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IIT Kanpur: जिस तरह से चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली में ये कोरोना का नया वेरिएंट तबाही मचा रहा है उसे देखने के बाद तो भारत में भी डर बढ़ रहा था। हालांकि अब कानपुर आईआईटी ने ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. 7 के बारे में ऐसा बयान दिया है जिससे जानने के बाद आप भी राहत की सांस लेंगे। नई दिल्ली। पहले कोरोना, फिर ओमिक्रॉन और फिर न जाने इसके कितने ही वेरिएंट सामने आए जिन्होंने लोगों की मुश्किलें बढ़ा कर रख दिया था। अब एक फिर कोरोना वायरस के नए वेरिएंट BF. 7 (Covid BF. 7) ने हाहाकार मचा कर रख दिया है। चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली समेत 5 देशों में इस वेरिएंट के लाखों नए मरीज सामने आ चुके हैं। इस वायरस से जान गंवाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। जिस तरह से चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली में ये कोरोना का नया वेरिएंट तबाही मचा रहा है उसे देखने के बाद तो भारत में भी डर बढ़ रहा था। हालांकि अब कानपुर आईआईटी ने ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BF. 7 के बारे में ऐसा बयान दिया है जिससे जानने के बाद आप भी राहत की सांस लेंगे। बता दें, जब भारत में कोरोना का कहर शुरू हुआ था तो उस दौरान कानपुर आईआईटी ने इसकी पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के बारे में अपने गणितीय मॉडल से सटीक अनुमान लगाया था। अब जब दुनिया पर ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. 7 का खतरा मंडरा रहा है तो इसपर कानपुर आईआईटी ने बयान दिया है। आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने इसे लेकर बयान में कहा है कि भारत में इससे लोगों को परेशान होने की जरूरत नही है। भारत में 98 फीसदी लोगों में हार्ड इम्यूनिटी हो गई है ऐसे में ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि समय काफी हो गया है ऐसे में लोगों को प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है लेकिन इसकी संभावना काफी कम है कि ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BF. 7 से ज्यादा नुकसान होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट बीएफ. 7 से काफी नुकसान देखने को मिल रहा है। इस वैरिएंट के संक्रमण से आए उछाल के बाद वहां संक्रमित और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई वीडियोज भी सामने आए हैं जिनमें अस्पतालों में लोग लेटे हुए नजर आ रहे हैं और डॉक्टर उनकी जान बचाने के लिए मशक्कत में लगे हुए हैं। बात भारत की करें तो अब ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. 7 को लेकर केंद्र सरकार एक्शन में आती हुई नजर आ रही है। 6) Short-term future does not look good. The pandemic will hit the remaining population soon, and then the cases will rise further. It will continue until more than 90% population gets infected. चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली समेत 5 देशों में कोरोना वायरस के नए BF. 7 वेरिएंट से मच रहे हाहाकार को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी खुद मैदान में उतर पड़े हैं। आज दोपहर में पीएम एक बड़ी बैठक करने वाले हैं जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, नीति आयोग के मेंबर डॉ. वीके पॉल समेत अन्य बड़े अफसर शामिल होंगे।
IIT Kanpur: जिस तरह से चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली में ये कोरोना का नया वेरिएंट तबाही मचा रहा है उसे देखने के बाद तो भारत में भी डर बढ़ रहा था। हालांकि अब कानपुर आईआईटी ने ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. सात के बारे में ऐसा बयान दिया है जिससे जानने के बाद आप भी राहत की सांस लेंगे। नई दिल्ली। पहले कोरोना, फिर ओमिक्रॉन और फिर न जाने इसके कितने ही वेरिएंट सामने आए जिन्होंने लोगों की मुश्किलें बढ़ा कर रख दिया था। अब एक फिर कोरोना वायरस के नए वेरिएंट BF. सात ने हाहाकार मचा कर रख दिया है। चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली समेत पाँच देशों में इस वेरिएंट के लाखों नए मरीज सामने आ चुके हैं। इस वायरस से जान गंवाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। जिस तरह से चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली में ये कोरोना का नया वेरिएंट तबाही मचा रहा है उसे देखने के बाद तो भारत में भी डर बढ़ रहा था। हालांकि अब कानपुर आईआईटी ने ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BF. सात के बारे में ऐसा बयान दिया है जिससे जानने के बाद आप भी राहत की सांस लेंगे। बता दें, जब भारत में कोरोना का कहर शुरू हुआ था तो उस दौरान कानपुर आईआईटी ने इसकी पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के बारे में अपने गणितीय मॉडल से सटीक अनुमान लगाया था। अब जब दुनिया पर ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. सात का खतरा मंडरा रहा है तो इसपर कानपुर आईआईटी ने बयान दिया है। आईआईटी के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने इसे लेकर बयान में कहा है कि भारत में इससे लोगों को परेशान होने की जरूरत नही है। भारत में अट्ठानवे फीसदी लोगों में हार्ड इम्यूनिटी हो गई है ऐसे में ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि समय काफी हो गया है ऐसे में लोगों को प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है लेकिन इसकी संभावना काफी कम है कि ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BF. सात से ज्यादा नुकसान होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट बीएफ. सात से काफी नुकसान देखने को मिल रहा है। इस वैरिएंट के संक्रमण से आए उछाल के बाद वहां संक्रमित और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई वीडियोज भी सामने आए हैं जिनमें अस्पतालों में लोग लेटे हुए नजर आ रहे हैं और डॉक्टर उनकी जान बचाने के लिए मशक्कत में लगे हुए हैं। बात भारत की करें तो अब ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BF. सात को लेकर केंद्र सरकार एक्शन में आती हुई नजर आ रही है। छः) Short-term future does not look good. The pandemic will hit the remaining population soon, and then the cases will rise further. It will continue until more than नब्बे% population gets infected. चीन, जापान, अमेरिका, ब्राजील, इटली समेत पाँच देशों में कोरोना वायरस के नए BF. सात वेरिएंट से मच रहे हाहाकार को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी खुद मैदान में उतर पड़े हैं। आज दोपहर में पीएम एक बड़ी बैठक करने वाले हैं जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, नीति आयोग के मेंबर डॉ. वीके पॉल समेत अन्य बड़े अफसर शामिल होंगे।
आपने सर्च किया थाः आशा वर्कर फिरदौस ने मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह दी तो यवुकों ने धमकाया। साल की शुरुआत में PM मोदी की रेटिंग 62% थी जो 14 अप्रैल तक बढ़कर 68% हो गई थी। इसकी वजह कोरोना से निपटने के लिए उठाए गए कदम हैं। जब कुम्भ के समय दलित को महामंडलेश्वर बनाया गया था, तब 'द वायर' जैसे प्रपंची पोर्टलों ने इसे चुनाव से पहले दलित वोटों को लुभाने वाला उपक्रम भी करार दिया था। 18 राज्यों मे इसका बेहतर प्रदर्शन देखा गया है। कुछ राज्यों में मामले डबल होने की दर 20-30 दिनों से भी अधिक है। साथ ही ओडिशा और केरल में यह दर 30 दिन से भी ज्यादा है। गोवा में अब कोरोना वायरस का कोई भी सक्रिय केस नहीं है।
आपने सर्च किया थाः आशा वर्कर फिरदौस ने मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह दी तो यवुकों ने धमकाया। साल की शुरुआत में PM मोदी की रेटिंग बासठ% थी जो चौदह अप्रैल तक बढ़कर अड़सठ% हो गई थी। इसकी वजह कोरोना से निपटने के लिए उठाए गए कदम हैं। जब कुम्भ के समय दलित को महामंडलेश्वर बनाया गया था, तब 'द वायर' जैसे प्रपंची पोर्टलों ने इसे चुनाव से पहले दलित वोटों को लुभाने वाला उपक्रम भी करार दिया था। अट्ठारह राज्यों मे इसका बेहतर प्रदर्शन देखा गया है। कुछ राज्यों में मामले डबल होने की दर बीस-तीस दिनों से भी अधिक है। साथ ही ओडिशा और केरल में यह दर तीस दिन से भी ज्यादा है। गोवा में अब कोरोना वायरस का कोई भी सक्रिय केस नहीं है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आदिवासी संग्रहालय तेजगढ़ में प्रदर्शित कुछ कलात्मक वस्तुएँ जनजातीय अकादमी संग्रहालय में प्रदर्शित जनजातीय हस्तशिल्प गणेश नारायणदास देवी (जन्मः१९५०) प्रसिद्ध साहित्यिक आलोचक एवं भाषा अनुसन्धान एवं प्रकाशन केन्द्र, वडोदरा के संस्थापक निदेशक हैं। वे पहले सयाजीराव गायकवाड़ विश्वविद्यालय, वडोदरा के अंग्रेजी के प्राध्यापक थे। डॉ॰ गणेश और उनकी पत्नी सुरेखा देवी 'भाषा' नामक गैर राजनीतिक ट्रस्ट संचालित करते हैं, जो गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से सक्रिय हैं। डॉ॰ गणेश का प्रबल दावा है कि भारत से 'लोक' की जुबान काटने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। 'भाषा' इसी के विरूद्ध एक अभियान है। भारत की लुप्त होती भाषाओं पर व्यापक सर्वेक्षण, संवर्धन और संरक्षण तथा दस्तावेजीकरण करने का उन्होंने स्वेच्छा से बीड़ा उठाया है। इसी सर्वेक्षण के माध्यम से उनका कहना है कि हिन्दी आम धारणा को तोड़ती हुई तेजी से आगे बढ़ रही है। २०१० उनके नेतृत्व में पीपल्स लिंग्विटिक सर्वे ऑफ इण्डिया ने भारत की ७८० जीवित भाषाओं का सर्वेक्षण प्रकाशित किया। श्री गणेश देवी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2014 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। . भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण (The People's Linguistic Survey of India (PLSI)) सन २०१० में शुरू किया गया एक भाषा सर्वेक्षण है। इसका उद्देश्य भारत में बोले जाने वाली भाषाओं की वर्तमान अवस्था का ज्ञान प्राप्त करना था। . गणेश नारायणदास देवी और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): सर्वेक्षण। सर्वेक्षण उपकरणो की तालिका सर्वेक्षण (Surveying) उस कलात्मक विज्ञान को कहते हैं जिससे पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदुओं की समुचित माप लेकर, किसी पैमाने पर आलेखन (plotting) करके, उनकी सापेक्ष क्षैतिज और ऊर्ध्व दूरियों का कागज या, दूसरे माध्यम पर सही-सही ज्ञान कराया जा सके। इस प्रकार का अंकित माध्यम लेखाचित्र या मानचित्र कहलाता है। ऐसी आलेखन क्रिया की संपन्नता और सफलता के लिए रैखिक और कोणीय, दोनों ही माप लेना आवश्यक होता है। सिद्धांततः आलेखन क्रिया के लिए रेखिक माप का होना ही पर्याप्त है। मगर बहुधा ऊँची नीची भग्न भूमि पर सीधे रैखिक माप प्राप्त करना या तो असंभव होता है, या इतना जटिल होता है कि उसकी यथार्थता संदिग्ध हो जाती है। ऐसे क्षेत्रों में कोणीय माप रैखिक माप के सहायक अंग बन जाते हैं और गणितीय विधियों से अज्ञात रैखिक माप ज्ञात करना संभव कर देते हैं। इस प्रकार सर्वेक्षण में तीन कार्य सम्मिलित होते हैं -. गणेश नारायणदास देवी 11 संबंध है और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण 2 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 7.69% है = 1 / (11 + 2)। यह लेख गणेश नारायणदास देवी और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आदिवासी संग्रहालय तेजगढ़ में प्रदर्शित कुछ कलात्मक वस्तुएँ जनजातीय अकादमी संग्रहालय में प्रदर्शित जनजातीय हस्तशिल्प गणेश नारायणदास देवी प्रसिद्ध साहित्यिक आलोचक एवं भाषा अनुसन्धान एवं प्रकाशन केन्द्र, वडोदरा के संस्थापक निदेशक हैं। वे पहले सयाजीराव गायकवाड़ विश्वविद्यालय, वडोदरा के अंग्रेजी के प्राध्यापक थे। डॉ॰ गणेश और उनकी पत्नी सुरेखा देवी 'भाषा' नामक गैर राजनीतिक ट्रस्ट संचालित करते हैं, जो गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से सक्रिय हैं। डॉ॰ गणेश का प्रबल दावा है कि भारत से 'लोक' की जुबान काटने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। 'भाषा' इसी के विरूद्ध एक अभियान है। भारत की लुप्त होती भाषाओं पर व्यापक सर्वेक्षण, संवर्धन और संरक्षण तथा दस्तावेजीकरण करने का उन्होंने स्वेच्छा से बीड़ा उठाया है। इसी सर्वेक्षण के माध्यम से उनका कहना है कि हिन्दी आम धारणा को तोड़ती हुई तेजी से आगे बढ़ रही है। दो हज़ार दस उनके नेतृत्व में पीपल्स लिंग्विटिक सर्वे ऑफ इण्डिया ने भारत की सात सौ अस्सी जीवित भाषाओं का सर्वेक्षण प्रकाशित किया। श्री गणेश देवी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दो हज़ार चौदह में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। . भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण ) सन दो हज़ार दस में शुरू किया गया एक भाषा सर्वेक्षण है। इसका उद्देश्य भारत में बोले जाने वाली भाषाओं की वर्तमान अवस्था का ज्ञान प्राप्त करना था। . गणेश नारायणदास देवी और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण आम में एक बात है : सर्वेक्षण। सर्वेक्षण उपकरणो की तालिका सर्वेक्षण उस कलात्मक विज्ञान को कहते हैं जिससे पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदुओं की समुचित माप लेकर, किसी पैमाने पर आलेखन करके, उनकी सापेक्ष क्षैतिज और ऊर्ध्व दूरियों का कागज या, दूसरे माध्यम पर सही-सही ज्ञान कराया जा सके। इस प्रकार का अंकित माध्यम लेखाचित्र या मानचित्र कहलाता है। ऐसी आलेखन क्रिया की संपन्नता और सफलता के लिए रैखिक और कोणीय, दोनों ही माप लेना आवश्यक होता है। सिद्धांततः आलेखन क्रिया के लिए रेखिक माप का होना ही पर्याप्त है। मगर बहुधा ऊँची नीची भग्न भूमि पर सीधे रैखिक माप प्राप्त करना या तो असंभव होता है, या इतना जटिल होता है कि उसकी यथार्थता संदिग्ध हो जाती है। ऐसे क्षेत्रों में कोणीय माप रैखिक माप के सहायक अंग बन जाते हैं और गणितीय विधियों से अज्ञात रैखिक माप ज्ञात करना संभव कर देते हैं। इस प्रकार सर्वेक्षण में तीन कार्य सम्मिलित होते हैं -. गणेश नारायणदास देवी ग्यारह संबंध है और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण दो है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक सात.उनहत्तर% है = एक / । यह लेख गणेश नारायणदास देवी और भारतीय लोक भाषा सर्वेक्षण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
Pan Aadhaar Link: जल्द करवा लें आधार को पैन से लिंक, वरना देना पड़ सकता है भारी जुर्माना! नई दिल्ली। आपने अगर अभी तक अपने पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया है तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल आधार और पैन कार्ड को लिंक करने की आखिरी तारीख नजदीक है। 30 सितंबर के बाद आप अपने आधार और पैन कार्ड को लिंक नहीं कर पाएंगे। सितंबर के अंत तक अगर आपने पैन कार्ड से आधार को लिंक नहीं किया तो आपका पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक यदि आपने 30 सितंबर तक पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया तो आपके पैन कार्ड को इनवैलिड कर दिया जाएगा। इसके अलावा यदि आपका आधार और पैन कार्ड सही समय पर लिंक नहीं होता है तो आप किसी भी तरह का फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन करते समय पेन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।। ऐसा नहीं करने पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत गंभीर नतीजे के तहत आप पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लग सकता है। बता दें कि सरकार के निर्देश के अनुसार पैन कार्ड को आधार से लिंक (Pan-Aadhaar link) करना अनिवार्य कर दिया है। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक अगर 30 सितंबर 2021 के बाद कोई भी व्यक्ति कैंसिल्ड या निष्क्रिय पैन कार्ड का इस्तेमाल करता हुआ पाया गया तो उस पर IT एक्ट के सेक्शन 272B के तहत 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 272 बी के तहत अगर आप समय सीमा के अंदर पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं करते हैं तो आपका पैन कार्ड इनऑपरेटिव हो जाएगा और इसका इस्तेमाल करने पर आपको 10,000 रुपए तक का जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है। पैन कार्ड और आधार कार्ड को लिंक कराना जरुरी है क्योंकि अगर आपने आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक नहीं करवाया तो ये इनवैलिड हो जाएगा। पैन कार्ड रद्द होने पर कई तरह की दिक्कतें हो सकती है और अगर आपको पैन कार्ड इनवैलिड हो गया तो आप पेन कार्ड से संबंधित काम नहीं करवा पाएंगे। इसी कड़ी में सीबीडीटी ने कहा कि जो लोग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर रहे हैं उनके लिए पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य है। पैन कार्ड लिंक के स्टेटस को आप www.incometaxgov.in पर लॉगइन करके चेक कर सकते हैं। इस साइट में जाकर आप अपने पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक कर सकते हैं। साथ ही अपने पैन कार्ड के स्टेटस को भी चेक कर सकते हैं। - सबसे पहले इनकम टैक्स की ऑफिशल साइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं. वहां से Link Aadhaar पर क्लिक करें। - फिर Click here पर क्लिक करें. नीचे दिए बॉक्स में पैन, आधार नंबर, अपना नाम और दिया हुआ कैप्चा टाइप करें। - सभी बॉक्स को भरने के बाद Link Aadhar पर क्लिक कर दें। पैन कार्ड को आधार कार्ड से आप SMS भेजकर भी लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से UIDPAN 12-digit Aadhaar 10-digit PAN को टाइप करना होगा। वहीं इस SMS को आपको 567678 या 561561 पर भेजना होगा।
Pan Aadhaar Link: जल्द करवा लें आधार को पैन से लिंक, वरना देना पड़ सकता है भारी जुर्माना! नई दिल्ली। आपने अगर अभी तक अपने पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया है तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल आधार और पैन कार्ड को लिंक करने की आखिरी तारीख नजदीक है। तीस सितंबर के बाद आप अपने आधार और पैन कार्ड को लिंक नहीं कर पाएंगे। सितंबर के अंत तक अगर आपने पैन कार्ड से आधार को लिंक नहीं किया तो आपका पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक यदि आपने तीस सितंबर तक पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया तो आपके पैन कार्ड को इनवैलिड कर दिया जाएगा। इसके अलावा यदि आपका आधार और पैन कार्ड सही समय पर लिंक नहीं होता है तो आप किसी भी तरह का फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन करते समय पेन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।। ऐसा नहीं करने पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत गंभीर नतीजे के तहत आप पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लग सकता है। बता दें कि सरकार के निर्देश के अनुसार पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक अगर तीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस के बाद कोई भी व्यक्ति कैंसिल्ड या निष्क्रिय पैन कार्ड का इस्तेमाल करता हुआ पाया गया तो उस पर IT एक्ट के सेक्शन दो सौ बहत्तरB के तहत दस हज़ार रुपयापए का जुर्माना लग सकता है। इनकम टैक्स एक्ट एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो सौ बहत्तर बी के तहत अगर आप समय सीमा के अंदर पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं करते हैं तो आपका पैन कार्ड इनऑपरेटिव हो जाएगा और इसका इस्तेमाल करने पर आपको दस,शून्य रुपयापए तक का जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है। पैन कार्ड और आधार कार्ड को लिंक कराना जरुरी है क्योंकि अगर आपने आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक नहीं करवाया तो ये इनवैलिड हो जाएगा। पैन कार्ड रद्द होने पर कई तरह की दिक्कतें हो सकती है और अगर आपको पैन कार्ड इनवैलिड हो गया तो आप पेन कार्ड से संबंधित काम नहीं करवा पाएंगे। इसी कड़ी में सीबीडीटी ने कहा कि जो लोग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर रहे हैं उनके लिए पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य है। पैन कार्ड लिंक के स्टेटस को आप www.incometaxgov.in पर लॉगइन करके चेक कर सकते हैं। इस साइट में जाकर आप अपने पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक कर सकते हैं। साथ ही अपने पैन कार्ड के स्टेटस को भी चेक कर सकते हैं। - सबसे पहले इनकम टैक्स की ऑफिशल साइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं. वहां से Link Aadhaar पर क्लिक करें। - फिर Click here पर क्लिक करें. नीचे दिए बॉक्स में पैन, आधार नंबर, अपना नाम और दिया हुआ कैप्चा टाइप करें। - सभी बॉक्स को भरने के बाद Link Aadhar पर क्लिक कर दें। पैन कार्ड को आधार कार्ड से आप SMS भेजकर भी लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से UIDPAN बारह-digit Aadhaar दस-digit PAN को टाइप करना होगा। वहीं इस SMS को आपको पाँच लाख सरसठ हज़ार छः सौ अठहत्तर या पाँच लाख इकसठ हज़ार पाँच सौ इकसठ पर भेजना होगा।
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अमेरिका में हैं। लॉकडाउन में कभी वो पति के साथ पोस्ट शेयर कर रही हैं तो कभी खाना बना रही हैं। प्रियंका ने एक और वीडियो शेयर किया है इस बार उन्होंने फैंस के लिए देसी नुस्खा शेयर किया है। प्रियंका ने बालों की देखभाल को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वो घरेलू नुस्खा बता रही हैं। उन्होंने बालों की देखभाल करने वाला एक प्रचलित उपाय बताया है। वीडियो में उनका देसी अंदाज देखते ही बनता है। नया वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपलोड किया है। प्रियंका कहती हैं कि 'दही लें, उसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। फिर एक अंडा फोड़कर डालें। आधे घंटे तक इसे बालों पर लगाकर छोड़ दें। फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। ' प्रियंका ने कैप्शन में लिखा, 'धूल से बचने के लिए आप घर पर ये ट्राई कर सकते हैं। बालों के ट्रीटमेंट के लिए मेरी मां ने मुझे ये सिखाया था। ' प्रियंका ने डिस्कलेमर भी दिया है, 'मेरे लिए ये कमाल का है। हालांकि इसकी महक आपको पसंद नहीं आएगी। बालों से दही को पूरी तरह से हटाने के लिए आपको दो बार शैंपू की जरूरत होगी। तब कंडीशनर तो करना ही होगा। ' प्रियंका चोपड़ा सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहती हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ पीएम केयर्स फंड में सहायता राशि दी है। जब प्रियंका की इस मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका शुक्रिया अदा किया तो देसी गर्ल ने भी इस पर उनको धन्यवाद दिया। प्रियंका ने लिखा, 'धन्यवाद श्री नरेंद्र मोदी। हम सब साथ में बेहद मजबूत हैं। उन सभी लोगों का भी बेहद शुक्रिया जिन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना योगदान दिया है। '
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अमेरिका में हैं। लॉकडाउन में कभी वो पति के साथ पोस्ट शेयर कर रही हैं तो कभी खाना बना रही हैं। प्रियंका ने एक और वीडियो शेयर किया है इस बार उन्होंने फैंस के लिए देसी नुस्खा शेयर किया है। प्रियंका ने बालों की देखभाल को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वो घरेलू नुस्खा बता रही हैं। उन्होंने बालों की देखभाल करने वाला एक प्रचलित उपाय बताया है। वीडियो में उनका देसी अंदाज देखते ही बनता है। नया वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपलोड किया है। प्रियंका कहती हैं कि 'दही लें, उसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। फिर एक अंडा फोड़कर डालें। आधे घंटे तक इसे बालों पर लगाकर छोड़ दें। फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। ' प्रियंका ने कैप्शन में लिखा, 'धूल से बचने के लिए आप घर पर ये ट्राई कर सकते हैं। बालों के ट्रीटमेंट के लिए मेरी मां ने मुझे ये सिखाया था। ' प्रियंका ने डिस्कलेमर भी दिया है, 'मेरे लिए ये कमाल का है। हालांकि इसकी महक आपको पसंद नहीं आएगी। बालों से दही को पूरी तरह से हटाने के लिए आपको दो बार शैंपू की जरूरत होगी। तब कंडीशनर तो करना ही होगा। ' प्रियंका चोपड़ा सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहती हैं। कोरोना के खिलाफ जंग में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ पीएम केयर्स फंड में सहायता राशि दी है। जब प्रियंका की इस मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका शुक्रिया अदा किया तो देसी गर्ल ने भी इस पर उनको धन्यवाद दिया। प्रियंका ने लिखा, 'धन्यवाद श्री नरेंद्र मोदी। हम सब साथ में बेहद मजबूत हैं। उन सभी लोगों का भी बेहद शुक्रिया जिन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना योगदान दिया है। '
बांसडीहरोड क्षेत्र के आसचौरा गांव में मंगलवार को डीएम की अध्यक्षता में चौपाल लगाई गई। इसमें गांव की विभिन्न समस्याओं को डीएम ने सूना। संबंधित अधिकारियों को निस्तारण का निर्देश दिया। ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की कि गांव के कोटेदार पांच रुपये अधिक लेते हैं। इस पर डीएम ने कोटेदार से कहा कि तीन दिन में ग्रामीणों से अधिक लिए गए रुपये को वापस नहीं किया गया तो कार्रवाई होगी। कहा कि राशन का रेट निर्धारित है। इससे अधिक लेने पर कोटेदार सहित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। छोटकी सेरिया से आसचौरा जर्जर मार्ग को शीघ्र ठीक करने को संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया। इस मौके पर विकलांग कल्याण अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा, एसडीएम बच्चालाल, तहसीलदार, कार्यक्रम अधिकारी सहित लल्लन सिंह, समन सिंह, शैलेश तिवारी, ईश्वर वर्मा, अविलाश सिंह आदि रहे।
बांसडीहरोड क्षेत्र के आसचौरा गांव में मंगलवार को डीएम की अध्यक्षता में चौपाल लगाई गई। इसमें गांव की विभिन्न समस्याओं को डीएम ने सूना। संबंधित अधिकारियों को निस्तारण का निर्देश दिया। ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की कि गांव के कोटेदार पांच रुपये अधिक लेते हैं। इस पर डीएम ने कोटेदार से कहा कि तीन दिन में ग्रामीणों से अधिक लिए गए रुपये को वापस नहीं किया गया तो कार्रवाई होगी। कहा कि राशन का रेट निर्धारित है। इससे अधिक लेने पर कोटेदार सहित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। छोटकी सेरिया से आसचौरा जर्जर मार्ग को शीघ्र ठीक करने को संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया। इस मौके पर विकलांग कल्याण अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा, एसडीएम बच्चालाल, तहसीलदार, कार्यक्रम अधिकारी सहित लल्लन सिंह, समन सिंह, शैलेश तिवारी, ईश्वर वर्मा, अविलाश सिंह आदि रहे।
अम्बेडकरनगर । जिला कारागार में विचाराधीन बंदी जिनको अधिकतम सात वर्ष की सजा हो सकती है उन्हें 60 दिन के अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए 12 प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राघिकरण की तरफ से प्रेषित किए गए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ द्वारा कोविड19 महामारी के दृष्टिगत हाई पावर कमेटी द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के क्रम में विचाराधीन बंदियों को 60 दिन की अंतरिम जामनत पर रिहा करने के लिए जनपद न्यायाधीश/जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष डा. बब्बू सारंग द्वारा कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में अपर जिला जज प्रथम विश्वनाथ व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूनम सिंह को नामित किया गया है। कारागार में ऐसे विचाराधीन बंदी जिनको अधिकतम 07 वर्ष की सजा हो सकती है, उन्हें 60 दिन के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए निर्देशित किया गया है। जिसके क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को जिला कारागार द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा करने हेतु 12 प्रार्थना पत्र प्रेषित किए गए हैं। प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह ने बताया कि प्रार्थना पत्र पर गठित कमेटी द्वारा विचाराधीन बंदी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए आदेश पारित किया गया। दूसरी तरफ जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन, पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी व प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह मौजूद रहीं, जिसमें कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा निर्देशों के क्रम में कोरोना महामारी से बचाव के लिए कोविड19 हेल्प डेस्क का गठन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली का हेल्पलाइन नम्बर 15100 व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ का हेल्पलाइन नम्बर 18004190234 है। जब कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से स्थापित कोविड-19 हेल्प डेस्क पर पंकज कुमार लिपिक के मोबाइल नम्बर 9170866975 व अंकुर पांडेय डाटा इंट्री आपरेटर को नियुक्त किया गया है जिनका मोबाइल नम्बर 9910397496 है।
अम्बेडकरनगर । जिला कारागार में विचाराधीन बंदी जिनको अधिकतम सात वर्ष की सजा हो सकती है उन्हें साठ दिन के अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए बारह प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राघिकरण की तरफ से प्रेषित किए गए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ द्वारा कोविडउन्नीस महामारी के दृष्टिगत हाई पावर कमेटी द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के क्रम में विचाराधीन बंदियों को साठ दिन की अंतरिम जामनत पर रिहा करने के लिए जनपद न्यायाधीश/जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष डा. बब्बू सारंग द्वारा कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में अपर जिला जज प्रथम विश्वनाथ व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूनम सिंह को नामित किया गया है। कारागार में ऐसे विचाराधीन बंदी जिनको अधिकतम सात वर्ष की सजा हो सकती है, उन्हें साठ दिन के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए निर्देशित किया गया है। जिसके क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को जिला कारागार द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा करने हेतु बारह प्रार्थना पत्र प्रेषित किए गए हैं। प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह ने बताया कि प्रार्थना पत्र पर गठित कमेटी द्वारा विचाराधीन बंदी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए आदेश पारित किया गया। दूसरी तरफ जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन, पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी व प्राधिकरण सचिव प्रियंका सिंह मौजूद रहीं, जिसमें कोविड-उन्नीस महामारी के दृष्टिगत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा निर्देशों के क्रम में कोरोना महामारी से बचाव के लिए कोविडउन्नीस हेल्प डेस्क का गठन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली का हेल्पलाइन नम्बर पंद्रह हज़ार एक सौ व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ का हेल्पलाइन नम्बर एक आठ शून्य शून्य चार एक नौ शून्य दो तीन चार है। जब कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से स्थापित कोविड-उन्नीस हेल्प डेस्क पर पंकज कुमार लिपिक के मोबाइल नम्बर नौ एक सात शून्य आठ छः छः नौ सात पाँच व अंकुर पांडेय डाटा इंट्री आपरेटर को नियुक्त किया गया है जिनका मोबाइल नम्बर नौ नौ एक शून्य तीन नौ सात चार नौ छः है।
और वह कमरे से बाहर चला गया। और दूसरे ही क्षण फिर अंदर आया। आ कर विनोदिनी से कहा - मुझे माफ कर दो! विनोदिनी बोली - क्या कुसूर किया है तुमने, लालाजी? महेंद्र बोला - तुम्हें यों जबरदस्ती यहाँ रोक रखने का हमें कोई अधिकार नहीं। विनोदिनी हँस कर बोली - जबरदस्ती कहाँ की है? प्यार से सीधी तरह ही तो रहने को कहा - यह जबरदस्ती थोड़े है। आशा सोलहों आने सहमत हो कर बोली - हर्गिज नहीं। विनोदिनी ने कहा - भाई साहब, तुम्हारी इच्छा है, मैं रहूँ। मेरे जाने से तुम्हें तकलीफ होगी- यह तो मेरी खुशकिस्मती है। क्यों भई किरकिरी, ऐसे सहृदय दुनिया में मिलते कितने हैं? और दुःख में दुखी, सुख में सुखी भाग्य से कोई मिला, तो मैं ही उसे छोड़ कर जाने को क्यों उतावली होऊँ? पति को चुप रहते देख आशा जरा खिन्न मन से बोली - बातों में तुमसे कौन जीते? मेरे स्वामी तो हार मान गए, अब जरा रुक भी जाओ। महेंद्र फिर तेजी से बाहर हो गया। उधर बिहारी कुछ देर राजलक्ष्मी से बातचीत करके महेंद्र की ओर आ रहा था। दरवाजे पर ज्यों ही बिहारी पर नजर पड़ी, महेंद्र बोल उठा- भाई बिहारी, मुझ-सा नालायक दुनिया में दूसरा नहीं। उसने कुछ ऐसे कहा कि वह बात कमरे में पहुँच गई। अंदर से उसी दम पुकार हुई - बिहारी बाबू? बिहारी ने कहा - अभी आया, विनोद भाभी! कमरे में जाते ही बिहारी ने तुरंत आशा की तरफ देखा - घूँघट में से जितना-भर दिखाई पड़ा, उसमें विषाद या वेदना की कोई निशानी ही न थी। आशा उठ कर जाने लगी। विनोदिनी उसे पकड़े रही। कहा - यह तो बताएँ भाई साहब, मेरी आँखों की किरकिरी से आपका सौत का नाता है क्या? आपको देखते ही वह भाग क्यों जाना चाहती है? आशा ने शर्मा कर विनोदिनी को झिड़का। बिहारी ने हँस कर कहा - इसलिए कि विधाता ने मुझे वैसा खूबसूरत नहीं बनाया है। विनोदिनी - देख लिया भई किरकिरी, बिहारी बाबू किस कदर बचा कर बात करना जानते हैं! इन्होंने तुम्हारी पसंद को दोष नहीं दिया, दिया विधाता को। लक्ष्मण-जैसे सुलक्षण देवर को पा कर तुझे आदर करना न आया, तेरी ही तकदीर खोटी है। बिहारी - इस पर तुम्हें अगर तरस आए विनोद भाभी, तो फिर मुझे शिकवा ही क्या रहे! विनोदिनी - समुद्र तो है ही, फिर भी बादलों के बरसे बिना चातक की प्यास क्यों नहीं मिटती? आशा को आखिर रोक कर न रखा जा सका। वह जबरदस्ती हाथ छुड़ा कर चली गई। बिहारी भी जाना चाह रहा था। विनोदिनी ने कहा - महेंद्र बाबू को क्या हुआ है, कह सकते हैं आप? बिहारी ठिठक पड़ा। बोला - मुझे तो कुछ पता नहीं, कुछ हुआ है क्या? विनोदिनी - पता नहीं, मुझे तो ठीक नहीं दीखता। उत्सुक हो कर बिहारी कुर्सी पर बैठ गया। पूरी तरह सुन लेने के खयाल से वह उन्मुख हो कर विनोदिनी की ओर ताकता रहा। विनोदिनी कुछ न बोली। मन लगा कर चादर सीने लगी। कुछ देर रुक कर वह बोला, तुमने महेंद्र में खास कुछ गौर किया क्या? विनोदिनी बड़े सहज भाव से बोली - क्या जानें, मुझे तो ठीक नहीं दीखता। मुझे तो अपनी किरकिरी के लिए फिक्र होती है। - और एक लंबी उसाँस ले कर वह सिलाई छोड़ कर जाने लगी। बिहारी ने व्यस्त हो कर कहा - जरा बैठो, भाभी! विनोदिनी ने कमरे के सारे खिड़की-किवाड़ खोल दिए। लालटेन की बत्ती बढ़ा दी और सिलाई का सामान लिए बिस्तर के उस छोर पर जा बैठी। बोली - मैं तो यहाँ सदा रहूँगी नहीं- मेरे चले जाने पर मेरी किरकिरी का खयाल रखना- वह बेचारी दुखी न हो। कह कर मन के उद्वेग को जब्त करने के लिए उसने मुँह फेर लिया। बिहारी बोल पड़ा- भाभी, तुम्हें रहना ही पड़ेगा। तुम्हारा अपना कहने को कोई नहीं- इस भोली लड़की को सुख-दुःख में बचाने का भार तुम लो- कहीं तुम छोड़ गई, तो फिर कोई चारा नहीं। विनोदिनी - भाई साहब, दुनिया का हाल तुमसे छिपा नहीं, मैं यहाँ सदा कैसे रह सकता हूँ? लोग क्या कहेंगे? बिहारी - लोग जो चाहें कहें, तुम ध्यान ही मत दो! तुम देवी हो, एक असहाय लड़की को दुनिया की ठोकरों से बचाना तुम्हारे ही योग्य काम है। विनोदिनी का रोआँ-रोआँ पुलकित हो उठा। बिहारी के इस भक्ति-उपहार को वह मन से भी गलत मान कर ठुकरा न सकी, हालाँकि वह छलना कर रही थी। ऐसा व्यवहार उसे कभी किसी से न मिला था। विनोदिनी के आँसू देख कर बिहारी मुश्किल से अपने आँसू जब्त करके महेंद्र के कमरे में चला गया। बिहारी को यह बात बिलकुल समझ में न आई कि महेंद्र ने अचानक अपने आपको नालायक क्यों कह दिया। कमरे में जा कर देखा, महेंद्र नहीं था। पता चला, वह टहलने निकल गया है। पहले बे-वजह वह घर से कभी बाहर नहीं जाया करता था। जाने-पहचाने लोगों के घर से बाहर उसे बड़ी परेशानी होती। बिहारी सोचता हुआ धीरे-धीरे अपने घर चला गया। विनोदिनी आशा को अपने कमरे में ले आई। उसे छाती से लगा कर छलछलाई आँखों से कहा - भई किरकिरी, मैं बड़ी अभागिन हूँ, बड़ी बदशकुन। आशा दुखी मन से बोली - ऐसा क्यों कहती हो, बहन? सुबकते बच्चे की तरह वह आशा की छाती में मुँह गाड़ कर बोली - मैं जहाँ भी रहूँगी, बुरा ही होगा। मुझे छोड़ दे बहन, छुट्टी दे! मैं अपने जंगल में चली जाऊँ। महेंद्र से बिहारी की मुलाकात न हो सकी, इसलिए कोई बहाना बना कर फिर वह वहाँ आया ताकि आशा और महेंद्र के बीच की आशंका वाली बात को और कुछ साफ तौर से जान सके। वह विनोदिनी से यह अनुरोध करने का बहाना लिए आया कि कल महेंद्र को अपने यहाँ भोजन के लिए आने को कहे। उसने आवाज दी - विनोद भाभी! और बाहर से ही बत्ती की मद्धम रोशनी में गीली आँखों वाली दोनों सखियों को आलिंगन में देख कर वह ठिठक गया। अचानक आशा के मन में हुआ कि हो न हो, आज बिहारी ने जरूर विनोदिनी से कुछ निंदा की बात कही है, तभी वह जाने की बात कर रही है। यह तो बिहारी बाबू की बड़ी ज्यादती है। ऊँहू, अच्छे मिजाज के नहीं हैं। कुढ़ कर आशा बाहर निकल आई और बिहारी भी विनोदिनी के प्रति मन की भक्ति की ओर बढ़ कर बैरँग वापस हो गया। रात को महेंद्र ने आशा से कहा - चुन्नी, मैं सुबह की गाड़ी से बनारस चला जाऊँगा। आशा का कलेजा धक से रह गया। पूछा, क्यों? महेंद्र बोला - काफी दिन हो गए, चाची से भेंट नहीं हुई। महेंद्र की यह बात सुन कर आशा शर्मिंदा हो गई। उसे यह इससे भी पहले सोचना चाहिए था। अपने सुख-दुःख के आकर्षण में वह अपनी स्नेहमयी मौसी को भूल गई। महेंद्र ने कहा - अपने स्नेह की एकमात्र थाती को वह मेरे ही हाथों सौंप गई हैं - उन्हें एक बार देखे बिना मुझे चैन नहीं मिलता। कहते-कहते महेंद्र का गला भर आया। स्नेह-भरे मौन आशीर्वाद और अव्यक्त मंगल-कामना से वह बार-बार अपना दायाँ हाथ आशा के माथे पर फेरने लगा। अचानक ऐसे उमड़ आए स्नेह का मर्म आशा न समझ सकी। उसका हृदय केवल पिघल कर आँखों से बहने लगा। आज ही शाम को स्नेहवश विनोदिनी ने उसे जो कुछ कहा था, याद आया। इन दोनों में कहीं योग भी है या नहीं, वह समझ न सकी। लेकिन उसे लगा, यह मानो उसके जीवन की कोई सूचना है। अच्छी बुरी, कौन जाने! भय से व्याकुल हो कर उसने महेंद्र को बाँहों में जकड़ लिया। महेंद्र उसके नाहक संदेह के आवेश को समझ गया। बोला - चुन्नी, तुम पर तुम्हारी पुण्यवती मौसी का आशीर्वाद है। तुम्हें कोई खतरा नहीं। तुम्हारी ही भलाई के लिए वह अपना सर्वस्व छोड़ कर चली गई - तुम्हारा कभी कोई बुरा नहीं हो सकता। इस पर आशा ने निडर हो कर अपने मन के भय को निकाल फेंका। पति के इस आशीर्वाद को उसने अक्षय कवच के समान ग्रहण किया। मन-ही-मन उसने मौसी के चरणों की धूल को बार-बार अपने माथे से लगाया और एकाग्र हो कर बोली - तुम्हारा आशीर्वाद सदा मेरे स्वामी की रक्षा करे। दूसरे दिन महेंद्र चला गया। विनोदिनी ने जाते समय कुछ न बोला। विनोदिनी मन में कहने लगी - गलती खुद की और गुस्सा मुझ पर! ऐसा साधु पुरुष तो मैंने नहीं देखा। लेकिन ऐसी साधुता ज्यादा दिन नहीं टिकती! बहुत दिनों के बाद अचानक महेंद्र को आते देख कर एक ओर तो अन्नपूर्णा गदगद हो गईं और दूसरी ओर उन्हें यह शंका हुई कि शायद आशा की माँ से फिर कुछ चख-चख हो गई है - महेंद्र उसी की शिकायत पर दिलासा देने आया है। छुटपन से ही महेंद्र मुसीबत पड़ने पर अपनी चाची की शरण में जाता रहा है। कभी किसी पर उसे गुस्सा आया, तो चाची ने उसे शांत कर दिया और कभी उसे कोई तकलीफ हुई तो चाची ने धीरज से सहने की नसीहत दी। लेकिन विवाह के बाद से जो सबसे बड़ा संकट महेंद्र पर आ पड़ा, उसके प्रतिकार की कोशिश तो दूर रही - सांत्वना देने तक में वह असमर्थ रहीं। इसके बारे में जब वह यह समझ गईं कि चाहे जैसे भी वह हाथ डालें, घर की अशांति दुगुनी हो जाएगी, तो उन्होंने घर ही छोड़ दिया। बीमार बच्चा जब पानी के लिए चीखता-रोता है और पानी देने की मनाही होती है, तो दुखिया माँ जैसे दूसरे कमरे में चली जाती है, अन्नपूर्णा ठीक वैसे ही काशी चली गई थीं। सुदूर तीर्थ में रह कर धर्म-कर्म में ध्यान-मन लगा कर दीन-दुखिया को कुछ भुलाया था - महेंद्र क्या फिर उन्हीं झगड़े-झंझटों की चर्चा से उनके छिपे घाव पर चोट करने आया है? लेकिन महेंद्र ने आशा के संबंध में अपनी माँ से कोई शिकायत नहीं की। फिर तो उनकी शंका दूसरी ओर बढ़ी। जिस महेंद्र के लिए आशा को छोड़ कर कॉलेज तक जाना गवारा न था, वह चाची की खोज-खबर लेने के लिए काशी कैसे आ पहुँचा? तो क्या आशा के प्रति उसका आकर्षण ढीला पड़ रहा है? उन्होंने पूछा - मेरे सिर की कसम महेंद्र, ठीक-ठीक बताना, चुन्नी कैसी है? महेंद्र बोला - वह तो खासे मजे में है, चाची! आजकल वह करती क्या है, बेटे! तुम लोग अभी तक वैसे ही बच्चों-जैसे हो या घर-गिरस्ती का भी ध्यान रखते हो अब? महेंद्र ने कहा - बचपना तो बिलकुल बंद है, चाची! सारे झंझटों की जड़ तो किताब थी - चारुपाठ - वह जाने कहाँ गायब हो गई, अब ढूँढ़े भी नहीं मिलती, कहीं। - अरे, बिहारी क्या कर रहा है? महेंद्र ने कहा - अपना जो काम है, उसे छोड़ कर वह सब कुछ कर रहा है। पटवारी-गुमाश्ते उसकी जायदाद की देख-भाल करते हैं। वे क्या देख-भाल करते हैं, खुदा जाने। बिहारी का हमेशा यही हाल रहा। उसका अपना काम दूसरे लोग देखते हैं, दूसरों का काम वह खुद देखता है। अन्नपूर्णा ने पूछा - विवाह नहीं करेगा क्या? महेंद्र जरा हँस कर बोला - कहाँ, ऐसा कुछ तो दिखाई नहीं पड़ता। अन्नपूर्णा को अंतर के गोपन स्थान में एक चोट-सी लगी। महेंद्र ने कभी मजाक से, कभी गंभीर हो कर अपनी गिरस्ती का मौजूदा हाल उन्हें सुनाया, केवल विनोदिनी का कोई जिक्र उसने नहीं किया। कॉलेज अभी खुला था। महेंद्र के ज्यादा दिन काशी में रहने की गुंजाइश न थी। लेकिन सख्त बीमारी के बाद अच्छी आबोहवा में सेहत सुधारने की जो तृप्ति होती है, काशी में अन्नपूर्णा के पास महेंद्र को हर रोज उसी तृप्ति का अनुभव हो रहा था - लिहाजा दिन बीतने लगे। अपने आप ही से विरोध की जो स्थिति हो गई थी, वह मिट गई। इन कई दिनों तक धर्मप्राण अन्नपूर्णा के साथ रह कर दुनियादारी के फर्ज़ ऐसे सहज और सुख देने वाले लगे कि महेंद्र को उनके हौआ लगने की पिछली बात हँसी उड़ाने-जैसी लगी। उसे लगा - विनोदिनी कुछ नहीं। यहाँ तक कि उसकी शक्ल भी वह साफ-साफ याद नहीं कर पाता। आखिरकार बड़ी दृढ़ता से महेंद्र मन-ही-मन बोला - आशा को मेरे हृदय से बाल-भर भी खिसका सके, ऐसा तो मैं किसी को, कहीं भी नहीं देख पाता। उसने अन्नपूर्णा से कहा - चाची, मेरे कॉलेज का हर्ज हो रहा है, अब इस बार तो मैं चलूँ! तुम संसार की माया छोड़ कर यहाँ आ बसी हो अकेले में, फिर भी अनुमति दो कि बीच-बीच में तुम्हारे चरणों की धूल ले जाया करूँ!
और वह कमरे से बाहर चला गया। और दूसरे ही क्षण फिर अंदर आया। आ कर विनोदिनी से कहा - मुझे माफ कर दो! विनोदिनी बोली - क्या कुसूर किया है तुमने, लालाजी? महेंद्र बोला - तुम्हें यों जबरदस्ती यहाँ रोक रखने का हमें कोई अधिकार नहीं। विनोदिनी हँस कर बोली - जबरदस्ती कहाँ की है? प्यार से सीधी तरह ही तो रहने को कहा - यह जबरदस्ती थोड़े है। आशा सोलहों आने सहमत हो कर बोली - हर्गिज नहीं। विनोदिनी ने कहा - भाई साहब, तुम्हारी इच्छा है, मैं रहूँ। मेरे जाने से तुम्हें तकलीफ होगी- यह तो मेरी खुशकिस्मती है। क्यों भई किरकिरी, ऐसे सहृदय दुनिया में मिलते कितने हैं? और दुःख में दुखी, सुख में सुखी भाग्य से कोई मिला, तो मैं ही उसे छोड़ कर जाने को क्यों उतावली होऊँ? पति को चुप रहते देख आशा जरा खिन्न मन से बोली - बातों में तुमसे कौन जीते? मेरे स्वामी तो हार मान गए, अब जरा रुक भी जाओ। महेंद्र फिर तेजी से बाहर हो गया। उधर बिहारी कुछ देर राजलक्ष्मी से बातचीत करके महेंद्र की ओर आ रहा था। दरवाजे पर ज्यों ही बिहारी पर नजर पड़ी, महेंद्र बोल उठा- भाई बिहारी, मुझ-सा नालायक दुनिया में दूसरा नहीं। उसने कुछ ऐसे कहा कि वह बात कमरे में पहुँच गई। अंदर से उसी दम पुकार हुई - बिहारी बाबू? बिहारी ने कहा - अभी आया, विनोद भाभी! कमरे में जाते ही बिहारी ने तुरंत आशा की तरफ देखा - घूँघट में से जितना-भर दिखाई पड़ा, उसमें विषाद या वेदना की कोई निशानी ही न थी। आशा उठ कर जाने लगी। विनोदिनी उसे पकड़े रही। कहा - यह तो बताएँ भाई साहब, मेरी आँखों की किरकिरी से आपका सौत का नाता है क्या? आपको देखते ही वह भाग क्यों जाना चाहती है? आशा ने शर्मा कर विनोदिनी को झिड़का। बिहारी ने हँस कर कहा - इसलिए कि विधाता ने मुझे वैसा खूबसूरत नहीं बनाया है। विनोदिनी - देख लिया भई किरकिरी, बिहारी बाबू किस कदर बचा कर बात करना जानते हैं! इन्होंने तुम्हारी पसंद को दोष नहीं दिया, दिया विधाता को। लक्ष्मण-जैसे सुलक्षण देवर को पा कर तुझे आदर करना न आया, तेरी ही तकदीर खोटी है। बिहारी - इस पर तुम्हें अगर तरस आए विनोद भाभी, तो फिर मुझे शिकवा ही क्या रहे! विनोदिनी - समुद्र तो है ही, फिर भी बादलों के बरसे बिना चातक की प्यास क्यों नहीं मिटती? आशा को आखिर रोक कर न रखा जा सका। वह जबरदस्ती हाथ छुड़ा कर चली गई। बिहारी भी जाना चाह रहा था। विनोदिनी ने कहा - महेंद्र बाबू को क्या हुआ है, कह सकते हैं आप? बिहारी ठिठक पड़ा। बोला - मुझे तो कुछ पता नहीं, कुछ हुआ है क्या? विनोदिनी - पता नहीं, मुझे तो ठीक नहीं दीखता। उत्सुक हो कर बिहारी कुर्सी पर बैठ गया। पूरी तरह सुन लेने के खयाल से वह उन्मुख हो कर विनोदिनी की ओर ताकता रहा। विनोदिनी कुछ न बोली। मन लगा कर चादर सीने लगी। कुछ देर रुक कर वह बोला, तुमने महेंद्र में खास कुछ गौर किया क्या? विनोदिनी बड़े सहज भाव से बोली - क्या जानें, मुझे तो ठीक नहीं दीखता। मुझे तो अपनी किरकिरी के लिए फिक्र होती है। - और एक लंबी उसाँस ले कर वह सिलाई छोड़ कर जाने लगी। बिहारी ने व्यस्त हो कर कहा - जरा बैठो, भाभी! विनोदिनी ने कमरे के सारे खिड़की-किवाड़ खोल दिए। लालटेन की बत्ती बढ़ा दी और सिलाई का सामान लिए बिस्तर के उस छोर पर जा बैठी। बोली - मैं तो यहाँ सदा रहूँगी नहीं- मेरे चले जाने पर मेरी किरकिरी का खयाल रखना- वह बेचारी दुखी न हो। कह कर मन के उद्वेग को जब्त करने के लिए उसने मुँह फेर लिया। बिहारी बोल पड़ा- भाभी, तुम्हें रहना ही पड़ेगा। तुम्हारा अपना कहने को कोई नहीं- इस भोली लड़की को सुख-दुःख में बचाने का भार तुम लो- कहीं तुम छोड़ गई, तो फिर कोई चारा नहीं। विनोदिनी - भाई साहब, दुनिया का हाल तुमसे छिपा नहीं, मैं यहाँ सदा कैसे रह सकता हूँ? लोग क्या कहेंगे? बिहारी - लोग जो चाहें कहें, तुम ध्यान ही मत दो! तुम देवी हो, एक असहाय लड़की को दुनिया की ठोकरों से बचाना तुम्हारे ही योग्य काम है। विनोदिनी का रोआँ-रोआँ पुलकित हो उठा। बिहारी के इस भक्ति-उपहार को वह मन से भी गलत मान कर ठुकरा न सकी, हालाँकि वह छलना कर रही थी। ऐसा व्यवहार उसे कभी किसी से न मिला था। विनोदिनी के आँसू देख कर बिहारी मुश्किल से अपने आँसू जब्त करके महेंद्र के कमरे में चला गया। बिहारी को यह बात बिलकुल समझ में न आई कि महेंद्र ने अचानक अपने आपको नालायक क्यों कह दिया। कमरे में जा कर देखा, महेंद्र नहीं था। पता चला, वह टहलने निकल गया है। पहले बे-वजह वह घर से कभी बाहर नहीं जाया करता था। जाने-पहचाने लोगों के घर से बाहर उसे बड़ी परेशानी होती। बिहारी सोचता हुआ धीरे-धीरे अपने घर चला गया। विनोदिनी आशा को अपने कमरे में ले आई। उसे छाती से लगा कर छलछलाई आँखों से कहा - भई किरकिरी, मैं बड़ी अभागिन हूँ, बड़ी बदशकुन। आशा दुखी मन से बोली - ऐसा क्यों कहती हो, बहन? सुबकते बच्चे की तरह वह आशा की छाती में मुँह गाड़ कर बोली - मैं जहाँ भी रहूँगी, बुरा ही होगा। मुझे छोड़ दे बहन, छुट्टी दे! मैं अपने जंगल में चली जाऊँ। महेंद्र से बिहारी की मुलाकात न हो सकी, इसलिए कोई बहाना बना कर फिर वह वहाँ आया ताकि आशा और महेंद्र के बीच की आशंका वाली बात को और कुछ साफ तौर से जान सके। वह विनोदिनी से यह अनुरोध करने का बहाना लिए आया कि कल महेंद्र को अपने यहाँ भोजन के लिए आने को कहे। उसने आवाज दी - विनोद भाभी! और बाहर से ही बत्ती की मद्धम रोशनी में गीली आँखों वाली दोनों सखियों को आलिंगन में देख कर वह ठिठक गया। अचानक आशा के मन में हुआ कि हो न हो, आज बिहारी ने जरूर विनोदिनी से कुछ निंदा की बात कही है, तभी वह जाने की बात कर रही है। यह तो बिहारी बाबू की बड़ी ज्यादती है। ऊँहू, अच्छे मिजाज के नहीं हैं। कुढ़ कर आशा बाहर निकल आई और बिहारी भी विनोदिनी के प्रति मन की भक्ति की ओर बढ़ कर बैरँग वापस हो गया। रात को महेंद्र ने आशा से कहा - चुन्नी, मैं सुबह की गाड़ी से बनारस चला जाऊँगा। आशा का कलेजा धक से रह गया। पूछा, क्यों? महेंद्र बोला - काफी दिन हो गए, चाची से भेंट नहीं हुई। महेंद्र की यह बात सुन कर आशा शर्मिंदा हो गई। उसे यह इससे भी पहले सोचना चाहिए था। अपने सुख-दुःख के आकर्षण में वह अपनी स्नेहमयी मौसी को भूल गई। महेंद्र ने कहा - अपने स्नेह की एकमात्र थाती को वह मेरे ही हाथों सौंप गई हैं - उन्हें एक बार देखे बिना मुझे चैन नहीं मिलता। कहते-कहते महेंद्र का गला भर आया। स्नेह-भरे मौन आशीर्वाद और अव्यक्त मंगल-कामना से वह बार-बार अपना दायाँ हाथ आशा के माथे पर फेरने लगा। अचानक ऐसे उमड़ आए स्नेह का मर्म आशा न समझ सकी। उसका हृदय केवल पिघल कर आँखों से बहने लगा। आज ही शाम को स्नेहवश विनोदिनी ने उसे जो कुछ कहा था, याद आया। इन दोनों में कहीं योग भी है या नहीं, वह समझ न सकी। लेकिन उसे लगा, यह मानो उसके जीवन की कोई सूचना है। अच्छी बुरी, कौन जाने! भय से व्याकुल हो कर उसने महेंद्र को बाँहों में जकड़ लिया। महेंद्र उसके नाहक संदेह के आवेश को समझ गया। बोला - चुन्नी, तुम पर तुम्हारी पुण्यवती मौसी का आशीर्वाद है। तुम्हें कोई खतरा नहीं। तुम्हारी ही भलाई के लिए वह अपना सर्वस्व छोड़ कर चली गई - तुम्हारा कभी कोई बुरा नहीं हो सकता। इस पर आशा ने निडर हो कर अपने मन के भय को निकाल फेंका। पति के इस आशीर्वाद को उसने अक्षय कवच के समान ग्रहण किया। मन-ही-मन उसने मौसी के चरणों की धूल को बार-बार अपने माथे से लगाया और एकाग्र हो कर बोली - तुम्हारा आशीर्वाद सदा मेरे स्वामी की रक्षा करे। दूसरे दिन महेंद्र चला गया। विनोदिनी ने जाते समय कुछ न बोला। विनोदिनी मन में कहने लगी - गलती खुद की और गुस्सा मुझ पर! ऐसा साधु पुरुष तो मैंने नहीं देखा। लेकिन ऐसी साधुता ज्यादा दिन नहीं टिकती! बहुत दिनों के बाद अचानक महेंद्र को आते देख कर एक ओर तो अन्नपूर्णा गदगद हो गईं और दूसरी ओर उन्हें यह शंका हुई कि शायद आशा की माँ से फिर कुछ चख-चख हो गई है - महेंद्र उसी की शिकायत पर दिलासा देने आया है। छुटपन से ही महेंद्र मुसीबत पड़ने पर अपनी चाची की शरण में जाता रहा है। कभी किसी पर उसे गुस्सा आया, तो चाची ने उसे शांत कर दिया और कभी उसे कोई तकलीफ हुई तो चाची ने धीरज से सहने की नसीहत दी। लेकिन विवाह के बाद से जो सबसे बड़ा संकट महेंद्र पर आ पड़ा, उसके प्रतिकार की कोशिश तो दूर रही - सांत्वना देने तक में वह असमर्थ रहीं। इसके बारे में जब वह यह समझ गईं कि चाहे जैसे भी वह हाथ डालें, घर की अशांति दुगुनी हो जाएगी, तो उन्होंने घर ही छोड़ दिया। बीमार बच्चा जब पानी के लिए चीखता-रोता है और पानी देने की मनाही होती है, तो दुखिया माँ जैसे दूसरे कमरे में चली जाती है, अन्नपूर्णा ठीक वैसे ही काशी चली गई थीं। सुदूर तीर्थ में रह कर धर्म-कर्म में ध्यान-मन लगा कर दीन-दुखिया को कुछ भुलाया था - महेंद्र क्या फिर उन्हीं झगड़े-झंझटों की चर्चा से उनके छिपे घाव पर चोट करने आया है? लेकिन महेंद्र ने आशा के संबंध में अपनी माँ से कोई शिकायत नहीं की। फिर तो उनकी शंका दूसरी ओर बढ़ी। जिस महेंद्र के लिए आशा को छोड़ कर कॉलेज तक जाना गवारा न था, वह चाची की खोज-खबर लेने के लिए काशी कैसे आ पहुँचा? तो क्या आशा के प्रति उसका आकर्षण ढीला पड़ रहा है? उन्होंने पूछा - मेरे सिर की कसम महेंद्र, ठीक-ठीक बताना, चुन्नी कैसी है? महेंद्र बोला - वह तो खासे मजे में है, चाची! आजकल वह करती क्या है, बेटे! तुम लोग अभी तक वैसे ही बच्चों-जैसे हो या घर-गिरस्ती का भी ध्यान रखते हो अब? महेंद्र ने कहा - बचपना तो बिलकुल बंद है, चाची! सारे झंझटों की जड़ तो किताब थी - चारुपाठ - वह जाने कहाँ गायब हो गई, अब ढूँढ़े भी नहीं मिलती, कहीं। - अरे, बिहारी क्या कर रहा है? महेंद्र ने कहा - अपना जो काम है, उसे छोड़ कर वह सब कुछ कर रहा है। पटवारी-गुमाश्ते उसकी जायदाद की देख-भाल करते हैं। वे क्या देख-भाल करते हैं, खुदा जाने। बिहारी का हमेशा यही हाल रहा। उसका अपना काम दूसरे लोग देखते हैं, दूसरों का काम वह खुद देखता है। अन्नपूर्णा ने पूछा - विवाह नहीं करेगा क्या? महेंद्र जरा हँस कर बोला - कहाँ, ऐसा कुछ तो दिखाई नहीं पड़ता। अन्नपूर्णा को अंतर के गोपन स्थान में एक चोट-सी लगी। महेंद्र ने कभी मजाक से, कभी गंभीर हो कर अपनी गिरस्ती का मौजूदा हाल उन्हें सुनाया, केवल विनोदिनी का कोई जिक्र उसने नहीं किया। कॉलेज अभी खुला था। महेंद्र के ज्यादा दिन काशी में रहने की गुंजाइश न थी। लेकिन सख्त बीमारी के बाद अच्छी आबोहवा में सेहत सुधारने की जो तृप्ति होती है, काशी में अन्नपूर्णा के पास महेंद्र को हर रोज उसी तृप्ति का अनुभव हो रहा था - लिहाजा दिन बीतने लगे। अपने आप ही से विरोध की जो स्थिति हो गई थी, वह मिट गई। इन कई दिनों तक धर्मप्राण अन्नपूर्णा के साथ रह कर दुनियादारी के फर्ज़ ऐसे सहज और सुख देने वाले लगे कि महेंद्र को उनके हौआ लगने की पिछली बात हँसी उड़ाने-जैसी लगी। उसे लगा - विनोदिनी कुछ नहीं। यहाँ तक कि उसकी शक्ल भी वह साफ-साफ याद नहीं कर पाता। आखिरकार बड़ी दृढ़ता से महेंद्र मन-ही-मन बोला - आशा को मेरे हृदय से बाल-भर भी खिसका सके, ऐसा तो मैं किसी को, कहीं भी नहीं देख पाता। उसने अन्नपूर्णा से कहा - चाची, मेरे कॉलेज का हर्ज हो रहा है, अब इस बार तो मैं चलूँ! तुम संसार की माया छोड़ कर यहाँ आ बसी हो अकेले में, फिर भी अनुमति दो कि बीच-बीच में तुम्हारे चरणों की धूल ले जाया करूँ!
Mahindra and Mahindra (महिंद्रा एंड महिंद्रा) ने अपनी नई Scorpio Classic (स्कॉर्पियो क्लासिक) एसयूवी से पर्दा उठा दिया है। भारत में Scorpio-N (स्कॉर्पियो-एन) एसयूवी को लॉन्च किए जाने के कुछ हफ्तों बाद वाहन निर्माता ने Mahindra Scorpio Classic को पेश किया है, जो पुरानी पीढ़ी की स्कॉर्पियो एसयूवी का अपडेटेड वर्जन है। जैसा कि पहले घोषणा की गई थी, महिंद्रा ज्यादा प्रीमियम स्कॉर्पियो-एन के साथ पुरानी स्कॉर्पियो को स्कॉर्पियो क्लासिक बैज के तहत बेचेगी। स्कॉर्पियो क्लासिक एसयूवी Classic S (क्लासिक एस) और Classic S 11 (क्लासिक एस 11) वैरिएंट्स में पेश की जाएगी और इसकी कीमत का एलान 20 अगस्त को होगा। दरअसल, पुराने स्कॉर्पियो मॉडल के बेसिक लुक में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, स्कॉर्पियो क्लासिक में क्रोम स्लैट्स के साथ एक नया डिजाइन किया गया ग्रिल और सेंटर में नया महिंद्रा लोगो मिलता है। एसयूवी के बंपर और बोनट को पहले से ज्यादा बोल्ड और आकर्षक बनाया गया है। ग्रिल के किनारे नए डीआरएल मिलते हैं। पीछे की तरफ, एसयूवी में सिग्नेचर स्कॉर्पियो टावर एलईडी टेल लैंप्स दिए गए हैं। साथ ही एसयूवी में रीडिजाइन किए गए 17-इंच डायमंड-कट अलॉय व्हील्स मिलते हैं। नई Scorpio Classic में केबिन के अंदर डुअल-टोन थीम है। सेंटर कंसोल में वुड-थीम फिनिश है। इसमें 9-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के अलावा अन्य प्रीमियम फीचर्स भी हैं। महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक को पांच एक्सटीरियर कलर ऑप्शन में पेश करेगी। इसमें रेड रेज, नेपोली बैक, डीसैट सिल्वर, पर्ल व्हाइट और गैलेक्सी ग्रे जैसे रंग शामिल हैं। वाहन निर्माता ने Mahindra Scorpio Classic एसयूवी में 2. 2-लीटर GEN-2 mHawk डीजल इंजन पेश किया है। यह इंजन अधिकतम 132 PS का पावर और 300 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। महिंद्रा का कहना है कि नया इंजन पुराने वाले की तुलना में 50 प्रतिशत से ज्यादा हल्का है और 14 प्रतिशत बेहतर माइलेज दे सकता है।
Mahindra and Mahindra ने अपनी नई Scorpio Classic एसयूवी से पर्दा उठा दिया है। भारत में Scorpio-N एसयूवी को लॉन्च किए जाने के कुछ हफ्तों बाद वाहन निर्माता ने Mahindra Scorpio Classic को पेश किया है, जो पुरानी पीढ़ी की स्कॉर्पियो एसयूवी का अपडेटेड वर्जन है। जैसा कि पहले घोषणा की गई थी, महिंद्रा ज्यादा प्रीमियम स्कॉर्पियो-एन के साथ पुरानी स्कॉर्पियो को स्कॉर्पियो क्लासिक बैज के तहत बेचेगी। स्कॉर्पियो क्लासिक एसयूवी Classic S और Classic S ग्यारह वैरिएंट्स में पेश की जाएगी और इसकी कीमत का एलान बीस अगस्त को होगा। दरअसल, पुराने स्कॉर्पियो मॉडल के बेसिक लुक में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, स्कॉर्पियो क्लासिक में क्रोम स्लैट्स के साथ एक नया डिजाइन किया गया ग्रिल और सेंटर में नया महिंद्रा लोगो मिलता है। एसयूवी के बंपर और बोनट को पहले से ज्यादा बोल्ड और आकर्षक बनाया गया है। ग्रिल के किनारे नए डीआरएल मिलते हैं। पीछे की तरफ, एसयूवी में सिग्नेचर स्कॉर्पियो टावर एलईडी टेल लैंप्स दिए गए हैं। साथ ही एसयूवी में रीडिजाइन किए गए सत्रह-इंच डायमंड-कट अलॉय व्हील्स मिलते हैं। नई Scorpio Classic में केबिन के अंदर डुअल-टोन थीम है। सेंटर कंसोल में वुड-थीम फिनिश है। इसमें नौ-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के अलावा अन्य प्रीमियम फीचर्स भी हैं। महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक को पांच एक्सटीरियर कलर ऑप्शन में पेश करेगी। इसमें रेड रेज, नेपोली बैक, डीसैट सिल्वर, पर्ल व्हाइट और गैलेक्सी ग्रे जैसे रंग शामिल हैं। वाहन निर्माता ने Mahindra Scorpio Classic एसयूवी में दो. दो-लीटर GEN-दो mHawk डीजल इंजन पेश किया है। यह इंजन अधिकतम एक सौ बत्तीस PS का पावर और तीन सौ Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। महिंद्रा का कहना है कि नया इंजन पुराने वाले की तुलना में पचास प्रतिशत से ज्यादा हल्का है और चौदह प्रतिशत बेहतर माइलेज दे सकता है।
संवाददाता,बछवाडा़ः प्रखण्ड क्षेत्र के साठा चौक स्थित 'शिक्षा विहार' के प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए हर्षोल्लास के साथ योग दिवस मनाया गया देहरादून के प्रशिक्षित योगाचार्य रूपेश कुमार आर्य ने बताया कि वर्तमान में चल रहे कोरोना जैसे महामारी से बचाव का अभी तक कोई भी सटीक इलाज नहीं हो पाया जबकि योग एक मात्र ऐसा साधन है जिससे हम असाध्य रोगों को अपने योग के माध्यम से आसानी से दूर कर सकते हैं। उन्होंने बहुत सारे योग बताया और फिर उपस्थित लोगो से करवाया भी जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सके वहीं संस्था के निदेशक सुशांत चंद्र मिश्र ने कहा कि विगत कई वर्षों से यह संस्था योग दिवस मनाते आ रही है और उन्होंने यह संदेश दिया कि योग अपनाएं कोरोना को भगाये। वैसे भी योग हमें निरोग रखता है। साथ ही उन्होंने आर्ष पद्धति को अपनाने पर जोर दिया। जो हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले बनाया और उसे अपनाकर अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रखा, तभी तो वो अपने जीवन को एक लंबी अवधि तक सेहतमंद रहकर जिया। वही संस्था के मनीष सिंह ने योग करे,निरोग रहें का नारा दिया। बताते चलें कि वर्चुअल रूप से भी उन बच्चों को योग सिखाया और कराया गया जो दूर रहने के कारण उपस्थित होने में असमर्थ थे। इस अवसर पर संयुक्त रूप से समाजसेवी सह मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार झा तथा शिक्षाविद सह प्रभारी नवल झा ने बच्चे के हौसले को बढ़ाते हुए उन्हें पुरस्कृत भी किया। मौके पर संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रीति कुमारी,भाजपा मण्डल मीडिया प्रभारी रौशन कुमार झा,शाहिना परवीन, वीरेंद्र कुमार,प्रफुल्ल चंद्र मिश्र,विधान चंद्र मिश्र,मुन्ना कुमार,रणवीर कुमार,सोनू कुमार,आनंद झा,अभिषेक कुमार झा,विकास कुमार,सीताराम झा,सौरभ झा,फुरकान अहमद,बलराम, रवि कुमार,अविनाश आदि उपस्थित थे।
संवाददाता,बछवाडा़ः प्रखण्ड क्षेत्र के साठा चौक स्थित 'शिक्षा विहार' के प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए हर्षोल्लास के साथ योग दिवस मनाया गया देहरादून के प्रशिक्षित योगाचार्य रूपेश कुमार आर्य ने बताया कि वर्तमान में चल रहे कोरोना जैसे महामारी से बचाव का अभी तक कोई भी सटीक इलाज नहीं हो पाया जबकि योग एक मात्र ऐसा साधन है जिससे हम असाध्य रोगों को अपने योग के माध्यम से आसानी से दूर कर सकते हैं। उन्होंने बहुत सारे योग बताया और फिर उपस्थित लोगो से करवाया भी जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सके वहीं संस्था के निदेशक सुशांत चंद्र मिश्र ने कहा कि विगत कई वर्षों से यह संस्था योग दिवस मनाते आ रही है और उन्होंने यह संदेश दिया कि योग अपनाएं कोरोना को भगाये। वैसे भी योग हमें निरोग रखता है। साथ ही उन्होंने आर्ष पद्धति को अपनाने पर जोर दिया। जो हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले बनाया और उसे अपनाकर अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रखा, तभी तो वो अपने जीवन को एक लंबी अवधि तक सेहतमंद रहकर जिया। वही संस्था के मनीष सिंह ने योग करे,निरोग रहें का नारा दिया। बताते चलें कि वर्चुअल रूप से भी उन बच्चों को योग सिखाया और कराया गया जो दूर रहने के कारण उपस्थित होने में असमर्थ थे। इस अवसर पर संयुक्त रूप से समाजसेवी सह मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार झा तथा शिक्षाविद सह प्रभारी नवल झा ने बच्चे के हौसले को बढ़ाते हुए उन्हें पुरस्कृत भी किया। मौके पर संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रीति कुमारी,भाजपा मण्डल मीडिया प्रभारी रौशन कुमार झा,शाहिना परवीन, वीरेंद्र कुमार,प्रफुल्ल चंद्र मिश्र,विधान चंद्र मिश्र,मुन्ना कुमार,रणवीर कुमार,सोनू कुमार,आनंद झा,अभिषेक कुमार झा,विकास कुमार,सीताराम झा,सौरभ झा,फुरकान अहमद,बलराम, रवि कुमार,अविनाश आदि उपस्थित थे।
हर रिश्ते में थोड़ी बहुत पजेसिवनेस होती ही है, लेकिन जब बात इससे आगे बढ़ जाए तो यह खतरे की घंटी है। ओवर पजेसिव नेचर वाले लोग दूसरों की जिंदगी की छोटी से छोटी चीज में भी दखल डालते हुए सवालों की झड़ी लगा देते हैं, जैसे- किससे फोन पर बात कर रही हो? वो लड़का तुमसे क्या कह रहा था? कहां जा रही हो? इतनी देर कैसे लग गई? आदि। इतना ही नहीं, ऐसे लोग पार्टनर का किसी से मिलना-जुलना भी अपनी पसंद-नापसंद के अनुसार करवाने लगते हैं। अगर आपका बॉयफ्रेंड भी ऐसा है तो यकीन मानिए आपके लिए ब्रेकअप कर लेना ही सही फैसला रहेगा। हर चीज को लेकर सबका अपना नजरिया होता है। जब बात रिलेशनशिप की आती है तो अक्सर देखा जाता है कि कपल्स एक-दूसरे की सोच के अनुसार खुद की पसंद-नापसंद को भी ढाल लेते हैं, जो कुछ हद तक रिश्ता चलाने के लिए जरूरी भी है। हालांकि, अगर आपका बॉयफ्रेंड आपकी हर चीज पर कंट्रोल कर रहा है जैसे- आप क्या कपड़े पहनेंगी, किससे मिलेंगी, किससे नहीं मिलेंगी, कितनी देर बाहर रहेंगी, कब बाहर नहीं जा सकेंगी, मोबाइल पर किससे बात कर सकेंगी आदि, तो बेस्ट ऑप्शन है कि आप ब्रेकअप कर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह आपको बॉयफ्रेंड का कंट्रोलिंग नेचर दिखाता है, जो कुछ समय के लिए तो आपको बहुत प्यारा लगेगा लेकिन बाद में गले की फांस बनकर रह जाएगा। यह स्थिति वह है जो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। अगर आपका बॉयफ्रेंड किसी भी तरह से आपको फिजिकली अब्यूज करता है तो आपको तुरंत उससे रिश्ता तोड़ लेना चाहिए। इतना ही नहीं ऐसे शख्स को अपनी जिंदगी से भविष्य में भी दूर ही रखें। इसके फेर में न पड़ें कि प्यार में ऐसा चलता है या फिर गुस्से में हो गया। यकीन मानिए अगर आपने पहली ही बार में स्टैंड नहीं लिया तो यह आपकी जिंदगी को बर्बाद करके रख देगा। क्या आपका बॉयफ्रेंड खुद के पुरुष होने, ज्यादा कमाने जैसी चीजों के आधार पर आपको नीचा दिखाता है? अगर हां, तो उससे राहें अलग कर लें। रिश्ता चाहे जो हो उसमें अगर एक-दूसरे के प्रति सम्मान नहीं है तो वह कभी खुशी से भरा रह ही नहीं सकता। बार-बार नीचा दिखाया जाना, भले ही वह मजाक के अंदाज में हो आपके कॉन्फिडेंस लेवल को बुरी तरह से गिरा सकता है जो आपको करियर में पीछे की ओर धकेलने में समय नहीं लगाएगा। हालात यह तक हो सकते हैं कि आपको किसी नए व्यक्ति से बात करने तक में हिचकिचाहट होने लगे। ऐसी स्थिति न ही आए तो बेहतर रहेगा। अपनी बात मनवाने के लिए आपका करियर बर्बाद करने की धमकी देना, खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना, आपकी इमेज खराब करने की धमकी देना, आपके माता-पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना आदि प्यार नहीं बल्कि जुर्म है। इस तरह की धमकियों से डरने के कारण कई लड़कियों ने अपनी जिंदगी को नरक बना लिया है, लेकिन आप ऐसा न करें। स्टैंड लें और उस शख्स से तुरंत दूरी बना लें। जरूरत पड़ने पर कानून की सहायता लेने से भी पीछे न हटें।
हर रिश्ते में थोड़ी बहुत पजेसिवनेस होती ही है, लेकिन जब बात इससे आगे बढ़ जाए तो यह खतरे की घंटी है। ओवर पजेसिव नेचर वाले लोग दूसरों की जिंदगी की छोटी से छोटी चीज में भी दखल डालते हुए सवालों की झड़ी लगा देते हैं, जैसे- किससे फोन पर बात कर रही हो? वो लड़का तुमसे क्या कह रहा था? कहां जा रही हो? इतनी देर कैसे लग गई? आदि। इतना ही नहीं, ऐसे लोग पार्टनर का किसी से मिलना-जुलना भी अपनी पसंद-नापसंद के अनुसार करवाने लगते हैं। अगर आपका बॉयफ्रेंड भी ऐसा है तो यकीन मानिए आपके लिए ब्रेकअप कर लेना ही सही फैसला रहेगा। हर चीज को लेकर सबका अपना नजरिया होता है। जब बात रिलेशनशिप की आती है तो अक्सर देखा जाता है कि कपल्स एक-दूसरे की सोच के अनुसार खुद की पसंद-नापसंद को भी ढाल लेते हैं, जो कुछ हद तक रिश्ता चलाने के लिए जरूरी भी है। हालांकि, अगर आपका बॉयफ्रेंड आपकी हर चीज पर कंट्रोल कर रहा है जैसे- आप क्या कपड़े पहनेंगी, किससे मिलेंगी, किससे नहीं मिलेंगी, कितनी देर बाहर रहेंगी, कब बाहर नहीं जा सकेंगी, मोबाइल पर किससे बात कर सकेंगी आदि, तो बेस्ट ऑप्शन है कि आप ब्रेकअप कर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह आपको बॉयफ्रेंड का कंट्रोलिंग नेचर दिखाता है, जो कुछ समय के लिए तो आपको बहुत प्यारा लगेगा लेकिन बाद में गले की फांस बनकर रह जाएगा। यह स्थिति वह है जो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। अगर आपका बॉयफ्रेंड किसी भी तरह से आपको फिजिकली अब्यूज करता है तो आपको तुरंत उससे रिश्ता तोड़ लेना चाहिए। इतना ही नहीं ऐसे शख्स को अपनी जिंदगी से भविष्य में भी दूर ही रखें। इसके फेर में न पड़ें कि प्यार में ऐसा चलता है या फिर गुस्से में हो गया। यकीन मानिए अगर आपने पहली ही बार में स्टैंड नहीं लिया तो यह आपकी जिंदगी को बर्बाद करके रख देगा। क्या आपका बॉयफ्रेंड खुद के पुरुष होने, ज्यादा कमाने जैसी चीजों के आधार पर आपको नीचा दिखाता है? अगर हां, तो उससे राहें अलग कर लें। रिश्ता चाहे जो हो उसमें अगर एक-दूसरे के प्रति सम्मान नहीं है तो वह कभी खुशी से भरा रह ही नहीं सकता। बार-बार नीचा दिखाया जाना, भले ही वह मजाक के अंदाज में हो आपके कॉन्फिडेंस लेवल को बुरी तरह से गिरा सकता है जो आपको करियर में पीछे की ओर धकेलने में समय नहीं लगाएगा। हालात यह तक हो सकते हैं कि आपको किसी नए व्यक्ति से बात करने तक में हिचकिचाहट होने लगे। ऐसी स्थिति न ही आए तो बेहतर रहेगा। अपनी बात मनवाने के लिए आपका करियर बर्बाद करने की धमकी देना, खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना, आपकी इमेज खराब करने की धमकी देना, आपके माता-पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना आदि प्यार नहीं बल्कि जुर्म है। इस तरह की धमकियों से डरने के कारण कई लड़कियों ने अपनी जिंदगी को नरक बना लिया है, लेकिन आप ऐसा न करें। स्टैंड लें और उस शख्स से तुरंत दूरी बना लें। जरूरत पड़ने पर कानून की सहायता लेने से भी पीछे न हटें।
ICSE बोर्ड हो या CBSE बोर्ड, रिजल्ट में इस बार बिहार की बेटियों ने इतिहास रच दिया है. आईसीएसई 10th बोर्ड परीक्षा में पटना की नेहा ने बिहार टॉप किया जिसके बाद से ही उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है. इस क्रम में बीते दिन मंगलवार को पटना के जिलाधिकारी ने भी नेहा को सम्मानित किया. इस दौरान समाहरणालय में डीएम ऑफिस में आयोजित सम्मान समारोह में नेहा का परिवार भी मौजूद था. इस दौरान पटना जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने नेहा के लक्ष्य के बारे में पूछा और भविष्य के लिए उसे शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि नेहा ने आज जिला के साथ साथ राज्य का भी नाम रोशन किया है. इस दौरान नेहा को सम्मान-पत्र प्रदान किया गया तथा श्री दुर्गा दास बसु द्वारा रचित पुस्तक "द कॉन्स्टिच्युशन ऑफ इंडिया" भेंट की गई. इसे देते हुए जिलाधिकारी डॉ सिंह ने कहा कि ये पुस्तक भविष्य में उसका मार्गदर्शन करेगी. सभी को भारतीय संविधान का ग्यान होना आवश्यक है. बता दें कि नेहा पटना के ही कार्मेल हाई स्कूल में पढ़ती थी. नेहा ने बोर्ड एग्जाम में 500 में से 498 अंक लाएं.
