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कपिल शर्मा का शो, एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहां बॉलीवुड सितारें अपनी जिंदगी के कई अनसुने राजों को खोलते है । और बॉलीवुड सितारों के ऐसे अनसुने राजों को सुनना हर किसी को बहुत अच्छा लगता है । हाल ही में प्रियंका चोपड़ा का भी एक फ़नी किस्सा वायरल हो रहा है जिसका खुलासा उन्होंने साल 2017 में कपिल शर्मा शो में शेयर किया था । प्रियंका चोपड़ा ने इस शो के दौरान बताया कि बचपन में उन्हें एक बंदरिया ने थप्पड़ मारा था ।
कपिल के साथ बातचीत में प्रियंका ने अपने साथ हुए इस फ़नी वाकए को शेयर करते हुए कहा था- "मैं लखनऊ में तीसरी क्लास में थी । और हमारे स्कूल के पास एक पेड़ था जहां बहुत सारे बंदर आया करते थे । तो एक बंदरिया ऊपर खड़े होकर पता नहीं, अपने आप को साफ कर रही थी तो मुझे ये बहुत फनी लगा । मैं खड़े होकर उस बंदरिया के ऊपर जोर जोर से हंस रही थी । मैं हंसते हुए कह रही थी- हाहहाह देखो कैसे अपने आप को साफ कर रही है । वो नीचे आई, उसने मुझे देखा मुझे थप्पड़ मारा और ऊपर चली गई । मुझे एक बंदरिया से थप्पड़ पड़ा ।" प्रियंका चोपड़ा से जुड़ा ये मजेदार वाकया सुनकर कपिल शर्मा शो में बैठे सभी दर्शक हंसने लगे ।
वर्क फ़्रंट की बात करें , प्रियंका हाल ही में अपनी आगामी बॉलीवुड कमबैक फ़िल्म द स्काई इज पिंक की रेप अप पार्टी में नजर आई थी । इस दौरान उनके साथ फ़रहान अख्तर और जाहिरा वसीम सहित फ़िल्म की पूरी टीम मौजूद थी । सोनाली बोस द्दारा निर्देशित इस फ़ि्ल्म में प्रियंका एक मां के किरदार में नजर आएंगी । द स्काई इज पिंक इसी साल अक्टूबर में सिनेमाघरों में रिलीज होगी ।
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कपिल शर्मा का शो, एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहां बॉलीवुड सितारें अपनी जिंदगी के कई अनसुने राजों को खोलते है । और बॉलीवुड सितारों के ऐसे अनसुने राजों को सुनना हर किसी को बहुत अच्छा लगता है । हाल ही में प्रियंका चोपड़ा का भी एक फ़नी किस्सा वायरल हो रहा है जिसका खुलासा उन्होंने साल दो हज़ार सत्रह में कपिल शर्मा शो में शेयर किया था । प्रियंका चोपड़ा ने इस शो के दौरान बताया कि बचपन में उन्हें एक बंदरिया ने थप्पड़ मारा था । कपिल के साथ बातचीत में प्रियंका ने अपने साथ हुए इस फ़नी वाकए को शेयर करते हुए कहा था- "मैं लखनऊ में तीसरी क्लास में थी । और हमारे स्कूल के पास एक पेड़ था जहां बहुत सारे बंदर आया करते थे । तो एक बंदरिया ऊपर खड़े होकर पता नहीं, अपने आप को साफ कर रही थी तो मुझे ये बहुत फनी लगा । मैं खड़े होकर उस बंदरिया के ऊपर जोर जोर से हंस रही थी । मैं हंसते हुए कह रही थी- हाहहाह देखो कैसे अपने आप को साफ कर रही है । वो नीचे आई, उसने मुझे देखा मुझे थप्पड़ मारा और ऊपर चली गई । मुझे एक बंदरिया से थप्पड़ पड़ा ।" प्रियंका चोपड़ा से जुड़ा ये मजेदार वाकया सुनकर कपिल शर्मा शो में बैठे सभी दर्शक हंसने लगे । वर्क फ़्रंट की बात करें , प्रियंका हाल ही में अपनी आगामी बॉलीवुड कमबैक फ़िल्म द स्काई इज पिंक की रेप अप पार्टी में नजर आई थी । इस दौरान उनके साथ फ़रहान अख्तर और जाहिरा वसीम सहित फ़िल्म की पूरी टीम मौजूद थी । सोनाली बोस द्दारा निर्देशित इस फ़ि्ल्म में प्रियंका एक मां के किरदार में नजर आएंगी । द स्काई इज पिंक इसी साल अक्टूबर में सिनेमाघरों में रिलीज होगी ।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। पीएम मोदी देश के 100 सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में पहले नंबर पर हैं। इस लिस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मोहन भागवत, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हैं।
100 पॉवरफुल लोगों की सूची जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी के आलोचकों का मानना था कि कोरोना और कृषि कानूनों को वापस लेने से उनकी छवि खराब हुई है लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनकी छवि में निखार आया है। पीएम मोदी की राजनीतिक छवि पर कृषि कानून का कोई असर नहीं पड़ा है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से दूर रहना और फिर भी 22,000 भारतीयों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए यूरोपीय देशों तक पहुंचना उनके नेतृत्व को एक जबरदस्त कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि जेपी नड्डा के भाजपा अध्यक्ष होने के बावजूद अमित शाह का पार्टी में काफी प्रभाव है। केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में वह सरकार में प्रभावी नंबर 2 बने हुए हैं। हालांकि यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों ही भाजपा के प्रचार के चेहरे थे। शाह को पार्टी का कैडर को सक्रिय करने के लिए कदम उठाना पड़ा क्योंकि किसान आंदोलन के बीच पश्चिमी यूपी में पार्टी को कड़ी टक्कर मिली।
तीसरे पर RSS चीफ मोहन भागवत हैं। 96 बिलियन डॉलर (फोर्ब्स के अनुसार) की कुल संपत्ति के साथ सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में 5वें स्थान पर हैं। हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने वाले योगी आदित्यनाथ 100 सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में छठे स्थान पर मौजूद हैं। लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी नाम है, जो 11वें स्थान पर हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। पीएम मोदी देश के एक सौ सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में पहले नंबर पर हैं। इस लिस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मोहन भागवत, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हैं। एक सौ पॉवरफुल लोगों की सूची जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी के आलोचकों का मानना था कि कोरोना और कृषि कानूनों को वापस लेने से उनकी छवि खराब हुई है लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनकी छवि में निखार आया है। पीएम मोदी की राजनीतिक छवि पर कृषि कानून का कोई असर नहीं पड़ा है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से दूर रहना और फिर भी बाईस,शून्य भारतीयों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए यूरोपीय देशों तक पहुंचना उनके नेतृत्व को एक जबरदस्त कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि जेपी नड्डा के भाजपा अध्यक्ष होने के बावजूद अमित शाह का पार्टी में काफी प्रभाव है। केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में वह सरकार में प्रभावी नंबर दो बने हुए हैं। हालांकि यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों ही भाजपा के प्रचार के चेहरे थे। शाह को पार्टी का कैडर को सक्रिय करने के लिए कदम उठाना पड़ा क्योंकि किसान आंदोलन के बीच पश्चिमी यूपी में पार्टी को कड़ी टक्कर मिली। तीसरे पर RSS चीफ मोहन भागवत हैं। छियानवे बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में पाँचवें स्थान पर हैं। हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने वाले योगी आदित्यनाथ एक सौ सबसे शक्तिशाली लोगों की लिस्ट में छठे स्थान पर मौजूद हैं। लिस्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी नाम है, जो ग्यारहवें स्थान पर हैं।
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जय श्रेयनाथ नुत सहसभुज्ज । जय वासवपूजित वासुपुज्ज ।।५ दुति दन्त सेत= स्वच्छ दातो के समान सफेद और चमकदार शरीर वाले । शीतल गुननि केत- शान्ति देनेवाले गुणो के घर । नुत सहस भुज्ज- हजार भुजा वाले इन्द्रादि के द्वारा नमस्कार के योग्य । वासव पूजित- इन्द्रादि से पूजे गये ।
अर्थ- जो स्वच्छ दांतो के समान सफेद और चमकदार शरीर वाले है, ऐसे पुष्पदन्त भगवान् की जय हो । जो शान्ति देनेवाले गुणो के घर है, ऐसे भव्शीतलनाथ की जय हो । जो हजार भुजा वाले इन्द्रादि से नमस्कार किये जाते हैं, ऐसे भ० श्रेयांसनाथ की जय हो । जो इन्द्रादि के द्वारा पूजे गये है, ऐसे वासुपूज्य भगवान् की जय हो ॥५
जय विमल विमलपद देनहार । जय अनंत गुनगन अपार । जय धर्म धर्म शिव शर्म देत । जय शांति शांति पुष्टी करेत ॥६
विमल पद- मोक्ष रूप पवित्र स्थान । देन हार देने वाले । पोरअन्त । शिव शर्म= मोक्ष सुख । शान्ति पुष्टी - शान्ति की मजबूती ।
अर्थ - जो मोक्ष रूप पवित्र स्थान की देने वाले है, ऐसे भ० विमलनाथ की जय हो । जिनके गुणो का कभी अन्त नही होता ऐसे अनन्तनाथ भगवान् की जय हो । जो धर्म का उपदेश देकर मोक्ष-सुख को देने वाले हैं, ऐसे भ० धर्मनाथ की जय हो । जो आत्मा मे शान्ति गुण को पुष्ट करते हैं, ऐसे शान्तिनाथ भगवान् की जय हो ॥ ६
जय कुन्थु कुन्थुवादिक रखेय जय थर जिन वसु छिप करेय ।। जय मल्लि मल्ल हत मोह मल्ल । जय
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जय श्रेयनाथ नुत सहसभुज्ज । जय वासवपूजित वासुपुज्ज ।।पाँच दुति दन्त सेत= स्वच्छ दातो के समान सफेद और चमकदार शरीर वाले । शीतल गुननि केत- शान्ति देनेवाले गुणो के घर । नुत सहस भुज्ज- हजार भुजा वाले इन्द्रादि के द्वारा नमस्कार के योग्य । वासव पूजित- इन्द्रादि से पूजे गये । अर्थ- जो स्वच्छ दांतो के समान सफेद और चमकदार शरीर वाले है, ऐसे पुष्पदन्त भगवान् की जय हो । जो शान्ति देनेवाले गुणो के घर है, ऐसे भव्शीतलनाथ की जय हो । जो हजार भुजा वाले इन्द्रादि से नमस्कार किये जाते हैं, ऐसे भशून्य श्रेयांसनाथ की जय हो । जो इन्द्रादि के द्वारा पूजे गये है, ऐसे वासुपूज्य भगवान् की जय हो ॥पाँच जय विमल विमलपद देनहार । जय अनंत गुनगन अपार । जय धर्म धर्म शिव शर्म देत । जय शांति शांति पुष्टी करेत ॥छः विमल पद- मोक्ष रूप पवित्र स्थान । देन हार देने वाले । पोरअन्त । शिव शर्म= मोक्ष सुख । शान्ति पुष्टी - शान्ति की मजबूती । अर्थ - जो मोक्ष रूप पवित्र स्थान की देने वाले है, ऐसे भशून्य विमलनाथ की जय हो । जिनके गुणो का कभी अन्त नही होता ऐसे अनन्तनाथ भगवान् की जय हो । जो धर्म का उपदेश देकर मोक्ष-सुख को देने वाले हैं, ऐसे भशून्य धर्मनाथ की जय हो । जो आत्मा मे शान्ति गुण को पुष्ट करते हैं, ऐसे शान्तिनाथ भगवान् की जय हो ॥ छः जय कुन्थु कुन्थुवादिक रखेय जय थर जिन वसु छिप करेय ।। जय मल्लि मल्ल हत मोह मल्ल । जय
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वाह गर्लफ्रैंड आज तो फुल ऑन मूड में हो।
एफएम पर गीत सुनती हुई सुमन जी को छेड़ते हुए अंदाज़ में आरव ने कहा!
क्या अवी तू हर समय क्यों अपनी दादी को परेशान करता रहता है और ये हमेशा तू गर्लफ्रैंड गर्लफ्रैंड क्या कहता रहता है?किचन में बर्तन सजाती हुई मिसेज़ शर्मा यानि कि सुमन जी की बहू और आरव की मम्मी ने कहा!
क्यों दादी क्या मैं सचमुच आपको परेशान करता हूँ?
नहीं मेरे बच्चे,बिल्कुल भी नहीं!
लव यू माय स्वीट गर्लफ्रैंड!!
लव यू माय वैरी स्वीट ब्यॉयफ्रैंड!!
अरे!दादी मैं आपको एक बात बताना तो भूल ही गया।
बता न क्या बात है?
दादी वो मेरे क्लास का पूरन है न?
हाँ,कौन वो जो एग्जाम में तेरे नोट्स ले गया था और टाइम पर लौटाने की बजाय उसनें न तो तेरा फोन उठाया और न हीं खुद नोट्स ही वापिस लौटाने आया।
हाँ वो ही पूरन दादी जिसे आपनें इस बात पर उसके घर जाकर इतना डाँटा था कि बेचारा आज तक वो याद करके डरता है,कहकर आरव अपनी दादी के साथ ठहाके लगाकर हँसने लगा।हँसते हँसते ही आरव बताने लगा कि दादी उसी पूरन की दादी नें परसों शादी कर ली।आपको पता है कि उसकी दादी नें न लव मैरिज की है और दादी वो पूरन के नये दादा जी से फेसबुक पर मिली थीं।
जहाँ दादी आरव की बात बड़े ही ध्यान से सुन रही थीं वहीं उनकी बहू अपने बेटे आरव को चुप होने का इशारा कर रही थीं।
आरव क्यों तू बार बार अपनी दादी से एक ही बात दोहराता रहता है?कभी दादी फेसबुक ज्वाइन कर लो तो कभी मैं आपका बायोडाटा मैट्रीमोनियल साइट पर डाल दूँ और अब तेरे दोस्तों के ये ऊलजुलूल किस्से!!हद्द है बेटा!!
मम्मा!इसमें ऊलजुलूल क्या है?क्या कभी आपनें दादी जी के अकेलेपन या उनकी खामोशी को पढ़ने की कोशिश की है?मम्मा आप ही बताएं कि दादा जी के सामने क्या दादी ऐंसी ही थीं?क्या वो ऐंसे ही गुमसुम रहा करती थीं?और मम्मा मुझे तो नहीं लगता कि मेरे अलावा वो इस घर में किसी और से हँसती या कभी कुछ शेयर भी करती हैं।अब मम्मा मेरा भी कॉलेज दो महीने बाद खत्म हो जाएगा।पता नहीं मुझे कैम्पस कहाँ मिले?इसलिए मम्मा मैं यहाँ से जाने से पहले अपनी दादी को सैटल कर देना चाहता हूँ!
आरव लगातार बोलता ही जा रहा था और मिसेज़ शर्मा अपने बेटे की समझदारी को बड़े ही सम्मान के साथ समझने की कोशिश कर रही थीं।
बेटा तू कब इतना बड़ा हो गया,मुझे तो पता ही नहीं चला!!बेटा तुझे जैसा ठीक लगे वैसा कर,एक लम्बी साँस लेते हुए मिसेज़ शर्मा नें कहा।
दादी हम बहुत दिनों से कहीं घूमने नहीं गए।चलो न गर्लफ्रैंड कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाते हैं!
अरे बेटा मेरा शरीर अब साथ नहीं देता,बड़ी जल्दी ही थकान हो जाती है।तू अपने मम्मा और पापा के साथ प्लान बना ले।
नो,नो,नो!विदाउट गर्लफ्रैंड,नो आउटिंग!
अरे बेटा!अच्छा बता कहाँ ले जायेगा मुझे?
जहाँ भी आप चाहो और वैसे भी अभी एक हफ्ते की छुट्टियाँ हैं मेरी फिर इसके बाद वैसे भी मैं बहुत बिज़ी होने वाला हूँ!
अच्छा,मतलब कि अपनी गर्लफ्रैंड के लिए भी बिज़ी?सुमन जी ने उदास होते हुए कहा।
नो वे,अपनी गर्लफ्रैंड के लिए तो हमेशा हाज़िर!आरव इतना कहकर अपनी दादी से लिपट गया और अब दोनों की ही आँखें नम थीं।
बोलो न दादी,कहाँ चलोगी?
बनारस!आज का वाराणसी!
अगले दिन सुबह सुबह पूरी शर्मा फ़ैमिली वाराणसी पहुँच चुकी थी।वाराणसी के सभी घाटों पर घूमने और गंगा आरती में शामिल होने के बाद भी न जाने क्यों सुमन जी की आँखों में एक अधूरापन स्पष्ट दिख रहा था जिसे बाखूबी महसूस कर रहा था आरव।
दादी अब कल हम आर्ट गैलरी चलेंगे।
नहीं बेटा अब बस घर लौटेंगे कल!
दादी आप वाराणसी में किसी को जानती हैं क्या?मेरा मतलब है कि क्या यहाँ पर आपका कोई जानकार रहता है?
हाँ,नहीं!नहीं तो!सुमन जी इसके सवाल के जवाब पर कुछ असहज हो गयीं।
अरे गर्लफ्रैंड!हाँ या न?ठीक से सोचकर बताओ।
हाँ मेरा मतलब है कि एक जानकार रहते तो थे यहाँ मेरे मगर पता नहीं कि अब वो यहाँ रहते हैं या नहीं!
अरे आप बताओ तो सही,मैं इसका भी पता लगा लूँगा!!
मेरे एक,कहते कहते कुछ संकोच के साथ रुक गयीं सुमन जी।
अरे! आप उनका नाम तो बताओ मेरी प्यारी दादी जी!
संदीप!!संदीप मिश्रा,वो बैंक में काम करते थे।रिज़र्व बैंक में!वैसे तो उनकी पोस्टिंग लखनऊ में थी मगर वो रहने वाले वाराणसी के ही थे।
सुमन जी कुछ और बता पातीं उससे पहले ही आरव नें संदीप मिश्रा नाम के शख्स को फेसबुक पर सर्च भी कर लिया। दादी देखना ज़रा यही हैं क्या वो?आरव ने लैपटॉप को सुमन जी की तरफ़ मोड़ते हुए कहा।
सुमन जी की नज़र न चाहते हुए भी उस शख्स की तस्वीर पर कुछ इस कदर टिक गई मानों कह रही हो कि हाँ इसी एक झलक का इंतज़ार तो था मुझे बरसों से और हाँ यही तो वो कशिश है जो मुझे दिल्ली से वाराणसी तक खींच लायी।
दादी बोलो न!!यही हैं क्या वो?आपके जानकार!!
हम्म!हाँ शायद यही हैं।जहाँ सबके सामने सुमन जी शायद यही हैं कह रही थीं और अपनी बेचैनी को छुपाने का भरसक प्रयास कर रही थीं वहीं उनका दिल उनसे बार बार ये कह रहा था कि हाँ यही तो हैं वो!
आरव को मैसेंजर पर उस शख्स यानि कि संदीप जी से कॉन्ट्रैक्ट करते जरा भी देर न लगी और अगले दो घंटे के भीतर ही वो लोग अब संदीप जी के घर में थे।
सुमन आपनें यदि पहले बताया होता तो मैं आप लोगों को खुद लेने आ जाता!
मुझे खुद भी कहाँ पता था कि आरव आपसे यूं बात कर लेगा और...इसके आगे सुमन जी कुछ कह पातीं उससे पहले ही संदीप जी बोल पड़े!
चलो किसी ने तो बात की!!
इसपर अचानक से मिलीं संदीप जी और सुमन जी की नज़र।उफ्फ!!धक्क से हुआ सुमन जी का दिल जोरों से धड़कने लगा और सुमन जी आँखों ही आँखों में मानों संदीप जी से कह रही हो हे भगवान!इस उम्र में भी तुम्हें देखकर ये दिल ऐंसे धड़कता है और संदीप जी का वो ही बरसों पुराना जवाब,देख लीजिए!!
दादा जी!मैं आपको दादा जी कह सकता हूँ न?आरव नें संदीप जी से पूछा।
हाँ बेटे बिल्कुल कह सकते हो।
तो दादा जी एक बात बताइए कि आपनें हमारी दादी जी को कहाँ छुपाकर रखा है क्योंकि जबसे हम लोग यहाँ आये हैं बस आपके ये चंदन साहब और उनकी धर्मपत्नी जी ही सारा काम कर रही हैं।
हाँ बेटा मैंने इस चंदन को अपने बेटे की तरह ही पाला है।दरअसल इसके पिताजी हमारे घर में काफी सालों से काम कर रहे थे और उनके देहाँत के बाद मैंने इन दोंनो बच्चों को यहीं रख लिया।
और बेटा दादी जी को छुपाने की बात तो तब आयेगी न जब दादी जी होंगी!
नहीं ऐंसा कुछ नहीं है बेटा,दरअसल मैंने शादी ही नहीं की!
ओह्ह!!ऐंसा क्यों दादा जी?
बेटा दरअसल मैं जिससे शादी करना चाहता था,उसनें किसी और से शादी कर ली और उसके बाद उस जैसी कोई मिली ही नहीं।
दादा जी कहीं वो कातिल हसीना हमारी दादी जी तो नहीं??
आरव के ऐंसा कहते ही सुमन जी इतनी बुरी तरह से झेंप गयीं,मानो उनकी चोरी पकड़ी गयी हो।इधर संदीप जी भी इस तरह से आरव द्वारा अचानक पूछे गए इस प्रश्न से कुछ असहज हो गए।
आरव बहुत ज्यादा बोलने लगे हो आजकल तुम।आरव के पापा नें आरव को डाँटते हुए अंदाज़ में कहा।
बाबूजी खाना डाइनिंग टेबल पर लगा दिया है,चंदन के कहने पर सभी खाना खाने के लिए उठ गए।
अच्छा अंकल जी अब आज्ञा दें!हमारी ट्रेन का टाइम हो रहा है।आरव के पापा ने संदीप जी से कहा।
अच्छा बेटा फिर आना!आप लोग आये बहुत अच्छा लगा!बरसों बाद अपनों से मिलकर सुकून मिला,अपने चेहरे पर एक सुकूनभरी मुस्कुराहट बिखेरते हुए संदीप जी नें कहा।
अरे दादा जी अब तो आप आयेंगे हमारे घर!मैं आपको यहाँ इनविटेशन देने ही तो आया था।अरे!दादा जी अगले महीने हमारी प्यारी सी दादी जी का जन्मदिन है और आपको पक्का आना है।
संदीप जी की नज़रों में ये बहुत अच्छे से नज़र आ रहा था कि उन्हें पता है कि अगले महीने सुमन जी का जन्मदिन है मगर फिर भी उन्होंने अंजान बनते हुए कहा,अच्छा!!मैं आने की कोशिश करूँगा!
नहीं दादा जी!कोशिश नहीं,प्रॉमिस!!
ओके बेटा जी प्रॉमिस और संदीप जी ने हँसकर आरव को अपने गले से लगा लिया।
वाराणसी से आये शर्मा फ़ैमिली को आज पूरे आठ दिन हो गए थे।आरव सोफे पर लेटकर अपना मोबाईल देख रहा था तभी उसके पीछे से गुजरती हुई सुमन जी की नज़र उसके मोबाईल पर पड़ी और वो स्तब्ध रह गयीं ये देखकर कि आरव संदीप जी से वॉट्सऐप चैट कर रहा था और उसके चैट मैसेजेस बड़े ही लम्बे लम्बे थे।
बोलो माय स्वीट गर्लफ्रैंड!
आरव तू हर समय न मजाक मत किया कर!एक तो तू हर काम अपने हिसाब से करता है और तुझे कभी किसी को कुछ बताना भी नहीं होता है,हैं न?
अरे!आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो मुझपर?क्या मम्मा का असर आ गया आपपर?
ओके!सॉरी दादी,बट हुआ क्या?
तू संदीप जी से कब से बात कर रहा है?
ओफ्फो!!तो ये बात है!अरे तो आप भी कर लो न बात उनसे।अच्छा तो आप इसलिए नाराज हो गए कि मैंने अकेले अकेले बात कर ली और आपसे बात नहीं करवाई,हैं न?
फिर से मजाक!इस बार दादी का मिजाज़ सचमुच कुछ गर्म था।
अच्छा एक मिनट रूको आप,इससे पहले की सुमन जी कुछ कह पातीं आरव नें संदीप जी को वीडियो कॉल लगा दी।
दादा जी,हाय!कैसे हैं आप?एक मिनट जरा आप दादी जी से बात कीजिए,कहते हुए आरव नें अपना मोबाईल सुमन जी के हाथों में पकड़ा दिया।
हैलो!कैसी हैं आप?
मैं अच्छी हूँ और आप,सुमन जी की आवाज़ में एक अजीब सी कंपकंपाहट थी।कुछ औपचारिक बातों के बाद कॉल डिसकनेक्ट हो गयी।
हम्म!!आरव बेटा!
कुछ मत बोलो दादी प्लीज़ कुछ मत बोलो।दादी आप जब इस घर का, मम्मा पापा का, मेरा,हम सबका ख्याल करती हो तो क्या मैं आपके लिए कुछ भी करने का हक नहीं रखता?मुझे संदीप दादा जी नें सबकुछ बता दिया है कि कैसे आप लोगों की जिंदगी अचानक ही बदल गयी।कि कैसे आप दोनों को जिंदगी ने मिलाया और कैसे अलग भी कर दिया।आप,दादा जी और संदीप दादा जी एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दादा जी और आप एक ही क्लास में थे जबकि संदीप दादा जी आप लोगों से एक क्लास सीनियर थे।संदीप दादा जी वाराणसी से कानपुर पढ़ने के लिए आये थे।संदीप दादा जी,हमारे दादा जी के पिताजी के दोस्त के बेटे थे और फिर किस तरह आप तीनों की दोस्ती हुई,मुझे संदीप दादा जी नें सबकुछ बता दिया है।फिर उसके बाद दादा जी का आपसे प्यार का इज़हार और नाना जी के पास आपके लिए अपना रिश्ता भेजना।इसके बाद आपको संदीप दादा जी नें किस तरह इस रिश्ते के लिए मनाया,मुझे सब पता है दादी।संदीप दादा जी पर हमारे दादा जी के पिताजी के एहसान और उसपर दादा जी और संदीप दादा जी की दोस्ती,सब जानता हूँ मैं!!
एक बात और है,मेरे बच्चे जो तू नहीं जानता।तुझे पता है तेरे दादा जी का दिल कितना बड़ा था?वो मुझे बहुत प्यार करते थे और मुझसे भी ज्यादा मान तो वो संदीप जी का करते थे।मैं भी उनकी बहुत इज्ज़त करती थी मगर सिर्फ किसी अमीर के एहसानों की खातिर किसी गरीब की मोहब्बत को सूली पर चढ़ाना मुझे गंवारा नहीं था लेकिन बेटा किस्मत के खेल के आगे मुझे भी अपने घुटने टेकने पड़ गए।
मुझे आज भी बहुत अच्छे से याद है वो दिन जब संदीप जी नें मुझे तुम्हारे दादा जी यानि कि संजय की रिपोर्ट दिखाई थी और मैं रिपोर्ट देखते ही गश खाकर गिर पड़ी थी,बेटा वो आखिरी बार गिरी थी मैं संदीप जी की बाहों में,कहते कहते सुमन जी की आँखों से आँसू टप टप कर बहने लगे!तुझे पता है कि उस रिपोर्ट में क्या लिखा था?
नहीं दादी!मुझे नहीं पता,ये कहते हुए रूआंसी हो गयी आरव की भी आवाज़!!
बेटा उसमें लिखा था कि संजय के दिल में छेद है!!
शादी के तीन महीने बाद ही हम लोगों को पता चल चुका था कि वो रिपोर्ट संजय की नहीं थी बल्कि हॉस्पिटल स्टाफ की गलती का नतीजा थी मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी,बहुत देर!!
संदीप जी मेरी दुनिया से बहुत दूर जा चुके थे और मैं उनसे अलग अपनी एक नयी दुनिया बसा चुकी थी,सिर्फ मेरी और संजय की दुनिया जिसमें किसी भी तीसरे शख्स के लिए अब कोई जगह नहीं बची थी,सुमन जी नें खुद को सम्भालते हुए और अपने गालों पर ढुलकते हुए आँसुओं को पोंछते हुए कहा।
आरव!आरव कहाँ है बेटा?
आया मम्मा!
अरे बेटा तू केक लाया या नहीं?देख न सात बजनें वाले हैं और मम्मी जी का केक सात बजे कटना है न!!
ओह्हो!!मम्मा,फिकर नॉट।ये अरेंजमेंट आरव दि ग्रेट का है तो जस्ट चिल!!
हैप्पी बर्थडे टू यू ,हैप्पी बर्थडे टू डियर दादी,हैप्पी बर्थडे टू यू!!
वाह बेटा जी,आपका अरेंजमेंट तो वाकई बहुत शानदार था।
थैंक्यू दादा जी!अच्छा अब मैं चलता हूँ,कल सुबह मुझे जल्दी उठना है।
अरे आरव बेटा कल तो आपनें कॉलेज से छुट्टी ले रखी है न,फिर जल्दी क्यों?सुमन जी नें पूछा।
अरे दादी आपका बर्थडे तो सैलिब्रेट हो गया मगर मैंने आपको अभी तक गिफ्ट कहाँ दिया है तो आपका गिफ़्ट बाकी है न अभी!बस उसी के लिए उठना है मुझे सुबह जल्दी,ओके गुडनाईट दादा जी,गुडनाईट दादी जी!
गुडनाईट बेटा!!
सुमन जी को आरव की बात से कुछ शक तो ज़रूर हो रहा था मगर समझने की काफ़ी कोशिश करने पर भी वो कुछ भी समझ नहीं पा रही थीं।
अब आप भी सो जाइए संदीप जी।कल सुबह आपकी ट्रेन भी है।बेवजह ही इस लड़के नें आपको परेशान कर दिया।
अरे आप कैसी बात कर रही हैं और वैसे भी हर साल अकेले केक काटने से अच्छा तो आज सबके साथ ही,संदीप जी आगे कुछ कह पाते उससे पहले ही सुमन जी नें उन्हें बीच में ही टोंक दिया!
हर साल,मतलब!!
मतलब कुछ नहीं!
बताइए न प्लीज़!
सुमन क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे जन्मदिन की तारीख कभी भूल से भी भूल सकता हूँ??मैं हर साल इस दिन तुम्हारे नाम का केक काटता था,मन्दिर जाता था और..कहते कहते संदीप जी की पलकें भीग गयीं।
आपको पता है संदीप जी,संजय अपनें आखिरी दिनों में मुझसे हमेशा एक ही बात कहा करते थे कि मेरे बाद तुम संदीप के पास चली जाना।
न जानें उन्हें क्या एहसास हो गया था या इस दुनिया में उनके बाद उन्हें मेरे लिए सिर्फ़ आप पर ही भरोसा था।मैं उनकी इस बात पर कभी समझ ही नहीं पायी कि क्या जवाब दूँ?
रात बहुत हो चुकी है,अब आपको आराम करना चाहिए फिर कल आपको सफ़र भी करना है,कहते हुए सुमन जी अपने कमरे में चली गयीं।
अगले दिन सुबह पूरी शर्मा फ़ैमिली संदीप जी को स्टेशन छोड़ने के लिए चल पड़ी।
अरे!बेटा आरव ये रास्ता तो स्टेशन की तरफ़ नहीं जाता।बेटा शायद तुमनें गलत टर्न ले लिया,आरव के पापा नें कहा।
नहीं पापा,यही सही टर्न है।बिल्कुल सही!!
कुछ ही देर में गाड़ी कोर्ट के बाहर थी। किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
आइए सुमन जी,संदीप जी नें अपना हाथ सुमन जी की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा। सुमन जी नें एक नज़र अपनी बहू और आरव के ऊपर डाली और जवाब उन्हें एक मुस्कुराहटभरी रजामंदी में मिला।सुमन जी कुछ समझ भी रही थीं तो कुछ नहीं भी या शायद आज वो कुछ समझना भी नहीं चाहती थीं।बस आँख मूंदकर भरोसा करना चाहती थीं अपनों पर बहना चाहती थीं बहते हुए वक्त के बहाव में,बहुत थक चुकी थीं वो अब जिंदगी के इस ठहराव से!!
आइए मम्मी,अब आ भी जाओ मेरी एक्स गर्लफ्रेंड,सुमन जी की बहू और आरव नें एक साथ कहा!
सुमन जी नें मुस्कुराते हुए और शर्माते हुए बड़ी ही अदा से अपना हाथ संदीप जी के हाथ में दे दिया!!
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वाह गर्लफ्रैंड आज तो फुल ऑन मूड में हो। एफएम पर गीत सुनती हुई सुमन जी को छेड़ते हुए अंदाज़ में आरव ने कहा! क्या अवी तू हर समय क्यों अपनी दादी को परेशान करता रहता है और ये हमेशा तू गर्लफ्रैंड गर्लफ्रैंड क्या कहता रहता है?किचन में बर्तन सजाती हुई मिसेज़ शर्मा यानि कि सुमन जी की बहू और आरव की मम्मी ने कहा! क्यों दादी क्या मैं सचमुच आपको परेशान करता हूँ? नहीं मेरे बच्चे,बिल्कुल भी नहीं! लव यू माय स्वीट गर्लफ्रैंड!! लव यू माय वैरी स्वीट ब्यॉयफ्रैंड!! अरे!दादी मैं आपको एक बात बताना तो भूल ही गया। बता न क्या बात है? दादी वो मेरे क्लास का पूरन है न? हाँ,कौन वो जो एग्जाम में तेरे नोट्स ले गया था और टाइम पर लौटाने की बजाय उसनें न तो तेरा फोन उठाया और न हीं खुद नोट्स ही वापिस लौटाने आया। हाँ वो ही पूरन दादी जिसे आपनें इस बात पर उसके घर जाकर इतना डाँटा था कि बेचारा आज तक वो याद करके डरता है,कहकर आरव अपनी दादी के साथ ठहाके लगाकर हँसने लगा।हँसते हँसते ही आरव बताने लगा कि दादी उसी पूरन की दादी नें परसों शादी कर ली।आपको पता है कि उसकी दादी नें न लव मैरिज की है और दादी वो पूरन के नये दादा जी से फेसबुक पर मिली थीं। जहाँ दादी आरव की बात बड़े ही ध्यान से सुन रही थीं वहीं उनकी बहू अपने बेटे आरव को चुप होने का इशारा कर रही थीं। आरव क्यों तू बार बार अपनी दादी से एक ही बात दोहराता रहता है?कभी दादी फेसबुक ज्वाइन कर लो तो कभी मैं आपका बायोडाटा मैट्रीमोनियल साइट पर डाल दूँ और अब तेरे दोस्तों के ये ऊलजुलूल किस्से!!हद्द है बेटा!! मम्मा!इसमें ऊलजुलूल क्या है?क्या कभी आपनें दादी जी के अकेलेपन या उनकी खामोशी को पढ़ने की कोशिश की है?मम्मा आप ही बताएं कि दादा जी के सामने क्या दादी ऐंसी ही थीं?क्या वो ऐंसे ही गुमसुम रहा करती थीं?और मम्मा मुझे तो नहीं लगता कि मेरे अलावा वो इस घर में किसी और से हँसती या कभी कुछ शेयर भी करती हैं।अब मम्मा मेरा भी कॉलेज दो महीने बाद खत्म हो जाएगा।पता नहीं मुझे कैम्पस कहाँ मिले?इसलिए मम्मा मैं यहाँ से जाने से पहले अपनी दादी को सैटल कर देना चाहता हूँ! आरव लगातार बोलता ही जा रहा था और मिसेज़ शर्मा अपने बेटे की समझदारी को बड़े ही सम्मान के साथ समझने की कोशिश कर रही थीं। बेटा तू कब इतना बड़ा हो गया,मुझे तो पता ही नहीं चला!!बेटा तुझे जैसा ठीक लगे वैसा कर,एक लम्बी साँस लेते हुए मिसेज़ शर्मा नें कहा। दादी हम बहुत दिनों से कहीं घूमने नहीं गए।चलो न गर्लफ्रैंड कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाते हैं! अरे बेटा मेरा शरीर अब साथ नहीं देता,बड़ी जल्दी ही थकान हो जाती है।तू अपने मम्मा और पापा के साथ प्लान बना ले। नो,नो,नो!विदाउट गर्लफ्रैंड,नो आउटिंग! अरे बेटा!अच्छा बता कहाँ ले जायेगा मुझे? जहाँ भी आप चाहो और वैसे भी अभी एक हफ्ते की छुट्टियाँ हैं मेरी फिर इसके बाद वैसे भी मैं बहुत बिज़ी होने वाला हूँ! अच्छा,मतलब कि अपनी गर्लफ्रैंड के लिए भी बिज़ी?सुमन जी ने उदास होते हुए कहा। नो वे,अपनी गर्लफ्रैंड के लिए तो हमेशा हाज़िर!आरव इतना कहकर अपनी दादी से लिपट गया और अब दोनों की ही आँखें नम थीं। बोलो न दादी,कहाँ चलोगी? बनारस!आज का वाराणसी! अगले दिन सुबह सुबह पूरी शर्मा फ़ैमिली वाराणसी पहुँच चुकी थी।वाराणसी के सभी घाटों पर घूमने और गंगा आरती में शामिल होने के बाद भी न जाने क्यों सुमन जी की आँखों में एक अधूरापन स्पष्ट दिख रहा था जिसे बाखूबी महसूस कर रहा था आरव। दादी अब कल हम आर्ट गैलरी चलेंगे। नहीं बेटा अब बस घर लौटेंगे कल! दादी आप वाराणसी में किसी को जानती हैं क्या?मेरा मतलब है कि क्या यहाँ पर आपका कोई जानकार रहता है? हाँ,नहीं!नहीं तो!सुमन जी इसके सवाल के जवाब पर कुछ असहज हो गयीं। अरे गर्लफ्रैंड!हाँ या न?ठीक से सोचकर बताओ। हाँ मेरा मतलब है कि एक जानकार रहते तो थे यहाँ मेरे मगर पता नहीं कि अब वो यहाँ रहते हैं या नहीं! अरे आप बताओ तो सही,मैं इसका भी पता लगा लूँगा!! मेरे एक,कहते कहते कुछ संकोच के साथ रुक गयीं सुमन जी। अरे! आप उनका नाम तो बताओ मेरी प्यारी दादी जी! संदीप!!संदीप मिश्रा,वो बैंक में काम करते थे।रिज़र्व बैंक में!वैसे तो उनकी पोस्टिंग लखनऊ में थी मगर वो रहने वाले वाराणसी के ही थे। सुमन जी कुछ और बता पातीं उससे पहले ही आरव नें संदीप मिश्रा नाम के शख्स को फेसबुक पर सर्च भी कर लिया। दादी देखना ज़रा यही हैं क्या वो?आरव ने लैपटॉप को सुमन जी की तरफ़ मोड़ते हुए कहा। सुमन जी की नज़र न चाहते हुए भी उस शख्स की तस्वीर पर कुछ इस कदर टिक गई मानों कह रही हो कि हाँ इसी एक झलक का इंतज़ार तो था मुझे बरसों से और हाँ यही तो वो कशिश है जो मुझे दिल्ली से वाराणसी तक खींच लायी। दादी बोलो न!!यही हैं क्या वो?आपके जानकार!! हम्म!हाँ शायद यही हैं।जहाँ सबके सामने सुमन जी शायद यही हैं कह रही थीं और अपनी बेचैनी को छुपाने का भरसक प्रयास कर रही थीं वहीं उनका दिल उनसे बार बार ये कह रहा था कि हाँ यही तो हैं वो! आरव को मैसेंजर पर उस शख्स यानि कि संदीप जी से कॉन्ट्रैक्ट करते जरा भी देर न लगी और अगले दो घंटे के भीतर ही वो लोग अब संदीप जी के घर में थे। सुमन आपनें यदि पहले बताया होता तो मैं आप लोगों को खुद लेने आ जाता! मुझे खुद भी कहाँ पता था कि आरव आपसे यूं बात कर लेगा और...इसके आगे सुमन जी कुछ कह पातीं उससे पहले ही संदीप जी बोल पड़े! चलो किसी ने तो बात की!! इसपर अचानक से मिलीं संदीप जी और सुमन जी की नज़र।उफ्फ!!धक्क से हुआ सुमन जी का दिल जोरों से धड़कने लगा और सुमन जी आँखों ही आँखों में मानों संदीप जी से कह रही हो हे भगवान!इस उम्र में भी तुम्हें देखकर ये दिल ऐंसे धड़कता है और संदीप जी का वो ही बरसों पुराना जवाब,देख लीजिए!! दादा जी!मैं आपको दादा जी कह सकता हूँ न?आरव नें संदीप जी से पूछा। हाँ बेटे बिल्कुल कह सकते हो। तो दादा जी एक बात बताइए कि आपनें हमारी दादी जी को कहाँ छुपाकर रखा है क्योंकि जबसे हम लोग यहाँ आये हैं बस आपके ये चंदन साहब और उनकी धर्मपत्नी जी ही सारा काम कर रही हैं। हाँ बेटा मैंने इस चंदन को अपने बेटे की तरह ही पाला है।दरअसल इसके पिताजी हमारे घर में काफी सालों से काम कर रहे थे और उनके देहाँत के बाद मैंने इन दोंनो बच्चों को यहीं रख लिया। और बेटा दादी जी को छुपाने की बात तो तब आयेगी न जब दादी जी होंगी! नहीं ऐंसा कुछ नहीं है बेटा,दरअसल मैंने शादी ही नहीं की! ओह्ह!!ऐंसा क्यों दादा जी? बेटा दरअसल मैं जिससे शादी करना चाहता था,उसनें किसी और से शादी कर ली और उसके बाद उस जैसी कोई मिली ही नहीं। दादा जी कहीं वो कातिल हसीना हमारी दादी जी तो नहीं?? आरव के ऐंसा कहते ही सुमन जी इतनी बुरी तरह से झेंप गयीं,मानो उनकी चोरी पकड़ी गयी हो।इधर संदीप जी भी इस तरह से आरव द्वारा अचानक पूछे गए इस प्रश्न से कुछ असहज हो गए। आरव बहुत ज्यादा बोलने लगे हो आजकल तुम।आरव के पापा नें आरव को डाँटते हुए अंदाज़ में कहा। बाबूजी खाना डाइनिंग टेबल पर लगा दिया है,चंदन के कहने पर सभी खाना खाने के लिए उठ गए। अच्छा अंकल जी अब आज्ञा दें!हमारी ट्रेन का टाइम हो रहा है।आरव के पापा ने संदीप जी से कहा। अच्छा बेटा फिर आना!आप लोग आये बहुत अच्छा लगा!बरसों बाद अपनों से मिलकर सुकून मिला,अपने चेहरे पर एक सुकूनभरी मुस्कुराहट बिखेरते हुए संदीप जी नें कहा। अरे दादा जी अब तो आप आयेंगे हमारे घर!मैं आपको यहाँ इनविटेशन देने ही तो आया था।अरे!दादा जी अगले महीने हमारी प्यारी सी दादी जी का जन्मदिन है और आपको पक्का आना है। संदीप जी की नज़रों में ये बहुत अच्छे से नज़र आ रहा था कि उन्हें पता है कि अगले महीने सुमन जी का जन्मदिन है मगर फिर भी उन्होंने अंजान बनते हुए कहा,अच्छा!!मैं आने की कोशिश करूँगा! नहीं दादा जी!कोशिश नहीं,प्रॉमिस!! ओके बेटा जी प्रॉमिस और संदीप जी ने हँसकर आरव को अपने गले से लगा लिया। वाराणसी से आये शर्मा फ़ैमिली को आज पूरे आठ दिन हो गए थे।आरव सोफे पर लेटकर अपना मोबाईल देख रहा था तभी उसके पीछे से गुजरती हुई सुमन जी की नज़र उसके मोबाईल पर पड़ी और वो स्तब्ध रह गयीं ये देखकर कि आरव संदीप जी से वॉट्सऐप चैट कर रहा था और उसके चैट मैसेजेस बड़े ही लम्बे लम्बे थे। बोलो माय स्वीट गर्लफ्रैंड! आरव तू हर समय न मजाक मत किया कर!एक तो तू हर काम अपने हिसाब से करता है और तुझे कभी किसी को कुछ बताना भी नहीं होता है,हैं न? अरे!आप इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो मुझपर?क्या मम्मा का असर आ गया आपपर? ओके!सॉरी दादी,बट हुआ क्या? तू संदीप जी से कब से बात कर रहा है? ओफ्फो!!तो ये बात है!अरे तो आप भी कर लो न बात उनसे।अच्छा तो आप इसलिए नाराज हो गए कि मैंने अकेले अकेले बात कर ली और आपसे बात नहीं करवाई,हैं न? फिर से मजाक!इस बार दादी का मिजाज़ सचमुच कुछ गर्म था। अच्छा एक मिनट रूको आप,इससे पहले की सुमन जी कुछ कह पातीं आरव नें संदीप जी को वीडियो कॉल लगा दी। दादा जी,हाय!कैसे हैं आप?एक मिनट जरा आप दादी जी से बात कीजिए,कहते हुए आरव नें अपना मोबाईल सुमन जी के हाथों में पकड़ा दिया। हैलो!कैसी हैं आप? मैं अच्छी हूँ और आप,सुमन जी की आवाज़ में एक अजीब सी कंपकंपाहट थी।कुछ औपचारिक बातों के बाद कॉल डिसकनेक्ट हो गयी। हम्म!!आरव बेटा! कुछ मत बोलो दादी प्लीज़ कुछ मत बोलो।दादी आप जब इस घर का, मम्मा पापा का, मेरा,हम सबका ख्याल करती हो तो क्या मैं आपके लिए कुछ भी करने का हक नहीं रखता?मुझे संदीप दादा जी नें सबकुछ बता दिया है कि कैसे आप लोगों की जिंदगी अचानक ही बदल गयी।कि कैसे आप दोनों को जिंदगी ने मिलाया और कैसे अलग भी कर दिया।आप,दादा जी और संदीप दादा जी एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दादा जी और आप एक ही क्लास में थे जबकि संदीप दादा जी आप लोगों से एक क्लास सीनियर थे।संदीप दादा जी वाराणसी से कानपुर पढ़ने के लिए आये थे।संदीप दादा जी,हमारे दादा जी के पिताजी के दोस्त के बेटे थे और फिर किस तरह आप तीनों की दोस्ती हुई,मुझे संदीप दादा जी नें सबकुछ बता दिया है।फिर उसके बाद दादा जी का आपसे प्यार का इज़हार और नाना जी के पास आपके लिए अपना रिश्ता भेजना।इसके बाद आपको संदीप दादा जी नें किस तरह इस रिश्ते के लिए मनाया,मुझे सब पता है दादी।संदीप दादा जी पर हमारे दादा जी के पिताजी के एहसान और उसपर दादा जी और संदीप दादा जी की दोस्ती,सब जानता हूँ मैं!! एक बात और है,मेरे बच्चे जो तू नहीं जानता।तुझे पता है तेरे दादा जी का दिल कितना बड़ा था?वो मुझे बहुत प्यार करते थे और मुझसे भी ज्यादा मान तो वो संदीप जी का करते थे।मैं भी उनकी बहुत इज्ज़त करती थी मगर सिर्फ किसी अमीर के एहसानों की खातिर किसी गरीब की मोहब्बत को सूली पर चढ़ाना मुझे गंवारा नहीं था लेकिन बेटा किस्मत के खेल के आगे मुझे भी अपने घुटने टेकने पड़ गए। मुझे आज भी बहुत अच्छे से याद है वो दिन जब संदीप जी नें मुझे तुम्हारे दादा जी यानि कि संजय की रिपोर्ट दिखाई थी और मैं रिपोर्ट देखते ही गश खाकर गिर पड़ी थी,बेटा वो आखिरी बार गिरी थी मैं संदीप जी की बाहों में,कहते कहते सुमन जी की आँखों से आँसू टप टप कर बहने लगे!तुझे पता है कि उस रिपोर्ट में क्या लिखा था? नहीं दादी!मुझे नहीं पता,ये कहते हुए रूआंसी हो गयी आरव की भी आवाज़!! बेटा उसमें लिखा था कि संजय के दिल में छेद है!! शादी के तीन महीने बाद ही हम लोगों को पता चल चुका था कि वो रिपोर्ट संजय की नहीं थी बल्कि हॉस्पिटल स्टाफ की गलती का नतीजा थी मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी,बहुत देर!! संदीप जी मेरी दुनिया से बहुत दूर जा चुके थे और मैं उनसे अलग अपनी एक नयी दुनिया बसा चुकी थी,सिर्फ मेरी और संजय की दुनिया जिसमें किसी भी तीसरे शख्स के लिए अब कोई जगह नहीं बची थी,सुमन जी नें खुद को सम्भालते हुए और अपने गालों पर ढुलकते हुए आँसुओं को पोंछते हुए कहा। आरव!आरव कहाँ है बेटा? आया मम्मा! अरे बेटा तू केक लाया या नहीं?देख न सात बजनें वाले हैं और मम्मी जी का केक सात बजे कटना है न!! ओह्हो!!मम्मा,फिकर नॉट।ये अरेंजमेंट आरव दि ग्रेट का है तो जस्ट चिल!! हैप्पी बर्थडे टू यू ,हैप्पी बर्थडे टू डियर दादी,हैप्पी बर्थडे टू यू!! वाह बेटा जी,आपका अरेंजमेंट तो वाकई बहुत शानदार था। थैंक्यू दादा जी!अच्छा अब मैं चलता हूँ,कल सुबह मुझे जल्दी उठना है। अरे आरव बेटा कल तो आपनें कॉलेज से छुट्टी ले रखी है न,फिर जल्दी क्यों?सुमन जी नें पूछा। अरे दादी आपका बर्थडे तो सैलिब्रेट हो गया मगर मैंने आपको अभी तक गिफ्ट कहाँ दिया है तो आपका गिफ़्ट बाकी है न अभी!बस उसी के लिए उठना है मुझे सुबह जल्दी,ओके गुडनाईट दादा जी,गुडनाईट दादी जी! गुडनाईट बेटा!! सुमन जी को आरव की बात से कुछ शक तो ज़रूर हो रहा था मगर समझने की काफ़ी कोशिश करने पर भी वो कुछ भी समझ नहीं पा रही थीं। अब आप भी सो जाइए संदीप जी।कल सुबह आपकी ट्रेन भी है।बेवजह ही इस लड़के नें आपको परेशान कर दिया। अरे आप कैसी बात कर रही हैं और वैसे भी हर साल अकेले केक काटने से अच्छा तो आज सबके साथ ही,संदीप जी आगे कुछ कह पाते उससे पहले ही सुमन जी नें उन्हें बीच में ही टोंक दिया! हर साल,मतलब!! मतलब कुछ नहीं! बताइए न प्लीज़! सुमन क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे जन्मदिन की तारीख कभी भूल से भी भूल सकता हूँ??मैं हर साल इस दिन तुम्हारे नाम का केक काटता था,मन्दिर जाता था और..कहते कहते संदीप जी की पलकें भीग गयीं। आपको पता है संदीप जी,संजय अपनें आखिरी दिनों में मुझसे हमेशा एक ही बात कहा करते थे कि मेरे बाद तुम संदीप के पास चली जाना। न जानें उन्हें क्या एहसास हो गया था या इस दुनिया में उनके बाद उन्हें मेरे लिए सिर्फ़ आप पर ही भरोसा था।मैं उनकी इस बात पर कभी समझ ही नहीं पायी कि क्या जवाब दूँ? रात बहुत हो चुकी है,अब आपको आराम करना चाहिए फिर कल आपको सफ़र भी करना है,कहते हुए सुमन जी अपने कमरे में चली गयीं। अगले दिन सुबह पूरी शर्मा फ़ैमिली संदीप जी को स्टेशन छोड़ने के लिए चल पड़ी। अरे!बेटा आरव ये रास्ता तो स्टेशन की तरफ़ नहीं जाता।बेटा शायद तुमनें गलत टर्न ले लिया,आरव के पापा नें कहा। नहीं पापा,यही सही टर्न है।बिल्कुल सही!! कुछ ही देर में गाड़ी कोर्ट के बाहर थी। किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। आइए सुमन जी,संदीप जी नें अपना हाथ सुमन जी की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा। सुमन जी नें एक नज़र अपनी बहू और आरव के ऊपर डाली और जवाब उन्हें एक मुस्कुराहटभरी रजामंदी में मिला।सुमन जी कुछ समझ भी रही थीं तो कुछ नहीं भी या शायद आज वो कुछ समझना भी नहीं चाहती थीं।बस आँख मूंदकर भरोसा करना चाहती थीं अपनों पर बहना चाहती थीं बहते हुए वक्त के बहाव में,बहुत थक चुकी थीं वो अब जिंदगी के इस ठहराव से!! आइए मम्मी,अब आ भी जाओ मेरी एक्स गर्लफ्रेंड,सुमन जी की बहू और आरव नें एक साथ कहा! सुमन जी नें मुस्कुराते हुए और शर्माते हुए बड़ी ही अदा से अपना हाथ संदीप जी के हाथ में दे दिया!!
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Urvashi Rautela new dance video: बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी तसवीरों से फैंस का दिल जीतते रहती हैं. अब उर्वशी का एक डांस वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा हैं. इस वीडियो में एक्ट्रेस डांस रिहर्सल कर रही है. उन्होंने ब्लैक कलर का कॉस्ट्यूम पहन रखा है, जिसमें वो किलर लग रही है. इस वीडियो को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.
उर्वशी रौतेला ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस वीडियो को शेयर किया है. वीडियो में उर्वशी हेट स्टोरी के अपने गाने आशिक बनाया आपने पर डांस रिहर्सल करती दिख रही हैं. इस वीडियो की खास बात यह है कि इसमें उर्वशी ने हाई हील्स पहन रखी हैं, जिसके साथ भी वह शानदार डांस स्टेप्स करती दिक रही हैं. वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा है, 'पर्दे पर हील्स के साथ परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय कलाकार बनने पर सम्मानित और आभारी महसूस कर रही हूं. '
उर्वशी के फैंस को उनका यह डांस वीडियो काफी पसंद आ रहा है, जिसके चलते वह उनकी खूब तारीफ भी कर रहे हैं. वहीं, उर्वशी रौतेला की फैन फॉलोविंग कमाल की है. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर 25 मिलियन फॉलोवर को पार करने वाली सबसे कम उम्र की बॉलीवुड सेलिब्रिटी बनीं.
वहीं, हाल ही में एक्ट्रेस का फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था. जिसकी जानकारी खुद अभिनेत्री ने ट्वीट के जरिए दी थी. उर्वशी रौतेला ने मुबंई पुलिस से इसकी शिकायत भी कर दी थी. जिसके बाद उर्वशी रौतेला की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने उनकी शिकायत साइबर सेल को भेज दिया. मुंबई पुलिस ने उनके ट्वीट पर मुंबई पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उन्हें जवाब दिया गया, "हमने आपकी शिकायत साइबर सेल को भेज दी है. " उर्वशी ने जवाब देते हुए कहा धन्यवाद.
उर्वशी रौतेला के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह जल्द एक अनटाइटल्ड फिल्म में दिखाई देंगी, जो 2017 की सुपर हिट तमिल फिल्म थिरुट्टू पेले 2 की रीमेक है. फिल्म का निर्देशन सूसी गणेशन ने किया है. फिल्म में उर्वशी के अलावा अक्षय ओबेरॉय और विनीत कुमार भी नजर आयेंगे. बताया जा रहा है कि इस फिल्म में उर्वशी रौतेला का किरदार बेहद दिलचस्प होने वाला है.
बता दें कि उर्वशी ने फिल्म सिंह साहब द ग्रेट (2013) से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसके बाद वह सनम रे (2016), ग्रेट ग्रैंड मस्ती (2016), हेट स्टोरी 4 (2018) और पागलपंती (2019) में नजर आ चुकी हैं.
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Urvashi Rautela new dance video: बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी तसवीरों से फैंस का दिल जीतते रहती हैं. अब उर्वशी का एक डांस वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा हैं. इस वीडियो में एक्ट्रेस डांस रिहर्सल कर रही है. उन्होंने ब्लैक कलर का कॉस्ट्यूम पहन रखा है, जिसमें वो किलर लग रही है. इस वीडियो को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं. उर्वशी रौतेला ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस वीडियो को शेयर किया है. वीडियो में उर्वशी हेट स्टोरी के अपने गाने आशिक बनाया आपने पर डांस रिहर्सल करती दिख रही हैं. इस वीडियो की खास बात यह है कि इसमें उर्वशी ने हाई हील्स पहन रखी हैं, जिसके साथ भी वह शानदार डांस स्टेप्स करती दिक रही हैं. वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा है, 'पर्दे पर हील्स के साथ परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय कलाकार बनने पर सम्मानित और आभारी महसूस कर रही हूं. ' उर्वशी के फैंस को उनका यह डांस वीडियो काफी पसंद आ रहा है, जिसके चलते वह उनकी खूब तारीफ भी कर रहे हैं. वहीं, उर्वशी रौतेला की फैन फॉलोविंग कमाल की है. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर पच्चीस मिलियन फॉलोवर को पार करने वाली सबसे कम उम्र की बॉलीवुड सेलिब्रिटी बनीं. वहीं, हाल ही में एक्ट्रेस का फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था. जिसकी जानकारी खुद अभिनेत्री ने ट्वीट के जरिए दी थी. उर्वशी रौतेला ने मुबंई पुलिस से इसकी शिकायत भी कर दी थी. जिसके बाद उर्वशी रौतेला की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने उनकी शिकायत साइबर सेल को भेज दिया. मुंबई पुलिस ने उनके ट्वीट पर मुंबई पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उन्हें जवाब दिया गया, "हमने आपकी शिकायत साइबर सेल को भेज दी है. " उर्वशी ने जवाब देते हुए कहा धन्यवाद. उर्वशी रौतेला के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह जल्द एक अनटाइटल्ड फिल्म में दिखाई देंगी, जो दो हज़ार सत्रह की सुपर हिट तमिल फिल्म थिरुट्टू पेले दो की रीमेक है. फिल्म का निर्देशन सूसी गणेशन ने किया है. फिल्म में उर्वशी के अलावा अक्षय ओबेरॉय और विनीत कुमार भी नजर आयेंगे. बताया जा रहा है कि इस फिल्म में उर्वशी रौतेला का किरदार बेहद दिलचस्प होने वाला है. बता दें कि उर्वशी ने फिल्म सिंह साहब द ग्रेट से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसके बाद वह सनम रे , ग्रेट ग्रैंड मस्ती , हेट स्टोरी चार और पागलपंती में नजर आ चुकी हैं.
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अहमदाबाद से बेंगलुरु जा रहे एक यात्री ने फ्लाइट के टॉयलेट में जाकर बीड़ी पी ली. फ्लाइट का अलार्म बजा तो यात्री घबरा गए और यात्री को स्टाफ ने पकड़ लिया जिसे बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
उन्होंने एक फ्लाइट में यात्रियों की जान को खतरे में डालने के आरोप में बेंगलुरु सेंट्रल जेल में सात दिन की सेवा की है।
मूल रूप से अहमदाबाद से बेंगलुरू जाने वाले राजस्थान के एक यात्री ने पहली बार किसी फ्लाइट में सफर किया तो उसे लगा कि उसने शौचालय में बीड़ी जलाई है, जैसे वह ट्रेन में भी बीड़ी पी सकता है और फ्लाइट में भी।
यह घटना मंगलवार को अहमदाबाद से बेंगलुरु जाने वाली आकाश एयरलाइन की फ्लाइट में 150 से अधिक यात्रियों के साथ हुई थी। फ्लाइट में राजस्थान पाली के 56 वर्षीय प्रवीण कुमार नाम का एक यात्री भी था, जो अपने रिश्तेदार की मौत के बाद बेंगलुरु जा रहा था। इसी बीच फ्लाइट के उड़ान भरने के कुछ देर बाद प्रवीण टॉयलेट में चला गया और एक बीडी को जलाने के लिए अलार्म बजा और क्रू मेंबर्स ने दौड़कर उसे पकड़ लिया और बीडी बुझा दी।
जब पुलिस ने फ्लाइट में बीड़ी पीने की वजह पूछी तो उसने कहा कि मैं पहली बार फ्लाइट में बैठा था इसलिए मुझे नहीं पता था।
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अहमदाबाद से बेंगलुरु जा रहे एक यात्री ने फ्लाइट के टॉयलेट में जाकर बीड़ी पी ली. फ्लाइट का अलार्म बजा तो यात्री घबरा गए और यात्री को स्टाफ ने पकड़ लिया जिसे बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने एक फ्लाइट में यात्रियों की जान को खतरे में डालने के आरोप में बेंगलुरु सेंट्रल जेल में सात दिन की सेवा की है। मूल रूप से अहमदाबाद से बेंगलुरू जाने वाले राजस्थान के एक यात्री ने पहली बार किसी फ्लाइट में सफर किया तो उसे लगा कि उसने शौचालय में बीड़ी जलाई है, जैसे वह ट्रेन में भी बीड़ी पी सकता है और फ्लाइट में भी। यह घटना मंगलवार को अहमदाबाद से बेंगलुरु जाने वाली आकाश एयरलाइन की फ्लाइट में एक सौ पचास से अधिक यात्रियों के साथ हुई थी। फ्लाइट में राजस्थान पाली के छप्पन वर्षीय प्रवीण कुमार नाम का एक यात्री भी था, जो अपने रिश्तेदार की मौत के बाद बेंगलुरु जा रहा था। इसी बीच फ्लाइट के उड़ान भरने के कुछ देर बाद प्रवीण टॉयलेट में चला गया और एक बीडी को जलाने के लिए अलार्म बजा और क्रू मेंबर्स ने दौड़कर उसे पकड़ लिया और बीडी बुझा दी। जब पुलिस ने फ्लाइट में बीड़ी पीने की वजह पूछी तो उसने कहा कि मैं पहली बार फ्लाइट में बैठा था इसलिए मुझे नहीं पता था।
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पटना (एजेंसी/वार्ता): बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि बिहार सरकार ने 28 नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर तथाकथित अति पिछड़ा वर्ग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए बिना पुरानी अधिसूचना पर ही आनन-फानन में चुनाव की घोषणा कर दी है, जिससे एक बार फिर सरकार की फजीहत होने वाली है।
श्री मोदी ने गुरुवार को बयान जारी नगर निकाय चुनाव से संबंधित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टतः अति पिछड़ा आयोग को काम करने से रोक दिया था, उसके बावजूद आयोग को 30 तारीख तक काम करने दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि अति पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट को क्यों नहीं सार्वजनिक किया गया । क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है कि कौन सी जातियों को राजनीतिक आरक्षण मिलेगा, किन्हें वंचित किया गया या यथावत स्थिति रहेगी।
भाजपा सांसद ने कहा कि जब नई रिपोर्ट आ गई तो नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण कर नए सिरे से चुनाव कराया जाना चाहिए था लेकिन पुरानी अधिसूचना के आधार पर चुनाव कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकना पूर्णतया असंवैधानिक होगा।
श्री मोदी ने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए चुनाव कराना चाहिए ताकि नगर निकाय चुनाव को फिर स्थगित नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि श्री नीतीश कुमार के अहंकार और अति पिछड़ा विरोधी मानसिकता के कारण एक बार फिर सरकार की फजीहत होने वाली है।
-(एजेंसी/वार्ता)
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पटना : बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि बिहार सरकार ने अट्ठाईस नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर तथाकथित अति पिछड़ा वर्ग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए बिना पुरानी अधिसूचना पर ही आनन-फानन में चुनाव की घोषणा कर दी है, जिससे एक बार फिर सरकार की फजीहत होने वाली है। श्री मोदी ने गुरुवार को बयान जारी नगर निकाय चुनाव से संबंधित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टतः अति पिछड़ा आयोग को काम करने से रोक दिया था, उसके बावजूद आयोग को तीस तारीख तक काम करने दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि अति पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट को क्यों नहीं सार्वजनिक किया गया । क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है कि कौन सी जातियों को राजनीतिक आरक्षण मिलेगा, किन्हें वंचित किया गया या यथावत स्थिति रहेगी। भाजपा सांसद ने कहा कि जब नई रिपोर्ट आ गई तो नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण कर नए सिरे से चुनाव कराया जाना चाहिए था लेकिन पुरानी अधिसूचना के आधार पर चुनाव कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकना पूर्णतया असंवैधानिक होगा। श्री मोदी ने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए चुनाव कराना चाहिए ताकि नगर निकाय चुनाव को फिर स्थगित नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि श्री नीतीश कुमार के अहंकार और अति पिछड़ा विरोधी मानसिकता के कारण एक बार फिर सरकार की फजीहत होने वाली है। - यह भी पढ़ेंः-स्किन का रूखापन दूर करने के लिए कीजिए कोको बटर यूज, चमकने लगी आपकी त्वचा!
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कोलकाता से अमृतसर जा रही एक ट्रेन में एक यात्री पर पेशाब करने के आरोप में रेलवे के यात्रा टिकट निरीक्षक (टीटीई) के पकड़े जाने के कुछ दिनों बाद बेंगलुरु (Bengaluru) के कृष्णराजपुरम स्टेशन से यात्रा कर रही एक स्त्री यात्री के साथ कथित बदसलूकी के आरोप में एक अन्य टीटीई को निलंबित किया गया है। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें स्त्री रोते हुए कह रही है कि टिकट दिखाने के बाद भी टीटीई उसे क्यों परेशान कर रहा है? वीडियो में देखा जा सकता है कि लोगों के विरोध के बाद टीटीई वहां से भागने की प्रयास करता है और लोग उसे पकड़ लेते हैं।
रेलवे ने मंगलवार की इस घटना पर बोला है कि टीटीई के विरूद्ध आरोप की जांच लंबित रहने तक रेलवे ने टीटीई को निलंबित कर दिया है। रेलवे के मुताबिक, दूसरी ट्रेन की क्रॉसिंग के लिए कृष्णराजपुरम स्टेशन पर रुकी ट्रेन में टीटीई ने स्त्री से टिकट दिखाने को बोला था और बदसलूकी की थी। कथित तौर पर मंगलवार को रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर टीटीई का विरोध करती स्त्री का एक वीडियो एक यूजर ने ट्विटर पर साझा किया है। वीडियो में परेशान और रोती हुई स्त्री को टीटीई पर चिल्लाते हुए देखा जा सकता है, जो यह पूछती हुई दिख रही है कि टिकट दिखाने के बाद भी उसे टीटीई ने क्यों खींचा और मिसबिहेव किया?
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कोलकाता से अमृतसर जा रही एक ट्रेन में एक यात्री पर पेशाब करने के आरोप में रेलवे के यात्रा टिकट निरीक्षक के पकड़े जाने के कुछ दिनों बाद बेंगलुरु के कृष्णराजपुरम स्टेशन से यात्रा कर रही एक स्त्री यात्री के साथ कथित बदसलूकी के आरोप में एक अन्य टीटीई को निलंबित किया गया है। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें स्त्री रोते हुए कह रही है कि टिकट दिखाने के बाद भी टीटीई उसे क्यों परेशान कर रहा है? वीडियो में देखा जा सकता है कि लोगों के विरोध के बाद टीटीई वहां से भागने की प्रयास करता है और लोग उसे पकड़ लेते हैं। रेलवे ने मंगलवार की इस घटना पर बोला है कि टीटीई के विरूद्ध आरोप की जांच लंबित रहने तक रेलवे ने टीटीई को निलंबित कर दिया है। रेलवे के मुताबिक, दूसरी ट्रेन की क्रॉसिंग के लिए कृष्णराजपुरम स्टेशन पर रुकी ट्रेन में टीटीई ने स्त्री से टिकट दिखाने को बोला था और बदसलूकी की थी। कथित तौर पर मंगलवार को रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर टीटीई का विरोध करती स्त्री का एक वीडियो एक यूजर ने ट्विटर पर साझा किया है। वीडियो में परेशान और रोती हुई स्त्री को टीटीई पर चिल्लाते हुए देखा जा सकता है, जो यह पूछती हुई दिख रही है कि टिकट दिखाने के बाद भी उसे टीटीई ने क्यों खींचा और मिसबिहेव किया?
