ्तार किये गए आरोपियों में से एक संतोष राय नामक व्यक्ति फिल्म निर्माता है जो शकरपुर का निवासी है.
पुलिस ने कहा कि राय के अलावा, दिलशाद कॉलोनी के निवासी भूपेंद्र सिंह गुसाईं, यमुना विहार के रहने वाले कुलदीप कुमार और संजय को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस को ईडी से शिकायत मिली थी कि एक व्यक्ति खुद को एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को नोटिस भेज रहा है और उन्हें कॉल कर रहा है.
पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नोटिस मध्य क्षेत्र कार्यालय के विशेष क्षेत्रीय अधिकारी राजीव सिंह के नाम से भेजे गए थे लेकिन ऐसा कोई पद या व्यक्ति था ही नहीं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
क्राइम ब्रांच की टीमों ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए संदिग्धों की कई जानकारियां जुटा लीं. इनमें ई-मेल भी थे. जानकारियों के आधार पर पुलिस टीमों ने सबसे पहले जाल बिछाकर ठग संतोष राय को गिरफ्तार कर लिया. पता चला कि संतोष राय ही शिकार को फांसने के लिए ईडी का स्पेशल रीजनल अफसर राजीव कुमार सिंह बनकर नोटिस भेजता था, जबकि उसके साथ गिरफ्तार भूपेंद्र सिंह गुसाईं खुद को वकील बताता था. हालांकि क्राइम ब्रांच की पड़ताल में आरोपी फर्जी वकील निकला. इन दोनों को नई दिल्ली जिले के पार्लियामेंट इलाके से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब यह दोनों ठग एक शिकार से रकम ऐंठने पहुंचे थे. इन दोनों से पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह को शिकार अफजल अहमद उर्फ छोटे फंसाकर लाता था. अफजल दिल्ली के दयालपुर इलाके का रहने वाला है. वो इन दिनों कत्ल के एक मामले में पेरोल पर जेल से बाहर है.
अफजल अहमद उर्फ छोटे के साथ मिलकर कुलदीप, संजय और अर्जुन राघव ठगी का ताना-बाना बुनते थे. इस ठगी में आकाश चौहान का नाम भी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सामने आया है. आकाश चौहान मंझा हुआ साइबर अपराधी है. फर्जी ईडी नोटिस बनाने का काम संतोष राय करता था. इन जाली ईडी नोटिसों पर संतोष राय ही, राजीव कुमार सिंह के फर्जी नाम से स्पेशल रीजनल अफसर (ईडी) के बतौर अपने दस्तखत करता था. इन जाली ईडी नोटिसों को शिकार तक पहुंचाने का काम आकाश चौहान का था. फिलहाल पुलिस अर्जुन सिंह राघव, अफजल अहमद उर्फ छोटे और आकाश चौहान की तलाश कर रही है.
पूछताछ में पता चला है कि संतोष राय का जन्म साल 1974 में दिल्ली में ही हुआ था. उसके पिता महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) दिल्ली में तैनात हैं. वो दावा करता है कि 1997 में उसने जबलपुर के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री भी हासिल कर रखी है. उसके बाद उसने नेशनल फैमली हेल्थ सर्विस-2 (NFHS-2) में भी नौकरी कर चुका है. हाल ही में उसने अपना नाम बदलकर हृदय भारती उर्फ स्वामी कर लिया था. ईडी अफसर बनकर ठगी करने का आईडिया इसी का था. संतोष राय के खिलाफ दिल्ली के पांडव नगर, त्रिलोकपुरी, क्राइम ब्रांच, मंडावली थाने सहित NI एक्ट व सीबीआई द्वारा दिल्ली में भी मुकदमा पहले से दर्ज है. इसके अलावा उसके खिलाफ बंगलुरू, कर्नाटक, में 21 मुकदमे, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में 2 मुकदमे, एक मुकदमा आंध्र प्रदेश (विजाग) में, एक मुकदमा गोरखपुर (यूपी) और एक आपराधिक मुकदमा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी दर्ज है. गिरफ्तार ठगों में से एक ठग ने ठगी के जरिए कैसे रकम उगाही की जाए, पर आधारित एक फिल्म प्रोड्यूस करने की बात भी कबूली है.
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पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नोटिस मध्य क्षेत्र कार्यालय के विशेष क्षेत्रीय अधिकारी राजीव सिंह के नाम से भेजे गए थे लेकिन ऐसा कोई पद या व्यक्ति था ही नहीं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. दिल्ली में कथित तौर पर खुद को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी और वकील बताकर कई लोगों से पैसे की उगाही करने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने रविवार को बताया कि गिरफ्तार किये गए आरोपियों में से एक संतोष राय नामक व्यक्ति फिल्म निर्माता है जो शकरपुर का निवासी है. पुलिस ने कहा कि राय के अलावा, दिलशाद कॉलोनी के निवासी भूपेंद्र सिंह गुसाईं, यमुना विहार के रहने वाले कुलदीप कुमार और संजय को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि पुलिस को ईडी से शिकायत मिली थी कि एक व्यक्ति खुद को एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को नोटिस भेज रहा है और उन्हें कॉल कर रहा है. पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नोटिस मध्य क्षेत्र कार्यालय के विशेष क्षेत्रीय अधिकारी राजीव सिंह के नाम से भेजे गए थे लेकिन ऐसा कोई पद या व्यक्ति था ही नहीं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. क्राइम ब्रांच की टीमों ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए संदिग्धों की कई जानकारियां जुटा लीं. इनमें ई-मेल भी थे. जानकारियों के आधार पर पुलिस टीमों ने सबसे पहले जाल बिछाकर ठग संतोष राय को गिरफ्तार कर लिया. पता चला कि संतोष राय ही शिकार को फांसने के लिए ईडी का स्पेशल रीजनल अफसर राजीव कुमार सिंह बनकर नोटिस भेजता था, जबकि उसके साथ गिरफ्तार भूपेंद्र सिंह गुसाईं खुद को वकील बताता था. हालांकि क्राइम ब्रांच की पड़ताल में आरोपी फर्जी वकील निकला. इन दोनों को नई दिल्ली जिले के पार्लियामेंट इलाके से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब यह दोनों ठग एक शिकार से रकम ऐंठने पहुंचे थे. इन दोनों से पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह को शिकार अफजल अहमद उर्फ छोटे फंसाकर लाता था. अफजल दिल्ली के दयालपुर इलाके का रहने वाला है. वो इन दिनों कत्ल के एक मामले में पेरोल पर जेल से बाहर है. अफजल अहमद उर्फ छोटे के साथ मिलकर कुलदीप, संजय और अर्जुन राघव ठगी का ताना-बाना बुनते थे. इस ठगी में आकाश चौहान का नाम भी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सामने आया है. आकाश चौहान मंझा हुआ साइबर अपराधी है. फर्जी ईडी नोटिस बनाने का काम संतोष राय करता था. इन जाली ईडी नोटिसों पर संतोष राय ही, राजीव कुमार सिंह के फर्जी नाम से स्पेशल रीजनल अफसर के बतौर अपने दस्तखत करता था. इन जाली ईडी नोटिसों को शिकार तक पहुंचाने का काम आकाश चौहान का था. फिलहाल पुलिस अर्जुन सिंह राघव, अफजल अहमद उर्फ छोटे और आकाश चौहान की तलाश कर रही है. पूछताछ में पता चला है कि संतोष राय का जन्म साल एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में दिल्ली में ही हुआ था. उसके पिता महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड दिल्ली में तैनात हैं. वो दावा करता है कि एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में उसने जबलपुर के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री भी हासिल कर रखी है. उसके बाद उसने नेशनल फैमली हेल्थ सर्विस-दो में भी नौकरी कर चुका है. हाल ही में उसने अपना नाम बदलकर हृदय भारती उर्फ स्वामी कर लिया था. ईडी अफसर बनकर ठगी करने का आईडिया इसी का था. संतोष राय के खिलाफ दिल्ली के पांडव नगर, त्रिलोकपुरी, क्राइम ब्रांच, मंडावली थाने सहित NI एक्ट व सीबीआई द्वारा दिल्ली में भी मुकदमा पहले से दर्ज है. इसके अलावा उसके खिलाफ बंगलुरू, कर्नाटक, में इक्कीस मुकदमे, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में दो मुकदमे, एक मुकदमा आंध्र प्रदेश में, एक मुकदमा गोरखपुर और एक आपराधिक मुकदमा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी दर्ज है. गिरफ्तार ठगों में से एक ठग ने ठगी के जरिए कैसे रकम उगाही की जाए, पर आधारित एक फिल्म प्रोड्यूस करने की बात भी कबूली है.
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बच्चों को औषधीय पौधों की जानकारी देने व उसके प्रति रुझान बढ़ाने के लिए केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) डिजिटल माध्यम को अपनाएगा। संस्थान परिसर में बने मानव पार्क का डिजिटलीकरण किया जाएगा। एनीमेशन के माध्यम से पौधों के औषधीय गुण की जानकारी दी जाएगी। शरीर के हर अंग के लिए गुणकारी पौधे, उसकी विशेषता आदि का ब्योरा एक क्लिक पर मिल जाएगा।
सीमैप परिसर में मानव पार्क बना है। यहां पर मानव शरीर के आकार में पार्क विकसित किया गया है। सिर से लेकर पांव तक हर अंग के लिए कुल 128 लाभकारी पौधे लगाए गए हैं। इस पार्क के बारे में जानकारी के लिए अभी बच्चों या अन्य लोगों को परिसर तक आना पड़ता था। इसमें कई पौधे मौसमी हैं। लिहाजा ठंडी में गर्मी वाले व गर्मी में ठंडी वाले पौधों को देखना संभव नहीं था। लेकिन अब घर बैठे हर पौधे को डिजिटल फार्म में देखा जा सकेगा।
डिजटलीकरण के लिए सभी पौधों की नम्बरिंग कर दी गई है। त्वचा, बाल, दिमाग, आंख, कान, नाक, हृदय, फेफड़ा, आंत, किडनी, पेट आदि के लिए कई तहर के अलग-अलग पौधे हैं। जिस नम्बर के पौधे को क्लिक किया जाएगा उसके बारे में पूरा ब्योरा कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगा। उसका बायोलॉजिकल नाम, सामान्य प्रचलित नाम, उसमें मौजूद तत्व, किस मौसम में उत्पादन आदि की जानकारी मिल जाएगी। पौधे की फोटो भी उपलब्ध रहेगी।
एनीमेशन में मानव पार्क का पाथ-वे होगा। पूरे मानव पार्क को डिजिटल प्लेटफर्म पर टहला जा सकता है। जिस अंग के लिए लाभकारी पौधे के बारे में जानकारी चाहिए पाथ-वे के माध्यम से पहुंचा जा सकेगा। वहां पर रुककर पौधे के बारे में जानकारी ली जा सकेगी।
बाल-तिल, भृंगराज, पीला भृंगराज, लिवरी एलोज, बरियाणा, गूधल, हिना।
दिमाग-मंडुपकर्णी, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मलकांगनी।
फेफड़ा-सिरिस, नीली निरगुंडी, भटकटाया, धतूरा।
किटनी-पथरचूर्ण, गोरखमोजा, गोखुरू।
पेट-अग्निमंथा, निसोथ, सदाब, पिपली, चित्रक।
मानव पार्क का डिजिटलीकरण इसी माह पूरा हो जाएगा। सीएसआईआर व सीमैप की वेबसाइट पर जाकर पौधों के बारे में जानकारी ली जा सकेगी। इसके अलावा जिज्ञासा कार्यक्रम के तहत बच्चों को डिजिटल प्लेटफार्म की जानकारी दी जाएगी।
मनोज सेमवाल, वैज्ञानिक सीमैप।
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बच्चों को औषधीय पौधों की जानकारी देने व उसके प्रति रुझान बढ़ाने के लिए केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान डिजिटल माध्यम को अपनाएगा। संस्थान परिसर में बने मानव पार्क का डिजिटलीकरण किया जाएगा। एनीमेशन के माध्यम से पौधों के औषधीय गुण की जानकारी दी जाएगी। शरीर के हर अंग के लिए गुणकारी पौधे, उसकी विशेषता आदि का ब्योरा एक क्लिक पर मिल जाएगा। सीमैप परिसर में मानव पार्क बना है। यहां पर मानव शरीर के आकार में पार्क विकसित किया गया है। सिर से लेकर पांव तक हर अंग के लिए कुल एक सौ अट्ठाईस लाभकारी पौधे लगाए गए हैं। इस पार्क के बारे में जानकारी के लिए अभी बच्चों या अन्य लोगों को परिसर तक आना पड़ता था। इसमें कई पौधे मौसमी हैं। लिहाजा ठंडी में गर्मी वाले व गर्मी में ठंडी वाले पौधों को देखना संभव नहीं था। लेकिन अब घर बैठे हर पौधे को डिजिटल फार्म में देखा जा सकेगा। डिजटलीकरण के लिए सभी पौधों की नम्बरिंग कर दी गई है। त्वचा, बाल, दिमाग, आंख, कान, नाक, हृदय, फेफड़ा, आंत, किडनी, पेट आदि के लिए कई तहर के अलग-अलग पौधे हैं। जिस नम्बर के पौधे को क्लिक किया जाएगा उसके बारे में पूरा ब्योरा कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगा। उसका बायोलॉजिकल नाम, सामान्य प्रचलित नाम, उसमें मौजूद तत्व, किस मौसम में उत्पादन आदि की जानकारी मिल जाएगी। पौधे की फोटो भी उपलब्ध रहेगी। एनीमेशन में मानव पार्क का पाथ-वे होगा। पूरे मानव पार्क को डिजिटल प्लेटफर्म पर टहला जा सकता है। जिस अंग के लिए लाभकारी पौधे के बारे में जानकारी चाहिए पाथ-वे के माध्यम से पहुंचा जा सकेगा। वहां पर रुककर पौधे के बारे में जानकारी ली जा सकेगी। बाल-तिल, भृंगराज, पीला भृंगराज, लिवरी एलोज, बरियाणा, गूधल, हिना। दिमाग-मंडुपकर्णी, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मलकांगनी। फेफड़ा-सिरिस, नीली निरगुंडी, भटकटाया, धतूरा। किटनी-पथरचूर्ण, गोरखमोजा, गोखुरू। पेट-अग्निमंथा, निसोथ, सदाब, पिपली, चित्रक। मानव पार्क का डिजिटलीकरण इसी माह पूरा हो जाएगा। सीएसआईआर व सीमैप की वेबसाइट पर जाकर पौधों के बारे में जानकारी ली जा सकेगी। इसके अलावा जिज्ञासा कार्यक्रम के तहत बच्चों को डिजिटल प्लेटफार्म की जानकारी दी जाएगी। मनोज सेमवाल, वैज्ञानिक सीमैप।
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Yoni me fungal sankraman योनि यीस्ट संक्रमण या वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन एक ऐसा संक्रमण है जिसे कैंडिडिआसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सामान्य स्थिति होती है जिसमे योनि में खुजली जलन और सफ़ेद तरल पदार्थ का स्त्राव होता है। योनि यीस्ट इन्फेक्शन महिलाओ में होने वाली एक आम समस्या है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से योनि यीस्ट इन्फेक्शन क्या है? वजाइना में फंगल संक्रमण कैसे होता है इसके लक्षण, कारण, जांच, उपचार,और घरेलू उपाय के बारे में बतायेंगे।
योनि यीस्ट इन्फेक्शन या संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है जो योनि में होता है यह एक फंगल संक्रमण है जिससे महिला के जननागों में खुजली, जलन और योनि स्त्राव होता है । महिला की स्वस्थ योनि में कुछ बैक्टेरिया या कुछ फंगल कोशिकाये होती है लेकिन जब बैक्टेरिया और फंगल कोशिकाओ का संतुलन बिगड़ता है तो बैक्टेरिया की तुलना में फंगस कोशिकाएँ कई गुना तक बढ़ जाती है खमीर कोशिकाओ के बढ़ने के कारण योनि (वेजाइना) में तेज खुजली के साथ लालपन, सूजन और जलन होने लगती है।
अगर समय रहते वजाइना में फंगल संक्रमण का इलाज हो जाये तो योनि में हो रहे लक्षण जैसे-जलन और खुजली की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाएगी। योनि के संक्रमण को ठीक होने में कम से कम दो हफ्तों तक का समय लग सकता है।
योनि खमीर संक्रमण को योन संचारित संक्रमण (SIT) नहीं माना जाता है। परन्तु यह शारीरिक संबंध बनाने से फ़ैल सकता है लेकिन जो महिलाये शारीरिक संबंध बनाने में सक्रिय नहीं होती है उन महिलाओ में भी योनि को साफ न रखने से योनि यीस्ट संक्रमण हो सकता है जिन महिलाओ में एक बार योनि यीस्ट संक्रमण हो जाये तो उनमे योनि यीस्ट संक्रमण दोबारा होने की सम्भावना ज्यादा बढ़ जाती है।
(और पढ़े - योनी में खुजली, जलन और इन्फेक्शन के कारण और घरेलू इलाज...)
- वजाइना में इन्फेक्शन होने के कारण खुजली चलना।
- योनि में खुजली के दौरान योनि के आसपास सूजन आना।
- पेशाब या सेक्स (शारीरिक संबंध) करते समय योनि में जलन होना।
- वजाइना में सेक्स के दौरान तेज दर्द होना।
- योनि में लालपन या लाल चकते आ जाना।
योनि से कभी-कभी सफ़ेद पानी का निकलना भी योनि में फंगस संक्रमण का एक प्रमुख लक्षण होता है। अगर आप सही समय पर वजाइना में फंगल संक्रमण का उपचार नहीं करवाती है तो योनि यीस्ट संक्रमण के लक्षण बहुत ज्यादा गंभीर हो सकते है।
(और पढ़े - योनि में जलन के कारण और घरेलू इलाज...)
- महिलाओ के मासिक धर्म चक्र में कई महिलाये 4 से 5 घंटे तक एक ही सेनेटरी पैड का उपयोग करती है इस सेनेटरी पैड को हर 4 घंटे में नहीं बदलती है कई महिलाये सेनेटरी पैड की जगह संक्रमित कपड़ो का उपयोग करती है जिससे योनि में यीस्ट इन्फेक्शन बहुत तेजी से फैलता है।
- महिलाओं का नहाते समय हल्के गर्म पानी का उपयोग करना। और पानी से अपनी योनि (वेजाइना) की अच्छे से सफाई न करना भी वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन का कारण बनता है।
- वेजाइना में रफ साबुन का प्रयोग करने से भी योनि में संक्रमण बढ़ जाता है योनि को साफ़ व स्वच्छ न रखना।
- ढीले कपड़े या काटन की पेंटी नहीं पहनने से पसीने के द्वारा बैक्टेरिया पनपने से योनि में नमी के कारण संक्रमण बढ़ जाता है।
- अधिक तनाव में रहने से और पर्याप्त नींद न लेने से भी हमारे शरीर में हॉर्मोन का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है जिससे वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।
(और पढ़े - योनि के साथ कभी नहीं करना चाहिए ये 7 चीजें...)
- योनि में यीस्ट (फंगस) संक्रमण कवक कैंडिडा नामक सूक्ष्मजीव के कारण फैलता है जो शरीर में हॉर्मोन के संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ देता है जो योनि में फंगस संक्रमण की अधिकता का कारण बनता है।
- कुछ एंटीबायोटिक्स होती है जो योनि (वेजाइना) में लेक्टोबेसिलस यानि अच्छे बैक्टेरिया की मात्रा को कम कर देता है जो सामान्यतः दही में पाया जाता है जिससे दही में खट्टापन आ जाता है।
- गर्भावस्था भी योनि यीस्ट संक्रमण का एक प्रमुख कारण है गर्भावस्था में महिलाओ को योनि की ज्यादा देखभाल करने की जरुरत होती है।
- जिन महिलाओ के शरीर में शुगर (मधुमेह) यानि डाइबिटिज बहुत ज्यादा है उनका हार्मोनल संतुलन, और प्रतिरोधकता प्रणाली को फंगस संक्रमण ज्यादा प्रभावित करते है जिससे जिससे वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है।
- कैंडिडा एल्बिकस नामक जीव होता है जो योनि (वेजाइना) में संक्रमण को बढाने में मदद करता है ।
- पर्याप्त नींद न होना और अत्यधिक पानी न पीना, ख़राब भोजन जैसे-कम पोषक तत्व वाला खाना खाने से भी योनि में संक्रमण बढ़ सकता है।
(और पढ़े - कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) के कारण, लक्षण, उपचार, बचाव और घरेलू उपाय...)
- खमीर संक्रमण का निदान करना आसान है। आपका डॉक्टर आपके मेडिकल इतिहास के बारे में पूछेगा। इसमें शामिल है कि क्या आपको पहले खमीर संक्रमण हुआ था। वे यह भी पूछ सकते हैं कि क्या आपको कभी एस.टी.आई. रोग हुआ था।
- कही ऐसा तो नहीं की आपकी योनि में संक्रमण पहले भी हो चुका हो या आप पहले भी इसका इलाज करवा चुकी है यदि ऐसा है तो आपको अपनी योनि संक्रमण की जाँच की रिपोर्ट भी डॉक्टर को दिखानी होगी।
- अगला चरण एक श्रोणि परीक्षा है। आपका डॉक्टर आपकी योनि की दीवारों और गर्भाशय ग्रीवा की जांच करेगा। वे संक्रमण के बाहरी लक्षणों के लिए आसपास के क्षेत्र को भी देखेंगे।
आपका डॉक्टर क्या देखता है, इसके आधार पर, अगला कदम आपकी योनि से कुछ कोशिकाओं को इकट्ठा करना हो सकता है। ये कोशिकाएं जांच के लिए एक लैब में जाती हैं। लैब परीक्षण का आमतौर पर उन महिलाओं के लिए आदेश दिया जाता है जिनके पास नियमित रूप से योनि में खमीर संक्रमण होता है या उन संक्रमणों के लिए जो जल्दी दूर नहीं होते हैं। जिससे यह पता लगाया जा सके की आपकी योनि में संक्रमण बार-बार होने का कारण क्या है तथा योनि में यह संक्रमण क्यों हो रहा है।
(और पढ़े - गर्भाशय की जानकारी, रोग और उपचार...)
महिलाओ में प्रत्येक यीस्ट संक्रमण बहुत अलग होता है योनि में यीस्ट संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टर अच्छे उपचार की सलाह देते है सामान्य तौर पर योनि में संक्रमण से इलाज आपकी योनि में फंगस इन्फेक्शन के लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
साधारण संक्रमण में डॉक्टर आपको कुछ दवाएँ खाने के लिए देता है जो सामान्य तौर पर एंटीफंगल होती है इसमें आपको योनि में लगाने के लिए कुछ मलहम क्रीम और टेबलेट दी जाती है एक दो दिन के लिए आपके आहार चार्ट को भी बदला जाता है। ये दवाएँ खाने के बाद आपको डॉक्टर से मिलकर यह बताना होता है की आपको दी हुई दवाएँ असर कर रही है या नहीं ।
(और पढ़े - योनि से जुड़े रोग और उपचार...)
- जटिल संक्रमण में महिलाओ को अधिक समय तक योनि में संक्रमण रहता है जैसे- योनि में जलन, खुजली, लालिमा या चकतों का होना।
- यदि आपको योनि में बार-बार संक्रमण हो रहा है तो यह कैंडिडा एल्बिकैस के अलावा कैंडिडा जीव के कारण होता है। जो योनि में होने वाले संक्रमण को बढ़ाते है।
- यदि आपको अत्यधिक मधुमेह तो नहीं जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ हॉर्मोन में बदलाव के कारण भी संक्रमण ज्यादा होता है।
- कही आप एच.आई.वी (एड्स) पॉजिटिव तो नहीं है।
- इसमें आपको कुछ एंटीफंगल दवाएँ और मलहम क्रीम,और टेबलेट दी जाती है जो आपको 14 दिनों तक उपयोग करनी पड़ती है।
- सेक्स (शारीरिक संबंध) बनाते समय यह पता कर लें की आपके पार्टनर को यीस्ट (फंगस) संक्रमण तो नहीं है और कंडोम का उपयोग करे।
(और पढ़े - महिलाओं में एचआईवी एड्स के लक्षण...)
- नारियल का तेल जो योनि के संक्रमण में लाभदायक है इसे आप अपनी योनि में नारियल के तेल के साथ कपूर डालकर लगाये। जिससे आपको योनि में खुजली की समस्या नहीं होगी।
- योनि में संक्रमण से बचने के लिए आप लहसुन का प्रयोग भी कर सकती है। यह योनि संक्रमण से बचने के लिए एक अच्छा घरेलू उपाय है।
- आप दही भी पी सकती है, इसमें लेक्टोबेसिलस नामक जीवाणु होता है जो योनि में हो रहे संक्रमण को रोकता है और अच्छे बैक्टेरियां की संख्या को बढाता है इसे आप अपनी योनि में भी कुछ मात्रा में लगा सकतीं है।
- योनि यीस्ट संक्रमण के प्राकर्तिक उपचार में आप बोरिक एसिड का प्रयोग भी योनि में कर सकते है इसे आपको अपनी योनि में लगाना होता है। जिससे योनि में फंगस इन्फेक्शन नहीं होता है।
- साफ़ व स्वच्छ कपड़ो का ही उपयोग करे।
- पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियां खाए और खूब पानी पिए।
- योनि को साफ़ पानी से नियमित धोये, तथा धोने से लिक्विड चीजों का ही प्रयोग करे।
(और पढ़े - संतुलित आहार के लिए जरूरी तत्व , जिसे अपनाकर आप रोंगों से बच पाएंगे...)
- आप अधिक मात्रा में दही का प्रयोग करे। जिससे आपके शरीर में अच्छे बैक्टेरियां की मात्रा कम न हो।
- गीले कपड़ो को पहनने से बचे तथा कॉटन की पेंटी या सूती लेगिग्न्स का ही प्रयोग करे।
- आप सुगन्धित सेनेटरी पैड का उपयोग करने से बचे। इससे आपकी योनि में नमी बढ़ेगी जिससे बैक्टेरियां पनपने लगेंगे।
- नियमित गर्म पानी से अपनी पेंटी को धोये।
- योनि में क्रीम, लगाने से पहले आप अपने हाथो को अच्छे से साफ़ करे।
(और पढ़े - योनी में गीलापन होने के कारण और उपाय...)
- टाइट पैंट, पेंटीहोज, पेंटी या लेगिंग न पहने।
- सुगंधित टैम्पोन या पैड का उपयोग न करें।
- गर्म टब में न बैठे या लगातार गर्म स्नान न करें।
- अंदर तक योनि की सफाई या डोउच (douching) न करें।
(और पढ़े - टैम्पोन का उपयोग कैसे करें फायदे और नुकसान...)