ICSE बोर्ड हो या CBSE बोर्ड, रिजल्ट में इस बार बिहार की बेटियों ने इतिहास रच दिया है. आईसीएसई दसth बोर्ड परीक्षा में पटना की नेहा ने बिहार टॉप किया जिसके बाद से ही उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है. इस क्रम में बीते दिन मंगलवार को पटना के जिलाधिकारी ने भी नेहा को सम्मानित किया. इस दौरान समाहरणालय में डीएम ऑफिस में आयोजित सम्मान समारोह में नेहा का परिवार भी मौजूद था. इस दौरान पटना जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने नेहा के लक्ष्य के बारे में पूछा और भविष्य के लिए उसे शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि नेहा ने आज जिला के साथ साथ राज्य का भी नाम रोशन किया है. इस दौरान नेहा को सम्मान-पत्र प्रदान किया गया तथा श्री दुर्गा दास बसु द्वारा रचित पुस्तक "द कॉन्स्टिच्युशन ऑफ इंडिया" भेंट की गई. इसे देते हुए जिलाधिकारी डॉ सिंह ने कहा कि ये पुस्तक भविष्य में उसका मार्गदर्शन करेगी. सभी को भारतीय संविधान का ग्यान होना आवश्यक है. बता दें कि नेहा पटना के ही कार्मेल हाई स्कूल में पढ़ती थी. नेहा ने बोर्ड एग्जाम में पाँच सौ में से चार सौ अट्ठानवे अंक लाएं.
Saturday December 23, 2023, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप ओला इलेक्ट्रिक () ने अपने IPO के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को दाखिल कर दिए हैं. शेयर बाजारों का रूख करने वाली यह पहली भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपनी है. कंपनी के आगामी आईपीओ में 5,500 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और 10 रुपये के अंकित मूल्य पर 95.2 मिलियन इक्विटी शेयरों का ऑफर फोर सेल (OFS) शामिल होगा. DRHP के अनुसार, इश्यू का न्यूनतम 75% योग्य संस्थागत खरीदारों को आवंटित किया जाएगा, 15% तक गैर-संस्थागत बोलीदाताओं को आवंटन के लिए उपलब्ध होगा, और अधिकतम 10% खुदरा व्यक्तिगत बोलीदाताओं को आवंटन के लिए नामित किया जाएगा. DRHP के अनुसार, फ्रेश इश्यू से कुल आय में से, फंड का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी 1,600 करोड़ रुपये का उपयोग कंपनी की R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) परियोजनाओं के लिए किया जाएगा. साथ ही, ओला गीगाफैक्ट्री परियोजना के निर्माण के लिए सहायक कंपनी OCT (Ola Cell Technologies) द्वारा 1,226.4 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा. 800 करोड़ रुपये का उपयोग ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए किया जाएगा, और शेष का उपयोग जैविक विकास पहल और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. ओला इलेक्ट्रिक ईवी और सेल सहित मुख्य ईवी कंपोनेंट्स के लिए इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी और विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण कर रही है. यह तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में अपनी विनिर्माण सुविधा ओला फ्यूचरफैक्ट्री में ईवी और बैटरी पैक और मोटर्स जैसे मुख्य ईवी कंपोनेंट बनाती है. रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, 30 सितंबर, 2023 तक उत्पादन क्षमता के आधार पर ओला फ्यूचरफैक्ट्री भारत में सबसे बड़ा एकीकृत और स्वचालित E2W (इलेक्ट्रिक दोपहिया) विनिर्माण संयंत्र है. यह तमिलनाडु के कृष्णागिरी और धर्मपुरी जिलों में सक्रिय रूप से एक इलेक्ट्रिक वाहन हब का निर्माण कर रही है. इस हब में ओला फ्यूचरफैक्ट्री, आगामी ओला गीगाफैक्ट्री और कृष्णागिरी में संबंधित आपूर्तिकर्ता शामिल हैं. DRHP के अनुसार, कंपनी 31 अक्टूबर, 2023 तक अपने डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) ओमनीचैनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का संचालन करती है, जिसमें 414 सर्विस सेंटर सहित पूरे भारत में 935 अनुभव केंद्र शामिल हैं. वित्त वर्ष23 में, ओला का ऑपरेशनल रेवेन्यू सात गुना बढ़कर 2,630.93 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 373.42 करोड़ रुपये था. 30 जून, 2023 को समाप्त तिमाही के लिए, ऑपरेशनल रेवेन्यू 1,242.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कंपनी को प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं के लिए भी मंजूरी दी गई है, जिसमें एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के निर्माण के लिए ऑटोमोबाइल पीएलआई योजना और सेल कैमेस्ट्री बैटरी को आगे बढ़ाने के लिए सेल पीएलआई योजना शामिल है. आईपीओ के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजरों में कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया लिमिटेड, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज लिमिटेड, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड और बीओबी कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शामिल हैं. लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ऑफर के रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया गया है. इक्विटी शेयरों को बीएसई और एनएसई दोनों पर सूचीबद्ध करने का इरादा है. (Translated by: रविकांत पारीक) (डिस्क्लेमरः YourStory की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा, ओला इलेक्ट्रिक में एक स्वतंत्र निदेशक हैं.)
Saturday December तेईस, दो हज़ार तेईस, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप ओला इलेक्ट्रिक ने अपने IPO के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के साथ अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को दाखिल कर दिए हैं. शेयर बाजारों का रूख करने वाली यह पहली भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी है. कंपनी के आगामी आईपीओ में पाँच,पाँच सौ करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और दस रुपयापये के अंकित मूल्य पर पचानवे.दो मिलियन इक्विटी शेयरों का ऑफर फोर सेल शामिल होगा. DRHP के अनुसार, इश्यू का न्यूनतम पचहत्तर% योग्य संस्थागत खरीदारों को आवंटित किया जाएगा, पंद्रह% तक गैर-संस्थागत बोलीदाताओं को आवंटन के लिए उपलब्ध होगा, और अधिकतम दस% खुदरा व्यक्तिगत बोलीदाताओं को आवंटन के लिए नामित किया जाएगा. DRHP के अनुसार, फ्रेश इश्यू से कुल आय में से, फंड का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी एक,छः सौ करोड़ रुपये का उपयोग कंपनी की R&D परियोजनाओं के लिए किया जाएगा. साथ ही, ओला गीगाफैक्ट्री परियोजना के निर्माण के लिए सहायक कंपनी OCT द्वारा एक,दो सौ छब्बीस.चार करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा. आठ सौ करोड़ रुपये का उपयोग ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए किया जाएगा, और शेष का उपयोग जैविक विकास पहल और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. ओला इलेक्ट्रिक ईवी और सेल सहित मुख्य ईवी कंपोनेंट्स के लिए इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी और विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण कर रही है. यह तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में अपनी विनिर्माण सुविधा ओला फ्यूचरफैक्ट्री में ईवी और बैटरी पैक और मोटर्स जैसे मुख्य ईवी कंपोनेंट बनाती है. रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, तीस सितंबर, दो हज़ार तेईस तक उत्पादन क्षमता के आधार पर ओला फ्यूचरफैक्ट्री भारत में सबसे बड़ा एकीकृत और स्वचालित Eदो वाट विनिर्माण संयंत्र है. यह तमिलनाडु के कृष्णागिरी और धर्मपुरी जिलों में सक्रिय रूप से एक इलेक्ट्रिक वाहन हब का निर्माण कर रही है. इस हब में ओला फ्यूचरफैक्ट्री, आगामी ओला गीगाफैक्ट्री और कृष्णागिरी में संबंधित आपूर्तिकर्ता शामिल हैं. DRHP के अनुसार, कंपनी इकतीस अक्टूबर, दो हज़ार तेईस तक अपने डायरेक्ट-टू-कस्टमर ओमनीचैनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का संचालन करती है, जिसमें चार सौ चौदह सर्विस सेंटर सहित पूरे भारत में नौ सौ पैंतीस अनुभव केंद्र शामिल हैं. वित्त वर्षतेईस में, ओला का ऑपरेशनल रेवेन्यू सात गुना बढ़कर दो,छः सौ तीस.तिरानवे करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह तीन सौ तिहत्तर.बयालीस करोड़ रुपये था. तीस जून, दो हज़ार तेईस को समाप्त तिमाही के लिए, ऑपरेशनल रेवेन्यू एक,दो सौ बयालीस.पचहत्तर करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कंपनी को प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं के लिए भी मंजूरी दी गई है, जिसमें एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के निर्माण के लिए ऑटोमोबाइल पीएलआई योजना और सेल कैमेस्ट्री बैटरी को आगे बढ़ाने के लिए सेल पीएलआई योजना शामिल है. आईपीओ के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजरों में कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया लिमिटेड, गोल्डमैन सैक्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज लिमिटेड, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड और बीओबी कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शामिल हैं. लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ऑफर के रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया गया है. इक्विटी शेयरों को बीएसई और एनएसई दोनों पर सूचीबद्ध करने का इरादा है.
जयपुर. जयपुर ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Municipal Corporation) के पार्षदों के सपनों पर राज्य सरकार ने पानी फेर दिया हैं. पार्षदों के भत्ते में बढ़ोत्तरी की फाइल को राज्य सरकार ने नामंजूर कर दिया हैं, लेकिन इसी बीच निगम की कार्यवाहक मेयर ने अगली साधारण सभा में फिर से भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजने का ऐलान किया है. दरअसल, जयपुर ग्रेटर नगर निगम के पहले बोर्ड की पहली साधारण सभा की बैठक बीते 28 जनवरी को हुई थी. इस दौरान पार्षदों को रिझाने के लिए भी कई प्रस्ताव पारित किये गए थे. पार्षदों को लैपटाँप देने से लेकर भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने पार्षदों का भत्ता 3750 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रूपए करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया. अब पार्षदों को भत्ते के तौर पर वही 3750 रूपए मिलते रहेंगे. ग्रेटर नगर निगम की कार्यवाहक मेयर शील धाभाई के मुताबिक अभी तो पार्षदों को 3750 रुपये मासिक के लिहाज से बीते महिनों का भत्ता एक मुश्त दिया जा रहा हैं. लेकिन अब अधिकारियों को ताकीद किया गया हैं कि अब ये भत्ता हर माह 1 से 5 तारीख के बीच दिया जाए. हालांकि, कार्यवाहक मेयर शील धाभाई खुद तर्क गिना रही हैं कि पार्षदों को मिलने वाला ये भत्ता बेहद कम है. लिहाजा अब अगली साधारण सभा की बैठक में पार्षदों का भत्ता 3750 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये मासिक करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा और सरकार को फिर से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. बहरहाल, पार्षदों को रिझाने या उन्हें साधने के लिए मेयर भले ही एक बार फिर भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजने का दावा करें, लेकिन हकीकत ये है कि जब सरकार ने भत्ता 3750 से बढ़ाकर 11 हजार करने का प्रस्ताव ही नामंजूर कर दिया तो फिर 15 हजार की मांग को हरी झंडी कैसे दी जा सकती है. .
जयपुर. जयपुर ग्रेटर नगर निगम के पार्षदों के सपनों पर राज्य सरकार ने पानी फेर दिया हैं. पार्षदों के भत्ते में बढ़ोत्तरी की फाइल को राज्य सरकार ने नामंजूर कर दिया हैं, लेकिन इसी बीच निगम की कार्यवाहक मेयर ने अगली साधारण सभा में फिर से भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजने का ऐलान किया है. दरअसल, जयपुर ग्रेटर नगर निगम के पहले बोर्ड की पहली साधारण सभा की बैठक बीते अट्ठाईस जनवरी को हुई थी. इस दौरान पार्षदों को रिझाने के लिए भी कई प्रस्ताव पारित किये गए थे. पार्षदों को लैपटाँप देने से लेकर भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव भी पारित हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने पार्षदों का भत्ता तीन हज़ार सात सौ पचास रुपयापये से बढ़ाकर ग्यारह हजार रूपए करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया. अब पार्षदों को भत्ते के तौर पर वही तीन हज़ार सात सौ पचास रूपए मिलते रहेंगे. ग्रेटर नगर निगम की कार्यवाहक मेयर शील धाभाई के मुताबिक अभी तो पार्षदों को तीन हज़ार सात सौ पचास रुपयापये मासिक के लिहाज से बीते महिनों का भत्ता एक मुश्त दिया जा रहा हैं. लेकिन अब अधिकारियों को ताकीद किया गया हैं कि अब ये भत्ता हर माह एक से पाँच तारीख के बीच दिया जाए. हालांकि, कार्यवाहक मेयर शील धाभाई खुद तर्क गिना रही हैं कि पार्षदों को मिलने वाला ये भत्ता बेहद कम है. लिहाजा अब अगली साधारण सभा की बैठक में पार्षदों का भत्ता तीन हज़ार सात सौ पचास रुपयापये से बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपये मासिक करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा और सरकार को फिर से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. बहरहाल, पार्षदों को रिझाने या उन्हें साधने के लिए मेयर भले ही एक बार फिर भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजने का दावा करें, लेकिन हकीकत ये है कि जब सरकार ने भत्ता तीन हज़ार सात सौ पचास से बढ़ाकर ग्यारह हजार करने का प्रस्ताव ही नामंजूर कर दिया तो फिर पंद्रह हजार की मांग को हरी झंडी कैसे दी जा सकती है. .
सिविल सर्विसेज़ छोड़कर नेता बने शाह फैसल भारत छोड़कर जा रहे थे, उन्हें नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर वापस कश्मीर भेज दिया गया है। शाह फैसल को कश्मीर में ही नजरबंद (House Arrest) किया गया है। स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, शाह फैसल को नई दिल्ली एयरपोर्ट से भारत छोड़ने से रोका गया है। गौरतलब है कि शाह फैसल जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 से काफी नाखुश थे। और वो इसको लेकर लगातार बयान भी दे रहे थे। इससे पहले रायटर्स के पत्रकार घोषाल ने दवा किया था, उन्होंने शाह फैसल से बात की। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में 'संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प' होने का दावा करते हुए लिखा है कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई। I walked a km to find the nicest auto-wallah in the land. He didn't have a clue of what had happened, why his city had overnight turned into ghost town - blanketed with security. शाह फैसल ने कश्मीर को लेकर बुधवार (अगस्त 13, 2019) को विवादित बयान देते हुए कहा था कि हमारे सामने दो ही रास्ते हैं- कश्मीर कठपुतली बने या फिर अलगाववादी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद शाह फैसल ने कहा था कि राजनीतिक अधिकारों को दोबारा पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है। ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर भी शाह फैसल ने केंद्र सरकार पर बयानबाजी करते हुए कहा कि कश्मीर में ईद नहीं है। पूरी दुनिया में कश्मीर के लोग अपनी जमीन के गलत तरीके से भारत में शामिल होने से रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ तब तक ईद नहीं होगी जब तक 1947 से मिला विशेष राज्य का दर्जा हमें वापस नहीं किया जाएगा।
सिविल सर्विसेज़ छोड़कर नेता बने शाह फैसल भारत छोड़कर जा रहे थे, उन्हें नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर वापस कश्मीर भेज दिया गया है। शाह फैसल को कश्मीर में ही नजरबंद किया गया है। स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार, शाह फैसल को नई दिल्ली एयरपोर्ट से भारत छोड़ने से रोका गया है। गौरतलब है कि शाह फैसल जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद तीन सौ सत्तर से काफी नाखुश थे। और वो इसको लेकर लगातार बयान भी दे रहे थे। इससे पहले रायटर्स के पत्रकार घोषाल ने दवा किया था, उन्होंने शाह फैसल से बात की। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में 'संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प' होने का दावा करते हुए लिखा है कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई। I walked a km to find the nicest auto-wallah in the land. He didn't have a clue of what had happened, why his city had overnight turned into ghost town - blanketed with security. शाह फैसल ने कश्मीर को लेकर बुधवार को विवादित बयान देते हुए कहा था कि हमारे सामने दो ही रास्ते हैं- कश्मीर कठपुतली बने या फिर अलगाववादी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। तीन सौ सत्तर पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद शाह फैसल ने कहा था कि राजनीतिक अधिकारों को दोबारा पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है। ईद-उल-अजहा के अवसर पर भी शाह फैसल ने केंद्र सरकार पर बयानबाजी करते हुए कहा कि कश्मीर में ईद नहीं है। पूरी दुनिया में कश्मीर के लोग अपनी जमीन के गलत तरीके से भारत में शामिल होने से रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ तब तक ईद नहीं होगी जब तक एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस से मिला विशेष राज्य का दर्जा हमें वापस नहीं किया जाएगा।
बिहार के सहरसा जिले में मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर कहरा प्रखंड के बनगांव में मनाई जाने वाली होली की पूरे राज्य में अलग पहचान है. ये घुमौर होली ब्रज की होली जैसी बेमिसाल है. इसमें लोग एक दूसरे के कंधे पर सवार होकर ,जोर आजमाइश करके होली मनाते हैं. संत लक्ष्मी नाथ गोंसाई द्वारा शुरू की गयी बनगांव की होली ब्रज की लठमार होली की तरह ही प्रसिद्ध है. मान्यता है कि इसकी परंपरा भगवान् श्री कृष्ण के काल से चली आ रही है. 18 वीं सदी में यहां के प्रसिद्ध संत लक्ष्मी नाथ गोंसाई बाबाजी ने इस प्रथा को शुरू किया था. बिहार की सबसे बड़ी आबादी और तीन पंचायत वाले बनगांव की इस होली की राज्य और देश में अलग सांस्कृतिक पहचान है. बनगांव के भागवती स्थान के पास यह होली खेली जाती है जिसमें इंसानों के साथ ही आसपास के इमारतों को भी रंग बिरंगे पानी के फव्वारे से सराबोर कर दिया जाता है. स्थानीय लोगों की माने तो यहां की होली सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है . बाबा लक्ष्मी नाथ गोंसाई द्वारा शुरू की गई परंपरा के मुताबिक सभी जाति- धर्म के लोग बगैर राग-द्वेष के एक साथ होली खेलते है ,सभी लोग बैलजोड़ी होली का प्रदर्शन करते है. पूरे क्षेत्र और गांव के लोग भगवती स्थान के प्रांगण में आकर होली मनाते हैं. इस दौरान वहां एक-दूसरे के कपड़ों को फाड़ कर भी लोग होली का आनंद उठाते हैं. गांव के एकता की इस अनूठे मिशाल की तारीफ हरतरफ होती है. सभी जाति धर्म के लोग एक दूसरे के कंधे पर सवार होकर होली मनाते हैं. बिहार की राजधानी पटना में जूते और चप्पलों से होली खेली गई है. लोगों ने जूते और चप्पलों से ऐसी होली खेली की कुछ ही देर में पूरा स्वीमिंग पूल रंग-बिरंगे पानी की जगह जूते-चप्पलों से भरा हुआ नजर आया. दरअसल, होली के मौके पर हर साल पटना के फेंटेंसिया वाटर पार्क में LA Tomatina फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है. इस खास मौके पर लोग एक-दूसरे पर टमाटर फेंककर होली मनाते हैं. इस बार भी होली से एक दिन LA Tomatina फेस्टिवल का आयोजन किया था. इस फेस्टिवल में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, लेकिन इस भीड़ में अचानक कुछ लोगों ने टमाटर की जगह चप्पलों की बारिश शुरू कर दी और आधे घंटे तक दो गुटों में जमकर चप्पल की बरसात हुई. ये भी पढ़ेंः
बिहार के सहरसा जिले में मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर कहरा प्रखंड के बनगांव में मनाई जाने वाली होली की पूरे राज्य में अलग पहचान है. ये घुमौर होली ब्रज की होली जैसी बेमिसाल है. इसमें लोग एक दूसरे के कंधे पर सवार होकर ,जोर आजमाइश करके होली मनाते हैं. संत लक्ष्मी नाथ गोंसाई द्वारा शुरू की गयी बनगांव की होली ब्रज की लठमार होली की तरह ही प्रसिद्ध है. मान्यता है कि इसकी परंपरा भगवान् श्री कृष्ण के काल से चली आ रही है. अट्ठारह वीं सदी में यहां के प्रसिद्ध संत लक्ष्मी नाथ गोंसाई बाबाजी ने इस प्रथा को शुरू किया था. बिहार की सबसे बड़ी आबादी और तीन पंचायत वाले बनगांव की इस होली की राज्य और देश में अलग सांस्कृतिक पहचान है. बनगांव के भागवती स्थान के पास यह होली खेली जाती है जिसमें इंसानों के साथ ही आसपास के इमारतों को भी रंग बिरंगे पानी के फव्वारे से सराबोर कर दिया जाता है. स्थानीय लोगों की माने तो यहां की होली सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है . बाबा लक्ष्मी नाथ गोंसाई द्वारा शुरू की गई परंपरा के मुताबिक सभी जाति- धर्म के लोग बगैर राग-द्वेष के एक साथ होली खेलते है ,सभी लोग बैलजोड़ी होली का प्रदर्शन करते है. पूरे क्षेत्र और गांव के लोग भगवती स्थान के प्रांगण में आकर होली मनाते हैं. इस दौरान वहां एक-दूसरे के कपड़ों को फाड़ कर भी लोग होली का आनंद उठाते हैं. गांव के एकता की इस अनूठे मिशाल की तारीफ हरतरफ होती है. सभी जाति धर्म के लोग एक दूसरे के कंधे पर सवार होकर होली मनाते हैं. बिहार की राजधानी पटना में जूते और चप्पलों से होली खेली गई है. लोगों ने जूते और चप्पलों से ऐसी होली खेली की कुछ ही देर में पूरा स्वीमिंग पूल रंग-बिरंगे पानी की जगह जूते-चप्पलों से भरा हुआ नजर आया. दरअसल, होली के मौके पर हर साल पटना के फेंटेंसिया वाटर पार्क में LA Tomatina फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है. इस खास मौके पर लोग एक-दूसरे पर टमाटर फेंककर होली मनाते हैं. इस बार भी होली से एक दिन LA Tomatina फेस्टिवल का आयोजन किया था. इस फेस्टिवल में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, लेकिन इस भीड़ में अचानक कुछ लोगों ने टमाटर की जगह चप्पलों की बारिश शुरू कर दी और आधे घंटे तक दो गुटों में जमकर चप्पल की बरसात हुई. ये भी पढ़ेंः
जयपुर। बीजेपी नेता राज्यवर्धन राठौर ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कांग्रेस शासित राज्यों पर ध्यान न देकर बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों के शासित राज्यों के साथ राजनीति कर रहे हैं। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुयी हिंसा पर राजनीति कर रहे हैं और वहां जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। इस बीच खबर है कि योगी सरकार ने लखीमपुर जाने वाले विपक्षी नेताओं को जाने की अनुमति दे दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राज्यवर्धन राठौर ने कहा, 'इसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की भी होती है। कांग्रेस सीएम अपने राज्यों को छोड़कर 'एक जगह-एक आदमी' की महिमा करने के लिए दौड़ रहे हैं। वे दिखा रहे हैं कि कांग्रेस के साथ क्या गलत है। ' राठौर की यह टिप्पणी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की केंद्र और उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकारों पर लखीमपुर खीरी हिंसा पर प्रतिक्रिया के बाद आई। अशोक गहलोत ने कहा था कि देश में लोकतंत्र 'खतरे' में है। राठौर ने श्रीगंगानगर जल संकट को लेकर कांग्रेस सरकार पर प्रहार किया। राहुल गांधी हर मामले में राजनीति करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने हर बार मुंह की खाई है। चाहे दिल्ली में हुए नाबालिग बच्ची की रेप व हत्या मामला हो । उन्होंने हर मुद्दे को राजनितिक नजरिये से भुनाने की कोशिश की, जिसका नतीज़ा कांग्रेस के सामने है। महाराष्ट्र के मुंबई में हुई साकीनाका रेप की घटना के बाद यहां का हाल तक नहीं जाने आये राहुल गांधी। राहुल गांधी केवल अन्य राजनितिक दलों के शासित राज्यों में अपनी राजनीति चमकाने के लिए दौरा और विरोध प्रदर्शन करते है। राहुल गांधी हर मामले में राजनीति करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने हर बार मुंह की खाई है। चाहे दिल्ली में हुए नाबालिग बच्ची की रेप व हत्या मामला हो । उन्होंने हर मुद्दे को राजनितिक नजरिये से भुनाने की कोशिश की, जिसका नतीज़ा कांग्रेस के सामने है। महाराष्ट्र के मुंबई में हुई साकीनाका रेप की घटना के बाद यहां का हाल तक नहीं जाने आये राहुल गांधी। राहुल गांधी केवल अन्य राजनितिक दलों के शासित राज्यों में अपनी राजनीति चमकाने के लिए दौरा और विरोध प्रदर्शन करते है।
जयपुर। बीजेपी नेता राज्यवर्धन राठौर ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कांग्रेस शासित राज्यों पर ध्यान न देकर बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों के शासित राज्यों के साथ राजनीति कर रहे हैं। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुयी हिंसा पर राजनीति कर रहे हैं और वहां जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। इस बीच खबर है कि योगी सरकार ने लखीमपुर जाने वाले विपक्षी नेताओं को जाने की अनुमति दे दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राज्यवर्धन राठौर ने कहा, 'इसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की भी होती है। कांग्रेस सीएम अपने राज्यों को छोड़कर 'एक जगह-एक आदमी' की महिमा करने के लिए दौड़ रहे हैं। वे दिखा रहे हैं कि कांग्रेस के साथ क्या गलत है। ' राठौर की यह टिप्पणी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की केंद्र और उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकारों पर लखीमपुर खीरी हिंसा पर प्रतिक्रिया के बाद आई। अशोक गहलोत ने कहा था कि देश में लोकतंत्र 'खतरे' में है। राठौर ने श्रीगंगानगर जल संकट को लेकर कांग्रेस सरकार पर प्रहार किया। राहुल गांधी हर मामले में राजनीति करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने हर बार मुंह की खाई है। चाहे दिल्ली में हुए नाबालिग बच्ची की रेप व हत्या मामला हो । उन्होंने हर मुद्दे को राजनितिक नजरिये से भुनाने की कोशिश की, जिसका नतीज़ा कांग्रेस के सामने है। महाराष्ट्र के मुंबई में हुई साकीनाका रेप की घटना के बाद यहां का हाल तक नहीं जाने आये राहुल गांधी। राहुल गांधी केवल अन्य राजनितिक दलों के शासित राज्यों में अपनी राजनीति चमकाने के लिए दौरा और विरोध प्रदर्शन करते है। राहुल गांधी हर मामले में राजनीति करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने हर बार मुंह की खाई है। चाहे दिल्ली में हुए नाबालिग बच्ची की रेप व हत्या मामला हो । उन्होंने हर मुद्दे को राजनितिक नजरिये से भुनाने की कोशिश की, जिसका नतीज़ा कांग्रेस के सामने है। महाराष्ट्र के मुंबई में हुई साकीनाका रेप की घटना के बाद यहां का हाल तक नहीं जाने आये राहुल गांधी। राहुल गांधी केवल अन्य राजनितिक दलों के शासित राज्यों में अपनी राजनीति चमकाने के लिए दौरा और विरोध प्रदर्शन करते है।
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। हैदराबाद में हुए जघन्य हत्याकांड एवं देश हो रहे बहन बेटियों के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध में आज छतीसगढ़ छात्र संगठन जोगी ने मुँह में काली पट्टी बांधकर कैंडल मार्च स्थानीय डी पी विप्र महाविद्यालय से गांधी चौक तक निकाला गया। गांधी प्रतिमा के नीचे कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मौन सभा की इस प्रदर्शन के माध्यम से छतीसगढ़ छात्र संगठन जोगी द्वारा देश मे मौजूद कमजोर कानून व्यवस्था व देश की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति असफल सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए यह मांग की गई। कि देश में ऐसा कानून बनाया जाए कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले दरिन्दों की कोई सुनवाई ना हो और उन्हें सीधे फाँसी पर लटका दिया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति ऐसा करने की सोच भी ना सके।
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। हैदराबाद में हुए जघन्य हत्याकांड एवं देश हो रहे बहन बेटियों के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध में आज छतीसगढ़ छात्र संगठन जोगी ने मुँह में काली पट्टी बांधकर कैंडल मार्च स्थानीय डी पी विप्र महाविद्यालय से गांधी चौक तक निकाला गया। गांधी प्रतिमा के नीचे कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मौन सभा की इस प्रदर्शन के माध्यम से छतीसगढ़ छात्र संगठन जोगी द्वारा देश मे मौजूद कमजोर कानून व्यवस्था व देश की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति असफल सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए यह मांग की गई। कि देश में ऐसा कानून बनाया जाए कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले दरिन्दों की कोई सुनवाई ना हो और उन्हें सीधे फाँसी पर लटका दिया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति ऐसा करने की सोच भी ना सके।
Daily Horoscope । Today's Rashifal in Hindi (आज का राशिफल रविवार, 16 अक्टूबर 2022): ज्योतिषशास्त्र (Astrology) में राशिफल के माध्यम से विभिन्न काल खण्डों के बारे में भविष्यवाणी की जाती है. दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) रोजाना की भविष्य का कथन करता है, जो ग्रह नक्षत्रों की चाल पर निर्भर होता है. खाने में पीली वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. आइये जानते हैं कि मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन राशि के जातकों का राशिफल आज रविवार को क्या है. आज का राशिफल रविवार, 16 अक्टूबर, 2022 (Today's Horoscope Sunday, 16 October, 2022) आपका दानशीलता का व्यवहार आपके लिए छुपे हुए आशीर्वाद की तरह सिद्ध होगा, क्योंकि यह आपको शक, अनास्था, लालच और आसक्ति जैसी ख़राबियों से बचाएगा. आज आप घर से बाहर तो बहुत सकारात्मकता के साथ निकलेंगे लेकिन किसी कीमती वस्तु के चोरी होने की वजह से आपका मूड खराब हो सकता है. आपको परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी दिक़्क़त होगी, लेकिन इस वजह से अपनी मानसिक शान्ति भंग न होने दें. दोस्ती में प्रगाढ़ता के चलते रोमांस का फूल खिल सकता है. खाली वक्त में आप कोई फिल्म देख सकते हैं यह फिल्म आपको पसंद नहीं आएगी और आपको लगेगा कि आपने अपना कीमती वक्त जाया कर दिया. जीवनसाथी से आपको अपने दिल की सारी बातें करने का भरपूर समय मिलेगा. जिन्दगी का स्वाद तो स्वादिष्ट भोजन को करने में ही है. यह बात आज आपके जुबान पर आ सकती है क्योंकि आप के घर में आज स्वादिष्ट भोजन बन सकता है. उपाय :- ज्ञानी, विद्वान और न्यायकर्ता लोगों का सम्मान करने से आर्थिक स्थिति अच्छी होगी. भागमभाग भरे दिन के बावजूद आपकी सेहत पूरी तरह दुरुस्त रहेगी. बिना बताये आज कोई देनदार आपके अकाउंट में पैसे डाल सकता है जिसके बारे में जानकर आपको अचंभा भी होगा और खुशी भी. बच्चों की उनसे जुड़े मामलों में मदद करना आवश्यक है. अपने प्रिय की नाराज़गी के बावजूद अपना प्यार ज़ाहिर करते रहें. आज आप फुर्सत के क्षणों में कोई नया काम करने का सोचेंगे लेकिन इस काम में आप इतना उलझ सकते हैं कि आपके जरुरी काम भी छूट जाएंगे . जीवनसाथी का स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ हो सकता है. आज के दिन रिश्तेदारों से मुलाक़ात करके आप सामाजिक दायित्वों की पूर्ति कर सकते हैं. उपाय :- गंगाजल को घर में छिड़कना पारिवारिक जीवन में सुख शांति देगा. आज आप खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं, जो आपको तन्दुरुस्त बनाए रखेगा. आज के दिन भूलकर भी किसी को पैसे उधार न दें और यदि देना जरुरी हो तो देने वाले से लिखित में लें कि वो पैसा वापस कब करेगा. आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा. प्यार के नज़रिए से देखें तो आज आप जीवन के रस का भरपूर आनन्द लेने में सफल रहेंगे. आज के दिन यात्रा, मनोरंजन और लोगों से मिलना-जुलना होगा. आज चाहे दुनिया इधर-की-उधर ही क्यों न हो जाए, आप अपने जीवनसाथी की बाहों से दूर नहीं हो सकेंगे. आज का दिन उन चन्द दिनों जैसा है जब घड़ी की सुईयाँ बहुत धीरे-धीरे हिलती हैं और आप लंबे समय तक बिस्तर में पड़े रहते हैं. लेकिन इसके बाद ख़ुद को तरोताज़ा भी महसूस करेंगे और इसकी आपको काफ़ी ज़रूरत भी है. उपाय :- एकमुखी रुद्राक्ष को सफेद धागे में धारण करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. आपका उदार स्वभाव आज आपके लिए कई ख़ुशनुमा पल लेकर आएगा. किसी करीबी रिश्तेदार की मदद से आज आप अपने करोबार में अच्छा कर सकते हैं जिससे आपको आर्थिक लाभ भी होगा. बच्चों की उनसे जुड़े मामलों में मदद करना आवश्यक है. आपका बेपनाह प्यार आपके प्रिय के लिए बेहद क़ीमती है. रात को ऑफिस से घर आते वक्त आज आपको सावधानी से वाहन चलाना चाहिए, नहीं तो दुर्घटना हो सकती है और कई दिनों के लिए आप बीमार पड़ सकते हैं. आपका जीवनसाथी आपको ख़ुश करने के लिए आज काफ़ी कोशिशें करता नज़र आएगा. अपनी बातों को अहमियत दिलाने के लिए आज आप मनघडंत बातें बोल सकते हैं. मेरी आपको सलाह रहेगी कि ऐसा न करें. उपाय :- पारिवारिक जीवन की खुशहाली के लिए घर में क्रीम रंग के परदे लगाएं. आपका ऊर्जा-स्तर ऊँचा रहेगा. आपकी माता पक्ष से आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है. हो सकता है कि आपके मामा या नाना आपकी आर्थिक मदद करें. दूसरों को प्रभावित करने की आपकी क्षमता आपको कई सकारात्मक चीज़ें दिलाएगी. आपके प्रिय की ख़राब तबियत के चलते रोमांस को दरकिनार होना पड़ सकता है. जीवन की आपाधापी के बीच आज आप अपने बच्चों के लिए वक्त निकालेंगे. उनके साथ वक्त गुजार के आपको महसूस हो सकता है कि आपने जीवन के कई जरुरी पल गवां दिए हैं. आपके जीवनसाथी की सुस्ती आपके कई कामों पर पानी फेर सकती है. किसी सहकर्मी की अचानक तबीयत खराब होने पर आज आप उनका भरपूर सहयोग दे सकते हैं. उपाय :- खाने में पीली वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. आज का दिन ऐसे काम करने के लिए बेहतरीन है, जिन्हें करके आप ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस करते हैं. अचानक नए स्रोतों से धन मिलेगा, जो आपके दिन को ख़ुशनुमा बना देगा. आपका लापरवाह रवैया आपके माता-पिता को दुःखी कर सकता है. कोई भी नयी परियोजना शुरू करने से पहले उनकी राय भी जान लें. किसी की प्यार में क़ामयाबी मिलने की कल्पना को सच कराने में मदद करें. उन चीजों को दोहराना जिनका अब आपके जीवन में कोई महत्व नहीं है, आपके लिए ठीक नहीं है. ऐसा करके आप अपना वक्त ही बर्बाद करेंगे और कुछ नहीं. अपने साथी पर किया गया संदेह एक बड़ी लड़ाई का रूप ले सकता है. आपके किये गये कामों को आज आपके सीनियर्स के द्वारा सराहा जाएगा जिससे आपके चेहरे पर भी मुस्कान दौड़ जाएगी. उपाय :- पाँच पीले पुष्प किसी भी पीपल के पास दबाने से पारिवारिक जीवन अच्छा होगा. आज आप उम्मीदों की जादुई दुनिया में हैं. रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा. आज हर कोई आपसे दोस्ती करना चाहता है और आप उनकी ये इच्छा पूरी करने में ख़ुशी महसूस करेंगे. आपको अपनी हार से कुछ सबक़ सीखने की ज़रूरत है, क्योंकि आज अपने दिल की बात ज़ाहिर करने से नुक़सान भी हो सकता है. आपका व्यक्तित्व और लोगों से थोड़ा अलग है आप अकेले वक्त बिताना पसंद करते हैं. आज आपको अपने लिए वक्त तो मिलेगा लेकिन ऑफिस की कोई समस्या आपको सताती रहेगी. जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है. किसी ऐसे इंसान के साथ समय बिताना जिसका साथ आपको बहुत पसंद न हो, आपकी खीझ की वजह हो सकता है. इसलिए सोच-समझकर फ़ैसला करें कि आप किसके साथ बाहर जाने वाले हैं. उपाय :- समय-समय पर अपने प्रेमी/प्रेमिका को लाल वस्त्र गिफ्ट में दें, इससे प्रेम में वृद्धि होगी. असहजता आपकी मानसिक शांति में बाधा पैदा कर सकती है, लेकिन कोई दोस्त आपकी परेशानियों के समाधान में काफ़ी मददगार साबित होगा. तनाव से बचने के लिए मधुर संगीत का सहारा लें. दीर्घावधि मुनाफ़े के नज़रिए से स्टॉक और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना फ़ायदेमंद रहेगा. ख़ुद को घरेलू कामकाज में लगाए रखें. साथ ही कुछ वक़्त अपने शौक़ के लिए भी ज़रूर निकालें, ताकि आपकी रफ़्तार बरक़रार रहे और शरीर व मन चुस्त रहे. आपके प्रेम की राह एक ख़ूबसूरत मोड़ ले सकती है. आज आपको पता चलेगा कि फ़िजा़ओं में जब प्यार घुलता है तो कैसा महसूस होता है. व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आज आप अपने लिए समय निकालपाने में सक्षम होंगे. खाली वक्त में आज कुछ रचनात्मक कर सकते हैं. आज आपको रंग ज़्यादा चटख नज़र आएंगे, क्योंकि फ़िजाओं में प्यार का ख़ुमार चढ़ रहा है. अपने प्रियजनों के साथ फ़िल्म देखना बढ़िया और मज़ेदार रहने वाला है. उपाय :- प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से बनी मूर्तियां घर में रखने से स्वास्थ्य अच्छा होगा. आपकी ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा. आपको अपने अटके कामों को पूरा करने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए. दिन की शुरुआत में ही आज आपको कोई आर्थिक हानि हो सकती है जिससे सारा दिन खराब हो सकता है. दोस्त और पारिवारिक मित्र आपका उत्साह बढ़ाएंगे. किसी दिलचस्प इंसान से मिलने की प्रबल संभावना है. मौज-मस्ती के लिए घूमना संतोषजनक रहेगा. जो यह समझते हैं कि शादी सिर्फ़ सेक्स के लिए होती है, वे ग़लत हैं. क्योंकि आज आपको सच्चे प्यार का एहसास होगा. टी. वी. देखना टाइम पास करने का एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है परन्तु लगातार देखने से आँखों में दर्द संभव है. उपाय :- सफेद खरगोश को भोजन कराने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. आपको अपना अतिरिक्त समय अपने शौक़ पूरे करने या उन कामों को करने में लगाना चाहिए, जिन्हें करने में आपको सबसे ज़्यादा मज़ा आता है. आर्थिक तौर पर सुधार के चलते आप आसानी से काफ़ी वक़्त से लंबित बिल और उधार चुका सकेंगे. अगर आप सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, तो आप नए दोस्त बना सकते हैं. आपके महंगे तोहफ़े भी आपके प्रिय के चेहरे पर मुस्कान लाने में नाकाम साबित होंगे, क्योंकि वह उनसे क़तई प्रभावित नहीं होगा/ होगी. अगर आज आप यात्रा कर रहे हैं तो आपको अपने सामान की अतिरिक्त सुरक्षा करने की ज़रूरत है. आपका जीवनसाथी अपने दोस्तों में कुछ ज़्यादा व्यस्त हो सकता है, जिसके चलते आपके उदास होने की संभावना है. आपकी बात को यदि सुना नहीं जा रहा तो आपा न खोएं बल्कि परिस्थिति को समझने की कोशिश करें. उपाय :- गाय को पीले चने की दाल खिलाने से प्रेम सम्बन्ध अच्छे होंगे. ज़िन्दगी की बेहतरीन चीज़ों को शिद्दत से महसूस करने के लिए अपने दिल-दिमाग़ के दरवाज़े खोलें. चिंता को छोड़ना इसकी ओर पहला क़दम है. ख़र्चों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी आपके मन की शांति को भंग करेगी. आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा. आज प्यार के नज़रिए से दिन काफ़ी विवादास्पद रहेगा. वक्त की नाजाकत को समझते हुए आज आप सब लोगों से दूरी बनाकर एकांत में वक्त बिताना पसंद करेंगे. ऐसा करना आपके लिए हितकर भी होगा. लोगों की दख़लअन्दाज़ी वैवाहिक जीवन में परेशानी खड़ी कर सकती है. आज आप ऑफिस के कामों को इतनी तेजी से निपटाएंगे कि आपके सहकर्मी आपको देखते ही रह जाएंगे. उपाय :- ज्ञानी, विद्वान और न्यायकर्ता लोगों का सम्मान करने से आर्थिक स्थिति अच्छी होगी. अपनी शारीरिक चुस्ती-फुर्ती को बनाए रखने के लिए आप आज का दिन खेलने में व्यतीत कर सकते हैं. जो लोग शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं आज उनका पैसा डूब सकता है. वक्त रहते सचेत हो जाएं तो आपके लिए बेहतर रहेगा. कुछ लोगों के लिए- परिवार में किसी नए का आना जश्न और उल्लास के पल लेकर आएगा. आपकी आकर्षक छवि मनचाहा परिणाम देगी. आज ऐसी कई सारी चीज़ें होंगी - जिनकी तरफ़ तुरन्त ग़ौर करने की आवश्यकता है. ऐसा लगता है कि आपके जीवनसाथी आज आपके ऊपर ख़ास ध्यान देंगे. अगर बहुत ज़्यादा न हो, तो आज देर रात स्मार्टफ़ोन पर गप्पें मारने में भी कोई बुराई नहीं है. हालाँकि किसी भी चीज़ की अति नुक़सानदेह है. उपाय :- पूरा दिन बैठकर ऊबने की बजाय शिवजी की आराधना करें इससे आपकी अकर्मण्यता दूर होगी. Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. Rewa Riyasat.Com इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Daily Horoscope । Today's Rashifal in Hindi : ज्योतिषशास्त्र में राशिफल के माध्यम से विभिन्न काल खण्डों के बारे में भविष्यवाणी की जाती है. दैनिक राशिफल रोजाना की भविष्य का कथन करता है, जो ग्रह नक्षत्रों की चाल पर निर्भर होता है. खाने में पीली वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. आइये जानते हैं कि मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन राशि के जातकों का राशिफल आज रविवार को क्या है. आज का राशिफल रविवार, सोलह अक्टूबर, दो हज़ार बाईस आपका दानशीलता का व्यवहार आपके लिए छुपे हुए आशीर्वाद की तरह सिद्ध होगा, क्योंकि यह आपको शक, अनास्था, लालच और आसक्ति जैसी ख़राबियों से बचाएगा. आज आप घर से बाहर तो बहुत सकारात्मकता के साथ निकलेंगे लेकिन किसी कीमती वस्तु के चोरी होने की वजह से आपका मूड खराब हो सकता है. आपको परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी दिक़्क़त होगी, लेकिन इस वजह से अपनी मानसिक शान्ति भंग न होने दें. दोस्ती में प्रगाढ़ता के चलते रोमांस का फूल खिल सकता है. खाली वक्त में आप कोई फिल्म देख सकते हैं यह फिल्म आपको पसंद नहीं आएगी और आपको लगेगा कि आपने अपना कीमती वक्त जाया कर दिया. जीवनसाथी से आपको अपने दिल की सारी बातें करने का भरपूर समय मिलेगा. जिन्दगी का स्वाद तो स्वादिष्ट भोजन को करने में ही है. यह बात आज आपके जुबान पर आ सकती है क्योंकि आप के घर में आज स्वादिष्ट भोजन बन सकता है. उपाय :- ज्ञानी, विद्वान और न्यायकर्ता लोगों का सम्मान करने से आर्थिक स्थिति अच्छी होगी. भागमभाग भरे दिन के बावजूद आपकी सेहत पूरी तरह दुरुस्त रहेगी. बिना बताये आज कोई देनदार आपके अकाउंट में पैसे डाल सकता है जिसके बारे में जानकर आपको अचंभा भी होगा और खुशी भी. बच्चों की उनसे जुड़े मामलों में मदद करना आवश्यक है. अपने प्रिय की नाराज़गी के बावजूद अपना प्यार ज़ाहिर करते रहें. आज आप फुर्सत के क्षणों में कोई नया काम करने का सोचेंगे लेकिन इस काम में आप इतना उलझ सकते हैं कि आपके जरुरी काम भी छूट जाएंगे . जीवनसाथी का स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ हो सकता है. आज के दिन रिश्तेदारों से मुलाक़ात करके आप सामाजिक दायित्वों की पूर्ति कर सकते हैं. उपाय :- गंगाजल को घर में छिड़कना पारिवारिक जीवन में सुख शांति देगा. आज आप खेल-कूद में हिस्सा ले सकते हैं, जो आपको तन्दुरुस्त बनाए रखेगा. आज के दिन भूलकर भी किसी को पैसे उधार न दें और यदि देना जरुरी हो तो देने वाले से लिखित में लें कि वो पैसा वापस कब करेगा. आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा. प्यार के नज़रिए से देखें तो आज आप जीवन के रस का भरपूर आनन्द लेने में सफल रहेंगे. आज के दिन यात्रा, मनोरंजन और लोगों से मिलना-जुलना होगा. आज चाहे दुनिया इधर-की-उधर ही क्यों न हो जाए, आप अपने जीवनसाथी की बाहों से दूर नहीं हो सकेंगे. आज का दिन उन चन्द दिनों जैसा है जब घड़ी की सुईयाँ बहुत धीरे-धीरे हिलती हैं और आप लंबे समय तक बिस्तर में पड़े रहते हैं. लेकिन इसके बाद ख़ुद को तरोताज़ा भी महसूस करेंगे और इसकी आपको काफ़ी ज़रूरत भी है. उपाय :- एकमुखी रुद्राक्ष को सफेद धागे में धारण करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. आपका उदार स्वभाव आज आपके लिए कई ख़ुशनुमा पल लेकर आएगा. किसी करीबी रिश्तेदार की मदद से आज आप अपने करोबार में अच्छा कर सकते हैं जिससे आपको आर्थिक लाभ भी होगा. बच्चों की उनसे जुड़े मामलों में मदद करना आवश्यक है. आपका बेपनाह प्यार आपके प्रिय के लिए बेहद क़ीमती है. रात को ऑफिस से घर आते वक्त आज आपको सावधानी से वाहन चलाना चाहिए, नहीं तो दुर्घटना हो सकती है और कई दिनों के लिए आप बीमार पड़ सकते हैं. आपका जीवनसाथी आपको ख़ुश करने के लिए आज काफ़ी कोशिशें करता नज़र आएगा. अपनी बातों को अहमियत दिलाने के लिए आज आप मनघडंत बातें बोल सकते हैं. मेरी आपको सलाह रहेगी कि ऐसा न करें. उपाय :- पारिवारिक जीवन की खुशहाली के लिए घर में क्रीम रंग के परदे लगाएं. आपका ऊर्जा-स्तर ऊँचा रहेगा. आपकी माता पक्ष से आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है. हो सकता है कि आपके मामा या नाना आपकी आर्थिक मदद करें. दूसरों को प्रभावित करने की आपकी क्षमता आपको कई सकारात्मक चीज़ें दिलाएगी. आपके प्रिय की ख़राब तबियत के चलते रोमांस को दरकिनार होना पड़ सकता है. जीवन की आपाधापी के बीच आज आप अपने बच्चों के लिए वक्त निकालेंगे. उनके साथ वक्त गुजार के आपको महसूस हो सकता है कि आपने जीवन के कई जरुरी पल गवां दिए हैं. आपके जीवनसाथी की सुस्ती आपके कई कामों पर पानी फेर सकती है. किसी सहकर्मी की अचानक तबीयत खराब होने पर आज आप उनका भरपूर सहयोग दे सकते हैं. उपाय :- खाने में पीली वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने से लव लाइफ अच्छी रहेगी. आज का दिन ऐसे काम करने के लिए बेहतरीन है, जिन्हें करके आप ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस करते हैं. अचानक नए स्रोतों से धन मिलेगा, जो आपके दिन को ख़ुशनुमा बना देगा. आपका लापरवाह रवैया आपके माता-पिता को दुःखी कर सकता है. कोई भी नयी परियोजना शुरू करने से पहले उनकी राय भी जान लें. किसी की प्यार में क़ामयाबी मिलने की कल्पना को सच कराने में मदद करें. उन चीजों को दोहराना जिनका अब आपके जीवन में कोई महत्व नहीं है, आपके लिए ठीक नहीं है. ऐसा करके आप अपना वक्त ही बर्बाद करेंगे और कुछ नहीं. अपने साथी पर किया गया संदेह एक बड़ी लड़ाई का रूप ले सकता है. आपके किये गये कामों को आज आपके सीनियर्स के द्वारा सराहा जाएगा जिससे आपके चेहरे पर भी मुस्कान दौड़ जाएगी. उपाय :- पाँच पीले पुष्प किसी भी पीपल के पास दबाने से पारिवारिक जीवन अच्छा होगा. आज आप उम्मीदों की जादुई दुनिया में हैं. रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा. आज हर कोई आपसे दोस्ती करना चाहता है और आप उनकी ये इच्छा पूरी करने में ख़ुशी महसूस करेंगे. आपको अपनी हार से कुछ सबक़ सीखने की ज़रूरत है, क्योंकि आज अपने दिल की बात ज़ाहिर करने से नुक़सान भी हो सकता है. आपका व्यक्तित्व और लोगों से थोड़ा अलग है आप अकेले वक्त बिताना पसंद करते हैं. आज आपको अपने लिए वक्त तो मिलेगा लेकिन ऑफिस की कोई समस्या आपको सताती रहेगी. जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है. किसी ऐसे इंसान के साथ समय बिताना जिसका साथ आपको बहुत पसंद न हो, आपकी खीझ की वजह हो सकता है. इसलिए सोच-समझकर फ़ैसला करें कि आप किसके साथ बाहर जाने वाले हैं. उपाय :- समय-समय पर अपने प्रेमी/प्रेमिका को लाल वस्त्र गिफ्ट में दें, इससे प्रेम में वृद्धि होगी. असहजता आपकी मानसिक शांति में बाधा पैदा कर सकती है, लेकिन कोई दोस्त आपकी परेशानियों के समाधान में काफ़ी मददगार साबित होगा. तनाव से बचने के लिए मधुर संगीत का सहारा लें. दीर्घावधि मुनाफ़े के नज़रिए से स्टॉक और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करना फ़ायदेमंद रहेगा. ख़ुद को घरेलू कामकाज में लगाए रखें. साथ ही कुछ वक़्त अपने शौक़ के लिए भी ज़रूर निकालें, ताकि आपकी रफ़्तार बरक़रार रहे और शरीर व मन चुस्त रहे. आपके प्रेम की राह एक ख़ूबसूरत मोड़ ले सकती है. आज आपको पता चलेगा कि फ़िजा़ओं में जब प्यार घुलता है तो कैसा महसूस होता है. व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आज आप अपने लिए समय निकालपाने में सक्षम होंगे. खाली वक्त में आज कुछ रचनात्मक कर सकते हैं. आज आपको रंग ज़्यादा चटख नज़र आएंगे, क्योंकि फ़िजाओं में प्यार का ख़ुमार चढ़ रहा है. अपने प्रियजनों के साथ फ़िल्म देखना बढ़िया और मज़ेदार रहने वाला है. उपाय :- प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से बनी मूर्तियां घर में रखने से स्वास्थ्य अच्छा होगा. आपकी ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा. आपको अपने अटके कामों को पूरा करने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए. दिन की शुरुआत में ही आज आपको कोई आर्थिक हानि हो सकती है जिससे सारा दिन खराब हो सकता है. दोस्त और पारिवारिक मित्र आपका उत्साह बढ़ाएंगे. किसी दिलचस्प इंसान से मिलने की प्रबल संभावना है. मौज-मस्ती के लिए घूमना संतोषजनक रहेगा. जो यह समझते हैं कि शादी सिर्फ़ सेक्स के लिए होती है, वे ग़लत हैं. क्योंकि आज आपको सच्चे प्यार का एहसास होगा. टी. वी. देखना टाइम पास करने का एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है परन्तु लगातार देखने से आँखों में दर्द संभव है. उपाय :- सफेद खरगोश को भोजन कराने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. आपको अपना अतिरिक्त समय अपने शौक़ पूरे करने या उन कामों को करने में लगाना चाहिए, जिन्हें करने में आपको सबसे ज़्यादा मज़ा आता है. आर्थिक तौर पर सुधार के चलते आप आसानी से काफ़ी वक़्त से लंबित बिल और उधार चुका सकेंगे. अगर आप सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, तो आप नए दोस्त बना सकते हैं. आपके महंगे तोहफ़े भी आपके प्रिय के चेहरे पर मुस्कान लाने में नाकाम साबित होंगे, क्योंकि वह उनसे क़तई प्रभावित नहीं होगा/ होगी. अगर आज आप यात्रा कर रहे हैं तो आपको अपने सामान की अतिरिक्त सुरक्षा करने की ज़रूरत है. आपका जीवनसाथी अपने दोस्तों में कुछ ज़्यादा व्यस्त हो सकता है, जिसके चलते आपके उदास होने की संभावना है. आपकी बात को यदि सुना नहीं जा रहा तो आपा न खोएं बल्कि परिस्थिति को समझने की कोशिश करें. उपाय :- गाय को पीले चने की दाल खिलाने से प्रेम सम्बन्ध अच्छे होंगे. ज़िन्दगी की बेहतरीन चीज़ों को शिद्दत से महसूस करने के लिए अपने दिल-दिमाग़ के दरवाज़े खोलें. चिंता को छोड़ना इसकी ओर पहला क़दम है. ख़र्चों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी आपके मन की शांति को भंग करेगी. आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा. आज प्यार के नज़रिए से दिन काफ़ी विवादास्पद रहेगा. वक्त की नाजाकत को समझते हुए आज आप सब लोगों से दूरी बनाकर एकांत में वक्त बिताना पसंद करेंगे. ऐसा करना आपके लिए हितकर भी होगा. लोगों की दख़लअन्दाज़ी वैवाहिक जीवन में परेशानी खड़ी कर सकती है. आज आप ऑफिस के कामों को इतनी तेजी से निपटाएंगे कि आपके सहकर्मी आपको देखते ही रह जाएंगे. उपाय :- ज्ञानी, विद्वान और न्यायकर्ता लोगों का सम्मान करने से आर्थिक स्थिति अच्छी होगी. अपनी शारीरिक चुस्ती-फुर्ती को बनाए रखने के लिए आप आज का दिन खेलने में व्यतीत कर सकते हैं. जो लोग शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं आज उनका पैसा डूब सकता है. वक्त रहते सचेत हो जाएं तो आपके लिए बेहतर रहेगा. कुछ लोगों के लिए- परिवार में किसी नए का आना जश्न और उल्लास के पल लेकर आएगा. आपकी आकर्षक छवि मनचाहा परिणाम देगी. आज ऐसी कई सारी चीज़ें होंगी - जिनकी तरफ़ तुरन्त ग़ौर करने की आवश्यकता है. ऐसा लगता है कि आपके जीवनसाथी आज आपके ऊपर ख़ास ध्यान देंगे. अगर बहुत ज़्यादा न हो, तो आज देर रात स्मार्टफ़ोन पर गप्पें मारने में भी कोई बुराई नहीं है. हालाँकि किसी भी चीज़ की अति नुक़सानदेह है. उपाय :- पूरा दिन बैठकर ऊबने की बजाय शिवजी की आराधना करें इससे आपकी अकर्मण्यता दूर होगी. Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. Rewa Riyasat.Com इसकी पुष्टि नहीं करता है.
प्रतीकात्मक फोटो (Photo Credit: फाइल फोटो) : उत्तर प्रदेश न्यूज उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के लाइव ब्लॉग (Live Blog) में आपका स्वागत है. 18 जून 2020 की दिनभर की ब्रेकिंग न्यूज (Breaking News) के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए. यहां आपको उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड से जुड़ी हर बड़ी खबर की अपडेट्स लगातार मिलती रहेगी. देश-दुनिया के ताजातरीन खबरों के लिए भी आप Newsnationtv. com के होम पेज पर जा सकते हैं और हर छोटी-बड़ी खबरों को पढ़ सकते हैं. चलती हुई बस में महिला के साथ रेप का मामला सामने आया है. पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है. साथ ही बस को अफने कब्जे में ले लिया है. महिला प्रतापगढ़ से नोएडा सेक्टर 45 आ रही थी. महिला के शोर मचाने पर आरोपियों ने महिला को विनायक हॉस्पिटल के पास फेक कर भाग गए. महिला के शिकायत पर सेक्टर 20 थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. मामले की जांच चल रही है.
प्रतीकात्मक फोटो : उत्तर प्रदेश न्यूज उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है. अट्ठारह जून दो हज़ार बीस की दिनभर की ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए. यहां आपको उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड से जुड़ी हर बड़ी खबर की अपडेट्स लगातार मिलती रहेगी. देश-दुनिया के ताजातरीन खबरों के लिए भी आप Newsnationtv. com के होम पेज पर जा सकते हैं और हर छोटी-बड़ी खबरों को पढ़ सकते हैं. चलती हुई बस में महिला के साथ रेप का मामला सामने आया है. पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है. साथ ही बस को अफने कब्जे में ले लिया है. महिला प्रतापगढ़ से नोएडा सेक्टर पैंतालीस आ रही थी. महिला के शोर मचाने पर आरोपियों ने महिला को विनायक हॉस्पिटल के पास फेक कर भाग गए. महिला के शिकायत पर सेक्टर बीस थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. मामले की जांच चल रही है.
हिसुआ में बीडीओ डॉ मृत्युंजय कुमार, सीओ नीतेश कुमार और विधि व्यवस्था प्रभारी सुभाष कुमार, एएसआई कुमार गौरव सहित पुलिस टीम ने मार्च के दौरान चार दुकानों को सील किया गया। हिसुआ-नवादा मेन रोड में एक चप्पल दुकान, एक सैलून और एस इलेक्ट्रिक दुकान को सील किया गया। जबकि अंदर बाजार के मिडिल स्कूल के समीप के एक फर्नीचर दुकान सील हुआ। बीडीओ डॉ मृत्युंजय कमार ने बताया कि हर दिन दो-चार दुकानों को सील करने, माइक से ऐलान करने का काम हो रहा है। प्रशासन नियमित गश्ती कर अंकुश का प्रयास कर रही है लेकिन फिर भी दुकानदार नहीं मान रहे हैं। पकरीबरावां प्रखण्ड में लॉक डाउन के उल्लंघन मामले में बुधवार को फिर कार्रवाई की गई है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार, अंचलाधिकारी सुक्रांत राहुल, ओपी अध्यक्ष नीरज कुमार ने धमौल में एक कपड़ा एवं एक आभूषण की दुकान को सील किया। इसी तरह पकरीबरावां बाजार में दो दुकानों को सील किया गया है। इस तरह प्रखण्ड में लॉक डाउन के उल्लंघन मामले में चार दुकानों को सील किया गया है। बीडीओ ने कहा कि जिन दुकानों को खोलने की अनुमति मिली है, केवल वे ही दुकानें खुलेंगी। अगर नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पदाधिकारियों ने लोगों से आग्रह किया कि नियमों का पालन करें।
हिसुआ में बीडीओ डॉ मृत्युंजय कुमार, सीओ नीतेश कुमार और विधि व्यवस्था प्रभारी सुभाष कुमार, एएसआई कुमार गौरव सहित पुलिस टीम ने मार्च के दौरान चार दुकानों को सील किया गया। हिसुआ-नवादा मेन रोड में एक चप्पल दुकान, एक सैलून और एस इलेक्ट्रिक दुकान को सील किया गया। जबकि अंदर बाजार के मिडिल स्कूल के समीप के एक फर्नीचर दुकान सील हुआ। बीडीओ डॉ मृत्युंजय कमार ने बताया कि हर दिन दो-चार दुकानों को सील करने, माइक से ऐलान करने का काम हो रहा है। प्रशासन नियमित गश्ती कर अंकुश का प्रयास कर रही है लेकिन फिर भी दुकानदार नहीं मान रहे हैं। पकरीबरावां प्रखण्ड में लॉक डाउन के उल्लंघन मामले में बुधवार को फिर कार्रवाई की गई है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार, अंचलाधिकारी सुक्रांत राहुल, ओपी अध्यक्ष नीरज कुमार ने धमौल में एक कपड़ा एवं एक आभूषण की दुकान को सील किया। इसी तरह पकरीबरावां बाजार में दो दुकानों को सील किया गया है। इस तरह प्रखण्ड में लॉक डाउन के उल्लंघन मामले में चार दुकानों को सील किया गया है। बीडीओ ने कहा कि जिन दुकानों को खोलने की अनुमति मिली है, केवल वे ही दुकानें खुलेंगी। अगर नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पदाधिकारियों ने लोगों से आग्रह किया कि नियमों का पालन करें।
सीवान-खबर सीवान से है . . जहां शादी के खूशी गम में बदल गई और बारात देखने घर से निकली एक महिला और बच्ची का शव वापस घर आ पाया है. दरअसल बारात देखने के दौरान एक घर का छज्जा गिर पड़ा जिसमें एक महिला और एक बच्ची की मौके पर मौत हो गई. . यह हादसा जिले के सिसवन थाना क्षेत्र के भागड़ गांव का है. मिली जानकारे के अनुसार नंदकिशोर यादव के शादी समारोह आयोजित था और बारात आने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे छत पर चढ कर बारात देख रहे थे . इसी दौरान घर का छज्जा टूट गया जिसमें करीब 30 लोग घायल हो गए,जिसमें से 15 की स्थिति गंभीर बनी हुई है. वहीं एक महिला एवं एक बच्ची की मौत हो गई है. इधर हादसे के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. वहीं सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच रेस्क्यू करके घायलों को अस्पताल भेजा. वहीं हादसे के बाद शादी की रस्मे औपचारिक रूप से पूरी की गई.
सीवान-खबर सीवान से है . . जहां शादी के खूशी गम में बदल गई और बारात देखने घर से निकली एक महिला और बच्ची का शव वापस घर आ पाया है. दरअसल बारात देखने के दौरान एक घर का छज्जा गिर पड़ा जिसमें एक महिला और एक बच्ची की मौके पर मौत हो गई. . यह हादसा जिले के सिसवन थाना क्षेत्र के भागड़ गांव का है. मिली जानकारे के अनुसार नंदकिशोर यादव के शादी समारोह आयोजित था और बारात आने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे छत पर चढ कर बारात देख रहे थे . इसी दौरान घर का छज्जा टूट गया जिसमें करीब तीस लोग घायल हो गए,जिसमें से पंद्रह की स्थिति गंभीर बनी हुई है. वहीं एक महिला एवं एक बच्ची की मौत हो गई है. इधर हादसे के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. वहीं सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच रेस्क्यू करके घायलों को अस्पताल भेजा. वहीं हादसे के बाद शादी की रस्मे औपचारिक रूप से पूरी की गई.
