raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
PATNA: उत्तर प्रदेश का माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गयी। दोनों की हत्या मीडिया और पुलिस के सामने किये जाने को लेकर राजनीति तेज हो गयी है। इस वारदात को लेकर विपक्ष यूपी सरकार पर हमलावर है और योगी सरकार को घेरने में लगी है।
इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। वही बिहार में भी इस घटना को लेकर सिरायत गर्म गयी है। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने इस घटना क लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार पुलिस को चुड़ी ना पहनाएं।
पटना से समस्तीपुर जाने के दौरान हाजीपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सम्राट चौधरी का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार पुलिस को भी खुली छूट दी जानी चाहिए। पुलिस को चुड़ी पहनाने का काम नहीं करना चाहिए। पुलिस को छूट देंगे तब ही कानून का राज स्थापित हो सकेगा।
बता दें कि बाहुबली अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में काल्विन अस्पताल के पास शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद अब यूपी पुलिस ने इस मामले में शामिल आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। इसके साथ ही प्रयागराज में धारा 144 लागू कर दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, माफिया अतीक और उसके भाई को गोली मारने वाले तीनों हमलावर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हमलावरों को थाने ले जाया गया है। इस बीच एक सिपाही भी घायल हो गया। घायल सिपाही को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं, गिरफ्तार किए गए तीनों हमलावरों के नाम भी सामने आ गए हैं। अतीक अहमद पर गोली चलाने वाले हमलावरों में अरुण मौर्या, नवीन तिवारी और सोनू का नाम शामिल है।
बताया जा रहा है कि, अज्ञात वाहनों से आए हमलावर इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही बाहुबली की हत्या के बाद जिले की सीमा को सील कर दिया गया है। वहीं, मौके पर पुलिस के साथ आरएएफ को भी बुला लिया गया है। शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और आरएएफ के जवान तैनात कर दिए गए हैं। शहर में दंगे की स्थिति पनप रही है।
बता दें कि अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए लाया गया था। यही पर पत्रकार बनकर तीन हमलावर पहुंचे। अन्य पत्रकार जब अतीक से बात करने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान एक हमलावर ने सबसे पहले अतीक की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता अशरफ को भी गोली मार दी गई। अशरफ को आगे और पीछे दोनों तरफ से हमला किया गया। इस दौरान अतीक और अशरफ की मौके पर ही मौत हो गयी।
|
PATNA: उत्तर प्रदेश का माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गयी। दोनों की हत्या मीडिया और पुलिस के सामने किये जाने को लेकर राजनीति तेज हो गयी है। इस वारदात को लेकर विपक्ष यूपी सरकार पर हमलावर है और योगी सरकार को घेरने में लगी है। इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। वही बिहार में भी इस घटना को लेकर सिरायत गर्म गयी है। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने इस घटना क लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार पुलिस को चुड़ी ना पहनाएं। पटना से समस्तीपुर जाने के दौरान हाजीपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सम्राट चौधरी का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार पुलिस को भी खुली छूट दी जानी चाहिए। पुलिस को चुड़ी पहनाने का काम नहीं करना चाहिए। पुलिस को छूट देंगे तब ही कानून का राज स्थापित हो सकेगा। बता दें कि बाहुबली अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की प्रयागराज में काल्विन अस्पताल के पास शनिवार की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद अब यूपी पुलिस ने इस मामले में शामिल आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। इसके साथ ही प्रयागराज में धारा एक सौ चौंतालीस लागू कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, माफिया अतीक और उसके भाई को गोली मारने वाले तीनों हमलावर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हमलावरों को थाने ले जाया गया है। इस बीच एक सिपाही भी घायल हो गया। घायल सिपाही को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं, गिरफ्तार किए गए तीनों हमलावरों के नाम भी सामने आ गए हैं। अतीक अहमद पर गोली चलाने वाले हमलावरों में अरुण मौर्या, नवीन तिवारी और सोनू का नाम शामिल है। बताया जा रहा है कि, अज्ञात वाहनों से आए हमलावर इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही बाहुबली की हत्या के बाद जिले की सीमा को सील कर दिया गया है। वहीं, मौके पर पुलिस के साथ आरएएफ को भी बुला लिया गया है। शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और आरएएफ के जवान तैनात कर दिए गए हैं। शहर में दंगे की स्थिति पनप रही है। बता दें कि अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए लाया गया था। यही पर पत्रकार बनकर तीन हमलावर पहुंचे। अन्य पत्रकार जब अतीक से बात करने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान एक हमलावर ने सबसे पहले अतीक की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता अशरफ को भी गोली मार दी गई। अशरफ को आगे और पीछे दोनों तरफ से हमला किया गया। इस दौरान अतीक और अशरफ की मौके पर ही मौत हो गयी।
|
DEHRADUN: अगर आप अक्सर एटीएम से पैसा निकालते हैं तो सावधान, शहर में हाईटेक एटीएम फ्रॉड सक्रिय हैं। जो पलक झपकते ही आपके एटीएम का क्लोन तैयार कर आपके खाते से ऑनलाइन कैश उड़ा सकते हैं। शहर में ये फ्रॉड अब तक चार घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। हाईटेक ठगी के ये मामले सामने आने के बाद पुलिस और एसओजी पड़ताल में जुट गई है। एटीएम क्लोनिंग की इस टेक्निक का भी पुलिस पता कर रही है। ये आशंका भी जताई जा रही है कि हाईटेक फ्रॉड के इन मामलों में विदेशियों का भी हाथ हो सकता है।
एसएसपी देहरादून डा। सदानंद दाते ने बताया कि देहरादून में लगातार एक के बाद एक एटीएम क्लोनिंग के जरिए लोगों के अकाउंट हैक करने वाले गिरोह की तलाश में पुलिस जुटी है। यह गिरोह नेहरू कॉलोनी के धरमपुर, मोहकमपुर, राजपुर रोड और सहसपुर में चार घटनाओं को अंजाम दे चुका है। पहले इस तरह की घटनाएं मेट्रो सिटीज में ही देखने को मिलती थी, लेकिन अब देहरादून भी इस तरह के हाईटेक गिरोह के टारगेट पर है।
पुलिस एक्सपर्ट्स के अनुसार गिरोह बेहद शातिर तरीके से किसी एटीएम में सेटिंग बदलकर वहां स्क्रीमिंग वाला सॉफ्टवेयर लगा देता है। कुछ देर एटीएम के आस पास खड़े रहने के बाद जब कोई व्यक्ति अपना एटीएम पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल करता है तो वह उसे स्कैन कर पूरे डाटाबेस का क्लोन तैयार कर लेता है। बाद में पेन ड्राइव पर डाटा लेकर गिरोह के शातिर सदस्य अपने घर से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं।
राजेंद्र नगर निवासी प्रकाश वर्मा ने एसएसपी से शिकायत की, कि उनका बेटा मयंक कौशिक मर्चेट नेवी में है। उसका राजपुर रोड स्थित स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक में एनआरआई अकाउंट है। क्भ् सितंबर की रात मयंक के खाते से फ्0 किश्तों में दस-दस हजार कुल तीन लाख रुपए निकाल दिए गए। पैसे इंडिया से बाहर चीन में निकाले गए हैं।
नेहरू कॉलोनी थाने में बीते गुरुवार को लीलाधर पांडे ने तहरीर देते हुए बताया कि उनका स्टेट बैंक, मोहकमपुर में खाता है। यहां उनके खाते से 9 सितंबर को दिल्ली से अलग-अलग किश्तों में 80 हजार रुपए निकाल लिए गए हैं। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
नेहरू कॉलोनी थाना इलाके में रहने वाले सोहन लाल डबराल ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि उनका एसबीआई धर्मपुर में खाता है। क्0 सितंबर को उनके खाते से कई किश्तों में दो लाख रुपए निकाल लिए गए हैं। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
एटीएम फ्रॉड की ये नई तरकीब दून में देखने को मिली है। मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। हाईटेक ठगी के इन मामलों में पुलिस के हाथ कुछ इनपुट लगे हैं, जिनके आधार पर पड़ताल जारी है।
|
DEHRADUN: अगर आप अक्सर एटीएम से पैसा निकालते हैं तो सावधान, शहर में हाईटेक एटीएम फ्रॉड सक्रिय हैं। जो पलक झपकते ही आपके एटीएम का क्लोन तैयार कर आपके खाते से ऑनलाइन कैश उड़ा सकते हैं। शहर में ये फ्रॉड अब तक चार घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। हाईटेक ठगी के ये मामले सामने आने के बाद पुलिस और एसओजी पड़ताल में जुट गई है। एटीएम क्लोनिंग की इस टेक्निक का भी पुलिस पता कर रही है। ये आशंका भी जताई जा रही है कि हाईटेक फ्रॉड के इन मामलों में विदेशियों का भी हाथ हो सकता है। एसएसपी देहरादून डा। सदानंद दाते ने बताया कि देहरादून में लगातार एक के बाद एक एटीएम क्लोनिंग के जरिए लोगों के अकाउंट हैक करने वाले गिरोह की तलाश में पुलिस जुटी है। यह गिरोह नेहरू कॉलोनी के धरमपुर, मोहकमपुर, राजपुर रोड और सहसपुर में चार घटनाओं को अंजाम दे चुका है। पहले इस तरह की घटनाएं मेट्रो सिटीज में ही देखने को मिलती थी, लेकिन अब देहरादून भी इस तरह के हाईटेक गिरोह के टारगेट पर है। पुलिस एक्सपर्ट्स के अनुसार गिरोह बेहद शातिर तरीके से किसी एटीएम में सेटिंग बदलकर वहां स्क्रीमिंग वाला सॉफ्टवेयर लगा देता है। कुछ देर एटीएम के आस पास खड़े रहने के बाद जब कोई व्यक्ति अपना एटीएम पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल करता है तो वह उसे स्कैन कर पूरे डाटाबेस का क्लोन तैयार कर लेता है। बाद में पेन ड्राइव पर डाटा लेकर गिरोह के शातिर सदस्य अपने घर से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं। राजेंद्र नगर निवासी प्रकाश वर्मा ने एसएसपी से शिकायत की, कि उनका बेटा मयंक कौशिक मर्चेट नेवी में है। उसका राजपुर रोड स्थित स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक में एनआरआई अकाउंट है। क्भ् सितंबर की रात मयंक के खाते से फ्शून्य किश्तों में दस-दस हजार कुल तीन लाख रुपए निकाल दिए गए। पैसे इंडिया से बाहर चीन में निकाले गए हैं। नेहरू कॉलोनी थाने में बीते गुरुवार को लीलाधर पांडे ने तहरीर देते हुए बताया कि उनका स्टेट बैंक, मोहकमपुर में खाता है। यहां उनके खाते से नौ सितंबर को दिल्ली से अलग-अलग किश्तों में अस्सी हजार रुपए निकाल लिए गए हैं। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है, पुलिस मामले की जांच कर रही है। नेहरू कॉलोनी थाना इलाके में रहने वाले सोहन लाल डबराल ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि उनका एसबीआई धर्मपुर में खाता है। क्शून्य सितंबर को उनके खाते से कई किश्तों में दो लाख रुपए निकाल लिए गए हैं। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। एटीएम फ्रॉड की ये नई तरकीब दून में देखने को मिली है। मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। हाईटेक ठगी के इन मामलों में पुलिस के हाथ कुछ इनपुट लगे हैं, जिनके आधार पर पड़ताल जारी है।
|
काठमांडू, ८ जनवरी ।
काठमांडू घाटी का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री दर्ज किया गया है । काठमांडू घाटी में तापमान गिरने के साथ ही आज इस साल में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई और जाहिर तौर पर घाटी सहित देश भर में ठंड काफी बढ़ गई है ।
वहीं पिछले कई दिनों से तराई में लगातार घने कोहरे की वजह से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित बना हुआ है । घाटी का न्यूनतम तापमान और एक दो दिन स्थिर रहने की बात मौसमविद शांति कँडेल ने बताई ।
|
काठमांडू, आठ जनवरी । काठमांडू घाटी का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री दर्ज किया गया है । काठमांडू घाटी में तापमान गिरने के साथ ही आज इस साल में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई और जाहिर तौर पर घाटी सहित देश भर में ठंड काफी बढ़ गई है । वहीं पिछले कई दिनों से तराई में लगातार घने कोहरे की वजह से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित बना हुआ है । घाटी का न्यूनतम तापमान और एक दो दिन स्थिर रहने की बात मौसमविद शांति कँडेल ने बताई ।
|
धान की फसल में खरीद के मुद्दे पर शनिवार को किसानों के सब्र का पैमाना छलक गया। किसान संगठनों ने बीजेपी-जेजेपी के विधायकों सांसदों तक पहुंचने के लिए पुलिस के बेरीकेड्स भी कई जगहों पर तोड़ दिए। करनाल में किसानों ने सीएम मनोहर लाल खट्टर के सरकारी आवास पर धावा बोला तो पुलिस ने उन्हें तितर बितर करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया। कुरुक्षेत्र, यमुनानगर समेत हरियाणा के कई जिलों में किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था को वो यहां से हटेंगे नहीं। उधऱ, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि किसानों को संयम रखना चाहिए। गांधी के देश में हिंसा की जगह नहीं है।
केंद्र सरकार ने हरियाणा और पंजाब को 11 अक्तूबर से एमएसपी पर धान की खरीद करने का निर्देश जारी किया है। गुरुवार शाम को आए इस आदेश के बाद से किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बेमौसमी बारिश और नमी का हवाला देते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस फैसले पर किसानों ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को बर्बाद करने में लगी हुई है। 11 अक्टूबर तक किसान अपनी धान की फसल को लेकर कहां रखेंगे।
किसान नेताओं का कहना है कि किसानों के घर पर अनाज रखने की पर्याप्त जगह नहीं है। अधिकतर किसान खेत से धान काट कर सीधा मंडी में बिक्री के लिए जाता है। लेकिन सरकार के द्वारा दस दिन देरी से खरीद शुरू करने के निर्णय से किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। भाकियू ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि दो अक्टूबर को किसान अपनी धान की ट्रालियों के साथ जेजेपी व भाजपा विधायकों के घरों का घेराव कर पक्का मोर्चा डालेंगे। सभी विधायकों को ज्ञापन दिए जाएंगे। पुलिस ने भी एहतियात बरतते हुए विधायकों, सांसदों के घरों के सामने जवानों का भारी बंदोबस्त कर दिया था।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी पत्र में साफ लिखा है कि बारिश के कारण अभी तक धान की फसल पूरी तरह नहीं पकी है, साथ ही इससे फसल में नमी है। इसी के चलते अब 11 अक्टूबर से धान की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी। हालांकि. हरियाणा सरकार एक अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद की घोषणा कर चुकी थी। बाकायदा इसके लिए सभी मंडियों में तैयारियां भी की गई हैं। लेकिन केंद्र के निर्णय के बाद धान खरीद को 11 तक स्थगित कर दिया गया था।
पंजाब व हरियाणा में किसान आंदोलन का ज्यादा जोर है लिहाजा पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पीएम मोदी से एक अक्तूबर से पंजाब में धान खरीद शुरु करने की अनुमति मांगी थी। वह शुक्रवार को पीएम मोदी से पहली बार मिले थे। लेकिन जब केंद्र ने अपने फैसले को वापस लेने से मना कर दिया तो शनिवार सुबह से किसानों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है पर हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
|
धान की फसल में खरीद के मुद्दे पर शनिवार को किसानों के सब्र का पैमाना छलक गया। किसान संगठनों ने बीजेपी-जेजेपी के विधायकों सांसदों तक पहुंचने के लिए पुलिस के बेरीकेड्स भी कई जगहों पर तोड़ दिए। करनाल में किसानों ने सीएम मनोहर लाल खट्टर के सरकारी आवास पर धावा बोला तो पुलिस ने उन्हें तितर बितर करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया। कुरुक्षेत्र, यमुनानगर समेत हरियाणा के कई जिलों में किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था को वो यहां से हटेंगे नहीं। उधऱ, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि किसानों को संयम रखना चाहिए। गांधी के देश में हिंसा की जगह नहीं है। केंद्र सरकार ने हरियाणा और पंजाब को ग्यारह अक्तूबर से एमएसपी पर धान की खरीद करने का निर्देश जारी किया है। गुरुवार शाम को आए इस आदेश के बाद से किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बेमौसमी बारिश और नमी का हवाला देते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस फैसले पर किसानों ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को बर्बाद करने में लगी हुई है। ग्यारह अक्टूबर तक किसान अपनी धान की फसल को लेकर कहां रखेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि किसानों के घर पर अनाज रखने की पर्याप्त जगह नहीं है। अधिकतर किसान खेत से धान काट कर सीधा मंडी में बिक्री के लिए जाता है। लेकिन सरकार के द्वारा दस दिन देरी से खरीद शुरू करने के निर्णय से किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। भाकियू ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि दो अक्टूबर को किसान अपनी धान की ट्रालियों के साथ जेजेपी व भाजपा विधायकों के घरों का घेराव कर पक्का मोर्चा डालेंगे। सभी विधायकों को ज्ञापन दिए जाएंगे। पुलिस ने भी एहतियात बरतते हुए विधायकों, सांसदों के घरों के सामने जवानों का भारी बंदोबस्त कर दिया था। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी पत्र में साफ लिखा है कि बारिश के कारण अभी तक धान की फसल पूरी तरह नहीं पकी है, साथ ही इससे फसल में नमी है। इसी के चलते अब ग्यारह अक्टूबर से धान की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी। हालांकि. हरियाणा सरकार एक अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद की घोषणा कर चुकी थी। बाकायदा इसके लिए सभी मंडियों में तैयारियां भी की गई हैं। लेकिन केंद्र के निर्णय के बाद धान खरीद को ग्यारह तक स्थगित कर दिया गया था। पंजाब व हरियाणा में किसान आंदोलन का ज्यादा जोर है लिहाजा पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पीएम मोदी से एक अक्तूबर से पंजाब में धान खरीद शुरु करने की अनुमति मांगी थी। वह शुक्रवार को पीएम मोदी से पहली बार मिले थे। लेकिन जब केंद्र ने अपने फैसले को वापस लेने से मना कर दिया तो शनिवार सुबह से किसानों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है पर हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
|
पाकिस्तान क्रिकेट टीम और इंग्लैंड सीमित ओवर सीरीज में भिड़ने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तान टीम अगले महीने इंग्लैंड दौरे पर छह मुकाबले खेलेगी, जिसमें तीन वनडे और तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय शामिल हैं। पाकिस्तानी खिलाड़ी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) 2021 के समापन के बाद इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए। खिलाड़ियों को चार्टर्ड फ्लाइट से यूके भेजा गया है।
पाकिस्तान के लिए सीमित ओवरों की सीरीज इस साल के अंत में होने वाले आगामी टी20 विश्व कप के लिए एक ड्रेस रिहर्सल होगी। वहीं, इयोन मोर्गन के नेतृत्व वाली इंग्लैंड टीम फिलहाल श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज खेल रही है। ऐसे में इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मोड में आने के लिए थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। आइए आपको पाकिस्तान के इंग्लैंड दौरे 2021 से जुड़ी सभी अहम डिटेल्स बताते हैं।
पाकिस्तान वनडे टीमः बाबर आजम (कप्तान), शादाब खान (उपकप्तान), अब्दुल्ला शफीक, फहीम अशरफ, फखर जमान, सोहेब मकसूद, हारिस रऊफ, हारिस सोहेल, हसन अली, इमाम-उल-हक, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज , मोहम्मद रिजवान (विकेटकीपर), सलमान अली आगा, सरफराज अहमद (विकेटकीपर), सऊद शकील, शाहीन शाह अफरीदी और उस्मान कादिर।
पाकिस्तान टी20 टीमः बाबर आजम (कप्तान), शादाब खान (उपकप्तान), अरशद इकबाल, आजम खान, फहीम अशरफ, फखर जमान, सोहेब मकसूद, हारिस रऊफ, हसन अली, इमाद वसीम, मोहम्मद हफीज, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज , मोहम्मद रिजवान (विकेटकीपर), मोहम्मद वसीम जूनियर, सरफराज अहमद (विकेटकीपर), शाहीन शाह अफरीदी, शरजील खान और उस्मान कादिर।
इंग्लैंड स्क्वाडः इंग्लैंड ने अभी तक वनडे और टी20 सीरीज के लिए अपनी टीम का ऐलान नहीं किया है।
इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैचसोनी सिक्स और सोनी सिक्स एचडी टीवी चैनल पर देखा जा सकेंगे।
इंग्लैंड-पाकिस्तान सीरीज SonyLiv डिजिटल प्लेटफॉर्म (वेबसाइट, ऐप) पर लाइव स्ट्रीम की जाएगी। इसे प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के साथ देख सकेंगे।
|
पाकिस्तान क्रिकेट टीम और इंग्लैंड सीमित ओवर सीरीज में भिड़ने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तान टीम अगले महीने इंग्लैंड दौरे पर छह मुकाबले खेलेगी, जिसमें तीन वनडे और तीन टीबीस अंतरराष्ट्रीय शामिल हैं। पाकिस्तानी खिलाड़ी संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तान सुपर लीग दो हज़ार इक्कीस के समापन के बाद इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए। खिलाड़ियों को चार्टर्ड फ्लाइट से यूके भेजा गया है। पाकिस्तान के लिए सीमित ओवरों की सीरीज इस साल के अंत में होने वाले आगामी टीबीस विश्व कप के लिए एक ड्रेस रिहर्सल होगी। वहीं, इयोन मोर्गन के नेतृत्व वाली इंग्लैंड टीम फिलहाल श्रीलंका के खिलाफ टीबीस सीरीज खेल रही है। ऐसे में इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मोड में आने के लिए थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। आइए आपको पाकिस्तान के इंग्लैंड दौरे दो हज़ार इक्कीस से जुड़ी सभी अहम डिटेल्स बताते हैं। पाकिस्तान वनडे टीमः बाबर आजम , शादाब खान , अब्दुल्ला शफीक, फहीम अशरफ, फखर जमान, सोहेब मकसूद, हारिस रऊफ, हारिस सोहेल, हसन अली, इमाम-उल-हक, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज , मोहम्मद रिजवान , सलमान अली आगा, सरफराज अहमद , सऊद शकील, शाहीन शाह अफरीदी और उस्मान कादिर। पाकिस्तान टीबीस टीमः बाबर आजम , शादाब खान , अरशद इकबाल, आजम खान, फहीम अशरफ, फखर जमान, सोहेब मकसूद, हारिस रऊफ, हसन अली, इमाद वसीम, मोहम्मद हफीज, मोहम्मद हसनैन, मोहम्मद नवाज , मोहम्मद रिजवान , मोहम्मद वसीम जूनियर, सरफराज अहमद , शाहीन शाह अफरीदी, शरजील खान और उस्मान कादिर। इंग्लैंड स्क्वाडः इंग्लैंड ने अभी तक वनडे और टीबीस सीरीज के लिए अपनी टीम का ऐलान नहीं किया है। इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच होने वाले मैचसोनी सिक्स और सोनी सिक्स एचडी टीवी चैनल पर देखा जा सकेंगे। इंग्लैंड-पाकिस्तान सीरीज SonyLiv डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम की जाएगी। इसे प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के साथ देख सकेंगे।
|
टॉमस याट ( Wyatt ) के नेतृत्व में कैंट ( Kent ) के लोगों ने विद्रोह कर दिया । बड़ी मुश्किल से मेरी ने इस विद्रोह को शांत किया । उसने लेडी एलिज़बेथ को क़ैद कर दिया और टॉमस याट को फाँसी पर चढ़ा दिया । फाँसी पर चढ़ते समय याट ने स्पष्ट शब्दों में यह कहा कि एलिज़बेथ का कुछ भी अपराध नहीं है, उसको तो क़ैद से छोड़ देना चाहिए । इस पर मेरी ने एलिजबेथ को क़ैद से मुक्त
एलिजबेथ ने मेरी की खूब सेवा-सुश्रुषा करनी शुरू की और उसके साथ चर्च में भी जाने लगी ।
( २ ) मेरी का प्रोटेस्टेंट लोगों को जिंदा जलाना फ़िलिप तथा मेरी ने आपस में मिलकर प्रोटेस्टेंट लोगों को सताना शुरू किया । ४ फ़रवरी, १५५५ से लेकर १० नवंबर, १५५८ तक २८० मनुष्य जलाए गए ! इन लोगों के जलाने से भी प्रोटेस्टेंट मत का प्रचार इंगलैंड में नहीं रुका ।
रिड्ले तथा लैटिमर - लैटिमर प्रोटेस्टेंट मत में दृढ़ था । इसको योरप में भाग जाने का काफ़ी मौक़ा था। लोग इसका बहुत
अधिक आदर-सत्कार करते थे । यह लंदन पहुँचा । रिड्ले तथा कैनमर भी इसको वहीं पर मिले । १५५५ में तीनों ही ऑक्सफोर्ड में कैथलिक लोगों से शास्त्रार्थ करने के लिये भेजे
गए । बड़ा भारी वाद-विवाद हुआ, परंतु उसका कुछ भी फल न निकला। ऑक्टोबर की पहली तारीख को रिड्ले तथा लैटिमर् को मृत्यु- दंड दिया गया । इन्होंने बड़ी शांति तथा धैर्य से मृत्यु- दंड को स्वीकार किया और मरते समय तक किसी प्रकार के भी निराशा या दुःख के चिह्न नहीं प्रकट किए ।
कैनमर - ऑक्सफ़ोर्ड में कैनमर पाँच महीने तक लगातार कैद रहा । कैनर के अपराध का निर्णय पोप के सिवा और कोई भी नहीं कर सकता था । कैनर के स्थान पर पोप ने पोल को नियत किया और १५५६ में कैनमर को मृत्यु दंड दिया गया। कैनमर भीरु-स्वभाव का था, उसका दिल बहुत ही कमजोर था । यही कारण है कि वह कैथलिक धर्म की ओर कुछ-कुछ झुक गया । इस पर भी उसको मृत्यु-दंड दिया गया । उसको क़त्ल करने से पहले एक • भारी सभा बुलाई गई । मेरी का नयाल था कि वह उस भरी'सभा में अपने धर्म परिवर्तन की बात मान लेगा । परंतु उसने ऐसा नहीं किया । भरी सभा में उसने ये शब्द कहे कि अमुक हाथ ने ही ये सब पाप-कार्य किए हैं, अतः सबसे पहले मैं इसी हाथ को जला डालूँगा । उसने जो कुछ कहा, उसे बड़ी वीरतापूर्वक करके दिखा दिया । इसका आंग्ल-जनता पर बहुत ही
अच्छा असर हुआ । लोगों की महानुभूति शहीदों के ही साथ हो गई और वे कैथलिक मत को घृणा की दृष्टि से देखने लगे ।
इन ऊपर लिखी हत्याओं से रानी मेरी तथा उसके सलाहकारों का नाम बदनाम हो गया। इसी से वह ( Bloody ) - 'नूनी मेरी' के नाम से प्रसिद्ध हुई । असल बात तो यह है कि इस प्रकार की घटनाएँ मध्यकाल में आमतौर पर होती थीं। उन दिनों लोग धार्मिक सहिष्णुता को पाप समझते थे । क्या कैथलिक और क्या प्रोटेस्टेंट, मौक़ा पड़ने पर सभी अपना भयंकर रूप प्रकट करते और अपने से विरुद्ध मतबालों को जिंदा जला देते थे । एडवर्ड छठे ने 'बैप्टिस्ट' ( Anabaptist ) लोगों को इसीलिये जला दिया था कि वे बहुत ही अधिक सुधार चाहते थे ।
( ३ ) मेरी की विदेशी नीति
मेरी अभी धार्मिक सुधार कर ही रही थी कि उस पर कई विपत्तियाँ पड़ीं। प्रोटेस्टेंट लोगों ने इंगलैंड के किनारों को लूटकर कैथलिक लोगों को सताना शुरू किया । स्पेन का फ्रांस से झगड़ा था । यही कारण है कि फ़िलिप ने मेरी को भी फ्रांस से लड़ने के लिये बाधित किया । वह यह नहीं चाहती थी ।
फांस तथा जर्मनीका युद्ध (१५५२-१५५६) - १५५२
से १५५९ तक फ्रांस तथा जर्मनी का युद्ध हुआ। फ्रांस का राजा हेनरी द्वितीय बहुत ही शक्तिशाली था । उसने जर्मनी के प्रोटेस्टेंट लोगों का पक्ष लेकर सम्राट् चार्ल्स को पराजित किया । १५५६ में चार्ल्स ने राजगद्दी छोड़ दी । उसके जर्मन प्रांत तथा सम्राट् का पद उसके भाई फ़र्दिनंद को मिला । यह हेनरी और बोहीमिया (Bohemia) का राजा था । स्पेन, इंडीज, इटली तथा नीदरलैंड ( Netherland ) के प्रांत फ़िलिप को मिले ।
इंगलैंड का फांस से युद्ध - फिलिप द्वितीय फ्रांस
को नीचा दिखाना चाहता था । उसने १५५७ में मेरी को अपने साथ मिलाया और फ्रांस में सेंट कटिन (St. Quentin)नामक स्थान पर बड़ी भारी विजय प्राप्त की । उसने पोप को नीचा दिखाया और अपनी इच्छा के अनुसार चलना शुरू किया । फ़्रांसीसियों ने फ़िलिप से चिढ़कर इंगलैंड को तंग करना शुरू किया। उन्होंने कैले ( Calais ) पर आक्रमण किया और उसको फ़तह भी कर लिया । मेरी का स्वास्थ्य ठीक न था । कैले हाथ से निकल जाने पर उसका दिल टूट गया और वह १५५८ की १७ नवंबर को परलोक सिधारी । दैवी घटना से उसके १२ घंटे के बाद ही कार्डिनल पोल की भी मृत्यु हो गई ।
|
टॉमस याट के नेतृत्व में कैंट के लोगों ने विद्रोह कर दिया । बड़ी मुश्किल से मेरी ने इस विद्रोह को शांत किया । उसने लेडी एलिज़बेथ को क़ैद कर दिया और टॉमस याट को फाँसी पर चढ़ा दिया । फाँसी पर चढ़ते समय याट ने स्पष्ट शब्दों में यह कहा कि एलिज़बेथ का कुछ भी अपराध नहीं है, उसको तो क़ैद से छोड़ देना चाहिए । इस पर मेरी ने एलिजबेथ को क़ैद से मुक्त एलिजबेथ ने मेरी की खूब सेवा-सुश्रुषा करनी शुरू की और उसके साथ चर्च में भी जाने लगी । मेरी का प्रोटेस्टेंट लोगों को जिंदा जलाना फ़िलिप तथा मेरी ने आपस में मिलकर प्रोटेस्टेंट लोगों को सताना शुरू किया । चार फ़रवरी, एक हज़ार पाँच सौ पचपन से लेकर दस नवंबर, एक हज़ार पाँच सौ अट्ठावन तक दो सौ अस्सी मनुष्य जलाए गए ! इन लोगों के जलाने से भी प्रोटेस्टेंट मत का प्रचार इंगलैंड में नहीं रुका । रिड्ले तथा लैटिमर - लैटिमर प्रोटेस्टेंट मत में दृढ़ था । इसको योरप में भाग जाने का काफ़ी मौक़ा था। लोग इसका बहुत अधिक आदर-सत्कार करते थे । यह लंदन पहुँचा । रिड्ले तथा कैनमर भी इसको वहीं पर मिले । एक हज़ार पाँच सौ पचपन में तीनों ही ऑक्सफोर्ड में कैथलिक लोगों से शास्त्रार्थ करने के लिये भेजे गए । बड़ा भारी वाद-विवाद हुआ, परंतु उसका कुछ भी फल न निकला। ऑक्टोबर की पहली तारीख को रिड्ले तथा लैटिमर् को मृत्यु- दंड दिया गया । इन्होंने बड़ी शांति तथा धैर्य से मृत्यु- दंड को स्वीकार किया और मरते समय तक किसी प्रकार के भी निराशा या दुःख के चिह्न नहीं प्रकट किए । कैनमर - ऑक्सफ़ोर्ड में कैनमर पाँच महीने तक लगातार कैद रहा । कैनर के अपराध का निर्णय पोप के सिवा और कोई भी नहीं कर सकता था । कैनर के स्थान पर पोप ने पोल को नियत किया और एक हज़ार पाँच सौ छप्पन में कैनमर को मृत्यु दंड दिया गया। कैनमर भीरु-स्वभाव का था, उसका दिल बहुत ही कमजोर था । यही कारण है कि वह कैथलिक धर्म की ओर कुछ-कुछ झुक गया । इस पर भी उसको मृत्यु-दंड दिया गया । उसको क़त्ल करने से पहले एक • भारी सभा बुलाई गई । मेरी का नयाल था कि वह उस भरी'सभा में अपने धर्म परिवर्तन की बात मान लेगा । परंतु उसने ऐसा नहीं किया । भरी सभा में उसने ये शब्द कहे कि अमुक हाथ ने ही ये सब पाप-कार्य किए हैं, अतः सबसे पहले मैं इसी हाथ को जला डालूँगा । उसने जो कुछ कहा, उसे बड़ी वीरतापूर्वक करके दिखा दिया । इसका आंग्ल-जनता पर बहुत ही अच्छा असर हुआ । लोगों की महानुभूति शहीदों के ही साथ हो गई और वे कैथलिक मत को घृणा की दृष्टि से देखने लगे । इन ऊपर लिखी हत्याओं से रानी मेरी तथा उसके सलाहकारों का नाम बदनाम हो गया। इसी से वह - 'नूनी मेरी' के नाम से प्रसिद्ध हुई । असल बात तो यह है कि इस प्रकार की घटनाएँ मध्यकाल में आमतौर पर होती थीं। उन दिनों लोग धार्मिक सहिष्णुता को पाप समझते थे । क्या कैथलिक और क्या प्रोटेस्टेंट, मौक़ा पड़ने पर सभी अपना भयंकर रूप प्रकट करते और अपने से विरुद्ध मतबालों को जिंदा जला देते थे । एडवर्ड छठे ने 'बैप्टिस्ट' लोगों को इसीलिये जला दिया था कि वे बहुत ही अधिक सुधार चाहते थे । मेरी की विदेशी नीति मेरी अभी धार्मिक सुधार कर ही रही थी कि उस पर कई विपत्तियाँ पड़ीं। प्रोटेस्टेंट लोगों ने इंगलैंड के किनारों को लूटकर कैथलिक लोगों को सताना शुरू किया । स्पेन का फ्रांस से झगड़ा था । यही कारण है कि फ़िलिप ने मेरी को भी फ्रांस से लड़ने के लिये बाधित किया । वह यह नहीं चाहती थी । फांस तथा जर्मनीका युद्ध - एक हज़ार पाँच सौ बावन से एक हज़ार पाँच सौ उनसठ तक फ्रांस तथा जर्मनी का युद्ध हुआ। फ्रांस का राजा हेनरी द्वितीय बहुत ही शक्तिशाली था । उसने जर्मनी के प्रोटेस्टेंट लोगों का पक्ष लेकर सम्राट् चार्ल्स को पराजित किया । एक हज़ार पाँच सौ छप्पन में चार्ल्स ने राजगद्दी छोड़ दी । उसके जर्मन प्रांत तथा सम्राट् का पद उसके भाई फ़र्दिनंद को मिला । यह हेनरी और बोहीमिया का राजा था । स्पेन, इंडीज, इटली तथा नीदरलैंड के प्रांत फ़िलिप को मिले । इंगलैंड का फांस से युद्ध - फिलिप द्वितीय फ्रांस को नीचा दिखाना चाहता था । उसने एक हज़ार पाँच सौ सत्तावन में मेरी को अपने साथ मिलाया और फ्रांस में सेंट कटिन नामक स्थान पर बड़ी भारी विजय प्राप्त की । उसने पोप को नीचा दिखाया और अपनी इच्छा के अनुसार चलना शुरू किया । फ़्रांसीसियों ने फ़िलिप से चिढ़कर इंगलैंड को तंग करना शुरू किया। उन्होंने कैले पर आक्रमण किया और उसको फ़तह भी कर लिया । मेरी का स्वास्थ्य ठीक न था । कैले हाथ से निकल जाने पर उसका दिल टूट गया और वह एक हज़ार पाँच सौ अट्ठावन की सत्रह नवंबर को परलोक सिधारी । दैवी घटना से उसके बारह घंटाटे के बाद ही कार्डिनल पोल की भी मृत्यु हो गई ।
|
एजेंट "सर्नोलन" अनुदेश को बिल्लियों और कुत्तों में परजीवी, फंगल और बैक्टीरियल एटियलजि के ओटिटिस के इलाज के लिए तैयार एक जटिल तैयारी के रूप में वर्णित करता है। इस दवा के उपयोग के एक स्पष्ट antipruritic और विरोधी भड़काऊ प्रभाव है इसी समय, निर्माता की सिफारिश की खुराक में इसके उपयोग में किसी भी पुनर्व्यवस्थित-जहरीले या त्वचा-परेशानी प्रभाव नहीं होता है। "सर्नोलन" उपाय के जानवर के शरीर पर प्रभाव की डिग्री के लिए, जिस अनुदेश को हमेशा संलग्न किया जाता है, उसे मध्यम के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
यह ड्रग कान की बूंदों के रूप में तैयार की जाती है, जो कि एक सिपाही निलंबन है, जिसमें कमजोर विशिष्ट गंध है सक्रिय जटिल तत्वों के रूप में इस जटिल एजेंट की संरचना में शामिल हैं पर्डिनसोलोन एसीटेट, पॉलीमीक्सिन बी सल्फेट और माइकोनाजोल नाइट्रेट।
अतिरिक्त पदार्थ तरल पैराफिन और कोलाइडयन सिलिकॉन डाइऑक्साइड होते हैं । इस मामले में, "सरोलन" के माध्यम से प्रदान की जाने वाली उपयोगी कार्यवाही (यह पुष्टि इस बात की पुष्टि करता है) सीधे इसकी संरचना द्वारा निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, माइकोनाजोल नाइट्रेट में ग्राम पॉजिटिव रोगजनकों के खिलाफ एक स्पष्ट एंटिफंगल गतिविधि है। प्रीडिनसोलोन एसीटेट में एक मजबूत एंटीप्रू्रोटिक और एंटी-इन्फ्लॉमरेटी प्रभाव होता है, और पॉलिमीक्सिन बी सल्फेट, एक पॉलीपेप्टाइड प्रकार एंटीबायोटिक, ग्राम नकारात्मक बैक्टीरिया के खिलाफ एक जीवाणुनाशक प्रभाव होता है।
कानों को लागू करने से ज्यादातर मामलों में "सर्रोलन" को कुत्तों या बिल्लियों में ओटिटिस एक्स्ट्रा को खत्म करने की सिफारिश की जाती है। सबसे प्रभावी ग्राम-नकारात्मक या ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया, साथ ही कवक और खमीर के कारण सूजन के लिए यह उपाय है। ओटिटिस मीडिया में, कान के कणों द्वारा उकसाया गया, यह भी दवा "सूरोनल" का उपयोग शुरू करने की सिफारिश करता है निर्देश, समीक्षा बिल्लियों और कुत्तों में जिल्द की सूजन के लिए इसके उपयोग के अच्छे परिणाम बताते हैं।
विशेष रूप से यह बल दिया जाना चाहिए कि "सरोलन" की बूंदों के उपयोग को स्पष्ट रूप से बिल्लियों और कुत्ते के लिए छिद्रित झिल्ली के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा, इस विरोधी भड़काऊ एजेंट का उपयोग पशु के व्यक्तिगत संवेदनशीलता के मामले में इसकी संरचना में निहित घटकों के लिए नहीं करते हैं। जटिलताओं और संभावित पक्ष प्रतिक्रियाओं के लिए, यदि निर्देश ठीक से मनाए जाते हैं, तो वे एक नियम के रूप में नहीं मनाए जाते हैं।
|
एजेंट "सर्नोलन" अनुदेश को बिल्लियों और कुत्तों में परजीवी, फंगल और बैक्टीरियल एटियलजि के ओटिटिस के इलाज के लिए तैयार एक जटिल तैयारी के रूप में वर्णित करता है। इस दवा के उपयोग के एक स्पष्ट antipruritic और विरोधी भड़काऊ प्रभाव है इसी समय, निर्माता की सिफारिश की खुराक में इसके उपयोग में किसी भी पुनर्व्यवस्थित-जहरीले या त्वचा-परेशानी प्रभाव नहीं होता है। "सर्नोलन" उपाय के जानवर के शरीर पर प्रभाव की डिग्री के लिए, जिस अनुदेश को हमेशा संलग्न किया जाता है, उसे मध्यम के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह ड्रग कान की बूंदों के रूप में तैयार की जाती है, जो कि एक सिपाही निलंबन है, जिसमें कमजोर विशिष्ट गंध है सक्रिय जटिल तत्वों के रूप में इस जटिल एजेंट की संरचना में शामिल हैं पर्डिनसोलोन एसीटेट, पॉलीमीक्सिन बी सल्फेट और माइकोनाजोल नाइट्रेट। अतिरिक्त पदार्थ तरल पैराफिन और कोलाइडयन सिलिकॉन डाइऑक्साइड होते हैं । इस मामले में, "सरोलन" के माध्यम से प्रदान की जाने वाली उपयोगी कार्यवाही सीधे इसकी संरचना द्वारा निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, माइकोनाजोल नाइट्रेट में ग्राम पॉजिटिव रोगजनकों के खिलाफ एक स्पष्ट एंटिफंगल गतिविधि है। प्रीडिनसोलोन एसीटेट में एक मजबूत एंटीप्रू्रोटिक और एंटी-इन्फ्लॉमरेटी प्रभाव होता है, और पॉलिमीक्सिन बी सल्फेट, एक पॉलीपेप्टाइड प्रकार एंटीबायोटिक, ग्राम नकारात्मक बैक्टीरिया के खिलाफ एक जीवाणुनाशक प्रभाव होता है। कानों को लागू करने से ज्यादातर मामलों में "सर्रोलन" को कुत्तों या बिल्लियों में ओटिटिस एक्स्ट्रा को खत्म करने की सिफारिश की जाती है। सबसे प्रभावी ग्राम-नकारात्मक या ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया, साथ ही कवक और खमीर के कारण सूजन के लिए यह उपाय है। ओटिटिस मीडिया में, कान के कणों द्वारा उकसाया गया, यह भी दवा "सूरोनल" का उपयोग शुरू करने की सिफारिश करता है निर्देश, समीक्षा बिल्लियों और कुत्तों में जिल्द की सूजन के लिए इसके उपयोग के अच्छे परिणाम बताते हैं। विशेष रूप से यह बल दिया जाना चाहिए कि "सरोलन" की बूंदों के उपयोग को स्पष्ट रूप से बिल्लियों और कुत्ते के लिए छिद्रित झिल्ली के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा, इस विरोधी भड़काऊ एजेंट का उपयोग पशु के व्यक्तिगत संवेदनशीलता के मामले में इसकी संरचना में निहित घटकों के लिए नहीं करते हैं। जटिलताओं और संभावित पक्ष प्रतिक्रियाओं के लिए, यदि निर्देश ठीक से मनाए जाते हैं, तो वे एक नियम के रूप में नहीं मनाए जाते हैं।
|
फर्जी वैक्सीनेशन का शिकार हुईं सांसद मिमी चक्रवर्ती की तबियत खराब होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि सांसद ने पेट में दर्द की शिकायत की है। साथ ही उनको काफी ज्यादा पसीना भी आ रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह दिक्कत वैक्सीन की वजह से हुई है या नहीं पर इसकी जांच की जा रही है। सांसद द्वारा डॉक्टर को घर पर बुलाए जाने की जानकारी भी सूत्रों ने दी है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने मिमी चक्रवर्ती को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है। मालूम हो कि मिमी चक्रवर्ती ने एक फर्जी वैक्सीनेशन कैंप में टीका लगवाया था।
इस बीच कोलकाता में संदिग्ध कोविड टीकाकरण शिविर के संबंध में फर्जी आईएएस अधिकारी देबांजन देब के तीन और सहयोगियों को शनिवार सुबह गिरफ्तार किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में बताया। अधिकारी ने बताया कि देब के दो सहयोगी कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के नाम से आरोपी द्वारा खोले गये बैंक खाते के हस्ताक्षरकर्ता थे। देब के मातहत काम करने वाला तीसरा आरोपी शिविर में काफी सक्रियता से हिस्सा ले रहा था, जहां कई लोगों को नकली टीके की खुराक दी गयी।
अधिकारी ने बताया, "इनमें से एक सॉल्ट लेक का निवासी है जबकि दूसरा बारासात का रहने वाला है। दोनों को गिरफ्तारी से पहले पूछताछ के लिए लाया गया था। " उन्होंने बताया कि तीसरा व्यक्ति तालतला का रहने वाला है। शिविर के आयोजन में "बेहद सक्रियता से" मदद करते पाये जाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस बीच कसबा पुलिस थाना में देब के खिलाफ तीन और मामले दर्ज किये हैं।
उन्होंने बताया, "तीसरी शिकायत एक दवा कंपनी ने दर्ज करायी है जिसने निविदा के लिए देब को चार लाख रुपये भुगतान करने का दावा किया है। " खुद को आईएएस अधिकारी बताकर कसबा इलाके में कोविड-19 टीकाकरण शिविर आयोजित करने के आरोप में देब को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। इस शिविर में तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने टीके की खुराक ली थी।
चक्रवर्ती को टीकाकरण की प्रक्रिया पर उस समय शक हुआ जब उन्हें एसएमएस नहीं आया, जो आम तौर पर टीके की खुराक लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मोबाइल फोन पर आता है। इसके बाद चक्रवर्ती ने इसकी शिकायत पुलिस में की। जांच में खुलासा हुआ कि देब ने उत्तर कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके में एक कॉलेज में ऐसा ही टीकाकरण शिविर लगाया था, जिसमें कई शिक्षकों और छात्रों ने टीके की खुराक ली थी। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने फर्जी टीकाकरण के प्रभाव की जांच करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
|
फर्जी वैक्सीनेशन का शिकार हुईं सांसद मिमी चक्रवर्ती की तबियत खराब होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि सांसद ने पेट में दर्द की शिकायत की है। साथ ही उनको काफी ज्यादा पसीना भी आ रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह दिक्कत वैक्सीन की वजह से हुई है या नहीं पर इसकी जांच की जा रही है। सांसद द्वारा डॉक्टर को घर पर बुलाए जाने की जानकारी भी सूत्रों ने दी है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने मिमी चक्रवर्ती को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है। मालूम हो कि मिमी चक्रवर्ती ने एक फर्जी वैक्सीनेशन कैंप में टीका लगवाया था। इस बीच कोलकाता में संदिग्ध कोविड टीकाकरण शिविर के संबंध में फर्जी आईएएस अधिकारी देबांजन देब के तीन और सहयोगियों को शनिवार सुबह गिरफ्तार किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में बताया। अधिकारी ने बताया कि देब के दो सहयोगी कोलकाता नगर निगम के नाम से आरोपी द्वारा खोले गये बैंक खाते के हस्ताक्षरकर्ता थे। देब के मातहत काम करने वाला तीसरा आरोपी शिविर में काफी सक्रियता से हिस्सा ले रहा था, जहां कई लोगों को नकली टीके की खुराक दी गयी। अधिकारी ने बताया, "इनमें से एक सॉल्ट लेक का निवासी है जबकि दूसरा बारासात का रहने वाला है। दोनों को गिरफ्तारी से पहले पूछताछ के लिए लाया गया था। " उन्होंने बताया कि तीसरा व्यक्ति तालतला का रहने वाला है। शिविर के आयोजन में "बेहद सक्रियता से" मदद करते पाये जाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस बीच कसबा पुलिस थाना में देब के खिलाफ तीन और मामले दर्ज किये हैं। उन्होंने बताया, "तीसरी शिकायत एक दवा कंपनी ने दर्ज करायी है जिसने निविदा के लिए देब को चार लाख रुपये भुगतान करने का दावा किया है। " खुद को आईएएस अधिकारी बताकर कसबा इलाके में कोविड-उन्नीस टीकाकरण शिविर आयोजित करने के आरोप में देब को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। इस शिविर में तृणमूल कांग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने टीके की खुराक ली थी। चक्रवर्ती को टीकाकरण की प्रक्रिया पर उस समय शक हुआ जब उन्हें एसएमएस नहीं आया, जो आम तौर पर टीके की खुराक लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मोबाइल फोन पर आता है। इसके बाद चक्रवर्ती ने इसकी शिकायत पुलिस में की। जांच में खुलासा हुआ कि देब ने उत्तर कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके में एक कॉलेज में ऐसा ही टीकाकरण शिविर लगाया था, जिसमें कई शिक्षकों और छात्रों ने टीके की खुराक ली थी। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने फर्जी टीकाकरण के प्रभाव की जांच करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
|
त्योहारी सीजन के दौरान एमेजन इंडिया पर कई नए पुराने गैजेट पर छूट दिया जा रहा है। एमेजन ग्रेट इंडिया फेस्टिवल के दौरान कई महंगे उपकरण में गिरावट आई है, जिसे कम कीमत पर खरीदा जा सकता है। इन गैजेट्स में एप्पल व सैमसंग के सामान शामिल हैं। आइए जानते हैं इन त्योहारी सीजन के दौरान मिलने वाले ऑफर के बारे में, जिस आप छूट पर अच्छे दामों में खरीद सकते हैं।
Apple iPad Air Apple के सबसे शक्तिशाली प्रोसेसर में से एक पर चलता है और iPad OS15 चलाता है। IPad Air की अन्य विशेषताओं में Apple पेंसिल 2 सपोर्ट, 10. 8-इंच OLED डिस्प्ले और क्वाड स्पीकर सेटअप शामिल हैं। यह आप 46,900 रुपये में खरीद सकते हैं।
सैमसंग गैलेक्सी टैब एस 6 लाइट एक किफायती टैबलेट है और ऐसा कहा जाता है कि एसपेन सपोर्ट देने वाला यह एकमात्र टैबलेट भी है। टैबलेट में 10 इंच का डिस्प्ले है और यह Exynos 9611SoC द्वारा चलता है। यह आपको 25,999 रुपये में उपलब्ध होगी।
Oppo Enco कंपनी के प्रीमियम TWS ईयरबड्स हैं। यह आपको 8,999 रुपये में मिल जाएगी। ईयरबड्स को डायनाडियो द्वारा ट्यून किया गया है और यह अच्छा साउंड आउटपुट और बैटरी लाइफ प्रदान करते हैं। ईयरबड्स का एएनसी अच्छा है और अन्य प्रीमियम ईयरबड्स के बराबर है।
सैमसंग गैलेक्सी बड्स+ आरामदायक फिट और हल्के वजन में आता है। यह अच्छे साउंड आउटपुट के साथ-साथ पैसिव नॉइज़ कैंसिलेशन भी करता है। यह 7,480 रुपये में उपलब्ध है।
ऐप्पल वॉच एसई वर्तमान में बिक्री पर ऐप्पल की सबसे किफायती स्मार्टवॉच है। यह कुछ प्रमुख विशेषताओं जैसे गतिविधि ट्रैकिंग, कसरत मोड इत्यादि के साथ आता है। इस कारण यह लॉन्च के कुछ सालों बाद भी इसे एक अच्छा विकल्प बनाता है। इसकी कीमत 25,900 रुपये है।
सैमसंग गैलेक्सी वॉच 3 फिलहाल अमेज़न पर 15,999 रुपये में बिक रही है। इस कीमत पर, वॉच 3 सबसे अधिक सुविधा संपन्न स्मार्टवॉच में से एक है। स्मार्ट वॉच कई फिटनेस मॉडल, एक्टिविटी ट्रैकिंग, जीपीएस, हार्ट रेट मॉनिटरिंग और कई अन्य फीचर्स के साथ आती है।
इसकी कीमत 17,999 रुपये में है। ओप्पो वॉच वियर ओएस पर चलती है और कई फिटनेस मोड, एक्टिविटी ट्रैकिंग, कॉलिंग फीचर और बहुत कुछ के साथ आती है।
Mi स्मार्ट बैंड 5 बाजार में सबसे लोकप्रिय फिटनेस बैंड में से एक है। यह न केवल किफायती है, बल्कि यह सबसे अधिक सुविधा संपन्न फिटनेस बैंड में से एक है। इसे आप 1,999 रुपये में खरीद सकते हैं।
Lenovo IdeaPad Slim 3 10वीं पीढ़ी के Intel Core i3 प्रोसेसर, 8GB रैम और 256GB SSD स्टोरेज के साथ आता है। इसकी कीमत 35,490 रुपये है।
TUF गेमिंग F15 एक बहुत अच्छा गेमिंग लैपटॉप है और समर्पित Nvidia GeForce GTX 1650Ti ग्राफिक्स के साथ आता है। लैपटॉप की अन्य विशेषताओं में 144Hz डिस्प्ले, 8GB रैम और 512GB SSD शामिल हैं। यह आपको 58,990 रुपये में मिल सकता है।
AirPods Pro एक्टिव नॉइज़ कैंसिलेशन और ट्रांसपेरेंसी मोड के साथ आता है। AirPods Pro की अन्य विशेषताओं में एडेप्टिव EQ, अरे सिरी सपोर्ट और 24 घंटे की बैटरी लाइफ शामिल है। यह 17,990 रुपये में उपलब्ध है।
|
त्योहारी सीजन के दौरान एमेजन इंडिया पर कई नए पुराने गैजेट पर छूट दिया जा रहा है। एमेजन ग्रेट इंडिया फेस्टिवल के दौरान कई महंगे उपकरण में गिरावट आई है, जिसे कम कीमत पर खरीदा जा सकता है। इन गैजेट्स में एप्पल व सैमसंग के सामान शामिल हैं। आइए जानते हैं इन त्योहारी सीजन के दौरान मिलने वाले ऑफर के बारे में, जिस आप छूट पर अच्छे दामों में खरीद सकते हैं। Apple iPad Air Apple के सबसे शक्तिशाली प्रोसेसर में से एक पर चलता है और iPad OSपंद्रह चलाता है। IPad Air की अन्य विशेषताओं में Apple पेंसिल दो सपोर्ट, दस. आठ-इंच OLED डिस्प्ले और क्वाड स्पीकर सेटअप शामिल हैं। यह आप छियालीस,नौ सौ रुपयापये में खरीद सकते हैं। सैमसंग गैलेक्सी टैब एस छः लाइट एक किफायती टैबलेट है और ऐसा कहा जाता है कि एसपेन सपोर्ट देने वाला यह एकमात्र टैबलेट भी है। टैबलेट में दस इंच का डिस्प्ले है और यह Exynos नौ हज़ार छः सौ ग्यारहSoC द्वारा चलता है। यह आपको पच्चीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में उपलब्ध होगी। Oppo Enco कंपनी के प्रीमियम TWS ईयरबड्स हैं। यह आपको आठ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में मिल जाएगी। ईयरबड्स को डायनाडियो द्वारा ट्यून किया गया है और यह अच्छा साउंड आउटपुट और बैटरी लाइफ प्रदान करते हैं। ईयरबड्स का एएनसी अच्छा है और अन्य प्रीमियम ईयरबड्स के बराबर है। सैमसंग गैलेक्सी बड्स+ आरामदायक फिट और हल्के वजन में आता है। यह अच्छे साउंड आउटपुट के साथ-साथ पैसिव नॉइज़ कैंसिलेशन भी करता है। यह सात,चार सौ अस्सी रुपयापये में उपलब्ध है। ऐप्पल वॉच एसई वर्तमान में बिक्री पर ऐप्पल की सबसे किफायती स्मार्टवॉच है। यह कुछ प्रमुख विशेषताओं जैसे गतिविधि ट्रैकिंग, कसरत मोड इत्यादि के साथ आता है। इस कारण यह लॉन्च के कुछ सालों बाद भी इसे एक अच्छा विकल्प बनाता है। इसकी कीमत पच्चीस,नौ सौ रुपयापये है। सैमसंग गैलेक्सी वॉच तीन फिलहाल अमेज़न पर पंद्रह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में बिक रही है। इस कीमत पर, वॉच तीन सबसे अधिक सुविधा संपन्न स्मार्टवॉच में से एक है। स्मार्ट वॉच कई फिटनेस मॉडल, एक्टिविटी ट्रैकिंग, जीपीएस, हार्ट रेट मॉनिटरिंग और कई अन्य फीचर्स के साथ आती है। इसकी कीमत सत्रह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में है। ओप्पो वॉच वियर ओएस पर चलती है और कई फिटनेस मोड, एक्टिविटी ट्रैकिंग, कॉलिंग फीचर और बहुत कुछ के साथ आती है। Mi स्मार्ट बैंड पाँच बाजार में सबसे लोकप्रिय फिटनेस बैंड में से एक है। यह न केवल किफायती है, बल्कि यह सबसे अधिक सुविधा संपन्न फिटनेस बैंड में से एक है। इसे आप एक,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीद सकते हैं। Lenovo IdeaPad Slim तीन दसवीं पीढ़ी के Intel Core iतीन प्रोसेसर, आठGB रैम और दो सौ छप्पनGB SSD स्टोरेज के साथ आता है। इसकी कीमत पैंतीस,चार सौ नब्बे रुपयापये है। TUF गेमिंग Fपंद्रह एक बहुत अच्छा गेमिंग लैपटॉप है और समर्पित Nvidia GeForce GTX एक हज़ार छः सौ पचासTi ग्राफिक्स के साथ आता है। लैपटॉप की अन्य विशेषताओं में एक सौ चौंतालीस हर्ट्ज़ डिस्प्ले, आठGB रैम और पाँच सौ बारहGB SSD शामिल हैं। यह आपको अट्ठावन,नौ सौ नब्बे रुपयापये में मिल सकता है। AirPods Pro एक्टिव नॉइज़ कैंसिलेशन और ट्रांसपेरेंसी मोड के साथ आता है। AirPods Pro की अन्य विशेषताओं में एडेप्टिव EQ, अरे सिरी सपोर्ट और चौबीस घंटाटे की बैटरी लाइफ शामिल है। यह सत्रह,नौ सौ नब्बे रुपयापये में उपलब्ध है।
|
Gulmohar Review: इस फिल्म में आपको एक बड़े से परिवार की कहानी देखने को मिलती है, जो टूटने वाला है। फिल्म की शुरुआत में जब आप इस गुलमोहर विला के परिवार से रूबरू होते हैं और आपको पता चलता है कि इस परिवार के टूटने से पहले ही इस परिवार के लोग लगभग टूट चुके हैं। जैसे गुलमोहर के पेड़ को देखकर आपको ठंडक का एहसास होता है वैसा ही कुछ एहसास देती है ये फिल्म भी।
Rajkummar Rao: राजकुमार राव की फिल्म भीड़ की शूटिंग समाप्त हो गई है और जल्द ही उसे सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा। इसके राजकुमार राव, राज एंड डीके की वेब सीरीज गुलाब एंड गन्स भी नज़र आने वाले हैं। जिसे इसी साल रिलीज़ किया जाएगा। वहीं आज राजकुमार राव की नई फिल्म के टीज़र को रिलीज़ कर दिया गया है। यहां हम इसी बारे में बात करने वाले हैं।
Hera Pheri 3: अक्षय कुमार के किरदार को लेकर भी संशय बना हुआ था। इसके अलावा हेरा फेरी 3 का नाम हेरा फेरी 4 होगा। वहीं हमने इससे पहले आपको बताया था कि हेरा फेरी 3 के साथ संजय दत्त भी नज़र आने वाले हैं। वहीं अब संजय दत्त का किरदार क्या होगा वो भी स्पष्ट हो गया है। यहां हम इस बारे में आपको बताएंगे।
Shah Rukh Khan: खबरें आ रही हैं कि जवान फिल्म की रिलीज़ डेट को आगे भी बढ़ाया जाएगा। वहीं आपको बता दें पुष्पा स्टार अल्लू अर्जुन ने अब शाहरुख खान की फिल्म जवान में काम करने से मना कर दिया है। जिसका मतलब ये है कि अब हमें शाहरुख खान के साथ अल्लू अर्जुन देखने को मिलने वाले नहीं हैं। क्या है पूरी खबर यहां हम आपको बतांएगे।
Tu Jhoothi Main Makkaar: रणबीर कपूर हाल ही में फिल्म के प्रमोशन को लेकर सौरव गांगुली से भी मिले थे इसके अलावा उन्होंने उनके साथ एक मैच भी खेला था। अब हाल ही में "तू झूठी मैं मक्कार" फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर ने बॉयकॉट ट्रेंड पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे।
Billi Billi Song: किसी का भाई किसी की जान फिल्म से रिलीज़ हुआ बिल्ली-बिल्ली सांग प्रॉपर डांस नंबर दिख रहा है। इसमें आपको सलमान खान के साथ पूजा हेगड़े, वेंकटेश, भूमिका चावला, सिद्धार्थ निगम, राघव जुयाल और जस्सी गिल नज़र आते हैं। तो चलिए यहां पर हम बिल्ली-बिल्ली सांग के बारे में बात करते हैं।
Gandhada Gudi OTT Release Date: पुनीत ने इस फिल्म में अपने कम्फर्ट ज़ोन से हटकर काम किया था। और डायरेक्टर अमोघवर्ष ने भी फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य दिखाए हैं जिसे देखकर सब हैरान रह गए थे। गंधड़ा गुड़ी फिल्म का दर्शक काफी समय से ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ का इतंज़ार कर रहे थे और अब इस फिल्म की ओटीटी रिलीज़ डेट आ गई है। यहां हम इसी बारे में आपको बताएंगे।
Tu Jhoothi Main Makkaar: मेकर्स दर्शकों को फिल्म में एक और सरप्राइज़ गिफ्ट देने वाले हैं। खबरों की माने तो "तू झूठी मैं मक्कार" फिल्म में भूल भुलैया 2 एक्टर कार्तिक आर्यन भी नज़र आने वाले हैं। यहां हम इसी खबर के बारे में आपको बताने वाले हैं।
Top 5 Horror Web-Series On OTT: अगर आपको भी हॉरर फिल्म और वेब सीरीज देखना पसंद है और अगर हॉरर शो के दीवाने हैं तो हम यहां आपको कुछ ऐसे शो और फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जो नेटफ्लिक्स के ओटीटी प्लेटफार्म पर आप देख सकते हैं। तो चलिए मनोरंजन के लिए हो जाइए तैयार क्योंकि नेटफ्लिक्स की ये हैं कुछ हॉरर वेब सीरीज।
Amazon Prime OTT Releases In March 2023: अमेज़न प्राइम पर फरवरी महीने में रिलीज़ हुआ शाहिद कपूर और विजय सेतुपति का शो फ़र्ज़ी दर्शकों को पसंद की लिस्ट में सबसे ऊपर रहा है। इस मार्च आखिर अमेज़न प्राइम पर ऐसा क्या ख़ास रिलीज़ होने वाला है जो दर्शकों की पहली पसंद बन सकता है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। यहां हम आपको मार्च महीने में अमेज़न प्राइम के ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ होने वाले वेब सीरीज और फिल्म के बारे में बताएंगे।
|
Gulmohar Review: इस फिल्म में आपको एक बड़े से परिवार की कहानी देखने को मिलती है, जो टूटने वाला है। फिल्म की शुरुआत में जब आप इस गुलमोहर विला के परिवार से रूबरू होते हैं और आपको पता चलता है कि इस परिवार के टूटने से पहले ही इस परिवार के लोग लगभग टूट चुके हैं। जैसे गुलमोहर के पेड़ को देखकर आपको ठंडक का एहसास होता है वैसा ही कुछ एहसास देती है ये फिल्म भी। Rajkummar Rao: राजकुमार राव की फिल्म भीड़ की शूटिंग समाप्त हो गई है और जल्द ही उसे सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा। इसके राजकुमार राव, राज एंड डीके की वेब सीरीज गुलाब एंड गन्स भी नज़र आने वाले हैं। जिसे इसी साल रिलीज़ किया जाएगा। वहीं आज राजकुमार राव की नई फिल्म के टीज़र को रिलीज़ कर दिया गया है। यहां हम इसी बारे में बात करने वाले हैं। Hera Pheri तीन: अक्षय कुमार के किरदार को लेकर भी संशय बना हुआ था। इसके अलावा हेरा फेरी तीन का नाम हेरा फेरी चार होगा। वहीं हमने इससे पहले आपको बताया था कि हेरा फेरी तीन के साथ संजय दत्त भी नज़र आने वाले हैं। वहीं अब संजय दत्त का किरदार क्या होगा वो भी स्पष्ट हो गया है। यहां हम इस बारे में आपको बताएंगे। Shah Rukh Khan: खबरें आ रही हैं कि जवान फिल्म की रिलीज़ डेट को आगे भी बढ़ाया जाएगा। वहीं आपको बता दें पुष्पा स्टार अल्लू अर्जुन ने अब शाहरुख खान की फिल्म जवान में काम करने से मना कर दिया है। जिसका मतलब ये है कि अब हमें शाहरुख खान के साथ अल्लू अर्जुन देखने को मिलने वाले नहीं हैं। क्या है पूरी खबर यहां हम आपको बतांएगे। Tu Jhoothi Main Makkaar: रणबीर कपूर हाल ही में फिल्म के प्रमोशन को लेकर सौरव गांगुली से भी मिले थे इसके अलावा उन्होंने उनके साथ एक मैच भी खेला था। अब हाल ही में "तू झूठी मैं मक्कार" फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर ने बॉयकॉट ट्रेंड पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। Billi Billi Song: किसी का भाई किसी की जान फिल्म से रिलीज़ हुआ बिल्ली-बिल्ली सांग प्रॉपर डांस नंबर दिख रहा है। इसमें आपको सलमान खान के साथ पूजा हेगड़े, वेंकटेश, भूमिका चावला, सिद्धार्थ निगम, राघव जुयाल और जस्सी गिल नज़र आते हैं। तो चलिए यहां पर हम बिल्ली-बिल्ली सांग के बारे में बात करते हैं। Gandhada Gudi OTT Release Date: पुनीत ने इस फिल्म में अपने कम्फर्ट ज़ोन से हटकर काम किया था। और डायरेक्टर अमोघवर्ष ने भी फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य दिखाए हैं जिसे देखकर सब हैरान रह गए थे। गंधड़ा गुड़ी फिल्म का दर्शक काफी समय से ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ का इतंज़ार कर रहे थे और अब इस फिल्म की ओटीटी रिलीज़ डेट आ गई है। यहां हम इसी बारे में आपको बताएंगे। Tu Jhoothi Main Makkaar: मेकर्स दर्शकों को फिल्म में एक और सरप्राइज़ गिफ्ट देने वाले हैं। खबरों की माने तो "तू झूठी मैं मक्कार" फिल्म में भूल भुलैया दो एक्टर कार्तिक आर्यन भी नज़र आने वाले हैं। यहां हम इसी खबर के बारे में आपको बताने वाले हैं। Top पाँच Horror Web-Series On OTT: अगर आपको भी हॉरर फिल्म और वेब सीरीज देखना पसंद है और अगर हॉरर शो के दीवाने हैं तो हम यहां आपको कुछ ऐसे शो और फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जो नेटफ्लिक्स के ओटीटी प्लेटफार्म पर आप देख सकते हैं। तो चलिए मनोरंजन के लिए हो जाइए तैयार क्योंकि नेटफ्लिक्स की ये हैं कुछ हॉरर वेब सीरीज। Amazon Prime OTT Releases In March दो हज़ार तेईस: अमेज़न प्राइम पर फरवरी महीने में रिलीज़ हुआ शाहिद कपूर और विजय सेतुपति का शो फ़र्ज़ी दर्शकों को पसंद की लिस्ट में सबसे ऊपर रहा है। इस मार्च आखिर अमेज़न प्राइम पर ऐसा क्या ख़ास रिलीज़ होने वाला है जो दर्शकों की पहली पसंद बन सकता है। यहां हम इसी बारे में बात करेंगे। यहां हम आपको मार्च महीने में अमेज़न प्राइम के ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज़ होने वाले वेब सीरीज और फिल्म के बारे में बताएंगे।
|
मुंबई : पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के खिलाफ मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज किया है. दरअसल, मुंबई के ड्रेगन फ्लाई नाम के एक पब में कोरोना के नियमों का पालन न करते हुए कई लोग पकड़े गए थे. इनमें सुरेश रैना भी शामिल हैं. रैना पर धारा 188, 269 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
बताया जा रहा है कि उनके साथ पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा व सुजैन खान (ऋतिक रोशन की एक्स वाइफ) भी मौजूद थी. इस पार्टी में रैपर बादशाह भी शामिल थे. जब पुलिस ने छापा मारा तो कई बड़े सेलिब्रेटिज वहां से पीछे के दरवाजे से निकल गए. पुलिस ने कई हाई प्रोफाइल सेलिब्रेटिज को हिरासत में लिया है. सेलिब्रिटीज को गिरफ्तार करने का बाद छोड़ भी दिया गया. बीती रात की गई इस छापेमारी में पुलिस ने कई कलाकार और खिलाड़ियों को हिरासत में लिया था.
दरअसल, रात करीब तीन बजे मुंबई पुलिस ने अंधेरी के एक बड़े क्लब ड्रैगन फ्लाई पर छापा मारा. जानकारी के मुताबिक क्लब में पार्टी चल रही थी. इस पार्टी में पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना भी मौजूद थे. मुंबई पुलिस ने रैना पर केस भी दर्ज कर लिया गया है. बताया गया कि इस दौरान उनके साथ पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा व सुजैन खान भी मौजूद थे. इस पार्टी में रैपर बादशाह भी शामिल थे.
|
मुंबई : पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के खिलाफ मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज किया है. दरअसल, मुंबई के ड्रेगन फ्लाई नाम के एक पब में कोरोना के नियमों का पालन न करते हुए कई लोग पकड़े गए थे. इनमें सुरेश रैना भी शामिल हैं. रैना पर धारा एक सौ अठासी, दो सौ उनहत्तर और चौंतीस के तहत मामला दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि उनके साथ पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा व सुजैन खान भी मौजूद थी. इस पार्टी में रैपर बादशाह भी शामिल थे. जब पुलिस ने छापा मारा तो कई बड़े सेलिब्रेटिज वहां से पीछे के दरवाजे से निकल गए. पुलिस ने कई हाई प्रोफाइल सेलिब्रेटिज को हिरासत में लिया है. सेलिब्रिटीज को गिरफ्तार करने का बाद छोड़ भी दिया गया. बीती रात की गई इस छापेमारी में पुलिस ने कई कलाकार और खिलाड़ियों को हिरासत में लिया था. दरअसल, रात करीब तीन बजे मुंबई पुलिस ने अंधेरी के एक बड़े क्लब ड्रैगन फ्लाई पर छापा मारा. जानकारी के मुताबिक क्लब में पार्टी चल रही थी. इस पार्टी में पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना भी मौजूद थे. मुंबई पुलिस ने रैना पर केस भी दर्ज कर लिया गया है. बताया गया कि इस दौरान उनके साथ पंजाबी सिंगर गुरू रंधावा व सुजैन खान भी मौजूद थे. इस पार्टी में रैपर बादशाह भी शामिल थे.
|
हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट......मुंबई : महाराष्ट्र की नयी सरकार का खाका तैयार हो गया है। नई सरकार में शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनेंगे। शिवसेना-राकांपा को 15-15 जबकि कांग्रेस को 13 मंत्री पद मिल सकता हैं। विश्वस्त सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को 13 मंत्री पद के अलावें विधानसभा अध्यक्ष का पद भी दिया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि शिवसेना को पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री का पद मिलेगा। इस पर तीनों दलों के बीच सहमति बन गई है।
शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार नयी सरकार में शिवेसना को मुख्यमंत्री के अलावा 14 मंत्री पद मिल सकता है। जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को उप मुख्यमंत्री समेत 15 मंत्री पद दिये जा सकते हैं। महाराष्ट्र की सरकार में अधिकतम 43 मंत्री हो सकते हैं। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में मंत्रियों की संख्या कुल सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। महाराष्ट्र की नई विधानसभा में शिवसेना के 56, राकांपा के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उद्धव ठाकरे ने आज राकांपा अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की है। दिन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल एवं अन्य के साथ पवार की बातचीत के मद्देनजर दोनों शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। शरद पवार एवं शिवसेना नेता ठाकरे ने अपने मंत्रिपरिषद एवं बृहस्पतिवार शाम को शिवाजी पार्क में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। जबसे शिवसेना ने राकांपा एवं कांग्रेस गठबंधन से संपर्क किया है तब से पवार सरकार गठन के लिए तीनों पार्टियों के बीच बातचीत का केंद्र रहे हैं।
अब यह देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे के बुलावे पर केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता शपथ ग्रहण समारोह में आते हैं या नहीं।
|
हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट......मुंबई : महाराष्ट्र की नयी सरकार का खाका तैयार हो गया है। नई सरकार में शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनेंगे। शिवसेना-राकांपा को पंद्रह-पंद्रह जबकि कांग्रेस को तेरह मंत्री पद मिल सकता हैं। विश्वस्त सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को तेरह मंत्री पद के अलावें विधानसभा अध्यक्ष का पद भी दिया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि शिवसेना को पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री का पद मिलेगा। इस पर तीनों दलों के बीच सहमति बन गई है। शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार नयी सरकार में शिवेसना को मुख्यमंत्री के अलावा चौदह मंत्री पद मिल सकता है। जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को उप मुख्यमंत्री समेत पंद्रह मंत्री पद दिये जा सकते हैं। महाराष्ट्र की सरकार में अधिकतम तैंतालीस मंत्री हो सकते हैं। दो सौ अठासी सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में मंत्रियों की संख्या कुल सदस्य संख्या का पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। महाराष्ट्र की नई विधानसभा में शिवसेना के छप्पन, राकांपा के चौवन और कांग्रेस के चौंतालीस विधायक हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उद्धव ठाकरे ने आज राकांपा अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की है। दिन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल एवं अन्य के साथ पवार की बातचीत के मद्देनजर दोनों शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। शरद पवार एवं शिवसेना नेता ठाकरे ने अपने मंत्रिपरिषद एवं बृहस्पतिवार शाम को शिवाजी पार्क में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। जबसे शिवसेना ने राकांपा एवं कांग्रेस गठबंधन से संपर्क किया है तब से पवार सरकार गठन के लिए तीनों पार्टियों के बीच बातचीत का केंद्र रहे हैं। अब यह देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे के बुलावे पर केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता शपथ ग्रहण समारोह में आते हैं या नहीं।
|
इराक़ के प्रधानमंत्री ने सरकार और इराक़ी कुर्दिस्तान के बीच तनाव कम करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
हैदर अलएबादी ने सरकारी टीवी से बात करते हुए कहा कि कुर्दों और सरकार के बीच तनाव किसी के भी हित में नहीं है और इराक़ी कुर्दिस्तान की पृथकता के लिए रिफ़्रेन्डम कराए जाने से केवल स्थिति अधिक तनावपूर्ण होगी। गत सप्ताह इराक़ के राष्ट्रपति फ़ुआद मासूम ने भी इस देश की अखंडता व एकता पर बल देते हुए कहा था कि इराक़ी कुर्दिस्तान की स्वायत्तता और पृथकता, सरकार के लिए अनेक समस्याओं का कारण बनेगी।
ज्ञात रहे कि इससे पहले भी इराक़ी कुर्दिस्तान के क्षेत्र के नेता मसऊद बारेज़ानी ने कहा था कि वे इस क्षेत्र की स्वाधीनता के लिए रिफ़्रेन्डम कराएंगे। (HN)
|
इराक़ के प्रधानमंत्री ने सरकार और इराक़ी कुर्दिस्तान के बीच तनाव कम करने की आवश्यकता पर बल दिया है। हैदर अलएबादी ने सरकारी टीवी से बात करते हुए कहा कि कुर्दों और सरकार के बीच तनाव किसी के भी हित में नहीं है और इराक़ी कुर्दिस्तान की पृथकता के लिए रिफ़्रेन्डम कराए जाने से केवल स्थिति अधिक तनावपूर्ण होगी। गत सप्ताह इराक़ के राष्ट्रपति फ़ुआद मासूम ने भी इस देश की अखंडता व एकता पर बल देते हुए कहा था कि इराक़ी कुर्दिस्तान की स्वायत्तता और पृथकता, सरकार के लिए अनेक समस्याओं का कारण बनेगी। ज्ञात रहे कि इससे पहले भी इराक़ी कुर्दिस्तान के क्षेत्र के नेता मसऊद बारेज़ानी ने कहा था कि वे इस क्षेत्र की स्वाधीनता के लिए रिफ़्रेन्डम कराएंगे।
|
राहुल गांधी व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मुख्य सेवादार हलका खरड़ जगमोहन सिंह कंग के नेतृत्व में राजबीर सिंह राजी को यूथ कांग्रेस खरड़ का अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस के सभी नेताओं व यूथ वर्करों की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम सन्नी इन्कलेव खरड़ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जगमोहन सिंह कंग ने श्री राजी को यूथ कांग्रेस खरड़ के अध्यक्षका नियुक्ति पत्र सौंपा । इस अवसर पर बातचीत दौरान श्री कंग ने कहा कि राजबीर सिंह राज़ी की पिछले 15 वर्षों से पार्टी प्रति दी गई सेवाओं के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है क्योंकि श्री राजी यूथ के भी अतिप्रिय नेता रहे है और उन्होंने यूथ की समस्याओं व उनके मुद्दों को हमेशा जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने आशा प्रगटाई कि श्री राजी को जो जुम्मेवारी सौंपी गई है उसे भी वह पूरी निष्ठा से निभायेंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित समूह कांग्रेस नेताओं व अपने यूथ साथियों का श्री राजी की तरफ से धन्यवाद किया गया उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत गर्व है कि एक छोटे से निमत्रण वह बडी संख्या इस कार्यक्रम में उपस्थित हुये। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के उत्थान के लिये हमेशा जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का विशेष रोल रहता है उन्होंने कहा कि मेरी भी इस प्राप्ती के लिये मेरे यूथ साथियों का बहुत साथ रहा है जो पिछले 15 वर्ष से मेरे साथ दिन-रात मेहनत कर रहें है। उन्होंने कहा कि पार्टी के तरफ से जो उन्हें नई जिम्मेवारी दी गई है वह उसे पूरी निष्ठा से निभायेंगे और अधिक से अधिक संख्या में यूथ को कांग्रेस की नीतियों संबंधी अवगत करवाकर पार्टी के साथ जोडेगे। इस अवसर पर यादविंदर सिंह कंग, मनजोत सिंह अध्यक्ष लोकसभा श्री आनंदपुर साहिब व अन्य कांग्रेस पदाधिकारी व यूथ कार्यकर्ता उपस्थित थे।
|
राहुल गांधी व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मुख्य सेवादार हलका खरड़ जगमोहन सिंह कंग के नेतृत्व में राजबीर सिंह राजी को यूथ कांग्रेस खरड़ का अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस के सभी नेताओं व यूथ वर्करों की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम सन्नी इन्कलेव खरड़ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जगमोहन सिंह कंग ने श्री राजी को यूथ कांग्रेस खरड़ के अध्यक्षका नियुक्ति पत्र सौंपा । इस अवसर पर बातचीत दौरान श्री कंग ने कहा कि राजबीर सिंह राज़ी की पिछले पंद्रह वर्षों से पार्टी प्रति दी गई सेवाओं के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है क्योंकि श्री राजी यूथ के भी अतिप्रिय नेता रहे है और उन्होंने यूथ की समस्याओं व उनके मुद्दों को हमेशा जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने आशा प्रगटाई कि श्री राजी को जो जुम्मेवारी सौंपी गई है उसे भी वह पूरी निष्ठा से निभायेंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित समूह कांग्रेस नेताओं व अपने यूथ साथियों का श्री राजी की तरफ से धन्यवाद किया गया उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत गर्व है कि एक छोटे से निमत्रण वह बडी संख्या इस कार्यक्रम में उपस्थित हुये। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के उत्थान के लिये हमेशा जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का विशेष रोल रहता है उन्होंने कहा कि मेरी भी इस प्राप्ती के लिये मेरे यूथ साथियों का बहुत साथ रहा है जो पिछले पंद्रह वर्ष से मेरे साथ दिन-रात मेहनत कर रहें है। उन्होंने कहा कि पार्टी के तरफ से जो उन्हें नई जिम्मेवारी दी गई है वह उसे पूरी निष्ठा से निभायेंगे और अधिक से अधिक संख्या में यूथ को कांग्रेस की नीतियों संबंधी अवगत करवाकर पार्टी के साथ जोडेगे। इस अवसर पर यादविंदर सिंह कंग, मनजोत सिंह अध्यक्ष लोकसभा श्री आनंदपुर साहिब व अन्य कांग्रेस पदाधिकारी व यूथ कार्यकर्ता उपस्थित थे।
|
Health Tips: ड्राई फ्रूट्स खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। खासतौर पर सर्दी के मौसम में ड्रायफ्रूट्स खाना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि ड्रायफ्रूट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। इसलिए डॉक्टर्स भी स्वसथ्य रहने के लिए ड्राईफ्रूट्स खाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ज्यादा फाइबर का सेवन आपके पाचन तंत्र को खराब कर सकता है।
ड्रायफ्रूट्स खाने के फायदे तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ड्रायफ्रूट्स खाने के नुकसान नहीं जानते, जो की आपको जानना चाहिए। तो आइए जानते हैं ड्राईफ्रूट्स से होने वाले नुकसान के बारे में....