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Noida Twin Tower: नोएडा में ट्विन टावर( Noida Twin Tower) को अब 21 अगस्त को गिराया जाएगा। नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) की ओर से मंगलवार इसकी जानकारी दी गई। सुपरटेक एमराल्ड सोसायटी (Supertech) के ट्विन टावर ढहाने की नई तारीख 21 अगस्त तय की गई है।
टावर ढहाए जाने की तैयारियों पर नोएडा अथॉरिटी में हुई समीक्षा बैठक में बिल्डर की एजेंसी ने यह जानकारी दी। इसके पहले टावर ढहाने की तारीख 22 मई थी। तैयारी पूरी न होने का हवाला देकर बिल्डर और एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से 28 अगस्त तक का समय लिया था। टावर ढहाने की तैयारियां फरवरी से चल रही हैं।
सारे मायनो में देखकर लिया गया फैसला(Noida Twin Tower)
निवासियों की मांग पर बैठक में 50 मीटर की परिधि में निर्मित इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराने पर फैसला लिया गया। बैठक में निर्देश दिया गया कि 8 जून तक ट्विन टावर की 50 मीटर की परिधि में आने वाले क्षेत्र को चिह्नित करते हुए एमराल्ड व एटीएस सोसाइटी की एसोसिएशन को उपलब्ध करा दिया जाए।
इसके अलावा 30 जून तक उपरोक्त चिह्नित क्षेत्र का प्री-डिमोलिशन संरचनात्मक ऑडिट एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) को उपलब्ध करा दिया जाए।
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Noida Twin Tower: नोएडा में ट्विन टावर को अब इक्कीस अगस्त को गिराया जाएगा। नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से मंगलवार इसकी जानकारी दी गई। सुपरटेक एमराल्ड सोसायटी के ट्विन टावर ढहाने की नई तारीख इक्कीस अगस्त तय की गई है। टावर ढहाए जाने की तैयारियों पर नोएडा अथॉरिटी में हुई समीक्षा बैठक में बिल्डर की एजेंसी ने यह जानकारी दी। इसके पहले टावर ढहाने की तारीख बाईस मई थी। तैयारी पूरी न होने का हवाला देकर बिल्डर और एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से अट्ठाईस अगस्त तक का समय लिया था। टावर ढहाने की तैयारियां फरवरी से चल रही हैं। सारे मायनो में देखकर लिया गया फैसला निवासियों की मांग पर बैठक में पचास मीटर की परिधि में निर्मित इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराने पर फैसला लिया गया। बैठक में निर्देश दिया गया कि आठ जून तक ट्विन टावर की पचास मीटर की परिधि में आने वाले क्षेत्र को चिह्नित करते हुए एमराल्ड व एटीएस सोसाइटी की एसोसिएशन को उपलब्ध करा दिया जाए। इसके अलावा तीस जून तक उपरोक्त चिह्नित क्षेत्र का प्री-डिमोलिशन संरचनात्मक ऑडिट एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को उपलब्ध करा दिया जाए।
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fe Care
चक्रवर्ती जयसेनका आयुकाल तीन हजार वर्षका था तीनसो वर्ष तो इनके कुमार कालमें वीते, तीनसो वर्ष पर्यंत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा, सो वर्ष दिग्विजय किया, एक हजार नोसो वर्ष राज्य किया और चारसो वर्ष पर्यत संयमी और केवलज्ञानी रहै । बारहवें ब्रह्मदत्त चक्रवतका आयु सातसो वर्षका था उसमें अठारह वर्ष तो कुमार कालमें व्यतीत हुये, छप्पन वर्ष पर्यत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा, सोलह वर्ष दिग्विजय किया और छहसौ वर्ष पर्यंत राज्य किया 'इसने तप नहिं किया था इसलिये यह भी सुभौम चक्रवतके समान मरकर सातवें नरक गया ।
प्रथम वासुदेव त्रिपृष्ठका आयु चौरासी लाख वर्षका था उसमें पच्चीस हजार वर्ष तो उनकी कुमार अवस्था में व्यतीत हुई एक हजार वर्ष तक दिग्विजय किया और तिरासी लाख चौहत्तर हजार वर्ष राज्य भोगा ॥ ५१५-५१९ ॥ वासुदेव द्विपृष्ठका आयुकाल वहत्तर लाख वर्षका था उसमें पच्चीस हजार वर्ष तो वे कुमार रहे पच्चीस हजार वर्ष पर्यंत ही मंडलीक पदका सुख भोगा सो वर्ष दिग्विजय किया इकत्तरलाख चार हजार नो सो नव्वे वर्ग राज्य किया ।। ५२० -५२१ ॥ स्वयंभु वासुदेवका आयु काल साठ लाख कुछ घाट सो वर्षका था उसमें साडे बारह हजार तो उनके कुमार कालमें वीते साडे चारह हजार वर्ष पर्यंत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा नव्वे वर्ष दि ग्विजय किया और उनसठ लाख चौहत्तर हजार नो सो दश वर्ष राज्य किया । ॥ ५२२-५२३ ।। वासुदेव पुरुषोत्तमका आयुकाल तीस लाख वर्षका था उसमें सात सो वर्ष तो कुमार कालमें गये, अस्सी वर्ष दिग्विजय किया, तेरहसो वर्ष मंडलेश्वर पदका सुख भोगा उनतीस लाख सतानवे हजार नो सो वीस वर्ष तक राज्य किया। और नीतिपूर्वक प्रजाका पालन कर संसारमें पुरुषोत्तमताका लाभ किया ॥ ५२४ - ५२६ ॥ वासुदेव पुरुपसिंहका आयुकाल दश लाख वर्षका था उसमें तीनसो वर्ष तक तो ये कुमार रहै एकसो पच्चीस वर्ष तक मंडलीक पदका सुखभोगा सत्तर वर्ष दिग्विजय और नो लाख निन्यानवे हजार पांचसो पांच वर्ष तक राज्य किया ॥ ५२७-५२८ ॥ वासुदेव पुंडरीकका आयु काल पैंसठ हजार वर्षका था उसमें ढाईसो वर्ष कुमार कालमें वीते, ढाईसो वर्ष ही मंडलेश्वर पदका भोग भोगा, साठ वर्ष दिग्विजय किया और चौंसठ हजार चारसो चालीस वर्ष पर्यंत राज्य किया ॥ ५२९-५३० । सातवे वासुदेव दत्तका आयुकाल वतीस हजार वर्षका था उसमें दो सो वर्ष कुमार अवस्था में व्यतीत हुये, पचास वर्ष पर्यंत मंडलीक पदका भोग किया पचास वर्ष दिग्विजय और और इकतीस हजार सातसो वर्ष राज्य किया ॥ ५३१ ॥ वासुदेव लक्ष्मणका समस्त आयु वारह हजार वर्ष का था उसमें सो वर्ष तक तो वे कुमार रहे चालीस वर्ष दिग्विजय और ग्यारह हजार आठसो साठ वर्ष राज्य किया ।। ५३२ ।। अंतिम वासुदेव कृष्णका
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fe Care चक्रवर्ती जयसेनका आयुकाल तीन हजार वर्षका था तीनसो वर्ष तो इनके कुमार कालमें वीते, तीनसो वर्ष पर्यंत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा, सो वर्ष दिग्विजय किया, एक हजार नोसो वर्ष राज्य किया और चारसो वर्ष पर्यत संयमी और केवलज्ञानी रहै । बारहवें ब्रह्मदत्त चक्रवतका आयु सातसो वर्षका था उसमें अठारह वर्ष तो कुमार कालमें व्यतीत हुये, छप्पन वर्ष पर्यत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा, सोलह वर्ष दिग्विजय किया और छहसौ वर्ष पर्यंत राज्य किया 'इसने तप नहिं किया था इसलिये यह भी सुभौम चक्रवतके समान मरकर सातवें नरक गया । प्रथम वासुदेव त्रिपृष्ठका आयु चौरासी लाख वर्षका था उसमें पच्चीस हजार वर्ष तो उनकी कुमार अवस्था में व्यतीत हुई एक हजार वर्ष तक दिग्विजय किया और तिरासी लाख चौहत्तर हजार वर्ष राज्य भोगा ॥ पाँच सौ पंद्रह-पाँच सौ उन्नीस ॥ वासुदेव द्विपृष्ठका आयुकाल वहत्तर लाख वर्षका था उसमें पच्चीस हजार वर्ष तो वे कुमार रहे पच्चीस हजार वर्ष पर्यंत ही मंडलीक पदका सुख भोगा सो वर्ष दिग्विजय किया इकत्तरलाख चार हजार नो सो नव्वे वर्ग राज्य किया ।। पाँच सौ बीस -पाँच सौ इक्कीस ॥ स्वयंभु वासुदेवका आयु काल साठ लाख कुछ घाट सो वर्षका था उसमें साडे बारह हजार तो उनके कुमार कालमें वीते साडे चारह हजार वर्ष पर्यंत मंडलेश्वर पदका सुख भोगा नव्वे वर्ष दि ग्विजय किया और उनसठ लाख चौहत्तर हजार नो सो दश वर्ष राज्य किया । ॥ पाँच सौ बाईस-पाँच सौ तेईस ।। वासुदेव पुरुषोत्तमका आयुकाल तीस लाख वर्षका था उसमें सात सो वर्ष तो कुमार कालमें गये, अस्सी वर्ष दिग्विजय किया, तेरहसो वर्ष मंडलेश्वर पदका सुख भोगा उनतीस लाख सतानवे हजार नो सो वीस वर्ष तक राज्य किया। और नीतिपूर्वक प्रजाका पालन कर संसारमें पुरुषोत्तमताका लाभ किया ॥ पाँच सौ चौबीस - पाँच सौ छब्बीस ॥ वासुदेव पुरुपसिंहका आयुकाल दश लाख वर्षका था उसमें तीनसो वर्ष तक तो ये कुमार रहै एकसो पच्चीस वर्ष तक मंडलीक पदका सुखभोगा सत्तर वर्ष दिग्विजय और नो लाख निन्यानवे हजार पांचसो पांच वर्ष तक राज्य किया ॥ पाँच सौ सत्ताईस-पाँच सौ अट्ठाईस ॥ वासुदेव पुंडरीकका आयु काल पैंसठ हजार वर्षका था उसमें ढाईसो वर्ष कुमार कालमें वीते, ढाईसो वर्ष ही मंडलेश्वर पदका भोग भोगा, साठ वर्ष दिग्विजय किया और चौंसठ हजार चारसो चालीस वर्ष पर्यंत राज्य किया ॥ पाँच सौ उनतीस-पाँच सौ तीस । सातवे वासुदेव दत्तका आयुकाल वतीस हजार वर्षका था उसमें दो सो वर्ष कुमार अवस्था में व्यतीत हुये, पचास वर्ष पर्यंत मंडलीक पदका भोग किया पचास वर्ष दिग्विजय और और इकतीस हजार सातसो वर्ष राज्य किया ॥ पाँच सौ इकतीस ॥ वासुदेव लक्ष्मणका समस्त आयु वारह हजार वर्ष का था उसमें सो वर्ष तक तो वे कुमार रहे चालीस वर्ष दिग्विजय और ग्यारह हजार आठसो साठ वर्ष राज्य किया ।। पाँच सौ बत्तीस ।। अंतिम वासुदेव कृष्णका बाईस GRASC
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उत्तराखंड । । नॉर्थ स्वीडन के एक छोटे से विश्वविद्यालय शहर उमिया के पास एक स्काईडाइविंग यात्रा के दौरान बड़ी दुर्घटना हुई है। स्काईडाइविंग के लिए लोगों को ले जाने वाला प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में स्वीडन के 9 लोगों की मौत हो गई है।
पुलिस के प्रवक्ता पेडर जोंसन ने कहा कि पैराशूटिस्टों को ले जाने के लिए बनाया गया छोटा प्लेन उमे नदी के तट से कुछ ही दूरी पर एक द्वीप पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पुलिस ने कहा कि सभी पीड़ित स्वीडिश थे। इसमें एक व्यक्ति के पास दोहरी नागरिकता थी।
पीड़ितों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस ने बताया कि द्वीप के पास एक पहाड़ी पर हवा के ज्यादा दवाब के कारण प्लेन का बैलेंस बिगड़ गया। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।
स्वीडन के किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने एक बयान में दुख व्यक्त किया। उन्होंने फेसबुक पर कहा कि आज के दुखद हवाई हादसे में नौ लोगों की जान जा चुकी है। मैं मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं। मैं और मेरा परिवार पीड़ितों और उनके परिवार तथा रिश्तेदारों के प्रति अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं।
वहीं स्वीडन के पीएम स्टीफन लोफवेन ने बताया कि सरकार संबंधित अफसरों के साथ निकट संपर्क में है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के कारण की जांच चल रही है।
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उत्तराखंड । । नॉर्थ स्वीडन के एक छोटे से विश्वविद्यालय शहर उमिया के पास एक स्काईडाइविंग यात्रा के दौरान बड़ी दुर्घटना हुई है। स्काईडाइविंग के लिए लोगों को ले जाने वाला प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में स्वीडन के नौ लोगों की मौत हो गई है। पुलिस के प्रवक्ता पेडर जोंसन ने कहा कि पैराशूटिस्टों को ले जाने के लिए बनाया गया छोटा प्लेन उमे नदी के तट से कुछ ही दूरी पर एक द्वीप पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पुलिस ने कहा कि सभी पीड़ित स्वीडिश थे। इसमें एक व्यक्ति के पास दोहरी नागरिकता थी। पीड़ितों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस ने बताया कि द्वीप के पास एक पहाड़ी पर हवा के ज्यादा दवाब के कारण प्लेन का बैलेंस बिगड़ गया। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है। स्वीडन के किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने एक बयान में दुख व्यक्त किया। उन्होंने फेसबुक पर कहा कि आज के दुखद हवाई हादसे में नौ लोगों की जान जा चुकी है। मैं मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं। मैं और मेरा परिवार पीड़ितों और उनके परिवार तथा रिश्तेदारों के प्रति अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं। वहीं स्वीडन के पीएम स्टीफन लोफवेन ने बताया कि सरकार संबंधित अफसरों के साथ निकट संपर्क में है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के कारण की जांच चल रही है।
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रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से गोरखपुर के लिए स्पेशल ट्रेन (01245) लखनऊ होकर 28 अप्रैल से चलाएगा। बोकारो से रविवार दोपहर को चली दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस सोमवार को लखनऊ पहुंच गई है। इस बार 15-15 हजार लीटर की क्षमता वाले चार टैंकर आए हैं।
रेलवे प्रशासन के मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से गोरखपुर के लिए 01245 स्पेशल ट्रेन 28 अप्रैल को शाम 05:15 बजे चलकर अगले दिन रात 10:45 बजे लखनऊ के ऐशबाग पहुंचकर तीसरे दिन तड़के सुबह 05:05 बजे गोरखपुर पहुंचेगी।
इसी तरह से वापसी में गोरखपुर से 01246 स्पेशल ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के लिए 30 अप्रैल को चलाई जाएगी। यह स्पेशल ट्रेन 30 अप्रैल को गोरखपुर से सुबह 09:45 बजे छूटकर उसी दिन शाम 04:15 बजे ऐशबाग पहुंचकर अगले दिन रात 11 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर पहुंचेगी। इस ट्रेन के सभी कोच आरक्षित श्रेणी के होंगे। ट्रेन में सभी श्रेणी के कुल 18 कोच लगेंगे। यात्रियों के लिए कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है।
कोरोना संकट काल में बोकारो से रविवार को रवाना हुई दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस सोमवार को लखनऊ पहुंच गई है। इस बार 15-15 हजार लीटर की क्षमता वाले चार टैंकर आए हैं।
रेलवे ने बोकोरो से आने वाली ऑक्सीजन एक्सप्रेस के लिए 735 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया था। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन से वाराणसी होते हुए सुल्तानपुर का रूट तय किया गया था।
इसके पहले बोकारो स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के प्लांट से तीन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकर गत शनिवार को लखनऊ आए थे।
मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) संजय त्रिपाठी ने बताया कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस के लिए रैक की तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। पंजाब से कई और रैक मंगवाए गए हैं। हालांकि टैंकरों की ऊंचाई ज्यादा होने से रेलवे को ऑक्सीजन एक्सप्रेस की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित करनी पड़ रही है।
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रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से गोरखपुर के लिए स्पेशल ट्रेन लखनऊ होकर अट्ठाईस अप्रैल से चलाएगा। बोकारो से रविवार दोपहर को चली दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस सोमवार को लखनऊ पहुंच गई है। इस बार पंद्रह-पंद्रह हजार लीटर की क्षमता वाले चार टैंकर आए हैं। रेलवे प्रशासन के मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से गोरखपुर के लिए एक हज़ार दो सौ पैंतालीस स्पेशल ट्रेन अट्ठाईस अप्रैल को शाम पाँच:पंद्रह बजे चलकर अगले दिन रात दस:पैंतालीस बजे लखनऊ के ऐशबाग पहुंचकर तीसरे दिन तड़के सुबह पाँच:पाँच बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इसी तरह से वापसी में गोरखपुर से एक हज़ार दो सौ छियालीस स्पेशल ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के लिए तीस अप्रैल को चलाई जाएगी। यह स्पेशल ट्रेन तीस अप्रैल को गोरखपुर से सुबह नौ:पैंतालीस बजे छूटकर उसी दिन शाम चार:पंद्रह बजे ऐशबाग पहुंचकर अगले दिन रात ग्यारह बजे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर पहुंचेगी। इस ट्रेन के सभी कोच आरक्षित श्रेणी के होंगे। ट्रेन में सभी श्रेणी के कुल अट्ठारह कोच लगेंगे। यात्रियों के लिए कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। कोरोना संकट काल में बोकारो से रविवार को रवाना हुई दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस सोमवार को लखनऊ पहुंच गई है। इस बार पंद्रह-पंद्रह हजार लीटर की क्षमता वाले चार टैंकर आए हैं। रेलवे ने बोकोरो से आने वाली ऑक्सीजन एक्सप्रेस के लिए सात सौ पैंतीस किलोग्राममीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया था। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन से वाराणसी होते हुए सुल्तानपुर का रूट तय किया गया था। इसके पहले बोकारो स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्लांट से तीन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकर गत शनिवार को लखनऊ आए थे। मंडल रेल प्रबंधक संजय त्रिपाठी ने बताया कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस के लिए रैक की तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। पंजाब से कई और रैक मंगवाए गए हैं। हालांकि टैंकरों की ऊंचाई ज्यादा होने से रेलवे को ऑक्सीजन एक्सप्रेस की गति साठ किलोग्राममीटर प्रति घंटा तक सीमित करनी पड़ रही है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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धनतेरस पर पूजन का शुभ महूर्त शाम 6. 18 से रात 8. 14 बजे तक रहेगा। धन्वंतरि देवताओं के वैद्य हैं। इस दिन स्वास्थ्य रक्षा व आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि की उपासना की जाती है। इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है।
नवदीप सिंह, संगरूर। मंगलवार को धनतेरस का त्योहार पूरे देश में पारंपरिक तरीके से खरीददारी करके मनाया जाएगा। फिर, एक दिन बाद 4 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। धनतेरस के लिए बाजार पूरी तरह से सज गए हैं। बाजारों में खूब रौनक है। मूर्तियां, बर्तन, पूजा का सामान, कपड़े व सजावट के सामानों के साथ साथ विभिन्न दो पहिया व चार पहिया वाहनों के शोरूम भी गुलजार हो गए हैं। ऐसे में जो लोग यह जानना चाहते हैं कि खरीददारी का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, तो वे यह पूरी खबर पढ़ लें।
पंडित कपिल जोशी का कहना है कि धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5. 37 मिनट से रात 8. 11 मिनट तक का है। वहीं वृषभ काल शाम 6. 18 से रात 8. 14 तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ महूर्त शाम 6. 18 से रात 8. 14 बजे तक रहेगा। धन्वन्तरि देवताओं के वैद्य हैं। यही वजह है कि धनतेरस के दिन अपनी सेहत की रक्षा व आरोग्य के लिए भगवान धन्वन्तरि की उपासना की जाती है। इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है।
धनतेरस पर बर्तनों की दुकान से लेकर ज्वेलर्स शोरूम, मिठाई की दुकानें, फूल मालाओं सहित फर्नीचर की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है। इलेक्ट्रानिक दुकानों में भी पूरे दिन भीड़ देखी गई। मोबाइल दुकान में भी रौनक है। इसके साथ ही बाजारों में मिठाई की मांग बढ़ी है।
इस बार दीपावली का उत्साह महंगाई पर भारी पड़ रहा है। दुकानों में भीड़ इस बात की पुष्टि कर रही है। आभूषणों के साथ बर्तन, मिठाई आदि की खरीद जारी है। खास पैकिंग वाले मिठाई व ड्राईफ्रूट इस बार बाजार में अपनी पैठ जमाए हुए हैं। वहीं आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, गणेश लक्ष्मी वाले चांदी के सिक्के व झालरों में रोटेड बल्ब, एसएमडी रोल ग्रहकों की पसंद बनी हुई है। ग्राहकों की भीड़ बढ़ने से बाजारों में रौनक छाई हुई है।
बगैर मिठाई बांटे त्योहार फीके माने जाते हैं। अपनों को उपहार स्वरूप इस पर्व में लोग ज्यादातर मिठाइयां व ड्राई फ्रूट ही देते हैं। बाजारों में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से मिठाई व ड्राई फ्रूट की खास पैकिंग तैयार की गई है। बादाम, अखरोट, किशमिश, काजू, पिस्ता जैसे मेवों को शानदार साज सज्जा के साथ पैक किया गया है।
धनतेरस के दिन अष्टधातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, सोना-चांदी खरीदना भी शुभ है। लेकिन क्या आप जानते हैं धनतेरस के दिन सिर्फ इन 9 चीजों का खरीदना भी धनतेरस के दिन शुभ माना जाता है। अगर धनतेरस के दिन आप इनमें से कोई भी चीज खरीदते हैं तो सालभर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही धन की वर्षा होती है। इस दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए खरीददारी को शुभ माना जाता है।
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धनतेरस पर पूजन का शुभ महूर्त शाम छः. अट्ठारह से रात आठ. चौदह बजे तक रहेगा। धन्वंतरि देवताओं के वैद्य हैं। इस दिन स्वास्थ्य रक्षा व आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि की उपासना की जाती है। इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है। नवदीप सिंह, संगरूर। मंगलवार को धनतेरस का त्योहार पूरे देश में पारंपरिक तरीके से खरीददारी करके मनाया जाएगा। फिर, एक दिन बाद चार नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। धनतेरस के लिए बाजार पूरी तरह से सज गए हैं। बाजारों में खूब रौनक है। मूर्तियां, बर्तन, पूजा का सामान, कपड़े व सजावट के सामानों के साथ साथ विभिन्न दो पहिया व चार पहिया वाहनों के शोरूम भी गुलजार हो गए हैं। ऐसे में जो लोग यह जानना चाहते हैं कि खरीददारी का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, तो वे यह पूरी खबर पढ़ लें। पंडित कपिल जोशी का कहना है कि धनतेरस पर प्रदोष काल शाम पाँच. सैंतीस मिनट से रात आठ. ग्यारह मिनट तक का है। वहीं वृषभ काल शाम छः. अट्ठारह से रात आठ. चौदह तक रहेगा। धनतेरस पर पूजन का शुभ महूर्त शाम छः. अट्ठारह से रात आठ. चौदह बजे तक रहेगा। धन्वन्तरि देवताओं के वैद्य हैं। यही वजह है कि धनतेरस के दिन अपनी सेहत की रक्षा व आरोग्य के लिए भगवान धन्वन्तरि की उपासना की जाती है। इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है। धनतेरस पर बर्तनों की दुकान से लेकर ज्वेलर्स शोरूम, मिठाई की दुकानें, फूल मालाओं सहित फर्नीचर की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है। इलेक्ट्रानिक दुकानों में भी पूरे दिन भीड़ देखी गई। मोबाइल दुकान में भी रौनक है। इसके साथ ही बाजारों में मिठाई की मांग बढ़ी है। इस बार दीपावली का उत्साह महंगाई पर भारी पड़ रहा है। दुकानों में भीड़ इस बात की पुष्टि कर रही है। आभूषणों के साथ बर्तन, मिठाई आदि की खरीद जारी है। खास पैकिंग वाले मिठाई व ड्राईफ्रूट इस बार बाजार में अपनी पैठ जमाए हुए हैं। वहीं आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक्स, गणेश लक्ष्मी वाले चांदी के सिक्के व झालरों में रोटेड बल्ब, एसएमडी रोल ग्रहकों की पसंद बनी हुई है। ग्राहकों की भीड़ बढ़ने से बाजारों में रौनक छाई हुई है। बगैर मिठाई बांटे त्योहार फीके माने जाते हैं। अपनों को उपहार स्वरूप इस पर्व में लोग ज्यादातर मिठाइयां व ड्राई फ्रूट ही देते हैं। बाजारों में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से मिठाई व ड्राई फ्रूट की खास पैकिंग तैयार की गई है। बादाम, अखरोट, किशमिश, काजू, पिस्ता जैसे मेवों को शानदार साज सज्जा के साथ पैक किया गया है। धनतेरस के दिन अष्टधातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, सोना-चांदी खरीदना भी शुभ है। लेकिन क्या आप जानते हैं धनतेरस के दिन सिर्फ इन नौ चीजों का खरीदना भी धनतेरस के दिन शुभ माना जाता है। अगर धनतेरस के दिन आप इनमें से कोई भी चीज खरीदते हैं तो सालभर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही धन की वर्षा होती है। इस दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए खरीददारी को शुभ माना जाता है।
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पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भारतीय दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) के शतक लगाने की संभावना को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में भी विराट कोहली के शतक लगाने की संभावना नहीं है। आकाश चोपड़ा के मुताबिक कोहली इस मैच में भी अपने शतकों का सूखा नहीं खत्म कर पाएंगे।
विराट कोहली काफी लंबे समय से खराब फॉर्म में चल रहे हैं। नवंबर 2019 से ही किसी भी प्रारूप में वो शतक नहीं बना पाए हैं। वहीं इस साल उनके आंकड़े काफी साधारण हैं। विराट कोहली के लिए आईपीएल 2022 भी कुछ खास नहीं रहा था। वो तीन मैचों में तो डक पर भी आउट हो गए थे। ऐसे में विराट कोहली को अपने शतक का इंतजार काफी लंबे समय से है।
हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से पहले लीसेस्टरशायर के खिलाफ खेले गए चार दिवसीय अभ्यास मैच में विराट काफी अच्छी लय में नजर आये थे। उन्होंने पहली पारी में 33 और दूसरी पारी में 67 रन बनाए थे। दूसरी पारी में वह ज्यादा बेहतर टाइमिंग करते हुए नजर आये। ऐसे में उनसे अच्छी पारी की उम्मीद की जा रही है।
अपने यू-ट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान आकाश चोपड़ा ने विराट कोहली और ऋषभ पंत के फॉर्म को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा 'कोहली और पंत दोनों मिलकर 120 से ज्यादा रन बनाएंगे। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या विराट कोहली इस मुकाबले में अपना 71वां शतक लगा पाएंगे। मुझे ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता है। हालांकि उन्होंने इसी मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया था लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इस बार वो शतक लगाने में कामयाब होंगे। हालांकि वो और पंत मिलकर रन जरूर बनाएंगे। '
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पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भारतीय दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली के शतक लगाने की संभावना को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में भी विराट कोहली के शतक लगाने की संभावना नहीं है। आकाश चोपड़ा के मुताबिक कोहली इस मैच में भी अपने शतकों का सूखा नहीं खत्म कर पाएंगे। विराट कोहली काफी लंबे समय से खराब फॉर्म में चल रहे हैं। नवंबर दो हज़ार उन्नीस से ही किसी भी प्रारूप में वो शतक नहीं बना पाए हैं। वहीं इस साल उनके आंकड़े काफी साधारण हैं। विराट कोहली के लिए आईपीएल दो हज़ार बाईस भी कुछ खास नहीं रहा था। वो तीन मैचों में तो डक पर भी आउट हो गए थे। ऐसे में विराट कोहली को अपने शतक का इंतजार काफी लंबे समय से है। हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से पहले लीसेस्टरशायर के खिलाफ खेले गए चार दिवसीय अभ्यास मैच में विराट काफी अच्छी लय में नजर आये थे। उन्होंने पहली पारी में तैंतीस और दूसरी पारी में सरसठ रन बनाए थे। दूसरी पारी में वह ज्यादा बेहतर टाइमिंग करते हुए नजर आये। ऐसे में उनसे अच्छी पारी की उम्मीद की जा रही है। अपने यू-ट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान आकाश चोपड़ा ने विराट कोहली और ऋषभ पंत के फॉर्म को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा 'कोहली और पंत दोनों मिलकर एक सौ बीस से ज्यादा रन बनाएंगे। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या विराट कोहली इस मुकाबले में अपना इकहत्तरवां शतक लगा पाएंगे। मुझे ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता है। हालांकि उन्होंने इसी मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया था लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इस बार वो शतक लगाने में कामयाब होंगे। हालांकि वो और पंत मिलकर रन जरूर बनाएंगे। '
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विद्या बालन (Vidya Balan) और शेफाली शाह (Shefali Shah) बॉलीवुड की दो बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, जहां इस जोड़ी ने आज मुंबई में अपनी अगली फिल्म 'जलसा' (Jalsa) की शूटिंग को शुरू कर दिया है. विद्या बालन ने इस फिल्म का एक मोशन पोस्टर रिलीज किया है.
लंबे और नीरस लॉकडाउन के बाद एक बार फिर मुंबई में शूटिंग पूरी तरह से शुरू हो चुकी है. जहां बॉलीवुड सितारे अब तेजी से अपनी फिल्मों की शूटिंग को करने में लगे हुए हैं. ऐसे में अब विद्या बालन (Vidya Balan) और शेफाली शाह (Shefali Shah) अपनी नई फिल्म 'जलसा' (Jalsa) में हमें साथ नजर आने वाली हैं. ये दोनों ही बॉलीवुड की बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने हमेशा इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. इस फिल्म के निर्माता टी-सीरीज और अबुंदंतिया एंटरटेनमेंट हैं. इस फिल्म की शूटिंग आज से मुंबई में शुरू हो गई है.
'जलसा' का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी करने जा रहे हैं. वहीं सुरेश इस फिल्म के सह-लेखक भी हैं. सुरेश, विद्या बालन के साथ मिलकर मशहूर फिल्म 'तुम्हारी सुल्लु' भी बना चुके हैं. जिस वजह से ये जोड़ी अब फिर एक बार साथ काम करने जा रही है. वहीं इस फिल्म में हमें विद्या और शेफाली के अलावा रोहिणी हट्टंगडी, इकबाल खान, विधात्री बंदी, गुरपाल सिंह भी नजर आने वाले हैं. फिल्म की टीम के द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक इस फिल्म में हमें मानव कौल भी कैमियो करते हुए नजर आएंगे. इस फिल्म के लेखक प्रज्वल चंद्रशेखर और सुरेश त्रिवेणी हैं. जहां इस फिल्म के संवाद को हुसैन और अब्बास दलाल ने लिखा है.
आपको बता दें, अबुदंतिया एंटरटेनमेंट और टी-सीरीज साथ मिलकर इससे पहले भी कई फिल्मों बना चुके हैं. जिसमें 2015 में रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म "बेबी" और 2016 में रिलीज हुई फिल्म "एयरलिफ्ट" शामिल है. जिसके बाद अब ये टीम हमें "जलसा" में साथ काम करते हुए नजर आएगी.
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विद्या बालन और शेफाली शाह बॉलीवुड की दो बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, जहां इस जोड़ी ने आज मुंबई में अपनी अगली फिल्म 'जलसा' की शूटिंग को शुरू कर दिया है. विद्या बालन ने इस फिल्म का एक मोशन पोस्टर रिलीज किया है. लंबे और नीरस लॉकडाउन के बाद एक बार फिर मुंबई में शूटिंग पूरी तरह से शुरू हो चुकी है. जहां बॉलीवुड सितारे अब तेजी से अपनी फिल्मों की शूटिंग को करने में लगे हुए हैं. ऐसे में अब विद्या बालन और शेफाली शाह अपनी नई फिल्म 'जलसा' में हमें साथ नजर आने वाली हैं. ये दोनों ही बॉलीवुड की बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने हमेशा इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. इस फिल्म के निर्माता टी-सीरीज और अबुंदंतिया एंटरटेनमेंट हैं. इस फिल्म की शूटिंग आज से मुंबई में शुरू हो गई है. 'जलसा' का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी करने जा रहे हैं. वहीं सुरेश इस फिल्म के सह-लेखक भी हैं. सुरेश, विद्या बालन के साथ मिलकर मशहूर फिल्म 'तुम्हारी सुल्लु' भी बना चुके हैं. जिस वजह से ये जोड़ी अब फिर एक बार साथ काम करने जा रही है. वहीं इस फिल्म में हमें विद्या और शेफाली के अलावा रोहिणी हट्टंगडी, इकबाल खान, विधात्री बंदी, गुरपाल सिंह भी नजर आने वाले हैं. फिल्म की टीम के द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक इस फिल्म में हमें मानव कौल भी कैमियो करते हुए नजर आएंगे. इस फिल्म के लेखक प्रज्वल चंद्रशेखर और सुरेश त्रिवेणी हैं. जहां इस फिल्म के संवाद को हुसैन और अब्बास दलाल ने लिखा है. आपको बता दें, अबुदंतिया एंटरटेनमेंट और टी-सीरीज साथ मिलकर इससे पहले भी कई फिल्मों बना चुके हैं. जिसमें दो हज़ार पंद्रह में रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म "बेबी" और दो हज़ार सोलह में रिलीज हुई फिल्म "एयरलिफ्ट" शामिल है. जिसके बाद अब ये टीम हमें "जलसा" में साथ काम करते हुए नजर आएगी.
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एड इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए किसी शिक्षण संस्थान से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट लेवल एड एजुकेशन की डिग्री या फिर डिप्लोमा लेना जरूरी होता है।
गे्रजुएट में एडमिशन के लिए आपको कम से कम 12वीं या उसके समकक्ष डिग्री में करीब 50 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य हैं। एड इंडस्ट्री की विशेष बात ये है कि मॉस कम्युनिकेशन की एजुकेशन लेने वाले भी इसमें जॉब कर सकते हैं। विभिन्न सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप, कोरलड्रा, इन- डिजाइन का भी अच्छा ज्ञान जरूरी है।
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एड इंडस्ट्री में प्रवेश के लिए किसी शिक्षण संस्थान से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट लेवल एड एजुकेशन की डिग्री या फिर डिप्लोमा लेना जरूरी होता है। गे्रजुएट में एडमिशन के लिए आपको कम से कम बारहवीं या उसके समकक्ष डिग्री में करीब पचास प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य हैं। एड इंडस्ट्री की विशेष बात ये है कि मॉस कम्युनिकेशन की एजुकेशन लेने वाले भी इसमें जॉब कर सकते हैं। विभिन्न सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप, कोरलड्रा, इन- डिजाइन का भी अच्छा ज्ञान जरूरी है।
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Nirsa : डीवीडी में ट्रेड यूनियन चुनाव की सरगर्मी बढ़ने लगी है. मंगलवार 12 अप्रैल को डीवीसी संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा मैथन शाखा की ओर से प्रचार अभियान शुरू कर दिया गया. सदस्यों ने चुनाव चिह्न काला छाता छाप पर मुहर लगाकर भारी मतों से विजयी बनाने की अपील डीवीसी कर्मचारियों से की.
डीवीसी में मान्यता प्राप्त यूनियनों का चुनाव 28 अप्रैल को होने वाला है. संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में डीवीसी श्रमिक यूनियन, डीवीसी स्टाफ एसोसिएशन, डीवीसी कर्मचारी संघ एवं डीवीसी मजदूर यूनियन शामिल है. चुनाव प्रचार अभियान कम्बाइंड बिल्डिंग और सी एस ओ बिल्डिंग मैथन से शुरू हुआ. अभियान में लगभग 35 सदस्य शामिल थे. यूनियन के नेताओं ने कार्यालयों घूम घूम कर कर्मचारियों से काला छाता छाप पर मुहर लगाने की अपील की.
प्रचार अभियान में नवेंदु चक्रवर्ती, के के त्रिपाठी, सुभाष झा, निशीथ मुखर्जी, राजू मुखर्जी, सुधिष्ठ कुमार, दीपा विश्वास, एस के दास, सुधीर पाण्डेय, अतनु साहा, लालजीत चटर्जी, मदन मेहता, प्रेम सिंह, विनय गोस्वामी, राहुल मिश्रा, अनील सिंह, पी कविराज, जी सी मंडल, टी पी जसवारा, पी जे राव, राम मुर्मू, मीठु शर्मा, देवदास कर, मनोज शर्मा, कामरुद्दीन, गौतम मल्लिक, केशव मंडल, एन एन गिरि, तौसीफ, मुकेश साव, द्वीवेन्दु चक्रवर्ती, रंजीत लोहार, कबीर दास, महेंद्र दास धर्म देव सिंह आदि शामिल थे.
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Nirsa : डीवीडी में ट्रेड यूनियन चुनाव की सरगर्मी बढ़ने लगी है. मंगलवार बारह अप्रैल को डीवीसी संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा मैथन शाखा की ओर से प्रचार अभियान शुरू कर दिया गया. सदस्यों ने चुनाव चिह्न काला छाता छाप पर मुहर लगाकर भारी मतों से विजयी बनाने की अपील डीवीसी कर्मचारियों से की. डीवीसी में मान्यता प्राप्त यूनियनों का चुनाव अट्ठाईस अप्रैल को होने वाला है. संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में डीवीसी श्रमिक यूनियन, डीवीसी स्टाफ एसोसिएशन, डीवीसी कर्मचारी संघ एवं डीवीसी मजदूर यूनियन शामिल है. चुनाव प्रचार अभियान कम्बाइंड बिल्डिंग और सी एस ओ बिल्डिंग मैथन से शुरू हुआ. अभियान में लगभग पैंतीस सदस्य शामिल थे. यूनियन के नेताओं ने कार्यालयों घूम घूम कर कर्मचारियों से काला छाता छाप पर मुहर लगाने की अपील की. प्रचार अभियान में नवेंदु चक्रवर्ती, के के त्रिपाठी, सुभाष झा, निशीथ मुखर्जी, राजू मुखर्जी, सुधिष्ठ कुमार, दीपा विश्वास, एस के दास, सुधीर पाण्डेय, अतनु साहा, लालजीत चटर्जी, मदन मेहता, प्रेम सिंह, विनय गोस्वामी, राहुल मिश्रा, अनील सिंह, पी कविराज, जी सी मंडल, टी पी जसवारा, पी जे राव, राम मुर्मू, मीठु शर्मा, देवदास कर, मनोज शर्मा, कामरुद्दीन, गौतम मल्लिक, केशव मंडल, एन एन गिरि, तौसीफ, मुकेश साव, द्वीवेन्दु चक्रवर्ती, रंजीत लोहार, कबीर दास, महेंद्र दास धर्म देव सिंह आदि शामिल थे.
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यरुशलम, 24 मार्च (एपी) इजराइल में मंगलवार को हुए चुनाव में कांटे की टक्कर के बाद एक अरब इस्लामी पार्टी देश के नए प्रधानमंत्री का निर्णय कर सकती है।
चुनाव के अंतिम नतीजे लगभग आ गए हैं जिसके अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नीत गठबंधन और उनके विरोधी दलों के गठबंधन के बीच अंतर बहुत कम है और सरकार बनाने के लिए दोनों तरफ के गठबंधन को अरब इस्लामी पार्टी के समर्थन की जरूरत है जिसने 120 सदस्यीय इजराइली संसद में मात्र पांच सीट जीती हैं।
इस पार्टी ने फिलहाल किसी को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है लेकिन हालात को देखते हुए इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि 'यूनाइटेड अरब लिस्ट', जिसे हिब्रू में 'राम' कहा जाता है, इस बारे में फैसला कर सकती है कि इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता में रहेंगे या नहीं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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यरुशलम, चौबीस मार्च इजराइल में मंगलवार को हुए चुनाव में कांटे की टक्कर के बाद एक अरब इस्लामी पार्टी देश के नए प्रधानमंत्री का निर्णय कर सकती है। चुनाव के अंतिम नतीजे लगभग आ गए हैं जिसके अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नीत गठबंधन और उनके विरोधी दलों के गठबंधन के बीच अंतर बहुत कम है और सरकार बनाने के लिए दोनों तरफ के गठबंधन को अरब इस्लामी पार्टी के समर्थन की जरूरत है जिसने एक सौ बीस सदस्यीय इजराइली संसद में मात्र पांच सीट जीती हैं। इस पार्टी ने फिलहाल किसी को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है लेकिन हालात को देखते हुए इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि 'यूनाइटेड अरब लिस्ट', जिसे हिब्रू में 'राम' कहा जाता है, इस बारे में फैसला कर सकती है कि इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता में रहेंगे या नहीं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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लखनऊ में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की शुरुआत 10 फरवरी से होने जा रही है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। आयोजन में मुकेश अंबानी, आनंद महिंद्रा, एन. चंद्रशेखरन समेत कई दिग्गज उद्योगपति शामिल होंगे।
लखनऊः यूपी में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आगाज शुक्रवार 10 फरवरी से हो रहा है। समिट का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे। इस समिट के जरिए तकरीबन 25 लाख करोड़ रुपए के निवेश के करार होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी के साथ दो करोड़ रोजगार के अवसर भी आने वाले दिनों में यूपी में सृजित होंगे।
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी, आदित्य बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला, महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल समेत कई दिग्गज उद्योगपति भी इस आयोजन के दौरान मौजूद रहेंगे। समिट के दौरान फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म, वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक, आईटी एंड इलेक्ट्रानिक, हेल्थकेयर समेत कई क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं हैं।
लखनऊ के वृंदावन योजना में आयोजित हो रही इस समिट को लेकर काफी इंतजाम किए गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन सत्र में पीएण मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त तीन दिनों के इस आयोजन में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप पुरी समेत कई मंत्री मौजूद रहेंगे। इसी के साथ प्रदेश सरकार के तमाम मंत्री भी इस आयोजन में शामिल होंगे। समिट में 10 साझीदार देशों के अलावा 40 देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। इसी के साथ 10 हजार छोटे-बड़े निवेशक महाकुंभ का हिस्सा बनेंगे। ज्ञात हो कि यूपीपीजीआईएस-23 के माध्यम से सरकार ने शुरुआत में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि देश और दुनिया के बड़े निवेशकों के उत्साहजनक समर्थन को देखने के बाद सरकार को अपना लक्ष्य बढ़ाना पड़ा।
अदाणी समूह के गौतम अदाणी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का हिस्सा नहीं बनेंगे। वह 2018 में आयोजित समिट में आए थे। इस बार भी उनका इस समिट में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि शीर्ष उद्यमियों की संशोधित सूची में उनका नाम नहीं है।
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लखनऊ में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की शुरुआत दस फरवरी से होने जा रही है। पीएम मोदी इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। आयोजन में मुकेश अंबानी, आनंद महिंद्रा, एन. चंद्रशेखरन समेत कई दिग्गज उद्योगपति शामिल होंगे। लखनऊः यूपी में तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आगाज शुक्रवार दस फरवरी से हो रहा है। समिट का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे। इस समिट के जरिए तकरीबन पच्चीस लाख करोड़ रुपए के निवेश के करार होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी के साथ दो करोड़ रोजगार के अवसर भी आने वाले दिनों में यूपी में सृजित होंगे। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी, आदित्य बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला, महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल समेत कई दिग्गज उद्योगपति भी इस आयोजन के दौरान मौजूद रहेंगे। समिट के दौरान फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म, वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक, आईटी एंड इलेक्ट्रानिक, हेल्थकेयर समेत कई क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं हैं। लखनऊ के वृंदावन योजना में आयोजित हो रही इस समिट को लेकर काफी इंतजाम किए गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन सत्र में पीएण मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त तीन दिनों के इस आयोजन में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप पुरी समेत कई मंत्री मौजूद रहेंगे। इसी के साथ प्रदेश सरकार के तमाम मंत्री भी इस आयोजन में शामिल होंगे। समिट में दस साझीदार देशों के अलावा चालीस देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। इसी के साथ दस हजार छोटे-बड़े निवेशक महाकुंभ का हिस्सा बनेंगे। ज्ञात हो कि यूपीपीजीआईएस-तेईस के माध्यम से सरकार ने शुरुआत में दस लाख करोड़ रुपए का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि देश और दुनिया के बड़े निवेशकों के उत्साहजनक समर्थन को देखने के बाद सरकार को अपना लक्ष्य बढ़ाना पड़ा। अदाणी समूह के गौतम अदाणी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का हिस्सा नहीं बनेंगे। वह दो हज़ार अट्ठारह में आयोजित समिट में आए थे। इस बार भी उनका इस समिट में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि शीर्ष उद्यमियों की संशोधित सूची में उनका नाम नहीं है।
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भारत नेपाल के गौरीफंटा बार्डर पर कस्टम विभाग का कार्यालय सालों से छप्परनुमा भवन में चल रहा था। कस्टम विभाग वन विभाग से दशकों से कार्यालय निर्माण के लिए भूमि की मांग कर रहा था जो अब जाकर पूरी होती नजर आ रही है। सोमवार को वन विभाग की सर्वेयर टीम एवं वन विभाग गौरीफंटा के रेंजर खड्ग बहादुर सिंह ने अपने दल के साथ जमीन को नापकर देते हुए खूटाबंदी करा दी।
उम्मीद है कि अब जल्द कस्टम विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को पक्का भवन नसीब हो जाएगा। बता दें कि भारत नेपाल के गौरीफंटा बार्डर पर एसएसबी, कस्टम, आईबी, वन विभाग सहित कई एजेंसियों के कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था के लिये तैनात हैं। बार्डर पर अधिकतर भूमि वन विभाग की होने के चलते किसी भी विभाग को पक्का कार्यालय नसीब नही हो सका। चूंकि बार्डर पर कस्टम विभाग का काम अधिक है। इसलिये वहां विभाग के कई अधिकारी कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहते हैं। लेकिन पक्का भवन न होने के कारण अधिकतरों ने अपना आवास पलिया शहर में बना रखा है। बार्डर पर पक्के भवन के निर्माण के लिये विभाग ने वर्ष 1984 से वन विभाग से भूमि आवंटन किये जाने की मांग की थी। 35 वर्ष बाद कस्टम की मांग पूरी होती नजर आ रही है। सोमवार को वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने 29/50 33/50 मीटर जमीन को खूंटा गाढ़कर कस्टम विभाग को हैंडओवर कर दिया। इस अवसर पर कस्टम विभाग की तरफ से कस्टम अधीक्षक आलोक श्रीवास्तव, अतुल दीक्षित, कस्टम निरीक्षक अनिल कुमार मिश्र, एम सिद्दीकी तथा कस्टम सिपाही शम्भू यादव, रामलाल सैनी, महबूब अली में खुशी नजर आई। वन विभाग गौरीफंटा के रेंजर खड्ग बहादुर सिंह ने बताया कि कस्टम को जो जमीन हैंडओवर की गयी है उसमें छह पेड़ों को चिन्हित कर दिया गया है और शीघ्र ही इन पेड़ों को वन निगम द्वारा कटवा दिया जायेगा। कस्टम अधीक्षक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि एक दो साल के अन्दर कस्टम का भवन बनकर तैयार हो जायेगा और हम सभी विभाग के स्टाफ को वर्षों से छप्पर के नीचे रहकर कार्य करने से निजात मिल जायेगी।
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भारत नेपाल के गौरीफंटा बार्डर पर कस्टम विभाग का कार्यालय सालों से छप्परनुमा भवन में चल रहा था। कस्टम विभाग वन विभाग से दशकों से कार्यालय निर्माण के लिए भूमि की मांग कर रहा था जो अब जाकर पूरी होती नजर आ रही है। सोमवार को वन विभाग की सर्वेयर टीम एवं वन विभाग गौरीफंटा के रेंजर खड्ग बहादुर सिंह ने अपने दल के साथ जमीन को नापकर देते हुए खूटाबंदी करा दी। उम्मीद है कि अब जल्द कस्टम विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को पक्का भवन नसीब हो जाएगा। बता दें कि भारत नेपाल के गौरीफंटा बार्डर पर एसएसबी, कस्टम, आईबी, वन विभाग सहित कई एजेंसियों के कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था के लिये तैनात हैं। बार्डर पर अधिकतर भूमि वन विभाग की होने के चलते किसी भी विभाग को पक्का कार्यालय नसीब नही हो सका। चूंकि बार्डर पर कस्टम विभाग का काम अधिक है। इसलिये वहां विभाग के कई अधिकारी कर्मचारी चौबीस घंटाटे तैनात रहते हैं। लेकिन पक्का भवन न होने के कारण अधिकतरों ने अपना आवास पलिया शहर में बना रखा है। बार्डर पर पक्के भवन के निर्माण के लिये विभाग ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरासी से वन विभाग से भूमि आवंटन किये जाने की मांग की थी। पैंतीस वर्ष बाद कस्टम की मांग पूरी होती नजर आ रही है। सोमवार को वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने उनतीस/पचास तैंतीस/पचास मीटर जमीन को खूंटा गाढ़कर कस्टम विभाग को हैंडओवर कर दिया। इस अवसर पर कस्टम विभाग की तरफ से कस्टम अधीक्षक आलोक श्रीवास्तव, अतुल दीक्षित, कस्टम निरीक्षक अनिल कुमार मिश्र, एम सिद्दीकी तथा कस्टम सिपाही शम्भू यादव, रामलाल सैनी, महबूब अली में खुशी नजर आई। वन विभाग गौरीफंटा के रेंजर खड्ग बहादुर सिंह ने बताया कि कस्टम को जो जमीन हैंडओवर की गयी है उसमें छह पेड़ों को चिन्हित कर दिया गया है और शीघ्र ही इन पेड़ों को वन निगम द्वारा कटवा दिया जायेगा। कस्टम अधीक्षक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि एक दो साल के अन्दर कस्टम का भवन बनकर तैयार हो जायेगा और हम सभी विभाग के स्टाफ को वर्षों से छप्पर के नीचे रहकर कार्य करने से निजात मिल जायेगी।
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उत्तर प्रदेश के गजरौला जिले से बीते दो अगस्त को लापता हुए रोहतक निवासी कैंटर चालक संजय उर्फ राजा का शव रविवार को बरामद किया गया है। पता चला है कि गजरौला के ही दो युवकों ने उसकी हत्या कर दी थी।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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उत्तर प्रदेश के गजरौला जिले से बीते दो अगस्त को लापता हुए रोहतक निवासी कैंटर चालक संजय उर्फ राजा का शव रविवार को बरामद किया गया है। पता चला है कि गजरौला के ही दो युवकों ने उसकी हत्या कर दी थी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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EV Fire: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) खासतौर पर इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग जोरदार है। लेकिन बीते कुछ महीनों से इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लग रही आग की घटनाओं ने नए खरीदारों को एक बार फिर विचार करने पर मजबूर कर दिया है। बीते सप्ताह टाटा नेक्सन ईवी में आग की घटना ने तो कंज्यूमर सेंटिमेंट को जबर्दस्त धक्का पहुंचाया है।
आग लगने की घटनाओं के बाद सरकार ने इसके लिए एक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया था। अंग्रेजी अखबार इकोनोमिक टाइम्स ने इस रिपोर्ट के कुछ पॉइंट प्रकाशित किए हें। अखबार के मुताबिक जांच कर रहे एक एक्सपर्ट पैनल ने पाया है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर वाहनों में आग की अहम वजह बेसिक सेफ्टी सिस्टम की भी कमी है। माना जा रहा है कि एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट के बाद सरकार इस कमी को ठीक करने के उपाय और निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
जांच में पाया गया है कि पैनल को ज्यादा गर्म बैटरियों की ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए कोई वेंटिंग सिस्टम नहीं मिला। इसके अलावा बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर खामियां मिली हैं। रिपोर्ट में आया है कि कई इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनियां शॉर्टकट पर यकीन कर रही हैं और केवल न्यूनतम कार्यक्षमता पर ही उनका फोकस है।
सरकार की ओर से गठित जांच कमेटी ने पाया कि देश में चल रहे कई इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बैटरी की डिजाइन में काफी कमियां हैं। माना जा रहा है कि अब विशेषज्ञ अब बैटरी की समस्या को हल करने के लिए ईवी निर्माताओं के साथ काम करेंगे। पैनल की इस जांच में ओकिनावा ऑटोटेक, बूम मोटर, प्योर ईवी, जितेंद्र ईवी और ओला इलेक्ट्रिक को शामिल किया था, इन्हीं कंपनियों के स्कूटरों में आग की घटना सामने आई थी।
केंद्रीय मानक-निर्धारण एजेंसी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने कुछ ही दिन पहले इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों से जुड़े न्यूनतम मानक तय किए हैं। नए मानकों के तहत बैटरियों को परफॉर्मेंस, विश्वसनीयता और इलेक्ट्रिक कार्यक्षमता के आधार पर टेस्ट से गुजरना होगा।
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EV Fire: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों खासतौर पर इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग जोरदार है। लेकिन बीते कुछ महीनों से इलेक्ट्रिक स्कूटरों में लग रही आग की घटनाओं ने नए खरीदारों को एक बार फिर विचार करने पर मजबूर कर दिया है। बीते सप्ताह टाटा नेक्सन ईवी में आग की घटना ने तो कंज्यूमर सेंटिमेंट को जबर्दस्त धक्का पहुंचाया है। आग लगने की घटनाओं के बाद सरकार ने इसके लिए एक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया था। अंग्रेजी अखबार इकोनोमिक टाइम्स ने इस रिपोर्ट के कुछ पॉइंट प्रकाशित किए हें। अखबार के मुताबिक जांच कर रहे एक एक्सपर्ट पैनल ने पाया है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर वाहनों में आग की अहम वजह बेसिक सेफ्टी सिस्टम की भी कमी है। माना जा रहा है कि एक्सपर्ट पैनल की रिपोर्ट के बाद सरकार इस कमी को ठीक करने के उपाय और निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है। जांच में पाया गया है कि पैनल को ज्यादा गर्म बैटरियों की ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए कोई वेंटिंग सिस्टम नहीं मिला। इसके अलावा बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर खामियां मिली हैं। रिपोर्ट में आया है कि कई इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनियां शॉर्टकट पर यकीन कर रही हैं और केवल न्यूनतम कार्यक्षमता पर ही उनका फोकस है। सरकार की ओर से गठित जांच कमेटी ने पाया कि देश में चल रहे कई इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बैटरी की डिजाइन में काफी कमियां हैं। माना जा रहा है कि अब विशेषज्ञ अब बैटरी की समस्या को हल करने के लिए ईवी निर्माताओं के साथ काम करेंगे। पैनल की इस जांच में ओकिनावा ऑटोटेक, बूम मोटर, प्योर ईवी, जितेंद्र ईवी और ओला इलेक्ट्रिक को शामिल किया था, इन्हीं कंपनियों के स्कूटरों में आग की घटना सामने आई थी। केंद्रीय मानक-निर्धारण एजेंसी भारतीय मानक ब्यूरो ने कुछ ही दिन पहले इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों से जुड़े न्यूनतम मानक तय किए हैं। नए मानकों के तहत बैटरियों को परफॉर्मेंस, विश्वसनीयता और इलेक्ट्रिक कार्यक्षमता के आधार पर टेस्ट से गुजरना होगा।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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- 9 min ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह!
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बंद होने जा रहा है 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल'?
न्यूज पेपर में छपी खबर की माने तो शो के निर्माता और होस्ट कपिल शर्मा अब अपना सारा ध्यान अपने फिल्मी करियर पर लगाना चाहते हैं। कपिल ने यशराज फिल्म के साथ तीन फिल्मों का कांट्रेक्ट किया है।
कपिल की पहली फिल्म 'बैंक चोर' अप्रैल में रिलीज होने वाली है, ऐसे में कपिल ने पहले फैसला किया था अब उनका शो कलर्स पर हफ्ते में दो दिन नहीं बल्कि एक दिन ही आयेगा।
लेकिन शो की जबरदस्त टीआरपी के कारण कलर्स चैनल वाले इस बात के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। ऐसे में कपिल और चैनल के बीच तना-तनी चल रही है जिसके चलते कपिल ने फैसला शो को बंद करने का ले लिया है।
क्योंकि अब कपिल अपने फिल्म करियर पर ही ज्यादा फोकस करना चाहते हैं। फिलहाल इस खबर पर कपिल शर्मा या चैनल्स की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।
Did You Know: कहा जा रहा है कि कपिल शर्मा का 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' की क्रिएटिव डायरेक्टर प्रीति सिमोस से चक्कर चल रहा है दोनों जल्द शादी करने जा रहे हैं। दोनों काफी समय से डेटिंग कर रहे हैं। कपिल के साथ प्रीति ने 'कॉमेडी सर्कस' में भी काम किया है।
तलाकशुदा हसीना ने नाइटी में पोस्ट कर दीं S*xy तस्वीरें, रात होते ही बेडरूम में ऐसे मचलीं कि. .
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- नौ मिनट ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! बंद होने जा रहा है 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल'? न्यूज पेपर में छपी खबर की माने तो शो के निर्माता और होस्ट कपिल शर्मा अब अपना सारा ध्यान अपने फिल्मी करियर पर लगाना चाहते हैं। कपिल ने यशराज फिल्म के साथ तीन फिल्मों का कांट्रेक्ट किया है। कपिल की पहली फिल्म 'बैंक चोर' अप्रैल में रिलीज होने वाली है, ऐसे में कपिल ने पहले फैसला किया था अब उनका शो कलर्स पर हफ्ते में दो दिन नहीं बल्कि एक दिन ही आयेगा। लेकिन शो की जबरदस्त टीआरपी के कारण कलर्स चैनल वाले इस बात के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। ऐसे में कपिल और चैनल के बीच तना-तनी चल रही है जिसके चलते कपिल ने फैसला शो को बंद करने का ले लिया है। क्योंकि अब कपिल अपने फिल्म करियर पर ही ज्यादा फोकस करना चाहते हैं। फिलहाल इस खबर पर कपिल शर्मा या चैनल्स की ओर से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। Did You Know: कहा जा रहा है कि कपिल शर्मा का 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' की क्रिएटिव डायरेक्टर प्रीति सिमोस से चक्कर चल रहा है दोनों जल्द शादी करने जा रहे हैं। दोनों काफी समय से डेटिंग कर रहे हैं। कपिल के साथ प्रीति ने 'कॉमेडी सर्कस' में भी काम किया है। तलाकशुदा हसीना ने नाइटी में पोस्ट कर दीं S*xy तस्वीरें, रात होते ही बेडरूम में ऐसे मचलीं कि. .
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के कहर के कारण देशभर में 31 मई तक के लिए लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों लगातार उनके घरों तक पहुंचाने का काम जारी है। इसी बीच एक खबर आ रही है कि 1 मई से अब तक चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 21 बच्चों ने जन्म लिया है।
ममता यादव आठ मई को गुजरात के जामनगर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार हुई थीं। वह अकेले सफर कर रही थीं। हालांकि बिहार में गंतव्य स्टेशन पर उतरने पर उनकी गोद में उनकी बच्ची थी। ममता ने ट्रेन में बच्ची को जन्म दिया। ममता बहुत मुश्किल समय में ट्रेन में सवार हुई थीं, उनके पति नगर में एक कारखाने में काम करते थे और लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी चली गई । वह गर्भावस्था के अंतिम दौर में थी और उनका घर सैकड़ों किलोमीटर दूर था।
उन्होंने कड़ा फैसला लेते हुए आठ मई को जामनगर-मुजफ्फरपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होने का निर्णय किया ताकि वह जब अपने बच्चे को जन्म दें तो वह बिहार के छपरा जिले में स्थित अपने गांव में अपनी मां के पास हों। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन रात आठ बजे जामनगर स्टेशन से रवाना हुई। 35 वर्षीय ममता को मध्यरात्रि में प्रसव पीड़ा होने लगी। रेलवे ने यद्यपि कहा था कि ट्रेन बीच में कहीं नहीं रुकेगी लेकिन इस ट्रेन को आगरा फोर्ट स्टेशन पर रोका गया ताकि ममता को चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी जा सके।
गौरतलब है कि अब तक करीब 2050 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी गई हैं। ट्रेनों में सबसे अधिक सात बच्चों का जन्म पश्चिम मध्य रेलवे में हुआ है। वहीं तीन-तीन बच्चों के जन्म दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे में हुए हैं। मध्य रेलवे में दो ऐसे बच्चों का जन्म हुआ है। वहीं पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे और पश्चिम रेलवे में एक-एक बच्चे का जन्म हुआ है।
कोरोना से जुड़े 11 सवाल, जिनके जवाब दुनियाभर के वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और जानकार नहीं दे पाए हैं!
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नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के कहर के कारण देशभर में इकतीस मई तक के लिए लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों लगातार उनके घरों तक पहुंचाने का काम जारी है। इसी बीच एक खबर आ रही है कि एक मई से अब तक चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में इक्कीस बच्चों ने जन्म लिया है। ममता यादव आठ मई को गुजरात के जामनगर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार हुई थीं। वह अकेले सफर कर रही थीं। हालांकि बिहार में गंतव्य स्टेशन पर उतरने पर उनकी गोद में उनकी बच्ची थी। ममता ने ट्रेन में बच्ची को जन्म दिया। ममता बहुत मुश्किल समय में ट्रेन में सवार हुई थीं, उनके पति नगर में एक कारखाने में काम करते थे और लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी चली गई । वह गर्भावस्था के अंतिम दौर में थी और उनका घर सैकड़ों किलोमीटर दूर था। उन्होंने कड़ा फैसला लेते हुए आठ मई को जामनगर-मुजफ्फरपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होने का निर्णय किया ताकि वह जब अपने बच्चे को जन्म दें तो वह बिहार के छपरा जिले में स्थित अपने गांव में अपनी मां के पास हों। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन रात आठ बजे जामनगर स्टेशन से रवाना हुई। पैंतीस वर्षीय ममता को मध्यरात्रि में प्रसव पीड़ा होने लगी। रेलवे ने यद्यपि कहा था कि ट्रेन बीच में कहीं नहीं रुकेगी लेकिन इस ट्रेन को आगरा फोर्ट स्टेशन पर रोका गया ताकि ममता को चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी जा सके। गौरतलब है कि अब तक करीब दो हज़ार पचास श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी गई हैं। ट्रेनों में सबसे अधिक सात बच्चों का जन्म पश्चिम मध्य रेलवे में हुआ है। वहीं तीन-तीन बच्चों के जन्म दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे में हुए हैं। मध्य रेलवे में दो ऐसे बच्चों का जन्म हुआ है। वहीं पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे और पश्चिम रेलवे में एक-एक बच्चे का जन्म हुआ है। कोरोना से जुड़े ग्यारह सवाल, जिनके जवाब दुनियाभर के वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और जानकार नहीं दे पाए हैं!
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सामायिक, तथा चउविहार करते है। चतुदर्शी का उपवास तथा मासिक आयम्विल भी करते है। आपने अनेक अठाया, नाले, नेले आदि तपस्या भी की हे । ताम्वरम् मे जैन स्थानक एव पाठशाला के निर्माण मे आपने तन मन-वन से सहयोग प्रदान किया। माप एम० एस० जैन एसोसियेशन ताम्वरम् के कोषाध्यक्ष है।
आपके सुपुत्र श्रीमान ज्ञानचन्द जी एक उत्साही वर्तव्यनिष्ठ युवक है। माता-पिता के भक्त तथा गुरुजनो के प्रति असीम आम्था रखते हुए, सामाजिक तथा राष्ट्रीय सेवा कार्यो मे सदा सहयोग प्रदान करते है । श्रीमान ज्ञानचन्दजी की धर्मपत्नी सौ० खमाबाई ( सुपुत्री श्रीमान पुखराज जी कटारिया राणावास) भी आपके सभी कार्यो मे भरपूर सहयोग करती है ।
इस प्रकार यह भाग्यशाली मुणोत परिवार म्व० गुरुदेव श्री मरुघर केशरी जी महाराज के प्रति सदा से असीम आम्थाशील रहा है। विगत मेडता (वि० स० २०३६) चातुर्मास मे श्री सूर्य मुनिजी की दीक्षा प्रसग (आसोज सुदी १० ) पर श्रीमान पुखराज जी ने गुरुदेव की उम्र के वर्षों जितनी विपुल धन राशि पच सग्रह प्रकाशन मे प्रदान करने की घोषणा की। इतनी उदारता के साथ सन् साहित्य के प्रचार-प्रसार मे सास्कृतिक रुचि का यह उदाहरण वास्तव मे ही अनुकरणीय व प्रशसनीय है। श्रीमान ज्ञानचन्द जी मुणोत की उदारता, सज्जनता और दानशीलता वस्तुत आज के युवक समाज के समक्ष एक प्रेरणा प्रकाश है ।
हम आपके उदार सहयोग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आपके समस्त परिवार की सुख-समृद्धि की शुभ कामना करते हैं । आप इसी प्रकार जिनशासन की प्रभावना करते रहे - यही मगल कामना है।
मन्त्रीपूज्य श्री रघुनाथ जैन शोध संस्थान जोधपुर
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सामायिक, तथा चउविहार करते है। चतुदर्शी का उपवास तथा मासिक आयम्विल भी करते है। आपने अनेक अठाया, नाले, नेले आदि तपस्या भी की हे । ताम्वरम् मे जैन स्थानक एव पाठशाला के निर्माण मे आपने तन मन-वन से सहयोग प्रदान किया। माप एमशून्य एसशून्य जैन एसोसियेशन ताम्वरम् के कोषाध्यक्ष है। आपके सुपुत्र श्रीमान ज्ञानचन्द जी एक उत्साही वर्तव्यनिष्ठ युवक है। माता-पिता के भक्त तथा गुरुजनो के प्रति असीम आम्था रखते हुए, सामाजिक तथा राष्ट्रीय सेवा कार्यो मे सदा सहयोग प्रदान करते है । श्रीमान ज्ञानचन्दजी की धर्मपत्नी सौशून्य खमाबाई भी आपके सभी कार्यो मे भरपूर सहयोग करती है । इस प्रकार यह भाग्यशाली मुणोत परिवार म्वशून्य गुरुदेव श्री मरुघर केशरी जी महाराज के प्रति सदा से असीम आम्थाशील रहा है। विगत मेडता चातुर्मास मे श्री सूर्य मुनिजी की दीक्षा प्रसग पर श्रीमान पुखराज जी ने गुरुदेव की उम्र के वर्षों जितनी विपुल धन राशि पच सग्रह प्रकाशन मे प्रदान करने की घोषणा की। इतनी उदारता के साथ सन् साहित्य के प्रचार-प्रसार मे सास्कृतिक रुचि का यह उदाहरण वास्तव मे ही अनुकरणीय व प्रशसनीय है। श्रीमान ज्ञानचन्द जी मुणोत की उदारता, सज्जनता और दानशीलता वस्तुत आज के युवक समाज के समक्ष एक प्रेरणा प्रकाश है । हम आपके उदार सहयोग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आपके समस्त परिवार की सुख-समृद्धि की शुभ कामना करते हैं । आप इसी प्रकार जिनशासन की प्रभावना करते रहे - यही मगल कामना है। मन्त्रीपूज्य श्री रघुनाथ जैन शोध संस्थान जोधपुर
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अशोक गहलोत, राहुल गांधी और सचिन पायलट (फाइल फोटो)
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए कांग्रेस की ओर से शेष 48 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं. पार्टी के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने शुक्रवार देर शाम बताया है कि दूसरी लिस्ट जारी करने की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब उम्मीदवारों की लिस्ट कभी भी आ सकती है. हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दूसरी लिस्ट आज रात आएगी या कल सुबह, यह नहीं कह सकता, ये मुकुल वासनिक ही बता सकते हैं. गहलोत ने कहा कि अब CEC की कोई बैठक नहीं होगी, हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है. सचिन पायलट, डॉ. सीपी जोशी, कटारिया समेत हम सब एक हैं. इसकी बानगी आपको आने वाले चुनाव में देखने को मिलेगी.
यहां देखें- राजस्थान कांग्रेस की पहली लिस्ट में कहां से कौन हैं उम्मीदवार?
इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी स्थित 15 GRG में कांग्रेस की बैठक हुई. इस बैठक के बाद अशोक गहलोत, सचिन पायलट, रामेश्वर डूडी, कुमारी शैलजा, अविनाश पांडे समेत तमाम नेता शामिल थे. बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकले गहलोत ने वहां मौजूद लोगों से मुलाकात की. इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों ने अपनी मांग भी रखी.
ये भी पढ़ें- राजस्थान की कांग्रेस लिस्ट में झूठा निकला राहुल गांधी का ये दावा!
कांग्रेस ने गुरुवार रात अपनी पहली लिस्ट जारी की थी. केंद्रीय चुनाव समिति की देर रात तक चली बैठक में 152 प्रत्याशियों के नामों के ऐलान किया गया. इस सूची में सचिन पायलट, अशोक गहलोत, रामेश्वरलाल डूडी, डॉ. सीपी जोशी के नाम शामिल हैं. कांग्रेस की पिछले सरकार के 22 मंत्रियों को भी इस सूची में जगह दी गई.
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अशोक गहलोत, राहुल गांधी और सचिन पायलट राजस्थान विधानसभा चुनाव दो हज़ार अट्ठारह के लिए कांग्रेस की ओर से शेष अड़तालीस सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं. पार्टी के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने शुक्रवार देर शाम बताया है कि दूसरी लिस्ट जारी करने की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब उम्मीदवारों की लिस्ट कभी भी आ सकती है. हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दूसरी लिस्ट आज रात आएगी या कल सुबह, यह नहीं कह सकता, ये मुकुल वासनिक ही बता सकते हैं. गहलोत ने कहा कि अब CEC की कोई बैठक नहीं होगी, हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है. सचिन पायलट, डॉ. सीपी जोशी, कटारिया समेत हम सब एक हैं. इसकी बानगी आपको आने वाले चुनाव में देखने को मिलेगी. यहां देखें- राजस्थान कांग्रेस की पहली लिस्ट में कहां से कौन हैं उम्मीदवार? इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी स्थित पंद्रह GRG में कांग्रेस की बैठक हुई. इस बैठक के बाद अशोक गहलोत, सचिन पायलट, रामेश्वर डूडी, कुमारी शैलजा, अविनाश पांडे समेत तमाम नेता शामिल थे. बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकले गहलोत ने वहां मौजूद लोगों से मुलाकात की. इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों ने अपनी मांग भी रखी. ये भी पढ़ें- राजस्थान की कांग्रेस लिस्ट में झूठा निकला राहुल गांधी का ये दावा! कांग्रेस ने गुरुवार रात अपनी पहली लिस्ट जारी की थी. केंद्रीय चुनाव समिति की देर रात तक चली बैठक में एक सौ बावन प्रत्याशियों के नामों के ऐलान किया गया. इस सूची में सचिन पायलट, अशोक गहलोत, रामेश्वरलाल डूडी, डॉ. सीपी जोशी के नाम शामिल हैं. कांग्रेस की पिछले सरकार के बाईस मंत्रियों को भी इस सूची में जगह दी गई. .