CM Jairam Thakur हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली जाएंगे। उनका दो दिवसीय दिल्ली दौरा तय हो गया है। माना जा रहा है चुनाव नतीजों के आधार पर सरकार और संगठन में बदलाव तय है। शिमला, राज्य ब्यूरो। Himachal CM Jairam Thakur, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार 11 व 12 मार्च को प्रस्तावित दौरा है। इस दौरान जयराम ठाकुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व आलाकमान से प्रदेश के राजनीतिक हालात पर मंथन करेंगे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद जयराम ठाकुर का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के आधार पर हिमाचल में सरकार व संगठन में राजनीतिक बदलाव होगा। संभावना है कि गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त दो अप्रैल को खाली हो रही प्रदेश की राज्यसभा सीट के चुनाव पर भी मंथन होगा। जानकारी है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एम्स में रूटीन चेकअप के लिए भी जा सकते हैं। हिमाचल सरकार के दो मंत्रियों का जाना तय माना जा रहा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी संकेत दे चुके हैं। मंत्रियों को बाहर करने के पीछे उनकी विभागों में परफारमेंस सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। भाजपा मिशन रिपीट को लेकर उत्साहित है। तर्क दिया जा रहा है कि प्रदेश के लोगों ने चार उपचुनाव में सरकार के खिलाफ गुस्सा निकाल लिया है। अब आम चुनाव में भाजपा की जीत की संभावनाएं अधिक नजर आ रही हैं, क्योंकि नाराज कार्यकर्ता संगठन के साथ मजबूती के साथ जुड़ गए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार देर शाम राज्यपाल राजेंद्र नाथ आर्लेकर के साथ भी भेंट की थी। हालांकि इस मुलाकात को मुख्यमंत्री ने शिष्टाचार भेंट बताया था। राज्यपाल बीते कल मंडी शिवरात्रि महोत्सव के समापन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे, जबकि मुख्यमंत्री स्वयं जोगेंद्रनगर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित समारोह में मौजूद थे। शाम को श्मिला पहुंचने पर दोनों की मुलाकात हुई।
CM Jairam Thakur हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली जाएंगे। उनका दो दिवसीय दिल्ली दौरा तय हो गया है। माना जा रहा है चुनाव नतीजों के आधार पर सरकार और संगठन में बदलाव तय है। शिमला, राज्य ब्यूरो। Himachal CM Jairam Thakur, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार ग्यारह व बारह मार्च को प्रस्तावित दौरा है। इस दौरान जयराम ठाकुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व आलाकमान से प्रदेश के राजनीतिक हालात पर मंथन करेंगे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद जयराम ठाकुर का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के आधार पर हिमाचल में सरकार व संगठन में राजनीतिक बदलाव होगा। संभावना है कि गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त दो अप्रैल को खाली हो रही प्रदेश की राज्यसभा सीट के चुनाव पर भी मंथन होगा। जानकारी है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एम्स में रूटीन चेकअप के लिए भी जा सकते हैं। हिमाचल सरकार के दो मंत्रियों का जाना तय माना जा रहा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी संकेत दे चुके हैं। मंत्रियों को बाहर करने के पीछे उनकी विभागों में परफारमेंस सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। भाजपा मिशन रिपीट को लेकर उत्साहित है। तर्क दिया जा रहा है कि प्रदेश के लोगों ने चार उपचुनाव में सरकार के खिलाफ गुस्सा निकाल लिया है। अब आम चुनाव में भाजपा की जीत की संभावनाएं अधिक नजर आ रही हैं, क्योंकि नाराज कार्यकर्ता संगठन के साथ मजबूती के साथ जुड़ गए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार देर शाम राज्यपाल राजेंद्र नाथ आर्लेकर के साथ भी भेंट की थी। हालांकि इस मुलाकात को मुख्यमंत्री ने शिष्टाचार भेंट बताया था। राज्यपाल बीते कल मंडी शिवरात्रि महोत्सव के समापन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे, जबकि मुख्यमंत्री स्वयं जोगेंद्रनगर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित समारोह में मौजूद थे। शाम को श्मिला पहुंचने पर दोनों की मुलाकात हुई।
September Weekly Numerology Predictions अंग्रेजी कैलेंडर के 9वें माह सितंबर का दूसरा सप्ताह शुरु हो गया है। आज आपको अंक ज्योतिष के आधार पर बता रहे हैं कि अंक 7 से 9 तक के जातकों के लिए यह सप्ताह 06 सितंबर से 12 सितंबर के बीच कैसा रहेगा। September Weekly Numerology Predictions: अंग्रेजी कैलेंडर के 9वें माह सितंबर का दूसरा सप्ताह शुरु हो गया है। जागरण अध्यात्म में आज अंक ज्योतिषी विजय कुड़ी आपको अंक ज्योतिष के आधार पर बता रहे हैं कि अंक 7 से 9 तक के जातकों के लिए यह सप्ताह 06 सितंबर से 12 सितंबर के बीच कैसा रहेगा। जानते हैं इस सप्ताह का भविष्यफल। अंकः 7 (जिनका जन्म 7, 16, 25 तारीख को हुआ हो) अंक फलः नौकरीपेशा लोगों के लिए जीवन सुचारू ढंग से चलता रहेगा। आपके उच्च अधिकारियों से आपको पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। पेपर वर्क करते समय सावधानी रखें। निजी जीवन में करीबी लोगों के साथ आपसी तालमेल में थोड़ी कमी हो सकती है। अपने परिवार के किसी व्यक्ति के जिद्दी व्यवहार से आप परेशान हो सकते हैं। कुछ समय अकेले में बिताने की इच्छा होगी। अपनी रूचि की किसी गतिविधि में समय बिताएं। 7 जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः एम एस धोनी, कटरीना कैफ, सर आइज़क न्यूटन, पिकासो, करण जौहर, सैफ अली खान, अरविन्द केजरीवाल, शाहिद कपूर। अंकः 8 (जिनका जन्म 8, 17, 26 तारीख को हुआ हो) अंक फलः इस सप्ताह आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा। आपका बीता हुआ समय आपके वर्तमान के लिए बाधा बन रहा है। पुरानी कड़वी यादों को भूलकर आगे बढ़ें और अच्छे भविष्य के निर्माण के लिए प्रयास बढ़ाएं। साझेदारी में व्यापार करते हैं तो पारदर्शिता बनाकर रखना जरुरी होगा अन्यथा भविष्य में दिक्कतें आएगी। इस दौरान वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा और प्रेम संबंधों में मधुरता देखने को मिलेगी। 8 जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः नरेंद्र मोदी, सौरव गांगुली, रितेश देशमुख, जॉन अब्राहम, बेंजामिन फ्रेंकलिन, शिल्पा शेट्टी, अनिल कुंबले, मनमोहन सिंह। अंकः 9 (जिनका जन्म 9, 18, 27 तारीख को हुआ हो) अंक फलः आर्थिक दृष्टि से यह सप्ताह आपके लिए उपलब्धिपूर्ण रहने वाला है। हालाँकि इसकी अधिकतम सफलता आपकी मेहनत और सूझबूझ पर ज्यादा निर्भर करेगी। किसी परिचिति की बात में आकर पैसों से जुड़ा कोई फैसला न करें। संतान के अधिक मन लगाकर पढ़ाई करने से आपको निश्चिंतता अनुभव होगी। हालाँकि खुद के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए आप पर्याप्त समय निकाल पाने में असमर्थ रहेंगे। 9 जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः सलमान खान, अक्षय कुमार, फरहान अख्तर, गैलिलियो, प्रियंका चोपड़ा, सोनम कपूर, सुरेश रैना। "इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्स माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। "
September Weekly Numerology Predictions अंग्रेजी कैलेंडर के नौवें माह सितंबर का दूसरा सप्ताह शुरु हो गया है। आज आपको अंक ज्योतिष के आधार पर बता रहे हैं कि अंक सात से नौ तक के जातकों के लिए यह सप्ताह छः सितंबर से बारह सितंबर के बीच कैसा रहेगा। September Weekly Numerology Predictions: अंग्रेजी कैलेंडर के नौवें माह सितंबर का दूसरा सप्ताह शुरु हो गया है। जागरण अध्यात्म में आज अंक ज्योतिषी विजय कुड़ी आपको अंक ज्योतिष के आधार पर बता रहे हैं कि अंक सात से नौ तक के जातकों के लिए यह सप्ताह छः सितंबर से बारह सितंबर के बीच कैसा रहेगा। जानते हैं इस सप्ताह का भविष्यफल। अंकः सात अंक फलः नौकरीपेशा लोगों के लिए जीवन सुचारू ढंग से चलता रहेगा। आपके उच्च अधिकारियों से आपको पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। पेपर वर्क करते समय सावधानी रखें। निजी जीवन में करीबी लोगों के साथ आपसी तालमेल में थोड़ी कमी हो सकती है। अपने परिवार के किसी व्यक्ति के जिद्दी व्यवहार से आप परेशान हो सकते हैं। कुछ समय अकेले में बिताने की इच्छा होगी। अपनी रूचि की किसी गतिविधि में समय बिताएं। सात जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः एम एस धोनी, कटरीना कैफ, सर आइज़क न्यूटन, पिकासो, करण जौहर, सैफ अली खान, अरविन्द केजरीवाल, शाहिद कपूर। अंकः आठ अंक फलः इस सप्ताह आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा। आपका बीता हुआ समय आपके वर्तमान के लिए बाधा बन रहा है। पुरानी कड़वी यादों को भूलकर आगे बढ़ें और अच्छे भविष्य के निर्माण के लिए प्रयास बढ़ाएं। साझेदारी में व्यापार करते हैं तो पारदर्शिता बनाकर रखना जरुरी होगा अन्यथा भविष्य में दिक्कतें आएगी। इस दौरान वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा और प्रेम संबंधों में मधुरता देखने को मिलेगी। आठ जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः नरेंद्र मोदी, सौरव गांगुली, रितेश देशमुख, जॉन अब्राहम, बेंजामिन फ्रेंकलिन, शिल्पा शेट्टी, अनिल कुंबले, मनमोहन सिंह। अंकः नौ अंक फलः आर्थिक दृष्टि से यह सप्ताह आपके लिए उपलब्धिपूर्ण रहने वाला है। हालाँकि इसकी अधिकतम सफलता आपकी मेहनत और सूझबूझ पर ज्यादा निर्भर करेगी। किसी परिचिति की बात में आकर पैसों से जुड़ा कोई फैसला न करें। संतान के अधिक मन लगाकर पढ़ाई करने से आपको निश्चिंतता अनुभव होगी। हालाँकि खुद के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए आप पर्याप्त समय निकाल पाने में असमर्थ रहेंगे। नौ जन्मांक वाली मशहूर शख्सियतेंः सलमान खान, अक्षय कुमार, फरहान अख्तर, गैलिलियो, प्रियंका चोपड़ा, सोनम कपूर, सुरेश रैना। "इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्स माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। "
उसके पुत्र मूलुक ( मूलु ) का पुत्र था और चलभी सं० ६११ ( वि० सं० १२८७ ) में राज्य कर रहा था, जैसा कि उसके घेलाणा के शिलालेख से निश्चित है । सेजक के कई पुत्र थे; क्योंकि मांगरोल के लेख में 'पुत्र' शब्द बहुवचन में रखा है; किन्तु नाम दो-मूलुक और सोमराज के ही दिये हैं। ऐसी दशा में सारंग के विषय में निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता । खेड़के गोहिलों का राज्य राठौड़ सीहा ने नहीं; किन्तु उसके पुत्र स्थान ने गोहिलों के मंत्री डाभी राजपूर्वो के विश्वासघात करने पर वि० सं० १३४० ( ई० स० १२८३ ) के आसपास लिया था। उससे लगभग १५० वर्ष पूर्व ही सेजक के पूर्वज ( गोहित ) मारवाड़ छोड़ कर गुजरात में चले गये थे और जो गोहिल वहां ( खेड़ में ) रहे, उनका राज्य ने लिया था। अब भी जोधपुर राज्य में 'गोहितों की ढाणी' नामका एक छोटा सा ठिकाना है, जहां गोहिल, मेवाड़ के राजाओं के वंशज माने जाते हैं । अतएव काठियावाड़ आदि के गोहिलों का मेवाड़ के गुहिलवंशी राजाओं के वंशज और सूर्यवंशीहोना सिद्ध है, जैसा कि काठियावाड़ में पहले माना जाता था । वि० सं० की १५वीं शताब्दी के बने हुए 'मंडलीक काव्य' में, जिसमें जूनागढ़ ( गिरनार ) के राजाओं का इतिहास है, काठियावाड़ के गोहिलों को सूर्य वंशी और झालों को चन्द्रवंशी लिखा है 3 । कर्नल टॉड कर्नल वॉट्सन", दीवान बहांदुर रणछोड़भाई उदयास आदि विद्वानों ने भी उनको सूर्यवंशी ही माना है । १ एपिग्राफ़िया इण्डिका; जि० २० के परिशिष्ट में प्रकाशित इन्स्क्रिप्शन्स ऑफ़ नॉर्दर्न इन्डिया, पृ० १३२; लेख संख्या १८२ । २ तवारीख जागीरदारान राज मारवाड़; पृ० २५८ । ३ र विविधूद्धव गोहिल फल्लकेंर्व्यजनवानरमाजनधारक । विविधत्रर्तनसंवित कारणैः ससमदै समः समसेव्यत ।। ४ टॉड राजस्थाम; जिल्द १, पृ० १२३; फलकत्ता संस्करण । ५ वॉटसन; बॉम्बे गेजेटियर; जि० ८ काठियावाड़; पृ० २८२ । ६ रासमाला ( गुजराती अनुवाद); दूसरा संस्करण पृ ७१० टिप्पण १ } ऊपर उद्धृत किये हुए प्रमाणों से स्पष्ट है कि काठियावाड़ आदि के गोहिल शक संवत् के प्रवर्तक ( सातवाहन ) वंशी शालिवाहन के वंशज नहीं; किंन्तु मेवाड़ के गुहिलवंशी शालिवाहन के वंशज हैं और सूर्यवंशी हैं। भाटों ने अपने ऐतिहासिक ज्ञान के कारण उनको चन्द्रवंशी बना दिया है । सुधा ( मासिक पत्रिका ), लखनऊ, वर्ष ६, ई०स० १६३२
उसके पुत्र मूलुक का पुत्र था और चलभी संशून्य छः सौ ग्यारह में राज्य कर रहा था, जैसा कि उसके घेलाणा के शिलालेख से निश्चित है । सेजक के कई पुत्र थे; क्योंकि मांगरोल के लेख में 'पुत्र' शब्द बहुवचन में रखा है; किन्तु नाम दो-मूलुक और सोमराज के ही दिये हैं। ऐसी दशा में सारंग के विषय में निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता । खेड़के गोहिलों का राज्य राठौड़ सीहा ने नहीं; किन्तु उसके पुत्र स्थान ने गोहिलों के मंत्री डाभी राजपूर्वो के विश्वासघात करने पर विशून्य संशून्य एक हज़ार तीन सौ चालीस के आसपास लिया था। उससे लगभग एक सौ पचास वर्ष पूर्व ही सेजक के पूर्वज मारवाड़ छोड़ कर गुजरात में चले गये थे और जो गोहिल वहां रहे, उनका राज्य ने लिया था। अब भी जोधपुर राज्य में 'गोहितों की ढाणी' नामका एक छोटा सा ठिकाना है, जहां गोहिल, मेवाड़ के राजाओं के वंशज माने जाते हैं । अतएव काठियावाड़ आदि के गोहिलों का मेवाड़ के गुहिलवंशी राजाओं के वंशज और सूर्यवंशीहोना सिद्ध है, जैसा कि काठियावाड़ में पहले माना जाता था । विशून्य संशून्य की पंद्रहवीं शताब्दी के बने हुए 'मंडलीक काव्य' में, जिसमें जूनागढ़ के राजाओं का इतिहास है, काठियावाड़ के गोहिलों को सूर्य वंशी और झालों को चन्द्रवंशी लिखा है तीन । कर्नल टॉड कर्नल वॉट्सन", दीवान बहांदुर रणछोड़भाई उदयास आदि विद्वानों ने भी उनको सूर्यवंशी ही माना है । एक एपिग्राफ़िया इण्डिका; जिशून्य बीस के परिशिष्ट में प्रकाशित इन्स्क्रिप्शन्स ऑफ़ नॉर्दर्न इन्डिया, पृशून्य एक सौ बत्तीस; लेख संख्या एक सौ बयासी । दो तवारीख जागीरदारान राज मारवाड़; पृशून्य दो सौ अट्ठावन । तीन र विविधूद्धव गोहिल फल्लकेंर्व्यजनवानरमाजनधारक । विविधत्रर्तनसंवित कारणैः ससमदै समः समसेव्यत ।। चार टॉड राजस्थाम; जिल्द एक, पृशून्य एक सौ तेईस; फलकत्ता संस्करण । पाँच वॉटसन; बॉम्बे गेजेटियर; जिशून्य आठ काठियावाड़; पृशून्य दो सौ बयासी । छः रासमाला ; दूसरा संस्करण पृ सात सौ दस टिप्पण एक } ऊपर उद्धृत किये हुए प्रमाणों से स्पष्ट है कि काठियावाड़ आदि के गोहिल शक संवत् के प्रवर्तक वंशी शालिवाहन के वंशज नहीं; किंन्तु मेवाड़ के गुहिलवंशी शालिवाहन के वंशज हैं और सूर्यवंशी हैं। भाटों ने अपने ऐतिहासिक ज्ञान के कारण उनको चन्द्रवंशी बना दिया है । सुधा , लखनऊ, वर्ष छः, ईशून्यसशून्य एक हज़ार छः सौ बत्तीस
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रविवार को 248 नये कोरोना संक्रमितों के मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 5447 हो गयी है। आधिकारिक सूत्रो ने बताया कि आज प्राप्त जांच रिपोर्ट में जिले में 248 नये लोग कोरोना संक्रमित मिले है,जिन्हें मिलाकर पॉजिटिवों की संख्या 5447 तक पहुंच गयी। अभी तक 1079 मरीज स्वस्थ्य होने के बाद घर चले गये हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान अब तक 86 लोगों की मृत्यु हो चुकी है । उन्होंने बताया कि अभी 2501 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज विभिन्न कोविड अस्पतालों में चल रहा है। जिला प्रशासन ने लोगों को संक्रमण को रोकने के लिए जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रविवार को दो सौ अड़तालीस नये कोरोना संक्रमितों के मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़कर पाँच हज़ार चार सौ सैंतालीस हो गयी है। आधिकारिक सूत्रो ने बताया कि आज प्राप्त जांच रिपोर्ट में जिले में दो सौ अड़तालीस नये लोग कोरोना संक्रमित मिले है,जिन्हें मिलाकर पॉजिटिवों की संख्या पाँच हज़ार चार सौ सैंतालीस तक पहुंच गयी। अभी तक एक हज़ार उन्यासी मरीज स्वस्थ्य होने के बाद घर चले गये हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान अब तक छियासी लोगों की मृत्यु हो चुकी है । उन्होंने बताया कि अभी दो हज़ार पाँच सौ एक कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज विभिन्न कोविड अस्पतालों में चल रहा है। जिला प्रशासन ने लोगों को संक्रमण को रोकने के लिए जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
कनाडा के एक अस्पताल में भर्ती कादर खान की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। करीब 81 साल के कादर खान को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वो कोमा में चले गए। खबर है कि उनकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। कादर खान की सलामती की दुआ हर कोई कर रहा है। बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं वहीं ट्विटर पर भी उनके फैंस का यही हाल है। सूत्रों की मानें तो कादर खान अपनी आंखों से लोगों से कॉनटेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। बाइपेप वेंटीलेटर को हटा लिया गया है और Valve Oxygen लगा दिया गया है। कादर खान को अभी भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। कादर खान प्रोगेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर के शिकार है। इस बीमारी की वजह से कादर खान का दिमाग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। नगीना राय नाम के एक यूजर ने लिखा- आप बहुत अच्छे एक्टर हैं. . हम आपकी सलामती की दुआ करते हैं। हम आपसे प्यार करते हैं और जल्द आपको किसी और फिल्म में देखना चाहते हैं। एक यूजर ने लिखा- आप जल्दी ठीक हो जाएं. . . आपने मेरे बचपन को खुशनुमा बनाया है. . . गेट वैल सून सर. . . । एक यूजर ने लिखा- अल्लाह आपको सेहत और तंदुरुस्ती अता फरमाए. . । एक और यूजर ने लिखा - 'भगवान करे वह जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। बॉलीवुड के सबसे होनहार कॉमेडियन हैं कादर खान। ' कादर खान साल 1973 में पहली फिल्म 'दाग' में नजर आए थे। इस फिल्म में कादर खान वकील की भूमिका में थे। कहा जाता है कि कादर खान के कॉलेज ड्रामा में किए गए काम से दिलीप कुमार इतने इंप्रेस हुए थे कि उन्होंने कादर खान को दो फिल्मों 'सगीना' और 'बैराग' के लिए साइन कर लिया था। कादर खान ने करीब 300 फिल्मों में काम किया है। इसके साथ ही करीब हिंदी और उर्दू में 250 फिल्मों के डायलॉग भी लिखे हैं।
कनाडा के एक अस्पताल में भर्ती कादर खान की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। करीब इक्यासी साल के कादर खान को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वो कोमा में चले गए। खबर है कि उनकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। कादर खान की सलामती की दुआ हर कोई कर रहा है। बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं वहीं ट्विटर पर भी उनके फैंस का यही हाल है। सूत्रों की मानें तो कादर खान अपनी आंखों से लोगों से कॉनटेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। बाइपेप वेंटीलेटर को हटा लिया गया है और Valve Oxygen लगा दिया गया है। कादर खान को अभी भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। कादर खान प्रोगेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर के शिकार है। इस बीमारी की वजह से कादर खान का दिमाग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। नगीना राय नाम के एक यूजर ने लिखा- आप बहुत अच्छे एक्टर हैं. . हम आपकी सलामती की दुआ करते हैं। हम आपसे प्यार करते हैं और जल्द आपको किसी और फिल्म में देखना चाहते हैं। एक यूजर ने लिखा- आप जल्दी ठीक हो जाएं. . . आपने मेरे बचपन को खुशनुमा बनाया है. . . गेट वैल सून सर. . . । एक यूजर ने लिखा- अल्लाह आपको सेहत और तंदुरुस्ती अता फरमाए. . । एक और यूजर ने लिखा - 'भगवान करे वह जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। बॉलीवुड के सबसे होनहार कॉमेडियन हैं कादर खान। ' कादर खान साल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में पहली फिल्म 'दाग' में नजर आए थे। इस फिल्म में कादर खान वकील की भूमिका में थे। कहा जाता है कि कादर खान के कॉलेज ड्रामा में किए गए काम से दिलीप कुमार इतने इंप्रेस हुए थे कि उन्होंने कादर खान को दो फिल्मों 'सगीना' और 'बैराग' के लिए साइन कर लिया था। कादर खान ने करीब तीन सौ फिल्मों में काम किया है। इसके साथ ही करीब हिंदी और उर्दू में दो सौ पचास फिल्मों के डायलॉग भी लिखे हैं।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को लिखने में और इसकी गुणवत्ता सुधारने में लेखकों ने अपनी स्वेच्छा से (volunteer authors) कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को लिखने में और इसकी गुणवत्ता सुधारने में लेखकों ने अपनी स्वेच्छा से (volunteer authors) कार्य किया। यह आर्टिकल २८,६९६ बार देखा गया है। जब आप यह निर्णय करते हैं कि आप नौकरी छोड़ देंगे और कुछ और करने के लिए तत्पर हो जाते हैं, तो आपको अपने नियोक्ता को अपने अभिप्राय के बारे में कम से कम 2 हफ्ते पहले बता देना चाहिए। अपने बॉस को विनम्र लेकिन दृढ़ दो हफ्ते का नोटिस कैसे लिखा जाय यह सीखिए। विधि 1 का 3: {"smallUrl":"https:\/\/www2अपने नियोक्ता को कम से कम दो हफ्ते देंः आजकल, बहुत से कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर दो हफ्ते पहले त्यागपत्र देने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन ऐसा करना अभी भी व्यावसायिक शिष्टाचार समझा जाता है। - अगर आप दो हफ़्तों से पहले छोड़ते हैं, तो भावी या प्रत्याशित नियोक्ता यह सोच सकते हैं कि आप उनके साथ भी ऐसा ही करेंगे। - अगर आपकी कंपनी आजकल एक व्यस्त दौर से गुज़र रही है,आप केवल दो के बजाय चार हफ़्ते का नोटिस देने के बारे में सोच सकते हैं। - वरिष्ठ प्रबंधक और अन्य कर्मचारी जो फ़ूड चेन को चलाते हैं उन्हें दो हफ़्ते से अधिक समय देने के बारे में विचार करना चाहिए। सामान्य नियमानुसार, आपको अपने पद के अनुसार जितना समय छुट्टी का मिलता है, उतना ही समय देना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आपको अपने पद के अनुसार तीन हफ्ते का अवकाश मिलता है, तो आप उसकी जगह "तीन हफ्तों का नोटिस"( three weeks notice) दें। {"smallUrl":"https:\/\/www4आप दोनों औपचारिक और मित्रवत बनिएः दो सप्ताह के नोटिस का पूरा टोन व्यावसायिक होना चाहिए, लेकिन इतना भी व्यावसायिक नहीं कि आप ठन्डे या कठोर हो जाएँ। विशेषकर आपको परम मित्र के टोन में पत्र लिखना चाहिए जैसा आप अपने नियोक्ता के साथ में पहले प्रयोग करते रहे हैं। - अगर आपका अपने बौस के साथ सम्प्रेषण सदा कठोर, व्यावसायिक ढंग का रहा है तो आप उस टोन को अपने दो हफ्ते के नोटिस में जारी रखिये। इसके विपरीत, अगर आप अपने बॉस से व्यक्तिगत रूप से सम्प्रेषण करते हैं, तो और व्यक्तिगत टोन से परेशान मत होइए। एक व्यक्तिगत टोन उपयुक्त है जब तक कि वह अनौपचारिक और लापरवाह न हो। - अच्छा उदाहरणः "मैं बहुत धन्यवाद देता हूँ आपके लिए काम करके जो मुझे अनुभव और विकास प्राप्त हुआ है" (working for you"I am very thankful for the experience and growth has afforded me5सकारात्मक टोन रखेंः यह आपके कार्मिक फोल्डर में आख़िरी डॉक्यूमेंट होगा, इसलिए इसे अच्छा प्रभाव छोड़ना चाहिए। यद्यपि आप जिस नौकरी को छोड़ रहे हैं उससे नफ़रत करते हैं और आप आगे कंपनी में किसी से भी कुछ नहीं चाहते हैं, फिर भी आपको पुल जलाने से अच्छा है कि आप उसे अखंड रखें। - अगर आपके भावी नियोक्ता आपके पूर्व के नियोक्ता को बुलाते हैं, और उनको यह पता चलता है कि आप दो हफ्ते का सकारात्मक नोटिस देके आये इससे आपकी छवि अच्छी होगी। यह लाभकारी भी है यद्यपि आपके पुरानी कंपनी के कर्मचारी जो आपकी फाइल को खींचने में लगे थे वह आपके बारे में कुछ नहीं जानते हैं। - अपने दो हफ्ते के नोटिस के समय में किसी को बिना काम का मत समझिये और न हि कंपनी की कार्यशैली की आलोचना कीजिये। {"smallUrl":"https:\/\/www7अपने नियोक्ता को बता दें यदि आप कोई बड़ी परियोजनाएं पूरी करना चाहते हैंः ज़िम्मेदारी और विश्वसनीयता की पराकाष्ठा में, आपको कोई भी लंबित या चालू परियोजनाएं नोट करनी चाहिए जो आपकी मदद के बिना धराशायी हो सकती हैं आपको संकल्प करना चाहिए कि आप उन परियोजनाओं को पूरा करेंगे और कंपनी को लडखडाने नहीं देंगे। - चालू परियोजनाएं और छोटी परियोजनाएं जो अन्य लोगों द्वारा आसानी से की जा सकती हैं उन्हें आप छोड़ सकते हैं। - यह आपके नियोक्ता पर अच्छा प्रभाव छोड़ता है।, इससे यह भी काफी संभव होता है कि आवश्यकता पड़ने पर वह किसी दूसरे नियोक्ता को अच्छी अनुशंसा दे दें। {"smallUrl":"https:\/\/www9प्रशंसा के साथ नोट को समाप्त करेंः यद्यपि आप अपने नियोक्ता को नोटिस में पहले भी धन्यवाद दे चुके हैं,फिर भी यह विवेकपूर्ण विचार है यदि आप पत्र के अंत में पुनः आभार प्रदर्शन करें। विधि 2 का 3: {"smallUrl":"https:\/\/www2ऊपर बाईं तरफ दिनांक डालेंः स्तरीय नियमों के अनुसार औपचारिक पत्र में तिथि इस तरह लिखी जाती है, आपको पेज के ऊपर बाईं तरफ़ महीना-दिनांक-वर्ष डालना चाहिए। महीने की वर्तनी लिखनी चाहिए, लेकिन दिनांक और वर्ष अंकों में होना चाहिए। - नोट करिए कि आपको सामान्यतयः दिनांक के ऊपर वापसी पता देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपका और आपके नियोक्ता का पता एक ही होगा। आप, फिर भी, यदि चाहें तो कंपनी का लेटरहेड प्रयोग कर सकते हैं जिसके ऊपर पता होगा। - आपको अपने बौस को उसी तरह संबोधित करना चाहिए जैसा कि आप सामान्य रूप से करते हैं, यद्यपि वह तरीका बिलकुल अनौपचारिक है। उदाहरण के लिए, अगर आप अपने बॉस का पहला नाम लेते हैं, तो लिखें "प्रिय जेनिफ़र" (Dear Jennifer), अगर आप केवल व्यावसायिक रूप से अंतिम नाम से अपने बोंस को बुलाते हैं तो, "प्रिय श्री स्मिथ" (Dear Ms। Smith) लिखें। - आपको साधारण रूप से एक मीटिंग पूर्वनिर्धारित करवानी पड़ेगी, लेकिन अगर आप छोटी कंपनी में काम कर रहे हैं और आपके अपने बॉस से नज़दीकी सम्बन्ध हैं, तो आप उनसे बिना पहले से बताये मिल सकते हैं। - प्रवेश करते ही अपने पीछे का दरवाज़ा बंद कर दें ताकि आपका वार्तालाप प्राइवेट रहे। - अपने बॉस को दो हफ्ते का नोटिस दें और जैसे ही आप देते हैं, आप उन्हें बताएं, कि पत्र किस बारे में है। - आपके बॉस संभवतः आपसे स्थितियों के बारे में जानना चाहेंगे। यद्यपि आपका पत्र आपके सामने रखे गए सभी प्रश्नों का उत्तर देता है, फिर भी हर प्रश्न का पूरा उत्तर दें। - जब आप कार्यालय छोड़ें तो अपने बॉस को धन्यवाद दें और हाथ मिलाएं। {"smallUrl":"https:\/\/www3कठोर परिश्रम करें और ढीले सिरों को चुस्त कर देंः अगर आपने अपने पत्र में, कार्य छोड़ने से पहले बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने का वादा किया है तो आपको उसका अनुपालन करते हुए उन परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए। - यदि आपने कोई वादे नहीं किये हैं, तो भी आप अपने कार्यकाल के अंतिम दो हफ़्तों में ढीले नहीं पड़ सकते हैं। संक्रमणकाल हरेक के लिए कठिन होता है, और यह आपका व्यावसायिक कर्तव्य है कि आप उसे अपने पुराने नियोक्ता के लिए उतना आसान बनाएं, जितना बना सकते हैं। - इसके विपरीत, अगर आपको संदेह होता है कि आपकी कंपनी आपके साथ अनुचित व्यवहार कर रही है क्योंकि आपने त्यागपत्र दिया है, तो आप उन्हें इसका फ़ायदा न उठाने दें, या वह अमानवीय तरह से अतिरिक्त काम देकर आपको उत्तेजित कर दें। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो २८,६९६ बार पढ़ा गया है।
विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को लिखने में और इसकी गुणवत्ता सुधारने में लेखकों ने अपनी स्वेच्छा से कार्य किया। विकीहाउ एक "विकी" है जिसका मतलब होता है कि यहाँ एक आर्टिकल कई सहायक लेखकों द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल को लिखने में और इसकी गुणवत्ता सुधारने में लेखकों ने अपनी स्वेच्छा से कार्य किया। यह आर्टिकल अट्ठाईस,छः सौ छियानवे बार देखा गया है। जब आप यह निर्णय करते हैं कि आप नौकरी छोड़ देंगे और कुछ और करने के लिए तत्पर हो जाते हैं, तो आपको अपने नियोक्ता को अपने अभिप्राय के बारे में कम से कम दो हफ्ते पहले बता देना चाहिए। अपने बॉस को विनम्र लेकिन दृढ़ दो हफ्ते का नोटिस कैसे लिखा जाय यह सीखिए। विधि एक का तीन: {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोअपने नियोक्ता को कम से कम दो हफ्ते देंः आजकल, बहुत से कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर दो हफ्ते पहले त्यागपत्र देने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन ऐसा करना अभी भी व्यावसायिक शिष्टाचार समझा जाता है। - अगर आप दो हफ़्तों से पहले छोड़ते हैं, तो भावी या प्रत्याशित नियोक्ता यह सोच सकते हैं कि आप उनके साथ भी ऐसा ही करेंगे। - अगर आपकी कंपनी आजकल एक व्यस्त दौर से गुज़र रही है,आप केवल दो के बजाय चार हफ़्ते का नोटिस देने के बारे में सोच सकते हैं। - वरिष्ठ प्रबंधक और अन्य कर्मचारी जो फ़ूड चेन को चलाते हैं उन्हें दो हफ़्ते से अधिक समय देने के बारे में विचार करना चाहिए। सामान्य नियमानुसार, आपको अपने पद के अनुसार जितना समय छुट्टी का मिलता है, उतना ही समय देना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आपको अपने पद के अनुसार तीन हफ्ते का अवकाश मिलता है, तो आप उसकी जगह "तीन हफ्तों का नोटिस" दें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारआप दोनों औपचारिक और मित्रवत बनिएः दो सप्ताह के नोटिस का पूरा टोन व्यावसायिक होना चाहिए, लेकिन इतना भी व्यावसायिक नहीं कि आप ठन्डे या कठोर हो जाएँ। विशेषकर आपको परम मित्र के टोन में पत्र लिखना चाहिए जैसा आप अपने नियोक्ता के साथ में पहले प्रयोग करते रहे हैं। - अगर आपका अपने बौस के साथ सम्प्रेषण सदा कठोर, व्यावसायिक ढंग का रहा है तो आप उस टोन को अपने दो हफ्ते के नोटिस में जारी रखिये। इसके विपरीत, अगर आप अपने बॉस से व्यक्तिगत रूप से सम्प्रेषण करते हैं, तो और व्यक्तिगत टोन से परेशान मत होइए। एक व्यक्तिगत टोन उपयुक्त है जब तक कि वह अनौपचारिक और लापरवाह न हो। - अच्छा उदाहरणः "मैं बहुत धन्यवाद देता हूँ आपके लिए काम करके जो मुझे अनुभव और विकास प्राप्त हुआ है" , अगर आप केवल व्यावसायिक रूप से अंतिम नाम से अपने बोंस को बुलाते हैं तो, "प्रिय श्री स्मिथ" लिखें। - आपको साधारण रूप से एक मीटिंग पूर्वनिर्धारित करवानी पड़ेगी, लेकिन अगर आप छोटी कंपनी में काम कर रहे हैं और आपके अपने बॉस से नज़दीकी सम्बन्ध हैं, तो आप उनसे बिना पहले से बताये मिल सकते हैं। - प्रवेश करते ही अपने पीछे का दरवाज़ा बंद कर दें ताकि आपका वार्तालाप प्राइवेट रहे। - अपने बॉस को दो हफ्ते का नोटिस दें और जैसे ही आप देते हैं, आप उन्हें बताएं, कि पत्र किस बारे में है। - आपके बॉस संभवतः आपसे स्थितियों के बारे में जानना चाहेंगे। यद्यपि आपका पत्र आपके सामने रखे गए सभी प्रश्नों का उत्तर देता है, फिर भी हर प्रश्न का पूरा उत्तर दें। - जब आप कार्यालय छोड़ें तो अपने बॉस को धन्यवाद दें और हाथ मिलाएं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनकठोर परिश्रम करें और ढीले सिरों को चुस्त कर देंः अगर आपने अपने पत्र में, कार्य छोड़ने से पहले बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने का वादा किया है तो आपको उसका अनुपालन करते हुए उन परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए। - यदि आपने कोई वादे नहीं किये हैं, तो भी आप अपने कार्यकाल के अंतिम दो हफ़्तों में ढीले नहीं पड़ सकते हैं। संक्रमणकाल हरेक के लिए कठिन होता है, और यह आपका व्यावसायिक कर्तव्य है कि आप उसे अपने पुराने नियोक्ता के लिए उतना आसान बनाएं, जितना बना सकते हैं। - इसके विपरीत, अगर आपको संदेह होता है कि आपकी कंपनी आपके साथ अनुचित व्यवहार कर रही है क्योंकि आपने त्यागपत्र दिया है, तो आप उन्हें इसका फ़ायदा न उठाने दें, या वह अमानवीय तरह से अतिरिक्त काम देकर आपको उत्तेजित कर दें। सभी लेखकों को यह पृष्ठ बनाने के लिए धन्यवाद दें जो अट्ठाईस,छः सौ छियानवे बार पढ़ा गया है।
Bollywood News Updates: दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) अपनी फिल्म Gehraiyaan को लेकर चर्चे में बने हुए हैं। Bollywood News Updates Deepika Padukone सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) और Ananya Panday अपनी फिल्म Gehraiyaan को लेकर चर्चे में बने हुए हैं। Bollywood News Updates: पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि एक्ट्रेस काजल अग्रवाल (Kajal Aggarwal) मां बनने वाली है। जो कि अब सच हो गया है। Bollywood News Updates अभिनेत्री नोरा फतेही के कोरोना होने के बाद अब एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर (Mrunal Thakur) भी कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) आई है। बॅालीवुड के दबंग Salman Khan ने हाल ही में अपनी नई फिल्म 'नो एंट्री' के सीक्वल की अनाउंसमेंट की है। सलमान ने बताया कि बहुत जल्द वो इसके लिए शूटिंग शुरू करेंगे। Bollywood News Updates: साउथ सुपरस्टार विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) अपनी फिल्म 'लाइगरः साला क्रॉसब्रीड'(LIGER ) को लेकर सूर्खियों में बने हुए हैं।
Bollywood News Updates: दीपिका पादुकोण सिद्धांत चतुर्वेदी अपनी फिल्म Gehraiyaan को लेकर चर्चे में बने हुए हैं। Bollywood News Updates Deepika Padukone सिद्धांत चतुर्वेदी और Ananya Panday अपनी फिल्म Gehraiyaan को लेकर चर्चे में बने हुए हैं। Bollywood News Updates: पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि एक्ट्रेस काजल अग्रवाल मां बनने वाली है। जो कि अब सच हो गया है। Bollywood News Updates अभिनेत्री नोरा फतेही के कोरोना होने के बाद अब एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर भी कोरोना पॉजिटिव आई है। बॅालीवुड के दबंग Salman Khan ने हाल ही में अपनी नई फिल्म 'नो एंट्री' के सीक्वल की अनाउंसमेंट की है। सलमान ने बताया कि बहुत जल्द वो इसके लिए शूटिंग शुरू करेंगे। Bollywood News Updates: साउथ सुपरस्टार विजय देवरकोंडा अपनी फिल्म 'लाइगरः साला क्रॉसब्रीड' को लेकर सूर्खियों में बने हुए हैं।
बीजेपी के अध्यक्ष जे पी नड्डा के आमंत्रण पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के अध्यक्ष भारत के दौरे पर हैं। जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी प्रथम की नीति को दर्शाते हुए भारत प्रगति और समृद्धि की तलाश में नेपाल का एक अटल भागीदार बना रहेगा। नई दिल्लीः भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को प्रचंड के नाम से लोकप्रिय नेपाली नेता पुष्प कमल दहल से मुलाकात के बाद कहा कि प्रगति और समृद्धि की तलाश में भारत हमेशा नेपाल का एक अटल साझेदार रहेगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा के आमंत्रण पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के अध्यक्ष भारत के दौरे पर हैं। बैठक के बाद जयशंकर ने चर्चा को लाभदायक बताया। उन्होंने ट्वीट किया, 'भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जी के आमंत्रण पर भारत यात्रा पर आए प्रचंड का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। आर्थिक सहयोग पर ध्यान देने के साथ हमारे संबंधों को मजबूत करने पर एक उपयोगी चर्चा हुई। ' जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी प्रथम की नीति को दर्शाते हुए भारत प्रगति और समृद्धि की तलाश में नेपाल का एक अटल भागीदार बना रहेगा। नेपाल समग्र सामरिक हितों के संदर्भ में भारत के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के नेताओं ने अक्सर सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के संबंधों का जिक्र किया है। नेपाल पांच भारतीय राज्यों - सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1,850 किमी से अधिक की सीमा साझा करता है। स्थलरुद्ध देश नेपाल माल और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर करता है। वर्ष 1950 की शांति और मित्रता की भारत-नेपाल संधि दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों का आधार है।
बीजेपी के अध्यक्ष जे पी नड्डा के आमंत्रण पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के अध्यक्ष भारत के दौरे पर हैं। जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी प्रथम की नीति को दर्शाते हुए भारत प्रगति और समृद्धि की तलाश में नेपाल का एक अटल भागीदार बना रहेगा। नई दिल्लीः भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को प्रचंड के नाम से लोकप्रिय नेपाली नेता पुष्प कमल दहल से मुलाकात के बाद कहा कि प्रगति और समृद्धि की तलाश में भारत हमेशा नेपाल का एक अटल साझेदार रहेगा। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा के आमंत्रण पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के अध्यक्ष भारत के दौरे पर हैं। बैठक के बाद जयशंकर ने चर्चा को लाभदायक बताया। उन्होंने ट्वीट किया, 'भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जी के आमंत्रण पर भारत यात्रा पर आए प्रचंड का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। आर्थिक सहयोग पर ध्यान देने के साथ हमारे संबंधों को मजबूत करने पर एक उपयोगी चर्चा हुई। ' जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी प्रथम की नीति को दर्शाते हुए भारत प्रगति और समृद्धि की तलाश में नेपाल का एक अटल भागीदार बना रहेगा। नेपाल समग्र सामरिक हितों के संदर्भ में भारत के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के नेताओं ने अक्सर सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के संबंधों का जिक्र किया है। नेपाल पांच भारतीय राज्यों - सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ एक,आठ सौ पचास किमी से अधिक की सीमा साझा करता है। स्थलरुद्ध देश नेपाल माल और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर करता है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचास की शांति और मित्रता की भारत-नेपाल संधि दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों का आधार है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (5 दिसंबर) को चंदौली में कहा कि प्रदेश में अब दंगाई और उपद्रवी ही नहीं, कोरोना भी शांत भी हो जाता है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा सकते हैं और आज भाजपा पौराणिक स्थलों का निर्माण करा रही है। आज प्रदेश में माफिया और अपराधियों की इतनी जुर्रत नहीं कि वे व्यापारियों या बेटियों पर आँख उठाकर भी देख सकें। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि सत्ता में रहने हुए समाजवादी पार्टी की सरकार ने राम भक्तों पर गोलियाँ चलवाईं, लेकिन राम जन्मभूमि पर हमला करने वाले आतंकवादियों की पैरवी करते हुए उनके खिलाफ दायर मुकदमों को वापस लिया था। यही थी प्रदेश की सपा सरकार। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास बहुत पहले हो जाना चाहिए था, बुआ-बबुआ (अखिलेश यादव और मायावती) की जोड़ी क्या कर रही थी। इन्होंने केवल अपना विकास किया। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में सपा की चार बार सरकार रही, लेकिन प्रदेश का विकास करने के बजाय सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रही। आज प्रदेश में अगर कोई माफिया किसी व्यापारी को सताने की कोशिश करता है तो बुलडोजर चलवा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी माँ-बेटी की तरफ आँख उठाकर भी देखने की कोशिश की तो उसकी छाती पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। इस दौरान सीएम योगी ने चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में 30 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम आश्रम के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण भी शामिल है। दो महीने पहले बाबा कीनाराम के नाम से स्थापित मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। अब इसका सुंदरीकरण की योजना का शुभारंभ किया गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चंदौली में कहा कि प्रदेश में अब दंगाई और उपद्रवी ही नहीं, कोरोना भी शांत भी हो जाता है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा सकते हैं और आज भाजपा पौराणिक स्थलों का निर्माण करा रही है। आज प्रदेश में माफिया और अपराधियों की इतनी जुर्रत नहीं कि वे व्यापारियों या बेटियों पर आँख उठाकर भी देख सकें। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि सत्ता में रहने हुए समाजवादी पार्टी की सरकार ने राम भक्तों पर गोलियाँ चलवाईं, लेकिन राम जन्मभूमि पर हमला करने वाले आतंकवादियों की पैरवी करते हुए उनके खिलाफ दायर मुकदमों को वापस लिया था। यही थी प्रदेश की सपा सरकार। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास बहुत पहले हो जाना चाहिए था, बुआ-बबुआ की जोड़ी क्या कर रही थी। इन्होंने केवल अपना विकास किया। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में सपा की चार बार सरकार रही, लेकिन प्रदेश का विकास करने के बजाय सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रही। आज प्रदेश में अगर कोई माफिया किसी व्यापारी को सताने की कोशिश करता है तो बुलडोजर चलवा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी माँ-बेटी की तरफ आँख उठाकर भी देखने की कोशिश की तो उसकी छाती पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। इस दौरान सीएम योगी ने चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में तीस करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम आश्रम के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण भी शामिल है। दो महीने पहले बाबा कीनाराम के नाम से स्थापित मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। अब इसका सुंदरीकरण की योजना का शुभारंभ किया गया।
आम बजट 1 फरवरी 2023 को आने वाला है. अब ये तो बजट पेश होने के बाद पता चलेगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम आदमी को टैक्स में राहत देने वाली हैं या उसका बोझ बढ़ने वाला है. लेकिन सरकार को ये टैक्स वसूलने के लिए संसद से एक विधेयक पेश कराना होता है. इसे फाइनेंस बिल कहते हैं. क्या होता है ये बिल, बजट के साथ क्यों लाया जाता है और क्यों जरूरी है इस बिल को लाना. टीवी9 भारतवर्ष के डिजिटल प्लेटफॉर्म मनी9 के बजट गुरुकुल की इस क्लास में आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारी मिल जाएगी.
आम बजट एक फरवरी दो हज़ार तेईस को आने वाला है. अब ये तो बजट पेश होने के बाद पता चलेगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम आदमी को टैक्स में राहत देने वाली हैं या उसका बोझ बढ़ने वाला है. लेकिन सरकार को ये टैक्स वसूलने के लिए संसद से एक विधेयक पेश कराना होता है. इसे फाइनेंस बिल कहते हैं. क्या होता है ये बिल, बजट के साथ क्यों लाया जाता है और क्यों जरूरी है इस बिल को लाना. टीवीनौ भारतवर्ष के डिजिटल प्लेटफॉर्म मनीनौ के बजट गुरुकुल की इस क्लास में आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारी मिल जाएगी.
येसिल्कोय अस्पताल का निर्माण, जो बंद अतातुर्क हवाई अड्डे के दो रनवे पर बनाया गया था, 2 बिलियन डॉलर की लागत से जारी है। सीएचपी के काराबाट ने कहा, "उन्होंने रणनीतिक महत्व के बिंदुओं को नष्ट कर दिया।" SÖZCÜ से यूसुफ डेमीर की खबर के अनुसार; "इस्तांबुल में येसिल्कोय अस्पताल का अधिकांश कच्चा निर्माण, जो महामारी के कारण शुरू किया गया था, पूरा हो चुका है। हवाई तस्वीरों से एक बार फिर पता चला कि किस तरह 2 अरब डॉलर की लागत से रनवे पर खड़ा अस्पताल और बंद किया गया अतातुर्क हवाई अड्डा बेकार हो गया। अतातुर्क हवाई अड्डे के तीन रनवे में से दो, जो येसिल्कोय अस्पताल के निर्माण के दौरान बंद कर दिए गए थे, टूटकर नष्ट हो गए। अरबों लीरा के निर्माण मूल्य के साथ केवल दो रनवे पर एक अस्पताल का निर्माण एक अस्पताल के बजाय अतातुर्क हवाई अड्डे को नष्ट करने के लिए एक ऑपरेशन माना जाता है। सीएचपी इस्तांबुल के डिप्टी ओज़गुर कराबात ने कहा, "एएचएल में तीन रनवे थे। उनमें से दो, जिन्हें उत्तर-दक्षिण के नाम से जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 3 हजार मीटर लंबे और 45 मीटर चौड़े हैं, और एक 2 मीटर लंबा और 500 मीटर चौड़ा है। दोनों लंबे ट्रैक 'हेड ब्रोकन' थे। इसलिए, दोनों रनवे अनुपयोगी हो गए। उन्होंने रणनीतिक बिंदुओं को नष्ट कर दिया," उन्होंने कहा।
येसिल्कोय अस्पताल का निर्माण, जो बंद अतातुर्क हवाई अड्डे के दो रनवे पर बनाया गया था, दो बिलियन डॉलर की लागत से जारी है। सीएचपी के काराबाट ने कहा, "उन्होंने रणनीतिक महत्व के बिंदुओं को नष्ट कर दिया।" SÖZCÜ से यूसुफ डेमीर की खबर के अनुसार; "इस्तांबुल में येसिल्कोय अस्पताल का अधिकांश कच्चा निर्माण, जो महामारी के कारण शुरू किया गया था, पूरा हो चुका है। हवाई तस्वीरों से एक बार फिर पता चला कि किस तरह दो अरब डॉलर की लागत से रनवे पर खड़ा अस्पताल और बंद किया गया अतातुर्क हवाई अड्डा बेकार हो गया। अतातुर्क हवाई अड्डे के तीन रनवे में से दो, जो येसिल्कोय अस्पताल के निर्माण के दौरान बंद कर दिए गए थे, टूटकर नष्ट हो गए। अरबों लीरा के निर्माण मूल्य के साथ केवल दो रनवे पर एक अस्पताल का निर्माण एक अस्पताल के बजाय अतातुर्क हवाई अड्डे को नष्ट करने के लिए एक ऑपरेशन माना जाता है। सीएचपी इस्तांबुल के डिप्टी ओज़गुर कराबात ने कहा, "एएचएल में तीन रनवे थे। उनमें से दो, जिन्हें उत्तर-दक्षिण के नाम से जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तीन हजार मीटर लंबे और पैंतालीस मीटर चौड़े हैं, और एक दो मीटर लंबा और पाँच सौ मीटर चौड़ा है। दोनों लंबे ट्रैक 'हेड ब्रोकन' थे। इसलिए, दोनों रनवे अनुपयोगी हो गए। उन्होंने रणनीतिक बिंदुओं को नष्ट कर दिया," उन्होंने कहा।
बिहार के इन 4 जिलों में 30 हजार ड्राइवर फेल हो चुके लाइसेंस पर चला रहे गाड़ी, कहां सोया है परिवहन विभाग? जिला मुख्यालय के समीप गाड़ी चलाने वाले लोगों का रैंडमली ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच की गयी। एनजीओ के निदेशक ने बताया कि सीमांचल के इलाकों के लोग ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बहुत संजीदा नहीं हैं। बिहार में हजारों लोग फेल हो चुके लाइसेंस पर गाड़ी चला रहे हैं। सिर्फ पूर्णिया प्रमंडल के चार जिलों में 30 हजार से अधिक चालक एक्सपायरी ड्राइविंग लाइसेंस से ही गाड़ी चला रहे हैं। परिवहन विभाग का अभियान नहीं चलाए जाने का नतीजा है कि ड्राइविंग लाइसेंस फेल होने के बावजूद भी लोग इसे रिन्यूअल कराने में भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिले के एसपी के आदेश पर थानाध्यक्ष के द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है लेकिन इस दौरान पुलिसकर्मियों का मुख्य फोकस हेलमेट पर ही रह जाता है। कुछ ही फीसदी मामले में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच पड़ताल की जाती है जबकि सरकार के नियमानुसार ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल कराने में ड्राइविंग टेस्ट भी दोबारा से नहीं देना पड़ता है। यह प्रक्रिया काफी आसानी से ऑनलाइन कहीं से भी बैठे की जा सकती है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक निजी एनजीओ की एजेंसी के द्वारा पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के जिला मुख्यालय के समीप गाड़ी चलाने वाले लोगों का रैंडमली ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच की गयी। निजी एनजीओ के निदेशक ने बताया कि सीमांचल के इलाकों के लोग ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बहुत ज्यादा संजीदा नहीं है। इस कारण अनदेखी करते हैं। 90मामलों में पुलिस की टीम के द्वारा सिर्फ प्रथम दृष्टया हेलमेटनहीं रहने की जांच कर मामले की इतिश्री कर देते हैं। यातायात प्रभारी मुकेश कुमार मंडल ने बताया कि अब हेलमेट के साथ लाइसेंस, प्रदूषण समेत कई अन्य कागजातों की जांच भी करने का निर्देश दिया जाएगा। जिला परिवहन पदाधिकारी रामशंकर का कहना है कि जुलाई माह के प्रथम सप्ताह से जिले के सीमाई इलाकों तक सघन रूप से ड्राइविंग लाइसेंस चेकिंग को लेकर अभियान चलाया जाएगा। एमवीआई के कुछ कर्मी प्रशिक्षण में गए हैं वह लौट आएंगे। उसके बाद अभियान चलेगा। आनन-फानन में जब भी जांच के दौरान उपस्थित पुलिसकर्मी ड्राइविंग लाइसेंस मांगते हैं तो लोग फेल हो चुकी ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर ही चलते बन जाते हैं। ऐसे पुलिसकर्मी बारीकी से उनके लाइसेंस की जांच भी नहीं करते हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी रामशंकर का कहना कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस या एक्सपायर रहने पर चालकों से पांच हजार रुपया का जुर्माना लेने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कोई भी चालक घर बैठेऑनलाइन लाइसेंस का रिन्यूअल करा सकते है। इसमें कोई भी परेशानी है। रैंडमली जांच किए जाने के दौरान15 हजार से अधिक पूर्णिया जिले के लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस फेल मिला जबकि किशनगंज में करीब सात हजार, कटिहार में छह हजार और अररिया में पांच हजार लोगों का लाइसेंस फेल पाया गया। व्यवसायिक लाइसेंस की अवधि पहले तीन साल की होती थी। केंद्र सरकार ने नए एमबी एक्ट में इसे बढ़ाकर पांच साल कर दिया है। लाइसेंस धारक को पांच साल में लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होगा। जबकि परिवहन विभाग ज्वलनशील पदार्थ के चालकों को पहले एक साल के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता था। अब इसकी अवधि भी बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। फेल ड्राइविंग लाइसेंस लेकर चलने में पूर्णिया जिला के लोग अव्वल हैं। वहीं दूसरे स्थान पर किशनगंज तीसरे स्थान पर कटिहार और चौथे स्थान पर अररिया जिला के लोग हैं। बताया जाता है कि पूर्णिया प्रमंडल में हजारों की संख्या में प्रतिदिन दूसरे जिले के लोग भी आते हैं। इनमें अधिकांश लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं रहता है। पड़ोसी देश नेपाल और सीमाई इलाके के राज्य पश्चिम बंगाल के लोग भी सीमांचल के अलग-अलग जिलों में बिना लाइसेंस की ही धड़ल्ले से घूमते हैं। हालांकि इनमें से कई लोगों के पास बिहार के ही अलग-अलग जिलों के बने लाइसेंस भी होते हैं, जो सिर्फ कागज मात्र का रहता है। जबकि सरकार ने डीएल जारी करने को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। इस नियम के तहत 30 वर्ष से कम उम्र का कोई व्यक्ति डीएल बनवाता है तो उसे 40 वर्ष पूरे होने तक लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके बाद लाइसेंस धारक को लाइसेंस रिन्यूअल कराना होगा। 30 साल से अधिक और 55 वर्ष से कम आयु वाले को 10 वर्ष के लिए लाइसेंस जारी होगा। इसके बाद लाइसेंस का नवीनीकरण होगा।
बिहार के इन चार जिलों में तीस हजार ड्राइवर फेल हो चुके लाइसेंस पर चला रहे गाड़ी, कहां सोया है परिवहन विभाग? जिला मुख्यालय के समीप गाड़ी चलाने वाले लोगों का रैंडमली ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच की गयी। एनजीओ के निदेशक ने बताया कि सीमांचल के इलाकों के लोग ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बहुत संजीदा नहीं हैं। बिहार में हजारों लोग फेल हो चुके लाइसेंस पर गाड़ी चला रहे हैं। सिर्फ पूर्णिया प्रमंडल के चार जिलों में तीस हजार से अधिक चालक एक्सपायरी ड्राइविंग लाइसेंस से ही गाड़ी चला रहे हैं। परिवहन विभाग का अभियान नहीं चलाए जाने का नतीजा है कि ड्राइविंग लाइसेंस फेल होने के बावजूद भी लोग इसे रिन्यूअल कराने में भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिले के एसपी के आदेश पर थानाध्यक्ष के द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता है लेकिन इस दौरान पुलिसकर्मियों का मुख्य फोकस हेलमेट पर ही रह जाता है। कुछ ही फीसदी मामले में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच पड़ताल की जाती है जबकि सरकार के नियमानुसार ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल कराने में ड्राइविंग टेस्ट भी दोबारा से नहीं देना पड़ता है। यह प्रक्रिया काफी आसानी से ऑनलाइन कहीं से भी बैठे की जा सकती है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक निजी एनजीओ की एजेंसी के द्वारा पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के जिला मुख्यालय के समीप गाड़ी चलाने वाले लोगों का रैंडमली ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जांच की गयी। निजी एनजीओ के निदेशक ने बताया कि सीमांचल के इलाकों के लोग ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बहुत ज्यादा संजीदा नहीं है। इस कारण अनदेखी करते हैं। नब्बेमामलों में पुलिस की टीम के द्वारा सिर्फ प्रथम दृष्टया हेलमेटनहीं रहने की जांच कर मामले की इतिश्री कर देते हैं। यातायात प्रभारी मुकेश कुमार मंडल ने बताया कि अब हेलमेट के साथ लाइसेंस, प्रदूषण समेत कई अन्य कागजातों की जांच भी करने का निर्देश दिया जाएगा। जिला परिवहन पदाधिकारी रामशंकर का कहना है कि जुलाई माह के प्रथम सप्ताह से जिले के सीमाई इलाकों तक सघन रूप से ड्राइविंग लाइसेंस चेकिंग को लेकर अभियान चलाया जाएगा। एमवीआई के कुछ कर्मी प्रशिक्षण में गए हैं वह लौट आएंगे। उसके बाद अभियान चलेगा। आनन-फानन में जब भी जांच के दौरान उपस्थित पुलिसकर्मी ड्राइविंग लाइसेंस मांगते हैं तो लोग फेल हो चुकी ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर ही चलते बन जाते हैं। ऐसे पुलिसकर्मी बारीकी से उनके लाइसेंस की जांच भी नहीं करते हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी रामशंकर का कहना कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस या एक्सपायर रहने पर चालकों से पांच हजार रुपया का जुर्माना लेने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कोई भी चालक घर बैठेऑनलाइन लाइसेंस का रिन्यूअल करा सकते है। इसमें कोई भी परेशानी है। रैंडमली जांच किए जाने के दौरानपंद्रह हजार से अधिक पूर्णिया जिले के लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस फेल मिला जबकि किशनगंज में करीब सात हजार, कटिहार में छह हजार और अररिया में पांच हजार लोगों का लाइसेंस फेल पाया गया। व्यवसायिक लाइसेंस की अवधि पहले तीन साल की होती थी। केंद्र सरकार ने नए एमबी एक्ट में इसे बढ़ाकर पांच साल कर दिया है। लाइसेंस धारक को पांच साल में लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होगा। जबकि परिवहन विभाग ज्वलनशील पदार्थ के चालकों को पहले एक साल के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता था। अब इसकी अवधि भी बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। फेल ड्राइविंग लाइसेंस लेकर चलने में पूर्णिया जिला के लोग अव्वल हैं। वहीं दूसरे स्थान पर किशनगंज तीसरे स्थान पर कटिहार और चौथे स्थान पर अररिया जिला के लोग हैं। बताया जाता है कि पूर्णिया प्रमंडल में हजारों की संख्या में प्रतिदिन दूसरे जिले के लोग भी आते हैं। इनमें अधिकांश लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं रहता है। पड़ोसी देश नेपाल और सीमाई इलाके के राज्य पश्चिम बंगाल के लोग भी सीमांचल के अलग-अलग जिलों में बिना लाइसेंस की ही धड़ल्ले से घूमते हैं। हालांकि इनमें से कई लोगों के पास बिहार के ही अलग-अलग जिलों के बने लाइसेंस भी होते हैं, जो सिर्फ कागज मात्र का रहता है। जबकि सरकार ने डीएल जारी करने को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। इस नियम के तहत तीस वर्ष से कम उम्र का कोई व्यक्ति डीएल बनवाता है तो उसे चालीस वर्ष पूरे होने तक लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके बाद लाइसेंस धारक को लाइसेंस रिन्यूअल कराना होगा। तीस साल से अधिक और पचपन वर्ष से कम आयु वाले को दस वर्ष के लिए लाइसेंस जारी होगा। इसके बाद लाइसेंस का नवीनीकरण होगा।
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच अनिल कुंबले ने साल 2017 में अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफा देने का कारण विराट कोहली का कुंबले की कोचिंग से खुश नहीं होना बताया गया था. अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच एक साल पहले हुए इस विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. हाल ही में एक लीक हुए ईमेल से खुलासा हुआ है कि अनिल कुंबले को कोच पद से हटाने में विराट कोहली का हाथ था. वहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कोहली और कुंबले के बीच विवाद को अफवाह करार दिया था. वहीं एक लीक हुई ईमेल से पता चला है कि कुंबले हटाने में कोहली का हाथ था. दरअसल लीक हुए एक ईमेल से खुलासा हुआ है कि बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीओए प्रमुख विनोद राय को पत्र लिखकर कहा था कि विराट कोहली अक्सर बीसीसीआई सेक्रेटरी राहुल जौहरी को मैसेज भेजे जिसके बाद में कोच बदलना पड़ा. ये खुलासा करने वाली कोई और नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई क्रिकेट प्रशाकीय समित की सदस्य डियाना इडुल्जी हैं. डियाना इडुल्जी ने बीसीसीआई पर आरोप लगाया है कि रवि शास्त्री को भारतीय टीम का कोच बनाने में नियमों को ताक पर रख दिया गया था. डियाना इडुल्जी का कहना है कि विराट कोहली ने लगातार बीसीसीआई सेक्रेटरी राहुल जौहरी को ईमेल भेजे थे जो बाद में कोच कुंबले के इस्तीफे का कारण बने. बता दें टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और तत्कालीन कोच अनिल कुंबले और विराट कोहली के साथ सम्बंधों में दरार आ जाने के चलते जून 2017 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. डियाना इडुल्जी के मुताबिक, अनिल कुंबले जैसे लीजेंड क्रिकेटर को विलेन बना दिया गया और उन्होंने खुद विनम्रता दिखाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, मैं कुंबले का बहुत सम्मान करती हूं और उनके द्वारा लिए गए निर्णय की सराहना करती हूं, मैंने उस समय भी विरोध किया था. बता दें कि सीओए की सदस्य डियाना इडुल्जी का ये गुस्सा भारतीय महिला क्रिकेट टीम के चयन के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा गठित की गई एड हॉक कमेटी के गठन के बाद फूटा है. डियाना इडुल्जी का कहना है कि विराट कोहली की मांग पर जब रवि शास्त्री को टीम का कोच बनाया जा सकता है तो हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना के कहने पर रमेश पवार को महिला टीम का कोच क्यों नहीं बरकरार रखा जा सकता. गौरतलब है कि टी20 महिला विश्व कप के दौरान मिथाली राज और कोच रमेश पवार के सम्बंधों में दरार आ गई थी.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच अनिल कुंबले ने साल दो हज़ार सत्रह में अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफा देने का कारण विराट कोहली का कुंबले की कोचिंग से खुश नहीं होना बताया गया था. अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच एक साल पहले हुए इस विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. हाल ही में एक लीक हुए ईमेल से खुलासा हुआ है कि अनिल कुंबले को कोच पद से हटाने में विराट कोहली का हाथ था. वहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कोहली और कुंबले के बीच विवाद को अफवाह करार दिया था. वहीं एक लीक हुई ईमेल से पता चला है कि कुंबले हटाने में कोहली का हाथ था. दरअसल लीक हुए एक ईमेल से खुलासा हुआ है कि बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीओए प्रमुख विनोद राय को पत्र लिखकर कहा था कि विराट कोहली अक्सर बीसीसीआई सेक्रेटरी राहुल जौहरी को मैसेज भेजे जिसके बाद में कोच बदलना पड़ा. ये खुलासा करने वाली कोई और नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई क्रिकेट प्रशाकीय समित की सदस्य डियाना इडुल्जी हैं. डियाना इडुल्जी ने बीसीसीआई पर आरोप लगाया है कि रवि शास्त्री को भारतीय टीम का कोच बनाने में नियमों को ताक पर रख दिया गया था. डियाना इडुल्जी का कहना है कि विराट कोहली ने लगातार बीसीसीआई सेक्रेटरी राहुल जौहरी को ईमेल भेजे थे जो बाद में कोच कुंबले के इस्तीफे का कारण बने. बता दें टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और तत्कालीन कोच अनिल कुंबले और विराट कोहली के साथ सम्बंधों में दरार आ जाने के चलते जून दो हज़ार सत्रह में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. डियाना इडुल्जी के मुताबिक, अनिल कुंबले जैसे लीजेंड क्रिकेटर को विलेन बना दिया गया और उन्होंने खुद विनम्रता दिखाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, मैं कुंबले का बहुत सम्मान करती हूं और उनके द्वारा लिए गए निर्णय की सराहना करती हूं, मैंने उस समय भी विरोध किया था. बता दें कि सीओए की सदस्य डियाना इडुल्जी का ये गुस्सा भारतीय महिला क्रिकेट टीम के चयन के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा गठित की गई एड हॉक कमेटी के गठन के बाद फूटा है. डियाना इडुल्जी का कहना है कि विराट कोहली की मांग पर जब रवि शास्त्री को टीम का कोच बनाया जा सकता है तो हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना के कहने पर रमेश पवार को महिला टीम का कोच क्यों नहीं बरकरार रखा जा सकता. गौरतलब है कि टीबीस महिला विश्व कप के दौरान मिथाली राज और कोच रमेश पवार के सम्बंधों में दरार आ गई थी.