सूखे मेवों का सेवर सीमित मात्रा में करें।
कई बार कहा जाता है कि ड्राय फ्रूट्स के ज्यादा सेवन से वजन बढ़ने लगता है। दरअसल, इनमें कैलोरी बहुत ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आप हर रोज सूखे मेवे खाते हैं तो आप कुछ ही समय में मोटे हो जाएंगे। इसलिए सूखे मेवे की मात्रा अपनी डाइट में कम रखें।
ड्राई फ्रूट में पाए जाने वाला फ्रुक्टोस आपको सेहतमंद बनाता है। लेकिन ज्यादा ड्राय फ्रूट खाने से आपके दांतों को लेकर परेशान हो सकते हैं। दरअसल, सूखे मेवों में ज्यादा चीनी होती है, जो दांतों में चिपक जाती है। इस कारण दांतों में सड़न पैदा होती है।
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राई फ्रूट खाने के बाद हमेशा ब्रश करना चाहिए। इसके अलावा इस समस्या से बचने के लिए सूखे मेवे खाने के बाद हमेशा पानी पीना चाहिए।
सूखे मेवों का बहुत ज्यादा सेवन अस्थमा का कारण बन सकता है। बहुत लोग नहीं जानते, कि सूखे मेवों को संरक्षित करने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। यह वाकई में एक खतरनाक घटक है। यह बड़े लेवल पर ब्लीचिंग एजेंट और डिस्इंफेक्टेंट के रूप में भी यूज किया जाता है।
|
Health Tips: ड्राई फ्रूट्स खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। खासतौर पर सर्दी के मौसम में ड्रायफ्रूट्स खाना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि ड्रायफ्रूट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। इसलिए डॉक्टर्स भी स्वसथ्य रहने के लिए ड्राईफ्रूट्स खाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ज्यादा फाइबर का सेवन आपके पाचन तंत्र को खराब कर सकता है। ड्रायफ्रूट्स खाने के फायदे तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ड्रायफ्रूट्स खाने के नुकसान नहीं जानते, जो की आपको जानना चाहिए। तो आइए जानते हैं ड्राईफ्रूट्स से होने वाले नुकसान के बारे में.... सूखे मेवों का सेवर सीमित मात्रा में करें। कई बार कहा जाता है कि ड्राय फ्रूट्स के ज्यादा सेवन से वजन बढ़ने लगता है। दरअसल, इनमें कैलोरी बहुत ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आप हर रोज सूखे मेवे खाते हैं तो आप कुछ ही समय में मोटे हो जाएंगे। इसलिए सूखे मेवे की मात्रा अपनी डाइट में कम रखें। ड्राई फ्रूट में पाए जाने वाला फ्रुक्टोस आपको सेहतमंद बनाता है। लेकिन ज्यादा ड्राय फ्रूट खाने से आपके दांतों को लेकर परेशान हो सकते हैं। दरअसल, सूखे मेवों में ज्यादा चीनी होती है, जो दांतों में चिपक जाती है। इस कारण दांतों में सड़न पैदा होती है। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राई फ्रूट खाने के बाद हमेशा ब्रश करना चाहिए। इसके अलावा इस समस्या से बचने के लिए सूखे मेवे खाने के बाद हमेशा पानी पीना चाहिए। सूखे मेवों का बहुत ज्यादा सेवन अस्थमा का कारण बन सकता है। बहुत लोग नहीं जानते, कि सूखे मेवों को संरक्षित करने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। यह वाकई में एक खतरनाक घटक है। यह बड़े लेवल पर ब्लीचिंग एजेंट और डिस्इंफेक्टेंट के रूप में भी यूज किया जाता है।
|
कोतवाली थाना एरिया के छित्तमपुर गांव में बुधवार की रात जहरीली शराब पीने से दो युवकों की मौत हो गई। दो की हालत गंभीर है। इनका इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में चल रहा है। जहरीली शराब से मौत की जानकारी होते ही पुलिस और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया। शराब के अड्डों पर छापेमारी शुरू हो गयी है। डीएम और एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया है। अवैध शराब का धंधा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है।
छित्तमपुर गांव में नैयापर मौजा निवासी सुरेंद्र (क्8 वर्ष) अपने मित्र सुक्खू (ख्8 वर्ष), जितेंद्र (ख्म् वर्ष) और सुजीत (ख्0 वर्ष) के साथ अलीनगर थाना एरिया के रेमा गांव स्थित अपने ससुराल गया था। वहां सभी ने कच्ची शराब पी और मुर्गा खाया। अगले दिन सभी अपने घर लौट आए। बुधवार की रात चारों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। परिजन सभी को लेकर मुगलसराय स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाने लगे। सुक्खू और सुरेंद्र की रास्ते में मौत हो गई। जितेंद्र और सुजीत को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां दोनों की हालत गंभीर है।
जहरीली शराब पीने के कारण दो की मौत और दो की हालत गंभीर होने की सूचना पर डीएम सुरेंद्र विक्रम और एसपी अमित वर्मा हॉस्पिटल पहुंचे। भर्ती दोनों युवकों के बारे में जानकारी ली। डीएम का कहा है कि मेडिकल जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि मौत की वजह जहरीली शराब है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी आरएस यादव का कहना है प्रारम्भिक जांच में मौत की वजह फूड प्वाज¨नग है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामला स्पष्ट हो पाएगा।
फोटो परिचय क्भ्सीएचए07 से 09 तक।
|
कोतवाली थाना एरिया के छित्तमपुर गांव में बुधवार की रात जहरीली शराब पीने से दो युवकों की मौत हो गई। दो की हालत गंभीर है। इनका इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में चल रहा है। जहरीली शराब से मौत की जानकारी होते ही पुलिस और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया। शराब के अड्डों पर छापेमारी शुरू हो गयी है। डीएम और एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया है। अवैध शराब का धंधा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। छित्तमपुर गांव में नैयापर मौजा निवासी सुरेंद्र अपने मित्र सुक्खू , जितेंद्र और सुजीत के साथ अलीनगर थाना एरिया के रेमा गांव स्थित अपने ससुराल गया था। वहां सभी ने कच्ची शराब पी और मुर्गा खाया। अगले दिन सभी अपने घर लौट आए। बुधवार की रात चारों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। परिजन सभी को लेकर मुगलसराय स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाने लगे। सुक्खू और सुरेंद्र की रास्ते में मौत हो गई। जितेंद्र और सुजीत को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां दोनों की हालत गंभीर है। जहरीली शराब पीने के कारण दो की मौत और दो की हालत गंभीर होने की सूचना पर डीएम सुरेंद्र विक्रम और एसपी अमित वर्मा हॉस्पिटल पहुंचे। भर्ती दोनों युवकों के बारे में जानकारी ली। डीएम का कहा है कि मेडिकल जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि मौत की वजह जहरीली शराब है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी आरएस यादव का कहना है प्रारम्भिक जांच में मौत की वजह फूड प्वाज¨नग है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामला स्पष्ट हो पाएगा। फोटो परिचय क्भ्सीएचएसात से नौ तक।
|
अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान ने कहा कि उन्हें लगता है कि देश का 'तेज गेंदबाजी पावरहाउस' के रूप में ऊपर बढ़ना ही साल की सुर्खियां रहीं।
उमेश यादव (23), इशांत शर्मा (25) और मोहम्मद शमी (33) ने 20 से भी कम औसत से इस साल टेस्ट में 81 विकेट चटकाए। इससे पहले 41 वर्ष पूर्व ऐसा हुआ था जब एक टीम के तीन तेज गेंदबाजों ने एक कैलेंडर वर्ष में 20 से भी कम औसत से 20 से ज्यादा विकेट चटकाए थे। तब 1978 में इंग्लैंड के इयान बॉथम, क्रिस ओल्ड और बॉब विलिस ने यह उपलब्धि हासिल की थी।
पूर्व स्टाइलिश बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने ऑस्ट्रेलिया पर उसकी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज में मिली जीत को 2019 के 'पंसदीदा क्षण' में शामिल किया है। भारत ने दिसंबर 2018 में शुरू होकर जनवरी 2019 तक हुई चार मैचों की सीरीज में 2-1 से जीत हासिल की।
लक्ष्मण ने कहा, 'यह भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा साल रहा लेकिन टेस्ट क्रिकेटर होने के नाते मेरा सपना हमेशा ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना था लेकिन मैं अपने करियर में इसे हासिल नहीं कर सका। मैं बहुत खुश हूं कि भारतीय टीम ने विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को पहली बार उसकी ही सरजमीं पर हरा दिया जो 2019 में भारतीय क्रिकेट के पसंदीदा पल रहा।
|
अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान ने कहा कि उन्हें लगता है कि देश का 'तेज गेंदबाजी पावरहाउस' के रूप में ऊपर बढ़ना ही साल की सुर्खियां रहीं। उमेश यादव , इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी ने बीस से भी कम औसत से इस साल टेस्ट में इक्यासी विकेट चटकाए। इससे पहले इकतालीस वर्ष पूर्व ऐसा हुआ था जब एक टीम के तीन तेज गेंदबाजों ने एक कैलेंडर वर्ष में बीस से भी कम औसत से बीस से ज्यादा विकेट चटकाए थे। तब एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में इंग्लैंड के इयान बॉथम, क्रिस ओल्ड और बॉब विलिस ने यह उपलब्धि हासिल की थी। पूर्व स्टाइलिश बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने ऑस्ट्रेलिया पर उसकी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज में मिली जीत को दो हज़ार उन्नीस के 'पंसदीदा क्षण' में शामिल किया है। भारत ने दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में शुरू होकर जनवरी दो हज़ार उन्नीस तक हुई चार मैचों की सीरीज में दो-एक से जीत हासिल की। लक्ष्मण ने कहा, 'यह भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा साल रहा लेकिन टेस्ट क्रिकेटर होने के नाते मेरा सपना हमेशा ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना था लेकिन मैं अपने करियर में इसे हासिल नहीं कर सका। मैं बहुत खुश हूं कि भारतीय टीम ने विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को पहली बार उसकी ही सरजमीं पर हरा दिया जो दो हज़ार उन्नीस में भारतीय क्रिकेट के पसंदीदा पल रहा।
|
जालौन में पुलिस ने सारे दस्तावेज होने के बावजूद एक व्यापारी का वाहन रोक लिया और उस पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। इस मामले में व्यापारी ने हाई कोर्ट से न्याय किए जाने की गुहार लगाई थी।
विशाल वर्मा, जालौन व्यापारियों से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव के साथ जालौन के पुलिस अधीक्षक को तलब किया। अदालत ने पूरे प्रकरण में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलबंन की कार्यवाही की है। इसमें एक इंस्पेक्टर के साथ दो सब इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है।
बुधवार को हाई कोर्ट के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी अदालत में तलब हुए थे। न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने जालौन के व्यापारी विशाल गुप्ता के याचिका पर पुलिस अधीक्षक जालौन रवि कुमार और थाना नदीगांव के उपनिरीक्षक केदार सिंह को तलब किया था।
फर्जी तरीके से व्यापारी पर हुआ मुकदमा हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस व्यापारियों के खिलाफ मनमानी कर रही है। उनके ऊपर फर्जी तरीके से धोखाधड़ी के मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। 20 फरवरी को दर्ज कराई गई याचिका के खिलाफ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पान मसाला व्यापारी ट्रक पर सुपारी और तंबाकू लेकर जा रहा था। तभी तत्कालीन सब इंस्पेक्टर ने वाहन रोक लिया। सारे दस्तावेज होने के बावजूद पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
मामले में अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और जालौन के पुलिस अधीक्षक ने हलफनामा देते हुए बताया कि दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई और व्यापारी को पूरे मामले में राहत मिली है। पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि व्यापारी विशाल गुप्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए तत्कालीन इंस्पेक्टर व दो दरोगा को निलंबित किया गया है।
|
जालौन में पुलिस ने सारे दस्तावेज होने के बावजूद एक व्यापारी का वाहन रोक लिया और उस पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। इस मामले में व्यापारी ने हाई कोर्ट से न्याय किए जाने की गुहार लगाई थी। विशाल वर्मा, जालौन व्यापारियों से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव के साथ जालौन के पुलिस अधीक्षक को तलब किया। अदालत ने पूरे प्रकरण में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलबंन की कार्यवाही की है। इसमें एक इंस्पेक्टर के साथ दो सब इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। बुधवार को हाई कोर्ट के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी अदालत में तलब हुए थे। न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने जालौन के व्यापारी विशाल गुप्ता के याचिका पर पुलिस अधीक्षक जालौन रवि कुमार और थाना नदीगांव के उपनिरीक्षक केदार सिंह को तलब किया था। फर्जी तरीके से व्यापारी पर हुआ मुकदमा हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस व्यापारियों के खिलाफ मनमानी कर रही है। उनके ऊपर फर्जी तरीके से धोखाधड़ी के मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। बीस फरवरी को दर्ज कराई गई याचिका के खिलाफ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पान मसाला व्यापारी ट्रक पर सुपारी और तंबाकू लेकर जा रहा था। तभी तत्कालीन सब इंस्पेक्टर ने वाहन रोक लिया। सारे दस्तावेज होने के बावजूद पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले में अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और जालौन के पुलिस अधीक्षक ने हलफनामा देते हुए बताया कि दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई और व्यापारी को पूरे मामले में राहत मिली है। पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि व्यापारी विशाल गुप्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए तत्कालीन इंस्पेक्टर व दो दरोगा को निलंबित किया गया है।
|
नई दिल्लीः देशभर में कोरोनावायरस के अभी तक 1024 मामले सामने आ चुके हैं। शनिवार को कोरोना संक्रमण के 179 नए केस आए। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह देश में एक दिन में संक्रमण के सबसे ज्यादा सामने आने वाले मामले हैं। इनमें महाराष्ट्र के 30, कर्नाटक के 17, उत्तर प्रदेश के 16, जम्मू कश्मीर के 13, दिल्ली के 9, तेलंगाना और गुजरात के 8-8, केरल के 6, मध्य प्रदेश के 5, राजस्थान-तमिलनाडु के 4-4, अंडमान निकोबार और पश्चिम बंगाल के 3-3, छत्तीसगढ़-उत्तराखंड के 1-1 मामले शामिल हैं। वहीं, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में अब तक संक्रमण के 918 मामले बताए हैं, जिनमें से 819 एक्टिव मरीज हैं। हालांकि, covid19india.org के मुताबिक देश में संक्रमितों की संख्या 1024 है। एक दिन में संक्रमण के सबसे ज्यादा 151 मामले शुक्रवार को सामने आए थे, जबकि 3 लोगों की मौत हुई थी और 25 लोग ठीक हुए थे। इससे पहले 23 मार्च को एक दिन में 102 लोग संक्रमित हुए थे। इधर, पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ में कोरोनावायरस संक्रमित 5 और मरीज ठीक हो गए हैं। इनकी दूसरी टेस्ट रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि इन सभी मरीजों की जल्द ही अस्पताल से छोड़ दिया जाएगा। इससे पहले, 14 दिन अस्पताल में आइसोलेशन में रहने के बाद 3 मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इन्हें शुक्रवार को डिस्चार्ज किया गया था। पिंपरी-चिंचवड़ में अब तक कोरोनावायरस के 12 केस सामने आए हैं। हालांकि, बीते 8 दिनों में एक भी नया मामला सामने नहीं आया।
इधर, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को चिठ्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बताया है कि राज्य में एनआरआई की संख्या बहुत ज्यादा है। इसी महीने 90 हजार अनिवासी भारतीय पंजाब आए हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है। इससे लड़ने के लिए राज्य को 150 करोड़ के अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ेगी।
इस बीच, हिमाचल प्रदेश सरकार ने चंडीगढ़ में रह रहे अपने यहां के छात्रों को हिमाचल भवन में रखने का फैसला किया है। ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि यहां मकान मालिक प्रदेश के छात्रों को घर खाली करने के लिए कह रहे हैं। इधर, तिहाड़ जेल प्रशासन ने एहतियातन 356 कैदियों को 45 दिन की अंतिरम जमानत दे दी है और 63 को इमरजेंसी पैरोल पर रिहा करने का फैसला किया है।
इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्रालय ने कहा है कि कोरोनावायरस के इलाज के लिए देशभर में डॉक्टरों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है।एम्स में इसके लिए एक सेंटर बनाया जा रहा है। वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा- देशभर में 30 जून तक बिजली की आपूर्ति 24 घंटे जारी रहेगी। अगर राज्यों में वितरण कंपनियों का बकाया है तो भी बिजली उत्पादक कंपनियां आपूर्ति को नियंत्रित नहीं करेंगी।
इस संक्रमण से मुकाबले के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। ट्रेन के डिब्बे को ही आइसोलेशन कोच के रूप में बदलने की तैयारी है। दिल्ली डिपो में एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसमें 6 बर्थ वाले हिस्से में से एक तरफ की मिडिल बर्थ और सामने वाली तीनों बर्थ निकाल दी गई हैं। इस हिस्से में एक मरीज को रखा जाएगा। इससे हर मरीज के बीच जरूरी दूरी रहेगी। रेलवे का कहना है कि मंजूरी मिलते ही हर जोन में हर हफ्ते 10 डिब्बों को आइसोलेशन कोच में बदला जाएगा।
मध्यप्रदेश; कुल संक्रमित- 34: राज्य में शनिवार को 5 नए मामले सामने आए। इससे पहले शुक्रवार को जबलपुर में दो लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दोनों नए मरीज पहले से संक्रमित सराफा व्यापारी के यहां काम करते हैं। अब इंदौर में 16, जबलपुर में 8, भोपाल-उज्जैन में 3-3, शिवपुरी में 2 और ग्वालियर में 2 पॉजिटिव हैं। प्रदेश में अब तक 2 लोगों की मौत हुई है।
राजस्थान; कुल संक्रमित- 54: आज 4 नए मामले सामने आए। अजमेर में 23 साल का युवक संक्रमित मिला है। वह हाल ही में पंजाब से लौटा था। 21 साल की एक युवती भीलवाड़ा में संक्रमित पाई गई है। भीलवाड़ा में ही बांगड़ हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ के दो लोग संक्रमित मिले हैं। राज्य में भीलवाड़ा में सबसे ज्यादा 20 मरीज हैं।
छत्तीसगढ़; कुल संक्रमित- 7: शनिवार को 1 नया मामला सामने आया। 7 संक्रमितों में से 5 मामले बुधवार से गुरुवार के बीच सामने आए। यहां रायपुर में 3 और बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में 1-1 संक्रमित हैं। इस बीच, राज्य के कृषि मंत्री रवींद्र चौबे का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान किसानों को मंडी से खाली वाहन लेकर लौटने पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निर्देश दिया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उत्तरप्रदेश; कुल संक्रमित- 65: आज 16 मामले सामने आए। राज्य में सबसे ज्यादा 9 संक्रमित आगरा में हैं। इसके बाद 8 केस लखनऊ में सामने आए हैं। लॉकडाउन के कारण आसपास के इलाकों और सीमावर्ती राज्यों में मुश्किलों का सामना कर रहे मजदूरों को उत्तर प्रदेश सरकार सरकार बसों के जरिए उनके घर भेज रही है। इसके लिए एक हजार बसों का इंतजाम किया गया।
बिहार; कुल संक्रमित- 11: शनिवार को राज्य में कोरोना संक्रमण के दो नए केस सामने आए। 11 संक्रमितों में से 10 का इलाज चल रहा है। जबकि 38 साल के मरीज की पटना में 21 मार्च को मौत हो गई थी। कुल मरीजों में 6 संक्रमित ऐसे हैं, जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। यानी, इन लोगों ने देश में या देश से बाहर कहीं यात्रा नहीं की है। राज्य में शुक्रवार को दो संक्रमित पाए गए थे।
महाराष्ट्र; कुल संक्रमित- 186: महाराष्ट्र में आज 30 नए मामले सामने आए। शुक्रवार को पॉजिटिव मिले 29 मरीजों में से 15 केवल सांगली के थे। सांगली के मरीज पहले से ही संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे। राज्य में मुंबई, पुणे और नागपुर समेत कई शहरों से मजदूर अपने राज्यों को पैदल ही लौट रहे हैं। कुछ लोगों को 200-300 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इनसे अपील की है कि वे कहीं न जाएं महाराष्ट्र में उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा।
दिल्ली; कुल संक्रमित- 49: यहां आज संक्रमण के 9 मामले सामने आए। इससे पहले यहां 6 लोग ठीक हो चुके हैं और एक मौत हुई है। वहीं, लॉकडाउन के बाद शहर से मजदूरों का पलायन नहीं थम रहा। उन्हें तमाम मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब; कुल संक्रमित- 39: शनिवार को यहां 1 नया मामला सामने आया। शुक्रवार को 5 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। राज्य के 39 संक्रमितों में से 27 लोग पिछले हफ्ते जान गंवाने वाले 70 साल के कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग के परिजन और मिलने वाले हैं।
उत्तराखंड; कुल संक्रमित- 6: आज एक संक्रमित मिला। बुधवार को भी एक कोरोना पॉजिटिव मिला था, जो स्पेन से लौटा था। राज्य में संक्रमण को रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है। शनिवार को यहां चमोली की पुरसादी जिला जेल से उन 15 कैदियों को 6 महीने की पैरोल पर रिहा कर दिया गया, जिन्हें 7 साल से कम सजा हुई है। फिलहाल जेल में 89 कैदी हैं।
केरल; कुल संक्रमित- 182: यहां आज 6 नए मामले सामने आए। सबसे ज्यादा 82 केस कासरगोड़ जिले में सामने आए। लॉकडाउन के बीच यहां जरूरी सामानों की कमी हो रही है। मुख्यमंत्री पी विजयन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख नेशनल हाईवे 30 खुलवाने की अपील की है। उनका कहना है कि कर्नाटक पुलिस वहां से जरूरी सामानों के वाहन नहीं आने दे रही।
तमिलनाडु; कुल संक्रमित- 42: शनिवार को यहां 4 नए पॉजिटिव मिले। कुम्बकोणम में 42 साल का व्यक्ति संक्रमित मिला, जो वेस्टइंडीज से लौटा था। वहीं, काटपड़ी में 49 साल का व्यक्ति संक्रमित मिला। वह ब्रिटेन से लौटा था। दोनों को वेल्लोर में भर्ती किया गया है। इस बीच, चेन्नई में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तीन मरीजों की शनिवार को मौत हो गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे कोरोना पॉजिटिव थे। उनकी टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार है। मृतकों में एक की उम्र 66 साल थी। उन्हें किडनी की गंभीर समस्या थी। 24 साल के दूसरे मृतक को निमोनिया की शिकायत थी। तीसरा मृतक दो साल का बच्चा है, जो ऑस्टियोपेट्रेटिस (हडि्डयों की बीमारी) से पीड़ित था।
लॉकडाउन के बीच दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है। यहां अक्सर धुंध छाई रहती है, लेकिन शनिवार को आसमान नीला नजर आया। प्रदूषण स्तर में भी सुधार हुआ है। शनिवार को यहां पीएम 2.5 का स्तर 20 रहा, वहीं प्रदूषण का स्तर 69 था। यह दिसंबर के आसपास 500 तक पहुंच गया था।
इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति कोरोनावायरस से लड़ाई में योगदान के लिए 28 लाख रुपए के चिकित्सा उपकरण दान करेंगी। मेंगलुरु पुलिस कमिश्नर हर्षा ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट करके उनसे अपील की थी। सुधा मूर्ति ने 36 घंटे बाद ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए दान देने की घोषणा की।
|
नई दिल्लीः देशभर में कोरोनावायरस के अभी तक एक हज़ार चौबीस मामले सामने आ चुके हैं। शनिवार को कोरोना संक्रमण के एक सौ उन्यासी नए केस आए। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह देश में एक दिन में संक्रमण के सबसे ज्यादा सामने आने वाले मामले हैं। इनमें महाराष्ट्र के तीस, कर्नाटक के सत्रह, उत्तर प्रदेश के सोलह, जम्मू कश्मीर के तेरह, दिल्ली के नौ, तेलंगाना और गुजरात के आठ-आठ, केरल के छः, मध्य प्रदेश के पाँच, राजस्थान-तमिलनाडु के चार-चार, अंडमान निकोबार और पश्चिम बंगाल के तीन-तीन, छत्तीसगढ़-उत्तराखंड के एक-एक मामले शामिल हैं। वहीं, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में अब तक संक्रमण के नौ सौ अट्ठारह मामले बताए हैं, जिनमें से आठ सौ उन्नीस एक्टिव मरीज हैं। हालांकि, covidउन्नीसindia.org के मुताबिक देश में संक्रमितों की संख्या एक हज़ार चौबीस है। एक दिन में संक्रमण के सबसे ज्यादा एक सौ इक्यावन मामले शुक्रवार को सामने आए थे, जबकि तीन लोगों की मौत हुई थी और पच्चीस लोग ठीक हुए थे। इससे पहले तेईस मार्च को एक दिन में एक सौ दो लोग संक्रमित हुए थे। इधर, पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ में कोरोनावायरस संक्रमित पाँच और मरीज ठीक हो गए हैं। इनकी दूसरी टेस्ट रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि इन सभी मरीजों की जल्द ही अस्पताल से छोड़ दिया जाएगा। इससे पहले, चौदह दिन अस्पताल में आइसोलेशन में रहने के बाद तीन मरीजों की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इन्हें शुक्रवार को डिस्चार्ज किया गया था। पिंपरी-चिंचवड़ में अब तक कोरोनावायरस के बारह केस सामने आए हैं। हालांकि, बीते आठ दिनों में एक भी नया मामला सामने नहीं आया। इधर, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को चिठ्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने बताया है कि राज्य में एनआरआई की संख्या बहुत ज्यादा है। इसी महीने नब्बे हजार अनिवासी भारतीय पंजाब आए हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है। इससे लड़ने के लिए राज्य को एक सौ पचास करोड़ के अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ेगी। इस बीच, हिमाचल प्रदेश सरकार ने चंडीगढ़ में रह रहे अपने यहां के छात्रों को हिमाचल भवन में रखने का फैसला किया है। ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि यहां मकान मालिक प्रदेश के छात्रों को घर खाली करने के लिए कह रहे हैं। इधर, तिहाड़ जेल प्रशासन ने एहतियातन तीन सौ छप्पन कैदियों को पैंतालीस दिन की अंतिरम जमानत दे दी है और तिरेसठ को इमरजेंसी पैरोल पर रिहा करने का फैसला किया है। इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्रालय ने कहा है कि कोरोनावायरस के इलाज के लिए देशभर में डॉक्टरों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है।एम्स में इसके लिए एक सेंटर बनाया जा रहा है। वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा- देशभर में तीस जून तक बिजली की आपूर्ति चौबीस घंटाटे जारी रहेगी। अगर राज्यों में वितरण कंपनियों का बकाया है तो भी बिजली उत्पादक कंपनियां आपूर्ति को नियंत्रित नहीं करेंगी। इस संक्रमण से मुकाबले के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। ट्रेन के डिब्बे को ही आइसोलेशन कोच के रूप में बदलने की तैयारी है। दिल्ली डिपो में एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। इसमें छः बर्थ वाले हिस्से में से एक तरफ की मिडिल बर्थ और सामने वाली तीनों बर्थ निकाल दी गई हैं। इस हिस्से में एक मरीज को रखा जाएगा। इससे हर मरीज के बीच जरूरी दूरी रहेगी। रेलवे का कहना है कि मंजूरी मिलते ही हर जोन में हर हफ्ते दस डिब्बों को आइसोलेशन कोच में बदला जाएगा। मध्यप्रदेश; कुल संक्रमित- चौंतीस: राज्य में शनिवार को पाँच नए मामले सामने आए। इससे पहले शुक्रवार को जबलपुर में दो लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दोनों नए मरीज पहले से संक्रमित सराफा व्यापारी के यहां काम करते हैं। अब इंदौर में सोलह, जबलपुर में आठ, भोपाल-उज्जैन में तीन-तीन, शिवपुरी में दो और ग्वालियर में दो पॉजिटिव हैं। प्रदेश में अब तक दो लोगों की मौत हुई है। राजस्थान; कुल संक्रमित- चौवन: आज चार नए मामले सामने आए। अजमेर में तेईस साल का युवक संक्रमित मिला है। वह हाल ही में पंजाब से लौटा था। इक्कीस साल की एक युवती भीलवाड़ा में संक्रमित पाई गई है। भीलवाड़ा में ही बांगड़ हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टाफ के दो लोग संक्रमित मिले हैं। राज्य में भीलवाड़ा में सबसे ज्यादा बीस मरीज हैं। छत्तीसगढ़; कुल संक्रमित- सात: शनिवार को एक नया मामला सामने आया। सात संक्रमितों में से पाँच मामले बुधवार से गुरुवार के बीच सामने आए। यहां रायपुर में तीन और बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में एक-एक संक्रमित हैं। इस बीच, राज्य के कृषि मंत्री रवींद्र चौबे का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान किसानों को मंडी से खाली वाहन लेकर लौटने पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निर्देश दिया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उत्तरप्रदेश; कुल संक्रमित- पैंसठ: आज सोलह मामले सामने आए। राज्य में सबसे ज्यादा नौ संक्रमित आगरा में हैं। इसके बाद आठ केस लखनऊ में सामने आए हैं। लॉकडाउन के कारण आसपास के इलाकों और सीमावर्ती राज्यों में मुश्किलों का सामना कर रहे मजदूरों को उत्तर प्रदेश सरकार सरकार बसों के जरिए उनके घर भेज रही है। इसके लिए एक हजार बसों का इंतजाम किया गया। बिहार; कुल संक्रमित- ग्यारह: शनिवार को राज्य में कोरोना संक्रमण के दो नए केस सामने आए। ग्यारह संक्रमितों में से दस का इलाज चल रहा है। जबकि अड़तीस साल के मरीज की पटना में इक्कीस मार्च को मौत हो गई थी। कुल मरीजों में छः संक्रमित ऐसे हैं, जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। यानी, इन लोगों ने देश में या देश से बाहर कहीं यात्रा नहीं की है। राज्य में शुक्रवार को दो संक्रमित पाए गए थे। महाराष्ट्र; कुल संक्रमित- एक सौ छियासी: महाराष्ट्र में आज तीस नए मामले सामने आए। शुक्रवार को पॉजिटिव मिले उनतीस मरीजों में से पंद्रह केवल सांगली के थे। सांगली के मरीज पहले से ही संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे। राज्य में मुंबई, पुणे और नागपुर समेत कई शहरों से मजदूर अपने राज्यों को पैदल ही लौट रहे हैं। कुछ लोगों को दो सौ-तीन सौ किलोग्राममीटर तक का सफर करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इनसे अपील की है कि वे कहीं न जाएं महाराष्ट्र में उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा। दिल्ली; कुल संक्रमित- उनचास: यहां आज संक्रमण के नौ मामले सामने आए। इससे पहले यहां छः लोग ठीक हो चुके हैं और एक मौत हुई है। वहीं, लॉकडाउन के बाद शहर से मजदूरों का पलायन नहीं थम रहा। उन्हें तमाम मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है। पंजाब; कुल संक्रमित- उनतालीस: शनिवार को यहां एक नया मामला सामने आया। शुक्रवार को पाँच लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। राज्य के उनतालीस संक्रमितों में से सत्ताईस लोग पिछले हफ्ते जान गंवाने वाले सत्तर साल के कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग के परिजन और मिलने वाले हैं। उत्तराखंड; कुल संक्रमित- छः: आज एक संक्रमित मिला। बुधवार को भी एक कोरोना पॉजिटिव मिला था, जो स्पेन से लौटा था। राज्य में संक्रमण को रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है। शनिवार को यहां चमोली की पुरसादी जिला जेल से उन पंद्रह कैदियों को छः महीने की पैरोल पर रिहा कर दिया गया, जिन्हें सात साल से कम सजा हुई है। फिलहाल जेल में नवासी कैदी हैं। केरल; कुल संक्रमित- एक सौ बयासी: यहां आज छः नए मामले सामने आए। सबसे ज्यादा बयासी केस कासरगोड़ जिले में सामने आए। लॉकडाउन के बीच यहां जरूरी सामानों की कमी हो रही है। मुख्यमंत्री पी विजयन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख नेशनल हाईवे तीस खुलवाने की अपील की है। उनका कहना है कि कर्नाटक पुलिस वहां से जरूरी सामानों के वाहन नहीं आने दे रही। तमिलनाडु; कुल संक्रमित- बयालीस: शनिवार को यहां चार नए पॉजिटिव मिले। कुम्बकोणम में बयालीस साल का व्यक्ति संक्रमित मिला, जो वेस्टइंडीज से लौटा था। वहीं, काटपड़ी में उनचास साल का व्यक्ति संक्रमित मिला। वह ब्रिटेन से लौटा था। दोनों को वेल्लोर में भर्ती किया गया है। इस बीच, चेन्नई में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तीन मरीजों की शनिवार को मौत हो गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे कोरोना पॉजिटिव थे। उनकी टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार है। मृतकों में एक की उम्र छयासठ साल थी। उन्हें किडनी की गंभीर समस्या थी। चौबीस साल के दूसरे मृतक को निमोनिया की शिकायत थी। तीसरा मृतक दो साल का बच्चा है, जो ऑस्टियोपेट्रेटिस से पीड़ित था। लॉकडाउन के बीच दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है। यहां अक्सर धुंध छाई रहती है, लेकिन शनिवार को आसमान नीला नजर आया। प्रदूषण स्तर में भी सुधार हुआ है। शनिवार को यहां पीएम दो.पाँच का स्तर बीस रहा, वहीं प्रदूषण का स्तर उनहत्तर था। यह दिसंबर के आसपास पाँच सौ तक पहुंच गया था। इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति कोरोनावायरस से लड़ाई में योगदान के लिए अट्ठाईस लाख रुपए के चिकित्सा उपकरण दान करेंगी। मेंगलुरु पुलिस कमिश्नर हर्षा ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट करके उनसे अपील की थी। सुधा मूर्ति ने छत्तीस घंटाटे बाद ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए दान देने की घोषणा की।
|
मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (शहरी विकास) नीरज मंडलोई के अनुसार आज के परिप्रेक्ष्य में पांच स्तंभ शहरी विकास के हो सकते हैं। सभी को ध्यान में रखते हुए किया जाने वाला विकास पारदर्शिता और जवाबदेही तकनीक पर्यावरण का हित चिंतन और अपनी क्षमता का निर्माण।
मनीष तिवारी, इंदौर। शहरीकरण की तेज रफ्तार और उसके कारण उभरीं चुनौतियों का सामना करने के लिए शहर तभी तैयार होंगे जब वे प्लानिंग से लेकर योजनाओं के क्रियावन्यन तक एक नए नजरिये, कामकाज की शैली और सबसे अधिक जरूरी प्रशासनिक सुधार के साथ आगे बढ़ेंगे।
अहमदाबाद में जुलाई में जी-20 देशों की मेयर्स कान्फ्रेंस के लिए विचार-विमर्श की साझा रूपरेखा तैयार करने के लिए इंदौर में गुरुवार को आयोजित अर्बन-20 सम्मेलन का निष्कर्ष यही सामने आया कि अगले 25 सालों में शहरों के विस्तार की संभावना और उसके आधार पर किए जा रहे आकलनों ने गंभीर चुनौती खड़ी की है, जिसका सामना करने के लिए समय कम है।
सम्मेलन में विचार के तीन बिंदु थे- भविष्य के लिए डिजिटलीकरण को कैसे अधिक से अधिक अपनाया जाए, शहरी शासन और प्लानिंग के स्वरूप को कैसे सुधार जाए और स्थानीय पहचान को मजबूती देने के उपाय क्या-क्या हो सकते हैं।
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी विकास के लिए एक रोल माडल के रूप में उभरे इंदौर को इस सम्मेलन की जिम्मेदारी इसलिए दी थी, क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन से लेकर पीएम आवास योजना जैसे केंद्र की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में शहर ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। खासकर लगभग उन्हीं चुनौतियों को झेलते हुए जो बाकी देश में भी व्याप्त हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (शहरी विकास) नीरज मंडलोई के अनुसार, आज के परिप्रेक्ष्य में पांच स्तंभ शहरी विकास के हो सकते हैं। सभी को ध्यान में रखते हुए किया जाने वाला विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही, तकनीक, पर्यावरण का हित चिंतन और अपनी क्षमता का निर्माण। प्रशासनिक तंत्र से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुणाल कुमार ने भी की।
उन्होंने सुझाव दिया कि शहरों में सेवाओं को लेकर एक बिंदु पर फैसलों की प्रणाली के बारे में भी सोचा जा सकता है। एक सेवा में कई पक्षों का शामिल होना भी कई बार चीजों को मुश्किल बना देता है। इससे सेवाओं में बिखराव हो सकता है।
"शहरी विकास पर मौलिक सोच की जरूरत"
कुणाल कुमार के अनुसार, हमें शहरी विकास पर मौलिक सोच की जरूरत है। अर्बन-20 के आयोजन पर मंत्रालय के प्रवक्ता राजीव जैन ने कहा कि इस सम्मेलन ने शहरी विकास की नीतियों को नई दिशा दी है। अब तक इस तरह को दो सम्मेलनों में शहरों के नीति-निर्धारकों और नेतृत्वकर्ताओं ने कई ऐसे सुझाव दिए हैं जो शहरी विकास की नई दिशा तय करने वाले हैं। अहमदाबाद में हम एक साझा फ्रेमवर्क की उम्मीद कर रहे हैं।
शहरों की दशा सुधारने के लिए मंत्रालय ने अपनी फ्लैगशिप परियोजनाओं के साथ-साथ उनके वित्तीय माडल में सुधार और स्वच्छता तथा सुंदरता की प्रतियोगिता जैसी कुछ अहम पहल की हैं। इसी कड़ी में अर्बन-20 को नीति निर्धारण के लिए बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
|
मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार आज के परिप्रेक्ष्य में पांच स्तंभ शहरी विकास के हो सकते हैं। सभी को ध्यान में रखते हुए किया जाने वाला विकास पारदर्शिता और जवाबदेही तकनीक पर्यावरण का हित चिंतन और अपनी क्षमता का निर्माण। मनीष तिवारी, इंदौर। शहरीकरण की तेज रफ्तार और उसके कारण उभरीं चुनौतियों का सामना करने के लिए शहर तभी तैयार होंगे जब वे प्लानिंग से लेकर योजनाओं के क्रियावन्यन तक एक नए नजरिये, कामकाज की शैली और सबसे अधिक जरूरी प्रशासनिक सुधार के साथ आगे बढ़ेंगे। अहमदाबाद में जुलाई में जी-बीस देशों की मेयर्स कान्फ्रेंस के लिए विचार-विमर्श की साझा रूपरेखा तैयार करने के लिए इंदौर में गुरुवार को आयोजित अर्बन-बीस सम्मेलन का निष्कर्ष यही सामने आया कि अगले पच्चीस सालों में शहरों के विस्तार की संभावना और उसके आधार पर किए जा रहे आकलनों ने गंभीर चुनौती खड़ी की है, जिसका सामना करने के लिए समय कम है। सम्मेलन में विचार के तीन बिंदु थे- भविष्य के लिए डिजिटलीकरण को कैसे अधिक से अधिक अपनाया जाए, शहरी शासन और प्लानिंग के स्वरूप को कैसे सुधार जाए और स्थानीय पहचान को मजबूती देने के उपाय क्या-क्या हो सकते हैं। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी विकास के लिए एक रोल माडल के रूप में उभरे इंदौर को इस सम्मेलन की जिम्मेदारी इसलिए दी थी, क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन से लेकर पीएम आवास योजना जैसे केंद्र की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में शहर ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। खासकर लगभग उन्हीं चुनौतियों को झेलते हुए जो बाकी देश में भी व्याप्त हैं। मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार, आज के परिप्रेक्ष्य में पांच स्तंभ शहरी विकास के हो सकते हैं। सभी को ध्यान में रखते हुए किया जाने वाला विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही, तकनीक, पर्यावरण का हित चिंतन और अपनी क्षमता का निर्माण। प्रशासनिक तंत्र से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुणाल कुमार ने भी की। उन्होंने सुझाव दिया कि शहरों में सेवाओं को लेकर एक बिंदु पर फैसलों की प्रणाली के बारे में भी सोचा जा सकता है। एक सेवा में कई पक्षों का शामिल होना भी कई बार चीजों को मुश्किल बना देता है। इससे सेवाओं में बिखराव हो सकता है। "शहरी विकास पर मौलिक सोच की जरूरत" कुणाल कुमार के अनुसार, हमें शहरी विकास पर मौलिक सोच की जरूरत है। अर्बन-बीस के आयोजन पर मंत्रालय के प्रवक्ता राजीव जैन ने कहा कि इस सम्मेलन ने शहरी विकास की नीतियों को नई दिशा दी है। अब तक इस तरह को दो सम्मेलनों में शहरों के नीति-निर्धारकों और नेतृत्वकर्ताओं ने कई ऐसे सुझाव दिए हैं जो शहरी विकास की नई दिशा तय करने वाले हैं। अहमदाबाद में हम एक साझा फ्रेमवर्क की उम्मीद कर रहे हैं। शहरों की दशा सुधारने के लिए मंत्रालय ने अपनी फ्लैगशिप परियोजनाओं के साथ-साथ उनके वित्तीय माडल में सुधार और स्वच्छता तथा सुंदरता की प्रतियोगिता जैसी कुछ अहम पहल की हैं। इसी कड़ी में अर्बन-बीस को नीति निर्धारण के लिए बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
|
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
शिल्पा शेट्टी आए दिन अपने फैंस के साथ हेल्दी डाइट टिप्स शेयर करती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज - "एसएस ऐप बाय शिल्पा शेट्टी" के माध्यम से ज्वार की रोटी की एक देसी रेसिपी शेयर की है, जो निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक और ताकतवर फूड है इतना ही नहीं, उन्होंने साथ में इस ज्वार से जुड़े कुछ स्वास्थ्य लाभों को भी रेखांकित किया है।
कैप्शन में, उन्होंने लिखा है कि, "यदि आप अपने दैनिक आहार में ज्वार को शामिल करना चाहते हैं, लेकिन नहीं मालूम है कि कैसे, तो यहां समाधान हैः ज्वार की रोटी। " उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि यह ग्लूटेन फ्री होने के साथ ही, वजन घटाने में सहायता करता है, और बाउल मूवमेंट को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
कैसे बनाएं ज्वार की रोटी?
1) वीडियो में, हमने सबसे पहले शिल्पा शेट्टी को एक कंटेनर में लगभग एक कप पानी लेकर उसमें नमक डालकर उबाला।
2) पानी में उबाल आने के बाद, वह उसमें लगभग एक कप ज्वार के आटे को डाल देती है। फिर वह इसमें लगभग एक बड़ा चम्मच तेल मिलाती है और अच्छी तरह मिलाती है।
3) कुछ देर तक पकाने के बाद वह इन सबको एक थाली में निकाल लेती हैं। अब, ज्वार के मिश्रण को आटा बना देती है। इससे पहले, वह इसे थोड़ा नरम बनाने के लिए इसमें थोड़ा घी डालती है। इस प्रक्रिया में, हम उन्हें एक बड़ा चम्मच सफेद तिल और काले तिल भी मिलाते हुए देखते हैं।
4) अंत में, वह इसमें से एक अच्छा आटा बनाती है। फ्लैटब्रेड बनाने के अंतिम चरण के रूप में, वह एक छोटे से हिस्से को गेंद के रूप में उपयोग करती है और इसे रोटी के रूप में चपटा करती है। अंत में, वह इसे और पकाने के लिए फ्लैट तवे पर रखती है। थोड़ा सा घी लगाकर, ज्वार की रोटी बनकर तैयार हो जाती है।
ज्वार की एक सर्विंग में 12 ग्राम फाइबर और प्रोटीन होता है। ये दोनों ही चीजें न केवल आपका वजन कम करने में मदद करते हैं बल्कि इसके सेवन से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। साथ ही इसमें एक जटिल कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो हमारे शरीर में बहुत धीरे-धीरे डाइडेस्ट होता है। जिस वजह से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। इससे आपके शरीर की हड्डियां भी मजबूत रहती है।
|
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? शिल्पा शेट्टी आए दिन अपने फैंस के साथ हेल्दी डाइट टिप्स शेयर करती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज - "एसएस ऐप बाय शिल्पा शेट्टी" के माध्यम से ज्वार की रोटी की एक देसी रेसिपी शेयर की है, जो निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक और ताकतवर फूड है इतना ही नहीं, उन्होंने साथ में इस ज्वार से जुड़े कुछ स्वास्थ्य लाभों को भी रेखांकित किया है। कैप्शन में, उन्होंने लिखा है कि, "यदि आप अपने दैनिक आहार में ज्वार को शामिल करना चाहते हैं, लेकिन नहीं मालूम है कि कैसे, तो यहां समाधान हैः ज्वार की रोटी। " उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि यह ग्लूटेन फ्री होने के साथ ही, वजन घटाने में सहायता करता है, और बाउल मूवमेंट को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। कैसे बनाएं ज्वार की रोटी? एक) वीडियो में, हमने सबसे पहले शिल्पा शेट्टी को एक कंटेनर में लगभग एक कप पानी लेकर उसमें नमक डालकर उबाला। दो) पानी में उबाल आने के बाद, वह उसमें लगभग एक कप ज्वार के आटे को डाल देती है। फिर वह इसमें लगभग एक बड़ा चम्मच तेल मिलाती है और अच्छी तरह मिलाती है। तीन) कुछ देर तक पकाने के बाद वह इन सबको एक थाली में निकाल लेती हैं। अब, ज्वार के मिश्रण को आटा बना देती है। इससे पहले, वह इसे थोड़ा नरम बनाने के लिए इसमें थोड़ा घी डालती है। इस प्रक्रिया में, हम उन्हें एक बड़ा चम्मच सफेद तिल और काले तिल भी मिलाते हुए देखते हैं। चार) अंत में, वह इसमें से एक अच्छा आटा बनाती है। फ्लैटब्रेड बनाने के अंतिम चरण के रूप में, वह एक छोटे से हिस्से को गेंद के रूप में उपयोग करती है और इसे रोटी के रूप में चपटा करती है। अंत में, वह इसे और पकाने के लिए फ्लैट तवे पर रखती है। थोड़ा सा घी लगाकर, ज्वार की रोटी बनकर तैयार हो जाती है। ज्वार की एक सर्विंग में बारह ग्राम फाइबर और प्रोटीन होता है। ये दोनों ही चीजें न केवल आपका वजन कम करने में मदद करते हैं बल्कि इसके सेवन से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। साथ ही इसमें एक जटिल कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो हमारे शरीर में बहुत धीरे-धीरे डाइडेस्ट होता है। जिस वजह से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। इससे आपके शरीर की हड्डियां भी मजबूत रहती है।
|
है मतएव प्रमाण है, ऐसे ही अनुमान भी प्रविसम्वादक है मतएव प्रमाण है। फिर अनुमान आदिक प्रमाणसे प्रत्यक्ष में ज्येष्ठत्व मोर गरिष्ठ कैसे व्यवस्थित किया जा रहा ? प्रत्यक्ष तो अनुमान आदिकसे महान हो और मनुमान आदिक प्रत्यक्ष से महान न हो यह व्यवस्था नहीं बनतो ।
आतमोमासा प्रवचन
उक्त शकाके समाधानमें अनेक युक्तियोसे प्रत्यक्षकी ज्येष्ठता व गरिष्ठताका समर्थन - अब उक्त शकरके समाधान में कहते हैं कि यह शफा युक्तिसगत नहीं है क्योकि साधन आदिकको विषय करने वाले प्रत्यक्षका प्रभाव होनेपर मनुमान बादिक अन्य प्रमाणोंकी प्रवृत्ति नहीं हो सकती। मनुमान बनाया जायगा तो उसमें जो भी साधन बनाया जाय वह तो पहिले प्रमाण सिद्ध होना चाहिए। मोर चूकि अनुमान प्रमाण बनाया जा रहा है तो मनुमान प्रमाण बनाने वाले हेतुको प्रत्यक्षका विषय बनना चाहिए। यदि उस साधनको अन्य अनुमान से सिद्ध मान करके अनुमान प्रमाण में भी तो साधन होगा, उस साधनको धन्य अनुमान से सिद्धि को जानी पडेगो । इस तरह मनवस्था दोष आयगा । सब प्रत्यक्ष ही एक ऐसा प्रमाण है जो नियत रूप से समस्त प्रमाणका अग्रेसर सिद्ध होता है। अर्थात् प्रत्यक्षज्ञान से निणय किए जाने के बाद ही अन्य प्रमाण की उपपत्ति होती है मत प्रत्यक्ष ही ज्येष्ठ प्रमारण है। प्रत्यक्ष की शवृत्ति सो मनुमान प्रादिक प्रमोसोंके बिना ही हो जाती है परन्तु मनुमान मादिक प्रमाण प्रत्यक्षके मुकाबले में पुरस्सर नहीं है अर्थात् पहिले नहीं हुमा करते । अनुमान आदिक प्रमाणों को प्रमाणता कायम करनेके लिए पहिले प्रत्यक्ष प्रमाण हुमा करता है, पर अन्य प्रमाणों में यह खूबी नहीं है कि प्रत्यक्ष की प्रमाणतो कायम करने के लिए सत्य प्रमाणोंको पहिले होना पडेगा। इस कारण अन्य प्रमाण में उपेष्ठानेका योग नहीं मिलता। प्रत्यक्ष हो अनुमान भादिक प्रमाणो से गरिष्ठ ( बड़ा ) है 1 साथ हो प्रत्यक्ष प्रमाण सशय विपर्यय, मनव्यवसाय, इन सीन तीन दाबोंका विशेषरूप से विच्छेद करता है। जिस तरह सशय आदिकका निराकरण प्रत्यक्ष से होता हुमा देखा गया है. किसी भी विशेष ज्ञेय के सम्बन्ध में प्रत्यक्षने जो जाना उस जानने के बाद फिर वहाँ कुछ प्राकांक्षा नहीं रहती, सो जिस तरह प्रत्यक्ष प्रमाणसे सशयादिकका विच्छेद निर्दोष रूपसे हो जाता है उस तरह मनुमान प्रादिक प्रमाणों से सशप आदिकका व्यवच्छेद नहीं होता। यद्यपि धन्य प्रमाणो भी समारोपका लण्डन तो होता है, क्योंकि यदि साय, विपर्यंय, मनध्यवसाय इन दोषोंमें से कोई दोष रहे तो प्रमाण नहीं बनता । तो भग्य प्रमाणोंमें भी सामध्यं तो है यह कि अनुमानादि प्रमाण भी सशयादिक दोषका निराकरण करता है लेकिन प्रनुमाना दिसे सामान्यकरसे संशयादिकका निराकरण प्रत्यक्ष से होता है वैसे विशेष रूप से अनुमामादि प्रमाणोंके द्वारा नहीं होता किन्तु प्रतु मानादि प्रमाणोंसे सामान्यतया सशयादिकका व्यवच्छेदक होता है। एक अन्य बात यह भी समझ लेना चाहिए इस प्रसगमें कि प्रत्यक्ष प्रमाण इसलिए भी महान है कि वह मन्वय और व्यतिरेकका स्वभाव भेद स्पष्ट दिखा देता है। किसी पदार्थका प्रस्ति
|
है मतएव प्रमाण है, ऐसे ही अनुमान भी प्रविसम्वादक है मतएव प्रमाण है। फिर अनुमान आदिक प्रमाणसे प्रत्यक्ष में ज्येष्ठत्व मोर गरिष्ठ कैसे व्यवस्थित किया जा रहा ? प्रत्यक्ष तो अनुमान आदिकसे महान हो और मनुमान आदिक प्रत्यक्ष से महान न हो यह व्यवस्था नहीं बनतो । आतमोमासा प्रवचन उक्त शकाके समाधानमें अनेक युक्तियोसे प्रत्यक्षकी ज्येष्ठता व गरिष्ठताका समर्थन - अब उक्त शकरके समाधान में कहते हैं कि यह शफा युक्तिसगत नहीं है क्योकि साधन आदिकको विषय करने वाले प्रत्यक्षका प्रभाव होनेपर मनुमान बादिक अन्य प्रमाणोंकी प्रवृत्ति नहीं हो सकती। मनुमान बनाया जायगा तो उसमें जो भी साधन बनाया जाय वह तो पहिले प्रमाण सिद्ध होना चाहिए। मोर चूकि अनुमान प्रमाण बनाया जा रहा है तो मनुमान प्रमाण बनाने वाले हेतुको प्रत्यक्षका विषय बनना चाहिए। यदि उस साधनको अन्य अनुमान से सिद्ध मान करके अनुमान प्रमाण में भी तो साधन होगा, उस साधनको धन्य अनुमान से सिद्धि को जानी पडेगो । इस तरह मनवस्था दोष आयगा । सब प्रत्यक्ष ही एक ऐसा प्रमाण है जो नियत रूप से समस्त प्रमाणका अग्रेसर सिद्ध होता है। अर्थात् प्रत्यक्षज्ञान से निणय किए जाने के बाद ही अन्य प्रमाण की उपपत्ति होती है मत प्रत्यक्ष ही ज्येष्ठ प्रमारण है। प्रत्यक्ष की शवृत्ति सो मनुमान प्रादिक प्रमोसोंके बिना ही हो जाती है परन्तु मनुमान मादिक प्रमाण प्रत्यक्षके मुकाबले में पुरस्सर नहीं है अर्थात् पहिले नहीं हुमा करते । अनुमान आदिक प्रमाणों को प्रमाणता कायम करनेके लिए पहिले प्रत्यक्ष प्रमाण हुमा करता है, पर अन्य प्रमाणों में यह खूबी नहीं है कि प्रत्यक्ष की प्रमाणतो कायम करने के लिए सत्य प्रमाणोंको पहिले होना पडेगा। इस कारण अन्य प्रमाण में उपेष्ठानेका योग नहीं मिलता। प्रत्यक्ष हो अनुमान भादिक प्रमाणो से गरिष्ठ है एक साथ हो प्रत्यक्ष प्रमाण सशय विपर्यय, मनव्यवसाय, इन सीन तीन दाबोंका विशेषरूप से विच्छेद करता है। जिस तरह सशय आदिकका निराकरण प्रत्यक्ष से होता हुमा देखा गया है. किसी भी विशेष ज्ञेय के सम्बन्ध में प्रत्यक्षने जो जाना उस जानने के बाद फिर वहाँ कुछ प्राकांक्षा नहीं रहती, सो जिस तरह प्रत्यक्ष प्रमाणसे सशयादिकका विच्छेद निर्दोष रूपसे हो जाता है उस तरह मनुमान प्रादिक प्रमाणों से सशप आदिकका व्यवच्छेद नहीं होता। यद्यपि धन्य प्रमाणो भी समारोपका लण्डन तो होता है, क्योंकि यदि साय, विपर्यंय, मनध्यवसाय इन दोषोंमें से कोई दोष रहे तो प्रमाण नहीं बनता । तो भग्य प्रमाणोंमें भी सामध्यं तो है यह कि अनुमानादि प्रमाण भी सशयादिक दोषका निराकरण करता है लेकिन प्रनुमाना दिसे सामान्यकरसे संशयादिकका निराकरण प्रत्यक्ष से होता है वैसे विशेष रूप से अनुमामादि प्रमाणोंके द्वारा नहीं होता किन्तु प्रतु मानादि प्रमाणोंसे सामान्यतया सशयादिकका व्यवच्छेदक होता है। एक अन्य बात यह भी समझ लेना चाहिए इस प्रसगमें कि प्रत्यक्ष प्रमाण इसलिए भी महान है कि वह मन्वय और व्यतिरेकका स्वभाव भेद स्पष्ट दिखा देता है। किसी पदार्थका प्रस्ति
|
Don't Miss!
वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ करते हुए बप्पी ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद रायपुर आकर अपनापन लगता है। उन्होंने कहा कि मैं रायपुर के अलावा राजनांदगांव, कवर्धा सहित अन्य शहरों में पहले भी आ चुका हूं। यहां की जनता से मुझे बहुत प्यार मिला। संगीत के वर्तमान परिवेश में हो रहे बदलाव के संबंध में उन्होंने कहा कि लोगों की मांग पर ही हम संगीत और गाने तैयार करते हैं। 'डर्टी पिक्चर' का 'ऊ लाला' गाना हो या फिर 'गुंडे' का 'तूने मारी एंट्री' दोनों सुपरहिट हैं। आज भी डिस्को के साथ मैलोडी गाने भी उतने ही पसंद किए जा रहे हैं, जितने पहले किए जाते थे।
मंगलवार को रात बीटीआई मैदान में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बप्पी लहरी ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरूआत के बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी। दर्शकों की मांग पर बप्पी दा ने पुराने गीतों के साथ नए गाने भी सुनाए। इनमें हालिया रिलीज फिल्म 'गुंडे' का रोमांटिक गीत 'तूने मारी एंट्री यार, दिल में बजी घंटी यार'.. और 'ऊ लाला, ऊ लाला'.. जैसे गीत शामिल थे। कार्यक्रम का लुत्फ मुख्यमंत्री रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने भी उठाया।
|
Don't Miss! वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ करते हुए बप्पी ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद रायपुर आकर अपनापन लगता है। उन्होंने कहा कि मैं रायपुर के अलावा राजनांदगांव, कवर्धा सहित अन्य शहरों में पहले भी आ चुका हूं। यहां की जनता से मुझे बहुत प्यार मिला। संगीत के वर्तमान परिवेश में हो रहे बदलाव के संबंध में उन्होंने कहा कि लोगों की मांग पर ही हम संगीत और गाने तैयार करते हैं। 'डर्टी पिक्चर' का 'ऊ लाला' गाना हो या फिर 'गुंडे' का 'तूने मारी एंट्री' दोनों सुपरहिट हैं। आज भी डिस्को के साथ मैलोडी गाने भी उतने ही पसंद किए जा रहे हैं, जितने पहले किए जाते थे। मंगलवार को रात बीटीआई मैदान में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बप्पी लहरी ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरूआत के बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी। दर्शकों की मांग पर बप्पी दा ने पुराने गीतों के साथ नए गाने भी सुनाए। इनमें हालिया रिलीज फिल्म 'गुंडे' का रोमांटिक गीत 'तूने मारी एंट्री यार, दिल में बजी घंटी यार'.. और 'ऊ लाला, ऊ लाला'.. जैसे गीत शामिल थे। कार्यक्रम का लुत्फ मुख्यमंत्री रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने भी उठाया।
|
अक्षय कुमार(Akshay Kumar), कैटरीना कैफ (Katrina Kaif), रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और अजय देवगन (Ajay Devgn) की ये फिल्म एक साल से भी ज्यादा वक्त से रिलीज का इंतजार कर रही है लेकिन कोरोना का कहर इसे रिलीज नहीं होने दे रहा.
अक्षय कुमार (Akshay Kumar) कल ही कोरोना (Corona) निगेटिव हुए हैं और लग रहा है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता इस वक्त फिल्म सूर्यवंशी (Sooryavashi) को लेकर है. ये फिल्म रिलीज के लिए पिछले एक साल से तैयार रखी है लेकिन कोरोना ने इसे एक साल भी ज्यादा वक्त से ऐसा क्वारंटीन किया है कि ये बॉक्स ऑफिस की शक्ल नहीं देख पा रही है.
सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अब सूर्यवंशी के मेकर्स जिनमें रोहित शेट्टी और करण जौहर जैसे बड़े नाम शामिल हैं. मन बना रहे हैं कि इस फिल्म को अब रिलीज कर ही दिया जाए. तो प्लान का खुलासा जो हुआ है उसके मुताबिक, इस फिल्म को ओटीटी (OTT) पर रिलीज करने की तैयारी हो रही है लेकिन नेटफ्लिक्स और एमेजॉन या हॉटस्टार पर नहीं.
सूर्यवंशी का बजट सौ करोड़ रुपए से भी ज्यादा है और इसमें अक्षय कुमार के अलावा अजय देवगन (Ajay Devgn), रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) जैसे सुपरस्टार्स हैं. जाहिर है इनकी फीस जोड़ ली जाए तो बजट अकेला सौ करोड़ से ऊपर चला जाएगा और फिल्म का प्रोडक्शन कॉस्ट अलग से क्योंकि रोहित शेट्टी ने ये फिल्म बनाई है. रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) अपनी फिल्मों में महंगी कारों को उड़ाने के लिए मशहूर हैं तो एक्शन बजट भी ज्यादा है. ऐसे में बजट की भरपाई कैसे हो. उसके लिए इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पे पर व्यू के हिसाब से रिलीज करने की तैयारी हो रही है. अगर आपको अपने टीवी या मोबाइल पर फिल्म देखनी है तो आपको इस फिल्म का अलग से पैसा चुकाना होगा तभी इसे देख पाएंगे.
ओटीटी पर फिल्म रिलीज करने में अब सबसे बड़ा रिस्क पायरेसी (Piracy) का है क्योंकि फिल्म चुराने वाले लोग इसे डाउनलोड करके वायरल करा देते हैं और टेलिग्राम से लेकर कई ऐसे ऐप हैं जिनपर फिल्म की पायरेटेड कॉपी तेजी से वायरल हो जाती है. लोग इसे अपने फोन में या लैपटॉप में डाउनलोड करके देख लेते हैं. पैसे देने में किसी का इंट्रेस्ट नहीं होता. ऐसे में मेकर्स को पायरेसी से अब बड़ा डर सताने लगा है. इस पर रोक लगाने में फिलहाल सरकार नाकाम ही रही है.
मेकर्स की चिंता ये भी है कि जिस तरह से कोरोना ने पिछले एक महीने में फिर से अपने पैर पसारने शुरू किए हैं उसके आगे सरकारें बेबस नजर आ रही हैं और लॉकडाउन के अलावा उन्हें कोई और रास्ता नहीं सूझ रहा. ऐसे में फिर से थिएटर्स कब खुलेंगे और सौ प्रतिशत ऑपरेशन में आएंगे इसमें भी लंबा वक्त लगने की आशंका नजर आ रही है.
सूर्यवंशी के मेकर्स को चिंता सताने लगी है कि कहीं ऐसा न हो जाए कि करोड़ों लगाकर ये फिल्म डब्बे में बंद न रह जाए. तो इसे एक बार रिलीज कर दें और फिर धीरे धीरे विभिन्न माध्यमों से इसका घाटा पूरा करने की कोशिशें की जाएं. माना जा रहा है कि ये फिल्म 30 अप्रैल को रिलीज हो सकती है.
|
अक्षय कुमार, कैटरीना कैफ , रणवीर सिंह और अजय देवगन की ये फिल्म एक साल से भी ज्यादा वक्त से रिलीज का इंतजार कर रही है लेकिन कोरोना का कहर इसे रिलीज नहीं होने दे रहा. अक्षय कुमार कल ही कोरोना निगेटिव हुए हैं और लग रहा है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता इस वक्त फिल्म सूर्यवंशी को लेकर है. ये फिल्म रिलीज के लिए पिछले एक साल से तैयार रखी है लेकिन कोरोना ने इसे एक साल भी ज्यादा वक्त से ऐसा क्वारंटीन किया है कि ये बॉक्स ऑफिस की शक्ल नहीं देख पा रही है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अब सूर्यवंशी के मेकर्स जिनमें रोहित शेट्टी और करण जौहर जैसे बड़े नाम शामिल हैं. मन बना रहे हैं कि इस फिल्म को अब रिलीज कर ही दिया जाए. तो प्लान का खुलासा जो हुआ है उसके मुताबिक, इस फिल्म को ओटीटी पर रिलीज करने की तैयारी हो रही है लेकिन नेटफ्लिक्स और एमेजॉन या हॉटस्टार पर नहीं. सूर्यवंशी का बजट सौ करोड़ रुपए से भी ज्यादा है और इसमें अक्षय कुमार के अलावा अजय देवगन , रणवीर सिंह और कैटरीना कैफ जैसे सुपरस्टार्स हैं. जाहिर है इनकी फीस जोड़ ली जाए तो बजट अकेला सौ करोड़ से ऊपर चला जाएगा और फिल्म का प्रोडक्शन कॉस्ट अलग से क्योंकि रोहित शेट्टी ने ये फिल्म बनाई है. रोहित शेट्टी अपनी फिल्मों में महंगी कारों को उड़ाने के लिए मशहूर हैं तो एक्शन बजट भी ज्यादा है. ऐसे में बजट की भरपाई कैसे हो. उसके लिए इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पे पर व्यू के हिसाब से रिलीज करने की तैयारी हो रही है. अगर आपको अपने टीवी या मोबाइल पर फिल्म देखनी है तो आपको इस फिल्म का अलग से पैसा चुकाना होगा तभी इसे देख पाएंगे. ओटीटी पर फिल्म रिलीज करने में अब सबसे बड़ा रिस्क पायरेसी का है क्योंकि फिल्म चुराने वाले लोग इसे डाउनलोड करके वायरल करा देते हैं और टेलिग्राम से लेकर कई ऐसे ऐप हैं जिनपर फिल्म की पायरेटेड कॉपी तेजी से वायरल हो जाती है. लोग इसे अपने फोन में या लैपटॉप में डाउनलोड करके देख लेते हैं. पैसे देने में किसी का इंट्रेस्ट नहीं होता. ऐसे में मेकर्स को पायरेसी से अब बड़ा डर सताने लगा है. इस पर रोक लगाने में फिलहाल सरकार नाकाम ही रही है. मेकर्स की चिंता ये भी है कि जिस तरह से कोरोना ने पिछले एक महीने में फिर से अपने पैर पसारने शुरू किए हैं उसके आगे सरकारें बेबस नजर आ रही हैं और लॉकडाउन के अलावा उन्हें कोई और रास्ता नहीं सूझ रहा. ऐसे में फिर से थिएटर्स कब खुलेंगे और सौ प्रतिशत ऑपरेशन में आएंगे इसमें भी लंबा वक्त लगने की आशंका नजर आ रही है. सूर्यवंशी के मेकर्स को चिंता सताने लगी है कि कहीं ऐसा न हो जाए कि करोड़ों लगाकर ये फिल्म डब्बे में बंद न रह जाए. तो इसे एक बार रिलीज कर दें और फिर धीरे धीरे विभिन्न माध्यमों से इसका घाटा पूरा करने की कोशिशें की जाएं. माना जा रहा है कि ये फिल्म तीस अप्रैल को रिलीज हो सकती है.
|
बीजिंगः अमेरिका के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि चीन के गुब्बारा निगरानी कार्यक्रम से अमेरिका समेत कम से कम 40 देश प्रभावित हुए हैं, लेकिन उन्होंने उन देशों के नाम बताने से इंकार कर दिया, जहां अब तक ये गुब्बारे देखे गए हैं। हालांकि चीन ने इस तरह का कोई भी कार्यक्रम चलाने से इंकार किया है, लेकिन अमेरिका ने कहा कि वह चीन में इस तरह के कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाले संगठनों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने सहित कार्रवाई करने पर काम कर रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने इस प्रणाली का जल्दी पता लगा लिया और विवेकपूर्ण कार्रवाई की, इसलिए हम इसकी खुफिया जानकारी एकत्र करने की क्षमता को कम करने में सक्षम रहे। " उन्होंने कहा कि लेकिन हर देश के लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा और इसलिए अमेरिका उन देशों को सूचना मुहैया कराएगा, जो इस प्रकार के कार्यक्रम से रक्षा के लिए मददगार हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पांच महाद्वीपों के 40 देशों में फैला है। अमेरिका ने शनिवार को अटलांटिक महासागर में साउथ कैरोलाइना के तट के पास एक लड़ाकू विमान की मदद से एक बड़े गुब्बारे को नष्ट कर दिया था, जो 30 जनवरी को अमेरिकी हवाई क्षेत्र में घुसा था। अमेरिका ने अपने क्वाड सहयोगियों और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगियों के साथ यह सूचना साझी की है। प्राइस ने कहा कि अमेरिका इस प्रकार के कार्यक्रम के निशाने पर आए देशों का एक औपचारिक गठबंधन बनाने की सोच रहा है।
|
बीजिंगः अमेरिका के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि चीन के गुब्बारा निगरानी कार्यक्रम से अमेरिका समेत कम से कम चालीस देश प्रभावित हुए हैं, लेकिन उन्होंने उन देशों के नाम बताने से इंकार कर दिया, जहां अब तक ये गुब्बारे देखे गए हैं। हालांकि चीन ने इस तरह का कोई भी कार्यक्रम चलाने से इंकार किया है, लेकिन अमेरिका ने कहा कि वह चीन में इस तरह के कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाले संगठनों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने सहित कार्रवाई करने पर काम कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने इस प्रणाली का जल्दी पता लगा लिया और विवेकपूर्ण कार्रवाई की, इसलिए हम इसकी खुफिया जानकारी एकत्र करने की क्षमता को कम करने में सक्षम रहे। " उन्होंने कहा कि लेकिन हर देश के लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा और इसलिए अमेरिका उन देशों को सूचना मुहैया कराएगा, जो इस प्रकार के कार्यक्रम से रक्षा के लिए मददगार हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पांच महाद्वीपों के चालीस देशों में फैला है। अमेरिका ने शनिवार को अटलांटिक महासागर में साउथ कैरोलाइना के तट के पास एक लड़ाकू विमान की मदद से एक बड़े गुब्बारे को नष्ट कर दिया था, जो तीस जनवरी को अमेरिकी हवाई क्षेत्र में घुसा था। अमेरिका ने अपने क्वाड सहयोगियों और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन सहयोगियों के साथ यह सूचना साझी की है। प्राइस ने कहा कि अमेरिका इस प्रकार के कार्यक्रम के निशाने पर आए देशों का एक औपचारिक गठबंधन बनाने की सोच रहा है।
|
पीसीओडी एक हार्मोनल असंतुलन के कारण पैदा होने वाली स्थिति है इसलिए इसकी वजह से पीरियड्स नियमित नहीं रहते हैं। प्रेगनेंट होने के लिए मासिक चक्र नियमित होना बहुत जरूरी है इसलिए पीसीओडी से ग्रस्त महिलाओं को कंसीव करने में दिक्कत आती है और उनकी बॉडी में कंसीव करने के लिए जरूरी हार्मोंस नहीं बन पाते हैं।
पीसीओडी में कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाओं को डॉक्टर अर्चना की सलाह है कि आप पहले अपना हार्मोनल चेकअप करवाएं। इससे पता चलेगा कि आपकी बॉडी में कौन-सा हार्मोन असंतुलित है जिसकी वजह से आपको प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है।
पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन हार्मोनल टेस्ट होते हैं और इसकी रिपोर्ट के आधार पर पता चलता है कि आपके हार्मोन में क्या-क्या परेशानियां हैं।
शरीर में हार्मोंस का लेवल जानने के लिए एएमएच, थायराइड, प्रोलैक्टिन, एफएसएच, एलएच टेस्ट करवाए जाते हैं। इन टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर इलाज दिया जाता है।
डॉक्टर अर्चना ने पीसीओडी में कंसीव करने के लिए कुछ टिप्स भी बताए हैं, जो इस प्रकार हैं :
- प्रेगनेंट होने के लिए आपको सबसे पहले अपने लाइफस्टाइल को बदलना होगा। अपना वेट कंट्रोल में रखें।
- तला-भुना, चीनी, सफेद चावल और मैदा से बनी चीजें खाने से बचें।
- अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों, अनाज और फलों को शामिल करना है।
पीसीओडी को ठीक करने के साथ-साथ प्रेगनेंट होने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। आप सप्ताह में कम से कम तीन या चार बार आधे घंटे के लिए एक्सरसाइज जरूर करनी है वरना दवाइयां भी असर करना बंद कर देंगी।
इस हार्मोनल विकार में कंसीव करने के लिए डॉक्टर अर्चना ने कुछ घरेलू नुस्खे भी बताए। उन्होंने कहा कि डाइट, लाइफस्टाइल ठीक करने और एक्सरसाइज करने के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
अपनी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए आप अलसी के बीज, मेथीदाने का पानी पी सकती हैं। इसके अलावा एग की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं जिसमें मायोइनिसिटॉल शामिल है। पीसीओडी में प्रेगनेंट होने के लिए विटामिन डी का लेवल भी नॉर्मल करना जरूरी है।
|
पीसीओडी एक हार्मोनल असंतुलन के कारण पैदा होने वाली स्थिति है इसलिए इसकी वजह से पीरियड्स नियमित नहीं रहते हैं। प्रेगनेंट होने के लिए मासिक चक्र नियमित होना बहुत जरूरी है इसलिए पीसीओडी से ग्रस्त महिलाओं को कंसीव करने में दिक्कत आती है और उनकी बॉडी में कंसीव करने के लिए जरूरी हार्मोंस नहीं बन पाते हैं। पीसीओडी में कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाओं को डॉक्टर अर्चना की सलाह है कि आप पहले अपना हार्मोनल चेकअप करवाएं। इससे पता चलेगा कि आपकी बॉडी में कौन-सा हार्मोन असंतुलित है जिसकी वजह से आपको प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है। पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन हार्मोनल टेस्ट होते हैं और इसकी रिपोर्ट के आधार पर पता चलता है कि आपके हार्मोन में क्या-क्या परेशानियां हैं। शरीर में हार्मोंस का लेवल जानने के लिए एएमएच, थायराइड, प्रोलैक्टिन, एफएसएच, एलएच टेस्ट करवाए जाते हैं। इन टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर इलाज दिया जाता है। डॉक्टर अर्चना ने पीसीओडी में कंसीव करने के लिए कुछ टिप्स भी बताए हैं, जो इस प्रकार हैं : - प्रेगनेंट होने के लिए आपको सबसे पहले अपने लाइफस्टाइल को बदलना होगा। अपना वेट कंट्रोल में रखें। - तला-भुना, चीनी, सफेद चावल और मैदा से बनी चीजें खाने से बचें। - अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों, अनाज और फलों को शामिल करना है। पीसीओडी को ठीक करने के साथ-साथ प्रेगनेंट होने के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। आप सप्ताह में कम से कम तीन या चार बार आधे घंटे के लिए एक्सरसाइज जरूर करनी है वरना दवाइयां भी असर करना बंद कर देंगी। इस हार्मोनल विकार में कंसीव करने के लिए डॉक्टर अर्चना ने कुछ घरेलू नुस्खे भी बताए। उन्होंने कहा कि डाइट, लाइफस्टाइल ठीक करने और एक्सरसाइज करने के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। अपनी फर्टिलिटी को बढ़ाने के लिए आप अलसी के बीज, मेथीदाने का पानी पी सकती हैं। इसके अलावा एग की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं जिसमें मायोइनिसिटॉल शामिल है। पीसीओडी में प्रेगनेंट होने के लिए विटामिन डी का लेवल भी नॉर्मल करना जरूरी है।
|
शाहीन बाग पर बातचीत के बीच एक रास्ता खुला. 70 दिन बाद नोएडा से कालिंदी कुंज सड़क पर दौड़ी गाड़ियां. नोएडा के महामाया फ्लाइओवर से एक रास्ता खुला- पुलिस ने रोड से हटाई बैरिकेडिंग. यूपी पुलिस ने कालिन्दीकुंज से फरीदाबाद और जैतपुर की तरफ जाने वाले रास्ते को खोला. लोगों की मिली बड़ी राहत. शाहीन बाग पर तीसरे दौर की बातचीत आज शाम 4 बजे पहुंचेंगे वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन. कल दूसरे दिन भी शाहीन बाग में पहुंचे थे वार्ताकार. लेकिन हटने के लिए तैयार नहीं हैं प्रदर्शनकारी.
A key road near Delhi Shaheen Bagh where protests have been on for two months against the Citizenship (Amendment) Act CAA was reopened briefly today by the Uttar Pradesh and Delhi Police 69 days after it was barricaded. The opening of the road for 40 minutes today to ease traffic congestion comes two Supreme Court-appointed mediators met those who have been sitting in protest for more than two months.
|
शाहीन बाग पर बातचीत के बीच एक रास्ता खुला. सत्तर दिन बाद नोएडा से कालिंदी कुंज सड़क पर दौड़ी गाड़ियां. नोएडा के महामाया फ्लाइओवर से एक रास्ता खुला- पुलिस ने रोड से हटाई बैरिकेडिंग. यूपी पुलिस ने कालिन्दीकुंज से फरीदाबाद और जैतपुर की तरफ जाने वाले रास्ते को खोला. लोगों की मिली बड़ी राहत. शाहीन बाग पर तीसरे दौर की बातचीत आज शाम चार बजे पहुंचेंगे वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन. कल दूसरे दिन भी शाहीन बाग में पहुंचे थे वार्ताकार. लेकिन हटने के लिए तैयार नहीं हैं प्रदर्शनकारी. A key road near Delhi Shaheen Bagh where protests have been on for two months against the Citizenship Act CAA was reopened briefly today by the Uttar Pradesh and Delhi Police उनहत्तर days after it was barricaded. The opening of the road for चालीस minutes today to ease traffic congestion comes two Supreme Court-appointed mediators met those who have been sitting in protest for more than two months.
|
जशपुरनगर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का जशपुर और अंबिकापुर प्रवास से संभाग की सामाजिक,धार्मिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। कार्यक्रम को लेकर दोनों जिलों में जिस तरह से लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है,वह आने वाले भविष्य का साफ संकेत है कि मतांतरण के दिन अब लद गए हैं। नईदुनिया से विशेष चर्चा करते हुए,घर वापसी कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने उक्त बातें कही। उन्होनें बताया कि जशपुर और सरगुजा सहित देश के सभी जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र मतातंरण माफिया के निशाने में है। सेवा की आड़ में मतातंरण का खेल चल रहा है। इससे हिंदूओं के अल्पसंख्यक होने का खतरा तो है ही,साथ ही नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी राष्ट्रद्रोही ताकतों के सिर उठाने की भी आशंका है। यहीं कारण है कि उनके पिता दिलीप सिंह जूदेव ने घर वापसी अभियान शुरू किया था। इस अभियान ने हिंदूओं को अपनी धर्म और संस्कृति के लिए जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घर वापसी अभियान ने लोगों को पहली बार अहसास कराया कि हिंदूओं की संख्या घटने से हिंदू समाज के साथ देश की सुरक्षा को भी खतरा है। इस खतरे का अहसास होने से सरकारी तंत्र भी सचेत हुए। 14 नवंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हाथों,दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा के अनावरण के क्षण को अविस्मरणीय बताते हुए,प्रबल प्रताप ने कहा आजीवन हिंदूत्व की रक्षा और संवर्धन के लिए संघर्ष करने वाले उनके पिता की प्रतिमा का अनावरण,विश्व के सबसे बड़े हिंदू नेता के हाथों होना,सौभाग्य की बात है। दिलीप सिंह जूदेव जैसे विराट व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की प्रतिमा के अनावरण के लिए इससे बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता है। 14 नवंबर को जशपुर राज परिवार से मिलने के कार्यक्रम को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रबल ने कहा कि मोहन भागवत जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व का विजय विहार में राजपरिवार के बीच आना,पूरे राज परिवार के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होनें कहा कि इसके लिए राजपरिवार के सभी सदस्य उत्सुक हैं। यह क्षण आजीवन हम सबकों देश और हिंदूत्व के हित में कार्य और संघर्ष करने के लिए प्रेरणा और ऊर्जा देता रहेगा।
|
जशपुरनगर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का जशपुर और अंबिकापुर प्रवास से संभाग की सामाजिक,धार्मिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। कार्यक्रम को लेकर दोनों जिलों में जिस तरह से लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है,वह आने वाले भविष्य का साफ संकेत है कि मतांतरण के दिन अब लद गए हैं। नईदुनिया से विशेष चर्चा करते हुए,घर वापसी कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने उक्त बातें कही। उन्होनें बताया कि जशपुर और सरगुजा सहित देश के सभी जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र मतातंरण माफिया के निशाने में है। सेवा की आड़ में मतातंरण का खेल चल रहा है। इससे हिंदूओं के अल्पसंख्यक होने का खतरा तो है ही,साथ ही नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी राष्ट्रद्रोही ताकतों के सिर उठाने की भी आशंका है। यहीं कारण है कि उनके पिता दिलीप सिंह जूदेव ने घर वापसी अभियान शुरू किया था। इस अभियान ने हिंदूओं को अपनी धर्म और संस्कृति के लिए जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घर वापसी अभियान ने लोगों को पहली बार अहसास कराया कि हिंदूओं की संख्या घटने से हिंदू समाज के साथ देश की सुरक्षा को भी खतरा है। इस खतरे का अहसास होने से सरकारी तंत्र भी सचेत हुए। चौदह नवंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हाथों,दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा के अनावरण के क्षण को अविस्मरणीय बताते हुए,प्रबल प्रताप ने कहा आजीवन हिंदूत्व की रक्षा और संवर्धन के लिए संघर्ष करने वाले उनके पिता की प्रतिमा का अनावरण,विश्व के सबसे बड़े हिंदू नेता के हाथों होना,सौभाग्य की बात है। दिलीप सिंह जूदेव जैसे विराट व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की प्रतिमा के अनावरण के लिए इससे बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता है। चौदह नवंबर को जशपुर राज परिवार से मिलने के कार्यक्रम को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रबल ने कहा कि मोहन भागवत जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व का विजय विहार में राजपरिवार के बीच आना,पूरे राज परिवार के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होनें कहा कि इसके लिए राजपरिवार के सभी सदस्य उत्सुक हैं। यह क्षण आजीवन हम सबकों देश और हिंदूत्व के हित में कार्य और संघर्ष करने के लिए प्रेरणा और ऊर्जा देता रहेगा।
|
अरुन तगा (१) कै नैन जनु गरै जनेऊ डार
रूप दान मांगत रहें ये पल करन (२) पसार ॥ २५२ ॥ त्रपत न मानत नैन ये लेत रूप रस दान रहत पसारै लोभिया निस वासर पल पान (३) ॥ २५३ ॥ जब तैं वह सिर पढ़ि दियो हेरन मै हित बील (४) पल घर मै बैठत नहीं तब तैं दृग हुइ सील ॥ २५४ ॥ दूग मृग नैननि के कहूं फाँद न पाव जान जुलफ फँदा मुख भूमि पर रोपै बधिक सुजान ॥२५५॥ मत चलाव मो सामुहै इनको तैं अरु यार नजर कटारी बांकुरी पल म्यानै पड़ यार ॥ २५६ ॥ रीझत आपु नजार कै लखि छबि नंदकुमार मन को डारत वार जे नौखे हग रिझवार ॥ २५७ ॥ नेह नगर मै कहु तुहीं कौन बसे सुख चैन मन धन लूटत सहज मै लाल वटपरा (५) नैन ॥२५८ ॥ देखत नैन न देखती यह डर मोहन ओर आप लागि करिहैं करन मेरे मन पर जोर ॥ २५९ ॥ सुरत सहेली बाल छवि नित सँवार के ल्याइ हग प्रीतम कौ देत है आछी भांति मिलाइ ॥ २६ ॥
(१) डोरा । (२) हाथों को ।
(२) हाथ । (४) मंत्र । (५) डांकू ।
साधत इक छूटत सहस लगत अमित दृग गात । अरजुन सम बानावली तेरे दृग करि जात ॥२६॥ तेरे नैन मसालची रूप मसाल दिखाइ
नेही तन तैं बिरह तम दीनौ दूर भजाइ ॥ २६२ ॥ मेरे जान सुजान तुव नैन किलकिला (1) आइ हृदय सिंधु तैं मीन मन तुरत सुधरि लै जाइ ॥२६३ ॥ सज्जन सांची बात यह यामै नहीं विवाद बिना जीभ के लेत हग मोहनरूप सवाद ॥ २६४ ॥ जे अखियां बैरा (२) रही लगै बिरह की बाइ प्रीतम पग रज को तिन्हें अंजन देहु लगाइ ॥ २६५॥ हेरत मोहनरूप कौं बृजवाला न अघाइ
चहूं वोर तैं दौर के हग कोरन मिलजाइ ॥२६६॥ अंजन होइ न लसत तौ ढिग इन नैन बिसाल । पहिराई जनु मदन गुर स्याम वंदनीमाल विदित न सनमुख है सकें अखियां बड़ी लजोर । वरुनी सिरकिन वोट है हेरत मोहन ओर ॥२६८ ॥ अवगाहे इन रूप निधि जब तैं नैन मलाह तब तैं मन नृप चलत है इनही बूझि सलाह ॥ २६६ ॥
(१) नाम उस चिड़या जो मछली पकड़ती है और जिसको फारसी मे माहौखोर कहका हैं । (२) बिगड़ रहों ।
जामै ये छबि पावतीं छवि पावन्ता भात रसनिधि अखियां ताहियै नित अवलोकि सिहात ॥ २७ ॥ दृग दुस्सासन लाल के ज्यों ज्यों खैंचत जात त्यों त्यों द्रोपदिचीर लौं मन पट बाढ़त जात ॥ २७१ ॥ बाहक दृग नँदलाल के अँडन औंठी घाल
आड़ि छुटावति मन हयन तुरत चलावत चाल ॥२७२॥ हग दरजी बरुनी सुई रेसम डोरे लाल मगजी ज्यों मो मन सियौ तुव दामन सौं लाल ॥२७३॥ भावन्ता लखि लगत पल जानत कौ केहि हेत पल ओटन सौं नैन ये रूपस्वाद कौं लेत ॥ २७४ ॥ जब जब निकसत भावतो रसनिधि इहि मग आइ । नेह अंतर लै डीठ कर लोचन देत लगाइ (१) ॥ २७५ ॥ बँहकाये तैं और के ये ही (२) तैं जनि बैकु (३) देखन दै मुखचंद कौ नैन चकोरन नैकु ॥ २७६ ॥ थिरकत सहज सुभाव सौं चलत चपलगत सैन मनरंजन रिझवार के खंजन तेरे नैन नींद निरादर देत हैं नेही हग इहि आस कबहुँक देखों उदित है भावंता हग पास
(२) हे हृदय ।
(१) इसोकारण नेत्रों में आंसू भर आता है। (३) बहक ।
|
अरुन तगा कै नैन जनु गरै जनेऊ डार रूप दान मांगत रहें ये पल करन पसार ॥ दो सौ बावन ॥ त्रपत न मानत नैन ये लेत रूप रस दान रहत पसारै लोभिया निस वासर पल पान ॥ दो सौ तिरेपन ॥ जब तैं वह सिर पढ़ि दियो हेरन मै हित बील पल घर मै बैठत नहीं तब तैं दृग हुइ सील ॥ दो सौ चौवन ॥ दूग मृग नैननि के कहूं फाँद न पाव जान जुलफ फँदा मुख भूमि पर रोपै बधिक सुजान ॥दो सौ पचपन॥ मत चलाव मो सामुहै इनको तैं अरु यार नजर कटारी बांकुरी पल म्यानै पड़ यार ॥ दो सौ छप्पन ॥ रीझत आपु नजार कै लखि छबि नंदकुमार मन को डारत वार जे नौखे हग रिझवार ॥ दो सौ सत्तावन ॥ नेह नगर मै कहु तुहीं कौन बसे सुख चैन मन धन लूटत सहज मै लाल वटपरा नैन ॥दो सौ अट्ठावन ॥ देखत नैन न देखती यह डर मोहन ओर आप लागि करिहैं करन मेरे मन पर जोर ॥ दो सौ उनसठ ॥ सुरत सहेली बाल छवि नित सँवार के ल्याइ हग प्रीतम कौ देत है आछी भांति मिलाइ ॥ छब्बीस ॥ डोरा । हाथों को । हाथ । मंत्र । डांकू । साधत इक छूटत सहस लगत अमित दृग गात । अरजुन सम बानावली तेरे दृग करि जात ॥छब्बीस॥ तेरे नैन मसालची रूप मसाल दिखाइ नेही तन तैं बिरह तम दीनौ दूर भजाइ ॥ दो सौ बासठ ॥ मेरे जान सुजान तुव नैन किलकिला आइ हृदय सिंधु तैं मीन मन तुरत सुधरि लै जाइ ॥दो सौ तिरेसठ ॥ सज्जन सांची बात यह यामै नहीं विवाद बिना जीभ के लेत हग मोहनरूप सवाद ॥ दो सौ चौंसठ ॥ जे अखियां बैरा रही लगै बिरह की बाइ प्रीतम पग रज को तिन्हें अंजन देहु लगाइ ॥ दो सौ पैंसठ॥ हेरत मोहनरूप कौं बृजवाला न अघाइ चहूं वोर तैं दौर के हग कोरन मिलजाइ ॥दो सौ छयासठ॥ अंजन होइ न लसत तौ ढिग इन नैन बिसाल । पहिराई जनु मदन गुर स्याम वंदनीमाल विदित न सनमुख है सकें अखियां बड़ी लजोर । वरुनी सिरकिन वोट है हेरत मोहन ओर ॥दो सौ अड़सठ ॥ अवगाहे इन रूप निधि जब तैं नैन मलाह तब तैं मन नृप चलत है इनही बूझि सलाह ॥ दो सौ छयासठ ॥ नाम उस चिड़या जो मछली पकड़ती है और जिसको फारसी मे माहौखोर कहका हैं । बिगड़ रहों । जामै ये छबि पावतीं छवि पावन्ता भात रसनिधि अखियां ताहियै नित अवलोकि सिहात ॥ सत्ताईस ॥ दृग दुस्सासन लाल के ज्यों ज्यों खैंचत जात त्यों त्यों द्रोपदिचीर लौं मन पट बाढ़त जात ॥ दो सौ इकहत्तर ॥ बाहक दृग नँदलाल के अँडन औंठी घाल आड़ि छुटावति मन हयन तुरत चलावत चाल ॥दो सौ बहत्तर॥ हग दरजी बरुनी सुई रेसम डोरे लाल मगजी ज्यों मो मन सियौ तुव दामन सौं लाल ॥दो सौ तिहत्तर॥ भावन्ता लखि लगत पल जानत कौ केहि हेत पल ओटन सौं नैन ये रूपस्वाद कौं लेत ॥ दो सौ चौहत्तर ॥ जब जब निकसत भावतो रसनिधि इहि मग आइ । नेह अंतर लै डीठ कर लोचन देत लगाइ ॥ दो सौ पचहत्तर ॥ बँहकाये तैं और के ये ही तैं जनि बैकु देखन दै मुखचंद कौ नैन चकोरन नैकु ॥ दो सौ छिहत्तर ॥ थिरकत सहज सुभाव सौं चलत चपलगत सैन मनरंजन रिझवार के खंजन तेरे नैन नींद निरादर देत हैं नेही हग इहि आस कबहुँक देखों उदित है भावंता हग पास हे हृदय । इसोकारण नेत्रों में आंसू भर आता है। बहक ।
|
अमरावती/दि. 5- शिक्षकों के जिलांतर्गत तबादलोें की प्रक्रिया अंततः 31 अक्तूबर से शुरू हो गई है. पहले दो दिनों के दौरान दुर्गम क्षेत्र की शालाओं की चयन सूची घोषित की जानी है और धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में करीब दो माह का समय लगेगा. जिसके चलते लगभग 5 जनवरी को यानी नये साल में ही स्थलांतरित किये गये शिक्षकों को उनके तबादले के आदेश दिये जा सकेंगे.
बता देें कि, जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के लिए पहले घोषित किये गये टाईम टेबल को पीछे लेकर नया संशोधित टाईम टेबल लागू किया गया था. जिसके अनुसार 31 अगस्त से प्रत्यक्ष प्रक्रिया की शुरूआत करने के निर्देश जारी हुए है. वहीं 31 अक्तूबर से शुरू हुई तबादला प्रक्रिया के बाद पहले दो दिन यानी 31 अक्तूबर व 1 नवंबर को जिलेभर के दुर्गम क्षेत्रों आनेवाली शालाओं की चयन समिती निश्चित की गई और 4 नवंबर तक रिक्त पदों की भी निश्चिती की गई. जिसके उपरांत 9 नवंबर को तबादले हेतु पात्र शिक्षकों की सूची प्रकाशित की जायेगी. इस दौरान तबादले की संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्ण होने में करीब दो माह का समय लगेगा.
तबादले की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शक रहने हेतु इस बार ऑनलाईन कंप्यूटर प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है और पूरी तबादला प्रक्रिया पर जिप सीईओ की नजर रहेगी. कुल मिलाकर तबादले हेतु पात्र शिक्षकों के हाथ में उनके तबादले के आदेश नये साल में ही आयेंगे.
तबादले के लिए पात्र रहनेवाले शिक्षकों की सूची संवर्गनिहाय घोषित की जायेगी. साधारणतः 9 नवंबर तक इन सूचियों को घोषित कर दिया जायेगा. वहीं अगर इन सूचियों को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति या आक्षेप रहने पर इस बारे में शिक्षाधिकारी को अवगत कराया जा सकेगा औरा यदि वहां पर समाधान नहीं होता, तो फिर सीधे सीईओ के पास अपील की जा सकेगी. यह संपूर्ण प्रक्रिया 10 से 18 नवंबर के दौरान पूरी कर ली जायेगी.
जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के लिए दो माह की कालावधि लगना तय है और तबादले की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 5 जनवरी 2023 को स्थलांतरित किये गये शिक्षकों को उनके तबादले के आदेश और तबादला सूची प्रदान की जायेगी. जिसके लिए ऑनलाईन संगणक प्रणाली का प्रयोग किया जायेगा.
सरकार ने जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के घटक और टाईम टेबल तय कर दिये है. इसके अनुसार ही शिक्षा विभाग एवं जिला परिषद को तमाम कार्य करने है. इसमें यदि किसी भी तरह की कोई कोताही या देरी होती है, तो संबंधितों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने की बात सरकार ने अपने आदेश में कही है.
|
अमरावती/दि. पाँच- शिक्षकों के जिलांतर्गत तबादलोें की प्रक्रिया अंततः इकतीस अक्तूबर से शुरू हो गई है. पहले दो दिनों के दौरान दुर्गम क्षेत्र की शालाओं की चयन सूची घोषित की जानी है और धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में करीब दो माह का समय लगेगा. जिसके चलते लगभग पाँच जनवरी को यानी नये साल में ही स्थलांतरित किये गये शिक्षकों को उनके तबादले के आदेश दिये जा सकेंगे. बता देें कि, जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के लिए पहले घोषित किये गये टाईम टेबल को पीछे लेकर नया संशोधित टाईम टेबल लागू किया गया था. जिसके अनुसार इकतीस अगस्त से प्रत्यक्ष प्रक्रिया की शुरूआत करने के निर्देश जारी हुए है. वहीं इकतीस अक्तूबर से शुरू हुई तबादला प्रक्रिया के बाद पहले दो दिन यानी इकतीस अक्तूबर व एक नवंबर को जिलेभर के दुर्गम क्षेत्रों आनेवाली शालाओं की चयन समिती निश्चित की गई और चार नवंबर तक रिक्त पदों की भी निश्चिती की गई. जिसके उपरांत नौ नवंबर को तबादले हेतु पात्र शिक्षकों की सूची प्रकाशित की जायेगी. इस दौरान तबादले की संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्ण होने में करीब दो माह का समय लगेगा. तबादले की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शक रहने हेतु इस बार ऑनलाईन कंप्यूटर प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है और पूरी तबादला प्रक्रिया पर जिप सीईओ की नजर रहेगी. कुल मिलाकर तबादले हेतु पात्र शिक्षकों के हाथ में उनके तबादले के आदेश नये साल में ही आयेंगे. तबादले के लिए पात्र रहनेवाले शिक्षकों की सूची संवर्गनिहाय घोषित की जायेगी. साधारणतः नौ नवंबर तक इन सूचियों को घोषित कर दिया जायेगा. वहीं अगर इन सूचियों को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति या आक्षेप रहने पर इस बारे में शिक्षाधिकारी को अवगत कराया जा सकेगा औरा यदि वहां पर समाधान नहीं होता, तो फिर सीधे सीईओ के पास अपील की जा सकेगी. यह संपूर्ण प्रक्रिया दस से अट्ठारह नवंबर के दौरान पूरी कर ली जायेगी. जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के लिए दो माह की कालावधि लगना तय है और तबादले की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद पाँच जनवरी दो हज़ार तेईस को स्थलांतरित किये गये शिक्षकों को उनके तबादले के आदेश और तबादला सूची प्रदान की जायेगी. जिसके लिए ऑनलाईन संगणक प्रणाली का प्रयोग किया जायेगा. सरकार ने जिलांतर्गत तबादला प्रक्रिया के घटक और टाईम टेबल तय कर दिये है. इसके अनुसार ही शिक्षा विभाग एवं जिला परिषद को तमाम कार्य करने है. इसमें यदि किसी भी तरह की कोई कोताही या देरी होती है, तो संबंधितों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने की बात सरकार ने अपने आदेश में कही है.
|
Quick links:
मानसून सत्र के दौरान किसान केंद्र के नए कृषि कानूनों को लेकर संसद के सामने विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है। अब वो अपने आंदोलन को तेज करने के लिए किसान संसद आयोजित करेंगे। यह जानकारी किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने दी।
भारतीय किसान मोर्चा (बीकेएम) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने रविवार को कहा कि 22 जुलाई को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन से संसद का कोई घेराव नहीं होगा, क्योंकि पुलिस ने हमें संसद के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी है।
धरने की अनुमति न मिलने पर बीकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि किसान संघ ने रविवार को दिल्ली पुलिस से सिंघू सीमा के पास मंत्रम रिसॉर्ट में मुलाकात की और जंतर-मंतर पर किसान संसद की अनुमति मांगी, जिसमें 200 लोग शामिल होंगे।
उन्होंने कहा, "हमने दिल्ली पुलिस के साथ अपना कार्यक्रम साझा किया है। 22 जुलाई से 200 किसान बस से जंतर मंतर पहुंचेंगे और किसान संसद करेंगे। जो किसान जंतर-मंतर पर जाएंगे, उन्हें किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से पहचान पत्र दिए जाएंगे। जिनके पास पहचान पत्र नहीं होगा, उन्हें भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"
मध्य प्रदेश के एक अन्य किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा, "हमने दिल्ली पुलिस को बताया कि 200 लोग हर दिन सिंघू सीमा से संसद तक मार्च करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति के पास एक पहचान बैज होगा। हम प्रदर्शनकारियों की एक सूची सरकार को सौंपेंगे। पुलिस ने हमें प्रदर्शनकारियों की संख्या कम करने के लिए कहा, जिसे हमने मना कर दिया। अगर वे अनुमति नहीं देते हैं तो हम बलपूर्वक जाएंगे।"
किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से दिल्ली सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे है। इस आंदोलन को समाप्त करने को लेकर केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
अपने आंदोलन को तेज करने के लिए भारतीय किसान यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा समेत की किसान संगठनों ने मानसून सत्र के दौरान संसद के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हालांकि किसान संगठनों ने कहा है कि इस प्रदर्शन में किसानों की संख्या निश्चित होगी और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा।
|
Quick links: मानसून सत्र के दौरान किसान केंद्र के नए कृषि कानूनों को लेकर संसद के सामने विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है। अब वो अपने आंदोलन को तेज करने के लिए किसान संसद आयोजित करेंगे। यह जानकारी किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने दी। भारतीय किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने रविवार को कहा कि बाईस जुलाई को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन से संसद का कोई घेराव नहीं होगा, क्योंकि पुलिस ने हमें संसद के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी है। धरने की अनुमति न मिलने पर बीकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि किसान संघ ने रविवार को दिल्ली पुलिस से सिंघू सीमा के पास मंत्रम रिसॉर्ट में मुलाकात की और जंतर-मंतर पर किसान संसद की अनुमति मांगी, जिसमें दो सौ लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "हमने दिल्ली पुलिस के साथ अपना कार्यक्रम साझा किया है। बाईस जुलाई से दो सौ किसान बस से जंतर मंतर पहुंचेंगे और किसान संसद करेंगे। जो किसान जंतर-मंतर पर जाएंगे, उन्हें किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से पहचान पत्र दिए जाएंगे। जिनके पास पहचान पत्र नहीं होगा, उन्हें भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" मध्य प्रदेश के एक अन्य किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा, "हमने दिल्ली पुलिस को बताया कि दो सौ लोग हर दिन सिंघू सीमा से संसद तक मार्च करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति के पास एक पहचान बैज होगा। हम प्रदर्शनकारियों की एक सूची सरकार को सौंपेंगे। पुलिस ने हमें प्रदर्शनकारियों की संख्या कम करने के लिए कहा, जिसे हमने मना कर दिया। अगर वे अनुमति नहीं देते हैं तो हम बलपूर्वक जाएंगे।" किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से दिल्ली सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे है। इस आंदोलन को समाप्त करने को लेकर केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। अपने आंदोलन को तेज करने के लिए भारतीय किसान यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा समेत की किसान संगठनों ने मानसून सत्र के दौरान संसद के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हालांकि किसान संगठनों ने कहा है कि इस प्रदर्शन में किसानों की संख्या निश्चित होगी और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा।
|
बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान (Sara Ali Khan) और क्रिकेटर शुभमन गिल (Shubman Gill) की डेटिंग का खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. सारा और शुभमन को एक साथ में कई बार स्पॉट भी किया है. गौरतलब है कि, दोनों के डेटिंग अफवाहों ने इंटरनेट पर तब से हलचल मचा दी थी जब दोनों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. जिसमें सारा (Sara Ali Khan) और शुभमन (Shubman Gill) एक साथ एक होटल से बाहर निकलते देखा गया था. तब से ही दोनों के अफेयर की खबरें उड़ रही हैं. वहीं इस बीच क्रिकेटर शुभमन गिल ने सारा (Sara Ali Khan) के साथ अपने अफेयर को लेकर जबरस्त हिंट दिया है. यह भी पढ़ेंः Aamir Khan: 'लाल सिंह चड्ढा' फ्लॉप होने के बाद आमिर खान ने फिल्मों से बनाई दूरी, किया चौकानें वाला ऐलान!
शुभमन गिल ने अपनी डेटिंग का दिया हिंटः
पहले शुभमन (Shubman Gill) के सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर को डेट करने की अफवाह थी, लेकिन अब उनका नाम सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान (Sara Ali Khan) के साथ जोड़ा जा रहा है. हाल ही में भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल से उनकी पसंद के साथ उनके डेटिंग लाइफ के बारे में सवाल किया गया था. जिनके जवाब शुभमन गिल (Shubman Gill) ने कुछ इस अंदाज में दिए कि लोग मानने को मजबूर हो गए हैं कि वो और सारा रिलेशन में हैं. हाल ही में शुभमन प्रीति और नीति सिमोस के फेमस पंजाबी शो 'दिल दिया गल्लां' में पहुंचे. इस शो के दौरान सलामी बल्लेबाज (Shubman Gill) से पूछा गया कि, बॉलीवुड में सबसे फिट एक्ट्रेस कौन है? इसका जवाब देते हुए शुभम ने 'सारा अली खान' (Sara Ali Khan) का नाम लिया.
सारा का बोला सारा सचः
सोनम ने फिर सीधे क्रिकेटर शुभमन गिल (Shubman Gill) से पूछा कि क्या वो सारा अली खान (Sara Ali Khan) को डेट कर रहे हैं? शुभमन ने इसका जवाब बड़े ही दिलचस्प अंदाज में दिया. उन्होंने कहा, 'शायद ...' इसके बाद शुभमन से बोला गया कि सारा का सारा सच बोलो. तो क्रिकेटर (Shubman Gill) ने शरमाते हुए और चेहरे पर बड़ी सी स्माइल के साथ कहा, 'सारा दा सारा सच बोल दिया. शायद हां, शायद नहीं'. शुभमन गिल के इस जवाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो और सारा अली खान (Sara Ali Khan) अभी फिलहाल दोस्त से बढ़कर भी हैं. शुभमन (Shubman Gill) ने खुलकर अगर हामी नहीं भरी, तो इससे इंकार भी नहीं किया.
यह भी पढ़ेंः रणवीर सिंह के पीछे जब एक प्रोड्यूसर ने छोड़ दिया था अपना कुत्ता, एक्टर ने बयां किया अपने स्ट्रगल का दर्द!
बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः
|
बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान और क्रिकेटर शुभमन गिल की डेटिंग का खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. सारा और शुभमन को एक साथ में कई बार स्पॉट भी किया है. गौरतलब है कि, दोनों के डेटिंग अफवाहों ने इंटरनेट पर तब से हलचल मचा दी थी जब दोनों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. जिसमें सारा और शुभमन एक साथ एक होटल से बाहर निकलते देखा गया था. तब से ही दोनों के अफेयर की खबरें उड़ रही हैं. वहीं इस बीच क्रिकेटर शुभमन गिल ने सारा के साथ अपने अफेयर को लेकर जबरस्त हिंट दिया है. यह भी पढ़ेंः Aamir Khan: 'लाल सिंह चड्ढा' फ्लॉप होने के बाद आमिर खान ने फिल्मों से बनाई दूरी, किया चौकानें वाला ऐलान! शुभमन गिल ने अपनी डेटिंग का दिया हिंटः पहले शुभमन के सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर को डेट करने की अफवाह थी, लेकिन अब उनका नाम सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान के साथ जोड़ा जा रहा है. हाल ही में भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल से उनकी पसंद के साथ उनके डेटिंग लाइफ के बारे में सवाल किया गया था. जिनके जवाब शुभमन गिल ने कुछ इस अंदाज में दिए कि लोग मानने को मजबूर हो गए हैं कि वो और सारा रिलेशन में हैं. हाल ही में शुभमन प्रीति और नीति सिमोस के फेमस पंजाबी शो 'दिल दिया गल्लां' में पहुंचे. इस शो के दौरान सलामी बल्लेबाज से पूछा गया कि, बॉलीवुड में सबसे फिट एक्ट्रेस कौन है? इसका जवाब देते हुए शुभम ने 'सारा अली खान' का नाम लिया. सारा का बोला सारा सचः सोनम ने फिर सीधे क्रिकेटर शुभमन गिल से पूछा कि क्या वो सारा अली खान को डेट कर रहे हैं? शुभमन ने इसका जवाब बड़े ही दिलचस्प अंदाज में दिया. उन्होंने कहा, 'शायद ...' इसके बाद शुभमन से बोला गया कि सारा का सारा सच बोलो. तो क्रिकेटर ने शरमाते हुए और चेहरे पर बड़ी सी स्माइल के साथ कहा, 'सारा दा सारा सच बोल दिया. शायद हां, शायद नहीं'. शुभमन गिल के इस जवाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो और सारा अली खान अभी फिलहाल दोस्त से बढ़कर भी हैं. शुभमन ने खुलकर अगर हामी नहीं भरी, तो इससे इंकार भी नहीं किया. यह भी पढ़ेंः रणवीर सिंह के पीछे जब एक प्रोड्यूसर ने छोड़ दिया था अपना कुत्ता, एक्टर ने बयां किया अपने स्ट्रगल का दर्द! बॉलीवुड और टीवी की अन्य खबरों के लिए क्लिक करेंः
|
शिलांग। मेघालय सरकार ने लज्जा राम बिश्नोई को सोमवार को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया। श्री बिश्नोई ने साढ़े चार महीने पहले 31 दिसंबर, 2021 को डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए आर चंद्रनाथन की जगह ली है। असम-मेघालय कैडर के 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी बिश्नोई वर्तमान में असम पुलिस में विशेष महानिदेशक (प्रशिक्षण और सशस्त्र पुलिस) हैं।
बिश्नोई ने बताया, 'मैंने अभी तक तय नहीं किया है कि कब (मेघालय के डीजीपी के रूप में) पदभार ग्रहण करना है। असम सरकार द्वारा सेवामुक्त करने के बाद मैं मेघालय आ जाऊंगा। ' पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातकोत्तर श्री बिश्नोई, वर्तमान में मेघालय के कार्यवाहक डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग से पदभार ग्रहण करेंगे।
मेघालय सरकार ने चंद्रनाथन के सेवानिवृत्त होने के बाद अगले डीजीपी के रूप में नियुक्ति के लिए असम-मेघालय कैडर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे थे। यूपीएससी ने गत नौ फरवरी को तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी, जिनमें मुकेश अग्रवाल, के. वी. ङ्क्षसह देव (दोनों 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी) और एल. राम बिश्नोई (1991 बैच) के नाम शामिल थे।
सर्वश्री अग्रवाल और देव वर्तमान में असम पुलिस में सेवारत हैं। वरिष्ठता के अनुसार, हालांकि श्री अग्रवाल की मेघालय में डीजीपी के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किया जाना चाहिए था लेकिन राज्य सरकार यूपीएससी द्वारा भेजी गई सूची में सूचीबद्ध तीन नामों में से किसी को भी नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है।
|
शिलांग। मेघालय सरकार ने लज्जा राम बिश्नोई को सोमवार को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया। श्री बिश्नोई ने साढ़े चार महीने पहले इकतीस दिसंबर, दो हज़ार इक्कीस को डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए आर चंद्रनाथन की जगह ली है। असम-मेघालय कैडर के एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बिश्नोई वर्तमान में असम पुलिस में विशेष महानिदेशक हैं। बिश्नोई ने बताया, 'मैंने अभी तक तय नहीं किया है कि कब पदभार ग्रहण करना है। असम सरकार द्वारा सेवामुक्त करने के बाद मैं मेघालय आ जाऊंगा। ' पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातकोत्तर श्री बिश्नोई, वर्तमान में मेघालय के कार्यवाहक डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग से पदभार ग्रहण करेंगे। मेघालय सरकार ने चंद्रनाथन के सेवानिवृत्त होने के बाद अगले डीजीपी के रूप में नियुक्ति के लिए असम-मेघालय कैडर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजे थे। यूपीएससी ने गत नौ फरवरी को तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी, जिनमें मुकेश अग्रवाल, के. वी. ङ्क्षसह देव और एल. राम बिश्नोई के नाम शामिल थे। सर्वश्री अग्रवाल और देव वर्तमान में असम पुलिस में सेवारत हैं। वरिष्ठता के अनुसार, हालांकि श्री अग्रवाल की मेघालय में डीजीपी के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किया जाना चाहिए था लेकिन राज्य सरकार यूपीएससी द्वारा भेजी गई सूची में सूचीबद्ध तीन नामों में से किसी को भी नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है।
|
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
|
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
|
तीसवां पर
को मैं उचित मानवीय प्रवृत्ति मानता हूँ और कला को उस प्रवृति की अन्तःस्फूर्ति समझता है और इनके नाम पर ही में आजकल के नामधारी विज्ञान और कला की आलोचना करता हूँ. ताकि मनुष्य उस जंगली अवस्था को न पहुँच जायँ कि जिधर को आजकल झूठी शिक्षा के कारण यडी तेजी से दौड़ रहे हैं।
विज्ञान और कला की मनुष्य को उतनी ही आवश्यकता है जितनी कि खाने और करड़े की, पल्कि सच पूछिए तो वे इनसे भी ज्यादा जरूरी है। किन्तु वे जरूरी इसलिए नहीं बन जाते कि हम लोग जिनको विज्ञान और कला मानते हैं उनको मानवजीवन के लिए जरूरी बताते हैं, बल्कि इसलिए कि वे वास्तव में मनुष्य के लिए आवश्यक है। यदि मैं घास को मनुष्य का खाना मानूँ और उसे मनुष्य के खान के लिए तैयार करूँ, तो इससे घास मनुष्य का भोग्य नहीं हो सकती। मैं यह नहीं कह सकता 'तुम घास क्यों नहीं स्याते, वह तो तुम्हारा आवश्यक भोजन है.? भोजन तो निस्सन्देह आवश्यक है, पर मैं जो कुछ दे रहा हूँ वह शायद भोजन ही नहीं है।
हमारे विज्ञान और हमारी कला के विषय में भी ऐसी ही बात हुई । हमें तो ऐसा मालूम होता है कि यदि हम किसी ग्रीक शब्द के पीछे 'लाजी' -शास्त्र शब्द लगादें और उसे शास्त्र या विज्ञान कहने लग जायँ तो वह अवश्य ही शास्त्र हो जायगा,
और अगर नग्न, स्त्रियों के चित्र खींचने जैसी किसी अश्लीलता को एक महत्त्वपूर्ण ग्रीक नाम दे दें और उसे कला, कहने लगें तो बस वह अश्लीलता भी कला बन जायगी ।
किन्तु हम चाहे कुछ ही क्या न कहे, कीडे गिनने की, इस बात का विश्लेषण करने को कि आकाशगगा में क्या पदार्थ है, अप्सराओं तथा ऐतिहासिक पुरुषों और घटनाओं के चित्र खीचने तथा आख्यायिकायें और कविताये लिखने को
प्रवृत्तियों की हम अपने मुँह से चाहे कितनी ही तारीफ क्यो, न करें और उन्हें कितने ही बड़े नाम से क्यों न पुकारें, मगर जबतक लोग अपनी मर्जी से उन्हें स्वीकार नहीं करते तत्रतक वे कला या विज्ञान जैसी कोई भी चीज हो नहीं सकतीं । और आजकल लोगों ने न इन्हें स्वीकार किया है और न इन्हें सन्मान दिया है ।
यदि कुछ थोड़े ही लोगो को भोजन बनाने का अधिकार दिया जाय, और अन्य सव लोगों को बिलकुल मना कर दिया जाय, या इस काबिल भी न रहने दिया जाय कि वे भोजन बना सकें, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भोजन की उत्कृष्टता मे खरावी हो जायगी। यदि रूस के किसानो को भोजन बनाने का ठेका दे दिया जाय तो सिवा काली रोटी, क्वास, आलू और प्याज के कि जो उन्हे प्रिय तथा अनुकूल हैं और कोई चीज नवनाई जायगी । यही अवस्था मनुष्य की उन उच्चातिउच्च प्रवृत्तियो की
द्वत्तोसमा परिच्छेद
होगी, जिन्हें हम विज्ञान और कला कहते हैं- यदि उनका ठेका किसी एक जाति-विशेष को दे दिया जाय । वस, अन्तर इतना ही है कि शारीरिक भोजन के सम्बन्ध में मूल प्रकृति से अधिक दूर नहीं जाया जा सकता । काली रोटी और प्याज़ यद्यपि दिष्ट हैं, मगर फिर भी खाये जा सकते हैं, किन्तु मानसिक भोजन में बहुत कुछ हेर-फेर हो सकता है। कुछ लोग दीर्घ काल तक अनावश्यक या हानिकारक विपैला मानसिक भोजन कर सकते हैं । वे स्वयं अपने को धीरे-धीरे उसके जहरीले प्रभाव से मार सकते हैं और उसी तरह का मानसिक भोजन वे दूसरों को भी दे सकते हैं ।
हम लोगों के साथ यही बात हुई, और वह इसलिए कि विज्ञान और कला/आजकल किन्हीं विशिष्ट लोगों के हाथ में । ध्याज वह समस्त मानव-समाज की प्रवृत्ति नहीं है, जिसमें कोई भी अपवाद न हो और जिसमें प्रत्येक मनुष्य अपनी
उत्कृष्ट शक्तियों को इन विद्याओं की आराधना के लिए खास
तौर पर अर्पित कर देता है। आज तो वह एक छोटे से समूह की प्रवृत्ति रह गई है, जिसने उसे अपना पेशा रौती समझ रक्खा है और जो अपने को वैज्ञानिक और कला मी कह कर पुकारता है। इसीलिए उन्होंने कला और विज्ञान का अर्थही "बिलकुल बदल डाला है और अपने कार्य की महत्ता को मुला
|
तीसवां पर को मैं उचित मानवीय प्रवृत्ति मानता हूँ और कला को उस प्रवृति की अन्तःस्फूर्ति समझता है और इनके नाम पर ही में आजकल के नामधारी विज्ञान और कला की आलोचना करता हूँ. ताकि मनुष्य उस जंगली अवस्था को न पहुँच जायँ कि जिधर को आजकल झूठी शिक्षा के कारण यडी तेजी से दौड़ रहे हैं। विज्ञान और कला की मनुष्य को उतनी ही आवश्यकता है जितनी कि खाने और करड़े की, पल्कि सच पूछिए तो वे इनसे भी ज्यादा जरूरी है। किन्तु वे जरूरी इसलिए नहीं बन जाते कि हम लोग जिनको विज्ञान और कला मानते हैं उनको मानवजीवन के लिए जरूरी बताते हैं, बल्कि इसलिए कि वे वास्तव में मनुष्य के लिए आवश्यक है। यदि मैं घास को मनुष्य का खाना मानूँ और उसे मनुष्य के खान के लिए तैयार करूँ, तो इससे घास मनुष्य का भोग्य नहीं हो सकती। मैं यह नहीं कह सकता 'तुम घास क्यों नहीं स्याते, वह तो तुम्हारा आवश्यक भोजन है.? भोजन तो निस्सन्देह आवश्यक है, पर मैं जो कुछ दे रहा हूँ वह शायद भोजन ही नहीं है। हमारे विज्ञान और हमारी कला के विषय में भी ऐसी ही बात हुई । हमें तो ऐसा मालूम होता है कि यदि हम किसी ग्रीक शब्द के पीछे 'लाजी' -शास्त्र शब्द लगादें और उसे शास्त्र या विज्ञान कहने लग जायँ तो वह अवश्य ही शास्त्र हो जायगा, और अगर नग्न, स्त्रियों के चित्र खींचने जैसी किसी अश्लीलता को एक महत्त्वपूर्ण ग्रीक नाम दे दें और उसे कला, कहने लगें तो बस वह अश्लीलता भी कला बन जायगी । किन्तु हम चाहे कुछ ही क्या न कहे, कीडे गिनने की, इस बात का विश्लेषण करने को कि आकाशगगा में क्या पदार्थ है, अप्सराओं तथा ऐतिहासिक पुरुषों और घटनाओं के चित्र खीचने तथा आख्यायिकायें और कविताये लिखने को प्रवृत्तियों की हम अपने मुँह से चाहे कितनी ही तारीफ क्यो, न करें और उन्हें कितने ही बड़े नाम से क्यों न पुकारें, मगर जबतक लोग अपनी मर्जी से उन्हें स्वीकार नहीं करते तत्रतक वे कला या विज्ञान जैसी कोई भी चीज हो नहीं सकतीं । और आजकल लोगों ने न इन्हें स्वीकार किया है और न इन्हें सन्मान दिया है । यदि कुछ थोड़े ही लोगो को भोजन बनाने का अधिकार दिया जाय, और अन्य सव लोगों को बिलकुल मना कर दिया जाय, या इस काबिल भी न रहने दिया जाय कि वे भोजन बना सकें, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भोजन की उत्कृष्टता मे खरावी हो जायगी। यदि रूस के किसानो को भोजन बनाने का ठेका दे दिया जाय तो सिवा काली रोटी, क्वास, आलू और प्याज के कि जो उन्हे प्रिय तथा अनुकूल हैं और कोई चीज नवनाई जायगी । यही अवस्था मनुष्य की उन उच्चातिउच्च प्रवृत्तियो की द्वत्तोसमा परिच्छेद होगी, जिन्हें हम विज्ञान और कला कहते हैं- यदि उनका ठेका किसी एक जाति-विशेष को दे दिया जाय । वस, अन्तर इतना ही है कि शारीरिक भोजन के सम्बन्ध में मूल प्रकृति से अधिक दूर नहीं जाया जा सकता । काली रोटी और प्याज़ यद्यपि दिष्ट हैं, मगर फिर भी खाये जा सकते हैं, किन्तु मानसिक भोजन में बहुत कुछ हेर-फेर हो सकता है। कुछ लोग दीर्घ काल तक अनावश्यक या हानिकारक विपैला मानसिक भोजन कर सकते हैं । वे स्वयं अपने को धीरे-धीरे उसके जहरीले प्रभाव से मार सकते हैं और उसी तरह का मानसिक भोजन वे दूसरों को भी दे सकते हैं । हम लोगों के साथ यही बात हुई, और वह इसलिए कि विज्ञान और कला/आजकल किन्हीं विशिष्ट लोगों के हाथ में । ध्याज वह समस्त मानव-समाज की प्रवृत्ति नहीं है, जिसमें कोई भी अपवाद न हो और जिसमें प्रत्येक मनुष्य अपनी उत्कृष्ट शक्तियों को इन विद्याओं की आराधना के लिए खास तौर पर अर्पित कर देता है। आज तो वह एक छोटे से समूह की प्रवृत्ति रह गई है, जिसने उसे अपना पेशा रौती समझ रक्खा है और जो अपने को वैज्ञानिक और कला मी कह कर पुकारता है। इसीलिए उन्होंने कला और विज्ञान का अर्थही "बिलकुल बदल डाला है और अपने कार्य की महत्ता को मुला
|
धातु और प्लास्टिक से बना विंडोज लंबे समय से मान्यता प्राप्त हैउपयोगकर्ता, क्योंकि उनके पास एक साधारण डिज़ाइन है, समायोजित करना, अच्छी तरह साफ करना और लंबे समय तक सेवा करना आसान है। लेकिन उन्होंने लंबे समय तक सेवा जारी रखी, प्लास्टिक खिड़कियों के लिए एक सीलेंट चुनना आवश्यक है।
चाहे कितना ध्यान से आप अपनी खिड़की देख सकते हैं,आपको अभी भी हर कुछ वर्षों में मुहर बदलने की जरूरत है। प्रतिस्थापन के लिए, आपको एक गुणवत्ता सामग्री चुननी होगी जिसमें आवश्यक लंबाई होगी। सामान्य रूप से, प्लास्टिक खिड़कियों के लिए एक रबरकृत मुहर का उपयोग किया जाता है। स्वाभाविक रूप से, जब कोई सामग्री चुनते हैं, तो यह जांचना आवश्यक है कि यह दोषपूर्ण है या नहीं। तथ्य यह है कि आपकी खिड़की की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि गुणवत्ता और संपूर्ण कॉर्ड कितना होगा।
अवांछित के लिए भी प्रतिस्थापन मुश्किल नहीं होगाजादूगर। सबसे पहले, पुरानी अपशिष्ट सामग्री खिड़की से हटा दी जाती है, और जिस छेद में इसे धूल और मलबे से पूरी तरह साफ़ किया गया था। नाली धीरे-धीरे गोंद के साथ smeared है। धीरे-धीरे, आपको प्लास्टिक की खिड़कियों के लिए मुहर भी रखना चाहिए, यह सुनिश्चित करना कि यह समान रूप से झूठ बोलता है। अगर कॉर्ड बहुत लंबा हो गया, तो अतिरिक्त भाग को आसानी से काटा जाना चाहिए। अभी भी यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि कॉर्ड को नाली के लिए कसकर चिपकाया गया था।
एक नए सीलर के लिए लंबे समय तक चलने के लिए, यह आवश्यक हैनियमित रूप से इसे धूल से मिटा दें, इसे विशेष सुरक्षात्मक यौगिकों के साथ इलाज करें जो आक्रामक पदार्थों को नष्ट करने की अनुमति नहीं देगा। स्वाभाविक रूप से, किसी को विभिन्न रासायनिक पदार्थों के साथ ताकत और मजबूती के लिए इसका परीक्षण नहीं करना चाहिए।
रबर सामग्री के अलावा, आप इसका उपयोग कर सकते हैंअभी भी बहुलक और सिलिकॉन उत्पादों। प्लास्टिक खिड़कियों के लिए बहुलक सीलेंट अपने कार्यों को अच्छी तरह से करता है, लेकिन इसमें किसी भी नुकसान की कमी नहीं है। उदाहरण के लिए, गर्म मौसम में यह नरम हो सकता है, और सर्दी में सख्त हो सकता है। इससे सेवा जीवन कम हो जाता है। बहुलक मुहरों से, आप एक रबर थर्मोपाइमर चुन सकते हैं। इस तरह की मुहर में गुणों में सुधार हुआ है और दोनों ठंढ और उच्च तापमान का सामना कर सकते हैं। उचित देखभाल के साथ, यह दो दशकों तक काम कर सकता है।
सिलिकॉन मुहरों का लाभ भी हैवायुमंडलीय प्रभाव, पराबैंगनी किरणों और आक्रामक पदार्थों के प्रतिरोध। वे खिड़की के फ्रेम के अंदर और बाहर घुड़सवार हैं। सिलिकॉन का एकमात्र नुकसान यह है कि इसकी काफी अधिक लागत है।
|
धातु और प्लास्टिक से बना विंडोज लंबे समय से मान्यता प्राप्त हैउपयोगकर्ता, क्योंकि उनके पास एक साधारण डिज़ाइन है, समायोजित करना, अच्छी तरह साफ करना और लंबे समय तक सेवा करना आसान है। लेकिन उन्होंने लंबे समय तक सेवा जारी रखी, प्लास्टिक खिड़कियों के लिए एक सीलेंट चुनना आवश्यक है। चाहे कितना ध्यान से आप अपनी खिड़की देख सकते हैं,आपको अभी भी हर कुछ वर्षों में मुहर बदलने की जरूरत है। प्रतिस्थापन के लिए, आपको एक गुणवत्ता सामग्री चुननी होगी जिसमें आवश्यक लंबाई होगी। सामान्य रूप से, प्लास्टिक खिड़कियों के लिए एक रबरकृत मुहर का उपयोग किया जाता है। स्वाभाविक रूप से, जब कोई सामग्री चुनते हैं, तो यह जांचना आवश्यक है कि यह दोषपूर्ण है या नहीं। तथ्य यह है कि आपकी खिड़की की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि गुणवत्ता और संपूर्ण कॉर्ड कितना होगा। अवांछित के लिए भी प्रतिस्थापन मुश्किल नहीं होगाजादूगर। सबसे पहले, पुरानी अपशिष्ट सामग्री खिड़की से हटा दी जाती है, और जिस छेद में इसे धूल और मलबे से पूरी तरह साफ़ किया गया था। नाली धीरे-धीरे गोंद के साथ smeared है। धीरे-धीरे, आपको प्लास्टिक की खिड़कियों के लिए मुहर भी रखना चाहिए, यह सुनिश्चित करना कि यह समान रूप से झूठ बोलता है। अगर कॉर्ड बहुत लंबा हो गया, तो अतिरिक्त भाग को आसानी से काटा जाना चाहिए। अभी भी यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि कॉर्ड को नाली के लिए कसकर चिपकाया गया था। एक नए सीलर के लिए लंबे समय तक चलने के लिए, यह आवश्यक हैनियमित रूप से इसे धूल से मिटा दें, इसे विशेष सुरक्षात्मक यौगिकों के साथ इलाज करें जो आक्रामक पदार्थों को नष्ट करने की अनुमति नहीं देगा। स्वाभाविक रूप से, किसी को विभिन्न रासायनिक पदार्थों के साथ ताकत और मजबूती के लिए इसका परीक्षण नहीं करना चाहिए। रबर सामग्री के अलावा, आप इसका उपयोग कर सकते हैंअभी भी बहुलक और सिलिकॉन उत्पादों। प्लास्टिक खिड़कियों के लिए बहुलक सीलेंट अपने कार्यों को अच्छी तरह से करता है, लेकिन इसमें किसी भी नुकसान की कमी नहीं है। उदाहरण के लिए, गर्म मौसम में यह नरम हो सकता है, और सर्दी में सख्त हो सकता है। इससे सेवा जीवन कम हो जाता है। बहुलक मुहरों से, आप एक रबर थर्मोपाइमर चुन सकते हैं। इस तरह की मुहर में गुणों में सुधार हुआ है और दोनों ठंढ और उच्च तापमान का सामना कर सकते हैं। उचित देखभाल के साथ, यह दो दशकों तक काम कर सकता है। सिलिकॉन मुहरों का लाभ भी हैवायुमंडलीय प्रभाव, पराबैंगनी किरणों और आक्रामक पदार्थों के प्रतिरोध। वे खिड़की के फ्रेम के अंदर और बाहर घुड़सवार हैं। सिलिकॉन का एकमात्र नुकसान यह है कि इसकी काफी अधिक लागत है।
|
Rahul Gandhi lookalike: इस वक्त राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली से उत्तरप्रदेश के रास्ते हरियाणा में प्रवेश कर चुकी है। जब कांग्रेस की यात्रा यूपी में बागपत के रास्ते मेरठ की तरफ जा रही थी इसी दौरान राहुल गांधी के हमशक्ल को देखा गया। राहुल गांधी की तरह दिखने वाला शख्स पिछले कई दिनों से काफी सुर्खियों में है।
बता दें कि वायरल वीडियो में राहुल गांधी की तरह दिख रहे शख्स का नाम फैसल चौधरी है औऱ वह यूपी के मेरठ के रहने वाले है। बता दें कि फैसल कांग्रेस पार्टी के ही कार्यकर्ता है। फैसल ने बताया कि पिछले एक साल से उनको लोग राहुल गांधी का हमशक्ल बता रहे हैं। शख्स का कहना है कि बहुत लोग बोलते हैं कि मै राहुल की तरह दिखता हूं। बहुत से लोग साथ में फोटो खिंचवाते हैं, वीडियो बनवाते हैं।
बता दें कि कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा सात सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। ये यात्रा 12 राज्यों से होकर जम्मू कश्मीर तक जानी है। राहुल गांधी अबतक तीन हजार किलोमीटर से ज्यादा पैदल चल चुके हैं। अब सिर्फ 342 किलोमीटर की यात्रा बची है। हरियाणा के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में यह यात्रा पंजाब और फिर आखिर में जम्मू कश्मीर पहुंचेगी।
|
Rahul Gandhi lookalike: इस वक्त राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली से उत्तरप्रदेश के रास्ते हरियाणा में प्रवेश कर चुकी है। जब कांग्रेस की यात्रा यूपी में बागपत के रास्ते मेरठ की तरफ जा रही थी इसी दौरान राहुल गांधी के हमशक्ल को देखा गया। राहुल गांधी की तरह दिखने वाला शख्स पिछले कई दिनों से काफी सुर्खियों में है। बता दें कि वायरल वीडियो में राहुल गांधी की तरह दिख रहे शख्स का नाम फैसल चौधरी है औऱ वह यूपी के मेरठ के रहने वाले है। बता दें कि फैसल कांग्रेस पार्टी के ही कार्यकर्ता है। फैसल ने बताया कि पिछले एक साल से उनको लोग राहुल गांधी का हमशक्ल बता रहे हैं। शख्स का कहना है कि बहुत लोग बोलते हैं कि मै राहुल की तरह दिखता हूं। बहुत से लोग साथ में फोटो खिंचवाते हैं, वीडियो बनवाते हैं। बता दें कि कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा सात सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। ये यात्रा बारह राज्यों से होकर जम्मू कश्मीर तक जानी है। राहुल गांधी अबतक तीन हजार किलोमीटर से ज्यादा पैदल चल चुके हैं। अब सिर्फ तीन सौ बयालीस किलोग्राममीटर की यात्रा बची है। हरियाणा के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में यह यात्रा पंजाब और फिर आखिर में जम्मू कश्मीर पहुंचेगी।
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
अजितनाथ जैन धर्म के २४ तीर्थकरो में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर है।अजितनाथ का जन्म अयोध्या के राजपरिवार में माघ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में हुआ था। इनके पिता का नाम जितशत्रु और माता का नाम विजया था। अजितनाथ का चिह्न हाथी था। जैन ग्रन्थों के अनुसार द्वितीय तीर्थंकर, अजितनाथ का जन्म प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ के जन्म के बाद 50 लाख करोड़ वर्गरोस पम और 12 लाख पूर्व बीत जाने के बाद हुआ था। उनकी ऊंचाई 450 धनुष थी। उन्होंने 18 लाख पूर्व युवा अवस्था (कुमारकाल) में व्यतीत किए। उन्होंने अपने राज्य पर 53 लाख पूर्व और १ पूर्वांग तक शासन किया (राज्यकाल)। उन्होंने १ पूर्वांग कम १ लाख पूर्व काल संयम साधना में व्यतीत किया (संयमकाल)। भगवान अजिताथ की कुल आयु 72 लाख पूर्व की थी। . ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम दिगम्बर जैन मुनि थे। .
अजितनाथ और ऋषभदेव आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): तीर्थंकर, सोना, अयोध्या।
जैन धर्म में तीर्थंकर (अरिहंत, जिनेन्द्र) उन २४ व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान (केवल ज्ञान) प्राप्त करते है। जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर वह व्यक्ति हैं जिन्होनें पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त की हो)। तीर्थंकर को इस नाम से कहा जाता है क्योंकि वे "तीर्थ" (पायाब), एक जैन समुदाय के संस्थापक हैं, जो "पायाब" के रूप में "मानव कष्ट की नदी" को पार कराता है। .
सोना या स्वर्ण (Gold) अत्यंत चमकदार मूल्यवान धातु है। यह आवर्त सारणी के प्रथम अंतर्ववर्ती समूह (transition group) में ताम्र तथा रजत के साथ स्थित है। इसका केवल एक स्थिर समस्थानिक (isotope, द्रव्यमान 197) प्राप्त है। कृत्रिम साधनों द्वारा प्राप्त रेडियोधर्मी समस्थानिकों का द्रव्यमान क्रमशः 192, 193, 194, 195, 196, 198 तथा 199 है। .
अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। यह फैजाबाद जिला के अन्तर्गत आता है। यह सरयू नदी (घाघरा नदी) के दाएं तट पर बसा है। प्राचीन काल में इसे 'कौशल देश' कहा जाता था। अयोध्या हिन्दुओं का प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में एक है। .
अजितनाथ 9 संबंध है और ऋषभदेव 25 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 8.82% है = 3 / (9 + 25)।
यह लेख अजितनाथ और ऋषभदेव के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अजितनाथ जैन धर्म के चौबीस तीर्थकरो में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर है।अजितनाथ का जन्म अयोध्या के राजपरिवार में माघ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में हुआ था। इनके पिता का नाम जितशत्रु और माता का नाम विजया था। अजितनाथ का चिह्न हाथी था। जैन ग्रन्थों के अनुसार द्वितीय तीर्थंकर, अजितनाथ का जन्म प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ के जन्म के बाद पचास लाख करोड़ वर्गरोस पम और बारह लाख पूर्व बीत जाने के बाद हुआ था। उनकी ऊंचाई चार सौ पचास धनुष थी। उन्होंने अट्ठारह लाख पूर्व युवा अवस्था में व्यतीत किए। उन्होंने अपने राज्य पर तिरेपन लाख पूर्व और एक पूर्वांग तक शासन किया । उन्होंने एक पूर्वांग कम एक लाख पूर्व काल संयम साधना में व्यतीत किया । भगवान अजिताथ की कुल आयु बहत्तर लाख पूर्व की थी। . ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम दिगम्बर जैन मुनि थे। . अजितनाथ और ऋषभदेव आम में तीन बातें हैं : तीर्थंकर, सोना, अयोध्या। जैन धर्म में तीर्थंकर उन चौबीस व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करते है। जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर वह व्यक्ति हैं जिन्होनें पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त की हो)। तीर्थंकर को इस नाम से कहा जाता है क्योंकि वे "तीर्थ" , एक जैन समुदाय के संस्थापक हैं, जो "पायाब" के रूप में "मानव कष्ट की नदी" को पार कराता है। . सोना या स्वर्ण अत्यंत चमकदार मूल्यवान धातु है। यह आवर्त सारणी के प्रथम अंतर्ववर्ती समूह में ताम्र तथा रजत के साथ स्थित है। इसका केवल एक स्थिर समस्थानिक प्राप्त है। कृत्रिम साधनों द्वारा प्राप्त रेडियोधर्मी समस्थानिकों का द्रव्यमान क्रमशः एक सौ बानवे, एक सौ तिरानवे, एक सौ चौरानवे, एक सौ पचानवे, एक सौ छियानवे, एक सौ अट्ठानवे तथा एक सौ निन्यानवे है। . अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। यह फैजाबाद जिला के अन्तर्गत आता है। यह सरयू नदी के दाएं तट पर बसा है। प्राचीन काल में इसे 'कौशल देश' कहा जाता था। अयोध्या हिन्दुओं का प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में एक है। . अजितनाथ नौ संबंध है और ऋषभदेव पच्चीस है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक आठ.बयासी% है = तीन / । यह लेख अजितनाथ और ऋषभदेव के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
राजस्व और वन विभाग के अंतर्गत आने वाली ये पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं। इन पहाड़ियों पर माफिया या बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर लिया है।
ग्वालियर (अंकुर जैन): शहर के बीचोंबीच दो दशक में 15 से ज्यादा पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं और ज्यादातर पहाड़ियों पर कब्जा हो चुका है, तो कुछ पहाड़ियों को माफिया ने खुर्द-बुर्द कर दिया है। शहर में 15 प्रमुख पहाड़ियां हैं। राजस्व और वन विभाग के अंतर्गत आने वाली ये पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं। इन पहाड़ियों पर माफिया या बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर लिया है। खास बात यह है कि अब इन पहाड़ियों को लेकर न तो राजस्व विभाग कुछ बोलने को तैयार है न वन विभाग के अफसर। तो आइए हम बताते हैं कि कुछ खास पहाड़ियां किस हाल में हैं। पहाड़ियों के गायब होने का खामियाजा ग्वालियर शहर के नागरिक भी लगातार भुगत रहे हैं। यहां प्रदूषण बढ़ रहा है और तापमान भी। बारिश का स्तर भी अनियमित हो गया है।
महलगांव पहाड़ीः यह पहाड़ी हाउसिंग बोर्ड को रहवासी क्षेत्र विकसित करने के लिए दी गई थी। इसके बाद नीचे क्षेत्र में निजी कॉलोनी बसा दी गई। इस पर पांच सौ से ज्यादा मकान है, जिनमें अब लगभग 6 हजार लोग रहते हैं।
कैंसर पहाड़ीः कैंसर हॉस्पिटल और शोध संस्थान को यहां चिकित्सीय कार्य और औषधीय पौधों का विकास करने की लीज दी गई थी। पहाड़ी पर हॉस्पिटल सिर्फ एक क्षेत्र में है। बाकी की 40 फीसदी दूसरी जगह अतिक्रमण में है। मांढरे की माता के आसपास के अवैध आवासीय क्षेत्र को हटाने के लिए कई बार निर्देश हो चुके हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव और अफसरों की लापरवाही ने अतिक्रमण को और बढ़ावा दिया है। यहां सैकड़ों मकान तो अब पक्के बन चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में कच्चे मकान भी है। यहां सड़क, बिजली और पानी सब का इंतजाम है।
मोतीझील पहाड़ीः इस पहाड़ी पर भूमाफिया ने 1. 50 लाख से 4 लाख तक की कीमत के प्लॉट बेचे हैं। 2016 में कोर्ट के आदेश पर यहां से 250 अतिक्रमण हटाए गए थे। लेकिन बाद में राजस्व और नगर निगम के अधिकारिों की लापरवाही के कारण दोबारा से अतिक्रमण हो गया। इस पहाड़ी पर अब बाकायदा कॉलोनियां विकसित हो चुकी है।
रहमत नगर पहाड़ीः पहाड़ी पर भूमाफिया ने लॉटरी के जरिए 50 हजार से 2 लाख तक की कीमत में प्लॉट बेचे हैं। 2016 में कोर्ट के आदेश पर यहां से 400 अतिक्रमण हटाए गए थे। लेकिन बाद में राजस्व नगर निगम के अधिकारी द्वारा ध्यान न दिए जाने की जाने से द्वारा अतिक्रमण हो गया।
सत्यनारायण की टेकरीः शहर के बीच मौजूद इस पहाड़ी पर तीन से चार हजार अतिक्रमण हैं। कोर्ट इस पहाड़ी पर बसावट को अवैध घोषित कर चुका है। इस पहाड़ी पर मंदिर के बहाने कब्जे की शुरुआत हुई और अब कॉलोनियों से घिरकर पहाड़ी गायब ही हो गई।
गोल पहाड़ियाः बीते दो दशक में इस पहाड़ी पर वैध और अवैध बसावट काबिज है। घर बनाने के लिए पूरी पहाड़ी काट दी गई। यहां लगभग 5000 मकान हैं। अब इसका सिर्फ नाम ही पहाड़ी है, लेकिन मौके पर पहाड़ का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
ग्वालियर शहर की इन 15 पहाड़ियों पर करीब 1. 5 लाख से ज्यादा लोग कब्जा कर बैठे हैं। वहीं ये आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। वहीं, फॉरेस्ट विभाग के अफसरों पर पहाड़ियों पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है। क्योंकि इनका स्वामित्व उसी का है। वह खामोश है। यहां तक मीडिया में भी नहीं बोल पा रहे हैं। क्योंकि उन पर पहाड़ियों पर पैसा लेकर कब्जा कराने के आरोप भी लगते रहे हैं। उसके अफसर इसके लिए राजस्व अमले को जिम्मेदार मानते हैं।
इस मामले में डीएफओ ब्रिजेन्द्र श्रीवास्तव का कहना हैं कि जब भी अतिक्रमण की खबर मिलती है, हम उसे तत्काल तोड़ते हैं। वह पहाड़ियों के अतिक्रमण पर चुप्पी साध जाते हैं। जबकि राजस्व अधिकारी कहते हैं कि वन अफसर जब अतिक्रमण हटाने के लिए अमला मांगते हैं, हम तत्काल देते हैं। उनके कहने पर 2 साल पहले कलेक्ट्रेट के आगे की पहाड़ी पर कब्जा होने से तत्काल रोका था।
पहाड़ियों पर अतिक्रमण देखकर ग्वालियर की शहरी क्षेत्र और आसपास मौजूद पहाड़ियों और सरकारी जमीनों पर भू माफिया के लगातार बढ़ती कब्जे को देख हाल में ही 3 स्थानों पर मौजूद पारियों को चिन्हित किया है। जहां से जल्द ही अतिक्रमणकारियों से जमीन को मुक्त कराने का प्लान है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर पहाड़ियों पर ऐसे कब्जाधारी है, जिन्होंने धार्मिक स्थान पर कब्जा करने की शुरुआत की है। ऐसे में प्रशासन के सामने मौजूदा वक्त में मुश्किल थोड़ी ज्यादा है। इन अतिक्रमणों को लेकर अनेक बार कोर्ट तोड़ने का आदेश दे चुका है। लेकिन अपील के बाद ये फिर लंबित हो जाते हैं। राजस्व विभाग के अफसर हो या वन विभाग के वे भी कोर्ट में पक्ष रखने नही जाते लिहाजा, मामले लटककर ही रह जाते हैं।
नगर निगम अधिकारी कैमरे के सामने तो कुछ नहीं बोलते लेकिन निजी बातचीत में कहते हैं कि ज्यादातर अतिक्रमण या तो वन विभाग की पहाड़ियों पर है या राजस्व विभाग की। लेकिन न तो तहसीलदार और न ही डीएफओ इसके लिए पहल करते हैं। नगर निगम उन्हें साधन उपलब्ध कराता है लेकिन प्रक्रिया तो उन्हें ही पूरी करनी पड़ेगी। जबकि राजस्व और वन से जुड़े अफसर इसका ठीकरा निगम पर फोड़ते हुए कहते है। सब निगम की मिली भगत से ही होता है।
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आरपी सिंह कहते हैं कि मध्य प्रदेश में 15 साल बीजेपी की सरकार रही, तो भूमाफिया और बीजेपी नेताओं के गठजोड़ से पहाड़िया बेची गई। इनमें गैर कानूनी ढंग से सुविधाएं दी गई। चूंकि इसमें सरकार के लोग शामिल थे। लिहाजा प्रशासन बेवस होकर देखता रहा और पहाड़िया गायब होती गई।
वहीं बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि देखिए कोई माफिया राज, शिवराज मामा (shivraj mama) के राज में नहीं चला। जीरो टैलेंट से हमारी जो शिवराज मामा का बुलडोजर है। जो सभी माफियाओं पर चलता है, चाहे वह बेटियों पर परेशान करने का मामला हो या या जमीनों पर कब्जा करने का मामला हो। इन सभी मामलों पर चलेगा सोन चिरैया अभ्यारण (Sonchiraiya forest) के तहत जो माफियाओं ने आपके करे हैं, उन पर बुलडोजर रुकेगा नहीं।
|
राजस्व और वन विभाग के अंतर्गत आने वाली ये पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं। इन पहाड़ियों पर माफिया या बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर लिया है। ग्वालियर : शहर के बीचोंबीच दो दशक में पंद्रह से ज्यादा पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं और ज्यादातर पहाड़ियों पर कब्जा हो चुका है, तो कुछ पहाड़ियों को माफिया ने खुर्द-बुर्द कर दिया है। शहर में पंद्रह प्रमुख पहाड़ियां हैं। राजस्व और वन विभाग के अंतर्गत आने वाली ये पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं। इन पहाड़ियों पर माफिया या बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर लिया है। खास बात यह है कि अब इन पहाड़ियों को लेकर न तो राजस्व विभाग कुछ बोलने को तैयार है न वन विभाग के अफसर। तो आइए हम बताते हैं कि कुछ खास पहाड़ियां किस हाल में हैं। पहाड़ियों के गायब होने का खामियाजा ग्वालियर शहर के नागरिक भी लगातार भुगत रहे हैं। यहां प्रदूषण बढ़ रहा है और तापमान भी। बारिश का स्तर भी अनियमित हो गया है। महलगांव पहाड़ीः यह पहाड़ी हाउसिंग बोर्ड को रहवासी क्षेत्र विकसित करने के लिए दी गई थी। इसके बाद नीचे क्षेत्र में निजी कॉलोनी बसा दी गई। इस पर पांच सौ से ज्यादा मकान है, जिनमें अब लगभग छः हजार लोग रहते हैं। कैंसर पहाड़ीः कैंसर हॉस्पिटल और शोध संस्थान को यहां चिकित्सीय कार्य और औषधीय पौधों का विकास करने की लीज दी गई थी। पहाड़ी पर हॉस्पिटल सिर्फ एक क्षेत्र में है। बाकी की चालीस फीसदी दूसरी जगह अतिक्रमण में है। मांढरे की माता के आसपास के अवैध आवासीय क्षेत्र को हटाने के लिए कई बार निर्देश हो चुके हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव और अफसरों की लापरवाही ने अतिक्रमण को और बढ़ावा दिया है। यहां सैकड़ों मकान तो अब पक्के बन चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में कच्चे मकान भी है। यहां सड़क, बिजली और पानी सब का इंतजाम है। मोतीझील पहाड़ीः इस पहाड़ी पर भूमाफिया ने एक. पचास लाख से चार लाख तक की कीमत के प्लॉट बेचे हैं। दो हज़ार सोलह में कोर्ट के आदेश पर यहां से दो सौ पचास अतिक्रमण हटाए गए थे। लेकिन बाद में राजस्व और नगर निगम के अधिकारिों की लापरवाही के कारण दोबारा से अतिक्रमण हो गया। इस पहाड़ी पर अब बाकायदा कॉलोनियां विकसित हो चुकी है। रहमत नगर पहाड़ीः पहाड़ी पर भूमाफिया ने लॉटरी के जरिए पचास हजार से दो लाख तक की कीमत में प्लॉट बेचे हैं। दो हज़ार सोलह में कोर्ट के आदेश पर यहां से चार सौ अतिक्रमण हटाए गए थे। लेकिन बाद में राजस्व नगर निगम के अधिकारी द्वारा ध्यान न दिए जाने की जाने से द्वारा अतिक्रमण हो गया। सत्यनारायण की टेकरीः शहर के बीच मौजूद इस पहाड़ी पर तीन से चार हजार अतिक्रमण हैं। कोर्ट इस पहाड़ी पर बसावट को अवैध घोषित कर चुका है। इस पहाड़ी पर मंदिर के बहाने कब्जे की शुरुआत हुई और अब कॉलोनियों से घिरकर पहाड़ी गायब ही हो गई। गोल पहाड़ियाः बीते दो दशक में इस पहाड़ी पर वैध और अवैध बसावट काबिज है। घर बनाने के लिए पूरी पहाड़ी काट दी गई। यहां लगभग पाँच हज़ार मकान हैं। अब इसका सिर्फ नाम ही पहाड़ी है, लेकिन मौके पर पहाड़ का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। ग्वालियर शहर की इन पंद्रह पहाड़ियों पर करीब एक. पाँच लाख से ज्यादा लोग कब्जा कर बैठे हैं। वहीं ये आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। वहीं, फॉरेस्ट विभाग के अफसरों पर पहाड़ियों पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है। क्योंकि इनका स्वामित्व उसी का है। वह खामोश है। यहां तक मीडिया में भी नहीं बोल पा रहे हैं। क्योंकि उन पर पहाड़ियों पर पैसा लेकर कब्जा कराने के आरोप भी लगते रहे हैं। उसके अफसर इसके लिए राजस्व अमले को जिम्मेदार मानते हैं। इस मामले में डीएफओ ब्रिजेन्द्र श्रीवास्तव का कहना हैं कि जब भी अतिक्रमण की खबर मिलती है, हम उसे तत्काल तोड़ते हैं। वह पहाड़ियों के अतिक्रमण पर चुप्पी साध जाते हैं। जबकि राजस्व अधिकारी कहते हैं कि वन अफसर जब अतिक्रमण हटाने के लिए अमला मांगते हैं, हम तत्काल देते हैं। उनके कहने पर दो साल पहले कलेक्ट्रेट के आगे की पहाड़ी पर कब्जा होने से तत्काल रोका था। पहाड़ियों पर अतिक्रमण देखकर ग्वालियर की शहरी क्षेत्र और आसपास मौजूद पहाड़ियों और सरकारी जमीनों पर भू माफिया के लगातार बढ़ती कब्जे को देख हाल में ही तीन स्थानों पर मौजूद पारियों को चिन्हित किया है। जहां से जल्द ही अतिक्रमणकारियों से जमीन को मुक्त कराने का प्लान है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर पहाड़ियों पर ऐसे कब्जाधारी है, जिन्होंने धार्मिक स्थान पर कब्जा करने की शुरुआत की है। ऐसे में प्रशासन के सामने मौजूदा वक्त में मुश्किल थोड़ी ज्यादा है। इन अतिक्रमणों को लेकर अनेक बार कोर्ट तोड़ने का आदेश दे चुका है। लेकिन अपील के बाद ये फिर लंबित हो जाते हैं। राजस्व विभाग के अफसर हो या वन विभाग के वे भी कोर्ट में पक्ष रखने नही जाते लिहाजा, मामले लटककर ही रह जाते हैं। नगर निगम अधिकारी कैमरे के सामने तो कुछ नहीं बोलते लेकिन निजी बातचीत में कहते हैं कि ज्यादातर अतिक्रमण या तो वन विभाग की पहाड़ियों पर है या राजस्व विभाग की। लेकिन न तो तहसीलदार और न ही डीएफओ इसके लिए पहल करते हैं। नगर निगम उन्हें साधन उपलब्ध कराता है लेकिन प्रक्रिया तो उन्हें ही पूरी करनी पड़ेगी। जबकि राजस्व और वन से जुड़े अफसर इसका ठीकरा निगम पर फोड़ते हुए कहते है। सब निगम की मिली भगत से ही होता है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आरपी सिंह कहते हैं कि मध्य प्रदेश में पंद्रह साल बीजेपी की सरकार रही, तो भूमाफिया और बीजेपी नेताओं के गठजोड़ से पहाड़िया बेची गई। इनमें गैर कानूनी ढंग से सुविधाएं दी गई। चूंकि इसमें सरकार के लोग शामिल थे। लिहाजा प्रशासन बेवस होकर देखता रहा और पहाड़िया गायब होती गई। वहीं बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि देखिए कोई माफिया राज, शिवराज मामा के राज में नहीं चला। जीरो टैलेंट से हमारी जो शिवराज मामा का बुलडोजर है। जो सभी माफियाओं पर चलता है, चाहे वह बेटियों पर परेशान करने का मामला हो या या जमीनों पर कब्जा करने का मामला हो। इन सभी मामलों पर चलेगा सोन चिरैया अभ्यारण के तहत जो माफियाओं ने आपके करे हैं, उन पर बुलडोजर रुकेगा नहीं।
|
इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन में गुरुवार को दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला गया। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए ऑरेंज आर्मी को 21 रन से हरा दिया। इस मैच के बाद अब प्लेऑफ की रेस और भी ज्यादा मजेदार हो गई है।
दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में खेले गए इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 207 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में सनराइजर्स हैदराबाद 186 रन ही बना सकी।
दिल्ली कैपिटल्स के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर अपनी पुरानी टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ जबरदस्त खेले। डेविड वार्नर ने इस मैच में केवल 58 गेंदों का सामना करते हुए 92 रन की नाबाद पारी खेली। उन्हें मैन ऑफ द मैच दिया गया।
दिल्ली कैपिटल्स के मध्यक्रम के बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल पिछले कुछ मैचों से अलग ही लय में दिख रहे हैं। एक बार फिर से उन्होंने तूफानी पारी खेल 35 गेंद में 67 रन बनाए। 191 की स्ट्राइक रेट के साथ वो पंच सुपर स्ट्राइकर ऑफ द मैच रहे।
सनराइजर्स हैदराबाद के लिए इस मैच में अनुभवी गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाजी बहुत ही खास रही। भुवनेश्वर कुमार ने पावर प्ले में ही 2 ओवर में 1 रन देकर 1 विकेट हासिल किया। भुवी को इस प्रदर्शन के लिए क्रेड पावर प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
आईपीएल के इस सीजन में डेविड वार्नर का प्रदर्शन बहुत ही खास नजर आ रहा है। वो हर मैच में बहुत ही खतरनाक दिख रहे हैं। इस मैच में भी दिल्ली कैपिटल्स के लिए डेविड वार्नर ने गेम चेंजर का काम किया। वार्नर ड्रीम इलेवन गेम चेंजर ऑफ द मैच चुने गए।
सनराइजर्स हैदराबाद का मैच हो तो सबसे तेज गेंद किसने डाली, इस सवाल का जवाब तो पहले से ही हर किसी को पता चल जाता है। सनराइजर्स के तेज गेंदबाज उमरान मलिक ने एक बार फिर से खतरनाक रफ्तार दिखायी। उन्होंने एक गेंद रिकॉर्ड 157 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से डाली। वो इस मैच के स्विगी इंस्टामार्ट फास्टेट डिलिवरी ऑफ द मैच बने।
डेविड वार्नर इस मैच में काफी बेहतरीन नजर आए। वो एक बार फिर से दिल्ली कैपिटल्स के लिए मोस्ट वेल्यूएबल खिलाड़ी बने। डेविड वार्नर को इस मैच का अपस्टोक्स मोस्ट वेल्यूएबल एसेट ऑफ द मैच का अवार्ड दिया गया।
ऑरेंज आर्मी के विकेटकीपर बल्लेबाज निकोलस पूरन इस मैच में जबरदस्त फॉर्म में दिखे। पूरन ने 34 गेंद में 62 रन बनाए जिसमें 6 छक्के जड़े। उनका एक छक्का 108 मीटर का होने से उन्हें अनएकेडमी लेट्स क्रेक इट सिक्स ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया।
दिल्ली कैपिटल्स के धाकड़ सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने इस मैच में जबरदस्त पारी खेली। उन्होंने अपनी 92 रन की पारी के दौरान 12 चौके जड़े। वो इस मैच के रूपे ऑन गो फोर ऑफ द मैच रहे।
|
इंडियन प्रीमियर लीग के पंद्रहवें सीजन में गुरुवार को दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला गया। इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए ऑरेंज आर्मी को इक्कीस रन से हरा दिया। इस मैच के बाद अब प्लेऑफ की रेस और भी ज्यादा मजेदार हो गई है। दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में खेले गए इस मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दो सौ सात रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में सनराइजर्स हैदराबाद एक सौ छियासी रन ही बना सकी। दिल्ली कैपिटल्स के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर अपनी पुरानी टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ जबरदस्त खेले। डेविड वार्नर ने इस मैच में केवल अट्ठावन गेंदों का सामना करते हुए बानवे रन की नाबाद पारी खेली। उन्हें मैन ऑफ द मैच दिया गया। दिल्ली कैपिटल्स के मध्यक्रम के बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल पिछले कुछ मैचों से अलग ही लय में दिख रहे हैं। एक बार फिर से उन्होंने तूफानी पारी खेल पैंतीस गेंद में सरसठ रन बनाए। एक सौ इक्यानवे की स्ट्राइक रेट के साथ वो पंच सुपर स्ट्राइकर ऑफ द मैच रहे। सनराइजर्स हैदराबाद के लिए इस मैच में अनुभवी गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाजी बहुत ही खास रही। भुवनेश्वर कुमार ने पावर प्ले में ही दो ओवर में एक रन देकर एक विकेट हासिल किया। भुवी को इस प्रदर्शन के लिए क्रेड पावर प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। आईपीएल के इस सीजन में डेविड वार्नर का प्रदर्शन बहुत ही खास नजर आ रहा है। वो हर मैच में बहुत ही खतरनाक दिख रहे हैं। इस मैच में भी दिल्ली कैपिटल्स के लिए डेविड वार्नर ने गेम चेंजर का काम किया। वार्नर ड्रीम इलेवन गेम चेंजर ऑफ द मैच चुने गए। सनराइजर्स हैदराबाद का मैच हो तो सबसे तेज गेंद किसने डाली, इस सवाल का जवाब तो पहले से ही हर किसी को पता चल जाता है। सनराइजर्स के तेज गेंदबाज उमरान मलिक ने एक बार फिर से खतरनाक रफ्तार दिखायी। उन्होंने एक गेंद रिकॉर्ड एक सौ सत्तावन किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से डाली। वो इस मैच के स्विगी इंस्टामार्ट फास्टेट डिलिवरी ऑफ द मैच बने। डेविड वार्नर इस मैच में काफी बेहतरीन नजर आए। वो एक बार फिर से दिल्ली कैपिटल्स के लिए मोस्ट वेल्यूएबल खिलाड़ी बने। डेविड वार्नर को इस मैच का अपस्टोक्स मोस्ट वेल्यूएबल एसेट ऑफ द मैच का अवार्ड दिया गया। ऑरेंज आर्मी के विकेटकीपर बल्लेबाज निकोलस पूरन इस मैच में जबरदस्त फॉर्म में दिखे। पूरन ने चौंतीस गेंद में बासठ रन बनाए जिसमें छः छक्के जड़े। उनका एक छक्का एक सौ आठ मीटर का होने से उन्हें अनएकेडमी लेट्स क्रेक इट सिक्स ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। दिल्ली कैपिटल्स के धाकड़ सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने इस मैच में जबरदस्त पारी खेली। उन्होंने अपनी बानवे रन की पारी के दौरान बारह चौके जड़े। वो इस मैच के रूपे ऑन गो फोर ऑफ द मैच रहे।
|
Don't Miss!