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Yoni me fungal sankraman योनि यीस्ट संक्रमण या वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन एक ऐसा संक्रमण है जिसे कैंडिडिआसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सामान्य स्थिति होती है जिसमे योनि में खुजली जलन और सफ़ेद तरल पदार्थ का स्त्राव होता है। योनि यीस्ट इन्फेक्शन महिलाओ में होने वाली एक आम समस्या है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से योनि यीस्ट इन्फेक्शन क्या है? वजाइना में फंगल संक्रमण कैसे होता है इसके लक्षण, कारण, जांच, उपचार,और घरेलू उपाय के बारे में बतायेंगे। योनि यीस्ट इन्फेक्शन या संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है जो योनि में होता है यह एक फंगल संक्रमण है जिससे महिला के जननागों में खुजली, जलन और योनि स्त्राव होता है । महिला की स्वस्थ योनि में कुछ बैक्टेरिया या कुछ फंगल कोशिकाये होती है लेकिन जब बैक्टेरिया और फंगल कोशिकाओ का संतुलन बिगड़ता है तो बैक्टेरिया की तुलना में फंगस कोशिकाएँ कई गुना तक बढ़ जाती है खमीर कोशिकाओ के बढ़ने के कारण योनि में तेज खुजली के साथ लालपन, सूजन और जलन होने लगती है। अगर समय रहते वजाइना में फंगल संक्रमण का इलाज हो जाये तो योनि में हो रहे लक्षण जैसे-जलन और खुजली की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाएगी। योनि के संक्रमण को ठीक होने में कम से कम दो हफ्तों तक का समय लग सकता है। योनि खमीर संक्रमण को योन संचारित संक्रमण नहीं माना जाता है। परन्तु यह शारीरिक संबंध बनाने से फ़ैल सकता है लेकिन जो महिलाये शारीरिक संबंध बनाने में सक्रिय नहीं होती है उन महिलाओ में भी योनि को साफ न रखने से योनि यीस्ट संक्रमण हो सकता है जिन महिलाओ में एक बार योनि यीस्ट संक्रमण हो जाये तो उनमे योनि यीस्ट संक्रमण दोबारा होने की सम्भावना ज्यादा बढ़ जाती है। - वजाइना में इन्फेक्शन होने के कारण खुजली चलना। - योनि में खुजली के दौरान योनि के आसपास सूजन आना। - पेशाब या सेक्स करते समय योनि में जलन होना। - वजाइना में सेक्स के दौरान तेज दर्द होना। - योनि में लालपन या लाल चकते आ जाना। योनि से कभी-कभी सफ़ेद पानी का निकलना भी योनि में फंगस संक्रमण का एक प्रमुख लक्षण होता है। अगर आप सही समय पर वजाइना में फंगल संक्रमण का उपचार नहीं करवाती है तो योनि यीस्ट संक्रमण के लक्षण बहुत ज्यादा गंभीर हो सकते है। - महिलाओ के मासिक धर्म चक्र में कई महिलाये चार से पाँच घंटाटे तक एक ही सेनेटरी पैड का उपयोग करती है इस सेनेटरी पैड को हर चार घंटाटे में नहीं बदलती है कई महिलाये सेनेटरी पैड की जगह संक्रमित कपड़ो का उपयोग करती है जिससे योनि में यीस्ट इन्फेक्शन बहुत तेजी से फैलता है। - महिलाओं का नहाते समय हल्के गर्म पानी का उपयोग करना। और पानी से अपनी योनि की अच्छे से सफाई न करना भी वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन का कारण बनता है। - वेजाइना में रफ साबुन का प्रयोग करने से भी योनि में संक्रमण बढ़ जाता है योनि को साफ़ व स्वच्छ न रखना। - ढीले कपड़े या काटन की पेंटी नहीं पहनने से पसीने के द्वारा बैक्टेरिया पनपने से योनि में नमी के कारण संक्रमण बढ़ जाता है। - अधिक तनाव में रहने से और पर्याप्त नींद न लेने से भी हमारे शरीर में हॉर्मोन का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है जिससे वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। - योनि में यीस्ट संक्रमण कवक कैंडिडा नामक सूक्ष्मजीव के कारण फैलता है जो शरीर में हॉर्मोन के संतुलन को पूरी तरह से बिगाड़ देता है जो योनि में फंगस संक्रमण की अधिकता का कारण बनता है। - कुछ एंटीबायोटिक्स होती है जो योनि में लेक्टोबेसिलस यानि अच्छे बैक्टेरिया की मात्रा को कम कर देता है जो सामान्यतः दही में पाया जाता है जिससे दही में खट्टापन आ जाता है। - गर्भावस्था भी योनि यीस्ट संक्रमण का एक प्रमुख कारण है गर्भावस्था में महिलाओ को योनि की ज्यादा देखभाल करने की जरुरत होती है। - जिन महिलाओ के शरीर में शुगर यानि डाइबिटिज बहुत ज्यादा है उनका हार्मोनल संतुलन, और प्रतिरोधकता प्रणाली को फंगस संक्रमण ज्यादा प्रभावित करते है जिससे जिससे वैजिनल यीस्ट इन्फेक्शन फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है। - कैंडिडा एल्बिकस नामक जीव होता है जो योनि में संक्रमण को बढाने में मदद करता है । - पर्याप्त नींद न होना और अत्यधिक पानी न पीना, ख़राब भोजन जैसे-कम पोषक तत्व वाला खाना खाने से भी योनि में संक्रमण बढ़ सकता है। के कारण, लक्षण, उपचार, बचाव और घरेलू उपाय...) - खमीर संक्रमण का निदान करना आसान है। आपका डॉक्टर आपके मेडिकल इतिहास के बारे में पूछेगा। इसमें शामिल है कि क्या आपको पहले खमीर संक्रमण हुआ था। वे यह भी पूछ सकते हैं कि क्या आपको कभी एस.टी.आई. रोग हुआ था। - कही ऐसा तो नहीं की आपकी योनि में संक्रमण पहले भी हो चुका हो या आप पहले भी इसका इलाज करवा चुकी है यदि ऐसा है तो आपको अपनी योनि संक्रमण की जाँच की रिपोर्ट भी डॉक्टर को दिखानी होगी। - अगला चरण एक श्रोणि परीक्षा है। आपका डॉक्टर आपकी योनि की दीवारों और गर्भाशय ग्रीवा की जांच करेगा। वे संक्रमण के बाहरी लक्षणों के लिए आसपास के क्षेत्र को भी देखेंगे। आपका डॉक्टर क्या देखता है, इसके आधार पर, अगला कदम आपकी योनि से कुछ कोशिकाओं को इकट्ठा करना हो सकता है। ये कोशिकाएं जांच के लिए एक लैब में जाती हैं। लैब परीक्षण का आमतौर पर उन महिलाओं के लिए आदेश दिया जाता है जिनके पास नियमित रूप से योनि में खमीर संक्रमण होता है या उन संक्रमणों के लिए जो जल्दी दूर नहीं होते हैं। जिससे यह पता लगाया जा सके की आपकी योनि में संक्रमण बार-बार होने का कारण क्या है तथा योनि में यह संक्रमण क्यों हो रहा है। महिलाओ में प्रत्येक यीस्ट संक्रमण बहुत अलग होता है योनि में यीस्ट संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टर अच्छे उपचार की सलाह देते है सामान्य तौर पर योनि में संक्रमण से इलाज आपकी योनि में फंगस इन्फेक्शन के लक्षणों के आधार पर किया जाता है। साधारण संक्रमण में डॉक्टर आपको कुछ दवाएँ खाने के लिए देता है जो सामान्य तौर पर एंटीफंगल होती है इसमें आपको योनि में लगाने के लिए कुछ मलहम क्रीम और टेबलेट दी जाती है एक दो दिन के लिए आपके आहार चार्ट को भी बदला जाता है। ये दवाएँ खाने के बाद आपको डॉक्टर से मिलकर यह बताना होता है की आपको दी हुई दवाएँ असर कर रही है या नहीं । - जटिल संक्रमण में महिलाओ को अधिक समय तक योनि में संक्रमण रहता है जैसे- योनि में जलन, खुजली, लालिमा या चकतों का होना। - यदि आपको योनि में बार-बार संक्रमण हो रहा है तो यह कैंडिडा एल्बिकैस के अलावा कैंडिडा जीव के कारण होता है। जो योनि में होने वाले संक्रमण को बढ़ाते है। - यदि आपको अत्यधिक मधुमेह तो नहीं जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ हॉर्मोन में बदलाव के कारण भी संक्रमण ज्यादा होता है। - कही आप एच.आई.वी पॉजिटिव तो नहीं है। - इसमें आपको कुछ एंटीफंगल दवाएँ और मलहम क्रीम,और टेबलेट दी जाती है जो आपको चौदह दिनों तक उपयोग करनी पड़ती है। - सेक्स बनाते समय यह पता कर लें की आपके पार्टनर को यीस्ट संक्रमण तो नहीं है और कंडोम का उपयोग करे। - नारियल का तेल जो योनि के संक्रमण में लाभदायक है इसे आप अपनी योनि में नारियल के तेल के साथ कपूर डालकर लगाये। जिससे आपको योनि में खुजली की समस्या नहीं होगी। - योनि में संक्रमण से बचने के लिए आप लहसुन का प्रयोग भी कर सकती है। यह योनि संक्रमण से बचने के लिए एक अच्छा घरेलू उपाय है। - आप दही भी पी सकती है, इसमें लेक्टोबेसिलस नामक जीवाणु होता है जो योनि में हो रहे संक्रमण को रोकता है और अच्छे बैक्टेरियां की संख्या को बढाता है इसे आप अपनी योनि में भी कुछ मात्रा में लगा सकतीं है। - योनि यीस्ट संक्रमण के प्राकर्तिक उपचार में आप बोरिक एसिड का प्रयोग भी योनि में कर सकते है इसे आपको अपनी योनि में लगाना होता है। जिससे योनि में फंगस इन्फेक्शन नहीं होता है। - साफ़ व स्वच्छ कपड़ो का ही उपयोग करे। - पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियां खाए और खूब पानी पिए। - योनि को साफ़ पानी से नियमित धोये, तथा धोने से लिक्विड चीजों का ही प्रयोग करे। - आप अधिक मात्रा में दही का प्रयोग करे। जिससे आपके शरीर में अच्छे बैक्टेरियां की मात्रा कम न हो। - गीले कपड़ो को पहनने से बचे तथा कॉटन की पेंटी या सूती लेगिग्न्स का ही प्रयोग करे। - आप सुगन्धित सेनेटरी पैड का उपयोग करने से बचे। इससे आपकी योनि में नमी बढ़ेगी जिससे बैक्टेरियां पनपने लगेंगे। - नियमित गर्म पानी से अपनी पेंटी को धोये। - योनि में क्रीम, लगाने से पहले आप अपने हाथो को अच्छे से साफ़ करे। - टाइट पैंट, पेंटीहोज, पेंटी या लेगिंग न पहने। - सुगंधित टैम्पोन या पैड का उपयोग न करें। - गर्म टब में न बैठे या लगातार गर्म स्नान न करें। - अंदर तक योनि की सफाई या डोउच न करें। इसी तरह की अन्य जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक करें। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।
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IPL 2023 GT vs MI Pitch Report Match 35 आईपीएल 2023 के 35वें मैच में गुजरात टाइटंस की भिडंत पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के साथ होगी। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा।
नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल 2023 के 35वें मैच में गुजरात टाइटंस की भिड़ंत मुंबई इंडियंस के साथ होगी। गुजरात ने अपने आखिरी मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स को धूल चटाई थी। वहीं, रोहित की पलटन को पंजाब किंग्स के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था। ऐसे में गुजरात अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहेगी, तो मुंबई भी इस सीजन की चौथी जीत की तलाश में उतरेगी।
गुजरात ने आईपीएल 2023 में अब तक खेले 6 मैचों में से चार में जीत का स्वाद चखा है, तो सिर्फ दो मैचों में टीम के हाथ हार लगी है। बल्लेबाजी में ऋद्धिमान साहा और शुभमन गिल टीम को दमदार शुरुआत देने में सफल रहे हैं। वहीं, कप्तान हार्दिक पांड्या का बल्ला भी लखनऊ के खिलाफ लास्ट मैच में भी खूब चला था। गेंदबाजी में मोहित शर्मा और मोहम्मद शमी बल्लेबाजों को बांधकर रखने में सफल रहे हैं। वहीं, राशिद खान ने अपनी फिरकी का जादू बखूबी बिखेरा है।
दूसरी ओर, जीत की हैट्रिक लगाने के बाद मुंबई इंडियंस को आखिर मैच में पंजाब किंग्स के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। रोहित के गेंदबाजों ने जमकर रन लुटाए थे और जोफ्रा आर्चर और अर्जुन तेंदुलकर बेहद महंगे साबित हुए थे। हालांकि, बल्लेबाजी में कप्तान रोहित शर्मा और कैमरून ग्रीन ने धमाल मचाया था, तो सूर्यकुमार यादव के बल्ले से इस सीजन का पहला अर्धशतक निकला था।
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में चेज करने वाली टीम का बोलबाला रहता है। आईपीएल 2023 में इस मैदान पर तीन मैच खेले गए हैं और तीनों ही में जीत रनों का पीछा करने वाली टीम के हाथ लगी है। केकेआर की टीम ने इसी ग्राउंड पर 205 रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था।
नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में बल्लेबाजों की फुल मौज रहती है। अहमदाबाद के इस ग्राउंड पर जमकर चौके-छक्कों की बरसात होती है। हालांकि, सही लाइन एंड लेंथ से गेंदबाजी करने वाले बॉलर्स इस मैदान पर विकेट निकलाने में भी सफल रहते हैं।
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IPL दो हज़ार तेईस GT vs MI Pitch Report Match पैंतीस आईपीएल दो हज़ार तेईस के पैंतीसवें मैच में गुजरात टाइटंस की भिडंत पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के साथ होगी। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल दो हज़ार तेईस के पैंतीसवें मैच में गुजरात टाइटंस की भिड़ंत मुंबई इंडियंस के साथ होगी। गुजरात ने अपने आखिरी मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स को धूल चटाई थी। वहीं, रोहित की पलटन को पंजाब किंग्स के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था। ऐसे में गुजरात अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहेगी, तो मुंबई भी इस सीजन की चौथी जीत की तलाश में उतरेगी। गुजरात ने आईपीएल दो हज़ार तेईस में अब तक खेले छः मैचों में से चार में जीत का स्वाद चखा है, तो सिर्फ दो मैचों में टीम के हाथ हार लगी है। बल्लेबाजी में ऋद्धिमान साहा और शुभमन गिल टीम को दमदार शुरुआत देने में सफल रहे हैं। वहीं, कप्तान हार्दिक पांड्या का बल्ला भी लखनऊ के खिलाफ लास्ट मैच में भी खूब चला था। गेंदबाजी में मोहित शर्मा और मोहम्मद शमी बल्लेबाजों को बांधकर रखने में सफल रहे हैं। वहीं, राशिद खान ने अपनी फिरकी का जादू बखूबी बिखेरा है। दूसरी ओर, जीत की हैट्रिक लगाने के बाद मुंबई इंडियंस को आखिर मैच में पंजाब किंग्स के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। रोहित के गेंदबाजों ने जमकर रन लुटाए थे और जोफ्रा आर्चर और अर्जुन तेंदुलकर बेहद महंगे साबित हुए थे। हालांकि, बल्लेबाजी में कप्तान रोहित शर्मा और कैमरून ग्रीन ने धमाल मचाया था, तो सूर्यकुमार यादव के बल्ले से इस सीजन का पहला अर्धशतक निकला था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में चेज करने वाली टीम का बोलबाला रहता है। आईपीएल दो हज़ार तेईस में इस मैदान पर तीन मैच खेले गए हैं और तीनों ही में जीत रनों का पीछा करने वाली टीम के हाथ लगी है। केकेआर की टीम ने इसी ग्राउंड पर दो सौ पाँच रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था। नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में बल्लेबाजों की फुल मौज रहती है। अहमदाबाद के इस ग्राउंड पर जमकर चौके-छक्कों की बरसात होती है। हालांकि, सही लाइन एंड लेंथ से गेंदबाजी करने वाले बॉलर्स इस मैदान पर विकेट निकलाने में भी सफल रहते हैं।
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इन स्मार्टफोन की बैटरी भी काफी दमदार और लॉन्ग लास्टिंग है। ये बढ़िया स्क्रीन क्वालिटी के साथ आते हैं। इनका लुक और डिजाइन भी काफी स्लिम है। इन्हें आप स्मार्टफोन ईएमआई कार्निवल सेल से नो कॉस्ट ईएमआई पर भी ले सकते हैं।
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यह मोबाइल लो बजट सिग्मेंट में काफी बढ़िया माना जाता है। इसमें 8GB का RAM और 128GB का स्टोरेज दिया जा रहा है। इसके रैम को 16GB तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसमें 50MP का एआई कैमरा भी दिया गया है, जिससे काफी बढ़िया फोटो भी क्लिक कर सकते हैं।
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प्रीमियम डिजाइन के साथ आ रहा यह कमाल का स्मार्टफोन है। इस स्मार्टफोन का फेदर गोल्ड कलर काफी बढ़िया है। इसमें 33W का फास्टेस्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया जा रहा है। इसकी बैटरी भी काफी दमदार परफॉर्मेंस देती है। यह काफी और स्लीक स्मार्टफोन है।
Itel P40 (6000mAh Battery with Fast Charging)
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यह स्मार्टफोन बहुत ही अच्छी क्वालिटी वाला है। इस स्मार्टफोन में 2GB RAM + 64GB ROM दिया गया है। इसके RAM को 4GB तक बढ़ाया जा सकता है। यह स्मार्टफोन हाई स्पीड प्रोसेसर वाला है। इसका डिजाइन भी काफी स्लिम और स्लीक है।
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यह टॉप रेटेड और बढ़िया फीचर वाला लेटेस्ट स्मार्टफोन है। यह स्ट्रिप पैटर्न और डिजाइन के साथ आ रहा है। इसमें हाई परफॉर्मेंस वाला मीडियाटेक हेलिओ G85 का प्रोसेसर दिया गया है। यह 6. 71 इंच की एचडी+ स्क्रीन के साथ आ रहा है।
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अगर आप बढ़िया फीचर वाला लेटेस्ट मोबाइल लेना चाहते हैं, तो यह आपके लिए काफी बढ़िया चॉइस हो सकता है। इस स्मार्टफोन में रैम प्लस का फीचर दिया गया है, जिससे इसके RAM को 8GB तक बढ़ा सकते हैं। इसमें ओक्टा कोर प्रोसेसर भी दिया गया है।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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इन स्मार्टफोन की बैटरी भी काफी दमदार और लॉन्ग लास्टिंग है। ये बढ़िया स्क्रीन क्वालिटी के साथ आते हैं। इनका लुक और डिजाइन भी काफी स्लिम है। इन्हें आप स्मार्टफोन ईएमआई कार्निवल सेल से नो कॉस्ट ईएमआई पर भी ले सकते हैं। यह मोबाइल लो बजट सिग्मेंट में काफी बढ़िया माना जाता है। इसमें आठGB का RAM और एक सौ अट्ठाईसGB का स्टोरेज दिया जा रहा है। इसके रैम को सोलहGB तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसमें पचासMP का एआई कैमरा भी दिया गया है, जिससे काफी बढ़िया फोटो भी क्लिक कर सकते हैं। realme narzo Nतिरेपन प्रीमियम डिजाइन के साथ आ रहा यह कमाल का स्मार्टफोन है। इस स्मार्टफोन का फेदर गोल्ड कलर काफी बढ़िया है। इसमें तैंतीस वाट का फास्टेस्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया जा रहा है। इसकी बैटरी भी काफी दमदार परफॉर्मेंस देती है। यह काफी और स्लीक स्मार्टफोन है। Itel Pचालीस यह स्मार्टफोन बहुत ही अच्छी क्वालिटी वाला है। इस स्मार्टफोन में दोGB RAM + चौंसठGB ROM दिया गया है। इसके RAM को चारGB तक बढ़ाया जा सकता है। यह स्मार्टफोन हाई स्पीड प्रोसेसर वाला है। इसका डिजाइन भी काफी स्लिम और स्लीक है। Redmi बारह डिग्री सेल्सियस यह टॉप रेटेड और बढ़िया फीचर वाला लेटेस्ट स्मार्टफोन है। यह स्ट्रिप पैटर्न और डिजाइन के साथ आ रहा है। इसमें हाई परफॉर्मेंस वाला मीडियाटेक हेलिओ Gपचासी का प्रोसेसर दिया गया है। यह छः. इकहत्तर इंच की एचडी+ स्क्रीन के साथ आ रहा है। अगर आप बढ़िया फीचर वाला लेटेस्ट मोबाइल लेना चाहते हैं, तो यह आपके लिए काफी बढ़िया चॉइस हो सकता है। इस स्मार्टफोन में रैम प्लस का फीचर दिया गया है, जिससे इसके RAM को आठGB तक बढ़ा सकते हैं। इसमें ओक्टा कोर प्रोसेसर भी दिया गया है। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ में भू-धंसाव से बुरी तरह प्रभावित दो होटलों को मंगलवार को गिराने की तैयारी कर ली है लेकिन संपत्ति मालिकों और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, वहीं खतरा संभावित क्षेत्र से और लोगों को निकाला गया है तथा प्रभावित मकानों की संख्या बढ़कर 700 से अधिक हो गयी है. राज्य सरकार ने सोमवार को 'माउंट व्यू' और 'मालारी इन' होटलों को गिराने का फैसला किया जिनमें हाल में बड़ी दरार आ गयीं और दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गये हैं. इससे आसपास की इमारतों को खतरा पैदा हो गया है. इलाके में अवरोधक लगा दिये गये हैं और मंगलवार को इन होटल तथा आसपास के मकानों में बिजली आपूर्ति रोक दी गयी है.
राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) के कर्मी जेसीबी के साथ मौके पर पहुंच गये हैं और लोगों को इन होटल से दूरी बनाने को कहा गया है. हालांकि, जब प्रशासन शाम को 'मलारी इन' को गिराने वाला था तो इसके मालिक ठाकुर सिंह विरोध स्वरूप होटल के सामने सड़क पर लेट गये. होटल मालिकों ने कहा कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से इस बारे में पता चला. उन्होंने मांग की कि होटल गिराने से पहले उन्हें एकमुश्त निपटान के लिए प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलना चाहिए. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल रहे. उन्होंने दावा किया कि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि जिन लोगों की संपत्तियां गिराई जाएंगी, उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा.
ठाकुर सिंह ने बाद में दावा किया कि उन्हें 2. 92 करोड़ रुपये (नुकसान) का अनुमान भेजा गया और एसडीएम ने उस पर हस्ताक्षर करने को कहा. उन्होंने कहा, "मैं इस पर दस्तखत कैसे कर सकता हूं. मैंने 2011 तक होटल को बनाने पर 6-7 करोड़ रुपये खर्च कर दिये थे. जहां तक लोगों की सुरक्षा की बात है, मैं राज्य सरकार के साथ हूं लेकिन मुआवजे के तौर पर मुझे जो राशि की पेशकश की जा रही है, उससे सहमत नहीं हूं.
मालारी इन के मालिक ठाकुर सिंह ने कहा, "मुझे आज सुबह अखबार से इस बारे में पता चला. कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया. अगर सरकार ने मेरे होटल को असुरक्षित समझा है तो उसे इसे गिराने का फैसला करने से पहले एकमुश्त निपटान योजना लानी चाहिए. भोटिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "मैंने अपने खून पसीने से यह होटल बनाया है. अगर इसे इस तरह गिरा दिया जाएगा तो मेरा क्या होगा.
आपदा प्रबंधन के सचिव रंजीत सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की को होटलों को गिराने के काम में लगाया गया है. लोगों को घरों से निकालने के प्रयास जारी रहने के बीच अब तक कुल 131 परिवार अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंच गये हैं, वहीं जोशीमठ में दरार पड़ने और जमीन धंसने से प्रभावित घरों की संख्या 723 हो गयी है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की चमोली इकाई ने मंगलवार को एक बुलेटिन में यह जानकारी दी.
क्षेत्र में 86 घरों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है. जिला प्रशासन ने ऐसे घरों के बाहर लाल निशान लगा दिये हैं. राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने मंगलवार को जोशीमठ की स्थिति की समीक्षा की जहां इमारतों और अन्य ढांचों में दरारें आ गई हैं तथा इस बात पर जोर दिया कि तत्काल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र से पूरी तरह से एवं सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.
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उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ में भू-धंसाव से बुरी तरह प्रभावित दो होटलों को मंगलवार को गिराने की तैयारी कर ली है लेकिन संपत्ति मालिकों और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, वहीं खतरा संभावित क्षेत्र से और लोगों को निकाला गया है तथा प्रभावित मकानों की संख्या बढ़कर सात सौ से अधिक हो गयी है. राज्य सरकार ने सोमवार को 'माउंट व्यू' और 'मालारी इन' होटलों को गिराने का फैसला किया जिनमें हाल में बड़ी दरार आ गयीं और दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गये हैं. इससे आसपास की इमारतों को खतरा पैदा हो गया है. इलाके में अवरोधक लगा दिये गये हैं और मंगलवार को इन होटल तथा आसपास के मकानों में बिजली आपूर्ति रोक दी गयी है. राज्य आपदा राहत बल के कर्मी जेसीबी के साथ मौके पर पहुंच गये हैं और लोगों को इन होटल से दूरी बनाने को कहा गया है. हालांकि, जब प्रशासन शाम को 'मलारी इन' को गिराने वाला था तो इसके मालिक ठाकुर सिंह विरोध स्वरूप होटल के सामने सड़क पर लेट गये. होटल मालिकों ने कहा कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से इस बारे में पता चला. उन्होंने मांग की कि होटल गिराने से पहले उन्हें एकमुश्त निपटान के लिए प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलना चाहिए. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल रहे. उन्होंने दावा किया कि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि जिन लोगों की संपत्तियां गिराई जाएंगी, उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा. ठाकुर सिंह ने बाद में दावा किया कि उन्हें दो. बानवे करोड़ रुपये का अनुमान भेजा गया और एसडीएम ने उस पर हस्ताक्षर करने को कहा. उन्होंने कहा, "मैं इस पर दस्तखत कैसे कर सकता हूं. मैंने दो हज़ार ग्यारह तक होटल को बनाने पर छः-सात करोड़ रुपये खर्च कर दिये थे. जहां तक लोगों की सुरक्षा की बात है, मैं राज्य सरकार के साथ हूं लेकिन मुआवजे के तौर पर मुझे जो राशि की पेशकश की जा रही है, उससे सहमत नहीं हूं. मालारी इन के मालिक ठाकुर सिंह ने कहा, "मुझे आज सुबह अखबार से इस बारे में पता चला. कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया. अगर सरकार ने मेरे होटल को असुरक्षित समझा है तो उसे इसे गिराने का फैसला करने से पहले एकमुश्त निपटान योजना लानी चाहिए. भोटिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "मैंने अपने खून पसीने से यह होटल बनाया है. अगर इसे इस तरह गिरा दिया जाएगा तो मेरा क्या होगा. आपदा प्रबंधन के सचिव रंजीत सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की को होटलों को गिराने के काम में लगाया गया है. लोगों को घरों से निकालने के प्रयास जारी रहने के बीच अब तक कुल एक सौ इकतीस परिवार अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंच गये हैं, वहीं जोशीमठ में दरार पड़ने और जमीन धंसने से प्रभावित घरों की संख्या सात सौ तेईस हो गयी है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की चमोली इकाई ने मंगलवार को एक बुलेटिन में यह जानकारी दी. क्षेत्र में छियासी घरों को असुरक्षित चिह्नित किया गया है. जिला प्रशासन ने ऐसे घरों के बाहर लाल निशान लगा दिये हैं. राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति ने मंगलवार को जोशीमठ की स्थिति की समीक्षा की जहां इमारतों और अन्य ढांचों में दरारें आ गई हैं तथा इस बात पर जोर दिया कि तत्काल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र से पूरी तरह से एवं सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.
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समृद्धि एक्सप्रेस-वे ( Image Source : Twitter )
Samriddhi Expressway Bus Accident: समृद्धि एक्सप्रेसवे पर शनिवार को एक भीषण बस दुर्घटना हुई, जिसमें 25 लोगों की जलकर मौत हो गई. इस एक्सप्रेसवे के बारे में एक अधिकारी ने बात करते हुए कहा कि इस साल 1 अप्रैल से 30 जून के बीच टायर खराब होने के कारण लगभग 1,000 वाहनों को समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश करने से रोका जा चुका है. संबंधित एक्सप्रेसवे, नागपुर को नासिक से जोड़ता है, और इसकी लंबाई 601 किलोमीटर है. महाराष्ट्र के सड़क सुरक्षा सेल के साझा किए गए कार्यवाही के आंकड़ों के अनुसार, आठ आरटीओ कार्यालयों की टीमों ने 21,053 वाहन चालकों की काउंसलिंग की और इस साल 1 अप्रैल से समृद्धि एक्सप्रेसवे पर घिसे हुए टायरों के कारण 973 वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया. ये 8 टीमें अमरावती, औरंगाबाद, वाशिम, बुलढाणा, जालना, श्रीरामपुर और नासिक आरटीओ से संबंधित थीं.
एक अधिकारी ने बताया कि, यहां कुल 234 मोटर चालकों को तेज स्पीड से वाहन चलाते हुए पकड़ा गया, जिनमें से 77 को सड़क पर लगाए गए कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के जरिए पकड़ा गया. इस एक्सप्रेसवे की डिज़ाइन स्पीड 150 किमी प्रति घंटे और स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटे है. सड़क सुरक्षा डिप्टी कमिश्नर भरत कालस्कर ने कहा कि आरटीओ इंटरसेप्टर वाहनों के साथ-साथ कंप्यूटराइज्ड सिस्टम का उपयोग करके कार्यवाही की गई. इसके इंट्री पॉइंट्स पर घिसे-पिटे टायरों की जांच की गई और एक्जिट पॉइंट्स पर नियमों के उल्लंघन के लिए कार्यवाही की गई.
वाहनों के स्पीड का पता एक कंप्यूटर सिस्टम से लगाया जाता है और इसके कारण ये वाहन ऑटोमेटिकली पकड़ में आ जाते हैं और टोल प्लाजा पर रुक जाते हैं. कालस्कर ने बताया कि इंटरसेप्टर वाहनों के जरिए कुछ वाहनों का पता लगाया गया और फिर इंस्पेक्टर ने उन्हें टोल प्लाजा पर रोक दिया. वाहनों की तेज स्पीड, मार्ग पर होने वाली अधिकतर दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन डेटा से पता चलता है कि आरटीओ टीमों ने नो पार्किंग और लेन कटिंग जैसे अन्य उल्लंघनों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 3169 मोटर चालकों को 'नो पार्किंग' उल्लंघन के लिए कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जबकि 2204 पर 'लेन कटिंग' के लिए और 1043 पर रिफ्लेक्टिव टेप नहीं लगाने के लिए कार्यवाही हुई. रिफ्लेक्टिव टेप के कारण वाहन रात में अन्य मोटर चालकों को आसानी से दिखाई देते हैं.