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा) हरियाणा में विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। इसी कड़ी करनाल से 26 लाख की ठगी का मामला आया है। मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित बेटे और बहू को विदेश भेजना चाहता था। करनाल में ऑस्ट्रेलिया में स्टडी बेस पर वीजा लगवाने के नाम पर एक व्यक्ति से दो आरोपियों ने 26 लाख 25 हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ित से पहले 20 लाख में बात फाइनल की और बाद में बार-बार पैनेल्टी दिखाकर हड़प लिए 26. 25 लाख रुपये। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गांव छपरा जागीर निवासी बलजीत ने सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने पुत्र रविंद्र व पुत्रवधु सोनिया को ऑस्ट्रेलिया स्टडी स्पाउस वीजा पर भेजना चाहता था। जिसके लिए उसने एक वीजा काउंसलर सेक्टर-सात निवासी गुरुवचन सिंह और गोंदर के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल एवं सेक्टर-13 निवासी ब्रह्मदत्त उर्फ अजीत से बातचीत की। दोनों आरोपियों ने उससे 20 लाख रुपये में वीजा लगवाने की बात फाइनल की। इसके बाद उन्होंने डीसीबी, आईडीएफसी व आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुलवाया और कहा कि उन्होंने दोनों बच्चों के एफडी करवानी है, फीस भरवानी है। वहीं उन्होंने सिक्योरिटी के तौर पर उससे बैंक की चेकबुक, एटीएम, पासबुक व कुछ चेक पर साइन करवाकर अपने पास रख लिए और अपनी कमीशन के तौर पर एक लाख दो हजार रुपये फरवरी 2022 को ले लिए। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी की फीस, ऑफर लेटर, इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, इंटरव्यू, वीजा, मेडिकल, फिंगर प्रिंट के नाम पर और बार-बार पैनेल्टी के दिखा-दिखाकर धीरे-धीरे उस पर से कुल 26 लाख 25 हजार रुपये हड़प लिए। पीड़ित ने बताया कि ये सब पैसा उसने घर, दुकान पर लोन लेकर और आढ़ती से रुपये उधार लेकर उन्हें दिए थे। इसके बाद आरोपियों ने उसको दोनों बच्चों के वीजा व ऑफर लेटर दे दिए। जब उन्होंने उसे चेक करवाया तो दोनों वीजा व ऑफर लेटर फर्जी निकले। इसके बाद उन्होंने आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने रुपये देने से साफ मना कर दिया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल हरियाणा में विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। इसी कड़ी करनाल से छब्बीस लाख की ठगी का मामला आया है। मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित बेटे और बहू को विदेश भेजना चाहता था। करनाल में ऑस्ट्रेलिया में स्टडी बेस पर वीजा लगवाने के नाम पर एक व्यक्ति से दो आरोपियों ने छब्बीस लाख पच्चीस हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ित से पहले बीस लाख में बात फाइनल की और बाद में बार-बार पैनेल्टी दिखाकर हड़प लिए छब्बीस. पच्चीस लाख रुपये। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गांव छपरा जागीर निवासी बलजीत ने सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने पुत्र रविंद्र व पुत्रवधु सोनिया को ऑस्ट्रेलिया स्टडी स्पाउस वीजा पर भेजना चाहता था। जिसके लिए उसने एक वीजा काउंसलर सेक्टर-सात निवासी गुरुवचन सिंह और गोंदर के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल एवं सेक्टर-तेरह निवासी ब्रह्मदत्त उर्फ अजीत से बातचीत की। दोनों आरोपियों ने उससे बीस लाख रुपये में वीजा लगवाने की बात फाइनल की। इसके बाद उन्होंने डीसीबी, आईडीएफसी व आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुलवाया और कहा कि उन्होंने दोनों बच्चों के एफडी करवानी है, फीस भरवानी है। वहीं उन्होंने सिक्योरिटी के तौर पर उससे बैंक की चेकबुक, एटीएम, पासबुक व कुछ चेक पर साइन करवाकर अपने पास रख लिए और अपनी कमीशन के तौर पर एक लाख दो हजार रुपये फरवरी दो हज़ार बाईस को ले लिए। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी की फीस, ऑफर लेटर, इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, इंटरव्यू, वीजा, मेडिकल, फिंगर प्रिंट के नाम पर और बार-बार पैनेल्टी के दिखा-दिखाकर धीरे-धीरे उस पर से कुल छब्बीस लाख पच्चीस हजार रुपये हड़प लिए। पीड़ित ने बताया कि ये सब पैसा उसने घर, दुकान पर लोन लेकर और आढ़ती से रुपये उधार लेकर उन्हें दिए थे। इसके बाद आरोपियों ने उसको दोनों बच्चों के वीजा व ऑफर लेटर दे दिए। जब उन्होंने उसे चेक करवाया तो दोनों वीजा व ऑफर लेटर फर्जी निकले। इसके बाद उन्होंने आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने रुपये देने से साफ मना कर दिया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
ज्योतिष शास्त्र की माने तो हिन्दू धर्म में व्यक्ति का भविष्य या उनके जीवन मे घटने वाली घटना जातक के राशि ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति पर निर्भर करती है। ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति जातक के जीवन को बहुत प्रभावित करती है। ऐसी परिस्थिति में कभी जातक को लाभ होता है तो कभी हानि होती है। कभी कभी यह लाभ हानि जातक को उचित और अनुचित कार्य करने के लिए प्रेरित भी करती है। क्या है मलमास ? सूर्य ग्रह जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है तब मलमास होता है क्योंकि सूर्य की किरण की वजह से बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। जबकि किसी भी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वृहस्पति का मजबूत होना बहुत ही आवश्यक होता है। क्योंकि वृहस्पति ग्रह को मुख्य रूप से वैवाहिक सुख और संतान देने वाला ग्रह माना जाता है। इसे अधिकमास, मलमास, मलिम्लुच मास और पुरुषोत्तममास भी कहा जाता है। इसलिए खरमास में सभी शुभ कार्य नहीं किए जाते। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, 12 महीनों में वरुण, सूर्य, भानु, तपन, चण्ड, रवि, गभस्ति, अर्यमा, हिरण्यरेता, दिवाकर, मित्र और विष्णु 12 मित्र होते हैं। खरमास का अर्थ होता है खराब महीना। यानी वह महीना जब सभी प्रकार के शुभ कार्य बंद हो कर दिए जाएं। इस मास में सूर्य प्रतिकूल होते हैं, इस धारणा के चलते माना जाता है कि हर कार्य में असफलता नजर आती है। अधिक मास को पहले बहुत अशुभ माना जाता था। बाद में श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया। तभी से अधिक मास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया। Note: भारत के विशेष क्षेत्र गंगा और गोदावरी के साथ-साथ उत्तर भारत के उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, राज्यों में सभी मांगलिक कार्य व यज्ञ करना इस मास मे निषेध होता है, जबकि पूर्वी व दक्षिण प्रदेशों में इस तरह का दोष नहीं माना गया है। तो चलिए आज इस आर्टिकल के माध्यम से यह जानते है कि वह कौन-कौन से कार्य हैं जो मलमास में नही करना चाहिए। हिंदू धर्म शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, सगाई, गृह प्रवेश, नए गृह का निर्माण इतयादि नही करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समयावधि के दौरान सूर्य गुरु की राशियों में रहता है, जिसके वजह से गुरु का प्रभाव कम हो जाता है। जबकि कोई भी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत ही आवश्यक होता है। वैदिक और ज्योतिष शास्त्र कहता है कि वृहस्पति किसी भी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में सुख और संतान देने का कारक होता है। वैदिक शास्त्र कहता है कि इस समयावधि के दौरान में किये गए विवाह जैसे शुभ कार्यों में पति पत्नी को किसी भी तरह के वैवाहिक सुख की प्राप्ति नहीं होती। इस तरह के रिश्ते में किसी भी तरह के शारीरिक सुख की भी प्राप्ति नहीं होती। इस तरह के विवाह मे पति-पत्नी में हमेशा अनबन बनी ही रहती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का विवाह करना है तो मलमास से पहले करें या फिर इस मास के खत्म हो जाने के बाद करें। यदि हिंदू धर्म शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास में किसी भी प्रकार का नया व्यवसाय या नये कार्य की शुरूआत नही करनी चाहिए। माना जाता है कि इस मास में नये व्यवसाय की शुरुआत करने से जातक को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। व्यापार में हमेशा पैसों की तंगी बनी ही रहती है। इसलिए कोई भी नया काम, नई नौकरी या बड़ा निवेश करने से इस मास मे बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास के दौरान किए गए कोई भी शुभ कार्य के मंगल परिणाम नहीं आते हैं। इसलिए इस मास में कोई भी मुंडन और कर्णवेध या फिर अन्य कोई संस्कार नहीं करना चाहिए। इस महीने में कोई गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। इस अवधि में कोई भी संपत्ति का क्रय या फिर विक्रय नहीं करना चाहिए। ऐसी संपत्ति भविष्य में आपका नुकसान करवा देती है। इस मास में सूर्य का गुरु राशि में गोचर होने की वजह से ये समय पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इस समय अनुष्ठान से जुड़े कर्म को साथ पितरों से संबंधित श्राद्ध कार्य करना भी अनुकूल माना गया है। इस मास में जलदान का भी बहुत महत्व माना जाता है। इस समय ब्रह्म मूहूर्त के समय किए गए स्नान को शरीर के लिए बहुत उपयोगी माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र की माने तो हिन्दू धर्म में व्यक्ति का भविष्य या उनके जीवन मे घटने वाली घटना जातक के राशि ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति पर निर्भर करती है। ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति जातक के जीवन को बहुत प्रभावित करती है। ऐसी परिस्थिति में कभी जातक को लाभ होता है तो कभी हानि होती है। कभी कभी यह लाभ हानि जातक को उचित और अनुचित कार्य करने के लिए प्रेरित भी करती है। क्या है मलमास ? सूर्य ग्रह जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है तब मलमास होता है क्योंकि सूर्य की किरण की वजह से बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। जबकि किसी भी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वृहस्पति का मजबूत होना बहुत ही आवश्यक होता है। क्योंकि वृहस्पति ग्रह को मुख्य रूप से वैवाहिक सुख और संतान देने वाला ग्रह माना जाता है। इसे अधिकमास, मलमास, मलिम्लुच मास और पुरुषोत्तममास भी कहा जाता है। इसलिए खरमास में सभी शुभ कार्य नहीं किए जाते। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, बारह महीनों में वरुण, सूर्य, भानु, तपन, चण्ड, रवि, गभस्ति, अर्यमा, हिरण्यरेता, दिवाकर, मित्र और विष्णु बारह मित्र होते हैं। खरमास का अर्थ होता है खराब महीना। यानी वह महीना जब सभी प्रकार के शुभ कार्य बंद हो कर दिए जाएं। इस मास में सूर्य प्रतिकूल होते हैं, इस धारणा के चलते माना जाता है कि हर कार्य में असफलता नजर आती है। अधिक मास को पहले बहुत अशुभ माना जाता था। बाद में श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया। तभी से अधिक मास का नाम पुरुषोत्तम मास हो गया। Note: भारत के विशेष क्षेत्र गंगा और गोदावरी के साथ-साथ उत्तर भारत के उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, राज्यों में सभी मांगलिक कार्य व यज्ञ करना इस मास मे निषेध होता है, जबकि पूर्वी व दक्षिण प्रदेशों में इस तरह का दोष नहीं माना गया है। तो चलिए आज इस आर्टिकल के माध्यम से यह जानते है कि वह कौन-कौन से कार्य हैं जो मलमास में नही करना चाहिए। हिंदू धर्म शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, सगाई, गृह प्रवेश, नए गृह का निर्माण इतयादि नही करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समयावधि के दौरान सूर्य गुरु की राशियों में रहता है, जिसके वजह से गुरु का प्रभाव कम हो जाता है। जबकि कोई भी शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत ही आवश्यक होता है। वैदिक और ज्योतिष शास्त्र कहता है कि वृहस्पति किसी भी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में सुख और संतान देने का कारक होता है। वैदिक शास्त्र कहता है कि इस समयावधि के दौरान में किये गए विवाह जैसे शुभ कार्यों में पति पत्नी को किसी भी तरह के वैवाहिक सुख की प्राप्ति नहीं होती। इस तरह के रिश्ते में किसी भी तरह के शारीरिक सुख की भी प्राप्ति नहीं होती। इस तरह के विवाह मे पति-पत्नी में हमेशा अनबन बनी ही रहती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का विवाह करना है तो मलमास से पहले करें या फिर इस मास के खत्म हो जाने के बाद करें। यदि हिंदू धर्म शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास में किसी भी प्रकार का नया व्यवसाय या नये कार्य की शुरूआत नही करनी चाहिए। माना जाता है कि इस मास में नये व्यवसाय की शुरुआत करने से जातक को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। व्यापार में हमेशा पैसों की तंगी बनी ही रहती है। इसलिए कोई भी नया काम, नई नौकरी या बड़ा निवेश करने से इस मास मे बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र की माने तो इनके अनुसार मलमास के दौरान किए गए कोई भी शुभ कार्य के मंगल परिणाम नहीं आते हैं। इसलिए इस मास में कोई भी मुंडन और कर्णवेध या फिर अन्य कोई संस्कार नहीं करना चाहिए। इस महीने में कोई गृह प्रवेश भी नहीं करना चाहिए। इस अवधि में कोई भी संपत्ति का क्रय या फिर विक्रय नहीं करना चाहिए। ऐसी संपत्ति भविष्य में आपका नुकसान करवा देती है। इस मास में सूर्य का गुरु राशि में गोचर होने की वजह से ये समय पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इस समय अनुष्ठान से जुड़े कर्म को साथ पितरों से संबंधित श्राद्ध कार्य करना भी अनुकूल माना गया है। इस मास में जलदान का भी बहुत महत्व माना जाता है। इस समय ब्रह्म मूहूर्त के समय किए गए स्नान को शरीर के लिए बहुत उपयोगी माना गया है।
उनके जीवन पर साउथ में धीरन नामक फ़िल्म बन चुकी है। स्थानीय युवा उधमी आजाद सिंह राठौड़ के कार्यालय परिषर में आयोजित अभिनन्दन कार्यक्रम में शिक्षाविद कमलसिंह महेचा, वरिष्ठ पत्रकार एवम लेखक शंकर गोली, पूर्व प्रधान उदाराम मेघवाल, युवा लेखक आजाद सिंह राठौड़ मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। आयोजन में स्वागत भाषण के जरिये डीजीपी जांगिड़ की जीवनी पर प्रकाश डाला। आयोजन में डीजीपी तमिलनाडु पुलिस ने ओमा बावरिया गैंग के खात्मे की पूरी घटना को तफशील से बताया। अपने ऑपरेशन के डेढ़ साल को रुपहले पर्दे पर देखना बहुत यादगार लगा जांगिड़ को। बकौल जांगिड़ अद्भुत अनुभव था खुद के काम को 70 एम एम के पर्दे पर देखना। आंतक का पर्याय बन चुकी ओमा बावरिया की गैंग भरतपुर रूपावास से जुड़ी थी। इसके कारण फिल्म का फिल्मांकन भी भरतपुर, बाड़मेर व जैसलमेर में हुआ है। फ़िल्म में साउथ के ख्यातनाम अभिनेता कार्तिक सांगाराम जांगिड़ के किरदार को अदा कर रहे है और फ़िल्म को युवा डारेक्टर विनोथ ने निर्देशित किया है। सांगाराम जांगिड़ के मुताबित थिरन का स्पेशल प्रीमियर में उन्हें बतौर विशिष्ठ अतिथि बुलाया गया यह उनके लिए यादगार था। गौरतलब है कि आंतक का पर्याय बन चुके ओमा बावरिया गैंग को बिना किसी सुराग के खत्म करने वाले पुलिस अधिकारी और अब चैन्नई पुलिस डीजीपी सांगाराम जांगिड़ ने गैंग का सफाया किया था। सांगाराम बाड़मेर जिले के कवास गांव के निवासी है। साल 1995-2005 के बीच बावरिया गैंग ने 50 के करीब हत्याएं और हाईवे पर लूट की कई वारदातों को अंजाम दिया था। इस गैंग को खत्म करने का जिम्मा आईपीएस सांगााराम जांगिड़ को मिला था। जांगिड़ के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में गैंग के 13 सदस्य गिरफ्तार किए गए थे और पुलिस ने दो एंकाउंटर भी किए। बावरिया गैंग खत्म करने के साहसिक कार्य के लिए सांगाराम को राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड प्रदान किया गया। डेढ़ साल तक राजस्थान , हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र में केस को सुलझाने के लिए अपनी टीम के साथ प्रयास कर सफलता पाने वाले सांगाराम जांगिड़ अपनी टीम के साथ साथ डीजीपी ए एस गिल,आई जी ओपी ग्लोत्रा,भरतपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एसपी राजीव शर्मा, धौलपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक हेमन्त प्रियदर्शी, इस्पेक्टर महावीर सिंह, सुखवीर सिंह के साथ का शुक्रिया अदा करना नही भूलते। उनके मुताबित बहुत मुश्किल था ऑपरेशन , लेकिन मेहनत रंग लाई। आयोजन में युवा फोटोग्राफर तरुण चौहान ने अपने द्वारा खींचे गए एक छायाचित्र को बतौर स्मृति जांगिड़ को भेंट किया। आयोजन में नगरपरिषद के पार्षद नरेश देव सारण, बीरबल माली, हुकमाराम सुथार, रघुवीर सिंह तामलोर ने डीजीपी सांगाराम जांगिड़ का स्मृति चिन्ह देकर बहुमान किया। आयोजन का मंच संचालन मुकेश पचौरी ने किया।
उनके जीवन पर साउथ में धीरन नामक फ़िल्म बन चुकी है। स्थानीय युवा उधमी आजाद सिंह राठौड़ के कार्यालय परिषर में आयोजित अभिनन्दन कार्यक्रम में शिक्षाविद कमलसिंह महेचा, वरिष्ठ पत्रकार एवम लेखक शंकर गोली, पूर्व प्रधान उदाराम मेघवाल, युवा लेखक आजाद सिंह राठौड़ मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। आयोजन में स्वागत भाषण के जरिये डीजीपी जांगिड़ की जीवनी पर प्रकाश डाला। आयोजन में डीजीपी तमिलनाडु पुलिस ने ओमा बावरिया गैंग के खात्मे की पूरी घटना को तफशील से बताया। अपने ऑपरेशन के डेढ़ साल को रुपहले पर्दे पर देखना बहुत यादगार लगा जांगिड़ को। बकौल जांगिड़ अद्भुत अनुभव था खुद के काम को सत्तर एम एम के पर्दे पर देखना। आंतक का पर्याय बन चुकी ओमा बावरिया की गैंग भरतपुर रूपावास से जुड़ी थी। इसके कारण फिल्म का फिल्मांकन भी भरतपुर, बाड़मेर व जैसलमेर में हुआ है। फ़िल्म में साउथ के ख्यातनाम अभिनेता कार्तिक सांगाराम जांगिड़ के किरदार को अदा कर रहे है और फ़िल्म को युवा डारेक्टर विनोथ ने निर्देशित किया है। सांगाराम जांगिड़ के मुताबित थिरन का स्पेशल प्रीमियर में उन्हें बतौर विशिष्ठ अतिथि बुलाया गया यह उनके लिए यादगार था। गौरतलब है कि आंतक का पर्याय बन चुके ओमा बावरिया गैंग को बिना किसी सुराग के खत्म करने वाले पुलिस अधिकारी और अब चैन्नई पुलिस डीजीपी सांगाराम जांगिड़ ने गैंग का सफाया किया था। सांगाराम बाड़मेर जिले के कवास गांव के निवासी है। साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे-दो हज़ार पाँच के बीच बावरिया गैंग ने पचास के करीब हत्याएं और हाईवे पर लूट की कई वारदातों को अंजाम दिया था। इस गैंग को खत्म करने का जिम्मा आईपीएस सांगााराम जांगिड़ को मिला था। जांगिड़ के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में गैंग के तेरह सदस्य गिरफ्तार किए गए थे और पुलिस ने दो एंकाउंटर भी किए। बावरिया गैंग खत्म करने के साहसिक कार्य के लिए सांगाराम को राष्ट्रपति गैलेंट्री अवार्ड प्रदान किया गया। डेढ़ साल तक राजस्थान , हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र में केस को सुलझाने के लिए अपनी टीम के साथ प्रयास कर सफलता पाने वाले सांगाराम जांगिड़ अपनी टीम के साथ साथ डीजीपी ए एस गिल,आई जी ओपी ग्लोत्रा,भरतपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एसपी राजीव शर्मा, धौलपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक हेमन्त प्रियदर्शी, इस्पेक्टर महावीर सिंह, सुखवीर सिंह के साथ का शुक्रिया अदा करना नही भूलते। उनके मुताबित बहुत मुश्किल था ऑपरेशन , लेकिन मेहनत रंग लाई। आयोजन में युवा फोटोग्राफर तरुण चौहान ने अपने द्वारा खींचे गए एक छायाचित्र को बतौर स्मृति जांगिड़ को भेंट किया। आयोजन में नगरपरिषद के पार्षद नरेश देव सारण, बीरबल माली, हुकमाराम सुथार, रघुवीर सिंह तामलोर ने डीजीपी सांगाराम जांगिड़ का स्मृति चिन्ह देकर बहुमान किया। आयोजन का मंच संचालन मुकेश पचौरी ने किया।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरूवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है । मायावती ने यहां एक बयान में कहा, "उत्तर प्रदेश में लोकसभा के वर्तमान चुनाव के दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका लगातार संदिग्ध व सत्ताधारी भाजपा के प्रति मददगार बनी हुई है, जो स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया एवं मंशा को प्रभावित कर रही है । " उन्होंने कहा कि इस पर चुनाव आयोग को तत्काल कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है । मायावती ने कहा, "आज हस्तक्षेप के बाद हालांकि बुलन्दशहर (सुरक्षित) सीट से भाजपा के प्रत्याशी को चुनाव के दौरान गलत व गैर कानूनी काम करने से रोककर नजरबंद तो कर दिया गया, लेकिन उस जिले के कलेक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई चुनाव आयोग द्वारा क्यों नहीं की गई जिनके आदेश पर ही भाजपा प्रत्याशी को मतदान केन्द्र के अन्दर जाकर चुनाव को अपने पक्ष में प्रभावित करने का प्रयास किया गया । " उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस संबंध में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि दूसरे अधिकारी अगले चरण में ऐसा गलत कार्य करने से थोड़ा डरें । बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इससे पहले प्रथम चरण के मतदान के दौरान भी पुलिस व प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा था । कमजोर वर्ग के लोगों को वोट डालने से रोका गया और धमकाया गया था । उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत उसी दिन चुनाव आयोग से की गई है लेकिन तब भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई । मायावती ने चुनाव आयोग से मांग की कि शान्तिपूर्ण, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए वह पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भाजपा के प्रति मददगार बनने यानी पक्षपात रवैया अपनाने से रोके तथा शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करे ।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरूवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है । मायावती ने यहां एक बयान में कहा, "उत्तर प्रदेश में लोकसभा के वर्तमान चुनाव के दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका लगातार संदिग्ध व सत्ताधारी भाजपा के प्रति मददगार बनी हुई है, जो स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया एवं मंशा को प्रभावित कर रही है । " उन्होंने कहा कि इस पर चुनाव आयोग को तत्काल कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है । मायावती ने कहा, "आज हस्तक्षेप के बाद हालांकि बुलन्दशहर सीट से भाजपा के प्रत्याशी को चुनाव के दौरान गलत व गैर कानूनी काम करने से रोककर नजरबंद तो कर दिया गया, लेकिन उस जिले के कलेक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई चुनाव आयोग द्वारा क्यों नहीं की गई जिनके आदेश पर ही भाजपा प्रत्याशी को मतदान केन्द्र के अन्दर जाकर चुनाव को अपने पक्ष में प्रभावित करने का प्रयास किया गया । " उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस संबंध में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि दूसरे अधिकारी अगले चरण में ऐसा गलत कार्य करने से थोड़ा डरें । बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इससे पहले प्रथम चरण के मतदान के दौरान भी पुलिस व प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा था । कमजोर वर्ग के लोगों को वोट डालने से रोका गया और धमकाया गया था । उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत उसी दिन चुनाव आयोग से की गई है लेकिन तब भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई । मायावती ने चुनाव आयोग से मांग की कि शान्तिपूर्ण, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए वह पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भाजपा के प्रति मददगार बनने यानी पक्षपात रवैया अपनाने से रोके तथा शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करे ।
बाघंबरी गद्दी मठ के आगंतुक कक्ष में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज हमेशा हर किसी के लिए राज ही बनकर रह जाए, इसके लिए हर कदम पर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस सनसनीखेज घटना को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। कहा जा रहा है कि इस रहस्यमय मौत की बिसात के पीछे मठ में लगे एचडी कैमरे भी हैं, जो घटना वाले दिन बंद हो गए थे । Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बाघंबरी गद्दी मठ के आगंतुक कक्ष में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज हमेशा हर किसी के लिए राज ही बनकर रह जाए, इसके लिए हर कदम पर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस सनसनीखेज घटना को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। कहा जा रहा है कि इस रहस्यमय मौत की बिसात के पीछे मठ में लगे एचडी कैमरे भी हैं, जो घटना वाले दिन बंद हो गए थे । Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मेष :- आज आपका पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। घरेलु कार्यों में व्यस्त रहेंगे। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। सुझाव :- आज आप शिव मंदिर में प्रसाद बांटे, मंगल होगा। वृष :- आज व्यर्थ की परेशानियां बढ़ सकती हैं। क्रोध पर नियंत्रण रखें। सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है। सुझाव :- आज आप दर्पण कंघा दान करें, लाभ होगा। मिथुन :- आज आपके व्यावसायिक मामलों में प्रगति होने की सम्भावना है। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य मिलेगा। सुझाव :- आज आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें, उत्तम होगा। कर्क :- आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होने की सम्भावना है। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद व लाभदायी होगी। सुझाव :- आज आप शिवलिंग पर 21 बेलपत्र सीता राम नाम अंकित अर्पण करें, लाभ होगा। सिंह :- आज आपके पुराने वाद-विवाद सुलझ सकते हैं। मित्रों से घनिष्ठता बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। सुझाव :- आज आप एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करें, लाभ होगा। कन्या :- आज प्रियजनों से आपकी मुलाकात हो सकती है। नए समारोह में जाने का अवसर प्राप्त हो सकता है। यात्रा से लाभ संभव। सुझाव :- आज आप श्री गणेश जी को मोदक अर्पण करें, लाभ होगा। तुला :- आज आपके व्यवसाय में मंदी आ सकती है। आय पक्ष उत्तम रहेगा। आपके कार्य व्यवहार से लोग प्रसन्न रहेंगे। सुझाव :- आज आप भगवान कार्तिकेय का दर्शन करें, लाभ होगा। वृश्चिक :- आज आप अत्यधिक व्यस्त हो सकते हैं। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। आर्थिक उन्नति सम्भव है। सुझाव :- आज आप भगवान अर्धनारीश्वर की उपासना करें, लाभ होगा। धनु :- आज आपके सोचे हुए कार्य पूर्ण हो सकते हैं। पारिवारिक उन्नति हो सकती है। संतान से सुख मिलेगा। सुझाव :- आज आप भगवान शिव की आराधना करें, लाभ होगा। मकर :- आज आपको अचानक कही से शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है मित्रो का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार। सुझाव :- आज आप भगवान शिव का सपरिवार पूजन करें, लाभ होगा। कुम्भ :- आज आपके चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होने की संभावना है। आर्थिक पक्ष सबल रहेगा। सुझाव :- आज आप श्वेत वस्त्र भगवान शिव को अर्पण करें, लाभ होगा। मीन :- आज आपके अभिलाषाओं की पूर्ति हो सकती है। कार्यक्षेत्र में प्रगति होने की संभावना है। वाणी के सदुपयोग से समाज में प्रतिष्ठित होंगे। सुझाव :- आज आप भगवती को सुगन्धित पुष्प अर्पित करें, लाभ होगा। 1 आज श्रावण कृष्णपक्ष चतुर्दशी तिथि है। 2 आज श्रावण सोमवार व्रत है, उमा महेश्वर पूजन है। पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजन मोर तेहि भाव न काऊ। । अर्थ :- पापवन्त जीव का सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे अच्छा नही लगता और पतन को प्राप्त होता है।
मेष :- आज आपका पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। घरेलु कार्यों में व्यस्त रहेंगे। रचनात्मक प्रयास फलीभूत होंगे। सुझाव :- आज आप शिव मंदिर में प्रसाद बांटे, मंगल होगा। वृष :- आज व्यर्थ की परेशानियां बढ़ सकती हैं। क्रोध पर नियंत्रण रखें। सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है। सुझाव :- आज आप दर्पण कंघा दान करें, लाभ होगा। मिथुन :- आज आपके व्यावसायिक मामलों में प्रगति होने की सम्भावना है। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य मिलेगा। सुझाव :- आज आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें, उत्तम होगा। कर्क :- आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होने की सम्भावना है। यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद व लाभदायी होगी। सुझाव :- आज आप शिवलिंग पर इक्कीस बेलपत्र सीता राम नाम अंकित अर्पण करें, लाभ होगा। सिंह :- आज आपके पुराने वाद-विवाद सुलझ सकते हैं। मित्रों से घनिष्ठता बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। सुझाव :- आज आप एकमुखी रुद्राक्ष को धारण करें, लाभ होगा। कन्या :- आज प्रियजनों से आपकी मुलाकात हो सकती है। नए समारोह में जाने का अवसर प्राप्त हो सकता है। यात्रा से लाभ संभव। सुझाव :- आज आप श्री गणेश जी को मोदक अर्पण करें, लाभ होगा। तुला :- आज आपके व्यवसाय में मंदी आ सकती है। आय पक्ष उत्तम रहेगा। आपके कार्य व्यवहार से लोग प्रसन्न रहेंगे। सुझाव :- आज आप भगवान कार्तिकेय का दर्शन करें, लाभ होगा। वृश्चिक :- आज आप अत्यधिक व्यस्त हो सकते हैं। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। आर्थिक उन्नति सम्भव है। सुझाव :- आज आप भगवान अर्धनारीश्वर की उपासना करें, लाभ होगा। धनु :- आज आपके सोचे हुए कार्य पूर्ण हो सकते हैं। पारिवारिक उन्नति हो सकती है। संतान से सुख मिलेगा। सुझाव :- आज आप भगवान शिव की आराधना करें, लाभ होगा। मकर :- आज आपको अचानक कही से शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है मित्रो का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति में सुधार। सुझाव :- आज आप भगवान शिव का सपरिवार पूजन करें, लाभ होगा। कुम्भ :- आज आपके चल या अचल संपत्ति में वृद्धि होने की संभावना है। आर्थिक पक्ष सबल रहेगा। सुझाव :- आज आप श्वेत वस्त्र भगवान शिव को अर्पण करें, लाभ होगा। मीन :- आज आपके अभिलाषाओं की पूर्ति हो सकती है। कार्यक्षेत्र में प्रगति होने की संभावना है। वाणी के सदुपयोग से समाज में प्रतिष्ठित होंगे। सुझाव :- आज आप भगवती को सुगन्धित पुष्प अर्पित करें, लाभ होगा। एक आज श्रावण कृष्णपक्ष चतुर्दशी तिथि है। दो आज श्रावण सोमवार व्रत है, उमा महेश्वर पूजन है। पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजन मोर तेहि भाव न काऊ। । अर्थ :- पापवन्त जीव का सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे अच्छा नही लगता और पतन को प्राप्त होता है।
क्लीनिक चलाने वाली रेखा पहले एक क्लीनिक में सफाईकर्मी के रूप में काम करती थी. बाद में उसने अपना क्लीनिक खोल लिया. उत्तर पूर्वी दिल्ली में एक झोलाछाप डॉक्टर का भंडाफोड़ हुआ है. यह महिला झोलाछाप तब पकड़ में आई जब इलाज के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई. इस घटना के बाद महिला के परिजनों ने रविवार को पुलिस में शिकाय दर्ज करवाई है, जिसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई. आरोपी महिला का नाम रेखा है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसके क्लीनिक को सील कर दिया है. आरोपी महिला के पास कोई भी डिग्री नहीं है. वहीं मृतक महिला संध्या हर्ष विहार की रहने वाली थी. यहां वह अपने पति अर्जुन सिंह और दो बेटियों के साथ रहती थी. मृतक महिला के पति ने बताया कि संध्या छह महीने की प्रेगनेंट थी और स्वामी दयानंद अस्पताल में उसका चेकअप चल रहा था. शनिवार को संध्या की तबीयत खराब हो गई तो वह उसे अस्पताल ले गए. जहां भीड़ और कोरोना के खतरे को देखते हुए वह उसे वैष्णव क्लीनिक पर ले गए. यहां मौजूद रेखा ने खुद को डॉक्टर बताया. उसने अर्जुन से जांच रिपोर्ट मांगी और फिर संध्या को एडमिट करने को कहा. उसने एडवांस 16 हजार रुपये भी मांगे, जिसे अर्जुन ने डिपॉजिट किया. कुछ देर बाद अर्जुन वहां से चाय लेने चला गया. जब अर्जुन लौटा तो रेखा ने उसे संख्या से मिलने नहीं दिया और कहा कि वह अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस मंगा रही है. इस पर अर्जुन और उसके कुछ रिश्तेदारों ने संध्या से मिलने की जिद की. बाद में उन्हें पता चला कि संख्या के साथ-साथ उसके बच्चे की मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं रेखा ने उसके बच्चे को डस्टबिन में डाल दिया था. इस मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव का पंचनामा कर जीटीबी अस्पताल पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. जांच में पता चला है कि रेखा मीत नगर के एक क्लीनिक पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती थी. उसके पास कोई भी मेडिकल की डिग्री नहीं है. डॉक्टरों को देख-देख कर उसने अपना क्लीनिक खोल लिया. मृतक महिला के पति की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. यह भी पढ़ें- Fractured Leg : अर्जुन रामपाल को बैसाखी के सहारे चलता देखकर लगा शॉक, आखिर कैसे टूटा पैर?
क्लीनिक चलाने वाली रेखा पहले एक क्लीनिक में सफाईकर्मी के रूप में काम करती थी. बाद में उसने अपना क्लीनिक खोल लिया. उत्तर पूर्वी दिल्ली में एक झोलाछाप डॉक्टर का भंडाफोड़ हुआ है. यह महिला झोलाछाप तब पकड़ में आई जब इलाज के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई. इस घटना के बाद महिला के परिजनों ने रविवार को पुलिस में शिकाय दर्ज करवाई है, जिसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई. आरोपी महिला का नाम रेखा है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसके क्लीनिक को सील कर दिया है. आरोपी महिला के पास कोई भी डिग्री नहीं है. वहीं मृतक महिला संध्या हर्ष विहार की रहने वाली थी. यहां वह अपने पति अर्जुन सिंह और दो बेटियों के साथ रहती थी. मृतक महिला के पति ने बताया कि संध्या छह महीने की प्रेगनेंट थी और स्वामी दयानंद अस्पताल में उसका चेकअप चल रहा था. शनिवार को संध्या की तबीयत खराब हो गई तो वह उसे अस्पताल ले गए. जहां भीड़ और कोरोना के खतरे को देखते हुए वह उसे वैष्णव क्लीनिक पर ले गए. यहां मौजूद रेखा ने खुद को डॉक्टर बताया. उसने अर्जुन से जांच रिपोर्ट मांगी और फिर संध्या को एडमिट करने को कहा. उसने एडवांस सोलह हजार रुपये भी मांगे, जिसे अर्जुन ने डिपॉजिट किया. कुछ देर बाद अर्जुन वहां से चाय लेने चला गया. जब अर्जुन लौटा तो रेखा ने उसे संख्या से मिलने नहीं दिया और कहा कि वह अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस मंगा रही है. इस पर अर्जुन और उसके कुछ रिश्तेदारों ने संध्या से मिलने की जिद की. बाद में उन्हें पता चला कि संख्या के साथ-साथ उसके बच्चे की मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं रेखा ने उसके बच्चे को डस्टबिन में डाल दिया था. इस मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव का पंचनामा कर जीटीबी अस्पताल पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. जांच में पता चला है कि रेखा मीत नगर के एक क्लीनिक पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती थी. उसके पास कोई भी मेडिकल की डिग्री नहीं है. डॉक्टरों को देख-देख कर उसने अपना क्लीनिक खोल लिया. मृतक महिला के पति की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. यह भी पढ़ें- Fractured Leg : अर्जुन रामपाल को बैसाखी के सहारे चलता देखकर लगा शॉक, आखिर कैसे टूटा पैर?
देश की राजधानी दिल्ली में नए साल के जश्न के बीच एक लड़की की कार से घसीटने से मौत के मामले में नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया है. इस वीडियो में लड़की बलेनो कार के नीचे फंसी हुई दिखाई दे रही है और कार चालक उसे घसीटते हुए यूटर्न लेते दिख रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर में गैर इरादतन हत्या की धारा जोड़ दी है. 'गाड़ी ने आगे जाकर यूटर्न लिया था' चश्मदीद दीपक ने बताया था कि गाड़ी आगे जाकर यूटर्न लेकर आई थी. दीपक का कहना था कि कार सामान्य गति में थी और देखने से लग रहा था कि उसे चलाने वाला नॉर्मल है. सुबह के समय करीब 3:15 बजे दीपक दूध की डिलीवरी का इंतजार कर रहे थे, तभी उन्होंने एक कार को आते देखा. उस कार में पीछे के पहियों से तेज आवाज आ रही थी. नया सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में गैर इरादतन हत्या की धारा को भी जोड़ दिया है. दिल्ली आउटर के डीसीपी हरेंद्र सिंह का कहना है कि सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, आरोपियों का ब्लड सैंपल लिया गया है जिससे पुष्टि हो सके की शराब पी थी या नहीं, पोस्टमार्टम के लिए बोर्ड बनाने की रिक्वेस्ट की गई है. तीन डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी. डीसीपी हरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए पांच लड़कों ने बताया कि लड़की कार के नीचे फंसी हुई थी इसलिए पता नहीं लगा. फिलहाल 4-5 किलोमीटर तक लड़की को घसीटने की पुष्टि की गई है लेकिन दिल्ली पुलिस दोबारा क्राइम सीन का मुआयना करेगी. दिल्ली पुलिस अपनी लीगल टीम के साथ संपर्क में है ताकि आरोपियों की जमानत न हो सके. डीसीपी हरेंद्र सिंह का दावा है कि दिल्ली पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने ही सबसे पहले स्कूटी देखी थी लेकिन मौके पर पीड़िता नहीं मिली थी. वहीं दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि पीसीआर वैन में मौजूद पुलिस होश में नहीं थी और पुलिस ने घटना को लेकर चश्मदीद की बात सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. चश्मदीद दीपक ने कहा कि शव जब तक कार में फंसा रहा, तब तक कार को इधर-उधर कर दौड़ाते रहे. जब शव गिर गया तो वे उसे छोड़कर मौके से फरार हो गए. वहीं सुल्तानपुरी इलाके में एसएचओ ने रात्रि गश्त के दौरान स्कूटी को दुर्घटनाग्रस्त हालत में देखा था और इसकी जानकारी थाने में 3. 53 बजे दी थी. पुलिस ने बताया कि कॉल पर किसी ने सूचना दी थी कि एक ग्रे कलर की कार कुतुबगढ़ की तरफ जा रही है. उसमें एक डेड बॉडी लटकी हुई नजर आ रही है. इसके बाद तुरंत पिकेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क कर दिया गया. पुलिस कार की तलाश करने लगी. इसके कुछ समय बाद पुलिस को पीसीआर कॉल मिली. कॉल पर बताया गया कि थाना कंझावला में सड़क पर एक लड़की का शव पड़ा है. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची घटनास्थल का निरीक्षण किया. लड़की का शव बीच रोड पर पड़ा था. शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. रोड पर घसीटने की वजह से लड़की के पैर गायब हो चुके थे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसजीएम अस्पताल मंगोलपुरी भेजा, शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया है. लड़की के साथ दरिंदगी करने वाले पांच लड़के दिल्ली के हैं. इनमें से कोई हेयर ड्रेसर है तो कोई राशन डीलर. पुलिस ने कार में सवार पांच लोगों को पकड़ लिया है. इनमें 26 वर्षीय दीपक खन्ना पुत्र राजेश खन्ना ग्रामीण सेवा में चालक के पद पर है. इसके अलावा 25 वर्षीय अमित खन्ना, उत्तम नगर में एसबीआई कार्ड्स के लिए काम करता है. गाड़ी दीपक खन्ना ही चला रहा था.
देश की राजधानी दिल्ली में नए साल के जश्न के बीच एक लड़की की कार से घसीटने से मौत के मामले में नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया है. इस वीडियो में लड़की बलेनो कार के नीचे फंसी हुई दिखाई दे रही है और कार चालक उसे घसीटते हुए यूटर्न लेते दिख रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर में गैर इरादतन हत्या की धारा जोड़ दी है. 'गाड़ी ने आगे जाकर यूटर्न लिया था' चश्मदीद दीपक ने बताया था कि गाड़ी आगे जाकर यूटर्न लेकर आई थी. दीपक का कहना था कि कार सामान्य गति में थी और देखने से लग रहा था कि उसे चलाने वाला नॉर्मल है. सुबह के समय करीब तीन:पंद्रह बजे दीपक दूध की डिलीवरी का इंतजार कर रहे थे, तभी उन्होंने एक कार को आते देखा. उस कार में पीछे के पहियों से तेज आवाज आ रही थी. नया सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में गैर इरादतन हत्या की धारा को भी जोड़ दिया है. दिल्ली आउटर के डीसीपी हरेंद्र सिंह का कहना है कि सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, आरोपियों का ब्लड सैंपल लिया गया है जिससे पुष्टि हो सके की शराब पी थी या नहीं, पोस्टमार्टम के लिए बोर्ड बनाने की रिक्वेस्ट की गई है. तीन डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी. डीसीपी हरेंद्र सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए पांच लड़कों ने बताया कि लड़की कार के नीचे फंसी हुई थी इसलिए पता नहीं लगा. फिलहाल चार-पाँच किलोग्राममीटर तक लड़की को घसीटने की पुष्टि की गई है लेकिन दिल्ली पुलिस दोबारा क्राइम सीन का मुआयना करेगी. दिल्ली पुलिस अपनी लीगल टीम के साथ संपर्क में है ताकि आरोपियों की जमानत न हो सके. डीसीपी हरेंद्र सिंह का दावा है कि दिल्ली पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने ही सबसे पहले स्कूटी देखी थी लेकिन मौके पर पीड़िता नहीं मिली थी. वहीं दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि पीसीआर वैन में मौजूद पुलिस होश में नहीं थी और पुलिस ने घटना को लेकर चश्मदीद की बात सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. चश्मदीद दीपक ने कहा कि शव जब तक कार में फंसा रहा, तब तक कार को इधर-उधर कर दौड़ाते रहे. जब शव गिर गया तो वे उसे छोड़कर मौके से फरार हो गए. वहीं सुल्तानपुरी इलाके में एसएचओ ने रात्रि गश्त के दौरान स्कूटी को दुर्घटनाग्रस्त हालत में देखा था और इसकी जानकारी थाने में तीन. तिरेपन बजे दी थी. पुलिस ने बताया कि कॉल पर किसी ने सूचना दी थी कि एक ग्रे कलर की कार कुतुबगढ़ की तरफ जा रही है. उसमें एक डेड बॉडी लटकी हुई नजर आ रही है. इसके बाद तुरंत पिकेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को सतर्क कर दिया गया. पुलिस कार की तलाश करने लगी. इसके कुछ समय बाद पुलिस को पीसीआर कॉल मिली. कॉल पर बताया गया कि थाना कंझावला में सड़क पर एक लड़की का शव पड़ा है. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची घटनास्थल का निरीक्षण किया. लड़की का शव बीच रोड पर पड़ा था. शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. रोड पर घसीटने की वजह से लड़की के पैर गायब हो चुके थे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसजीएम अस्पताल मंगोलपुरी भेजा, शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया है. लड़की के साथ दरिंदगी करने वाले पांच लड़के दिल्ली के हैं. इनमें से कोई हेयर ड्रेसर है तो कोई राशन डीलर. पुलिस ने कार में सवार पांच लोगों को पकड़ लिया है. इनमें छब्बीस वर्षीय दीपक खन्ना पुत्र राजेश खन्ना ग्रामीण सेवा में चालक के पद पर है. इसके अलावा पच्चीस वर्षीय अमित खन्ना, उत्तम नगर में एसबीआई कार्ड्स के लिए काम करता है. गाड़ी दीपक खन्ना ही चला रहा था.
शराब प्रतिबंध का दायरा बढ़ने के साथ देश के पर्यटन उद्योग के लिए खतरा पैदा हो रहा है। ऐसे में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने शुक्रवार को कहा कि यह तय करना राज्यों का काम नहीं है कि पर्यटकों को क्या पीना और क्या खाना चाहिए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
शराब प्रतिबंध का दायरा बढ़ने के साथ देश के पर्यटन उद्योग के लिए खतरा पैदा हो रहा है। ऐसे में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने शुक्रवार को कहा कि यह तय करना राज्यों का काम नहीं है कि पर्यटकों को क्या पीना और क्या खाना चाहिए। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पाटन (उन्नाव)। लोकतंत्र के उत्सव में आधी आबादी ने भी अपनी ताकत का अहसास कराया। घरों से निकलकर महिलाओं ने महापर्व में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मतदान किया। कसबे साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मताधिकार का प्रयोग किया। सुमेरपुर के प्राथमिक विद्यालय कीरतपुर में वोट डालने पहुंची महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई पड़ा। यहां वोट डालने पहुंची रामकीर्ति ने बताया कि वह पांचवी बार मतदान करने आई हैं। रामकीर्ति के साथ ही उनके परिवार की कई अन्य महिलाएं भी वोट डालने आई थी। शहर के गांधी नगर स्थित मैचलेस पब्लिक स्कूल में सुबह नौ बजे महिलाओं की लंबी लाइन लगी दिखी। यहां गांधी नगर में रहने वाली शुभी, गरिमा, हेमलता लाइन अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ लाइन में लगी थी। मतदान के लिए सभी के मन में उत्साह था। नवाबगंज के बाल्हेमऊ, महनौरा, रसूलपुर व सरौती में भी महिलाओं ने बढ़ चढक़र मतदान किया। बीघापुर के कमलापत, बेहटा सचान और दानामऊ पोलिंग बूथों पर भी महिलाओं की खासी भीड़ मौजूद रही। यहां वोट डालने पहुंची महिलाओं ने बताया कि वह घर के सभी काम निपटाने के बाद अपना वोट डालने पहुंची हैं।
पाटन । लोकतंत्र के उत्सव में आधी आबादी ने भी अपनी ताकत का अहसास कराया। घरों से निकलकर महिलाओं ने महापर्व में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मतदान किया। कसबे साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मताधिकार का प्रयोग किया। सुमेरपुर के प्राथमिक विद्यालय कीरतपुर में वोट डालने पहुंची महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई पड़ा। यहां वोट डालने पहुंची रामकीर्ति ने बताया कि वह पांचवी बार मतदान करने आई हैं। रामकीर्ति के साथ ही उनके परिवार की कई अन्य महिलाएं भी वोट डालने आई थी। शहर के गांधी नगर स्थित मैचलेस पब्लिक स्कूल में सुबह नौ बजे महिलाओं की लंबी लाइन लगी दिखी। यहां गांधी नगर में रहने वाली शुभी, गरिमा, हेमलता लाइन अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ लाइन में लगी थी। मतदान के लिए सभी के मन में उत्साह था। नवाबगंज के बाल्हेमऊ, महनौरा, रसूलपुर व सरौती में भी महिलाओं ने बढ़ चढक़र मतदान किया। बीघापुर के कमलापत, बेहटा सचान और दानामऊ पोलिंग बूथों पर भी महिलाओं की खासी भीड़ मौजूद रही। यहां वोट डालने पहुंची महिलाओं ने बताया कि वह घर के सभी काम निपटाने के बाद अपना वोट डालने पहुंची हैं।
क्या उपाय करें ?" तव माँ को पुकारते - पुकारते वह स्वभाव टूर हुआ । "उस अवस्था में ईश्वरीय प्रमग के सिवा और कुछ अच्छा नही लगता था । वैषयिक चर्चा होते सुनकर मैं बैठा रोया करता था। जब मथुरवाचू मुझे अपने साथ तीर्थों को ले गये, तब थोड़ें दिन हम वाराणसी में राजा बाबू के मकान पर रहे। मथुरबाबू के साथ बैठकखाने मे मै बैठा था और राजा बाबू भी थे। मैंने देखा कि वे सासारिक बाते कह रहे है । इतने रुपये का नुक्सान हुआ है, ―― ऐसी-ऐसी बाते । मैं रोने लगा-कहा 'माँ, मुझे यह कहाँ लायी । मै तो रासमणि के मन्दिर में कही अच्छा था । तीर्थ करने को आते हुए भी वे ही कामिनी काचन की बाते । पर वहाँ ( दक्षिणेश्वर में) तो विषय चर्चा सुननी नहीं पड़ती थी, होती ही न थी ।" श्रीरामकृष्ण ने भक्तो से, विशेषकर नरेन्द्र से, जरा आराम लेने के लिए कहा, और आप भी छोटे तखन पर थोड़ा आराम करने चले गये । नरेन्द्र आदि के साथ कोर्तनानन्द । नरेन्द्र का प्रेमालिंगन तीसरा पहर हुआ है। नरेन्द्र गाना गा रहे हैं। राखाल, लाडू, मास्टर, नरेन्द्र के मित्र प्रिय, हाजरा आदि सब हैं । नरेन्द्र ने कीर्तन गाया, मृदंग वजने लगा'ऐ मन, तू चिद्धन हरी का चिन्तन कर। उनकी मोहनमूर्ति को कैसी छटा है !" (पृष्ठ २१ देखिये ) गरेन्द्र ने फिर गाना गाया-(भावायं) "सत्य- शिव सुन्दर का रूप हृदय मन्दिर में शोभायश्रीरामकृष्ण को प्रथम प्रेमोन्माद कथा मान है, जिसे नित्य देखकर हम उस रूप के समुद्र में डूब जायेंगे । वह दिन कब आयेगा ? हे प्रभु, मुझ दोन के भाग्य में यह कव होगा ? हे नाथ, कब अनन्त ज्ञान के रूप में तुम हमारे हृदय मे विराजोगे और हमारा चचल मन निर्वाक् होकर तुम्हारी शरण लेगा, कब अविनाशी आनन्द के रूप में तुम हृदयाकाश में उदय होगे ? चन्द्रमा के उदय होने पर चकोर जैसे उल्लसित होता है, वैसे हम भी तुम्हारे प्रकट होने पर मस्त हो जायेंगे । तुम शान्तं, शिव, अद्वितीय और राजराज हो । हे प्राणसखा, तुम्हारे चरणा मे हम बिक जायेंगे और अपने जीवन को सफल करगे । ऐसा अधिकार और ऐसा जीते जी स्वर्गभोग हमे और कहा मिलेगा ? तुम्हारा शुद्ध और अपापविद्ध रूप हम देखेंगे। जिस तरह प्रकाश को देखकर अन्धेरा जल्द भाग जाता है, उसी तरह तुम्हारे प्रकट होने से पापरूपी अन्धकार भाग जायगा । तुम ध्रुवतारा हो, हे दोनबन्धो, हमारे हृदय में ज्वलन्त विश्वास का सचार कर मन की आशाएं पूरी कर दो । तुम्हे प्राप्त कर हम अहर्निश प्रेमानन्द मे डूबे रहेंगे और अपने आपको भूल जायेंगे । वह दिन क्य आयेगा, प्रभो ?" "आनन्द से मधुर ब्रह्मज्ञान का उच्चारण करो ! नाम से सुधा का सिन्धु उमड आयेगा । उसे लगातार पीते रहो । आप पोते रहो और दूसरो को पिलाते रहो । विषय-स्पी मृग-जल मे पड कर यदि कभी हृदय शुष्क हो जाय तो नाम -गान करना । प्रेम से हृदय सरस हो उठेगा। देखना वह महामन्न नहीं भूलना । सकट के समय उसे दयालु पिता कहकर पुकारना । हुकार से पाप का बन्धन तोड डालो । जय ब्रह्म कहकर आओ, सब मिलकर ब्रह्मानन्द में मस्त होवे और सब कामनाओं को मिटा दे । प्रेमयोग के धोराम कृष्णवचनामृत योगी बनकर ।" मृदग और करताल के साथ कीर्तन हो रहा है । नरेन्द्र आदि भक्त श्रीरामकृष्ण को घेरकर कीर्तन कर रहे हैं । कभी गाते हैं - 'प्रेमानन्द - रस में चिर दिन के लिए मग्न हो जा ।' फिर बभी गाते हैं - सत्य - शिव सुन्दर का रूप हृदय मन्दिर में शोभायमान है ।' अन्त में नरेन्द्र ने स्वय मुदग उठा लिया है - और मतवाले होकर श्रीरामकृष्ण के साथ गा रहे हैं - 'आनन्द से मधुर ब्रह्मनाम का उच्चारण करो ।' कीर्तन समाप्त होने पर श्रीरामकृष्ण ने नरेन्द्र को बार-बार छाती से लगाया और कहा - अहा, आज तुमने मुझे मा आनन्द दिया । आज श्रीरामकृष्ण के हृदय में प्रेम का स्रोत उमड रहा है । रात को आठ बजे होगे, तो भी प्रेमोन्मत्त होकर बरामदे में अकेले टहल रहे हैं। उत्तर वाले लम्बे बरामदे में आये हैं और अकेले एक छोर से दूसरे छोर तक जल्दी-जल्दी टहन रह हैं। बीच-बीच जगन्माता के साथ कुछ बातचीत कर रह है। एकाएक उन्मत्त की भांति बोल उठे, 'तू मेरा क्या बिगाडेगो ?" क्या आप यही कह रहे हैं कि जगन्माता जिने महारा दे रही हैं, माया उसका क्या विगाड सकती है ? नरेन्द्र, प्रिय और मास्टर रात को रहेगे । नरेन्द्र रहेंगे --बम, श्रीरामकृष्ण फूले नहीं समाते । रात का भोजन तैयार हुआ। श्री श्री माताजी नहवतवाने में हैं -- आपने अपने भक्तों के लिए रोटी, दाल आदि बनावर भेज दिया है । भवन लोग बीच-बीच में रहा करते हैं, सुरेन्द्र प्रतिमास वुछ खर्च देते है । कमरे के दक्षिण पूर्व वाले वरामदे में भोजन के चौके लगाये श्रीरामकृष्ण को प्रथम प्रेमोन्माद कया जा रहे हैं। पूर्व वाले दरवाजे के पास नरेन्द्र आदि बातचीन कर रहे है ? नरेन्द्र - आजकल के लड़को को कैमा देख रहे हैं मास्टर - बुरे नहीं, पर धर्म के उपदेश कुछ नहीं पाते हैं । नरेन्द्र - मैंने खुद जो देखा है उससे तो जान पड़ता है कि सब बिगड रहे है । चुरट पीना, ठठ्ठेबाजी, ठाटबाट, स्कूल से भागना ये नव हरदम होते देखे जाते हैं, यहाँ तक कि सराव जगहों में भी जाया करते हैं । मास्टर जब हम पटते थे तब तो ऐसा न देखा, न सुना । नरेन्द्र - शायद आप उतना मिलने-जुलते नहीं। मैंने यह भी देखा कि खराब औरते उन्हें नाम से पुकारती है । कब उनसे मिले है, कौन जान ? मान्दर क्या आश्चर्य की बात नरेन्द्र - मैं जानता हूँ कि बहुतो का चरित्र बिगड गया है । स्कूल के संचालक और लडको के अभिभावक इस विषय पर ध्यान दें तो अच्छा हो । इन तरह बातें हो रही थी कि श्रीरामकृष्ण कोठरी के भीतर से उनके पास आये और हँसते हुए कहते हैं, "भला तुम्हारी क्या चानचीत हो रही है ।" नरेन्द्र ने कहा, "उनसे स्कूल की चर्चा हो रही थी । लड़कों का चरिन ठीक नहीं रहता।" श्रीरामकृष्ण थोडी देर तक उन बातो को सुनकर मास्टर से गम्भीर भाव से हते हैं, "ऐसी वानचीत अच्छी नही । ईश्वर की बात को छोड़ दूसरी बाते अच्छी नहीं । तुम इनसे उम्र में बड़े हो, तुम सयाने हुए हो, तुम्हें ये सब बातें उठने देना उचित न था ।" उस समय नरेन्द्र की उम्र उनीस-बीस रही होगी और मास्टर
क्या उपाय करें ?" तव माँ को पुकारते - पुकारते वह स्वभाव टूर हुआ । "उस अवस्था में ईश्वरीय प्रमग के सिवा और कुछ अच्छा नही लगता था । वैषयिक चर्चा होते सुनकर मैं बैठा रोया करता था। जब मथुरवाचू मुझे अपने साथ तीर्थों को ले गये, तब थोड़ें दिन हम वाराणसी में राजा बाबू के मकान पर रहे। मथुरबाबू के साथ बैठकखाने मे मै बैठा था और राजा बाबू भी थे। मैंने देखा कि वे सासारिक बाते कह रहे है । इतने रुपये का नुक्सान हुआ है, ―― ऐसी-ऐसी बाते । मैं रोने लगा-कहा 'माँ, मुझे यह कहाँ लायी । मै तो रासमणि के मन्दिर में कही अच्छा था । तीर्थ करने को आते हुए भी वे ही कामिनी काचन की बाते । पर वहाँ तो विषय चर्चा सुननी नहीं पड़ती थी, होती ही न थी ।" श्रीरामकृष्ण ने भक्तो से, विशेषकर नरेन्द्र से, जरा आराम लेने के लिए कहा, और आप भी छोटे तखन पर थोड़ा आराम करने चले गये । नरेन्द्र आदि के साथ कोर्तनानन्द । नरेन्द्र का प्रेमालिंगन तीसरा पहर हुआ है। नरेन्द्र गाना गा रहे हैं। राखाल, लाडू, मास्टर, नरेन्द्र के मित्र प्रिय, हाजरा आदि सब हैं । नरेन्द्र ने कीर्तन गाया, मृदंग वजने लगा'ऐ मन, तू चिद्धन हरी का चिन्तन कर। उनकी मोहनमूर्ति को कैसी छटा है !" गरेन्द्र ने फिर गाना गाया- "सत्य- शिव सुन्दर का रूप हृदय मन्दिर में शोभायश्रीरामकृष्ण को प्रथम प्रेमोन्माद कथा मान है, जिसे नित्य देखकर हम उस रूप के समुद्र में डूब जायेंगे । वह दिन कब आयेगा ? हे प्रभु, मुझ दोन के भाग्य में यह कव होगा ? हे नाथ, कब अनन्त ज्ञान के रूप में तुम हमारे हृदय मे विराजोगे और हमारा चचल मन निर्वाक् होकर तुम्हारी शरण लेगा, कब अविनाशी आनन्द के रूप में तुम हृदयाकाश में उदय होगे ? चन्द्रमा के उदय होने पर चकोर जैसे उल्लसित होता है, वैसे हम भी तुम्हारे प्रकट होने पर मस्त हो जायेंगे । तुम शान्तं, शिव, अद्वितीय और राजराज हो । हे प्राणसखा, तुम्हारे चरणा मे हम बिक जायेंगे और अपने जीवन को सफल करगे । ऐसा अधिकार और ऐसा जीते जी स्वर्गभोग हमे और कहा मिलेगा ? तुम्हारा शुद्ध और अपापविद्ध रूप हम देखेंगे। जिस तरह प्रकाश को देखकर अन्धेरा जल्द भाग जाता है, उसी तरह तुम्हारे प्रकट होने से पापरूपी अन्धकार भाग जायगा । तुम ध्रुवतारा हो, हे दोनबन्धो, हमारे हृदय में ज्वलन्त विश्वास का सचार कर मन की आशाएं पूरी कर दो । तुम्हे प्राप्त कर हम अहर्निश प्रेमानन्द मे डूबे रहेंगे और अपने आपको भूल जायेंगे । वह दिन क्य आयेगा, प्रभो ?" "आनन्द से मधुर ब्रह्मज्ञान का उच्चारण करो ! नाम से सुधा का सिन्धु उमड आयेगा । उसे लगातार पीते रहो । आप पोते रहो और दूसरो को पिलाते रहो । विषय-स्पी मृग-जल मे पड कर यदि कभी हृदय शुष्क हो जाय तो नाम -गान करना । प्रेम से हृदय सरस हो उठेगा। देखना वह महामन्न नहीं भूलना । सकट के समय उसे दयालु पिता कहकर पुकारना । हुकार से पाप का बन्धन तोड डालो । जय ब्रह्म कहकर आओ, सब मिलकर ब्रह्मानन्द में मस्त होवे और सब कामनाओं को मिटा दे । प्रेमयोग के धोराम कृष्णवचनामृत योगी बनकर ।" मृदग और करताल के साथ कीर्तन हो रहा है । नरेन्द्र आदि भक्त श्रीरामकृष्ण को घेरकर कीर्तन कर रहे हैं । कभी गाते हैं - 'प्रेमानन्द - रस में चिर दिन के लिए मग्न हो जा ।' फिर बभी गाते हैं - सत्य - शिव सुन्दर का रूप हृदय मन्दिर में शोभायमान है ।' अन्त में नरेन्द्र ने स्वय मुदग उठा लिया है - और मतवाले होकर श्रीरामकृष्ण के साथ गा रहे हैं - 'आनन्द से मधुर ब्रह्मनाम का उच्चारण करो ।' कीर्तन समाप्त होने पर श्रीरामकृष्ण ने नरेन्द्र को बार-बार छाती से लगाया और कहा - अहा, आज तुमने मुझे मा आनन्द दिया । आज श्रीरामकृष्ण के हृदय में प्रेम का स्रोत उमड रहा है । रात को आठ बजे होगे, तो भी प्रेमोन्मत्त होकर बरामदे में अकेले टहल रहे हैं। उत्तर वाले लम्बे बरामदे में आये हैं और अकेले एक छोर से दूसरे छोर तक जल्दी-जल्दी टहन रह हैं। बीच-बीच जगन्माता के साथ कुछ बातचीत कर रह है। एकाएक उन्मत्त की भांति बोल उठे, 'तू मेरा क्या बिगाडेगो ?" क्या आप यही कह रहे हैं कि जगन्माता जिने महारा दे रही हैं, माया उसका क्या विगाड सकती है ? नरेन्द्र, प्रिय और मास्टर रात को रहेगे । नरेन्द्र रहेंगे --बम, श्रीरामकृष्ण फूले नहीं समाते । रात का भोजन तैयार हुआ। श्री श्री माताजी नहवतवाने में हैं -- आपने अपने भक्तों के लिए रोटी, दाल आदि बनावर भेज दिया है । भवन लोग बीच-बीच में रहा करते हैं, सुरेन्द्र प्रतिमास वुछ खर्च देते है । कमरे के दक्षिण पूर्व वाले वरामदे में भोजन के चौके लगाये श्रीरामकृष्ण को प्रथम प्रेमोन्माद कया जा रहे हैं। पूर्व वाले दरवाजे के पास नरेन्द्र आदि बातचीन कर रहे है ? नरेन्द्र - आजकल के लड़को को कैमा देख रहे हैं मास्टर - बुरे नहीं, पर धर्म के उपदेश कुछ नहीं पाते हैं । नरेन्द्र - मैंने खुद जो देखा है उससे तो जान पड़ता है कि सब बिगड रहे है । चुरट पीना, ठठ्ठेबाजी, ठाटबाट, स्कूल से भागना ये नव हरदम होते देखे जाते हैं, यहाँ तक कि सराव जगहों में भी जाया करते हैं । मास्टर जब हम पटते थे तब तो ऐसा न देखा, न सुना । नरेन्द्र - शायद आप उतना मिलने-जुलते नहीं। मैंने यह भी देखा कि खराब औरते उन्हें नाम से पुकारती है । कब उनसे मिले है, कौन जान ? मान्दर क्या आश्चर्य की बात नरेन्द्र - मैं जानता हूँ कि बहुतो का चरित्र बिगड गया है । स्कूल के संचालक और लडको के अभिभावक इस विषय पर ध्यान दें तो अच्छा हो । इन तरह बातें हो रही थी कि श्रीरामकृष्ण कोठरी के भीतर से उनके पास आये और हँसते हुए कहते हैं, "भला तुम्हारी क्या चानचीत हो रही है ।" नरेन्द्र ने कहा, "उनसे स्कूल की चर्चा हो रही थी । लड़कों का चरिन ठीक नहीं रहता।" श्रीरामकृष्ण थोडी देर तक उन बातो को सुनकर मास्टर से गम्भीर भाव से हते हैं, "ऐसी वानचीत अच्छी नही । ईश्वर की बात को छोड़ दूसरी बाते अच्छी नहीं । तुम इनसे उम्र में बड़े हो, तुम सयाने हुए हो, तुम्हें ये सब बातें उठने देना उचित न था ।" उस समय नरेन्द्र की उम्र उनीस-बीस रही होगी और मास्टर
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! मशहूर स्पोर्ट्स कमेंटेटर और फुटबाल की आवाज कहे जाने वाले नोवी कपाड़िया (Novy Kapadia Dies) का आज दोपहर निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मशहूर समीक्षक और कमेंटेटर नोवी पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। लगभग 1 महीने से वे आईसीयू में थे और जिंदगी से जंग लड़ रहे थे। लेकिन आज दोपहर 68 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह खबर सामने आते ही हर खिलाड़ी की आंखें नम हो गई हैं। बता दें कि कमेंटेटर होने के साथ-साथ नवो कपाड़िया कई किताबें के लेखक और दिल्ली यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर भी रह चुके थे। दरअसल, नोवी मोटर न्यूरोन (Motor Neurones) नाम की खास बीमारी से पीड़ित थे। जिस वजह से वो पिछले 2 साल से अपने घर में ही कैद थे और पिछले 1 महीने से उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था। मोटर न्यूरॉन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने लगता है। यानि कि इस बीमारी का शिकार हुए व्यक्ति का दिमाग धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है और रीढ़ की नसें भी कमजोर होने लगती हैं। इस बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। सबसे डरावनी बात ये है कि मोटर न्यूरॉन का कोई इलाज नहीं है। हालांकि बचाव के कई ऐसे तरीके हैं जो इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। कुछ लोग इस बीमारी से जल्दी उभर जाते हैं जबकि कुछ लोगों को यह लंबे समय तक झेलनी पड़ती है।
Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! मशहूर स्पोर्ट्स कमेंटेटर और फुटबाल की आवाज कहे जाने वाले नोवी कपाड़िया का आज दोपहर निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मशहूर समीक्षक और कमेंटेटर नोवी पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। लगभग एक महीने से वे आईसीयू में थे और जिंदगी से जंग लड़ रहे थे। लेकिन आज दोपहर अड़सठ साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह खबर सामने आते ही हर खिलाड़ी की आंखें नम हो गई हैं। बता दें कि कमेंटेटर होने के साथ-साथ नवो कपाड़िया कई किताबें के लेखक और दिल्ली यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर भी रह चुके थे। दरअसल, नोवी मोटर न्यूरोन नाम की खास बीमारी से पीड़ित थे। जिस वजह से वो पिछले दो साल से अपने घर में ही कैद थे और पिछले एक महीने से उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था। मोटर न्यूरॉन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने लगता है। यानि कि इस बीमारी का शिकार हुए व्यक्ति का दिमाग धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है और रीढ़ की नसें भी कमजोर होने लगती हैं। इस बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। सबसे डरावनी बात ये है कि मोटर न्यूरॉन का कोई इलाज नहीं है। हालांकि बचाव के कई ऐसे तरीके हैं जो इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। कुछ लोग इस बीमारी से जल्दी उभर जाते हैं जबकि कुछ लोगों को यह लंबे समय तक झेलनी पड़ती है।
आप मो बता दे की साल 1892 के दौर को दिखाने वाली इस फ़िल्म में जो क्रिकेट मैच हुआ था उसमें एक ओवर में 6 बाल दिखाई गई थी जबकि उस समय एक ओवर में 5 ही बाल हुआ करते थे। रोहित 2 सालो से घर पर नही बल्कि सिंगापुर था फिर भी प्रीति जिंटा प्रेग्नेंट हो जाती हैं, पता नही कैसे? सरफराज, जग्गू को बोलता हैं कि वो Brudges की पाकिस्तान एम्बेसी में काम करता हैं लेकिन वहाँ कोई पाकिस्तान की एम्बेसी नही हैं। और जगह का नाम भी Brussels हैं। शाहरुख इस फ़िल्म में साउथ इंडियन थे, मरने के बाद अंतिम संस्कार क्रिस्चियन तौर पर होता हैं, अगले सीन में करीना कपूर अस्थियां बहा रही हैं। ये हो क्या रहा हैं ?
आप मो बता दे की साल एक हज़ार आठ सौ बानवे के दौर को दिखाने वाली इस फ़िल्म में जो क्रिकेट मैच हुआ था उसमें एक ओवर में छः बाल दिखाई गई थी जबकि उस समय एक ओवर में पाँच ही बाल हुआ करते थे। रोहित दो सालो से घर पर नही बल्कि सिंगापुर था फिर भी प्रीति जिंटा प्रेग्नेंट हो जाती हैं, पता नही कैसे? सरफराज, जग्गू को बोलता हैं कि वो Brudges की पाकिस्तान एम्बेसी में काम करता हैं लेकिन वहाँ कोई पाकिस्तान की एम्बेसी नही हैं। और जगह का नाम भी Brussels हैं। शाहरुख इस फ़िल्म में साउथ इंडियन थे, मरने के बाद अंतिम संस्कार क्रिस्चियन तौर पर होता हैं, अगले सीन में करीना कपूर अस्थियां बहा रही हैं। ये हो क्या रहा हैं ?