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भोपाल (भाषा)। भारतीय खेल प्राधिकरण . साई. में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे एक खिलाडी को जीप द्वारा कुचल दिये जाने से उसकी मृत्यु हो गयी जबकि एक अन्य खिलाडी घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने आज यहां बताया कि साई में हाकी का प्रशिक्षण ले रहे खिलाडी अजय प्रभाकर 19 तथा उदित कल शाम छुट्टी होने के कारण बाजार गये थे और जब वे वापस होस्टल लौट रहे थे तभी गारेगांव के पास तेज गति से आ रही जीप ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में अजय की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गयी जबकि उदित गंभीर रुप से घायल हो गया। दोनों ही खिलाडी लखनउढ के रहने वाले हैं। इस घटना के बाद गुस्साये ग्रामीणों ने तोडफोड के बाद जीप को आग के हवाले कर दिया जबकि जीप चालक फरार हो गया। साई के सूत्रों के अनुसार अजय फारवर्ड खिलाड़ी था जबकि उदित गोलकीपर है। अजय के बडे भाई अमित प्रभाकर एयर इंडिया की टीम की ओर से हाकी खेलते हैं।
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भोपाल । भारतीय खेल प्राधिकरण . साई. में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे एक खिलाडी को जीप द्वारा कुचल दिये जाने से उसकी मृत्यु हो गयी जबकि एक अन्य खिलाडी घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने आज यहां बताया कि साई में हाकी का प्रशिक्षण ले रहे खिलाडी अजय प्रभाकर उन्नीस तथा उदित कल शाम छुट्टी होने के कारण बाजार गये थे और जब वे वापस होस्टल लौट रहे थे तभी गारेगांव के पास तेज गति से आ रही जीप ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में अजय की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गयी जबकि उदित गंभीर रुप से घायल हो गया। दोनों ही खिलाडी लखनउढ के रहने वाले हैं। इस घटना के बाद गुस्साये ग्रामीणों ने तोडफोड के बाद जीप को आग के हवाले कर दिया जबकि जीप चालक फरार हो गया। साई के सूत्रों के अनुसार अजय फारवर्ड खिलाड़ी था जबकि उदित गोलकीपर है। अजय के बडे भाई अमित प्रभाकर एयर इंडिया की टीम की ओर से हाकी खेलते हैं।
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हिसार/सिरसा, 22 मई (हप्र/निस)
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने यहां कहा कि जजपा ने भाजपा को समर्थन देकर जनमत और जनभावनाओं का सौदा किया। जनता अगर भाजपा के पहले कार्यकाल से इतनी संतुष्ट होती तो वह 2019 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनवाती। लेकिन जनता ने भाजपा सरकार के 14 में से 12 मंत्रियों को हराकर घर पर बैठा दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पतन का इससे बड़ा उदाहरण संभवतः किसी ने नहीं देखा होगा। दीपेंद्र हुड्डा फतेहाबाद में 29 मई को पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और कार्यक्रम का न्योता दिया।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के एक-एक कोने से लोगों ने भाजपा को हराया, लेकिन जजपा के धोखे के कारण प्रदेश में फिर भाजपा सरकार बन गई और जजपा उसकी साझीदार। जजपा की इस दगाबाजी को हरियाणा का मतदाता कभी नहीं भूलेगा और समय आने पर इसका माकूल जवाब देगा। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हो रहा विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम हरियाणा में आम जन की आवाज बन चुका है और लोग हरियाणा की भ्रष्ट सरकार से जल्द से जल्द निजात पाना चाहते हैं। सांसद कोविड-19 के दौरान एनएचएम में अनुबंध पर लगे फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर, जीडीए, स्वीपर इत्यादि पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का रोजगार छीने जाने के खिलाफ जारी धरने पर पहुंचे और उनकी मांगों का पूर्ण समर्थन किया। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि ये सरकार नौकरी देने की बजाय छीनने में ही लगी है, यही कारण है कि आज हरियाणा में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा है।
वहीं सिरसा में सांसद दीपेंद्र ने कहा कि प्रदेश सरकार से हर वर्ग त्रस्त है, कांग्रेस शासन के चलते हरियाणा प्रदेश चाहे नौकरी का मामला हो या खेलों का समूचे देश में अव्वल था, जबकि आज हरियाणा का नाम नशाखोरी और बेरोजगारी में नंबर वन है। वे चोपटा के शिव मंदिर धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
इस सम्मेलन को वरिष्ठ नेता डॉ. केवी सिंह, पूर्व विधायक भरत सिंह बेनीवाल, सुशील इंदौरा, कैप्टन अमरदीप सिंह, अमरपाल खोसा, दलीप बुडानिया, जसवंत कस्वां सहित कई कांग्रेस नेताओं ने संबोधित किया।
चंडीगढ़ (ट्रिन्यू) : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने अखिल भारतीय कांग्रेस सेवा दल द्वारा देश में निकाली जा रही आजादी गौरव यात्रा के हरियाणा आगमन पर इस यात्रा के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से समिति गठित की है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश गुप्ता हरियाणा कांग्रेस सेवा दल के प्रभारी होने के नाते हरियाणा में यात्रा से समन्वय बनाए रखेंगे। हरियाणा कांग्रेस सेवा दल की मुख्य संगठक डॉ. पूनम चौहान इस यात्रा में अपने साथियों सहित शामिल होंगी। कुलराज कटारिया तथा ओपी यादव को क्रमशः गुरुग्राम तथा रेवाड़ी जिलों के समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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हिसार/सिरसा, बाईस मई कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने यहां कहा कि जजपा ने भाजपा को समर्थन देकर जनमत और जनभावनाओं का सौदा किया। जनता अगर भाजपा के पहले कार्यकाल से इतनी संतुष्ट होती तो वह दो हज़ार उन्नीस के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनवाती। लेकिन जनता ने भाजपा सरकार के चौदह में से बारह मंत्रियों को हराकर घर पर बैठा दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पतन का इससे बड़ा उदाहरण संभवतः किसी ने नहीं देखा होगा। दीपेंद्र हुड्डा फतेहाबाद में उनतीस मई को पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और कार्यक्रम का न्योता दिया। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के एक-एक कोने से लोगों ने भाजपा को हराया, लेकिन जजपा के धोखे के कारण प्रदेश में फिर भाजपा सरकार बन गई और जजपा उसकी साझीदार। जजपा की इस दगाबाजी को हरियाणा का मतदाता कभी नहीं भूलेगा और समय आने पर इसका माकूल जवाब देगा। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हो रहा विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम हरियाणा में आम जन की आवाज बन चुका है और लोग हरियाणा की भ्रष्ट सरकार से जल्द से जल्द निजात पाना चाहते हैं। सांसद कोविड-उन्नीस के दौरान एनएचएम में अनुबंध पर लगे फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर, जीडीए, स्वीपर इत्यादि पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का रोजगार छीने जाने के खिलाफ जारी धरने पर पहुंचे और उनकी मांगों का पूर्ण समर्थन किया। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि ये सरकार नौकरी देने की बजाय छीनने में ही लगी है, यही कारण है कि आज हरियाणा में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा है। वहीं सिरसा में सांसद दीपेंद्र ने कहा कि प्रदेश सरकार से हर वर्ग त्रस्त है, कांग्रेस शासन के चलते हरियाणा प्रदेश चाहे नौकरी का मामला हो या खेलों का समूचे देश में अव्वल था, जबकि आज हरियाणा का नाम नशाखोरी और बेरोजगारी में नंबर वन है। वे चोपटा के शिव मंदिर धर्मशाला में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन को वरिष्ठ नेता डॉ. केवी सिंह, पूर्व विधायक भरत सिंह बेनीवाल, सुशील इंदौरा, कैप्टन अमरदीप सिंह, अमरपाल खोसा, दलीप बुडानिया, जसवंत कस्वां सहित कई कांग्रेस नेताओं ने संबोधित किया। चंडीगढ़ : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान ने अखिल भारतीय कांग्रेस सेवा दल द्वारा देश में निकाली जा रही आजादी गौरव यात्रा के हरियाणा आगमन पर इस यात्रा के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से समिति गठित की है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश गुप्ता हरियाणा कांग्रेस सेवा दल के प्रभारी होने के नाते हरियाणा में यात्रा से समन्वय बनाए रखेंगे। हरियाणा कांग्रेस सेवा दल की मुख्य संगठक डॉ. पूनम चौहान इस यात्रा में अपने साथियों सहित शामिल होंगी। कुलराज कटारिया तथा ओपी यादव को क्रमशः गुरुग्राम तथा रेवाड़ी जिलों के समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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जिला मुख्यालय पर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर विनोद यादव की सेवाएं आखिरकार बर्खास्त कर दी गईं। यादव पर काफी समय से संस्थान में नौकरियां देने के मामले में अनियमितताएं बरतने के आरोप लग रहे थे और इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मिले थे और उन्हें प्रोफेसर विनोद यादव के बारे में स्थिति से अवगत करवाया था। संस्थान में नौकरी में चहेतों को रखने और अनियमितताएं बरतने के आरोपों के चलते अब यादव की सेवाएं खत्म कर दी गई है। दरअसल, कुछ माह पहले ही उन्हें संस्थान के निदेशक के पद से हटा दिया गया था, अब उनकी सेवाएं बर्खास्त कर दी गई हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये आदेश जारी किए हैं। एनआईटी जालंधर के डायरेक्टर प्रोफेसर ललित अवस्थी को एनआईटी हमीरपुर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
भर्ती में अनियमितताओं को लेकर विवाद के चलते विनोद यादव के खिलाफ जांच चल रही थी। केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार विनोद यादव के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं, जिनकी जांच चल रही थी। उन्हें पांच साल के लिए निदेशक नियुक्त किया गया था। 13 जुलाई को एक जांच कमेटी बनाई गई थी, जिसकी शुरुआती जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कमेटी ने स्वीकार कर लिये। विनोद यादव की नियुक्ति 23 मार्च, 2018 को हुई थी। उनका कार्यकाल 2023 तक था।
मंत्रालय की ओर से कहा कि गया है कि कमेटी ने उन पर लगे आरोपों को सही पाया, ऐसे में अब उनके खिलाफ आगे जांच होगी। ऐसे में विनोद यादव को सेवाओं से मुक्त किया जाता है। अगले तीन महीने तक उन्हें वेतन मिलेगा और इसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त हो जायेंगी।
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जिला मुख्यालय पर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर विनोद यादव की सेवाएं आखिरकार बर्खास्त कर दी गईं। यादव पर काफी समय से संस्थान में नौकरियां देने के मामले में अनियमितताएं बरतने के आरोप लग रहे थे और इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मिले थे और उन्हें प्रोफेसर विनोद यादव के बारे में स्थिति से अवगत करवाया था। संस्थान में नौकरी में चहेतों को रखने और अनियमितताएं बरतने के आरोपों के चलते अब यादव की सेवाएं खत्म कर दी गई है। दरअसल, कुछ माह पहले ही उन्हें संस्थान के निदेशक के पद से हटा दिया गया था, अब उनकी सेवाएं बर्खास्त कर दी गई हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ये आदेश जारी किए हैं। एनआईटी जालंधर के डायरेक्टर प्रोफेसर ललित अवस्थी को एनआईटी हमीरपुर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। भर्ती में अनियमितताओं को लेकर विवाद के चलते विनोद यादव के खिलाफ जांच चल रही थी। केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार विनोद यादव के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं, जिनकी जांच चल रही थी। उन्हें पांच साल के लिए निदेशक नियुक्त किया गया था। तेरह जुलाई को एक जांच कमेटी बनाई गई थी, जिसकी शुरुआती जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कमेटी ने स्वीकार कर लिये। विनोद यादव की नियुक्ति तेईस मार्च, दो हज़ार अट्ठारह को हुई थी। उनका कार्यकाल दो हज़ार तेईस तक था। मंत्रालय की ओर से कहा कि गया है कि कमेटी ने उन पर लगे आरोपों को सही पाया, ऐसे में अब उनके खिलाफ आगे जांच होगी। ऐसे में विनोद यादव को सेवाओं से मुक्त किया जाता है। अगले तीन महीने तक उन्हें वेतन मिलेगा और इसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त हो जायेंगी।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Lok Sabha Elections 2019. गुजरात कपडवंज से कांग्रेस विधायक कालू सिंह ने इस्तीफा दे दिया है।
अहमदाबाद, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के चलते भाजपा और कांग्रेस सहित कई पार्टियां टिकट आवंटन के मामले में भीतरघात और विरोध का सामना कर रही हैं। गुजरात में खेड़ा लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने विमल शाह को टिकट देने पर कपडवंज के विधायक कालू सिंह डाभी ने अपने समर्थकों के साथ इस्तीफा दे दिया है। वहीं, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र दाहोद में बाबू कटारा को टिकट देने पर कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ता पार्टी बदल कर भाजपा में जाने के लिए तैयार हैं। वहीं, सुरेन्द्रनगर में विधायक सोमा भाई पटेल को टिकट मिलने पर पूर्व विधायक लालजी मेर ने निर्दलीय उम्मीदवारी की है।
यहां रोष के कारण डैमेज कंट्रोल के लिए प्रभारी राजीव सातव गुजरात के दौरे पर हैं। खेड़ा की लोकसभा बैठक से पूर्व मंत्री विमल शाह को टिकट मिलने पर जिले में रोष है। इसके विरोध में कपड़वंज के विधायक कालू सिंह डाभी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि वे भाजपा में शामिल होंगे। सुरेन्द्रनगर से विधायक सोमागांडा पटेल को टिकट मिलने पर पूर्व विधायक लालजी मेर नाराज हो गए। उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल कर निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी है।
दाहोद में भी प्रभा तावियाड ने बदले भाजपा से कांग्रेस में शामिल बाबू काटारा को टिकट मिलने पर स्थानीय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कांग्रेस को उत्तर गुजरात में भी बगावत का सामना करना पड़ रह है। पाटण की सीट से जगदीश ठाकोर को टिकट देने पर ठाकोर सेना नाराज है। यहां रोष के कारण डैमेज कंट्रोल के लिए प्रभारी राजीव सातव गुजरात के दौरे पर है।
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Lok Sabha Elections दो हज़ार उन्नीस. गुजरात कपडवंज से कांग्रेस विधायक कालू सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। अहमदाबाद, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के चलते भाजपा और कांग्रेस सहित कई पार्टियां टिकट आवंटन के मामले में भीतरघात और विरोध का सामना कर रही हैं। गुजरात में खेड़ा लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने विमल शाह को टिकट देने पर कपडवंज के विधायक कालू सिंह डाभी ने अपने समर्थकों के साथ इस्तीफा दे दिया है। वहीं, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र दाहोद में बाबू कटारा को टिकट देने पर कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ता पार्टी बदल कर भाजपा में जाने के लिए तैयार हैं। वहीं, सुरेन्द्रनगर में विधायक सोमा भाई पटेल को टिकट मिलने पर पूर्व विधायक लालजी मेर ने निर्दलीय उम्मीदवारी की है। यहां रोष के कारण डैमेज कंट्रोल के लिए प्रभारी राजीव सातव गुजरात के दौरे पर हैं। खेड़ा की लोकसभा बैठक से पूर्व मंत्री विमल शाह को टिकट मिलने पर जिले में रोष है। इसके विरोध में कपड़वंज के विधायक कालू सिंह डाभी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि वे भाजपा में शामिल होंगे। सुरेन्द्रनगर से विधायक सोमागांडा पटेल को टिकट मिलने पर पूर्व विधायक लालजी मेर नाराज हो गए। उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल कर निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी है। दाहोद में भी प्रभा तावियाड ने बदले भाजपा से कांग्रेस में शामिल बाबू काटारा को टिकट मिलने पर स्थानीय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कांग्रेस को उत्तर गुजरात में भी बगावत का सामना करना पड़ रह है। पाटण की सीट से जगदीश ठाकोर को टिकट देने पर ठाकोर सेना नाराज है। यहां रोष के कारण डैमेज कंट्रोल के लिए प्रभारी राजीव सातव गुजरात के दौरे पर है।
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ओडिशा के बालासोर में दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने से इस दर्दनाक ट्रेन हादसे का शिकार हुई जिसमें अब तक 233 लोगों की जान जाने की खबर है, वहीं, करीब 900 लोग घायल हैं.
इस घटना के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ से लेकर सुरक्षाबलों के कई जवानों को भी राहत-बचाव कार्यों में लगा दिया गया, 2 जून 2023 को बालेश्वर ज़िले के बहानागा में हुई रेल दुर्घटना के मद्देनजर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक दिन के राजकीय शोक का आदेश दिया है, पूरे राज्य में 3 जून को कोई उत्सव नहीं मनाया जाएगा.
जानकारी के अनुसार, एसएमवीबी-हावड़ा एक्सप्रेस (12864), कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी की टक्कर हुई है, सबसे पहले हावड़ा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से टक्कर हुई, उसके बाद मालगाड़ी कोरोमंडल से टकरा गई, टक्कर इतनी तेज थी कि एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई, फिलहाल इस रूट की ट्रेनों को रोक दिया गया है.
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ओडिशा के बालासोर में दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने से इस दर्दनाक ट्रेन हादसे का शिकार हुई जिसमें अब तक दो सौ तैंतीस लोगों की जान जाने की खबर है, वहीं, करीब नौ सौ लोग घायल हैं. इस घटना के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ से लेकर सुरक्षाबलों के कई जवानों को भी राहत-बचाव कार्यों में लगा दिया गया, दो जून दो हज़ार तेईस को बालेश्वर ज़िले के बहानागा में हुई रेल दुर्घटना के मद्देनजर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक दिन के राजकीय शोक का आदेश दिया है, पूरे राज्य में तीन जून को कोई उत्सव नहीं मनाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, एसएमवीबी-हावड़ा एक्सप्रेस , कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी की टक्कर हुई है, सबसे पहले हावड़ा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से टक्कर हुई, उसके बाद मालगाड़ी कोरोमंडल से टकरा गई, टक्कर इतनी तेज थी कि एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई, फिलहाल इस रूट की ट्रेनों को रोक दिया गया है. उत्तराखंड संगीत एवं फिल्म जगत की सभी ख़बरों को विस्तार से देखने के लिए हिलीवुड न्यूज़ को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद का मुकाबला करने में बहुपक्षीय सहयोग का आह्वान किया राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से जल शक्ति अभियान को सफल बनाने का किया आह्वान केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा प्याज की कीमतों में वृद्धि अस्थायी और इसपर जल्द काबू पा लिया जाएगा राज्य सरकार प्रदेश में पंजीकृत सभी केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों की करा रही है ऑडिट मौसमी बीमारियों को लेकर जिला कलेक्टर हर सप्ताह करेंगे समीक्षा चिकित्सा मंत्री ने दिए निर्देश प्रदेशभर में मानसून अपने अंतिम चरण में राज्य के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश शून्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद का मुकाबला करने में बहुपक्षीय सहयोग का आह्वान किया है
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें अधिवेशन से अलग आतंक तथा अतिवादी बयानों पर दुनिया के रूख पर विश्व नेताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचे से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए
विदेश मंत्रालय में सचिव ए गीतेश सरमा ने न्यूयार्क में संवाददाताओं को बताया कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादियों को धन और हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए
उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी ऐसे हमलों को आतंकी कार्रवाई माना जाना चाहिए
आतंक सिर्फ आतंक है यह अच्छा या बुरा नहीं है
शून्य संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में दुनिया की सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है
भारत और स्वीडन के साथ अर्जेन्टीना फिनलैण्ड फ्रांस जर्मनी आयरलैण्ड लग्जमबर्ग हॉलैण्ड दक्षिण कोरिया तथा ब्रिटेन और कंपनियों के एक समूह ने उद्योगों में इस तरह के बदलाव लाने के लिए एक नये नेतृत्व समूह की घोषणा की है
संवाददाता सम्मेलन में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पिछले दो दिनों में जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में बड़े फैसले हुए हैं जिसमें भारी उद्योगों के बिना किसी बाहरी मदद के कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में काम करने का फैसला भी शामिल है
शून्य राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से स्वच्छ भारत अभियान की तरह जल शक्ति अभियान को सफल बनाने को कहा है
उन्होंने कहा कि देश ने स्वच्छता के लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया है और देश खुले में शौच से लगभग मुक्त होने वाला है
नई दिल्ली में छठे भारत जल सप्ताह दो हज़ार उन्नीस के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि दो अक्टूबर को देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती स्वच्छ भारत अभियान के पूर्ण होने के दिन के रूप में मना रहा है
उन्होंने बताया कि सरकार ने दो हज़ार चौबिस तक सभी ग्रामीण परिवारों को जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलजीवन अभियान की शुरूआत की है
इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार जल जीवन अभियान के तहत सभी परिवारों को पानी की आपूर्ति के लिए पचास अरब डॉलर का निवेश कर रही है
शून्य एक गृहमंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में निजी सुरक्षा एजेंसी लाइसेंसिंग पोर्टल की शुरूआत की
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पोर्टल तीन महीने के अंदर सभी आधिकारिक भाषाओं जैसे हिंदी गुजराती तेलुगु और तमिल में काम करने लगेगा
गृहमंत्री ने कहा कि पोर्टल पर राज्यों में मौजूद लाइसेंस्ड एजेंसियों के नम्बर भी उपलब्ध होंगे ताकि निजी सुरक्षा एजेंसियों की धोखाधड़ी के शिकार न हों
शून्य उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा है कि वह सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने के लिए दिशा निर्देश लाने में लगने वाले समय की जानकारी तीन सप्ताह के अंदर उसे दे
न्यायालय ने कहा कि न तो उच्चतम न्यायालय और न ही उच्च न्यायालय इस मुद्दे पर दिशा निर्देश तय करने में सक्षम है और यह सरकार का काम है कि वह सोशल मीडिया के दुरूपयोग को रोकने के लिए उचित दिशा निर्देश लाए
शून्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महीने की उनतीस तारीख को सुबह ग्यारह बजे आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में अपने विचार साझा करेंगे
कार्यक्रम की यह 57वीं कड़ी होगी
एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम के लिए लोगों से अपने विचार साझा करने की अपील की है
उन्होंने माई जीओवी ओपन फोरम या नमो एप पर अपने विचार भेजने को कहा है
टोल फ्री नम्बर अट्ठारह शून्य शून्य ग्यारह अठहत्तर शून्य शून्य पर भी हिन्दी और अंग्रेजी में संदेश रिकॉर्ड कराये जा सकते हैं
ये फोन लाईन छब्बीस सितम्बर तक खुली रहेगी
शून्य केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि प्याज की कीमतों में वृद्धि अस्थायी है और इस पर जल्दी ही काबू पा लिया जाएगा
दोनों केन्द्रीय मंत्री आज नई दिल्ली में अलगअलग संवाददाता सम्मेलन में प्याज की कीमतों को लेकर बनी स्थिति पर चर्चा कर रहे थे
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री पासवान ने कहा कि इस बार आलू और टमाटर का मूल्य नियंत्रण में है लेकिन बाढ़ और बरसात के कारण प्याज का मूल्य बढा हुआ है
उन्होंने कहा कि राज्यों को सस्ते मूल्य पर प्याज उपलब्ध करवाया जा रहा है
शून्य केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों के माध्यम से ठगी के विभिन्न प्रकरण सामने आने के बाद राज्य सरकार प्रदेष में पंजीकृत सभी ग्यारह सौ उनसठ केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों की ऑडिट करवा रही है
साथ ही सरकार द्वारा अब सेंट्रल रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत कॉपरेटिव सोसाइटियों पर भी षिकंजा कसा जा रहा है
कॉपरेटिव रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने आकाशवाणी को बताया कि जिस तरह कुछ सोसाइटियों द्वारा लोगों के साथ ठगी की गई है ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए सभी कॉपरेटिव सोसाइटियों की जांच की जा रही है
शून्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देष दिये हैं कि वे मौसमी बीमारी की स्थिति को लेकर हर सप्ताह समीक्षा करें
आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों और चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ संवाद में चिकित्सा मंत्री ने यह निर्देष दिये
उन्होंने सप्ताह में एक दिन घर में मच्छर पनपने वाली जगहों की सफाई करने के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने को भी कहा
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उच्च षिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी तकनीकी षिक्षा मंत्री डॉ सुभाष गर्ग भी उपस्थित रहे
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दो अक्टूबर को सभी जिलों में आठ से दस स्थानों पर विषाल रक्तदान षिविर आयोजित करने की तैयारियों को लेकर भी निर्देष दिये गये
शून्य राज्य में जल्द ही एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली आईएचएमएस लागू की जायेगी
इसकी शुरुआत अजमेर जिले के केकड़ी स्थित राजकीय जिला चिकित्सालय से की जायेगी
इस नयी प्रणाली के तहत मरीज घर से ही सरकारी अस्पताल में पंजीयन करा सकेंगे
इससे उन्हें लम्बी कतार में लगने से निजात मिलेगी वहीं मरीज की बीमारी का रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी
शून्य केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा है प्राचीन धरोहर आयुष पद्धति को घरघर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत सभी जिलों में पचास बिस्तरों वाला अस्पताल खोले जाने की योजना है
श्री नाइक ने आज नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि कम समय में मंत्रालय ने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं
उन्होंने कहा कि अब तक अठासी आयुष अस्पताल खोले जाने के लिए बजट जारी किया गया है और वे तैयार होने के कगार पर है
शून्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज जयपुर में मुख्यमंत्री निवास से निर्भया स्कवॉड में शामिल बीस मोटरसाइकिल सवार महिला पुलिसकर्मियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
इस स्कवॉड में शामिल नीली वर्दी पहने प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी जयपुर शहर के स्कूल कॉलेज तथा सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बालिकाओं विशेषकर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करेंगी
इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सीएसआर के तहत इस तरह के प्रयास से प्रदेश में महिला सुरक्षा के प्रति एक अच्छा मैसेज जाएगा
शून्य जिलों से प्राप्त अन्य समाचार बीकानेर में महाजन पुलिस थाना इलाके में एक बोलेरो और मोटर साइकिल की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक घायल हो गया
चित्तौड़कोटा राजमार्ग पर आज सुबह एक हादसे में सड़क पर बैठी गायों को एक वाहन ने चपेट में ले लिया जिससे ग्यारह गायों की मौत हो गई
बीकानेर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आज गर्ल्स कॉलेज की ओर से प्रभात फेरी निकाली गई
श्रीगंगानगर जिले में मान्यताप्राप्त निजी विद्यालय संचालकों ने विभिन्न मांगों को लेकर आज जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के आगे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया
पाली बार एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा न्यायिक कार्यों का बहिष्कार आज लगातार 26वें दिन भी जारी रहा
पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर एक यात्री की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई
राजस्थान निर्माण मजदूर यूनियन सीटू के आह्वान पर राज्य के निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक कल जयपुर में श्रम आयुक्त कार्यालय के समक्ष इक्कीस सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे
शून्य चूरू में कल क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला वार्तालाप का आयोजन किया जा रहा है
कार्यशाला में चूरू व जिले के अन्य कस्बों में कार्यरत अस्सी से अधिक मीडियाकर्मी भाग लेंगे
शून्य दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में आज शाम भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए
राजधानी जयपुर समेत राज्य के कई भागों में भूकंप के झटके आने की खबर है
मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छः दशमलव तीन मापी गयी शून्य राज्य में मानसून अपने अंतिम चरण में है
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पूरे सप्ताह बारिश का दौर जारी रहेगा लेकिन भारी बारिश की संभावना अब कम हो गयी है
मौसम विभाग के निदेशक शिव गणेश ने आकाशवाणी को बताया कि अजमेर उदयपुर कोटा और भरतपुर संभाग में इस सप्ताह मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है
पिछले चौबिस घंटों में प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई
सिरोही जिले में माउंटआबू सहित अनेक स्थानों पर आज बारिश हुई बारिश के बाद माउंटआबू में झरने बहने लगे और नक्की झील पर एक बार फिर चादर चलने लगी है
धौलपुर से हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि जिले में बीते दो दिनों से कभी तेज और कभी हल्की वर्षा का दौर जारी है इससे शहर की सड़कों और आसपास के इलाकों में पानी भर गया है
राज्य के बांसवाड़ा में एक घंटे तक झमाझम बरसात हुई
वहीं बाड़मेर जिले के चौहटन में भी हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होने के समाचार हैं
चित्तौडगढ में मानसून के दौरान हुई लगातार बारिश से फसलों के खराबे का सीधा असर देखने को मिल रहा है
शून्य
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद का मुकाबला करने में बहुपक्षीय सहयोग का आह्वान किया राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से जल शक्ति अभियान को सफल बनाने का किया आह्वान केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा प्याज की कीमतों में वृद्धि अस्थायी और इसपर जल्द काबू पा लिया जाएगा राज्य सरकार प्रदेश में पंजीकृत सभी केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों की करा रही है ऑडिट मौसमी बीमारियों को लेकर जिला कलेक्टर हर सप्ताह करेंगे समीक्षा चिकित्सा मंत्री ने दिए निर्देश प्रदेशभर में मानसून अपने अंतिम चरण में राज्य के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश शून्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद का मुकाबला करने में बहुपक्षीय सहयोग का आह्वान किया है संयुक्त राष्ट्र महासभा के चौहत्तरवें अधिवेशन से अलग आतंक तथा अतिवादी बयानों पर दुनिया के रूख पर विश्व नेताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचे से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए विदेश मंत्रालय में सचिव ए गीतेश सरमा ने न्यूयार्क में संवाददाताओं को बताया कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवादियों को धन और हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी ऐसे हमलों को आतंकी कार्रवाई माना जाना चाहिए आतंक सिर्फ आतंक है यह अच्छा या बुरा नहीं है शून्य संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में दुनिया की सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है भारत और स्वीडन के साथ अर्जेन्टीना फिनलैण्ड फ्रांस जर्मनी आयरलैण्ड लग्जमबर्ग हॉलैण्ड दक्षिण कोरिया तथा ब्रिटेन और कंपनियों के एक समूह ने उद्योगों में इस तरह के बदलाव लाने के लिए एक नये नेतृत्व समूह की घोषणा की है संवाददाता सम्मेलन में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पिछले दो दिनों में जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में बड़े फैसले हुए हैं जिसमें भारी उद्योगों के बिना किसी बाहरी मदद के कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में काम करने का फैसला भी शामिल है शून्य राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोगों से स्वच्छ भारत अभियान की तरह जल शक्ति अभियान को सफल बनाने को कहा है उन्होंने कहा कि देश ने स्वच्छता के लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया है और देश खुले में शौच से लगभग मुक्त होने वाला है नई दिल्ली में छठे भारत जल सप्ताह दो हज़ार उन्नीस के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि दो अक्टूबर को देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती स्वच्छ भारत अभियान के पूर्ण होने के दिन के रूप में मना रहा है उन्होंने बताया कि सरकार ने दो हज़ार चौबिस तक सभी ग्रामीण परिवारों को जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलजीवन अभियान की शुरूआत की है इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार जल जीवन अभियान के तहत सभी परिवारों को पानी की आपूर्ति के लिए पचास अरब डॉलर का निवेश कर रही है शून्य एक गृहमंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में निजी सुरक्षा एजेंसी लाइसेंसिंग पोर्टल की शुरूआत की इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पोर्टल तीन महीने के अंदर सभी आधिकारिक भाषाओं जैसे हिंदी गुजराती तेलुगु और तमिल में काम करने लगेगा गृहमंत्री ने कहा कि पोर्टल पर राज्यों में मौजूद लाइसेंस्ड एजेंसियों के नम्बर भी उपलब्ध होंगे ताकि निजी सुरक्षा एजेंसियों की धोखाधड़ी के शिकार न हों शून्य उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा है कि वह सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने के लिए दिशा निर्देश लाने में लगने वाले समय की जानकारी तीन सप्ताह के अंदर उसे दे न्यायालय ने कहा कि न तो उच्चतम न्यायालय और न ही उच्च न्यायालय इस मुद्दे पर दिशा निर्देश तय करने में सक्षम है और यह सरकार का काम है कि वह सोशल मीडिया के दुरूपयोग को रोकने के लिए उचित दिशा निर्देश लाए शून्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महीने की उनतीस तारीख को सुबह ग्यारह बजे आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में अपने विचार साझा करेंगे कार्यक्रम की यह सत्तावनवीं कड़ी होगी एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम के लिए लोगों से अपने विचार साझा करने की अपील की है उन्होंने माई जीओवी ओपन फोरम या नमो एप पर अपने विचार भेजने को कहा है टोल फ्री नम्बर अट्ठारह शून्य शून्य ग्यारह अठहत्तर शून्य शून्य पर भी हिन्दी और अंग्रेजी में संदेश रिकॉर्ड कराये जा सकते हैं ये फोन लाईन छब्बीस सितम्बर तक खुली रहेगी शून्य केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि प्याज की कीमतों में वृद्धि अस्थायी है और इस पर जल्दी ही काबू पा लिया जाएगा दोनों केन्द्रीय मंत्री आज नई दिल्ली में अलगअलग संवाददाता सम्मेलन में प्याज की कीमतों को लेकर बनी स्थिति पर चर्चा कर रहे थे एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री पासवान ने कहा कि इस बार आलू और टमाटर का मूल्य नियंत्रण में है लेकिन बाढ़ और बरसात के कारण प्याज का मूल्य बढा हुआ है उन्होंने कहा कि राज्यों को सस्ते मूल्य पर प्याज उपलब्ध करवाया जा रहा है शून्य केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों के माध्यम से ठगी के विभिन्न प्रकरण सामने आने के बाद राज्य सरकार प्रदेष में पंजीकृत सभी ग्यारह सौ उनसठ केडिट कॉपरेटिव सोसाइटियों की ऑडिट करवा रही है साथ ही सरकार द्वारा अब सेंट्रल रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत कॉपरेटिव सोसाइटियों पर भी षिकंजा कसा जा रहा है कॉपरेटिव रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने आकाशवाणी को बताया कि जिस तरह कुछ सोसाइटियों द्वारा लोगों के साथ ठगी की गई है ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए सभी कॉपरेटिव सोसाइटियों की जांच की जा रही है शून्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देष दिये हैं कि वे मौसमी बीमारी की स्थिति को लेकर हर सप्ताह समीक्षा करें आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों और चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ संवाद में चिकित्सा मंत्री ने यह निर्देष दिये उन्होंने सप्ताह में एक दिन घर में मच्छर पनपने वाली जगहों की सफाई करने के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने को भी कहा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उच्च षिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी तकनीकी षिक्षा मंत्री डॉ सुभाष गर्ग भी उपस्थित रहे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दो अक्टूबर को सभी जिलों में आठ से दस स्थानों पर विषाल रक्तदान षिविर आयोजित करने की तैयारियों को लेकर भी निर्देष दिये गये शून्य राज्य में जल्द ही एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली आईएचएमएस लागू की जायेगी इसकी शुरुआत अजमेर जिले के केकड़ी स्थित राजकीय जिला चिकित्सालय से की जायेगी इस नयी प्रणाली के तहत मरीज घर से ही सरकारी अस्पताल में पंजीयन करा सकेंगे इससे उन्हें लम्बी कतार में लगने से निजात मिलेगी वहीं मरीज की बीमारी का रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी शून्य केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा है प्राचीन धरोहर आयुष पद्धति को घरघर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत सभी जिलों में पचास बिस्तरों वाला अस्पताल खोले जाने की योजना है श्री नाइक ने आज नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि कम समय में मंत्रालय ने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं उन्होंने कहा कि अब तक अठासी आयुष अस्पताल खोले जाने के लिए बजट जारी किया गया है और वे तैयार होने के कगार पर है शून्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज जयपुर में मुख्यमंत्री निवास से निर्भया स्कवॉड में शामिल बीस मोटरसाइकिल सवार महिला पुलिसकर्मियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया इस स्कवॉड में शामिल नीली वर्दी पहने प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी जयपुर शहर के स्कूल कॉलेज तथा सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बालिकाओं विशेषकर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करेंगी इस अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सीएसआर के तहत इस तरह के प्रयास से प्रदेश में महिला सुरक्षा के प्रति एक अच्छा मैसेज जाएगा शून्य जिलों से प्राप्त अन्य समाचार बीकानेर में महाजन पुलिस थाना इलाके में एक बोलेरो और मोटर साइकिल की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक घायल हो गया चित्तौड़कोटा राजमार्ग पर आज सुबह एक हादसे में सड़क पर बैठी गायों को एक वाहन ने चपेट में ले लिया जिससे ग्यारह गायों की मौत हो गई बीकानेर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती और राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आज गर्ल्स कॉलेज की ओर से प्रभात फेरी निकाली गई श्रीगंगानगर जिले में मान्यताप्राप्त निजी विद्यालय संचालकों ने विभिन्न मांगों को लेकर आज जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के आगे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया पाली बार एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा न्यायिक कार्यों का बहिष्कार आज लगातार छब्बीसवें दिन भी जारी रहा पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन स्टेशन पर एक यात्री की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई राजस्थान निर्माण मजदूर यूनियन सीटू के आह्वान पर राज्य के निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक कल जयपुर में श्रम आयुक्त कार्यालय के समक्ष इक्कीस सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे शून्य चूरू में कल क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला वार्तालाप का आयोजन किया जा रहा है कार्यशाला में चूरू व जिले के अन्य कस्बों में कार्यरत अस्सी से अधिक मीडियाकर्मी भाग लेंगे शून्य दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में आज शाम भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए राजधानी जयपुर समेत राज्य के कई भागों में भूकंप के झटके आने की खबर है मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छः दशमलव तीन मापी गयी शून्य राज्य में मानसून अपने अंतिम चरण में है मौसम विभाग के अनुसार राज्य में पूरे सप्ताह बारिश का दौर जारी रहेगा लेकिन भारी बारिश की संभावना अब कम हो गयी है मौसम विभाग के निदेशक शिव गणेश ने आकाशवाणी को बताया कि अजमेर उदयपुर कोटा और भरतपुर संभाग में इस सप्ताह मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है पिछले चौबिस घंटों में प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई सिरोही जिले में माउंटआबू सहित अनेक स्थानों पर आज बारिश हुई बारिश के बाद माउंटआबू में झरने बहने लगे और नक्की झील पर एक बार फिर चादर चलने लगी है धौलपुर से हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि जिले में बीते दो दिनों से कभी तेज और कभी हल्की वर्षा का दौर जारी है इससे शहर की सड़कों और आसपास के इलाकों में पानी भर गया है राज्य के बांसवाड़ा में एक घंटे तक झमाझम बरसात हुई वहीं बाड़मेर जिले के चौहटन में भी हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होने के समाचार हैं चित्तौडगढ में मानसून के दौरान हुई लगातार बारिश से फसलों के खराबे का सीधा असर देखने को मिल रहा है शून्य
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दुनिया में बहुत सारे परिचित चीजें हैं जो हम पर ध्यान नहीं देते हैं। जीवन विविध और बहुमुखी है। लेकिन इसके पीछे की घमंड के पीछे हम "आखिरी वस्तुओं और अवधारणाओं को" चलाते हैं, जो इसके आधार बनते हैं।
उदाहरण के लिए, क्या आप जानते हैं कि कितने घंटे मेंवर्ष, मिनट, सेकंड? वैसे, प्राचीन रोम में इस प्रश्न पर केवल विशिष्ट रूप से उत्तरदायित्व का उत्तर दिया जा सकता था, जिनकी शक्तियों में समय सीमा की स्थापना भी शामिल थी। यही है, ग्रेट पोंटफ ने समय-समय पर मनमाने ढंग से बदलाव किया था। केवल सीज़र गाइल जूलियस ने हमारी समझ में एक प्रथागत कैलेंडर स्थापित किया, और फिर हर नागरिक एक सामान्य और विश्वसनीय तथ्य के रूप में वर्ष में घंटों की संख्या जान सकता है।
और वैज्ञानिक हमें क्या बताते हैं? सूर्य के चारों ओर का धरती 365 दिनों की मोड़ बनाता है लेकिन यह एक सटीक आंकड़ा नहीं है, लेकिन एक गोल एक वास्तव में, कारोबार 365.2564 दिनों से अधिक होता है अल्पविराम के बाद बाकी एकत्र किया जाता है, और 24 घंटों के बाद, जब यह एक दिन होना चाहिए, तब कैलेंडर में एक और अतिरिक्त दिन डालें। इस तरह के एक अतिरिक्त हर 4 साल होते हैं, जो एक लीप वर्ष के अस्तित्व को बताते हैं।
क्या आप जानते हैं कि एक साल में कितने घंटे सोते हैं? प्रश्न, वैसे, निष्क्रिय नहीं है, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है निश्चित रूप से कई लोगों ने सुना है कि नींद की प्रतिभा एक साधारण व्यक्ति की तुलना में बहुत कम समय दी जाती है। यह वास्तव में ऐसा है ऐसा नहीं है कि वे कम थक गए हैं। दुनिया में पर्याप्त लोग हैं जो केवल तीन से चार घंटे नींद की अवधि के साथ सहज महसूस करते हैं।
उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध करोड़पति डी। ट्रम्प रोज सोने के लिए 4 घंटे लेता है और नेपोलियन बोनापार्ट एक दिन में केवल चार घंटे सोते थे। उसी समय के बारे में न्यूटन, जो एक सपने पर "बचाना" पसंद करते थे, विश्वास करते थे कि यह समय की बर्बादी थी। लियोनार्डो दा विंची ने कुछ घंटों के बारे में, कम भी आराम किया। इसने कई सेलिब्रिटीओं को लंबे और पूरा जीवन जीने से नहीं रोका।
दस साल पहले, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने आयोजितप्रयोग है, जो इकतीस सौ साल से लोगों ने भाग लिया। स्वयंसेवक 1 लाख से अधिक थे। इस प्रयोग के अनुसार, जो लोग कई सामान्य 08:00 या अधिक, या लोग हैं, जो अधिक बार उन जिनकी नींद 6 या 7 घंटे / दिन औसत की तुलना में 4 घंटे और कम मरने के लिए सोया के लिए सोया।
यह पता चलता है कि हम कितने साल में सोते हैं,एक व्यक्ति की प्रतिभा या "मूर्खता" पर निर्भर नहीं करता है पूरी बात यह है कि कैसे हम सोते हैं, यह है कि, हमारी रात आराम के रूप में मानव नींद की उत्पादकता 2 महत्वपूर्ण बारीकियों पर निर्भर करती हैः
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दुनिया में बहुत सारे परिचित चीजें हैं जो हम पर ध्यान नहीं देते हैं। जीवन विविध और बहुमुखी है। लेकिन इसके पीछे की घमंड के पीछे हम "आखिरी वस्तुओं और अवधारणाओं को" चलाते हैं, जो इसके आधार बनते हैं। उदाहरण के लिए, क्या आप जानते हैं कि कितने घंटे मेंवर्ष, मिनट, सेकंड? वैसे, प्राचीन रोम में इस प्रश्न पर केवल विशिष्ट रूप से उत्तरदायित्व का उत्तर दिया जा सकता था, जिनकी शक्तियों में समय सीमा की स्थापना भी शामिल थी। यही है, ग्रेट पोंटफ ने समय-समय पर मनमाने ढंग से बदलाव किया था। केवल सीज़र गाइल जूलियस ने हमारी समझ में एक प्रथागत कैलेंडर स्थापित किया, और फिर हर नागरिक एक सामान्य और विश्वसनीय तथ्य के रूप में वर्ष में घंटों की संख्या जान सकता है। और वैज्ञानिक हमें क्या बताते हैं? सूर्य के चारों ओर का धरती तीन सौ पैंसठ दिनों की मोड़ बनाता है लेकिन यह एक सटीक आंकड़ा नहीं है, लेकिन एक गोल एक वास्तव में, कारोबार तीन सौ पैंसठ.दो हज़ार पाँच सौ चौंसठ दिनों से अधिक होता है अल्पविराम के बाद बाकी एकत्र किया जाता है, और चौबीस घंटाटों के बाद, जब यह एक दिन होना चाहिए, तब कैलेंडर में एक और अतिरिक्त दिन डालें। इस तरह के एक अतिरिक्त हर चार साल होते हैं, जो एक लीप वर्ष के अस्तित्व को बताते हैं। क्या आप जानते हैं कि एक साल में कितने घंटे सोते हैं? प्रश्न, वैसे, निष्क्रिय नहीं है, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है निश्चित रूप से कई लोगों ने सुना है कि नींद की प्रतिभा एक साधारण व्यक्ति की तुलना में बहुत कम समय दी जाती है। यह वास्तव में ऐसा है ऐसा नहीं है कि वे कम थक गए हैं। दुनिया में पर्याप्त लोग हैं जो केवल तीन से चार घंटे नींद की अवधि के साथ सहज महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध करोड़पति डी। ट्रम्प रोज सोने के लिए चार घंटाटे लेता है और नेपोलियन बोनापार्ट एक दिन में केवल चार घंटे सोते थे। उसी समय के बारे में न्यूटन, जो एक सपने पर "बचाना" पसंद करते थे, विश्वास करते थे कि यह समय की बर्बादी थी। लियोनार्डो दा विंची ने कुछ घंटों के बारे में, कम भी आराम किया। इसने कई सेलिब्रिटीओं को लंबे और पूरा जीवन जीने से नहीं रोका। दस साल पहले, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने आयोजितप्रयोग है, जो इकतीस सौ साल से लोगों ने भाग लिया। स्वयंसेवक एक लाख से अधिक थे। इस प्रयोग के अनुसार, जो लोग कई सामान्य आठ:शून्य या अधिक, या लोग हैं, जो अधिक बार उन जिनकी नींद छः या सात घंटाटे / दिन औसत की तुलना में चार घंटाटे और कम मरने के लिए सोया के लिए सोया। यह पता चलता है कि हम कितने साल में सोते हैं,एक व्यक्ति की प्रतिभा या "मूर्खता" पर निर्भर नहीं करता है पूरी बात यह है कि कैसे हम सोते हैं, यह है कि, हमारी रात आराम के रूप में मानव नींद की उत्पादकता दो महत्वपूर्ण बारीकियों पर निर्भर करती हैः
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ओडिशा के संबलपुर में हनुमान भक्तों पर एक मस्जिद के पास हमला हुआ था। एफआईआर से खुलासा हुआ है कि मुस्लिम भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाते हुए हिंदुओं पर हमला किया था।
एक शिष्य के पूछने पर कहा था कि उन्हें ठीक करने का संकल्प काम नहीं करेगा, क्योंकि उनका शरीर से अपनापन नहीं रह गया है, उन्होंने अपना सब कुछ अपने आराध्य को सौंप दिया है।
मध्य प्रदेश दमोह जिले के एक मंदिर में स्थापित बजरंग बली की प्रतिमा को अज्ञात हमलावरों द्वारा खंडित कर दिया गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की जाँच।
वीडियो में उसने रामभद्राचार्य को 'डर के साए में जीने वाला प्राणी' बताते हुए 'गुंडा' करार दिया और कहा कि मुलायम-कांशीराम के डर से 'जय श्री राम' नहीं बोल पा रहे थे।
पत्रकार अहमद खबीर ने झूठा दावा किया था कि तेलंगाना में हिंदुओं ने तीन मुस्लिमों को पीटा और शराब पीने के मजबूर किया। खुद को महिला बता कर और लड़कियों की तस्वीरें ट्वीट कर के बढ़ाए थे फॉलोवर्स।
दिल्ली में रामनवमी के मौके पर लगाए गए भगवा झंडों को पैरों से कुचलने का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में दिख रहे शख्स की पहचान अजीम के तौर पर हुई है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे करण कटारिया के खिलाफ राहुल गाँधी की एक प्रोेफेसर ने प्रोपेगेंडा फैलाया था।
रामनवमी पर देश के अलग-अलग राज्यों में कट्टरपंथियों द्वारा की गई साम्प्रदायिक हिंसा में अधिकतर घटनास्थल मस्जिदों के आस-पास रहे।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक प्राचीन मंदिर को नुकसान पहुँचाया गया है और उसमें मौजूद भगवान गणेश की मूर्ति को तोड़ दिया गया। आरोपितों का सुराग नहीं।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सिद्धांत तिवारी द्वारा हनुमान चालीसा बजाए जाने पर तौफीक ने उन्हें टुकड़ों में काटने की धमकी दी।
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ओडिशा के संबलपुर में हनुमान भक्तों पर एक मस्जिद के पास हमला हुआ था। एफआईआर से खुलासा हुआ है कि मुस्लिम भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाते हुए हिंदुओं पर हमला किया था। एक शिष्य के पूछने पर कहा था कि उन्हें ठीक करने का संकल्प काम नहीं करेगा, क्योंकि उनका शरीर से अपनापन नहीं रह गया है, उन्होंने अपना सब कुछ अपने आराध्य को सौंप दिया है। मध्य प्रदेश दमोह जिले के एक मंदिर में स्थापित बजरंग बली की प्रतिमा को अज्ञात हमलावरों द्वारा खंडित कर दिया गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की जाँच। वीडियो में उसने रामभद्राचार्य को 'डर के साए में जीने वाला प्राणी' बताते हुए 'गुंडा' करार दिया और कहा कि मुलायम-कांशीराम के डर से 'जय श्री राम' नहीं बोल पा रहे थे। पत्रकार अहमद खबीर ने झूठा दावा किया था कि तेलंगाना में हिंदुओं ने तीन मुस्लिमों को पीटा और शराब पीने के मजबूर किया। खुद को महिला बता कर और लड़कियों की तस्वीरें ट्वीट कर के बढ़ाए थे फॉलोवर्स। दिल्ली में रामनवमी के मौके पर लगाए गए भगवा झंडों को पैरों से कुचलने का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में दिख रहे शख्स की पहचान अजीम के तौर पर हुई है। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे करण कटारिया के खिलाफ राहुल गाँधी की एक प्रोेफेसर ने प्रोपेगेंडा फैलाया था। रामनवमी पर देश के अलग-अलग राज्यों में कट्टरपंथियों द्वारा की गई साम्प्रदायिक हिंसा में अधिकतर घटनास्थल मस्जिदों के आस-पास रहे। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक प्राचीन मंदिर को नुकसान पहुँचाया गया है और उसमें मौजूद भगवान गणेश की मूर्ति को तोड़ दिया गया। आरोपितों का सुराग नहीं। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सिद्धांत तिवारी द्वारा हनुमान चालीसा बजाए जाने पर तौफीक ने उन्हें टुकड़ों में काटने की धमकी दी।
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कोरोना कर्फ्यू के दौरान मंगलवार को मेन बाजार में किराना की दुकानों के अलावा मीट की दुकानें खोली गई लेकिन बंद पड़ी दुकानों के सामने भी सुबह दस बजे तक काफी भीड़भाड़ रही। इस दौरान एकाध बार पुलिसकमिर्यों ने बाजार में गश्त की तो दुकानों के सामने बैठे लोग थोड़े समय के लिए तितर-बितर जरूर हुए।
सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने कोरोना कर्फ्यू का समय बढ़ाकर 25 मई तक कर दिया है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान लक्सर में सुबह 10 बजे तक किराना और मीट की ही दुकानें खुली रही। इनके अलावा फड़ व ठेलियों पर फल, सब्जियों की भी बिक्री हुई। लेकिन मेन बाजार में बंद पड़ी ज्वैलरी, गारमेंट्स, जनरल स्टोर, कपड़ा, बर्तन, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, इलैक्ट्रोनिक्स और प्लास्टिक के सामान की दुकानों के सामने भी दुकानदार व अन्य लोग बैठे दिखाई दिए।
इस दौरान कस्बा चौकी व कोतवाली पुलिस के सिपाहियों ने गश्त की तो उन्हें देखकर बंद दुकानों के सामने लगी भीड़ थोड़ी देर के लिए इधर, उधर जरुर हुई। लेकिन पुलिसकमिर्यों के जाने के बाद ही लोग फिर बंद दुकानों के सामने जमे दिखे। जानकारों ने बताया कि दुकानदार अपनी बंद दुकानों के सामने बैठकर ग्राहकों को देखते हैं। अपने सामान का ग्राहक होने पर चुपचाप शटर खोलकर उसे भीतर दाखिल करके शटर गिरा दिया जाता है। सामान देने के बाद इसी तरह उसे बाहर निकाल दिया जाता है। कोतवाल प्रदीप चौहान ने बताया कि बंद दुकान के भीतर ग्राहक घुसाकर सामान बेचने पर कई दुकानदारों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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कोरोना कर्फ्यू के दौरान मंगलवार को मेन बाजार में किराना की दुकानों के अलावा मीट की दुकानें खोली गई लेकिन बंद पड़ी दुकानों के सामने भी सुबह दस बजे तक काफी भीड़भाड़ रही। इस दौरान एकाध बार पुलिसकमिर्यों ने बाजार में गश्त की तो दुकानों के सामने बैठे लोग थोड़े समय के लिए तितर-बितर जरूर हुए। सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने कोरोना कर्फ्यू का समय बढ़ाकर पच्चीस मई तक कर दिया है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान लक्सर में सुबह दस बजे तक किराना और मीट की ही दुकानें खुली रही। इनके अलावा फड़ व ठेलियों पर फल, सब्जियों की भी बिक्री हुई। लेकिन मेन बाजार में बंद पड़ी ज्वैलरी, गारमेंट्स, जनरल स्टोर, कपड़ा, बर्तन, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, इलैक्ट्रोनिक्स और प्लास्टिक के सामान की दुकानों के सामने भी दुकानदार व अन्य लोग बैठे दिखाई दिए। इस दौरान कस्बा चौकी व कोतवाली पुलिस के सिपाहियों ने गश्त की तो उन्हें देखकर बंद दुकानों के सामने लगी भीड़ थोड़ी देर के लिए इधर, उधर जरुर हुई। लेकिन पुलिसकमिर्यों के जाने के बाद ही लोग फिर बंद दुकानों के सामने जमे दिखे। जानकारों ने बताया कि दुकानदार अपनी बंद दुकानों के सामने बैठकर ग्राहकों को देखते हैं। अपने सामान का ग्राहक होने पर चुपचाप शटर खोलकर उसे भीतर दाखिल करके शटर गिरा दिया जाता है। सामान देने के बाद इसी तरह उसे बाहर निकाल दिया जाता है। कोतवाल प्रदीप चौहान ने बताया कि बंद दुकान के भीतर ग्राहक घुसाकर सामान बेचने पर कई दुकानदारों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा चरण मंगलवार से शुरू हो चुका है व इसी के साथ कांग्रेस पार्टी कल यूपी के बागपत जिले पहुंची है। इस यात्रा के दौरान यूपी के कई जिलों से लोग आए हुए थे और इस यात्रा का हिस्सा बने।
खबर लहरिया की टीम भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए लोगों से बातचीत की। बहुत से लोग कांग्रेस पार्टी के प्रेसीडेंट राहुल गांधी के समर्थन में वहाँ पर उपस्थित थे। उनका कहना था कि वर्तमान में उपस्थित पार्टी नें जो देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल कर रखा। बेरोज़गारी के चलते नौजवान सड़कों पर स्टॉल लगाने को मजबूर हो चुके हैं। देश की इस दुर्दशा को आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी ही ठीक कर पायेगी।
लोगों की कांग्रेस पार्टी से काफी उम्मीदें हैं और वह चाहते हैं कि अगले चुनाव में देश के प्रधानमंत्री राहुल गाँधी ही बने।
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भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा चरण मंगलवार से शुरू हो चुका है व इसी के साथ कांग्रेस पार्टी कल यूपी के बागपत जिले पहुंची है। इस यात्रा के दौरान यूपी के कई जिलों से लोग आए हुए थे और इस यात्रा का हिस्सा बने। खबर लहरिया की टीम भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए लोगों से बातचीत की। बहुत से लोग कांग्रेस पार्टी के प्रेसीडेंट राहुल गांधी के समर्थन में वहाँ पर उपस्थित थे। उनका कहना था कि वर्तमान में उपस्थित पार्टी नें जो देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल कर रखा। बेरोज़गारी के चलते नौजवान सड़कों पर स्टॉल लगाने को मजबूर हो चुके हैं। देश की इस दुर्दशा को आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी ही ठीक कर पायेगी। लोगों की कांग्रेस पार्टी से काफी उम्मीदें हैं और वह चाहते हैं कि अगले चुनाव में देश के प्रधानमंत्री राहुल गाँधी ही बने।
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बटाला में हमलावरों द्वारा शिव सेना (समाजवादी) नेता और उनके दो रिश्तेदारों को उनके शोरूम में गोली मारने के एक दिन बाद, अज्ञात व्यक्तियों ने आज सुबह लगभग 4. 30 बजे धरमपुरा कॉलोनी के पास पंजाब बजरंग दल (हिंदुस्तान) के प्रमुख गगन प्लाजा की दुकान पर दो गोलियां चलाईं। .
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे घटना को "बहुत गंभीरता से" ले रहे हैं और कहा कि बदमाशों का जल्द से जल्द पता लगाया जाएगा। "हम सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं। इस स्तर पर, हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते। मामले की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं, "पुलिस अधिकारी ने कहा।
विडंबना यह है कि पिछले 24 घंटों में किसी हिंदू नेता के खिलाफ गोलीबारी की यह दूसरी घटना थी। सूत्रों ने कहा कि जिस तेजी से इन नेताओं को निशाना बनाया जा रहा था, उससे पुलिस घबरा गई थी।
हनी महाजन, प्रमुख, शिव सेना (युवा विंग, उधव बालासाहेब ठाकरे) और रमेश नैय्यर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिव सेना (ठाकरे) ने गुरदासपुर एसएसपी सतिंदर सिंह से मिलने के लिए नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। निवर्तमान एसएसपी अश्विनी गोत्याल, जो छुट्टी पर थे, भी बैठक के अंत में कार्यवाही में शामिल हुए।
"हमने एसएसपी को बताया कि मुट्ठी भर लोगों द्वारा पंजाब की शांति और सद्भाव को परेशान किया जा रहा है। हम ऐसा नहीं होने देंगे. 26 जून को बटाला बंद का आह्वान पांच दिन के लिए टाल दिया गया है। अगर पुलिस पांच दिनों के भीतर कल की गोलीबारी की घटना को सुलझाने में विफल रहती है तो हम अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे, "महाजन ने कहा।
एसएसपी सतिंदर ने कहा, "हां, वे बंद स्थगित करने पर सहमत हो गए हैं। हम कल की गोलीबारी से जुड़े मामले को सुलझाने के काफी करीब हैं. हमने सेना नेताओं को आश्वासन दिया है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
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बटाला में हमलावरों द्वारा शिव सेना नेता और उनके दो रिश्तेदारों को उनके शोरूम में गोली मारने के एक दिन बाद, अज्ञात व्यक्तियों ने आज सुबह लगभग चार. तीस बजे धरमपुरा कॉलोनी के पास पंजाब बजरंग दल के प्रमुख गगन प्लाजा की दुकान पर दो गोलियां चलाईं। . एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वे घटना को "बहुत गंभीरता से" ले रहे हैं और कहा कि बदमाशों का जल्द से जल्द पता लगाया जाएगा। "हम सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं। इस स्तर पर, हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते। मामले की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं, "पुलिस अधिकारी ने कहा। विडंबना यह है कि पिछले चौबीस घंटाटों में किसी हिंदू नेता के खिलाफ गोलीबारी की यह दूसरी घटना थी। सूत्रों ने कहा कि जिस तेजी से इन नेताओं को निशाना बनाया जा रहा था, उससे पुलिस घबरा गई थी। हनी महाजन, प्रमुख, शिव सेना और रमेश नैय्यर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिव सेना ने गुरदासपुर एसएसपी सतिंदर सिंह से मिलने के लिए नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। निवर्तमान एसएसपी अश्विनी गोत्याल, जो छुट्टी पर थे, भी बैठक के अंत में कार्यवाही में शामिल हुए। "हमने एसएसपी को बताया कि मुट्ठी भर लोगों द्वारा पंजाब की शांति और सद्भाव को परेशान किया जा रहा है। हम ऐसा नहीं होने देंगे. छब्बीस जून को बटाला बंद का आह्वान पांच दिन के लिए टाल दिया गया है। अगर पुलिस पांच दिनों के भीतर कल की गोलीबारी की घटना को सुलझाने में विफल रहती है तो हम अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे, "महाजन ने कहा। एसएसपी सतिंदर ने कहा, "हां, वे बंद स्थगित करने पर सहमत हो गए हैं। हम कल की गोलीबारी से जुड़े मामले को सुलझाने के काफी करीब हैं. हमने सेना नेताओं को आश्वासन दिया है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
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उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर और खतौली, ओडिशा की पदमपुर, राजस्थान की सरदारशहर, बिहार की कुरहानी और छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है।
गुजरात में विधानसभा चुनाव (Assembly elections in gujarat) के दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान हो रहा है। वहीं इसी बीच आज उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट और पांच राज्यों की 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (Bypolls Election) के लिए मतदान जारी है। मैनपुरी में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला है। यह सीट सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई थी।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर और खतौली, ओडिशा की पदमपुर, राजस्थान की सरदारशहर, बिहार की कुरहानी और छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर सीट शामिल हैं। यहां पर भी उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। उपचुनाव को लेकर चुनाव अधिकारियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के साथ ही एक लोकसभा और 6 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना 8 दिसंबर को होगी।
उत्तर प्रदेश में रामपुर सदर और खतौली विधानसभा सीटों और मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। बसपा और कांग्रेस इन सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उपचुनावों में 24. 43 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसमें 13. 14 लाख पुरुष मतदाता, 11. 29 लाख महिला मतदाता और 132 ट्रांसजेंडर श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। मैनपुरी संसदीय सीट पर उपचुनाव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण हो रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि मुलायम सिंह यादव की बड़ी बहू डिंपल यादव मैनपुरी में सपा की उम्मीदवार हैं, जबकि भाजपा ने मुलायम के भाई शिवपाल सिंह यादव के पूर्व विश्वासपात्र रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है।
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उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर और खतौली, ओडिशा की पदमपुर, राजस्थान की सरदारशहर, बिहार की कुरहानी और छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। गुजरात में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान हो रहा है। वहीं इसी बीच आज उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट और पांच राज्यों की छः विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। मैनपुरी में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला है। यह सीट सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर और खतौली, ओडिशा की पदमपुर, राजस्थान की सरदारशहर, बिहार की कुरहानी और छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर सीट शामिल हैं। यहां पर भी उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। उपचुनाव को लेकर चुनाव अधिकारियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के साथ ही एक लोकसभा और छः विधानसभा सीटों के लिए मतगणना आठ दिसंबर को होगी। उत्तर प्रदेश में रामपुर सदर और खतौली विधानसभा सीटों और मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। बसपा और कांग्रेस इन सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि उपचुनावों में चौबीस. तैंतालीस लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसमें तेरह. चौदह लाख पुरुष मतदाता, ग्यारह. उनतीस लाख महिला मतदाता और एक सौ बत्तीस ट्रांसजेंडर श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। मैनपुरी संसदीय सीट पर उपचुनाव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण हो रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि मुलायम सिंह यादव की बड़ी बहू डिंपल यादव मैनपुरी में सपा की उम्मीदवार हैं, जबकि भाजपा ने मुलायम के भाई शिवपाल सिंह यादव के पूर्व विश्वासपात्र रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है।
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अन्नदाता कार्यक्रम में जानें केले की फसल में होने वाले सम-सामयिक कार्यों पर जानकारी, जिसे बता रहे हैं डॉ आर के बिसन. साथ ही किसान यह भी ध्यान रखें कि इसकी फसल में खरपतवार का नियंत्रण करना काफी जरूरी हो जाता है. फलों के अंतर्गत किसान केले की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं, इस समय केले के पौधे बढ़वार की अवस्था में हैं तो किसानों के लिए जरूरी है कि वह इसकी फसल में आवश्यक कार्य करना जरूरी होता है. गर्मी के मौसम में केले की फसल में उचित पानी की व्यव्सथा करनी जरूरी होती है.
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अन्नदाता कार्यक्रम में जानें केले की फसल में होने वाले सम-सामयिक कार्यों पर जानकारी, जिसे बता रहे हैं डॉ आर के बिसन. साथ ही किसान यह भी ध्यान रखें कि इसकी फसल में खरपतवार का नियंत्रण करना काफी जरूरी हो जाता है. फलों के अंतर्गत किसान केले की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं, इस समय केले के पौधे बढ़वार की अवस्था में हैं तो किसानों के लिए जरूरी है कि वह इसकी फसल में आवश्यक कार्य करना जरूरी होता है. गर्मी के मौसम में केले की फसल में उचित पानी की व्यव्सथा करनी जरूरी होती है.
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वैज्ञानिकों ने कन्फर्म किया है कि दुनिया के सबसे बड़े समुद्री शिकारियों में से एक Orcas यानी किलर व्हेल्स, व्हाइट शार्क के लिए काल साबित हो रहे हैं. उन्हें व्हाइट शार्क को घेरकर हमला करते हुए देखा गया है.
शार्क की लगभग 400 प्रजातियां हैं, जिनमें ग्रेट व्हाइट शार्क काफी पॉपुलर है. इनकी लोकप्रियता की वजह हॉलीवुड की वो डरावनी फिल्में हैं, जिनमें इस मछली को 'समुद्री राक्षस' के रूप में दिखाया गया है. वैसे, आपको बता दें कि व्हाइट शार्क को समुद्र में सबसे बड़ी शिकारी प्रजाति माना जाता है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने अब उस 'महाशिकारी' को ढूंढ निकाला है, जो व्हाइट शार्क का शिकार करते हैं. वैज्ञानिकों ने कन्फर्म किया है कि दुनिया के सबसे बड़े समुद्री शिकारियों में से एक Orcas यानी किलर व्हेल्स, व्हाइट शार्क के लिए काल साबित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में उन्हें व्हाइट शार्क को घेरकर हमला करते हुए देखा गया है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है.
वायरल हो रहा ये वीडियो दक्षिणी पश्चिमी केप प्रांत के एक बंदरगाह शहर मोसेल बे का बताया जा रहा है, जहां व्हाइट शार्क्स की मौजूदगी में अचानक कमी देखने को मिल रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि शार्क की इस प्रजाति के अचानक से गायब होने के पीछे इंसानी गतिविधि या क्लाइमेट चेंज नहीं है, बल्कि किलर व्हेल्स हैं. वैज्ञानिकों ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन फुटेज जारी किए हैं, जिसमें किलर व्हेल्स व्हाइट शार्क का पीछा कर उस पर हमला करते हुए नजर आती हैं. वायरल क्लिप में आप देख सकते हैं कि किलर व्हेल्स कैसे एक व्हाइट शार्क को घेरकर अपना शिकार बनाती है. इसके बाद एक किलर व्हेल उसे अपने नूकीले और मजबूत जबड़े में दबोच कर उसे गहराइयों में लेकर चली जाती है.
ओर्कास यानी किलर व्हेल्स को शार्क की अन्य प्रजातियों का शिकार करने के लिए तो जाना जाता है, लेकिन ग्रेट व्हाइट शार्क पर हमले का ये सबूत पहली बार सामने आया है. किलर व्हेल्स आमतौर पर टाइगर शार्क, सील और दूसरी व्हेल मछलियों को ही अपना निवाला बनाती रही हैं. लेकिन व्हाइट शार्क, जिसे समुद्र का सबसे खतरनाक शिकारी माना जाता है उस पर किलर व्हेल के हमले का वीडियो देखने के बाद वैज्ञानिक भी दंग रह गए हैं.
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वैज्ञानिकों ने कन्फर्म किया है कि दुनिया के सबसे बड़े समुद्री शिकारियों में से एक Orcas यानी किलर व्हेल्स, व्हाइट शार्क के लिए काल साबित हो रहे हैं. उन्हें व्हाइट शार्क को घेरकर हमला करते हुए देखा गया है. शार्क की लगभग चार सौ प्रजातियां हैं, जिनमें ग्रेट व्हाइट शार्क काफी पॉपुलर है. इनकी लोकप्रियता की वजह हॉलीवुड की वो डरावनी फिल्में हैं, जिनमें इस मछली को 'समुद्री राक्षस' के रूप में दिखाया गया है. वैसे, आपको बता दें कि व्हाइट शार्क को समुद्र में सबसे बड़ी शिकारी प्रजाति माना जाता है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने अब उस 'महाशिकारी' को ढूंढ निकाला है, जो व्हाइट शार्क का शिकार करते हैं. वैज्ञानिकों ने कन्फर्म किया है कि दुनिया के सबसे बड़े समुद्री शिकारियों में से एक Orcas यानी किलर व्हेल्स, व्हाइट शार्क के लिए काल साबित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में उन्हें व्हाइट शार्क को घेरकर हमला करते हुए देखा गया है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है. वायरल हो रहा ये वीडियो दक्षिणी पश्चिमी केप प्रांत के एक बंदरगाह शहर मोसेल बे का बताया जा रहा है, जहां व्हाइट शार्क्स की मौजूदगी में अचानक कमी देखने को मिल रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि शार्क की इस प्रजाति के अचानक से गायब होने के पीछे इंसानी गतिविधि या क्लाइमेट चेंज नहीं है, बल्कि किलर व्हेल्स हैं. वैज्ञानिकों ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन फुटेज जारी किए हैं, जिसमें किलर व्हेल्स व्हाइट शार्क का पीछा कर उस पर हमला करते हुए नजर आती हैं. वायरल क्लिप में आप देख सकते हैं कि किलर व्हेल्स कैसे एक व्हाइट शार्क को घेरकर अपना शिकार बनाती है. इसके बाद एक किलर व्हेल उसे अपने नूकीले और मजबूत जबड़े में दबोच कर उसे गहराइयों में लेकर चली जाती है. ओर्कास यानी किलर व्हेल्स को शार्क की अन्य प्रजातियों का शिकार करने के लिए तो जाना जाता है, लेकिन ग्रेट व्हाइट शार्क पर हमले का ये सबूत पहली बार सामने आया है. किलर व्हेल्स आमतौर पर टाइगर शार्क, सील और दूसरी व्हेल मछलियों को ही अपना निवाला बनाती रही हैं. लेकिन व्हाइट शार्क, जिसे समुद्र का सबसे खतरनाक शिकारी माना जाता है उस पर किलर व्हेल के हमले का वीडियो देखने के बाद वैज्ञानिक भी दंग रह गए हैं.