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समृद्धि एक्सप्रेस-वे Samriddhi Expressway Bus Accident: समृद्धि एक्सप्रेसवे पर शनिवार को एक भीषण बस दुर्घटना हुई, जिसमें पच्चीस लोगों की जलकर मौत हो गई. इस एक्सप्रेसवे के बारे में एक अधिकारी ने बात करते हुए कहा कि इस साल एक अप्रैल से तीस जून के बीच टायर खराब होने के कारण लगभग एक,शून्य वाहनों को समृद्धि एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश करने से रोका जा चुका है. संबंधित एक्सप्रेसवे, नागपुर को नासिक से जोड़ता है, और इसकी लंबाई छः सौ एक किलोग्राममीटर है. महाराष्ट्र के सड़क सुरक्षा सेल के साझा किए गए कार्यवाही के आंकड़ों के अनुसार, आठ आरटीओ कार्यालयों की टीमों ने इक्कीस,तिरेपन वाहन चालकों की काउंसलिंग की और इस साल एक अप्रैल से समृद्धि एक्सप्रेसवे पर घिसे हुए टायरों के कारण नौ सौ तिहत्तर वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दिया. ये आठ टीमें अमरावती, औरंगाबाद, वाशिम, बुलढाणा, जालना, श्रीरामपुर और नासिक आरटीओ से संबंधित थीं. एक अधिकारी ने बताया कि, यहां कुल दो सौ चौंतीस मोटर चालकों को तेज स्पीड से वाहन चलाते हुए पकड़ा गया, जिनमें से सतहत्तर को सड़क पर लगाए गए कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के जरिए पकड़ा गया. इस एक्सप्रेसवे की डिज़ाइन स्पीड एक सौ पचास किमी प्रति घंटे और स्पीड लिमिट एक सौ बीस किमी प्रति घंटे है. सड़क सुरक्षा डिप्टी कमिश्नर भरत कालस्कर ने कहा कि आरटीओ इंटरसेप्टर वाहनों के साथ-साथ कंप्यूटराइज्ड सिस्टम का उपयोग करके कार्यवाही की गई. इसके इंट्री पॉइंट्स पर घिसे-पिटे टायरों की जांच की गई और एक्जिट पॉइंट्स पर नियमों के उल्लंघन के लिए कार्यवाही की गई. वाहनों के स्पीड का पता एक कंप्यूटर सिस्टम से लगाया जाता है और इसके कारण ये वाहन ऑटोमेटिकली पकड़ में आ जाते हैं और टोल प्लाजा पर रुक जाते हैं. कालस्कर ने बताया कि इंटरसेप्टर वाहनों के जरिए कुछ वाहनों का पता लगाया गया और फिर इंस्पेक्टर ने उन्हें टोल प्लाजा पर रोक दिया. वाहनों की तेज स्पीड, मार्ग पर होने वाली अधिकतर दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन डेटा से पता चलता है कि आरटीओ टीमों ने नो पार्किंग और लेन कटिंग जैसे अन्य उल्लंघनों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल तीन हज़ार एक सौ उनहत्तर मोटर चालकों को 'नो पार्किंग' उल्लंघन के लिए कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जबकि दो हज़ार दो सौ चार पर 'लेन कटिंग' के लिए और एक हज़ार तैंतालीस पर रिफ्लेक्टिव टेप नहीं लगाने के लिए कार्यवाही हुई. रिफ्लेक्टिव टेप के कारण वाहन रात में अन्य मोटर चालकों को आसानी से दिखाई देते हैं. Car loan Information:
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मथुरा पुलिस ने मंगलवार तड़के एक मुठभेड़ के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर डकैती की दो हालिया घटनाओं में कथित रूप से शामिल सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
आगरा : 13 दिनों की लगातार खोज के दौरान, सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी पेड़ों पर बैठे थे।मथुरा पुलिस ने मंगलवार तड़के एक मुठभेड़ के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर डकैती की दो हालिया घटनाओं में कथित रूप से शामिल सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों को यमुना पार पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के तहत माइलस्टोन 101 के पास एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) कर्मियों सहित पुलिस की एक टीम ने देखा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए, उन्होंने पुलिस घेरा तोड़ने के लिए गोलियां चलाईं। पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई की और सात आरोपियों में से तीन को गोली लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र 18-28 साल के बीच है। इनमें से पांच मथुरा और अन्य दो आगरा जिले के रहने वाले हैं।
पुलिस ने उनके पास से 15 हजार रुपये नकद, दो सोने की अंगूठी और लैपटॉप बरामद किया है. उनके कब्जे से चार देशी 315 बोर के हथियार, दो खंजर और जिंदा कारतूस मिले हैं। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने कहा,'कम से कम चार आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है।
गिरोह के सरगना राहुल के रूप में पहचाने गए, उसके खिलाफ चार मामले लंबित हैं। अपने तौर-तरीकों के बारे में, गिरफ्तार किए गए लोगों ने कहा कि वे कारों की विंडस्क्रीन पर पत्थर फेंकते थे। यदि चालक मौके पर नहीं रुकता है, तो गिरोह के कुछ सदस्य वाहन पर हमला करने के लिए लगभग 100-200 मीटर आगे खड़े हो जाते हैं। पता लगाने से बचने के लिए वे पीड़ितों के मोबाइल फोन कभी नहीं लूटेंगे। 29 मई को, दिल्ली में लोक निर्माण विभाग के एक इंजीनियर, उसकी पत्नी और ड्राइवर के साथ, अज्ञात लोगों द्वारा नकदी और आभूषण लूट लिए गए।
इसी तरह 2 जून को फिरोजाबाद से दिल्ली जा रहे एक किराना कारोबारी को उसके तीन परिजनों के साथ लूट लिया गया था. दोनों घटनाएं देर शाम मथुरा जिले से गुजरने वाले एक्सप्रेस-वे के उस हिस्से में हुईं। बदमाशों ने वाहनों को रोकने के लिए पहले पथराव किया और फिर लूट की घटना को अंजाम दिया। आईजी (आगरा रेंज) दीपक कुमार ने कहा,हम एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों को जारी रखेंगे।
एक्सप्रेसवे पर 1,248 हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
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मथुरा पुलिस ने मंगलवार तड़के एक मुठभेड़ के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर डकैती की दो हालिया घटनाओं में कथित रूप से शामिल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आगरा : तेरह दिनों की लगातार खोज के दौरान, सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी पेड़ों पर बैठे थे।मथुरा पुलिस ने मंगलवार तड़के एक मुठभेड़ के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर डकैती की दो हालिया घटनाओं में कथित रूप से शामिल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को यमुना पार पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के तहत माइलस्टोन एक सौ एक के पास एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप कर्मियों सहित पुलिस की एक टीम ने देखा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए, उन्होंने पुलिस घेरा तोड़ने के लिए गोलियां चलाईं। पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई की और सात आरोपियों में से तीन को गोली लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र अट्ठारह-अट्ठाईस साल के बीच है। इनमें से पांच मथुरा और अन्य दो आगरा जिले के रहने वाले हैं। पुलिस ने उनके पास से पंद्रह हजार रुपये नकद, दो सोने की अंगूठी और लैपटॉप बरामद किया है. उनके कब्जे से चार देशी तीन सौ पंद्रह बोर के हथियार, दो खंजर और जिंदा कारतूस मिले हैं। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने कहा,'कम से कम चार आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। गिरोह के सरगना राहुल के रूप में पहचाने गए, उसके खिलाफ चार मामले लंबित हैं। अपने तौर-तरीकों के बारे में, गिरफ्तार किए गए लोगों ने कहा कि वे कारों की विंडस्क्रीन पर पत्थर फेंकते थे। यदि चालक मौके पर नहीं रुकता है, तो गिरोह के कुछ सदस्य वाहन पर हमला करने के लिए लगभग एक सौ-दो सौ मीटर आगे खड़े हो जाते हैं। पता लगाने से बचने के लिए वे पीड़ितों के मोबाइल फोन कभी नहीं लूटेंगे। उनतीस मई को, दिल्ली में लोक निर्माण विभाग के एक इंजीनियर, उसकी पत्नी और ड्राइवर के साथ, अज्ञात लोगों द्वारा नकदी और आभूषण लूट लिए गए। इसी तरह दो जून को फिरोजाबाद से दिल्ली जा रहे एक किराना कारोबारी को उसके तीन परिजनों के साथ लूट लिया गया था. दोनों घटनाएं देर शाम मथुरा जिले से गुजरने वाले एक्सप्रेस-वे के उस हिस्से में हुईं। बदमाशों ने वाहनों को रोकने के लिए पहले पथराव किया और फिर लूट की घटना को अंजाम दिया। आईजी दीपक कुमार ने कहा,हम एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों को जारी रखेंगे। एक्सप्रेसवे पर एक,दो सौ अड़तालीस हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
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नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)
प्रिलिम्स के लियेः
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, कारगिल रिव्यू कमेटी (1999) की रिपोर्ट, नरेश चंद्र कमेटी।
मेन्स के लियेः
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का महत्त्व।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्र सरकार ने पूर्वी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) को नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में नियुक्त किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS):
- पृष्ठभूमिः इसके निर्माण की सिफारिश वर्ष 2001 में मंत्रियों के एक समूह (GoM) द्वारा की गई थी जिसे कारगिल समीक्षा समिति (1999) की रिपोर्ट का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था।
- GoM की सिफारिशों के बाद CDS के पद की स्थापना हेतु सरकार ने वर्ष 2002 में एकीकृत रक्षा स्टाफ बनाया, जिसे अंततः CDS के सचिवालय के रूप में काम करना था।
- वर्ष 2012 में नरेश चंद्र समिति ने CDS पर आशंकाओं को खत्म करने के लिये चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
- अंत में CDS का पद वर्ष 2019 में लेफ्टिनेंट जनरल डी.बी. शेकातकर की अध्यक्षता में रक्षा विशेषज्ञों की समिति की सिफारिशों पर बनाया गया था।
- जनरल बिपिन रावत देश के पहले CDS थे और उन्हें 31 दिसंबर, 2019 को नियुक्त किया गया था।
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की भूमिका एवं ज़िम्मेदारीः
- CDS 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के स्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है जिसमें तीनों सेवाओं के प्रमुख भी सदस्य होंगे।
- उसका मुख्य कार्य भारतीय सेना की त्रि-सेवाओं के बीच अधिक-से-अधिक परिचालन तालमेल को बढ़ावा देना और अंतर-सेवा विरोधाभास को कम-से-कम करना है।
- वह रक्षा मंत्रालय में नवनिर्मित सैन्य मामलों के विभाग (DMA) का प्रमुख भी है।
- वह सेना के तीनों अंगों के मामले में रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेगा, लेकिन इसके साथ ही तीनों सेनाओं के अध्यक्ष रक्षा मंत्री को अपनी सेनाओं के संबंध में सलाह देना जारी रखेंगे।
- DMA के प्रमुख के तौर पर CDS को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में अंतर-सेवा खरीद निर्णयों को प्राथमिकता देने का अधिकार प्राप्त है।
- CDS को तीनों प्रमुखों को निर्देश देने का अधिकार भी दिया गया है।
- हालाँकि उसे सेना के किसी भी कमांड का अधिकार प्राप्त नहीं है।
- CDS का पद समकक्षों में प्रथम है, उसे DoD (रक्षा विभाग) के भीतर सचिव का पद प्राप्त है और उसकी शक्तियांँ केवल राजस्व बजट तक ही सीमित रहेंगी।
- वह परमाणु कमान प्राधिकरण (NCA) में सलाहकार की भूमिका भी निभाएगा।
- CDS 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के स्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है जिसमें तीनों सेवाओं के प्रमुख भी सदस्य होंगे।
- महत्त्वः
- सशस्त्र बलों और सरकार के बीच तालमेलः CDS की भूमिका केवल त्रि-सेवा सहयोग ही नहीं है, बल्कि रक्षा मंत्रालय, नौकरशाही और सशस्त्र सेवाओं के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना भी है।
- वर्ष 1947 से रक्षा विभाग (DoD) के "संलग्न कार्यालय" के रूप में नामित त्रि-सेवा मुख्यालय (SHQ) हैं। इसके कारण SHQ और DoD के बीच संचार मुख्य रूप से फाइलों के माध्यम से होता है।
- रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार (PMA) के रूप में CDS की नियुक्ति से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।
- संचालन में संलग्नताः चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (CDS की पूर्ववर्ती), निष्क्रिय रहेगी, क्योंकि इसकी अध्यक्षता तीन प्रमुखों में से एक द्वारा अंशकालिक रोटेशन के आधार पर की जाती है।
- ऐतिहासिक रूप से COSC के अध्यक्ष के पास अधिकार के साथ-साथ तीनों सेवाओं की भूमिका से संबंधित विवादों को निपटाने की क्षमता का अभाव था।
- CDS को अब "COSC के स्थायी अध्यक्ष" के रूप में नामित किया गया है, वह त्रि-सेवा संगठनों के प्रशासन पर समान रूप से ध्यान देने में सक्षम होगा।
- थियेटर कमांड का संचालनः
- यद्यपि अंडमान और निकोबार कमान में संयुक्त संचालन के लिये एक सफल ढाँचा बनाया गया था, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और COSC की उदासीनता के कारण यह संयुक्त कमान निष्क्रिय बना हुआ है।
- थियेटर कमांड को थल सेना, नौसेना और वायु सेना को तैनात करने के लिये जानकारी एवं अनुभवी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इन्हें CDS द्वारा सर्वोत्तम रूप से लागू किया जाएगा।
- CDS परमाणु कमांड शृंखला में एक प्रमुख अधिकारी के रूप में सामरिक बल कमांड को भी प्रशासित करेगा।
- यह उपाय भारत के परमाणु निवारक विश्वसनीयता को बढ़ाने के क्रम में एक लंबा मार्ग तय करेगा।
- CDS भारत की परमाणु नीति की समीक्षा भी करेगा।
- घटते रक्षा बजट के कारण आने वाले समय में CDS का एक महत्त्वपूर्ण कार्य व्यक्तिगत सेवाओं के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को "प्राथमिकता" देना होगा।
- सशस्त्र बलों और सरकार के बीच तालमेलः CDS की भूमिका केवल त्रि-सेवा सहयोग ही नहीं है, बल्कि रक्षा मंत्रालय, नौकरशाही और सशस्त्र सेवाओं के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना भी है।
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नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ प्रिलिम्स के लियेः चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, कारगिल रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट, नरेश चंद्र कमेटी। मेन्स के लियेः चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का महत्त्व। चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्र सरकार ने पूर्वी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में नियुक्त किया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ : - पृष्ठभूमिः इसके निर्माण की सिफारिश वर्ष दो हज़ार एक में मंत्रियों के एक समूह द्वारा की गई थी जिसे कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था। - GoM की सिफारिशों के बाद CDS के पद की स्थापना हेतु सरकार ने वर्ष दो हज़ार दो में एकीकृत रक्षा स्टाफ बनाया, जिसे अंततः CDS के सचिवालय के रूप में काम करना था। - वर्ष दो हज़ार बारह में नरेश चंद्र समिति ने CDS पर आशंकाओं को खत्म करने के लिये चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की सिफारिश की थी। - अंत में CDS का पद वर्ष दो हज़ार उन्नीस में लेफ्टिनेंट जनरल डी.बी. शेकातकर की अध्यक्षता में रक्षा विशेषज्ञों की समिति की सिफारिशों पर बनाया गया था। - जनरल बिपिन रावत देश के पहले CDS थे और उन्हें इकतीस दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को नियुक्त किया गया था। - चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की भूमिका एवं ज़िम्मेदारीः - CDS 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के स्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है जिसमें तीनों सेवाओं के प्रमुख भी सदस्य होंगे। - उसका मुख्य कार्य भारतीय सेना की त्रि-सेवाओं के बीच अधिक-से-अधिक परिचालन तालमेल को बढ़ावा देना और अंतर-सेवा विरोधाभास को कम-से-कम करना है। - वह रक्षा मंत्रालय में नवनिर्मित सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख भी है। - वह सेना के तीनों अंगों के मामले में रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेगा, लेकिन इसके साथ ही तीनों सेनाओं के अध्यक्ष रक्षा मंत्री को अपनी सेनाओं के संबंध में सलाह देना जारी रखेंगे। - DMA के प्रमुख के तौर पर CDS को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में अंतर-सेवा खरीद निर्णयों को प्राथमिकता देने का अधिकार प्राप्त है। - CDS को तीनों प्रमुखों को निर्देश देने का अधिकार भी दिया गया है। - हालाँकि उसे सेना के किसी भी कमांड का अधिकार प्राप्त नहीं है। - CDS का पद समकक्षों में प्रथम है, उसे DoD के भीतर सचिव का पद प्राप्त है और उसकी शक्तियांँ केवल राजस्व बजट तक ही सीमित रहेंगी। - वह परमाणु कमान प्राधिकरण में सलाहकार की भूमिका भी निभाएगा। - CDS 'चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी' के स्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है जिसमें तीनों सेवाओं के प्रमुख भी सदस्य होंगे। - महत्त्वः - सशस्त्र बलों और सरकार के बीच तालमेलः CDS की भूमिका केवल त्रि-सेवा सहयोग ही नहीं है, बल्कि रक्षा मंत्रालय, नौकरशाही और सशस्त्र सेवाओं के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना भी है। - वर्ष एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से रक्षा विभाग के "संलग्न कार्यालय" के रूप में नामित त्रि-सेवा मुख्यालय हैं। इसके कारण SHQ और DoD के बीच संचार मुख्य रूप से फाइलों के माध्यम से होता है। - रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के रूप में CDS की नियुक्ति से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी। - संचालन में संलग्नताः चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी , निष्क्रिय रहेगी, क्योंकि इसकी अध्यक्षता तीन प्रमुखों में से एक द्वारा अंशकालिक रोटेशन के आधार पर की जाती है। - ऐतिहासिक रूप से COSC के अध्यक्ष के पास अधिकार के साथ-साथ तीनों सेवाओं की भूमिका से संबंधित विवादों को निपटाने की क्षमता का अभाव था। - CDS को अब "COSC के स्थायी अध्यक्ष" के रूप में नामित किया गया है, वह त्रि-सेवा संगठनों के प्रशासन पर समान रूप से ध्यान देने में सक्षम होगा। - थियेटर कमांड का संचालनः - यद्यपि अंडमान और निकोबार कमान में संयुक्त संचालन के लिये एक सफल ढाँचा बनाया गया था, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और COSC की उदासीनता के कारण यह संयुक्त कमान निष्क्रिय बना हुआ है। - थियेटर कमांड को थल सेना, नौसेना और वायु सेना को तैनात करने के लिये जानकारी एवं अनुभवी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इन्हें CDS द्वारा सर्वोत्तम रूप से लागू किया जाएगा। - CDS परमाणु कमांड शृंखला में एक प्रमुख अधिकारी के रूप में सामरिक बल कमांड को भी प्रशासित करेगा। - यह उपाय भारत के परमाणु निवारक विश्वसनीयता को बढ़ाने के क्रम में एक लंबा मार्ग तय करेगा। - CDS भारत की परमाणु नीति की समीक्षा भी करेगा। - घटते रक्षा बजट के कारण आने वाले समय में CDS का एक महत्त्वपूर्ण कार्य व्यक्तिगत सेवाओं के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को "प्राथमिकता" देना होगा। - सशस्त्र बलों और सरकार के बीच तालमेलः CDS की भूमिका केवल त्रि-सेवा सहयोग ही नहीं है, बल्कि रक्षा मंत्रालय, नौकरशाही और सशस्त्र सेवाओं के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना भी है।
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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में किसानों ने मेहनत से ग्रीष्मकालीन मूंग पैदा की है। मूंग के दाम बाजार में समर्थन मूल्य से काफी कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, यह किसानों की सरकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला लिया गया है कि हम अपने किसानों को न्याय देंगे और उनकी मूंग, न्यूनतम समर्थन मूल्य 7 हजार 275 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मूंग खरीद के लिए राज्य सरकार 18 जुलाई से रजिस्ट्रेशन प्रारंभ कर रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय से मीडिया के लिए जारी संदेश में यह बात कही।
वही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी के लिए बड़ी घोषणा करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कि बाजार में मूंग की दर काफी कम है जबकि मध्य प्रदेश के किसानों ने काफी मेहनत से मूंग का उत्पादन किया है। शिवराज सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की सरकार है और उनके लिए बड़े फैसले ले रही है। Registration 18 जुलाई से शुरू की जाएगी। जिसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग प्रति क्विंटल ₹7275 किया गया है। वहीं किसानों की मूंग खरीदी की तैयारी सभी जिलों में शुरू कर दी गई है।
इससे पहले बेस्ट क्वालिटी की मूंग सुधार कर नीचे में ₹5800 वहीं ऊपर ₹6100 प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है जबकि मसूर में ऊंचे दामों पर ग्राहकों की सपोर्ट के भाव में गिरावट देखी गई है। आंकड़ों की माने तो केंद्र सरकार ने इस साल 2 लाख 25000 खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया जबकि मध्यप्रदेश में उत्पादन 15 टन से अधिक हुआ है। वहीं राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार से उपार्जन समर्थन मूल्य पर करने की अनुमति मांगी गई है।
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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में किसानों ने मेहनत से ग्रीष्मकालीन मूंग पैदा की है। मूंग के दाम बाजार में समर्थन मूल्य से काफी कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, यह किसानों की सरकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला लिया गया है कि हम अपने किसानों को न्याय देंगे और उनकी मूंग, न्यूनतम समर्थन मूल्य सात हजार दो सौ पचहत्तर रूपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मूंग खरीद के लिए राज्य सरकार अट्ठारह जुलाई से रजिस्ट्रेशन प्रारंभ कर रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय से मीडिया के लिए जारी संदेश में यह बात कही। वही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी के लिए बड़ी घोषणा करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कि बाजार में मूंग की दर काफी कम है जबकि मध्य प्रदेश के किसानों ने काफी मेहनत से मूंग का उत्पादन किया है। शिवराज सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की सरकार है और उनके लिए बड़े फैसले ले रही है। Registration अट्ठारह जुलाई से शुरू की जाएगी। जिसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग प्रति क्विंटल सात हज़ार दो सौ पचहत्तर रुपया किया गया है। वहीं किसानों की मूंग खरीदी की तैयारी सभी जिलों में शुरू कर दी गई है। इससे पहले बेस्ट क्वालिटी की मूंग सुधार कर नीचे में पाँच हज़ार आठ सौ रुपया वहीं ऊपर छः हज़ार एक सौ रुपया प्रति क्विंटल पर पहुंच गई है जबकि मसूर में ऊंचे दामों पर ग्राहकों की सपोर्ट के भाव में गिरावट देखी गई है। आंकड़ों की माने तो केंद्र सरकार ने इस साल दो लाख पच्चीस हज़ार खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया जबकि मध्यप्रदेश में उत्पादन पंद्रह टन से अधिक हुआ है। वहीं राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार से उपार्जन समर्थन मूल्य पर करने की अनुमति मांगी गई है।
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इंदौर (मध्य प्रदेश). इंदौर शहर सफाई के मामले में पूरे देश में जाना जाता है। लगातार चार बार नंबर वन आते हुए कई अवॉर्ड जीत चुका है। लेकिन स्वच्छता के नाम पर नगर निगम का जो अमानवीय चेहरा सामने आया है, उसने मानवता को तार-तार कर दिया है। जहां निगम के कर्मचारियों ने बुजुर्ग भिक्षुकों के साथ जानवरों ते बदतर सलूक किया। निगमकर्मी इन लोगों को कचरा गाड़ी में मवेशियों की तरह ठूंसकर शहर से बाहर फेंकने ले गए।
दरअसल, यह शर्मनाक घटना शुक्रवार के दिन की बताई जा रही है, लेकिन अब इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसके बाद शिवराज सरकार हरकत में आई और सीएम के निर्देश पर नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस मामले में आरोपी पाए जाने वाले कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। किस तरह से नगर निगम के कर्मचरियों ने स्वच्छता के नाम पर बुजुर्गों, अपंगों को भेड़-बकरी की तरह भरा गया। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो ठीक से चल भी नहीं सकते ।
बताया जा रहा है कि शहर के बाहर इंदौर-देवास हाईवे पर नगर निगम की कचरे वाली गाड़ी कुछ बेसहारा और बेघर बुजुर्गों को लेकर पहुंचा था। जिसमें निगम जब्ती का माल, होर्डिंग और पोस्टर भरे जाते थे, उसमें इन बुर्जुग लोगों को ठूंस-ठूसकर भरा था। निगम ने इन लोगों को जानवरों की तरह ट्रक से उतारने लगे। मजबूर लोग बिलख रहे थे, हम ठंड में मर जाएंगे यहां नहीं छोड़ों, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी। यह देख स्थानीय लोगों को दया आई और उन्होंने कर्मचारियों से इन लोगों को शहर से बाहर यू हाईवे पर छोड़ने की वजह पूछी तो वह जवाब नहीं दे सके। इसके बाद स्थानीय निवासियों ने इस घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जिसके बाद निगमकर्मी बुजुर्गों को गाड़ी में भरकर वापस लाने लगी।
बता दें कि जिस तरह से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, ऐसे में बड़ी संख्या में बेसहारा बुजुर्ग सड़क किनारे रात काटने को मजबूर हैं। वह रात होते ही अपने सिर को ढ़कने के लिए किसी छत की तलाश में जुट जाते हैं। जब नाइट में बाजारा या दुकान बंद हो जाती हैं तो यह बेसहारा बुजुर्ग भिक्षुक लोग उनके नीचे अपना आशियाना बनाकर सो जाते हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए लिखा-आज इंदौर में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा वृद्धजनों के साथ अमानवीय व्यवहार के संबंध में मुझे जानकारी मिली। इस मामले में जिम्मेदार नगर निगम उपायुक्त सहित दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कलेक्टर इंदौर को बुजुर्गों की समुचित देखभाल करने का निर्देश दिया है। बुजुर्गों के प्रति अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मेरे लिये नर सेवा ही नारायण सेवा है। हर वृद्ध को आदर, प्रेम और सम्मान मिलना चाहिए; यही हमारी संस्कृति है और मानव धर्म भी।
जब मामला मीडिया में सामने आया तो नगर निगम की आयुक्त प्रतिभा पाल का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है, जांच होगी और जिसकी भी लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं कांग्रेस विधायक और मंत्री जीतू पटवारी ने बुजुर्गों को वाहन में ले जाने का वीडियो शेयर किया है। जहां उन्होंने लिखाॉ मां अहिल्या की नगरी को शर्मसार कर दिया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेष शर्मा का कहना है कि शिवराज सरकार में मानवता हुई शर्मसार, बुजुर्गों को, अपंगों को इंदौर से नगर निगम की गाड़ी में भेड़-बकरी की तरह भरा गया।
यह भिक्षुक रामू हैं, जिनको स्वच्छता के नाम पर नगर निगम के लोगों ने बाहर फेंक दिया था। उन्होंने बताया कि वह मालवा मिल का रहने वाला है, लेकिन 20 साल से शिवाजी वाटिका में ही अपना आशियाना बनाया हुआ है। जब निगम के लोग हम लोगों को कचरे वाली गाड़ी में ले जाने लगे तो मैंने कहा-कहां ले जा रहे हो छोड़ दो। हम यहीं पर भीख मांगकर अपना पेट पालते हैं, वहां कहा रहेंगे, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी।
यह बुजुर्ग महिला सूजीबाई हैं जो भीख मांगकर अपना पेट पालती हैं। वह भी शिवाजी वाटिका में रहती हैं। उन्होंने बताया कि करीब सुबह 9 से 10 बजे निगम के लोग आए और हमको जबरदस्ती कचरे वाली गाड़ी में भरने लगे। मैंने कहा भैया में मर जाऊंगू बूढ़ी हूं वहां कौन मेरे पेट भरेगा। यहां दो वक्त की रोटी नसीब हो जाती हैं, मत ले जाओ। पर वो नहीं माने, में चल नहीं सकती हूं, तो मुझे जबरन जानवरों की तरह गाड़ी में डाल दिया।
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इंदौर . इंदौर शहर सफाई के मामले में पूरे देश में जाना जाता है। लगातार चार बार नंबर वन आते हुए कई अवॉर्ड जीत चुका है। लेकिन स्वच्छता के नाम पर नगर निगम का जो अमानवीय चेहरा सामने आया है, उसने मानवता को तार-तार कर दिया है। जहां निगम के कर्मचारियों ने बुजुर्ग भिक्षुकों के साथ जानवरों ते बदतर सलूक किया। निगमकर्मी इन लोगों को कचरा गाड़ी में मवेशियों की तरह ठूंसकर शहर से बाहर फेंकने ले गए। दरअसल, यह शर्मनाक घटना शुक्रवार के दिन की बताई जा रही है, लेकिन अब इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसके बाद शिवराज सरकार हरकत में आई और सीएम के निर्देश पर नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस मामले में आरोपी पाए जाने वाले कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। किस तरह से नगर निगम के कर्मचरियों ने स्वच्छता के नाम पर बुजुर्गों, अपंगों को भेड़-बकरी की तरह भरा गया। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो ठीक से चल भी नहीं सकते । बताया जा रहा है कि शहर के बाहर इंदौर-देवास हाईवे पर नगर निगम की कचरे वाली गाड़ी कुछ बेसहारा और बेघर बुजुर्गों को लेकर पहुंचा था। जिसमें निगम जब्ती का माल, होर्डिंग और पोस्टर भरे जाते थे, उसमें इन बुर्जुग लोगों को ठूंस-ठूसकर भरा था। निगम ने इन लोगों को जानवरों की तरह ट्रक से उतारने लगे। मजबूर लोग बिलख रहे थे, हम ठंड में मर जाएंगे यहां नहीं छोड़ों, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी। यह देख स्थानीय लोगों को दया आई और उन्होंने कर्मचारियों से इन लोगों को शहर से बाहर यू हाईवे पर छोड़ने की वजह पूछी तो वह जवाब नहीं दे सके। इसके बाद स्थानीय निवासियों ने इस घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जिसके बाद निगमकर्मी बुजुर्गों को गाड़ी में भरकर वापस लाने लगी। बता दें कि जिस तरह से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, ऐसे में बड़ी संख्या में बेसहारा बुजुर्ग सड़क किनारे रात काटने को मजबूर हैं। वह रात होते ही अपने सिर को ढ़कने के लिए किसी छत की तलाश में जुट जाते हैं। जब नाइट में बाजारा या दुकान बंद हो जाती हैं तो यह बेसहारा बुजुर्ग भिक्षुक लोग उनके नीचे अपना आशियाना बनाकर सो जाते हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए लिखा-आज इंदौर में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा वृद्धजनों के साथ अमानवीय व्यवहार के संबंध में मुझे जानकारी मिली। इस मामले में जिम्मेदार नगर निगम उपायुक्त सहित दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कलेक्टर इंदौर को बुजुर्गों की समुचित देखभाल करने का निर्देश दिया है। बुजुर्गों के प्रति अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। मेरे लिये नर सेवा ही नारायण सेवा है। हर वृद्ध को आदर, प्रेम और सम्मान मिलना चाहिए; यही हमारी संस्कृति है और मानव धर्म भी। जब मामला मीडिया में सामने आया तो नगर निगम की आयुक्त प्रतिभा पाल का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है, जांच होगी और जिसकी भी लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं कांग्रेस विधायक और मंत्री जीतू पटवारी ने बुजुर्गों को वाहन में ले जाने का वीडियो शेयर किया है। जहां उन्होंने लिखाॉ मां अहिल्या की नगरी को शर्मसार कर दिया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेष शर्मा का कहना है कि शिवराज सरकार में मानवता हुई शर्मसार, बुजुर्गों को, अपंगों को इंदौर से नगर निगम की गाड़ी में भेड़-बकरी की तरह भरा गया। यह भिक्षुक रामू हैं, जिनको स्वच्छता के नाम पर नगर निगम के लोगों ने बाहर फेंक दिया था। उन्होंने बताया कि वह मालवा मिल का रहने वाला है, लेकिन बीस साल से शिवाजी वाटिका में ही अपना आशियाना बनाया हुआ है। जब निगम के लोग हम लोगों को कचरे वाली गाड़ी में ले जाने लगे तो मैंने कहा-कहां ले जा रहे हो छोड़ दो। हम यहीं पर भीख मांगकर अपना पेट पालते हैं, वहां कहा रहेंगे, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। यह बुजुर्ग महिला सूजीबाई हैं जो भीख मांगकर अपना पेट पालती हैं। वह भी शिवाजी वाटिका में रहती हैं। उन्होंने बताया कि करीब सुबह नौ से दस बजे निगम के लोग आए और हमको जबरदस्ती कचरे वाली गाड़ी में भरने लगे। मैंने कहा भैया में मर जाऊंगू बूढ़ी हूं वहां कौन मेरे पेट भरेगा। यहां दो वक्त की रोटी नसीब हो जाती हैं, मत ले जाओ। पर वो नहीं माने, में चल नहीं सकती हूं, तो मुझे जबरन जानवरों की तरह गाड़ी में डाल दिया।
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शिवपुरी।
माधव नेशनल पार्क में स्थित चांदपाठा झील को अभी रामसर में शामिल हुए छह माह भी नहीं गुजरे कि उसके डिनोटिफाइड होने का खतरा मंडराने लगा। क्योंकि झील के 75 फीसदी एरिया के पानी पर जलकुंभी ने कब्जा कर लिया, तथा वो तेजी से फैलती जा रही है। वहीं दूसरी ओर जाधव सागर तालाब में फैली जलकुंभी को हटवाने का काम सिंधिया छत्री ट्रस्ट ने शुरू कर दिया। अब माधव नेशनल पार्क प्रबंधन को भी इस दिशा में जल्द कोई कदम उठाना होगा।
गौरतलब है कि भोपाल में बड़ा तालाब के बाद शिवपुरी की चांदपाठा झील को रामसर साइट में शामिल करके उसे न केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, बल्कि यह मध्यप्रदेश में दो दशक बाद दूसरी रामसर साइट बनी। जुलाई में यह झील रामसर साइट में शामिल हुई,और उसके बाद से इसमें जलकुंभी ने तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया। पहले तो जलकुंभी एक सीमित दायरे में थी, लेकिन अब यह झील के 75 फीसदी एरिया में फैल चुकी है। जलकुंभी के फेर में मगरमच्छों ने झील के किनारों से बाहर निकलना बंद कर दिया,तथा वो अब किनारों पर दिखना बंद हो गए।
गंदे पानी पर रोक के बाद ही खत्म होगी जलकुंभीतेजी से फैल रही जलकुंभी पर चिंता व्यक्त करते हुए माधव नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम शर्मा का कहना है कि जब तक बाहर से आने वाले गंदे पानी पर रोक नहीं लगेगी, तब तक यह जलकुंभी खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई पहल नहीं की तो रामसर में शामिल हुई चांदपाठा झील डिनोटिफाइड हो जाएगी।
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शिवपुरी। माधव नेशनल पार्क में स्थित चांदपाठा झील को अभी रामसर में शामिल हुए छह माह भी नहीं गुजरे कि उसके डिनोटिफाइड होने का खतरा मंडराने लगा। क्योंकि झील के पचहत्तर फीसदी एरिया के पानी पर जलकुंभी ने कब्जा कर लिया, तथा वो तेजी से फैलती जा रही है। वहीं दूसरी ओर जाधव सागर तालाब में फैली जलकुंभी को हटवाने का काम सिंधिया छत्री ट्रस्ट ने शुरू कर दिया। अब माधव नेशनल पार्क प्रबंधन को भी इस दिशा में जल्द कोई कदम उठाना होगा। गौरतलब है कि भोपाल में बड़ा तालाब के बाद शिवपुरी की चांदपाठा झील को रामसर साइट में शामिल करके उसे न केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, बल्कि यह मध्यप्रदेश में दो दशक बाद दूसरी रामसर साइट बनी। जुलाई में यह झील रामसर साइट में शामिल हुई,और उसके बाद से इसमें जलकुंभी ने तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया। पहले तो जलकुंभी एक सीमित दायरे में थी, लेकिन अब यह झील के पचहत्तर फीसदी एरिया में फैल चुकी है। जलकुंभी के फेर में मगरमच्छों ने झील के किनारों से बाहर निकलना बंद कर दिया,तथा वो अब किनारों पर दिखना बंद हो गए। गंदे पानी पर रोक के बाद ही खत्म होगी जलकुंभीतेजी से फैल रही जलकुंभी पर चिंता व्यक्त करते हुए माधव नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम शर्मा का कहना है कि जब तक बाहर से आने वाले गंदे पानी पर रोक नहीं लगेगी, तब तक यह जलकुंभी खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई पहल नहीं की तो रामसर में शामिल हुई चांदपाठा झील डिनोटिफाइड हो जाएगी।
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DHANBAD : जिले में लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशियां देखने को मिल रही है. वही बारिश ने कई घरों में कहर भी बरपाया है. धनबाद जिला के बलियापुर प्रखंड क्षेत्र के बलियापुर पश्चिमी पंचायत की उप मुखिया आशा देवी की घर के मलबे में दब जाने से मौत हो गयी.
जिले में लगातार हो रही झमाझम बारिश से उप मुखिया आशा देवी के घर के चारों ओर पानी इकट्ठा हो गया था. इससे कमजोर दीवार टिक न सकी और भरभरा कर गिर गयी. दीवार ढहने से उप मुखिया आशा देवी दीवार के नीचे दब गयीं.
आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बलियापुर पहुंचाया. लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टर ने आशा देवी को मृत घोषित कर दिया. मौत की सूचना मिलते ही आसपास के लोग अस्पताल पहुंचने लगे. स्थानीय लोगों ने बताया कि आशा देवी को एक बेटा और 4 बेटियां थीं.
3 महीने पहले ही उप मुखिया आशा देवी ने एक बेटी को जन्म दिया था. बहरहाल उप मुखिया की मौत से पूरा परिवार सदमे में है. बताया जा रहा है की उप मुखिया का परिवार बिहार के भोजपुर जिले का शाहपुर का रहनेवाला है. कई वर्षो से बलियापुर में रह कर यह परिवार दूध का व्यापार कर रहा था.
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DHANBAD : जिले में लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशियां देखने को मिल रही है. वही बारिश ने कई घरों में कहर भी बरपाया है. धनबाद जिला के बलियापुर प्रखंड क्षेत्र के बलियापुर पश्चिमी पंचायत की उप मुखिया आशा देवी की घर के मलबे में दब जाने से मौत हो गयी. जिले में लगातार हो रही झमाझम बारिश से उप मुखिया आशा देवी के घर के चारों ओर पानी इकट्ठा हो गया था. इससे कमजोर दीवार टिक न सकी और भरभरा कर गिर गयी. दीवार ढहने से उप मुखिया आशा देवी दीवार के नीचे दब गयीं. आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बलियापुर पहुंचाया. लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टर ने आशा देवी को मृत घोषित कर दिया. मौत की सूचना मिलते ही आसपास के लोग अस्पताल पहुंचने लगे. स्थानीय लोगों ने बताया कि आशा देवी को एक बेटा और चार बेटियां थीं. तीन महीने पहले ही उप मुखिया आशा देवी ने एक बेटी को जन्म दिया था. बहरहाल उप मुखिया की मौत से पूरा परिवार सदमे में है. बताया जा रहा है की उप मुखिया का परिवार बिहार के भोजपुर जिले का शाहपुर का रहनेवाला है. कई वर्षो से बलियापुर में रह कर यह परिवार दूध का व्यापार कर रहा था.
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। . स्वामी हरिदास (1480 - 1575) भक्त कवि, शास्त्रीय संगीतकार तथा कृष्णोपासक सखी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। इन्हें ललिता सखी का अवतार माना जाता है। वे वैष्णव भक्त थे तथा उच्च कोटि के संगीतज्ञ भी थे। वे प्राचीन शास्त्रीय संगीत के उद्भट विद्वान एवम् चतुष् ध्रुपदशैली के रचयिता हैं। प्रसिद्ध गायक तानसेन इनके शिष्य थे। अकबर इनके दर्शन करने वृन्दावन गए थे। 'केलिमाल' में इनके सौ से अधिक पद संग्रहित हैं। इनकी वाणी सरस और भावुक है। स्वामी हरिदास का जन्म 1490 में हुआ था। इनके जन्म स्थान और गुरु के विषय में कई मत प्रचलित हैं। इनका जन्म समय कुछ ज्ञात नहीं है। ये महात्मा वृन्दावन में निंबार्क सखी संप्रदाय के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत-कला-कोविद माने जाते थे। कविताकाल सन् 1543 से 1560 ई. ठहरता है। प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन इनका गुरूवत् सम्मान करते थे। यह प्रसिद्ध है कि अकबर बादशाह साधु के वेश में तानसेन के साथ इनका गाना सुनने के लिए गया था। कहते हैं कि तानसेन इनके सामने गाने लगे और उन्होंने जानबूझकर गाने में कुछ भूल कर दी। इसपर स्वामी हरिदास ने उसी गाना को शुद्ध करके गाया। इस युक्ति से अकबर को इनका गाना सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। पीछे अकबर ने बहुत कुछ पूजा चढ़ानी चाही पर इन्होंने स्वीकार नहीं की। .
मथुरा और स्वामी हरिदास आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): वृन्दावन।
कृष्ण बलराम मन्दिर इस्कॉन वृन्दावन वृन्दावन मथुरा क्षेत्र में एक स्थान है जो भगवान कृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान के बाललीलाओं का स्थान माना जाता है। यह मथुरा से १५ किमी कि दूरी पर है। यहाँ पर श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर की विशाल संख्या है। यहाँ स्थित बांके विहारी जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री कृष्ण बलराम, इस्कान मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, निधि वन आदिदर्शनीय स्थान है। यह कृष्ण की लीलास्थली है। हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। कालिदास ने इसका उल्लेख रघुवंश में इंदुमती-स्वयंवर के प्रसंग में शूरसेनाधिपति सुषेण का परिचय देते हुए किया है इससे कालिदास के समय में वृन्दावन के मनोहारी उद्यानों की स्थिति का ज्ञान होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार गोकुल से कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातीयों के साथ वृन्दावन निवास के लिए आये थे। विष्णु पुराण में इसी प्रसंग का उल्लेख है। विष्णुपुराण में अन्यत्र वृन्दावन में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन भी है। .