ओम राउत के निर्देशन में बन रही फिल्म 'आदिपुरुष' पर विवाद बढ़ता जा रहा है। 2 अक्तूबर को बेहद ही ग्रैंड तरीके से इस फिल्म का टीजर राम नगरी अयोध्या में रिलीज किया गया। लेकिन टीजर को सोशल मीडिया पर लोगों ने रिजेक्टर दिया। सोशल मीडिया पर फिल्म के मेकर्स को ट्रोल किया जा रहा है। वहीं राम बने प्रभास और रावण के रूप में सैफ अली खान का लुक लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसके अलावा भी टीजर में कई तरह की कमियां लोगों ने निकाल दी हैं। इसी बीच रामानंद सागर की 'रामायण' के राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल का बयान सामने आया है। अभिनेता ने वीडियो जारी कर 'आदिपुरुष' के मेकर्स पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। अरुण गोविल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा कि आदिपुरुष का जब टीजर रिलीज हुआ तब से लेकर अभी तक चारों तरफ एक हंगामा है। हर तरफ इसकी चर्चा है। मेरे पास सैकड़ों फोन आए हैं। बहुत समय से मेरे दिमाग में बहुत-सी बातें चल रही हैं। लगता है अब उन बातों को आपके साथ साझा करने का समय आ गया है। 'रामायण' और 'महाभारत' जैसे जितने भी पौराणिक ग्रंथ और शास्त्र हैं, ये हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर। ये हमारी संस्कृति है। ये हमारी जड़ है। हसारी मानव सभ्यता के लिए ये नींव के समान है। ना तो नींव को हिलाया जा सकता है और ना ही जड़ को बदला जा सकता है, और इसके साथ किसी तरह का खिलवाड़ या छेड़छाड़ भी ठीक नहीं है। वीडियो में अरुण गोविल आगे कहते हैं कि हमें शास्त्रों से संस्कार मिले हैं, जीने का आधार मिलता है। ये धरोहर ही हमें जीने की कला सिखाती हैं। हमारी संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। ऐसे में इसके साथ छेड़छाड़ करना धार्मिक भावनाओं को आहत करना है। जब ढाई साल पहले आए कोरोना ने हमारी धार्मिक मान्यताओं को मजबूत कर दिया है। इतना ही नहीं कोरोना के दौरान जब एक बार फिर से 'रामायण' का प्रसारण शुरू हुआ था, तो उसने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। ये हमारी मान्यताओं और परंपरा का बहुत बड़ा संकेत है। 35 साल पहले बनी 'रामायण' को हमारी युवा पीढ़ी ने पूरी श्रद्धा और आस्था से देखा। एक्टर ने आगे कहा कि आपको हमारी नीव, जड़ और धार्मिक संस्कृति से छेड़छाड़ करने का कोई हक नहीं है। आप क्रिएटिविटी के नाम पर धर्म का मजाक नहीं बना सकते हैं। आजकल ये चलन सा बनता जा रहा है सनातन धर्म का मजाक बनाओ, देवी देवताओं के आपत्तिजनक पोस्टर बनाओ, अभद्र भाषा में बोलता हुआ दिखाओ, आखिर किसने अधिकार दे दिया। स्वतंत्रता के नाम पर धर्म का मजाक ना बनाएं और ना ही किसी की मान्यता और परंपरा को तोड़ मोड़ के प्रस्तुत करें। वीडियो के आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को पहचान दिलाने के लिए शुक्रिया भी अदा किया।
ओम राउत के निर्देशन में बन रही फिल्म 'आदिपुरुष' पर विवाद बढ़ता जा रहा है। दो अक्तूबर को बेहद ही ग्रैंड तरीके से इस फिल्म का टीजर राम नगरी अयोध्या में रिलीज किया गया। लेकिन टीजर को सोशल मीडिया पर लोगों ने रिजेक्टर दिया। सोशल मीडिया पर फिल्म के मेकर्स को ट्रोल किया जा रहा है। वहीं राम बने प्रभास और रावण के रूप में सैफ अली खान का लुक लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसके अलावा भी टीजर में कई तरह की कमियां लोगों ने निकाल दी हैं। इसी बीच रामानंद सागर की 'रामायण' के राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल का बयान सामने आया है। अभिनेता ने वीडियो जारी कर 'आदिपुरुष' के मेकर्स पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। अरुण गोविल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा कि आदिपुरुष का जब टीजर रिलीज हुआ तब से लेकर अभी तक चारों तरफ एक हंगामा है। हर तरफ इसकी चर्चा है। मेरे पास सैकड़ों फोन आए हैं। बहुत समय से मेरे दिमाग में बहुत-सी बातें चल रही हैं। लगता है अब उन बातों को आपके साथ साझा करने का समय आ गया है। 'रामायण' और 'महाभारत' जैसे जितने भी पौराणिक ग्रंथ और शास्त्र हैं, ये हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर। ये हमारी संस्कृति है। ये हमारी जड़ है। हसारी मानव सभ्यता के लिए ये नींव के समान है। ना तो नींव को हिलाया जा सकता है और ना ही जड़ को बदला जा सकता है, और इसके साथ किसी तरह का खिलवाड़ या छेड़छाड़ भी ठीक नहीं है। वीडियो में अरुण गोविल आगे कहते हैं कि हमें शास्त्रों से संस्कार मिले हैं, जीने का आधार मिलता है। ये धरोहर ही हमें जीने की कला सिखाती हैं। हमारी संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। ऐसे में इसके साथ छेड़छाड़ करना धार्मिक भावनाओं को आहत करना है। जब ढाई साल पहले आए कोरोना ने हमारी धार्मिक मान्यताओं को मजबूत कर दिया है। इतना ही नहीं कोरोना के दौरान जब एक बार फिर से 'रामायण' का प्रसारण शुरू हुआ था, तो उसने विश्व रिकॉर्ड बनाया था। ये हमारी मान्यताओं और परंपरा का बहुत बड़ा संकेत है। पैंतीस साल पहले बनी 'रामायण' को हमारी युवा पीढ़ी ने पूरी श्रद्धा और आस्था से देखा। एक्टर ने आगे कहा कि आपको हमारी नीव, जड़ और धार्मिक संस्कृति से छेड़छाड़ करने का कोई हक नहीं है। आप क्रिएटिविटी के नाम पर धर्म का मजाक नहीं बना सकते हैं। आजकल ये चलन सा बनता जा रहा है सनातन धर्म का मजाक बनाओ, देवी देवताओं के आपत्तिजनक पोस्टर बनाओ, अभद्र भाषा में बोलता हुआ दिखाओ, आखिर किसने अधिकार दे दिया। स्वतंत्रता के नाम पर धर्म का मजाक ना बनाएं और ना ही किसी की मान्यता और परंपरा को तोड़ मोड़ के प्रस्तुत करें। वीडियो के आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को पहचान दिलाने के लिए शुक्रिया भी अदा किया।
लीजै बँगलापान पुनि, यकतालीस सँगाइ ।। औषधसाहि मिलाइकै, हयको देल खवाइ ॥ ३ ॥ कही एक सौताज यह, सो दीजै दिन सात ।। दाना बीजे नाहि तिहि, तुरी नीक हैजात ॥ ४ ॥ पछिले दोनों पाँइ जो, तुरी घसीटत होइ ।। ताके भीतर पाँवकी, रमै दगावै सोइ ॥ ५॥ अथ सलग्रहणी लक्षण । दोहा -- जो पियंरो पानी गिरै, सुख अरु नासा माहि ।। मलग्रहणी लक्षण निरखि, यतन करौ हय चाहि ॥ चौपाई-मधु अरु दूध मिलायक दीजै । सलग्रहणी ताकी हरिलीजै अथ शीतलतारोग देहमें काम नरहै । दोहा- बीजालेड पलाशके, टंक एक मँगवाय ।। बीज केवॉच समानले, संघवटंक मिलाय ॥ १ ॥ गोघृत के सँग दीजिये, जाय शितलता रोग ।। औषधकरै विचारिकै, भाषत कोविद लोग ॥ २ ॥ अथ विषशोधन विधि । दोहा- बिन शोधे विष औषधी, खान न दीजौ मीत ॥ अति दुखदायक होतिहै, करत जीव भयभीत ।। सोरठा - सुमिलपारले जानि, जहर शंखिया होत जो ।। सुनौ सकल बुधवान, विष शोधनकी जतन अब चौपाई-प्रथम शंखियाकी विधि जानौ । एकटकाभरि सो परमानौ ।। फिरि अमलोनियाँको मँगवावै । चारिटका सरि सो तौलावै ।। दोनों एकम खरिल करावै । एक पहर मौताज बतावे ।। पतरी पतरी टिकिया करै । घामें सुखै और विधि धेरै । लीजै अजयादूध मँगाई । एकसेर पक्के तौलाई 10 इक माटीकी हाँड़ी लावै । दूधडारि तिहि अग्नि पकावै ।। टिकिया कृपरा पोटरी वाँधै । डोरा कसि हाँडी बिच साधै ।। दूधमबूडी पोटरी राखो । डोलयंत्र या विधि कहि भाषौ ॥ जस जस दूध कमी है जावे तस तस पोटरीका सकिलावै ॥ दूधक बाहर जबै निकारी । कपसकी तह करु तब चारी !! तामें पोटरी फेरि बँधावै । वाकी ऐसी जतन करावै ॥ पाव एक रस छिरका लावै । तिहि मा डोलयंत्र पकवावे ।। चौथाई छिरका रहिजावै । तब उतारि टिकिया जलध्वावै ॥ करिकै साफ सुखैकै घरै । सुमिलपार या विधि अनुसरै ॥ अथ काषादि विष शोधन । सोरठा-करियारी बछनाग, और सिंगिया हरदिया ।। पुनि कुचिला निर्दाग, काष्ठादि विष जो सबै ।। चौपाई-प्रथम एक विष शाधन कीजै । ताको तौलि टकाभरि लीजै पानी पाँचसेर मँगवावै । महिषाको गोबर लैआवै ।। माटीकी हाँडीमें भरै । कंडा आंच यासत्रय करै ॥ जल जार जाय और फिरि भरै । जहर धोयकै कतरा करै ।। चारि टकाभरि लै चौराई । मूल सहित लीजौ पिसवाई । सेरक पानी में घुरवावै । कतरे जहर डारि पकवावै !! पहर सवाइक आँच करावै । फेरि उतारि ताहि धुलवावै ॥ कपरामें, पोटरी करवाई । अजयादूध डेढ़ स्यर लाई ।। हाँडीमें भरि अग्नि पावै । तिहिमा डोलयंत्र करवावै ॥ जस जस दूध घंटे हँडिया में । तस पोटरी सकिलावै वा ।। दूध जबै थोरा रहिजावै । पानी मा तब ताहि धुवावै ॥ घामें सुखै धरौ तब भाई । दवा माहिं याको डरवाई । याहीविधि सब विष शोधवाइ । कचिलै मति डारौ चौराई ।। शाकहोगसंग्रह । अथ काढ़ासर्वरोगपर । हरिगीतिका राजहि के भलीविधि मांसपिंडहि आनि लेलफल इंद्रायनीके औ पुरनवाँ सानि ।। बेल लोपो लाखलेकै सैंधवै सब सानि । कूपजलमें औटि लीजै अष्टअंश प्रमानि ।। दोहा - सिद्धिअर्थ काढा कहो, बाजिनके सुखदेत । अंगरोग नाशे सकल, दुरंग बली बहु होत ।। छंदतोमर - मोथ महुआ पात । अरु नागकेसरि तात ॥ समलोन सेंहुड़ा दूध । करि काथ देउ अमुग्ध ।। सब मिटै बाजी सोग । तहँ हरै वाइस रोग ।। यह मानि लीजौ मित्त । अतिहोय चंचल चित्त ।। छंद छप्पय - दारु हर्द अरु सहत लेड सैंधव समान करि । सर्षप सरस सफेद खाँड़ सौंफै मिलाय घरि ।। औरा समकरि देड लेड इमि फूल फिरंगहि । समकार तुलसी बीज डारि औषध के संगहि ।। कीजै काथ कूपजललै सो अंश तीसरो दीजिये । वात पित्त कफरोग जे सब अश्वके तबु छीजिये ! द भुजंगप्रयात-सोंठी हर्र लैकै सुमोथा मिलावै । तहाँ फालसीमास पिंडा रलावै ॥ सबली हरिद्वा मालती मिलावै ।. तुरंगहिले तीसरो अंश प्यावै ॥ सोरठा-सन्निपात मिटिजाय, नशैतीजरो बाजिको ॥ बहु उपचार बनाय, भाष्यो ग्रंथन नकुलमत ।। चौपाई-महुरेठी और केसरिनागा । लेड भेंलाव पातरज भागा ।। शंखाहाल बहेरे लेहू । त्रिफला ताहि युक्त करिदेहू ।। काथ बाजिको दीजो चारू । घाँस मिटावै सुधकर सारू 11दिन दिन सबल करै उत्साहा । जानिलेउकाढा नरनाहा ।। अथ पिंड सब रोगनाशन । छंद - कुटकी जेती लीजिये महुरेठी पिपरी प्रमान । वच पीसिकै मोथा मिलावहु पंच अमृत ज्ञानु ।। पिंड याको देउ हयको रोग अंगन सब नसे पुष्टहोय सुनीन्द्र भाषै चारुचरणनसों लसै ।। सोरठा - दूरिहोत सब रोग, जा बाजीको दीजिये । कहत सयाने लोग, शूल आदि मिटिजाँय सब ।। चौपाई-केसरिफल श्री कमलकआनौ । तारामखिगिरिकनिकाजानौ ।। लै सबको करि पिंड खवावो । बाजी पवन समान चलावो । छंदचर्चरी - बच कपूर मँगाय सैंधव कीजिये यक ठाँव । सहत पीपरि गुर्च मेलो पिंड याको नाव ।। देउ प्रथम खवाय बाजी होय हलुको अंग । शालहोत्र विचारिये यह वरणिये शुभ संग ।। चौपाई - मिर्चस्याहअरु लहसुन लेहू । केसरिनाग युक्त करिदेव ।। मास दुगुनमें ठीकोकरो । पिंड बनाय अश्वमुख धरौ दोहा - यह खवाइ सब दुखहरौ, मारग चलै सचेत ॥ शालहोत्र मत पिंड यह, भाषो ग्रंथ निकेत ॥ शालहोमसंग्रह । छंदहलना-पतालफिरंग सोबरू मँगाइये । पंकज केसरि आनि जँसीर रलाइये ।। रक्तदोष मिटिजाय सु पिंड बताइये । होत तुरी आनंद सो ग्रंथन गाइये ।। छंद नराच - तमालपत्र सालिमो सो बृहकरो समानिको । तहाँसो लोध चिरचिरा औ तेंदुवा प्रमानिको ।। करो सुपिंड दूधमो हरौ सो वातरोगको । सो शालहोत्र देखिकै करौ जु बाजिभोगको ।। दोहा - लेउ चिरैता कूटिंकै, छिरका मध्य पचाय ॥ पिंडखवावै वाजिको, शूल सकलसिटिजाय ।। छंदहरिगीतिका - सँग को रस औटि लीजै देड मिर्च मिलाइकै । सहिंजना रस औटि लीज देर नासु बनायकै ।। अथ सर्वरोग नाशन । छँदछप्पय - इंद्रायाने फल चारु कमलगट्टा सुलेर युति । शिलाजीत दुइ निंधु नागकेसरि विशाल अति ॥ कमलके फल औ सहत लेउ बुधिवानटंक भरि । महुरेठी तिहि युक्त जानि लीजै समान करि ।। तिहि ले सकल घृत अठगुनो शोधि अग्नि परिपक्क करि । पनि देउ बाजी पुष्ट करिहै सबै व्याधि इसि जाय हरि ।
लीजै बँगलापान पुनि, यकतालीस सँगाइ ।। औषधसाहि मिलाइकै, हयको देल खवाइ ॥ तीन ॥ कही एक सौताज यह, सो दीजै दिन सात ।। दाना बीजे नाहि तिहि, तुरी नीक हैजात ॥ चार ॥ पछिले दोनों पाँइ जो, तुरी घसीटत होइ ।। ताके भीतर पाँवकी, रमै दगावै सोइ ॥ पाँच॥ अथ सलग्रहणी लक्षण । दोहा -- जो पियंरो पानी गिरै, सुख अरु नासा माहि ।। मलग्रहणी लक्षण निरखि, यतन करौ हय चाहि ॥ चौपाई-मधु अरु दूध मिलायक दीजै । सलग्रहणी ताकी हरिलीजै अथ शीतलतारोग देहमें काम नरहै । दोहा- बीजालेड पलाशके, टंक एक मँगवाय ।। बीज केवॉच समानले, संघवटंक मिलाय ॥ एक ॥ गोघृत के सँग दीजिये, जाय शितलता रोग ।। औषधकरै विचारिकै, भाषत कोविद लोग ॥ दो ॥ अथ विषशोधन विधि । दोहा- बिन शोधे विष औषधी, खान न दीजौ मीत ॥ अति दुखदायक होतिहै, करत जीव भयभीत ।। सोरठा - सुमिलपारले जानि, जहर शंखिया होत जो ।। सुनौ सकल बुधवान, विष शोधनकी जतन अब चौपाई-प्रथम शंखियाकी विधि जानौ । एकटकाभरि सो परमानौ ।। फिरि अमलोनियाँको मँगवावै । चारिटका सरि सो तौलावै ।। दोनों एकम खरिल करावै । एक पहर मौताज बतावे ।। पतरी पतरी टिकिया करै । घामें सुखै और विधि धेरै । लीजै अजयादूध मँगाई । एकसेर पक्के तौलाई दस इक माटीकी हाँड़ी लावै । दूधडारि तिहि अग्नि पकावै ।। टिकिया कृपरा पोटरी वाँधै । डोरा कसि हाँडी बिच साधै ।। दूधमबूडी पोटरी राखो । डोलयंत्र या विधि कहि भाषौ ॥ जस जस दूध कमी है जावे तस तस पोटरीका सकिलावै ॥ दूधक बाहर जबै निकारी । कपसकी तह करु तब चारी !! तामें पोटरी फेरि बँधावै । वाकी ऐसी जतन करावै ॥ पाव एक रस छिरका लावै । तिहि मा डोलयंत्र पकवावे ।। चौथाई छिरका रहिजावै । तब उतारि टिकिया जलध्वावै ॥ करिकै साफ सुखैकै घरै । सुमिलपार या विधि अनुसरै ॥ अथ काषादि विष शोधन । सोरठा-करियारी बछनाग, और सिंगिया हरदिया ।। पुनि कुचिला निर्दाग, काष्ठादि विष जो सबै ।। चौपाई-प्रथम एक विष शाधन कीजै । ताको तौलि टकाभरि लीजै पानी पाँचसेर मँगवावै । महिषाको गोबर लैआवै ।। माटीकी हाँडीमें भरै । कंडा आंच यासत्रय करै ॥ जल जार जाय और फिरि भरै । जहर धोयकै कतरा करै ।। चारि टकाभरि लै चौराई । मूल सहित लीजौ पिसवाई । सेरक पानी में घुरवावै । कतरे जहर डारि पकवावै !! पहर सवाइक आँच करावै । फेरि उतारि ताहि धुलवावै ॥ कपरामें, पोटरी करवाई । अजयादूध डेढ़ स्यर लाई ।। हाँडीमें भरि अग्नि पावै । तिहिमा डोलयंत्र करवावै ॥ जस जस दूध घंटे हँडिया में । तस पोटरी सकिलावै वा ।। दूध जबै थोरा रहिजावै । पानी मा तब ताहि धुवावै ॥ घामें सुखै धरौ तब भाई । दवा माहिं याको डरवाई । याहीविधि सब विष शोधवाइ । कचिलै मति डारौ चौराई ।। शाकहोगसंग्रह । अथ काढ़ासर्वरोगपर । हरिगीतिका राजहि के भलीविधि मांसपिंडहि आनि लेलफल इंद्रायनीके औ पुरनवाँ सानि ।। बेल लोपो लाखलेकै सैंधवै सब सानि । कूपजलमें औटि लीजै अष्टअंश प्रमानि ।। दोहा - सिद्धिअर्थ काढा कहो, बाजिनके सुखदेत । अंगरोग नाशे सकल, दुरंग बली बहु होत ।। छंदतोमर - मोथ महुआ पात । अरु नागकेसरि तात ॥ समलोन सेंहुड़ा दूध । करि काथ देउ अमुग्ध ।। सब मिटै बाजी सोग । तहँ हरै वाइस रोग ।। यह मानि लीजौ मित्त । अतिहोय चंचल चित्त ।। छंद छप्पय - दारु हर्द अरु सहत लेड सैंधव समान करि । सर्षप सरस सफेद खाँड़ सौंफै मिलाय घरि ।। औरा समकरि देड लेड इमि फूल फिरंगहि । समकार तुलसी बीज डारि औषध के संगहि ।। कीजै काथ कूपजललै सो अंश तीसरो दीजिये । वात पित्त कफरोग जे सब अश्वके तबु छीजिये ! द भुजंगप्रयात-सोंठी हर्र लैकै सुमोथा मिलावै । तहाँ फालसीमास पिंडा रलावै ॥ सबली हरिद्वा मालती मिलावै ।. तुरंगहिले तीसरो अंश प्यावै ॥ सोरठा-सन्निपात मिटिजाय, नशैतीजरो बाजिको ॥ बहु उपचार बनाय, भाष्यो ग्रंथन नकुलमत ।। चौपाई-महुरेठी और केसरिनागा । लेड भेंलाव पातरज भागा ।। शंखाहाल बहेरे लेहू । त्रिफला ताहि युक्त करिदेहू ।। काथ बाजिको दीजो चारू । घाँस मिटावै सुधकर सारू ग्यारहदिन दिन सबल करै उत्साहा । जानिलेउकाढा नरनाहा ।। अथ पिंड सब रोगनाशन । छंद - कुटकी जेती लीजिये महुरेठी पिपरी प्रमान । वच पीसिकै मोथा मिलावहु पंच अमृत ज्ञानु ।। पिंड याको देउ हयको रोग अंगन सब नसे पुष्टहोय सुनीन्द्र भाषै चारुचरणनसों लसै ।। सोरठा - दूरिहोत सब रोग, जा बाजीको दीजिये । कहत सयाने लोग, शूल आदि मिटिजाँय सब ।। चौपाई-केसरिफल श्री कमलकआनौ । तारामखिगिरिकनिकाजानौ ।। लै सबको करि पिंड खवावो । बाजी पवन समान चलावो । छंदचर्चरी - बच कपूर मँगाय सैंधव कीजिये यक ठाँव । सहत पीपरि गुर्च मेलो पिंड याको नाव ।। देउ प्रथम खवाय बाजी होय हलुको अंग । शालहोत्र विचारिये यह वरणिये शुभ संग ।। चौपाई - मिर्चस्याहअरु लहसुन लेहू । केसरिनाग युक्त करिदेव ।। मास दुगुनमें ठीकोकरो । पिंड बनाय अश्वमुख धरौ दोहा - यह खवाइ सब दुखहरौ, मारग चलै सचेत ॥ शालहोत्र मत पिंड यह, भाषो ग्रंथ निकेत ॥ शालहोमसंग्रह । छंदहलना-पतालफिरंग सोबरू मँगाइये । पंकज केसरि आनि जँसीर रलाइये ।। रक्तदोष मिटिजाय सु पिंड बताइये । होत तुरी आनंद सो ग्रंथन गाइये ।। छंद नराच - तमालपत्र सालिमो सो बृहकरो समानिको । तहाँसो लोध चिरचिरा औ तेंदुवा प्रमानिको ।। करो सुपिंड दूधमो हरौ सो वातरोगको । सो शालहोत्र देखिकै करौ जु बाजिभोगको ।। दोहा - लेउ चिरैता कूटिंकै, छिरका मध्य पचाय ॥ पिंडखवावै वाजिको, शूल सकलसिटिजाय ।। छंदहरिगीतिका - सँग को रस औटि लीजै देड मिर्च मिलाइकै । सहिंजना रस औटि लीज देर नासु बनायकै ।। अथ सर्वरोग नाशन । छँदछप्पय - इंद्रायाने फल चारु कमलगट्टा सुलेर युति । शिलाजीत दुइ निंधु नागकेसरि विशाल अति ॥ कमलके फल औ सहत लेउ बुधिवानटंक भरि । महुरेठी तिहि युक्त जानि लीजै समान करि ।। तिहि ले सकल घृत अठगुनो शोधि अग्नि परिपक्क करि । पनि देउ बाजी पुष्ट करिहै सबै व्याधि इसि जाय हरि ।
पंजाब में लुधियाना के गांव मंडियानी में 7 दिन पहले झुग्गी में लगी आग के मामले में 2 और बच्चों की मौत हो गई है। आग से मरने वालों का आंकड़ा 4 पहुंच गया है। आग में 6 बच्चे झुलस गए थे। बच्चों का PGI में इलाज चल रहा था। मृतकों की पहचान प्रवीण (11), कोमल (10), शुक्रा (7) और मोहन (3) के रूप में हुई है। मामले की जांच कर रहे ASI परमजीत सिंह ने बताया कि 2 बच्चे राधिका और अमन अभी भी PGI चंडीगढ़ में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। दोनों बच्चों की हालत अभी गंभीर बताई है। डॉक्टरों के मुताबिक, राधिका 60 फीसदी से ज्यादा और अमन 35 फीसदी तक झुलस चुका है। 9 जनवरी को 6 बच्चे अपनी मां सुनीता के साथ झुग्गी में सो रहे थे और उन्होंने खुद को गर्म रखने के लिए तेल का दिया जला रखा था। इसी बीच झोपड़ी में आग लग गई और परिवार द्वारा छत के रूप में इस्तेमाल की जा रही प्लास्टिक की शीट पिघल कर बच्चों पर गिर गई। हादसे में एक छोटा बच्चा सुरक्षित बच गया क्योंकि वह अपनी मां की गोद में सो रहा था। 6 बच्चे झुलस गए थे और उन्हें PGI चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां उनमें से दो की उसी दिन मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में CRPC की धारा 174 के तहत कार्रवाई की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब में लुधियाना के गांव मंडियानी में सात दिन पहले झुग्गी में लगी आग के मामले में दो और बच्चों की मौत हो गई है। आग से मरने वालों का आंकड़ा चार पहुंच गया है। आग में छः बच्चे झुलस गए थे। बच्चों का PGI में इलाज चल रहा था। मृतकों की पहचान प्रवीण , कोमल , शुक्रा और मोहन के रूप में हुई है। मामले की जांच कर रहे ASI परमजीत सिंह ने बताया कि दो बच्चे राधिका और अमन अभी भी PGI चंडीगढ़ में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। दोनों बच्चों की हालत अभी गंभीर बताई है। डॉक्टरों के मुताबिक, राधिका साठ फीसदी से ज्यादा और अमन पैंतीस फीसदी तक झुलस चुका है। नौ जनवरी को छः बच्चे अपनी मां सुनीता के साथ झुग्गी में सो रहे थे और उन्होंने खुद को गर्म रखने के लिए तेल का दिया जला रखा था। इसी बीच झोपड़ी में आग लग गई और परिवार द्वारा छत के रूप में इस्तेमाल की जा रही प्लास्टिक की शीट पिघल कर बच्चों पर गिर गई। हादसे में एक छोटा बच्चा सुरक्षित बच गया क्योंकि वह अपनी मां की गोद में सो रहा था। छः बच्चे झुलस गए थे और उन्हें PGI चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां उनमें से दो की उसी दिन मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में CRPC की धारा एक सौ चौहत्तर के तहत कार्रवाई की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
महाराष्ट्र। जलयुक्त परिसर के बोगस कार्यों ने ली बालक की बलि- अमरावती जिल्हे के चांदूर रेलवे तहसील अन्तर्गत आने वाले सातेफल में गांव से सटे नाले में तैरने के लिए गए एक 13 वर्षीय बालक की जलयुक्त परिसर योजना के बोगस कार्यों की वजह से काल शाम मौत हो गई। मृत बालक का नाम पार्थ अशोकराव घानोरकर है। घटना की जानकारी देने के बावजूद तलेगांव दशासर पुलिस के देर तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचने से रात 11. 00 बजे तक लाश वैसे ही पड़ी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार चांदूर रेलवे तहसील अन्तर्गत आने वाले सातेफल गांव में एक नाला बहता है सातेफल के विघि मंदिर हाईस्कूल के आठवीं कक्षा का छात्र पार्थ धानोरकर दोपहर के भोजन के बाद नाले के किनारे बने शहीद स्मारक के पास गया, तैरने की इच्छा होने पर वह पानी में उतरा इस दौरान सीमेंट प्लग के पास खुला छोड़ दिए गए लोहे के बार से पार्थ को चोट लग गई और गड्ढे में डूबने से उसकी मौत शाम होने पर भी जब पार्थ घर नहीं लौटा तो् परिजनों ने उसके तलाश शुरू की ढूंढते-ढूंढते उसके पिता शहीद स्मारक के निकट पहुंचे तो बांध के पास उसके कपड़े दिखाई दिए. पार्थ के पिता किसान हैं. उसके परिवार में माता और 10 साल का छोटा भाई है पार्थ पढ़ने में हो शियार था। चांदूर रेलवे स्थित ग्रामीण अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दोपहर में शोकाकुल वातावरण में उसका अंतिम संस्कार किया गया। कुछ ग्रामीणों ने इस घटना की जानकारी तलेगांव दशासर पुलिस को रात 8. 15 बजे दी, लेकिन 10. 30 बजे तक पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी। एक ग्रामीण ने इस बारे में आम आदमी पार्टी के नेता नितिन गवली को जानकारी दी नितिन गवली ने उपविभागीय पुलिस के अधिकारी शिंगटे को पुलिस के घटनास्थल पर नहीं पहुंचने की जानकारी दी। शिंगटे ने फोन पर बताया कि कुछ ही समय में पुलिस पहुंच जाएगी। इस के बाद रात करीब 11 बजे तलेगांव पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और तब जाकर शव पानी से बाहर निकाला गया. पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए ग्रामीण अस्पताल भेज दिया पुलिस कर्मियों ने पंचनामा न करते हुए कल आएंगे कह कर चले गए। ग्रामिण ने बताया कि वह पंचनामा करने की स्थिति में भी नहीं थी इस से तलेगांव दशासर पुलिस की लापरवाही एक बार फिर सामने आ गई है।
महाराष्ट्र। जलयुक्त परिसर के बोगस कार्यों ने ली बालक की बलि- अमरावती जिल्हे के चांदूर रेलवे तहसील अन्तर्गत आने वाले सातेफल में गांव से सटे नाले में तैरने के लिए गए एक तेरह वर्षीय बालक की जलयुक्त परिसर योजना के बोगस कार्यों की वजह से काल शाम मौत हो गई। मृत बालक का नाम पार्थ अशोकराव घानोरकर है। घटना की जानकारी देने के बावजूद तलेगांव दशासर पुलिस के देर तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचने से रात ग्यारह. शून्य बजे तक लाश वैसे ही पड़ी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार चांदूर रेलवे तहसील अन्तर्गत आने वाले सातेफल गांव में एक नाला बहता है सातेफल के विघि मंदिर हाईस्कूल के आठवीं कक्षा का छात्र पार्थ धानोरकर दोपहर के भोजन के बाद नाले के किनारे बने शहीद स्मारक के पास गया, तैरने की इच्छा होने पर वह पानी में उतरा इस दौरान सीमेंट प्लग के पास खुला छोड़ दिए गए लोहे के बार से पार्थ को चोट लग गई और गड्ढे में डूबने से उसकी मौत शाम होने पर भी जब पार्थ घर नहीं लौटा तो् परिजनों ने उसके तलाश शुरू की ढूंढते-ढूंढते उसके पिता शहीद स्मारक के निकट पहुंचे तो बांध के पास उसके कपड़े दिखाई दिए. पार्थ के पिता किसान हैं. उसके परिवार में माता और दस साल का छोटा भाई है पार्थ पढ़ने में हो शियार था। चांदूर रेलवे स्थित ग्रामीण अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दोपहर में शोकाकुल वातावरण में उसका अंतिम संस्कार किया गया। कुछ ग्रामीणों ने इस घटना की जानकारी तलेगांव दशासर पुलिस को रात आठ. पंद्रह बजे दी, लेकिन दस. तीस बजे तक पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी। एक ग्रामीण ने इस बारे में आम आदमी पार्टी के नेता नितिन गवली को जानकारी दी नितिन गवली ने उपविभागीय पुलिस के अधिकारी शिंगटे को पुलिस के घटनास्थल पर नहीं पहुंचने की जानकारी दी। शिंगटे ने फोन पर बताया कि कुछ ही समय में पुलिस पहुंच जाएगी। इस के बाद रात करीब ग्यारह बजे तलेगांव पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और तब जाकर शव पानी से बाहर निकाला गया. पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए ग्रामीण अस्पताल भेज दिया पुलिस कर्मियों ने पंचनामा न करते हुए कल आएंगे कह कर चले गए। ग्रामिण ने बताया कि वह पंचनामा करने की स्थिति में भी नहीं थी इस से तलेगांव दशासर पुलिस की लापरवाही एक बार फिर सामने आ गई है।
JEE Main Result 2023 :कोटा। देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम JEE-main 2023 का रिजल्ट जारी हो गया है। जिसमें कोटा के कोचिंग इंस्टिट्यूट के 3 छात्रों ने टॉप 5 में बाजी मारी है। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। कोटा की जिस कोचिंग के तीन स्टूडेंट टॉप 5 में आए हैं। उनके नाम श्रीकांत वैरागडे(AIR-3), मलय केडिया(AIR-4) और कौशल विजयवर्गीय(AIR-5) हैं। श्रीकांत वैरागडे ने 300 में 300 अंक प्राप्त किए। मलय केडिया ने भी 300 में 300 अंक और कौशल विजयवर्गीय ने भी 300 में 300 अंक प्राप्त करके टॉप 5 में अपनी जगह पक्की कर ली है। बता दें कि इस परीक्षा में 11 लाख 12 हजार अभ्यर्थियों ने पार्टिसिपेट किया था। जिसमें 2,50000 शीर्ष रैंक पाने वाले छात्र अब जेईई एडवांस में आवेदन करेंगे। रिजल्ट के साथ ही टॉपर्स के भी नाम जारी कर दिए गए हैं। साथ में ऑल इंडिया रैंक को भी मेंशन किया गया है। इस वर्ष परीक्षा (JEE Main Result 2023) में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण ही कटऑफ भी बढ़ी। जेईई-मेन के आधार पर शीर्ष सभी कैटेगरी मिलाकर 2. 5 लाख विद्यार्थियों को एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए क्वालीफाई किया जाता है। इसमें ओपन कैटेगरी से 1 लाख एक हजार 250, ईडब्ल्यूएस से 25 हजार, ओबीसी के 67 हजार 500, एससी के 37500 तथा एसटी कैटेगरी के 18750 स्टूडेंट्स क्वालीफाई किया जाता है। इस वर्ष सामान्य श्रेणी की कटऑफ 90. 7788642, ईडब्ल्यूएस की कटऑफ 75. 6229025, ओबीसी की कटऑफ 73. 6114227, एससी की कटऑफ 51. 9776027, एसटी की कटऑफ 37. 2348772 रही। वहीं गत वर्ष इन्हीं कैटेगरी की कटऑफ ओपन कैटेगरी में कटऑफ 88. 41, ईडब्ल्यूएस की 63. 11, ओबीसी की 67. 00, एससी 43. 08, एसटी की 26. 73 कटऑफ रही थी। इस वर्ष ओपन की एडवांस्ड परीक्षा के लिए क्वालीफाई कटऑफ 2. 3, ईडब्ल्यूएस की 12, ओबीसी की 6, एससी की 8 व एसटी की 11 पर्सेन्टाइल कटऑफ में बढ़ोतरी हुई। अमित आहूजा ने बताया कि इस वर्ष पहली बार विद्यार्थियों के हायर एनटीए स्कोर में टाइ लगने पर रैंक के निर्धारण के लिए 9 मापदण्ड निर्धारित किए गए हैं, जिसमें यदि दो विद्यार्थियों के टोटल एनटीए स्कोर समान आते हैं तो ऑल इंडिया रैंक निर्धारण में सर्वप्रथम मैथेमेटिक्स का एनटीए स्कोर देखा जाता है। यह समान होने पर फिजिक्स, इसके बाद कैमेस्ट्री का एनटीए स्कोर, फिर सही और गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। इस स्थिति में टाइ लगने पर विषयवार मैथेमेटिक्स के सही व गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात, यहां भी टाइ लगने पर फिजिक्स के सही और गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात, उसमें टाइ लगने पर कैमेस्ट्री के सही एवं गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। उपरोक्त सभी मापदण्डों में भी टाइ लगने की स्थिति में जिस विद्यार्थी की आयु ज्यादा होगी, उसे आल इंडिया रैंक में प्राथमिकता दी जाती है। आयु के मापदण्ड के स्तर पर ही भी यदि टाइ की स्थिति बनती है आवेदन क्रमांक के आरोही क्रम को प्राथमिकता दी देते हैं। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि विद्यार्थी जिनकी एआईआर 5 हजार से कम रहेगी उन्हें टॉप 5 एनआईटी तिरछी, वारंगल, सूरतकल, इलाहाबाद, जयपुर ट्रिपलआईटी इलाहाबाद की कोर ब्रांच मिलने की संभावना होगी। विद्यार्थी जिनकी आल इंडिया रैंक 5 से 10 हजार के मध्य रहेगी, उन्हें उपरोक्त टॉप 5 एनआईटी की अन्य ब्रांचों के अतिरिक्त कालीकट, सूरत, नागपुर,भोपाल,कुरूक्षेत्र, राउरकेला जैसे एनआईटी में कोर ब्रांच मिलने की संभावना है। ऐसे विद्यार्थी जिनकी एआईआर 10 से 20 हजार के मध्य आने की संभावना है, उन्हें जालंधर,जमशेदपुर, दिल्ली, गोवा,अगरतला, हमीरपुर, दुर्गापुर जैसे एनआईटी में कोर ब्रांच के साथ-साथ ट्रिपलआईटी ग्वालियर, जबलपुर, गुवाहाटी,लखनऊ, पेक चंडीगढ़, बिट्स मिसरा आईआईईएसटी शिवपुर, जेएनयू, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में कोर ब्रांच मिलने की संभावना रहेगी। विद्यार्थी जिनकी ऑल इंडिया रैंक 20 से 30 हजार के मध्य रहती है उन्हें टॉप 10 एनआईटी की अन्य ब्रांचों के अतिरिक्त पटना, रायपुर, सिल्चर, उत्तराखंड, श्रीनगर, आंध्रप्रदेश, अरूणाचल प्रदेश जैसे एनआईटी की कोर ब्रांचों के साथ-साथ नए ट्रिपलआईटी जैसे तिरछी, नागपुर, पूणे, सूरत, भोपाल, वडोदरा, , रांची, आदि मिलने की संभावनाएं बन सकती है। साथ ही 30 से 60 हजार ऑल इंडिया रैंक वाले विद्यार्थियों को टॉप 20 एनआईटी की कोर ब्रांचों के अलावा अन्य ब्रांचों व नोर्थ ईस्ट के एनआईटी जैसे सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम में कोर ब्रांचों के साथ साथ नए ट्रिपलआईटी रांची, धारवाड़ ,कल्याणी, कुर्नूल, चित्तूर ,नया रायपुर, मणिपुर ऊना, कोटयम व जीएफटीआई में प्रवेश मिलने की संभावना बन सकती है। यह दी गयी एआईआर पर कॉलेज मिलने की संभावनाएं कैटेगिरी अनुसार सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए बदल सकती है। ( इनपुट- योगेश जोशी )
JEE Main Result दो हज़ार तेईस :कोटा। देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम JEE-main दो हज़ार तेईस का रिजल्ट जारी हो गया है। जिसमें कोटा के कोचिंग इंस्टिट्यूट के तीन छात्रों ने टॉप पाँच में बाजी मारी है। परीक्षार्थी अपना रिजल्ट अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। कोटा की जिस कोचिंग के तीन स्टूडेंट टॉप पाँच में आए हैं। उनके नाम श्रीकांत वैरागडे, मलय केडिया और कौशल विजयवर्गीय हैं। श्रीकांत वैरागडे ने तीन सौ में तीन सौ अंक प्राप्त किए। मलय केडिया ने भी तीन सौ में तीन सौ अंक और कौशल विजयवर्गीय ने भी तीन सौ में तीन सौ अंक प्राप्त करके टॉप पाँच में अपनी जगह पक्की कर ली है। बता दें कि इस परीक्षा में ग्यारह लाख बारह हजार अभ्यर्थियों ने पार्टिसिपेट किया था। जिसमें दो,पचास हज़ार शीर्ष रैंक पाने वाले छात्र अब जेईई एडवांस में आवेदन करेंगे। रिजल्ट के साथ ही टॉपर्स के भी नाम जारी कर दिए गए हैं। साथ में ऑल इंडिया रैंक को भी मेंशन किया गया है। इस वर्ष परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण ही कटऑफ भी बढ़ी। जेईई-मेन के आधार पर शीर्ष सभी कैटेगरी मिलाकर दो. पाँच लाख विद्यार्थियों को एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए क्वालीफाई किया जाता है। इसमें ओपन कैटेगरी से एक लाख एक हजार दो सौ पचास, ईडब्ल्यूएस से पच्चीस हजार, ओबीसी के सरसठ हजार पाँच सौ, एससी के सैंतीस हज़ार पाँच सौ तथा एसटी कैटेगरी के अट्ठारह हज़ार सात सौ पचास स्टूडेंट्स क्वालीफाई किया जाता है। इस वर्ष सामान्य श्रेणी की कटऑफ नब्बे. सतहत्तर लाख अठासी हज़ार छः सौ बयालीस, ईडब्ल्यूएस की कटऑफ पचहत्तर. बासठ लाख उनतीस हज़ार पच्चीस, ओबीसी की कटऑफ तिहत्तर. इकसठ लाख चौदह हज़ार दो सौ सत्ताईस, एससी की कटऑफ इक्यावन. सत्तानवे लाख छिहत्तर हज़ार सत्ताईस, एसटी की कटऑफ सैंतीस. तेईस लाख अड़तालीस हज़ार सात सौ बहत्तर रही। वहीं गत वर्ष इन्हीं कैटेगरी की कटऑफ ओपन कैटेगरी में कटऑफ अठासी. इकतालीस, ईडब्ल्यूएस की तिरेसठ. ग्यारह, ओबीसी की सरसठ. शून्य, एससी तैंतालीस. आठ, एसटी की छब्बीस. तिहत्तर कटऑफ रही थी। इस वर्ष ओपन की एडवांस्ड परीक्षा के लिए क्वालीफाई कटऑफ दो. तीन, ईडब्ल्यूएस की बारह, ओबीसी की छः, एससी की आठ व एसटी की ग्यारह पर्सेन्टाइल कटऑफ में बढ़ोतरी हुई। अमित आहूजा ने बताया कि इस वर्ष पहली बार विद्यार्थियों के हायर एनटीए स्कोर में टाइ लगने पर रैंक के निर्धारण के लिए नौ मापदण्ड निर्धारित किए गए हैं, जिसमें यदि दो विद्यार्थियों के टोटल एनटीए स्कोर समान आते हैं तो ऑल इंडिया रैंक निर्धारण में सर्वप्रथम मैथेमेटिक्स का एनटीए स्कोर देखा जाता है। यह समान होने पर फिजिक्स, इसके बाद कैमेस्ट्री का एनटीए स्कोर, फिर सही और गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। इस स्थिति में टाइ लगने पर विषयवार मैथेमेटिक्स के सही व गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात, यहां भी टाइ लगने पर फिजिक्स के सही और गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात, उसमें टाइ लगने पर कैमेस्ट्री के सही एवं गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। उपरोक्त सभी मापदण्डों में भी टाइ लगने की स्थिति में जिस विद्यार्थी की आयु ज्यादा होगी, उसे आल इंडिया रैंक में प्राथमिकता दी जाती है। आयु के मापदण्ड के स्तर पर ही भी यदि टाइ की स्थिति बनती है आवेदन क्रमांक के आरोही क्रम को प्राथमिकता दी देते हैं। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि विद्यार्थी जिनकी एआईआर पाँच हजार से कम रहेगी उन्हें टॉप पाँच एनआईटी तिरछी, वारंगल, सूरतकल, इलाहाबाद, जयपुर ट्रिपलआईटी इलाहाबाद की कोर ब्रांच मिलने की संभावना होगी। विद्यार्थी जिनकी आल इंडिया रैंक पाँच से दस हजार के मध्य रहेगी, उन्हें उपरोक्त टॉप पाँच एनआईटी की अन्य ब्रांचों के अतिरिक्त कालीकट, सूरत, नागपुर,भोपाल,कुरूक्षेत्र, राउरकेला जैसे एनआईटी में कोर ब्रांच मिलने की संभावना है। ऐसे विद्यार्थी जिनकी एआईआर दस से बीस हजार के मध्य आने की संभावना है, उन्हें जालंधर,जमशेदपुर, दिल्ली, गोवा,अगरतला, हमीरपुर, दुर्गापुर जैसे एनआईटी में कोर ब्रांच के साथ-साथ ट्रिपलआईटी ग्वालियर, जबलपुर, गुवाहाटी,लखनऊ, पेक चंडीगढ़, बिट्स मिसरा आईआईईएसटी शिवपुर, जेएनयू, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में कोर ब्रांच मिलने की संभावना रहेगी। विद्यार्थी जिनकी ऑल इंडिया रैंक बीस से तीस हजार के मध्य रहती है उन्हें टॉप दस एनआईटी की अन्य ब्रांचों के अतिरिक्त पटना, रायपुर, सिल्चर, उत्तराखंड, श्रीनगर, आंध्रप्रदेश, अरूणाचल प्रदेश जैसे एनआईटी की कोर ब्रांचों के साथ-साथ नए ट्रिपलआईटी जैसे तिरछी, नागपुर, पूणे, सूरत, भोपाल, वडोदरा, , रांची, आदि मिलने की संभावनाएं बन सकती है। साथ ही तीस से साठ हजार ऑल इंडिया रैंक वाले विद्यार्थियों को टॉप बीस एनआईटी की कोर ब्रांचों के अलावा अन्य ब्रांचों व नोर्थ ईस्ट के एनआईटी जैसे सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम में कोर ब्रांचों के साथ साथ नए ट्रिपलआईटी रांची, धारवाड़ ,कल्याणी, कुर्नूल, चित्तूर ,नया रायपुर, मणिपुर ऊना, कोटयम व जीएफटीआई में प्रवेश मिलने की संभावना बन सकती है। यह दी गयी एआईआर पर कॉलेज मिलने की संभावनाएं कैटेगिरी अनुसार सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए बदल सकती है।
Quick links: दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy CM Manish Sisodia) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मौजूदा शराब घोटाले के सिलसिले में गहन जांच के बीच तलब किया है। 'आप' नेता को सोमवार (17 अक्टूबर) सुबह 11 बजे सीबीआई के सामने पेश होना होगा। गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले (Liquor Scam Case) में कथित तौर पर सबसे पहला आरोपी बनाया गया है। 'आप' नेता ने रविवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि उनके आवास पर 14 घंटे तक छापेमारी की गई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने उनके बैंक लॉकर की तलाशी ली और उनके गांव में घर पर भी छापा मारा लेकिन कुछ नहीं मिला। सिसोदिया ने आगे कहा कि उन्हें सोमवार को सीबीआई मुख्यालय तलब किया गया है। उन्होंने कहा, "मैं जाऊंगा और अपना पूरा सहयोग दूंगा।" अब इन्होंने कल 11 बजे मुझे CBI मुख्यालय बुलाया है. मैं जाऊँगा और पूरा सहयोग करूँगा. सत्यमेव जयते. इससे पहले अगस्त में प्रवर्तन एजेंसियों ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के दिल्ली स्थित आवास पर करीब 15 घंटे तक छापेमारी की। इसके अलावा, दिल्ली की आबकारी नीति के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में कई अन्य स्थानों की भी तलाशी ली गई। बाद में आप और बीजेपी के बीच एक राजनीतिक गतिरोध देखा गया, जिसमें दोनों राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। आबकारी विभाग के प्रभारी सिसोदिया कथित जानबूझकर और घोर प्रक्रियात्मक चूक के लिए जांच के दायरे में हैं, जिसने दिल्ली में साल 2021-22 के लिए शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। यह आरोप लगाया गया था कि आबकारी नीति में संशोधनों सहित अनियमितताएं की गई थीं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया, जिसमें लाइसेंस शुल्क में छूट या कमी दी गई। साथ ही अप्रूवल के बिना एल -1 लाइसेंस को एक्सटेंड किया गया। सीबीआई ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया सहित 15 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 477A (खातों में हेराफेरी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। जबकि AAP ने आरोप लगाया कि यह सिसोदिया और अन्य विधायकों को बीजेपी में शामिल होने और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए मजबूर करने की कोशिश थी। हालांकि, भाजपा ने इस दावे का खंडन किया है। इस बीच, बीजेपी ने दो स्टिंग वीडियो जारी किए हैं, जिसमें आरोपी पैसे के लेन-देन और शराब नीति बनाने में शामिल प्रमुख व्यक्तियों के बारे में ब्योरा देते नजर आ रहे हैं। आरोपियों को यह दावा करते हुए भी सुना गया कि 'घोटाले' से अवैध रूप से अर्जित राशि का इस्तेमाल 'आप' के पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान में किया गया था। यह मामला तब आया जब दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 'आप' सरकार की संशोधित आबकारी नीति की सीबीआई जांच की सिफारिश की। एक आकलन रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में कथित उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियां शामिल थीं, जिससे सरकारी खजाने को 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
Quick links: दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मौजूदा शराब घोटाले के सिलसिले में गहन जांच के बीच तलब किया है। 'आप' नेता को सोमवार सुबह ग्यारह बजे सीबीआई के सामने पेश होना होगा। गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में कथित तौर पर सबसे पहला आरोपी बनाया गया है। 'आप' नेता ने रविवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि उनके आवास पर चौदह घंटाटे तक छापेमारी की गई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने उनके बैंक लॉकर की तलाशी ली और उनके गांव में घर पर भी छापा मारा लेकिन कुछ नहीं मिला। सिसोदिया ने आगे कहा कि उन्हें सोमवार को सीबीआई मुख्यालय तलब किया गया है। उन्होंने कहा, "मैं जाऊंगा और अपना पूरा सहयोग दूंगा।" अब इन्होंने कल ग्यारह बजे मुझे CBI मुख्यालय बुलाया है. मैं जाऊँगा और पूरा सहयोग करूँगा. सत्यमेव जयते. इससे पहले अगस्त में प्रवर्तन एजेंसियों ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के दिल्ली स्थित आवास पर करीब पंद्रह घंटाटे तक छापेमारी की। इसके अलावा, दिल्ली की आबकारी नीति के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में कई अन्य स्थानों की भी तलाशी ली गई। बाद में आप और बीजेपी के बीच एक राजनीतिक गतिरोध देखा गया, जिसमें दोनों राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। आबकारी विभाग के प्रभारी सिसोदिया कथित जानबूझकर और घोर प्रक्रियात्मक चूक के लिए जांच के दायरे में हैं, जिसने दिल्ली में साल दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। यह आरोप लगाया गया था कि आबकारी नीति में संशोधनों सहित अनियमितताएं की गई थीं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया, जिसमें लाइसेंस शुल्क में छूट या कमी दी गई। साथ ही अप्रूवल के बिना एल -एक लाइसेंस को एक्सटेंड किया गया। सीबीआई ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया सहित पंद्रह आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा एक सौ बीसB और चार सौ सतहत्तर एम्पीयर और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा सात के तहत मामला दर्ज किया है। जबकि AAP ने आरोप लगाया कि यह सिसोदिया और अन्य विधायकों को बीजेपी में शामिल होने और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने के लिए मजबूर करने की कोशिश थी। हालांकि, भाजपा ने इस दावे का खंडन किया है। इस बीच, बीजेपी ने दो स्टिंग वीडियो जारी किए हैं, जिसमें आरोपी पैसे के लेन-देन और शराब नीति बनाने में शामिल प्रमुख व्यक्तियों के बारे में ब्योरा देते नजर आ रहे हैं। आरोपियों को यह दावा करते हुए भी सुना गया कि 'घोटाले' से अवैध रूप से अर्जित राशि का इस्तेमाल 'आप' के पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान में किया गया था। यह मामला तब आया जब दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 'आप' सरकार की संशोधित आबकारी नीति की सीबीआई जांच की सिफारिश की। एक आकलन रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली आबकारी नीति दो हज़ार इक्कीस-बाईस में कथित उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियां शामिल थीं, जिससे सरकारी खजाने को एक सौ पचास करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
राजनांदगांव। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने राजनांदगाँव जिले की सीमा पर प्रवासी यात्रियों के अत्यधिक दबाव एवं संक्रमण की संभावना को देखते हुए मुख्य सचिव आरपी मण्डल को पत्र लिखा है। राजनांदगांव जिले की महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के साथ लंबी सीमा लगती है। जिले में कुल 6 चेक पोस्ट स्थित हैं, जिसमें मुख्यतया बागनदी चेक पोस्ट में वाहनों का आवागमन अधिक होता है। बागनदी चेकपोस्ट राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 (मुंबई से हजीरा) में स्थित है। इस चेक पोस्ट में प्रतिदिन अनुमानित 10000 से 15000 लोग प्रवेश कर रहे हैं। विगत तीन-चार दिनों में ही इनकी संख्या बहुत अधिक बढ़ी है। भविष्य में इनकी संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। कलेक्टर ने मुख्य सचिव को लिखा है, मेरे संज्ञान में यह आया है कि महाराष्ट्र और गुजरात परिवहन विभाग की बसों एवं उन राज्यों से आने वाले ट्रकों के माध्यम से बड़ी संख्या में यात्रियों को बागनदी चेक पोस्ट के समीप उतार दिया जाता है, जिससे लगातार बागनदी चेक पोस्ट पर हजारों लोगों की भीड़ एकत्र हो रही है। इससे राजनांदगाँव जिले में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सीमा पर आने वाले यात्री छत्तीसगढ़, झारखंड बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। जिसमें केवल 20% यात्री ही छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। इन प्रवासी यात्रियों के सुरक्षित परिवहन हेतु संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय की आवश्यकता है। कलेक्टर ने लिखा है, इन प्रवासी यात्रियों के परिवहन हेतु बड़ी संख्या में बसों की आवश्यकता होगी, जिसका भार राज्य सरकार पर आएगा। उचित होगा कि अन्य राज्यों के निवासियों के परिवहन व्यय का भार संबंधित राज्य सरकारें वाहन करें कृपया उक्त संबंध में उचित कार्यवाही कर पर्याप्त संख्या में बस उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध है।
राजनांदगांव। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने राजनांदगाँव जिले की सीमा पर प्रवासी यात्रियों के अत्यधिक दबाव एवं संक्रमण की संभावना को देखते हुए मुख्य सचिव आरपी मण्डल को पत्र लिखा है। राजनांदगांव जिले की महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के साथ लंबी सीमा लगती है। जिले में कुल छः चेक पोस्ट स्थित हैं, जिसमें मुख्यतया बागनदी चेक पोस्ट में वाहनों का आवागमन अधिक होता है। बागनदी चेकपोस्ट राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक छः में स्थित है। इस चेक पोस्ट में प्रतिदिन अनुमानित दस हज़ार से पंद्रह हज़ार लोग प्रवेश कर रहे हैं। विगत तीन-चार दिनों में ही इनकी संख्या बहुत अधिक बढ़ी है। भविष्य में इनकी संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। कलेक्टर ने मुख्य सचिव को लिखा है, मेरे संज्ञान में यह आया है कि महाराष्ट्र और गुजरात परिवहन विभाग की बसों एवं उन राज्यों से आने वाले ट्रकों के माध्यम से बड़ी संख्या में यात्रियों को बागनदी चेक पोस्ट के समीप उतार दिया जाता है, जिससे लगातार बागनदी चेक पोस्ट पर हजारों लोगों की भीड़ एकत्र हो रही है। इससे राजनांदगाँव जिले में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सीमा पर आने वाले यात्री छत्तीसगढ़, झारखंड बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। जिसमें केवल बीस% यात्री ही छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। इन प्रवासी यात्रियों के सुरक्षित परिवहन हेतु संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय की आवश्यकता है। कलेक्टर ने लिखा है, इन प्रवासी यात्रियों के परिवहन हेतु बड़ी संख्या में बसों की आवश्यकता होगी, जिसका भार राज्य सरकार पर आएगा। उचित होगा कि अन्य राज्यों के निवासियों के परिवहन व्यय का भार संबंधित राज्य सरकारें वाहन करें कृपया उक्त संबंध में उचित कार्यवाही कर पर्याप्त संख्या में बस उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध है।
नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून को पूरी तरह लागू करने और पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी। याचिका में कानूनी मदद और घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं के लिए शेल्टर होम बनाए जाने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि घरेलू हिंसा कानून का सख्ती से पालन करने का दिशा-निर्देश जारी किया जाए। याचिका में घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है। याचिका वी द वुमन नामक एनजीओ ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून के लागू होने के 15 साल ज्यादा बीत चुके हैं। इसके बावजूद देश में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा कम नहीं हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के 2019 के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ दर्ज चार लाख पांच हजार अपराधों में से एक तिहाई मामले घरेलू हिंसा के हैं। घरेलू हिंसा के अधिकांश मामलों में तो महिलाएं शिकायत दर्ज कराती ही नहीं हैं।
नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून को पूरी तरह लागू करने और पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई छः दिसंबर को होगी। याचिका में कानूनी मदद और घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं के लिए शेल्टर होम बनाए जाने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि घरेलू हिंसा कानून का सख्ती से पालन करने का दिशा-निर्देश जारी किया जाए। याचिका में घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है। याचिका वी द वुमन नामक एनजीओ ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून के लागू होने के पंद्रह साल ज्यादा बीत चुके हैं। इसके बावजूद देश में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा कम नहीं हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के दो हज़ार उन्नीस के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ दर्ज चार लाख पांच हजार अपराधों में से एक तिहाई मामले घरेलू हिंसा के हैं। घरेलू हिंसा के अधिकांश मामलों में तो महिलाएं शिकायत दर्ज कराती ही नहीं हैं।
नई दिल्लीः केंद्र सरकार आज 27 जुलाई को राज्यसभा में 'भारतीय अंटार्कटिक विधेयक-2022' पेश करेगी, जबकि विपक्षी दलों द्वारा 19 सदस्यों के निलंबन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की उम्मीद है। राज्यसभा ने मंगलवार को सदन की प्रक्रियाओं में बाधा डालने के लिए विपक्ष के 19 सदस्यों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के सात, द्रमुक के छह, टीआरएस के तीन, माकपा के दो और भाकपा के पास एक सदस्य है। सदस्यों को सभा और सभापीठ के अधिकार के प्रति पूर्ण अवमानना का प्रदर्शन करने के लिए निलंबित कर दिया गया था। केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह विधेयक पर प्रस्ताव करेंगे कि 'भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, 2022' पर, जैसा कि लोकसभा द्वारा पारित किया गया है, पर विचार किया जाए। विधेयक में घरेलू कानूनों को भारत के अंटार्कटिक अनुसंधान चौकियों तक लागू करने का प्रस्ताव है। भारत अंटार्कटिक में दो सक्रिय अनुसंधान स्टेशन, मैत्री और भारती संचालित करता है, जहां वैज्ञानिक अनुसंधान करते हैं। अंटार्कटिक के लिए निजी पर्यटन और अभियानों को विधेयक के प्रावधानों के तहत निषिद्ध किया जाएगा जब तक कि किसी सदस्य देश से परमिट या लिखित प्राधिकरण के साथ न हो। सोमवार को, जबकि भाजपा के सदस्यों ने विपक्षी बेंचों की नारेबाजी के बीच विधेयक पर बहस जारी रखी, अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक पर मंत्री की टिप्पणी, और इस पर विचार और पारित, अगले दिन होगा। हालांकि, विपक्ष के प्रदर्शनों के कारण, इसे मंगलवार को नहीं लाया जा सका।
नई दिल्लीः केंद्र सरकार आज सत्ताईस जुलाई को राज्यसभा में 'भारतीय अंटार्कटिक विधेयक-दो हज़ार बाईस' पेश करेगी, जबकि विपक्षी दलों द्वारा उन्नीस सदस्यों के निलंबन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की उम्मीद है। राज्यसभा ने मंगलवार को सदन की प्रक्रियाओं में बाधा डालने के लिए विपक्ष के उन्नीस सदस्यों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के सात, द्रमुक के छह, टीआरएस के तीन, माकपा के दो और भाकपा के पास एक सदस्य है। सदस्यों को सभा और सभापीठ के अधिकार के प्रति पूर्ण अवमानना का प्रदर्शन करने के लिए निलंबित कर दिया गया था। केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह विधेयक पर प्रस्ताव करेंगे कि 'भारतीय अंटार्कटिक विधेयक, दो हज़ार बाईस' पर, जैसा कि लोकसभा द्वारा पारित किया गया है, पर विचार किया जाए। विधेयक में घरेलू कानूनों को भारत के अंटार्कटिक अनुसंधान चौकियों तक लागू करने का प्रस्ताव है। भारत अंटार्कटिक में दो सक्रिय अनुसंधान स्टेशन, मैत्री और भारती संचालित करता है, जहां वैज्ञानिक अनुसंधान करते हैं। अंटार्कटिक के लिए निजी पर्यटन और अभियानों को विधेयक के प्रावधानों के तहत निषिद्ध किया जाएगा जब तक कि किसी सदस्य देश से परमिट या लिखित प्राधिकरण के साथ न हो। सोमवार को, जबकि भाजपा के सदस्यों ने विपक्षी बेंचों की नारेबाजी के बीच विधेयक पर बहस जारी रखी, अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक पर मंत्री की टिप्पणी, और इस पर विचार और पारित, अगले दिन होगा। हालांकि, विपक्ष के प्रदर्शनों के कारण, इसे मंगलवार को नहीं लाया जा सका।
अगर आप दुर्गा पूजा, दिवाली या छठ पर्व पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता से घर जाने की तैयारी कर रहे हैं तो क्या आपने टिकट बुक कर लिया है। इन गंतव्यों से बिहार-UP जाने वाली अधिकांश ट्रेन में सीट बुक हो चुकी हैं। वहीं, अगर, आप हवाई जहाज से जाने का प्लान बना रहे हैं तो हवाई टिकट के रेट आसामान पर पहुंच गए हैं। आइए, एक नजर डालते हैं कि हवाई टिकट के रेट प्रमुख मार्गों पर क्या चल रहे हैं। इस बार 5 अक्टूबर को विजयदशमी हैं। वहीं, 24 अक्टूबर को दिवाली और 30 अक्टूबर को छठ पर्व है। इस दौरान अधिकांश लोग जो देश से बाहर या देश के अलग-अगल हिस्सों में रहते हैं अपने घर को आते हैं। इसी को देखते हुए एयरलाइंस कंपनियां इन तारीखों के आस-पास मोटा किराया वसूल रही हैं। ये तारीखें नजदीक आने के साथ टिकट दर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है।
अगर आप दुर्गा पूजा, दिवाली या छठ पर्व पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता से घर जाने की तैयारी कर रहे हैं तो क्या आपने टिकट बुक कर लिया है। इन गंतव्यों से बिहार-UP जाने वाली अधिकांश ट्रेन में सीट बुक हो चुकी हैं। वहीं, अगर, आप हवाई जहाज से जाने का प्लान बना रहे हैं तो हवाई टिकट के रेट आसामान पर पहुंच गए हैं। आइए, एक नजर डालते हैं कि हवाई टिकट के रेट प्रमुख मार्गों पर क्या चल रहे हैं। इस बार पाँच अक्टूबर को विजयदशमी हैं। वहीं, चौबीस अक्टूबर को दिवाली और तीस अक्टूबर को छठ पर्व है। इस दौरान अधिकांश लोग जो देश से बाहर या देश के अलग-अगल हिस्सों में रहते हैं अपने घर को आते हैं। इसी को देखते हुए एयरलाइंस कंपनियां इन तारीखों के आस-पास मोटा किराया वसूल रही हैं। ये तारीखें नजदीक आने के साथ टिकट दर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है।
भोपाल। संस्कृति गरबा महोत्सव 2021 का समापन निर्मल रेजिडेन्सी ललघाटी में धूम धाम से किया गया । लगातार 15 दिवसी गरबा अभ्यास के बाद कॉम्पटिशन रखा गया जिसमें बेस्ट डांसर, बेस्ट ड्रेसअप का अवार्ड दिया गया। गरबा की आयोजक डॉक्टर सपना पालीवाल पिछले 8 वर्ष से कर्मिशयल गरबा महोत्सव में प्राइज एवं अवार्ड प्राप्त किया। गरबा में उनकी रुचि ओर उनका साहस ने इस महोत्सव को सफल बनाया। इसी बीच हुजूर विधानसभा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने अवार्ड देकर प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
भोपाल। संस्कृति गरबा महोत्सव दो हज़ार इक्कीस का समापन निर्मल रेजिडेन्सी ललघाटी में धूम धाम से किया गया । लगातार पंद्रह दिवसी गरबा अभ्यास के बाद कॉम्पटिशन रखा गया जिसमें बेस्ट डांसर, बेस्ट ड्रेसअप का अवार्ड दिया गया। गरबा की आयोजक डॉक्टर सपना पालीवाल पिछले आठ वर्ष से कर्मिशयल गरबा महोत्सव में प्राइज एवं अवार्ड प्राप्त किया। गरबा में उनकी रुचि ओर उनका साहस ने इस महोत्सव को सफल बनाया। इसी बीच हुजूर विधानसभा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने अवार्ड देकर प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
नोटबंदी के बाद से ही राहुल गांधी जगह-जगह जाकर लोगों का हाल जान रहे हैं। इसी सिलसिले में आज राहुल गांधी ग्रेटर नोएडा के दादरी की अनाज मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने लोगों से मिलकर उनका हाल जाना और पीएम मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने दादरी के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि, 'जो ईमानदार लोग हैं उनको लाइन में खड़ा कर दिया मोदी जी ने। ' पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बोले कि, '8 नवंबर को पीएम ने गरीबों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। ' राहुल ने आगे कहा कि, 'एक भी अमीर व्यक्ति दिखाई दे रहा है लाइन में आपको? पीएम का वक्तव्य दिन पर दिन बदलता रहा है। पहले बोले ये काले धन के खिलाफ लड़ाई है, फिर आतंकवाद और अब कह रहे हैं कि ये समाज को कैशलेस बनाने के लिए है। ' राहुल ने मोदी को आड़े हाथों लेते हुए आगे कहा कि, 'पीएम लोगों से समाज को कैशलेस बनाने की बात कहते हैं लेकिन सोसाइटी तो उनके इस कदम से पहले ही कैशलेस हो गई है, लोग परेशानी में हैं। आपको मिल रहे हैं 2000 और जो भी चोर 50-100 करोड़ रुपए निकालना चाहता है वो बैंक के पीछे से निकाल रहा है। '
नोटबंदी के बाद से ही राहुल गांधी जगह-जगह जाकर लोगों का हाल जान रहे हैं। इसी सिलसिले में आज राहुल गांधी ग्रेटर नोएडा के दादरी की अनाज मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने लोगों से मिलकर उनका हाल जाना और पीएम मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने दादरी के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि, 'जो ईमानदार लोग हैं उनको लाइन में खड़ा कर दिया मोदी जी ने। ' पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बोले कि, 'आठ नवंबर को पीएम ने गरीबों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। ' राहुल ने आगे कहा कि, 'एक भी अमीर व्यक्ति दिखाई दे रहा है लाइन में आपको? पीएम का वक्तव्य दिन पर दिन बदलता रहा है। पहले बोले ये काले धन के खिलाफ लड़ाई है, फिर आतंकवाद और अब कह रहे हैं कि ये समाज को कैशलेस बनाने के लिए है। ' राहुल ने मोदी को आड़े हाथों लेते हुए आगे कहा कि, 'पीएम लोगों से समाज को कैशलेस बनाने की बात कहते हैं लेकिन सोसाइटी तो उनके इस कदम से पहले ही कैशलेस हो गई है, लोग परेशानी में हैं। आपको मिल रहे हैं दो हज़ार और जो भी चोर पचास-एक सौ करोड़ रुपए निकालना चाहता है वो बैंक के पीछे से निकाल रहा है। '
(www. arya-tv. com) ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार और गायक ए आर रहमान की गिनती अभी तक संगीत जगत के उन लोगों में होती रही है, जिनका ये जमाना अनुसरण करता है। लेकिन, पिछले कुछ साल से उनका लीडर बनने का ये स्टाइल अब धीमा पड़ता दिख रहा है। कोरोना काल में घर बैठे लोगों के लिए बन रहे गीतों की सोशल मीडिया पर इन दिनों बाढ़ आई हुई है और इसी में शामिल हो गया है अब रहमान का एक गाना। इस गाने का निर्माण किया है उस एचडीएफसी बैंक ने जिसके शेयर खरीद का मामला सामने आने के बाद सरकार को अपनी निवेश नीति बदलनी पड़ी। रहमान का ये गाना भारत भर के जाने-माने गीतकारों और संगीतकारों के साथ मिलकर बना है। बैंक की ब्रांडिंग के लिए बने गीत 'हम हार नहीं मानेंगे' का उद्देश्य लोगों को कोरोना वायरस से लगातार लड़ते रहने के लिए प्रेरित करना है। यह गीत उन लोगों को भी सलाम करने की बात करता है जो दिन रात निस्वार्थ भावना से और पूरे साहस के साथ कोरोना वायरस से इस लड़ाई में लगातार करोड़ों भारतीयों के साथ खड़े हुए हैं।
ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार और गायक ए आर रहमान की गिनती अभी तक संगीत जगत के उन लोगों में होती रही है, जिनका ये जमाना अनुसरण करता है। लेकिन, पिछले कुछ साल से उनका लीडर बनने का ये स्टाइल अब धीमा पड़ता दिख रहा है। कोरोना काल में घर बैठे लोगों के लिए बन रहे गीतों की सोशल मीडिया पर इन दिनों बाढ़ आई हुई है और इसी में शामिल हो गया है अब रहमान का एक गाना। इस गाने का निर्माण किया है उस एचडीएफसी बैंक ने जिसके शेयर खरीद का मामला सामने आने के बाद सरकार को अपनी निवेश नीति बदलनी पड़ी। रहमान का ये गाना भारत भर के जाने-माने गीतकारों और संगीतकारों के साथ मिलकर बना है। बैंक की ब्रांडिंग के लिए बने गीत 'हम हार नहीं मानेंगे' का उद्देश्य लोगों को कोरोना वायरस से लगातार लड़ते रहने के लिए प्रेरित करना है। यह गीत उन लोगों को भी सलाम करने की बात करता है जो दिन रात निस्वार्थ भावना से और पूरे साहस के साथ कोरोना वायरस से इस लड़ाई में लगातार करोड़ों भारतीयों के साथ खड़े हुए हैं।