क्रिकेट की दीवानगी बॉलीवुड सितारों में अक्सर देखने को मिलती है। और अब तो क्रिकेट मैच के दौरान स्टेडियम में अपनी फिल्म का प्रमोशन करने का नया तरीका निकाला है। खबर के अनुसार अक्षय कुमार अपनी आने वाली फिल्म वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई के प्रमोशन के लिए भारत पाकिस्तान मैच के दौरान स्टेडियम में नज़र आएंगे। हाल ही में अक्षय कुमार भारत पाकिस्तान के बीच बर्मिंघम में चल रही आईसीसी ट्रॉफी में शामिल होने के लिए बर्मिंघम पहुंच गये हैं और अब वहीं पर वो अपनी फिल्म को प्रमोट करेंगे। अक्षय कुमार वैसे भी पर्सनली क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन हैं।
वैसे याद दिला दें कि शाहरुख खान ने भी इस साल आईपीएल के दौरान अपनी फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस का प्रमोशन किया था। और इस साल शाहरुख खान की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस और अक्षय कुमार की वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई अगेन दोनों फिल्में एक साथ 8 अगस्त को रिलीज होने वाली थीं। लेकिन बाद में शाहरुख की रिक्वेस्ट पर जीतेंद्र ने वंस अपॉन ए टाइम की रिलीज आग बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन शाहरुख की देखा देखी अक्षय ने भी अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए क्रिकेट स्टेडियम को चुन लिया।
क्रिकेट को भारत में वैसे भी भगवान की तरह पूजा जाता है और अब हमारे एक्टर्स भी जनता की क्रिकेट के प्रति दीवानगी का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। अक्षय कुमार ने चूंकि वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई अगेन में भी एक ऐसे डॉन का किरदार निभाया है जो कि क्रिकेट का दीवाना है। इसलिए भी शायद उन्हें लग रहा है कि क्रिकेट स्टेडियम ही उनके लिए प्रमोशन का बेस्ट तरीका होगा।
|
Don't Miss! क्रिकेट की दीवानगी बॉलीवुड सितारों में अक्सर देखने को मिलती है। और अब तो क्रिकेट मैच के दौरान स्टेडियम में अपनी फिल्म का प्रमोशन करने का नया तरीका निकाला है। खबर के अनुसार अक्षय कुमार अपनी आने वाली फिल्म वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई के प्रमोशन के लिए भारत पाकिस्तान मैच के दौरान स्टेडियम में नज़र आएंगे। हाल ही में अक्षय कुमार भारत पाकिस्तान के बीच बर्मिंघम में चल रही आईसीसी ट्रॉफी में शामिल होने के लिए बर्मिंघम पहुंच गये हैं और अब वहीं पर वो अपनी फिल्म को प्रमोट करेंगे। अक्षय कुमार वैसे भी पर्सनली क्रिकेट के बहुत बड़े शौकीन हैं। वैसे याद दिला दें कि शाहरुख खान ने भी इस साल आईपीएल के दौरान अपनी फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस का प्रमोशन किया था। और इस साल शाहरुख खान की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस और अक्षय कुमार की वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई अगेन दोनों फिल्में एक साथ आठ अगस्त को रिलीज होने वाली थीं। लेकिन बाद में शाहरुख की रिक्वेस्ट पर जीतेंद्र ने वंस अपॉन ए टाइम की रिलीज आग बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन शाहरुख की देखा देखी अक्षय ने भी अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए क्रिकेट स्टेडियम को चुन लिया। क्रिकेट को भारत में वैसे भी भगवान की तरह पूजा जाता है और अब हमारे एक्टर्स भी जनता की क्रिकेट के प्रति दीवानगी का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। अक्षय कुमार ने चूंकि वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई अगेन में भी एक ऐसे डॉन का किरदार निभाया है जो कि क्रिकेट का दीवाना है। इसलिए भी शायद उन्हें लग रहा है कि क्रिकेट स्टेडियम ही उनके लिए प्रमोशन का बेस्ट तरीका होगा।
|
लुधियाना. यहां रविवार दोपहर एक होजरी फैक्ट्री में आग लग गई। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद दमकल गाड़ियों की लाइन लग गई। अब तक 25 दमकल गाड़ियां आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। फिलहाल, आग बेकाबू है। आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है।
घटना चीमा चौक स्थित एक बड़ी होजरी फैक्ट्री नेशनल स्पिनिंग मिल की है। रविवार को अक्सर यह फैक्ट्री बंद रहती है। अब लॉकडाउन में करीब दो महीने बाद सरकार की अनुमति के साथ काम कर रही यह फैक्ट्री आज रविवार को भी खुली थी। हालांकि यहां लेबर न के बराबर थी। दोपहर में करीब 1 बजे फैक्ट्री में आग लग गई।
|
लुधियाना. यहां रविवार दोपहर एक होजरी फैक्ट्री में आग लग गई। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद दमकल गाड़ियों की लाइन लग गई। अब तक पच्चीस दमकल गाड़ियां आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। फिलहाल, आग बेकाबू है। आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है। घटना चीमा चौक स्थित एक बड़ी होजरी फैक्ट्री नेशनल स्पिनिंग मिल की है। रविवार को अक्सर यह फैक्ट्री बंद रहती है। अब लॉकडाउन में करीब दो महीने बाद सरकार की अनुमति के साथ काम कर रही यह फैक्ट्री आज रविवार को भी खुली थी। हालांकि यहां लेबर न के बराबर थी। दोपहर में करीब एक बजे फैक्ट्री में आग लग गई।
|
लखनऊ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संगठन को मजबूत बनाने के लिये बड़े परिवर्तन कियें हैं। इस क्रम मे समाजवादी पार्टी के कई प्रकोष्ठों के अध्यक्ष और कुछ महानगरों के नगर अध्यक्ष बदल दिये गयें हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की स्वीकृति से समाजवादी पार्टी से सम्बद्ध चार प्रकोष्ठो का पुनर्गठन कर दिया गया है। साथ ही अलीगढ़ और मेरठ महानगर के नगर अध्यक्ष पद पर नये नगर अध्यक्ष नियुक्त कर दियें हैं।
समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रियाज अहमद पूर्व मंत्री, समाजवादी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दयाराम प्रजापति तथा समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर डाॅ0 मान सिंह यादव नामित किए गए हैं। इनके अतिरिक्त समाजवादी अनुसूचित जाति-प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद पर सवेश अम्बेडकर नामित किए गए हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की स्वीकृति से अलीगढ़ महानगर एवं मेरठ महानगर संगठन का पुनर्गठन कर दिया गया हैं। अलीगढ़ महानगर के जावेद अजीज नगर अध्यक्ष होंगे। मेरठ महानगर के नगर अध्यक्ष पद पर आदिल चौधरी नामित किए गए हैं।
|
लखनऊ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संगठन को मजबूत बनाने के लिये बड़े परिवर्तन कियें हैं। इस क्रम मे समाजवादी पार्टी के कई प्रकोष्ठों के अध्यक्ष और कुछ महानगरों के नगर अध्यक्ष बदल दिये गयें हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की स्वीकृति से समाजवादी पार्टी से सम्बद्ध चार प्रकोष्ठो का पुनर्गठन कर दिया गया है। साथ ही अलीगढ़ और मेरठ महानगर के नगर अध्यक्ष पद पर नये नगर अध्यक्ष नियुक्त कर दियें हैं। समाजवादी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रियाज अहमद पूर्व मंत्री, समाजवादी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दयाराम प्रजापति तथा समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर डाॅशून्य मान सिंह यादव नामित किए गए हैं। इनके अतिरिक्त समाजवादी अनुसूचित जाति-प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद पर सवेश अम्बेडकर नामित किए गए हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की स्वीकृति से अलीगढ़ महानगर एवं मेरठ महानगर संगठन का पुनर्गठन कर दिया गया हैं। अलीगढ़ महानगर के जावेद अजीज नगर अध्यक्ष होंगे। मेरठ महानगर के नगर अध्यक्ष पद पर आदिल चौधरी नामित किए गए हैं।
|
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने बुधवार को देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर यहां विवेकानंद स्टेडियम से 'रन फॉर यूनिटी' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती प्रत्येेक वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनायी जाती है। मुख्यमंत्री के कैबिनेट सहयोगियों, भाजपा विधायकों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध सैकड़ों लोगों के अलावा सुरक्षाकर्मियों ने भी इस दौड़ में भाग लिया।
'रन फॉर यूनिटी' का उद्देश्य देश में विभिन्नता में एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। देब ने लौह पुरुष सरदार पटेल को उनकी प्रतिमा के अनावरण के रूप में सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की।
मोदी ने आज अपने गृह प्रदेश गुजरात के नर्मदा जिले में केवड़यिा स्थित सरदार सरोवर बांध से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर साधु द्वीप पर बनी सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया।
इसके साथ ही यह चीन के स्प्रिंगफील्ड बुद्धा की 153 मीटर ऊंची मूर्ति को आधिकारिक तौर पर पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बन गयी। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में गुजरात के नादियाड में हुआ था।
लौह पुरुष ने अपने राजनीतिक कौशल और विलक्षण सूझबूझ का परिचय देते हुए 562 रियासतों को बिना रक्त बहाये भारत में मिलाकर देश को एकता और अखंडता के सूत्र में पिरोया। सरदार पटेल ने यह काम कठिन चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कर दिखाया।
लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की खर्च से करीब साढ़े तीन साल में बन कर तैयार हुई इस मूर्ति की ऊंचाई न्यूयॉर्क स्थित 'स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी' से भी करीब दोगुनी है। इसे बनाने की घोषणा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने वर्ष 2010 में की थी। इसका काम एल एंड टी कंपनी को अक्टूबर 2014 में सौंपा गया था। काम की शुरूआत अप्रैल 2015 में हुई थी।
|
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने बुधवार को देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की एक सौ तैंतालीसवीं जयंती के अवसर पर यहां विवेकानंद स्टेडियम से 'रन फॉर यूनिटी' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती प्रत्येेक वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनायी जाती है। मुख्यमंत्री के कैबिनेट सहयोगियों, भाजपा विधायकों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध सैकड़ों लोगों के अलावा सुरक्षाकर्मियों ने भी इस दौड़ में भाग लिया। 'रन फॉर यूनिटी' का उद्देश्य देश में विभिन्नता में एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। देब ने लौह पुरुष सरदार पटेल को उनकी प्रतिमा के अनावरण के रूप में सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की। मोदी ने आज अपने गृह प्रदेश गुजरात के नर्मदा जिले में केवड़यिा स्थित सरदार सरोवर बांध से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर साधु द्वीप पर बनी सरदार वल्लभभाई पटेल की एक सौ बयासी मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया। इसके साथ ही यह चीन के स्प्रिंगफील्ड बुद्धा की एक सौ तिरेपन मीटर ऊंची मूर्ति को आधिकारिक तौर पर पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बन गयी। सरदार पटेल का जन्म इकतीस अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में गुजरात के नादियाड में हुआ था। लौह पुरुष ने अपने राजनीतिक कौशल और विलक्षण सूझबूझ का परिचय देते हुए पाँच सौ बासठ रियासतों को बिना रक्त बहाये भारत में मिलाकर देश को एकता और अखंडता के सूत्र में पिरोया। सरदार पटेल ने यह काम कठिन चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कर दिखाया। लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की खर्च से करीब साढ़े तीन साल में बन कर तैयार हुई इस मूर्ति की ऊंचाई न्यूयॉर्क स्थित 'स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी' से भी करीब दोगुनी है। इसे बनाने की घोषणा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने वर्ष दो हज़ार दस में की थी। इसका काम एल एंड टी कंपनी को अक्टूबर दो हज़ार चौदह में सौंपा गया था। काम की शुरूआत अप्रैल दो हज़ार पंद्रह में हुई थी।
|
ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध वॉर्म-अप मैच में एक बार फिर चमके और अपनी बहुत बढ़िया फॉर्म को बरकरार रखते हुए एक और अर्धशतक जड़ा. सूर्यकुमार ने 32 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की मगर जिस अंदाज में वह आउट हुए उसे देखने के बाद गेंदबाज भी दंग था. पारी के अंतिम ओवर की चौथी गेंद पर सूर्यकुमार स्क्वॉयर लेग और फाइनल लेग की दिशा में शॉट खेलना चाहते थे, मगर गेंद के आने से पहले वह बल्ले का मुंह बंद कर बैठे और गेंद उनके बैट का किनारा लेकर गेंदबाज केन रिचर्डसन के हाथों में पहुंच गई. केन भी जानते थे कि यदि गेंद सूर्यकुमार के बैट के बीच लगती तो वह बाउंड्री तक ही जाती.
पारी खत्म होने के बाद केन रिचर्डसन ने सूर्यकुमार यादव के इस विकेट पर अपना रिएक्शन दिया. इस दौरान उन्होंने इस भारतीय खिलाड़ी को मौजूदा समय में दुनिया को सबसे बेहतरीन बल्लेबाज भी बताया.
केन रिचर्डसन ने हिंदुस्तान के विरूद्ध सूर्यकुमार यादव समेत कुल चार विकेट चटकाए. इनमें हार्दिक पांड्या और दिनेश कार्तिक का भी विकेट शामिल है. केन आज की अपनी परफॉर्मेंस से काफी खुश दिखे.
बात मुकाबले की करें तो हिंदुस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 187 रनों का लक्ष्य रखा है. केएल राहुल और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी ने हिंदुस्तान को तूफानी आरंभ देते हुए पहले 6 ओवर में बिना विकेट खोए 70 रन जोड़े थे. राहुल ने इस दौरान 27 गेंदों पर अर्धशतक जड़ा, वहीं रोहित ने भी कुछ खूबसूरत शॉट खेलें. पावरप्ले तो हिंदुस्तान के नाम रहा मगर ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद अगले चार ओवर में जोरदार वापसी की. इस दौरान ग्लेन मैक्सवेल और एस्टन एगर ने क्रमशः केएल राहुल (57) और रोहित शर्मा (15) को आउट कर दो झटके दिए.
10 ओवर के बाद हिंदुस्तान ने दो विकेट के हानि पर 89 रन बनाए. 10 से 15 ओवर के बीच भी हिंदुस्तान ने 49 रन बटोरे मगर इस दौरान उन्होंने विराट कोहली (19) और हार्दिक पांड्या (2) के विकेट भी गंवाए. अंतिम 5 ओवर में हिंदुस्तान 48 रन ही बटोर पाया और निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट के हानि पर 186 रन बनाए. इस दौरान सूर्यकुमार यादव ने 32 गेंदों पर अर्धशतक भी जड़ा.
|
ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध वॉर्म-अप मैच में एक बार फिर चमके और अपनी बहुत बढ़िया फॉर्म को बरकरार रखते हुए एक और अर्धशतक जड़ा. सूर्यकुमार ने बत्तीस गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की मगर जिस अंदाज में वह आउट हुए उसे देखने के बाद गेंदबाज भी दंग था. पारी के अंतिम ओवर की चौथी गेंद पर सूर्यकुमार स्क्वॉयर लेग और फाइनल लेग की दिशा में शॉट खेलना चाहते थे, मगर गेंद के आने से पहले वह बल्ले का मुंह बंद कर बैठे और गेंद उनके बैट का किनारा लेकर गेंदबाज केन रिचर्डसन के हाथों में पहुंच गई. केन भी जानते थे कि यदि गेंद सूर्यकुमार के बैट के बीच लगती तो वह बाउंड्री तक ही जाती. पारी खत्म होने के बाद केन रिचर्डसन ने सूर्यकुमार यादव के इस विकेट पर अपना रिएक्शन दिया. इस दौरान उन्होंने इस भारतीय खिलाड़ी को मौजूदा समय में दुनिया को सबसे बेहतरीन बल्लेबाज भी बताया. केन रिचर्डसन ने हिंदुस्तान के विरूद्ध सूर्यकुमार यादव समेत कुल चार विकेट चटकाए. इनमें हार्दिक पांड्या और दिनेश कार्तिक का भी विकेट शामिल है. केन आज की अपनी परफॉर्मेंस से काफी खुश दिखे. बात मुकाबले की करें तो हिंदुस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए एक सौ सत्तासी रनों का लक्ष्य रखा है. केएल राहुल और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी ने हिंदुस्तान को तूफानी आरंभ देते हुए पहले छः ओवर में बिना विकेट खोए सत्तर रन जोड़े थे. राहुल ने इस दौरान सत्ताईस गेंदों पर अर्धशतक जड़ा, वहीं रोहित ने भी कुछ खूबसूरत शॉट खेलें. पावरप्ले तो हिंदुस्तान के नाम रहा मगर ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद अगले चार ओवर में जोरदार वापसी की. इस दौरान ग्लेन मैक्सवेल और एस्टन एगर ने क्रमशः केएल राहुल और रोहित शर्मा को आउट कर दो झटके दिए. दस ओवर के बाद हिंदुस्तान ने दो विकेट के हानि पर नवासी रन बनाए. दस से पंद्रह ओवर के बीच भी हिंदुस्तान ने उनचास रन बटोरे मगर इस दौरान उन्होंने विराट कोहली और हार्दिक पांड्या के विकेट भी गंवाए. अंतिम पाँच ओवर में हिंदुस्तान अड़तालीस रन ही बटोर पाया और निर्धारित बीस ओवर में सात विकेट के हानि पर एक सौ छियासी रन बनाए. इस दौरान सूर्यकुमार यादव ने बत्तीस गेंदों पर अर्धशतक भी जड़ा.
|
मुंबई, 10 नवंबर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने महामारी से बेहाल क्षेत्रों को तरलता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए मौद्रिक कदमों को फलदायक बताते हुए बुधवार को कहा कि मौद्रिक नीति का पुनर्संतुलन एक जटिल एवं लंबी प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में उठाए गए तरलता संबंधी अधिकांश कदमों की एक तय समापन तिथि है और काफी हद तक पहले राहत पैकेज से पूर्व की स्थिति बहाल हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी की आवक बढ़ने से प्रणाली में काफी तरलता आ गई। दास ने कहा, "इसलिए हम सामान्यीकरण के बजाय नए सिरे से संतुलन साधने में लगे हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
मुंबई, दस नवंबर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने महामारी से बेहाल क्षेत्रों को तरलता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए मौद्रिक कदमों को फलदायक बताते हुए बुधवार को कहा कि मौद्रिक नीति का पुनर्संतुलन एक जटिल एवं लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में उठाए गए तरलता संबंधी अधिकांश कदमों की एक तय समापन तिथि है और काफी हद तक पहले राहत पैकेज से पूर्व की स्थिति बहाल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी की आवक बढ़ने से प्रणाली में काफी तरलता आ गई। दास ने कहा, "इसलिए हम सामान्यीकरण के बजाय नए सिरे से संतुलन साधने में लगे हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
लखनउढ, (भाषा)। उच्चतम न्यायालय द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय को लेकर तल्ख टिप्पणी किये जाने के एक दिन बाद आज उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने फौरी कदम उ"ाकर `घर की सफाई' की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया। इन पूर्व न्यायाधीशों का मानना है कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी ने आत्मावलोकन करने और खुद में सुधार लाने की जरूरत के साथ नियुक्ति तथा तबादला नीति को अधिक जवाबदेहीपूर्ण तथा पारदर्शी बनाने की आवश्यकता की तरफ भी इशारा किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एसोसिएशन के सचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने `भाषा' से कहा,न्यायपालिका में आजकल जो भी हो रहा है वह गलत ढंग से की गई नियुक्तियों का नतीजा है। इसमें फौरन सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहाबार कौंसिल और बेंच को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करना होगा ताकि स्थिति भयावह न हो सके। पूर्व न्यायमूर्ति श्रीवास्तव की राय से सहमति जताते हुए एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एच. एन. तिलहरी ने कहा कि न्यायाधीशें के पद पर नियुक्ति के लिये प्रस्तावित किये जाने वाले लोगों के बारे में समुचित पड़ताल की जानी चाहिये और किसी भी स्तर पर राजनीतिक दबाव का असर नहीं होने देना चाहिये। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा,नियुक्ति का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका में ही निहित होने के साथ-साथ प्रस्तावित नामों पर बहस भी होनी चाहिये और अदालत में उन दावेदारों की कार्यशैली भी परखी जानी चाहिये। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एस. एच. ए. रजा ने जजों के पदों पर नियुक्ति तथा तबादलों एवं कदाचार की शिकायतों की जांच के लिये एक न्यायिक आयोग के ग"न का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि महाभियोग की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसलिये आरोप लगने की स्थिति में जांच और उस पर कार्रवाई का अधिकार भी आयोग में निहित होना चाहिये जो ज्यादा कारगर और प्रभावी होगा। न्यायमूर्ति रजा ने कहा,नियुक्ति से पहले सम्बन्धित अभ्यर्थी को उसके ज्ञान और बौद्धिक कौशल को परखने के लिये बुलाया जाना चाहिये और कोई शिकायत मिलने पर उससे स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिये। न्यायमूर्ति तिलहरी ने वर्ष 1980 में लागू सम्बन्धित नीति में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा,उच्च न्यायालयों में कुल न्यायमूर्तियों की एक तिहाई संख्या दूसरे राज्यों के मूल निवासी न्यायाधीशों की होनी चाहिये, लेकिन इस नियम का समुचित पालन नहीं हो रहा है। यह भी विसंगति को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण से न्यायमूर्तियों का दायरा बढ़ता है और उन्हें व्यापक अनुभव होते हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा इंगित `अंकल जज सिंड्रोम' को रोकने के बारे में स्पष्ट राय जाहिर करते हुए न्यायमूर्ति रजा ने कहा,किसी जज के रिश्तेदार को एक ही अदालत में वकालत करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय सम्बन्धित न्यायमूर्ति से यह लिखित सहमति ली जानी चाहिये कि वैसी स्थिति में उसे किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए।
|
लखनउढ, । उच्चतम न्यायालय द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय को लेकर तल्ख टिप्पणी किये जाने के एक दिन बाद आज उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने फौरी कदम उ"ाकर `घर की सफाई' की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया। इन पूर्व न्यायाधीशों का मानना है कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी ने आत्मावलोकन करने और खुद में सुधार लाने की जरूरत के साथ नियुक्ति तथा तबादला नीति को अधिक जवाबदेहीपूर्ण तथा पारदर्शी बनाने की आवश्यकता की तरफ भी इशारा किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एसोसिएशन के सचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने `भाषा' से कहा,न्यायपालिका में आजकल जो भी हो रहा है वह गलत ढंग से की गई नियुक्तियों का नतीजा है। इसमें फौरन सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहाबार कौंसिल और बेंच को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करना होगा ताकि स्थिति भयावह न हो सके। पूर्व न्यायमूर्ति श्रीवास्तव की राय से सहमति जताते हुए एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एच. एन. तिलहरी ने कहा कि न्यायाधीशें के पद पर नियुक्ति के लिये प्रस्तावित किये जाने वाले लोगों के बारे में समुचित पड़ताल की जानी चाहिये और किसी भी स्तर पर राजनीतिक दबाव का असर नहीं होने देना चाहिये। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा,नियुक्ति का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका में ही निहित होने के साथ-साथ प्रस्तावित नामों पर बहस भी होनी चाहिये और अदालत में उन दावेदारों की कार्यशैली भी परखी जानी चाहिये। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एस. एच. ए. रजा ने जजों के पदों पर नियुक्ति तथा तबादलों एवं कदाचार की शिकायतों की जांच के लिये एक न्यायिक आयोग के ग"न का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि महाभियोग की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसलिये आरोप लगने की स्थिति में जांच और उस पर कार्रवाई का अधिकार भी आयोग में निहित होना चाहिये जो ज्यादा कारगर और प्रभावी होगा। न्यायमूर्ति रजा ने कहा,नियुक्ति से पहले सम्बन्धित अभ्यर्थी को उसके ज्ञान और बौद्धिक कौशल को परखने के लिये बुलाया जाना चाहिये और कोई शिकायत मिलने पर उससे स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिये। न्यायमूर्ति तिलहरी ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ अस्सी में लागू सम्बन्धित नीति में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा,उच्च न्यायालयों में कुल न्यायमूर्तियों की एक तिहाई संख्या दूसरे राज्यों के मूल निवासी न्यायाधीशों की होनी चाहिये, लेकिन इस नियम का समुचित पालन नहीं हो रहा है। यह भी विसंगति को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण से न्यायमूर्तियों का दायरा बढ़ता है और उन्हें व्यापक अनुभव होते हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा इंगित `अंकल जज सिंड्रोम' को रोकने के बारे में स्पष्ट राय जाहिर करते हुए न्यायमूर्ति रजा ने कहा,किसी जज के रिश्तेदार को एक ही अदालत में वकालत करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय सम्बन्धित न्यायमूर्ति से यह लिखित सहमति ली जानी चाहिये कि वैसी स्थिति में उसे किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए।
|
मध्यवर्ती आप देखते हैं कि ग्लूटामेट से 2 लोहे के केंद्र केंद्रित हैं और भाग लिया है और हाइड्रॉक्सिल और हिस्टिडाइन लिगैंड है और हिस्टिडाइन लिगैंड अनसिमिट्रिक लिगैंड ये सुंदर सही हैं। लेकिन हमने पहले और स्पेक्ट्रोस्कोपिक फीचर्स और हर चीज को नहीं देखा है, लेकिन आइए हम उन कुछ केमिस्ट्री पर नजर डालते हैं जो इन नॉन हीम आयरन सेंटर द्वारा की जा सकती हैं। बेशक, ये केंद्र बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन ये सही ज्ञात हैं क्योंकि पोरफाइरिन रिंग नहीं है ।
(स्लाइड समय देखेंः 22:59 )
Selective Hydroxylation of aliphatic C-H Bond
इसलिए, यदि आप आगे देखते हैं, तो ये उसे केंद्र के रूप में जानते हैं, आइए हम कुछ हाइड्रॉक्सिलेशन रसायन विज्ञान पर नज़र डालते हैं जिन्हें हमने कुछ समय पहले देखा था। तो, ये हाइड्रॉक्सिलेशन रसायन सिंथेटिक दृष्टिकोण से और साथ ही, से महत्वपूर्ण है एंजाइम परिप्रेक्ष्य यह बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सिंथेटिक दृष्टिकोण से भी बहुत रोमांचक है।
|
मध्यवर्ती आप देखते हैं कि ग्लूटामेट से दो लोहे के केंद्र केंद्रित हैं और भाग लिया है और हाइड्रॉक्सिल और हिस्टिडाइन लिगैंड है और हिस्टिडाइन लिगैंड अनसिमिट्रिक लिगैंड ये सुंदर सही हैं। लेकिन हमने पहले और स्पेक्ट्रोस्कोपिक फीचर्स और हर चीज को नहीं देखा है, लेकिन आइए हम उन कुछ केमिस्ट्री पर नजर डालते हैं जो इन नॉन हीम आयरन सेंटर द्वारा की जा सकती हैं। बेशक, ये केंद्र बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन ये सही ज्ञात हैं क्योंकि पोरफाइरिन रिंग नहीं है । Selective Hydroxylation of aliphatic C-H Bond इसलिए, यदि आप आगे देखते हैं, तो ये उसे केंद्र के रूप में जानते हैं, आइए हम कुछ हाइड्रॉक्सिलेशन रसायन विज्ञान पर नज़र डालते हैं जिन्हें हमने कुछ समय पहले देखा था। तो, ये हाइड्रॉक्सिलेशन रसायन सिंथेटिक दृष्टिकोण से और साथ ही, से महत्वपूर्ण है एंजाइम परिप्रेक्ष्य यह बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सिंथेटिक दृष्टिकोण से भी बहुत रोमांचक है।
|
अलङ्कार - इस श्लोक में "रसैः कथा यस्य सुधावधीरिणी" पंक्ति में "व्यतिरेक अलङ्कार है। लक्षण - पूर्ववत् । इसके अतिरिक्त राजा नल की प्रतापावलि में सुवर्णदण्ड और कीर्ति-मण्डल में धवल छत्र का आरोप किया जाने से " रूपक" अलङ्कार है । लक्षण - पूर्ववत् । अथः प्रथम श्लोक की ही भाँति इसमें भी व्यतिरेक और रूपक अलङ्कारों के होने से "संसृष्टि " अलङ्कार भी बन गया है।
सुधा (उपपद) + अव + √धीर + 'सुवर्णदण्डैकसितातपत्र' शब्द से " तत्करोति तदाचष्टे" सूत्र से 'णिच् ' प्रत्यय को योग होने और तदनन्तर नामधातु से कर्म में "क्त" प्रत्यय का योग होने पर "सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित' शब्द
बनता है।
समास - सुधावधीरिणी सुधां अवधीरयति तिरस्करोति - इति । (बहुव्रीहि ) । भूजानिः = भूः जायाः यस्य स भूजानि [ भूपतिः - इत्यर्थः] यहाँ बहुब्रीहि समास होने के कारण "जायाया निङ्" से जाया शब्द को निदेश हो जाता है। गुणाद्भुतः गुणैः अद्भुतः इति । प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित-ज्वलत् सुवर्णदण्डश्च एकं सितातपत्रं च इति सुवर्णदण्डैक-सितातपत्रे (द्वन्द्व) ते कृते ज्वलत्प्रतापावलिः कीर्तिमण्डलं च यस्य [तथाभूतः] सः ।
टिप्पणियाँ - रसैः =[ रसो गन्धः रसः स्वादः - इतिं विश्वः] रसों के अथवा स्वाद अर्थात् आस्वादन के द्वारा। राजा नल की कथा में नवों रसों का आस्वादन होता है किन्तु अमृत को मधुर-गुण- सम्पन्न माना गया है। यदि उसे षड् रस (मधुर, अम्ल, तिक्त, कषाय, लवण ये ६ प्रकार के खाद्य रस माने गये ये हैं।) सम्पन्न भी मान लिया जाय तो भी वह रसों की दृष्टि से राजा नल की कथा की अपेक्षा हीन ही रह जाता है। अतः सुधावधीरिणी [ राजा नल की कथा] अमृता को भी तिरस्कृत कर देने वाली कही गयी है। भूजानिः = पृथ्वी ही जिसकी पत्नी है ऐसा राजा नल। अर्थात् जो पृथ्वीपति अथवा पृथ्वीपालक
|
अलङ्कार - इस श्लोक में "रसैः कथा यस्य सुधावधीरिणी" पंक्ति में "व्यतिरेक अलङ्कार है। लक्षण - पूर्ववत् । इसके अतिरिक्त राजा नल की प्रतापावलि में सुवर्णदण्ड और कीर्ति-मण्डल में धवल छत्र का आरोप किया जाने से " रूपक" अलङ्कार है । लक्षण - पूर्ववत् । अथः प्रथम श्लोक की ही भाँति इसमें भी व्यतिरेक और रूपक अलङ्कारों के होने से "संसृष्टि " अलङ्कार भी बन गया है। सुधा + अव + √धीर + 'सुवर्णदण्डैकसितातपत्र' शब्द से " तत्करोति तदाचष्टे" सूत्र से 'णिच् ' प्रत्यय को योग होने और तदनन्तर नामधातु से कर्म में "क्त" प्रत्यय का योग होने पर "सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित' शब्द बनता है। समास - सुधावधीरिणी सुधां अवधीरयति तिरस्करोति - इति । । भूजानिः = भूः जायाः यस्य स भूजानि [ भूपतिः - इत्यर्थः] यहाँ बहुब्रीहि समास होने के कारण "जायाया निङ्" से जाया शब्द को निदेश हो जाता है। गुणाद्भुतः गुणैः अद्भुतः इति । प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित-ज्वलत् सुवर्णदण्डश्च एकं सितातपत्रं च इति सुवर्णदण्डैक-सितातपत्रे ते कृते ज्वलत्प्रतापावलिः कीर्तिमण्डलं च यस्य [तथाभूतः] सः । टिप्पणियाँ - रसैः =[ रसो गन्धः रसः स्वादः - इतिं विश्वः] रसों के अथवा स्वाद अर्थात् आस्वादन के द्वारा। राजा नल की कथा में नवों रसों का आस्वादन होता है किन्तु अमृत को मधुर-गुण- सम्पन्न माना गया है। यदि उसे षड् रस सम्पन्न भी मान लिया जाय तो भी वह रसों की दृष्टि से राजा नल की कथा की अपेक्षा हीन ही रह जाता है। अतः सुधावधीरिणी [ राजा नल की कथा] अमृता को भी तिरस्कृत कर देने वाली कही गयी है। भूजानिः = पृथ्वी ही जिसकी पत्नी है ऐसा राजा नल। अर्थात् जो पृथ्वीपति अथवा पृथ्वीपालक
|
बुलंदशहर जिले में नया मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। 27 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शिलान्यास करेंगे। इस दौरान सीएम जनसभा को भी संबोधित करेंगे। प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज होगा, ऐसा मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार की योजनाओं की सूची में सबसे ऊपर रखा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 27 दिसंबर को जिले के डिबाई दौलतपुर में जनसभा को संबोधित करेंगे। बीजेपी की जन विश्वास यात्रा भी 26 दिसंबर को बुलंदशहर जिले में प्रवेश करेगी और सीएम की जनसभा में शामिल होगी। जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री योगी की जनसभा की तैयारियों में जुट गया है। जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह और बीजेपी जिलाध्यक्ष अनिल सिसोदिया ने जनसभा स्थल पर जाकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
|
बुलंदशहर जिले में नया मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। सत्ताईस दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका शिलान्यास करेंगे। इस दौरान सीएम जनसभा को भी संबोधित करेंगे। प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज होगा, ऐसा मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार की योजनाओं की सूची में सबसे ऊपर रखा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सत्ताईस दिसंबर को जिले के डिबाई दौलतपुर में जनसभा को संबोधित करेंगे। बीजेपी की जन विश्वास यात्रा भी छब्बीस दिसंबर को बुलंदशहर जिले में प्रवेश करेगी और सीएम की जनसभा में शामिल होगी। जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री योगी की जनसभा की तैयारियों में जुट गया है। जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह और बीजेपी जिलाध्यक्ष अनिल सिसोदिया ने जनसभा स्थल पर जाकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
|
रवि सिंह,
गोरखपुरः माधोपुर पुरानी काली मंदिर की रहने वाली मंजू देवी ने तिवारीपुर थाना में 04.07.2020 को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राम गोपाल साहनी पुत्र शिव शंकर साहनी निवासी माधोपुर पुरानी काली मंदिर गैस गोदाम गली थाना तिवारीपुर ने मेरी लड़की को बहला फुसलाकर कर भगा ले गया है, मेरी लड़की नाबालिग है.
इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने सब इंस्पेक्टर नागेंद्र मणि और कॉन्स्टेबल जय प्रकाश वर्मा को लगाया और सर्विलांस की मदद से दोनो का लोकेशन रोडवेज बस अड्डे के पास मिला दोनो को थाने पर लाया गया और पूछताछ की गई तो लड़की ने बताया कि हम अपनी मर्ज़ी से घर से गए थे. हम दोनों 03.07.2020 को शाम 5 बजे घर से भागकर वाराणसी चले गए और वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में हम दिनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी कर लिया हम दोनों बालिग है दोनो प्रेमी युगल ने अपने बालिग होने का प्रमाण पत्र भी थाने पर प्रस्तुत किया.
थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने दोनों परिवारों को सूचना दिया लड़का और लड़की पक्ष को समझबूझ कर राजी करवाया लड़की की मां भी राजी हो गुई और लड़के के पिता ने भी उस लड़की को अपनी बहू कबूल कर लिया. दोनो परिवार हसी खुशी राजी होकर अपनी बहू को घर ले गए इस पूरे प्रकरण में थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने अहम भूमिका निभाई.
|
रवि सिंह, गोरखपुरः माधोपुर पुरानी काली मंदिर की रहने वाली मंजू देवी ने तिवारीपुर थाना में चार.सात.दो हज़ार बीस को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राम गोपाल साहनी पुत्र शिव शंकर साहनी निवासी माधोपुर पुरानी काली मंदिर गैस गोदाम गली थाना तिवारीपुर ने मेरी लड़की को बहला फुसलाकर कर भगा ले गया है, मेरी लड़की नाबालिग है. इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने सब इंस्पेक्टर नागेंद्र मणि और कॉन्स्टेबल जय प्रकाश वर्मा को लगाया और सर्विलांस की मदद से दोनो का लोकेशन रोडवेज बस अड्डे के पास मिला दोनो को थाने पर लाया गया और पूछताछ की गई तो लड़की ने बताया कि हम अपनी मर्ज़ी से घर से गए थे. हम दोनों तीन.सात.दो हज़ार बीस को शाम पाँच बजे घर से भागकर वाराणसी चले गए और वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में हम दिनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी कर लिया हम दोनों बालिग है दोनो प्रेमी युगल ने अपने बालिग होने का प्रमाण पत्र भी थाने पर प्रस्तुत किया. थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने दोनों परिवारों को सूचना दिया लड़का और लड़की पक्ष को समझबूझ कर राजी करवाया लड़की की मां भी राजी हो गुई और लड़के के पिता ने भी उस लड़की को अपनी बहू कबूल कर लिया. दोनो परिवार हसी खुशी राजी होकर अपनी बहू को घर ले गए इस पूरे प्रकरण में थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह ने अहम भूमिका निभाई.
|
पेट्रोल के दाम में मंगलवार को फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम में 4-5 पैसे की वृद्धि हुई है। हालांकि, डीजल के दाम में स्थिरता बनी हुई है। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर तेजी लौटी है।
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः 82. 08 रूपए हैं। कोलकाता में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः 83. 57 रूपए और 77. 06 रूपए हैं। मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः 88. 73 रूपए और 80. 11 रूपए है। चैन्नई में पेट्रोल और डीजल के दाम 85. 04 रूपए और 78. 86 रूपए हैं।
वहीं यदि आपको अपने शहर के दाम जाननें हैं तो इसके लिए आपको मैसेज करना होगा। आप मैसेज के जरिए अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जान सकते हैं। इसके लिए आपको आरएसपी और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 पर मैसेज करना होगा, जिसके जरिए आप अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जान सकते हैं। एक बात ध्यान रहे कि हर शहर का कोड अलग-अलग होता है, लिहाजा आप आईओसीएल की वेबसाइट पर जाकर अपने शहर का कोड जान सकते हैं।
|
पेट्रोल के दाम में मंगलवार को फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम में चार-पाँच पैसे की वृद्धि हुई है। हालांकि, डीजल के दाम में स्थिरता बनी हुई है। उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर तेजी लौटी है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः बयासी. आठ रूपए हैं। कोलकाता में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः तिरासी. सत्तावन रूपए और सतहत्तर. छः रूपए हैं। मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमशः अठासी. तिहत्तर रूपए और अस्सी. ग्यारह रूपए है। चैन्नई में पेट्रोल और डीजल के दाम पचासी. चार रूपए और अठहत्तर. छियासी रूपए हैं। वहीं यदि आपको अपने शहर के दाम जाननें हैं तो इसके लिए आपको मैसेज करना होगा। आप मैसेज के जरिए अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जान सकते हैं। इसके लिए आपको आरएसपी और अपने शहर का कोड लिखकर नौ दो दो चार नौ नौ दो दो चार नौ पर मैसेज करना होगा, जिसके जरिए आप अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जान सकते हैं। एक बात ध्यान रहे कि हर शहर का कोड अलग-अलग होता है, लिहाजा आप आईओसीएल की वेबसाइट पर जाकर अपने शहर का कोड जान सकते हैं।
|
श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के पंपोर कस्बे में सुरक्षाकर्मियों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ 48 घंटे के बाद सोमवार को खत्म हो गई। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि जम्मू एवं कश्मीर उद्यमिता विकास संस्थान (जेकेईडीआई) में छिपे तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। मुठभेड़ में 5 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। एक नागरिक की भी मौत हुई है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सुरक्षाकर्मियों ने पंपोर के जेकेईडीआई परिसर में तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। इनके शव मिल गए हैं। " अधिकारी ने कहा, "गोलीबारी अब रुक गई है। अब इस बहुमंजिला इमारत के एक-एक कमरे की तलाशी ली जा रही है। "
गोलीबारी शनिवार शाम शुरू हुई थी, जब हथियारों से लैस आतंकवादियों ने श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेम्पोरा (पंपोर) में सीआरपीएफ की बस पर हमला कर दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ कांस्टेबल भोला प्रसाद और चालक कांस्टेबल आर. के. राणा की मौत हो गई। बस पर हमले के बाद आतंकवादी जेकेईडीआई परिसर में घुस गए।
सुरक्षाकर्मियों ने परिसर को घेर लिया। लेकिन, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तभी शुरू की गई जब सभी 120 कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं को परिसर से सुरक्षित निकाल लिया गया। सेना ने अभियान की जिम्मेदारी संभाली। माना जा रहा है कि आतंकियों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था।
हरियाणा के जींद से ताल्लुक रखने वाले 10 पैरा रेजिमेंट के कैप्टन पवन कुमार और जम्मू क्षेत्र के ऊधमपुर शहर से संबंध रखने वाले 9 पैरा रेजिमेंट के कैप्टन तुषार महाजन ने अभियान की अगुआई की। लेकिन, बहुमंजिला इमारत में दाखिल होने के दौरान दोनों अफसर आतंकियों की गोली का निशाना बनकर शहीद हो गए।
9 पैरा रेजिमेंट के लांस नायक ओम प्रकाश कार्रवाई के दौरान घायल हो गए। उन्होंने रविवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस मुठभेड़ में जान गंवाने वालों में गुंदिपोरा पुलवामा के निवासी अब्दुल गनी मीर भी शामिल हैं। वह इस संस्थान में माली थे। मुठभेड़ की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट समेत 15 सुरक्षाकर्मी मुठभेड़ में घायल हुए हैं।
पंपोर में सोमवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भिड़ंत में 15 प्रदर्शनकारी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों को तोड़ते हुए मुठभेड़ स्थल की तरफ जाने की कोशिश की थी।
|
श्रीनगरः जम्मू एवं कश्मीर के पंपोर कस्बे में सुरक्षाकर्मियों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ अड़तालीस घंटाटे के बाद सोमवार को खत्म हो गई। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि जम्मू एवं कश्मीर उद्यमिता विकास संस्थान में छिपे तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। मुठभेड़ में पाँच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। एक नागरिक की भी मौत हुई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सुरक्षाकर्मियों ने पंपोर के जेकेईडीआई परिसर में तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। इनके शव मिल गए हैं। " अधिकारी ने कहा, "गोलीबारी अब रुक गई है। अब इस बहुमंजिला इमारत के एक-एक कमरे की तलाशी ली जा रही है। " गोलीबारी शनिवार शाम शुरू हुई थी, जब हथियारों से लैस आतंकवादियों ने श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेम्पोरा में सीआरपीएफ की बस पर हमला कर दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ कांस्टेबल भोला प्रसाद और चालक कांस्टेबल आर. के. राणा की मौत हो गई। बस पर हमले के बाद आतंकवादी जेकेईडीआई परिसर में घुस गए। सुरक्षाकर्मियों ने परिसर को घेर लिया। लेकिन, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तभी शुरू की गई जब सभी एक सौ बीस कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं को परिसर से सुरक्षित निकाल लिया गया। सेना ने अभियान की जिम्मेदारी संभाली। माना जा रहा है कि आतंकियों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था। हरियाणा के जींद से ताल्लुक रखने वाले दस पैरा रेजिमेंट के कैप्टन पवन कुमार और जम्मू क्षेत्र के ऊधमपुर शहर से संबंध रखने वाले नौ पैरा रेजिमेंट के कैप्टन तुषार महाजन ने अभियान की अगुआई की। लेकिन, बहुमंजिला इमारत में दाखिल होने के दौरान दोनों अफसर आतंकियों की गोली का निशाना बनकर शहीद हो गए। नौ पैरा रेजिमेंट के लांस नायक ओम प्रकाश कार्रवाई के दौरान घायल हो गए। उन्होंने रविवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस मुठभेड़ में जान गंवाने वालों में गुंदिपोरा पुलवामा के निवासी अब्दुल गनी मीर भी शामिल हैं। वह इस संस्थान में माली थे। मुठभेड़ की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट समेत पंद्रह सुरक्षाकर्मी मुठभेड़ में घायल हुए हैं। पंपोर में सोमवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भिड़ंत में पंद्रह प्रदर्शनकारी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों को तोड़ते हुए मुठभेड़ स्थल की तरफ जाने की कोशिश की थी।
|
नगर विकास एवं आवास विभाग ने जूनियर इंजीनियर के 141 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन मांगे गए है। उम्मीदवारा अपनी इच्छा से इनके लिए अप्लाई कर सकते है।
डिप्लोमा / डिग्री (सिविल / इलेक्ट्रिकल / मैकेनिकल इंजीनियरिंग)
उम्मीदवार का चयन शॉर्टलिस्टिंग और रिटेन टेस्ट में प्रदर्शन के अनुसार किया जाएगा।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ऑफीशियल वेबसाइट udhd. jharkhand. gov. in के जरिए 5 नवंबर 2018 तक अप्लाई कर सकते है।
|
नगर विकास एवं आवास विभाग ने जूनियर इंजीनियर के एक सौ इकतालीस पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन मांगे गए है। उम्मीदवारा अपनी इच्छा से इनके लिए अप्लाई कर सकते है। डिप्लोमा / डिग्री उम्मीदवार का चयन शॉर्टलिस्टिंग और रिटेन टेस्ट में प्रदर्शन के अनुसार किया जाएगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ऑफीशियल वेबसाइट udhd. jharkhand. gov. in के जरिए पाँच नवंबर दो हज़ार अट्ठारह तक अप्लाई कर सकते है।
|
So he married Gomer daughter of Diblaim, and she conceived and bore him a son.
सो उस ने जाकर दिबलैम की बेटी गोमेर को अपनी पत्नी कर लिया, और वह उस से गर्भवती हुई और उसके पुत्रा उत्पन्न हुआ।
அவன் போய், திப்லாயிமின் குமாரத்தியாகிய கோமேரைச் சேர்த்துக்கொண்டான்; அவள் கர்ப்பந்தரித்து, அவனுக்கு ஒரு குமாரனைப் பெற்றாள்.
അങ്ങനെ അവന് ചെന്നു ദിബ്ളയീമിന്റെ മകളായ ഗോമരിനെ പരിഗ്രഹിച്ചു; അവള് ഗര്ഭം ധരിച്ചു അവന്നു ഒരു മകനെ പ്രസവിച്ചു.
ಆಗ ಅವನು ಹೋಗಿ ದಿಬ್ಲಯಿ ಮನ ಮಗಳಾದ ಗೋಮೆರಳನ್ನು ಮದುವೆಯಾದನು; ಅವಳು ಗರ್ಭಿಣಿಯಾಗಿ ಅವನಿಗೆ ಮಗನನ್ನು ಹೆತ್ತಳು.
So he went and took Gomer the daughter of Diblaim, who conceived and bore him a son.
|
So he married Gomer daughter of Diblaim, and she conceived and bore him a son. सो उस ने जाकर दिबलैम की बेटी गोमेर को अपनी पत्नी कर लिया, और वह उस से गर्भवती हुई और उसके पुत्रा उत्पन्न हुआ। அவன் போய், திப்லாயிமின் குமாரத்தியாகிய கோமேரைச் சேர்த்துக்கொண்டான்; அவள் கர்ப்பந்தரித்து, அவனுக்கு ஒரு குமாரனைப் பெற்றாள். അങ്ങനെ അവന് ചെന്നു ദിബ്ളയീമിന്റെ മകളായ ഗോമരിനെ പരിഗ്രഹിച്ചു; അവള് ഗര്ഭം ധരിച്ചു അവന്നു ഒരു മകനെ പ്രസവിച്ചു. ಆಗ ಅವನು ಹೋಗಿ ದಿಬ್ಲಯಿ ಮನ ಮಗಳಾದ ಗೋಮೆರಳನ್ನು ಮದುವೆಯಾದನು; ಅವಳು ಗರ್ಭಿಣಿಯಾಗಿ ಅವನಿಗೆ ಮಗನನ್ನು ಹೆತ್ತಳು. So he went and took Gomer the daughter of Diblaim, who conceived and bore him a son.
|
साल्टसेडर एक आक्रामक गैर-देशी पेड़ के लिए कई आम नामों में से एक है जो पश्चिमी संयुक्त राज्य के इंटरमाउंटन क्षेत्र के माध्यम से कोलोराडो नदी घाटी, ग्रेट बेसिन, कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास के माध्यम से तेजी से फैल रहा है। अन्य आम नामों में तामारिस्क और नमक देवदार शामिल हैं।
तामचीनी दक्षिणपश्चिम - गीले मैदानों में रेगिस्तान के सबसे दुर्लभ निवासों को कम कर रहा है। नमक देवदार स्प्रिंग्स, डिच, और स्ट्रीमबैंक पर हमला करता है।
पेड़ ने बहुमूल्य पश्चिमी रिपेरियन संसाधन के 1 मिलियन एकड़ से अधिक का अधिग्रहण किया है।
अच्छी परिस्थितियों में, एक ही मौसम में अवसरवादी तामचीनी 9 से 12 फीट बढ़ सकती है। सूखे की स्थिति के तहत, नमकीन व्यक्ति अपनी पत्तियों को छोड़कर जीवित रहता है। कठोर रेगिस्तान स्थितियों के तहत जीवित रहने की यह क्षमता पेड़ को अधिक वांछनीय देशी प्रजातियों पर बढ़त दे रही है और कपासवुड आबादी में तेज गिरावट आई है।
परिपक्व पौधे 70 दिनों तक बाढ़ से बच सकते हैं और बीज की निरंतर उपलब्धता के कारण जल्दी से नम क्षेत्रों को उपनिवेशित कर सकते हैं। पौधों की लंबी अवधि के दौरान उपयुक्त अंकुरित स्थितियों का शोषण करने की क्षमता नमकीन व्यक्ति को देशी रिपेरियन प्रजातियों पर काफी लाभ देती है।
परिपक्व तामारिस्क अग्निशामक के साथ आग, बाढ़, या उपचार के बाद वनस्पति के रूप में भी पुनर्जीवित हो सकता है और मिट्टी की स्थिति में व्यापक भिन्नता के अनुकूल हो सकता है।
साल्टसेडर 5,400 फीट तक ऊंचाई पर बढ़ेगा और नमकीन मिट्टी पसंद करेगा। वे आम तौर पर मध्यवर्ती नमी, उच्च पानी की मेज, और न्यूनतम क्षरण के साथ साइटों पर कब्जा करते हैं।
नमकीन के गंभीर प्रत्यक्ष प्रभाव असंख्य हैं। यह आक्रामक पेड़ अब मूल पौधों, विशेष रूप से कपासवुड को ले जा रहा है और उन क्षेत्रों में आक्रामक विकास लाभ का उपयोग कर रहा है जहां प्राकृतिक देशी समुदायों को आग, बाढ़ या कुछ अन्य परेशानी से क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।
देशी पौधे तामचीनी की तुलना में गीले मैदानों पर नमी को बनाए रखने में अधिक मूल्यवान साबित हुए हैं। इन देशी प्रजातियों के नुकसान को तामचीनी के नुकसान से अंततः पानी की शुद्ध हानि होती है।
तामारिस्क में एक बेहद तेजी से वाष्पीकरण दर है। एक डर है कि नमी का यह तेजी से नुकसान संभवतः भूजल की गंभीर कमी का कारण बन सकता है। तामारिस्क-इन्फेस्टेड धाराओं में तलछटों में वृद्धि हुई है जो अवरोध का कारण बनती है। ये तलछट जमा नमकीन पदार्थ की वृद्धि के घने पंखों को प्रोत्साहित करती है जो तब भारी बारिश की अवधि के दौरान बाढ़ को बढ़ावा देती है।
तामारिस्क - यांत्रिक, जैविक, प्रतिस्पर्धा, और रासायनिक को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य रूप से 4 तरीके हैं। किसी भी प्रबंधन कार्यक्रम की पूरी सफलता सभी विधियों के एकीकरण पर निर्भर करती है।
हाथ से खींचने, खोदने, खरपतवार खाने वालों, अक्षों, मैकेट्स, बुलडोजर और आग का उपयोग, मैकेनिकल नियंत्रण, नमकीन पदार्थ को हटाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका नहीं हो सकता है। हाथ श्रम हमेशा उपलब्ध नहीं होता है और जब तक यह स्वयंसेवी नहीं होता है तब तक महंगा होता है। जब भारी उपकरण का उपयोग किया जाता है, तो मिट्टी अक्सर उन परिणामों के साथ परेशान होती है जो पौधे होने से भी बदतर हो सकती हैं।
कई परिस्थितियों में, हर्बीसाइड्स के साथ नियंत्रण तामारिस्क को हटाने के लिए नियंत्रण का सबसे प्रभावी और प्रभावी तरीका है।
रासायनिक विधि देशी प्रजातियों के साथ मूल निवासी या पुनः वनस्पति की पुनर्जन्म और / या पुनः आबादी की अनुमति देती है। हर्बीसाइड्स का उपयोग विशिष्ट, चुनिंदा और तेज़ हो सकता है।
नमकीन पदार्थों के लिए कीड़ों की संभावित जैविक नियंत्रण एजेंट के रूप में जांच की जा रही है। इनमें से दो, एक मेलीबग (त्रबुतिना मणिपारा) और एक पत्ता बीटल (डायओरहाडा एलोन्गाटा), रिलीज के लिए प्रारंभिक अनुमोदन है। इस संभावना पर कुछ चिंता है कि, तामारिस्क के कारण होने वाले पर्यावरणीय क्षति के कारण, मूल पौधों की प्रजातियां इसे बदलने में सक्षम नहीं हो सकती हैं यदि जैविक नियंत्रण एजेंट इसे खत्म करने में सफल होते हैं।
|
साल्टसेडर एक आक्रामक गैर-देशी पेड़ के लिए कई आम नामों में से एक है जो पश्चिमी संयुक्त राज्य के इंटरमाउंटन क्षेत्र के माध्यम से कोलोराडो नदी घाटी, ग्रेट बेसिन, कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास के माध्यम से तेजी से फैल रहा है। अन्य आम नामों में तामारिस्क और नमक देवदार शामिल हैं। तामचीनी दक्षिणपश्चिम - गीले मैदानों में रेगिस्तान के सबसे दुर्लभ निवासों को कम कर रहा है। नमक देवदार स्प्रिंग्स, डिच, और स्ट्रीमबैंक पर हमला करता है। पेड़ ने बहुमूल्य पश्चिमी रिपेरियन संसाधन के एक मिलियन एकड़ से अधिक का अधिग्रहण किया है। अच्छी परिस्थितियों में, एक ही मौसम में अवसरवादी तामचीनी नौ से बारह फीट बढ़ सकती है। सूखे की स्थिति के तहत, नमकीन व्यक्ति अपनी पत्तियों को छोड़कर जीवित रहता है। कठोर रेगिस्तान स्थितियों के तहत जीवित रहने की यह क्षमता पेड़ को अधिक वांछनीय देशी प्रजातियों पर बढ़त दे रही है और कपासवुड आबादी में तेज गिरावट आई है। परिपक्व पौधे सत्तर दिनों तक बाढ़ से बच सकते हैं और बीज की निरंतर उपलब्धता के कारण जल्दी से नम क्षेत्रों को उपनिवेशित कर सकते हैं। पौधों की लंबी अवधि के दौरान उपयुक्त अंकुरित स्थितियों का शोषण करने की क्षमता नमकीन व्यक्ति को देशी रिपेरियन प्रजातियों पर काफी लाभ देती है। परिपक्व तामारिस्क अग्निशामक के साथ आग, बाढ़, या उपचार के बाद वनस्पति के रूप में भी पुनर्जीवित हो सकता है और मिट्टी की स्थिति में व्यापक भिन्नता के अनुकूल हो सकता है। साल्टसेडर पाँच,चार सौ फीट तक ऊंचाई पर बढ़ेगा और नमकीन मिट्टी पसंद करेगा। वे आम तौर पर मध्यवर्ती नमी, उच्च पानी की मेज, और न्यूनतम क्षरण के साथ साइटों पर कब्जा करते हैं। नमकीन के गंभीर प्रत्यक्ष प्रभाव असंख्य हैं। यह आक्रामक पेड़ अब मूल पौधों, विशेष रूप से कपासवुड को ले जा रहा है और उन क्षेत्रों में आक्रामक विकास लाभ का उपयोग कर रहा है जहां प्राकृतिक देशी समुदायों को आग, बाढ़ या कुछ अन्य परेशानी से क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। देशी पौधे तामचीनी की तुलना में गीले मैदानों पर नमी को बनाए रखने में अधिक मूल्यवान साबित हुए हैं। इन देशी प्रजातियों के नुकसान को तामचीनी के नुकसान से अंततः पानी की शुद्ध हानि होती है। तामारिस्क में एक बेहद तेजी से वाष्पीकरण दर है। एक डर है कि नमी का यह तेजी से नुकसान संभवतः भूजल की गंभीर कमी का कारण बन सकता है। तामारिस्क-इन्फेस्टेड धाराओं में तलछटों में वृद्धि हुई है जो अवरोध का कारण बनती है। ये तलछट जमा नमकीन पदार्थ की वृद्धि के घने पंखों को प्रोत्साहित करती है जो तब भारी बारिश की अवधि के दौरान बाढ़ को बढ़ावा देती है। तामारिस्क - यांत्रिक, जैविक, प्रतिस्पर्धा, और रासायनिक को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य रूप से चार तरीके हैं। किसी भी प्रबंधन कार्यक्रम की पूरी सफलता सभी विधियों के एकीकरण पर निर्भर करती है। हाथ से खींचने, खोदने, खरपतवार खाने वालों, अक्षों, मैकेट्स, बुलडोजर और आग का उपयोग, मैकेनिकल नियंत्रण, नमकीन पदार्थ को हटाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका नहीं हो सकता है। हाथ श्रम हमेशा उपलब्ध नहीं होता है और जब तक यह स्वयंसेवी नहीं होता है तब तक महंगा होता है। जब भारी उपकरण का उपयोग किया जाता है, तो मिट्टी अक्सर उन परिणामों के साथ परेशान होती है जो पौधे होने से भी बदतर हो सकती हैं। कई परिस्थितियों में, हर्बीसाइड्स के साथ नियंत्रण तामारिस्क को हटाने के लिए नियंत्रण का सबसे प्रभावी और प्रभावी तरीका है। रासायनिक विधि देशी प्रजातियों के साथ मूल निवासी या पुनः वनस्पति की पुनर्जन्म और / या पुनः आबादी की अनुमति देती है। हर्बीसाइड्स का उपयोग विशिष्ट, चुनिंदा और तेज़ हो सकता है। नमकीन पदार्थों के लिए कीड़ों की संभावित जैविक नियंत्रण एजेंट के रूप में जांच की जा रही है। इनमें से दो, एक मेलीबग और एक पत्ता बीटल , रिलीज के लिए प्रारंभिक अनुमोदन है। इस संभावना पर कुछ चिंता है कि, तामारिस्क के कारण होने वाले पर्यावरणीय क्षति के कारण, मूल पौधों की प्रजातियां इसे बदलने में सक्षम नहीं हो सकती हैं यदि जैविक नियंत्रण एजेंट इसे खत्म करने में सफल होते हैं।
|
पुरी का जगन्नाथ मंदिर रविवार को आम लोगो के लिए तीन घंटों से भी अधिक समय के लिए बंद रहा.
मंदिर बंद रहने का कारण यह था कि पुरी की रानी लीलावती पट्टामहादेई दर्शन के लिए आने वाली थीं.
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, पुरी की रानी अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ़ एक बार दर्शन के लिए जगन्नाथ मंदिर में आती हैं और एकांत में दर्शन करती हैं.
उल्लेखनीय है कि उड़ीसा राज्य के पूर्वी समुद्र-तट पर स्थित बारहवीं शताब्दी में बना पुरी का जगन्नाथ मंदिर, भारत में हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ-स्थानों में से एक है.
हालाँकि रानी जगन्नाथ मंदिर के 200 मीटर दायरें में ही अलग से बने एक महल में रहती हैं. लेकिन उन्होंने अब तक मंदिर में जाकर दर्शन नहीं किए थे.
पुरी की रानी इससे पहले जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए वर्ष 1966 में आईं थी. मौजूदा महारानी लीलावती पट्टामहादेई, उन्हीं की पुत्रवधू हैं.
भारत के कई पूर्व शाही परिवारों के सदस्यों ने महारानी लीलावती के साथ जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए.
इसके लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त भी किए गए थे.
|
पुरी का जगन्नाथ मंदिर रविवार को आम लोगो के लिए तीन घंटों से भी अधिक समय के लिए बंद रहा. मंदिर बंद रहने का कारण यह था कि पुरी की रानी लीलावती पट्टामहादेई दर्शन के लिए आने वाली थीं. सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, पुरी की रानी अपने पूरे जीवनकाल में सिर्फ़ एक बार दर्शन के लिए जगन्नाथ मंदिर में आती हैं और एकांत में दर्शन करती हैं. उल्लेखनीय है कि उड़ीसा राज्य के पूर्वी समुद्र-तट पर स्थित बारहवीं शताब्दी में बना पुरी का जगन्नाथ मंदिर, भारत में हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ-स्थानों में से एक है. हालाँकि रानी जगन्नाथ मंदिर के दो सौ मीटर दायरें में ही अलग से बने एक महल में रहती हैं. लेकिन उन्होंने अब तक मंदिर में जाकर दर्शन नहीं किए थे. पुरी की रानी इससे पहले जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए वर्ष एक हज़ार नौ सौ छयासठ में आईं थी. मौजूदा महारानी लीलावती पट्टामहादेई, उन्हीं की पुत्रवधू हैं. भारत के कई पूर्व शाही परिवारों के सदस्यों ने महारानी लीलावती के साथ जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए. इसके लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त भी किए गए थे.
|
India Post Recruitment 2022: भारतीय डाक ने ग्रामीण डाक सेवक सहित अन्य 38926 पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीद्वारों से आवेदन मांगे हैं। सभी उम्मीद्वार India Post GDS Recruitment 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in पर 5 जून 2022 तक आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 2 मई से शुरू की जा चुकी है।
नोटिफिकेशन के अनुसार, इस प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय डाक में ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM), असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर (ABPM) और डाक सेवक के 38,926 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड के कक्षा 10वीं पास होना चाहिए।
इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल से 40 साल के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। सभी योग्य उम्मीदवार India Post GDS Bharti 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in 5 जून 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) में ग्रामीण डाक सेवक पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण डाक सेवक के 650 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। उम्मीदवार IPPB GDS Recruitment 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट ippbonline. com पर 20 मई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
|
India Post Recruitment दो हज़ार बाईस: भारतीय डाक ने ग्रामीण डाक सेवक सहित अन्य अड़तीस हज़ार नौ सौ छब्बीस पदों पर भर्ती के लिए योग्य उम्मीद्वारों से आवेदन मांगे हैं। सभी उम्मीद्वार India Post GDS Recruitment दो हज़ार बाईस के लिए आधिकारिक वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in पर पाँच जून दो हज़ार बाईस तक आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया दो मई से शुरू की जा चुकी है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इस प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय डाक में ब्रांच पोस्टमास्टर , असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर और डाक सेवक के अड़तीस,नौ सौ छब्बीस रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड के कक्षा दसवीं पास होना चाहिए। इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु अट्ठारह साल से चालीस साल के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। सभी योग्य उम्मीदवार India Post GDS Bharti दो हज़ार बाईस के लिए आधिकारिक वेबसाइट indiapostgdsonline. gov. in पाँच जून दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में ग्रामीण डाक सेवक पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण डाक सेवक के छः सौ पचास रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। उम्मीदवार IPPB GDS Recruitment दो हज़ार बाईस के लिए आधिकारिक वेबसाइट ippbonline. com पर बीस मई दो हज़ार बाईस तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
|
Don't Miss!
बाहुबली 2 सिर्फ भारत और अन्य देशों में नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी धूम मचा रही है और हाउसफुल चल रही है ।
इसे कहते हैं रियल बाहुबली। पूरी दुनिया में धूम मचा रही एसएस राजामौली की फिल्म बाहुबली 2 का जादू पाकिस्तान में भी सर चढ़कर बोल रहा है। पाकिस्तान में शो पूरी तरह हाउसफुल जा रही है और वहां भी लोगों के बीच बाहुबली 2 का उतना ही क्रेज है जितना हमारे देश में।
पाकिस्तान के कुछ यूथ ने फिल्म के बाहर भीड़ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की और साथ ही फिल्म देखकर निकल रहे युवाओं की भी तस्वीर पोस्ट की।उन तस्वीरों को देखकर पता चल राह है कि फिल्म ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। फिल्म वैसे भी पाकिस्तान में भी हाउसफुल चल रही है।
फिल्म वर्ल्ड वाइड 1000 करोड़ की कमाई कर चुकी है और सिर्फ हिंदी में फिल्म 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म की तारीफ दर्शक से लेकर बड़े से बड़े सुपरस्टार भी कर रहे हैं। फिल्म पहले ही भारत की ऐतिहासिक फिल्मों में अपना नाम दर्ज करा चुकी है।
फिलहाल देखना ये है कि फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन कहां तक जाता है और अकेले पाकिस्तान में फिल्म कितनी कमाई कर जाती है ये देखना भी मजेदार होगा।
|
Don't Miss! बाहुबली दो सिर्फ भारत और अन्य देशों में नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी धूम मचा रही है और हाउसफुल चल रही है । इसे कहते हैं रियल बाहुबली। पूरी दुनिया में धूम मचा रही एसएस राजामौली की फिल्म बाहुबली दो का जादू पाकिस्तान में भी सर चढ़कर बोल रहा है। पाकिस्तान में शो पूरी तरह हाउसफुल जा रही है और वहां भी लोगों के बीच बाहुबली दो का उतना ही क्रेज है जितना हमारे देश में। पाकिस्तान के कुछ यूथ ने फिल्म के बाहर भीड़ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की और साथ ही फिल्म देखकर निकल रहे युवाओं की भी तस्वीर पोस्ट की।उन तस्वीरों को देखकर पता चल राह है कि फिल्म ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। फिल्म वैसे भी पाकिस्तान में भी हाउसफुल चल रही है। फिल्म वर्ल्ड वाइड एक हज़ार करोड़ की कमाई कर चुकी है और सिर्फ हिंदी में फिल्म तीन सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म की तारीफ दर्शक से लेकर बड़े से बड़े सुपरस्टार भी कर रहे हैं। फिल्म पहले ही भारत की ऐतिहासिक फिल्मों में अपना नाम दर्ज करा चुकी है। फिलहाल देखना ये है कि फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन कहां तक जाता है और अकेले पाकिस्तान में फिल्म कितनी कमाई कर जाती है ये देखना भी मजेदार होगा।
|
Swara Bhasker ने पाकिस्तानी लहंगे में फोटोज शेयर कर ट्रोल्स पर कसा तंज, बोलीं- 'ये लाहौर से पहले दुबई और फिर...'
Swara Bhaser Wore Pakistani Lehenga In Walima Shared Photos: एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने अपने वलीमे में पाकिस्तानी डिजाइनर का लहंगा पहना था। अब एक्ट्रेस ने अपनी रिसेप्शन पार्टी की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनके जरिए उन्होंने पाकिस्तानी डिजाइनर को धन्यवाद दिया है।
Swara Bhaser Shared Reception Pics: बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने समाजवादी पार्टी के नेता और सोशल एक्टिविस्ट फहद अहमद के साथ 6 जनवरी को कोर्ट मैरिज की थी, जिसके बाद दोनों ने मार्च में पूरे रीति-रिवाजों से शादी रचाई। 16 मार्च को बी-टाउन के इस नए कपल ने एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और जया बच्चन जैसे बड़े-बड़े नेता शामिल हुए थे। वहीं 19 मार्च को फहद के होमटाउन बरेली में एक और रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें उनके कुछ करीबी दोस्त और रिश्तेदार ही शामिल हुए थे। हालांकि दूसरी रिसेप्शन पार्टी में स्वरा के लहंगे को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा था। क्योंकि कंट्रोवर्सी क्वीन ने अपने वलीमे में पाकिस्तानी डिजाइनर का लहंगा पहना था।
अब इस विवाद के बीच स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने अपनी रिसेप्शन पार्टी की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की हैं। इन फोटोज में एक्ट्रेस क्रीम कलर के लहंगे में सजी-धजी नजर आ रही हैं। स्वरा ने इस लहंगे के साथ ही हैवी ज्वैलरी भी पहनी हैं, जो उनकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रही हैं। इन फोटोज को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, "मेरे वलीमे का आउटफिट, जो लाहौर से होते हुए पहले दुबई फिर बॉम्बे फिर दिल्ली और आखिरकार बरेली पहुंचा। मैं अली जीशान की प्रतिभा से अचंभित हूं। जब मैंने उन्हें फोन करके कहा कि मैं अपने वलीमे में आपका काम पहनना चाहती हूं तो उनकी गर्मजोशी और उदारता को देख मैं उनकी प्रशंसा करने के लिए मजबूर हो गई थी।"
स्वरा भास्कर के इस पोस्ट पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जहां कुछ लोग स्वरा को बधाई दे रहे हैं तो वहीं कुछ वलीमे में पाकिस्तानी लहंगा पहनने पर ट्रोल कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "भारतीय डिजाइनर तो वैसे भी आपके बजट से बाहर होंगे और आईएसआई ने आपके लिए विशेष रूप से बड़ी छूट की पेशकश की होगी।" तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, "आपने ये जानबूझकर किया है।" एक और यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "आपने अपने वलीमे के आउटफिट के लिए पाकिस्तानी डिजाइनर को क्यों चुना और दूसरा आपको इसे मेंशन करने की जरूरत महसूस हुई। आपकी मर्जी है लेकिन यह कई चीजों की तरफ इशारा है।"
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
Swara Bhasker ने पाकिस्तानी लहंगे में फोटोज शेयर कर ट्रोल्स पर कसा तंज, बोलीं- 'ये लाहौर से पहले दुबई और फिर...' Swara Bhaser Wore Pakistani Lehenga In Walima Shared Photos: एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने अपने वलीमे में पाकिस्तानी डिजाइनर का लहंगा पहना था। अब एक्ट्रेस ने अपनी रिसेप्शन पार्टी की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनके जरिए उन्होंने पाकिस्तानी डिजाइनर को धन्यवाद दिया है। Swara Bhaser Shared Reception Pics: बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने समाजवादी पार्टी के नेता और सोशल एक्टिविस्ट फहद अहमद के साथ छः जनवरी को कोर्ट मैरिज की थी, जिसके बाद दोनों ने मार्च में पूरे रीति-रिवाजों से शादी रचाई। सोलह मार्च को बी-टाउन के इस नए कपल ने एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और जया बच्चन जैसे बड़े-बड़े नेता शामिल हुए थे। वहीं उन्नीस मार्च को फहद के होमटाउन बरेली में एक और रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें उनके कुछ करीबी दोस्त और रिश्तेदार ही शामिल हुए थे। हालांकि दूसरी रिसेप्शन पार्टी में स्वरा के लहंगे को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा था। क्योंकि कंट्रोवर्सी क्वीन ने अपने वलीमे में पाकिस्तानी डिजाइनर का लहंगा पहना था। अब इस विवाद के बीच स्वरा भास्कर ने अपनी रिसेप्शन पार्टी की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की हैं। इन फोटोज में एक्ट्रेस क्रीम कलर के लहंगे में सजी-धजी नजर आ रही हैं। स्वरा ने इस लहंगे के साथ ही हैवी ज्वैलरी भी पहनी हैं, जो उनकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रही हैं। इन फोटोज को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, "मेरे वलीमे का आउटफिट, जो लाहौर से होते हुए पहले दुबई फिर बॉम्बे फिर दिल्ली और आखिरकार बरेली पहुंचा। मैं अली जीशान की प्रतिभा से अचंभित हूं। जब मैंने उन्हें फोन करके कहा कि मैं अपने वलीमे में आपका काम पहनना चाहती हूं तो उनकी गर्मजोशी और उदारता को देख मैं उनकी प्रशंसा करने के लिए मजबूर हो गई थी।" स्वरा भास्कर के इस पोस्ट पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जहां कुछ लोग स्वरा को बधाई दे रहे हैं तो वहीं कुछ वलीमे में पाकिस्तानी लहंगा पहनने पर ट्रोल कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "भारतीय डिजाइनर तो वैसे भी आपके बजट से बाहर होंगे और आईएसआई ने आपके लिए विशेष रूप से बड़ी छूट की पेशकश की होगी।" तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, "आपने ये जानबूझकर किया है।" एक और यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "आपने अपने वलीमे के आउटफिट के लिए पाकिस्तानी डिजाइनर को क्यों चुना और दूसरा आपको इसे मेंशन करने की जरूरत महसूस हुई। आपकी मर्जी है लेकिन यह कई चीजों की तरफ इशारा है।" बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
लुधियाना। यहां पश्चिम बंगाल की महिला और उसकी छह महिला साथियों से छह क्विंटल से अधिक गोमांस बरामद किया गया है। वे यह गोमांस बस में ले जा रही थीं। यह गोमांस 17 बाेरियों में भरा था। महिला को एक हिंदू नेता की सूचना पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। महिला के छह साथी भागने में कामयाब हो गए। इस मामले का खुलासा होने पर हंगामा मच गया।
महिला को चौकी बस स्टैंड की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित महिला की पहचान धूरी लाइन निवासी मुसलिमा के रूप में हुई है। वह मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। उसके कब्जे से छह क्विंटल 36 किलो गोमांस बरामद हुआ है। पुलिस अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है।
जांच अधिकारी चांद हीर ने बताया कि हिंदू नेता चेतन मल्होत्रा पुलिस को सूचना दी थी कि भारत नगर चौक में कुछ महिलाएं बोरों में गोमांस भरकर ले जा रही हैं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुसलिमा नाम की महिला को गिरफ्तार कर लिया। उसकी साथी छह अन्य महिलाएं वहां से फरार हो गईं। आरोपिता के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।
शिवसेना पंजाब के चेयरमैन राजीव टंडन ने बताया कि हिंदू नेता चेतन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। वह बस में आरोपितों का पीछा करते हुए आ रहे थे। लुधियाना पहुंचकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। गोमांस 17 बोरों में भरा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लुधियाना में किराये के मकान में रहने वाली मुसलिमा साथी महिलाओं के साथ फिरोजपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित हड्डारोड़ी से 20 रुपये किलो के हिसाब से गोमांस लाई थी। पूछताछ में सामने आया कि वह पहले भी कई बार ऐसा कर चुकी है। इस बार वह ज्यादा मांस लेकर जा रही थी तो पकड़ी गई।
आरोपित महिला ने पुलिस के समक्ष कबूल किया है कि वह लुधियाना में ही कई लोगों को गोमांस की सप्लाई करती थी। पहले वह स्थानीय स्तर पर किसी महिला से गोमांस लेकर लोगों को सप्लाई देती थी। वहां से उसे गोमांस मंहगा मिलता था। लेकिन अब वह 20 रुपये किलो की दर से गोमांस लाकर 100 रुपये किलो की दर से बेचना चाहती थी। वह लुधियाना के झुग्गी झोंपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गोमांस का सप्लाई करती थी। वहीं सूत्रों का कहना है कि वह कई रेहडिय़ों व दुकानों पर भी मांस की सप्लाई करती थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में बड़ा जाल सामने आ सकता है। इस मामले में आरोपिता की साथी महिलाओं के अलावा अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। लुधियाना में गोमांस की डिमांड करने वाले लोगों की पहचान के लिए भी पुलिस सक्रिय हो गई है। वहीं हड्डारोड़ी से गोमांस की बिक्री करने वालों पर भी पुलिस कड़ी कार्रवाई कर सकती है।
" मामला गंभीर है और जांच शुरु कर दी गई है। अभी तक यही सामने आया है कि ये महिलाएं फिरोजपुर रेलवे स्टेशन के पास हड्डारोड़ी से गोमांस लाती थीं। पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और फरार महिलाओं की तलाश भी की जा रही है। इश नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
|
लुधियाना। यहां पश्चिम बंगाल की महिला और उसकी छह महिला साथियों से छह क्विंटल से अधिक गोमांस बरामद किया गया है। वे यह गोमांस बस में ले जा रही थीं। यह गोमांस सत्रह बाेरियों में भरा था। महिला को एक हिंदू नेता की सूचना पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। महिला के छह साथी भागने में कामयाब हो गए। इस मामले का खुलासा होने पर हंगामा मच गया। महिला को चौकी बस स्टैंड की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित महिला की पहचान धूरी लाइन निवासी मुसलिमा के रूप में हुई है। वह मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। उसके कब्जे से छह क्विंटल छत्तीस किलो गोमांस बरामद हुआ है। पुलिस अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। जांच अधिकारी चांद हीर ने बताया कि हिंदू नेता चेतन मल्होत्रा पुलिस को सूचना दी थी कि भारत नगर चौक में कुछ महिलाएं बोरों में गोमांस भरकर ले जा रही हैं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुसलिमा नाम की महिला को गिरफ्तार कर लिया। उसकी साथी छह अन्य महिलाएं वहां से फरार हो गईं। आरोपिता के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है। शिवसेना पंजाब के चेयरमैन राजीव टंडन ने बताया कि हिंदू नेता चेतन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। वह बस में आरोपितों का पीछा करते हुए आ रहे थे। लुधियाना पहुंचकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। गोमांस सत्रह बोरों में भरा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लुधियाना में किराये के मकान में रहने वाली मुसलिमा साथी महिलाओं के साथ फिरोजपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित हड्डारोड़ी से बीस रुपयापये किलो के हिसाब से गोमांस लाई थी। पूछताछ में सामने आया कि वह पहले भी कई बार ऐसा कर चुकी है। इस बार वह ज्यादा मांस लेकर जा रही थी तो पकड़ी गई। आरोपित महिला ने पुलिस के समक्ष कबूल किया है कि वह लुधियाना में ही कई लोगों को गोमांस की सप्लाई करती थी। पहले वह स्थानीय स्तर पर किसी महिला से गोमांस लेकर लोगों को सप्लाई देती थी। वहां से उसे गोमांस मंहगा मिलता था। लेकिन अब वह बीस रुपयापये किलो की दर से गोमांस लाकर एक सौ रुपयापये किलो की दर से बेचना चाहती थी। वह लुधियाना के झुग्गी झोंपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गोमांस का सप्लाई करती थी। वहीं सूत्रों का कहना है कि वह कई रेहडिय़ों व दुकानों पर भी मांस की सप्लाई करती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में बड़ा जाल सामने आ सकता है। इस मामले में आरोपिता की साथी महिलाओं के अलावा अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। लुधियाना में गोमांस की डिमांड करने वाले लोगों की पहचान के लिए भी पुलिस सक्रिय हो गई है। वहीं हड्डारोड़ी से गोमांस की बिक्री करने वालों पर भी पुलिस कड़ी कार्रवाई कर सकती है। " मामला गंभीर है और जांच शुरु कर दी गई है। अभी तक यही सामने आया है कि ये महिलाएं फिरोजपुर रेलवे स्टेशन के पास हड्डारोड़ी से गोमांस लाती थीं। पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और फरार महिलाओं की तलाश भी की जा रही है। इश नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
|
युहरा पृथ्वीरो सहर पासवे बाहर है, ऐ बहाना है। इमग, आवाग स्वच्छ होन पर भी पथ्वीवा सतह पर हवा घुगती है।
जहाँ बादल होने पर भी वरमात नहीं होती बड़ी हवाई 117 से रासी(बर्फ जमायो वन टाइ ऑक्साइट) छिपनसे बरमान लाया जा सकती है 1
"यह बादल बेचनके लिए है। मिलिये अमेरिकामें ऐसो
वैज्ञानिक तरकीबसे बरसान ला देनेश दवा करने वाली पनिय इ। इस वाटून चित्रमें उनपर व्यग किया गया है।
नाश्ने वगैरा पर जैसे हम नमक हिवाश, उभी तरह बादलों पर नमक छिन्वनेसे बरमान आती।
परिचयम हमन देखा कि नमो जमकर वासूम जलकण बननेवे लिए रजकण जावश्यक होते हैं। उसी तरह बुहम भी अति सूक्ष्म जलवा जमने लिए हवाम उडते रजवण आवश्यक होता है। आमम घमन निकल तो हमारे शरीर और कपड़ा पर भी आस जमती है पर दुहरेन हमारा शरीर भीगता नहीं है । (हर तक हो ता बोछार पडे ना ) । हरेवाली हवा नमी यवत जरूर कही जा सकती है पर वह मासम भी तो जाती है। मा तथा रागिया के लिए ऐसी आबोहवा अच्छी नही होतो !
धुके आधार पर जो कुहरा जमता है वह अधिव भयकर होता है क्यानि धुएम बादन मानॉक्साइड भी होती है जा बाबत डाइआक्साइडसे भी जधिर मतरनाक है। १९५२ लदनम ऐमा धुएँवाला कुहरा इतना जमा था कि उसके चार हजार मनुष्याकी जान ला । अग्रजीम धुए
१८० पृथ्वी दशन
|
युहरा पृथ्वीरो सहर पासवे बाहर है, ऐ बहाना है। इमग, आवाग स्वच्छ होन पर भी पथ्वीवा सतह पर हवा घुगती है। जहाँ बादल होने पर भी वरमात नहीं होती बड़ी हवाई एक सौ सत्रह से रासी छिपनसे बरमान लाया जा सकती है एक "यह बादल बेचनके लिए है। मिलिये अमेरिकामें ऐसो वैज्ञानिक तरकीबसे बरसान ला देनेश दवा करने वाली पनिय इ। इस वाटून चित्रमें उनपर व्यग किया गया है। नाश्ने वगैरा पर जैसे हम नमक हिवाश, उभी तरह बादलों पर नमक छिन्वनेसे बरमान आती। परिचयम हमन देखा कि नमो जमकर वासूम जलकण बननेवे लिए रजकण जावश्यक होते हैं। उसी तरह बुहम भी अति सूक्ष्म जलवा जमने लिए हवाम उडते रजवण आवश्यक होता है। आमम घमन निकल तो हमारे शरीर और कपड़ा पर भी आस जमती है पर दुहरेन हमारा शरीर भीगता नहीं है । । हरेवाली हवा नमी यवत जरूर कही जा सकती है पर वह मासम भी तो जाती है। मा तथा रागिया के लिए ऐसी आबोहवा अच्छी नही होतो ! धुके आधार पर जो कुहरा जमता है वह अधिव भयकर होता है क्यानि धुएम बादन मानॉक्साइड भी होती है जा बाबत डाइआक्साइडसे भी जधिर मतरनाक है। एक हज़ार नौ सौ बावन लदनम ऐमा धुएँवाला कुहरा इतना जमा था कि उसके चार हजार मनुष्याकी जान ला । अग्रजीम धुए एक सौ अस्सी पृथ्वी दशन
|
( ५ ) सम्रदर्शन से शुरू हुए जीव, अवतो होने पर भी नारक, तियंत्र, नपुगक और श्रीपर्यायको धारण नहीं करते, न दुष्कुलोंमें जन्म लेते हैं, न विकृतांग तथा अल्पायु होते हैं और न दरिदोपनेको हो पाते हैं।
द्वितीय परिच्छेदमें सम्यग्ज्ञानका लक्षण देकर उसके विषयभूत प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग और इम्यानुयोगका सामान्य स्वरूप दिया है।
तीसरे परिच्छेदमें सम्पचारित्रके धारण करनेकी पात्रता और आवश्यकताका वर्णन करते हुए उसे हिंसा, असत्य, बोरी, मैथुनसेवा और परिमहरूप पापप्रणालिकाओंसे विरतिरूप बतलाया है। साथ ही, चारित्रके सकल और ● विकल' ऐसे दो भेद करके और यह अतलाकर कि सकल चारित्र सर्वसंगविरत गुनियों के होता है और निकलचारित्र परिप्रहमाहित गृहस्यों के गृहस्थों के योग्य विकलचारित्र के बारह भेद किये हैं, जिनमें पाँच अधुनत, तीन गुणनत और चार शिक्षामत शामिल है। इसके बाद हिंसा, असत्य, चोरी, कामसेवा और परिमहरूपी पाँच पापोंके स्थूलरूप से त्यागको अनुमत बतलाया है और अहिंगादि पोतोका स्वरूप उनके पाँच पाँच अतीचारों सहित दिया है। साथ ही, यह प्रतिपादन किया है कि मथ, मांस और मधुके स्मागसहित ये पंचअणुव्रत गृहस्थों के 'अष्ट मूलगुण' कहलाते है ।
चाँधे परिच्छेदमें रिम्मत, अनर्थदण्डवत और भोगोपभोगपरिमाण नामसे तीन गुणवतोंका उनके पाँच पाँच अतिवारोंसहित कथन है, पापोपदेश, हिंसादान, अपभ्यान, दुःभुति और प्रमादचर्या ऐसे अनर्थडके पाँच भेदोंका वर्णन है और भोगोपभोगकी व्याख्या के साथ उसमें कुछ विशेष त्यागडा विधान, मतका लक्षण और यमनियमका स्वरूप भी दिया है।
पाँचये परिच्छेदमें देशावकाशिक, सामाजिक, प्रोषधोपवास और वैय्याच्य नाम के चार शिक्षामतोंका, उनके पाँच पाँच अतीचारोंसदित, वर्णन है। सामायिक और प्रोषधोपवास के कथनने कुछ विशेष कर्तव्योंका भी उल्लेख किया है और सामाजिक के रामय गृहस्थको लोग्टमुले की उपमा दी है। संख्या में रोमियोवो दान देने और देवाधिदेवकी पूजा करने भी विधान किया है और उस दानके आहार, औपष, उरकरण, आवास ऐसे बार भेद किये है।
छड़े परिच्छेद अनुदानावस्था के निर्देशसहित देखना ( समाधिमरम) का स्वरूप और उसको आवश्यकताका प्रतिपादन करते हुए, संझेपर्ने गमाजि
मरणकी विधिका उल्लेख किया है और सलेखनाके पाँच अतीचार भी दिये हैं अन्तमें सद्धर्भके फलका कीर्तन करते हुए, निःश्रेयम मुखके स्वरूपका कुछ दिग्ददोन भी कराया गया है ।
सातये परिच्छेद में धावकके उन ग्यारह पदोंका स्वरूप दिया गया है जिन्हें ● प्रतिमा' भी कहते हैं और जिनमें उत्तरोत्तर प्रतिमाओंके गुण पूर्वपूर्वकी प्रतिमाओंके संपूर्ण गुणों को लिये हुए होते हैं और इस तरह पर क्रमशः विवृद्ध होकर तिष्ठते हैं। इन प्रतिमाओंमें छठी प्रतिमा 'रात्रिभोजनत्याग' बतलाई गई है।
इस तरह पर, इस ग्रंथ में, श्रावकोंके अनुष्ठानयोग्य धर्मका जो वर्णन दिया है वह बड़ा ही हृदयमाही, समीचीन, सुखमूलक और प्रामाणिक है। और इम. लिये प्रत्येक गृहस्थको, चाहे वह श्री हो या पुरुष, अवश्य ही इस ग्रंयका भळे प्रकार अध्ययन और मनन करना चाहिये। इसके अनुकूल आवरण निःसन्देह कल्याणका कर्ता है और आत्माको बहुत कुछ उमत तथा स्वाधीन बनाने में समर्थ है। प्रथकी भाषा भी बड़ी ही मधुर, प्रौद और अर्थगौरवको लिये हुए ६। सचमुच ही मद्द मथ धर्मरानोंका एक छोटासा पिटारा है और इस लिये इसका 'रत्नकडक' नाम बहुत ही मार्थक जान पड़ता है।
यद्यपि, मंथकार महोदयने स्वय हीं इस प्रथको एक छोटासा पिटारा (क) बतलाया है तो भी श्रावकाचार विषयका दूसरा कोई भी मप अभी तक एंगा नहीं मिला ओ इससे अधिक बड़ा और साथ ही अधिक प्राचीन हो । प्रकृत विषयका अलग और स्वतन ग्रंथ तो शायद इससे पहलेका में भावकोंके संयमाचरणको प्रतियरा दन करनेवाली कुल पाँच गाया है जिनमें ११ प्रतिमाओं तथा १२ मतों के नाम मात्र दिये हैं उनका स्वाद कुछ नहीं दिया और न व्रतों के अतोनासे ही किया है। उमास्वाति महाराज के तत्वार्थमूत्रमें व्रतीके अतीचार
दिये है परंतु दिग्ननादिकके लक्षणोका तथा अनपैदके भेदादिकका उगमें समान है और हिमाननादिक के जोक्षण दिये है ये खाग धावको मस्य नीलिये गये। महेनाका और विधि विधानादि भी उसमें नहीं है। ११ प्रतिमाओंके कथन तथा और भी बातों मे
है और हम तरह पर में भी आपका बहुत ही पंशिय
वर्जन है।
|
सम्रदर्शन से शुरू हुए जीव, अवतो होने पर भी नारक, तियंत्र, नपुगक और श्रीपर्यायको धारण नहीं करते, न दुष्कुलोंमें जन्म लेते हैं, न विकृतांग तथा अल्पायु होते हैं और न दरिदोपनेको हो पाते हैं। द्वितीय परिच्छेदमें सम्यग्ज्ञानका लक्षण देकर उसके विषयभूत प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग और इम्यानुयोगका सामान्य स्वरूप दिया है। तीसरे परिच्छेदमें सम्पचारित्रके धारण करनेकी पात्रता और आवश्यकताका वर्णन करते हुए उसे हिंसा, असत्य, बोरी, मैथुनसेवा और परिमहरूप पापप्रणालिकाओंसे विरतिरूप बतलाया है। साथ ही, चारित्रके सकल और ● विकल' ऐसे दो भेद करके और यह अतलाकर कि सकल चारित्र सर्वसंगविरत गुनियों के होता है और निकलचारित्र परिप्रहमाहित गृहस्यों के गृहस्थों के योग्य विकलचारित्र के बारह भेद किये हैं, जिनमें पाँच अधुनत, तीन गुणनत और चार शिक्षामत शामिल है। इसके बाद हिंसा, असत्य, चोरी, कामसेवा और परिमहरूपी पाँच पापोंके स्थूलरूप से त्यागको अनुमत बतलाया है और अहिंगादि पोतोका स्वरूप उनके पाँच पाँच अतीचारों सहित दिया है। साथ ही, यह प्रतिपादन किया है कि मथ, मांस और मधुके स्मागसहित ये पंचअणुव्रत गृहस्थों के 'अष्ट मूलगुण' कहलाते है । चाँधे परिच्छेदमें रिम्मत, अनर्थदण्डवत और भोगोपभोगपरिमाण नामसे तीन गुणवतोंका उनके पाँच पाँच अतिवारोंसहित कथन है, पापोपदेश, हिंसादान, अपभ्यान, दुःभुति और प्रमादचर्या ऐसे अनर्थडके पाँच भेदोंका वर्णन है और भोगोपभोगकी व्याख्या के साथ उसमें कुछ विशेष त्यागडा विधान, मतका लक्षण और यमनियमका स्वरूप भी दिया है। पाँचये परिच्छेदमें देशावकाशिक, सामाजिक, प्रोषधोपवास और वैय्याच्य नाम के चार शिक्षामतोंका, उनके पाँच पाँच अतीचारोंसदित, वर्णन है। सामायिक और प्रोषधोपवास के कथनने कुछ विशेष कर्तव्योंका भी उल्लेख किया है और सामाजिक के रामय गृहस्थको लोग्टमुले की उपमा दी है। संख्या में रोमियोवो दान देने और देवाधिदेवकी पूजा करने भी विधान किया है और उस दानके आहार, औपष, उरकरण, आवास ऐसे बार भेद किये है। छड़े परिच्छेद अनुदानावस्था के निर्देशसहित देखना का स्वरूप और उसको आवश्यकताका प्रतिपादन करते हुए, संझेपर्ने गमाजि मरणकी विधिका उल्लेख किया है और सलेखनाके पाँच अतीचार भी दिये हैं अन्तमें सद्धर्भके फलका कीर्तन करते हुए, निःश्रेयम मुखके स्वरूपका कुछ दिग्ददोन भी कराया गया है । सातये परिच्छेद में धावकके उन ग्यारह पदोंका स्वरूप दिया गया है जिन्हें ● प्रतिमा' भी कहते हैं और जिनमें उत्तरोत्तर प्रतिमाओंके गुण पूर्वपूर्वकी प्रतिमाओंके संपूर्ण गुणों को लिये हुए होते हैं और इस तरह पर क्रमशः विवृद्ध होकर तिष्ठते हैं। इन प्रतिमाओंमें छठी प्रतिमा 'रात्रिभोजनत्याग' बतलाई गई है। इस तरह पर, इस ग्रंथ में, श्रावकोंके अनुष्ठानयोग्य धर्मका जो वर्णन दिया है वह बड़ा ही हृदयमाही, समीचीन, सुखमूलक और प्रामाणिक है। और इम. लिये प्रत्येक गृहस्थको, चाहे वह श्री हो या पुरुष, अवश्य ही इस ग्रंयका भळे प्रकार अध्ययन और मनन करना चाहिये। इसके अनुकूल आवरण निःसन्देह कल्याणका कर्ता है और आत्माको बहुत कुछ उमत तथा स्वाधीन बनाने में समर्थ है। प्रथकी भाषा भी बड़ी ही मधुर, प्रौद और अर्थगौरवको लिये हुए छः। सचमुच ही मद्द मथ धर्मरानोंका एक छोटासा पिटारा है और इस लिये इसका 'रत्नकडक' नाम बहुत ही मार्थक जान पड़ता है। यद्यपि, मंथकार महोदयने स्वय हीं इस प्रथको एक छोटासा पिटारा बतलाया है तो भी श्रावकाचार विषयका दूसरा कोई भी मप अभी तक एंगा नहीं मिला ओ इससे अधिक बड़ा और साथ ही अधिक प्राचीन हो । प्रकृत विषयका अलग और स्वतन ग्रंथ तो शायद इससे पहलेका में भावकोंके संयमाचरणको प्रतियरा दन करनेवाली कुल पाँच गाया है जिनमें ग्यारह प्रतिमाओं तथा बारह मतों के नाम मात्र दिये हैं उनका स्वाद कुछ नहीं दिया और न व्रतों के अतोनासे ही किया है। उमास्वाति महाराज के तत्वार्थमूत्रमें व्रतीके अतीचार दिये है परंतु दिग्ननादिकके लक्षणोका तथा अनपैदके भेदादिकका उगमें समान है और हिमाननादिक के जोक्षण दिये है ये खाग धावको मस्य नीलिये गये। महेनाका और विधि विधानादि भी उसमें नहीं है। ग्यारह प्रतिमाओंके कथन तथा और भी बातों मे है और हम तरह पर में भी आपका बहुत ही पंशिय वर्जन है।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी ने प्रत्याशियों की नई लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में 9 उम्मीदवारों का नाम शामिल है। बसपा ने तुलसीपुर से भुवन प्रताप सिंह, नौतनवा से अमन मणि त्रिपाठी, सिसवां से धीरेंद्र प्रताप सिंह, सहजनवा से सुधीर सिंह, खड्डा सीट से निसार अहम, तमकुहीराज से संजय गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा है।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीएसपी ने प्रत्याशियों की नई लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में नौ उम्मीदवारों का नाम शामिल है। बसपा ने तुलसीपुर से भुवन प्रताप सिंह, नौतनवा से अमन मणि त्रिपाठी, सिसवां से धीरेंद्र प्रताप सिंह, सहजनवा से सुधीर सिंह, खड्डा सीट से निसार अहम, तमकुहीराज से संजय गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा है।
|
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने मंगलवार को एक ट्वीट कर साफ कर दिया कि वे कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. प्रशांत ने कहा कि कांग्रेस को सामूहिक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है. पिछले काफी दिनों से ये सस्पेंस चल रहा था कि प्रशांत कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने पार्टी के सामने एक प्रजेंटेशन भी दिया था. कांग्रेस भी प्रशांत की एंट्री के लिए तैयार थी. प्रशांत ने कांग्रेस संगठन में कई सारे बदलाव के सुझाव भी दिए थे.
बता दें कि वैसे तो प्रशांत किशोर की पहचान एक चुनावी रणनीतिकार की रही है. लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्होंने राजनीति में सीधे तौर पर दखल नहीं रखा है. प्रशांत 2 साल से ज्यादा वक्त तक जदयू के उपाध्यक्ष रहे. प्रशांत ने 16 सितंबर 2018 को जदयू जॉइन की थी. 2 साल बाद ही प्रशांत और नीतीश कुमार के बीच खटास बढ़ने लगी. प्रशांत की कंपनी आईपैक ने जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाने की कमान संभाली. इसके बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव में प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी के लिए रणनीति बनाने के जिम्मेदारी संभाली. इसी के बाद पीके और पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ नीतीश कुमार से भी दूरी बढ़ने लगी. 29 जनवरी 2020 को नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जदयू से बाहर कर दिया.
प्रशांत किशोर को पंजाब में भी कांग्रेस चुनावी अभियान में लगाना चाहती थी, मगर तब बात नहीं बन सकी थी. हाल ही में पांच राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर पार्टी में जी-23 ग्रुप सक्रिय हुआ और संगठन में सुधार की मांग जोर पकड़ने लगी. इसी बीच, पार्टी की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी और प्रशांत किशोर के बीच संगठन में सुधारों को लेकर चर्चा हुई. हाल ही में प्रशांत किशोर ने 2024 के आम चुनाव को लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सामने एक प्रजेंटेशन दिया था.
इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक समिति बनाई थी. इस समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी. माना जा रहा था प्रशांत किशोर जल्द ही कांग्रेस जॉइन करने जा रहे हैं. अब प्रशांत किशोर ने जो ट्वीट किया, उसमें लिखा- मैंने इंपावर्ड एक्शन ग्रुप (EAG) के हिस्से के तौर पर पार्टी में शामिल होने और चुनावों की जिम्मेदार संभालने की कांग्रेस की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है. संगठन से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए पार्टी को मुझसे ज्यादा नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है.
प्रशांत किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम किया था, जिसके बाद सुर्खियों में आए थे. बीजेपी की 2014 के जीत में पीके की अहम भूमिका रही. लेकिन नरेंद्र मोदी के पीएम बनते ही बीजेपी के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए. इसके बाद बिहार चुनाव के दौरान जेडीयू के करीब आ गए. 2015 के बाद सक्रिय रूप से सियासत में कदम रखा. सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर प्रशांत किशोर को जदयू में शामिल किया था. बिहार में नीतीश की साल 2015 की जीत के पीछे प्रशांत किशोर को रणनीति को श्रेय दिया गया था. उन्हें सीएम मेकर से सम्मानित तक किया गया था.
प्रशांत किशोर का बिहार के बक्सर जिले में साल 1977 में जन्म हुआ था. वो अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे. वो वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में नौकरी करते थे. भारत आने पर चुनावी रणनीतिकार के तौर पर करियर की शुरुआत की. साल 2011 में वो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़े थे. उन्हें मोदी के प्रचार की कमान दी गई थी. प्रशांत ने मोदी की पॉलिटिकल ब्रांडिंग का कार्य किया. जिसके बाद किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के अभियान को मोदी लहर में तब्दील करने में अहम भूमिका निभाई.
फिर साल 2014 में भाजपा को छोड़कर प्रशांत किशोर 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार- लालू यादव के महागठबंधन से जुड़ गए. फिर साल 2017 में वह वाईएसआर कांग्रेस से जुड़े. चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के प्रचार अभियान में 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' नारा पीके ने ही दिया था. यह नारा काफी चर्चा में रहा. इसके अलावा हर घर दस्तक नारा भी उन्होंने दिया था.
इसके साथ प्रशांत किशोर 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान से जुड़ें. कैप्टन अमरिंदर सिंह के 'कॉफी विद कैप्टन' और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (तब उपाध्यक्ष थे) की किसान यात्रा और 'खाट सभा' की रूप रेखा भी तैयार की. किशोर के किसी भी दल के साथ काम करने की पहली शर्त यह होती है कि वे उस नेता के घर से ही अपने दफ्तर का संचालन करते हैं. लेकिन कांग्रेस में यह संभव न हो सका. प्रशांत किशोर की कांग्रेस की रणनीति में दखल कई कांग्रेसी पचा नहीं पाए और खुले तौर पर इसकी मुखालफत की.
प्रशांत किशोर के पिता बिहार सरकार में डॉक्टर हैं और मां हाउस वाइफ. प्रशांत की पत्नी जाह्नवी दास असम के गुवाहाटी जिले में डॉक्टर हैं. प्रशांत किशोर और जाह्नवी का एक बेटा है.
|
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने मंगलवार को एक ट्वीट कर साफ कर दिया कि वे कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. प्रशांत ने कहा कि कांग्रेस को सामूहिक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है. पिछले काफी दिनों से ये सस्पेंस चल रहा था कि प्रशांत कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने पार्टी के सामने एक प्रजेंटेशन भी दिया था. कांग्रेस भी प्रशांत की एंट्री के लिए तैयार थी. प्रशांत ने कांग्रेस संगठन में कई सारे बदलाव के सुझाव भी दिए थे. बता दें कि वैसे तो प्रशांत किशोर की पहचान एक चुनावी रणनीतिकार की रही है. लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्होंने राजनीति में सीधे तौर पर दखल नहीं रखा है. प्रशांत दो साल से ज्यादा वक्त तक जदयू के उपाध्यक्ष रहे. प्रशांत ने सोलह सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को जदयू जॉइन की थी. दो साल बाद ही प्रशांत और नीतीश कुमार के बीच खटास बढ़ने लगी. प्रशांत की कंपनी आईपैक ने जुलाई दो हज़ार उन्नीस में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाने की कमान संभाली. इसके बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव में प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी के लिए रणनीति बनाने के जिम्मेदारी संभाली. इसी के बाद पीके और पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ नीतीश कुमार से भी दूरी बढ़ने लगी. उनतीस जनवरी दो हज़ार बीस को नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जदयू से बाहर कर दिया. प्रशांत किशोर को पंजाब में भी कांग्रेस चुनावी अभियान में लगाना चाहती थी, मगर तब बात नहीं बन सकी थी. हाल ही में पांच राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर पार्टी में जी-तेईस ग्रुप सक्रिय हुआ और संगठन में सुधार की मांग जोर पकड़ने लगी. इसी बीच, पार्टी की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी और प्रशांत किशोर के बीच संगठन में सुधारों को लेकर चर्चा हुई. हाल ही में प्रशांत किशोर ने दो हज़ार चौबीस के आम चुनाव को लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सामने एक प्रजेंटेशन दिया था. इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक समिति बनाई थी. इस समिति ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी. माना जा रहा था प्रशांत किशोर जल्द ही कांग्रेस जॉइन करने जा रहे हैं. अब प्रशांत किशोर ने जो ट्वीट किया, उसमें लिखा- मैंने इंपावर्ड एक्शन ग्रुप के हिस्से के तौर पर पार्टी में शामिल होने और चुनावों की जिम्मेदार संभालने की कांग्रेस की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है. संगठन से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए पार्टी को मुझसे ज्यादा नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है. प्रशांत किशोर ने दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम किया था, जिसके बाद सुर्खियों में आए थे. बीजेपी की दो हज़ार चौदह के जीत में पीके की अहम भूमिका रही. लेकिन नरेंद्र मोदी के पीएम बनते ही बीजेपी के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए. इसके बाद बिहार चुनाव के दौरान जेडीयू के करीब आ गए. दो हज़ार पंद्रह के बाद सक्रिय रूप से सियासत में कदम रखा. सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर प्रशांत किशोर को जदयू में शामिल किया था. बिहार में नीतीश की साल दो हज़ार पंद्रह की जीत के पीछे प्रशांत किशोर को रणनीति को श्रेय दिया गया था. उन्हें सीएम मेकर से सम्मानित तक किया गया था. प्रशांत किशोर का बिहार के बक्सर जिले में साल एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में जन्म हुआ था. वो अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे. वो वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में नौकरी करते थे. भारत आने पर चुनावी रणनीतिकार के तौर पर करियर की शुरुआत की. साल दो हज़ार ग्यारह में वो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़े थे. उन्हें मोदी के प्रचार की कमान दी गई थी. प्रशांत ने मोदी की पॉलिटिकल ब्रांडिंग का कार्य किया. जिसके बाद किशोर ने दो हज़ार चौदह के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के अभियान को मोदी लहर में तब्दील करने में अहम भूमिका निभाई. फिर साल दो हज़ार चौदह में भाजपा को छोड़कर प्रशांत किशोर दो हज़ार पंद्रह में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार- लालू यादव के महागठबंधन से जुड़ गए. फिर साल दो हज़ार सत्रह में वह वाईएसआर कांग्रेस से जुड़े. चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के प्रचार अभियान में 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' नारा पीके ने ही दिया था. यह नारा काफी चर्चा में रहा. इसके अलावा हर घर दस्तक नारा भी उन्होंने दिया था. इसके साथ प्रशांत किशोर दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान से जुड़ें. कैप्टन अमरिंदर सिंह के 'कॉफी विद कैप्टन' और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्रा और 'खाट सभा' की रूप रेखा भी तैयार की. किशोर के किसी भी दल के साथ काम करने की पहली शर्त यह होती है कि वे उस नेता के घर से ही अपने दफ्तर का संचालन करते हैं. लेकिन कांग्रेस में यह संभव न हो सका. प्रशांत किशोर की कांग्रेस की रणनीति में दखल कई कांग्रेसी पचा नहीं पाए और खुले तौर पर इसकी मुखालफत की. प्रशांत किशोर के पिता बिहार सरकार में डॉक्टर हैं और मां हाउस वाइफ. प्रशांत की पत्नी जाह्नवी दास असम के गुवाहाटी जिले में डॉक्टर हैं. प्रशांत किशोर और जाह्नवी का एक बेटा है.
|
[ श्री 'सतनामी' ]
स्वतः 'सत्ता' शब्द का अर्थ है अस्तित्व । और अस्तित्व का अर्थ है केन्द्रीभूत स्थापक शक्ति ( Static force ) । भौतिक विज्ञान के अनुसार यह स्थापकशक्ति बादितस्त्र 'इंघ' (Eter) की आवर्तगति का ( Vertex Motion ) केन्द्र है। तथा अध्यात्मशास्त्र के अनुसार आत्मा का केन्द्रस्थ अधिकार ही सत्ता है। स्थापकशक्ति के कारण इन्धक में भिन्न-भिन्न तत्त्र और इनसे असंख्य पदार्थ उत्पन्न होकर यह विविध सृष्टि हुई है। और बता से आत्मा में व्यक्ति, कुटुम्ब, समाज, राज्य इत्यादि व्यष्टि समटियाँ स्थापित हुई हैं। यह केन्द्रस्थ शक्ति अनेक परमाणुओं को अथवा अनेक घटकों को केवल संगठित करके किसी घटना को केवल अस्तित्व में ही नहीं जाती, अपितु उन घटकों पर अपना अधिकार भी चलाती है। यह अर्थ राजकीय घटनाओं में विशेषतः स्पष्ट होता है । राज्य में यद्यपि अधिकारीवर्ग का संगठन समष्टिरूप से उस राज्य की सरकार कहलाती है तथापि राजा, सीनेट, पार्टमेण्ट, डिक्टेटर इत्यादि राज्य के तथा सरकार के भिक्ष. मिश्र केन्द्र होकर उस राज्य का अस्तित्व सिद्ध करते हैं । यही राजकीय सत्ता के केन्द्र कहलाते हैं और इन्हीं केन्द्रों से राजकीय सत्ता का विकास (Radiation ) होकर अधिकारीवर्ग बनता है। अर्थात् अस्तित्व और अधिकार इस रूप से सत्ता के रूप में दिखाई देते हैं।
सत्ता अथवा अस्तित्व के बिना शक्ति का प्रादुर्भाव नहीं होता, तथापि वह भो निस्प देखने में आता है कि शक्ति से ही जहाँ तहाँ सत्ता स्थापित होती है। अर्थात सत्ता और शक्ति एक ही सामर्थ्य के दो रूप है। सत्ता स्थापकशक्ति (static force ) है तो शक्ति गतिशील सत्ता ( dynamic force ) है । सत्ता साधक है तो शक्ति उसका साधन है। सत्ता में जितना अधिक सामर्थ्य होगा
उतनी ही उसकी शक्ति अधिक बलवान होगी। आक्रमण अथवा विरोध किंवा संरक्षण में विशेषनः सत्ता का शक्तिरूप प्रकट होता है।
परन्तु इस सामर्थ्य का - जो सत्ता और शक्ति का माध्यम अथवा आश्रय माना गया है-झ्या स्वरूप है, इसका निश्चय करना आवश्यक है। हम प्रत्येक कर्म में, प्रत्येक व्यवहार में, नित्य अनुभव करते हैं कि जहाँ-जहाँ शक्ति अथवा गति का नियमबद्ध उपयोग किया जाता है वहाँ-वहाँ उस शक्ति अथवा गति की प्रेणा और उसका संचा. लन ज्ञान-कला को करना पड़ता है। ज्ञान के बिना कोई भी नियम नहीं बनता। इसीपर से यह सिद्धान भी उपस्थित होता है कि इस नियमबद्ध प्रकृति का - जिसे 'नेचर' (Nature ) अथवा निसर्ग कहते हैं- आधार किंवा उसका संचालक ज्ञानशक्ति ही होना आवश्यक है। सना अथवा अस्तित्व का आविर्भाव भी ज्ञान में ही होता है। ज्ञान बिना अस्तित्व की प्रतीति हो नहीं है, और जहाँ अस्तित्व नहीं वहाँ किसी भी सत्ता का प्रभाव नहीं हो सकता; एवं सत्ता और शक्ति का आश्रय ज्ञान है। और ज्ञान ही वह सामर्थ्य है, जिसके सत्ता और शक्ति दो अंग है।
अध्यात्मशास्त्र के अनुसार तथा विज्ञान के अनुसार यह सृष्टि द्विविधा है- 6 चेनन सृष्टि, दूसरी जद विज्ञान बहता है- पदार्थों का जड़त्व केवल मार-रूप है और भार देवल आकर्षण शक्ति ( G avity ) का विकास है। अर्थात् अखिल अड़-सृष्टि मूलतः देवल शक्ति-रूप है। और जब कि शक्ति ज्ञान का ही एक अंग है तो यही मानना पड़ता है कि ज्ञान ही धन होकर शतिरूप बनता है। हम निस्य अनुभव करते हैं कि किसी कहरमा का जितना ही अधिक से अधिक मनन और निदिध्यास करते हैं इतनी ही वह दृढ़ होती चली जाती है। यह दृढ़ता ही हस करना
को कभी-कभी भवप्नावस्था में अड़ रूप में दिखाती है और कमी प्रत्यक्ष व्यवहार में कार्य रूप में प्रकट होती है। मिस मनन और निदिध्यास से यह हड़ता उत्पन्न होती है वह केवल अभ्यास है। और अभ्यास का अर्थ है, एक ही बात को पुनः पुनः कई बार दुहराना अथवा आवर्तन । एक ही केन्द्र में परिभ्रमण करते रहने से भावर्तन होता है। आवर्तन केवळ एक गति है। तथापि वह नित्य एक ही केन्द्र में होती रहने से नियमबद्ध होती है। और इस नियमबद्धता ही से गनि में शक्ति होती है। अर्थात् नियमबद्ध गति हो शक्ति है। ज्ञान को नियमबद्ध गति प्राप्त होने से ही उसमें शक्ति उत्पन होकर अड़स्व प्राप्त होता है। सारांश जड़त्व अथवा जसृष्टि अभ्यास का परिणाम है और अभ्यास ज्ञान को नियमबद्ध गति है। इसी कारण जड़ सृष्टि प्रकृति के नियमों से बद्ध है; किन्तु अखिक जड़-सृष्टिको प्रकृति, निसर्गकिया 'नेचर' ( Nature ) ही कहते हैं।
शक्ति अथवा प्रकृति का मूल कारण जो आवर्त-गति ( Recurring force ) है वह नित्य वृत्ताकार होती है। बुत के मुख्य दो अंग होते हैं। एक केन्द्र और दूसरा परिधि । केन्द्र यद्यपि विन्दुमात्र है तथापि परिधि उसका विस्तार है। केन्द्र की विकास रेखायें परिधि की त्रिज्यायें होती हैं। यद्यपि परिधि को केन्द्र से ही गति प्राप्त होती है तथापि केन्द्र स्थिर रहता है। इसी कारण केन्द्रस्थ शक्ति को सत्ता स्थापक-शक्ति ( Static force ) कहते हैं। और परिधिरूप शक्ति सत्ता का विकास है। केन्द्रस्य सत्ता गुप्त रूप से रहती है और परिधि में यह गति और शक्ति रूप से प्रकट दिखाई देती है। केन्द्र परिधि का माश्रय और संचालक है तो शक्ति का आश्रय और संचालक ज्ञान है। और जब परिधि और क्षति एकरूप है तो केन्द्रस्थ सत्ता का भी ज्ञानरूप होना अनिवार्य है। अध्यात्म शास्त्र कहता है कि प्रत्येक जड़ पदार्थ में केन्द्रस्य सत्ता शाम का ही है, यद्यपि वह गूदरहती है। गूढ़ रहने का कारण यह है कि जड़ पदार्थ में केन्द्रस्थ शाम-सत्ता जड़ अदा रूप से ही रहती है। अतपुर्ण चेतनता प्रकट नहीं दीखती ।
विकास-विज्ञान ( Evolution theory ) का यह अभिप्राय है कि विकास नित्य आवश्यकतानुसार होता है। हमारे पास नेत्र हैं, इसका कारण हमें देखने की आव श्यकता है; न कि हमारे नेत्र हैं, इस वास्ते हम देखते हैं। इसमें कौन सन्देह कर सकता है कि आवश्यकता का आविर्भाव ज्ञान में ही हो सकता है, जड़ में कोई आवश्य कता नहीं है। अर्थात् विकास-विज्ञान के अनुसार भी बढ़विकास के मूल में ज्ञान की ही प्ररणा है। वह प्रेरणा वही है, जिसका उल्लेख ऊपर ज्ञान-सत्ता के नाम से किया है। केन्द्रस्थ ससा ज्ञानरूप है और शक्ति अथवा असृष्टिरूप परिधि उसीका विकास है, तो इन्हीं में से मनुष्य, कुटुम्ब, समाज, राज्य साम्राज्य व्यवहार, नीति, धर्म, सध्वज्ञान इत्यादि शानमय घटनाओं और सिद्धान्तों का विकास होना साहजिक है। अखिल विश्व चेतन अथवा ज्ञानमय है तो भौतिक सृष्टि और भौतिक शक्ति ज्ञान का की घमस्व है । अर्थात् सर्व अड़-सृष्टि और भौतिक शक्ति की उत्पत्ति ज्ञान से है और निर्माण-कर्म का अधिकार ज्ञान का ही है। सत्तावही है, जिसमें निर्माण करने की शक्ति हो, जो भौतिक शक्ति को भी निर्माण करती है तथा उसका संचालन भी करती है।
सृष्टि में दो प्रकार को शक्तियों काम कर रही है। एक सत्ता और दूसरी ( मौलिक ) शक्ति । पहली चेतन है तो दूसरी जड़ है। पहली कर्ता और भोक्ता है तो दूसरी साधन एवं भोग्य विषय है। पहली निर्माण-कर्म और पुरस्कार करती है तो दूसरी संहार और प्रतीकार करती है। परन्तु निर्माण-कर्म और पुरस्कार तथा संहार और प्रतीकार दोनों का संचालन करने वाली ज्ञान-शक्ति तीसरी है। यह सत्ता और शक्ति में भी आरम्भ से गूढ़ रूप में रहती है। परन्तु प्रकट दोनों के पश्चात् होती है। किन्तु यह कह देना मिथ्या नहीं है कि यह तीसरी ज्ञान-शक्ति सत्ता और शक्ति को निर्माण भी करती है। इसे नीति अथवा नैतिक शक्ति कहते हैं। स्वाभिमान तथा संघम, ये दोनों प्ररेणायें नेतिक शक्ति के हाथ हैं । वह निर्माणशक्ति का उपयोग करेगी तो
हुए पलंग के समान वह निरंतर सन्नतावस्था प्राप्त होता रहता है। परन्तु जब इसके विपरीत केन्द्रस्य सत्ता उसके विकसित रूप की - अर्थात भौतिक शक्ति की आश्रित हो जाती है, और भौतिक शक्ति से ही अपना अधिकार चल सकता है, अपने स्वत में कुछ भी नही है, ऐसी श्रद्धा हो जाती है, तब कटे हुर पतंग के समान वह भौतिक बल कुछ समय तक परिस्थिति रूप हवा के ज़ोर से ऊँचे-नीचे झाँके खाता हुआ थोड़े ही अव घर में किसी भी अनपेक्षित स्थान में पतित हो जाता है। कारण निर्माण-शक्ति केवल केन्द्रस्थ आरमीय सत्ता में ही रहती है, यह ऊपर बता चुके हैं। वह जब संहारकाक्ति की भाषित हो जाती है, तब दूसरों का संहार करते-करते स्वतः संहारशक्ति का भी संहार होना अनिवार्य है। किन्तु संहारशक्ति स्वतः पराश्रित होने से वह एक केन्द्र से निशश्रित होते ही अन्य केन्द्र का आश्र ग्रहण कर लेती है। इस प्रकार भौतिक बल के केन्द्र का परिवर्तन होना ही क्रान्ति है ।
शाश्वत सुख और कल्याण के वास्ते; वह संहार-शक्ति का उपयोग करेगी तो शाश्वत सुख और कल्याण के वास्ते; और वह सत्ता और शक्ति का त्याग भी करेगी तो अंतिम धार्मिक और तात्विक सिद्धान्त अपनाने के वास्ते। यह नैतिक शक्ति सत्ता और ( भौतिक ) शक्ति दोनों का संचालन करने वाली है। अर्थात् प्रत्येक अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति को शाश्वत और श्रेष्ठनम कल्याणकारी बनाने की कुशलता ही नीति का मुख्य स्वरूप है । अतएव सत्ता और शक्ति प्रस्थापित होने के पश्चात वह प्रकट होती है । तथापि गृढ़ रूप में आरम्भ से भी रहती है। यदि सत्ता के आरम्भ में हो नीति रूप से न हो तो श्रेष्ठ और सखति कारक घटनाओं का निर्माण नहीं होता ।
तात्पर्य, सत्ता से शक्ति उत्पन्न होती है और शक्ति से नीति प्रस्थापित होती है । उदी नीति से सत्ता स्थापित होती है और सत्ता में ही बल का प्रादुर्भाव होता है । अर्थात् सत्ता और नीति एक हो शक्ति की दो अवस्थायें हैं। सत्ता केन्द्रस्थ शक्ति है, अतपुत्र आत्मबल का यही रूप और यही स्थान है। यह सामर्थ्य आत्मा का ही है जो अपने ही अन्दर से बल को प्रकट करें तथा बाह्य उपकरणों के बल को अपने में ही संगठित करे । इतिहासज्ञ भलीभाँति जानते हैं कि गो ब्राह्मण-प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज, कर्मवीर मैज़िनी, महात्मा लेनिन इत्यादि ने अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थिति में ही कई गुनी अधिक बलवती शकि का भी संहार करके राज्य क्रान्ति कर दिखाई । यही आत्मबक अथवा आत्मिक सत्ता का प्रभाव है। आत्मबल अथवा सत्ता ज्ञानशक्ति की अध्यक्त अवस्था है तो नीति व्यक्त अवस्था है और भौतिक शक्ति जड़ावस्था है। सत्ता में नीति जितनी अधिक हो उतना उससे आत्मबल अधिक प्रकट होता है; और आत्मबक जितना अधिक हो उतना ही उस में भौतिक शक्ति का संगठन ( Assrmilation ) भी अधिक होता है। भौतिक शक्ति निस्य केन्द्रस्थ सत्ता का विकास है, अतएव स्वयंसिद्ध नहीं है। स्वयं सिद्ध न होने से स्वतंत्र नहीं है। केन्द्रस्थ सत्ता के आश्रम से जहाँ तक भौतिक बल का उपयोग किया जाता है, वहां तक डोर में
सत्ताधारी और शक्तिशाली शासकों को यह विवेचन अत्यन्त उपयोगी है। सबा बल नीति में ही है। इति हास मुक्तकंठ से कह रहा है कि बड़े-बड़े भौतिक बलशालियों ने भी नैतिक सत्ता के आगे मस्तक झुकाये हैं। इस का यह मतलब नहीं है कि भौतिक शक्ति निरर्थक या अना वश्यक है। भौतिक काकि सत्ता और नोति के आश्रम से तो उपयुक्त तथा संरक्षक होती है, किन्तु सत्ता और नीत जब भौतिक शक्ति की आश्रित होती हैं तब भौतिक शक्ति दुखदायी तथा विवातक होती है। भौतिक बल निर्माण करना तो सत्ता और नीति का स्वाभाविक धर्म है, और इसी कारण भौतिक बल को सत्ता और नीति के सम्मुख पराजित होना पढ़ा है। स्वर्गीय देवी अहिल्याबाई- होलकर के राज्यकाल का इतिहास इसका उत्तम साक्ष है। उस समय भारत-भर में राजकीय सत्ता के लिए सर्वत्र प्रतिद्वंद्विता हो रही थी। देशभर में राजकीय युद्धों की भरमार हो रही थी। अधिक से अधिक भौतिकसफि का उपयोग करके अधिक से अधिक राजकीय सत्ता हस्तसंवत १९८७ ]
गत करना सद्गुण और सौभाग्य का लक्षण माना जाता था। इस अवस्था में देवी अहिल्या-जैसी अबला के हाथ से छत्तीस वर्ष तक राज्यसूत्र किसी का न छोनना क्या मार्य नहीं है ? एक समय तात्कालिक महाशक्तिशाली राघो पेशवा ने देवी की राजधानी पर आक्रमण भी किया था । परन्तु उस समय अवला-स्वभाव के अनुसार श्वानवृत्ति का आश्रय लेकर पूँड हिलाकर देवी ने अपना रक्षण नहीं किया, किन्तु निर्भीकता से सामना करके और चातुर्य मे राघोबा का बलोन्माद उतार का हो राज्य का रक्षण किया था । क्या राजनीतिज्ञ इस बात को मान लेंगे कि रावोत्रा पेशवा और महादजी सँधिया-परीखे तात्कालिक महावलशाली भी देवी की ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकने थे, इसका
तानी नम ने नई कमान ! अबको सावन के मेघों ने, गाया नूतन करुण-गान ! चिर दिन की चिन्ता की तान ! आान वही मेरे प्राणों से, करती है घुल-मिल पहचान ! बरस रही है व्यथा महान ! तानी नभ ने नई कमान !
एक मात्र कारण देवी अहिल्या की नीतिमत्ता ही था ? ( १० )
सात्पर्य यह कि अब किसी शासक की यह धारणा हो जाती है कि शासितों की कोई भी न्यायोचित माँग स्वीकृत करके कोई सरकारी भाज्ञा हटाने से सरकार का प्रभाव घट जाता है, तब निश्चय करना चाहिए कि उस सरकार में भौतिक बढ़ का प्राधान्य हो रहा है, नैतिक बल का ह्रास हो रहा है। केन्द्रस्थ सत्ता का नाम हो रहा है और राजकीय क्रांति निकट आ रही है। न्यायोचित माँग स्वीकृत करने से तथा अनुचित भाज्ञा रद करने से किसी का भी प्रभाव घटता नहीं, उलटे प्रभाव की वृद्धि ही होती है।
श्री हरिकृष्ण 'प्रेमी'
विश्व-व्यथा के बहु आाख्यानमेघों की काली स्याही से कवि ने अंकित किये अजान ! पढ़ कर पागल होते प्राण ! सकल जगत के अश्रु साथ उड़ नग से बरस रहे अम्लान ! उठत। मानस में तूफ़ान तानी नभ ने नई कमान !
गिरता है वह वज्रमहान !
चंचल चपला चमक छुरी-सी चीर-चीर देती है प्राण ! मुदती है आँखें अज्ञान !
हृदय अचानक टुकड़े टुकड़े हो बह जावेगा अनजान ! जीवन में है कितनी जान ! वानी नभ ने नई कमान !
|
[ श्री 'सतनामी' ] स्वतः 'सत्ता' शब्द का अर्थ है अस्तित्व । और अस्तित्व का अर्थ है केन्द्रीभूत स्थापक शक्ति । भौतिक विज्ञान के अनुसार यह स्थापकशक्ति बादितस्त्र 'इंघ' की आवर्तगति का केन्द्र है। तथा अध्यात्मशास्त्र के अनुसार आत्मा का केन्द्रस्थ अधिकार ही सत्ता है। स्थापकशक्ति के कारण इन्धक में भिन्न-भिन्न तत्त्र और इनसे असंख्य पदार्थ उत्पन्न होकर यह विविध सृष्टि हुई है। और बता से आत्मा में व्यक्ति, कुटुम्ब, समाज, राज्य इत्यादि व्यष्टि समटियाँ स्थापित हुई हैं। यह केन्द्रस्थ शक्ति अनेक परमाणुओं को अथवा अनेक घटकों को केवल संगठित करके किसी घटना को केवल अस्तित्व में ही नहीं जाती, अपितु उन घटकों पर अपना अधिकार भी चलाती है। यह अर्थ राजकीय घटनाओं में विशेषतः स्पष्ट होता है । राज्य में यद्यपि अधिकारीवर्ग का संगठन समष्टिरूप से उस राज्य की सरकार कहलाती है तथापि राजा, सीनेट, पार्टमेण्ट, डिक्टेटर इत्यादि राज्य के तथा सरकार के भिक्ष. मिश्र केन्द्र होकर उस राज्य का अस्तित्व सिद्ध करते हैं । यही राजकीय सत्ता के केन्द्र कहलाते हैं और इन्हीं केन्द्रों से राजकीय सत्ता का विकास होकर अधिकारीवर्ग बनता है। अर्थात् अस्तित्व और अधिकार इस रूप से सत्ता के रूप में दिखाई देते हैं। सत्ता अथवा अस्तित्व के बिना शक्ति का प्रादुर्भाव नहीं होता, तथापि वह भो निस्प देखने में आता है कि शक्ति से ही जहाँ तहाँ सत्ता स्थापित होती है। अर्थात सत्ता और शक्ति एक ही सामर्थ्य के दो रूप है। सत्ता स्थापकशक्ति है तो शक्ति गतिशील सत्ता है । सत्ता साधक है तो शक्ति उसका साधन है। सत्ता में जितना अधिक सामर्थ्य होगा उतनी ही उसकी शक्ति अधिक बलवान होगी। आक्रमण अथवा विरोध किंवा संरक्षण में विशेषनः सत्ता का शक्तिरूप प्रकट होता है। परन्तु इस सामर्थ्य का - जो सत्ता और शक्ति का माध्यम अथवा आश्रय माना गया है-झ्या स्वरूप है, इसका निश्चय करना आवश्यक है। हम प्रत्येक कर्म में, प्रत्येक व्यवहार में, नित्य अनुभव करते हैं कि जहाँ-जहाँ शक्ति अथवा गति का नियमबद्ध उपयोग किया जाता है वहाँ-वहाँ उस शक्ति अथवा गति की प्रेणा और उसका संचा. लन ज्ञान-कला को करना पड़ता है। ज्ञान के बिना कोई भी नियम नहीं बनता। इसीपर से यह सिद्धान भी उपस्थित होता है कि इस नियमबद्ध प्रकृति का - जिसे 'नेचर' अथवा निसर्ग कहते हैं- आधार किंवा उसका संचालक ज्ञानशक्ति ही होना आवश्यक है। सना अथवा अस्तित्व का आविर्भाव भी ज्ञान में ही होता है। ज्ञान बिना अस्तित्व की प्रतीति हो नहीं है, और जहाँ अस्तित्व नहीं वहाँ किसी भी सत्ता का प्रभाव नहीं हो सकता; एवं सत्ता और शक्ति का आश्रय ज्ञान है। और ज्ञान ही वह सामर्थ्य है, जिसके सत्ता और शक्ति दो अंग है। अध्यात्मशास्त्र के अनुसार तथा विज्ञान के अनुसार यह सृष्टि द्विविधा है- छः चेनन सृष्टि, दूसरी जद विज्ञान बहता है- पदार्थों का जड़त्व केवल मार-रूप है और भार देवल आकर्षण शक्ति का विकास है। अर्थात् अखिल अड़-सृष्टि मूलतः देवल शक्ति-रूप है। और जब कि शक्ति ज्ञान का ही एक अंग है तो यही मानना पड़ता है कि ज्ञान ही धन होकर शतिरूप बनता है। हम निस्य अनुभव करते हैं कि किसी कहरमा का जितना ही अधिक से अधिक मनन और निदिध्यास करते हैं इतनी ही वह दृढ़ होती चली जाती है। यह दृढ़ता ही हस करना को कभी-कभी भवप्नावस्था में अड़ रूप में दिखाती है और कमी प्रत्यक्ष व्यवहार में कार्य रूप में प्रकट होती है। मिस मनन और निदिध्यास से यह हड़ता उत्पन्न होती है वह केवल अभ्यास है। और अभ्यास का अर्थ है, एक ही बात को पुनः पुनः कई बार दुहराना अथवा आवर्तन । एक ही केन्द्र में परिभ्रमण करते रहने से भावर्तन होता है। आवर्तन केवळ एक गति है। तथापि वह नित्य एक ही केन्द्र में होती रहने से नियमबद्ध होती है। और इस नियमबद्धता ही से गनि में शक्ति होती है। अर्थात् नियमबद्ध गति हो शक्ति है। ज्ञान को नियमबद्ध गति प्राप्त होने से ही उसमें शक्ति उत्पन होकर अड़स्व प्राप्त होता है। सारांश जड़त्व अथवा जसृष्टि अभ्यास का परिणाम है और अभ्यास ज्ञान को नियमबद्ध गति है। इसी कारण जड़ सृष्टि प्रकृति के नियमों से बद्ध है; किन्तु अखिक जड़-सृष्टिको प्रकृति, निसर्गकिया 'नेचर' ही कहते हैं। शक्ति अथवा प्रकृति का मूल कारण जो आवर्त-गति है वह नित्य वृत्ताकार होती है। बुत के मुख्य दो अंग होते हैं। एक केन्द्र और दूसरा परिधि । केन्द्र यद्यपि विन्दुमात्र है तथापि परिधि उसका विस्तार है। केन्द्र की विकास रेखायें परिधि की त्रिज्यायें होती हैं। यद्यपि परिधि को केन्द्र से ही गति प्राप्त होती है तथापि केन्द्र स्थिर रहता है। इसी कारण केन्द्रस्थ शक्ति को सत्ता स्थापक-शक्ति कहते हैं। और परिधिरूप शक्ति सत्ता का विकास है। केन्द्रस्य सत्ता गुप्त रूप से रहती है और परिधि में यह गति और शक्ति रूप से प्रकट दिखाई देती है। केन्द्र परिधि का माश्रय और संचालक है तो शक्ति का आश्रय और संचालक ज्ञान है। और जब परिधि और क्षति एकरूप है तो केन्द्रस्थ सत्ता का भी ज्ञानरूप होना अनिवार्य है। अध्यात्म शास्त्र कहता है कि प्रत्येक जड़ पदार्थ में केन्द्रस्य सत्ता शाम का ही है, यद्यपि वह गूदरहती है। गूढ़ रहने का कारण यह है कि जड़ पदार्थ में केन्द्रस्थ शाम-सत्ता जड़ अदा रूप से ही रहती है। अतपुर्ण चेतनता प्रकट नहीं दीखती । विकास-विज्ञान का यह अभिप्राय है कि विकास नित्य आवश्यकतानुसार होता है। हमारे पास नेत्र हैं, इसका कारण हमें देखने की आव श्यकता है; न कि हमारे नेत्र हैं, इस वास्ते हम देखते हैं। इसमें कौन सन्देह कर सकता है कि आवश्यकता का आविर्भाव ज्ञान में ही हो सकता है, जड़ में कोई आवश्य कता नहीं है। अर्थात् विकास-विज्ञान के अनुसार भी बढ़विकास के मूल में ज्ञान की ही प्ररणा है। वह प्रेरणा वही है, जिसका उल्लेख ऊपर ज्ञान-सत्ता के नाम से किया है। केन्द्रस्थ ससा ज्ञानरूप है और शक्ति अथवा असृष्टिरूप परिधि उसीका विकास है, तो इन्हीं में से मनुष्य, कुटुम्ब, समाज, राज्य साम्राज्य व्यवहार, नीति, धर्म, सध्वज्ञान इत्यादि शानमय घटनाओं और सिद्धान्तों का विकास होना साहजिक है। अखिल विश्व चेतन अथवा ज्ञानमय है तो भौतिक सृष्टि और भौतिक शक्ति ज्ञान का की घमस्व है । अर्थात् सर्व अड़-सृष्टि और भौतिक शक्ति की उत्पत्ति ज्ञान से है और निर्माण-कर्म का अधिकार ज्ञान का ही है। सत्तावही है, जिसमें निर्माण करने की शक्ति हो, जो भौतिक शक्ति को भी निर्माण करती है तथा उसका संचालन भी करती है। सृष्टि में दो प्रकार को शक्तियों काम कर रही है। एक सत्ता और दूसरी शक्ति । पहली चेतन है तो दूसरी जड़ है। पहली कर्ता और भोक्ता है तो दूसरी साधन एवं भोग्य विषय है। पहली निर्माण-कर्म और पुरस्कार करती है तो दूसरी संहार और प्रतीकार करती है। परन्तु निर्माण-कर्म और पुरस्कार तथा संहार और प्रतीकार दोनों का संचालन करने वाली ज्ञान-शक्ति तीसरी है। यह सत्ता और शक्ति में भी आरम्भ से गूढ़ रूप में रहती है। परन्तु प्रकट दोनों के पश्चात् होती है। किन्तु यह कह देना मिथ्या नहीं है कि यह तीसरी ज्ञान-शक्ति सत्ता और शक्ति को निर्माण भी करती है। इसे नीति अथवा नैतिक शक्ति कहते हैं। स्वाभिमान तथा संघम, ये दोनों प्ररेणायें नेतिक शक्ति के हाथ हैं । वह निर्माणशक्ति का उपयोग करेगी तो हुए पलंग के समान वह निरंतर सन्नतावस्था प्राप्त होता रहता है। परन्तु जब इसके विपरीत केन्द्रस्य सत्ता उसके विकसित रूप की - अर्थात भौतिक शक्ति की आश्रित हो जाती है, और भौतिक शक्ति से ही अपना अधिकार चल सकता है, अपने स्वत में कुछ भी नही है, ऐसी श्रद्धा हो जाती है, तब कटे हुर पतंग के समान वह भौतिक बल कुछ समय तक परिस्थिति रूप हवा के ज़ोर से ऊँचे-नीचे झाँके खाता हुआ थोड़े ही अव घर में किसी भी अनपेक्षित स्थान में पतित हो जाता है। कारण निर्माण-शक्ति केवल केन्द्रस्थ आरमीय सत्ता में ही रहती है, यह ऊपर बता चुके हैं। वह जब संहारकाक्ति की भाषित हो जाती है, तब दूसरों का संहार करते-करते स्वतः संहारशक्ति का भी संहार होना अनिवार्य है। किन्तु संहारशक्ति स्वतः पराश्रित होने से वह एक केन्द्र से निशश्रित होते ही अन्य केन्द्र का आश्र ग्रहण कर लेती है। इस प्रकार भौतिक बल के केन्द्र का परिवर्तन होना ही क्रान्ति है । शाश्वत सुख और कल्याण के वास्ते; वह संहार-शक्ति का उपयोग करेगी तो शाश्वत सुख और कल्याण के वास्ते; और वह सत्ता और शक्ति का त्याग भी करेगी तो अंतिम धार्मिक और तात्विक सिद्धान्त अपनाने के वास्ते। यह नैतिक शक्ति सत्ता और शक्ति दोनों का संचालन करने वाली है। अर्थात् प्रत्येक अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति को शाश्वत और श्रेष्ठनम कल्याणकारी बनाने की कुशलता ही नीति का मुख्य स्वरूप है । अतएव सत्ता और शक्ति प्रस्थापित होने के पश्चात वह प्रकट होती है । तथापि गृढ़ रूप में आरम्भ से भी रहती है। यदि सत्ता के आरम्भ में हो नीति रूप से न हो तो श्रेष्ठ और सखति कारक घटनाओं का निर्माण नहीं होता । तात्पर्य, सत्ता से शक्ति उत्पन्न होती है और शक्ति से नीति प्रस्थापित होती है । उदी नीति से सत्ता स्थापित होती है और सत्ता में ही बल का प्रादुर्भाव होता है । अर्थात् सत्ता और नीति एक हो शक्ति की दो अवस्थायें हैं। सत्ता केन्द्रस्थ शक्ति है, अतपुत्र आत्मबल का यही रूप और यही स्थान है। यह सामर्थ्य आत्मा का ही है जो अपने ही अन्दर से बल को प्रकट करें तथा बाह्य उपकरणों के बल को अपने में ही संगठित करे । इतिहासज्ञ भलीभाँति जानते हैं कि गो ब्राह्मण-प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज, कर्मवीर मैज़िनी, महात्मा लेनिन इत्यादि ने अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थिति में ही कई गुनी अधिक बलवती शकि का भी संहार करके राज्य क्रान्ति कर दिखाई । यही आत्मबक अथवा आत्मिक सत्ता का प्रभाव है। आत्मबल अथवा सत्ता ज्ञानशक्ति की अध्यक्त अवस्था है तो नीति व्यक्त अवस्था है और भौतिक शक्ति जड़ावस्था है। सत्ता में नीति जितनी अधिक हो उतना उससे आत्मबल अधिक प्रकट होता है; और आत्मबक जितना अधिक हो उतना ही उस में भौतिक शक्ति का संगठन भी अधिक होता है। भौतिक शक्ति निस्य केन्द्रस्थ सत्ता का विकास है, अतएव स्वयंसिद्ध नहीं है। स्वयं सिद्ध न होने से स्वतंत्र नहीं है। केन्द्रस्थ सत्ता के आश्रम से जहाँ तक भौतिक बल का उपयोग किया जाता है, वहां तक डोर में सत्ताधारी और शक्तिशाली शासकों को यह विवेचन अत्यन्त उपयोगी है। सबा बल नीति में ही है। इति हास मुक्तकंठ से कह रहा है कि बड़े-बड़े भौतिक बलशालियों ने भी नैतिक सत्ता के आगे मस्तक झुकाये हैं। इस का यह मतलब नहीं है कि भौतिक शक्ति निरर्थक या अना वश्यक है। भौतिक काकि सत्ता और नोति के आश्रम से तो उपयुक्त तथा संरक्षक होती है, किन्तु सत्ता और नीत जब भौतिक शक्ति की आश्रित होती हैं तब भौतिक शक्ति दुखदायी तथा विवातक होती है। भौतिक बल निर्माण करना तो सत्ता और नीति का स्वाभाविक धर्म है, और इसी कारण भौतिक बल को सत्ता और नीति के सम्मुख पराजित होना पढ़ा है। स्वर्गीय देवी अहिल्याबाई- होलकर के राज्यकाल का इतिहास इसका उत्तम साक्ष है। उस समय भारत-भर में राजकीय सत्ता के लिए सर्वत्र प्रतिद्वंद्विता हो रही थी। देशभर में राजकीय युद्धों की भरमार हो रही थी। अधिक से अधिक भौतिकसफि का उपयोग करके अधिक से अधिक राजकीय सत्ता हस्तसंवत एक हज़ार नौ सौ सत्तासी ] गत करना सद्गुण और सौभाग्य का लक्षण माना जाता था। इस अवस्था में देवी अहिल्या-जैसी अबला के हाथ से छत्तीस वर्ष तक राज्यसूत्र किसी का न छोनना क्या मार्य नहीं है ? एक समय तात्कालिक महाशक्तिशाली राघो पेशवा ने देवी की राजधानी पर आक्रमण भी किया था । परन्तु उस समय अवला-स्वभाव के अनुसार श्वानवृत्ति का आश्रय लेकर पूँड हिलाकर देवी ने अपना रक्षण नहीं किया, किन्तु निर्भीकता से सामना करके और चातुर्य मे राघोबा का बलोन्माद उतार का हो राज्य का रक्षण किया था । क्या राजनीतिज्ञ इस बात को मान लेंगे कि रावोत्रा पेशवा और महादजी सँधिया-परीखे तात्कालिक महावलशाली भी देवी की ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकने थे, इसका तानी नम ने नई कमान ! अबको सावन के मेघों ने, गाया नूतन करुण-गान ! चिर दिन की चिन्ता की तान ! आान वही मेरे प्राणों से, करती है घुल-मिल पहचान ! बरस रही है व्यथा महान ! तानी नभ ने नई कमान ! एक मात्र कारण देवी अहिल्या की नीतिमत्ता ही था ? सात्पर्य यह कि अब किसी शासक की यह धारणा हो जाती है कि शासितों की कोई भी न्यायोचित माँग स्वीकृत करके कोई सरकारी भाज्ञा हटाने से सरकार का प्रभाव घट जाता है, तब निश्चय करना चाहिए कि उस सरकार में भौतिक बढ़ का प्राधान्य हो रहा है, नैतिक बल का ह्रास हो रहा है। केन्द्रस्थ सत्ता का नाम हो रहा है और राजकीय क्रांति निकट आ रही है। न्यायोचित माँग स्वीकृत करने से तथा अनुचित भाज्ञा रद करने से किसी का भी प्रभाव घटता नहीं, उलटे प्रभाव की वृद्धि ही होती है। श्री हरिकृष्ण 'प्रेमी' विश्व-व्यथा के बहु आाख्यानमेघों की काली स्याही से कवि ने अंकित किये अजान ! पढ़ कर पागल होते प्राण ! सकल जगत के अश्रु साथ उड़ नग से बरस रहे अम्लान ! उठत। मानस में तूफ़ान तानी नभ ने नई कमान ! गिरता है वह वज्रमहान ! चंचल चपला चमक छुरी-सी चीर-चीर देती है प्राण ! मुदती है आँखें अज्ञान ! हृदय अचानक टुकड़े टुकड़े हो बह जावेगा अनजान ! जीवन में है कितनी जान ! वानी नभ ने नई कमान !
|
विपक्ष की परेशानी है कि उसकी एकता की चाहत परवान नहीं चढ़ पा रही है. उधर नरेंद्र मोदी और भाजपा तीसरी बार अपनी वापसी के लिए सिर्फ बिखरे विपक्ष और उसकी कमजोरियों के आसरे नहीं बैठे हैं.
दूसरा कार्यकाल और उसका आखिरी चरण. फिर भी नरेंद्र मोदी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. ये अकारण नहीं हैं. आमतौर पर इस अवधि के आने तक सरकार हांफने लगती हैं. यूपीए -2 का अंतिम दौर याद कर सकते हैं, जब घोटालों और आपसी खींचतान के बीच सरकार के विरुद्ध जनाक्रोश अपने चरम पर था.
सोनिया -राहुल गांधी के रिमोट से संचालित होने के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की वैसे भी दयनीय छवि बनी हुई थी. विपक्ष सरकार को घेर चुका था. तुलना में नरेंद्र मोदी की स्थिति बिल्कुल उलट नजर आ रही है. वे अपने शासन के नौवें साल में भी लोकप्रियता के रथ पर सवार हैं. जनता की उम्मीदें उनसे बरकरार हैं और वे रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक मुद्रा में हैं.
राष्ट्रपति के अभिभाषण के सिलसिले में विपक्ष और खासतौर पर राहुल गांधी के हमलों के प्रतिउत्तर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत प्रभावी तरीके से अपनी सरकार का पक्ष रखने और विपक्ष को निरुत्तर करने में कामयाब रहे. मोदी के इन तेवरों और ताकत की असली वजह क्या है ? असल में उन्हें एक ऐसी सरकार की अगुवाई का श्रेय हासिल है, जिस पर दूसरे कार्यकाल के आखिरी चरण में भी किसी घोटाले का कलंक नहीं लगा है. खुद उनकी छवि भी पाकसाफ है. वे एक ऐसे राजनेता हैं, जो लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने और फिर प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल नौंवें साल में पहुंच कर भी आम जनता के बीच एक ईमानदार राजनेता की छवि बनाए हुए हैं.
बेशक विपक्ष और खासतौर पर राहुल गांधी इससे इत्तफाक नहीं रखते. विपक्षी खेमे के लिए ये स्वाभाविक है और वह कदम कदम पर सरकार अथवा मोदी की मंशा पर सवाल उठाकर, अपनी भूमिका और धर्म का निर्वाह कर रहा है. लेकिन राहुल गांधी ने इस लड़ाई को व्यक्तिगत बना दिया है. 2019 के लोकसभा चुनाव के अपने प्रचार अभियान को उन्होंने " चौकीदार चोर है " के नारे पर केंद्रित कर दिया था. चुनाव में जनता ने अपना जबाब दिया और 2014 की तुलना में अधिक सीटें जीतकर मोदी फिर सत्तारूढ़ हुए.
राहुल फिर भी नहीं थमे. चार हजार किलोमीटर की पदयात्रा के अनुभवों से समृद्ध राहुल ने मंगलवार को लोकसभा में एक बार फिर मोदी और उनकी सरकार से उद्योगपति अदानी से रिश्तों और ईमानदारी पर सवाल उठाकर घेराबंदी की कोशिश की. राहुल की दिक्कत है कि अपने आरोपों के समर्थन में वे ऐसे कुछ सबूत नहीं पेश कर पाते , जिनकी काट आसान न हो. तथ्यों के अभाव में उनके भाषण भी समर्थकों की वाहवाही तक सीमित रह जाते हैं, और ऐसे लोगों की स्मृतियों में जगह नहीं बना पाते , जो उनके आधार के विस्तार में सहायक हों.
उम्मीद के मुताबिक अगले दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष और राहुल गांधी को आईना दिखा दिया. सरकार के मुखिया के तौर पर उनके पास जनहित के जमीनी कामों की लंबी फेहरिस्त है तो दूसरी ओर जबरदस्त वाक कौशल और वक्तृता का अनूठा गुण उनकी बात दूर तक पहुंचाने में मददगार है. एक बार फिर उन्होंने गिनाया कि उनकी सरकार अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है.
11 करोड़ किसानों को सम्मान निधि,तीन करोड़ बेघरों को पक्के घर, नौ करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन, 11करोड़ घरों को शौचालय, इतने ही घरों को नल से जल और दो करोड़ लोगों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ प्रदान करने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों का भरोसा उनके लिए ईमानदारी से जीवन खपा कर हासिल हुआ है. अपनी उपलब्धियां गिनाते समय मोदी यूपीए के दस साल के घोटालों का इतिहास दोहराने में नहीं चूके.
2024 की चुनौती नजदीक आ रही है. पक्ष और विपक्ष दोनो की ही उस पर नजर है. जाहिर है कि दोनो खेमों के आक्रमण और प्रति आक्रमण अगले चुनाव को ध्यान में रखकर हो रहे हैं. विपक्ष मोदी को बेदखल करने के लिए कमर कस रहा है लेकिन फिलहाल उसकी तैयारी ऐसी नहीं है जिससे सरकार किसी बड़े संकट में घिरती नजर आए.
विपक्ष अथवा मोदी के धुर विरोधी इसे क्यों मानना चाहेंगे लेकिन जमीनी सच यही है कि फिलहाल सरकार के खिलाफ जन भावनाओं का ऐसा कोई बड़ा बहाव नजर नहीं आ रहा, जो अगली बार किसी बड़े फेर बदल की आहट दे रहा हो. विपक्ष यह मान चुका है कि 2024 में मोदी के रथ को रोकने के लिए उसे एकजुट लड़ना होगा.
विपक्ष की परेशानी है कि उसकी एकता की चाहत परवान नहीं चढ़ पा रही है. उधर नरेंद्र मोदी और भाजपा तीसरी बार अपनी वापसी के लिए सिर्फ बिखरे विपक्ष और उसकी कमजोरियों के आसरे नहीं बैठे हैं. अपने संगठन के साथ ही केंद्र और राज्यों की अपनी सरकारों के जरिए उनकी जमीनी कोशिशें जारी हैं. मोदी अकारण दुष्यंत के जरिए विपक्ष को चुनौती नहीं दे रहे हैं,
तुम्हारे पांवों के नीचे कोई जमीन नहीं कमाल है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं.
|
विपक्ष की परेशानी है कि उसकी एकता की चाहत परवान नहीं चढ़ पा रही है. उधर नरेंद्र मोदी और भाजपा तीसरी बार अपनी वापसी के लिए सिर्फ बिखरे विपक्ष और उसकी कमजोरियों के आसरे नहीं बैठे हैं. दूसरा कार्यकाल और उसका आखिरी चरण. फिर भी नरेंद्र मोदी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. ये अकारण नहीं हैं. आमतौर पर इस अवधि के आने तक सरकार हांफने लगती हैं. यूपीए -दो का अंतिम दौर याद कर सकते हैं, जब घोटालों और आपसी खींचतान के बीच सरकार के विरुद्ध जनाक्रोश अपने चरम पर था. सोनिया -राहुल गांधी के रिमोट से संचालित होने के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की वैसे भी दयनीय छवि बनी हुई थी. विपक्ष सरकार को घेर चुका था. तुलना में नरेंद्र मोदी की स्थिति बिल्कुल उलट नजर आ रही है. वे अपने शासन के नौवें साल में भी लोकप्रियता के रथ पर सवार हैं. जनता की उम्मीदें उनसे बरकरार हैं और वे रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक मुद्रा में हैं. राष्ट्रपति के अभिभाषण के सिलसिले में विपक्ष और खासतौर पर राहुल गांधी के हमलों के प्रतिउत्तर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत प्रभावी तरीके से अपनी सरकार का पक्ष रखने और विपक्ष को निरुत्तर करने में कामयाब रहे. मोदी के इन तेवरों और ताकत की असली वजह क्या है ? असल में उन्हें एक ऐसी सरकार की अगुवाई का श्रेय हासिल है, जिस पर दूसरे कार्यकाल के आखिरी चरण में भी किसी घोटाले का कलंक नहीं लगा है. खुद उनकी छवि भी पाकसाफ है. वे एक ऐसे राजनेता हैं, जो लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने और फिर प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल नौंवें साल में पहुंच कर भी आम जनता के बीच एक ईमानदार राजनेता की छवि बनाए हुए हैं. बेशक विपक्ष और खासतौर पर राहुल गांधी इससे इत्तफाक नहीं रखते. विपक्षी खेमे के लिए ये स्वाभाविक है और वह कदम कदम पर सरकार अथवा मोदी की मंशा पर सवाल उठाकर, अपनी भूमिका और धर्म का निर्वाह कर रहा है. लेकिन राहुल गांधी ने इस लड़ाई को व्यक्तिगत बना दिया है. दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव के अपने प्रचार अभियान को उन्होंने " चौकीदार चोर है " के नारे पर केंद्रित कर दिया था. चुनाव में जनता ने अपना जबाब दिया और दो हज़ार चौदह की तुलना में अधिक सीटें जीतकर मोदी फिर सत्तारूढ़ हुए. राहुल फिर भी नहीं थमे. चार हजार किलोमीटर की पदयात्रा के अनुभवों से समृद्ध राहुल ने मंगलवार को लोकसभा में एक बार फिर मोदी और उनकी सरकार से उद्योगपति अदानी से रिश्तों और ईमानदारी पर सवाल उठाकर घेराबंदी की कोशिश की. राहुल की दिक्कत है कि अपने आरोपों के समर्थन में वे ऐसे कुछ सबूत नहीं पेश कर पाते , जिनकी काट आसान न हो. तथ्यों के अभाव में उनके भाषण भी समर्थकों की वाहवाही तक सीमित रह जाते हैं, और ऐसे लोगों की स्मृतियों में जगह नहीं बना पाते , जो उनके आधार के विस्तार में सहायक हों. उम्मीद के मुताबिक अगले दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष और राहुल गांधी को आईना दिखा दिया. सरकार के मुखिया के तौर पर उनके पास जनहित के जमीनी कामों की लंबी फेहरिस्त है तो दूसरी ओर जबरदस्त वाक कौशल और वक्तृता का अनूठा गुण उनकी बात दूर तक पहुंचाने में मददगार है. एक बार फिर उन्होंने गिनाया कि उनकी सरकार अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है. ग्यारह करोड़ किसानों को सम्मान निधि,तीन करोड़ बेघरों को पक्के घर, नौ करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन, ग्यारहकरोड़ घरों को शौचालय, इतने ही घरों को नल से जल और दो करोड़ लोगों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ प्रदान करने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों का भरोसा उनके लिए ईमानदारी से जीवन खपा कर हासिल हुआ है. अपनी उपलब्धियां गिनाते समय मोदी यूपीए के दस साल के घोटालों का इतिहास दोहराने में नहीं चूके. दो हज़ार चौबीस की चुनौती नजदीक आ रही है. पक्ष और विपक्ष दोनो की ही उस पर नजर है. जाहिर है कि दोनो खेमों के आक्रमण और प्रति आक्रमण अगले चुनाव को ध्यान में रखकर हो रहे हैं. विपक्ष मोदी को बेदखल करने के लिए कमर कस रहा है लेकिन फिलहाल उसकी तैयारी ऐसी नहीं है जिससे सरकार किसी बड़े संकट में घिरती नजर आए. विपक्ष अथवा मोदी के धुर विरोधी इसे क्यों मानना चाहेंगे लेकिन जमीनी सच यही है कि फिलहाल सरकार के खिलाफ जन भावनाओं का ऐसा कोई बड़ा बहाव नजर नहीं आ रहा, जो अगली बार किसी बड़े फेर बदल की आहट दे रहा हो. विपक्ष यह मान चुका है कि दो हज़ार चौबीस में मोदी के रथ को रोकने के लिए उसे एकजुट लड़ना होगा. विपक्ष की परेशानी है कि उसकी एकता की चाहत परवान नहीं चढ़ पा रही है. उधर नरेंद्र मोदी और भाजपा तीसरी बार अपनी वापसी के लिए सिर्फ बिखरे विपक्ष और उसकी कमजोरियों के आसरे नहीं बैठे हैं. अपने संगठन के साथ ही केंद्र और राज्यों की अपनी सरकारों के जरिए उनकी जमीनी कोशिशें जारी हैं. मोदी अकारण दुष्यंत के जरिए विपक्ष को चुनौती नहीं दे रहे हैं, तुम्हारे पांवों के नीचे कोई जमीन नहीं कमाल है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं.
|
त्रिलोचनजी से मेरी मुलाकात कोलकाता में हुई थी. पहली मुलाकात के बाद से ही वे मेरी अभिव्यक्ति के लिए चुनौती बन गए थे. आज भी बने हुए हैं. हालांकि, पत्रकारिता के पेशे से जुड़ा होने का सबसे बड़ा लाभ मेरे खयाल से किसी लेखक को यह होता है कि वह अभिव्यक्ति के संकट से उतना आक्रांत नहीं होता, जितने अन्य लेखक होते हैं. यों यही उसके साहित्य को कई बार उथला और तात्कालिक बना देता है. पत्रकार के सामने पेशागत मजबूरी होती है कि वह अपने अनुभूत को शब्द देने में विलम्ब न करे. डेड लाइन की तलवार हमेशा उसके सिर पर लटकी होती है.
इन सबके बावजूद लगभग पांच-सात सालों में मैं उन पर कुछ चाहकर भी न लिख पाया. जो कुछ लिखा वह इतना भर कि उन्होंने किसी सभा में क्या कहा समाचार कवरेज की जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए, लेकिन और बहुत कुछ लिखने का रह ही गया. और मैं उन पर कुछ लिखने के आंतरिक दबाव को लगातार टालता गया हूं तो सिर्फ इसलिए कि उनकी साधारण दिखने वाली असाधरणता मेरी अभिव्यक्ति के लिए चुनौती रही है.
उन दिनों मैं लेखन के उस दौर से गुजर रहा था जब अपने लिखे पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने की बड़ी उत्सुकता रहती है. विख्यात लेखकों से मिलना-जुलना और उनसे खतों-किताबत करना लिखने से कम महत्वपूर्ण नहीं लगता. उन्हीं पत्रों में एक पत्र मुक्तिबोध सृजन पीठ, सागर के अध्यक्ष त्रिलोचन शास्त्री का भी था. उन दिनों उनकी प्रतिक्रिया ने संबल दिया था. और उनका खत कई मायनों में मेरे लिए इसलिए भी अहम् था, क्योंकि वे केदारनाथ सिंह के काव्य गुर रह चुके थे, जिन पर मैं कोलकाता विश्ववि'ालय से पीएचडी क़े लिए शोध कर रहा था. मैंने केदारजी पर पढ़ने के उपक्रम में ही त्रिलोचनजी के साहित्य को किसी हद तक पढ़ डाला था. कहना न होगा कि यह उस शोध-प्रक्रिया के कारण भी हूआ था, जिसमें केदारजी पर उनके पूर्ववर्ती कवियों के प्रभाव की पड़ताल करनी थी. जिस केदारनाथ सिंह ने बनारस में अपने विदयार्थी जीवन में त्रिलोचनजी के प्रभाव में सॉनेट लिखे थे, उन पर त्रिलोचनजी के आरंभिक प्रभाव के बाद उसका सीधा असर परिलक्षित नहीं किया जा सकता है. त्रिलोचनजी की कविता अपना असर धीरे-धीरे करती है. पहली नजर में उसकी सादगी ऐेसी कि किसी कौशल का पता ही नहीं देती. वह लगातार इस बात का एहसास दिलाती है कि कौशल के बगैर भी कविता लिखी जा सकती है. केदारजी की कविता का स्वभाव दूसरा है. काफी हद तक उन्होंने त्रिलोचनजी से उल्टी राह पकड़ी है. केदारजी के यहां साधारण हमेशा असाधारण की तरह आता है. हर छोटी-मोटी हलचल एक विस्मय बन जाया करती है, लेकिन त्रिलोचनजी के यहां गंभीर से गंभीर बात सहजता का दामन नहीं छोड़ती, इसलिए वे पढ़ते समय काफी असहज लगे थे. बिम्ब जैसे विधान की वहां कोई गुंजाइश नहीं थी जो केदारजी और शमशेर में मुझे उन दिनों विशेष प्रभावित कर रहा था.
यहां यह कहना समीचीन होगा कि बाद में त्रिलोचनजी ने केदारजी की कविता को समझने की एक कुंजी दी थी. उन्होंने बताया था कि केदार की कविता की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे जो मुख्य रूप से कहना चाहते हैं, उसे कविता में जहां-तहां देते हैं. उनकी कविता पाठक पर अपना सम्मोहन जाल फेंक देती है और लोग नहीं समझ पाते आखिर क्या है उनकी कविता में और कहां है, जो उन्हें भा रहा है. दूसरे यह कि जिसने कई बेटियां ब्याही हों, वह अपने आप अच्छा कवि बन जाता है. कोई आसान काम नहीं अपने कलेजे के टुकड़ों को विदा करना. त्रिलोचन मुक्त कंठ से स्वीकार करते हैं कि केदार अपनी खूबियां के कारण हर युवा कवि के लिए चुनौती हैं और उसके नायक भी. हिन्दी में समकालीन कविता की जगह केदार के आस-पास ही है. इधर केदारजी ने भी मुझसे बातचीत में यह सहज स्वीकार किया कि त्रिलोचनजी गुर हैं पर आवश्यक नहीं कि शिष्य गुर की परंपरा को ही आगे बढ़ाए. उसे जो गुर से मिलता है वह चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की तमीज.
अस्तु, यह एक इत्तफाक था कि कोलकाता से जनसत्ता' निकलने लगा तो त्रिलोचनजी के पुत्र अमित प्रकाश सिंह वहां समाचार सम्पादक होकर आ गए. उनसे धीरे-धीरे मित्रता होती गई. बहुत कम लोग जानते हैं कि वे भी प्यारी कविताएं लिख लेते हैं. यहां तक कि टालीगंज से जनसत्ता कार्यालय पहुंचने के दौरान मेट्रो रेल के संक्षिप्त सफर में उन्होंने कई कविताएं लिख डाली थीं. कई शास्त्रीय संगीत की महफिलों का लुत्फ हमने रात-रात एक साथ जागकर लिया है और उस पर लिखा भी है. बंगाल की नृत्य कलानाचनी' पर तो उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है कला समीक्षक वनिता झारखंडी के साथ मिलकर.
ह्नऔर त्रिलोचनजी जब भी अमितजी के यहां पारिवारिक कारणों से या कोलकाता के किसी साहित्यिक आयोजन में आते, मुलाकात के अवसर मिलते रहे. अमितजी के टालीगंज निवास पर मैं शास्त्री के यहां घंटों जम जाता. अमितजी उस वक्त हमारे लिए लगभग अनुपस्थित से दूसरे कमरे में रहते या कहीं निकल जाते. उस समय मैं केवल त्रिलोचनजी का परिचित होता अमितजी का नहीं. पिता पुत्र के बीच कुछ ऐेसा था कि वे एक-दूसरे के सामने बहूत सहज नहीं हो पाते थे. इस समय मैं त्रिलोचनजी को करीब पाता. हमारी दुनिया दूसरी हो जाती और अमितजी हमें दूसरी दुनिया के लगते. अमितजी में सहजता और सांसारिक छद्म के निर्वाह की व्यावहारिकता का किसी हद तक अभाव रहा है, जिसके कारण एक काबिल पत्रकार की तमाम खूबियों के बावजूद वे अपने सहकर्मियों के बीच लोकप्रिय नहीं रहे हैं. शायद उन्होंने इसकी कोई आवश्यकता भी महसूस नहीं की.
शास्त्रीजी बताते कैसे वे लाठी चलाने में कुशल थे. किस-किस भाषा को कब-कब और कैसे सीखा. दिवंगत पत्नी की चर्चा भी करते. जान कर अद्भुत लगता कि वे बनारस में अपने घर का पता भूल जाते थे. सावधानी से अपनी जेब में जेब में अपने घर का पता लिखकर रख लेते थे और अकसर अजनबी की तरह अपने घर का पता खोजते हुए लौटते. देर से लौटना गृह कलह का कारण बनता रहता. कई बार पर्ची खो जाती और अपने ऐसे परिचित को तलाशते जिसने उनका घर देखा हो. अपने घर लौटने के लिए उन्हें मार्गदर्शक की जरूरत पड़ती. बात को छिपाने के लिए परिचित को अपने घर न्योत ले जाते.
यूं त्रिलोचनजी से बात करने का मतलब उन्हें सुनना ही होता. उनके पास बातों का अनन्त भंडार है और बातें भी ऐसी कि सुनते ही रह जाओ. वे हर शब्द की तह में पहुंच जाते हैं. कई भाषाओं, विभिन्न सब्जियों की विशेषताओं, विभिन्न देशों की ॠतुओं, विभिन्न पक्षियों के व्यवहार की जानकारी उन्हें थी. उनके अन्दर कई दुनिया मैंने महसूस की. कई बार तो मुझे लगा कि कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी के अधिक अकेले शास्त्रीजी में सूचनाएं भरी पड़ी हैैं. वे जीते जागते संदर्भ ग्रंथ हैं. वे बड़े कवि न भी होते तो भी उनका विद्वान उनसी स्मरण शक्ति का आदमी बिरला ही कोई होगा. या फिर संभव है हुआ ही न हो.
पहले-पहल तो उनकी बातचीत की शैली अजीब लगी. मैंने पाया कि बातों का तारतम्य सुनने वाले के लिए गड्ड-मड्ड हो जाता है. वे एक बात को शुरू करते हैं, फिर बीच में ही उसके संदर्भ पर चर्चा छेड़ देते हैं. मूल बात तो वहीं कुछ देर के लिए ठहर जाती है और संदर्भ भी मूल बात सा विस्तार पाने लगता है. वहां से फिर एक नया संदर्भ जुड़ जाता है. इस प्रकार चार प्रसंग एक साथ चलने लगते हैं. रह-रहकर सबको वे थोड़ा-थोड़ा विस्तार देते चलते हैं. यदि आपने मनोहरश्याम जोशी को पढ़ा हो तो आप कुछ-कुछ अनुमान लगा सकते हैं, कथानक के भीतर कथानकों का अनंत सिलसिला. जैसे कोई वादक कई वाद्य यंत्र एक ही साथ हेरफेर के साथ ऐक ही सुर धुन में बजाता है. बात की यह शैली सुनने वाले के लिए खासी दिक्कत का सबब बन सकता है पर एक अभूतपूर्व अनुभव तक भी उसे ले जाता है.
एक सुखद संयोग का था जब मुझे शास्त्रीजी की मौजूदगी में उनकी प्रिय कविताएं पढ़ने का अवसर मिला था. भारतीय भाषा परिषद की ओर से शायद उनकी 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था. वहां शास्त्रीजी को अपनी प्रिय कविताएं भी सुनानी थीं. मैं अखबार से होने की वजह से आगे की पंक्ति में पत्रकारों के साथ बैठा था. अपनी एक कविता सुनाने के बाद शास्त्रीजी ने एकाएक मेरा नाम लेकर कहा था कि और कुछ कविताएं सुनाने का मन है जो अभिज्ञात पढ़कर सुनाएंगे. मेरे हाथ-पांव फूल गए थे, क्योंकि जिन कविताओं की अर्थतह तक पहुंचना किसी समय मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था, अब मुझे उसका पाठ करना था. मुझे भरी महफिल में उनकी डांट सुनने के आसार भी नजर आए थे. इसके कुछ अरसा पहले मैं बुजुर्ग कवि नार्गाजुन से कई लोगों के सामने पिट चुका था. सो इस तरह की आशंका निर्मूल नहीं थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हूआ. नागार्जुन व्यवहार में अराजक थे, लेकिन त्रिलोचन संयत. यहां तक कि मैंने पाया कि किसी सभा में ोता उनके लम्बे वक्तव्य से ऊबने लगते तो उन्हें अपनी बात समेटने के लिए पर्ची दे दी जाती. वे इसका बुरा नहीं मानते. वैसे भी वे बातों को जिस फलक तक ले जाने के आदी रहे हैं, उसे समेटने के लिए भी उन्हें काफी समय की आवश्यकता पड़ती है. खैर, शास्त्रीजी ने पुस्तकालय मेें उपलब्ध अपनी पसंद की कविताओं में पर्ची लगा रखी थी, सो कविताओं के चयन का संकट नहीं था. वह काव्य पाठ आज भी मेरे लिए सुख का विषय है.
कार्यक्रम की समाप्ति पर उन्होंने मेरे पीठ पर हाथ रखा था जो आज भी कहीं मेरे अनुभूतियों में है. उनके आने की अग्रिम खबर मुझे अमितजी से पहले ही मिल जाया करती थी. वे एक बार संजोग से कालीपूजा के अवसर पर कोलकाता पहूंचे थे. कोलकाता में दुर्गापूजा के बाद कालीपूजा ही सबसे बड़ा जनोत्सव है. कालीपूजा पंडालों के उद्धाटन की प्रथा भी चल निकली है. पूजा कमेटियां किसी विख्यात व्यक्ति से पंडाल का उद्धाटन करवाती हैं. यहां लोकप्रिय अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से लेकर राज्यपाल तक इन सबमें व्यस्त रहते हैं. मेरे एक रंगकर्मी मित्र और प्रतिभा के संगीत-शिष्य शिव जायसवाल के नेतृत्व में भी एक पूजा कमेटी थी. उन्हें किसी उपयुक्त उद्धाटक की तलाश थी, सो मैंने उन्हें अपने साथ लिया और शास्त्रीजी के यहां हाजिर हो गया. मैंने शास्त्रीजी से कहा कि मैं पहले ही आपकी ओर से हां कह चुका हूं, आयोजक को आपसे औपचारिक तौर पर मिलवाने लाया हूं. उद्धाटन आपको ही करना है. मेरे मन में चोर यह था कि शास्त्रीजी प्रगतिशीलता के हिमायती रहे हैं. पूजापाठ को कर्मकांड मानकर इनकार न कर बैठें, लेकिन उन्होंने इसमें प्रसन्नता जाहिर की थी. एक तो इसलिए कि बंगाल में दुर्गापूजा और कालीपूजा को जिस उत्साह से लोग मनाते हैं, इससे वे भी सहमत थे कि यह केवल एक मांगलिक कार्य या विधि-विधान नहीं है, बल्कि लोकोत्सव है. दूसरे वे काली की पूजा को मातृशक्ति की पूजा मानते हैं. यह स्त्री की सत्ता का स्वीकार है.
और शाम को उन्होंने पूरे उत्साह से कालीपूजा पंडाल का उद्धाटन किया था. उन्होंने कहा था कि यह उनके लिए एक सुखद अनुभव का अवसर है.
एक बार एक संस्था ने मुझसे सलाह ली कि कोई ऐसा आयोजन किया जाए जो थोड़ा लीक से हटकर हो. तय यह हुआ कि प्रेम पर साहित्य चिन्तकों से बुलवाया जाए. शास्त्रीजी कोलकाता में थे. मेरे प्रति आत्मीयता रखने वाली और मेरी शोध निर्देशिका डॉ ऌलारानी सिंह को भी पढ़ा चुकी ज्ञानोदय के दौर की कथाकार-कवयित्री डॉ सुकीर्ति गुप्ता भी टालीगंज रहती हैं. मैं त्रिलोचनजी के साथ टैक्सी से उनके यहां पहुंचा और उन्हें भी रिसीव करता हुआ आयोजन स्थल ठनठनियां कालीबाड़ी जायसवाल भवन के लिए निकला था. सुकीर्तिजी काफी पहले से सजधज कर तैयार बैठी थीं, सो मेरे विलम्ब से पहुंचने पर उन्होंने मुझे कोसना शुरू कर दिया था. त्रिलोचनजी कोलकाता में हम सबके प्रिय भाई मनमोहन ठाकौर के किस्से सुनाते रहे, लेकिन वह दिन ऐसा था कि जगह-जगह तीन संगठनों के जुलूस मिले और रास्ता जाम का सामना करना पड़ा. गलती मेरी थी कि मैं खुद तयशुदा समय से काफी देर से शास्त्रीजी के यहां पहुंचा था. सुकीर्तिजी हर जाम के बाद धमकाती रहीं. कार्यक्रम खत्म होने के बाद पहुंचे तो तुम्हारा कान उमेठूंगी वगैरह-वगैरह. शास्त्रीजी मेरी हालत पर मुस्कुराते रहे और चुटकियां लेते रहे.
सुकीर्तिजी को प्रकारांतर से और भड़काते भी रहे और उस समय शास्त्रीजी ने सीख दी थी आयोजक हमेशा पदाधिकारी' होता है. अर्थात पद यानी लात खाने का अधिकारी. इस पर हम तीनों देर तक हंसते रहे थे और गनीमत यह थी कि आयोजकों ने कार्यक्रम त्रिलोचनजी को ध्यान में रखते हुए शुरू ही नहीं किया था.
और इन्हीं सुकीर्तिजी को शास्त्रीजी ने किस तरह से दुःखी किया था, इसका शायद उन्हें आज भी भान न हो. मैंने अपना एक प्रकाशन भी शुरू किया था नाद प्रकाशन के नाम से, जो डूब गया. सुकीर्ति गुप्ता का एक कथा संग्रह दायरे' काफी पहले शायद मेरे जन्म के पहले 1960 में छपा था. उन्हें अफसोस था कि जिस नाम से वह किताब छपी थी, एक साजिश के चलते वह कहानी उस संग्रह में शामिल ही नहीं की गई थी. वे फिर किसी साजिश का शिकार नहीं होना चाहती थीं, सो पहला कविता संग्रह शब्दों से घुलते-मिलते हुए' उन्होंने मुझे प्रकाशित करने को दिया था. इसके पहले मैंने सकलदीप सिंह औरर् कीत्तिनारायण मिश्र के काव्य संग्रह प्रकाशित किए थे, जिसकी साहित्यिक हलके में ठीक-ठाक चर्चा हो गई थी. इस वजह से भी मेरा प्रकाशन उन्हें भाया था. सबसे बड़ी बात यह थी कि वे मुझ पर हर तरह से धौंस जमा सकती थीं. उनकी धौंस का मैं इस कदर कायल रहा कि कई-कई बार प्रूफ देखने के बाद भी कई गलतियां उन्होंने छोड़ दी थीं और मुझे उनकी हिदायत थी कि मैं ज्ञान बघारने के लिए उनकी भाषा से छेड़छाड़ न करूं, प्रूफ वे खुद ही देखेंगी. उन्हें इस बात का भान न था कि केवल शब्द ज्ञान की कला ही प्रूफ देखने की कला नहीं है. साधारण तौर पर बगैर अभ्यास के प्रूफ देखा जाए तो तमाम गलतियां छूट जाया करती हैं. वे गलतियां तब नजर आती हैं, जब अवसर निकल चुका होता है. नतीजतन गलतियों की एक सूची भी छापनी पड़ी उन्हीं के कहने पर. पुस्तक अभी पूरी छपी न थी और कि इस बीच त्रिलोचन जी कोलकाता आए. सुकीर्तिजी ने एकाएक ठान लिया उन्हीं से पुस्तक का लोकार्पण कराना है. आनन-फानन में तीन रात जगकर पुस्तक छपी. लोकार्पण के समय पुस्तक की जिल्द गीली थी. समारोह में भी सुकीर्तिजी ने गलतियों के लिए अपने इस नराधम प्रकाशक को फटकारा था. शास्त्रीजी ने पुस्तक का लोकार्पण तो किया,
दुनिया-जहान की तमाम बातें की और बैठ गए. यह उन्हें याद नहीं रहा या जानबूझ कर याद करना नहीं चाहा कि यह कार्यक्रम सुकीर्ति गुप्ता की पुस्तक पर है उन पर या उनकी पुस्तक पर दो शब्द बोलें. सुर्कीतिजी की मायूसी को मैंने उसी समय ताड़ लिया था. वह तो गनीमत है कि मनमोहन ठाकौरजी ने सुर्कीतिजी की तारीफ में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी, वह आखिरकार सुकीर्तिजी के वर्षों पुराने दोस्त थे और मुझे भी दिलासा दिया था कि अपनों की फटकार भी उसके सम्मान की भाषा है.
मैं अभी दो सप्ताह पहले ही कोलकाता गया था. मेरे युवा चित्रकार और कवि मित्र नंदकिशोर ने बताया कि हाल ही में त्रिलोचनजी कोलकाता में थे. वे त्रिलोचनजी के साथ एक होटल में चले गए. वहां पाया कि शास्त्रीजी बातें किए जा रहे हैं और केवल रोटियां खा रहे हैं. उन्होंने टोका था- शास्त्रीजी सब्जी वगैरह भी लीजिए.' शास्त्रीजी का जवाब था-मुझे एक समय में एक ही चीज खाना पसंद है. सब्जियों की भी बारी आएगी.' इस तरह के किस्से भी त्रिलोचनजी पर खूब हैं, पर इसका प्रत्यक्ष अनुभव मुझे नहीं है. इधर समाचार पत्रों में खबर पढ़कर मर्माहत अवश्य हूआ कि जिस मुक्तिबोध सृजन पीठ का नाम त्रिलोचनजी की वजह से सुना था, उस पद पर आसीन इस महान विभूति को महज तीन हजार रपए मासिक दिए जाने का ही सरकारी प्रावधान था और उसके भुगतान में भी विलंब होता रंहा है. यह किसी भी संस्कृतिकर्मी के लिए सदमे से कम नहीं है. जिस पद से मुक्तिबोध और त्रिलोचन का नाम जुड़ा हो उसकी गरिमा यूं तार-तार है. इधर फिर राहत की खबर मिली कि अगस्त 2001 से मुक्तिबोध सृजन पीठ का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर दस हजार कर दिया गया है. हालांकि यह भी अपर्याप्त है.
हाल ही में फिर समाचारपत्रों से पता चला कि अस्वथता की वजह से उन्होंने सृजनपीठ का दायित्व छोड़ दिया है और वे बेटे के यहां हरिद्वार चले गए हैं. वे संभवतः उषा जी के साथ होेंगे, जहां उनका मायका है. अमित जी कुछ माह पहले कोलकाता जनसत्ता से ट्रांसफर होकर लखनऊ चले गए हैं. वहां से कभी-कभार उनके फोन मुझे यहां इंदौर में आते रहते हैं.
त्रिलोचनजी की कथा अनंत है. कभी साहस कर सका तो कुछ लिखूंगा. यह तो लिखने का उपक्रम भर है. शायद उनकी अनंतता से थोड़ा सा कुछ अभिव्यक्त कभी कर सकूं. मुझे याद आता है भैयाजी बनारसी का कथन जो अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले अपने इंटरव्यू में उन्होंने मुझसे कहा था. मैंने त्रिलोचनजी का उनसे जिक्र इसलिए किया था, क्योंकि त्रिलोचनजी ने उनके साथ आज' में भी पत्रकारिता की थी. ज्ञानमंडल लिमिटेड के शब्दकोष की रचना में भी त्रिलोचनजी की भूमिका रही है. भैयाजी बनारसी का कहना था कि त्रिलोचनजी ने कभी नौकरी की परवाह नहीं की. आज में कोई पढ़ने-लिखने वाला आ जाता तो उसके साथ बाहर किसी चाय आदि की दुकान पर निकल जाते थे और फिर उन्हें यह याद नहीं रहता था कि वे डयूटी पर हैं. जहां की योजना बन गई निकल जाते थे. कभी आज से खफा हो जाते तो जनवार्ता' में चले जाते थे और फिर वहां से खफा होकर आज में लौट आते. बंदिशें शास्त्रीजी के लिए नहीं थीं.
भैयाजी का मानना था कि त्रिलोचनजी को वह गरिमा नहीं मिल पाई है, जिसके वे हकदार हैं. उनके ज्ञान और प्रतिभा का दूसरों ने इस्तेमाल किया है. किसी जमाने में आलोचक उन्हें घेरे रहते थे और वे जो कुछ कहते-बोलते उसे लिख-लिख कर कई आलोचकों ने अपने ज्ञान का लोहा बौध्दिक समाज में मनवा लिया.
|
त्रिलोचनजी से मेरी मुलाकात कोलकाता में हुई थी. पहली मुलाकात के बाद से ही वे मेरी अभिव्यक्ति के लिए चुनौती बन गए थे. आज भी बने हुए हैं. हालांकि, पत्रकारिता के पेशे से जुड़ा होने का सबसे बड़ा लाभ मेरे खयाल से किसी लेखक को यह होता है कि वह अभिव्यक्ति के संकट से उतना आक्रांत नहीं होता, जितने अन्य लेखक होते हैं. यों यही उसके साहित्य को कई बार उथला और तात्कालिक बना देता है. पत्रकार के सामने पेशागत मजबूरी होती है कि वह अपने अनुभूत को शब्द देने में विलम्ब न करे. डेड लाइन की तलवार हमेशा उसके सिर पर लटकी होती है. इन सबके बावजूद लगभग पांच-सात सालों में मैं उन पर कुछ चाहकर भी न लिख पाया. जो कुछ लिखा वह इतना भर कि उन्होंने किसी सभा में क्या कहा समाचार कवरेज की जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए, लेकिन और बहुत कुछ लिखने का रह ही गया. और मैं उन पर कुछ लिखने के आंतरिक दबाव को लगातार टालता गया हूं तो सिर्फ इसलिए कि उनकी साधारण दिखने वाली असाधरणता मेरी अभिव्यक्ति के लिए चुनौती रही है. उन दिनों मैं लेखन के उस दौर से गुजर रहा था जब अपने लिखे पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने की बड़ी उत्सुकता रहती है. विख्यात लेखकों से मिलना-जुलना और उनसे खतों-किताबत करना लिखने से कम महत्वपूर्ण नहीं लगता. उन्हीं पत्रों में एक पत्र मुक्तिबोध सृजन पीठ, सागर के अध्यक्ष त्रिलोचन शास्त्री का भी था. उन दिनों उनकी प्रतिक्रिया ने संबल दिया था. और उनका खत कई मायनों में मेरे लिए इसलिए भी अहम् था, क्योंकि वे केदारनाथ सिंह के काव्य गुर रह चुके थे, जिन पर मैं कोलकाता विश्ववि'ालय से पीएचडी क़े लिए शोध कर रहा था. मैंने केदारजी पर पढ़ने के उपक्रम में ही त्रिलोचनजी के साहित्य को किसी हद तक पढ़ डाला था. कहना न होगा कि यह उस शोध-प्रक्रिया के कारण भी हूआ था, जिसमें केदारजी पर उनके पूर्ववर्ती कवियों के प्रभाव की पड़ताल करनी थी. जिस केदारनाथ सिंह ने बनारस में अपने विदयार्थी जीवन में त्रिलोचनजी के प्रभाव में सॉनेट लिखे थे, उन पर त्रिलोचनजी के आरंभिक प्रभाव के बाद उसका सीधा असर परिलक्षित नहीं किया जा सकता है. त्रिलोचनजी की कविता अपना असर धीरे-धीरे करती है. पहली नजर में उसकी सादगी ऐेसी कि किसी कौशल का पता ही नहीं देती. वह लगातार इस बात का एहसास दिलाती है कि कौशल के बगैर भी कविता लिखी जा सकती है. केदारजी की कविता का स्वभाव दूसरा है. काफी हद तक उन्होंने त्रिलोचनजी से उल्टी राह पकड़ी है. केदारजी के यहां साधारण हमेशा असाधारण की तरह आता है. हर छोटी-मोटी हलचल एक विस्मय बन जाया करती है, लेकिन त्रिलोचनजी के यहां गंभीर से गंभीर बात सहजता का दामन नहीं छोड़ती, इसलिए वे पढ़ते समय काफी असहज लगे थे. बिम्ब जैसे विधान की वहां कोई गुंजाइश नहीं थी जो केदारजी और शमशेर में मुझे उन दिनों विशेष प्रभावित कर रहा था. यहां यह कहना समीचीन होगा कि बाद में त्रिलोचनजी ने केदारजी की कविता को समझने की एक कुंजी दी थी. उन्होंने बताया था कि केदार की कविता की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे जो मुख्य रूप से कहना चाहते हैं, उसे कविता में जहां-तहां देते हैं. उनकी कविता पाठक पर अपना सम्मोहन जाल फेंक देती है और लोग नहीं समझ पाते आखिर क्या है उनकी कविता में और कहां है, जो उन्हें भा रहा है. दूसरे यह कि जिसने कई बेटियां ब्याही हों, वह अपने आप अच्छा कवि बन जाता है. कोई आसान काम नहीं अपने कलेजे के टुकड़ों को विदा करना. त्रिलोचन मुक्त कंठ से स्वीकार करते हैं कि केदार अपनी खूबियां के कारण हर युवा कवि के लिए चुनौती हैं और उसके नायक भी. हिन्दी में समकालीन कविता की जगह केदार के आस-पास ही है. इधर केदारजी ने भी मुझसे बातचीत में यह सहज स्वीकार किया कि त्रिलोचनजी गुर हैं पर आवश्यक नहीं कि शिष्य गुर की परंपरा को ही आगे बढ़ाए. उसे जो गुर से मिलता है वह चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की तमीज. अस्तु, यह एक इत्तफाक था कि कोलकाता से जनसत्ता' निकलने लगा तो त्रिलोचनजी के पुत्र अमित प्रकाश सिंह वहां समाचार सम्पादक होकर आ गए. उनसे धीरे-धीरे मित्रता होती गई. बहुत कम लोग जानते हैं कि वे भी प्यारी कविताएं लिख लेते हैं. यहां तक कि टालीगंज से जनसत्ता कार्यालय पहुंचने के दौरान मेट्रो रेल के संक्षिप्त सफर में उन्होंने कई कविताएं लिख डाली थीं. कई शास्त्रीय संगीत की महफिलों का लुत्फ हमने रात-रात एक साथ जागकर लिया है और उस पर लिखा भी है. बंगाल की नृत्य कलानाचनी' पर तो उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है कला समीक्षक वनिता झारखंडी के साथ मिलकर. ह्नऔर त्रिलोचनजी जब भी अमितजी के यहां पारिवारिक कारणों से या कोलकाता के किसी साहित्यिक आयोजन में आते, मुलाकात के अवसर मिलते रहे. अमितजी के टालीगंज निवास पर मैं शास्त्री के यहां घंटों जम जाता. अमितजी उस वक्त हमारे लिए लगभग अनुपस्थित से दूसरे कमरे में रहते या कहीं निकल जाते. उस समय मैं केवल त्रिलोचनजी का परिचित होता अमितजी का नहीं. पिता पुत्र के बीच कुछ ऐेसा था कि वे एक-दूसरे के सामने बहूत सहज नहीं हो पाते थे. इस समय मैं त्रिलोचनजी को करीब पाता. हमारी दुनिया दूसरी हो जाती और अमितजी हमें दूसरी दुनिया के लगते. अमितजी में सहजता और सांसारिक छद्म के निर्वाह की व्यावहारिकता का किसी हद तक अभाव रहा है, जिसके कारण एक काबिल पत्रकार की तमाम खूबियों के बावजूद वे अपने सहकर्मियों के बीच लोकप्रिय नहीं रहे हैं. शायद उन्होंने इसकी कोई आवश्यकता भी महसूस नहीं की. शास्त्रीजी बताते कैसे वे लाठी चलाने में कुशल थे. किस-किस भाषा को कब-कब और कैसे सीखा. दिवंगत पत्नी की चर्चा भी करते. जान कर अद्भुत लगता कि वे बनारस में अपने घर का पता भूल जाते थे. सावधानी से अपनी जेब में जेब में अपने घर का पता लिखकर रख लेते थे और अकसर अजनबी की तरह अपने घर का पता खोजते हुए लौटते. देर से लौटना गृह कलह का कारण बनता रहता. कई बार पर्ची खो जाती और अपने ऐसे परिचित को तलाशते जिसने उनका घर देखा हो. अपने घर लौटने के लिए उन्हें मार्गदर्शक की जरूरत पड़ती. बात को छिपाने के लिए परिचित को अपने घर न्योत ले जाते. यूं त्रिलोचनजी से बात करने का मतलब उन्हें सुनना ही होता. उनके पास बातों का अनन्त भंडार है और बातें भी ऐसी कि सुनते ही रह जाओ. वे हर शब्द की तह में पहुंच जाते हैं. कई भाषाओं, विभिन्न सब्जियों की विशेषताओं, विभिन्न देशों की ॠतुओं, विभिन्न पक्षियों के व्यवहार की जानकारी उन्हें थी. उनके अन्दर कई दुनिया मैंने महसूस की. कई बार तो मुझे लगा कि कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी के अधिक अकेले शास्त्रीजी में सूचनाएं भरी पड़ी हैैं. वे जीते जागते संदर्भ ग्रंथ हैं. वे बड़े कवि न भी होते तो भी उनका विद्वान उनसी स्मरण शक्ति का आदमी बिरला ही कोई होगा. या फिर संभव है हुआ ही न हो. पहले-पहल तो उनकी बातचीत की शैली अजीब लगी. मैंने पाया कि बातों का तारतम्य सुनने वाले के लिए गड्ड-मड्ड हो जाता है. वे एक बात को शुरू करते हैं, फिर बीच में ही उसके संदर्भ पर चर्चा छेड़ देते हैं. मूल बात तो वहीं कुछ देर के लिए ठहर जाती है और संदर्भ भी मूल बात सा विस्तार पाने लगता है. वहां से फिर एक नया संदर्भ जुड़ जाता है. इस प्रकार चार प्रसंग एक साथ चलने लगते हैं. रह-रहकर सबको वे थोड़ा-थोड़ा विस्तार देते चलते हैं. यदि आपने मनोहरश्याम जोशी को पढ़ा हो तो आप कुछ-कुछ अनुमान लगा सकते हैं, कथानक के भीतर कथानकों का अनंत सिलसिला. जैसे कोई वादक कई वाद्य यंत्र एक ही साथ हेरफेर के साथ ऐक ही सुर धुन में बजाता है. बात की यह शैली सुनने वाले के लिए खासी दिक्कत का सबब बन सकता है पर एक अभूतपूर्व अनुभव तक भी उसे ले जाता है. एक सुखद संयोग का था जब मुझे शास्त्रीजी की मौजूदगी में उनकी प्रिय कविताएं पढ़ने का अवसर मिला था. भारतीय भाषा परिषद की ओर से शायद उनकी पचहत्तर वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था. वहां शास्त्रीजी को अपनी प्रिय कविताएं भी सुनानी थीं. मैं अखबार से होने की वजह से आगे की पंक्ति में पत्रकारों के साथ बैठा था. अपनी एक कविता सुनाने के बाद शास्त्रीजी ने एकाएक मेरा नाम लेकर कहा था कि और कुछ कविताएं सुनाने का मन है जो अभिज्ञात पढ़कर सुनाएंगे. मेरे हाथ-पांव फूल गए थे, क्योंकि जिन कविताओं की अर्थतह तक पहुंचना किसी समय मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था, अब मुझे उसका पाठ करना था. मुझे भरी महफिल में उनकी डांट सुनने के आसार भी नजर आए थे. इसके कुछ अरसा पहले मैं बुजुर्ग कवि नार्गाजुन से कई लोगों के सामने पिट चुका था. सो इस तरह की आशंका निर्मूल नहीं थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हूआ. नागार्जुन व्यवहार में अराजक थे, लेकिन त्रिलोचन संयत. यहां तक कि मैंने पाया कि किसी सभा में ोता उनके लम्बे वक्तव्य से ऊबने लगते तो उन्हें अपनी बात समेटने के लिए पर्ची दे दी जाती. वे इसका बुरा नहीं मानते. वैसे भी वे बातों को जिस फलक तक ले जाने के आदी रहे हैं, उसे समेटने के लिए भी उन्हें काफी समय की आवश्यकता पड़ती है. खैर, शास्त्रीजी ने पुस्तकालय मेें उपलब्ध अपनी पसंद की कविताओं में पर्ची लगा रखी थी, सो कविताओं के चयन का संकट नहीं था. वह काव्य पाठ आज भी मेरे लिए सुख का विषय है. कार्यक्रम की समाप्ति पर उन्होंने मेरे पीठ पर हाथ रखा था जो आज भी कहीं मेरे अनुभूतियों में है. उनके आने की अग्रिम खबर मुझे अमितजी से पहले ही मिल जाया करती थी. वे एक बार संजोग से कालीपूजा के अवसर पर कोलकाता पहूंचे थे. कोलकाता में दुर्गापूजा के बाद कालीपूजा ही सबसे बड़ा जनोत्सव है. कालीपूजा पंडालों के उद्धाटन की प्रथा भी चल निकली है. पूजा कमेटियां किसी विख्यात व्यक्ति से पंडाल का उद्धाटन करवाती हैं. यहां लोकप्रिय अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से लेकर राज्यपाल तक इन सबमें व्यस्त रहते हैं. मेरे एक रंगकर्मी मित्र और प्रतिभा के संगीत-शिष्य शिव जायसवाल के नेतृत्व में भी एक पूजा कमेटी थी. उन्हें किसी उपयुक्त उद्धाटक की तलाश थी, सो मैंने उन्हें अपने साथ लिया और शास्त्रीजी के यहां हाजिर हो गया. मैंने शास्त्रीजी से कहा कि मैं पहले ही आपकी ओर से हां कह चुका हूं, आयोजक को आपसे औपचारिक तौर पर मिलवाने लाया हूं. उद्धाटन आपको ही करना है. मेरे मन में चोर यह था कि शास्त्रीजी प्रगतिशीलता के हिमायती रहे हैं. पूजापाठ को कर्मकांड मानकर इनकार न कर बैठें, लेकिन उन्होंने इसमें प्रसन्नता जाहिर की थी. एक तो इसलिए कि बंगाल में दुर्गापूजा और कालीपूजा को जिस उत्साह से लोग मनाते हैं, इससे वे भी सहमत थे कि यह केवल एक मांगलिक कार्य या विधि-विधान नहीं है, बल्कि लोकोत्सव है. दूसरे वे काली की पूजा को मातृशक्ति की पूजा मानते हैं. यह स्त्री की सत्ता का स्वीकार है. और शाम को उन्होंने पूरे उत्साह से कालीपूजा पंडाल का उद्धाटन किया था. उन्होंने कहा था कि यह उनके लिए एक सुखद अनुभव का अवसर है. एक बार एक संस्था ने मुझसे सलाह ली कि कोई ऐसा आयोजन किया जाए जो थोड़ा लीक से हटकर हो. तय यह हुआ कि प्रेम पर साहित्य चिन्तकों से बुलवाया जाए. शास्त्रीजी कोलकाता में थे. मेरे प्रति आत्मीयता रखने वाली और मेरी शोध निर्देशिका डॉ ऌलारानी सिंह को भी पढ़ा चुकी ज्ञानोदय के दौर की कथाकार-कवयित्री डॉ सुकीर्ति गुप्ता भी टालीगंज रहती हैं. मैं त्रिलोचनजी के साथ टैक्सी से उनके यहां पहुंचा और उन्हें भी रिसीव करता हुआ आयोजन स्थल ठनठनियां कालीबाड़ी जायसवाल भवन के लिए निकला था. सुकीर्तिजी काफी पहले से सजधज कर तैयार बैठी थीं, सो मेरे विलम्ब से पहुंचने पर उन्होंने मुझे कोसना शुरू कर दिया था. त्रिलोचनजी कोलकाता में हम सबके प्रिय भाई मनमोहन ठाकौर के किस्से सुनाते रहे, लेकिन वह दिन ऐसा था कि जगह-जगह तीन संगठनों के जुलूस मिले और रास्ता जाम का सामना करना पड़ा. गलती मेरी थी कि मैं खुद तयशुदा समय से काफी देर से शास्त्रीजी के यहां पहुंचा था. सुकीर्तिजी हर जाम के बाद धमकाती रहीं. कार्यक्रम खत्म होने के बाद पहुंचे तो तुम्हारा कान उमेठूंगी वगैरह-वगैरह. शास्त्रीजी मेरी हालत पर मुस्कुराते रहे और चुटकियां लेते रहे. सुकीर्तिजी को प्रकारांतर से और भड़काते भी रहे और उस समय शास्त्रीजी ने सीख दी थी आयोजक हमेशा पदाधिकारी' होता है. अर्थात पद यानी लात खाने का अधिकारी. इस पर हम तीनों देर तक हंसते रहे थे और गनीमत यह थी कि आयोजकों ने कार्यक्रम त्रिलोचनजी को ध्यान में रखते हुए शुरू ही नहीं किया था. और इन्हीं सुकीर्तिजी को शास्त्रीजी ने किस तरह से दुःखी किया था, इसका शायद उन्हें आज भी भान न हो. मैंने अपना एक प्रकाशन भी शुरू किया था नाद प्रकाशन के नाम से, जो डूब गया. सुकीर्ति गुप्ता का एक कथा संग्रह दायरे' काफी पहले शायद मेरे जन्म के पहले एक हज़ार नौ सौ साठ में छपा था. उन्हें अफसोस था कि जिस नाम से वह किताब छपी थी, एक साजिश के चलते वह कहानी उस संग्रह में शामिल ही नहीं की गई थी. वे फिर किसी साजिश का शिकार नहीं होना चाहती थीं, सो पहला कविता संग्रह शब्दों से घुलते-मिलते हुए' उन्होंने मुझे प्रकाशित करने को दिया था. इसके पहले मैंने सकलदीप सिंह औरर् कीत्तिनारायण मिश्र के काव्य संग्रह प्रकाशित किए थे, जिसकी साहित्यिक हलके में ठीक-ठाक चर्चा हो गई थी. इस वजह से भी मेरा प्रकाशन उन्हें भाया था. सबसे बड़ी बात यह थी कि वे मुझ पर हर तरह से धौंस जमा सकती थीं. उनकी धौंस का मैं इस कदर कायल रहा कि कई-कई बार प्रूफ देखने के बाद भी कई गलतियां उन्होंने छोड़ दी थीं और मुझे उनकी हिदायत थी कि मैं ज्ञान बघारने के लिए उनकी भाषा से छेड़छाड़ न करूं, प्रूफ वे खुद ही देखेंगी. उन्हें इस बात का भान न था कि केवल शब्द ज्ञान की कला ही प्रूफ देखने की कला नहीं है. साधारण तौर पर बगैर अभ्यास के प्रूफ देखा जाए तो तमाम गलतियां छूट जाया करती हैं. वे गलतियां तब नजर आती हैं, जब अवसर निकल चुका होता है. नतीजतन गलतियों की एक सूची भी छापनी पड़ी उन्हीं के कहने पर. पुस्तक अभी पूरी छपी न थी और कि इस बीच त्रिलोचन जी कोलकाता आए. सुकीर्तिजी ने एकाएक ठान लिया उन्हीं से पुस्तक का लोकार्पण कराना है. आनन-फानन में तीन रात जगकर पुस्तक छपी. लोकार्पण के समय पुस्तक की जिल्द गीली थी. समारोह में भी सुकीर्तिजी ने गलतियों के लिए अपने इस नराधम प्रकाशक को फटकारा था. शास्त्रीजी ने पुस्तक का लोकार्पण तो किया, दुनिया-जहान की तमाम बातें की और बैठ गए. यह उन्हें याद नहीं रहा या जानबूझ कर याद करना नहीं चाहा कि यह कार्यक्रम सुकीर्ति गुप्ता की पुस्तक पर है उन पर या उनकी पुस्तक पर दो शब्द बोलें. सुर्कीतिजी की मायूसी को मैंने उसी समय ताड़ लिया था. वह तो गनीमत है कि मनमोहन ठाकौरजी ने सुर्कीतिजी की तारीफ में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी, वह आखिरकार सुकीर्तिजी के वर्षों पुराने दोस्त थे और मुझे भी दिलासा दिया था कि अपनों की फटकार भी उसके सम्मान की भाषा है. मैं अभी दो सप्ताह पहले ही कोलकाता गया था. मेरे युवा चित्रकार और कवि मित्र नंदकिशोर ने बताया कि हाल ही में त्रिलोचनजी कोलकाता में थे. वे त्रिलोचनजी के साथ एक होटल में चले गए. वहां पाया कि शास्त्रीजी बातें किए जा रहे हैं और केवल रोटियां खा रहे हैं. उन्होंने टोका था- शास्त्रीजी सब्जी वगैरह भी लीजिए.' शास्त्रीजी का जवाब था-मुझे एक समय में एक ही चीज खाना पसंद है. सब्जियों की भी बारी आएगी.' इस तरह के किस्से भी त्रिलोचनजी पर खूब हैं, पर इसका प्रत्यक्ष अनुभव मुझे नहीं है. इधर समाचार पत्रों में खबर पढ़कर मर्माहत अवश्य हूआ कि जिस मुक्तिबोध सृजन पीठ का नाम त्रिलोचनजी की वजह से सुना था, उस पद पर आसीन इस महान विभूति को महज तीन हजार रपए मासिक दिए जाने का ही सरकारी प्रावधान था और उसके भुगतान में भी विलंब होता रंहा है. यह किसी भी संस्कृतिकर्मी के लिए सदमे से कम नहीं है. जिस पद से मुक्तिबोध और त्रिलोचन का नाम जुड़ा हो उसकी गरिमा यूं तार-तार है. इधर फिर राहत की खबर मिली कि अगस्त दो हज़ार एक से मुक्तिबोध सृजन पीठ का मानदेय तीन हजार से बढ़ाकर दस हजार कर दिया गया है. हालांकि यह भी अपर्याप्त है. हाल ही में फिर समाचारपत्रों से पता चला कि अस्वथता की वजह से उन्होंने सृजनपीठ का दायित्व छोड़ दिया है और वे बेटे के यहां हरिद्वार चले गए हैं. वे संभवतः उषा जी के साथ होेंगे, जहां उनका मायका है. अमित जी कुछ माह पहले कोलकाता जनसत्ता से ट्रांसफर होकर लखनऊ चले गए हैं. वहां से कभी-कभार उनके फोन मुझे यहां इंदौर में आते रहते हैं. त्रिलोचनजी की कथा अनंत है. कभी साहस कर सका तो कुछ लिखूंगा. यह तो लिखने का उपक्रम भर है. शायद उनकी अनंतता से थोड़ा सा कुछ अभिव्यक्त कभी कर सकूं. मुझे याद आता है भैयाजी बनारसी का कथन जो अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले अपने इंटरव्यू में उन्होंने मुझसे कहा था. मैंने त्रिलोचनजी का उनसे जिक्र इसलिए किया था, क्योंकि त्रिलोचनजी ने उनके साथ आज' में भी पत्रकारिता की थी. ज्ञानमंडल लिमिटेड के शब्दकोष की रचना में भी त्रिलोचनजी की भूमिका रही है. भैयाजी बनारसी का कहना था कि त्रिलोचनजी ने कभी नौकरी की परवाह नहीं की. आज में कोई पढ़ने-लिखने वाला आ जाता तो उसके साथ बाहर किसी चाय आदि की दुकान पर निकल जाते थे और फिर उन्हें यह याद नहीं रहता था कि वे डयूटी पर हैं. जहां की योजना बन गई निकल जाते थे. कभी आज से खफा हो जाते तो जनवार्ता' में चले जाते थे और फिर वहां से खफा होकर आज में लौट आते. बंदिशें शास्त्रीजी के लिए नहीं थीं. भैयाजी का मानना था कि त्रिलोचनजी को वह गरिमा नहीं मिल पाई है, जिसके वे हकदार हैं. उनके ज्ञान और प्रतिभा का दूसरों ने इस्तेमाल किया है. किसी जमाने में आलोचक उन्हें घेरे रहते थे और वे जो कुछ कहते-बोलते उसे लिख-लिख कर कई आलोचकों ने अपने ज्ञान का लोहा बौध्दिक समाज में मनवा लिया.
|
।ऑनलाईन आर0टी0आई0 सूचना प्रणाली।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 क्या है?
प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के संवर्धन के लिए, लोक प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों के सूचना के अधिकार की व्यावहारिक व्यवस्था को स्थापित करने हेतु भारत सरकार ने "सूचना का अधिकार अधिनियम 2005" को अधिनियमित किया जो 12.10.2005 से प्रभाव में आया।
- सूचना के अधिकार का मतलब?
इसमें किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रण में या उसके अधीन होने वाली जानकारी तक पहुंचने का अधिकार शामिल है तथा इसमें कार्यों, दस्तावेजों, अभिलेखों, नोट्स, निष्कर्षों या दस्तावेजों एवं रिकॉर्डों की प्रमाणित प्रतियों का निरीक्षण करने का अधिकार भी शामिल है तथा सामग्री के प्रमाणित नमूने को प्राप्त करके उसमें से प्रिंटआउट डिस्केट्स, फ़्लॉपीज़, टेप, वीडियो कैसेट या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली या प्रिंटआउट्स के माध्यम से जानकारी प्राप्त करना भी सम्मिलित है।
- सूचना के लिए कौन पूछ सकता है?
अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार है। चूंकि अधिनियम की जानकारी केवल भारत के नागरिकों को ही उपलब्ध कराई जा सकती है, इसलिये आवेदकों को अनुरोध के लिए नागरिकता दिखानी पड़ेगी । आवेदकों को अनुरोध हेतु अपनी संपर्क सूचना(डाक पता, दूरभाष, फैक्स नंबर, ई-माइल एड्रैस) भी देनी पड़ेगी।
- कौनसी सूचना को प्रकट किए जाने से छूट है?
अधिनियम के 8 व 9 धारा में उल्लेखित वर्गों की सूचना को प्रकट किए जाने से छूट है। इसलिये सूचना के लिए अनुरोध करने से पहले नागरिकों को पूर्वोक्त वर्गों का उल्लेख कर लेना चाहिए।
- सूचना के लिए अनुरोध करने की प्रक्रिया :
सूचना प्राप्त करने के लिए केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी को लिखित में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा अंग्रेज़ी, हिन्दी या अन्य उस क्षेत्र की राजभाषा में अनुरोध भेजा जा सकता है, मांगी गई सूचना के विवरण के उल्लेख के साथ-साथ निर्धारित शुल्क सम्मिलित करना अनिवार्य है। मौखिक अनुरोध को कम करने के लिए उचित सहायता प्रदान की जाएगी।
- निर्धारित शुल्क का भुगतानः
धारा 6 की उप-धारा (1) के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा या भारतीय डाक आदेश 6.2 द्वारा आवेदन शुल्क (रु. 10/-) सम्मिलित करना होगा। धारा 7 की उप-धारा(1) के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा शुल्क लिया जाएगा जिसके दर इस प्रकार हैंः रु.2/- प्रत्येक पृष्ठ के लिए (ए4 या ए3 साइज़ पृष्ठ में) जो सृजित या नकल किया गया; अभिलेखों के निरीक्षण हेतु प्रथम घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा तथा उसके बाद से प्रत्येक घंटे के लिए (रु. 05/-) लगेगा (या उसका अंश)। धारा 7 की उप-धारा (5) के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा शुल्क लिया जाएगा जिसके दर इस प्रकार हैंः डिस्क या फ्लॉपि में सूचना प्राप्त करने के लिए (रु.50/-) प्रति डिस्क/फ्लॉपिः तथा प्रकाशन से मुद्रित रूप में सूचना प्राप्त करने हेतु (रु. 02/-) प्रति पृष्ठ की फोटोकॉपी का शुल्क निर्धारित है। यदि जानकारी प्रदान करने की लागत का प्रतिनिधित्व करने वाले और भी शुल्क निर्धारित किए जाते हैं तो उसका का विवरण भी दिया जाएगा। गरीबी रेखा के नीचे आने वाले आवेदकों को इस शुल्क को जमा करने से छूट है।
- अनुरोध की प्रक्रिया तथा कई मामलों में अस्वीकृति के लिए आधार :
केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी जानकारी प्रदान करने के लिए अनुरोध पर प्रक्रिया करता है तथा उसका समय सीमा में निपटान करता है या तो सूचना प्रदान करके या अनुरोध को अस्वीकृत करके। केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी उस अनुरोध को अस्वीकृत कर सकता है जिसमें अन्य किसी राज्य के व्यक्ति द्वारा कॉपीराइट का उलंघन हो तथा वह सूचना जो छूट वाली श्रेणी की हो।
- प्राविधिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश में लोक सूचना अधिकारियों की संरचना (डिप्लोमा स्तर)
(सहायक निदेशक)
|
।ऑनलाईन आरशून्यटीशून्यआईशून्य सूचना प्रणाली। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच क्या है? प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के संवर्धन के लिए, लोक प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों के सूचना के अधिकार की व्यावहारिक व्यवस्था को स्थापित करने हेतु भारत सरकार ने "सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच" को अधिनियमित किया जो बारह.दस.दो हज़ार पाँच से प्रभाव में आया। - सूचना के अधिकार का मतलब? इसमें किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रण में या उसके अधीन होने वाली जानकारी तक पहुंचने का अधिकार शामिल है तथा इसमें कार्यों, दस्तावेजों, अभिलेखों, नोट्स, निष्कर्षों या दस्तावेजों एवं रिकॉर्डों की प्रमाणित प्रतियों का निरीक्षण करने का अधिकार भी शामिल है तथा सामग्री के प्रमाणित नमूने को प्राप्त करके उसमें से प्रिंटआउट डिस्केट्स, फ़्लॉपीज़, टेप, वीडियो कैसेट या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली या प्रिंटआउट्स के माध्यम से जानकारी प्राप्त करना भी सम्मिलित है। - सूचना के लिए कौन पूछ सकता है? अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार है। चूंकि अधिनियम की जानकारी केवल भारत के नागरिकों को ही उपलब्ध कराई जा सकती है, इसलिये आवेदकों को अनुरोध के लिए नागरिकता दिखानी पड़ेगी । आवेदकों को अनुरोध हेतु अपनी संपर्क सूचना भी देनी पड़ेगी। - कौनसी सूचना को प्रकट किए जाने से छूट है? अधिनियम के आठ व नौ धारा में उल्लेखित वर्गों की सूचना को प्रकट किए जाने से छूट है। इसलिये सूचना के लिए अनुरोध करने से पहले नागरिकों को पूर्वोक्त वर्गों का उल्लेख कर लेना चाहिए। - सूचना के लिए अनुरोध करने की प्रक्रिया : सूचना प्राप्त करने के लिए केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी को लिखित में या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा अंग्रेज़ी, हिन्दी या अन्य उस क्षेत्र की राजभाषा में अनुरोध भेजा जा सकता है, मांगी गई सूचना के विवरण के उल्लेख के साथ-साथ निर्धारित शुल्क सम्मिलित करना अनिवार्य है। मौखिक अनुरोध को कम करने के लिए उचित सहायता प्रदान की जाएगी। - निर्धारित शुल्क का भुगतानः धारा छः की उप-धारा के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा या भारतीय डाक आदेश छः.दो द्वारा आवेदन शुल्क सम्मिलित करना होगा। धारा सात की उप-धारा के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा शुल्क लिया जाएगा जिसके दर इस प्रकार हैंः रु.दो/- प्रत्येक पृष्ठ के लिए जो सृजित या नकल किया गया; अभिलेखों के निरीक्षण हेतु प्रथम घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा तथा उसके बाद से प्रत्येक घंटे के लिए लगेगा । धारा सात की उप-धारा के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ उचित रसीद के विरूद्ध नगद के माध्यम से या बैंक को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकरों के चेक द्वारा शुल्क लिया जाएगा जिसके दर इस प्रकार हैंः डिस्क या फ्लॉपि में सूचना प्राप्त करने के लिए प्रति डिस्क/फ्लॉपिः तथा प्रकाशन से मुद्रित रूप में सूचना प्राप्त करने हेतु प्रति पृष्ठ की फोटोकॉपी का शुल्क निर्धारित है। यदि जानकारी प्रदान करने की लागत का प्रतिनिधित्व करने वाले और भी शुल्क निर्धारित किए जाते हैं तो उसका का विवरण भी दिया जाएगा। गरीबी रेखा के नीचे आने वाले आवेदकों को इस शुल्क को जमा करने से छूट है। - अनुरोध की प्रक्रिया तथा कई मामलों में अस्वीकृति के लिए आधार : केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी जानकारी प्रदान करने के लिए अनुरोध पर प्रक्रिया करता है तथा उसका समय सीमा में निपटान करता है या तो सूचना प्रदान करके या अनुरोध को अस्वीकृत करके। केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी उस अनुरोध को अस्वीकृत कर सकता है जिसमें अन्य किसी राज्य के व्यक्ति द्वारा कॉपीराइट का उलंघन हो तथा वह सूचना जो छूट वाली श्रेणी की हो। - प्राविधिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश में लोक सूचना अधिकारियों की संरचना
|
New Delhi. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के छह करोड़ से अधिक सदस्यों को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 8. 65% की दर से ब्याज मिलेगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि EPFO जल्द अपने 6 करोड़ सदस्यों के खातों में ब्याज को क्रेडिट करेगा। उन्होंने कहा कि साल 2018-19 6 करोड़ सदस्यों को 8. 65 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा।
श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि वित्त मंत्री 8. 65 फीसदी ब्याज दर के लिए सहमत थी। इससे पहले ये खबरें आ रही थी कि वित्त मंत्रालय ब्याज दर कम करने के लिए कह रहा है। हालांकि, अब 8. 65 फीसदी की दर से EPF अंशधारकों को ब्याज मिलेगा। गंगवार ने कहा कि अब जल्द ही ये ब्याज खाताधारकों को मिलेगा।
इससे पहले श्रम मंत्रालय 2018-19 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8. 65% की ब्याज दर को जल्द अधिसूचित करेगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पहले इस बात की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय को इस ब्याज दर पर किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है। भविष्य निधि खाताधारकों के खाते में ब्याज का पैसा जमा करने के लिए श्रम मंत्रालय की अधिसूचना की जरूरत होती है। मंत्रालय ब्याज दर को लेकर अधिसूचना जारी करता है। इसके बाद ही भविष्यनिधि के छह करोड़ से ज्यादा अंशधारकों को इसका फायदा होगा।
इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस ब्याज दर पर भविष्य निधि कोष की निकासी के दावों का निपटान कर सकेंगे। फिलहाल, भविष्य निधि निकासी दावों के तहत EPFO 2018-19 के लिए 8. 65% की दर से ब्याज का भुगतान कर रही है। वहीं, वित्त वर्ष 2017-18 के लिए EPF जमा पर 8. 55% की ब्याज दर से ब्याज दिया गया था।
|
New Delhi. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के छह करोड़ से अधिक सदस्यों को वित्त वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए आठ. पैंसठ% की दर से ब्याज मिलेगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि EPFO जल्द अपने छः करोड़ सदस्यों के खातों में ब्याज को क्रेडिट करेगा। उन्होंने कहा कि साल दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस छः करोड़ सदस्यों को आठ. पैंसठ फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि वित्त मंत्री आठ. पैंसठ फीसदी ब्याज दर के लिए सहमत थी। इससे पहले ये खबरें आ रही थी कि वित्त मंत्रालय ब्याज दर कम करने के लिए कह रहा है। हालांकि, अब आठ. पैंसठ फीसदी की दर से EPF अंशधारकों को ब्याज मिलेगा। गंगवार ने कहा कि अब जल्द ही ये ब्याज खाताधारकों को मिलेगा। इससे पहले श्रम मंत्रालय दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर आठ. पैंसठ% की ब्याज दर को जल्द अधिसूचित करेगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पहले इस बात की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय को इस ब्याज दर पर किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है। भविष्य निधि खाताधारकों के खाते में ब्याज का पैसा जमा करने के लिए श्रम मंत्रालय की अधिसूचना की जरूरत होती है। मंत्रालय ब्याज दर को लेकर अधिसूचना जारी करता है। इसके बाद ही भविष्यनिधि के छह करोड़ से ज्यादा अंशधारकों को इसका फायदा होगा। इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इस ब्याज दर पर भविष्य निधि कोष की निकासी के दावों का निपटान कर सकेंगे। फिलहाल, भविष्य निधि निकासी दावों के तहत EPFO दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए आठ. पैंसठ% की दर से ब्याज का भुगतान कर रही है। वहीं, वित्त वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के लिए EPF जमा पर आठ. पचपन% की ब्याज दर से ब्याज दिया गया था।
|
Herbal Tea's Recipe For Healthy Skin: हम सभी ने ये सुन रखा है कि हर्बल चाय पीने के ढेरों फायदे हैं. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं हर्बल टी की रेसिपी जिन्हें आप जरूर ट्राई करना पसंद करेंगे.
Different Types Of Herbal Teas: चाय के शौकीन बहुत लोग होते हैं. कितने लोग तो ऐसे भी होते हैं जो दिन में कई बार चाय पीते हैं. वो इसलिए क्योंकि चाय पीने से वो ज्यादा Energetic महसूस करते हैं. चाय पीने के बाद वो किसी भी काम को ज्यादा अच्छे से कर पाते हैं. आपको यह तो पता होगा कि बहुत ज्यादा चाय पीना सेहत को नुकसान पहुंचाता है. इसी कारण से बहुत सारे लोग ऐसे भी आपको मिलेंगे जो बिल्कुल भी चाय नहीं पीते होंगे. लेकिन आज हम आपके लिए लेकर आए हैं हर्बल टी की एक ऐसी लिस्ट जो सेहत के लिए फायदेमंद तो है ही. साथ ही उसे पीने से स्किन और बाल भी हेल्दी रहते हैं.
ग्रीन टी पीने के बहुत सारे फायदे हैं और ये अब ज्यादातर घरों में मिल ही जाती है. इसे बनाना बहुत आसान है. इसे बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक पैन में पानी लेना है फिर उसमें ग्रीन टी डालकर अच्छे से उबालें. उबाल आने पर गैस को बंद कर दें. आपकी ग्रीन टी तैयार है.
पुदीने की चाय का सेवन करने से स्किन हेल्दी रहती है. इसे पीने से त्वचा को ठंडक मिलती है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 8-10 पुदीने की पत्तियां, काली मिर्च, काला नमक, 2 कप पानी. एक पैन में पानी उबलने के लिए रख दें और फिर उसमें पुदीने की पत्तियां, काली मिर्च, काला नमक को डालकर कुछ देर के लिए उबालें. आपकी पुदीने की चाय तैयार है.
रोज टी पीने के बहुत सारे फायदे हो सकते हैं. इसे पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है और ये पाचन तंत्र के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए थोड़ी सी ताजी कटी गुलाब की पंखुड़ियां, पानी और शहद.
सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को पानी से अच्छी तरह धो लें. अब पैन में पानी गर्म करें और उसमें गुलाब की पंखुड़ियों को डाल दें. पर ध्यान दें कि ये उबले नहीं. थोड़ी देर बाद इसे एक कप में छान लें और इसमें शहद मिला कर सर्व करें.
|
Herbal Tea's Recipe For Healthy Skin: हम सभी ने ये सुन रखा है कि हर्बल चाय पीने के ढेरों फायदे हैं. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं हर्बल टी की रेसिपी जिन्हें आप जरूर ट्राई करना पसंद करेंगे. Different Types Of Herbal Teas: चाय के शौकीन बहुत लोग होते हैं. कितने लोग तो ऐसे भी होते हैं जो दिन में कई बार चाय पीते हैं. वो इसलिए क्योंकि चाय पीने से वो ज्यादा Energetic महसूस करते हैं. चाय पीने के बाद वो किसी भी काम को ज्यादा अच्छे से कर पाते हैं. आपको यह तो पता होगा कि बहुत ज्यादा चाय पीना सेहत को नुकसान पहुंचाता है. इसी कारण से बहुत सारे लोग ऐसे भी आपको मिलेंगे जो बिल्कुल भी चाय नहीं पीते होंगे. लेकिन आज हम आपके लिए लेकर आए हैं हर्बल टी की एक ऐसी लिस्ट जो सेहत के लिए फायदेमंद तो है ही. साथ ही उसे पीने से स्किन और बाल भी हेल्दी रहते हैं. ग्रीन टी पीने के बहुत सारे फायदे हैं और ये अब ज्यादातर घरों में मिल ही जाती है. इसे बनाना बहुत आसान है. इसे बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक पैन में पानी लेना है फिर उसमें ग्रीन टी डालकर अच्छे से उबालें. उबाल आने पर गैस को बंद कर दें. आपकी ग्रीन टी तैयार है. पुदीने की चाय का सेवन करने से स्किन हेल्दी रहती है. इसे पीने से त्वचा को ठंडक मिलती है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए आठ-दस पुदीने की पत्तियां, काली मिर्च, काला नमक, दो कप पानी. एक पैन में पानी उबलने के लिए रख दें और फिर उसमें पुदीने की पत्तियां, काली मिर्च, काला नमक को डालकर कुछ देर के लिए उबालें. आपकी पुदीने की चाय तैयार है. रोज टी पीने के बहुत सारे फायदे हो सकते हैं. इसे पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है और ये पाचन तंत्र के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए थोड़ी सी ताजी कटी गुलाब की पंखुड़ियां, पानी और शहद. सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को पानी से अच्छी तरह धो लें. अब पैन में पानी गर्म करें और उसमें गुलाब की पंखुड़ियों को डाल दें. पर ध्यान दें कि ये उबले नहीं. थोड़ी देर बाद इसे एक कप में छान लें और इसमें शहद मिला कर सर्व करें.
|
वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज के लिए पाकिस्तान पहुंची श्रीलंका की टीम को हवाई अड्डे से ही राष्ट्राध्यक्षों के स्तर की सुरक्षा दी गई है।
श्रीलंकाई टीम यहां सुरक्षा विशेषज्ञों का प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के कुछ घंटे बाद पहुंची। खिलाड़ियों को भारी सुरक्षा के बीच ओल्ड कराची हवाई अड्डे से बुलेट प्रूफ कोस्टर (छोटी बस) और कार से सीधे होटल ले जाया गया।
पाकिस्तान की टीम भी कराची पहुंच चुकी है। श्रीलंकाई टीम पर मार्च 2009 के दौरे के दौरान लाहौर में आतंकी हमला हुआ था जिसमें छह खिलाड़ी घायल हुए थे। छह पाकिस्तानी पुलिसकर्मी और दो नागरिकों की इस हमले में मौत हो गई थी।
इस हमले के बाद अधिकतर अंतरराष्ट्रीय टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करने से इनकार दिया था। श्रीलंका के भी दस शीर्ष खिलाड़ियों ने हमले की आशंका से दौरे से हटने का फैसला किया है।
श्रीलंका इस दौरे में 27 सितंबर से दो अक्टूबर के बीच तीन वनडे खेलेगा। ये तीनों मैच कराची में होंगे। इसके बाद लाहौर में पांच से नौ अक्टूबर के बीच तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे।
|
वनडे और टी-बीस अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज के लिए पाकिस्तान पहुंची श्रीलंका की टीम को हवाई अड्डे से ही राष्ट्राध्यक्षों के स्तर की सुरक्षा दी गई है। श्रीलंकाई टीम यहां सुरक्षा विशेषज्ञों का प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के कुछ घंटे बाद पहुंची। खिलाड़ियों को भारी सुरक्षा के बीच ओल्ड कराची हवाई अड्डे से बुलेट प्रूफ कोस्टर और कार से सीधे होटल ले जाया गया। पाकिस्तान की टीम भी कराची पहुंच चुकी है। श्रीलंकाई टीम पर मार्च दो हज़ार नौ के दौरे के दौरान लाहौर में आतंकी हमला हुआ था जिसमें छह खिलाड़ी घायल हुए थे। छह पाकिस्तानी पुलिसकर्मी और दो नागरिकों की इस हमले में मौत हो गई थी। इस हमले के बाद अधिकतर अंतरराष्ट्रीय टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करने से इनकार दिया था। श्रीलंका के भी दस शीर्ष खिलाड़ियों ने हमले की आशंका से दौरे से हटने का फैसला किया है। श्रीलंका इस दौरे में सत्ताईस सितंबर से दो अक्टूबर के बीच तीन वनडे खेलेगा। ये तीनों मैच कराची में होंगे। इसके बाद लाहौर में पांच से नौ अक्टूबर के बीच तीन टी-बीस अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे।
|
4.78 ppm एक क्वार्टेट (quartet) है; 1.78 ppm एक डबलेट (doublet) है। एक क्वार्टेट और एक डबलेट का अनिवार्य रूप से मतलब है की आपके पास CH3CH तरह का फंक्शन ग्रुप है। लाल हाइड्रोजन क्वार्टेट (quartet) होगा जो कि 1 हाइड्रोजन इंटेंसिटी है; और नीला हाइड्रोजन डबलेट होगा जो कि 3 हाइड्रोजन इंटेंसिटी का है। हमने पहले वाले तर्क से ही एरियल ऑक्सी फंक्शनल ग्रुप (aryl oxy functional group) की पहचान कर ली है, कि यह एक एरियल ऑक्सी फंक्शनल ग्रुप है। इसलिए, हम R समूह को उन एलीफेंट सिग्नल के संदर्भ में देख रहे हैं जो इस विशेष उदाहरण में दिखाई देते हैं। तो, ४ या तो फिर क्लोरीन होगा या फिर कारबॉक्सलिक एसिड ( chlorine, or carboxylic acid) होगा।
संभव है की यह एक कारबॉक्सलिक एसिड (carboxylic acid) है जो लाल हाइड्रोजन के रसायनिक बदलाव की वजह से है जो कि X है जो अनिवार्य रूप से 4.7 ppm के आसपास आ रहा है। आमतौर पर, अगर यह कार्बन रखने वाले ऑक्सीजन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है तब वह 4.1ppm के आसपास आएगा। अगर वहां पर कोई अन्य इलेक्ट्रॉन विड्राविंग फंक्शनल ग्रुप है जैसे की COOH जुड़ा हुआ है, तब वह 4.78 के पास आएगा। इससे अतिरिक्त, अगर कोई कारबॉक्सी फंक्शनल ग्रुप एरोमेटिक रिंग से जुड़ा हुआ है तब उसके पास अनिवार्य रूप से एक हाइड्रोजन डीशीलडिड (deshielded) होगा जो 7.5ppm के आसपास आता है लेकिन यहां पर 7.5 ppm के आस पास कोई भी सिग्नल नहीं है, पर हम यहां देख सकते हैं कि सिग्रल 7.25 के पास ही रुक जाता है। तो कारबॉक्सलिक एसिड एरोमेटिक रिंग से जुड़ नहीं हो सकता; वह सिर्फ साइड चेन से ही जुड़ हो सकता है। तो क्लोरीन एरोमेटिक रिंग से जुड़ा हुआ है और साइड चैन इस विशेष मामले में कारबॉक्सलिक
एसिड से जुड़ी हुई है। तो वास्तव में मेटा क्लोरोफिनॉक्सीप्रोपीयोनिक एसिड (meta chlorophenoxypropionic acid) वह मॉलिक्यूल है जिसकी हम बात कर रहे हैं।
(Refer Slide Time: 11:52)
चलिए देखते हैं कि क्या अगर हम पीक को भी निरुपित कर पाते हैं या नहीं I Ha, जो b और d के कारण एक ट्रिपलेट (triplet) होना चाहिए, अनिवार्य रूप से मेटा कपलिंग (meta coupling) के साथ ट्रिपलेट के रूप में आता है। मेटा कपलिंग (meta coupling) गलती से बराबर हैं; यही कारण है कि, यहाँ एक ट्रिपलेट की तरह दिखता है। Hc भी एक ट्रिपलेट (triplet) है, जो ऑर्थो कपलिंग (ortho coupling) की वजह से है ; गलती से दो ऑर्थो कपलिंग (ortho coupling) समान है। तो इस विशेष मामले में, यह एक ट्रिपलेट की
COOH Ha H3C - 0. CI
तरह नजर आता है। Hb काफी जटिल है जो इस क्षेत्र में यहां आ रहा है। Ha ऑक्सीजन (oxygen) से निकट है इसीलिए ऑक्सीजन के लिए आर्थो (ortho) सबसे कम डेल्टा (delta) मूल्य पर आता है। तो, Hd के पास एक ऑर्थो कपलिंग (ortho coupling) होगा और दो मेटा कपलिंग पार्टनर (meta coupling partners) होंगे जो कि Ha और Hb
है। शायद, Ha Hd कपलिंग (coupling) Hb Hd कपलिंग से अलग है। इसलिए, यह काफी हद तक मल्टीप्लेट (multiplet) प्रकार की एक चीज है जिसे हम देख रहे हैं।
मैं कहना चाहूंगा की ऑर्थो कपलिंग (ortho coupling) की वजह से यह एक डबलेट ( doublet) है। फिर से मेटा कपलिंग (meta coupling) की वजह से एक डबलेट है; पार्टनर b के साथ कपलिंग होने की वजह से एक और अन्य डबलेट है। तो, यह एक डबलेट के डबलेट का डबलेट होगा; 8 रेखाओं का पैटर्न हम यहां देख सकते हैं। लेकिन मेटा कपलिंग काफी छोटे हैं कि हम उन्हें इस विशेष मामले में अच्छे से नहीं देख पाते हैं। सिर्फ ऑर्थो कपलिंग ( बड़ी कपलिंग की तरह नजर आता है। तो अनिवार्य रूप से यह कंपाउंड के प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम को पूर्ण करता है। तो एक को कंपाउंड की संरचना को पहचानना होगा, वास्तव में तथ्य से आपके पास इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम के साथ-साथ प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम भी है। सिर्फ इन दो स्पेक्ट्रेल डाटा से ही कंपाउंड को पहचानना संभव है। इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम मौजूद फंक्शनल ग्रुप के संकेत देता है और मॉलिक्यूलर फार्मूला दूसरे सब्सीट्यूएंट के लिए संकेत देता है जोकि शायद क्लोरीन सबसीक्वेंट हो सकता है। प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम संरचनात्मक जानकारी देता है। तो जानकारी को आधार बनाकर हम संरचना पर आते हैं जो कि एक विशेष संरचना है जो दिए हुए स्पेक्ट्रोस्कोपिक डाटा से मेल खाता है। अब नियुक्ति भी साफ तौर पर नजर आती है; Ha, Hb
, Hc,Hd अच्छी तरह से नियुक्त करे गए हैं। मल्टीप्लेट को आसानी से समझाया जा सकता है तथ्यों को आधार बनाकर हमारे पास इस विशेष उदाहरण में ऑर्थो और मेटा कपलिंग है।
|
चार.अठहत्तर ppm एक क्वार्टेट है; एक.अठहत्तर ppm एक डबलेट है। एक क्वार्टेट और एक डबलेट का अनिवार्य रूप से मतलब है की आपके पास CHतीनCH तरह का फंक्शन ग्रुप है। लाल हाइड्रोजन क्वार्टेट होगा जो कि एक हाइड्रोजन इंटेंसिटी है; और नीला हाइड्रोजन डबलेट होगा जो कि तीन हाइड्रोजन इंटेंसिटी का है। हमने पहले वाले तर्क से ही एरियल ऑक्सी फंक्शनल ग्रुप की पहचान कर ली है, कि यह एक एरियल ऑक्सी फंक्शनल ग्रुप है। इसलिए, हम R समूह को उन एलीफेंट सिग्नल के संदर्भ में देख रहे हैं जो इस विशेष उदाहरण में दिखाई देते हैं। तो, चार या तो फिर क्लोरीन होगा या फिर कारबॉक्सलिक एसिड होगा। संभव है की यह एक कारबॉक्सलिक एसिड है जो लाल हाइड्रोजन के रसायनिक बदलाव की वजह से है जो कि X है जो अनिवार्य रूप से चार.सात ppm के आसपास आ रहा है। आमतौर पर, अगर यह कार्बन रखने वाले ऑक्सीजन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है तब वह चार.एकppm के आसपास आएगा। अगर वहां पर कोई अन्य इलेक्ट्रॉन विड्राविंग फंक्शनल ग्रुप है जैसे की COOH जुड़ा हुआ है, तब वह चार.अठहत्तर के पास आएगा। इससे अतिरिक्त, अगर कोई कारबॉक्सी फंक्शनल ग्रुप एरोमेटिक रिंग से जुड़ा हुआ है तब उसके पास अनिवार्य रूप से एक हाइड्रोजन डीशीलडिड होगा जो सात.पाँचppm के आसपास आता है लेकिन यहां पर सात.पाँच ppm के आस पास कोई भी सिग्नल नहीं है, पर हम यहां देख सकते हैं कि सिग्रल सात.पच्चीस के पास ही रुक जाता है। तो कारबॉक्सलिक एसिड एरोमेटिक रिंग से जुड़ नहीं हो सकता; वह सिर्फ साइड चेन से ही जुड़ हो सकता है। तो क्लोरीन एरोमेटिक रिंग से जुड़ा हुआ है और साइड चैन इस विशेष मामले में कारबॉक्सलिक एसिड से जुड़ी हुई है। तो वास्तव में मेटा क्लोरोफिनॉक्सीप्रोपीयोनिक एसिड वह मॉलिक्यूल है जिसकी हम बात कर रहे हैं। चलिए देखते हैं कि क्या अगर हम पीक को भी निरुपित कर पाते हैं या नहीं I Ha, जो b और d के कारण एक ट्रिपलेट होना चाहिए, अनिवार्य रूप से मेटा कपलिंग के साथ ट्रिपलेट के रूप में आता है। मेटा कपलिंग गलती से बराबर हैं; यही कारण है कि, यहाँ एक ट्रिपलेट की तरह दिखता है। Hc भी एक ट्रिपलेट है, जो ऑर्थो कपलिंग की वजह से है ; गलती से दो ऑर्थो कपलिंग समान है। तो इस विशेष मामले में, यह एक ट्रिपलेट की COOH Ha Hतीन डिग्री सेल्सियस - शून्य. CI तरह नजर आता है। Hb काफी जटिल है जो इस क्षेत्र में यहां आ रहा है। Ha ऑक्सीजन से निकट है इसीलिए ऑक्सीजन के लिए आर्थो सबसे कम डेल्टा मूल्य पर आता है। तो, Hd के पास एक ऑर्थो कपलिंग होगा और दो मेटा कपलिंग पार्टनर होंगे जो कि Ha और Hb है। शायद, Ha Hd कपलिंग Hb Hd कपलिंग से अलग है। इसलिए, यह काफी हद तक मल्टीप्लेट प्रकार की एक चीज है जिसे हम देख रहे हैं। मैं कहना चाहूंगा की ऑर्थो कपलिंग की वजह से यह एक डबलेट है। फिर से मेटा कपलिंग की वजह से एक डबलेट है; पार्टनर b के साथ कपलिंग होने की वजह से एक और अन्य डबलेट है। तो, यह एक डबलेट के डबलेट का डबलेट होगा; आठ रेखाओं का पैटर्न हम यहां देख सकते हैं। लेकिन मेटा कपलिंग काफी छोटे हैं कि हम उन्हें इस विशेष मामले में अच्छे से नहीं देख पाते हैं। सिर्फ ऑर्थो कपलिंग ( बड़ी कपलिंग की तरह नजर आता है। तो अनिवार्य रूप से यह कंपाउंड के प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम को पूर्ण करता है। तो एक को कंपाउंड की संरचना को पहचानना होगा, वास्तव में तथ्य से आपके पास इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम के साथ-साथ प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम भी है। सिर्फ इन दो स्पेक्ट्रेल डाटा से ही कंपाउंड को पहचानना संभव है। इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम मौजूद फंक्शनल ग्रुप के संकेत देता है और मॉलिक्यूलर फार्मूला दूसरे सब्सीट्यूएंट के लिए संकेत देता है जोकि शायद क्लोरीन सबसीक्वेंट हो सकता है। प्रोटोन NMR स्पेक्ट्रम संरचनात्मक जानकारी देता है। तो जानकारी को आधार बनाकर हम संरचना पर आते हैं जो कि एक विशेष संरचना है जो दिए हुए स्पेक्ट्रोस्कोपिक डाटा से मेल खाता है। अब नियुक्ति भी साफ तौर पर नजर आती है; Ha, Hb , Hc,Hd अच्छी तरह से नियुक्त करे गए हैं। मल्टीप्लेट को आसानी से समझाया जा सकता है तथ्यों को आधार बनाकर हमारे पास इस विशेष उदाहरण में ऑर्थो और मेटा कपलिंग है।
|
कम्प्यूटर मानव': 'भगवान के कारखाने में बनने वाले असली मानव को जीवन के हर क्षेत्र में पछाड़ देगा। उनका बनाया कम्प्यूटर मानव ईमानदार है, लगन का पक्का है, मेहनती है, यह भाई भतीजा वाद में विश्वास नहीं रखता । और न मंत्री पद के लालच में बेचा या खरीदा जा सकता है । प्रोफेसर पोटैटो का विचार है कि भविष्य में उनके बनाये कम्प्यूटर मानव सरकार चलाने और देश की सेवा करने में भगवान के बनाये नेताओं से
अधिक प्रतिभाशाली सिद्ध होंगे ।
प्रोफेसर से कहेंगे वह अपना एक कम्प्यूटर मानव हमें कुछ दिन के लिये उधार दे दे
जरा सोचकर देखो आज के युग में विज्ञान ने मनुष्य को -कहां से कहां पहुंचा दिया है। तीन चार सौ साल पहले हम बैलगाड़ी या ऊंटगाड़ी से आगे की बात सोच भी नहीं सकते, थे। और इस बात पर कोई सपने में भी विश्वास नहीं कर सकता था कि एक दिन इंसान चांद पर चर्खा कातने वाली बुढ़िया के पास जाकर खड़ा हो जाएगा। हमारे दैनिक जीवन को विज्ञान ने कितना सुखी बना दिया। ऊंची से ऊंची बिल्डिंग पर हमें लिफ्ट सैकिण्डों में पहुंचा देती है। टेलिफोन, टेलीविजन रैफ्रीजेंटर, आटोमेटिक कुकुर, हीटर,
चलो प्रोफेसर पोटैटो के पास चलकर देख
• उसने कैसा
कम्प्यूटर मानव बनाया है।
मोटू-पतलू प्रोफेसर पोटैटो से मिले तो उसकी योग्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सके ।
ऐयर कंडीशनर, इलैक्ट्रिक रेजर, वाशिंग मशीन, इलेक्ट्रिक, कुकर, पंखे, गीजर, ट्यूब लाईट्स, कैमरा, ट्रांजिस्टर, टेप रिकार्डर, पिक्चर रिकार्डर, स्कूटर, मोटर और ऐसी कितनी ही छोटी मोटी मशीनें बन गई हैं जिन्हें उपयोग में लाकर हम अधिक से अधिक लाभ उठाते हैं और अब कम्प्यूटर बनने के बाद तो हमारी सैंकड़ों मुश्किलें प्रासान हो गई हैं। सच पूछो तो आज ऐसा कौन-सा
काम है जो आटोमैटिक मशीनों द्वारा नहीं होता।
|
कम्प्यूटर मानव': 'भगवान के कारखाने में बनने वाले असली मानव को जीवन के हर क्षेत्र में पछाड़ देगा। उनका बनाया कम्प्यूटर मानव ईमानदार है, लगन का पक्का है, मेहनती है, यह भाई भतीजा वाद में विश्वास नहीं रखता । और न मंत्री पद के लालच में बेचा या खरीदा जा सकता है । प्रोफेसर पोटैटो का विचार है कि भविष्य में उनके बनाये कम्प्यूटर मानव सरकार चलाने और देश की सेवा करने में भगवान के बनाये नेताओं से अधिक प्रतिभाशाली सिद्ध होंगे । प्रोफेसर से कहेंगे वह अपना एक कम्प्यूटर मानव हमें कुछ दिन के लिये उधार दे दे जरा सोचकर देखो आज के युग में विज्ञान ने मनुष्य को -कहां से कहां पहुंचा दिया है। तीन चार सौ साल पहले हम बैलगाड़ी या ऊंटगाड़ी से आगे की बात सोच भी नहीं सकते, थे। और इस बात पर कोई सपने में भी विश्वास नहीं कर सकता था कि एक दिन इंसान चांद पर चर्खा कातने वाली बुढ़िया के पास जाकर खड़ा हो जाएगा। हमारे दैनिक जीवन को विज्ञान ने कितना सुखी बना दिया। ऊंची से ऊंची बिल्डिंग पर हमें लिफ्ट सैकिण्डों में पहुंचा देती है। टेलिफोन, टेलीविजन रैफ्रीजेंटर, आटोमेटिक कुकुर, हीटर, चलो प्रोफेसर पोटैटो के पास चलकर देख • उसने कैसा कम्प्यूटर मानव बनाया है। मोटू-पतलू प्रोफेसर पोटैटो से मिले तो उसकी योग्यता से प्रभावित हुए बिना न रह सके । ऐयर कंडीशनर, इलैक्ट्रिक रेजर, वाशिंग मशीन, इलेक्ट्रिक, कुकर, पंखे, गीजर, ट्यूब लाईट्स, कैमरा, ट्रांजिस्टर, टेप रिकार्डर, पिक्चर रिकार्डर, स्कूटर, मोटर और ऐसी कितनी ही छोटी मोटी मशीनें बन गई हैं जिन्हें उपयोग में लाकर हम अधिक से अधिक लाभ उठाते हैं और अब कम्प्यूटर बनने के बाद तो हमारी सैंकड़ों मुश्किलें प्रासान हो गई हैं। सच पूछो तो आज ऐसा कौन-सा काम है जो आटोमैटिक मशीनों द्वारा नहीं होता।
|
कर्मचारियों को जल्द ही उनके बकाए वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। कर्मचारियों को होने वाले वेतन भुगतान के साथ ही उनके खाते में 25 से 30 हजार रुपए तक की राशि देखने को मिलेगी।
Employees Arrears Payment : कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल उनके वेतन का रास्ता साफ हो गया है। जल्द उन्हें बकाये वेतन का भुगतान किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारी संघ की मांग पर गौर किया गया है। दरअसल तकनीकी कारणों से कर्मचारियों के 1 महीने का वेतन रुका हुआ था। वहीं कर्मचारी वेतन जारी करने की मांग कर रहे थे।
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में सेवारत कर्मचारियों को अब जल्दी वेतन जारी किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारी संघ की मांग पर गौर किया गया। वहीं उपायुक्त हमीरपुर देवश्वेता बनीक को आयोग का छोटी भी नियुक्त किया गया है। आयोग के एचओडी को यह अधिकार होगा कि वह डीडीओ की शक्तियां किसी भी अधिकारी को प्रदान कर सकते हैं। वहीं अधिकारी को डीडीओ की शक्ति मिलने के बाद वह कर्मचारियों के वेतन को जारी कर सकते हैं।
इसके साथ ही विजिलेंस की ओर से भर्ती परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में भी जांच की जा रही है। विजिलेंस द्वारा प्रदेश के उन सभी उम्मीदवारों को विजिलेंस थाना में तलब किया गया है, जिसकी पूर्व सचिव की बात हुई थी। हालांकि फोन पर बात करने वाले में कई उम्मीदवार शामिल है। यह ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपने एडमिट कार्ड जारी न होने की स्थिति में और परीक्षा केंद्र से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए पूर्व सचिव को फोन किया था। विजिलेंस द्वारा अपनी जांच में यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि पेपर लीक में यह उम्मीदवार शामिल तो नहीं। फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। वही विजिलेंस द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर, जूनियर ऑडिटर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जिनमें से चार को जमानत मिल चुकी है।
वही वेतन जारी होने के साथ ही कर्मचारियों के खाते में 25 से 30 हजार रुपए की राशि देखी जाएगी। बता दें कि पिछले 1 महीने से कर्मचारियों को इन कारणों की वजह से वेतन का भुगतान किया गया था। इसको लेकर आयोग के उच्च अधिकारी तक कर्मचारी अपनी बात पहुंचा रहे थे।
|
कर्मचारियों को जल्द ही उनके बकाए वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। कर्मचारियों को होने वाले वेतन भुगतान के साथ ही उनके खाते में पच्चीस से तीस हजार रुपए तक की राशि देखने को मिलेगी। Employees Arrears Payment : कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल उनके वेतन का रास्ता साफ हो गया है। जल्द उन्हें बकाये वेतन का भुगतान किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारी संघ की मांग पर गौर किया गया है। दरअसल तकनीकी कारणों से कर्मचारियों के एक महीने का वेतन रुका हुआ था। वहीं कर्मचारी वेतन जारी करने की मांग कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में सेवारत कर्मचारियों को अब जल्दी वेतन जारी किया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारी संघ की मांग पर गौर किया गया। वहीं उपायुक्त हमीरपुर देवश्वेता बनीक को आयोग का छोटी भी नियुक्त किया गया है। आयोग के एचओडी को यह अधिकार होगा कि वह डीडीओ की शक्तियां किसी भी अधिकारी को प्रदान कर सकते हैं। वहीं अधिकारी को डीडीओ की शक्ति मिलने के बाद वह कर्मचारियों के वेतन को जारी कर सकते हैं। इसके साथ ही विजिलेंस की ओर से भर्ती परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में भी जांच की जा रही है। विजिलेंस द्वारा प्रदेश के उन सभी उम्मीदवारों को विजिलेंस थाना में तलब किया गया है, जिसकी पूर्व सचिव की बात हुई थी। हालांकि फोन पर बात करने वाले में कई उम्मीदवार शामिल है। यह ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपने एडमिट कार्ड जारी न होने की स्थिति में और परीक्षा केंद्र से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए पूर्व सचिव को फोन किया था। विजिलेंस द्वारा अपनी जांच में यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि पेपर लीक में यह उम्मीदवार शामिल तो नहीं। फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। वही विजिलेंस द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर, जूनियर ऑडिटर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जिनमें से चार को जमानत मिल चुकी है। वही वेतन जारी होने के साथ ही कर्मचारियों के खाते में पच्चीस से तीस हजार रुपए की राशि देखी जाएगी। बता दें कि पिछले एक महीने से कर्मचारियों को इन कारणों की वजह से वेतन का भुगतान किया गया था। इसको लेकर आयोग के उच्च अधिकारी तक कर्मचारी अपनी बात पहुंचा रहे थे।
|
नयी दिल्ली, 19 जून केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि 'कोविड सीवियरिटी स्कोर' नामक एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो ऐसे मरीजों की पहले से पहचान कर सकता है जिन्हें वेंटिलेटर या आपातकालीन सेवा और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है।
इस सॉफ्टवेयर में ऐसा 'एल्गोरिदम' है जो कुछ मानकों को मापकर उन मरीजों की पहचान करता है जिन्हें आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इसकी मदद से समय पर चिकित्सा पहुंचाई जा सकती है और आपातकालीन स्थिति होने से पहले आवश्यक इंतजाम किये जा सकते हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि इस सॉफ्टवेयर की सहायता से उन मरीजों को अस्पतालों द्वारा दिए गए 'रेफरल' की संख्या घटाने में मदद मिल सकती है जिन्हें गंभीर देखभाल की जरूरत नहीं पड़ सकती।
प्रायः देखा जाता है कि अस्पताल, ऐसे मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में रेफर कर देते हैं जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर जैसी आवश्यकता नहीं होती। यह सॉफ्टवेयर ऐसे मरीजों की पहचान कर सकता है जिससे अन्य मरीजों को बिस्तर मिल सकते हैं।
आईआईटी गुवाहाटी, डॉ केविन धालीवाल, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और डब्ल्यूएचओ में काम कर चुके डॉ सायंतन बंद्योपाध्याय ने संयुक्त रूप से सीएसएस विकिसित किया है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
नयी दिल्ली, उन्नीस जून केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि 'कोविड सीवियरिटी स्कोर' नामक एक सॉफ्टवेयर बनाया गया है जो ऐसे मरीजों की पहले से पहचान कर सकता है जिन्हें वेंटिलेटर या आपातकालीन सेवा और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। इस सॉफ्टवेयर में ऐसा 'एल्गोरिदम' है जो कुछ मानकों को मापकर उन मरीजों की पहचान करता है जिन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इसकी मदद से समय पर चिकित्सा पहुंचाई जा सकती है और आपातकालीन स्थिति होने से पहले आवश्यक इंतजाम किये जा सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि इस सॉफ्टवेयर की सहायता से उन मरीजों को अस्पतालों द्वारा दिए गए 'रेफरल' की संख्या घटाने में मदद मिल सकती है जिन्हें गंभीर देखभाल की जरूरत नहीं पड़ सकती। प्रायः देखा जाता है कि अस्पताल, ऐसे मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में रेफर कर देते हैं जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर जैसी आवश्यकता नहीं होती। यह सॉफ्टवेयर ऐसे मरीजों की पहचान कर सकता है जिससे अन्य मरीजों को बिस्तर मिल सकते हैं। आईआईटी गुवाहाटी, डॉ केविन धालीवाल, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और डब्ल्यूएचओ में काम कर चुके डॉ सायंतन बंद्योपाध्याय ने संयुक्त रूप से सीएसएस विकिसित किया है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
आगामी 3 मार्च को खाटू श्याम जी मे फाल्गुनी मेले को लेकर खाटू श्याम एवं सालासर बालाजी के दर्शनार्थ के लिए श्याम मित्र मंडल डेगाना का जत्था रवाना हुआ। श्याम मित्र मंडल डेगाना सदस्य पार्षद प्रतिनिधि युवा नेता हेमंत दाधीच के सानिध्य में रेलवे शिव मन्दिर से पूजा अर्चना कर संघ को श्याम ध्वजा दिखाकर रवाना किया गया। इस पदयात्रा में करीब 30 से ज्यादा श्याम भक्त शामिल है . सभी श्याम भक्त आज बुधवार को भजन कीर्तन कर रवाना हुए।
श्याम मित्र मंडल संघ कल गुरुवार को 11 बजे रिंगस से पैदल रवाना होकर खाटू धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन का लाभ लेंगे. श्याम मित्र मंडल संघ डेगाना की ओर से फाल्गुन मास में तीसरी बार गुरुवार को यह संघ रिंगस से खाटू श्याम तक पैदल चलकर बाबा के दर्शन करेंगे। संघ अध्यक्ष मदन गोपाल बुला के सानिध्य में सभी श्याम भक्तों ने श्याम बाबा के जयकारों के साथ भक्तगण रवाना हुए। हेमन्त दाधीच ने बताया कि फाल्गुन मास में श्याम बाबा के मेले में बाबा के दर्शन के लिए श्याम मित्र मंडल संघ डेगाना के तत्वावधान में यह तीसरी पदयात्रा है। इस तीन दिवसीय पदयात्रा में करीब 30 से ज्यादा श्याम भक्त शामिल है, सभी श्याम भक्त बुधवार को बस से रवाना होकर गोठ मांगलोद में दधिमती माता रानी के दर्शन कर शाम को सालासर बालाजी के दर्शन करेगी।
उसके बाद झुंझनु होते हुए कल गुरुवार को 11 बजे रिंगस में श्याम शरण में आजा रे ट्रस्ट के साथ सम्मिलित होकर बाबा के जयकारे लगाते हुए खाटू धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन का लाभ लेंगे। इस मौके पर मदनगोपाल बुला, हेमंत दाधीच, विष्णु झांकल, दिनेश गुर्जर, जितेंद्र सोनी, कन्हैया लाल दाधीच, सुनील तवालड़ा, पृथ्वीराज प्रजापत, नितेश टेलर, नवीन विठल, जितेंद्र झांकल, हिलाराल गोदारा, अभिषेक प्रजापत, पंकज दाधीच, ओम प्रकाश टांडी, राहुल झांकल, हनुमान दाधीच, पीयूष अग्रवाल, पप्पू गोदारा, नरेंद्र धोजक, गौतम लखारा, रामावतार दाधीच, रमेश दाधीच, तिलोक दाधीच, सम्पत दाधीच रमेश दाधीच, अजीत दाधीच, अमित दर्जी, लक्की राठौड, श्रवण प्रजापत सहित श्याम भक्त हुए रवाना।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
आगामी तीन मार्च को खाटू श्याम जी मे फाल्गुनी मेले को लेकर खाटू श्याम एवं सालासर बालाजी के दर्शनार्थ के लिए श्याम मित्र मंडल डेगाना का जत्था रवाना हुआ। श्याम मित्र मंडल डेगाना सदस्य पार्षद प्रतिनिधि युवा नेता हेमंत दाधीच के सानिध्य में रेलवे शिव मन्दिर से पूजा अर्चना कर संघ को श्याम ध्वजा दिखाकर रवाना किया गया। इस पदयात्रा में करीब तीस से ज्यादा श्याम भक्त शामिल है . सभी श्याम भक्त आज बुधवार को भजन कीर्तन कर रवाना हुए। श्याम मित्र मंडल संघ कल गुरुवार को ग्यारह बजे रिंगस से पैदल रवाना होकर खाटू धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन का लाभ लेंगे. श्याम मित्र मंडल संघ डेगाना की ओर से फाल्गुन मास में तीसरी बार गुरुवार को यह संघ रिंगस से खाटू श्याम तक पैदल चलकर बाबा के दर्शन करेंगे। संघ अध्यक्ष मदन गोपाल बुला के सानिध्य में सभी श्याम भक्तों ने श्याम बाबा के जयकारों के साथ भक्तगण रवाना हुए। हेमन्त दाधीच ने बताया कि फाल्गुन मास में श्याम बाबा के मेले में बाबा के दर्शन के लिए श्याम मित्र मंडल संघ डेगाना के तत्वावधान में यह तीसरी पदयात्रा है। इस तीन दिवसीय पदयात्रा में करीब तीस से ज्यादा श्याम भक्त शामिल है, सभी श्याम भक्त बुधवार को बस से रवाना होकर गोठ मांगलोद में दधिमती माता रानी के दर्शन कर शाम को सालासर बालाजी के दर्शन करेगी। उसके बाद झुंझनु होते हुए कल गुरुवार को ग्यारह बजे रिंगस में श्याम शरण में आजा रे ट्रस्ट के साथ सम्मिलित होकर बाबा के जयकारे लगाते हुए खाटू धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन का लाभ लेंगे। इस मौके पर मदनगोपाल बुला, हेमंत दाधीच, विष्णु झांकल, दिनेश गुर्जर, जितेंद्र सोनी, कन्हैया लाल दाधीच, सुनील तवालड़ा, पृथ्वीराज प्रजापत, नितेश टेलर, नवीन विठल, जितेंद्र झांकल, हिलाराल गोदारा, अभिषेक प्रजापत, पंकज दाधीच, ओम प्रकाश टांडी, राहुल झांकल, हनुमान दाधीच, पीयूष अग्रवाल, पप्पू गोदारा, नरेंद्र धोजक, गौतम लखारा, रामावतार दाधीच, रमेश दाधीच, तिलोक दाधीच, सम्पत दाधीच रमेश दाधीच, अजीत दाधीच, अमित दर्जी, लक्की राठौड, श्रवण प्रजापत सहित श्याम भक्त हुए रवाना। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
संसार और शरीरकी अनित्यताको समझकर यह निश्चय कर लेना कि शरीर मैं नहीं हूँ और संसार मेरा नहीं है । इसका नाम विवेक है । जहाँ विवेकवल होगा वहाँ निर्वासना अवश्य आ जायगी। वासनाके जाल में फँसा हुआ प्राणी ही करने योग्य और न करने योग्य सब प्रकारके आचरण कर लेता है। परंतु जहाँ निर्वासना आ जाती है वहाँ चरित्रवल अपने-आप सुरक्षित रहता है । विवेकशील मनुष्यको किसी प्रकारका भय या प्रलोभन अपने कर्तव्यसे नहीं डिगा सकता । अतः साधकको चाहिये कि कठिनाईसे घबराये नहीं, भयभीत न हो, किंतु विवेकवलसे काम ले और धैर्यपूर्वक कर्तव्यका पालन करे ।
संसार सुख और दुःखसे मिला हुआ है । न तो कोई पूर्ण, सुखी है न पूर्ण दुखी ही है; क्योंकि जो सचमुच पूर्ण दुखी हो जाता है उसके दुःखको दुःखहारी भगवान् खा जाते हैं और पूर्ण सुखी वह है जो संसारसे अतीत है । संसारको अनित्य कहनेवाले मनुष्य भी प्राप्तिकालमें सुखका उपभोग करते रहते हैं और दुःखकी प्राप्तिमें सुखके पीछे दौड़ते हैं । उन सुखलोलुप मनुष्यों को सुख-दुःखकी वास्तविकताका अनुभव नहीं होता । अतः साधकको चाहिये कि जिसको वह अनित्य समझता है उससे विमुख होकर नित्यके सम्मुख हो जाय एवं प्राप्त परिस्थितिका सदुपयोग करे, दुरुपयोग न करे ।
जब मनुष्य सचमुच संसारसे निराश हो जाता है, उसे संसारसे किसी प्रकारके सुखकी आशा नहीं रहती, तब उसका संसारसे
वैराग्य हो जाता है। सुखकी लालसा में फँसे हुए प्राणीके जीवन में वैराग्यका उदय नहीं होता । अतः साधकको अपने मन में ऐसी भावना. करनी चाहिये कि 'हे सुख ! अब मैं कभी तुम्हारे पीछे नहीं दौड़ेगा । तुमने मेरी बहुत दुर्दशा की है । अब मैं तुम्हारी आशा नहीं करूँगा ।।
जबतक मनुष्य संसारसे कुछ लेना चाहता है, उसका दास बना रहता है, तबतक उसके दुःख नहीं मिट सकते । करोड़पति और बड़े-से-बड़ा सम्राट हो जानेपर भी दुःखोंका अन्त नहीं होता । अतः साधकको चाहिये कि संसारकी चाहको मिटाकर चरित्रबल, विवेकवल और विश्वासवलको दृढ़ करे । चरित्र, विवेक और विश्वास - का बल दुःखको मिटा देता है।
भारी-से- भारी कठिनाई सहन करके चरित्रको शुद्ध रखने से चरित्रवल बढ़ता है। चरित्रवल में ही तपका निवास है । इससे उत्तरोत्तर सहनशक्ति बढ़ती है । विवेकबलसे त्यागकी शक्ति वढ़ती है और विश्वाससे समर्पण भावका उदय होता है । साधकमें ये अवश्य हों । इन तीनोंका होना ही जीवन है । इनके बदले में सब प्रकारके सुखोंका त्याग किया जा सकता है । संसारकी वड़ी-से-बड़ी कोई भी वस्तु या कोई भी अधिकार ऐसा नहीं है जो इनके बदलेमें नहीं दिया जा सकता हो । अधिक क्या, शरीरतकको देकर भी इनका पालन करना चाहिये ।
चरित्रबलसे विवेकवलका महत्त्व अधिक है। विवेकबलसे भी विश्वासबलका महत्त्व अधिक है; क्योंकि बिना विश्वासके विवेक
विकल्परहित नहीं हो पाता और चरित्र में दृढ़ता नहीं आती । 4 विश्वास दोनों को सुरक्षित रखता है।
साधकको चाहिये कि मनकी कामनापूर्ति के लिये विश्वास, विवेक और चरित्रबलका प्रयोग न करे । इनकी अमूल्य शक्तिका अनित्य वस्तुओंके लिये व्यय न करे । ईमानदारी और परिश्रमको कभी न छोड़े । सांसारिक वस्तु और व्यक्तियोंका संयोग और वियोग तो होता ही रहेगा। उसका कोई महत्व नहीं है ।
संसारकी चाह रहते हुए चित्त शुद्ध नहीं होता जौर विना चित्तकी निर्मलताके दुःख नहीं मिट सकता । अतः सुखभोगकी इच्छाका त्याग अनिवार्य है। परंतु साधारण मनुष्योंको इसका त्याग मृत्युके तुल्य प्रतीत होता है ।
धर्मके विश्वाससे ही चरित्रवल सुरक्षित रहता है, उसके विना वह नहीं रह सकता । संसारको असलियतको समझ लेनेपर विवेकबलकी प्राप्ति होती है, किंतु धर्म और विवेक भी ईश्वरविश्वाससे ही पुष्ट होते हैं और सुरक्षित रह सकते हैं । हरेक परिस्थिति में ईश्वरविश्वास ही काम करता है । उसीके बलपर मनुष्य अपने लक्ष्यतक पहुँच सकता हैं ।
सांसारिक व्यक्तियोंका विश्वास बड़ा भयानक सिद्ध हुआ है । इनपर विश्वास करके मनुष्य बहुत धोखेमें आ जाता है । अधिक क्या, सावकको तो अपने शरीर, मन और बुद्धिपर भी विश्वास नहीं करना चाहिये। विश्वासके योग्य तो एकमात्र ईश्वर ही है ।
व्यक्तियोंपर विश्वास न करनेका यह मतलब नहीं है कि साधक उनके दोषों को देखे या उनको बुरा समझे, ऐसा कहीं नहीं होना चाहिये । किसीको भी बुरा नहीं समझना चाहिये, परंतु किसी कर्तव्य के लिये उनपर निर्भर नहीं रहना चाहिये ।
जबतक मनुष्य संसारपर विश्वास करता है, उसको अपना मानता रहता है, तबतक वह खतरेसे खाली नहीं है । संसारकी सब चीजें धोखा देती हैं । शरीर, बुद्धि, धन और कुटुम्बी आदि जो कुछ मिला है, वह अवश्य छूट जायगा । अतः कामनापूर्ति के लिये ईश्वर विश्वासका उपयोग करना भूल है ।
ईश्वर विश्वास तो साधकका जीवन होना चाहिये। उसके बिना और कोई भी अपना नहीं है । और किसीसे साधकका काम नहीं चलेगा । ईश्वरत्रिश्वासपूर्वक भोग-वासनाके त्यागसे ही दुःख दूर होता है । अतः भगवानूपर निर्भर होकर साधकको चरित्रबलकी रक्षाके लिये बड़े-से-बड़े दुःखको उत्साहपूर्वक सहन कर लेना चाहिये ।
प्राप्त वस्तुओंमें आसक्ति और अप्राप्तका चिन्तन - यही सुखकी लोलुपता और दरिद्रता अर्थात् अभाव है । इसके रहते हुए दुःख नहीं मिट सकता । दुःख मिटानेके लिये निर्लोभी, निर्मोही और अभिमानरहित होना आवश्यक है, जो ईश्वरपर निर्भर होनेसे ही सहज है
दुःख मनुष्यको दुःखहारीसे मिलानेके लिये आता है । अतः वह जबतक दुःखहारीसे मिला नहीं देता, तबतक जाता नहीं। सुख
|
संसार और शरीरकी अनित्यताको समझकर यह निश्चय कर लेना कि शरीर मैं नहीं हूँ और संसार मेरा नहीं है । इसका नाम विवेक है । जहाँ विवेकवल होगा वहाँ निर्वासना अवश्य आ जायगी। वासनाके जाल में फँसा हुआ प्राणी ही करने योग्य और न करने योग्य सब प्रकारके आचरण कर लेता है। परंतु जहाँ निर्वासना आ जाती है वहाँ चरित्रवल अपने-आप सुरक्षित रहता है । विवेकशील मनुष्यको किसी प्रकारका भय या प्रलोभन अपने कर्तव्यसे नहीं डिगा सकता । अतः साधकको चाहिये कि कठिनाईसे घबराये नहीं, भयभीत न हो, किंतु विवेकवलसे काम ले और धैर्यपूर्वक कर्तव्यका पालन करे । संसार सुख और दुःखसे मिला हुआ है । न तो कोई पूर्ण, सुखी है न पूर्ण दुखी ही है; क्योंकि जो सचमुच पूर्ण दुखी हो जाता है उसके दुःखको दुःखहारी भगवान् खा जाते हैं और पूर्ण सुखी वह है जो संसारसे अतीत है । संसारको अनित्य कहनेवाले मनुष्य भी प्राप्तिकालमें सुखका उपभोग करते रहते हैं और दुःखकी प्राप्तिमें सुखके पीछे दौड़ते हैं । उन सुखलोलुप मनुष्यों को सुख-दुःखकी वास्तविकताका अनुभव नहीं होता । अतः साधकको चाहिये कि जिसको वह अनित्य समझता है उससे विमुख होकर नित्यके सम्मुख हो जाय एवं प्राप्त परिस्थितिका सदुपयोग करे, दुरुपयोग न करे । जब मनुष्य सचमुच संसारसे निराश हो जाता है, उसे संसारसे किसी प्रकारके सुखकी आशा नहीं रहती, तब उसका संसारसे वैराग्य हो जाता है। सुखकी लालसा में फँसे हुए प्राणीके जीवन में वैराग्यका उदय नहीं होता । अतः साधकको अपने मन में ऐसी भावना. करनी चाहिये कि 'हे सुख ! अब मैं कभी तुम्हारे पीछे नहीं दौड़ेगा । तुमने मेरी बहुत दुर्दशा की है । अब मैं तुम्हारी आशा नहीं करूँगा ।। जबतक मनुष्य संसारसे कुछ लेना चाहता है, उसका दास बना रहता है, तबतक उसके दुःख नहीं मिट सकते । करोड़पति और बड़े-से-बड़ा सम्राट हो जानेपर भी दुःखोंका अन्त नहीं होता । अतः साधकको चाहिये कि संसारकी चाहको मिटाकर चरित्रबल, विवेकवल और विश्वासवलको दृढ़ करे । चरित्र, विवेक और विश्वास - का बल दुःखको मिटा देता है। भारी-से- भारी कठिनाई सहन करके चरित्रको शुद्ध रखने से चरित्रवल बढ़ता है। चरित्रवल में ही तपका निवास है । इससे उत्तरोत्तर सहनशक्ति बढ़ती है । विवेकबलसे त्यागकी शक्ति वढ़ती है और विश्वाससे समर्पण भावका उदय होता है । साधकमें ये अवश्य हों । इन तीनोंका होना ही जीवन है । इनके बदले में सब प्रकारके सुखोंका त्याग किया जा सकता है । संसारकी वड़ी-से-बड़ी कोई भी वस्तु या कोई भी अधिकार ऐसा नहीं है जो इनके बदलेमें नहीं दिया जा सकता हो । अधिक क्या, शरीरतकको देकर भी इनका पालन करना चाहिये । चरित्रबलसे विवेकवलका महत्त्व अधिक है। विवेकबलसे भी विश्वासबलका महत्त्व अधिक है; क्योंकि बिना विश्वासके विवेक विकल्परहित नहीं हो पाता और चरित्र में दृढ़ता नहीं आती । चार विश्वास दोनों को सुरक्षित रखता है। साधकको चाहिये कि मनकी कामनापूर्ति के लिये विश्वास, विवेक और चरित्रबलका प्रयोग न करे । इनकी अमूल्य शक्तिका अनित्य वस्तुओंके लिये व्यय न करे । ईमानदारी और परिश्रमको कभी न छोड़े । सांसारिक वस्तु और व्यक्तियोंका संयोग और वियोग तो होता ही रहेगा। उसका कोई महत्व नहीं है । संसारकी चाह रहते हुए चित्त शुद्ध नहीं होता जौर विना चित्तकी निर्मलताके दुःख नहीं मिट सकता । अतः सुखभोगकी इच्छाका त्याग अनिवार्य है। परंतु साधारण मनुष्योंको इसका त्याग मृत्युके तुल्य प्रतीत होता है । धर्मके विश्वाससे ही चरित्रवल सुरक्षित रहता है, उसके विना वह नहीं रह सकता । संसारको असलियतको समझ लेनेपर विवेकबलकी प्राप्ति होती है, किंतु धर्म और विवेक भी ईश्वरविश्वाससे ही पुष्ट होते हैं और सुरक्षित रह सकते हैं । हरेक परिस्थिति में ईश्वरविश्वास ही काम करता है । उसीके बलपर मनुष्य अपने लक्ष्यतक पहुँच सकता हैं । सांसारिक व्यक्तियोंका विश्वास बड़ा भयानक सिद्ध हुआ है । इनपर विश्वास करके मनुष्य बहुत धोखेमें आ जाता है । अधिक क्या, सावकको तो अपने शरीर, मन और बुद्धिपर भी विश्वास नहीं करना चाहिये। विश्वासके योग्य तो एकमात्र ईश्वर ही है । व्यक्तियोंपर विश्वास न करनेका यह मतलब नहीं है कि साधक उनके दोषों को देखे या उनको बुरा समझे, ऐसा कहीं नहीं होना चाहिये । किसीको भी बुरा नहीं समझना चाहिये, परंतु किसी कर्तव्य के लिये उनपर निर्भर नहीं रहना चाहिये । जबतक मनुष्य संसारपर विश्वास करता है, उसको अपना मानता रहता है, तबतक वह खतरेसे खाली नहीं है । संसारकी सब चीजें धोखा देती हैं । शरीर, बुद्धि, धन और कुटुम्बी आदि जो कुछ मिला है, वह अवश्य छूट जायगा । अतः कामनापूर्ति के लिये ईश्वर विश्वासका उपयोग करना भूल है । ईश्वर विश्वास तो साधकका जीवन होना चाहिये। उसके बिना और कोई भी अपना नहीं है । और किसीसे साधकका काम नहीं चलेगा । ईश्वरत्रिश्वासपूर्वक भोग-वासनाके त्यागसे ही दुःख दूर होता है । अतः भगवानूपर निर्भर होकर साधकको चरित्रबलकी रक्षाके लिये बड़े-से-बड़े दुःखको उत्साहपूर्वक सहन कर लेना चाहिये । प्राप्त वस्तुओंमें आसक्ति और अप्राप्तका चिन्तन - यही सुखकी लोलुपता और दरिद्रता अर्थात् अभाव है । इसके रहते हुए दुःख नहीं मिट सकता । दुःख मिटानेके लिये निर्लोभी, निर्मोही और अभिमानरहित होना आवश्यक है, जो ईश्वरपर निर्भर होनेसे ही सहज है दुःख मनुष्यको दुःखहारीसे मिलानेके लिये आता है । अतः वह जबतक दुःखहारीसे मिला नहीं देता, तबतक जाता नहीं। सुख
|
ग्वालियर । केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आज ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर ग्वालियर में फूलबाग चौराहे पर 10 मजदूर संगठनों ने धरना दिया । इसमें सीटू,इंटक एटक सहित 10 मजदूर संगठनों के नेताओं और श्रमिकों ने हिस्सा लिया । धरना स्थल पर बैठे नेता और श्रमिक हाथों में झंडे और बैनर लिए थे और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कर्मचारी नेताओं का कहना था हमारी ये लड़ाई केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ है जो पूंजी पतियों को फायदा पहुंचाने के लिये श्रमिकों का शोषण कर रही है । सीटू के वरिष्ठ नेता रामविलास गोस्वामी ने कहा कि हमारी मांग सभी श्रमिकों को 21 हजार न्यूनतम वेतन और श्रम कानून का पालन करने की है सीटू नेता के मुताबिक महाभारत में जैसे दुशासन और दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था आज सरकार में बैठे रंगा बिल्ला मोदी और शाह देश का चीरहरण कर रहे है जिसे हम कतई बर्दाश्त नही करेंगे।
|
ग्वालियर । केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आज ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर ग्वालियर में फूलबाग चौराहे पर दस मजदूर संगठनों ने धरना दिया । इसमें सीटू,इंटक एटक सहित दस मजदूर संगठनों के नेताओं और श्रमिकों ने हिस्सा लिया । धरना स्थल पर बैठे नेता और श्रमिक हाथों में झंडे और बैनर लिए थे और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कर्मचारी नेताओं का कहना था हमारी ये लड़ाई केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ है जो पूंजी पतियों को फायदा पहुंचाने के लिये श्रमिकों का शोषण कर रही है । सीटू के वरिष्ठ नेता रामविलास गोस्वामी ने कहा कि हमारी मांग सभी श्रमिकों को इक्कीस हजार न्यूनतम वेतन और श्रम कानून का पालन करने की है सीटू नेता के मुताबिक महाभारत में जैसे दुशासन और दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था आज सरकार में बैठे रंगा बिल्ला मोदी और शाह देश का चीरहरण कर रहे है जिसे हम कतई बर्दाश्त नही करेंगे।
|
- नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद सीएम GBU और UPSC टॉपर इशिता किशोर को सम्मानित किया।
- ग्रेटर नोएडा को भी मुख्यमंत्री 331. 26 करोड़ की परियोजनाएं सौंपेंगे।
- CM योगी ने नोएडा की 1387. 40 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्ध नगर स्थित कार्यक्रम स्थल नोएडा स्टेडियम जनसभा को संबोधित करने के बाद अब GBU पहुंचे। जहां सीएम यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर सहित तीन अन्य सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित किया। साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की।
नोएडा, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्ध नगर स्थित कार्यक्रम स्थल नोएडा स्टेडियम जनसभा को संबोधित करने के बाद गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) पहुंच गए। यहां उन्होंने यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर सहित तीन अन्य सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित किया।
इसके बाद चार बजे से उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। यहां उन्होंने विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वो जीबीयू सभागार में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के शिरकत करेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे।
वहीं, स्टेडियम में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि आज यूपी में कानून व्यवस्था बेहतर होने से लोग नोएडा में निवेश के लिए विदेश से आना चाहते हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में माफिया ठंडे हो गए उसी तरह से मौसम ठंडा हो गया है।
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्रेटर नोएडा सेक्टर ईकोटेक-10 स्थित एडवर्ब टेक्नोलॉजी पहुंच गए। यहां वो विश्व की सबसे बड़ी रोबोट फैक्ट्री का लोकार्पण करेंगे।
गाजियाबाद में हुए मतांतरण मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधन में जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को स्मार्टफोन में गेमिंग के माध्यम से मतांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। परिवार में घुसपैठ की जा रही है, यह संस्कृति पर बहुत बड़ा हमला है।
दिल्ली और मुंबई में हुए लव जिहाद के मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि लव जिहाद मामले का उत्तर प्रदेश में बना एक्ट पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। अगर कोई संस्कृति पर हमला कर रहा है तो कानून हाथ में मत लीजिए, पुलिस को सूचना दीजिए।
वर्तमान परिवेश में लोगों को सकारात्मक मार्ग पर प्रेरित करने की जरूरत है। अगर हम कानून हाथ में लेंगे तो इसका लाभ आरोपित पक्ष को मिलता है। समाज में संस्कृति को बचाने के लिए सभी लोगों को मिलकर चुनौती का सामना करने की जरूरत है।
युवा आज के समय में स्मार्टफोन पर 24 घंटे में से 8 घंटे का समय बिताता है और यह भी एक तरीके से संस्कृति पर हमला है। संस्कृति पर डिजिटल माध्यम से भी हमले हो रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में सेव कल्चर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित करते हुए कहा कि समाज में संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं की भूमिका अहम है। आपातकाल पर कहा कि 48 साल पहले लोकतंत्र के गले को घोंटने का प्रयास किया गया था। अगर 48 साल पहले वह लोग सफल हो गए होते तो आज सांस्कृतिक एकता पुरस्कार ना हो पाता।
सीएम ने आगे कहा कि हर व्यक्ति की अपनी पहचान होती है। हर व्यक्ति में अलग-अलग गुण होता है। कोई सरकारी सेवा में जाना चाहता है तो कोई बिजनेस करना चाहता है। ऐसे ही समाज में भी अलग-अलग वर्ग है। जीव जंतु में भी अलग अलग वर्ग है, जैसे कुछ जानवर ठंड में रहना पसंद करते हैं और कुछ गर्मी में।
ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक की। इस दौरान उनके साथ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा टॉपर इशिता किशोर और तीन अन्य उम्मीदवारों से मुलाकात की, जहां उन्होंने उन्हें सम्मानित किया।
योगी आदित्यनाथ नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद अब GBU पहुंचे गए हैं, जहां टॉपर इशिता किशोर को सम्मानित करेंगे।
इसके बाद चार बजे तक आरक्षित समय वह अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। शाम चार बजे जीबीयू सभागार में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के शिरकत करेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे।
नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभा स्थल से GBU के लिए रवाना हो गए हैं।
Yogi In Noida: अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा- सरकार किसान बिल्डर बायर्स की समस्या का समाधान करने की ओर प्रयासरत है। जेवर एयरपोर्ट से पूरे प्रदेश को फायदा होगा।
Yogi In Noida: मुख्यमंत्री ने जनसभा में आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में प्रदेश में जी 20 की बैठक हो रहीं हैं। आज पाकिस्तान एक-एक रोटी के लिए मोहताज हो रहा है, लेकिन भारत तेजी से बढ़ रहा है। 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। प्रदेश को छह वर्ष में एक नई पहचान देने का काम किया है।
जनसभा में बोले योगी- 'यूपी में माफिया हुए ठंडे'
नोएडा स्टेडियम में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में माफिया ठंडे हो गए उसी तरह से मौसम ठंडा हो गया है।
नोएडा के सांसद महेश शर्मा ने कहा- कोरोना काल में योगी सरकार का काम अद्भुद रहा। देश का सौभाग्य है की प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ है और पीएम नरेंद्र मोदी है। 2014 से पहले लोग निवेश के नाम पर कतराते थे। योगी सरकार ने कानून व्यवस्था के नाम पर प्रदेश को नई पहचान दी है। बारिश के बावजूद नोएडा के लोगों का सभा में उपस्थित होना ये बताता है की प्रदेश की जनता लोगों को कितना स्नेह करती है।
राज्यसभा सदस्य ने सुरेंद्र नागर ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का नोएडा की धरती पर स्वागत अभिनंदन है। नोएडा पर भ्रष्टाचार का साया था। इसे हटाने का काम मुख्यमंत्री ने किया है।
कानून व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था से कानून का राज देने का काम किया है। इससे सबसे अधिक निवेश आने का काम हुआ है।
राजस्थान सहित पूरे देश में लोग योगी आदित्यनाथ सा शासन होने की मांग लोग कर रहे। किसान समस्या के समाधान की मांग की है।
विधायक पंकज सिंह ने बोलते हुए कहा कि नोएडा में अभूतपूर्व विकास का कार्य मुख्य्मंत्री के नेतृत्व में किया जा रहा है। बेमिशाल कार्य प्रणाली से कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की प्रगति देख कर लगता है कि देश की आर्थिक संपन्नता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।
प्रधानमन्त्री ने सिद्ध किया कि अब सेवा, समर्पण व गरीब कल्याण की राजनीति होगी। पहले उत्तर प्रदेश से लोग पलायन कर लोग जाते हैं। अब लोग यूपी में निवेश करने के साथ यहां रहना चाहते है। अब सड़क पर बुल्डोजर निकलने पर यह पता रहता है की माफिया को मिट्टी में मिलाने के लिए निकला है।
पांच ट्रिलियन इकानमी में सबसे अधिक योगदान यूपी और नोएडा का होगा। पहले प्राधिकरण का नाम लेने पर भ्रष्टाचार का नाम आता है। अब एयरपोर्ट, विकास की आकांक्षा दिखती है।
नोएडा में चमकती सड़क देखने का कार्य व यहां किसान की समस्याओं पर काम किया जाना चहिए। किसानों की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री दिशा निर्देश दे।
नोएडा में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि मेरे लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे थे। उन्हें रोकने के लिए जो आवाज मुखर हुई थी, उसमें उत्तर प्रदेश की एक बड़ी भूमिका थी।
नोएडा में शनिवार देर रात से शुरू हुई बारिश के बावजूद भी नोएडा स्टेडियम में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा को सुनने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं।
Yogi In Noida: मुखय्मंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम स्थल पर नोएडा स्टेडियम पहुंच चुके हैं। मौके पर कार्यकर्ता योगी योगी, वंदे मातरम् व भारत माता के जयकारे लगा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में रामनाथ गोयनका मार्ग का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री योगी की जनसभा को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। साथ ही प्रशासन में सुरक्षित व्यवस्था के मद्देनजर कई रूट का डायवर्जन किया है।
टेलीफोन एक्सचेंज चौक से सेक्टर 12/22/56 टी-प्वाइंट की ओर जाने वाले यातायात को सेक्टर 10/21 यूटर्न से जलवायु विहार चौक से निठारी होते हुए सेक्टर 31/25 चौक, एनटीपीसी, गिझौड़ होते हुए डायवर्ट किया गया है।
सेक्टर-12-22-56 टी-प्वाइंट से स्टेडियम चौक की ओर ट्रैफिक को सेक्टर-56 स्क्वायर, गिझोड़ से एनटीपीसी और सेक्टर 31/25 चौक से डायवर्ट।
सेक्टर-12/22/56 टी-प्वाइंट से रजनीगंधा चौक की ओर यातायात मेट्रो अस्पताल चेक, सेक्टर-8/10/11/12 चौक और हरौला/झुंडपुरा चौक से डायवर्ट।
डीएम चौक और जलवायु विहार चौक से स्पाइस और एडोब चौक की ओर जाने वाले यातायात को जलवायु विहार चौक से निठारी, सेक्टर 31-25 चौक, एनटीपीसी और गिझोड़ चौक की ओर डायवर्ट।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा आगमन पर नोएडा के डीसीपी ने बताया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का एक कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। कार्यक्रम को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में PAC, RAF को तैनात किया गया है। कुछ जगहों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।
सीएम की जनसभा में काले कपड़े पहनकर आने वालों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा हैं।
नोएडा स्टेडियम में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा स्थल में भरे पानी के बीच जाते लोग।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा में 8 घंटे रूकेंगे। उनके कार्यक्रम की रूपरेख कुछ इस प्रकार है।
- 10:40 से 11:50 तक नोएडा के सेक्टर-21 स्टेडियम में पुलिस की गाड़ियों और वाटर स्प्रिंकलर की गाड़ियों को हरी झंडी देंगे। दोनों प्राधिकरण की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
- 11:50 जनसभा को संबोधित करेंगे।
- 12:35 रामनाथ गोयनका मार्ग का उद्घाटन करेंगे।
- 13:20 जीबीयू में इशिता किशोर व तीन अन्य को सम्मानित करेंगे।
- इसके बाद दोपहर चार बजे तक आरक्षित समय यानी समीक्षा बैठक की जाएगी।
- चार बजे जीबीयू के आडिटोरियम में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के हिस्सा लेंगे।
- 5:30 बजे एडवर्ब टेक्नोलाजी लिमिटेड फैक्ट्री का लोकार्पण करेंगे।
- 6:30 पर गाजियाबाद हिंडन एयरपोर्ट पहुचेंगे।
नोएडा स्टेडियम में सीएम योगी की होने वाली जनसभा में स्कूली बच्चे पहुंचना शुरू हो गए हैं।
Yogi In Noida: सीएम योगी की जनसभा के लिए तैयार किए मंच के पास बारिश का पानी भर गया है, जिसको निकालने के लिए कर्मचारियों की एक टीम लगी हुई है।
|
- नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद सीएम GBU और UPSC टॉपर इशिता किशोर को सम्मानित किया। - ग्रेटर नोएडा को भी मुख्यमंत्री तीन सौ इकतीस. छब्बीस करोड़ की परियोजनाएं सौंपेंगे। - CM योगी ने नोएडा की एक हज़ार तीन सौ सत्तासी. चालीस करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्ध नगर स्थित कार्यक्रम स्थल नोएडा स्टेडियम जनसभा को संबोधित करने के बाद अब GBU पहुंचे। जहां सीएम यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर सहित तीन अन्य सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित किया। साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की। नोएडा, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्ध नगर स्थित कार्यक्रम स्थल नोएडा स्टेडियम जनसभा को संबोधित करने के बाद गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर सहित तीन अन्य सफल अभ्यर्थियों को सम्मानित किया। इसके बाद चार बजे से उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। यहां उन्होंने विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वो जीबीयू सभागार में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के शिरकत करेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे। वहीं, स्टेडियम में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि आज यूपी में कानून व्यवस्था बेहतर होने से लोग नोएडा में निवेश के लिए विदेश से आना चाहते हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में माफिया ठंडे हो गए उसी तरह से मौसम ठंडा हो गया है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्रेटर नोएडा सेक्टर ईकोटेक-दस स्थित एडवर्ब टेक्नोलॉजी पहुंच गए। यहां वो विश्व की सबसे बड़ी रोबोट फैक्ट्री का लोकार्पण करेंगे। गाजियाबाद में हुए मतांतरण मामले का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधन में जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को स्मार्टफोन में गेमिंग के माध्यम से मतांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। परिवार में घुसपैठ की जा रही है, यह संस्कृति पर बहुत बड़ा हमला है। दिल्ली और मुंबई में हुए लव जिहाद के मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि लव जिहाद मामले का उत्तर प्रदेश में बना एक्ट पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। अगर कोई संस्कृति पर हमला कर रहा है तो कानून हाथ में मत लीजिए, पुलिस को सूचना दीजिए। वर्तमान परिवेश में लोगों को सकारात्मक मार्ग पर प्रेरित करने की जरूरत है। अगर हम कानून हाथ में लेंगे तो इसका लाभ आरोपित पक्ष को मिलता है। समाज में संस्कृति को बचाने के लिए सभी लोगों को मिलकर चुनौती का सामना करने की जरूरत है। युवा आज के समय में स्मार्टफोन पर चौबीस घंटाटे में से आठ घंटाटे का समय बिताता है और यह भी एक तरीके से संस्कृति पर हमला है। संस्कृति पर डिजिटल माध्यम से भी हमले हो रहे हैं। ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में सेव कल्चर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित करते हुए कहा कि समाज में संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं की भूमिका अहम है। आपातकाल पर कहा कि अड़तालीस साल पहले लोकतंत्र के गले को घोंटने का प्रयास किया गया था। अगर अड़तालीस साल पहले वह लोग सफल हो गए होते तो आज सांस्कृतिक एकता पुरस्कार ना हो पाता। सीएम ने आगे कहा कि हर व्यक्ति की अपनी पहचान होती है। हर व्यक्ति में अलग-अलग गुण होता है। कोई सरकारी सेवा में जाना चाहता है तो कोई बिजनेस करना चाहता है। ऐसे ही समाज में भी अलग-अलग वर्ग है। जीव जंतु में भी अलग अलग वर्ग है, जैसे कुछ जानवर ठंड में रहना पसंद करते हैं और कुछ गर्मी में। ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक की। इस दौरान उनके साथ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को केंद्रीय लोक सेवा आयोग परीक्षा टॉपर इशिता किशोर और तीन अन्य उम्मीदवारों से मुलाकात की, जहां उन्होंने उन्हें सम्मानित किया। योगी आदित्यनाथ नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद अब GBU पहुंचे गए हैं, जहां टॉपर इशिता किशोर को सम्मानित करेंगे। इसके बाद चार बजे तक आरक्षित समय वह अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। शाम चार बजे जीबीयू सभागार में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के शिरकत करेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे। नोएडा स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभा स्थल से GBU के लिए रवाना हो गए हैं। Yogi In Noida: अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा- सरकार किसान बिल्डर बायर्स की समस्या का समाधान करने की ओर प्रयासरत है। जेवर एयरपोर्ट से पूरे प्रदेश को फायदा होगा। Yogi In Noida: मुख्यमंत्री ने जनसभा में आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में प्रदेश में जी बीस की बैठक हो रहीं हैं। आज पाकिस्तान एक-एक रोटी के लिए मोहताज हो रहा है, लेकिन भारत तेजी से बढ़ रहा है। दो हज़ार सत्ताईस तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। प्रदेश को छह वर्ष में एक नई पहचान देने का काम किया है। जनसभा में बोले योगी- 'यूपी में माफिया हुए ठंडे' नोएडा स्टेडियम में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में माफिया ठंडे हो गए उसी तरह से मौसम ठंडा हो गया है। नोएडा के सांसद महेश शर्मा ने कहा- कोरोना काल में योगी सरकार का काम अद्भुद रहा। देश का सौभाग्य है की प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ है और पीएम नरेंद्र मोदी है। दो हज़ार चौदह से पहले लोग निवेश के नाम पर कतराते थे। योगी सरकार ने कानून व्यवस्था के नाम पर प्रदेश को नई पहचान दी है। बारिश के बावजूद नोएडा के लोगों का सभा में उपस्थित होना ये बताता है की प्रदेश की जनता लोगों को कितना स्नेह करती है। राज्यसभा सदस्य ने सुरेंद्र नागर ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का नोएडा की धरती पर स्वागत अभिनंदन है। नोएडा पर भ्रष्टाचार का साया था। इसे हटाने का काम मुख्यमंत्री ने किया है। कानून व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था से कानून का राज देने का काम किया है। इससे सबसे अधिक निवेश आने का काम हुआ है। राजस्थान सहित पूरे देश में लोग योगी आदित्यनाथ सा शासन होने की मांग लोग कर रहे। किसान समस्या के समाधान की मांग की है। विधायक पंकज सिंह ने बोलते हुए कहा कि नोएडा में अभूतपूर्व विकास का कार्य मुख्य्मंत्री के नेतृत्व में किया जा रहा है। बेमिशाल कार्य प्रणाली से कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की प्रगति देख कर लगता है कि देश की आर्थिक संपन्नता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। प्रधानमन्त्री ने सिद्ध किया कि अब सेवा, समर्पण व गरीब कल्याण की राजनीति होगी। पहले उत्तर प्रदेश से लोग पलायन कर लोग जाते हैं। अब लोग यूपी में निवेश करने के साथ यहां रहना चाहते है। अब सड़क पर बुल्डोजर निकलने पर यह पता रहता है की माफिया को मिट्टी में मिलाने के लिए निकला है। पांच ट्रिलियन इकानमी में सबसे अधिक योगदान यूपी और नोएडा का होगा। पहले प्राधिकरण का नाम लेने पर भ्रष्टाचार का नाम आता है। अब एयरपोर्ट, विकास की आकांक्षा दिखती है। नोएडा में चमकती सड़क देखने का कार्य व यहां किसान की समस्याओं पर काम किया जाना चहिए। किसानों की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री दिशा निर्देश दे। नोएडा में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि मेरे लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे थे। उन्हें रोकने के लिए जो आवाज मुखर हुई थी, उसमें उत्तर प्रदेश की एक बड़ी भूमिका थी। नोएडा में शनिवार देर रात से शुरू हुई बारिश के बावजूद भी नोएडा स्टेडियम में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा को सुनने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं। Yogi In Noida: मुखय्मंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम स्थल पर नोएडा स्टेडियम पहुंच चुके हैं। मौके पर कार्यकर्ता योगी योगी, वंदे मातरम् व भारत माता के जयकारे लगा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में रामनाथ गोयनका मार्ग का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री योगी की जनसभा को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। साथ ही प्रशासन में सुरक्षित व्यवस्था के मद्देनजर कई रूट का डायवर्जन किया है। टेलीफोन एक्सचेंज चौक से सेक्टर बारह बाईस छप्पन टी-प्वाइंट की ओर जाने वाले यातायात को सेक्टर दस/इक्कीस यूटर्न से जलवायु विहार चौक से निठारी होते हुए सेक्टर इकतीस/पच्चीस चौक, एनटीपीसी, गिझौड़ होते हुए डायवर्ट किया गया है। सेक्टर-बारह बाईस छप्पन टी-प्वाइंट से स्टेडियम चौक की ओर ट्रैफिक को सेक्टर-छप्पन स्क्वायर, गिझोड़ से एनटीपीसी और सेक्टर इकतीस/पच्चीस चौक से डायवर्ट। सेक्टर-बारह बाईस छप्पन टी-प्वाइंट से रजनीगंधा चौक की ओर यातायात मेट्रो अस्पताल चेक, सेक्टर-आठ अक्टूबर ग्यारह/बारह चौक और हरौला/झुंडपुरा चौक से डायवर्ट। डीएम चौक और जलवायु विहार चौक से स्पाइस और एडोब चौक की ओर जाने वाले यातायात को जलवायु विहार चौक से निठारी, सेक्टर इकतीस-पच्चीस चौक, एनटीपीसी और गिझोड़ चौक की ओर डायवर्ट। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा आगमन पर नोएडा के डीसीपी ने बताया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का एक कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। कार्यक्रम को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में PAC, RAF को तैनात किया गया है। कुछ जगहों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है। सीएम की जनसभा में काले कपड़े पहनकर आने वालों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा हैं। नोएडा स्टेडियम में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा स्थल में भरे पानी के बीच जाते लोग। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा में आठ घंटाटे रूकेंगे। उनके कार्यक्रम की रूपरेख कुछ इस प्रकार है। - दस:चालीस से ग्यारह:पचास तक नोएडा के सेक्टर-इक्कीस स्टेडियम में पुलिस की गाड़ियों और वाटर स्प्रिंकलर की गाड़ियों को हरी झंडी देंगे। दोनों प्राधिकरण की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। - ग्यारह:पचास जनसभा को संबोधित करेंगे। - बारह:पैंतीस रामनाथ गोयनका मार्ग का उद्घाटन करेंगे। - तेरह:बीस जीबीयू में इशिता किशोर व तीन अन्य को सम्मानित करेंगे। - इसके बाद दोपहर चार बजे तक आरक्षित समय यानी समीक्षा बैठक की जाएगी। - चार बजे जीबीयू के आडिटोरियम में सेव कल्चर सेव मिशन कार्यक्रम के हिस्सा लेंगे। - पाँच:तीस बजे एडवर्ब टेक्नोलाजी लिमिटेड फैक्ट्री का लोकार्पण करेंगे। - छः:तीस पर गाजियाबाद हिंडन एयरपोर्ट पहुचेंगे। नोएडा स्टेडियम में सीएम योगी की होने वाली जनसभा में स्कूली बच्चे पहुंचना शुरू हो गए हैं। Yogi In Noida: सीएम योगी की जनसभा के लिए तैयार किए मंच के पास बारिश का पानी भर गया है, जिसको निकालने के लिए कर्मचारियों की एक टीम लगी हुई है।
|
रूपरसगन्धस्पर्शवती पृथिवी ॥८३ ॥
पृथिवी मे चार गुण रहतें है रूप, रस, गन्ध और स्पर्श ।
इनमे 'गन्ध' पृथिवी का विशेष गुण है । इसलिये 'गन्धवती पृथ्वी' यह लक्षण पूरी तरह अन्य निरपेक्ष है। पृथ्वी का स्वाभाविक गुण होने से वह अन्य किसी द्रव्य मे नही रहता । रूप अग्नि के सयोग से तथा स्पर्श वायु के सयोग से है ।। ८३।।
घ्राणग्राह्यो गुणो गन्ध ॥८४॥
नासिका से जिसका ग्रहण होता है वह गन्ध है ।।४।।
निष्क्रमणं प्रवेशनमित्याकाशस्य लिङ्गम् ॥८५ ॥
निष्क्रमण ( भीतर से बाहर आना ) तथा प्रवेशन (बाहर से भीतर जाना ) क्रियाओ का सम्भव होना आकाश के अस्तित्व का लिंग है ।
ठोस से ठोस पदार्थ मे भी आकाश की विद्यमानता है । इसी से पदार्थों का सिकुडना आदि सम्भव होता है। इसी कारण लोहे आदि मे भी अग्नि के सूक्ष्म परमाणु प्रवेश कर जाते हैं । आकाश मे सब और सबमे आकाश व्याप्त रहता है ।।८५॥
शब्दो लिङ्गमाकाशस्य ॥८६॥
शब्द आकाश का लिङ्ग (गुण ) है ।
शब्द एक बाह्यन्द्रिय से ग्रहण किया जाता है । चक्षु के अतिरिक्त अन्य इन्द्रिया गुण के अतिरिक्त किसी द्रव्य का ग्रहण नहीं करती । अत शब्द गुण है । किन्तु गुण किसी द्रव्य के आश्रय के विना नही रह सकता । पृथ्वी आदि आठ द्रव्य शब्द के आश्रय नही । इसलिये शब्द शेष नवम द्रव्य आकाश का गुण है। ध्वनि उत्पादक साधनो से जहा जितना अधिक आकाश आवेष्टित होगा '. उतना ही तुमुल शब्द वहाँ होगा ॥८६॥
श्रोत्रग्राह्यो गुणः शब्द ।।८७ ।।
श्रोत्र से ग्रहण होने वाला गुण 'शब्द' है ।।८७॥ दृश्यमान जगत् की उत्पत्ति का स्वरूप निर्धारण करते हैं -
त्रसरेणो द्विरावृत्ततया पृथिव्यादयों दृश्यपदार्थाः ॥ ८८ ॥
त्रसरेणु के दुगुना होने से पृथ्वी आदि दृश्य पदार्थ होते है ।
एक अणु = ६० परमाणु, द्वयणुक २x६० = १२० परमाणु, त्रसरेणु =
|
रूपरसगन्धस्पर्शवती पृथिवी ॥तिरासी ॥ पृथिवी मे चार गुण रहतें है रूप, रस, गन्ध और स्पर्श । इनमे 'गन्ध' पृथिवी का विशेष गुण है । इसलिये 'गन्धवती पृथ्वी' यह लक्षण पूरी तरह अन्य निरपेक्ष है। पृथ्वी का स्वाभाविक गुण होने से वह अन्य किसी द्रव्य मे नही रहता । रूप अग्नि के सयोग से तथा स्पर्श वायु के सयोग से है ।। तिरासी।। घ्राणग्राह्यो गुणो गन्ध ॥चौरासी॥ नासिका से जिसका ग्रहण होता है वह गन्ध है ।।चार।। निष्क्रमणं प्रवेशनमित्याकाशस्य लिङ्गम् ॥पचासी ॥ निष्क्रमण तथा प्रवेशन क्रियाओ का सम्भव होना आकाश के अस्तित्व का लिंग है । ठोस से ठोस पदार्थ मे भी आकाश की विद्यमानता है । इसी से पदार्थों का सिकुडना आदि सम्भव होता है। इसी कारण लोहे आदि मे भी अग्नि के सूक्ष्म परमाणु प्रवेश कर जाते हैं । आकाश मे सब और सबमे आकाश व्याप्त रहता है ।।पचासी॥ शब्दो लिङ्गमाकाशस्य ॥छियासी॥ शब्द आकाश का लिङ्ग है । शब्द एक बाह्यन्द्रिय से ग्रहण किया जाता है । चक्षु के अतिरिक्त अन्य इन्द्रिया गुण के अतिरिक्त किसी द्रव्य का ग्रहण नहीं करती । अत शब्द गुण है । किन्तु गुण किसी द्रव्य के आश्रय के विना नही रह सकता । पृथ्वी आदि आठ द्रव्य शब्द के आश्रय नही । इसलिये शब्द शेष नवम द्रव्य आकाश का गुण है। ध्वनि उत्पादक साधनो से जहा जितना अधिक आकाश आवेष्टित होगा '. उतना ही तुमुल शब्द वहाँ होगा ॥छियासी॥ श्रोत्रग्राह्यो गुणः शब्द ।।सत्तासी ।। श्रोत्र से ग्रहण होने वाला गुण 'शब्द' है ।।सत्तासी॥ दृश्यमान जगत् की उत्पत्ति का स्वरूप निर्धारण करते हैं - त्रसरेणो द्विरावृत्ततया पृथिव्यादयों दृश्यपदार्थाः ॥ अठासी ॥ त्रसरेणु के दुगुना होने से पृथ्वी आदि दृश्य पदार्थ होते है । एक अणु = साठ परमाणु, द्वयणुक दोxसाठ = एक सौ बीस परमाणु, त्रसरेणु =
|
एसएसपी किशोर कौशल ने मंगलवार को संविधान दिवस मौके पर पुलिस अफसरों और जवानों को भारत के संविधान की प्रस्तावना को आत्मसात करने की शपथ दिलाई। एसएसपी ने बताया कि भारत का संविधान विश्व के समृद्ध संविधान में से एक है। इसमें हर नागरिक का कर्तव्य और अधिकार समाहित है। देश की एकता-अखंडता का द्योतक है।
|
एसएसपी किशोर कौशल ने मंगलवार को संविधान दिवस मौके पर पुलिस अफसरों और जवानों को भारत के संविधान की प्रस्तावना को आत्मसात करने की शपथ दिलाई। एसएसपी ने बताया कि भारत का संविधान विश्व के समृद्ध संविधान में से एक है। इसमें हर नागरिक का कर्तव्य और अधिकार समाहित है। देश की एकता-अखंडता का द्योतक है।
|
बॉलीवुड सेलिब्रिटी कपल कियारा आडवानी और सिद्धार्थ मल्होत्रा बीते मंगलवार को शादी के बंधन में बंधे हैं.
सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवानी ने राजस्थान के जैसलमेर में एक-दूसरे के साथ सात फेर लिए.
इस जोड़े को एशिया के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने एक बड़ा तोहफा दिया है.
कियारा और सिद्धार्थ को Reliance Trends फुटवियर का नया ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है.
रिलायंस रिटेल के वेंचर ट्रेंड्स फुटवियर ने गुरुवार को नवविवाहित बॉलीवुड जोड़ी को ब्रांड एंबेसडर बनाने का ऐलान किया.
बता दें कियारा आडवानी का अंबानी फैमिली के साथ बचपन से ही बेहद गहरा नाता है.
मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी (Isha Ambani) और कियारा आडवानी दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं.
Kiara Advani की शादी में शरीक होने के लिए ईशा अंबानी भी पति आनंद पीरामल के साथ पहुंची थीं.
ट्रेंड्स का एबेंसडर बनने पर सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा, 'मैं भारत में इस ब्रांड के चेहरे के रूप में जुड़कर खुश हूं. '
सिद्धार्थ के मुताबिक, मैंने Trends ब्रांड के जो फुटवियर पहने थे, वे मुझे बहुत पसंद आए.
अंबानी फैमिली के इस तोहफे पर कियारा आडवानी ने कहा कि ट्रेंड्स को पूरे भारत में पसंद किया जाता है.
कियारा के मुताबिक, फैशन और ट्रेंड साथ-साथ चलते हैं. ब्रांड के जूते ऐसे हैं जिन्हें मैं 24 घंटे पहनना पसंद करूंगी.
Trends की ओर से कहा गया कि कियारा और सिद्धार्थ प्रतिभाशाली युवा आइकन हैं, जिनकी बड़ी फॉलोइंग है.
|
बॉलीवुड सेलिब्रिटी कपल कियारा आडवानी और सिद्धार्थ मल्होत्रा बीते मंगलवार को शादी के बंधन में बंधे हैं. सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवानी ने राजस्थान के जैसलमेर में एक-दूसरे के साथ सात फेर लिए. इस जोड़े को एशिया के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी ने एक बड़ा तोहफा दिया है. कियारा और सिद्धार्थ को Reliance Trends फुटवियर का नया ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है. रिलायंस रिटेल के वेंचर ट्रेंड्स फुटवियर ने गुरुवार को नवविवाहित बॉलीवुड जोड़ी को ब्रांड एंबेसडर बनाने का ऐलान किया. बता दें कियारा आडवानी का अंबानी फैमिली के साथ बचपन से ही बेहद गहरा नाता है. मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी और कियारा आडवानी दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं. Kiara Advani की शादी में शरीक होने के लिए ईशा अंबानी भी पति आनंद पीरामल के साथ पहुंची थीं. ट्रेंड्स का एबेंसडर बनने पर सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा, 'मैं भारत में इस ब्रांड के चेहरे के रूप में जुड़कर खुश हूं. ' सिद्धार्थ के मुताबिक, मैंने Trends ब्रांड के जो फुटवियर पहने थे, वे मुझे बहुत पसंद आए. अंबानी फैमिली के इस तोहफे पर कियारा आडवानी ने कहा कि ट्रेंड्स को पूरे भारत में पसंद किया जाता है. कियारा के मुताबिक, फैशन और ट्रेंड साथ-साथ चलते हैं. ब्रांड के जूते ऐसे हैं जिन्हें मैं चौबीस घंटाटे पहनना पसंद करूंगी. Trends की ओर से कहा गया कि कियारा और सिद्धार्थ प्रतिभाशाली युवा आइकन हैं, जिनकी बड़ी फॉलोइंग है.
|
ध्यजना वृत्ति ( शाब्दी व्यजना )
प्रकाशित अर्थ को प्रकाशित कर देती है। आचार्य हेमचन्द्र सूरि ने व्यंजना की परिभाषा निबद्ध करते हुए कहा है - "अभिधा शक्ति के द्वारा प्रतीत अर्थ सहृदय श्रोता की प्रतिभा की सहायता से एक नवीन अर्थको द्योतित करता है। इस नवीन अर्थ को योतित करनेवाली शक्ति व्यंजना है। " इस प्रकार वान्य व्यंग्यार्थ प्रतीति का आधार तो है, किन्तु वह कथन का वास्तविक लक्ष्य नहीं होता, केवल साधन मात्र है। उदाहरण के लिए, ऑफिस में बैठा हुआ कोई अफसर अपने लर्क से कहे "मैं जा रहा हूँ", तो इसका मुख्यार्थ इतना अधिक महत्वपूर्ण नहीं है, जितना इसका यह व्यग्यार्थ कि अब ऑफिस का काम तुम सम्हालो । इसका तात्पर्य यह नहीं कि यहाँ "मैं जा रहा हूँ" इस वाक्य मे काव्यत्व है । यद्यपि यहाँ व्यंग्यार्थ प्रतीति होती है, तथापि यह व्यंग्यार्थ रमणीय तथा चमत्कारशाली नहीं है । वस्तुतः वही व्यग्यार्थ युक्त कथन काव्य हो सकता है, जिसमे रमणीय व्यंग्य हो । तभी तो पण्डितराज जगन्नाथ ने रमणीय अर्थ के प्रतिपादित करने वाले शब्द को काव्य माना है। कुछ लोगों के मतानुसार व्यग्य सर्वदा रमणीय ही होता है किन्तु हम इस मत से सहमत नहीं । व्यंग्यार्थ हमारे मत से अरमणीय भी हो सकता है। जिसका उदाहरण हम अभी चुके हैं ।
हम देखते हैं कि काव्य में मुख्यार्थ व लक्ष्यार्थ से इतर एक प्रमुख अर्थ की सत्ता माननी ही पड़ेगी। इसी अर्थ को प्रकट करने वाला व्यापार व्यञ्जना शक्ति है । मम्मट ने व्यञ्जना की कोई एक निश्चित परिभाषा निवद्ध नहीं की है । वे व्यञ्जना के श्रमिधामूला तथा लक्षरणमूला इन दो भेदों को अलग अलग लेकर उनका स्वरूप निबद्ध करते हैं । श्रभिधामूला के विषय मे मम्मट कहते हैंः--"जहाँ संयोगादि अर्थ नियामकों के द्वारा शब्द की अभिधा शक्ति एक स्थल मे नियन्त्रित हो जाती है, पर फिर भी किसी अमुख्यार्थ की प्रतीति
१ तच्छषम्युजनितार्थावगमप विचितप्रतिपप्रतिभामहाया थंध्यांतनशनिरजम् - काव्यानुशासन २००५९
हो ही जाती है, वहाँ अभिधामूला व्यंजना होती है ।"" लक्षणा के प्रयोजन के विषय में बताते हुए वे कहते हैं कि इस प्रयोजन की प्रतीति कराने में व्यञ्जना व्यापार ही साधन होता है। इसी के आगे वे बताते हैं कि जिस प्रयोजन या फल की प्रतीति के लिए प्रयोजनवती लक्षणा का प्रयोग किया जाता है, वहाँ व्यञ्जना से भिन्न और कोई शक्ति नहीं है, क्योंकि फल ( प्रयोजन ) की प्रतीति लक्ष्यार्थ के लिए प्रयुक्त शब्द से ही होती है । इन दोनों प्रसंगों को देखने से व्यंजना का एक निश्चित स्वरूप तो समझ में आ जाता है, किंतु फिर भी शास्त्रीय दृष्टि से इसे हम व्यंजना की परिभाषा नहीं मान सकते। साथ ही व्यंजना की हम ऐसी परिभाषा चाहते हैं, जिसमें लक्षणामूला तथा अभिधामूला दोनों का समावेश हो जाय । विश्वनाथ के द्वारा दी गई व्यंजना की परिभाषा इस दृष्टि से अधिक समीचीन कही जा सकती है। उनके मतानुसार जिस स्थान पर अभिधा तथा लक्षणा के कार्य करके शान्त हो जाने पर किसी न किसी व्यापार के कारण दूसरे की प्रतीति होती है, वहाँ व्यजना शक्ति ही होती है । 3 लाला भगवानदीन ने 'व्यंग्यार्थमञ्जूषा मे व्यंजना की निम्न परिभाषा दी है, जो दास के 'काव्यनिर्णय' से ली गई है ।
सूधो अर्थ जु वचन को, तेहि तजि बैन । समुझि परे ते कहत है, शक्ति व्यंजना ऐन ।।
वाचक लक्षक शब्द ए राजत भाजन रूप ।
व्यग्यारथहिं सुनीर कहि, बरनत सुकवि अनूप ।।
तन्त्र व्यापारो व्यन्जनात्मक । यस्य प्रतीतिमाधातु लक्षणा समुपास्यते । फले शब्दकगम्येऽत्र व्यञ्जनान्नापरा किया ।।
२ " अनेकार्थस्य शब्दस्य चाचकत्वे नियन्त्रिते । सयोगाद्यैरवाच्यार्थधीवृद् व्यापृतिरञ्जनम् ॥
३ विरतास्वभिधाद्यास्तु ययार्थो योध्यते पर. सा वृत्ति व्यञ्जना नाम .
- वही पृ० ६३.
घ्यजन' वृत्ति ( शाब्दी व्यंजना )
कोई व्यक्ति 'गंगा मै घोप है" इस वाक्य का प्रयोग करता है । यहाँ वह व्यक्ति घोप की शीतलता तथा पवित्रता की प्रतीति कराना चाहता है। पहले पहल "गंगा प्रवाह मे स्थित आमीरों की वस्ती" इस मुख्यार्थ के बाघ का ज्ञान होता है, फिर सामीप्य संबंध से "गगातीर पर घोप' इस लक्ष्यार्थ की प्रतीति होती है । तीसरे क्षण में "गंगा तट पर तथा घोप के पास शीतलता तथा पवित्रता का होना" व्यक्त होता है। कोई भी शक्ति एक से अधिक अर्थको व्यक्त नहीं कर सकती । अतः तीसरे अर्थ के लिए अलग से शक्ति माननी ही पड़ेगी। श्रय दीक्षित ने इसी बात को अपने वृत्तिचार्तिक में कहा है । वक्ता किसी कारण से "गंगा में घोप" इस वाक्य मे गंगा पद का प्रयोग करता है। उसका प्रयोजन पहले तो काव्य की शोभा बढ़ाकर गंगा प्रवाह के साथ गंगातट का तादात्म्य स्थापित करना है, फिर गगा वाली अतिशय पवित्रता तथा शीतलता का द्योतन कराना है । "" एक दूसरे आलंकारिक रत्नाकर ने भी कहा है - "गंगा के प्रवाह तथा तीर को एक ही शब्द से घोधित कराने से उनमें अभेदप्रतीति होती है इसके बाद प्रवाह के त्य पावनत्वादि गुणों की प्रतीति तीर में होने लगती है, यही लक्षणा के प्रयोग का प्रयोजन है ।"२ व्यग्यार्थप्रतीति सदा लक्षणा के ही चाद होती हो, ऐसा नहीं है । वाच्यार्थ से सीधी भी व्यंग्यार्थप्रतीति होती है। इस दशा मे नधा तथा व्यजना ढो ही व्यापार वाक्य मे पाये जाते हैं। व्यंजना शक्ति को न मान कर कुछ लोग प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति श्रमिधा से ही कराना चाहते हैं। कुछ तात्पर्यवृत्ति, लक्षणा या अनुमान प्रमाण से इसकी प्रतीति मानते है । वस्तुतः व्यजना का
१ रक्षणाया काव्यशाभातिशयाघायवनयाप्यधिक मनोनुकामम्य प्राद नादायप्रतिपय तानिशयितपावन वयतनाय तस्मिन् गगापट प्रयुट के । - पृ० चा० १०. ● सोतस्तरियो रेक्ष्ययन तादात सोतोधर्मा. शैत्यपावनवादयन्तीरे प्रतोयन्न इति प्रयोजनमिति ।
- वृ० च० में सून 'गार' १० २०
समावेश इनमें से किसी में भी नहीं हो सकता, इसे हम आगामी तीन परिच्छेदों में विस्तार से बतायँगे । अभिनवगुप्त ने इसी बात को लोचन में में बताया है : - "अभिधा, लक्षणा, तथा तात्पर्य से भिन्न चौथा व्यापार मानना ही पड़ेगा । इस व्यापार को ध्वनन, द्योतन, प्रत्यायन, अवगमन आदि शब्दों के द्वारा निरूपित कर सकते हैं।'
व्यंजना के विषय में हम देख चुके हैं कि व्यंग्यार्थ का बोधन कराने के लिए कभी तो कोई शब्द विशेष प्रमुख साधन होता है, कभी कभी कोई अर्थ विशेष । इसी आधार पर व्यंजना के शाब्दी तथा आर्थी ये दो भेद किये जाते हैं । इस संबंध में एक प्रश्न अवश्य उपस्थित होता है कि व्यंजना को शब्दशक्ति मान लेने पर फिर आर्थी व्यंजन जैसा भेद मानना क्या 'वदतो व्याघात नहीं होगा ? क्योंकि व्यंजना शब्द की शक्ति है, अर्थ की नहीं। यदि आप व्यजना मानते हैं, तो उसे शब्दशक्ति क्यों कहते हैं, क्योंकि यह तो शब्द व अर्थ दोनों की शक्ति हो जाती है । इसी का उत्तर देते हुए मम्मट कहते हैं कि वैसे तो त्र्यंजना शब्दशक्ति ही है, फिर भी जिस काव्य मे शब्द प्रमाण से सवेद्य कोई अर्थ पुनः किसी अर्थको व्यजित करता है, वहाँ अर्थ व्यंजक है शब्द केवल सहायक मात्र है। इसी को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया है कि वही अर्थ व्यंजक होगा, जो शब्द से प्रतीत हो ( न हि प्रमाणान्तर संवेद्योऽर्थो व्यजकः ) दूसरे शब्दों में जहाँ अर्थव्यजक हो,
१ तस्मात् अभिघातात्पर्यलक्षणाव्यतिरिक्त. चतुर्थोऽमौ व्यापारी ध्वननद्योतनव्यजनप्रत्यायनावगमनादि पोदरव्यपदेश निरूपितोऽभ्युपगन्तव्यः । - रोचन पृ० ११५ ( मद्रास स० )
२. किसी सिद्धान्त को लेकर चलने पर उसी के विरुद्ध कोई बात कह देना 'वदतो व्याघात' कहा जाता है। अगरेजी में इसे contradictory statement कहते हैं ।
३. शब्दप्रमाणवेधोर्थो व्यनस्क्यर्थान्तर यत । अर्थस्य व्यजकत्वे तत् शब्दस्य सहकारिता ।।
• का० प्र० तृतीय उ० पृ० ८१
व्यजना वृत्ति ( शाब्दी व्यंजना )
शब्द केवल सहकारी हो, वहाँ आर्थी तथा जहाँ शब्द में ही व्यंजकत्व हो वहाँ शाब्दी व्यंजना होती है। यदि कोई सिनेमा का शौकीन कहे"सूर्य अस्त हो गया" और इस वाक्य से "सिनेमा देखने चलो" इस अर्थ की अभिव्यक्ति हो तो, यहाँ आर्थी व्यंजना ही होगी। यहाँ पहले पहल 'सूर्य अस्त हो गया' इस वाक्य से मुख्यार्थ की प्रतीत होती है, फिर यह मुख्यार्थ ही सिनेमा वाले अर्थ को व्यंजित करता है । इस व्यंग्यार्थ की प्रतीति मुख्यार्थ के जान लेने पर ही होगी, पहले नहीं । शादी व्यंजना में शब्द ही मुख्यार्थ के अतिरिक्त अन्य अर्थ की भी प्रतीति कराता है। अभिधामूला शाब्दी व्यंजना में शब्द सदा ही द्वयर्थक होगा। जैसे "चिरजीवों जारी जुरै" आदि इसी परिच्छेद मे आगे उद्धृत दोहे मे 'वृषभानुजा' तथा 'हलधर के वीर' ये शब्द अमुख्यार्थ की भी व्यक्ति कराते हैं।' लक्षणा मूला शाब्दी में वह द्वचर्थक नहीं होता ।
व्यग्यार्थ की प्रतीति प्रकरणवश होती है। कौन कहने वाला है, किससे कहा जा रहा है, कहाँ, कध, किस ढंग से कहा जा रहा है, आदि विभिन्न प्रकरणों के जानने पर जब प्रतिभाशाली सहृदय उन प्रकरणों से मुख्यार्थ की संगति विटाता है, तभी व्यंग्यार्थ की प्रतीति होती है। इसीलिए व्यग्यार्थ प्रतीति में वक्तृबोद्धव्यादिवैशिष्ट्य का बड़ा महत्त्व है। प्रसिद्ध भाषावैज्ञानिक ब्लूमफील्ड ने तो साधारण अर्थ की प्रतीति में भी वक्तृत्रोद्वव्यवैशिष्ट्य को एक महत्त्वपूर्ण अंग माना है तभी तो उसने कहा है - "यदि हमे प्रत्येक चक्का की स्थिति तथा प्रत्येक श्रोता की प्रतिपत्ति का पूर्ण ज्ञान हो, तो केवल इन्हीं दो वस्तुओं को हम किसी शब्द के अर्थ के रूप में महण कर सकते हैं। केवल इन्हीं के आधार पर हम अपने अध्ययन के विषय की समस्त ज्ञान के अन्य क्षेत्रों से अच्छी तरह अलग कर सकते हैं । १२
१. इस दो को आगे हमी परिछेद में अभिधामूल व्यंजना के संबंध में देखिये ।
>. If we had an accurate knowledge of every speaker's situation and of erery hearer's responsc, -
|
ध्यजना वृत्ति प्रकाशित अर्थ को प्रकाशित कर देती है। आचार्य हेमचन्द्र सूरि ने व्यंजना की परिभाषा निबद्ध करते हुए कहा है - "अभिधा शक्ति के द्वारा प्रतीत अर्थ सहृदय श्रोता की प्रतिभा की सहायता से एक नवीन अर्थको द्योतित करता है। इस नवीन अर्थ को योतित करनेवाली शक्ति व्यंजना है। " इस प्रकार वान्य व्यंग्यार्थ प्रतीति का आधार तो है, किन्तु वह कथन का वास्तविक लक्ष्य नहीं होता, केवल साधन मात्र है। उदाहरण के लिए, ऑफिस में बैठा हुआ कोई अफसर अपने लर्क से कहे "मैं जा रहा हूँ", तो इसका मुख्यार्थ इतना अधिक महत्वपूर्ण नहीं है, जितना इसका यह व्यग्यार्थ कि अब ऑफिस का काम तुम सम्हालो । इसका तात्पर्य यह नहीं कि यहाँ "मैं जा रहा हूँ" इस वाक्य मे काव्यत्व है । यद्यपि यहाँ व्यंग्यार्थ प्रतीति होती है, तथापि यह व्यंग्यार्थ रमणीय तथा चमत्कारशाली नहीं है । वस्तुतः वही व्यग्यार्थ युक्त कथन काव्य हो सकता है, जिसमे रमणीय व्यंग्य हो । तभी तो पण्डितराज जगन्नाथ ने रमणीय अर्थ के प्रतिपादित करने वाले शब्द को काव्य माना है। कुछ लोगों के मतानुसार व्यग्य सर्वदा रमणीय ही होता है किन्तु हम इस मत से सहमत नहीं । व्यंग्यार्थ हमारे मत से अरमणीय भी हो सकता है। जिसका उदाहरण हम अभी चुके हैं । हम देखते हैं कि काव्य में मुख्यार्थ व लक्ष्यार्थ से इतर एक प्रमुख अर्थ की सत्ता माननी ही पड़ेगी। इसी अर्थ को प्रकट करने वाला व्यापार व्यञ्जना शक्ति है । मम्मट ने व्यञ्जना की कोई एक निश्चित परिभाषा निवद्ध नहीं की है । वे व्यञ्जना के श्रमिधामूला तथा लक्षरणमूला इन दो भेदों को अलग अलग लेकर उनका स्वरूप निबद्ध करते हैं । श्रभिधामूला के विषय मे मम्मट कहते हैंः--"जहाँ संयोगादि अर्थ नियामकों के द्वारा शब्द की अभिधा शक्ति एक स्थल मे नियन्त्रित हो जाती है, पर फिर भी किसी अमुख्यार्थ की प्रतीति एक तच्छषम्युजनितार्थावगमप विचितप्रतिपप्रतिभामहाया थंध्यांतनशनिरजम् - काव्यानुशासन बीस हज़ार उनसठ हो ही जाती है, वहाँ अभिधामूला व्यंजना होती है ।"" लक्षणा के प्रयोजन के विषय में बताते हुए वे कहते हैं कि इस प्रयोजन की प्रतीति कराने में व्यञ्जना व्यापार ही साधन होता है। इसी के आगे वे बताते हैं कि जिस प्रयोजन या फल की प्रतीति के लिए प्रयोजनवती लक्षणा का प्रयोग किया जाता है, वहाँ व्यञ्जना से भिन्न और कोई शक्ति नहीं है, क्योंकि फल की प्रतीति लक्ष्यार्थ के लिए प्रयुक्त शब्द से ही होती है । इन दोनों प्रसंगों को देखने से व्यंजना का एक निश्चित स्वरूप तो समझ में आ जाता है, किंतु फिर भी शास्त्रीय दृष्टि से इसे हम व्यंजना की परिभाषा नहीं मान सकते। साथ ही व्यंजना की हम ऐसी परिभाषा चाहते हैं, जिसमें लक्षणामूला तथा अभिधामूला दोनों का समावेश हो जाय । विश्वनाथ के द्वारा दी गई व्यंजना की परिभाषा इस दृष्टि से अधिक समीचीन कही जा सकती है। उनके मतानुसार जिस स्थान पर अभिधा तथा लक्षणा के कार्य करके शान्त हो जाने पर किसी न किसी व्यापार के कारण दूसरे की प्रतीति होती है, वहाँ व्यजना शक्ति ही होती है । तीन लाला भगवानदीन ने 'व्यंग्यार्थमञ्जूषा मे व्यंजना की निम्न परिभाषा दी है, जो दास के 'काव्यनिर्णय' से ली गई है । सूधो अर्थ जु वचन को, तेहि तजि बैन । समुझि परे ते कहत है, शक्ति व्यंजना ऐन ।। वाचक लक्षक शब्द ए राजत भाजन रूप । व्यग्यारथहिं सुनीर कहि, बरनत सुकवि अनूप ।। तन्त्र व्यापारो व्यन्जनात्मक । यस्य प्रतीतिमाधातु लक्षणा समुपास्यते । फले शब्दकगम्येऽत्र व्यञ्जनान्नापरा किया ।। दो " अनेकार्थस्य शब्दस्य चाचकत्वे नियन्त्रिते । सयोगाद्यैरवाच्यार्थधीवृद् व्यापृतिरञ्जनम् ॥ तीन विरतास्वभिधाद्यास्तु ययार्थो योध्यते पर. सा वृत्ति व्यञ्जना नाम . - वही पृशून्य तिरेसठ. घ्यजन' वृत्ति कोई व्यक्ति 'गंगा मै घोप है" इस वाक्य का प्रयोग करता है । यहाँ वह व्यक्ति घोप की शीतलता तथा पवित्रता की प्रतीति कराना चाहता है। पहले पहल "गंगा प्रवाह मे स्थित आमीरों की वस्ती" इस मुख्यार्थ के बाघ का ज्ञान होता है, फिर सामीप्य संबंध से "गगातीर पर घोप' इस लक्ष्यार्थ की प्रतीति होती है । तीसरे क्षण में "गंगा तट पर तथा घोप के पास शीतलता तथा पवित्रता का होना" व्यक्त होता है। कोई भी शक्ति एक से अधिक अर्थको व्यक्त नहीं कर सकती । अतः तीसरे अर्थ के लिए अलग से शक्ति माननी ही पड़ेगी। श्रय दीक्षित ने इसी बात को अपने वृत्तिचार्तिक में कहा है । वक्ता किसी कारण से "गंगा में घोप" इस वाक्य मे गंगा पद का प्रयोग करता है। उसका प्रयोजन पहले तो काव्य की शोभा बढ़ाकर गंगा प्रवाह के साथ गंगातट का तादात्म्य स्थापित करना है, फिर गगा वाली अतिशय पवित्रता तथा शीतलता का द्योतन कराना है । "" एक दूसरे आलंकारिक रत्नाकर ने भी कहा है - "गंगा के प्रवाह तथा तीर को एक ही शब्द से घोधित कराने से उनमें अभेदप्रतीति होती है इसके बाद प्रवाह के त्य पावनत्वादि गुणों की प्रतीति तीर में होने लगती है, यही लक्षणा के प्रयोग का प्रयोजन है ।"दो व्यग्यार्थप्रतीति सदा लक्षणा के ही चाद होती हो, ऐसा नहीं है । वाच्यार्थ से सीधी भी व्यंग्यार्थप्रतीति होती है। इस दशा मे नधा तथा व्यजना ढो ही व्यापार वाक्य मे पाये जाते हैं। व्यंजना शक्ति को न मान कर कुछ लोग प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति श्रमिधा से ही कराना चाहते हैं। कुछ तात्पर्यवृत्ति, लक्षणा या अनुमान प्रमाण से इसकी प्रतीति मानते है । वस्तुतः व्यजना का एक रक्षणाया काव्यशाभातिशयाघायवनयाप्यधिक मनोनुकामम्य प्राद नादायप्रतिपय तानिशयितपावन वयतनाय तस्मिन् गगापट प्रयुट के । - पृशून्य चाशून्य दस. ● सोतस्तरियो रेक्ष्ययन तादात सोतोधर्मा. शैत्यपावनवादयन्तीरे प्रतोयन्न इति प्रयोजनमिति । - वृशून्य चशून्य में सून 'गार' दस बीस समावेश इनमें से किसी में भी नहीं हो सकता, इसे हम आगामी तीन परिच्छेदों में विस्तार से बतायँगे । अभिनवगुप्त ने इसी बात को लोचन में में बताया है : - "अभिधा, लक्षणा, तथा तात्पर्य से भिन्न चौथा व्यापार मानना ही पड़ेगा । इस व्यापार को ध्वनन, द्योतन, प्रत्यायन, अवगमन आदि शब्दों के द्वारा निरूपित कर सकते हैं।' व्यंजना के विषय में हम देख चुके हैं कि व्यंग्यार्थ का बोधन कराने के लिए कभी तो कोई शब्द विशेष प्रमुख साधन होता है, कभी कभी कोई अर्थ विशेष । इसी आधार पर व्यंजना के शाब्दी तथा आर्थी ये दो भेद किये जाते हैं । इस संबंध में एक प्रश्न अवश्य उपस्थित होता है कि व्यंजना को शब्दशक्ति मान लेने पर फिर आर्थी व्यंजन जैसा भेद मानना क्या 'वदतो व्याघात नहीं होगा ? क्योंकि व्यंजना शब्द की शक्ति है, अर्थ की नहीं। यदि आप व्यजना मानते हैं, तो उसे शब्दशक्ति क्यों कहते हैं, क्योंकि यह तो शब्द व अर्थ दोनों की शक्ति हो जाती है । इसी का उत्तर देते हुए मम्मट कहते हैं कि वैसे तो त्र्यंजना शब्दशक्ति ही है, फिर भी जिस काव्य मे शब्द प्रमाण से सवेद्य कोई अर्थ पुनः किसी अर्थको व्यजित करता है, वहाँ अर्थ व्यंजक है शब्द केवल सहायक मात्र है। इसी को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया है कि वही अर्थ व्यंजक होगा, जो शब्द से प्रतीत हो दूसरे शब्दों में जहाँ अर्थव्यजक हो, एक तस्मात् अभिघातात्पर्यलक्षणाव्यतिरिक्त. चतुर्थोऽमौ व्यापारी ध्वननद्योतनव्यजनप्रत्यायनावगमनादि पोदरव्यपदेश निरूपितोऽभ्युपगन्तव्यः । - रोचन पृशून्य एक सौ पंद्रह दो. किसी सिद्धान्त को लेकर चलने पर उसी के विरुद्ध कोई बात कह देना 'वदतो व्याघात' कहा जाता है। अगरेजी में इसे contradictory statement कहते हैं । तीन. शब्दप्रमाणवेधोर्थो व्यनस्क्यर्थान्तर यत । अर्थस्य व्यजकत्वे तत् शब्दस्य सहकारिता ।। • काशून्य प्रशून्य तृतीय उशून्य पृशून्य इक्यासी व्यजना वृत्ति शब्द केवल सहकारी हो, वहाँ आर्थी तथा जहाँ शब्द में ही व्यंजकत्व हो वहाँ शाब्दी व्यंजना होती है। यदि कोई सिनेमा का शौकीन कहे"सूर्य अस्त हो गया" और इस वाक्य से "सिनेमा देखने चलो" इस अर्थ की अभिव्यक्ति हो तो, यहाँ आर्थी व्यंजना ही होगी। यहाँ पहले पहल 'सूर्य अस्त हो गया' इस वाक्य से मुख्यार्थ की प्रतीत होती है, फिर यह मुख्यार्थ ही सिनेमा वाले अर्थ को व्यंजित करता है । इस व्यंग्यार्थ की प्रतीति मुख्यार्थ के जान लेने पर ही होगी, पहले नहीं । शादी व्यंजना में शब्द ही मुख्यार्थ के अतिरिक्त अन्य अर्थ की भी प्रतीति कराता है। अभिधामूला शाब्दी व्यंजना में शब्द सदा ही द्वयर्थक होगा। जैसे "चिरजीवों जारी जुरै" आदि इसी परिच्छेद मे आगे उद्धृत दोहे मे 'वृषभानुजा' तथा 'हलधर के वीर' ये शब्द अमुख्यार्थ की भी व्यक्ति कराते हैं।' लक्षणा मूला शाब्दी में वह द्वचर्थक नहीं होता । व्यग्यार्थ की प्रतीति प्रकरणवश होती है। कौन कहने वाला है, किससे कहा जा रहा है, कहाँ, कध, किस ढंग से कहा जा रहा है, आदि विभिन्न प्रकरणों के जानने पर जब प्रतिभाशाली सहृदय उन प्रकरणों से मुख्यार्थ की संगति विटाता है, तभी व्यंग्यार्थ की प्रतीति होती है। इसीलिए व्यग्यार्थ प्रतीति में वक्तृबोद्धव्यादिवैशिष्ट्य का बड़ा महत्त्व है। प्रसिद्ध भाषावैज्ञानिक ब्लूमफील्ड ने तो साधारण अर्थ की प्रतीति में भी वक्तृत्रोद्वव्यवैशिष्ट्य को एक महत्त्वपूर्ण अंग माना है तभी तो उसने कहा है - "यदि हमे प्रत्येक चक्का की स्थिति तथा प्रत्येक श्रोता की प्रतिपत्ति का पूर्ण ज्ञान हो, तो केवल इन्हीं दो वस्तुओं को हम किसी शब्द के अर्थ के रूप में महण कर सकते हैं। केवल इन्हीं के आधार पर हम अपने अध्ययन के विषय की समस्त ज्ञान के अन्य क्षेत्रों से अच्छी तरह अलग कर सकते हैं । बारह एक. इस दो को आगे हमी परिछेद में अभिधामूल व्यंजना के संबंध में देखिये । >. If we had an accurate knowledge of every speaker's situation and of erery hearer's responsc, -
|
1. एंड्रयू साइमंड्स (Andrew Symonds)
Bad Boys: इस लिस्ट में पहले और आखिरी नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के ही दिवंगत क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड्स का नाम आता है, जिनका विवादों से पुराना नाता रहा. साइमंड्स ने अपने क्रिकेट करियर में जमकर नाम तो कमाया ही साथ ही वो विवादों का भी हिस्सा रहे. साइमंड्स शराब के बेहद शौकीन थे और ये बात किसी से छिपी नहीं है.
साल 2009 में हुए बड़े विवाद के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ओर से इनका केंद्रीय अनुबंध वापस ले लिया गया था और टी-20 टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही इन्हें घर वापस भेज दिया गया था. इसके पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्प थी. एक तरफ टीम के सभी प्लेयर्स मीटिंग में थे और साइमंड्स मछली पकड़ने में बिजी थे. इसके अलावा एक और विवाद में उनका नाम सुर्खियों रहा.
भारत के खिलाफ सिडनी में नए साल की शुरूआत में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान एंड्रयू साइमंड्स पर भारत के खिलाडी स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह को 'बंदर' कहने का आरोप लगा था. इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी और ये मामला क्रिकेट बोर्ड तक पहुंचा था.
|
एक. एंड्रयू साइमंड्स Bad Boys: इस लिस्ट में पहले और आखिरी नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के ही दिवंगत क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड्स का नाम आता है, जिनका विवादों से पुराना नाता रहा. साइमंड्स ने अपने क्रिकेट करियर में जमकर नाम तो कमाया ही साथ ही वो विवादों का भी हिस्सा रहे. साइमंड्स शराब के बेहद शौकीन थे और ये बात किसी से छिपी नहीं है. साल दो हज़ार नौ में हुए बड़े विवाद के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ओर से इनका केंद्रीय अनुबंध वापस ले लिया गया था और टी-बीस टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही इन्हें घर वापस भेज दिया गया था. इसके पीछे की वजह भी बेहद दिलचस्प थी. एक तरफ टीम के सभी प्लेयर्स मीटिंग में थे और साइमंड्स मछली पकड़ने में बिजी थे. इसके अलावा एक और विवाद में उनका नाम सुर्खियों रहा. भारत के खिलाफ सिडनी में नए साल की शुरूआत में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान एंड्रयू साइमंड्स पर भारत के खिलाडी स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह को 'बंदर' कहने का आरोप लगा था. इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी और ये मामला क्रिकेट बोर्ड तक पहुंचा था.
|
कहीं से भी, मुझे शनिवार की दोपहर में एक गहरा गले मिला। लेकिन अजीब चीज यह है कि दुख और सूजन केवल मेरी बाईं ओर है। मेरे गले का दाहिना तरफ बिल्कुल ठीक है। और कोई खांसी नहीं है। बाईं तरफ बस एक वास्तव में गले में गले।
यह रविवार की शाम को और भी खराब हो गया, और मुझे यह भी यकीन नहीं था कि मैं कल रात सो जाऊंगा, लेकिन मुझे ठीक आराम मिला (कुछ बार उठ गया) और यह आज सुबह बेहतर महसूस हुआ... लेकिन यह अभी भी 7 / अभी दर्द के लिए 10। उम्मीद है कि कल चले गए। और उम्मीद है कि बदतर नहीं है।
वैसे भी, मैंने आज एक नया कसरत शुरू कियाः
1 बी) पुलअप - 3x10 (विफलता से कम 1-2 प्रतिनिधि रोकना)
35 मिनट का सत्र,
|
कहीं से भी, मुझे शनिवार की दोपहर में एक गहरा गले मिला। लेकिन अजीब चीज यह है कि दुख और सूजन केवल मेरी बाईं ओर है। मेरे गले का दाहिना तरफ बिल्कुल ठीक है। और कोई खांसी नहीं है। बाईं तरफ बस एक वास्तव में गले में गले। यह रविवार की शाम को और भी खराब हो गया, और मुझे यह भी यकीन नहीं था कि मैं कल रात सो जाऊंगा, लेकिन मुझे ठीक आराम मिला और यह आज सुबह बेहतर महसूस हुआ... लेकिन यह अभी भी सात / अभी दर्द के लिए दस। उम्मीद है कि कल चले गए। और उम्मीद है कि बदतर नहीं है। वैसे भी, मैंने आज एक नया कसरत शुरू कियाः एक बी) पुलअप - तीनxदस पैंतीस मिनट का सत्र,
|
Weather Update : गर्मी का सितम. . . कर डाला बेदम ! पारा झुलसाने लगा, सूरज जलाने लगा ! Hindi News उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow Weather Today) में तापमान एक बार फिर ऊपर जाने लगा है। उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी हो रही है।
Karnataka Politics: क्या कर्नाटक में BJP-JDS कोई बड़ा प्लान बना रहे हैं? Deve Gowda क्या बोले?
Anju Pakistan Lover: Pakistani प्रेमी से शादी करने वाली अंजू बनी फातिमा? पहले भी बदला था धर्म?
|
Weather Update : गर्मी का सितम. . . कर डाला बेदम ! पारा झुलसाने लगा, सूरज जलाने लगा ! Hindi News उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तापमान एक बार फिर ऊपर जाने लगा है। उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी हो रही है। Karnataka Politics: क्या कर्नाटक में BJP-JDS कोई बड़ा प्लान बना रहे हैं? Deve Gowda क्या बोले? Anju Pakistan Lover: Pakistani प्रेमी से शादी करने वाली अंजू बनी फातिमा? पहले भी बदला था धर्म?
|
RANCHI: सरकार ने पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके बावजूद सिटी में बिना हैंडल वाले पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। खुलेआम रांची नगर निगम की नाक के नीचे दुकान वाले इस पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं थोक में भी इसकी सप्लाई का सिलसिला जारी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पॉलीथिन को लेकर निगम की कार्रवाई केवल आईवॉश बन कर रह गई है।
पॉलीथिन की जगह दुकान और मॉल में कागज के बने थैले का इस्तेमाल करने का आदेश दिया गया था। कुछ दुकानों में इसे सख्ती से लागू भी कराया गया। लेकिन अधिकतर दुकानों में बिना हैंडल वाले प्लास्टिक में ही कस्टमर्स को सामान बेचा जा रहा है। यही पॉलीथिन अब लोगों के घरों में फिर से पहुंचने लगा है। और वहां से रोड और फिर नालियों में यही प्लास्टिक पहुंच जाएगा। इससे पानी की निकासी नहीं हो पाएगी और नालियां भी जाम होंगी।
सिटी की बड़ी दुकानों में दिखावे के लिए नगर निगम के अधिकारी छापेमारी तो करते हैं। वहीं उनसे कुछ फाइन भी वसूला जाता है। इसके बाद निगम के अधिकारी सो जाते हैं। कुछ दिनों से सिटी में पॉलीथिन को लेकर छापेमारी अभियान भी बंद है। ऐसे में दुकानदार भी नियमों को ताक पर रख बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरी बैग में सामान दे रहे हैं।
पॉलिथिन के कारण हो रही समस्याओं को देखते हुए सरकार ने राज्य में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब प्लास्टिक बैग का निर्माण, इंपोर्ट, स्टोरेज, बिक्री पर बैन हो गया। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना सहित जेल तक की कार्रवाई का भी प्रावधान सरकार ने रखा है। इसके बावजूद इसके इस्तेमाल में कोई कमी नहीं आ रही है। वहीं पॉलीथिन के कारण पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इसके अलावा ग्राउंड वाटर लेवल प्रभावित हो रहा है। वहीं पर्यावरण को भी इससे काफी नुकसान हो रहा है।
सरकार ने फिलहाल प्लास्टिक कैरीबैग पर रोक लगाई है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरीबैग का इस्तेमाल कर रहे है। हमलोग इसपर भी काम करेंगे और जल्द ही बिना हैंडल वाले प्लास्टिक पर भी रोक लगाई जाएगी।
हमारा फोकस प्लास्टिक कैरीबैग के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। इसके लिए हम रेगुलर छापेमारी भी कर रहे हैं। अगर सरकार से हमें कुछ निर्देश मिलता है, तो बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरीबैग पर भी रोक लगाई जाएगी।
|
RANCHI: सरकार ने पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके बावजूद सिटी में बिना हैंडल वाले पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। खुलेआम रांची नगर निगम की नाक के नीचे दुकान वाले इस पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं थोक में भी इसकी सप्लाई का सिलसिला जारी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पॉलीथिन को लेकर निगम की कार्रवाई केवल आईवॉश बन कर रह गई है। पॉलीथिन की जगह दुकान और मॉल में कागज के बने थैले का इस्तेमाल करने का आदेश दिया गया था। कुछ दुकानों में इसे सख्ती से लागू भी कराया गया। लेकिन अधिकतर दुकानों में बिना हैंडल वाले प्लास्टिक में ही कस्टमर्स को सामान बेचा जा रहा है। यही पॉलीथिन अब लोगों के घरों में फिर से पहुंचने लगा है। और वहां से रोड और फिर नालियों में यही प्लास्टिक पहुंच जाएगा। इससे पानी की निकासी नहीं हो पाएगी और नालियां भी जाम होंगी। सिटी की बड़ी दुकानों में दिखावे के लिए नगर निगम के अधिकारी छापेमारी तो करते हैं। वहीं उनसे कुछ फाइन भी वसूला जाता है। इसके बाद निगम के अधिकारी सो जाते हैं। कुछ दिनों से सिटी में पॉलीथिन को लेकर छापेमारी अभियान भी बंद है। ऐसे में दुकानदार भी नियमों को ताक पर रख बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरी बैग में सामान दे रहे हैं। पॉलिथिन के कारण हो रही समस्याओं को देखते हुए सरकार ने राज्य में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब प्लास्टिक बैग का निर्माण, इंपोर्ट, स्टोरेज, बिक्री पर बैन हो गया। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना सहित जेल तक की कार्रवाई का भी प्रावधान सरकार ने रखा है। इसके बावजूद इसके इस्तेमाल में कोई कमी नहीं आ रही है। वहीं पॉलीथिन के कारण पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इसके अलावा ग्राउंड वाटर लेवल प्रभावित हो रहा है। वहीं पर्यावरण को भी इससे काफी नुकसान हो रहा है। सरकार ने फिलहाल प्लास्टिक कैरीबैग पर रोक लगाई है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरीबैग का इस्तेमाल कर रहे है। हमलोग इसपर भी काम करेंगे और जल्द ही बिना हैंडल वाले प्लास्टिक पर भी रोक लगाई जाएगी। हमारा फोकस प्लास्टिक कैरीबैग के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। इसके लिए हम रेगुलर छापेमारी भी कर रहे हैं। अगर सरकार से हमें कुछ निर्देश मिलता है, तो बिना हैंडल वाले प्लास्टिक कैरीबैग पर भी रोक लगाई जाएगी।
|
धर्मपरायण विचक्षण नवाब अपने प्रभु के पादेशको अन्यथा करना नहीं चाहते हैं।
फोर्थ - तो क्या गुवराज के प्रतिवादी होनेने ईरा इण्डिया कम्पनी को पत्र वङ्गालमें वाणिज्य अधिकार नहीं मिलेगा
महतात्र - यह बात में नहीं कह सकता हूँ। जिसका राज्य है, जो दण्ड-मण्डका कर्त्ता है, उसके रहते में क्या का मकता हूँ? विशेष करके उनको इच्छा के विरुद्ध किन्तु तोभी में नवाब दरवारमै ययामाध्य उमी वातका यत्र करूँगा, कि जिसमें आप लोगों को प्रापका वाणिज्य अधिकार फिर से मिल
फोर्थ-बम, इतना ही बहुत है। चापको महायता होने से हमारे कार्यको सिद्धि अवश्य होगो । हम लोग आपके गरणागत है और आप भी गरणागतके रथक ४ मे हमारा उदार कोजिये ●
मह-महाशय ! मुझको बहुत बातें करनी नहीं धा। मैंने नयाव बहादुरमे कभी किसी बातका अनुरोध नहीं किया है। इस बार पाप मोर्गकि लिये यह भी करूँगा । अच्छा हो, चाप दरवारमै उपस्थित रहकर मेरे कार्य देख जायें । मेसे यही इच्छा है कि पापको बाणिज्य परिकार फिरमे मिस प्राय । परन्तु एक बात भापने पूछता हूँ कि यदि नयाव बहादुर बहाब्रेकि मुटेका पानीबात पर और देकर, पाप कि ऊपर पर्यदक
बङ्गालका भन्तिम नवाब ।
करना चाहें, तो क्या आप उस अर्थदण्डको देने के लिये तय्यार हे ?
" डाकर फोर्थ बोले, "हम लोगोंपर चाशा है कि बहुत भारी वोझ नहीं रक्खा जायगा, क्योंकि आपको सब हाल मालूम है कि हम लोग इस मामले में नितान्त हो निरपराध हैं - यह मिथ्या दोषारोपण हुया है।"
मह० -- यह वात नवाब बहादुरको इच्छा पर निर्भर है। रुपये का लोभ दिखाकर भले ही राज़ी कर सको तो कर सको, वातोसे तो कुछ भी नहीं होगा ।
फोर्थ - मैं आप ही के ऊपर सब भार अर्पण करता हूँ । आप जो कुछ ठीक समकें वही कीजियेगा।
मह -- मेरे ऊपर वोझ डालकर आप नियिन्त रहें, ऐसे काम नहीं चलेगा। चाप लोगोंको भी नवाव दरवारमें उपस्थित रहना पड़ेगा।
फोर्थ - जबकि मैं सब ही बोझ आपके ऊपर रखता हूँ, फिर हम लोगोंके वहीं उपस्थित रहने को क्या श्रावश्यकता है ?
फोर्थ आपको यह युक्ति बहुत ठोक है '
" मह० - उपस्थित रहनेमे लाभके अतिरिक्त हानि तो कुछ नहीं है। आपको दो चार खुशामद की बातों से कुछ न कुछ उपकार हो होगा और एक के दूसरे के सामने होने से आँखों को लब्जा भी होती है ।
|
धर्मपरायण विचक्षण नवाब अपने प्रभु के पादेशको अन्यथा करना नहीं चाहते हैं। फोर्थ - तो क्या गुवराज के प्रतिवादी होनेने ईरा इण्डिया कम्पनी को पत्र वङ्गालमें वाणिज्य अधिकार नहीं मिलेगा महतात्र - यह बात में नहीं कह सकता हूँ। जिसका राज्य है, जो दण्ड-मण्डका कर्त्ता है, उसके रहते में क्या का मकता हूँ? विशेष करके उनको इच्छा के विरुद्ध किन्तु तोभी में नवाब दरवारमै ययामाध्य उमी वातका यत्र करूँगा, कि जिसमें आप लोगों को प्रापका वाणिज्य अधिकार फिर से मिल फोर्थ-बम, इतना ही बहुत है। चापको महायता होने से हमारे कार्यको सिद्धि अवश्य होगो । हम लोग आपके गरणागत है और आप भी गरणागतके रथक चार मे हमारा उदार कोजिये ● मह-महाशय ! मुझको बहुत बातें करनी नहीं धा। मैंने नयाव बहादुरमे कभी किसी बातका अनुरोध नहीं किया है। इस बार पाप मोर्गकि लिये यह भी करूँगा । अच्छा हो, चाप दरवारमै उपस्थित रहकर मेरे कार्य देख जायें । मेसे यही इच्छा है कि पापको बाणिज्य परिकार फिरमे मिस प्राय । परन्तु एक बात भापने पूछता हूँ कि यदि नयाव बहादुर बहाब्रेकि मुटेका पानीबात पर और देकर, पाप कि ऊपर पर्यदक बङ्गालका भन्तिम नवाब । करना चाहें, तो क्या आप उस अर्थदण्डको देने के लिये तय्यार हे ? " डाकर फोर्थ बोले, "हम लोगोंपर चाशा है कि बहुत भारी वोझ नहीं रक्खा जायगा, क्योंकि आपको सब हाल मालूम है कि हम लोग इस मामले में नितान्त हो निरपराध हैं - यह मिथ्या दोषारोपण हुया है।" महशून्य -- यह वात नवाब बहादुरको इच्छा पर निर्भर है। रुपये का लोभ दिखाकर भले ही राज़ी कर सको तो कर सको, वातोसे तो कुछ भी नहीं होगा । फोर्थ - मैं आप ही के ऊपर सब भार अर्पण करता हूँ । आप जो कुछ ठीक समकें वही कीजियेगा। मह -- मेरे ऊपर वोझ डालकर आप नियिन्त रहें, ऐसे काम नहीं चलेगा। चाप लोगोंको भी नवाव दरवारमें उपस्थित रहना पड़ेगा। फोर्थ - जबकि मैं सब ही बोझ आपके ऊपर रखता हूँ, फिर हम लोगोंके वहीं उपस्थित रहने को क्या श्रावश्यकता है ? फोर्थ आपको यह युक्ति बहुत ठोक है ' " महशून्य - उपस्थित रहनेमे लाभके अतिरिक्त हानि तो कुछ नहीं है। आपको दो चार खुशामद की बातों से कुछ न कुछ उपकार हो होगा और एक के दूसरे के सामने होने से आँखों को लब्जा भी होती है ।
|
नीना ने अगस्त में इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की थी, जिसके साथ कैप्शन में उन्होंने संकेत दिया था कि वह काम करना चाहती हैं। उन्होंने साथ में लिखा था, "मैं मुंबई में रहती हूं और काम करती हूं। मैं एक अच्छी अभिनेत्री हूं और अच्छी भूमिकाएं निभाना चाहती हूं। " सिन्हा ने कहा कि वह हमेशा से नीना के काम के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने कहा, "वह पूरी तरह इस भूमिका के लिए फिट हैं। उनका इंस्टाग्राम पोस्ट देखने के बाद मैने बिना हिचकिचाए उन्हें फोन किया क्योंकि उद्योग में कुछ लोग सदाबहार हैं और नीना उनमें से एक हैं। " 'मुल्क' की शूटिंग अक्टूबर से शुरू होगी। इसमें तापसी पन्नू, प्रतीक बब्बर और रजत कपूर भी दिखेंगे। फिल्म के अगले साल रिलीज होने की संभावना है।
जब नीना ने इंस्टाग्राम पर काम मांगने वाली तस्वीर शेयर की थी। उस पोस्ट को एक्ट्रेस की बेटी मसाबा ने अपने अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा था- कुछ दिन पहले मैं किसी से कह रही थी कि मुझे काम मांगने में न तो डर लगता है और न ही शर्म आती है। जाहिर है कि यह खानदानी काम है। मेरी मां ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की है। नेशनल अवॉर्ड विनर 62 वर्षीय मेरी मां। वह हमेशा मुझे काम करने की प्रेरणा देती रही हैं।
मसाबा ने लिखा था- मेरी मां मुझसे कहती हैं कि काम हमें बूढ़ा होने से रोकता है। नीना द्वारा शेयर की गई इस तस्वीर ने ढेरों लोगों को प्रेरित किया है। इस लिस्ट में बॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा समेत कई जाने-माने कलाकार शामिल हैं।
|
नीना ने अगस्त में इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की थी, जिसके साथ कैप्शन में उन्होंने संकेत दिया था कि वह काम करना चाहती हैं। उन्होंने साथ में लिखा था, "मैं मुंबई में रहती हूं और काम करती हूं। मैं एक अच्छी अभिनेत्री हूं और अच्छी भूमिकाएं निभाना चाहती हूं। " सिन्हा ने कहा कि वह हमेशा से नीना के काम के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने कहा, "वह पूरी तरह इस भूमिका के लिए फिट हैं। उनका इंस्टाग्राम पोस्ट देखने के बाद मैने बिना हिचकिचाए उन्हें फोन किया क्योंकि उद्योग में कुछ लोग सदाबहार हैं और नीना उनमें से एक हैं। " 'मुल्क' की शूटिंग अक्टूबर से शुरू होगी। इसमें तापसी पन्नू, प्रतीक बब्बर और रजत कपूर भी दिखेंगे। फिल्म के अगले साल रिलीज होने की संभावना है। जब नीना ने इंस्टाग्राम पर काम मांगने वाली तस्वीर शेयर की थी। उस पोस्ट को एक्ट्रेस की बेटी मसाबा ने अपने अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा था- कुछ दिन पहले मैं किसी से कह रही थी कि मुझे काम मांगने में न तो डर लगता है और न ही शर्म आती है। जाहिर है कि यह खानदानी काम है। मेरी मां ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर शेयर की है। नेशनल अवॉर्ड विनर बासठ वर्षीय मेरी मां। वह हमेशा मुझे काम करने की प्रेरणा देती रही हैं। मसाबा ने लिखा था- मेरी मां मुझसे कहती हैं कि काम हमें बूढ़ा होने से रोकता है। नीना द्वारा शेयर की गई इस तस्वीर ने ढेरों लोगों को प्रेरित किया है। इस लिस्ट में बॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा समेत कई जाने-माने कलाकार शामिल हैं।
|
गोशा जॉर्ज के नाम का एक छोटा आकार है एक व्यक्ति आमतौर पर बहुत ही महत्वाकांक्षी है और कभी-कभी तो अहंकारी भी है। इस को छिपाने के लिए, जॉर्जिया अक्सर कम नाम वाले झोरा, गोशा को पसंद करते हैं। पूरा नाम भी कुछ अनिवार्य है आखिरकार, जब लोग जॉर्ज का नाम सुनाते हैं, तो लोगों में क्या मूल संघ उत्पन्न होता है? बेशक, विजयी!
इसलिए, कुछ विफलता के साथ, गोशी अक्सर उपहास का डरना शुरू करते हैं, बिना किसी कारण के। की तरह, जैसा कि - विजय, लेकिन blundered!
गोशा, जिसका पूरा नाम हस्ताक्षर द्वारा शासित होता हैराशि चक्र धनु, विशेषकर परेशान, संक्रमणकालीन समय में अपने चरित्र की मजबूत विशेषताएं दर्शाता है। उनके कार्यों से लोगों में मजबूत भावनाएं हो सकती हैं। कोई इसे प्यार करेगा, लेकिन कोई इसे नफरत करेगा सामान्य समय में, जॉर्ज अदृश्य हो जाता है जो लोग इस नाम को सहन करते हैं, उनमें त्वरित प्रतिक्रिया और एक क्रूर दबाव की प्रवृत्ति होती है, खासकर व्यवसाय में।
तथ्य यह है कि कुछ अस्थायीता -सभी घोष की पहचान वे अक्सर अपनी गतिविधियों को बदलते हैं गोशा, जिसका पूरा नाम ग्रह बृहस्पति द्वारा नियंत्रित किया जाता है, असामान्य रूप से विभिन्न प्रकार के रोमांचों के लिए इच्छुक है और यह लापरवाही से अलग है। अक्सर, जॉर्जियाई कानून के साथ अंतर पर भी हैं इस नाम वाले लोग अक्सर एक तेज, विचित्र मन रखते हैं और चालाक द्वारा प्रतिष्ठित होते हैं।
|
गोशा जॉर्ज के नाम का एक छोटा आकार है एक व्यक्ति आमतौर पर बहुत ही महत्वाकांक्षी है और कभी-कभी तो अहंकारी भी है। इस को छिपाने के लिए, जॉर्जिया अक्सर कम नाम वाले झोरा, गोशा को पसंद करते हैं। पूरा नाम भी कुछ अनिवार्य है आखिरकार, जब लोग जॉर्ज का नाम सुनाते हैं, तो लोगों में क्या मूल संघ उत्पन्न होता है? बेशक, विजयी! इसलिए, कुछ विफलता के साथ, गोशी अक्सर उपहास का डरना शुरू करते हैं, बिना किसी कारण के। की तरह, जैसा कि - विजय, लेकिन blundered! गोशा, जिसका पूरा नाम हस्ताक्षर द्वारा शासित होता हैराशि चक्र धनु, विशेषकर परेशान, संक्रमणकालीन समय में अपने चरित्र की मजबूत विशेषताएं दर्शाता है। उनके कार्यों से लोगों में मजबूत भावनाएं हो सकती हैं। कोई इसे प्यार करेगा, लेकिन कोई इसे नफरत करेगा सामान्य समय में, जॉर्ज अदृश्य हो जाता है जो लोग इस नाम को सहन करते हैं, उनमें त्वरित प्रतिक्रिया और एक क्रूर दबाव की प्रवृत्ति होती है, खासकर व्यवसाय में। तथ्य यह है कि कुछ अस्थायीता -सभी घोष की पहचान वे अक्सर अपनी गतिविधियों को बदलते हैं गोशा, जिसका पूरा नाम ग्रह बृहस्पति द्वारा नियंत्रित किया जाता है, असामान्य रूप से विभिन्न प्रकार के रोमांचों के लिए इच्छुक है और यह लापरवाही से अलग है। अक्सर, जॉर्जियाई कानून के साथ अंतर पर भी हैं इस नाम वाले लोग अक्सर एक तेज, विचित्र मन रखते हैं और चालाक द्वारा प्रतिष्ठित होते हैं।
|
अमेरिकी पुलिस ने साल 2022 से 2023 के बीच कैलिफोर्निया के कई गुरुद्वारों और उसके आस-पास हुई गोलीबारी की घटनाओं के मामले में 17 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपितों को 20 से अधिक स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद पकड़ा गया है। पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान पिस्टल, AK 47 और मशीनगन जैसी घातक हथियार भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपितों में अधिकतर सिख समुदाय के लोग बताए जा रहे हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार लोगों में कम से कम 4 भारतीय बताए जा रहे हैं जिनके पास भारतीय पासपोर्ट बरामद हुआ है। इसमें से 2 लोग माफिया गैंग से जुड़े हैं जो भारत के कई केसों में वॉन्टेड हैं। बाकी आरोपित जन्म से ही अमेरिका के सिख समुदाय के लोग है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार लोग दूसरी गैंग से अदावत में गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिया करते थे। गोलीबारी की ये घटनाएँ अमेरिका के सट्टर, सैक्रामेंटो, साइन जोकिन, सोलानो, योलो और मर्सेड काउंटी में हुई थीं। पुलिस ने इन घटनाओं में हत्या के प्रयास की धाराओं में केस दर्ज किया था।
पुलिस ने कुछ गिरफ्तार आरोपितों के नाम भी प्रकाशित किए हैं। इसमें से अमरदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, नितीश कौशल, हरमनदीप सिंह, गुरमिंदर सिंह, देवेंदर सिंह, गुरशरण सिंह और गुरचरण सिंह प्रमुख हैं। इसके अलावा एक अन्य स्थान वुडलैंड पर हुई गोलीबारी के मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम पवित्तर सिंह, हुसनदीप सिंह, हरकीरत सिंह, सहजप्रीत सिंह और तीरथ राम हैं। इसमें से पवित्तर सिंह और हुसनदीप सिंह पर भारत भारत में केस दर्ज हैं और दोनों वहाँ से भगोड़े घोषित हैं। इन सभी के अलावा पुलिस ने 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है जिन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपितों द्वारा की गई 2 प्रमुख घटनाओं में पहली घटना 27 अगस्त, 2022 की है। तब स्टॉकटन के एक गुरुद्वारा में गोलीबारी हुई थी। इसके अलावा मार्च 2023 को सैक्रामेंटो के एक अन्य गुरूद्वारे में भी गोलीबारी हुई थी। जाँच के दौरान पुलिस ने बताया कि अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुई तमाम गोलीबारी के पीछे 2 गैंग की आपसी टशन थी। इन समूहों के नाम AK 47 और मिंटा हैं इन आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के अधिकारियों ने कैलिफोर्निया को सुरक्षित बताया है।
|
अमेरिकी पुलिस ने साल दो हज़ार बाईस से दो हज़ार तेईस के बीच कैलिफोर्निया के कई गुरुद्वारों और उसके आस-पास हुई गोलीबारी की घटनाओं के मामले में सत्रह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपितों को बीस से अधिक स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद पकड़ा गया है। पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान पिस्टल, AK सैंतालीस और मशीनगन जैसी घातक हथियार भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपितों में अधिकतर सिख समुदाय के लोग बताए जा रहे हैं। पुलिस ने यह कार्रवाई सोमवार को की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार लोगों में कम से कम चार भारतीय बताए जा रहे हैं जिनके पास भारतीय पासपोर्ट बरामद हुआ है। इसमें से दो लोग माफिया गैंग से जुड़े हैं जो भारत के कई केसों में वॉन्टेड हैं। बाकी आरोपित जन्म से ही अमेरिका के सिख समुदाय के लोग है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार लोग दूसरी गैंग से अदावत में गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम दिया करते थे। गोलीबारी की ये घटनाएँ अमेरिका के सट्टर, सैक्रामेंटो, साइन जोकिन, सोलानो, योलो और मर्सेड काउंटी में हुई थीं। पुलिस ने इन घटनाओं में हत्या के प्रयास की धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने कुछ गिरफ्तार आरोपितों के नाम भी प्रकाशित किए हैं। इसमें से अमरदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, नितीश कौशल, हरमनदीप सिंह, गुरमिंदर सिंह, देवेंदर सिंह, गुरशरण सिंह और गुरचरण सिंह प्रमुख हैं। इसके अलावा एक अन्य स्थान वुडलैंड पर हुई गोलीबारी के मामले में पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम पवित्तर सिंह, हुसनदीप सिंह, हरकीरत सिंह, सहजप्रीत सिंह और तीरथ राम हैं। इसमें से पवित्तर सिंह और हुसनदीप सिंह पर भारत भारत में केस दर्ज हैं और दोनों वहाँ से भगोड़े घोषित हैं। इन सभी के अलावा पुलिस ने दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है जिन पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपितों द्वारा की गई दो प्रमुख घटनाओं में पहली घटना सत्ताईस अगस्त, दो हज़ार बाईस की है। तब स्टॉकटन के एक गुरुद्वारा में गोलीबारी हुई थी। इसके अलावा मार्च दो हज़ार तेईस को सैक्रामेंटो के एक अन्य गुरूद्वारे में भी गोलीबारी हुई थी। जाँच के दौरान पुलिस ने बताया कि अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुई तमाम गोलीबारी के पीछे दो गैंग की आपसी टशन थी। इन समूहों के नाम AK सैंतालीस और मिंटा हैं इन आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के अधिकारियों ने कैलिफोर्निया को सुरक्षित बताया है।
|
कुछ दिनों बाद मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. बारिश का मौसम हर साल अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है. इस मौसम में हमें खांसी-जुकाम होना आम बात है. इसके अलावा कई तरह के इन्फेक्शन भी होते हैं.
नई दिल्लीः कुछ दिनों बाद मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. बारिश का मौसम हर साल अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है. इस मौसम में हमें खांसी-जुकाम होना आम बात है. इसके अलावा कई तरह के इन्फेक्शन भी होते हैं. हम देखते हैं कि बारिश के मौसम में कुछ लोगों को डेंगू, हैजा और टाईफायड जैसी गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बदलते मौसम की वजह से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. यही वजह है कि इस मौसम में बीमारियां हमें जल्दी अपनी चपेट में ले लेती हैं.
डाइट एक्सपर्ट डॉक्टर रंजना सिंह कहती हैं कि अगर खाने-पीने में थोड़ा ध्यान रखा जाए तो आप मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं. वे कहती हैं कि आपको बारिश के मौसम में खूब फल और सब्जियां खानी चाहिए. इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और आप लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे. गर्मी और बारिश में नींबू खाना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू खाने से शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन सी मिलता है. जिसेस हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है.
डॉक्टर रंजना सिंह के अनुसार, बारिश में लीजी खूब खानी चाहिए.
इससे खाना जल्दी पाचता है. इससे इम्यूनिटी भी बढ़ती है.
लीची में एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं. और ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है.
लीची आपको अपनी मानसून डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए.
बारिश के मौसम में आपको करेला भी जरूर खाना चाहिए.
करेला अल्सर और मलेरिया जैसी बीमारियों में फायदा करता है.
डायबिटीज के मरीजों को भी करेला खाने की सलाह दी जाती है.
आपको हफ्ते में 2-3 दिन करेला जरूर खाना चाहिए.
रोज एक सेब खाने से आप कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं.
सेब खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है.
कोशिश करें कि एप्पल सुबह के वक्त ही खा लें.
सेब में भरपूर डाइट्री फाइबर्स होते हैं. जिससे पाचन क्रिया अच्छी रहती है.
बारिश के मौसम में सेब खाने से पाचनतंत्र सही रहता है.
अनार किसी भी सीजन में खाए जाने वाला फल है, लेकिन बारिश के मौसम में यह ज्यादा फायदेमंद होता है. इससे आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. अनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण काफी होते हैं जिससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. अनार से शरीर में रेड ब्लड शेल्स भा बढ़ती हैं. यह वजन कम करने में भी मददगार है.
मानसून में लोग आलूबुखारा (Plum) भी खूब आते हैं.
इसमें विटामिन सी, मिनरल्स, विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है.
आलूबुखारा में कैलोरी बहुत कम होती हैं.
|
कुछ दिनों बाद मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. बारिश का मौसम हर साल अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है. इस मौसम में हमें खांसी-जुकाम होना आम बात है. इसके अलावा कई तरह के इन्फेक्शन भी होते हैं. नई दिल्लीः कुछ दिनों बाद मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. बारिश का मौसम हर साल अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है. इस मौसम में हमें खांसी-जुकाम होना आम बात है. इसके अलावा कई तरह के इन्फेक्शन भी होते हैं. हम देखते हैं कि बारिश के मौसम में कुछ लोगों को डेंगू, हैजा और टाईफायड जैसी गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बदलते मौसम की वजह से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है. यही वजह है कि इस मौसम में बीमारियां हमें जल्दी अपनी चपेट में ले लेती हैं. डाइट एक्सपर्ट डॉक्टर रंजना सिंह कहती हैं कि अगर खाने-पीने में थोड़ा ध्यान रखा जाए तो आप मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं. वे कहती हैं कि आपको बारिश के मौसम में खूब फल और सब्जियां खानी चाहिए. इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और आप लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे. गर्मी और बारिश में नींबू खाना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू खाने से शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन सी मिलता है. जिसेस हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है. डॉक्टर रंजना सिंह के अनुसार, बारिश में लीजी खूब खानी चाहिए. इससे खाना जल्दी पाचता है. इससे इम्यूनिटी भी बढ़ती है. लीची में एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं. और ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है. लीची आपको अपनी मानसून डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए. बारिश के मौसम में आपको करेला भी जरूर खाना चाहिए. करेला अल्सर और मलेरिया जैसी बीमारियों में फायदा करता है. डायबिटीज के मरीजों को भी करेला खाने की सलाह दी जाती है. आपको हफ्ते में दो-तीन दिन करेला जरूर खाना चाहिए. रोज एक सेब खाने से आप कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं. सेब खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. कोशिश करें कि एप्पल सुबह के वक्त ही खा लें. सेब में भरपूर डाइट्री फाइबर्स होते हैं. जिससे पाचन क्रिया अच्छी रहती है. बारिश के मौसम में सेब खाने से पाचनतंत्र सही रहता है. अनार किसी भी सीजन में खाए जाने वाला फल है, लेकिन बारिश के मौसम में यह ज्यादा फायदेमंद होता है. इससे आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. अनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण काफी होते हैं जिससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. अनार से शरीर में रेड ब्लड शेल्स भा बढ़ती हैं. यह वजन कम करने में भी मददगार है. मानसून में लोग आलूबुखारा भी खूब आते हैं. इसमें विटामिन सी, मिनरल्स, विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. आलूबुखारा में कैलोरी बहुत कम होती हैं.
|
बेलग्रेड, दो नवंबर अपनी निजी जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना करने वाले आकाश कुमार (54 किग्रा) ने एआईबीए विश्व पुरुष मुक्केबाजी चैंपियनशिप में मंगलवार को यहां वेनेजुएला के पूर्व ओलंपिक रजत पदक विजेता योएल फिनोल रिवास पर शानदार जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंच कर भारत का पहला पदक पक्का किया।
मौजूदा राष्ट्रीय चैम्पियन, 21 साल के इस मुक्केबाज ने विरोधी खिलाड़ी को शानदार पंच जड़ने के साथ दमदार जज्बा दिखाते हुए 5-0 की उत्कृष्ट जीत दर्ज की।
नरेंदर बेरवाल (92 किग्रा से अधिक) और एशियाई चैंपियनशिप के पांच बार के पदक विजेता शिव थापा (63. 5 किग्रा) प्रतियोगिता से बाहर हो गये। बेरवाल को अजरबेजान के मोहम्मद अब्दुल्लायेव ने आसानी से 5-0 से हराया जबकि शिव को तुर्की के 19 साल के केरेम ओजमैन ने क्वार्टर फाइनल में इसी अंतर से मात दी।
शिव विश्व चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाला पहला भारतीय मुक्केबाज बनने के लिए चुनौती पेश कर रहे थे। उन्होंने 2015 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था।
बेखौफ होकर रिंग में उतरे सेना के मुक्केबाज आकाश ने ने वेनेजुएला के खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने अपनी फुर्ती और तेजतर्रार मुक्कों से रिवास को आश्चर्यचकित कर दिया।
पुणे स्थित सेना खेल संस्थान से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले आकाश की मां का सितंबर में फेफड़े के कैंसर से निधन हो गया था। जब उनकी मां का निधन हुआ , उस समय वह राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में चुनौती पेश कर रहे थे और उन्हें टूर्नामेंट खत्म होने के बाद इसकी जानकारी दी गयी।
उनके पिता की मृत्यु एक दशक से भी अधिक समय पहले हुई है जबकि उनका छोटा भाई 2017 से हत्या के मामले में जेल में है।
आकाश मंगलवार को विश्व चैंपियनशिप पदक हासिल करने वाले सातवें भारतीय पुरुष मुक्केबाज बने। इससे उन्होंने अपने लिये कम से कम 25 हजार डॉलर की पुरस्कार राशि भी अपने नाम पर पक्की की।
रिवास ने रियो ओलंपिक 2016 में कांस्य पदक जीता था लेकिन डोपिंग के एक मामले के बाद उन्हें बाद में रजत पदक दिया गया था।
फाइनल में पहुंचने के लिए आकाश को 19 साल के मखमुद सबिरखान से भिड़ना होगा। कजाकिस्तान का यह मुक्केबाज युवा स्तर पर तीन बार एशियाई स्वर्ण पदक विजेता रहा है।
शाम को पांच बार के एशियाई पदक विजेता शिव थापा (63 . 5 किलो) का भी क्वार्टर फाइनल मैच है। वह विश्व चैम्पियनशिप में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बनने से एक जीत दूर हैं ।
असम के 27 वर्षीय थापा ने 2015 में दोहा में हुई विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था ।
उनके अलावा तीन और भारतीय मुक्केबाज अंतिम-आठ में चुनौती पेश करेंगे। निशांत देव (71 किलो) की टक्कर रूस के वादिम मुसाएव से और एशियाई चैम्पियन संजीत (92 किलो) का सामना इटली के अजीज अब्बेस एम से होगा ।
इस टूर्नामेंट के स्वर्ण पदक विजेता को एक लाख रुपये की इनामी राशि मिलेगी। रजत पदक विजेता को 50 हजार डॉलर जबकि दोनों कांस्य पदक विजेताओं में प्रत्येक को 25 हजार डॉलर मिलेंगे। टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि 26 लाख डॉलर है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
बेलग्रेड, दो नवंबर अपनी निजी जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना करने वाले आकाश कुमार ने एआईबीए विश्व पुरुष मुक्केबाजी चैंपियनशिप में मंगलवार को यहां वेनेजुएला के पूर्व ओलंपिक रजत पदक विजेता योएल फिनोल रिवास पर शानदार जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंच कर भारत का पहला पदक पक्का किया। मौजूदा राष्ट्रीय चैम्पियन, इक्कीस साल के इस मुक्केबाज ने विरोधी खिलाड़ी को शानदार पंच जड़ने के साथ दमदार जज्बा दिखाते हुए पाँच-शून्य की उत्कृष्ट जीत दर्ज की। नरेंदर बेरवाल और एशियाई चैंपियनशिप के पांच बार के पदक विजेता शिव थापा प्रतियोगिता से बाहर हो गये। बेरवाल को अजरबेजान के मोहम्मद अब्दुल्लायेव ने आसानी से पाँच-शून्य से हराया जबकि शिव को तुर्की के उन्नीस साल के केरेम ओजमैन ने क्वार्टर फाइनल में इसी अंतर से मात दी। शिव विश्व चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाला पहला भारतीय मुक्केबाज बनने के लिए चुनौती पेश कर रहे थे। उन्होंने दो हज़ार पंद्रह विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। बेखौफ होकर रिंग में उतरे सेना के मुक्केबाज आकाश ने ने वेनेजुएला के खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने अपनी फुर्ती और तेजतर्रार मुक्कों से रिवास को आश्चर्यचकित कर दिया। पुणे स्थित सेना खेल संस्थान से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले आकाश की मां का सितंबर में फेफड़े के कैंसर से निधन हो गया था। जब उनकी मां का निधन हुआ , उस समय वह राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में चुनौती पेश कर रहे थे और उन्हें टूर्नामेंट खत्म होने के बाद इसकी जानकारी दी गयी। उनके पिता की मृत्यु एक दशक से भी अधिक समय पहले हुई है जबकि उनका छोटा भाई दो हज़ार सत्रह से हत्या के मामले में जेल में है। आकाश मंगलवार को विश्व चैंपियनशिप पदक हासिल करने वाले सातवें भारतीय पुरुष मुक्केबाज बने। इससे उन्होंने अपने लिये कम से कम पच्चीस हजार डॉलर की पुरस्कार राशि भी अपने नाम पर पक्की की। रिवास ने रियो ओलंपिक दो हज़ार सोलह में कांस्य पदक जीता था लेकिन डोपिंग के एक मामले के बाद उन्हें बाद में रजत पदक दिया गया था। फाइनल में पहुंचने के लिए आकाश को उन्नीस साल के मखमुद सबिरखान से भिड़ना होगा। कजाकिस्तान का यह मुक्केबाज युवा स्तर पर तीन बार एशियाई स्वर्ण पदक विजेता रहा है। शाम को पांच बार के एशियाई पदक विजेता शिव थापा का भी क्वार्टर फाइनल मैच है। वह विश्व चैम्पियनशिप में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बनने से एक जीत दूर हैं । असम के सत्ताईस वर्षीय थापा ने दो हज़ार पंद्रह में दोहा में हुई विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था । उनके अलावा तीन और भारतीय मुक्केबाज अंतिम-आठ में चुनौती पेश करेंगे। निशांत देव की टक्कर रूस के वादिम मुसाएव से और एशियाई चैम्पियन संजीत का सामना इटली के अजीज अब्बेस एम से होगा । इस टूर्नामेंट के स्वर्ण पदक विजेता को एक लाख रुपये की इनामी राशि मिलेगी। रजत पदक विजेता को पचास हजार डॉलर जबकि दोनों कांस्य पदक विजेताओं में प्रत्येक को पच्चीस हजार डॉलर मिलेंगे। टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि छब्बीस लाख डॉलर है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
भेजी गई। इसके बाद इस स्कूल भवन को उपायुक्त द्वारा अनसेफ घोषित किया गया, जबकि इसका इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया। हैरानी है कि लगभग तीन महीने पहले इस भवन को गिराने के आदेश लोक निर्माण विभाग को दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक एक भी ईंट उखाड़ी नहीं जा सकी है। ऐसे में सवाल ये भी है कि अगर कल को कोई बड़ा हादसा घट जाता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। अभिभावकों व आम लोगों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिझड़ी का आट्र्स व कॉमर्स भवन जर्जर हालत में हो चुका है, जिसके चलते इसको अनसेफ घोषित कर दिया गया है, साथ में शिक्षा विभाग को इस बारे में बहुत पहले अवगत करवा दिया है। करीब तीन महीने पहले स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल प्रबंधन समिति के साथ बैठक कर इसको डिस्मेंटल करने के लिए लोक निर्माण विभाग को भी पत्र लिखा था, लेकिन अब तक इस जर्जर हो चुके भवन को डिस्मेंटल करने का कार्य शुरू नहीं हुआ है और न ही नए भवन की कोई प्रोपोजल बन पाई है।
वहीं, छात्रों को खुले में कक्षाएं लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि यह बिल्डिंग जितनी जल्द डिस्मेंटल होगी तभी नए भवन का निर्माण हो सकेगा। बहरहाल, बड़सर के अंतर्गत वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिझड़ी का भवन जर्जर होने से कभी भी गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। इससे छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों व आम लोगों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिझड़ी का आट्र्स व कॉमर्स भवन जर्जर हालत में हो चुका है, जिसके चलते इसको अनसेफ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जल्द इस समस्या का हल करें। वहीं, इस संदर्भ में स्कूल प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार का कहना है कि इस बारे में लोक निर्माण विभाग को लिखित में डिस्मेंटल करने के लिए पत्र लिख दिया गया है। दोबारा उनको इस बारे में रिमाइंड भी करवा दिया जाएगा। (एचडीएम)
|
भेजी गई। इसके बाद इस स्कूल भवन को उपायुक्त द्वारा अनसेफ घोषित किया गया, जबकि इसका इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया। हैरानी है कि लगभग तीन महीने पहले इस भवन को गिराने के आदेश लोक निर्माण विभाग को दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक एक भी ईंट उखाड़ी नहीं जा सकी है। ऐसे में सवाल ये भी है कि अगर कल को कोई बड़ा हादसा घट जाता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। अभिभावकों व आम लोगों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिझड़ी का आट्र्स व कॉमर्स भवन जर्जर हालत में हो चुका है, जिसके चलते इसको अनसेफ घोषित कर दिया गया है, साथ में शिक्षा विभाग को इस बारे में बहुत पहले अवगत करवा दिया है। करीब तीन महीने पहले स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल प्रबंधन समिति के साथ बैठक कर इसको डिस्मेंटल करने के लिए लोक निर्माण विभाग को भी पत्र लिखा था, लेकिन अब तक इस जर्जर हो चुके भवन को डिस्मेंटल करने का कार्य शुरू नहीं हुआ है और न ही नए भवन की कोई प्रोपोजल बन पाई है। वहीं, छात्रों को खुले में कक्षाएं लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि यह बिल्डिंग जितनी जल्द डिस्मेंटल होगी तभी नए भवन का निर्माण हो सकेगा। बहरहाल, बड़सर के अंतर्गत वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिझड़ी का भवन जर्जर होने से कभी भी गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। इससे छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों व आम लोगों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बिझड़ी का आट्र्स व कॉमर्स भवन जर्जर हालत में हो चुका है, जिसके चलते इसको अनसेफ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जल्द इस समस्या का हल करें। वहीं, इस संदर्भ में स्कूल प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार का कहना है कि इस बारे में लोक निर्माण विभाग को लिखित में डिस्मेंटल करने के लिए पत्र लिख दिया गया है। दोबारा उनको इस बारे में रिमाइंड भी करवा दिया जाएगा।
|
कोरोना काल के बीच चल रही कई कोविड स्पेशल ट्रेनों का विस्तार किया गया है. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है. रेलवे ने इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं.
कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बाद से रेलयात्रियों को दिक्कत नहीं हो, इसलिए भारतीय रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनें शुरू की थी, जिसमें लगातार विस्तार किया जा रहा है. बहुत सारी स्पेशल ट्रेनों की सेवा 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली थी. लेकिन यात्रियों की मांग को देखते हुए ट्रेनों की सेवा अवधि बढ़ा दी गई है.
कोरोना काल के बीच चल रही कई कोविड स्पेशल ट्रेनों का विस्तार किया गया है. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है. रेलवे के मुताबिक इन ट्रेनों के परिचालन के समय को 31 दिसंबर 2020 से बढ़ाकर 31 जनवरी 2021 कर दिया गया है. रेलवे ने इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं.
पुणे-दरभंगा कोविड स्पेशल ट्रेन - 01033 : यह गाड़ी 06 जनवरी से 27 जनवरी तक हर बुधवार को पुणे से दरभंगा के लिए प्रस्थान करेगी. दरभंगा - पुणे कोविड स्पेशल ट्रेन- 01034 : 08 जनवरी से 29 जनतक जनवरी तक हर शुक्रवार को दरभंगा से पुणे के लिए प्रस्थान करेगी.
पुरी-जयनगर स्पेशल ट्रेन- 08419 : 07 जनवरी से 28 जनवरी तक हर गुरुवार को पुरी से जयनगर के लिए प्रस्थान करेगी. जयनगर-पुरी स्पेशल ट्रेन): 09 जनवरी से 30 जनवरी तक हर शनिवार को जयनगर से पुरी के लिए प्रस्थान करेगी.
ग्वालियर-बरौनी स्पेशल ट्रेन- 04185 : 01 जनवरी से 31 जनवरी तक हर रविवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को ग्वालियर से बरौनी के लिए प्रस्थान करेगी. बरौनी-ग्वालियर स्पेशल ट्रेन- 04186 : 02 जनवरी से एक फरवरी तक हर सोमवार, बुधवार, गुरूवार, शनिवार और रविवार को बरौनी से ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेगी.
रक्सौल-एलटीटी एक्सप्रेस- 05547 : 04 जनवरी से 25 जनवरी तक हर सोमवार को रक्सौल से लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक चलेगी. एलटीटी-रक्सौल एक्सप्रेस- 05548: 06 जनवरी से 27 जनवरी तक हर बुधवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनल से रक्सौल बीच चलेगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर रेलवे (Northern Railways) जल्द ही 24 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें शुरू करने जा रहा है. इसके अलावा समस्तीपुर रेलमंडल ने रक्सौल से लोकमान्य तिलक टर्मिनल के लिए एक विशेष ट्रेन चलाने का भी निर्णय लिया है, जो 4 जनवरी से 27 जनवरी तक चलेगी.
वर्तमान में चलाई जा रही सभी स्पेशल ट्रेनों में सफर करने के लिए आरक्षित टिकट लेकर ही यात्रा करने की अनुमति होगी. इसके साथ ही यात्रा के दौरान कोरोना संबंधी तमाम दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा. रेल मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल सभी मेल एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेनें, फेस्टिवल स्पेशल और क्लोन स्पेशल ट्रेनें पूरी तरह से आरक्षित ट्रेनों की तरह चलाई जा रही हैं. सिर्फ जोनल रेलवे को अनारक्षित टिकट जारी करने की छूट दी गई है. इसके तहत कुछ ही जोन में सब-अर्बन (Sub-Urban Trains) और सीमित लोकल पैसेंजर ट्रेनों के यात्रियों को अनारक्षित टिकट जारी किए जाएंगे.
|
कोरोना काल के बीच चल रही कई कोविड स्पेशल ट्रेनों का विस्तार किया गया है. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है. रेलवे ने इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं. कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बाद से रेलयात्रियों को दिक्कत नहीं हो, इसलिए भारतीय रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनें शुरू की थी, जिसमें लगातार विस्तार किया जा रहा है. बहुत सारी स्पेशल ट्रेनों की सेवा इकतीस दिसंबर को समाप्त होने वाली थी. लेकिन यात्रियों की मांग को देखते हुए ट्रेनों की सेवा अवधि बढ़ा दी गई है. कोरोना काल के बीच चल रही कई कोविड स्पेशल ट्रेनों का विस्तार किया गया है. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है. रेलवे के मुताबिक इन ट्रेनों के परिचालन के समय को इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस से बढ़ाकर इकतीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस कर दिया गया है. रेलवे ने इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं. पुणे-दरभंगा कोविड स्पेशल ट्रेन - एक हज़ार तैंतीस : यह गाड़ी छः जनवरी से सत्ताईस जनवरी तक हर बुधवार को पुणे से दरभंगा के लिए प्रस्थान करेगी. दरभंगा - पुणे कोविड स्पेशल ट्रेन- एक हज़ार चौंतीस : आठ जनवरी से उनतीस जनतक जनवरी तक हर शुक्रवार को दरभंगा से पुणे के लिए प्रस्थान करेगी. पुरी-जयनगर स्पेशल ट्रेन- आठ हज़ार चार सौ उन्नीस : सात जनवरी से अट्ठाईस जनवरी तक हर गुरुवार को पुरी से जयनगर के लिए प्रस्थान करेगी. जयनगर-पुरी स्पेशल ट्रेन): नौ जनवरी से तीस जनवरी तक हर शनिवार को जयनगर से पुरी के लिए प्रस्थान करेगी. ग्वालियर-बरौनी स्पेशल ट्रेन- चार हज़ार एक सौ पचासी : एक जनवरी से इकतीस जनवरी तक हर रविवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को ग्वालियर से बरौनी के लिए प्रस्थान करेगी. बरौनी-ग्वालियर स्पेशल ट्रेन- चार हज़ार एक सौ छियासी : दो जनवरी से एक फरवरी तक हर सोमवार, बुधवार, गुरूवार, शनिवार और रविवार को बरौनी से ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेगी. रक्सौल-एलटीटी एक्सप्रेस- पाँच हज़ार पाँच सौ सैंतालीस : चार जनवरी से पच्चीस जनवरी तक हर सोमवार को रक्सौल से लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक चलेगी. एलटीटी-रक्सौल एक्सप्रेस- पाँच हज़ार पाँच सौ अड़तालीस: छः जनवरी से सत्ताईस जनवरी तक हर बुधवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनल से रक्सौल बीच चलेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर रेलवे जल्द ही चौबीस जोड़ी स्पेशल ट्रेनें शुरू करने जा रहा है. इसके अलावा समस्तीपुर रेलमंडल ने रक्सौल से लोकमान्य तिलक टर्मिनल के लिए एक विशेष ट्रेन चलाने का भी निर्णय लिया है, जो चार जनवरी से सत्ताईस जनवरी तक चलेगी. वर्तमान में चलाई जा रही सभी स्पेशल ट्रेनों में सफर करने के लिए आरक्षित टिकट लेकर ही यात्रा करने की अनुमति होगी. इसके साथ ही यात्रा के दौरान कोरोना संबंधी तमाम दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा. रेल मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल सभी मेल एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेनें, फेस्टिवल स्पेशल और क्लोन स्पेशल ट्रेनें पूरी तरह से आरक्षित ट्रेनों की तरह चलाई जा रही हैं. सिर्फ जोनल रेलवे को अनारक्षित टिकट जारी करने की छूट दी गई है. इसके तहत कुछ ही जोन में सब-अर्बन और सीमित लोकल पैसेंजर ट्रेनों के यात्रियों को अनारक्षित टिकट जारी किए जाएंगे.
|
लाइव हिंदी समाचार (हेल्थ कार्नर ) :- दुनियाभर में दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है. इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन और कैल्शियम उपस्थित होते हैं लेकिन यदि दूध हार्मोंस से भरा हो तो यह दूध आपके लिए किसी बड़े खतरे से भी कम नहीं.
करीब 40 वर्षों से डेयरी उद्योग पूरे विश्व में डेयरी प्रोडक्ट्स के बहाने स्वास्थ्य के बाजार को कैश कर रहा है. स्तनधारियों का दूध उनके बच्चों के लिए एक सीमित अवधि तक पोषण प्रदान करने के लिए होता है. चार पैर वाले दूधारू पशुओं के दूध में जो हार्मोन होते हैं उनसे 50किलो का बछड़ा एक वर्ष में 350 किलो का हो जाता है. चौपायों के दूध में हार्माेन के असर से बच्चों का वजन तेजी से बढ़ता है.
अमरीका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने 1988 में ही हार्मोन वाले दूध के खतरों से आगाह कर दिया था. आम दूध से 10 गुना अधिक 'आईजीएफ-1Ó हार्मोन इंजेक्शन से प्राप्त किए दूध में पाया गया. आईजीएफ-1 पाश्चुराइजेशन से नष्ट होने के बजाय ताकतवर हो जाता है. अमरीका कीड नियामक संस्थान एफडीए के शोधकर्ताओं ने बताया है कि आईजीएफ-1 आंतों से रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है.
डॉक्टर जॉन मैकडुगल के अध्ययन के मुताबिक मानव शरीर में ग्रोथ हार्मोन होता है और दूध में भी यही ग्रोथ हार्मोन होता है. दूध का प्रोटीन भी एमिनो एसिड से बनता है जबकि शरीर के भीतर भी पहले से एमिनो एसिड होता है. यह आपस में मिलकर परस्पर विरोधी के रूप में काम करते हैं. इसे मेडिकल साइंस में 'ऑटो इम्युन डिसीज' बोला जाता है, जिसका मतलब होता है कि शरीर अपने ही विरूद्ध लड़ाई लड़ने लगता है. इससे दिल की बीमारियां, कैंसर, गठिया और मधुमेह जैसी बीमारियां हो जाती हैं.
जिन लोगों को दूध अच्छा नहीं लगता, वे संतुलित मात्रा में दही, पनीर या छाछ लें. डेयरी उत्पादों के सैचुरेटेड फेटी एसिड्स शरीर की पाचन प्रक्रिया धीमी करते हैं और इस कारण आलस आता है.
कुछ लोगों को बचपन से ही डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है क्योंकि वह दूध में पाए जाने वाले लेक्टोज को पचा नहीं पाते. दूध लेने पर उनके पेट में मरोड़ उठती है या उन्हें दस्त लग जाते हैं. संभवतया इसीलिए करीब डेढ़ लाख हैल्थ प्रोफेशनल्स की भागीदारी वाला एनजीओ द फिजियन कमेटी फॉर रिस्पॉसिबल मेडिसिन भी बच्चों को दूध न देने के पक्ष में है. जयपुर के डॉक्टर श्रीकांत शर्मा कहते हैं हार्मोनयुक्त दूध प्रतिदिन पीने से बच्चों में वजन का तेजी से बढ़ना, अनचाही जगहों पर उभार आना, लड़कियों का शीघ्र वयस्क होना, स्त्रियों में मासिक अनियमितता, गर्भधारण में कठिनाई के अतिरिक्त कई खतरनाक बीमारियां होने लगी हैं.
|
लाइव हिंदी समाचार :- दुनियाभर में दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है. इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन और कैल्शियम उपस्थित होते हैं लेकिन यदि दूध हार्मोंस से भरा हो तो यह दूध आपके लिए किसी बड़े खतरे से भी कम नहीं. करीब चालीस वर्षों से डेयरी उद्योग पूरे विश्व में डेयरी प्रोडक्ट्स के बहाने स्वास्थ्य के बाजार को कैश कर रहा है. स्तनधारियों का दूध उनके बच्चों के लिए एक सीमित अवधि तक पोषण प्रदान करने के लिए होता है. चार पैर वाले दूधारू पशुओं के दूध में जो हार्मोन होते हैं उनसे पचासकिलो का बछड़ा एक वर्ष में तीन सौ पचास किलो का हो जाता है. चौपायों के दूध में हार्माेन के असर से बच्चों का वजन तेजी से बढ़ता है. अमरीका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने एक हज़ार नौ सौ अठासी में ही हार्मोन वाले दूध के खतरों से आगाह कर दिया था. आम दूध से दस गुना अधिक 'आईजीएफ-एकÓ हार्मोन इंजेक्शन से प्राप्त किए दूध में पाया गया. आईजीएफ-एक पाश्चुराइजेशन से नष्ट होने के बजाय ताकतवर हो जाता है. अमरीका कीड नियामक संस्थान एफडीए के शोधकर्ताओं ने बताया है कि आईजीएफ-एक आंतों से रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है. डॉक्टर जॉन मैकडुगल के अध्ययन के मुताबिक मानव शरीर में ग्रोथ हार्मोन होता है और दूध में भी यही ग्रोथ हार्मोन होता है. दूध का प्रोटीन भी एमिनो एसिड से बनता है जबकि शरीर के भीतर भी पहले से एमिनो एसिड होता है. यह आपस में मिलकर परस्पर विरोधी के रूप में काम करते हैं. इसे मेडिकल साइंस में 'ऑटो इम्युन डिसीज' बोला जाता है, जिसका मतलब होता है कि शरीर अपने ही विरूद्ध लड़ाई लड़ने लगता है. इससे दिल की बीमारियां, कैंसर, गठिया और मधुमेह जैसी बीमारियां हो जाती हैं. जिन लोगों को दूध अच्छा नहीं लगता, वे संतुलित मात्रा में दही, पनीर या छाछ लें. डेयरी उत्पादों के सैचुरेटेड फेटी एसिड्स शरीर की पाचन प्रक्रिया धीमी करते हैं और इस कारण आलस आता है. कुछ लोगों को बचपन से ही डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है क्योंकि वह दूध में पाए जाने वाले लेक्टोज को पचा नहीं पाते. दूध लेने पर उनके पेट में मरोड़ उठती है या उन्हें दस्त लग जाते हैं. संभवतया इसीलिए करीब डेढ़ लाख हैल्थ प्रोफेशनल्स की भागीदारी वाला एनजीओ द फिजियन कमेटी फॉर रिस्पॉसिबल मेडिसिन भी बच्चों को दूध न देने के पक्ष में है. जयपुर के डॉक्टर श्रीकांत शर्मा कहते हैं हार्मोनयुक्त दूध प्रतिदिन पीने से बच्चों में वजन का तेजी से बढ़ना, अनचाही जगहों पर उभार आना, लड़कियों का शीघ्र वयस्क होना, स्त्रियों में मासिक अनियमितता, गर्भधारण में कठिनाई के अतिरिक्त कई खतरनाक बीमारियां होने लगी हैं.
|
ऐसी बात नही है, सुहृद । अभी कलि मे उनी शक्ति व्यापक नहीं है। भावा अपने भ्रम का रूप प्रसारित कर रही है। सामने
कौन तैर रहे है । श्वेत हस है जो ज्ञान के प्रतीक है, देवी सती के है। ऐसी आसुरी शक्तिया जो धर्म क्षेत्र मे कदाचिन् बाधक बन पड़गी दे, न और सत्य के तेज से तिरोहित होती देखी गई है।
इतनी वार्ता के पश्चात् दोनो धर्म पुत्र ज्ञान के दर्शनार्थ चलि
उत्तर दिशा के एक शान्तिमय विस्तृत प्रदेश में एक महाबन था। जिसके म त्ताकार मे श्वेत निर्मल जल से पूरित एक सरिता हो
ऐसा निर्मल था जिसमे धरातल में पड़ी हुई छोटी सी कंपड़ी भी गुरुपद देख पडली थी । इसी के दक्षिण तट पर विविध सुमनो से परिपूर्ण रम्य बाटिका के दोष न प्रस्तर से बना एक मण्डप था जिसमें चन्द्र मरियां नहीं हुई थी। उसके मध्य चन्दन की वेदिकापरआभा मोर कान्ति को सिमाधिष्ठ गांधी को भागि इस बार यहा ज्ञान विराजमान थे पक्षी-गण वाटिका में बिहार को मनोरम वातावरण में सत्यान्वेषण में तत्पर उषा और प्रदीप पहुये। तोगन्धिा मे हस्त, पाद, प्रच्छालन करके उस रम्य वाटिका में जाकर ज्ञान को प्रणाम के पश्चात सामने पड़ी श्वेत चमरी की बनी आसदियों पर कर बद्ध बैठ गये।
की स्थिति बड़ी भयावह है। शिष्टा की सर्वश्रेष्ट रचना मानव आज पथ भ्रष्ट है। अके द्वारा उसे जो धर्म-पथ दिखाया गया था आज उसने उसे विस्त कर दिया है। माया की मोहक भगिमाओं का वह दास बन गया है, कलि के प्रभाव से अव है। हम 'मानव मे पुनः मानव की प्रतिष्ठा चाहते हैं, वह अपना स्वरूप पहिचाने, स्वयंभू मनु की 'वॉणी में उसे प्रास्था हो, अतः एक अन्तर्राष्ट्रीय धर्म-सम्मेलन की योजना का विचार है। श्राप से प्रार्थना है कि हमें मार्ग प्रदर्शित करें ।
ज्ञान ने आशीर्वादात्मक रूप में कहा । तुम्हारा यह दृष्टिकोण उत्तम है। इस 'सम्मेलन द्वारा धर्म की बेलि विकसित होगी और धर्मा और प्रेम का संचार होगा ।
रहा । जहाँ
प्रदीप ने अनुगृहीत हो ज्ञान के चरण कमलों का आप का वरद् हस्त है वहाँ सर्वत्र विजय है ।
इसी वार्तालाप के मध्य प्रदीप को प्रभाषित हुआ कि दक्षिण दिशा से किसी का आगमन हो रहा है। उधर देखा - एक महात्मा मस्तक पर भस्म का त्रिपुड
किये, कटि मे मुञ्ज-मेखला तथा कुश की कोपीन धारण किये, दक्षिण कर मे पलाश दण्ड और बायें मे जल पूरित कमण्डल लिये शान्ति गति से चले आ रहे हैं । निकट आकर उन्होंने ज्ञान को प्रणाम किया। प्रदीप और उषा पर अपनी स्नेह पूर्ण दृष्टि डालते हुये ज्ञान के दक्षिण दिशा में बैठ गये ।
ज्ञान ने प्रदीप से कहा । क्या इन्हे पहिचानते हो ? यह महात्मा धर्म-श्रुति है ।
धर्म श्रुति ने एक गहरा निश्वास खीचा । उनके नेत्र जलमय हो उठे और कपोलो पर बहते हुये अश्र, बिन्दु श्वेत भस्म को प्राभा से मिश्रित हो उठे ।
ज्ञान ने विस्मय से देखते हुये पूछा । सन्यासिन । कैसी वेदना है इतना विकल क्यों हो ?
धर्म-श्रुति को छलछलाते हुये कस्शा स्वर मे कहा । महाराज ! संसार में अधर्म बहुत बढ़ रहा है। क्या इसके निराकरण का कोई उपाय आपके विचार मे है ?
ज्ञान ने प्रदीप और उपा की ओर इङ्गित करते हुये कहा । देखो - यह दो तरुण इसी भावना को लेकर आये है, जाओ इन्हें सहयोग दो ।
प्रदीप ने ज्ञान से निवेदन किया। कैसे शुभ मुहूर्त पर महात्मा धर्म श्रुति जी का शुभागमन हुआ है। अब सम्मेलन का कार्य महात्मा जी के मन्त्रित्व मे सम्पन्न हो जायगा । हम दोनो अनुचर बनकर कार्य करेगे ।
ज्ञान ने 'तथास्तु' कह कर अपने पार्श्व मे रखे हुये मन्दार कुसुमों को महात्मा धर्मश्रुति, प्रदीप और उषा को आशीर्वाद रूप मे दिये ।
समारोह के आयोजन का विश्व व्यापक प्रचार करने की दृष्टि से सभी समाचार पत्रो के प्रतिनिधियों को आमन्त्रित किया गया ।
अन्तर्राष्ट्रीय धर्म सम्मेलन के तिथि की घोषणा, सभी धर्म-विभूतियों को आमन्त्रित कर उनकी सयुक्त प्रवर धर्म समिति की स्थापना करना, विश्व में बढ़ती हुई तामसी वृत्ति को रोकने के लिये एक संयुक्त मञ्च तैय्यार करना और धर्म के दसो लक्षणों से युक्त विविध धर्मों के प्रधान आचार्यों की एक प्रचार समिति गठित करना आदि विषय प्रसारित किये गये।
इस सूचना से अवगत होते ही विश्व के धर्म संस्थानों में उल्लास का वातावरण पैदा हुआ। सभी धर्म संस्थानों से धन्यवाद और शुभकामनायें आने लगी ।
|
ऐसी बात नही है, सुहृद । अभी कलि मे उनी शक्ति व्यापक नहीं है। भावा अपने भ्रम का रूप प्रसारित कर रही है। सामने कौन तैर रहे है । श्वेत हस है जो ज्ञान के प्रतीक है, देवी सती के है। ऐसी आसुरी शक्तिया जो धर्म क्षेत्र मे कदाचिन् बाधक बन पड़गी दे, न और सत्य के तेज से तिरोहित होती देखी गई है। इतनी वार्ता के पश्चात् दोनो धर्म पुत्र ज्ञान के दर्शनार्थ चलि उत्तर दिशा के एक शान्तिमय विस्तृत प्रदेश में एक महाबन था। जिसके म त्ताकार मे श्वेत निर्मल जल से पूरित एक सरिता हो ऐसा निर्मल था जिसमे धरातल में पड़ी हुई छोटी सी कंपड़ी भी गुरुपद देख पडली थी । इसी के दक्षिण तट पर विविध सुमनो से परिपूर्ण रम्य बाटिका के दोष न प्रस्तर से बना एक मण्डप था जिसमें चन्द्र मरियां नहीं हुई थी। उसके मध्य चन्दन की वेदिकापरआभा मोर कान्ति को सिमाधिष्ठ गांधी को भागि इस बार यहा ज्ञान विराजमान थे पक्षी-गण वाटिका में बिहार को मनोरम वातावरण में सत्यान्वेषण में तत्पर उषा और प्रदीप पहुये। तोगन्धिा मे हस्त, पाद, प्रच्छालन करके उस रम्य वाटिका में जाकर ज्ञान को प्रणाम के पश्चात सामने पड़ी श्वेत चमरी की बनी आसदियों पर कर बद्ध बैठ गये। की स्थिति बड़ी भयावह है। शिष्टा की सर्वश्रेष्ट रचना मानव आज पथ भ्रष्ट है। अके द्वारा उसे जो धर्म-पथ दिखाया गया था आज उसने उसे विस्त कर दिया है। माया की मोहक भगिमाओं का वह दास बन गया है, कलि के प्रभाव से अव है। हम 'मानव मे पुनः मानव की प्रतिष्ठा चाहते हैं, वह अपना स्वरूप पहिचाने, स्वयंभू मनु की 'वॉणी में उसे प्रास्था हो, अतः एक अन्तर्राष्ट्रीय धर्म-सम्मेलन की योजना का विचार है। श्राप से प्रार्थना है कि हमें मार्ग प्रदर्शित करें । ज्ञान ने आशीर्वादात्मक रूप में कहा । तुम्हारा यह दृष्टिकोण उत्तम है। इस 'सम्मेलन द्वारा धर्म की बेलि विकसित होगी और धर्मा और प्रेम का संचार होगा । रहा । जहाँ प्रदीप ने अनुगृहीत हो ज्ञान के चरण कमलों का आप का वरद् हस्त है वहाँ सर्वत्र विजय है । इसी वार्तालाप के मध्य प्रदीप को प्रभाषित हुआ कि दक्षिण दिशा से किसी का आगमन हो रहा है। उधर देखा - एक महात्मा मस्तक पर भस्म का त्रिपुड किये, कटि मे मुञ्ज-मेखला तथा कुश की कोपीन धारण किये, दक्षिण कर मे पलाश दण्ड और बायें मे जल पूरित कमण्डल लिये शान्ति गति से चले आ रहे हैं । निकट आकर उन्होंने ज्ञान को प्रणाम किया। प्रदीप और उषा पर अपनी स्नेह पूर्ण दृष्टि डालते हुये ज्ञान के दक्षिण दिशा में बैठ गये । ज्ञान ने प्रदीप से कहा । क्या इन्हे पहिचानते हो ? यह महात्मा धर्म-श्रुति है । धर्म श्रुति ने एक गहरा निश्वास खीचा । उनके नेत्र जलमय हो उठे और कपोलो पर बहते हुये अश्र, बिन्दु श्वेत भस्म को प्राभा से मिश्रित हो उठे । ज्ञान ने विस्मय से देखते हुये पूछा । सन्यासिन । कैसी वेदना है इतना विकल क्यों हो ? धर्म-श्रुति को छलछलाते हुये कस्शा स्वर मे कहा । महाराज ! संसार में अधर्म बहुत बढ़ रहा है। क्या इसके निराकरण का कोई उपाय आपके विचार मे है ? ज्ञान ने प्रदीप और उपा की ओर इङ्गित करते हुये कहा । देखो - यह दो तरुण इसी भावना को लेकर आये है, जाओ इन्हें सहयोग दो । प्रदीप ने ज्ञान से निवेदन किया। कैसे शुभ मुहूर्त पर महात्मा धर्म श्रुति जी का शुभागमन हुआ है। अब सम्मेलन का कार्य महात्मा जी के मन्त्रित्व मे सम्पन्न हो जायगा । हम दोनो अनुचर बनकर कार्य करेगे । ज्ञान ने 'तथास्तु' कह कर अपने पार्श्व मे रखे हुये मन्दार कुसुमों को महात्मा धर्मश्रुति, प्रदीप और उषा को आशीर्वाद रूप मे दिये । समारोह के आयोजन का विश्व व्यापक प्रचार करने की दृष्टि से सभी समाचार पत्रो के प्रतिनिधियों को आमन्त्रित किया गया । अन्तर्राष्ट्रीय धर्म सम्मेलन के तिथि की घोषणा, सभी धर्म-विभूतियों को आमन्त्रित कर उनकी सयुक्त प्रवर धर्म समिति की स्थापना करना, विश्व में बढ़ती हुई तामसी वृत्ति को रोकने के लिये एक संयुक्त मञ्च तैय्यार करना और धर्म के दसो लक्षणों से युक्त विविध धर्मों के प्रधान आचार्यों की एक प्रचार समिति गठित करना आदि विषय प्रसारित किये गये। इस सूचना से अवगत होते ही विश्व के धर्म संस्थानों में उल्लास का वातावरण पैदा हुआ। सभी धर्म संस्थानों से धन्यवाद और शुभकामनायें आने लगी ।
|
लखनऊ. दुनिया में कोविड-19 (COVID-19) का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. दुनियाभर में इससे अब तक 1 लाख 14 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. भारत में सोमवार सुबह तक 9 हजार से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो चुके थे और 307 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. सोमवार रात तक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कोरोनो वायरस (Coronavirus) के 75 पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 35 तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) से संबंधित हैं. इससे राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 558 हो गए हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी है.
झांसी में तेजी से फैल रहा आई फ्लू का खतरा, स्कूल के 50 बच्चों में दिखे लक्षण,
उत्तर प्रदेश में कोविड-19 (Covid-19) से बचाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार पहल की जा रही है. इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में हॉटस्पॉट की पहचान की गई थी. इन इलाकों से कोरोना संक्रमण के ज्यादातार मामले सामने आए हैं. गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश के अवस्थी ने बताया कि प्रदेश के 25 जिलों में 62 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है.
इन जिलों में 1,62,664 घरों की पहचान हुई है और यहां 9 लाख से ज्यादा लोग मौजूद हैं. इन इलाकों में कोरोना पॉजिटिव के 80 मामले सामने आये हैं. जबकि अन्य 15 जिलों में 146 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. यहां 1,71,232 घरों में 9,78,055 लोग रह रहे हैं. इन इलाकों की बैरिकेडिंग की गई है. इसके अलावा सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया भी जारी है.
अवस्थी के अनुसार, यहां अब तक 401 केस कोरोना संक्रमण के मिले हैं. सभी डीएम ने खुद पहले चरण में 15 जिलों और दूसरे चरण में 25 जिलों में हॉटस्पॉट की पहचान की है. अवस्थी का कहना है कि कोरोना के 85% मामले 'रिंग फेंस' के अंदर के हैं.
सूत्रों का कहना है कि कोरोना के कारण यूपी की योगी सरकार ने 30 अप्रैल तक लॉकडाउन (Lockdown) को जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है. दरअसल, यहां के जिलों में प्रदेश के जिलों को दो भागों में बांटा गया है. इनमें से एक वर्ग के जिलों में कुछ रियायतें दी जा सकती हैं. इस श्रेणी में वैसे जिले शामिल होंगे जहां 14 अप्रैल तक एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिला है. जबकि वर्ग बी में वह जिले हैं जहां पॉजिटिव केस मिल चुके हैं या 14 अप्रैल तक और मिलने की आशंका है.
.
|
लखनऊ. दुनिया में कोविड-उन्नीस का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. दुनियाभर में इससे अब तक एक लाख चौदह हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. भारत में सोमवार सुबह तक नौ हजार से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो चुके थे और तीन सौ सात से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. सोमवार रात तक उत्तर प्रदेश में कोरोनो वायरस के पचहत्तर पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से पैंतीस तबलीगी जमात से संबंधित हैं. इससे राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल मामले बढ़कर पाँच सौ अट्ठावन हो गए हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी है. झांसी में तेजी से फैल रहा आई फ्लू का खतरा, स्कूल के पचास बच्चों में दिखे लक्षण, उत्तर प्रदेश में कोविड-उन्नीस से बचाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार पहल की जा रही है. इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में हॉटस्पॉट की पहचान की गई थी. इन इलाकों से कोरोना संक्रमण के ज्यादातार मामले सामने आए हैं. गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश के अवस्थी ने बताया कि प्रदेश के पच्चीस जिलों में बासठ हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. इन जिलों में एक,बासठ,छः सौ चौंसठ घरों की पहचान हुई है और यहां नौ लाख से ज्यादा लोग मौजूद हैं. इन इलाकों में कोरोना पॉजिटिव के अस्सी मामले सामने आये हैं. जबकि अन्य पंद्रह जिलों में एक सौ छियालीस हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. यहां एक,इकहत्तर,दो सौ बत्तीस घरों में नौ,अठहत्तर,पचपन लोग रह रहे हैं. इन इलाकों की बैरिकेडिंग की गई है. इसके अलावा सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया भी जारी है. अवस्थी के अनुसार, यहां अब तक चार सौ एक केस कोरोना संक्रमण के मिले हैं. सभी डीएम ने खुद पहले चरण में पंद्रह जिलों और दूसरे चरण में पच्चीस जिलों में हॉटस्पॉट की पहचान की है. अवस्थी का कहना है कि कोरोना के पचासी% मामले 'रिंग फेंस' के अंदर के हैं. सूत्रों का कहना है कि कोरोना के कारण यूपी की योगी सरकार ने तीस अप्रैल तक लॉकडाउन को जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है. दरअसल, यहां के जिलों में प्रदेश के जिलों को दो भागों में बांटा गया है. इनमें से एक वर्ग के जिलों में कुछ रियायतें दी जा सकती हैं. इस श्रेणी में वैसे जिले शामिल होंगे जहां चौदह अप्रैल तक एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिला है. जबकि वर्ग बी में वह जिले हैं जहां पॉजिटिव केस मिल चुके हैं या चौदह अप्रैल तक और मिलने की आशंका है. .
|
इस बीच भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की नेटवर्थ में बुधवार को 68. 9 करोड़ डॉलर की गिरावट आई। उनकी नेटवर्थ में इस साल 3. 10 अरब डॉलर की गिरावट आई है। अंबानी की नेटवर्थ अब 84 अरब डॉलर रह गई है। इसी तरह अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) की नेटवर्थ में भी बुधवार को 48. 7 करोड़ डॉलर की गिरावट आई। उनकी नेटवर्थ अब 53. 9 अरब डॉलर रह गई है। अडानी ने इस साल सबसे ज्यादा दौलत गंवाई है। उनकी नेटवर्थ में जनवरी से अब तक 66. 7 अरब डॉलर की गिरावट आई है।
ऐमजॉन के जेफ बेजोस (Jeff Bezos) 139 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। बुधवार को उनकी नेटवर्थ में 1. 98 अरब डॉलर की तेजी आई। माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स इस लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं। उनकी नेटवर्थ 125 अरब डॉलर है। अमेरिका के दिग्गज इनवेस्टर वॉरेन बफे 115 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ पांचवें नंबर पर हैं। लैरी एलिसन (112 अरब डॉलर) छठे, लैरी पेज (110 अरब डॉलर) सातवें, स्टीव बामर (109 अरब डॉलर) आठवें, सर्गेई ब्रिन (104 अरब डॉलर) नौवें, और कार्लोस स्लिम (93. 7 अरब डॉलर) दसवें नंबर पर हैं।
|
इस बीच भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में बुधवार को अड़सठ. नौ करोड़ डॉलर की गिरावट आई। उनकी नेटवर्थ में इस साल तीन. दस अरब डॉलर की गिरावट आई है। अंबानी की नेटवर्थ अब चौरासी अरब डॉलर रह गई है। इसी तरह अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी की नेटवर्थ में भी बुधवार को अड़तालीस. सात करोड़ डॉलर की गिरावट आई। उनकी नेटवर्थ अब तिरेपन. नौ अरब डॉलर रह गई है। अडानी ने इस साल सबसे ज्यादा दौलत गंवाई है। उनकी नेटवर्थ में जनवरी से अब तक छयासठ. सात अरब डॉलर की गिरावट आई है। ऐमजॉन के जेफ बेजोस एक सौ उनतालीस अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। बुधवार को उनकी नेटवर्थ में एक. अट्ठानवे अरब डॉलर की तेजी आई। माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स इस लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं। उनकी नेटवर्थ एक सौ पच्चीस अरब डॉलर है। अमेरिका के दिग्गज इनवेस्टर वॉरेन बफे एक सौ पंद्रह अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ पांचवें नंबर पर हैं। लैरी एलिसन छठे, लैरी पेज सातवें, स्टीव बामर आठवें, सर्गेई ब्रिन नौवें, और कार्लोस स्लिम दसवें नंबर पर हैं।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.