मथुरा 66 संबंध है और स्वामी हरिदास 4 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.43% है = 1 / (66 + 4)।
यह लेख मथुरा और स्वामी हरिदास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। . स्वामी हरिदास भक्त कवि, शास्त्रीय संगीतकार तथा कृष्णोपासक सखी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। इन्हें ललिता सखी का अवतार माना जाता है। वे वैष्णव भक्त थे तथा उच्च कोटि के संगीतज्ञ भी थे। वे प्राचीन शास्त्रीय संगीत के उद्भट विद्वान एवम् चतुष् ध्रुपदशैली के रचयिता हैं। प्रसिद्ध गायक तानसेन इनके शिष्य थे। अकबर इनके दर्शन करने वृन्दावन गए थे। 'केलिमाल' में इनके सौ से अधिक पद संग्रहित हैं। इनकी वाणी सरस और भावुक है। स्वामी हरिदास का जन्म एक हज़ार चार सौ नब्बे में हुआ था। इनके जन्म स्थान और गुरु के विषय में कई मत प्रचलित हैं। इनका जन्म समय कुछ ज्ञात नहीं है। ये महात्मा वृन्दावन में निंबार्क सखी संप्रदाय के संस्थापक थे और अकबर के समय में एक सिद्ध भक्त और संगीत-कला-कोविद माने जाते थे। कविताकाल सन् एक हज़ार पाँच सौ तैंतालीस से एक हज़ार पाँच सौ साठ ई. ठहरता है। प्रसिद्ध गायनाचार्य तानसेन इनका गुरूवत् सम्मान करते थे। यह प्रसिद्ध है कि अकबर बादशाह साधु के वेश में तानसेन के साथ इनका गाना सुनने के लिए गया था। कहते हैं कि तानसेन इनके सामने गाने लगे और उन्होंने जानबूझकर गाने में कुछ भूल कर दी। इसपर स्वामी हरिदास ने उसी गाना को शुद्ध करके गाया। इस युक्ति से अकबर को इनका गाना सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। पीछे अकबर ने बहुत कुछ पूजा चढ़ानी चाही पर इन्होंने स्वीकार नहीं की। . मथुरा और स्वामी हरिदास आम में एक बात है : वृन्दावन। कृष्ण बलराम मन्दिर इस्कॉन वृन्दावन वृन्दावन मथुरा क्षेत्र में एक स्थान है जो भगवान कृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान के बाललीलाओं का स्थान माना जाता है। यह मथुरा से पंद्रह किमी कि दूरी पर है। यहाँ पर श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर की विशाल संख्या है। यहाँ स्थित बांके विहारी जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री कृष्ण बलराम, इस्कान मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, निधि वन आदिदर्शनीय स्थान है। यह कृष्ण की लीलास्थली है। हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। कालिदास ने इसका उल्लेख रघुवंश में इंदुमती-स्वयंवर के प्रसंग में शूरसेनाधिपति सुषेण का परिचय देते हुए किया है इससे कालिदास के समय में वृन्दावन के मनोहारी उद्यानों की स्थिति का ज्ञान होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार गोकुल से कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातीयों के साथ वृन्दावन निवास के लिए आये थे। विष्णु पुराण में इसी प्रसंग का उल्लेख है। विष्णुपुराण में अन्यत्र वृन्दावन में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन भी है। . मथुरा छयासठ संबंध है और स्वामी हरिदास चार है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.तैंतालीस% है = एक / । यह लेख मथुरा और स्वामी हरिदास के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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प्यार के लिए कोई पहाड़ से कूद जाता है तो कोई सूली चढ़ जाता है. लेकिन यहां मीनू को आसान सा इम्तिहान देना है. अब ये मीनू कौन है और उसके सामने कौन सा चैलेंज है आइए बताते हैं.
पंचायत फेम एक्टर जितेंद्र कुमार अपने नए नेटफ्लिक्स मूवी जादूगर के साथ जल्द ही लोगों को मनोरंजन की दुनिया के एक अनोखे सैर पर ले जाने को तैयार हैं. जादूगर का ट्रेलर रिलीज हो गया है. जादूगर के ट्रेलर को देख आपको सूरमा की याद आ जाएगी जिसमें दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू के लिए खेल के मैदान में उतर जाते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी जादूगर की भी है.
फिल्म की कहानी नीमच नाम के छोटे से शहर की पृष्ठभूमि पर बनी है. इसमें जितेंद्र कुमार, मीनू नाम के किरदार में हैं. उनके अलावा इसमें जावेद जाफरी और आरुषि शर्मा लीड रोल में हैं. कहानी है एक प्रोफेशनल जादूगर की जिसे फुटबॉल का ए तक नहीं आता है. टीम की लाख कोशिशों के बावजूद वह टीम में फिट नहीं बैठता है. वह बार-बार खेल को बीच में छोड़ देता है. फिर एक ऐसा मोड़ आता है जब उसे अपने प्यार को पाने के लिए फुटबॉल को अपनाना पड़ता है. उसके सामने प्यार को जीतने के लिए फुटबॉल जीतने की चुनौती होती है. अब मीनू अपने इस चैलेंज को कैसे पूरा करता है और उसकी जीत होती है या नहीं, इसे जानने के लिए फिल्म का इंतजार करना होगा.
ट्रेलर में जादूगर की कहानी का हल्का-फुल्का, फैमिली एंड रोमांटिक ड्रामा देखने को मिला. अपने पिछले प्रोजेक्ट पंचायत और पंचायत 2 से लोगों को चटपटे कहानियों का स्वाद चखाने वाले जितेंद्र अपनी इस नई कहानी से कितना ललचा पाएंगे यह देखना दिलचस्प होगा.
कब होगी रिलीज?
फिल्म की कहानी बिस्वापति सरकार ने और इसका निर्देशन समीर सक्सेना ने किया है. यह नेटफ्लिक्स ओरिजिनल 15 जुलाई से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगा. फिल्म को पोशम पा पिक्चर्स और चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है.
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प्यार के लिए कोई पहाड़ से कूद जाता है तो कोई सूली चढ़ जाता है. लेकिन यहां मीनू को आसान सा इम्तिहान देना है. अब ये मीनू कौन है और उसके सामने कौन सा चैलेंज है आइए बताते हैं. पंचायत फेम एक्टर जितेंद्र कुमार अपने नए नेटफ्लिक्स मूवी जादूगर के साथ जल्द ही लोगों को मनोरंजन की दुनिया के एक अनोखे सैर पर ले जाने को तैयार हैं. जादूगर का ट्रेलर रिलीज हो गया है. जादूगर के ट्रेलर को देख आपको सूरमा की याद आ जाएगी जिसमें दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू के लिए खेल के मैदान में उतर जाते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी जादूगर की भी है. फिल्म की कहानी नीमच नाम के छोटे से शहर की पृष्ठभूमि पर बनी है. इसमें जितेंद्र कुमार, मीनू नाम के किरदार में हैं. उनके अलावा इसमें जावेद जाफरी और आरुषि शर्मा लीड रोल में हैं. कहानी है एक प्रोफेशनल जादूगर की जिसे फुटबॉल का ए तक नहीं आता है. टीम की लाख कोशिशों के बावजूद वह टीम में फिट नहीं बैठता है. वह बार-बार खेल को बीच में छोड़ देता है. फिर एक ऐसा मोड़ आता है जब उसे अपने प्यार को पाने के लिए फुटबॉल को अपनाना पड़ता है. उसके सामने प्यार को जीतने के लिए फुटबॉल जीतने की चुनौती होती है. अब मीनू अपने इस चैलेंज को कैसे पूरा करता है और उसकी जीत होती है या नहीं, इसे जानने के लिए फिल्म का इंतजार करना होगा. ट्रेलर में जादूगर की कहानी का हल्का-फुल्का, फैमिली एंड रोमांटिक ड्रामा देखने को मिला. अपने पिछले प्रोजेक्ट पंचायत और पंचायत दो से लोगों को चटपटे कहानियों का स्वाद चखाने वाले जितेंद्र अपनी इस नई कहानी से कितना ललचा पाएंगे यह देखना दिलचस्प होगा. कब होगी रिलीज? फिल्म की कहानी बिस्वापति सरकार ने और इसका निर्देशन समीर सक्सेना ने किया है. यह नेटफ्लिक्स ओरिजिनल पंद्रह जुलाई से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगा. फिल्म को पोशम पा पिक्चर्स और चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है.
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टॉलीवुड स्टार जूनियर एनटीआर फिल्म आरआरआर (RRR) से फ्री होकर अपनी फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं। हाल ही में फिल्म स्टार जूनियर एनटीआर ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी ताजा तस्वीरें शेयर की हैं। जो इस वक्त सुर्खियों में हैं। जूनियर एनटीआर की ये तस्वीरें पेरिस ट्रिप की हैं। यहां देखें फोटोज।
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टॉलीवुड स्टार जूनियर एनटीआर फिल्म आरआरआर से फ्री होकर अपनी फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं। हाल ही में फिल्म स्टार जूनियर एनटीआर ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी ताजा तस्वीरें शेयर की हैं। जो इस वक्त सुर्खियों में हैं। जूनियर एनटीआर की ये तस्वीरें पेरिस ट्रिप की हैं। यहां देखें फोटोज।
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अक्सर आपने कई लोगों को गले में कई तरह की मालाओं को पहनते हुए देखा होगा। कुछ लोग सोने की माला पहनते हैं तो कुछ लोग चाँदी की पहनते हैं। कई लोगों को गले में रुद्राक्ष की माला पहनते हुए भी देखा होगा आपने। जो लोग रुद्राक्ष के बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें समझ में नहीं आता है कि आखिर लोग इसकी माला क्यों पहनते हैं? आपको बता दें रुद्राक्ष के माला का धार्मिक महत्व होता है, जिसके बारे में हर किसी को नहीं पता होता है। अगर आपको भी रुद्राक्ष के बारे में पता नहीं है तो चिंता करने की जरुरत नहीं है। हम आपको रुद्राक्ष के बारे में सबकुछ बताएँगे।
रुद्राक्ष को भगवान शंकर का एक अंग माना जाता है। शिवपुराण और श्रीमद्देवीभागवत में रुद्राक्ष की माला धारण करने के कई नियम बताये गए हैं। अगर आप भी रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं तो आपको भी इन नियमों का जरुर पालन करना चाहिए। इन ग्रंथों में यह साफ़-साफ़ मिलता है कि रुद्राक्ष से बनी ही माला शरीर के कौन-कौन से अंग पर धारण करनी चाहिए, जिससे पहनने वाले की हर मनोकामना पूर्ण हो जाये। अगर आप इन पुराणों में लिखी गयी बातों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करते हैं तो आपको जीवन में कोई कमी नहीं होगी।
श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने के नियमः
*- आपको पहले ही बता दें रुद्राक्ष की माला एक ही तरह की नहीं होती है। एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक रुद्राक्ष होते हैं और इन्ही से माला का निर्माण किया जाता है। शरीर के अलग-अलग अंगों पर अलग-अलग संख्या के रुद्राक्ष की माला को धारण करना चाहिए। 50 दानों के रुद्राक्ष की माला को हृदय पर और 20 दानों की माला को सर पर धारण करना शुभ होता है।
*- रुद्राक्ष के 16 दानों से बनी हुई माला को अपनी भुजाओं पर और 12 दानों से बनी हुई माला को मणिबंध यानी पंजे और हाथ को जोडनें वाले हिस्से पर पहनना चाहिए। गले में 108 दानों वाले रुद्राक्ष की माला को धारण करना शुभ माना जाता है।
*- ऐसा कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति ने रुद्राक्ष के 108 दानों की माला को गले में धारण किया होता है, उसे हर पल अश्मेघ यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है। ऐसे लोगों को शिवलोक की प्राप्ति होती है। सामान्य माला की जगह अगर आप 108 दानों वाली रुद्राक्ष की माला से जप करते हैं तो आपको 10 गुना ज्यादा पुण्य मिलता है।
*- रुद्राक्ष धारण करने से ज्यादा शुभ चीज इस दुनिया में कुछ और नहीं है। जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करने के बाद उसकी पवित्रता का ध्यान रखता है, उसे जीवन में कोई कष्ट नहीं होता है। उसकी हर मनोकामना पूरी हो जाती है।
शिव पुराण के अनुसारः
*- पुरे संसार में रुद्राक्ष जैसी पुन्य और फल देने वाली दूसरी कोई माला नहीं है। इसलिए अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए रुद्राक्ष की माला जरुर धारण करना चाहिए। इसकी पूजा भी करनी चाहिए और जप भी करना चाहिए।
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अक्सर आपने कई लोगों को गले में कई तरह की मालाओं को पहनते हुए देखा होगा। कुछ लोग सोने की माला पहनते हैं तो कुछ लोग चाँदी की पहनते हैं। कई लोगों को गले में रुद्राक्ष की माला पहनते हुए भी देखा होगा आपने। जो लोग रुद्राक्ष के बारे में नहीं जानते हैं, उन्हें समझ में नहीं आता है कि आखिर लोग इसकी माला क्यों पहनते हैं? आपको बता दें रुद्राक्ष के माला का धार्मिक महत्व होता है, जिसके बारे में हर किसी को नहीं पता होता है। अगर आपको भी रुद्राक्ष के बारे में पता नहीं है तो चिंता करने की जरुरत नहीं है। हम आपको रुद्राक्ष के बारे में सबकुछ बताएँगे। रुद्राक्ष को भगवान शंकर का एक अंग माना जाता है। शिवपुराण और श्रीमद्देवीभागवत में रुद्राक्ष की माला धारण करने के कई नियम बताये गए हैं। अगर आप भी रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं तो आपको भी इन नियमों का जरुर पालन करना चाहिए। इन ग्रंथों में यह साफ़-साफ़ मिलता है कि रुद्राक्ष से बनी ही माला शरीर के कौन-कौन से अंग पर धारण करनी चाहिए, जिससे पहनने वाले की हर मनोकामना पूर्ण हो जाये। अगर आप इन पुराणों में लिखी गयी बातों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करते हैं तो आपको जीवन में कोई कमी नहीं होगी। श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने के नियमः *- आपको पहले ही बता दें रुद्राक्ष की माला एक ही तरह की नहीं होती है। एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक रुद्राक्ष होते हैं और इन्ही से माला का निर्माण किया जाता है। शरीर के अलग-अलग अंगों पर अलग-अलग संख्या के रुद्राक्ष की माला को धारण करना चाहिए। पचास दानों के रुद्राक्ष की माला को हृदय पर और बीस दानों की माला को सर पर धारण करना शुभ होता है। *- रुद्राक्ष के सोलह दानों से बनी हुई माला को अपनी भुजाओं पर और बारह दानों से बनी हुई माला को मणिबंध यानी पंजे और हाथ को जोडनें वाले हिस्से पर पहनना चाहिए। गले में एक सौ आठ दानों वाले रुद्राक्ष की माला को धारण करना शुभ माना जाता है। *- ऐसा कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति ने रुद्राक्ष के एक सौ आठ दानों की माला को गले में धारण किया होता है, उसे हर पल अश्मेघ यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है। ऐसे लोगों को शिवलोक की प्राप्ति होती है। सामान्य माला की जगह अगर आप एक सौ आठ दानों वाली रुद्राक्ष की माला से जप करते हैं तो आपको दस गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। *- रुद्राक्ष धारण करने से ज्यादा शुभ चीज इस दुनिया में कुछ और नहीं है। जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करने के बाद उसकी पवित्रता का ध्यान रखता है, उसे जीवन में कोई कष्ट नहीं होता है। उसकी हर मनोकामना पूरी हो जाती है। शिव पुराण के अनुसारः *- पुरे संसार में रुद्राक्ष जैसी पुन्य और फल देने वाली दूसरी कोई माला नहीं है। इसलिए अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए रुद्राक्ष की माला जरुर धारण करना चाहिए। इसकी पूजा भी करनी चाहिए और जप भी करना चाहिए।
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Avatar 2 Advance booking Report: जेम्स कैमरून की फिल्म अवतार 2 की एडवांस बुकिंग को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। जिसे जानने के बाद मेकर्स काफी खुश नजर आ रहे हैं।
Avatar 2 Advance Booking: साउथ और बॉलीवुड के बाद अब हॉलीवुड की फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' (Avatar: The Way of Water) को लेकर काफी चर्चा हो रही है। जेम्स कैमरून (James Cameron) की इस फिल्म ने रिलीज से पहले की करोड़ों रुपये की कमाई कर ली हैं। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग को लेकर रोज नए अपडेट सामने आ रहे है। अभी हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया था इस फिल्म के अभी तक एडवांस बुकिंग में इंडिया में 4 लाख से ज्यादा टिकट बिक गए है। अब इसके बाद इस रिपोर्ट में नया अपडेट आया है। जिसे जानने के बाद मेकर्स गदगद हो जाएंगे।
जेम्स कैमरून की फिल्म अवतार 2 रिलीज होने से पहले ही काफी चर्चा में बनी हुई। इस फिल्म के बजट से लेकर एडवांस बुकिंग तक सबको लेकर एंटरटेनमेंट जगत में काफी बातें हो रही हैं। इसी बीच ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने भी फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' को लेकर एक ट्विट किया है। जिसमें उन्होंने फिल्म की एडवांस बुकिंग के बारे में जनकारी दी है। ट्वीट के अनुसार एडवांस बुकिंग में अब तक अवतार 2 की 4,41,960 टिकट बुक हो चुकी है। ये आंकड़ा धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि अभी फिल्म को रिलीज होने में 2 दिन बाकी है। जेम्स कैमरून की ये फिल्म 16 दिसंबर 2022 को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है।
ओपनिंग वीकेंड इतना कलेक्शन कर सकती है 'अवतार 2'
अवतार 2 को लेकर कई सारी रिपोर्ट्स सामने आई है। अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ये फिल्म 150 मिलियन डॉलर की ओपनिंग वीकेंड पर कमाई कर सकती है। जानकारी के लिए बता दें 'अवतार 2' साल 2009 में आई फिल्म 'अवतार' का सीक्वल है। अवतार ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की थी। अब देखना होगा अवतार 2 बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखा पाती है।
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Avatar दो Advance booking Report: जेम्स कैमरून की फिल्म अवतार दो की एडवांस बुकिंग को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। जिसे जानने के बाद मेकर्स काफी खुश नजर आ रहे हैं। Avatar दो Advance Booking: साउथ और बॉलीवुड के बाद अब हॉलीवुड की फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' को लेकर काफी चर्चा हो रही है। जेम्स कैमरून की इस फिल्म ने रिलीज से पहले की करोड़ों रुपये की कमाई कर ली हैं। इस फिल्म की एडवांस बुकिंग को लेकर रोज नए अपडेट सामने आ रहे है। अभी हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया था इस फिल्म के अभी तक एडवांस बुकिंग में इंडिया में चार लाख से ज्यादा टिकट बिक गए है। अब इसके बाद इस रिपोर्ट में नया अपडेट आया है। जिसे जानने के बाद मेकर्स गदगद हो जाएंगे। जेम्स कैमरून की फिल्म अवतार दो रिलीज होने से पहले ही काफी चर्चा में बनी हुई। इस फिल्म के बजट से लेकर एडवांस बुकिंग तक सबको लेकर एंटरटेनमेंट जगत में काफी बातें हो रही हैं। इसी बीच ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने भी फिल्म 'अवतारः द वे ऑफ वॉटर' को लेकर एक ट्विट किया है। जिसमें उन्होंने फिल्म की एडवांस बुकिंग के बारे में जनकारी दी है। ट्वीट के अनुसार एडवांस बुकिंग में अब तक अवतार दो की चार,इकतालीस,नौ सौ साठ टिकट बुक हो चुकी है। ये आंकड़ा धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि अभी फिल्म को रिलीज होने में दो दिन बाकी है। जेम्स कैमरून की ये फिल्म सोलह दिसंबर दो हज़ार बाईस को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है। ओपनिंग वीकेंड इतना कलेक्शन कर सकती है 'अवतार दो' अवतार दो को लेकर कई सारी रिपोर्ट्स सामने आई है। अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ये फिल्म एक सौ पचास मिलियन डॉलर की ओपनिंग वीकेंड पर कमाई कर सकती है। जानकारी के लिए बता दें 'अवतार दो' साल दो हज़ार नौ में आई फिल्म 'अवतार' का सीक्वल है। अवतार ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की थी। अब देखना होगा अवतार दो बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखा पाती है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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पुलिस अधीक्षक डा. ओम प्रकाश सिंह ने बुधवार को जमानियां कोतवाली में निरीक्षण किया। घटना के बाद कोतवाली पहुंचे एसपी के साथ एसपीआरए ने इंतजाम परखे और जमानियां की पुलिसिंग जानी। वाहनों की अधिक संख्या पर नाराजगी जताते हुए नीलामी प्रक्रिया में कवायद की बात कही।
बुधवार को एसपी ने निरीक्षण के दौरान मालखाना, रजिस्टरों का रख रखाव,कम्प्यूटर कक्ष को चेक किया गया तथा साफ सफाई हेतु आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए। सीज छोटे बड़े वाहनों की मुआयना किया। पुलिस अधीक्षक परिसर में साफ सफाई को देखा। कहा कि फरियादियों के साथ अच्छा व्यवहार करते हुए छोटी बड़ी समस्याओं का समाधान कराने पर विशेष ध्यान दी जाए। इस मौके पर सीओ सुरेश शर्मा के साथ कोतवाली प्रभारी राजीव कुमार सिंह, देवरिया पुलिस चौकी इंचार्ज राजीव कुमार त्रिपाठी, अनिल कुमार पांडे के अलावा कई पुलिस कर्मी उपस्थित रहे।
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पुलिस अधीक्षक डा. ओम प्रकाश सिंह ने बुधवार को जमानियां कोतवाली में निरीक्षण किया। घटना के बाद कोतवाली पहुंचे एसपी के साथ एसपीआरए ने इंतजाम परखे और जमानियां की पुलिसिंग जानी। वाहनों की अधिक संख्या पर नाराजगी जताते हुए नीलामी प्रक्रिया में कवायद की बात कही। बुधवार को एसपी ने निरीक्षण के दौरान मालखाना, रजिस्टरों का रख रखाव,कम्प्यूटर कक्ष को चेक किया गया तथा साफ सफाई हेतु आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए। सीज छोटे बड़े वाहनों की मुआयना किया। पुलिस अधीक्षक परिसर में साफ सफाई को देखा। कहा कि फरियादियों के साथ अच्छा व्यवहार करते हुए छोटी बड़ी समस्याओं का समाधान कराने पर विशेष ध्यान दी जाए। इस मौके पर सीओ सुरेश शर्मा के साथ कोतवाली प्रभारी राजीव कुमार सिंह, देवरिया पुलिस चौकी इंचार्ज राजीव कुमार त्रिपाठी, अनिल कुमार पांडे के अलावा कई पुलिस कर्मी उपस्थित रहे।
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एरप्पन मधुवे का आगमन श्रीधरन को एक त्योहार के समान लगा। उस दिन अच्छी मछली का व्यंजन नजीब होने के कारण ही नहीं, एरपन ने अच्छी ने समुद्री दास्तानें भी बतायी। सब अनुभव की दास्तान थीं : वे तीन-चार दिन तक लगातार समुद्र में इधर-उधर चक्कर खाने पर नाव में संचित पीने का जल खतम हो गया था। जब वह गला सूखकर मरनेवाला था, तब काविलम्मा की पुकारकर रोते हुए मिन्नत प्रार्थना की। काविलम्मा का दिल पसीज गया। उसने आसमान से स्तनपान कराया । यों बारिश का जल पीकर मृत्यु से अपने बचने की बात वह वड़े मनोयोग से मुनाता ।
एक लम्बे आकार की हांगर मछली जाल में फंसी तो जाल और नाव को ही खींचकर ले गयी । फिर समुद्र के बीच चक्कर खाने की उस घटना को भी वह सुनाता कि कैसे जाल को समुद्र में छोड़कर प्राण लेकर वापस आना पड़ा ।
"तिमिंगल को देखा करते हो ?" श्रीधरन ने जिज्ञासा के साथ पूछा । "तिमिंगल - विमिंगल तो समुद्र में नहीं है ।" एरप्पन पान खाने के लिए सुपारी काटते हुए सिर हिलाकर बोला । फिर कुछ याद कर पहले कही बात का संशोधन करके उसने बताया, "हाँ मुन्ना, समुद्री हाथी के बारे में ही कह रहे हो न वही तो समुद्र का राजा है- ईमानदार राजा । उसके सिर पर एक नली है । इससे पानी ऊपर छिटकाता है। दूर से ही दीख जाता है ।"
क्षणभर चुप रहकर फिर बखान करने लगा - "सफेद छतरी लेकर खड़े समुद्री राजा को देखने पर नाव के लोग तुरन्त उठ खड़े होकर प्रार्थना करते, 'समुद्र के राजा, हमें बचाइए' यह सुनकर वह सफेद छाता समेटकर झट डुबकी लगा लेता। लेकिन राजा के बारे में हँसी-ठिठोली करें तो राजा को मालूम हो जाता । तब नाव के नीचे आकर वह पिचकारी से पानी उछालने लगता । उस समय नाव और मछुवे कहाँ होते - उधर आसमान में ! एक नारियल के पेड़ की ऊँचाई में फुहार की धारा में लटकते रहते । यह राजा का एक खेल है । मजाक उड़ानेवालों के लिए दण्ड भी । तव नाव के लोग 'समुद्री राजा, माफ़ी दे दीजिए !' रोते हुए मिन्नत - प्रार्थना करते । यह सुनते ही राजा शान्त हो जाता । वह अपना सफेद छाता समेटकर पानी में विलीन हो जाता । एकाएक नाव और मछुवे सीधे पानी में आ ग़िरते । किसी को भी कोई खतरा नहीं होता । वह तो ईमानदार है । मछुओं को आसमान में तिमिंगल के सफेद छाते पर थोड़ी देर लटकने का अनुभव अवश्य करा देता है ।
ॠद्ध तिमिंगल की अत्युग्र जलधारा में आसमान में नाचनेवाली नौकाओं और उनमें प्रार्थना करते हुए मछुवों की तस्वीर श्रीधरन के मन में नाच उठी ।
कृष्णन मास्टर ने एरप्पन से पूछा, "क्या तेरे दूसरे बेटे की शादी हो गयी है ?" यह सुनकर एरप्पन हँस पड़ा । फिर दूसरे बेटे चन्तप्पन की बात विस्तार से
310 :: कथा एक प्रान्तर की.
बतायी ।
चन्तप्पन को एक मुस्लिम लड़की से मोहब्बत हो गयी । धर्म परिवर्तन कर वह मुसलमान बना, टोपी डाली और सेटताली हो गया । उससे निकाह किया । साल भर बाद उस औरत से उसे नफ़रत हो गयी । वह तो रंडी थी । सेटताली ने उसको छोड़ दिया। फिर आर्य समाज में आकर वह हिन्दू बना । विवेकानन्द नाम स्वीकार किया । अब वह अच्छा है। शादी की बात कहने पर चन्तप्पन को - नहीं, विवेकानन्द को गुस्सा आ जाता है.
चन्तप्पन की प्रणय-कथा सुनकर कृष्णन मास्टर हँस पड़े ।
"महिला को देखकर मोहित होने पर पुरुष की हालत गधे की तरह हो जाती है।"
कृष्णन मास्टर हँसते हुए बोले, "मैंने भी एक लड़की से प्यार किया था । वह घटना सुनना चाहोगे ?"