RANCHI : कांग्रेस और बीजेपी से झारांड में लोकसा चुनाव लड़नेवाले उमीदवारों की घोषणा होते ही अब झारखंड में चुनावी समर तेज हो गया। थर्सडे को बीजेपी ने झारांड की क्ब् में से क्फ् लोकसा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। बीजेपी ने एक बार फिर से अपने सीटिंग सांसदों पर ारोसा कायम राते हुए उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। सिर्फ हजारीबाग को छोड़कर। यहां से मौजूदा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा की जगह उनके बड़े बेटे जयंत सिन्हा को बीजेपी ने अपना उमीदवार बनाया है। जबकि झारांड प्रदेश अध्यक्ष डॉ। रविन्द्र कुमार राय को कोडरमा से लोकसा का टिकट दिया गया है। वहीं झारांड में एक्स डीजीपी रहे बीडी राम को ाजपा ने पलामू से टिकट दिया है। लोकसा उपाध्यक्ष कडि़या मुंडा को ाूंटी से उमीदवार बनाया गया है। जमशेदपुर सीट पर आी फैसला नहीं हुआ है। नई दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर में पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अनंत कुमार ने चुनाव के लिए बीजेपी के तीसरी लिस्ट जारी की, जिसमें झारांड की क्ब् में से क्फ् लोकसा सीटों के लिए अपने उमीदवारों की घोषणा की।
RANCHI : कांग्रेस और बीजेपी से झारांड में लोकसा चुनाव लड़नेवाले उमीदवारों की घोषणा होते ही अब झारखंड में चुनावी समर तेज हो गया। थर्सडे को बीजेपी ने झारांड की क्ब् में से क्फ् लोकसा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। बीजेपी ने एक बार फिर से अपने सीटिंग सांसदों पर ारोसा कायम राते हुए उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। सिर्फ हजारीबाग को छोड़कर। यहां से मौजूदा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा की जगह उनके बड़े बेटे जयंत सिन्हा को बीजेपी ने अपना उमीदवार बनाया है। जबकि झारांड प्रदेश अध्यक्ष डॉ। रविन्द्र कुमार राय को कोडरमा से लोकसा का टिकट दिया गया है। वहीं झारांड में एक्स डीजीपी रहे बीडी राम को ाजपा ने पलामू से टिकट दिया है। लोकसा उपाध्यक्ष कडि़या मुंडा को ाूंटी से उमीदवार बनाया गया है। जमशेदपुर सीट पर आी फैसला नहीं हुआ है। नई दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर में पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अनंत कुमार ने चुनाव के लिए बीजेपी के तीसरी लिस्ट जारी की, जिसमें झारांड की क्ब् में से क्फ् लोकसा सीटों के लिए अपने उमीदवारों की घोषणा की।
अमिताभ बच्चन बीते दिन अस्पताल में भर्ती हुए थे जिससे उनके फैंस काफी परेशान हो गए थे। तबीयत खराब होने की वजह से वो रविवार को घर के बाहर फैंस से मिलने भी नहीं पहुंचे। इसके लिए अमिताभ ने माफी भी मांगी। अमिताभ के आंतों में दिक्कत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था हालांकि आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया गया। अब पहली बार अमिताभ ने बताया कि फिलहाल उनकी हालत कैसी है। अस्पताल से लौटने के बाद अमिताभ ने ब्लॉग लिखकर बताया कि उनकी तबीयत कैसी है। उन्होंने फैंस के बारे में लिखा- 'उन्हें शाम के बाद कहा गया कि मैं गेट पर प्रशंसकों से नहीं मिल पाऊंगा। फिर भी वो आते हैं। मेरी अनुपस्थिति के लिए सभी से माफी मांगता हूं। ' अमिताभ आगे लिखते हैं कि 'डॉक्टरों की निगरानी में अच्छा हो जाना चाहिए। उनके निर्देशों का पालन कर रहा हूं। डॉक्टरों की सलाह माननी चाहिए। ' अमिताभ के इस पोस्ट के बाद उनके फैंस की चिंताएं भी कम होंगी जिसमें उन्होंने बताया कि वो ठीक होने के लिए डॉक्टरों की सलाह ले रहे हैं। 77 वर्षीय अमिताभ बच्चन को 15 अक्टूबर को तड़के 3 बजे नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नानावती अस्पताल में अमिताभ का इलाज जरूर हुआ लेकिन मामला लिवर का नहीं बल्कि आंतों में आई दिक्कत का है। पहले ऐसी खबरें थीं कि उनके लिवर में दिक्कत है।
अमिताभ बच्चन बीते दिन अस्पताल में भर्ती हुए थे जिससे उनके फैंस काफी परेशान हो गए थे। तबीयत खराब होने की वजह से वो रविवार को घर के बाहर फैंस से मिलने भी नहीं पहुंचे। इसके लिए अमिताभ ने माफी भी मांगी। अमिताभ के आंतों में दिक्कत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था हालांकि आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया गया। अब पहली बार अमिताभ ने बताया कि फिलहाल उनकी हालत कैसी है। अस्पताल से लौटने के बाद अमिताभ ने ब्लॉग लिखकर बताया कि उनकी तबीयत कैसी है। उन्होंने फैंस के बारे में लिखा- 'उन्हें शाम के बाद कहा गया कि मैं गेट पर प्रशंसकों से नहीं मिल पाऊंगा। फिर भी वो आते हैं। मेरी अनुपस्थिति के लिए सभी से माफी मांगता हूं। ' अमिताभ आगे लिखते हैं कि 'डॉक्टरों की निगरानी में अच्छा हो जाना चाहिए। उनके निर्देशों का पालन कर रहा हूं। डॉक्टरों की सलाह माननी चाहिए। ' अमिताभ के इस पोस्ट के बाद उनके फैंस की चिंताएं भी कम होंगी जिसमें उन्होंने बताया कि वो ठीक होने के लिए डॉक्टरों की सलाह ले रहे हैं। सतहत्तर वर्षीय अमिताभ बच्चन को पंद्रह अक्टूबर को तड़के तीन बजे नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नानावती अस्पताल में अमिताभ का इलाज जरूर हुआ लेकिन मामला लिवर का नहीं बल्कि आंतों में आई दिक्कत का है। पहले ऐसी खबरें थीं कि उनके लिवर में दिक्कत है।
स्कूल के बाद क्या करना बेहतर हैः अध्ययन या काम? युवा लोगों और उनके माता-पिता के लिए कई प्रश्न उठते हैंः अध्ययन या काम करने के लिए? कौन सा विकल्प बेहतर है? इस लेख में हम इस बारे में क्या बात करेंगे। हमारे लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस समय क्या अधिक लाभदायक है। दुर्भाग्य से, लगभग हर दिन स्थिति न केवल देश में, बल्कि दुनिया में भी बदल रही हैः आजकल डॉक्टरों की मांग थी- वकीलों, और कल, शायद, उनमें से कोई भी ज़रूरत नहीं होगी। प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोटी के टुकड़े के बिना रहना महत्वपूर्ण नहीं है युवा पीढ़ी के लिए जोखिमों से बचने के लिए संभावित विकल्पों पर विचार करेंः स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्र, दोनों संस्थानों के स्नातक। यदि आप अभी भी स्कूल में हैं, तो एक वर्ग, उदाहरण के लिए, सातवें-आठवें, फिर तय करें कि आपको क्या रुचि है। मान लीजिएः - "फ़ोटोशॉप" में चित्र और लोगो को अच्छी तरह से बनाएं; - पता है कैसे न केवल स्वादिष्ट सेंकना, लेकिन यह भी सुंदर केक; - कविता या किताबें लिखें; - चित्र बनाएं, क्रॉस सिलाई के पैटर्न के साथ आओ; - संगीत करना और इसी तरह। एनमानेट करना अनिश्चित काल तक संभव है। यहां तक कि एक युवा फोटोग्राफर एक वांछित हो सकता है अगर वांछित आप जो रुचि रखते हैं, साहित्य का चयन करें, प्रदर्शनियों पर जाएं, पेशेवरों के साथ संवाद करें और अपने खाली समय कौशल में सीखें। सबसे अधिक संभावना है, आपकी प्रतिभा भविष्य में उपयोगी होगी उदाहरण के लिए, एक विवाहित युवती डिक्री पर जाएगी या उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा और आपको परिवार को खाना, आवास और भोजन के लिए भुगतान करना होगा। सबसे अधिक संभावना है, केवल स्कूल या कॉलेज के वर्षों में संचित अनुभव बचाएगा। संकट के समय, सवाल उठता नहीं हैः क्या पढ़ाई या स्कूल के बाद काम करना है? अब समझाने दो कि ऐसा क्यों है। तो अच्छे और विस्मित पुराने बचाव में आएंगे - प्रतिभा, स्कूल शिल्प कौशल। उदाहरण के लिए, आपने खूबसूरती से चित्रों, चित्रों को चित्रित किया है शुरू करने की कोशिश करो इस तथ्य के बावजूद कि लेखक, कलाकार और कवि बहुत कम कमाते हैं, आप अभी भी कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, न केवल पार्क में चित्र खींचें, बल्कि लेखक की छवि के साथ कैलेंडर भी प्रिंट करें। क्या मुझे कॉलेज जाना चाहिए? यदि ज्ञान है, इसका मतलब है, तो, ज़ाहिर है, अध्ययन जाओ। अपनी पसंद के लिए एक विशेषता चुनें आप एक साथ कुछ नया सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक अर्थशास्त्री, अध्ययन गणित, विदेशी भाषाओं के लिए अध्ययन करते हैं। आप आसानी से अंग्रेजी सीख सकते हैं इसे गंभीरता से पढ़ना जारी रखें या समानांतर एक अतिरिक्त भाषा में सीखें। सक्षम अनुवादक अच्छी तरह से कमाते हैं, आप विदेशी संगठनों के साथ सहयोग कर सकते हैं। आप अध्ययन या काम कर सकते हैं, या आप दोनों कर सकते हैं। अब फ्रीलांस अच्छी तरह से विकसित है। एक स्थायी ग्राहक खोजें मुश्किल नहीं होगा, लेकिन आपको ईमानदारी से देखना चाहिए। एक पूर्व भुगतान (अग्रिम भुगतान) लेने की सिफारिश की गई है। कई छात्र रात में मैकडॉनल्ड्स, कोरियर, लोडर में अतिरिक्त पैसा कमाते हैं। ऐसा काम लाभ लाएगा, लेकिन प्रतिभा, कौशल विकसित करने के लिए, सबसे अधिक संभावना, मदद नहीं करेगा। एक रचनात्मक काम की तलाश करना बेहतर है लेकिन अगर आप इसे कहीं भी नहीं लेते हैं, तो अपने खाली समय में घर पर सीखना बेहतर होगा। उदाहरण के लिए, फोटोमॉन्टेज के लिए एक स्टूडियो में पेशेवरों की आवश्यकता होती है, लेकिन आपको रेखापुंज छवि के साथ कोई अनुभव नहीं है, आपको नहीं पता कि कैसे विशेष प्रभाव डालना है, लेकिन इसे सीखने की इच्छा है। यह सराहनीय है पेशेवर स्तर पर "फ़ोटोशॉप" सीखें, फिल्मों को देखने, खेल खेलने के बजाय, होमवर्क करें, आराम करें और सब कुछ में आपको धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। अगर मैं कुछ नहीं कर सकता? नौवीं कक्षा के बाद, आप लगभग किसी भी कॉलेज में जा सकते हैं। कभी-कभी संस्थानों की तुलना में व्यावसायिक विद्यालयों और कॉलेजों में विशिष्टताओं का विकल्प बहुत अधिक होता है। उदाहरण के लिए, आप 3 साल के प्रशिक्षण के बाद एक उत्कृष्ट पाक-पेस्ट्री कुकर बन सकते हैं, जबकि एक ही समय में संस्थान में पूर्णकालिक छात्र अध्ययन खाद्य उद्योग से संबंधित बोरिंग वस्तुओं का अध्ययन करता है। अब इन दोनों छात्रों की कल्पना करो। पहले क्या होगा? वह काम करेगाः सेंकना केक, अद्भुत व्यंजन करें एक कन्फेक्शनरी फ़ैक्टरी में उन्हें रेस्तरां या पिज़्ज़ेरिया में काम करने का अनुभव है। एक विशेषज्ञ जो उच्च शिक्षा वाले जोखिमों को पेशे के बिना छोड़ दिया जाता है, क्योंकि इसमें कोई अनुभव नहीं है। और क्या करना बेहतर हैः ऐसे किसी मामले में अध्ययन या काम करना है? बेशक, कड़ी मेहनत करें। वैसे, यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा है, लेकिन आप अपनी नौकरी छोड़ नहीं सकते हैं, अनुपस्थिति में या दूरस्थ रूप से अध्ययन करने का एक मौका हमेशा होता है। क्या मुझे उच्च शिक्षा की आवश्यकता है? उपरोक्त कुछ उपशीर्षक पढ़ने के बाद, सुनिश्चित करें कि आप में से बहुत से लोग सोचेंगेः तो उच्च शिक्षा क्यों ज़रूरत नहीं हो सकती है? लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि सब कुछ इतना आसान नहीं है। 2000 के दशक तक, उच्च शिक्षा वाले लोग इतने सारे नहीं थे ज्ञान, अनुभव, परिश्रम के लिए लगभग कहीं भी, सबसे महत्वपूर्ण काम करने के लिए संभव था। दुर्भाग्य से, श्रम के आधुनिक क्षेत्र की आवश्यकताओं को कम कर देता है उदाहरण के लिए, रेलवे और मेट्रो में, यह तेजी से उच्च शिक्षा के साथ नियोजित किया जा रहा है, यहां तक कि कम पदों के लिए भी। अचानक, 10 वर्षों में सभी तालक और तकनीशियनों को उच्च प्रोफ़ाइल शिक्षा प्राप्त करने के लिए मजबूर किया जाएगा या क्या उन्हें अपनी स्वयं की इच्छा पर जाने के लिए कहा जाएगा? मेरे बड़े अफसोस के लिए, रेल परिवहन के क्षेत्र में, यह सब चला जाता है इसलिए, भले ही आप एक लोकोमोटिव चालक के सहायक बनने का सपना देख रहे हों, फिर आप लंबे समय के लिए नहीं सोचें, अध्ययन करें या काम करें, तो विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार हो जाना बेहतर है। भविष्य में समय बर्बाद न करने के लिए, ध्यान से सोचेंः अध्ययन या काम करने के लिए? क्या चुनना है? 6-10 साल से आपके पुराने लोगों से परामर्श करें, क्योंकि इन लोगों को 1-5 साल पहले शिक्षित किया गया था, यह पता चला है कि आधुनिक श्रमिक क्षेत्र में स्थिति क्या है।
स्कूल के बाद क्या करना बेहतर हैः अध्ययन या काम? युवा लोगों और उनके माता-पिता के लिए कई प्रश्न उठते हैंः अध्ययन या काम करने के लिए? कौन सा विकल्प बेहतर है? इस लेख में हम इस बारे में क्या बात करेंगे। हमारे लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस समय क्या अधिक लाभदायक है। दुर्भाग्य से, लगभग हर दिन स्थिति न केवल देश में, बल्कि दुनिया में भी बदल रही हैः आजकल डॉक्टरों की मांग थी- वकीलों, और कल, शायद, उनमें से कोई भी ज़रूरत नहीं होगी। प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोटी के टुकड़े के बिना रहना महत्वपूर्ण नहीं है युवा पीढ़ी के लिए जोखिमों से बचने के लिए संभावित विकल्पों पर विचार करेंः स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्र, दोनों संस्थानों के स्नातक। यदि आप अभी भी स्कूल में हैं, तो एक वर्ग, उदाहरण के लिए, सातवें-आठवें, फिर तय करें कि आपको क्या रुचि है। मान लीजिएः - "फ़ोटोशॉप" में चित्र और लोगो को अच्छी तरह से बनाएं; - पता है कैसे न केवल स्वादिष्ट सेंकना, लेकिन यह भी सुंदर केक; - कविता या किताबें लिखें; - चित्र बनाएं, क्रॉस सिलाई के पैटर्न के साथ आओ; - संगीत करना और इसी तरह। एनमानेट करना अनिश्चित काल तक संभव है। यहां तक कि एक युवा फोटोग्राफर एक वांछित हो सकता है अगर वांछित आप जो रुचि रखते हैं, साहित्य का चयन करें, प्रदर्शनियों पर जाएं, पेशेवरों के साथ संवाद करें और अपने खाली समय कौशल में सीखें। सबसे अधिक संभावना है, आपकी प्रतिभा भविष्य में उपयोगी होगी उदाहरण के लिए, एक विवाहित युवती डिक्री पर जाएगी या उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा और आपको परिवार को खाना, आवास और भोजन के लिए भुगतान करना होगा। सबसे अधिक संभावना है, केवल स्कूल या कॉलेज के वर्षों में संचित अनुभव बचाएगा। संकट के समय, सवाल उठता नहीं हैः क्या पढ़ाई या स्कूल के बाद काम करना है? अब समझाने दो कि ऐसा क्यों है। तो अच्छे और विस्मित पुराने बचाव में आएंगे - प्रतिभा, स्कूल शिल्प कौशल। उदाहरण के लिए, आपने खूबसूरती से चित्रों, चित्रों को चित्रित किया है शुरू करने की कोशिश करो इस तथ्य के बावजूद कि लेखक, कलाकार और कवि बहुत कम कमाते हैं, आप अभी भी कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, न केवल पार्क में चित्र खींचें, बल्कि लेखक की छवि के साथ कैलेंडर भी प्रिंट करें। क्या मुझे कॉलेज जाना चाहिए? यदि ज्ञान है, इसका मतलब है, तो, ज़ाहिर है, अध्ययन जाओ। अपनी पसंद के लिए एक विशेषता चुनें आप एक साथ कुछ नया सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक अर्थशास्त्री, अध्ययन गणित, विदेशी भाषाओं के लिए अध्ययन करते हैं। आप आसानी से अंग्रेजी सीख सकते हैं इसे गंभीरता से पढ़ना जारी रखें या समानांतर एक अतिरिक्त भाषा में सीखें। सक्षम अनुवादक अच्छी तरह से कमाते हैं, आप विदेशी संगठनों के साथ सहयोग कर सकते हैं। आप अध्ययन या काम कर सकते हैं, या आप दोनों कर सकते हैं। अब फ्रीलांस अच्छी तरह से विकसित है। एक स्थायी ग्राहक खोजें मुश्किल नहीं होगा, लेकिन आपको ईमानदारी से देखना चाहिए। एक पूर्व भुगतान लेने की सिफारिश की गई है। कई छात्र रात में मैकडॉनल्ड्स, कोरियर, लोडर में अतिरिक्त पैसा कमाते हैं। ऐसा काम लाभ लाएगा, लेकिन प्रतिभा, कौशल विकसित करने के लिए, सबसे अधिक संभावना, मदद नहीं करेगा। एक रचनात्मक काम की तलाश करना बेहतर है लेकिन अगर आप इसे कहीं भी नहीं लेते हैं, तो अपने खाली समय में घर पर सीखना बेहतर होगा। उदाहरण के लिए, फोटोमॉन्टेज के लिए एक स्टूडियो में पेशेवरों की आवश्यकता होती है, लेकिन आपको रेखापुंज छवि के साथ कोई अनुभव नहीं है, आपको नहीं पता कि कैसे विशेष प्रभाव डालना है, लेकिन इसे सीखने की इच्छा है। यह सराहनीय है पेशेवर स्तर पर "फ़ोटोशॉप" सीखें, फिल्मों को देखने, खेल खेलने के बजाय, होमवर्क करें, आराम करें और सब कुछ में आपको धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। अगर मैं कुछ नहीं कर सकता? नौवीं कक्षा के बाद, आप लगभग किसी भी कॉलेज में जा सकते हैं। कभी-कभी संस्थानों की तुलना में व्यावसायिक विद्यालयों और कॉलेजों में विशिष्टताओं का विकल्प बहुत अधिक होता है। उदाहरण के लिए, आप तीन साल के प्रशिक्षण के बाद एक उत्कृष्ट पाक-पेस्ट्री कुकर बन सकते हैं, जबकि एक ही समय में संस्थान में पूर्णकालिक छात्र अध्ययन खाद्य उद्योग से संबंधित बोरिंग वस्तुओं का अध्ययन करता है। अब इन दोनों छात्रों की कल्पना करो। पहले क्या होगा? वह काम करेगाः सेंकना केक, अद्भुत व्यंजन करें एक कन्फेक्शनरी फ़ैक्टरी में उन्हें रेस्तरां या पिज़्ज़ेरिया में काम करने का अनुभव है। एक विशेषज्ञ जो उच्च शिक्षा वाले जोखिमों को पेशे के बिना छोड़ दिया जाता है, क्योंकि इसमें कोई अनुभव नहीं है। और क्या करना बेहतर हैः ऐसे किसी मामले में अध्ययन या काम करना है? बेशक, कड़ी मेहनत करें। वैसे, यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा है, लेकिन आप अपनी नौकरी छोड़ नहीं सकते हैं, अनुपस्थिति में या दूरस्थ रूप से अध्ययन करने का एक मौका हमेशा होता है। क्या मुझे उच्च शिक्षा की आवश्यकता है? उपरोक्त कुछ उपशीर्षक पढ़ने के बाद, सुनिश्चित करें कि आप में से बहुत से लोग सोचेंगेः तो उच्च शिक्षा क्यों ज़रूरत नहीं हो सकती है? लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि सब कुछ इतना आसान नहीं है। दो हज़ार के दशक तक, उच्च शिक्षा वाले लोग इतने सारे नहीं थे ज्ञान, अनुभव, परिश्रम के लिए लगभग कहीं भी, सबसे महत्वपूर्ण काम करने के लिए संभव था। दुर्भाग्य से, श्रम के आधुनिक क्षेत्र की आवश्यकताओं को कम कर देता है उदाहरण के लिए, रेलवे और मेट्रो में, यह तेजी से उच्च शिक्षा के साथ नियोजित किया जा रहा है, यहां तक कि कम पदों के लिए भी। अचानक, दस वर्षों में सभी तालक और तकनीशियनों को उच्च प्रोफ़ाइल शिक्षा प्राप्त करने के लिए मजबूर किया जाएगा या क्या उन्हें अपनी स्वयं की इच्छा पर जाने के लिए कहा जाएगा? मेरे बड़े अफसोस के लिए, रेल परिवहन के क्षेत्र में, यह सब चला जाता है इसलिए, भले ही आप एक लोकोमोटिव चालक के सहायक बनने का सपना देख रहे हों, फिर आप लंबे समय के लिए नहीं सोचें, अध्ययन करें या काम करें, तो विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार हो जाना बेहतर है। भविष्य में समय बर्बाद न करने के लिए, ध्यान से सोचेंः अध्ययन या काम करने के लिए? क्या चुनना है? छः-दस साल से आपके पुराने लोगों से परामर्श करें, क्योंकि इन लोगों को एक-पाँच साल पहले शिक्षित किया गया था, यह पता चला है कि आधुनिक श्रमिक क्षेत्र में स्थिति क्या है।
सबक़ नंबर २३ उमरह के वीज़े पर हज के लिये रुकना कैसा ? उमरह के वीज़े पर जा कर गैर कानूनी तौर पर हज के लिये रुकने या दुन्या के किसी भी मुल्क में VISA की मुद्दत पूरी होने के बाद गैर कानूनी रहने की जिन की निय्यत हो वोह वीज़े की मुद्दत ख़त्म होते वक़्त जिस शहर या गाउं में मुकीम हों वहां जब तक रहेंगे उन के लिये मुकीम ही के अहकाम होंगे, अगर्चे बरसों पड़े रहें मुक़ीम ही रहेंगे, अलबत्ता एक बार भी अगर 92 किलो मीटर या इस से ज़ियादा फ़ासिले के सफ़र के इरादे से उस शहर या गाउं से चले तो अपनी आबादी से बाहर निकलते ही मुसाफ़िर हो गए और अब उन की इकामत की निय्यत बेकार है, म-सलन कोई शख्स पाकिस्तान से उम्रह के VISA पर मक्कए मुकर्रमा Lajthaig li ji all laal j गया, VISA की मुद्दत ख़त्म होते वक़्त भी मक्का शरीफ़ ही में मुकीम है तो उस पर मुकीम के अहकाम हैं, अब अगर म-सलन वहां से मदीनए मुनव्वरह Vashiaig li ji ail bajl; आ गया तो चाहे बरसों गैर कानूनी पड़ा रहे, मगर मुसाफ़िर ही है, यहां तक कि अगर दोबारा मक्कए मुकर्रमा Vasthaig b ji all lajl; आ जाए फिर भी मुसाफ़िर रहेगा, इस को नमाज़ कर ही अदा करनी होगी। हाँ अगर दोबारा VISA मिल गया तो इक़ामत की निय्यत की जा सकती है, याद रहे ! जिस कानून की खिलाफ़ वर्जी करने पर जिल्लत रिश्वत और झूट वगैरा आफ़ात में पड़ने का अन्देशा हो उस कानून की खिलाफ वर्जी जाइज़ नहीं, चुनान्चे मेरे आका आ'ला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना शाह इमाम अहमद रज़ा खान isilaj sale फ़रमाते हैं : मुबाह (या'नी जाइज़) सूरतों में से बा'ज़ (सूरतें) कानूनी तौर पर जुर्म होती हैं इन में मुलव्वस होना (या'नी ऐसे कानून की ख़िलाफ़ वर्जी करना) अपनी जात को अज़िय्यत व जिल्लत के लिये पेश करना है और वोह ना लिहाज़ा बिगैर VISA के दुन्या के किसी भी मुल्क में रहना या हज के लिये रुकना जाइज़ नहीं । गैर कानूनी ज़राएअ से हज के लिये रुकने में कामयाबी हासिल करने को Jog.jc ail ilas अल्लाह व रसूल hwgrile ail का करम कहना सख्त बेबाक़ी है । क़स्र वाजिब है मुसाफ़िर पर वाजिब है कि नमाज़ में कर करे या'नी चार रकअत वाले फ़र्ज़ को दो पढ़े इस के हक़ में दो ही रकअतें पूरी नमाज़ है और क़स्दन चार पढ़ी और दो पर क़ादह किया तो फ़र्ज़ अदा हो गए और पिछली दो रकअतें नफ़ल हो गई मगर गुनहगार व अज़ाबे नार का हकदार है कि वाजिब तर्क किया लिहाज़ा तौबा करे और दो रकअत पर क़ादह न किया तो फ़र्ज़ अदा न हुए और वोह नमाज़ नफ़ल हो गई हाँ अगर तीसरी रकअत का सज्दा करने से पेश्तर इक़ामत की निय्यत कर ली तो फ़र्ज़ बातिल न होंगे मगर क़ियाम व रुकूअ का इआदा करना होगा और तीसरी के सज्दे में निय्यत की तो अब फ़र्ज़ जाते रहे यूंही अगर पहली दो या एक में क़िराअत न की नमाज़ फ़ासिद हो गई । क़स्र के बदले चार की निय्यत बांधली तो....? मुसाफ़िर ने कर के बजाए चार रकअत फ़र्ज़ की निय्यत बांध ली फिर याद आने पर दो पर सलाम फैर दिया तो नमाज़ हो जाएगी, इसी तरह मुक़ीम ने चार रकअत फ़र्ज़ की जगह दो रकअत फ़र्ज की निय्यत की और चार पर सलाम फैरा उस की भी नमाज़ हो गई। फु-कहाए किराम (Dulal फ़रमाते हैं ,"निय्यते नमाज़ में ता'दादे रक्आत की ता'यीन या'नी तक़र्रुर करना ज़रूरी नहीं क्यूं कि येह जिम्नन हासिल है। निय्यत में तादाद मुअय्यन करने में खता नुक्सान देह नहीं । " मुसाफ़िर इमाम और मुकीम मुक्तदी इक़्तिदा दुरुस्त होने के लिये एक शर्त यह भी है कि इमाम का मुकीम या मुसाफ़िर होना मा'लूम हो ख्वाह नमाज़ शुरूआ करते वक़्त मालूम हुवा या बाद में, लिहाज़ा इमाम को चाहिये कि शुरूआ करते वक़्त अपना मुसाफ़िर होना ज़ाहिर कर दे और शुरूअ में न कहा तो बा'दे नमाज़ कह दे कि "मुक़ीम इस्लामी भाई अपनी नमाज़े पूरी कर लें मैं मुसाफ़िर हूं, और शुरूअ में ए'लान कर चुका है जब भी बाद में कह दे कि जो लोग उस वक़्त मौजूद न थे उन्हें भी मालूम हो जाए । मुकीम मुक्तदी और बक़िय्या दो रकअतें क़स्र वाली नमाज़ में मुसाफ़िर इमाम के सलाम फैरने के बाद मुकीम मुक्ती जब अपनी बक़िय्या नमाज़ अदा करे तो फ़र्ज की तीसरी और चौथी रकअत में सू-रतुल फ़ातिहा पढ़ने के बजाए अन्दाज़न उतनी देर चुप खड़ा रहे । क्या मुसाफ़िर को सुन्नतें मुआफ़ हैं ? सुन्नतों में कर नहीं बल्कि पूरी पढ़ी जाएंगी, खौफ़ और रवा रवी (या'नी घबराहट) की हालत में सुन्नतें मुआफ़ हैं और अम्न की हालत में पढ़ी जाएंगी । "नमाज़" के चार हुरूफ़ की निस्बत से चलती गाड़ी में नफ़्ल पढ़ने के 4 मदनी के 4 फूल *. बैरुने शहर ( बैरुने शत्र से मुराद वोह जगह है जहां से मुसाफ़िर पर कस करना वाजिब होता है) सुवारी पर (म-सलन चलती कार, बस, वेगन में भी नफ़्ल पढ़ सकता है और इस सूरत में इस्तिक्बाले क़िब्ला या'नी क़िब्ला रुख होना) शर्त नहीं बल्कि सुवारी (या गाड़ी) जिस रुख को जा रही हो उधर ही मुंह हो और अगर उधर मुंह न हो तो नमाज़ जाइज़ नहीं और शुरुआ करते वक़्त भी क़िब्ले की तरफ़ मुंह होना शर्त नहीं बल्कि सुवारी (या गाड़ी) जिधर जा रही है उसी तरफ़ मुंह हो और रुकूअ व सुजूद इशारे से करे और (ज़रूरी है कि ) सज्दे का इशारा ब निस्बत रुकूअ के पस्त हो (या'नी रुकूअ के लिये जिस क़दर झुका, सज्दे के लिये उस से ज़ियादा झुके), चलती ट्रेन वगैरा ऐसी सुवारी जिस में जगह मिल सकती है उस में क़िब्ला रुख हो कर काइदे के मुताबिक़ नवाफ़िल पढ़ने होंगे • गाउं में रहने वाला जब गाउं से बाहर हुवा तो सुवारी ( गाड़ी) पर * नफ़्ल पढ़ सकता है * बैरूने शह सुवारी पर नमाज़ शुरूआ की थी और पढ़ते पढ़ते शहर में दाखिल हो गया तो जब तक घर न पहुंचा सुवारी पर पूरी कर सकता है * चलती गाड़ी में बिला उफ्रे शर ई फ़र्ज व सुन्नते फ़ज व तमाम वाजिबात जैसे वित्र व नज़ और वोह नफ्ल जिस को तोड़ दिया हो और सज्दए तिलावत जब कि आयते सज्दा ज़मीन पर तिलावत की हो अदा नहीं कर सकता और अगर उज़ की वजह से हो तो इन सब में शर्त येह है कि अगर मुम्किन हो तो क़िब्ला रू खड़ा हो कर अदा करे वरना जैसे भी मुम्किन हो और बाद में नमाज़ का इआदा कर लें (यानी दोबारा पढ़ लें ) मुसाफ़िर तीसरी रकअत के लिये खड़ा हो जाए तो...? अगर मुसाफ़िर कर वाली नमाज़ की तीसरी रकअत शुरूअ कर दे तो इस की दो सूरतें हैं (1) ब क़दरे तशहुद का दए अख़िरह कर चुका था तो जब तक तीसरी रकअत का सज्दा न किया हो लौट आए और सज्दए सब कर के सलाम फैर दे अगर न लौटे और खड़े खड़े सलाम फैर दे तो भी नमाज़ हो जाएगी मगर सुन्नत तर्क हुई, अगर तीसरी रकअत का सज्दा कर लिया तो एक और रकअत मिला कर सज्दए सहव कर के नमाज़ मुकम्मल करे येह आखिरी दो रकअतें नफ़्ल शुमार होंगी ( 2 ) का 'दए अखीरा किये बिगैर खड़ा गया था तो जब तक तीसरी रकअत का सज्दा न किया हो लौट आए और सज्दए सहव कर के सलाम फैर दे अगर तीसरी रकअत का सज्दा कर लिया फ़र्ज़ बातिल हो गए अब एक और रकअत मिला कर सज्दए सहव कर के नमाज़ मुकम्मल करे चारों रकअतें नफ़्ल शुमार होंगी (दो रकअत फ़र्ज़ अदा करने अभी ज़िम्मे बाक़ी हैं)
सबक़ नंबर तेईस उमरह के वीज़े पर हज के लिये रुकना कैसा ? उमरह के वीज़े पर जा कर गैर कानूनी तौर पर हज के लिये रुकने या दुन्या के किसी भी मुल्क में VISA की मुद्दत पूरी होने के बाद गैर कानूनी रहने की जिन की निय्यत हो वोह वीज़े की मुद्दत ख़त्म होते वक़्त जिस शहर या गाउं में मुकीम हों वहां जब तक रहेंगे उन के लिये मुकीम ही के अहकाम होंगे, अगर्चे बरसों पड़े रहें मुक़ीम ही रहेंगे, अलबत्ता एक बार भी अगर बानवे किलो मीटर या इस से ज़ियादा फ़ासिले के सफ़र के इरादे से उस शहर या गाउं से चले तो अपनी आबादी से बाहर निकलते ही मुसाफ़िर हो गए और अब उन की इकामत की निय्यत बेकार है, म-सलन कोई शख्स पाकिस्तान से उम्रह के VISA पर मक्कए मुकर्रमा Lajthaig li ji all laal j गया, VISA की मुद्दत ख़त्म होते वक़्त भी मक्का शरीफ़ ही में मुकीम है तो उस पर मुकीम के अहकाम हैं, अब अगर म-सलन वहां से मदीनए मुनव्वरह Vashiaig li ji ail bajl; आ गया तो चाहे बरसों गैर कानूनी पड़ा रहे, मगर मुसाफ़िर ही है, यहां तक कि अगर दोबारा मक्कए मुकर्रमा Vasthaig b ji all lajl; आ जाए फिर भी मुसाफ़िर रहेगा, इस को नमाज़ कर ही अदा करनी होगी। हाँ अगर दोबारा VISA मिल गया तो इक़ामत की निय्यत की जा सकती है, याद रहे ! जिस कानून की खिलाफ़ वर्जी करने पर जिल्लत रिश्वत और झूट वगैरा आफ़ात में पड़ने का अन्देशा हो उस कानून की खिलाफ वर्जी जाइज़ नहीं, चुनान्चे मेरे आका आ'ला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना शाह इमाम अहमद रज़ा खान isilaj sale फ़रमाते हैं : मुबाह सूरतों में से बा'ज़ कानूनी तौर पर जुर्म होती हैं इन में मुलव्वस होना अपनी जात को अज़िय्यत व जिल्लत के लिये पेश करना है और वोह ना लिहाज़ा बिगैर VISA के दुन्या के किसी भी मुल्क में रहना या हज के लिये रुकना जाइज़ नहीं । गैर कानूनी ज़राएअ से हज के लिये रुकने में कामयाबी हासिल करने को Jog.jc ail ilas अल्लाह व रसूल hwgrile ail का करम कहना सख्त बेबाक़ी है । क़स्र वाजिब है मुसाफ़िर पर वाजिब है कि नमाज़ में कर करे या'नी चार रकअत वाले फ़र्ज़ को दो पढ़े इस के हक़ में दो ही रकअतें पूरी नमाज़ है और क़स्दन चार पढ़ी और दो पर क़ादह किया तो फ़र्ज़ अदा हो गए और पिछली दो रकअतें नफ़ल हो गई मगर गुनहगार व अज़ाबे नार का हकदार है कि वाजिब तर्क किया लिहाज़ा तौबा करे और दो रकअत पर क़ादह न किया तो फ़र्ज़ अदा न हुए और वोह नमाज़ नफ़ल हो गई हाँ अगर तीसरी रकअत का सज्दा करने से पेश्तर इक़ामत की निय्यत कर ली तो फ़र्ज़ बातिल न होंगे मगर क़ियाम व रुकूअ का इआदा करना होगा और तीसरी के सज्दे में निय्यत की तो अब फ़र्ज़ जाते रहे यूंही अगर पहली दो या एक में क़िराअत न की नमाज़ फ़ासिद हो गई । क़स्र के बदले चार की निय्यत बांधली तो....? मुसाफ़िर ने कर के बजाए चार रकअत फ़र्ज़ की निय्यत बांध ली फिर याद आने पर दो पर सलाम फैर दिया तो नमाज़ हो जाएगी, इसी तरह मुक़ीम ने चार रकअत फ़र्ज़ की जगह दो रकअत फ़र्ज की निय्यत की और चार पर सलाम फैरा उस की भी नमाज़ हो गई। फु-कहाए किराम की हालत में सुन्नतें मुआफ़ हैं और अम्न की हालत में पढ़ी जाएंगी । "नमाज़" के चार हुरूफ़ की निस्बत से चलती गाड़ी में नफ़्ल पढ़ने के चार मदनी के चार फूल *. बैरुने शहर सुवारी पर शर्त नहीं बल्कि सुवारी जिस रुख को जा रही हो उधर ही मुंह हो और अगर उधर मुंह न हो तो नमाज़ जाइज़ नहीं और शुरुआ करते वक़्त भी क़िब्ले की तरफ़ मुंह होना शर्त नहीं बल्कि सुवारी जिधर जा रही है उसी तरफ़ मुंह हो और रुकूअ व सुजूद इशारे से करे और सज्दे का इशारा ब निस्बत रुकूअ के पस्त हो , चलती ट्रेन वगैरा ऐसी सुवारी जिस में जगह मिल सकती है उस में क़िब्ला रुख हो कर काइदे के मुताबिक़ नवाफ़िल पढ़ने होंगे • गाउं में रहने वाला जब गाउं से बाहर हुवा तो सुवारी पर * नफ़्ल पढ़ सकता है * बैरूने शह सुवारी पर नमाज़ शुरूआ की थी और पढ़ते पढ़ते शहर में दाखिल हो गया तो जब तक घर न पहुंचा सुवारी पर पूरी कर सकता है * चलती गाड़ी में बिला उफ्रे शर ई फ़र्ज व सुन्नते फ़ज व तमाम वाजिबात जैसे वित्र व नज़ और वोह नफ्ल जिस को तोड़ दिया हो और सज्दए तिलावत जब कि आयते सज्दा ज़मीन पर तिलावत की हो अदा नहीं कर सकता और अगर उज़ की वजह से हो तो इन सब में शर्त येह है कि अगर मुम्किन हो तो क़िब्ला रू खड़ा हो कर अदा करे वरना जैसे भी मुम्किन हो और बाद में नमाज़ का इआदा कर लें मुसाफ़िर तीसरी रकअत के लिये खड़ा हो जाए तो...? अगर मुसाफ़िर कर वाली नमाज़ की तीसरी रकअत शुरूअ कर दे तो इस की दो सूरतें हैं ब क़दरे तशहुद का दए अख़िरह कर चुका था तो जब तक तीसरी रकअत का सज्दा न किया हो लौट आए और सज्दए सब कर के सलाम फैर दे अगर न लौटे और खड़े खड़े सलाम फैर दे तो भी नमाज़ हो जाएगी मगर सुन्नत तर्क हुई, अगर तीसरी रकअत का सज्दा कर लिया तो एक और रकअत मिला कर सज्दए सहव कर के नमाज़ मुकम्मल करे येह आखिरी दो रकअतें नफ़्ल शुमार होंगी का 'दए अखीरा किये बिगैर खड़ा गया था तो जब तक तीसरी रकअत का सज्दा न किया हो लौट आए और सज्दए सहव कर के सलाम फैर दे अगर तीसरी रकअत का सज्दा कर लिया फ़र्ज़ बातिल हो गए अब एक और रकअत मिला कर सज्दए सहव कर के नमाज़ मुकम्मल करे चारों रकअतें नफ़्ल शुमार होंगी
Jharkhand Politics बिहार में एनडीए सरकार में शामिल रह चुकी विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) झारखंड में अपनी जमीन तलाश रही है। पार्टी ने सोमवार को झारखंड प्रदेश समिति की घोषणा की। वीआइपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने जानकारी दी। रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Politics बिहार में एनडीए सरकार में शामिल रह चुकी विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) झारखंड में अपनी जमीन तलाश रही है। पार्टी ने सोमवार को झारखंड प्रदेश समिति की घोषणा की। रांची स्थित प्रेस क्लब के सभागार में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार के पूर्व मंत्री सह वीआइपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने पार्टी की प्रदेश समिति के गठन की जानकारी दी। उनके अनुसार, पार्टी ने प्रो. राजकुमार चौधरी (रांची) को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व विनोद चौहान (जमशेदपुर), प्रदीप सिंह (पाकुड़) और एसपी चौहान (धनबाद) को दिया गया है, जबकि रामगढ़ के चरण केवट को प्रधान महासचिव बनाया गया है। इनके अलावा प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी मनोज कुमार निषाद (धनबाद) और अधिवक्ता मंजीत चौधरी को दी गई है। इसी तरह, प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी राजेश कुमार केवट तथा प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी चंद्रमोहन कुमार चंद्रवंशी को दी गई है। सहनी ने कहा कि झारखंड में होनेवाले चुनाव में कई सीटों पर पार्टी पहली बार उम्मीदवार देगी। कहा कि झारखंड में अभी तक किसी भी दल ने किसी निषाद को टिकट देने का काम नहीं किया, सिर्फ वोट लेने का काम किया। दावा किया कि झारखंड के गढ़वा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है। वहां पार्टी अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी।
Jharkhand Politics बिहार में एनडीए सरकार में शामिल रह चुकी विकासशील इंसान पार्टी झारखंड में अपनी जमीन तलाश रही है। पार्टी ने सोमवार को झारखंड प्रदेश समिति की घोषणा की। वीआइपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने जानकारी दी। रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Politics बिहार में एनडीए सरकार में शामिल रह चुकी विकासशील इंसान पार्टी झारखंड में अपनी जमीन तलाश रही है। पार्टी ने सोमवार को झारखंड प्रदेश समिति की घोषणा की। रांची स्थित प्रेस क्लब के सभागार में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार के पूर्व मंत्री सह वीआइपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने पार्टी की प्रदेश समिति के गठन की जानकारी दी। उनके अनुसार, पार्टी ने प्रो. राजकुमार चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व विनोद चौहान , प्रदीप सिंह और एसपी चौहान को दिया गया है, जबकि रामगढ़ के चरण केवट को प्रधान महासचिव बनाया गया है। इनके अलावा प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी मनोज कुमार निषाद और अधिवक्ता मंजीत चौधरी को दी गई है। इसी तरह, प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी राजेश कुमार केवट तथा प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी चंद्रमोहन कुमार चंद्रवंशी को दी गई है। सहनी ने कहा कि झारखंड में होनेवाले चुनाव में कई सीटों पर पार्टी पहली बार उम्मीदवार देगी। कहा कि झारखंड में अभी तक किसी भी दल ने किसी निषाद को टिकट देने का काम नहीं किया, सिर्फ वोट लेने का काम किया। दावा किया कि झारखंड के गढ़वा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है। वहां पार्टी अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी।
कोरिया, सुरेश मिनोचा । कलेक्टर एस एन राठौर के निर्देशानुसार कोविड-19 से संक्रमण से बचाव हेतु जिले में लाकडाउन के दौरान जारी किए गए आदेशों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। भरतपुर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विरेन्द्र लकडा ने बताया कि उत्तरप्रदेश के जिला गोरखपुर के ग्राम बसंतपुर निवासी दो पुटु व्यापारियों को बगैर सूचना एवं अनुमति के अपने घर रहने देने, व्यापार कराने तथा लाकडाउन के दौरान जारी किए गये आदेशों का उल्लंघन करने के कारण विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत जनकपुर के मकान मालिकों के विरूध्द जनकपुर थाना में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। यह प्रथम सूचना प्रतिवेदन जनकपुर के रोजगार सहायक विसम्भर अहिरवार के द्वारा दर्ज कराई गई है।
कोरिया, सुरेश मिनोचा । कलेक्टर एस एन राठौर के निर्देशानुसार कोविड-उन्नीस से संक्रमण से बचाव हेतु जिले में लाकडाउन के दौरान जारी किए गए आदेशों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। भरतपुर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विरेन्द्र लकडा ने बताया कि उत्तरप्रदेश के जिला गोरखपुर के ग्राम बसंतपुर निवासी दो पुटु व्यापारियों को बगैर सूचना एवं अनुमति के अपने घर रहने देने, व्यापार कराने तथा लाकडाउन के दौरान जारी किए गये आदेशों का उल्लंघन करने के कारण विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत जनकपुर के मकान मालिकों के विरूध्द जनकपुर थाना में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। यह प्रथम सूचना प्रतिवेदन जनकपुर के रोजगार सहायक विसम्भर अहिरवार के द्वारा दर्ज कराई गई है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Chaibasa (Sukesh Kumar) : विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के क्लासरूम में दरारे होने से क्लास रूम की सुंदरता खराब हो गई है. जूलॉजी विभाग में मात्र दो क्लास रूम है. इसमें से एक क्लास रूम में पानी का भी रिसाव होने लगा है. बारिश के दिनों में यहां के विद्यार्थीयों को भी परेशानी होती हैं. इस मामले को लेकर कई बार विद्यार्थियों द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति के पास समाधान करने की मांग की गई. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है. क्लास रूम के चारों तरफ दीवार काला हो गया है. सुंदरता तो खत्म हो चुका है लेकिन उसके नीचे विद्यार्थी बैठने से भी डरते हैं. सीलिंग का पपड़ी भी गिरने लगता है इसके अलावा पानी भी छत से टपकता है. मालूम हो कि कोल्हान विश्वविद्यालय के पीजी विभाग का उद्घाटन 2016 में तत्कालीन कुलपति डॉ. आरपीपी सिंह के कार्यकाल में हुआ था. उद्घाटन के पश्चात अभी तक पीजी विभाग की मरम्मत नहीं हुई है. हालांकि कुछ स्थानों में दरारें आ गई थी. उसे ठेकेदार द्वारा ठीक करा लिया गया है. लेकिन अब भी अधिकतर स्थानों में दरारें पड़ी हुई है. अब क्लास रूम के अंदर के दीवारों में वॉल पुट्टी गिरने लगा है. इससे क्लासरूम की सुंदरता भी खत्म होती जा रही है. विद्यार्थियों का मानना है कि पीजी स्तर के विद्यार्थी का अध्ययन इस विभाग में होता है. इससे ऐसा लगता है कि खानापूर्ति का काम किया जा रहा है.
Chaibasa : विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के क्लासरूम में दरारे होने से क्लास रूम की सुंदरता खराब हो गई है. जूलॉजी विभाग में मात्र दो क्लास रूम है. इसमें से एक क्लास रूम में पानी का भी रिसाव होने लगा है. बारिश के दिनों में यहां के विद्यार्थीयों को भी परेशानी होती हैं. इस मामले को लेकर कई बार विद्यार्थियों द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति के पास समाधान करने की मांग की गई. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है. क्लास रूम के चारों तरफ दीवार काला हो गया है. सुंदरता तो खत्म हो चुका है लेकिन उसके नीचे विद्यार्थी बैठने से भी डरते हैं. सीलिंग का पपड़ी भी गिरने लगता है इसके अलावा पानी भी छत से टपकता है. मालूम हो कि कोल्हान विश्वविद्यालय के पीजी विभाग का उद्घाटन दो हज़ार सोलह में तत्कालीन कुलपति डॉ. आरपीपी सिंह के कार्यकाल में हुआ था. उद्घाटन के पश्चात अभी तक पीजी विभाग की मरम्मत नहीं हुई है. हालांकि कुछ स्थानों में दरारें आ गई थी. उसे ठेकेदार द्वारा ठीक करा लिया गया है. लेकिन अब भी अधिकतर स्थानों में दरारें पड़ी हुई है. अब क्लास रूम के अंदर के दीवारों में वॉल पुट्टी गिरने लगा है. इससे क्लासरूम की सुंदरता भी खत्म होती जा रही है. विद्यार्थियों का मानना है कि पीजी स्तर के विद्यार्थी का अध्ययन इस विभाग में होता है. इससे ऐसा लगता है कि खानापूर्ति का काम किया जा रहा है.
178 अन्ना पासवान ही अधिकार मिलना चाहिए यह तो निश्चित ही है।' 'हा, मैं नही सहूँगा इसमयाय को सेनापति की बात से त्रोध झलकने लगा था, 'आप साथ दें तो में अधिकार छीनकर सही व्यक्ति को दिलवा सकता हू ।' नही, हथियार उठाना तब तक व्यथ होगा, जब तक कि खुद युवराज इसके लिए तैयार न हो । युवराज जसवत के लिए त्याग और पिता जादश का आदर करत का तत्पर हैं। उन्हें तो मनाओ ।' मैंन बात की है। वह धीरे धीरे हमारे विचार वा समझने लगे है। भरा विश्वास है कि व साथ देंगे' सेनापति उत्साहित हो उठा था। इधर दीवानजी के लिए अब चित्र बिलकुल स्पष्ट था। वे समझ गय थे कि पडयन जसी यह प्रथम चिगारी सेनापति की ही देन है। फिर भी सेनापति पर कुछ भी प्रक्ट न करत हुए दीवानजीन इस दिशा में गहरा विचार करन का आश्वासन दिया। सनापति के यहाँ स दीवानजी जसवत के वक्ष में जा पहुचे । जसवत 'भाषा भूषण' को पूर्ण करने म जुटा था। चारा और संस्कृत रीतिप्रथो के ढेर लग थे, बीच मै जसवत अपनी पाडुलिपि पर झुका था। राज प्रासाद मे जहाँ सदा राजनीतिक घेरावदिया की ही बात होती है, केवल जसवत का प्रकोष्ठ ही एसा स्थान है जहाँ शास्त्र और साहित्य की बात की संभावना बनी रहती है। जसवत T दृष्टि उठावर जव दीवानजी को अपने निकट दखा तो सम्मानाथ उठ खडा हुआ । अभिवादनोपरात आसन ग्रहण करने को निवदा भरत हुए दीवानजी का मुह ताक्न लगा। मन क्षण भर या लिए चचल हो उठा, चिंता बाहरी सतह तक झलकने लगी । जसवत को भय लगा कि वही महाराज वा बाई यसुखद समाचार न आया हो । जसवत को साहित्यिय व्यस्तता एवं निश्छल व्यवहार देखवर दीवान जी किसी भी मोल पर उस थडयत्र घा अग्र स्वीकार करने को तयार नही हा सक। फिर भी स्थिति स भली भांति परिचित होन और महाराज की अनुपस्थिति म राज्य को सुचारु व्यवस्था बनाये रखनव लिए उन्होंने जसवत से पहा, 'क्लागारका क्षेत्र इतना गहरा होता है कि उसे अपन पराये की तमोज क्भ हो होती है। वह क्ता होता है इसलिए अपनी
एक सौ अठहत्तर अन्ना पासवान ही अधिकार मिलना चाहिए यह तो निश्चित ही है।' 'हा, मैं नही सहूँगा इसमयाय को सेनापति की बात से त्रोध झलकने लगा था, 'आप साथ दें तो में अधिकार छीनकर सही व्यक्ति को दिलवा सकता हू ।' नही, हथियार उठाना तब तक व्यथ होगा, जब तक कि खुद युवराज इसके लिए तैयार न हो । युवराज जसवत के लिए त्याग और पिता जादश का आदर करत का तत्पर हैं। उन्हें तो मनाओ ।' मैंन बात की है। वह धीरे धीरे हमारे विचार वा समझने लगे है। भरा विश्वास है कि व साथ देंगे' सेनापति उत्साहित हो उठा था। इधर दीवानजी के लिए अब चित्र बिलकुल स्पष्ट था। वे समझ गय थे कि पडयन जसी यह प्रथम चिगारी सेनापति की ही देन है। फिर भी सेनापति पर कुछ भी प्रक्ट न करत हुए दीवानजीन इस दिशा में गहरा विचार करन का आश्वासन दिया। सनापति के यहाँ स दीवानजी जसवत के वक्ष में जा पहुचे । जसवत 'भाषा भूषण' को पूर्ण करने म जुटा था। चारा और संस्कृत रीतिप्रथो के ढेर लग थे, बीच मै जसवत अपनी पाडुलिपि पर झुका था। राज प्रासाद मे जहाँ सदा राजनीतिक घेरावदिया की ही बात होती है, केवल जसवत का प्रकोष्ठ ही एसा स्थान है जहाँ शास्त्र और साहित्य की बात की संभावना बनी रहती है। जसवत T दृष्टि उठावर जव दीवानजी को अपने निकट दखा तो सम्मानाथ उठ खडा हुआ । अभिवादनोपरात आसन ग्रहण करने को निवदा भरत हुए दीवानजी का मुह ताक्न लगा। मन क्षण भर या लिए चचल हो उठा, चिंता बाहरी सतह तक झलकने लगी । जसवत को भय लगा कि वही महाराज वा बाई यसुखद समाचार न आया हो । जसवत को साहित्यिय व्यस्तता एवं निश्छल व्यवहार देखवर दीवान जी किसी भी मोल पर उस थडयत्र घा अग्र स्वीकार करने को तयार नही हा सक। फिर भी स्थिति स भली भांति परिचित होन और महाराज की अनुपस्थिति म राज्य को सुचारु व्यवस्था बनाये रखनव लिए उन्होंने जसवत से पहा, 'क्लागारका क्षेत्र इतना गहरा होता है कि उसे अपन पराये की तमोज क्भ हो होती है। वह क्ता होता है इसलिए अपनी
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के जल-तनाव वाले या अवर्षणग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और फसल उत्पाद के पारंपरिक तरीकों में बदलाव लाने के लिए भूजल नीति तैयार की है, इस निति की तहत गन्ने जैसी जल-गहन फसलों का जल तनाव वाले इलाकों में पारंपरिक तरीकों से उत्पादन लेने से परहेज किया जायेगा । जल तनाव वाले इलाकों में किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तरीकों का उपयोग करना होगा, जिससे उस इलाके की जल व्यवस्था पर अतिरिक्त तनाव ना पड़ सके। इन जल निति का मसौदा अब टिप्पणियों के लिए खुला रखा गया है। आगे जाकर महाराष्ट्र के इस जल निति का देश के अन्य राज्य भी अनुकरण कर सकते है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1951 में 5,177 घनमीटर की तुलना में २०१८ में लगभग 1,400 घन मीटर तक कम हुई है और 2050 तक यह 1,140 घन मीटर तक गिरने का अनुमान है। इस स्थिति में, राज्य के किसानों द्वारा भूजल का सही और सटिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, और किसानों को फसल उत्पादन करते वक़्त वाटरशेड जल संसाधन समिति (डब्ल्यूडब्ल्यूआरसी) से अनुमति प्राप्त करनी होगी । द इंडियन एक्सप्रेस में छपे समाचार के अनुसार, जल निति मसौदे के नियमों में सभी जल-तनाव वाले क्षेत्रों के किसानों को फसल को पाणी देने के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर सूक्ष्म सिंचाई तरीकों का उपयोग करने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जायेगा । अशोक गुलाटी और गायत्री मोहन बताते हैं कि, भारत की सबसे बड़ी समस्या कृषि में भारी जल-अपशिष्ट है, जो भारत के कुल ताजे पानी के संसाधनों का लगभग 78% उपभोग करती है। उनका कहना हैं की, चावल और गन्ना यह दो फसलें देश में 60% से अधिक सिंचाई के पानी का उपभोग करते हैं, जो कुल फसल वाले क्षेत्र मे केवल 24% हैं। गन्ने के मामले में, वे कहते है की, बाढ़-सिंचाई से 65% पाणी खींचता है, अगर पारंपरिक बाढ़-सिंचाई की जगह ड्रिप-सिंचाई का उपयोग किया जाता है तो 35% पाणी बच जायेगा, और तो और उर्वरकों जैसे अन्य इनपुट की खपत भी कम होगी । जबकि महाराष्ट्र में कुल भूमि के 4% पर गन्ना उगाई जाती है, यह राज्य में दो तिहाई पानी का उपयोग करती है; यह तब बदतर हो जाता है क्योंकि भारत के 48% की तुलना में महाराष्ट्र की भूमि का केवल 19% सिंचित है। जब कुछ साल पहले महाराष्ट्र सरकार ने पाणी की बर्बादी रोकने के लिए आईपीएल मैच का विरोध किया था, एफई ने बताया कि, सभी आईपीएल मैचों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी के बराबर तीन टन चीनी उत्पादन होता था, जबकि राज्य में हर साल 8-9 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया जाता है । गुलाटी-मोहन बताते हैं की, गन्ना क्षेत्र के परंपरागत सिंचाई में एक हेक्टर के लिए जितने पानी की जरूरत होती है, उसी जगह उतनेही पानी से ड्रिप प्रौद्योगिकी के माध्यम से अतिरिक्त 2.29 हेक्टर क्षेत्र लाया जा सकता है और कपास में ड्रिप सिंचाई को अपनाया जाने पर इस क्षेत्र को दोगुना कर दिया जा सकता है; इसका मतलब है 1.95 लाख रुपये तक अतिरिक्त आउटपुट मिलता सकता हैं। साथ ही सोचने वाली बात यह भी है की, बिहार को जहां 1 किलो चीनी उत्पादन के लिए केवल 799 लीटर की जरूरत है, वही महाराष्ट्र राज्य को 2.7 गुना ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। महाराष्ट्र ने जल निति लाकर अच्छी शुरुआत की है ।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के जल-तनाव वाले या अवर्षणग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और फसल उत्पाद के पारंपरिक तरीकों में बदलाव लाने के लिए भूजल नीति तैयार की है, इस निति की तहत गन्ने जैसी जल-गहन फसलों का जल तनाव वाले इलाकों में पारंपरिक तरीकों से उत्पादन लेने से परहेज किया जायेगा । जल तनाव वाले इलाकों में किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तरीकों का उपयोग करना होगा, जिससे उस इलाके की जल व्यवस्था पर अतिरिक्त तनाव ना पड़ सके। इन जल निति का मसौदा अब टिप्पणियों के लिए खुला रखा गया है। आगे जाकर महाराष्ट्र के इस जल निति का देश के अन्य राज्य भी अनुकरण कर सकते है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में पाँच,एक सौ सतहत्तर घनमीटर की तुलना में दो हज़ार अट्ठारह में लगभग एक,चार सौ घन मीटर तक कम हुई है और दो हज़ार पचास तक यह एक,एक सौ चालीस घन मीटर तक गिरने का अनुमान है। इस स्थिति में, राज्य के किसानों द्वारा भूजल का सही और सटिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, और किसानों को फसल उत्पादन करते वक़्त वाटरशेड जल संसाधन समिति से अनुमति प्राप्त करनी होगी । द इंडियन एक्सप्रेस में छपे समाचार के अनुसार, जल निति मसौदे के नियमों में सभी जल-तनाव वाले क्षेत्रों के किसानों को फसल को पाणी देने के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर सूक्ष्म सिंचाई तरीकों का उपयोग करने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जायेगा । अशोक गुलाटी और गायत्री मोहन बताते हैं कि, भारत की सबसे बड़ी समस्या कृषि में भारी जल-अपशिष्ट है, जो भारत के कुल ताजे पानी के संसाधनों का लगभग अठहत्तर% उपभोग करती है। उनका कहना हैं की, चावल और गन्ना यह दो फसलें देश में साठ% से अधिक सिंचाई के पानी का उपभोग करते हैं, जो कुल फसल वाले क्षेत्र मे केवल चौबीस% हैं। गन्ने के मामले में, वे कहते है की, बाढ़-सिंचाई से पैंसठ% पाणी खींचता है, अगर पारंपरिक बाढ़-सिंचाई की जगह ड्रिप-सिंचाई का उपयोग किया जाता है तो पैंतीस% पाणी बच जायेगा, और तो और उर्वरकों जैसे अन्य इनपुट की खपत भी कम होगी । जबकि महाराष्ट्र में कुल भूमि के चार% पर गन्ना उगाई जाती है, यह राज्य में दो तिहाई पानी का उपयोग करती है; यह तब बदतर हो जाता है क्योंकि भारत के अड़तालीस% की तुलना में महाराष्ट्र की भूमि का केवल उन्नीस% सिंचित है। जब कुछ साल पहले महाराष्ट्र सरकार ने पाणी की बर्बादी रोकने के लिए आईपीएल मैच का विरोध किया था, एफई ने बताया कि, सभी आईपीएल मैचों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पानी के बराबर तीन टन चीनी उत्पादन होता था, जबकि राज्य में हर साल आठ-नौ मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया जाता है । गुलाटी-मोहन बताते हैं की, गन्ना क्षेत्र के परंपरागत सिंचाई में एक हेक्टर के लिए जितने पानी की जरूरत होती है, उसी जगह उतनेही पानी से ड्रिप प्रौद्योगिकी के माध्यम से अतिरिक्त दो.उनतीस हेक्टर क्षेत्र लाया जा सकता है और कपास में ड्रिप सिंचाई को अपनाया जाने पर इस क्षेत्र को दोगुना कर दिया जा सकता है; इसका मतलब है एक.पचानवे लाख रुपये तक अतिरिक्त आउटपुट मिलता सकता हैं। साथ ही सोचने वाली बात यह भी है की, बिहार को जहां एक किलो चीनी उत्पादन के लिए केवल सात सौ निन्यानवे लीटरटर की जरूरत है, वही महाराष्ट्र राज्य को दो.सात गुना ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। महाराष्ट्र ने जल निति लाकर अच्छी शुरुआत की है ।
शिवसेना ने सामना के संपादकीय में राज्यपाल पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया, राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। श्रीमान कोश्यारी कभी संघ के प्रचारक या भाजपा के नेता रहे भी होंगे, लेकिन आज वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के राज्यपाल हैं, लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। मुंबई. शिवसेना ने सामना के संपादकीय में राज्यपाल पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया, राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। श्रीमान कोश्यारी कभी संघ के प्रचारक या भाजपा के नेता रहे भी होंगे, लेकिन आज वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के राज्यपाल हैं, लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। "रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं" महाराष्ट्र के भाजपा के नेता रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं। यह समझा जा सकता है, लेकिन उस मुहिम की कीचड़ राज्यपाल अपने ऊपर क्यों उड़वा लेते हैं? भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में सत्ता गंवा चुकी है। यह बड़ी पीड़ा है, लेकिन इससे हो रहे पेटदर्द पर राज्यपाल द्वारा हमेशा लेप लगाने में कोई अर्थ नहीं। यह पीड़ा आगामी चार साल तो रहने ही वाली है। लेकिन भाजपा का पेट दुख रहा है इसलिए संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को भी प्रसव पीड़ा हो, ये गंभीर है। लेकिन उस प्रसव पीड़ा का मुख्यमंत्री ठाकरे ने उपचार किया है। "मर्यादा लांघ कर व्यवहार करे तो क्या होता है" राज्यपाल पद पर बैठा बुजुर्ग व्यक्ति अपनी मर्यादा लांघ कर व्यवहार करे तो क्या होता है, इसका सबक देश के सभी राज्यपालों ने ले ही लिया होगा। राज्य के मंदिरों को खोलने के लिए भाजपा ने आंदोलन शुरू किया। उस राजनीतिक आंदोलन में राज्यपाल को सहभागी होने की आवश्यकता नहीं थी। जब यह आंदोलन शुरू था तब टाइमिंग साधते हुए माननीय राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। वह पत्र मुख्यमंत्री तक पहुंचने की यात्रा के दौरान ही अखबारों तक पहुंच गया। राज्य में बार और रेस्टॉरेंट शुरू हो गए हैं। लेकिन प्रार्थना स्थल क्यों बंद हैं? "मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली" आपको मंदिरों को बंद रखने के लिए कोई दैवीय संकेत मिल रहा है क्या? या आप अचानक सेक्युलर हो गए हैं? ऐसा सवाल राज्यपाल ने पूछा। इस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली और राजभवन को हिलाकर रख दिया, हमारे द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग करना असंसदीय हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री ने विशेष ठाकरी शैली में ही राज्यपाल को कड़ा उत्तर दिया है, यह सच है। "राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा बर्ताव किया" ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा, राज्यपाल महोदय, संविधान के अनुसार आपने राज्यपाल पद की शपथ ली है। आपको देश का संविधान व सेक्युलरिज्म स्वीकार नहीं है क्या? और आपको हमारे हिंदुत्व पर कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है। मेरे हिंदुत्ववाद को आपके प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार से मुख्यमंत्री ठाकरे ने एक लोहार की देते हुए ये दिखा दिया कि महाराष्ट्र का स्वाभिमान, अभिमान और तेवर क्या होता है? इस मामले में राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा बर्ताव किया। लेकिन यहां बैल नहीं, बल्कि 'शेर' है, इस बात को वे कैसे भूल गए? मुख्य बात यह है कि इस पूरे 'धुलाई' मामले में भारतीय जनता पार्टी का भी वस्त्रहरण हो गया। राज्यपाल के सहारे महाराष्ट्र सरकार पर हमला करना उन्हें महंगा पड़ गया। यह सारा मामला हम पर ही इस प्रकार से उलट आएगा और मुंह दबाकर मुक्के की मार सहनी पड़ेगी, उन्होंने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। इस मामले में भाजपा और उनके द्वारा नियुक्त राज्यपाल इतने खुल चुके हैं कि अगर श्रीकृष्ण उन्हें वस्त्र दें, तब भी उनकी इज्जत नहीं बचेगी। महाराष्ट्र में कोरोना का खतरा बना हुआ है। चार घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ऐसा कहते हैं और उनके मार्गदर्शन की परवाह न करते हुए भाजपा वाले और उनके राज्यपाल मंदिर खोलो, भीड़ हुई तब भी कोई बात नहीं, ऐसी नारेबाजी करते हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना लक्षण हैं। राज्यपाल कोश्यारी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भेजना अविवेकी कदम ही कहना पड़ेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने एक ही मारा लेकिन सॉलिड मारा! यह शिवतेज देखकर मंदिरों के देवताओं ने भी आनंदपूर्वक घंटानाद किया होगा। यह घंटानाद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचा ही होगा, तब वे राजभवन की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए राज्यपाल को वापस बुलाएंगे। और ज्यादा क्या कहें?
शिवसेना ने सामना के संपादकीय में राज्यपाल पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया, राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। श्रीमान कोश्यारी कभी संघ के प्रचारक या भाजपा के नेता रहे भी होंगे, लेकिन आज वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के राज्यपाल हैं, लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। मुंबई. शिवसेना ने सामना के संपादकीय में राज्यपाल पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया, राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, यह भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। श्रीमान कोश्यारी कभी संघ के प्रचारक या भाजपा के नेता रहे भी होंगे, लेकिन आज वे महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के राज्यपाल हैं, लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। "रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं" महाराष्ट्र के भाजपा के नेता रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं। यह समझा जा सकता है, लेकिन उस मुहिम की कीचड़ राज्यपाल अपने ऊपर क्यों उड़वा लेते हैं? भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में सत्ता गंवा चुकी है। यह बड़ी पीड़ा है, लेकिन इससे हो रहे पेटदर्द पर राज्यपाल द्वारा हमेशा लेप लगाने में कोई अर्थ नहीं। यह पीड़ा आगामी चार साल तो रहने ही वाली है। लेकिन भाजपा का पेट दुख रहा है इसलिए संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को भी प्रसव पीड़ा हो, ये गंभीर है। लेकिन उस प्रसव पीड़ा का मुख्यमंत्री ठाकरे ने उपचार किया है। "मर्यादा लांघ कर व्यवहार करे तो क्या होता है" राज्यपाल पद पर बैठा बुजुर्ग व्यक्ति अपनी मर्यादा लांघ कर व्यवहार करे तो क्या होता है, इसका सबक देश के सभी राज्यपालों ने ले ही लिया होगा। राज्य के मंदिरों को खोलने के लिए भाजपा ने आंदोलन शुरू किया। उस राजनीतिक आंदोलन में राज्यपाल को सहभागी होने की आवश्यकता नहीं थी। जब यह आंदोलन शुरू था तब टाइमिंग साधते हुए माननीय राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। वह पत्र मुख्यमंत्री तक पहुंचने की यात्रा के दौरान ही अखबारों तक पहुंच गया। राज्य में बार और रेस्टॉरेंट शुरू हो गए हैं। लेकिन प्रार्थना स्थल क्यों बंद हैं? "मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली" आपको मंदिरों को बंद रखने के लिए कोई दैवीय संकेत मिल रहा है क्या? या आप अचानक सेक्युलर हो गए हैं? ऐसा सवाल राज्यपाल ने पूछा। इस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली और राजभवन को हिलाकर रख दिया, हमारे द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग करना असंसदीय हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री ने विशेष ठाकरी शैली में ही राज्यपाल को कड़ा उत्तर दिया है, यह सच है। "राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा बर्ताव किया" ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा, राज्यपाल महोदय, संविधान के अनुसार आपने राज्यपाल पद की शपथ ली है। आपको देश का संविधान व सेक्युलरिज्म स्वीकार नहीं है क्या? और आपको हमारे हिंदुत्व पर कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है। मेरे हिंदुत्ववाद को आपके प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार से मुख्यमंत्री ठाकरे ने एक लोहार की देते हुए ये दिखा दिया कि महाराष्ट्र का स्वाभिमान, अभिमान और तेवर क्या होता है? इस मामले में राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा बर्ताव किया। लेकिन यहां बैल नहीं, बल्कि 'शेर' है, इस बात को वे कैसे भूल गए? मुख्य बात यह है कि इस पूरे 'धुलाई' मामले में भारतीय जनता पार्टी का भी वस्त्रहरण हो गया। राज्यपाल के सहारे महाराष्ट्र सरकार पर हमला करना उन्हें महंगा पड़ गया। यह सारा मामला हम पर ही इस प्रकार से उलट आएगा और मुंह दबाकर मुक्के की मार सहनी पड़ेगी, उन्होंने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। इस मामले में भाजपा और उनके द्वारा नियुक्त राज्यपाल इतने खुल चुके हैं कि अगर श्रीकृष्ण उन्हें वस्त्र दें, तब भी उनकी इज्जत नहीं बचेगी। महाराष्ट्र में कोरोना का खतरा बना हुआ है। चार घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ऐसा कहते हैं और उनके मार्गदर्शन की परवाह न करते हुए भाजपा वाले और उनके राज्यपाल मंदिर खोलो, भीड़ हुई तब भी कोई बात नहीं, ऐसी नारेबाजी करते हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना लक्षण हैं। राज्यपाल कोश्यारी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भेजना अविवेकी कदम ही कहना पड़ेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने एक ही मारा लेकिन सॉलिड मारा! यह शिवतेज देखकर मंदिरों के देवताओं ने भी आनंदपूर्वक घंटानाद किया होगा। यह घंटानाद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचा ही होगा, तब वे राजभवन की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए राज्यपाल को वापस बुलाएंगे। और ज्यादा क्या कहें?