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केंद्रीय रेल तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, श्री पीयूष गोयल ने आज रेलवे के कोयला कारोबार के समेकन को सुनिश्चित करने के लिए कोयला तथा विद्युतक्षेत्र के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक बैठक की और कोयले की ढुलाई से संबंधित रेलवे, कोयला एवं विद्युतक्षेत्र की संयुक्त परिचालन उत्पादकता में सुधार करने के तरीके एवं उपाय सुझाए।
यह गौरतलब है कि रेल की कुल ढुलाई का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कोयले का होता है। पिछले साल 1210 मीट्रिक टन की कुल माल ढुलाई में से 587 मिलियन टन कोयले की लोडिंग हुई थी।
इस अवसर पर बोलते हुए, श्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे माल ढुलाई को बढ़ावा देने के दिशा में अथक प्रयास कर रहा है और किसी भी मोर्चे पर किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं है। मंत्री ने रेलवे, कोयला और विद्युत संस्थाओं के बीच समन्वित संचालन का आह्वान कियाताकि रेलवे, विद्युत एवं कोयला, तीनों क्षेत्रों की अधिकतम पारस्परिक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
यहां यह गौर करने लायक है कि एक उल्लेखनीय बदलाव के तौर पर सितंबर 2020 में भारतीय रेल ने माल ढुलाई से 9896.86 करोड़ रुपये अर्जित किये, जोकि पिछले साल की इसी अवधि में प्राप्त आय (8716.29 करोड़ रुपये) की तुलना में 1180.57 करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रकार, माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व में 13.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोयले की लोडिंग को और बढ़ाने की काफी संभावना है। कोयला की लोडिंग में वृद्धि का रेलवे के माल ढुलाई राजस्व पर एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
रेलवे अब संचयी आधार पर और साथ ही साथ कोविड से जुड़ी चुनौतियों तथा लंबे समय तक लॉकडाउन के बावजूद पिछले वर्ष के आंकड़ों से आगे निकलने के लिए पूरी तरह से कमर कसने जा रहा है।
सितंबर 2020 में माल ढुलाई की लोडिंग पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 15.3 प्रतिशत अधिक है।
आंचलिक स्तर पर 25 से अधिक व्यवसाय विकास इकाइयों के गठनकी नीतिगत पहल, पार्सल तथा किसान, दोनों तरह की विशेष गाड़ियां चलाने और बेहतर सर्वांगीण निगरानी जैसे विभिन्न प्रयासों से विकास सुनिश्चित हो रहा है।
रेल माल ढुलाई परिचालन को बेहद आकर्षक बनाने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई रियायतें / छूट भी दी जा रही है। इसकी कुल माल ढुलाई में कोयले का हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत है।
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केंद्रीय रेल तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, श्री पीयूष गोयल ने आज रेलवे के कोयला कारोबार के समेकन को सुनिश्चित करने के लिए कोयला तथा विद्युतक्षेत्र के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक बैठक की और कोयले की ढुलाई से संबंधित रेलवे, कोयला एवं विद्युतक्षेत्र की संयुक्त परिचालन उत्पादकता में सुधार करने के तरीके एवं उपाय सुझाए। यह गौरतलब है कि रेल की कुल ढुलाई का लगभग पचास प्रतिशत हिस्सा कोयले का होता है। पिछले साल एक हज़ार दो सौ दस मीट्रिक टन की कुल माल ढुलाई में से पाँच सौ सत्तासी मिलियन टन कोयले की लोडिंग हुई थी। इस अवसर पर बोलते हुए, श्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे माल ढुलाई को बढ़ावा देने के दिशा में अथक प्रयास कर रहा है और किसी भी मोर्चे पर किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं है। मंत्री ने रेलवे, कोयला और विद्युत संस्थाओं के बीच समन्वित संचालन का आह्वान कियाताकि रेलवे, विद्युत एवं कोयला, तीनों क्षेत्रों की अधिकतम पारस्परिक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। यहां यह गौर करने लायक है कि एक उल्लेखनीय बदलाव के तौर पर सितंबर दो हज़ार बीस में भारतीय रेल ने माल ढुलाई से नौ हज़ार आठ सौ छियानवे.छियासी करोड़ रुपये अर्जित किये, जोकि पिछले साल की इसी अवधि में प्राप्त आय की तुलना में एक हज़ार एक सौ अस्सी.सत्तावन करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रकार, माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व में तेरह.चौवन प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोयले की लोडिंग को और बढ़ाने की काफी संभावना है। कोयला की लोडिंग में वृद्धि का रेलवे के माल ढुलाई राजस्व पर एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रेलवे अब संचयी आधार पर और साथ ही साथ कोविड से जुड़ी चुनौतियों तथा लंबे समय तक लॉकडाउन के बावजूद पिछले वर्ष के आंकड़ों से आगे निकलने के लिए पूरी तरह से कमर कसने जा रहा है। सितंबर दो हज़ार बीस में माल ढुलाई की लोडिंग पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में पंद्रह.तीन प्रतिशत अधिक है। आंचलिक स्तर पर पच्चीस से अधिक व्यवसाय विकास इकाइयों के गठनकी नीतिगत पहल, पार्सल तथा किसान, दोनों तरह की विशेष गाड़ियां चलाने और बेहतर सर्वांगीण निगरानी जैसे विभिन्न प्रयासों से विकास सुनिश्चित हो रहा है। रेल माल ढुलाई परिचालन को बेहद आकर्षक बनाने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई रियायतें / छूट भी दी जा रही है। इसकी कुल माल ढुलाई में कोयले का हिस्सा लगभग पचास प्रतिशत है।
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अगरतला : अलग राज्य की मांग दिवस को लेकर इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्वीपुरा की ओर से आदिवासी क्षेत्र स्वायत्तशासी जिला परिषद के मुख्यालय खुमुल्वंग में आयोजित समारोह को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आईपीएफटी इस मौके पर पहले अगरतला में कार्यक्रम करना चाहती थी लेकिन अधिकारियों ने गत वर्ष रैली के दौरान शहर में हुई हिंसा के अनुभव को देखते हुए इसे शहर में कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं दी। हालांकि आईपीएफटी को खुमुल्वंग में कुछ शर्तों के साथ शांति से दिवस के आयोजन की मंजूरी दे दी गई।
पुलिस ने कहा, "समारोह को हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए उचित सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा आईपीएफटी के प्रभाव वाले और हिंसा की संभावनाओं वाले इलाके में राज्य पुलिस और सशस्त्र बल के साथ बड़ी संख्या में अद्र्धसैनिक बल के जवानों तथा सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है। इस बीच आईपीएफटी ने कहा कि वे कभी भी किसी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं रहे।
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अगरतला : अलग राज्य की मांग दिवस को लेकर इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्वीपुरा की ओर से आदिवासी क्षेत्र स्वायत्तशासी जिला परिषद के मुख्यालय खुमुल्वंग में आयोजित समारोह को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आईपीएफटी इस मौके पर पहले अगरतला में कार्यक्रम करना चाहती थी लेकिन अधिकारियों ने गत वर्ष रैली के दौरान शहर में हुई हिंसा के अनुभव को देखते हुए इसे शहर में कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं दी। हालांकि आईपीएफटी को खुमुल्वंग में कुछ शर्तों के साथ शांति से दिवस के आयोजन की मंजूरी दे दी गई। पुलिस ने कहा, "समारोह को हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए उचित सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा आईपीएफटी के प्रभाव वाले और हिंसा की संभावनाओं वाले इलाके में राज्य पुलिस और सशस्त्र बल के साथ बड़ी संख्या में अद्र्धसैनिक बल के जवानों तथा सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है। इस बीच आईपीएफटी ने कहा कि वे कभी भी किसी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं रहे।
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गोरखपुर(रुद्र प्रताप सिंह): नेपाल से निकली देवशिला रथ यात्रा (Devshila Rath Yatra) मंगलवार की रात गोरखपुर (Gorakhpur) में पहुंची। शहर में निर्धारित 2 जगह स्वागत के बाद यात्रा का गोरखनाथ मंदिर में पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple) के मुख्य पुजारी कमलनाथ और पंडित अरविंद चतुर्वेदी के साथ साधु-संतों ने देवशिला का पूजन किया।
नेपाल के जनकपुर से निकलकर मधुबनी, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, कुशीनगर के रास्ते होते हुए देवशिला यात्रा ने रात 11 बजे गोरखपुर की सीमा में प्रवेश किया। जहां जगह-जगह लोगों के द्वारा देवशिला का भव्य स्वागत किया गया, जिस वजह से यात्रा में देरी हुई। गोरखपुर में यह यात्रा शाम 4:00 बजे तक पहुंचने वाली थी। शहर में कई जगह शालिग्राम के स्वागत के लिए तैयारियां की गई थी, लेकिन रात्रि के कारण कई स्वागत के कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए। शहर में केवल 2 जगह ही स्वागत हुआ।
सबसे पहले मोहद्दीपुर हाइडिल के पास, उसके बाद विश्वविद्यालय छात्रावास के समीप स्वागत किया गया। स्वागत स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों इकट्ठा हुए। बड़े हुजूम के कारण जाम जैसी स्थिति बनी रही। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ स्थानीय और दूरदराज से लोग देवशिला के दर्शन के लिए पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं में राजनाथ को लेकर चरम पर उत्साह देखा गया। जगह-जगह शालिग्राम पत्थर को छूने के लिए लोग लालायित दिखे।
शहर में प्रवेश के बाद स्वागत स्थल पर जय श्री राम के नारों से पूरा माहौल भक्ति से सराबोर हो गया। देवशिला का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया, मोहद्दीपुर होते हुए देव शीला गोरखनाथ मंदिर पहुंची। जहां गोरखनाथ मंदिर में प्रवेश करने पर भूतनाथ मंदिर के पुजारियों और पदाधिकारियों ने पूरे गर्मजोशी के साथ स्वागत अभिनंदन किया। देवशिला का पूजा अर्चना कर आरती उतारी गई, इस दौरान पूरे मंदिर में पुरोहितों के मंत्र उच्चारण गूंज रहे थे। इसके बाद देवशिला को गोरखनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम करवाया गया। इसके साथ ही जो लोग साथ आए थे उन्हें हिंदू सेवाश्रम में ठहराया गया। मिली जानकारी के अनुसार, देवशिला रात्रि विश्राम के बाद बुधवार की सुबह पूजा-अर्चना के बाद अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगी। रथ यात्रा में नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि भी मौजूद है, जिन्होंने महानगर के निजी होटल रात्रि विश्राम पर किया।
बता दें कि काली गंडकी नदी ही एकमात्र ऐसी नदी है, जहां शालिग्राम पत्थर मिलते हैं। यह नदी दामोदर कुंड से निकलकर गंगा नदी में मिलती है। नदी के किनारे से लिया गया यह शिलाखंड एक 26 टन का और दूसरा 14 टन का है। शिलाखंड को निकालने से पहले काली गंडकी नदी में क्षमा पूजा की गई और विशेष पूजा के साथ इसे लाया जा रहा है। इस शिला का 26 जनवरी के दिन गलेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया। 6 करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम पत्थर की दो देवशिलाओं से अयोध्या के श्री राम मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप की मूर्ति और माता सीता की मूर्ति बनाई जाएगी।
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गोरखपुर: नेपाल से निकली देवशिला रथ यात्रा मंगलवार की रात गोरखपुर में पहुंची। शहर में निर्धारित दो जगह स्वागत के बाद यात्रा का गोरखनाथ मंदिर में पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ और पंडित अरविंद चतुर्वेदी के साथ साधु-संतों ने देवशिला का पूजन किया। नेपाल के जनकपुर से निकलकर मधुबनी, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, कुशीनगर के रास्ते होते हुए देवशिला यात्रा ने रात ग्यारह बजे गोरखपुर की सीमा में प्रवेश किया। जहां जगह-जगह लोगों के द्वारा देवशिला का भव्य स्वागत किया गया, जिस वजह से यात्रा में देरी हुई। गोरखपुर में यह यात्रा शाम चार:शून्य बजे तक पहुंचने वाली थी। शहर में कई जगह शालिग्राम के स्वागत के लिए तैयारियां की गई थी, लेकिन रात्रि के कारण कई स्वागत के कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए। शहर में केवल दो जगह ही स्वागत हुआ। सबसे पहले मोहद्दीपुर हाइडिल के पास, उसके बाद विश्वविद्यालय छात्रावास के समीप स्वागत किया गया। स्वागत स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों इकट्ठा हुए। बड़े हुजूम के कारण जाम जैसी स्थिति बनी रही। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ स्थानीय और दूरदराज से लोग देवशिला के दर्शन के लिए पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं में राजनाथ को लेकर चरम पर उत्साह देखा गया। जगह-जगह शालिग्राम पत्थर को छूने के लिए लोग लालायित दिखे। शहर में प्रवेश के बाद स्वागत स्थल पर जय श्री राम के नारों से पूरा माहौल भक्ति से सराबोर हो गया। देवशिला का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया, मोहद्दीपुर होते हुए देव शीला गोरखनाथ मंदिर पहुंची। जहां गोरखनाथ मंदिर में प्रवेश करने पर भूतनाथ मंदिर के पुजारियों और पदाधिकारियों ने पूरे गर्मजोशी के साथ स्वागत अभिनंदन किया। देवशिला का पूजा अर्चना कर आरती उतारी गई, इस दौरान पूरे मंदिर में पुरोहितों के मंत्र उच्चारण गूंज रहे थे। इसके बाद देवशिला को गोरखनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम करवाया गया। इसके साथ ही जो लोग साथ आए थे उन्हें हिंदू सेवाश्रम में ठहराया गया। मिली जानकारी के अनुसार, देवशिला रात्रि विश्राम के बाद बुधवार की सुबह पूजा-अर्चना के बाद अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगी। रथ यात्रा में नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि भी मौजूद है, जिन्होंने महानगर के निजी होटल रात्रि विश्राम पर किया। बता दें कि काली गंडकी नदी ही एकमात्र ऐसी नदी है, जहां शालिग्राम पत्थर मिलते हैं। यह नदी दामोदर कुंड से निकलकर गंगा नदी में मिलती है। नदी के किनारे से लिया गया यह शिलाखंड एक छब्बीस टन का और दूसरा चौदह टन का है। शिलाखंड को निकालने से पहले काली गंडकी नदी में क्षमा पूजा की गई और विशेष पूजा के साथ इसे लाया जा रहा है। इस शिला का छब्बीस जनवरी के दिन गलेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया। छः करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम पत्थर की दो देवशिलाओं से अयोध्या के श्री राम मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप की मूर्ति और माता सीता की मूर्ति बनाई जाएगी।
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(ललित के झा)
वाशिंगटन, 16 अप्रैल भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने अनिवासी भारतीय (ओसीआई) कार्ड की वैधता को बनाये रखने की प्रक्रिया को सरल करने के भारत सरकार के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे विदेशों में रहने वाले अधिक से अधिक भारतीय इस तरह की प्रक्रिया को चुन सकेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार ओसीआई कार्डधारकों को अपने कार्ड को कई बार जारी कराते रहने के मौजूदा नियम के बजाय अब 20 साल उम्र होने पर ही दस्तावेज को पुनः जारी कराना होगा।
विदेशों में रहने वाले भारतीयों में बेहद लोकप्रिय ओसीआई कार्ड उन्हें लंबे समय तक वीजामुक्त यात्रा और भारत में रहने की सुविधा प्रदान करता है। इससे कार्डधारकों को कई सुविधाएं मिलती हैं जो आम तौर पर किसी विदेशी नागरिक को नहीं मिलती हैं।
भारत ने अब तक करीब 37. 72 लाख ओसीआई कार्ड जारी किये हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, "ओसीआई कार्डधारकों की सुविधा को देखते हुए भारत सरकार ने यह फैसला किया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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वाशिंगटन, सोलह अप्रैल भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने अनिवासी भारतीय कार्ड की वैधता को बनाये रखने की प्रक्रिया को सरल करने के भारत सरकार के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे विदेशों में रहने वाले अधिक से अधिक भारतीय इस तरह की प्रक्रिया को चुन सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार ओसीआई कार्डधारकों को अपने कार्ड को कई बार जारी कराते रहने के मौजूदा नियम के बजाय अब बीस साल उम्र होने पर ही दस्तावेज को पुनः जारी कराना होगा। विदेशों में रहने वाले भारतीयों में बेहद लोकप्रिय ओसीआई कार्ड उन्हें लंबे समय तक वीजामुक्त यात्रा और भारत में रहने की सुविधा प्रदान करता है। इससे कार्डधारकों को कई सुविधाएं मिलती हैं जो आम तौर पर किसी विदेशी नागरिक को नहीं मिलती हैं। भारत ने अब तक करीब सैंतीस. बहत्तर लाख ओसीआई कार्ड जारी किये हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, "ओसीआई कार्डधारकों की सुविधा को देखते हुए भारत सरकार ने यह फैसला किया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने अपने पिता उद्धव ठाकरे के साथ चलते हुए तस्वीर शेयर की. साथ ही तस्वीर के कैप्शन में लिखा, 'हमेशा सही कदमों का पर चलना बेहद जरूरी है.' इस पोस्ट के जरिए उन्होंने शिवसेना और पूरे राज्य की जनता को खास संदेश देने की कोशिश की. इसके अलावा आदित्य ठाकरे ने अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनका प्यार और आशीर्वाद ही सेना की असली ताकत है.इससे पहले फादर्स डे पर किया था पोस्टबता दें कि कि इससे पहले आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के सियासी घमासान से पहले इंस्टाग्राम पर आखिरी पोस्ट फादर्स डे पर किया था. इस पोस्ट में उन्होंने अपने बचपन की तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो अपने पिता उद्धव ठाकरे की गोद में बैठे दिख रहे थे. इस तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'मेरी निरंतर प्रेरणा और शक्ति को हैप्पी फादर्स डे!'आज चुना जाएगा स्पीकरगौरतलब है कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के बाद आज (रविवार को) विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा. विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए महा विकास अघाड़ी ने भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर के खिलाफ शिवसेना विधायक राजन साल्वी को मैदान में उतारा है. इसके साथ ही बागी विधायक भी मुंबई पहुंच चुके हैं. आज से विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो रहा है. विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कल एकनाथ शिंदे सरकार को फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा.
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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में उन्होंने अपने पिता उद्धव ठाकरे के साथ चलते हुए तस्वीर शेयर की. साथ ही तस्वीर के कैप्शन में लिखा, 'हमेशा सही कदमों का पर चलना बेहद जरूरी है.' इस पोस्ट के जरिए उन्होंने शिवसेना और पूरे राज्य की जनता को खास संदेश देने की कोशिश की. इसके अलावा आदित्य ठाकरे ने अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनका प्यार और आशीर्वाद ही सेना की असली ताकत है.इससे पहले फादर्स डे पर किया था पोस्टबता दें कि कि इससे पहले आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के सियासी घमासान से पहले इंस्टाग्राम पर आखिरी पोस्ट फादर्स डे पर किया था. इस पोस्ट में उन्होंने अपने बचपन की तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो अपने पिता उद्धव ठाकरे की गोद में बैठे दिख रहे थे. इस तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'मेरी निरंतर प्रेरणा और शक्ति को हैप्पी फादर्स डे!'आज चुना जाएगा स्पीकरगौरतलब है कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के बाद आज विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा. विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए महा विकास अघाड़ी ने भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर के खिलाफ शिवसेना विधायक राजन साल्वी को मैदान में उतारा है. इसके साथ ही बागी विधायक भी मुंबई पहुंच चुके हैं. आज से विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो रहा है. विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कल एकनाथ शिंदे सरकार को फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा.
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हिमाचल प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनावों में बीजेपी के 'राज नहीं, रिवाज बदलो' के नारे से असहमति जताते हुए एक बार फिर 'रिवाज' को कायम रखते हुए कांग्रेस पार्टी को मौका दिया है. हालांकि, कांग्रेस पार्टी भले ही यह चुनाव जीत गई है, लेकिन अभी तक यह निर्णय नहीं कर पाई है कि सीएम किसे बनाया जाए. सूत्रों के मुताबिक, आज शाम 4 बजे होने वाली विधायक दल की बैठक के बाद सूबे के नए मुख्यमंत्री के नाम का घोषणा हो सकता है.
बता दें कि कांग्रेस पार्टी के जीते हुए विधायकों का एक धड़ा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू तो दूसरा धड़ा वर्तमान हिमाचल प्रमुख प्रतिभा सिंह को सूबे का अगला मुख्यमंत्री बनते देखना चाहता है. सीएम की कुर्सी को लेकर दोनों धड़ों में लड़ाई जारी है, और शुक्रवार को इस बात की भी बानगी मिल गई थी कि यह लड़ाई किस स्तर तक जा सकती है. हालांकि सूत्रों ने बताया है कि आज देर शाम तक हिमाचल के नए मुख्यमंत्री के नाम का घोषणा हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की रेस में अभी सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री का नाम सबसे आगे है.
हिमाचल की राजनीति में शुक्रवार की सुबह से लेकर रात तक जो भी हुआ, उससे साफ हो गया था कि कांग्रेस के सारे विधायक एक पेज पर नहीं हैं. शुक्रवार को विधायक दल की बैठक के बाद भी प्रतिभा सिंह के विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री फेस के प्रश्न पर गोल-मोल उत्तर ही दिए. दोनों धड़ों की तरफ से लगातार यही उत्तर आ रहा है कि उन्होंने अपनी बात रख दी है और राज्य के मुख्यमंत्री के बारे में निर्णय अब आलाकमान को लेना है. अनेक उठापटक के बाद अब आज शाम तक सीएम फेस का नाम सामने आने की बात कही जा रही है.
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हिमाचल प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनावों में बीजेपी के 'राज नहीं, रिवाज बदलो' के नारे से असहमति जताते हुए एक बार फिर 'रिवाज' को कायम रखते हुए कांग्रेस पार्टी को मौका दिया है. हालांकि, कांग्रेस पार्टी भले ही यह चुनाव जीत गई है, लेकिन अभी तक यह निर्णय नहीं कर पाई है कि सीएम किसे बनाया जाए. सूत्रों के मुताबिक, आज शाम चार बजे होने वाली विधायक दल की बैठक के बाद सूबे के नए मुख्यमंत्री के नाम का घोषणा हो सकता है. बता दें कि कांग्रेस पार्टी के जीते हुए विधायकों का एक धड़ा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू तो दूसरा धड़ा वर्तमान हिमाचल प्रमुख प्रतिभा सिंह को सूबे का अगला मुख्यमंत्री बनते देखना चाहता है. सीएम की कुर्सी को लेकर दोनों धड़ों में लड़ाई जारी है, और शुक्रवार को इस बात की भी बानगी मिल गई थी कि यह लड़ाई किस स्तर तक जा सकती है. हालांकि सूत्रों ने बताया है कि आज देर शाम तक हिमाचल के नए मुख्यमंत्री के नाम का घोषणा हो सकता है. मुख्यमंत्री पद की रेस में अभी सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री का नाम सबसे आगे है. हिमाचल की राजनीति में शुक्रवार की सुबह से लेकर रात तक जो भी हुआ, उससे साफ हो गया था कि कांग्रेस के सारे विधायक एक पेज पर नहीं हैं. शुक्रवार को विधायक दल की बैठक के बाद भी प्रतिभा सिंह के विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री फेस के प्रश्न पर गोल-मोल उत्तर ही दिए. दोनों धड़ों की तरफ से लगातार यही उत्तर आ रहा है कि उन्होंने अपनी बात रख दी है और राज्य के मुख्यमंत्री के बारे में निर्णय अब आलाकमान को लेना है. अनेक उठापटक के बाद अब आज शाम तक सीएम फेस का नाम सामने आने की बात कही जा रही है.
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हजारों वर्षों से पश्चिमी विज्ञान सृष्टि के विकास की कहानी को ठीक तरह से समझनेसमझाने का प्रयास कर रहे हैं । फिर भी यह कहानी अभी तक अधूरी है। अभी तक जितना पता चला है उससे यह अनुमान लगाया जाता है कि इस सृष्टिमण्डल में कम से कम ३,००,००,००,००,००० तीन अरव सूर्य हैं जिनके चारों ओर असंख्य तारे परिक्रमा कर रहे हैं । हिन्दू शास्त्र के अनुसार हर ग्रह पर देवताओं का वास तथा उनका राज्य है । आज का विज्ञान कहता है कि बहुत सम्भव है कि अनेक ग्रहों पर सजीव प्राणीहर भूमण्डल से अधिक उन्नत सभ्यता भी हो । शुरू में केवल रजकण थे, गैस थी, अंधकार था । करोड़ों वर्ष पूर्व ये कण तथा परमाणु तारिकाओं से प्राप्त क्षीण प्रकाश के दवाव से एकत्रित होने लगे । वे शून्य ब्रह्माण्ड में भयंकर गति से परिक्रमा करते-करते, गुरुत्वाकर्पण के कारण कुछ स्थिरता प्राप्त करने लगे । भयंकर वेग से परिक्रमा करने के कारण, भयंकर संघर्पण से भयंकर ज्वाला उत्पन्न हुई । उसका एक बहुत ही तीव्र ज्वाला का पिण्ड वनने लगा । इस प्रकार हमारे सूर्य का निर्माण प्रारम्भ हुआ । इस वृहत् कण-पिण्ड के और भी टुकड़े होते गये । इन्हीं वड़े-बड़े टुकड़ों ने ग्रहों का रूप धारण किया । हर एक ग्रह अपने आकर्षक से अनगिनत उपग्रहों को खींचता रहा पर सबसे बड़े अग्निपिड - सूर्य के आकर्षण में सभी ग्रह उपग्रह रहे । इस प्रकार सूर्यमण्डल का जन्म ठोस रूप धारण करता रहा । ठण्ढा भी पड़ता रहा । हमारी पृथ्वी भी धीरे-धीरे शान्त हो चली, पर इसकी तह पर विशाल ज्वालामुखियों का ढेरथा । उनसे विशाल वाष्प-पुंज निकल रहे थे । भाप ने भयंकर वर्पा तथा जल का रूप धारण किया । लाखों वर्षों तक वृष्टि होती रही । रासायनिक पदार्थ तथा नमक वह वह कर जलागार समुद्र में जाने लगा । बड़ी-बड़ी नदियाँ तथा समुद्र बन गये । इस प्रकार भूगर्भ के निर्माण में कम से कम एक अरव वर्ष समाप्त हो गये । अव गरम तथा खनिज और रासायनिक पदार्थ से संयुक्त जल के पेट में, यानी समुद्र के गर्भ में सजीव प्राणी का प्रादुर्भाव हुआ । प्रकाश तथा जल के संयोग से जीवन का स्रोत वना । जव अंधकार था, शून्य था, तव परब्रह्म का आदि रूप था । प्रकाश ही परम शिव है । जल ही परम
वाला तथा विस्तार करनेवाला है। यहाँ पर हम यदि यह कहें तो क्या अनुचित होगा कि परमात्मा के प्रतीक विष्णु है और इस सृष्टि का विकास जिस प्रकार हुआ है, हर एक अवतार उस विकास का प्रतीक है । हमारा तात्पर्य दशावतार से है । प्रारम्भिक अवतार वेचल सृष्टि के विकास के प्रतीक है और बोधक है । बाद वे मानव शरीरधारी अवतार महापुरुषा की ईश्वरी शक्ति के प्रतीक है। यह बात सिद्ध करने के लिए थोडा विषयातर तो होगा, पर हम आधुनिक विज्ञान के द्वारा निर्धारित सृष्टि का विकास समझ लें ।
मूल पर जीवित रहनेवाले वाराह ( सूअर) का आविर्भाव हुआ। फिर सिंह आदि का । फिर धपशु आधा मनुष्य -- नृसिंह और तव मनुष्य ने जन्म लिया जो पहले वामन के रूप में, बौना रहा होगा । बौने के बाद पूर्ण मनुष्य हुआ । ग्रहों पर क्या है, उपग्रहो की क्या सत्ता है, इन सबकी वात तो छोड़ दीजिए । केवल इतना ही जान लेना पर्याप्त है कि सृष्टि के विकास की वैज्ञानिक खोज के साथ हमारे अवतारों की कथा तथा तांत्रिक यंत्रों का मेल कितने सुन्दर रूप में होता है । इसलिए यदि अवतार को सृष्टि के विकास का प्रतीक मान ले, यदि विष्णु के मुख्य तथा गौण रूप को सृष्टि के इतिहास तथा सभ्यता का द्योतक, संकेत, प्रतीक मानले तो पौराणिक इतिहास में सन्निहित गूढ़ तत्त्व समझ में जाता है। किन्तु यह बात तब तक स्पष्ट न होगी जब तक हम देवताओं की मूर्ति का थोड़ा परिचय न प्राप्त कर ले ।
मूर्तिकला तथा प्रतीक
शव-चत्र-गदा-पपधारी विष्णु की मूर्ति की वस्पना पहले पहल पुराणो द्वारा हुई, यह सा निविवाद प्रतीत होता है, पर उगयी रचना वय हुई, पथ से शुरू हुई, यह कहना बठिन है। महँजादाड़ा तथा हडप्पा की खुदाई से यह तय हा गया है वि ५००० वर्ष पहले देवी देवतामा मूर्तियाँ प्रचलित थी। यह भी मान लें कि उमसे दो हजार वर्ष पहले से मूर्ति का प्रचलन रहा होगा। पर, पुराणा से इस विषय में निश्चित जानकारी नहीं हो सकती । वेद में शिय-लिंग तथा शकर के रूप मा विचित् वर्णन ता है, पर उससे मूर्तिकला सम्बन्धी काम नहीं चलता । महाभारत में मूर्ति का वर्णन मिलता है। पर एक ही व्यास ने समूचा महाभारत लिखा तथा सभी पुराण बनाये, यह सन्देहजन है । देवीभागवत के अनुसार २८ व्यास हुए हूँ । फिर तो समयनिर्धारण वडा कठिन है। प्राचीन ग्रन्यो में बेवल हमशीपंसहिता तया वैवानसहिता में मूर्ति का बुछ वर्णन मिलता है, पर उनका समयनिर्धारण कटिन है। एक लेखक के अनुसार ईमा के ६०० से ८०० वर्ष बाद यानी शताब्दी में कम-से-कम १४-१५ सहिताएँ लिखी गयी थी। इसलिए इनमें प्राप्त वर्णन उतना पुराना नहीं हो सकता, जितनी पुरानी मूत्तियाँ मिलती है, पर एक विद्वान् लेखक के अनुसार वैष्णव आगम में सबसे पुराना प्रथ वैधानस सहिता है । इसमें विष्णु की ३६ मूर्तियों का वर्णन है । साधव को जैसी इच्छा हो, जैसी कामना हो, उस प्रकार की मूर्ति की उपासना करे । याग, भोग, वीर अभिचारिका - भिन्न प्रकार के भगवान् के रूप है। इसी लेखक व अनुसार शवागम का सबसे प्राचीन ग्रन्थ वामिकागम तथा कारणागम है जो नवीं शताब्दी के बाद के हैं। डॉ० जितेन्द्रनाथ बनर्जी के कथनानुसार शाक्त तत्रो में वर्णित मूत्तियाँ
F O Schroedar-Introduction to Pancaratra AhirbudhnyaSamhita," page 19
TAG Rao - Elements of Hindu Iconography - Vol I
३ वही, खण्ड १, भाग १, पृष्ठ ७८-८०
४ वही, पृष्ठ ५६ ५७
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हजारों वर्षों से पश्चिमी विज्ञान सृष्टि के विकास की कहानी को ठीक तरह से समझनेसमझाने का प्रयास कर रहे हैं । फिर भी यह कहानी अभी तक अधूरी है। अभी तक जितना पता चला है उससे यह अनुमान लगाया जाता है कि इस सृष्टिमण्डल में कम से कम तीन,शून्य,शून्य,शून्य,शून्य,शून्य तीन अरव सूर्य हैं जिनके चारों ओर असंख्य तारे परिक्रमा कर रहे हैं । हिन्दू शास्त्र के अनुसार हर ग्रह पर देवताओं का वास तथा उनका राज्य है । आज का विज्ञान कहता है कि बहुत सम्भव है कि अनेक ग्रहों पर सजीव प्राणीहर भूमण्डल से अधिक उन्नत सभ्यता भी हो । शुरू में केवल रजकण थे, गैस थी, अंधकार था । करोड़ों वर्ष पूर्व ये कण तथा परमाणु तारिकाओं से प्राप्त क्षीण प्रकाश के दवाव से एकत्रित होने लगे । वे शून्य ब्रह्माण्ड में भयंकर गति से परिक्रमा करते-करते, गुरुत्वाकर्पण के कारण कुछ स्थिरता प्राप्त करने लगे । भयंकर वेग से परिक्रमा करने के कारण, भयंकर संघर्पण से भयंकर ज्वाला उत्पन्न हुई । उसका एक बहुत ही तीव्र ज्वाला का पिण्ड वनने लगा । इस प्रकार हमारे सूर्य का निर्माण प्रारम्भ हुआ । इस वृहत् कण-पिण्ड के और भी टुकड़े होते गये । इन्हीं वड़े-बड़े टुकड़ों ने ग्रहों का रूप धारण किया । हर एक ग्रह अपने आकर्षक से अनगिनत उपग्रहों को खींचता रहा पर सबसे बड़े अग्निपिड - सूर्य के आकर्षण में सभी ग्रह उपग्रह रहे । इस प्रकार सूर्यमण्डल का जन्म ठोस रूप धारण करता रहा । ठण्ढा भी पड़ता रहा । हमारी पृथ्वी भी धीरे-धीरे शान्त हो चली, पर इसकी तह पर विशाल ज्वालामुखियों का ढेरथा । उनसे विशाल वाष्प-पुंज निकल रहे थे । भाप ने भयंकर वर्पा तथा जल का रूप धारण किया । लाखों वर्षों तक वृष्टि होती रही । रासायनिक पदार्थ तथा नमक वह वह कर जलागार समुद्र में जाने लगा । बड़ी-बड़ी नदियाँ तथा समुद्र बन गये । इस प्रकार भूगर्भ के निर्माण में कम से कम एक अरव वर्ष समाप्त हो गये । अव गरम तथा खनिज और रासायनिक पदार्थ से संयुक्त जल के पेट में, यानी समुद्र के गर्भ में सजीव प्राणी का प्रादुर्भाव हुआ । प्रकाश तथा जल के संयोग से जीवन का स्रोत वना । जव अंधकार था, शून्य था, तव परब्रह्म का आदि रूप था । प्रकाश ही परम शिव है । जल ही परम वाला तथा विस्तार करनेवाला है। यहाँ पर हम यदि यह कहें तो क्या अनुचित होगा कि परमात्मा के प्रतीक विष्णु है और इस सृष्टि का विकास जिस प्रकार हुआ है, हर एक अवतार उस विकास का प्रतीक है । हमारा तात्पर्य दशावतार से है । प्रारम्भिक अवतार वेचल सृष्टि के विकास के प्रतीक है और बोधक है । बाद वे मानव शरीरधारी अवतार महापुरुषा की ईश्वरी शक्ति के प्रतीक है। यह बात सिद्ध करने के लिए थोडा विषयातर तो होगा, पर हम आधुनिक विज्ञान के द्वारा निर्धारित सृष्टि का विकास समझ लें । मूल पर जीवित रहनेवाले वाराह का आविर्भाव हुआ। फिर सिंह आदि का । फिर धपशु आधा मनुष्य -- नृसिंह और तव मनुष्य ने जन्म लिया जो पहले वामन के रूप में, बौना रहा होगा । बौने के बाद पूर्ण मनुष्य हुआ । ग्रहों पर क्या है, उपग्रहो की क्या सत्ता है, इन सबकी वात तो छोड़ दीजिए । केवल इतना ही जान लेना पर्याप्त है कि सृष्टि के विकास की वैज्ञानिक खोज के साथ हमारे अवतारों की कथा तथा तांत्रिक यंत्रों का मेल कितने सुन्दर रूप में होता है । इसलिए यदि अवतार को सृष्टि के विकास का प्रतीक मान ले, यदि विष्णु के मुख्य तथा गौण रूप को सृष्टि के इतिहास तथा सभ्यता का द्योतक, संकेत, प्रतीक मानले तो पौराणिक इतिहास में सन्निहित गूढ़ तत्त्व समझ में जाता है। किन्तु यह बात तब तक स्पष्ट न होगी जब तक हम देवताओं की मूर्ति का थोड़ा परिचय न प्राप्त कर ले । मूर्तिकला तथा प्रतीक शव-चत्र-गदा-पपधारी विष्णु की मूर्ति की वस्पना पहले पहल पुराणो द्वारा हुई, यह सा निविवाद प्रतीत होता है, पर उगयी रचना वय हुई, पथ से शुरू हुई, यह कहना बठिन है। महँजादाड़ा तथा हडप्पा की खुदाई से यह तय हा गया है वि पाँच हज़ार वर्ष पहले देवी देवतामा मूर्तियाँ प्रचलित थी। यह भी मान लें कि उमसे दो हजार वर्ष पहले से मूर्ति का प्रचलन रहा होगा। पर, पुराणा से इस विषय में निश्चित जानकारी नहीं हो सकती । वेद में शिय-लिंग तथा शकर के रूप मा विचित् वर्णन ता है, पर उससे मूर्तिकला सम्बन्धी काम नहीं चलता । महाभारत में मूर्ति का वर्णन मिलता है। पर एक ही व्यास ने समूचा महाभारत लिखा तथा सभी पुराण बनाये, यह सन्देहजन है । देवीभागवत के अनुसार अट्ठाईस व्यास हुए हूँ । फिर तो समयनिर्धारण वडा कठिन है। प्राचीन ग्रन्यो में बेवल हमशीपंसहिता तया वैवानसहिता में मूर्ति का बुछ वर्णन मिलता है, पर उनका समयनिर्धारण कटिन है। एक लेखक के अनुसार ईमा के छः सौ से आठ सौ वर्ष बाद यानी शताब्दी में कम-से-कम चौदह-पंद्रह सहिताएँ लिखी गयी थी। इसलिए इनमें प्राप्त वर्णन उतना पुराना नहीं हो सकता, जितनी पुरानी मूत्तियाँ मिलती है, पर एक विद्वान् लेखक के अनुसार वैष्णव आगम में सबसे पुराना प्रथ वैधानस सहिता है । इसमें विष्णु की छत्तीस मूर्तियों का वर्णन है । साधव को जैसी इच्छा हो, जैसी कामना हो, उस प्रकार की मूर्ति की उपासना करे । याग, भोग, वीर अभिचारिका - भिन्न प्रकार के भगवान् के रूप है। इसी लेखक व अनुसार शवागम का सबसे प्राचीन ग्रन्थ वामिकागम तथा कारणागम है जो नवीं शताब्दी के बाद के हैं। डॉशून्य जितेन्द्रनाथ बनर्जी के कथनानुसार शाक्त तत्रो में वर्णित मूत्तियाँ F O Schroedar-Introduction to Pancaratra AhirbudhnyaSamhita," page उन्नीस TAG Rao - Elements of Hindu Iconography - Vol I तीन वही, खण्ड एक, भाग एक, पृष्ठ अठहत्तर-अस्सी चार वही, पृष्ठ छप्पन सत्तावन
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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प्रथम महायुद्ध के बाद
में सवार कराकर मैं छपरे की गाड़ी से छपरे चला गया। वह दूसरे दिन सबेरे जब पटने पहुँचे तो उनकी हालत पहले की तरह बिलकुल एक पागल जैसी हो गयी थी। स्टेशन के कर्मचारियों ने उन्हें पहचाना । ऐसी अवस्था में उनको अकेला देखकर कुछ मित्रों को खबर दी। मित्रों को खबर दी। वे लोग आये और उनको किसी तरह घर ले गये । दूसरे दिन जब में पटने वापस आया तो मैंने उनको उसी बुरी दशा में पाया । मुझे बहुत अफसोस हुआ कि मैंने बड़ी गलती की थी। उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने बड़ी हँसी उड़ायी। कहा कि आप अपने को बड़ा होशियार समझते हैं, मुझे पहरे में रखने के लिए - जगन्नाथजी के साथ षड्यंत्र करके - मेरे साथ आये थे; कैसा चकमा देकर बेवकूफ बनाया ! इतना कहकर हँसने लगे। फिर वही बेतुकी बकझक आरम्भ कर दी।
पटने में भी हम लोग बराबर देख-रेख करते रहे; पर वह कभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए। कभी-कभी अच्छे हो जाते, यहाँ तक कि वह हाइकोर्ट भी जाने लगते । 'पटना-लॉ-वीकली', जिसको मैं और वह साथ मिलकर निकाला करते थे, निकालने भी लगते । पर बीमारी ज्यों की त्यों बनी रहती। कुछ दिनों के बाद उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु का सदमा मेरे दिल पर बहुत पड़ा। पर वह जिस अवस्था में थे उसमें रहने से कहीं अच्छा देहान्त हो जाना था। उनके लिए यह मृत्यु एक प्रकार की मुक्ति ही थी। उनका जितना मेरे साथ प्रेम था और जितना उपकार उन्होंने मेरे साथ किया था, वह जब स्मरण आता है तो आज भी दुःख होता है; और इस बात का पश्चात्ताप होता रहता है कि उनके लिए अथवा उनके कुटुम्ब के लिए मैं कुछ भी न कर सका । २४ - प्रथम महायुद्ध के बाद
सन् १९९८ के नवम्बर में योरप का महायुद्ध समाप्त हो गया। १९१७ से ही भारतवर्ष में राजनीतिक जागृ ति की लहर उठने लगी थी। चम्पारन में गांधीजी के पवारने और रैयतों की सेवा करने का असर चारों ओर पड़ रहा था - यद्यपि समाचार-पत्रों में बहुत कम खबरें छपने के लिए दी जाती थीं और कहीं भी सभाओं में व्याख्यान देने की हम लोगों को मनाही थी । श्रीमती एनी बेसेण्ट ने 'होमरूल लीग' कायम करके सारे देश में १९९७ में ही बड़ी हलचल मचा दी थी। प्रायः सभी प्रान्तों में उसकी शाखाएँ कायम हो गयी थीं। लोग खूब जोरों से प्रचार के काम में लग गये थे । सरकार इससे कुछ घबरा सी गयी। उसने श्रीमती एनी बेसेण्ट को, उनके दो साथियों के साथ, नजरबन्द कर दिया था। इस पर आन्दोलन ने और जोर पकड़ा। ब्रिटिश सरकार अपनी दुधारी नीति को १९१७ में भी चला रही थी। एक ओर उसने इस तरह आन्दोलन की मुख्य अधिष्ठात्री को नजरबन्द किया, दूसरी ओर पारलेमेण्ट में नये नियुक्त भारत मंत्री श्री मांटेगू ने एक एलान किया, जिसमें वादा किया गया कि भारत को आहिस्ता-आहिस्ता करके शासन का अधिकार दिया जायगा; पर कब और कितना अधिकार भारतीयों के हाथ में आवेगा, इसका निर्णय पारलेमेण्ट
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प्रथम महायुद्ध के बाद में सवार कराकर मैं छपरे की गाड़ी से छपरे चला गया। वह दूसरे दिन सबेरे जब पटने पहुँचे तो उनकी हालत पहले की तरह बिलकुल एक पागल जैसी हो गयी थी। स्टेशन के कर्मचारियों ने उन्हें पहचाना । ऐसी अवस्था में उनको अकेला देखकर कुछ मित्रों को खबर दी। मित्रों को खबर दी। वे लोग आये और उनको किसी तरह घर ले गये । दूसरे दिन जब में पटने वापस आया तो मैंने उनको उसी बुरी दशा में पाया । मुझे बहुत अफसोस हुआ कि मैंने बड़ी गलती की थी। उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने बड़ी हँसी उड़ायी। कहा कि आप अपने को बड़ा होशियार समझते हैं, मुझे पहरे में रखने के लिए - जगन्नाथजी के साथ षड्यंत्र करके - मेरे साथ आये थे; कैसा चकमा देकर बेवकूफ बनाया ! इतना कहकर हँसने लगे। फिर वही बेतुकी बकझक आरम्भ कर दी। पटने में भी हम लोग बराबर देख-रेख करते रहे; पर वह कभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए। कभी-कभी अच्छे हो जाते, यहाँ तक कि वह हाइकोर्ट भी जाने लगते । 'पटना-लॉ-वीकली', जिसको मैं और वह साथ मिलकर निकाला करते थे, निकालने भी लगते । पर बीमारी ज्यों की त्यों बनी रहती। कुछ दिनों के बाद उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु का सदमा मेरे दिल पर बहुत पड़ा। पर वह जिस अवस्था में थे उसमें रहने से कहीं अच्छा देहान्त हो जाना था। उनके लिए यह मृत्यु एक प्रकार की मुक्ति ही थी। उनका जितना मेरे साथ प्रेम था और जितना उपकार उन्होंने मेरे साथ किया था, वह जब स्मरण आता है तो आज भी दुःख होता है; और इस बात का पश्चात्ताप होता रहता है कि उनके लिए अथवा उनके कुटुम्ब के लिए मैं कुछ भी न कर सका । चौबीस - प्रथम महायुद्ध के बाद सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के नवम्बर में योरप का महायुद्ध समाप्त हो गया। एक हज़ार नौ सौ सत्रह से ही भारतवर्ष में राजनीतिक जागृ ति की लहर उठने लगी थी। चम्पारन में गांधीजी के पवारने और रैयतों की सेवा करने का असर चारों ओर पड़ रहा था - यद्यपि समाचार-पत्रों में बहुत कम खबरें छपने के लिए दी जाती थीं और कहीं भी सभाओं में व्याख्यान देने की हम लोगों को मनाही थी । श्रीमती एनी बेसेण्ट ने 'होमरूल लीग' कायम करके सारे देश में एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में ही बड़ी हलचल मचा दी थी। प्रायः सभी प्रान्तों में उसकी शाखाएँ कायम हो गयी थीं। लोग खूब जोरों से प्रचार के काम में लग गये थे । सरकार इससे कुछ घबरा सी गयी। उसने श्रीमती एनी बेसेण्ट को, उनके दो साथियों के साथ, नजरबन्द कर दिया था। इस पर आन्दोलन ने और जोर पकड़ा। ब्रिटिश सरकार अपनी दुधारी नीति को एक हज़ार नौ सौ सत्रह में भी चला रही थी। एक ओर उसने इस तरह आन्दोलन की मुख्य अधिष्ठात्री को नजरबन्द किया, दूसरी ओर पारलेमेण्ट में नये नियुक्त भारत मंत्री श्री मांटेगू ने एक एलान किया, जिसमें वादा किया गया कि भारत को आहिस्ता-आहिस्ता करके शासन का अधिकार दिया जायगा; पर कब और कितना अधिकार भारतीयों के हाथ में आवेगा, इसका निर्णय पारलेमेण्ट
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नई-दिल्लीः स्मिता पाटिल ने अपने फिल्मी करियर में वो सब कुछ किया जो हर किसी को नसीब नहीं होता। एक्सपेरिमेंटल और आर्ट फिल्मों के दौर से लेकर कमर्शियल फिल्मों तक स्मिता पाटिल ने हर फिल्म में काम किया।
स्मिता पाटिल का नाम मिर्च मासाला, भूमिका, आक्रोश, अर्थ बाजार आदि फिल्मों से जुड़ा हुआ है। कई सारे नेशनल अवार्ड और ढेर सारे एक्सपीरियंस के साथ स्मिता ने कमर्शियल और मेन स्ट्रीम सिनेमा की ओर रुख किया। उन्हें पहला मौका मिला अमिताभ के साथ प्रकाश मेहरा की फिल्म नमक हलाल में ।
बाकी सब कुछ तो ठीक था लेकिन कमर्शियल फिल्मों का ताम-झाम और ठाटबाट देख कर स्मिता सहम गयी। ऐसे में पहला सीन था अमिताभ के साथ वो भी थोड़ा अलग-सा। अमिताभ ने स्मिता की झिझक को दूर किया, लेकिन जब स्मिता ने अमिताभ के साथ बारिश में भीगते हुए 'आज रपट जाये तो' गाना किया तो वो इस गाने को बर्दाश्त नहीं कर पायी। ये गाना करने के बाद स्मिता को लगा उन्होंने ये क्या कर दिया , स्मिता को दर्शकों के सामने अपना ये अवतार पेश करने में बेहद शर्म आयी।
इसी कश्मकश में स्मिता रातभर रोती रही। दूसरे दिन शूटिंग पर अमिताभ ने जब स्मिता की हालत देखी तो वो समझ गये कि क्या हुआ है। अमिताभ ने स्मिता को इस गाने और इसमें भीगे बदन डांस की जरुरत को समझाया ।
हालांकि तब तक स्मिता पाटिल ये तय कर चुकी थी कि इसके बाद वो कभी कमर्शियल सिनेमा में काम नहीं करेगी। लेकिन अमिताभ के समझाने पर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। और संयोग ऐसा बना कि स्मिता पाटिल की दूसरी फिल्म भी अमिताभ बच्चन के साथ ही बनी।
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नई-दिल्लीः स्मिता पाटिल ने अपने फिल्मी करियर में वो सब कुछ किया जो हर किसी को नसीब नहीं होता। एक्सपेरिमेंटल और आर्ट फिल्मों के दौर से लेकर कमर्शियल फिल्मों तक स्मिता पाटिल ने हर फिल्म में काम किया। स्मिता पाटिल का नाम मिर्च मासाला, भूमिका, आक्रोश, अर्थ बाजार आदि फिल्मों से जुड़ा हुआ है। कई सारे नेशनल अवार्ड और ढेर सारे एक्सपीरियंस के साथ स्मिता ने कमर्शियल और मेन स्ट्रीम सिनेमा की ओर रुख किया। उन्हें पहला मौका मिला अमिताभ के साथ प्रकाश मेहरा की फिल्म नमक हलाल में । बाकी सब कुछ तो ठीक था लेकिन कमर्शियल फिल्मों का ताम-झाम और ठाटबाट देख कर स्मिता सहम गयी। ऐसे में पहला सीन था अमिताभ के साथ वो भी थोड़ा अलग-सा। अमिताभ ने स्मिता की झिझक को दूर किया, लेकिन जब स्मिता ने अमिताभ के साथ बारिश में भीगते हुए 'आज रपट जाये तो' गाना किया तो वो इस गाने को बर्दाश्त नहीं कर पायी। ये गाना करने के बाद स्मिता को लगा उन्होंने ये क्या कर दिया , स्मिता को दर्शकों के सामने अपना ये अवतार पेश करने में बेहद शर्म आयी। इसी कश्मकश में स्मिता रातभर रोती रही। दूसरे दिन शूटिंग पर अमिताभ ने जब स्मिता की हालत देखी तो वो समझ गये कि क्या हुआ है। अमिताभ ने स्मिता को इस गाने और इसमें भीगे बदन डांस की जरुरत को समझाया । हालांकि तब तक स्मिता पाटिल ये तय कर चुकी थी कि इसके बाद वो कभी कमर्शियल सिनेमा में काम नहीं करेगी। लेकिन अमिताभ के समझाने पर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। और संयोग ऐसा बना कि स्मिता पाटिल की दूसरी फिल्म भी अमिताभ बच्चन के साथ ही बनी।
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अपराधियों को पकड़ने के लिए उनके उंगलियों के निशानों का लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है.
ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अब उंगलियों के निशानों के एक नए पहलू पर शोध किया है.
शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया है कि उंगलियों के निशानों से कैसे किसी व्यक्ति की जीवनशैली के बारे में पता लगाया जा सकता है.
बीबीसी के विज्ञान संवाददाता ने बताया है कि शोधकर्ताओं ने इस ओर काम किया है कि किस तरह उम्र, धूम्रपान, मादक पदार्थों और कुछ विशेष निजी उत्पादों के सेवन से उंगलियों के निशान बदलते हैं.
शोधकर्ताओं ने ये भी कहा है कि वे उंगलियों के उन निशानों के बेहतर नमूने पेश करने में मदद कर सकते हैं जो निशान कई दिनों या हफ़्तों से अनदेखे रह गए हों.
शोध का मकसद उन बंदूकों और बमों के हिस्सों पर से उंगलियों के निशान ढूँढना है, जिन निशानों को ढूँढना आम तौर पर मुश्किल होता है.
ये काम लंदन के किंग्स कॉलेज में डॉक्टर सू जिक्कैल्स की अगुआई में चल रहा है.
उंगलियों के निशानों से ज़्यादा जानकारी हासिल करने के काम में इन निशानों की रासायनिक संरचना और समय के साथ उनमें आए बदलाव का सहारा लिया गया है.
डॉक्टर सू जिक्कैल्स का कहना है कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को छूता है, तो उसके अणु और लिपिड पीछे छूट जाते हैं.
इन्हीं का अध्ययन कर शोधकर्ता पुराने पड़ चुके उंगलियों के निशानों से कई तरह के तथ्य निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
डॉक्टर सू जिक्कैल्स के मुताबिक बच्चे, बड़े और बूढ़ों के उंगलियों के निशानों में अलग अलग तरह के ऑर्गेनिक कंपाउंड यानि ऑर्गेनिक मिश्रण होते हैं.
इसी तरह ध्रूमपान करने वाले लोग कोटिनाइन नाम का रयासन छोड़ते हैं.
शोधकर्ताओं ने इन्हीं तथ्यों का इस्तेमाल अपने शोध में किया है.
इसके अलावा वेल्स विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर नील और उनके साथी भी उंगलियों के निशानों पर शोध कर रहे हैं, ख़ासकर गोलियों पर से उंगलियों के निशान ढूँढने के काम पर.
प्रोफ़ेसर नील ने कहा है कि इस शोध का नतीजा होगा एक ऐसा यंत्र जो घटनास्थल पर ही उंगलियों के निशानों का परीक्षण कर सकेगा.
उंगलियों के निशान पर अब तक किया गया शोध लंदन में हुए एक आयोजन में पेश किया गया है.
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अपराधियों को पकड़ने के लिए उनके उंगलियों के निशानों का लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अब उंगलियों के निशानों के एक नए पहलू पर शोध किया है. शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया है कि उंगलियों के निशानों से कैसे किसी व्यक्ति की जीवनशैली के बारे में पता लगाया जा सकता है. बीबीसी के विज्ञान संवाददाता ने बताया है कि शोधकर्ताओं ने इस ओर काम किया है कि किस तरह उम्र, धूम्रपान, मादक पदार्थों और कुछ विशेष निजी उत्पादों के सेवन से उंगलियों के निशान बदलते हैं. शोधकर्ताओं ने ये भी कहा है कि वे उंगलियों के उन निशानों के बेहतर नमूने पेश करने में मदद कर सकते हैं जो निशान कई दिनों या हफ़्तों से अनदेखे रह गए हों. शोध का मकसद उन बंदूकों और बमों के हिस्सों पर से उंगलियों के निशान ढूँढना है, जिन निशानों को ढूँढना आम तौर पर मुश्किल होता है. ये काम लंदन के किंग्स कॉलेज में डॉक्टर सू जिक्कैल्स की अगुआई में चल रहा है. उंगलियों के निशानों से ज़्यादा जानकारी हासिल करने के काम में इन निशानों की रासायनिक संरचना और समय के साथ उनमें आए बदलाव का सहारा लिया गया है. डॉक्टर सू जिक्कैल्स का कहना है कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को छूता है, तो उसके अणु और लिपिड पीछे छूट जाते हैं. इन्हीं का अध्ययन कर शोधकर्ता पुराने पड़ चुके उंगलियों के निशानों से कई तरह के तथ्य निकालने की कोशिश कर रहे हैं. डॉक्टर सू जिक्कैल्स के मुताबिक बच्चे, बड़े और बूढ़ों के उंगलियों के निशानों में अलग अलग तरह के ऑर्गेनिक कंपाउंड यानि ऑर्गेनिक मिश्रण होते हैं. इसी तरह ध्रूमपान करने वाले लोग कोटिनाइन नाम का रयासन छोड़ते हैं. शोधकर्ताओं ने इन्हीं तथ्यों का इस्तेमाल अपने शोध में किया है. इसके अलावा वेल्स विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर नील और उनके साथी भी उंगलियों के निशानों पर शोध कर रहे हैं, ख़ासकर गोलियों पर से उंगलियों के निशान ढूँढने के काम पर. प्रोफ़ेसर नील ने कहा है कि इस शोध का नतीजा होगा एक ऐसा यंत्र जो घटनास्थल पर ही उंगलियों के निशानों का परीक्षण कर सकेगा. उंगलियों के निशान पर अब तक किया गया शोध लंदन में हुए एक आयोजन में पेश किया गया है.
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छत्तीसगढ़ की अहिवारा विधानसभा सीट पर अजब-गजब नजारा देखने को मिला।
चुनावी सरगर्मियों जोरों पर हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में नेता एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। एक दूसरे पर तल्ख टिप्पणियां और आरोप प्रत्यारोप किए जा रहे हैं। इन सबके बीच छत्तीसगढ़ की अहिवारा विधानसभा सीट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। प्रचार के दौरान आमना-सामना होने पर बीजेपी प्रत्याशी ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी के पैर छुए और जीत का आशीर्वाद मांग लिया।
दरअसल, अहिवारा सीट पर चुनाव लड़ रहे बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच गुरु-शिष्य का रिश्ता है। इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। कांग्रेस प्रत्याशी रुद्र कुमार को पिछले चुनाव में भी अहिवारा सीट से टिकट मिला था लेकिन वो चुनाव हार गए थे। लेकिन इस बार वो कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसलिए पूरी शिद्दत से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
वहीं, गुरु की हवा देखते हुए बीजेपी ने भी एक चाल चली। उसी सीट से शिष्य सांवलाराम डाहरे को टिकट दे दिया और गुरु शिष्य आमने-सामने आ गए। इससे मुकाबला रोमांचक हो गया है। सांवलाराम गुरुगद्दी के प्रति निष्ठावान रहे हैं। यही वजह है कि जब प्रचार के दौरान दोनों नेता टकराए तो शिष्य ने लपक कर गुरू के पैर छू लिए और जीत का आशीर्वाद भी मांग लिया।
गुरु भी अपने चेले के इस निवेदन को टाल नहीं पाए. उन्होंने सांवलाराम डाहरे के सिर पर हाथ रखते हुए 'विजयी हो' का आशीर्वाद दिया। ये दृश्य देखकर आस-पास मौजूद लोग अभिभूत हो गए।
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छत्तीसगढ़ की अहिवारा विधानसभा सीट पर अजब-गजब नजारा देखने को मिला। चुनावी सरगर्मियों जोरों पर हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में नेता एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। एक दूसरे पर तल्ख टिप्पणियां और आरोप प्रत्यारोप किए जा रहे हैं। इन सबके बीच छत्तीसगढ़ की अहिवारा विधानसभा सीट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। प्रचार के दौरान आमना-सामना होने पर बीजेपी प्रत्याशी ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी के पैर छुए और जीत का आशीर्वाद मांग लिया। दरअसल, अहिवारा सीट पर चुनाव लड़ रहे बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच गुरु-शिष्य का रिश्ता है। इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। कांग्रेस प्रत्याशी रुद्र कुमार को पिछले चुनाव में भी अहिवारा सीट से टिकट मिला था लेकिन वो चुनाव हार गए थे। लेकिन इस बार वो कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसलिए पूरी शिद्दत से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं, गुरु की हवा देखते हुए बीजेपी ने भी एक चाल चली। उसी सीट से शिष्य सांवलाराम डाहरे को टिकट दे दिया और गुरु शिष्य आमने-सामने आ गए। इससे मुकाबला रोमांचक हो गया है। सांवलाराम गुरुगद्दी के प्रति निष्ठावान रहे हैं। यही वजह है कि जब प्रचार के दौरान दोनों नेता टकराए तो शिष्य ने लपक कर गुरू के पैर छू लिए और जीत का आशीर्वाद भी मांग लिया। गुरु भी अपने चेले के इस निवेदन को टाल नहीं पाए. उन्होंने सांवलाराम डाहरे के सिर पर हाथ रखते हुए 'विजयी हो' का आशीर्वाद दिया। ये दृश्य देखकर आस-पास मौजूद लोग अभिभूत हो गए।
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कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के 4 दिन बाद इन हवाई अड्डों के सेफ्टी ऑडिट की घोषणा की थी। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) देश में 100 से अधिक हवाई अड्डों का प्रबंधन करती है। इनमें कोझिकोड हवाई अड्डा भी शामिल है।
नई दिल्ली केरल के कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के करीब दो हफ्ते बाद डीजीसीए (DGCA) ने सभी भारतीय एयरलाइन कंपनियों का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट (Special Safty Audit) शुरू कर दिया है। सिविल एविएशन रेग्युलेटर डीजीसीए के एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कोझिकोड में हुई दु्र्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई थी।
अधिकारी ने कहा, यह कंप्लीट फ्लाइट ऑपरेशंस क्वालिटी एश्योरेंस (एफओक्यूए) ऑडिट होगा। एफओक्यूए ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी फ्लाइट्स के डेटा को एनालाइज किया जाता है ताकि भविष्य में उनकी सेफ्टी में सुधार किया जा सके। डीजीसीए के अधिकारी ने कहा, 'सभी भारतीय एयरलाइंस का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट होगा। यह ऑडिट शुरू हो चुका है। पहले चरण में स्पाइसजेट और एयर इंडिया का ऑडिट हो रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने पहले ही देश के उन सभी हवाई अड्डों का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया शुरू कर दी है जहां मॉनसून को दौरान भारी बारिश होती है। '
कोझिकोड दुर्घटना कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के 4 दिन बाद इन हवाई अड्डों के सेफ्टी ऑडिट की घोषणा की गई थी। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) देश में 100 से अधिक हवाई अड्डों का प्रबंधन करती है। इनमें कोझिकोड हवाई अड्डा भी शामिल है। हालांकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट्स को निजी कंपनियां मैनेज करती हैं।
7 अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस का बी737एनजी विमान कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरने के बाद रनवे से बाहर निकलकर खाई में गिर गया था। इस दुर्घटना में दोनों पायलट समेत 18 लोग मारे गए थे। एयर इंडिया एक्सप्रेस एयर इंडिया के स्वामित्व वाली कंपनी है। इसकी जांच के लिए कैप्टन एसएस चाहर की अगुवाई में एक पांच सदस्यीय पैनल बनाया गया है।
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कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के चार दिन बाद इन हवाई अड्डों के सेफ्टी ऑडिट की घोषणा की थी। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया देश में एक सौ से अधिक हवाई अड्डों का प्रबंधन करती है। इनमें कोझिकोड हवाई अड्डा भी शामिल है। नई दिल्ली केरल के कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के करीब दो हफ्ते बाद डीजीसीए ने सभी भारतीय एयरलाइन कंपनियों का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट शुरू कर दिया है। सिविल एविएशन रेग्युलेटर डीजीसीए के एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कोझिकोड में हुई दु्र्घटना में अट्ठारह लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारी ने कहा, यह कंप्लीट फ्लाइट ऑपरेशंस क्वालिटी एश्योरेंस ऑडिट होगा। एफओक्यूए ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी फ्लाइट्स के डेटा को एनालाइज किया जाता है ताकि भविष्य में उनकी सेफ्टी में सुधार किया जा सके। डीजीसीए के अधिकारी ने कहा, 'सभी भारतीय एयरलाइंस का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट होगा। यह ऑडिट शुरू हो चुका है। पहले चरण में स्पाइसजेट और एयर इंडिया का ऑडिट हो रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने पहले ही देश के उन सभी हवाई अड्डों का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया शुरू कर दी है जहां मॉनसून को दौरान भारी बारिश होती है। ' कोझिकोड दुर्घटना कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना के चार दिन बाद इन हवाई अड्डों के सेफ्टी ऑडिट की घोषणा की गई थी। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया देश में एक सौ से अधिक हवाई अड्डों का प्रबंधन करती है। इनमें कोझिकोड हवाई अड्डा भी शामिल है। हालांकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु और हैदराबाद के एयरपोर्ट्स को निजी कंपनियां मैनेज करती हैं। सात अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस का बीसात सौ सैंतीसएनजी विमान कोझिकोड एयरपोर्ट पर उतरने के बाद रनवे से बाहर निकलकर खाई में गिर गया था। इस दुर्घटना में दोनों पायलट समेत अट्ठारह लोग मारे गए थे। एयर इंडिया एक्सप्रेस एयर इंडिया के स्वामित्व वाली कंपनी है। इसकी जांच के लिए कैप्टन एसएस चाहर की अगुवाई में एक पांच सदस्यीय पैनल बनाया गया है।
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रविचंद्रन अश्विन और इयोन मॉर्गन विवाद में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न ने भारतीय गेंदबाज की गलती बताई है। यही नहीं, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी रविचंद्रन अश्विन को ही विलेन करार दिया है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा है कि जब वर्ल्ड कप फाइनल में ओवर थ्रो के जरिए इंग्लैंड की टीम को चौका मिल गया था, तब इयोन मॉर्गन की खेल भावना क्यों मर गई थी।
पूरा मामला 28 सितंबर की दोपहर (भारतीय समयानुसार) कोलकाता नाइटराइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेले गए मैच के दौरान एक थ्रो से जुड़ा है। उस लो स्कोरिंग मैच में इयोन मॉर्गन की अगुआई वाली केकेआर ने ऋषभ पंत की दिल्ली कैपिटल्स को 3 विकेट से हरा दिया था। मैच के दौरान दिल्ली कैपिटल्स की पारी के दौरान टिम साउदी की गेंद पर राहुल त्रिपाठी ने थ्रो किया। गेंद पंत से टकराकर दूर चली गई।
दूसरे छोर पर खड़े अश्विन ने इस पर अतिरिक्त रन लेने की कोशिश की। टिम साउदी और इयोन मॉर्गन को लगा कि रन लेना खेल की भावना के खिलाफ था। इसे लेकर अश्विन की पहले साउदी और उसके बाद मॉर्गन से बहसा-बहसी हुई। मामला तूल पकड़ता दिख रहा था, तभी अंपायर्स और दिनेश कार्तिक ने बीच-बचाव किया।
इस विवाद में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया भी कूद पड़ा। फॉक्स क्रिकेट के टेलीविजन चैनल ने शेन वार्न के ट्वीट को 'अपमानजनक' की हेडिंग के साथ लगाया। उसने अपने प्रोग्राम में अश्विन की 'मांकडिंग' घटना को भी याद किया। उसने अश्विन को खेल भावना का पालन नहीं करने वाला खिलाड़ी बताया। अश्विन ने आईपीएल 2019 में इंग्लैंड के जोस बटलर को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर बैकअप के दौरान रन आउट कर दिया था।
बता दें कि मॉर्गन की सबसे प्रसिद्ध जीत में एक विवादास्पद ओवर-थ्रो का योगदान था। 2019 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड आमने-सामने थे। इस मुकाबले में बेन स्टोक्स की पारी और खेल के अंतिम तनावपूर्ण क्षण में एक महत्वपूर्ण ओवरथ्रो ने पूरा खेल बदल दिया था। अंतिम ओवर में स्टोक्स ने एक रन चुराने की कोशिश करते हुए डाइव लगाई थी। ऐसा करते हुए उनके बल्ले से गेंद लगकर बाउंड्री पार चली गई थी।
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रविचंद्रन अश्विन और इयोन मॉर्गन विवाद में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न ने भारतीय गेंदबाज की गलती बताई है। यही नहीं, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भी रविचंद्रन अश्विन को ही विलेन करार दिया है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा है कि जब वर्ल्ड कप फाइनल में ओवर थ्रो के जरिए इंग्लैंड की टीम को चौका मिल गया था, तब इयोन मॉर्गन की खेल भावना क्यों मर गई थी। पूरा मामला अट्ठाईस सितंबर की दोपहर कोलकाता नाइटराइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेले गए मैच के दौरान एक थ्रो से जुड़ा है। उस लो स्कोरिंग मैच में इयोन मॉर्गन की अगुआई वाली केकेआर ने ऋषभ पंत की दिल्ली कैपिटल्स को तीन विकेट से हरा दिया था। मैच के दौरान दिल्ली कैपिटल्स की पारी के दौरान टिम साउदी की गेंद पर राहुल त्रिपाठी ने थ्रो किया। गेंद पंत से टकराकर दूर चली गई। दूसरे छोर पर खड़े अश्विन ने इस पर अतिरिक्त रन लेने की कोशिश की। टिम साउदी और इयोन मॉर्गन को लगा कि रन लेना खेल की भावना के खिलाफ था। इसे लेकर अश्विन की पहले साउदी और उसके बाद मॉर्गन से बहसा-बहसी हुई। मामला तूल पकड़ता दिख रहा था, तभी अंपायर्स और दिनेश कार्तिक ने बीच-बचाव किया। इस विवाद में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया भी कूद पड़ा। फॉक्स क्रिकेट के टेलीविजन चैनल ने शेन वार्न के ट्वीट को 'अपमानजनक' की हेडिंग के साथ लगाया। उसने अपने प्रोग्राम में अश्विन की 'मांकडिंग' घटना को भी याद किया। उसने अश्विन को खेल भावना का पालन नहीं करने वाला खिलाड़ी बताया। अश्विन ने आईपीएल दो हज़ार उन्नीस में इंग्लैंड के जोस बटलर को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर बैकअप के दौरान रन आउट कर दिया था। बता दें कि मॉर्गन की सबसे प्रसिद्ध जीत में एक विवादास्पद ओवर-थ्रो का योगदान था। दो हज़ार उन्नीस वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड आमने-सामने थे। इस मुकाबले में बेन स्टोक्स की पारी और खेल के अंतिम तनावपूर्ण क्षण में एक महत्वपूर्ण ओवरथ्रो ने पूरा खेल बदल दिया था। अंतिम ओवर में स्टोक्स ने एक रन चुराने की कोशिश करते हुए डाइव लगाई थी। ऐसा करते हुए उनके बल्ले से गेंद लगकर बाउंड्री पार चली गई थी।
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रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मिशन मानवीय जिन्दगी व सेहत को बचाना है। हर साल 8 मई को वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाया जाता है। इसकी स्थापना 1863 ई. में हेनरी ड्यूनेन्ट ने जेनेवा में की। इसका मुख्यालय जेनेवा (सि्वट्जरलेंड) में है। इसे तीन बार (1917,1944,1963) में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है।
रेड क्रॉस का मुख्य उद्देश्य युद्ध या विपदा के समय में कठिनाईंयों से राहत दिलाना है। 8 मई रेडक्रास के संस्थापक हेनरी ड्यूनेंट का जन्म हुआ। इसलिए पूरे विश्व में इसे इसी दिन मनाया जाता है।
रेड क्रांस संस्था के उद्देश्य व उसके कार्य की बात की जाये तो इस संस्था का मुख्य उद्देश्य युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की मदद और चिकित्सा करना है। भारत में इसकी स्थापना 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के अनुसार की गई। दुनिया के लगभग 210 देश रेड क्रॉस सोसाइटी से जुड़े हुए हैं। रेड क्रॉस के सिद्धांतों को मान्यता 15वें इंटरनेशनल कांफ्रेंस में वर्ष 1934 में मिली, जिसके बाद इसे दुनियाभर में लागू किया गया।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस सोसाइटी (IFRC) ने लीग ऑफ द रेड क्रॉस सोसाइटीज से हर वर्ष इसे मनाए जाने की मांग की। जिसके बाद हर साल वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाने की शुरुआत हुई। 8 मई 1948 को पहला वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाया गया। वर्ष 1984 में आधिकारिक रूप से इसका नाम वर्ल्ड रेड क्रॉस डे और रेड क्रेसेंट डे रखा गया।
यह संस्था शांति और युद्ध के समय दुनियाभर के विभिन्न देशों की सरकार के बीच समन्वय का कार्य करती हैं। यह होने वाली महामारी बीमारी जैसी प्राकृतिक आपदा में पीड़ितों की सहायता करती है। इसका मुख्य कार्य मानव सेवा है।
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रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मिशन मानवीय जिन्दगी व सेहत को बचाना है। हर साल आठ मई को वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाया जाता है। इसकी स्थापना एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ ई. में हेनरी ड्यूनेन्ट ने जेनेवा में की। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसे तीन बार में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है। रेड क्रॉस का मुख्य उद्देश्य युद्ध या विपदा के समय में कठिनाईंयों से राहत दिलाना है। आठ मई रेडक्रास के संस्थापक हेनरी ड्यूनेंट का जन्म हुआ। इसलिए पूरे विश्व में इसे इसी दिन मनाया जाता है। रेड क्रांस संस्था के उद्देश्य व उसके कार्य की बात की जाये तो इस संस्था का मुख्य उद्देश्य युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की मदद और चिकित्सा करना है। भारत में इसकी स्थापना एक हज़ार नौ सौ बीस में पार्लियामेंट्री एक्ट के अनुसार की गई। दुनिया के लगभग दो सौ दस देश रेड क्रॉस सोसाइटी से जुड़े हुए हैं। रेड क्रॉस के सिद्धांतों को मान्यता पंद्रहवें इंटरनेशनल कांफ्रेंस में वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौंतीस में मिली, जिसके बाद इसे दुनियाभर में लागू किया गया। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस सोसाइटी ने लीग ऑफ द रेड क्रॉस सोसाइटीज से हर वर्ष इसे मनाए जाने की मांग की। जिसके बाद हर साल वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाने की शुरुआत हुई। आठ मई एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस को पहला वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाया गया। वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरासी में आधिकारिक रूप से इसका नाम वर्ल्ड रेड क्रॉस डे और रेड क्रेसेंट डे रखा गया। यह संस्था शांति और युद्ध के समय दुनियाभर के विभिन्न देशों की सरकार के बीच समन्वय का कार्य करती हैं। यह होने वाली महामारी बीमारी जैसी प्राकृतिक आपदा में पीड़ितों की सहायता करती है। इसका मुख्य कार्य मानव सेवा है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैक्सीन विकसित करने, दवाओं की खोज, रोग-निदान और परीक्षण की दिशा में भारत के प्रयासों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। भारतीय वैक्सीन कंपनियां अपनी गुणवत्ता, विनिर्माण क्षमता और वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, अब तो भारतीय वैक्सीन कंपनियां शुरुआती चरण के वैक्सीन विकास अनुसंधान में अन्वेषकों (इनोवेटर) के रूप में भी अपना व्यापक प्रभाव डालने लगी हैं। इसी तरह, भारतीय शिक्षाविद और स्टार्ट-अप्स भी इस क्षेत्र में अग्रणी की भूमिका में उभर चुके हैं। 30 से भी अधिक भारतीय वैक्सीन (टीका) फिलहाल कोरोना वैक्सीन के विकास के विभिन्न चरणों में हैं। यही नहीं, कुछ वैक्सीन तो परीक्षण के चरणों में भी पहुंच गई हैं।
इसी तरह, दवाओं के विकास में तीन तरह के दृष्टिकोण पर विचार किया जा रहा है। पहला, मौजूदा दवाओं का प्रयोजन पुनः तय करना। इस श्रेणी में कम से कम चार दवाओं का संश्लेषण और परीक्षण किया जा रहा है। दूसरा, बेहतरीन प्रदर्शन संबंधी अभिकलन दृष्टिकोण को प्रयोगशाला (लैब) में सत्यापन के साथ जोड़ते हुए नई दवाओं और अणुओं के विकास में तेजी लाई जा रही है। तीसरा, पौधों के अर्क और उत्पादों के सामान्य वायरल रोधी गुणों का पता लगाने के लिए उनकी गहन जांच की जा रही है।
रोग-निदान एवं परीक्षण के क्षेत्र में कई शैक्षणिक अनुसंधान संस्थानों और स्टार्ट-अप्स ने आरटी-पीसीआर दृष्टिकोण और एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए नए परीक्षण (टेस्ट) विकसित किए हैं। इसके अलावा, देश भर की प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ देने से इन दोनों ही प्रकार के परीक्षणों की क्षमता में व्यापक वृद्धि हुई है। परीक्षण के लिए अभिकर्मकों (रीएजेंट) के आयात की समस्या को भारतीय स्टार्ट-अप्स और उद्योग जगत के कंसोर्टियम ने दूर कर दिया है, क्योंकि वे वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। वर्तमान में इसके तहत दिए जा रहे विशेष जोर से इस क्षेत्र में एक मजबूत दीर्घकालिक उद्योग के विकसित होने की उम्मीद बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री द्वारा की गई समीक्षा के दौरान शिक्षाविदों, उद्योग जगत एवं सरकार की ओर से अभूतपूर्व एकजुटता दिखाने की बात को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही त्वरित एवं दक्ष नियामकीय प्रक्रिया के साथ संयोजन भी हुआ। प्रधानमंत्री ने इच्छा जताई कि इस तरह के बेहतरीन समन्वय और गति को दरअसल एक मानक परिचालन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि साझा प्रयास से जो काम संकट में संभव हो सकता है उसे विज्ञान संबंधी हमारे रोजमर्रा के कामकाज का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
दवाओं की खोज में कंप्यूटर विज्ञान, रसायन शास्त्र और जैव प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिकों के एकजुट होने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि इस विषय पर एक हैकाथॉन आयोजित किया जाना चाहिए, जिसके तहत कंप्यूटर विज्ञान को प्रयोगशाला में होने वाले संश्लेषण और परीक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाए। इस हैकाथॉन के सफल अभ्यर्थियों की सेवाएं स्टार्ट-अप्स ले सकते हैं, ताकि इस दिशा में आगे विकास करने के साथ-साथ इसके स्तर को भी बढ़ाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी विज्ञान से लेकर अप्लायड साइंस तक के वैज्ञानिकों ने जिस अभिनव और मूल तरीके से उद्योग जगत के साथ एकजुटता दिखाई है वह अत्यंत अत्साहवर्धक है। इस तरह के गर्व, मौलिकता और उद्देश्य की भावना दरअसल हमारी प्रगति में आगे भी दिखती रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ठीक यही भावना होने पर हम भी विज्ञान के क्षेत्र में किसी का अनुसरण करने के बजाय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ में शुमार हो सकते हैं।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैक्सीन विकसित करने, दवाओं की खोज, रोग-निदान और परीक्षण की दिशा में भारत के प्रयासों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। भारतीय वैक्सीन कंपनियां अपनी गुणवत्ता, विनिर्माण क्षमता और वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, अब तो भारतीय वैक्सीन कंपनियां शुरुआती चरण के वैक्सीन विकास अनुसंधान में अन्वेषकों के रूप में भी अपना व्यापक प्रभाव डालने लगी हैं। इसी तरह, भारतीय शिक्षाविद और स्टार्ट-अप्स भी इस क्षेत्र में अग्रणी की भूमिका में उभर चुके हैं। तीस से भी अधिक भारतीय वैक्सीन फिलहाल कोरोना वैक्सीन के विकास के विभिन्न चरणों में हैं। यही नहीं, कुछ वैक्सीन तो परीक्षण के चरणों में भी पहुंच गई हैं। इसी तरह, दवाओं के विकास में तीन तरह के दृष्टिकोण पर विचार किया जा रहा है। पहला, मौजूदा दवाओं का प्रयोजन पुनः तय करना। इस श्रेणी में कम से कम चार दवाओं का संश्लेषण और परीक्षण किया जा रहा है। दूसरा, बेहतरीन प्रदर्शन संबंधी अभिकलन दृष्टिकोण को प्रयोगशाला में सत्यापन के साथ जोड़ते हुए नई दवाओं और अणुओं के विकास में तेजी लाई जा रही है। तीसरा, पौधों के अर्क और उत्पादों के सामान्य वायरल रोधी गुणों का पता लगाने के लिए उनकी गहन जांच की जा रही है। रोग-निदान एवं परीक्षण के क्षेत्र में कई शैक्षणिक अनुसंधान संस्थानों और स्टार्ट-अप्स ने आरटी-पीसीआर दृष्टिकोण और एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए नए परीक्षण विकसित किए हैं। इसके अलावा, देश भर की प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ देने से इन दोनों ही प्रकार के परीक्षणों की क्षमता में व्यापक वृद्धि हुई है। परीक्षण के लिए अभिकर्मकों के आयात की समस्या को भारतीय स्टार्ट-अप्स और उद्योग जगत के कंसोर्टियम ने दूर कर दिया है, क्योंकि वे वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। वर्तमान में इसके तहत दिए जा रहे विशेष जोर से इस क्षेत्र में एक मजबूत दीर्घकालिक उद्योग के विकसित होने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा की गई समीक्षा के दौरान शिक्षाविदों, उद्योग जगत एवं सरकार की ओर से अभूतपूर्व एकजुटता दिखाने की बात को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही त्वरित एवं दक्ष नियामकीय प्रक्रिया के साथ संयोजन भी हुआ। प्रधानमंत्री ने इच्छा जताई कि इस तरह के बेहतरीन समन्वय और गति को दरअसल एक मानक परिचालन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि साझा प्रयास से जो काम संकट में संभव हो सकता है उसे विज्ञान संबंधी हमारे रोजमर्रा के कामकाज का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। दवाओं की खोज में कंप्यूटर विज्ञान, रसायन शास्त्र और जैव प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिकों के एकजुट होने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि इस विषय पर एक हैकाथॉन आयोजित किया जाना चाहिए, जिसके तहत कंप्यूटर विज्ञान को प्रयोगशाला में होने वाले संश्लेषण और परीक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाए। इस हैकाथॉन के सफल अभ्यर्थियों की सेवाएं स्टार्ट-अप्स ले सकते हैं, ताकि इस दिशा में आगे विकास करने के साथ-साथ इसके स्तर को भी बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी विज्ञान से लेकर अप्लायड साइंस तक के वैज्ञानिकों ने जिस अभिनव और मूल तरीके से उद्योग जगत के साथ एकजुटता दिखाई है वह अत्यंत अत्साहवर्धक है। इस तरह के गर्व, मौलिकता और उद्देश्य की भावना दरअसल हमारी प्रगति में आगे भी दिखती रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ठीक यही भावना होने पर हम भी विज्ञान के क्षेत्र में किसी का अनुसरण करने के बजाय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ में शुमार हो सकते हैं।
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बांग्लादेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज मुश्फिकुर रहीम फिर से विवाद में फंसते दिख रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे वनडे मैच के दौरान वे बांग्लादेश के स्पिनर मेहदी हसन मिराज को श्रीलंकन बल्लेबाज पाथुम निसंका का रास्ता रोकने के लिए कहते सुने गए हैं। उनकी बात स्टंप माइक में दर्ज हुई है।
अब यह रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर काफी शेयर की जा रही है। रहीम ने इस मैच में 127 गेंद में 125 रन की पारी खेली थी। इसके चलते बांग्लादेश ने लगातार दूसरा मैच जीतते हुए वनडे सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त ले ली थी। लेकिन अब रहीम स्टंप माइक में रिकॉर्ड हुई बातचीत के चलते सुर्खियों में हैं।
वायरल हो रहे वीडियो में वे बांग्ला भाषा में मिराज से कहते सुनाई देते हैं, 'अगर वह तुम्हारे सामने रन लेने के लिए आता है तो उसे मैदान पर गिरा दो। वीडियो सामने आने के बाद मुश्फिकुर रहीम की खेल भावना को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ काफी कुछ लिखा जा रहा है। हालांकि इस मामले में अभी तक बांग्लादेश या श्रीलंकाई क्रिकेट टीम की ओर से कोई बयान नहीं आया है। साथ में रहीम की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। वे पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। जैसे निदाहास ट्रॉफी के दौरान श्रीलंका को हराने पर नागिन डांस करना, 2016 वर्ल्ड टी20 में भारत के खिलाफ मैच जीतने से पहले ही जश्न मनाना।
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बांग्लादेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज मुश्फिकुर रहीम फिर से विवाद में फंसते दिख रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे वनडे मैच के दौरान वे बांग्लादेश के स्पिनर मेहदी हसन मिराज को श्रीलंकन बल्लेबाज पाथुम निसंका का रास्ता रोकने के लिए कहते सुने गए हैं। उनकी बात स्टंप माइक में दर्ज हुई है। अब यह रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर काफी शेयर की जा रही है। रहीम ने इस मैच में एक सौ सत्ताईस गेंद में एक सौ पच्चीस रन की पारी खेली थी। इसके चलते बांग्लादेश ने लगातार दूसरा मैच जीतते हुए वनडे सीरीज में दो-शून्य की अजेय बढ़त ले ली थी। लेकिन अब रहीम स्टंप माइक में रिकॉर्ड हुई बातचीत के चलते सुर्खियों में हैं। वायरल हो रहे वीडियो में वे बांग्ला भाषा में मिराज से कहते सुनाई देते हैं, 'अगर वह तुम्हारे सामने रन लेने के लिए आता है तो उसे मैदान पर गिरा दो। वीडियो सामने आने के बाद मुश्फिकुर रहीम की खेल भावना को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ काफी कुछ लिखा जा रहा है। हालांकि इस मामले में अभी तक बांग्लादेश या श्रीलंकाई क्रिकेट टीम की ओर से कोई बयान नहीं आया है। साथ में रहीम की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। वे पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। जैसे निदाहास ट्रॉफी के दौरान श्रीलंका को हराने पर नागिन डांस करना, दो हज़ार सोलह वर्ल्ड टीबीस में भारत के खिलाफ मैच जीतने से पहले ही जश्न मनाना।
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पिछले साल ग्रामीण भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में 18 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच के इजाफे की तुलना में ज्यादा है, जो वर्ष 2021 में पांच प्रतिशत था। वर्ष 2025 तक देश में 90 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। इसका श्रेय ग्रामीण क्षेत्रों तीव्र वृद्धि को जाता है।
इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और डेटा एनालिटिक्स कंपनी कैंटार की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में अब 35. 1 करोड़ या 37 प्रतिशत लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। तेज वृद्धि के बावजूद लगभग 76. 2 करोड़ भारतीयों ने अभी तक इंटरनेट नहीं अपनाया है, जिनमें से 63 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के लोग हैं।
'इंटरनेट को समझने में मुश्किल' जागरूकता की कमी के साथ-साथ विशेष रूप से ग्रामीण भारत में प्राथमिक बाधा बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यवार तुलना में गोवा में इंटरनेट की पहुंच सर्वाधिक है, जबकि बिहार में सबसे कम है।
रिपोर्ट के अनुसार अगले दो साल में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 तक देश में 90 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। ऐसा लगता है कि शहरी भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में होने वाली वृद्धि 34. 1 करोड़ उपयोगकर्ताओं और 69 प्रतिशत पहुंच के साथ स्थिर हो गई है। 'भारत में इंटरनेट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (लक्षद्वीप को छोड़कर) के 77,000 परिवारों के सर्वेक्षण पर आधारित है।
34. 6 करोड़ भारतीय ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान जैसे ऑनलाइन लेनदेन करते हैं, यह अमेरिका की कुल अनुमानित आबादी 33. 1 करोड़ से अधिक है। वैश्विक महामारी के दौरान इस लेनदेन में काफी उछाल आई है।
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पिछले साल ग्रामीण भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में अट्ठारह प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच के इजाफे की तुलना में ज्यादा है, जो वर्ष दो हज़ार इक्कीस में पांच प्रतिशत था। वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक देश में नब्बे करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। इसका श्रेय ग्रामीण क्षेत्रों तीव्र वृद्धि को जाता है। इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया और डेटा एनालिटिक्स कंपनी कैंटार की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में अब पैंतीस. एक करोड़ या सैंतीस प्रतिशत लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। तेज वृद्धि के बावजूद लगभग छिहत्तर. दो करोड़ भारतीयों ने अभी तक इंटरनेट नहीं अपनाया है, जिनमें से तिरेसठ प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के लोग हैं। 'इंटरनेट को समझने में मुश्किल' जागरूकता की कमी के साथ-साथ विशेष रूप से ग्रामीण भारत में प्राथमिक बाधा बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यवार तुलना में गोवा में इंटरनेट की पहुंच सर्वाधिक है, जबकि बिहार में सबसे कम है। रिपोर्ट के अनुसार अगले दो साल में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बीस करोड़ से भी ज्यादा बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक देश में नब्बे करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। ऐसा लगता है कि शहरी भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में होने वाली वृद्धि चौंतीस. एक करोड़ उपयोगकर्ताओं और उनहत्तर प्रतिशत पहुंच के साथ स्थिर हो गई है। 'भारत में इंटरनेट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सतहत्तर,शून्य परिवारों के सर्वेक्षण पर आधारित है। चौंतीस. छः करोड़ भारतीय ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान जैसे ऑनलाइन लेनदेन करते हैं, यह अमेरिका की कुल अनुमानित आबादी तैंतीस. एक करोड़ से अधिक है। वैश्विक महामारी के दौरान इस लेनदेन में काफी उछाल आई है।
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डाइटिशियंस के मुताबिक अदरक में मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण वजन को कम करने में प्रभावी होते हैं, वहीं अजवाइन में पाचन को मजबूत करने का गुण होता है, जब ये दोनों एक साथ मिलते हैं तो आपके शरीर के बढ़ते वजन कंट्रोल होते हैं. इस चाय को उपयोग करने से वजन तेजी से घट सकता है. दरअसल अजवाइन और अदरक हमारे बॉडी को डिटॉक्सिफाई कर सकता है. ये शरीर को सूजन और फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाता है. ऐसे में ये गुण शरीर के बढ़ते वजन को घटाने में असरदार हो सकता है. दिन की शुरुआत अगर आप एक कप अजवाइन की चाय से करते हैं तो आपका मेटाबॉलिज्म रेट काफी बूस्ट होता है. मेटाबॉलिज्म बेहतर होने से आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी तेजी से बर्न होती है, ये पेट को कम करने में प्रभावी होता है. इसके साथ ही अदरक और अजवाइन से तैयार चाय एसिडिटी से जुड़ी प्रॉब्लम्स को भी कम कर सकता है.