पिताजी के इश्क की कथा सुनने के लिए श्रीधरन कान खड़े कर वहीं बैठा रहा । श्रीधरन को डर था कि पिताजी उसको उठकर चले जाने का आदेश देंगे । श्रीधरन के न सुनने लायक कोई बात होती तो पिताजी श्रीधरन से कहते कि तू अपने कमरे में जाकर सबक पढ़, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा । इतना ही नहीं, श्रीधरन को लगा कि अपने बेटे को सुनाने के वास्ते ही बांबूजी यह कथा कह रहे हैं ।
कृष्णन मास्टर की पुरानी मोहब्बत की दास्तान का सार कुछ इस प्रकार
था :
कृष्णन मास्टर के टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल में पढ़ने का जमाना । मोहल्ले के एक पुराने घराने की एक सुन्दर युवती से कृष्णन मास्टर की आँखें चार हुई उन्होंने उससे शादी करने के इरादे से ऐसा किया था । लेकिन युवती को जरा सन्देह था कि इस दीवाने ने शादी किये बिना ही उसे छोड़ दिया तो "। उसे मालूम हो गया था कि उसकी खूबसूरती पर मास्टर लट्टू हो गये हैं ।
वह अनपढ़ थी ।
एक दिन शाम को कृष्णन मास्टर ने ट्रेनिंग स्कूल से वापस आते समय एक अजनबी इन्सान को रास्ते में इन्तजार करते हुए देखा । मास्टर को देखने पर उसने बड़े अदब से प्रणाम किया । कृष्णन मास्टर की उस प्रिया ने एक गुप्त संदेश के साथ ही उस नौजवान को भेजा था । वह चार मील दूर मामा के घर जा रही है, कल रात वहाँ आने पर सुविधापूर्वक बातचीत हो सकती है। यही संदेश था । इस प्रेम-संदेश से कृष्णन मास्टर के रोंगटे खड़े हो गये ।
"उससे कहो कि कल मिलेंगे ।" मास्टर ने जवाब दिया ।
घर जाने के बाद उस पर पुनः विचार किया । ज़रा विवेक का उदय हुआ ।
वापसी - फिर एक बार :: 311
गुप्त- संदेश देनेवाले व्यक्ति के बारे में स्मरण किया। सफेद हट्टा-कट्टा नौजवान। लम्बे बाल, ललाट पर सिंदूर उसने गुप्त संदेश उसी युवक के द्वारा दिया था। " ऐसी हालत में इन दोनों के बीच भी गुप्त सम्वन्ध जरूर होगा ।
मास्टर अगली रात उससे मिलने नहीं गये । फिर कभी नहीं गये ।
प्रेम करने में ही नहीं, पुरुषों को धोखा देने और अपमानित करने में भी इन महिलाओं को एक खास खुशी महसूस होती है। एक भी महिला पर विश्वास नहीं करना चाहिए । जो पुरुष प्रेम के जाल में फँसा कि वस एक गधा बन जाता है। वह असलियत नहीं जान पाता कृष्णन मास्टर ने अपनी पुरानी मुहव्वत की
दास्तान यों खतम की ।
श्रीधरन के लिए यह कोई तत्वोपदेश नहीं था । वर्षों पहले रावुत्तर मौलवी ने जो गीत गाया था, वह उसके कानों में गूंज रहा था"आट्टेयुं काट्टेयुं नंपलाम् - अन्त शेल केट्टिय मातरै नंपलाम्"
15. कडुवा, खट्टा, तीखा और मोठा प्रकृति के रंगमंच पर बारिश का नाच शुरू हो गया । श्रीधरन को बारिश का मौसम पसन्द है । जब पहले-पहल वर्षा होती है तब वह बड़ी उमंग से आँगन में झूम-झूमकर नाच उठता है । बरामदे के सामने जलबिन्दुओं के नीचे गिरने पर कई आकार के बुलबुले पैदा होते । उनके पैदा होने, रेंगने और फिर एकाएक फूट जाने अर्थात् सृष्टि-स्थिति-संहार लीलाओं को वह उत्सुकता से देखता । हवा में पेड़ों के शिखरों को झूमते और पौधों को नृत्य करते देखकर वह खुश होता । वर्षाऋतु को आधार बनाकर उसने एक कविता भी लिखी है : "स्वच्छ विभा डूब, कारी बदरियों का क्रीडांगन हो गया सारा आकाश । कल-कल ध्वनि में 'बीज खंता' 'बीज खंता' गाती चिड़ियाँ भी उड़ गयीं कहीं । रंग बदल सारी धरा ने कपिल कंचुक ओढ़ा ! सूखी पत्तियाँ उड़ जातीधूल भरी झँझा के झोंके में । इन्द्रधनुष की रंग-छटा उदित हुई
शीतल नभ की छाती पर
312 :: कथा एक प्रान्तर की "
चन्द्रमा ने डाल दिया घूंघट (चाँदनी का सुख हुआ अस्त ) नव वर्षा से आलिंगित मिट्टी की मदगन्ध पवन में भर गयी ।
वर्षा ऋतु के नर्तन में
बज उठे मंडूक ताल
मेघ गर्जन और ठण्डी पुरवैया को ले साथ ऋषभ मध्य 1 भी आ गया लो ।
मूसलाधार वर्षा से घाट डूवे, रास्ते हुए बन्द । हरियाली ओढ़े आ पहुँची
आद्रा 2रवि संगम की नव वेला हुई काली मिर्च की लताएँ फूली फलीं ।
खेत-खेत की मेड़ें, पगडंडियाँ और मिट्टी की दीवारें लाँघ, बढ़ आया बाढ़ का पानी
घरों के आँगन को पार कर ।
बारिश में आँगन की जलधारा में बहाने के लिए कागज़ के बहुरंगी जहाज़ देने वाले गोपालन भैया की भी याद आयी । (वेचारा गोपालन भैया ! अब जीवित शव है । बारिश के समय आँगन की तरफ़ देखता हुआ बरामदे में लेटा है । ) रात को वर्षा-देवता एक बड़ा ऑरकेस्ट्रा शुरू करता । मेंढकों का नगाड़ा, छोटे मेंढकों का मृदंग, झिल्लियों का रव - मूसलाधार वर्षा का शोर भी । युगों के उस पार के ध्वनि- आलोक में श्रीधरन की आत्मा लीन हो जाती उसमें लीन होकर वह सो जाता ।
आज वर्षाऋतु अपने सभी आकर्षक कार्यक्रमों के साथ जारी है तो भी श्रीधरन उस पर ध्यान दिये बिना घर के बरामदे में विषाद-भरे मन से मूक बना बैठा है । छोटी-छोटी चिन्ताएँ वर्षा के पानी के बुलबुले की तरह उठती-फूटती रहती हैं ।
इण्टरमीडियेट पब्लिक परीक्षाफल कल अखबार में प्रकाशित हुआ । श्रीधरन का नम्बर नहीं था ~इम्तहान में हार गया है ।
उस दुष्ट गणित ने ही धोखा दिया होगा ।
परीक्षाफल ज्ञात होने पर पिताजी ने डाँटा नहीं, सान्त्वना भी नहीं दी - उन्होंने कुछ नहीं कहा - सिर्फ 'हूँ' की आवाज़ प्रकट की।
1. 'ऋषभ मध्य' मानसून की वर्षा जो केरल में बैशाख महीने में शुरू होती है । 2. भाद्रा में सूर्य की स्थिति खेती शुरू करने की सूचक है ।
कड़वा, खट्टा, तीखा और मीठा :: 313
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एरप्पन मधुवे का आगमन श्रीधरन को एक त्योहार के समान लगा। उस दिन अच्छी मछली का व्यंजन नजीब होने के कारण ही नहीं, एरपन ने अच्छी ने समुद्री दास्तानें भी बतायी। सब अनुभव की दास्तान थीं : वे तीन-चार दिन तक लगातार समुद्र में इधर-उधर चक्कर खाने पर नाव में संचित पीने का जल खतम हो गया था। जब वह गला सूखकर मरनेवाला था, तब काविलम्मा की पुकारकर रोते हुए मिन्नत प्रार्थना की। काविलम्मा का दिल पसीज गया। उसने आसमान से स्तनपान कराया । यों बारिश का जल पीकर मृत्यु से अपने बचने की बात वह वड़े मनोयोग से मुनाता । एक लम्बे आकार की हांगर मछली जाल में फंसी तो जाल और नाव को ही खींचकर ले गयी । फिर समुद्र के बीच चक्कर खाने की उस घटना को भी वह सुनाता कि कैसे जाल को समुद्र में छोड़कर प्राण लेकर वापस आना पड़ा । "तिमिंगल को देखा करते हो ?" श्रीधरन ने जिज्ञासा के साथ पूछा । "तिमिंगल - विमिंगल तो समुद्र में नहीं है ।" एरप्पन पान खाने के लिए सुपारी काटते हुए सिर हिलाकर बोला । फिर कुछ याद कर पहले कही बात का संशोधन करके उसने बताया, "हाँ मुन्ना, समुद्री हाथी के बारे में ही कह रहे हो न वही तो समुद्र का राजा है- ईमानदार राजा । उसके सिर पर एक नली है । इससे पानी ऊपर छिटकाता है। दूर से ही दीख जाता है ।" क्षणभर चुप रहकर फिर बखान करने लगा - "सफेद छतरी लेकर खड़े समुद्री राजा को देखने पर नाव के लोग तुरन्त उठ खड़े होकर प्रार्थना करते, 'समुद्र के राजा, हमें बचाइए' यह सुनकर वह सफेद छाता समेटकर झट डुबकी लगा लेता। लेकिन राजा के बारे में हँसी-ठिठोली करें तो राजा को मालूम हो जाता । तब नाव के नीचे आकर वह पिचकारी से पानी उछालने लगता । उस समय नाव और मछुवे कहाँ होते - उधर आसमान में ! एक नारियल के पेड़ की ऊँचाई में फुहार की धारा में लटकते रहते । यह राजा का एक खेल है । मजाक उड़ानेवालों के लिए दण्ड भी । तव नाव के लोग 'समुद्री राजा, माफ़ी दे दीजिए !' रोते हुए मिन्नत - प्रार्थना करते । यह सुनते ही राजा शान्त हो जाता । वह अपना सफेद छाता समेटकर पानी में विलीन हो जाता । एकाएक नाव और मछुवे सीधे पानी में आ ग़िरते । किसी को भी कोई खतरा नहीं होता । वह तो ईमानदार है । मछुओं को आसमान में तिमिंगल के सफेद छाते पर थोड़ी देर लटकने का अनुभव अवश्य करा देता है । ॠद्ध तिमिंगल की अत्युग्र जलधारा में आसमान में नाचनेवाली नौकाओं और उनमें प्रार्थना करते हुए मछुवों की तस्वीर श्रीधरन के मन में नाच उठी । कृष्णन मास्टर ने एरप्पन से पूछा, "क्या तेरे दूसरे बेटे की शादी हो गयी है ?" यह सुनकर एरप्पन हँस पड़ा । फिर दूसरे बेटे चन्तप्पन की बात विस्तार से तीन सौ दस :: कथा एक प्रान्तर की. बतायी । चन्तप्पन को एक मुस्लिम लड़की से मोहब्बत हो गयी । धर्म परिवर्तन कर वह मुसलमान बना, टोपी डाली और सेटताली हो गया । उससे निकाह किया । साल भर बाद उस औरत से उसे नफ़रत हो गयी । वह तो रंडी थी । सेटताली ने उसको छोड़ दिया। फिर आर्य समाज में आकर वह हिन्दू बना । विवेकानन्द नाम स्वीकार किया । अब वह अच्छा है। शादी की बात कहने पर चन्तप्पन को - नहीं, विवेकानन्द को गुस्सा आ जाता है. चन्तप्पन की प्रणय-कथा सुनकर कृष्णन मास्टर हँस पड़े । "महिला को देखकर मोहित होने पर पुरुष की हालत गधे की तरह हो जाती है।" कृष्णन मास्टर हँसते हुए बोले, "मैंने भी एक लड़की से प्यार किया था । वह घटना सुनना चाहोगे ?" पिताजी के इश्क की कथा सुनने के लिए श्रीधरन कान खड़े कर वहीं बैठा रहा । श्रीधरन को डर था कि पिताजी उसको उठकर चले जाने का आदेश देंगे । श्रीधरन के न सुनने लायक कोई बात होती तो पिताजी श्रीधरन से कहते कि तू अपने कमरे में जाकर सबक पढ़, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा । इतना ही नहीं, श्रीधरन को लगा कि अपने बेटे को सुनाने के वास्ते ही बांबूजी यह कथा कह रहे हैं । कृष्णन मास्टर की पुरानी मोहब्बत की दास्तान का सार कुछ इस प्रकार था : कृष्णन मास्टर के टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल में पढ़ने का जमाना । मोहल्ले के एक पुराने घराने की एक सुन्दर युवती से कृष्णन मास्टर की आँखें चार हुई उन्होंने उससे शादी करने के इरादे से ऐसा किया था । लेकिन युवती को जरा सन्देह था कि इस दीवाने ने शादी किये बिना ही उसे छोड़ दिया तो "। उसे मालूम हो गया था कि उसकी खूबसूरती पर मास्टर लट्टू हो गये हैं । वह अनपढ़ थी । एक दिन शाम को कृष्णन मास्टर ने ट्रेनिंग स्कूल से वापस आते समय एक अजनबी इन्सान को रास्ते में इन्तजार करते हुए देखा । मास्टर को देखने पर उसने बड़े अदब से प्रणाम किया । कृष्णन मास्टर की उस प्रिया ने एक गुप्त संदेश के साथ ही उस नौजवान को भेजा था । वह चार मील दूर मामा के घर जा रही है, कल रात वहाँ आने पर सुविधापूर्वक बातचीत हो सकती है। यही संदेश था । इस प्रेम-संदेश से कृष्णन मास्टर के रोंगटे खड़े हो गये । "उससे कहो कि कल मिलेंगे ।" मास्टर ने जवाब दिया । घर जाने के बाद उस पर पुनः विचार किया । ज़रा विवेक का उदय हुआ । वापसी - फिर एक बार :: तीन सौ ग्यारह गुप्त- संदेश देनेवाले व्यक्ति के बारे में स्मरण किया। सफेद हट्टा-कट्टा नौजवान। लम्बे बाल, ललाट पर सिंदूर उसने गुप्त संदेश उसी युवक के द्वारा दिया था। " ऐसी हालत में इन दोनों के बीच भी गुप्त सम्वन्ध जरूर होगा । मास्टर अगली रात उससे मिलने नहीं गये । फिर कभी नहीं गये । प्रेम करने में ही नहीं, पुरुषों को धोखा देने और अपमानित करने में भी इन महिलाओं को एक खास खुशी महसूस होती है। एक भी महिला पर विश्वास नहीं करना चाहिए । जो पुरुष प्रेम के जाल में फँसा कि वस एक गधा बन जाता है। वह असलियत नहीं जान पाता कृष्णन मास्टर ने अपनी पुरानी मुहव्वत की दास्तान यों खतम की । श्रीधरन के लिए यह कोई तत्वोपदेश नहीं था । वर्षों पहले रावुत्तर मौलवी ने जो गीत गाया था, वह उसके कानों में गूंज रहा था"आट्टेयुं काट्टेयुं नंपलाम् - अन्त शेल केट्टिय मातरै नंपलाम्" पंद्रह. कडुवा, खट्टा, तीखा और मोठा प्रकृति के रंगमंच पर बारिश का नाच शुरू हो गया । श्रीधरन को बारिश का मौसम पसन्द है । जब पहले-पहल वर्षा होती है तब वह बड़ी उमंग से आँगन में झूम-झूमकर नाच उठता है । बरामदे के सामने जलबिन्दुओं के नीचे गिरने पर कई आकार के बुलबुले पैदा होते । उनके पैदा होने, रेंगने और फिर एकाएक फूट जाने अर्थात् सृष्टि-स्थिति-संहार लीलाओं को वह उत्सुकता से देखता । हवा में पेड़ों के शिखरों को झूमते और पौधों को नृत्य करते देखकर वह खुश होता । वर्षाऋतु को आधार बनाकर उसने एक कविता भी लिखी है : "स्वच्छ विभा डूब, कारी बदरियों का क्रीडांगन हो गया सारा आकाश । कल-कल ध्वनि में 'बीज खंता' 'बीज खंता' गाती चिड़ियाँ भी उड़ गयीं कहीं । रंग बदल सारी धरा ने कपिल कंचुक ओढ़ा ! सूखी पत्तियाँ उड़ जातीधूल भरी झँझा के झोंके में । इन्द्रधनुष की रंग-छटा उदित हुई शीतल नभ की छाती पर तीन सौ बारह :: कथा एक प्रान्तर की " चन्द्रमा ने डाल दिया घूंघट नव वर्षा से आलिंगित मिट्टी की मदगन्ध पवन में भर गयी । वर्षा ऋतु के नर्तन में बज उठे मंडूक ताल मेघ गर्जन और ठण्डी पुरवैया को ले साथ ऋषभ मध्य एक भी आ गया लो । मूसलाधार वर्षा से घाट डूवे, रास्ते हुए बन्द । हरियाली ओढ़े आ पहुँची आद्रा दोरवि संगम की नव वेला हुई काली मिर्च की लताएँ फूली फलीं । खेत-खेत की मेड़ें, पगडंडियाँ और मिट्टी की दीवारें लाँघ, बढ़ आया बाढ़ का पानी घरों के आँगन को पार कर । बारिश में आँगन की जलधारा में बहाने के लिए कागज़ के बहुरंगी जहाज़ देने वाले गोपालन भैया की भी याद आयी । रात को वर्षा-देवता एक बड़ा ऑरकेस्ट्रा शुरू करता । मेंढकों का नगाड़ा, छोटे मेंढकों का मृदंग, झिल्लियों का रव - मूसलाधार वर्षा का शोर भी । युगों के उस पार के ध्वनि- आलोक में श्रीधरन की आत्मा लीन हो जाती उसमें लीन होकर वह सो जाता । आज वर्षाऋतु अपने सभी आकर्षक कार्यक्रमों के साथ जारी है तो भी श्रीधरन उस पर ध्यान दिये बिना घर के बरामदे में विषाद-भरे मन से मूक बना बैठा है । छोटी-छोटी चिन्ताएँ वर्षा के पानी के बुलबुले की तरह उठती-फूटती रहती हैं । इण्टरमीडियेट पब्लिक परीक्षाफल कल अखबार में प्रकाशित हुआ । श्रीधरन का नम्बर नहीं था ~इम्तहान में हार गया है । उस दुष्ट गणित ने ही धोखा दिया होगा । परीक्षाफल ज्ञात होने पर पिताजी ने डाँटा नहीं, सान्त्वना भी नहीं दी - उन्होंने कुछ नहीं कहा - सिर्फ 'हूँ' की आवाज़ प्रकट की। एक. 'ऋषभ मध्य' मानसून की वर्षा जो केरल में बैशाख महीने में शुरू होती है । दो. भाद्रा में सूर्य की स्थिति खेती शुरू करने की सूचक है । कड़वा, खट्टा, तीखा और मीठा :: तीन सौ तेरह
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दिलेर समाचार, कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे अपनी फिल्म 'पति, पत्नी और वो' के प्रचार के लिए दिल्ली आए। यहां के एयरोसिटी स्थित होटल प्राइड प्लाजा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलाकारों ने मीडिया से खुलकर बातें कीं।
बता दें कि यह फिल्म एक रोमांटिक-कॉमेडी है, जो मुदस्सर अजीज द्वारा निर्देशित और भूषण कुमार और रेणु रवि चोपड़ा द्वारा निर्मित है। यह 6 दिसंबर, 2019 को रिलीज होगी।
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दिलेर समाचार, कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे अपनी फिल्म 'पति, पत्नी और वो' के प्रचार के लिए दिल्ली आए। यहां के एयरोसिटी स्थित होटल प्राइड प्लाजा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलाकारों ने मीडिया से खुलकर बातें कीं। बता दें कि यह फिल्म एक रोमांटिक-कॉमेडी है, जो मुदस्सर अजीज द्वारा निर्देशित और भूषण कुमार और रेणु रवि चोपड़ा द्वारा निर्मित है। यह छः दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को रिलीज होगी।
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धर्मशाला - स्मार्ट सिटी धर्मशाला में बेसहारा पशुओं का कोई सहारा नहीं है। धौलाधार की वादियों सहित निचले क्षेत्रों में बर्फबारी, ठंड, बारिश और हवाओं के प्रकोप में बेसहारा पशु ठिठुर रहे हैं। लेकिन सरकार, प्रशासन, नगर निगम और पशुपालन विभाग मात्र मूकदर्शक बना हुआ है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार के शीतलकालीन प्रवास के समय चली मुहिम भी अब पूरी तरह से हवा-हवाई हो गई है। जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला में कुछ दिनांे से कड़ाके की ठंड के साथ बारिश लगातार कहर ढहा रही है। जिससे बचने के लिए लोग अपने घरांे से बाहर निकलने से भी कतरा रहे है, और घरांे मंे आग सेंकने और गर्म कपड़ों से लिपटने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सड़कांे पर बेसहारा पशु बारिश में भीग रहे हैं, और अपने सिर पर छत के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं। इन बेसहारा पशुआंे के लिए कोई भी ठिकाना ही अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। दिन-प्रतिदिन इन बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला मुख्यालय धर्मशाला के साथ ही सराह गांव मे गोशाला चलाई जा रही है। बावजूद इसके सड़कांे पर अब भी आवारा पशु घूमते हुए बड़ी मात्रा में नजर आ रहे हंै। प्रशासन की ऐसी लापरवाही से बेसहारा पशु कभी बंद दुकानों, रेन शेल्टर और यहां तक मिनी सचिवालय में बनी पार्किंग का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में इन बेसहारा पशुओं की जान भी खतरे मे पड़ रही है। शहर के मुख्य स्थानों कोतवाली की सड़कों, कचहरी चौक, चीलगाड़ी की सड़कों सहित रामनगर-श्यामनगर व अन्य क्षेत्रों में हर समय बेसहारा पशुओं को देखा जा सकता है। धर्मशाला में दिसंबर को आयोजित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार को दिखाने के लिए बेसहारा पशुओं को गोशाला में भेजने की एक मुहिम भी चलाई गई थी। जिसमें नगर निगम व प्रशासन ने मिलकर शहर के पशुओं को गोसदन में भेजा था। लेकिन उसके बाद बेसहारा पशु फिर से स्मार्ट सिटी की सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। जिसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रशासन, निगम व विभाग की लापरवाही के कारण पशु सड़कों पर ही घूम रहे हैं। धर्मशाला के मिनी सचिवालय में बनी गाडि़यों की पार्किंग में भी पशुओं ने अपना बसेरा बनाया हुआ है।
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धर्मशाला - स्मार्ट सिटी धर्मशाला में बेसहारा पशुओं का कोई सहारा नहीं है। धौलाधार की वादियों सहित निचले क्षेत्रों में बर्फबारी, ठंड, बारिश और हवाओं के प्रकोप में बेसहारा पशु ठिठुर रहे हैं। लेकिन सरकार, प्रशासन, नगर निगम और पशुपालन विभाग मात्र मूकदर्शक बना हुआ है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार के शीतलकालीन प्रवास के समय चली मुहिम भी अब पूरी तरह से हवा-हवाई हो गई है। जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला में कुछ दिनांे से कड़ाके की ठंड के साथ बारिश लगातार कहर ढहा रही है। जिससे बचने के लिए लोग अपने घरांे से बाहर निकलने से भी कतरा रहे है, और घरांे मंे आग सेंकने और गर्म कपड़ों से लिपटने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सड़कांे पर बेसहारा पशु बारिश में भीग रहे हैं, और अपने सिर पर छत के लिए इधर-उधर घूम रहे हैं। इन बेसहारा पशुआंे के लिए कोई भी ठिकाना ही अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। दिन-प्रतिदिन इन बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला मुख्यालय धर्मशाला के साथ ही सराह गांव मे गोशाला चलाई जा रही है। बावजूद इसके सड़कांे पर अब भी आवारा पशु घूमते हुए बड़ी मात्रा में नजर आ रहे हंै। प्रशासन की ऐसी लापरवाही से बेसहारा पशु कभी बंद दुकानों, रेन शेल्टर और यहां तक मिनी सचिवालय में बनी पार्किंग का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में इन बेसहारा पशुओं की जान भी खतरे मे पड़ रही है। शहर के मुख्य स्थानों कोतवाली की सड़कों, कचहरी चौक, चीलगाड़ी की सड़कों सहित रामनगर-श्यामनगर व अन्य क्षेत्रों में हर समय बेसहारा पशुओं को देखा जा सकता है। धर्मशाला में दिसंबर को आयोजित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार को दिखाने के लिए बेसहारा पशुओं को गोशाला में भेजने की एक मुहिम भी चलाई गई थी। जिसमें नगर निगम व प्रशासन ने मिलकर शहर के पशुओं को गोसदन में भेजा था। लेकिन उसके बाद बेसहारा पशु फिर से स्मार्ट सिटी की सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। जिसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रशासन, निगम व विभाग की लापरवाही के कारण पशु सड़कों पर ही घूम रहे हैं। धर्मशाला के मिनी सचिवालय में बनी गाडि़यों की पार्किंग में भी पशुओं ने अपना बसेरा बनाया हुआ है।
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खुदरा महंगाई 14. 12 प्रतिशत बढ़ गई है, सब्जियों की कीमतों में 60 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। यह ऐसे समय हुआ है जब वित्त मंत्री बजट तैयार करने में मशगूल हैं। प्रधानमंत्री चुप हैं तो गृह मंत्री नागरिकता क़ानून को सख़्ती से कुचलने में लगे हुए हैं। क्या अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने के लिए यह सब हो रहा है? सत्य हिन्दी पर देखें प्रमोद मल्लिक का विश्लेषण।
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खुदरा महंगाई चौदह. बारह प्रतिशत बढ़ गई है, सब्जियों की कीमतों में साठ प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। यह ऐसे समय हुआ है जब वित्त मंत्री बजट तैयार करने में मशगूल हैं। प्रधानमंत्री चुप हैं तो गृह मंत्री नागरिकता क़ानून को सख़्ती से कुचलने में लगे हुए हैं। क्या अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने के लिए यह सब हो रहा है? सत्य हिन्दी पर देखें प्रमोद मल्लिक का विश्लेषण।
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डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। Dainik Panchang 7 September 2021: मंगलवार 7 सितंबर को अमावस्या तिथि 06:22:00 तक तदोपरान्त प्रतिपदा तिथि है। अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं। मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है। आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें। इस तिथि में कांसे के पात्र में भोजन करना मना है। यह तिथि पितृ कार्य और शल्य क्रिया के लिए शुभ है। दिन का शुभ मुहूर्त, दिशाशूल की स्थिति, राहुकाल एवं गुलिक काल की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी आगे दी गई है।
विशेषः- मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
तिथि स्वामीः- अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं।
नक्षत्र स्वामीः- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव जी हैं तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी हैं।
दिशाशूलः- आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें।
तिथि का महत्वः- इस तिथि में कांसे के पात्र में भोजन करना मना है। यह तिथि पितृ कार्य और शल्य क्रिया के लिए शुभ है।
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डाॅ. त्रिलोकीनाथ । Dainik Panchang सात सितंबरtember दो हज़ार इक्कीस: मंगलवार सात सितंबर को अमावस्या तिथि छः:बाईस:शून्य तक तदोपरान्त प्रतिपदा तिथि है। अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं। मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है। आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें। इस तिथि में कांसे के पात्र में भोजन करना मना है। यह तिथि पितृ कार्य और शल्य क्रिया के लिए शुभ है। दिन का शुभ मुहूर्त, दिशाशूल की स्थिति, राहुकाल एवं गुलिक काल की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी आगे दी गई है। विशेषः- मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है। तिथि स्वामीः- अमावस्या तिथि के स्वामी पित्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं। नक्षत्र स्वामीः- पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव जी हैं तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी हैं। दिशाशूलः- आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें। तिथि का महत्वः- इस तिथि में कांसे के पात्र में भोजन करना मना है। यह तिथि पितृ कार्य और शल्य क्रिया के लिए शुभ है।
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मोदी कैबिनेट का विस्तार (Photo Credit: फाइल)
नई दिल्लीः
नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के दूसरे कार्यकाल का लगभग आधा कार्यकाल समाप्ति की ओर है. बुधवार को मोदी 2. 0 कार्यकाल वाली सरकार का पहली बार कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) हो रहा है. थोड़ी देर में राष्ट्रपति भवन (President House) में 43 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी. मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) में इस बार कई नये चेहरों को मौका दिया जा सकता है. वहीं इस बार कुछ दिग्गजों की छुट्टी भी की जा सकती है. कुछ दिग्गजों की इस बार मंत्रिमंडल से हटाया भी गया है.
पंकज चौधरी ने ली राज्य मंत्री पद की शपथ, यूपी के महाराजगंज से सांसद हैं. 2019 में छठी बार लोकसभा सांसद बने हैं.
पुरुषोत्तम रुपाला को भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ.
अनुराग ठाकुर ने भी ली कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ.
बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव को भी राष्ट्रपति कोविंद ने दिलाई कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ. भूपेंद्र यादव ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी.
RCP singh ने जैसे ही कैबिनेट मंत्री की पद और गोपनीयता की शपथ ली, पार्टी ऑफिस में ढोल नगाड़े, अबीर और मिठाई का दौर शुरू हो गया.
मनसुख मांडविया को भी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मनसुख को कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपनी जगह बरकरार रखी उन्होंने भी ली कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ.
एलजेपी के मुखिया पशुपति पारस (पशुपति पारस गुट) ने मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली.
डॉ. वीरेंद्र कुमार भी बने मोदी सरकार में मंत्री ली पद और गोपनीयता की शपथ.
बिहार के रामचंद्र प्रसाद सिंह ने ली कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ.
पिछले साल मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ली कैबिनेट मंत्री पद की शपथ.
असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी ली कैबिनेट मंत्री पद की शपथ.
सबसे पहले महाराष्ट्र के नारायण राणे ने ली केंद्रीय मंत्री पद की शपथ.
राष्ट्रपति भवन में बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर, रवि शंकर प्रसाद, हर्षवर्धन कार्यक्रम में मौजूद. इस कैबिनेट विस्तार में 43 नए मंत्री शामिल होंगे.
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मोदी कैबिनेट का विस्तार नई दिल्लीः नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का लगभग आधा कार्यकाल समाप्ति की ओर है. बुधवार को मोदी दो. शून्य कार्यकाल वाली सरकार का पहली बार कैबिनेट विस्तार हो रहा है. थोड़ी देर में राष्ट्रपति भवन में तैंतालीस नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी. मोदी कैबिनेट में इस बार कई नये चेहरों को मौका दिया जा सकता है. वहीं इस बार कुछ दिग्गजों की छुट्टी भी की जा सकती है. कुछ दिग्गजों की इस बार मंत्रिमंडल से हटाया भी गया है. पंकज चौधरी ने ली राज्य मंत्री पद की शपथ, यूपी के महाराजगंज से सांसद हैं. दो हज़ार उन्नीस में छठी बार लोकसभा सांसद बने हैं. पुरुषोत्तम रुपाला को भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ. अनुराग ठाकुर ने भी ली कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ. बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव को भी राष्ट्रपति कोविंद ने दिलाई कैबिनेट मंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ. भूपेंद्र यादव ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी. RCP singh ने जैसे ही कैबिनेट मंत्री की पद और गोपनीयता की शपथ ली, पार्टी ऑफिस में ढोल नगाड़े, अबीर और मिठाई का दौर शुरू हो गया. मनसुख मांडविया को भी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मनसुख को कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. पूर्व केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपनी जगह बरकरार रखी उन्होंने भी ली कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ. एलजेपी के मुखिया पशुपति पारस ने मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली. डॉ. वीरेंद्र कुमार भी बने मोदी सरकार में मंत्री ली पद और गोपनीयता की शपथ. बिहार के रामचंद्र प्रसाद सिंह ने ली कैबिनेट मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ. पिछले साल मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ली कैबिनेट मंत्री पद की शपथ. असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी ली कैबिनेट मंत्री पद की शपथ. सबसे पहले महाराष्ट्र के नारायण राणे ने ली केंद्रीय मंत्री पद की शपथ. राष्ट्रपति भवन में बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर, रवि शंकर प्रसाद, हर्षवर्धन कार्यक्रम में मौजूद. इस कैबिनेट विस्तार में तैंतालीस नए मंत्री शामिल होंगे.
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"इंस्पेक्टर" - पिस्सू की एक बूंद और टिक, जो दोनों कुत्तों और बिल्लियों के लिए उपयुक्त हैं। अपने पालतू जानवरों, जो अक्सर सड़क पर होता है के लिए गर्मी के समय सुरक्षा में, यह बहुत जरूरी है, क्योंकि पशु बस कीट का एक समूह के अधिग्रहण नहीं करता है, लेकिन यह भी विभिन्न रोगों, जो टिक और पिस्सू ले से संक्रमित हो सकता है। इस लेख में हम कैसे बूंदें, दवा के प्रयोग से बचना चाहिए जो मामलों में और कहा कि वे पालतू पशु मालिकों जो अपने पसंदीदा पर बूंदों का परीक्षण किया है का कहना है कि लागू करने के लिए के बारे में बात करेंगे।
कंपनी Ekoprom - रूस में निर्मित "इंस्पेक्टर", निर्माता के चला जाता है।
दवा केवल बाहरी उपयोग के लिए है। एक समाधान है, जो एक पीला पीले या बेरंग तेल तरल है, जो बहुलक पिपेट 0. 4 में पैक किया जाता है के रूप में उपलब्ध; 1; 2. 5; 4 मिलीलीटर। ये pipettes प्लास्टिक छाले, जो शिक्षा के साथ एक गत्ता बॉक्स में रखा गया था में पैक कर रहे हैं।
"इंस्पेक्टर '- 0 डिग्री सेल्सियस - - 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर एक अंधेरे, सूखी फ़ीड और भोजन, से दूर जगह में जानवरों संग्रहीत करने की आवश्यकता है, पैक उत्पादों की बूँदें पैकेज बूँदें खोलने तुरंत इस्तेमाल किया जाना चाहिए के बाद, उन्हें क्लियर अस्वीकार्य में संग्रहीत करते हैं। तैयारी उत्पादन की तारीख से 3 साल के लिए फिट है।
कुत्तों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है एक संयोजन कर रहे हैं antiparasitic तैयारी पिस्सू, नेमाटोड, चिमटा, sarkoptoidnyh, Ixodes और demodectic के कण के लिए।
सामग्रीः
- Fipronil - 10%;
- moxidectin - 2. 5%;
- polyethylene glycol - 28. 4%;
- डी इ एम इ - 58. 8%;
- BHT - 0. 1%;
- बीएचए -0. 2%।
Fipronil और mokidektin - की दवा मुख्य सक्रिय तत्व। Fipronil गाबा रिसेप्टर्स निर्भर arthropods कि तंत्रिका आवेग संचरण के विघटन के लिए आता है और एक परिणाम के बाद पक्षाघात और परजीवी की मौत के रूप में, पर एक अवरुद्ध कार्रवाई है। Moxidectin मांसपेशियों, जो भी पक्षाघात और नेमाटोड और ectoparasites के बाद मौत हो जाती है का उल्लंघन है।
एक बार जब Fipronil त्वचा पर दिखाई देता है, यह लगभग लथपथ, जानवर के शरीर में फैल, बाल और बाह्य त्वचा पर तय कर रहे हैं। यहां उन्होंने एक लंबे समय के लिए अपने प्रभाव बनाए रखने में सक्षम है। Moxidectin, इसके विपरीत, तेजी से अवशोषित कर लेता है, खून, अंगों और ऊतकों में प्रवेश। मल के साथ बरकरार उत्सर्जित।
दवा 6 सप्ताह, टिक के खिलाफ 4 हफ्तों के लिए पिस्सू के खिलाफ पहले उपचार के बाद पशु सुरक्षा करता है।
"इंस्पेक्टर" - बूँदें, सुरक्षा और बिल्लियों और विभिन्न खून चूसने परजीवी से कुत्तों के उद्धार के लिए बनाया गया। इसके अलावा, विभिन्न helminths, उदाहरण के लिए, नेमाटोड, और अन्य पेट का कीड़ा परजीवी के खिलाफ दवा काम करता है।
दवा रोकथाम और निम्न बीमारियों के इलाज के लिए निर्धारित किया गया हैः
- enthomosis;
- demodicosis;
- otodektoz;
- akaroz;
- sarcoptic मांगे;
- nematodosiss जठरांत्र पथ (trichuriasis, untsinarioz, Toxocara, हुकवर्म, toksaskaridoz);
- dirofilariasis।
"इंस्पेक्टर" - बूँदें, जो खतरे के 3 वर्ग के हैं, यानी वे कर रहे हैं गर्म खून वाले जानवरों के शरीर के लिए "मामूली खतरनाक"। आप खुराक निर्देशों में उल्लेख किया से अधिक नहीं है, तो आप कोई त्वचा पर जलन या अन्य दुष्प्रभाव होना चाहिए। इसके अलावा, बूंदों पशु की प्रतिरक्षा प्रणाली पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं है और भ्रूण के लिए हानिकारक हैं।
हालांकि, उपकरण मधुमक्खियों, खरगोश, मछली और अन्य जलीय जीव (जलीय जीवन) के लिए विषाक्त है।
दवा की एक सही आवेदन के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए आवश्यक हैः
- बूंदों किसी भी नुकसान के बिना साफ करने के लिए, शुष्क त्वचा लागू होते हैं। दवा जगह में pipetted जहां पशु nedotyagivaet भाषा, उदाहरण के लिए, स्कंध पर ब्लेड के क्षेत्र में।
- आदेश है कि बूंदों ठीक त्वचा के लिए मारा में, यह ऊन और pointwise लागू किया एजेंट पुश करने के लिए आवश्यक है।
- एक छोटे से जानवर हैं, तैयारी एक ही स्थान पर डाल करने के लिए पर्याप्त होगा। आप एक बड़े कुत्ते के मालिक हैं, तो सबसे अच्छी बात 3-4 अंक पर कार्रवाई करने के "इंस्पेक्टर" पूरे शरीर पालतू की रक्षा के लिए किया जाएगा। दवा के आवेदन के लिए एक जगह का चयन, याद रखें कि जानवर तक पहुँचने के लिए नहीं है।
- एक बार उपकरण लागू किया गया है, पालतू अगले चार दिनों में धोया नहीं किया जाना चाहिए।
क्षति की राशि दवा पशु के वजन पर निर्भर करता हैः
- 1 से 4 किलो से पालतू जानवरों के लिए। - 0. 4 मिलीलीटर।
- जो लोग 4 से 10 किलो से वजन के लिए। - 1 मिलीलीटर।
- 2. 5 मिलीलीटर - उन जिसका वजन 10 से 25 के बीच और किलोग्राम है।
- और 24 से 40 किलो से पालतू जानवरों के लिए। - 4 मिलीलीटर।
अपने पशु 40 से अधिक किलो वजन, तो खुराक 0. 1 मिलीग्राम की दर से निर्धारित किया गया है। प्रति किलोग्राम पालतू वजन।
दवा कितनी बार का उपयोग करें?