डिग्री- एम. बी. बी. एस, एम. एस (जनरल सर्जरी), डीएनबी (सर्जरी गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी) आंत को शरीर का 'दूसरा मस्तिष्क' भी कहा जाता है। यह आहार नली का अहम हिस्सा होती है, जिसका संबंध सीधे पाचन तंत्र से होता है। अगर आंत कमजोर पड़ने लगते हैं तो पाचन संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इसलिए आंतों का मजबूत होना अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। हालांकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की अनियमित खानपान की आदतें और खराब जीवनशैली पाचन तंत्र को कमजोर कर देती हैं, जिससे आंतों में भी गड़बड़ी आ जाती है। सिर्फ यही नहीं, व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी आंतों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर व्यक्ति को आंत से जुड़ी कोई परेशानी है तो वह आसानी से सामान्य बीमारियों जैसे फ्लू आदि का शिकार हो जाता है। इसलिए आंतों में गड़बड़ी के लक्षणों को पहचानने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि इसके क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? अगर आपको हर समय पेट फूला हुआ या पेट में भारीपन महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह आंत की गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा अगर आपको कब्ज की समस्या है, दिन में दो या इससे ज्यादा बार मल त्याग करना पड़ रहा है, सांसों से दुर्गंध आती है, तो इसे भी नजरअंदाज न करें। अगर आप अपना वजन घटाने या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं और लगातार मेहनत करने के बाद भी इसमें सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो ऐसा हो सकता है कि आपकी आंत सही ढंग से काम न कर रही हो। इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है। खानपान सही होने के बावजूद अगर आपको दिनभर थकान का अहसास होता है, तो यह भी कहीं न कहीं यह खराब आंत का संकेत हो सकता है। अस्वस्थ आंत के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता हो सकती है। आंतों को कैसे मजबूत बनाएं? नोटः डॉ. विजयंत कुमार सचान अत्यधिक योग्य और अनुभवी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन हैं। इन्होंने चेन्नई के स्टेनली मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूर किया है। इसके बाद इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमएस (जनरल सर्जरी) की पढ़ाई पूरी की है। बता दें कि डॉ. विजयंत कुमार सचान ने हैदराबाद के ग्लोबल हॉस्पिटल से सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी में सुपर स्पेशलाइजेशन भी किया है। यहां पर इन्होंने एडवांस्ड मिनिमल एक्सेस सर्जरी (लैप्रोस्कोपी) कॉम्प्लेक्स आंतों के कैंसर सर्जरी, हेपेटोबिलियरी सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग ली। इनकी खास दिलचस्पी जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर सर्जरी और एचपीबी सर्जरी में है। डॉ. विजयंत कुमार सचान की आईएमए और एएसआई में सदस्यता भी है। वह एक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन हैं, जो इस क्षेत्र में 8 साल का विशाल अनुभव रखते हैं। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
डिग्री- एम. बी. बी. एस, एम. एस , डीएनबी आंत को शरीर का 'दूसरा मस्तिष्क' भी कहा जाता है। यह आहार नली का अहम हिस्सा होती है, जिसका संबंध सीधे पाचन तंत्र से होता है। अगर आंत कमजोर पड़ने लगते हैं तो पाचन संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इसलिए आंतों का मजबूत होना अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। हालांकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की अनियमित खानपान की आदतें और खराब जीवनशैली पाचन तंत्र को कमजोर कर देती हैं, जिससे आंतों में भी गड़बड़ी आ जाती है। सिर्फ यही नहीं, व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी आंतों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर व्यक्ति को आंत से जुड़ी कोई परेशानी है तो वह आसानी से सामान्य बीमारियों जैसे फ्लू आदि का शिकार हो जाता है। इसलिए आंतों में गड़बड़ी के लक्षणों को पहचानने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि इसके क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? अगर आपको हर समय पेट फूला हुआ या पेट में भारीपन महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह आंत की गड़बड़ी का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा अगर आपको कब्ज की समस्या है, दिन में दो या इससे ज्यादा बार मल त्याग करना पड़ रहा है, सांसों से दुर्गंध आती है, तो इसे भी नजरअंदाज न करें। अगर आप अपना वजन घटाने या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं और लगातार मेहनत करने के बाद भी इसमें सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो ऐसा हो सकता है कि आपकी आंत सही ढंग से काम न कर रही हो। इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है। खानपान सही होने के बावजूद अगर आपको दिनभर थकान का अहसास होता है, तो यह भी कहीं न कहीं यह खराब आंत का संकेत हो सकता है। अस्वस्थ आंत के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता हो सकती है। आंतों को कैसे मजबूत बनाएं? नोटः डॉ. विजयंत कुमार सचान अत्यधिक योग्य और अनुभवी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन हैं। इन्होंने चेन्नई के स्टेनली मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूर किया है। इसके बाद इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमएस की पढ़ाई पूरी की है। बता दें कि डॉ. विजयंत कुमार सचान ने हैदराबाद के ग्लोबल हॉस्पिटल से सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी में सुपर स्पेशलाइजेशन भी किया है। यहां पर इन्होंने एडवांस्ड मिनिमल एक्सेस सर्जरी कॉम्प्लेक्स आंतों के कैंसर सर्जरी, हेपेटोबिलियरी सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग ली। इनकी खास दिलचस्पी जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर सर्जरी और एचपीबी सर्जरी में है। डॉ. विजयंत कुमार सचान की आईएमए और एएसआई में सदस्यता भी है। वह एक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन हैं, जो इस क्षेत्र में आठ साल का विशाल अनुभव रखते हैं। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः भारत में मंकीपॉक्स के रोगियों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई। सरकार ने रविवार को यह जानकारी दी। इससे पहले केरल में मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आए थे। सूत्रों के मुताबिक उसने हाल में हिमाचल प्रदेश के मनाली में एक 'स्टैग पार्टी' में भाग लिया था। हिमाचल प्रदेश के मनाली में पार्टी करने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः भारत में मंकीपॉक्स के रोगियों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई। सरकार ने रविवार को यह जानकारी दी। इससे पहले केरल में मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आए थे। सूत्रों के मुताबिक उसने हाल में हिमाचल प्रदेश के मनाली में एक 'स्टैग पार्टी' में भाग लिया था। हिमाचल प्रदेश के मनाली में पार्टी करने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
पुरुलिया (पश्चिम बंगाल), 19 जनवरी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भाजपा को माओवादियों से ज्यादा खतरनाक बताते हुए आरोप लगाया कि भगवा पार्टी चुनाव से पहले लोगों से झूठे वादे कर रही है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि राजनीति एक पवित्र विचारधारा और दर्शन है तथा कपड़ों की तरह रोज विचारधारा नहीं बदली जा सकती है। राज्य में अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा नेताओं ने झूठे वादे कर जंगलमहल इलाके के आदिवासियों को गुमराह किया और लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनके पास कभी नहीं आए। पुरुलिया भी जंगलमहल इलाके में आता है। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पुरुलिया समेत जंगलमहल इलाके में सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
पुरुलिया , उन्नीस जनवरी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भाजपा को माओवादियों से ज्यादा खतरनाक बताते हुए आरोप लगाया कि भगवा पार्टी चुनाव से पहले लोगों से झूठे वादे कर रही है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि राजनीति एक पवित्र विचारधारा और दर्शन है तथा कपड़ों की तरह रोज विचारधारा नहीं बदली जा सकती है। राज्य में अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा नेताओं ने झूठे वादे कर जंगलमहल इलाके के आदिवासियों को गुमराह किया और लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनके पास कभी नहीं आए। पुरुलिया भी जंगलमहल इलाके में आता है। भाजपा ने दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में पुरुलिया समेत जंगलमहल इलाके में सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी द्वारा कीपिंग ग्लव्स पर बलिदान बैज लगाकर खेलने का मामला शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा। हालांकि अभी तक धोनी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी बोलते नजर नहीं आए हैं। बलिदान बैज मामले में कई दिग्गज खिलाड़ी उनके सपोर्ट में बोल चुके हैं। अब इसी क्रम में भारत के पूर्व विकेटकीपर फारूख इंजीनियर ने भी अपनी बात रखी है। धोनी ने रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेलने से पहले शनिवार को इस मुद्दे पर भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर के साथ बातचीत की है। भारतीय विश्व कप टीम के सबसे सीनियर खिलाडी धोनी को आईसीसी ने उनके दस्ताने से बलिदान बैज हटाने की बात कही है। संभवतः धोनी आगे मैच में बलिदान बैज लगाकर खेलते नहीं दिखेंगे। इस मुद्दे पर फारुख इंजीनियर ने कहा, कल मैंने धोनी के साथ एक चैट की थी और हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस छोटी सी बात को इतना तूल देकर पहाड़ जैसा बना दिया गया है । मैंने धोनी को कहा कि वास्तव में मुझे धोनी पर गर्व है। हम सब भारतीय हैं और अपनी सेना की इज्जत से जुड़े हुए हैं । यदि मैं उनकी जगह पर होता तो मुझे अपने इस निर्णय पर गर्व होता। टीम इंडिया के विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी ने खुले तौर पर अपने दस्ताने पर सेना के लोगो के बारे में अपने विचार व्यक्त नहीं किए हैं, लेकिन उनका मानना है कि सेना के लोगो को उनके स्टंपिंग दस्ताने पर पहनने के निर्णय को तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। बताते चलें कि, दिलचस्प बात यह है कि बीसीसीआई ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया है। देखना काफी दिलचस्प होगा कि रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते वक्त धोनी बलिदान बैज पहनेंगे या नहीं।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी द्वारा कीपिंग ग्लव्स पर बलिदान बैज लगाकर खेलने का मामला शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा। हालांकि अभी तक धोनी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी बोलते नजर नहीं आए हैं। बलिदान बैज मामले में कई दिग्गज खिलाड़ी उनके सपोर्ट में बोल चुके हैं। अब इसी क्रम में भारत के पूर्व विकेटकीपर फारूख इंजीनियर ने भी अपनी बात रखी है। धोनी ने रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेलने से पहले शनिवार को इस मुद्दे पर भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर के साथ बातचीत की है। भारतीय विश्व कप टीम के सबसे सीनियर खिलाडी धोनी को आईसीसी ने उनके दस्ताने से बलिदान बैज हटाने की बात कही है। संभवतः धोनी आगे मैच में बलिदान बैज लगाकर खेलते नहीं दिखेंगे। इस मुद्दे पर फारुख इंजीनियर ने कहा, कल मैंने धोनी के साथ एक चैट की थी और हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस छोटी सी बात को इतना तूल देकर पहाड़ जैसा बना दिया गया है । मैंने धोनी को कहा कि वास्तव में मुझे धोनी पर गर्व है। हम सब भारतीय हैं और अपनी सेना की इज्जत से जुड़े हुए हैं । यदि मैं उनकी जगह पर होता तो मुझे अपने इस निर्णय पर गर्व होता। टीम इंडिया के विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी ने खुले तौर पर अपने दस्ताने पर सेना के लोगो के बारे में अपने विचार व्यक्त नहीं किए हैं, लेकिन उनका मानना है कि सेना के लोगो को उनके स्टंपिंग दस्ताने पर पहनने के निर्णय को तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। बताते चलें कि, दिलचस्प बात यह है कि बीसीसीआई ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया है। देखना काफी दिलचस्प होगा कि रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते वक्त धोनी बलिदान बैज पहनेंगे या नहीं।
IPL 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स का अब तक का सफर कुछ खास नहीं रहा है। दो बार आईपीएल का खिताब जीत चुकी कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम इस साल अब तक अपने खेले गए आठ मुकाबलों में से सिर्फ तीन मैचों में ही जीत दर्ज कर सकी है। इसी बीच अब केकेआर को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केकेआर टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज़ लिटन दास पारिवारिक कारणों की वजह से वापस अपने घर यानी बांग्लादेश लौट चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केकेआर टीम के एक अधिकारी ने इस खबर की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, 'लिटन दास के परिवार में मेडिकल इमरजेंसी आ गई है जिसके कारण वह ढाका रवाना हो चुके हैं। वह आईपीएल में कब वापसी करेंगे इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है।' बता दें कि केकेआर ने इस घातक बांग्लादेशी बल्लेबाज़ को ऑक्शन में 50 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन वह ज्यादा समय के लिए केकेआर के साथ नहीं जुड़ सके।
IPL दो हज़ार तेईस में कोलकाता नाइट राइडर्स का अब तक का सफर कुछ खास नहीं रहा है। दो बार आईपीएल का खिताब जीत चुकी कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम इस साल अब तक अपने खेले गए आठ मुकाबलों में से सिर्फ तीन मैचों में ही जीत दर्ज कर सकी है। इसी बीच अब केकेआर को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केकेआर टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज़ लिटन दास पारिवारिक कारणों की वजह से वापस अपने घर यानी बांग्लादेश लौट चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केकेआर टीम के एक अधिकारी ने इस खबर की जानकारी दी है। उन्होंने कहा, 'लिटन दास के परिवार में मेडिकल इमरजेंसी आ गई है जिसके कारण वह ढाका रवाना हो चुके हैं। वह आईपीएल में कब वापसी करेंगे इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है।' बता दें कि केकेआर ने इस घातक बांग्लादेशी बल्लेबाज़ को ऑक्शन में पचास लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन वह ज्यादा समय के लिए केकेआर के साथ नहीं जुड़ सके।
अंग-सचालन भी कर सकती हैं, होठ और आँख को चलायमान कर सकती हैं तथा वोलने का उपक्रम भी कर सकती है, परन्तु वास्तव मे वे बोल नहीं सकती । ऐसी स्थिति मे उन पर कथोपकथन आदि मानवीय ढंग से थोप देने से उनका दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं पडता । यही कारण है कि पुतलियो से वाचन, संभाषण आदि उसी समय कराया जाता है, जबकि वे अत्यधिक क्रियाशील हो ताकि क्रिया-कलापों के अस्पष्ट अर्थ शाब्दिक अर्थो मे मिलकर पूर्ण अर्थ की सृष्टि कर सकें । पुतली की स्थिर स्थिति में वहुधा कोई संभाषरण नही होता । उस समय वाचन द्वारा कथाप्रसग को अत्यत रोचक ढंग से वढाया जाता है और प्रत्यक्ष सभापरणजनित कमियों को पूरा किया जाता है । कथाप्रसंग के चुनाव में भी उन्हीं स्थितियों को प्रधानता दी जाती है, जो क्रियाप्रधान हो और प्रदेश, उपदेश, भाषरण आदि ग्ररुचिकर स्थितियों से मुक्त हो । पुतलियो के माध्यम से भावाभिव्यजनाएँ जहाँ तक हो सके वचा ली जाती है और उन्ही उद्रेकमयी स्थितियों को प्रधानता दी जाती है जिनमे पुतलियो की उछल-कूद, उनकी उड़ान तथा क्रियाशील स्थितियां सर्वोपरि स्थान पा सके । यही कारण है कि पुतलीनाट्य की रचना मानवीय नाट्य जितनी सरल नहीं है । पुतलीनाट्यतत्र इतना जटिल है कि कोई भी साधारण पुतलीकार नवीन रचना करने की हिम्मत नहीं करता । विरले ही ऐसे चमत्कारी पुतलीकार पैदा होते हैं जो किसी विशिष्ट पुतलीनाट्य की परम्परा डालते हैं और कई वर्षो मे वे परिपक्व नाट्य का स्वरूप ग्रहण करती है। आज जो ग्रान्ध्र मे महाभारत तथा रामायण आदि पर आधारित छायानाट्य चलते हैं उनके प्रारम्भिक एव मौलिक रूप की कल्पना करना मभव नहीं है । सदियों से जो एक ही नाट्य समी शैली की भारतीय कठपुतलियो मे चलता है, उसका अर्थ यह कभी नही है कि पुतलीनाट्य का रचनाक्रम शिथिल पड गया है और दर्शको को उदासीनता के कारण अब कोई भी नवीन रचना का खर्च वहन करने को तैयार नहीं । सदियों पूर्व रची हुई ये भारतीय पुतली रचनाएँ अपने को किसी विशिष्ट रचयिता के नाम के साथ नही जोडतीं । उनकी सार्थकता और व्यापकता इसी में है कि वे सामाजिक घरातल पर अवस्थित हैं और सामाजिक पुतलियो ही का अंकन उन्होंने स्वीकार किया है। यही कारण है कि भारतीय पुतलियाँ सर्वदा ही लोकशैली पर ही निर्मित हुई है और किसी व्यक्तिविशेष की अभिव्यक्ति से वे सदा ही दूर रही है। जनमानस पर आज भी उनका जो चिरस्थायी प्रभाव पड़ता है और समाज उस रचना को एक सामाजिक संस्कार तरह स्वीकार करता है, उसके पीछे भी उसकी गहरी लोकशैली ही है । भारतीय पुतलियां, जो कुछ ही सूत्रो, छडियो तथा न्यूनतम रगमचीय साज-सज्जा के माध्यम से किसी सूक्ष्मातिसूक्ष्म प्रसग को लेकर भी इतना गहरा प्रभाव उत्पन्न करती हैं, उसके पीछे सहस्रो प्रतिभाओ का हाथ है। उन्होंने निरन्तर एव लम्बे परीक्षण तथा प्रयोग से यह भली प्रकार ज्ञात कर लिया है कि किस प्रकार के वाचन, नर्तन, गायन एव परिचालन से पुतलियाँ सर्वाधिक प्रभावशाली हो सकती हैं । पुतली के निर्माण मे भी भावोद्दीपन की समस्त वारीकियो का पता लगा लिया गया है और उन्हीं के अनुसार पुतलियो के अनुपात, रग एव विविध रेखा का प्रायोजन नियोजन होता है । कठपुतलियाँ और चर्मपुतलियाँ भारतीय काष्ठपुतलियो के सबंध मे भी ये ही सिद्धात लागू होते हैं । काष्ठपुतलियाँ चर्मपुतलियो की ही वशज हैं। उनकी उत्पत्ति चर्मपुतलियो के शारीरिक अवयवो के प्रभाव की पूर्ति के लिए ही हुई थी । चर्मपुतलियो मे स्थूल शरीर की कल्पना करना असंभव था । सबसे वडी सीमा तो यह थी कि उसका प्रोफील (Profile ) वाला मुख ही सफल अनुकृतिमूलक छाया की सृष्टि करता था । सामने का मुख केवल अधकार का पुज मात्र था । पुतली को घुमानेफिराने तथा उसके द्वारा सन्मुख हुई अन्य पुतलियो की घोर उसका उन्मुख होना अत्यत कष्टसाध्य कार्य था । पुतली के शृंगार एव अन्य प्रसाधन भी रगो द्वारा ही चित्रित किये जाते थे। उन पर वस्त्र प्रभूपरण का वास्तविक शृगार सभव नही था । इन्ही सीमाओ पर विजय प्राप्त करने के लिये काष्ठपुतलियो का आविर्भाव हुआ, परन्तु पुतलीनाट्य-विज्ञान की परम्परा पूर्ववत् ही कायम रही । कठपुतली के माध्यम से पुतलीनाट्य परिपक्व तथा सर्वांगपूर्ण अवश्य हुआ, परन्तु वह प्रचलित पुतली नाट्य के एक विशिष्ट प्रकार के रूप मे । काष्ठ की पुतलियो मे जो नाट्य रचे गये, वे परम्परा से पुष्ट हुए । किसी व्यक्ति विशेष की प्रतिभा उनके लिये पर्याप्त नहीं थी । उनकी पृष्ठभूमि सैकडो वर्ष प्राचीन है। इन कठपुतलीकारो को अपनी पुतलियां परम्परा से प्राप्त हुई हैं, जिनकी सुरक्षा के चर्मपुतलीकार की तरह ही करते है । मुख के रग-रोगन, पुतली के शृगार, सजाव, अतिरजित प्राकृतियाँ, वेश, श्राहार्य, परिचालन, सभाषरण, गायन, भावाभिव्यजन, प्रस्तुतीकरण श्रादि मे भी चर्मपुतलियों के नियमो का ही पालन होता है । उनके गहन अध्ययन से उनमे अत्यत उच्चकोटि के नाट्यतत्वो के दर्शन होते हैं । समय और काल के चक्र से इन नाट्यो के केवल ध्वसावशेष अवश्य रह गये हैं, और कई विकृत कथाएँ औौर क्षेपक उनमे जुड गये । अपनी निर्धनता के कारण इनकी पुतलियो की वेशभूपाएँ भी चिथडे बन गई हैं। पूर्वजो द्वारा पहिनाई हुई ये पोशाकें, जो कई परतो के रूप मे आज भी अपनी गलित अवस्था में विद्यमान हैं, अपने पुरातन वैभव का भान कराती है । इन काष्ठपुतलियो के विकृत नाट्य प्रसगो मे भी किसी विगत पुष्ट नाट्यपरम्परा के दर्शन हो सकते हैं । इन पुतलियो के रगो मे अभी भी उसी पुरातन परम्परा का अनुशीलन किया गया है, जो आज भी प्रान्ध्र की छायापुतलियो मे विद्यमान है। राम और कृष्ण के चेहरे और शरीर कालिमा लिये हुए नोले के रंग के होते हैं। अन्य सव दिव्य चरित्रो के रगो मे लाल और पीले रगो की प्रधानता है तथा राक्षसी चरित्रो मे काले रगो का प्रयोग हुआ है । पुतलियो की प्राकृतियो की खुदाई मे उमो प्रतिरजनात्मक शैली का अनुसरण किया गया है जो चर्मपुतलियो मे विद्यमान है। उनकी विविध भावभगिमाओ को भी अत्यत मार्मिक ढंग से तराशा गया है । हास्य, विनोद, मयानक, रौद्र, शान्त और मनमोहकता से परिपूर्ण पुतलियो के विविध चेहरे किसी न किसी परम्परा के अनुसार ही तराशे गये मालूम होते हैं । यद्यपि उडीसा की अधिकाश पुतलियाँ परम्परा से ही प्राप्त हुई हैं और नवीन पुतलियो का निर्मारण बहुधा रुक-सा गया है, फिर भी उनसे यह भली प्रकार ज्ञात हो सकता है कि उनको मुखाकृतियो तथा रंग-विधान, परिधान, अलकरण आदि मे एक विशिष्ट नाट्यपरम्परा निहित है, जिसे श्राज उड़ीसा के सखी एवं कन्हाई भाट लकीर मानकर पकड़े हुए हैं । यद्यपि उडीसा की कठपुतलियो मे विशिष्ट कमवद्ध कथावस्तु के दर्शन नही होते, फिर भी जो विखरे हुए कथाप्रसग भाज भी मौजूद हैं, उनमे वस्तुव्यवस्था का तनिक भास मिल सकता है। कृष्ण-कथा मे कृष्ण जहाँ नायक के रूप मे दर्शाये गये हैं, वहाँ उपनायक के रूप मे वलराम आदि पात्रो का उपयोग हुआ है । राधा प्रधान नायिका के रूप में अन्य नायिका से अब भी सर्वोपरि मानी गई है। यद्यपि इस कथाप्रसग मे अनेक नवीन प्रसग घुस गये हैं और समस्त नाट्य नवीन पुरातन की एक वेमेल एच वेस्वाद खिचडी वन गई है, परन्तु उनका प्रस्तुतीकरण आज भी अत्यंत प्रभावशाली ढंग से होता है । पुतलियो का समापण मानवीय सवाद के रूप में प्रस्तुत नही होकर परिचालको द्वारा पुतली सवाद के रूप में अनायास ही प्रकट होता है । गीत परिचालक गाते है परन्तु उनका श्रारोपण पुतलियो पर बहुत ही मार्मिक ढंग से होता है । पुतलियो का प्रधान विदूषक इस सवाद धारोपण मे जबर्दस्त हाथ वॅटाता है । वह कई कथाप्रसगो को जोड़ता है और रगमच पर नहीं आने योग्य प्रसगो, दृश्यो एव पात्रो को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है । यद्यपि रामायण एव महाभारत की कथा को इन कन्हैया तथा सन्त्री नटो ने बहुत ही मनमाने ढंग से प्रयुक्त किया है औौर परपरा की दृष्टि से उनमे काफी ग्राघात भी पहुँचा है, परन्तु पुतलीनाट्य-विज्ञान की दृष्टि से उनके ये प्रयोग बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण मालूम होते हैं। उन्हें यह भली प्रकार ज्ञात है कि चर्मपुतलियो की तरह उनकी ये काठपुतलियाँ दर्शको को दीर्घकालीन मनोरजन प्रदान करने में असमर्थ रहती हैं, प्रत कथाप्रसगो मे उन्होंने जो स्वतंत्रता ली है वह अनुचित नहीं है । छायापुतलियों के प्रकार प्रकार, रंगरूप तथा रगमचीय विधान आदि बडे पैमाने पर बनाये जाते हैं । पुतलियाँ भी बहुधा मानवीय आकार की ही होती हैं। कई दलो के सहयोग से प्रदर्शन भी बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किये जाते हैं, प्रत दर्शको को सख्या पर कोई प्रतिवध नहीं है । रगमच भी मानवीय ऊँचाई से ऊपर वनता है, ऋत. लम्बी दूरी से भी दर्शकगरण इन पुतलियो का भली प्रकार आनन्द ले सकते है, परन्तु काष्ठपुतलियो को अनेक सीमाओ मे रहना पड़ता है । वे वृहद् दर्शक समाज का मनोरजन करने में असफल रहती हैं । चर्मपुतलियो के संबंध में एक विशेष बात यह है कि इनमे मानवीय नाट्य काश काष्ठपुतलियो से कही अधिक निखरा हुआ और स्पष्ट रूप से आरोपित होता है । समस्त परिचालकगरण पुतलियो को पकडकर परदे के पीछे खडे रहते हैं और पुतलियों के साथ ही स्वय भी नाचते, कूदते, फुदकते एव उछलते हैं । पीछे की प्रकाश व्यवस्था की चतुराई के कारण ये परिचालकगरण दर्शको को दृष्टिगत नही होते, परन्तु वास्तव मे नाट्य के पात्र स्वय पुतली परिचालक ही हैं । पुतलियाँ तो केवल निमित्तमात्र हैं। यही कारण है कि ये छायापुतलियाँ दर्शको पर रसनिरूपण अधिक सफलतापूर्वक कर सकती हैं, परन्तु उडीसा तथा अन्य शैली की काष्ठपुतलियो का दायरा छोटा होता है । दर्शको की तादाद तो कम रहती है, परन्तु उनके लिये विशिष्ट रुचि के दर्शक भी आवश्यक होते है । उडीसा की काष्ठनिर्मित पुतलियो की तरह ही दक्षिण भारत और राजस्थान की कठपुतलियाँ विशिष्ट रुचि के दर्शको को अधिक प्रभावित करती हैं। हलके-फुलके, अनुरजनात्मक तथा रसीले किस्म के लोग घटा दो घटा बैठकर इन पुतलियो का आनन्द ले सकते हैं । गभीर, चिन्तनशील तथा दार्शनिक अभिरुचि के लोगो के मनोरंजन के लिये ये पुतलियाँ अधिक कारगर नहीं होती। यही कारण है कि ये काष्ठनिर्मित पुतलियाँ इन हलके-फुलके लोगो को अधिक मनोरजित करती हैं, छायापुतलियां कम । छायापुतलियो के अनुरंजनात्मक तत्व अधिक प्रवल है। चपटी और एकमुखी छायापुतली की भीमकाय छाया में पूरे गोश्त-मास, रक्त तथा मासपेशियो वाले पात्रो की कल्पना करनी पड़ती है, जिसके लिये वयस्क मस्तिष्क और चिन्तनशील दर्शकों की आवश्यकता होती है । काष्ठपुतली खिलौने के समान सम्पूर्ण आकृतिमूलक होने के नाते बच्चो को अपनी ओर अधिक खीचती है । दक्षिरण भारत की वम्मोलोटम पुतलियाँ भारत की प्रति प्राचीन परम्परा मे होते हुए भी उन्हें अनेक प्राघात सहने पड़े हैं । अन्य सुमम्पन्न और वैभवशाली कला स्वरूपों ने इस स्वरूप को लगभग नष्टप्रायः ही कर दिया है। इसका पुनर्जीवन वजोर के दरवार में आज से तीन सौ वर्ष पूर्व ही हुआ । अत प्राचीन पुतली परम्परा और मध्यकालीन पुतली-परपरा को जोड़नेवाली कोई विशिष्ट कडी कायम नही रही । आज से दो सौ वर्ष पूर्व कुभकुनम तथा मुदुकोटे के विशिष्ट अगर परिवार उसे तजोर से अपने यहाँ ले आये और आज तक उसका अभ्यास करते रहे । कोचीन तथा तजोर के भरतनाट्यम, कुचपुडी, कथकलि, यक्षनाट्य शैलियो की अत्यधिक लोकप्रियता के कारण कठपुतली कला को निश्चय ही प्राघात पहुँचा है, बल्कि यो कहिये कि उनके कारण उसका प्राय लोप ही हो गया है । आन्ध्र मे भी केवल उसके उत्तरी-पूर्वी भागो मे ही छाया पुतलियो का प्रचलन है । अन्य भागो मे उसकी लोकप्रियता को काफी धक्का लगा है । कुमकुनम की पुतलियाँ इसी कारण उडीसा और राजस्थान की पुतलियो से भिन्न हैं, क्योंकि उन्हें अन्य नत्य-स्वरूपो के मुकावले जीवित रहना था, वे उनकी हूबहू नकल के रूप में हुई और जिस तरह मानवीय पात्र रगमच पर नाचते गाते हैं, उसी तरह ये पुतलियाँ भी मानवीय पात्रों की तरह क्रिया कलाप करती हैं। उनके आकार प्रकार भी मानवीय पात्रो की तरह ही छोटे-वडे होने लगे हैं तथा प्रस्तुतीकरण की दृष्टि से भी वे मानवीय पात्रो की तरह प्रस्तुत होने लगी हैं । राजस्थान की कठपुतलियो मे आज भी पुरातन नाट्यतत्वो के दर्शन होते हैं । मध्यकालीन राजस्थान की विशिष्ट शासनिक तथा सामाजिक स्थिति के कारण इन पुतलियो ने अपना चोला अवश्य बदला है । मुगल साम्राज्य से प्रभावित राजस्थान के रजवाडे अपनी वेशभूषा, भाषा, रहन-सहन, व्यवहार, धर्मकर्म, समाजव्यवस्था, कलाकारिता आदि मे आगरा तथा दिल्ली की तरफ उन्मुख हुए । परिणाम यह हुआ कि यहां के विविध राजे-महाराजे अपनी समस्त प्रेरणा मुगलदरवार से प्राप्त करने लगे । अनेक कलाकार, वादक, नर्तक, कवि, शायर, चित्रकार, दस्तकार तथा नाना प्रकार के शिल्पकार इन रजवाड़ो मे श्राश्रय प्राप्त करने लगे । राजस्थान के पुतली कलाकार भी इन आश्रित कलाकार वर्गों मे से एक थे । वे अपने पुरातन कथाप्रसग को छोड़कर दिल्ली के दरबारी कलाकारों की तरह ही इन राजा-महाराजाओ के गुण गाने लगे । इनका सर्वोच्च प्राश्रयदाता नागौर का राजा अमरसिंह राठौड था, जिसने मुगलदरवार मे श्राश्रय पाकर भी समय पर अपनी मान-मर्यादा की रक्षा के लिये उनसे लोहा लिया । महत्त्वाकाक्षी नागौर के राजा अमरसिंह ने अपनी उपलब्धियो को कठपुतलियो के माध्यम से प्रचारित करने के उद्देश्य से इन पुतलीकारो को प्रदान किया, जिसके फलस्वरूप अमरसिंह राठौड नामक कठपुतली नाटिका की सृष्टि हुई, जो आज भी अपनी सड़ी-गली अवस्था में विद्यमान है। उसमे परम्परागत पुतलीनाट्य की अनेक विधाओं के दर्शन होते हैं। वर्तमान कथावस्तु किसी वृहत् कथावस्तु की अश मात्र प्रतीत होती है । नाट्यारम से पूर्व रंगमच की सफाई श्रादि के लिये जो भिश्ती, मेहतर के प्रसग प्रयुक्त हुए हैं, उनमे डुगडुगी वाले के साथ जो मनोविनोदकारी सभाषरण दिये गये है, उनमे किमी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण वृहत् कथाप्रसग की ओर सकेत स्पष्ट है । मुगलदरवार मे विविध राजाओ का पदार्पण, नृत्य-गायन का आयोजन तथा अमरसिंह राठौड की अनुपस्थिति के प्रसंग मे जो कुछ भी कहा सुना जाता है, उसमे किसी पूर्व कथा का आभास मिलता है । अर्जुनगोड और सलावतखा के विवादों मे भी अमरसिंह की वशावली पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। राजस्थान के कठपुतलीवाले आज जो भी दिखलाते हैं वह केवल उस वृहद् नाटक का एक दृश्य मात्र है, जिसमे मुगलदरबार का वैभव तथा अमरसिंह राठौड के शौर्य का परिचय दिया गया है । जिन कारणो से मुगलदरवार मे तलवारें चली और स्वय वादशाह को दरबार छोड़कर भाग जाना पडा, उनका विवेचन निश्चित ही किन्ही विशिष्ट दृश्यो मे हुआ होगा, जिनको समय एव जनरुचि के प्रभाव मे ये कलाकार छोडते चले गये फलतः राजस्थानी कठपुतली प्रदर्शन के इस मुगलदरवार के दृश्य मे विविध कलावाज़ियाँ दिखलाकर जनता को अनुरजित करने का ही लक्ष्य प्रमुखत रह गया । लेखक ने ग्राज से २० वर्ष पूर्व जव राजस्थानी कठपुतलियो की खोज प्रारम्भ की थी तब नब्बे वर्षीय भाट नाथू ने कुछ गीत ऐसे सुनाये थे, जिनमे अमरसिंह राठौड के जीवन सबंधी अनेक प्रसगो का उल्लेख था । उन प्रसगो मे अमरसिंह की रानी के वे विवाद भी मौजूद थे, जिनमे उसने अपने वीर पति को मुगलदरवार मे पूरी सावधानी बरतने का आदेश दिया था । अमरसिंह मे ने राजपूत जाति के गौरव और उसकी मान-मर्यादा की सुरक्षा के लिये जो भी सुकृत्य किये तथा मुग़ल सम्राटी के प्रति जो उपेक्षा की भावना प्रकट की, वे सभी प्रसंग वर्तमान नाट्य से निकाल दिये गये हैं । नाथू से यह भी ज्ञात हुआ कि उसी के पूर्वजो ने आज से १००० वर्ष पूर्व पृथ्वीराज-सयोगिता नामक कठपुतली नाटिका का सृजन किया था । उस संबध मे उसने कुछ गीत भी सुनाये थे, जो उसे अपने पूर्वजो से घरोहर के रूप में प्राप्त हुए थे। इन गीतो का प्रयोग यदा-कदा अप्रासंगिक रूप से अमरसिंह राठौड की नाटिका के प्रदर्शन में होता ही रहता है । उसका यह भी कहना था कि भारतवर्ष मे जितने भी कठपुतली नट आज विद्यमान हैं, वे सभी उस आदि नट के वशज हैं, जिसने सर्वप्रथम कठपुतली नाट्य की रचना की थी। नाथू भाट की बातचीत से यह भी पता लगा कि आज से २००० वर्ष पूर्व विक्रमादित्य के समय की प्रसिद्ध कठपुतली नाटिका सिंहासनबत्तीसी के रचयिता भी उसी के पूर्वज थे । वर्तमान श्रमरसिंह राठौड कठपुतली नाटिका की सवाद तथा कथोपकथन शैली में आज भी उच्चकोटि की नाट्यविधा के दर्शन होते हैं । कई हजार वर्ष पूर्व ही इन पुतलीकारो को यह ज्ञात था कि ये प्रारणहीन काष्ठपुतलियाँ मानव की तरह वोल नही सकती है, न उनमे किसी प्रकार का भावात्मक स्पदन उत्पन्न करने की सामर्थ्य ही है, इसी कारण उन्होंने सीटियो की वारणी का विष्कार किया और उसी से वाचन, सभापण आदि का उपक्रम पैदा किया । उनकी यह वैज्ञानिक धारणा कि पुतलियाँ मानवीय पात्रो की अनुकृति नहीं हैं, कई हजार वर्ष पूर्व उनके पूर्वजो द्वारा स्थापित की गई थी । इसलिये उन्हें किसी परलोकवासी का दर्जा देकर उनकी प्राकृति, भाषा, वेशविन्यास, अगसचालन आदि को मानवीय व्यवहार से पूर्णरूप से बचाया गया । जिस बात का पता आधुनिक पुतलीकार ग्राज लगा सके हैं, उसका पता हमारे भारतीय पुतलीकारों को सैकडो वर्ष पूर्व था। सीटियों के कथोपकथन जिस मनोरजक ढंग से इन पुतलीकारो द्वारा उलथाये जाते हैं, वह भारतीय कठपुतली-कला की सव से वडी विशेषता है । कथोपकथन की यह उलथाने की कला भारत की प्राय सभी कठपुतली टोलियो मे आज भी विद्यमान है । भारतीय पुतलियो मे पुतलियाँ सोधे सभाषरण नही करती, किसी न किसी माध्यम से ही ये सभाषण प्रस्तुत किये जाते हैं । वाचन की इस अनोखी विधि ने समस्त कठपुतली कला को इतना अधिक मनोरजक बना दिया है कि आज की यह गलित, विकृत और पदच्युत कठपुतली कला किसी विशिष्ट कथावस्तु तथा रगमचीय साज-सज्जा के बिना ही समाज मे विशिष्ट स्थान प्राप्त की हुई है । इन पुतलियो मे मित्र और भावभगिमात्र का भी सपूर्ण शास्त्र परिलक्षित होता है । कठपुतलियो को मानवीय अनुकृति से बचाने के लिये न केवल उनके कार-प्रकार तथा प्राकृतियों को प्रतिरजित किया गया है, बल्कि विविध कृत्यो के लिये विशिष्ट अगमगिमाओ की भी सृष्टि की गई है । वे मगन गिमाएँ मानवीय भगिमाओ से बिल्कुल भिन्न हैं । ये सभी प्रगभगिमाएँ न केवल राजस्थानी पुतलियो मे वल्कि भारत की समस्त कठपुतली शैलियो में प्राय. समान रूप से ही प्रयुक्त होती हैं। भावाभिव्यजन की दृष्टि से जो टेकनिक ये पुतलीकार अपनाते हैं, वह वास्तव मे सैकडो वर्षों के अनुभव और प्रयोग का ही परिणाम है । ये निर्जीव तथा स्पदनहीन पुतलियाँ भावाभिव्यजना की विशिष्ट स्थितियो मे प्राय निष्क्रिय रहती है, परन्तु उनकी प्राकृतिमूलक रेखाएं उन पर प्रारोपित गीत-सवादो की सहायता मे दर्शको पर एक विशिष्ट प्रभाव उत्पन्न करने में सफल होती हैं । ऐसी विशिष्ट भावमूलक स्थितियों मे पुतलियाँ किसी ऐसी स्थिरभावी मुद्रा मे अपने आपको प्रस्तुत करती हैं, जिससे एक विशिष्ट उद्दीपनकारी स्थिति पैदा हो सके। यही कारण है कि छायापुतलियो मे जब राम-भरत का मिलाप होता है तो कुछ क्षरणों तक भरत राम के कधो पर अपना मस्तक घर कर ठिसुक ठिमुक कर रोते हैं । सीता को रावरण से वचाने मे गिद्धराज जटायु जव घायल हो जाता है और भगवान राम के जब उसे अन्तिम दर्शन होते हैं तो वह अपनी चोच भगवान की जघा पर रखकर विलाप करता है। भगवान अपनी गर्दन उस पर लटका देते है। इसी तरह उड़ीसी पुतलियो मे जब गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपना विरहभाव प्रकट करती है तो वे ऊधो के कधो पर अपना सिर रखकर विलाप - निमग्न हो जाती हैं । राजस्थानी पुतलियों में भी जव घोविन के पति को मगर खा जाता है तो वह स्थिरभाव से ज़मीन पर बैठ जाती है और अपना माथा बार-बार जमीन पर पीटती 1 इस तरह कठपुतलियो के नाना प्रकार के क्रिया-कलापों का एक नियोजित शास्त्र ही बन गया है जो अलिखित होते हुए भी इन कठपुतलीकारो मे परम्परा के रूप मे घुलमिल गया है । पुतलियो के मारपीट, युद्ध, अभिवादन, श्रावागमन, उठने-बैठने, खाने, रोने, हँसने, नाचने, गाने, चिढने, चढने-उतरने, दौडने प्रादि की विशिष्ट क्रियाओ का एक विशिष्ट कोड (Code) ही बन गया है जो सैकडो वर्षों से घरोहर के रूप मे उन्हें प्राप्त हुआ है। यह कोड (Code) भारत को प्राय सभी पुतलियो पर समान रूप से लागू होता है । पुतलियो की भावमूलक आकृतियो की रेखा मे कुछ विशिष्ट परम्पराएँ घरोहर के रूप में कायम हुई हैं, जिनका पालन लगभग सभी परम्परागत पुतलीकार करते हैं । हास्यप्रधान पुतलियो के नाक और होठ को दाएँ-वाएँ विकृत रूप से बनाने की प्रथा प्रायः सभी पुतलियो मे विद्यमान है । भयानक पात्रों को पुतलियो की मौ ऊपर चढा दी जाती हैं और उनके गाल फुला दिये जाते हैं। इसी तरह दीन, दुर्बल, असहाय पात्रो की पुतलियो की आँखें गडी हुई, गाल पिचके हुए तथा गर्दन तनिक झुकी हुई होती है । छायापुतलियो के चेहरे तथा अन्य अग अधिक नुकीले होते हैं। उनकी नाक विशेष रूप से नुकीली, भौंहे अधिक तेजी से कटी हुई, होठो के वीच की जगह अधिक स्पष्ट, हाथ की उँगलियाँ अधिक नुकीली बताई जाती है, ताकि उनकी छायाएँ स्पष्ट रूप से उन भावो को प्रकट कर सकें जो गीत-सवादो से व्यक्त किये जाते है । पुतलियो की ये अतिरजनात्मक आकृतियां, उनके अतिरजनात्मक हाव-भाव, क्रिया-कलाप, रग-रोगन, अगभगिमाएँ सभी किसी विशिष्ट प्रयोजन से निर्दिष्ट की गई है। निर्जीव पुतलियो मे प्रारण और स्पदनकारी स्थितियां पैदा करने के लिये इन सव अरिजनो का सहारा लेना पडता है । जो कलाकार इस गूढाशय को नहीं समझते और पुतलियो को मानव की वास्तविक अनुकृति बनाने की कोशिश करते हैं वे अपने कार्य मे पूर्णरूप से असफल होते हैं। भारत में आज के आधुनिक कठपुतली प्रयोग इसीलिये असफल हो रहे हैं तथा यूरोप के आधुनिक पुतलीकार इस कठपुतली - विज्ञान को पूर्णरूप से समझ गये हैं इसलिये उन्हें अपने प्रयोगो में श्राशातीत सफलता मिल रही है । पुतलियो का रंगमंचीय विधान परम्परागत भारतीय पुतलियो का रगमचीय विधान मी नाट्यतत्वो से से परिपूर्ण है । बम्मोलोटम पुतलीकार बहुधा किसी रगमच का प्रयोग नही करते । जहाँ कहीं भी पुतली का तम्बूनुमा रगमंच बनाकर इन पुतलियो के परिचालको को छिपाने की कोशिश हो रही है, वह आधुनिक प्रयोग है । है परपरा से उनका कोई मवध नही है । वम्मोलोटम पुतलीकार स्वयं कुछ गहरे रंग के कपड़े पहनते हैं। उनकी पुतलियाँ आदमकद से छोटो, परन्तु अन्य शैलियों को काष्ठपुतलियों ने काफी बड़ी होती है । उनके सिर पर वडी-वडी
अंग-सचालन भी कर सकती हैं, होठ और आँख को चलायमान कर सकती हैं तथा वोलने का उपक्रम भी कर सकती है, परन्तु वास्तव मे वे बोल नहीं सकती । ऐसी स्थिति मे उन पर कथोपकथन आदि मानवीय ढंग से थोप देने से उनका दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं पडता । यही कारण है कि पुतलियो से वाचन, संभाषण आदि उसी समय कराया जाता है, जबकि वे अत्यधिक क्रियाशील हो ताकि क्रिया-कलापों के अस्पष्ट अर्थ शाब्दिक अर्थो मे मिलकर पूर्ण अर्थ की सृष्टि कर सकें । पुतली की स्थिर स्थिति में वहुधा कोई संभाषरण नही होता । उस समय वाचन द्वारा कथाप्रसग को अत्यत रोचक ढंग से वढाया जाता है और प्रत्यक्ष सभापरणजनित कमियों को पूरा किया जाता है । कथाप्रसंग के चुनाव में भी उन्हीं स्थितियों को प्रधानता दी जाती है, जो क्रियाप्रधान हो और प्रदेश, उपदेश, भाषरण आदि ग्ररुचिकर स्थितियों से मुक्त हो । पुतलियो के माध्यम से भावाभिव्यजनाएँ जहाँ तक हो सके वचा ली जाती है और उन्ही उद्रेकमयी स्थितियों को प्रधानता दी जाती है जिनमे पुतलियो की उछल-कूद, उनकी उड़ान तथा क्रियाशील स्थितियां सर्वोपरि स्थान पा सके । यही कारण है कि पुतलीनाट्य की रचना मानवीय नाट्य जितनी सरल नहीं है । पुतलीनाट्यतत्र इतना जटिल है कि कोई भी साधारण पुतलीकार नवीन रचना करने की हिम्मत नहीं करता । विरले ही ऐसे चमत्कारी पुतलीकार पैदा होते हैं जो किसी विशिष्ट पुतलीनाट्य की परम्परा डालते हैं और कई वर्षो मे वे परिपक्व नाट्य का स्वरूप ग्रहण करती है। आज जो ग्रान्ध्र मे महाभारत तथा रामायण आदि पर आधारित छायानाट्य चलते हैं उनके प्रारम्भिक एव मौलिक रूप की कल्पना करना मभव नहीं है । सदियों से जो एक ही नाट्य समी शैली की भारतीय कठपुतलियो मे चलता है, उसका अर्थ यह कभी नही है कि पुतलीनाट्य का रचनाक्रम शिथिल पड गया है और दर्शको को उदासीनता के कारण अब कोई भी नवीन रचना का खर्च वहन करने को तैयार नहीं । सदियों पूर्व रची हुई ये भारतीय पुतली रचनाएँ अपने को किसी विशिष्ट रचयिता के नाम के साथ नही जोडतीं । उनकी सार्थकता और व्यापकता इसी में है कि वे सामाजिक घरातल पर अवस्थित हैं और सामाजिक पुतलियो ही का अंकन उन्होंने स्वीकार किया है। यही कारण है कि भारतीय पुतलियाँ सर्वदा ही लोकशैली पर ही निर्मित हुई है और किसी व्यक्तिविशेष की अभिव्यक्ति से वे सदा ही दूर रही है। जनमानस पर आज भी उनका जो चिरस्थायी प्रभाव पड़ता है और समाज उस रचना को एक सामाजिक संस्कार तरह स्वीकार करता है, उसके पीछे भी उसकी गहरी लोकशैली ही है । भारतीय पुतलियां, जो कुछ ही सूत्रो, छडियो तथा न्यूनतम रगमचीय साज-सज्जा के माध्यम से किसी सूक्ष्मातिसूक्ष्म प्रसग को लेकर भी इतना गहरा प्रभाव उत्पन्न करती हैं, उसके पीछे सहस्रो प्रतिभाओ का हाथ है। उन्होंने निरन्तर एव लम्बे परीक्षण तथा प्रयोग से यह भली प्रकार ज्ञात कर लिया है कि किस प्रकार के वाचन, नर्तन, गायन एव परिचालन से पुतलियाँ सर्वाधिक प्रभावशाली हो सकती हैं । पुतली के निर्माण मे भी भावोद्दीपन की समस्त वारीकियो का पता लगा लिया गया है और उन्हीं के अनुसार पुतलियो के अनुपात, रग एव विविध रेखा का प्रायोजन नियोजन होता है । कठपुतलियाँ और चर्मपुतलियाँ भारतीय काष्ठपुतलियो के सबंध मे भी ये ही सिद्धात लागू होते हैं । काष्ठपुतलियाँ चर्मपुतलियो की ही वशज हैं। उनकी उत्पत्ति चर्मपुतलियो के शारीरिक अवयवो के प्रभाव की पूर्ति के लिए ही हुई थी । चर्मपुतलियो मे स्थूल शरीर की कल्पना करना असंभव था । सबसे वडी सीमा तो यह थी कि उसका प्रोफील वाला मुख ही सफल अनुकृतिमूलक छाया की सृष्टि करता था । सामने का मुख केवल अधकार का पुज मात्र था । पुतली को घुमानेफिराने तथा उसके द्वारा सन्मुख हुई अन्य पुतलियो की घोर उसका उन्मुख होना अत्यत कष्टसाध्य कार्य था । पुतली के शृंगार एव अन्य प्रसाधन भी रगो द्वारा ही चित्रित किये जाते थे। उन पर वस्त्र प्रभूपरण का वास्तविक शृगार सभव नही था । इन्ही सीमाओ पर विजय प्राप्त करने के लिये काष्ठपुतलियो का आविर्भाव हुआ, परन्तु पुतलीनाट्य-विज्ञान की परम्परा पूर्ववत् ही कायम रही । कठपुतली के माध्यम से पुतलीनाट्य परिपक्व तथा सर्वांगपूर्ण अवश्य हुआ, परन्तु वह प्रचलित पुतली नाट्य के एक विशिष्ट प्रकार के रूप मे । काष्ठ की पुतलियो मे जो नाट्य रचे गये, वे परम्परा से पुष्ट हुए । किसी व्यक्ति विशेष की प्रतिभा उनके लिये पर्याप्त नहीं थी । उनकी पृष्ठभूमि सैकडो वर्ष प्राचीन है। इन कठपुतलीकारो को अपनी पुतलियां परम्परा से प्राप्त हुई हैं, जिनकी सुरक्षा के चर्मपुतलीकार की तरह ही करते है । मुख के रग-रोगन, पुतली के शृगार, सजाव, अतिरजित प्राकृतियाँ, वेश, श्राहार्य, परिचालन, सभाषरण, गायन, भावाभिव्यजन, प्रस्तुतीकरण श्रादि मे भी चर्मपुतलियों के नियमो का ही पालन होता है । उनके गहन अध्ययन से उनमे अत्यत उच्चकोटि के नाट्यतत्वो के दर्शन होते हैं । समय और काल के चक्र से इन नाट्यो के केवल ध्वसावशेष अवश्य रह गये हैं, और कई विकृत कथाएँ औौर क्षेपक उनमे जुड गये । अपनी निर्धनता के कारण इनकी पुतलियो की वेशभूपाएँ भी चिथडे बन गई हैं। पूर्वजो द्वारा पहिनाई हुई ये पोशाकें, जो कई परतो के रूप मे आज भी अपनी गलित अवस्था में विद्यमान हैं, अपने पुरातन वैभव का भान कराती है । इन काष्ठपुतलियो के विकृत नाट्य प्रसगो मे भी किसी विगत पुष्ट नाट्यपरम्परा के दर्शन हो सकते हैं । इन पुतलियो के रगो मे अभी भी उसी पुरातन परम्परा का अनुशीलन किया गया है, जो आज भी प्रान्ध्र की छायापुतलियो मे विद्यमान है। राम और कृष्ण के चेहरे और शरीर कालिमा लिये हुए नोले के रंग के होते हैं। अन्य सव दिव्य चरित्रो के रगो मे लाल और पीले रगो की प्रधानता है तथा राक्षसी चरित्रो मे काले रगो का प्रयोग हुआ है । पुतलियो की प्राकृतियो की खुदाई मे उमो प्रतिरजनात्मक शैली का अनुसरण किया गया है जो चर्मपुतलियो मे विद्यमान है। उनकी विविध भावभगिमाओ को भी अत्यत मार्मिक ढंग से तराशा गया है । हास्य, विनोद, मयानक, रौद्र, शान्त और मनमोहकता से परिपूर्ण पुतलियो के विविध चेहरे किसी न किसी परम्परा के अनुसार ही तराशे गये मालूम होते हैं । यद्यपि उडीसा की अधिकाश पुतलियाँ परम्परा से ही प्राप्त हुई हैं और नवीन पुतलियो का निर्मारण बहुधा रुक-सा गया है, फिर भी उनसे यह भली प्रकार ज्ञात हो सकता है कि उनको मुखाकृतियो तथा रंग-विधान, परिधान, अलकरण आदि मे एक विशिष्ट नाट्यपरम्परा निहित है, जिसे श्राज उड़ीसा के सखी एवं कन्हाई भाट लकीर मानकर पकड़े हुए हैं । यद्यपि उडीसा की कठपुतलियो मे विशिष्ट कमवद्ध कथावस्तु के दर्शन नही होते, फिर भी जो विखरे हुए कथाप्रसग भाज भी मौजूद हैं, उनमे वस्तुव्यवस्था का तनिक भास मिल सकता है। कृष्ण-कथा मे कृष्ण जहाँ नायक के रूप मे दर्शाये गये हैं, वहाँ उपनायक के रूप मे वलराम आदि पात्रो का उपयोग हुआ है । राधा प्रधान नायिका के रूप में अन्य नायिका से अब भी सर्वोपरि मानी गई है। यद्यपि इस कथाप्रसग मे अनेक नवीन प्रसग घुस गये हैं और समस्त नाट्य नवीन पुरातन की एक वेमेल एच वेस्वाद खिचडी वन गई है, परन्तु उनका प्रस्तुतीकरण आज भी अत्यंत प्रभावशाली ढंग से होता है । पुतलियो का समापण मानवीय सवाद के रूप में प्रस्तुत नही होकर परिचालको द्वारा पुतली सवाद के रूप में अनायास ही प्रकट होता है । गीत परिचालक गाते है परन्तु उनका श्रारोपण पुतलियो पर बहुत ही मार्मिक ढंग से होता है । पुतलियो का प्रधान विदूषक इस सवाद धारोपण मे जबर्दस्त हाथ वॅटाता है । वह कई कथाप्रसगो को जोड़ता है और रगमच पर नहीं आने योग्य प्रसगो, दृश्यो एव पात्रो को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है । यद्यपि रामायण एव महाभारत की कथा को इन कन्हैया तथा सन्त्री नटो ने बहुत ही मनमाने ढंग से प्रयुक्त किया है औौर परपरा की दृष्टि से उनमे काफी ग्राघात भी पहुँचा है, परन्तु पुतलीनाट्य-विज्ञान की दृष्टि से उनके ये प्रयोग बहुत ही बुद्धिमत्तापूर्ण मालूम होते हैं। उन्हें यह भली प्रकार ज्ञात है कि चर्मपुतलियो की तरह उनकी ये काठपुतलियाँ दर्शको को दीर्घकालीन मनोरजन प्रदान करने में असमर्थ रहती हैं, प्रत कथाप्रसगो मे उन्होंने जो स्वतंत्रता ली है वह अनुचित नहीं है । छायापुतलियों के प्रकार प्रकार, रंगरूप तथा रगमचीय विधान आदि बडे पैमाने पर बनाये जाते हैं । पुतलियाँ भी बहुधा मानवीय आकार की ही होती हैं। कई दलो के सहयोग से प्रदर्शन भी बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किये जाते हैं, प्रत दर्शको को सख्या पर कोई प्रतिवध नहीं है । रगमच भी मानवीय ऊँचाई से ऊपर वनता है, ऋत. लम्बी दूरी से भी दर्शकगरण इन पुतलियो का भली प्रकार आनन्द ले सकते है, परन्तु काष्ठपुतलियो को अनेक सीमाओ मे रहना पड़ता है । वे वृहद् दर्शक समाज का मनोरजन करने में असफल रहती हैं । चर्मपुतलियो के संबंध में एक विशेष बात यह है कि इनमे मानवीय नाट्य काश काष्ठपुतलियो से कही अधिक निखरा हुआ और स्पष्ट रूप से आरोपित होता है । समस्त परिचालकगरण पुतलियो को पकडकर परदे के पीछे खडे रहते हैं और पुतलियों के साथ ही स्वय भी नाचते, कूदते, फुदकते एव उछलते हैं । पीछे की प्रकाश व्यवस्था की चतुराई के कारण ये परिचालकगरण दर्शको को दृष्टिगत नही होते, परन्तु वास्तव मे नाट्य के पात्र स्वय पुतली परिचालक ही हैं । पुतलियाँ तो केवल निमित्तमात्र हैं। यही कारण है कि ये छायापुतलियाँ दर्शको पर रसनिरूपण अधिक सफलतापूर्वक कर सकती हैं, परन्तु उडीसा तथा अन्य शैली की काष्ठपुतलियो का दायरा छोटा होता है । दर्शको की तादाद तो कम रहती है, परन्तु उनके लिये विशिष्ट रुचि के दर्शक भी आवश्यक होते है । उडीसा की काष्ठनिर्मित पुतलियो की तरह ही दक्षिण भारत और राजस्थान की कठपुतलियाँ विशिष्ट रुचि के दर्शको को अधिक प्रभावित करती हैं। हलके-फुलके, अनुरजनात्मक तथा रसीले किस्म के लोग घटा दो घटा बैठकर इन पुतलियो का आनन्द ले सकते हैं । गभीर, चिन्तनशील तथा दार्शनिक अभिरुचि के लोगो के मनोरंजन के लिये ये पुतलियाँ अधिक कारगर नहीं होती। यही कारण है कि ये काष्ठनिर्मित पुतलियाँ इन हलके-फुलके लोगो को अधिक मनोरजित करती हैं, छायापुतलियां कम । छायापुतलियो के अनुरंजनात्मक तत्व अधिक प्रवल है। चपटी और एकमुखी छायापुतली की भीमकाय छाया में पूरे गोश्त-मास, रक्त तथा मासपेशियो वाले पात्रो की कल्पना करनी पड़ती है, जिसके लिये वयस्क मस्तिष्क और चिन्तनशील दर्शकों की आवश्यकता होती है । काष्ठपुतली खिलौने के समान सम्पूर्ण आकृतिमूलक होने के नाते बच्चो को अपनी ओर अधिक खीचती है । दक्षिरण भारत की वम्मोलोटम पुतलियाँ भारत की प्रति प्राचीन परम्परा मे होते हुए भी उन्हें अनेक प्राघात सहने पड़े हैं । अन्य सुमम्पन्न और वैभवशाली कला स्वरूपों ने इस स्वरूप को लगभग नष्टप्रायः ही कर दिया है। इसका पुनर्जीवन वजोर के दरवार में आज से तीन सौ वर्ष पूर्व ही हुआ । अत प्राचीन पुतली परम्परा और मध्यकालीन पुतली-परपरा को जोड़नेवाली कोई विशिष्ट कडी कायम नही रही । आज से दो सौ वर्ष पूर्व कुभकुनम तथा मुदुकोटे के विशिष्ट अगर परिवार उसे तजोर से अपने यहाँ ले आये और आज तक उसका अभ्यास करते रहे । कोचीन तथा तजोर के भरतनाट्यम, कुचपुडी, कथकलि, यक्षनाट्य शैलियो की अत्यधिक लोकप्रियता के कारण कठपुतली कला को निश्चय ही प्राघात पहुँचा है, बल्कि यो कहिये कि उनके कारण उसका प्राय लोप ही हो गया है । आन्ध्र मे भी केवल उसके उत्तरी-पूर्वी भागो मे ही छाया पुतलियो का प्रचलन है । अन्य भागो मे उसकी लोकप्रियता को काफी धक्का लगा है । कुमकुनम की पुतलियाँ इसी कारण उडीसा और राजस्थान की पुतलियो से भिन्न हैं, क्योंकि उन्हें अन्य नत्य-स्वरूपो के मुकावले जीवित रहना था, वे उनकी हूबहू नकल के रूप में हुई और जिस तरह मानवीय पात्र रगमच पर नाचते गाते हैं, उसी तरह ये पुतलियाँ भी मानवीय पात्रों की तरह क्रिया कलाप करती हैं। उनके आकार प्रकार भी मानवीय पात्रो की तरह ही छोटे-वडे होने लगे हैं तथा प्रस्तुतीकरण की दृष्टि से भी वे मानवीय पात्रो की तरह प्रस्तुत होने लगी हैं । राजस्थान की कठपुतलियो मे आज भी पुरातन नाट्यतत्वो के दर्शन होते हैं । मध्यकालीन राजस्थान की विशिष्ट शासनिक तथा सामाजिक स्थिति के कारण इन पुतलियो ने अपना चोला अवश्य बदला है । मुगल साम्राज्य से प्रभावित राजस्थान के रजवाडे अपनी वेशभूषा, भाषा, रहन-सहन, व्यवहार, धर्मकर्म, समाजव्यवस्था, कलाकारिता आदि मे आगरा तथा दिल्ली की तरफ उन्मुख हुए । परिणाम यह हुआ कि यहां के विविध राजे-महाराजे अपनी समस्त प्रेरणा मुगलदरवार से प्राप्त करने लगे । अनेक कलाकार, वादक, नर्तक, कवि, शायर, चित्रकार, दस्तकार तथा नाना प्रकार के शिल्पकार इन रजवाड़ो मे श्राश्रय प्राप्त करने लगे । राजस्थान के पुतली कलाकार भी इन आश्रित कलाकार वर्गों मे से एक थे । वे अपने पुरातन कथाप्रसग को छोड़कर दिल्ली के दरबारी कलाकारों की तरह ही इन राजा-महाराजाओ के गुण गाने लगे । इनका सर्वोच्च प्राश्रयदाता नागौर का राजा अमरसिंह राठौड था, जिसने मुगलदरवार मे श्राश्रय पाकर भी समय पर अपनी मान-मर्यादा की रक्षा के लिये उनसे लोहा लिया । महत्त्वाकाक्षी नागौर के राजा अमरसिंह ने अपनी उपलब्धियो को कठपुतलियो के माध्यम से प्रचारित करने के उद्देश्य से इन पुतलीकारो को प्रदान किया, जिसके फलस्वरूप अमरसिंह राठौड नामक कठपुतली नाटिका की सृष्टि हुई, जो आज भी अपनी सड़ी-गली अवस्था में विद्यमान है। उसमे परम्परागत पुतलीनाट्य की अनेक विधाओं के दर्शन होते हैं। वर्तमान कथावस्तु किसी वृहत् कथावस्तु की अश मात्र प्रतीत होती है । नाट्यारम से पूर्व रंगमच की सफाई श्रादि के लिये जो भिश्ती, मेहतर के प्रसग प्रयुक्त हुए हैं, उनमे डुगडुगी वाले के साथ जो मनोविनोदकारी सभाषरण दिये गये है, उनमे किमी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण वृहत् कथाप्रसग की ओर सकेत स्पष्ट है । मुगलदरवार मे विविध राजाओ का पदार्पण, नृत्य-गायन का आयोजन तथा अमरसिंह राठौड की अनुपस्थिति के प्रसंग मे जो कुछ भी कहा सुना जाता है, उसमे किसी पूर्व कथा का आभास मिलता है । अर्जुनगोड और सलावतखा के विवादों मे भी अमरसिंह की वशावली पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। राजस्थान के कठपुतलीवाले आज जो भी दिखलाते हैं वह केवल उस वृहद् नाटक का एक दृश्य मात्र है, जिसमे मुगलदरबार का वैभव तथा अमरसिंह राठौड के शौर्य का परिचय दिया गया है । जिन कारणो से मुगलदरवार मे तलवारें चली और स्वय वादशाह को दरबार छोड़कर भाग जाना पडा, उनका विवेचन निश्चित ही किन्ही विशिष्ट दृश्यो मे हुआ होगा, जिनको समय एव जनरुचि के प्रभाव मे ये कलाकार छोडते चले गये फलतः राजस्थानी कठपुतली प्रदर्शन के इस मुगलदरवार के दृश्य मे विविध कलावाज़ियाँ दिखलाकर जनता को अनुरजित करने का ही लक्ष्य प्रमुखत रह गया । लेखक ने ग्राज से बीस वर्ष पूर्व जव राजस्थानी कठपुतलियो की खोज प्रारम्भ की थी तब नब्बे वर्षीय भाट नाथू ने कुछ गीत ऐसे सुनाये थे, जिनमे अमरसिंह राठौड के जीवन सबंधी अनेक प्रसगो का उल्लेख था । उन प्रसगो मे अमरसिंह की रानी के वे विवाद भी मौजूद थे, जिनमे उसने अपने वीर पति को मुगलदरवार मे पूरी सावधानी बरतने का आदेश दिया था । अमरसिंह मे ने राजपूत जाति के गौरव और उसकी मान-मर्यादा की सुरक्षा के लिये जो भी सुकृत्य किये तथा मुग़ल सम्राटी के प्रति जो उपेक्षा की भावना प्रकट की, वे सभी प्रसंग वर्तमान नाट्य से निकाल दिये गये हैं । नाथू से यह भी ज्ञात हुआ कि उसी के पूर्वजो ने आज से एक हज़ार वर्ष पूर्व पृथ्वीराज-सयोगिता नामक कठपुतली नाटिका का सृजन किया था । उस संबध मे उसने कुछ गीत भी सुनाये थे, जो उसे अपने पूर्वजो से घरोहर के रूप में प्राप्त हुए थे। इन गीतो का प्रयोग यदा-कदा अप्रासंगिक रूप से अमरसिंह राठौड की नाटिका के प्रदर्शन में होता ही रहता है । उसका यह भी कहना था कि भारतवर्ष मे जितने भी कठपुतली नट आज विद्यमान हैं, वे सभी उस आदि नट के वशज हैं, जिसने सर्वप्रथम कठपुतली नाट्य की रचना की थी। नाथू भाट की बातचीत से यह भी पता लगा कि आज से दो हज़ार वर्ष पूर्व विक्रमादित्य के समय की प्रसिद्ध कठपुतली नाटिका सिंहासनबत्तीसी के रचयिता भी उसी के पूर्वज थे । वर्तमान श्रमरसिंह राठौड कठपुतली नाटिका की सवाद तथा कथोपकथन शैली में आज भी उच्चकोटि की नाट्यविधा के दर्शन होते हैं । कई हजार वर्ष पूर्व ही इन पुतलीकारो को यह ज्ञात था कि ये प्रारणहीन काष्ठपुतलियाँ मानव की तरह वोल नही सकती है, न उनमे किसी प्रकार का भावात्मक स्पदन उत्पन्न करने की सामर्थ्य ही है, इसी कारण उन्होंने सीटियो की वारणी का विष्कार किया और उसी से वाचन, सभापण आदि का उपक्रम पैदा किया । उनकी यह वैज्ञानिक धारणा कि पुतलियाँ मानवीय पात्रो की अनुकृति नहीं हैं, कई हजार वर्ष पूर्व उनके पूर्वजो द्वारा स्थापित की गई थी । इसलिये उन्हें किसी परलोकवासी का दर्जा देकर उनकी प्राकृति, भाषा, वेशविन्यास, अगसचालन आदि को मानवीय व्यवहार से पूर्णरूप से बचाया गया । जिस बात का पता आधुनिक पुतलीकार ग्राज लगा सके हैं, उसका पता हमारे भारतीय पुतलीकारों को सैकडो वर्ष पूर्व था। सीटियों के कथोपकथन जिस मनोरजक ढंग से इन पुतलीकारो द्वारा उलथाये जाते हैं, वह भारतीय कठपुतली-कला की सव से वडी विशेषता है । कथोपकथन की यह उलथाने की कला भारत की प्राय सभी कठपुतली टोलियो मे आज भी विद्यमान है । भारतीय पुतलियो मे पुतलियाँ सोधे सभाषरण नही करती, किसी न किसी माध्यम से ही ये सभाषण प्रस्तुत किये जाते हैं । वाचन की इस अनोखी विधि ने समस्त कठपुतली कला को इतना अधिक मनोरजक बना दिया है कि आज की यह गलित, विकृत और पदच्युत कठपुतली कला किसी विशिष्ट कथावस्तु तथा रगमचीय साज-सज्जा के बिना ही समाज मे विशिष्ट स्थान प्राप्त की हुई है । इन पुतलियो मे मित्र और भावभगिमात्र का भी सपूर्ण शास्त्र परिलक्षित होता है । कठपुतलियो को मानवीय अनुकृति से बचाने के लिये न केवल उनके कार-प्रकार तथा प्राकृतियों को प्रतिरजित किया गया है, बल्कि विविध कृत्यो के लिये विशिष्ट अगमगिमाओ की भी सृष्टि की गई है । वे मगन गिमाएँ मानवीय भगिमाओ से बिल्कुल भिन्न हैं । ये सभी प्रगभगिमाएँ न केवल राजस्थानी पुतलियो मे वल्कि भारत की समस्त कठपुतली शैलियो में प्राय. समान रूप से ही प्रयुक्त होती हैं। भावाभिव्यजन की दृष्टि से जो टेकनिक ये पुतलीकार अपनाते हैं, वह वास्तव मे सैकडो वर्षों के अनुभव और प्रयोग का ही परिणाम है । ये निर्जीव तथा स्पदनहीन पुतलियाँ भावाभिव्यजना की विशिष्ट स्थितियो मे प्राय निष्क्रिय रहती है, परन्तु उनकी प्राकृतिमूलक रेखाएं उन पर प्रारोपित गीत-सवादो की सहायता मे दर्शको पर एक विशिष्ट प्रभाव उत्पन्न करने में सफल होती हैं । ऐसी विशिष्ट भावमूलक स्थितियों मे पुतलियाँ किसी ऐसी स्थिरभावी मुद्रा मे अपने आपको प्रस्तुत करती हैं, जिससे एक विशिष्ट उद्दीपनकारी स्थिति पैदा हो सके। यही कारण है कि छायापुतलियो मे जब राम-भरत का मिलाप होता है तो कुछ क्षरणों तक भरत राम के कधो पर अपना मस्तक घर कर ठिसुक ठिमुक कर रोते हैं । सीता को रावरण से वचाने मे गिद्धराज जटायु जव घायल हो जाता है और भगवान राम के जब उसे अन्तिम दर्शन होते हैं तो वह अपनी चोच भगवान की जघा पर रखकर विलाप करता है। भगवान अपनी गर्दन उस पर लटका देते है। इसी तरह उड़ीसी पुतलियो मे जब गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपना विरहभाव प्रकट करती है तो वे ऊधो के कधो पर अपना सिर रखकर विलाप - निमग्न हो जाती हैं । राजस्थानी पुतलियों में भी जव घोविन के पति को मगर खा जाता है तो वह स्थिरभाव से ज़मीन पर बैठ जाती है और अपना माथा बार-बार जमीन पर पीटती एक इस तरह कठपुतलियो के नाना प्रकार के क्रिया-कलापों का एक नियोजित शास्त्र ही बन गया है जो अलिखित होते हुए भी इन कठपुतलीकारो मे परम्परा के रूप मे घुलमिल गया है । पुतलियो के मारपीट, युद्ध, अभिवादन, श्रावागमन, उठने-बैठने, खाने, रोने, हँसने, नाचने, गाने, चिढने, चढने-उतरने, दौडने प्रादि की विशिष्ट क्रियाओ का एक विशिष्ट कोड ही बन गया है जो सैकडो वर्षों से घरोहर के रूप मे उन्हें प्राप्त हुआ है। यह कोड भारत को प्राय सभी पुतलियो पर समान रूप से लागू होता है । पुतलियो की भावमूलक आकृतियो की रेखा मे कुछ विशिष्ट परम्पराएँ घरोहर के रूप में कायम हुई हैं, जिनका पालन लगभग सभी परम्परागत पुतलीकार करते हैं । हास्यप्रधान पुतलियो के नाक और होठ को दाएँ-वाएँ विकृत रूप से बनाने की प्रथा प्रायः सभी पुतलियो मे विद्यमान है । भयानक पात्रों को पुतलियो की मौ ऊपर चढा दी जाती हैं और उनके गाल फुला दिये जाते हैं। इसी तरह दीन, दुर्बल, असहाय पात्रो की पुतलियो की आँखें गडी हुई, गाल पिचके हुए तथा गर्दन तनिक झुकी हुई होती है । छायापुतलियो के चेहरे तथा अन्य अग अधिक नुकीले होते हैं। उनकी नाक विशेष रूप से नुकीली, भौंहे अधिक तेजी से कटी हुई, होठो के वीच की जगह अधिक स्पष्ट, हाथ की उँगलियाँ अधिक नुकीली बताई जाती है, ताकि उनकी छायाएँ स्पष्ट रूप से उन भावो को प्रकट कर सकें जो गीत-सवादो से व्यक्त किये जाते है । पुतलियो की ये अतिरजनात्मक आकृतियां, उनके अतिरजनात्मक हाव-भाव, क्रिया-कलाप, रग-रोगन, अगभगिमाएँ सभी किसी विशिष्ट प्रयोजन से निर्दिष्ट की गई है। निर्जीव पुतलियो मे प्रारण और स्पदनकारी स्थितियां पैदा करने के लिये इन सव अरिजनो का सहारा लेना पडता है । जो कलाकार इस गूढाशय को नहीं समझते और पुतलियो को मानव की वास्तविक अनुकृति बनाने की कोशिश करते हैं वे अपने कार्य मे पूर्णरूप से असफल होते हैं। भारत में आज के आधुनिक कठपुतली प्रयोग इसीलिये असफल हो रहे हैं तथा यूरोप के आधुनिक पुतलीकार इस कठपुतली - विज्ञान को पूर्णरूप से समझ गये हैं इसलिये उन्हें अपने प्रयोगो में श्राशातीत सफलता मिल रही है । पुतलियो का रंगमंचीय विधान परम्परागत भारतीय पुतलियो का रगमचीय विधान मी नाट्यतत्वो से से परिपूर्ण है । बम्मोलोटम पुतलीकार बहुधा किसी रगमच का प्रयोग नही करते । जहाँ कहीं भी पुतली का तम्बूनुमा रगमंच बनाकर इन पुतलियो के परिचालको को छिपाने की कोशिश हो रही है, वह आधुनिक प्रयोग है । है परपरा से उनका कोई मवध नही है । वम्मोलोटम पुतलीकार स्वयं कुछ गहरे रंग के कपड़े पहनते हैं। उनकी पुतलियाँ आदमकद से छोटो, परन्तु अन्य शैलियों को काष्ठपुतलियों ने काफी बड़ी होती है । उनके सिर पर वडी-वडी
खरीफ सीजन शुरू होने में महज कुछ दिन बाकी हैं. ऐसे में किसान अपने-अपने खेतों को तैयार करने में लगे हुए हैं. खरीफ फसलों जैसे धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि की बुवाई किसान इस मौसम में अधिक से अधिक करते हैं. इसका मुख्य कारण बढ़ती खपत और मांग है. ऐसे में इस साल खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान जमकर कृषि यंत्र की खरीद करते नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि जिस तरह से विज्ञान का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है और उसका सीधा असर फसल के उपज और उसकी गुणवत्ता पर देखने को मिल रहा है. ऐसे में कृषि यंत्र उनके लिए बहुत जरुरी है. रबी फसलों की कटाई जारी है. कटाई के बाद जब फसल मंडी में पहुँचती हैं, तो किसानों को अच्छा मुनाफा हाथ लगता है. उसी मुनाफे से किसान भाइयों ने कृषि यंत्र खरीद, खरीफ की खेती उन्नत तरीके से करने का मन बनाया है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस बार यह देखा जा रहा है कि किसान तेज़ी से कृषि यंत्र की खरीदी कर रहे हैं. एमबी प्लाऊ (खेतों की तैयारी हेतु कृषि यंत्र) खेतों की तैयारी करने का यह बिल्कुल सही समय है. ऐसे में किसान सबसे पहले अपने खेतों की जुताई कर मिट्टी को हल्का और भुरभुरा बनाते हैं, ताकि खेतों में लगे खरपतवार आसानी से निकल जाएँ और मिट्टी को जरुरी पोषक तत्व भी मिल सके. वहीँ इस साल खरीफ सीजन के लिए अपने खेतों को तैयार कर रहे किसानों ने इसके लिए एमबी प्लाऊ कृषि यन्त्र का सहारा लिया है. यह कृषि यंत्र लोहे का बना होता है. इसमें नीचे लगा फाल (नुकीला लोहा) मिट्टी को काटता है साथ ही फाल से लगा लोहा मुड़े हुए प्लेट की मदद से मिट्टी को पलटने का काम करता है. यह आपको आसानी से बाजारों में मिल जाएगा, जिसकी मदद से आप भी अपने खेतों की जुताई समय रहते आसानी से कर सकते हैं. कल्टीवेटर (Cultivator) किसान अपने खेतों इस यंत्र का प्रयोग खेतों में जुताई के बाद मिट्टी के ढेलों को तोडऩे, मिट्टी भुरभुरी करने एवं खेत में सूखी घास, जड़ों को ऊपर लाने के लिए करते हैं. इससे पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व मिल पाता है और उपज के साथ-साथ गुणवत्ता भी अच्छी होती है. इस यंत्र का प्रयोग कतार युक्त फसलों में निराई हेतु भी किया जाता है. कल्टीवेटर के कई प्रकार बाजारों में मौजूद हैं जैसे स्प्रिंग टाइन कल्टीवेटर, रिजिड टाइन कल्टीवेटर इत्यादि. हैरो (Harrow) खेतों में जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरी एवं मिट्टी की नमी को सुरक्षित रखने के लिए किसान उथली जुताई करते हैं. इस विधि से मिट्टी को भुरभुरी और उसमे नमी बना रहता है. इस कार्य को करने के लिए हैरो उपकरण अत्यंत उपयोगी है. इतना ही नहीं हैरो घास फूस जड़ इत्यादि को भी खेत से साफ करने में किसानों की सहायता करता है. यह कृषि यंत्र दो प्रकार का है- तवेदार हैरो और ब्लैड हैरो. रोटावेटर (Rotavator) किसानों के बिच यह कृषि यंत्र काफी प्रचलित है. यह एक विशेष प्रकार का ट्रैक्टर से चलने वाला भारी एवं विशाल कृषि यंत्र है. इस यंत्र को ख़ास बनाता है इसमें लगा हुआ कई तरह का ब्लैड, जो मिट्टी को काटकर, ऊपर उठाकर और मिट्टी के अन्दर जाकर मिट्टी को पलटते हुए आगे बढ़ता चला जाता है. जिससे मिट्टी की जुताई और मिट्टी को भुरभुरा एक साथ बनाया जा सकता है.
खरीफ सीजन शुरू होने में महज कुछ दिन बाकी हैं. ऐसे में किसान अपने-अपने खेतों को तैयार करने में लगे हुए हैं. खरीफ फसलों जैसे धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि की बुवाई किसान इस मौसम में अधिक से अधिक करते हैं. इसका मुख्य कारण बढ़ती खपत और मांग है. ऐसे में इस साल खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान जमकर कृषि यंत्र की खरीद करते नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि जिस तरह से विज्ञान का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है और उसका सीधा असर फसल के उपज और उसकी गुणवत्ता पर देखने को मिल रहा है. ऐसे में कृषि यंत्र उनके लिए बहुत जरुरी है. रबी फसलों की कटाई जारी है. कटाई के बाद जब फसल मंडी में पहुँचती हैं, तो किसानों को अच्छा मुनाफा हाथ लगता है. उसी मुनाफे से किसान भाइयों ने कृषि यंत्र खरीद, खरीफ की खेती उन्नत तरीके से करने का मन बनाया है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस बार यह देखा जा रहा है कि किसान तेज़ी से कृषि यंत्र की खरीदी कर रहे हैं. एमबी प्लाऊ खेतों की तैयारी करने का यह बिल्कुल सही समय है. ऐसे में किसान सबसे पहले अपने खेतों की जुताई कर मिट्टी को हल्का और भुरभुरा बनाते हैं, ताकि खेतों में लगे खरपतवार आसानी से निकल जाएँ और मिट्टी को जरुरी पोषक तत्व भी मिल सके. वहीँ इस साल खरीफ सीजन के लिए अपने खेतों को तैयार कर रहे किसानों ने इसके लिए एमबी प्लाऊ कृषि यन्त्र का सहारा लिया है. यह कृषि यंत्र लोहे का बना होता है. इसमें नीचे लगा फाल मिट्टी को काटता है साथ ही फाल से लगा लोहा मुड़े हुए प्लेट की मदद से मिट्टी को पलटने का काम करता है. यह आपको आसानी से बाजारों में मिल जाएगा, जिसकी मदद से आप भी अपने खेतों की जुताई समय रहते आसानी से कर सकते हैं. कल्टीवेटर किसान अपने खेतों इस यंत्र का प्रयोग खेतों में जुताई के बाद मिट्टी के ढेलों को तोडऩे, मिट्टी भुरभुरी करने एवं खेत में सूखी घास, जड़ों को ऊपर लाने के लिए करते हैं. इससे पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व मिल पाता है और उपज के साथ-साथ गुणवत्ता भी अच्छी होती है. इस यंत्र का प्रयोग कतार युक्त फसलों में निराई हेतु भी किया जाता है. कल्टीवेटर के कई प्रकार बाजारों में मौजूद हैं जैसे स्प्रिंग टाइन कल्टीवेटर, रिजिड टाइन कल्टीवेटर इत्यादि. हैरो खेतों में जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरी एवं मिट्टी की नमी को सुरक्षित रखने के लिए किसान उथली जुताई करते हैं. इस विधि से मिट्टी को भुरभुरी और उसमे नमी बना रहता है. इस कार्य को करने के लिए हैरो उपकरण अत्यंत उपयोगी है. इतना ही नहीं हैरो घास फूस जड़ इत्यादि को भी खेत से साफ करने में किसानों की सहायता करता है. यह कृषि यंत्र दो प्रकार का है- तवेदार हैरो और ब्लैड हैरो. रोटावेटर किसानों के बिच यह कृषि यंत्र काफी प्रचलित है. यह एक विशेष प्रकार का ट्रैक्टर से चलने वाला भारी एवं विशाल कृषि यंत्र है. इस यंत्र को ख़ास बनाता है इसमें लगा हुआ कई तरह का ब्लैड, जो मिट्टी को काटकर, ऊपर उठाकर और मिट्टी के अन्दर जाकर मिट्टी को पलटते हुए आगे बढ़ता चला जाता है. जिससे मिट्टी की जुताई और मिट्टी को भुरभुरा एक साथ बनाया जा सकता है.