अजवाइन और अदरक की चाय का नियमित उपयोग आपको डायबिटीज के खतरे से बचाता है यह ब्लड सूगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है.
अजवाइन और अदरक की चाय पीने से स्किन संबंधित कई प्रॉब्लम्स से निजात मिल सकता है. यह त्वचा इंफेक्शन के खतरे को कम करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को कील मुंहासे और झुर्रियों की प्रॉब्लम से बचाते हैं.
अजवाइन और अदरक की चाय पीने से हृदय के लिए बहुत फायदा होता है. इस चाय में फ्लेवोनॉयड होते हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में हेल्प करते हैं.
सबसे पहले अदरक को घिस लें.
एक गिलास पानी में घिसे हुए अदरक और अजवाइन को रात भर पानी में भिगोकर छोड़ दें.
इसके बाद अगली सुबह इस पानी को अच्छे से उबालकर एक कप में छान लें.
इसमें आधा नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें.
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डाइटिशियंस के मुताबिक अदरक में मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण वजन को कम करने में प्रभावी होते हैं, वहीं अजवाइन में पाचन को मजबूत करने का गुण होता है, जब ये दोनों एक साथ मिलते हैं तो आपके शरीर के बढ़ते वजन कंट्रोल होते हैं. इस चाय को उपयोग करने से वजन तेजी से घट सकता है. दरअसल अजवाइन और अदरक हमारे बॉडी को डिटॉक्सिफाई कर सकता है. ये शरीर को सूजन और फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाता है. ऐसे में ये गुण शरीर के बढ़ते वजन को घटाने में असरदार हो सकता है. दिन की शुरुआत अगर आप एक कप अजवाइन की चाय से करते हैं तो आपका मेटाबॉलिज्म रेट काफी बूस्ट होता है. मेटाबॉलिज्म बेहतर होने से आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी तेजी से बर्न होती है, ये पेट को कम करने में प्रभावी होता है. इसके साथ ही अदरक और अजवाइन से तैयार चाय एसिडिटी से जुड़ी प्रॉब्लम्स को भी कम कर सकता है. अजवाइन और अदरक की चाय का नियमित उपयोग आपको डायबिटीज के खतरे से बचाता है यह ब्लड सूगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है. अजवाइन और अदरक की चाय पीने से स्किन संबंधित कई प्रॉब्लम्स से निजात मिल सकता है. यह त्वचा इंफेक्शन के खतरे को कम करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को कील मुंहासे और झुर्रियों की प्रॉब्लम से बचाते हैं. अजवाइन और अदरक की चाय पीने से हृदय के लिए बहुत फायदा होता है. इस चाय में फ्लेवोनॉयड होते हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में हेल्प करते हैं. सबसे पहले अदरक को घिस लें. एक गिलास पानी में घिसे हुए अदरक और अजवाइन को रात भर पानी में भिगोकर छोड़ दें. इसके बाद अगली सुबह इस पानी को अच्छे से उबालकर एक कप में छान लें. इसमें आधा नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने काऱी हद तक लोगों की चिंता बढ़ दी है. इसकी वजह से आम आदमी की जेब काफी प्रभावित हो रही है. अगर आप इस वजह से बाइक नहीं खरीदना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसी बाइक की जानकारी लेकर आए हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन के रूप में जानी जाती है.
बढ़ते पेट्रोल के दामों को देखते हुए लोगों की सुविधाओं के लिए दो पहिया वाहन की कंपनी वार्डविज़ार्ड नवाचार ने एक इलेक्ट्रिक बाएक निकली है. इसका नाम जोए ई बाईक मोंस्टर है. यह बाइक मात्र 64 रूपए की कीमत में 280 किलोमीटर तक का माइलेज दे सकती है. तो आइए इस बाइक की खासियत जानते हैं.
जोए ई बाईक मोंस्टर की खासियत (Features Of Joe E Bike Monster)
यह एक ऐसी इलेक्ट्रिक बाइक है. यह बाइक मात्र 64 रुपये में 280 किलोमीटर तक का माइलेज़ देती है.
अगर प्रति किलोमीटर खर्च की बात करें, तो यह इलेक्ट्रिक बाइक सिर्फ 23 पैसे में एक किलोमीटर की रेंज ऑफर करती है.
कंपनी का दावा है कि 1 किलोमीटर में इसका खर्च सिर्फ 23 पैसे आता है.
यह सिंगल चार्ज पर 95 Km की रेंज ऑफर करती है.
इसमें 72 V, 39 Ah लिथियम आयन बैटरी है.
इसमें 1500 वाल्ट की डीसी ब्रशलेस हब मोटर पाई जाती है.
यह एक बार फुल चार्ज होने पर 5 से 5 घंटे चलती है.
यह इलेक्ट्रिक बाइक की फुल चार्ज होने पर ड्राइविंग रेंज 95 किलोमीटर की होती है.
एक बार बैटरी फुल चार्ज करने में 3 यूनिट बिजली खर्ज होती है.
वहीं, इसकी स्पीड की बात करें, तो यह 60 Km/H है.
इस इलेक्ट्रिक बाइक की कीमत 98,666 रुपए तय की गई है.
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पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने काऱी हद तक लोगों की चिंता बढ़ दी है. इसकी वजह से आम आदमी की जेब काफी प्रभावित हो रही है. अगर आप इस वजह से बाइक नहीं खरीदना चाहते हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसी बाइक की जानकारी लेकर आए हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन के रूप में जानी जाती है. बढ़ते पेट्रोल के दामों को देखते हुए लोगों की सुविधाओं के लिए दो पहिया वाहन की कंपनी वार्डविज़ार्ड नवाचार ने एक इलेक्ट्रिक बाएक निकली है. इसका नाम जोए ई बाईक मोंस्टर है. यह बाइक मात्र चौंसठ रूपए की कीमत में दो सौ अस्सी किलोग्राममीटर तक का माइलेज दे सकती है. तो आइए इस बाइक की खासियत जानते हैं. जोए ई बाईक मोंस्टर की खासियत यह एक ऐसी इलेक्ट्रिक बाइक है. यह बाइक मात्र चौंसठ रुपयापये में दो सौ अस्सी किलोग्राममीटर तक का माइलेज़ देती है. अगर प्रति किलोमीटर खर्च की बात करें, तो यह इलेक्ट्रिक बाइक सिर्फ तेईस पैसे में एक किलोमीटर की रेंज ऑफर करती है. कंपनी का दावा है कि एक किलोग्राममीटर में इसका खर्च सिर्फ तेईस पैसे आता है. यह सिंगल चार्ज पर पचानवे Km की रेंज ऑफर करती है. इसमें बहत्तर वोल्ट, उनतालीस Ah लिथियम आयन बैटरी है. इसमें एक हज़ार पाँच सौ वाल्ट की डीसी ब्रशलेस हब मोटर पाई जाती है. यह एक बार फुल चार्ज होने पर पाँच से पाँच घंटाटे चलती है. यह इलेक्ट्रिक बाइक की फुल चार्ज होने पर ड्राइविंग रेंज पचानवे किलोग्राममीटर की होती है. एक बार बैटरी फुल चार्ज करने में तीन यूनिट बिजली खर्ज होती है. वहीं, इसकी स्पीड की बात करें, तो यह साठ Km/H है. इस इलेक्ट्रिक बाइक की कीमत अट्ठानवे,छः सौ छयासठ रुपयापए तय की गई है.
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दैनिक भास्कर की ओर से रविवार को चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और जीरकपुर के समाचार पत्र वितरकों को मास्क और सैनिटाइजर बांटे गए। भास्कर की इस पहल को ट्राईसिटी के समस्त समाचार पत्र संगठनों की ओर से सराहा गया। समाचार पत्र वितरक संघ चंडीगढ़ से मदन शर्मा, अरुण कुमार, पंकज भट्ट, पंचकूला वितरक संघ से अश्वनी कुमार, प्रीतम सिंह, ऋषिपाल शर्मा, मनीमाजरा से चंदर मोहन, रमेश कुमार, जीरकपुर से श्री भगवान, राजेश वर्मा, मोहाली वितरक संघ से हरप्रीत सिंह, रविंद्र छाव्ला, विजय सिंह ने दैनिक भास्कर का आभार व्यक्त किया है।
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दैनिक भास्कर की ओर से रविवार को चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और जीरकपुर के समाचार पत्र वितरकों को मास्क और सैनिटाइजर बांटे गए। भास्कर की इस पहल को ट्राईसिटी के समस्त समाचार पत्र संगठनों की ओर से सराहा गया। समाचार पत्र वितरक संघ चंडीगढ़ से मदन शर्मा, अरुण कुमार, पंकज भट्ट, पंचकूला वितरक संघ से अश्वनी कुमार, प्रीतम सिंह, ऋषिपाल शर्मा, मनीमाजरा से चंदर मोहन, रमेश कुमार, जीरकपुर से श्री भगवान, राजेश वर्मा, मोहाली वितरक संघ से हरप्रीत सिंह, रविंद्र छाव्ला, विजय सिंह ने दैनिक भास्कर का आभार व्यक्त किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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जून की तपन में बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए स्कूलों को बंद कर दिया जाता है। कुछ ऐसा ही हाल कड़ाके की ठंड में भी होता है। इससे इतर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से कम उम्र के मासूमों को मुट्ठी भर पंजीरी के लिए तपन भरे दिनों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुलाया जाता है। इन केंद्रों पर पंखे तक नहीं हैं।
बच्चों, माताओं व किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए गांवों से लेकर शहरों तक संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उनको पोषाहार देने की व्यवस्था है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए गर्म भोजन और पंजीरी की व्यवस्था होती है। खाने के लिए साढ़े तीन रुपये प्रति बच्चे की दर से सरकार धन देती है। आंगनबाड़ी केंद्रों की सहायिका मेन्यू के अनुसार भोजन पकाती हैं। हॉट कुक्ड भोजन के लिए अक्टूबर में धन आया था, जिससे नवंबर में हॉट कुक्ड भोजन बच्चों को दिया गया था। मार्च में करीब पंद्रह दिनों के लिए हॉटकुक्ड भोजन का धन दिया गया है। इसके बाद से अब तक केंद्रों पर चूल्हे नहीं जले। अब बच्चों को प्रतिदिन केवल पचास ग्राम पंजीरी दी जाती है।
अभिभावकों का कहना है कि इतने छोटे बच्चों को इस तरह की गर्मी में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुलाया जाता है, जबकि वहां पंखे तक नहीं लगे हैं। ऐसे में मासूमों के बीमार होने का खतरा बना रहता है। आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश संगठन मंत्री एवं गोसाईगंज के रसूलपुर केंद्र की संचालिका रामदेवी वर्मा कहती हैं कि गर्मी व सर्दी में इंटर तक के स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र कभी बंद नहीं किए जाते। ऐसा तब है जबकि यहां तीन से छह साल तक के बच्चे पढ़ते हैं। हॉटकुक्ड साल में सिर्फ दो-चार महीने ही बन पाता है। इसके अलावा पोषाहार भी समाप्त कर दिया जाता है।
लखनऊः बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जल्द ही आरटीई की दूसरी सूची जारी की जाएगी। दूसरी सूची में करीब 10 हजार बच्चों के नाम शामिल रहेंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक दूसरी सूची के साथ ही पहली सूची में गड़बड़ रहे नामों को संशोधित करते हुए उनकी भी सूची जारी की जाएगी।
शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 25 अप्रैल को आरटीई की पहली दाखिला सूची जारी की गई। पहली सूची में करीब 2600 बच्चों के नाम शामिल थे। विभाग द्वारा शुरुआत में किए गए दावों के तहत दूसरी सूची भी 10 मई तक जारी होनी थी। मगर पहली सूची में करीब 600 बच्चों के नामों में रही अनियमितताओं के चलते दूसरी सूची में भी प्रभावित रही। जिस कारण अभिभावक रोजाना समस्याओं का सामना करने को मजबूर रहे। इसे विभागीय शिथिलता का ही नतीजा का जाएगा कि 5 जून तक भी आरटीई की दूसरी सूची जारी नहीं हो सकी। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग 11 जून तक दूसरी सूची जारी किए जाने का दम भर रहा है। इसमें करीब 10 हजार नाम शामिल रहेंगे।
बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी के मुताबिक पहली सूची में जो गलती रही, उसे सही कर लिया गया है। संशोधित और दूसरी सूची 11 जून को जारी किए जाने का प्रयास किया जा रहा।
लखनऊ : विदेश में जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक छात्रों की मदद अब राज्य सरकार करेगी। उन्हें इसके लिए फॉरेन एजुकेशन एंड रिसर्च स्कालरशिप के तहत आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी, हालांकि यह धनराशि उन्हें बाद में वापस करनी होगी। छात्रों को इसके लिए कोई ब्याज नहीं देना होगा। अगले सत्र से यह योजना शुरू की जा सकती है।
समाज कल्याण विभाग अभी प्रदेश या प्रदेश बाहर के शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति करता है। इनमें कई छात्र ऐसे होते हैं जो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहते हैं लेकिन, आर्थिक रूप से कमजोर होने के नाते नहीं जा पाते। समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री के अनुसार विभाग ऐसे छात्रों का सपना पूरा करेगा। हालांकि सिर्फ उच्च शिक्षा के लिए ही यह योजना लागू की जाएगी। योजना में उन्हीं छात्रों को शामिल किए जाने की योजना है, जिनके माता-पिता की सालाना आय छह लाख से कम हो। गौरतलब है कि पूर्व की समाजवादी सरकार में भी इस योजना का प्रस्ताव किया गया था लेकिन, इसे अमल में नहीं लाया जा सका। योजना के तहत एक भी छात्र को विदेश में शिक्षा के लिए नहीं भेजा गया था।
शिक्षा पूरी होने के बाद नौकरी मिलने पर छात्रों को यह धनराशि वापस करनी होगी। फिलहाल इस राशि को ब्याज मुक्त रखने का प्रस्ताव है लेकिन आगे चलकर मामूली ब्याज का प्रावधान भी किया जा सकता है।10वीं पास एक लाख छात्रओं को मिलेंगे ै 10 हजार1लखनऊ : योगी सरकार कन्या विद्या धन की जगह पर हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली एक लाख मेधावी छात्रओं को एकमुश्त 10 हजार रुपये देने पर मंथन कर रही है।
इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड आगामी नौ जून को दोपहर 12.30 बजे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम घोषित करेगा। यह जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव शैल यादव ने दी है। उन्होंने बताया कि पत्रकारों को रिजल्ट की विस्तृत जानकारी और परीक्षाफल की प्रतियां दी जाएंगी।
10वीं और 12वीं में 3404715 व 2656319 छात्र-छात्रएं पंजीकृत थे। इनमें से 10वीं के 389658 और 12वीं के 204845 छात्र-छात्रओं ने परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। अब 54 लाख 66 हजार 531 परीक्षार्थियों को परिणाम का इंतजार है।
इलाहाबाद : अशासकीय माध्यमिक कालेजों से अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे कालेज ले जाना आसान नहीं होगा। इसमें कालेजों का प्रबंधतंत्र सबसे बड़ी बाधा है और यदि प्रबंधतंत्र तैयार भी हो जाये तो अतिरिक्त शिक्षकों का प्रमोशन व वरिष्ठता आदि कैसे तय होगी यह अभी स्पष्ट नहीं है। विभागीय अफसर तक प्रदेश सरकार के इस आदेश को बेहद कठिन मान रहे हैं। इसीलिए जिला और मंडल से अतिरिक्त शिक्षकों की सूचनाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
प्रदेश भर के अशासकीय व राजकीय माध्यमिक कालेजों के अतिरिक्त शिक्षकों को सरकार उन कालेजों में भेजना चाहती है, जहां छात्र-छात्रओं की संख्या पर्याप्त है, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है। माध्यमिक कालेजों के अतिरिक्त शिक्षकों का आकलन छात्र संख्या और स्कूल के वादन (शिक्षक को पढ़ाने के तय घंटे) के आधार पर हो रहा है। हर जिले में शहर से लेकर ग्रामीण तक ऐसे कालेज बहुतायत में हैं, जहां शिक्षक व छात्र संख्या मेल नहीं खाती।
राजकीय कालेजों में सरकार आसानी से अतिरिक्त शिक्षकों को इधर से उधर कर सकती है, वहीं अशासकीय कालेजों में शिक्षकों का फेरबदल उतना ही कठिन कार्य है। अब तक अशासकीय कालेजों में तबादले तक संबंधित स्कूलों के प्रबंधतंत्र की मर्जी से होते रहे हैं यानी जिस स्कूल से और दूसरे स्कूल में शिक्षक जाना चाहता उन दोनों के प्रबंधतंत्र मौखिक ही नहीं लिखित रूप से सहमत हों, तब अफसर अनुमोदन देते आये हैं। ऐसे में सरकार का अतिरिक्त शिक्षक हटाने का आदेश प्रबंधतंत्र को रास नहीं आ रहा है, लेकिन सब मौन हैं।
सरकार के निर्णय से यदि प्रबंधतंत्र भी सहमत हो जाए तब भी अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे कालेज ले जाने में वरिष्ठता और प्रमोशन सबसे बड़ी समस्या है। असल में अशासकीय कालेजों के प्रवक्ता या फिर एलटी ग्रेड शिक्षकों की वरिष्ठता यूनिट यानी कालेज स्तर पर ही बनती है। एलटी ग्रेड शिक्षक को प्रमोशन पाने के लिए पांच साल की सेवा और संबंधित विषय में योग्यता जरूरी है।
बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ कड़ी की जा सकती है। इस संबंध में डीएम ने बीएसए को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इससे बीएसए दफ्तर में हलचल मची हुई है।
रामपुर। ब्लाक संसाधन केन्द्र पर फाइल जमा करने के लिए सोमवार को अंतिम दिन है। मदरसा अनुदेशक और विद्या केन्द्रों के आचार्य बीआरसी पर फाइल जमा कर सकते हैं। करीब बीस साल पहले मदरसों के बच्चों को हिदीं, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान आदि विषय पढ़ाने के लिए मदरसा अनुदेशक रखे गए थे। वहीं विद्या केन्द्रों पर आचार्यों की नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2006 के बाद इन्हें हटा दिया गया था। तभी से वे नौकरी की मांग कर रहे थे। अब बेसिक शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और इंटर पास अनुदेशक आचार्य को शिक्षा प्रेरक बनाने का निर्णय लिया है, जबकि स्नातक अनुदेशक आचार्यों को बीटीसी कराई जाएगी।
सोने की खेती, खेती-किसानी, समझदार लडकियां, देवताओं का अहंकार, प्यारी मां मदर टेरेसा, पानी स्वच्छता एवं महिलाओं का स्वास्थ्य, जंगल में रोटी, रेल का पास, हमारा ब्रह्मांड, भारत के प्रमुख वाद्य यंत्र, धरती की पाती, संस्कृति, जल देवा, शेर व गिरगिट, पृथ्वी घूमती है, शहीद आजाद, जय जय भारत देश, हमारे पथ प्रदर्शक, किसान की बेटी, राष्ट्रीय अखंडता व छोटे परिवारों के आदर्श आदि पुस्तकें भेजी गई हैं।
साक्षर भारत मिशन के तहत 1054 ग्राम पंचायतों में संचालित लोक शिक्षा केंद्रों पर पुस्तकालय की स्थापना होगी। इसमें कानून, रेल, संस्कृति, कृषि सहित अन्य सामाजिक सरोकार से जुड़ी किताबें उपलब्ध रहेंगी। जिसे पढ़कर नवसाक्षर कर्तव्य व अधिकार से परिचित होंगे। इसके लिए 64 किताबों की खेप आ चुकी है। केंद्रों तक पहुंचाने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले 14 से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2014 में साक्षर भारत मिशन के तहत गांवों में लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की गई थी। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक ढाई लाख लोगों को अक्षर ज्ञान कराया जा चुका है। अब इनकी जिंदगी को सामान्य व्यक्ति की तरह करने के लिए सरकार ने पुस्तकालय स्थापना की व्यवस्था की है। ताकि अक्षर ज्ञान प्राप्त कर चुके नवसाक्षर स्वाध्याय के माध्यम से अपने जीवन स्तर को आगे बढ़ा सकें। पुस्तकालय में कृषि, परिवार, कानून, प्रदूषण, रेल पास, फसल चक्र, स्वास्थ्य, संगीत सहित अन्य किताबें केंद्र पर मुहैया कराई जाएंगी।
विद्यालय के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने धनेवा में भूमि उपलब्ध कराई है। राजकीय महाविद्यालय के पीछे मिले भूमि को एक बार केंद्रीय टीम ने देख लिया है। छह सदस्यीय टीम पहुंच कर भूमि को देखेगी तथा निर्माण की हरी झंडी देगी।
प्राथमिक स्तर से प्रारंभ होगा :
डीआइओएस जिला विद्यालय निरीक्षक कालीचरन भारती ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय को अस्थाई रूप से प्राथमिक स्तर तक जुलाई से प्रारंभ किया जाएगा। शिक्षकों की तैनाती बड़े स्तर का मामला है।
इलाहाबाद : शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकिट हाउस में मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याएं बताईं। नेतृत्व डॉ. शैलेश पांडेय ने किया। बताया कि सरप्लस शिक्षकों के नाम पर शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है जो तर्क संगत नहीं है। पूर्ववर्ती सरकारों की गलत शिक्षा नीतियों के कारण अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में छात्र संख्या में गिरावट आयी है जिसका ठीकरा अध्यापकों पर फोड़ना ठीक नहीं है।
बताया कि चयन बोर्ड द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया में विलम्ब के कारण आज लगभग 70 प्रतिशत विद्यालयों में अंग्रेजी, गणित, विज्ञान पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं हैं। प्रदेश के व्यायाम, कला, संगीत के अध्यापकों का प्रवक्ता पदनाम छीनने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक किसी भी प्रकार की पेंशन व्यवस्था से वंचित हैं। शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव और मातृत्व अवकाश नहीं मिल पा रहा है। इन समस्याओं पर सीएम ने उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस दौरान अजय सिंह, इंद्रदेव पांडेय मौजूद रहे।
माध्यमिक शिक्षा महकमे के फेरबदल में अफसरों की चरित्र पंजिका देखी जा रही है लेकिन, वरिष्ठ अफसरों का प्रमोशन आंख मूंदकर किया जा रहा है। पिछले दिनों मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक यानी जेडी की डीपीसी का औपचारिक पत्र अब तक जारी नहीं हो सका है, क्योंकि पांच अफसरों के प्रमोशन में एक दागी की भी पदोन्नति का प्रस्ताव है। इसकी शासन तक शिकायत हो चुकी है और अब अगले सप्ताह फिर शिकायत करने की तैयारी है किस तरह से आरोपी अफसरों को गले लगाया जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा महकमे में प्रमोशन और फेरबदल की सूची बनाने की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। इसमें विभागीय अफसर अपनों को पदोन्नति देने और चहेतों को सही स्थानों पर नियुक्ति दिलाने की प्रक्रिया में जुटे हैं। पिछले दिनों शासन स्तर पर जेडी की पदोन्नति हुई है। छह पदों के सापेक्ष पांच को पदोन्नत करने की तैयारी है। इसमें दो अफसरों अनिल भूषण चतुर्वेदी और ओम प्रकाश द्विवेदी का नाम सूची से जानबूझकर बाहर कर दिया गया। कहा गया कि उन पर पुरानी जांच लंबित है, जबकि दोनों अफसर शासन को प्रत्यावेदन दे चुके हैं। नियमानुसार यदि किसी मामले में प्रत्यावेदन दिया जा चुका हो तो उसे अफसर को डीपीसी से वंचित नहीं किया जा सकता। पदोन्नति सूची से इन दो अफसरों का हटना इसलिए जरूरी था क्योंकि विभागीय 'बड़े' अफसर को अपने करीबी अफसर को पदोन्नति देनी थी।
इसीलिए सूची में पहले तीन नाम संतराम सोनी, संजय यादव व सुरेंद्र तिवारी के बाद अजय कुमार द्विवेदी और फिर अरविंद पांडेय को पदोन्नति सूची में शामिल किया गया। इसमें अरविंद कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने बस्ती मंडल का जेडी रहने के दौरान संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षिका की नियुक्ति में अनियमितता की है। इस संबंध में बीते 11 मई को ही शासन से अरविंद पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। इसके पहले माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने भी चयन पर सवाल खड़े किये हैं। इतना ही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्टैंडिंग काउंसिल उपेंद्र सिंह ने भी कड़ी टिप्पणी की है। यह प्रकरण अभी खत्म नहीं हुआ है फिर भी अफसरों ने उनकी पदोन्नति के लिए नियमों को किनारे कर दिया। दो दिन पहले शासन में इसकी शिकायत हुई तो हलचल मच गई। इसका यह असर रहा कि जेडी की पदोन्नति सूची जारी नहीं हो रही है। अगले सप्ताह नए सिरे से उप मुख्यमंत्री व शासन में फिर शिकायत होना है।
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जून की तपन में बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए स्कूलों को बंद कर दिया जाता है। कुछ ऐसा ही हाल कड़ाके की ठंड में भी होता है। इससे इतर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से कम उम्र के मासूमों को मुट्ठी भर पंजीरी के लिए तपन भरे दिनों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुलाया जाता है। इन केंद्रों पर पंखे तक नहीं हैं। बच्चों, माताओं व किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए गांवों से लेकर शहरों तक संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उनको पोषाहार देने की व्यवस्था है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए गर्म भोजन और पंजीरी की व्यवस्था होती है। खाने के लिए साढ़े तीन रुपये प्रति बच्चे की दर से सरकार धन देती है। आंगनबाड़ी केंद्रों की सहायिका मेन्यू के अनुसार भोजन पकाती हैं। हॉट कुक्ड भोजन के लिए अक्टूबर में धन आया था, जिससे नवंबर में हॉट कुक्ड भोजन बच्चों को दिया गया था। मार्च में करीब पंद्रह दिनों के लिए हॉटकुक्ड भोजन का धन दिया गया है। इसके बाद से अब तक केंद्रों पर चूल्हे नहीं जले। अब बच्चों को प्रतिदिन केवल पचास ग्राम पंजीरी दी जाती है। अभिभावकों का कहना है कि इतने छोटे बच्चों को इस तरह की गर्मी में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुलाया जाता है, जबकि वहां पंखे तक नहीं लगे हैं। ऐसे में मासूमों के बीमार होने का खतरा बना रहता है। आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश संगठन मंत्री एवं गोसाईगंज के रसूलपुर केंद्र की संचालिका रामदेवी वर्मा कहती हैं कि गर्मी व सर्दी में इंटर तक के स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र कभी बंद नहीं किए जाते। ऐसा तब है जबकि यहां तीन से छह साल तक के बच्चे पढ़ते हैं। हॉटकुक्ड साल में सिर्फ दो-चार महीने ही बन पाता है। इसके अलावा पोषाहार भी समाप्त कर दिया जाता है। लखनऊः बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जल्द ही आरटीई की दूसरी सूची जारी की जाएगी। दूसरी सूची में करीब दस हजार बच्चों के नाम शामिल रहेंगे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक दूसरी सूची के साथ ही पहली सूची में गड़बड़ रहे नामों को संशोधित करते हुए उनकी भी सूची जारी की जाएगी। शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पच्चीस अप्रैल को आरटीई की पहली दाखिला सूची जारी की गई। पहली सूची में करीब दो हज़ार छः सौ बच्चों के नाम शामिल थे। विभाग द्वारा शुरुआत में किए गए दावों के तहत दूसरी सूची भी दस मई तक जारी होनी थी। मगर पहली सूची में करीब छः सौ बच्चों के नामों में रही अनियमितताओं के चलते दूसरी सूची में भी प्रभावित रही। जिस कारण अभिभावक रोजाना समस्याओं का सामना करने को मजबूर रहे। इसे विभागीय शिथिलता का ही नतीजा का जाएगा कि पाँच जून तक भी आरटीई की दूसरी सूची जारी नहीं हो सकी। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग ग्यारह जून तक दूसरी सूची जारी किए जाने का दम भर रहा है। इसमें करीब दस हजार नाम शामिल रहेंगे। बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी के मुताबिक पहली सूची में जो गलती रही, उसे सही कर लिया गया है। संशोधित और दूसरी सूची ग्यारह जून को जारी किए जाने का प्रयास किया जा रहा। लखनऊ : विदेश में जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक छात्रों की मदद अब राज्य सरकार करेगी। उन्हें इसके लिए फॉरेन एजुकेशन एंड रिसर्च स्कालरशिप के तहत आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी, हालांकि यह धनराशि उन्हें बाद में वापस करनी होगी। छात्रों को इसके लिए कोई ब्याज नहीं देना होगा। अगले सत्र से यह योजना शुरू की जा सकती है। समाज कल्याण विभाग अभी प्रदेश या प्रदेश बाहर के शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति करता है। इनमें कई छात्र ऐसे होते हैं जो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहते हैं लेकिन, आर्थिक रूप से कमजोर होने के नाते नहीं जा पाते। समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री के अनुसार विभाग ऐसे छात्रों का सपना पूरा करेगा। हालांकि सिर्फ उच्च शिक्षा के लिए ही यह योजना लागू की जाएगी। योजना में उन्हीं छात्रों को शामिल किए जाने की योजना है, जिनके माता-पिता की सालाना आय छह लाख से कम हो। गौरतलब है कि पूर्व की समाजवादी सरकार में भी इस योजना का प्रस्ताव किया गया था लेकिन, इसे अमल में नहीं लाया जा सका। योजना के तहत एक भी छात्र को विदेश में शिक्षा के लिए नहीं भेजा गया था। शिक्षा पूरी होने के बाद नौकरी मिलने पर छात्रों को यह धनराशि वापस करनी होगी। फिलहाल इस राशि को ब्याज मुक्त रखने का प्रस्ताव है लेकिन आगे चलकर मामूली ब्याज का प्रावधान भी किया जा सकता है।दसवीं पास एक लाख छात्रओं को मिलेंगे ै दस हजारएकलखनऊ : योगी सरकार कन्या विद्या धन की जगह पर हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली एक लाख मेधावी छात्रओं को एकमुश्त दस हजार रुपये देने पर मंथन कर रही है। इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड आगामी नौ जून को दोपहर बारह.तीस बजे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम घोषित करेगा। यह जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव शैल यादव ने दी है। उन्होंने बताया कि पत्रकारों को रिजल्ट की विस्तृत जानकारी और परीक्षाफल की प्रतियां दी जाएंगी। दसवीं और बारहवीं में चौंतीस लाख चार हज़ार सात सौ पंद्रह व छब्बीस लाख छप्पन हज़ार तीन सौ उन्नीस छात्र-छात्रएं पंजीकृत थे। इनमें से दसवीं के तीन लाख नवासी हज़ार छः सौ अट्ठावन और बारहवीं के दो लाख चार हज़ार आठ सौ पैंतालीस छात्र-छात्रओं ने परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। अब चौवन लाख छयासठ हजार पाँच सौ इकतीस परीक्षार्थियों को परिणाम का इंतजार है। इलाहाबाद : अशासकीय माध्यमिक कालेजों से अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे कालेज ले जाना आसान नहीं होगा। इसमें कालेजों का प्रबंधतंत्र सबसे बड़ी बाधा है और यदि प्रबंधतंत्र तैयार भी हो जाये तो अतिरिक्त शिक्षकों का प्रमोशन व वरिष्ठता आदि कैसे तय होगी यह अभी स्पष्ट नहीं है। विभागीय अफसर तक प्रदेश सरकार के इस आदेश को बेहद कठिन मान रहे हैं। इसीलिए जिला और मंडल से अतिरिक्त शिक्षकों की सूचनाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। प्रदेश भर के अशासकीय व राजकीय माध्यमिक कालेजों के अतिरिक्त शिक्षकों को सरकार उन कालेजों में भेजना चाहती है, जहां छात्र-छात्रओं की संख्या पर्याप्त है, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है। माध्यमिक कालेजों के अतिरिक्त शिक्षकों का आकलन छात्र संख्या और स्कूल के वादन के आधार पर हो रहा है। हर जिले में शहर से लेकर ग्रामीण तक ऐसे कालेज बहुतायत में हैं, जहां शिक्षक व छात्र संख्या मेल नहीं खाती। राजकीय कालेजों में सरकार आसानी से अतिरिक्त शिक्षकों को इधर से उधर कर सकती है, वहीं अशासकीय कालेजों में शिक्षकों का फेरबदल उतना ही कठिन कार्य है। अब तक अशासकीय कालेजों में तबादले तक संबंधित स्कूलों के प्रबंधतंत्र की मर्जी से होते रहे हैं यानी जिस स्कूल से और दूसरे स्कूल में शिक्षक जाना चाहता उन दोनों के प्रबंधतंत्र मौखिक ही नहीं लिखित रूप से सहमत हों, तब अफसर अनुमोदन देते आये हैं। ऐसे में सरकार का अतिरिक्त शिक्षक हटाने का आदेश प्रबंधतंत्र को रास नहीं आ रहा है, लेकिन सब मौन हैं। सरकार के निर्णय से यदि प्रबंधतंत्र भी सहमत हो जाए तब भी अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे कालेज ले जाने में वरिष्ठता और प्रमोशन सबसे बड़ी समस्या है। असल में अशासकीय कालेजों के प्रवक्ता या फिर एलटी ग्रेड शिक्षकों की वरिष्ठता यूनिट यानी कालेज स्तर पर ही बनती है। एलटी ग्रेड शिक्षक को प्रमोशन पाने के लिए पांच साल की सेवा और संबंधित विषय में योग्यता जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ कड़ी की जा सकती है। इस संबंध में डीएम ने बीएसए को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इससे बीएसए दफ्तर में हलचल मची हुई है। रामपुर। ब्लाक संसाधन केन्द्र पर फाइल जमा करने के लिए सोमवार को अंतिम दिन है। मदरसा अनुदेशक और विद्या केन्द्रों के आचार्य बीआरसी पर फाइल जमा कर सकते हैं। करीब बीस साल पहले मदरसों के बच्चों को हिदीं, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान आदि विषय पढ़ाने के लिए मदरसा अनुदेशक रखे गए थे। वहीं विद्या केन्द्रों पर आचार्यों की नियुक्ति की गई थी। वर्ष दो हज़ार छः के बाद इन्हें हटा दिया गया था। तभी से वे नौकरी की मांग कर रहे थे। अब बेसिक शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और इंटर पास अनुदेशक आचार्य को शिक्षा प्रेरक बनाने का निर्णय लिया है, जबकि स्नातक अनुदेशक आचार्यों को बीटीसी कराई जाएगी। सोने की खेती, खेती-किसानी, समझदार लडकियां, देवताओं का अहंकार, प्यारी मां मदर टेरेसा, पानी स्वच्छता एवं महिलाओं का स्वास्थ्य, जंगल में रोटी, रेल का पास, हमारा ब्रह्मांड, भारत के प्रमुख वाद्य यंत्र, धरती की पाती, संस्कृति, जल देवा, शेर व गिरगिट, पृथ्वी घूमती है, शहीद आजाद, जय जय भारत देश, हमारे पथ प्रदर्शक, किसान की बेटी, राष्ट्रीय अखंडता व छोटे परिवारों के आदर्श आदि पुस्तकें भेजी गई हैं। साक्षर भारत मिशन के तहत एक हज़ार चौवन ग्राम पंचायतों में संचालित लोक शिक्षा केंद्रों पर पुस्तकालय की स्थापना होगी। इसमें कानून, रेल, संस्कृति, कृषि सहित अन्य सामाजिक सरोकार से जुड़ी किताबें उपलब्ध रहेंगी। जिसे पढ़कर नवसाक्षर कर्तव्य व अधिकार से परिचित होंगे। इसके लिए चौंसठ किताबों की खेप आ चुकी है। केंद्रों तक पहुंचाने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले चौदह से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष दो हज़ार चौदह में साक्षर भारत मिशन के तहत गांवों में लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की गई थी। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक ढाई लाख लोगों को अक्षर ज्ञान कराया जा चुका है। अब इनकी जिंदगी को सामान्य व्यक्ति की तरह करने के लिए सरकार ने पुस्तकालय स्थापना की व्यवस्था की है। ताकि अक्षर ज्ञान प्राप्त कर चुके नवसाक्षर स्वाध्याय के माध्यम से अपने जीवन स्तर को आगे बढ़ा सकें। पुस्तकालय में कृषि, परिवार, कानून, प्रदूषण, रेल पास, फसल चक्र, स्वास्थ्य, संगीत सहित अन्य किताबें केंद्र पर मुहैया कराई जाएंगी। विद्यालय के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने धनेवा में भूमि उपलब्ध कराई है। राजकीय महाविद्यालय के पीछे मिले भूमि को एक बार केंद्रीय टीम ने देख लिया है। छह सदस्यीय टीम पहुंच कर भूमि को देखेगी तथा निर्माण की हरी झंडी देगी। प्राथमिक स्तर से प्रारंभ होगा : डीआइओएस जिला विद्यालय निरीक्षक कालीचरन भारती ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय को अस्थाई रूप से प्राथमिक स्तर तक जुलाई से प्रारंभ किया जाएगा। शिक्षकों की तैनाती बड़े स्तर का मामला है। इलाहाबाद : शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकिट हाउस में मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याएं बताईं। नेतृत्व डॉ. शैलेश पांडेय ने किया। बताया कि सरप्लस शिक्षकों के नाम पर शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है जो तर्क संगत नहीं है। पूर्ववर्ती सरकारों की गलत शिक्षा नीतियों के कारण अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में छात्र संख्या में गिरावट आयी है जिसका ठीकरा अध्यापकों पर फोड़ना ठीक नहीं है। बताया कि चयन बोर्ड द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया में विलम्ब के कारण आज लगभग सत्तर प्रतिशत विद्यालयों में अंग्रेजी, गणित, विज्ञान पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं हैं। प्रदेश के व्यायाम, कला, संगीत के अध्यापकों का प्रवक्ता पदनाम छीनने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं एक अप्रैल दो हज़ार पाँच के बाद नियुक्त शिक्षक किसी भी प्रकार की पेंशन व्यवस्था से वंचित हैं। शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव और मातृत्व अवकाश नहीं मिल पा रहा है। इन समस्याओं पर सीएम ने उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस दौरान अजय सिंह, इंद्रदेव पांडेय मौजूद रहे। माध्यमिक शिक्षा महकमे के फेरबदल में अफसरों की चरित्र पंजिका देखी जा रही है लेकिन, वरिष्ठ अफसरों का प्रमोशन आंख मूंदकर किया जा रहा है। पिछले दिनों मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक यानी जेडी की डीपीसी का औपचारिक पत्र अब तक जारी नहीं हो सका है, क्योंकि पांच अफसरों के प्रमोशन में एक दागी की भी पदोन्नति का प्रस्ताव है। इसकी शासन तक शिकायत हो चुकी है और अब अगले सप्ताह फिर शिकायत करने की तैयारी है किस तरह से आरोपी अफसरों को गले लगाया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा महकमे में प्रमोशन और फेरबदल की सूची बनाने की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। इसमें विभागीय अफसर अपनों को पदोन्नति देने और चहेतों को सही स्थानों पर नियुक्ति दिलाने की प्रक्रिया में जुटे हैं। पिछले दिनों शासन स्तर पर जेडी की पदोन्नति हुई है। छह पदों के सापेक्ष पांच को पदोन्नत करने की तैयारी है। इसमें दो अफसरों अनिल भूषण चतुर्वेदी और ओम प्रकाश द्विवेदी का नाम सूची से जानबूझकर बाहर कर दिया गया। कहा गया कि उन पर पुरानी जांच लंबित है, जबकि दोनों अफसर शासन को प्रत्यावेदन दे चुके हैं। नियमानुसार यदि किसी मामले में प्रत्यावेदन दिया जा चुका हो तो उसे अफसर को डीपीसी से वंचित नहीं किया जा सकता। पदोन्नति सूची से इन दो अफसरों का हटना इसलिए जरूरी था क्योंकि विभागीय 'बड़े' अफसर को अपने करीबी अफसर को पदोन्नति देनी थी। इसीलिए सूची में पहले तीन नाम संतराम सोनी, संजय यादव व सुरेंद्र तिवारी के बाद अजय कुमार द्विवेदी और फिर अरविंद पांडेय को पदोन्नति सूची में शामिल किया गया। इसमें अरविंद कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने बस्ती मंडल का जेडी रहने के दौरान संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षिका की नियुक्ति में अनियमितता की है। इस संबंध में बीते ग्यारह मई को ही शासन से अरविंद पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। इसके पहले माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने भी चयन पर सवाल खड़े किये हैं। इतना ही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्टैंडिंग काउंसिल उपेंद्र सिंह ने भी कड़ी टिप्पणी की है। यह प्रकरण अभी खत्म नहीं हुआ है फिर भी अफसरों ने उनकी पदोन्नति के लिए नियमों को किनारे कर दिया। दो दिन पहले शासन में इसकी शिकायत हुई तो हलचल मच गई। इसका यह असर रहा कि जेडी की पदोन्नति सूची जारी नहीं हो रही है। अगले सप्ताह नए सिरे से उप मुख्यमंत्री व शासन में फिर शिकायत होना है।
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न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि हम सभी नारियल पानी तो पीते हैं लेकिन इसकी मलाई को छोड़ देते हैं. लेकिन , नारियल की मलाई में कई हेल्थ बेनिफिट्स उपस्थित हैं. इसलिए आपको इसे जरूर खाना चाहिए. नारियल की मलाई में फैट और एमसीटी होते हैं, जो दूसरे फैट की तुलना में स्वास्थ्य वर्धक होते हैं. यह फैट नुकसानदायक नहीं होता है, ऐसे में आप इसका सरलता से सेवन कर सकते हैं.
नारियल की मलाई में एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा में पाया जाता है. साथ ही इसमें हेल्दी फैट और फाइबर भी उपस्थित होता है. ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह मलाई ब्लड शुगर को सरलता से कंट्रोल करता है.
अगर आपका भी वजन तेजी से बढ़ रहा है तो आप नारियल पानी पीने के अलाव उसकी मलाई भी ज़रूर खाएं. इसमें हेल्दी फैट होता है जो आपका वजन नहीं बढ़ने देता. इसमें उपस्थित फाइबर पेट को लंबे समय तक के लिए फुल रखता है, जिससे भूख कम लगती है.
अगर आपको हर छोटी-बड़ी बात पर मानसिक तनाव होने लगता है तो आपको इसकी मलाई का सेवन ज़रूर करना चाहिए. नारियल की मलाई में कई न्यूट्रिएंट्स हैं, जो दिगमग को स्ट्रेस फ्री रखते हैं. इसमें सीमित मात्रा में सैचुरेटेड फैट्स भी होता है. ऐसे में इस मलाई का सेवन कम मात्रा में करना बेस्ट साबित हो सकता है.
नारियल के मलाई में पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं,जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं. इसके सेवन से आप कई क्रोनिक डिजीज से अपना बचाव कर सकते हैं. लो कार्ब, ग्लूटेन-फ्री या नट फ्री डाइट करने वाले लोगों के लिए नारियल का उपयोग बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
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न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि हम सभी नारियल पानी तो पीते हैं लेकिन इसकी मलाई को छोड़ देते हैं. लेकिन , नारियल की मलाई में कई हेल्थ बेनिफिट्स उपस्थित हैं. इसलिए आपको इसे जरूर खाना चाहिए. नारियल की मलाई में फैट और एमसीटी होते हैं, जो दूसरे फैट की तुलना में स्वास्थ्य वर्धक होते हैं. यह फैट नुकसानदायक नहीं होता है, ऐसे में आप इसका सरलता से सेवन कर सकते हैं. नारियल की मलाई में एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा में पाया जाता है. साथ ही इसमें हेल्दी फैट और फाइबर भी उपस्थित होता है. ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह मलाई ब्लड शुगर को सरलता से कंट्रोल करता है. अगर आपका भी वजन तेजी से बढ़ रहा है तो आप नारियल पानी पीने के अलाव उसकी मलाई भी ज़रूर खाएं. इसमें हेल्दी फैट होता है जो आपका वजन नहीं बढ़ने देता. इसमें उपस्थित फाइबर पेट को लंबे समय तक के लिए फुल रखता है, जिससे भूख कम लगती है. अगर आपको हर छोटी-बड़ी बात पर मानसिक तनाव होने लगता है तो आपको इसकी मलाई का सेवन ज़रूर करना चाहिए. नारियल की मलाई में कई न्यूट्रिएंट्स हैं, जो दिगमग को स्ट्रेस फ्री रखते हैं. इसमें सीमित मात्रा में सैचुरेटेड फैट्स भी होता है. ऐसे में इस मलाई का सेवन कम मात्रा में करना बेस्ट साबित हो सकता है. नारियल के मलाई में पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं,जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं. इसके सेवन से आप कई क्रोनिक डिजीज से अपना बचाव कर सकते हैं. लो कार्ब, ग्लूटेन-फ्री या नट फ्री डाइट करने वाले लोगों के लिए नारियल का उपयोग बेहतर ऑप्शन हो सकता है.
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रायपुर(वि)। अगर आप 10वीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। 10वीं पास छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए कैंपस साक्षात्कार रखा गया है। साक्षात्कार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था माना कैम्प में नौ जून की सुबह 10 बजे शुरू होगा। मारुति सुजुकी मोटर प्राइवेट लिमिटेड गुरुग्राम, हरियाणा द्वारा आइटीआइ से उत्तीर्ण प्रशिक्षार्थियों के लिए फिटर, वेल्डर, पेंटर, एमएमवी, डीजल मैकेनिक, मोटर मैकेनिक, टर्नर, मशीनिष्ट, सीओइ (आटोमोबाईल) ट्रेक्टर मेकैनिक आदि पदों के लिए साक्षात्कार लिया जाएगा। आवेदकों का 10 वीं में 40 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, माना कैम्प के प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि इसके लिए युवाओं की आयु 18 से 26 वर्ष के बीच होनी चाहिए। चयनित युवाओं को बेसिक स्टाइपेंड 12 हजार 900 रूपये , हाउसरेंट 4,605 रूपये, यूनिफार्म मेंटेनेंस 1,425 रूपये, यात्रा भत्ता दो हजार रूपये, अतिरिक्त परिवहन भत्ता 600 रूपये, भोजन भत्ता 300 रूपये, उपस्थिति इनाम 4,160 रूपये, भविष्य निधि 12 प्रतिशत तथा चिकित्सा भत्ता 50 रूपये दिया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार कैंपस इंटरव्यू में सम्मलित हो सकते है ।
रायपुर के मोवा स्थित शंकरा हुंडई शो-रूम ने पर्यावरण दिवस के मौके पर पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मोवा पुलिस थाने में भी पौधे लगाए गए। इसके साथ ही शो-रूम और वर्कशाप में आने वाले प्रत्येक ग्राहकों को उपहार स्वरूप पौधा भेंट किया गया। यहां आने वाली सभी कारो के लिए मुफ्त पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण) जांच का भी आयोजन हुआ। शंकरा हुंडई के निदेशक गौरव मध्यानी ने बताया कि पर्यावरण की रक्षा करने के साथ ही उनके कर्मचारी, ग्राहकों, और अन्य लोगों को जागरूक करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किया गया। शंकरा हुंडई प्रबंधन ने मिलकर यह शपथ लिया कि वातावरण के लिए खतरनाक प्लास्टिक जैसे कई पदार्थों का उपयोग नहीं करेंगे और सोलर एनर्जी जैसी इको फ्रेंडली चीजों को ज्यादा से ज्यादा प्रयोग में लाएंगे।
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रायपुर। अगर आप दसवीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। दसवीं पास छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए कैंपस साक्षात्कार रखा गया है। साक्षात्कार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था माना कैम्प में नौ जून की सुबह दस बजे शुरू होगा। मारुति सुजुकी मोटर प्राइवेट लिमिटेड गुरुग्राम, हरियाणा द्वारा आइटीआइ से उत्तीर्ण प्रशिक्षार्थियों के लिए फिटर, वेल्डर, पेंटर, एमएमवी, डीजल मैकेनिक, मोटर मैकेनिक, टर्नर, मशीनिष्ट, सीओइ ट्रेक्टर मेकैनिक आदि पदों के लिए साक्षात्कार लिया जाएगा। आवेदकों का दस वीं में चालीस प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, माना कैम्प के प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि इसके लिए युवाओं की आयु अट्ठारह से छब्बीस वर्ष के बीच होनी चाहिए। चयनित युवाओं को बेसिक स्टाइपेंड बारह हजार नौ सौ रूपये , हाउसरेंट चार,छः सौ पाँच रूपये, यूनिफार्म मेंटेनेंस एक,चार सौ पच्चीस रूपये, यात्रा भत्ता दो हजार रूपये, अतिरिक्त परिवहन भत्ता छः सौ रूपये, भोजन भत्ता तीन सौ रूपये, उपस्थिति इनाम चार,एक सौ साठ रूपये, भविष्य निधि बारह प्रतिशत तथा चिकित्सा भत्ता पचास रूपये दिया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार कैंपस इंटरव्यू में सम्मलित हो सकते है । रायपुर के मोवा स्थित शंकरा हुंडई शो-रूम ने पर्यावरण दिवस के मौके पर पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मोवा पुलिस थाने में भी पौधे लगाए गए। इसके साथ ही शो-रूम और वर्कशाप में आने वाले प्रत्येक ग्राहकों को उपहार स्वरूप पौधा भेंट किया गया। यहां आने वाली सभी कारो के लिए मुफ्त पीयूसी जांच का भी आयोजन हुआ। शंकरा हुंडई के निदेशक गौरव मध्यानी ने बताया कि पर्यावरण की रक्षा करने के साथ ही उनके कर्मचारी, ग्राहकों, और अन्य लोगों को जागरूक करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किया गया। शंकरा हुंडई प्रबंधन ने मिलकर यह शपथ लिया कि वातावरण के लिए खतरनाक प्लास्टिक जैसे कई पदार्थों का उपयोग नहीं करेंगे और सोलर एनर्जी जैसी इको फ्रेंडली चीजों को ज्यादा से ज्यादा प्रयोग में लाएंगे।
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नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों के खिली धूप के बाद आज फिर से ठंड और कोहरे ने वापसी की. कोहरे के कारण सुबह सड़कों पर लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. वहीं दिल्ली से चलने वाली कई ट्रेनें और फ्लाइट्स भी लेट हैं.
कोहरे और विजिबिलिटी कम होने के कारण दिल्ली से चलने वाली 21 ट्रेनें लेट हैं और 4 का समय बदला गया है. वहीं 13 ट्रेन कैंसिल कर दी गई हैं. दिल्ली से उड़ान भरने वाली कई फ्लाइट्स भी कोहरे के कारण प्रभावित है. टर्मिनल 3 एयरपोर्ट एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में भी प्रदूषण का स्तर खतरे के लेवल पर नजर आ रहा है.
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले 2-3 दिनों में लोगों को फिलहाल ठंड से राहत नहीं मिलने वाली है. पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर उत्तर भारत पर साफ देखा जा सकता है. ठंड के कारण दिल्ली और एनसीआर के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री है, जबकि अधिकतम 22 डिग्री रहने का अमुमान है. मौसम विभाग ने अनुमान आनेवाले कुछ दिनों में हलकी बारिश भी हो सकती है.
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नई दिल्लीः दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों के खिली धूप के बाद आज फिर से ठंड और कोहरे ने वापसी की. कोहरे के कारण सुबह सड़कों पर लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. वहीं दिल्ली से चलने वाली कई ट्रेनें और फ्लाइट्स भी लेट हैं. कोहरे और विजिबिलिटी कम होने के कारण दिल्ली से चलने वाली इक्कीस ट्रेनें लेट हैं और चार का समय बदला गया है. वहीं तेरह ट्रेन कैंसिल कर दी गई हैं. दिल्ली से उड़ान भरने वाली कई फ्लाइट्स भी कोहरे के कारण प्रभावित है. टर्मिनल तीन एयरपोर्ट एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में भी प्रदूषण का स्तर खतरे के लेवल पर नजर आ रहा है. मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दो-तीन दिनों में लोगों को फिलहाल ठंड से राहत नहीं मिलने वाली है. पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर उत्तर भारत पर साफ देखा जा सकता है. ठंड के कारण दिल्ली और एनसीआर के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर का न्यूनतम तापमान दस डिग्री है, जबकि अधिकतम बाईस डिग्री रहने का अमुमान है. मौसम विभाग ने अनुमान आनेवाले कुछ दिनों में हलकी बारिश भी हो सकती है.
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सात एक दिवसीय मैचों की सिरीज़ का चौथा मैच चंडीगढ़ में खेला जा रहा है.
इस सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया की टीम दो मैच जीतकर 2-0 से आगे हैं. जबकि एक मैच बारिश के कारण पूरा नहीं हो पाया था.
दो वनडे मैचों में भारत को भारत की धरती पर हराकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के हौसले बुलंद है जबकि हार के कारण भारतीय खिलाड़ी दबाव में हैं.
भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.
भारतीय टीम में तीन बदलाव किए गए हैं. टीम में सौरभ गांगुली, आरपी सिंह और मुरली कार्तिक को गौतम गंभीर, एस श्रीसंत और रोहित शर्मा के स्थान पर शामिल किया गया है.
ऑस्ट्रेलिया ने नैथन ब्रेकन को स्टुअर्ट क्लार्क की जगह लिया है.
टीम इस प्रकार हैः
भारतः सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, रॉबिन उथप्पा, युवराज सिंह, राहुल द्रविड़, महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), इरफ़ान पठान, हरभजन सिंह, ज़हीर ख़ान, मुरली कार्तिक और आरपी सिंह.
ऑस्ट्रेलियाः एडम गिलक्रिस्ट, मैथ्यू हेडन, ब्रैड हॉज, माइकल क्लार्क, रिकी पोंटिंग (कप्तान), एंड्र्यू साइमंड्स, ब्रैड हॉग, नैथन ब्रेकन, जेम्स होप्स, ब्रेट ली, मिशेल जॉनसन.
'वरिष्ठ खिलाड़ियों की जगह पक्की नहीं'
'कामयाबी इतनी बड़ी, अब हुआ अहसास'
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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सात एक दिवसीय मैचों की सिरीज़ का चौथा मैच चंडीगढ़ में खेला जा रहा है. इस सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया की टीम दो मैच जीतकर दो-शून्य से आगे हैं. जबकि एक मैच बारिश के कारण पूरा नहीं हो पाया था. दो वनडे मैचों में भारत को भारत की धरती पर हराकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के हौसले बुलंद है जबकि हार के कारण भारतीय खिलाड़ी दबाव में हैं. भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है. भारतीय टीम में तीन बदलाव किए गए हैं. टीम में सौरभ गांगुली, आरपी सिंह और मुरली कार्तिक को गौतम गंभीर, एस श्रीसंत और रोहित शर्मा के स्थान पर शामिल किया गया है. ऑस्ट्रेलिया ने नैथन ब्रेकन को स्टुअर्ट क्लार्क की जगह लिया है. टीम इस प्रकार हैः भारतः सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, रॉबिन उथप्पा, युवराज सिंह, राहुल द्रविड़, महेंद्र सिंह धोनी , इरफ़ान पठान, हरभजन सिंह, ज़हीर ख़ान, मुरली कार्तिक और आरपी सिंह. ऑस्ट्रेलियाः एडम गिलक्रिस्ट, मैथ्यू हेडन, ब्रैड हॉज, माइकल क्लार्क, रिकी पोंटिंग , एंड्र्यू साइमंड्स, ब्रैड हॉग, नैथन ब्रेकन, जेम्स होप्स, ब्रेट ली, मिशेल जॉनसन. 'वरिष्ठ खिलाड़ियों की जगह पक्की नहीं' 'कामयाबी इतनी बड़ी, अब हुआ अहसास'
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मूत्रप्रणाली के किसी भी हिस्से में होने वाले इंफेक्शन को मूत्र पथ में संक्रमण कहा जाता है और इसे अंग्रेजी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और यूटीआई के नाम से जाना जाता है। मूत्राशय में होने वाले संक्रमण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का सबसे आम प्रकार होता है और इसके मामले भी काफी देखे जाते हैं। वहीं किडनी में होने वाला संक्रमण जिसे पायलोनेफ्राइटिस भी कहा जाता है, वह भी मूत्र पथ में संक्रमण का एक प्रकार है और इसके मामले भी काफी कम देखे जाते हैं। यूटीआई एक आम समस्या है और विशेष रूप से महिलाओं में इसके मामले काफी देखे जाते हैं। लगभग आधी से ज्यादा महिलाओं को अपने जीवन में एक बार मूत्र पथ में संक्रमण जरूर होता है। मूत्र पथ में संक्रमण के बारे में माना जाता है, कि यह समस्या ठीक हो जाती है लेकिन कई बार इससे गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। आंकड़ों के अनुसार यूटीआई एक प्रचलित प्रसारित संक्रमण है, जो हर साल लगभग 15 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। हर तीन में से एक महिला 24 साल की उम्र से पहले ही मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित हो जाती है और वहीं लगभग 50 फीसद महिलाएं 35 साल से पहले जीवन में एक बार यूटीआई से ग्रसित हो जाती हैं। वहीं मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित होने वाली 30 प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें यह संक्रमण फिर से हो जाता है जिसे आरयूटीआई (rUTI) कहा जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो मूत्र पथ में संक्रमण को ब्लैडर इंफेक्शन के रूप जाना जाता है। यह आमतौर पर संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्म जीव मूत्र पथ में घुस जाने के कारण होता है। मूत्र पथ में घुस कर ये रोगाणु अपनी संख्या बढ़ाने लग जाते हैं और फिर उसके बाद संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है। मूत्र पथ में संक्रमण काफी दर्दनाक और परेशान कर देने वाली समस्या है और अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह गुर्दों को प्रभावित कर सकती है। मूत्र प्रणाली उन अंगों से मिलकर बनी है, जो पेशाब को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं इसमें मुख्य रूप से गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं। मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु आमतौर पर मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र प्रणाली तक पहुंचते है और फिर संक्रमण फैला देते हैं। मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले ज्यादातर प्रकार के रोगाणु आमतौर पर मानव मल में ही पाए जाते हैं। इसलिए ये रोगाणु किसी व्यक्ति की आंतों में या गुदा के आसपास होना भी एक सामान्य बात है। जब ये रोगाणु किसी तरह से मूत्र प्रणाली तक पहुंच जाते हैं, तो फिर संक्रमण फैलने लग जाता है।
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मूत्रप्रणाली के किसी भी हिस्से में होने वाले इंफेक्शन को मूत्र पथ में संक्रमण कहा जाता है और इसे अंग्रेजी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और यूटीआई के नाम से जाना जाता है। मूत्राशय में होने वाले संक्रमण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का सबसे आम प्रकार होता है और इसके मामले भी काफी देखे जाते हैं। वहीं किडनी में होने वाला संक्रमण जिसे पायलोनेफ्राइटिस भी कहा जाता है, वह भी मूत्र पथ में संक्रमण का एक प्रकार है और इसके मामले भी काफी कम देखे जाते हैं। यूटीआई एक आम समस्या है और विशेष रूप से महिलाओं में इसके मामले काफी देखे जाते हैं। लगभग आधी से ज्यादा महिलाओं को अपने जीवन में एक बार मूत्र पथ में संक्रमण जरूर होता है। मूत्र पथ में संक्रमण के बारे में माना जाता है, कि यह समस्या ठीक हो जाती है लेकिन कई बार इससे गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। आंकड़ों के अनुसार यूटीआई एक प्रचलित प्रसारित संक्रमण है, जो हर साल लगभग पंद्रह करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। हर तीन में से एक महिला चौबीस साल की उम्र से पहले ही मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित हो जाती है और वहीं लगभग पचास फीसद महिलाएं पैंतीस साल से पहले जीवन में एक बार यूटीआई से ग्रसित हो जाती हैं। वहीं मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित होने वाली तीस प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें यह संक्रमण फिर से हो जाता है जिसे आरयूटीआई कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो मूत्र पथ में संक्रमण को ब्लैडर इंफेक्शन के रूप जाना जाता है। यह आमतौर पर संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्म जीव मूत्र पथ में घुस जाने के कारण होता है। मूत्र पथ में घुस कर ये रोगाणु अपनी संख्या बढ़ाने लग जाते हैं और फिर उसके बाद संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है। मूत्र पथ में संक्रमण काफी दर्दनाक और परेशान कर देने वाली समस्या है और अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह गुर्दों को प्रभावित कर सकती है। मूत्र प्रणाली उन अंगों से मिलकर बनी है, जो पेशाब को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं इसमें मुख्य रूप से गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं। मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु आमतौर पर मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र प्रणाली तक पहुंचते है और फिर संक्रमण फैला देते हैं। मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले ज्यादातर प्रकार के रोगाणु आमतौर पर मानव मल में ही पाए जाते हैं। इसलिए ये रोगाणु किसी व्यक्ति की आंतों में या गुदा के आसपास होना भी एक सामान्य बात है। जब ये रोगाणु किसी तरह से मूत्र प्रणाली तक पहुंच जाते हैं, तो फिर संक्रमण फैलने लग जाता है।
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फुकुई/वाशिंगटन। शोधकर्ताओं को जापान के नागासाकी में डायनासोर के 8. 1 करोड़ साल पुराने दांतों के तीन टुकड़े मिले हैं। इन तीनों में एक जीवाश्म शाकाहारी समूह के अंकाइलोसोर का है, जो कि करीब 5 से 8 मीटर लंबे हड्डियों के कवच से ढंका था।
फुकुई प्रीफेक्चरल डायनासोर म्यूजियम और नागासाकी सिटी एजुकेशन बोर्ड की संयुक्त टीम ने बताया कि 10 गुणा 9 मिलीमीटर आकार के ये दांत जापान में अंकाइलोसोर के जीवाश्मों के मामले में चौथी खोज है। इसी प्रकार के जीवाश्म होकाइदो, ह्योगो और कुमामोतो में पाए गए थे। जीवाश्म से मिले शेष दोनों दांत मांसाहारी डायनासोरों के हैं। इनके बारे में अभी सुनिश्चित किया जाना बाकी है। फुकुई म्यूजियम के कजुनोरी मियाता ने कहा कि एक ही परत से तीन जीवाश्मों का मिलना अनोखा है।
अलास्का के देनाली नेशनल पार्क में बतख सरीखे डायनासोर के पदचिह्न मिले हैं। बतख सरीखे इन डायनासोर को हैड्रोसोर के नाम से जाना जाता है। हैड्रोसोर प्रायः शाकाहारी और दो पैरों वाले डायनासोर होते थे, जिनकी नाक बतख सरीखी थी। ये क्रिटेशियस काल में पाए जाते थे। इस ध्रुवीय क्षेत्र में इन पदचिह्नों के मिलने से यह स्पष्ट है कि ये डायनासोर न केवल बहुप्रजातीय झुंड में रहते थे बल्कि ध्रुवीय पारिस्थितिकी में भी पाए जाते थे।
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फुकुई/वाशिंगटन। शोधकर्ताओं को जापान के नागासाकी में डायनासोर के आठ. एक करोड़ साल पुराने दांतों के तीन टुकड़े मिले हैं। इन तीनों में एक जीवाश्म शाकाहारी समूह के अंकाइलोसोर का है, जो कि करीब पाँच से आठ मीटर लंबे हड्डियों के कवच से ढंका था। फुकुई प्रीफेक्चरल डायनासोर म्यूजियम और नागासाकी सिटी एजुकेशन बोर्ड की संयुक्त टीम ने बताया कि दस गुणा नौ मिलीमीटर आकार के ये दांत जापान में अंकाइलोसोर के जीवाश्मों के मामले में चौथी खोज है। इसी प्रकार के जीवाश्म होकाइदो, ह्योगो और कुमामोतो में पाए गए थे। जीवाश्म से मिले शेष दोनों दांत मांसाहारी डायनासोरों के हैं। इनके बारे में अभी सुनिश्चित किया जाना बाकी है। फुकुई म्यूजियम के कजुनोरी मियाता ने कहा कि एक ही परत से तीन जीवाश्मों का मिलना अनोखा है। अलास्का के देनाली नेशनल पार्क में बतख सरीखे डायनासोर के पदचिह्न मिले हैं। बतख सरीखे इन डायनासोर को हैड्रोसोर के नाम से जाना जाता है। हैड्रोसोर प्रायः शाकाहारी और दो पैरों वाले डायनासोर होते थे, जिनकी नाक बतख सरीखी थी। ये क्रिटेशियस काल में पाए जाते थे। इस ध्रुवीय क्षेत्र में इन पदचिह्नों के मिलने से यह स्पष्ट है कि ये डायनासोर न केवल बहुप्रजातीय झुंड में रहते थे बल्कि ध्रुवीय पारिस्थितिकी में भी पाए जाते थे।
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जुलाई 2022 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'गुलामी के समकालीन रूप' पर तैयार की गई एक रिपोर्ट अगस्त में पब्लिक हुई जिसमें कहा गया कि भारत में, बाल श्रम, जाति-आधारित भेदभाव और गरीबी एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। हमारे समाज में बाल श्रम को सिर्फ़ गरीबी के एक परिणाम के रूप में देखा जाता है जिसमें बच्चे की आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक स्थिति को दरकिनार कर दिया जाता है जबकि भारत में बाल मज़दूरी के पनपने की परिस्थितियों में जाति और उससे उत्पन्न भेदभाव और संसाधन की कमी पहली और मुख्य वजहें हैं।
डीडब्ल्यू द्वारा प्रकाशित एक लेख में सिद्धार्थ कारा (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, केनेडी स्कूल ऑफ़ गवर्मेंट में ह्यूमन ट्रैफिकिंग एंड मॉडर्न स्लेवरी प्रोग्राम के डायरेक्टर) कहते हैं, "हर एक बाल मज़दूर जिसका मैंने दस्तावेजीकरण किया है, एक अत्यधिक गरीब परिवार और एक तथाकथित निम्न जाति या अल्पसंख्यक समुदाय से आता है, जिसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों के रूप में जाना जाता है। " इस अल्पसंख्यक समुदाय की परिभाषा में हमें डिनोटिफाइड ट्राइब्स से से आनेवाले लोगों और बच्चों को भी देखने की ज़रूरत है। जब इन सभी वंचित समुदायों से बच्चे बाल मज़दूरी में जाते हैं तब वे शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत से भी दूर हो जाते हैं और बाल यौन हिंसा का सामना करते हैं।
ऐसे ही बाल मज़दूरी की वजह से यौन हिंसा के सर्वाइवर रहे और शिक्षा से भी दूर हो चुके बच्चों के लिए मथुरा के वृंदावन क्षेत्र के सकराया बांगर में सामुदायिक स्तर पर बच्चों के लिए एक लर्निंग सेंटर चलाया जा रहा है जिसका नाम है- 'सावित्री का विद्याबाग। ' सकराया बांगर गांव में डेनोटिफाइड कम्युनिटी नट रहते हैं जिनमें कुछ हिंदू, कुछ मुस्लिम हैं और आसपास के गांवों में ठाकुर, निषाद समुदाय रहते हैं। गांव के अधिकतर घर कच्चे हैं, रास्ते संकरे और बिजली की भी बहुत ठीक-ठाक व्यवस्था नहीं है।
विद्याबाग में खुले आसमान में पेड़ के नीचे पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। अब सेंटर के बच्चे जिनकी संख्या तीस हो चुकी है उन्हें सेंटर के को-ऑर्डिनेटर रूबिन अपने घर में पढ़ा रहे हैं। ये सभी बच्चे बेहद गरीब, दलित, मुस्लिम, ट्राइबल आदि समुदाय से आते हैं जिनके माता-पिता ज़्यादातर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।
लॉकडाउन के समय में वृंदावन में सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता गोस्वामी द्वारा संचालित एनजीओ निर्मल इनिशिएटिव इसी गांव में जब सामग्री वितरण कर रहा था तब उन्होंने देखा कि एक चौदह साल की बच्ची गर्भवती है। इसे देखने के बाद उन्होंने सोचा कि बच्चियों को यौन हिंसा से दूर करने की ज़रूरत है। वे जो खेतों में काम करने जा रही हैं, उनसे उन्हें बचाने की ज़रूरत है। इसकी शुरुआत लॉकडाउन में इस विचार के साथ की गई कि पहले पांच से सात बच्चियों को पढ़ाया जाए और बुनियादी शिक्षा पूरी होने के बाद उनका नज़दीकी प्राइवेट या सरकारी स्कूल में दाखिल करवा दिया जाए।
इन बच्चियों के साथ प्रयास सफल होने तक बच्चियों की संख्या 15 तक पहुंच गई (जिनका दाखिला वृंदावन के एक प्राइवेट स्कूल में करा दिया गया था)। विद्याबाग में खुले आसमान में पेड़ के नीचे पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। अब सेंटर के बच्चे जिनकी संख्या तीस हो चुकी है, उन्हें सेंटर के कोऑर्डिनेटर रूबिन पढ़ा रहे हैं। सेंटर में पांच-छह साल की उम्र से लेकर सत्रह-अठारह वर्ष की उम्र तक की बच्चियां और पांच-छह साल की उम्र से लेकर आठ-दस साल के लड़के पढ़ते हैं। ये सभी बच्चे बेहद गरीब, दलित, मुस्लिम, ट्राइबल आदि समुदाय से आते हैं जिनके माता-पिता ज़्यादातर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।
हाशिये की पहचान से आनेवाले लोग संसाधन की कमी से सबसे अधिक जूझते हैं। किसी भी तरह की पूंजी न होने पर समय-समय पर घर को चलाने में उन्हें बच्चों की मदद लेनी पड़ती है। हम जब विद्याबाग को जानने और देखने पहुंचे थे तब वहां तीस में से केवल ग्यारह बच्चियां मौजूद थीं। कारण था कि वे कपास के खेतों में मज़दूरी करने अपने परिवारों के साथ न सिर्फ आसपास के क्षेत्र में बल्कि दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा गई हुई थीं।
समाज बहुत आसानी से यह नैरेटिव गढ़ देता है कि बाल मज़दूरी के दोषी मज़दूरी करनेवाले बच्चों के मां बाप हैं लेकिन यह कभी सामने नहीं लाया जाता है कि ये बच्चे जिन समुदायों से आ रहे हैं उनके पास इस व्यवस्था ने क्या विकल्प छोड़ा है? पूंजी के नाम पर ये समुदाय खाली हाथ हैं, अवसर जैसी कोई भी चीज़ इन तक नहीं पहुंचती। स्कूल में अगर वे दाखिल हो भी जाएं तो ओमप्रकाश वाल्मीकि का जीवन उनके साथ क्रूरतम रूप में घटित होता है।
लर्निंग सेंटर में सबसे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं रूबिन। इन्होंने हाल ही में बारहवीं पास की है और आगे बैचलर्स डिग्री लेने पर विचार कर रहे हैं। वह आगे चलकर अध्यापक बनना चाहते हैं। वह एनजीओ निर्मल इनिशिएटिव की महात्मा फुले अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन फेलोशिप के चार फेलो में से एक फेलो हैं। वर्तमान में वह इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली से अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन में डिप्लोमा कर रहे हैं। रूबिन ने भी छोटी उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। वह लॉकडाउन में राजस्थान में पेंट करने के काम को छोड़कर घर आए ही थे कि इस लर्निंग सेंटर से जुड़ गए। अब वह बच्चों को दो शिफ्ट में पढ़ाते हैं जिसमें सुबह बच्चियां और शाम में लड़के पढ़ते हैं। दो अलग शिफ्ट चलाने का कारण यही है कि आसपास के लोग और बच्चियों के माता-पिता उन्हें शाम में घर से बाहर रखने के पक्ष में नहीं हैं। सुबह भी ये बच्चियां घरेलू काम करके ही आती हैं जिसकी वजह से सेंटर में पढ़ाई का समय भी सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक का है।
हम जब विद्याबाग को जानने और देखने पहुंचे थे तब वहां तीस में से केवल ग्यारह बच्चियां मौजूद थीं। कारण था कि वे कपास के खेतों में मज़दूरी करने अपने परिवारों के साथ न सिर्फ आसपास के क्षेत्र में बल्कि दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा गई हुई थीं।
हम अक्सर सोशल मीडिया पर और अपने आसपास ये देखते हैं कि समाज सेवा के लिए कोई भी व्यक्ति तीन-चार गरीब बच्चों को सीधा पढ़ाने लगते हैं और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी पूरी कर देने के भाव से भर जाते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसका कोई परिणाम इन बच्चों के जीवन में नहीं निकलता। लेकिन सावित्री का विद्याबाग ऐसी 'समाज सेवा' को चुनौती दे रहा है। बच्चों को बकायदा छोटी उम्र से एजुकेशन किट के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है जिसमें बच्चों के लिए गाइडेंस की सामग्री होती है। साथ ही हर महीने एक प्लान बनाकर रोज़ पढ़ाई का रूटीन तैयार करते हैं।
यहां पढ़ते हुए बच्चों का एक बेस तैयार किया जाता है और फिर नज़दीकी प्राइवेट स्कूल या प्राथमिक शिक्षा विद्यालय में दाखिला करवा दिया जाता है। जिनका दाखिला हो जाता है उनका भी बकायदा ट्रैक रखा जाता है। इस तरह सावित्री का यह विद्याबाग बाल मज़दूरी से जूझते बच्चों को शिक्षा से जोड़कर मुख्यधारा का हिस्सा बनाने का काम कर रहा है। हमने विद्याबाग की अपनी विजि़ट के दौरान वहां मौजूद बच्चियों से बातचीत की। तो मालूम हुआ कि कुछ बच्चियां जैसे किरण का पहला अनुभव शिक्षा के साथ विद्याबाग में ही हो रहा है यानी वे ज़ीरो लेवल से यहां पढ़ाई कर रही हैं। छबीली, शहनाज़, रवीना, सपना, शिवानी, मधु, नज़मा लॉकडाउन से पहले प्राइवेट स्कूल या किसी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रही थीं लेकिन लॉकडाउन के बाद उनकी पढ़ाई आर्थिक हालातों की वजह से और शादी के दबाव के कारण उनका स्कूल जाना छूट गया है।
समाज बहुत आसानी से यह नैरेटिव गढ़ देता है कि बाल मज़दूरी के दोषी मज़दूरी करनेवाले बच्चों के मां बाप हैं लेकिन यह कभी सामने नहीं लाया जाता है कि ये बच्चे जिन समुदायों से आ रहे हैं उनके पास इस व्यवस्था ने क्या विकल्प छोड़ा है? पूंजी के नाम पर ये समुदाय खाली हाथ हैं, अवसर जैसी कोई भी चीज़ इन तक नहीं पहुंचती।
लेकिन कुछ बच्चियों के माता-पिता उन्हें आगे पढ़ना भी चाहते हैं। जैसे शहनाज़ के माता-पिता उन्हें पढ़ाना चाहते हैं लेकिन "लड़की बड़ी हो गई है, शादी के लायक है, बाहर पढ़ने भेजने पर लड़की के साथ कुछ भी हो सकता है" जैसी बातों से डर के कारण वे उन्हें आगे पढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं। छात्राओं को लर्निंग सेंटर में पढ़ाने के लिए माता-पिता को समझाते हुए सहमति लेने में श्वेता गोस्वामी समेत पूरी टीम ने बहुत मेहनत की है। वहां मौजूद छात्राओं से पता चला कि दो लड़कियों की जिनकी उम्र चौदह से सत्रह के बीच में थी, उनकी शादी तक हो चुकी है। छात्राओं से हमने जब पूछा कि उन्हें क्या चीजें पसंद हैं? सबका जवाब था कि उन्हें पढ़ना पसंद है।
इस तरह के हालात में भी वे पढ़ने के लिए हिम्मत दिखा रही हैं, डटी हुई हैं, संघर्ष कर रही हैं। इस संघर्ष में रूबिन इनका बहुत बड़ा सपोर्ट हैं। वह जब बच्चियों को पढ़ा रहे हैं तब खुद भी बहुत कुछ झेल रहे हैं। पढ़ाने को लेकर चुनौतियों पर जब हमने उनसे पूछा तो वह बताते हैं कि गांववाले उन्हें कभी भी घेरकर धमकियां देने लगते हैं, झगड़ने के लिए इस तर्क के साथ आते हैं कि लड़कियों को पढ़ाकर वह दरअसल उन्हें 'बिगाड़' रहे हैं। इन सबका जवाब रूबिन चुप होकर देते हैं।
रूबिन किसी से कुछ नहीं कहते हैं, बस अपना काम कर रहे हैं। इसीलिए ही शायद जब हम बच्चियों से बात कर रहे थे तब एक बच्ची रूबिन की ओर इशारा करते हुए कहती है भैया ही हमारे महात्मा फुले हैं। विद्याबाग में पढ़ाई से इतर दूसरी गतिविधियों जैसे खेल आदि को लेकर रूबिन से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि कई तरह के कंसंट्रेशन से संबंधित खेल बच्चियों को खिलाए जाते हैं। खिलौने भी हैं और अंतरिक्ष से संबंधित किताबें, चित्र भी हैं। छात्राओं का अंतरिक्ष के बारे में जानना जरूरी है ताकि वे ये जान सके दुनिया सिर्फ़ इतनी नहीं है जितनी उनके आसपास है बल्कि बहुत बड़ी है जिसके रहस्य रोहित वेमुला ढूंढना चाहते थे।
सावित्री का विद्याबाग एक ऐसा मॉडल है जिसे हर वंचित समुदाय के बच्चों के बीच ले जाने की जरूरत है, समुदाय द्वारा समुदाय के ही बच्चों के लिए शिक्षा का यह संघर्ष बहुत जरूरी है जब तक कि मुख्यधारा में इन समुदायों की बात न की जाने लगे।
साथ ही उन्होंने बताया कि बिजली की व्यवस्था गांव में बेहतर नहीं है क्योंकि कम आय वाले ये परिवार बिजली का बिल भरने में असमर्थ हैं इसीलिए बिजली विभाग के लोग कनेक्शन काट गए हैं, ऐसे में सोलर पैनल की मदद से यहां बिजली की व्यवस्था है जिससे टीवी पर सावित्रीबाई फुले संबंधित फिल्म, आदि चीजें दिखाई जाती हैं। लर्निंग सेंटर में जो सामान बच्चों की उपयोगिता के लिए मौजूद हैं वे सब क्राउड फंडिंग की वजह से हैं। इस प्रक्रिया में यहां पढ़ने वाले बच्चों की आइडेंटिटी 'गरीब बच्चों के लिए सहायता' तक सीमित नहीं की जाती बल्कि बकायदा बताया जाता है कि किस समुदाय के बच्चों के लिए फंडिंग की जा रही है।
हमने रूबिन की माँ पिंकी से भी पूछा कि उनके घर में विद्याबाग चल रहा है तब आसपास की महिलाओं पर इसका क्या कहना है। पिंकी ने बताया कि आसपास की महिलाएं विद्याबाग के बारे में खुश नज़र आती हैं और इस बात की सराहना करती हैं वे बेशक नहीं पढ़ पाईं लेकिन कम से कम उनकी बेटियां पढ़ रही हैं, जो उन्होंने झेला है, शायद उनकी बेटियां वैसा नहीं झेलेंगी। सावित्री का विद्याबाग एक ऐसा मॉडल है जिसे हर वंचित समुदाय के बच्चों के बीच ले जाने की जरूरत है, समुदाय द्वारा समुदाय के ही बच्चों के लिए शिक्षा का यह संघर्ष बहुत जरूरी है जब तक कि मुख्यधारा में इन समुदायों की बात न की जाने लगे। हम बाल मज़दूरी में संलग्न बच्चों को दया भाव से तो देखते हैं लेकिन उन्हें उससे निकालने के लिए, उनके कारणों पर कभी ठोस विचार नहीं करते, काम नहीं करते। लेकिन सावित्री का विद्याबाग न सिर्फ ऐसे बच्चों को पहचान रहा है बल्कि उनके लिए वैसे अवसर पैदा कर रहा है जिससे वे इस दुष्चक्र से बाहर निकलकर अपना भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
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जुलाई दो हज़ार बाईस में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'गुलामी के समकालीन रूप' पर तैयार की गई एक रिपोर्ट अगस्त में पब्लिक हुई जिसमें कहा गया कि भारत में, बाल श्रम, जाति-आधारित भेदभाव और गरीबी एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। हमारे समाज में बाल श्रम को सिर्फ़ गरीबी के एक परिणाम के रूप में देखा जाता है जिसमें बच्चे की आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक स्थिति को दरकिनार कर दिया जाता है जबकि भारत में बाल मज़दूरी के पनपने की परिस्थितियों में जाति और उससे उत्पन्न भेदभाव और संसाधन की कमी पहली और मुख्य वजहें हैं। डीडब्ल्यू द्वारा प्रकाशित एक लेख में सिद्धार्थ कारा कहते हैं, "हर एक बाल मज़दूर जिसका मैंने दस्तावेजीकरण किया है, एक अत्यधिक गरीब परिवार और एक तथाकथित निम्न जाति या अल्पसंख्यक समुदाय से आता है, जिसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों के रूप में जाना जाता है। " इस अल्पसंख्यक समुदाय की परिभाषा में हमें डिनोटिफाइड ट्राइब्स से से आनेवाले लोगों और बच्चों को भी देखने की ज़रूरत है। जब इन सभी वंचित समुदायों से बच्चे बाल मज़दूरी में जाते हैं तब वे शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत से भी दूर हो जाते हैं और बाल यौन हिंसा का सामना करते हैं। ऐसे ही बाल मज़दूरी की वजह से यौन हिंसा के सर्वाइवर रहे और शिक्षा से भी दूर हो चुके बच्चों के लिए मथुरा के वृंदावन क्षेत्र के सकराया बांगर में सामुदायिक स्तर पर बच्चों के लिए एक लर्निंग सेंटर चलाया जा रहा है जिसका नाम है- 'सावित्री का विद्याबाग। ' सकराया बांगर गांव में डेनोटिफाइड कम्युनिटी नट रहते हैं जिनमें कुछ हिंदू, कुछ मुस्लिम हैं और आसपास के गांवों में ठाकुर, निषाद समुदाय रहते हैं। गांव के अधिकतर घर कच्चे हैं, रास्ते संकरे और बिजली की भी बहुत ठीक-ठाक व्यवस्था नहीं है। विद्याबाग में खुले आसमान में पेड़ के नीचे पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। अब सेंटर के बच्चे जिनकी संख्या तीस हो चुकी है उन्हें सेंटर के को-ऑर्डिनेटर रूबिन अपने घर में पढ़ा रहे हैं। ये सभी बच्चे बेहद गरीब, दलित, मुस्लिम, ट्राइबल आदि समुदाय से आते हैं जिनके माता-पिता ज़्यादातर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। लॉकडाउन के समय में वृंदावन में सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता गोस्वामी द्वारा संचालित एनजीओ निर्मल इनिशिएटिव इसी गांव में जब सामग्री वितरण कर रहा था तब उन्होंने देखा कि एक चौदह साल की बच्ची गर्भवती है। इसे देखने के बाद उन्होंने सोचा कि बच्चियों को यौन हिंसा से दूर करने की ज़रूरत है। वे जो खेतों में काम करने जा रही हैं, उनसे उन्हें बचाने की ज़रूरत है। इसकी शुरुआत लॉकडाउन में इस विचार के साथ की गई कि पहले पांच से सात बच्चियों को पढ़ाया जाए और बुनियादी शिक्षा पूरी होने के बाद उनका नज़दीकी प्राइवेट या सरकारी स्कूल में दाखिल करवा दिया जाए। इन बच्चियों के साथ प्रयास सफल होने तक बच्चियों की संख्या पंद्रह तक पहुंच गई । विद्याबाग में खुले आसमान में पेड़ के नीचे पढ़ाने की शुरुआत हुई थी। अब सेंटर के बच्चे जिनकी संख्या तीस हो चुकी है, उन्हें सेंटर के कोऑर्डिनेटर रूबिन पढ़ा रहे हैं। सेंटर में पांच-छह साल की उम्र से लेकर सत्रह-अठारह वर्ष की उम्र तक की बच्चियां और पांच-छह साल की उम्र से लेकर आठ-दस साल के लड़के पढ़ते हैं। ये सभी बच्चे बेहद गरीब, दलित, मुस्लिम, ट्राइबल आदि समुदाय से आते हैं जिनके माता-पिता ज़्यादातर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। हाशिये की पहचान से आनेवाले लोग संसाधन की कमी से सबसे अधिक जूझते हैं। किसी भी तरह की पूंजी न होने पर समय-समय पर घर को चलाने में उन्हें बच्चों की मदद लेनी पड़ती है। हम जब विद्याबाग को जानने और देखने पहुंचे थे तब वहां तीस में से केवल ग्यारह बच्चियां मौजूद थीं। कारण था कि वे कपास के खेतों में मज़दूरी करने अपने परिवारों के साथ न सिर्फ आसपास के क्षेत्र में बल्कि दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा गई हुई थीं। समाज बहुत आसानी से यह नैरेटिव गढ़ देता है कि बाल मज़दूरी के दोषी मज़दूरी करनेवाले बच्चों के मां बाप हैं लेकिन यह कभी सामने नहीं लाया जाता है कि ये बच्चे जिन समुदायों से आ रहे हैं उनके पास इस व्यवस्था ने क्या विकल्प छोड़ा है? पूंजी के नाम पर ये समुदाय खाली हाथ हैं, अवसर जैसी कोई भी चीज़ इन तक नहीं पहुंचती। स्कूल में अगर वे दाखिल हो भी जाएं तो ओमप्रकाश वाल्मीकि का जीवन उनके साथ क्रूरतम रूप में घटित होता है। लर्निंग सेंटर में सबसे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं रूबिन। इन्होंने हाल ही में बारहवीं पास की है और आगे बैचलर्स डिग्री लेने पर विचार कर रहे हैं। वह आगे चलकर अध्यापक बनना चाहते हैं। वह एनजीओ निर्मल इनिशिएटिव की महात्मा फुले अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन फेलोशिप के चार फेलो में से एक फेलो हैं। वर्तमान में वह इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली से अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन में डिप्लोमा कर रहे हैं। रूबिन ने भी छोटी उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। वह लॉकडाउन में राजस्थान में पेंट करने के काम को छोड़कर घर आए ही थे कि इस लर्निंग सेंटर से जुड़ गए। अब वह बच्चों को दो शिफ्ट में पढ़ाते हैं जिसमें सुबह बच्चियां और शाम में लड़के पढ़ते हैं। दो अलग शिफ्ट चलाने का कारण यही है कि आसपास के लोग और बच्चियों के माता-पिता उन्हें शाम में घर से बाहर रखने के पक्ष में नहीं हैं। सुबह भी ये बच्चियां घरेलू काम करके ही आती हैं जिसकी वजह से सेंटर में पढ़ाई का समय भी सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक का है। हम जब विद्याबाग को जानने और देखने पहुंचे थे तब वहां तीस में से केवल ग्यारह बच्चियां मौजूद थीं। कारण था कि वे कपास के खेतों में मज़दूरी करने अपने परिवारों के साथ न सिर्फ आसपास के क्षेत्र में बल्कि दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा गई हुई थीं। हम अक्सर सोशल मीडिया पर और अपने आसपास ये देखते हैं कि समाज सेवा के लिए कोई भी व्यक्ति तीन-चार गरीब बच्चों को सीधा पढ़ाने लगते हैं और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी पूरी कर देने के भाव से भर जाते हैं। यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसका कोई परिणाम इन बच्चों के जीवन में नहीं निकलता। लेकिन सावित्री का विद्याबाग ऐसी 'समाज सेवा' को चुनौती दे रहा है। बच्चों को बकायदा छोटी उम्र से एजुकेशन किट के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है जिसमें बच्चों के लिए गाइडेंस की सामग्री होती है। साथ ही हर महीने एक प्लान बनाकर रोज़ पढ़ाई का रूटीन तैयार करते हैं। यहां पढ़ते हुए बच्चों का एक बेस तैयार किया जाता है और फिर नज़दीकी प्राइवेट स्कूल या प्राथमिक शिक्षा विद्यालय में दाखिला करवा दिया जाता है। जिनका दाखिला हो जाता है उनका भी बकायदा ट्रैक रखा जाता है। इस तरह सावित्री का यह विद्याबाग बाल मज़दूरी से जूझते बच्चों को शिक्षा से जोड़कर मुख्यधारा का हिस्सा बनाने का काम कर रहा है। हमने विद्याबाग की अपनी विजि़ट के दौरान वहां मौजूद बच्चियों से बातचीत की। तो मालूम हुआ कि कुछ बच्चियां जैसे किरण का पहला अनुभव शिक्षा के साथ विद्याबाग में ही हो रहा है यानी वे ज़ीरो लेवल से यहां पढ़ाई कर रही हैं। छबीली, शहनाज़, रवीना, सपना, शिवानी, मधु, नज़मा लॉकडाउन से पहले प्राइवेट स्कूल या किसी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रही थीं लेकिन लॉकडाउन के बाद उनकी पढ़ाई आर्थिक हालातों की वजह से और शादी के दबाव के कारण उनका स्कूल जाना छूट गया है। समाज बहुत आसानी से यह नैरेटिव गढ़ देता है कि बाल मज़दूरी के दोषी मज़दूरी करनेवाले बच्चों के मां बाप हैं लेकिन यह कभी सामने नहीं लाया जाता है कि ये बच्चे जिन समुदायों से आ रहे हैं उनके पास इस व्यवस्था ने क्या विकल्प छोड़ा है? पूंजी के नाम पर ये समुदाय खाली हाथ हैं, अवसर जैसी कोई भी चीज़ इन तक नहीं पहुंचती। लेकिन कुछ बच्चियों के माता-पिता उन्हें आगे पढ़ना भी चाहते हैं। जैसे शहनाज़ के माता-पिता उन्हें पढ़ाना चाहते हैं लेकिन "लड़की बड़ी हो गई है, शादी के लायक है, बाहर पढ़ने भेजने पर लड़की के साथ कुछ भी हो सकता है" जैसी बातों से डर के कारण वे उन्हें आगे पढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं। छात्राओं को लर्निंग सेंटर में पढ़ाने के लिए माता-पिता को समझाते हुए सहमति लेने में श्वेता गोस्वामी समेत पूरी टीम ने बहुत मेहनत की है। वहां मौजूद छात्राओं से पता चला कि दो लड़कियों की जिनकी उम्र चौदह से सत्रह के बीच में थी, उनकी शादी तक हो चुकी है। छात्राओं से हमने जब पूछा कि उन्हें क्या चीजें पसंद हैं? सबका जवाब था कि उन्हें पढ़ना पसंद है। इस तरह के हालात में भी वे पढ़ने के लिए हिम्मत दिखा रही हैं, डटी हुई हैं, संघर्ष कर रही हैं। इस संघर्ष में रूबिन इनका बहुत बड़ा सपोर्ट हैं। वह जब बच्चियों को पढ़ा रहे हैं तब खुद भी बहुत कुछ झेल रहे हैं। पढ़ाने को लेकर चुनौतियों पर जब हमने उनसे पूछा तो वह बताते हैं कि गांववाले उन्हें कभी भी घेरकर धमकियां देने लगते हैं, झगड़ने के लिए इस तर्क के साथ आते हैं कि लड़कियों को पढ़ाकर वह दरअसल उन्हें 'बिगाड़' रहे हैं। इन सबका जवाब रूबिन चुप होकर देते हैं। रूबिन किसी से कुछ नहीं कहते हैं, बस अपना काम कर रहे हैं। इसीलिए ही शायद जब हम बच्चियों से बात कर रहे थे तब एक बच्ची रूबिन की ओर इशारा करते हुए कहती है भैया ही हमारे महात्मा फुले हैं। विद्याबाग में पढ़ाई से इतर दूसरी गतिविधियों जैसे खेल आदि को लेकर रूबिन से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि कई तरह के कंसंट्रेशन से संबंधित खेल बच्चियों को खिलाए जाते हैं। खिलौने भी हैं और अंतरिक्ष से संबंधित किताबें, चित्र भी हैं। छात्राओं का अंतरिक्ष के बारे में जानना जरूरी है ताकि वे ये जान सके दुनिया सिर्फ़ इतनी नहीं है जितनी उनके आसपास है बल्कि बहुत बड़ी है जिसके रहस्य रोहित वेमुला ढूंढना चाहते थे। सावित्री का विद्याबाग एक ऐसा मॉडल है जिसे हर वंचित समुदाय के बच्चों के बीच ले जाने की जरूरत है, समुदाय द्वारा समुदाय के ही बच्चों के लिए शिक्षा का यह संघर्ष बहुत जरूरी है जब तक कि मुख्यधारा में इन समुदायों की बात न की जाने लगे। साथ ही उन्होंने बताया कि बिजली की व्यवस्था गांव में बेहतर नहीं है क्योंकि कम आय वाले ये परिवार बिजली का बिल भरने में असमर्थ हैं इसीलिए बिजली विभाग के लोग कनेक्शन काट गए हैं, ऐसे में सोलर पैनल की मदद से यहां बिजली की व्यवस्था है जिससे टीवी पर सावित्रीबाई फुले संबंधित फिल्म, आदि चीजें दिखाई जाती हैं। लर्निंग सेंटर में जो सामान बच्चों की उपयोगिता के लिए मौजूद हैं वे सब क्राउड फंडिंग की वजह से हैं। इस प्रक्रिया में यहां पढ़ने वाले बच्चों की आइडेंटिटी 'गरीब बच्चों के लिए सहायता' तक सीमित नहीं की जाती बल्कि बकायदा बताया जाता है कि किस समुदाय के बच्चों के लिए फंडिंग की जा रही है। हमने रूबिन की माँ पिंकी से भी पूछा कि उनके घर में विद्याबाग चल रहा है तब आसपास की महिलाओं पर इसका क्या कहना है। पिंकी ने बताया कि आसपास की महिलाएं विद्याबाग के बारे में खुश नज़र आती हैं और इस बात की सराहना करती हैं वे बेशक नहीं पढ़ पाईं लेकिन कम से कम उनकी बेटियां पढ़ रही हैं, जो उन्होंने झेला है, शायद उनकी बेटियां वैसा नहीं झेलेंगी। सावित्री का विद्याबाग एक ऐसा मॉडल है जिसे हर वंचित समुदाय के बच्चों के बीच ले जाने की जरूरत है, समुदाय द्वारा समुदाय के ही बच्चों के लिए शिक्षा का यह संघर्ष बहुत जरूरी है जब तक कि मुख्यधारा में इन समुदायों की बात न की जाने लगे। हम बाल मज़दूरी में संलग्न बच्चों को दया भाव से तो देखते हैं लेकिन उन्हें उससे निकालने के लिए, उनके कारणों पर कभी ठोस विचार नहीं करते, काम नहीं करते। लेकिन सावित्री का विद्याबाग न सिर्फ ऐसे बच्चों को पहचान रहा है बल्कि उनके लिए वैसे अवसर पैदा कर रहा है जिससे वे इस दुष्चक्र से बाहर निकलकर अपना भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
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बोकारोः जिले के पेटरवार इलाके में रहने वाली दसवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ दो किशोर व एक युवक ने सामूहिक दुष्कर्म किया।
एक नाबालिग इस छात्रा का प्रेमी था। उसने उसके साथ गलत काम किया, इस दौरान वीडियो बना लिया। बाद में अन्य दोनों ने भी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छात्र के साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस ने दोनों नाबालिग को दबोच लिया है, आरोपी युवक त्रिलोकी साव फरार हो गया है।
लड़की के घरवालों ने पुलिस को बताया कि बेटी को इलाके के रहने वाले एक किशोर ने बरगलाकर प्रेम जाल में फंसा लिया। चार दिन पहले वह लड़की को अपने एक दोस्त के खाली पड़े घर में ले गया।
यहां उसके साथ गलत काम कर वीडियो बनाया। इसी बीच उसके अन्य दोनों दोस्त पहुंचे। लड़की को वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद इन दोनों ने भी दुष्कर्म किया।
साथ ही इस वीडियो को भी शेयर कर दिया। घबराई छात्र ने पहले तो घरवालों को जानकारी नहीं दी। उसे गुमसुम देख घरवालों ने पूछताछ की तो बुधवार को उसने सारी बात बता दी।
इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। इधर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों नाबालिग को पकड़ लिया है।
पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म व पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों नाबालिग को बाल सुधारगृह भेज दिया गया है।
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बोकारोः जिले के पेटरवार इलाके में रहने वाली दसवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ दो किशोर व एक युवक ने सामूहिक दुष्कर्म किया। एक नाबालिग इस छात्रा का प्रेमी था। उसने उसके साथ गलत काम किया, इस दौरान वीडियो बना लिया। बाद में अन्य दोनों ने भी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छात्र के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने दोनों नाबालिग को दबोच लिया है, आरोपी युवक त्रिलोकी साव फरार हो गया है। लड़की के घरवालों ने पुलिस को बताया कि बेटी को इलाके के रहने वाले एक किशोर ने बरगलाकर प्रेम जाल में फंसा लिया। चार दिन पहले वह लड़की को अपने एक दोस्त के खाली पड़े घर में ले गया। यहां उसके साथ गलत काम कर वीडियो बनाया। इसी बीच उसके अन्य दोनों दोस्त पहुंचे। लड़की को वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद इन दोनों ने भी दुष्कर्म किया। साथ ही इस वीडियो को भी शेयर कर दिया। घबराई छात्र ने पहले तो घरवालों को जानकारी नहीं दी। उसे गुमसुम देख घरवालों ने पूछताछ की तो बुधवार को उसने सारी बात बता दी। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। इधर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों नाबालिग को पकड़ लिया है। पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म व पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों नाबालिग को बाल सुधारगृह भेज दिया गया है।
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Samastipur News अब शहर से लेकर गांव तक के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर बेड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत जरूरत के सामानों को उपलब्ध कराया जाएगा। 15वीं वित्त आयोग की योजना से खर्च होगी राशि जिला परिषद ने की पहल।
समस्तीपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी से लड़ने को लेकर एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग पूरा प्रयास कर रहा है वहीं संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर पंचायती राज संस्था द्वारा भी यह पहल की जा रही है। अब शहर से लेकर गांव तक के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर, बेड, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत जरूरत के सामानों को उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने कोरोना महामारी से निबटने के लिए 15 वीं वित्त आयोग की अनुदान राशि को कोरोना प्रबंधन एवं सरकारी अस्पतालों में आधारभूत ढांचा में वृद्धि में उपयोग करने का निर्देश दिया है। इस राशि से समस्तीपुर जिला कोरोना व ब्लैक फंगस से लड़ाई लड़ेगा। इस राशि से जिले के त्रिस्तरीय पंचायत संस्थानों यथा जिला परिषद, पंचायत समिति व ग्राम पंचायत कोरोना व ब्लैक फंगस से दो-दो हाथ करेंगे।
इसमें जिला परिषद फिलहाल 2 करोड़ रुपया खर्च करने को तैयार हुआ है। इसके अलावा पंचायत समिति व ग्राम पंचायत की ओर से राशि खर्च होगी। बताया गया कि इन तीनों संस्थाओं के पास पहले से भी पैसे बचे हैं। जिला परिषद व पंचायत समिति 15वीं वित्त आयोग के अनुदान की राशि का कोविड प्रबंधन के लिए खर्च की जाएगी। इसके तहत सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं ग्राम पंचायत से प्राप्त राशि से मास्क की खरीदारी कर ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक परिवार के बीच वितरण किया जाना है।
सरकार व संबंधित विभाग ने कोविड प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए 15वीं वित्त आयोग की राशि खर्च करने की अनुमति तो दे दी है लेकिन इसमें अभी भी कई पेंच फंसे हुए हैं। पहली बात यह है कि विभागीय स्तर पर बुलाई जाने वाली बैठक अभी तक नहीं हुई है। जिला परिषद का बताना है कि खरीद की जाने वाली सामानों की सूची स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया था। लेकिन, स्वास्थ्य प्रशासन ने अब तक जरूरी सामानों की सूची उपलब्ध नहीं कराई है। ऐसे में बैठक नहीं होने से कोविड प्रबंधन मद में राशि खर्च करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, पंचायत स्तर पर मास्क की खरीदारी जारी है।
जिला परिषद अध्यक्ष प्रेमलता ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की बेहतर इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की खरीद को लेकर पहल की गई है। सिविल सर्जन से जरूरी सामानों की सूची की मांग की गई है। इसके लिए ऑक्सीजन सिलिंडर, बेड, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, नेबुलाइजर, बीपी मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सहित अन्य सामानों की खरीददारी की जानी है। महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य संस्थानों मरीजों का बेहतर इलाज करने में मदद मिलेगी।
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Samastipur News अब शहर से लेकर गांव तक के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर बेड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत जरूरत के सामानों को उपलब्ध कराया जाएगा। पंद्रहवीं वित्त आयोग की योजना से खर्च होगी राशि जिला परिषद ने की पहल। समस्तीपुर, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी से लड़ने को लेकर एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग पूरा प्रयास कर रहा है वहीं संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर पंचायती राज संस्था द्वारा भी यह पहल की जा रही है। अब शहर से लेकर गांव तक के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर, बेड, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत जरूरत के सामानों को उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने कोरोना महामारी से निबटने के लिए पंद्रह वीं वित्त आयोग की अनुदान राशि को कोरोना प्रबंधन एवं सरकारी अस्पतालों में आधारभूत ढांचा में वृद्धि में उपयोग करने का निर्देश दिया है। इस राशि से समस्तीपुर जिला कोरोना व ब्लैक फंगस से लड़ाई लड़ेगा। इस राशि से जिले के त्रिस्तरीय पंचायत संस्थानों यथा जिला परिषद, पंचायत समिति व ग्राम पंचायत कोरोना व ब्लैक फंगस से दो-दो हाथ करेंगे। इसमें जिला परिषद फिलहाल दो करोड़ रुपया खर्च करने को तैयार हुआ है। इसके अलावा पंचायत समिति व ग्राम पंचायत की ओर से राशि खर्च होगी। बताया गया कि इन तीनों संस्थाओं के पास पहले से भी पैसे बचे हैं। जिला परिषद व पंचायत समिति पंद्रहवीं वित्त आयोग के अनुदान की राशि का कोविड प्रबंधन के लिए खर्च की जाएगी। इसके तहत सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं ग्राम पंचायत से प्राप्त राशि से मास्क की खरीदारी कर ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक परिवार के बीच वितरण किया जाना है। सरकार व संबंधित विभाग ने कोविड प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए पंद्रहवीं वित्त आयोग की राशि खर्च करने की अनुमति तो दे दी है लेकिन इसमें अभी भी कई पेंच फंसे हुए हैं। पहली बात यह है कि विभागीय स्तर पर बुलाई जाने वाली बैठक अभी तक नहीं हुई है। जिला परिषद का बताना है कि खरीद की जाने वाली सामानों की सूची स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया था। लेकिन, स्वास्थ्य प्रशासन ने अब तक जरूरी सामानों की सूची उपलब्ध नहीं कराई है। ऐसे में बैठक नहीं होने से कोविड प्रबंधन मद में राशि खर्च करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, पंचायत स्तर पर मास्क की खरीदारी जारी है। जिला परिषद अध्यक्ष प्रेमलता ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की बेहतर इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की खरीद को लेकर पहल की गई है। सिविल सर्जन से जरूरी सामानों की सूची की मांग की गई है। इसके लिए ऑक्सीजन सिलिंडर, बेड, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, नेबुलाइजर, बीपी मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सहित अन्य सामानों की खरीददारी की जानी है। महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य संस्थानों मरीजों का बेहतर इलाज करने में मदद मिलेगी।
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शारजाह, 22 अक्टूबर (CRICKETNMORE)। चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब जीतने के बाद से पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा है और श्रीलंका के खिलाफ पांच वनडे मैचों की सीरीज में टीम ने 4-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इस पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफराज अहमद का कहना है कि उनकी टीम की गेंदबाजी वर्ल्ड की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी के रूप में विकसित हुई है।
पाकिस्तान की गेंदबाजी को वर्ल्ड में सर्वश्रेष्ठ माने जाने के बारे में सरफराज ने कहा, "हां, आप कह सकते हैं। जिस प्रकार से गेंदबाज चैम्पियंस ट्रॉफी से ही अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं, उसमें देखा जाए, तो हमने किसी भी टीम को 240 से अधिक रन नहीं बनाने दिए हैं और बाद में इस लक्ष्य को भी हासिल कर लिया है। हम अच्छी गेंदबाजी भी कर रहे हैं और बल्लेबाजी भी।"
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शारजाह, बाईस अक्टूबर । चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब जीतने के बाद से पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा है और श्रीलंका के खिलाफ पांच वनडे मैचों की सीरीज में टीम ने चार-शून्य की अजेय बढ़त बना ली है। इस पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफराज अहमद का कहना है कि उनकी टीम की गेंदबाजी वर्ल्ड की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी के रूप में विकसित हुई है। पाकिस्तान की गेंदबाजी को वर्ल्ड में सर्वश्रेष्ठ माने जाने के बारे में सरफराज ने कहा, "हां, आप कह सकते हैं। जिस प्रकार से गेंदबाज चैम्पियंस ट्रॉफी से ही अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं, उसमें देखा जाए, तो हमने किसी भी टीम को दो सौ चालीस से अधिक रन नहीं बनाने दिए हैं और बाद में इस लक्ष्य को भी हासिल कर लिया है। हम अच्छी गेंदबाजी भी कर रहे हैं और बल्लेबाजी भी।"
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चर्चा में क्यों?
हाल ही में अमेरिका ने अपनी वार्षिक स्पेशल 301 रिपोर्ट जारी की है। गौरतलब है कि अमेरिका ने रिपोर्ट के इस संस्करण में कुल 36 देशों को निगरानी सूची में डाला है।
- इस रिपोर्ट के अंतर्गत, अमेरिका अपने व्यापारिक भागीदारों का बौद्धिक संपदा की रक्षा और प्रवर्तन संबंधी ट्रैक रिकॉर्ड पर आकलन करता है।
- यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव (USTR) के अनुसार, भारत को बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के कथित उल्लंघनों के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की 'प्रायोरिटी वाच लिस्ट' में बरकरार रखा गया है।
- 'प्रायोरिटी वाच लिस्ट' में भारत के साथ ही चीन, इंडोनेशिया, रूस, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला जैसे कुल 11 देशों को रखा गया है।
- तुर्की और पाकिस्तान जैसे कुल 25 देशों को अमेरिका ने 'वाच लिस्ट' में शामिल किया है।
- इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बौद्धिक संपदा की चुनौतियाँ लंबे समय से बरकरार हैं और भारत बौद्धिक संपदा के संरक्षण तथा उनके प्रवर्तन के संबंध में दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
- अमेरिकी सरकार विश्व व्यापार संगठन (WTO) या अन्य प्रासंगिक व्यापार समझौते पर विवाद निपटान की कार्यवाहियाँ शुरू कर सकती है।
- अमेरिकी सरकार एकतरफा टैरिफ प्राथमिकताओं जैसे कि सामान्यीकृत प्रणाली (GSP) को भी समाप्त कर सकती है।
- बौद्धिक संपदा अधिकार, निजी अधिकार हैं जो किसी देश की सीमा के भीतर मान्य होते हैं तथा औद्योगिक, वैज्ञानिक, साहित्य और कला के क्षेत्र में व्यक्ति (व्यक्तियों) अथवा कानूनी कंपनियों को उनकी रचनात्मकता अथवा नवप्रयोग के संरक्षण के लिये दिये जाते हैं।
- बौद्धिक संपदा अधिकार किसी भी प्रकार या आकार की अर्थव्यवस्थाओं में रोज़गार, नवाचार, सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
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चर्चा में क्यों? हाल ही में अमेरिका ने अपनी वार्षिक स्पेशल तीन सौ एक रिपोर्ट जारी की है। गौरतलब है कि अमेरिका ने रिपोर्ट के इस संस्करण में कुल छत्तीस देशों को निगरानी सूची में डाला है। - इस रिपोर्ट के अंतर्गत, अमेरिका अपने व्यापारिक भागीदारों का बौद्धिक संपदा की रक्षा और प्रवर्तन संबंधी ट्रैक रिकॉर्ड पर आकलन करता है। - यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव के अनुसार, भारत को बौद्धिक संपदा अधिकारों के कथित उल्लंघनों के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका की 'प्रायोरिटी वाच लिस्ट' में बरकरार रखा गया है। - 'प्रायोरिटी वाच लिस्ट' में भारत के साथ ही चीन, इंडोनेशिया, रूस, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला जैसे कुल ग्यारह देशों को रखा गया है। - तुर्की और पाकिस्तान जैसे कुल पच्चीस देशों को अमेरिका ने 'वाच लिस्ट' में शामिल किया है। - इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बौद्धिक संपदा की चुनौतियाँ लंबे समय से बरकरार हैं और भारत बौद्धिक संपदा के संरक्षण तथा उनके प्रवर्तन के संबंध में दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। - अमेरिकी सरकार विश्व व्यापार संगठन या अन्य प्रासंगिक व्यापार समझौते पर विवाद निपटान की कार्यवाहियाँ शुरू कर सकती है। - अमेरिकी सरकार एकतरफा टैरिफ प्राथमिकताओं जैसे कि सामान्यीकृत प्रणाली को भी समाप्त कर सकती है। - बौद्धिक संपदा अधिकार, निजी अधिकार हैं जो किसी देश की सीमा के भीतर मान्य होते हैं तथा औद्योगिक, वैज्ञानिक, साहित्य और कला के क्षेत्र में व्यक्ति अथवा कानूनी कंपनियों को उनकी रचनात्मकता अथवा नवप्रयोग के संरक्षण के लिये दिये जाते हैं। - बौद्धिक संपदा अधिकार किसी भी प्रकार या आकार की अर्थव्यवस्थाओं में रोज़गार, नवाचार, सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
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बिजनौर। ब्रिटिश शिकारी एवं मशहूर लेखक जिम कॉर्बेट ने अपनी किताब माई इण्डिया में लिखा है कि सुल्ताना डाकू क़े डकैतों के पास उस दौर में भी अत्याधुनिक हथियार हुआ करते थे व उसके डाकू दल में सैकड़ों प्रशिक्षित डकैत शामिल थे। ब्रिटिश काल में सुल्ताना डाकू की भातू जनजाति को आपराधिक करार दिए जाने के बाद उसके पूरे गैंग को नजीबाबाद किले की चारदीवारी में कैद कर सुधरने का अवसर दिया गया था। सुल्ताना अपनी युवा पत्नी और नवजात बेटे सहित सैकड़ों अन्य भातुओं के साथ नजीबाबाद के किले में कैद था। एक रात वह किले की दीवारों को फांदकर भाग निकला, जैसा कि कोई भी नौजवान और हौसले वाला इंसान करता है। किले के बाहर सुल्ताना को उसके जैसे सैकड़ों साथी गांव जट्टीवाला में मिले। वे सब हथियारबंद बदमाश थे क्योंकि उस दिन सुल्ताना डाकू की गैंग ने डकैती डालने की सरेआम घोषणा कर रखी थी। उस दौर में डकैत तराई और भावर के जंगलों में भटकते और पूरब में गोंडा से लेकर सहारनपुर तक डाका डालते थे। उस दौर में सुल्ताना का गैंग बिजनौर के गांव जालपुर तथा गांव बनियो के रामपुर में भी डकैती डाल चुका था।
जिम कार्बेट लिखते हैं जब मैंने पहली बार सुल्ताना डाकू का नाम तब सुना तब मैं गडप्पू के जंगलों में कैंप कर रहा था। गडप्पू का यह क्षेत्र कालाढुंगी के नजदीक था जो सर्दियों में मेरा घर हुआ करता था। उस समय पर्सी विंडहैम कुमाऊं कमिश्नर हुआ करते थे। नजीबाबाद से लेकर राबर्स केव तराई भावर का जंगल सुल्ताना डाकू का ठिकाना हुआ करता था। सुल्ताना डाकू से परेशान ब्रिटिश सरकार के विंडहैम कमिश्नर ने युवा पुलिस अधिकारी फ्रेडरिक यंग की मदद मांगी थी। ब्रिटिश सरकार ने विंडहैम की इल्तिजा मान ली और सुलताना डाकू को पकड़ने के लिए विशेष दस्ते पर मुहर लगा दी। फ्रेडरिक यंग उस दस्ते के मुखिया थे और उन्हें अपनी पसंद के पुलिसकर्मियों को चुनने की छूट दी गयी थी, जिसमें गांव बिजनौर जनपद के भी कई लोग थे। जब पहली बार सुल्ताना को पकड़ने की कोशिश सर फ्रेडरिक यंग द्वारा जंगलों में की गई, तब उस समय वन विभाग जंगल के एक हिस्से को साफ कर रहा था। उन मजदूरों के एक ठेकेदार को सुल्ताना को न्योता देने को कहा गया था तब सुल्ताना का पड़ाव काला ढूंगी के आस-पास ही था। उस दिन सुल्ताना को भोज और उसके बाद नाच-गाने के कार्यक्रम का न्योता दिया गया था। सुल्ताना और उसके साथियों ने यह बुलावा मंजूर भी कर लिया था लेकिन पहले मदिरा और भोज और बाद में नाच का आयोजन रखने को कहा गया। सुल्ताना ने यह भी कहा कि उसके साथी पेट भरने के बाद नाच देखने का कहीं अधिक लुत्फ ले पाएंगे। उस दिन नाच गाने के जश्न की तैयारियां होने लगीं। ठेकेदार अमीर आदमी था, उसने रामनगर और काशीपुर के अपने दोस्तों को भी न्योता दिया था क्योंकि मशहूर नाचने वालियों को बुलवाया गया था। खाने-पीने का जबरदस्त इंतजाम था, दारू पीने का इंतजाम खासतौर पर डकैतों के लिए था। सारे सामान खरीदकर बैलगाड़ियों से कैंप तक लाए गये थे। आयोजन की रात मेहमान आए और दावत शुरू हुई। अक्सर ऐसे आयोजनों में मेहमान अलग-अलग गोल बनाकर बैठते हैं, रोशनी के लिए कुछ अलाव और कुछ लालटेन भी थी। उस दिन सुल्ताना और उसके साथियों ने जमकर खाया और छककर शराब पी। दावत जब खत्म हुई तब सुल्ताना अपने मेजबान के कंधे पर हाथ रख कर एक किनारे ले गया और मेहमाननवाजी के लिए उसका शुक्रिया अदा किया। उसके बाद उसने ठेकेदार से कहा कि हमें लंबा सफर तय करना है, इसलिए नाच देखना संभव नहीं होगा। जाने से पहले उसने एक और गुजारिश की थी कि दावत और जश्न जारी रहना चाहिये। उस दौर में सुल्ताना की गुजारिश फरमान होती थी क्योंकि किसी में हिम्मत नही होती कि सुल्ताना की बात न माने। उस दिन के नाच-गाने में मुख्य वाद्य ढोलक था। ढोलक की ताल ही फ्रेडरिक के लिए सिग्नल थी। सिग्नल मिलते ही फ्रेडरिक को पहले की पोजिशन छोड़कर पुलिसकर्मियों के साथ कैंप को चारों ओर से घेर लेना था। इसमें से एक दस्ते का नेतृत्व एक फॉरेस्ट गार्ड कर रहा था, जो रात के अंधेरे में रास्ता भटक गया। इसी टोली को सुल्ताना का रास्ता रोकना था लेकिन वह टोली रात भर भटकती रही। वैसे सच यह है कि फॉरेस्ट गार्ड कभी सुल्ताना के साथ जंगल में रह चुका था और समझदार इंसान था, अगर उसे सुल्ताना से प्लान में तब्दीली की गुजारिश न मिली होती तो वह जानबूझकर रास्ता नहीं भूलता। इससे फ्रेडरिक को सिग्नल मिलने से पहले सुल्ताना को वहां से निकलने का मौका मिल गया और सुल्ताना अपनी गैंग के साथ खिसक लिया। उसके बाद जब फ्रेडरिक का दस्ता मुश्किल रास्ते से घने जंगलों से होकर कैंप पर पहुंचा तो वहां कुछ डरी हुई नचनियों और ठेकेदार के हैरान-परेशान दोस्तों के अलावा कोई न मिला।
रामनगर के जंगलों से भागने के बाद सुल्ताना देहरादून की ओर पहुंचा तो वहां उसने थोड़े समय में जो डाके डाले, उससे उसकी टोली को एक लाख रुपये के सोने के जेवरात मिले। इसके बाद वह संयुक्त प्रांत के घने जंगलों में लौट आया। देहरादून से लौटते वक्त उसे गंगा नदी पार करनी थी। उस समय गंगा नदी पर इक्का-दुक्का ही पुल बने हुए थे। पुलिस को खबर थी कि सुल्ताना देहरादून की ओर से लौटेगा, इसलिए जिन पुलों से उसके लौटने की संभावना थी, उन पर सख्त पहरा था। लौटते वक्त सुल्ताना उस पुल से गुजरा जिसके बारे में उसे अपने मुखबिरों से पता चला था कि वहां पुलिस तैनात नहीं है। रास्ते में एक गांव पड़ा, जहां उसे गीत-संगीत सुनाई पड़ा। सुल्ताना को मालूम हुआ कि उस गांव में एक अमीर आदमी के बेटे की शादी हो रही है। गांव के बीचोबीच बाराती और मेहमान इकट्ठा थे। जब वहां जगमगाती मशालों के बीच सुल्ताना पहुंचा तो हलचल मच गयी, तब उसने उन लोगों से बैठे रहने को कहा। सुल्ताना ने फिर कहा कि अगर वे लोग उसकी बात मान लें तो डरने की कोई जरूरत नहीं। इसके बाद उसने गांव के मुखिया और दूल्हे के पिता को बुलाया। उसने मुखिया से वह बंदूक मांगी जो उसने हाल ही में खरीदी थी, इसके साथ अपने आदमियों के लिए उसने 10 हजार रुपये मांगे। बंदूक और पैसा फौरन उसे सौंप दिया गया, जिसके बाद सुल्ताना और उसके साथी गांव से लौट गए। अगले दिन सुल्ताना को पता चला कि उसके साथी भूरा पहलवान ने दुल्हन को अगवा कर लिया है।
पसंद आई थी चतुराई, सेवाभाव देख लूटने से कर दिया था इनकारः
बताया जाता है कि सुल्ताना डाकू क़े जमाने में खूनीबड़, मवाकोट कोटद्वार भावर क्षेत्र में एक जागीरदार और मालदार जोशी हुआ करते थे। मालदार जोशी (पितृशरण जोशी पूर्व प्रधान मवाकोट क़े दादा) बहुत चतुर किस्म क़े व्यक्ति थे। उन्हें लूटने क़े लिए डाकू सुल्ताना ने दो बार चिट्ठी भिजवाई कि वह फलां तारीख उन्हें लूटने आ रहा है, तो पूरा परिवार घबरा गया व सारे क्षेत्र क़े लोग सुल्ताना डाकू क़े नाम से भयभीत होकर दिन में ही दुबक गये। पंडित जोशी ने माली की वेशभूषा बनाई व डकैतों क़े लिए मुर्गा व भात बनाने में जुट गये। जैसे ही अर्धरात्रि में डकैतों का काफिला मालदार जोशी क़े यहाँ पहुंचा। पंडित जोशी हाथ जोड़कर खड़ा होकर बोला 'साहब, आपकी चिट्ठी मिलते ही मालदार साहब माल लपेटकर परिवार सहित पहाड़ क़े किसी गाँव चले गये व मुझे हुक्म दे गये कि मैं आपकी खातिरदारी में कोई कमी न छोडूं। आपके लिए भात मुर्गा बना है व रास्ते क़े लिए भी चार जिंदा मुर्गा आपको देने को कहा है। सुना है आप गरीबों क़े मसीहा हैं इसलिए मैं जान की परवाह न कर आपकी सेवा में लगा हूँ हुजूर...'! डाकू सुल्ताना व उसके साथियों ने दावत उड़ाई व ठहाके लगाते हुए बोला चल पंडत... तुझे माफ़ किया। तेरी चतुराई मुझे पसंद आई। मैं तुझे पहले ही पहचान गया था लेकिन तेरे सेवाभाव से हम खुश हुए। अब तुझे नहीं लूटूंगा लेकिन दुबारा कभी इधर से आये तो तेरी दावत ख़ाकर ही जाएंगे।
बड़ पर टांग दी थी ठाकुर उमराव सिंह की लाशः
कोटद्वार-भाबर क्षेत्र में जमीदार उमराव सिंह क़े बारे में प्रचलित है। बताया जाता है कि सुल्ताना डाकू ने करीब 1915 से 1920 के बीच कोटद्वार-भावर के प्रसिद्ध जमीदार उमराव सिंह के घर चिट्ठी भेजी कि हम उक्त तारीख को उनके घर लूट करने आ रहे हैं। जागीरदार व जमींदार उमराव सिंह को यह काफी नागवार गुजरा व उन्हें चिट्ठी पढ़कर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को देने की योजना बनाई। भावर से करीब 20 किमी दूर कोटद्वार में पुलिस थाना था। ठा. उमराव सिंह ने अपने घर में काम करने वाले एक व्यक्ति को चिट्ठी दी और कहा कि वह उनका घोड़ा ले जाकर कोटद्वार थाने में यह चिट्ठी देकर आ। उस दौर में भावर से होते हुए कोटद्वार सनेह से कुमाऊं तक कंडी रोड थी। कुछ लोग बताते हैं कि कंडी रोड हिमांचल से हरिद्वार और कोटद्वार से कुमाऊं होते हुए नेपाल तक जाती थी। जो वन विभाग के अंतर्गत आती थी। इस रोड पर बैल गाड़ी आदि चलती थी, जिसमें सिगड्डी क्षेत्र क़े जंगलों से बांस काटकर ले जाया जाता था। ठाकुर उमराव सिंह का नौकर जब घर से कोटद्वार घोड़े पर जा रहा था, तब दुर्गापुरी के पास नहर किनारे सुल्ताना डाकू और उसके साथी नहा रहे थे। डाकू और उसके साथी एक विशेष वेशभूषा में होते थे, जो पुलिस की वर्दी की तरह लगती थी। सुल्ताना ने घोड़े पर किसी को जाते देखा तो उसे रोका। उसने कहा कि घोड़ा तो किसी जागीरदार का लग रहा है, लेकिन इस पर नौकर कहां जा रहा है। उसे शक हुआ तो कड़क आवाज में पूछा कि कहाँ जा रहे हो? नौकर को लगा यही पुलिस वाले हैं तो उन्हें सारा भेद बता दिया। डाकू सुल्ताना ने कहा कि अच्छा हुआ, हम यहीं मिल गये वरना खामख्वाह तुम्हें कोटद्वार जाना पड़ता। कहो जागीरदार का क्या संदेश है? नौकर ने चिट्ठी सुल्ताना डाकू को थमा दी और घर लौट गया। चिट्ठी पढ़ कर सुल्ताना भड़क गया। नौकर के घर पहुंचने पर उमराव सिंह ने पूछा कि चिट्ठी दे दी पुलिस को और तू जल्दी वापस आ गया। उसने बताया कि पुलिस वाले दुर्गापुरी के पास ही मिल गए थे। सुल्ताना भी वहां से सीधे उमराव सिंह के घर पहुंच गया और उन्हें गोली मार दी और उनकी लाश लाकर गाँव क़े वटवृक्ष में टांग दी। तब से इस गाँव का नाम ही खूनीबड़ पड़ गया। भले ही ठाकुर उमराव सिंह क़े नाम पर आज भी उमरावपुर व उमराव नगर है, लेकिन खूनी बड़ आज भी डाकू सुल्ताना क़े जुल्मों की कहानी सुनाता नजर आता है। जहाँ अमीर लोग सुल्ताना डाकू को दुर्दांत डकैत मानते थे वहीं गरीब उसे मसीहा कहते थे क्योंकि वह अक्सर अमीरों का माल लूटकर गरीबों में बाँट देता था। जिम कार्बेट की पुस्तक "माय इंडिया" क़े अध्याय सुल्ताना : इंडियाज रॉबिन हुड" नथाराम शर्मा गौड़ की पुस्तक " सुल्ताना डाकू गरीबों का प्यारा" पेंग्वेन इंडिया में छपी लेखक सुजीत श्राफ की पुस्तक "कनेक्शन ऑफ़ सुल्ताना डाकू" सहित कई लेखकों की पुस्तकों में सुल्ताना डाकू सचमुच ब्रिटिश काल में किसी रॉबिन हुड से कम नहीं था।
आगरा जेल में 10 जून 1924 को फांसी दी गई थी सुल्ताना कोः
ब्रिटिश सरकार क़े लिए सिरदर्द बने सुल्ताना डाकू को जिन्दा या मुर्दा गिरफ्तार करने क़े लिए टिहरी रियासत क़े राजा नरेंद्र शाह के अनुरोध पर ब्रिटिश सरकार ने सुल्ताना को पकड़ने के लिए एक कुशल और दुस्साहसी अफसर फ्रेडी यंग को बुलाया गया। आगे जाकर फ्रेडी यंग का नाम इतिहास में सुल्ताना डाकू के साथ अमिट रूप से दर्ज हो गया क्योंकि लम्बे संघर्ष के बाद फ्रेडी ने न केवल सुल्ताना को धर दबोचा, उसने सुल्ताना की मौत के बाद उसके बेटे और उसकी पत्नी की जैसी सहायता की, वह अपने आप में एक मिसाल है। तीन सौ सिपाहियों और पचास घुड़सवारों की फ़ौज लेकर फ्रेडरिक यंग ने नजीबाबाद हरिद्वार के बीच गैण्डीखाता में ताबड़तोड़ चौदह बार छापेमारी की और अंतत 14 दिसंबर 1923 को सुल्ताना को गैण्डीखाता के जंगलों से गिरफ्तार कर हल्द्वानी की जेल में बंद कर दिया। सुल्ताना के साथ उसके साथी पीताम्बर नन्नू पहलवान नरसिंह बलदेव और भूरे भी पकड़े गए थे। इस पूरे मिशन में सर जिम कॉर्बेट ने भी यंग साहब की मदद की थी। नैनीताल की अदालत में सुल्ताना पर मुकदमा चलाया गया और इस मुकदमे को 'नैनीताल गन केस' कहा गया। बताया जाता है कि उन्हें आखिरी पेशी पर आगरा ले जाया गया जहाँ उन्हें 8 जून 1924 को फांसी की सजा सुनाई गई और आगरा जेल में ही सुलताना को 10 जून 1924 को फांसी पर लटका दिया गया था। सुल्ताना की मौत के बाद उसे याद करते हुए जिम कॉर्बेट ने 'माई इंडिया' के अध्याय 'सुल्तानाः इण्डियाज़ रोबिन हुड' में यह भी लिखा है "समाज मांग करता है कि उसे अपराधियों से बचाया जाय, और सुल्ताना एक अपराधी था। उस पर देश के कानून के मुताबिक़ मुकदमा चला, उसे दोषी पाया गया और उसे फांसी दे दी गयी। जो भी हो, इस छोटे से आदमी के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है जिसने तीन साल तक सरकार की ताकत का मुकाबला किया और जेल की कोठरी में अपने व्यवहार से पहरेदारों का दिल जीता। " इस बात के प्रमाण हैं कि फ्रेडी यंग ने सुल्ताना की पत्नी और उसके बेटे को भोपाल के नज़दीक पुनर्वासित किया। बाद में उसने उसके बेटे को अपना नाम दिया और उसे पढ़ने के लिए इंग्लैण्ड भेजा। कहते हैं फ्रेडी यंग ने ऐसा करने का सुल्ताना से वादा भी किया था।
'इतना मरियल सा आदमी सुल्ताना डाकू':
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बिजनौर। ब्रिटिश शिकारी एवं मशहूर लेखक जिम कॉर्बेट ने अपनी किताब माई इण्डिया में लिखा है कि सुल्ताना डाकू क़े डकैतों के पास उस दौर में भी अत्याधुनिक हथियार हुआ करते थे व उसके डाकू दल में सैकड़ों प्रशिक्षित डकैत शामिल थे। ब्रिटिश काल में सुल्ताना डाकू की भातू जनजाति को आपराधिक करार दिए जाने के बाद उसके पूरे गैंग को नजीबाबाद किले की चारदीवारी में कैद कर सुधरने का अवसर दिया गया था। सुल्ताना अपनी युवा पत्नी और नवजात बेटे सहित सैकड़ों अन्य भातुओं के साथ नजीबाबाद के किले में कैद था। एक रात वह किले की दीवारों को फांदकर भाग निकला, जैसा कि कोई भी नौजवान और हौसले वाला इंसान करता है। किले के बाहर सुल्ताना को उसके जैसे सैकड़ों साथी गांव जट्टीवाला में मिले। वे सब हथियारबंद बदमाश थे क्योंकि उस दिन सुल्ताना डाकू की गैंग ने डकैती डालने की सरेआम घोषणा कर रखी थी। उस दौर में डकैत तराई और भावर के जंगलों में भटकते और पूरब में गोंडा से लेकर सहारनपुर तक डाका डालते थे। उस दौर में सुल्ताना का गैंग बिजनौर के गांव जालपुर तथा गांव बनियो के रामपुर में भी डकैती डाल चुका था। जिम कार्बेट लिखते हैं जब मैंने पहली बार सुल्ताना डाकू का नाम तब सुना तब मैं गडप्पू के जंगलों में कैंप कर रहा था। गडप्पू का यह क्षेत्र कालाढुंगी के नजदीक था जो सर्दियों में मेरा घर हुआ करता था। उस समय पर्सी विंडहैम कुमाऊं कमिश्नर हुआ करते थे। नजीबाबाद से लेकर राबर्स केव तराई भावर का जंगल सुल्ताना डाकू का ठिकाना हुआ करता था। सुल्ताना डाकू से परेशान ब्रिटिश सरकार के विंडहैम कमिश्नर ने युवा पुलिस अधिकारी फ्रेडरिक यंग की मदद मांगी थी। ब्रिटिश सरकार ने विंडहैम की इल्तिजा मान ली और सुलताना डाकू को पकड़ने के लिए विशेष दस्ते पर मुहर लगा दी। फ्रेडरिक यंग उस दस्ते के मुखिया थे और उन्हें अपनी पसंद के पुलिसकर्मियों को चुनने की छूट दी गयी थी, जिसमें गांव बिजनौर जनपद के भी कई लोग थे। जब पहली बार सुल्ताना को पकड़ने की कोशिश सर फ्रेडरिक यंग द्वारा जंगलों में की गई, तब उस समय वन विभाग जंगल के एक हिस्से को साफ कर रहा था। उन मजदूरों के एक ठेकेदार को सुल्ताना को न्योता देने को कहा गया था तब सुल्ताना का पड़ाव काला ढूंगी के आस-पास ही था। उस दिन सुल्ताना को भोज और उसके बाद नाच-गाने के कार्यक्रम का न्योता दिया गया था। सुल्ताना और उसके साथियों ने यह बुलावा मंजूर भी कर लिया था लेकिन पहले मदिरा और भोज और बाद में नाच का आयोजन रखने को कहा गया। सुल्ताना ने यह भी कहा कि उसके साथी पेट भरने के बाद नाच देखने का कहीं अधिक लुत्फ ले पाएंगे। उस दिन नाच गाने के जश्न की तैयारियां होने लगीं। ठेकेदार अमीर आदमी था, उसने रामनगर और काशीपुर के अपने दोस्तों को भी न्योता दिया था क्योंकि मशहूर नाचने वालियों को बुलवाया गया था। खाने-पीने का जबरदस्त इंतजाम था, दारू पीने का इंतजाम खासतौर पर डकैतों के लिए था। सारे सामान खरीदकर बैलगाड़ियों से कैंप तक लाए गये थे। आयोजन की रात मेहमान आए और दावत शुरू हुई। अक्सर ऐसे आयोजनों में मेहमान अलग-अलग गोल बनाकर बैठते हैं, रोशनी के लिए कुछ अलाव और कुछ लालटेन भी थी। उस दिन सुल्ताना और उसके साथियों ने जमकर खाया और छककर शराब पी। दावत जब खत्म हुई तब सुल्ताना अपने मेजबान के कंधे पर हाथ रख कर एक किनारे ले गया और मेहमाननवाजी के लिए उसका शुक्रिया अदा किया। उसके बाद उसने ठेकेदार से कहा कि हमें लंबा सफर तय करना है, इसलिए नाच देखना संभव नहीं होगा। जाने से पहले उसने एक और गुजारिश की थी कि दावत और जश्न जारी रहना चाहिये। उस दौर में सुल्ताना की गुजारिश फरमान होती थी क्योंकि किसी में हिम्मत नही होती कि सुल्ताना की बात न माने। उस दिन के नाच-गाने में मुख्य वाद्य ढोलक था। ढोलक की ताल ही फ्रेडरिक के लिए सिग्नल थी। सिग्नल मिलते ही फ्रेडरिक को पहले की पोजिशन छोड़कर पुलिसकर्मियों के साथ कैंप को चारों ओर से घेर लेना था। इसमें से एक दस्ते का नेतृत्व एक फॉरेस्ट गार्ड कर रहा था, जो रात के अंधेरे में रास्ता भटक गया। इसी टोली को सुल्ताना का रास्ता रोकना था लेकिन वह टोली रात भर भटकती रही। वैसे सच यह है कि फॉरेस्ट गार्ड कभी सुल्ताना के साथ जंगल में रह चुका था और समझदार इंसान था, अगर उसे सुल्ताना से प्लान में तब्दीली की गुजारिश न मिली होती तो वह जानबूझकर रास्ता नहीं भूलता। इससे फ्रेडरिक को सिग्नल मिलने से पहले सुल्ताना को वहां से निकलने का मौका मिल गया और सुल्ताना अपनी गैंग के साथ खिसक लिया। उसके बाद जब फ्रेडरिक का दस्ता मुश्किल रास्ते से घने जंगलों से होकर कैंप पर पहुंचा तो वहां कुछ डरी हुई नचनियों और ठेकेदार के हैरान-परेशान दोस्तों के अलावा कोई न मिला। रामनगर के जंगलों से भागने के बाद सुल्ताना देहरादून की ओर पहुंचा तो वहां उसने थोड़े समय में जो डाके डाले, उससे उसकी टोली को एक लाख रुपये के सोने के जेवरात मिले। इसके बाद वह संयुक्त प्रांत के घने जंगलों में लौट आया। देहरादून से लौटते वक्त उसे गंगा नदी पार करनी थी। उस समय गंगा नदी पर इक्का-दुक्का ही पुल बने हुए थे। पुलिस को खबर थी कि सुल्ताना देहरादून की ओर से लौटेगा, इसलिए जिन पुलों से उसके लौटने की संभावना थी, उन पर सख्त पहरा था। लौटते वक्त सुल्ताना उस पुल से गुजरा जिसके बारे में उसे अपने मुखबिरों से पता चला था कि वहां पुलिस तैनात नहीं है। रास्ते में एक गांव पड़ा, जहां उसे गीत-संगीत सुनाई पड़ा। सुल्ताना को मालूम हुआ कि उस गांव में एक अमीर आदमी के बेटे की शादी हो रही है। गांव के बीचोबीच बाराती और मेहमान इकट्ठा थे। जब वहां जगमगाती मशालों के बीच सुल्ताना पहुंचा तो हलचल मच गयी, तब उसने उन लोगों से बैठे रहने को कहा। सुल्ताना ने फिर कहा कि अगर वे लोग उसकी बात मान लें तो डरने की कोई जरूरत नहीं। इसके बाद उसने गांव के मुखिया और दूल्हे के पिता को बुलाया। उसने मुखिया से वह बंदूक मांगी जो उसने हाल ही में खरीदी थी, इसके साथ अपने आदमियों के लिए उसने दस हजार रुपये मांगे। बंदूक और पैसा फौरन उसे सौंप दिया गया, जिसके बाद सुल्ताना और उसके साथी गांव से लौट गए। अगले दिन सुल्ताना को पता चला कि उसके साथी भूरा पहलवान ने दुल्हन को अगवा कर लिया है। पसंद आई थी चतुराई, सेवाभाव देख लूटने से कर दिया था इनकारः बताया जाता है कि सुल्ताना डाकू क़े जमाने में खूनीबड़, मवाकोट कोटद्वार भावर क्षेत्र में एक जागीरदार और मालदार जोशी हुआ करते थे। मालदार जोशी बहुत चतुर किस्म क़े व्यक्ति थे। उन्हें लूटने क़े लिए डाकू सुल्ताना ने दो बार चिट्ठी भिजवाई कि वह फलां तारीख उन्हें लूटने आ रहा है, तो पूरा परिवार घबरा गया व सारे क्षेत्र क़े लोग सुल्ताना डाकू क़े नाम से भयभीत होकर दिन में ही दुबक गये। पंडित जोशी ने माली की वेशभूषा बनाई व डकैतों क़े लिए मुर्गा व भात बनाने में जुट गये। जैसे ही अर्धरात्रि में डकैतों का काफिला मालदार जोशी क़े यहाँ पहुंचा। पंडित जोशी हाथ जोड़कर खड़ा होकर बोला 'साहब, आपकी चिट्ठी मिलते ही मालदार साहब माल लपेटकर परिवार सहित पहाड़ क़े किसी गाँव चले गये व मुझे हुक्म दे गये कि मैं आपकी खातिरदारी में कोई कमी न छोडूं। आपके लिए भात मुर्गा बना है व रास्ते क़े लिए भी चार जिंदा मुर्गा आपको देने को कहा है। सुना है आप गरीबों क़े मसीहा हैं इसलिए मैं जान की परवाह न कर आपकी सेवा में लगा हूँ हुजूर...'! डाकू सुल्ताना व उसके साथियों ने दावत उड़ाई व ठहाके लगाते हुए बोला चल पंडत... तुझे माफ़ किया। तेरी चतुराई मुझे पसंद आई। मैं तुझे पहले ही पहचान गया था लेकिन तेरे सेवाभाव से हम खुश हुए। अब तुझे नहीं लूटूंगा लेकिन दुबारा कभी इधर से आये तो तेरी दावत ख़ाकर ही जाएंगे। बड़ पर टांग दी थी ठाकुर उमराव सिंह की लाशः कोटद्वार-भाबर क्षेत्र में जमीदार उमराव सिंह क़े बारे में प्रचलित है। बताया जाता है कि सुल्ताना डाकू ने करीब एक हज़ार नौ सौ पंद्रह से एक हज़ार नौ सौ बीस के बीच कोटद्वार-भावर के प्रसिद्ध जमीदार उमराव सिंह के घर चिट्ठी भेजी कि हम उक्त तारीख को उनके घर लूट करने आ रहे हैं। जागीरदार व जमींदार उमराव सिंह को यह काफी नागवार गुजरा व उन्हें चिट्ठी पढ़कर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को देने की योजना बनाई। भावर से करीब बीस किमी दूर कोटद्वार में पुलिस थाना था। ठा. उमराव सिंह ने अपने घर में काम करने वाले एक व्यक्ति को चिट्ठी दी और कहा कि वह उनका घोड़ा ले जाकर कोटद्वार थाने में यह चिट्ठी देकर आ। उस दौर में भावर से होते हुए कोटद्वार सनेह से कुमाऊं तक कंडी रोड थी। कुछ लोग बताते हैं कि कंडी रोड हिमांचल से हरिद्वार और कोटद्वार से कुमाऊं होते हुए नेपाल तक जाती थी। जो वन विभाग के अंतर्गत आती थी। इस रोड पर बैल गाड़ी आदि चलती थी, जिसमें सिगड्डी क्षेत्र क़े जंगलों से बांस काटकर ले जाया जाता था। ठाकुर उमराव सिंह का नौकर जब घर से कोटद्वार घोड़े पर जा रहा था, तब दुर्गापुरी के पास नहर किनारे सुल्ताना डाकू और उसके साथी नहा रहे थे। डाकू और उसके साथी एक विशेष वेशभूषा में होते थे, जो पुलिस की वर्दी की तरह लगती थी। सुल्ताना ने घोड़े पर किसी को जाते देखा तो उसे रोका। उसने कहा कि घोड़ा तो किसी जागीरदार का लग रहा है, लेकिन इस पर नौकर कहां जा रहा है। उसे शक हुआ तो कड़क आवाज में पूछा कि कहाँ जा रहे हो? नौकर को लगा यही पुलिस वाले हैं तो उन्हें सारा भेद बता दिया। डाकू सुल्ताना ने कहा कि अच्छा हुआ, हम यहीं मिल गये वरना खामख्वाह तुम्हें कोटद्वार जाना पड़ता। कहो जागीरदार का क्या संदेश है? नौकर ने चिट्ठी सुल्ताना डाकू को थमा दी और घर लौट गया। चिट्ठी पढ़ कर सुल्ताना भड़क गया। नौकर के घर पहुंचने पर उमराव सिंह ने पूछा कि चिट्ठी दे दी पुलिस को और तू जल्दी वापस आ गया। उसने बताया कि पुलिस वाले दुर्गापुरी के पास ही मिल गए थे। सुल्ताना भी वहां से सीधे उमराव सिंह के घर पहुंच गया और उन्हें गोली मार दी और उनकी लाश लाकर गाँव क़े वटवृक्ष में टांग दी। तब से इस गाँव का नाम ही खूनीबड़ पड़ गया। भले ही ठाकुर उमराव सिंह क़े नाम पर आज भी उमरावपुर व उमराव नगर है, लेकिन खूनी बड़ आज भी डाकू सुल्ताना क़े जुल्मों की कहानी सुनाता नजर आता है। जहाँ अमीर लोग सुल्ताना डाकू को दुर्दांत डकैत मानते थे वहीं गरीब उसे मसीहा कहते थे क्योंकि वह अक्सर अमीरों का माल लूटकर गरीबों में बाँट देता था। जिम कार्बेट की पुस्तक "माय इंडिया" क़े अध्याय सुल्ताना : इंडियाज रॉबिन हुड" नथाराम शर्मा गौड़ की पुस्तक " सुल्ताना डाकू गरीबों का प्यारा" पेंग्वेन इंडिया में छपी लेखक सुजीत श्राफ की पुस्तक "कनेक्शन ऑफ़ सुल्ताना डाकू" सहित कई लेखकों की पुस्तकों में सुल्ताना डाकू सचमुच ब्रिटिश काल में किसी रॉबिन हुड से कम नहीं था। आगरा जेल में दस जून एक हज़ार नौ सौ चौबीस को फांसी दी गई थी सुल्ताना कोः ब्रिटिश सरकार क़े लिए सिरदर्द बने सुल्ताना डाकू को जिन्दा या मुर्दा गिरफ्तार करने क़े लिए टिहरी रियासत क़े राजा नरेंद्र शाह के अनुरोध पर ब्रिटिश सरकार ने सुल्ताना को पकड़ने के लिए एक कुशल और दुस्साहसी अफसर फ्रेडी यंग को बुलाया गया। आगे जाकर फ्रेडी यंग का नाम इतिहास में सुल्ताना डाकू के साथ अमिट रूप से दर्ज हो गया क्योंकि लम्बे संघर्ष के बाद फ्रेडी ने न केवल सुल्ताना को धर दबोचा, उसने सुल्ताना की मौत के बाद उसके बेटे और उसकी पत्नी की जैसी सहायता की, वह अपने आप में एक मिसाल है। तीन सौ सिपाहियों और पचास घुड़सवारों की फ़ौज लेकर फ्रेडरिक यंग ने नजीबाबाद हरिद्वार के बीच गैण्डीखाता में ताबड़तोड़ चौदह बार छापेमारी की और अंतत चौदह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ तेईस को सुल्ताना को गैण्डीखाता के जंगलों से गिरफ्तार कर हल्द्वानी की जेल में बंद कर दिया। सुल्ताना के साथ उसके साथी पीताम्बर नन्नू पहलवान नरसिंह बलदेव और भूरे भी पकड़े गए थे। इस पूरे मिशन में सर जिम कॉर्बेट ने भी यंग साहब की मदद की थी। नैनीताल की अदालत में सुल्ताना पर मुकदमा चलाया गया और इस मुकदमे को 'नैनीताल गन केस' कहा गया। बताया जाता है कि उन्हें आखिरी पेशी पर आगरा ले जाया गया जहाँ उन्हें आठ जून एक हज़ार नौ सौ चौबीस को फांसी की सजा सुनाई गई और आगरा जेल में ही सुलताना को दस जून एक हज़ार नौ सौ चौबीस को फांसी पर लटका दिया गया था। सुल्ताना की मौत के बाद उसे याद करते हुए जिम कॉर्बेट ने 'माई इंडिया' के अध्याय 'सुल्तानाः इण्डियाज़ रोबिन हुड' में यह भी लिखा है "समाज मांग करता है कि उसे अपराधियों से बचाया जाय, और सुल्ताना एक अपराधी था। उस पर देश के कानून के मुताबिक़ मुकदमा चला, उसे दोषी पाया गया और उसे फांसी दे दी गयी। जो भी हो, इस छोटे से आदमी के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है जिसने तीन साल तक सरकार की ताकत का मुकाबला किया और जेल की कोठरी में अपने व्यवहार से पहरेदारों का दिल जीता। " इस बात के प्रमाण हैं कि फ्रेडी यंग ने सुल्ताना की पत्नी और उसके बेटे को भोपाल के नज़दीक पुनर्वासित किया। बाद में उसने उसके बेटे को अपना नाम दिया और उसे पढ़ने के लिए इंग्लैण्ड भेजा। कहते हैं फ्रेडी यंग ने ऐसा करने का सुल्ताना से वादा भी किया था। 'इतना मरियल सा आदमी सुल्ताना डाकू':
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रवि सिन्हा, रांचीकोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच झारखंड में 15 अप्रैल को सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जा सकेगी। 52 साल में लगातार दूसरे साल रामनवमी और सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को तुगलकी फरमान करार दिया है और इसे धार्मिक आस्था पर प्रहार बताया है।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि झारखंड सरकार ने धार्मिक परंपरा और देश की संस्कृति पर हमला करने का काम किया है। उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण सरकार सोशल डिस्टेसिंग की अनुमति के साथ रामनवमी और सरहुल की शोभायात्रा को निकालने की अनुमति देने की मांग की है। बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार हमारी परंपरा और धार्मिक भावना पर आघात करने का काम ना करें।
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें यह विश्वास है कि मुख्यमंत्री ने जो फैसला लिया है, उसे मधुपुर विधानसभा उपचुनाव में अपने ऊपर भी लागू करेंगे। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीएम मधुपुर उपचुनाव में कोई चुनावी जनसभा को संबोधित नहीं करेंगे। जनता भी यही अपेक्षा करेगी।
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रवि सिन्हा, रांचीकोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच झारखंड में पंद्रह अप्रैल को सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जा सकेगी। बावन साल में लगातार दूसरे साल रामनवमी और सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को तुगलकी फरमान करार दिया है और इसे धार्मिक आस्था पर प्रहार बताया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि झारखंड सरकार ने धार्मिक परंपरा और देश की संस्कृति पर हमला करने का काम किया है। उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण सरकार सोशल डिस्टेसिंग की अनुमति के साथ रामनवमी और सरहुल की शोभायात्रा को निकालने की अनुमति देने की मांग की है। बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार हमारी परंपरा और धार्मिक भावना पर आघात करने का काम ना करें। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें यह विश्वास है कि मुख्यमंत्री ने जो फैसला लिया है, उसे मधुपुर विधानसभा उपचुनाव में अपने ऊपर भी लागू करेंगे। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीएम मधुपुर उपचुनाव में कोई चुनावी जनसभा को संबोधित नहीं करेंगे। जनता भी यही अपेक्षा करेगी।
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पुणे : पुलिसनामा ऑनलाइन - Mann Ki Baat's 100th Episode Promotion In Pune । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को देशवासियों को मन की बात कार्यक्रम के जरिए संबोधित करते है. देश के नागरिक बड़े उत्साह से इसे सुनते है. देश के नागरिक बड़े उत्साह से यह कार्यक्रम सुनते है. देश में घटी कई घटनाओं और विभिन्न नागरिकों अथवा विभिन्न समूहों द्वारा किए गए विशेष कार्य इस कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों तक पहुंचाते है. इस कार्यक्रम की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है. आने वाले रविवार 30 अप्रैल की सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री के इस अनूठे व देश और विश्व में प्रसिद्ध कार्यक्रम का सौवां भाग प्रसारित होगा. पुणे शहर में इस सौवे मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण 1000 जगहों पर आयोजित करना भाजपा ने तय किया है. यह जानकारी शहराध्यक्ष जगदीश मुलीक ने दी है. (Mann Ki Baat's 100th Episode Promotion In Pune)
पुणे शहर के प्रत्येक बूथ पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा. साथ ही विभिन्न सोसायटियों, गणेश मंडलों व कई संस्थाओं के जरिए यह मन की बात कार्यक्रम प्रसारित की जाएगी. पुणे शहर के सभी नागरिक इस सौवे मन की बात कार्यक्रम के प्रसारण में शामिल हो. यह अपील पुणे शहर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगदीश मुलीक ने की है.
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पुणे : पुलिसनामा ऑनलाइन - Mann Ki Baat's एक सौth Episode Promotion In Pune । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को देशवासियों को मन की बात कार्यक्रम के जरिए संबोधित करते है. देश के नागरिक बड़े उत्साह से इसे सुनते है. देश के नागरिक बड़े उत्साह से यह कार्यक्रम सुनते है. देश में घटी कई घटनाओं और विभिन्न नागरिकों अथवा विभिन्न समूहों द्वारा किए गए विशेष कार्य इस कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों तक पहुंचाते है. इस कार्यक्रम की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है. आने वाले रविवार तीस अप्रैल की सुबह ग्यारह बजे प्रधानमंत्री के इस अनूठे व देश और विश्व में प्रसिद्ध कार्यक्रम का सौवां भाग प्रसारित होगा. पुणे शहर में इस सौवे मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण एक हज़ार जगहों पर आयोजित करना भाजपा ने तय किया है. यह जानकारी शहराध्यक्ष जगदीश मुलीक ने दी है. पुणे शहर के प्रत्येक बूथ पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा. साथ ही विभिन्न सोसायटियों, गणेश मंडलों व कई संस्थाओं के जरिए यह मन की बात कार्यक्रम प्रसारित की जाएगी. पुणे शहर के सभी नागरिक इस सौवे मन की बात कार्यक्रम के प्रसारण में शामिल हो. यह अपील पुणे शहर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगदीश मुलीक ने की है.
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Toothpaste: सुबह उठने के बाद आप सबसे पहला काम क्या करते हैं। ज्यादातर लोगों का जवाब होगा मुंह की सफाई। बहुत से लोग टूथपेस्ट करते हैं तो कुछ लोग आज भी दातुन करना पसंद करते हैं। हालांकि टूथपेस्ट लोगों की पहली पसंद है। जिसे चुनते वक्त आप सिर्फ नाम को ही देखते होंगे। लेकिन टूथपेस्ट खरीदने के बाद क्या आपने कभी ट्यूब पर पड़ी हरी, लाल, नीली या फिर काली स्ट्रिप पर गौर किया है। शायद नहीं। अगर आपने आज से पहले कभी इस बात पर गौर नहीं किया तो इस वीडियो में हम आपकी इस उत्सुकता को दूर करने जा रहे हैं।
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Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Toothpaste: सुबह उठने के बाद आप सबसे पहला काम क्या करते हैं। ज्यादातर लोगों का जवाब होगा मुंह की सफाई। बहुत से लोग टूथपेस्ट करते हैं तो कुछ लोग आज भी दातुन करना पसंद करते हैं। हालांकि टूथपेस्ट लोगों की पहली पसंद है। जिसे चुनते वक्त आप सिर्फ नाम को ही देखते होंगे। लेकिन टूथपेस्ट खरीदने के बाद क्या आपने कभी ट्यूब पर पड़ी हरी, लाल, नीली या फिर काली स्ट्रिप पर गौर किया है। शायद नहीं। अगर आपने आज से पहले कभी इस बात पर गौर नहीं किया तो इस वीडियो में हम आपकी इस उत्सुकता को दूर करने जा रहे हैं।
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भरमौर - उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर प्रशासन की टीम शुक्रवार को देर शाम वापस उपमंडल मुख्यालय लौट आई है। जबकि टीम के कुछ सदस्य डल झील तक का जायजा लेने के लिए रवाना हो गए हैं। उनके शनिवार तक वापस लौटने की उम्मीद है। शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे के करीब टीम उपमंडल मुख्यालय से हड़सर की ओर रवाना हुई थी। इस दौरान एडीएम भरमौर समेत एसडीएम बीके चौधरी और तहसीलदार डा. गणेश ठाकुर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। अहम है कि पवित्र मणिमहेश यात्रा 15 अगस्त से अधिकारिक तौर पर आरंभ हो रही है। 29 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा को लेकर इन दिनों प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। इस कड़ी में शुक्रवार को एडीएम भरमौर विनय धीमान की अगवाई में अधिकारियों की टीम यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए रवाना हुई थी और देर शाम को भरमौर लौट आई है। एडीएम विनय धीमान ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि टीम ने धनछो तक का दौरा किया है। बरसात ज्यादा होने के चलते यात्रा की राह में जगह-जगह स्लाईडिंग हो रही है। जिस को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए लोक निर्माण विभाग को मौके पर ही क्लॉकवाइज लेबर की तैनाती करने के आदेश जारी किए हैं। यात्रा को लेकर सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य के प्रबंध संतोषजनक पाए गए हैं। आईपीएच ने यात्रा को लेकर पेयजल व्यवस्था का प्रबंध कर दिया है। एडीएम की अगवाई वाली टीम में लोनिवि के अधिशाषी अभियंता मुनीष सहगल, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता एसके शर्मा समेत अन्य शामिल रहे।
भरमौर - मणिमहेश यात्रा को खुले से शौचमुक्त बनाने के लिए प्रशासन की ओर से इस मर्तबा कड़े इंतजाम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर जल्द से जल्द शौचालयों का निर्माण करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही यात्रा में यात्रियों के लिए बैडिंग या फिर अस्थाई लॉज की सुविधा प्रदान करने वालों को शौचालय निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि अगर उनके द्वारा शौचालय का निर्माण नहीं किया जाता है तो, उन्हें यात्रा के दौरान उक्त गतिविधियों के संचालन की अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी। एडीएम भरमौर विनय धीमान ने कहा कि शुक्रवार को इस बाबत मौके पर ही आदेश दे दिए हैं। इसके बाद भी शौचालय निर्माण को लेकर आनाकानी की जाती है तो प्रशासन यात्रा के दौरान उपरोक्त को गतिविधियों के संचालन की अनुमति प्रदान नहीं करेगा।
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भरमौर - उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर प्रशासन की टीम शुक्रवार को देर शाम वापस उपमंडल मुख्यालय लौट आई है। जबकि टीम के कुछ सदस्य डल झील तक का जायजा लेने के लिए रवाना हो गए हैं। उनके शनिवार तक वापस लौटने की उम्मीद है। शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे के करीब टीम उपमंडल मुख्यालय से हड़सर की ओर रवाना हुई थी। इस दौरान एडीएम भरमौर समेत एसडीएम बीके चौधरी और तहसीलदार डा. गणेश ठाकुर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। अहम है कि पवित्र मणिमहेश यात्रा पंद्रह अगस्त से अधिकारिक तौर पर आरंभ हो रही है। उनतीस अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा को लेकर इन दिनों प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। इस कड़ी में शुक्रवार को एडीएम भरमौर विनय धीमान की अगवाई में अधिकारियों की टीम यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए रवाना हुई थी और देर शाम को भरमौर लौट आई है। एडीएम विनय धीमान ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि टीम ने धनछो तक का दौरा किया है। बरसात ज्यादा होने के चलते यात्रा की राह में जगह-जगह स्लाईडिंग हो रही है। जिस को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए लोक निर्माण विभाग को मौके पर ही क्लॉकवाइज लेबर की तैनाती करने के आदेश जारी किए हैं। यात्रा को लेकर सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य के प्रबंध संतोषजनक पाए गए हैं। आईपीएच ने यात्रा को लेकर पेयजल व्यवस्था का प्रबंध कर दिया है। एडीएम की अगवाई वाली टीम में लोनिवि के अधिशाषी अभियंता मुनीष सहगल, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता एसके शर्मा समेत अन्य शामिल रहे। भरमौर - मणिमहेश यात्रा को खुले से शौचमुक्त बनाने के लिए प्रशासन की ओर से इस मर्तबा कड़े इंतजाम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर जल्द से जल्द शौचालयों का निर्माण करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही यात्रा में यात्रियों के लिए बैडिंग या फिर अस्थाई लॉज की सुविधा प्रदान करने वालों को शौचालय निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि अगर उनके द्वारा शौचालय का निर्माण नहीं किया जाता है तो, उन्हें यात्रा के दौरान उक्त गतिविधियों के संचालन की अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी। एडीएम भरमौर विनय धीमान ने कहा कि शुक्रवार को इस बाबत मौके पर ही आदेश दे दिए हैं। इसके बाद भी शौचालय निर्माण को लेकर आनाकानी की जाती है तो प्रशासन यात्रा के दौरान उपरोक्त को गतिविधियों के संचालन की अनुमति प्रदान नहीं करेगा। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
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में परिवर्तन तथा नये-नये यज्ञों की कल्पना १५७
याज्ञिक-प्रक्रिया में परिवर्तन तथा नये-नये यज्ञों की कल्पना
संसार का नियम है कि जिस विषय में जनसाधारण की रुचि अधिक हो जाती है, व्यवहारकुशल समझे जानेवाले व्यक्ति उस जनरुचि का सदा अनुचित लाभ उठाया करते हैं। उनकी सदा यही चेष्टा रहती है कि जनसाधारण की वह रुचि उत्तरोत्तर बढ़ती जाये, जिससे उन का काम बनता रहे इस नियम के अनुसार जब जनसाधारण की रुचि यज्ञों के प्रति बढ़ने लगी, तब लोभ प्रादि के वशीभूत होकर याज्ञिक लोगों ने भी यज्ञों की रोचकता बढ़ाने के लिये उनमें उत्तरोत्तर बाह्य आडम्बर की वृद्धि की, और शुभ या अशुभ प्रत्येक अवसर पर करने योग्य विविध नये-नये यज्ञहोम आदि की सृष्टि की । अधिकतर काम्य और नैमित्तिक यज्ञों के विकास का यही मूल आधार है। आज भी जनता की यज्ञकर्म के प्रति श्रद्धा का अनुचित लाभ उठाने के लिये दुर्गासप्तशती एवं तुलसी रामायण आदि से यज्ञ कराने की परिपाटी विकसित हो रही है । इस दुष्प्रवृत्ति का प्रभाव (अन्धश्रद्धा को दूर करके वैदिक कर्मकाण्ड को प्रचलित करने का उद्घोष करनेवाले) आर्यसमाज में भी दिखाई देने लगा है । आर्यसमाज में भी कुछ काल से स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा उद्घोषित 'अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेघपर्यन्त' वैदिकयज्ञों के स्थान में वेद-पारायण, गायत्री महायज्ञ, स्वस्ति याग, शान्तियाग जैसे अवैदिक यज्ञों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है ।
इस प्रकार यज्ञों में उत्तरोत्तर सादगी और सात्त्विकता की हानि, तथा ब ह्याडम्बर की वृद्धि हुई । नये यज्ञों की कल्पना से अन्त में याज्ञिक-कल्पना की प्रारम्भिक वैज्ञानिक दृष्टि आखों से सर्वथा ओझल हो गई । अतः इस काल में कल्पित अधिकांश यज्ञों की क्रियाओं तथा पदार्थों का आधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् के साथ दूर का भी सम्बन्ध नहीं रहा ।
किया है (स्व-कृत एक ग्रन्थ का भी निर्देश नहीं किया ) । इससे स्पष्ट है कि वे समस्त आर्ष-ग्रन्थों को प्रमाण तो मानते हैं, परन्तु उन्हें आधुनिक विद्वानों के समान स्वतः-प्रमाण नहीं मानते । इसीलिये संस्कार - विधि में निर्दिष्ट पाठविधि में ब्राह्मण-श्रौतसूत्र और गृह्यसूत्रों सहित वेद के अध्ययन के प्रसंग में टिप्पणी दी है - 'जो ब्राह्मण वा सूत्र वेद विरुद्ध हिंसापरक हों, उनको प्रमाण न करना ।'संस्कार-विधि, पृष्ठ १३१ (रा० ला०कपूर ट्रस्ट, शताब्दी संस्करण ) । १. द्र० - पूर्व पृष्ठ १५४, टि० १, २ ।
याज्ञिक प्रक्रिया और वेदाथ
भारतीय इतिहास से स्पष्ट है कि वेदों का प्रादुर्भाव सृष्टि के आदि अर्थात् कृतयुग के प्रारम्भ में हुआ; और द्रव्यमय यज्ञों की कल्पना का उदय कृतयुग और त्रेतायुग के सन्धिकाल में हुआ । इस ऐतिहासिक तथ्य से यह स्पष्ट हो जाता है कि यज्ञों की प्रवृत्ति से पूर्व प्रादुर्भूत वेदमन्त्रों में द्रव्यमय यज्ञों का साक्षात् विधान अथवा उनकी प्रक्रिया का साक्षात् निर्देश निहित नहीं है । वेदमन्त्रों में श्रौत द्रव्यमय यज्ञों के कुछ नाम, उनके साधनभूत कतिपय पात्रों कतिपय क्रियाओं का निर्देश उपलब्ध होता है। उनसे यह भ्रम
नहीं होना चाहिये कि वेदमन्त्रों में श्रौत द्रव्यमय यज्ञों, उनके पात्रों एवं क्रियाओं के नाम निर्दिष्ट हैं । वेदमन्त्रस्थ समस्त यज्ञ, उनके पात्र, और क्रियाएं सृष्टियज्ञों उनके पात्रों एवं कर्मों के ही बोधक हैं । वेद में द्रव्यमय यज्ञों के वर्णन का भ्रम इस कारण होता है कि इन द्रव्यमध यज्ञों की कल्पना आधिदैविक जगत् (= सृष्टियज्ञ ) और श्राध्यात्मिक जगत् की समता के आधार पर की गई है। द्रव्यमय यज्ञों की कल्पना आधिदैविक जगत् और आध्यात्मिक जगत् की परोक्ष स्थिति को समझाने के लिये की गई थी, यह हम पूर्व सोदाहरण विस्तार से दर्शा चुके हैं। इसलिये प्राधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् की क्रियाओं एवं पदार्थों का वर्णन करनेवाले मन्त्रों का गूढ अभिप्राय प्रत्यक्षरूप से समझाने के लिये उन-उन मन्त्रों का सम्बन्ध यज्ञ की तदर्थभूत तत् तत् क्रियाओं के साथ किया गया । इसीलिये किस यज्ञकर्म को करते हुए किस मन्त्र का उच्चारण करना चाहिये, इस सम्बन्ध का बोध करानेवाले वाक्य को विनियोग कहते हैं । विनियोग का अभिप्राय होता है - विनियुज्यतेऽनेन = जिससे सम्बद्ध किया जाये ।
इस तात्पर्य को सरलता से समझने के लिये हम एक उदाहरण देते हैं । रामायण में जो चरित्र वर्णन हैं, उनका साक्षात् सम्बन्ध दशरथ राम सीता भरत लक्ष्मण आदि के साथ है । उनके आधार पर रचे गये नाटकों में दशरथ
१. द्र० - पूर्व पृष्ठ १४६, टि० १ ।
३. मन्त्रों में यज्ञों, उनके पात्रों वा क्रियाओं के जो-जो नाम उपलब्ध होते हैं, उनका निर्देश हमने श्रौतयज्ञों की वैदिकता निबन्ध में किया है । द्र० - वैदिक - सिद्धान्त-मीमांसा, पृष्ठ ३४२-३५३।
याज्ञिक प्रक्रिया और वेदार्थ
राम सीता भरत लक्ष्मण आदि का जो संवाद निबद्ध किया जाता है, उसका सम्बन्ध भी मूल व्यक्तियों से ही होता है । परन्तु रामचरित्र की परोक्ष घटना को प्रत्यक्षरूप से दर्शाने के लिये जब उस नाटक का अभिनय किया जाता है, तब उसमें राम सीता भरत आदि के संवाद को जो व्यक्ति प्रस्तुत करते हैं, उन व्यक्तियों के साथ उस संवाद का सीधा सम्बन्ध नहीं होता है। राम का अभि नय यह व्यक्ति करे और सीता का यह, इस प्रकार उस उस संवाद के साथ उन-उन व्यक्तियों को विनियुक्त किया जाता है । अतः जिस प्रकार नाटक करने वाले व्यक्ति किसी पूर्वकालीन ऐतिहासिक घटना का प्रदर्शन करते हुए उन उन ऐतिहासिक व्यक्तियों के मध्य हुए संवाद का मात्र अनुकरण करते हैं, उस संवाद के साथ उन नाटक के पात्रों का कोई साक्षात् सम्बन्ध नहीं होता, ठीक उसी प्रकार प्राधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् का वर्णन करनेवाले वेदमन्त्रों का उन-उन को प्रतिनिधिभूत याज्ञिक क्रियाओं तथा पदार्थों के साथ कोई साक्षात् सम्बन्ध नहीं है। दूसरे शब्दों में, याज्ञिक प्रक्रियानुसार किया गया वेदार्थ वेद का मुख्य प्रर्थ नहीं हैं। वह तो प्राधिदैविक तथा प्राध्यात्मिक वेदार्थ को समझाने का 'निमित्तमात्र' है ।
नाटकों की रचना यज्ञों के आधार पर
भरतमुनि ने स्वयं लिखा हैजग्राह पाठ्यमृग्वेदात् सामभ्यो गीतमेव च । यजुर्वेदादभिनयान् रसानाथर्वणादपि ।। नाट्यशास्त्र १।१७।।
यज्ञों में ऋग्वेद के मन्त्रों का पाठ, सामगान और यजुर्वेद मन्त्रों द्वारा यज्ञक्रियाएं की जाती हैं । ये यज्ञक्रियाएं अभिनयरूप ही हैं। इन्हीं के आधार पर नाटकों की रचना हुई, यह भरतमुनि का तात्पर्य है ।
इसमें नाटकों की पात्र संज्ञा भी इस बात का संकेत करती है कि लौकिक नाटकों की उत्पत्ति यज्ञीय नाटकों वा रूपकों के पश्चात् उनके अनुकरण पर हुई । क्योंकि द्रव्यमय यज्ञों में प्रयुज्यमान आाज्यस्थाली, पाकस्थाली, भृत्, स्रव, आदि पात्रों में पात्रता वैसी ही है, जैसे लौकिक भोजनक्रिया में प्रयुज्यमान पात्रों में है । अर्थात् उन में पाति रक्षति स्वगतं द्रव्यं यत् तत् पात्रम ( = अपने भीतर स्थापित वस्तु की रक्षा करना, उसे बाहर न गिरने देना) लक्षण विद्यमान है । परन्तु नाटकों में जो पात्र नाम से व्यवहृत होते हैं, उनमें पात्र का उक्त लक्षण घटित नहीं होता है । अतः वे पात्र पात्रमिव
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में परिवर्तन तथा नये-नये यज्ञों की कल्पना एक सौ सत्तावन याज्ञिक-प्रक्रिया में परिवर्तन तथा नये-नये यज्ञों की कल्पना संसार का नियम है कि जिस विषय में जनसाधारण की रुचि अधिक हो जाती है, व्यवहारकुशल समझे जानेवाले व्यक्ति उस जनरुचि का सदा अनुचित लाभ उठाया करते हैं। उनकी सदा यही चेष्टा रहती है कि जनसाधारण की वह रुचि उत्तरोत्तर बढ़ती जाये, जिससे उन का काम बनता रहे इस नियम के अनुसार जब जनसाधारण की रुचि यज्ञों के प्रति बढ़ने लगी, तब लोभ प्रादि के वशीभूत होकर याज्ञिक लोगों ने भी यज्ञों की रोचकता बढ़ाने के लिये उनमें उत्तरोत्तर बाह्य आडम्बर की वृद्धि की, और शुभ या अशुभ प्रत्येक अवसर पर करने योग्य विविध नये-नये यज्ञहोम आदि की सृष्टि की । अधिकतर काम्य और नैमित्तिक यज्ञों के विकास का यही मूल आधार है। आज भी जनता की यज्ञकर्म के प्रति श्रद्धा का अनुचित लाभ उठाने के लिये दुर्गासप्तशती एवं तुलसी रामायण आदि से यज्ञ कराने की परिपाटी विकसित हो रही है । इस दुष्प्रवृत्ति का प्रभाव आर्यसमाज में भी दिखाई देने लगा है । आर्यसमाज में भी कुछ काल से स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा उद्घोषित 'अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेघपर्यन्त' वैदिकयज्ञों के स्थान में वेद-पारायण, गायत्री महायज्ञ, स्वस्ति याग, शान्तियाग जैसे अवैदिक यज्ञों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है । इस प्रकार यज्ञों में उत्तरोत्तर सादगी और सात्त्विकता की हानि, तथा ब ह्याडम्बर की वृद्धि हुई । नये यज्ञों की कल्पना से अन्त में याज्ञिक-कल्पना की प्रारम्भिक वैज्ञानिक दृष्टि आखों से सर्वथा ओझल हो गई । अतः इस काल में कल्पित अधिकांश यज्ञों की क्रियाओं तथा पदार्थों का आधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् के साथ दूर का भी सम्बन्ध नहीं रहा । किया है । इससे स्पष्ट है कि वे समस्त आर्ष-ग्रन्थों को प्रमाण तो मानते हैं, परन्तु उन्हें आधुनिक विद्वानों के समान स्वतः-प्रमाण नहीं मानते । इसीलिये संस्कार - विधि में निर्दिष्ट पाठविधि में ब्राह्मण-श्रौतसूत्र और गृह्यसूत्रों सहित वेद के अध्ययन के प्रसंग में टिप्पणी दी है - 'जो ब्राह्मण वा सूत्र वेद विरुद्ध हिंसापरक हों, उनको प्रमाण न करना ।'संस्कार-विधि, पृष्ठ एक सौ इकतीस । एक. द्रशून्य - पूर्व पृष्ठ एक सौ चौवन, टिशून्य एक, दो । याज्ञिक प्रक्रिया और वेदाथ भारतीय इतिहास से स्पष्ट है कि वेदों का प्रादुर्भाव सृष्टि के आदि अर्थात् कृतयुग के प्रारम्भ में हुआ; और द्रव्यमय यज्ञों की कल्पना का उदय कृतयुग और त्रेतायुग के सन्धिकाल में हुआ । इस ऐतिहासिक तथ्य से यह स्पष्ट हो जाता है कि यज्ञों की प्रवृत्ति से पूर्व प्रादुर्भूत वेदमन्त्रों में द्रव्यमय यज्ञों का साक्षात् विधान अथवा उनकी प्रक्रिया का साक्षात् निर्देश निहित नहीं है । वेदमन्त्रों में श्रौत द्रव्यमय यज्ञों के कुछ नाम, उनके साधनभूत कतिपय पात्रों कतिपय क्रियाओं का निर्देश उपलब्ध होता है। उनसे यह भ्रम नहीं होना चाहिये कि वेदमन्त्रों में श्रौत द्रव्यमय यज्ञों, उनके पात्रों एवं क्रियाओं के नाम निर्दिष्ट हैं । वेदमन्त्रस्थ समस्त यज्ञ, उनके पात्र, और क्रियाएं सृष्टियज्ञों उनके पात्रों एवं कर्मों के ही बोधक हैं । वेद में द्रव्यमय यज्ञों के वर्णन का भ्रम इस कारण होता है कि इन द्रव्यमध यज्ञों की कल्पना आधिदैविक जगत् और श्राध्यात्मिक जगत् की समता के आधार पर की गई है। द्रव्यमय यज्ञों की कल्पना आधिदैविक जगत् और आध्यात्मिक जगत् की परोक्ष स्थिति को समझाने के लिये की गई थी, यह हम पूर्व सोदाहरण विस्तार से दर्शा चुके हैं। इसलिये प्राधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् की क्रियाओं एवं पदार्थों का वर्णन करनेवाले मन्त्रों का गूढ अभिप्राय प्रत्यक्षरूप से समझाने के लिये उन-उन मन्त्रों का सम्बन्ध यज्ञ की तदर्थभूत तत् तत् क्रियाओं के साथ किया गया । इसीलिये किस यज्ञकर्म को करते हुए किस मन्त्र का उच्चारण करना चाहिये, इस सम्बन्ध का बोध करानेवाले वाक्य को विनियोग कहते हैं । विनियोग का अभिप्राय होता है - विनियुज्यतेऽनेन = जिससे सम्बद्ध किया जाये । इस तात्पर्य को सरलता से समझने के लिये हम एक उदाहरण देते हैं । रामायण में जो चरित्र वर्णन हैं, उनका साक्षात् सम्बन्ध दशरथ राम सीता भरत लक्ष्मण आदि के साथ है । उनके आधार पर रचे गये नाटकों में दशरथ एक. द्रशून्य - पूर्व पृष्ठ एक सौ छियालीस, टिशून्य एक । तीन. मन्त्रों में यज्ञों, उनके पात्रों वा क्रियाओं के जो-जो नाम उपलब्ध होते हैं, उनका निर्देश हमने श्रौतयज्ञों की वैदिकता निबन्ध में किया है । द्रशून्य - वैदिक - सिद्धान्त-मीमांसा, पृष्ठ तीन सौ बयालीस-तीन सौ तिरेपन। याज्ञिक प्रक्रिया और वेदार्थ राम सीता भरत लक्ष्मण आदि का जो संवाद निबद्ध किया जाता है, उसका सम्बन्ध भी मूल व्यक्तियों से ही होता है । परन्तु रामचरित्र की परोक्ष घटना को प्रत्यक्षरूप से दर्शाने के लिये जब उस नाटक का अभिनय किया जाता है, तब उसमें राम सीता भरत आदि के संवाद को जो व्यक्ति प्रस्तुत करते हैं, उन व्यक्तियों के साथ उस संवाद का सीधा सम्बन्ध नहीं होता है। राम का अभि नय यह व्यक्ति करे और सीता का यह, इस प्रकार उस उस संवाद के साथ उन-उन व्यक्तियों को विनियुक्त किया जाता है । अतः जिस प्रकार नाटक करने वाले व्यक्ति किसी पूर्वकालीन ऐतिहासिक घटना का प्रदर्शन करते हुए उन उन ऐतिहासिक व्यक्तियों के मध्य हुए संवाद का मात्र अनुकरण करते हैं, उस संवाद के साथ उन नाटक के पात्रों का कोई साक्षात् सम्बन्ध नहीं होता, ठीक उसी प्रकार प्राधिदैविक तथा आध्यात्मिक जगत् का वर्णन करनेवाले वेदमन्त्रों का उन-उन को प्रतिनिधिभूत याज्ञिक क्रियाओं तथा पदार्थों के साथ कोई साक्षात् सम्बन्ध नहीं है। दूसरे शब्दों में, याज्ञिक प्रक्रियानुसार किया गया वेदार्थ वेद का मुख्य प्रर्थ नहीं हैं। वह तो प्राधिदैविक तथा प्राध्यात्मिक वेदार्थ को समझाने का 'निमित्तमात्र' है । नाटकों की रचना यज्ञों के आधार पर भरतमुनि ने स्वयं लिखा हैजग्राह पाठ्यमृग्वेदात् सामभ्यो गीतमेव च । यजुर्वेदादभिनयान् रसानाथर्वणादपि ।। नाट्यशास्त्र एक।सत्रह।। यज्ञों में ऋग्वेद के मन्त्रों का पाठ, सामगान और यजुर्वेद मन्त्रों द्वारा यज्ञक्रियाएं की जाती हैं । ये यज्ञक्रियाएं अभिनयरूप ही हैं। इन्हीं के आधार पर नाटकों की रचना हुई, यह भरतमुनि का तात्पर्य है । इसमें नाटकों की पात्र संज्ञा भी इस बात का संकेत करती है कि लौकिक नाटकों की उत्पत्ति यज्ञीय नाटकों वा रूपकों के पश्चात् उनके अनुकरण पर हुई । क्योंकि द्रव्यमय यज्ञों में प्रयुज्यमान आाज्यस्थाली, पाकस्थाली, भृत्, स्रव, आदि पात्रों में पात्रता वैसी ही है, जैसे लौकिक भोजनक्रिया में प्रयुज्यमान पात्रों में है । अर्थात् उन में पाति रक्षति स्वगतं द्रव्यं यत् तत् पात्रम लक्षण विद्यमान है । परन्तु नाटकों में जो पात्र नाम से व्यवहृत होते हैं, उनमें पात्र का उक्त लक्षण घटित नहीं होता है । अतः वे पात्र पात्रमिव
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रायपुर। बलरामपुर जिले में कुपोषण से हुई कोडाकू जनजाति के दो वर्षीय बच्चे की मौत पर भाजपा ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बताया कि जांच दल में पूर्व मंत्री रामसेवक पैकरा के साथ दो अन्य सदस्य शामिल होंगे.
बता दें कि बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत भगवानपुर में भीख मांगकर गुजारा करने वाले कोडाकू जनजाति के बिपन के दो वर्षीय नाती की कुपोषण और भूख से मौत हो गई थी. परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है, जिसकी वजह से कोरोना काल में सरकार से मिलने वाला मुफ्त का चावल तक नसीब नहीं हुआ. बच्चे की मौत के बाद पहुंचे अधिकारियों ने राशन की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन किसी प्रकार के मुआवजे का कोई एलान नहीं किया.
वाड्रफनगर विकास खंड के अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा ने भी माना था कि बच्चे की मौत कुपोषण से ही हुई है, और महिला बाल विकास की घोर लापरवाही है, अगर समय पर उसे पोषित आहार दिया गया होता तो उसकी मौत नहीं हुई होती.
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रायपुर। बलरामपुर जिले में कुपोषण से हुई कोडाकू जनजाति के दो वर्षीय बच्चे की मौत पर भाजपा ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बताया कि जांच दल में पूर्व मंत्री रामसेवक पैकरा के साथ दो अन्य सदस्य शामिल होंगे. बता दें कि बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत भगवानपुर में भीख मांगकर गुजारा करने वाले कोडाकू जनजाति के बिपन के दो वर्षीय नाती की कुपोषण और भूख से मौत हो गई थी. परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है, जिसकी वजह से कोरोना काल में सरकार से मिलने वाला मुफ्त का चावल तक नसीब नहीं हुआ. बच्चे की मौत के बाद पहुंचे अधिकारियों ने राशन की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन किसी प्रकार के मुआवजे का कोई एलान नहीं किया. वाड्रफनगर विकास खंड के अनुविभागीय अधिकारी विशाल महाराणा ने भी माना था कि बच्चे की मौत कुपोषण से ही हुई है, और महिला बाल विकास की घोर लापरवाही है, अगर समय पर उसे पोषित आहार दिया गया होता तो उसकी मौत नहीं हुई होती.
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धनतेरस पर मुख्य रुप से धनवंतरी भगवान और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। लेकिन इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। इस दीपक को रात्रि के समय जलाया जाता है, जब परिवार के सभी सदस्य घर में आ चुके हो। यम का दीपदान करने के लिए पुराना दीपक प्रयोग मान लाया जाता है। यम का दीपक जलाने के लिए उसमें सरसों का तेल और बत्ती डालकर दरवाजे के बाहर या फिर कूड़ें के स्थान के निकट दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दिया जाता है। क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। मान्यता है कि यह दीपक जलाने के परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस बात का वर्णन पौराणिक कथा में भी मिलता है। यम का दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीतयामिति।
धनतेरस के दूसरे दिन यानि चतुर्दशी तिथि जिसे नरक चतुर्दशी या फिर रूपचौदस भी कहा जाता है। इस दिन भी यम के नाम का दीपक जलाने के परंपरा है। यह दीपक घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य द्वारा जलाया जाता है। इस दीपक को किसी सूप (गेंहू साफ करने का पात्र) में या फिर किसी थाली में रखकर जलाया जाता है। इसे घर में जलाने के बाद देहली के बाहर या फिर घर से कहीं दूर रख दिया जाता है। इससे घर की बुरी शुक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा भी बाहर निकल जाती है।
छोटी दिवाली के अगले दिन दिवाली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन विशेषतौर पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी की समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाया जाता है। उसके बाद अपने कुलदेवी-देवताओं के लिए भी एक दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इससे उनकी छत्रछाया पूरे परिवार पर बनी रहती है। जिससे किसी प्रकार का कोई संकट आने से पहले ही टल जाता है। इसके अलावा एक दीपक पितरों के नाम का भी जला सकते हैं जिससे उनका आशीर्वाद आप पर बना रहता है।
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धनतेरस पर मुख्य रुप से धनवंतरी भगवान और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। लेकिन इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। इस दीपक को रात्रि के समय जलाया जाता है, जब परिवार के सभी सदस्य घर में आ चुके हो। यम का दीपदान करने के लिए पुराना दीपक प्रयोग मान लाया जाता है। यम का दीपक जलाने के लिए उसमें सरसों का तेल और बत्ती डालकर दरवाजे के बाहर या फिर कूड़ें के स्थान के निकट दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दिया जाता है। क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। मान्यता है कि यह दीपक जलाने के परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस बात का वर्णन पौराणिक कथा में भी मिलता है। यम का दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीतयामिति। धनतेरस के दूसरे दिन यानि चतुर्दशी तिथि जिसे नरक चतुर्दशी या फिर रूपचौदस भी कहा जाता है। इस दिन भी यम के नाम का दीपक जलाने के परंपरा है। यह दीपक घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य द्वारा जलाया जाता है। इस दीपक को किसी सूप में या फिर किसी थाली में रखकर जलाया जाता है। इसे घर में जलाने के बाद देहली के बाहर या फिर घर से कहीं दूर रख दिया जाता है। इससे घर की बुरी शुक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा भी बाहर निकल जाती है। छोटी दिवाली के अगले दिन दिवाली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन विशेषतौर पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी की समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाया जाता है। उसके बाद अपने कुलदेवी-देवताओं के लिए भी एक दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इससे उनकी छत्रछाया पूरे परिवार पर बनी रहती है। जिससे किसी प्रकार का कोई संकट आने से पहले ही टल जाता है। इसके अलावा एक दीपक पितरों के नाम का भी जला सकते हैं जिससे उनका आशीर्वाद आप पर बना रहता है।
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श्री हरि की गाची
नमो देव करयां मई, परममेवायनमो भगन थाप्पोन आय, भगममेवाय नमो ॥ पार उरवार विस थाह नाही नमो, मोद ममता नहीं भूप नमो । समन्द गिगनां नहि, जारित जोगे नमो मर गिरवर नदीमोग रोग नमो ।।
दाण डाकर नहीं भयो थोडं नमो खाल नहि गाली कैस बोर्ड नमो ।।
जन्म बरानहि शुभ बानमो, भापत्राणे नहि नदीनालनमो। उठ बैठे नहि बागि सोपे नमा, मादिनहीं अंतनहीं विघ्नहो नमो ।। परसी पर मार नहि रोसरोगं नमो, निकट निरलेपनाह सामसगनमो। गरगुम रूप गुणवीन वादिनमो, खंड महीनमो ॥ गहरगतान करम्पेनकापानमो भगम असतांन निगमद्दपाबानमो । अमर सपूत वरानबासनमो, समक्ष सिरिसाचमाशानपासँनमो। सबदनहीं स्वाद सरगंग साईनमो, करण करवा तुमठाई नमो। बाद बकवाद विटरूप नाहनमो, परम निवरूप सरपंग साईनमो । विनिमुष्टिदेवेन दास नमो, डालनदि मुखनदि नविनासैनमो।। अमर भमरा बनमें न जापानेमो करुवा मई रामरामानमो।
बन दरिदास भवरि मग हि परममेह निमरूप
अगाधचिरज जोग ॥७॥
वा हरिसागर अणसरचा, ते उलटिन कूप ।
।। इति साधु चाल जोग ग्रन्थ ।। ६ ।।
।। अथ अगाध चिरज जोग ग्रन्थ ।।७।।
गोरख हामं भरथरी सुकदेव, सिध सनकादिक सुखसारम् । नारद शंकर मुनि ब्रह्मादिक, श्रगणित साधू परसि भये पारं ॥ चंद्र सूर किया दोय दीपक, करि तागमंडल करितारं । अनंत लोक विसपाल विशंभर, सकलसछाया तो सार ।। रूप नहि रेख भरम नहि मंजन, जाहि भजो भजि भ्रमजारं । वेद कतेच कहे दोय बातो, दोय आगे नर निस्तारं ।। ग्यान न ध्यान पाप नहि पुनियर, अधर अलेख नहिं चखचालं । भेद अभेद अरी अछेदं, सुन्नि सदारसरहतालम् ॥ राज न रीति प्रीति नहिं परघत, कलपि न झलके करतारं । रमता राम सकलविसव्यापी, निरखि निरखर २ निरधार ।। निज निरसिंघ अगह, अभि अन्तरी, अकल अरूप नहि वृध बालं। धरणी कास न समंद सुमेर, लखचौरासी प्रतिपालम् ।।
चर्म दृष्टि का विषय निरक्षर
उपमि न बिनसे न जागि न सोधे, भालस नींद न साकारम् । पुरुप न नारि करे नहि फीडा, भगम भगोचर ववसारम् ।। गांव ने ठॉग विघन aft वास, सास उसास न नवे द्वारम । पूरणमा परम सुख दाता, मास उदास न भाषारम् ॥ नौसे नदी बहोवरि छामा, इंद्रिपोचन जित चारम । पेट न पीठ नैन नर नासा, हाथ न पोग न घटमारम् ।। मोदिन छोवि सुनिनधि संकट रोजसपुंजि न भूमारम् । मेख भरेख भदेख मलख, भादि मखंडित श्रम आरम् ।। बार न पार मुनि नहि बकता भगह अफह तर्दा धुनिधारं । ऊंच न नीच पर नई भरण, कार न व्यापे तस कामम् । भयगति भगम भगेह अभिमन्वरी, नाथ निरंजन निरकार । गरणे गगन मगन मन उनमनि, निमदिन दरसे दीदारम् ।। नित्र निरक्षेप सका भुग करता, सफासपोस मुख न्मारम् ।
निरंवरि सरम न व्यापे, मानन्द रूप भगम वारम् । दिष्टि न मुष्टि मान नई पुष्टि, सफट वन विस्तारम् । मेह मग भोग नहि रोग बटान योगी नम नाजम् ।। सीत न धूप मीन नई पाखि कीर नबारे किस बासम । स्वाम न सव रगत नहि रेवम्, तरवर मूझ न विसालम् ।। मध्य न गरम न पिता सहोदर, मोहन दोड न परिवारं । परम उदार परम निधि निरमै, निम चिन्तामणि चिचवारम् ।
अगाव भचिरज जोग ॥७॥
भरघन उरध जोग नहि जापं, अजर प्रजोनि तिसभालम् । मंगम प्रथाह परम सुख सागर, नाथ अनाथन प्रतिपालम् ।। न्यू का सकल भंजन जल, सबमें दीसे श्राकारम् । हात गह्यां कोई गहत न आवे, यूं सब घटमैं घट धारम ।। निरमै निर्माण अखिल अविनासी, अवरण वरण न विसतारम् । दीरघ लघु लोभि खिमां नहि खीजे, हरि निरसिंघ निकटि न्यारम् ।। निरगुण निरधात गात गुणनांही, निज निरमूल सनिज सारम् जोगन भोग पाप नहि पुनियर, पूत अऊत न परवारम् ॥ वल नहि प्रवल निरूप निरखिरं, सदा सनेही मुखसारम् । निडर निराट विराट अनंत हरि, सब क करि सवते न्यारम् ।। अधर अरूप अथाह अनि, अनंत अमूरति अवजारम् । दीन दयाल काल नहि करणा, त्रिवधि न व्यापे तत्सारम् ।। हरि पति मारण सदासंगि संम्रथ, परसिपरम ततमै पारम् । उदैन अस्त प्रान नहि अटपट, तरवर मूल न इलधारम् ।। सुभनहि असुभ गिरणत नहि अगिगात, भख नहि अभख मधुरखारं। विरक्त नहि अकुलविकुलअभिअन्तरि, तन मनसों मन तहांधारं ।।
( नोट ) इस अंगमें बृहदारण्यकोपनिषद तृतीयाध्याय के अष्टम ब्राह्मण के अष्टममन्त्रोक्त अक्षर ब्रह्मका वर्णन है देखो मंत्र "सहोवाचतद्वैति" ।
भी दरी की बाधी
अमृत नई सदर कहर नई करयां, मर नहि मर न भौतारम् नर नहि भनर अमर भवरानन्द, है पणि सारी शिर सारम् । छल नईि मछल मचल नहि धन्वल घर नहि मघर न इंकारम् । खालच नहि लोम मरम नहि विधि भ्रम नटबाजी करि नट म्यारम्।। निरमल निरखोद निरास निरंवरि, निश्वत वहाँ निजमन घारम्। संकट नहि सरम करम नदि अकरम, मरम न मापे सिसमारम्।। परम ज्योति परकास परम सुख, पगम भगम सोई उरभारम् ऊंच न नीच बरगा नई अरम, गतिनहिं भगतिन ? कारमा।। समापी अस्मि अपरंपर, स्वत नई मस्लम न में भारम् फाम उदार अपार मस्पेंडित, रटिरसनां रटि र स्कारम् । भगा अकर उस्तै भ्रममारण, सुनि मंडसम सहम मफासा जन इरिदास पति परसि परम सुख, परिमजीवि धर्मपुरिश्वास।।
।। इति अगाम अचिरज जोग ॥ ७ ॥
आप आग संग्राम जोग प्रथ ॥८॥
भोगी मान खडग करि घार, मनसा जीति मनोरम मारे । भासयकाभिनव नहि माय, वा संगि रमे निरंजन राम ॥
११३ मोजपुरी ।
जोग संग्राम ।।८।।
दीरघ रोग वियोग निवारे, कौडि सटे न हीरा हारे । परधन हरे डरे न हिलोय, आपा डारे तो यूं होय ।। विषय विप तजौ भजौ हरीवीर, सुनि मंडलमै निरमैं नीर । ऊंच नीच सवमूं समिभाय, मन वच करम नहो मनलाय ।। नृभै नृवाणा परम सुखसार, आदि अनादि वार नहि पार । जुरा न व्यापे काल न खाय, हमकूं सतगुरु दिया वताय ।। लेख अभेट गहर गुणग्रामी, माणनाथ हरि अंतरयामी । '( कोई ) ज्ञानी लहे ज्ञान गुण और खीर नीर ज्यू सवही ठोर ॥ भजि भगवन्त असुर अरिमारि, सुनि मंडलम मढि सवारी । तांली लगि बैठा मांहिं, गंग जमन जल पीवे नांहि ।। मोह दोह मैं तें करि दूरि, रमता राम रह्या भरपूरि ।
मांर्हि, गुरु विन गेला लाभ नाहि ।। 'अप्रमाण निधि अगम विचारे, आप तिरे साथि संगी तारे । पवन पियाला उलटा धरे, भरि भरि पीवे जरा जर ।। नाथ निरंजन निरमै जोगी, जुरा न जन्म भोग नहि रोगी । खरच्या घंटे न दीया जाय, सोई वित चितम रह्या समाय ।।
(नोट) स्मरण रहे कि ब्रह्मस्तुति से लगाकर यहां पर्यन्त रहाका ही वर्णन किया है ।
काम न जास भीष नहि माया, नट यू घर घरैनपट परिभाया। पूरण ब्रह्म परसिपति मारत, दुर्मिस्ल पडे न जम ले दान ।। ग्रह मैरागन मिग्छ भियोगी, पाप पुनि परवेसन भोगी । उसटि सुरवि सुनिमै पारी, तब जाय दरसे देष मुरारी ।। यिर नहीं अरि अरूप अछाया निरगुग्णनिराधार निरवरिपाया। गरमे गगन मगन मन सोइ, हरि मजै सहरि समि होई ॥ स्मिरनहीं अस्विर सरम नहीं सोग, मप नहि विया मेद नहि रोगा अ' प्रकटे तहाँ ऐसी करे, मवरण भगनि बिमा पनिचर। प्रास उदास मोड नदि माया, ज्ञान विज्ञान धूप नहि छापा। मरम किनाडी कम लोप है तो सही सभै नै कोप । संकट नहि सरम नहि मेय् जठरा नहि जुराकम नहि छेद। सकस बियापी सबसे हरि, भगति जहां सां मरपुरी ।। नर्षि भक्त चित नहीं चाही, परम भरम नहि वाहि तमि अमिमान भगहि यूँ गइम्सा, जागि लागि मन उनमन इरमा ।। डर नहि निडर निर्गुठ निजकम, उद न अस्त सीव नदि धूप घर नई भर पुरुप नहि नारि, परपंच भीति जीति नहि हारि।।
१ सर्वाद जो शाकादि प्रहोगे ये योगी को चाहिये कि भागस्यामि शामिनको मम्म करनेगे( ३१ )
नर हरि भजन ग्रहोनिसी करे, ताहि जालै अग निन मारचा मरे । संकट पड्या साथि रघुनाथ, जहां तहां जनके सिर हाथ ।। उलटा खेलि अपूटा आवे, जैसी भूख तिसा भरिपाव । निरमै निजनांव निरन्तरि रहणा, सापशिडसै न परलै चहणा ।। अनरथ अनन्त तहाँ जीव जाय, ताकूं सरपर सदा संगिखाय । जहर दाढ कंठी लागी दोय, रामभज्यां नर निरविपहोय ।। चैसि निरन्तर अलख जगावे, आसण अमर अगम भरपाये । भूखा रहेन धापिन खाय, मनसा चलैन परधरि जाय ॥ ब्रह्म अगनिमै काया ढहे, मन चंचल निहिचल होग्ररहे । काम क्रोधका झडै जंजीर, परमसिद्ध जहां जालन कीर ॥. चार पार नहि अगम अछेह, धरती चरषे अंबर तेह । निर्मल धार अपार अनन्त, ता सुखि लागि रहे सब सन्त ॥ निगम अगम गुरु गम्यमगहोय, पवन निर्लेप अंधो । निरंजनराय, राखी वसत शाहकूं खाय ।।
जोग समाम ।।८।।
पारम उदार अपार अनन्त, अवरण वरण अगहि भगवन्त । उलटी गंग जमन मै आण, तोहि पिछाणे ताहि पिछाण ।।१ माया २ समार व मोह ३ काम क्रोध ४ मिताहारी ५ ज्ञानाभि में ६ चागादि इन्द्रियग्राम व सूक्ष्म शरीर लिङ्गदेह ।
सह बन नहि तां मठ छाय, पंकनासिय अमृतरसम्बाय 1 ज्ञान गुफामे भारम करे, मोगी भीवे मोरों भरे । मौ सागर टर अनन्त भार, ता तिर को यो विचार । मनषिप छारि विसंमरभजो काम क्रोम मिपया मिपवमो !! परमानन्द परम सुखसार, ताईि भनो भजि वमो बिकार ।
या मरस्तां जुरा भरणां (भब) मरि साहिब मारगि सरभरणां ।। काई मूरवीर का काम, कायर कम कहै. नहि राम । मरि सगराम घाम परिस, परदम भीति परम गति सहे ॥ भगमें यो मोग संग्राम, कोई करो आपणा काम पपासा पोपड़ि ए सारी, भक्कै जीति जाहँ मागे हारि ॥ जन हरिदास कई मतपुर, बड़ निभ हामि बढी नरदेह गोविन्द मनो रामकी भारत, बहोडि म भाग अमका बांया ।।
॥ इति लोग समाम योग अन्य ॥ ८ ॥
॥ अथ अष्टपदी जोग मन्य ॥ ६ ॥
हमहेक अप गति हेरे, भाता मन उमटा फेरे । महादेमका मता पिछायो, मनद दिसाम् उम्रय भाणे।।
१ सर्वाधिक आत्मडयम योग के अधिकारी प्रति उपगई।
अष्टपदी योग ग्रन्थ ह
मनसा देवी सत्रकूं खावे, हमकुं मनसा सांच वतावे । हम जोगी जोग जुगति गमिजांणे, बहती नदी अपूठी आाणे ।। पवन गोटिका पारा बांधे, उलटी सुरति गगनकं सौधे । काम क्रोधका मूल उपारे गगन मंडल में प्रासण धारे । पियाला भरि भरि पीवे, अरूप रूप विचारत जीवे । हरि सुख सिंधु तहां भय नाही, हरिजन हंस बसे ता मांही ।। परम ज्योति [अंतर मनराखे, हरि हीरा विणि चूणि न भाखे । जन हरिदास निरखिये निज, मनकी ठोर उठाय ॥ सुरति सुलटि उलटा चढे, तो अगम तहां चलिजाय । लहिये अगम निगमते आगे, अंतरी नीद नेत ज़ब जागे । ससिहर के घरि सूर समावे, उलटि कवल कवलापति पावे । सब मैं राम दूरि हरिनाही, ज्यू ज्वाला काष्ट घृतपे मांडी ।। यहुनिज सुख जाग्या सो जा, सूता अरथ कहां सुआंणे । मवार नहि पारं, ताका कैसा भेद विचार । वरण वियोग रोग नहि जांगा, परमभेद ऐसा अथांगणा ।। सकल सपीपी सकल सुहावा, तीनि लोक त्रिभुवन पतिरावा । सुखमनि उलटि गगनी, मुनि मंडल में खेले प्रांणी ।। मुखमनि परम सिंघमें कले, तारुति कवल कंतुकी ३ फूले । नाभि सरोवर निज जल नेरा, मन मतवाला झूले मेरा ।।
१ रजोगुण २ चन्द्रमा ३ वेतकी
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श्री हरि की गाची नमो देव करयां मई, परममेवायनमो भगन थाप्पोन आय, भगममेवाय नमो ॥ पार उरवार विस थाह नाही नमो, मोद ममता नहीं भूप नमो । समन्द गिगनां नहि, जारित जोगे नमो मर गिरवर नदीमोग रोग नमो ।। दाण डाकर नहीं भयो थोडं नमो खाल नहि गाली कैस बोर्ड नमो ।। जन्म बरानहि शुभ बानमो, भापत्राणे नहि नदीनालनमो। उठ बैठे नहि बागि सोपे नमा, मादिनहीं अंतनहीं विघ्नहो नमो ।। परसी पर मार नहि रोसरोगं नमो, निकट निरलेपनाह सामसगनमो। गरगुम रूप गुणवीन वादिनमो, खंड महीनमो ॥ गहरगतान करम्पेनकापानमो भगम असतांन निगमद्दपाबानमो । अमर सपूत वरानबासनमो, समक्ष सिरिसाचमाशानपासँनमो। सबदनहीं स्वाद सरगंग साईनमो, करण करवा तुमठाई नमो। बाद बकवाद विटरूप नाहनमो, परम निवरूप सरपंग साईनमो । विनिमुष्टिदेवेन दास नमो, डालनदि मुखनदि नविनासैनमो।। अमर भमरा बनमें न जापानेमो करुवा मई रामरामानमो। बन दरिदास भवरि मग हि परममेह निमरूप अगाधचिरज जोग ॥सात॥ वा हरिसागर अणसरचा, ते उलटिन कूप । ।। इति साधु चाल जोग ग्रन्थ ।। छः ।। ।। अथ अगाध चिरज जोग ग्रन्थ ।।सात।। गोरख हामं भरथरी सुकदेव, सिध सनकादिक सुखसारम् । नारद शंकर मुनि ब्रह्मादिक, श्रगणित साधू परसि भये पारं ॥ चंद्र सूर किया दोय दीपक, करि तागमंडल करितारं । अनंत लोक विसपाल विशंभर, सकलसछाया तो सार ।। रूप नहि रेख भरम नहि मंजन, जाहि भजो भजि भ्रमजारं । वेद कतेच कहे दोय बातो, दोय आगे नर निस्तारं ।। ग्यान न ध्यान पाप नहि पुनियर, अधर अलेख नहिं चखचालं । भेद अभेद अरी अछेदं, सुन्नि सदारसरहतालम् ॥ राज न रीति प्रीति नहिं परघत, कलपि न झलके करतारं । रमता राम सकलविसव्यापी, निरखि निरखर दो निरधार ।। निज निरसिंघ अगह, अभि अन्तरी, अकल अरूप नहि वृध बालं। धरणी कास न समंद सुमेर, लखचौरासी प्रतिपालम् ।। चर्म दृष्टि का विषय निरक्षर उपमि न बिनसे न जागि न सोधे, भालस नींद न साकारम् । पुरुप न नारि करे नहि फीडा, भगम भगोचर ववसारम् ।। गांव ने ठॉग विघन aft वास, सास उसास न नवे द्वारम । पूरणमा परम सुख दाता, मास उदास न भाषारम् ॥ नौसे नदी बहोवरि छामा, इंद्रिपोचन जित चारम । पेट न पीठ नैन नर नासा, हाथ न पोग न घटमारम् ।। मोदिन छोवि सुनिनधि संकट रोजसपुंजि न भूमारम् । मेख भरेख भदेख मलख, भादि मखंडित श्रम आरम् ।। बार न पार मुनि नहि बकता भगह अफह तर्दा धुनिधारं । ऊंच न नीच पर नई भरण, कार न व्यापे तस कामम् । भयगति भगम भगेह अभिमन्वरी, नाथ निरंजन निरकार । गरणे गगन मगन मन उनमनि, निमदिन दरसे दीदारम् ।। नित्र निरक्षेप सका भुग करता, सफासपोस मुख न्मारम् । निरंवरि सरम न व्यापे, मानन्द रूप भगम वारम् । दिष्टि न मुष्टि मान नई पुष्टि, सफट वन विस्तारम् । मेह मग भोग नहि रोग बटान योगी नम नाजम् ।। सीत न धूप मीन नई पाखि कीर नबारे किस बासम । स्वाम न सव रगत नहि रेवम्, तरवर मूझ न विसालम् ।। मध्य न गरम न पिता सहोदर, मोहन दोड न परिवारं । परम उदार परम निधि निरमै, निम चिन्तामणि चिचवारम् । अगाव भचिरज जोग ॥सात॥ भरघन उरध जोग नहि जापं, अजर प्रजोनि तिसभालम् । मंगम प्रथाह परम सुख सागर, नाथ अनाथन प्रतिपालम् ।। न्यू का सकल भंजन जल, सबमें दीसे श्राकारम् । हात गह्यां कोई गहत न आवे, यूं सब घटमैं घट धारम ।। निरमै निर्माण अखिल अविनासी, अवरण वरण न विसतारम् । दीरघ लघु लोभि खिमां नहि खीजे, हरि निरसिंघ निकटि न्यारम् ।। निरगुण निरधात गात गुणनांही, निज निरमूल सनिज सारम् जोगन भोग पाप नहि पुनियर, पूत अऊत न परवारम् ॥ वल नहि प्रवल निरूप निरखिरं, सदा सनेही मुखसारम् । निडर निराट विराट अनंत हरि, सब क करि सवते न्यारम् ।। अधर अरूप अथाह अनि, अनंत अमूरति अवजारम् । दीन दयाल काल नहि करणा, त्रिवधि न व्यापे तत्सारम् ।। हरि पति मारण सदासंगि संम्रथ, परसिपरम ततमै पारम् । उदैन अस्त प्रान नहि अटपट, तरवर मूल न इलधारम् ।। सुभनहि असुभ गिरणत नहि अगिगात, भख नहि अभख मधुरखारं। विरक्त नहि अकुलविकुलअभिअन्तरि, तन मनसों मन तहांधारं ।। इस अंगमें बृहदारण्यकोपनिषद तृतीयाध्याय के अष्टम ब्राह्मण के अष्टममन्त्रोक्त अक्षर ब्रह्मका वर्णन है देखो मंत्र "सहोवाचतद्वैति" । भी दरी की बाधी अमृत नई सदर कहर नई करयां, मर नहि मर न भौतारम् नर नहि भनर अमर भवरानन्द, है पणि सारी शिर सारम् । छल नईि मछल मचल नहि धन्वल घर नहि मघर न इंकारम् । खालच नहि लोम मरम नहि विधि भ्रम नटबाजी करि नट म्यारम्।। निरमल निरखोद निरास निरंवरि, निश्वत वहाँ निजमन घारम्। संकट नहि सरम करम नदि अकरम, मरम न मापे सिसमारम्।। परम ज्योति परकास परम सुख, पगम भगम सोई उरभारम् ऊंच न नीच बरगा नई अरम, गतिनहिं भगतिन ? कारमा।। समापी अस्मि अपरंपर, स्वत नई मस्लम न में भारम् फाम उदार अपार मस्पेंडित, रटिरसनां रटि र स्कारम् । भगा अकर उस्तै भ्रममारण, सुनि मंडसम सहम मफासा जन इरिदास पति परसि परम सुख, परिमजीवि धर्मपुरिश्वास।। ।। इति अगाम अचिरज जोग ॥ सात ॥ आप आग संग्राम जोग प्रथ ॥आठ॥ भोगी मान खडग करि घार, मनसा जीति मनोरम मारे । भासयकाभिनव नहि माय, वा संगि रमे निरंजन राम ॥ एक सौ तेरह मोजपुरी । जोग संग्राम ।।आठ।। दीरघ रोग वियोग निवारे, कौडि सटे न हीरा हारे । परधन हरे डरे न हिलोय, आपा डारे तो यूं होय ।। विषय विप तजौ भजौ हरीवीर, सुनि मंडलमै निरमैं नीर । ऊंच नीच सवमूं समिभाय, मन वच करम नहो मनलाय ।। नृभै नृवाणा परम सुखसार, आदि अनादि वार नहि पार । जुरा न व्यापे काल न खाय, हमकूं सतगुरु दिया वताय ।। लेख अभेट गहर गुणग्रामी, माणनाथ हरि अंतरयामी । ' ज्ञानी लहे ज्ञान गुण और खीर नीर ज्यू सवही ठोर ॥ भजि भगवन्त असुर अरिमारि, सुनि मंडलम मढि सवारी । तांली लगि बैठा मांहिं, गंग जमन जल पीवे नांहि ।। मोह दोह मैं तें करि दूरि, रमता राम रह्या भरपूरि । मांर्हि, गुरु विन गेला लाभ नाहि ।। 'अप्रमाण निधि अगम विचारे, आप तिरे साथि संगी तारे । पवन पियाला उलटा धरे, भरि भरि पीवे जरा जर ।। नाथ निरंजन निरमै जोगी, जुरा न जन्म भोग नहि रोगी । खरच्या घंटे न दीया जाय, सोई वित चितम रह्या समाय ।। स्मरण रहे कि ब्रह्मस्तुति से लगाकर यहां पर्यन्त रहाका ही वर्णन किया है । काम न जास भीष नहि माया, नट यू घर घरैनपट परिभाया। पूरण ब्रह्म परसिपति मारत, दुर्मिस्ल पडे न जम ले दान ।। ग्रह मैरागन मिग्छ भियोगी, पाप पुनि परवेसन भोगी । उसटि सुरवि सुनिमै पारी, तब जाय दरसे देष मुरारी ।। यिर नहीं अरि अरूप अछाया निरगुग्णनिराधार निरवरिपाया। गरमे गगन मगन मन सोइ, हरि मजै सहरि समि होई ॥ स्मिरनहीं अस्विर सरम नहीं सोग, मप नहि विया मेद नहि रोगा अ' प्रकटे तहाँ ऐसी करे, मवरण भगनि बिमा पनिचर। प्रास उदास मोड नदि माया, ज्ञान विज्ञान धूप नहि छापा। मरम किनाडी कम लोप है तो सही सभै नै कोप । संकट नहि सरम नहि मेय् जठरा नहि जुराकम नहि छेद। सकस बियापी सबसे हरि, भगति जहां सां मरपुरी ।। नर्षि भक्त चित नहीं चाही, परम भरम नहि वाहि तमि अमिमान भगहि यूँ गइम्सा, जागि लागि मन उनमन इरमा ।। डर नहि निडर निर्गुठ निजकम, उद न अस्त सीव नदि धूप घर नई भर पुरुप नहि नारि, परपंच भीति जीति नहि हारि।। एक सर्वाद जो शाकादि प्रहोगे ये योगी को चाहिये कि भागस्यामि शामिनको मम्म करनेगे नर हरि भजन ग्रहोनिसी करे, ताहि जालै अग निन मारचा मरे । संकट पड्या साथि रघुनाथ, जहां तहां जनके सिर हाथ ।। उलटा खेलि अपूटा आवे, जैसी भूख तिसा भरिपाव । निरमै निजनांव निरन्तरि रहणा, सापशिडसै न परलै चहणा ।। अनरथ अनन्त तहाँ जीव जाय, ताकूं सरपर सदा संगिखाय । जहर दाढ कंठी लागी दोय, रामभज्यां नर निरविपहोय ।। चैसि निरन्तर अलख जगावे, आसण अमर अगम भरपाये । भूखा रहेन धापिन खाय, मनसा चलैन परधरि जाय ॥ ब्रह्म अगनिमै काया ढहे, मन चंचल निहिचल होग्ररहे । काम क्रोधका झडै जंजीर, परमसिद्ध जहां जालन कीर ॥. चार पार नहि अगम अछेह, धरती चरषे अंबर तेह । निर्मल धार अपार अनन्त, ता सुखि लागि रहे सब सन्त ॥ निगम अगम गुरु गम्यमगहोय, पवन निर्लेप अंधो । निरंजनराय, राखी वसत शाहकूं खाय ।। जोग समाम ।।आठ।। पारम उदार अपार अनन्त, अवरण वरण अगहि भगवन्त । उलटी गंग जमन मै आण, तोहि पिछाणे ताहि पिछाण ।।एक माया दो समार व मोह तीन काम क्रोध चार मिताहारी पाँच ज्ञानाभि में छः चागादि इन्द्रियग्राम व सूक्ष्म शरीर लिङ्गदेह । सह बन नहि तां मठ छाय, पंकनासिय अमृतरसम्बाय एक ज्ञान गुफामे भारम करे, मोगी भीवे मोरों भरे । मौ सागर टर अनन्त भार, ता तिर को यो विचार । मनषिप छारि विसंमरभजो काम क्रोम मिपया मिपवमो !! परमानन्द परम सुखसार, ताईि भनो भजि वमो बिकार । या मरस्तां जुरा भरणां मरि साहिब मारगि सरभरणां ।। काई मूरवीर का काम, कायर कम कहै. नहि राम । मरि सगराम घाम परिस, परदम भीति परम गति सहे ॥ भगमें यो मोग संग्राम, कोई करो आपणा काम पपासा पोपड़ि ए सारी, भक्कै जीति जाहँ मागे हारि ॥ जन हरिदास कई मतपुर, बड़ निभ हामि बढी नरदेह गोविन्द मनो रामकी भारत, बहोडि म भाग अमका बांया ।। ॥ इति लोग समाम योग अन्य ॥ आठ ॥ ॥ अथ अष्टपदी जोग मन्य ॥ छः ॥ हमहेक अप गति हेरे, भाता मन उमटा फेरे । महादेमका मता पिछायो, मनद दिसाम् उम्रय भाणे।। एक सर्वाधिक आत्मडयम योग के अधिकारी प्रति उपगई। अष्टपदी योग ग्रन्थ ह मनसा देवी सत्रकूं खावे, हमकुं मनसा सांच वतावे । हम जोगी जोग जुगति गमिजांणे, बहती नदी अपूठी आाणे ।। पवन गोटिका पारा बांधे, उलटी सुरति गगनकं सौधे । काम क्रोधका मूल उपारे गगन मंडल में प्रासण धारे । पियाला भरि भरि पीवे, अरूप रूप विचारत जीवे । हरि सुख सिंधु तहां भय नाही, हरिजन हंस बसे ता मांही ।। परम ज्योति [अंतर मनराखे, हरि हीरा विणि चूणि न भाखे । जन हरिदास निरखिये निज, मनकी ठोर उठाय ॥ सुरति सुलटि उलटा चढे, तो अगम तहां चलिजाय । लहिये अगम निगमते आगे, अंतरी नीद नेत ज़ब जागे । ससिहर के घरि सूर समावे, उलटि कवल कवलापति पावे । सब मैं राम दूरि हरिनाही, ज्यू ज्वाला काष्ट घृतपे मांडी ।। यहुनिज सुख जाग्या सो जा, सूता अरथ कहां सुआंणे । मवार नहि पारं, ताका कैसा भेद विचार । वरण वियोग रोग नहि जांगा, परमभेद ऐसा अथांगणा ।। सकल सपीपी सकल सुहावा, तीनि लोक त्रिभुवन पतिरावा । सुखमनि उलटि गगनी, मुनि मंडल में खेले प्रांणी ।। मुखमनि परम सिंघमें कले, तारुति कवल कंतुकी तीन फूले । नाभि सरोवर निज जल नेरा, मन मतवाला झूले मेरा ।। एक रजोगुण दो चन्द्रमा तीन वेतकी
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
भाटिया मूल रूप से कच्छ, सिंध और काठियावाड़ में रहने वाली जाति है। इनका मुख्य पेशा व्यापार हुआ करता था लेकिन वह राजपूत होने का दावा करते हैं। पंजाब के लाहौर जिले और मुल्तान जिले में भी इनकी पर्याप्त आबादी थी। भाटिया के दो मुख्य समूह हैः- कच्छी और सिंधी। इनकी मातृभाषा कच्छी और सिंध में सिंधी है। . सिंधी भारत के पश्चिमी हिस्से और मुख्य रूप से गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। इसका संबंध भाषाई परिवार के स्तर पर आर्य भाषा परिवार से है जिसमें संस्कृत समेत हिन्दी, पंजाबी और गुजराती भाषाएँ शामिल हैं। अनेक मान्य विद्वानों के मतानुसार, आधुनिक भारतीय भाषाओं में, सिन्धी, बोली के रूप में संस्कृत के सर्वाधिक निकट है। सिन्धी के लगभग ७० प्रतिशत शब्द संस्कृत मूल के हैं। सिंधी भाषा सिंध प्रदेश की आधुनिक भारतीय-आर्य भाषा जिसका संबंध पैशाची नाम की प्राकृत और व्राचड नाम की अपभ्रंश से जोड़ा जाता है। इन दोनों नामों से विदित होता है कि सिंधी के मूल में अनार्य तत्व पहले से विद्यमान थे, भले ही वे आर्य प्रभावों के कारण गौण हो गए हों। सिंधी के पश्चिम में बलोची, उत्तर में लहँदी, पूर्व में मारवाड़ी और दक्षिण में गुजराती का क्षेत्र है। यह बात उल्लेखनीय है कि इस्लामी शासनकाल में सिंध और मुलतान (लहँदीभाषी) एक प्रांत रहा है और 1843 से 1936 ई. तक सिन्ध, बम्बई प्रांत का एक भाग होने के नाते गुजराती के विशेष संपर्क में रहा है। पाकिस्तान में सिंधी भाषा नस्तालिक (यानि अरबी लिपि) में लिखी जाती है जबकि भारत में इसके लिये देवनागरी और नस्तालिक दोनो प्रयोग किये जाते हैं। .
भाटिया जाति और सिन्धी भाषा आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): कच्छ, काठियावाड़।
कच्छ गुजरात प्रान्त का एक जिला है। गुजरात यात्रा कच्छ जिले के भ्रमण के बिना अधूरी मानी जाती है। पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां बहुत कुछ है। जिले का मुख्यालय है भुज। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष कच्छ महोत्सव आयोजित किया जाता है। 45652 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले गुजरात के इस सबसे बड़े जिले का अधिकांश हिस्सा रेतीला और दलदली है। जखाऊ, कांडला और मुन्द्रा यहां के मुख्य बंदरगाह हैं। जिले में अनेक ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर, मस्जिद, हिल स्टेशन आदि पर्यटन स्थलों को देखा जा सकता है। मिलें अवशेषों के आधार पर कच्छ प्राचीन सिन्धु संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। सन १२७० में कच्छ एक स्वतंत्र प्रदेश था। सन १८१५ में यह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हुआ। रजवाड़े के रूप में कच्छ के तत्कालीन महाराजा ने ब्रिटिश सत्ता स्वीकार कर ली। सन १९४७ में भारत की स्वतंत्रता के बाद कच्छ तत्कालीन ' महागुजरात ' राज्य का जिला बना। सन १९५० में कच्छ भारत का एक राज्य बना। १ नवम्बर सन १९५६ को यह मुंबई राज्य के अंतर्गत आया। सन १९६० में भाषा के आधार पर मुंबई राज्य का महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजन हो गया तथा कच्छ गुजरात का एक हिस्सा बन गया। सन १९४७ में भारत के विभाजन के पश्चात सिंध और कराची में स्थित बंदरगाह पाकिस्तान के अंतर्गत चला गया। स्वतंत्र भारत की सरकार ने कच्छ के कंडला में नवीन बंदरगाह विकसित करने का निर्णय लिया। कंडला बंदरगाह पश्चिम भारत का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। इतिहास में १६ जून सन १८१५ का दिन कच्छ के पहले भूकंप के रूप में दर्ज है। २६ जनवरी २००१ में आया प्रचंड भूकंप का केंद्र कच्छ जिले के अंजार में था। कच्छ के १८५ वर्ष के दर्ज भूस्तरीयशास्त्र के इतिहास में यह सबसे बड़ा भूकंप था। .
काठियावाड़ (કાઠીયાવાડ) पश्चिम भारत में एक प्रायद्वीपहै। ये गुजरात का भाग है, जिसके उत्तरी ओर कच्छ के रण की नम भूमि, दक्षिण और पश्चिम की ओर अरब सागर और दक्षिण-पश्चिम की ओर कैम्बे की खाड़ी है। इस क्षेत्र की दो प्रमुख नदियाँ भादर और शतरंजी हैं जो क्रमशः पश्चिम और पूर्व की ओर बहती हैं। इस प्रदेश का मध्यवर्ती भाग पहाड़ी है। इस स्थान का नाम राजपुत शासक वर्ग की काठी जाति से पड़ा है। प्रतिहार शासक सम्राट मिहिर भोज के काल में क्षत्रिये प्रतिहार की पश्चिमी सीमा काठियावाड़ और पूर्वी सीमा बंगाल की खाड़ी थी। हड्डोला शिलालेखों से यह सुनिश्चित होता है कि क्षत्रिये प्रतिहार शासकों का शासन सम्राट महिपाल २ के काल तक भी उत्कर्ष पर रहा। काठिय़ावाड़ के वर्तमान जिले काठियावाड़ क्षेत्र के प्रमुख शहरों में प्रायद्वीप के मध्य में मोरबी राजकोट, कच्छ की खाड़ी में जामनगर, खंबात की खाड़ी में भावनगर मध्य-गुजरात में सुरेंद्रनगर और वधावन, पश्चिमी तट पर पोरबंदर और दक्षिण में जूनागढ़ हैं। पुर्तगाली उपनिवेश का भाग रहे और वर्तमान में भारतीय संघ में जुड़े दमन और दीव संघ शासित क्षेत्र काठियावाड़ के दक्षिणी छोर पर हैं। सोमनाथ का शहर और मंदिर भी दक्षिणी छोर पर स्थित हैं। इस मंदिर में हिन्दू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगोंमें से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है। इसके अलावा दूसरा प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ द्वारका भी यहीं स्थित है, जहां भगवान कृष्ण ने अपनी नगरी बसायी थी। पालिताना प्रसिद्ध जैन तीर्थ है, जहां पर्वत शिखर पर सैंकड़ो मंदिर बने हैं। विश्व का सबसे बड़ा शिपब्रेकिंग यार्ड अलंग और विश्व की सबसे बड़ी जामनगर तेल शोधनी (ऑयल रिफ़ाइनरी) भी इस क्षेत्र में ही स्थित हैं। गिर वन स्थित सासन भी यहीं है, जहां एशिया के एशियाटिक जाति के प्रसिद्ध गिर लॉयन का प्राकृतिक आवास है और सिंह सफ़ारी का भी आयोजन होता है। यहाँ चूने का पत्थर पर्याप्त रूप में मिलता है जो आर्थिक दृष्टि से महत्वूपर्ण है। इस प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर दीव स्थित है। .
भाटिया जाति 6 संबंध है और सिन्धी भाषा 44 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 4.00% है = 2 / (6 + 44)।
यह लेख भाटिया जाति और सिन्धी भाषा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। भाटिया मूल रूप से कच्छ, सिंध और काठियावाड़ में रहने वाली जाति है। इनका मुख्य पेशा व्यापार हुआ करता था लेकिन वह राजपूत होने का दावा करते हैं। पंजाब के लाहौर जिले और मुल्तान जिले में भी इनकी पर्याप्त आबादी थी। भाटिया के दो मुख्य समूह हैः- कच्छी और सिंधी। इनकी मातृभाषा कच्छी और सिंध में सिंधी है। . सिंधी भारत के पश्चिमी हिस्से और मुख्य रूप से गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। इसका संबंध भाषाई परिवार के स्तर पर आर्य भाषा परिवार से है जिसमें संस्कृत समेत हिन्दी, पंजाबी और गुजराती भाषाएँ शामिल हैं। अनेक मान्य विद्वानों के मतानुसार, आधुनिक भारतीय भाषाओं में, सिन्धी, बोली के रूप में संस्कृत के सर्वाधिक निकट है। सिन्धी के लगभग सत्तर प्रतिशत शब्द संस्कृत मूल के हैं। सिंधी भाषा सिंध प्रदेश की आधुनिक भारतीय-आर्य भाषा जिसका संबंध पैशाची नाम की प्राकृत और व्राचड नाम की अपभ्रंश से जोड़ा जाता है। इन दोनों नामों से विदित होता है कि सिंधी के मूल में अनार्य तत्व पहले से विद्यमान थे, भले ही वे आर्य प्रभावों के कारण गौण हो गए हों। सिंधी के पश्चिम में बलोची, उत्तर में लहँदी, पूर्व में मारवाड़ी और दक्षिण में गुजराती का क्षेत्र है। यह बात उल्लेखनीय है कि इस्लामी शासनकाल में सिंध और मुलतान एक प्रांत रहा है और एक हज़ार आठ सौ तैंतालीस से एक हज़ार नौ सौ छत्तीस ई. तक सिन्ध, बम्बई प्रांत का एक भाग होने के नाते गुजराती के विशेष संपर्क में रहा है। पाकिस्तान में सिंधी भाषा नस्तालिक में लिखी जाती है जबकि भारत में इसके लिये देवनागरी और नस्तालिक दोनो प्रयोग किये जाते हैं। . भाटिया जाति और सिन्धी भाषा आम में दो बातें हैं : कच्छ, काठियावाड़। कच्छ गुजरात प्रान्त का एक जिला है। गुजरात यात्रा कच्छ जिले के भ्रमण के बिना अधूरी मानी जाती है। पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां बहुत कुछ है। जिले का मुख्यालय है भुज। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष कच्छ महोत्सव आयोजित किया जाता है। पैंतालीस हज़ार छः सौ बावन वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले गुजरात के इस सबसे बड़े जिले का अधिकांश हिस्सा रेतीला और दलदली है। जखाऊ, कांडला और मुन्द्रा यहां के मुख्य बंदरगाह हैं। जिले में अनेक ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर, मस्जिद, हिल स्टेशन आदि पर्यटन स्थलों को देखा जा सकता है। मिलें अवशेषों के आधार पर कच्छ प्राचीन सिन्धु संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। सन एक हज़ार दो सौ सत्तर में कच्छ एक स्वतंत्र प्रदेश था। सन एक हज़ार आठ सौ पंद्रह में यह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हुआ। रजवाड़े के रूप में कच्छ के तत्कालीन महाराजा ने ब्रिटिश सत्ता स्वीकार कर ली। सन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत की स्वतंत्रता के बाद कच्छ तत्कालीन ' महागुजरात ' राज्य का जिला बना। सन एक हज़ार नौ सौ पचास में कच्छ भारत का एक राज्य बना। एक नवम्बर सन एक हज़ार नौ सौ छप्पन को यह मुंबई राज्य के अंतर्गत आया। सन एक हज़ार नौ सौ साठ में भाषा के आधार पर मुंबई राज्य का महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजन हो गया तथा कच्छ गुजरात का एक हिस्सा बन गया। सन एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के विभाजन के पश्चात सिंध और कराची में स्थित बंदरगाह पाकिस्तान के अंतर्गत चला गया। स्वतंत्र भारत की सरकार ने कच्छ के कंडला में नवीन बंदरगाह विकसित करने का निर्णय लिया। कंडला बंदरगाह पश्चिम भारत का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। इतिहास में सोलह जून सन एक हज़ार आठ सौ पंद्रह का दिन कच्छ के पहले भूकंप के रूप में दर्ज है। छब्बीस जनवरी दो हज़ार एक में आया प्रचंड भूकंप का केंद्र कच्छ जिले के अंजार में था। कच्छ के एक सौ पचासी वर्ष के दर्ज भूस्तरीयशास्त्र के इतिहास में यह सबसे बड़ा भूकंप था। . काठियावाड़ पश्चिम भारत में एक प्रायद्वीपहै। ये गुजरात का भाग है, जिसके उत्तरी ओर कच्छ के रण की नम भूमि, दक्षिण और पश्चिम की ओर अरब सागर और दक्षिण-पश्चिम की ओर कैम्बे की खाड़ी है। इस क्षेत्र की दो प्रमुख नदियाँ भादर और शतरंजी हैं जो क्रमशः पश्चिम और पूर्व की ओर बहती हैं। इस प्रदेश का मध्यवर्ती भाग पहाड़ी है। इस स्थान का नाम राजपुत शासक वर्ग की काठी जाति से पड़ा है। प्रतिहार शासक सम्राट मिहिर भोज के काल में क्षत्रिये प्रतिहार की पश्चिमी सीमा काठियावाड़ और पूर्वी सीमा बंगाल की खाड़ी थी। हड्डोला शिलालेखों से यह सुनिश्चित होता है कि क्षत्रिये प्रतिहार शासकों का शासन सम्राट महिपाल दो के काल तक भी उत्कर्ष पर रहा। काठिय़ावाड़ के वर्तमान जिले काठियावाड़ क्षेत्र के प्रमुख शहरों में प्रायद्वीप के मध्य में मोरबी राजकोट, कच्छ की खाड़ी में जामनगर, खंबात की खाड़ी में भावनगर मध्य-गुजरात में सुरेंद्रनगर और वधावन, पश्चिमी तट पर पोरबंदर और दक्षिण में जूनागढ़ हैं। पुर्तगाली उपनिवेश का भाग रहे और वर्तमान में भारतीय संघ में जुड़े दमन और दीव संघ शासित क्षेत्र काठियावाड़ के दक्षिणी छोर पर हैं। सोमनाथ का शहर और मंदिर भी दक्षिणी छोर पर स्थित हैं। इस मंदिर में हिन्दू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगोंमें से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है। इसके अलावा दूसरा प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ द्वारका भी यहीं स्थित है, जहां भगवान कृष्ण ने अपनी नगरी बसायी थी। पालिताना प्रसिद्ध जैन तीर्थ है, जहां पर्वत शिखर पर सैंकड़ो मंदिर बने हैं। विश्व का सबसे बड़ा शिपब्रेकिंग यार्ड अलंग और विश्व की सबसे बड़ी जामनगर तेल शोधनी भी इस क्षेत्र में ही स्थित हैं। गिर वन स्थित सासन भी यहीं है, जहां एशिया के एशियाटिक जाति के प्रसिद्ध गिर लॉयन का प्राकृतिक आवास है और सिंह सफ़ारी का भी आयोजन होता है। यहाँ चूने का पत्थर पर्याप्त रूप में मिलता है जो आर्थिक दृष्टि से महत्वूपर्ण है। इस प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर दीव स्थित है। . भाटिया जाति छः संबंध है और सिन्धी भाषा चौंतालीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक चार.शून्य% है = दो / । यह लेख भाटिया जाति और सिन्धी भाषा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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आपको बता दें कि पहले योगेश ताम्रकार भाजपा उपाध्यक्ष थे, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने उन्हें सतना जिले से मेयर की सीट दी थी। सतना जिले का मेयर बनने के बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से हटाया जाएगा। योगेश ताम्रकार की जगह अब ललिता यादव को संगठन में जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।
बता दें कि ललिता यादव 2018 में छतरपुर जिले की बड़ामलहरा विधानसभा सीट से अपना चुनाव हार गईं थी। ललिता यादव को कांग्रेस उम्मीदवार प्रद्युम्न सिंह लोधी ने हराया था। बाद में प्रद्युम्न सिंह लोधी बीजेपी में शामिल हो गए थे। जिसके बाद से ललिता यादव नाराज बताई जा रही थी।
बीजेपी की मीडिया टीम के प्रवक्ता के तौर पर वर्तमान में मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, हितेश वाजपेई, राजपाल सिंह सिसोदिया, शशिकांत शुक्ला, दुर्गेश केसरवानी, प्रहलाद कुशवाहा, पंकज चतुर्वेदी, सनव्वर पटेल, दिव्या राम डांगोरे, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, केपी यादव, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, नरेंद्र सलूजा और नेहा बग्गा हैं। संभावना जताई जा रही है कि नए प्रवक्ताओं की भी नई नियुक्तियां भी जल्द शुरू हो जाएगी।
भाजपा के सू़त्रों ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा संगठन में और भी बड़े बदलाव करने जा रहे हैं। वर्तमान मीडिया टीम में अभी प्रशांत तिवारी, अनिल पटेल, नरेंद्र शिवाजी पटेल, जवाहर प्रजापति, सचिन सक्सेना, आशीष तिवारी, विवेक तिवारी, दीपक जैन, जुगल किशोर शर्मा सह मीडिया प्रभारी हैं। जल्द ही इस टीम में भी बदलाव हो सकता है।
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आपको बता दें कि पहले योगेश ताम्रकार भाजपा उपाध्यक्ष थे, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने उन्हें सतना जिले से मेयर की सीट दी थी। सतना जिले का मेयर बनने के बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से हटाया जाएगा। योगेश ताम्रकार की जगह अब ललिता यादव को संगठन में जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। बता दें कि ललिता यादव दो हज़ार अट्ठारह में छतरपुर जिले की बड़ामलहरा विधानसभा सीट से अपना चुनाव हार गईं थी। ललिता यादव को कांग्रेस उम्मीदवार प्रद्युम्न सिंह लोधी ने हराया था। बाद में प्रद्युम्न सिंह लोधी बीजेपी में शामिल हो गए थे। जिसके बाद से ललिता यादव नाराज बताई जा रही थी। बीजेपी की मीडिया टीम के प्रवक्ता के तौर पर वर्तमान में मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, हितेश वाजपेई, राजपाल सिंह सिसोदिया, शशिकांत शुक्ला, दुर्गेश केसरवानी, प्रहलाद कुशवाहा, पंकज चतुर्वेदी, सनव्वर पटेल, दिव्या राम डांगोरे, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, केपी यादव, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, नरेंद्र सलूजा और नेहा बग्गा हैं। संभावना जताई जा रही है कि नए प्रवक्ताओं की भी नई नियुक्तियां भी जल्द शुरू हो जाएगी। भाजपा के सू़त्रों ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा संगठन में और भी बड़े बदलाव करने जा रहे हैं। वर्तमान मीडिया टीम में अभी प्रशांत तिवारी, अनिल पटेल, नरेंद्र शिवाजी पटेल, जवाहर प्रजापति, सचिन सक्सेना, आशीष तिवारी, विवेक तिवारी, दीपक जैन, जुगल किशोर शर्मा सह मीडिया प्रभारी हैं। जल्द ही इस टीम में भी बदलाव हो सकता है।
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ताज से क्या चाहते हैं आज़म?
उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मोहम्मद आज़म खान ने एक बार फिर ताजमहल को लेकर विवादित बयान दिया है.
इस बार उनकी मांग है कि ताजमहल को सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को दिया जाना चाहिए और वहाँ नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी जानी चाहिए.
आज़म ख़ान इससे पहले ताज को तोड़ने की बात कह चुके हैं और उसे महज़ एक कब्रिस्तान करार दे चुके हैं.
आज़म खान ने कहा है कि ताजमहल में मस्जिद हैं और वहाँ मुसलमानों की कब्रें हैं, इसलिए वह सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की जायदाद है. इसलिए उस पर पुरातत्व विभाग का हक़ नहीं बनता.
उन्होंने यह भी कहा कि इससे होने वाली सारी आमदनी वक़्फ़ को मिलनी चाहिए और मुसलमानों के विकास पर खर्च की जानी चाहिए.
ताजमहल में पर्यटन से हर वर्ष लगभग 72 करोड़ रुपये की आमदनी होती है.
इसमें से 50 करोड़ रुपये आगरा विकास प्राधिकरण को और 21. 81 रुपये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मिलते हैं. यहां हर महीने 10 लाख सैलानी आते हैं, जिनमें से 1 . 5 लाख विदेशी होते हैं.
आज़म खान ने 2013 में यह भी कहा था कि अगर ताजमहल को गिराने की बात होगी तो "मैं सबसे आगे चलूंगा. "
उस वक़्त उन्होंने कहा था कि किसी भी हुकूमत को आम अवाम के ख़ज़ाने से अपनी महबूबा की कब्र बनाने का हक़ नहीं है.
2005 में आज़म ख़ान ने ताजमहल को दो कब्रों वाला कब्रिस्तान कहा था.
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "आज़म खान मुंगेरी लाल जैसे सपने देखना बंद कर दें, यह सपना कभी पूरे नहीं होंगे. हमारा तो कहना है कि यह महाराजा जय सिंह का बनवाया हुआ, जिसे शाहजहां ने उनसे ख़रीदा था. "
बाजपेयी का मत है कि ताजमहल एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है और उसे अन्य वक़्फ़ संपत्तियों की तरह बिकने नहीं दिया जाएगा. इसलिए वह जिसके संरक्षण में है, सही है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, "ताजमहल एक अजूबा है और यहां देश-विदेश से लाखों सैलानी आते हैं. इस तरह के स्थानों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. "
शिया मौलाना कल्बे जव्वाद कहते हैं कि वक़्फ़ बोर्ड की हालत इतनी खराब है कि "अगर ताजमहल उसे दिया गया तो ख़त्म हो जाएगा. खुद आज़म खान की नाक के नीचे सब धांधली हो रही है. "
हालांकि मौलाना जव्वाद भी कहते हैं कि वहां नमाज़ पढ़ने की इजाज़त मिलनी चाहिए.
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ताज से क्या चाहते हैं आज़म? उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मोहम्मद आज़म खान ने एक बार फिर ताजमहल को लेकर विवादित बयान दिया है. इस बार उनकी मांग है कि ताजमहल को सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को दिया जाना चाहिए और वहाँ नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी जानी चाहिए. आज़म ख़ान इससे पहले ताज को तोड़ने की बात कह चुके हैं और उसे महज़ एक कब्रिस्तान करार दे चुके हैं. आज़म खान ने कहा है कि ताजमहल में मस्जिद हैं और वहाँ मुसलमानों की कब्रें हैं, इसलिए वह सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की जायदाद है. इसलिए उस पर पुरातत्व विभाग का हक़ नहीं बनता. उन्होंने यह भी कहा कि इससे होने वाली सारी आमदनी वक़्फ़ को मिलनी चाहिए और मुसलमानों के विकास पर खर्च की जानी चाहिए. ताजमहल में पर्यटन से हर वर्ष लगभग बहत्तर करोड़ रुपये की आमदनी होती है. इसमें से पचास करोड़ रुपये आगरा विकास प्राधिकरण को और इक्कीस. इक्यासी रुपयापये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मिलते हैं. यहां हर महीने दस लाख सैलानी आते हैं, जिनमें से एक . पाँच लाख विदेशी होते हैं. आज़म खान ने दो हज़ार तेरह में यह भी कहा था कि अगर ताजमहल को गिराने की बात होगी तो "मैं सबसे आगे चलूंगा. " उस वक़्त उन्होंने कहा था कि किसी भी हुकूमत को आम अवाम के ख़ज़ाने से अपनी महबूबा की कब्र बनाने का हक़ नहीं है. दो हज़ार पाँच में आज़म ख़ान ने ताजमहल को दो कब्रों वाला कब्रिस्तान कहा था. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, "आज़म खान मुंगेरी लाल जैसे सपने देखना बंद कर दें, यह सपना कभी पूरे नहीं होंगे. हमारा तो कहना है कि यह महाराजा जय सिंह का बनवाया हुआ, जिसे शाहजहां ने उनसे ख़रीदा था. " बाजपेयी का मत है कि ताजमहल एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है और उसे अन्य वक़्फ़ संपत्तियों की तरह बिकने नहीं दिया जाएगा. इसलिए वह जिसके संरक्षण में है, सही है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बहुजन समाज पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, "ताजमहल एक अजूबा है और यहां देश-विदेश से लाखों सैलानी आते हैं. इस तरह के स्थानों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. " शिया मौलाना कल्बे जव्वाद कहते हैं कि वक़्फ़ बोर्ड की हालत इतनी खराब है कि "अगर ताजमहल उसे दिया गया तो ख़त्म हो जाएगा. खुद आज़म खान की नाक के नीचे सब धांधली हो रही है. " हालांकि मौलाना जव्वाद भी कहते हैं कि वहां नमाज़ पढ़ने की इजाज़त मिलनी चाहिए.
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भगवा रंग के कुर्ते-अचले और ऊपर से इसी रंग का ही अंगवस्त्र धारण कर जब वे निकलते हैं तो सबकी निगाहें उन्हीं पर ही होती हैं। कहने को तो ये सन्यासी लुक है लेकिन उनका ये अंदाज सबसे अलग है।
अपने इस लुक को भी स्मार्टली कैरी करना उन्हें बहुत अच्छे से आता है। कानों में कुंडल धारण किए योगी जब गॉगल्स लगाकर निकलते हैं तो ये अंदाज भी गजब का होता है।
सीएम आवास हो या सचिवालय, योगी जी की कुर्सी भगवा रंग की ही होती है। यदि कुर्सी किसी दूसरे रंग की हो तो उस पर बिछी तौलिया और कुशन जरूर भगवा रंग का होता है।
सीएम योगी की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे इस तपती गर्मी में भी बिना एसी के ही सोते हैं। फ्रिज के ठंडे पानी से भी वे परहेज करते हैं।
गौ सेवा करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा उन्हें अन्य जीव जंतुओं से भी बेहद प्रेम है।
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भगवा रंग के कुर्ते-अचले और ऊपर से इसी रंग का ही अंगवस्त्र धारण कर जब वे निकलते हैं तो सबकी निगाहें उन्हीं पर ही होती हैं। कहने को तो ये सन्यासी लुक है लेकिन उनका ये अंदाज सबसे अलग है। अपने इस लुक को भी स्मार्टली कैरी करना उन्हें बहुत अच्छे से आता है। कानों में कुंडल धारण किए योगी जब गॉगल्स लगाकर निकलते हैं तो ये अंदाज भी गजब का होता है। सीएम आवास हो या सचिवालय, योगी जी की कुर्सी भगवा रंग की ही होती है। यदि कुर्सी किसी दूसरे रंग की हो तो उस पर बिछी तौलिया और कुशन जरूर भगवा रंग का होता है। सीएम योगी की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे इस तपती गर्मी में भी बिना एसी के ही सोते हैं। फ्रिज के ठंडे पानी से भी वे परहेज करते हैं। गौ सेवा करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा उन्हें अन्य जीव जंतुओं से भी बेहद प्रेम है।
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प्रयागराज, 31 मार्च फूलपुर स्थित इफको संयंत्र में 23 मार्च को बायलर में हुए धमाके की जांच में प्रबंधन ने लापरवाही बरतने के लिए 11 अधिकारियों को बुधवार को निलंबित कर दिया।
इफको फूलपुर के जनसंपर्क अधिकारी संजय मिश्रा ने बताया कि इफको प्रबंधन ने स्थानीय प्रबंधन का प्रभार महाप्रबंधक संजय कुदेशिया को सौंप दिया है।
बुधवार को जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया उनमें कार्यकारी निदेशक मसूद अहमद, संयुक्त महाप्रबंधक (उपयोगिता) टी रामा कृष्णा, मुख्य प्रबंधक (बिजली) अरुण कुमार, प्रबंधक (बिजली) सीएन राम, वाईएस यादव, भुवन चंद्र, मुख्य परिचालक (बिजली) सुशील कुमार मिश्र, मुख्य प्रबंधक (अग्नि सुरक्षा) एके सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक (यूरिया) आरआर विश्वकर्मा, प्रबंधक (यांत्रिक) एसबी भारती और उप प्रबंधक (यूरिया) काशी सिंह यादव शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 23 मार्च को इफको फूलपुर के बिजली संयंत्र के बायलर नंबर चार में हुए विस्फोट की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। घटना के दो दिन बाद एक और कर्मचारी की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी।
इस घटना में 14 लोग घायल हुए थे। इफको के प्रबंध निदेशक ने इस घटना की जांच के आदेश दिए थे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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प्रयागराज, इकतीस मार्च फूलपुर स्थित इफको संयंत्र में तेईस मार्च को बायलर में हुए धमाके की जांच में प्रबंधन ने लापरवाही बरतने के लिए ग्यारह अधिकारियों को बुधवार को निलंबित कर दिया। इफको फूलपुर के जनसंपर्क अधिकारी संजय मिश्रा ने बताया कि इफको प्रबंधन ने स्थानीय प्रबंधन का प्रभार महाप्रबंधक संजय कुदेशिया को सौंप दिया है। बुधवार को जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया उनमें कार्यकारी निदेशक मसूद अहमद, संयुक्त महाप्रबंधक टी रामा कृष्णा, मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार, प्रबंधक सीएन राम, वाईएस यादव, भुवन चंद्र, मुख्य परिचालक सुशील कुमार मिश्र, मुख्य प्रबंधक एके सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक आरआर विश्वकर्मा, प्रबंधक एसबी भारती और उप प्रबंधक काशी सिंह यादव शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि तेईस मार्च को इफको फूलपुर के बिजली संयंत्र के बायलर नंबर चार में हुए विस्फोट की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। घटना के दो दिन बाद एक और कर्मचारी की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस घटना में चौदह लोग घायल हुए थे। इफको के प्रबंध निदेशक ने इस घटना की जांच के आदेश दिए थे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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राजपूत महासभा प्रदेश युवा मोर्चा की॒कोर कमेटी की बैठक प्रदेश संयोजक विपुल ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में॒केएस जम्वाल राजपूत महासभा के प्रदेश सचिव व॒प्रदेश संयोजक सामान्य वर्ग संयुक्त मंच व अन्य वशिष्ठ पदाधिकारियों ने विशेष रूप से॒ भाग लिया। ॒ इस बैठक में हाल ही में हिमाचल राज्य विद्युत बोर्ड में सामान्य वर्ग के कोटे में॒जूनियर इंजीनियरों के 90 पदों में से 47 पदों पर बाहरी राज्यों के अभ्यार्थियों को नियुक्ति चयनित करने का कड़ा विरोध किया गया। सदस्यों ने इस निर्णय को प्रदेश के सामान्य वर्ग के युवाओं के साथ सरकारी तंत्र द्वारा एक सोचे समझे षड्यंत्र के तहत उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया।
बैठक में प्रदेश सचिव केएस जम्वाल॒ने कहा कि हिमाचल में पहले ही गत वर्ष जुलाई, 2019 में सबोर्डिनेट पब्लिक सर्विस कमीशन हमीरपुर द्वारा पोस्ट कोड 663 के अंतर्गत जूनियर इंजीनियर के 222 पदों के सिलेक्शन तथा॒ प्रदेश सचिवालय में 31 लिपिकों की भर्ती॒का विरोध किया था और 20 जुलाई, 2019 को मुख्यमंत्री महोदय को इसका ज्ञापन भी सौंपा था। ॒राजपूत महासभा और सचिवालय कर्मचारी संघ द्वारा इसका विरोध करने के कारण उत्पन्न स्थिति को भांपते हुए हिमाचल सरकार ने उन आदेशों को तुरंत स्थगित करने का निर्णय लिया था, मगर बाद में सरकार ने जब इसका संशोधन किया तो उसमें एससी, एसटी कैटेगरी को हिमाचली बोनाफाइड होने की शर्तलगा कर राहत दे दी।
बैठक में हेम सिंह ठाकुर, अरुण ठाकुर, शिव सिंह सैन, नंदलाल ठाकुर, अमर सिंह, महेश शर्मा, करण सिंह, कशमीर ठाकुर, उपमन्यु ठाकुर, दिग्विजय सिंह, अमर सिंह, उपमन्यु ठाकुर, राहुल ठाकुर व भास्कर ठाकुर सहित अन्य उपस्थित रहे।
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राजपूत महासभा प्रदेश युवा मोर्चा की॒कोर कमेटी की बैठक प्रदेश संयोजक विपुल ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में॒केएस जम्वाल राजपूत महासभा के प्रदेश सचिव व॒प्रदेश संयोजक सामान्य वर्ग संयुक्त मंच व अन्य वशिष्ठ पदाधिकारियों ने विशेष रूप से॒ भाग लिया। ॒ इस बैठक में हाल ही में हिमाचल राज्य विद्युत बोर्ड में सामान्य वर्ग के कोटे में॒जूनियर इंजीनियरों के नब्बे पदों में से सैंतालीस पदों पर बाहरी राज्यों के अभ्यार्थियों को नियुक्ति चयनित करने का कड़ा विरोध किया गया। सदस्यों ने इस निर्णय को प्रदेश के सामान्य वर्ग के युवाओं के साथ सरकारी तंत्र द्वारा एक सोचे समझे षड्यंत्र के तहत उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। बैठक में प्रदेश सचिव केएस जम्वाल॒ने कहा कि हिमाचल में पहले ही गत वर्ष जुलाई, दो हज़ार उन्नीस में सबोर्डिनेट पब्लिक सर्विस कमीशन हमीरपुर द्वारा पोस्ट कोड छः सौ तिरेसठ के अंतर्गत जूनियर इंजीनियर के दो सौ बाईस पदों के सिलेक्शन तथा॒ प्रदेश सचिवालय में इकतीस लिपिकों की भर्ती॒का विरोध किया था और बीस जुलाई, दो हज़ार उन्नीस को मुख्यमंत्री महोदय को इसका ज्ञापन भी सौंपा था। ॒राजपूत महासभा और सचिवालय कर्मचारी संघ द्वारा इसका विरोध करने के कारण उत्पन्न स्थिति को भांपते हुए हिमाचल सरकार ने उन आदेशों को तुरंत स्थगित करने का निर्णय लिया था, मगर बाद में सरकार ने जब इसका संशोधन किया तो उसमें एससी, एसटी कैटेगरी को हिमाचली बोनाफाइड होने की शर्तलगा कर राहत दे दी। बैठक में हेम सिंह ठाकुर, अरुण ठाकुर, शिव सिंह सैन, नंदलाल ठाकुर, अमर सिंह, महेश शर्मा, करण सिंह, कशमीर ठाकुर, उपमन्यु ठाकुर, दिग्विजय सिंह, अमर सिंह, उपमन्यु ठाकुर, राहुल ठाकुर व भास्कर ठाकुर सहित अन्य उपस्थित रहे।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
काबा (अरबीः, अंग्रेज़ीः Ka'aba, सही उच्चारणः क'आबा) मक्का, सउदी अरब में स्थित एक घनाकार (क्यूब के आकार की) इमारत है जो इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है। यह भवन इब्राहीम के समय में खुद इब्राहिम ने बनाया था, जो अबतक की सबसे पुरानी निर्मित भवन है। इस भवन के आसपास एक मस्जिद-अल-हरम है। पूरी दुनिया के सभी मुसलमान चाहें वे कहीं भी हो नमाज़ के समय अपना मुँह काबा की ओर ही रखते हैं।Wensinck, A. J; Ka`ba. वाजिद खान (जन्मः १० मार्च १९८१, मंदसौर,मध्य प्रदेश, भारत) एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयरन नेल आर्टिस्ट (कलाकार), चित्रकार, पेटेंट धारक, व अविष्कारक हैं। .
काबा और वाजिद खान आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): इस्लाम।
इस्लाम (अरबीः الإسلام) एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के 25% हिस्से, यानी लगभग 1.6 से 1.8 अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से (स्रोतों के अनुसार) लगभग 20 से 30 करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। .
काबा 9 संबंध है और वाजिद खान 50 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.69% है = 1 / (9 + 50)।
यह लेख काबा और वाजिद खान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। काबा मक्का, सउदी अरब में स्थित एक घनाकार इमारत है जो इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है। यह भवन इब्राहीम के समय में खुद इब्राहिम ने बनाया था, जो अबतक की सबसे पुरानी निर्मित भवन है। इस भवन के आसपास एक मस्जिद-अल-हरम है। पूरी दुनिया के सभी मुसलमान चाहें वे कहीं भी हो नमाज़ के समय अपना मुँह काबा की ओर ही रखते हैं।Wensinck, A. J; Ka`ba. वाजिद खान एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयरन नेल आर्टिस्ट , चित्रकार, पेटेंट धारक, व अविष्कारक हैं। . काबा और वाजिद खान आम में एक बात है : इस्लाम। इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो इसके अनुयायियों के अनुसार, अल्लाह के अंतिम रसूल और नबी, मुहम्मद द्वारा मनुष्यों तक पहुंचाई गई अंतिम ईश्वरीय पुस्तक क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। कुरान अरबी भाषा में रची गई और इसी भाषा में विश्व की कुल जनसंख्या के पच्चीस% हिस्से, यानी लगभग एक.छः से एक.आठ अरब लोगों, द्वारा पढ़ी जाती है; इनमें से लगभग बीस से तीस करोड़ लोगों की यह मातृभाषा है। हजरत मुहम्मद साहब के मुँह से कथित होकर लिखी जाने वाली पुस्तक और पुस्तक का पालन करने के निर्देश प्रदान करने वाली शरीयत ही दो ऐसे संसाधन हैं जो इस्लाम की जानकारी स्रोत को सही करार दिये जाते हैं। . काबा नौ संबंध है और वाजिद खान पचास है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.उनहत्तर% है = एक / । यह लेख काबा और वाजिद खान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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सनराइजर्स हैदराबाद ने यहां के एमए चिदम्बरम स्टेडिमय में रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के साथ जारी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 14वें संस्करण के अपने पहले मुकाबले में टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया है।
बीते सीजन की तरह इस सीजन में भी पूर्व विजेता सनराइजर्स की कमान आस्ट्रेलिया के धुरंधर सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर के हाथों है जबकि इस साल के लिए इयोन मोर्गन केकेआर के पूर्णकालिक कप्तान हैं। बीते सीजन में मोर्गन ने दूसरे हाफ में कप्तानी सम्भाली थी। पूर्व कप्तान दिनेश कार्तिक का उन्हें भरपूर साथ मिलेगा।
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सनराइजर्स हैदराबाद ने यहां के एमए चिदम्बरम स्टेडिमय में रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ जारी इंडियन प्रीमियर लीग के चौदहवें संस्करण के अपने पहले मुकाबले में टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया है। बीते सीजन की तरह इस सीजन में भी पूर्व विजेता सनराइजर्स की कमान आस्ट्रेलिया के धुरंधर सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर के हाथों है जबकि इस साल के लिए इयोन मोर्गन केकेआर के पूर्णकालिक कप्तान हैं। बीते सीजन में मोर्गन ने दूसरे हाफ में कप्तानी सम्भाली थी। पूर्व कप्तान दिनेश कार्तिक का उन्हें भरपूर साथ मिलेगा।
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Marathon 3-D Live Surgery दून मेडिकल कालेज में 12 घंटे की मैराथन 3-डी लाइव सर्जरी का प्रसारण किया गया। जिसमें देशभर के 25 से अधिक नेत्र सर्जन ने 33 जटिल सर्जरी की। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने दून मेडिकल कालेज सभागार में सर्जरी देखी।
जागरण संवाददाता, देहरादून : Marathon 3-D Live Surgery : दृष्टि आई इंस्टीट्यूट से दून मेडिकल कालेज में 12 घंटे की मैराथन 3-डी लाइव सर्जरी का प्रसारण किया गया। राज्य नेत्र विज्ञान सम्मेलन उत्तरा आईकान के तहत यह लाइव सर्जरी की गई। जिसमें देशभर के 25 से अधिक नेत्र सर्जन ने 33 जटिल सर्जरी की।
वहीं, 300 से अधिक चिकित्सकों ने 3-डी चश्मा पहनकर यह सर्जरी देखी। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने दून मेडिकल कालेज सभागार में सर्जरी देखी। राज्यापाल ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की सराहना की। इस दौरान दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के डा. सौरभ लूथरा ने जटिल मैकुलर रेटिनल होल की 3-डी सर्जरी की।
पीजीआइ चंडीगढ़ के प्रमुख डा. एस एस पांडव ने वाल्व इम्प्लांट के साथ एक बहुत ही उन्नत ग्लूकोमा सर्जरी की। नारायण नेत्रालय बेंगलुरु के डा. नरेन शेट्टी, मुंबई के डा. कुमार और पीजीआइ चंडीगढ़ के डा. अरुण जैन ने मोतियाबिंद सर्जरी की। दृष्टि आई इंस्टीट्यूट से डा. गौरव लूथरा और डा. सौरभ चौधरी भी मोतियाबिंद सर्जरी की।
चेन्नई से डा. अमर अग्रवाल ने कार्नियल ट्रांसप्लांट, डा. गौरव लूथरा और चेन्नई से डा. अरुल मोझी, चेन्नई ने चश्मा हटाने के लिए स्माइल लेजर सर्जरी की। उदघाटन दिवस पर दृष्टि आई इंस्टीट्यूट की डा. श्वेता पारेख ने डा. एमसी लूथरा गोल्ड मेडल जीता। विज्ञानिक सत्रों में डा. सीएस ग्रोवर व्याख्यान डा. ललित वर्मा ने दिया। डा. जगत राम को प्रतिष्ठित यूकेएसओएस लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय (दून अस्पताल) में सोमवार से यूरोलाजी की ओपीडी शुरू हो गई है। शुरुआत में यह ओपीडी सोमवार व गुरुवार को चलेगी। पहले दिन ओपीडी में 50 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे। ओपीडी शुरू होने से मूत्र, किडनी, प्रोस्टेट संबंधी बीमारियों के मरीजों को राहत मिली है।
गुर्दे की पथरी, कैंसर और प्रोस्टेट के कैंसर के आपरेशन भी दूरबीन विधि से किए जाएंगे। अस्पताल के सीपीआरओ महेंद्र भंडारी ने बताया कि एम्स में लंबे समय तक सेवा देने वाले यूरोलाजिस्ट डा. मनोज बिस्वास ने ज्वाइन कर ओपीडी में बैठना शुरू कर दिया है। उन्हें वार्ड भी आवंटित किया जा रहा है।
दूरबीन विधि से भी जल्द मरीजों के आपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। वहीं, सालभर के भीतर अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू करने का भी लक्ष्य है।
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Marathon तीन-D Live Surgery दून मेडिकल कालेज में बारह घंटाटे की मैराथन तीन-डी लाइव सर्जरी का प्रसारण किया गया। जिसमें देशभर के पच्चीस से अधिक नेत्र सर्जन ने तैंतीस जटिल सर्जरी की। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने दून मेडिकल कालेज सभागार में सर्जरी देखी। जागरण संवाददाता, देहरादून : Marathon तीन-D Live Surgery : दृष्टि आई इंस्टीट्यूट से दून मेडिकल कालेज में बारह घंटाटे की मैराथन तीन-डी लाइव सर्जरी का प्रसारण किया गया। राज्य नेत्र विज्ञान सम्मेलन उत्तरा आईकान के तहत यह लाइव सर्जरी की गई। जिसमें देशभर के पच्चीस से अधिक नेत्र सर्जन ने तैंतीस जटिल सर्जरी की। वहीं, तीन सौ से अधिक चिकित्सकों ने तीन-डी चश्मा पहनकर यह सर्जरी देखी। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने दून मेडिकल कालेज सभागार में सर्जरी देखी। राज्यापाल ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की सराहना की। इस दौरान दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के डा. सौरभ लूथरा ने जटिल मैकुलर रेटिनल होल की तीन-डी सर्जरी की। पीजीआइ चंडीगढ़ के प्रमुख डा. एस एस पांडव ने वाल्व इम्प्लांट के साथ एक बहुत ही उन्नत ग्लूकोमा सर्जरी की। नारायण नेत्रालय बेंगलुरु के डा. नरेन शेट्टी, मुंबई के डा. कुमार और पीजीआइ चंडीगढ़ के डा. अरुण जैन ने मोतियाबिंद सर्जरी की। दृष्टि आई इंस्टीट्यूट से डा. गौरव लूथरा और डा. सौरभ चौधरी भी मोतियाबिंद सर्जरी की। चेन्नई से डा. अमर अग्रवाल ने कार्नियल ट्रांसप्लांट, डा. गौरव लूथरा और चेन्नई से डा. अरुल मोझी, चेन्नई ने चश्मा हटाने के लिए स्माइल लेजर सर्जरी की। उदघाटन दिवस पर दृष्टि आई इंस्टीट्यूट की डा. श्वेता पारेख ने डा. एमसी लूथरा गोल्ड मेडल जीता। विज्ञानिक सत्रों में डा. सीएस ग्रोवर व्याख्यान डा. ललित वर्मा ने दिया। डा. जगत राम को प्रतिष्ठित यूकेएसओएस लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में सोमवार से यूरोलाजी की ओपीडी शुरू हो गई है। शुरुआत में यह ओपीडी सोमवार व गुरुवार को चलेगी। पहले दिन ओपीडी में पचास से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे। ओपीडी शुरू होने से मूत्र, किडनी, प्रोस्टेट संबंधी बीमारियों के मरीजों को राहत मिली है। गुर्दे की पथरी, कैंसर और प्रोस्टेट के कैंसर के आपरेशन भी दूरबीन विधि से किए जाएंगे। अस्पताल के सीपीआरओ महेंद्र भंडारी ने बताया कि एम्स में लंबे समय तक सेवा देने वाले यूरोलाजिस्ट डा. मनोज बिस्वास ने ज्वाइन कर ओपीडी में बैठना शुरू कर दिया है। उन्हें वार्ड भी आवंटित किया जा रहा है। दूरबीन विधि से भी जल्द मरीजों के आपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। वहीं, सालभर के भीतर अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू करने का भी लक्ष्य है।
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DEHRADUN : स्टेट में चल रहे ट्रांसफर की फेहरिस्त में मंगलवार को दो आईपीएस ऑफिसर के तबादले हुए। शासन द्वारा जारी सूची में एआईजी पीएसी मुख्तार मोहसिन को टिहरी का कप्तान नियुक्त किया गया। वहीं जनपद टिहरी के एसपी जन्मेजय प्रभाकर कैलाश को एआईजी पीएसी के पद पर पुलिस मुख्यालय में तैनाती दी गई। उधर, एक डिप्टी एसपी मनोज कुमार कत्याल का ट्रांसफर भी जनपद हरिद्वार से रूद्रप्रयाग के लिए किया गया। गौरतलब है कि मंडे को चार डिप्टी एसपी के ट्रांसफर किए गए थे।
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DEHRADUN : स्टेट में चल रहे ट्रांसफर की फेहरिस्त में मंगलवार को दो आईपीएस ऑफिसर के तबादले हुए। शासन द्वारा जारी सूची में एआईजी पीएसी मुख्तार मोहसिन को टिहरी का कप्तान नियुक्त किया गया। वहीं जनपद टिहरी के एसपी जन्मेजय प्रभाकर कैलाश को एआईजी पीएसी के पद पर पुलिस मुख्यालय में तैनाती दी गई। उधर, एक डिप्टी एसपी मनोज कुमार कत्याल का ट्रांसफर भी जनपद हरिद्वार से रूद्रप्रयाग के लिए किया गया। गौरतलब है कि मंडे को चार डिप्टी एसपी के ट्रांसफर किए गए थे।
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ओडिशा के बालासोर रेल हादसे को लेकर अबतक की सबसे बड़ी खबर आ रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सीबीआई जांच के लिए सिफारिश कर दी है. अश्विनी वैष्णव ने खुद ये जानकारी अब से थोड़ी देर पहले दी. चित्रा त्रिपाठी के साथ बालासोर से देखिए शंखनाद.
The biggest news so far is coming regarding the Balasore train accident in Odisha. Railway Minister Ashwini Vaishnav has recommended for CBI inquiry. Ashwini Vaishnav himself gave this information a while back. Watch Shankhnaad from Balasore with Chitra Tripathi.
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ओडिशा के बालासोर रेल हादसे को लेकर अबतक की सबसे बड़ी खबर आ रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सीबीआई जांच के लिए सिफारिश कर दी है. अश्विनी वैष्णव ने खुद ये जानकारी अब से थोड़ी देर पहले दी. चित्रा त्रिपाठी के साथ बालासोर से देखिए शंखनाद. The biggest news so far is coming regarding the Balasore train accident in Odisha. Railway Minister Ashwini Vaishnav has recommended for CBI inquiry. Ashwini Vaishnav himself gave this information a while back. Watch Shankhnaad from Balasore with Chitra Tripathi.
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विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने नौतपा से जुड़ी भ्रांतियों को वैज्ञानिक ढंग से तथ्यों के साथ दूर किया। madhya pradeshThu, 25 May 2023 01:59 PM (IST)
National Science Day 2023: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बच्चों के लिए खगोल विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम चलाया। madhya pradeshTue, 28 Feb 2023 09:50 AM (IST)
Solar Eclipse 2022: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी आंचलिक विज्ञान केंद्र पहुंचे थे। विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू बताया कि 100 से अधिक लोगों ने सुरिक्षत तरीके से बीएचईएल मैदान पर सूर. . . madhya pradeshTue, 25 Oct 2022 10:37 PM (IST)
Sutak Kaal: चूंकि ग्रहण शाम को समाप्त हो रहा है और सूर्य अस्त होने से रात्रि काल में भोजन नहीं कर सकेंगे। अगले दिन सुबह सूर्य दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाएगा। सूतक काल में मूर्ति स्पर्श, भोजन, शयन नहीं करना चाहिए। chhattisgarhTue, 25 Oct 2022 05:08 PM (IST)
नर्मदापुरम। नवदुनिया प्रतिनिधि भारतीय परंपरा में जब आज 13 जुलाई लोग अपने गुरू की महानता व विशालता को नमन कर रहे होंगे तब शाम के आकाश में गुरू पूर्णिमा का चंद्रमा भी साल का सबसे विशाल चंद्रमा महसूस होगा। इस खगोलीय घटना की. . . madhya pradeshTue, 12 Jul 2022 08:43 PM (IST)
नर्मदापुरम। 13 जुलाई को द्वितीय चरण में जिले की विभिन्ना नगर सरकार के चुनाव होने जा रहे हैं। ईवीएम के माध्यम से शहर के विकास का रास्ता खुलेगा। पांच साल के लिए प्रतिनिधि चुनने में कहीं आपकी एक दिन की चूक भारी न पड़ जाए। इस. . . madhya pradeshSun, 10 Jul 2022 10:59 PM (IST)
हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि राज्य निर्वाचन आयोग की ब्रांड एंबेसडर सारिका घारू ने जिले के मतदाताओं से मतदान और मत का महत्व बताया। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि 6 जुलाई को वे अपने नगरीय निकाय की नई सरकार के गठन के लिए जरूर मतदा. . . madhya pradeshMon, 04 Jul 2022 11:17 PM (IST)
राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह एवं सचिव राकेश सिंह के मार्गदर्शन में राज्य ब्रांड एम्बेसेडर सारिका घारू ने नगरीय निर्वाचन के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया। madhya pradeshSat, 02 Jul 2022 07:33 PM (IST)
नर्मदापुरम। नवदुनिया प्रतिनिधि छह और 13 जुलाई को नगर सरकार को चुनने की बारी आ रही है। ईवीएम की नीली बटन पर अंगुली दबाकर परिषद बनाई जाएगी। उसी से विकास का रास्ता खुलेगा। पांच साल के लिए प्रतिनिधि चुनने में कहीं एक दिन की . . . madhya pradeshSat, 02 Jul 2022 05:56 PM (IST)
शत प्रतिशत मतदान के लिए आम लोगों को जागरूक करने राज्य निर्वाचन आयुक्त, आयोग सचिव तथा सेंस गतिविधि के राज्य प्रभारी के मार्गदर्शन में जागरूकता कार्यक्रम विभिन्ना जिलों में चलाया जा रहा है। धग्राम पंचायत चुनाव में वोट देने . . . madhya pradeshThu, 23 Jun 2022 08:43 PM (IST)
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विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने नौतपा से जुड़ी भ्रांतियों को वैज्ञानिक ढंग से तथ्यों के साथ दूर किया। madhya pradeshThu, पच्चीस मई दो हज़ार तेईस एक:उनसठ PM National Science Day दो हज़ार तेईस: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बच्चों के लिए खगोल विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम चलाया। madhya pradeshTue, अट्ठाईस फ़रवरी दो हज़ार तेईस नौ:पचास AM Solar Eclipse दो हज़ार बाईस: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी आंचलिक विज्ञान केंद्र पहुंचे थे। विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू बताया कि एक सौ से अधिक लोगों ने सुरिक्षत तरीके से बीएचईएल मैदान पर सूर. . . madhya pradeshTue, पच्चीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस दस:सैंतीस PM Sutak Kaal: चूंकि ग्रहण शाम को समाप्त हो रहा है और सूर्य अस्त होने से रात्रि काल में भोजन नहीं कर सकेंगे। अगले दिन सुबह सूर्य दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाएगा। सूतक काल में मूर्ति स्पर्श, भोजन, शयन नहीं करना चाहिए। chhattisgarhTue, पच्चीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस पाँच:आठ PM नर्मदापुरम। नवदुनिया प्रतिनिधि भारतीय परंपरा में जब आज तेरह जुलाई लोग अपने गुरू की महानता व विशालता को नमन कर रहे होंगे तब शाम के आकाश में गुरू पूर्णिमा का चंद्रमा भी साल का सबसे विशाल चंद्रमा महसूस होगा। इस खगोलीय घटना की. . . madhya pradeshTue, बारह जुलाई दो हज़ार बाईस आठ:तैंतालीस PM नर्मदापुरम। तेरह जुलाई को द्वितीय चरण में जिले की विभिन्ना नगर सरकार के चुनाव होने जा रहे हैं। ईवीएम के माध्यम से शहर के विकास का रास्ता खुलेगा। पांच साल के लिए प्रतिनिधि चुनने में कहीं आपकी एक दिन की चूक भारी न पड़ जाए। इस. . . madhya pradeshSun, दस जुलाई दो हज़ार बाईस दस:उनसठ PM हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि राज्य निर्वाचन आयोग की ब्रांड एंबेसडर सारिका घारू ने जिले के मतदाताओं से मतदान और मत का महत्व बताया। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि छः जुलाई को वे अपने नगरीय निकाय की नई सरकार के गठन के लिए जरूर मतदा. . . madhya pradeshMon, चार जुलाई दो हज़ार बाईस ग्यारह:सत्रह PM राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह एवं सचिव राकेश सिंह के मार्गदर्शन में राज्य ब्रांड एम्बेसेडर सारिका घारू ने नगरीय निर्वाचन के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया। madhya pradeshSat, दो जुलाई दो हज़ार बाईस सात:तैंतीस PM नर्मदापुरम। नवदुनिया प्रतिनिधि छह और तेरह जुलाई को नगर सरकार को चुनने की बारी आ रही है। ईवीएम की नीली बटन पर अंगुली दबाकर परिषद बनाई जाएगी। उसी से विकास का रास्ता खुलेगा। पांच साल के लिए प्रतिनिधि चुनने में कहीं एक दिन की . . . madhya pradeshSat, दो जुलाई दो हज़ार बाईस पाँच:छप्पन PM शत प्रतिशत मतदान के लिए आम लोगों को जागरूक करने राज्य निर्वाचन आयुक्त, आयोग सचिव तथा सेंस गतिविधि के राज्य प्रभारी के मार्गदर्शन में जागरूकता कार्यक्रम विभिन्ना जिलों में चलाया जा रहा है। धग्राम पंचायत चुनाव में वोट देने . . . madhya pradeshThu, तेईस जून दो हज़ार बाईस आठ:तैंतालीस PM
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बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार के सात केंद्रीय मंत्रियों को राज्य में न घुसने की चेतावनी पर नरम रुख अपनाया.
मुख्यमंत्री ने इसे महज मज़ाक बताया.
उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ इसलिए कही गयी थी ताकि मंत्रीगण केंद्र से बिहार की अपेक्षा पूरी करने पर ज़्यादा ध्यान दें.
उन्होंने राज्य के लिए विशेष दर्जे की मांग पूरी करने पर भी ज़ोर दिया.
साथ ही यह भी कहा कि लोक सभा चुनाव के पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक उस दिशा में कुछ नहीं किया गया है.
मुख्यमंत्री ने मनरेगा और इंदिरा आवास योजना की राशि घटाने पर भी आपत्ति जताई.
इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत पर राज्य सरकार के द्वारा खर्च किए गए एक हज़ार करोड़ रुपए देने की मांग भी की.
जनता दल यूनाइटेड सरकार के कामकाज की नौवीं रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने ये बातें राजधानी पटना में सूबे के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कही.
इस अवसर पर अगले साल चुनाव को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री ने नौ घोषणाएं भी की.
इनमे योजनाओँ में अल्पसंख्यकों, युवाओं और किसानों पर विशेष ध्यान दिया गया है.
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री मांझी ने बीती बातों को भूल जाने की सलाह देते हुए केंद्र सरकार से बिहार को उसका हक़ देने की मांग की.
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बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार के सात केंद्रीय मंत्रियों को राज्य में न घुसने की चेतावनी पर नरम रुख अपनाया. मुख्यमंत्री ने इसे महज मज़ाक बताया. उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ इसलिए कही गयी थी ताकि मंत्रीगण केंद्र से बिहार की अपेक्षा पूरी करने पर ज़्यादा ध्यान दें. उन्होंने राज्य के लिए विशेष दर्जे की मांग पूरी करने पर भी ज़ोर दिया. साथ ही यह भी कहा कि लोक सभा चुनाव के पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक उस दिशा में कुछ नहीं किया गया है. मुख्यमंत्री ने मनरेगा और इंदिरा आवास योजना की राशि घटाने पर भी आपत्ति जताई. इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत पर राज्य सरकार के द्वारा खर्च किए गए एक हज़ार करोड़ रुपए देने की मांग भी की. जनता दल यूनाइटेड सरकार के कामकाज की नौवीं रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने ये बातें राजधानी पटना में सूबे के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कही. इस अवसर पर अगले साल चुनाव को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री ने नौ घोषणाएं भी की. इनमे योजनाओँ में अल्पसंख्यकों, युवाओं और किसानों पर विशेष ध्यान दिया गया है. अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री मांझी ने बीती बातों को भूल जाने की सलाह देते हुए केंद्र सरकार से बिहार को उसका हक़ देने की मांग की.
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आज के बच्चे बूढ़े नौजवान सभी मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं।
क्योंकि ए उन सबकी जरूरत है पहले के जमाने में सिर्फ पैसे वाले ही मोबाइल फोन रखते थे उनके घर पर लैंडलाइन फोन होते थे। लेकिन आज के जमाने में मोबाइल फोन हर किसी की जेब में देखे जाते हैं आजकल के तो कुछ स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी मोबाइल फोन अपने पास रखते हैं मोबाइल फोन का उपयोग बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि मोबाइल फोन कुछ उसी तरह काम करता है जैसे एक छोटी सी वस्तु हो और वह बहुत बड़ा काम करती है।
आज हम देखें तो किसी चीज के लाभ होते हैं साथ में अगर हम उस का ज्यादा उपयोग करते हैं। या हद से ज्यादा उपयोग करते हैं तो उसके नुकसान भी बहुत होते हैं तो चलिए पढ़ते हैं ।
पॉजिटिवः आज मोबाइल फोन सिर्फ मोबाइल फोन नहीं रहा है उसमें बहुत सारे फीचर आ चुके हैं जिनके जरिए हम अपनी जिंदगी को सुविधाजनक बना सकते हैं। आज के जमाने में मोबाइल फोन में पूरी दुनिया समाई हुई है यानी मोबाइल फोन में हम इंटरनेट चला सकते हैं पहले इंटरनेट हम सिर्फ कंप्यूटर में चला सकते थे लेकिन बदलते जमाने में मोबाइल फोन में ही इंटरनेट उपलब्ध है हम इंटरनेट के जरिए किसी भी जगह का पता लगा सकते हैं किसी भी प्रकार की जानकारी इंटरनेट के जरिए तुरंत पा सकते हैं हम इंटरनेट के द्वारा पढ़ाई भी कर सकते हैं।
नेगेटिवः आँखे कमजोर होना-आज के जमाने में बहुत से लोग ज्यादा समय तक मोबाइल का उपयोग करने लगे है वो लम्बे समय तक फ़ोन पर इन्टरनेट,गेम आदि चलाने लगे है जिससे उनकी आँखों पर बहुत बुरा प्रभाव होता है। रिश्तों में दरार-अक्सर देखा जाता है। की पति पत्नी आदि के रिश्ते में ये मोबाइल फ़ोन झगडे की वजह बनता है दरअसल पति या पत्नी दोनों में से कोई एक अपने पार्टनर के पास में रहते भी घंटो मोबाइल पर मेसेज,गेम्स,इन्टरनेट में व्यस्त रहते है जिससे पार्टनर को लगता है की उसका पार्टनर उससे ज्यादा मोबाइल को अहमियत देता है और उनके बीच झगडे बढ़ते है। हम सभी को चाहिए की मोबाइल का उपयोग केवल जरुरत पड़ने पर ही करे।
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आज के बच्चे बूढ़े नौजवान सभी मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं। क्योंकि ए उन सबकी जरूरत है पहले के जमाने में सिर्फ पैसे वाले ही मोबाइल फोन रखते थे उनके घर पर लैंडलाइन फोन होते थे। लेकिन आज के जमाने में मोबाइल फोन हर किसी की जेब में देखे जाते हैं आजकल के तो कुछ स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी मोबाइल फोन अपने पास रखते हैं मोबाइल फोन का उपयोग बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि मोबाइल फोन कुछ उसी तरह काम करता है जैसे एक छोटी सी वस्तु हो और वह बहुत बड़ा काम करती है। आज हम देखें तो किसी चीज के लाभ होते हैं साथ में अगर हम उस का ज्यादा उपयोग करते हैं। या हद से ज्यादा उपयोग करते हैं तो उसके नुकसान भी बहुत होते हैं तो चलिए पढ़ते हैं । पॉजिटिवः आज मोबाइल फोन सिर्फ मोबाइल फोन नहीं रहा है उसमें बहुत सारे फीचर आ चुके हैं जिनके जरिए हम अपनी जिंदगी को सुविधाजनक बना सकते हैं। आज के जमाने में मोबाइल फोन में पूरी दुनिया समाई हुई है यानी मोबाइल फोन में हम इंटरनेट चला सकते हैं पहले इंटरनेट हम सिर्फ कंप्यूटर में चला सकते थे लेकिन बदलते जमाने में मोबाइल फोन में ही इंटरनेट उपलब्ध है हम इंटरनेट के जरिए किसी भी जगह का पता लगा सकते हैं किसी भी प्रकार की जानकारी इंटरनेट के जरिए तुरंत पा सकते हैं हम इंटरनेट के द्वारा पढ़ाई भी कर सकते हैं। नेगेटिवः आँखे कमजोर होना-आज के जमाने में बहुत से लोग ज्यादा समय तक मोबाइल का उपयोग करने लगे है वो लम्बे समय तक फ़ोन पर इन्टरनेट,गेम आदि चलाने लगे है जिससे उनकी आँखों पर बहुत बुरा प्रभाव होता है। रिश्तों में दरार-अक्सर देखा जाता है। की पति पत्नी आदि के रिश्ते में ये मोबाइल फ़ोन झगडे की वजह बनता है दरअसल पति या पत्नी दोनों में से कोई एक अपने पार्टनर के पास में रहते भी घंटो मोबाइल पर मेसेज,गेम्स,इन्टरनेट में व्यस्त रहते है जिससे पार्टनर को लगता है की उसका पार्टनर उससे ज्यादा मोबाइल को अहमियत देता है और उनके बीच झगडे बढ़ते है। हम सभी को चाहिए की मोबाइल का उपयोग केवल जरुरत पड़ने पर ही करे।
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