आवेदन करने वाले दवा "इंस्पेक्टर नियमों से ऊपर प्रस्तुत किए गए '(कुत्तों के लिए चला जाता है)। निर्देश, तथापि, निर्देश और पर देना कितनी बार यह पिस्सू से पशु को संभालने के लिए आवश्यक है, जूँ और टिक्स।
परजीवी, पर्याप्त सिर्फ एक बार की एक बूंद डाल करने से पशुओं को बचाने के लिए। फिर भी यदि आप फिर से संक्रमण को रोकने के लिए चाहते हैं, उपचार खून चूसने परजीवी की गतिविधि की पूरी अवधि के दौरान हर 4-6 सप्ताह किया जाना चाहिए।
दवा 24 घंटे के बाद प्रभावी होता है। तो अगर आप के कण की संख्या ने साथ क्षेत्रों में अपने पालतू चलने के लिए निर्णय लेते हैं, उपचार की योजना बनाई की पैदल दूरी से एक दिन पहले बाहर किया जाना चाहिए।
अटक टिक नष्ट करने के लिए, परजीवी ही है, और जगह पर दवा की 1 बूंद के लिए जो यह जुड़ा हुआ है लागू होते हैं। 20 मिनट के भीतर यह गिर चाहिए। यदि नहीं, तो निर्धारित समय की समाप्ति को ध्यान से टिक चिमटी से हटाने और नष्ट कर।
जब (कान के कण की वजह से एक रोग) बाहरी कान मार्ग crusts और scabs से शुद्ध otodektoza इलाज है, तो टपकता 3-4 प्रत्येक कान साधन में चला जाता है (प्रत्येक कान में दवा को पेश करने के लिए आवश्यक है, फिर भी यहां तक कि केवल अगर एक हिट)। Zama अपने आधार के साथ कान और मालिश गुना करने के लिए। तैयारी के अवशेषों कंधे की हड्डियों के बीच लागू किया जाता है। 2 से 3 गुना से 10 दिन, - उपचार हर 7 बाहर किया जाना चाहिए। यह आवश्यक हो जाता है, तो उपचार एक महीने के बाद दोहराया जा सकता है।
"इंस्पेक्टर" - कुत्तों, अनुदेश के जो यहां प्रस्तुत किया है, जो sarcoptic मांगे और demodectic मांगे के इलाज के लिए उपयुक्त हैं के लिए चला जाता है। इस तैयारी प्रति पालतू जानवर की 1 किलो वजन 0. 1 मिलीलीटर की दर से एक पतली परत के साथ शरीर की पहले से साफ प्रभावित क्षेत्रों के लिए लागू किया जाता है। जब लागू करते समय आपको स्वस्थ त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर कब्जा करने की जरूरत है। 7 से 10 दिनों के अंतराल पर 4 बार - उपचार 2 बाहर किया जाना चाहिए।
घावों भी कई हैं, की प्रक्रिया एक दिन के अंतराल के साथ दो चरणों में किया जाना है। आप इसे करने के लिए देखना होगा कि पशु आवेदन के बाद पहले 20 मिनट के भीतर बूँदें चाटना नहीं है।
कुत्तों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है साइड इफेक्ट की एक संख्या है, लेकिन आमतौर पर जानवरों बहुत अच्छी तरह से स्थानांतरित कर रहे हैं। उनमें से, खुजली और त्वचा की लालिमा। ये लक्षण धीरे-धीरे दूर जाना।
दवा एलर्जी हो सकती है। इस मामले में, यह जानवर धोने और एंटीथिस्टेमाइंस देने के लिए आवश्यक है।
पालतू में अधिक मात्रा के मामलों अवसाद का अनुभव हो सकता है, लार, उल्टी और मांसपेशियों झटके वृद्धि हुई है। जब दवा अनुभव इस तरह के लक्षण तुरंत इसे बंद धोना चाहिए।
बिल्लियों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है और कुत्तों सभी जानवरों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। हम मुख्य सीमाओं की सूचीः
- दवा बिल्ली के बच्चे और puppies कि नहीं किया है अभी तक 7 सप्ताह कर दिया डाल करने के लिए निषिद्ध है।
- यदि पशु बीमार या सिर्फ बरामद है, बच्चे के जन्म के बाद कमजोर या आप lactones साथ अपने पालतू दवाओं दे रहे हैं।
- सावधान रहें, यदि एक पालतू एलर्जी होने का खतरा है।
- बूंदों घटकों के अतिसंवेदनशीलता।
- निषिद्ध दवा कान कान वेध में पैदा किया।
- अस्वीकार्य संभाल पालतू जानवर जिसका वजन 1 किलो तक पहुंच नहीं है।
- अन्य Antiparasitic एजेंटों के साथ संयोजन के रूप में "इंस्पेक्टर" का प्रयोग न करें।
- महिला गर्भवती या नर्सिंग के लिए दवा लागू करने से पहले, एक पशु चिकित्सक से परामर्श करें।
दवा सकारात्मक प्रतिक्रिया और सिफारिशों का एक बहुत है। कुत्ते के मालिक से अधिकांश, धन का उपयोग करने के लिए, नोट्स इसकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता - "इंस्पेक्टर" कुत्ते की रक्षा करता है, के निर्देश दिए के रूप में एक महीने के लिए,। संकेत देखते हैं हालांकि कुछ जानवरों कोई लाभ नहीं हुआ इसका मतलब है कि। हालांकि, वे बहुत छोटे होते हैं।
इसके अलावा, "इंस्पेक्टर" पेशेवरों के बीच प्रजनक उपयोग में आसानी, उपलब्धता vetaptekah, स्वीकार्य लागत, और कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला का कहना है। दवा के मुख्य नुकसान - एक किसी न किसी प्रकार गंध, असुविधाजनक पैकेजिंग, केवल एक महीने की वैधता।
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"इंस्पेक्टर" - पिस्सू की एक बूंद और टिक, जो दोनों कुत्तों और बिल्लियों के लिए उपयुक्त हैं। अपने पालतू जानवरों, जो अक्सर सड़क पर होता है के लिए गर्मी के समय सुरक्षा में, यह बहुत जरूरी है, क्योंकि पशु बस कीट का एक समूह के अधिग्रहण नहीं करता है, लेकिन यह भी विभिन्न रोगों, जो टिक और पिस्सू ले से संक्रमित हो सकता है। इस लेख में हम कैसे बूंदें, दवा के प्रयोग से बचना चाहिए जो मामलों में और कहा कि वे पालतू पशु मालिकों जो अपने पसंदीदा पर बूंदों का परीक्षण किया है का कहना है कि लागू करने के लिए के बारे में बात करेंगे। कंपनी Ekoprom - रूस में निर्मित "इंस्पेक्टर", निर्माता के चला जाता है। दवा केवल बाहरी उपयोग के लिए है। एक समाधान है, जो एक पीला पीले या बेरंग तेल तरल है, जो बहुलक पिपेट शून्य. चार में पैक किया जाता है के रूप में उपलब्ध; एक; दो. पाँच; चार मिलीलीटर। ये pipettes प्लास्टिक छाले, जो शिक्षा के साथ एक गत्ता बॉक्स में रखा गया था में पैक कर रहे हैं। "इंस्पेक्टर '- शून्य डिग्री सेल्सियस - - तीस डिग्री सेल्सियस के तापमान पर एक अंधेरे, सूखी फ़ीड और भोजन, से दूर जगह में जानवरों संग्रहीत करने की आवश्यकता है, पैक उत्पादों की बूँदें पैकेज बूँदें खोलने तुरंत इस्तेमाल किया जाना चाहिए के बाद, उन्हें क्लियर अस्वीकार्य में संग्रहीत करते हैं। तैयारी उत्पादन की तारीख से तीन साल के लिए फिट है। कुत्तों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है एक संयोजन कर रहे हैं antiparasitic तैयारी पिस्सू, नेमाटोड, चिमटा, sarkoptoidnyh, Ixodes और demodectic के कण के लिए। सामग्रीः - Fipronil - दस%; - moxidectin - दो. पाँच%; - polyethylene glycol - अट्ठाईस. चार%; - डी इ एम इ - अट्ठावन. आठ%; - BHT - शून्य. एक%; - बीएचए -शून्य. दो%। Fipronil और mokidektin - की दवा मुख्य सक्रिय तत्व। Fipronil गाबा रिसेप्टर्स निर्भर arthropods कि तंत्रिका आवेग संचरण के विघटन के लिए आता है और एक परिणाम के बाद पक्षाघात और परजीवी की मौत के रूप में, पर एक अवरुद्ध कार्रवाई है। Moxidectin मांसपेशियों, जो भी पक्षाघात और नेमाटोड और ectoparasites के बाद मौत हो जाती है का उल्लंघन है। एक बार जब Fipronil त्वचा पर दिखाई देता है, यह लगभग लथपथ, जानवर के शरीर में फैल, बाल और बाह्य त्वचा पर तय कर रहे हैं। यहां उन्होंने एक लंबे समय के लिए अपने प्रभाव बनाए रखने में सक्षम है। Moxidectin, इसके विपरीत, तेजी से अवशोषित कर लेता है, खून, अंगों और ऊतकों में प्रवेश। मल के साथ बरकरार उत्सर्जित। दवा छः सप्ताह, टिक के खिलाफ चार हफ्तों के लिए पिस्सू के खिलाफ पहले उपचार के बाद पशु सुरक्षा करता है। "इंस्पेक्टर" - बूँदें, सुरक्षा और बिल्लियों और विभिन्न खून चूसने परजीवी से कुत्तों के उद्धार के लिए बनाया गया। इसके अलावा, विभिन्न helminths, उदाहरण के लिए, नेमाटोड, और अन्य पेट का कीड़ा परजीवी के खिलाफ दवा काम करता है। दवा रोकथाम और निम्न बीमारियों के इलाज के लिए निर्धारित किया गया हैः - enthomosis; - demodicosis; - otodektoz; - akaroz; - sarcoptic मांगे; - nematodosiss जठरांत्र पथ ; - dirofilariasis। "इंस्पेक्टर" - बूँदें, जो खतरे के तीन वर्ग के हैं, यानी वे कर रहे हैं गर्म खून वाले जानवरों के शरीर के लिए "मामूली खतरनाक"। आप खुराक निर्देशों में उल्लेख किया से अधिक नहीं है, तो आप कोई त्वचा पर जलन या अन्य दुष्प्रभाव होना चाहिए। इसके अलावा, बूंदों पशु की प्रतिरक्षा प्रणाली पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं है और भ्रूण के लिए हानिकारक हैं। हालांकि, उपकरण मधुमक्खियों, खरगोश, मछली और अन्य जलीय जीव के लिए विषाक्त है। दवा की एक सही आवेदन के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए आवश्यक हैः - बूंदों किसी भी नुकसान के बिना साफ करने के लिए, शुष्क त्वचा लागू होते हैं। दवा जगह में pipetted जहां पशु nedotyagivaet भाषा, उदाहरण के लिए, स्कंध पर ब्लेड के क्षेत्र में। - आदेश है कि बूंदों ठीक त्वचा के लिए मारा में, यह ऊन और pointwise लागू किया एजेंट पुश करने के लिए आवश्यक है। - एक छोटे से जानवर हैं, तैयारी एक ही स्थान पर डाल करने के लिए पर्याप्त होगा। आप एक बड़े कुत्ते के मालिक हैं, तो सबसे अच्छी बात तीन-चार अंक पर कार्रवाई करने के "इंस्पेक्टर" पूरे शरीर पालतू की रक्षा के लिए किया जाएगा। दवा के आवेदन के लिए एक जगह का चयन, याद रखें कि जानवर तक पहुँचने के लिए नहीं है। - एक बार उपकरण लागू किया गया है, पालतू अगले चार दिनों में धोया नहीं किया जाना चाहिए। क्षति की राशि दवा पशु के वजन पर निर्भर करता हैः - एक से चार किलो से पालतू जानवरों के लिए। - शून्य. चार मिलीलीटर। - जो लोग चार से दस किलो से वजन के लिए। - एक मिलीलीटर। - दो. पाँच मिलीलीटर - उन जिसका वजन दस से पच्चीस के बीच और किलोग्राम है। - और चौबीस से चालीस किलो से पालतू जानवरों के लिए। - चार मिलीलीटर। अपने पशु चालीस से अधिक किलो वजन, तो खुराक शून्य. एक मिलीग्राम की दर से निर्धारित किया गया है। प्रति किलोग्राम पालतू वजन। दवा कितनी बार का उपयोग करें? आवेदन करने वाले दवा "इंस्पेक्टर नियमों से ऊपर प्रस्तुत किए गए '। निर्देश, तथापि, निर्देश और पर देना कितनी बार यह पिस्सू से पशु को संभालने के लिए आवश्यक है, जूँ और टिक्स। परजीवी, पर्याप्त सिर्फ एक बार की एक बूंद डाल करने से पशुओं को बचाने के लिए। फिर भी यदि आप फिर से संक्रमण को रोकने के लिए चाहते हैं, उपचार खून चूसने परजीवी की गतिविधि की पूरी अवधि के दौरान हर चार-छः सप्ताह किया जाना चाहिए। दवा चौबीस घंटाटे के बाद प्रभावी होता है। तो अगर आप के कण की संख्या ने साथ क्षेत्रों में अपने पालतू चलने के लिए निर्णय लेते हैं, उपचार की योजना बनाई की पैदल दूरी से एक दिन पहले बाहर किया जाना चाहिए। अटक टिक नष्ट करने के लिए, परजीवी ही है, और जगह पर दवा की एक बूंद के लिए जो यह जुड़ा हुआ है लागू होते हैं। बीस मिनट के भीतर यह गिर चाहिए। यदि नहीं, तो निर्धारित समय की समाप्ति को ध्यान से टिक चिमटी से हटाने और नष्ट कर। जब बाहरी कान मार्ग crusts और scabs से शुद्ध otodektoza इलाज है, तो टपकता तीन-चार प्रत्येक कान साधन में चला जाता है । Zama अपने आधार के साथ कान और मालिश गुना करने के लिए। तैयारी के अवशेषों कंधे की हड्डियों के बीच लागू किया जाता है। दो से तीन गुना से दस दिन, - उपचार हर सात बाहर किया जाना चाहिए। यह आवश्यक हो जाता है, तो उपचार एक महीने के बाद दोहराया जा सकता है। "इंस्पेक्टर" - कुत्तों, अनुदेश के जो यहां प्रस्तुत किया है, जो sarcoptic मांगे और demodectic मांगे के इलाज के लिए उपयुक्त हैं के लिए चला जाता है। इस तैयारी प्रति पालतू जानवर की एक किलो वजन शून्य. एक मिलीलीटर की दर से एक पतली परत के साथ शरीर की पहले से साफ प्रभावित क्षेत्रों के लिए लागू किया जाता है। जब लागू करते समय आपको स्वस्थ त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर कब्जा करने की जरूरत है। सात से दस दिनों के अंतराल पर चार बार - उपचार दो बाहर किया जाना चाहिए। घावों भी कई हैं, की प्रक्रिया एक दिन के अंतराल के साथ दो चरणों में किया जाना है। आप इसे करने के लिए देखना होगा कि पशु आवेदन के बाद पहले बीस मिनट के भीतर बूँदें चाटना नहीं है। कुत्तों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है साइड इफेक्ट की एक संख्या है, लेकिन आमतौर पर जानवरों बहुत अच्छी तरह से स्थानांतरित कर रहे हैं। उनमें से, खुजली और त्वचा की लालिमा। ये लक्षण धीरे-धीरे दूर जाना। दवा एलर्जी हो सकती है। इस मामले में, यह जानवर धोने और एंटीथिस्टेमाइंस देने के लिए आवश्यक है। पालतू में अधिक मात्रा के मामलों अवसाद का अनुभव हो सकता है, लार, उल्टी और मांसपेशियों झटके वृद्धि हुई है। जब दवा अनुभव इस तरह के लक्षण तुरंत इसे बंद धोना चाहिए। बिल्लियों के लिए "इंस्पेक्टर" चला जाता है और कुत्तों सभी जानवरों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। हम मुख्य सीमाओं की सूचीः - दवा बिल्ली के बच्चे और puppies कि नहीं किया है अभी तक सात सप्ताह कर दिया डाल करने के लिए निषिद्ध है। - यदि पशु बीमार या सिर्फ बरामद है, बच्चे के जन्म के बाद कमजोर या आप lactones साथ अपने पालतू दवाओं दे रहे हैं। - सावधान रहें, यदि एक पालतू एलर्जी होने का खतरा है। - बूंदों घटकों के अतिसंवेदनशीलता। - निषिद्ध दवा कान कान वेध में पैदा किया। - अस्वीकार्य संभाल पालतू जानवर जिसका वजन एक किलो तक पहुंच नहीं है। - अन्य Antiparasitic एजेंटों के साथ संयोजन के रूप में "इंस्पेक्टर" का प्रयोग न करें। - महिला गर्भवती या नर्सिंग के लिए दवा लागू करने से पहले, एक पशु चिकित्सक से परामर्श करें। दवा सकारात्मक प्रतिक्रिया और सिफारिशों का एक बहुत है। कुत्ते के मालिक से अधिकांश, धन का उपयोग करने के लिए, नोट्स इसकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता - "इंस्पेक्टर" कुत्ते की रक्षा करता है, के निर्देश दिए के रूप में एक महीने के लिए,। संकेत देखते हैं हालांकि कुछ जानवरों कोई लाभ नहीं हुआ इसका मतलब है कि। हालांकि, वे बहुत छोटे होते हैं। इसके अलावा, "इंस्पेक्टर" पेशेवरों के बीच प्रजनक उपयोग में आसानी, उपलब्धता vetaptekah, स्वीकार्य लागत, और कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला का कहना है। दवा के मुख्य नुकसान - एक किसी न किसी प्रकार गंध, असुविधाजनक पैकेजिंग, केवल एक महीने की वैधता।
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पटना में 23 जून को देशभर के भाजपा विरोधी दलों की प्रस्तावित बैठक के लिए तैयारी चरम पर है। गुरुवार से कई नेता आने भी लगेंगे और शुक्रवार सुबह तक सभी आ भी जाएंगे। बैठक में प्रधानमंत्री पद को लेकर मन में सभी के रहेगा, बोलेंगे कोई नहीं- यह भी लगभग तय है। विपक्षी दलों के बीच राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस पीएम पद को लेकर क्या समझौता करेगी, यह इस पोस्टर से दिख रहा है। बिहार विधानसभा के सामने एक विधायक ने पोस्टर लगाकर कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी को भावी प्रधानमंत्री घोषित कर दिया है। पोस्टर वैशाली के राजापकार की विधायक प्रतिमा कुमारी दास की ओर से लगा है, हालांकि उन्होंने यह ध्यान नहीं दिया कि कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी की सांसदी तक जा चुकी है।
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पटना में तेईस जून को देशभर के भाजपा विरोधी दलों की प्रस्तावित बैठक के लिए तैयारी चरम पर है। गुरुवार से कई नेता आने भी लगेंगे और शुक्रवार सुबह तक सभी आ भी जाएंगे। बैठक में प्रधानमंत्री पद को लेकर मन में सभी के रहेगा, बोलेंगे कोई नहीं- यह भी लगभग तय है। विपक्षी दलों के बीच राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस पीएम पद को लेकर क्या समझौता करेगी, यह इस पोस्टर से दिख रहा है। बिहार विधानसभा के सामने एक विधायक ने पोस्टर लगाकर कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी को भावी प्रधानमंत्री घोषित कर दिया है। पोस्टर वैशाली के राजापकार की विधायक प्रतिमा कुमारी दास की ओर से लगा है, हालांकि उन्होंने यह ध्यान नहीं दिया कि कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी की सांसदी तक जा चुकी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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सुहागन महिलाओं को अपने सिन्दूर को बाहर खुले में नहीं रखना चाहिए। साथ ही सिंदूर की डिब्बी को ज्यादा सजाकर भी नहीं रखना चाहिए। सिंदूर पर किया गया टोटका बहुत भयानक होता है। इससे आपके पति की मृत्यु तक की साजिश की जाती है। उन्हें खून की उल्टियां तक हो सकती हैं।
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सुहागन महिलाओं को अपने सिन्दूर को बाहर खुले में नहीं रखना चाहिए। साथ ही सिंदूर की डिब्बी को ज्यादा सजाकर भी नहीं रखना चाहिए। सिंदूर पर किया गया टोटका बहुत भयानक होता है। इससे आपके पति की मृत्यु तक की साजिश की जाती है। उन्हें खून की उल्टियां तक हो सकती हैं।
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"क्यों ?" माँ के स्वर में शंका का सम्मिश्रण और अधिक हो गया । "क्या बहू पसन्द नहीं आयी ?"
"नहीं पसन्द है।" विवश क्रोध के तूफ़ान को मन ही में दबाते हुए, पराजित होकर उस ने कहा । ऊपरश में धीरे-धीरे चाँद की तड़प थक गयी थी और चारोंछा गया था । वृजेश ने छलकोप भीतर चला
गया । नरेन्द्र ने उसे कितना समझाया था, कितना कहा था कि अतिरिक्त किसी पर भरोसा न करो । लेकिन बड़ा कलाकार बनता था चह् ! अपनी इस कलाकारिता के दर्प में उसने अपना ही बिगाड़ा, उस गरीब का भविष्य भी तबाह कर दिया, जो न जाने कितनी अभिलाषाएँ, कितनी लालसाएँ मन में लिए, सोहागरात की उस सेज पर बैठी थी-उसे क्या अधिकार था उस के जीवन को यो कारमय बनाने का ? मूर्ख, अपने किये का दंड भोग-निबाह !
परन्तु तभी उसे विचार आया कि महज़ कलाकार होने को तो बात न थी । जब उस ने सगाई से पहले अपनी पत्नी को देखना चाहा था ने तो उसकी माँ ने उस की बहन का ज़िक्र किया था कि यदि तुम्हारी बहन को कोई देखकर नापसन्द कर दे ? और वह निरुत्तर हो गया था । दुर्बलता पर उसे क्रोध हो । वाह क्या तर्क
है क्योंकि उसकी बहन सुन्दर है इसलिए उसे सुन्दर पत्नी पाने काहीं। और उसका मन अपनी माँ, अपनी बहन, स्वयं अपने विरुद्ध एक असह्य क्रोध और ग्लानि से भर आया, किन्तु क्रोध का यह तूफ़ान उस के अन्तर ही में उठता रहा, उस के मुख पर उसका प्रतिबिम्ब तक न आया।
वैवाहिक जीवन के उन पहले चार दिनों में बृजेश की दशा उस नौका की सी थी जो तूफ़ानी लहरों में घिरी कभी डूबतो और कभी
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"क्यों ?" माँ के स्वर में शंका का सम्मिश्रण और अधिक हो गया । "क्या बहू पसन्द नहीं आयी ?" "नहीं पसन्द है।" विवश क्रोध के तूफ़ान को मन ही में दबाते हुए, पराजित होकर उस ने कहा । ऊपरश में धीरे-धीरे चाँद की तड़प थक गयी थी और चारोंछा गया था । वृजेश ने छलकोप भीतर चला गया । नरेन्द्र ने उसे कितना समझाया था, कितना कहा था कि अतिरिक्त किसी पर भरोसा न करो । लेकिन बड़ा कलाकार बनता था चह् ! अपनी इस कलाकारिता के दर्प में उसने अपना ही बिगाड़ा, उस गरीब का भविष्य भी तबाह कर दिया, जो न जाने कितनी अभिलाषाएँ, कितनी लालसाएँ मन में लिए, सोहागरात की उस सेज पर बैठी थी-उसे क्या अधिकार था उस के जीवन को यो कारमय बनाने का ? मूर्ख, अपने किये का दंड भोग-निबाह ! परन्तु तभी उसे विचार आया कि महज़ कलाकार होने को तो बात न थी । जब उस ने सगाई से पहले अपनी पत्नी को देखना चाहा था ने तो उसकी माँ ने उस की बहन का ज़िक्र किया था कि यदि तुम्हारी बहन को कोई देखकर नापसन्द कर दे ? और वह निरुत्तर हो गया था । दुर्बलता पर उसे क्रोध हो । वाह क्या तर्क है क्योंकि उसकी बहन सुन्दर है इसलिए उसे सुन्दर पत्नी पाने काहीं। और उसका मन अपनी माँ, अपनी बहन, स्वयं अपने विरुद्ध एक असह्य क्रोध और ग्लानि से भर आया, किन्तु क्रोध का यह तूफ़ान उस के अन्तर ही में उठता रहा, उस के मुख पर उसका प्रतिबिम्ब तक न आया। वैवाहिक जीवन के उन पहले चार दिनों में बृजेश की दशा उस नौका की सी थी जो तूफ़ानी लहरों में घिरी कभी डूबतो और कभी
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लखीमपुर के खीरी थाना क्षेत्र के गांव में एक प्रेमी जोड़े का शव एक साथ पेड़ पर लटका मिला और मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर-खीरी (Lakhimpur Kheri) जिले के खीरी थाना क्षेत्र के निजामपुर रामदास गांव में दो शव एक साथ गांव के बाहर लटकते हुए दिखाई दिए. दोनों शवों की पहचान सुग्रीम के बेटे प्रीतम उर्फ जग्गा और शिवकुमार की बेटी चांदनी के रूप में हुई. गांव में पेड़ में लटके शव मिलने के बाद चांदनी के भाई सूरज ने पुलिस को सूचना दी और उसने पुलिस को बताया कि चांदनी देर रात घर से गायब हो गई. वहीं घर के सामने रहने वाले प्रीतम को कुछ पता भी नहीं था. जानकारी के मुताबिक चांदनी के परिजन गुमशुदगी दर्ज कराने पुलिस चौकी जा रहे थे, तभी दोनों के शवों की जानकारी मिली.
वहीं गांव को लोगों का कहना है कि दोनों ने प्रेम प्रसंग में फांसी लगाकर आत्महत्या की है. क्योंकि दोनों ही एक ही जाति के हैं और कुछ दिनों में चांदनी की शादी होने वाली थी. फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जानकारी के मुताबिक लड़की के परिजन शुक्रवार को सिकंदराबाद जाने वाले थे. थाना खीरी क्षेत्र के निजामपुर रामदास गांव में रहने वाले प्रीतम उर्फ जग्गा को घर के सामने रहने वाली चांदनी से अफेयर चल रहा था. दोनों के बीच पिछले चार साल से रिश्ते चल रहे थे लेकिन परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि दोनों साथ रहें और शादी करें. वहीं दोनों की जाति एक होने के कारण शादी की बात नहीं बन पा रही थी.
वहीं लोगों का कहना है कि परिजनों ने दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने. दोनों मिलते थे और इसके कारण परिवार की भी बदनामी हो रही थी. इससे परेशान होकर लड़की के परिजनों ने उसकी शादी की तलाश शुरू कर दी थी. लेकिन जब प्रेमी जोड़े को इसकी जानकारी हुई तो दोनों ने साथ मरने की योजना बनाई.
घर के लोगों का कहना है कि रात करीब दो बजे परिजनों ने देखा कि घर के दरवाजे खुले हुए हैं और चांदनी अपने बिस्तर से गायब थी. उसकी तलाश की गई और जब परिजन लड़के के घर गए तो पता चला कि वह भी घर से गायब है. रात में दोनों को तलाशा गया. लेकिन दोनों में से कोई नहीं मिला. वहीं सुबह दोनों के शव गांव के बाहर रस्सी के सहारे नीम के पेड़ से लटके मिले.
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लखीमपुर के खीरी थाना क्षेत्र के गांव में एक प्रेमी जोड़े का शव एक साथ पेड़ पर लटका मिला और मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले के खीरी थाना क्षेत्र के निजामपुर रामदास गांव में दो शव एक साथ गांव के बाहर लटकते हुए दिखाई दिए. दोनों शवों की पहचान सुग्रीम के बेटे प्रीतम उर्फ जग्गा और शिवकुमार की बेटी चांदनी के रूप में हुई. गांव में पेड़ में लटके शव मिलने के बाद चांदनी के भाई सूरज ने पुलिस को सूचना दी और उसने पुलिस को बताया कि चांदनी देर रात घर से गायब हो गई. वहीं घर के सामने रहने वाले प्रीतम को कुछ पता भी नहीं था. जानकारी के मुताबिक चांदनी के परिजन गुमशुदगी दर्ज कराने पुलिस चौकी जा रहे थे, तभी दोनों के शवों की जानकारी मिली. वहीं गांव को लोगों का कहना है कि दोनों ने प्रेम प्रसंग में फांसी लगाकर आत्महत्या की है. क्योंकि दोनों ही एक ही जाति के हैं और कुछ दिनों में चांदनी की शादी होने वाली थी. फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जानकारी के मुताबिक लड़की के परिजन शुक्रवार को सिकंदराबाद जाने वाले थे. थाना खीरी क्षेत्र के निजामपुर रामदास गांव में रहने वाले प्रीतम उर्फ जग्गा को घर के सामने रहने वाली चांदनी से अफेयर चल रहा था. दोनों के बीच पिछले चार साल से रिश्ते चल रहे थे लेकिन परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि दोनों साथ रहें और शादी करें. वहीं दोनों की जाति एक होने के कारण शादी की बात नहीं बन पा रही थी. वहीं लोगों का कहना है कि परिजनों ने दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने. दोनों मिलते थे और इसके कारण परिवार की भी बदनामी हो रही थी. इससे परेशान होकर लड़की के परिजनों ने उसकी शादी की तलाश शुरू कर दी थी. लेकिन जब प्रेमी जोड़े को इसकी जानकारी हुई तो दोनों ने साथ मरने की योजना बनाई. घर के लोगों का कहना है कि रात करीब दो बजे परिजनों ने देखा कि घर के दरवाजे खुले हुए हैं और चांदनी अपने बिस्तर से गायब थी. उसकी तलाश की गई और जब परिजन लड़के के घर गए तो पता चला कि वह भी घर से गायब है. रात में दोनों को तलाशा गया. लेकिन दोनों में से कोई नहीं मिला. वहीं सुबह दोनों के शव गांव के बाहर रस्सी के सहारे नीम के पेड़ से लटके मिले.
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फीरोजाबाद : भाजपा नेता के भाई सुमन हत्याकांड के आरोपी अशोक दीक्षित की कब्जे में ली गई संपत्ति तहसील प्रशासन ने किराए पर उठा दी है। यह व्यवस्था हाईकोर्ट के अग्रिम आदेश तक रहेगी।
12 अक्टूबर, 2007 को भाजपा नेता लक्ष्मीनारायण यादव के भाई सुमन यादव की हत्या हुई थी। रिपोर्ट ट्रांसपोर्ट व्यवसायी अशोक दीक्षित व पप्पू दीक्षित आदि के खिलाफ दर्ज हुई थी। वर्ष 2008 में अशोक दीक्षित आदि पर गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर 12 नवंबर को तहसीलदार जीत सिंह राय ने फोर्स की मौजूदगी में अशोक दीक्षित की सदर बाजार स्थित दो दुकानें और हनुमान रोड स्थित मकान को अपने कब्जे में लिया था।
सदर तहसील में इस संपत्ति को नीलामी प्रक्रिया के तहत किराए पर उठाया गया। हनुमान रोड स्थित मकान की सर्वाधिक बोली आठ हजार रुपये प्रतिमाह परमिंदर सिंह पुत्र परम जीत सिंह की रही। इस पर उन्हें यह मकान किराए पर एक साल के लिए दिया गया है। इसी तरह सदर बाजार स्थित एक दुकान 1100 रुपये प्रतिमाह अशोक पाल सिंह पुत्र बिहारीलाल और दूसरी दुकान टीम चंद्र जैन पुत्र संजय जैन को 1200 रुपये प्रतिमाह दी गई है। तहसीलदार जीत सिंह राय ने बताया हाईकोर्ट के आदेश पर अशोक दीक्षित की संपत्ति एक साल के लिए किराए पर दी गई है।
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फीरोजाबाद : भाजपा नेता के भाई सुमन हत्याकांड के आरोपी अशोक दीक्षित की कब्जे में ली गई संपत्ति तहसील प्रशासन ने किराए पर उठा दी है। यह व्यवस्था हाईकोर्ट के अग्रिम आदेश तक रहेगी। बारह अक्टूबर, दो हज़ार सात को भाजपा नेता लक्ष्मीनारायण यादव के भाई सुमन यादव की हत्या हुई थी। रिपोर्ट ट्रांसपोर्ट व्यवसायी अशोक दीक्षित व पप्पू दीक्षित आदि के खिलाफ दर्ज हुई थी। वर्ष दो हज़ार आठ में अशोक दीक्षित आदि पर गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर बारह नवंबर को तहसीलदार जीत सिंह राय ने फोर्स की मौजूदगी में अशोक दीक्षित की सदर बाजार स्थित दो दुकानें और हनुमान रोड स्थित मकान को अपने कब्जे में लिया था। सदर तहसील में इस संपत्ति को नीलामी प्रक्रिया के तहत किराए पर उठाया गया। हनुमान रोड स्थित मकान की सर्वाधिक बोली आठ हजार रुपये प्रतिमाह परमिंदर सिंह पुत्र परम जीत सिंह की रही। इस पर उन्हें यह मकान किराए पर एक साल के लिए दिया गया है। इसी तरह सदर बाजार स्थित एक दुकान एक हज़ार एक सौ रुपयापये प्रतिमाह अशोक पाल सिंह पुत्र बिहारीलाल और दूसरी दुकान टीम चंद्र जैन पुत्र संजय जैन को एक हज़ार दो सौ रुपयापये प्रतिमाह दी गई है। तहसीलदार जीत सिंह राय ने बताया हाईकोर्ट के आदेश पर अशोक दीक्षित की संपत्ति एक साल के लिए किराए पर दी गई है।
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गौनाहा प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका ने मंगलवार को 17 सूत्री मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया। बाल विकास परियोजना कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिला महासचिव सुमन वर्मा ने कहा कि वे लोग 31 अगस्त से हड़ताल पर हैं। किन्तु सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है। जून माह से पोषाहार बंद है। सरकार द्वारा डीवीडी के माध्यम से सभी लाभुकों के खाता में पोषाहार राशि देने की बात कही गई थी लेकिन ना पोषाहार दी गई ना ही पोषाहार की राशि ही दी गई। गर्भवती, धात्री , अति कुपोषित, कुपोषित लाभुकों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है साथ ही सेविकाओं के मानदेय की बढ़ोतरी भी नहीं हो रही है। किन्तु किसी प्रकार का लाभ नहीं दिया जाता है। मौके पर जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष स्नेहलता कुमारी, जिला संगठन प्रभारी अजय वर्मा , संध्या देवी, लालती देवी, कल्याणी काजी, सत्या देवी, रिचा शर्मा, सरोज देवी थे।
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गौनाहा प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका ने मंगलवार को सत्रह सूत्री मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया। बाल विकास परियोजना कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिला महासचिव सुमन वर्मा ने कहा कि वे लोग इकतीस अगस्त से हड़ताल पर हैं। किन्तु सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है। जून माह से पोषाहार बंद है। सरकार द्वारा डीवीडी के माध्यम से सभी लाभुकों के खाता में पोषाहार राशि देने की बात कही गई थी लेकिन ना पोषाहार दी गई ना ही पोषाहार की राशि ही दी गई। गर्भवती, धात्री , अति कुपोषित, कुपोषित लाभुकों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है साथ ही सेविकाओं के मानदेय की बढ़ोतरी भी नहीं हो रही है। किन्तु किसी प्रकार का लाभ नहीं दिया जाता है। मौके पर जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष स्नेहलता कुमारी, जिला संगठन प्रभारी अजय वर्मा , संध्या देवी, लालती देवी, कल्याणी काजी, सत्या देवी, रिचा शर्मा, सरोज देवी थे।
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GORAKHPUR: एनई रेलवे के जीएम राजीव मिश्र ने गुरुवार को ललित नारायण मिश्र रेलवे अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के आखिरी चरण में दवाओं के स्टोर में गए जीएम ने दवाओं की कमी मिलने पर जिम्मेदारों को जमकर फटकार लगाई। जीएम ने कहा कि जब दवा नहीं खरीद सकते तो खरीद की जिम्मेदारी किसी और को क्यों न दे दिया जाए। जीएम को अस्पताल में तय स्टॉक से आधे से भी कम दवाएं उपलब्ध मिली। इससे पहले वाडरें के निरीक्षण के दौरान मरीजों व उनके परिजनों ने भी जीएम से अव्यवस्था को लेकर शिकायत की। जीएम वाडरें व परिसर की साफ-सफाई तथा मरीजों व परिजनों के हित में किए गए कई अन्य कार्यो से प्रसन्न भी हुए और अस्पताल प्रबंधन के लिए 75 हजार रुपए का इनाम घोषित किया।
जीएम राजीव मिश्र गुरुवार सुबह करीब 11. 10 बजे रेलवे अस्पताल पहुंचे। जीएम ने सबसे पहले आईसीयू का निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्था से संतुष्टि जताते हुए मिश्र ने कुछ और बेड बढ़ाने की आवश्यकता बताई। आईसीयू से निकलकर वह ओपीडी गए अैर वहां का निरीक्षण किया। ओपीडी में भी लगभग सभी चीजें संतोषजनक मिली। एक दवा काउंटर बंद देखकर जीएम ने हर हाल में सभी दवा काउंटरों को खुला रखने का निर्देश दिया। इसके बाद जीएम विभिन्न वार्डो में जांच करने पहुंचे। न्यू मेडिकल वार्ड में अच्छी व्यवस्था देखकर जीएम ने प्रसन्नता जाहिर की। इसके अलावा, फिमेल व मेल सर्जिकल वार्ड, आर्थो वार्ड, जनरल मेल वार्ड में जीएम ने साफ-सफाई पर संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण पर आए जीएम से मिलकर मरीजों व परिजनों से व्यवस्था को लेकर शिकायत भी की। मरीजों की शिकायत थी कि डॉक्टर राउंड पर नियमित रूप से नहीं आते। आते भी हैं तो लेट-लतीफ। यह शिकायत सुनकर जीएम ने सीएमडी डॉ। सतीश चंद्रा से कहा कि चेंबर से बाहर निकलिए, तब व्यवस्थाएं सुधरेंगी। मिश्र ने निर्देश दिया कि सभी डॉक्टर समय से ओपीडी में जाएं, वाडरें में राउंड पर जाएं। मरीजों को संतुष्ट करना ही डॉक्टर का पहला काम है।
जीएम इसके बाद परिसर होते हुए स्टोर में पहुंचे और वहां मौजूद फार्मासिस्ट से दवा की उपलब्धता के बारे में पूछा तो उन्हें केवल 40 प्रतिशत दवाएं उपलब्ध होने की बात बताई गई। यह सुनकर जीएम ने नाराजगी व्यक्त की। जीएम ने कारण पूछा तो पता चला कि टेंडर फाइनल नहीं हो सके हैं। इस तरह की धीमी कार्यशैली पर जीएम ने दो टूक कहा कि यदि आप लोग दवा नहीं खरीद सकते तो यह जिम्मेदारी रेलवे के स्टोर विभाग को क्यों न दे दी जाए। उन्होंने हर हाल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने का निर्देश दिया। जीएम करीब ढाई घंटे बाद अपराह्न करीब पौने दो बजे अस्पताल से बाहर निकले।
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GORAKHPUR: एनई रेलवे के जीएम राजीव मिश्र ने गुरुवार को ललित नारायण मिश्र रेलवे अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के आखिरी चरण में दवाओं के स्टोर में गए जीएम ने दवाओं की कमी मिलने पर जिम्मेदारों को जमकर फटकार लगाई। जीएम ने कहा कि जब दवा नहीं खरीद सकते तो खरीद की जिम्मेदारी किसी और को क्यों न दे दिया जाए। जीएम को अस्पताल में तय स्टॉक से आधे से भी कम दवाएं उपलब्ध मिली। इससे पहले वाडरें के निरीक्षण के दौरान मरीजों व उनके परिजनों ने भी जीएम से अव्यवस्था को लेकर शिकायत की। जीएम वाडरें व परिसर की साफ-सफाई तथा मरीजों व परिजनों के हित में किए गए कई अन्य कार्यो से प्रसन्न भी हुए और अस्पताल प्रबंधन के लिए पचहत्तर हजार रुपए का इनाम घोषित किया। जीएम राजीव मिश्र गुरुवार सुबह करीब ग्यारह. दस बजे रेलवे अस्पताल पहुंचे। जीएम ने सबसे पहले आईसीयू का निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्था से संतुष्टि जताते हुए मिश्र ने कुछ और बेड बढ़ाने की आवश्यकता बताई। आईसीयू से निकलकर वह ओपीडी गए अैर वहां का निरीक्षण किया। ओपीडी में भी लगभग सभी चीजें संतोषजनक मिली। एक दवा काउंटर बंद देखकर जीएम ने हर हाल में सभी दवा काउंटरों को खुला रखने का निर्देश दिया। इसके बाद जीएम विभिन्न वार्डो में जांच करने पहुंचे। न्यू मेडिकल वार्ड में अच्छी व्यवस्था देखकर जीएम ने प्रसन्नता जाहिर की। इसके अलावा, फिमेल व मेल सर्जिकल वार्ड, आर्थो वार्ड, जनरल मेल वार्ड में जीएम ने साफ-सफाई पर संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण पर आए जीएम से मिलकर मरीजों व परिजनों से व्यवस्था को लेकर शिकायत भी की। मरीजों की शिकायत थी कि डॉक्टर राउंड पर नियमित रूप से नहीं आते। आते भी हैं तो लेट-लतीफ। यह शिकायत सुनकर जीएम ने सीएमडी डॉ। सतीश चंद्रा से कहा कि चेंबर से बाहर निकलिए, तब व्यवस्थाएं सुधरेंगी। मिश्र ने निर्देश दिया कि सभी डॉक्टर समय से ओपीडी में जाएं, वाडरें में राउंड पर जाएं। मरीजों को संतुष्ट करना ही डॉक्टर का पहला काम है। जीएम इसके बाद परिसर होते हुए स्टोर में पहुंचे और वहां मौजूद फार्मासिस्ट से दवा की उपलब्धता के बारे में पूछा तो उन्हें केवल चालीस प्रतिशत दवाएं उपलब्ध होने की बात बताई गई। यह सुनकर जीएम ने नाराजगी व्यक्त की। जीएम ने कारण पूछा तो पता चला कि टेंडर फाइनल नहीं हो सके हैं। इस तरह की धीमी कार्यशैली पर जीएम ने दो टूक कहा कि यदि आप लोग दवा नहीं खरीद सकते तो यह जिम्मेदारी रेलवे के स्टोर विभाग को क्यों न दे दी जाए। उन्होंने हर हाल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने का निर्देश दिया। जीएम करीब ढाई घंटे बाद अपराह्न करीब पौने दो बजे अस्पताल से बाहर निकले।
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प्रमुख संस्थान : 1- इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली. 2- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, चेन्नई. 3- मणिपाल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मणिपाल. 4- राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इंदौर. 5- कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोच्चि. (मिताली जैन)
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प्रमुख संस्थान : एक- इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली. दो- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, चेन्नई. तीन- मणिपाल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मणिपाल. चार- राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इंदौर. पाँच- कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोच्चि.
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आपको बता दें कि मामलों की ट्रैकिंग एक पोर्टल के माध्यम से की जाती है। इसे यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग प्रणाली (ITSSO) के रूप में जाना जाता है। ये यौन उत्पीड़न के मामलों में पुलिस जांच की समय पर निगरानी और ट्रैक करने के लिए 2018 में शुरू किया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि वेबसाइट का रखरखाव राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा किया जाता है।
"इसके साथ, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों की निगरानी और काम करने के लिए जिलों में एक समर्पित सेल के साथ दो स्तरीय प्रणाली बनाई गई, और तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए लखनऊ में एक मुख्यालय बनाया गया है। संबंधित पुलिस प्रमुख जिला प्रकोष्ठों में मामलों की निगरानी कर रहे हैं। " एडीजी रावत ने कहा।
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आपको बता दें कि मामलों की ट्रैकिंग एक पोर्टल के माध्यम से की जाती है। इसे यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग प्रणाली के रूप में जाना जाता है। ये यौन उत्पीड़न के मामलों में पुलिस जांच की समय पर निगरानी और ट्रैक करने के लिए दो हज़ार अट्ठारह में शुरू किया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि वेबसाइट का रखरखाव राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा किया जाता है। "इसके साथ, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों की निगरानी और काम करने के लिए जिलों में एक समर्पित सेल के साथ दो स्तरीय प्रणाली बनाई गई, और तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए लखनऊ में एक मुख्यालय बनाया गया है। संबंधित पुलिस प्रमुख जिला प्रकोष्ठों में मामलों की निगरानी कर रहे हैं। " एडीजी रावत ने कहा। This website uses cookies.
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भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब प्रदर्शन जारी है। सिंगापुर ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता के दूसरे दौर में भारत के खिलाड़ियों की हार के साथ भारतीय चुनौती समाप्त हो गई है। पुरुष सिंगल्स के दूसरे दौर में पूर्व विश्व नंबर 1 किदाम्बी श्रीकांत की हार के साथ देश के खिलाड़ियों का अभियान खत्म हो गया।
विश्व नंबर 23 श्रीकांत को रैंकिंग में 42वें स्थान पर मौजूद ताईवान के चिया हाओ ली के हाथों सीधे सेटों में 21-15, 21-19 से हार मिली। श्रीकांत ने साल 2019 में इंडियन ओपन के रूप में अपना आखिरी BWF सिंगल्स खिताब जीता था। वहीं भारत के प्रियांशु राजावत को भी दूसरे दौर में हार झेलनी पड़ी। प्रियांशु को तीसरी सीड जापान के कोडाई नाराओका ने 21-17, 21-16 से हराने में कामयाबी हासिल की। नाराओका ने पहले दौर में एच एस प्रणॉय को हराकर बाहर किया था। लक्ष्य सेन भी पहले दौर में हारकर बाहर हो चुके हैं।
पुरुष डबल्स के दूसरे दौर में भारत के एमआर अर्जुन-ध्रुव कपिला की जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी को इंग्लैंड के बेन लेन और शॉन वेन्डी की जोड़ी ने 21-15, 21-19 से मात दी। भारत की टॉप डबल्स जोड़ी सात्विक साईंराज-चिराग शेट्टी प्रतियोगिता के पहले दौर में हार चुकी है। ऐसे में पुरुष डबल्स में भारत की चुनौती समाप्त हो गई है।
भारत के लिए इस बार सिंगापुर ओपन में सभी परिणाम बेहद खराब रहे हैं। पिछले साल पीवी सिंधू टूर्नामेंट में महिला सिंगल्स चैंपियन बनीं थीं जबकि इस बार वह पहले ही दौर में हार गईं। पूर्व विश्व नंबर 1 साइना नेहवाल भी इस बार पहले राउंड से आगे नहीं बढ़ पाईं। पुरुष सिंगल्स में पिछले साल क्वार्टर-फाइनल तक पहुंचने वाले प्रणॉय इस बार एक भी मैच नहीं जीत पाए।
मौजूदा सीजन बैडमिंटन के लिहाज से देश के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए खास नहीं रहा है। पूरे साल में प्रियांशु राजावत, एच एस प्रणॉय ही BWF वर्ल्ड टूर लेवल का सिंगल्स खिताब जीत पाए हैं। वहीं डबल्स में सात्विक और चिराग की जोड़ी को एक ट्रॉफी हासिल हुई है।
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भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब प्रदर्शन जारी है। सिंगापुर ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता के दूसरे दौर में भारत के खिलाड़ियों की हार के साथ भारतीय चुनौती समाप्त हो गई है। पुरुष सिंगल्स के दूसरे दौर में पूर्व विश्व नंबर एक किदाम्बी श्रीकांत की हार के साथ देश के खिलाड़ियों का अभियान खत्म हो गया। विश्व नंबर तेईस श्रीकांत को रैंकिंग में बयालीसवें स्थान पर मौजूद ताईवान के चिया हाओ ली के हाथों सीधे सेटों में इक्कीस-पंद्रह, इक्कीस-उन्नीस से हार मिली। श्रीकांत ने साल दो हज़ार उन्नीस में इंडियन ओपन के रूप में अपना आखिरी BWF सिंगल्स खिताब जीता था। वहीं भारत के प्रियांशु राजावत को भी दूसरे दौर में हार झेलनी पड़ी। प्रियांशु को तीसरी सीड जापान के कोडाई नाराओका ने इक्कीस-सत्रह, इक्कीस-सोलह से हराने में कामयाबी हासिल की। नाराओका ने पहले दौर में एच एस प्रणॉय को हराकर बाहर किया था। लक्ष्य सेन भी पहले दौर में हारकर बाहर हो चुके हैं। पुरुष डबल्स के दूसरे दौर में भारत के एमआर अर्जुन-ध्रुव कपिला की जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी को इंग्लैंड के बेन लेन और शॉन वेन्डी की जोड़ी ने इक्कीस-पंद्रह, इक्कीस-उन्नीस से मात दी। भारत की टॉप डबल्स जोड़ी सात्विक साईंराज-चिराग शेट्टी प्रतियोगिता के पहले दौर में हार चुकी है। ऐसे में पुरुष डबल्स में भारत की चुनौती समाप्त हो गई है। भारत के लिए इस बार सिंगापुर ओपन में सभी परिणाम बेहद खराब रहे हैं। पिछले साल पीवी सिंधू टूर्नामेंट में महिला सिंगल्स चैंपियन बनीं थीं जबकि इस बार वह पहले ही दौर में हार गईं। पूर्व विश्व नंबर एक साइना नेहवाल भी इस बार पहले राउंड से आगे नहीं बढ़ पाईं। पुरुष सिंगल्स में पिछले साल क्वार्टर-फाइनल तक पहुंचने वाले प्रणॉय इस बार एक भी मैच नहीं जीत पाए। मौजूदा सीजन बैडमिंटन के लिहाज से देश के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए खास नहीं रहा है। पूरे साल में प्रियांशु राजावत, एच एस प्रणॉय ही BWF वर्ल्ड टूर लेवल का सिंगल्स खिताब जीत पाए हैं। वहीं डबल्स में सात्विक और चिराग की जोड़ी को एक ट्रॉफी हासिल हुई है।
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यहां हम आपको बढ़िया क्वालिटी का Weight Gainer के बारे में बताएंगे। यह बॉडी को जरूरी पोषण देते हैं। इससे मसल्स रिकवर होती हैं और नई मसल्स बनती भी हैं। इनसे आप भी अपनी पर्सनैलिटी को निखार सकते हैं और तेजी से मसल्स वाली टोन्ड बॉडी पा सकते हैं।
Muscletech Whey Protein Peptides & Isolate :
Endura Mass Weight Gainer :
Powerus Raw Whey Protein :
Nutrition Vegan Protein Drink For Men :
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Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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यहां हम आपको बढ़िया क्वालिटी का Weight Gainer के बारे में बताएंगे। यह बॉडी को जरूरी पोषण देते हैं। इससे मसल्स रिकवर होती हैं और नई मसल्स बनती भी हैं। इनसे आप भी अपनी पर्सनैलिटी को निखार सकते हैं और तेजी से मसल्स वाली टोन्ड बॉडी पा सकते हैं। Muscletech Whey Protein Peptides & Isolate : Endura Mass Weight Gainer : Powerus Raw Whey Protein : Nutrition Vegan Protein Drink For Men : Essential Series Platinum MultiVitamin : नोट : Amazon Fashion Wardrobe Refresh Sale पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरडी के साईं बाबा मंदिर में भक्तों द्वारा लाखों रुपये के सिक्के दान किए जाते हैं, जो अब मंदिर ट्रस्ट के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं क्योंकि बैंकों ने भी इन चढ़ावे के सिक्कों को लेने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राहुल जाधव ने बताया कि शिरडी में बैंकों ने जगह की कमी के कारण सिक्के लेना बंद कर दिया। आइये जानते हैं ये पूरा मामला क्या है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के सरकारी बैंकों की 13 शाखाओं में मंदिर ट्रस्ट के खाते हैं। उनमें से एक दर्जन खाते अकेले नासिक में ही है। वर्तमान में इन सभी बैंकों के पास सामूहिक रूप से मंदिर ट्रस्ट के लगभग 11 करोड़ रुपये सिक्कों के रूप में जमा हैं। ऐसे में अब 4 बैंकों के अधिकारियों ने ट्रस्ट द्वारा सिक्कों के रूप में जमा कराए जाने वाले पैसों को लेने से इनकार कर दिया है।
मंदिर ट्रस्ट के CEO ने क्या कहा?
ट्रस्ट के CEO जाधव ने कहा, "ये मंदिर ट्रस्ट के लिए बड़ी समस्या है और इससे निपटने के लिए हमने अहमदनगर जिले के अन्य हिस्सों के साथ-साथ राज्य के अन्य बैंकों से भी संपर्क करने का फैसला किया है। हम ऐसे बैंकों में मंदिर ट्रस्ट के खाते खोलेंगे, ताकि वहां सिक्के जमा किए जा सकें। " उन्होंने कहा कि अब मंदिर ट्रस्ट सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग करेगा।
इससे पहले साल 2019 में बैंकों ने मंदिर ट्रस्ट के सामने ये मुद्दा उठाया था। बैंकों ने कहा था कि मंदिर से आए सिक्कों के बैग उनकी शाखाओं में जगह घेर रहे हैं। उस वक्त ट्रस्ट ने इन सिक्कों को रखने के लिए मंदिर परिसर में बैंकों के कमरे बनाने की पेशकश की थी। हालांकि, बैंकों ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बैंकिग नियम इस तरह की व्यवस्था की अनुमति नहीं देते हैं।
मंदिर में सिक्कों के रूप में कितना मिलता है दान?
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महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरडी के साईं बाबा मंदिर में भक्तों द्वारा लाखों रुपये के सिक्के दान किए जाते हैं, जो अब मंदिर ट्रस्ट के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं क्योंकि बैंकों ने भी इन चढ़ावे के सिक्कों को लेने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जाधव ने बताया कि शिरडी में बैंकों ने जगह की कमी के कारण सिक्के लेना बंद कर दिया। आइये जानते हैं ये पूरा मामला क्या है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के सरकारी बैंकों की तेरह शाखाओं में मंदिर ट्रस्ट के खाते हैं। उनमें से एक दर्जन खाते अकेले नासिक में ही है। वर्तमान में इन सभी बैंकों के पास सामूहिक रूप से मंदिर ट्रस्ट के लगभग ग्यारह करोड़ रुपये सिक्कों के रूप में जमा हैं। ऐसे में अब चार बैंकों के अधिकारियों ने ट्रस्ट द्वारा सिक्कों के रूप में जमा कराए जाने वाले पैसों को लेने से इनकार कर दिया है। मंदिर ट्रस्ट के CEO ने क्या कहा? ट्रस्ट के CEO जाधव ने कहा, "ये मंदिर ट्रस्ट के लिए बड़ी समस्या है और इससे निपटने के लिए हमने अहमदनगर जिले के अन्य हिस्सों के साथ-साथ राज्य के अन्य बैंकों से भी संपर्क करने का फैसला किया है। हम ऐसे बैंकों में मंदिर ट्रस्ट के खाते खोलेंगे, ताकि वहां सिक्के जमा किए जा सकें। " उन्होंने कहा कि अब मंदिर ट्रस्ट सीधे भारतीय रिजर्व बैंक को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग करेगा। इससे पहले साल दो हज़ार उन्नीस में बैंकों ने मंदिर ट्रस्ट के सामने ये मुद्दा उठाया था। बैंकों ने कहा था कि मंदिर से आए सिक्कों के बैग उनकी शाखाओं में जगह घेर रहे हैं। उस वक्त ट्रस्ट ने इन सिक्कों को रखने के लिए मंदिर परिसर में बैंकों के कमरे बनाने की पेशकश की थी। हालांकि, बैंकों ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बैंकिग नियम इस तरह की व्यवस्था की अनुमति नहीं देते हैं। मंदिर में सिक्कों के रूप में कितना मिलता है दान?
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Ayodhya news: अयोध्या में बन रहे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) की जमीन को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां नजूल की जमीन को ट्रस्ट (Janmbhumi trust) ने खरीद लिया। नजूल की जमीन बेचने का आरोप मेयर और उनके भतीजे पर लगा है। राम कोट हवेली की यह जमीन राम जन्मभूमि परिसर से महज 500 मीटर की दूरी पर है।
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Ayodhya news: अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की जमीन को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां नजूल की जमीन को ट्रस्ट ने खरीद लिया। नजूल की जमीन बेचने का आरोप मेयर और उनके भतीजे पर लगा है। राम कोट हवेली की यह जमीन राम जन्मभूमि परिसर से महज पाँच सौ मीटर की दूरी पर है।
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खड़गपुर/कांथीः पूर्व मिदनापुर जिला अंतर्गत कांथी में तिरपाल चोरी के मामले में शुभेन्दु अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के 2 जवानों से पूछताछ के लिए पुलिस की ओर से नोटिस भेजी गयी है। हालांकि दोनों जवानों ने नोटिस नहीं लिया जिस कारण नोटिस को खड़गपुर के सीआरपीएफ कमांडेंट के पास भेजे जाने की जानकारी मिली है। मालूम हो कि 29 मई को कांथी नगरपालिका के गोदाम से कथित रूप से तिरपाल चोरी की घटना हुई थी। इस मामले में नगरपालिका प्रशासक बोर्ड के सदस्य रत्नदीप मन्ना ने शुभेन्दु अधिकारी, उनके भाई व कांथी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सोमेन्दु अधिकारी समेत 4 लोगों के खिलाफ गत 1 जून को कांथी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नगरपालिका के एक कर्मी जिसका नाम प्रताप चंद्र दे है, उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल वाहन को भी जब्त कर लिया है। संबंधित धाराओं के तहत मामला नामजद कर पुलिस ने चोरी के अभियुक्त नगरपालिका कर्मचारी का अदालत में चालान किया। अदालत ने उसकी जमानत याचिका को नामंजूर कर उसे 5 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इधर जिला पुलिस के एसपी के. अमरनाथ ने कहा कि तिरपाल चोरी के मामले में पूछताछ के लिए शुभेन्दु अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के 2 जवानों को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उन लोगों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस की ओर से खड़गपुर स्थित सीआरपीएफ कमाडेंट आफिस में नोटिस भेजा गया है। दोनों जवानों को पूछताछ के लिए गुरुवार को कांथी थाने में बुलाया गया है।
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खड़गपुर/कांथीः पूर्व मिदनापुर जिला अंतर्गत कांथी में तिरपाल चोरी के मामले में शुभेन्दु अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के दो जवानों से पूछताछ के लिए पुलिस की ओर से नोटिस भेजी गयी है। हालांकि दोनों जवानों ने नोटिस नहीं लिया जिस कारण नोटिस को खड़गपुर के सीआरपीएफ कमांडेंट के पास भेजे जाने की जानकारी मिली है। मालूम हो कि उनतीस मई को कांथी नगरपालिका के गोदाम से कथित रूप से तिरपाल चोरी की घटना हुई थी। इस मामले में नगरपालिका प्रशासक बोर्ड के सदस्य रत्नदीप मन्ना ने शुभेन्दु अधिकारी, उनके भाई व कांथी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सोमेन्दु अधिकारी समेत चार लोगों के खिलाफ गत एक जून को कांथी थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नगरपालिका के एक कर्मी जिसका नाम प्रताप चंद्र दे है, उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल वाहन को भी जब्त कर लिया है। संबंधित धाराओं के तहत मामला नामजद कर पुलिस ने चोरी के अभियुक्त नगरपालिका कर्मचारी का अदालत में चालान किया। अदालत ने उसकी जमानत याचिका को नामंजूर कर उसे पाँच दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इधर जिला पुलिस के एसपी के. अमरनाथ ने कहा कि तिरपाल चोरी के मामले में पूछताछ के लिए शुभेन्दु अधिकारी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के दो जवानों को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उन लोगों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस की ओर से खड़गपुर स्थित सीआरपीएफ कमाडेंट आफिस में नोटिस भेजा गया है। दोनों जवानों को पूछताछ के लिए गुरुवार को कांथी थाने में बुलाया गया है।
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चेन्नई। दक्षिणी सिनेमा के सुपरस्टार कमल हसन ने जन्मदिन न मनाने की बात तय की है। इस मामले में जानकारी देते हुए कहा गया है कि, चेन्नई में बाढ़ आने व उससे बिगड़े हालातों के कारण कमल हसन ने मंगलवार को जन्मदिन सेलिब्रेट न करने का निर्णय किया है। अपने जन्मदिन पर वे बाढ़ प्रभावितों से मिलेंगे। इस दौरान वे उनकी समस्याओं को जानेंगे और देखेंगे कि, बाढ़ प्रभावित कितने अभाव में हैं।
गौरतलब है कि, हसन ने तमिलनाडु की पलानीसामी सरकार का भ्रष्टाचार को लेकर विरोध किया था। तथा राज्य में विरोधी सरकार को लेकर जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि, सरकार ने व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। कमल हसन की भेंट बाढ़ प्रभावितों से होगी। वे हसन मेडिकल कैंप्स का दौरा करेंगे। कमल हसन बदलाव लाने का भरोसा देंगे।
इस मामले में प्रवक्ता ने कहा कि, हसन मेडिकल कैंप्स का दौरा करेंगे, वे बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता करेंगे। वे बदलाव का भरोसा भी देंगे। गौरतलब है कि, इस तरह के प्रयास में राजनीति की संभावनाऐं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करीब 5 लाख वाॅलिंटियर्स और सपोर्टस को भेजा जाए।
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चेन्नई। दक्षिणी सिनेमा के सुपरस्टार कमल हसन ने जन्मदिन न मनाने की बात तय की है। इस मामले में जानकारी देते हुए कहा गया है कि, चेन्नई में बाढ़ आने व उससे बिगड़े हालातों के कारण कमल हसन ने मंगलवार को जन्मदिन सेलिब्रेट न करने का निर्णय किया है। अपने जन्मदिन पर वे बाढ़ प्रभावितों से मिलेंगे। इस दौरान वे उनकी समस्याओं को जानेंगे और देखेंगे कि, बाढ़ प्रभावित कितने अभाव में हैं। गौरतलब है कि, हसन ने तमिलनाडु की पलानीसामी सरकार का भ्रष्टाचार को लेकर विरोध किया था। तथा राज्य में विरोधी सरकार को लेकर जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि, सरकार ने व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। कमल हसन की भेंट बाढ़ प्रभावितों से होगी। वे हसन मेडिकल कैंप्स का दौरा करेंगे। कमल हसन बदलाव लाने का भरोसा देंगे। इस मामले में प्रवक्ता ने कहा कि, हसन मेडिकल कैंप्स का दौरा करेंगे, वे बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता करेंगे। वे बदलाव का भरोसा भी देंगे। गौरतलब है कि, इस तरह के प्रयास में राजनीति की संभावनाऐं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करीब पाँच लाख वाॅलिंटियर्स और सपोर्टस को भेजा जाए।
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स्पेशल न्यूज़ः क्रिसमस का त्यौहार खुशियों, उत्साह और प्यार का प्रतीक माना जाता है. इस त्यौहार को केवल कुछ ही दिन मनाया जाता है लेकिन इसकी धूम काफी लंबे समय तक बरक़रार रहती है. इस दिन लोग घरों में क्रिसमस ट्री और लाइटों से जगमगाहट करके खुश रहते हैं और साथ ही अपने दोस्त और रिश्तेदारों में तोहफे भी बांटते हैं. क्रिसमस की सुबह अकसर छोटे बच्चे उठने के बाद सबसे पहले अपना गिफ्ट ढूँढना शुरू कर देते हैं, हालांकि तोहफों और पार्टियों की तैयारियों के पागलपन के बीच हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ये त्योहार कई तरह की ज़िम्मेदारियां भी लाता है.
क्रिसमस के दिनों में लोग बड़े ही धूमधाम से त्यौहार को मनाने के साथ-साथ सेल का भी इंतज़ार करते हैं. अगर आपके या आपके घर में बच्चे हैं, तो बतौर मां-बाप या घर के बड़े होने के नाते ये ज़रूरी है कि आप उन्हें सिखाएं कि उपहार लेने से कहीं ज़्यादा सुकून देता है उपहार देना. इसलिए आज हम बता रहे हैं कि कैसे आप अपने बच्चों को इन छुट्टियों और त्योहार के मौसम में थोड़ी दयालुता, उदारता और सहानुभूति की सीख दे सकते हैं.
हर बार क्रिसमस के दौरान लोग सजावट, शॉपिंग और कपड़ों में खो जाते हैं. तो इससे पहले कि आपके बच्चे क्रिसमस के लिए अपने तोहफों की लिस्ट बनाएं, आप उन्हें परिवार और दोस्तों के लिए गिफ्ट खरीदने की प्रकिया में शामिल करें। सोच समझकर गिफ्ट से लेकर उन्हें पैक करने तक, ये बेहद ज़रूरी है कि आप अपने बच्चों को गिफ्ट देना सिखाएं.
अपने बच्चों को प्यार और आभार की भावना सिखाने के लिए उनसे परिवार और दोस्तों के लिए धन्यवाद नोट या कार्ड लिखवाएं. ये भले ही पुराना तरीका है, लेकिन इस तरह आपका बच्चा अपने परिवार और दोस्तों को प्यार और स्नेह देना सीखेगा. इस तरह आपका क्रिसमस ज़्यादा पूर्ण और प्यार से भरा रहेगा.
आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, ज़्यादातर लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने को तरस्ते हैं. हालांकि, इस साल कोरोना वायरल की वजह से लगे लॉकडाउन में हम में से कई लोगों को परिवार के साथ काफी समय बिताने को मिला, तो वहीं, दोस्तों से नहीं मिल पाए. वहीं, कुछ लोगों के साथ उल्टी हुआ, जो परिवार से अलग दूसरे शहर में रहते हैं. सभी से मिलने के लिए क्रिसमस से बेहतर त्योहार और कौन सा होगा। इस दिन अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खाना खाएं और पार्टी करें. इस दौरान सभी एक-एक कर ये बता सकते हैं कि उन्हें परिवार के बारे में क्या पसंद है या फिर परिवार के एक-एक इंसान के बारे में एक-एक कर कुछ कहें.
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स्पेशल न्यूज़ः क्रिसमस का त्यौहार खुशियों, उत्साह और प्यार का प्रतीक माना जाता है. इस त्यौहार को केवल कुछ ही दिन मनाया जाता है लेकिन इसकी धूम काफी लंबे समय तक बरक़रार रहती है. इस दिन लोग घरों में क्रिसमस ट्री और लाइटों से जगमगाहट करके खुश रहते हैं और साथ ही अपने दोस्त और रिश्तेदारों में तोहफे भी बांटते हैं. क्रिसमस की सुबह अकसर छोटे बच्चे उठने के बाद सबसे पहले अपना गिफ्ट ढूँढना शुरू कर देते हैं, हालांकि तोहफों और पार्टियों की तैयारियों के पागलपन के बीच हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ये त्योहार कई तरह की ज़िम्मेदारियां भी लाता है. क्रिसमस के दिनों में लोग बड़े ही धूमधाम से त्यौहार को मनाने के साथ-साथ सेल का भी इंतज़ार करते हैं. अगर आपके या आपके घर में बच्चे हैं, तो बतौर मां-बाप या घर के बड़े होने के नाते ये ज़रूरी है कि आप उन्हें सिखाएं कि उपहार लेने से कहीं ज़्यादा सुकून देता है उपहार देना. इसलिए आज हम बता रहे हैं कि कैसे आप अपने बच्चों को इन छुट्टियों और त्योहार के मौसम में थोड़ी दयालुता, उदारता और सहानुभूति की सीख दे सकते हैं. हर बार क्रिसमस के दौरान लोग सजावट, शॉपिंग और कपड़ों में खो जाते हैं. तो इससे पहले कि आपके बच्चे क्रिसमस के लिए अपने तोहफों की लिस्ट बनाएं, आप उन्हें परिवार और दोस्तों के लिए गिफ्ट खरीदने की प्रकिया में शामिल करें। सोच समझकर गिफ्ट से लेकर उन्हें पैक करने तक, ये बेहद ज़रूरी है कि आप अपने बच्चों को गिफ्ट देना सिखाएं. अपने बच्चों को प्यार और आभार की भावना सिखाने के लिए उनसे परिवार और दोस्तों के लिए धन्यवाद नोट या कार्ड लिखवाएं. ये भले ही पुराना तरीका है, लेकिन इस तरह आपका बच्चा अपने परिवार और दोस्तों को प्यार और स्नेह देना सीखेगा. इस तरह आपका क्रिसमस ज़्यादा पूर्ण और प्यार से भरा रहेगा. आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, ज़्यादातर लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने को तरस्ते हैं. हालांकि, इस साल कोरोना वायरल की वजह से लगे लॉकडाउन में हम में से कई लोगों को परिवार के साथ काफी समय बिताने को मिला, तो वहीं, दोस्तों से नहीं मिल पाए. वहीं, कुछ लोगों के साथ उल्टी हुआ, जो परिवार से अलग दूसरे शहर में रहते हैं. सभी से मिलने के लिए क्रिसमस से बेहतर त्योहार और कौन सा होगा। इस दिन अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खाना खाएं और पार्टी करें. इस दौरान सभी एक-एक कर ये बता सकते हैं कि उन्हें परिवार के बारे में क्या पसंद है या फिर परिवार के एक-एक इंसान के बारे में एक-एक कर कुछ कहें.
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कुडल छंद - इस छंद के भी प्रयोग में नियमों का बहुत उल्लंघन किया - गया है। इसमें १२ तथा १० के विराम से २२ मात्राएँ होती हैं। प्रयोग की अशुद्धि के प्रमारणस्वरूप यह पद लिया जा सकता हैगोहने गुपाल फिरूँ ऐसी श्रावत मन में। प्रवलोकन वारिज वदन विवस भई तन में ॥
मुरली कर लकुट लेइ, पीत वसन
धारूँ ।
काछि गोप भेष मुकुट, गोधन संग चारूँ ।
प्रथम पंक्ति के सम चरण की मात्राश्रों की विषमता से ही यह सम्पूर्ण पद सदोष हो गया है। इन मात्रिक छंदों के प्रतिरिक्त कुछ वरिंगक छन्दों का प्रयोग भी मिलता है जिनमें मनहर कवित्त मुख्य है ।
इस प्रकार मीरा के काव्य मे छंदात्मक संगीत के पूर्ण प्रभाव का निष्कर्ष भ्रममूलक सिद्ध होता है । भाव संगीतबद्ध होकर ही गेय पदों का रूप ग्रहण करते है, मीरा के पदों को पूर्ण मुक्त छंदों की संज्ञा दे देना अनुचित है। उनके काव्य में जो लय तथा संगीत है, उसे सहसा भावनाओं का प्रजस्त्र प्रभावमात्र मान लेना तर्कसंगत नहीं है। यह सत्य है कि भाव काव्य की श्रात्मा है, पर जहाँ भावनाएँ गीत बनकर प्रस्फुटित होती है, वहाँ सचेष्ट कला की प्रति चाहे न हो, परन्तु कला का अस्तित्व अनिवार्य होता है।
मीरा को संगीत का पूर्ण ज्ञान था । उन्होंने अपने पदों की रचना रागरागिनियों के अनुसार की है। उनके पदों में अनेक शास्त्रगत छंदों का प्रयोग भी मिलता है, इन प्रयोगों को श्राकस्मिक मान लेना काव्य तथा कला की उपेक्षा के साथ-साथ मीरा के संगीत तथा काव्य-ज्ञान की भी उपेक्षा होगी। मीरा के काव्य में छंदों का प्रयोग भावनाओं की सरस तथा लयपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए हुआ है, यह कहना तो उपयुक्त है, पर उनकी भावनाएँ काव्य-नियमों के बन्धन में पड़ी ही नहीं, यह कहना भ्रामक है। उन्होंने पदों की रचना के उपयुक्त अनेक प्रचलित छंदों में अपनी रचनाएँ कीं, जिसमें लोकगीतों में प्रयुक्त शब्दावलियों का भी प्रयोग किया । लोकगीतों के इसी प्रभाव के कारण उनके पदों में ऐसे निरर्थक प्रयोग मिलते हैं, जो केवल गाने की रोचकता वृद्धि करने की दृष्टि से हो प्रयुक्त हुए हैं। इनके प्रयोग के साथ-साथ ही उन्होंने छंदों के नियमों की मर्यादा भंग की है। रे, री, जी, ए, माय, हो, माई इत्यादि शब्दों का प्रयोग उनके काव्यगत साधारण ज्ञान को स्थानीय लोकगीतों का पुट देकर अधिक स्वाभाविक तथा गेय बना देते है ।
पद-रचना परम्परा मे, और विशेषकर रामबद्ध रचनाओं में, इस प्रकार के
प्रयोग प्रक्षम्य नहीं माने जाते। किसी विशिष्ट राग की सुविधानुसार एक ही पद में कई छंदों का प्रयोग, अथवा दो भिन्न-भिन्न छंदों का सम्मिश्ररण काव्य-दोष नहीं ठहराया जा सकता। मीरा के ऐसे अनेक पद है जिनमें भिन्न-भिन्न छंद एकत्रित हो गये हैं। ऐसे पदों को सदोष नहीं ठहराया जा सकता, परन्तु जिन छंदों का प्रयोग हुआ हो उनका शुद्ध प्रयोग ही अभीष्ट होता है। मीरा के छंद इस दृष्टि से दोषयुक्त हैं, विविध छंदों के प्रयोग में मात्राश्रों में नियम-भंग अनेक स्थानों पर मिलता है, परन्तु यह दोष भी उन्हीं स्थलों पर प्राया है जहाँ पद को रागबद्ध करने के लिए विभिन्न तालों के साथ उनका सामंजस्य करने का प्रयास किया गया है, ऐसे ही स्थलों पर पिंगल के नियम भंग किये गये है । संगीत की सुविधानुसार ह्रस्व की गरगना दीर्घ रूप में तथा दीर्घ की गरगना ह्रस्व रूप में करनी पड़ी है ।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि मीरा की अजस्त्र भावनाओं का स्रोत छंदों द्वारा उद्भूत संगीत के लय मे बँधकर प्रवाहित होता है । अनुभूतियों का प्रवाह छंदों की परिधि से टकराकर नहीं रह जाता, अनेक बार सीमा की मर्यादा का उल्लंघन कर पूर्ण वेग से विकास की ओर अग्रसर होता है, परन्तु इस आवेग में असंयत उच्छृंखलता नहीं, संयत प्रवाह तथा रागात्मक लय है, जिसका श्रेय उनकी रागात्मक अनुभूतियों के साथ-साथ उनके कला - परिचय तथा संगीत प्रेम को भी है ।
मोरा की भाषा - प्रत्येक कवि की भाषा स्थान तथा काल से प्रभावित होती है । मीरा की रचनाओं के साथ भी यही सिद्धान्त शत-प्रतिशत लागू होता है। उनके जीवन के तीन मुख्य क्रीड़ास्थल रहे । शैशव तथा गार्हस्थ्य जीवन राजस्थान में व्यतीत कर वे वृन्दावन गई, तदुपरान्त द्वारिकापुरी में जाकर जीवन के शेष दिन बिताये । इन तीनों ही प्रदेशों की भाषा का प्रभाव उनकी रचनाओं में मिलता है। राजस्थानी, ब्रजभाषा तथा गुजराती भाषा का प्रत्यक्ष प्रभाव है। यथेष्ट संख्या में उनके पद शुद्ध गुजराती में प्राप्त होते हैं ।
पद चाहे गुजराती के हों या ब्रजभाषा अथवा राजस्थानी के, सरलता तथा आडम्बरहीनता सबके गुरण है। उनकी भाषा में अलंकारों का विधान नहीं, भाषा को सुन्दर बनाने का कलापूर्ण प्रयास उसमें नहीं दृष्टिगत होता, परन्तु भावों की अभिव्यक्ति में पूर्ण सफलता तथा परिष्कार दृष्टिगोचर होता है। उनकी श्रनलंकृत भाषा का सौंदर्य अनूठा है। उनकी सर्वग्राहक प्रवृत्ति ने जो कुछ भी जहाँ प्राप्त किया उसे ग्रहरण किया, परन्तु उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति का साधन सदैव जनता की ही भाषा रही, साहित्यिक विद्वज्जनों की नहीं।
राजस्थान में भाषा दो रूपों में विकसित हो रही थी - पश्चिमी राजस्थानी तथा पूर्वी राजस्थानी । पश्चिमी राजस्थानी का प्रयोग साहित्यिक रूप में करने वाले
चाररण तथा जैन कवि थे । इनकी भाषा पर संस्कृत का प्रभाव प्रायः नगण्य था । इसलिए एक ओर इसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्दों का प्रभाव तो है ही दूसरी ओर उसमें प्राकृत तथा प्रपभ्रंश की अनेक विशेषताएँ संरक्षित रहीं, औौर दुर्भाग्यवश विकास के अनुकूल परिस्थितियाँ न पाकर अधिकतर अपने प्रान्तीय रूप में ही सीमित रह गईं ।
पूर्वी राजस्थानी पर संस्कृत का प्रभाव बहुत अधिक है। इसी का विकसित रूप आगे चलकर ब्रजभाषा के रूप में प्रचलित हुआ । उस काल की पिंगल भाषा तथा शुद्ध भाषा में व्याकरण तथा उच्चारण सम्बन्धी कुछ मौलिक अन्तर है। मोरा के राजस्थानी में लिखे हुए पदों में इसी भाषा का प्रभाव प्रधान है । डिंगल के शब्दों का प्रयोग भी यत्र-तत्र मिलता है, पर पूर्वी राजस्थानी ही उनकी भाषा का मुख्य रूप है । श्री सुरेन्द्रनाथ सेन ने अपने लेख 'मेवाड़ कोकिल मीराबाई' में एक समस्या की अपेक्षा की है। यह एक समस्या अपने हल की अपेक्षा करती है कि उस समय की परमप्रिय डिंगल को छोड़कर मीरा ने हिन्दी मे ही भजन क्यों गाये ? राजस्थानी भाषा की उपर्युक्त विवेचना इस समस्या का पूर्ण समाधान कर देती है ।
मीरा की राजस्थानी में पिंगल का रूप ही प्रधान है, परन्तु पिंगल के शब्दों का समावेश यत्र-तत्र हो गया है। जैसेसखी मेरी नींद नसानी हो ।
पिय को पंथ निहारत, सिगरी रैन बिहानी हो ॥ अंगि अंगि व्याकुल भई मुख पिय पिय बानी हो । अन्तर वेदन विरह की वह पीर न जानी हो ॥ ज्यूं चातक घन को रटे, मछरी जिमि पानी हो । मीरा व्याकुल बिरहिनी, सुध बुध बिसरानी हो ॥
यों तो मीरा के गुजराती पदों का स्वतन्त्र अस्तित्व है। इन्हीं के आधार पर उन्हें गुजराती भाषा के श्रग्रगण्य कवियों में स्थान प्राप्त है। उनके वे पद तो स्वतन्त्र प्रालोचना की अपेक्षा रखते है, परन्तु हिन्दी में लिखे पदों में भी गुजराती की स्पष्ट छाप है। उदाहरणार्थप्रेम नी प्रेम नो प्रेम नी मोहे लागी कटारी प्रेम नो ।
जल जमुना माँ भरवा गमांतां, हती गागर माथे हेम नी । इसके अतिरिक्त पंजाबी, खड़ीबोली, तथा पूर्वी भाषा का प्रभाव भी उनके पदों में दिखाई पड़ता है। यद्यपि मीरा की भाषा पर ये प्रभाव बहुत गौरग हैं, परन्तु उनके प्रयोग में भी सौंदर्य तथा सरलता का हनन नहीं होने पाया है। उदाहरण के लिए-कृष्ण काव्य धारा की कवयित्रियाँ हो कान किन गूंथी जुल्फां कारियां पूर्वी का प्रयोग भी यत्र-तत्र मिलता हैजसुमति के दुवखाँ, ग्वालिन सब जाय ।
बरजहु प्रापन दुलरुवा हमसे श्ररुझाय ॥ मीरा की भाषा की इस अनेकरूपता का एक कारण उनके पदों की लोकप्रियता तथा गेयात्मकता है। माधुर्य तथा प्रसाद गुरण प्रधान होने के कारण उनके पद सर्वसाधारण में प्रचलित होते गये । समस्त उत्तरापथ तथा दक्षिरण भूमि, साधना और विश्वास प्रधान उस धार्मिक युग में मीरा की मधुर वारगी से गूंज उठा।
बंग देश से पंचनद प्रदेश तथा उत्तरापथ से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिरणात्य तक उनके गान जनता की वारणी में मुखरित हो उठे । तत्पश्चात् परम्परागत विकास, प्रचार के विस्तृत क्षेत्र और सार्वजनिक लोकप्रियता के कारण उनके गीतों के बाह्य परिधान में अनेकरूपता श्रा गई । मीरा के नाम से अनेक पद लिखकर उनके पदों के नाम से प्रचलित किये गये, पर मीरा की भ्रमर माधुर्य भावना की तुलना में वे इतने पीछे पड़ जाते है कि प्रक्षिप्त पदों मौलिक पदों के मध्य एक निश्चित रूपरेखा खींची जा सकती है । मीरा के गीत स्थान प्राप्त कर सर्वयुगीन तथा सर्वकालीन बन गये है ।
इस प्रकार मीरा का नैसर्गिक व्यक्तित्व हिन्दी काव्य जगत् में शाश्वत बन गया है। उनकी चरम अनुभूतियों की सरस अभिव्यक्तियों ने उन्हें धमरता का वरदान दिया है। मीरा कवि नहीं थीं, यह कथन काव्य रस से अनभिज्ञ उन कृत्रिम व्यक्तियों की मूढ़ता का परिचायक है जो सचेष्ट छंद रचना तथा अलंकार विधान को ही कला मानते है । मीरा की कला उनकी सरस अनुभूतियों तथा श्राडम्बरहीन सरलता में निहित है । उनका काव्य उनके हृदय की अनुभूतियाँ हैं, अन्तर्वेदना का चीत्कार मीरा की गम्भीर विरहानुभूतियों में व्यंजित है । जायसी, सूरदास तथा । विद्यापति को शास्त्रगत परम्पराबद्ध विरहोक्तियाँ विदग्धता तथा चमत्कार की दृष्टि से चाहे मीरा की कविता विरह-व्यंजना से प्रागे हो, परन्तु उनका बहिर्मुखी दृष्टिकोरण मीरा के आभ्यंतरिक विरह की अनुभूतियों की उत्कृष्टता को स्पर्श भी नहीं कर सकता । मीरा चिर श्राकुल विरहिरगी थीं, उनके गीतों में व्यक्त विरह- भावना अनुपम प्रतुलनीय है। श्रन्तर्वेदना का इससे सजीव चित्र अन्य किस कवि की रचना में मिलेगा. राम मिलन के काज सखी मेरे प्रारति उर में जागी री । तलफत तलफत कल न परत है, विरहबारण उर लागी रो ।
विरह भुवंग मेरो डस्यो है कलेजो, लहरि हलाहल जागी री ॥
मीरा में काव्य-रचना की नैसर्गिक प्रतिभा थी । पाण्डित्य, साहित्य तथा कला
सम्बन्धी परिपक्व ज्ञान के प्रभाव के कारण उन्हें भक्ति शाखाओं के महान कवियों के समकक्ष नहीं रखा जा सकता । परन्तु वदं दीवानी मीरा की प्रेमानुभूतियों की स्वच्छंदता, सौंदर्य तथा माधुर्य की समता अन्य कहीं असम्भव है । उनके नैसर्गिक व्यक्तित्व की अनुपमेयता की भाँति हो उनका काव्य भी अनुपम है, जिनमें उनकी विह्वल भावनाएँ व्यक्त है जिनकी स्वच्छंदता मे उन्मुक्त परन्तु उनकी मर्यादापूरर्ण मधुर भावनाएं मुखरित हो उठती हैलोक लाज कुल कारिग जगत की, दई बहाय जस पारगी ।
अपने घर का परदा कर ले, मै अबला बौराणी ॥ गंगाबाई - (विट्ठल गिरधरन ) गंगाबाई के स्वर कृष्ण काव्यधारा में मिले हुए उस निर्झरिणी के एकान्त प्रवाह के सदृश है, जिसके सौंदर्य तथा संगीत का महत्त्व, प्रमुख धारा में लय होने वाले बृहत्तर प्रवाहों की गरिमा के समक्ष उपेक्षित रह जाता है। गंगाबाई श्री विठ्ठलदास जी की शिष्या थीं । विट्ठलनाथ जी के अन्य शिष्य जहाँ श्रष्टछाप में कृष्ण के सखाओं के प्रतीक बनकर वैष्णव जगत् के माध्यम से हिन्दी में श्रमर हो गये, वहीं गंगाबाई के सरस पदों को प्रतिध्वनि एक सीमा में ही गूंजकर विलीन हो गई । कृष्ण भक्ति परम्परा की इस कवयित्री के नाम का उल्लेख अभी नागरी प्रचारिणी सभा की प्रकाशित खोज रिपोर्टों में भी नहीं प्राया है। स्वर्गीय डा० बड़थ्वाल द्वारा सम्पादित हस्तलिखित ग्रंथों की खोज रिपोर्टों की उन प्रतियों में जिनका अभी मुद्ररण नहीं हुआ है, उनके नाम का उल्लेख मिलता है। मिश्रबंधुत्रों ने इनके नाम का उल्लेखमात्र अपने बृहत् इतिहास 'मिश्रवन्धु विनोद में कर दिया है ।
गंगाबाई के रचनाकाल के विषय में यद्यपि कोई निश्चित उल्लेख नहीं मिलता, पर विठ्ठलनाथ जी की शिष्या होने के कारण उनका समय संवत् १६०७ (विक्रमी) सन् १५५० के लगभग होना निश्चित है, क्योंकि विट्ठलनाथ जी का समय इसी के श्रासपास माना जाता है । इनका जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था तथा ये महावन नामक स्थान में रहती थीं। गंगाबाई की जीवनी के विषय में और कुछ उल्लेख नहीं प्राप्त होता । विठ्ठलदास के शिष्यों द्वारा रचित पदों के संग्रहों में उनके पद विट्ठल गिरधरन के नाम से संगृहीत है ।
गंगाबाई द्वारा रचित एक स्वतन्त्र ग्रंथ गंगाबाई है । इस ग्रंथ में प्राप्त उल्लेखों से प्रमाणित होता है कि
के पद नाम से प्राप्त हुभ्रा उन्होंने कृष्ण के बाल रूप
की उपासना की है तथा बाललीला के हो गीत गाये है । इन पदों को विषय की विभिन्नता के अनुसार चार भागों में विभाजित किया जा सकता है
१. कृष्ण जन्म के पद ।
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कुडल छंद - इस छंद के भी प्रयोग में नियमों का बहुत उल्लंघन किया - गया है। इसमें बारह तथा दस के विराम से बाईस मात्राएँ होती हैं। प्रयोग की अशुद्धि के प्रमारणस्वरूप यह पद लिया जा सकता हैगोहने गुपाल फिरूँ ऐसी श्रावत मन में। प्रवलोकन वारिज वदन विवस भई तन में ॥ मुरली कर लकुट लेइ, पीत वसन धारूँ । काछि गोप भेष मुकुट, गोधन संग चारूँ । प्रथम पंक्ति के सम चरण की मात्राश्रों की विषमता से ही यह सम्पूर्ण पद सदोष हो गया है। इन मात्रिक छंदों के प्रतिरिक्त कुछ वरिंगक छन्दों का प्रयोग भी मिलता है जिनमें मनहर कवित्त मुख्य है । इस प्रकार मीरा के काव्य मे छंदात्मक संगीत के पूर्ण प्रभाव का निष्कर्ष भ्रममूलक सिद्ध होता है । भाव संगीतबद्ध होकर ही गेय पदों का रूप ग्रहण करते है, मीरा के पदों को पूर्ण मुक्त छंदों की संज्ञा दे देना अनुचित है। उनके काव्य में जो लय तथा संगीत है, उसे सहसा भावनाओं का प्रजस्त्र प्रभावमात्र मान लेना तर्कसंगत नहीं है। यह सत्य है कि भाव काव्य की श्रात्मा है, पर जहाँ भावनाएँ गीत बनकर प्रस्फुटित होती है, वहाँ सचेष्ट कला की प्रति चाहे न हो, परन्तु कला का अस्तित्व अनिवार्य होता है। मीरा को संगीत का पूर्ण ज्ञान था । उन्होंने अपने पदों की रचना रागरागिनियों के अनुसार की है। उनके पदों में अनेक शास्त्रगत छंदों का प्रयोग भी मिलता है, इन प्रयोगों को श्राकस्मिक मान लेना काव्य तथा कला की उपेक्षा के साथ-साथ मीरा के संगीत तथा काव्य-ज्ञान की भी उपेक्षा होगी। मीरा के काव्य में छंदों का प्रयोग भावनाओं की सरस तथा लयपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए हुआ है, यह कहना तो उपयुक्त है, पर उनकी भावनाएँ काव्य-नियमों के बन्धन में पड़ी ही नहीं, यह कहना भ्रामक है। उन्होंने पदों की रचना के उपयुक्त अनेक प्रचलित छंदों में अपनी रचनाएँ कीं, जिसमें लोकगीतों में प्रयुक्त शब्दावलियों का भी प्रयोग किया । लोकगीतों के इसी प्रभाव के कारण उनके पदों में ऐसे निरर्थक प्रयोग मिलते हैं, जो केवल गाने की रोचकता वृद्धि करने की दृष्टि से हो प्रयुक्त हुए हैं। इनके प्रयोग के साथ-साथ ही उन्होंने छंदों के नियमों की मर्यादा भंग की है। रे, री, जी, ए, माय, हो, माई इत्यादि शब्दों का प्रयोग उनके काव्यगत साधारण ज्ञान को स्थानीय लोकगीतों का पुट देकर अधिक स्वाभाविक तथा गेय बना देते है । पद-रचना परम्परा मे, और विशेषकर रामबद्ध रचनाओं में, इस प्रकार के प्रयोग प्रक्षम्य नहीं माने जाते। किसी विशिष्ट राग की सुविधानुसार एक ही पद में कई छंदों का प्रयोग, अथवा दो भिन्न-भिन्न छंदों का सम्मिश्ररण काव्य-दोष नहीं ठहराया जा सकता। मीरा के ऐसे अनेक पद है जिनमें भिन्न-भिन्न छंद एकत्रित हो गये हैं। ऐसे पदों को सदोष नहीं ठहराया जा सकता, परन्तु जिन छंदों का प्रयोग हुआ हो उनका शुद्ध प्रयोग ही अभीष्ट होता है। मीरा के छंद इस दृष्टि से दोषयुक्त हैं, विविध छंदों के प्रयोग में मात्राश्रों में नियम-भंग अनेक स्थानों पर मिलता है, परन्तु यह दोष भी उन्हीं स्थलों पर प्राया है जहाँ पद को रागबद्ध करने के लिए विभिन्न तालों के साथ उनका सामंजस्य करने का प्रयास किया गया है, ऐसे ही स्थलों पर पिंगल के नियम भंग किये गये है । संगीत की सुविधानुसार ह्रस्व की गरगना दीर्घ रूप में तथा दीर्घ की गरगना ह्रस्व रूप में करनी पड़ी है । इस प्रकार यह स्पष्ट है कि मीरा की अजस्त्र भावनाओं का स्रोत छंदों द्वारा उद्भूत संगीत के लय मे बँधकर प्रवाहित होता है । अनुभूतियों का प्रवाह छंदों की परिधि से टकराकर नहीं रह जाता, अनेक बार सीमा की मर्यादा का उल्लंघन कर पूर्ण वेग से विकास की ओर अग्रसर होता है, परन्तु इस आवेग में असंयत उच्छृंखलता नहीं, संयत प्रवाह तथा रागात्मक लय है, जिसका श्रेय उनकी रागात्मक अनुभूतियों के साथ-साथ उनके कला - परिचय तथा संगीत प्रेम को भी है । मोरा की भाषा - प्रत्येक कवि की भाषा स्थान तथा काल से प्रभावित होती है । मीरा की रचनाओं के साथ भी यही सिद्धान्त शत-प्रतिशत लागू होता है। उनके जीवन के तीन मुख्य क्रीड़ास्थल रहे । शैशव तथा गार्हस्थ्य जीवन राजस्थान में व्यतीत कर वे वृन्दावन गई, तदुपरान्त द्वारिकापुरी में जाकर जीवन के शेष दिन बिताये । इन तीनों ही प्रदेशों की भाषा का प्रभाव उनकी रचनाओं में मिलता है। राजस्थानी, ब्रजभाषा तथा गुजराती भाषा का प्रत्यक्ष प्रभाव है। यथेष्ट संख्या में उनके पद शुद्ध गुजराती में प्राप्त होते हैं । पद चाहे गुजराती के हों या ब्रजभाषा अथवा राजस्थानी के, सरलता तथा आडम्बरहीनता सबके गुरण है। उनकी भाषा में अलंकारों का विधान नहीं, भाषा को सुन्दर बनाने का कलापूर्ण प्रयास उसमें नहीं दृष्टिगत होता, परन्तु भावों की अभिव्यक्ति में पूर्ण सफलता तथा परिष्कार दृष्टिगोचर होता है। उनकी श्रनलंकृत भाषा का सौंदर्य अनूठा है। उनकी सर्वग्राहक प्रवृत्ति ने जो कुछ भी जहाँ प्राप्त किया उसे ग्रहरण किया, परन्तु उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति का साधन सदैव जनता की ही भाषा रही, साहित्यिक विद्वज्जनों की नहीं। राजस्थान में भाषा दो रूपों में विकसित हो रही थी - पश्चिमी राजस्थानी तथा पूर्वी राजस्थानी । पश्चिमी राजस्थानी का प्रयोग साहित्यिक रूप में करने वाले चाररण तथा जैन कवि थे । इनकी भाषा पर संस्कृत का प्रभाव प्रायः नगण्य था । इसलिए एक ओर इसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्दों का प्रभाव तो है ही दूसरी ओर उसमें प्राकृत तथा प्रपभ्रंश की अनेक विशेषताएँ संरक्षित रहीं, औौर दुर्भाग्यवश विकास के अनुकूल परिस्थितियाँ न पाकर अधिकतर अपने प्रान्तीय रूप में ही सीमित रह गईं । पूर्वी राजस्थानी पर संस्कृत का प्रभाव बहुत अधिक है। इसी का विकसित रूप आगे चलकर ब्रजभाषा के रूप में प्रचलित हुआ । उस काल की पिंगल भाषा तथा शुद्ध भाषा में व्याकरण तथा उच्चारण सम्बन्धी कुछ मौलिक अन्तर है। मोरा के राजस्थानी में लिखे हुए पदों में इसी भाषा का प्रभाव प्रधान है । डिंगल के शब्दों का प्रयोग भी यत्र-तत्र मिलता है, पर पूर्वी राजस्थानी ही उनकी भाषा का मुख्य रूप है । श्री सुरेन्द्रनाथ सेन ने अपने लेख 'मेवाड़ कोकिल मीराबाई' में एक समस्या की अपेक्षा की है। यह एक समस्या अपने हल की अपेक्षा करती है कि उस समय की परमप्रिय डिंगल को छोड़कर मीरा ने हिन्दी मे ही भजन क्यों गाये ? राजस्थानी भाषा की उपर्युक्त विवेचना इस समस्या का पूर्ण समाधान कर देती है । मीरा की राजस्थानी में पिंगल का रूप ही प्रधान है, परन्तु पिंगल के शब्दों का समावेश यत्र-तत्र हो गया है। जैसेसखी मेरी नींद नसानी हो । पिय को पंथ निहारत, सिगरी रैन बिहानी हो ॥ अंगि अंगि व्याकुल भई मुख पिय पिय बानी हो । अन्तर वेदन विरह की वह पीर न जानी हो ॥ ज्यूं चातक घन को रटे, मछरी जिमि पानी हो । मीरा व्याकुल बिरहिनी, सुध बुध बिसरानी हो ॥ यों तो मीरा के गुजराती पदों का स्वतन्त्र अस्तित्व है। इन्हीं के आधार पर उन्हें गुजराती भाषा के श्रग्रगण्य कवियों में स्थान प्राप्त है। उनके वे पद तो स्वतन्त्र प्रालोचना की अपेक्षा रखते है, परन्तु हिन्दी में लिखे पदों में भी गुजराती की स्पष्ट छाप है। उदाहरणार्थप्रेम नी प्रेम नो प्रेम नी मोहे लागी कटारी प्रेम नो । जल जमुना माँ भरवा गमांतां, हती गागर माथे हेम नी । इसके अतिरिक्त पंजाबी, खड़ीबोली, तथा पूर्वी भाषा का प्रभाव भी उनके पदों में दिखाई पड़ता है। यद्यपि मीरा की भाषा पर ये प्रभाव बहुत गौरग हैं, परन्तु उनके प्रयोग में भी सौंदर्य तथा सरलता का हनन नहीं होने पाया है। उदाहरण के लिए-कृष्ण काव्य धारा की कवयित्रियाँ हो कान किन गूंथी जुल्फां कारियां पूर्वी का प्रयोग भी यत्र-तत्र मिलता हैजसुमति के दुवखाँ, ग्वालिन सब जाय । बरजहु प्रापन दुलरुवा हमसे श्ररुझाय ॥ मीरा की भाषा की इस अनेकरूपता का एक कारण उनके पदों की लोकप्रियता तथा गेयात्मकता है। माधुर्य तथा प्रसाद गुरण प्रधान होने के कारण उनके पद सर्वसाधारण में प्रचलित होते गये । समस्त उत्तरापथ तथा दक्षिरण भूमि, साधना और विश्वास प्रधान उस धार्मिक युग में मीरा की मधुर वारगी से गूंज उठा। बंग देश से पंचनद प्रदेश तथा उत्तरापथ से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिरणात्य तक उनके गान जनता की वारणी में मुखरित हो उठे । तत्पश्चात् परम्परागत विकास, प्रचार के विस्तृत क्षेत्र और सार्वजनिक लोकप्रियता के कारण उनके गीतों के बाह्य परिधान में अनेकरूपता श्रा गई । मीरा के नाम से अनेक पद लिखकर उनके पदों के नाम से प्रचलित किये गये, पर मीरा की भ्रमर माधुर्य भावना की तुलना में वे इतने पीछे पड़ जाते है कि प्रक्षिप्त पदों मौलिक पदों के मध्य एक निश्चित रूपरेखा खींची जा सकती है । मीरा के गीत स्थान प्राप्त कर सर्वयुगीन तथा सर्वकालीन बन गये है । इस प्रकार मीरा का नैसर्गिक व्यक्तित्व हिन्दी काव्य जगत् में शाश्वत बन गया है। उनकी चरम अनुभूतियों की सरस अभिव्यक्तियों ने उन्हें धमरता का वरदान दिया है। मीरा कवि नहीं थीं, यह कथन काव्य रस से अनभिज्ञ उन कृत्रिम व्यक्तियों की मूढ़ता का परिचायक है जो सचेष्ट छंद रचना तथा अलंकार विधान को ही कला मानते है । मीरा की कला उनकी सरस अनुभूतियों तथा श्राडम्बरहीन सरलता में निहित है । उनका काव्य उनके हृदय की अनुभूतियाँ हैं, अन्तर्वेदना का चीत्कार मीरा की गम्भीर विरहानुभूतियों में व्यंजित है । जायसी, सूरदास तथा । विद्यापति को शास्त्रगत परम्पराबद्ध विरहोक्तियाँ विदग्धता तथा चमत्कार की दृष्टि से चाहे मीरा की कविता विरह-व्यंजना से प्रागे हो, परन्तु उनका बहिर्मुखी दृष्टिकोरण मीरा के आभ्यंतरिक विरह की अनुभूतियों की उत्कृष्टता को स्पर्श भी नहीं कर सकता । मीरा चिर श्राकुल विरहिरगी थीं, उनके गीतों में व्यक्त विरह- भावना अनुपम प्रतुलनीय है। श्रन्तर्वेदना का इससे सजीव चित्र अन्य किस कवि की रचना में मिलेगा. राम मिलन के काज सखी मेरे प्रारति उर में जागी री । तलफत तलफत कल न परत है, विरहबारण उर लागी रो । विरह भुवंग मेरो डस्यो है कलेजो, लहरि हलाहल जागी री ॥ मीरा में काव्य-रचना की नैसर्गिक प्रतिभा थी । पाण्डित्य, साहित्य तथा कला सम्बन्धी परिपक्व ज्ञान के प्रभाव के कारण उन्हें भक्ति शाखाओं के महान कवियों के समकक्ष नहीं रखा जा सकता । परन्तु वदं दीवानी मीरा की प्रेमानुभूतियों की स्वच्छंदता, सौंदर्य तथा माधुर्य की समता अन्य कहीं असम्भव है । उनके नैसर्गिक व्यक्तित्व की अनुपमेयता की भाँति हो उनका काव्य भी अनुपम है, जिनमें उनकी विह्वल भावनाएँ व्यक्त है जिनकी स्वच्छंदता मे उन्मुक्त परन्तु उनकी मर्यादापूरर्ण मधुर भावनाएं मुखरित हो उठती हैलोक लाज कुल कारिग जगत की, दई बहाय जस पारगी । अपने घर का परदा कर ले, मै अबला बौराणी ॥ गंगाबाई - गंगाबाई के स्वर कृष्ण काव्यधारा में मिले हुए उस निर्झरिणी के एकान्त प्रवाह के सदृश है, जिसके सौंदर्य तथा संगीत का महत्त्व, प्रमुख धारा में लय होने वाले बृहत्तर प्रवाहों की गरिमा के समक्ष उपेक्षित रह जाता है। गंगाबाई श्री विठ्ठलदास जी की शिष्या थीं । विट्ठलनाथ जी के अन्य शिष्य जहाँ श्रष्टछाप में कृष्ण के सखाओं के प्रतीक बनकर वैष्णव जगत् के माध्यम से हिन्दी में श्रमर हो गये, वहीं गंगाबाई के सरस पदों को प्रतिध्वनि एक सीमा में ही गूंजकर विलीन हो गई । कृष्ण भक्ति परम्परा की इस कवयित्री के नाम का उल्लेख अभी नागरी प्रचारिणी सभा की प्रकाशित खोज रिपोर्टों में भी नहीं प्राया है। स्वर्गीय डाशून्य बड़थ्वाल द्वारा सम्पादित हस्तलिखित ग्रंथों की खोज रिपोर्टों की उन प्रतियों में जिनका अभी मुद्ररण नहीं हुआ है, उनके नाम का उल्लेख मिलता है। मिश्रबंधुत्रों ने इनके नाम का उल्लेखमात्र अपने बृहत् इतिहास 'मिश्रवन्धु विनोद में कर दिया है । गंगाबाई के रचनाकाल के विषय में यद्यपि कोई निश्चित उल्लेख नहीं मिलता, पर विठ्ठलनाथ जी की शिष्या होने के कारण उनका समय संवत् एक हज़ार छः सौ सात सन् एक हज़ार पाँच सौ पचास के लगभग होना निश्चित है, क्योंकि विट्ठलनाथ जी का समय इसी के श्रासपास माना जाता है । इनका जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था तथा ये महावन नामक स्थान में रहती थीं। गंगाबाई की जीवनी के विषय में और कुछ उल्लेख नहीं प्राप्त होता । विठ्ठलदास के शिष्यों द्वारा रचित पदों के संग्रहों में उनके पद विट्ठल गिरधरन के नाम से संगृहीत है । गंगाबाई द्वारा रचित एक स्वतन्त्र ग्रंथ गंगाबाई है । इस ग्रंथ में प्राप्त उल्लेखों से प्रमाणित होता है कि के पद नाम से प्राप्त हुभ्रा उन्होंने कृष्ण के बाल रूप की उपासना की है तथा बाललीला के हो गीत गाये है । इन पदों को विषय की विभिन्नता के अनुसार चार भागों में विभाजित किया जा सकता है एक. कृष्ण जन्म के पद ।
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5वीं मंजिल, ईस्ट विंग,
टॉवर 3, एलबीएस मार्ग,
कुर्ला (प.)
(राजिंदर कुमार)
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