अमरावती के उमेश कोल्हे मर्डर केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब सातों आरोपियों से सीन रिक्रिएट कराएगी। दरअसल, बीते दिनों हीं अमरावती की अदालत ने सातों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर एनआईए को सौंपा था। जांच के बाद एजेंसी सातो आरोपियों को 8 जुलाई को मुंबई कोर्ट में भी पेश कर सकती है। हालांकि, अभी भी एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी शेख रहीम शेख इरफान के साथ-साथ 22 साल के मुदस्सिर अहमद, 22 साल के शोएब खान और आतिब रशीद, 24 साल के अब्दुल तौफिक, 25 साल के शाहरुख पठान और 32 साल के युसूफ खान को गिरफ्तार किया है। केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या 21 जून को सिर्फ इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने नुपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस दुनिया में सबसे पवित्र रिश्ता दोस्ती को मानते हैं, लेकिन उमेश कोल्हे की हत्या के मामले ने इस दोस्ती शब्द को भी कलंकित किया है। दरअसल, उमेश कोल्हे की हत्या की साजिश में उनके वेटनरी डॉक्टर और दोस्त यूसुफ खान का भी हाथ है। यूसुफ खान सभी आरोपियों में सबसे उम्रदराज है। पुलिस के मुताबिक यूसुफ ने ही वह पोस्ट अपने साथियों के पास शेयर की थी जिसकी वजह से उमेश कोल्हे की हत्या हुई। उमेश कोल्हे ने नुपुर शर्मा के समर्थन वाला मैसेज जिस व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया था उसका एडमिन यूसुफ खान था। अमरावती हत्याकांड में पुलिस भी सवालों के घेरे में है। पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि उसने जानबूझ कर हेट क्राइम से संबंधित हत्या के मामले को लूटपाट से जोड़ कर बताया। यहां तक कि पुलिस ने इस केस में नुपुर शर्मा के समर्थन वाले एंगल को भी छिपाया, जबकि महाराष्ट्र एटीएस आतंकी एंगल पर पहले से ही जांच कर रही थी। उमेश कोल्हे की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है। इसमें साफ-साफ 2 हमलावर बाइक से आते दिख रहे हैं। 21 जून की रात जब उमेश कोल्हे अपनी दवाई की दुकान बंद करके घर जा रहा था, तभी इन आरोपियों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया जिसमें उमेश की मौत हो गई।
अमरावती के उमेश कोल्हे मर्डर केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी अब सातों आरोपियों से सीन रिक्रिएट कराएगी। दरअसल, बीते दिनों हीं अमरावती की अदालत ने सातों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर एनआईए को सौंपा था। जांच के बाद एजेंसी सातो आरोपियों को आठ जुलाई को मुंबई कोर्ट में भी पेश कर सकती है। हालांकि, अभी भी एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस केस में पुलिस ने मुख्य आरोपी शेख रहीम शेख इरफान के साथ-साथ बाईस साल के मुदस्सिर अहमद, बाईस साल के शोएब खान और आतिब रशीद, चौबीस साल के अब्दुल तौफिक, पच्चीस साल के शाहरुख पठान और बत्तीस साल के युसूफ खान को गिरफ्तार किया है। केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या इक्कीस जून को सिर्फ इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने नुपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस दुनिया में सबसे पवित्र रिश्ता दोस्ती को मानते हैं, लेकिन उमेश कोल्हे की हत्या के मामले ने इस दोस्ती शब्द को भी कलंकित किया है। दरअसल, उमेश कोल्हे की हत्या की साजिश में उनके वेटनरी डॉक्टर और दोस्त यूसुफ खान का भी हाथ है। यूसुफ खान सभी आरोपियों में सबसे उम्रदराज है। पुलिस के मुताबिक यूसुफ ने ही वह पोस्ट अपने साथियों के पास शेयर की थी जिसकी वजह से उमेश कोल्हे की हत्या हुई। उमेश कोल्हे ने नुपुर शर्मा के समर्थन वाला मैसेज जिस व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया था उसका एडमिन यूसुफ खान था। अमरावती हत्याकांड में पुलिस भी सवालों के घेरे में है। पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि उसने जानबूझ कर हेट क्राइम से संबंधित हत्या के मामले को लूटपाट से जोड़ कर बताया। यहां तक कि पुलिस ने इस केस में नुपुर शर्मा के समर्थन वाले एंगल को भी छिपाया, जबकि महाराष्ट्र एटीएस आतंकी एंगल पर पहले से ही जांच कर रही थी। उमेश कोल्हे की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है। इसमें साफ-साफ दो हमलावर बाइक से आते दिख रहे हैं। इक्कीस जून की रात जब उमेश कोल्हे अपनी दवाई की दुकान बंद करके घर जा रहा था, तभी इन आरोपियों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया जिसमें उमेश की मौत हो गई।
बिलासपुर - 30 नवंबर से 10 दिसंबर तक जापान के कुमामोटो में आयोजित की जा रही एशियन हैंडबाल चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए भारतीय महिला टीम बुधवार को रवाना हो गई। भारतीय 16 सदस्यीय टीम में हिमाचल के बिलासपुर की मेनिका पाल भी शामिल हैं। यह जानकारी भारतीय हैंडबाल संघ के सदस्य व प्रदेश संघ के महासचिव नंद किशोर शर्मा, सीईओ डाक्टर प्रवेश शर्मा व मीडिया इंचार्ज कर्ण चंदेल ने दी। इस मौके पर भरत साहनी, अशोक भुट्टो, डा. लालचंद शर्मा, दिलीप ठाकुर, डीडी तनवर, वीरेंद्र शर्मा, लखबीर लखी, आशीष ढिल्लों, राजीव कुमार, कपिल जैन, डा. राजकुमार, हीरा सिंह, विनोद गुलेरिया, संदीप मित्तल, मुनीष राणा, मितांशु, अतुल सोनी, राजेश ठाकुर, मुनीष शर्मा, रणदीप सिंह, मनोज चौहान, संजय कौशल, अरुण, हर्ष त्रिपाठी, दीपक ठाकुर, विवेक पठानिया, सतिंद्र लाली, अजयप्रताप सिंह, अनुज चौधरी, जगदीश कौंडल, एमएम गर्ग, केआर गर्ग, अनिल शर्मा, सरित शर्मा, अशोक गौतम, मनोज, प्रियंका, सुदर्शन, ललित शर्मा, हिमांशु तिवारी, अंशुल शर्मा, विवेक, प्रीतम देव, प्रवेश राणा, रफीक मोहम्मद, वीरेंद्र शर्मा, सोहन लाल, दीपक सैणी व अजय चौधरी ने मेनिका को टीम में चयन की बधाई दी है। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
बिलासपुर - तीस नवंबर से दस दिसंबर तक जापान के कुमामोटो में आयोजित की जा रही एशियन हैंडबाल चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए भारतीय महिला टीम बुधवार को रवाना हो गई। भारतीय सोलह सदस्यीय टीम में हिमाचल के बिलासपुर की मेनिका पाल भी शामिल हैं। यह जानकारी भारतीय हैंडबाल संघ के सदस्य व प्रदेश संघ के महासचिव नंद किशोर शर्मा, सीईओ डाक्टर प्रवेश शर्मा व मीडिया इंचार्ज कर्ण चंदेल ने दी। इस मौके पर भरत साहनी, अशोक भुट्टो, डा. लालचंद शर्मा, दिलीप ठाकुर, डीडी तनवर, वीरेंद्र शर्मा, लखबीर लखी, आशीष ढिल्लों, राजीव कुमार, कपिल जैन, डा. राजकुमार, हीरा सिंह, विनोद गुलेरिया, संदीप मित्तल, मुनीष राणा, मितांशु, अतुल सोनी, राजेश ठाकुर, मुनीष शर्मा, रणदीप सिंह, मनोज चौहान, संजय कौशल, अरुण, हर्ष त्रिपाठी, दीपक ठाकुर, विवेक पठानिया, सतिंद्र लाली, अजयप्रताप सिंह, अनुज चौधरी, जगदीश कौंडल, एमएम गर्ग, केआर गर्ग, अनिल शर्मा, सरित शर्मा, अशोक गौतम, मनोज, प्रियंका, सुदर्शन, ललित शर्मा, हिमांशु तिवारी, अंशुल शर्मा, विवेक, प्रीतम देव, प्रवेश राणा, रफीक मोहम्मद, वीरेंद्र शर्मा, सोहन लाल, दीपक सैणी व अजय चौधरी ने मेनिका को टीम में चयन की बधाई दी है। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
वियना - वियना स्थित अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि गोलाबारी ने यूक्रेन के खार्किव शहर में एक नई परमाणु अनुसंधान सुविधा को क्षतिग्रस्त कर दिया जो चिकित्सा और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करता है। ग्रॉसी ने सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रीय परमाणु नियामक का हवाला देते हुए कहा कि एक दिन पहले हुई घटना के परिणामस्वरूप साइट पर विकिरण के स्तर में वृद्धि नहीं हुई। "चूंकि सुविधा में परमाणु सामग्री हमेशा उप-महत्वपूर्ण होती है और रेडियोधर्मी सामग्री की सूची बहुत कम होती है, आईएईए के आकलन ने पुष्टि की है कि इसे रिपोर्ट की गई क्षति का कोई रेडियोलॉजिकल परिणाम नहीं होगा," महानिदेशक ने एक बयान में पोस्ट किया। नियामक की वेबसाइट। रविवार की घटना, "एक बार फिर से सशस्त्र संघर्ष के दौरान यूक्रेन के परमाणु प्रतिष्ठानों के सामने आने वाले जोखिमों को उजागर करती है, देश में परमाणु सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक IAEA पहल की तात्कालिकता को जोड़ती है। " ग्रॉसी ने कहा। उन्होंने कहा, "ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे यूक्रेन के परमाणु स्थलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। " 27 फरवरी को, यूक्रेन ने बताया कि रूसी मिसाइलों ने कीव में एक रेडियोधर्मी अपशिष्ट निपटान सुविधा पर हमला किया था, लेकिन कोई रेडियोधर्मी सामग्री जारी नहीं की गई थी। यह ठीक एक दिन बाद हुआ जब खार्किव के पास एक समान निपटान सुविधा में एक विद्युत ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गया था। यूक्रेन का दावा, कहा- "दुश्मनों के 11 हजार सैनिकों और कई विमानों को किया ढेर. . . "
वियना - वियना स्थित अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि गोलाबारी ने यूक्रेन के खार्किव शहर में एक नई परमाणु अनुसंधान सुविधा को क्षतिग्रस्त कर दिया जो चिकित्सा और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करता है। ग्रॉसी ने सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रीय परमाणु नियामक का हवाला देते हुए कहा कि एक दिन पहले हुई घटना के परिणामस्वरूप साइट पर विकिरण के स्तर में वृद्धि नहीं हुई। "चूंकि सुविधा में परमाणु सामग्री हमेशा उप-महत्वपूर्ण होती है और रेडियोधर्मी सामग्री की सूची बहुत कम होती है, आईएईए के आकलन ने पुष्टि की है कि इसे रिपोर्ट की गई क्षति का कोई रेडियोलॉजिकल परिणाम नहीं होगा," महानिदेशक ने एक बयान में पोस्ट किया। नियामक की वेबसाइट। रविवार की घटना, "एक बार फिर से सशस्त्र संघर्ष के दौरान यूक्रेन के परमाणु प्रतिष्ठानों के सामने आने वाले जोखिमों को उजागर करती है, देश में परमाणु सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक IAEA पहल की तात्कालिकता को जोड़ती है। " ग्रॉसी ने कहा। उन्होंने कहा, "ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे यूक्रेन के परमाणु स्थलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। " सत्ताईस फरवरी को, यूक्रेन ने बताया कि रूसी मिसाइलों ने कीव में एक रेडियोधर्मी अपशिष्ट निपटान सुविधा पर हमला किया था, लेकिन कोई रेडियोधर्मी सामग्री जारी नहीं की गई थी। यह ठीक एक दिन बाद हुआ जब खार्किव के पास एक समान निपटान सुविधा में एक विद्युत ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गया था। यूक्रेन का दावा, कहा- "दुश्मनों के ग्यारह हजार सैनिकों और कई विमानों को किया ढेर. . . "
11. प्रायश्चित कर्म : शास्त्रों में मृत्यु के बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्म विपाक आदि के द्वारा पापों को दूर कर विधान का प्रायश्चित कहा गया है। आदि काल में देवी और देवता भी प्रेषित करने के लिए अलग-अलग उपाय करते थे जैसे भगवान श्रीराम ने जब रावण का वध किया तो उन पर ब्राह्मण हत्या का दोष लगा । जिसके प्रायश्चित के लिए भगवान श्रीराम ने कपाल मोचन तीर्थ स्थान पर तप और स्नान करने का निश्चय किया था। भगवान श्री राम और कृष्ण की भक्ति हमारे मन को आंतरिक और भारी शरीर दोनों को स्वस्थ और स्वच्छ करने का काम करती है। जो हमें अपने होने वाले पापों से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं।
ग्यारह. प्रायश्चित कर्म : शास्त्रों में मृत्यु के बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्म विपाक आदि के द्वारा पापों को दूर कर विधान का प्रायश्चित कहा गया है। आदि काल में देवी और देवता भी प्रेषित करने के लिए अलग-अलग उपाय करते थे जैसे भगवान श्रीराम ने जब रावण का वध किया तो उन पर ब्राह्मण हत्या का दोष लगा । जिसके प्रायश्चित के लिए भगवान श्रीराम ने कपाल मोचन तीर्थ स्थान पर तप और स्नान करने का निश्चय किया था। भगवान श्री राम और कृष्ण की भक्ति हमारे मन को आंतरिक और भारी शरीर दोनों को स्वस्थ और स्वच्छ करने का काम करती है। जो हमें अपने होने वाले पापों से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं।
राष्ट्रपति भवन में मौजूद अमृत उद्यान (पहले नाम मुगल गार्डन) खुल चुका है। अमृत उद्यान अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के खुशबूदार रंग-बिरंगे फूलों का आकर्षण और अमृत उद्यान का शानदार नजारा न केवल देश के लोगों को आकर्षित करता है, बल्कि विदेशों से भी लोग दिल्ली में इसे देखने के लिए आते हैं। चलिए जानते हैं कैसे आप यहां बुकिंग कर सकते हैं और किस टाइमिंग पर यहां जा सकते हैं। लेकिन उससे पहले जानिए आखिर इस बार अमृत उद्यान में नया क्या है। जहां आमतौर पर अब तक एक महीने के लिए गार्डन खुलता था, वहीं इस साल हर्बल गार्डन, बोन्साई गार्डन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन दो महीने तक जनता के लिए खुले रहेंगे। इस साल, आपको पहले से बुकिंग करनी होगी क्योंकि एक सीमित स्लॉट ही लोगों को हर दिन दिए जाएंगे। उद्यान में विशेष रूप से ट्यूलिप की 12 किस्में और गुलाब की 120 किस्में प्रदर्शित की जाएंगी। ये जलकुंभी, गेंदा, दहलिया और अन्य फूलों की पंक्तियों से एकदम अलग हैं। यहां आपको फ्लोरल कार्पेट, म्यूजिकल फाउंटेन और वर्टिकल गार्डन भी देखने को मिल जाएंगे। इस साल का मुख्य आकर्षण 200 साल पुराना शीशम का पेड़ है, यही नहीं दशकों पुराने बोन्साई के लिए एक अलग से गार्डन भी बनाया गया है। अगर आपको उस पेड़ या पौधे के बारे में और जानना है, तो वहां आप क्यूआर कोड से स्कैन करके भी जानकारी ले सकते हैं। अमृत उद्यान घूमने की क्या टाइमिंग है - आम लोगों के लिए अमृत उद्यान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहेगा। लेकिन ध्यान रहे 4 बजे के बाद यहां एंट्री नहीं होती। वही, सोमवार को ये गार्डन बंद रहता है। 1 और 2 मार्च को भी गार्डन आम के लिए बंद रहेगा, यही नहीं, 8 मार्च होली के दिन भी आप गार्डन घूमने नहीं जा पाएंगे।
राष्ट्रपति भवन में मौजूद अमृत उद्यान खुल चुका है। अमृत उद्यान अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के खुशबूदार रंग-बिरंगे फूलों का आकर्षण और अमृत उद्यान का शानदार नजारा न केवल देश के लोगों को आकर्षित करता है, बल्कि विदेशों से भी लोग दिल्ली में इसे देखने के लिए आते हैं। चलिए जानते हैं कैसे आप यहां बुकिंग कर सकते हैं और किस टाइमिंग पर यहां जा सकते हैं। लेकिन उससे पहले जानिए आखिर इस बार अमृत उद्यान में नया क्या है। जहां आमतौर पर अब तक एक महीने के लिए गार्डन खुलता था, वहीं इस साल हर्बल गार्डन, बोन्साई गार्डन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन दो महीने तक जनता के लिए खुले रहेंगे। इस साल, आपको पहले से बुकिंग करनी होगी क्योंकि एक सीमित स्लॉट ही लोगों को हर दिन दिए जाएंगे। उद्यान में विशेष रूप से ट्यूलिप की बारह किस्में और गुलाब की एक सौ बीस किस्में प्रदर्शित की जाएंगी। ये जलकुंभी, गेंदा, दहलिया और अन्य फूलों की पंक्तियों से एकदम अलग हैं। यहां आपको फ्लोरल कार्पेट, म्यूजिकल फाउंटेन और वर्टिकल गार्डन भी देखने को मिल जाएंगे। इस साल का मुख्य आकर्षण दो सौ साल पुराना शीशम का पेड़ है, यही नहीं दशकों पुराने बोन्साई के लिए एक अलग से गार्डन भी बनाया गया है। अगर आपको उस पेड़ या पौधे के बारे में और जानना है, तो वहां आप क्यूआर कोड से स्कैन करके भी जानकारी ले सकते हैं। अमृत उद्यान घूमने की क्या टाइमिंग है - आम लोगों के लिए अमृत उद्यान सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक खुला रहेगा। लेकिन ध्यान रहे चार बजे के बाद यहां एंट्री नहीं होती। वही, सोमवार को ये गार्डन बंद रहता है। एक और दो मार्च को भी गार्डन आम के लिए बंद रहेगा, यही नहीं, आठ मार्च होली के दिन भी आप गार्डन घूमने नहीं जा पाएंगे।
श्रीवाराहपुराण भाषीं । कहि व पिंजरेसे निकल उत्तरदिशा में ध्रुवनाम तारेको पहिचानि नीचगति हो उस नाव से उड़ा व उड़ते २ कई योजन के बाद एक बड़ा ऊंचा पर्वत का शिखर दृष्टि में आया उसे देखि बडेहव में होकर उसपर्वतपर गया तो वहां क्या देखता है कि एक मन्दिर बहुत उत्तम शोभा करके युक्त विष्णु भगवान् का उस पर्वत को शोभित कर रहा है उसे देखि प्रसन्न होकर यह विचारने • लगा कि; किसीभांति हमारा पिता भी यहां को आजाता तो उत्तम होता इसी विचार में कुछ घड़ी व्यतीत भई कि निज २ हाथों में स्वर्ण की थालियों में भांति २ की पूजन सामग्री लिये बहुतसी देवियां वहां पहुँचींव आतेही विष्णु भगवान की तरफ देखि (ॐ नमो नारायणाय ) इसशब्द को कहि साष्टाङ्ग प्रणामकर उत्तम आसन पर बैठि आनन्दपूर्वक नृत्य व संगानका प्रारम्भ किया व भांति २ के बाजे बजनेलगे व हे धरणि ! उसी समय दिव्य भूषण व वस्त्रोकरके शोभित मनोहर जिनके रूप ऐसी अनेकदेवियां वहांही और कर प्राप्त भई सबकी सब बड़ीभक्ति से नाचि गाय विष्णु भगवान् को रिझाय, निज २ स्थान को चलीगई फिर वह शुक क्या देखता है कि देवता के दक्षिण भाग में अनेकजटा के धारण करनेवाले पक्षी बहुत बड़ा ऊंचा जिन्होंका शरीर सो विराजमान होरहे हैं तिन्होंके मध्य में वह शुक लीख के तुल्य अत्यन्त लघु दीखता उससमय शुक उस जटायु को देखि निज भाषा में शरण २ इस शब्द को बारम्बार पुकारनेलगा तब तो शुक की दीनवाणी सुनि आश्वासन करता हुआ बड़ी प्रीतिसे जटायुष कहने लगा कि; हे शुक ! इस समुद्र के मध्य बड़े २ कराल जीवोंसे बच करके किसभांति कहां से सो त सत्य २ वर्णन करो यह जटायुष का वचनसुनि शुक कहनेलगा कि हे महाराज ! प्रारब्धवश हमारा पिता नौका में बैठि बणिज के लिये कई मनुष्यों के साथ आया है सो दैवगति वायुवश होनेसे नौका निजमार्ग को त्यांगि कुपथ में गई इस विपत्ति से दुःखी होकर निजरक्षा के लिये इस • पर्वत में आये सो आप सबप्रकार समर्थ हैं दीन व मृत्यु के मुख में गिरेजान आप हमारेपिता की रक्षाकरें जिसमें हमको सुख होय इस वचन को सुनि सबपक्षी बोले कि हे पुत्र ! डरो मत हमारे साथ चलो नौका के समीप हम तुमको मार्ग बताते हैं हमारी पीठिपर बैठि के तुम्हारा पिता सुखपूर्वक यहां को आवे और जलजन्तुका भय नहीं करना सब हमारे चञ्चुसे डर हमको देखि दूर होजाते हैं इतना कहि जटायुष शुक के साथ नौका के समीप चला व जाय वहां से गोकर्ण को निज पीठपर बैठाय लौटि उसी पर्वत पर फिर ल्याय उतारि दिया तवतो गोकर्ण जटायुष की पीठ से उतरि कमलों करके शोभित उत्तम सरोवर में स्नानकर सन्ध्यातर्पण आदि नियमोंसे निवृत्त हो विष्णु मन्दिर में आय विष्णु भगवान की पूजाकर और देवताओं का दर्शन कर शुक की सम्मति से एकान्त में छिपकरके बैठि गया उसीसमय बहुत देवियों के यूथ उसीभांति निज २ हाथों में पूजा की सामग्री लिये आपहुँचीं व आतेही पूजन करि नाच गोन भांति २ के बाजे के साथकर सावधान होकर सबसे जो बड़ी थी सो कहने लगी कि जो अभ्यागत दैवयोग से आवेव महात्मा होय ब्राह्मण का भक्त होय उस भूखे को भोजन के लिये अमृत के तुल्य फल व तृषाशान्ति करने के लिये उत्तम मीठा और ठंढा जल देना चाहिये इसलिये गोकर्ण को सब दो जिस में तीन महीने तक इसे क्षुधा तृषा फिर दुःख न देवे जिसमें इस पुण्यात्मा का शोक व मोह सब संहित पापों के दूर होय यह कहि उत्तम फल का भोजन अमृततुल्य जल दे देवी बोली कि, हे गोकर्ण ! अब किसी भांति का भय और शोक न करो यह स्थान स्वर्ग के तुल्य है इसमें यथासुख निवास करो जबतक श्रीवाराहपुराण भाषा । तुम्हारे सब कार्य सिद्ध होयँ इसभांति गोकर्ण से वचन कहकर सब देवी निज २ स्थान को चलीगई उस दिन से बड़े आनन्द में जिसभांति मथुरा में रहा करता उसीभांति उस पर्वत में रहने लगा हे धरणि ! दैवयोग से गोकर्ण की नाव भी वायु ने उठा करके उस भूमि में डाल दिया जहां अनेक भांति रत्नों की ट थिवी तब तो साथ के व्यापारियों ने उस अमोल रत्न को ले इच्छापूर्वक नाव भरलिया और गोकर्ण का खोज करने लगे जब गोकर्ण न मिला तब तो सबके सब दुःखीहो कहने लगे कि, गोकर्ण क्लेश से वा लज्जा से समुद्र में डूबमरा देखो जिसको हम पिता करके जानते और जो हमारी सबकी रक्षा पुत्र की तुल्य करता था वह महात्मा कहां गया और हम उसके घर में लौटिके क्या वृत्तान्त कहेंगे ? और तो हमारा कौन बल है उसका भाग उसके पिता को देंगे यह विचारि फिर मथुराजी की यात्रा की और हे धरणि ! उस पर्वत में इसीभांति बड़े शोक को करता गोकर्ण. भी. कालक्षेप करनेलगा किसी दिन शोकयुक्त हो शुक से निज पिता माता के लिये कहने लगा कि, हे शक ! किसी भांति माता पितां का वृत्तान्त हमको व हमारा माता पिता को मिलना चाहिये तब तो शुक बोला कि हे पितः ! हम पक्षियों में छोटे सवभांति अस मर्थ हैं नहीं तो आपको यहां से लेचलते सो तो होता नहीं परन्तु मथुरा में जाय आपके माता पिताको तुम्हारा वृत्तान्त कहदेंगे व उन्होंका वृत्तान्त आप से कहेंगे यह हमारी सामर्थ्य है अब आप मुझे दें तो मैं मथुरा को गमन करूं यह शुक की वाणी सुनि हर्षित हो गोकर्ण कहने लगा कि हे पुत्र ! यानन्द से जावो बिलम्ब न करो वहां जाय हमारा वृत्तान्त माता पिता से कह शीघ्र यहां को वो जिसमें हमारे प्राण रहें विना तुम्हारे हम किसभांति जीवेंगे यह गोकर्ण का वचन सनि प्रणाम कर उसी समय शुक ने मथुरा की यात्रा की और चलते २ कुछ काल में
श्रीवाराहपुराण भाषीं । कहि व पिंजरेसे निकल उत्तरदिशा में ध्रुवनाम तारेको पहिचानि नीचगति हो उस नाव से उड़ा व उड़ते दो कई योजन के बाद एक बड़ा ऊंचा पर्वत का शिखर दृष्टि में आया उसे देखि बडेहव में होकर उसपर्वतपर गया तो वहां क्या देखता है कि एक मन्दिर बहुत उत्तम शोभा करके युक्त विष्णु भगवान् का उस पर्वत को शोभित कर रहा है उसे देखि प्रसन्न होकर यह विचारने • लगा कि; किसीभांति हमारा पिता भी यहां को आजाता तो उत्तम होता इसी विचार में कुछ घड़ी व्यतीत भई कि निज दो हाथों में स्वर्ण की थालियों में भांति दो की पूजन सामग्री लिये बहुतसी देवियां वहां पहुँचींव आतेही विष्णु भगवान की तरफ देखि इसशब्द को कहि साष्टाङ्ग प्रणामकर उत्तम आसन पर बैठि आनन्दपूर्वक नृत्य व संगानका प्रारम्भ किया व भांति दो के बाजे बजनेलगे व हे धरणि ! उसी समय दिव्य भूषण व वस्त्रोकरके शोभित मनोहर जिनके रूप ऐसी अनेकदेवियां वहांही और कर प्राप्त भई सबकी सब बड़ीभक्ति से नाचि गाय विष्णु भगवान् को रिझाय, निज दो स्थान को चलीगई फिर वह शुक क्या देखता है कि देवता के दक्षिण भाग में अनेकजटा के धारण करनेवाले पक्षी बहुत बड़ा ऊंचा जिन्होंका शरीर सो विराजमान होरहे हैं तिन्होंके मध्य में वह शुक लीख के तुल्य अत्यन्त लघु दीखता उससमय शुक उस जटायु को देखि निज भाषा में शरण दो इस शब्द को बारम्बार पुकारनेलगा तब तो शुक की दीनवाणी सुनि आश्वासन करता हुआ बड़ी प्रीतिसे जटायुष कहने लगा कि; हे शुक ! इस समुद्र के मध्य बड़े दो कराल जीवोंसे बच करके किसभांति कहां से सो त सत्य दो वर्णन करो यह जटायुष का वचनसुनि शुक कहनेलगा कि हे महाराज ! प्रारब्धवश हमारा पिता नौका में बैठि बणिज के लिये कई मनुष्यों के साथ आया है सो दैवगति वायुवश होनेसे नौका निजमार्ग को त्यांगि कुपथ में गई इस विपत्ति से दुःखी होकर निजरक्षा के लिये इस • पर्वत में आये सो आप सबप्रकार समर्थ हैं दीन व मृत्यु के मुख में गिरेजान आप हमारेपिता की रक्षाकरें जिसमें हमको सुख होय इस वचन को सुनि सबपक्षी बोले कि हे पुत्र ! डरो मत हमारे साथ चलो नौका के समीप हम तुमको मार्ग बताते हैं हमारी पीठिपर बैठि के तुम्हारा पिता सुखपूर्वक यहां को आवे और जलजन्तुका भय नहीं करना सब हमारे चञ्चुसे डर हमको देखि दूर होजाते हैं इतना कहि जटायुष शुक के साथ नौका के समीप चला व जाय वहां से गोकर्ण को निज पीठपर बैठाय लौटि उसी पर्वत पर फिर ल्याय उतारि दिया तवतो गोकर्ण जटायुष की पीठ से उतरि कमलों करके शोभित उत्तम सरोवर में स्नानकर सन्ध्यातर्पण आदि नियमोंसे निवृत्त हो विष्णु मन्दिर में आय विष्णु भगवान की पूजाकर और देवताओं का दर्शन कर शुक की सम्मति से एकान्त में छिपकरके बैठि गया उसीसमय बहुत देवियों के यूथ उसीभांति निज दो हाथों में पूजा की सामग्री लिये आपहुँचीं व आतेही पूजन करि नाच गोन भांति दो के बाजे के साथकर सावधान होकर सबसे जो बड़ी थी सो कहने लगी कि जो अभ्यागत दैवयोग से आवेव महात्मा होय ब्राह्मण का भक्त होय उस भूखे को भोजन के लिये अमृत के तुल्य फल व तृषाशान्ति करने के लिये उत्तम मीठा और ठंढा जल देना चाहिये इसलिये गोकर्ण को सब दो जिस में तीन महीने तक इसे क्षुधा तृषा फिर दुःख न देवे जिसमें इस पुण्यात्मा का शोक व मोह सब संहित पापों के दूर होय यह कहि उत्तम फल का भोजन अमृततुल्य जल दे देवी बोली कि, हे गोकर्ण ! अब किसी भांति का भय और शोक न करो यह स्थान स्वर्ग के तुल्य है इसमें यथासुख निवास करो जबतक श्रीवाराहपुराण भाषा । तुम्हारे सब कार्य सिद्ध होयँ इसभांति गोकर्ण से वचन कहकर सब देवी निज दो स्थान को चलीगई उस दिन से बड़े आनन्द में जिसभांति मथुरा में रहा करता उसीभांति उस पर्वत में रहने लगा हे धरणि ! दैवयोग से गोकर्ण की नाव भी वायु ने उठा करके उस भूमि में डाल दिया जहां अनेक भांति रत्नों की ट थिवी तब तो साथ के व्यापारियों ने उस अमोल रत्न को ले इच्छापूर्वक नाव भरलिया और गोकर्ण का खोज करने लगे जब गोकर्ण न मिला तब तो सबके सब दुःखीहो कहने लगे कि, गोकर्ण क्लेश से वा लज्जा से समुद्र में डूबमरा देखो जिसको हम पिता करके जानते और जो हमारी सबकी रक्षा पुत्र की तुल्य करता था वह महात्मा कहां गया और हम उसके घर में लौटिके क्या वृत्तान्त कहेंगे ? और तो हमारा कौन बल है उसका भाग उसके पिता को देंगे यह विचारि फिर मथुराजी की यात्रा की और हे धरणि ! उस पर्वत में इसीभांति बड़े शोक को करता गोकर्ण. भी. कालक्षेप करनेलगा किसी दिन शोकयुक्त हो शुक से निज पिता माता के लिये कहने लगा कि, हे शक ! किसी भांति माता पितां का वृत्तान्त हमको व हमारा माता पिता को मिलना चाहिये तब तो शुक बोला कि हे पितः ! हम पक्षियों में छोटे सवभांति अस मर्थ हैं नहीं तो आपको यहां से लेचलते सो तो होता नहीं परन्तु मथुरा में जाय आपके माता पिताको तुम्हारा वृत्तान्त कहदेंगे व उन्होंका वृत्तान्त आप से कहेंगे यह हमारी सामर्थ्य है अब आप मुझे दें तो मैं मथुरा को गमन करूं यह शुक की वाणी सुनि हर्षित हो गोकर्ण कहने लगा कि हे पुत्र ! यानन्द से जावो बिलम्ब न करो वहां जाय हमारा वृत्तान्त माता पिता से कह शीघ्र यहां को वो जिसमें हमारे प्राण रहें विना तुम्हारे हम किसभांति जीवेंगे यह गोकर्ण का वचन सनि प्रणाम कर उसी समय शुक ने मथुरा की यात्रा की और चलते दो कुछ काल में
विन्निक के अनुसार, यूक्रेनी सैन्य विभाग के पास इस वर्ग के एक जहाज को बनाए रखने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, हालांकि जहाज काला सागर में यूक्रेन की "रक्षा क्षमता में काफी वृद्धि करेगा"। उसी समय, डिप्टी ने उल्लेख किया कि यदि जहाज की बहाली के लिए धन प्राप्त करना संभव था, तो भी इसे बिना आयुध के छोड़ दिया जाएगा, "यूक्रेन में न तो नियंत्रण निगरानी प्रणाली हैं, न ही अग्नि नियंत्रण प्रणाली, और न ही मिसाइल विनाश प्रणाली जो स्थापित होनी चाहिए। " इसके अलावा, डिप्टी के अनुसार, यूक्रेन हवाई रक्षा प्रणाली का उत्पादन नहीं करता है, और मास्को उन्हें कीव में आपूर्ति नहीं करेगा। इसके अलावा, क्रूजर को सोवियत-पूर्व मानकों के लिए बनाया गया था, लेकिन आप इस पर यूरोपीय या अमेरिकी हथियार नहीं डाल सकते। डिप्टी ने यह भी कहा कि वह पोरोशेंको के जहाज को "डिमिलिटाइज" करने के फैसले को नहीं समझता है, क्योंकि क्रूजर पर कोई सैन्य उपकरण नहीं है, "सब कुछ पहले ही हटा दिया गया है। " उन्होंने कहा, "एक क्रूजर को रोकना असंभव है," उन्होंने कहा। क्रूजर "यूक्रेन" को 1993 में यूक्रेनी नौसेना बलों में स्थानांतरित कर दिया गया था, और 1996 के बाद से क्रूजर के पूरा होने की परियोजना वित्त की कमी के कारण जमी हुई है। 2017 में, क्रूजर को विमुद्रीकृत करने, और जहाज के शेष हिस्सों को बेचने का निर्णय लिया गया था।
विन्निक के अनुसार, यूक्रेनी सैन्य विभाग के पास इस वर्ग के एक जहाज को बनाए रखने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, हालांकि जहाज काला सागर में यूक्रेन की "रक्षा क्षमता में काफी वृद्धि करेगा"। उसी समय, डिप्टी ने उल्लेख किया कि यदि जहाज की बहाली के लिए धन प्राप्त करना संभव था, तो भी इसे बिना आयुध के छोड़ दिया जाएगा, "यूक्रेन में न तो नियंत्रण निगरानी प्रणाली हैं, न ही अग्नि नियंत्रण प्रणाली, और न ही मिसाइल विनाश प्रणाली जो स्थापित होनी चाहिए। " इसके अलावा, डिप्टी के अनुसार, यूक्रेन हवाई रक्षा प्रणाली का उत्पादन नहीं करता है, और मास्को उन्हें कीव में आपूर्ति नहीं करेगा। इसके अलावा, क्रूजर को सोवियत-पूर्व मानकों के लिए बनाया गया था, लेकिन आप इस पर यूरोपीय या अमेरिकी हथियार नहीं डाल सकते। डिप्टी ने यह भी कहा कि वह पोरोशेंको के जहाज को "डिमिलिटाइज" करने के फैसले को नहीं समझता है, क्योंकि क्रूजर पर कोई सैन्य उपकरण नहीं है, "सब कुछ पहले ही हटा दिया गया है। " उन्होंने कहा, "एक क्रूजर को रोकना असंभव है," उन्होंने कहा। क्रूजर "यूक्रेन" को एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में यूक्रेनी नौसेना बलों में स्थानांतरित कर दिया गया था, और एक हज़ार नौ सौ छियानवे के बाद से क्रूजर के पूरा होने की परियोजना वित्त की कमी के कारण जमी हुई है। दो हज़ार सत्रह में, क्रूजर को विमुद्रीकृत करने, और जहाज के शेष हिस्सों को बेचने का निर्णय लिया गया था।
नयी दिल्लीः राज्यसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी के आरोपों से घिरी कांग्रेस अपनों के विरोध तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति के कारण कई सीटों पर फंसती हुई नजर आ रही है और राजस्थान, महाराष्ट्र तथा हरियाणा में एक एक सीट पर उसकी मुश्किल ज्यादा ही बढ़ गई है। राज्य सभा की 57 सीटों के लिए 10 जून को चुनाव होना है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नाम का जो ऐलान किया है उसको लेकर पार्टी में शुरू से ही विरोध के स्वर उठ रहे हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा विरोध श्री इमरान प्रतापगढ़ी का हो रहा है। कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र से टिकट दिया है। उनको लेकर प्रदेश कांग्रेस के नेता पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी कड़ा पत्र लिखकर पूछ रहे हैं कि क्या इसी तरह से दरबारियों को टिकट दिया जाता रहेगा। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और नगमा प्रतागढ़ी भी श्री प्रतापगढ़ी को टिकट दिए जाने पर नारजगी जाहिर कर चुके हैं। श्री खेड़ा ने कहा कहा था कि शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अभिनेत्री नगमा ने और तीखे अंदाज में कहा कि हमारी 18 साल की तपस्या भी इमरान भाई के सामने कम रह गई। वह यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे कहा, "हमारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया जी ने व्यक्तिगत रूप से मुझे 2003-04 में राज्यसभा में भेजने के लिए आश्वासन दिया था। पार्टी नेता इमरान प्रतापगढ़ी को टिकट दिए जाने का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। कांग्रेस के लिए उसके शासन वाले राज्य राजस्थान में भी एक सीट पर मुश्किल हो रही है। उसने राज्य से तीन उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं लेकिन दिक्कत यह है कि इनमें से कोई भी राजस्थान का रहने वाला नहीं है और वहां बाहरी उम्मीदवार बताकर उनका विरोध हो रहा है। राज्य में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है और वहां से कांग्रेस दो सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर सकती है लेकिन उसने अपने तीन नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बीच यहां भाजपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उद्योगपति सुभाष चंद्रा मुकाबले में आ गये हैं। वह पहले हरियाणा से राज्य सभा के निर्दलीय सदस्य रहे हैं लेकिन इस बार राजस्थान में उनके आने से मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस में बाहरी लोगों को टिकट देने के बगावती स्वर के बीच उद्योगपति सुभाष चंद्रा खुद को राजस्थान का बेटा बताकर राज्यसभा में पहुंचना चाहते हैं। उनके चुनाव में उतरने से कांग्रेस में खलबली मच गई है और यदि कांग्रेस का उम्मीदवार हारता है तो उसके लिए शर्मिंदगी जैसी बात होगी। कांग्रेस के लिए हरियाणा में भी संकट की स्थिति पैदा हो गई है और वहां महासचिव अजय माकन फंसते हुए नजर आ रहे हैं। वहां दो सीटों पर राज्यसभा के चुनाव हैं। भाजपा की एक सीट पक्की है, लेकिन दूसरी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर उसने कांग्रेस की मुश्किल बढा दी है। उम्मीदवार अजय माकन को फंसा दिया है (वार्ता)
नयी दिल्लीः राज्यसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी के आरोपों से घिरी कांग्रेस अपनों के विरोध तथा भारतीय जनता पार्टी की रणनीति के कारण कई सीटों पर फंसती हुई नजर आ रही है और राजस्थान, महाराष्ट्र तथा हरियाणा में एक एक सीट पर उसकी मुश्किल ज्यादा ही बढ़ गई है। राज्य सभा की सत्तावन सीटों के लिए दस जून को चुनाव होना है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नाम का जो ऐलान किया है उसको लेकर पार्टी में शुरू से ही विरोध के स्वर उठ रहे हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा विरोध श्री इमरान प्रतापगढ़ी का हो रहा है। कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र से टिकट दिया है। उनको लेकर प्रदेश कांग्रेस के नेता पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी कड़ा पत्र लिखकर पूछ रहे हैं कि क्या इसी तरह से दरबारियों को टिकट दिया जाता रहेगा। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और नगमा प्रतागढ़ी भी श्री प्रतापगढ़ी को टिकट दिए जाने पर नारजगी जाहिर कर चुके हैं। श्री खेड़ा ने कहा कहा था कि शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अभिनेत्री नगमा ने और तीखे अंदाज में कहा कि हमारी अट्ठारह साल की तपस्या भी इमरान भाई के सामने कम रह गई। वह यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे कहा, "हमारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया जी ने व्यक्तिगत रूप से मुझे दो हज़ार तीन-चार में राज्यसभा में भेजने के लिए आश्वासन दिया था। पार्टी नेता इमरान प्रतापगढ़ी को टिकट दिए जाने का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। कांग्रेस के लिए उसके शासन वाले राज्य राजस्थान में भी एक सीट पर मुश्किल हो रही है। उसने राज्य से तीन उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं लेकिन दिक्कत यह है कि इनमें से कोई भी राजस्थान का रहने वाला नहीं है और वहां बाहरी उम्मीदवार बताकर उनका विरोध हो रहा है। राज्य में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है और वहां से कांग्रेस दो सीटों पर आसानी से जीत हासिल कर सकती है लेकिन उसने अपने तीन नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा है। इस बीच यहां भाजपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उद्योगपति सुभाष चंद्रा मुकाबले में आ गये हैं। वह पहले हरियाणा से राज्य सभा के निर्दलीय सदस्य रहे हैं लेकिन इस बार राजस्थान में उनके आने से मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस में बाहरी लोगों को टिकट देने के बगावती स्वर के बीच उद्योगपति सुभाष चंद्रा खुद को राजस्थान का बेटा बताकर राज्यसभा में पहुंचना चाहते हैं। उनके चुनाव में उतरने से कांग्रेस में खलबली मच गई है और यदि कांग्रेस का उम्मीदवार हारता है तो उसके लिए शर्मिंदगी जैसी बात होगी। कांग्रेस के लिए हरियाणा में भी संकट की स्थिति पैदा हो गई है और वहां महासचिव अजय माकन फंसते हुए नजर आ रहे हैं। वहां दो सीटों पर राज्यसभा के चुनाव हैं। भाजपा की एक सीट पक्की है, लेकिन दूसरी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर उसने कांग्रेस की मुश्किल बढा दी है। उम्मीदवार अजय माकन को फंसा दिया है
रोहित शर्मा ने ओपनिंग को लेकर किया बड़ा खुलासा, कहा- मेरा गेम ऐसा ही है. . पैड पहनो और सीधे. . Ind Vs SA 1st Test: बुधवार को विजाग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन भारत के नए टेस्ट सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने शानदार शतक लगाया। टेस्ट ओपनर के तौर पर शतक जड़ने के बाद रोहित शर्मा काफी खुश थे। पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने प्रेस कांफ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। Ind Vs SA 1st Test Rohit Sharma Test hundred भारत के नए टेस्ट सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के शतक से बुधवार को विजाग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन भारत मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। खराब रोशनी और बाद हुई बारिश की वजह से पहले दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने बिना किसी नुकसान के 202 रन बना लिए हैं। रोहित 115 रन और मयंक अग्रवाल 84 रन बनाकर नॉटआउट है। टेस्ट ओपनर के तौर पर शतक जड़ने के बाद रोहित शर्मा काफी खुश थे। पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने प्रेस कांफ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। एक सवाल के जवाब में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने कहा कि पिच पर अधिक बाउंस नहीं था तो मैंने तय किया कि गेंद के पास ज्यादा से ज्यादा पहुंचने की कोशिश करनी है। बीच के ओवरों में मैं मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) से कहता रहा कि गैप में कैसे शॉट खेलकर स्ट्राइक रोटेट करनी है। उन्होंने आगे कहा कि मेरा गेम ऐसा ही है कि पैड पहनकर सीधे जाकर बैटिंग करो, मुझे ये ही सूट करता है। ओपनिंग करते हुए आपका माइंड फ्रेश रहता है। आपको पता है कि नई बॉल का सामना करना है तो फील्डर कहां-कहां होते हैं। ऐसे में प्लान सिंपल होता है। मैं बोल नहीं पाऊंगा लेकिन ये ही मेरे गेम को सूट करता है कि पैड पहनो और अंदर जाओ। मैंने ऐसा ही किया। रोहित शर्मा ने जब टेस्ट में ओपनिंग को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं भविष्य और बीते हुए समय के बारे में नहीं सोच रहा था। मेरे पास ओपनिंग का सुनहरा मौका था। मुझे अवसर दिया गया और मैं इसके लिए तैयार था। मैं टीम मैनेजमेंट का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे ये मौका दिया। बता दें कि रोहित शर्मा का टेस्ट क्रिकेट में यह चौथा शतक था और ये सभी शतक घरेलू सरजमीं पर आए हैं। टेस्ट क्रिकेट में लगभग दो साल बाद उनका शतक आया है। रोहित शर्मा अपने 115 रनों की पारी में 12 चौके और 5 छक्के लगा चुके हैं। इस शतकीय पारी के दौरान रोहित ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।
रोहित शर्मा ने ओपनिंग को लेकर किया बड़ा खुलासा, कहा- मेरा गेम ऐसा ही है. . पैड पहनो और सीधे. . Ind Vs SA एकst Test: बुधवार को विजाग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन भारत के नए टेस्ट सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने शानदार शतक लगाया। टेस्ट ओपनर के तौर पर शतक जड़ने के बाद रोहित शर्मा काफी खुश थे। पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद रोहित शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। Ind Vs SA एकst Test Rohit Sharma Test hundred भारत के नए टेस्ट सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के शतक से बुधवार को विजाग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के पहले दिन भारत मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। खराब रोशनी और बाद हुई बारिश की वजह से पहले दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने बिना किसी नुकसान के दो सौ दो रन बना लिए हैं। रोहित एक सौ पंद्रह रन और मयंक अग्रवाल चौरासी रन बनाकर नॉटआउट है। टेस्ट ओपनर के तौर पर शतक जड़ने के बाद रोहित शर्मा काफी खुश थे। पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद रोहित शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में कई सवालों के जवाब दिए। एक सवाल के जवाब में रोहित शर्मा ने कहा कि पिच पर अधिक बाउंस नहीं था तो मैंने तय किया कि गेंद के पास ज्यादा से ज्यादा पहुंचने की कोशिश करनी है। बीच के ओवरों में मैं मयंक अग्रवाल से कहता रहा कि गैप में कैसे शॉट खेलकर स्ट्राइक रोटेट करनी है। उन्होंने आगे कहा कि मेरा गेम ऐसा ही है कि पैड पहनकर सीधे जाकर बैटिंग करो, मुझे ये ही सूट करता है। ओपनिंग करते हुए आपका माइंड फ्रेश रहता है। आपको पता है कि नई बॉल का सामना करना है तो फील्डर कहां-कहां होते हैं। ऐसे में प्लान सिंपल होता है। मैं बोल नहीं पाऊंगा लेकिन ये ही मेरे गेम को सूट करता है कि पैड पहनो और अंदर जाओ। मैंने ऐसा ही किया। रोहित शर्मा ने जब टेस्ट में ओपनिंग को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं भविष्य और बीते हुए समय के बारे में नहीं सोच रहा था। मेरे पास ओपनिंग का सुनहरा मौका था। मुझे अवसर दिया गया और मैं इसके लिए तैयार था। मैं टीम मैनेजमेंट का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे ये मौका दिया। बता दें कि रोहित शर्मा का टेस्ट क्रिकेट में यह चौथा शतक था और ये सभी शतक घरेलू सरजमीं पर आए हैं। टेस्ट क्रिकेट में लगभग दो साल बाद उनका शतक आया है। रोहित शर्मा अपने एक सौ पंद्रह रनों की पारी में बारह चौके और पाँच छक्के लगा चुके हैं। इस शतकीय पारी के दौरान रोहित ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।
दाड़लाघाट - राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में मंगलवार को एनएसयूआई दाड़लाघाट यूनिट द्वारा नए छात्र-छात्राओं के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्यातिथि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव संजय अवस्थी व संगठक प्रदेश कांग्रेस सेवादल सुशील ठाकुर ने शिरकत की। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं मुख्यातिथि ने सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एनएसयूआई यूनिट दाड़लाघाट के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर मुख्यातिथि व अन्य गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान गायक अर्जुन गोपाल ने मेरे रूह का परिंदा फड़-फड़ाये गाने से आगाज किया वहीं उन्होंने सूफी गीतों से सबका मन मोह लिया। इसके बाद उर्वशी ने स्टेज पर अपनी एंट्री करते ही तू कर एतबार मेरा, मैं करू इंतजार तेरा से गाना गाया। इसके अलावा सुंदरनगर से आए कलाकार विवेक मौर्य ने तूने ऐसा क्या कर डाला गाने से शुरुआत की। इसके साथ उन्होंने पंजाबी गाने गाकर खूब वाहवाही लूटी। मुख्यातिथि संजय अवस्थी ने अपने संबोधन में भव्य कार्यक्रम के आयोजन के लिए एनएसयूआई दाड़लाघाट यूनिट की सराहना की। इसके साथ मुख्यतिथि ने मिस्टर प्रेशर का अवार्ड नरेंद्र, मिस फे्रशर ऊर्वशी,बेस्ट जोड़ी व ,बेस्ट मिस्टर पर्सनेलिटी, मिस पर्सनेलिटी,मिस्टर रनअप, मिस रनअप को स्मृति चिन्ह देकर सम्मनित किया।
दाड़लाघाट - राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में मंगलवार को एनएसयूआई दाड़लाघाट यूनिट द्वारा नए छात्र-छात्राओं के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्यातिथि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव संजय अवस्थी व संगठक प्रदेश कांग्रेस सेवादल सुशील ठाकुर ने शिरकत की। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उनका भव्य स्वागत किया। वहीं मुख्यातिथि ने सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एनएसयूआई यूनिट दाड़लाघाट के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर मुख्यातिथि व अन्य गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान गायक अर्जुन गोपाल ने मेरे रूह का परिंदा फड़-फड़ाये गाने से आगाज किया वहीं उन्होंने सूफी गीतों से सबका मन मोह लिया। इसके बाद उर्वशी ने स्टेज पर अपनी एंट्री करते ही तू कर एतबार मेरा, मैं करू इंतजार तेरा से गाना गाया। इसके अलावा सुंदरनगर से आए कलाकार विवेक मौर्य ने तूने ऐसा क्या कर डाला गाने से शुरुआत की। इसके साथ उन्होंने पंजाबी गाने गाकर खूब वाहवाही लूटी। मुख्यातिथि संजय अवस्थी ने अपने संबोधन में भव्य कार्यक्रम के आयोजन के लिए एनएसयूआई दाड़लाघाट यूनिट की सराहना की। इसके साथ मुख्यतिथि ने मिस्टर प्रेशर का अवार्ड नरेंद्र, मिस फे्रशर ऊर्वशी,बेस्ट जोड़ी व ,बेस्ट मिस्टर पर्सनेलिटी, मिस पर्सनेलिटी,मिस्टर रनअप, मिस रनअप को स्मृति चिन्ह देकर सम्मनित किया।
सौन्दर नह रुरुने खोज खोज कर सर्पों की हत्या की और क्रोध के कारण अपनी प्रिय तपस्या की रक्षा नहीं की ॥३७॥ नता शशाङ्कस्य यशोगुणाको बुधस्य सूनुर्विबुधप्रभावः । तथोर्वशीमप्सरसं विचिन्त्य राजर्षिरुन्मादमगच्छदैडः ।।३८।। चन्द्रमा का नाती, बुध का पुत्र, देवता के समान प्रभावशाली, यशस्वी और गुणवान् राजर्षि ऐड उर्वशी अप्सरा का चिन्तन कर उन्मत्त हो गया ॥३८॥ रक्तो गिरमूर्धनि मेनकायां कामात्मकत्वाच्च स तालजङ्घः । पाहेन विश्वावसुना सरोषं वज्रण हिन्ताल इवाभिजन ।।३९ ।। पर्वत के शिखर पर मेनका के प्रति अपनी कामासक्ति के कारण वह नालजङ्घ अनुरक्त हो गया और विश्वावसु ने क्रोधपूर्वक अपने पाँव से उसपर प्रहार किया, जैसे कि वज्र हिन्ताल वृक्ष पर श्राघात करता है ॥३९॥ नाशं गतायां परमाङ्गनायां गङ्गाजलेऽनङ्गपरीतचेताः । जहूनुश्च गङ्गां नृपतिभु जाभ्यां रुरोध मैनाक इवाचलेन्द्रः ॥४०॥ गंगा के जल में अपनी उत्तम पत्नी के नष्ट होने ( डूब मरने ) पर राजा जहूनु ने पर्वत श्रेष्ठ मैनाक के समान अपनी भुजाओं से गंगा को रोक लिया ।।४०।। नृपश्च गङ्गाविरहाज्जुघूर्ण गङ्गाम्भसा साल इवात्तमूलः । कुन्तपदीपः प्रतिपस्य सूनुः श्रीमत्तनुः शन्तनुरस्वतन्त्रः ॥४१॥ प्रतिप का पुत्र, अपने कुलका प्रदीप-स्वरूप, सुन्दर शरीर वाला राजा शन्तनु अपनी पत्नी गङ्गा से बिछुड़ कर अधीर हो ऐसे चक्कर
सौन्दर नह रुरुने खोज खोज कर सर्पों की हत्या की और क्रोध के कारण अपनी प्रिय तपस्या की रक्षा नहीं की ॥सैंतीस॥ नता शशाङ्कस्य यशोगुणाको बुधस्य सूनुर्विबुधप्रभावः । तथोर्वशीमप्सरसं विचिन्त्य राजर्षिरुन्मादमगच्छदैडः ।।अड़तीस।। चन्द्रमा का नाती, बुध का पुत्र, देवता के समान प्रभावशाली, यशस्वी और गुणवान् राजर्षि ऐड उर्वशी अप्सरा का चिन्तन कर उन्मत्त हो गया ॥अड़तीस॥ रक्तो गिरमूर्धनि मेनकायां कामात्मकत्वाच्च स तालजङ्घः । पाहेन विश्वावसुना सरोषं वज्रण हिन्ताल इवाभिजन ।।उनतालीस ।। पर्वत के शिखर पर मेनका के प्रति अपनी कामासक्ति के कारण वह नालजङ्घ अनुरक्त हो गया और विश्वावसु ने क्रोधपूर्वक अपने पाँव से उसपर प्रहार किया, जैसे कि वज्र हिन्ताल वृक्ष पर श्राघात करता है ॥उनतालीस॥ नाशं गतायां परमाङ्गनायां गङ्गाजलेऽनङ्गपरीतचेताः । जहूनुश्च गङ्गां नृपतिभु जाभ्यां रुरोध मैनाक इवाचलेन्द्रः ॥चालीस॥ गंगा के जल में अपनी उत्तम पत्नी के नष्ट होने पर राजा जहूनु ने पर्वत श्रेष्ठ मैनाक के समान अपनी भुजाओं से गंगा को रोक लिया ।।चालीस।। नृपश्च गङ्गाविरहाज्जुघूर्ण गङ्गाम्भसा साल इवात्तमूलः । कुन्तपदीपः प्रतिपस्य सूनुः श्रीमत्तनुः शन्तनुरस्वतन्त्रः ॥इकतालीस॥ प्रतिप का पुत्र, अपने कुलका प्रदीप-स्वरूप, सुन्दर शरीर वाला राजा शन्तनु अपनी पत्नी गङ्गा से बिछुड़ कर अधीर हो ऐसे चक्कर
रूसी संघ के सैन्य-औद्योगिक आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष, साथ ही रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि पश्चिमी देशों में यह स्वीकार करने का साहस नहीं है कि उनकी प्रतिबंध नीति विफल हो गई है। राजनेता ने इस बारे में अपने टेलीग्राम चैनल में लिखा। यहां बताया गया है कि मंत्रियों के रूसी कैबिनेट के पूर्व प्रमुख ने क्या हो रहा था पर टिप्पणी कीः पश्चिमी देश इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर सकते कि उनके "कठोर" प्रतिबंध वांछित प्रभाव दिए बिना विफल हो गए हैं। इसके विपरीत, यह सब हमें लाभान्वित भी करता है, क्योंकि हम अधिकांश औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं को अपने घरेलू सामानों से बदलने में कामयाब रहे, और हम एशियाई राज्यों की कीमत पर लापता लोगों के नुकसान की भरपाई करने में कामयाब रहे। साथ ही, समानांतर आयात भी संचालित होता है, जिसके माध्यम से वही पश्चिमी ब्रांड हमारे पास आते हैं, जिनके मालिकों को इससे कोई लाभ नहीं होता है। इसके अलावा, मास्को पर आर्थिक प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया के रूप में, उन्होंने पश्चिमी बौद्धिक संपदा के उपयोग के लिए नए नियमों को अपनाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें लाइसेंस और रॉयल्टी का भुगतान न करना शामिल था। रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष के अनुसार, यह उपाय सभी उत्पादों पर लागू होना चाहिएः प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया के रूप में फिल्मों से लेकर औद्योगिक सॉफ्टवेयर तक। इस संबंध में, उन्होंने उन डेवलपर्स के प्रयासों की प्रशंसा की जिनके उत्पाद बिना संबंधित लाइसेंस के उत्पाद के उपयोग की अनुमति देते हैं। मेदवेदेव ने सारांशित किया। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
रूसी संघ के सैन्य-औद्योगिक आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष, साथ ही रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि पश्चिमी देशों में यह स्वीकार करने का साहस नहीं है कि उनकी प्रतिबंध नीति विफल हो गई है। राजनेता ने इस बारे में अपने टेलीग्राम चैनल में लिखा। यहां बताया गया है कि मंत्रियों के रूसी कैबिनेट के पूर्व प्रमुख ने क्या हो रहा था पर टिप्पणी कीः पश्चिमी देश इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर सकते कि उनके "कठोर" प्रतिबंध वांछित प्रभाव दिए बिना विफल हो गए हैं। इसके विपरीत, यह सब हमें लाभान्वित भी करता है, क्योंकि हम अधिकांश औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं को अपने घरेलू सामानों से बदलने में कामयाब रहे, और हम एशियाई राज्यों की कीमत पर लापता लोगों के नुकसान की भरपाई करने में कामयाब रहे। साथ ही, समानांतर आयात भी संचालित होता है, जिसके माध्यम से वही पश्चिमी ब्रांड हमारे पास आते हैं, जिनके मालिकों को इससे कोई लाभ नहीं होता है। इसके अलावा, मास्को पर आर्थिक प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया के रूप में, उन्होंने पश्चिमी बौद्धिक संपदा के उपयोग के लिए नए नियमों को अपनाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें लाइसेंस और रॉयल्टी का भुगतान न करना शामिल था। रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष के अनुसार, यह उपाय सभी उत्पादों पर लागू होना चाहिएः प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया के रूप में फिल्मों से लेकर औद्योगिक सॉफ्टवेयर तक। इस संबंध में, उन्होंने उन डेवलपर्स के प्रयासों की प्रशंसा की जिनके उत्पाद बिना संबंधित लाइसेंस के उत्पाद के उपयोग की अनुमति देते हैं। मेदवेदेव ने सारांशित किया। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
थाईलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा अपने खिलाफ मामले में अदालत का फैसला आने से पहले फरार हो गई हैं। उनकी पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने इसकी जानकारी दी। यिंगलक समर्थकों ने अदालती कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। अदालत के इस फैसले में उन्हें 10 साल जेल की सजा सुनाई जा सकती थी।
थाईलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा अपने खिलाफ मामले में अदालत का फैसला आने से पहले फरार हो गई हैं। उनकी पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने इसकी जानकारी दी। यिंगलक समर्थकों ने अदालती कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। अदालत के इस फैसले में उन्हें दस साल जेल की सजा सुनाई जा सकती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुसरी बार अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बन सकती है। इस दौरान चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर की खरीद पर मुहर लगने की भी संभावना है। आइए जानते हैं इन दोनों हेलीकॉप्टरों के खूबियों के बारे में। बोइंग सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी वायुसेना का एक जबर्दस्त हेलीकॉप्टर है जो भारी से भारी सामान उठाने के साथ ही एक बार में कई जवानों को किसी भी जगह आसानी से पहुंचाने में सक्षम है। इस हेलीकॉप्टर में दो इंजन लगे हैं जो इसे बेजोड़ ताकत और रफ्तार देते हैं। यह हेलीकॉप्टर 315 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। चिनूक हेलीकॉप्टर थल सीमा से लेकर समुद्री सीमा की भी निगरानी करने में सक्षम है। अगर भारत-अमेरिका की डील होती है तो जाहिर सी बात है कि इसके भारतीय वायु सेना की ताकत में अप्रत्याशित रुप से बढ़ोतरी होगी। इसकी क्षमता का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह टैंकर को भी आसानी से उठा सकता है। इससे भारतीय थल सेना को ऊंचे पहाड़ियों पर टैंकर और भारी सामान ले जाने में काफी मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुसरी बार अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बन सकती है। इस दौरान चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर की खरीद पर मुहर लगने की भी संभावना है। आइए जानते हैं इन दोनों हेलीकॉप्टरों के खूबियों के बारे में। बोइंग सीएच-सैंतालीस चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी वायुसेना का एक जबर्दस्त हेलीकॉप्टर है जो भारी से भारी सामान उठाने के साथ ही एक बार में कई जवानों को किसी भी जगह आसानी से पहुंचाने में सक्षम है। इस हेलीकॉप्टर में दो इंजन लगे हैं जो इसे बेजोड़ ताकत और रफ्तार देते हैं। यह हेलीकॉप्टर तीन सौ पंद्रह किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। चिनूक हेलीकॉप्टर थल सीमा से लेकर समुद्री सीमा की भी निगरानी करने में सक्षम है। अगर भारत-अमेरिका की डील होती है तो जाहिर सी बात है कि इसके भारतीय वायु सेना की ताकत में अप्रत्याशित रुप से बढ़ोतरी होगी। इसकी क्षमता का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह टैंकर को भी आसानी से उठा सकता है। इससे भारतीय थल सेना को ऊंचे पहाड़ियों पर टैंकर और भारी सामान ले जाने में काफी मदद मिलेगी।
सिवान. जिले में तेज रफ्तार एक बोलरो अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे एक पेड़ से टकरा गई। टक्कर के बाद बोलेरो गाड़ी के परखच्चे उड़ गये। घटना में गाड़ी में सवार करीब 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। इस बीच इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गयी। हादसे के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए आनन-फानन में लेकर सदर अस्पताल भेजा गया, जिसमें से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान 38 वर्षीय गायत्री देवी के रूप में हुई। वहीं हादसे में घायलों की पहचान एमएच नगर हसनपुरा थाना क्षेत्र के सरैया गांव के रहने वाले 45 वर्षीय विजय सिंह कुशवाहा, 22 वर्षीय पुत्र शिवम कुमार और उनके एक पड़ोसी भी गंभीर रूप से घायल हो गये। घटना के संबंध में बताया जाता है कि यह सभी लोग शादी समारोह से अपने घर लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी अचानक बेकाबू हो गई और एमएच नगर हसनपुरा थाना क्षेत्र के पेट्रोल पम्प के समीप अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे करीब 5 फीट गड्ढे में पेड़ से टकरा गई। हादसे में बोलेरो गाड़ी के परखच्चे उड़ गये। घटना के बाद सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर एक-एक कर सभी को दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी से बाहर निकाला। एक निजी वाहन में भरकर आनन-फानन में हसनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए लाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी को सिवान सदर अस्पताल रेफर कर दिया है। घटना के संबंध में स्थानीय कुछ लोगों ने बताया कि घने कोहरे की वजह से चालक विजय कुशवाहा को सड़क दिखाई नहीं दिया। इसके कारण गाड़ी सड़क के किनारे पेड़ से जाकर टकरा गयी।
सिवान. जिले में तेज रफ्तार एक बोलरो अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे एक पेड़ से टकरा गई। टक्कर के बाद बोलेरो गाड़ी के परखच्चे उड़ गये। घटना में गाड़ी में सवार करीब पाँच लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। इस बीच इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गयी। हादसे के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए आनन-फानन में लेकर सदर अस्पताल भेजा गया, जिसमें से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान अड़तीस वर्षीय गायत्री देवी के रूप में हुई। वहीं हादसे में घायलों की पहचान एमएच नगर हसनपुरा थाना क्षेत्र के सरैया गांव के रहने वाले पैंतालीस वर्षीय विजय सिंह कुशवाहा, बाईस वर्षीय पुत्र शिवम कुमार और उनके एक पड़ोसी भी गंभीर रूप से घायल हो गये। घटना के संबंध में बताया जाता है कि यह सभी लोग शादी समारोह से अपने घर लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी अचानक बेकाबू हो गई और एमएच नगर हसनपुरा थाना क्षेत्र के पेट्रोल पम्प के समीप अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे करीब पाँच फीट गड्ढे में पेड़ से टकरा गई। हादसे में बोलेरो गाड़ी के परखच्चे उड़ गये। घटना के बाद सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर एक-एक कर सभी को दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी से बाहर निकाला। एक निजी वाहन में भरकर आनन-फानन में हसनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए लाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी को सिवान सदर अस्पताल रेफर कर दिया है। घटना के संबंध में स्थानीय कुछ लोगों ने बताया कि घने कोहरे की वजह से चालक विजय कुशवाहा को सड़क दिखाई नहीं दिया। इसके कारण गाड़ी सड़क के किनारे पेड़ से जाकर टकरा गयी।
बरही (हजारीबाग) : बरही के परियोजना बालिका उच्च विद्यालय बरही, प्लस टू उच्च विद्यालय, बरही एवं परियोजना प्लस टू उच्च विद्यालय गोरियाकरमा में बुधवार को शिक्षक अभिभावक बैठक हुई। बैठक में मुख्य रूप से समुदाय, माता-पिता, जनप्रतिनिधि एवं शिक्षकों को एक मंच पर लाकर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर पर चर्चा किया गया। कार्यक्रम में कोविड-19 के मानकों का पालन, सामाजिक व्यवहार पर चर्चा, विद्यार्थियों के मूल्यांकन का प्रस्तुतीकरण, छिजित व अनियमित उपस्थिति वाले बच्चों को चिन्हित कर उसके पुर्ननामांकन व नियमित उपस्थिति पर विचार, विद्यार्थियों के उपलब्धि स्तर को बढ़ाने के लिए शिक्षक व अभिभावकों द्वारा संकल्प आदि पर विचार विमर्श किया गया। परियोजना बालिका उच्च विद्यालय : परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, बरही में बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष प्रमोद विश्वकर्मा व संचालन प्रधानाध्यापक सह सचिव रविकांत ओम ने की। बैठक में शिक्षक सज्जाद अहमद, संजय कुमार पासवान, ज्योति कुमारी, सुनीता कुमारी, मोनीता कुमारी, बिनोद कुमार, कमलेश कुमार सिंहा, लिपिक रेणु देवी, खेमलाल ठाकुर सहित अभिभावक बसंत यादव, रीना देवी, शहीदा खातून, राकेश पाठक, राजकिशोर प्रसाद, होरिल साव, राहुल राणा, अनिता देवी आदि भारी संख्या में शिक्षक अभिभावक शामिल हुए। प्लस टू उच्च विद्यालय : राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय, बरही मैं बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष नरेश सिंह व संचालन प्रधानाध्यापक सह सचिव शिव कुमार राम ने किया। अध्यक्ष नरेश सिंह ने कहा कि उनके विद्यालय में करीब 3400 विद्यार्थी हैं जबकि शिक्षकों की संख्या मात्र 17 है। सबसे भयावह स्थिति इंटर के विद्यार्थियों के लिए है जिसमें कुल 2700 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और शिक्षक मात्र 10 हैं। वही जर्जर भवन व समुचित रूप से चार दिवारी निर्माण पर भी विचार रखा। बैठक में विधायक के मनोनीत शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि गाजो यादव, अब्दुल मनान वारसी, मो रुस्तम, सुनील साहू आदि शामिल हुए। उच्च विद्यालय गोरियाकरमा : परियोजना प्लस टू उच्च विद्यालय गोरियाकरमा मैं अभिभावक शिक्षक गोष्टी धूमधाम से किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानाध्यापक सह सचिव राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों को पठन-पाठन का जिम्मेवारी शिक्षकों की है, लेकिन अभिभावक भी अपनी जिम्मेवारी को गंभीरतापूर्वक निभाएं। गोष्ठी के दौरान विद्यालय द्वारा आयोजित खेलकूद, सांस्कृतिक, भाषण, पेंटिंग आदि में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के बीच अतिथियों, शिक्षक व अभिभावकों द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुखिया मनोज कुमार, जिला परिषद संतोष कुमार, अभिभावक अब्दुल कयूम आदि ने संबोधित किया। मंच संचालन सहायक शिक्षक बमबम कुमार राम व धन्यवाद ज्ञापन वरीय शिक्षक बसंत सिंह ने की।
बरही : बरही के परियोजना बालिका उच्च विद्यालय बरही, प्लस टू उच्च विद्यालय, बरही एवं परियोजना प्लस टू उच्च विद्यालय गोरियाकरमा में बुधवार को शिक्षक अभिभावक बैठक हुई। बैठक में मुख्य रूप से समुदाय, माता-पिता, जनप्रतिनिधि एवं शिक्षकों को एक मंच पर लाकर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर पर चर्चा किया गया। कार्यक्रम में कोविड-उन्नीस के मानकों का पालन, सामाजिक व्यवहार पर चर्चा, विद्यार्थियों के मूल्यांकन का प्रस्तुतीकरण, छिजित व अनियमित उपस्थिति वाले बच्चों को चिन्हित कर उसके पुर्ननामांकन व नियमित उपस्थिति पर विचार, विद्यार्थियों के उपलब्धि स्तर को बढ़ाने के लिए शिक्षक व अभिभावकों द्वारा संकल्प आदि पर विचार विमर्श किया गया। परियोजना बालिका उच्च विद्यालय : परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, बरही में बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष प्रमोद विश्वकर्मा व संचालन प्रधानाध्यापक सह सचिव रविकांत ओम ने की। बैठक में शिक्षक सज्जाद अहमद, संजय कुमार पासवान, ज्योति कुमारी, सुनीता कुमारी, मोनीता कुमारी, बिनोद कुमार, कमलेश कुमार सिंहा, लिपिक रेणु देवी, खेमलाल ठाकुर सहित अभिभावक बसंत यादव, रीना देवी, शहीदा खातून, राकेश पाठक, राजकिशोर प्रसाद, होरिल साव, राहुल राणा, अनिता देवी आदि भारी संख्या में शिक्षक अभिभावक शामिल हुए। प्लस टू उच्च विद्यालय : राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय, बरही मैं बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष नरेश सिंह व संचालन प्रधानाध्यापक सह सचिव शिव कुमार राम ने किया। अध्यक्ष नरेश सिंह ने कहा कि उनके विद्यालय में करीब तीन हज़ार चार सौ विद्यार्थी हैं जबकि शिक्षकों की संख्या मात्र सत्रह है। सबसे भयावह स्थिति इंटर के विद्यार्थियों के लिए है जिसमें कुल दो हज़ार सात सौ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और शिक्षक मात्र दस हैं। वही जर्जर भवन व समुचित रूप से चार दिवारी निर्माण पर भी विचार रखा। बैठक में विधायक के मनोनीत शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि गाजो यादव, अब्दुल मनान वारसी, मो रुस्तम, सुनील साहू आदि शामिल हुए। उच्च विद्यालय गोरियाकरमा : परियोजना प्लस टू उच्च विद्यालय गोरियाकरमा मैं अभिभावक शिक्षक गोष्टी धूमधाम से किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानाध्यापक सह सचिव राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों को पठन-पाठन का जिम्मेवारी शिक्षकों की है, लेकिन अभिभावक भी अपनी जिम्मेवारी को गंभीरतापूर्वक निभाएं। गोष्ठी के दौरान विद्यालय द्वारा आयोजित खेलकूद, सांस्कृतिक, भाषण, पेंटिंग आदि में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के बीच अतिथियों, शिक्षक व अभिभावकों द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुखिया मनोज कुमार, जिला परिषद संतोष कुमार, अभिभावक अब्दुल कयूम आदि ने संबोधित किया। मंच संचालन सहायक शिक्षक बमबम कुमार राम व धन्यवाद ज्ञापन वरीय शिक्षक बसंत सिंह ने की।
समाचार पत्र 'कोलंबो पेज' की एक रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के बंदरगाह, नौवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री निमल सिरिपाल डी सिल्वा ने कहा कि अगले साल जनवरी के मध्य में यह नौका सेवा शुरू करने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जाफना में स्थित कांकेसंतुरई और पुडुचेरी के बीच नौका चलाई जाएगी। 'डेली मिरर' के मुताबिक, डी सिल्वा ने कहा कि भारत सरकार ने भी इस नौका सेवा पर अपनी सहमति दे दी है। उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक जाफना में व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हैं। इस तरह के संपर्क से विदेशी राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इससे बौद्ध तीर्थयात्रियों को भी सुविधा होगी। " मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत से श्रीलंका के त्रिंकोमाली और कोलंबो तक यात्री परिवहन सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब तक तलाइमन्नार और भारत के बीच नौका सेवा शुरू करने के बारे में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है।
समाचार पत्र 'कोलंबो पेज' की एक रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के बंदरगाह, नौवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री निमल सिरिपाल डी सिल्वा ने कहा कि अगले साल जनवरी के मध्य में यह नौका सेवा शुरू करने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जाफना में स्थित कांकेसंतुरई और पुडुचेरी के बीच नौका चलाई जाएगी। 'डेली मिरर' के मुताबिक, डी सिल्वा ने कहा कि भारत सरकार ने भी इस नौका सेवा पर अपनी सहमति दे दी है। उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक जाफना में व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हैं। इस तरह के संपर्क से विदेशी राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इससे बौद्ध तीर्थयात्रियों को भी सुविधा होगी। " मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत से श्रीलंका के त्रिंकोमाली और कोलंबो तक यात्री परिवहन सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब तक तलाइमन्नार और भारत के बीच नौका सेवा शुरू करने के बारे में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है।
टालस्टॉय और टैगोर प्रभावित हैं। मनुष्यों के कार्य-कलाप, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और व्यक्तिगत भावनाओं का चित्रण करने में टालस्टाय और टैगोर दोनो ने ही कमाल कर दिखाया । मानव और उनके चतुर्दिक वातावरण की घटनाएं ही उनकी कलाकृतियो की उपादान है और उनके सफल चित्रण द्वारा उन्होंने नित्य परिवर्तनशील समाज और राष्ट्र के रूपातर को प्रत्यक्ष करने का प्रयास किया है । टालस्टाय की 'चाइल्डहुड, वायहुड एण्ड यूथ' ( Childhood, Boy - hood and Youth ) नामक पुस्तक में उच्च कोटि की बौद्धिक चेतना और जीवन के गम्भीर मर्म में पैठने की बलवती आकाक्षा दृष्टिगत होती है । यद्यपि उनकी अन्य रचनायें 'स्नोस्टार्म' (Snow Storm) 'पिलिकुश्का' (Pilikushka ) 'दि टु हसर्स' ( The two Hussars ) 'दि हिस्ट्री आफ हार्स' ( The History of Horse ) और 'फेमिली हेप्पीनेस' ( Family Happiness ) उतनी प्रसिद्ध नहीं है, तथापि उनमें तत्कालीन सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था मे छटपटाते व्यक्ति तथा रूढिवादी परम्पराओ और अन्धविश्वासो से प्रताडित मानव का अद्भुत पर्यवेक्षण शक्ति के साथ, सूक्ष्म चित्रण हुआ है । सामाजिकअव्यवस्थाये समाज और राष्ट्र को कितना खोखला और निर्जीव बना देती हैउनसे मानव की आत्मा कैसे मुक्त हो - इसी की सफल चेष्टा उनको रचनाओ मे सर्वत्र दिखाई देती है । टालस्टाय के दोनो विलक्षण महाग्रन्थो 'वार एण्ड पीस (War & Peace ) और 'अन्ना करेनिना' (Anna Kerenina) की रचना उनके विवाह के पश्चात् हुई । कुछ विद्वानो की सम्मति मे ये विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यास हैं, किन्तु यदि ऐसा न भी हो तो इतना तो निर्विवाद है कि विश्व के उपन्यासों में इनकी महत्ता सर्वमान्य है। 'वार एण्ड पीस' मे दो रूसी परिवारों का चित्रण और नेपोलियन द्वारा रूस पर आक्रमण दर्शाया गया है । उसकी विस्तृत पृष्ठभूमि में महाकाव्य को सो गरिमा, विकास और अतर्जीवन का गम्भीरतम इतिहास निगूढ़ है। उसके प्लान में जीवनदर्शन झलकता है और यह जीवन-दर्शन इतना व्यक्त है कि सारा उपन्यास विविध घटनाओ का एक चित्रपट सा ज्ञात होता है। इस वृहत उपन्यास में लेखक ने मानवीय दुना शक्ति के समन्वय का मूर्त रूप, चरित्र की तेजस्विता, आत्मविश्वास की एवं मानव हृदय में जो विभिन्न भावनाओं का अनवरत सघयं न रहा है उसका एक सूक्ष्म अन्वीक्षक की नाई, दिग्दर्शन कराया है। टालस्टाय की प्रतिभा की सीमाओ को लांघकर भाव की गहराइयों में रम गई है और प लालिस को विस्त कर भावानुभूति में पैठ जाने को आगा
टालस्टॉय और टैगोर प्रभावित हैं। मनुष्यों के कार्य-कलाप, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और व्यक्तिगत भावनाओं का चित्रण करने में टालस्टाय और टैगोर दोनो ने ही कमाल कर दिखाया । मानव और उनके चतुर्दिक वातावरण की घटनाएं ही उनकी कलाकृतियो की उपादान है और उनके सफल चित्रण द्वारा उन्होंने नित्य परिवर्तनशील समाज और राष्ट्र के रूपातर को प्रत्यक्ष करने का प्रयास किया है । टालस्टाय की 'चाइल्डहुड, वायहुड एण्ड यूथ' नामक पुस्तक में उच्च कोटि की बौद्धिक चेतना और जीवन के गम्भीर मर्म में पैठने की बलवती आकाक्षा दृष्टिगत होती है । यद्यपि उनकी अन्य रचनायें 'स्नोस्टार्म' 'पिलिकुश्का' 'दि टु हसर्स' 'दि हिस्ट्री आफ हार्स' और 'फेमिली हेप्पीनेस' उतनी प्रसिद्ध नहीं है, तथापि उनमें तत्कालीन सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था मे छटपटाते व्यक्ति तथा रूढिवादी परम्पराओ और अन्धविश्वासो से प्रताडित मानव का अद्भुत पर्यवेक्षण शक्ति के साथ, सूक्ष्म चित्रण हुआ है । सामाजिकअव्यवस्थाये समाज और राष्ट्र को कितना खोखला और निर्जीव बना देती हैउनसे मानव की आत्मा कैसे मुक्त हो - इसी की सफल चेष्टा उनको रचनाओ मे सर्वत्र दिखाई देती है । टालस्टाय के दोनो विलक्षण महाग्रन्थो 'वार एण्ड पीस और 'अन्ना करेनिना' की रचना उनके विवाह के पश्चात् हुई । कुछ विद्वानो की सम्मति मे ये विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यास हैं, किन्तु यदि ऐसा न भी हो तो इतना तो निर्विवाद है कि विश्व के उपन्यासों में इनकी महत्ता सर्वमान्य है। 'वार एण्ड पीस' मे दो रूसी परिवारों का चित्रण और नेपोलियन द्वारा रूस पर आक्रमण दर्शाया गया है । उसकी विस्तृत पृष्ठभूमि में महाकाव्य को सो गरिमा, विकास और अतर्जीवन का गम्भीरतम इतिहास निगूढ़ है। उसके प्लान में जीवनदर्शन झलकता है और यह जीवन-दर्शन इतना व्यक्त है कि सारा उपन्यास विविध घटनाओ का एक चित्रपट सा ज्ञात होता है। इस वृहत उपन्यास में लेखक ने मानवीय दुना शक्ति के समन्वय का मूर्त रूप, चरित्र की तेजस्विता, आत्मविश्वास की एवं मानव हृदय में जो विभिन्न भावनाओं का अनवरत सघयं न रहा है उसका एक सूक्ष्म अन्वीक्षक की नाई, दिग्दर्शन कराया है। टालस्टाय की प्रतिभा की सीमाओ को लांघकर भाव की गहराइयों में रम गई है और प लालिस को विस्त कर भावानुभूति में पैठ जाने को आगा
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया की प्रतिष्ठित आईएनए की वयोवृद्ध सेनानी अंजलाई पोन्नुसामी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहाः "मलेशिया की प्रतिष्ठित आईएनए की वयोवृद्ध सेनानी अंजलाई पोन्नुसामी जी के निधन से दुखी हूं। हम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके साहस और प्रेरक भूमिका को हमेशा याद रखेंगे। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना।" Read this release in:
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया की प्रतिष्ठित आईएनए की वयोवृद्ध सेनानी अंजलाई पोन्नुसामी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहाः "मलेशिया की प्रतिष्ठित आईएनए की वयोवृद्ध सेनानी अंजलाई पोन्नुसामी जी के निधन से दुखी हूं। हम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके साहस और प्रेरक भूमिका को हमेशा याद रखेंगे। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना।" Read this release in: