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अक्सर देखा जाता है की अगर शनि अपना चाल चल रहा होता है तो कई लोग डर जाते है क्योंकि अजीबो घटनाएं होने लगती है दिन बुरे चलने लगते है। अगर कोई शनि का नाम सुन लेता है तो वो परेशान हो जाता है। परेशान इस लिए क्योंकि वो ये सोच रहा होता है की कही जो बुरे काम हो रहे है वो शनि का दोष तो नही। सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि किसी एक राशि मे ढाई साल तक रहते है फिर जाकर वो दूसरे राशि में गोचर करते हैं। ये ढाई साल का समय बहुत ही ज्यादा होता है जिसमे काफी नुकसान भी उठाना पड़ता हैं। माना जाता है कि अगर किसी के कुंडली में शनि खराब होता है तो उसको बहुत ही सावधान रहना चाहिए क्योंकि बीमारियों से पीछा नही छूटता तो वही एक न एक समस्या लगी रहती हैं। कुंडली में शनि की खराब स्थिति होने पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा लग जाती है। शनि किसी एक राशि में लगभग ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि के एक राशि में रहने से तीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और दो पर ढ़ैय्या लग जाती है। वर्तमान में शनि मकर राशि में भ्रमण पर हैं जिस कारण से धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती लगी हुई है और मिथुन और कन्या पर ढैय्या।
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अक्सर देखा जाता है की अगर शनि अपना चाल चल रहा होता है तो कई लोग डर जाते है क्योंकि अजीबो घटनाएं होने लगती है दिन बुरे चलने लगते है। अगर कोई शनि का नाम सुन लेता है तो वो परेशान हो जाता है। परेशान इस लिए क्योंकि वो ये सोच रहा होता है की कही जो बुरे काम हो रहे है वो शनि का दोष तो नही। सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि किसी एक राशि मे ढाई साल तक रहते है फिर जाकर वो दूसरे राशि में गोचर करते हैं। ये ढाई साल का समय बहुत ही ज्यादा होता है जिसमे काफी नुकसान भी उठाना पड़ता हैं। माना जाता है कि अगर किसी के कुंडली में शनि खराब होता है तो उसको बहुत ही सावधान रहना चाहिए क्योंकि बीमारियों से पीछा नही छूटता तो वही एक न एक समस्या लगी रहती हैं। कुंडली में शनि की खराब स्थिति होने पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा लग जाती है। शनि किसी एक राशि में लगभग ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि के एक राशि में रहने से तीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और दो पर ढ़ैय्या लग जाती है। वर्तमान में शनि मकर राशि में भ्रमण पर हैं जिस कारण से धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती लगी हुई है और मिथुन और कन्या पर ढैय्या।
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ताजनगरी में वेलेंटाइन डे पर युवा जोड़ों ने खूब मौज मस्ती की। होटलों और रेस्तरां में गाने गाए, डांस किया और एक दूसरे को उपहार दिए। विदेशी जोड़ों ने भी प्यार का इजहार किया।
ताजमहल के आसपास के रेस्तरां में वेलेंटाइन डे के लिए खास तैयारी की गई थी। शुक्रवार को ताजमहल बंद था। इसलिए सैलानियों ने मेहताब बाग जाकर ताज के पार्श्व में फोटो खिंचवाए।
किला के मुसम्मन बुर्ज में भी युवा जोड़ों की भीड़ रही। यहां से ताज साफ नजर आता है। आखिरी वक्त में शाहजहां को यहीं पर कैद रखा गया था। वो यहां से ताज निहारते रहते थे।
मरियम टूम, अकबर टूम, सुभाष पार्क, कीठम स्थिति सूर सरोवर में भी बड़ी संख्या में युवा जोड़े पहुंचे। फिल्म देखने वाले भी कम नहीं रहे।
मदिया कटरा पर फूल के दुकानदार सोनू ने बताया कि रोज पर उसके 200 गुलाब बिके थे जबकि वेलेंटाइन डे पर आंकड़ा 250 रहा। सबसे ज्यादा लाल गुलाब बिके। दोस्ती के लिए दिए जाने वाले सफेद और पीले गुलाब की मांग न के बराबर रही।
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ताजनगरी में वेलेंटाइन डे पर युवा जोड़ों ने खूब मौज मस्ती की। होटलों और रेस्तरां में गाने गाए, डांस किया और एक दूसरे को उपहार दिए। विदेशी जोड़ों ने भी प्यार का इजहार किया। ताजमहल के आसपास के रेस्तरां में वेलेंटाइन डे के लिए खास तैयारी की गई थी। शुक्रवार को ताजमहल बंद था। इसलिए सैलानियों ने मेहताब बाग जाकर ताज के पार्श्व में फोटो खिंचवाए। किला के मुसम्मन बुर्ज में भी युवा जोड़ों की भीड़ रही। यहां से ताज साफ नजर आता है। आखिरी वक्त में शाहजहां को यहीं पर कैद रखा गया था। वो यहां से ताज निहारते रहते थे। मरियम टूम, अकबर टूम, सुभाष पार्क, कीठम स्थिति सूर सरोवर में भी बड़ी संख्या में युवा जोड़े पहुंचे। फिल्म देखने वाले भी कम नहीं रहे। मदिया कटरा पर फूल के दुकानदार सोनू ने बताया कि रोज पर उसके दो सौ गुलाब बिके थे जबकि वेलेंटाइन डे पर आंकड़ा दो सौ पचास रहा। सबसे ज्यादा लाल गुलाब बिके। दोस्ती के लिए दिए जाने वाले सफेद और पीले गुलाब की मांग न के बराबर रही।
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गोड्डाः शुक्रवार की सुबह बाराबांघ गांव से पिकअप वैन में लदे छह गाय और एक बाछी को जब्त किया गया. बताया गया कि सहायक अवर निरीक्षक महेश सिंह गस्ती में थे उसी दौरान उन्होंने देखा कि एक पिकअप वैन बारकोप मोड़ से निकलकर तेजी से बाराबांध की ओर निकला. पीछा करके पिकअप वैन को पकड़ा गया.
जब्त गायों को थाना लाया गया. गिरफ्तार हसनपुर धोरैया निवासी मो. मिनसार उम्र 30 वर्ष, नवीन ततवा पिता अर्जुन ततवा घर लोचनी बसंतराय, साखी बसंतराय निवासी 50 वर्षीय कलीम पिता स्व. अनीफ और लक्ष्मी के रुप में पहचान हुई है.
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गोड्डाः शुक्रवार की सुबह बाराबांघ गांव से पिकअप वैन में लदे छह गाय और एक बाछी को जब्त किया गया. बताया गया कि सहायक अवर निरीक्षक महेश सिंह गस्ती में थे उसी दौरान उन्होंने देखा कि एक पिकअप वैन बारकोप मोड़ से निकलकर तेजी से बाराबांध की ओर निकला. पीछा करके पिकअप वैन को पकड़ा गया. जब्त गायों को थाना लाया गया. गिरफ्तार हसनपुर धोरैया निवासी मो. मिनसार उम्र तीस वर्ष, नवीन ततवा पिता अर्जुन ततवा घर लोचनी बसंतराय, साखी बसंतराय निवासी पचास वर्षीय कलीम पिता स्व. अनीफ और लक्ष्मी के रुप में पहचान हुई है.
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आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। खर्च में कमी करना जरूरी है। इस सप्ताह आप निराशावादी मानसिकता को काबू में लाने का प्रयास करें। आधी-अधूरी जानकारी को अपडेट कर लें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, व्यापार में नई दिशा में ध्यान केंद्रित करें। यह सप्ताह कारोबार के लिहाज से अच्छा है लेकिन लेनदेन में सावधानी बरतने की जरूरत है।
इस सप्ताह घरेलू परेशानियों के योग बन रहे हैं। दूसरों को अपनी समस्या का कारण मानने से बचें, एकाग्रता का अभाव रहेगा। कपटियों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है, धैर्य से अच्छे समय की प्रतीक्षा करें। खून से संबंधित रोग होने के योग बन रहे हैं। आपकर कानूनी मुकदमा थोपा जा सकता है। आफिस में अधिकारियों से मनमुटाव हो सकता है।
आपका सप्ताह अच्छा रहेगा। व्यापार को लेकर आपका आर्थिक संकट दूर होगा, हालांकि कोई भी निवेश सोच समझकर करें। जोड़ों के दर्द से परेशान होना पड़ सकता है। निर्णय लेने में जल्दबाजी नही करें, वरिष्ठों से सलाह लेकर ही कार्य करें। विशेष तौर पर अपरिचित महिलाओं से न उलझें। आपके मित्र आपकी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं, आप बुरे लोगों की संगत में आ सकते हैं।
सेहत के प्रति सावधान रहें। किसी बड़े निर्णय लेने से पहले घर-परिवार या दोस्तों से चर्चा कर लें। इस सप्ताह व्यापार में जोखिम लेने से बचें, हालांकि बाद में सब होगा। घर परिवार में किसी बुजुर्ग को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। कोई शुभ समाचार मिल सकता है। परिवार के साथ कहीं घूमने फिरने के लिए बाहर जा सकते हैं।
इस हफ्ते आपको आपका रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। इसके इतर अपने काम पर ध्यान दें, मेहनत करें, लाभ होगा। लेन-देन के मामलों को पहले निपटाएं। कार्यक्षेत्र में उम्मीद से ज्यादा सफलता मिलेगी। कला के प्रति रुझान बढ़ेगा। व्यापार के लिए समय अच्छा है। स्वास्थ्य विकार संभव हैं, सचेत रहें। आफिस में मान सम्मान में वृद्धि होगी, अधिकारी प्रसन्न रहेंगे।
व्यापार और कार्यस्थल पर आपकी किस्मत साथ नहीं देगी, रुके हुए काम और टलेंगे। हालांकि आलोचनाएं आपको सफल होने में बल प्रदान करेंगीं। किसी बड़े निवेश से बचें। इस हफ्ते जीवन साथी के साथ अच्छे संबंध बनेंगे, सेहत भी अच्छी रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, आप भू-संपत्ति का सौदा कर सकते हैं, खरीद-बिक्री में आपको लाभ हो सकता है।
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आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। खर्च में कमी करना जरूरी है। इस सप्ताह आप निराशावादी मानसिकता को काबू में लाने का प्रयास करें। आधी-अधूरी जानकारी को अपडेट कर लें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, व्यापार में नई दिशा में ध्यान केंद्रित करें। यह सप्ताह कारोबार के लिहाज से अच्छा है लेकिन लेनदेन में सावधानी बरतने की जरूरत है। इस सप्ताह घरेलू परेशानियों के योग बन रहे हैं। दूसरों को अपनी समस्या का कारण मानने से बचें, एकाग्रता का अभाव रहेगा। कपटियों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है, धैर्य से अच्छे समय की प्रतीक्षा करें। खून से संबंधित रोग होने के योग बन रहे हैं। आपकर कानूनी मुकदमा थोपा जा सकता है। आफिस में अधिकारियों से मनमुटाव हो सकता है। आपका सप्ताह अच्छा रहेगा। व्यापार को लेकर आपका आर्थिक संकट दूर होगा, हालांकि कोई भी निवेश सोच समझकर करें। जोड़ों के दर्द से परेशान होना पड़ सकता है। निर्णय लेने में जल्दबाजी नही करें, वरिष्ठों से सलाह लेकर ही कार्य करें। विशेष तौर पर अपरिचित महिलाओं से न उलझें। आपके मित्र आपकी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं, आप बुरे लोगों की संगत में आ सकते हैं। सेहत के प्रति सावधान रहें। किसी बड़े निर्णय लेने से पहले घर-परिवार या दोस्तों से चर्चा कर लें। इस सप्ताह व्यापार में जोखिम लेने से बचें, हालांकि बाद में सब होगा। घर परिवार में किसी बुजुर्ग को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। कोई शुभ समाचार मिल सकता है। परिवार के साथ कहीं घूमने फिरने के लिए बाहर जा सकते हैं। इस हफ्ते आपको आपका रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। इसके इतर अपने काम पर ध्यान दें, मेहनत करें, लाभ होगा। लेन-देन के मामलों को पहले निपटाएं। कार्यक्षेत्र में उम्मीद से ज्यादा सफलता मिलेगी। कला के प्रति रुझान बढ़ेगा। व्यापार के लिए समय अच्छा है। स्वास्थ्य विकार संभव हैं, सचेत रहें। आफिस में मान सम्मान में वृद्धि होगी, अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। व्यापार और कार्यस्थल पर आपकी किस्मत साथ नहीं देगी, रुके हुए काम और टलेंगे। हालांकि आलोचनाएं आपको सफल होने में बल प्रदान करेंगीं। किसी बड़े निवेश से बचें। इस हफ्ते जीवन साथी के साथ अच्छे संबंध बनेंगे, सेहत भी अच्छी रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, आप भू-संपत्ति का सौदा कर सकते हैं, खरीद-बिक्री में आपको लाभ हो सकता है।
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सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष के भाई ने रविवार रात सेक्टर-18 मार्केट में जमकर हंगामा किया। पुलिस के साथ भी हाथापाई की। मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा गया तो वहां भी डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की।
मेडिकल के बाद थाना सेक्टर-20 पुलिस ने आरोपी को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को आरोपी को जमानत मिल गई। आरोपी भी सपा नेता है। पुलिस केअनुसार सर्फाबाद गांव में रहने वाले पूर्व सपा महानगर अध्यक्ष राकेश यादव का बड़ा भाई महेश यादव रविवार रात सेक्टर-18 मार्केट में कार खड़ी कर खुले में शराब पी रहा था।
शराब पीते समय वह गालियां दे रहा था। आते-जाते लोगों से बदसलूकी और हंगामा कर रहा था। सूचना पाकर थाना सेक्टर-20 की पीसीआर मौकेपर पहुंची तो आरोपी ने पीसीआर में सवार पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई कर दी।
नशे में धुत महेश यादव को पुलिस थाना सेक्टर-20 ले आई। थाने में महेश यादव ने और हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने महेश यादव को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में भी उसने डॉक्टरों संग बदतमीजी शुरू कर दी।
जिला अस्पताल में महेश यादव के हंगामा करने पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद ये वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने लगा। सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने पर अधिकारियों को सपा नेता की करतूतों का पता चला।
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सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष के भाई ने रविवार रात सेक्टर-अट्ठारह मार्केट में जमकर हंगामा किया। पुलिस के साथ भी हाथापाई की। मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा गया तो वहां भी डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की। मेडिकल के बाद थाना सेक्टर-बीस पुलिस ने आरोपी को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को आरोपी को जमानत मिल गई। आरोपी भी सपा नेता है। पुलिस केअनुसार सर्फाबाद गांव में रहने वाले पूर्व सपा महानगर अध्यक्ष राकेश यादव का बड़ा भाई महेश यादव रविवार रात सेक्टर-अट्ठारह मार्केट में कार खड़ी कर खुले में शराब पी रहा था। शराब पीते समय वह गालियां दे रहा था। आते-जाते लोगों से बदसलूकी और हंगामा कर रहा था। सूचना पाकर थाना सेक्टर-बीस की पीसीआर मौकेपर पहुंची तो आरोपी ने पीसीआर में सवार पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई कर दी। नशे में धुत महेश यादव को पुलिस थाना सेक्टर-बीस ले आई। थाने में महेश यादव ने और हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने महेश यादव को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में भी उसने डॉक्टरों संग बदतमीजी शुरू कर दी। जिला अस्पताल में महेश यादव के हंगामा करने पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद ये वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने लगा। सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने पर अधिकारियों को सपा नेता की करतूतों का पता चला।
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किसी भी मसले का ताव जब मीडिया की जुबान पर आता है, तब मालूम होता है कि हिमाचल किधर जा रहा है। ऊना के रायपुर सहोड़ा में ट्रक यूनियन यूं तो आईओसीएल के एलपीजी बाटलिंग प्लांट के गेट पर आधिपत्य जमाए बैठी रहती, लेकिन जब मीडिया से उलझी तो उसका चारित्रिक पतन दर्ज हो गया। यह दो घटनाओं का विवरण है। एक पहलू उनके विरोध और बाटलिंग प्लांट के अस्तित्व का है, तो दूसरा वह आक्रोश है जिसे बगल में छुपा कर ट्रकों का आंदोलन पत्रकारों के दल पर हमलावर हो गया। जाहिर है इस घटना ने प्रदेश के माहौल में घर कर रही विभिन्न संगठनों की अराजक मानसिकता का उल्लेख किया है, जिसे हम पत्रकारिता के आईने से देख सकते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में हो रहे निवेश या औद्योगिक उत्पादन के दरपेश परिवहन संबंधी दिक्कतें भयावह होती जा रही हैं। इससे पहले सीमेंट उद्योग के दरवाजे पर भी इस तरह के माहौल ने चेतावनी दी थी और अब ऊना के परिदृश्य में ट्रकों की जमात के सामने सारा माहौल शर्मिंदा है। हम घटना के पहले भाग में हिमाचल की पूरी परिवहन व्यवस्था का अवलोकन करें तो सारे औद्योगिक क्षेत्रों को माल ढुलाई के रोग से ग्रस्त पाएंगे। यही तानाशाही रवैया औद्योगिक वातावरण में खंजरनुमा बनकर घूम रहा है। परिवहन का एक दूसरा रूप पर्यटन उद्योग के गले में अंगूठा देकर निरंकुश होने का अधिकार प्राप्त कर रहा है। हिमाचल में टैक्सियों का संचालन जिस तरह और जिस जिरह पर हो रहा है, उससे पर्यटन संभावनाएं अपमानित हैं। दिल्ली या मुंबई एयरपोर्ट से आप जिस दर पर टैक्सी लेकर महानगर के किसी भी छोर तक पहुंच सकते हैं, उससे कहीं विपरीत हिमाचल में चंद मिनटों की दूरी हजारों रुपयों में तय होती है। परिवहन नीति से मंजिलें तय करने के दावे कहीं तो सरकारी परिवहन की मजदूरी कर रहे हैं, तो कहीं खुली छूट में बिगड़ते माहौल की सडक़ पर बेबसी गुजर रही है। हिमाचल के तमाम औद्योगिक केंद्र अगर माल ढुलाई के फेरों में ट्रक यूनियनों से आजिज हैं, तो पर्यटक हिमाचल में टैक्सी की मुंहमांगी दरों से परेशान हैं। ढुलाई सेब की हो या सब्जी की, हिमाचल के हर कदम पर महंगाई का यही अवांछित पहलू है। परिवहन की सदाबहार फसल के आगे सेब-सब्जी उगाने वाले भी हर साल दुष्चक्र में फंस जाते हैं, तो इस बार बाटलिंग प्लांट के बाहर परिवहन के अवरोध में, मीडिया की उपस्थिति पर भी अराजक होती ट्रक यूनियन ने बता दिया कि माफिया पैदा कैसे होता है।
परिवहन के ये जख्म अब मीडिया के चेहरे पर आए, तो मालूम यह करना होगा कि ट्रकों के पंजे में कौनसी बिसात बिछी है। यह विडंबना दोनों तरफ से है। मीडिया के सरोकार अब गांव-देहात से आर्थिक हालात तक नई पहल चाहते हैं, ताकि निजी क्षेत्र की उम्मीदों से ज्यादती न हो। हम यह नहीं कह सकते कि हर ट्रक हड़ताल गलत ही होगी, लेकिन हर बार हिमाचल से भागते निवेशक को पूछेंगे तो परिवहन की निरंकुश दरें ही शैतान बन कर डरा रही हैं। ऊना प्रकरण में अब तक सरकार को सारे विषाद की जड़ खोज लेनी चाहिए थी, ताकि सडक़ों पर बढ़ता उत्पात नियंत्रित किया जा सके। बेशक निवेश तो किसी ट्रक और टैक्सी की मिलकीयत में भी है, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि परिवहन क्षेत्र को माफिया होने से बचाया जा सके। इस बार मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ट्रकों की मनमर्जी का शिकार मीडिया भी हो गया। यह महज कानूनी मर•ा नहीं, बल्कि उस छूट की गुस्ताखी है जो परिवहन क्षेत्र को मिल रही है यानी अब तक जो दौर डरा-धमका कर माल ढुलाई को महंगा कर रहा था, वह मीडिया की स्वतंत्रता को भी आंखें दिखाने लगा है। यह विभिन्न यूनियनों की छत्रछाया में फैल रही अराजकता है, जो अपने सामने किसी भी लोकतांत्रिक सवाल को बर्दाश्त नहीं करती। हिमाचल में हिमाचली धौंस का सरकारीकरण उस भावना से प्रेरित है, जो दिल खोलकर सरकारी नौकरियां बांटता है और प्राइवेट धंधे को भी अनावश्यक दखल के नाखूनों से छीलता है। यही वजह है कि हमारी आर्थिकी ठहर-सी गई है या निजी क्षेत्र के रोजगार को भी प्रताडि़त कर रही है। परिवहन क्षेत्र को ही सुधार लें, तो इसके साथ पर्यटन, उद्योग व व्यापार के साथ-साथ उपभोक्ताओं की भी सरलता व सहजता से प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी बढ़ाने की भूमिका बढ़ेगी।
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किसी भी मसले का ताव जब मीडिया की जुबान पर आता है, तब मालूम होता है कि हिमाचल किधर जा रहा है। ऊना के रायपुर सहोड़ा में ट्रक यूनियन यूं तो आईओसीएल के एलपीजी बाटलिंग प्लांट के गेट पर आधिपत्य जमाए बैठी रहती, लेकिन जब मीडिया से उलझी तो उसका चारित्रिक पतन दर्ज हो गया। यह दो घटनाओं का विवरण है। एक पहलू उनके विरोध और बाटलिंग प्लांट के अस्तित्व का है, तो दूसरा वह आक्रोश है जिसे बगल में छुपा कर ट्रकों का आंदोलन पत्रकारों के दल पर हमलावर हो गया। जाहिर है इस घटना ने प्रदेश के माहौल में घर कर रही विभिन्न संगठनों की अराजक मानसिकता का उल्लेख किया है, जिसे हम पत्रकारिता के आईने से देख सकते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में हो रहे निवेश या औद्योगिक उत्पादन के दरपेश परिवहन संबंधी दिक्कतें भयावह होती जा रही हैं। इससे पहले सीमेंट उद्योग के दरवाजे पर भी इस तरह के माहौल ने चेतावनी दी थी और अब ऊना के परिदृश्य में ट्रकों की जमात के सामने सारा माहौल शर्मिंदा है। हम घटना के पहले भाग में हिमाचल की पूरी परिवहन व्यवस्था का अवलोकन करें तो सारे औद्योगिक क्षेत्रों को माल ढुलाई के रोग से ग्रस्त पाएंगे। यही तानाशाही रवैया औद्योगिक वातावरण में खंजरनुमा बनकर घूम रहा है। परिवहन का एक दूसरा रूप पर्यटन उद्योग के गले में अंगूठा देकर निरंकुश होने का अधिकार प्राप्त कर रहा है। हिमाचल में टैक्सियों का संचालन जिस तरह और जिस जिरह पर हो रहा है, उससे पर्यटन संभावनाएं अपमानित हैं। दिल्ली या मुंबई एयरपोर्ट से आप जिस दर पर टैक्सी लेकर महानगर के किसी भी छोर तक पहुंच सकते हैं, उससे कहीं विपरीत हिमाचल में चंद मिनटों की दूरी हजारों रुपयों में तय होती है। परिवहन नीति से मंजिलें तय करने के दावे कहीं तो सरकारी परिवहन की मजदूरी कर रहे हैं, तो कहीं खुली छूट में बिगड़ते माहौल की सडक़ पर बेबसी गुजर रही है। हिमाचल के तमाम औद्योगिक केंद्र अगर माल ढुलाई के फेरों में ट्रक यूनियनों से आजिज हैं, तो पर्यटक हिमाचल में टैक्सी की मुंहमांगी दरों से परेशान हैं। ढुलाई सेब की हो या सब्जी की, हिमाचल के हर कदम पर महंगाई का यही अवांछित पहलू है। परिवहन की सदाबहार फसल के आगे सेब-सब्जी उगाने वाले भी हर साल दुष्चक्र में फंस जाते हैं, तो इस बार बाटलिंग प्लांट के बाहर परिवहन के अवरोध में, मीडिया की उपस्थिति पर भी अराजक होती ट्रक यूनियन ने बता दिया कि माफिया पैदा कैसे होता है। परिवहन के ये जख्म अब मीडिया के चेहरे पर आए, तो मालूम यह करना होगा कि ट्रकों के पंजे में कौनसी बिसात बिछी है। यह विडंबना दोनों तरफ से है। मीडिया के सरोकार अब गांव-देहात से आर्थिक हालात तक नई पहल चाहते हैं, ताकि निजी क्षेत्र की उम्मीदों से ज्यादती न हो। हम यह नहीं कह सकते कि हर ट्रक हड़ताल गलत ही होगी, लेकिन हर बार हिमाचल से भागते निवेशक को पूछेंगे तो परिवहन की निरंकुश दरें ही शैतान बन कर डरा रही हैं। ऊना प्रकरण में अब तक सरकार को सारे विषाद की जड़ खोज लेनी चाहिए थी, ताकि सडक़ों पर बढ़ता उत्पात नियंत्रित किया जा सके। बेशक निवेश तो किसी ट्रक और टैक्सी की मिलकीयत में भी है, लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि परिवहन क्षेत्र को माफिया होने से बचाया जा सके। इस बार मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ट्रकों की मनमर्जी का शिकार मीडिया भी हो गया। यह महज कानूनी मर•ा नहीं, बल्कि उस छूट की गुस्ताखी है जो परिवहन क्षेत्र को मिल रही है यानी अब तक जो दौर डरा-धमका कर माल ढुलाई को महंगा कर रहा था, वह मीडिया की स्वतंत्रता को भी आंखें दिखाने लगा है। यह विभिन्न यूनियनों की छत्रछाया में फैल रही अराजकता है, जो अपने सामने किसी भी लोकतांत्रिक सवाल को बर्दाश्त नहीं करती। हिमाचल में हिमाचली धौंस का सरकारीकरण उस भावना से प्रेरित है, जो दिल खोलकर सरकारी नौकरियां बांटता है और प्राइवेट धंधे को भी अनावश्यक दखल के नाखूनों से छीलता है। यही वजह है कि हमारी आर्थिकी ठहर-सी गई है या निजी क्षेत्र के रोजगार को भी प्रताडि़त कर रही है। परिवहन क्षेत्र को ही सुधार लें, तो इसके साथ पर्यटन, उद्योग व व्यापार के साथ-साथ उपभोक्ताओं की भी सरलता व सहजता से प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी बढ़ाने की भूमिका बढ़ेगी।
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दोनों का सिर धड़ से अलग था। सिर लाइन के अंदर और धड़ बाहर की इस वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रेन के करीब आने पर दोनों एक साथ पटरी पर लेट गए।
उत्तराखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसको जानकर आप भी हैरान होंगे। यहां एक 7 साल की मासूम छात्रा को स्कूल की शिक्षिका ने डंडे से बेरहमी से पिटाई कर दी।
यूपी के रामपुर में 6 साल की बच्ची को किडनैप कर उसके साथ रेप करने वाले दोषी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। बीते 13 दिसंबर को कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया था। जिसके बाद बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई।
धोखाधड़ी एक मामला हरियाणा में सामने आया है। जहां एक महिला ने पहले फेसबुक पर एक कमांडो से दोस्ती की। फिर इसके बाद उसने अपने असली मकसद को अंजाम दे दिया और पांच लाख रुपए का चूना लगा दिया।
यूपी के रामपुर में सपा सांसद आजम खान और उनकी फैमिली के लिए मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट ने आजम, पत्नी तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ कुर्की के आदेश दिए हैं। एडीजे 6 की कोर्ट ने धारा 82 के तहत ये नोटिस जारी किया। मामले में अगली सुनवाई 24 जनवरी 2020 को होगी।
मध्य प्रदेश में रिश्वत का एक बड़ा मामला सामने आया है। लोकायुक्त टीम ने मप्र पूर्व विद्युत वितरण कंपनी के एक इंजीनियर को 15 लाख रुपए की रिश्वत के संग रंगे हाथ पकड़ा गया है।
हरियाणा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां इस रिश्ते को टीचर ने स्कूल के अन्य स्टॉफ के साथ मिलकर कलंकित कर दिया है। यहां के 24 छत्राओं ने इन आरोपियों पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुए बवाल के बाद पुलिस ने गोरखपुर के सोशल एक्टिविस्ट डॉक्टर कफील खान के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनपर एएमयू में छात्रों को भड़काने, शांति माहौल को खराब करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है।
महिला अपराधों पर सख्ती के बावजूद भोपाल में सरेआम एक एक्ट्रेस और उसकी सहेली के साथ छेड़छाड़ और मारपीट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
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दोनों का सिर धड़ से अलग था। सिर लाइन के अंदर और धड़ बाहर की इस वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रेन के करीब आने पर दोनों एक साथ पटरी पर लेट गए। उत्तराखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसको जानकर आप भी हैरान होंगे। यहां एक सात साल की मासूम छात्रा को स्कूल की शिक्षिका ने डंडे से बेरहमी से पिटाई कर दी। यूपी के रामपुर में छः साल की बच्ची को किडनैप कर उसके साथ रेप करने वाले दोषी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। बीते तेरह दिसंबर को कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया था। जिसके बाद बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई। धोखाधड़ी एक मामला हरियाणा में सामने आया है। जहां एक महिला ने पहले फेसबुक पर एक कमांडो से दोस्ती की। फिर इसके बाद उसने अपने असली मकसद को अंजाम दे दिया और पांच लाख रुपए का चूना लगा दिया। यूपी के रामपुर में सपा सांसद आजम खान और उनकी फैमिली के लिए मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट ने आजम, पत्नी तजीन फातमा और बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ कुर्की के आदेश दिए हैं। एडीजे छः की कोर्ट ने धारा बयासी के तहत ये नोटिस जारी किया। मामले में अगली सुनवाई चौबीस जनवरी दो हज़ार बीस को होगी। मध्य प्रदेश में रिश्वत का एक बड़ा मामला सामने आया है। लोकायुक्त टीम ने मप्र पूर्व विद्युत वितरण कंपनी के एक इंजीनियर को पंद्रह लाख रुपए की रिश्वत के संग रंगे हाथ पकड़ा गया है। हरियाणा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां इस रिश्ते को टीचर ने स्कूल के अन्य स्टॉफ के साथ मिलकर कलंकित कर दिया है। यहां के चौबीस छत्राओं ने इन आरोपियों पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुए बवाल के बाद पुलिस ने गोरखपुर के सोशल एक्टिविस्ट डॉक्टर कफील खान के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनपर एएमयू में छात्रों को भड़काने, शांति माहौल को खराब करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है। महिला अपराधों पर सख्ती के बावजूद भोपाल में सरेआम एक एक्ट्रेस और उसकी सहेली के साथ छेड़छाड़ और मारपीट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
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गुजरात में पहले चरण के वोटिंग के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय बचा है. ऐसे में सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं. मांडवी सीट पर इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है.
गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए एक और पांच दिसंबर को वोटिंग होनी है, जबकि आठ दिसंबर को चुनाव परिणाम आ जाएंगे. राज्य में 182 सीटों पर चुनाव हो रहा है. प्रदेश की मांडवी सीट हॉट बनी हुई है. यहां पर मुस्लिम वोटर्स पर सभी पार्टियों की नजर है. सभी पार्टियां इन्हें लुभाने में जुटी हुई हैं. बता दें कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी भी चुनाव लड़ रही है.
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गुजरात में पहले चरण के वोटिंग के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय बचा है. ऐसे में सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं. मांडवी सीट पर इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है. गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए एक और पांच दिसंबर को वोटिंग होनी है, जबकि आठ दिसंबर को चुनाव परिणाम आ जाएंगे. राज्य में एक सौ बयासी सीटों पर चुनाव हो रहा है. प्रदेश की मांडवी सीट हॉट बनी हुई है. यहां पर मुस्लिम वोटर्स पर सभी पार्टियों की नजर है. सभी पार्टियां इन्हें लुभाने में जुटी हुई हैं. बता दें कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी भी चुनाव लड़ रही है.
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दिल्ली वाले अपने काम के साथ मोबाइल और लैपटॉप पर इतना बिजी रहने लगे हैं कि अब तो उनकी आंखों का पानी भी सूखने लगा है। आलम यह है कि इसकी जानकारी होते हुए भी वह इसे हल्के में ले रहे हैं। एम्स के आई स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि दिल्ली में ड्राई आई के केसेज हर दिन बढ़ रहे हैं।
क्या होती है ड्राई आई?
एम्स के आई स्पेशलिस्ट डॉ राजेश सिन्हा बताते हैं कि जब हम मोबाइल या लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करने लगते हैं और एक टक उसमें नजर गढ़ाए रहते हैं, तो इससे आंखों पर जोर पड़ता है। इससे आंखों का पानी, जो आंसू के रूप में बाहर आता है, वह सूखने लगता है। ज्यादा देर तक लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर काम करने से व्यक्ति की आंखों के रेटिना पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आंखों में बनने वाला तरल पदार्थ पलक नहीं झपकने से आंखों में फैल नहीं पाता है जिससे आंखों में सूखापन, भारीपन, सिरदर्द और घबराहट महसूस होती है।
डॉ सिन्हा का कहना है कि ज्यादातर घरों, ऑफिस और कॉलेजों में एयर कंडीशन लगे हुए हैं। एसी में बैठकर घंटों बिना पलक झपकाए स्क्रीन पर देखने से आंखों की नमी घट जाती है। इस स्थिति में तेजी से आंखों का पानी सूखने लगता है।
आमतौर पर इंसान को 1 मिनट में कम से कम 15 बार आंखें झपकानी चाहिए, लेकिन जब हम मोबाइल या लैपटॉप में किसी काम या विडियो देखने में व्यस्त होते हैं, तो हम एक मिनट में सिर्फ 5 बार ही पलकें झपकाते हैं। इससे भी आंखों का पानी उड़ जाता है क्योंकि जब हम पलक को झपकाकर खोलते हैं, तो यह पानी पूरी आंख में फैलता है। पलकें न झपकाने की वजह से यह आंख में फैल नहीं पाता और सूखने लगता है।
अब तो बच्चों में भी ड्राई आई के काफी केस आ रहे हैं। छोटी उम्र में ही बच्चों के हाथ में मोबाइल देना इसकी वजह है। बच्चों ने बाहर खेलना बंद कर दिया है। वह पूरा दिन सिर्फ मोबाइल में ही लगे रहते हैं, जिसकी वजह से बच्चों में यह केस बढ़ रहे हैं। रोते बच्चे को चुप करवाने के लिए या बच्चे का किसी चीज से ध्यान भटकाने के लिए माता-पिता उन्हें मोबाइल दे देते हैं, जिससे बच्चों की आंखों को काफी नुकसान होता है।
- कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी या टैबलट को देखते हुए हर 5 सेकंड में पलक झपकाएं।
- आंखों को रगड़ें नहीं, इससे आंख को नुकसान हो सकता है।
- आंखों में नमी बनाए रखने के लिए अच्छे ब्रैंड की लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स यूज करें।
- कॉन्टैक्ट लेंस साफ रखें और उन्हें हमेशा पहनकर न रखें।
- कोशिश करें कि आंखों पर सीधी हवा न लगे।
- हेल्दी खाना खाएं, साबुत अनाज, फल-सब्जियां ज्यादा खाएं और चीनी कम।
- डॉक्टर की सलाह के बगैर आंख में कोई भी दवा न डालें।
- आंख में डालने वाली कोई भी दवा खोलने के महीने भर में खत्म कर लें। महीना बीत जाने पर उसे इस्तेमाल न करें।
- स्वीमिंग के दौरान चश्मा जरूर पहनें और कोशिश करें कि आंखों में पानी न जाए।
- हो सके तो आंख में काजल न लगाएं।
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दिल्ली वाले अपने काम के साथ मोबाइल और लैपटॉप पर इतना बिजी रहने लगे हैं कि अब तो उनकी आंखों का पानी भी सूखने लगा है। आलम यह है कि इसकी जानकारी होते हुए भी वह इसे हल्के में ले रहे हैं। एम्स के आई स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि दिल्ली में ड्राई आई के केसेज हर दिन बढ़ रहे हैं। क्या होती है ड्राई आई? एम्स के आई स्पेशलिस्ट डॉ राजेश सिन्हा बताते हैं कि जब हम मोबाइल या लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करने लगते हैं और एक टक उसमें नजर गढ़ाए रहते हैं, तो इससे आंखों पर जोर पड़ता है। इससे आंखों का पानी, जो आंसू के रूप में बाहर आता है, वह सूखने लगता है। ज्यादा देर तक लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर काम करने से व्यक्ति की आंखों के रेटिना पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आंखों में बनने वाला तरल पदार्थ पलक नहीं झपकने से आंखों में फैल नहीं पाता है जिससे आंखों में सूखापन, भारीपन, सिरदर्द और घबराहट महसूस होती है। डॉ सिन्हा का कहना है कि ज्यादातर घरों, ऑफिस और कॉलेजों में एयर कंडीशन लगे हुए हैं। एसी में बैठकर घंटों बिना पलक झपकाए स्क्रीन पर देखने से आंखों की नमी घट जाती है। इस स्थिति में तेजी से आंखों का पानी सूखने लगता है। आमतौर पर इंसान को एक मिनट में कम से कम पंद्रह बार आंखें झपकानी चाहिए, लेकिन जब हम मोबाइल या लैपटॉप में किसी काम या विडियो देखने में व्यस्त होते हैं, तो हम एक मिनट में सिर्फ पाँच बार ही पलकें झपकाते हैं। इससे भी आंखों का पानी उड़ जाता है क्योंकि जब हम पलक को झपकाकर खोलते हैं, तो यह पानी पूरी आंख में फैलता है। पलकें न झपकाने की वजह से यह आंख में फैल नहीं पाता और सूखने लगता है। अब तो बच्चों में भी ड्राई आई के काफी केस आ रहे हैं। छोटी उम्र में ही बच्चों के हाथ में मोबाइल देना इसकी वजह है। बच्चों ने बाहर खेलना बंद कर दिया है। वह पूरा दिन सिर्फ मोबाइल में ही लगे रहते हैं, जिसकी वजह से बच्चों में यह केस बढ़ रहे हैं। रोते बच्चे को चुप करवाने के लिए या बच्चे का किसी चीज से ध्यान भटकाने के लिए माता-पिता उन्हें मोबाइल दे देते हैं, जिससे बच्चों की आंखों को काफी नुकसान होता है। - कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी या टैबलट को देखते हुए हर पाँच सेकंड में पलक झपकाएं। - आंखों को रगड़ें नहीं, इससे आंख को नुकसान हो सकता है। - आंखों में नमी बनाए रखने के लिए अच्छे ब्रैंड की लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स यूज करें। - कॉन्टैक्ट लेंस साफ रखें और उन्हें हमेशा पहनकर न रखें। - कोशिश करें कि आंखों पर सीधी हवा न लगे। - हेल्दी खाना खाएं, साबुत अनाज, फल-सब्जियां ज्यादा खाएं और चीनी कम। - डॉक्टर की सलाह के बगैर आंख में कोई भी दवा न डालें। - आंख में डालने वाली कोई भी दवा खोलने के महीने भर में खत्म कर लें। महीना बीत जाने पर उसे इस्तेमाल न करें। - स्वीमिंग के दौरान चश्मा जरूर पहनें और कोशिश करें कि आंखों में पानी न जाए। - हो सके तो आंख में काजल न लगाएं।
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आईपीएल के 12 सीजन में से सिर्फ एक बार खिताब अपने नाम कर चुकी राजस्थान रॉयल्स की टीम आईपीएल 2020 में एक बार फिर इतिहास दोहराने का इरादा लेकर उतरने के लिए तैयार है. इस टीम में मध्यक्रम के रूप में खुद कप्तान स्टीव स्मिथ मौजूद रहेंगे. स्मिथ ने पिछले सीजन भी इस टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया था.
स्मिथ के अतिरिक्त टीम के लिए मध्यक्रम में बेन स्टोक्स के रूप में शानदार खिलाड़ी मौजूद है. हालाँकि विश्व क्रिकेट में इस खिलाड़ी की जिस तरह की छवि है. उसके अनुसार स्टोक्स ने आईपीएल में अपना जलवा नहीं बिखेरा हैं. हालाँकि इसके बावजूद राजस्थान की टीम को इस वर्ष एक बार फिर बेन स्टोक्स पर सबसे ज्यादा उम्मीद होगी.
स्टोक्स तथा स्मिथ के अलावा कई वर्षों से राजस्थान की तरफ से खेल रहे संजू सैमसन पर भी टीम को मध्यक्रम में शानदार प्रदर्शन की भरपूर उम्मीद होगी. संजू सैमसन को इस साल शानदार प्रदर्शन करना ही पड़ेगा यदि वो आगामी टी20 विश्वकप में भारतीय टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं.
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आईपीएल के बारह सीजन में से सिर्फ एक बार खिताब अपने नाम कर चुकी राजस्थान रॉयल्स की टीम आईपीएल दो हज़ार बीस में एक बार फिर इतिहास दोहराने का इरादा लेकर उतरने के लिए तैयार है. इस टीम में मध्यक्रम के रूप में खुद कप्तान स्टीव स्मिथ मौजूद रहेंगे. स्मिथ ने पिछले सीजन भी इस टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया था. स्मिथ के अतिरिक्त टीम के लिए मध्यक्रम में बेन स्टोक्स के रूप में शानदार खिलाड़ी मौजूद है. हालाँकि विश्व क्रिकेट में इस खिलाड़ी की जिस तरह की छवि है. उसके अनुसार स्टोक्स ने आईपीएल में अपना जलवा नहीं बिखेरा हैं. हालाँकि इसके बावजूद राजस्थान की टीम को इस वर्ष एक बार फिर बेन स्टोक्स पर सबसे ज्यादा उम्मीद होगी. स्टोक्स तथा स्मिथ के अलावा कई वर्षों से राजस्थान की तरफ से खेल रहे संजू सैमसन पर भी टीम को मध्यक्रम में शानदार प्रदर्शन की भरपूर उम्मीद होगी. संजू सैमसन को इस साल शानदार प्रदर्शन करना ही पड़ेगा यदि वो आगामी टीबीस विश्वकप में भारतीय टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं.
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आज कल शादियों का सीजन चल रहा है। हर कपल अपनी शादी को खास और यादगार बनाने के लिए कुछ ना कुछ अलग जरूर करते हैं। कोई वेडिंग कार्ड को अलग अंदाज में छपवा रहा है, तो किसी की एंट्री अलग अंदाज में हो रही है। सोशल मीडिया पर भी शादियों के एक से एक मजेदार वीडियो वायरल हो रहे हैं। वहीं, कई तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिसे देखकर लोग दंग रह गए। हालांकि, कुछ मामलो को देखकर लोगों की हंसी भी छूट रही है। इसी कड़ी में एक वकील साहब का वेडिंग कार्ड वायरल हो रहा है, जिसे पढ़ने के बाद लोग हैरान भी हैं और हंस भी रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, असम के वकील का वेडिंग कार्ड इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए वकील साहब ने संविधान थीम वाला शादी का कार्ड छपवाया है। न्याय के तराजू के दोनों ओर दूल्हा और दुल्हन के नाम लिखे गए हैं। इसके अलावा कार्ड में भारतीय विवाहों को नियंत्रित करने वाले कानूनों और अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है। कार्ड में लिखा है, 'विवाह का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक घटक है। इस मौलिक अधिकार का उपयोग करने का समय रविवार 28 नवंबर 2021 को है। ' इतना ही नहीं कार्ड में यह भी लिखा है कि जब वकीलों की शादी होती है, तो वे हां नहीं कहते हैं बल्कि कहते हैं, 'हम नियम और शर्तों को स्वीकार करते हैं। '
अब यह तस्वीर वायरल हो गई है। शादी कार्ड देखने के बाद कुछ लोग इस पर चटकारे भी ले रहे हैं। किसी ने लिखा, ' इस कार्ड को पढ़ने के बाद CLAT का आधा हिस्सा पूरा हो गया'। एक ने मजे लेते हुए लिखा, ' लगता है यह कार्ड कोर्ट समन की तरह है'। तो इस वेडिंग कार्ड पर आपकी क्या राय है कमेंट कर जरूर बताएं।
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आज कल शादियों का सीजन चल रहा है। हर कपल अपनी शादी को खास और यादगार बनाने के लिए कुछ ना कुछ अलग जरूर करते हैं। कोई वेडिंग कार्ड को अलग अंदाज में छपवा रहा है, तो किसी की एंट्री अलग अंदाज में हो रही है। सोशल मीडिया पर भी शादियों के एक से एक मजेदार वीडियो वायरल हो रहे हैं। वहीं, कई तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिसे देखकर लोग दंग रह गए। हालांकि, कुछ मामलो को देखकर लोगों की हंसी भी छूट रही है। इसी कड़ी में एक वकील साहब का वेडिंग कार्ड वायरल हो रहा है, जिसे पढ़ने के बाद लोग हैरान भी हैं और हंस भी रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, असम के वकील का वेडिंग कार्ड इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए वकील साहब ने संविधान थीम वाला शादी का कार्ड छपवाया है। न्याय के तराजू के दोनों ओर दूल्हा और दुल्हन के नाम लिखे गए हैं। इसके अलावा कार्ड में भारतीय विवाहों को नियंत्रित करने वाले कानूनों और अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है। कार्ड में लिखा है, 'विवाह का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद इक्कीस के तहत जीवन के अधिकार का एक घटक है। इस मौलिक अधिकार का उपयोग करने का समय रविवार अट्ठाईस नवंबर दो हज़ार इक्कीस को है। ' इतना ही नहीं कार्ड में यह भी लिखा है कि जब वकीलों की शादी होती है, तो वे हां नहीं कहते हैं बल्कि कहते हैं, 'हम नियम और शर्तों को स्वीकार करते हैं। ' अब यह तस्वीर वायरल हो गई है। शादी कार्ड देखने के बाद कुछ लोग इस पर चटकारे भी ले रहे हैं। किसी ने लिखा, ' इस कार्ड को पढ़ने के बाद CLAT का आधा हिस्सा पूरा हो गया'। एक ने मजे लेते हुए लिखा, ' लगता है यह कार्ड कोर्ट समन की तरह है'। तो इस वेडिंग कार्ड पर आपकी क्या राय है कमेंट कर जरूर बताएं।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने ऋषि सुनक से ब्रिटेन में भारतीय राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. (फोटो- Reuters )
नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ब्रिटेन (Britain) में भारत विरोधी तत्वों पर सख्त कार्रवाई और भारतीय मिशन की सुरक्षा की ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक (Rishi Sunak) से मांग की है. दोनों नेताओं के बीच फोन पर विभिन्न मसलों पर बातचीत हुई. 2 दिन में यह लगातार दूसरी बार है जब भारत ने यूके से उसकी सरजमीन पर भारत विरोधी गतिविधियां पनपने और भारतीय संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है. इस पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बताया कि ब्रिटेन, भारतीय उच्चायोग पर हमले को पूरी तरह से अस्वीकार्य मानता है और भारतीय मिशन और उसके कर्मियों की सुरक्षा का आश्वासन देता है.
पीएम मोदी और यूके पीएम ऋषि सुनक संवाद से पहले कल भारत सरकार गृह मंत्रालय गृह सचिव ने यूके सरकार होम डिपार्टमेंट को भारत की चिंताओं के बारे में अवगत कराया था और सख्त कार्रवाई करने को कहा था. यह चिंताएं हैं ब्रिटेन में खालिस्तानी गतिविधियों का पनपना और भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन करने जैसी घटना को रोकना और ब्रिटेन में भारतीय संस्थानों को सुरक्षित रखना. बीते दिनों खालिस्तान समर्थकों ने हमला करते हुए भारतीय उच्चायोग की खिड़की तोड़ दी थी.
अधिकारियों ने कहा कि दोनों नेताओं ने कई द्विपक्षीय मुद्दों की प्रगति की समीक्षा की, खासकर व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में. वार्ता के दौरान, सुनक ने जी20 की भारत की अध्यक्षता के लिए भी ब्रिटेन का पूर्ण समर्थन दोहराया. दोनों नेताओं ने भारत-यूके रोडमैप 2030 के हिस्से के रूप में कई द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने हाल के उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और विशेष रूप से व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया. वे दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभप्रद मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र समापन की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में वांछित आर्थिक अपराधियों की वापसी पर भी प्रगति का आह्वान किया. इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन भगोड़ों की वापसी हो ताकि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था के सामने पेश हो सकें.
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पीएम नरेंद्र मोदी ने ऋषि सुनक से ब्रिटेन में भारतीय राजनयिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन में भारत विरोधी तत्वों पर सख्त कार्रवाई और भारतीय मिशन की सुरक्षा की ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक से मांग की है. दोनों नेताओं के बीच फोन पर विभिन्न मसलों पर बातचीत हुई. दो दिन में यह लगातार दूसरी बार है जब भारत ने यूके से उसकी सरजमीन पर भारत विरोधी गतिविधियां पनपने और भारतीय संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है. इस पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बताया कि ब्रिटेन, भारतीय उच्चायोग पर हमले को पूरी तरह से अस्वीकार्य मानता है और भारतीय मिशन और उसके कर्मियों की सुरक्षा का आश्वासन देता है. पीएम मोदी और यूके पीएम ऋषि सुनक संवाद से पहले कल भारत सरकार गृह मंत्रालय गृह सचिव ने यूके सरकार होम डिपार्टमेंट को भारत की चिंताओं के बारे में अवगत कराया था और सख्त कार्रवाई करने को कहा था. यह चिंताएं हैं ब्रिटेन में खालिस्तानी गतिविधियों का पनपना और भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन करने जैसी घटना को रोकना और ब्रिटेन में भारतीय संस्थानों को सुरक्षित रखना. बीते दिनों खालिस्तान समर्थकों ने हमला करते हुए भारतीय उच्चायोग की खिड़की तोड़ दी थी. अधिकारियों ने कहा कि दोनों नेताओं ने कई द्विपक्षीय मुद्दों की प्रगति की समीक्षा की, खासकर व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में. वार्ता के दौरान, सुनक ने जीबीस की भारत की अध्यक्षता के लिए भी ब्रिटेन का पूर्ण समर्थन दोहराया. दोनों नेताओं ने भारत-यूके रोडमैप दो हज़ार तीस के हिस्से के रूप में कई द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने हाल के उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और विशेष रूप से व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया. वे दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभप्रद मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र समापन की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में वांछित आर्थिक अपराधियों की वापसी पर भी प्रगति का आह्वान किया. इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन भगोड़ों की वापसी हो ताकि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था के सामने पेश हो सकें. .
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Hazaribagh : हजारीबाग कर्जन ग्राउंड स्थित टेनिस कोट मैदान में बुधवार को राज्य स्तरीय अंतर जिला टेनिस प्रतियोगिता का समापन हुआ. प्रतियोगिता में हजारीबाग, रांची एवं जमशेदपुर सहित कई जिला की टीमों ने विभिन्न वर्गों में बंटकर खेला. अलग-अलग वर्ग की प्रतियोगिता में कुल 54 खिलाड़ी शामिल हुए. फाइनल मुकाबले में हजारीबाग के खिलाड़ी छाए रहे.
पहला फाइनल मुकाबला मेंस सिंगल में हजारीबाग के मोहम्मद हमजह काजमी बनाम रांची के जीशान कैफ के बीच खेला गया. जिसमें हजारीबाग के मोहम्मद हमजह ने रांची के जीशान को 8-6 से पराजित किया. दूसरा फाइनल मुकाबला बालिका अंडर-18 हजारीबाग के शिवानी बनाम हजारीबाग की अपराजिता के बीच खेला गया. इसमें हजारीबाग की शिवानी ने अपराजिता को 5-4 से पराजित किया. तीसरा फाइनल मुकाबला बालक अंडर-12 झारखंड पुलिस के प्रशन्नजीत सोना बनाम कुणाल मुर्मू के बीच खेला गया. इसमें झारखंड पुलिस के प्रशन्नजीत सोना ने कुणाल मुर्मू को 6-3 से पराजित किया. चौथा बालिका अंडर-12 रांची की अदविता अलंकार बनाम अनवी गर्व के बीच खेला गया. इसमें अदविता अलंकार ने अनवी गर्व को 6-1 से पराजित किया. पांचवा फाइनल मुकाबला बालक अंडर-14 हंजला काजमी बनाम रांची के कुणाल मुर्मू के बीच खेला गया. इसमें हजारीबाग के हंजला काजमी ने रांची के कुणाल मुर्मू को 6-3 से पराजित किया.
समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सदर विधायक मनीष जायसवाल एवं विशिष्ट अतिथि जिला परिवहन पदाधिकारी बिजय कुमार, डॉल्फिन रिसोर्ट के निदेशक विकास कुमार व गुलमोहर विद्यालय के निदेशक विद्या बक्सी सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए. जिला लॉन टेनिस एसोसिएशन के निदेशक राकेश गुप्ता एवं कोच मोहम्मद रफीक के नेतृत्व में अतिथियों का सत्कार किया गया.
प्रतियोगिता को सफल बनाने में स्वीमिंग कोच मुन्नू कुमार राणा, स्केटिंग कोच अकरम खान, साहिल, मेहफुज, अनीर्बन, अर्पित, प्रगति, श्रयेशी, जीशान, सहरेयर, जितेंद्र एवं असफाग ने अपना सराहनीय योगदान दिया. चोटिल व घायलों की सेवा में फीट फिजियोथेरेपी से द्वीया सिन्हा, दिवाकर कुमार पांडे एवं प्रियंका कुमारी ने अपनी सेवाएं दीं. मौके पर विशेष रूप से चंद्रमोहन पटेल, राकेश ठाकुर, नाबार्ड अधिकारी प्रेम प्रकाश, जेटू यादव एवं तापस चक्रवर्ती सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए.
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Hazaribagh : हजारीबाग कर्जन ग्राउंड स्थित टेनिस कोट मैदान में बुधवार को राज्य स्तरीय अंतर जिला टेनिस प्रतियोगिता का समापन हुआ. प्रतियोगिता में हजारीबाग, रांची एवं जमशेदपुर सहित कई जिला की टीमों ने विभिन्न वर्गों में बंटकर खेला. अलग-अलग वर्ग की प्रतियोगिता में कुल चौवन खिलाड़ी शामिल हुए. फाइनल मुकाबले में हजारीबाग के खिलाड़ी छाए रहे. पहला फाइनल मुकाबला मेंस सिंगल में हजारीबाग के मोहम्मद हमजह काजमी बनाम रांची के जीशान कैफ के बीच खेला गया. जिसमें हजारीबाग के मोहम्मद हमजह ने रांची के जीशान को आठ-छः से पराजित किया. दूसरा फाइनल मुकाबला बालिका अंडर-अट्ठारह हजारीबाग के शिवानी बनाम हजारीबाग की अपराजिता के बीच खेला गया. इसमें हजारीबाग की शिवानी ने अपराजिता को पाँच-चार से पराजित किया. तीसरा फाइनल मुकाबला बालक अंडर-बारह झारखंड पुलिस के प्रशन्नजीत सोना बनाम कुणाल मुर्मू के बीच खेला गया. इसमें झारखंड पुलिस के प्रशन्नजीत सोना ने कुणाल मुर्मू को छः-तीन से पराजित किया. चौथा बालिका अंडर-बारह रांची की अदविता अलंकार बनाम अनवी गर्व के बीच खेला गया. इसमें अदविता अलंकार ने अनवी गर्व को छः-एक से पराजित किया. पांचवा फाइनल मुकाबला बालक अंडर-चौदह हंजला काजमी बनाम रांची के कुणाल मुर्मू के बीच खेला गया. इसमें हजारीबाग के हंजला काजमी ने रांची के कुणाल मुर्मू को छः-तीन से पराजित किया. समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सदर विधायक मनीष जायसवाल एवं विशिष्ट अतिथि जिला परिवहन पदाधिकारी बिजय कुमार, डॉल्फिन रिसोर्ट के निदेशक विकास कुमार व गुलमोहर विद्यालय के निदेशक विद्या बक्सी सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए. जिला लॉन टेनिस एसोसिएशन के निदेशक राकेश गुप्ता एवं कोच मोहम्मद रफीक के नेतृत्व में अतिथियों का सत्कार किया गया. प्रतियोगिता को सफल बनाने में स्वीमिंग कोच मुन्नू कुमार राणा, स्केटिंग कोच अकरम खान, साहिल, मेहफुज, अनीर्बन, अर्पित, प्रगति, श्रयेशी, जीशान, सहरेयर, जितेंद्र एवं असफाग ने अपना सराहनीय योगदान दिया. चोटिल व घायलों की सेवा में फीट फिजियोथेरेपी से द्वीया सिन्हा, दिवाकर कुमार पांडे एवं प्रियंका कुमारी ने अपनी सेवाएं दीं. मौके पर विशेष रूप से चंद्रमोहन पटेल, राकेश ठाकुर, नाबार्ड अधिकारी प्रेम प्रकाश, जेटू यादव एवं तापस चक्रवर्ती सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए.
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बेरी पार्फेट हेजलनट वाइट चॉकलेट सेबल रेसिपी बेरी पार्फेट हेजलनट वाइट चॉकलेट सेबल रेसिपीः यह एक बहुत ही स्वादिष्ट डिजर्ट है जिसे बेरी से तैयार किया जाता है। इसे हेजलनट क्रंबल के साथ सर्व किया जाता है जिसे वाइट चॉकलेट, कोको और मुरमुरे से बनाया जाता है। इस स्पेशल डिजर्ट को आप अपने स्पेशल वन के लिए इस बार वैलेंटाइन डे के मौके पर बना सकते हैं।
बेरी पाफेट बनाने के लिएः
हेजलनट स्ट्रेसेल के लिएः
हेजलनट वाइट चॉकलेट प्रेस्ड सेबल के लिएः
फ्लेक्सी बेरी के लिएः
बेरी पार्फेट बनाने के लिएः
1. थोड़े से पानी के साथ चीनी उबालें। अंडे के पीले भाग को फेंट और इसमें आराम से चीनी का सिरप डालें और मिक्स करें।
2. इसमें बेरी प्यूरी, क्रीम चीज और डबल क्रीम डालें। इसे मोल्डस में डालकर पूरी रात फ्रिज में रख दें।
हेजलनट स्ट्रेसेल बनाने के लिएः
1. सारी सामग्री को मिलाकर अच्छी तरह तब तक मिक्स करें जब तक कि या क्रंबल न हो जाए। इसे 12 मिनट के 165 डिग्री तापमान पर बेक करें। इसे ओवन से निकाल कर ठंडा होने दें।
हेजलनट वाइट चॉकलेट प्रेस्ड सेबल तैयार करने के लिएः1. सारी सामग्री को मिक्स करके अपने मनचाहे मोल्डस में डालकर किसी फ्लैट चीज से इसे अच्छे से दबाएं। इसे पूरी तरह तैयार होने के लिए फ्रिज में रख दें।
फ्लेक्सी बेरी तैयार करने के लिएः
1. एक पैन में बेरी प्यूरी को गर्म करें, इसमें 100 ग्राम चीनी और ग्लूकोज डाले। जब यह 60 प्रतिशत बचें तो इसमें बची हुई चीनी और पेक्टीन डालकर अच्छे से पकाएं।
2. इसे सिलपट पर फैलाएं और 140 पर 12 मिनट के लिए ओवन में रखें।
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बेरी पार्फेट हेजलनट वाइट चॉकलेट सेबल रेसिपी बेरी पार्फेट हेजलनट वाइट चॉकलेट सेबल रेसिपीः यह एक बहुत ही स्वादिष्ट डिजर्ट है जिसे बेरी से तैयार किया जाता है। इसे हेजलनट क्रंबल के साथ सर्व किया जाता है जिसे वाइट चॉकलेट, कोको और मुरमुरे से बनाया जाता है। इस स्पेशल डिजर्ट को आप अपने स्पेशल वन के लिए इस बार वैलेंटाइन डे के मौके पर बना सकते हैं। बेरी पाफेट बनाने के लिएः हेजलनट स्ट्रेसेल के लिएः हेजलनट वाइट चॉकलेट प्रेस्ड सेबल के लिएः फ्लेक्सी बेरी के लिएः बेरी पार्फेट बनाने के लिएः एक. थोड़े से पानी के साथ चीनी उबालें। अंडे के पीले भाग को फेंट और इसमें आराम से चीनी का सिरप डालें और मिक्स करें। दो. इसमें बेरी प्यूरी, क्रीम चीज और डबल क्रीम डालें। इसे मोल्डस में डालकर पूरी रात फ्रिज में रख दें। हेजलनट स्ट्रेसेल बनाने के लिएः एक. सारी सामग्री को मिलाकर अच्छी तरह तब तक मिक्स करें जब तक कि या क्रंबल न हो जाए। इसे बारह मिनट के एक सौ पैंसठ डिग्री तापमान पर बेक करें। इसे ओवन से निकाल कर ठंडा होने दें। हेजलनट वाइट चॉकलेट प्रेस्ड सेबल तैयार करने के लिएःएक. सारी सामग्री को मिक्स करके अपने मनचाहे मोल्डस में डालकर किसी फ्लैट चीज से इसे अच्छे से दबाएं। इसे पूरी तरह तैयार होने के लिए फ्रिज में रख दें। फ्लेक्सी बेरी तैयार करने के लिएः एक. एक पैन में बेरी प्यूरी को गर्म करें, इसमें एक सौ ग्राम चीनी और ग्लूकोज डाले। जब यह साठ प्रतिशत बचें तो इसमें बची हुई चीनी और पेक्टीन डालकर अच्छे से पकाएं। दो. इसे सिलपट पर फैलाएं और एक सौ चालीस पर बारह मिनट के लिए ओवन में रखें।
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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कारागार महानिरीक्षक को निर्देश दिया है कि वे सभी जेलों में आईसोलेशन चिकित्सा वार्ड या क्वारंटाइन क्षेत्र बनाना सुनिश्चित करें ताकि गंभीर अपराधों के आरोप में जेल में बंद कैदियों को इस आधार पर बार-बार अंतरिम जमानत पर छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
उच्च न्यायालय ने संक्रामक रोग हर्पीज से ग्रस्त एक कैदी को अंतरिम जमानत देते हुए कारागार महानिरीक्षक को उक्त निर्देश दिए। कैदी ने अपनी अर्जी में कहा था कि उसे हर्पीज रोग है और उसे फफोले हो गए हैं और दर्द है।
न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, इस बात पर विचार किया जाता है चूंकि हर्पीज संक्रामक रोग है और इस तथ्य के बावजूद कि आवेदक (आरोपी) को पहले भी अंतरिम जमानत दी गई है जिसका उसे कभी दुरुपयोग नहीं किया और उसकी सामान्य जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। संक्रमक बीमारी से ग्रस्त किसी व्यक्ति को क्वारंटाइन की व्यवस्था के बगैर जेल में रहने की अनुमति दी जा रही है, यह वास्तविकता एक चिंता का विषय है।
अदालत ने आगे कहा कि कारागार महानिरीक्षक (दिल्ली) को निर्देश दिया जाता है कि वह सुनिश्चित करें कि सभी जेलों में आईसोलेशन चिकित्सा वार्ड या क्वारंटाइन क्षेत्र बने ताकि गंभीर अपराधों के आरोप झेल रहे कैदियों को बार-बार अंतरिम जमानत पर छोड़ने को मजबूर न होना पड़े।
मादक पदार्थ निषेध संबंधी एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामले में मुकदमे का सामना कर रहे आरोपी ने याचिका में कहा है कि वह हर्पीज से ग्रस्त है और उसने साथ में मेडिकल रिपोर्ट भी दी है। अभियोजक ने अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी बार-बार अंतरिम जमानत आदेश का नाजायज फायदा उठा रहा है और उसकी समान्य जमानत अर्जी को उच्चतम न्यायालय ने भी खारिज कर दिया है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि जेल के मेडिकल अधिकारी की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि ठंडे मौसम में (मरीज कैदी की) हालत में सुधार होगा इसलिए 1 लाख रुपए के निजी मुचलके और 1 लाख रुपए के मुचलके पर जेल से रिहाई की तारीख से 2 महीने के लिए आवेदक को अंतरिम जमानत दी जाती है। अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह निचली अदालत के आदेश के बिना दिल्ली से बाहर न जाए और जमानत के दौरान सुनवाई प्रक्रिया में देरी न करे। (भाषा)
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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कारागार महानिरीक्षक को निर्देश दिया है कि वे सभी जेलों में आईसोलेशन चिकित्सा वार्ड या क्वारंटाइन क्षेत्र बनाना सुनिश्चित करें ताकि गंभीर अपराधों के आरोप में जेल में बंद कैदियों को इस आधार पर बार-बार अंतरिम जमानत पर छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उच्च न्यायालय ने संक्रामक रोग हर्पीज से ग्रस्त एक कैदी को अंतरिम जमानत देते हुए कारागार महानिरीक्षक को उक्त निर्देश दिए। कैदी ने अपनी अर्जी में कहा था कि उसे हर्पीज रोग है और उसे फफोले हो गए हैं और दर्द है। न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, इस बात पर विचार किया जाता है चूंकि हर्पीज संक्रामक रोग है और इस तथ्य के बावजूद कि आवेदक को पहले भी अंतरिम जमानत दी गई है जिसका उसे कभी दुरुपयोग नहीं किया और उसकी सामान्य जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। संक्रमक बीमारी से ग्रस्त किसी व्यक्ति को क्वारंटाइन की व्यवस्था के बगैर जेल में रहने की अनुमति दी जा रही है, यह वास्तविकता एक चिंता का विषय है। अदालत ने आगे कहा कि कारागार महानिरीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वह सुनिश्चित करें कि सभी जेलों में आईसोलेशन चिकित्सा वार्ड या क्वारंटाइन क्षेत्र बने ताकि गंभीर अपराधों के आरोप झेल रहे कैदियों को बार-बार अंतरिम जमानत पर छोड़ने को मजबूर न होना पड़े। मादक पदार्थ निषेध संबंधी एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामले में मुकदमे का सामना कर रहे आरोपी ने याचिका में कहा है कि वह हर्पीज से ग्रस्त है और उसने साथ में मेडिकल रिपोर्ट भी दी है। अभियोजक ने अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी बार-बार अंतरिम जमानत आदेश का नाजायज फायदा उठा रहा है और उसकी समान्य जमानत अर्जी को उच्चतम न्यायालय ने भी खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि जेल के मेडिकल अधिकारी की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि ठंडे मौसम में हालत में सुधार होगा इसलिए एक लाख रुपए के निजी मुचलके और एक लाख रुपए के मुचलके पर जेल से रिहाई की तारीख से दो महीने के लिए आवेदक को अंतरिम जमानत दी जाती है। अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह निचली अदालत के आदेश के बिना दिल्ली से बाहर न जाए और जमानत के दौरान सुनवाई प्रक्रिया में देरी न करे।
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IIFA Awards का 22वां संस्करण दो साल के अंतराल के बाद 20-21 मई, 2022 को अबू धाबी के यस द्वीप पर होगा। IIFA अवॉर्ड्स प्रतिवर्ष दिए जाते हैं, लेकिन covid19 महामारी के कारण 2020 से स्थगित कर दिए गए थे।
मुंबईः बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय अवॉर्ड शो आईफा (IIFA Awards 2022) एक धमाके के साथ वापसी कर रहा है। इस बार 22वें संस्करण का आयोजन यास आइलैंड, अबू धाबी में किया गया है। IIFA अवॉर्डकी घोषणा के बाद से ही लोगों के बीच एक अलग ही एक्साइटमेंट देखने को मिल रहा है। सितारों से सजे इस अवॉर्ड फंक्शन में बॉलीवुड चार्टबस्टर पर कई नामचीन चेहरे परफॉर्म करते हुए नजर आयेंगे, उनमें से एक नाम है खूबसूरत और टैलेंटेड दिव्या खोसला कुमार का। यह पहली बार होगा जब दिव्या आईफा के मंच पर अपने मूव्ज, मिलियन डॉलर स्माइल और टेलेंट से हम सभी को आश्चर्यचकित करती नजर आएंगी और उनके प्रशंसक निश्चित रूप से इस परफॉर्मेंस का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
अवॉर्डशो की भव्यता निश्चित रूप से उत्कृष्ट है और मंच पर बहुमुखी, वर्सेटाइल और खूबसूरत दिव्या खोसला कुमार का प्रदर्शन निश्चित रूप से बहुत ही दमदार होने वाला है। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि दिव्या को हमेशा से ही डांस करने का शौक रहा है और उन्होंने इसमें प्रोफेशनली ट्रेनिंग भी ली है। वह अपनी फिट और शानदार फिजिक को बनाए रखने के लिए डांस को एक एक्सरसाइज के रूप में भी इस्तेमाल करती हैं!
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IIFA Awards का बाईसवां संस्करण दो साल के अंतराल के बाद बीस-इक्कीस मई, दो हज़ार बाईस को अबू धाबी के यस द्वीप पर होगा। IIFA अवॉर्ड्स प्रतिवर्ष दिए जाते हैं, लेकिन covidउन्नीस महामारी के कारण दो हज़ार बीस से स्थगित कर दिए गए थे। मुंबईः बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय अवॉर्ड शो आईफा एक धमाके के साथ वापसी कर रहा है। इस बार बाईसवें संस्करण का आयोजन यास आइलैंड, अबू धाबी में किया गया है। IIFA अवॉर्डकी घोषणा के बाद से ही लोगों के बीच एक अलग ही एक्साइटमेंट देखने को मिल रहा है। सितारों से सजे इस अवॉर्ड फंक्शन में बॉलीवुड चार्टबस्टर पर कई नामचीन चेहरे परफॉर्म करते हुए नजर आयेंगे, उनमें से एक नाम है खूबसूरत और टैलेंटेड दिव्या खोसला कुमार का। यह पहली बार होगा जब दिव्या आईफा के मंच पर अपने मूव्ज, मिलियन डॉलर स्माइल और टेलेंट से हम सभी को आश्चर्यचकित करती नजर आएंगी और उनके प्रशंसक निश्चित रूप से इस परफॉर्मेंस का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। अवॉर्डशो की भव्यता निश्चित रूप से उत्कृष्ट है और मंच पर बहुमुखी, वर्सेटाइल और खूबसूरत दिव्या खोसला कुमार का प्रदर्शन निश्चित रूप से बहुत ही दमदार होने वाला है। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि दिव्या को हमेशा से ही डांस करने का शौक रहा है और उन्होंने इसमें प्रोफेशनली ट्रेनिंग भी ली है। वह अपनी फिट और शानदार फिजिक को बनाए रखने के लिए डांस को एक एक्सरसाइज के रूप में भी इस्तेमाल करती हैं!
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त्रिलोकी राय के दरवाज़े पर पहुँचकर उन लोगों ने ख़बर दी, तो वे खद्दर की जाँघिया और गन्जी पहने, दाहिने हाथ की तर्जनी से जनेऊ से बँधे चाभियों के गुच्छे को नचाते हुए बाहर आये। सभापति और मन्ने के राम-राम और आदाबअर्ज़ को अनसुना कर, उन्हें बैठने को भी कहे बिना वे खड़े-खड़े ही बोले-आप लोग मेरे यहाँ क्या करने आये?
-ऐसा आप काहे कहते हैं, बाबू साहब,-सभापति बोले-कोई बात पड़ेगी, तो आपके यहाँ हम नहीं आएँगे तो कहाँ जाएँगे?
आप लोग कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटरी के यहाँ जाइए, हमसे आप लोगों का क्या मतलब?-भौंहें कुंचित करके त्रिलोकी राय बोले-हमें सब मालूम है! राधे बाबू चले गये, तो क्या आप लोग समझते हैं कि उस गाँव के कांग्रेसी अनाथ हो गये हैं?
-आपको शायद मालूम नहीं,-मन्ने बोला-वे लोग क़स्बे से जनसंघ के स्वयंसेवकों को रोज़ बुला रहे हैं।
-इसमें हम कोई हर्ज नहीं समझते,-आप लोग ज्यादती करेंगे, तो वे अपनी रक्षा के लिए जिसे भी ज़रूरी समझेंगे बुलाएँगे ही। इसमें हम क्या कर सकते हैं?
-तुम हमको बहलाने की कोशिश मत करो!-बिगडक़र त्रिलोकी राय बोले-हमें सब मालूम है, स्कूल , पंचायत के चुनाव और सती मैया के चौरे, सब मामलों को वहाँ वर्ग-संघर्ष का विषय बनाया गया है और वहाँ के महाजनों के खिलाफ़ जनता को भडक़ाया गया है। हम इस पंचायत की कोई मदद नहीं कर सकते!
-अगर आप हमारे फैसले को ग़लत समझते हैं, तो हम आप ही पर छोड़ते हैं, आप ख़ुद फैसला देकर समझौता करा दें।
-हमारी बात ये लोग नहीं मानेंगे!
-क्यों नहीं मानेंगे, आप चलिए तो!
-क्या फ़ायदा जाने से? हम तो यही फैसला देंगे कि चबूतरा बन ही गया है, तो उसे रहने दिया जाय। पूछिए, ये लोग मानेंगे?
-देखिए! राजनीति और पार्टी में ईमान-विमान कोई चीज़ नही होता। हम अपनी पार्टी के खिलाफ़ फैसला नहीं दे सकते! फिर धर्म का भी यहाँ सवाल है! हमारी वजह से सती थान की एक ईंट भी खरके, यह कैसे हो सकता है?
-चलिए, सभापतिजी!-मन्ने बोला।
-चलिए, सभापतिजी!-मन्ने ने उनका हाथ पकडक़र कहा।
ग्राम-सभापति ने सिर झुकाकर अपना पाँव बढ़ाया।
काफ़ी देर तक कोई भी कुछ न बोला। सभापति का सिर वैसे ही झुका हुआ था। मन्ने मन-ही-मन गुस्से से फुँक रहा था।
क़स्बे के बाहर आये, तो सभापति ने सिर उठाकर कहा-आप लोग ठीक ही कहते थे। हम इन लोगों के यहाँ बेकार आये!
मन्ने कुछ भी कहने की स्थिति में न था। उसे लगता था कि उसने मुँह खोला नहीं कि पट से कोई गाली निकल जायगी।
-ये लोग तो सच ही हमारी पंचायत तोड़ देना चाहते हैं,-सभापति ही फिर बोले-इसीलिए न कि उनके आदमी सभापति नहीं चुने गये और मेम्बरों में उनके आदमी कम हैं, जैसा वे चाहें नहीं कर सकते?
मन्ने ने अपने को बहुत ज़ब्त करके कहा-मुनेसर भाई, कोई कोइरी सभापति हो, इसे वे कैसे बरदाश्त कर सकते हैं?
-अगर मैं कांग्रेसी होता?
-तो भी क्या कैलास के मुक़ाबिले सभापति के लिए वे लोग आपको खड़ा करते?
-मन्ने बाबू, अब हम लोग भी कुछ-कुछ राजनीति समझने लगे है। लेकिन हमारी राजनीति और इनकी राजनीति में कितना फरक है!-सभापति बोले-सच कहते हैं, मन्ने बाबू, जब से हम सभापति बने हैं, हमारे मन में यह डर बराबर समाया रहता है कि कहीं हमसे कोई अनियाव न हो जाय, कहीं हम कोई बेईमानी न कर बैठें। यहाँ देखिए, सती मैया के चौरे के बारे में जो इन्साफ हमने किया है, उसमें आप ही लोगों को हमने दबाया है न? ...मन्ने बाबू, अपने लोगों को ही तो दबाया जा सकता है, जो लोग हमें अपना दुश्मन समझते हैं, उन्हें दबाएँ तो हमारी बदनामी ही होगी न? आप सच-सच बताइए, हमने कोई गलत बात कही है?
-नहीं,-मन्ने का गुस्सा जाने कहाँ उड़ गया। उसका मन जैसे सभापति की बातें सुनकर भरा आ रहा था, श्रद्धा से उस गँवार के प्रति झुककर उसने कहा-आपके ख़याल बहुत ऊँचे हैं, सभापतिजी, पहाड़ की चोटी की तरह, जिसे क़ुदरत ने ही ऊँचा बनाया है!
-और वो धरम की बात कर रहे थे,-सभापति अपने में खोये हुए-से बोले-धरम का मतलब का यह होता है कि गैर धरमवाले का आप गला काट दीजिए? गाँव के सभापति होने की हैसयित से का सभी के साथ, वह किसी भी धरमवाला हो, हमारा बेवहार एक समान नहीं होना चाहिए? जब तक हम सभापति नहीं थे, दूसरी बात थी, लेकिन अब जान-बूझकर किसी के साथ हम गैरइन्साफी कैसे कर सकते हैं? हम जानते हैं कि हममें अकल नहीं है, लेकिन पंचायत में दस आदमी और भी तो हैं। ...पंचायत से वे लोग उठकर चले गये, हमको तो वो भी बहुत बुरा लगा, मन्ने बाबू! दस आदमी की बात कोई न माने, भला उसे का कहा जाय? उन लोगों को किसी भी तरह का हम नहीं मना सकते, मन्ने बाबू?
मन्ने क्या जवाब दे, सहसा उसकी समझ में न आया जिस स्तर पर सभापति सोच रहे थे, उसी स्तर पर उसने भी कितनी ही बार सोचा था, बल्कि उसने तो हर कोशिश भी की थी कि गाँव की यह फ़िरक़ापरस्ती खत्म हो और सब मिल-जुलकर गाँव की भलाई के लिए कुछ करें, लेकिन वह कहाँ सफ़ल हुआ था? सभापति के सामने सती मैया के चौरे का सवाल उस रूप में न था , जिस रूप में मन्ने के सामने था। उसके जी में आया कि वह उन्हें उस सवाल की पूरी अहमियत समझाये, लेकिन फिर उसे लगा कि शायद वे न समझ सकें, कम-से-कम इस समय जिस मनः स्थिति में वे बात कर रहे थे, उसमें तो उनका समझना कठिन ही था। इस समय वे साधारण मनुष्य न रह गये थे, साधारण मनुष्य की तरह अपने हानि-लाभ का प्रश्न उनके सामने न था। इस समय तो वे सभापति के आसन पर विराजमान थे और हृदय से चाहते थे कि गाँव के सभी लोगों में मेल हो जाय, गाँव के सभी लोग प्रेम से रहें, जैसे एक पिता चाहता है कि उसके सब लडक़े मिल-जुलकर रहें। यह एक भोले, सच्चे हृदय की चाह थी। मन्ने जानता था कि यह इच्छा चाहे कितनी ही पवित्र, कितनी ही सच्ची, कितनी ही हार्दिक क्यों न हो, इस तरह पूरी होनेवाली नहीं। जब गाँधीजी की पूरी न हुई, तो इनकी क्या होगी? फिर भी सभापति के प्रश्न के उत्तर में वह ना न कह सका। अचानक ही उसके ख़याल में दो बातें आयीं, एक तो यह कि शायद वह मुसलमान था, इसलिए इस दिशा में उसकी कोशिशें कामयाब न हुई हों; सभापति हिन्दू हैं, शायद ये अपनी इस कोशिश में कामयाब हो जायँ। दूसरी यह कि अगर वे कामयाब न हुए, तो उसके परिणामस्वरूप वे अपने 'देवत्व' के आसन से आप ही नीचे उतर आएँगे और चुनाव के पहले की मनः स्थिति में आ जाएँगे, और इस बात को और अच्छी तरह समझ जाएँगे कि वही सभापति क्यों और कैसे चुने गये और उन्हें किन लोगों ने चुना? और कौन जाने कहीं कामयाब हो ही गये, तो क्या कहने! आख़िर ऐसे गाँवों में वर्ग-भेद असलियत में है ही क्या?
मन्ने बोला-मनाकर देखिए न! अगर वे लोग मान जाते हैं, तो इससे अच्छा क्या होगा! हमारी तरफ़ से आपको पूरी छूट है, आप जैसा भी मुनासिब समझकर करेंगे, हम मान लेंगे, इसका मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ! लेकिन एक वादा आपको भी करना होगा?
-कहिए, हम करने के लिए तैयार हैं।
-अगर वे लोग न मानें, तो पंचायत के निर्णय के अनुसार चाहे जैसे भी हो सती मैया का चबूतरा चार हाथ तोड़ दिया जायगा!
-वैसा ही होगा, आपसे वादा करते हैं!
-तो फिर आज रात तक आप उन लोगों से बातें कर लीजिए।
-आप हमारे साथ उनके यहाँ नहीं चलेंगे?
-नहीं, मुझे अपने साथ आप न ले जायँ। कोई ज़रूरत पड़े, तो बुला लें, आ जाऊँगा।
मन्ने ने जब ये बातें मुन्नी को बतायीं, तो वह बोला-देखा तुमने यह फ़र्क़? एक सभापति मेरे भाई साहब थे और एक यह कोइरी है! सभापति बनते ही वे अपने को गाँव का हाकिम समझने लगे थे, और ठीक अंग्रेजों के जमाने के गाँव के मुखियों की तरह उन्होंने गाँववालों के साथ व्यवहार किया था। और आज यह कोइरी है कि सभापति बनते ही गाँव का सारा दुःख-दर्द अपने सिर पर ओढऩे को उद्यत है। उसकी सोयी हुई सारी नैतिकता, कत्र्तव्य-परायणता और भाईचारगी जग उठी है और वह चाहता है कि जैसे भी हो गाँव के लोगों का आपसी मनमुटाव दूर हो, उनमें एका स्थापित हो, सद््भावना उत्पन्न हो ताकि सब लोग मिलकर गाँव की भलाई के लिए कुछ काम कर सकें। यह कोई साधारण बात नहीं है, यह गाँव के भविष्य का एक संकेत है। काश, धरती के इन पुत्रों पर से सामन्ती और महाजनी राक्षस का काला साया हट जाता, तो तुम देखते, ये कितनी जल्दी आगे बढ़ जाते हैं, उन्नति कर जाते हैं और गाँवो को ख़ुशहाल बना देते हैं!
-यह बात अब बहुत दिनों तक नहीं चलेगी,-मुन्नी बोला-अब गाँव की जनता जाग रही है, किसान जाग रहे हैं, उन पर जो बड़े लोगों का प्रभाव था, तेज़ी से नष्ट हो रहा है, वे अब अपनी शक्ति पहचानने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगे हैं। अबकी अकेले हमारे गाँव में ही कोइरी सभापति नहीं चुना गया है, बल्कि कई गाँवों में ऐसा हुआ है। भूतपूर्व ज़मींदार और महाजन इन चुनावों से बौखलाये हुए हैं। वे नहीं चाहते कि गाँव का नेतृत्व उनके हाथों से छीन लिया जाय। वे इन चुनावों को रद्द कराने के लिए हथकण्डे से काम ले रहे हैं किन्तु गाँव की जनता का एका बना रहा, लोगों की चेतना विकसित होती रही, और गाँव की भलाई के काम होते रहे, तो अन्तिम विजय इन्हीं की होगी। सरकार के लिए भी किशोर-काण्ड को दुहराना अब कठिन है पूरे देश के पैमाने पर जनवादी ताक़तें अब बहुत बढ़ गयी हैं।
-सो तो है,-मन्ने ने कहा-लेकिन इस संघर्ष में विजय प्राप्त करना कोई सरल काम नहीं है। गाँवों के प्रायः सभी भूतपूर्व ज़मींदार और महाजन कांग्रेस मे शामिल हो गये हैं। सरकार गाँवों के लिए जो भी अनुदान या सहायता देती है, उसे यही हड़प लेते हैं और उसका उपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं। इस काम में अफ़सर उनका साथ देते हैं। तुम्हें शायद मालूम नहीं कि हमारे गाँव को ही कितने कुओं , खाद के कम्पोस्टों , बीजों, खादों, नयी तरह के हलों, मुर्गे-मुर्गियों और साँड़ों की सहायता मिली किन्तु इनसे आम किसानों का कोई भी लाभ न हुआ। सब महाजन और फ़ारम के लोग हड़प गये।
-यह मसला ख़त्म होगा, तो दूसरा मसला शुरू हो जायगा। मसलों में फँसे रहना ही तो एक काम नहीं हैं। असल काम तो कोई-न-कोई चलता ही रहना चाहिए। काम से ही लोगों का उत्साह बढ़ता है, उनकी दिलचस्पी बनी रहती है रात्रि-पाठशाला की स्थापना ज़रूर हो जानी चाहिए।
-सभापतिजी आज समझौता कराने में कामयाब हो गये, तो कल ही ये काम शुरू हो सकते हैं। वर्ना देखो वे क्या करते हैं। हमने तो उन्हीं पर सब छोड़ दिया है। समझौता हो जाता तो बहुत अच्छा होता।
-तो चलो, उन्हीं की ओर चला जाय, शायद वे उन लोगों से बातचीत करके आ गये हों।
-थोड़ी देर रुको, शायद वे यहीं आ जायँ।
-नहीं, हमीं को उनके पास चलना चाहिए।
शाम झुक आयी थी। बैठक में अन्धकार का साया आ चुका था। मन्ने और मुन्नी साथ रहते हैं, तो यह वक़्त उनका तालाब के किनारे गुज़रता है। लेकिन इस बार वे एक शाम भी तालाब पर न जा सके। मसला ही ऐसा आ पड़ा था कि फ़ुरसत न मिलती थी फिर भी शाम होते ही उन्हें ऐसा लगता कि तालाब उन्हें पुकार रहा है।
मन्ने बोला-चलो, हम तालाब की ओर चलें। खण्ड से भिखरिया को सभापतिजी के पास समचार लाने को भेज देंगे। मेरा खयाल है कि अगर वे बातचीत कर चुके होते तो सीधे मेरे पास आते।
वे उठने ही वाले थे कि बद्दे ने नीचे से पुकारकर कहा-भैया! भाभी पूछती हैं, चाय भेजें?
-बोलो, क्या कहते हो? मन्ने ने पूछा-वो शिकायत कर रही थीं कि हमारे यहाँ अबकी तुमने एक बार भी न खाना खाया, न चाय पी? वो तुमसे मिलने के लिए भी बेक़रार हैं।
मुन्नी को कुछ मोह-सा हो आया। फिर भी बोला-तुम्हारा क्या इरादा है?
-मेरा क्या?-मन्ने बोला-तुम तो जानते हो, मुझे चाय माफ़िक नहीं पड़ती । यह तो तुम्हारे लिए उन्होंने पुछवाया है।
-उन्हें कैसे मालूम कि मैं यहाँ बैठा हूँ?
-जिसको दिलचस्पी होती है, वह सब मालूम कर लेता है!-हँसकर मन्ने बोला-पहले मालूम कर लिया होगा, फिर ख़बर भेजी है। बोलो!
-नीचे से आवाज़ आयी-क्या कहते हैं, मैं खड़ा हूँ?
-लाओ,-मन्ने ने कह दिया-लालटेन भी लेते आना।
-यार, आज भी तालाब न जा सके!
-आज चाँदनी रात है, चाहो तो रात को चलें। उन्हें भी रात को घूमने का बड़ा शौक़ है। मुझे तो फ़ुरसत ही नहीं मिलती।
-क्या हाल-चाल हैं उनके?
-ठीक हैं। जब मैं मुसीबत और परेशानी में रहता हूँ, तो वो मुझसे सिर्फ़ मुहब्बत करती है! इतनी ख़िदमत करती है कि क्या बताऊँ?
-तब तो तुम्हारी मुसीबत का भी एक रौशन पहलू है!-हँसकर मुन्नी बोला-और उसके क्या हाल-चाल हैं?
-उसी अजन्ता के?
मन्ने ज़रा शर्मा गया। बोला-उसका भी ठीक ही है। अपने बेटे को गोद में लेकर जब वह चलती है, तो उसे देखो!
-मैंने तो बहुत दिनों से उसे नहीं देखा। किस पर पड़ा है उसका बेटा?
मन्ने ने मुस्कराकर कहा-उसी पर।
-तभी, बेटा, तुम साफ़ बच निकले!-मुन्नी हँसकर बोला-वर्ना उसकी माई तुम्हें छोड़ने वाली न थी! अब उसके साथ तुम्हारे सम्बन्ध कैसे हैं?
-कुछ नहीं,-मन्ने बोला-अब वो बातें नहीं रहीं। ...हाँ, जब कभी बच्चे को गोद में लिये उसे जाते देखता हूँ, तो जी में आता है कि उसकी गोद से बच्चे को मैं ले लूँ और उसके गाल चूम लूँ!
-वह कुछ नहीं कहती?
-कभी अकेले में मिल जाती है, तो मेरी ओर इशारा करके अपने बच्चे से कहती है, अब्बा! उस वक़्त उसके चेहरे की चमक देखते ही बनती है!
-ससुराल नहीं गयी?
-नहीं, उसका ससुर कई बार आया, लेकिन वह नहीं गयी। यहीं बनिहारी करके कमाती-खाती है। मैं भी कुछ मदद कर देता हूँ।
-और, यार!-मुन्नी को सहसा ही कैलसिया की याद हो आयी-कैलसिया की कोई ख़बर नहीं मिली?
-यह किसका ज़िक्र छिड़ा है?
दोनों ने अचानक महशर की आवाज़ सुनकर दरवाज़े की ओर देखा। मुन्नी के मुँह से अनायास ही निकल गया-अरे!
-नमस्ते!-कहती हुई महशर अन्दर चली आयी और एक ओर आड़ में फ़र्श पर बैठ गयी।
मुन्नी को आश्चर्य हो रहा था, सरे शाम ही महशर कैसे घर में से निकलकर बैठक में आ गयी? ...यही महशर पहली बार रात को जब उससे मिलने पोखरे पर आयी थी, तो कैसा कुहराम मचा था! बोला-तुम्हारी हिम्मत तो क़ाबिले-दाद है!
महशर कुछ कहने ही वाली थी कि बद्दे एक हाथ में चाय और नाश्ते की ट्रे और दूसरे हाथ में लालटेन लटकाये आ पहुँचा। वह रखकर चला गया, तो महशर बोली-अब दुनिया बदल गयी है। तुम्हारे साथ मुझे दिन में भी देखकर शायद ही कोई अँगुली उठाये!
-यह क्या गाँव के इन्क्लाब का असर है?-हँसकर मुन्नी बोला।
-यह तो तुम इनसे पूछो!-महशर ने ताना दिया-इन्क्लाब का भूत तो इनके सिर पर सवार है! अपनी हालत नहीं देखते! यह किसी शरीफ़ इन्सान की सूरत है!
मँुह झुकाये मन्ने की ओर देखते हुए मुन्नी बोला-क्यों इनकी सूरत को क्या हुआ?
-चाय ठण्डी हो रही है!-बीच में ही टुप से मन्ने बोल पड़ा।
ट्रे की ओर हाथ बढ़ाती हुई महशर बोली-इन्हें भी शहर में क्यों नहीं बुला लेते? जो बची-खुची ज़िन्दगी है, वह तो ज़रा आराम से कटे!
-अब तो ये भी गाँव में ही आने की सोच रहे है!-मन्ने बोला।
-क्यों?-ताज्जुब से मुन्नी की ओर देखती हुई महशर बोली-तुम्हें यह क्या सूझ रही है, भाई? अच्छे-ख़ासे आराम की नौकरी छोडक़र यहाँ क्या झख मारने आओगे? है न एक ये, ज़िन्दगी ही बरबाद करके रख दी! तुम्हें यही राय दे रहे हैं क्या?
-नहीं-नहीं, महशर!-मुन्नी बोला-ये बिलकुल झूठ बोल रहे है! इन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा, मेरी नौकरी ही छूट रही है।
-क्यों?-चकित होकर महशर बोली।
-मालिक की मर्ज़ी, और क्यों?
-वो तो सामने ही आयगा!-मुन्नी बोला-ख़ैर, छोड़ो यह-सब, कुछ अपनी सुनाओ!
-चुप भी रहो! लो, क्या खाओगे?
-खाओ, यार, कुछ!-मुन्नी ने ज़ोर दिया।
-फिर कह-सुन लीजिएगा, चाय पानी हो रही है!
तभी नीचे से जुब्ली की पुकार सुनाई दी-मन्ने हो? सभापतिजी आये हैं।
-आया!-हड़बड़ाकर मन्ने जोर से बोला-नीचे ही आ रहा हूँ!-फिर मुन्नी से बोला-तुम आराम से चाय पिओ।
-नहीं!-मन्ने बोला-मैं उधर सहन में जा रहा हूँ। चाय पीकर आ जाना।
-हाँ, जी आप रुकिए!-महशर बोली-अभी तो हमारी कोई बात ही नहीं हुई! कितने दिनों के बाद तो मिले हैं!
नीचे हाथ में लालटेन लटकाये जुब्ली के साथ सभापतिजी खड़े थे। उनका हाथ पकडक़र दूसरी ओर सहन में ले जाते हुए मन्ने बोला-कहिए, क्या हुआ?
सहन में कई चारपाइयाँ बिछी थीं। एक पर तीनों बैठ गये।
थोड़ी देर तक सभापति न बोले, तो मन्ने का दिल धडक़ उठा। वही फिर बोला-आप कुछ कहते क्यों नहीं?
सभापति ने अपना झुका हुआ सिर हिलाया और सूखे गले से कहा-उन लोगों से मिलने न गये होते तो अच्छा होता।
मन्ने का मन भारी हो उठा। अभी तक सभापति का हाथ उसके हाथ में था, उसकी समझ में न आ रहा था कि वह उस हाथ को छोड़ दे या थामे रहे?
थोड़ी देर तक ख़ामोशी छायी रही, तो ऊबकर जुब्ली बोला-क्या बात है? कुछ मुझे तो बताइए।
फिर भी सभापति कुछ न बोले, तो मन्ने ने सभापति का हाथ दबाकर कहा-किसी को भेजकर दूकान से बीड़ी तो मँगवाइए।
संकेत समझकर जुब्ली वहाँ से उठ गया, तो मन्ने ने सभापति का हाथ दबाकर कहा-क्या कहा उन लोगों ने?
-छोड़िए उन लोगों की बात,-गिरे स्वर में सभापति ने कहा-उन लोगों की मति मारी गयी है। अब आगे हम का करें, इस पर विचार करना चाहिए।
मन्ने बस इतना ही कह सका-हूँ।
थोड़ी देर के लिए फिर खामोशी छा गयी।
तभी गली से सिर पर अंगौछा ओढ़े, सत्तराम निकलकर उनके पास आ खड़ा हुआ और सिर से अंगौछा गर्दन के पीछे हटाकर बोला-राम-राम।
-राम-राम,-मन्ने बोला-बैठो, सत्तराम।
-बैठेंगे नहीं, वो आ गये हैं!-दाहिनी आँख मारकर सत्तराम बोला।
-कौन?-सभापति बोले।
-अवधेश बाबू,-मन्ने ने बताया।
-अच्छा, तो ज़रा उधर ही जा रहे हैं,-सत्तराम बोला-आप यहीं रहेंगे न?
-हाँ-हाँ,-मन्ने बोला-इधर से ही लौटना ।
वह चला गया, तो सभापति ने कहा-कहाँ बसना और कहाँ डसना, इसी को कहते है! सब इसी अवधेसवा का बोया हुआ है!
-मालूम है,-मन्ने ने कहा-वे लोग अवधेश के बारे में भी कुछ कहते थे?
-कहते थे, अवधेस बाबू कह गये हैं कि इस पंचायत को तोड़ा नहीं, तो गाँव को कभी मुँह नहीं दिखाऊँगा! महाजन होकर कोइरी-कोइलासी की हूकूमत सहने से डूब मरना अच्छा है! और कुछ सुनेंगे?-कहते-कहते क्षोभ से सभापति का स्वर काँप गया।
मन्ने का दिमाग़ भन्ना उठा, लेकिन वह कुछ बोला नहीं।
जुब्ली ने बीड़ी-दियासलाई लाकर मन्ने की हथेली पर रख दी, तो मन्ने ने अपनी हथेली सभापति की ओर बढ़ा दी।
-लीजिए, आप बीड़ी पीजिए!-मन्ने ने कड़ा होकर कहा-सीधी अँगुली घी नहीं निकलता! जितना ही हम लोग सिहुर-सिहुर करेंगे, उतना ही उन लोगों का दिमाग़ आसमान पर चढ़ेगा। आप बेकार ही उन लोगों के पास गये।
-आदमी का भरम टूटते-टूटते टूटता है, मन्ने बाबू...हम लोग अपढ़-गँवार, छोटे, नीच कौम के आदमी हैं। हमारी सीधी चाल में भी लोगों को ऐंठ निकालते देर नहीं लगती। लेकिन अब तो कोई नही कहेगा न कि हमने समझौते की कोसिस नहीं की? अब हमें आगे का रास्ता निकालना चाहिए।
-तो और लोगों को भी बुला लिया जाय,-मन्ने ने कहा-सब लोग जैसा कहें।
-हाँ, मुन्नी बाबू को भी जरूर बुलवा लीजिए।
-यहीं कि आपके दरवाजे?
-सब ठीक रहेगा!-सभापति बोले-आप जब हमारे लिए सिर देने को तैयार रहते हैं तो हमीं आप से मँुह काहे को छुपाएँ? आप यहीं सबको बुलाइए, अभी!
-अच्छा, आप बीड़ी तो पीजिए।
सभापति ने एक बीड़ी उठाकर उसका आधा हिस्सा अपने मुँह में डालकर दियासलाई जलायी।
मन्ने ने जुब्ली से कहा-आप किसी को भेजकर...किनको-किनको बुलाया जाय, सभापतिजी?
जोर के एक टान लेकर सभापति बोले-पाँच-सात ख़ास-ख़ास लोगों को बुलवा लीजिए।
सुबह सूरज उगते ही स्कूल पर लोग जमा होने लगे। चमरौटिए, भटोलिए, अहिराने, कोइरियाने आदि टोले-मोहल्ले के लोग दल बाँध-बाँधकर आ जुटे। नहीं आये तो महाजन लोग और उनके कुछ खद््दुक।
-हमारी पंचायत को कोई नही तोड़ सकता!-सभा में से कई आवाज़ें एक साथ उठीं।
-ठीक है,-सभापति ने कहा-यह आप लोगों की पंचायत है, इसे आप लोग बनाये रखना चाहते हैं, तो इसे कोई नहीं तोड़ सकता! लेकिन इसे बनाये रखने के लिए यह जरूरी है कि जो लोग इसे तोडऩा चाहते हैं, उनका हम मुकाबिला करें। इस समय हमारे सामने एक ही सवाल है, वह यह कि पंचायत का फैसला लागू कराया जाय। जो फैसला पंचायत ने दिया है, वह आप लोगों को मालूम है। अगर आप लोग उसे लागू कराने में हमारी मदद करें, और अगर आप लोग समझते हैं कि पंचायत का फैसला ठीक नहीं है, तो आप लोग खुद जैसा मुनासिब समझें, फैसला दें और उसे लागू करवाएँ।-इतना कहकर सभापति बैठ गये।
थोड़ी देर तक लोग आपस में बातचीत करते रहे। उसके बाद जीधन उठकर बोला-भाइयों! सभापतिजी ने जो बातें कही हैं, आप लोगों ने सुनीं। आप लोगों के सामने पंचायत जिम्मेदार है, आप लोग जो कहेंगे, पंचायत वही करेगी। ...हमारे देखने में पंचायत का फैसला बिलकुल मुनासिब है। दूसरा फरीक इसे जो नहीं मानता, वह इसलिए नहीं कि यह फैसला गैरमुनासिब है, बल्कि इसलिए कि वह तो पंचायत को ही नहीं मानना चाहता। वह इस फैसले को घूरे पर फेंककर पंचायत को ही नकार देना चाहता है। इस नजर से आप लोग देखें, तो यह समझना कठिन न होगा कि इस फैसले पर ही पंचायत का रहना और न रहना मुनहसर करता है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपकी पंचायत न टूटे, तो जैसे भी हो आप लोग पंचायत का फैसला लागू कराइए!
एक आदमी उठकर बोला-आखिर वो लोग कहते का हैं? किसी ने उन लोगों से इसके बारे में कोई बातचीत की है?
-अब कुछ बताने की जरूरत नहीं!-कई आवाज़ें गूँज उठीं-वे लोग पंचायत को ही तोडऩा चाहते हैं, इसमें कोई सन्देह नहीं!
-भाइयों!-सभापति बोले-हमने किस पर कौन-सी हूकूमत चलायी है, आप लोग ही बताइए!
-उन्हें आप बकने दीजिए, सभापतिजी!-रमेसर बोला-जब तक जिमिदार रहें, उन्होंने हूकूमत की, जब कांग्रेस का राज आया, तो इन महाजनों ने हम पर हूकूमत की और अब समझते हैं कि हूकूमत उनकी बपौती है! लेकिन अब वह जमाना लद गया!
-फिर भाइयों,-सभापति बोले-यहाँ हुकूमत का सवाल ही कहाँ उठता है, यहाँ तो गाँव की भलाई के लिए काम करना है। गाँव के झगड़े खतम हों, सबमें मेल-जोल बढ़े, सब मिलकर गाँव की तरक्क़ी के लिए काम करें, हम तो यही चाहते हैं न?
-लेकिन वे लोग तो सोचते हैं कि उनकी हुकूतम छिनी जा रही है!
-भाइयों! सौ बात की एक बात यह है कि आप लोग इस बात पर विचार कीजिए कि पंचायत ने जो फैसला दिया है, उसे लागू कैसे कराया जाय?
-हाँ-हाँ! असल बात तो यही है, इसी पर विचार होना चाहिए!-कई लोग बोल पड़े।
-आप ही लोग कोई रास्ता सुझाइए,-सभापति ने कहा।
-इसमें किसी सोच-विचार की का ज़रूरत है? सब लोग उठकर यहाँ से चलें और अपने हाथ से चबूतरा चार हाथ पीछे हटा दें। आखिर वह पंचायत की जमीन है, किसी दूसरे की तो है नहीं।
-तो फिर उठा ही जाय।
-चलिए! चलिए! सब लोग चलिए!
और लोग धोती झाड़-झाडक़र उठ खड़े हुए।
आगे-आगे सभापति और पंचायत के मेम्बर और उनके पीछे जनता की भीड़। एक जलूस ही सती मैया के चौरे की ओर चल पड़ा।
रास्ते में रमेसर ने नारा दिया-सती मैया की जय!
और भीड़ में जैसे जान आ गयी। चारों दिशाएँ सती मैया की जयजयकार से गूँजने लगीं।
मन्ने और मुन्नी ने आँखें मिलायीं। दोनों की आँखों में एक ही भाव था, यह नारा किस दिमाग़ की उपज है, जो कानों में पड़ते ही सबके ख़ून में उबलने लगा है। जिन लोगों ने चबूतरा बनाया है, उन्हें विश्वास है कि उस चबूतरे पर कोई हिन्दू हाथ नहीं लगाएगा। उन्होंने हिन्दूओं को सती मैया के नाम पर भडक़ाने की हर कोशिश की है। और यह जनता की भीड़, जिसमें हिन्दू-ही-हिन्दू हैं, सती मैया की जयजयकार करते हुए उनका चबूतरा तोड़ने जा रही है! कोई विश्वास करेगा इस बात पर? मन्ने तो दंग था। यह अपढ़, गँवार, ग़रीब जनता है, जिसे धर्म-भीरु कहा जाता है, रूढिय़ों से चिपके रहने का जिस पर आरोप लगाया जाता है, जिसके विषय में बड़े-बड़े नेताओं को यह कहते सुना जाता है कि हमारे देश की जनता बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, हर नयी चीज़ को सन्देह की दृष्टि से देखती है, हर नयी बात से कतराती है, वह अपनी ओर से कोई नया क़दम नहीं उठा सकती और कोई नया काम उसके लिए किया जाय, तो उसमें वह कोई दिलचस्पी नहीं लेती। मुन्नी की आँखों में विस्मय से अधिक कुछ और भी था। उसका हृदय हर्षातिरेक से धडक़ रहा था।
फिर एक और नया नारा गूँज उठा-सत्त की जय!
सती मैया की जय से ऊपर उठकर भीड़ सत्त की, सत्य की जय-जयकार करने लगी, जैसे सती मैया के माध्यम से ही उसने सत्य को पा लिया हो।
भीड़ चबूतरे के पास आ खड़ी हुई। चारों दिशाओं में जयजयकार गूँजती रही।
सभापति ने चार हाथ नापकर चबूतरे पर निशान लगा दिया और लोग उतनी दूर की ईटें उठाने के लिए लपक पड़े। किसी के हिस्से एक ईट पड़ी और किसी के दो और कितने ही हाथ मलते रह गये कि इस पुण्य कार्य में भाग लेने से वंचित रह गये।
ईंटें रहमान को दे दी गयीं और उसके सहन में भी एक हाथ छोडक़र लकीर खींच दी गयी।
आश्चर्य! वहाँ एक चिडिय़ा भी विरोध में न बोली।
रहमान ने हाथ जोडक़र सभापति से पूछा-अब हम सहन घेर लें न?
सभापति ने कहा-निशान के अन्दर तुम जो चाहे करो।
लोगों को शंका थी कि शायद शाम को क़स्बे से जनसंघ के स्वयंसेवक आयें, तो कोई उत्पात मचे। लेकिन उत्पात तो दूर, स्वयंसेवक उस दिन आये ही नहीं। और तीन दिन शान्ति से बीत गये, तो लोगों के सिर से एक बोझ उतर गया।
फिर धूमधाम से स्कूल में रात्रि पाठशाला और सभापति की चौपाल में पुस्तकालय का उद््घाटन हुआ। मन्ने ने पहला सबक दिया। पंचायत-भवन का भी शिलान्यास हो गया।
मुन्नी नौकरी पर जाने लगा, तो मन्ने ने पूछा-क्या सच ही तुम नौकरी छोडक़र गाँव में आ जाओगे?
-तुम्हें यह विश्वास नहीं होता?
-किसी का कोई बहुत पहले देखा स्पप्न अनायास ही सच्चा होता हुआ दिखाई दे, तो क्या उसे उसपर विश्वास हो सकता है? ...मुन्नी, तुम्हें याद है? कभी हमने एक स्वप्न देखा था, लेकिन वह वैसे ही छिन्न-भिन्न हो गया था, जैसे सूरज के निकलते ही ऊषा के रंग उड़ जाते हैं। जीवन की पहली ही ठोकर ने तुम्हें एक ओर और मुझे दूसरी ओर ठुकरा दिया।
-और वही जीवन आज फिर हमें पास-पास ला रहा है। मन्ने, लगता है, जैसे हमारे जीवन क्रम में कोई ऐसा समान तत्व अवश्य था, जो हमारे दूर-दूर होते हुए भी हमें एक शृंखला में बाँधे हुए था।
-उस समय हमें जीवन की क्या समझ थी! लोगों को हम कमाते-खाते देखते थे और सोचते थे हम भी कहीं एक साथ रहकर कमाये-खाएँगे। हमें क्या मालूम था कि इस कमाने-खाने के पीछे कितनी बड़ी-बड़ी मुसीबतें, कठिनाइयाँ, बाधाएँ और परेशानियाँ छुपी हुई हैं। ...आज तुम गाँव में आने को कह रहे हो, तो मेरी ख़ुशी की इन्तिहा नहीं, लेकिन मेरा मन कहता है कि तुम यहाँ मत आओ, मत आओ!
-यह क्या कहते हो?-हैरान होकर मुन्नी बोला।
-मन्ने!-झँुझलाकर मुन्नी बोला-आज भी तुम्हारा यह व्यर्थ का रोना ना गया, इसका मुझे बेहद रंज है! एक बात जो न हुई, तुम सोचते हो, अगर वह हो गयी होती, तो पता नहीं तुम क्या होते! यह मान भी लिया जाय कि तुम एक बड़े अफ़सर होते, मोटी तनख़ाह पाते, बंगले में रहते, कार पर चढ़ते, शान-शौकत और ऐश-आराम की ज़िन्दगी बसर करते, गोकि यह अवसर हज़ारों में एक को नसीब होता है, तो भी मैं पूछता हूँ, उससे क्या होता? क्या तुम समझते हो, वह तुम्हारे जीवन की सफलता होती? जीवन का उद्देश्य क्या सचमुच यही है? बोलो!-कहकर मुन्नी ने मन्ने की ओर देखा।
मन्ने सहसा कुछ जवाब न दे सका। ज़रा देर तक ख़ामोशी छायी रही। मन्ने ने सिर झुका लिया, तो मुन्नी ने कहा-बोलते क्यों नहीं? जिस एक बात को लेकर तुम हमेशा पछताते रहते हो, उसके विषय में निधडक़ होकर क्यों नहीं कुछ कह पाते?
-जीवन का एक मात्र वही उद्देश्य हो, यह तो मैं नहीं कह सकता। लेकिन इस गाँव में ही कौन-सा उद्देश्य पूरा हुआ, मेरी समझ में नहीं आता।-मन्ने ने सिर झुकाये हुए ही कहा।
-क्या सच ही तुम्हारी समझ में यह नहीं आता, मन्ने?-मुन्नी ने पूछा-यह गाँव आज कहाँ से कहाँ पहुँच गया है, लोग क्या थे और अब क्या हो गये हैं, अभी-अभी तुम लोगों ने एक कितनी बड़ी लड़ाई जीती है! ...मन्ने! क्या सच ही तुम समझते हो, यह सब नगण्य है?
-ऐसा तुम नहीं कह सकते!-मुन्नी ने सिर हिलाकर कहा-स्कूल की नींव रखने में ज़रूर मेरा हाथ था, लेकिन चलाया है उसे तुम लोगों ने ही, उसे लेकर जो लड़ाई शुरू हुई, वह तुम लोगों ने लड़ी है और अब भी लड़ रहे हो।
-मैं न भी होता, तो भी यह लड़ाई लड़ी ही जाती।
-हो सकता है, तुम्हारी यह बात एक हद तक सही हो। लेकिन मेरा यह कहना भी ग़लत नहीं कि इस लड़ाई में तुम्हारा बहुत बड़ा भाग रहा है। फिर तुम यह क्यों भूलते हो कि तुम्हारी ही वजह से स्कूल का काम शुरू हुआ था। तुम्हें याद है, तुम हिन्दू-मुस्लिम का सवाल उठाया करते थे। यह सवाल तुम्हारे लिए, हमारे लिए, पूरे गाँव के लिए हमेशा सिर-दर्द रहा है। ...आज क्या तुम यह नहीं कह सकते कि यह मसला अब हल होने के रास्ते पर आ गया है? सती मैया के चौरे पर जो दृश्य हमने-तुमने देखा है, वे क्या कोई साधारण हैं? मैंने तो कल्पना भी न की थी कि यह काम इतनी आसानी से पूरा हो जायगा। मैं सोचता था, पुलिस आयगी, जनसंघ के स्वयंसेवक आएँगे, पंचायत इन्स्पेक्टर आयगा और कुछ-न-कुछ बावेला ज़रूर मचेगा। फिर यह भी भय था कि कुछ हिन्दू ज़रूर मुख़ालिफ़त करेंगे। लेकिन किसी ओर से एक अँगुली भी न उठी, यह सोचकर अब भी कम आश्चर्य नहीं होता। चेतना की एक साधारण-सी किरण का यह प्रभाव है। तुम्हें इससे कोई प्रेरणा नहीं मिली?
मन्ने ने कोई जवाब नहीं दिया। मुन्नी ही बोला-मालूम होता है, तुम अपने को कहीं-न-कहीं दबा रहे हो। खुलकर बातें नहीं करते?
मुन्नी जोर से हँस पड़ा। बोला-मन्ने! मुझे तो तुम्हारे जीवन से ईष्र्या होती है। कितनी भरपूर ज़िन्दगी तुमने जी है! शुरू से अब तक तुम्हारी ज़िन्दगी एक मुसलसल जद्दोजहद रही है! ...ट्यूशन करके तुमने अपनी पढ़ाई की...बिरादरी से लडक़र और कर्ज़ काढक़र तुमने अपनी बहनों का ब्याह किया...बहन पर कोई आँच न आये, इसलिए तुमने अपनी शादी की...फिर आर्थिक कठिनाई दूर करने के लिए पढ़ाई छोडक़र तुमने नौकरी की...रिश्वत ली...फिर इश्क़ और घरेलू कलह...रोज़गार...फिर गाँव और गाँव का लम्बा संघर्ष...मन्ने! तुम्हारे साहस,जीवट, शक्ति और परिश्रम का मैं क़ायल हूँ! और तुम मेरी बात करते हो? मैं तो पहली लड़ाई में ही मार खा गया था। ख़र्चे का इन्तज़ाम न होने के कारण मैं अपनी पढ़ाई जारी न रख सका...और पहली ही बेकारी में...नहीं, मन्ने, तुम अपने को समझ नहीं रहे हो। एक झूठे सपने में पडक़र तुम यथार्थ को झुठलाने की कोशिश मत करो। मुझे तुम पर गर्व है! मुझे तुमसे प्रेरणा मिलती है और इसी कारण मैं अब गाँव में आना चाहता हूँ और तुम लोगों के साथ कुछ करना चाहता हूँ।
-तुम्हारे-जैसे इन्सान कभी भी नहीं टूटते, मन्ने! तुम्हारी ज़िन्दगी इसकी गवाह है! ...और अब तो इसका सवाल ही नहीं उठता, अब तो वह ज़माना आ रहा है, जब टूटे हुए इन्सानों की भी ज़िन्दगी सँवरेगी। ...हमारा गाँव आँखें खोल चुका है। स्कूल...पंचायत...कोआपरेटिव फ़ारम...ग्राम उद्योग...हर मंजिल पर ज़िन्दगी सँवरती जायगी। ...संघर्ष साधारण नहीं, लेकिन फिर भी हमारी जीत निश्चित है। सरकार जो भी पंचायत को, गाँव को, फारम को, स्कूल को दे रही है, उसे अफ़सरों और स्वार्थी लोगों और नेताओं के पंजों से छीनकर गाँव की भलाई और तरक्क़ी के कामों में हम लोगों को लगाना है और सरकार से और अधिक सहायता माँगना है। कितने ही गाँव, संगठित रूप से यह काम करेंगे। अकेले हमारे गाँव में ही तो यह लड़ाई नहीं चल रही।
थोड़ी देर की ख़ामोशी के बाद अचानक मन्ने बोला-मुन्नी! तुम शादी नहीं करोगे?
सुनकर मुन्नी अचकचा-सा गया। फिर जोर से हँस पड़ा। बोला-यह अचानक तुम कहाँ से कहाँ पहुँच गये? महशर ने भी मुझसे यही बात पूछी थी।
-हाँ, उसने मुझसे भी कई बार पूछा है कि तुम शादी क्यों नहीं करते? माताजी ने भी कई बार कहा है। मेरी तो राय है कि तुम ज़रूर शादी करो!
-इस उम्र में तो अब यह बात भी अच्छी नहीं लगती।
-अभी तुम्हारी इतनी ज्यादा उम्र थोड़े है!
-क्यों नहीं? तुमसे तो मै बड़ा हूँ और तुम्हारी बेटी शम्मू अब शादी की उम्र की हुई।
-मिली तो थी एक वहाँ भी, लेकिन तुमने अवसर से लाभ न उठाया। कहाँ हैं वो 'बहनजी' आजकल? चिठ्ठी-विठ्ठी आती है कि नहीं?
-...में कल्चरल अटैची हैं। छठे-छमासे अब भी याद करती हैं।
-छोड़ो, उन पुरानी कहानियों को याद करने से अब क्या मिलने वाला है!
मुन्नी के चेहरे का भाव देख़कर मन्ने ने बात बन्द कर दी।
-मुन्नी के जाने के पन्द्रह दिन बाद तहसील के जे.ओ. के यहाँ से मन्ने, जुब्ली, बद्दे, रहमान और उसके लडक़े मंसूर के नाम सम्मन आ पहुँचे। रहमान और मंसूर के नाम होने से यह बात समझने में कोई कठिनाई न पड़ी कि सती मैया के चौरे को लेकर ही उन पर कोई मुक़द्दमा दायर किया गया है। किसी हिन्दू के नाम सम्मन नहीं आया, यह जानकर मन्ने को कोई आश्चर्य न हुआ। हिन्दुओं को उससे अलग करने की यह चाल होगी। वे लोग पंचायत के ख़िलाफ़ शायद अब कोई कार्रवाई न करें। यह अच्छा ही हुआ। लेकिन सती मैया के चौरे को लेकर उन लोगों ने कैसे मुक़द्दमा खड़ा किया है, यह समझना ज़रा मुश्किल था, क्योंकि मन्ने वग़ैरा ने, जिनके नाम सम्मन आये थे, आख़िर क्या किया था? सती मैया के चौरे के पास जो चबूतरा उन लोगों ने बनाया था, उसे तो हिन्दुओं ने ही तोड़ा था।
दूसरे दिन ही वह ज़िले के लिए रवाना हो गया। तहसील के जे.ओ. की कचहरी से इस्तग़ासे की नक़ल लेकर, सामने मैदान में एक पेड़ के नीचे बैठकर वह पढऩे लगा। नक़ल हिन्दी में मिली थीः
मुकद्दमा फौजदारी नं० ३६८ थाना सिकन्दरपुर बाबत १९५६, किसन राम बनाम मन्ने बगैरा बइजलास जे.ओ. बाँसडीह।
नाम मुस्तगीसः
किसन राम पेसर नन्दन राम, साकिन पियरी, थाना सिकन्दरपुर।
नाम मुल्जिमानः
अवधेश, जयराम, हरखदेव, रामसागर, कैलास, इनके अलावा और भी गवाहान हैं।
इस भाषा में ये बातें पढक़र मन्ने के जी में आया कि वह ठठाकर हँस पड़े। आज तक जितने मुक़द्दमे उसपर दायर किये गये थे, सबके इस्तगासे इसी प्रकार झूठे और बनावटी थे। इस इस्तगासे की कहानी तो सबसे चढ़-बढक़र थी। और अब बाक़ायदा मुक़द्दमा चलेगा, भगवान को हाज़िर-नाज़िर समझकर गवाहान बयान देंगे और उनका वकील इस झूठी कहानी को सच सिद्ध करने में अपनी सारी क़ानूनी योग्यता समाप्त कर देगा और सम्भव है कि हाकिम भी इसे सच मान ले और मुल्जि़मान को सज़ा भी हो जाय। ...हर मुक़द्दमे का इस्तग़ासा देखकर, बयान और वकीलों की बहसें सुनकर मन्ने के मन में एक ही तरह की बातें उठतीं कि आख़िर इतने बड़े झूठे तमाशे के लिए सरकार ने यह मंच, वह भी न्याय के नाम पर, क्यों खड़ा कर रखा है? सरकार इतने बड़े पैमाने पर यह झूठ का रोज़गार क्यों चला रही है? कितने बेगुनाह लोग इस काले रोजगार की चक्की में रोज़ पीस दिये जाते हैं और कितने गुनहगार साफ़-साफ़ बचकर निकल जाते हैं, इसका हिसाब क्या कोई भी कभी भी लगा सकता है? ...काश, ये हाकिम वारदात की जगह पर जाकर स्वयं सचाई का पता लगाने की कोशिश करते। ...किसी ज़माने में राजा, बादशाह, या क़ाज़ी भेष बदलकर सचाई का पता लगाने जाते थे। उस समय की न्याय-व्यवस्था निस्सन्देह आज से कहीं बेहतर होगी। आज तो क़ानून को इस तरह पेशा बना दिया गया है, उसके अंग-अंग को इस तरह दाँव-पेच से जकड़ दिया गया है, उसे एक ऐसा दिमागी कसरत का विषय बना दिया गया है, वह आज इतना यान्त्रिक हो गया है कि उससे न्याय, सच्चाई और मानवीय मूल्यों की आशा करना बालू से तेल निकालने के बराबर है। इस क़ानूनी व्यवस्था को किसी प्रकार भी जनवादी नहीं कहा जा सकता। ग़रीब जनता को कभी भी इसमें न्याय नहीं मिल सकता। ...सच्चे जनवाद की स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि इस न्याय-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन किया जाय। नये चीन की न्याय-व्यवस्था इस दिशा में हमारा पथ-प्रदर्शन कर सकती है। जन-न्यायालयों की स्थापना करके उन्होंने न्याय को कितना सीधा, सच्चा, सरल और सस्ता बना दिया है! हमारी ग्राम-पंचायतो को विकसित किया जाय, तो वे जनन्यायालयों का स्थान ले सकती हैं। आख़िर पचहत्तर फ़ी सदी से अधिक मुक़द्दमे गाँवों से ही तो आते हैं। लेकिन सरकार तो इन अदालती पंचायतों को क़ागजी ढाँचे के आगे बढ़ाना ही नहीं चाहती।
मन्ने ने वहाँ से उठते हुए यह दृढ़ संकल्प किया कि अबकी अदालती पंचायत का चुनाव भी वे अवश्य लड़ेंगे।
शाम को वह अपने वकील के यहाँ पहुँचा, तो उन्होंने देखते ही कहा-कोई और तोहफ़ा लाये हैं क्या?
मन्ने ने नक़ल उनके आगे बढ़ाते हुए कहा-जी हाँ, उनकी मेहरबानियों के मारे तो नाक में दम आ गया है?
नक़ल पर नज़र फेरते हुए वकील ने कहा-लड़ते हम हैं और परेशान आप होते हैं, ख़ूब! ...तो यह सती मैया के चौरे के बारे में है, हम तो इसका इन्तजार ही कर रहे थे। लेकिन कमबख़्तों ने इस्तग़ासा कुछ बनाया नहीं, यह तो एक फूँक भी बरदाश्त न कर पाएगा। ख़ैर, साहब, आप लोगों ने काम कमाल का किया, बधाई!
-तो आपको सब मालूम हो गया है?
-किसको नहीं मालूम? ...फिर जाते समय मुन्नी साहब भी मिले थे। उन्होंने पूरा क़िस्सा सुनाया था। आप लोगों ने क़िला फ़तह कर लिया, अब जमकर काम करने की ज़रूरत है।
-लेकिन इन मुक़द्दमों का सिलसिला कब ख़त्म होगा, वकील साहब?
-जब अवधेश बाबू का दीवाला निकल जायगा!-और वह ज़ोर से हँस पड़े।
-सो तो वो और भी मोटे होते जा रहे हैं, वकील साहब!
तभी कोई मुअक्किल आ गया। और वकील साहब का ध्यान बँट गया। बोले-तारीख़ के दिन ज़मानत के साथ आप लोग आ जाइएगा। मुक़द्दमे में कुछ है नहीं। अच्छा, नमस्कार!
मन्ने वहाँ से स्कूल-इन्स्पेक्टर के यहाँ गया।
इन्स्पेक्टर ने सलाम का जवाब देकर पूछा-क्यों, साहब, आपके गाँव के लड़कियों के स्कूल का क्या हाल है? डिप्टी ने रिपोर्ट की है कि उन्हें वहाँ न कोई मास्टरनी मिली, न लडक़ी। स्कूल की एक दीवार भी गिर पड़ी है। आप लोगों ने तो कोई रिपोर्ट मेरे पास की नहीं।
-डिप्टी साहब ने सही ही रिपोर्ट दी है,-मन्ने इतना कहकर चुप हो गया।
-नहीं, आप बन्द मत कीजिए। मैं जाते ही गाँव के लोगों से कहूँगा। इतना बड़ा गाँव है, पास-पड़ोस में लड़कियों का कोई स्कूल नहीं, वहाँ तो लड़कियों का एक जूनियर हाई-स्कूल भी चल सकता है।
-ख़ूब!-इन्स्पेक्टर ने ताना दिया-एक प्राइमरी स्कूल तो चलता ही नहीं, आप जूनियर हाई स्कूल की बात करते हैं! यह स्कूल बनवाया किसने था कि इतने ही दिन में उसकी एक दीवार भी गिर गयी। कमबख़्त रुपया खा गया क्या?
-छोड़िए वह-सब । अब जैसे भी हो आप लोग वह स्कूल चलाइए। मेरे लिए भी यह कम शर्मिन्दगी की बात नहीं कि एक स्कूल टूट जाय। मरम्मत के लिए जितने पैसे की जरूरत हो, आप बताएँ। मैं मंजूर करा दूँगा।
-आप ग्राम सभापति के नाम स्कूल के बारे में एक हिदायत दे दें, तो हमें सहूलियत होगी।
-मैं कल ही भिजवा दूँगा।
-और अपने स्कूल के बारे में कहिए।
-सब आपकी मेहरबानी है।
दूसरे दिन मन्ने पहली मोटर से वापस आ रहा था। हमेशा वह क़स्बे में उतरकर गाँव जाता था। उस दिन वह घूरी के टोले पर ही उतर गया और वहाँ से फ़ारम होकर घर जाने की सोची। सुबह वह कोआपरेटिव इन्स्पेक्टर से मिला था और कोआपरेटिव फ़ारम खोलने के विषय में उनसे बातें की थीं। उनकी बातों से उसे बड़ी आशा बँधी थी। वह जल्दी-से-जल्दी सब बातें जुब्ली को बता देना चाहता था।
धान के खेतों को पारकर वह बाग़ में पहुँचा, तो देखा, सामने से समरनाथ आ रहा था। क़स्बे के स्कूल का सीधा और नज़दीक का रास्ता इधर से ही था। समरनाथ शायद आज देर से स्कूल जा रहा था।
बाग़ बहुत पुराना था। बहुत ही बूढ़े-बूढ़े, बड़े-बड़े,बेडौल आम के पेड़ थे। काले-काले, ऊँचे-ऊँचे तनों के ऊपर उनमें बहुत ही कम डालियाँ रह गयी थीं, जिनके सिरों पर थोड़ी हरियाली दिखाई देती थी। पेड़ों के बीच से, इधर-उधर पगडण्डी की लीक साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर भी कोई ज़रा भी बेध्यान होकर उसपर चले, तो किसी-न-किसी पेड़ के तने से ज़रूर टकरा जाय।
मन्ने ने देखा कि समरनाथ की चाल में अकड़ और चेहरे पर सख़्ती आ गयी है। दूर से ही एक बार उनकी आँखें मिलीं, तो मन्ने को ऐसा भी लगा कि समरनाथ का नथुना कुछ फूला हुआ है।
समरनाथ की उच्छृंखलता गाँव में मशहूर है। कभी-कभी वह ऐसे काम भी कर गुज़रता है, जो ठीक दिल-दिमाग़ का आदमी नहीं कर सकता। पच्चीस के क़रीब की उम्र है, हड्डी मज़बूत, लेकिन शायद पर्याप्त और पौष्टिक भोजन न मिलने से शरीर पतला रह गया है, इसी कारण उसका मियाना क़द भी देखने में कुछ ऊँचा लगता है। रंग गेंहुआ, दाढ़ी-मूँछ और सिर के बाल बढ़े हुए, अधमैला पैजामा और आधी आस्तीन की वैसी ही क़मीज़, पाँवों में पुरानी चप्पलें। पहली ही दृष्टि में कोई भी उसे अद्र्धविक्षिप्त कह सकता है। लाला के सबसे छोटे पट्टीदार का लडक़ा है। उनके घराने की कभी बहुत ही अच्छी हालत थी, लेकिन समरनाथ के नालायक़ बाप ने सब फूँककर ताप लिया। हालत बिगड़ने लगी, तो कलकत्ता में दूकान खोली। उस वक़्त समरनाथ बनारस युनिवर्सिटी में बी.एस-सी. फाइनल में पढ़ रहा था। उसके बाप ने उसे कलकत्ता बुला लिया। समरनाथ के जीवन में कलकत्ता जाना ही ज़हर हो गया। अच्छा-ख़ासा लडक़ा, वहाँ सेठों के लडक़ों के चक्कर में पड़ गया और उसका दिमाग़ खराब हो गया। वह उम्दा-से-उम्दा कपड़ा पहनता और सिनेमा-थिएटर देखता और बदनाम गलियों का चक्कर लगाता। उसका ख़याल था कि उसके बाप के पास बहुत पैसा है, वह जैसे चाहे रह सकता है। लेकिन एक दिन उसके बाप ने अपनी स्थिति से उसका परिचय कराया और कहा कि घर में जो थोड़ा-बहुत सोना था, उसी को बेंचकर उसने यह दूकान खोली है। यह दूकान अन्तिम अवलम्ब है, समरनाथ इस तरह रुपये बर्बाद करेगा, तो एक दिन दीवाला निकल जायगा। इसलिए यह जरूरी है कि समरनाथ कोई काम करे, कोई नौकरी ढूँढ़े, दूकान की आमदनी के भरोसे न रहे।
यह सुनना था कि समरनाथ बिगड़ पड़ा। उसने बाप को बड़ी गालियाँ सुनाई। और साफ़-साफ़ कह दिया कि दादा-परदादा की कमाई से तुमने बहुत मजे किये हैं, अब जो-कुछ बच गया है, उसका मालिक मैं हूँ, तुम ख़ुद अपने लिये कोई काम ढूँढ़ो। इसपर कई दिन तक बाप-बेटे के बीच बातचीत बन्द रही। बाप ने आस-पास के बुजुर्गों से बेटे को समझाने के लिए कहा और इसका नतीजा एक रात यह हुआ कि समरनाथ ने बिगडक़र अपने बाप को पीटा और उसे दूकान से निकाल दिया।
बाप जैसे सब-कुछ गवाँकर गाँव में वापस आ गया। लेकिन किसी से इस झगड़े के बारे में कुछ भी नहीं कहा। कई महीने वह गाँव में रह गया, तो लोगों को कुछ सन्देह हुआ। पूछने पर उसने बताया कि समरनाथ एम. एस.-सी. पढ़ रहा है और साथ ही दूकान भी देख रहा है, मुनीम और आदमी हैं ही। घर सम्हालने के लिए वह यहाँ आ गया है। ...फिर होनी कुछ ऐसी हुई कि पटना के इन्जीनियर रामाधार प्रसाद अपनी लडक़ी के लिए अच्छे घराने के एक पढ़े-लिखे लडक़े की खोज में इस ज़िले आये और वहाँ से अवधेश की राय से उसके साथ इस गाँव में पहुँचे। बिरादरी में पढ़े-लिखे लडक़ों की बेहद कमी थी। इन्जीनियर अपनी लडक़ी को डाक्टरी पढ़ा रहे थे। यहाँ समरनाथ की बात सुनी, उसका घर-द्वार देखा, तो बहुत ख़ुश हुए। वे अवधेश और समरनाथ के बाप को लेकर कलकत्ता गये और समरनाथ को देखते ही उस पर रीझ गये। बात पक्की करने के लिए उन्होंनें छेंका की रस्म भी तुरन्त पूरी कर दी।
इन्जीनियर चले गये, तो मुनीम ने दूकान का कच्चा चिठ्ठा समरनाथ के बाप के सामने रखा और कहा-यह दूकान अब बहुत दिनों तक नहीं चल सकती। इससे अच्छा है कि आप दूकान किसी के हाथ बेंच दें और उससे जो-कुछ मिल जाय, उसे ही बहुत समझें, वर्ना कुछ दिनों के बाद कुछ भी हाथ नहीं लगेगा।
समरनाथ के बाप ने दूकान की छान-बीन की और काग़ज-पतर देखा तो वह भी इसी नतीजे पर पहुँचा। उसे क्रोध तो बहुत आया, लेकिन समरनाथ से कुछ कहने का साहस उसे न हुआ। उसने उससे इतना ही कहा-जो किया, वह बहुत अच्छा किया। अब कोई पूछे तो कह देना बीमार हो जाने के कारण पढ़ाई छोडऩी पड़ी, अगले साल फिर युनिवर्सिटी में नाम लिखाएँगे।
इन्जीनियर की बेटी से उसकी शादी हो रही है, वह डाक्टरी पढ़ रही है, यह जानकर समरनाथ की ख़ुशी का ठिकाना न था। उसने बाप की बात तुरन्त मान ली और गाँव वापस आ गया।
समरनाथ किसी कलकतिया सेठ के बेटे की तरह कपड़े झाडक़र इधर गाँव की गलियों की रौनक़ बढ़ाने लगा और उधर बाप ने अपनी खिचड़ी पकानी शुरू की । वह समरनाथ को समझ चुका था। उससे हाथ धो लेना ही उसने ठीक समझा। उसके दो छोटे-छोटे लडक़े और थे, बीवी थी, उनके गुज़र का सवाल उसके सामने था। दूकान बेंचकर वह सीधे पटना पहुँचा और इन्जीनियर के सामने अपनी कुछ शर्तें पेश कर दीं।
इन्जीनियर के पास धन था। वे ख़ुद भी अपनी लडक़ी की शादी में अच्छा ख़र्चा करना चाहते थे। उन्होंने समरनाथ के बाप की सब शर्तें बिना किसी हुज्जत के मान लीं।
पुरोहित बुलाये गये। शादी की तारीख़ पक्की हो गयी। समरनाथ का बाप बिदा होने लगा, तो शर्त के अनुसार इन्जीनियर ने उसके हाथ पर पाँच हज़ार के नोट रख दिये और कहा-बरात का पूरा ख़र्च मैं शादी के वक़्त दे दूँगा और लडक़ी की डाक्टरी की पढ़ाई का पूरा ख़र्च भी मेरे ही ज़िम्मे रहेगा। आप किसी बात की चिन्ता न करें।
शादी हो गयी। दुलहिन ससुराल में सात दिन रहकर अपने भाई के साथ घर चली गयी।
उसके आठ-दस दिन बाद मालूम हुआ कि बाप-बेटे में लड़ाई हो गयी है। बाप ने बेटे से कह दिया है कि वह अपना अलग इन्तजाम कर ले। एक दिन सुना गया कि समरनाथ ने अपने बाप को कई डण्डे मारे हैं। लोगों ने बीच में पडक़र उसे हटाया न होता, तो शायद वह अपने बाप की जान लेकर ही छोड़ता। बाप ने घर में उसका खाना-पीना बन्द कर दिया, तो समरनाथ ने अलग्यौझा कराने के लिए बिरादरी को बटोरा। बाप ने सबके सामने टाट उलट दिया और कहा कि बाँटने-चुटने के लिए उसके पास एक दमड़ी भी नहीं है। ले-देकर एक घर रह गया है, उसमें वह अपना हिस्सा ले ले। बिरादरी क्या करती? ...उसके बाद समरनाथ का काम गाँव में बडऱाना और अपने बाप को कोसना और गाली देना रह गया। कोई उसे मना करता, तो वह उसे भी गाली देने लगता और लड़ने पर आमादा हो जाता। ...लोग उसे पागल कहने लगे।
फिर समरनाथ को क़स्बे के स्कूल में पचास रुपये की नौकरी मिल गयी। अब जिससे भी वह मिलता, एक ही बात कहता-गाँव में पहली कार मेरी ही आएगी। बस, मेरी पत्नी के डाक्टरी पास करने की देर है!-गाली-गुफ्ता, लड़ाई-झगड़ा उसके लिए मामूली बात थी। कार का सपना लेते हुए भी जाने क्यों वह हमेशा सारी दुनियाँ पर झल्लाया रहता। गाँव का स्कूल चल निकला, तो उसने बहुत चाहा कि उसकी भी वहाँ नियुक्ति हो जाय। लेकिन गाँव के लोग उसके आचरण से परिचित थे। नियुक्ति-कमेटी के किसी भी सदस्य ने उसके नाम की सिफ़ारिश न की। समरनाथ का ख़याल था कि मन्ने ही उसके विरुद्ध है। और वह तब से स्कूल के साथ मन्ने की भी जड़ खोदने में लग गया था। कैलास वग़ैरा दम देकर हर मामले में उसे आगे-आगे रखते थे।
मन्ने पगडण्डी छोडक़र एक ओर से चलने लगा। नंगे से चार हाथ दूर रहना ही अच्छा!
लेकिन समरनाथ की आवाज़ आयी-ए मुसल्ला! तू अपनी हरकत से बाज़ नहीं आएगा?
सुनकर मन्ने का शरीर जल उठा। उसके सामने का पैदा हुआ यह लौंडा, किस तरह बात करता है! लेकिन ग़म खाकर, सिर गाड़े वह चलता रहा, जैसे कुछ सुना ही न हो। छाते की डण्डी पर उसका हाथ ज़रूर कुछ कुछ सख़्त हो गया।
समरनाथ और तेज़ होकर चिल्लाया-सुनता नहीं, ए मुसल्ला?
मन्ने फिर भी चलता रहा। भभकती आग को छाती में दबाये रहा।
समरनाथ दौडक़र, उसके पास आ बोला-कान में रूई ठुसी है क्या?
मन्ने से अब न रहा गया। रुककर, उससे सीधे आँख मिलाकर बोला-क्या बात है?
-बात सुनाई नहीं दी है?-अकडक़र समरनाथ बोला।
-कैसी बात?-वैसे ही घूरते हुए मन्ने ने पूछा।
-अपनी हरकत से बाज आओ!
-क्या मतलब?
-समझ में नहीं आता?
-स्कूल छोड़ दो! पंचायत तोड़ दो! सती मैया का चौरा जोड़ दो!
-वर्ना मन्ने का सिर फोड़ दो! यही न?-गर्म होकर मन्ने बोला।
-हाँ!-समरनाथ ने दबंगई के साथ कहा।
-बस? या और कुछ कहना है?
समरनाथ के होंठ फडफ़ड़ाकर रह गये। वह हत् बुद्धि-सा मन्ने का मुँह तकने लगा, सहसा उसके मुँह से कोई बात ही नहीं निकली।
मन्ने ने क़दम आगे बढ़ा दिये। दस क़दम जाने पर पीछे से समरनाथ की आवाज़ आयी-यह हमारी पहली और आख़िरी चेतावनी है!
-सुन ली, सुन ली!-मन्ने ने मुडक़र, छाता उसकी ओर उठाकर कहा और फिर चल पड़ा।
थोड़ी दूर आगे बढक़र मन्ने ने चलते हुए ही पीछे मुडक़र देखा, तो समरनाथ अब भी बाग़ में ही खड़ा था। मन्ने को खटका हुआ, यह वहाँ खड़ा क्यों है? थोड़ा और आगे बढक़र देखा, तो समरनाथ उसके पीछे-पीछे आ रहा था। मन्ने का खटका बढ़ गया, शायद इसके मन में कुछ है। लेकिन फ़ारम का हाता और स्कूल अब पास ही थे, मन्ने के लिए घबराने की कोई बात न थी। यों भी समरनाथ के लिए अकेला मन्ने भी काफ़ी था। समरनाथ में दबंगई और नंगापन चाहे जितना हो, लेकिन दम कुछ नहीं, यह सभी जानते थे।
फ़ारम की घेराई के फाटक पर खड़े होकर मन्ने ने देखा, तो समरनाथ पगडण्डी छोडक़र लपकता हुआ, खेतों को लाँघता हुआ गाँव की ओर चला जा रहा था।
ओसारे में से जुब्ली ने पुकारा-वहाँ खड़े-खड़े क्या देख रहे हो? घर से आ रहे हो, या बाहर-ही बाहर?
मन्ने ने अन्दर मुड़ते हुए कहा-बाहर-ही-बाहर।
-टोले पर उतर गये थे क्या?
-हम लोग तो कल शाम को ही तुम्हारा इन्तज़ार कर रहे थे।
-क्यों? ख़ैरियत तो?-खटिया पर बैठते हुए मन्ने बोला।
-तुम्हें कैसे मालूम?
-अभी समरनाथ से मुलाक़ात हुई थी।
-यहीं बाग़ में।
-वही जुलूस के आगे-आगे था।
-नहीं, कुछ हुआ नहीं। हम लोगों को डर तो था, लेकिन सती मैया की तरफ़ जलूस गया ही नहीं। सभापतिजी के साथ हम लोग पोखरे पर जमा हो गये थे।
-अवधेश बाबू यहीं हैं?
-हाँ! कल रात को उनके यहाँ मीटिंग भी हुई थी। रात को सत्तराम कई बार तुमसे मिलने आया था।
-कुछ कहता था?
-मुझसे कुछ नहीं कहा। तुम्हीं को ढूँढ़ रहा था।
-खैर, अब वहाँ की सुनिए। कोआपरेटिव इन्स्पेक्टर से मैं मिला था। वे हर तरह की मदद देने को तैयार हैं। कम-से-कम बीस मेम्बर होने चाहिए। कितने हैं अभी आपके फ़ारम में?
-तो सात किसानों को और मेम्बर बनाइए। फिर रजिस्ट्रेशन कराके बाक़ायदे काम शुरू कर दिया जाय। आज शाम को सभापतिजी से कहकर किसानों की एक मीटिंग कराइए।
-बहुत अच्छा! ...इस्तग़ासे की नक़ल मिली?
-हाँ, वकील साहब को दे आया हूँ। उसमें कोई दम नहीं है। तारीख़ के दिन ज़मानतदारों के साथ चलना है। ज़मानतदार आप ठीक कर लीजिएगा।
-कर लेंगे।
-और कोई बात?
-मुझे कुछ नहीं होगा, जुब्ली भाई! ...अच्छा, मैं चलता हूँ। सभापतिजी से आप ज़रूर मिल लीजिएगा!
-अभी खाना खाने जाएँगे, तो मिल लेंगे!
घेराई के फाटक पर आकर मन्ने फिर रुक गया। सामने ही एक लाल झण्डा गड़ा था। उसने पुकारकर पूछा-जुब्ली भाई, यह झण्डा कैसा गड़ा है?
-अरे, मैं तो तुम्हें बताना ही भूल गया!-लपककर उसके पास आ जुब्ली ने कहा-अभी एक घण्टे पहले नहरवाले आये थे। नहर निकल रही है! घाघरा से निकलकर, इधर से होते हुई सुरहा में जा मिलेगी। वही झण्डा गाड़ गये हैं। कहते थे, जल्दी ही खुदाई शुरू होनेवाली है।
-सच?-मन्ने का चेहरा ख़ुशी से चमक उठा। उसने अपना हाथ जुब्ली की ओर बढ़ा दिया।
उसका हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर जुब्ली बोला-हाँ-हाँ!
-यह तो आपने बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी सुनाई, जुब्ली भाई! किसानों को मालूम है?
-ज़रूर मालूम हो गया होगा।
-मालूम हो गया होगा के क्या माने? गाँव के किसानों को नहरवालों ने बुलाया नहीं था क्या?
-तुम बुलाने की बात कहते हो? वो लोग तो जीप पर आँधी की तरह आये और झण्डा गाडक़र तूफ़ान की तरह चले गये। यहाँ बस लडक़ों और मास्टरों की भीड़ लगी थी। मैं पहुँचा, तब तक जीप आगे बढ़ गयी थी। वह तो प्रिन्सिपल साहब ने बताया कि नहर महकमे के अफ़सर थे, नहर निकलने वाली है, नहर के रास्ते का निशान लगा रहे हैं।
-अजीब अहमक़ हैं सब!-मन्ने ने आश्चर्य से भरके कहा- जिनके लिए नहर निकल रही है, उनसे बात भी नहीं की सबों ने!
-सभी महकमों के अफ़सरों का यही हाल है!-जुब्ली ने कहा-तभी तो सरकार के किसी भी काम में जनता कोई दिलचस्पी नहीं लेती। सब अफ़सर ऊपर-ही-ऊपर तैरते हैं, धरती छूने का नाम ही नहीं लेते।
-ठीक है, लेकिन इससे कमबख्त अफ़सरों का क्या नुक़सान होता है, बल्कि उन्हें तो माल मारने में और भी आसानी हो जाती है। अफ़सोस इस बात का है कि सरकार अपने अफ़सरों पर ही विश्वास करती है, जनता पर नहीं। लेकिन जनता को इस तरह उदासीन नहीं रहना चाहिए, आख़िर काम तो उन्हीं के फ़ायदे के लिए होते हैं। अगर जनता दिलचस्पी लेने लगे, तो इन अफ़सरों को भी ठीक किया जा सकता है।
-जनता में चेतना आने दीजिए, जुब्ली भाई! फिर तो आप देखेंगे कि कैसे इन अफ़सरों और इनकी सरकार को ठीक किया जाता है! ख़ैर, नहर निकल रही है, यह बहुत बड़ी बात है!
मन्ने वहाँ से चला, तो उसकी आँखे झण्डे पर ही टिकी थीं। वह अपने को झण्डे के पास जाने से न रोक सका। झण्डे के छोटे बाँस पर हाथ रख उसने पूरब की ओर देखा। बहुत दूर चटियल मैदान में एक और झण्डा दिखाई पड़ रहा था और उसके आगे एक और...और जैसे मन्ने की आँखों के आगे नहर का हिलोर लेता हुआ पानी बहने लगा...कल-कल...छल-छल...मन्ने ने अपने जीवन में यह स्वप्न कब देखा था? लेकिन इस घड़ी उसे लग रहा था, जैसे उसने जीवन में बस एक यही स्वप्न देखा था और वह आज पूरा हो गया, तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है, जैसे उसका जीवन ही सार्थक हो गया, मन-प्राण, सब तृप्त, जैसे आजीवन भूखे को भर पेट सुन्दर भोजन मिल गया हो।
-नमस्कार! सेक्रेटरी साहब!
पीछे से प्रिन्सिपल के शब्द कानों में पड़े, तो मन्ने का जैसे सपना टूटा, लेकिन उत्तर में उसके मुँह से कोई शब्द नहीं निकला। उसका सिर बस ज़रा-सा हिल गया।
-नहर निकल रही है!-ख़ुशी से दाँतों की पंक्तियाँ चमकाते हुए प्रिन्सिपल बोले।
मन्ने ने फिर वैसे ही गूँगे की तरह सिर हिला दिया।
-अगले वर्ष इण्टर में भी एग्रिकल्चर खोलवाइए। इस परती पर अब तो कालेज का भी एक छोटा-सा फ़ारम खोला जा सकता है। आपका गाँव बड़ा भाग्यशाली है!
मन्ने ने फिर उसी तरह सिर हिलाया, तो प्रिन्सिपल ने आँखे सिकोडक़र जाने कैसी नज़रों से उसे देखा। फिर बोले-आप कुछ बोलते क्यों नहीं?
मन्ने ने फिर उसी तरह सिर हिलाया और गाँव की तरफ़ मुड़ गया। प्रिन्सिपल अचकचाये-से उसका मुँह निहारते उसके साथ-साथ चलने लगे। स्कूल पास आ गया, तो मन्ने ने मुँह खोला, फिर भी जैसे सूखे गले से आवाज़ न निकल रही हो, इस तरह बोला-प्रिन्सिपल साहब,-खाँसकर ज़रा देर बाद मन्ने ने कहा-आज मैं बहुत ख़ुश हूँ्! यह नहर नहीं निकलने जा रही है, गाँव के सूखे जिस्म को खून मिलने जा रहा है! ...आप ज़रूर एग्रिकल्चर खोलवाइए...फ़ारम खोलवाइए! ...मुन्नी बाबू आ रहे हैं, वही अब स्कूल का काम देखेंगे। मैं तो अब गाँव का काम देखूँगा...कोआपरेटिव फ़ारम...पंचायत...कोई ग्राम उद्योग...बहुत काम बढ़ जायगा, प्रिन्सिपल साहब! ...हमारा गाँव अब पुराना गाँव नहीं रहेगा...आप इसका भावी रूप देख रहे हैं न?
-उनकी भी आँखें, खुलेंगी, प्रिन्सिपल साहब! इस गाँव के इतिहास में महाजनों के पुरखों के बड़े ही शानदार रोल रहे हैं। आप समझते हैं, इनके जिस्म में उनका खून नहीं?
-उसकी रीढ़ की हड्डी तो सती मैया के चौरे ने तोड़ दी, प्रिन्सिपल साहब।
-कुच्छ नहीं, प्रिन्सिपल साहब, वह कुच्छ नहीं! ...गाँव ने रास्ता बदल दिया है! अब इसे अपने रास्ते से कोई भी नहीं हटा सकता! जो इस रास्ते पर नहीं चलेगा, या इस रास्ते में किसी भी प्रकार की रुकावट डालेगा, ख़ुद अपनी मौत को दावत देगा!
परती की हद आ चुकी थी। प्रिन्सिपल साहब ने कहा-आप बिलकुल ठीक कहते हैं, सेक्रेटरी साहब! ...भगवान इन लोगों को सद्बुद्धि दे! ...अच्छा, अब मुझे इजाज़त दें। नमस्कार!
क़स्बे के अस्पताल के सहन में खटोले पर मन्ने की आँखे खुलीं, तो उसने कई चेहरे अपने ऊपर झुके हुए देखे ...सभापति...बाबू साहब...जीवन... बसमतिया...जुब्ली...प्रिन्सिपल...और उनके पीछे अनगिनत चेहरे।
-डाक्टर साहब! इन्हें होश आ गया!-यह जुब्ली बोला था।
-होश आ गया, सो तो ठीक है, लेकिन आप लोग हटिए। हवा आने दीजिए। घेरे रहने से आप लोगों को क्या मिलता है?
डाक्टर ने उसकी कलाई पर हाथ रखकर नब्ज़ देखी। मन्ने ने होंठो पर जीभ फेरकर कहा-पानी।
-अभी लाते हैं,-डॉक्टर की धीमी आवाज़ आयी-कोई जाकर जल्दी दूध लाये।
-अभी लाते हैं!-कहता हुआ जीधन क़स्बे की ओर दौड़ पड़ा।
डाक्टर चला गया, तो मन्ने की आँखें फिर बाबू साहब पर ठहर गयीं। बाबू साहब उसके मुँह पर झुक आये, तो वह बोला-मुन्नी को तार दे दें।
सिर उठाकर बाबू साहब ने कहा-मुन्नी बाबू को तार देने को कह रहे हैं। इस वक़्त तो डाकख़ाना बन्द हो गया होगा।
-तार बाबू पाँच बजे तक रहते हैं!-मजमे में से किसी की आवाज आयी-आप लपककर चले जायँ, तो मिल जाएँगे!
बाबू साहब चले गये, तो मन्ने की नज़र जुब्ली पर जा ठहरी। संकेत समझ कर जुब्ली झुका, तो मन्ने ने कहा-महशर को ख़बर भेजवा दें, मैं ठीक हूँ।
-अच्छा-अच्छा!-कहकर जुब्ली ने मजमे के पास आकर पुकारा-भिखरिया!
-आप लोग हटे नहीं?-डाक्टर की आवाज़ फिर सुनाई दी-आप लोग तो बात ही नहीं सुनते!-फिर मन्ने के होंठों के अन्दर गिलास की बार घुसेड़ते हुए उन्होंने कहा-पानी लीजिए!
मन्ने ग़ट-ग़ट पी चुका, तो डाक्टर ने गिलास हटा लिया।
मुँह बनाकर मन्ने बोला-यह क्या था, डाक्टर साहब?
-कुछ नहीं, आप चुपचाप आराम से सो जाइए!
Download PDF (सती मैया का चौरा भाग 11)
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त्रिलोकी राय के दरवाज़े पर पहुँचकर उन लोगों ने ख़बर दी, तो वे खद्दर की जाँघिया और गन्जी पहने, दाहिने हाथ की तर्जनी से जनेऊ से बँधे चाभियों के गुच्छे को नचाते हुए बाहर आये। सभापति और मन्ने के राम-राम और आदाबअर्ज़ को अनसुना कर, उन्हें बैठने को भी कहे बिना वे खड़े-खड़े ही बोले-आप लोग मेरे यहाँ क्या करने आये? -ऐसा आप काहे कहते हैं, बाबू साहब,-सभापति बोले-कोई बात पड़ेगी, तो आपके यहाँ हम नहीं आएँगे तो कहाँ जाएँगे? आप लोग कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटरी के यहाँ जाइए, हमसे आप लोगों का क्या मतलब?-भौंहें कुंचित करके त्रिलोकी राय बोले-हमें सब मालूम है! राधे बाबू चले गये, तो क्या आप लोग समझते हैं कि उस गाँव के कांग्रेसी अनाथ हो गये हैं? -आपको शायद मालूम नहीं,-मन्ने बोला-वे लोग क़स्बे से जनसंघ के स्वयंसेवकों को रोज़ बुला रहे हैं। -इसमें हम कोई हर्ज नहीं समझते,-आप लोग ज्यादती करेंगे, तो वे अपनी रक्षा के लिए जिसे भी ज़रूरी समझेंगे बुलाएँगे ही। इसमें हम क्या कर सकते हैं? -तुम हमको बहलाने की कोशिश मत करो!-बिगडक़र त्रिलोकी राय बोले-हमें सब मालूम है, स्कूल , पंचायत के चुनाव और सती मैया के चौरे, सब मामलों को वहाँ वर्ग-संघर्ष का विषय बनाया गया है और वहाँ के महाजनों के खिलाफ़ जनता को भडक़ाया गया है। हम इस पंचायत की कोई मदद नहीं कर सकते! -अगर आप हमारे फैसले को ग़लत समझते हैं, तो हम आप ही पर छोड़ते हैं, आप ख़ुद फैसला देकर समझौता करा दें। -हमारी बात ये लोग नहीं मानेंगे! -क्यों नहीं मानेंगे, आप चलिए तो! -क्या फ़ायदा जाने से? हम तो यही फैसला देंगे कि चबूतरा बन ही गया है, तो उसे रहने दिया जाय। पूछिए, ये लोग मानेंगे? -देखिए! राजनीति और पार्टी में ईमान-विमान कोई चीज़ नही होता। हम अपनी पार्टी के खिलाफ़ फैसला नहीं दे सकते! फिर धर्म का भी यहाँ सवाल है! हमारी वजह से सती थान की एक ईंट भी खरके, यह कैसे हो सकता है? -चलिए, सभापतिजी!-मन्ने बोला। -चलिए, सभापतिजी!-मन्ने ने उनका हाथ पकडक़र कहा। ग्राम-सभापति ने सिर झुकाकर अपना पाँव बढ़ाया। काफ़ी देर तक कोई भी कुछ न बोला। सभापति का सिर वैसे ही झुका हुआ था। मन्ने मन-ही-मन गुस्से से फुँक रहा था। क़स्बे के बाहर आये, तो सभापति ने सिर उठाकर कहा-आप लोग ठीक ही कहते थे। हम इन लोगों के यहाँ बेकार आये! मन्ने कुछ भी कहने की स्थिति में न था। उसे लगता था कि उसने मुँह खोला नहीं कि पट से कोई गाली निकल जायगी। -ये लोग तो सच ही हमारी पंचायत तोड़ देना चाहते हैं,-सभापति ही फिर बोले-इसीलिए न कि उनके आदमी सभापति नहीं चुने गये और मेम्बरों में उनके आदमी कम हैं, जैसा वे चाहें नहीं कर सकते? मन्ने ने अपने को बहुत ज़ब्त करके कहा-मुनेसर भाई, कोई कोइरी सभापति हो, इसे वे कैसे बरदाश्त कर सकते हैं? -अगर मैं कांग्रेसी होता? -तो भी क्या कैलास के मुक़ाबिले सभापति के लिए वे लोग आपको खड़ा करते? -मन्ने बाबू, अब हम लोग भी कुछ-कुछ राजनीति समझने लगे है। लेकिन हमारी राजनीति और इनकी राजनीति में कितना फरक है!-सभापति बोले-सच कहते हैं, मन्ने बाबू, जब से हम सभापति बने हैं, हमारे मन में यह डर बराबर समाया रहता है कि कहीं हमसे कोई अनियाव न हो जाय, कहीं हम कोई बेईमानी न कर बैठें। यहाँ देखिए, सती मैया के चौरे के बारे में जो इन्साफ हमने किया है, उसमें आप ही लोगों को हमने दबाया है न? ...मन्ने बाबू, अपने लोगों को ही तो दबाया जा सकता है, जो लोग हमें अपना दुश्मन समझते हैं, उन्हें दबाएँ तो हमारी बदनामी ही होगी न? आप सच-सच बताइए, हमने कोई गलत बात कही है? -नहीं,-मन्ने का गुस्सा जाने कहाँ उड़ गया। उसका मन जैसे सभापति की बातें सुनकर भरा आ रहा था, श्रद्धा से उस गँवार के प्रति झुककर उसने कहा-आपके ख़याल बहुत ऊँचे हैं, सभापतिजी, पहाड़ की चोटी की तरह, जिसे क़ुदरत ने ही ऊँचा बनाया है! -और वो धरम की बात कर रहे थे,-सभापति अपने में खोये हुए-से बोले-धरम का मतलब का यह होता है कि गैर धरमवाले का आप गला काट दीजिए? गाँव के सभापति होने की हैसयित से का सभी के साथ, वह किसी भी धरमवाला हो, हमारा बेवहार एक समान नहीं होना चाहिए? जब तक हम सभापति नहीं थे, दूसरी बात थी, लेकिन अब जान-बूझकर किसी के साथ हम गैरइन्साफी कैसे कर सकते हैं? हम जानते हैं कि हममें अकल नहीं है, लेकिन पंचायत में दस आदमी और भी तो हैं। ...पंचायत से वे लोग उठकर चले गये, हमको तो वो भी बहुत बुरा लगा, मन्ने बाबू! दस आदमी की बात कोई न माने, भला उसे का कहा जाय? उन लोगों को किसी भी तरह का हम नहीं मना सकते, मन्ने बाबू? मन्ने क्या जवाब दे, सहसा उसकी समझ में न आया जिस स्तर पर सभापति सोच रहे थे, उसी स्तर पर उसने भी कितनी ही बार सोचा था, बल्कि उसने तो हर कोशिश भी की थी कि गाँव की यह फ़िरक़ापरस्ती खत्म हो और सब मिल-जुलकर गाँव की भलाई के लिए कुछ करें, लेकिन वह कहाँ सफ़ल हुआ था? सभापति के सामने सती मैया के चौरे का सवाल उस रूप में न था , जिस रूप में मन्ने के सामने था। उसके जी में आया कि वह उन्हें उस सवाल की पूरी अहमियत समझाये, लेकिन फिर उसे लगा कि शायद वे न समझ सकें, कम-से-कम इस समय जिस मनः स्थिति में वे बात कर रहे थे, उसमें तो उनका समझना कठिन ही था। इस समय वे साधारण मनुष्य न रह गये थे, साधारण मनुष्य की तरह अपने हानि-लाभ का प्रश्न उनके सामने न था। इस समय तो वे सभापति के आसन पर विराजमान थे और हृदय से चाहते थे कि गाँव के सभी लोगों में मेल हो जाय, गाँव के सभी लोग प्रेम से रहें, जैसे एक पिता चाहता है कि उसके सब लडक़े मिल-जुलकर रहें। यह एक भोले, सच्चे हृदय की चाह थी। मन्ने जानता था कि यह इच्छा चाहे कितनी ही पवित्र, कितनी ही सच्ची, कितनी ही हार्दिक क्यों न हो, इस तरह पूरी होनेवाली नहीं। जब गाँधीजी की पूरी न हुई, तो इनकी क्या होगी? फिर भी सभापति के प्रश्न के उत्तर में वह ना न कह सका। अचानक ही उसके ख़याल में दो बातें आयीं, एक तो यह कि शायद वह मुसलमान था, इसलिए इस दिशा में उसकी कोशिशें कामयाब न हुई हों; सभापति हिन्दू हैं, शायद ये अपनी इस कोशिश में कामयाब हो जायँ। दूसरी यह कि अगर वे कामयाब न हुए, तो उसके परिणामस्वरूप वे अपने 'देवत्व' के आसन से आप ही नीचे उतर आएँगे और चुनाव के पहले की मनः स्थिति में आ जाएँगे, और इस बात को और अच्छी तरह समझ जाएँगे कि वही सभापति क्यों और कैसे चुने गये और उन्हें किन लोगों ने चुना? और कौन जाने कहीं कामयाब हो ही गये, तो क्या कहने! आख़िर ऐसे गाँवों में वर्ग-भेद असलियत में है ही क्या? मन्ने बोला-मनाकर देखिए न! अगर वे लोग मान जाते हैं, तो इससे अच्छा क्या होगा! हमारी तरफ़ से आपको पूरी छूट है, आप जैसा भी मुनासिब समझकर करेंगे, हम मान लेंगे, इसका मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ! लेकिन एक वादा आपको भी करना होगा? -कहिए, हम करने के लिए तैयार हैं। -अगर वे लोग न मानें, तो पंचायत के निर्णय के अनुसार चाहे जैसे भी हो सती मैया का चबूतरा चार हाथ तोड़ दिया जायगा! -वैसा ही होगा, आपसे वादा करते हैं! -तो फिर आज रात तक आप उन लोगों से बातें कर लीजिए। -आप हमारे साथ उनके यहाँ नहीं चलेंगे? -नहीं, मुझे अपने साथ आप न ले जायँ। कोई ज़रूरत पड़े, तो बुला लें, आ जाऊँगा। मन्ने ने जब ये बातें मुन्नी को बतायीं, तो वह बोला-देखा तुमने यह फ़र्क़? एक सभापति मेरे भाई साहब थे और एक यह कोइरी है! सभापति बनते ही वे अपने को गाँव का हाकिम समझने लगे थे, और ठीक अंग्रेजों के जमाने के गाँव के मुखियों की तरह उन्होंने गाँववालों के साथ व्यवहार किया था। और आज यह कोइरी है कि सभापति बनते ही गाँव का सारा दुःख-दर्द अपने सिर पर ओढऩे को उद्यत है। उसकी सोयी हुई सारी नैतिकता, कत्र्तव्य-परायणता और भाईचारगी जग उठी है और वह चाहता है कि जैसे भी हो गाँव के लोगों का आपसी मनमुटाव दूर हो, उनमें एका स्थापित हो, सद््भावना उत्पन्न हो ताकि सब लोग मिलकर गाँव की भलाई के लिए कुछ काम कर सकें। यह कोई साधारण बात नहीं है, यह गाँव के भविष्य का एक संकेत है। काश, धरती के इन पुत्रों पर से सामन्ती और महाजनी राक्षस का काला साया हट जाता, तो तुम देखते, ये कितनी जल्दी आगे बढ़ जाते हैं, उन्नति कर जाते हैं और गाँवो को ख़ुशहाल बना देते हैं! -यह बात अब बहुत दिनों तक नहीं चलेगी,-मुन्नी बोला-अब गाँव की जनता जाग रही है, किसान जाग रहे हैं, उन पर जो बड़े लोगों का प्रभाव था, तेज़ी से नष्ट हो रहा है, वे अब अपनी शक्ति पहचानने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगे हैं। अबकी अकेले हमारे गाँव में ही कोइरी सभापति नहीं चुना गया है, बल्कि कई गाँवों में ऐसा हुआ है। भूतपूर्व ज़मींदार और महाजन इन चुनावों से बौखलाये हुए हैं। वे नहीं चाहते कि गाँव का नेतृत्व उनके हाथों से छीन लिया जाय। वे इन चुनावों को रद्द कराने के लिए हथकण्डे से काम ले रहे हैं किन्तु गाँव की जनता का एका बना रहा, लोगों की चेतना विकसित होती रही, और गाँव की भलाई के काम होते रहे, तो अन्तिम विजय इन्हीं की होगी। सरकार के लिए भी किशोर-काण्ड को दुहराना अब कठिन है पूरे देश के पैमाने पर जनवादी ताक़तें अब बहुत बढ़ गयी हैं। -सो तो है,-मन्ने ने कहा-लेकिन इस संघर्ष में विजय प्राप्त करना कोई सरल काम नहीं है। गाँवों के प्रायः सभी भूतपूर्व ज़मींदार और महाजन कांग्रेस मे शामिल हो गये हैं। सरकार गाँवों के लिए जो भी अनुदान या सहायता देती है, उसे यही हड़प लेते हैं और उसका उपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं। इस काम में अफ़सर उनका साथ देते हैं। तुम्हें शायद मालूम नहीं कि हमारे गाँव को ही कितने कुओं , खाद के कम्पोस्टों , बीजों, खादों, नयी तरह के हलों, मुर्गे-मुर्गियों और साँड़ों की सहायता मिली किन्तु इनसे आम किसानों का कोई भी लाभ न हुआ। सब महाजन और फ़ारम के लोग हड़प गये। -यह मसला ख़त्म होगा, तो दूसरा मसला शुरू हो जायगा। मसलों में फँसे रहना ही तो एक काम नहीं हैं। असल काम तो कोई-न-कोई चलता ही रहना चाहिए। काम से ही लोगों का उत्साह बढ़ता है, उनकी दिलचस्पी बनी रहती है रात्रि-पाठशाला की स्थापना ज़रूर हो जानी चाहिए। -सभापतिजी आज समझौता कराने में कामयाब हो गये, तो कल ही ये काम शुरू हो सकते हैं। वर्ना देखो वे क्या करते हैं। हमने तो उन्हीं पर सब छोड़ दिया है। समझौता हो जाता तो बहुत अच्छा होता। -तो चलो, उन्हीं की ओर चला जाय, शायद वे उन लोगों से बातचीत करके आ गये हों। -थोड़ी देर रुको, शायद वे यहीं आ जायँ। -नहीं, हमीं को उनके पास चलना चाहिए। शाम झुक आयी थी। बैठक में अन्धकार का साया आ चुका था। मन्ने और मुन्नी साथ रहते हैं, तो यह वक़्त उनका तालाब के किनारे गुज़रता है। लेकिन इस बार वे एक शाम भी तालाब पर न जा सके। मसला ही ऐसा आ पड़ा था कि फ़ुरसत न मिलती थी फिर भी शाम होते ही उन्हें ऐसा लगता कि तालाब उन्हें पुकार रहा है। मन्ने बोला-चलो, हम तालाब की ओर चलें। खण्ड से भिखरिया को सभापतिजी के पास समचार लाने को भेज देंगे। मेरा खयाल है कि अगर वे बातचीत कर चुके होते तो सीधे मेरे पास आते। वे उठने ही वाले थे कि बद्दे ने नीचे से पुकारकर कहा-भैया! भाभी पूछती हैं, चाय भेजें? -बोलो, क्या कहते हो? मन्ने ने पूछा-वो शिकायत कर रही थीं कि हमारे यहाँ अबकी तुमने एक बार भी न खाना खाया, न चाय पी? वो तुमसे मिलने के लिए भी बेक़रार हैं। मुन्नी को कुछ मोह-सा हो आया। फिर भी बोला-तुम्हारा क्या इरादा है? -मेरा क्या?-मन्ने बोला-तुम तो जानते हो, मुझे चाय माफ़िक नहीं पड़ती । यह तो तुम्हारे लिए उन्होंने पुछवाया है। -उन्हें कैसे मालूम कि मैं यहाँ बैठा हूँ? -जिसको दिलचस्पी होती है, वह सब मालूम कर लेता है!-हँसकर मन्ने बोला-पहले मालूम कर लिया होगा, फिर ख़बर भेजी है। बोलो! -नीचे से आवाज़ आयी-क्या कहते हैं, मैं खड़ा हूँ? -लाओ,-मन्ने ने कह दिया-लालटेन भी लेते आना। -यार, आज भी तालाब न जा सके! -आज चाँदनी रात है, चाहो तो रात को चलें। उन्हें भी रात को घूमने का बड़ा शौक़ है। मुझे तो फ़ुरसत ही नहीं मिलती। -क्या हाल-चाल हैं उनके? -ठीक हैं। जब मैं मुसीबत और परेशानी में रहता हूँ, तो वो मुझसे सिर्फ़ मुहब्बत करती है! इतनी ख़िदमत करती है कि क्या बताऊँ? -तब तो तुम्हारी मुसीबत का भी एक रौशन पहलू है!-हँसकर मुन्नी बोला-और उसके क्या हाल-चाल हैं? -उसी अजन्ता के? मन्ने ज़रा शर्मा गया। बोला-उसका भी ठीक ही है। अपने बेटे को गोद में लेकर जब वह चलती है, तो उसे देखो! -मैंने तो बहुत दिनों से उसे नहीं देखा। किस पर पड़ा है उसका बेटा? मन्ने ने मुस्कराकर कहा-उसी पर। -तभी, बेटा, तुम साफ़ बच निकले!-मुन्नी हँसकर बोला-वर्ना उसकी माई तुम्हें छोड़ने वाली न थी! अब उसके साथ तुम्हारे सम्बन्ध कैसे हैं? -कुछ नहीं,-मन्ने बोला-अब वो बातें नहीं रहीं। ...हाँ, जब कभी बच्चे को गोद में लिये उसे जाते देखता हूँ, तो जी में आता है कि उसकी गोद से बच्चे को मैं ले लूँ और उसके गाल चूम लूँ! -वह कुछ नहीं कहती? -कभी अकेले में मिल जाती है, तो मेरी ओर इशारा करके अपने बच्चे से कहती है, अब्बा! उस वक़्त उसके चेहरे की चमक देखते ही बनती है! -ससुराल नहीं गयी? -नहीं, उसका ससुर कई बार आया, लेकिन वह नहीं गयी। यहीं बनिहारी करके कमाती-खाती है। मैं भी कुछ मदद कर देता हूँ। -और, यार!-मुन्नी को सहसा ही कैलसिया की याद हो आयी-कैलसिया की कोई ख़बर नहीं मिली? -यह किसका ज़िक्र छिड़ा है? दोनों ने अचानक महशर की आवाज़ सुनकर दरवाज़े की ओर देखा। मुन्नी के मुँह से अनायास ही निकल गया-अरे! -नमस्ते!-कहती हुई महशर अन्दर चली आयी और एक ओर आड़ में फ़र्श पर बैठ गयी। मुन्नी को आश्चर्य हो रहा था, सरे शाम ही महशर कैसे घर में से निकलकर बैठक में आ गयी? ...यही महशर पहली बार रात को जब उससे मिलने पोखरे पर आयी थी, तो कैसा कुहराम मचा था! बोला-तुम्हारी हिम्मत तो क़ाबिले-दाद है! महशर कुछ कहने ही वाली थी कि बद्दे एक हाथ में चाय और नाश्ते की ट्रे और दूसरे हाथ में लालटेन लटकाये आ पहुँचा। वह रखकर चला गया, तो महशर बोली-अब दुनिया बदल गयी है। तुम्हारे साथ मुझे दिन में भी देखकर शायद ही कोई अँगुली उठाये! -यह क्या गाँव के इन्क्लाब का असर है?-हँसकर मुन्नी बोला। -यह तो तुम इनसे पूछो!-महशर ने ताना दिया-इन्क्लाब का भूत तो इनके सिर पर सवार है! अपनी हालत नहीं देखते! यह किसी शरीफ़ इन्सान की सूरत है! मँुह झुकाये मन्ने की ओर देखते हुए मुन्नी बोला-क्यों इनकी सूरत को क्या हुआ? -चाय ठण्डी हो रही है!-बीच में ही टुप से मन्ने बोल पड़ा। ट्रे की ओर हाथ बढ़ाती हुई महशर बोली-इन्हें भी शहर में क्यों नहीं बुला लेते? जो बची-खुची ज़िन्दगी है, वह तो ज़रा आराम से कटे! -अब तो ये भी गाँव में ही आने की सोच रहे है!-मन्ने बोला। -क्यों?-ताज्जुब से मुन्नी की ओर देखती हुई महशर बोली-तुम्हें यह क्या सूझ रही है, भाई? अच्छे-ख़ासे आराम की नौकरी छोडक़र यहाँ क्या झख मारने आओगे? है न एक ये, ज़िन्दगी ही बरबाद करके रख दी! तुम्हें यही राय दे रहे हैं क्या? -नहीं-नहीं, महशर!-मुन्नी बोला-ये बिलकुल झूठ बोल रहे है! इन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा, मेरी नौकरी ही छूट रही है। -क्यों?-चकित होकर महशर बोली। -मालिक की मर्ज़ी, और क्यों? -वो तो सामने ही आयगा!-मुन्नी बोला-ख़ैर, छोड़ो यह-सब, कुछ अपनी सुनाओ! -चुप भी रहो! लो, क्या खाओगे? -खाओ, यार, कुछ!-मुन्नी ने ज़ोर दिया। -फिर कह-सुन लीजिएगा, चाय पानी हो रही है! तभी नीचे से जुब्ली की पुकार सुनाई दी-मन्ने हो? सभापतिजी आये हैं। -आया!-हड़बड़ाकर मन्ने जोर से बोला-नीचे ही आ रहा हूँ!-फिर मुन्नी से बोला-तुम आराम से चाय पिओ। -नहीं!-मन्ने बोला-मैं उधर सहन में जा रहा हूँ। चाय पीकर आ जाना। -हाँ, जी आप रुकिए!-महशर बोली-अभी तो हमारी कोई बात ही नहीं हुई! कितने दिनों के बाद तो मिले हैं! नीचे हाथ में लालटेन लटकाये जुब्ली के साथ सभापतिजी खड़े थे। उनका हाथ पकडक़र दूसरी ओर सहन में ले जाते हुए मन्ने बोला-कहिए, क्या हुआ? सहन में कई चारपाइयाँ बिछी थीं। एक पर तीनों बैठ गये। थोड़ी देर तक सभापति न बोले, तो मन्ने का दिल धडक़ उठा। वही फिर बोला-आप कुछ कहते क्यों नहीं? सभापति ने अपना झुका हुआ सिर हिलाया और सूखे गले से कहा-उन लोगों से मिलने न गये होते तो अच्छा होता। मन्ने का मन भारी हो उठा। अभी तक सभापति का हाथ उसके हाथ में था, उसकी समझ में न आ रहा था कि वह उस हाथ को छोड़ दे या थामे रहे? थोड़ी देर तक ख़ामोशी छायी रही, तो ऊबकर जुब्ली बोला-क्या बात है? कुछ मुझे तो बताइए। फिर भी सभापति कुछ न बोले, तो मन्ने ने सभापति का हाथ दबाकर कहा-किसी को भेजकर दूकान से बीड़ी तो मँगवाइए। संकेत समझकर जुब्ली वहाँ से उठ गया, तो मन्ने ने सभापति का हाथ दबाकर कहा-क्या कहा उन लोगों ने? -छोड़िए उन लोगों की बात,-गिरे स्वर में सभापति ने कहा-उन लोगों की मति मारी गयी है। अब आगे हम का करें, इस पर विचार करना चाहिए। मन्ने बस इतना ही कह सका-हूँ। थोड़ी देर के लिए फिर खामोशी छा गयी। तभी गली से सिर पर अंगौछा ओढ़े, सत्तराम निकलकर उनके पास आ खड़ा हुआ और सिर से अंगौछा गर्दन के पीछे हटाकर बोला-राम-राम। -राम-राम,-मन्ने बोला-बैठो, सत्तराम। -बैठेंगे नहीं, वो आ गये हैं!-दाहिनी आँख मारकर सत्तराम बोला। -कौन?-सभापति बोले। -अवधेश बाबू,-मन्ने ने बताया। -अच्छा, तो ज़रा उधर ही जा रहे हैं,-सत्तराम बोला-आप यहीं रहेंगे न? -हाँ-हाँ,-मन्ने बोला-इधर से ही लौटना । वह चला गया, तो सभापति ने कहा-कहाँ बसना और कहाँ डसना, इसी को कहते है! सब इसी अवधेसवा का बोया हुआ है! -मालूम है,-मन्ने ने कहा-वे लोग अवधेश के बारे में भी कुछ कहते थे? -कहते थे, अवधेस बाबू कह गये हैं कि इस पंचायत को तोड़ा नहीं, तो गाँव को कभी मुँह नहीं दिखाऊँगा! महाजन होकर कोइरी-कोइलासी की हूकूमत सहने से डूब मरना अच्छा है! और कुछ सुनेंगे?-कहते-कहते क्षोभ से सभापति का स्वर काँप गया। मन्ने का दिमाग़ भन्ना उठा, लेकिन वह कुछ बोला नहीं। जुब्ली ने बीड़ी-दियासलाई लाकर मन्ने की हथेली पर रख दी, तो मन्ने ने अपनी हथेली सभापति की ओर बढ़ा दी। -लीजिए, आप बीड़ी पीजिए!-मन्ने ने कड़ा होकर कहा-सीधी अँगुली घी नहीं निकलता! जितना ही हम लोग सिहुर-सिहुर करेंगे, उतना ही उन लोगों का दिमाग़ आसमान पर चढ़ेगा। आप बेकार ही उन लोगों के पास गये। -आदमी का भरम टूटते-टूटते टूटता है, मन्ने बाबू...हम लोग अपढ़-गँवार, छोटे, नीच कौम के आदमी हैं। हमारी सीधी चाल में भी लोगों को ऐंठ निकालते देर नहीं लगती। लेकिन अब तो कोई नही कहेगा न कि हमने समझौते की कोसिस नहीं की? अब हमें आगे का रास्ता निकालना चाहिए। -तो और लोगों को भी बुला लिया जाय,-मन्ने ने कहा-सब लोग जैसा कहें। -हाँ, मुन्नी बाबू को भी जरूर बुलवा लीजिए। -यहीं कि आपके दरवाजे? -सब ठीक रहेगा!-सभापति बोले-आप जब हमारे लिए सिर देने को तैयार रहते हैं तो हमीं आप से मँुह काहे को छुपाएँ? आप यहीं सबको बुलाइए, अभी! -अच्छा, आप बीड़ी तो पीजिए। सभापति ने एक बीड़ी उठाकर उसका आधा हिस्सा अपने मुँह में डालकर दियासलाई जलायी। मन्ने ने जुब्ली से कहा-आप किसी को भेजकर...किनको-किनको बुलाया जाय, सभापतिजी? जोर के एक टान लेकर सभापति बोले-पाँच-सात ख़ास-ख़ास लोगों को बुलवा लीजिए। सुबह सूरज उगते ही स्कूल पर लोग जमा होने लगे। चमरौटिए, भटोलिए, अहिराने, कोइरियाने आदि टोले-मोहल्ले के लोग दल बाँध-बाँधकर आ जुटे। नहीं आये तो महाजन लोग और उनके कुछ खद््दुक। -हमारी पंचायत को कोई नही तोड़ सकता!-सभा में से कई आवाज़ें एक साथ उठीं। -ठीक है,-सभापति ने कहा-यह आप लोगों की पंचायत है, इसे आप लोग बनाये रखना चाहते हैं, तो इसे कोई नहीं तोड़ सकता! लेकिन इसे बनाये रखने के लिए यह जरूरी है कि जो लोग इसे तोडऩा चाहते हैं, उनका हम मुकाबिला करें। इस समय हमारे सामने एक ही सवाल है, वह यह कि पंचायत का फैसला लागू कराया जाय। जो फैसला पंचायत ने दिया है, वह आप लोगों को मालूम है। अगर आप लोग उसे लागू कराने में हमारी मदद करें, और अगर आप लोग समझते हैं कि पंचायत का फैसला ठीक नहीं है, तो आप लोग खुद जैसा मुनासिब समझें, फैसला दें और उसे लागू करवाएँ।-इतना कहकर सभापति बैठ गये। थोड़ी देर तक लोग आपस में बातचीत करते रहे। उसके बाद जीधन उठकर बोला-भाइयों! सभापतिजी ने जो बातें कही हैं, आप लोगों ने सुनीं। आप लोगों के सामने पंचायत जिम्मेदार है, आप लोग जो कहेंगे, पंचायत वही करेगी। ...हमारे देखने में पंचायत का फैसला बिलकुल मुनासिब है। दूसरा फरीक इसे जो नहीं मानता, वह इसलिए नहीं कि यह फैसला गैरमुनासिब है, बल्कि इसलिए कि वह तो पंचायत को ही नहीं मानना चाहता। वह इस फैसले को घूरे पर फेंककर पंचायत को ही नकार देना चाहता है। इस नजर से आप लोग देखें, तो यह समझना कठिन न होगा कि इस फैसले पर ही पंचायत का रहना और न रहना मुनहसर करता है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपकी पंचायत न टूटे, तो जैसे भी हो आप लोग पंचायत का फैसला लागू कराइए! एक आदमी उठकर बोला-आखिर वो लोग कहते का हैं? किसी ने उन लोगों से इसके बारे में कोई बातचीत की है? -अब कुछ बताने की जरूरत नहीं!-कई आवाज़ें गूँज उठीं-वे लोग पंचायत को ही तोडऩा चाहते हैं, इसमें कोई सन्देह नहीं! -भाइयों!-सभापति बोले-हमने किस पर कौन-सी हूकूमत चलायी है, आप लोग ही बताइए! -उन्हें आप बकने दीजिए, सभापतिजी!-रमेसर बोला-जब तक जिमिदार रहें, उन्होंने हूकूमत की, जब कांग्रेस का राज आया, तो इन महाजनों ने हम पर हूकूमत की और अब समझते हैं कि हूकूमत उनकी बपौती है! लेकिन अब वह जमाना लद गया! -फिर भाइयों,-सभापति बोले-यहाँ हुकूमत का सवाल ही कहाँ उठता है, यहाँ तो गाँव की भलाई के लिए काम करना है। गाँव के झगड़े खतम हों, सबमें मेल-जोल बढ़े, सब मिलकर गाँव की तरक्क़ी के लिए काम करें, हम तो यही चाहते हैं न? -लेकिन वे लोग तो सोचते हैं कि उनकी हुकूतम छिनी जा रही है! -भाइयों! सौ बात की एक बात यह है कि आप लोग इस बात पर विचार कीजिए कि पंचायत ने जो फैसला दिया है, उसे लागू कैसे कराया जाय? -हाँ-हाँ! असल बात तो यही है, इसी पर विचार होना चाहिए!-कई लोग बोल पड़े। -आप ही लोग कोई रास्ता सुझाइए,-सभापति ने कहा। -इसमें किसी सोच-विचार की का ज़रूरत है? सब लोग उठकर यहाँ से चलें और अपने हाथ से चबूतरा चार हाथ पीछे हटा दें। आखिर वह पंचायत की जमीन है, किसी दूसरे की तो है नहीं। -तो फिर उठा ही जाय। -चलिए! चलिए! सब लोग चलिए! और लोग धोती झाड़-झाडक़र उठ खड़े हुए। आगे-आगे सभापति और पंचायत के मेम्बर और उनके पीछे जनता की भीड़। एक जलूस ही सती मैया के चौरे की ओर चल पड़ा। रास्ते में रमेसर ने नारा दिया-सती मैया की जय! और भीड़ में जैसे जान आ गयी। चारों दिशाएँ सती मैया की जयजयकार से गूँजने लगीं। मन्ने और मुन्नी ने आँखें मिलायीं। दोनों की आँखों में एक ही भाव था, यह नारा किस दिमाग़ की उपज है, जो कानों में पड़ते ही सबके ख़ून में उबलने लगा है। जिन लोगों ने चबूतरा बनाया है, उन्हें विश्वास है कि उस चबूतरे पर कोई हिन्दू हाथ नहीं लगाएगा। उन्होंने हिन्दूओं को सती मैया के नाम पर भडक़ाने की हर कोशिश की है। और यह जनता की भीड़, जिसमें हिन्दू-ही-हिन्दू हैं, सती मैया की जयजयकार करते हुए उनका चबूतरा तोड़ने जा रही है! कोई विश्वास करेगा इस बात पर? मन्ने तो दंग था। यह अपढ़, गँवार, ग़रीब जनता है, जिसे धर्म-भीरु कहा जाता है, रूढिय़ों से चिपके रहने का जिस पर आरोप लगाया जाता है, जिसके विषय में बड़े-बड़े नेताओं को यह कहते सुना जाता है कि हमारे देश की जनता बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, हर नयी चीज़ को सन्देह की दृष्टि से देखती है, हर नयी बात से कतराती है, वह अपनी ओर से कोई नया क़दम नहीं उठा सकती और कोई नया काम उसके लिए किया जाय, तो उसमें वह कोई दिलचस्पी नहीं लेती। मुन्नी की आँखों में विस्मय से अधिक कुछ और भी था। उसका हृदय हर्षातिरेक से धडक़ रहा था। फिर एक और नया नारा गूँज उठा-सत्त की जय! सती मैया की जय से ऊपर उठकर भीड़ सत्त की, सत्य की जय-जयकार करने लगी, जैसे सती मैया के माध्यम से ही उसने सत्य को पा लिया हो। भीड़ चबूतरे के पास आ खड़ी हुई। चारों दिशाओं में जयजयकार गूँजती रही। सभापति ने चार हाथ नापकर चबूतरे पर निशान लगा दिया और लोग उतनी दूर की ईटें उठाने के लिए लपक पड़े। किसी के हिस्से एक ईट पड़ी और किसी के दो और कितने ही हाथ मलते रह गये कि इस पुण्य कार्य में भाग लेने से वंचित रह गये। ईंटें रहमान को दे दी गयीं और उसके सहन में भी एक हाथ छोडक़र लकीर खींच दी गयी। आश्चर्य! वहाँ एक चिडिय़ा भी विरोध में न बोली। रहमान ने हाथ जोडक़र सभापति से पूछा-अब हम सहन घेर लें न? सभापति ने कहा-निशान के अन्दर तुम जो चाहे करो। लोगों को शंका थी कि शायद शाम को क़स्बे से जनसंघ के स्वयंसेवक आयें, तो कोई उत्पात मचे। लेकिन उत्पात तो दूर, स्वयंसेवक उस दिन आये ही नहीं। और तीन दिन शान्ति से बीत गये, तो लोगों के सिर से एक बोझ उतर गया। फिर धूमधाम से स्कूल में रात्रि पाठशाला और सभापति की चौपाल में पुस्तकालय का उद््घाटन हुआ। मन्ने ने पहला सबक दिया। पंचायत-भवन का भी शिलान्यास हो गया। मुन्नी नौकरी पर जाने लगा, तो मन्ने ने पूछा-क्या सच ही तुम नौकरी छोडक़र गाँव में आ जाओगे? -तुम्हें यह विश्वास नहीं होता? -किसी का कोई बहुत पहले देखा स्पप्न अनायास ही सच्चा होता हुआ दिखाई दे, तो क्या उसे उसपर विश्वास हो सकता है? ...मुन्नी, तुम्हें याद है? कभी हमने एक स्वप्न देखा था, लेकिन वह वैसे ही छिन्न-भिन्न हो गया था, जैसे सूरज के निकलते ही ऊषा के रंग उड़ जाते हैं। जीवन की पहली ही ठोकर ने तुम्हें एक ओर और मुझे दूसरी ओर ठुकरा दिया। -और वही जीवन आज फिर हमें पास-पास ला रहा है। मन्ने, लगता है, जैसे हमारे जीवन क्रम में कोई ऐसा समान तत्व अवश्य था, जो हमारे दूर-दूर होते हुए भी हमें एक शृंखला में बाँधे हुए था। -उस समय हमें जीवन की क्या समझ थी! लोगों को हम कमाते-खाते देखते थे और सोचते थे हम भी कहीं एक साथ रहकर कमाये-खाएँगे। हमें क्या मालूम था कि इस कमाने-खाने के पीछे कितनी बड़ी-बड़ी मुसीबतें, कठिनाइयाँ, बाधाएँ और परेशानियाँ छुपी हुई हैं। ...आज तुम गाँव में आने को कह रहे हो, तो मेरी ख़ुशी की इन्तिहा नहीं, लेकिन मेरा मन कहता है कि तुम यहाँ मत आओ, मत आओ! -यह क्या कहते हो?-हैरान होकर मुन्नी बोला। -मन्ने!-झँुझलाकर मुन्नी बोला-आज भी तुम्हारा यह व्यर्थ का रोना ना गया, इसका मुझे बेहद रंज है! एक बात जो न हुई, तुम सोचते हो, अगर वह हो गयी होती, तो पता नहीं तुम क्या होते! यह मान भी लिया जाय कि तुम एक बड़े अफ़सर होते, मोटी तनख़ाह पाते, बंगले में रहते, कार पर चढ़ते, शान-शौकत और ऐश-आराम की ज़िन्दगी बसर करते, गोकि यह अवसर हज़ारों में एक को नसीब होता है, तो भी मैं पूछता हूँ, उससे क्या होता? क्या तुम समझते हो, वह तुम्हारे जीवन की सफलता होती? जीवन का उद्देश्य क्या सचमुच यही है? बोलो!-कहकर मुन्नी ने मन्ने की ओर देखा। मन्ने सहसा कुछ जवाब न दे सका। ज़रा देर तक ख़ामोशी छायी रही। मन्ने ने सिर झुका लिया, तो मुन्नी ने कहा-बोलते क्यों नहीं? जिस एक बात को लेकर तुम हमेशा पछताते रहते हो, उसके विषय में निधडक़ होकर क्यों नहीं कुछ कह पाते? -जीवन का एक मात्र वही उद्देश्य हो, यह तो मैं नहीं कह सकता। लेकिन इस गाँव में ही कौन-सा उद्देश्य पूरा हुआ, मेरी समझ में नहीं आता।-मन्ने ने सिर झुकाये हुए ही कहा। -क्या सच ही तुम्हारी समझ में यह नहीं आता, मन्ने?-मुन्नी ने पूछा-यह गाँव आज कहाँ से कहाँ पहुँच गया है, लोग क्या थे और अब क्या हो गये हैं, अभी-अभी तुम लोगों ने एक कितनी बड़ी लड़ाई जीती है! ...मन्ने! क्या सच ही तुम समझते हो, यह सब नगण्य है? -ऐसा तुम नहीं कह सकते!-मुन्नी ने सिर हिलाकर कहा-स्कूल की नींव रखने में ज़रूर मेरा हाथ था, लेकिन चलाया है उसे तुम लोगों ने ही, उसे लेकर जो लड़ाई शुरू हुई, वह तुम लोगों ने लड़ी है और अब भी लड़ रहे हो। -मैं न भी होता, तो भी यह लड़ाई लड़ी ही जाती। -हो सकता है, तुम्हारी यह बात एक हद तक सही हो। लेकिन मेरा यह कहना भी ग़लत नहीं कि इस लड़ाई में तुम्हारा बहुत बड़ा भाग रहा है। फिर तुम यह क्यों भूलते हो कि तुम्हारी ही वजह से स्कूल का काम शुरू हुआ था। तुम्हें याद है, तुम हिन्दू-मुस्लिम का सवाल उठाया करते थे। यह सवाल तुम्हारे लिए, हमारे लिए, पूरे गाँव के लिए हमेशा सिर-दर्द रहा है। ...आज क्या तुम यह नहीं कह सकते कि यह मसला अब हल होने के रास्ते पर आ गया है? सती मैया के चौरे पर जो दृश्य हमने-तुमने देखा है, वे क्या कोई साधारण हैं? मैंने तो कल्पना भी न की थी कि यह काम इतनी आसानी से पूरा हो जायगा। मैं सोचता था, पुलिस आयगी, जनसंघ के स्वयंसेवक आएँगे, पंचायत इन्स्पेक्टर आयगा और कुछ-न-कुछ बावेला ज़रूर मचेगा। फिर यह भी भय था कि कुछ हिन्दू ज़रूर मुख़ालिफ़त करेंगे। लेकिन किसी ओर से एक अँगुली भी न उठी, यह सोचकर अब भी कम आश्चर्य नहीं होता। चेतना की एक साधारण-सी किरण का यह प्रभाव है। तुम्हें इससे कोई प्रेरणा नहीं मिली? मन्ने ने कोई जवाब नहीं दिया। मुन्नी ही बोला-मालूम होता है, तुम अपने को कहीं-न-कहीं दबा रहे हो। खुलकर बातें नहीं करते? मुन्नी जोर से हँस पड़ा। बोला-मन्ने! मुझे तो तुम्हारे जीवन से ईष्र्या होती है। कितनी भरपूर ज़िन्दगी तुमने जी है! शुरू से अब तक तुम्हारी ज़िन्दगी एक मुसलसल जद्दोजहद रही है! ...ट्यूशन करके तुमने अपनी पढ़ाई की...बिरादरी से लडक़र और कर्ज़ काढक़र तुमने अपनी बहनों का ब्याह किया...बहन पर कोई आँच न आये, इसलिए तुमने अपनी शादी की...फिर आर्थिक कठिनाई दूर करने के लिए पढ़ाई छोडक़र तुमने नौकरी की...रिश्वत ली...फिर इश्क़ और घरेलू कलह...रोज़गार...फिर गाँव और गाँव का लम्बा संघर्ष...मन्ने! तुम्हारे साहस,जीवट, शक्ति और परिश्रम का मैं क़ायल हूँ! और तुम मेरी बात करते हो? मैं तो पहली लड़ाई में ही मार खा गया था। ख़र्चे का इन्तज़ाम न होने के कारण मैं अपनी पढ़ाई जारी न रख सका...और पहली ही बेकारी में...नहीं, मन्ने, तुम अपने को समझ नहीं रहे हो। एक झूठे सपने में पडक़र तुम यथार्थ को झुठलाने की कोशिश मत करो। मुझे तुम पर गर्व है! मुझे तुमसे प्रेरणा मिलती है और इसी कारण मैं अब गाँव में आना चाहता हूँ और तुम लोगों के साथ कुछ करना चाहता हूँ। -तुम्हारे-जैसे इन्सान कभी भी नहीं टूटते, मन्ने! तुम्हारी ज़िन्दगी इसकी गवाह है! ...और अब तो इसका सवाल ही नहीं उठता, अब तो वह ज़माना आ रहा है, जब टूटे हुए इन्सानों की भी ज़िन्दगी सँवरेगी। ...हमारा गाँव आँखें खोल चुका है। स्कूल...पंचायत...कोआपरेटिव फ़ारम...ग्राम उद्योग...हर मंजिल पर ज़िन्दगी सँवरती जायगी। ...संघर्ष साधारण नहीं, लेकिन फिर भी हमारी जीत निश्चित है। सरकार जो भी पंचायत को, गाँव को, फारम को, स्कूल को दे रही है, उसे अफ़सरों और स्वार्थी लोगों और नेताओं के पंजों से छीनकर गाँव की भलाई और तरक्क़ी के कामों में हम लोगों को लगाना है और सरकार से और अधिक सहायता माँगना है। कितने ही गाँव, संगठित रूप से यह काम करेंगे। अकेले हमारे गाँव में ही तो यह लड़ाई नहीं चल रही। थोड़ी देर की ख़ामोशी के बाद अचानक मन्ने बोला-मुन्नी! तुम शादी नहीं करोगे? सुनकर मुन्नी अचकचा-सा गया। फिर जोर से हँस पड़ा। बोला-यह अचानक तुम कहाँ से कहाँ पहुँच गये? महशर ने भी मुझसे यही बात पूछी थी। -हाँ, उसने मुझसे भी कई बार पूछा है कि तुम शादी क्यों नहीं करते? माताजी ने भी कई बार कहा है। मेरी तो राय है कि तुम ज़रूर शादी करो! -इस उम्र में तो अब यह बात भी अच्छी नहीं लगती। -अभी तुम्हारी इतनी ज्यादा उम्र थोड़े है! -क्यों नहीं? तुमसे तो मै बड़ा हूँ और तुम्हारी बेटी शम्मू अब शादी की उम्र की हुई। -मिली तो थी एक वहाँ भी, लेकिन तुमने अवसर से लाभ न उठाया। कहाँ हैं वो 'बहनजी' आजकल? चिठ्ठी-विठ्ठी आती है कि नहीं? -...में कल्चरल अटैची हैं। छठे-छमासे अब भी याद करती हैं। -छोड़ो, उन पुरानी कहानियों को याद करने से अब क्या मिलने वाला है! मुन्नी के चेहरे का भाव देख़कर मन्ने ने बात बन्द कर दी। -मुन्नी के जाने के पन्द्रह दिन बाद तहसील के जे.ओ. के यहाँ से मन्ने, जुब्ली, बद्दे, रहमान और उसके लडक़े मंसूर के नाम सम्मन आ पहुँचे। रहमान और मंसूर के नाम होने से यह बात समझने में कोई कठिनाई न पड़ी कि सती मैया के चौरे को लेकर ही उन पर कोई मुक़द्दमा दायर किया गया है। किसी हिन्दू के नाम सम्मन नहीं आया, यह जानकर मन्ने को कोई आश्चर्य न हुआ। हिन्दुओं को उससे अलग करने की यह चाल होगी। वे लोग पंचायत के ख़िलाफ़ शायद अब कोई कार्रवाई न करें। यह अच्छा ही हुआ। लेकिन सती मैया के चौरे को लेकर उन लोगों ने कैसे मुक़द्दमा खड़ा किया है, यह समझना ज़रा मुश्किल था, क्योंकि मन्ने वग़ैरा ने, जिनके नाम सम्मन आये थे, आख़िर क्या किया था? सती मैया के चौरे के पास जो चबूतरा उन लोगों ने बनाया था, उसे तो हिन्दुओं ने ही तोड़ा था। दूसरे दिन ही वह ज़िले के लिए रवाना हो गया। तहसील के जे.ओ. की कचहरी से इस्तग़ासे की नक़ल लेकर, सामने मैदान में एक पेड़ के नीचे बैठकर वह पढऩे लगा। नक़ल हिन्दी में मिली थीः मुकद्दमा फौजदारी नंशून्य तीन सौ अड़सठ थाना सिकन्दरपुर बाबत एक हज़ार नौ सौ छप्पन, किसन राम बनाम मन्ने बगैरा बइजलास जे.ओ. बाँसडीह। नाम मुस्तगीसः किसन राम पेसर नन्दन राम, साकिन पियरी, थाना सिकन्दरपुर। नाम मुल्जिमानः अवधेश, जयराम, हरखदेव, रामसागर, कैलास, इनके अलावा और भी गवाहान हैं। इस भाषा में ये बातें पढक़र मन्ने के जी में आया कि वह ठठाकर हँस पड़े। आज तक जितने मुक़द्दमे उसपर दायर किये गये थे, सबके इस्तगासे इसी प्रकार झूठे और बनावटी थे। इस इस्तगासे की कहानी तो सबसे चढ़-बढक़र थी। और अब बाक़ायदा मुक़द्दमा चलेगा, भगवान को हाज़िर-नाज़िर समझकर गवाहान बयान देंगे और उनका वकील इस झूठी कहानी को सच सिद्ध करने में अपनी सारी क़ानूनी योग्यता समाप्त कर देगा और सम्भव है कि हाकिम भी इसे सच मान ले और मुल्जि़मान को सज़ा भी हो जाय। ...हर मुक़द्दमे का इस्तग़ासा देखकर, बयान और वकीलों की बहसें सुनकर मन्ने के मन में एक ही तरह की बातें उठतीं कि आख़िर इतने बड़े झूठे तमाशे के लिए सरकार ने यह मंच, वह भी न्याय के नाम पर, क्यों खड़ा कर रखा है? सरकार इतने बड़े पैमाने पर यह झूठ का रोज़गार क्यों चला रही है? कितने बेगुनाह लोग इस काले रोजगार की चक्की में रोज़ पीस दिये जाते हैं और कितने गुनहगार साफ़-साफ़ बचकर निकल जाते हैं, इसका हिसाब क्या कोई भी कभी भी लगा सकता है? ...काश, ये हाकिम वारदात की जगह पर जाकर स्वयं सचाई का पता लगाने की कोशिश करते। ...किसी ज़माने में राजा, बादशाह, या क़ाज़ी भेष बदलकर सचाई का पता लगाने जाते थे। उस समय की न्याय-व्यवस्था निस्सन्देह आज से कहीं बेहतर होगी। आज तो क़ानून को इस तरह पेशा बना दिया गया है, उसके अंग-अंग को इस तरह दाँव-पेच से जकड़ दिया गया है, उसे एक ऐसा दिमागी कसरत का विषय बना दिया गया है, वह आज इतना यान्त्रिक हो गया है कि उससे न्याय, सच्चाई और मानवीय मूल्यों की आशा करना बालू से तेल निकालने के बराबर है। इस क़ानूनी व्यवस्था को किसी प्रकार भी जनवादी नहीं कहा जा सकता। ग़रीब जनता को कभी भी इसमें न्याय नहीं मिल सकता। ...सच्चे जनवाद की स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि इस न्याय-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन किया जाय। नये चीन की न्याय-व्यवस्था इस दिशा में हमारा पथ-प्रदर्शन कर सकती है। जन-न्यायालयों की स्थापना करके उन्होंने न्याय को कितना सीधा, सच्चा, सरल और सस्ता बना दिया है! हमारी ग्राम-पंचायतो को विकसित किया जाय, तो वे जनन्यायालयों का स्थान ले सकती हैं। आख़िर पचहत्तर फ़ी सदी से अधिक मुक़द्दमे गाँवों से ही तो आते हैं। लेकिन सरकार तो इन अदालती पंचायतों को क़ागजी ढाँचे के आगे बढ़ाना ही नहीं चाहती। मन्ने ने वहाँ से उठते हुए यह दृढ़ संकल्प किया कि अबकी अदालती पंचायत का चुनाव भी वे अवश्य लड़ेंगे। शाम को वह अपने वकील के यहाँ पहुँचा, तो उन्होंने देखते ही कहा-कोई और तोहफ़ा लाये हैं क्या? मन्ने ने नक़ल उनके आगे बढ़ाते हुए कहा-जी हाँ, उनकी मेहरबानियों के मारे तो नाक में दम आ गया है? नक़ल पर नज़र फेरते हुए वकील ने कहा-लड़ते हम हैं और परेशान आप होते हैं, ख़ूब! ...तो यह सती मैया के चौरे के बारे में है, हम तो इसका इन्तजार ही कर रहे थे। लेकिन कमबख़्तों ने इस्तग़ासा कुछ बनाया नहीं, यह तो एक फूँक भी बरदाश्त न कर पाएगा। ख़ैर, साहब, आप लोगों ने काम कमाल का किया, बधाई! -तो आपको सब मालूम हो गया है? -किसको नहीं मालूम? ...फिर जाते समय मुन्नी साहब भी मिले थे। उन्होंने पूरा क़िस्सा सुनाया था। आप लोगों ने क़िला फ़तह कर लिया, अब जमकर काम करने की ज़रूरत है। -लेकिन इन मुक़द्दमों का सिलसिला कब ख़त्म होगा, वकील साहब? -जब अवधेश बाबू का दीवाला निकल जायगा!-और वह ज़ोर से हँस पड़े। -सो तो वो और भी मोटे होते जा रहे हैं, वकील साहब! तभी कोई मुअक्किल आ गया। और वकील साहब का ध्यान बँट गया। बोले-तारीख़ के दिन ज़मानत के साथ आप लोग आ जाइएगा। मुक़द्दमे में कुछ है नहीं। अच्छा, नमस्कार! मन्ने वहाँ से स्कूल-इन्स्पेक्टर के यहाँ गया। इन्स्पेक्टर ने सलाम का जवाब देकर पूछा-क्यों, साहब, आपके गाँव के लड़कियों के स्कूल का क्या हाल है? डिप्टी ने रिपोर्ट की है कि उन्हें वहाँ न कोई मास्टरनी मिली, न लडक़ी। स्कूल की एक दीवार भी गिर पड़ी है। आप लोगों ने तो कोई रिपोर्ट मेरे पास की नहीं। -डिप्टी साहब ने सही ही रिपोर्ट दी है,-मन्ने इतना कहकर चुप हो गया। -नहीं, आप बन्द मत कीजिए। मैं जाते ही गाँव के लोगों से कहूँगा। इतना बड़ा गाँव है, पास-पड़ोस में लड़कियों का कोई स्कूल नहीं, वहाँ तो लड़कियों का एक जूनियर हाई-स्कूल भी चल सकता है। -ख़ूब!-इन्स्पेक्टर ने ताना दिया-एक प्राइमरी स्कूल तो चलता ही नहीं, आप जूनियर हाई स्कूल की बात करते हैं! यह स्कूल बनवाया किसने था कि इतने ही दिन में उसकी एक दीवार भी गिर गयी। कमबख़्त रुपया खा गया क्या? -छोड़िए वह-सब । अब जैसे भी हो आप लोग वह स्कूल चलाइए। मेरे लिए भी यह कम शर्मिन्दगी की बात नहीं कि एक स्कूल टूट जाय। मरम्मत के लिए जितने पैसे की जरूरत हो, आप बताएँ। मैं मंजूर करा दूँगा। -आप ग्राम सभापति के नाम स्कूल के बारे में एक हिदायत दे दें, तो हमें सहूलियत होगी। -मैं कल ही भिजवा दूँगा। -और अपने स्कूल के बारे में कहिए। -सब आपकी मेहरबानी है। दूसरे दिन मन्ने पहली मोटर से वापस आ रहा था। हमेशा वह क़स्बे में उतरकर गाँव जाता था। उस दिन वह घूरी के टोले पर ही उतर गया और वहाँ से फ़ारम होकर घर जाने की सोची। सुबह वह कोआपरेटिव इन्स्पेक्टर से मिला था और कोआपरेटिव फ़ारम खोलने के विषय में उनसे बातें की थीं। उनकी बातों से उसे बड़ी आशा बँधी थी। वह जल्दी-से-जल्दी सब बातें जुब्ली को बता देना चाहता था। धान के खेतों को पारकर वह बाग़ में पहुँचा, तो देखा, सामने से समरनाथ आ रहा था। क़स्बे के स्कूल का सीधा और नज़दीक का रास्ता इधर से ही था। समरनाथ शायद आज देर से स्कूल जा रहा था। बाग़ बहुत पुराना था। बहुत ही बूढ़े-बूढ़े, बड़े-बड़े,बेडौल आम के पेड़ थे। काले-काले, ऊँचे-ऊँचे तनों के ऊपर उनमें बहुत ही कम डालियाँ रह गयी थीं, जिनके सिरों पर थोड़ी हरियाली दिखाई देती थी। पेड़ों के बीच से, इधर-उधर पगडण्डी की लीक साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर भी कोई ज़रा भी बेध्यान होकर उसपर चले, तो किसी-न-किसी पेड़ के तने से ज़रूर टकरा जाय। मन्ने ने देखा कि समरनाथ की चाल में अकड़ और चेहरे पर सख़्ती आ गयी है। दूर से ही एक बार उनकी आँखें मिलीं, तो मन्ने को ऐसा भी लगा कि समरनाथ का नथुना कुछ फूला हुआ है। समरनाथ की उच्छृंखलता गाँव में मशहूर है। कभी-कभी वह ऐसे काम भी कर गुज़रता है, जो ठीक दिल-दिमाग़ का आदमी नहीं कर सकता। पच्चीस के क़रीब की उम्र है, हड्डी मज़बूत, लेकिन शायद पर्याप्त और पौष्टिक भोजन न मिलने से शरीर पतला रह गया है, इसी कारण उसका मियाना क़द भी देखने में कुछ ऊँचा लगता है। रंग गेंहुआ, दाढ़ी-मूँछ और सिर के बाल बढ़े हुए, अधमैला पैजामा और आधी आस्तीन की वैसी ही क़मीज़, पाँवों में पुरानी चप्पलें। पहली ही दृष्टि में कोई भी उसे अद्र्धविक्षिप्त कह सकता है। लाला के सबसे छोटे पट्टीदार का लडक़ा है। उनके घराने की कभी बहुत ही अच्छी हालत थी, लेकिन समरनाथ के नालायक़ बाप ने सब फूँककर ताप लिया। हालत बिगड़ने लगी, तो कलकत्ता में दूकान खोली। उस वक़्त समरनाथ बनारस युनिवर्सिटी में बी.एस-सी. फाइनल में पढ़ रहा था। उसके बाप ने उसे कलकत्ता बुला लिया। समरनाथ के जीवन में कलकत्ता जाना ही ज़हर हो गया। अच्छा-ख़ासा लडक़ा, वहाँ सेठों के लडक़ों के चक्कर में पड़ गया और उसका दिमाग़ खराब हो गया। वह उम्दा-से-उम्दा कपड़ा पहनता और सिनेमा-थिएटर देखता और बदनाम गलियों का चक्कर लगाता। उसका ख़याल था कि उसके बाप के पास बहुत पैसा है, वह जैसे चाहे रह सकता है। लेकिन एक दिन उसके बाप ने अपनी स्थिति से उसका परिचय कराया और कहा कि घर में जो थोड़ा-बहुत सोना था, उसी को बेंचकर उसने यह दूकान खोली है। यह दूकान अन्तिम अवलम्ब है, समरनाथ इस तरह रुपये बर्बाद करेगा, तो एक दिन दीवाला निकल जायगा। इसलिए यह जरूरी है कि समरनाथ कोई काम करे, कोई नौकरी ढूँढ़े, दूकान की आमदनी के भरोसे न रहे। यह सुनना था कि समरनाथ बिगड़ पड़ा। उसने बाप को बड़ी गालियाँ सुनाई। और साफ़-साफ़ कह दिया कि दादा-परदादा की कमाई से तुमने बहुत मजे किये हैं, अब जो-कुछ बच गया है, उसका मालिक मैं हूँ, तुम ख़ुद अपने लिये कोई काम ढूँढ़ो। इसपर कई दिन तक बाप-बेटे के बीच बातचीत बन्द रही। बाप ने आस-पास के बुजुर्गों से बेटे को समझाने के लिए कहा और इसका नतीजा एक रात यह हुआ कि समरनाथ ने बिगडक़र अपने बाप को पीटा और उसे दूकान से निकाल दिया। बाप जैसे सब-कुछ गवाँकर गाँव में वापस आ गया। लेकिन किसी से इस झगड़े के बारे में कुछ भी नहीं कहा। कई महीने वह गाँव में रह गया, तो लोगों को कुछ सन्देह हुआ। पूछने पर उसने बताया कि समरनाथ एम. एस.-सी. पढ़ रहा है और साथ ही दूकान भी देख रहा है, मुनीम और आदमी हैं ही। घर सम्हालने के लिए वह यहाँ आ गया है। ...फिर होनी कुछ ऐसी हुई कि पटना के इन्जीनियर रामाधार प्रसाद अपनी लडक़ी के लिए अच्छे घराने के एक पढ़े-लिखे लडक़े की खोज में इस ज़िले आये और वहाँ से अवधेश की राय से उसके साथ इस गाँव में पहुँचे। बिरादरी में पढ़े-लिखे लडक़ों की बेहद कमी थी। इन्जीनियर अपनी लडक़ी को डाक्टरी पढ़ा रहे थे। यहाँ समरनाथ की बात सुनी, उसका घर-द्वार देखा, तो बहुत ख़ुश हुए। वे अवधेश और समरनाथ के बाप को लेकर कलकत्ता गये और समरनाथ को देखते ही उस पर रीझ गये। बात पक्की करने के लिए उन्होंनें छेंका की रस्म भी तुरन्त पूरी कर दी। इन्जीनियर चले गये, तो मुनीम ने दूकान का कच्चा चिठ्ठा समरनाथ के बाप के सामने रखा और कहा-यह दूकान अब बहुत दिनों तक नहीं चल सकती। इससे अच्छा है कि आप दूकान किसी के हाथ बेंच दें और उससे जो-कुछ मिल जाय, उसे ही बहुत समझें, वर्ना कुछ दिनों के बाद कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। समरनाथ के बाप ने दूकान की छान-बीन की और काग़ज-पतर देखा तो वह भी इसी नतीजे पर पहुँचा। उसे क्रोध तो बहुत आया, लेकिन समरनाथ से कुछ कहने का साहस उसे न हुआ। उसने उससे इतना ही कहा-जो किया, वह बहुत अच्छा किया। अब कोई पूछे तो कह देना बीमार हो जाने के कारण पढ़ाई छोडऩी पड़ी, अगले साल फिर युनिवर्सिटी में नाम लिखाएँगे। इन्जीनियर की बेटी से उसकी शादी हो रही है, वह डाक्टरी पढ़ रही है, यह जानकर समरनाथ की ख़ुशी का ठिकाना न था। उसने बाप की बात तुरन्त मान ली और गाँव वापस आ गया। समरनाथ किसी कलकतिया सेठ के बेटे की तरह कपड़े झाडक़र इधर गाँव की गलियों की रौनक़ बढ़ाने लगा और उधर बाप ने अपनी खिचड़ी पकानी शुरू की । वह समरनाथ को समझ चुका था। उससे हाथ धो लेना ही उसने ठीक समझा। उसके दो छोटे-छोटे लडक़े और थे, बीवी थी, उनके गुज़र का सवाल उसके सामने था। दूकान बेंचकर वह सीधे पटना पहुँचा और इन्जीनियर के सामने अपनी कुछ शर्तें पेश कर दीं। इन्जीनियर के पास धन था। वे ख़ुद भी अपनी लडक़ी की शादी में अच्छा ख़र्चा करना चाहते थे। उन्होंने समरनाथ के बाप की सब शर्तें बिना किसी हुज्जत के मान लीं। पुरोहित बुलाये गये। शादी की तारीख़ पक्की हो गयी। समरनाथ का बाप बिदा होने लगा, तो शर्त के अनुसार इन्जीनियर ने उसके हाथ पर पाँच हज़ार के नोट रख दिये और कहा-बरात का पूरा ख़र्च मैं शादी के वक़्त दे दूँगा और लडक़ी की डाक्टरी की पढ़ाई का पूरा ख़र्च भी मेरे ही ज़िम्मे रहेगा। आप किसी बात की चिन्ता न करें। शादी हो गयी। दुलहिन ससुराल में सात दिन रहकर अपने भाई के साथ घर चली गयी। उसके आठ-दस दिन बाद मालूम हुआ कि बाप-बेटे में लड़ाई हो गयी है। बाप ने बेटे से कह दिया है कि वह अपना अलग इन्तजाम कर ले। एक दिन सुना गया कि समरनाथ ने अपने बाप को कई डण्डे मारे हैं। लोगों ने बीच में पडक़र उसे हटाया न होता, तो शायद वह अपने बाप की जान लेकर ही छोड़ता। बाप ने घर में उसका खाना-पीना बन्द कर दिया, तो समरनाथ ने अलग्यौझा कराने के लिए बिरादरी को बटोरा। बाप ने सबके सामने टाट उलट दिया और कहा कि बाँटने-चुटने के लिए उसके पास एक दमड़ी भी नहीं है। ले-देकर एक घर रह गया है, उसमें वह अपना हिस्सा ले ले। बिरादरी क्या करती? ...उसके बाद समरनाथ का काम गाँव में बडऱाना और अपने बाप को कोसना और गाली देना रह गया। कोई उसे मना करता, तो वह उसे भी गाली देने लगता और लड़ने पर आमादा हो जाता। ...लोग उसे पागल कहने लगे। फिर समरनाथ को क़स्बे के स्कूल में पचास रुपये की नौकरी मिल गयी। अब जिससे भी वह मिलता, एक ही बात कहता-गाँव में पहली कार मेरी ही आएगी। बस, मेरी पत्नी के डाक्टरी पास करने की देर है!-गाली-गुफ्ता, लड़ाई-झगड़ा उसके लिए मामूली बात थी। कार का सपना लेते हुए भी जाने क्यों वह हमेशा सारी दुनियाँ पर झल्लाया रहता। गाँव का स्कूल चल निकला, तो उसने बहुत चाहा कि उसकी भी वहाँ नियुक्ति हो जाय। लेकिन गाँव के लोग उसके आचरण से परिचित थे। नियुक्ति-कमेटी के किसी भी सदस्य ने उसके नाम की सिफ़ारिश न की। समरनाथ का ख़याल था कि मन्ने ही उसके विरुद्ध है। और वह तब से स्कूल के साथ मन्ने की भी जड़ खोदने में लग गया था। कैलास वग़ैरा दम देकर हर मामले में उसे आगे-आगे रखते थे। मन्ने पगडण्डी छोडक़र एक ओर से चलने लगा। नंगे से चार हाथ दूर रहना ही अच्छा! लेकिन समरनाथ की आवाज़ आयी-ए मुसल्ला! तू अपनी हरकत से बाज़ नहीं आएगा? सुनकर मन्ने का शरीर जल उठा। उसके सामने का पैदा हुआ यह लौंडा, किस तरह बात करता है! लेकिन ग़म खाकर, सिर गाड़े वह चलता रहा, जैसे कुछ सुना ही न हो। छाते की डण्डी पर उसका हाथ ज़रूर कुछ कुछ सख़्त हो गया। समरनाथ और तेज़ होकर चिल्लाया-सुनता नहीं, ए मुसल्ला? मन्ने फिर भी चलता रहा। भभकती आग को छाती में दबाये रहा। समरनाथ दौडक़र, उसके पास आ बोला-कान में रूई ठुसी है क्या? मन्ने से अब न रहा गया। रुककर, उससे सीधे आँख मिलाकर बोला-क्या बात है? -बात सुनाई नहीं दी है?-अकडक़र समरनाथ बोला। -कैसी बात?-वैसे ही घूरते हुए मन्ने ने पूछा। -अपनी हरकत से बाज आओ! -क्या मतलब? -समझ में नहीं आता? -स्कूल छोड़ दो! पंचायत तोड़ दो! सती मैया का चौरा जोड़ दो! -वर्ना मन्ने का सिर फोड़ दो! यही न?-गर्म होकर मन्ने बोला। -हाँ!-समरनाथ ने दबंगई के साथ कहा। -बस? या और कुछ कहना है? समरनाथ के होंठ फडफ़ड़ाकर रह गये। वह हत् बुद्धि-सा मन्ने का मुँह तकने लगा, सहसा उसके मुँह से कोई बात ही नहीं निकली। मन्ने ने क़दम आगे बढ़ा दिये। दस क़दम जाने पर पीछे से समरनाथ की आवाज़ आयी-यह हमारी पहली और आख़िरी चेतावनी है! -सुन ली, सुन ली!-मन्ने ने मुडक़र, छाता उसकी ओर उठाकर कहा और फिर चल पड़ा। थोड़ी दूर आगे बढक़र मन्ने ने चलते हुए ही पीछे मुडक़र देखा, तो समरनाथ अब भी बाग़ में ही खड़ा था। मन्ने को खटका हुआ, यह वहाँ खड़ा क्यों है? थोड़ा और आगे बढक़र देखा, तो समरनाथ उसके पीछे-पीछे आ रहा था। मन्ने का खटका बढ़ गया, शायद इसके मन में कुछ है। लेकिन फ़ारम का हाता और स्कूल अब पास ही थे, मन्ने के लिए घबराने की कोई बात न थी। यों भी समरनाथ के लिए अकेला मन्ने भी काफ़ी था। समरनाथ में दबंगई और नंगापन चाहे जितना हो, लेकिन दम कुछ नहीं, यह सभी जानते थे। फ़ारम की घेराई के फाटक पर खड़े होकर मन्ने ने देखा, तो समरनाथ पगडण्डी छोडक़र लपकता हुआ, खेतों को लाँघता हुआ गाँव की ओर चला जा रहा था। ओसारे में से जुब्ली ने पुकारा-वहाँ खड़े-खड़े क्या देख रहे हो? घर से आ रहे हो, या बाहर-ही बाहर? मन्ने ने अन्दर मुड़ते हुए कहा-बाहर-ही-बाहर। -टोले पर उतर गये थे क्या? -हम लोग तो कल शाम को ही तुम्हारा इन्तज़ार कर रहे थे। -क्यों? ख़ैरियत तो?-खटिया पर बैठते हुए मन्ने बोला। -तुम्हें कैसे मालूम? -अभी समरनाथ से मुलाक़ात हुई थी। -यहीं बाग़ में। -वही जुलूस के आगे-आगे था। -नहीं, कुछ हुआ नहीं। हम लोगों को डर तो था, लेकिन सती मैया की तरफ़ जलूस गया ही नहीं। सभापतिजी के साथ हम लोग पोखरे पर जमा हो गये थे। -अवधेश बाबू यहीं हैं? -हाँ! कल रात को उनके यहाँ मीटिंग भी हुई थी। रात को सत्तराम कई बार तुमसे मिलने आया था। -कुछ कहता था? -मुझसे कुछ नहीं कहा। तुम्हीं को ढूँढ़ रहा था। -खैर, अब वहाँ की सुनिए। कोआपरेटिव इन्स्पेक्टर से मैं मिला था। वे हर तरह की मदद देने को तैयार हैं। कम-से-कम बीस मेम्बर होने चाहिए। कितने हैं अभी आपके फ़ारम में? -तो सात किसानों को और मेम्बर बनाइए। फिर रजिस्ट्रेशन कराके बाक़ायदे काम शुरू कर दिया जाय। आज शाम को सभापतिजी से कहकर किसानों की एक मीटिंग कराइए। -बहुत अच्छा! ...इस्तग़ासे की नक़ल मिली? -हाँ, वकील साहब को दे आया हूँ। उसमें कोई दम नहीं है। तारीख़ के दिन ज़मानतदारों के साथ चलना है। ज़मानतदार आप ठीक कर लीजिएगा। -कर लेंगे। -और कोई बात? -मुझे कुछ नहीं होगा, जुब्ली भाई! ...अच्छा, मैं चलता हूँ। सभापतिजी से आप ज़रूर मिल लीजिएगा! -अभी खाना खाने जाएँगे, तो मिल लेंगे! घेराई के फाटक पर आकर मन्ने फिर रुक गया। सामने ही एक लाल झण्डा गड़ा था। उसने पुकारकर पूछा-जुब्ली भाई, यह झण्डा कैसा गड़ा है? -अरे, मैं तो तुम्हें बताना ही भूल गया!-लपककर उसके पास आ जुब्ली ने कहा-अभी एक घण्टे पहले नहरवाले आये थे। नहर निकल रही है! घाघरा से निकलकर, इधर से होते हुई सुरहा में जा मिलेगी। वही झण्डा गाड़ गये हैं। कहते थे, जल्दी ही खुदाई शुरू होनेवाली है। -सच?-मन्ने का चेहरा ख़ुशी से चमक उठा। उसने अपना हाथ जुब्ली की ओर बढ़ा दिया। उसका हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर जुब्ली बोला-हाँ-हाँ! -यह तो आपने बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी सुनाई, जुब्ली भाई! किसानों को मालूम है? -ज़रूर मालूम हो गया होगा। -मालूम हो गया होगा के क्या माने? गाँव के किसानों को नहरवालों ने बुलाया नहीं था क्या? -तुम बुलाने की बात कहते हो? वो लोग तो जीप पर आँधी की तरह आये और झण्डा गाडक़र तूफ़ान की तरह चले गये। यहाँ बस लडक़ों और मास्टरों की भीड़ लगी थी। मैं पहुँचा, तब तक जीप आगे बढ़ गयी थी। वह तो प्रिन्सिपल साहब ने बताया कि नहर महकमे के अफ़सर थे, नहर निकलने वाली है, नहर के रास्ते का निशान लगा रहे हैं। -अजीब अहमक़ हैं सब!-मन्ने ने आश्चर्य से भरके कहा- जिनके लिए नहर निकल रही है, उनसे बात भी नहीं की सबों ने! -सभी महकमों के अफ़सरों का यही हाल है!-जुब्ली ने कहा-तभी तो सरकार के किसी भी काम में जनता कोई दिलचस्पी नहीं लेती। सब अफ़सर ऊपर-ही-ऊपर तैरते हैं, धरती छूने का नाम ही नहीं लेते। -ठीक है, लेकिन इससे कमबख्त अफ़सरों का क्या नुक़सान होता है, बल्कि उन्हें तो माल मारने में और भी आसानी हो जाती है। अफ़सोस इस बात का है कि सरकार अपने अफ़सरों पर ही विश्वास करती है, जनता पर नहीं। लेकिन जनता को इस तरह उदासीन नहीं रहना चाहिए, आख़िर काम तो उन्हीं के फ़ायदे के लिए होते हैं। अगर जनता दिलचस्पी लेने लगे, तो इन अफ़सरों को भी ठीक किया जा सकता है। -जनता में चेतना आने दीजिए, जुब्ली भाई! फिर तो आप देखेंगे कि कैसे इन अफ़सरों और इनकी सरकार को ठीक किया जाता है! ख़ैर, नहर निकल रही है, यह बहुत बड़ी बात है! मन्ने वहाँ से चला, तो उसकी आँखे झण्डे पर ही टिकी थीं। वह अपने को झण्डे के पास जाने से न रोक सका। झण्डे के छोटे बाँस पर हाथ रख उसने पूरब की ओर देखा। बहुत दूर चटियल मैदान में एक और झण्डा दिखाई पड़ रहा था और उसके आगे एक और...और जैसे मन्ने की आँखों के आगे नहर का हिलोर लेता हुआ पानी बहने लगा...कल-कल...छल-छल...मन्ने ने अपने जीवन में यह स्वप्न कब देखा था? लेकिन इस घड़ी उसे लग रहा था, जैसे उसने जीवन में बस एक यही स्वप्न देखा था और वह आज पूरा हो गया, तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है, जैसे उसका जीवन ही सार्थक हो गया, मन-प्राण, सब तृप्त, जैसे आजीवन भूखे को भर पेट सुन्दर भोजन मिल गया हो। -नमस्कार! सेक्रेटरी साहब! पीछे से प्रिन्सिपल के शब्द कानों में पड़े, तो मन्ने का जैसे सपना टूटा, लेकिन उत्तर में उसके मुँह से कोई शब्द नहीं निकला। उसका सिर बस ज़रा-सा हिल गया। -नहर निकल रही है!-ख़ुशी से दाँतों की पंक्तियाँ चमकाते हुए प्रिन्सिपल बोले। मन्ने ने फिर वैसे ही गूँगे की तरह सिर हिला दिया। -अगले वर्ष इण्टर में भी एग्रिकल्चर खोलवाइए। इस परती पर अब तो कालेज का भी एक छोटा-सा फ़ारम खोला जा सकता है। आपका गाँव बड़ा भाग्यशाली है! मन्ने ने फिर उसी तरह सिर हिलाया, तो प्रिन्सिपल ने आँखे सिकोडक़र जाने कैसी नज़रों से उसे देखा। फिर बोले-आप कुछ बोलते क्यों नहीं? मन्ने ने फिर उसी तरह सिर हिलाया और गाँव की तरफ़ मुड़ गया। प्रिन्सिपल अचकचाये-से उसका मुँह निहारते उसके साथ-साथ चलने लगे। स्कूल पास आ गया, तो मन्ने ने मुँह खोला, फिर भी जैसे सूखे गले से आवाज़ न निकल रही हो, इस तरह बोला-प्रिन्सिपल साहब,-खाँसकर ज़रा देर बाद मन्ने ने कहा-आज मैं बहुत ख़ुश हूँ्! यह नहर नहीं निकलने जा रही है, गाँव के सूखे जिस्म को खून मिलने जा रहा है! ...आप ज़रूर एग्रिकल्चर खोलवाइए...फ़ारम खोलवाइए! ...मुन्नी बाबू आ रहे हैं, वही अब स्कूल का काम देखेंगे। मैं तो अब गाँव का काम देखूँगा...कोआपरेटिव फ़ारम...पंचायत...कोई ग्राम उद्योग...बहुत काम बढ़ जायगा, प्रिन्सिपल साहब! ...हमारा गाँव अब पुराना गाँव नहीं रहेगा...आप इसका भावी रूप देख रहे हैं न? -उनकी भी आँखें, खुलेंगी, प्रिन्सिपल साहब! इस गाँव के इतिहास में महाजनों के पुरखों के बड़े ही शानदार रोल रहे हैं। आप समझते हैं, इनके जिस्म में उनका खून नहीं? -उसकी रीढ़ की हड्डी तो सती मैया के चौरे ने तोड़ दी, प्रिन्सिपल साहब। -कुच्छ नहीं, प्रिन्सिपल साहब, वह कुच्छ नहीं! ...गाँव ने रास्ता बदल दिया है! अब इसे अपने रास्ते से कोई भी नहीं हटा सकता! जो इस रास्ते पर नहीं चलेगा, या इस रास्ते में किसी भी प्रकार की रुकावट डालेगा, ख़ुद अपनी मौत को दावत देगा! परती की हद आ चुकी थी। प्रिन्सिपल साहब ने कहा-आप बिलकुल ठीक कहते हैं, सेक्रेटरी साहब! ...भगवान इन लोगों को सद्बुद्धि दे! ...अच्छा, अब मुझे इजाज़त दें। नमस्कार! क़स्बे के अस्पताल के सहन में खटोले पर मन्ने की आँखे खुलीं, तो उसने कई चेहरे अपने ऊपर झुके हुए देखे ...सभापति...बाबू साहब...जीवन... बसमतिया...जुब्ली...प्रिन्सिपल...और उनके पीछे अनगिनत चेहरे। -डाक्टर साहब! इन्हें होश आ गया!-यह जुब्ली बोला था। -होश आ गया, सो तो ठीक है, लेकिन आप लोग हटिए। हवा आने दीजिए। घेरे रहने से आप लोगों को क्या मिलता है? डाक्टर ने उसकी कलाई पर हाथ रखकर नब्ज़ देखी। मन्ने ने होंठो पर जीभ फेरकर कहा-पानी। -अभी लाते हैं,-डॉक्टर की धीमी आवाज़ आयी-कोई जाकर जल्दी दूध लाये। -अभी लाते हैं!-कहता हुआ जीधन क़स्बे की ओर दौड़ पड़ा। डाक्टर चला गया, तो मन्ने की आँखें फिर बाबू साहब पर ठहर गयीं। बाबू साहब उसके मुँह पर झुक आये, तो वह बोला-मुन्नी को तार दे दें। सिर उठाकर बाबू साहब ने कहा-मुन्नी बाबू को तार देने को कह रहे हैं। इस वक़्त तो डाकख़ाना बन्द हो गया होगा। -तार बाबू पाँच बजे तक रहते हैं!-मजमे में से किसी की आवाज आयी-आप लपककर चले जायँ, तो मिल जाएँगे! बाबू साहब चले गये, तो मन्ने की नज़र जुब्ली पर जा ठहरी। संकेत समझ कर जुब्ली झुका, तो मन्ने ने कहा-महशर को ख़बर भेजवा दें, मैं ठीक हूँ। -अच्छा-अच्छा!-कहकर जुब्ली ने मजमे के पास आकर पुकारा-भिखरिया! -आप लोग हटे नहीं?-डाक्टर की आवाज़ फिर सुनाई दी-आप लोग तो बात ही नहीं सुनते!-फिर मन्ने के होंठों के अन्दर गिलास की बार घुसेड़ते हुए उन्होंने कहा-पानी लीजिए! मन्ने ग़ट-ग़ट पी चुका, तो डाक्टर ने गिलास हटा लिया। मुँह बनाकर मन्ने बोला-यह क्या था, डाक्टर साहब? -कुछ नहीं, आप चुपचाप आराम से सो जाइए! 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सरकार ने पोस्ट ऑफिस की कई योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में इजाफा किया है। जिसमें RD Scheme भी शामिल है। योजना में अधिक ब्याज का मतलब है अधिक मुनाफा। तो आइए जानते हैं, आरडी स्कीम कैसे आपको लाखों का मुनाफा करवा सकती है।
Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस नागरिकों कॉ सुरक्षित और फायदेमंद निवेश का ऑप्शन देता है। जिसके लिए कई योजनाएं भी उपलब्ध हैं। इन्हीं में से एक रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम (RD Scheme) है। इस स्कीम का लाभ बच्चों से लेकर बड़े तक उठा सकते हैं। हाल ही में सरकार ने ब्याज दरों में इजाफा करने का ऐलान भी कर दिया है। इसका मतलब है अब निवेशकों को पहले से भी ज्यादा मुनाफा होगा। 30 जून 2023 तक के लिए ब्याज दरें 6. 2 फीसदी हैं।
योजना 5 से लेकर 10 सालों में मैच्योर होती है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से इनवेस्टमेंट कर सकते हैं। कोई भी भारतीय नागरिक मात्र 100 रुपये से आरडी स्कीम के लिए अकाउंट खुलवा सकता है। बाद में 10 रुपये के मल्टीपल में इसे बढ़ाया भी जा सकता है। पहली बार में खाता 5 सालों के लिए खुलता है। लेकिन मैच्योरिटी पूरी होने के बाद निवेशक इसे एक्सटेन्ड भी करवा सकता है। अकाउंट में डिपॉजिट रकम पर जो भी ब्याज बनता है, उसे हर तिमाही के अंत में जोड़ा जाता है।
नेशनल सेविंग्स रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम में एडवांस डिपॉजिट की सुविधा भी उपलब्ध होती है। जिसमें आप 12 महीनों के लिए भी पैसा एक साथ जमा कर सकते हैं। मान लीजिए यदि कोई निवेशक एक साथ 1 लाख रुपये का निवेश सकता है। फिर उसे 6. 2 फीसदी ब्याज मिलता है। मैच्योरिटी पूरी होने पर उसे 70,43,272 रुपये का रिटर्न मिलेगा। जिसमें से 10,43,272 रुपये केवल इंटरेस्ट होगा। बता दें कि इस स्कीम में चक्रवृद्धि ब्याज का फॉर्मूला लागू होता। 30 जून के बाद सरकार ब्याज दरों की समीक्षा करके इसमें फिर से बदलाव कर सकता है।
(Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है। MP Breaking News किसी भी योजना में निवेश करने की सलाह नहीं देता। )
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सरकार ने पोस्ट ऑफिस की कई योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में इजाफा किया है। जिसमें RD Scheme भी शामिल है। योजना में अधिक ब्याज का मतलब है अधिक मुनाफा। तो आइए जानते हैं, आरडी स्कीम कैसे आपको लाखों का मुनाफा करवा सकती है। Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस नागरिकों कॉ सुरक्षित और फायदेमंद निवेश का ऑप्शन देता है। जिसके लिए कई योजनाएं भी उपलब्ध हैं। इन्हीं में से एक रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम है। इस स्कीम का लाभ बच्चों से लेकर बड़े तक उठा सकते हैं। हाल ही में सरकार ने ब्याज दरों में इजाफा करने का ऐलान भी कर दिया है। इसका मतलब है अब निवेशकों को पहले से भी ज्यादा मुनाफा होगा। तीस जून दो हज़ार तेईस तक के लिए ब्याज दरें छः. दो फीसदी हैं। योजना पाँच से लेकर दस सालों में मैच्योर होती है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से इनवेस्टमेंट कर सकते हैं। कोई भी भारतीय नागरिक मात्र एक सौ रुपयापये से आरडी स्कीम के लिए अकाउंट खुलवा सकता है। बाद में दस रुपयापये के मल्टीपल में इसे बढ़ाया भी जा सकता है। पहली बार में खाता पाँच सालों के लिए खुलता है। लेकिन मैच्योरिटी पूरी होने के बाद निवेशक इसे एक्सटेन्ड भी करवा सकता है। अकाउंट में डिपॉजिट रकम पर जो भी ब्याज बनता है, उसे हर तिमाही के अंत में जोड़ा जाता है। नेशनल सेविंग्स रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम में एडवांस डिपॉजिट की सुविधा भी उपलब्ध होती है। जिसमें आप बारह महीनों के लिए भी पैसा एक साथ जमा कर सकते हैं। मान लीजिए यदि कोई निवेशक एक साथ एक लाख रुपये का निवेश सकता है। फिर उसे छः. दो फीसदी ब्याज मिलता है। मैच्योरिटी पूरी होने पर उसे सत्तर,तैंतालीस,दो सौ बहत्तर रुपयापये का रिटर्न मिलेगा। जिसमें से दस,तैंतालीस,दो सौ बहत्तर रुपयापये केवल इंटरेस्ट होगा। बता दें कि इस स्कीम में चक्रवृद्धि ब्याज का फॉर्मूला लागू होता। तीस जून के बाद सरकार ब्याज दरों की समीक्षा करके इसमें फिर से बदलाव कर सकता है।
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रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में बड़े पैमाने पर शराब भी बनाई जा रही है। जो आए दिन मौत का कारण बन रही है। रविवार देर रात बेगूसराय के पोखरिया मोहल्ले में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पोखरिया निवासी जदयू नेता 45 वर्षीय मनोज पासवान के अलावा 40 वर्षीय सुनील राउत, 31 वर्षीय सोनू कुमार तथा लोहियानगर झोपड़पट्टी निवासी 35 वर्षीय प्रदीप पासवान शामिल हैं। मृतकों के परिजनों ने सबूत को मिटाने के लिए आनन-फानन में शव की अंत्येष्टि कर दी। जबकि पुलिस ने सुनील राउत के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
शराब पीने से हो रही मौत सरकार, पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठा रही है। जब राज्य में शराबबंदी है तो लोगों तक शराब कैसे पहुंच रही है। पुलिस क्या कर रही है। सरकार की खुफिया एजेंसी क्यों सक्रिय नहीं है। क्या सरकार का काम आदेश जारी करने तक ही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जदयू नेता मनोज पासवान आदतन नशेड़ी था। वह नशा के लिए एक कंपनी का सर्जिकल स्प्रिट का इस्तेमाल के साथ-साथ शराब भी पीता था। मनोज पासवान शहर के पोखरिया स्थिति पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बगल वाली सड़क में अपना अड्डा बनाए हुए था। रविवार को उसने अपने अड्डे पर पहले अपने साथियों के साथ स्प्रिट पीया था। इसके बाद चारों ने मिलकर गांधी स्टेडियम में बैठकर शराब पी थी।
स्टेडियम में शराब पीने के बाद वह चारों अपने-अपने घर चले गए। घर पहुंचते ही सबसे पहले सुनील की तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में उसके परिजन ने उसे इलाज के लिए ग्लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां उसकी मौत हो गई। फिर रात्रि में ही मनोज पासवान एवं सोनू कुमार की मौत हो गई। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि प्रदीप पासवान की स्थिति बिगड़ने पर उसके घरवालों ने उसे शहर के किसी निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया जहां उसकी स्थिति को बदतर होता देख उसके परिवार वाले उसे लेकर कहीं और चले गए। जहां उसकी मौत हो गई।
मौत मामले की जांच करने पहुंचे मुंगेर डीआइजी जितेंद्र मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नगर थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह एवं एक सेक्टर प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया। डीआइजी ने बताया कि तीन लोगों की मौत होने की पुष्टि हो रही है। वहीं एक अन्य के मौत की पुष्टि नहीं हो पाई है।
किडनी भी खराब थी। जिसका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।
सर्जिकल स्प्रिट की खाली बोतलों से यह पता चलता है कि इसका भी इस्तेमाल नशे के सामान के रूप में धड़ल्ले से किया जा रहा है। उन्होंने कड़े शदों में कहा कि डीएम एवं एसपी को उक्त सर्जिकल स्प्रिट की अवैध बिक्री की जांच का निर्देश दिया गया है।
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रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में बड़े पैमाने पर शराब भी बनाई जा रही है। जो आए दिन मौत का कारण बन रही है। रविवार देर रात बेगूसराय के पोखरिया मोहल्ले में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पोखरिया निवासी जदयू नेता पैंतालीस वर्षीय मनोज पासवान के अलावा चालीस वर्षीय सुनील राउत, इकतीस वर्षीय सोनू कुमार तथा लोहियानगर झोपड़पट्टी निवासी पैंतीस वर्षीय प्रदीप पासवान शामिल हैं। मृतकों के परिजनों ने सबूत को मिटाने के लिए आनन-फानन में शव की अंत्येष्टि कर दी। जबकि पुलिस ने सुनील राउत के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। शराब पीने से हो रही मौत सरकार, पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठा रही है। जब राज्य में शराबबंदी है तो लोगों तक शराब कैसे पहुंच रही है। पुलिस क्या कर रही है। सरकार की खुफिया एजेंसी क्यों सक्रिय नहीं है। क्या सरकार का काम आदेश जारी करने तक ही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जदयू नेता मनोज पासवान आदतन नशेड़ी था। वह नशा के लिए एक कंपनी का सर्जिकल स्प्रिट का इस्तेमाल के साथ-साथ शराब भी पीता था। मनोज पासवान शहर के पोखरिया स्थिति पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बगल वाली सड़क में अपना अड्डा बनाए हुए था। रविवार को उसने अपने अड्डे पर पहले अपने साथियों के साथ स्प्रिट पीया था। इसके बाद चारों ने मिलकर गांधी स्टेडियम में बैठकर शराब पी थी। स्टेडियम में शराब पीने के बाद वह चारों अपने-अपने घर चले गए। घर पहुंचते ही सबसे पहले सुनील की तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में उसके परिजन ने उसे इलाज के लिए ग्लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां उसकी मौत हो गई। फिर रात्रि में ही मनोज पासवान एवं सोनू कुमार की मौत हो गई। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि प्रदीप पासवान की स्थिति बिगड़ने पर उसके घरवालों ने उसे शहर के किसी निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया जहां उसकी स्थिति को बदतर होता देख उसके परिवार वाले उसे लेकर कहीं और चले गए। जहां उसकी मौत हो गई। मौत मामले की जांच करने पहुंचे मुंगेर डीआइजी जितेंद्र मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नगर थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह एवं एक सेक्टर प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया। डीआइजी ने बताया कि तीन लोगों की मौत होने की पुष्टि हो रही है। वहीं एक अन्य के मौत की पुष्टि नहीं हो पाई है। किडनी भी खराब थी। जिसका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सर्जिकल स्प्रिट की खाली बोतलों से यह पता चलता है कि इसका भी इस्तेमाल नशे के सामान के रूप में धड़ल्ले से किया जा रहा है। उन्होंने कड़े शदों में कहा कि डीएम एवं एसपी को उक्त सर्जिकल स्प्रिट की अवैध बिक्री की जांच का निर्देश दिया गया है।
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VARANASI: रोडवेज के पास से चल रही डग्गामार बसों पर नकेल कसने के लिए भले ही रोडवेज के आरएम परेशान हों लेकिन पुलिस की हीलाहवाली से डग्गामार बसों पर नकेल लगना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि डीआईजी संजय कक्कड़ ने रोडवेज के आसपास से चल रही डग्गामार बसों के खिलाफ हुई कार्रवाई की डिटेल एसएसपी से मांगी है। इस बाबत डीआईजी ने एसएसपी को लेटर लिख डग्गामार बसों के खिलाफ हुए एक्शन की रिर्पोट देने को कहा है।
दरअसल कुछ दिन पहले रोडवेज के आरएम पीके तिवारी ने डीआईजी संजय कक्कड़ से मुलाकात कर कम्प्लेन की थी कि उनकी तरफ से एक लिस्ट एसएसपी को दी गई थी। इस लिस्ट में रोडवेज के पास से चल रही लगभग क्भ्0 बसों के नंबर्स मौजूद थे। जिसके बाद एसएसपी ने इन बसों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी। बावजूद इसके इन बसों का संचालन जारी है। जिसके कारण रोडवेज को नुकसान सहना पड़ रहा है। इसे देखते हुए डीआईजी ने रोडवेज के पास से चल रही डग्गामार बसों पर हुए एक्शन की जानकारी एसएसपी से मांगी है और लिखित आदेश दिया है कि आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और सिविल पुलिस की टीमें बनाकर डग्गमार बसों के खिलाफ कार्रवाई हो। जिससे डग्गामार बसों पर नकेल कसी जा सके।
डग्गामार बसें काफी पहले से रोडवेज के पास से संचालित हो रही हैं लेकिन इनको लेकर हंगामा तब हुआ जब पिछले दिनों एक डग्गामार बस का ड्राइवर और खलासी रोडवेज के आरएम से भिड़ गया। रोडवेज के आरएम संग हुई बदसलूकी के बाद रोडवेज कर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए खुद डग्गामार बसों को भगाने की बात कही थी। जिसके बाद पुलिस और आरटीओ ने अभियान चलाकर डग्गामारी पर नकेल कसने के दावे किए थे लेकिन ये दावे हवा हवाई साबित हुए।
डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई को कहा गया है। लोकल पुलिस के साथ आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की टीम डग्गामार बसों को पकड़ेंगी।
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VARANASI: रोडवेज के पास से चल रही डग्गामार बसों पर नकेल कसने के लिए भले ही रोडवेज के आरएम परेशान हों लेकिन पुलिस की हीलाहवाली से डग्गामार बसों पर नकेल लगना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि डीआईजी संजय कक्कड़ ने रोडवेज के आसपास से चल रही डग्गामार बसों के खिलाफ हुई कार्रवाई की डिटेल एसएसपी से मांगी है। इस बाबत डीआईजी ने एसएसपी को लेटर लिख डग्गामार बसों के खिलाफ हुए एक्शन की रिर्पोट देने को कहा है। दरअसल कुछ दिन पहले रोडवेज के आरएम पीके तिवारी ने डीआईजी संजय कक्कड़ से मुलाकात कर कम्प्लेन की थी कि उनकी तरफ से एक लिस्ट एसएसपी को दी गई थी। इस लिस्ट में रोडवेज के पास से चल रही लगभग क्भ्शून्य बसों के नंबर्स मौजूद थे। जिसके बाद एसएसपी ने इन बसों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी। बावजूद इसके इन बसों का संचालन जारी है। जिसके कारण रोडवेज को नुकसान सहना पड़ रहा है। इसे देखते हुए डीआईजी ने रोडवेज के पास से चल रही डग्गामार बसों पर हुए एक्शन की जानकारी एसएसपी से मांगी है और लिखित आदेश दिया है कि आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और सिविल पुलिस की टीमें बनाकर डग्गमार बसों के खिलाफ कार्रवाई हो। जिससे डग्गामार बसों पर नकेल कसी जा सके। डग्गामार बसें काफी पहले से रोडवेज के पास से संचालित हो रही हैं लेकिन इनको लेकर हंगामा तब हुआ जब पिछले दिनों एक डग्गामार बस का ड्राइवर और खलासी रोडवेज के आरएम से भिड़ गया। रोडवेज के आरएम संग हुई बदसलूकी के बाद रोडवेज कर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए खुद डग्गामार बसों को भगाने की बात कही थी। जिसके बाद पुलिस और आरटीओ ने अभियान चलाकर डग्गामारी पर नकेल कसने के दावे किए थे लेकिन ये दावे हवा हवाई साबित हुए। डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई को कहा गया है। लोकल पुलिस के साथ आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की टीम डग्गामार बसों को पकड़ेंगी।
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आईपीएल के (ipl auction live updates) 15वें एडिशन के लिए मेगा ऑक्शन का आयोजन बेंगलुरु में, इस बार लीग में लखनऊ सुपजाइंट्स (Lucknow Super Giants) और गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) सहित कुल 10 टीमें हिस्सा (new team ipl mega auction ) लेंगी. इस दौरान श्रीलंकाई ऑलराउंडर की बेस प्राइस 1 करोड़ रुपये थी. वहीं श्रीलंका और दुनिया भर की टी20 लीग्स में हसरंगा ने काफी प्रभावित किया और उसका असर आज नीलामी में देखने को मिल रहा है.
इसी के साथ हैदाराबाद, पंजाब किंग्स, आरसीबी के बीच उनके लिए टक्कर चल रही है और बोली 7. 75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. वहीं दूसरी तरफ दीपक हुड्डा के लिए राजस्थान, आरसीबी, मुंबई, सीएसके, लखनऊ के अलावा हैदराबाद ने भी बोली लगाई गई हालाँकि लखनऊ ने बाजी मार ली. हुड्डा को 5. 75 करोड़ रुपये में खरीदा. इसी के साथ हर्षल पटेल के लिए हैदराबाद ने हाथ पीछे खींच लिए और 10. 75 करोड़ रुपये में पटेल आरसीबी के हो गए. वहीं इन सभी के बीच ऑक्शन के दौरान हादसा हो गया और बोलते-बोलते नीलामीकर्ता गिर गए.
आप सभी को बता दें कि देवदत्त पडिक्कल के लिए राजस्थान के बाजी मार ली और 7. 75 करोड़ रुपये में अपने साथ शामिल किया. वहीं दूसरी तरफ जेसन रॉय 2 करोड़ रुपये मे गुजरात टाइटंस के हुए. इसी के साथ रॉबिन उथप्पा को चेन्नई सुपर किंग्स ने बेस प्राइस 2 करोड़ रुपये में लिया है. इसी तरह अभी बोली जारी है.
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आईपीएल के पंद्रहवें एडिशन के लिए मेगा ऑक्शन का आयोजन बेंगलुरु में, इस बार लीग में लखनऊ सुपजाइंट्स और गुजरात टाइटंस सहित कुल दस टीमें हिस्सा लेंगी. इस दौरान श्रीलंकाई ऑलराउंडर की बेस प्राइस एक करोड़ रुपये थी. वहीं श्रीलंका और दुनिया भर की टीबीस लीटरग्स में हसरंगा ने काफी प्रभावित किया और उसका असर आज नीलामी में देखने को मिल रहा है. इसी के साथ हैदाराबाद, पंजाब किंग्स, आरसीबी के बीच उनके लिए टक्कर चल रही है और बोली सात. पचहत्तर करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. वहीं दूसरी तरफ दीपक हुड्डा के लिए राजस्थान, आरसीबी, मुंबई, सीएसके, लखनऊ के अलावा हैदराबाद ने भी बोली लगाई गई हालाँकि लखनऊ ने बाजी मार ली. हुड्डा को पाँच. पचहत्तर करोड़ रुपये में खरीदा. इसी के साथ हर्षल पटेल के लिए हैदराबाद ने हाथ पीछे खींच लिए और दस. पचहत्तर करोड़ रुपये में पटेल आरसीबी के हो गए. वहीं इन सभी के बीच ऑक्शन के दौरान हादसा हो गया और बोलते-बोलते नीलामीकर्ता गिर गए. आप सभी को बता दें कि देवदत्त पडिक्कल के लिए राजस्थान के बाजी मार ली और सात. पचहत्तर करोड़ रुपये में अपने साथ शामिल किया. वहीं दूसरी तरफ जेसन रॉय दो करोड़ रुपये मे गुजरात टाइटंस के हुए. इसी के साथ रॉबिन उथप्पा को चेन्नई सुपर किंग्स ने बेस प्राइस दो करोड़ रुपये में लिया है. इसी तरह अभी बोली जारी है.
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अर्चना पूरन सिंह ने राजा हिंदुस्तानी से जुड़ा किस्सा शेयर किया है. (फोटो साभारः यूट्यूब/Kapil Sharma)
द कपिल शर्मा शो (The Kapil Sharma Show), टीवी जगत का एक ऐसा शो है, जिसमें आए दिन मनोरंजन जगत से लेकर खेल जगत तक के सितारे शिरकत करते नजर आ जाते हैं. शो में अक्सर जानी-मानी हस्तियां अपनी फिल्मों और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के प्रमोशन के लिए पहुंचती हैं, जहां इन सितारों से जुड़े कई किस्सों पर भी चर्चे होते हैं. ऐसा ही शो की जज अर्चना पूरन सिंह (Archana Puran Singh) के साथ भी हुआ. हाल ही में उन्होंने 1996 में आई आमिर खान (Aamir Khan) और करिश्मा कपूर (Karishma Kapoor) स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म राजा हिंदुस्तानी (Raja Hindustani) से जुड़ा एक ऐसा किस्सा शेयर किया, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा.
राजा हिंदुस्तानी में अर्चना पूरन सिंह ने आरती सहगल (करिशमा कपूर) की सौतेली मां शालू सहगल का किरदार निभाया था. कपिल शर्मा शो में खुलासा किया है कि जब वह राजा हिंदुस्तानी की शूटिंग कर रही थीं, उन दिनों वह प्रेग्नेंट थीं. द कपिल शर्मा शो के एक नए अनसेंसर्ड वीडियो में अर्चना पूरन सिंह को इस बारे में खुलासा करते देखा जा सकता है.
दरअसल, शो में पहुंचीं 'द व्हिसलब्लोअर' एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि जब वह 2011 में सिंघम के लिए शूटिंग कर रही थीं, वह उन दिनों प्रेग्नेंट थीं. सोनाली कुलकर्णी के किस्से ने अर्चना पूरन सिंह को उस समय की याद दिला दी जब वह प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने राजा हिंदुस्तानी के सेट पर मिनीस्कर्ट में डांस किया 'अभी तो मैं जवान हूं' गाना भी गाया.
उन्होंने 'द व्हिसलब्लोअर' की कास्ट और कपिल शर्मा को बताया कि शूटिंग के दौरान निर्देशक धर्मेश दर्शन ने उनसे पूछा कि क्या वह ब्रेक लेना चाहती हैं, क्योंकि वह उनका इंतजार करने के लिए तैयार थे, लेकिन अर्चना फिल्म में देरी नहीं करना चाहती थीं. इसके बाद वह बताती हैं कि कैसे उन्होंने मिनी स्कर्ट पहनकर डांस किया.
अर्चना पूरन सिंह इस किस्से के बारे में बात करते हुए कहती हैं- 'मिनी स्कर्ट पहन कर मैं रैकेट ऐसे-ऐसे घुमा रही हूं और गाना गा रही हूं, अभी तो मैं जवान हूं. ' सोशल मीडिया पर द कपिल शर्मा शो का यह 'अनसेंसर्ड' वीडियो अब वायरल हो रहा है. जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर अर्चना पूरन सिंह की तारीफ किए बिना नहीं रह पा रहे हैं.
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Asia Cup 2023: वर्ल्ड कप से पहले ही भारत-पाकिस्तान में टक्कर, 2 हफ्ते में 3 बार मुकाबला, जानें कैसे?
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अर्चना पूरन सिंह ने राजा हिंदुस्तानी से जुड़ा किस्सा शेयर किया है. द कपिल शर्मा शो , टीवी जगत का एक ऐसा शो है, जिसमें आए दिन मनोरंजन जगत से लेकर खेल जगत तक के सितारे शिरकत करते नजर आ जाते हैं. शो में अक्सर जानी-मानी हस्तियां अपनी फिल्मों और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के प्रमोशन के लिए पहुंचती हैं, जहां इन सितारों से जुड़े कई किस्सों पर भी चर्चे होते हैं. ऐसा ही शो की जज अर्चना पूरन सिंह के साथ भी हुआ. हाल ही में उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में आई आमिर खान और करिश्मा कपूर स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म राजा हिंदुस्तानी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा शेयर किया, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा. राजा हिंदुस्तानी में अर्चना पूरन सिंह ने आरती सहगल की सौतेली मां शालू सहगल का किरदार निभाया था. कपिल शर्मा शो में खुलासा किया है कि जब वह राजा हिंदुस्तानी की शूटिंग कर रही थीं, उन दिनों वह प्रेग्नेंट थीं. द कपिल शर्मा शो के एक नए अनसेंसर्ड वीडियो में अर्चना पूरन सिंह को इस बारे में खुलासा करते देखा जा सकता है. दरअसल, शो में पहुंचीं 'द व्हिसलब्लोअर' एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि जब वह दो हज़ार ग्यारह में सिंघम के लिए शूटिंग कर रही थीं, वह उन दिनों प्रेग्नेंट थीं. सोनाली कुलकर्णी के किस्से ने अर्चना पूरन सिंह को उस समय की याद दिला दी जब वह प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने राजा हिंदुस्तानी के सेट पर मिनीस्कर्ट में डांस किया 'अभी तो मैं जवान हूं' गाना भी गाया. उन्होंने 'द व्हिसलब्लोअर' की कास्ट और कपिल शर्मा को बताया कि शूटिंग के दौरान निर्देशक धर्मेश दर्शन ने उनसे पूछा कि क्या वह ब्रेक लेना चाहती हैं, क्योंकि वह उनका इंतजार करने के लिए तैयार थे, लेकिन अर्चना फिल्म में देरी नहीं करना चाहती थीं. इसके बाद वह बताती हैं कि कैसे उन्होंने मिनी स्कर्ट पहनकर डांस किया. अर्चना पूरन सिंह इस किस्से के बारे में बात करते हुए कहती हैं- 'मिनी स्कर्ट पहन कर मैं रैकेट ऐसे-ऐसे घुमा रही हूं और गाना गा रही हूं, अभी तो मैं जवान हूं. ' सोशल मीडिया पर द कपिल शर्मा शो का यह 'अनसेंसर्ड' वीडियो अब वायरल हो रहा है. जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर अर्चना पूरन सिंह की तारीफ किए बिना नहीं रह पा रहे हैं. . Asia Cup दो हज़ार तेईस: वर्ल्ड कप से पहले ही भारत-पाकिस्तान में टक्कर, दो हफ्ते में तीन बार मुकाबला, जानें कैसे?
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२६४ । काव्यशात्र
क्रियाकलाप उनके चरित्र पर प्रकाश डालता है, अत उनके राजीवना, यथायंता एवं आकर्षण होना चाहिए । चरित्र चित्रण की कुशल इसी बात में है कि उपन्याग का पाठक विभिन्न पात्रों को सरलता से पहच के और उनसे तादाम्य स्थापित कर सके। एक आलोचक ने लिखा है---
"मनुष्य प्रकृति के विभिन्न पक्ष और स्तरो के सूक्ष्म अध्ययन और कम कम शब्दों में चित्र को पूरा-पूरा उपस्थित कर सकने की योग्यता ही स वरित चित्रण की कमोटी है।" चरित्र चित्रण की मफलता के लिए पात्रों कथानक के अनुकूल ही प्रस्तुत करना चाहिए और उनमें मौलिक्ता, सजीव एवं स्वाभाविकता की सृष्टि करनी चाहिये। इस हेतु कलाकार को मानवजा को मनोदशाओ, प्रकृतियों एव परिस्थितियों का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए । चरित्रों के प्रकार
चरित्रचित्रण की विभिन्न पद्धतियाँ प्रचलित हैं, किन्तु मुख्यरूप में वा नात्मक प्रणाली और अभिनयात्मक प्रणाली, ये दो पद्धतियाँ प्रचलित हैं। को यथासम्भव दोनोगे समुचित लाभ उठाना चाहिए । सामान्यतया चरि ४ प्रकार के होते हैं -- (१) वर्गप्रधान चरित्र (२) व्यक्तिप्रधान चरित्र (= आदर्श चरित्र (४) यथार्थ चरित्र । वर्गप्रधान चरित्रो में जातीय विशेषता की प्रधानता होती है, व्यक्तिप्रधान चरित्रो मे स्वतन्त्र रूप से व्यक्तिगत वि पत्ताये अकित की जाती है । आदर्श चरित्र में किसी पात्र विशेष के जीवन आदर्शवादी दृष्टिकोण की प्रतिष्ठा की जाती है और यथार्थवादी चरित्रों पात्र विशेष के माध्यम से जीवन की यथायंता का अकन किया जाता है। इसमे पाग देव, असुर अथवा मानव, किसी भी कोटि के हो सकते हैं । ३. कथोपकथन
उपन्यास के कथोपकथन नाटकादि की तुलना में विस्तृत होते हैं, लेखक को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि कथोपकथन सगत, सजी एवं स्वाभाविक हो । अधिक लम्बे कथोपकथन नीरस लगने लगते हैं। उनक मार्थकता इस बात में है कि वे पात्रो के व्यक्तित्व का प्रकाश करते हो औ क्रम को भी गति देते हो । कथोपकथन से उपन्यास में नाटकीयता
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दो सौ चौंसठ । काव्यशात्र क्रियाकलाप उनके चरित्र पर प्रकाश डालता है, अत उनके राजीवना, यथायंता एवं आकर्षण होना चाहिए । चरित्र चित्रण की कुशल इसी बात में है कि उपन्याग का पाठक विभिन्न पात्रों को सरलता से पहच के और उनसे तादाम्य स्थापित कर सके। एक आलोचक ने लिखा है--- "मनुष्य प्रकृति के विभिन्न पक्ष और स्तरो के सूक्ष्म अध्ययन और कम कम शब्दों में चित्र को पूरा-पूरा उपस्थित कर सकने की योग्यता ही स वरित चित्रण की कमोटी है।" चरित्र चित्रण की मफलता के लिए पात्रों कथानक के अनुकूल ही प्रस्तुत करना चाहिए और उनमें मौलिक्ता, सजीव एवं स्वाभाविकता की सृष्टि करनी चाहिये। इस हेतु कलाकार को मानवजा को मनोदशाओ, प्रकृतियों एव परिस्थितियों का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए । चरित्रों के प्रकार चरित्रचित्रण की विभिन्न पद्धतियाँ प्रचलित हैं, किन्तु मुख्यरूप में वा नात्मक प्रणाली और अभिनयात्मक प्रणाली, ये दो पद्धतियाँ प्रचलित हैं। को यथासम्भव दोनोगे समुचित लाभ उठाना चाहिए । सामान्यतया चरि चार प्रकार के होते हैं -- वर्गप्रधान चरित्र व्यक्तिप्रधान चरित्र यथार्थ चरित्र । वर्गप्रधान चरित्रो में जातीय विशेषता की प्रधानता होती है, व्यक्तिप्रधान चरित्रो मे स्वतन्त्र रूप से व्यक्तिगत वि पत्ताये अकित की जाती है । आदर्श चरित्र में किसी पात्र विशेष के जीवन आदर्शवादी दृष्टिकोण की प्रतिष्ठा की जाती है और यथार्थवादी चरित्रों पात्र विशेष के माध्यम से जीवन की यथायंता का अकन किया जाता है। इसमे पाग देव, असुर अथवा मानव, किसी भी कोटि के हो सकते हैं । तीन. कथोपकथन उपन्यास के कथोपकथन नाटकादि की तुलना में विस्तृत होते हैं, लेखक को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि कथोपकथन सगत, सजी एवं स्वाभाविक हो । अधिक लम्बे कथोपकथन नीरस लगने लगते हैं। उनक मार्थकता इस बात में है कि वे पात्रो के व्यक्तित्व का प्रकाश करते हो औ क्रम को भी गति देते हो । कथोपकथन से उपन्यास में नाटकीयता
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कुदरत का एक साधारण सा नियम है। जो इस दुनिया में जन्म लेता है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। धर्म ग्रंथों में मरने के बाद स्वर्ग और नरक जाने की बात कही गई है। वहीं कुछ ग्रंथ ये भी बताते हैं कि कैसे व्यक्ति को परलोक में कष्टों का सामना करना पड़ता है। इन कष्टों को यमदंड भी कहा जाता है।
इन कष्टों से बचने का उपाय गरुड़ पुराण में देखने को मिल जाता है। इसमें बताया गया है कि यदि मरने से पहले व्यक्ति के पास 4 चीजें हो तो उसे परलोक में कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति के प्राण सहजता से चले जाते हैं। वह स्वर्ग में सुख भोगता है। तो चलिए जानते हैं कि वे कौन सी 4 चीजें हैं जो मरने के पहले आपके पास होनी चाहिए।
तुलसीः हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है। तुलसी को देवी का दर्जा प्राप्त है। इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। आप ने नोटिस किया होगा कि जब कोई व्यक्ति मरने वाला होता है तो उसके माथे पर तुलसी की पत्तियां लगाई जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि वह यमदंड से बच सके। मान्यताओं की माने तो मरने वाले के सिर के पास यदि तुलसी का पौधा होता है तो उसकी आत्मा शरीर त्यागने के पश्चात यमदंड से बच जाती है।
गंगाजलः मरने से पहले गंगाजल को मुख में रखने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसकी वजह ये है कि गंगाजल शुद्ध होता है। इसे पीने से आपका शरीर भी शुद्ध हो जाता है। इस तरह आप शुद्धतापूर्वक अपना शरीर त्यागते हैं। इसका लाभ यह होता है कि आप यमलोग में दंड के भागीदार नहीं बनते हैं। इसलिए व्यक्ति के अंतिम समय में उसे गंगाजल में तुलसी डालकर देना चाहिए।
श्रीमद्भागवतः जीवन के अंतिम पलों में व्यक्ति को श्री भागवत अथवा अपने किसी धर्मग्रंथ का पाठ करना चाहिए। इससे वह सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है। ऐसे में जब वह अपना शरीर त्यागता है तो उसे डायरेक्ट मुक्ति मिल जाती है और यमदंड का सामना करना नहीं पड़ता है। उसे इस पाठ से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वहीं कुछ लोगों को पुनर्जन्म मिलता है।
दानः यदि कोई व्यक्ति मरने की स्थिति में है तो उससे दान कराना शुभ होता है। अपने अंतिम समय में दान धर्म करने से प्राण सरलता से निकल जाते हैं। ऐसा कर हमे परलोक में भी किसी कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता है।
दोस्तों यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर कर उनका ज्ञान भी जरूर बढ़ाएं।
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कुदरत का एक साधारण सा नियम है। जो इस दुनिया में जन्म लेता है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। धर्म ग्रंथों में मरने के बाद स्वर्ग और नरक जाने की बात कही गई है। वहीं कुछ ग्रंथ ये भी बताते हैं कि कैसे व्यक्ति को परलोक में कष्टों का सामना करना पड़ता है। इन कष्टों को यमदंड भी कहा जाता है। इन कष्टों से बचने का उपाय गरुड़ पुराण में देखने को मिल जाता है। इसमें बताया गया है कि यदि मरने से पहले व्यक्ति के पास चार चीजें हो तो उसे परलोक में कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति के प्राण सहजता से चले जाते हैं। वह स्वर्ग में सुख भोगता है। तो चलिए जानते हैं कि वे कौन सी चार चीजें हैं जो मरने के पहले आपके पास होनी चाहिए। तुलसीः हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र माना जाता है। तुलसी को देवी का दर्जा प्राप्त है। इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। आप ने नोटिस किया होगा कि जब कोई व्यक्ति मरने वाला होता है तो उसके माथे पर तुलसी की पत्तियां लगाई जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि वह यमदंड से बच सके। मान्यताओं की माने तो मरने वाले के सिर के पास यदि तुलसी का पौधा होता है तो उसकी आत्मा शरीर त्यागने के पश्चात यमदंड से बच जाती है। गंगाजलः मरने से पहले गंगाजल को मुख में रखने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसकी वजह ये है कि गंगाजल शुद्ध होता है। इसे पीने से आपका शरीर भी शुद्ध हो जाता है। इस तरह आप शुद्धतापूर्वक अपना शरीर त्यागते हैं। इसका लाभ यह होता है कि आप यमलोग में दंड के भागीदार नहीं बनते हैं। इसलिए व्यक्ति के अंतिम समय में उसे गंगाजल में तुलसी डालकर देना चाहिए। श्रीमद्भागवतः जीवन के अंतिम पलों में व्यक्ति को श्री भागवत अथवा अपने किसी धर्मग्रंथ का पाठ करना चाहिए। इससे वह सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है। ऐसे में जब वह अपना शरीर त्यागता है तो उसे डायरेक्ट मुक्ति मिल जाती है और यमदंड का सामना करना नहीं पड़ता है। उसे इस पाठ से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। वहीं कुछ लोगों को पुनर्जन्म मिलता है। दानः यदि कोई व्यक्ति मरने की स्थिति में है तो उससे दान कराना शुभ होता है। अपने अंतिम समय में दान धर्म करने से प्राण सरलता से निकल जाते हैं। ऐसा कर हमे परलोक में भी किसी कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता है। दोस्तों यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर कर उनका ज्ञान भी जरूर बढ़ाएं।
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हमीरपुर- जिला हमीरपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को जिला के जाहू और टौणी देवी से ताल्लुक रखने वाले दो युवकों में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इन नए मामलों के बाद जिला में अब तक कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 114 पहुंच गया है। इनमें से 74 केस एक्टिव हैं। जबकि नौ मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और एक कोरोना संक्रमित की मौत हो चुकी है। बुधवार को जो कोरोना पॉजिटिव दो नए मामले सामने आए हैं। उनमें टौणी देवी के बारी मंदिर का एक युवक शामिल है जोकि दिल्ली से आया था। जबकि दूसरा 25 वर्षीय युवक भोरंज के जाहू क्षेत्र से है जोकि पंजाब के मोहाली से लौटा है। इनमें एक युवक को अणु में जबकि दूसरे को जाहू में संस्थागत क्वारंटाइन किया गया था।
इनके सैंपल की रिपोर्ट बुधवार सायं पहुंची, जिसमें इनमें पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। बता दें कि प्रदेश का सबसे छोटा जिला हमीरपुर इस वक्त कोरोना संक्त्रमण के मामलों में सबसे आगे चला हुआ है। अब तक 114 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि जिला में हो चुकी है, लेकिन सुखद बात यह भी है कि मरीजों के ठीक होने का आंकड़ा भी अब तेजी से बढ़ने लगा है। मंगलवार को एक साथ नौ लोगों के स्वस्थ होने की पुष्टि हुई थी। ऐसे में जिला में अब कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वाले मरीजों का आंकड़ा नौ पहुंच गया है।
दो युवक दिल्ली-पंजाब से आए कोरोना संक्रमित Reviewed by Himachal Fast News on 04 June Rating:
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हमीरपुर- जिला हमीरपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को जिला के जाहू और टौणी देवी से ताल्लुक रखने वाले दो युवकों में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इन नए मामलों के बाद जिला में अब तक कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा एक सौ चौदह पहुंच गया है। इनमें से चौहत्तर केस एक्टिव हैं। जबकि नौ मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और एक कोरोना संक्रमित की मौत हो चुकी है। बुधवार को जो कोरोना पॉजिटिव दो नए मामले सामने आए हैं। उनमें टौणी देवी के बारी मंदिर का एक युवक शामिल है जोकि दिल्ली से आया था। जबकि दूसरा पच्चीस वर्षीय युवक भोरंज के जाहू क्षेत्र से है जोकि पंजाब के मोहाली से लौटा है। इनमें एक युवक को अणु में जबकि दूसरे को जाहू में संस्थागत क्वारंटाइन किया गया था। इनके सैंपल की रिपोर्ट बुधवार सायं पहुंची, जिसमें इनमें पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। बता दें कि प्रदेश का सबसे छोटा जिला हमीरपुर इस वक्त कोरोना संक्त्रमण के मामलों में सबसे आगे चला हुआ है। अब तक एक सौ चौदह लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि जिला में हो चुकी है, लेकिन सुखद बात यह भी है कि मरीजों के ठीक होने का आंकड़ा भी अब तेजी से बढ़ने लगा है। मंगलवार को एक साथ नौ लोगों के स्वस्थ होने की पुष्टि हुई थी। ऐसे में जिला में अब कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वाले मरीजों का आंकड़ा नौ पहुंच गया है। दो युवक दिल्ली-पंजाब से आए कोरोना संक्रमित Reviewed by Himachal Fast News on चार जूनe Rating:
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मेघा उपाध्याय/इंदौर. इंदौर का प्रसिद्ध स्मारक राजवाड़ा मरम्मत के बाद बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित बन चुका है. अब यह स्मारक पर्यटक के साथ-साथ जिले के रहवासियों को भी मंत्रमुग्ध कर रहा है. फोटो और वीडियो बनाने के प्रतिबंध हटने के बाद अब स्थानीय लोग महल फोटोशूट और प्री वेडिंग शूट करने पहुंच रहे हैं. बता दें पहले संस्कृति विभाग ने यहां पर कई प्रतिबंध लगे हुए थे, जो अब हटाए जा चुके हैं.
यहां पर 5000 रुपए के शुल्क के साथ कोई भी व्यक्ति प्री वेडिंग फोटोशूट या अन्य फोटोशूट करवा सकता है, लेकिन उसके लिए पहले केयरटेकर से बात करनी होगी. प्रोफेशनल फोटोशूट के दौरान आपको स्मारक की साफ- सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है, वरना आपको जुर्माने का भुगतान भी करना पड़ सकता है.
दिन में अगर आप स्मारक को सिर्फ घूमने के लिए चुन रहे हैं तो आपको 20 रुपए की टिकट खरीदनी होगी जिसमें नॉर्मल मोबाइल फोन से फोटो शूट कर सकते है. इसके अलावा रात में यहां पर नाइट में लाइट शो होता है जो बेहद ही आकर्षक और खूबसूरत नजारा होता है, जिसका शुल्क 100 रुपए प्रति व्यक्ति है. इस दौरान स्मारक के बीचो बीच चौक में रंग-बिरंगे फुहारों के साथ लाइट जलती है और म्यूजिक भी सुनाई देती है. इसकी शुरुआत भारतीय प्रवासी दिवस के दौरान की गई थी और तभी से यहां पर लोगों का जमावड़ा रात के समय लगा रहता है.
यह पैलेस सुबह 11:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है. नाइट शो के दौरान कई लोग यहां की खूबसूरती को इंजॉय करने के बाद पास ही में सराफा निकल जाते हैं और वहां पर रात भर चलने वाली खाने की मशहूर डिशेज़ का आनंद लेते हैं.
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YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
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मेघा उपाध्याय/इंदौर. इंदौर का प्रसिद्ध स्मारक राजवाड़ा मरम्मत के बाद बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित बन चुका है. अब यह स्मारक पर्यटक के साथ-साथ जिले के रहवासियों को भी मंत्रमुग्ध कर रहा है. फोटो और वीडियो बनाने के प्रतिबंध हटने के बाद अब स्थानीय लोग महल फोटोशूट और प्री वेडिंग शूट करने पहुंच रहे हैं. बता दें पहले संस्कृति विभाग ने यहां पर कई प्रतिबंध लगे हुए थे, जो अब हटाए जा चुके हैं. यहां पर पाँच हज़ार रुपयापए के शुल्क के साथ कोई भी व्यक्ति प्री वेडिंग फोटोशूट या अन्य फोटोशूट करवा सकता है, लेकिन उसके लिए पहले केयरटेकर से बात करनी होगी. प्रोफेशनल फोटोशूट के दौरान आपको स्मारक की साफ- सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है, वरना आपको जुर्माने का भुगतान भी करना पड़ सकता है. दिन में अगर आप स्मारक को सिर्फ घूमने के लिए चुन रहे हैं तो आपको बीस रुपयापए की टिकट खरीदनी होगी जिसमें नॉर्मल मोबाइल फोन से फोटो शूट कर सकते है. इसके अलावा रात में यहां पर नाइट में लाइट शो होता है जो बेहद ही आकर्षक और खूबसूरत नजारा होता है, जिसका शुल्क एक सौ रुपयापए प्रति व्यक्ति है. इस दौरान स्मारक के बीचो बीच चौक में रंग-बिरंगे फुहारों के साथ लाइट जलती है और म्यूजिक भी सुनाई देती है. इसकी शुरुआत भारतीय प्रवासी दिवस के दौरान की गई थी और तभी से यहां पर लोगों का जमावड़ा रात के समय लगा रहता है. यह पैलेस सुबह ग्यारह:शून्य बजे से रात नौ:शून्य बजे तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है. नाइट शो के दौरान कई लोग यहां की खूबसूरती को इंजॉय करने के बाद पास ही में सराफा निकल जाते हैं और वहां पर रात भर चलने वाली खाने की मशहूर डिशेज़ का आनंद लेते हैं. . YouTube से मालामाल बनने के लिए बस कुछ बातें हैं जरूरी, अगर नोट कर लिए ये टिप्स. . . तो आप भी खेलेंगे लाखों में!
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के हाथ से जन-जीवन छीन कर वैज्ञानिको और साहित्यकारों को जन-जीवन का नेतृत्व प्रदान कर दिया जाय । यह शर्म की बात है कि वैज्ञानिक आज फौजी आदेश का यन्त्रवत् पालन कर रहे है ।"
'खग्रास' वे गूढ पुरुष वास्तव में आचार्य चतुरसेन जी स्वय हैं। वे ही एक वैज्ञानिक के रूप में प्रस्तुत उपन्यास मे आए है। जिन दिनो आचार्य चतुरसेन जी प्रस्तुत उपन्यास लिख रहे थे, मैं उनके समीप ही था । मुझसे उन्होंने हँसते हुए कहा था शुभ तुमने जितने भी वैज्ञानिक और राजनीतिक प्रश्न करके मेरे विचारो को कुरेदा था, उन सभी का समाधान मैंने स्वयं एक वैज्ञानिक बन कर प्रस्तुत उपन्यास में प्रस्तुत करने की चेष्टा है । तुमने उसी प्रकार मरे विचारों को कुरेदा है, जिस प्रकार तिवारी ने उस गूढ पुरुष के विचारों को कुरेदा था ।' इतना कहकर आचार्य जी खुल कर हँस पडे थे ।
में इस विषय के उस वार्तालाप को यहाँ उदधृत कर रहा हूँ 'आपने अपना यह उपन्यास किस वस्तु से प्रभावित होकर लिखा ।'
'सन् १९५८ से । यह वर्ष विज्ञान जगत में अपना ऐतिहासिक महत्व रखता है वैसे मैं तो अब यह मानने लगा हूँ कि बिना विज्ञान और साहित्य का का समन्वय हुए विश्व आगे नहीं बढ सकता । विज्ञान और साहित्य का समन्वय कैसे हो प्रश्न यह है स्पष्ट है, गद्य का सबसे निखरा रूप है उपन्यास । अत उपन्यारा को माध्यम बनाकर ही विज्ञान को साहित्य के अन्दर लाया जा सकता और अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये मैंने यह वैज्ञानिक उपन्यास लिखा है ।'
'विज्ञान की यह उनति क्या मानवता के लिये हितकारी होगी " 'अवश्य किंतु यदि उसका उपयोग मानवता के सृजन के लिए हो विनाश के लिये नही । मेरा पूर्ण विश्वास है कि यदि विज्ञान का उपयोग सृजन के कार्यों मे हुआ तो मनुष्य की औसतन आयु बढ़ जायगो कैंसर, हृदय रोग रक्त चाप और सिफलिस इन चार रोगो का अभी तक कोई निश्चित निदान नही
है किंतु मुझे पूर्ण विश्वास है कि अगले दस वर्षों में विज्ञान इन रोगो पर विजय पा लेगा तब निश्चित ही मनुष्य अकाल मृत्यु से बच सवेगा । कुछ स्व कर उन्होंने आगे कहा 'परन्तु शर्त यह है कि युद्ध के बादल वैज्ञानिक आविष्कारों पर न छा जायें !'
१ खप्रास-नाचार्य चतुरसेन.पू. २७६ ।
'अपने अपने इस उपन्यास में एक भाeate वैज्ञtfre को सर्वोपरि दिखला दिया है क्या यह आपका पक्षपात नहीं है ?"
'कदापि नही, कारण मैंने भारत को शान्ति दूत माना है, और वह भारतीय वैज्ञानिक शान्ति का हो पक्षपाती है उसके समस्त वैज्ञानिक आविष्कार शान्ति के लिये है विनाश के लिये नहीं इसलिए मैंने उसे सर्वोपरि दिखलाया है । परोक्ष मे मेरा सकेत यह है कि भविष्य मे सर्वोच्च वैज्ञानिक वही होगा जिसके चरण शान्ति की ओर बढ़ेंगे, विभाग की ओर नही । विज्ञान शान्ति मे साधक होगा, बाधक नहीं, ऐसा मेरा अपना विश्वास है ।"
आचार्य चतुरसेन जी विज्ञान और साहित्य को युद्ध और शांति से सदैव सम्बन्धित समझते रहे । उनका कथन था कि विश्व शाति विज्ञान और साहित्य के द्वारा ही सम्भव हो सकेगी। उन्होंने विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण को ही मान्यता दी है। उनका कथन है 'विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण आध्यात्मिक रहा है । भौतिकवादी दृष्टि से ससार जिस सूत्र से बँधा है, उसके अन तक पहुँच चुका है। अब इसे या तो कुछ नई कल्याणकारी स्थिति में आना पडेगा या नष्ट हो जाना होगा। उनका वैज्ञानिक प्रगति का मापदण्ड भी भिन्न है । वे उस राष्ट्र को सर्वशक्तिशाली मानते हैं जो विज्ञान को मानव मात्र के लिए मृत्युदूत न बनाकर मुक्तिदूत बनाना चाहता हूँ 13 तिवारी और गूढ पुरुष के पारस्परिक वार्तालाप द्वारा आचार्य चतुररोन जी ने अपने विज्ञान के भारतीय दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। यहां हम उस वार्तालाप का कुछ अश उद्धृत कर रहे है । तिवारी गूढ पुरुष से प्रश्न करते हैं' क्या हो -
-अच्छा हो भारतवर्ष आपकी सामर्थ्य को जान जाय ।।
क्यो ।
• वज्ञान की समर्थ ज्योति भारत में जगमग है यह दुनियां के कितने आदमी जानते हैं ।
'तो इससे क्या ? विज्ञान के संबंध मे तो भारतीय दृष्टिकोण विश्व के दृष्टिकोण से निराला है, उसे दुनिया को जानना चाहिए ।'
१. धर्मयुग, आचार्य चतुरसेन, व्यक्तित्व और विचार, शुभकार्य नाथ कपूर, ९ अगस्त सन् १९५४, पृ. ८
२. सप्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ ३१०
३. खग्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ. २७६ ।
'वह दृष्टिकोण कैसा है *
'विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण आध्यात्मिक रहा है। भौतिकवादी दृष्टि से ससार जिस सूत्र से बँधा है, उसे अंत तक पहुँचा चुका है। अब इसे या तो कुछ नई कल्याणकारी स्थिति में आना पड़ेगा या नष्ट हो जाना होगा।'
'परन्तु मैं तो यह समझता हूँ कि भारत वैज्ञानिक प्रगति मे बहुत पिछडा हुआ देश है।'
'केवल तुम ही ऐसा समझते हो यह बात नहीं । भारत में भी लोग ऐसा ही समझते हैं। जब वैज्ञानिक प्रगति की बात आगे आती है तो हमारे देश के लोग हीनता का अनुभव करने लगते हैं ?"
'इसका कारण क्या है ?"
'बिल्कुल स्पष्ट है । साधारणतया यह समझा जाता है कि जिस देश के वैज्ञानिक अणुबम और हाईड्रोजन बम बनाना नही जानते, वह प्रगति के हिसाब से बड़ा देश नहीं है । विश्व की राजनीतिक तराजू का भी यही मान है । यह बात केवल भारत ही से सम्बन्धित नहीं है, अन्य देश भी ऐसा ही अनुभव करते है ।'
'परंतु आप समझते हैं कि उनका यह अनुभव गलत है !' निस्सन्देह विज्ञान के प्रति यह एक गलत दृष्टिकोण है। इससे संसार के बहुत देश गुमराह् हो रहे हैं।'
किंतु आप विज्ञान के विकास को क्या स्वीकार ही नहीं करना चाहते।'
'क्यो नही । परन्तु मैं समझता हूँ प्राचीन भारतीय मनोषी विज्ञान को सत्य की खोज का साधन मानते थे। मैं तो चाहता हूँ कि भारतीयों के मन मे उनको मान्यता का समादर हो, तो भारत की प्रगति सही अर्थ में हो सकती है।'
'कृपा कर अपना अभिप्राय साफ-साफ कहिए ।
'शाफ ही सुनो। कोई देश किरा हद तक वैज्ञानिक प्रगति कर गया है, इम उसकी ध्वसात्मक शक्ति को देखवर यांना भारतीय दृष्टिकोण नहीं है । भारत तो मानव समाज के कल्याण में सहायक होने की क्षमता होने के अनुसार ही विज्ञान की सफलता आफ्ना चाहता है।'
'तो आप बडे राष्ट्रो की इस वैज्ञानिक प्रगति को तुच्छ समझते है ?"
'मैं उसके प्रति सम्मान की भावना नही रखता । मैं तो यह कहता हूँ कि मान जीवन को सुखो और सम्पन्न बनाने योग्य कोई छोटा सा भी आविष्कार हो तो उसे इस भयानक विध्वसात्मक शस्त्रास्त्रों की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण समझना चाहिए।'
'क्या हमारे देश के वैज्ञानिको का यही मत है ?"
'शायद नही है । वे जानते हैं कि हमे भी राष्ट्रों के समाज में रहना पड रहा है । वस्तु के मूल्याक्त का जो तरीका सब प्रमुख राष्ट्रो का है वे उससे प्रभावित है।
'आपकी समझ में यह ठीक नहीं है ?"
'यह दुर्भाग्य की बात है कि विज्ञान की प्रगति जारी रहे और ससार मे वैज्ञानिक वातावरण न पैदा हो ।'
'आप समझते हैं कि ससार का
वातावरण वैज्ञानिक नही बन
रहा है "
'मैं तो समझता हूँ कि संसार का जो वातावरण बन रहा है, वह विज्ञान के लिए द्रोहात्मक है ।'
'यह आप किस आधार पर कहते हैं "
'ससार मे तनाव बना हुआ है। यह तो तुम भी मानोगे और उसका असर केवल आर्थिक एवं राजनीतिक विचारों को ही नहीं वरन् विज्ञान की शुद्धता को भी कम बरता जा रहा है। विज्ञान की प्रगति की अनिवार्य शर्त है सत्य के प्रति पूर्ण सम्मान ।
'क्या आज की वैज्ञानिक प्रगति मे सत्य के प्रति सम्मान नहीं है ? 'ससार मे तनाव रहने पर सत्य के प्रति सम्मान कैसे रह सकता है ? 'आप समझते हैं कि विज्ञान जन कल्याणकारी नहीं है
'यदि उसके साथ छेड़-छाड न की जाय तो निश्चय ही विज्ञान मानव जाति का कल्याण ही करेगा । परन्तु विश्व के तनाव के कारण इसका उपयोग राजनीतिक गुट विशेष अथवा सिद्धान्त विशेष के लोगो का स्वार्य साधने मे होता है और अब तो विज्ञान का यह दुरुपयोग चरम सीमा पर पहुँच चुका है ।'
'कैसे ?"
'क्या तुम देख नही रहे- अब तो बडे कहे जाने वाले राष्ट्र भी विमूढ की भांति यही सोचने लगे हैं कि आगे क्या? और इसना उत्तर उनके पास नहीं है।'
'आपके पास है ?"
'हाँ, मैं कह सकता हूँ कि इसका एकमात्र उत्तर है कि विज्ञान की सफलता उसकी मानव समाज के कल्याण में सहायक होने की क्षमता ही है । "
उपर्युक्त उद्धरण आचार्य चतुरसेन जी ने 'युद्ध और शान्ति' विषयक विचारो पर पर्याप्त प्रकाश डालता है ।
आचार्य चतुरसेन जी ने भारत को जो विश्व की तीसरी शक्ति माना वह भी विज्ञान के कारण नहीं, 'शान्ति की शक्ति के कारण । उनका कथन है, सारे संसार का ध्यान इस शक्ति पर केन्द्रित हो रहा है और ससार के जन नायको की नजर में भारत का स्थान बहुत ऊँचा है । आज बहुत से राष्ट्र
भारत को शान्ति का स्तम्भ मानते है । उन्हें विश्वास है कि भारत सब देशो को प्रगति और स्वाधीनता का इच्छुफ है। उसने अपनी स्वाधीनता के अल्पवालीन समय में यह प्रमाणित किया है कि यदि राहिष्णुता और पारस्परिक सद्भावना से काम लिया जाय तो सव विभिन्न विचारधाराएँ साथ साथ जीवित रह सकती हैं। यह कितनी बड़ी बात है कि भारत सभी समस्याओं को लोकतन्त्रात्मक विधियों से सुलझाने की पद्धति अपना रहा है।
आचार्य चतुरसेन जी ने यह स्वीकार किया है कि भारत के समक्ष केवल शान्ति का ही मार्ग है, युद्ध से वह सदैव से लिए नष्ट हो जावेगा। उन्होंने स्वय कहा है पर हमारे ( भारत के ) पास न काफी युद्ध सामग्री है, न हमारी स्थिति हो इस योग्य है कि हम लडाई के धक्के सम्हाल सके । हम गरीव हैं । हमारी आजादी बच्चा है। हम तो शान्ति की गोद में ही पनप सकते हैं, इसी से वे इस ससार मे शान्ति स्थापना के कार्य मे दौड़ धूप कर रहे हैं। क्योकि वह जानते हैं लडाई कही भी छिडे हमारे देश को वह तबाह किए बिना न छोड़ेगी
निश्चय हो ये विचार बडे ही उपयुक्त और उपयोगी है ।
अन्त मे आचार्य चतुरसेन जी ने यह भी स्वीकार किया है कि यदि विश्व भारत के शान्ति मार्ग वा अनुगमन नही करता तो उसे विवश होकर इस मार्ग का अनुकरण करना पड़ेगा, अन्यथा उसे युद्ध की भयानक ज्वाला में जल्ना
१. सग्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ ३१० से ३१२ तक ।
२. खग्रास, आजपं नजुरसेन, पृ. २७३ २
३. उदयास्त, आचार्य चतुरसेन, पृ. २०१ ।
होगा । आचार्य चतुरसेन जी मन मे घोषणा करते हुए कहते है परंतु 'अणु महास्त्र' का आज मानव मस्तिष्क पर बिल्कुल हो नया और अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है, इससे वह रोष को दबाने की नहीं, अपने से दूर निकाल फेंकने यी सोचने लगा है। उसको चेतना में स्वच्छ विचारधारा का उदय हुआ है, और अब उसके पूर्ण पुरुष होने का युग आ गया है । इस युग मे बह वह सर्वथा रोपट्टीन होकर विचार सामर्थ्य से अपना संगठन करेगा। बडे-बडे क्रुद्धजन नियंक फूत्कार कर, आकन्छ रक्त स्नान कर मरणशरण हुए । 'लोहू और लोहा' जिनका नारा था, उनकी बेहद दुर्दशा हो गई । मानव शेष की निस्सारता विश्व ने देख ली। जानियों के भाग्य पलट गए। विश्व रेखायें बदल गईं । इन सबसे मानुष ने अब चार बातें सीखी है
१ विश्व के सब मनुष्य एक से हैं। वे परस्पर भाई-भाई हैं, समान हैं, अभय हैं, और विश्व को सम्पदाओं के अधिपति है ।
२ मानव fare a सबसे बड़ी इकाई है। उसकी पूजा, आत्मनिष्ठा, निर्भय विश्व विचरण तथा भोग सामर्थ्य कविजनगेय वस्तु है ।
३ जगत सत्य है, भूत्र सम्पदा मानव उत्कर्ष का साधन है।
४. 'कला' और 'विज्ञान' मनुष्य का हृदय और मस्तिष्क है । दोनो के विचार कौशल से एकीभूत करके उसे मानव विभूति वर्धन मे लगाना चाहिये, जिससे मनुष्य 'रोपहीन' हो ।"
आचार्य चतुरसेन जी के इस निष्कर्ष से भी स्पष्ट हो जाता है कि बहू मार्गसवादी विद्धान्तो की अपेक्षाकृत गावोबादी सिद्धातो की ओर अधिक उन्मुख हैं।
जन संख्या की समस्या
भाज की बढ़ती हुई जन संख्या की और भी आचार्य चतुरसेन जो का ध्यान गया है। उनका कथन है आज रूस और अमेरिका खतरनाक बम बनाने मे लगे हैं परंतु विश्व का सबसे बड़ा खतरनाक बम जन संख्या का प्राधिक्य है जिसे ससार भर के मनुष्य तैयार करने में जुटे हैं लाखो व्यक्ति भोजन की खोज मे रहते हैं। इसी कारण से उन्होने 'सतति निरोध' के प्रति अपनी आस्था द की है?
१. मौत के पजे मे जिन्दगी की वराह, आचार्य चतुरसेन, पृ १६४-६५ ।
२ 'खास' आचार्य चतुरसेन, पृ. २७५
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के हाथ से जन-जीवन छीन कर वैज्ञानिको और साहित्यकारों को जन-जीवन का नेतृत्व प्रदान कर दिया जाय । यह शर्म की बात है कि वैज्ञानिक आज फौजी आदेश का यन्त्रवत् पालन कर रहे है ।" 'खग्रास' वे गूढ पुरुष वास्तव में आचार्य चतुरसेन जी स्वय हैं। वे ही एक वैज्ञानिक के रूप में प्रस्तुत उपन्यास मे आए है। जिन दिनो आचार्य चतुरसेन जी प्रस्तुत उपन्यास लिख रहे थे, मैं उनके समीप ही था । मुझसे उन्होंने हँसते हुए कहा था शुभ तुमने जितने भी वैज्ञानिक और राजनीतिक प्रश्न करके मेरे विचारो को कुरेदा था, उन सभी का समाधान मैंने स्वयं एक वैज्ञानिक बन कर प्रस्तुत उपन्यास में प्रस्तुत करने की चेष्टा है । तुमने उसी प्रकार मरे विचारों को कुरेदा है, जिस प्रकार तिवारी ने उस गूढ पुरुष के विचारों को कुरेदा था ।' इतना कहकर आचार्य जी खुल कर हँस पडे थे । में इस विषय के उस वार्तालाप को यहाँ उदधृत कर रहा हूँ 'आपने अपना यह उपन्यास किस वस्तु से प्रभावित होकर लिखा ।' 'सन् एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन से । यह वर्ष विज्ञान जगत में अपना ऐतिहासिक महत्व रखता है वैसे मैं तो अब यह मानने लगा हूँ कि बिना विज्ञान और साहित्य का का समन्वय हुए विश्व आगे नहीं बढ सकता । विज्ञान और साहित्य का समन्वय कैसे हो प्रश्न यह है स्पष्ट है, गद्य का सबसे निखरा रूप है उपन्यास । अत उपन्यारा को माध्यम बनाकर ही विज्ञान को साहित्य के अन्दर लाया जा सकता और अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये मैंने यह वैज्ञानिक उपन्यास लिखा है ।' 'विज्ञान की यह उनति क्या मानवता के लिये हितकारी होगी " 'अवश्य किंतु यदि उसका उपयोग मानवता के सृजन के लिए हो विनाश के लिये नही । मेरा पूर्ण विश्वास है कि यदि विज्ञान का उपयोग सृजन के कार्यों मे हुआ तो मनुष्य की औसतन आयु बढ़ जायगो कैंसर, हृदय रोग रक्त चाप और सिफलिस इन चार रोगो का अभी तक कोई निश्चित निदान नही है किंतु मुझे पूर्ण विश्वास है कि अगले दस वर्षों में विज्ञान इन रोगो पर विजय पा लेगा तब निश्चित ही मनुष्य अकाल मृत्यु से बच सवेगा । कुछ स्व कर उन्होंने आगे कहा 'परन्तु शर्त यह है कि युद्ध के बादल वैज्ञानिक आविष्कारों पर न छा जायें !' एक खप्रास-नाचार्य चतुरसेन.पू. दो सौ छिहत्तर । 'अपने अपने इस उपन्यास में एक भाeate वैज्ञtfre को सर्वोपरि दिखला दिया है क्या यह आपका पक्षपात नहीं है ?" 'कदापि नही, कारण मैंने भारत को शान्ति दूत माना है, और वह भारतीय वैज्ञानिक शान्ति का हो पक्षपाती है उसके समस्त वैज्ञानिक आविष्कार शान्ति के लिये है विनाश के लिये नहीं इसलिए मैंने उसे सर्वोपरि दिखलाया है । परोक्ष मे मेरा सकेत यह है कि भविष्य मे सर्वोच्च वैज्ञानिक वही होगा जिसके चरण शान्ति की ओर बढ़ेंगे, विभाग की ओर नही । विज्ञान शान्ति मे साधक होगा, बाधक नहीं, ऐसा मेरा अपना विश्वास है ।" आचार्य चतुरसेन जी विज्ञान और साहित्य को युद्ध और शांति से सदैव सम्बन्धित समझते रहे । उनका कथन था कि विश्व शाति विज्ञान और साहित्य के द्वारा ही सम्भव हो सकेगी। उन्होंने विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण को ही मान्यता दी है। उनका कथन है 'विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण आध्यात्मिक रहा है । भौतिकवादी दृष्टि से ससार जिस सूत्र से बँधा है, उसके अन तक पहुँच चुका है। अब इसे या तो कुछ नई कल्याणकारी स्थिति में आना पडेगा या नष्ट हो जाना होगा। उनका वैज्ञानिक प्रगति का मापदण्ड भी भिन्न है । वे उस राष्ट्र को सर्वशक्तिशाली मानते हैं जो विज्ञान को मानव मात्र के लिए मृत्युदूत न बनाकर मुक्तिदूत बनाना चाहता हूँ तेरह तिवारी और गूढ पुरुष के पारस्परिक वार्तालाप द्वारा आचार्य चतुररोन जी ने अपने विज्ञान के भारतीय दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। यहां हम उस वार्तालाप का कुछ अश उद्धृत कर रहे है । तिवारी गूढ पुरुष से प्रश्न करते हैं' क्या हो - -अच्छा हो भारतवर्ष आपकी सामर्थ्य को जान जाय ।। क्यो । • वज्ञान की समर्थ ज्योति भारत में जगमग है यह दुनियां के कितने आदमी जानते हैं । 'तो इससे क्या ? विज्ञान के संबंध मे तो भारतीय दृष्टिकोण विश्व के दृष्टिकोण से निराला है, उसे दुनिया को जानना चाहिए ।' एक. धर्मयुग, आचार्य चतुरसेन, व्यक्तित्व और विचार, शुभकार्य नाथ कपूर, नौ अगस्त सन् एक हज़ार नौ सौ चौवन, पृ. आठ दो. सप्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ तीन सौ दस तीन. खग्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ. दो सौ छिहत्तर । 'वह दृष्टिकोण कैसा है * 'विज्ञान के प्रति भारतीय दृष्टिकोण आध्यात्मिक रहा है। भौतिकवादी दृष्टि से ससार जिस सूत्र से बँधा है, उसे अंत तक पहुँचा चुका है। अब इसे या तो कुछ नई कल्याणकारी स्थिति में आना पड़ेगा या नष्ट हो जाना होगा।' 'परन्तु मैं तो यह समझता हूँ कि भारत वैज्ञानिक प्रगति मे बहुत पिछडा हुआ देश है।' 'केवल तुम ही ऐसा समझते हो यह बात नहीं । भारत में भी लोग ऐसा ही समझते हैं। जब वैज्ञानिक प्रगति की बात आगे आती है तो हमारे देश के लोग हीनता का अनुभव करने लगते हैं ?" 'इसका कारण क्या है ?" 'बिल्कुल स्पष्ट है । साधारणतया यह समझा जाता है कि जिस देश के वैज्ञानिक अणुबम और हाईड्रोजन बम बनाना नही जानते, वह प्रगति के हिसाब से बड़ा देश नहीं है । विश्व की राजनीतिक तराजू का भी यही मान है । यह बात केवल भारत ही से सम्बन्धित नहीं है, अन्य देश भी ऐसा ही अनुभव करते है ।' 'परंतु आप समझते हैं कि उनका यह अनुभव गलत है !' निस्सन्देह विज्ञान के प्रति यह एक गलत दृष्टिकोण है। इससे संसार के बहुत देश गुमराह् हो रहे हैं।' किंतु आप विज्ञान के विकास को क्या स्वीकार ही नहीं करना चाहते।' 'क्यो नही । परन्तु मैं समझता हूँ प्राचीन भारतीय मनोषी विज्ञान को सत्य की खोज का साधन मानते थे। मैं तो चाहता हूँ कि भारतीयों के मन मे उनको मान्यता का समादर हो, तो भारत की प्रगति सही अर्थ में हो सकती है।' 'कृपा कर अपना अभिप्राय साफ-साफ कहिए । 'शाफ ही सुनो। कोई देश किरा हद तक वैज्ञानिक प्रगति कर गया है, इम उसकी ध्वसात्मक शक्ति को देखवर यांना भारतीय दृष्टिकोण नहीं है । भारत तो मानव समाज के कल्याण में सहायक होने की क्षमता होने के अनुसार ही विज्ञान की सफलता आफ्ना चाहता है।' 'तो आप बडे राष्ट्रो की इस वैज्ञानिक प्रगति को तुच्छ समझते है ?" 'मैं उसके प्रति सम्मान की भावना नही रखता । मैं तो यह कहता हूँ कि मान जीवन को सुखो और सम्पन्न बनाने योग्य कोई छोटा सा भी आविष्कार हो तो उसे इस भयानक विध्वसात्मक शस्त्रास्त्रों की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण समझना चाहिए।' 'क्या हमारे देश के वैज्ञानिको का यही मत है ?" 'शायद नही है । वे जानते हैं कि हमे भी राष्ट्रों के समाज में रहना पड रहा है । वस्तु के मूल्याक्त का जो तरीका सब प्रमुख राष्ट्रो का है वे उससे प्रभावित है। 'आपकी समझ में यह ठीक नहीं है ?" 'यह दुर्भाग्य की बात है कि विज्ञान की प्रगति जारी रहे और ससार मे वैज्ञानिक वातावरण न पैदा हो ।' 'आप समझते हैं कि ससार का वातावरण वैज्ञानिक नही बन रहा है " 'मैं तो समझता हूँ कि संसार का जो वातावरण बन रहा है, वह विज्ञान के लिए द्रोहात्मक है ।' 'यह आप किस आधार पर कहते हैं " 'ससार मे तनाव बना हुआ है। यह तो तुम भी मानोगे और उसका असर केवल आर्थिक एवं राजनीतिक विचारों को ही नहीं वरन् विज्ञान की शुद्धता को भी कम बरता जा रहा है। विज्ञान की प्रगति की अनिवार्य शर्त है सत्य के प्रति पूर्ण सम्मान । 'क्या आज की वैज्ञानिक प्रगति मे सत्य के प्रति सम्मान नहीं है ? 'ससार मे तनाव रहने पर सत्य के प्रति सम्मान कैसे रह सकता है ? 'आप समझते हैं कि विज्ञान जन कल्याणकारी नहीं है 'यदि उसके साथ छेड़-छाड न की जाय तो निश्चय ही विज्ञान मानव जाति का कल्याण ही करेगा । परन्तु विश्व के तनाव के कारण इसका उपयोग राजनीतिक गुट विशेष अथवा सिद्धान्त विशेष के लोगो का स्वार्य साधने मे होता है और अब तो विज्ञान का यह दुरुपयोग चरम सीमा पर पहुँच चुका है ।' 'कैसे ?" 'क्या तुम देख नही रहे- अब तो बडे कहे जाने वाले राष्ट्र भी विमूढ की भांति यही सोचने लगे हैं कि आगे क्या? और इसना उत्तर उनके पास नहीं है।' 'आपके पास है ?" 'हाँ, मैं कह सकता हूँ कि इसका एकमात्र उत्तर है कि विज्ञान की सफलता उसकी मानव समाज के कल्याण में सहायक होने की क्षमता ही है । " उपर्युक्त उद्धरण आचार्य चतुरसेन जी ने 'युद्ध और शान्ति' विषयक विचारो पर पर्याप्त प्रकाश डालता है । आचार्य चतुरसेन जी ने भारत को जो विश्व की तीसरी शक्ति माना वह भी विज्ञान के कारण नहीं, 'शान्ति की शक्ति के कारण । उनका कथन है, सारे संसार का ध्यान इस शक्ति पर केन्द्रित हो रहा है और ससार के जन नायको की नजर में भारत का स्थान बहुत ऊँचा है । आज बहुत से राष्ट्र भारत को शान्ति का स्तम्भ मानते है । उन्हें विश्वास है कि भारत सब देशो को प्रगति और स्वाधीनता का इच्छुफ है। उसने अपनी स्वाधीनता के अल्पवालीन समय में यह प्रमाणित किया है कि यदि राहिष्णुता और पारस्परिक सद्भावना से काम लिया जाय तो सव विभिन्न विचारधाराएँ साथ साथ जीवित रह सकती हैं। यह कितनी बड़ी बात है कि भारत सभी समस्याओं को लोकतन्त्रात्मक विधियों से सुलझाने की पद्धति अपना रहा है। आचार्य चतुरसेन जी ने यह स्वीकार किया है कि भारत के समक्ष केवल शान्ति का ही मार्ग है, युद्ध से वह सदैव से लिए नष्ट हो जावेगा। उन्होंने स्वय कहा है पर हमारे पास न काफी युद्ध सामग्री है, न हमारी स्थिति हो इस योग्य है कि हम लडाई के धक्के सम्हाल सके । हम गरीव हैं । हमारी आजादी बच्चा है। हम तो शान्ति की गोद में ही पनप सकते हैं, इसी से वे इस ससार मे शान्ति स्थापना के कार्य मे दौड़ धूप कर रहे हैं। क्योकि वह जानते हैं लडाई कही भी छिडे हमारे देश को वह तबाह किए बिना न छोड़ेगी निश्चय हो ये विचार बडे ही उपयुक्त और उपयोगी है । अन्त मे आचार्य चतुरसेन जी ने यह भी स्वीकार किया है कि यदि विश्व भारत के शान्ति मार्ग वा अनुगमन नही करता तो उसे विवश होकर इस मार्ग का अनुकरण करना पड़ेगा, अन्यथा उसे युद्ध की भयानक ज्वाला में जल्ना एक. सग्रास, आचार्य चतुरसेन, पृ तीन सौ दस से तीन सौ बारह तक । दो. खग्रास, आजपं नजुरसेन, पृ. दो सौ तिहत्तर दो तीन. उदयास्त, आचार्य चतुरसेन, पृ. दो सौ एक । होगा । आचार्य चतुरसेन जी मन मे घोषणा करते हुए कहते है परंतु 'अणु महास्त्र' का आज मानव मस्तिष्क पर बिल्कुल हो नया और अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है, इससे वह रोष को दबाने की नहीं, अपने से दूर निकाल फेंकने यी सोचने लगा है। उसको चेतना में स्वच्छ विचारधारा का उदय हुआ है, और अब उसके पूर्ण पुरुष होने का युग आ गया है । इस युग मे बह वह सर्वथा रोपट्टीन होकर विचार सामर्थ्य से अपना संगठन करेगा। बडे-बडे क्रुद्धजन नियंक फूत्कार कर, आकन्छ रक्त स्नान कर मरणशरण हुए । 'लोहू और लोहा' जिनका नारा था, उनकी बेहद दुर्दशा हो गई । मानव शेष की निस्सारता विश्व ने देख ली। जानियों के भाग्य पलट गए। विश्व रेखायें बदल गईं । इन सबसे मानुष ने अब चार बातें सीखी है एक विश्व के सब मनुष्य एक से हैं। वे परस्पर भाई-भाई हैं, समान हैं, अभय हैं, और विश्व को सम्पदाओं के अधिपति है । दो मानव fare a सबसे बड़ी इकाई है। उसकी पूजा, आत्मनिष्ठा, निर्भय विश्व विचरण तथा भोग सामर्थ्य कविजनगेय वस्तु है । तीन जगत सत्य है, भूत्र सम्पदा मानव उत्कर्ष का साधन है। चार. 'कला' और 'विज्ञान' मनुष्य का हृदय और मस्तिष्क है । दोनो के विचार कौशल से एकीभूत करके उसे मानव विभूति वर्धन मे लगाना चाहिये, जिससे मनुष्य 'रोपहीन' हो ।" आचार्य चतुरसेन जी के इस निष्कर्ष से भी स्पष्ट हो जाता है कि बहू मार्गसवादी विद्धान्तो की अपेक्षाकृत गावोबादी सिद्धातो की ओर अधिक उन्मुख हैं। जन संख्या की समस्या भाज की बढ़ती हुई जन संख्या की और भी आचार्य चतुरसेन जो का ध्यान गया है। उनका कथन है आज रूस और अमेरिका खतरनाक बम बनाने मे लगे हैं परंतु विश्व का सबसे बड़ा खतरनाक बम जन संख्या का प्राधिक्य है जिसे ससार भर के मनुष्य तैयार करने में जुटे हैं लाखो व्यक्ति भोजन की खोज मे रहते हैं। इसी कारण से उन्होने 'सतति निरोध' के प्रति अपनी आस्था द की है? एक. मौत के पजे मे जिन्दगी की वराह, आचार्य चतुरसेन, पृ एक सौ चौंसठ-पैंसठ । दो 'खास' आचार्य चतुरसेन, पृ. दो सौ पचहत्तर
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इन तर्कों में निम्नलिखित प्रमुख है
( १ ) व्यक्तिवाद का नैतिक आधार पर समर्थन करने वालो मे काण्ट, फिचे, मिल तथा हमवोल्ड प्रमुख है। इन के तर्कों का आधार न्याय तथा प्राकृतिक नियम सम्बन्धी प्रमूर्त धारणाएँ हैं । प्रत्येक व्यक्ति इतना बुद्धि सम्पन्न है कि वह जान सके कि उसका हित किस कार्य के करने मे है, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुद्धि तथा शक्तियो के अनुसार अपने व्यक्तित्व के विकास की स्वतन्त्रता होनी चाहिए। प्रत. प्रत्येक व्यक्ति को अपने चरित्र निर्माण तथा व्यक्तित्व के विकास की अधिक से अधिक स्वतन्त्रता होनी चाहिए। अगर राज्य व्यक्ति के वैयक्तिक कार्यो मे दखल दे और उसकी विकास की दिशा को निर्दिष्ट करे तो उसमे स्वालम्वन, कार्य प्रारम्भ करने की शक्ति तथा स्वाभाविक उत्साह खत्म हो जाता है। राज्य का नियन्त्रण व्यक्ति के चरित्र मे कमजोरियाँ उत्पन्न करता है, उसकी शक्तियों को नष्ट करता है और उसका प्रकृत-विकास रोक देता है ।
प्रकृति का नियम है प्रतियोगिता । इस प्रतियोगिता द्वारा ही वह उपयुक्ततम ( Fittest ) का चुनाव करती है और उन्हे पुरस्कृत करती है। प्रतियोगिता द्वारा मनुष्य की छिपी हुई शक्तियाँ प्रकाश में प्राती हैं और उनका विकास होता है । प्रतियोगिता द्वारा ही समाज मे उच्च या श्रेष्ठ व्यक्तियों का चुनाव किया जा सकता है । जब प्रतियोगिता प्रकृति का नियम है तो उस पर किसी प्रकार की भी रोक-टोक नही होनी चाहिए । आर्थिक क्षेत्र मे भी राज्य के नियन्त्ररण का प्रभाव होना चाहिए, और प्रतियोगिता की भावना के विकास की पूर्ण स्वतन्त्रता दी जानी चाहिए ।
अंतं न्याय तथा प्रकृत नियमो का अनुसरण करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विकास की पूर्ण स्वतन्त्रता देनी चाहिए । उसे अपनी रुचि, योग्यता तथा शक्ति के अनुसार जीवन की दौड़ में भाग लेने की खुली छूट होनी चाहिए ।
(२) व्यक्तिवाद का प्रारिण- वैज्ञानिक आधार पर समर्थन भी किया जाता है । स्पैन्सर का कथन है कि व्यक्तिवाद का सिद्धान्त प्राणियों के विकास सिद्धान्त के अनुरूप है । पीछे हम स्पैन्सर के सावयव राज्य के सिद्धान्त का अध्ययन कर आए है और यह देख चुके हैं कि किस प्रकार स्पैन्सर प्राणि - विज्ञान के आधार पर व्यक्तिवाद का समर्थन करता है । स्पैन्सर का कथन है प्रारिण-जगत मे अस्तित्व कायम रखने के लिए बरावर संघर्ष चलता रहता है । जो कमजोर प्रारणी होते हैं या जो इस सघर्ष मे पिछड जाते हैं, प्रकृति उन्हे खत्म होने देती है। जिन प्राणियों मे जीवन की शक्ति अधिक होती है, वही बच पाते हैं। प्राणियों के विकास का इतिहास यह सिद्ध करता है कि जो प्राणी इस संघर्ष में पीछे रह गए वह मिट गए। उनका स्थान अधिक शक्ति सम्पन्न प्राणियो ने ले लिया । उपयुक्ततम के बचने मे तथा आगे श्राने में उनकी अपनी शक्ति ने हो उनकी सहायता की, किसी बाहरी एजेन्सी ने नही । जब प्रारिण-जगत मे विकासयाद का यह सिद्धान्त कार्य करता है तो मानव समाज मे भला क्यो नही करेगा ? मानव-समाज मे निर्धन, प्रयोग्य तथा प्रक्षम व्यक्ति नष्ट हो जाते हैं और केवल योग्य तथा सक्षम व्यक्ति ही बच पाते हैं। प्रकृति का नियम है कि जीवित रहने का अधिकार
वे हैं से सम्बन्ध रखने वाले कार्य (Self-regarding-acts ) तथा सामाजिक कार्य (Social-acts ) राज्य केवल व्यक्ति के सामाजिक कार्यो का ही नियन्त्ररण कर सकता है, अपने आप से सम्बन्ध रखने वाले कार्यो का नहीं। अपने आप से सम्वन्ध रखने वाले कार्यो के विषय मे वह पूर्ण स्वतन्त्र है ।
स्पैन्सर तो राज्य को एक बहुत बडी बुराई मानता है, उसका कथन है कि राज्य का उदय हमारी दृष्ट प्रकृति के फलस्वरूप हुआ है । वह व्यक्ति के अधिकारो का रक्षक नहीं, बल्कि उनका भक्षक है । शासन दुराचारी है, यदि पूर्ण नैतिक अवस्था की स्थापना हो जाए तो उसकी आवश्यकता ही नही रह सकती । स्पैन्सर ने विकासवाद तथा प्रारिग - विज्ञान के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि राज्य की अवस्थिति मानव समाज के विकास क्रम के निचले स्तर पर आवश्यक होती है । उसका कथन है कि पुराना समाज 'सैनिक समाज' (Military society) था । उस मे कड़े नियन्त्रण को भले ही प्रावश्यकता रही हो, परन्तु वर्तमान युग के औद्योगिक समाज (Industrial society ) के लिए उसकी जरूरत नही । वर्तमान युग मे ऐच्छिक सहयोग का अधिक महत्त्व है। प्रारिण-विज्ञान के अनुसार स्पैन्सर यह स्वीकार करता है कि समाज मे उपयुक्ततम की अवस्थिति (Survival of the fittest ) का सिद्धान्त कार्य कर रहा है । प्रत्येक व्यक्ति अपनी शक्ति के अनुसार इस समाज मे अपना स्थान बनाने का प्रयत्न कर रहा है । इस प्रकृत प्रतियोगिता (Competition ) मे वही लोग बच सकते हैं जो कि शक्तिशाली हैं। राज्य को इस स्वाभाविक प्रक्रिया में किसी प्रकार का दखल नहीं देना चाहिए । श्रत स्पैन्मर के मतानुसार राज्य के केवलमात्र नकारात्मक कार्य हैं । वे इस प्रकार हैं( १ ) बाह्य आक्रमरण से व्यक्तियों की रक्षा ।
(२) प्रान्तरिक शत्रुनो से व्यक्तियों की रक्षा ।
( ३ ) कानून के अनुसार किए गए समझौते का पालन करवाना ।
राज्य को शिक्षा, जन स्वास्थ्य तथा जन हित के अनेक कार्यों की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए । राज्य को स्कूल नही खोलने चाहिए, हस्पताल नही स्थापित करने चाहिए, सडकें नही वनानी चाहिए, डाकखानो की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए । । सक्षेप मे सभी लोक-हित के कार्यो का सम्पादन व्यक्तियों के ही हाथ में छोड देना चाहिए । इन कार्यो को न कर राज्य व्यक्ति की वास्तविक उन्नति मे सहयोग देता है और समाज के प्रकृत विकास के प्रवाह को अवाध गति से वहने देता है ।
व्यक्तिवाद के इन प्रमुख समर्थको के अतिरिक्त काण्ड, हमवोल्ड, डी टाकवेल तथा फिचे इत्यादि भी इसके समर्थको मे से हैं ।
१६९ व्यक्तिवाद का समर्थन
व्यक्तिवाद का समर्थन अनेक प्रकार के तर्कों के आधार पर किया गया है,
] "Have we not shown that the Government is essentually Immoral ? Does it not exist simply because crime exists and must Government not cease when crime ceases ?"-H Spencer
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इन तर्कों में निम्नलिखित प्रमुख है व्यक्तिवाद का नैतिक आधार पर समर्थन करने वालो मे काण्ट, फिचे, मिल तथा हमवोल्ड प्रमुख है। इन के तर्कों का आधार न्याय तथा प्राकृतिक नियम सम्बन्धी प्रमूर्त धारणाएँ हैं । प्रत्येक व्यक्ति इतना बुद्धि सम्पन्न है कि वह जान सके कि उसका हित किस कार्य के करने मे है, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुद्धि तथा शक्तियो के अनुसार अपने व्यक्तित्व के विकास की स्वतन्त्रता होनी चाहिए। प्रत. प्रत्येक व्यक्ति को अपने चरित्र निर्माण तथा व्यक्तित्व के विकास की अधिक से अधिक स्वतन्त्रता होनी चाहिए। अगर राज्य व्यक्ति के वैयक्तिक कार्यो मे दखल दे और उसकी विकास की दिशा को निर्दिष्ट करे तो उसमे स्वालम्वन, कार्य प्रारम्भ करने की शक्ति तथा स्वाभाविक उत्साह खत्म हो जाता है। राज्य का नियन्त्रण व्यक्ति के चरित्र मे कमजोरियाँ उत्पन्न करता है, उसकी शक्तियों को नष्ट करता है और उसका प्रकृत-विकास रोक देता है । प्रकृति का नियम है प्रतियोगिता । इस प्रतियोगिता द्वारा ही वह उपयुक्ततम का चुनाव करती है और उन्हे पुरस्कृत करती है। प्रतियोगिता द्वारा मनुष्य की छिपी हुई शक्तियाँ प्रकाश में प्राती हैं और उनका विकास होता है । प्रतियोगिता द्वारा ही समाज मे उच्च या श्रेष्ठ व्यक्तियों का चुनाव किया जा सकता है । जब प्रतियोगिता प्रकृति का नियम है तो उस पर किसी प्रकार की भी रोक-टोक नही होनी चाहिए । आर्थिक क्षेत्र मे भी राज्य के नियन्त्ररण का प्रभाव होना चाहिए, और प्रतियोगिता की भावना के विकास की पूर्ण स्वतन्त्रता दी जानी चाहिए । अंतं न्याय तथा प्रकृत नियमो का अनुसरण करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विकास की पूर्ण स्वतन्त्रता देनी चाहिए । उसे अपनी रुचि, योग्यता तथा शक्ति के अनुसार जीवन की दौड़ में भाग लेने की खुली छूट होनी चाहिए । व्यक्तिवाद का प्रारिण- वैज्ञानिक आधार पर समर्थन भी किया जाता है । स्पैन्सर का कथन है कि व्यक्तिवाद का सिद्धान्त प्राणियों के विकास सिद्धान्त के अनुरूप है । पीछे हम स्पैन्सर के सावयव राज्य के सिद्धान्त का अध्ययन कर आए है और यह देख चुके हैं कि किस प्रकार स्पैन्सर प्राणि - विज्ञान के आधार पर व्यक्तिवाद का समर्थन करता है । स्पैन्सर का कथन है प्रारिण-जगत मे अस्तित्व कायम रखने के लिए बरावर संघर्ष चलता रहता है । जो कमजोर प्रारणी होते हैं या जो इस सघर्ष मे पिछड जाते हैं, प्रकृति उन्हे खत्म होने देती है। जिन प्राणियों मे जीवन की शक्ति अधिक होती है, वही बच पाते हैं। प्राणियों के विकास का इतिहास यह सिद्ध करता है कि जो प्राणी इस संघर्ष में पीछे रह गए वह मिट गए। उनका स्थान अधिक शक्ति सम्पन्न प्राणियो ने ले लिया । उपयुक्ततम के बचने मे तथा आगे श्राने में उनकी अपनी शक्ति ने हो उनकी सहायता की, किसी बाहरी एजेन्सी ने नही । जब प्रारिण-जगत मे विकासयाद का यह सिद्धान्त कार्य करता है तो मानव समाज मे भला क्यो नही करेगा ? मानव-समाज मे निर्धन, प्रयोग्य तथा प्रक्षम व्यक्ति नष्ट हो जाते हैं और केवल योग्य तथा सक्षम व्यक्ति ही बच पाते हैं। प्रकृति का नियम है कि जीवित रहने का अधिकार वे हैं से सम्बन्ध रखने वाले कार्य तथा सामाजिक कार्य राज्य केवल व्यक्ति के सामाजिक कार्यो का ही नियन्त्ररण कर सकता है, अपने आप से सम्बन्ध रखने वाले कार्यो का नहीं। अपने आप से सम्वन्ध रखने वाले कार्यो के विषय मे वह पूर्ण स्वतन्त्र है । स्पैन्सर तो राज्य को एक बहुत बडी बुराई मानता है, उसका कथन है कि राज्य का उदय हमारी दृष्ट प्रकृति के फलस्वरूप हुआ है । वह व्यक्ति के अधिकारो का रक्षक नहीं, बल्कि उनका भक्षक है । शासन दुराचारी है, यदि पूर्ण नैतिक अवस्था की स्थापना हो जाए तो उसकी आवश्यकता ही नही रह सकती । स्पैन्सर ने विकासवाद तथा प्रारिग - विज्ञान के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि राज्य की अवस्थिति मानव समाज के विकास क्रम के निचले स्तर पर आवश्यक होती है । उसका कथन है कि पुराना समाज 'सैनिक समाज' था । उस मे कड़े नियन्त्रण को भले ही प्रावश्यकता रही हो, परन्तु वर्तमान युग के औद्योगिक समाज के लिए उसकी जरूरत नही । वर्तमान युग मे ऐच्छिक सहयोग का अधिक महत्त्व है। प्रारिण-विज्ञान के अनुसार स्पैन्सर यह स्वीकार करता है कि समाज मे उपयुक्ततम की अवस्थिति का सिद्धान्त कार्य कर रहा है । प्रत्येक व्यक्ति अपनी शक्ति के अनुसार इस समाज मे अपना स्थान बनाने का प्रयत्न कर रहा है । इस प्रकृत प्रतियोगिता मे वही लोग बच सकते हैं जो कि शक्तिशाली हैं। राज्य को इस स्वाभाविक प्रक्रिया में किसी प्रकार का दखल नहीं देना चाहिए । श्रत स्पैन्मर के मतानुसार राज्य के केवलमात्र नकारात्मक कार्य हैं । वे इस प्रकार हैं बाह्य आक्रमरण से व्यक्तियों की रक्षा । प्रान्तरिक शत्रुनो से व्यक्तियों की रक्षा । कानून के अनुसार किए गए समझौते का पालन करवाना । राज्य को शिक्षा, जन स्वास्थ्य तथा जन हित के अनेक कार्यों की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए । राज्य को स्कूल नही खोलने चाहिए, हस्पताल नही स्थापित करने चाहिए, सडकें नही वनानी चाहिए, डाकखानो की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए । । सक्षेप मे सभी लोक-हित के कार्यो का सम्पादन व्यक्तियों के ही हाथ में छोड देना चाहिए । इन कार्यो को न कर राज्य व्यक्ति की वास्तविक उन्नति मे सहयोग देता है और समाज के प्रकृत विकास के प्रवाह को अवाध गति से वहने देता है । व्यक्तिवाद के इन प्रमुख समर्थको के अतिरिक्त काण्ड, हमवोल्ड, डी टाकवेल तथा फिचे इत्यादि भी इसके समर्थको मे से हैं । एक सौ उनहत्तर व्यक्तिवाद का समर्थन व्यक्तिवाद का समर्थन अनेक प्रकार के तर्कों के आधार पर किया गया है, ] "Have we not shown that the Government is essentually Immoral ? Does it not exist simply because crime exists and must Government not cease when crime ceases ?"-H Spencer
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किन्तु वह जो हो, किसी-न-किसी का मालिक होना ज़रूरी है, और हर एक का मालिक बनना लाज़िमी नहीं है और सम्भव भी नहीं है। इसलिए कुछ लोग जो तैयार हों कि वे मालिक को सेवा में सेवक बने रहे, तो उन्हीं को अधिकार है कि वे मैटर को भी श्रात्मा करके देखें ।
ऊपर आ गए प्रश्नों का दार्शनिक समाधान दार्शनिक लोग करेगे । मुझे तो मालूम होता है कि इसका असल समाधान तो इस बात में पहले ही से हुआ रखा है कि कौन बलशाली है, कौन निर्बल है । बलवान श्रात्मा को क्यों न मैटर देखे ? दूसरे की जानों को क्यों न खिलौना समझे ? मानवता के हित को क्यों न अंकों में नापे ? भावनाओं को क्यों न व्यर्थ समझे ? वाहुबल को वह क्यों न निर्णायक नीति घोषित करे ? वह क्यों न कहे कि बल में जय है और जो दुर्बल हैं, वे सबल के मुँह का कौर है ? बलशाली तो यह कहेगा और यह उसके बल का प्रमाण है ।
और जो निर्बल हैं, वे क्या कहते है क्या नहीं, यह कौन सुनता है । सदा से जिसको वे अपनी बात सुनाते आए हैं, वह राम उनकी बात सुने तो सुने, हम कौन है कि उस पर कान भी लावें । हम एडीटर हैं, और खुद निर्वलो मे है । पर जो हमें वेतन देता है, वह बलवान् है, और हम उसके विपक्ष की बात तनिक-सी भी कोई नहीं सुन सकते ।
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किन्तु वह जो हो, किसी-न-किसी का मालिक होना ज़रूरी है, और हर एक का मालिक बनना लाज़िमी नहीं है और सम्भव भी नहीं है। इसलिए कुछ लोग जो तैयार हों कि वे मालिक को सेवा में सेवक बने रहे, तो उन्हीं को अधिकार है कि वे मैटर को भी श्रात्मा करके देखें । ऊपर आ गए प्रश्नों का दार्शनिक समाधान दार्शनिक लोग करेगे । मुझे तो मालूम होता है कि इसका असल समाधान तो इस बात में पहले ही से हुआ रखा है कि कौन बलशाली है, कौन निर्बल है । बलवान श्रात्मा को क्यों न मैटर देखे ? दूसरे की जानों को क्यों न खिलौना समझे ? मानवता के हित को क्यों न अंकों में नापे ? भावनाओं को क्यों न व्यर्थ समझे ? वाहुबल को वह क्यों न निर्णायक नीति घोषित करे ? वह क्यों न कहे कि बल में जय है और जो दुर्बल हैं, वे सबल के मुँह का कौर है ? बलशाली तो यह कहेगा और यह उसके बल का प्रमाण है । और जो निर्बल हैं, वे क्या कहते है क्या नहीं, यह कौन सुनता है । सदा से जिसको वे अपनी बात सुनाते आए हैं, वह राम उनकी बात सुने तो सुने, हम कौन है कि उस पर कान भी लावें । हम एडीटर हैं, और खुद निर्वलो मे है । पर जो हमें वेतन देता है, वह बलवान् है, और हम उसके विपक्ष की बात तनिक-सी भी कोई नहीं सुन सकते ।
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नगर राज्य की सध्या
के परिणाम होते हैं । एपीक्यूरस ने एम्पेडोक्लीज़ ( Drupedocles ) से एक सिद्धान्त ग्रहण किया था जो प्राजक्त के प्राकृतिक सवरण ( natural sclection) के सिद्धान्त रो समानता रखता है। मनुष्य का सहज रूप से समाज की ओर भुवाव नहीं है । मनुष्य की एक मात्र स्वाभाविक प्रवृत्ति यह है कि यह जैसे भी हो व्यक्तिगत सुख प्राप्त करना चाहता है। शुरू म मनुष्य निर्हेन्द्र एकाकी जीवन व्यतीत वरता था । वह गुफाओ मे बसेरा करता था और अपनी रक्षा के लिए जगली जानवरो से सडता था। सभ्यता की दिशा में पहला कदम सयोगवश आग का अनुमधान था। धीरे धीरे उसने झोपड़ियो मे रहना और खालो स तन को ढवना सौख लिया। मनुष्य के चीखने चिल्लाने से भाषा का जन्म हुआ। कदन के द्वारा मनुष्य ने पहने पहल अपने भावो को व्यक्त किया। धीरे-धीरे मनुष्य का अनुभव बढता गया और उसने स्थय को प्राकृतिक परिस्थितियों में अनुसार बनाया। इस प्रक्रिया मे हो मनुष्य ने मगठित समाज की विभिन्न संस्थाम्रो विधियो और उपयोगी क्लाओं का सृजन विया । मनुष्य को भौतिष वातावरण द्वारा निर्धारित मर्यादाश्रो वे भीतर ही बायँ बरना पड़ता है। मनुष्य इन मर्यादाश्रो वे भीतर काय करते हुए अपनी प्राकृतिक शक्तियों के उपयोग द्वारा सभ्यता की सृष्टि करता है । सपनो के द्वारा देवनाभो मे विश्वास उत्पन्न होता है। जहाँ मनुष्य को यह अनुभूति होती है कि देवता मानव कार्यों मे कोई भाग नहीं लेते, वही ज्ञान का प्रारम्भ हो जाता है।
शुद्ध प्रहवाद ( ego1810 ) और प्रसविदा ( contract ) पर प्राधारित इस राजनैतिष दर्शन और सामाजिक विकास में सिद्धान्त की सारी सभावनाप्रो वा वर्तमान वाल तब पूरी तरह उपयोग नहीं किया जा रायता। हाँ के राजनैतिर दर्शन मे हमे इस सिद्धान्त का पुनरुदय दोखता है। हॉब्स वा दर्शन भी भौतिकवाद (materialism) पर आधारित है। वह भी मनुष्य के समस्त प्रस्तो मे स्वयं भी भावना देखता है और उसने भी राज्य के निर्माण का मुख्य हेतु सुरक्षा की ग्रावश्यक्ता बतलाया है। उसका यह दर्शन एपीक्यूरियन दर्शन से आश्चयजनक साभ्य रखता प्राचीन काल मे एपीक्यूरियन दर्शन का अधिक प्रचार इसलिए नहीं हो सका, क्योकि वह धर्म और मधविश्वास का विरोधी था जब कि उस समय इनकी तूती बोल रही थी। राव मिलावर, एपीक्यूरियन दर्शन पलायन या दर्शन था। एफोक्यूरिया दर्शन के ऊपर इन्द्रिय सुखवाद (sensualism) वा प्रारोप तो नहीं लगाया जा सकता तथापि उसने एक ऐसे निष्प्राण सौंदर्यवाद (Aestlict1c19m ) को प्रोत्साहन दिया जो न तो मानव षायों को प्रभावित कर सकता था और न उन पर प्रभाव डालना चाहता था। इस दर्शन ने व्यक्ति को शान्ति तथा सतोष का संदेश दिया लेकिन राजनैतिक विचारों के विकास में योग नहीं के बराबर था ।
सिरिय विचारव
( The Synies )
सिनिय विचारों का दर्शन भी पलायनवादी था लेकिन उनवा पलायनवाद एवं भिन्न प्रकार का था। वे अन्य किसी सम्प्रदाय की अपेक्षा नगर-राज्य में और
उसके सामाजिव वर्गीक के अधिक विरोधी थे। उनके पलायनवाद का रूपी अनोखा था। मनुष्य जिन वस्तुओं को जीवन का सुख सबभते हैं, उन्होंने उनका तिरपार किया। उन्होंने रामस्न सामाजिव भेद-भावों के निवारण पर जोर दिया। वे कभी-कभी सुविधामो तथा सामाजिव हडियो की शिष्टनामो तक को त्याग देते थे। अधिकातिक विचारक विदेशी और निर्वामित व्यक्ति थे। इन लोगों को राज्य की नागरिक्ता नहीं मिली थी। इन सम्प्रदाय को संस्थापक एडिस्पेनी (Antisthunes) वो मा प्रेमियन ( Thmey3m ) थो । उसका सबसे विचित्र सदस्य सिनोप वा डायोजनीम ( Diogenes of Sinope) निर्वासित व्यक्ति या इसने सबसे याग्य प्रतिनिधि क्रटीम (Crates) ने दौलत को लात मार कर दार्शनिक दरिद्रता वा जीवन अपनाया था। वह भ्रमणशील परिव्राजक तथा शिक्षक मा जीवन व्यतीत करन लगा था। उनकी पत्नी हिपाविया (Hipparch13 ) मञ्जार परिवार की महिला थी । वह पहले उसको शिप्या रहो थो, बाद में उनको सहमती बन गई। मिनिक विचारको वा कोई मगठन नहीं था। ये विचारण अधिक्तर घूम-घूम कर लोगों को शिक्षा देते थे। उन्होंने दरिद्रता का जोवन सिद्धान्त रूप से स्वीकार किया था। इनकी तुलना कुछ मशो मे मध्ययुगीन सतो से हो जा सकती है । उनको शिक्षाएँ अधिकतर गरीबों के लिए थी। उन्होंने रूदियो तिरस्कार करन की शिक्षा दो । उनना व्यवहार वडा सा था और वे भी शिष्टता की भीमाया का भी उल्धन कर जाते थे। प्राचीन समार मे सिनिक विचारको वो सर्वहारा दार्शनिको वा सबसे पहला उदाहरण समझा जा सकता है।
मिति विचारों की शिक्षा का दार्शनिक आधार यह याविबुद्धिमान व्यक्ति को पूर्ण रूप स आत्म-निर्भर होना चाहिए । उनका इसने यह माना कि जो बुद्ध व्यक्ति को अपनी शक्ति, अपने विचार और अपने चरित्र के मंन्दर है, मुखी जीवन के लिए वही मावश्यक है । नैतिक चरित्र के अतिरिक्त अन्य मारी चीजें वर्ष हैं। सम्पत्ति और विवाह, परिवार मोर नागग्निता, विद्वत्ता और प्रतिष्ठा, सोप में सभ्य जीवन को सभी श्रेष्ठ बातें धौर मंदियां निरस्कारयोग्य हैं। इस प्रकार, सिनिक विचारको ने यूनानो जोवन के समस्त प्रयागत भेद-भादो को तीव्र मातोचना को । मिनिको को दृष्टि में प्रमोर और गरीव, यूनानी और बर्बर, नागरिक और विदेश स्वतन्त्र और दाम, उच्नवीय और निम्नवशीय ये सभी लोग समान है क्योंकि सभी उदासीनता में समान घरातन पर लाकर सडे कर दिए जाते हैं। तथानि गिनिजको समानता नृत्यवाद (nibilism) को समानता थी । यह सम्प्रदाय मानवप्रेम (philanthropy) प्रथवा गुधारवाद (amelioration) के सामाजिक दर्शन 47 माधार कभी नहीं बना । लेकिन, यह सदेव सन्याम और प्युरिटनवाद भुरा रहा। उनकी निगाह में गरीबी और दानना का कोई महत्व नहीं था ! विचार में स्वतन्त्र व्यक्ति को स्थिति किसी भी हालत में दास से बेहतर नहीं दो । उनमें से किसी के अन्दर स्वयं कोई महत्त्व नहीं था। सिनिक यह भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि दासता बुरी चीज है मौर स्वतन्त्रता मच्छो चीज है। प्राचीन समार मे जो सामाजिक भेदभाव प्रचलित थे सिनियो को उनसे सस्त नफरत दो
नगर राज्य की सन्ध्या
इस नफरत के परिणामस्वरूप होने समानता की ओर से अपनी पीठ मोड नी और दर्शन शास्त्र के द्वारा प्राध्यात्मिकता के एक ऐसे जगत में प्रवेश किया जिसम छोटो बातों के लिए कोई स्थान नहीं था। सिनिक वा दर्शन भी पीक्यूरियन विचारको भतिको दर्शन था। वि यह त्याग परिजन और श्यवादी वा त्याग था, सौंदर्यप्रेमी वा नही ।
परिणाम यह हुआ वि सिनियो का दशन था। यहा जाता है वि एटिस्थेनीज (Antisthene ) प्रौर डायोजेनीज (Diogenes) दोना ने राजनीति घे सम्बन्ध मे पुस्तक लिखी थी और उन्होंने एक ऐसाद साम्यवाद प्रथवा संभवत अराजकता का चित्र खीचा है, जिसम सम्पत्ति विवाह और शामन लुप्त हो गए हो । सिनिय के विचार से मुख्य समस्या वह नहीं है जो अधिकाश व्यक्तियो वे जीवन मे सम्बन्ध रखती है ! अधिक व्यक्ति चाहे वे विमी भी सामाजिक वग थे क्यो न हो मूर्ख होते हैं। श्रेष्ठ जीवन केवल ज्ञानी पुरुष के लिए ही है। इसी प्रकार, मच्चा समान भी केवल ज्ञानी व्यक्तियों के लिए ही है । दर्शन अपने अनुयायियों को राज्य के बानूनों और बन्धनो से मुक्त कर देता है। ज्ञानो पुस्प हर जगह एक सी स्थिति मे रहता है। उसे न घर की जरूरत है न देश की न नगर वो न वानून की। उसके लिए तो उसका मद्गुण ही पाना होता है। सारी मस्थाएँ बनावटी और दार्शनिक वे लिए उपेक्षणीय होती हैं। जिन व्यक्तियों ने नैतिक आत्महरा प्राप्त कर ली है उनके लिए ये सारी चीजें अनावश्यक है। सच्चा राज्य वह है जिसकी नागरिक्ता की सबसे बडी शर्त ज्ञान हो इस राज्य के लिए न स्थान की आवश्यकता है और न मानून की बुद्धिमान् व्यक्ति सर्वत्र ही एवं समाजमा विदव नगर वा निर्माण करते हैं। डायोजेनीज (Diogunes) ने अनुमार, बुद्धिमान व्यक्ति विश्वात्मा', विश्व-नागरिक होता है। विश्वगता वा यह मिद्धा त आगे चल कर अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। स्टोइक विचारवी ने इस सिद्धान्त वा विस्तार किया और इसे सकारारमव अर्थ दिया। सिनिको ने इसने नकारात्मक पक्ष पर जोर दिया। उन्होंने एक प्रकार की प्रादिम अवस्था (primitivisru) वा प्रतिपादन किया। उन्होंने नागरिक और सामाजिव बन्धन और समस्त प्रतिबन्धो के उन्मूलन को सिफारिश की। वे बेवल उन्ही प्रतिबन्धो को मानने के लिए तैयार थे जो बुद्धिमान् व्यक्ति वक्तव्य भावना के आधार पर उत्पन्न होते हैं। सिनिको को सामाजिक रूढ़ियो के खिलाफ जिहाद एक प्रकार से प्रकृति की घोर वह भी बहुत अधिक नकारात्मक ढंग से लौटने का सिद्धान्त था ।
सिनिय सिद्धान्त वा व्यावहारिक महत्त्व यह है कि इस स्टोइववाद (stoncrem) को जन्म दिया। सिनिव सम्प्रदाय यो विचारधारा का एक और दृष्टि से भी महत्व है । सिनिय विचारो को हुए दो हजार वर्षों से भी अधिक का समय है। तथापि, उनके राजनैतिक दर्शन के बहुत स तत्व भब भी जीवित हैं। राति विचारधारा के उदय भौर विस्तार से ज्ञात होता है कि रात के समय म से ऐसे बहुत से व्यक्ति पे जो नगर-राज्य की संस्थामा से भारावात थे और उन्हें बसी भी प्रकार मादर्श नहीं मानते थे। लेकिन प्लेटो और मरस्तू इन व्यक्तियों के
विरोध में थे। इसलिए, स्वभावत, इनका महत्त्व स्थापित न हो सका। लेकिन, इन लोगो ने चौथो शताब्दी के भारम्भ मे हो नगर-राज्य का पतन देख लिया था। यही बात अन्य लोगो को शताब्दी के भन्न मे दिखाई दो ।
The Greek Atomists and Epicurus-A Study. By Cyril Bailey Oxford, 1928 Ch 10
Til Lucreti Cari De rerum natura. Ed with Prolegomens, Critical Apparatus and Commentary by Cyril Bailey. 3 Vols Oxford, 1947 Prolegomena, Section IV.
Greek Thinkers By Theodor Gomperz, Vol II. Trans. by G, G Berry New York, 1905 Bh, ch VII.
Store and Epicurean By R. D. Hicks London, 1910, Ch V. Diogenes of Sinope 4 Study of Greek Cynicism By Farrand Sayre Baltimore, 1938
Lucretius Poet and Philosopher By Edward E. Sikes, Cambridge,
The Stores, Epicurcans, and Scepties By E Zelbr, Trans by O J Reichel, London, 1850, Ch. XX
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नगर राज्य की सध्या के परिणाम होते हैं । एपीक्यूरस ने एम्पेडोक्लीज़ से एक सिद्धान्त ग्रहण किया था जो प्राजक्त के प्राकृतिक सवरण के सिद्धान्त रो समानता रखता है। मनुष्य का सहज रूप से समाज की ओर भुवाव नहीं है । मनुष्य की एक मात्र स्वाभाविक प्रवृत्ति यह है कि यह जैसे भी हो व्यक्तिगत सुख प्राप्त करना चाहता है। शुरू म मनुष्य निर्हेन्द्र एकाकी जीवन व्यतीत वरता था । वह गुफाओ मे बसेरा करता था और अपनी रक्षा के लिए जगली जानवरो से सडता था। सभ्यता की दिशा में पहला कदम सयोगवश आग का अनुमधान था। धीरे धीरे उसने झोपड़ियो मे रहना और खालो स तन को ढवना सौख लिया। मनुष्य के चीखने चिल्लाने से भाषा का जन्म हुआ। कदन के द्वारा मनुष्य ने पहने पहल अपने भावो को व्यक्त किया। धीरे-धीरे मनुष्य का अनुभव बढता गया और उसने स्थय को प्राकृतिक परिस्थितियों में अनुसार बनाया। इस प्रक्रिया मे हो मनुष्य ने मगठित समाज की विभिन्न संस्थाम्रो विधियो और उपयोगी क्लाओं का सृजन विया । मनुष्य को भौतिष वातावरण द्वारा निर्धारित मर्यादाश्रो वे भीतर ही बायँ बरना पड़ता है। मनुष्य इन मर्यादाश्रो वे भीतर काय करते हुए अपनी प्राकृतिक शक्तियों के उपयोग द्वारा सभ्यता की सृष्टि करता है । सपनो के द्वारा देवनाभो मे विश्वास उत्पन्न होता है। जहाँ मनुष्य को यह अनुभूति होती है कि देवता मानव कार्यों मे कोई भाग नहीं लेते, वही ज्ञान का प्रारम्भ हो जाता है। शुद्ध प्रहवाद और प्रसविदा पर प्राधारित इस राजनैतिष दर्शन और सामाजिक विकास में सिद्धान्त की सारी सभावनाप्रो वा वर्तमान वाल तब पूरी तरह उपयोग नहीं किया जा रायता। हाँ के राजनैतिर दर्शन मे हमे इस सिद्धान्त का पुनरुदय दोखता है। हॉब्स वा दर्शन भी भौतिकवाद पर आधारित है। वह भी मनुष्य के समस्त प्रस्तो मे स्वयं भी भावना देखता है और उसने भी राज्य के निर्माण का मुख्य हेतु सुरक्षा की ग्रावश्यक्ता बतलाया है। उसका यह दर्शन एपीक्यूरियन दर्शन से आश्चयजनक साभ्य रखता प्राचीन काल मे एपीक्यूरियन दर्शन का अधिक प्रचार इसलिए नहीं हो सका, क्योकि वह धर्म और मधविश्वास का विरोधी था जब कि उस समय इनकी तूती बोल रही थी। राव मिलावर, एपीक्यूरियन दर्शन पलायन या दर्शन था। एफोक्यूरिया दर्शन के ऊपर इन्द्रिय सुखवाद वा प्रारोप तो नहीं लगाया जा सकता तथापि उसने एक ऐसे निष्प्राण सौंदर्यवाद को प्रोत्साहन दिया जो न तो मानव षायों को प्रभावित कर सकता था और न उन पर प्रभाव डालना चाहता था। इस दर्शन ने व्यक्ति को शान्ति तथा सतोष का संदेश दिया लेकिन राजनैतिक विचारों के विकास में योग नहीं के बराबर था । सिरिय विचारव सिनिय विचारों का दर्शन भी पलायनवादी था लेकिन उनवा पलायनवाद एवं भिन्न प्रकार का था। वे अन्य किसी सम्प्रदाय की अपेक्षा नगर-राज्य में और उसके सामाजिव वर्गीक के अधिक विरोधी थे। उनके पलायनवाद का रूपी अनोखा था। मनुष्य जिन वस्तुओं को जीवन का सुख सबभते हैं, उन्होंने उनका तिरपार किया। उन्होंने रामस्न सामाजिव भेद-भावों के निवारण पर जोर दिया। वे कभी-कभी सुविधामो तथा सामाजिव हडियो की शिष्टनामो तक को त्याग देते थे। अधिकातिक विचारक विदेशी और निर्वामित व्यक्ति थे। इन लोगों को राज्य की नागरिक्ता नहीं मिली थी। इन सम्प्रदाय को संस्थापक एडिस्पेनी वो मा प्रेमियन थो । उसका सबसे विचित्र सदस्य सिनोप वा डायोजनीम निर्वासित व्यक्ति या इसने सबसे याग्य प्रतिनिधि क्रटीम ने दौलत को लात मार कर दार्शनिक दरिद्रता वा जीवन अपनाया था। वह भ्रमणशील परिव्राजक तथा शिक्षक मा जीवन व्यतीत करन लगा था। उनकी पत्नी हिपाविया मञ्जार परिवार की महिला थी । वह पहले उसको शिप्या रहो थो, बाद में उनको सहमती बन गई। मिनिक विचारको वा कोई मगठन नहीं था। ये विचारण अधिक्तर घूम-घूम कर लोगों को शिक्षा देते थे। उन्होंने दरिद्रता का जोवन सिद्धान्त रूप से स्वीकार किया था। इनकी तुलना कुछ मशो मे मध्ययुगीन सतो से हो जा सकती है । उनको शिक्षाएँ अधिकतर गरीबों के लिए थी। उन्होंने रूदियो तिरस्कार करन की शिक्षा दो । उनना व्यवहार वडा सा था और वे भी शिष्टता की भीमाया का भी उल्धन कर जाते थे। प्राचीन समार मे सिनिक विचारको वो सर्वहारा दार्शनिको वा सबसे पहला उदाहरण समझा जा सकता है। मिति विचारों की शिक्षा का दार्शनिक आधार यह याविबुद्धिमान व्यक्ति को पूर्ण रूप स आत्म-निर्भर होना चाहिए । उनका इसने यह माना कि जो बुद्ध व्यक्ति को अपनी शक्ति, अपने विचार और अपने चरित्र के मंन्दर है, मुखी जीवन के लिए वही मावश्यक है । नैतिक चरित्र के अतिरिक्त अन्य मारी चीजें वर्ष हैं। सम्पत्ति और विवाह, परिवार मोर नागग्निता, विद्वत्ता और प्रतिष्ठा, सोप में सभ्य जीवन को सभी श्रेष्ठ बातें धौर मंदियां निरस्कारयोग्य हैं। इस प्रकार, सिनिक विचारको ने यूनानो जोवन के समस्त प्रयागत भेद-भादो को तीव्र मातोचना को । मिनिको को दृष्टि में प्रमोर और गरीव, यूनानी और बर्बर, नागरिक और विदेश स्वतन्त्र और दाम, उच्नवीय और निम्नवशीय ये सभी लोग समान है क्योंकि सभी उदासीनता में समान घरातन पर लाकर सडे कर दिए जाते हैं। तथानि गिनिजको समानता नृत्यवाद को समानता थी । यह सम्प्रदाय मानवप्रेम प्रथवा गुधारवाद के सामाजिक दर्शन सैंतालीस माधार कभी नहीं बना । लेकिन, यह सदेव सन्याम और प्युरिटनवाद भुरा रहा। उनकी निगाह में गरीबी और दानना का कोई महत्व नहीं था ! विचार में स्वतन्त्र व्यक्ति को स्थिति किसी भी हालत में दास से बेहतर नहीं दो । उनमें से किसी के अन्दर स्वयं कोई महत्त्व नहीं था। सिनिक यह भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि दासता बुरी चीज है मौर स्वतन्त्रता मच्छो चीज है। प्राचीन समार मे जो सामाजिक भेदभाव प्रचलित थे सिनियो को उनसे सस्त नफरत दो नगर राज्य की सन्ध्या इस नफरत के परिणामस्वरूप होने समानता की ओर से अपनी पीठ मोड नी और दर्शन शास्त्र के द्वारा प्राध्यात्मिकता के एक ऐसे जगत में प्रवेश किया जिसम छोटो बातों के लिए कोई स्थान नहीं था। सिनिक वा दर्शन भी पीक्यूरियन विचारको भतिको दर्शन था। वि यह त्याग परिजन और श्यवादी वा त्याग था, सौंदर्यप्रेमी वा नही । परिणाम यह हुआ वि सिनियो का दशन था। यहा जाता है वि एटिस्थेनीज प्रौर डायोजेनीज दोना ने राजनीति घे सम्बन्ध मे पुस्तक लिखी थी और उन्होंने एक ऐसाद साम्यवाद प्रथवा संभवत अराजकता का चित्र खीचा है, जिसम सम्पत्ति विवाह और शामन लुप्त हो गए हो । सिनिय के विचार से मुख्य समस्या वह नहीं है जो अधिकाश व्यक्तियो वे जीवन मे सम्बन्ध रखती है ! अधिक व्यक्ति चाहे वे विमी भी सामाजिक वग थे क्यो न हो मूर्ख होते हैं। श्रेष्ठ जीवन केवल ज्ञानी पुरुष के लिए ही है। इसी प्रकार, मच्चा समान भी केवल ज्ञानी व्यक्तियों के लिए ही है । दर्शन अपने अनुयायियों को राज्य के बानूनों और बन्धनो से मुक्त कर देता है। ज्ञानो पुस्प हर जगह एक सी स्थिति मे रहता है। उसे न घर की जरूरत है न देश की न नगर वो न वानून की। उसके लिए तो उसका मद्गुण ही पाना होता है। सारी मस्थाएँ बनावटी और दार्शनिक वे लिए उपेक्षणीय होती हैं। जिन व्यक्तियों ने नैतिक आत्महरा प्राप्त कर ली है उनके लिए ये सारी चीजें अनावश्यक है। सच्चा राज्य वह है जिसकी नागरिक्ता की सबसे बडी शर्त ज्ञान हो इस राज्य के लिए न स्थान की आवश्यकता है और न मानून की बुद्धिमान् व्यक्ति सर्वत्र ही एवं समाजमा विदव नगर वा निर्माण करते हैं। डायोजेनीज ने अनुमार, बुद्धिमान व्यक्ति विश्वात्मा', विश्व-नागरिक होता है। विश्वगता वा यह मिद्धा त आगे चल कर अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। स्टोइक विचारवी ने इस सिद्धान्त वा विस्तार किया और इसे सकारारमव अर्थ दिया। सिनिको ने इसने नकारात्मक पक्ष पर जोर दिया। उन्होंने एक प्रकार की प्रादिम अवस्था वा प्रतिपादन किया। उन्होंने नागरिक और सामाजिव बन्धन और समस्त प्रतिबन्धो के उन्मूलन को सिफारिश की। वे बेवल उन्ही प्रतिबन्धो को मानने के लिए तैयार थे जो बुद्धिमान् व्यक्ति वक्तव्य भावना के आधार पर उत्पन्न होते हैं। सिनिको को सामाजिक रूढ़ियो के खिलाफ जिहाद एक प्रकार से प्रकृति की घोर वह भी बहुत अधिक नकारात्मक ढंग से लौटने का सिद्धान्त था । सिनिय सिद्धान्त वा व्यावहारिक महत्त्व यह है कि इस स्टोइववाद को जन्म दिया। सिनिव सम्प्रदाय यो विचारधारा का एक और दृष्टि से भी महत्व है । सिनिय विचारो को हुए दो हजार वर्षों से भी अधिक का समय है। तथापि, उनके राजनैतिक दर्शन के बहुत स तत्व भब भी जीवित हैं। राति विचारधारा के उदय भौर विस्तार से ज्ञात होता है कि रात के समय म से ऐसे बहुत से व्यक्ति पे जो नगर-राज्य की संस्थामा से भारावात थे और उन्हें बसी भी प्रकार मादर्श नहीं मानते थे। लेकिन प्लेटो और मरस्तू इन व्यक्तियों के विरोध में थे। इसलिए, स्वभावत, इनका महत्त्व स्थापित न हो सका। लेकिन, इन लोगो ने चौथो शताब्दी के भारम्भ मे हो नगर-राज्य का पतन देख लिया था। यही बात अन्य लोगो को शताब्दी के भन्न मे दिखाई दो । The Greek Atomists and Epicurus-A Study. By Cyril Bailey Oxford, एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस Ch दस Til Lucreti Cari De rerum natura. Ed with Prolegomens, Critical Apparatus and Commentary by Cyril Bailey. तीन Vols Oxford, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस Prolegomena, Section IV. Greek Thinkers By Theodor Gomperz, Vol II. Trans. by G, G Berry New York, एक हज़ार नौ सौ पाँच Bh, ch VII. Store and Epicurean By R. D. Hicks London, एक हज़ार नौ सौ दस, Ch V. Diogenes of Sinope चार Study of Greek Cynicism By Farrand Sayre Baltimore, एक हज़ार नौ सौ अड़तीस Lucretius Poet and Philosopher By Edward E. Sikes, Cambridge, The Stores, Epicurcans, and Scepties By E Zelbr, Trans by O J Reichel, London, एक हज़ार आठ सौ पचास, Ch. XX
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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"राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित धर्म संसद में 'अपमानजनक' टिप्पणी करने और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की तारीफ करने के आरोप में कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. मध्यप्रदेश के खजुराहो से कालीचरण की गिरफ्तारी हुई है. रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल ने कालीचरण की गिरफ्तारी की पुष्टि की है.
As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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"राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित धर्म संसद में 'अपमानजनक' टिप्पणी करने और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की तारीफ करने के आरोप में कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. मध्यप्रदेश के खजुराहो से कालीचरण की गिरफ्तारी हुई है. रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल ने कालीचरण की गिरफ्तारी की पुष्टि की है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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सीबीआई ने जल शक्ति मंत्रालय के वैपकोस वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी के पूर्व सीएमडी राजेंद्र कुमार गुप्ता के घर पर आय से अधिक संपत्ति को लेकर छापेमारी।
शहर की एंटी नारकोटिक्स सेल ने एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। साथ ही उसके कब्जे से 1 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद हुआ है।
शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक संस्कृत मॉडल स्कूल में टीचर पर हमला करने वाले चार नाबालिग आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
मुकेरिया पुलिस ने एक युवक को 100 ग्राम हैरोइन सहित गिरफ्तार किया है।
कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे।
तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा।
धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं।
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सीबीआई ने जल शक्ति मंत्रालय के वैपकोस वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी के पूर्व सीएमडी राजेंद्र कुमार गुप्ता के घर पर आय से अधिक संपत्ति को लेकर छापेमारी। शहर की एंटी नारकोटिक्स सेल ने एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। साथ ही उसके कब्जे से एक किलो छः सौ ग्राम गांजा बरामद हुआ है। शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक संस्कृत मॉडल स्कूल में टीचर पर हमला करने वाले चार नाबालिग आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मुकेरिया पुलिस ने एक युवक को एक सौ ग्राम हैरोइन सहित गिरफ्तार किया है। कर्क राशि वालों आज घर की सुख-सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। कन्या राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। तुला राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। धनु राशि वालों व्यापार में लाभ के संकेत हैं। उच्च अधिकारी आपके विचारों से प्रसन्न हो सकते हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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स्टेड दुरेड् Dured [3] पुं० द्र०-सूवार ।
वेळा दुरेडा Dureda [3] fao दूरतर ( वि०) अधिक दूर i
खेडे दुरेडे Durede [3] क्रि० दि०
दूरतर ( क्रि० वि०) अधिक दूरी पर ।
उ दुरंतू Durait [1] वि० द्वैत (वि०) दो, युगल
सुवै दुरंत्भाव Duraitbhāv [1] वुं द्वैतभाव (पुं०) द्वैतभाव, भेद दृष्टि ।
लवित दुल्हन Dulhan [3] स्त्री०
दुर्लभ (वि०) दुलहिन, नव विवाहिता ।
घुसा दुल्हा Dulhā [3] पुं०
दुर्लभ (वि०) दुल्हा, वर ।
छुर्लब दुलम्भु Dulambh [3] वि०
दुर्लभ (वि०) दुर्लभ, कठिनाई से प्राप्य ।
दिया दुविधा Duvidha [3] स्त्री०
द्विविधा (स्त्री०) दुविधा, शंका, सन्देह् ।
सुभ दूआ Duā [2] पुं०
द्वितीय (वि०) दूसरा, अन्य ।
सुटी दूई Dāī [3] स्त्री०
द्र०कृती ।
सुष्टीबाट दुईभाव Daibhav [3] पुं० द्वैतभाव (पुं०) भेदभाव, भेद-दृष्टि ।
टुमला दुस्णा Dusng [3] पुं० दूषण (नपुं० ) दूषण, दोष, कलङ्क ।
रमटा दृश्णा Düsna [3] सक० कि० वृष्यति ( दिवादि सक०) दूषित करना,
मलिन करना ।
मउ दशत् Dīśat [3] वि०
दूषित (वि०) दोष युक्त; नष्ट; कलंकित ।
टून दूज् Dūj [3] स्त्री०
द्वितीया (स्त्री०) द्वितीया तिथि ।
हता दूज्डा Dūjxa [3] पुं० द्र० सभा ।
हुन दूजा Düja [3] पुं० द्र० - चुभा ।
सुनी दूजी Dūjī [3] स्त्री०
द्वितीया (स्त्री०) दूसरी, अन्य ।
स दूज्जा Dujja [3] पुं०
द्र० - सभा । टूट टूण् Døn [3] वि०
द्विगुण (वि०) दून, दूना ।
टु दूणा Dūnā [3] पुं०
द्विगुण (वि०) दूना, दुगुना ।
टूटी दूणी Dünī [3] स्त्री०
द्विगुण (वि०) दूनी, दुगुनी ।
हुउ दूत Dūt [3] पुं०
यमदूत (पुं० ) यमदूत, यमराज का दूत ।
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स्टेड दुरेड् Dured [तीन] पुंशून्य द्रशून्य-सूवार । वेळा दुरेडा Dureda [तीन] fao दूरतर अधिक दूर i खेडे दुरेडे Durede [तीन] क्रिशून्य दिशून्य दूरतर अधिक दूरी पर । उ दुरंतू Durait [एक] विशून्य द्वैत दो, युगल सुवै दुरंत्भाव Duraitbhāv [एक] वुं द्वैतभाव द्वैतभाव, भेद दृष्टि । लवित दुल्हन Dulhan [तीन] स्त्रीशून्य दुर्लभ दुलहिन, नव विवाहिता । घुसा दुल्हा Dulhā [तीन] पुंशून्य दुर्लभ दुल्हा, वर । छुर्लब दुलम्भु Dulambh [तीन] विशून्य दुर्लभ दुर्लभ, कठिनाई से प्राप्य । दिया दुविधा Duvidha [तीन] स्त्रीशून्य द्विविधा दुविधा, शंका, सन्देह् । सुभ दूआ Duā [दो] पुंशून्य द्वितीय दूसरा, अन्य । सुटी दूई Dāī [तीन] स्त्रीशून्य द्रशून्यकृती । सुष्टीबाट दुईभाव Daibhav [तीन] पुंशून्य द्वैतभाव भेदभाव, भेद-दृष्टि । टुमला दुस्णा Dusng [तीन] पुंशून्य दूषण दूषण, दोष, कलङ्क । रमटा दृश्णा Düsna [तीन] सकशून्य किशून्य वृष्यति दूषित करना, मलिन करना । मउ दशत् Dīśat [तीन] विशून्य दूषित दोष युक्त; नष्ट; कलंकित । टून दूज् Dūj [तीन] स्त्रीशून्य द्वितीया द्वितीया तिथि । हता दूज्डा Dūjxa [तीन] पुंशून्य द्रशून्य सभा । हुन दूजा Düja [तीन] पुंशून्य द्रशून्य - चुभा । सुनी दूजी Dūjī [तीन] स्त्रीशून्य द्वितीया दूसरी, अन्य । स दूज्जा Dujja [तीन] पुंशून्य द्रशून्य - सभा । टूट टूण् Døn [तीन] विशून्य द्विगुण दून, दूना । टु दूणा Dūnā [तीन] पुंशून्य द्विगुण दूना, दुगुना । टूटी दूणी Dünī [तीन] स्त्रीशून्य द्विगुण दूनी, दुगुनी । हुउ दूत Dūt [तीन] पुंशून्य यमदूत यमदूत, यमराज का दूत ।
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छत्तीसगढ़ : तेलंगाना बॉर्डर पर हुई मुठभेड़ में 8 नक्सली मारे गए हैं। इसमें नक्सलियों के बड़े नेता लक्षणा के मारे जाने की भी खबर है। नक्सलियों के पास से सात बंदूकें और एके 47 और एक एसएलआर बरामद हुई हैं।
सुरक्षाकर्मियों को वहां टॉप नक्सल नेताओं के होने के सूचना मिली थी। पुलिस नक्सलियों के बड़े नेता हरिभूषण की तलाश में थी, लेकिन वह भाग निकलने में सफल हुए हैं।
यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर हुई है। दरअसल, गृह मंत्रालय ने पहले ही चिंता जताई थी कि तेलंगाना में नक्सल फिर पांव पसार रहा है इसलिए यह ऑपरेशन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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छत्तीसगढ़ : तेलंगाना बॉर्डर पर हुई मुठभेड़ में आठ नक्सली मारे गए हैं। इसमें नक्सलियों के बड़े नेता लक्षणा के मारे जाने की भी खबर है। नक्सलियों के पास से सात बंदूकें और एके सैंतालीस और एक एसएलआर बरामद हुई हैं। सुरक्षाकर्मियों को वहां टॉप नक्सल नेताओं के होने के सूचना मिली थी। पुलिस नक्सलियों के बड़े नेता हरिभूषण की तलाश में थी, लेकिन वह भाग निकलने में सफल हुए हैं। यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर हुई है। दरअसल, गृह मंत्रालय ने पहले ही चिंता जताई थी कि तेलंगाना में नक्सल फिर पांव पसार रहा है इसलिए यह ऑपरेशन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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जायगो । ये । सुन के चारों चौबे भाग गये । छीतस्वामी ने एक पद करिके गायो । राग नटभई अब गिरिधर सो पहेचान । ये पद सुन के गुसाई जी प्रसन्न भए ।
नागरीदास जी ने भी छीतस्वामी की झगड़ालू प्रकृति का वर्णन करते हुए कहा है कि एक दिन छीतस्वामी थोथे नारियल में राख भरकर गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के सम्मुख ले गए और उन्हें भेट किया किंतु गोस्वामी जी के तुड़वाने पर उनके सामने ही उसमे से गरी, निकलो । यह चमत्कार देखकर छीतस्वामी बहुत लज्जित हुए और उसी समय उन्होने यह पद गाया - राग सारंग - जे बसुदेव किये पूरन तप तेई फल फलित श्री वल्लभदेव ।
उपर्युक्त प्रसग से भी इसी बात की पुष्टि होती है कि ये वल्लभ-सम्प्रदाय में आने से पहले कवि थे और पद गाया करते थे । आचार्य जी के सम्पर्क में आने से पूर्व ही आपको संगीत का ज्ञान था । तभी तो छीतस्वामी ने गोस्वामी जी के समक्ष तत्काल पद बनाकर गाया था ।
छीतस्वामी के किसी सम्प्रदाय की दीक्षा देने वाले स्वामी होने का कोई प्रमाण नही मिलता । किंतु गोसाई जी की शरण में जाने से पहले ही छीतस्वामी भी गोविन्दस्वामी की तरह 'स्वामी' कहलाते थे । अत संभव है कि गान विद्या तथा कविता सीखने के लिए इनके पास आनेवाले शिष्यों ने इनको स्वामी की उपाधि दे दी हो ।
वार्ता अथवा अन्य किसी भी आधार से यह नही ज्ञात होता कि इन्होने सगीत की शिक्षा कब और कहाँ पाई । ऐसा ज्ञात होता है कि वल्लभ-सम्प्रदाय में आने से पूर्व आपको संगीत का थोड़ा ज्ञान था । किंतु गोस्वामी विट्ठलनाथ जी की शरण में आने के उपरान्त उनकी शिक्षा तथा अष्टछाप के अन्य कवियों के सम्पर्क से छीतस्वामी की संगीत विषयक प्रतिभा का और भी विकास तथा पूर्ण प्रस्फुटन हुआ । वार्ता में लिखा है कि श्री गुसाई जी की कृपा से छीतस्वामी भगवदीय कवीश्वर और कीर्तनकार हुए । वार्ता से ज्ञात होता है कि अकबर बादशाह ने भी उनका कीर्तन सुना था ।
" और एक दिन बीरबल देशाधिपति सों रजा लेके श्री गोकुल मे जन्माष्टमी के दर्शकु आयो । पाछे वेष पलटाय के देशाधिपतिहूं छाने छाने आयो । तब जन्माष्टमी के पालना के दर्शन करे। मनुष्यन की भीड मे । तब देशाधिपति कु श्री गुसाई जी बिना और कोई ने पहिचान्यो नही । तब छीतस्वामी कीर्तन करत हते । और श्री गुसाई जी श्री नवनीतप्रिया जी कु पालना झुलावत हते तब छीतस्वामी ने ये पद गायो ।" ४
१. २५२ वैष्णवन की वार्ता, पू० १६-१७
२. नागर समुच्चय, पद प्रसंग माला, सिंगार सागर, शिवलाल, पृ० २०७
३. 'सो वे गुसांई जी की कृपा ते बड़े कवीश्वर भये, सो बहुत कीर्तन किये ।'
अष्टछाप काँकरोली, पृ० २५६
४. २५२ वैष्णवन की वार्ता, पृ० १६
पुष्टि- सम्प्रदाय मे दीक्षा लेने के अनन्तर वे स्थायी रूप से गोवर्द्धन पर श्रीनाथ जी के मंदिर में भजन-कीर्तन करने लगे और भक्ति में लीन होकर उन्होने बहुत से पद बना कर गाए ।
गदाधर भट्ट
भक्तमाल मे जो छप्पय दिया हुआ है उसमे गदाधर भट्ट के संगीत ज्ञान पर कुछ भी प्रकाश नही पडता । भक्तमाल की पंक्तियो- 'भागवत सुधा बरखै बदन काहू को नाहिन दुखद, गुण निकर गदाधर भट्ट अति सबहिन को लागे सुखद ।" से यह अवश्य ज्ञात होता है कि गदाधर भट्ट जी भागवत सुनाया करते थे । भक्तनामावली में कहा गया है
भट्ट गदाधर नाथ भट्ट विद्या भजन प्रवीन । सरस कथा बानी मधुर सुनि रुचि होत नवीन ॥ १
इससे भी इस बात का समर्थन होता है कि ये भजन में प्रवीण थे और मधुर वाणी से कथा कहा करते थे । भक्तमाल की टीका में एक निम्नलिखित प्रसग दिया हुआ है"स्याम रग रगी" पद सुनि कै - गुसांई जी व पत्र दै पढाये उभै साधु बेगि धाये है । "रनी बिन रग कैसे चढ्यो अति साच बढ्यो कागद मे प्रेम मढ्यो तहा लैके आये है । पुरढिग कूप तहाँ बैठ रस रूप लगे पूछिबे को तिन हो सो नाम ले बताये है । रह्यो कौन ठौर सिरमोर वृंदावन धाम नाम सुनि मुरछा है गिरे प्रान पाये है ।"
काहू कही 'भट्ट श्री गदाधर जू एई जानौ' मानौ उही पाती चाह फेरि कै जिवाये है । दियौ पत्र हाथ लियो, सीस सो लगाय चाय बाचत ही, चले बेगि वृन्दावन आये है । मिले श्री गुसाई जू सो आंखे भरि आई नीर सुधि न शरीर धरि धीर वही गाये है । पढ़े सब ग्रथ सग नाना कृष्ण कथा रग रस की उमग अंग- अग भाव छाये है । "
इस प्रसंग से ज्ञात होता है कि जीवगुसाई जी के सम्पर्क में आने से पूर्व ही गदाधर भट्ट जी पद गाया करते थे और उनके पदो की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी ।
गदाघर जी ने गायन-कला की विधिवत शिक्षा पाई थी अथवा नही तथा उनके जीवन से संबंधित अन्य किसी संगीत संबंधी घटना का कोई विवरण नही प्राप्त होता ।
१ भक्तमाल, सुधा स्वाद तिलक, पू० ७९३ ० १३८ २. भक्तनामावली, पृ० ४
३. भक्तमाल, भक्ति सुधास्वाद तिलक, पृ० ७६४-७९५
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जायगो । ये । सुन के चारों चौबे भाग गये । छीतस्वामी ने एक पद करिके गायो । राग नटभई अब गिरिधर सो पहेचान । ये पद सुन के गुसाई जी प्रसन्न भए । नागरीदास जी ने भी छीतस्वामी की झगड़ालू प्रकृति का वर्णन करते हुए कहा है कि एक दिन छीतस्वामी थोथे नारियल में राख भरकर गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के सम्मुख ले गए और उन्हें भेट किया किंतु गोस्वामी जी के तुड़वाने पर उनके सामने ही उसमे से गरी, निकलो । यह चमत्कार देखकर छीतस्वामी बहुत लज्जित हुए और उसी समय उन्होने यह पद गाया - राग सारंग - जे बसुदेव किये पूरन तप तेई फल फलित श्री वल्लभदेव । उपर्युक्त प्रसग से भी इसी बात की पुष्टि होती है कि ये वल्लभ-सम्प्रदाय में आने से पहले कवि थे और पद गाया करते थे । आचार्य जी के सम्पर्क में आने से पूर्व ही आपको संगीत का ज्ञान था । तभी तो छीतस्वामी ने गोस्वामी जी के समक्ष तत्काल पद बनाकर गाया था । छीतस्वामी के किसी सम्प्रदाय की दीक्षा देने वाले स्वामी होने का कोई प्रमाण नही मिलता । किंतु गोसाई जी की शरण में जाने से पहले ही छीतस्वामी भी गोविन्दस्वामी की तरह 'स्वामी' कहलाते थे । अत संभव है कि गान विद्या तथा कविता सीखने के लिए इनके पास आनेवाले शिष्यों ने इनको स्वामी की उपाधि दे दी हो । वार्ता अथवा अन्य किसी भी आधार से यह नही ज्ञात होता कि इन्होने सगीत की शिक्षा कब और कहाँ पाई । ऐसा ज्ञात होता है कि वल्लभ-सम्प्रदाय में आने से पूर्व आपको संगीत का थोड़ा ज्ञान था । किंतु गोस्वामी विट्ठलनाथ जी की शरण में आने के उपरान्त उनकी शिक्षा तथा अष्टछाप के अन्य कवियों के सम्पर्क से छीतस्वामी की संगीत विषयक प्रतिभा का और भी विकास तथा पूर्ण प्रस्फुटन हुआ । वार्ता में लिखा है कि श्री गुसाई जी की कृपा से छीतस्वामी भगवदीय कवीश्वर और कीर्तनकार हुए । वार्ता से ज्ञात होता है कि अकबर बादशाह ने भी उनका कीर्तन सुना था । " और एक दिन बीरबल देशाधिपति सों रजा लेके श्री गोकुल मे जन्माष्टमी के दर्शकु आयो । पाछे वेष पलटाय के देशाधिपतिहूं छाने छाने आयो । तब जन्माष्टमी के पालना के दर्शन करे। मनुष्यन की भीड मे । तब देशाधिपति कु श्री गुसाई जी बिना और कोई ने पहिचान्यो नही । तब छीतस्वामी कीर्तन करत हते । और श्री गुसाई जी श्री नवनीतप्रिया जी कु पालना झुलावत हते तब छीतस्वामी ने ये पद गायो ।" चार एक. दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता, पूशून्य सोलह-सत्रह दो. नागर समुच्चय, पद प्रसंग माला, सिंगार सागर, शिवलाल, पृशून्य दो सौ सात तीन. 'सो वे गुसांई जी की कृपा ते बड़े कवीश्वर भये, सो बहुत कीर्तन किये ।' अष्टछाप काँकरोली, पृशून्य दो सौ छप्पन चार. दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता, पृशून्य सोलह पुष्टि- सम्प्रदाय मे दीक्षा लेने के अनन्तर वे स्थायी रूप से गोवर्द्धन पर श्रीनाथ जी के मंदिर में भजन-कीर्तन करने लगे और भक्ति में लीन होकर उन्होने बहुत से पद बना कर गाए । गदाधर भट्ट भक्तमाल मे जो छप्पय दिया हुआ है उसमे गदाधर भट्ट के संगीत ज्ञान पर कुछ भी प्रकाश नही पडता । भक्तमाल की पंक्तियो- 'भागवत सुधा बरखै बदन काहू को नाहिन दुखद, गुण निकर गदाधर भट्ट अति सबहिन को लागे सुखद ।" से यह अवश्य ज्ञात होता है कि गदाधर भट्ट जी भागवत सुनाया करते थे । भक्तनामावली में कहा गया है भट्ट गदाधर नाथ भट्ट विद्या भजन प्रवीन । सरस कथा बानी मधुर सुनि रुचि होत नवीन ॥ एक इससे भी इस बात का समर्थन होता है कि ये भजन में प्रवीण थे और मधुर वाणी से कथा कहा करते थे । भक्तमाल की टीका में एक निम्नलिखित प्रसग दिया हुआ है"स्याम रग रगी" पद सुनि कै - गुसांई जी व पत्र दै पढाये उभै साधु बेगि धाये है । "रनी बिन रग कैसे चढ्यो अति साच बढ्यो कागद मे प्रेम मढ्यो तहा लैके आये है । पुरढिग कूप तहाँ बैठ रस रूप लगे पूछिबे को तिन हो सो नाम ले बताये है । रह्यो कौन ठौर सिरमोर वृंदावन धाम नाम सुनि मुरछा है गिरे प्रान पाये है ।" काहू कही 'भट्ट श्री गदाधर जू एई जानौ' मानौ उही पाती चाह फेरि कै जिवाये है । दियौ पत्र हाथ लियो, सीस सो लगाय चाय बाचत ही, चले बेगि वृन्दावन आये है । मिले श्री गुसाई जू सो आंखे भरि आई नीर सुधि न शरीर धरि धीर वही गाये है । पढ़े सब ग्रथ सग नाना कृष्ण कथा रग रस की उमग अंग- अग भाव छाये है । " इस प्रसंग से ज्ञात होता है कि जीवगुसाई जी के सम्पर्क में आने से पूर्व ही गदाधर भट्ट जी पद गाया करते थे और उनके पदो की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी । गदाघर जी ने गायन-कला की विधिवत शिक्षा पाई थी अथवा नही तथा उनके जीवन से संबंधित अन्य किसी संगीत संबंधी घटना का कोई विवरण नही प्राप्त होता । एक भक्तमाल, सुधा स्वाद तिलक, पूशून्य सात सौ तिरानवे शून्य एक सौ अड़तीस दो. भक्तनामावली, पृशून्य चार तीन. भक्तमाल, भक्ति सुधास्वाद तिलक, पृशून्य सात सौ चौंसठ-सात सौ पचानवे
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DERAWA : करीब डेढ़ दर्जन मामलों में वांछित शातिर बाइक चोर को पुलिस ने वाहन चे¨कग के दौरान उसके साथी समेत धर दबोचा। पुलिस ने उसके पास से चोरी की बाइक भी बरामद की है।
डेरवा चौकी इंचार्ज आलोक प्रताप सिंह शनिवार की देर रात गश्त में थे। खटवारा गांव के पास एक बाइक पर दो युवक आते दिखाई दिए तो उन्होंने रोकने का प्रयास किया। बाइक चला रहे लोगों ने पुलिस को देख पहले तो बाइक धीमी की, फिर जब सिपाही उनके पास पहुंचा तो वह बाइक लेकर भागने लगे। पास खड़े सिपाही इजहार अहमद ने बाइक का कैरियर पकड़कर उसे रोकने का प्रयास किया तो बाइक चोर उसे भी करीब पचास मीटर तक घसीट ले गए। इस अफरातफरी में बाइक सवार आगे जाकर गिर पड़े। वहां दोनों को धर दबोचा गया। घायल सिपाही को इलाज के लिए स्थानीय चिकित्सक के पास ले गए। पूछताछ में पकड़े गए बाइक चोरों ने अपना नाम योगेश तिवारी उर्फ बउआ निवासी किशुनदासपुर आलापुर नवाबगंज व दूसरे ने अपना नाम सुभाष केसरवानी पुत्र बनवारी लाल निवासी खालसा सादात लालगंज कोतवाली बताया।
छानबीन के दौरान दोनों बदमाशों ने पुलिस को बताया कि वह जिस बाइक पर चढ़ रहे है वह बाइक एक वर्ष पूर्व लालगंज कोतवाली क्षेत्र से चोरी की गई है। इस पर पुलिस ने बाइक में मिले कागजात व इंजन एवं चेचिस नंबर मिलाया तो दोनों अलग-अलग थे। चौकी इंचार्ज आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि योगेश तिवारी उर्फ बउआ शातिर बाइक चोर है। वह कुछ माह पूर्व नवाबगंज में तैनात एसआई की बाइक को भी चोरी कर चुका है। उस पर जनपद के साथ ही गैर जनपद में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक चोरी के मुकदमें दर्ज है। फिलहाल पुलिस पकड़े गए दोनों बदमाशों के खिलाफ लिखापढ़ी कर उनका चालान कर दिया।
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DERAWA : करीब डेढ़ दर्जन मामलों में वांछित शातिर बाइक चोर को पुलिस ने वाहन चे¨कग के दौरान उसके साथी समेत धर दबोचा। पुलिस ने उसके पास से चोरी की बाइक भी बरामद की है। डेरवा चौकी इंचार्ज आलोक प्रताप सिंह शनिवार की देर रात गश्त में थे। खटवारा गांव के पास एक बाइक पर दो युवक आते दिखाई दिए तो उन्होंने रोकने का प्रयास किया। बाइक चला रहे लोगों ने पुलिस को देख पहले तो बाइक धीमी की, फिर जब सिपाही उनके पास पहुंचा तो वह बाइक लेकर भागने लगे। पास खड़े सिपाही इजहार अहमद ने बाइक का कैरियर पकड़कर उसे रोकने का प्रयास किया तो बाइक चोर उसे भी करीब पचास मीटर तक घसीट ले गए। इस अफरातफरी में बाइक सवार आगे जाकर गिर पड़े। वहां दोनों को धर दबोचा गया। घायल सिपाही को इलाज के लिए स्थानीय चिकित्सक के पास ले गए। पूछताछ में पकड़े गए बाइक चोरों ने अपना नाम योगेश तिवारी उर्फ बउआ निवासी किशुनदासपुर आलापुर नवाबगंज व दूसरे ने अपना नाम सुभाष केसरवानी पुत्र बनवारी लाल निवासी खालसा सादात लालगंज कोतवाली बताया। छानबीन के दौरान दोनों बदमाशों ने पुलिस को बताया कि वह जिस बाइक पर चढ़ रहे है वह बाइक एक वर्ष पूर्व लालगंज कोतवाली क्षेत्र से चोरी की गई है। इस पर पुलिस ने बाइक में मिले कागजात व इंजन एवं चेचिस नंबर मिलाया तो दोनों अलग-अलग थे। चौकी इंचार्ज आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि योगेश तिवारी उर्फ बउआ शातिर बाइक चोर है। वह कुछ माह पूर्व नवाबगंज में तैनात एसआई की बाइक को भी चोरी कर चुका है। उस पर जनपद के साथ ही गैर जनपद में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक चोरी के मुकदमें दर्ज है। फिलहाल पुलिस पकड़े गए दोनों बदमाशों के खिलाफ लिखापढ़ी कर उनका चालान कर दिया।
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शान्त बैठ सकने का सम्भव नहीं होता । बालक शब्द का अर्थ ही 'बल संचलने', संचलनशील है। (३) बहूनाम् = बहुतों के समने (सम् अननात्, अन् प्राणने) यह सम्यक् प्राणित करने में होता है, इसको देखकर माता-पिता आदि जी से उठते हैं । (४) धीमे-धीमे बढ़ता हुआ यह युवा बनता है। इस युवावस्था में यह 'यु मिश्रणामिश्रणयोः ' = खूब जोड़-तोड़ में लगा रहता है। कुछ अच्छी वृत्ति होने पर बुराइयों से अपना अमिश्रण व अच्छाइयों से अपना मिश्रण करता है। पर यह चहलपहल का जीवन बहुत देर तक नहीं रहता। युवानं सन्तम्- नौजवान होते हुए इसको पलितः बुढ़ापे के कारण होनेवाली बालों की सफेदी जगार=निगल लेती है। यह वृद्ध हो जाता है। यौवन की चहल-पहल व उमंगे समाप्त हो जाती हैं। (५) हे जीव ! तू देवस्य-उस क्रीड़ा करनेवाले, संसार रूप क्रीड़ा के (खेत के) अधिष्ठाता उस प्रभु के काव्यम्- इस अद्भुत कर्म को, कविता (wisdom, प्रज्ञा) पूर्ण कर्म को पश्य देख कि महित्वा - उसकी महिमा से स-वह व्यक्ति जो ह्यः-अभी कल ही समान-सम्यक् प्राणधारण कर रहा था, बिलकुल ठीक-ठाक थो, वह अद्या ममार= आज मृत्यु का ग्रास हो गया है, वस्तुतः यह मृत्यु की घटना रहस्यमय होने से 'काव्य' ही है । यह मृत्यु रूप कर्म प्रज्ञा-पूर्ण भी है, क्योंकि इसके अभाव में यह संसार रहने योग्य न रहता, चलने-फिरने के लिये भी स्थान न होता । एक विद्वान् का यह वाक्य ठीक ही है कि 'Hed there been no eath, manhwind world gave been foreed to intew it = मृत्यु न होती, तो इसका भी आविष्कार ही करना पड़ता । (६) इस प्रकार कालचक्र में एक दिन हम शरीरधारण करके जीवनयात्रा को प्रारम्भ करते हैं और उसमें आगे बढ़ते हुए एक दिन अन्तिम स्थान पर पहुँच जाते हैं। यह सारी ही चीज विचारने पर अद्भुत सी लगती है । भावार्थ - प्रभु दिन चले जाते हैं ।
ऋषिः - बृहदुक्थो वामदेव्यः ॥ देवता- इन्द्रः ॥ छन्दः - त्रिष्टुप् ॥ स्वरः - धैवतः ॥ सत्य-ज्ञ व स्पृहणीय धन
शाक्म॑ना शा॒को अ॑रुणः सु॑प॒र्ण आ यो म॒हः शूर॑ स॒नादनी॑ळः । यच्चिकेत॑ स॒त्यमित्तन्न मोघं वसु॑ स्पा॒ह॑मु॒त जेतो॒त दाता॑ ॥ ६ ॥
(१) वे प्रभु शाकना शाकः- सब शक्तियों से शक्ति सम्पन्न हैं। सर्वशक्तिमान् हैं। अरुणः = ( आरोचनः नि०५(२०) समन्तात् दीप्त हैं अपनी शक्तियों से वे प्रभु चमकते हैं । सुपर्णः- उत्तमता से हमारा पालन व पूरण करनेवाले हैं, शरीर में हमें रोगों से बचाते हैं तो हमारे मनों में न्यूनताओं को नहीं आने देते। (२) ये प्रभु आ-सब ओर से महः-महान् ही महान् हैं। ज्ञान के दृष्टिकोण से निरतिशय ज्ञानवाले हैं तो सर्वाधिक शक्तिवाले हैं 'नत्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यः'=हे प्रभो! आपके समान कोई नहीं, अधिक तो हो ही कैसे सकता है ? अतएव ये प्रभु (मह पूजायाम्) पूजा के योग्य हैं। शूरः=(शृ हिंसायाम्) हमारे सब काम-क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करनेवाले हैं । सनात् - सदा से हैं प्रभु सनातन हैं । अनीडः = वे प्रभु बिना नीडवाले हैं, उनका कोई घर नहीं, वस्तुतः वे प्रभु ही सबके घर हैं । (३) वे प्रभु यत्- जो चिकेत - ज्ञान देते हैं तत् वह ज्ञान इत्-निश्चय से सत्यम् - सत्य है, न मोघम् - वह ज्ञान व्यर्थ नहीं है । वेद में कोई भी शब्द अनावश्यक नहीं है । वेद का सम्पूर्ण ज्ञान सत्य व सार्थक है । (४) वे प्रभु जहाँ इस सत्य ज्ञान को हमें देते हैं, उत और वहाँ स्पार्हं वसु- स्पृहणीय धन को जेता जीतनेवाले होते हैं
उत और दाता- हमें देनेवाले हैं सम्पूर्ण धनों कुल विजय प्रश्न ही करते हैं। प्रभु कृपा से ही हमें
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शान्त बैठ सकने का सम्भव नहीं होता । बालक शब्द का अर्थ ही 'बल संचलने', संचलनशील है। बहूनाम् = बहुतों के समने यह सम्यक् प्राणित करने में होता है, इसको देखकर माता-पिता आदि जी से उठते हैं । धीमे-धीमे बढ़ता हुआ यह युवा बनता है। इस युवावस्था में यह 'यु मिश्रणामिश्रणयोः ' = खूब जोड़-तोड़ में लगा रहता है। कुछ अच्छी वृत्ति होने पर बुराइयों से अपना अमिश्रण व अच्छाइयों से अपना मिश्रण करता है। पर यह चहलपहल का जीवन बहुत देर तक नहीं रहता। युवानं सन्तम्- नौजवान होते हुए इसको पलितः बुढ़ापे के कारण होनेवाली बालों की सफेदी जगार=निगल लेती है। यह वृद्ध हो जाता है। यौवन की चहल-पहल व उमंगे समाप्त हो जाती हैं। हे जीव ! तू देवस्य-उस क्रीड़ा करनेवाले, संसार रूप क्रीड़ा के अधिष्ठाता उस प्रभु के काव्यम्- इस अद्भुत कर्म को, कविता पूर्ण कर्म को पश्य देख कि महित्वा - उसकी महिमा से स-वह व्यक्ति जो ह्यः-अभी कल ही समान-सम्यक् प्राणधारण कर रहा था, बिलकुल ठीक-ठाक थो, वह अद्या ममार= आज मृत्यु का ग्रास हो गया है, वस्तुतः यह मृत्यु की घटना रहस्यमय होने से 'काव्य' ही है । यह मृत्यु रूप कर्म प्रज्ञा-पूर्ण भी है, क्योंकि इसके अभाव में यह संसार रहने योग्य न रहता, चलने-फिरने के लिये भी स्थान न होता । एक विद्वान् का यह वाक्य ठीक ही है कि 'Hed there been no eath, manhwind world gave been foreed to intew it = मृत्यु न होती, तो इसका भी आविष्कार ही करना पड़ता । इस प्रकार कालचक्र में एक दिन हम शरीरधारण करके जीवनयात्रा को प्रारम्भ करते हैं और उसमें आगे बढ़ते हुए एक दिन अन्तिम स्थान पर पहुँच जाते हैं। यह सारी ही चीज विचारने पर अद्भुत सी लगती है । भावार्थ - प्रभु दिन चले जाते हैं । ऋषिः - बृहदुक्थो वामदेव्यः ॥ देवता- इन्द्रः ॥ छन्दः - त्रिष्टुप् ॥ स्वरः - धैवतः ॥ सत्य-ज्ञ व स्पृहणीय धन शाक्म॑ना शा॒को अ॑रुणः सु॑प॒र्ण आ यो म॒हः शूर॑ स॒नादनी॑ळः । यच्चिकेत॑ स॒त्यमित्तन्न मोघं वसु॑ स्पा॒ह॑मु॒त जेतो॒त दाता॑ ॥ छः ॥ वे प्रभु शाकना शाकः- सब शक्तियों से शक्ति सम्पन्न हैं। सर्वशक्तिमान् हैं। अरुणः = समन्तात् दीप्त हैं अपनी शक्तियों से वे प्रभु चमकते हैं । सुपर्णः- उत्तमता से हमारा पालन व पूरण करनेवाले हैं, शरीर में हमें रोगों से बचाते हैं तो हमारे मनों में न्यूनताओं को नहीं आने देते। ये प्रभु आ-सब ओर से महः-महान् ही महान् हैं। ज्ञान के दृष्टिकोण से निरतिशय ज्ञानवाले हैं तो सर्वाधिक शक्तिवाले हैं 'नत्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यः'=हे प्रभो! आपके समान कोई नहीं, अधिक तो हो ही कैसे सकता है ? अतएव ये प्रभु पूजा के योग्य हैं। शूरः= हमारे सब काम-क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करनेवाले हैं । सनात् - सदा से हैं प्रभु सनातन हैं । अनीडः = वे प्रभु बिना नीडवाले हैं, उनका कोई घर नहीं, वस्तुतः वे प्रभु ही सबके घर हैं । वे प्रभु यत्- जो चिकेत - ज्ञान देते हैं तत् वह ज्ञान इत्-निश्चय से सत्यम् - सत्य है, न मोघम् - वह ज्ञान व्यर्थ नहीं है । वेद में कोई भी शब्द अनावश्यक नहीं है । वेद का सम्पूर्ण ज्ञान सत्य व सार्थक है । वे प्रभु जहाँ इस सत्य ज्ञान को हमें देते हैं, उत और वहाँ स्पार्हं वसु- स्पृहणीय धन को जेता जीतनेवाले होते हैं उत और दाता- हमें देनेवाले हैं सम्पूर्ण धनों कुल विजय प्रश्न ही करते हैं। प्रभु कृपा से ही हमें
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कांग्रेस में चिट्टी को लेकर मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सोनिया गांधी की ओर से की गई डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी नाकाम होती दिखाई दे रही है।
नई दिल्लीः कांग्रेस में चिट्टी को लेकर मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सोनिया गांधी की ओर से की गई डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी नाकाम होती दिखाई दे रही है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिखाने की कोशिश की कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक हो गया और नाराज नेता मान गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अभी भी पार्टी में लगी आग से धूंआ उठ रहा है।
पार्टी में जग जारी है जिसका ताजा उत्तर प्रदेश से सामना आया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का लखीमपुर खीरी में जमकर विरोध किया गया। गौरतलब है कि सोनियां गांधी को चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में जितिन प्रसाद भी शामिल हैं।
कांग्रेस की जिला इकाई ने जितिन प्रसाद को निष्कासित की मांग की है और इसके लिए प्रस्ताव पास किया है। जितिन प्रसाद इस मामले को जितिन प्रसाद प्रदेश नेतृत्व के सामने उठा सकते हैं। हालांकि जितिन प्रसाद ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार किया है। इस प्रस्ताव पर जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल और लखीमपुर खीरी के अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इन लोगों ने सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाली चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन नेताओं को पार्टी से बाहर करने की मांग की गई है।
प्रहलाद पटेल और अन्य नेताओं ने चिट्ठी जारी की है और इसमें जितिन प्रसाद पर हमला बोला गया है। इस चिट्ठी में उनके पिता जितेंद्र प्रसाद के बागी तेवर की भी याद दिलाई गई है। कहा गया है कि आपके पिता भी सोनिया गांधी के खिलाफ बगावती सुर अपनाए थे और उनके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। प्रस्ताव में आगे कहा गया है अब जितिन प्रसाद भी अपने पिता के रास्ते पर चल रहे हैं। समिति ने इस कदम की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। आलोचक मानते हैं कि ये प्रस्ताव बिना उनकी जानकारी के पारित नहीं हो सकता है। तो वहीं एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता से कह रहे हैं कि उनको ऐसी कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया गया था।
वायरल ऑडियो में वो कह रहे हैं कि धीरज गुर्जर और प्रियंका गांधी जो भी करवा दें ठीक है। धीरज गुर्जर ने प्रस्ताव भेजा. . . हमने कहा कि हम हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे. . . कुछ लाइन इसमें से हटाई जाएं, लेकिन ऊपर से तलवार लटकी थी। हम भी क्या करते. . . इस तरह की गंदगी कांग्रेस में रहेगी तो पार्टी कहां खड़ी हो पाएगी. . . ।
एक तरफ जितिन प्रसाद को पार्टी से बाहर निष्काषित करने की मांग हो रही है, तो वहीं उनके समर्थन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आ गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने जितिन प्रसाद के समर्थन में लिखा है कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूपी में जितिन प्रसाद के खिलाफ आधिकारिक तौर पर हमला किया जा रहा है। कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के नेता पर निशाना साधने के बजाय बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए।
देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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कांग्रेस में चिट्टी को लेकर मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सोनिया गांधी की ओर से की गई डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी नाकाम होती दिखाई दे रही है। नई दिल्लीः कांग्रेस में चिट्टी को लेकर मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सोनिया गांधी की ओर से की गई डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी नाकाम होती दिखाई दे रही है। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिखाने की कोशिश की कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक हो गया और नाराज नेता मान गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अभी भी पार्टी में लगी आग से धूंआ उठ रहा है। पार्टी में जग जारी है जिसका ताजा उत्तर प्रदेश से सामना आया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का लखीमपुर खीरी में जमकर विरोध किया गया। गौरतलब है कि सोनियां गांधी को चिट्ठी लिखने वाले तेईस नेताओं में जितिन प्रसाद भी शामिल हैं। कांग्रेस की जिला इकाई ने जितिन प्रसाद को निष्कासित की मांग की है और इसके लिए प्रस्ताव पास किया है। जितिन प्रसाद इस मामले को जितिन प्रसाद प्रदेश नेतृत्व के सामने उठा सकते हैं। हालांकि जितिन प्रसाद ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार किया है। इस प्रस्ताव पर जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल और लखीमपुर खीरी के अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इन लोगों ने सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाली चिट्ठी लिखने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन नेताओं को पार्टी से बाहर करने की मांग की गई है। प्रहलाद पटेल और अन्य नेताओं ने चिट्ठी जारी की है और इसमें जितिन प्रसाद पर हमला बोला गया है। इस चिट्ठी में उनके पिता जितेंद्र प्रसाद के बागी तेवर की भी याद दिलाई गई है। कहा गया है कि आपके पिता भी सोनिया गांधी के खिलाफ बगावती सुर अपनाए थे और उनके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। प्रस्ताव में आगे कहा गया है अब जितिन प्रसाद भी अपने पिता के रास्ते पर चल रहे हैं। समिति ने इस कदम की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। आलोचक मानते हैं कि ये प्रस्ताव बिना उनकी जानकारी के पारित नहीं हो सकता है। तो वहीं एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता से कह रहे हैं कि उनको ऐसी कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया गया था। वायरल ऑडियो में वो कह रहे हैं कि धीरज गुर्जर और प्रियंका गांधी जो भी करवा दें ठीक है। धीरज गुर्जर ने प्रस्ताव भेजा. . . हमने कहा कि हम हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे. . . कुछ लाइन इसमें से हटाई जाएं, लेकिन ऊपर से तलवार लटकी थी। हम भी क्या करते. . . इस तरह की गंदगी कांग्रेस में रहेगी तो पार्टी कहां खड़ी हो पाएगी. . . । एक तरफ जितिन प्रसाद को पार्टी से बाहर निष्काषित करने की मांग हो रही है, तो वहीं उनके समर्थन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आ गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने जितिन प्रसाद के समर्थन में लिखा है कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूपी में जितिन प्रसाद के खिलाफ आधिकारिक तौर पर हमला किया जा रहा है। कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के नेता पर निशाना साधने के बजाय बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
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आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम 19 तारीख की दोपहर में जम्मू में प्रवेश करेंगे और 20 तारीख को जम्मू में भारत जोड़ो यात्रा शुरू करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने 30 तारीख के लिए 23 पार्टियों को भारत जोड़ो में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया है।
जम्मूः डांगरी नरसंहार के उपरांत खौफजदा माहौल के बावजूद कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' इस महीने की 19 तारीख को जम्मू कश्मीर में प्रवेश करेगी और इसका समापन श्रीनगर में 30 जनवरी को होगा। ऐसे में प्रदेश सरकार ने यात्रा को पूरी सुरक्षा मुहैया करवाने का आश्वासन दिया है।
भारत जोड़ो यात्रा का कार्यक्रम अब पूरी तरह तय हो चुका है। अब कठुआ जिले में राहुल गांधी दो दिन नहीं, तीन दिन रुकेंगे। ऐसे में वे एक दिन कठुआ में और दो दिन चड़वाल में रुकेंगे। इससे पहले उनका कठुआ जिले में दो दिन ही रुकने का कार्यक्रम था, लेकिन पार्टी ने उन्हें एक दिन कठुआ में विश्राम के लिए दिया है। इस यात्रा की तैयारियों को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है।
इस पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए भी कहा कि हम 19 तारीख की दोपहर में जम्मू में प्रवेश करेंगे और 20 तारीख को जम्मू में भारत जोड़ो यात्रा शुरू करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने 30 तारीख के लिए 23 पार्टियों को भारत जोड़ो में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। इनमें से कितनी पार्टी आएंगी यह हमें नहीं पता है।
ऐसे में यात्रा का समापन 30 जनवरी को श्रीनगर में होगा। उन्होंने बताया कि बताया कि 19 जनवरी को गांधी पंजाब-जम्मू सीमा पर लखनपुर पहुंचेंगे। स्वागत करने के लिए वहां ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया जाएगा। ऐसे में पूर्व कांग्रेस प्रमुख लखनपुर से कठुआ पैदल ही चलेंगे।
जम्मू कश्मीर के जिन नेताओं ने निमंत्रण स्वीकार किया है और यात्रा में शामिल होंगे वह हैं (नेकां के) फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, (पीडीपी प्रमुख) महबूबा मुफ्ती शामिल होंगी।
शिवसेना खासदार नेता एवं सांसद संजय राऊत 19 जनवरी को तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचेंगे।
इस दौरान कश्मीरी में कार्यरत कश्मीरी हिन्दुओं के धरने तथा भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के साथ पीओजेके एवं सिख प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे, जिसकी जानकारी पार्टी प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने दी है।
जम्मू में प्रवेश करने पर शिवसेना ठाकरे भारत जोड़ो यात्रा को पूरा साथ मिलेगा। जम्मू और उधमपुर में शिव सैनिक भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत करेंगे और यात्रा में शामिल भी होंगे। शिवसेना के प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने कहा कि पार्टी हाईकमान एवं राष्ट्रीय सचिव व सांसद अनिल देसाई के निर्देश पर भारत जोड़ो यात्रा का मंदिरों के शहर जम्मू में प्रवेश करने पर शिवसेना जम्मू कश्मीर ईकाई स्वागत करेगी और यात्रा में शामिल होगी।
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आपको बता दें कि कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम उन्नीस तारीख की दोपहर में जम्मू में प्रवेश करेंगे और बीस तारीख को जम्मू में भारत जोड़ो यात्रा शुरू करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने तीस तारीख के लिए तेईस पार्टियों को भारत जोड़ो में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया है। जम्मूः डांगरी नरसंहार के उपरांत खौफजदा माहौल के बावजूद कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' इस महीने की उन्नीस तारीख को जम्मू कश्मीर में प्रवेश करेगी और इसका समापन श्रीनगर में तीस जनवरी को होगा। ऐसे में प्रदेश सरकार ने यात्रा को पूरी सुरक्षा मुहैया करवाने का आश्वासन दिया है। भारत जोड़ो यात्रा का कार्यक्रम अब पूरी तरह तय हो चुका है। अब कठुआ जिले में राहुल गांधी दो दिन नहीं, तीन दिन रुकेंगे। ऐसे में वे एक दिन कठुआ में और दो दिन चड़वाल में रुकेंगे। इससे पहले उनका कठुआ जिले में दो दिन ही रुकने का कार्यक्रम था, लेकिन पार्टी ने उन्हें एक दिन कठुआ में विश्राम के लिए दिया है। इस यात्रा की तैयारियों को लगभग अंतिम रूप दे दिया गया है। इस पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए भी कहा कि हम उन्नीस तारीख की दोपहर में जम्मू में प्रवेश करेंगे और बीस तारीख को जम्मू में भारत जोड़ो यात्रा शुरू करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने तीस तारीख के लिए तेईस पार्टियों को भारत जोड़ो में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। इनमें से कितनी पार्टी आएंगी यह हमें नहीं पता है। ऐसे में यात्रा का समापन तीस जनवरी को श्रीनगर में होगा। उन्होंने बताया कि बताया कि उन्नीस जनवरी को गांधी पंजाब-जम्मू सीमा पर लखनपुर पहुंचेंगे। स्वागत करने के लिए वहां ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया जाएगा। ऐसे में पूर्व कांग्रेस प्रमुख लखनपुर से कठुआ पैदल ही चलेंगे। जम्मू कश्मीर के जिन नेताओं ने निमंत्रण स्वीकार किया है और यात्रा में शामिल होंगे वह हैं फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती शामिल होंगी। शिवसेना खासदार नेता एवं सांसद संजय राऊत उन्नीस जनवरी को तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचेंगे। इस दौरान कश्मीरी में कार्यरत कश्मीरी हिन्दुओं के धरने तथा भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के साथ पीओजेके एवं सिख प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे, जिसकी जानकारी पार्टी प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने दी है। जम्मू में प्रवेश करने पर शिवसेना ठाकरे भारत जोड़ो यात्रा को पूरा साथ मिलेगा। जम्मू और उधमपुर में शिव सैनिक भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत करेंगे और यात्रा में शामिल भी होंगे। शिवसेना के प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने कहा कि पार्टी हाईकमान एवं राष्ट्रीय सचिव व सांसद अनिल देसाई के निर्देश पर भारत जोड़ो यात्रा का मंदिरों के शहर जम्मू में प्रवेश करने पर शिवसेना जम्मू कश्मीर ईकाई स्वागत करेगी और यात्रा में शामिल होगी।
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क्या वह थॉमस जेफरसन की मालकिन थी?
शब्दों पर एक महत्वपूर्ण नोटः शब्द "मालकिन" एक ऐसी महिला को संदर्भित करती है जो विवाहित व्यक्ति के साथ रहती थी और यौन संबंध रखती थी। यह हमेशा यह नहीं दर्शाता है कि महिला ने स्वेच्छा से किया था या चुनाव करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र था; उम्र के माध्यम से महिलाओं को दबाव दिया गया है या शक्तिशाली पुरुषों की मालकिन बनने के लिए मजबूर किया गया है। यदि यह सच था - और नीचे उल्लिखित साक्ष्य की जांच करें - सैली हेमिंग्स के पास थॉमस जेफरसन द्वारा बच्चे थे, यह निस्संदेह सच है कि वह जेफरसन (फ्रांस में थोड़ी देर के लिए) के गुलाम थे और उनके पास कोई कानूनी नहीं था यह चुनने की क्षमता है कि उसके साथ यौन संबंध है या नहीं।
इस प्रकार, "मालकिन" का अक्सर उपयोग किया जाने वाला अर्थ जिसमें महिला विवाहित व्यक्ति के साथ संबंध बनाने का विकल्प चुनती है, वह लागू नहीं होगी।
1802 में रिचमंड रिकॉर्डर में, जेम्स थॉमसन कैलेंडर ने पहले सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि थॉमस जेफरसन ने अपने दासों में से एक को अपने "उपनिवेश" और उनके साथ बच्चों को जन्म दिया था। कॉलैंडर ने घोटाले पर अपने एक लेख में लिखा, "सैली का नाम श्री जेफरसन के अपने नाम के साथ वंश के लिए आगे बढ़ेगा। "
सैली हेमिंग्स कौन था?
सैली हेमिंग्स के बारे में क्या पता है? वह थॉमस जेफरसन के स्वामित्व वाले गुलाम थे, जब उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी, उनकी पत्नी मार्था वेल्स स्केल्टन जेफरसन (अक्टूबर 1 9/30, 1748 - 6 सितंबर, 1782) के माध्यम से विरासत में मिली थी। सैली की मां बेट्सी या बेट्टी को काले दास महिला और एक सफेद जहाज कप्तान की बेटी कहा जाता था; कहा जाता है कि बेट्स के बच्चों को उनके मालिक जॉन वेल्स ने जन्म दिया था, जिससे सैली जेफरसन की पत्नी की आधा बहन बना रही थीं।
1784 से, सैली ने स्पष्ट रूप से जेफरसन की सबसे छोटी बेटी मैरी जेफरसन की नौकरानी और साथी के रूप में सेवा दी। 1787 में, पेरिस में एक राजनयिक के रूप में नई संयुक्त राज्य सरकार की सेवा करने वाले जेफरसन ने अपनी छोटी बेटी को उनके साथ शामिल होने के लिए भेजा, और सैली को मैरी के साथ भेजा गया। जॉन और अबीगैल एडम्स के साथ रहने के लिए लंदन में एक संक्षिप्त स्टॉप के बाद, सैली और मैरी पेरिस पहुंचे।
लोग क्यों सोचते हैं सैली हेमिंग्स जेफरसन की मालकिन थीं?
चाहे सैली (और मैरी) जेफरसन अपार्टमेंट में रहते थे या कॉन्वेंट स्कूल अनिश्चित है। काफी निश्चित बात यह है कि सैली ने फ्रेंच सबक लिया और एक लॉन्ड्रेस के रूप में भी प्रशिक्षित किया हो सकता है। निश्चित बात यह है कि फ्रांस में, सैली फ्रांसीसी कानून के मुताबिक मुक्त थी।
आरोप लगाया गया है, और निहितार्थ को छोड़कर ज्ञात नहीं है, यह है कि थॉमस जेफरसन और सैली हेमिंग्स ने पेरिस में घनिष्ठ संबंध शुरू किया था, सैली संयुक्त राज्य अमेरिका की गर्भवती लौट रही थी, जेफरसन ने अपने किसी भी (बच्चों) को उम्र देने तक वादा किया था 21।
फ्रांस से लौटने के बाद सैली से पैदा हुए बच्चे के बारे में क्या कम सबूत मिलते हैंः कुछ सूत्रों का कहना है कि बच्चे की मृत्यु बहुत कम है (हेमिंग्स पारिवारिक परंपरा)।
और निश्चित बात यह है कि सैली के छह अन्य बच्चे थे। उनकी जन्म तिथि जेफरसन की फार्म बुक या उनके द्वारा लिखे गए पत्रों में दर्ज की गई है। 1 99 8 में डीएनए परीक्षण, और जन्म तिथियों की सावधानीपूर्वक प्रतिपादन और जेफरसन की अच्छी तरह से प्रलेखित यात्राएं जेलीसन को सैली से पैदा हुए प्रत्येक बच्चे के लिए "अवधारणा खिड़की" के दौरान मॉन्टिसेलो में रखती हैं।
थॉमस जेफरसन के लिए सैली के कई बच्चों की बहुत हल्की त्वचा और समानता को मॉन्टिसेलो में मौजूद लोगों की एक अच्छी संख्या द्वारा टिप्पणी की गई थी।
अन्य संभावित पितरों को या तो पुरुष रेखा वंशजों (कार भाइयों) पर 1 99 8 के डीएनए परीक्षणों द्वारा समाप्त कर दिया गया था या सबूतों में आंतरिक विसंगतियों की वजह से खारिज कर दिया गया था। उदाहरण के लिए, एक पर्यवेक्षक ने सैली के कमरे से नियमित रूप से आने वाले एक आदमी (जेफरसन) को नहीं देखा - लेकिन पर्यवेक्षक ने "विज़िट" के पांच साल बाद मॉन्टिसेलो में काम करना शुरू नहीं किया।
सैली ने मॉन्टिसेलो में एक चैम्बरमीड के रूप में, शायद प्रकाश सिलाई भी किया। जेफरसन ने उन्हें नौकरी देने से इनकार करने के बाद जेम्स कैलेंडर द्वारा इस मामले को सार्वजनिक रूप से प्रकट किया गया था। विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि उसने जेफरसन की मृत्यु के बाद मॉन्टिसेलो छोड़ दिया जब वह अपने बेटे एस्टन के साथ रहने गई। जब एस्टन चले गए, तो उसने पिछले दो वर्षों में अपने आप को बिताया।
कुछ सबूत हैं कि उन्होंने अपनी बेटी मार्था से "वर्ली को अपना समय देने" के लिए कहा, वर्जीनिया में एक गुलाम को मुक्त करने के लिए एक अनौपचारिक तरीका है जो 1805 वर्जीनिया कानून को लागू करने से रोक देगा जिससे मुक्त राज्य गुलामों को राज्य से बाहर निकलने की आवश्यकता होगी।
सैली हेमिंग्स 1833 की जनगणना में एक स्वतंत्र महिला के रूप में दर्ज की गई है।
- > सैली हेमिंग्सः इतिहास को फिर से परिभाषित करना । ए एंड ई / जीवनी से एक वीडियोः "यहां पहली राष्ट्रपति सेक्स स्कैंडल के केंद्र में महिला की पूरी कहानी है। " (डीवीडी या वीएचएस)
- > जेफरसन का रहस्यः मॉन्टिसेलो में मौत और इच्छा। एंड्रयू बर्स्टीन, 2005. (कीमतों की तुलना करें)
- > थॉमस जेफरसन और सैली हेमिंग्सः एक अमेरिकी विवाद : एनेट गॉर्डन-रीड और मिडोरी ताकागी, 1 99 8 में पुनर्मुद्रण। (कीमतों की तुलना करें)
- > सैली हेमिंग्स और थॉमस जेफरसनः हिस्ट्री, मेमोरी, और सिविक संस्कृति : जेन लुईस, पीटर एस ओनफ, और जेन ई। लुईस, संपादक, 1 999। (कीमतों की तुलना करें)
- > थॉमस जेफरसनः एक अंतरंग इतिहास : फॉन एम ब्रोडी, व्यापार पेपरबैक, पुनर्मुद्रण 1 99 8।
- > परिवार में एक राष्ट्रपतिः थॉमस जेफरसन, सैली हेमिंग्स, और थॉमस वुडसन : बायरन डब्ल्यू वुडसन, 2001. (कीमतों की तुलना करें)
- > सैली हेमिंग्सः एक अमेरिकी स्कैंडलः द स्ट्रगल इन द विवादास्पद ट्रू स्टोरी। टीना एंड्रयूज, 2002।
- > एनाटॉमी ऑफ़ ए स्कैंडलः थॉमस जेफरसन और सैली स्टोरी। रेबेका एल मैकमुरी, 2002।
- > जेफरसन स्कैंडलः एक Rebuttal। वर्जिनस डब्स, रीप्रिंट, 1 99 1।
- > जेफरसन के बच्चेः एक अमेरिकी परिवार की कहानी। शैनन लैनियर, जेन फेलमैन, 2000. युवा वयस्कों के लिए।
- > सैली हेमिंग्स : बारबरा चेस-रिबाउड, पुनर्मुद्रण 2000. ऐतिहासिक कथा।
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क्या वह थॉमस जेफरसन की मालकिन थी? शब्दों पर एक महत्वपूर्ण नोटः शब्द "मालकिन" एक ऐसी महिला को संदर्भित करती है जो विवाहित व्यक्ति के साथ रहती थी और यौन संबंध रखती थी। यह हमेशा यह नहीं दर्शाता है कि महिला ने स्वेच्छा से किया था या चुनाव करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र था; उम्र के माध्यम से महिलाओं को दबाव दिया गया है या शक्तिशाली पुरुषों की मालकिन बनने के लिए मजबूर किया गया है। यदि यह सच था - और नीचे उल्लिखित साक्ष्य की जांच करें - सैली हेमिंग्स के पास थॉमस जेफरसन द्वारा बच्चे थे, यह निस्संदेह सच है कि वह जेफरसन के गुलाम थे और उनके पास कोई कानूनी नहीं था यह चुनने की क्षमता है कि उसके साथ यौन संबंध है या नहीं। इस प्रकार, "मालकिन" का अक्सर उपयोग किया जाने वाला अर्थ जिसमें महिला विवाहित व्यक्ति के साथ संबंध बनाने का विकल्प चुनती है, वह लागू नहीं होगी। एक हज़ार आठ सौ दो में रिचमंड रिकॉर्डर में, जेम्स थॉमसन कैलेंडर ने पहले सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि थॉमस जेफरसन ने अपने दासों में से एक को अपने "उपनिवेश" और उनके साथ बच्चों को जन्म दिया था। कॉलैंडर ने घोटाले पर अपने एक लेख में लिखा, "सैली का नाम श्री जेफरसन के अपने नाम के साथ वंश के लिए आगे बढ़ेगा। " सैली हेमिंग्स कौन था? सैली हेमिंग्स के बारे में क्या पता है? वह थॉमस जेफरसन के स्वामित्व वाले गुलाम थे, जब उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी, उनकी पत्नी मार्था वेल्स स्केल्टन जेफरसन के माध्यम से विरासत में मिली थी। सैली की मां बेट्सी या बेट्टी को काले दास महिला और एक सफेद जहाज कप्तान की बेटी कहा जाता था; कहा जाता है कि बेट्स के बच्चों को उनके मालिक जॉन वेल्स ने जन्म दिया था, जिससे सैली जेफरसन की पत्नी की आधा बहन बना रही थीं। एक हज़ार सात सौ चौरासी से, सैली ने स्पष्ट रूप से जेफरसन की सबसे छोटी बेटी मैरी जेफरसन की नौकरानी और साथी के रूप में सेवा दी। एक हज़ार सात सौ सत्तासी में, पेरिस में एक राजनयिक के रूप में नई संयुक्त राज्य सरकार की सेवा करने वाले जेफरसन ने अपनी छोटी बेटी को उनके साथ शामिल होने के लिए भेजा, और सैली को मैरी के साथ भेजा गया। जॉन और अबीगैल एडम्स के साथ रहने के लिए लंदन में एक संक्षिप्त स्टॉप के बाद, सैली और मैरी पेरिस पहुंचे। लोग क्यों सोचते हैं सैली हेमिंग्स जेफरसन की मालकिन थीं? चाहे सैली जेफरसन अपार्टमेंट में रहते थे या कॉन्वेंट स्कूल अनिश्चित है। काफी निश्चित बात यह है कि सैली ने फ्रेंच सबक लिया और एक लॉन्ड्रेस के रूप में भी प्रशिक्षित किया हो सकता है। निश्चित बात यह है कि फ्रांस में, सैली फ्रांसीसी कानून के मुताबिक मुक्त थी। आरोप लगाया गया है, और निहितार्थ को छोड़कर ज्ञात नहीं है, यह है कि थॉमस जेफरसन और सैली हेमिंग्स ने पेरिस में घनिष्ठ संबंध शुरू किया था, सैली संयुक्त राज्य अमेरिका की गर्भवती लौट रही थी, जेफरसन ने अपने किसी भी को उम्र देने तक वादा किया था इक्कीस। फ्रांस से लौटने के बाद सैली से पैदा हुए बच्चे के बारे में क्या कम सबूत मिलते हैंः कुछ सूत्रों का कहना है कि बच्चे की मृत्यु बहुत कम है । और निश्चित बात यह है कि सैली के छह अन्य बच्चे थे। उनकी जन्म तिथि जेफरसन की फार्म बुक या उनके द्वारा लिखे गए पत्रों में दर्ज की गई है। एक निन्यानवे आठ में डीएनए परीक्षण, और जन्म तिथियों की सावधानीपूर्वक प्रतिपादन और जेफरसन की अच्छी तरह से प्रलेखित यात्राएं जेलीसन को सैली से पैदा हुए प्रत्येक बच्चे के लिए "अवधारणा खिड़की" के दौरान मॉन्टिसेलो में रखती हैं। थॉमस जेफरसन के लिए सैली के कई बच्चों की बहुत हल्की त्वचा और समानता को मॉन्टिसेलो में मौजूद लोगों की एक अच्छी संख्या द्वारा टिप्पणी की गई थी। अन्य संभावित पितरों को या तो पुरुष रेखा वंशजों पर एक निन्यानवे आठ के डीएनए परीक्षणों द्वारा समाप्त कर दिया गया था या सबूतों में आंतरिक विसंगतियों की वजह से खारिज कर दिया गया था। उदाहरण के लिए, एक पर्यवेक्षक ने सैली के कमरे से नियमित रूप से आने वाले एक आदमी को नहीं देखा - लेकिन पर्यवेक्षक ने "विज़िट" के पांच साल बाद मॉन्टिसेलो में काम करना शुरू नहीं किया। सैली ने मॉन्टिसेलो में एक चैम्बरमीड के रूप में, शायद प्रकाश सिलाई भी किया। जेफरसन ने उन्हें नौकरी देने से इनकार करने के बाद जेम्स कैलेंडर द्वारा इस मामले को सार्वजनिक रूप से प्रकट किया गया था। विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि उसने जेफरसन की मृत्यु के बाद मॉन्टिसेलो छोड़ दिया जब वह अपने बेटे एस्टन के साथ रहने गई। जब एस्टन चले गए, तो उसने पिछले दो वर्षों में अपने आप को बिताया। कुछ सबूत हैं कि उन्होंने अपनी बेटी मार्था से "वर्ली को अपना समय देने" के लिए कहा, वर्जीनिया में एक गुलाम को मुक्त करने के लिए एक अनौपचारिक तरीका है जो एक हज़ार आठ सौ पाँच वर्जीनिया कानून को लागू करने से रोक देगा जिससे मुक्त राज्य गुलामों को राज्य से बाहर निकलने की आवश्यकता होगी। सैली हेमिंग्स एक हज़ार आठ सौ तैंतीस की जनगणना में एक स्वतंत्र महिला के रूप में दर्ज की गई है। - > सैली हेमिंग्सः इतिहास को फिर से परिभाषित करना । ए एंड ई / जीवनी से एक वीडियोः "यहां पहली राष्ट्रपति सेक्स स्कैंडल के केंद्र में महिला की पूरी कहानी है। " - > जेफरसन का रहस्यः मॉन्टिसेलो में मौत और इच्छा। एंड्रयू बर्स्टीन, दो हज़ार पाँच. - > थॉमस जेफरसन और सैली हेमिंग्सः एक अमेरिकी विवाद : एनेट गॉर्डन-रीड और मिडोरी ताकागी, एक निन्यानवे आठ में पुनर्मुद्रण। - > सैली हेमिंग्स और थॉमस जेफरसनः हिस्ट्री, मेमोरी, और सिविक संस्कृति : जेन लुईस, पीटर एस ओनफ, और जेन ई। लुईस, संपादक, एक नौ सौ निन्यानवे। - > थॉमस जेफरसनः एक अंतरंग इतिहास : फॉन एम ब्रोडी, व्यापार पेपरबैक, पुनर्मुद्रण एक निन्यानवे आठ। - > परिवार में एक राष्ट्रपतिः थॉमस जेफरसन, सैली हेमिंग्स, और थॉमस वुडसन : बायरन डब्ल्यू वुडसन, दो हज़ार एक. - > सैली हेमिंग्सः एक अमेरिकी स्कैंडलः द स्ट्रगल इन द विवादास्पद ट्रू स्टोरी। टीना एंड्रयूज, दो हज़ार दो। - > एनाटॉमी ऑफ़ ए स्कैंडलः थॉमस जेफरसन और सैली स्टोरी। रेबेका एल मैकमुरी, दो हज़ार दो। - > जेफरसन स्कैंडलः एक Rebuttal। वर्जिनस डब्स, रीप्रिंट, एक निन्यानवे एक। - > जेफरसन के बच्चेः एक अमेरिकी परिवार की कहानी। शैनन लैनियर, जेन फेलमैन, दो हज़ार. युवा वयस्कों के लिए। - > सैली हेमिंग्स : बारबरा चेस-रिबाउड, पुनर्मुद्रण दो हज़ार. ऐतिहासिक कथा।
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महोदय / महोदया,
कृपया जाली नोट पकड़ने तथा उन्हें जब्त करने से संबंधित 20 जुलाई 2017 तक जारी अनुदेशों को समेकित करते हुए जारी हमारे 20 जुलाई 2017 के मास्टर परिपत्र डीसीएम (एफएनवीडी) सं.जी - 4/16.01.05/2017-18 का संदर्भ लें । मास्टर परिपत्र को अब तक जारी सभी निर्देशों को शामिल करते हुए अद्यतन किया गया हैं और इसे बैंक की वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध किया गया है।
इस मास्टर परिपत्र में उपरोक्त विषय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों को समेकित किया गया हैं, जो इस परिपत्र की तारीख पर प्रचलन में हैं ।
(मानस रंजन महान्ति)
जाली नोट निम्नलिखित द्वारा जब्त किये जा सकते हैं;
काउंटर पर प्रस्तुत किए गए बैंक नोटों को प्रामाणिकता के लिए मशीनों के द्वारा परीक्षण किया जाना चाहिए ।
इसी प्रकार से, बैक ऑफिस / मुद्रा तिजोरी में थोक निविदा के माध्यम से सीधे ही प्राप्त बैंक नोट, मशीनों के माध्यम से प्रमाणीकृत किए जाने चाहिए ।
काउंटर पर प्राप्त नोटों में या बैक ऑफिस / मुद्रा तिजोरी में पहचान किए गए जाली नोटों के लिए, ग्राहक के खाते में कोई क्रेडिट नहीं दिया जाना है ।
किसी भी स्थिति में, जाली नोटों को प्रस्तुतकर्ता को लौटाया नहीं जाना चाहिए अथवा बैंक शाखाओं/ कोषागारों द्वारा नष्ट नहीं किया जाना चाहिये। बैंकों के स्तर पर पता लगाये गये जाली नोटों की जब्ती में असफलता को, संबंधित बैंक की जाली नोटों के संचलन में इरादतन संलिप्तता मानी जाएगी और उन पर दण्ड लगाया जायेगा ।
जाली नोट के रुप में वर्गीकृत नोटों पर निर्धारित (अनुबंध I के अनुसार) "जाली बैंकनोट" स्टैम्प से चिन्हित कर उन्हें जब्त किया जाये । इस प्रकार से जब्त प्रत्येक नोट के ब्यौरे एक अलग रजिस्टर में प्रमाणीकरण के साथ अभिलिखित किये जाएंगे ।
जब बैंक शाखा के काउंटर / बैक ऑफिस तथा मुद्रा तिजोरी अथवा कोषागार में प्रस्तुत बैंकनोट जाली पाये जाते हैं, तब उक्त पैरा 3 के अनुसार नोट पर स्टैम्प लगाने के बाद निविदाकर्ता को निर्धारित फार्म (अनुबंध II) के अनुसार प्राप्ति सूचना रसीद जारी की जानी चाहिए । उक्त रसीद चल रहे सिरीयल नंबरों में, खजांची और जमाकर्ता द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए । इस आशय का नोटिस आम जनता की जानकारी के लिए कार्यालयों शाखाओं मे विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए । जहां निविदाकर्ता संबंधित रसीद पर प्रतिहस्ताक्षर करने के लिए इच्छुक नहीं है, ऐसे मामलों में भी प्राप्ति सूचना रसीद जारी की जानी है ।
पुलिस को जाली नोट का पता लगने की घटना की रिपोर्टिग करते समय, निम्न प्रक्रिया का अनुपालन किया जाए :
एक ही लेन-देन में 4 पीसेस तक जाली नोटों की पहचान के मामलों में, नोडल अधिकारी द्वारा पुलिस प्राधिकरण या नोडल पुलिस स्टेशन को माह की समाप्ति पर संदिग्ध जाली नोटों के साथ निर्धारित फार्मेट में एक समेकित रिपोर्ट (संलग्नक III के अनुसार) भेजी जाए।
एक ही लेन-देन में 5 या उससे अधिक पीसेस तक जाली नोटों की पहचान के मामलों में, नोडल बैंक अधिकारी द्वारा तुरंत वे जाली नोट, निर्धारित फार्मेट में (संलग्नक IV) एफआईआर दर्ज करते हुए जांच-पड़ताल के लिए स्थानीय पुलिस प्राधिकरण या नोडल पुलिस स्टेशन को अग्रेषित किये जाएं।
मासिक समेकित रिपोर्ट/एफआईआर की एक प्रति बैंक के प्रधान कार्यालय में बनाये गये जाली नोट सतर्कता कक्ष को (केवल बैंकों के मामले में) भेजी जाएगी और कोषागार के मामले में, भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित निर्गम कार्यालय को भेजी जाये ।
पुलिस प्राधिकारियों से उनको मासिक समेकित रिपोर्ट और एफआईआर द्वारा प्रेषित जाली नोटों की प्राप्ति सूचना प्राप्त की जाये । यदि पुलिस को नकली बैंक नोट बीमाकृत डाक द्वारा भेजे गए हैं तो उनकी प्राप्ति सूचना अनिवार्य रूप से ली जाये और उन्हें रिकार्ड में रखा जाए । पुलिस प्राधिकरण से प्राप्ति सूचना प्राप्त करने के लिए उचित अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक है । यदि मासिक समेकित रिपोर्टों को प्राप्त करने/ एफआईआर दर्ज करने में पुलिस की अनिच्छा के कारण कार्यालयों / बैंक शाखाओं को किसी भी कठिनाई का सामना करना पड रहा है तो उसका निपटान जाली बैंकनोटों की जांच से संबंधित मामलों की समन्वय हेतु नामित पुलिस प्राधिकरण के नोडल अधिकारी की सलाह से किया जाये । नोडल पुलिस स्टेशन की सूची भारतीय रिजर्व बैंक के संबन्धित कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं ।
जाली नोटों के परिचालन को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों की आसानी से पहचान करने के क्रम में, बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे बैंकिंग हॉल / क्षेत्र तथा काउंटर को सीसीटीवी की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग में रखें तथा रिकॉर्डिंग को संरक्षित रखें ।
बैंकों को ऐसी पहचान के स्वरुप/प्रवृत्तियों पर निगरानी रखनी चाहिए और संदिग्ध स्वरुप/प्रवृत्तियों को तत्काल भारतीय रिजर्व बैंक/पुलिस प्राधिकारी के ध्यान में लाना चाहिए।
जाली नोटों की पहचान और उक्त की सूचना पुलिस, आरबीआई आदि को देने में बैंकों द्वारा की गई प्रगति और उससे संबंधित समस्याओं पर विभिन्न राज्य स्तरीय समितियाँ अर्थात राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), करेंसी प्रबंधन पर स्थायी समिति (एससीसीएम) राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससी), आदि की बैठकों में नियमित रूप से विचार - विमर्श किया जाए ।
बैंक-शाखाओं/कोषागारों में पकड़े गए जाली भारतीय बैंक नोटों के आंकड़े, नीचे दिये गये पैरा- 10 के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक, निर्गम कार्यालय को प्रेषित की जानेवाली मासिक विवरणियों में शामिल किये जायें।
भारतीय दंड संहिता में "जाली बनाना" की परिभाषा में विदेशी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी करेंसी नोट भी शामिल हैं। पुलिस और सरकारी एजेंसियों से अभिमत /राय देने हेतु प्राप्त संदिग्ध विदेशी करेंसी नोटों के मामलों में, उन्हें यह सूचित किया जाये कि वे उक्त नोटों को नई दिल्ली स्थित सीबीआई की इंटरपोल विंग के पास उनसे पूर्व परामर्श के बाद भेज दें।
बैंकों को अपना नकद प्रबंधन कुछ इस तरह पुनर्निर्धारित करना चाहिये जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ₹ 100 और उससे अधिक मूल्य वर्ग की नकद प्राप्तियों को उन नोटों की मशीन प्रसंस्करण द्वारा प्रामाणिकता की जांच के बिना पुनः संचलन में नहीं डाला जाए। ये अनुदेश दैनिक नकद प्राप्ति के परिमाण को ध्यान में लिए बगैर सभी शाखाओं पर लागू होंगे। इस अनुदेश के किसी भी गैर अनुपालन को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों का उल्लंघन माना जाएगा।
एटीएम मशीनों से जाली नोटों की प्राप्ति संबंधित शिकायतों का निपटान करने और जाली नोटों के संचलन पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह अत्यावश्यक है कि एटीएम मशीनों में नोटों को भरने से पूर्व पर्याप्त सुरक्षा उपायों/ नियंत्रणों को लागू किया जाये । एटीएम मशीनों के माध्यम से जाली नोटों का वितरण, संबंधित बैंक द्वारा जाली नोटों के संचलन के लिये किया गया एक प्रयास माना जायेगा ।
मुद्रा तिजोरी विप्रेषणों /शेषों में जाली नोटों का पाये जाने को भी संबंधित मुद्रा तिजोरी द्वारा जान -बूझकर जाली नोटों के संचलन के लिये किया गया प्रयास माना जायेगा जिसके परिणामस्वरूप पुलिस प्राधिकरण द्वारा विशेष तहकीकात और अन्य कार्रवाई जैसे संबंधित मुद्रा तिजोरी के प्रचालनों को स्थगित करना, की जा सकती है ।
निम्नलिखित परिस्थितियों में जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अलावा, जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 100% दंड लगाया जाएगा :
20 जून 2012 के परिपत्र सं.डीपीएसएस.केंका.पीडी.2298/02.10.002/2011-12 के अनुसार व्हाइट लेबल एटीएम मे लोड की गई नकदी की गुणवत्ता तथा उसकी असलियत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रायोजक बैंक की होगी। 30 दिसंबर, 2016 के परिपत्र सं.डीपीएसएस.केंका.पीडी.1621/02.10.002/2016-17 के अनुसार रिटेल आउटलेट से नकदी प्राप्त की जाती है तो व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर एटीएम द्वारा वितरित किए गए मुद्रा नोटों की गुणवत्ता तथा प्रामाणिकता के लिए स्वयं ही पूर्णतः उत्तरदायी होगा ।
प्रत्येक बैंक जिला-वार नोडल अधिकारी नियुक्त करें और उसकी जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय और पुलिस प्राधिकरण को दें । पैरा 5 में यथाउल्लिखित, जाली नोट के पहचान की रिपोर्टिंग के मामले, नोडल बैंक अधिकारी के माध्यम से आने चाहिए। नोडल बैंक अधिकारी जाली नोट पाये जाने से संबंधित सभी कार्यकलापों के लिए एक संपर्क अधिकारी के रूप में भी कार्य करेगा।
जाली नोटों के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों को बैंक की सभी शाखाओं में प्रचारित करना । इन अनुदेशों के कार्यान्वयन पर निगरानी रखना । वर्तमान अनुदेशों के अनुसार जाली नोटों की पहचान से संबंधित आंकड़े को समेकित करना और भारतीय रिज़र्व बैंक, एफआईयू - आईएनडी तथा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को प्रेषित करना । पुलिस प्राधिकरण और निर्दिष्ट नोडल अधिकारी के साथ जाली नोटों के मामलों से संबंधित अनुवर्ती कार्रवाई करना।
इस तरह से संकलित जानकारी को बैंको के केंद्रीय सर्तकता अधिकारी से साझा करना तथा उन्हें काउंटरों पर स्वीकृत /जारी किये गये जाली नोटों से संबंधित मामलों की रिपोर्ट देना ।
ऐसी मुद्रा तिजोरियों; जहाँ पर दोषपूर्ण/जाली नोट आदि का पता लगा है, की आवधिक आकस्मिक जाँच करना ।
सभी मुद्रा तिजोरियों/ बैक आफिस में उपयुक्त क्षमता वाली नोट सॉर्टिग मशीनों के प्रचालन को सुनिश्चित करना और जाली नोटों के पता लगाने पर सावधानी पूर्वक निगरानी करना और उक्त का उचित रूप से रिकार्ड रखना । यह सुनिश्चित करना कि केवल छांटे गये और मशीनों से जांचे गये नोट ही एटीएम मशीनों में डाले जायें/ काउंटरों से जारी किये जायें और नोटों के प्रसंस्करण तथा पारगमन के समय आकस्मिक जांच सहित पर्याप्त सुरक्षा उपायों की व्यवस्था ।
जाली नोट सतर्कता कक्ष उपरोक्त पहलुओं को शामिल करते हुए तिमाही आधार पर, संबंधित तिमाही की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर, मुख्य महाप्रबंधक, मुद्रा प्रबंध विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, अमर भवन, चौथी मंजिल, सर पी.एम.रोड, फोर्ट, मुंबई - 400001 तथा आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय के निर्गम विभाग जिसके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत जाली नोट सतर्कता कक्ष कार्यरत हैं, को वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट प्रेषित करें । उपर्युक्त रिपोर्ट ई-मेल द्वारा भेजी जाये। हार्ड प्रति भेजने की आवश्यकता नहीं है ।
जाली नोट सतर्कता कक्षों के पते को अद्यतन करने के उद्देश्य से बैंक प्रत्येक वर्ष में, 1 जुलाई को अनुसार निर्धारित प्रोफार्मा (अनुबंध V) में ई- मेल से पते आदि आरबीआई को प्रस्तुत करें । हार्ड प्रति भेजने की आवश्यकता नहीं है ।
जाली नोटों की पहचान सुगम बनाने के लिए सभी बैंक शाखाओं /निर्दिष्ट बैक आफिसों को, अल्ट्रा-वायलेट लैम्प / अन्य उपयुक्त नोट सॉर्टिंग / पहचान वाली मशीनों से सुसज्जित होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सभी मुद्रा तिजोरी शाखाओं में सत्यापन, प्रसंस्करण और छँटनी करने वाली मशीनों की व्यवस्था होनी चाहिये और मशीनों का इष्टतम स्तर तक उपयोग होना चाहिये । इन मशीनों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मई 2010 में निर्धारित "नोट सत्यापन और फिटनेस सार्टिंग मानदंडो" के अनुरूप होना आवश्यक हैं ।
बैंक, पहचान किये गये जाली नोटों सहित नोट छँटनी मशीनों के माध्यम से प्रसंस्कृत नोटों का दैनिक रिकार्ड रखेंगे ।
बैंकों को जनता के उपयोग हेतु, काउंटर पर नोट गिनने वाली कम से कम एक मशीन (जिसमें दोनों तरफ संख्या प्रदर्शित करने की सुविधा हो), लगाने पर भी विचार करना चाहिए ।
बैंक की सभी शाखाओं द्वारा पता लगाये गये जाली नोटों के आंकड़े मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में सूचित करना आवश्यक है । माह के दौरान बैंक शाखाओं में पता लगाये गये जाली नोटों के ब्योरे दर्शानेवाला विवरण (अनुबंध VI) संकलित किया जाए और संबंधित रिज़र्व बैंक के निर्गम कार्यालय को इस प्रकार प्रेषित किया जाये कि वह आगामी माह की 7 तारीख तक उन्हें प्राप्त हो जाये ।
धनशोधन निवारण नियम, 2005 के नियम 3 के तहत, बैंकों के प्रधान अधिकारियों को भी ऐसे नकदी लेन देन, जहां जाली नोटों को असली नोटों के रूप में प्रयोग में लाया गया है, की सूचना, सात कार्यदिवस के अंदर, निदेशक, एफआईयू आईएनडी, वित्तीय खुफिया ईकाई-भारत, 6वीं मंजिल, होटल सम्राट, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली-110021 को, FINnet पोर्टल पर सूचना अपलोड करके करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार, एफआईसीएन की पहचान के आंकड़े नैशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो की बेबसाईट के वेब आधारित सॉफ्टवेयर पर भी अपलोड किए जाएँ।
माह के दौरान किसी जाली नोट की पहचान नहीं किये जाने की स्थिति में 'निरंक' विवरणी भेजी जाये ।
पुलिस प्राधिकरण / न्यायालयों से पुनः प्राप्त सभी जाली नोटों को बैंक की अभिरक्षा में सावधानीपूर्वक परिरक्षित किया जाये और संबंधित शाखा द्वारा उक्त का रिकार्ड रखा जाये। बैंक के जाली नोट सतर्कता कक्ष को भी ऐसे जाली नोटों का शाखावार समेकित रिकार्ड रखना होगा ।
इन जाली नोटों का सत्यापन संबंधित शाखा के प्रभारी अधिकारी द्वारा छमाही (31 मार्च और 30 सितंबर) आधार पर किया जाना चाहिये । पुलिस प्राधिकरण से प्राप्ति की तिथि से इन जाली नोटों का तीन वर्ष की अवधि के लिए परिरक्षण किया जाना चाहिये।
इसके पश्चात पूर्ण ब्योरे के साथ इन जाली नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित निर्गम कार्यालय को भेजा जाये ।
जाली नोट जो न्यायालय में मुकदमेबाजी के अधीन हैं उन्हें न्यायालय निर्णय के बाद संबंधित शाखा के पास तीन वर्ष तक रखा जाए ।
यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि बैंकों और कोषागारों / उप- कोषागारों में नकदी व्यवहार करनेवाला स्टाफ, बैंकनोटों की सुरक्षा विशेषताओं से पूरी तरह परिचित हो ।
जाली नोट की पहचान के संबंध में बैंक -शाखा के कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से अनुबंध - VII में दर्शाये गये बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताएँ तथा डिज़ाइन सभी बैंकों / कोषागारों को इस निर्देश के साथ भेजे गये हैं कि वे इन्हें आम जनता की जानकारी के लिए प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करें । शाखाओं के स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए 2005-06 श्रृंखला के बैंकनोटों के पोस्टरों की आपूर्ति की गयी है। रू. 2000/-, रू.500/-, रू. 200/- तथा रू. 50/- के नए डिजाईन के बैंक नोट की सुरक्षा विशेषताओं का विवरण https://www.paisaboltahai.rbi.org.in/ लिंक पर उपलब्ध है।
अन्य बैंक नोटों का विवरण भी उपरोक्त लिंक के "अपने नोट को जानिए" के तहत उपलब्ध है।
प्राप्ति के समय ही, जाली नोटों का पता लगाने में स्टाफ सदस्यों को सक्षम बनाने हेतु, नियंत्रक कार्यालयों /प्रशिक्षण केंद्रों को बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करने चाहियें । बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि नकदी का लेन-देन करनेवाले सभी बैंक कर्मी, वास्तविक भारतीय बैंक नोटों की विशेषताओं के संबंध में प्रशिक्षित हैं । भारतीय रिज़र्व बैंक भी, संकाय सहायता और प्रशिक्षण सामग्री प्रदान करेगा।
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महोदय / महोदया, कृपया जाली नोट पकड़ने तथा उन्हें जब्त करने से संबंधित बीस जुलाई दो हज़ार सत्रह तक जारी अनुदेशों को समेकित करते हुए जारी हमारे बीस जुलाई दो हज़ार सत्रह के मास्टर परिपत्र डीसीएम सं.जी - चार/सोलह.एक.पाँच/दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह का संदर्भ लें । मास्टर परिपत्र को अब तक जारी सभी निर्देशों को शामिल करते हुए अद्यतन किया गया हैं और इसे बैंक की वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध किया गया है। इस मास्टर परिपत्र में उपरोक्त विषय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों को समेकित किया गया हैं, जो इस परिपत्र की तारीख पर प्रचलन में हैं । जाली नोट निम्नलिखित द्वारा जब्त किये जा सकते हैं; काउंटर पर प्रस्तुत किए गए बैंक नोटों को प्रामाणिकता के लिए मशीनों के द्वारा परीक्षण किया जाना चाहिए । इसी प्रकार से, बैक ऑफिस / मुद्रा तिजोरी में थोक निविदा के माध्यम से सीधे ही प्राप्त बैंक नोट, मशीनों के माध्यम से प्रमाणीकृत किए जाने चाहिए । काउंटर पर प्राप्त नोटों में या बैक ऑफिस / मुद्रा तिजोरी में पहचान किए गए जाली नोटों के लिए, ग्राहक के खाते में कोई क्रेडिट नहीं दिया जाना है । किसी भी स्थिति में, जाली नोटों को प्रस्तुतकर्ता को लौटाया नहीं जाना चाहिए अथवा बैंक शाखाओं/ कोषागारों द्वारा नष्ट नहीं किया जाना चाहिये। बैंकों के स्तर पर पता लगाये गये जाली नोटों की जब्ती में असफलता को, संबंधित बैंक की जाली नोटों के संचलन में इरादतन संलिप्तता मानी जाएगी और उन पर दण्ड लगाया जायेगा । जाली नोट के रुप में वर्गीकृत नोटों पर निर्धारित "जाली बैंकनोट" स्टैम्प से चिन्हित कर उन्हें जब्त किया जाये । इस प्रकार से जब्त प्रत्येक नोट के ब्यौरे एक अलग रजिस्टर में प्रमाणीकरण के साथ अभिलिखित किये जाएंगे । जब बैंक शाखा के काउंटर / बैक ऑफिस तथा मुद्रा तिजोरी अथवा कोषागार में प्रस्तुत बैंकनोट जाली पाये जाते हैं, तब उक्त पैरा तीन के अनुसार नोट पर स्टैम्प लगाने के बाद निविदाकर्ता को निर्धारित फार्म के अनुसार प्राप्ति सूचना रसीद जारी की जानी चाहिए । उक्त रसीद चल रहे सिरीयल नंबरों में, खजांची और जमाकर्ता द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए । इस आशय का नोटिस आम जनता की जानकारी के लिए कार्यालयों शाखाओं मे विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए । जहां निविदाकर्ता संबंधित रसीद पर प्रतिहस्ताक्षर करने के लिए इच्छुक नहीं है, ऐसे मामलों में भी प्राप्ति सूचना रसीद जारी की जानी है । पुलिस को जाली नोट का पता लगने की घटना की रिपोर्टिग करते समय, निम्न प्रक्रिया का अनुपालन किया जाए : एक ही लेन-देन में चार पीसेस तक जाली नोटों की पहचान के मामलों में, नोडल अधिकारी द्वारा पुलिस प्राधिकरण या नोडल पुलिस स्टेशन को माह की समाप्ति पर संदिग्ध जाली नोटों के साथ निर्धारित फार्मेट में एक समेकित रिपोर्ट भेजी जाए। एक ही लेन-देन में पाँच या उससे अधिक पीसेस तक जाली नोटों की पहचान के मामलों में, नोडल बैंक अधिकारी द्वारा तुरंत वे जाली नोट, निर्धारित फार्मेट में एफआईआर दर्ज करते हुए जांच-पड़ताल के लिए स्थानीय पुलिस प्राधिकरण या नोडल पुलिस स्टेशन को अग्रेषित किये जाएं। मासिक समेकित रिपोर्ट/एफआईआर की एक प्रति बैंक के प्रधान कार्यालय में बनाये गये जाली नोट सतर्कता कक्ष को भेजी जाएगी और कोषागार के मामले में, भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित निर्गम कार्यालय को भेजी जाये । पुलिस प्राधिकारियों से उनको मासिक समेकित रिपोर्ट और एफआईआर द्वारा प्रेषित जाली नोटों की प्राप्ति सूचना प्राप्त की जाये । यदि पुलिस को नकली बैंक नोट बीमाकृत डाक द्वारा भेजे गए हैं तो उनकी प्राप्ति सूचना अनिवार्य रूप से ली जाये और उन्हें रिकार्ड में रखा जाए । पुलिस प्राधिकरण से प्राप्ति सूचना प्राप्त करने के लिए उचित अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक है । यदि मासिक समेकित रिपोर्टों को प्राप्त करने/ एफआईआर दर्ज करने में पुलिस की अनिच्छा के कारण कार्यालयों / बैंक शाखाओं को किसी भी कठिनाई का सामना करना पड रहा है तो उसका निपटान जाली बैंकनोटों की जांच से संबंधित मामलों की समन्वय हेतु नामित पुलिस प्राधिकरण के नोडल अधिकारी की सलाह से किया जाये । नोडल पुलिस स्टेशन की सूची भारतीय रिजर्व बैंक के संबन्धित कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं । जाली नोटों के परिचालन को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों की आसानी से पहचान करने के क्रम में, बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे बैंकिंग हॉल / क्षेत्र तथा काउंटर को सीसीटीवी की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग में रखें तथा रिकॉर्डिंग को संरक्षित रखें । बैंकों को ऐसी पहचान के स्वरुप/प्रवृत्तियों पर निगरानी रखनी चाहिए और संदिग्ध स्वरुप/प्रवृत्तियों को तत्काल भारतीय रिजर्व बैंक/पुलिस प्राधिकारी के ध्यान में लाना चाहिए। जाली नोटों की पहचान और उक्त की सूचना पुलिस, आरबीआई आदि को देने में बैंकों द्वारा की गई प्रगति और उससे संबंधित समस्याओं पर विभिन्न राज्य स्तरीय समितियाँ अर्थात राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति , करेंसी प्रबंधन पर स्थायी समिति राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति , आदि की बैठकों में नियमित रूप से विचार - विमर्श किया जाए । बैंक-शाखाओं/कोषागारों में पकड़े गए जाली भारतीय बैंक नोटों के आंकड़े, नीचे दिये गये पैरा- दस के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक, निर्गम कार्यालय को प्रेषित की जानेवाली मासिक विवरणियों में शामिल किये जायें। भारतीय दंड संहिता में "जाली बनाना" की परिभाषा में विदेशी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी करेंसी नोट भी शामिल हैं। पुलिस और सरकारी एजेंसियों से अभिमत /राय देने हेतु प्राप्त संदिग्ध विदेशी करेंसी नोटों के मामलों में, उन्हें यह सूचित किया जाये कि वे उक्त नोटों को नई दिल्ली स्थित सीबीआई की इंटरपोल विंग के पास उनसे पूर्व परामर्श के बाद भेज दें। बैंकों को अपना नकद प्रबंधन कुछ इस तरह पुनर्निर्धारित करना चाहिये जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक सौ रुपया और उससे अधिक मूल्य वर्ग की नकद प्राप्तियों को उन नोटों की मशीन प्रसंस्करण द्वारा प्रामाणिकता की जांच के बिना पुनः संचलन में नहीं डाला जाए। ये अनुदेश दैनिक नकद प्राप्ति के परिमाण को ध्यान में लिए बगैर सभी शाखाओं पर लागू होंगे। इस अनुदेश के किसी भी गैर अनुपालन को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों का उल्लंघन माना जाएगा। एटीएम मशीनों से जाली नोटों की प्राप्ति संबंधित शिकायतों का निपटान करने और जाली नोटों के संचलन पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह अत्यावश्यक है कि एटीएम मशीनों में नोटों को भरने से पूर्व पर्याप्त सुरक्षा उपायों/ नियंत्रणों को लागू किया जाये । एटीएम मशीनों के माध्यम से जाली नोटों का वितरण, संबंधित बैंक द्वारा जाली नोटों के संचलन के लिये किया गया एक प्रयास माना जायेगा । मुद्रा तिजोरी विप्रेषणों /शेषों में जाली नोटों का पाये जाने को भी संबंधित मुद्रा तिजोरी द्वारा जान -बूझकर जाली नोटों के संचलन के लिये किया गया प्रयास माना जायेगा जिसके परिणामस्वरूप पुलिस प्राधिकरण द्वारा विशेष तहकीकात और अन्य कार्रवाई जैसे संबंधित मुद्रा तिजोरी के प्रचालनों को स्थगित करना, की जा सकती है । निम्नलिखित परिस्थितियों में जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अलावा, जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का एक सौ% दंड लगाया जाएगा : बीस जून दो हज़ार बारह के परिपत्र सं.डीपीएसएस.केंका.पीडी.दो हज़ार दो सौ अट्ठानवे/दो.दस.दो/दो हज़ार ग्यारह-बारह के अनुसार व्हाइट लेबल एटीएम मे लोड की गई नकदी की गुणवत्ता तथा उसकी असलियत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रायोजक बैंक की होगी। तीस दिसंबर, दो हज़ार सोलह के परिपत्र सं.डीपीएसएस.केंका.पीडी.एक हज़ार छः सौ इक्कीस/दो.दस.दो/दो हज़ार सोलह-सत्रह के अनुसार रिटेल आउटलेट से नकदी प्राप्त की जाती है तो व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर एटीएम द्वारा वितरित किए गए मुद्रा नोटों की गुणवत्ता तथा प्रामाणिकता के लिए स्वयं ही पूर्णतः उत्तरदायी होगा । प्रत्येक बैंक जिला-वार नोडल अधिकारी नियुक्त करें और उसकी जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय और पुलिस प्राधिकरण को दें । पैरा पाँच में यथाउल्लिखित, जाली नोट के पहचान की रिपोर्टिंग के मामले, नोडल बैंक अधिकारी के माध्यम से आने चाहिए। नोडल बैंक अधिकारी जाली नोट पाये जाने से संबंधित सभी कार्यकलापों के लिए एक संपर्क अधिकारी के रूप में भी कार्य करेगा। जाली नोटों के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों को बैंक की सभी शाखाओं में प्रचारित करना । इन अनुदेशों के कार्यान्वयन पर निगरानी रखना । वर्तमान अनुदेशों के अनुसार जाली नोटों की पहचान से संबंधित आंकड़े को समेकित करना और भारतीय रिज़र्व बैंक, एफआईयू - आईएनडी तथा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को प्रेषित करना । पुलिस प्राधिकरण और निर्दिष्ट नोडल अधिकारी के साथ जाली नोटों के मामलों से संबंधित अनुवर्ती कार्रवाई करना। इस तरह से संकलित जानकारी को बैंको के केंद्रीय सर्तकता अधिकारी से साझा करना तथा उन्हें काउंटरों पर स्वीकृत /जारी किये गये जाली नोटों से संबंधित मामलों की रिपोर्ट देना । ऐसी मुद्रा तिजोरियों; जहाँ पर दोषपूर्ण/जाली नोट आदि का पता लगा है, की आवधिक आकस्मिक जाँच करना । सभी मुद्रा तिजोरियों/ बैक आफिस में उपयुक्त क्षमता वाली नोट सॉर्टिग मशीनों के प्रचालन को सुनिश्चित करना और जाली नोटों के पता लगाने पर सावधानी पूर्वक निगरानी करना और उक्त का उचित रूप से रिकार्ड रखना । यह सुनिश्चित करना कि केवल छांटे गये और मशीनों से जांचे गये नोट ही एटीएम मशीनों में डाले जायें/ काउंटरों से जारी किये जायें और नोटों के प्रसंस्करण तथा पारगमन के समय आकस्मिक जांच सहित पर्याप्त सुरक्षा उपायों की व्यवस्था । जाली नोट सतर्कता कक्ष उपरोक्त पहलुओं को शामिल करते हुए तिमाही आधार पर, संबंधित तिमाही की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर, मुख्य महाप्रबंधक, मुद्रा प्रबंध विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, अमर भवन, चौथी मंजिल, सर पी.एम.रोड, फोर्ट, मुंबई - चार लाख एक तथा आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय के निर्गम विभाग जिसके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत जाली नोट सतर्कता कक्ष कार्यरत हैं, को वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट प्रेषित करें । उपर्युक्त रिपोर्ट ई-मेल द्वारा भेजी जाये। हार्ड प्रति भेजने की आवश्यकता नहीं है । जाली नोट सतर्कता कक्षों के पते को अद्यतन करने के उद्देश्य से बैंक प्रत्येक वर्ष में, एक जुलाई को अनुसार निर्धारित प्रोफार्मा में ई- मेल से पते आदि आरबीआई को प्रस्तुत करें । हार्ड प्रति भेजने की आवश्यकता नहीं है । जाली नोटों की पहचान सुगम बनाने के लिए सभी बैंक शाखाओं /निर्दिष्ट बैक आफिसों को, अल्ट्रा-वायलेट लैम्प / अन्य उपयुक्त नोट सॉर्टिंग / पहचान वाली मशीनों से सुसज्जित होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सभी मुद्रा तिजोरी शाखाओं में सत्यापन, प्रसंस्करण और छँटनी करने वाली मशीनों की व्यवस्था होनी चाहिये और मशीनों का इष्टतम स्तर तक उपयोग होना चाहिये । इन मशीनों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मई दो हज़ार दस में निर्धारित "नोट सत्यापन और फिटनेस सार्टिंग मानदंडो" के अनुरूप होना आवश्यक हैं । बैंक, पहचान किये गये जाली नोटों सहित नोट छँटनी मशीनों के माध्यम से प्रसंस्कृत नोटों का दैनिक रिकार्ड रखेंगे । बैंकों को जनता के उपयोग हेतु, काउंटर पर नोट गिनने वाली कम से कम एक मशीन , लगाने पर भी विचार करना चाहिए । बैंक की सभी शाखाओं द्वारा पता लगाये गये जाली नोटों के आंकड़े मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में सूचित करना आवश्यक है । माह के दौरान बैंक शाखाओं में पता लगाये गये जाली नोटों के ब्योरे दर्शानेवाला विवरण संकलित किया जाए और संबंधित रिज़र्व बैंक के निर्गम कार्यालय को इस प्रकार प्रेषित किया जाये कि वह आगामी माह की सात तारीख तक उन्हें प्राप्त हो जाये । धनशोधन निवारण नियम, दो हज़ार पाँच के नियम तीन के तहत, बैंकों के प्रधान अधिकारियों को भी ऐसे नकदी लेन देन, जहां जाली नोटों को असली नोटों के रूप में प्रयोग में लाया गया है, की सूचना, सात कार्यदिवस के अंदर, निदेशक, एफआईयू आईएनडी, वित्तीय खुफिया ईकाई-भारत, छःवीं मंजिल, होटल सम्राट, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली-एक लाख दस हज़ार इक्कीस को, FINnet पोर्टल पर सूचना अपलोड करके करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार, एफआईसीएन की पहचान के आंकड़े नैशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो की बेबसाईट के वेब आधारित सॉफ्टवेयर पर भी अपलोड किए जाएँ। माह के दौरान किसी जाली नोट की पहचान नहीं किये जाने की स्थिति में 'निरंक' विवरणी भेजी जाये । पुलिस प्राधिकरण / न्यायालयों से पुनः प्राप्त सभी जाली नोटों को बैंक की अभिरक्षा में सावधानीपूर्वक परिरक्षित किया जाये और संबंधित शाखा द्वारा उक्त का रिकार्ड रखा जाये। बैंक के जाली नोट सतर्कता कक्ष को भी ऐसे जाली नोटों का शाखावार समेकित रिकार्ड रखना होगा । इन जाली नोटों का सत्यापन संबंधित शाखा के प्रभारी अधिकारी द्वारा छमाही आधार पर किया जाना चाहिये । पुलिस प्राधिकरण से प्राप्ति की तिथि से इन जाली नोटों का तीन वर्ष की अवधि के लिए परिरक्षण किया जाना चाहिये। इसके पश्चात पूर्ण ब्योरे के साथ इन जाली नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित निर्गम कार्यालय को भेजा जाये । जाली नोट जो न्यायालय में मुकदमेबाजी के अधीन हैं उन्हें न्यायालय निर्णय के बाद संबंधित शाखा के पास तीन वर्ष तक रखा जाए । यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि बैंकों और कोषागारों / उप- कोषागारों में नकदी व्यवहार करनेवाला स्टाफ, बैंकनोटों की सुरक्षा विशेषताओं से पूरी तरह परिचित हो । जाली नोट की पहचान के संबंध में बैंक -शाखा के कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से अनुबंध - VII में दर्शाये गये बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताएँ तथा डिज़ाइन सभी बैंकों / कोषागारों को इस निर्देश के साथ भेजे गये हैं कि वे इन्हें आम जनता की जानकारी के लिए प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करें । शाखाओं के स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए दो हज़ार पाँच-छः श्रृंखला के बैंकनोटों के पोस्टरों की आपूर्ति की गयी है। रू. दो हज़ार/-, रू.पाँच सौ/-, रू. दो सौ/- तथा रू. पचास/- के नए डिजाईन के बैंक नोट की सुरक्षा विशेषताओं का विवरण https://www.paisaboltahai.rbi.org.in/ लिंक पर उपलब्ध है। अन्य बैंक नोटों का विवरण भी उपरोक्त लिंक के "अपने नोट को जानिए" के तहत उपलब्ध है। प्राप्ति के समय ही, जाली नोटों का पता लगाने में स्टाफ सदस्यों को सक्षम बनाने हेतु, नियंत्रक कार्यालयों /प्रशिक्षण केंद्रों को बैंक नोटों की सुरक्षा विशेषताओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करने चाहियें । बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि नकदी का लेन-देन करनेवाले सभी बैंक कर्मी, वास्तविक भारतीय बैंक नोटों की विशेषताओं के संबंध में प्रशिक्षित हैं । भारतीय रिज़र्व बैंक भी, संकाय सहायता और प्रशिक्षण सामग्री प्रदान करेगा।
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मुंबईः महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को सीबीआई राहत देने को तैयार नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने के लिए CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है. CBI ने जमानत को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस मामले में 12 दिसंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी. हाईकोर्ट ने CBI को जमानत के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 10 दिन का समय दिया था.
मुंबई की विशेष अदालत में अनिल देशमुख की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था. जिसके खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जहां से उन्हें जमानत मिल गई. लेकिन सीबीआई अनिल देशमुख को राहत नहीं देगी। CBI ने उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. 12 दिसम्बर को दिए आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से अनिल देशमुख को जमानत देने के बाद 10 दिनों के लिए अपने आदेश के अमल पर रोक लगा दी थी. जिससे की सीबीआई इस बीच इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सके और अब सुप्रीम कोर्ट का रुख CBI ने किया है.
पहले प्रवर्तन निदेशालय ने बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री को जमानत देने का पूर्ण विरोध किया था। ईडी की तरफ से बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा था कि ये मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है। इससे देश के हितों को खतरा हो सकता है, इसलिए अनिल देशमुख को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
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मुंबईः महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को सीबीआई राहत देने को तैयार नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने के लिए CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है. CBI ने जमानत को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस मामले में बारह दिसंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी. हाईकोर्ट ने CBI को जमानत के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए दस दिन का समय दिया था. मुंबई की विशेष अदालत में अनिल देशमुख की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था. जिसके खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जहां से उन्हें जमानत मिल गई. लेकिन सीबीआई अनिल देशमुख को राहत नहीं देगी। CBI ने उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बारह दिसम्बर को दिए आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से अनिल देशमुख को जमानत देने के बाद दस दिनों के लिए अपने आदेश के अमल पर रोक लगा दी थी. जिससे की सीबीआई इस बीच इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सके और अब सुप्रीम कोर्ट का रुख CBI ने किया है. पहले प्रवर्तन निदेशालय ने बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री को जमानत देने का पूर्ण विरोध किया था। ईडी की तरफ से बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा था कि ये मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है। इससे देश के हितों को खतरा हो सकता है, इसलिए अनिल देशमुख को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
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- फरारी काटने का सबसे सुरक्षित ठिहा - सट्टा का खुलेआम कारोबार कर रहे आपराधिक तत्व पूरे गली मौहल्ले में पैर पसार चुके है। चौक में ही असामाजिक तत्वों का मजमा लगा रहता हैं। दिन-रात यहां गैंगस्टर और बड़े निगरानी शुदा बदमाश आना-जाना रहता है यहां तक वे फरारी भी यहीं काटते हैं। हर दिन शाम होते ही छत्तीसगढ़ कॉलेज के आस-पास रक्सेल गैंग, तंजील गैंग, दिनेश गैंग, रवि साहू गैंग गुर्गों की मीटिंग होती है और इस मीटिंग में सभी शामिल होकर सट्टे के कारोबार पर चर्चा करते है.
- जनता से रिश्ता के संवाददाता ने अपराधियों के अड्डे में जाकर स्टिंग किया है। इस पूरे मामले की जांच में पाया कि पुलिस के नाक के नीचे से अपराधी मीटिंग करते हैं और अपने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते है और कोतवाली थाना पुलिस व सिविल लाइन थाना पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहती है।
रायपुर। राजधानी में कई ऐसे इलाके है जहां खुलेआम सट्टा-जुआ का अवैध कारोबार चल रहा है, रायपुर में सट्टा का कारोबार रोजाना निरंतर चल रहा है। सिविल लाइन थाना और कोतवाली थाना के बीच के इलाके में दिनेश, प्रदीप और रवि साहू मिलकर अब कारोबार चला रहे है। वही दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ कॉलेज के आस-पास का इलाका अब पूरी तरह से सट्टेबाजों के कब्जे में आ चुका है। वही दूसरी तरफ सिविल लाइन और कोतवाली थाना पुलिस को ये पता ही नहीं कि बैरन बाजार छत्तीसगढ़ कॉलेज किस थाना क्षेत्र में आता है। यहां तक कि दोनों थाना पुलिस की पेट्रोलिंग टीम को भी इस बात की भनक तक नहीं होती कि उनके इलाके में सट्टा-जुआ गांजा का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। रायपुर पुलिस द्वारा चलाए अभियान अब ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे है। ताबड़तोड़ कार्रवाई कर 114 सट्टेबाजों की गिरफ्तारी के बाद सभी खाईवालों के गुर्गे जमानती धाराओं के चलते एक के बाद एक छूटते गए।
सिविल लाइन और कोतवाली के क्षेत्र आने वाला छत्तीसगढ़ कॉलेज का रास्ता किस थाना क्षेत्र में आता है। अब नए कप्तान शहर में आये है आते ही सट्टेबाजों, नशेडिय़ों के खिलाफ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद उन्हें ये तय करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ कॉलेज का रास्ता किस थाना क्षेत्र में आता है सिटी कोतवाली या सिविल लाइन थाना। नए कप्तान इस मामले में स्वतः संज्ञान में लेते हुए इस मुद्दे पर गौर करें।
शहर भर में सट्टा कारोबार रवि साहू की गैंग चला रहा है। लेकिन पुलिस इन तक नहीं पहुंच पाती है। पुलिस को इनके ठिकाने में दबिश देती जरूर है लेकिन उससे पहले ही रवि और उसके गुर्गों को पुलिस के आने की खबर मिल जाती है जिस वजह से रवि और उसके गुर्गे खुद को अपने इलाके से बाहर रखकर पुलिस की नजऱों से छिपकर घुमते है। सट्टेबाजी के दिग्गज माने जाने वाले सट्टा किंग दिलीप नायर (अन्ना) का शागिर्द रवि साहू ने दिलीप की मौत के बाद से ही उसने शहर भर में अपने सट्टे के धंधे को बढ़ा लिया है। शहर भर में मुंह में गमछा बांधकर घूमने वाला रवि शास्त्री बाजार में खुद भीड़ का फायदा उठाकर सट्टा खिलाता है। पुलिस की नजऱें भी रवि तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि भीड़ के बीचो-बीच बैठकर सट्टा खिलाने वाला रवि साहू खुद को पुलिस से बचाने के लिए अपने साथ बॉडीगार्ड भी रखे रहता है।
राजधानी में समता कालोनी,तेलाबांधा, कटोरातालाब , राजातालाब, बस स्टैंड, मोवा, दलदल सिवनी, पुरैना, गुढिय़ारी, कोटा, गोगांव, खमतराई, बिरगांव, कबीर नगर, बोरिया खुर्द और बोरिया कला, टीटीबंध, लाभांडी के तक सटोरियों का जाल बिछा है। हर रोज लाखों के दाव लगते है। लेकिन पुलिस बेखबर है। सट्टा खिलाना जहां दिन भर यातायात पुलिस, ट्रैफिक वाले तैनात रहते हैं उनके सामने इस तरह की अवैध कारोबार चल रहा हैं। सट्टेबाजों के खिलाफ आज तक थाना में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं हुई है, जिससे अपराधी सीना तानकर घूम रहे हैं। रायपुर में क्रिकेट सट्टा खिलाने के लिए सेवन स्टार नामक विशेष एप का भी इस्तेमाल किया जाता हैं। जब-जब आईपीएल क्रिकेट मैच चालू होता हैं सट्टा खिलाने वाले लोगों के प्यारे-न्यारे होते हैं और खुलेआम अपने घरों में भी मोबाइल के जरिए सट्टा खिलाते हैं।
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- फरारी काटने का सबसे सुरक्षित ठिहा - सट्टा का खुलेआम कारोबार कर रहे आपराधिक तत्व पूरे गली मौहल्ले में पैर पसार चुके है। चौक में ही असामाजिक तत्वों का मजमा लगा रहता हैं। दिन-रात यहां गैंगस्टर और बड़े निगरानी शुदा बदमाश आना-जाना रहता है यहां तक वे फरारी भी यहीं काटते हैं। हर दिन शाम होते ही छत्तीसगढ़ कॉलेज के आस-पास रक्सेल गैंग, तंजील गैंग, दिनेश गैंग, रवि साहू गैंग गुर्गों की मीटिंग होती है और इस मीटिंग में सभी शामिल होकर सट्टे के कारोबार पर चर्चा करते है. - जनता से रिश्ता के संवाददाता ने अपराधियों के अड्डे में जाकर स्टिंग किया है। इस पूरे मामले की जांच में पाया कि पुलिस के नाक के नीचे से अपराधी मीटिंग करते हैं और अपने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते है और कोतवाली थाना पुलिस व सिविल लाइन थाना पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहती है। रायपुर। राजधानी में कई ऐसे इलाके है जहां खुलेआम सट्टा-जुआ का अवैध कारोबार चल रहा है, रायपुर में सट्टा का कारोबार रोजाना निरंतर चल रहा है। सिविल लाइन थाना और कोतवाली थाना के बीच के इलाके में दिनेश, प्रदीप और रवि साहू मिलकर अब कारोबार चला रहे है। वही दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ कॉलेज के आस-पास का इलाका अब पूरी तरह से सट्टेबाजों के कब्जे में आ चुका है। वही दूसरी तरफ सिविल लाइन और कोतवाली थाना पुलिस को ये पता ही नहीं कि बैरन बाजार छत्तीसगढ़ कॉलेज किस थाना क्षेत्र में आता है। यहां तक कि दोनों थाना पुलिस की पेट्रोलिंग टीम को भी इस बात की भनक तक नहीं होती कि उनके इलाके में सट्टा-जुआ गांजा का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। रायपुर पुलिस द्वारा चलाए अभियान अब ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे है। ताबड़तोड़ कार्रवाई कर एक सौ चौदह सट्टेबाजों की गिरफ्तारी के बाद सभी खाईवालों के गुर्गे जमानती धाराओं के चलते एक के बाद एक छूटते गए। सिविल लाइन और कोतवाली के क्षेत्र आने वाला छत्तीसगढ़ कॉलेज का रास्ता किस थाना क्षेत्र में आता है। अब नए कप्तान शहर में आये है आते ही सट्टेबाजों, नशेडिय़ों के खिलाफ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद उन्हें ये तय करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ कॉलेज का रास्ता किस थाना क्षेत्र में आता है सिटी कोतवाली या सिविल लाइन थाना। नए कप्तान इस मामले में स्वतः संज्ञान में लेते हुए इस मुद्दे पर गौर करें। शहर भर में सट्टा कारोबार रवि साहू की गैंग चला रहा है। लेकिन पुलिस इन तक नहीं पहुंच पाती है। पुलिस को इनके ठिकाने में दबिश देती जरूर है लेकिन उससे पहले ही रवि और उसके गुर्गों को पुलिस के आने की खबर मिल जाती है जिस वजह से रवि और उसके गुर्गे खुद को अपने इलाके से बाहर रखकर पुलिस की नजऱों से छिपकर घुमते है। सट्टेबाजी के दिग्गज माने जाने वाले सट्टा किंग दिलीप नायर का शागिर्द रवि साहू ने दिलीप की मौत के बाद से ही उसने शहर भर में अपने सट्टे के धंधे को बढ़ा लिया है। शहर भर में मुंह में गमछा बांधकर घूमने वाला रवि शास्त्री बाजार में खुद भीड़ का फायदा उठाकर सट्टा खिलाता है। पुलिस की नजऱें भी रवि तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि भीड़ के बीचो-बीच बैठकर सट्टा खिलाने वाला रवि साहू खुद को पुलिस से बचाने के लिए अपने साथ बॉडीगार्ड भी रखे रहता है। राजधानी में समता कालोनी,तेलाबांधा, कटोरातालाब , राजातालाब, बस स्टैंड, मोवा, दलदल सिवनी, पुरैना, गुढिय़ारी, कोटा, गोगांव, खमतराई, बिरगांव, कबीर नगर, बोरिया खुर्द और बोरिया कला, टीटीबंध, लाभांडी के तक सटोरियों का जाल बिछा है। हर रोज लाखों के दाव लगते है। लेकिन पुलिस बेखबर है। सट्टा खिलाना जहां दिन भर यातायात पुलिस, ट्रैफिक वाले तैनात रहते हैं उनके सामने इस तरह की अवैध कारोबार चल रहा हैं। सट्टेबाजों के खिलाफ आज तक थाना में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं हुई है, जिससे अपराधी सीना तानकर घूम रहे हैं। रायपुर में क्रिकेट सट्टा खिलाने के लिए सेवन स्टार नामक विशेष एप का भी इस्तेमाल किया जाता हैं। जब-जब आईपीएल क्रिकेट मैच चालू होता हैं सट्टा खिलाने वाले लोगों के प्यारे-न्यारे होते हैं और खुलेआम अपने घरों में भी मोबाइल के जरिए सट्टा खिलाते हैं।
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कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें भांजे तेजस्वी यादव का विवाह रास नहीं आया है। तेजप्रताप यादव ने अपने सगे मामा को धमकी दी है।
पटना। कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों फिर चर्चा में हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने यादव समाज से बाहर की लड़की से विवाह किया तो साधु भड़क गए और इसे कलंक करार दिया। लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई को भांजे का विवाह रास नहीं आया।
सगे मामा ने जुबानी हमला किया तो जवाब देने तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप यादव सामने आ गए। ठेठ देसी अंदाज में कह दिया 'रुकऽअ हम आऽवतानी बिहार तऽ गर्दा उड़ाऽव तानी तोहार. . . । तेजप्रताप आज जिस साधु यादव को गर्दा उड़ाने की धमकी दे रहे हैं कभी बिहार में उनकी तूती बोलती थी। लालू-राबड़ी राज में साधु जो चाहे करते, उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था।
रेप, हत्या की कोशिश और रंगदारी के कई मामलों में आरोपी साधु यादव पर प्रकाश झा ने फिल्म 'गंगाजल' बनाया था। अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में दिखाया गया था कि बिहार में नेता किस कदर अपराध की दुनिया से जुड़े हैं। फिल्म में विलेन का नाम साधु यादव था। राबड़ी देवी के भाई और लालू यादव के साले साधु यादव की जीजा और दीदी के शासनकाल में पूरे बिहार में धाक थी। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि विरोध कर सके। 90 के दशक में साधु की खबरें अखबारों में छाई रहती थी। बाहुबली और दबंग भी साधु के रास्ते में नहीं आना चाहते थे। किसी अधिकारी या अपराधी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि साधु से पंगा ले सके। बिजनेसमैन तो किसी तरह अपना कारोबार बचाकर रखते थे ताकि साधु की नजर नहीं पड़े।
साधु यादव पर गोली चलाकर दहशत फैलाने, हत्या की कोशिश, रंगदारी नहीं देने पर पीटने, दंगा फैलाने और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने समेत कई आरोप लगे। बाढ़ राहत घोटाले में आईएएस गौतम गोस्वामी को जेल जाना पड़ा था। उनकी रहस्यमय स्थिति में मौत हो गई थी। इस मामले में साधु यादव का नाम आया था और उन्हें सरेंडर करना पड़ा था।
चर्चित शिल्पी जैन हत्या कांड में भी साधु यादव का नाम आया। सीबीआई ने साधु से डीएनए टेस्ट कराने को कहा, लेकिन साधु ने इनकार कर दिया। कहा जाता है कि अकेले साधु यादव की इतनी ताकत नहीं थी कि वह कुछ कर पाते। लालू यादव ने अपने सालों साधु यादव और सुभाष यादव को दबंगई के लिए इस्तेमाल किया था। वह इनकी बदौलत अपनी राजनीति चला रहे थे। लालू यादव की सबसे ज्यादा बदनामी साधु और सुभाष के चलते हुई।
2005 में जब जंगलराज के मुद्दे पर लालू यादव को बिहार की सत्ता से बेदखल कर दिया गया तब से साधु यादव के सितारे आसमान से गर्त की ओर गिरने लगे। लालू ने साधु से किनारा कर लिया। बाद में साधु यादव का लालू आवास में आना-जाना बंद हो गया। तेजस्वी की शादी में साधु को न्योता तक नहीं मिला।
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कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें भांजे तेजस्वी यादव का विवाह रास नहीं आया है। तेजप्रताप यादव ने अपने सगे मामा को धमकी दी है। पटना। कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों फिर चर्चा में हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने यादव समाज से बाहर की लड़की से विवाह किया तो साधु भड़क गए और इसे कलंक करार दिया। लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई को भांजे का विवाह रास नहीं आया। सगे मामा ने जुबानी हमला किया तो जवाब देने तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप यादव सामने आ गए। ठेठ देसी अंदाज में कह दिया 'रुकऽअ हम आऽवतानी बिहार तऽ गर्दा उड़ाऽव तानी तोहार. . . । तेजप्रताप आज जिस साधु यादव को गर्दा उड़ाने की धमकी दे रहे हैं कभी बिहार में उनकी तूती बोलती थी। लालू-राबड़ी राज में साधु जो चाहे करते, उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। रेप, हत्या की कोशिश और रंगदारी के कई मामलों में आरोपी साधु यादव पर प्रकाश झा ने फिल्म 'गंगाजल' बनाया था। अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में दिखाया गया था कि बिहार में नेता किस कदर अपराध की दुनिया से जुड़े हैं। फिल्म में विलेन का नाम साधु यादव था। राबड़ी देवी के भाई और लालू यादव के साले साधु यादव की जीजा और दीदी के शासनकाल में पूरे बिहार में धाक थी। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि विरोध कर सके। नब्बे के दशक में साधु की खबरें अखबारों में छाई रहती थी। बाहुबली और दबंग भी साधु के रास्ते में नहीं आना चाहते थे। किसी अधिकारी या अपराधी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि साधु से पंगा ले सके। बिजनेसमैन तो किसी तरह अपना कारोबार बचाकर रखते थे ताकि साधु की नजर नहीं पड़े। साधु यादव पर गोली चलाकर दहशत फैलाने, हत्या की कोशिश, रंगदारी नहीं देने पर पीटने, दंगा फैलाने और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने समेत कई आरोप लगे। बाढ़ राहत घोटाले में आईएएस गौतम गोस्वामी को जेल जाना पड़ा था। उनकी रहस्यमय स्थिति में मौत हो गई थी। इस मामले में साधु यादव का नाम आया था और उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। चर्चित शिल्पी जैन हत्या कांड में भी साधु यादव का नाम आया। सीबीआई ने साधु से डीएनए टेस्ट कराने को कहा, लेकिन साधु ने इनकार कर दिया। कहा जाता है कि अकेले साधु यादव की इतनी ताकत नहीं थी कि वह कुछ कर पाते। लालू यादव ने अपने सालों साधु यादव और सुभाष यादव को दबंगई के लिए इस्तेमाल किया था। वह इनकी बदौलत अपनी राजनीति चला रहे थे। लालू यादव की सबसे ज्यादा बदनामी साधु और सुभाष के चलते हुई। दो हज़ार पाँच में जब जंगलराज के मुद्दे पर लालू यादव को बिहार की सत्ता से बेदखल कर दिया गया तब से साधु यादव के सितारे आसमान से गर्त की ओर गिरने लगे। लालू ने साधु से किनारा कर लिया। बाद में साधु यादव का लालू आवास में आना-जाना बंद हो गया। तेजस्वी की शादी में साधु को न्योता तक नहीं मिला।
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उपनिदेशक देवेंद्र चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 12 के तहत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अलाभित समूह के छात्रों हेतूू 25 प्रतिशत आरक्षण देने तथा फीस प्रतिपूर्ति हेतू जागरूक करने के दृष्टिगत माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए जिला के समस्त निजी पाठशालाएं आरक्षित वर्गों के बच्चों के दाखिले हेतू 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करना सुनिश्चित करें।
उन्होंने बताया कि सभी निजी स्कूल वर्ष 2023-24 में होने वाले दाखिल हेतू प्रचार-प्रसार के माध्यमों से जागरूक करें ताकि गरीब एवं आरक्षित वर्गों के छात्रों को इसका लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के सूचना पट्ट पर अंकित करने के साथ-साथ प्रोस्पेकटस में आरक्षण का विवरण मुद्रित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिकत प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को कार्यालय की वेबसाईट पर भी अपलोड किया गया है।
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उपनिदेशक देवेंद्र चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा बारह के तहत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अलाभित समूह के छात्रों हेतूू पच्चीस प्रतिशत आरक्षण देने तथा फीस प्रतिपूर्ति हेतू जागरूक करने के दृष्टिगत माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए जिला के समस्त निजी पाठशालाएं आरक्षित वर्गों के बच्चों के दाखिले हेतू पच्चीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि सभी निजी स्कूल वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस में होने वाले दाखिल हेतू प्रचार-प्रसार के माध्यमों से जागरूक करें ताकि गरीब एवं आरक्षित वर्गों के छात्रों को इसका लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त विद्यालयों के सूचना पट्ट पर अंकित करने के साथ-साथ प्रोस्पेकटस में आरक्षण का विवरण मुद्रित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिकत प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को कार्यालय की वेबसाईट पर भी अपलोड किया गया है।
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अंचल के वार्ड नम्बर 1 राजीव नगर में स्थित त्रिदेवताओं के मंदिर श्री महामृत्युंजय शिव मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर एवं सद्गुरु साईनाथ महराज के मंदिर की जो सेवा समिति है वो आये दिन सामाजिक कार्यों में जुटी रहती है।
उसी के तहत श्री महामृत्युंजय मन्दिर समिति ने रविवार को सुबह 9 बजे से सारे सदस्यों के साथ मिलकर मन्दिर के बाहर और बगल में श्मशान के पास साफ सफाई की। इसमें महिलाओं ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। श्रीमती सुरेखा साओ, नारायणी पटेल, सरस्वती साहू, रामकली तिवारी, कुमुदनी सोना यह कार्यक्रम सम्पन्न मन्दिर समिति के अध्यक्ष ललित कुमार तिवारी उपाध्यक्ष मेघनाथ पटेल निरंजन दाश, संतोष साव, विश्वास पवार, लेखराम पटेल, कौशल पटेल, पार्षद महोदय गौतम प्रभाती महापात्र एवं समस्त संरक्षकगण के उपस्थिति में हुआ।
मन्दिर के मुख्य पीठाधीश पण्डित प्रीतिरंजन दाश ने बताया कि समिति आगे भी सभी समाजिक कार्यो में अग्रसर रहेगी। यह अभियान आगे चलकर पूरे मोहल्ले में फैलाया जाएगा। विवेकानंद जयंती के शुभ अवसर पर यह शुभ कार्य सम्पन्न किया गया।
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अंचल के वार्ड नम्बर एक राजीव नगर में स्थित त्रिदेवताओं के मंदिर श्री महामृत्युंजय शिव मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर एवं सद्गुरु साईनाथ महराज के मंदिर की जो सेवा समिति है वो आये दिन सामाजिक कार्यों में जुटी रहती है। उसी के तहत श्री महामृत्युंजय मन्दिर समिति ने रविवार को सुबह नौ बजे से सारे सदस्यों के साथ मिलकर मन्दिर के बाहर और बगल में श्मशान के पास साफ सफाई की। इसमें महिलाओं ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। श्रीमती सुरेखा साओ, नारायणी पटेल, सरस्वती साहू, रामकली तिवारी, कुमुदनी सोना यह कार्यक्रम सम्पन्न मन्दिर समिति के अध्यक्ष ललित कुमार तिवारी उपाध्यक्ष मेघनाथ पटेल निरंजन दाश, संतोष साव, विश्वास पवार, लेखराम पटेल, कौशल पटेल, पार्षद महोदय गौतम प्रभाती महापात्र एवं समस्त संरक्षकगण के उपस्थिति में हुआ। मन्दिर के मुख्य पीठाधीश पण्डित प्रीतिरंजन दाश ने बताया कि समिति आगे भी सभी समाजिक कार्यो में अग्रसर रहेगी। यह अभियान आगे चलकर पूरे मोहल्ले में फैलाया जाएगा। विवेकानंद जयंती के शुभ अवसर पर यह शुभ कार्य सम्पन्न किया गया।
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याचिकाकर्ता को इन अनेक कंपनियों की वार्षिक रिपोर्टें प्रदान की गई थी और इसी के आधार पर यह स्थापित किया गया था। इन कंपनियों के वास्तव में निर्माण सुविधाएं तक नहीं हैं और याचिका में उल्लिखित विचाराधीन उत्पाद के समान वस्तु के निर्माण में नहीं लगी है। ऐसे उत्पादकों, जो विचाराधीन उत्पाद के उत्पादन का दावा करते हैं, के संबंध में प्रदान किए जा रहे वास्तविक डाटा यह दर्शा रहे हैं कि उन्हें वर्तमान विचाराधीन के लिए घरेलू उद्योग के रूप में शामिल क्यों नहीं किया जाए। याचिकाकर्ता घरेलू उद्योग की अपेक्षाओं को पूरा करता है, जैसा कि पाटनरोधी नियमावली, 1995 के नियम (ख) के तहत निर्धारित किया गया है, और यह घरेलू उद्योग बनने के लिए पात्र है। उत्पादकों/निर्यातकों/आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किए गए अनुरोध
उत्पादकों/ निर्यातकों/ आयातकों / अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किए गए अनुरोध इस प्रकार है :याचिकाकर्ता मै० ग्लोबल नान वूमन, जो विचाराधीन उत्पाद का एकमात्र उत्पादक होने का दावा करता है, उसके पास वर्तमान जांच शुरू करने के लिए आधार का अभाव है लेकिन जांच को मिथ्या कथन के बाद शुरू किया गया है।
सेज यूनिट डी टी ए को बहुत ही कम मात्रा में बिक्री करती है। कोई सेज डी टी ए में अपनी बिक्री की सीमा तक ही घरेलू उद्योग की स्थिति का दावा कर सकता है। यह तथ्य कि सेज में एक उत्पादन डी टी ए बिक्री कर सकता है, इसका यह अर्थ नहीं है कि उसने उस प्रयोजन के लिए इसकी स्थापना की है। मै० एलस्टोर्म ऐसी वस्तुओं की बिक्री स्वास्थ्य अनुप्रयोगों के लिए करता है और याचिकाकर्ता स्वास्थ्य एवं सफाई अनुप्रयोगों के लिए वस्तुओं का उत्पादन करता है, जिससे उत्पाद भिन्न हैं। इसके अलावा, एलस्टोर्म ग्रुप वेट लेड टेक्नोलॉजी और स्मन लेड टेक्नोलॉजी का प्रयोग करता है, जिनका अनुप्रयोग हाइजीन के क्षेत्र में नहीं होता और स्पन मेल्ट का कुल आउटपुट, कुल आउटपुट का 12 प्रतिशत से कम है। इसलिए, मै० एलस्टोर्म को समान वस्तुओं का एक उत्पादक नहीं माना जाना चाहिए।
० अल्फा फोम को समान वस्तुओं के उत्पादक के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उनके उत्पादकों में भिन्नता है। याचिकाकर्ता विभिन्न तकनीकी और अल्फा फोम से भिन्न सामग्री भिन्नताओं वाली उत्पाद का उत्पादन करता है। साथ ही, अल्फा फोम एक पुराना उत्पादक होने के बावजूद, भारत में संबद्ध वस्तुओं का बड़ा उपभोक्ता होने के कारण बिक्री नहीं करता। जबकि याचिकाकर्ता बहुत ही कम समय में भारत और विदेशों में संबद्ध वस्तुओं के कई बड़े उपभोक्ताओं को बिक्री करता है।
घरेलू उद्योग सबसे महत्वपूर्ण घटक "बड़ा हिस्सा" और "घरेलू उत्पादक समग्र रूप से" के संबंध में गहन जांच की जानी चाहिए। बड़ा हिस्सा होने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता, यदि हिस्सा बहुत ही कम हो। इसी समय घरेलू उत्पादक समग्र रूप से होने का तात्पर्य संबद्ध वस्तुओं के सभी घरेलू उत्पादकों से है, जिसे घरेलू उद्योग के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए और इसे यूरोपीय समुदाय - चीन जन. गण. से कतिपय लौह और इस्पात फास्टनर्स के संबंध में निश्चयात्मक पाटनरोधी उपायों के मामले में अपील निकाय द्वारा पाया गया था।
याचिकाकर्ता में ऐसे सभी घरेलू उत्पादकों को शामिल नहीं किया गया था जिनमें समग्र उत्पादक शामिल हैं और यह पर्याप्त आधार है कि जांच को समाप्त किया जाना चाहिए अथवा घरेलू उद्योग का दायरा बदला जाना चाहिए तथा इसमें सभी अन्य घरेलू उत्पादक शामिल होने चाहिए।
याचिकाकर्ता का डी टी ए में एकमात्र उत्पादक होने का दावा बिल्कुल गलत है। अन्य घरेलू उत्पादक विगत कई वर्षों से समान उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं। घरेलू मांग की पूर्ति मै० फाइबर वेब इंडिया, मै० ० अल्फा फोम, मै० सूर्या टेक्सटेक जैसे घरेलू उत्पादकों द्वारा आयातों के साथ की गई थी। अन्य घरेलू उत्पादकों के डाटा मांगे जाने चाहिए और उनकी जांच करनी चाहिए। इन कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुएं बिल्कुल वहीं है, जो याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्मित किए जा रहे उत्पाद हैं।
जहां कोई स्थापित उद्योग मौजूद है, वहां प्रत्येक नए उद्योग के लिए मैटेरियल रिटार्डेशन का दावा खुला नहीं है। याचिकाकर्ता इस नव अवस्था में और विकास की अवस्था में, अन्य भारतीय उत्पादक द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन के 10-15 वर्षों के बाद स्वयं दावा नहीं कर सकता। यह सेज में एक उत्पादक की
पहले से मौजूदगी के चलते एक मैटेरियल रिटार्डेशन का मामला नहीं हो सकता । एक सेज यूनिट को घरेलू उद्योग के रूप में माना जाना चाहिए। प्राधिकारी ने विगत में ऐसे मामलों में ऐसा किया था। सेज यूनिट में अन्य उत्पादक हैं, जिनके पास डी टी ए की मंजूरी है और डी टी ए की मंजूरी वाली यूनिट को ए पाटनरोधी नियमावली के नियम 2 (ख) के प्रयोजन के लिए घरेलू उत्पादक के रूप में माना जाना चाहिए।
आवेदक पाटनरोधी नियमावली के नियम 2 (ख) में उल्लिखित आधार की अपेक्षा को पूरा नहीं करता। याचिकाकर्ता के उत्पादन का हिस्सा, हितबद्ध पक्षकारों की गणना के अनुसार केवल 20.39 प्रतिशत है, जो कि एक रूढि़िवादी धारणा के आधार पर है कि सभी अन्य घरेलू उत्पादक अपनी समेकित क्षमताओं का केवल 30 प्रतिशत प्रचालन कर रहे हैं।
घरेलू उद्योग के कुल आउटपुट में घरेलू उत्पादन का बड़ा हिस्सा शामिल है अर्थात 51 प्रतिशत से अधिक तक है । याचिकाकर्ता अपनी याचिका में उल्लिखित 29 उत्पादकों के कुल उत्पादक को शामिल करने में विफल रहा है, जिन्होंने विचाराधीन उत्पाद का निर्माण करने का दावा किया है। याचिका में शामिल उन 29 उत्पादकों में से एक उत्पादक मै० अल्फा फोम सुनवाई में मौजूद था। अल्फा फोम ने अपनी क्षमता प्रति वर्ष 3000 टन से बढ़ाकर 6000 टन प्रति वर्ष की है। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पास विचाराधीन के उत्पादन की क्षमता है, जो 10 जी एस एम से 150 जी एस एम तक की है। आयातकों मै० यूनिचार्म ने यह दावा किया है कि उन्होंने भारत में 25 जी एस एम से कम के बिना बुने फैब्रिक की खरीद की है और यह कि उनके द्वारा इस संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। यह तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विचाराधीन उत्पाद अन्य उत्पादकों द्वारा भी उत्पादित किए जा रहे हैं ।
आवेदन मै० ग्लोबल नान वूवन्स लिमिटेड द्वारा दायर किया जा रहा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि याचिकाकर्ता के पास विचाराधीन और भारत में घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डी टी ए) में उत्पादित समान उत्पाद का 100 प्रतिशत उत्पादन शामिल है। याचिकाकर्ता ने अन्य उत्पादकों के संबंध में याचिका में सूचना प्रदान की है लेकिन यह भी उल्लेख किया है कि ये उत्पादक बिना बुने फैब्रिक लेकिन उत्पाद जी एस एम से भिन्न का उत्पादन कर रहे हैं, जिसका उपयोग हाइजीन और स्वास्थ्य अनुप्रयोगों के लिए नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने अपने दावे का पुनः उल्लेख किया है कि याचिकाकर्ता द्वारा उत्पादित उत्पाद, बाजार में अन्य घरेलू उत्पादकों द्वारा उत्पादित उत्पादन से भिन्न है और उत्पाद के गुणों में और घरेलू उद्योग तथा अन्य उत्पादकों द्वारा बेचे गए उत्पाद की परिणामी कीमतें भिन्न हैं ।
जांच की शुरूआत की अवस्था में तथा रिकार्ड में उपलब्ध सूचना के आधार पर, प्राधिकारी ने यह विचार किया है कि विचाराधीन उत्पाद का उत्पादन भारत में केवल याचिकाकर्ता द्वारा किया जा रहा है, जहां तक डी टी ए में उत्पादन का संबंध है। इसके अलावा, विचाराधीन उत्पाद का उत्पादन एलस्ट्रोम फाइबर कंपोजिट्स द्वारा किया जाता है, जो सेज में उपलब्ध है और जिसने बाद में याचिका का समर्थन किया। अतः जांच की शुरूआत मै० ग्लोबल नान-वूवन्स लिमिटेड द्वारा घरेलू उद्योग की ओर से दाखिल की गई एक याचिका के आधार पर किया गया
जांच शुरू होने के बाद और सुनवाई के दौरान अनेक हितबद्ध पक्षकारों ने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का कोई आधार नहीं है और ऐसे अनेक उत्पादक है जिन्होंने देश में उत्पाद का उत्पादन किया है। यह भी तर्क दिया गया था कि चूंकि उत्पाद का उत्पादन देश में अनेक अन्य उत्पादकों द्वारा किया जा रहा है। मामले की जांच इस आधार पर नहीं शुरू की जा सकती कि पाटित आयातों से घरेलू उद्योग की स्थापना के लिए मैटेरियल रिटार्डेशन हो रहा है। जांच शुरू करने से पूर्व प्राधिकारी ने वस्त्र आयुक्त के कार्यालय को लिखा, जिसमें बिना बुने वस्त्र के ज्ञात उत्पादकों के ब्यौरों की मांग की गई है । तथापि, ऐसे कोई ब्यौरे प्राधिकारी को उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
इसके अलावा, यह नोट किया गया है कि याचिकाकर्ता ने न तो विचाराधीन उत्पाद का आयात किया है और नहीं विचाराधीन उत्पाद के उत्पादकों से वे संबद्ध हैं। किसी भी उत्पादक ने जांच शुरू करने की अधिसूचना का उत्तर नहीं दिया है, जिसे 15 जून, 2016 का सार्वजनिक डोमेन में अधिसूचित किया गया था। याचिकाकर्ता द्वारा
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याचिकाकर्ता को इन अनेक कंपनियों की वार्षिक रिपोर्टें प्रदान की गई थी और इसी के आधार पर यह स्थापित किया गया था। इन कंपनियों के वास्तव में निर्माण सुविधाएं तक नहीं हैं और याचिका में उल्लिखित विचाराधीन उत्पाद के समान वस्तु के निर्माण में नहीं लगी है। ऐसे उत्पादकों, जो विचाराधीन उत्पाद के उत्पादन का दावा करते हैं, के संबंध में प्रदान किए जा रहे वास्तविक डाटा यह दर्शा रहे हैं कि उन्हें वर्तमान विचाराधीन के लिए घरेलू उद्योग के रूप में शामिल क्यों नहीं किया जाए। याचिकाकर्ता घरेलू उद्योग की अपेक्षाओं को पूरा करता है, जैसा कि पाटनरोधी नियमावली, एक हज़ार नौ सौ पचानवे के नियम के तहत निर्धारित किया गया है, और यह घरेलू उद्योग बनने के लिए पात्र है। उत्पादकों/निर्यातकों/आयातकों/ अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किए गए अनुरोध उत्पादकों/ निर्यातकों/ आयातकों / अन्य हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किए गए अनुरोध इस प्रकार है :याचिकाकर्ता मैशून्य ग्लोबल नान वूमन, जो विचाराधीन उत्पाद का एकमात्र उत्पादक होने का दावा करता है, उसके पास वर्तमान जांच शुरू करने के लिए आधार का अभाव है लेकिन जांच को मिथ्या कथन के बाद शुरू किया गया है। सेज यूनिट डी टी ए को बहुत ही कम मात्रा में बिक्री करती है। कोई सेज डी टी ए में अपनी बिक्री की सीमा तक ही घरेलू उद्योग की स्थिति का दावा कर सकता है। यह तथ्य कि सेज में एक उत्पादन डी टी ए बिक्री कर सकता है, इसका यह अर्थ नहीं है कि उसने उस प्रयोजन के लिए इसकी स्थापना की है। मैशून्य एलस्टोर्म ऐसी वस्तुओं की बिक्री स्वास्थ्य अनुप्रयोगों के लिए करता है और याचिकाकर्ता स्वास्थ्य एवं सफाई अनुप्रयोगों के लिए वस्तुओं का उत्पादन करता है, जिससे उत्पाद भिन्न हैं। इसके अलावा, एलस्टोर्म ग्रुप वेट लेड टेक्नोलॉजी और स्मन लेड टेक्नोलॉजी का प्रयोग करता है, जिनका अनुप्रयोग हाइजीन के क्षेत्र में नहीं होता और स्पन मेल्ट का कुल आउटपुट, कुल आउटपुट का बारह प्रतिशत से कम है। इसलिए, मैशून्य एलस्टोर्म को समान वस्तुओं का एक उत्पादक नहीं माना जाना चाहिए। शून्य अल्फा फोम को समान वस्तुओं के उत्पादक के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि उनके उत्पादकों में भिन्नता है। याचिकाकर्ता विभिन्न तकनीकी और अल्फा फोम से भिन्न सामग्री भिन्नताओं वाली उत्पाद का उत्पादन करता है। साथ ही, अल्फा फोम एक पुराना उत्पादक होने के बावजूद, भारत में संबद्ध वस्तुओं का बड़ा उपभोक्ता होने के कारण बिक्री नहीं करता। जबकि याचिकाकर्ता बहुत ही कम समय में भारत और विदेशों में संबद्ध वस्तुओं के कई बड़े उपभोक्ताओं को बिक्री करता है। घरेलू उद्योग सबसे महत्वपूर्ण घटक "बड़ा हिस्सा" और "घरेलू उत्पादक समग्र रूप से" के संबंध में गहन जांच की जानी चाहिए। बड़ा हिस्सा होने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता, यदि हिस्सा बहुत ही कम हो। इसी समय घरेलू उत्पादक समग्र रूप से होने का तात्पर्य संबद्ध वस्तुओं के सभी घरेलू उत्पादकों से है, जिसे घरेलू उद्योग के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए और इसे यूरोपीय समुदाय - चीन जन. गण. से कतिपय लौह और इस्पात फास्टनर्स के संबंध में निश्चयात्मक पाटनरोधी उपायों के मामले में अपील निकाय द्वारा पाया गया था। याचिकाकर्ता में ऐसे सभी घरेलू उत्पादकों को शामिल नहीं किया गया था जिनमें समग्र उत्पादक शामिल हैं और यह पर्याप्त आधार है कि जांच को समाप्त किया जाना चाहिए अथवा घरेलू उद्योग का दायरा बदला जाना चाहिए तथा इसमें सभी अन्य घरेलू उत्पादक शामिल होने चाहिए। याचिकाकर्ता का डी टी ए में एकमात्र उत्पादक होने का दावा बिल्कुल गलत है। अन्य घरेलू उत्पादक विगत कई वर्षों से समान उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं। घरेलू मांग की पूर्ति मैशून्य फाइबर वेब इंडिया, मैशून्य शून्य अल्फा फोम, मैशून्य सूर्या टेक्सटेक जैसे घरेलू उत्पादकों द्वारा आयातों के साथ की गई थी। अन्य घरेलू उत्पादकों के डाटा मांगे जाने चाहिए और उनकी जांच करनी चाहिए। इन कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुएं बिल्कुल वहीं है, जो याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्मित किए जा रहे उत्पाद हैं। जहां कोई स्थापित उद्योग मौजूद है, वहां प्रत्येक नए उद्योग के लिए मैटेरियल रिटार्डेशन का दावा खुला नहीं है। याचिकाकर्ता इस नव अवस्था में और विकास की अवस्था में, अन्य भारतीय उत्पादक द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन के दस-पंद्रह वर्षों के बाद स्वयं दावा नहीं कर सकता। यह सेज में एक उत्पादक की पहले से मौजूदगी के चलते एक मैटेरियल रिटार्डेशन का मामला नहीं हो सकता । एक सेज यूनिट को घरेलू उद्योग के रूप में माना जाना चाहिए। प्राधिकारी ने विगत में ऐसे मामलों में ऐसा किया था। सेज यूनिट में अन्य उत्पादक हैं, जिनके पास डी टी ए की मंजूरी है और डी टी ए की मंजूरी वाली यूनिट को ए पाटनरोधी नियमावली के नियम दो के प्रयोजन के लिए घरेलू उत्पादक के रूप में माना जाना चाहिए। आवेदक पाटनरोधी नियमावली के नियम दो में उल्लिखित आधार की अपेक्षा को पूरा नहीं करता। याचिकाकर्ता के उत्पादन का हिस्सा, हितबद्ध पक्षकारों की गणना के अनुसार केवल बीस.उनतालीस प्रतिशत है, जो कि एक रूढि़िवादी धारणा के आधार पर है कि सभी अन्य घरेलू उत्पादक अपनी समेकित क्षमताओं का केवल तीस प्रतिशत प्रचालन कर रहे हैं। घरेलू उद्योग के कुल आउटपुट में घरेलू उत्पादन का बड़ा हिस्सा शामिल है अर्थात इक्यावन प्रतिशत से अधिक तक है । याचिकाकर्ता अपनी याचिका में उल्लिखित उनतीस उत्पादकों के कुल उत्पादक को शामिल करने में विफल रहा है, जिन्होंने विचाराधीन उत्पाद का निर्माण करने का दावा किया है। याचिका में शामिल उन उनतीस उत्पादकों में से एक उत्पादक मैशून्य अल्फा फोम सुनवाई में मौजूद था। अल्फा फोम ने अपनी क्षमता प्रति वर्ष तीन हज़ार टन से बढ़ाकर छः हज़ार टन प्रति वर्ष की है। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पास विचाराधीन के उत्पादन की क्षमता है, जो दस जी एस एम से एक सौ पचास जी एस एम तक की है। आयातकों मैशून्य यूनिचार्म ने यह दावा किया है कि उन्होंने भारत में पच्चीस जी एस एम से कम के बिना बुने फैब्रिक की खरीद की है और यह कि उनके द्वारा इस संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। यह तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विचाराधीन उत्पाद अन्य उत्पादकों द्वारा भी उत्पादित किए जा रहे हैं । आवेदन मैशून्य ग्लोबल नान वूवन्स लिमिटेड द्वारा दायर किया जा रहा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि याचिकाकर्ता के पास विचाराधीन और भारत में घरेलू टैरिफ क्षेत्र में उत्पादित समान उत्पाद का एक सौ प्रतिशत उत्पादन शामिल है। याचिकाकर्ता ने अन्य उत्पादकों के संबंध में याचिका में सूचना प्रदान की है लेकिन यह भी उल्लेख किया है कि ये उत्पादक बिना बुने फैब्रिक लेकिन उत्पाद जी एस एम से भिन्न का उत्पादन कर रहे हैं, जिसका उपयोग हाइजीन और स्वास्थ्य अनुप्रयोगों के लिए नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने अपने दावे का पुनः उल्लेख किया है कि याचिकाकर्ता द्वारा उत्पादित उत्पाद, बाजार में अन्य घरेलू उत्पादकों द्वारा उत्पादित उत्पादन से भिन्न है और उत्पाद के गुणों में और घरेलू उद्योग तथा अन्य उत्पादकों द्वारा बेचे गए उत्पाद की परिणामी कीमतें भिन्न हैं । जांच की शुरूआत की अवस्था में तथा रिकार्ड में उपलब्ध सूचना के आधार पर, प्राधिकारी ने यह विचार किया है कि विचाराधीन उत्पाद का उत्पादन भारत में केवल याचिकाकर्ता द्वारा किया जा रहा है, जहां तक डी टी ए में उत्पादन का संबंध है। इसके अलावा, विचाराधीन उत्पाद का उत्पादन एलस्ट्रोम फाइबर कंपोजिट्स द्वारा किया जाता है, जो सेज में उपलब्ध है और जिसने बाद में याचिका का समर्थन किया। अतः जांच की शुरूआत मैशून्य ग्लोबल नान-वूवन्स लिमिटेड द्वारा घरेलू उद्योग की ओर से दाखिल की गई एक याचिका के आधार पर किया गया जांच शुरू होने के बाद और सुनवाई के दौरान अनेक हितबद्ध पक्षकारों ने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का कोई आधार नहीं है और ऐसे अनेक उत्पादक है जिन्होंने देश में उत्पाद का उत्पादन किया है। यह भी तर्क दिया गया था कि चूंकि उत्पाद का उत्पादन देश में अनेक अन्य उत्पादकों द्वारा किया जा रहा है। मामले की जांच इस आधार पर नहीं शुरू की जा सकती कि पाटित आयातों से घरेलू उद्योग की स्थापना के लिए मैटेरियल रिटार्डेशन हो रहा है। जांच शुरू करने से पूर्व प्राधिकारी ने वस्त्र आयुक्त के कार्यालय को लिखा, जिसमें बिना बुने वस्त्र के ज्ञात उत्पादकों के ब्यौरों की मांग की गई है । तथापि, ऐसे कोई ब्यौरे प्राधिकारी को उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसके अलावा, यह नोट किया गया है कि याचिकाकर्ता ने न तो विचाराधीन उत्पाद का आयात किया है और नहीं विचाराधीन उत्पाद के उत्पादकों से वे संबद्ध हैं। किसी भी उत्पादक ने जांच शुरू करने की अधिसूचना का उत्तर नहीं दिया है, जिसे पंद्रह जून, दो हज़ार सोलह का सार्वजनिक डोमेन में अधिसूचित किया गया था। याचिकाकर्ता द्वारा
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Chitragupta Jayanti 2022 पाप और पुण्य का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त जयंती गुरुवार को हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा आयोजित केपी इंटर कालेज में चित्रगुप्त पूजा की गई। इसमें Kayastha Samaj के लोगों ने भाग लिया।
अलीगढ़, संदीप सक्सेना । पाप और पुण्य का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त जयंती Chitragupta Jayanti गुरुवार को हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा आयोजित केपी इंटर कालेज में चित्रगुप्त पूजा Chitragupta Puja की गई। इसमें कायस्थ समाज Kayastha Samaj के बुद्धजीवि, समाजसेवी, पत्रकार एवं युवाओं ने शिरकत की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा Kayastha Samaj कायस्थ समाज के लोगों का हर क्षेत्र में वर्चस्व कायम हैं। सभी क्षेत्रों में कायस्थ आगे बढ़ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कोरोना ने बहुत कुछ सिखा दिया है। उस दौर का भुलाया नहींं जा सकती। इसलिए जरूरत है कि कायस्थ उदयोग क्षेत्र में आगे आएं। नौकरी देने वाले बने। राजनीति में भी बढ़चढ़ कर भाग लें। मेहनत के बलबूते पर एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और समाज के लोगों की सहायता करें।
Deep Expo दीप एक्सपो के निदेशक निदेशक तरुण सक्सेना एव ललेश सक्सेना का कायस्थ महासभा की ओर से सम्मान किया गया। इस मौके पर दीप एक्सपो के निदेशक तरुण सक्सेना ने आश्वासन दिया कि वह केपी इंटर कालेज की तरक्की के लिए हर संभव सहायता देने काेे तैयार हैं। इसके लिए उन्होंने प्रस्ताव मांगा। बताते चलें कि सेना के लिए प्रोडक्ट तैयार करने वाली दीप एक्सपो की एक यूनिट डिफेंस कारीडोर में लग रही है। इसके अलावा जिम्मबावे में भी यूनिट कार्यरत है।
कार्यक्रम के शुरू में आगरा रोड स्थित केपी इंटर कालेज में श्री चित्रगुप्त महाराज जी का पूजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम श्री चित्रगुप्त महाराज Chitragupta Maharaj की प्रतिमा को दूध दही शहद गंगाजल से स्नान कराया गया। उसके बाद चित्रगुप्त महाराज जी का श्रृंगार किया गया। कायस्थ परिवार के लोगों ने हवन पूजन कार्यक्रम एवं Chitragupta Maharaj चित्रगुप्त महाराज की आरती कर उनका आशीर्वाद लिया। पंडित सुशील शर्मा ने कलम दवात का पूजन कराया। सभी सदस्यों को कलम का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के जिला अध्यक्ष अशोक सक्सेना, राष्ट्रीय सचिव तरुण सक्सेना ,जिला महामंत्री डॉ रजत सक्सेना, देवेंद्र सक्सेना, सुभाष सक्सेना,हरेंद्र जौहरी,अभिषेक सक्सेना, विकास सक्सेना,राजा सक्सेना,मोंटू पिल्लई,प्रदीप रायजादा,सी ए अतुल प्रकाश, पंकज सक्सेना,आनंद सक्सेना,कार्तिक सक्सेना,चिराग सक्सेना, प्रमोद कुलश्रेष्ठ,सुधाकर कुलश्रेष्ठ, अजय सक्सेना,शरद सक्सेना, अमित सक्सेना,अविनाश सक्सेना,संदीप सक्सेना,मुकेश सक्सेना, आदित्य सक्सेना,अर्जुन सक्सेना, अनुज सक्सेना,उमेश श्रीवास्तव, भांति जी,योगेश सक्सेना,आयुष सक्सेना, गौरव सक्सेना,अरविंद सरकार,मनोज सक्सेना,सनोज सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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Chitragupta Jayanti दो हज़ार बाईस पाप और पुण्य का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त जयंती गुरुवार को हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा आयोजित केपी इंटर कालेज में चित्रगुप्त पूजा की गई। इसमें Kayastha Samaj के लोगों ने भाग लिया। अलीगढ़, संदीप सक्सेना । पाप और पुण्य का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त जयंती Chitragupta Jayanti गुरुवार को हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा आयोजित केपी इंटर कालेज में चित्रगुप्त पूजा Chitragupta Puja की गई। इसमें कायस्थ समाज Kayastha Samaj के बुद्धजीवि, समाजसेवी, पत्रकार एवं युवाओं ने शिरकत की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा Kayastha Samaj कायस्थ समाज के लोगों का हर क्षेत्र में वर्चस्व कायम हैं। सभी क्षेत्रों में कायस्थ आगे बढ़ रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कोरोना ने बहुत कुछ सिखा दिया है। उस दौर का भुलाया नहींं जा सकती। इसलिए जरूरत है कि कायस्थ उदयोग क्षेत्र में आगे आएं। नौकरी देने वाले बने। राजनीति में भी बढ़चढ़ कर भाग लें। मेहनत के बलबूते पर एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और समाज के लोगों की सहायता करें। Deep Expo दीप एक्सपो के निदेशक निदेशक तरुण सक्सेना एव ललेश सक्सेना का कायस्थ महासभा की ओर से सम्मान किया गया। इस मौके पर दीप एक्सपो के निदेशक तरुण सक्सेना ने आश्वासन दिया कि वह केपी इंटर कालेज की तरक्की के लिए हर संभव सहायता देने काेे तैयार हैं। इसके लिए उन्होंने प्रस्ताव मांगा। बताते चलें कि सेना के लिए प्रोडक्ट तैयार करने वाली दीप एक्सपो की एक यूनिट डिफेंस कारीडोर में लग रही है। इसके अलावा जिम्मबावे में भी यूनिट कार्यरत है। कार्यक्रम के शुरू में आगरा रोड स्थित केपी इंटर कालेज में श्री चित्रगुप्त महाराज जी का पूजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम श्री चित्रगुप्त महाराज Chitragupta Maharaj की प्रतिमा को दूध दही शहद गंगाजल से स्नान कराया गया। उसके बाद चित्रगुप्त महाराज जी का श्रृंगार किया गया। कायस्थ परिवार के लोगों ने हवन पूजन कार्यक्रम एवं Chitragupta Maharaj चित्रगुप्त महाराज की आरती कर उनका आशीर्वाद लिया। पंडित सुशील शर्मा ने कलम दवात का पूजन कराया। सभी सदस्यों को कलम का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के जिला अध्यक्ष अशोक सक्सेना, राष्ट्रीय सचिव तरुण सक्सेना ,जिला महामंत्री डॉ रजत सक्सेना, देवेंद्र सक्सेना, सुभाष सक्सेना,हरेंद्र जौहरी,अभिषेक सक्सेना, विकास सक्सेना,राजा सक्सेना,मोंटू पिल्लई,प्रदीप रायजादा,सी ए अतुल प्रकाश, पंकज सक्सेना,आनंद सक्सेना,कार्तिक सक्सेना,चिराग सक्सेना, प्रमोद कुलश्रेष्ठ,सुधाकर कुलश्रेष्ठ, अजय सक्सेना,शरद सक्सेना, अमित सक्सेना,अविनाश सक्सेना,संदीप सक्सेना,मुकेश सक्सेना, आदित्य सक्सेना,अर्जुन सक्सेना, अनुज सक्सेना,उमेश श्रीवास्तव, भांति जी,योगेश सक्सेना,आयुष सक्सेना, गौरव सक्सेना,अरविंद सरकार,मनोज सक्सेना,सनोज सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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ट्विटर के एक वरिष्ठ इंजीनियर को यह स्वीकार किया है कि ट्विटर पर कैसे वामपंथियों के कब्जे में है और यह दक्षिणपंथी एकाउंट्स पर कैसे शिकंजा कसता है।
हिंदी को राष्ट्रीय भाषा नहीं बताकर विवाद को जन्म देने वाले किच्चा सुदीप की फिल्म 'विक्रांत रोणा' के लिए सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है।
महेश बाबू पिछले साल पान मसाला के विज्ञापन का हिस्सा बने थे। नेटिजन्स ने अब उन पर हमला बोलते हुए उसी ऐड को फिर से वायरल करना शुरू कर दिया है।
जल्द ही देश की दो प्रमुख सीमेंट कम्पनियाँ अम्बुजा सीमेंट लिमिटेड और ACC लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी अडानी ग्रुप की हो जाएगी।
तुगलक ने आसपास के छोटे-बड़े मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और रजिया मस्जिद का और विस्तार किया। काशी में सिकंदर लोदी और खिलजी ने भी तबाही मचाई।
"नमाज़ पढ़ने वाले जानते थे कि तालाब में शिवलिंग हैं। इसीलिए तो मौलवी लोग तालाब के पानी को निकालने का विरोध कर रहे थे। "
वर्मा के ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए केआरके ने लिखा, "ये 11. 75 करोड़ भी फेक हैं। रियल तो 10 करोड़ भी नहीं हैं। पब्लिक ने कुत्ता बना दिया इनको। "
बिहार में स्थित माता मुंडेश्वरी का मंदिर दुनिया का सबसे पुराना कार्यरत मंदिर है। 108 ईस्वी में स्थापना से आज तक इसमें पूजा नहीं रूका है।
वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग भी मिलने का दावा किया है। यह शिवलिंग कुएँ में मिला।
सर्वे के तीसरे दिन हिन्दू पक्ष की तरफ से सोमवार को करीब 12 फीट 8 इंच लंबा शिवलिंग नंदी के सामने विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिलने का दावा किया गया है।
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ट्विटर के एक वरिष्ठ इंजीनियर को यह स्वीकार किया है कि ट्विटर पर कैसे वामपंथियों के कब्जे में है और यह दक्षिणपंथी एकाउंट्स पर कैसे शिकंजा कसता है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा नहीं बताकर विवाद को जन्म देने वाले किच्चा सुदीप की फिल्म 'विक्रांत रोणा' के लिए सलमान खान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है। महेश बाबू पिछले साल पान मसाला के विज्ञापन का हिस्सा बने थे। नेटिजन्स ने अब उन पर हमला बोलते हुए उसी ऐड को फिर से वायरल करना शुरू कर दिया है। जल्द ही देश की दो प्रमुख सीमेंट कम्पनियाँ अम्बुजा सीमेंट लिमिटेड और ACC लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी अडानी ग्रुप की हो जाएगी। तुगलक ने आसपास के छोटे-बड़े मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और रजिया मस्जिद का और विस्तार किया। काशी में सिकंदर लोदी और खिलजी ने भी तबाही मचाई। "नमाज़ पढ़ने वाले जानते थे कि तालाब में शिवलिंग हैं। इसीलिए तो मौलवी लोग तालाब के पानी को निकालने का विरोध कर रहे थे। " वर्मा के ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए केआरके ने लिखा, "ये ग्यारह. पचहत्तर करोड़ भी फेक हैं। रियल तो दस करोड़ भी नहीं हैं। पब्लिक ने कुत्ता बना दिया इनको। " बिहार में स्थित माता मुंडेश्वरी का मंदिर दुनिया का सबसे पुराना कार्यरत मंदिर है। एक सौ आठ ईस्वी में स्थापना से आज तक इसमें पूजा नहीं रूका है। वाराणसी में ज्ञानवापी का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग भी मिलने का दावा किया है। यह शिवलिंग कुएँ में मिला। सर्वे के तीसरे दिन हिन्दू पक्ष की तरफ से सोमवार को करीब बारह फीट आठ इंच लंबा शिवलिंग नंदी के सामने विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिलने का दावा किया गया है।
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इस्लामिक स्टेट के कट्टरपंथियों ने * मास्को और नोवोसिबिर्स्क में आतंकवादी हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम देने की योजना बनाई। लेकिन कानून लागू करने वालों ने इन योजनाओं का पर्दाफाश किया और आईएस * के नेताओं में से एक की गतिविधियों को रोक दिया, जो रूस में आतंकवादी हमले की तैयारी कर रहा था।
यह संदेश मॉस्को और मॉस्को क्षेत्र के एफएसबी विभाग की प्रेस सेवा से आया है।
- एक प्रेस विज्ञप्ति में नोट किया गया।
निदेशालय के अनुसार, उक्त विदेशी ने रूसी क्षेत्र पर एक आतंकवादी सेल का गठन किया है। इसके कार्यों में मास्को और नोवोसिबिर्स्क क्षेत्रों में आतंकवादी हमले और तोड़फोड़ करना शामिल था। अन्य बातों के अलावा, नाज़रोव भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कामचलाऊ बमों के विस्फोट की व्यवस्था करने जा रहा था, जिसमें रूसी रेलवे द्वारा चलाए जा रहे बम भी शामिल थे।
इस महीने की शुरुआत में, मध्य एशिया के एक देश के एक नागरिक को सखालिन क्षेत्र में हिरासत में लिया गया था, जो चरमपंथी संगठनों में से एक के हितों में विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त था। उन्हें 12 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी समिति के अनुसार, पिछले साल फरवरी से इस साल अप्रैल तक, कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने रूस के विभिन्न क्षेत्रों में 118 आतंकवादी हमलों को रोकने में कामयाबी हासिल की।
एफएसबी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सक्रिय कार्य रूसी नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य को बचाता है, उन्हें चरमपंथियों का शिकार नहीं बनने देता है।
"इस्लामिक स्टेट"*, आईजी* रूसी संघ में प्रतिबंधित एक आतंकवादी संगठन है।
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इस्लामिक स्टेट के कट्टरपंथियों ने * मास्को और नोवोसिबिर्स्क में आतंकवादी हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम देने की योजना बनाई। लेकिन कानून लागू करने वालों ने इन योजनाओं का पर्दाफाश किया और आईएस * के नेताओं में से एक की गतिविधियों को रोक दिया, जो रूस में आतंकवादी हमले की तैयारी कर रहा था। यह संदेश मॉस्को और मॉस्को क्षेत्र के एफएसबी विभाग की प्रेस सेवा से आया है। - एक प्रेस विज्ञप्ति में नोट किया गया। निदेशालय के अनुसार, उक्त विदेशी ने रूसी क्षेत्र पर एक आतंकवादी सेल का गठन किया है। इसके कार्यों में मास्को और नोवोसिबिर्स्क क्षेत्रों में आतंकवादी हमले और तोड़फोड़ करना शामिल था। अन्य बातों के अलावा, नाज़रोव भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कामचलाऊ बमों के विस्फोट की व्यवस्था करने जा रहा था, जिसमें रूसी रेलवे द्वारा चलाए जा रहे बम भी शामिल थे। इस महीने की शुरुआत में, मध्य एशिया के एक देश के एक नागरिक को सखालिन क्षेत्र में हिरासत में लिया गया था, जो चरमपंथी संगठनों में से एक के हितों में विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त था। उन्हें बारह साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी समिति के अनुसार, पिछले साल फरवरी से इस साल अप्रैल तक, कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने रूस के विभिन्न क्षेत्रों में एक सौ अट्ठारह आतंकवादी हमलों को रोकने में कामयाबी हासिल की। एफएसबी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सक्रिय कार्य रूसी नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य को बचाता है, उन्हें चरमपंथियों का शिकार नहीं बनने देता है। "इस्लामिक स्टेट"*, आईजी* रूसी संघ में प्रतिबंधित एक आतंकवादी संगठन है।
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नाबालिग बच्ची से यौन शोषण मामले में फंसे आसाराम बापू को जोधपुर पुलिस से बड़ी राहत मिली है। पुलिस के अनुसार आसाराम पर अब बालात्कार का मामला नहीं चलेगा।
जोधपुर पुलिस ने आसाराम के खिलाफ रेप की धारा 376 हटाने का फैसला किया है। अब उन पर धारा 354 के तहत केवल यौन शोषण का मामला चलेगा।
पुलिस का कहना है कि रेप की पुष्टि नहीं हुई है इसलिए धारा 376 वापस ले ली गई है। जोधपुर पुलिस अब तक उनसे इस मामले में पूछताछ नहीं कर पाई है।
इससे पहले रविवार को पुलिस ने आसाराम बापू के खिलाफ समन जारी किया था।
इसे लेकर जोधपुर पुलिस की एक टीम अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई। इसके अलावा एक टीम इंदौर भी भेजी गई है क्योंकि सूत्रों के अनुसार इस समय आसाराम के इंदौर में होने की सूचना मिल रही है।
जांच के लिए पिछले कई दिनों से जोधपुर पुलिस की एक टीम दिल्ली, शाहजहांपुर और छिंदवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं। इसके आधार पर जो साक्ष्य मिले हैं, उसी के आधार पर जोधपुर पुलिस ने समन जारी किया है।
इस समन के जारी होने के बाद आसाराम को जल्द से जल्द जोधपुर में पेश होना होगा अन्यथा उनकी जल्द गिरफ्तारी संभव है।
आसाराम बापू के गुरुकुल का मुख्यालय अहमदाबाद में होने की वजह से समन वहां भेजा गया है। उधर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित गुरुकुल की वार्डन से पूछताछ के लिए गई टीम अभी नहीं लौटी है।
लेकिन सूत्रों की मानें तो वॉडर्न से पूछताछ पूरी हो गई हैं, जिसमें भी आसाराम के खिलाफ सबूत मिले हैं।
पुलिस की अब तक की जांच में पीड़िता द्वारा बताई गई कुटिया में आसाराम बापू के होने की बात पहले ही साबित हो चुकी है।
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नाबालिग बच्ची से यौन शोषण मामले में फंसे आसाराम बापू को जोधपुर पुलिस से बड़ी राहत मिली है। पुलिस के अनुसार आसाराम पर अब बालात्कार का मामला नहीं चलेगा। जोधपुर पुलिस ने आसाराम के खिलाफ रेप की धारा तीन सौ छिहत्तर हटाने का फैसला किया है। अब उन पर धारा तीन सौ चौवन के तहत केवल यौन शोषण का मामला चलेगा। पुलिस का कहना है कि रेप की पुष्टि नहीं हुई है इसलिए धारा तीन सौ छिहत्तर वापस ले ली गई है। जोधपुर पुलिस अब तक उनसे इस मामले में पूछताछ नहीं कर पाई है। इससे पहले रविवार को पुलिस ने आसाराम बापू के खिलाफ समन जारी किया था। इसे लेकर जोधपुर पुलिस की एक टीम अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई। इसके अलावा एक टीम इंदौर भी भेजी गई है क्योंकि सूत्रों के अनुसार इस समय आसाराम के इंदौर में होने की सूचना मिल रही है। जांच के लिए पिछले कई दिनों से जोधपुर पुलिस की एक टीम दिल्ली, शाहजहांपुर और छिंदवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं। इसके आधार पर जो साक्ष्य मिले हैं, उसी के आधार पर जोधपुर पुलिस ने समन जारी किया है। इस समन के जारी होने के बाद आसाराम को जल्द से जल्द जोधपुर में पेश होना होगा अन्यथा उनकी जल्द गिरफ्तारी संभव है। आसाराम बापू के गुरुकुल का मुख्यालय अहमदाबाद में होने की वजह से समन वहां भेजा गया है। उधर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित गुरुकुल की वार्डन से पूछताछ के लिए गई टीम अभी नहीं लौटी है। लेकिन सूत्रों की मानें तो वॉडर्न से पूछताछ पूरी हो गई हैं, जिसमें भी आसाराम के खिलाफ सबूत मिले हैं। पुलिस की अब तक की जांच में पीड़िता द्वारा बताई गई कुटिया में आसाराम बापू के होने की बात पहले ही साबित हो चुकी है।
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जोगीरा सारा रा रा की कहानी की क्या खास बात आप पाते हैं ?
अरेंज मैरिज करवाने वाले शख्स को जब शादी तोड़ने का टास्क दिया जाता है और जब वह ऐसा करता है तो उसके लिए चीजें कैसे गलत होने लगती हैं. फिल्म की कहानी का सार यही है. यही फिल्म की कहानी की शुरूआती लाइनें भी थी. ग़ालिब असद भोपाली, जो इस फिल्म के लेखक हैं, मेरे बहुत करीबी दोस्तों में से एक हैं, वे इस विचार के साथ आए, फिर कहानी लिखने लगे. हमने इसे नवाज़ को पिच किया, उन्हें यह पसंद आया और फिर हमने इस पर काम शुरू किया.
यह एक कॉमेडी फिल्म है, नवाज को ज्यादातर उनके इंटेंस किरदारों के लिए जाना जाता है?
मुझे लगता है कि उनके पास एक अनोखा सेंस ऑफ ह्यूमर है. बहुत ही स्ट्रेट फेस से सेंस ऑफ ह्यूमर वाली बात कह जाते हैं. जो बहुत ही दुर्लभ है. बाबूमोशाय बंदूकबाज के दौरान मैंने यह बात महसूस की थी. मुझे लगता है कि अभिनय के उस हिस्से को अब तक एक्सप्लोर नहीं किया गया है. मुझे लगता है कि उनके भीतर कुछ ऐसी नासमझी, पागलपन और मजेदार चीजें हैं, जिसे सभी को देखना चाहिए.
यह फिल्म पहले 12 मई को रिलीज होने वाली थी, क्या वजह थी जो फिल्म की रिलीज दो हफ्ते बाद 26 मई को कर दी गयी?
12 मई को टिकट खिड़की पर तीन फ़िल्में रिलीज हुई थी. 19 मई को भी कई फ़िल्में रिलीज हो रही थी. कई फिल्मों की रिलीज के बीच में प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन टीम ने ये फैसला किया कि ये फिल्म वे 26 मई को रिलीज करेंगे. मुझे भी यह फैसला सही लगा आखिरकार यह फिल्म के भले के लिए है. एक फिल्म को बनने में कई सौ लोगों की मेहनत लगती है. सभी ये चाहते हैं कि उनकी फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें.
इन-दिनों थिएटर में फ़िल्में नहीं चल रही हैं, आप क्या वजह मानते हैं?
हर पांच साल या 10 साल में मैं सुनता हूं कि सिनेमा अब मरने वाला है. लोग थिएटर में जाकर नहीं देखेंगे. लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे देश में सिनेमा को छोड़ मनोरंजन के लिए दूसरी चीजें नहीं हैं. एक परिवार अगर एक साथ समय बिताना चाहते हैं,तो सिनेमा देखने जाते हैं क्योंकि वे बाहर जाकर खाना भी खाएंगे. घर पर बैठकर साथ में ओटीटी पर देखते हैं. वे ऐसा कभी नहीं कहेंगे. भारतीय परिवार बाहर जाना चाहता है और अपनी एकजुटता का जश्न मनाना चाहते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि ऐसा कभी नहीं होगा कि सिनेमा खत्म हो जाएगा. दर्शकों की दूरी की वजह है कि वह इंटरटेनिंग फ़िल्में देखना चाहते हैं और पिछले कुछ समय से वैसी फ़िल्में बन नहीं पा रही हैं.
बाबूमोशाय बंदूकबाज की शूटिंग के दौरान आपका अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के साथ अनबन की खबरें आम थी, इस फिल्म की मेकिंग के दौरान कितना आपने उस अनुभव को याद रखते हुए अभिनेत्री को चुना?
ऐसी कोई बात नहीं है. मैंने बाबूमोशाय बंदूकबाज के बाद मैंने दो अभिनेत्रियों के साथ काम किया है. एक जोगीरा शारा रा नेहा शर्मा के साथ और एक फिल्म कुन फाया कुन संजीदा शेख के साथ दोनों अभिनेत्रियों के साथ कोई परेशानी नहीं हुई. नेहा को हमने एक म्यूजिक वीडियो में देखा, जिसके बाद हमें लगा कि वे इस फिल्म के लिए परफेक्ट होगी. हमने उनसे फ़ोन पर बात की और इस फिल्म की शूटिंग के दौर मैंने पाया कि वह कमाल की अभिनेत्री हैं. उनके टैलेंट के साथ अब तक न्याय नहीं किया गया है.
फिल्म में मिथुन के बेटे मिमोह भी है, उनकी कास्टिंग किस तरह से हुई?
मिमोह ऑडिशन के लिए आया था. बात हुई मुझे लगा कि फिल्म में उसे एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकता है. उसका किरदार बिल्कुल अलग है, जो उसकी पर्सनालिटी से बिल्कुल मैच नहीं करता है.
बाबूमोशाय बंदूकबाज के बाद आपकी दूसरी फिल्म में इतना लंबा गैप क्यों हुआ ?
2 साल या लगभग ढाई साल कोविड में चले गए. मैंने बंदूकबाज़ के बाद 2 फिल्में कीं, तो बेशक मैं दो फिल्मों को लिख रहा था, दो फिल्मों के लिए पतैयारी कर रहा था. उनकी शूटिंग कर रहा था. मेरा मतलब है कि उसमें समय गया. मेरी फिल्मों से परे भी एक जिंदगी है. मैं अगले काम पर जाने से पहले थोड़ा समय लेना पसंद करता हूं. इन दोनों फिल्मों को बनाने में काफी समय लगा है. लेकिन हां, उम्मीद है कि अगले दो महीनों में आप दोनों को देखेंगे. 26 मई को जोगीरा सिनेमाघरों में रिलीज होगी कुन फाया कुन को जून के अंत में ओटीटी में स्ट्रीम किए जाने की प्लानिंग है.
क्या इस फिल्म को शूट करते हुए कोविड ने आपको प्रभावित किया ?
हां पेंडेमिक से हमारी फिल्म भी नहीं बच नहीं पायी है. 2020 मार्च में फिल्म की शूटिंग के लिए गए और हमने दो दिनों की शूटिंग की और पहला लॉकडाउन हो गया. मुझे लगता है कि हमें शूट वापस आने में एक साल से अधिक का समय लगा. हमें उस हिस्से को फिर से शूट करना पड़ा, जिसे हमने पहले भी शूट किया था. शूटिंग की दिक्क़तों के साथ-साथ हम कोविड से प्रभावित भी हुए. शूट से जैसे ही हम लौटे हमारी टीम से 20 लोगों को कोविड हो गया था. इसमें मैं भी शामिल था और मैं अस्पताल में भर्ती था.
आपकी अब तक की जर्नी में सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम कौन रहा है? ?
जब मैं एक साल का था , तब मेरी मां और पिता (प्रीतीश नंदी) का तलाक हो गया था और मेरी मां ने अकेले ही मुझे पाला है. वह मेरी ताकत हैं. वह मेरी प्रेरणा रही हैं और मैं जहां हूं और जो भी हूं, उसका एकमात्र कारण वहीं हैं. अच्छा या बुरा, मैं जो कुछ भी हूं, उनकी बदौलत हूं. उन्होंने अपने जीवन में मेरे लिए बहुत सारे बलिदान दिए हैं.
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जोगीरा सारा रा रा की कहानी की क्या खास बात आप पाते हैं ? अरेंज मैरिज करवाने वाले शख्स को जब शादी तोड़ने का टास्क दिया जाता है और जब वह ऐसा करता है तो उसके लिए चीजें कैसे गलत होने लगती हैं. फिल्म की कहानी का सार यही है. यही फिल्म की कहानी की शुरूआती लाइनें भी थी. ग़ालिब असद भोपाली, जो इस फिल्म के लेखक हैं, मेरे बहुत करीबी दोस्तों में से एक हैं, वे इस विचार के साथ आए, फिर कहानी लिखने लगे. हमने इसे नवाज़ को पिच किया, उन्हें यह पसंद आया और फिर हमने इस पर काम शुरू किया. यह एक कॉमेडी फिल्म है, नवाज को ज्यादातर उनके इंटेंस किरदारों के लिए जाना जाता है? मुझे लगता है कि उनके पास एक अनोखा सेंस ऑफ ह्यूमर है. बहुत ही स्ट्रेट फेस से सेंस ऑफ ह्यूमर वाली बात कह जाते हैं. जो बहुत ही दुर्लभ है. बाबूमोशाय बंदूकबाज के दौरान मैंने यह बात महसूस की थी. मुझे लगता है कि अभिनय के उस हिस्से को अब तक एक्सप्लोर नहीं किया गया है. मुझे लगता है कि उनके भीतर कुछ ऐसी नासमझी, पागलपन और मजेदार चीजें हैं, जिसे सभी को देखना चाहिए. यह फिल्म पहले बारह मई को रिलीज होने वाली थी, क्या वजह थी जो फिल्म की रिलीज दो हफ्ते बाद छब्बीस मई को कर दी गयी? बारह मई को टिकट खिड़की पर तीन फ़िल्में रिलीज हुई थी. उन्नीस मई को भी कई फ़िल्में रिलीज हो रही थी. कई फिल्मों की रिलीज के बीच में प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन टीम ने ये फैसला किया कि ये फिल्म वे छब्बीस मई को रिलीज करेंगे. मुझे भी यह फैसला सही लगा आखिरकार यह फिल्म के भले के लिए है. एक फिल्म को बनने में कई सौ लोगों की मेहनत लगती है. सभी ये चाहते हैं कि उनकी फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें. इन-दिनों थिएटर में फ़िल्में नहीं चल रही हैं, आप क्या वजह मानते हैं? हर पांच साल या दस साल में मैं सुनता हूं कि सिनेमा अब मरने वाला है. लोग थिएटर में जाकर नहीं देखेंगे. लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे देश में सिनेमा को छोड़ मनोरंजन के लिए दूसरी चीजें नहीं हैं. एक परिवार अगर एक साथ समय बिताना चाहते हैं,तो सिनेमा देखने जाते हैं क्योंकि वे बाहर जाकर खाना भी खाएंगे. घर पर बैठकर साथ में ओटीटी पर देखते हैं. वे ऐसा कभी नहीं कहेंगे. भारतीय परिवार बाहर जाना चाहता है और अपनी एकजुटता का जश्न मनाना चाहते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि ऐसा कभी नहीं होगा कि सिनेमा खत्म हो जाएगा. दर्शकों की दूरी की वजह है कि वह इंटरटेनिंग फ़िल्में देखना चाहते हैं और पिछले कुछ समय से वैसी फ़िल्में बन नहीं पा रही हैं. बाबूमोशाय बंदूकबाज की शूटिंग के दौरान आपका अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के साथ अनबन की खबरें आम थी, इस फिल्म की मेकिंग के दौरान कितना आपने उस अनुभव को याद रखते हुए अभिनेत्री को चुना? ऐसी कोई बात नहीं है. मैंने बाबूमोशाय बंदूकबाज के बाद मैंने दो अभिनेत्रियों के साथ काम किया है. एक जोगीरा शारा रा नेहा शर्मा के साथ और एक फिल्म कुन फाया कुन संजीदा शेख के साथ दोनों अभिनेत्रियों के साथ कोई परेशानी नहीं हुई. नेहा को हमने एक म्यूजिक वीडियो में देखा, जिसके बाद हमें लगा कि वे इस फिल्म के लिए परफेक्ट होगी. हमने उनसे फ़ोन पर बात की और इस फिल्म की शूटिंग के दौर मैंने पाया कि वह कमाल की अभिनेत्री हैं. उनके टैलेंट के साथ अब तक न्याय नहीं किया गया है. फिल्म में मिथुन के बेटे मिमोह भी है, उनकी कास्टिंग किस तरह से हुई? मिमोह ऑडिशन के लिए आया था. बात हुई मुझे लगा कि फिल्म में उसे एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकता है. उसका किरदार बिल्कुल अलग है, जो उसकी पर्सनालिटी से बिल्कुल मैच नहीं करता है. बाबूमोशाय बंदूकबाज के बाद आपकी दूसरी फिल्म में इतना लंबा गैप क्यों हुआ ? दो साल या लगभग ढाई साल कोविड में चले गए. मैंने बंदूकबाज़ के बाद दो फिल्में कीं, तो बेशक मैं दो फिल्मों को लिख रहा था, दो फिल्मों के लिए पतैयारी कर रहा था. उनकी शूटिंग कर रहा था. मेरा मतलब है कि उसमें समय गया. मेरी फिल्मों से परे भी एक जिंदगी है. मैं अगले काम पर जाने से पहले थोड़ा समय लेना पसंद करता हूं. इन दोनों फिल्मों को बनाने में काफी समय लगा है. लेकिन हां, उम्मीद है कि अगले दो महीनों में आप दोनों को देखेंगे. छब्बीस मई को जोगीरा सिनेमाघरों में रिलीज होगी कुन फाया कुन को जून के अंत में ओटीटी में स्ट्रीम किए जाने की प्लानिंग है. क्या इस फिल्म को शूट करते हुए कोविड ने आपको प्रभावित किया ? हां पेंडेमिक से हमारी फिल्म भी नहीं बच नहीं पायी है. दो हज़ार बीस मार्च में फिल्म की शूटिंग के लिए गए और हमने दो दिनों की शूटिंग की और पहला लॉकडाउन हो गया. मुझे लगता है कि हमें शूट वापस आने में एक साल से अधिक का समय लगा. हमें उस हिस्से को फिर से शूट करना पड़ा, जिसे हमने पहले भी शूट किया था. शूटिंग की दिक्क़तों के साथ-साथ हम कोविड से प्रभावित भी हुए. शूट से जैसे ही हम लौटे हमारी टीम से बीस लोगों को कोविड हो गया था. इसमें मैं भी शामिल था और मैं अस्पताल में भर्ती था. आपकी अब तक की जर्नी में सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम कौन रहा है? ? जब मैं एक साल का था , तब मेरी मां और पिता का तलाक हो गया था और मेरी मां ने अकेले ही मुझे पाला है. वह मेरी ताकत हैं. वह मेरी प्रेरणा रही हैं और मैं जहां हूं और जो भी हूं, उसका एकमात्र कारण वहीं हैं. अच्छा या बुरा, मैं जो कुछ भी हूं, उनकी बदौलत हूं. उन्होंने अपने जीवन में मेरे लिए बहुत सारे बलिदान दिए हैं.
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स्कोडा ने अपनी खूबसूरत SUV Kushaq के दामों में 70 हजार तक का इजाफा किया है. ये दाम ऑटोमेटिक और मैनुअल दोनों वेरिएंट में बढ़ाए गए हैं. साथ ही स्कोडा SUV Kushaq का मॉन्टे कार्लो वेरिएंट भी 9 मई को लॉन्च करेगी.
मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण कार कंपनियों ने अपने मॉडलों की कीमत में इजाफा किया है. टाटा से लेकर मारुति, महिंद्रा और अब स्कोडा (Skoda) ने भी अपनी कार के दाम बढ़ा दिए हैं. स्कोडा ने अपनी खूबसूरत SUV Kushaq के दामों में 70 हजार तक का इजाफा किया है. इसके अलावा स्कोडा अपनी SUV Kushaq का मॉन्टे कार्लो (Monte Carlo) वेरिएंट भी लॉन्च करने जा रही है. ये वेरिएंट 9 मई को लॉन्च होगा. जानिए आप अगर Kushaq खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो अब कितने और रुपए खर्च करने होंगे.
स्कोडा ने अपनी फ्लैगशिप कॉम्पैक्ट SUV Kushaq के नए दामों की लिस्ट को ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है. कंपनी ने कुछ वेरिएंट की कीमत 70 हजार रुपए तक बढ़ाई है. स्कोडा ने अपनी इस एसयूवी की लॉन्चिंग बीते साल जून में की थी. इस कार को लॉन्च हुए एक साल होने जा रहा है. इस एसयूवी का सीधा मुकाबला हुंडई की क्रेटा और किआ की सेल्टोस से होगा. कीमत बढ़ाने के साथ साथ इस कार का नया मॉन्टे कार्लो वेरिएंट लॉन्च करने जा रही है.
स्कोडा की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक Kushaq के एंट्री लेवल एक्टिव वेरिएंट, जो 1.0 लीटर TSI इंजन के साथ आता है, उसके दाम 30 हजार रुपए तक बढ़ाए गए हैं. इस एंट्री लेवल वेरिएंट का लॉन्च प्राइज 10.49 लाख था, जिसे बाद में बढ़ाकर 10.99 लाख रुपए किया गया था. सभी मैनुअल वेरिएंट्स में Kushaq 1.5 लीटर स्टाइल वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत अब 17.19 लाख रुपए है, जो 70 हजार रुपए बढ़ाए गए हैं.
स्कोडा ने Kushaq मैनुअल के साथ साथ ऑटोमेटिक वेरिएंट्स के भी दाम बढ़ाए हैं. ऑटोमेटिक 1.0 लीटर एम्बिशन वेरिएंट का एक्सशोरूम प्राइज 14.59 लाख से शुरू हो रहा है. इस वेरिएंट की कीमत में कंपनी ने 25 हजार रुपए का इजाफा किया है. Kushaq के टॉप रेंज मॉडल 1.5 लीटर स्टाइल (DCT गेयरबॉक्स) और 6 एयरबैग के साथ आने वाले वेरिएंट की कीमत में 60 हजार रुपए तक इजाफा किया गया है. अब इस वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 18.79 लाख रुपए है.
स्कोडा द्वारा बढ़ाए गए दामों का असर Kushaq के कुछ वेरिएंट्स में नहीं देखने को मिला है. जैसे एम्बिशन क्लासिक मैनुअल और ऑटोमेटिक के दाम नहीं बढ़े हैं. इस वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 12.69 लाख रुपए है, जो बेस वेरिएंट एक्टिव और एम्बिशन के बीच में आता है. एम्बिशन क्लासिक के ऑटोमेटिक वर्जन की कीमत 14.09 लाख रुपए है.
स्कोडा एक साल पहले लॉन्च हुई Kushaq का अब नया मॉन्टे कार्लो वर्जन लॉन्च करने जा रही है. कपनी अगले हफ्ते 9 मई को ये वर्जन लॉन्च करेगी. ये इस कार का सबसे टॉप वर्जन होगा. कंपनी इसमें कुछ नए अपडेट्स भी लेकर आ रही है. इसके बाहरी और अंदर के डिजाइन में कुछ बदलाव किए गए हैं. इस वर्जन को अलग थीम के साथ पेश किया जाएगा.
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स्कोडा ने अपनी खूबसूरत SUV Kushaq के दामों में सत्तर हजार तक का इजाफा किया है. ये दाम ऑटोमेटिक और मैनुअल दोनों वेरिएंट में बढ़ाए गए हैं. साथ ही स्कोडा SUV Kushaq का मॉन्टे कार्लो वेरिएंट भी नौ मई को लॉन्च करेगी. मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण कार कंपनियों ने अपने मॉडलों की कीमत में इजाफा किया है. टाटा से लेकर मारुति, महिंद्रा और अब स्कोडा ने भी अपनी कार के दाम बढ़ा दिए हैं. स्कोडा ने अपनी खूबसूरत SUV Kushaq के दामों में सत्तर हजार तक का इजाफा किया है. इसके अलावा स्कोडा अपनी SUV Kushaq का मॉन्टे कार्लो वेरिएंट भी लॉन्च करने जा रही है. ये वेरिएंट नौ मई को लॉन्च होगा. जानिए आप अगर Kushaq खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो अब कितने और रुपए खर्च करने होंगे. स्कोडा ने अपनी फ्लैगशिप कॉम्पैक्ट SUV Kushaq के नए दामों की लिस्ट को ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है. कंपनी ने कुछ वेरिएंट की कीमत सत्तर हजार रुपए तक बढ़ाई है. स्कोडा ने अपनी इस एसयूवी की लॉन्चिंग बीते साल जून में की थी. इस कार को लॉन्च हुए एक साल होने जा रहा है. इस एसयूवी का सीधा मुकाबला हुंडई की क्रेटा और किआ की सेल्टोस से होगा. कीमत बढ़ाने के साथ साथ इस कार का नया मॉन्टे कार्लो वेरिएंट लॉन्च करने जा रही है. स्कोडा की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक Kushaq के एंट्री लेवल एक्टिव वेरिएंट, जो एक दशमलव शून्य लीटरटर TSI इंजन के साथ आता है, उसके दाम तीस हजार रुपए तक बढ़ाए गए हैं. इस एंट्री लेवल वेरिएंट का लॉन्च प्राइज दस.उनचास लाख था, जिसे बाद में बढ़ाकर दस.निन्यानवे लाख रुपए किया गया था. सभी मैनुअल वेरिएंट्स में Kushaq एक दशमलव पाँच लीटरटर स्टाइल वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत अब सत्रह.उन्नीस लाख रुपए है, जो सत्तर हजार रुपए बढ़ाए गए हैं. स्कोडा ने Kushaq मैनुअल के साथ साथ ऑटोमेटिक वेरिएंट्स के भी दाम बढ़ाए हैं. ऑटोमेटिक एक दशमलव शून्य लीटरटर एम्बिशन वेरिएंट का एक्सशोरूम प्राइज चौदह.उनसठ लाख से शुरू हो रहा है. इस वेरिएंट की कीमत में कंपनी ने पच्चीस हजार रुपए का इजाफा किया है. Kushaq के टॉप रेंज मॉडल एक दशमलव पाँच लीटरटर स्टाइल और छः एयरबैग के साथ आने वाले वेरिएंट की कीमत में साठ हजार रुपए तक इजाफा किया गया है. अब इस वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत अट्ठारह.उन्यासी लाख रुपए है. स्कोडा द्वारा बढ़ाए गए दामों का असर Kushaq के कुछ वेरिएंट्स में नहीं देखने को मिला है. जैसे एम्बिशन क्लासिक मैनुअल और ऑटोमेटिक के दाम नहीं बढ़े हैं. इस वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत बारह.उनहत्तर लाख रुपए है, जो बेस वेरिएंट एक्टिव और एम्बिशन के बीच में आता है. एम्बिशन क्लासिक के ऑटोमेटिक वर्जन की कीमत चौदह.नौ लाख रुपए है. स्कोडा एक साल पहले लॉन्च हुई Kushaq का अब नया मॉन्टे कार्लो वर्जन लॉन्च करने जा रही है. कपनी अगले हफ्ते नौ मई को ये वर्जन लॉन्च करेगी. ये इस कार का सबसे टॉप वर्जन होगा. कंपनी इसमें कुछ नए अपडेट्स भी लेकर आ रही है. इसके बाहरी और अंदर के डिजाइन में कुछ बदलाव किए गए हैं. इस वर्जन को अलग थीम के साथ पेश किया जाएगा.
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Optical Illusion: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरें लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। वहीं ऑप्टिकल इल्यूजन वाली तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों को देखने के बाद आप कन्फ्यूज हो जाएंगे। ऑप्टिकल इल्यूजन फोटोज का मतलब होता है आखों को धोखा देने वाली तस्वीरें। ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरों को देखने के बाद अधिकतर लोग धोखा खा जाते हैं। इन वायरल तस्वीरों में कई चीजें होती हैं, लेकिन इनको आसानी नहीं देखा जा सकता है। इसको लेकर मिले टॉस्क को भी कम लोग ही पूरा कर पाते हैं।
अब एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में एक में ही कई सारी महिलाओं की पिक्चर बनी हुई है। जिसमें एक नहीं सात चेहरे छिपे हुए हैं। छिपे हुए चेहरों को जो भी इंसान अभी तक ढूंढने गया उसका दिमाग घूम गया। लेकिन क्या आप छिपे हुए चेहरों को खोज सकते हैं जिसके लिए आपको 15 सेकंड का समय मिलेगा।
ऐसे कई लोग हैं जो कितनी महनत के बाद भी इसको सॉल्व नहीं कर पाए हैं। क्या आप भी छिपे हुए चेहरों को नहीं खोज पा रहे। तो घबराइए नहीं इसे सोल्व करने में आपकी मदद करते हैं। सबसे पहले पूरी तस्वीर को आप गौर से देख लीजिए। सामने ही आपको एक के बाद एक 6 चेहरे दिख जाएंगे। तस्वीर के दाईं तरफ खुले बालों में नजर दौड़ाएंगे तो वहां आपको एक और चेहरा नजर आ जाएगा।
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Optical Illusion: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरें लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। वहीं ऑप्टिकल इल्यूजन वाली तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों को देखने के बाद आप कन्फ्यूज हो जाएंगे। ऑप्टिकल इल्यूजन फोटोज का मतलब होता है आखों को धोखा देने वाली तस्वीरें। ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरों को देखने के बाद अधिकतर लोग धोखा खा जाते हैं। इन वायरल तस्वीरों में कई चीजें होती हैं, लेकिन इनको आसानी नहीं देखा जा सकता है। इसको लेकर मिले टॉस्क को भी कम लोग ही पूरा कर पाते हैं। अब एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में एक में ही कई सारी महिलाओं की पिक्चर बनी हुई है। जिसमें एक नहीं सात चेहरे छिपे हुए हैं। छिपे हुए चेहरों को जो भी इंसान अभी तक ढूंढने गया उसका दिमाग घूम गया। लेकिन क्या आप छिपे हुए चेहरों को खोज सकते हैं जिसके लिए आपको पंद्रह सेकंड का समय मिलेगा। ऐसे कई लोग हैं जो कितनी महनत के बाद भी इसको सॉल्व नहीं कर पाए हैं। क्या आप भी छिपे हुए चेहरों को नहीं खोज पा रहे। तो घबराइए नहीं इसे सोल्व करने में आपकी मदद करते हैं। सबसे पहले पूरी तस्वीर को आप गौर से देख लीजिए। सामने ही आपको एक के बाद एक छः चेहरे दिख जाएंगे। तस्वीर के दाईं तरफ खुले बालों में नजर दौड़ाएंगे तो वहां आपको एक और चेहरा नजर आ जाएगा।
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गोरखपुर : जुझारु पत्रकार एवं रेलकर्मी केडी पाण्डेय का 28 सितम्बर को वाराणसी में कैंसर से निधन हो गया. श्री पाण्डेय अपने इलाज के लिए सपरिवार कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट वाराणसी गए थे. 48 वर्षीय श्री पाण्डेय अपने पीछे पत्नी दो पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वे सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां व नूतन कहानियों में पिछले तीस वर्षों से लगातार शिवम-शनि के नाम से लिखते रहे.
दुखद यह कि गोरखपुर प्रेस क्लब जो तथाकथित पत्रकारों के हितों का संरक्षण होने का दावा करता है, उसने भी कोई शोक सभा तक आयोजित नहीं की और न तो प्रेस क्लब के अध्यक्ष व महामंत्री ने इस विषय में कोई जानकारी लेने का प्रयास किया. अपने जुझारू तेवर के कारण ही श्री पाण्डेय गोरखपुर के माफिया व ठेकेदार पत्रकारों के खिलाफ कई बार कलम चलाई थी. इसका परिणाम यह रहा कि गोरखपुर के माफिया पत्रकारों के भय से कोई भी पत्रकार श्री पाण्डेय के दाह-संस्कार में नहीं गया. पूर्वांचल का सबसे लोकप्रिय अखबार दैनिक जागरण ने तो श्री पाण्डेय के निधन तक की खबर नहीं छापी. इसका कारण श्री पाण्डेय ने अभी एक वर्ष पूर्व ही 'गोरखपुर के पत्रकारों में कहां है एक' शीर्षक से सच्ची कहानियां में चार पेज की एक स्टोरी लिखी थी.
उस स्टोरी में दैनिक जागरण के गोरखपुर के संपादक एवं प्रबंधक शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी के खिलाफ उन्होंने बताया था कि मात्र कुछ ही वर्षों में उन्होंने कैस करोड़ों रुपये की सम्पत्ति इकट्ठा कर ली. इस स्टोरी से जागरण ग्रुप बुरी तरह क्षुब्ध चल रहा था. यही नहीं इस स्टोरी में उन्होंने राष्ट्रीय सहारा, गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के खिलाफ भी कलम चलाई थी, जिससे गोरखपुर के कई पत्रकारों ने श्री पाण्डेय को जान से मारने की धमकी भी दी थी. बावजूद इसके श्री पाण्डेय ने कहा था कि वह शीघ्र ही दूसरी किस्त लिखने वाले हैं. इसके लिए कई पत्रकारों के बिजनेस व व्यवसाय के फोटो आदि इकट्ठा किया था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है.
गोरखपुर में रेलवे के खिलाफ कोई भी अखबार आज निगेटिव खबर नहीं प्रकाशित करता है, लेकिन श्री पाण्डेय जब तक रेलवे की सेवा में नहीं रहे रेलवे के खिलाफ लिखते रहे. श्री पाण्डेय को अपने पिता के मौत के बाद रेलवे में नौकरी मिल गई थी, लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा. भारतीय रेलवे जब देश भर में मात्र सात जोनों में विभक्त था, उस समय पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक, मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी समेत रेलवे के पांच वरिष्ठतम अधिकारियों के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराया था. इससे पूरे रेलवे में हड़कम्प मच गया था. लगभग तीस वर्ष को होने को हैं, उसके बाद कोई दूसरा व्यक्ति पूर्वांचल में नहीं पैदा हुआ, जो रेलवे के इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करा सका हो. श्री पाण्डेय के निधन से गोरखपुर के कई माफिया और व्यवसायिक पत्रकारों में दुख के बजाय हर्ष है, क्योंकि उन्हें भय था कि केडी फिर कुछ लिखेगा.
गोरखपुर के एक पत्रकार का दावा है कि जब वह प्रेस क्लब में केडी पाण्डेय के निधन की खबर देने पहुंचे तो वहां कई पत्रकार मतदाता सूची ठीक कराने में जुटे थे. उन्होंने पाण्डेय के निधन का तो संज्ञान ही नहीं लिया. हद तो तब हो गई जब केडी पाण्डेय के सबसे नजदीकी रहे वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही, दीप्त भानु डे, प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल, अशोक अज्ञात और रत्नाकर सिंह जैसे लोग हाल चाल लेने नहीं गए.
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गोरखपुर : जुझारु पत्रकार एवं रेलकर्मी केडी पाण्डेय का अट्ठाईस सितम्बर को वाराणसी में कैंसर से निधन हो गया. श्री पाण्डेय अपने इलाज के लिए सपरिवार कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट वाराणसी गए थे. अड़तालीस वर्षीय श्री पाण्डेय अपने पीछे पत्नी दो पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वे सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां व नूतन कहानियों में पिछले तीस वर्षों से लगातार शिवम-शनि के नाम से लिखते रहे. दुखद यह कि गोरखपुर प्रेस क्लब जो तथाकथित पत्रकारों के हितों का संरक्षण होने का दावा करता है, उसने भी कोई शोक सभा तक आयोजित नहीं की और न तो प्रेस क्लब के अध्यक्ष व महामंत्री ने इस विषय में कोई जानकारी लेने का प्रयास किया. अपने जुझारू तेवर के कारण ही श्री पाण्डेय गोरखपुर के माफिया व ठेकेदार पत्रकारों के खिलाफ कई बार कलम चलाई थी. इसका परिणाम यह रहा कि गोरखपुर के माफिया पत्रकारों के भय से कोई भी पत्रकार श्री पाण्डेय के दाह-संस्कार में नहीं गया. पूर्वांचल का सबसे लोकप्रिय अखबार दैनिक जागरण ने तो श्री पाण्डेय के निधन तक की खबर नहीं छापी. इसका कारण श्री पाण्डेय ने अभी एक वर्ष पूर्व ही 'गोरखपुर के पत्रकारों में कहां है एक' शीर्षक से सच्ची कहानियां में चार पेज की एक स्टोरी लिखी थी. उस स्टोरी में दैनिक जागरण के गोरखपुर के संपादक एवं प्रबंधक शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी के खिलाफ उन्होंने बताया था कि मात्र कुछ ही वर्षों में उन्होंने कैस करोड़ों रुपये की सम्पत्ति इकट्ठा कर ली. इस स्टोरी से जागरण ग्रुप बुरी तरह क्षुब्ध चल रहा था. यही नहीं इस स्टोरी में उन्होंने राष्ट्रीय सहारा, गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के खिलाफ भी कलम चलाई थी, जिससे गोरखपुर के कई पत्रकारों ने श्री पाण्डेय को जान से मारने की धमकी भी दी थी. बावजूद इसके श्री पाण्डेय ने कहा था कि वह शीघ्र ही दूसरी किस्त लिखने वाले हैं. इसके लिए कई पत्रकारों के बिजनेस व व्यवसाय के फोटो आदि इकट्ठा किया था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है. गोरखपुर में रेलवे के खिलाफ कोई भी अखबार आज निगेटिव खबर नहीं प्रकाशित करता है, लेकिन श्री पाण्डेय जब तक रेलवे की सेवा में नहीं रहे रेलवे के खिलाफ लिखते रहे. श्री पाण्डेय को अपने पिता के मौत के बाद रेलवे में नौकरी मिल गई थी, लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा. भारतीय रेलवे जब देश भर में मात्र सात जोनों में विभक्त था, उस समय पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक, मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी समेत रेलवे के पांच वरिष्ठतम अधिकारियों के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराया था. इससे पूरे रेलवे में हड़कम्प मच गया था. लगभग तीस वर्ष को होने को हैं, उसके बाद कोई दूसरा व्यक्ति पूर्वांचल में नहीं पैदा हुआ, जो रेलवे के इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करा सका हो. श्री पाण्डेय के निधन से गोरखपुर के कई माफिया और व्यवसायिक पत्रकारों में दुख के बजाय हर्ष है, क्योंकि उन्हें भय था कि केडी फिर कुछ लिखेगा. गोरखपुर के एक पत्रकार का दावा है कि जब वह प्रेस क्लब में केडी पाण्डेय के निधन की खबर देने पहुंचे तो वहां कई पत्रकार मतदाता सूची ठीक कराने में जुटे थे. उन्होंने पाण्डेय के निधन का तो संज्ञान ही नहीं लिया. हद तो तब हो गई जब केडी पाण्डेय के सबसे नजदीकी रहे वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही, दीप्त भानु डे, प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल, अशोक अज्ञात और रत्नाकर सिंह जैसे लोग हाल चाल लेने नहीं गए.
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लखनऊः महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 26 अगस्त गुरुवार को राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे। उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त तक वह अलग-अलग कार्यक्रम का हिस्सा होंगे, जिसमें गोरखपुर, अयोध्या और लखनऊ के कार्यक्रम शामिल हैं।
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, 26 अगस्त को वह लखनऊ पहुंचेंगे। इसी दिन बाबा भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगे, 27 अगस्त को लखनऊ के सैनिक स्कूल की हीरक जयंती है। इस दिन कार्यक्रम में पहुंचकर राष्ट्रपति द्वारा पोस्टल स्टांप का विमोचन भी किया जाएगा। इसके अलावा सैनिक स्कूल में 1000 की क्षमता वाला आधुनिक प्रेक्षागृह बनाया गया है, इसका लोकार्पण कि राष्ट्रपति के द्वारा किया जाएगा। बालिकाओं के लिए एक छात्रावास बनाया जाना है, जिसकी आधारशिला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रखेंगे।
28 अगस्त को उनका गोरखपुर जाने का कार्यक्रम है, जहां आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास और गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय में अस्पताल भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के द्वारा किया जाएगा। 29 अगस्त को वह प्रेसीडेंशियल ट्रेन से अयोध्या जाएंगे, जहां रामलला के दर्शन करने की तैयारी है। इस पूरे आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं।
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लखनऊः महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद छब्बीस अगस्त गुरुवार को राजधानी लखनऊ पहुंचेंगे। उत्तर प्रदेश में उनतीस अगस्त तक वह अलग-अलग कार्यक्रम का हिस्सा होंगे, जिसमें गोरखपुर, अयोध्या और लखनऊ के कार्यक्रम शामिल हैं। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, छब्बीस अगस्त को वह लखनऊ पहुंचेंगे। इसी दिन बाबा भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगे, सत्ताईस अगस्त को लखनऊ के सैनिक स्कूल की हीरक जयंती है। इस दिन कार्यक्रम में पहुंचकर राष्ट्रपति द्वारा पोस्टल स्टांप का विमोचन भी किया जाएगा। इसके अलावा सैनिक स्कूल में एक हज़ार की क्षमता वाला आधुनिक प्रेक्षागृह बनाया गया है, इसका लोकार्पण कि राष्ट्रपति के द्वारा किया जाएगा। बालिकाओं के लिए एक छात्रावास बनाया जाना है, जिसकी आधारशिला राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रखेंगे। अट्ठाईस अगस्त को उनका गोरखपुर जाने का कार्यक्रम है, जहां आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास और गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय में अस्पताल भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के द्वारा किया जाएगा। उनतीस अगस्त को वह प्रेसीडेंशियल ट्रेन से अयोध्या जाएंगे, जहां रामलला के दर्शन करने की तैयारी है। इस पूरे आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं।
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चीन के बढ़ते कर्ज पर पाकिस्तान में चिंता बढ़ती जा रही है। चीन के द्वारा बनाए जा रहे सीपेक के कारण पाकिस्तान चीन के भारी कर्जे में दबता जा रहा है। इस कर्जे को चुकाने को लेकर वहां अक्सर चिंता जाहिर की जाती रहती है। ऐसी ही एक चर्चा में चीन पर बात करते हुए कहा कि श्रीलंका ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी बंदरगाह 99 साल के लिए लीज पर दे दिया है। इस पर पत्रकार ने कहा कि हम तो बहुत सा काम कर चुके हैं। लोग रह गए है पांच रुपए पर हमें गिरवी रख दें, मैंने तो फिर भी कीमत ज्यादा रख दी हमारे हुक्मरान तो हमारी इतनी कीमत भी नहीं रखते। आपको सबकुछ अंत में गिरवी रखना पड़ेगा। श्रीलंकी भी हमारी तरह का एक मुल्क है। काफी समय आतंकवाद से पीड़ित रहा अब उनकी ये स्थिति आ गई है। जो कर्जा हम सीपेक के कारण ले रहे हैं उसका जो रिटर्न होगा वो उतना नहीं होगा। दूसरे विशेषज्ञ ने कहा कि हमारा क्वादर पोर्ट तो पहले चीन के पास हैं। अतं में जब में हम पैसे नहीं चुका पाएंगे तो वो टेकओवर करेगा।
तो वहीं पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री पद से बेदखल किए गए नवाज शरीफ द्वारा रिक्त की गयी पंजाब प्रांत की लाहौर संसदीय सीट पर 17 सितंबर को चुनाव कराया जाएगा। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी ने शरीफ के भाई और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को लाहौर की नेशनल एसेंबली (एनए)-120 सीट से उम्मीदवार बनाया है। गत 28जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने शरीफ को प्रधानमंत्री पद से बेदखल कर दिया था जिसके बाद यह सीट रिक्त हो गयी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते 67 साल के शरीफ को भ्रष्ट आचरण के कारण अयोग्य करार देते हुए उनके तथा उनके बच्चों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दायर करने का आदेश दिया था। पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) के अनुसार उम्मीदवार 10 से 12 अगस्त के बीच नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। उनके आवेदनों की जांच 15 से 17 अगस्त के बीच की जाएगी।
ईसीपी ने कहा कि एनए-120 सीट पर 17 सितंबर को चुनाव होगा।
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चीन के बढ़ते कर्ज पर पाकिस्तान में चिंता बढ़ती जा रही है। चीन के द्वारा बनाए जा रहे सीपेक के कारण पाकिस्तान चीन के भारी कर्जे में दबता जा रहा है। इस कर्जे को चुकाने को लेकर वहां अक्सर चिंता जाहिर की जाती रहती है। ऐसी ही एक चर्चा में चीन पर बात करते हुए कहा कि श्रीलंका ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी बंदरगाह निन्यानवे साल के लिए लीज पर दे दिया है। इस पर पत्रकार ने कहा कि हम तो बहुत सा काम कर चुके हैं। लोग रह गए है पांच रुपए पर हमें गिरवी रख दें, मैंने तो फिर भी कीमत ज्यादा रख दी हमारे हुक्मरान तो हमारी इतनी कीमत भी नहीं रखते। आपको सबकुछ अंत में गिरवी रखना पड़ेगा। श्रीलंकी भी हमारी तरह का एक मुल्क है। काफी समय आतंकवाद से पीड़ित रहा अब उनकी ये स्थिति आ गई है। जो कर्जा हम सीपेक के कारण ले रहे हैं उसका जो रिटर्न होगा वो उतना नहीं होगा। दूसरे विशेषज्ञ ने कहा कि हमारा क्वादर पोर्ट तो पहले चीन के पास हैं। अतं में जब में हम पैसे नहीं चुका पाएंगे तो वो टेकओवर करेगा। तो वहीं पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री पद से बेदखल किए गए नवाज शरीफ द्वारा रिक्त की गयी पंजाब प्रांत की लाहौर संसदीय सीट पर सत्रह सितंबर को चुनाव कराया जाएगा। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी ने शरीफ के भाई और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को लाहौर की नेशनल एसेंबली -एक सौ बीस सीट से उम्मीदवार बनाया है। गत अट्ठाईसजुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने शरीफ को प्रधानमंत्री पद से बेदखल कर दिया था जिसके बाद यह सीट रिक्त हो गयी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते सरसठ साल के शरीफ को भ्रष्ट आचरण के कारण अयोग्य करार देते हुए उनके तथा उनके बच्चों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दायर करने का आदेश दिया था। पाकिस्तान चुनाव आयोग के अनुसार उम्मीदवार दस से बारह अगस्त के बीच नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। उनके आवेदनों की जांच पंद्रह से सत्रह अगस्त के बीच की जाएगी। ईसीपी ने कहा कि एनए-एक सौ बीस सीट पर सत्रह सितंबर को चुनाव होगा।
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Toll plaza rules details (Photo Credit: सांकेतिक चित्र)
नई दिल्लीः
वाहन चालकों को ये खबर पढ़कर बेहद खुशी मिलेगी. दरअसल,अब टोल प्लाजा पर अगर 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार करना पड़ा तो वाहन चालक को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा. वाहनों चालकों के लिए टोल को और सुविधाजनक बनाते हुए NHAI ने घोषणा की है. इसके मुताबिक, टोल प्लाजा पर अगर लाइन 100 मीटर से ज्यादा लंबी है तो वाहन मालिकों को टोल टैक्स नहीं देना होगा. नए नियमों को लागू करने के लिए टोल कलेक्शन पॉइंट्स पर भी पीली लाइनें खींची जाएंगी, टोल ठेकेदार को निर्देश दिया जाएगा कि अगर ट्रैफिक पीली लाइन से आगे जाता है तो वाहन चालकों के लिए टोल माफ कर दिया जाए. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कहना है कि फास्टैग अनिवार्य होने के बाद ज्यादातर टोल प्लाजा में वाहनों को इंतजार नहीं करना पड़ता है जिसके चलते 100 मीटर की लंबी लाइनें नहीं लगती.
NHAI का कहना है कि फास्टैग (FASTag) को अनिवार्य किए जाने के बाद से अधिकतर टोल प्लाजा के ऊपर वेटिंग टाइम नहीं के बराबर है. नई गाइडलाइन में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लाइन 100 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. अगर गाड़ियों की लाइन 100 मीटर से अधिक होती है तो सभी गाड़ियों को बगैर टोल का भुगतान किए जाने की अनुमति होगी. हालांकि यह टोल पर फ्री में जाने का मौका तभी मिलेगा जब टोल प्लाजा से वाहन की कतार वापस 100 मीटर के भीतर नहीं आ जाती है. एनएचएआई का कहना है कि सभी टोल प्लाजा पर 100 मीटर की दूरी की जानकारी के लिए पीले रंग की लकीर बनाई जाएगी.
NHAI के मुताबिक मौजूदा समय में फास्टैग (FASTag) के जरिए टोल प्लाजा पर करीब 96 फीसदी भुगतान हो रहा है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए टोल कलेक्शन को देखते हुए अगले 10 साल में टोल प्लाजा के निर्माण पर जोर दिया जाएगा. एनएचएआई का कहना है कि फास्टैग का इस्तेमाल बढ़ने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी आसानी से हो रहा है. दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक मोड से टोल कलेक्शन की वजह से टोल संचालक और वाहन चालक एक दूसरे के संपर्क में नहीं आते हैं.
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Toll plaza rules details नई दिल्लीः वाहन चालकों को ये खबर पढ़कर बेहद खुशी मिलेगी. दरअसल,अब टोल प्लाजा पर अगर दस सेकंड से ज्यादा इंतजार करना पड़ा तो वाहन चालक को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा. वाहनों चालकों के लिए टोल को और सुविधाजनक बनाते हुए NHAI ने घोषणा की है. इसके मुताबिक, टोल प्लाजा पर अगर लाइन एक सौ मीटर से ज्यादा लंबी है तो वाहन मालिकों को टोल टैक्स नहीं देना होगा. नए नियमों को लागू करने के लिए टोल कलेक्शन पॉइंट्स पर भी पीली लाइनें खींची जाएंगी, टोल ठेकेदार को निर्देश दिया जाएगा कि अगर ट्रैफिक पीली लाइन से आगे जाता है तो वाहन चालकों के लिए टोल माफ कर दिया जाए. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कहना है कि फास्टैग अनिवार्य होने के बाद ज्यादातर टोल प्लाजा में वाहनों को इंतजार नहीं करना पड़ता है जिसके चलते एक सौ मीटर की लंबी लाइनें नहीं लगती. NHAI का कहना है कि फास्टैग को अनिवार्य किए जाने के बाद से अधिकतर टोल प्लाजा के ऊपर वेटिंग टाइम नहीं के बराबर है. नई गाइडलाइन में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लाइन एक सौ मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. अगर गाड़ियों की लाइन एक सौ मीटर से अधिक होती है तो सभी गाड़ियों को बगैर टोल का भुगतान किए जाने की अनुमति होगी. हालांकि यह टोल पर फ्री में जाने का मौका तभी मिलेगा जब टोल प्लाजा से वाहन की कतार वापस एक सौ मीटर के भीतर नहीं आ जाती है. एनएचएआई का कहना है कि सभी टोल प्लाजा पर एक सौ मीटर की दूरी की जानकारी के लिए पीले रंग की लकीर बनाई जाएगी. NHAI के मुताबिक मौजूदा समय में फास्टैग के जरिए टोल प्लाजा पर करीब छियानवे फीसदी भुगतान हो रहा है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए टोल कलेक्शन को देखते हुए अगले दस साल में टोल प्लाजा के निर्माण पर जोर दिया जाएगा. एनएचएआई का कहना है कि फास्टैग का इस्तेमाल बढ़ने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी आसानी से हो रहा है. दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक मोड से टोल कलेक्शन की वजह से टोल संचालक और वाहन चालक एक दूसरे के संपर्क में नहीं आते हैं.
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Kashi Tamil Sangamam: उन्होंने आह्वान किया कि काशी तमिल संगमम के लिए वाराणसी में उत्सव सा माहौल तैयार किया जाना चाहिए।
Kashi Tamil Sangamam: काशी तमिल संगमम की तैयारियों को लेकर शिक्षा मंत्री, भारत सरकार, श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने आह्वान किया कि काशी तमिल संगमम के लिए वाराणसी में उत्सव सा माहौल तैयार किया जाना चाहिए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में तमिलनाडु की संस्कृति का अद्भुत नजारा काशी में दिखाई देगा।
बैठक में कुलपति प्रो सुधीर कुमार जैन भी उपस्थित रहे। काशी तमिल संगमम के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान knowledge partner (ज्ञान साझीदार) हैं। समीक्षा बैठक में भारत सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार तथा कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े विभागों के अधिकारी उपस्थित रहें।
इससे पहले शिक्षा मंत्री ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह तथा स्वतंत्रता भवन का दौरा किया। काशी-तमिल संगमम ज्ञान के विभिन्न पहलुओं-साहित्य, प्राचीन ग्रंथों, दर्शन, आध्यात्मिकता, संगीत, नृत्य, नाटक, योग, आयुर्वेद, हथकरघा, हस्तशिल्प के साथ-साथ आधुनिक नवाचार, व्यापारिक आदान-प्रदान एवं अगली पीढ़ी की अन्य प्रौद्योगिकी आदि जैसे विषयों पर केंद्रित होगा।
इन विषयों पर विचार गोष्ठी, चर्चा, व्याख्यान, कार्यशाला आदि आयोजित किए जाएंगे। जिसके लिए संबंधित विषयों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। यह आयोजन छात्रों, विद्वानों, शिक्षाविदों, पेशेवरों आदि के लिए भारतीय ज्ञानप्रणाली, शिक्षा एवं प्रशिक्षण से संबंधित कार्यप्रणालियों, कला एवं संस्कृति, भाषा, साहित्य आदि से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में सीखने का एक अनूठा अनुभव होगा।
इस आयोजन में आईआईटी बीएचयू और आईआईटी मद्रास के अलावा केंद्र और राज्य सरकार के कई विभाग शामिल होंगे। यह आयोजन नई शिक्षा नीति (एनईपी) के लिए लोक शिक्षा, लोक अनुभव, भाषा, संस्कृति के क्षेत्र में आए सुझावों के नजरिए से एक महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने काशी-तमिल संगमम के आयोजनों से जुड़े स्थानों का निरीक्षण किया।
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Kashi Tamil Sangamam: उन्होंने आह्वान किया कि काशी तमिल संगमम के लिए वाराणसी में उत्सव सा माहौल तैयार किया जाना चाहिए। Kashi Tamil Sangamam: काशी तमिल संगमम की तैयारियों को लेकर शिक्षा मंत्री, भारत सरकार, श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने आह्वान किया कि काशी तमिल संगमम के लिए वाराणसी में उत्सव सा माहौल तैयार किया जाना चाहिए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में तमिलनाडु की संस्कृति का अद्भुत नजारा काशी में दिखाई देगा। बैठक में कुलपति प्रो सुधीर कुमार जैन भी उपस्थित रहे। काशी तमिल संगमम के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान knowledge partner हैं। समीक्षा बैठक में भारत सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार तथा कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े विभागों के अधिकारी उपस्थित रहें। इससे पहले शिक्षा मंत्री ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह तथा स्वतंत्रता भवन का दौरा किया। काशी-तमिल संगमम ज्ञान के विभिन्न पहलुओं-साहित्य, प्राचीन ग्रंथों, दर्शन, आध्यात्मिकता, संगीत, नृत्य, नाटक, योग, आयुर्वेद, हथकरघा, हस्तशिल्प के साथ-साथ आधुनिक नवाचार, व्यापारिक आदान-प्रदान एवं अगली पीढ़ी की अन्य प्रौद्योगिकी आदि जैसे विषयों पर केंद्रित होगा। इन विषयों पर विचार गोष्ठी, चर्चा, व्याख्यान, कार्यशाला आदि आयोजित किए जाएंगे। जिसके लिए संबंधित विषयों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। यह आयोजन छात्रों, विद्वानों, शिक्षाविदों, पेशेवरों आदि के लिए भारतीय ज्ञानप्रणाली, शिक्षा एवं प्रशिक्षण से संबंधित कार्यप्रणालियों, कला एवं संस्कृति, भाषा, साहित्य आदि से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में सीखने का एक अनूठा अनुभव होगा। इस आयोजन में आईआईटी बीएचयू और आईआईटी मद्रास के अलावा केंद्र और राज्य सरकार के कई विभाग शामिल होंगे। यह आयोजन नई शिक्षा नीति के लिए लोक शिक्षा, लोक अनुभव, भाषा, संस्कृति के क्षेत्र में आए सुझावों के नजरिए से एक महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने काशी-तमिल संगमम के आयोजनों से जुड़े स्थानों का निरीक्षण किया।
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११ :शान्ति क्यों नहीं ?
आज के जीवन में, फिर भले ही वह पारिवारिक, सामाजिक, प्राध्यात्मिक हो अथवा राष्ट्रीय हो, कुछ ऐसी परिस्थितियाँ एवं उलझनें सामने आती रहती हैं कि मानव-आत्मा को शान्ति की अनुभूति बहुत कम हो पाती है । जिन्दगी के ये महत्त्वपूर्ण क्षरण यथोचित आनन्द, उल्लास एवं हर्ष में नहीं बीत पाते ।
आज ऐसी क्या बात है कि जिधर देखो उधर ही प्रशान्ति की प्राग जल रही है । जब कि परिवार तो पहले भी थे, और हो सकता हैउनमें भी कभी-कभी मन-मुटाव होता रहा हो । फिर भी वे सब एक साथ चलते रहे, इधर-उधर भागे नहीं । संघ भी हजारों-हजार वर्षों से चला आ रहा है । भगवान् महावीर के युग में तथा उनके बाद के प्राचार्यों के युग में भी संघ रहा है । और सम्भव है, उस युग में भी कुछ मन परस्पर नहीं मिले हों, फिर भी वह अभ्युदय के मार्ग पर गति करता रहा । परन्तु आज क्या बात है, जो शान्त वातावरण तथा तो आनन्द एवं उल्लास के और हमारे पूर्वजों को प्राप्त था, वह आज हमारे लिए अति दुर्लभ हो रहा है ?
अपने परिवार तथा समाज के साथ पचास-साठ वर्ष की लम्बी
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ग्यारह :शान्ति क्यों नहीं ? आज के जीवन में, फिर भले ही वह पारिवारिक, सामाजिक, प्राध्यात्मिक हो अथवा राष्ट्रीय हो, कुछ ऐसी परिस्थितियाँ एवं उलझनें सामने आती रहती हैं कि मानव-आत्मा को शान्ति की अनुभूति बहुत कम हो पाती है । जिन्दगी के ये महत्त्वपूर्ण क्षरण यथोचित आनन्द, उल्लास एवं हर्ष में नहीं बीत पाते । आज ऐसी क्या बात है कि जिधर देखो उधर ही प्रशान्ति की प्राग जल रही है । जब कि परिवार तो पहले भी थे, और हो सकता हैउनमें भी कभी-कभी मन-मुटाव होता रहा हो । फिर भी वे सब एक साथ चलते रहे, इधर-उधर भागे नहीं । संघ भी हजारों-हजार वर्षों से चला आ रहा है । भगवान् महावीर के युग में तथा उनके बाद के प्राचार्यों के युग में भी संघ रहा है । और सम्भव है, उस युग में भी कुछ मन परस्पर नहीं मिले हों, फिर भी वह अभ्युदय के मार्ग पर गति करता रहा । परन्तु आज क्या बात है, जो शान्त वातावरण तथा तो आनन्द एवं उल्लास के और हमारे पूर्वजों को प्राप्त था, वह आज हमारे लिए अति दुर्लभ हो रहा है ? अपने परिवार तथा समाज के साथ पचास-साठ वर्ष की लम्बी
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ईशान की बाइक सड़क पर चल रही थी और पीछे बैठी शालू कभी सड़क तो कभी ईशान को देख रही थी।
आज ईशान की बाइक कुछ ज्यादा ही धीमी चल रही थी और इस बात को शालू भी महसूस कर रही थी।
"ईशान..!" शालू ने धीरे से कहा।
"हां बोलो क्या हुआ? " ईशान बोला।
"मौसम खराब हो रहा है देखो कितने बादल घिर आए हैं..!"
'तो ?" ईशान बोला।
"तो अपनी बाइक की स्पीड थोड़ा तेज करो ना...! इतना धीमा चलोगे तो हम भीग जाएंगे।" शालू बोली।
" भीगनें को ही तो दिल कर रहा है मेरा..!" ईशान ने कहा।
"मतलब?" शालू बोली।
"कुछ नहीं बस चल ही रहें है और थोड़ा सा भीगने में तो अच्छा ही लगता है ना? और यह मौसम की पहली बरसात है इस में भीगने का तो अलग ही मजा है।" ईशान बोला पर उसने बाइक की स्पीड नहीं बढ़ाई।
उसके बाद शालू ने भी कुछ नहीं कहा। अभी वह एक दो किलोमीटर ही आगे बढे होंगे कि बारिश शुरू हो गई।
"बारिश शुरु हो गई...! इसलिए मैंने कहा था ना कि बाइक थोड़ी तेज चलाओ। अब हम भीग जाएंगे।" शालू बोली तो ईशान ने बाइक रोक दी और उतर कर नीचे खड़ा हो गया।
शालू ने उसे देखा तो वह भी बाइक से उतर कर खड़ी हुई।
"क्या हुआ बाइक बंद हो गई क्या? " शालू ने परेशान होकर कहा तभी ईशान ने उसके आगे अपनी हथेली कर दी।
शालू ने नासमझी से ईशान की तरफ देखा।
"अब यहां ना ऑडियंस है न म्युजिक..! इस बारिश के संगीत के साथ मेरे साथ डांस करोगी? " ईशान बोला।
"यहां इस समय?" शालू ने उस खाली सड़क को देखकर कहा?
"क्यों सिर्फ दूसरों के लिए ही हम डांस कर सकते हैं? क्या हमारे खुद के सुकून के लिए नहीं? और मैंने कहा था ना कि हमारा डांस इसलिए खूबसूरत हुआ क्योंकि हमने उसे फील किया था नाकि इसलिए कि हमने प्रैक्टिस की थी।" ईशान बोला तो शालू ने झिझकते हुए उसके हाथ के ऊपर हाथ रख दिया।
अगले ही पल ईशान ने उसे गोल घुमाया और उसकी पीठ को अपने सीने से लगा उसकी कमर पर हाथ रख दिये।
एक तेज सिहरन शालू को हुई और फिर वो होती बरसात को इंजॉय करते हुए डांस करने लगी।
बारिश का पानी उनके शरीर पर और सड़क पर गिर रहा था और दोनों मस्त होकर जबरदस्त तरीके पर डांस कर रहे थे।
कुछ समय बाद शालू थक गई और एकदम से उसने अपना सिर ईशान के सीने पर टिका लिया।
"बस ईशान और नही..! मैं बहुत थक गई हूं।" शालू ने कहा।
ईशान ने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लिया और उसकी आंखों में देखा।
"तुमने पूछा था ना कि मैं तुम्हें अपनी बाइक पर क्यों बिठाता हूं? मतलब तुम्हे मेरी बाइक पर बैठने की परमिशन क्यों है?" ईशान ने कहा तो शालू ने गिरते पानी से बंद होती हुई आंखों को जबरदस्ती खोलकर उसकी आंखों में देखा।
"मेरी बाइक पर मेरी मां के बाद आज तक कोई लड़की नही बैठी..! मनु भी नही। सिर्फ तुम हो जो मेरी बाइक पर बैठी हो..! जानती हो क्यों ?" ईशान ने कहा तो शालू ने कुछ समझते तो कुछ नासमझी से उसकी आँखों मे देखा।
"क्यों?" शालू ने धीरे से कहा।
"क्योंकि तुम खास हो बेहद खास...! हर इंसान की जिंदगी में कोई एक ऐसा इंसान होता है जो बहुत खास होता है। जिस पर अपना दिल ही नहीं अपनी जान भी लुटाने का दिल करता है। जिसके चेहरे की मुस्कुराहट के लिए हर तकलीफ सहन करने से भी परहेज नहीं होता।" ईशान ने कहा,
"शालू अब उसकी बात समझने लगी थी और उसकी नजरें झुकने लगी।
"प्लीज शालू लुक एट मि..!" ईशान ने कहा तो शालू ने वापस से उसकी तरफ देखा।
"तुमसे इस दिल के एहसास न जाने कब और कैसे जुड़ गए! अक्षत जब इस तरह की बातें करता था तो मैं विश्वास नहीं करता था कि ऐसा भी कोई रिश्ता होता है जहां किसी की एक मुस्कुराहट पर जान देने का दिल करें। जहां दिल कुछ भी ना चाहे बस आपके मन में एक बात हो कि सामने वाला हमेशा खुश रहें और आपकी आंखों के सामने रहे...! जहां सामने वाले के दिल की धड़कन आप अपने सीने में महसूस करो।" ईशान बोला।
शालू का दिल खुशी से मयूर बन नाच उठा पर वो अब भी खामोश रही।
"और वही एहसास का रिश्ता मेरा तुम्हारे साथ जुड़ गया है..! तुम्हें देखता हूं तो दिल को सुकून मिलता है और जिस दिन भी तुम कॉलेज नहीं आती मन मेरा बेचैन रहता है। तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट देखता हूं तो खुद ब खुद मेरा चेहरा खिल जाता है और तुम्हारी उदासी देख न जाने क्यों मेरे दिल को तकलीफ होती है।
जानता हूं हर किसी के लिए कोई एक इंसान बेहद खास होता है और वह खास इंसान मेरे लिए तुम हो। क्योंकि तुम्हें प्यार करता हूं मैं शालू..!" ईशान ने कहा तो शालू की आँखे चमक उठी।
"यस आई लव यू...! पता नहीं चला कब कैसे क्यों पर तुम्हारे साथ जुड़ता चला गया और एक सामान्य सी मुलाकात कब गहरे प्यार के एहसास में बदल गई मुझे खुद भी पता नहीं चला।" ईशान ने कहा तो शालू के चेहरे पर गुलाबी आभा बिखर गई।
"जानता हूं शायद मैं थोड़ी जल्दबाजी कर रहा हूं। अभी हमारे कॉलेज चल रहे हैं पर मैं अक्षत के जितना संयम वाला नहीं हूं कि इंतजार करता रहूँ सही समय का। सही समय के इंतजार में कई बार चीजें गलत भी हो जाती हैं और मैं तुम्हारे साथ ना ही कोई रिस्क ले सकता हूं और ना ही कोई टेंशन। इसलिए अपने दिल की बात कहने में बिल्कुल भी देर नहीं की। मैं तुम्हें चाहने लगा हूं शालू ...! बेइंतहा मोहब्बत करने लगा हूं तुमसे।" ईशान की आवाज भारी हो गई।
शालू ने कोई जवाब नहीं दिया बस वह गुलाबी होते चेहरे के साथ ईशान को देख रही थी।
"तुम्हारे तुम्हारे ऊपर कोई जबरदस्ती नहीं है शालू बस मुझे न जाने क्यों ऐसा लगा कि जो मैं सोचता हूं वही तुम भी सोचती हो.! तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए फीलिंग है और हमारा रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ चुका है। बाकी अगर तुम्हारे दिल में ऐसा नहीं है तो तुम बेझिझक और बेफिक्र होकर अपने दिल की बात कह सकती हो।" ईशान ने कहा।
शालू ने अभी भी कोई जवाब नहीं दिया तो ईशान के चेहरे पर मायूसी आ गई।
ईशान ने आश्चर्य और खुशी के साथ शालू को देखा।
"आई लव यू ...आई लव यू...!आई लव यू टू...! और मैं भला नाराज क्यों होंगी? यह सब सुनने के लिए तो मैं कब से बेचैन थी। हां यह सच है मैं भी तुम्हें बहुत चाहती हूं। और तुम्हारी आंखों से मुझे समझ में आता था कि तुम्हारे दिल में भी फीलिंग है। और मैं बस यही सोचती थी कि ना जाने तुम कब कहोगे?" शालू बोली तो ईशान की आँखे चमक उठी।
"और फाइनली आज तुमने अपने दिल की बात मुझसे कह दी। एम सो हैप्पी..! थैंक यू सो मच।" शालू ने कहा तो ईशान ने भी अपनी बाहों का घेरा उसके इर्द-गिर्द कस दिया।
"इसका मतलब कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो और मैं बेवजह ही डर रहा था कि कहीं तुम मना ना कर दो..!" ईशान बोला।
"हां बुद्धू मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं और बेहद प्यार करती हूं...और मैं भी बस तुम्हारी तरफ से बोलने का इंतजार कर रही थी, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मैं तुमसे कहूं और तुम मना कर दो। बस इसीलिए पहले तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती थी बाकी मेरी तरफ से मना होने का तो सवाल ही नहीं होता। मेरे तो पापा को भी तुम पसंद हो।" शालू जल्दी जल्दी से बोल गई और अगले ही पल उसने अपनी जुबान को अपने दांतों तले दबा दिया।
और उसकी इस बात को सुनकर ईशान के चेहरे की मुस्कुराहट और भी बड़ी हो गई।
"तुम्हारे पापा को मैं पसंद हूं पर मेरे मम्मी पापा कभी तुम्हें नापसंद कर ही नहीं सकते। तो फिर हमारी आगे की टेंशन भी खत्म..! बस अब पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर देना है और हां थोड़ा-थोड़ा एक दूसरे पर भी। भी कॉलेज खत्म होते ही हम अपने पेरेंट्स से बात करेंगे।" ईशान ने कहा तो शालू ने गर्दन हिला दी और उससे अलग हो गई।
ईशान ने वापस से उसे अपने गले से लगा लिया।
"आज का दिन और यह बरसात मैं कभी नहीं भूलूंगा। आज मेरे दिल की मुराद पूरी हो गई और तुम्हारी हां सुनकर जो सुकून मिला है उसे मैं बता नहीं सकता।" ईशान ने कहा।।
" और मैं भी बहुत खुश हूं ईशान!" शालू बोली और उससे अलग हो गई।
ईशान ने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लिया और हौले से उसके माथे पर अपने होंठ रख दिए।
'थैंक यू सो मच।" ईशान बोला तो शालू ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा,
"बहुत देर हो गई है हो गई है और बारिश भी भी तेज होने लगी है अब चले!" शालू ने कहा।
"हां चलो अब रुकने का कोई मतलब ही नहीं है..! आखिर हम दोनों ने अपने प्यार का इजहार कर ही लिया तो अब बारिश में मैं भीग कर बीमार थोड़े ना होना है।" ईशान बोला और उसने बाइक स्टार्ट कर दी।
शालू तुरंत उसके पीछे बैठ गई और उसने अपने दोनों हाथों को ईशान के सीने पर लपेट लिया।
ईशान ने उसकी हथेली को पकड़ा और अपने होठों से लगा लिया और उसी के साथ बाइक आगे बढ़ा दी।
उधर नियति अपने कॉलेज से निकलकर बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी कि तभी सार्थक आकर उसके सामने खड़ा हो गया।
एक पल को नियति सकपका गई पर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया।
"हेलो.!" सार्थक ने कहा।
"जी...! जी कहिए..!" नियति ने हकलाते हुए कहा।
"आप भी उसी कॉलेज में पढ़ती हो जिसमें मैं पढ़ता हूं?" सार्थक ने पूछा।
" मैं ...मैंने ध्यान नहीं दिया शायद...!" नियति ने बात को टालते हुए कहा हालांकि वह बहुत अच्छे से सार्थक को पहचान गई थी।
"कब से आपको ढूंढ रहा हूं..! उस फुटबॉल मैच के बाद तो आप कभी दिखाई ही नहीं दी और आपकी फ्रेंड उससे मैंने पूछा तो उसने भी इस तरीके से जवाब दिया जैसे आपको जानती ही नहीं हो।" सार्थक बोला।
"पर आप मुझे क्यों ढूंढ हो रहे थे? " नियति ने एकदम से सवाल किया।
"बस यूं ही आपसे बात करने के लिए। आपसे दोस्ती करने के लिए। मुझसे दोस्ती करोगी?" सार्थक ने अपना हाथ आगे बढ़ाया कि तभी बस स्टॉप पर आकर बस रुकी और नियति ने उसका जवाब नहीं दिया और एक नजर उसे से देख कर बस पर चढ़ गई।।
बस आगे बढ़ गई और सार्थक खाली-खाली आंखों से जाती हुई बस को देखता रह गया।
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ईशान की बाइक सड़क पर चल रही थी और पीछे बैठी शालू कभी सड़क तो कभी ईशान को देख रही थी। आज ईशान की बाइक कुछ ज्यादा ही धीमी चल रही थी और इस बात को शालू भी महसूस कर रही थी। "ईशान..!" शालू ने धीरे से कहा। "हां बोलो क्या हुआ? " ईशान बोला। "मौसम खराब हो रहा है देखो कितने बादल घिर आए हैं..!" 'तो ?" ईशान बोला। "तो अपनी बाइक की स्पीड थोड़ा तेज करो ना...! इतना धीमा चलोगे तो हम भीग जाएंगे।" शालू बोली। " भीगनें को ही तो दिल कर रहा है मेरा..!" ईशान ने कहा। "मतलब?" शालू बोली। "कुछ नहीं बस चल ही रहें है और थोड़ा सा भीगने में तो अच्छा ही लगता है ना? और यह मौसम की पहली बरसात है इस में भीगने का तो अलग ही मजा है।" ईशान बोला पर उसने बाइक की स्पीड नहीं बढ़ाई। उसके बाद शालू ने भी कुछ नहीं कहा। अभी वह एक दो किलोमीटर ही आगे बढे होंगे कि बारिश शुरू हो गई। "बारिश शुरु हो गई...! इसलिए मैंने कहा था ना कि बाइक थोड़ी तेज चलाओ। अब हम भीग जाएंगे।" शालू बोली तो ईशान ने बाइक रोक दी और उतर कर नीचे खड़ा हो गया। शालू ने उसे देखा तो वह भी बाइक से उतर कर खड़ी हुई। "क्या हुआ बाइक बंद हो गई क्या? " शालू ने परेशान होकर कहा तभी ईशान ने उसके आगे अपनी हथेली कर दी। शालू ने नासमझी से ईशान की तरफ देखा। "अब यहां ना ऑडियंस है न म्युजिक..! इस बारिश के संगीत के साथ मेरे साथ डांस करोगी? " ईशान बोला। "यहां इस समय?" शालू ने उस खाली सड़क को देखकर कहा? "क्यों सिर्फ दूसरों के लिए ही हम डांस कर सकते हैं? क्या हमारे खुद के सुकून के लिए नहीं? और मैंने कहा था ना कि हमारा डांस इसलिए खूबसूरत हुआ क्योंकि हमने उसे फील किया था नाकि इसलिए कि हमने प्रैक्टिस की थी।" ईशान बोला तो शालू ने झिझकते हुए उसके हाथ के ऊपर हाथ रख दिया। अगले ही पल ईशान ने उसे गोल घुमाया और उसकी पीठ को अपने सीने से लगा उसकी कमर पर हाथ रख दिये। एक तेज सिहरन शालू को हुई और फिर वो होती बरसात को इंजॉय करते हुए डांस करने लगी। बारिश का पानी उनके शरीर पर और सड़क पर गिर रहा था और दोनों मस्त होकर जबरदस्त तरीके पर डांस कर रहे थे। कुछ समय बाद शालू थक गई और एकदम से उसने अपना सिर ईशान के सीने पर टिका लिया। "बस ईशान और नही..! मैं बहुत थक गई हूं।" शालू ने कहा। ईशान ने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लिया और उसकी आंखों में देखा। "तुमने पूछा था ना कि मैं तुम्हें अपनी बाइक पर क्यों बिठाता हूं? मतलब तुम्हे मेरी बाइक पर बैठने की परमिशन क्यों है?" ईशान ने कहा तो शालू ने गिरते पानी से बंद होती हुई आंखों को जबरदस्ती खोलकर उसकी आंखों में देखा। "मेरी बाइक पर मेरी मां के बाद आज तक कोई लड़की नही बैठी..! मनु भी नही। सिर्फ तुम हो जो मेरी बाइक पर बैठी हो..! जानती हो क्यों ?" ईशान ने कहा तो शालू ने कुछ समझते तो कुछ नासमझी से उसकी आँखों मे देखा। "क्यों?" शालू ने धीरे से कहा। "क्योंकि तुम खास हो बेहद खास...! हर इंसान की जिंदगी में कोई एक ऐसा इंसान होता है जो बहुत खास होता है। जिस पर अपना दिल ही नहीं अपनी जान भी लुटाने का दिल करता है। जिसके चेहरे की मुस्कुराहट के लिए हर तकलीफ सहन करने से भी परहेज नहीं होता।" ईशान ने कहा, "शालू अब उसकी बात समझने लगी थी और उसकी नजरें झुकने लगी। "प्लीज शालू लुक एट मि..!" ईशान ने कहा तो शालू ने वापस से उसकी तरफ देखा। "तुमसे इस दिल के एहसास न जाने कब और कैसे जुड़ गए! अक्षत जब इस तरह की बातें करता था तो मैं विश्वास नहीं करता था कि ऐसा भी कोई रिश्ता होता है जहां किसी की एक मुस्कुराहट पर जान देने का दिल करें। जहां दिल कुछ भी ना चाहे बस आपके मन में एक बात हो कि सामने वाला हमेशा खुश रहें और आपकी आंखों के सामने रहे...! जहां सामने वाले के दिल की धड़कन आप अपने सीने में महसूस करो।" ईशान बोला। शालू का दिल खुशी से मयूर बन नाच उठा पर वो अब भी खामोश रही। "और वही एहसास का रिश्ता मेरा तुम्हारे साथ जुड़ गया है..! तुम्हें देखता हूं तो दिल को सुकून मिलता है और जिस दिन भी तुम कॉलेज नहीं आती मन मेरा बेचैन रहता है। तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट देखता हूं तो खुद ब खुद मेरा चेहरा खिल जाता है और तुम्हारी उदासी देख न जाने क्यों मेरे दिल को तकलीफ होती है। जानता हूं हर किसी के लिए कोई एक इंसान बेहद खास होता है और वह खास इंसान मेरे लिए तुम हो। क्योंकि तुम्हें प्यार करता हूं मैं शालू..!" ईशान ने कहा तो शालू की आँखे चमक उठी। "यस आई लव यू...! पता नहीं चला कब कैसे क्यों पर तुम्हारे साथ जुड़ता चला गया और एक सामान्य सी मुलाकात कब गहरे प्यार के एहसास में बदल गई मुझे खुद भी पता नहीं चला।" ईशान ने कहा तो शालू के चेहरे पर गुलाबी आभा बिखर गई। "जानता हूं शायद मैं थोड़ी जल्दबाजी कर रहा हूं। अभी हमारे कॉलेज चल रहे हैं पर मैं अक्षत के जितना संयम वाला नहीं हूं कि इंतजार करता रहूँ सही समय का। सही समय के इंतजार में कई बार चीजें गलत भी हो जाती हैं और मैं तुम्हारे साथ ना ही कोई रिस्क ले सकता हूं और ना ही कोई टेंशन। इसलिए अपने दिल की बात कहने में बिल्कुल भी देर नहीं की। मैं तुम्हें चाहने लगा हूं शालू ...! बेइंतहा मोहब्बत करने लगा हूं तुमसे।" ईशान की आवाज भारी हो गई। शालू ने कोई जवाब नहीं दिया बस वह गुलाबी होते चेहरे के साथ ईशान को देख रही थी। "तुम्हारे तुम्हारे ऊपर कोई जबरदस्ती नहीं है शालू बस मुझे न जाने क्यों ऐसा लगा कि जो मैं सोचता हूं वही तुम भी सोचती हो.! तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए फीलिंग है और हमारा रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ चुका है। बाकी अगर तुम्हारे दिल में ऐसा नहीं है तो तुम बेझिझक और बेफिक्र होकर अपने दिल की बात कह सकती हो।" ईशान ने कहा। शालू ने अभी भी कोई जवाब नहीं दिया तो ईशान के चेहरे पर मायूसी आ गई। ईशान ने आश्चर्य और खुशी के साथ शालू को देखा। "आई लव यू ...आई लव यू...!आई लव यू टू...! और मैं भला नाराज क्यों होंगी? यह सब सुनने के लिए तो मैं कब से बेचैन थी। हां यह सच है मैं भी तुम्हें बहुत चाहती हूं। और तुम्हारी आंखों से मुझे समझ में आता था कि तुम्हारे दिल में भी फीलिंग है। और मैं बस यही सोचती थी कि ना जाने तुम कब कहोगे?" शालू बोली तो ईशान की आँखे चमक उठी। "और फाइनली आज तुमने अपने दिल की बात मुझसे कह दी। एम सो हैप्पी..! थैंक यू सो मच।" शालू ने कहा तो ईशान ने भी अपनी बाहों का घेरा उसके इर्द-गिर्द कस दिया। "इसका मतलब कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो और मैं बेवजह ही डर रहा था कि कहीं तुम मना ना कर दो..!" ईशान बोला। "हां बुद्धू मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं और बेहद प्यार करती हूं...और मैं भी बस तुम्हारी तरफ से बोलने का इंतजार कर रही थी, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मैं तुमसे कहूं और तुम मना कर दो। बस इसीलिए पहले तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती थी बाकी मेरी तरफ से मना होने का तो सवाल ही नहीं होता। मेरे तो पापा को भी तुम पसंद हो।" शालू जल्दी जल्दी से बोल गई और अगले ही पल उसने अपनी जुबान को अपने दांतों तले दबा दिया। और उसकी इस बात को सुनकर ईशान के चेहरे की मुस्कुराहट और भी बड़ी हो गई। "तुम्हारे पापा को मैं पसंद हूं पर मेरे मम्मी पापा कभी तुम्हें नापसंद कर ही नहीं सकते। तो फिर हमारी आगे की टेंशन भी खत्म..! बस अब पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई पर देना है और हां थोड़ा-थोड़ा एक दूसरे पर भी। भी कॉलेज खत्म होते ही हम अपने पेरेंट्स से बात करेंगे।" ईशान ने कहा तो शालू ने गर्दन हिला दी और उससे अलग हो गई। ईशान ने वापस से उसे अपने गले से लगा लिया। "आज का दिन और यह बरसात मैं कभी नहीं भूलूंगा। आज मेरे दिल की मुराद पूरी हो गई और तुम्हारी हां सुनकर जो सुकून मिला है उसे मैं बता नहीं सकता।" ईशान ने कहा।। " और मैं भी बहुत खुश हूं ईशान!" शालू बोली और उससे अलग हो गई। ईशान ने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लिया और हौले से उसके माथे पर अपने होंठ रख दिए। 'थैंक यू सो मच।" ईशान बोला तो शालू ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा, "बहुत देर हो गई है हो गई है और बारिश भी भी तेज होने लगी है अब चले!" शालू ने कहा। "हां चलो अब रुकने का कोई मतलब ही नहीं है..! आखिर हम दोनों ने अपने प्यार का इजहार कर ही लिया तो अब बारिश में मैं भीग कर बीमार थोड़े ना होना है।" ईशान बोला और उसने बाइक स्टार्ट कर दी। शालू तुरंत उसके पीछे बैठ गई और उसने अपने दोनों हाथों को ईशान के सीने पर लपेट लिया। ईशान ने उसकी हथेली को पकड़ा और अपने होठों से लगा लिया और उसी के साथ बाइक आगे बढ़ा दी। उधर नियति अपने कॉलेज से निकलकर बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थी कि तभी सार्थक आकर उसके सामने खड़ा हो गया। एक पल को नियति सकपका गई पर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया। "हेलो.!" सार्थक ने कहा। "जी...! जी कहिए..!" नियति ने हकलाते हुए कहा। "आप भी उसी कॉलेज में पढ़ती हो जिसमें मैं पढ़ता हूं?" सार्थक ने पूछा। " मैं ...मैंने ध्यान नहीं दिया शायद...!" नियति ने बात को टालते हुए कहा हालांकि वह बहुत अच्छे से सार्थक को पहचान गई थी। "कब से आपको ढूंढ रहा हूं..! उस फुटबॉल मैच के बाद तो आप कभी दिखाई ही नहीं दी और आपकी फ्रेंड उससे मैंने पूछा तो उसने भी इस तरीके से जवाब दिया जैसे आपको जानती ही नहीं हो।" सार्थक बोला। "पर आप मुझे क्यों ढूंढ हो रहे थे? " नियति ने एकदम से सवाल किया। "बस यूं ही आपसे बात करने के लिए। आपसे दोस्ती करने के लिए। मुझसे दोस्ती करोगी?" सार्थक ने अपना हाथ आगे बढ़ाया कि तभी बस स्टॉप पर आकर बस रुकी और नियति ने उसका जवाब नहीं दिया और एक नजर उसे से देख कर बस पर चढ़ गई।। बस आगे बढ़ गई और सार्थक खाली-खाली आंखों से जाती हुई बस को देखता रह गया।
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कलायत। नगर की अनाज मंडी में रविवार को कलायत विधानसभा का पन्ना प्रमुख सम्मेलन आयोजित किया गया। इस मौके पर भाजपा के हरियाणा प्रभारी बिपल्ब देव ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। कार्यकम की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने की। उन्होंने कहा कि पन्ना प्रमुखों की मेहनत से भारतीय जनता पार्टी मिशन 2024 में हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि जिस कलायत को कमल के लिए बंजर बताया जा रहा था आज उस पर हजारों पन्ना प्रमुखों के रूप में भाजपा की जमीन मजबूत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और गरीब, वंचित व जरूरतमंद के उत्थान से यहां की जनता में भाजपा के प्रति भरोसा मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि कलायत के मतदाताओं ने भाजपा और मेरे जैसी एक साधारण कार्यकर्ता को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उनके मार्गदर्शन में हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल काम कर रहे हैं। ढांडा ने देवीलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्व. पति नरसिंह ढांडा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए वो जनता की सेवा कर रही हैं। उन्हाेंने शुगर मिल बनवाने के अलावा इलाके के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे।
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कलायत। नगर की अनाज मंडी में रविवार को कलायत विधानसभा का पन्ना प्रमुख सम्मेलन आयोजित किया गया। इस मौके पर भाजपा के हरियाणा प्रभारी बिपल्ब देव ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। कार्यकम की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने की। उन्होंने कहा कि पन्ना प्रमुखों की मेहनत से भारतीय जनता पार्टी मिशन दो हज़ार चौबीस में हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि जिस कलायत को कमल के लिए बंजर बताया जा रहा था आज उस पर हजारों पन्ना प्रमुखों के रूप में भाजपा की जमीन मजबूत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और गरीब, वंचित व जरूरतमंद के उत्थान से यहां की जनता में भाजपा के प्रति भरोसा मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि कलायत के मतदाताओं ने भाजपा और मेरे जैसी एक साधारण कार्यकर्ता को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उनके मार्गदर्शन में हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल काम कर रहे हैं। ढांडा ने देवीलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्व. पति नरसिंह ढांडा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ते हुए वो जनता की सेवा कर रही हैं। उन्हाेंने शुगर मिल बनवाने के अलावा इलाके के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे।
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AGRA:। ग्वालियर हाईवे स्थित ओम गार्डन गांव ककुआ के समीप सनसनीखेज वारदात के दो दिन बाद पुलिस हरकत में आई। मौके पर डीआईजी व एसएसपी ने जाकर छानबीन की तो मामला सही पाया गया। पुलिस ने जब मृतका के पति से बात की तो मामला खुल कर सामने आ गया। उसने पुलिस को दबंगों की असलियत बता दी। पुलिस ने ग्राम पंचायत सहित दस लोगों पर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
थाना मलपुरा स्थित ग्वालियर हाईवे से सटे ओम गार्डन में 40 वर्षीय हेमा की नृशंस हत्या कर दी गई और ग्रामीण चुप्पी साधे रहे। लेकिन जब मामला उछला तो गांव में खलबली मच गई। इसके बाद मौके पर रविवार की रात फॉरेंसिक टीम को भेजा गया। पूरे तीन घंटे फॉरेंसिक टीम की पड़ताल चलती रही। बाद में एसएसपी व डीआईजी भी मौके पर जांच करने पहुंचे थे। पुलिस टीम ने ग्रामीणों से सघन पूछताछ की।
फॉरेंसिक टीम रात को करीब एक बजे पहुंच गई थी। पुलिस के साथ चली इंवेस्टीगेशन में फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। टीम के लोग ओम गार्डन में बनी कोठरी की छत पर भी गए। छत पर बने निशान को देख कर प्रतीत हो रहा था कि यहां शव रखा गया हो। छत पर बॉडी के निशान थे। टीम ने जब स्पे्र डाला तो खून के निशान उभर कर आए। इससे एक बात की तो पुष्टि होती है कि हत्या तो हुई है।
कल से हुई रिमझिम बारिश से खून के निशान मिट गए थे साथ ही मौके पर जमा साक्ष्य पर भी असर पड़ा है। लेकिन फॉरेंसिक टीम ने हर सम्भव प्रयास कर सबूत जुटाए। टीम ने वह स्थान भी देखा जहां पर चिता जलाई गई थी। आसपास के इलाके का भी मुआयना किया। चिता की आग से कुछ खास हाथ नहीं लगा है।
पुलिस टीम मृतका के पति को लेने सतना मध्य प्रदेश गई हुई है। उसने पुलिस को बताया कि जिस दौरान वह आया था हेमा मृतावस्था में मिली थी। उसका चेहरा कुचला हुआ था। दबंगों ने उसे धमकी दी। उन्होंने उसके शव को जलवा दिया। जबरन उसे बीमारी से मौत की कहानी लिखवाई।
जिस दौरान महिला की हत्या हुई उस दौरान गार्डन मालिक विक्रम ने गांव के प्रधान सुखपाल को सूचना दी। प्रधान ने उस दौरान बताया कि हेमराज ने उसे पत्र में पत्नी की मौत का कारण बीमारी के चलते बताया है। साथ ही उसने दाह संस्कार की बात कही थी। लेकिन हेमराज का कहना था कि दबंगों ने दबंगई से उससे सब करवा लिया।
पुलिस ने इस संबंध में गार्डन मालिक विक्रम, प्रधान सुखपाल, मनीष, राजेंद्र सहित दस लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने इस सिलसिले में पांच लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बलात्कार, हत्या व साक्ष्य मिटाने की धारा में मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस मृतका के पति के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
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AGRA:। ग्वालियर हाईवे स्थित ओम गार्डन गांव ककुआ के समीप सनसनीखेज वारदात के दो दिन बाद पुलिस हरकत में आई। मौके पर डीआईजी व एसएसपी ने जाकर छानबीन की तो मामला सही पाया गया। पुलिस ने जब मृतका के पति से बात की तो मामला खुल कर सामने आ गया। उसने पुलिस को दबंगों की असलियत बता दी। पुलिस ने ग्राम पंचायत सहित दस लोगों पर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। थाना मलपुरा स्थित ग्वालियर हाईवे से सटे ओम गार्डन में चालीस वर्षीय हेमा की नृशंस हत्या कर दी गई और ग्रामीण चुप्पी साधे रहे। लेकिन जब मामला उछला तो गांव में खलबली मच गई। इसके बाद मौके पर रविवार की रात फॉरेंसिक टीम को भेजा गया। पूरे तीन घंटे फॉरेंसिक टीम की पड़ताल चलती रही। बाद में एसएसपी व डीआईजी भी मौके पर जांच करने पहुंचे थे। पुलिस टीम ने ग्रामीणों से सघन पूछताछ की। फॉरेंसिक टीम रात को करीब एक बजे पहुंच गई थी। पुलिस के साथ चली इंवेस्टीगेशन में फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। टीम के लोग ओम गार्डन में बनी कोठरी की छत पर भी गए। छत पर बने निशान को देख कर प्रतीत हो रहा था कि यहां शव रखा गया हो। छत पर बॉडी के निशान थे। टीम ने जब स्पे्र डाला तो खून के निशान उभर कर आए। इससे एक बात की तो पुष्टि होती है कि हत्या तो हुई है। कल से हुई रिमझिम बारिश से खून के निशान मिट गए थे साथ ही मौके पर जमा साक्ष्य पर भी असर पड़ा है। लेकिन फॉरेंसिक टीम ने हर सम्भव प्रयास कर सबूत जुटाए। टीम ने वह स्थान भी देखा जहां पर चिता जलाई गई थी। आसपास के इलाके का भी मुआयना किया। चिता की आग से कुछ खास हाथ नहीं लगा है। पुलिस टीम मृतका के पति को लेने सतना मध्य प्रदेश गई हुई है। उसने पुलिस को बताया कि जिस दौरान वह आया था हेमा मृतावस्था में मिली थी। उसका चेहरा कुचला हुआ था। दबंगों ने उसे धमकी दी। उन्होंने उसके शव को जलवा दिया। जबरन उसे बीमारी से मौत की कहानी लिखवाई। जिस दौरान महिला की हत्या हुई उस दौरान गार्डन मालिक विक्रम ने गांव के प्रधान सुखपाल को सूचना दी। प्रधान ने उस दौरान बताया कि हेमराज ने उसे पत्र में पत्नी की मौत का कारण बीमारी के चलते बताया है। साथ ही उसने दाह संस्कार की बात कही थी। लेकिन हेमराज का कहना था कि दबंगों ने दबंगई से उससे सब करवा लिया। पुलिस ने इस संबंध में गार्डन मालिक विक्रम, प्रधान सुखपाल, मनीष, राजेंद्र सहित दस लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने इस सिलसिले में पांच लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बलात्कार, हत्या व साक्ष्य मिटाने की धारा में मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस मृतका के पति के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
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एक चित्रकार द्वारा कल्पनित किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा करता आदिग्रह चक्र आदिग्रह चक्र या प्रोटोप्लैनॅटेरी डिस्क या प्रॉपलिड एक नए जन्में तारे के इर्द-गिर्द घूमता घनी गैस का चक्र होता है। कभी-कभी इस चक्र में जगह-जगह पर पदार्थों का जमावड़ा हो जाने से पहले धूल के कण और फिर ग्रह जन्म ले लेते हैं। .
14 संबंधोंः ट्रैपिस्ट-१, परितारकीय चक्र, फ़ुमलहौत बी, बहिर्ग्रह, मलबा चक्र, शनि के छल्ले, शिशुग्रह, सौर मण्डल, सौर मंडल का गठन और विकास, खगोलशास्त्र से सम्बन्धित शब्दावली, खगोलीय धूल, ग्रहीय मण्डल, गैलीलियन चंद्रमा, उपग्रही छल्ला।
ट्रैपिस्ट-१ (TRAPPIST-1), जिसे 2MASS J23062928-0502285 भी नामांकित करा जाता है, कुम्भ तारामंडल के क्षेत्र में स्थित एक अतिशीतल बौना तारा है जो हमारे सौर मंडल के बृहस्पति ग्रह से ज़रा बड़ा है। यह सूरज से लगभग 39.5 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। इसके इर्द-गिर्द एक ग्रहीय मंडल है और फ़रवरी 2017 तक इस मंडल में सात स्थलीय ग्रह इस तारे की परिक्रमा करते पाए गए थे जो किसी भी अन्य ज्ञात ग्रहीय मंडल से अधिक हैं। .
SAO २०६४६२ नामक तारे के इर्द-गिर्द एक असाधारण परितारकीय चक्र है परितारकीय चक्र (Circumstellar disk) किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहे धूल, गैस, शिशुग्रहों, क्षुद्रग्रहों व अन्य पदार्थों के बने चक्र को कहते हैं। इस चक्र का आकार टॉरस-नुमा, छल्ले-नुमा या रोटी-नुमा होता है। नवजात तारों में इस चक्र में अव्यवस्थित सामग्री होती है जिस से आगे चलकर शिशुग्रह आदि जन्म सकते हैं, जबकि कुछ उम्र वाले तारो में इस चक्र मे शिशुग्रह होते हैं जिनसे ग्रह बन सकते हैं। .
धूल के बादल में फ़ुमलहौत बी ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया (हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गई तस्वीर) फ़ुमलहौत तारे के इर्द-गिर्द की धूल में फ़ुमलहौत बी का एक काल्पनिक चित्र फ़ुमलहौत बी पृथ्वी से २५ प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक ग़ैर-सौरीय ग्रह है जो दक्षिण मीन तारामंडल के फ़ुमलहौत तारे की परिक्रमा कर रहा है। इसे २००८ में हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गई तस्वीरों के ज़रिये ढूँढा गया था। यह अपने तारे की ११५ खगोलीय इकाई की दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। .
धूल के बादल में फ़ुमलहौत बी ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया (हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गई तस्वीर) बहिर्ग्रह (exoplanet) या ग़ैर-सौरीय ग्रह (extrasolar planet, ऍक्स्ट्रासोलर प्लैनॅट) ऐसे ग्रह को कहा जाता है जो हमारे सौर मण्डल से बाहर स्थित हो। सन् १९९२ तक खगोलशास्त्रियों को एक भी ग़ैर-सौरीय ग्रह के अस्तित्व का ज्ञान नहीं था, लेकिन उसके बाद बहुत से ऐसे ग्रह मिल चुके हैं। २४ मई २०११ तक ५५२ ग़ैर-सौरीय ग्रह ज्ञात हो चुके थे। क्योंकि इनमें से अधिकतर को सीधा देखने के लिए तकनीकें अभी विकसित नहीं हुई हैं, इसलिए सौ प्रतिशत भरोसे से नहीं कहा जा सकता के वास्तव में यह सारे ग्रह मौजूद हैं, लेकिन इनके तारों पर पड़ रहे गुरुत्वाकर्षक प्रभाव और अन्य लक्षणों से वैज्ञानिक इनके अस्तित्व के बारे में विश्वस्त हैं। अनुमान लगाया जाता है के सूरज की श्रेणी के लगभग १०% तारों के इर्द-गिर्द ग्रह परिक्रमा कर रहे हैं, हालांकि यह संख्या उस से भी अधिक हो सकती है। कॅप्लर अंतरिक्ष क्षोध यान द्वारा एकत्रित जानकारी के बूते पर कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है के आकाशगंगा (हमारी गैलेक्सी) में कम-से-कम ५० अरब ग्रहों के होने की सम्भावना है। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने जनवरी २०१३ में अनुमान लगाया कि आकाशगंगा में इस अनुमान से भी दुगने, यानि १०० अरब, ग्रह हो सकते हैं। .
फ़ुमलहौत तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा करता हुआ मलबा चक्र - (हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गई तस्वीर) मलबा चक्र (Debris disk) किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहा धूल और मलबे का परितारकीय चक्र होता है। कभी-कभी इस चक्र में सामग्री के एकीकरण से छल्ले बन जाते हैं, जैसा कि फ़ुमलहौत तारे के मलबे चक्र में देखा जाता है। मलबे चक्र नवजात और बूढ़े, दोनों प्रकार के तारों में देखे जा चुके हैं। एक न्यूट्रॉन तारे के इर्द-गिर्द भी मलबा चक्र परिक्रमा करता हुआ पाया गया है। मलबे चक्र उस समय बच जाते हैं जब आदिग्रह चक्र का काल ख़त्म होने पर ग्रह बन चुके हों और मलबा बचा हुआ हो। कभी-कभी शिशुग्रहों की टक्करों से भी मलबा चक्र बन सकते हैं। .
शनि के छल्लों की तस्वीर - बाहरी "ए" छल्ले और भीतरी "बी" छल्ले के बीच की कैसिनी दरार साफ़ नज़र आ रही है शनि के छल्ले हमारे सौर मण्डल के सबसे शानदार उपग्रही छल्लों का गुट हैं। यह छोटे-छोटे कणों से लेकर कई मीटर बड़े अनगिनत टुकड़ों से बने हुए हैं जो सारे इन छल्लों का हिस्सा बने शनि की परिक्रमा कर रहें हैं। यह सारे टुकड़े अधिकतर पानी की बर्फ़ के बने हुए हैं जिनमें कुछ-कुछ धुल भी मिश्रित है। यह सारे छल्ले एक चपटे चक्र में एक के अन्दर एक हैं। इस चक्र में छल्लों के बीच कुछ ख़ाली छल्ले-रुपी अंतराल या दरारे भी हैं। इन में से कुछ दरारे तो इस चक्र में परिक्रमा करते हुए उपग्रहों ने बना लीं हैंः जहाँ इनकी परिक्रमा की कक्षाएँ हैं वहाँ इन्होने छल्लों में से मलबा हटा दिया है। लेकिन कुछ दरारों के कारण अभी वैज्ञानिकों को ज्ञात नहीं हैं। .
हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा HD १४१९४३ और HD १९१०८९ नामक दो कम उम्र के तारों के इर्द-गिर्द के मलबा चक्र शिशुग्रह (planetesimal) उन ठोस वस्तुओं को कहते हैं जो किसी तारे के इर्द-गिर्द के आदिग्रह चक्र या मलबा चक्र में बन रही होती हैं। .
सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 166 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। .
सौरमंडल का गठन एक विशाल आणविक बादल के छोटे से हिस्से के गुरुत्वाकर्षण पतन के साथ 4.6 अरब साल पहले शुरू होने का अनुमान है। अधिकांश ढहा द्रव्यमान केंद्र में एकत्र हुआ, सूर्य को बनाया, जबकि बाकी एक प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क में चपट गया जिसमे से ग्रहों, चन्द्रमाओं, क्षुद्रग्रहों और अन्य छोटे सौरमंडलीय निकायों का निर्माण हुआ। .
यह पृष्ठ खगोलशास्त्र की शब्दावली है। खगोलशास्त्र वह वैज्ञानिक अध्ययन है जिसका सबंध पृथ्वी के वातावरण के बाहर उत्पन्न होने वाले खगोलीय पिंडों और घटनाओं से होता है। .
खगोलीय धूल का कण - यह कॉन्ड्राइट, यानि पत्थरीले पदार्थ, का बना है चील नॅब्युला जहाँ गैस और खगोलीय धूल के बादल में तारे बन रहे हैं खगोलीय धूल अंतरिक्ष में मिलने वाले वह कण होते हैं जो आकार में कुछ अणुओं के झुण्ड से लेकर ०.१ माइक्रोमीटर तक होते हैं। इस धूल में कई प्रकार के पदार्थ हो सकते हैं। खगोलीय धूल ब्रह्माण्ड में कई जगह मिलती है -.
एक काल्पनिक ग्रहीय मण्डल एक और काल्पनिक ग्रहीय मण्डल का नज़दीकी दृश्य - इसमें पत्थर, गैस और धूल अपने तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहें हैं ग्रहीय मण्डल किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। .
गैलीलियन चन्द्रमा (Galilean moons), गैलीलियो गैलीली द्वारा जनवरी 1610 में खोजे गए बृहस्पति के चार चन्द्रमा हैं। वे बृहस्पति के कई चन्द्रमाओं में से सबसे बड़े हैं और वें हैः आयो, युरोपा, गेनिमेड और कैलिस्टो। सूर्य और आठ ग्रहों को छोड़कर किसी भी वामन ग्रह से बड़ी त्रिज्या के साथ वें सौरमंडल में सबसे बड़े चंद्रमाओं में से है। तीन भीतरी चांद - गेनीमेड, यूरोपा और आयो एक 1: 2: 4 के कक्षीय अनुनाद में भाग लेते हैं। यह चारों चंद्रमा सन् 1609 और 1610 के बीच किसी समय खोजे गए जब गैलिलियो ने अपनी दूरबीन मे सुधार किया, जिसे उन्हे उन सूदूर आकाशीय पिंडो के प्रेक्षण के योग्य बनाया जिन्हे पहले कभी देखने की संभावना नहीं थी।Galilei, Galileo, Sidereus Nuncius.
हमारे सौर मण्डल के शनि ग्रह के मशहूर उपग्रहीय छल्ले बर्फ़ और धूल के बने हैं खगोलशास्त्र में उपग्रही छल्ला किसी ग्रह के इर्द गिर्द घूमता हुआ पत्थरों, धुल, बर्फ़ और अन्य पदार्थों का बना हुआ छल्ला होता है। हमारे सौर मण्डल में इसकी सबसे बड़ी मिसाल शनि की परिक्रमा करते हुए उसके छल्ले हैं। हमारे सौर मण्डल के अन्य तीन गैस दानव ग्रहों - बृहस्पति, अरुण और वरुण - के इर्द-गिर्द भी उपग्रहीय छल्ले हैं लेकिन उनकी संख्या और चौड़ाई शनि के छल्लों से कई कम है। .
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एक चित्रकार द्वारा कल्पनित किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा करता आदिग्रह चक्र आदिग्रह चक्र या प्रोटोप्लैनॅटेरी डिस्क या प्रॉपलिड एक नए जन्में तारे के इर्द-गिर्द घूमता घनी गैस का चक्र होता है। कभी-कभी इस चक्र में जगह-जगह पर पदार्थों का जमावड़ा हो जाने से पहले धूल के कण और फिर ग्रह जन्म ले लेते हैं। . चौदह संबंधोंः ट्रैपिस्ट-एक, परितारकीय चक्र, फ़ुमलहौत बी, बहिर्ग्रह, मलबा चक्र, शनि के छल्ले, शिशुग्रह, सौर मण्डल, सौर मंडल का गठन और विकास, खगोलशास्त्र से सम्बन्धित शब्दावली, खगोलीय धूल, ग्रहीय मण्डल, गैलीलियन चंद्रमा, उपग्रही छल्ला। ट्रैपिस्ट-एक , जिसे दोMASS Jदो करोड़ तीस लाख बासठ हज़ार नौ सौ अट्ठाईस-पाँच लाख दो हज़ार दो सौ पचासी भी नामांकित करा जाता है, कुम्भ तारामंडल के क्षेत्र में स्थित एक अतिशीतल बौना तारा है जो हमारे सौर मंडल के बृहस्पति ग्रह से ज़रा बड़ा है। यह सूरज से लगभग उनतालीस.पाँच प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। इसके इर्द-गिर्द एक ग्रहीय मंडल है और फ़रवरी दो हज़ार सत्रह तक इस मंडल में सात स्थलीय ग्रह इस तारे की परिक्रमा करते पाए गए थे जो किसी भी अन्य ज्ञात ग्रहीय मंडल से अधिक हैं। . SAO दो लाख छः हज़ार चार सौ बासठ नामक तारे के इर्द-गिर्द एक असाधारण परितारकीय चक्र है परितारकीय चक्र किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहे धूल, गैस, शिशुग्रहों, क्षुद्रग्रहों व अन्य पदार्थों के बने चक्र को कहते हैं। इस चक्र का आकार टॉरस-नुमा, छल्ले-नुमा या रोटी-नुमा होता है। नवजात तारों में इस चक्र में अव्यवस्थित सामग्री होती है जिस से आगे चलकर शिशुग्रह आदि जन्म सकते हैं, जबकि कुछ उम्र वाले तारो में इस चक्र मे शिशुग्रह होते हैं जिनसे ग्रह बन सकते हैं। . धूल के बादल में फ़ुमलहौत बी ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया फ़ुमलहौत तारे के इर्द-गिर्द की धूल में फ़ुमलहौत बी का एक काल्पनिक चित्र फ़ुमलहौत बी पृथ्वी से पच्चीस प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक ग़ैर-सौरीय ग्रह है जो दक्षिण मीन तारामंडल के फ़ुमलहौत तारे की परिक्रमा कर रहा है। इसे दो हज़ार आठ में हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गई तस्वीरों के ज़रिये ढूँढा गया था। यह अपने तारे की एक सौ पंद्रह खगोलीय इकाई की दूरी पर परिक्रमा कर रहा है। . धूल के बादल में फ़ुमलहौत बी ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया बहिर्ग्रह या ग़ैर-सौरीय ग्रह ऐसे ग्रह को कहा जाता है जो हमारे सौर मण्डल से बाहर स्थित हो। सन् एक हज़ार नौ सौ बानवे तक खगोलशास्त्रियों को एक भी ग़ैर-सौरीय ग्रह के अस्तित्व का ज्ञान नहीं था, लेकिन उसके बाद बहुत से ऐसे ग्रह मिल चुके हैं। चौबीस मई दो हज़ार ग्यारह तक पाँच सौ बावन ग़ैर-सौरीय ग्रह ज्ञात हो चुके थे। क्योंकि इनमें से अधिकतर को सीधा देखने के लिए तकनीकें अभी विकसित नहीं हुई हैं, इसलिए सौ प्रतिशत भरोसे से नहीं कहा जा सकता के वास्तव में यह सारे ग्रह मौजूद हैं, लेकिन इनके तारों पर पड़ रहे गुरुत्वाकर्षक प्रभाव और अन्य लक्षणों से वैज्ञानिक इनके अस्तित्व के बारे में विश्वस्त हैं। अनुमान लगाया जाता है के सूरज की श्रेणी के लगभग दस% तारों के इर्द-गिर्द ग्रह परिक्रमा कर रहे हैं, हालांकि यह संख्या उस से भी अधिक हो सकती है। कॅप्लर अंतरिक्ष क्षोध यान द्वारा एकत्रित जानकारी के बूते पर कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है के आकाशगंगा में कम-से-कम पचास अरब ग्रहों के होने की सम्भावना है। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने जनवरी दो हज़ार तेरह में अनुमान लगाया कि आकाशगंगा में इस अनुमान से भी दुगने, यानि एक सौ अरब, ग्रह हो सकते हैं। . फ़ुमलहौत तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा करता हुआ मलबा चक्र - मलबा चक्र किसी तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहा धूल और मलबे का परितारकीय चक्र होता है। कभी-कभी इस चक्र में सामग्री के एकीकरण से छल्ले बन जाते हैं, जैसा कि फ़ुमलहौत तारे के मलबे चक्र में देखा जाता है। मलबे चक्र नवजात और बूढ़े, दोनों प्रकार के तारों में देखे जा चुके हैं। एक न्यूट्रॉन तारे के इर्द-गिर्द भी मलबा चक्र परिक्रमा करता हुआ पाया गया है। मलबे चक्र उस समय बच जाते हैं जब आदिग्रह चक्र का काल ख़त्म होने पर ग्रह बन चुके हों और मलबा बचा हुआ हो। कभी-कभी शिशुग्रहों की टक्करों से भी मलबा चक्र बन सकते हैं। . शनि के छल्लों की तस्वीर - बाहरी "ए" छल्ले और भीतरी "बी" छल्ले के बीच की कैसिनी दरार साफ़ नज़र आ रही है शनि के छल्ले हमारे सौर मण्डल के सबसे शानदार उपग्रही छल्लों का गुट हैं। यह छोटे-छोटे कणों से लेकर कई मीटर बड़े अनगिनत टुकड़ों से बने हुए हैं जो सारे इन छल्लों का हिस्सा बने शनि की परिक्रमा कर रहें हैं। यह सारे टुकड़े अधिकतर पानी की बर्फ़ के बने हुए हैं जिनमें कुछ-कुछ धुल भी मिश्रित है। यह सारे छल्ले एक चपटे चक्र में एक के अन्दर एक हैं। इस चक्र में छल्लों के बीच कुछ ख़ाली छल्ले-रुपी अंतराल या दरारे भी हैं। इन में से कुछ दरारे तो इस चक्र में परिक्रमा करते हुए उपग्रहों ने बना लीं हैंः जहाँ इनकी परिक्रमा की कक्षाएँ हैं वहाँ इन्होने छल्लों में से मलबा हटा दिया है। लेकिन कुछ दरारों के कारण अभी वैज्ञानिकों को ज्ञात नहीं हैं। . हबल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा HD एक लाख इकतालीस हज़ार नौ सौ तैंतालीस और HD एक लाख इक्यानवे हज़ार नवासी नामक दो कम उम्र के तारों के इर्द-गिर्द के मलबा चक्र शिशुग्रह उन ठोस वस्तुओं को कहते हैं जो किसी तारे के इर्द-गिर्द के आदिग्रह चक्र या मलबा चक्र में बन रही होती हैं। . सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके एक सौ छयासठ ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं। सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। . सौरमंडल का गठन एक विशाल आणविक बादल के छोटे से हिस्से के गुरुत्वाकर्षण पतन के साथ चार.छः अरब साल पहले शुरू होने का अनुमान है। अधिकांश ढहा द्रव्यमान केंद्र में एकत्र हुआ, सूर्य को बनाया, जबकि बाकी एक प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क में चपट गया जिसमे से ग्रहों, चन्द्रमाओं, क्षुद्रग्रहों और अन्य छोटे सौरमंडलीय निकायों का निर्माण हुआ। . यह पृष्ठ खगोलशास्त्र की शब्दावली है। खगोलशास्त्र वह वैज्ञानिक अध्ययन है जिसका सबंध पृथ्वी के वातावरण के बाहर उत्पन्न होने वाले खगोलीय पिंडों और घटनाओं से होता है। . खगोलीय धूल का कण - यह कॉन्ड्राइट, यानि पत्थरीले पदार्थ, का बना है चील नॅब्युला जहाँ गैस और खगोलीय धूल के बादल में तारे बन रहे हैं खगोलीय धूल अंतरिक्ष में मिलने वाले वह कण होते हैं जो आकार में कुछ अणुओं के झुण्ड से लेकर शून्य.एक माइक्रोमीटर तक होते हैं। इस धूल में कई प्रकार के पदार्थ हो सकते हैं। खगोलीय धूल ब्रह्माण्ड में कई जगह मिलती है -. एक काल्पनिक ग्रहीय मण्डल एक और काल्पनिक ग्रहीय मण्डल का नज़दीकी दृश्य - इसमें पत्थर, गैस और धूल अपने तारे के इर्द-गिर्द परिक्रमा कर रहें हैं ग्रहीय मण्डल किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल। हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है। . गैलीलियन चन्द्रमा , गैलीलियो गैलीली द्वारा जनवरी एक हज़ार छः सौ दस में खोजे गए बृहस्पति के चार चन्द्रमा हैं। वे बृहस्पति के कई चन्द्रमाओं में से सबसे बड़े हैं और वें हैः आयो, युरोपा, गेनिमेड और कैलिस्टो। सूर्य और आठ ग्रहों को छोड़कर किसी भी वामन ग्रह से बड़ी त्रिज्या के साथ वें सौरमंडल में सबसे बड़े चंद्रमाओं में से है। तीन भीतरी चांद - गेनीमेड, यूरोपा और आयो एक एक: दो: चार के कक्षीय अनुनाद में भाग लेते हैं। यह चारों चंद्रमा सन् एक हज़ार छः सौ नौ और एक हज़ार छः सौ दस के बीच किसी समय खोजे गए जब गैलिलियो ने अपनी दूरबीन मे सुधार किया, जिसे उन्हे उन सूदूर आकाशीय पिंडो के प्रेक्षण के योग्य बनाया जिन्हे पहले कभी देखने की संभावना नहीं थी।Galilei, Galileo, Sidereus Nuncius. हमारे सौर मण्डल के शनि ग्रह के मशहूर उपग्रहीय छल्ले बर्फ़ और धूल के बने हैं खगोलशास्त्र में उपग्रही छल्ला किसी ग्रह के इर्द गिर्द घूमता हुआ पत्थरों, धुल, बर्फ़ और अन्य पदार्थों का बना हुआ छल्ला होता है। हमारे सौर मण्डल में इसकी सबसे बड़ी मिसाल शनि की परिक्रमा करते हुए उसके छल्ले हैं। हमारे सौर मण्डल के अन्य तीन गैस दानव ग्रहों - बृहस्पति, अरुण और वरुण - के इर्द-गिर्द भी उपग्रहीय छल्ले हैं लेकिन उनकी संख्या और चौड़ाई शनि के छल्लों से कई कम है। .
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दिग्विजय के गृह नगर राघोगढ़ में शनिवार (4 दिसंबर 2021) को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक सभा की थी। इसके कुछ ही देर बाद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने पूर्व सहयोगी पर तीखा प्रहार किया था। उन्होंने सिंधिया के विधायकों समेत कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने पर उन्हें 'गद्दार' बताया था।
बता दें कि गुना के मधुसूदनगढ़ के रघुनाथ गाँव और विदिशा जिले के मुंडेला गाँव में शनिवार को दिग्विजय सिंह ने सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2018 में हुए चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस की सरकार तो बन गई थी, लेकिन सिंधिया गद्दारी कर गए। सिंधिया जी कॉन्ग्रेस छोड़कर चले गए और एक-एक विधायक का 25-25 करोड़ रुपए ले गए। मैं इसका क्या करूँ, किसने सोचा था ऐसा होगा। दिग्विजय ने आगे कहा कि इतिहास इसका साक्षी है, जब कोई व्यक्ति गद्दारी करता है, तो पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी होती रहती है।
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दिग्विजय के गृह नगर राघोगढ़ में शनिवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक सभा की थी। इसके कुछ ही देर बाद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने पूर्व सहयोगी पर तीखा प्रहार किया था। उन्होंने सिंधिया के विधायकों समेत कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने पर उन्हें 'गद्दार' बताया था। बता दें कि गुना के मधुसूदनगढ़ के रघुनाथ गाँव और विदिशा जिले के मुंडेला गाँव में शनिवार को दिग्विजय सिंह ने सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में हुए चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस की सरकार तो बन गई थी, लेकिन सिंधिया गद्दारी कर गए। सिंधिया जी कॉन्ग्रेस छोड़कर चले गए और एक-एक विधायक का पच्चीस-पच्चीस करोड़ रुपए ले गए। मैं इसका क्या करूँ, किसने सोचा था ऐसा होगा। दिग्विजय ने आगे कहा कि इतिहास इसका साक्षी है, जब कोई व्यक्ति गद्दारी करता है, तो पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी होती रहती है।
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मिर्जापुर. यूपी के मिर्जापुर में पुलिस महकमे में तैनात अपर पुलिस अधिकारी संजय वर्मा के बेटे आदित्य वर्मा ने UPSC की परीक्षा में 200वीं रैंक हासिल की है. आदित्य वर्मा ने पहले ही प्रयास में देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किया. खास बात यह है कि आदित्य ने महज 22 वर्ष 6 महीने की उम्र में ही इस सफलता को हासिल किया. आदित्य वर्मा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई लखनऊ पब्लिक स्कूल से की. वहीं से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर दिल्ली चले गये, जहां से बीटेक किया.
आदित्य वर्मा ने एमटेक के बजाय संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की, जिसमें पहले प्रयास में ही उन्होंने सफलता हासिल किया. परीक्षा पास करने के बाद आदित्य वर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और मां को दिया. उन्होंने कहा कि उन्हीं की प्रेणना से यह उपलब्धि हासिल हुई है. आदित्य ने कहा कि पिता को पुलिस अधिकारी के रूप में गरीबों की सेवा करते हुए देखा तो वहीं से प्रेणना मिली कि आईपीएस बन कर देश सेवा करूं.
वहीं बेटे की सफलता पर परिवार काफी खुश है. अपर पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा ने कहा कि यह संघर्ष और मेहनत के बाद मिली सफलता है. मेरे पास इसके अलावा कुछ कहने के लिए शब्द नहीं है. उधर मां भी बेटे की सफलता से फूली नहीं समा रहीं. बता दें कि सोमवार शाम लोक सेवा आयोग ने यूपीएससी 2021 का परिणाम घोषित किया. पहले चार स्थानों पर बेटियों का कब्ज़ा रहा.
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मिर्जापुर. यूपी के मिर्जापुर में पुलिस महकमे में तैनात अपर पुलिस अधिकारी संजय वर्मा के बेटे आदित्य वर्मा ने UPSC की परीक्षा में दो सौवीं रैंक हासिल की है. आदित्य वर्मा ने पहले ही प्रयास में देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किया. खास बात यह है कि आदित्य ने महज बाईस वर्ष छः महीने की उम्र में ही इस सफलता को हासिल किया. आदित्य वर्मा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई लखनऊ पब्लिक स्कूल से की. वहीं से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर दिल्ली चले गये, जहां से बीटेक किया. आदित्य वर्मा ने एमटेक के बजाय संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की, जिसमें पहले प्रयास में ही उन्होंने सफलता हासिल किया. परीक्षा पास करने के बाद आदित्य वर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और मां को दिया. उन्होंने कहा कि उन्हीं की प्रेणना से यह उपलब्धि हासिल हुई है. आदित्य ने कहा कि पिता को पुलिस अधिकारी के रूप में गरीबों की सेवा करते हुए देखा तो वहीं से प्रेणना मिली कि आईपीएस बन कर देश सेवा करूं. वहीं बेटे की सफलता पर परिवार काफी खुश है. अपर पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा ने कहा कि यह संघर्ष और मेहनत के बाद मिली सफलता है. मेरे पास इसके अलावा कुछ कहने के लिए शब्द नहीं है. उधर मां भी बेटे की सफलता से फूली नहीं समा रहीं. बता दें कि सोमवार शाम लोक सेवा आयोग ने यूपीएससी दो हज़ार इक्कीस का परिणाम घोषित किया. पहले चार स्थानों पर बेटियों का कब्ज़ा रहा. .
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नई दिल्ली. RRB Group D admit card 2018: रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों पर तकनीकी गलतियों के कारण उम्मीदवार अपनी आरआरबी ग्रुप डी परीक्षा 2018 के ई-कॉल लैटर को डाउनलोड करने में असमर्थ थे. हालांकि, लिंक सक्रिय हो गए हैं. इसके अलावा आरआरबी ने एक नोट जारी करके स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 18, 19 और 20 सितंबर को है. उनको कंप्यूटर आधारित परीक्षण (सीबीटी) के लिए ईमेल के द्वारा परीक्षा केंद्र का विवरण, ई-कॉल पत्र को डाउनलोड और प्रिंट करने के लिंक भेजा गया है.
आरआरबी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वो ईमेल पर भेज गए लिंक के द्वारा अपने ई कॉल लेटर प्रिंट कर लें और मूल फोटो आईडी, पासपोर्ट आकार की फोटो के साथ परीक्षा केंद्र पर पहुंचे. इस बीच रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि वे 16 अक्टूबर के बाद आयोजित होने वाली ग्रुप डी परीक्षा के परीक्षा शहर, तिथि और शिफ्ट के बारे में जानकारी जारी कर देंगे, जब वेबसाइट सुचारू रूप से चलने लगेगी. बता दें कि 16 अक्टूबर के बाद आरआरबी ग्रुप डी परीक्षाओं की परीक्षा तिथि, शहर, कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जा.
आरआरबी ग्रुप डी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वो परीक्षा केंद्र पर किसी भी व्यक्तिगत कम्प्यूटेशनल डिवाइस, ब्लूटूथ डिवाइस, सेल फोन आदि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ना ले जाएं.
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नई दिल्ली. RRB Group D admit card दो हज़ार अट्ठारह: रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों पर तकनीकी गलतियों के कारण उम्मीदवार अपनी आरआरबी ग्रुप डी परीक्षा दो हज़ार अट्ठारह के ई-कॉल लैटर को डाउनलोड करने में असमर्थ थे. हालांकि, लिंक सक्रिय हो गए हैं. इसके अलावा आरआरबी ने एक नोट जारी करके स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों की परीक्षा अट्ठारह, उन्नीस और बीस सितंबर को है. उनको कंप्यूटर आधारित परीक्षण के लिए ईमेल के द्वारा परीक्षा केंद्र का विवरण, ई-कॉल पत्र को डाउनलोड और प्रिंट करने के लिंक भेजा गया है. आरआरबी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वो ईमेल पर भेज गए लिंक के द्वारा अपने ई कॉल लेटर प्रिंट कर लें और मूल फोटो आईडी, पासपोर्ट आकार की फोटो के साथ परीक्षा केंद्र पर पहुंचे. इस बीच रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि वे सोलह अक्टूबर के बाद आयोजित होने वाली ग्रुप डी परीक्षा के परीक्षा शहर, तिथि और शिफ्ट के बारे में जानकारी जारी कर देंगे, जब वेबसाइट सुचारू रूप से चलने लगेगी. बता दें कि सोलह अक्टूबर के बाद आरआरबी ग्रुप डी परीक्षाओं की परीक्षा तिथि, शहर, कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जा. आरआरबी ग्रुप डी परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वो परीक्षा केंद्र पर किसी भी व्यक्तिगत कम्प्यूटेशनल डिवाइस, ब्लूटूथ डिवाइस, सेल फोन आदि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ना ले जाएं.
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मुंबई, 26 मई (आईएएनएस)। सुपरस्टार सलमान खान की मशूहर फिल्म फ्रैंचाइजी 'दबंग' अब एक एनिमेटेड सीरीज के रूप में दिखाए जाने के लिए तैयार है।
सीरीज में सुपर कॉप चुलबुल पांडे (सलमान खान द्वारा निभाया गया किरदार) सहित छेदी सिंह (सोनू सूद द्वारा निभाया गया किरदार), रज्जो (सोनाक्षी सिंह) और प्रजापति जी (दिवंगत विनोद खन्ना द्वारा निभाया गया किरदार) भी एनिमेटेड अवतार में नजर आएंगे।
एनिमेशन स्टूडियो कॉस्मोस - माया को इस आगामी परियोजना के निर्माण करने के अधिकार मिले हैं।
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मुंबई, छब्बीस मई । सुपरस्टार सलमान खान की मशूहर फिल्म फ्रैंचाइजी 'दबंग' अब एक एनिमेटेड सीरीज के रूप में दिखाए जाने के लिए तैयार है। सीरीज में सुपर कॉप चुलबुल पांडे सहित छेदी सिंह , रज्जो और प्रजापति जी भी एनिमेटेड अवतार में नजर आएंगे। एनिमेशन स्टूडियो कॉस्मोस - माया को इस आगामी परियोजना के निर्माण करने के अधिकार मिले हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश विश्वभारती का संदेश पूरी दुनिया में फैला रहा है
शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा बड़ा देश है जो पेरिस समझौते के तहत निर्धारित पर्यावरण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी दुनिया में अग्रणी है
उन्होंने कहा कि विश्व भारती के लिए गुरुदेव की दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के विचार का सार है
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व कल्याण का रास्ता आत्मनिर्भर भारत के विचार से ही गुजरता
सुशासनदिवस पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के अवसर पर पूरे देश के साथसाथ मध्यप्रदेश में कल पच्चीस दिसम्बर को किसान कल्याण कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे
इसके पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित सुशासन के उच्चतम मापदण्डों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए आज सुशासन दिवस मनाया गया
भोपाल में सरकारी कार्यालयों ओर संस्थानों में कर्मचारियों और अधिकारियों ने सुशासन दिवस की शपथ ली
जबलपुर होशंगाबाद और आगर मालवा जिले में भी कर्मचारियों ने सुशासन की शपथ ली
प्रधानमंत्री किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वित्तीय लाभ की अगली किस्त जारी करेंगे
नौ करोड़ से अधिक लाभार्थी किसान परिवारों के खातों में अट्ठारह हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जाएगी
इस कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री छह राज्यों के किसानों से संवाद भी करेंगे
इस अवसर पर प्रधानमंत्री किसान निधि के अंतर्गत देश के लगभग नौ करोड़ किसानों के खाते में अट्ठारह हजार करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित करेंगे
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इसमें मध्यप्रदेश के अठहत्तर लाख किसान शामिल हैं
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में इस योजना में मध्यप्रदेश में दोदो हजार रुपये की दो अतिरिक्त किस्तें जोड़कर योजना में किसान को दस हजार रुपये वार्षिक दिए जाने का प्रावधान कर योजना की उपयोगिता बढ़ा दी गई है
मौसम प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है
हालांकि राजधानी भोपाल में तेज धूप के कारण तापमान में वृद्धि हुई है
दिन का तापमान सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा अट्ठाइस दशमलव तीन तक पहुंच गया
जबलपुर संवाददाता ने बताया है कि लगातार पांच दिनों से चल रही शीतलहर के कारण ठंड से शहरवासी हलाकान हैं
उत्तर से आ रही हवा की गति रुकने से जिले में फिलहाल दिन और रात का तापमान बढ़ा है
दिन का तापमान दो सौ इक्यानवे डिग्री दर्ज हुआ है
एक दिन पहले तापमान दो सौ पचासी डिग्री दर्ज हुआ था
दिन के अलावा रात का तापमान एक सौ नौ डिग्री दर्ज हुआ है
मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिन में हल्की बारिश की संभावना भी जताई है
होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी में पिछले तीन दिनों से तीन डिग्री पर रात का तापमान स्थिर बना हुआ है जिससे ठण्ड बरकरार है
कोरोना रिपोर्ट मध्यप्रदेश में कोविड उन्नीस से स्वास्थ्य हुए लोगो की संख्या कोविड पॉजिटिव मरीज़ों की संख्या से अधिक है
प्रदेश में सक्रिय कोविड मामलो में कमी आई है
प्रदेश में अब तक कुल दो लाख बीस हज़ार से अधिक मरीज़ संक्रमण से स्वस्थ्य हो चुके है
परीक्षा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अगले साल होने वाली दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है
एमपीबीएसई ने दो करोड़ दो लाख दो हज़ार इक्कीस सत्र से दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में तीस फीसदी प्रश्न ऑब्जेक्टिव रखने का फैसला लिया है
इसके साथ ही दीर्घउत्तरीय प्रश्नों को परीक्षा में नहीं शामिल करने का निर्णय लिया है
इस बात की जानकारी शिक्षा विभाग ने ट्वीट के जरिए दी है
नए पैटर्न के हिसाब से अब सभी विषयों में तीस फीसदी ऑब्जेक्टिव आधारित प्रश्न तीस फीसदी सब्जेक्टिव आधारित प्रश्न और चालीस फीसदी तार्किक प्रश्न होंगे
वहीं बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा की ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने की आखिरी तारीख भी बढ़ा दी है
अब अभ्यर्थी इकतीस दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे
एक अब कुछ समाचार संक्षेप में एक होशंगाबाद जिले में पिछले चौबिस घण्टे के दौरान कोरोना के अट्ठारह मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे
वहीं कोरोना के नौ नये पॉजिटिव मिले हैं
अब यहां कुल पॉजिटिव मामले तीन हज़ार पाँच सौ तेरह हो गए हैं जबकि तीन हज़ार तीन सौ निन्यानवे मरीज स्वस्थ हुए हैं
दो जबलपुर के पास पाटन में आज सुबह एक बस के अनियंत्रित होकर पलटने से हुए हादसे में चार लोगों की मृत्यु हो गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश विश्वभारती का संदेश पूरी दुनिया में फैला रहा है शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा बड़ा देश है जो पेरिस समझौते के तहत निर्धारित पर्यावरण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहा है प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी दुनिया में अग्रणी है उन्होंने कहा कि विश्व भारती के लिए गुरुदेव की दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के विचार का सार है प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व कल्याण का रास्ता आत्मनिर्भर भारत के विचार से ही गुजरता सुशासनदिवस पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के अवसर पर पूरे देश के साथसाथ मध्यप्रदेश में कल पच्चीस दिसम्बर को किसान कल्याण कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे इसके पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित सुशासन के उच्चतम मापदण्डों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए आज सुशासन दिवस मनाया गया भोपाल में सरकारी कार्यालयों ओर संस्थानों में कर्मचारियों और अधिकारियों ने सुशासन दिवस की शपथ ली जबलपुर होशंगाबाद और आगर मालवा जिले में भी कर्मचारियों ने सुशासन की शपथ ली प्रधानमंत्री किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वित्तीय लाभ की अगली किस्त जारी करेंगे नौ करोड़ से अधिक लाभार्थी किसान परिवारों के खातों में अट्ठारह हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जाएगी इस कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री छह राज्यों के किसानों से संवाद भी करेंगे इस अवसर पर प्रधानमंत्री किसान निधि के अंतर्गत देश के लगभग नौ करोड़ किसानों के खाते में अट्ठारह हजार करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित करेंगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इसमें मध्यप्रदेश के अठहत्तर लाख किसान शामिल हैं उन्होंने कहा कि किसानों के हित में इस योजना में मध्यप्रदेश में दोदो हजार रुपये की दो अतिरिक्त किस्तें जोड़कर योजना में किसान को दस हजार रुपये वार्षिक दिए जाने का प्रावधान कर योजना की उपयोगिता बढ़ा दी गई है मौसम प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है हालांकि राजधानी भोपाल में तेज धूप के कारण तापमान में वृद्धि हुई है दिन का तापमान सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा अट्ठाइस दशमलव तीन तक पहुंच गया जबलपुर संवाददाता ने बताया है कि लगातार पांच दिनों से चल रही शीतलहर के कारण ठंड से शहरवासी हलाकान हैं उत्तर से आ रही हवा की गति रुकने से जिले में फिलहाल दिन और रात का तापमान बढ़ा है दिन का तापमान दो सौ इक्यानवे डिग्री दर्ज हुआ है एक दिन पहले तापमान दो सौ पचासी डिग्री दर्ज हुआ था दिन के अलावा रात का तापमान एक सौ नौ डिग्री दर्ज हुआ है मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिन में हल्की बारिश की संभावना भी जताई है होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी में पिछले तीन दिनों से तीन डिग्री पर रात का तापमान स्थिर बना हुआ है जिससे ठण्ड बरकरार है कोरोना रिपोर्ट मध्यप्रदेश में कोविड उन्नीस से स्वास्थ्य हुए लोगो की संख्या कोविड पॉजिटिव मरीज़ों की संख्या से अधिक है प्रदेश में सक्रिय कोविड मामलो में कमी आई है प्रदेश में अब तक कुल दो लाख बीस हज़ार से अधिक मरीज़ संक्रमण से स्वस्थ्य हो चुके है परीक्षा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अगले साल होने वाली दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है एमपीबीएसई ने दो करोड़ दो लाख दो हज़ार इक्कीस सत्र से दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में तीस फीसदी प्रश्न ऑब्जेक्टिव रखने का फैसला लिया है इसके साथ ही दीर्घउत्तरीय प्रश्नों को परीक्षा में नहीं शामिल करने का निर्णय लिया है इस बात की जानकारी शिक्षा विभाग ने ट्वीट के जरिए दी है नए पैटर्न के हिसाब से अब सभी विषयों में तीस फीसदी ऑब्जेक्टिव आधारित प्रश्न तीस फीसदी सब्जेक्टिव आधारित प्रश्न और चालीस फीसदी तार्किक प्रश्न होंगे वहीं बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा की ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने की आखिरी तारीख भी बढ़ा दी है अब अभ्यर्थी इकतीस दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे एक अब कुछ समाचार संक्षेप में एक होशंगाबाद जिले में पिछले चौबिस घण्टे के दौरान कोरोना के अट्ठारह मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे वहीं कोरोना के नौ नये पॉजिटिव मिले हैं अब यहां कुल पॉजिटिव मामले तीन हज़ार पाँच सौ तेरह हो गए हैं जबकि तीन हज़ार तीन सौ निन्यानवे मरीज स्वस्थ हुए हैं दो जबलपुर के पास पाटन में आज सुबह एक बस के अनियंत्रित होकर पलटने से हुए हादसे में चार लोगों की मृत्यु हो गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए
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गोवा :- गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की प्रकृति बिगड़ने की खबर सामने आई है। शनिवार दिनभर गोवा में पर्रिकर की हालत को लेकर काफी अफ़वाए फैली थी। यहां तक की उनके कोमा में जाने की खबर ने काफी समय तक जोर पकड़ा था। लेकिन बताया गया है कि, पर्रिकर की तबियत में स्थिर है। फिलहाल वह अपनी आंखें खोलते है।
बता दे कि, पर्रिकर की देख रेख फिलहाल उनके निवास्थान पर की जा रही है। वह कृत्रिम रूप से सांस नहीं ले सकते है। मनोहर पर्रिकर को बिस्तर पर ही रहना पड़ता है। उनका रक्तचाप बहुत कम हो गया था । अब इसमें सुधार किया गया है। पिछले पंद्रह दिनों में, उनका रक्तचाप अतीत में दो बार बहुत कम हो गया था। हालांकि, उन्हें कृत्रिम ऑक्सीजन देने के बाद, उनकी स्थिति में सुधार हुआ। उन्हें अभी भी अक्सर कृत्रिम ऑक्सीजन देना पड़ता है। सुबह की तुलना में उनकी स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति चिंताजनक है।
इस बीच कांग्रेस ने इस मौके का फायदा उठाते हुए गोवा में सत्ता की स्थापना का दावा किया है। कांग्रेस का कहना है कि, पर्रिकर की तबियत बिगड़ने की वजह से वह सत्ता नहीं चला सकते इसलिए इनकी सरकार बर्खास्त कर हमें सत्ता स्थापना की अवसर दिया जाए। उन्होंने राज्यपाल मृदुला सिन्हा को चिट्ठी लिखकर गोवा में सरकार बनाने का दावा पेश किया।
सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने गोवा मुख्यमंत्री पद के लिए नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू कर दी है। जिसके लिए उन्होंने शनिवार रात गोवा भाजपा की बैठक भी हुई। गोवा में भाजपा विधायकों ने पार्टी नेताओं को मुख्यमंत्री यह विधायकों से हो ऐसी सलाह इस बैठक में हुई। भाजपा ने अपने सभी विधायकों को गोवा में ही रहने का निर्देश दिया हैं। विधायक को यह सुझाव दिया गया है कि, किसी को भी फुटबॉल मैच देखने के लिए मुंबई नहीं जाना है। सभी विधायकों को मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य की सुचना भाजपा कोर टीम द्वारा दी गई है।
गोवा के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय नेताओं की रविवार को विधायकों के साथ चर्चा करने की संभावना है। केंद्र के कुछ दिग्गज नेता आज गोवा में इस चर्चा में शामिल हो सकते है। इस समय गोवा के मित्रपक्ष के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई थी। तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा, गोमांत पार्टी और गोवा फ़ॉयर पार्टी के नेता के साथ चर्चा करेंगे।
राज्य मंत्री और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई ने शनिवार को पांच विधायकों के साथ पर्रिकर से उनके आवास पर मुलाकात की। इनमें तीन निर्दलीय विधायक रोहन खवाते, गोविंद गावड़े और प्रसाद गोनकर के साथ जयेश सलगांवकर और विनोद पालेकर शामिल थे।
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गोवा :- गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की प्रकृति बिगड़ने की खबर सामने आई है। शनिवार दिनभर गोवा में पर्रिकर की हालत को लेकर काफी अफ़वाए फैली थी। यहां तक की उनके कोमा में जाने की खबर ने काफी समय तक जोर पकड़ा था। लेकिन बताया गया है कि, पर्रिकर की तबियत में स्थिर है। फिलहाल वह अपनी आंखें खोलते है। बता दे कि, पर्रिकर की देख रेख फिलहाल उनके निवास्थान पर की जा रही है। वह कृत्रिम रूप से सांस नहीं ले सकते है। मनोहर पर्रिकर को बिस्तर पर ही रहना पड़ता है। उनका रक्तचाप बहुत कम हो गया था । अब इसमें सुधार किया गया है। पिछले पंद्रह दिनों में, उनका रक्तचाप अतीत में दो बार बहुत कम हो गया था। हालांकि, उन्हें कृत्रिम ऑक्सीजन देने के बाद, उनकी स्थिति में सुधार हुआ। उन्हें अभी भी अक्सर कृत्रिम ऑक्सीजन देना पड़ता है। सुबह की तुलना में उनकी स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति चिंताजनक है। इस बीच कांग्रेस ने इस मौके का फायदा उठाते हुए गोवा में सत्ता की स्थापना का दावा किया है। कांग्रेस का कहना है कि, पर्रिकर की तबियत बिगड़ने की वजह से वह सत्ता नहीं चला सकते इसलिए इनकी सरकार बर्खास्त कर हमें सत्ता स्थापना की अवसर दिया जाए। उन्होंने राज्यपाल मृदुला सिन्हा को चिट्ठी लिखकर गोवा में सरकार बनाने का दावा पेश किया। सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने गोवा मुख्यमंत्री पद के लिए नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू कर दी है। जिसके लिए उन्होंने शनिवार रात गोवा भाजपा की बैठक भी हुई। गोवा में भाजपा विधायकों ने पार्टी नेताओं को मुख्यमंत्री यह विधायकों से हो ऐसी सलाह इस बैठक में हुई। भाजपा ने अपने सभी विधायकों को गोवा में ही रहने का निर्देश दिया हैं। विधायक को यह सुझाव दिया गया है कि, किसी को भी फुटबॉल मैच देखने के लिए मुंबई नहीं जाना है। सभी विधायकों को मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य की सुचना भाजपा कोर टीम द्वारा दी गई है। गोवा के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय नेताओं की रविवार को विधायकों के साथ चर्चा करने की संभावना है। केंद्र के कुछ दिग्गज नेता आज गोवा में इस चर्चा में शामिल हो सकते है। इस समय गोवा के मित्रपक्ष के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई थी। तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा, गोमांत पार्टी और गोवा फ़ॉयर पार्टी के नेता के साथ चर्चा करेंगे। राज्य मंत्री और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई ने शनिवार को पांच विधायकों के साथ पर्रिकर से उनके आवास पर मुलाकात की। इनमें तीन निर्दलीय विधायक रोहन खवाते, गोविंद गावड़े और प्रसाद गोनकर के साथ जयेश सलगांवकर और विनोद पालेकर शामिल थे।
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मरीजों का उपचार करते हुए निपाह वायरस से संक्रमित होने के बाद कल जान गंवाने वाली नर्स लिनी पुतुसेरी के परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हुए फैसला किया है कि उनके पति को सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा उनके दोनों बच्चों को दस - दस लाख रूपये की मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया। सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि लिनी के पति सजीश को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी की पेशकश की जाएगी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से उनके दो और पांच वर्ष के बच्चों को दस - दस लाख रूपये प्रदान किए जाएंगे। लिनी के बच्चों के लिए जो राशि मंजूर की गई है उसमें से पांच-पांच लाख रूपये उनके बैंक खातों में जमा किए जाएंगे और बाकी के पांच - पांच लाख रूपये इस तरह से जमा किए जाएंगे कि अभिभावक उससे प्राप्त होने वाले ब्याज का इस्तेमाल बच्चों की जरूरत के लिए कर सकेंगे।
सरकार ने निपाह वायरस संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले अन्य नौ लोगों के परिजनों को भी पांच-पांच लाख रूपये देने का फैसला किया है। पेराम्ब्रा तालुका अस्पताल में काम करने वाली नर्स लिनी को यह संक्रमण शुरुआत के दिनों में अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीजों से हो गया था। बहरीन में काम करने वाले सजीश लिनी की बीमारी के बारे में सुनने के बाद उनकी मौत के दो दिन पहले पेराम्ब्रा आ गए थे। इस वायरस के कारण कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में दस लोगों की मौत हो चुकी है। अधिक जानकारियों के लिए यहाँ क्लिक करें।
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मरीजों का उपचार करते हुए निपाह वायरस से संक्रमित होने के बाद कल जान गंवाने वाली नर्स लिनी पुतुसेरी के परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हुए फैसला किया है कि उनके पति को सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा उनके दोनों बच्चों को दस - दस लाख रूपये की मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया। सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि लिनी के पति सजीश को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी की पेशकश की जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से उनके दो और पांच वर्ष के बच्चों को दस - दस लाख रूपये प्रदान किए जाएंगे। लिनी के बच्चों के लिए जो राशि मंजूर की गई है उसमें से पांच-पांच लाख रूपये उनके बैंक खातों में जमा किए जाएंगे और बाकी के पांच - पांच लाख रूपये इस तरह से जमा किए जाएंगे कि अभिभावक उससे प्राप्त होने वाले ब्याज का इस्तेमाल बच्चों की जरूरत के लिए कर सकेंगे। सरकार ने निपाह वायरस संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले अन्य नौ लोगों के परिजनों को भी पांच-पांच लाख रूपये देने का फैसला किया है। पेराम्ब्रा तालुका अस्पताल में काम करने वाली नर्स लिनी को यह संक्रमण शुरुआत के दिनों में अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीजों से हो गया था। बहरीन में काम करने वाले सजीश लिनी की बीमारी के बारे में सुनने के बाद उनकी मौत के दो दिन पहले पेराम्ब्रा आ गए थे। इस वायरस के कारण कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में दस लोगों की मौत हो चुकी है। अधिक जानकारियों के लिए यहाँ क्लिक करें।
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सत्यम कुमार/भागलपुर. श्रावण का पावन मेला शुरू हो गया है. ऐसे में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए यात्रा पर निकल गये हैं. इसमें कुछ ऐसे भक्त हैं जो दिव्यांग हैं, लेकिन फिर भी महादेव कृपा से अपनी भक्ति को दिखाने में किसी से पीछे नहीं हैं. ऐसे भी एक शिव भक्त उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के दिवाकर कुमार हैं. दिवाकर एक पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन वो भी सुल्तानगंज से जल भर कर बाबा नगरी झारखंड के देवघर के लिए चल पड़े हैं. दिवाकर बैसाखी के सहारे, मन में दृढ़ इच्छा लिये और श्रद्धा भक्ति लिए इस यात्रा पर निकले हैं. उन्होंने कहा कि हमें बाबा भोलेनाथ को जलाभिषेक करना है. यह संकल्प लिए बाबा के दरबार की यात्रा करने निकल गया हूं.
देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ की ओर रवाना हो रहे हैं. भक्तों की अटूट भक्ति कांवरिया पथ पर देखने को मिल रही है. बिहार समेत देश भर से शिव भक्त बोल बम के जयकारे के साथ देवघर जा रहे हैं. यूपी के चित्रकूट से आए दिव्यांग कांवरिया दिवाकर कुमार भी अन्य शिव भक्तों की तरह गंगाजल भर कर देवघर के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 13 साल से हम लगातार बाबा को जल अर्पण करने आ रहे हैं.
एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद हमारा बाबा भोले के प्रति अटूट श्रद्धा है. इसलिए हम प्रत्येक साल बाबा को जल अर्पण करते हुए आते हैं. रास्ते में कोई परेशानी नहीं होती है. बाबा भोलेनाथ हमारे दुख को समझते हैं और मेरा रास्ता आसान करते हैं. दिव्यांग शिव भक्त कांवरिया ने कहा कि जलाभिषेक करने में हमलोगों को परेशानी होती है. अगर प्रशासन सहयोग करें तो हमलोग भगवान भोलेनाथ को अच्छे से जलाभिषेक कर पाएंगे.
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सत्यम कुमार/भागलपुर. श्रावण का पावन मेला शुरू हो गया है. ऐसे में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए यात्रा पर निकल गये हैं. इसमें कुछ ऐसे भक्त हैं जो दिव्यांग हैं, लेकिन फिर भी महादेव कृपा से अपनी भक्ति को दिखाने में किसी से पीछे नहीं हैं. ऐसे भी एक शिव भक्त उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के दिवाकर कुमार हैं. दिवाकर एक पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन वो भी सुल्तानगंज से जल भर कर बाबा नगरी झारखंड के देवघर के लिए चल पड़े हैं. दिवाकर बैसाखी के सहारे, मन में दृढ़ इच्छा लिये और श्रद्धा भक्ति लिए इस यात्रा पर निकले हैं. उन्होंने कहा कि हमें बाबा भोलेनाथ को जलाभिषेक करना है. यह संकल्प लिए बाबा के दरबार की यात्रा करने निकल गया हूं. देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ की ओर रवाना हो रहे हैं. भक्तों की अटूट भक्ति कांवरिया पथ पर देखने को मिल रही है. बिहार समेत देश भर से शिव भक्त बोल बम के जयकारे के साथ देवघर जा रहे हैं. यूपी के चित्रकूट से आए दिव्यांग कांवरिया दिवाकर कुमार भी अन्य शिव भक्तों की तरह गंगाजल भर कर देवघर के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले तेरह साल से हम लगातार बाबा को जल अर्पण करने आ रहे हैं. एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद हमारा बाबा भोले के प्रति अटूट श्रद्धा है. इसलिए हम प्रत्येक साल बाबा को जल अर्पण करते हुए आते हैं. रास्ते में कोई परेशानी नहीं होती है. बाबा भोलेनाथ हमारे दुख को समझते हैं और मेरा रास्ता आसान करते हैं. दिव्यांग शिव भक्त कांवरिया ने कहा कि जलाभिषेक करने में हमलोगों को परेशानी होती है. अगर प्रशासन सहयोग करें तो हमलोग भगवान भोलेनाथ को अच्छे से जलाभिषेक कर पाएंगे. .
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यूपी। मुरादाबाद के मूढा पांडेय थाना क्षेत्र के मुकुटपुरा अहरौला गांव में गुरुवार रात शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान गोली लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गईं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मृतकों में एक लड़की पक्ष वालों की रिश्तेदार थी। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो महिलाओं की मौत से खुशी का माहौल गम में तब्दील हो गया। गम के माहौल में सात फेरे संपन्न हुए। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मूढा पांडेय थाना क्षेत्र के मुकुटपुरा अहरौला गांव में जसवीर की पोती की शादी थी। देर रात जयमाल कार्यक्रम चल रहा था, तभी युवकों ने तमंचे से ताबड़तोड़ फायरिंग करना शुरू कर दिया। आरोप है कि, फायरिंग करने वाले सभी लोग शराब के नशे में थे। फायरिंग के दौरान वहां वरमाला देख रहीं गांव की कुसुम व रिश्तेदार रुसुम समेत 6 लोगों को गोली लग गई। इस पर चीख-पुकार मच गई। लोगों ने तत्काल सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने कुसुम व रुसुम को मृत घोषित कर दिया। जबकि, घायल शिवानी, राजकुमारी, राजवती, सोमवती का इलाज चल रहा है।
हर्ष फायरिंग में दो महिलाओं की मौत के बाद शादी समारोह की खुशी गम में बदल गई। वरमाला के बाद जैसे-तैसे सात फेरे निपटाए गए। इसके बाद बारात भी विदा कर दी गई। वहीं, इस मामले में पुलिस ने मृतका कुसुम के पति फूल सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में गांव के जसवीर व कृष्णपाल को गिरफ्तार किया है।
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यूपी। मुरादाबाद के मूढा पांडेय थाना क्षेत्र के मुकुटपुरा अहरौला गांव में गुरुवार रात शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान गोली लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गईं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मृतकों में एक लड़की पक्ष वालों की रिश्तेदार थी। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो महिलाओं की मौत से खुशी का माहौल गम में तब्दील हो गया। गम के माहौल में सात फेरे संपन्न हुए। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मूढा पांडेय थाना क्षेत्र के मुकुटपुरा अहरौला गांव में जसवीर की पोती की शादी थी। देर रात जयमाल कार्यक्रम चल रहा था, तभी युवकों ने तमंचे से ताबड़तोड़ फायरिंग करना शुरू कर दिया। आरोप है कि, फायरिंग करने वाले सभी लोग शराब के नशे में थे। फायरिंग के दौरान वहां वरमाला देख रहीं गांव की कुसुम व रिश्तेदार रुसुम समेत छः लोगों को गोली लग गई। इस पर चीख-पुकार मच गई। लोगों ने तत्काल सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने कुसुम व रुसुम को मृत घोषित कर दिया। जबकि, घायल शिवानी, राजकुमारी, राजवती, सोमवती का इलाज चल रहा है। हर्ष फायरिंग में दो महिलाओं की मौत के बाद शादी समारोह की खुशी गम में बदल गई। वरमाला के बाद जैसे-तैसे सात फेरे निपटाए गए। इसके बाद बारात भी विदा कर दी गई। वहीं, इस मामले में पुलिस ने मृतका कुसुम के पति फूल सिंह की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में गांव के जसवीर व कृष्णपाल को गिरफ्तार किया है।
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अपकमिंग फिल्म बैल बॉटम का पहला सॉन्ग Marjaawaan रिलीज़ हो चुका है। इस गाने में अक्षय कुमार और वाणी कपूर नजर आ रहे हैं। दोनों की लवस्टोरी को दिखाया गया है। फिल्म में वाणी कपूर, अक्षय कुमार की पत्नि के रोल में नज़र आएंगी।इस गाने को गुरनज़र और असीस कौर ने गाया है। गाने के लिरिक्स भी गुरनज़र सिंह ने लिखे हैें और कम्पोजर भी वही हैं। इसका म्यूजिक गौरव देव और कार्तिक देव ने दिया है।हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ किया गया था जिसमें दिखाया गया था कि कुछ आतंकवादी एक फ्लाइट को हाइजेक कर लेते हैं जिसके बाद बैल बॉटम यानी की अक्षय कुमार को मिशन के लिए पीएम ऑफिस बुलाया जाता है।फिल्म में अक्षय एक म्यूजिक टीजर होते हैं जो हिंदी, इंग्लिश और जर्मन बोल लेते हैं। नेशनल लेवल चैस प्लेयर होते हैं। उनकी शार्प मेमोरी होती है। साथ ही फ्रेंच भाषा भी सिखाते हैं।इस फिल्म में अक्षय कुमार और वाणी कपूर के अलावा हुमा कुरैशी, लारा दत्ता, अनिरुध दवे नज़र आने वाले हैं।फिल्म 19 अगस्त को 2डी और 3डी थिएटर में रिलीज़ की जाएगी।
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अपकमिंग फिल्म बैल बॉटम का पहला सॉन्ग Marjaawaan रिलीज़ हो चुका है। इस गाने में अक्षय कुमार और वाणी कपूर नजर आ रहे हैं। दोनों की लवस्टोरी को दिखाया गया है। फिल्म में वाणी कपूर, अक्षय कुमार की पत्नि के रोल में नज़र आएंगी।इस गाने को गुरनज़र और असीस कौर ने गाया है। गाने के लिरिक्स भी गुरनज़र सिंह ने लिखे हैें और कम्पोजर भी वही हैं। इसका म्यूजिक गौरव देव और कार्तिक देव ने दिया है।हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ किया गया था जिसमें दिखाया गया था कि कुछ आतंकवादी एक फ्लाइट को हाइजेक कर लेते हैं जिसके बाद बैल बॉटम यानी की अक्षय कुमार को मिशन के लिए पीएम ऑफिस बुलाया जाता है।फिल्म में अक्षय एक म्यूजिक टीजर होते हैं जो हिंदी, इंग्लिश और जर्मन बोल लेते हैं। नेशनल लेवल चैस प्लेयर होते हैं। उनकी शार्प मेमोरी होती है। साथ ही फ्रेंच भाषा भी सिखाते हैं।इस फिल्म में अक्षय कुमार और वाणी कपूर के अलावा हुमा कुरैशी, लारा दत्ता, अनिरुध दवे नज़र आने वाले हैं।फिल्म उन्नीस अगस्त को दोडी और तीनडी थिएटर में रिलीज़ की जाएगी।
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लेना-देना नही है। परपरागत पाठ्यक्रम पुराना पड गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति राजनीतिक होती है। वह बिलकुल नही जानता कि बच्चो पर क्या गुजरती है। कोई भी ऐरा- गैरा अपने सुझाव दे देता है और उस विषय को पाठ्क्रम मे शामिल कर लिया जाता है। इससे स्कूली बच्चो के पहले से दबे कधो पर और भी बोझ बढ़ जाता है। उन्हें स्कूल या घर पर कोई मार्गदर्शन नही मिलता। बच्चो, शिक्षको व अभिभावको के बीच कोई सामजस्य नही होता । वह रिश्ता तो काफी पहले ही
मर गया।
आज की शिक्षा स्कूली बच्चो के शोषण के अलावा कुछ नही है। विख्यात शिक्षा विशेषज्ञ स्वर्गीय राम जोशी ने प्रणाली की पुन सरचना के लिए सभी शिक्षा संस्थानो को एक साल के लिए बद करने का सुझाव दिया था। हालाँकि यह सभव नही हो सकता, पर अब बच्चो को शिक्षा के बोझ से धीरे-धीरे निजात देने का समय आ गया है। उन्हे कॉपियो और किताबो से छूट मिलनी ही चाहिए। उन्हें केवल स्कूल के समय में ही पढाया जाना चाहिए। यदि चाहो, तो स्कूल का समय आधा घंटा बढा दो । उन्हे किताब-कॉपियॉ स्कूल के डेस्क में ही बद करने दो और तितलियो की तरह उडते हुए घर जाने दो। बच्चो को उनका बचपन वापस मिल जाएगा। माँ को बच्चो को कुछ सिखाने का समय मिल जाएगा और पिता को भी गर्व होगा।
परीक्षा होने दो । पर रैक मिलने की गलाकाट स्पर्धा नही होनी चाहिए। उसका कोई मतलब नही है। एसएससी का टॉपर, बी कॉम के तृतीय वर्ष में फेल हो सकता है। गाँव मे वैलगाडियो की दौड की याद है ? बैलो को आगे निकलने के लिए कोडे मारे जाते है । विजेता बैल वापस लौटते है । ट्रॉफी बैल के मालिक को दी जाती है, बैल को नही। सभी शिक्षा संस्थानो को इस चूहा दौड से बाहर आना चाहिए और बच्चो को उनका बचपन और पिताओ को उनका पितृत्व वापस मिलना ही चाहिए। मॉ एक माँ ही रहनी चाहिए।
अलका धाडीवाल
जीवन की मुश्किल राहो को
आसान बनाना सिखाया मेरे पापा ने ।। १ ।। कर्म ही कर्म
धर्म भी है सिखाया मेरे पापा ने ।।२।।
जीवन की
दो राहो मे चुनना मार्ग सत्य का सिखाया मेरे पापा ने ।।३।। मुश्किले तुम्हारीपरीक्षा है, धैर्य न खोनासिखाया,
कभी न भूलेगी
वो बाते
काम री हो पूछ है
झूठ नही
हर परिस्थिति में समझौता, वो पाणी मुलतान गयो,
कैया कुम्हार गधे नही चढे, अक्ल शरीग उपजे ॥ ५ ॥
विद्वत् खण्ड/ ४९,
7 इन्द्रकुमार कठोतिया
जैन धर्म से अनुप्रेरित शासक : जयसिंह सिद्धराज और उसकी मुद्राएँ
महान जैन धर्म से प्रभावित होकर न जाने कितने ही भारतीय नरेशो ने या तो जैन धर्म को अगीकार किया अथवा उसके प्रचारप्रसार और उत्थान में अपना महनीय योगदान दिया। अनहिलपाटण अथवा अनहिलवाद या अनहिलपुरा (गुजरात) के चालूक्यवशीय (सोलकी) जयसिह सिद्धराज (विक्रम संवत् ११५० - ११९९ तद्नुसार ई० सन् १०९४-१९४४) उन्ही राजाओ मे से एक था।
गुजरात के चालूक्यवशीय राजाओ के लगभग साढे तीन सौ वर्षों के इतिहास मे (९६१-१३४० ई०) जैनधर्म एव तत्सम्बन्धी साहित्य का अविच्छिन्न एव द्रुत गति से विकास हुआ । जैन लेखक राजघरानो एव प्रशासन से जुड़े रहे जिसमे उनके द्वारा रचित साहित्य से हमे तत्कालीन परिस्थितियो, घटनाओ एव राजनैतिक वातावरण का अविकल एव अक्षरस ज्ञान प्राप्त होता है । मूलराजा से लेकर अन्तिम राजा तक इस राजघराने की राजधानी अनहिलपताका अथवा अनहिलपुरा या अनहिलपाटण ही बनी रही । १
जयसिंह कर्ण एव मायानल्लादेवी का पुत्र था । मायानल्ला चद्रपुर के कदव राजा जयकेशी की पुत्री थी । २ "प्रबध चिंतामणि" के अनुसार यह जयकेशी 'शुभकेशी' का पुत्र था जो कर्णाटक का राजा था। हमे यह ज्ञात है कि शुभकेशी गोवा के कदव राजघराने का तीसरा अधिष्ठाता शष्ठदेव था । ऐसा समझा जाता है कि
विद्वत खण्ड / ५०
जयसिह के नाना जयकेशी कोकण के राजा थे जिसकी राजधानी आधुनिक गोवा थी । जयसिंह की माँ एक महान स्त्री थी । जयसिंह के आरम्भिक जीवन को सँवारने का पूर्ण श्रेय उन्ही को जाता है। राजा कर्ण की मृत्यु के उपरान्त मायानल्ला देवी ने मंत्री शातु की निगरानी मे जयसिह को शस्त्र विद्या की शिक्षा दिलवायी । ३ मायानल्ला देवी ने एक दीर्घ जीवन जीया और अपने पुत्र की उदीयमान जीवन यात्रा को निकटता से देखा। हेमचन्द्राचार्य अपने 'देव्याश्रय काव्य' मे लिखते है कि जयसिह बढती उम्र के साथ युद्ध-कला एव शासन-व्यवस्था में निपुण होता गया। हाथियो तक को वश मे कर लेने की कला भी वो जानने लगा था। तरुण अवस्था को प्राप्त करते ही उसका राज्याभिषेक कर दिया गया। यह औपचारिकता वि० स० ११५० पौष मास मे सम्पन्न की गई । ४ 'प्रबन्ध चिन्तामणि' के अनुसार उसका राज्यकाल उनचास वर्ष (वि० स० ११५० से ११९९ तद्नुसार १०९४ से ११४३ ई० ) था । ५ 'विचार श्रेणी' भी इसी तथ्य का प्रतिपादन करती है परन्तु 'आइने अकबरी' के अनुसार जयसिह ने पचास वर्षो तक राज्य किया।७ इस उल्लेख का अनुमोदन वि० स० १२०० (११४४ ई०) के बाली पाषाण शिलालेख से भी होता है।
'प्रबन्ध चिन्तामणि' के अनुसार 'कर्ण' जयसिह का राज्याभिषेक करके 'आशापल्लि' के विजय अभियान के निमित्त चला गया और विजयोपरान्त वही पर कर्णावटी नामक नगरी बसा कर स्वय राज्य करने लगा । ९
जयसिह जब राज्यारूढ हुआ तब अनहिलपाटण की राजनैतिक और भौगोलिक स्थिति उतनी सुदृढ नही थी । उसके पूर्वज मूलराज से लेकर भीम तक - शाकभरी, सिध, नाडूला, मालवा, सौराष्ट्र, लाट, कच्छ और अबूंद मडल के नरेशो से युद्ध करते रहे थे परन्तु अन्तिम तीन क्षेत्र ही उनके अधिपत्य मे आ पाए।
जयसिह बडा ही जीवट का योद्धा था। उसने जो कुछ भी अपने पूर्वजो से प्राप्त किया उसको विस्तृत करते हुए एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की और गुजरात की कीर्ति को चहुँ ओर फैलाया। कई जैन सूत्रो से हमे विदीत होता है कि जयसिह गुजरात साम्राज्य का 'साभर' से कोकण सीमा रेखा तक निर्विवाद राजा वन गया था। उसके साम्राज्य मे आधुनिक गुजरात - लाट, सौराष्ट्र, कच्छ सहित राजस्थान के कुछ भूभाग, मालवा एव मध्य भारत निहित थे।
जयसिंह का सर्वप्रथम महत्वपूर्ण कार्य 'मालवा विजय' के साथ आरम्भ हुआ। कहते है जयसिह के आरम्भिक राज्यत्वकाल मे परमार नरेश नरवर्मन ने अनहिल पाटण पर चढाई कर दी थी । यह
घटना तब घटित हुई बताई जाती है जब जयसिह अपनी माता मायानल्ला देवी के सग सोमनाथ की तीर्थ यात्रा पर गया हुआ था। उसके मुख्यमंत्री शातु को आक्राता के साथ अपमानजनक शर्तो पर सधि करनी पडी। तीर्थ यात्रा से लौटने के उपरान्त जयसिह ने इसका बदला मालवा पर जीत हासिल करके लिया। नरवर्मन के साथ हुए युद्ध का वर्णन जैन वाङ्गमय मे बड़े विस्तार से किया है। इनमे मे जयसिह सूरि रचित 'कुमार पाल चरित', जिनमण्डलगणि रचित 'कुमारपाल प्रबन्ध' तथा राजशेखर कृत 'प्रबन्ध कोष' प्रमुख है । इन काव्यो से यह जानकारी प्राप्त होती है कि इस युद्ध मे जयसिंह ने नरवर्मन को बदी बना लिया था। इन रचनाओ से पूर्व की एक कृति 'कीर्ति कौमुदी' से जानकारी मिलती है कि जयसिह ने नरवर्मन की धा नगरी पर अपनी विजय प्राप्त कर ली। इन साहित्यिक रचनाओ क अतिरिक्त हमे कतिपय शिलालेखो से भी इस महत्वपूर्ण विजय की जानकारी मिलती है। 'तालवार' शिलालेख से इस विषय पर प्रकाश पडता है कि जयसिह ने नरवर्मन का मानमर्दन कर दिया था । इसी प्रकार ललवाडा के गणपति मूर्ति लेख से पता चलता है कि जयसिंह ने नरवर्मन के घमड को चूर-चूर कर दिया । १० दोहड स्तभ-शिलालेख से ज्ञात होता है कि जयसिह ने मालवा के राजा को कैद कर लिया था । ११ जैन साधु जयमगल द्वारा रचित 'शुध शैल-शिलालेख' से ज्ञात होता है कि इस युद्ध मे नाडूल चाहमान अशराज ने जयसिह का साथ दिया था । १२ कुमारपाल की बडनगर प्रशस्ति मे भी इस कथानक का उल्लेख है कि किस तरह जयसिह ने मालवा के राजा का मानमर्दन किया था । १३
लगता है इस मालवा-विजय के उपलक्ष मे ही जयसिह ने 'महाराजाधिराज परमेश्वर' १४ एव 'त्रिभुवन गण्ड १५ की उपाधियाँ धारण की ।
जयसिह का द्वितीय महत्वपूर्ण युद्ध सौराष्ट्र के साथ हुआ । आ० हेमचन्द्र ने 'सिद्ध-हेम-व्याकरण' मे सौराष्ट्र विजय का वर्णन किया है। १६ 'कीर्ति कौमुदी' के अनुसार जयसिह ने शक्तिशाली सौराष्ट्र के 'खेगार' को युद्ध मे परास्त किया । १७ 'विविध तीर्थ कल्प' मे भी राजा का नाम 'खेगार राय' उल्लिखित है । १८ इसी प्रकार 'पुरातन प्रबन्ध सग्रह' मे भी इस युद्ध का उल्लेख किया गया है। १८ 'प्रवन्ध चिन्तामणि' के अनुसार जयसिह ने सौराष्ट्र के प्रबन्धन हेतु 'सज्जन' को अपना 'दण्डाधिपति' अथवा 'राज्यपाल' नियुक्त किया । २० जयसिह के राज्यत्वकालीन वि०स० ११९६ के दोहड शिलालेख मे भी यह उल्लिखित है कि उसने सौराष्ट्र के राजा को चदी बनाकर कारावास मे वद कर दिया था । २१ 'प्रवध चिन्तामणि' के सूत्रों से यह तो स्पष्ट हो हो जाता है कि सौराष्ट्र पर विजय ई०
११२५-२६ से पूर्व कभी भी हुई होगी । से
जयसिह की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अनार्य राक्षस राजा 'बरबरक' पर विजय प्राप्ति था । इस उपलब्धि के पश्चात् ही उसे 'सिद्धराजा' की उपाधि से विभूषित किया गया । २२ इसी विजयप्राप्ति के पश्चात् उसे 'बरबरक जिष्णु' का विरूद भी प्राप्त हुआ। उज्जैन के वि०स० ११९६ के खण्डयुक्त पाषाण शिलालेख मे इसका स्पष्ट उल्लेख हुआ है । २३ इस युद्ध विषयक वर्णन जैन कृति 'वाग भट्टालकार' २४ मे भी गुम्फित है। 'प्रबन्ध कोष' से हमे चन्देल 'मदनवर्मन' के साथ उसकी राजधानी 'महोबा' के लिए हुए युद्ध विषयक जानकारी प्राप्त होती है। अन्तत जयसिह ने, छियानवे करोड स्वर्ण मुद्राएँ प्राप्त कर युद्ध को समाप्त किया । 'कालीजर' के 'पाषाण शिलालेख' से भी उपर्युक्त घटना पर प्रकाश पडता है (जनरल ऑफ एसियाटिक सोसाइटी, १८४८ )।
हेमचन्द्राचार्य कृत 'चडोनुशासन' २५ तथा वागभट्ट कृत अलकार के लेखन से उजागर होता है कि जयसिह ने सिधुराज को युद्ध मे हराया था। 'वाग भट्टलकार' के टीकाकार सिंह देवगणि लिखते है कि वह 'सिधुदेशधीप' अर्थात् सिंध का शासक था। जयसिह के ११४० ई० के 'दोहड शिलालेख' मे इस युद्ध के विषय मे उल्लेख किया गया है । २६
सपादलक्ष के 'आनक राजा' (अर्णोराजा) (११३९-११५३ ई०) का वर्णन 'प्रबन्ध चिन्तामणि' मे किया गया है। उसने अर्णोराजा से लाखो वसूल करके छोड़ा। २७ साभर से प्राप्त एक शिलालेख मे भी यह उल्लिखित है कि 'आनक' जयसिंह के अधीन हो गया था । २८
इसी प्रकार जयसिह के दक्षिण भारतीय अभियान के विषय मे भी हमे 'जिन मडन गिरी' कृत 'कुमारपाल-प्रवन्ध' से ज्ञात होता है। २९ एक हस्तलिखित जैन ग्रन्थ से जयसिंह के 'देवगिरी' अभियान के विषय में जानकारी मिलती है। वहाँ से जयसिंह 'पेटान' की ओर अग्रसर हो गया जहाँ के राजा ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। 'कल्याण कटक' मे उस समय 'विक्रमादित्य-पप्ठ' का स्वामित्व था। इसका विरूद 'परमार्दी' था । जयसिंह के 'तालवार शिलालेख' मे परमार्दी के हार जाने का उल्लेख किया गया है। 'कोल्हापुर प्रवध चिन्तामणि' के मर्गों से हमे जयसिंह का उस क्षेत्र मे अधिकार होने का पता चलता है।
इस तरह उपर्युक्त लगभग दस युद्धो में विजय प्राप्त कर जयसिंह एक मान्यताप्राप्त योद्धा दन गया था और अपने बाहुबल वह निर्विवादित रूप से साभर से कोकण तक का एक चुका था।
विद्रुत उ
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लेना-देना नही है। परपरागत पाठ्यक्रम पुराना पड गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति राजनीतिक होती है। वह बिलकुल नही जानता कि बच्चो पर क्या गुजरती है। कोई भी ऐरा- गैरा अपने सुझाव दे देता है और उस विषय को पाठ्क्रम मे शामिल कर लिया जाता है। इससे स्कूली बच्चो के पहले से दबे कधो पर और भी बोझ बढ़ जाता है। उन्हें स्कूल या घर पर कोई मार्गदर्शन नही मिलता। बच्चो, शिक्षको व अभिभावको के बीच कोई सामजस्य नही होता । वह रिश्ता तो काफी पहले ही मर गया। आज की शिक्षा स्कूली बच्चो के शोषण के अलावा कुछ नही है। विख्यात शिक्षा विशेषज्ञ स्वर्गीय राम जोशी ने प्रणाली की पुन सरचना के लिए सभी शिक्षा संस्थानो को एक साल के लिए बद करने का सुझाव दिया था। हालाँकि यह सभव नही हो सकता, पर अब बच्चो को शिक्षा के बोझ से धीरे-धीरे निजात देने का समय आ गया है। उन्हे कॉपियो और किताबो से छूट मिलनी ही चाहिए। उन्हें केवल स्कूल के समय में ही पढाया जाना चाहिए। यदि चाहो, तो स्कूल का समय आधा घंटा बढा दो । उन्हे किताब-कॉपियॉ स्कूल के डेस्क में ही बद करने दो और तितलियो की तरह उडते हुए घर जाने दो। बच्चो को उनका बचपन वापस मिल जाएगा। माँ को बच्चो को कुछ सिखाने का समय मिल जाएगा और पिता को भी गर्व होगा। परीक्षा होने दो । पर रैक मिलने की गलाकाट स्पर्धा नही होनी चाहिए। उसका कोई मतलब नही है। एसएससी का टॉपर, बी कॉम के तृतीय वर्ष में फेल हो सकता है। गाँव मे वैलगाडियो की दौड की याद है ? बैलो को आगे निकलने के लिए कोडे मारे जाते है । विजेता बैल वापस लौटते है । ट्रॉफी बैल के मालिक को दी जाती है, बैल को नही। सभी शिक्षा संस्थानो को इस चूहा दौड से बाहर आना चाहिए और बच्चो को उनका बचपन और पिताओ को उनका पितृत्व वापस मिलना ही चाहिए। मॉ एक माँ ही रहनी चाहिए। अलका धाडीवाल जीवन की मुश्किल राहो को आसान बनाना सिखाया मेरे पापा ने ।। एक ।। कर्म ही कर्म धर्म भी है सिखाया मेरे पापा ने ।।दो।। जीवन की दो राहो मे चुनना मार्ग सत्य का सिखाया मेरे पापा ने ।।तीन।। मुश्किले तुम्हारीपरीक्षा है, धैर्य न खोनासिखाया, कभी न भूलेगी वो बाते काम री हो पूछ है झूठ नही हर परिस्थिति में समझौता, वो पाणी मुलतान गयो, कैया कुम्हार गधे नही चढे, अक्ल शरीग उपजे ॥ पाँच ॥ विद्वत् खण्ड/ उनचास, सात इन्द्रकुमार कठोतिया जैन धर्म से अनुप्रेरित शासक : जयसिंह सिद्धराज और उसकी मुद्राएँ महान जैन धर्म से प्रभावित होकर न जाने कितने ही भारतीय नरेशो ने या तो जैन धर्म को अगीकार किया अथवा उसके प्रचारप्रसार और उत्थान में अपना महनीय योगदान दिया। अनहिलपाटण अथवा अनहिलवाद या अनहिलपुरा के चालूक्यवशीय जयसिह सिद्धराज उन्ही राजाओ मे से एक था। गुजरात के चालूक्यवशीय राजाओ के लगभग साढे तीन सौ वर्षों के इतिहास मे जैनधर्म एव तत्सम्बन्धी साहित्य का अविच्छिन्न एव द्रुत गति से विकास हुआ । जैन लेखक राजघरानो एव प्रशासन से जुड़े रहे जिसमे उनके द्वारा रचित साहित्य से हमे तत्कालीन परिस्थितियो, घटनाओ एव राजनैतिक वातावरण का अविकल एव अक्षरस ज्ञान प्राप्त होता है । मूलराजा से लेकर अन्तिम राजा तक इस राजघराने की राजधानी अनहिलपताका अथवा अनहिलपुरा या अनहिलपाटण ही बनी रही । एक जयसिंह कर्ण एव मायानल्लादेवी का पुत्र था । मायानल्ला चद्रपुर के कदव राजा जयकेशी की पुत्री थी । दो "प्रबध चिंतामणि" के अनुसार यह जयकेशी 'शुभकेशी' का पुत्र था जो कर्णाटक का राजा था। हमे यह ज्ञात है कि शुभकेशी गोवा के कदव राजघराने का तीसरा अधिष्ठाता शष्ठदेव था । ऐसा समझा जाता है कि विद्वत खण्ड / पचास जयसिह के नाना जयकेशी कोकण के राजा थे जिसकी राजधानी आधुनिक गोवा थी । जयसिंह की माँ एक महान स्त्री थी । जयसिंह के आरम्भिक जीवन को सँवारने का पूर्ण श्रेय उन्ही को जाता है। राजा कर्ण की मृत्यु के उपरान्त मायानल्ला देवी ने मंत्री शातु की निगरानी मे जयसिह को शस्त्र विद्या की शिक्षा दिलवायी । तीन मायानल्ला देवी ने एक दीर्घ जीवन जीया और अपने पुत्र की उदीयमान जीवन यात्रा को निकटता से देखा। हेमचन्द्राचार्य अपने 'देव्याश्रय काव्य' मे लिखते है कि जयसिह बढती उम्र के साथ युद्ध-कला एव शासन-व्यवस्था में निपुण होता गया। हाथियो तक को वश मे कर लेने की कला भी वो जानने लगा था। तरुण अवस्था को प्राप्त करते ही उसका राज्याभिषेक कर दिया गया। यह औपचारिकता विशून्य सशून्य एक हज़ार एक सौ पचास पौष मास मे सम्पन्न की गई । चार 'प्रबन्ध चिन्तामणि' के अनुसार उसका राज्यकाल उनचास वर्ष था । पाँच 'विचार श्रेणी' भी इसी तथ्य का प्रतिपादन करती है परन्तु 'आइने अकबरी' के अनुसार जयसिह ने पचास वर्षो तक राज्य किया।सात इस उल्लेख का अनुमोदन विशून्य सशून्य एक हज़ार दो सौ के बाली पाषाण शिलालेख से भी होता है। 'प्रबन्ध चिन्तामणि' के अनुसार 'कर्ण' जयसिह का राज्याभिषेक करके 'आशापल्लि' के विजय अभियान के निमित्त चला गया और विजयोपरान्त वही पर कर्णावटी नामक नगरी बसा कर स्वय राज्य करने लगा । नौ जयसिह जब राज्यारूढ हुआ तब अनहिलपाटण की राजनैतिक और भौगोलिक स्थिति उतनी सुदृढ नही थी । उसके पूर्वज मूलराज से लेकर भीम तक - शाकभरी, सिध, नाडूला, मालवा, सौराष्ट्र, लाट, कच्छ और अबूंद मडल के नरेशो से युद्ध करते रहे थे परन्तु अन्तिम तीन क्षेत्र ही उनके अधिपत्य मे आ पाए। जयसिह बडा ही जीवट का योद्धा था। उसने जो कुछ भी अपने पूर्वजो से प्राप्त किया उसको विस्तृत करते हुए एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की और गुजरात की कीर्ति को चहुँ ओर फैलाया। कई जैन सूत्रो से हमे विदीत होता है कि जयसिह गुजरात साम्राज्य का 'साभर' से कोकण सीमा रेखा तक निर्विवाद राजा वन गया था। उसके साम्राज्य मे आधुनिक गुजरात - लाट, सौराष्ट्र, कच्छ सहित राजस्थान के कुछ भूभाग, मालवा एव मध्य भारत निहित थे। जयसिंह का सर्वप्रथम महत्वपूर्ण कार्य 'मालवा विजय' के साथ आरम्भ हुआ। कहते है जयसिह के आरम्भिक राज्यत्वकाल मे परमार नरेश नरवर्मन ने अनहिल पाटण पर चढाई कर दी थी । यह घटना तब घटित हुई बताई जाती है जब जयसिह अपनी माता मायानल्ला देवी के सग सोमनाथ की तीर्थ यात्रा पर गया हुआ था। उसके मुख्यमंत्री शातु को आक्राता के साथ अपमानजनक शर्तो पर सधि करनी पडी। तीर्थ यात्रा से लौटने के उपरान्त जयसिह ने इसका बदला मालवा पर जीत हासिल करके लिया। नरवर्मन के साथ हुए युद्ध का वर्णन जैन वाङ्गमय मे बड़े विस्तार से किया है। इनमे मे जयसिह सूरि रचित 'कुमार पाल चरित', जिनमण्डलगणि रचित 'कुमारपाल प्रबन्ध' तथा राजशेखर कृत 'प्रबन्ध कोष' प्रमुख है । इन काव्यो से यह जानकारी प्राप्त होती है कि इस युद्ध मे जयसिंह ने नरवर्मन को बदी बना लिया था। इन रचनाओ से पूर्व की एक कृति 'कीर्ति कौमुदी' से जानकारी मिलती है कि जयसिह ने नरवर्मन की धा नगरी पर अपनी विजय प्राप्त कर ली। इन साहित्यिक रचनाओ क अतिरिक्त हमे कतिपय शिलालेखो से भी इस महत्वपूर्ण विजय की जानकारी मिलती है। 'तालवार' शिलालेख से इस विषय पर प्रकाश पडता है कि जयसिह ने नरवर्मन का मानमर्दन कर दिया था । इसी प्रकार ललवाडा के गणपति मूर्ति लेख से पता चलता है कि जयसिंह ने नरवर्मन के घमड को चूर-चूर कर दिया । दस दोहड स्तभ-शिलालेख से ज्ञात होता है कि जयसिह ने मालवा के राजा को कैद कर लिया था । ग्यारह जैन साधु जयमगल द्वारा रचित 'शुध शैल-शिलालेख' से ज्ञात होता है कि इस युद्ध मे नाडूल चाहमान अशराज ने जयसिह का साथ दिया था । बारह कुमारपाल की बडनगर प्रशस्ति मे भी इस कथानक का उल्लेख है कि किस तरह जयसिह ने मालवा के राजा का मानमर्दन किया था । तेरह लगता है इस मालवा-विजय के उपलक्ष मे ही जयसिह ने 'महाराजाधिराज परमेश्वर' चौदह एव 'त्रिभुवन गण्ड पंद्रह की उपाधियाँ धारण की । जयसिह का द्वितीय महत्वपूर्ण युद्ध सौराष्ट्र के साथ हुआ । आशून्य हेमचन्द्र ने 'सिद्ध-हेम-व्याकरण' मे सौराष्ट्र विजय का वर्णन किया है। सोलह 'कीर्ति कौमुदी' के अनुसार जयसिह ने शक्तिशाली सौराष्ट्र के 'खेगार' को युद्ध मे परास्त किया । सत्रह 'विविध तीर्थ कल्प' मे भी राजा का नाम 'खेगार राय' उल्लिखित है । अट्ठारह इसी प्रकार 'पुरातन प्रबन्ध सग्रह' मे भी इस युद्ध का उल्लेख किया गया है। अट्ठारह 'प्रवन्ध चिन्तामणि' के अनुसार जयसिह ने सौराष्ट्र के प्रबन्धन हेतु 'सज्जन' को अपना 'दण्डाधिपति' अथवा 'राज्यपाल' नियुक्त किया । बीस जयसिह के राज्यत्वकालीन विशून्यसशून्य एक हज़ार एक सौ छियानवे के दोहड शिलालेख मे भी यह उल्लिखित है कि उसने सौराष्ट्र के राजा को चदी बनाकर कारावास मे वद कर दिया था । इक्कीस 'प्रवध चिन्तामणि' के सूत्रों से यह तो स्पष्ट हो हो जाता है कि सौराष्ट्र पर विजय ईशून्य एक हज़ार एक सौ पच्चीस-छब्बीस से पूर्व कभी भी हुई होगी । से जयसिह की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अनार्य राक्षस राजा 'बरबरक' पर विजय प्राप्ति था । इस उपलब्धि के पश्चात् ही उसे 'सिद्धराजा' की उपाधि से विभूषित किया गया । बाईस इसी विजयप्राप्ति के पश्चात् उसे 'बरबरक जिष्णु' का विरूद भी प्राप्त हुआ। उज्जैन के विशून्यसशून्य एक हज़ार एक सौ छियानवे के खण्डयुक्त पाषाण शिलालेख मे इसका स्पष्ट उल्लेख हुआ है । तेईस इस युद्ध विषयक वर्णन जैन कृति 'वाग भट्टालकार' चौबीस मे भी गुम्फित है। 'प्रबन्ध कोष' से हमे चन्देल 'मदनवर्मन' के साथ उसकी राजधानी 'महोबा' के लिए हुए युद्ध विषयक जानकारी प्राप्त होती है। अन्तत जयसिह ने, छियानवे करोड स्वर्ण मुद्राएँ प्राप्त कर युद्ध को समाप्त किया । 'कालीजर' के 'पाषाण शिलालेख' से भी उपर्युक्त घटना पर प्रकाश पडता है । हेमचन्द्राचार्य कृत 'चडोनुशासन' पच्चीस तथा वागभट्ट कृत अलकार के लेखन से उजागर होता है कि जयसिह ने सिधुराज को युद्ध मे हराया था। 'वाग भट्टलकार' के टीकाकार सिंह देवगणि लिखते है कि वह 'सिधुदेशधीप' अर्थात् सिंध का शासक था। जयसिह के एक हज़ार एक सौ चालीस ईशून्य के 'दोहड शिलालेख' मे इस युद्ध के विषय मे उल्लेख किया गया है । छब्बीस सपादलक्ष के 'आनक राजा' का वर्णन 'प्रबन्ध चिन्तामणि' मे किया गया है। उसने अर्णोराजा से लाखो वसूल करके छोड़ा। सत्ताईस साभर से प्राप्त एक शिलालेख मे भी यह उल्लिखित है कि 'आनक' जयसिंह के अधीन हो गया था । अट्ठाईस इसी प्रकार जयसिह के दक्षिण भारतीय अभियान के विषय मे भी हमे 'जिन मडन गिरी' कृत 'कुमारपाल-प्रवन्ध' से ज्ञात होता है। उनतीस एक हस्तलिखित जैन ग्रन्थ से जयसिंह के 'देवगिरी' अभियान के विषय में जानकारी मिलती है। वहाँ से जयसिंह 'पेटान' की ओर अग्रसर हो गया जहाँ के राजा ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। 'कल्याण कटक' मे उस समय 'विक्रमादित्य-पप्ठ' का स्वामित्व था। इसका विरूद 'परमार्दी' था । जयसिंह के 'तालवार शिलालेख' मे परमार्दी के हार जाने का उल्लेख किया गया है। 'कोल्हापुर प्रवध चिन्तामणि' के मर्गों से हमे जयसिंह का उस क्षेत्र मे अधिकार होने का पता चलता है। इस तरह उपर्युक्त लगभग दस युद्धो में विजय प्राप्त कर जयसिंह एक मान्यताप्राप्त योद्धा दन गया था और अपने बाहुबल वह निर्विवादित रूप से साभर से कोकण तक का एक चुका था। विद्रुत उ
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तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, "मैं, मेरा घर और चांद। "
नीना आखिरी बार बड़े पर्दे पर 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' में नजर आई थीं। फिल्म में आयुष्मान खुराना, जितेंद्र कुमार और गजराज राव भी थे।
फिल्म एक समलैंगिक पुरूष की प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसे इस रिश्ते के लिए अपने परिवार को मनाने में काफी मशक्कत उठानी पड़ी है। (आईएएनएस)
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तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने लिखा, "मैं, मेरा घर और चांद। " नीना आखिरी बार बड़े पर्दे पर 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' में नजर आई थीं। फिल्म में आयुष्मान खुराना, जितेंद्र कुमार और गजराज राव भी थे। फिल्म एक समलैंगिक पुरूष की प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसे इस रिश्ते के लिए अपने परिवार को मनाने में काफी मशक्कत उठानी पड़ी है।
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बिपरजॉय गुरुवार (15 जून, 2023) शाम गुजरात के जखाऊ बंदरगाह के तट से टकराएगा। इस तूफान को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेज एलर्ट जारी किया है।
भारत लगातार राहत सामग्री भेजकर तुर्की-सीरिया की मदद कर रहा है। मृतकों की संख्या की बात करें तो अब तक कुल 15000 लोगों की जान जा चुकी है।
डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था और उसकी पीठ पर चोट के बड़े निशान हैं।
तुर्की के राजदूत ने कहा, "तुर्की और हिंदी में 'दोस्त' एक आम शब्द है... ज़रूरत में काम आने वाला दोस्त ही सच्चा दोस्त होता है। धन्यवाद। "
अब भी मलबे में दबे लोगों को निकाला जा रहा है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। तुर्की में लगातार तीन झटके आए।
लखनऊ बिल्डिंग हादसे में सपा प्रवक्ता हैदर अब्बास की माँ और पत्नी की मौत हो गई है। मोहम्मद तारिक, फहद यजदानी और नवाजिश शाहिद पर FIR हुई है।
"सैद्धांतिक रूप से, हमें हाई कोर्ट को इससे निपटने की अनुमति देनी चाहिए। यदि मामला हाई कोर्ट के संज्ञान में है, तो हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हम आपको हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता देंगे। "
विजेंद्र लाल ने दावा किया है, "एनटीपीसी ने गाँव के नीचे 9 सुरँगे बनाई हैं। सुरँग बनाने के लिए बहुत सारे विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इससे यहाँ बने घरों की नींव कमजोर हो चुकी है। "
जोशीमठ की जमीनें जिस तेजी से धँस रही हैं, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर को आने वाले समय में बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तराखंड के जोशीमठ में सैन्य इमारतों में दरार आने के बाद जवानों को शिफ्ट कर दिया गया है। उत्तराखंड सरकार ने प्रभावितों के लिए 45 करोड़ का फंड जारी किया है।
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बिपरजॉय गुरुवार शाम गुजरात के जखाऊ बंदरगाह के तट से टकराएगा। इस तूफान को लेकर मौसम विभाग ने ऑरेज एलर्ट जारी किया है। भारत लगातार राहत सामग्री भेजकर तुर्की-सीरिया की मदद कर रहा है। मृतकों की संख्या की बात करें तो अब तक कुल पंद्रह हज़ार लोगों की जान जा चुकी है। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के शरीर का तापमान पैंतीस डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था और उसकी पीठ पर चोट के बड़े निशान हैं। तुर्की के राजदूत ने कहा, "तुर्की और हिंदी में 'दोस्त' एक आम शब्द है... ज़रूरत में काम आने वाला दोस्त ही सच्चा दोस्त होता है। धन्यवाद। " अब भी मलबे में दबे लोगों को निकाला जा रहा है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। तुर्की में लगातार तीन झटके आए। लखनऊ बिल्डिंग हादसे में सपा प्रवक्ता हैदर अब्बास की माँ और पत्नी की मौत हो गई है। मोहम्मद तारिक, फहद यजदानी और नवाजिश शाहिद पर FIR हुई है। "सैद्धांतिक रूप से, हमें हाई कोर्ट को इससे निपटने की अनुमति देनी चाहिए। यदि मामला हाई कोर्ट के संज्ञान में है, तो हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हम आपको हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता देंगे। " विजेंद्र लाल ने दावा किया है, "एनटीपीसी ने गाँव के नीचे नौ सुरँगे बनाई हैं। सुरँग बनाने के लिए बहुत सारे विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इससे यहाँ बने घरों की नींव कमजोर हो चुकी है। " जोशीमठ की जमीनें जिस तेजी से धँस रही हैं, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर को आने वाले समय में बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता है। उत्तराखंड के जोशीमठ में सैन्य इमारतों में दरार आने के बाद जवानों को शिफ्ट कर दिया गया है। उत्तराखंड सरकार ने प्रभावितों के लिए पैंतालीस करोड़ का फंड जारी किया है।
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राष्ट्रीय राजधानी की 77 प्रमुख सडक़ों पर ट्रैफिक जाम खत्म करने की योजना में सडक़ पर पेड़, इलेक्ट्रिक पोल, ट्रांसफार्मर व धार्मिक स्ट्रक्चर रोड़ा बने हुए हैं। वर्ष 2017 से इन्हें हटाने के प्रयास किए जा रहे, लेकिन एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की कमी से नहीं हट पा रहे हैं। इससे इन सडक़ों को जाम मुक्त करने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही। ऐसे में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाई है, ताकि इस पर काम आगे बढ़ सके।
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। मेहरौली-बदरपुर रोड पर लाल कुंआ के पास हनुमान मंदिर है, जिसकी वजह से इस इलाके में जाम की समस्या हो रही है। मेहरौली-गुरुग्राम रोड पर सीडीआर चौक के पास एक मजार के चलते जाम की समस्या पैदा होती है। इन सडक़ों पर कहीं पेड़ की वजह से तो कहीं खंभे या कहीं धार्मिक स्ट्रक्चर आदि से जाम की समस्या हो रही है। इन सडक़ों पर इस तरह के कुल 103 मामले हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों में सिर्फ 22 मामलों का ही समाधान निकल पाया है।
अभी भी 77 मामले पेंडिंग हैं। जिसमें 26 लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और 51 मामले दूसरे विभागों से संबंधित हैं। बता दें कि राजधानी की सडक़ों पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए वर्ष 2017 में 77 प्रमुख सडक़ों को जाम मुक्त करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इस पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। इन सडक़ों को जाम मुक्त करने के लिए ए,बी और सी श्रेणी में बांटकर एक्शन प्लॉन तैयार किया गया। पहले चरण में शामिल ए श्रेणी की 28 सडक़ों की विधिवत स्टडी कर ट्रैफिक को सुगम बनाने का काम शुरू किया गया।
इसमें पीडब्ल्यूडी, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल हैं। लेकिन अभी तक 77 में से किसी भी कॉरिडोर पर ट्रैफिक पूरी तरह सुगम नहीं हो पाया है। वहीं, बी श्रेणी में 30 और सी श्रेणी में 19 सडक़ों को शामिल किया गया है।
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राष्ट्रीय राजधानी की सतहत्तर प्रमुख सडक़ों पर ट्रैफिक जाम खत्म करने की योजना में सडक़ पर पेड़, इलेक्ट्रिक पोल, ट्रांसफार्मर व धार्मिक स्ट्रक्चर रोड़ा बने हुए हैं। वर्ष दो हज़ार सत्रह से इन्हें हटाने के प्रयास किए जा रहे, लेकिन एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की कमी से नहीं हट पा रहे हैं। इससे इन सडक़ों को जाम मुक्त करने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही। ऐसे में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाई है, ताकि इस पर काम आगे बढ़ सके। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। मेहरौली-बदरपुर रोड पर लाल कुंआ के पास हनुमान मंदिर है, जिसकी वजह से इस इलाके में जाम की समस्या हो रही है। मेहरौली-गुरुग्राम रोड पर सीडीआर चौक के पास एक मजार के चलते जाम की समस्या पैदा होती है। इन सडक़ों पर कहीं पेड़ की वजह से तो कहीं खंभे या कहीं धार्मिक स्ट्रक्चर आदि से जाम की समस्या हो रही है। इन सडक़ों पर इस तरह के कुल एक सौ तीन मामले हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों में सिर्फ बाईस मामलों का ही समाधान निकल पाया है। अभी भी सतहत्तर मामले पेंडिंग हैं। जिसमें छब्बीस लोक निर्माण विभाग और इक्यावन मामले दूसरे विभागों से संबंधित हैं। बता दें कि राजधानी की सडक़ों पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए वर्ष दो हज़ार सत्रह में सतहत्तर प्रमुख सडक़ों को जाम मुक्त करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इस पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। इन सडक़ों को जाम मुक्त करने के लिए ए,बी और सी श्रेणी में बांटकर एक्शन प्लॉन तैयार किया गया। पहले चरण में शामिल ए श्रेणी की अट्ठाईस सडक़ों की विधिवत स्टडी कर ट्रैफिक को सुगम बनाने का काम शुरू किया गया। इसमें पीडब्ल्यूडी, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल हैं। लेकिन अभी तक सतहत्तर में से किसी भी कॉरिडोर पर ट्रैफिक पूरी तरह सुगम नहीं हो पाया है। वहीं, बी श्रेणी में तीस और सी श्रेणी में उन्नीस सडक़ों को शामिल किया गया है।
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शाहिद कपूर-आलिया भट्ट की आने वाली रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म 'शानदार' इस साल 22 अक्तूबर को रिलीज होगी।
फिल्म के निर्देशक विकास बहल है जो इससे पहले सुपरहिट फिल्म 'क्वीन' का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म में शाहिद के पिता पंकज कपूर भी काम कर रहे हैं।
यह अनुराग और करण के सह निर्माण में बनी दूसरी फिल्म है। दोनों ने इससे पहले 'हंसी तो फंसी' फिल्म का सह निर्माण किया था। फिल्म में शाहिद और आलिया पहली बार साथ काम कर रहे हैं।
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शाहिद कपूर-आलिया भट्ट की आने वाली रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म 'शानदार' इस साल बाईस अक्तूबर को रिलीज होगी। फिल्म के निर्देशक विकास बहल है जो इससे पहले सुपरहिट फिल्म 'क्वीन' का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म में शाहिद के पिता पंकज कपूर भी काम कर रहे हैं। यह अनुराग और करण के सह निर्माण में बनी दूसरी फिल्म है। दोनों ने इससे पहले 'हंसी तो फंसी' फिल्म का सह निर्माण किया था। फिल्म में शाहिद और आलिया पहली बार साथ काम कर रहे हैं।
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हिन्दू देवी देवताओ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी (Munawwar Farooki) के साथी सदाक़त खान (Sadaqat Khan) की इंदौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने दूसरी बार जमानत अर्जी रद्द कर दी. चार दिन पहले मुनव्वर फारुकी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी. जिसके आधार पर सदाकत खान ने जमानत की अर्जी लगाई थी. जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दी.
नए साल के मौके पर इंदौर के 56 दुकान स्थित मुनरो कैफे में बिना इजाजत एक कॉमिडी शो रखा गया था. जहा कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी (Munawwar Farooki) ने हिन्दू देवी-देवताओ और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी. इसी आरोप में दोनों को सजा सुनाई गई है.
घटना के बाद तुकोगंज थाने में मुनव्वर फारुकी (Munawwar Farooki) , सदाकत खान (Sadaqat Khan) और अन्य के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया गया है. पर जब मुनव्वर फारुकी (Munawwar Farooki) को मिली जमानत के आधार पर सदाकत खान ने जमानत मांगी तो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज यतीन्द्र कुमार गुरु ने यह कहते हुए जमानत देने से मना कर दिया की किसी एक आरोपी को मिली जमानत का लाभ दूसरे आरोपी को नहीं दिया जा सकता.
मंगलवार को सदाकत के चाचा युसूफ खान ने बताया की सदाकत मुंबई में काम करता है और नए साल पर वो अपने दादी से मिलने इंदौर आया था. इसी दौरान वो मुनव्वर का शो देखने चला गया था. उसे नहीं पता था की वहा क्या होने वाला है. उन्होंने बताया कि वहा सदाकत ने न कोई टिपण्णी की नाही प्रोग्राम में उसने कोई सहयोग दिया है. उसे तो अदालत में से हिरासत में लिया गया था. वो बेगुनाह है.
युसूफ ने बताया की मुनव्वर की गिरफ्तारी के बाद उसके रिश्तेदार मुन्नवर से बात करने की कोशिश कर रहे थे. पर उसका फ़ोन बंद था. तब उन्होंने सदाकत को मुनव्वर के बारे में पता करने को कहा इसलिए जब सदाकत थाने पोहचा तो उसे कोर्ट जाने को कहा गया था. इसलिए सदाकत कोर्ट में मुनव्वर से मिलने गया था. इनके अलावा दोनों का कोई संबंध नहीं. इस आरोप में दो और आरोपी है.
प्रखर व्यास और एडविन अंटोनिओ यह दोनों का नाम है इसकी जमानत की सुनवाई12 फरवरी को होनी है.प्रखर के भाई का कहना है की प्रखर नाबालिग है इसलिए उसे जमानत मिलनी. इस उम्र में वो कैद में रहा तो उसका भविष्य ख़राब हो जाएंगा और उसकी संगत भी बिगड़ सकती है. प्रखर के वकील अजय बगड़िया का कहना है की पोलिस ने प्रखर पर दो आरोप लगाए है की प्रखर और मुनव्वर के बीच मार्च 2020 से जनवरी 2021 के बिच 18 कॉल हुए है इससे दोनों के शो कनेक्शन पुलिस साबित करना चाहती है. और दूसरा आरोप है की मुनव्वर के स्टेज से उतरने के बाद प्रखर स्टेज पर था उनके टिप्पणियों से धार्मिक भावनाए आहत हुई है.
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हिन्दू देवी देवताओ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के साथी सदाक़त खान की इंदौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने दूसरी बार जमानत अर्जी रद्द कर दी. चार दिन पहले मुनव्वर फारुकी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी. जिसके आधार पर सदाकत खान ने जमानत की अर्जी लगाई थी. जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दी. नए साल के मौके पर इंदौर के छप्पन दुकान स्थित मुनरो कैफे में बिना इजाजत एक कॉमिडी शो रखा गया था. जहा कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी ने हिन्दू देवी-देवताओ और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी. इसी आरोप में दोनों को सजा सुनाई गई है. घटना के बाद तुकोगंज थाने में मुनव्वर फारुकी , सदाकत खान और अन्य के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया गया है. पर जब मुनव्वर फारुकी को मिली जमानत के आधार पर सदाकत खान ने जमानत मांगी तो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज यतीन्द्र कुमार गुरु ने यह कहते हुए जमानत देने से मना कर दिया की किसी एक आरोपी को मिली जमानत का लाभ दूसरे आरोपी को नहीं दिया जा सकता. मंगलवार को सदाकत के चाचा युसूफ खान ने बताया की सदाकत मुंबई में काम करता है और नए साल पर वो अपने दादी से मिलने इंदौर आया था. इसी दौरान वो मुनव्वर का शो देखने चला गया था. उसे नहीं पता था की वहा क्या होने वाला है. उन्होंने बताया कि वहा सदाकत ने न कोई टिपण्णी की नाही प्रोग्राम में उसने कोई सहयोग दिया है. उसे तो अदालत में से हिरासत में लिया गया था. वो बेगुनाह है. युसूफ ने बताया की मुनव्वर की गिरफ्तारी के बाद उसके रिश्तेदार मुन्नवर से बात करने की कोशिश कर रहे थे. पर उसका फ़ोन बंद था. तब उन्होंने सदाकत को मुनव्वर के बारे में पता करने को कहा इसलिए जब सदाकत थाने पोहचा तो उसे कोर्ट जाने को कहा गया था. इसलिए सदाकत कोर्ट में मुनव्वर से मिलने गया था. इनके अलावा दोनों का कोई संबंध नहीं. इस आरोप में दो और आरोपी है. प्रखर व्यास और एडविन अंटोनिओ यह दोनों का नाम है इसकी जमानत की सुनवाईबारह फरवरी को होनी है.प्रखर के भाई का कहना है की प्रखर नाबालिग है इसलिए उसे जमानत मिलनी. इस उम्र में वो कैद में रहा तो उसका भविष्य ख़राब हो जाएंगा और उसकी संगत भी बिगड़ सकती है. प्रखर के वकील अजय बगड़िया का कहना है की पोलिस ने प्रखर पर दो आरोप लगाए है की प्रखर और मुनव्वर के बीच मार्च दो हज़ार बीस से जनवरी दो हज़ार इक्कीस के बिच अट्ठारह कॉल हुए है इससे दोनों के शो कनेक्शन पुलिस साबित करना चाहती है. और दूसरा आरोप है की मुनव्वर के स्टेज से उतरने के बाद प्रखर स्टेज पर था उनके टिप्पणियों से धार्मिक भावनाए आहत हुई है.
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। इनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति पर आने वाले आकस्मिक संकटों की रक्षा होती है। मां का यह स्वरूप शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला है। नवरात्री के सातवें दिन जो मां कालरात्रि की आराधना करते हैं उन्हें भूत, प्रेत या बुरी शक्ति का भय नहीं सताता है। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है। रंग के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया है। मां की 4 भुजाएं हैं। असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए ही दुर्गा मां ने मां कालरात्रि को उत्पन्न किया था। जो भी भक्त मां की सच्चे मन से पूजा करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए पढ़ते हैं मां की पूजा विधि, मंत्र और आरती।
मां कालरात्रि की पूजा विधिः
इस दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। फिर मां का स्मरण करें और मां कालरात्रि को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। फिर मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी चढ़ाएं। फिर मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें। इसके बात सच्चे मन से मां की आरती करें। मान्यता है कि इस दिन मां को गुड़ जरूर अर्पित करना चाहिए। साथ ही ब्राह्माणों को दान भी अवश्य करना चाहिए। मां का प्रिय रंग लाल है।
मां कालरात्रि के मंत्रः
1. ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नमः .
2. ॐ कालरात्र्यै नमः
4. ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।
5. ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ। ।
6. ॐ यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि। ।
संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमाऽऽपदः ॐ।
तस्य वित्तीर्द्धविभवैः धनदारादि समप्दाम् ऐं ॐ।
मां कालरात्रि की आरतीः
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। इनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति पर आने वाले आकस्मिक संकटों की रक्षा होती है। मां का यह स्वरूप शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला है। नवरात्री के सातवें दिन जो मां कालरात्रि की आराधना करते हैं उन्हें भूत, प्रेत या बुरी शक्ति का भय नहीं सताता है। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण का है। रंग के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया है। मां की चार भुजाएं हैं। असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए ही दुर्गा मां ने मां कालरात्रि को उत्पन्न किया था। जो भी भक्त मां की सच्चे मन से पूजा करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए पढ़ते हैं मां की पूजा विधि, मंत्र और आरती। मां कालरात्रि की पूजा विधिः इस दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। फिर मां का स्मरण करें और मां कालरात्रि को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। फिर मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी चढ़ाएं। फिर मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें। इसके बात सच्चे मन से मां की आरती करें। मान्यता है कि इस दिन मां को गुड़ जरूर अर्पित करना चाहिए। साथ ही ब्राह्माणों को दान भी अवश्य करना चाहिए। मां का प्रिय रंग लाल है। मां कालरात्रि के मंत्रः एक. ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नमः . दो. ॐ कालरात्र्यै नमः चार. ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा। पाँच. ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी। एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ। । छः. ॐ यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि। । संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमाऽऽपदः ॐ। तस्य वित्तीर्द्धविभवैः धनदारादि समप्दाम् ऐं ॐ। मां कालरात्रि की आरतीः
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- 8 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
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कुछ समय से लगातार देखा जा रहा है कि किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं और लोग उनके समर्थन में खड़े हैं। किसान लगातार किसान विरोधी बिलों का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में कुछ सितारे भी हैं जो कि लगातार सोशल मीडिया पर नजर आ रहे हैं और किसानों का समर्थन करते हुए ट्वीट कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही कुछ देखने मिला जब मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा ने एक ट्वीट किया था और किसानों का समर्थन किया था।
इस पर उनको काफी बुरी तरह से ट्रोल करने की कोशिश की गई। हालांकि कपिल शर्मा ने ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया है। कपिल शर्मा ने एक ट्वीट किया था. . 'किसानो के मुद्दे को राजनीतिक रंग ना देते हुए बातचीत से इस मसले का हल निकालना चाहिए। कोई भी मुद्दा इतना बड़ा नहीं होता के बातचीत से उसका हल ना निकले। हम सब देशवासी किसान भाइयों के साथ हैं। यह हमारे अन्नदाता हैं। '
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- बिहारी
लोने मुख डीठी न लगै, यों कहि दीनों ईठि । दूनी है लागन लगी, दिये डिठौना दीठि ॥
दीरघ साँस न लेहि दुख, सुख साई नहिं भूल । दई दई क्यों करत है, दई दई सु कबूल ॥
बड़े न हूजै गुनन बिन, बिरद बड़ाई पाय । कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाय ॥
संगति सुमति न पावहीं, परे कुमति के धंध । राखो मेलि कपूर में, हींग न होत सुगंध ।
सीस मुकुट, कटि काछनी, कर मुरली, उर माल । यहि बानिक मो मन बसो सदा बिहारीलाल ॥
जो चाहो चटक न घटे, मैलौ होय न मित्त । रज राजस न छुवाइये, नेह चीकने चित्त ॥ अति अगाध अति औथरे, नदी कूप सर बाय । जो ताको सागर जहाँ, जाकि प्यास बुझाय ॥
दूरि भजत प्रभु पीठी दै, गुन बिस्तारन काल । प्रकटत निर्गुन निकट ही, चंग रंग गोपाल ॥
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- बिहारी लोने मुख डीठी न लगै, यों कहि दीनों ईठि । दूनी है लागन लगी, दिये डिठौना दीठि ॥ दीरघ साँस न लेहि दुख, सुख साई नहिं भूल । दई दई क्यों करत है, दई दई सु कबूल ॥ बड़े न हूजै गुनन बिन, बिरद बड़ाई पाय । कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाय ॥ संगति सुमति न पावहीं, परे कुमति के धंध । राखो मेलि कपूर में, हींग न होत सुगंध । सीस मुकुट, कटि काछनी, कर मुरली, उर माल । यहि बानिक मो मन बसो सदा बिहारीलाल ॥ जो चाहो चटक न घटे, मैलौ होय न मित्त । रज राजस न छुवाइये, नेह चीकने चित्त ॥ अति अगाध अति औथरे, नदी कूप सर बाय । जो ताको सागर जहाँ, जाकि प्यास बुझाय ॥ दूरि भजत प्रभु पीठी दै, गुन बिस्तारन काल । प्रकटत निर्गुन निकट ही, चंग रंग गोपाल ॥
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चंडीगढ़, 18 जून (ट्रिन्यू)
जजपा ने बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष प्रो़ रणधीर चीका ने बताया कि कुल 54 पदाधिकारियों की नियुक्ति की हैं। अम्बाला के पंकज कौशिक, भिवानी के डॉ़ जयबीर बूरा, दादरी के मान सिंह शर्मा, फरीदाबाद के इंद्र सिंह, जींद के कृष्ण सिहाग, कैथल के प्रो़ आरआर मलिक, करनाल के मनोज खोखर, पंचकूला के मास्टर प्रकाश सिंह, सिरसा के इंद्रजीत द्योल तथा पलवल के प्रह्लाद सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। फतेहाबाद के आत्म प्रकाश बतरा, जींद के मास्टर गजे सिंह, कैथल के डॉ. बीरबल दलाल, करनाल के सचिन शर्मा, रोहतक से कृष्णा चौधरी, पंचकूला के अनिल कश्यप, फरीदाबाद के धर्मवीर कालीरमन, दादरी के रामकिशन, रोहतक के कपूर सिंह ढाका, पानीपत के श्रीनिवास मित्तल और भिवानी के रामफल को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया है।
डॉ़ कनव (अम्बाला), रूपचंद गोदवाल (फरीदाबाद), नवीन चोपड़ा (जींद), जसमेर बरसाना व राजीव धींगड़ा (कैथल), दर्शन पुरी (कैथल), सुभाष मान (करनाल), जोगेंद्र बडेसरा (महेंद्रगढ़), प्रताप यादव (नूंह), राजेंद्र बनवाड़िया (सिरसा), मामन सिंह दहिया (सोनीपत) व यशपाल नेहरा (यमुनानगर) को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी है। योगेश कुमार, ज्ञानचंद चहल, राज गोपाल शर्मा, सुरजीत सिंह, डॉ़ संजीव कौशिक, अमरीक सिंह, जगेराम व डॉ़ महावीर कश्यप को प्रदेश सहसचिव, राजबीर बैनीवाल, राम मेहर यादव, राम अवतार धारीवाल, राजेंद्र सिंह, रामफल कुंडू डीपी, कृष्ण शर्मा, महेंद्र सिंह, राज कुमार, हजारी लाल, धर्मवीर धनखड़, प्रदीप गुर्जर व गजे सिंह संधू को प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया है। यमुनानगर के सुनील राठी को सैल के प्रदेश प्रवक्ता का जिम्मा सौंपा है।
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चंडीगढ़, अट्ठारह जून जजपा ने बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष प्रो़ रणधीर चीका ने बताया कि कुल चौवन पदाधिकारियों की नियुक्ति की हैं। अम्बाला के पंकज कौशिक, भिवानी के डॉ़ जयबीर बूरा, दादरी के मान सिंह शर्मा, फरीदाबाद के इंद्र सिंह, जींद के कृष्ण सिहाग, कैथल के प्रो़ आरआर मलिक, करनाल के मनोज खोखर, पंचकूला के मास्टर प्रकाश सिंह, सिरसा के इंद्रजीत द्योल तथा पलवल के प्रह्लाद सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। फतेहाबाद के आत्म प्रकाश बतरा, जींद के मास्टर गजे सिंह, कैथल के डॉ. बीरबल दलाल, करनाल के सचिन शर्मा, रोहतक से कृष्णा चौधरी, पंचकूला के अनिल कश्यप, फरीदाबाद के धर्मवीर कालीरमन, दादरी के रामकिशन, रोहतक के कपूर सिंह ढाका, पानीपत के श्रीनिवास मित्तल और भिवानी के रामफल को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया है। डॉ़ कनव , रूपचंद गोदवाल , नवीन चोपड़ा , जसमेर बरसाना व राजीव धींगड़ा , दर्शन पुरी , सुभाष मान , जोगेंद्र बडेसरा , प्रताप यादव , राजेंद्र बनवाड़िया , मामन सिंह दहिया व यशपाल नेहरा को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी है। योगेश कुमार, ज्ञानचंद चहल, राज गोपाल शर्मा, सुरजीत सिंह, डॉ़ संजीव कौशिक, अमरीक सिंह, जगेराम व डॉ़ महावीर कश्यप को प्रदेश सहसचिव, राजबीर बैनीवाल, राम मेहर यादव, राम अवतार धारीवाल, राजेंद्र सिंह, रामफल कुंडू डीपी, कृष्ण शर्मा, महेंद्र सिंह, राज कुमार, हजारी लाल, धर्मवीर धनखड़, प्रदीप गुर्जर व गजे सिंह संधू को प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया है। यमुनानगर के सुनील राठी को सैल के प्रदेश प्रवक्ता का जिम्मा सौंपा है।
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नेतृत्व को लेकर उलझी हिमाचल कांग्रेस को एकजुट करने और विधानसभा चुनाव 2022 जीतने के लिए पार्टी हाईकमान ने प्रदेश में वीरभद्र सिंह कार्ड खेल दिया है। हाईकमान ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर स्व. वीरभद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का साफ संदेश दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि जैसा करिश्मा वीरभद्र के नाम पर उप चुनाव में देखने को मिला, विस चुनाव में भी देखने को मिलेगा।
बेशक कांग्रेस हाईकमान ने जंबो कार्यकारिणी गठित की है, लेकिन कई गुटों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने का यह अच्छा प्रयास माना जा रहा है। पार्टी ने चार वर्किंग प्रेसीडेंट के साथ-साथ पदाधिकारियों की लंबी सूची जारी की है। हालांकि पड़ोसी राज्य पंजाब में चार वर्किंग प्रेसीडेंट का फॉर्मूला फेल साबित हुआ है और पंजाब में तीन अध्यक्ष अपनी सीट तक नहीं बचा पाए, लेकिन हिमाचल में यह प्रयोग कितना कारगर साबित होगा, देखते हैं।
राजनीति के पंडितों की मानें तो हाईकमान के इस फैसले के बाद विरोध की गुंजाइश बहुत कम बची है। प्रदेश कांग्रेस में इससे पहले तक वीरभद्र सिंह, कौल सिंह ठाकुर और सुखविंद्र सिंह सुक्खू धड़ा सक्रिय रहा है। आज की कार्यकारिणी में सभी गुटों के नेताओं और जिलों को भी नेतृत्व दिया गया है। हाईकमान ने गुटबाजी खत्म करने के लिए सभी को परफॉर्मेंस दिखाने का जिम्मा दिया है।
कांग्रेस हाईकमान ने कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए क्षेत्रीय संतुलन बिठाने का भी प्रयास किया है। प्रदेश की सत्ता की चाबी तय करने वाला कांगड़ा जिला इस वक्त सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां आम आदमी पार्टी का बहुत ज्यादा फोकस है। कांग्रेस ने इसकी अहमियत को देखते हुए 9 पदाधिकारी कांगड़ा जिला के संगठन में शामिल किए हैं। इसी तरह सभी जिलों को कार्यकारिणी में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरुनी लड़ाई चल रही थी। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को बार-बार पद से हटाने के लिए दिल्ली दरबार में शिकायतें की जा रही थीं। विरोधी गुट के नेता कई बार अज्ञात पत्र जारी करके भी कुलदीप राठौर के खिलाफ षड़यंत्र रचते रहे हैं। इससे कार्यकर्ता हतोत्साहित हो रहे थे। यही वजह है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह निष्क्रिय हो गई, जबकि बीते साल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा को उप चुनाव में 4-0 से करारी पराजय दी है।
हिमाचल में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा की लंबे समय से आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चा थी। पार्टी हाईकमान ने उन्हें पब्लिसिटी एंड पब्लिकेशन कमेटी का चेयरमैन बनाया है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी नेताओं को एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस चुनाव प्रचार में काफी पिछड़ी हुई नजर आ रही है। सत्तारूढ़ भाजपा और यहां तक कि नई स्थापित हो रही आम आदमी पार्टी भी प्रदेश में अरविंद केजरीवाल के दो रोड शो और जनसभा कर चुकी है, लेकिन अब तक कांग्रेस नेतृत्व में ही उलझी रही है।
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नेतृत्व को लेकर उलझी हिमाचल कांग्रेस को एकजुट करने और विधानसभा चुनाव दो हज़ार बाईस जीतने के लिए पार्टी हाईकमान ने प्रदेश में वीरभद्र सिंह कार्ड खेल दिया है। हाईकमान ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर स्व. वीरभद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का साफ संदेश दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि जैसा करिश्मा वीरभद्र के नाम पर उप चुनाव में देखने को मिला, विस चुनाव में भी देखने को मिलेगा। बेशक कांग्रेस हाईकमान ने जंबो कार्यकारिणी गठित की है, लेकिन कई गुटों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने का यह अच्छा प्रयास माना जा रहा है। पार्टी ने चार वर्किंग प्रेसीडेंट के साथ-साथ पदाधिकारियों की लंबी सूची जारी की है। हालांकि पड़ोसी राज्य पंजाब में चार वर्किंग प्रेसीडेंट का फॉर्मूला फेल साबित हुआ है और पंजाब में तीन अध्यक्ष अपनी सीट तक नहीं बचा पाए, लेकिन हिमाचल में यह प्रयोग कितना कारगर साबित होगा, देखते हैं। राजनीति के पंडितों की मानें तो हाईकमान के इस फैसले के बाद विरोध की गुंजाइश बहुत कम बची है। प्रदेश कांग्रेस में इससे पहले तक वीरभद्र सिंह, कौल सिंह ठाकुर और सुखविंद्र सिंह सुक्खू धड़ा सक्रिय रहा है। आज की कार्यकारिणी में सभी गुटों के नेताओं और जिलों को भी नेतृत्व दिया गया है। हाईकमान ने गुटबाजी खत्म करने के लिए सभी को परफॉर्मेंस दिखाने का जिम्मा दिया है। कांग्रेस हाईकमान ने कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए क्षेत्रीय संतुलन बिठाने का भी प्रयास किया है। प्रदेश की सत्ता की चाबी तय करने वाला कांगड़ा जिला इस वक्त सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां आम आदमी पार्टी का बहुत ज्यादा फोकस है। कांग्रेस ने इसकी अहमियत को देखते हुए नौ पदाधिकारी कांगड़ा जिला के संगठन में शामिल किए हैं। इसी तरह सभी जिलों को कार्यकारिणी में प्रतिनिधित्व दिया गया है। कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरुनी लड़ाई चल रही थी। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को बार-बार पद से हटाने के लिए दिल्ली दरबार में शिकायतें की जा रही थीं। विरोधी गुट के नेता कई बार अज्ञात पत्र जारी करके भी कुलदीप राठौर के खिलाफ षड़यंत्र रचते रहे हैं। इससे कार्यकर्ता हतोत्साहित हो रहे थे। यही वजह है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह निष्क्रिय हो गई, जबकि बीते साल कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा को उप चुनाव में चार-शून्य से करारी पराजय दी है। हिमाचल में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा की लंबे समय से आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चा थी। पार्टी हाईकमान ने उन्हें पब्लिसिटी एंड पब्लिकेशन कमेटी का चेयरमैन बनाया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी नेताओं को एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस चुनाव प्रचार में काफी पिछड़ी हुई नजर आ रही है। सत्तारूढ़ भाजपा और यहां तक कि नई स्थापित हो रही आम आदमी पार्टी भी प्रदेश में अरविंद केजरीवाल के दो रोड शो और जनसभा कर चुकी है, लेकिन अब तक कांग्रेस नेतृत्व में ही उलझी रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अमेठी। उत्तर प्रदेश में अमेठी की नव निर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी ने हमलावरों की गोली के शिकार पूर्व प्रधान सुरेन्द्र सिंह के शव को कंधा दिया। पुलिस ने इस मामले में हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है।
पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि जामो क्षेत्र के बरौला गांव में पूर्व प्रधान सुरेन्द्र सिंह की हथियारबंद बदमाशों ने शनिवार देर रात गोली मार कर हत्या कर दी थी जब वह अपने घर के बरामदे में गहरी नींद में थे। पूर्व प्रधान काे गंभीर हालत में लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। गया।
सुरेंद्र सिंह ने ईरानी के लिए लोकसभा चुनाव में सक्रिय रूप से प्रचार किया था जिसकी बदौलत भाजपा कांग्रेस को उसके गढ़ में मात देने में सफल हुई थी। इस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,000 से अधिक मतों से पराजय का सामना करना पडा था।
घटना की सूचना मिलने के बाद ईरानी ने अमेठी पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ता को भावभीनी श्रद्धाजंलि दी और मृतक के परिजनो को ढाढस बंधाया। सांसद ने पूर्व प्रधान के शव को कंधा दिया और शव यात्रा के साथ कुछ दूर तक साथ चली। योगी सरकार के राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने भी मृतक भाजपा नेता के शव को कंधा दिया।
सूबे के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने दावा किया है कि इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्यारों के करीब है और उम्मीद है कि मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। मामला राजनीतिक प्रतिद्धंदिता से जुड़ा हो सकता है हालांकि इस मामले में भूमि विवाद और पारिवारिक रंजिश की बात भी सामने आई है। इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही मुख्य आरोपियों की धरपकड़ का काम पूरा कर लिया जाएगा।
इस बीच पूर्व प्रधान की हत्या को लेकर गांव में व्याप्त तनाव को देखते हुए पुलिस के अलावा पीएसी को तैनात किया गया है। मृतक के पुत्र अभय ने कहा कि उसके पिता ईरानी के प्रचार में दिन रात लगे रहते थे जिसे क्षेत्र में कांग्रेस के समर्थक पसंद नहीं करते थे। ईरानी की विजय यात्रा में भी उनके पिता ने हिस्सा लिया था।
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अमेठी। उत्तर प्रदेश में अमेठी की नव निर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी ने हमलावरों की गोली के शिकार पूर्व प्रधान सुरेन्द्र सिंह के शव को कंधा दिया। पुलिस ने इस मामले में हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि जामो क्षेत्र के बरौला गांव में पूर्व प्रधान सुरेन्द्र सिंह की हथियारबंद बदमाशों ने शनिवार देर रात गोली मार कर हत्या कर दी थी जब वह अपने घर के बरामदे में गहरी नींद में थे। पूर्व प्रधान काे गंभीर हालत में लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उन्हे मृत घोषित कर दिया। गया। सुरेंद्र सिंह ने ईरानी के लिए लोकसभा चुनाव में सक्रिय रूप से प्रचार किया था जिसकी बदौलत भाजपा कांग्रेस को उसके गढ़ में मात देने में सफल हुई थी। इस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पचपन,शून्य से अधिक मतों से पराजय का सामना करना पडा था। घटना की सूचना मिलने के बाद ईरानी ने अमेठी पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ता को भावभीनी श्रद्धाजंलि दी और मृतक के परिजनो को ढाढस बंधाया। सांसद ने पूर्व प्रधान के शव को कंधा दिया और शव यात्रा के साथ कुछ दूर तक साथ चली। योगी सरकार के राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने भी मृतक भाजपा नेता के शव को कंधा दिया। सूबे के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने दावा किया है कि इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्यारों के करीब है और उम्मीद है कि मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। मामला राजनीतिक प्रतिद्धंदिता से जुड़ा हो सकता है हालांकि इस मामले में भूमि विवाद और पारिवारिक रंजिश की बात भी सामने आई है। इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही मुख्य आरोपियों की धरपकड़ का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस बीच पूर्व प्रधान की हत्या को लेकर गांव में व्याप्त तनाव को देखते हुए पुलिस के अलावा पीएसी को तैनात किया गया है। मृतक के पुत्र अभय ने कहा कि उसके पिता ईरानी के प्रचार में दिन रात लगे रहते थे जिसे क्षेत्र में कांग्रेस के समर्थक पसंद नहीं करते थे। ईरानी की विजय यात्रा में भी उनके पिता ने हिस्सा लिया था।
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जयपुर (एजेंसी/वार्ता): राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि संजीवनी क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी घोटाले के पीड़ितों की उम्र के इस पड़ाव पर इनके साथ हुए विश्वासघात की पीड़ा हम समझ सकते हैं और हमारी सरकार इस पूरे प्रकरण के दोषियों को सजा दिलाएगी।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर संजीवनी घोटाले के पीड़ितों के आंसू और इनकी व्यथा संजीवनी घोटाले के दोषियों की बेईमानी को उजागर कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संजीवनी घोटाले ने बेईमानी का ऐसा तंत्र विकसित किया कि ना सिर्फ निवेशक बल्कि एजेंट्स को भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनधन की लूट के समूचे तंत्र के सूत्रधार व हर सहयोगी को प्रदेश सरकार उनके सही अंजाम तक पहुंचाएगी।
-(एजेंसी/वार्ता)
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जयपुर : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि संजीवनी क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी घोटाले के पीड़ितों की उम्र के इस पड़ाव पर इनके साथ हुए विश्वासघात की पीड़ा हम समझ सकते हैं और हमारी सरकार इस पूरे प्रकरण के दोषियों को सजा दिलाएगी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर संजीवनी घोटाले के पीड़ितों के आंसू और इनकी व्यथा संजीवनी घोटाले के दोषियों की बेईमानी को उजागर कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संजीवनी घोटाले ने बेईमानी का ऐसा तंत्र विकसित किया कि ना सिर्फ निवेशक बल्कि एजेंट्स को भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनधन की लूट के समूचे तंत्र के सूत्रधार व हर सहयोगी को प्रदेश सरकार उनके सही अंजाम तक पहुंचाएगी। - यह भी पढ़ें :- संतरे का सेवन करने से सेहत को मिलेंगे ये तीन फायदे, वजन हो सकता है कम!
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Love Jihad In UP यूपी में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हम आप को पांच ऐसी घटनाएं बताने जा रहे हैं जहां कभी महमूद खान ने रौनक बनकर तो कभी वसीम ने अर्जुन बनकर हिंदू युवती को प्रेम जाल में फंसाया।
लखनऊ, जेएनएन। Love Jihad In UP यूपी में हिन्दू युवकों का नाम रख हिन्दू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाने के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। बुधवार को लखनऊ की दुबग्गा कालोनी और आज बहराइच में लव जिहाद का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। लखनऊ में सूफियान ने मतांतरण का विरोध करने पर 19 वर्षीय छात्रा निधि गुप्ता को चौथी मंजिल से फेंक मौत के घाट उतारा वहीं बहराइच में रौनक बने महमूद खान ने युवती के बाल काटने के बाद उसे मारा पीटा और घर से भगा दिया।
पहला मामला लखनऊ में दुबग्गा के डूडा कालोनी का है। जहां सूफियान ने मतांतरण का विरोध करने पर छात्रा निधि गुप्ता को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। गंभीर अवस्था में निधि को ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मां लक्ष्मी ने बताया कि निधि (19 ) ने हाई स्कूल तक पढ़ाई की थी। वह पास के ब्यूटी पार्लर में काम भी सीख रही थी। सूफियान अक्सर उसे परेशान करता था। निधि को छत से फेकने के बाद सूफियान ट्रामा सेंटर भी गया था। इलाज के दौरान निधि की मौत की खबर सुनते ही वह मौके से फरार हो गया।
दूसरा मामला यूपी के बहराइच जिले का है। बहराइच के रिसिया गुदनी बसाई में महमूद खान हिन्दू युवती को प्रेम जाल में फंसाने के लिए रौनक चौरसिया बना गया। वह दो साल तक युवती का शोषण करता रहा और वीडियो भी बना लिए। असलियत पता चलने पर युवती ने विरोध किया तो वीडियो वायरल करने की धमकी दी और फिर धमकाकर निकाह कर लिया। इसके बाद वह आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। इसके साथ ही उसके बाल काट दिए और भगा दिया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
तीसरा मामला देश की राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद का है। गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र में एक मुस्लिम युवक ने भाई की हत्या करने की धमकी देकर हिंदू युवती से दुष्कर्म किया। इसके साथ ही युवती का रास्ता रोककर मारपीट भी की। स्थानीय निवासियों के संज्ञान में जब यह मामला आया तो उन्होंने लव जिहाद की आशंका जताते हुए गाजियाबाद पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसे तीन साल से परेशान कर रहा था।
चौथा मामला यूपी के शामली जिले का है। जहां नाम और धर्म छिपाकर सलीम ने हिंदू युवती को प्रेम जाल में फंसाकर उसका शारीरिक शोषण किया। इस मामले में पीड़िता ने तीन महीने पहले आत्महत्या कर ली थी। मृतका की भाभी ने बताया कि मली जनपद के झिंझाना निवासी युवक ने खुद को हिंदू बताते हुए फेसबुक के माध्यम से युवती को प्रेम जाल में फंसाया था। इस दौरान उसने युवती से शादी भी कर ली थी। अरोप लगाया कि युवक ने कई बार युवती का का गर्भपात कराया था।
पांचवां मामला सीतापुर जिले का है। यहां वसीम ने खुद का नाम अर्जुन बताया और लड़की को प्रेम जाल में फंसाकर शादी कर ली। एक वर्ष बाद जब पता चला कि लड़का अर्जुन नहीं, लहरपुर इलाके का वसीम है। सच सामने आया तो लड़की के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। विरोध जताने पर युवक और परिवारजन विवाद करने लगे। जब मामला थाने पहुंचा तो पूछताछ में लड़की ने कहा कि युवक ने उसे अपना नाम अर्जुन बताकर मंदिर में शादी की थी। वह एक वर्ष साथ रही। एक बच्चा भी है। उधर, मौका पाकर युवक और परिवारजन भाग निकले। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज किया था।
यूपी में विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 प्रदेश में 27 नवंबर, 2020 को प्रभावी हुआ था, जिसके बाद से जनवरी, 2022 तक इस अध्यादेश के तहत कुल 164 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें सबसे अधिक 38 मुकदमे बरेली जोन व 31 मुकदमे मेरठ जोन में दर्ज हुए। 97 मुकदमे ऐसे हैं, जिनमें पीड़ित महिला कोर्ट में आरोपितों के विरुद्ध बयान दे चुकी हैं। अब तक दर्ज कुल मुकदमों में 399 नामजद आरोपित हैं, जबकि 105 आरोपितों के नाम जांच के दौरान प्रकाश में आये।
यूपी पुलिस अब तक कुल 504 आरोपितों में से 280 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। 21 आरोपित अदालत में हाजिर हो गई, जबकि पुलिस की जांच के दौरान 99 आरोपितों की भूमिका नहीं पाई गई। पुलिस 90 आरोपितों की तलाश कर रही है। 115 मुकदमों में कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल किये जा चुके हैं। 30 मुकदमों में विवेचना चल रही है। पुलिस ने एक मुकदमे को खारिज किया और 17 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई जा चुकी है।
- अध्यादेश में छल-कपट से, प्रलोभन देकर, उत्पीड़न, बल पूर्वक अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के सामान्य मामले में कम से कम एक वर्ष तथा पांच वर्ष अधिकतम सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा कम से कम 15 हजार रुपये तक जुर्माना होगा।
- नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास तथा कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माना होगा।
- सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में कम से कम तीन वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माना होगा।
कानून के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जो मिथ्या, निरूपण, बलपूर्वक, असम्यक, प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या अन्य किसी कपट रीति से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए किया जाएगा।
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Love Jihad In UP यूपी में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हम आप को पांच ऐसी घटनाएं बताने जा रहे हैं जहां कभी महमूद खान ने रौनक बनकर तो कभी वसीम ने अर्जुन बनकर हिंदू युवती को प्रेम जाल में फंसाया। लखनऊ, जेएनएन। Love Jihad In UP यूपी में हिन्दू युवकों का नाम रख हिन्दू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाने के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। बुधवार को लखनऊ की दुबग्गा कालोनी और आज बहराइच में लव जिहाद का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। लखनऊ में सूफियान ने मतांतरण का विरोध करने पर उन्नीस वर्षीय छात्रा निधि गुप्ता को चौथी मंजिल से फेंक मौत के घाट उतारा वहीं बहराइच में रौनक बने महमूद खान ने युवती के बाल काटने के बाद उसे मारा पीटा और घर से भगा दिया। पहला मामला लखनऊ में दुबग्गा के डूडा कालोनी का है। जहां सूफियान ने मतांतरण का विरोध करने पर छात्रा निधि गुप्ता को चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। गंभीर अवस्था में निधि को ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मां लक्ष्मी ने बताया कि निधि ने हाई स्कूल तक पढ़ाई की थी। वह पास के ब्यूटी पार्लर में काम भी सीख रही थी। सूफियान अक्सर उसे परेशान करता था। निधि को छत से फेकने के बाद सूफियान ट्रामा सेंटर भी गया था। इलाज के दौरान निधि की मौत की खबर सुनते ही वह मौके से फरार हो गया। दूसरा मामला यूपी के बहराइच जिले का है। बहराइच के रिसिया गुदनी बसाई में महमूद खान हिन्दू युवती को प्रेम जाल में फंसाने के लिए रौनक चौरसिया बना गया। वह दो साल तक युवती का शोषण करता रहा और वीडियो भी बना लिए। असलियत पता चलने पर युवती ने विरोध किया तो वीडियो वायरल करने की धमकी दी और फिर धमकाकर निकाह कर लिया। इसके बाद वह आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। इसके साथ ही उसके बाल काट दिए और भगा दिया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा मामला देश की राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद का है। गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र में एक मुस्लिम युवक ने भाई की हत्या करने की धमकी देकर हिंदू युवती से दुष्कर्म किया। इसके साथ ही युवती का रास्ता रोककर मारपीट भी की। स्थानीय निवासियों के संज्ञान में जब यह मामला आया तो उन्होंने लव जिहाद की आशंका जताते हुए गाजियाबाद पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसे तीन साल से परेशान कर रहा था। चौथा मामला यूपी के शामली जिले का है। जहां नाम और धर्म छिपाकर सलीम ने हिंदू युवती को प्रेम जाल में फंसाकर उसका शारीरिक शोषण किया। इस मामले में पीड़िता ने तीन महीने पहले आत्महत्या कर ली थी। मृतका की भाभी ने बताया कि मली जनपद के झिंझाना निवासी युवक ने खुद को हिंदू बताते हुए फेसबुक के माध्यम से युवती को प्रेम जाल में फंसाया था। इस दौरान उसने युवती से शादी भी कर ली थी। अरोप लगाया कि युवक ने कई बार युवती का का गर्भपात कराया था। पांचवां मामला सीतापुर जिले का है। यहां वसीम ने खुद का नाम अर्जुन बताया और लड़की को प्रेम जाल में फंसाकर शादी कर ली। एक वर्ष बाद जब पता चला कि लड़का अर्जुन नहीं, लहरपुर इलाके का वसीम है। सच सामने आया तो लड़की के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। विरोध जताने पर युवक और परिवारजन विवाद करने लगे। जब मामला थाने पहुंचा तो पूछताछ में लड़की ने कहा कि युवक ने उसे अपना नाम अर्जुन बताकर मंदिर में शादी की थी। वह एक वर्ष साथ रही। एक बच्चा भी है। उधर, मौका पाकर युवक और परिवारजन भाग निकले। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज किया था। यूपी में विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश दो हज़ार बीस प्रदेश में सत्ताईस नवंबर, दो हज़ार बीस को प्रभावी हुआ था, जिसके बाद से जनवरी, दो हज़ार बाईस तक इस अध्यादेश के तहत कुल एक सौ चौंसठ मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें सबसे अधिक अड़तीस मुकदमे बरेली जोन व इकतीस मुकदमे मेरठ जोन में दर्ज हुए। सत्तानवे मुकदमे ऐसे हैं, जिनमें पीड़ित महिला कोर्ट में आरोपितों के विरुद्ध बयान दे चुकी हैं। अब तक दर्ज कुल मुकदमों में तीन सौ निन्यानवे नामजद आरोपित हैं, जबकि एक सौ पाँच आरोपितों के नाम जांच के दौरान प्रकाश में आये। यूपी पुलिस अब तक कुल पाँच सौ चार आरोपितों में से दो सौ अस्सी आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इक्कीस आरोपित अदालत में हाजिर हो गई, जबकि पुलिस की जांच के दौरान निन्यानवे आरोपितों की भूमिका नहीं पाई गई। पुलिस नब्बे आरोपितों की तलाश कर रही है। एक सौ पंद्रह मुकदमों में कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल किये जा चुके हैं। तीस मुकदमों में विवेचना चल रही है। पुलिस ने एक मुकदमे को खारिज किया और सत्रह मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई जा चुकी है। - अध्यादेश में छल-कपट से, प्रलोभन देकर, उत्पीड़न, बल पूर्वक अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के सामान्य मामले में कम से कम एक वर्ष तथा पांच वर्ष अधिकतम सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा कम से कम पंद्रह हजार रुपये तक जुर्माना होगा। - नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम दस वर्ष तक के कारावास तथा कम से कम पच्चीस हजार रुपये जुर्माना होगा। - सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में कम से कम तीन वर्ष तथा अधिकतम दस वर्ष तक की सजा और कम से कम पचास हजार रुपये जुर्माना होगा। कानून के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जो मिथ्या, निरूपण, बलपूर्वक, असम्यक, प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या अन्य किसी कपट रीति से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए किया जाएगा।
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1500. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह जब बारिश देखते तो फरमातेः "अल्लाह नफ़ामंद बारिश बरसा । (बुखारी.)
1501 - (صحيح) وعن أنس قال: أصابنا ونحن مع رسول الله صلى الله عليه وسلم مطر قال: ص:٤٧ فخسر رسول الله صلى الله عليه وسلم ثوبه حتى أصابه من المطر فقلنا: يا رسول الله لم صنعت هذا؟ قال: «لأنه حديث عهد بربه» . رواه مسلم
1501. अनस रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, हम रसूलुल्लाह के साथ थे के बारिश होने लगी तो रसूलुल्लाह ने अपने जिस्म से कुछ कपड़ा उठाया, हत्ता कि कुछ कतरे वहां गिरे तो हमने अर्ज़ कियाः अल्लाह के रसूल! आप ने ऐसे क्यों किया आपने फ़रमायाः "क्योंकि यह अभी नई नई अपने रब से आई है"। (मुस्लिम)
नमाज़ ए इस्तीस्का का बयान दूसरी फस्ल
(1032) SjbiuJl olgy
١٥٠٢ - (ضعيف) عن عبد الله بن زيد قال: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى المصلى فاستسقى وحول رداءه حين استقبل القبلة فجعل عطافه الأيمن على عاتقه الأيسر وجعل عطافه الأيسر على عاتقه الأيمن ثم دعا الله. رواه أبو داود
باب الاستسقاء الفصل الثاني
1502. अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ईदगाह तशरीफ़ लाए तो आप ने बारिश तलब की और जिस वक़्त किबले रुख हुए तो अपनी चादर पलटी, आप ने उस के दाए किनारे को अपने बाए कंधे पर और बाए किनारे को अपने दाए कंधे पर कर लिया, फिर अल्लाह से दुआ की। (सहीह )
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1503 - (صحيح) وعن عبد الله بن زيد أنه قال: استشفى رسول الله صلى الله عليه وسلم وعليه خميصة له سوداء فأراد أن
1503. अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है उन्होंने बयान किया रसूलुल्लाह ने बारिश के लिए दुआ की तो आप पर काली चादर थी आप ने उस के निचले हिस्से को ऊपर करना चाहा लेकिन गिराह होने पर आप ने इसे अपने कंधो पर ही बदल लिया । (सहीह )
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يأخذ أسفلها فيجعله أعلاها فلما ثقلت قلبها على عاتقيه. رواه أحمد وأبو داود
١٥٠٤ - (صحيح) وعن عمير مولى آبي اللحم أنه رأى النبي صلى الله عليه وسلم يستسقي عند أحجار الزيت قريبا من الزوراء قائما يدعو يستسقي رافعا يديه قبل وجهه لا يجاوز بهما رأسه. رواه أبو داود وروى الترمذي والنسائي نحوه
1504. उमैर मौला अबी अल लहम रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है के उन्होंने नबी को जवरा के करीब, मक़ाम ए अह्जारजियत के पास खड़े हो कर बारिश तलब करते हुए देखा, आप अपने चेहरे के सामने हाथ बुलंद किए हुए बारिश के लिए दुआ कर रहे थे और वह हाथ आप के सर से बुलंद नहीं थे। अबू दावुद, इमाम तिरमिज़ी और इमाम निसाई ने भी इसी तरह रिवायत किया है। (सहीह )
1505 - (حسن) وعن ابن عباس قال: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم يغني في الاستسقاء متبذلا متواضعا متخشغا متضرعا. رواه الترمذي وأبو داود والنسائي وابن ماجه
1505. इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाहपुराने कपड़े पहन कर आजिज़ी इख़्तियार कर के खुशु व खुजू और तजरीअ करते हुए बारिश तलब करने के लिए निकले। (हसन)
1506 - (حسن) وعن عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده قال: كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا استسقى قال: «اللهم اشق عبادك وبهيمتك وانشر رحمتك وأخي بلدك الميت» . رواه مالك وأبو داود
1506. अम्र बिन शुऐब अपने वालिद से और वह अपने दादा से रिवायत करते हैं, जब नबी बारिश तलब करते तो यह दुआ पढ़ा करते थेः "अल्लाह अपने बंदो और जानवरों को सेराब फरमा अपने रहमत को आम कर दे और अपने मुर्दा शहरो को जिंदगी अता फरमा"। (ज़ईफ़)
ضعیف ، رواه مالک (1 / 190 ، 191 ح 450) عن يحيى بن سعيد الانصاري عن عمرو بن شعيب عن رسول الله صلى الله عليه و آله وسلم الخ فهو
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1507 - (صحيح) وعن جابر قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم يواكئ فقال: «اللهم اسقنا غيثا مغيئًا مريئا مريعا نافعا غير ضار عاجلا غير آجل» . قال: فأطبقت عليهم السماء. رواه أبو داؤد
नमाज़ ए इस्तीस्का का बयान तीसरी फस्ल
1507. जाबिर रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह को हाथ ऊपर उठाकर यह दुआ करते हुए देखाः "अल्लाह हमें पानी पिला, हम पर ऐसी बारिश नाज़िल फरमा जो हमारी प्यास बुझा दे, हल्कि फुवारी बनकर गल्ला उगाने वाली, नफा देने वाली, नुक्सान पहुँचाने वाली न हो, जल्द आने वाली हो देर लगाने वाली न हो", रावी बयान करते हैं, फ़ौरन ही आसमान पर बादल छा गए। (हसन)
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١٥٠٨ - (حسن) عن عائشة قالت: شكا الناس إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فحوط المطر فأمر بمنبر فوضع له في المصلى ووعد النّاس يؤما يخرجون فيه. قالت عائشة: فخرج رسول الله صلى الله عليه وسلم حين بدا حاجب الشمس فقعد على المنبر فكبر وحمد الله عزوجل ثم قال: «إنكم شكوتم جذب دياركم واستئجار المطر عن إبان زمانه عنكم وقد أمركم الله عزوجل أن تدعوه ووعدكم أن يستجيب لكم» . ثم قال: «الحمد لله رب العالمين الرحمن الرحيم ملك يوم الدين لا إله إلا الله يفعل ما يريد اللهم أنت الله لا إله إلا أنت الغني ونحن الفقراء. أنزل علينا الغيث واجعل ما أنزلت لنا قوة وبلاغا إلى حين» ثم رفع يديه فلم يترك الرفع حتى بدا بياض إبطيه ثم حول إلى الناس ظهره وقلب أو حول رداءه وهو رافع يديه ثم أقبل على الناس ونزل فصلى ركعتين فأنشأ الله سخانة فرعدت وبرقت ثم أمطرت باذن الله فلم يأت مسجدة حتى سالت الشيول فلما رأى شرعتهم إلى الكن ضحك صلى الله عليه وسلم حتى بدت نواجذه فقال: «أشهد أن الله على كل شيء قدير وأني عبد الله ورسوله» . رواه أبو داود
باب الاستسقاء
1508. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, सहाबा ने रसूलुल्लाह से कहत साली की शिकायत की, तो आपने मिम्बर का हुक्म फ़रमाया, तो उसे आप के लिए ईदगाह में रख दिया गया, आपने सहाबा से एक मुईन दिन का वादा फ़रमाया, वह इस रोज़ बाहर निकले, आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, जब सूरज का किनारा ज़ाहिर हुआ तो रसूलुल्लाह भी तशरीफ़ ले गए, आप मिम्बर पर बैठ गए अल्लाह की किब्रियाई और हम्द बयान की, फिर फ़रमायाः "तुमने अपने इलाको की कहत साली और बरोकत बारिशो के न होने की शिकायत की है, अल्लाह ने तुम्हें हुक्म दिया है के तुम उस से दुआ करो और उस ने दुआ की क़बूलियत का तुम से वादा कर रखा है", फिर आप ने यूँ दुआ कीः "हर किस्म की तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो तमाम जहानों का रब है, जो बहोत मेहरबान निहायत रहम वाला रोज़े जज़ा का मालिक है, अल्लाह के सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं, वह जो चाहता है कर गुज़रता है, अल्लाह तू अल्लाह है, तेरे सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं, तू गनी है और हम फुकराअ हम पर बारिश बरसा और जब तू बारिश नाज़िल फरमाए, इसे हमारे लिए एक मुद्दत तक कुव्वत और मकासिद तक पहुँचने का ज़रिया बना", फिर आप ने हाथ बुलंद किए और उन्हें बुलंद करते रहे, हत्ता कि आप के बगलों की सफेदी नज़र
आने लगी, फिर आप ने लोगो की तरफ अपनी पीठ कर दी और अपनी चादर पलटी और आप ने अभी तक हाथ उठाए रखे, फिर लोगो की तरफ मुतवज्जे हुए और निचे उतर कर दो रकते पढ़ाइ, पस अल्लाह ने बादल की एक टुकड़ी भेजी, गरज चमक पैदा हुई तो फिर अल्लाह के हुक्म से बारिश होने लगी, आप अभी अपने मस्जिद तक तशरीफ़ नहीं लाए थे की नाले बहने लगे, जब आप ने उन्हें अपने झुपड़ीयों की तरफ दौड़ते हुए देखा तो आप हंसने लगे, हत्ता कि आप की दाढ़े नज़र आने लगी आपने फ़रमायाः "मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है और बेशक में अल्लाह का बंदा और उस का रसूल हूँ। (हसन)
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1509 - (صحيح) وعن أنس أن عمر بن الخطاب كان إذ قحطوا استسقى بالبعاس بن عبد المطلب فقال: اللهم إنا كنا نتوسل إليك بنبينا فتسقينا وإنا نتوسل إليك بعم نبينا فاسقنا. قال: فيسقون. رواه البخاري
1509. अनस रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब उमर बिन खत्ताब रदी अल्लाहु अन्हु कहत साली का शिकार होती तो अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के ज़रिए बारिश तलब करते थे और यूँ अर्ज़ करते ऐ अल्लाह, हम तेरे नबी की दुआ के ज़रिए बारिश तलब करते थे तो हम पर बारिश बरसाता था और अब हम तेरे नबी के चचा की दुआ के वसिले से बारिश तलब करते हैं तो हम पर बारिश नाज़िल फरमा चुनांचे बारिश होने लगती। (बुखारी )
(1010) SjJl olgy
١٥١٠ - (صحيح) وعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: " خرج نبي من الأنبياء بالنّاس يستسقي فإذا هو بنملة رافعة بعض قوائهما إلى السماء فقال: ارجعوا فقد استجيب لكم من أجل هذه النملة ". رواه الدارقطني
1510. अबू हुरैरा रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह को फरमाते हुए सुनाः "अंबिया अलैहिस्सलाम में से एक नबी लोगो के साथ बारिश तलब करने के लिए रवाना हुए, उन्होंने अचानक देखा के एक चींटी अपने नफ़ सी टांगे आसमान की तरफ ऊपर उठाए हुए दुआ कर रही है, पस इस नबी ने फ़रमायाः वापिस पलट जाओ इस चींटी की वजह से तुम्हारी दुआ कबूल हो गई है"। (हसन)
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आंधियों का बयान पहली फस्ल
1511 - (متفق عليه) عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «نصرت بالضبا وأهلكت عاد بالدبور»
1511. इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "बादिस्बा के ज़रिए मेरी नुसरत की गई जबके कौम ए आद बादीद्वोर मगरीबी हवा के ज़रिए हलाक कर दी गई"। (मुत्तफ़िक़_अलैह)
١٥١٢ - (متفق عليه) وعن عائشة قالت: ما رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضاحكا حتى أرى منه لهواته إنما كان يتبسم فكان إذا رأى غيما أو ريخا عرف في وجهه
1512. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, मैंने रसूलुल्लाह को कभी इस तरह हँसते हुए नहीं देखा के आप के गले का कव्वा नज़र आ जाए, आप तो बस तबस्सुम फ़रमाया करते थे, जब आप बाप या आंधी देखते तो (उस के खौफ के) असरात आपके चेहरे पर नुमाया हो जाते थे। (मुत्तफ़िक़_अलैह)
1513 - (متفق عليه) عن عائشة رضي الله عنها قالت: كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا عصفت الريح قال: «اللهم إنّي أسألك خيرها وخير ما فيها وخير ما أرسلت به وأعوذ بك من شرها وشر ما فيها وشر ما أرسلت به» وإذا تخيلت الشماء تغير لونه وحرج ودخل وأقبل وأدبر فإذا مطرت سري عنه فعرفت ذلك عائشة فسألته فقال: " لعله يا عائشة كما قال قوم عاد: (فلما . رأوه عارضا مستقبل أوديتهم قالوا: هذا عارض ممطرنا)»» وفي رواية: ويقول إذا رأى المطر ص:٤٨ «رحمة»
1513. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, जब तेज़ आंधी चलती तो नबी यह दुआ पढ़ा करते थेः "अल्लाह मैं उस की खैर का उस में जो खैर है उस का और उस के साथ जो भेजा गया है उस की खैर का तुझ से सवाल करता हूँ, और मैं उस के शर से उस में जो शर है उस का और जो उस के साथ भेजा गया है उस के शर की तुझ से पनाह चाहता हूँ", और जब आसमान पर बारिश के आसार ज़ाहिर होती तो आपका रंग तब्दील हो जाता आप कभी घर से बाहर आते और कभी अन्दर जाते कभी आगे आते और कभी पीछे हटते और जब बारिश हो जाती तो फिर आप से खौफ ज़ाइल होता, आयशा रदी अल्लाहु अन्हा ने उनकी यह कैफियत पहचान कर आप से दरियाफ्त किया तो आपने फ़रमायाः "आयशा शायद के यह ऐसे न हो जैसे कौम ए आद ने कहा था, जब उन्होंने अज़ाब को अबरा की सूरत में अपने मैदानों के सामने आते देखा तो कहने लगे यह बादल
है जो हम पर बरसेगा", और एक रिवायत में है जब आप बादल देखते तो फरमातेः "इसे रहमत बना दे" । (मुत्तफ़िक़_अलैह)
١٥١٤ - (صحيح) وعن ابن عمر قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " مفاتيح الغيب خمس ثم قرأ: (إن الله عنده علم الساعة وينزل الغيث)»» الآية. رواه البخاري
1514. अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "गैब की कुंजिया पांच है", फिर आप ने यह आयत तिलावत फरमाईः "बेशक क़यामत का इल्म इसी के पास है और वही बारिश बरसाता है ............"। (बुखारी )
आंधियों का बयान दूसरी फस्ल
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1515 - (صحيح) وعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «ليست السنة بأن لا تمطروا ولكن السنة أن تمطروا وتمطروا ولا تنبت الأرض شيئا» . رواه مسلم
1515. अबू हुरैरा रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "कहत साली यह नहीं है की बारिश न हो बल्के कहत साली यह है कि तुम पर बार बार बहोत ज़्यादा बारिश तो हो लेकिन ज़मीन कोई चीज़ न उगाए"। (मुस्लिम)
1516 - (صحيح) عن أبي هريرة قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «الريح من روح الله تأتي بالرحمة وبالعذاب فلا تسبوها وسلوا الله من خيرها وعوذوا به من شرها» . رواه الشافعي وأبو داود وابن ماجه والبيهقي في الدعوات
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एक हज़ार पाँच सौ. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह जब बारिश देखते तो फरमातेः "अल्लाह नफ़ामंद बारिश बरसा । एक हज़ार पाँच सौ एक - وعن أنس قال: أصابنا ونحن مع رسول الله صلى الله عليه وسلم مطر قال: ص:सैंतालीस فخسر رسول الله صلى الله عليه وسلم ثوبه حتى أصابه من المطر فقلنا: يا رسول الله لم صنعت هذا؟ قال: «لأنه حديث عهد بربه» . رواه مسلم एक हज़ार पाँच सौ एक. अनस रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, हम रसूलुल्लाह के साथ थे के बारिश होने लगी तो रसूलुल्लाह ने अपने जिस्म से कुछ कपड़ा उठाया, हत्ता कि कुछ कतरे वहां गिरे तो हमने अर्ज़ कियाः अल्लाह के रसूल! आप ने ऐसे क्यों किया आपने फ़रमायाः "क्योंकि यह अभी नई नई अपने रब से आई है"। नमाज़ ए इस्तीस्का का बयान दूसरी फस्ल SjbiuJl olgy एक हज़ार पाँच सौ दो - عن عبد الله بن زيد قال: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى المصلى فاستسقى وحول رداءه حين استقبل القبلة فجعل عطافه الأيمن على عاتقه الأيسر وجعل عطافه الأيسر على عاتقه الأيمن ثم دعا الله. رواه أبو داود باب الاستسقاء الفصل الثاني एक हज़ार पाँच सौ दो. अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ईदगाह तशरीफ़ लाए तो आप ने बारिश तलब की और जिस वक़्त किबले रुख हुए तो अपनी चादर पलटी, आप ने उस के दाए किनारे को अपने बाए कंधे पर और बाए किनारे को अपने दाए कंधे पर कर लिया, फिर अल्लाह से दुआ की। তর েJail goolget alg / एक) Gibijlilg Gojillg jb jनौ aajjs jul abig Gaaaul Swl is नौag: c . plus g एक हज़ार पाँच सौ तीन - وعن عبد الله بن زيد أنه قال: استشفى رسول الله صلى الله عليه وسلم وعليه خميصة له سوداء فأراد أن एक हज़ार पाँच सौ तीन. अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है उन्होंने बयान किया रसूलुल्लाह ने बारिश के लिए दुआ की तो आप पर काली चादर थी आप ने उस के निचले हिस्से को ऊपर करना चाहा लेकिन गिराह होने पर आप ने इसे अपने कंधो पर ही बदल लिया । jilall jul daap g sajill ajilgनौ pals byis basbJldaaep g] §।g।नौ aalolनौ) शून्य Osliwl chaall tirji يأخذ أسفلها فيجعله أعلاها فلما ثقلت قلبها على عاتقيه. رواه أحمد وأبو داود एक हज़ार पाँच सौ चार - وعن عمير مولى آبي اللحم أنه رأى النبي صلى الله عليه وسلم يستسقي عند أحجار الزيت قريبا من الزوراء قائما يدعو يستسقي رافعا يديه قبل وجهه لا يجاوز بهما رأسه. رواه أبو داود وروى الترمذي والنسائي نحوه एक हज़ार पाँच सौ चार. उमैर मौला अबी अल लहम रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है के उन्होंने नबी को जवरा के करीब, मक़ाम ए अह्जारजियत के पास खड़े हो कर बारिश तलब करते हुए देखा, आप अपने चेहरे के सामने हाथ बुलंद किए हुए बारिश के लिए दुआ कर रहे थे और वह हाथ आप के सर से बुलंद नहीं थे। अबू दावुद, इमाम तिरमिज़ी और इमाम निसाई ने भी इसी तरह रिवायत किया है। एक हज़ार पाँच सौ पाँच - وعن ابن عباس قال: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم يغني في الاستسقاء متبذلا متواضعا متخشغا متضرعا. رواه الترمذي وأبو داود والنسائي وابن ماجه एक हज़ार पाँच सौ पाँच. इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाहपुराने कपड़े पहन कर आजिज़ी इख़्तियार कर के खुशु व खुजू और तजरीअ करते हुए बारिश तलब करने के लिए निकले। एक हज़ार पाँच सौ छः - وعن عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده قال: كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا استسقى قال: «اللهم اشق عبادك وبهيمتك وانشر رحمتك وأخي بلدك الميت» . رواه مالك وأبو داود एक हज़ार पाँच सौ छः. अम्र बिन शुऐब अपने वालिद से और वह अपने दादा से रिवायत करते हैं, जब नबी बारिश तलब करते तो यह दुआ पढ़ा करते थेः "अल्लाह अपने बंदो और जानवरों को सेराब फरमा अपने रहमत को आम कर दे और अपने मुर्दा शहरो को जिंदगी अता फरमा"। ضعیف ، رواه مالک عن يحيى بن سعيد الانصاري عن عمرو بن شعيب عن رسول الله صلى الله عليه و آله وسلم الخ فهو .jl ও । g وعن جابر قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم يواكئ فقال: «اللهم اسقنا غيثا مغيئًا مريئا مريعا نافعا غير ضار عاجلا غير آجل» . قال: فأطبقت عليهم السماء. رواه أبو داؤد नमाज़ ए इस्तीस्का का बयान तीसरी फस्ल एक हज़ार पाँच सौ सात. जाबिर रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह को हाथ ऊपर उठाकर यह दुआ करते हुए देखाः "अल्लाह हमें पानी पिला, हम पर ऐसी बारिश नाज़िल फरमा जो हमारी प्यास बुझा दे, हल्कि फुवारी बनकर गल्ला उगाने वाली, नफा देने वाली, नुक्सान पहुँचाने वाली न हो, जल्द आने वाली हो देर लगाने वाली न हो", रावी बयान करते हैं, फ़ौरन ही आसमान पर बादल छा गए। [srajill abilgनौ jvirguill byis se aslilg aavji jilapg] ।agy। olg) • jarostiwl एक हज़ार पाँच सौ आठ - عن عائشة قالت: شكا الناس إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فحوط المطر فأمر بمنبر فوضع له في المصلى ووعد النّاس يؤما يخرجون فيه. قالت عائشة: فخرج رسول الله صلى الله عليه وسلم حين بدا حاجب الشمس فقعد على المنبر فكبر وحمد الله عزوجل ثم قال: «إنكم شكوتم جذب دياركم واستئجار المطر عن إبان زمانه عنكم وقد أمركم الله عزوجل أن تدعوه ووعدكم أن يستجيب لكم» . ثم قال: «الحمد لله رب العالمين الرحمن الرحيم ملك يوم الدين لا إله إلا الله يفعل ما يريد اللهم أنت الله لا إله إلا أنت الغني ونحن الفقراء. أنزل علينا الغيث واجعل ما أنزلت لنا قوة وبلاغا إلى حين» ثم رفع يديه فلم يترك الرفع حتى بدا بياض إبطيه ثم حول إلى الناس ظهره وقلب أو حول رداءه وهو رافع يديه ثم أقبل على الناس ونزل فصلى ركعتين فأنشأ الله سخانة فرعدت وبرقت ثم أمطرت باذن الله فلم يأت مسجدة حتى سالت الشيول فلما رأى شرعتهم إلى الكن ضحك صلى الله عليه وسلم حتى بدت نواجذه فقال: «أشهد أن الله على كل شيء قدير وأني عبد الله ورسوله» . رواه أبو داود باب الاستسقاء एक हज़ार पाँच सौ आठ. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, सहाबा ने रसूलुल्लाह से कहत साली की शिकायत की, तो आपने मिम्बर का हुक्म फ़रमाया, तो उसे आप के लिए ईदगाह में रख दिया गया, आपने सहाबा से एक मुईन दिन का वादा फ़रमाया, वह इस रोज़ बाहर निकले, आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, जब सूरज का किनारा ज़ाहिर हुआ तो रसूलुल्लाह भी तशरीफ़ ले गए, आप मिम्बर पर बैठ गए अल्लाह की किब्रियाई और हम्द बयान की, फिर फ़रमायाः "तुमने अपने इलाको की कहत साली और बरोकत बारिशो के न होने की शिकायत की है, अल्लाह ने तुम्हें हुक्म दिया है के तुम उस से दुआ करो और उस ने दुआ की क़बूलियत का तुम से वादा कर रखा है", फिर आप ने यूँ दुआ कीः "हर किस्म की तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो तमाम जहानों का रब है, जो बहोत मेहरबान निहायत रहम वाला रोज़े जज़ा का मालिक है, अल्लाह के सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं, वह जो चाहता है कर गुज़रता है, अल्लाह तू अल्लाह है, तेरे सिवा कोई माबूद ए बरहक़ नहीं, तू गनी है और हम फुकराअ हम पर बारिश बरसा और जब तू बारिश नाज़िल फरमाए, इसे हमारे लिए एक मुद्दत तक कुव्वत और मकासिद तक पहुँचने का ज़रिया बना", फिर आप ने हाथ बुलंद किए और उन्हें बुलंद करते रहे, हत्ता कि आप के बगलों की सफेदी नज़र आने लगी, फिर आप ने लोगो की तरफ अपनी पीठ कर दी और अपनी चादर पलटी और आप ने अभी तक हाथ उठाए रखे, फिर लोगो की तरफ मुतवज्जे हुए और निचे उतर कर दो रकते पढ़ाइ, पस अल्लाह ने बादल की एक टुकड़ी भेजी, गरज चमक पैदा हुई तो फिर अल्लाह के हुक्म से बारिश होने लगी, आप अभी अपने मस्जिद तक तशरीफ़ नहीं लाए थे की नाले बहने लगे, जब आप ने उन्हें अपने झुपड़ीयों की तरफ दौड़ते हुए देखा तो आप हंसने लगे, हत्ता कि आप की दाढ़े नज़र आने लगी आपने फ़रमायाः "मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है और बेशक में अल्लाह का बंदा और उस का रसूल हूँ। [srajill aåilg g SbJ।g j jl adapg] §।Jgl olg) • jus ojliwl एक हज़ार पाँच सौ नौ - وعن أنس أن عمر بن الخطاب كان إذ قحطوا استسقى بالبعاس بن عبد المطلب فقال: اللهم إنا كنا نتوسل إليك بنبينا فتسقينا وإنا نتوسل إليك بعم نبينا فاسقنا. قال: فيسقون. رواه البخاري एक हज़ार पाँच सौ नौ. अनस रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब उमर बिन खत्ताब रदी अल्लाहु अन्हु कहत साली का शिकार होती तो अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब के ज़रिए बारिश तलब करते थे और यूँ अर्ज़ करते ऐ अल्लाह, हम तेरे नबी की दुआ के ज़रिए बारिश तलब करते थे तो हम पर बारिश बरसाता था और अब हम तेरे नबी के चचा की दुआ के वसिले से बारिश तलब करते हैं तो हम पर बारिश नाज़िल फरमा चुनांचे बारिश होने लगती। SjJl olgy एक हज़ार पाँच सौ दस - وعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: " خرج نبي من الأنبياء بالنّاس يستسقي فإذا هو بنملة رافعة بعض قوائهما إلى السماء فقال: ارجعوا فقد استجيب لكم من أجل هذه النملة ". رواه الدارقطني एक हज़ार पाँच सौ दस. अबू हुरैरा रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, मैंने रसूलुल्लाह को फरमाते हुए सुनाः "अंबिया अलैहिस्सलाम में से एक नबी लोगो के साथ बारिश तलब करने के लिए रवाना हुए, उन्होंने अचानक देखा के एक चींटी अपने नफ़ सी टांगे आसमान की तरफ ऊपर उठाए हुए दुआ कर रही है, पस इस नबी ने फ़रमायाः वापिस पलट जाओ इस चींटी की वजह से तुम्हारी दुआ कबूल हो गई है"। jus hgtia छः हज़ार इक्यानवे नौ ige is wors * [sajill aãilgनौ psb>J। aarpg] jbāglwl olgy छः jus ट आंधियों का बयान पहली फस्ल एक हज़ार पाँच सौ ग्यारह - عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «نصرت بالضبا وأهلكت عاد بالدبور» एक हज़ार पाँच सौ ग्यारह. इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "बादिस्बा के ज़रिए मेरी नुसरत की गई जबके कौम ए आद बादीद्वोर मगरीबी हवा के ज़रिए हलाक कर दी गई"। एक हज़ार पाँच सौ बारह - وعن عائشة قالت: ما رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضاحكا حتى أرى منه لهواته إنما كان يتبسم فكان إذا رأى غيما أو ريخا عرف في وجهه एक हज़ार पाँच सौ बारह. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, मैंने रसूलुल्लाह को कभी इस तरह हँसते हुए नहीं देखा के आप के गले का कव्वा नज़र आ जाए, आप तो बस तबस्सुम फ़रमाया करते थे, जब आप बाप या आंधी देखते तो असरात आपके चेहरे पर नुमाया हो जाते थे। एक हज़ार पाँच सौ तेरह - عن عائشة رضي الله عنها قالت: كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا عصفت الريح قال: «اللهم إنّي أسألك خيرها وخير ما فيها وخير ما أرسلت به وأعوذ بك من شرها وشر ما فيها وشر ما أرسلت به» وإذا تخيلت الشماء تغير لونه وحرج ودخل وأقبل وأدبر فإذا مطرت سري عنه فعرفت ذلك عائشة فسألته فقال: " لعله يا عائشة كما قال قوم عاد: »» وفي رواية: ويقول إذا رأى المطر ص:अड़तालीस «رحمة» एक हज़ार पाँच सौ तेरह. आयशा रदी अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, जब तेज़ आंधी चलती तो नबी यह दुआ पढ़ा करते थेः "अल्लाह मैं उस की खैर का उस में जो खैर है उस का और उस के साथ जो भेजा गया है उस की खैर का तुझ से सवाल करता हूँ, और मैं उस के शर से उस में जो शर है उस का और जो उस के साथ भेजा गया है उस के शर की तुझ से पनाह चाहता हूँ", और जब आसमान पर बारिश के आसार ज़ाहिर होती तो आपका रंग तब्दील हो जाता आप कभी घर से बाहर आते और कभी अन्दर जाते कभी आगे आते और कभी पीछे हटते और जब बारिश हो जाती तो फिर आप से खौफ ज़ाइल होता, आयशा रदी अल्लाहु अन्हा ने उनकी यह कैफियत पहचान कर आप से दरियाफ्त किया तो आपने फ़रमायाः "आयशा शायद के यह ऐसे न हो जैसे कौम ए आद ने कहा था, जब उन्होंने अज़ाब को अबरा की सूरत में अपने मैदानों के सामने आते देखा तो कहने लगे यह बादल है जो हम पर बरसेगा", और एक रिवायत में है जब आप बादल देखते तो फरमातेः "इसे रहमत बना दे" । एक हज़ार पाँच सौ चौदह - وعن ابن عمر قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " مفاتيح الغيب خمس ثم قرأ: »» الآية. رواه البخاري एक हज़ार पाँच सौ चौदह. अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "गैब की कुंजिया पांच है", फिर आप ने यह आयत तिलावत फरमाईः "बेशक क़यामत का इल्म इसी के पास है और वही बारिश बरसाता है ............"। आंधियों का बयान दूसरी फस्ल SjbizJl olgy एक हज़ार पाँच सौ पंद्रह - وعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «ليست السنة بأن لا تمطروا ولكن السنة أن تمطروا وتمطروا ولا تنبت الأرض شيئا» . رواه مسلم एक हज़ार पाँच सौ पंद्रह. अबू हुरैरा रदी अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं, रसूलुल्लाह ने फरमायाः "कहत साली यह नहीं है की बारिश न हो बल्के कहत साली यह है कि तुम पर बार बार बहोत ज़्यादा बारिश तो हो लेकिन ज़मीन कोई चीज़ न उगाए"। एक हज़ार पाँच सौ सोलह - عن أبي هريرة قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «الريح من روح الله تأتي بالرحمة وبالعذاب فلا تسبوها وسلوا الله من خيرها وعوذوا به من شرها» . رواه الشافعي وأبو داود وابن ماجه والبيهقي في الدعوات
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"लौदा पारस मिल्या न पलट्या तो बच लिच अंतर जाना । अ माधु मंगति करता कपटी ना पटानी । पारण मिल कर हम न हूँवा जिन मिल जनपद माही । तो लिकोई कहिए पारस दोष म साँही । पर लगन जिज्ञा की स्थिति लिहुन भिन्न क्या विपरीत है। लगन जिजास लानशील प्राणी होता है। वामी जी ने मान जिनुओं की नर मुद्धि प्राणी कड़ा है। जैसे हुमागियों की नगन होती है, वैसे ही इन जिनाओं की हरि मार्ग पर होती है। वैज्ञान में लीन तत्व विवारस होते हैं और मांग में समय व्यतीत करते हैं । अर्ध भाष और ममता की अषता की घोर निरंतर 'रामरडम* मैं रत रहते हैं
"जैर्न लगन कलागा यूं हरि मारग में हाथ । रामवरण वे प्राणियां नरबुधि ये नाय । मर तुधि कहिये पाय जान गम तत्व विचार । सत्संगति में बैठ आपणा आप तारै । राम राम रमना रटै आई ममत मन घोय । जैरे लगन माग यूं हरि मारण पैहाय ।
'लगन जिनाप की लगन का वर्णन करते अविना नहीं । जैरे साम के अधीन ह कर कार्म लग्नशीन होता है जैसे पराये धन पर चोर की आपली गाय का बछड़े सेना लगाव होता है, सीप की स्वाती में जो अतुर कि होती है, परिता नगर की और जेपी लीक पड़ती है, प्यापा पानी के लिए जिप
प्रकार उथम रत रहता है
दुधातुर नरोजन लिए जा मैहाल रहता है, चंद्रमा
के लिए जर्म। आपक्कि नकार में एक हर्ति है, लोभी काम के लिए जिस प्रकार
वानरत होता है और मेह के लिए मौर जितना आतुर होता है
लगन आक
या वातरता आाठी पवर लगन जिजाय की रामभजनमें रहती है --
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"लौदा पारस मिल्या न पलट्या तो बच लिच अंतर जाना । अ माधु मंगति करता कपटी ना पटानी । पारण मिल कर हम न हूँवा जिन मिल जनपद माही । तो लिकोई कहिए पारस दोष म साँही । पर लगन जिज्ञा की स्थिति लिहुन भिन्न क्या विपरीत है। लगन जिजास लानशील प्राणी होता है। वामी जी ने मान जिनुओं की नर मुद्धि प्राणी कड़ा है। जैसे हुमागियों की नगन होती है, वैसे ही इन जिनाओं की हरि मार्ग पर होती है। वैज्ञान में लीन तत्व विवारस होते हैं और मांग में समय व्यतीत करते हैं । अर्ध भाष और ममता की अषता की घोर निरंतर 'रामरडम* मैं रत रहते हैं "जैर्न लगन कलागा यूं हरि मारग में हाथ । रामवरण वे प्राणियां नरबुधि ये नाय । मर तुधि कहिये पाय जान गम तत्व विचार । सत्संगति में बैठ आपणा आप तारै । राम राम रमना रटै आई ममत मन घोय । जैरे लगन माग यूं हरि मारण पैहाय । 'लगन जिनाप की लगन का वर्णन करते अविना नहीं । जैरे साम के अधीन ह कर कार्म लग्नशीन होता है जैसे पराये धन पर चोर की आपली गाय का बछड़े सेना लगाव होता है, सीप की स्वाती में जो अतुर कि होती है, परिता नगर की और जेपी लीक पड़ती है, प्यापा पानी के लिए जिप प्रकार उथम रत रहता है दुधातुर नरोजन लिए जा मैहाल रहता है, चंद्रमा के लिए जर्म। आपक्कि नकार में एक हर्ति है, लोभी काम के लिए जिस प्रकार वानरत होता है और मेह के लिए मौर जितना आतुर होता है लगन आक या वातरता आाठी पवर लगन जिजाय की रामभजनमें रहती है --
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हिंदुस्तान जय जवान जय किसान के लिए जाना जाता है,एक सीमा पर देश की रक्षा करता है तो दूसरा खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरता है,उत्तराखंडी गायक विनोद बिजल्वाण ने भारतीय सेना के वीर जवानों को अपना गीत 'ड्यूटी च बॉर्डर माँ' समर्पित किया है।
ड्यूटी च बॉर्डर माँ गीत की रचना विनोद बिजल्वाण ने ही की है एवं मोती शाह ने इस गीत को संगीत दिया है,सोनी कोठियाल ने प्रोमोशनल वीडियो को फिल्माया है एवं रज्जी गुसाईं ने भारतीय सेना के शौर्य को दर्शाते वीडियो का संपादन किया है। इसे सरगम म्यूजिक से रिलीज़ किया गया है।
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गीत के बोल काफी आकर्षक हैं जो फौजी भाइयों को काफी पसंद आएंगे,देश का जवान दिन-रात सीमा पर पहरेदारी करता है और देश की आन बान शान की रक्षा करता है और अपने प्राणों की आहुति देकर भी अपने राष्ट्र की रक्षा करने से नहीं घबराता,विषम परिस्थितियों का भी एक सैनिक डटकर सामना करता है,जिन क्षेत्रों में एक सैनिक देश रक्षा हेतु तैनात रहता है,वहां आम जन मानस का एक पल भी रुकना मुश्किल है,सारी बाधाओं से लड़कर भी सैनिक अपना धर्म नहीं भूलता और राष्ट्रधर्म ही सर्वोपरि मानता है,और राष्ट्र हित ही पहला कर्तव्य मानता है।
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इस गीत को विनोद बिजल्वाण ने उन सभी फौजी भाइयों को समर्पित किया है जो सीमा पर तैनात हैं और जिन अमर शहीदों का देश रक्षा में बलिदान हुआ है ये गीत उन सभी के लिए तैयार किया गया है,सुन्दर शब्दों से रचकर विनोद बिजल्वाण ने इसे बेहद खूबसूरत अंदाज में गाया भी है।
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देश के सैनिक तो अपना धर्म सदैव ही निभाते रहे हैं और हर उस बुरी नजर का खात्मा करते हैं जो हिंदुस्तान की धरती पर पड़ती है, लेकिन देश के वर्तमान हालात ऐसे हैं कि देश कई भागों में बँट चुका है जिससे सीमा पार से अधिक तो अंदर के दुश्मनों ने देश को खोखला कर दिया है और भारत के गौरव को ठेस पहुंचाई है ,ऐसे हालातों में सुधार हो ऐसी कामना करते हैं।
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फौजी भाइयों की बद्री विशाल रक्षा करें और सदैव हिमालय पर तिरंगा लहराता रहे इसी कामना के साथ आपके लिए प्रस्ततु है ये शानदार गीत। एक सैनिक जब ड्यूटी पर तैनात रहता है और अपनी माँ से क्या कहता है ये जरूर आप ड्यूटी च बॉर्डर माँ गीत में सुनें।
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हिंदुस्तान जय जवान जय किसान के लिए जाना जाता है,एक सीमा पर देश की रक्षा करता है तो दूसरा खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरता है,उत्तराखंडी गायक विनोद बिजल्वाण ने भारतीय सेना के वीर जवानों को अपना गीत 'ड्यूटी च बॉर्डर माँ' समर्पित किया है। ड्यूटी च बॉर्डर माँ गीत की रचना विनोद बिजल्वाण ने ही की है एवं मोती शाह ने इस गीत को संगीत दिया है,सोनी कोठियाल ने प्रोमोशनल वीडियो को फिल्माया है एवं रज्जी गुसाईं ने भारतीय सेना के शौर्य को दर्शाते वीडियो का संपादन किया है। इसे सरगम म्यूजिक से रिलीज़ किया गया है। यह भी पढ़ेः Uttarakhand: रिलीज़ हुआ मोस्ट अवैटिंग वीडियो सॉन्ग 'गजरा' संजू सिलोड़ी संग पहली बार नजर आई दिव्या नेगी ! गीत के बोल काफी आकर्षक हैं जो फौजी भाइयों को काफी पसंद आएंगे,देश का जवान दिन-रात सीमा पर पहरेदारी करता है और देश की आन बान शान की रक्षा करता है और अपने प्राणों की आहुति देकर भी अपने राष्ट्र की रक्षा करने से नहीं घबराता,विषम परिस्थितियों का भी एक सैनिक डटकर सामना करता है,जिन क्षेत्रों में एक सैनिक देश रक्षा हेतु तैनात रहता है,वहां आम जन मानस का एक पल भी रुकना मुश्किल है,सारी बाधाओं से लड़कर भी सैनिक अपना धर्म नहीं भूलता और राष्ट्रधर्म ही सर्वोपरि मानता है,और राष्ट्र हित ही पहला कर्तव्य मानता है। यह भी पढ़ेः एक लाख दर्शकों को पसंद आया मेरी माँजी गढ़वाली गीत ! आज फिर लागि गौले मा बडुली किले ! इस गीत को विनोद बिजल्वाण ने उन सभी फौजी भाइयों को समर्पित किया है जो सीमा पर तैनात हैं और जिन अमर शहीदों का देश रक्षा में बलिदान हुआ है ये गीत उन सभी के लिए तैयार किया गया है,सुन्दर शब्दों से रचकर विनोद बिजल्वाण ने इसे बेहद खूबसूरत अंदाज में गाया भी है। यह भी पढ़ेः स्वरकोकिला मीना राणा ने दी गढ़वाली भजन ॐ श्री गणेशाय नमः भजन को आवाज ! देश के सैनिक तो अपना धर्म सदैव ही निभाते रहे हैं और हर उस बुरी नजर का खात्मा करते हैं जो हिंदुस्तान की धरती पर पड़ती है, लेकिन देश के वर्तमान हालात ऐसे हैं कि देश कई भागों में बँट चुका है जिससे सीमा पार से अधिक तो अंदर के दुश्मनों ने देश को खोखला कर दिया है और भारत के गौरव को ठेस पहुंचाई है ,ऐसे हालातों में सुधार हो ऐसी कामना करते हैं। यह भी पढ़ेः सिनेमेटोग्राफर युवी नेगी युद्धवीर दिखेंगे लीड रोल में। चमोली नंदप्रयाग में चल रही है द्वी राति कु जप गीत की शूटिंग ! फौजी भाइयों की बद्री विशाल रक्षा करें और सदैव हिमालय पर तिरंगा लहराता रहे इसी कामना के साथ आपके लिए प्रस्ततु है ये शानदार गीत। एक सैनिक जब ड्यूटी पर तैनात रहता है और अपनी माँ से क्या कहता है ये जरूर आप ड्यूटी च बॉर्डर माँ गीत में सुनें।
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mustard Oil: इस साल सरसों (Mustered) की बुवाई का रकबा 12-15 फ़ीसदी तक बढ़ सकता है। एक बार मार्च-अप्रैल में सरसों की फसल पकने के बाद सरसों तेल (Mustered Oil) के भाव में कमी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली Mustard Oil Prices: दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) के नोएडा में पीएस एसोसिएट्स के नाम के कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाने वाले एक बिल्डर राधे चौधरी ने अपने 100 से अधिक मजदूरों के लिए इस साल अगस्त में सरसों तेल के 25 टिन खरीदे थे। उस समय राशन बेचने वाले दुकानदार ने उन्हें बताया था कि सरसों तेल के भाव बढ़ने वाले हैं, इसलिए आप अभी थोक में तेल खरीद कर रख सकते हो।
इस तेल की खरीदारी से 3 महीने तक उन्हें काफी मदद मिली, लेकिन अब जब सरसों तेल का भाव ₹200 किलो के पार कर गया है तो अपने कंस्ट्रक्शन मजदूरों को राशन उपलब्ध कराने में उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
साल भर में दोगुनी हुई कीमत दिलचस्प तथ्य यह है कि पिछले साल की इसी अवधि में सरसों तेल के भाव ₹125 लीटर के आसपास थे। इसी तरह रिफाइंड तेल की कीमत 90 से ₹100 के बीच थी जो अभी 150-170 रुपये के करीब है। पिछले महीने सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए खाद्य तेलों पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी में कमी की थी। उसके बाद देश भर में खाद्य तेलों के भाव में ₹5 से लेकर ₹20 प्रति लीटर तक की कमी आई है, लेकिन असल सवाल यह है कि पिछले साल भर में खाद्य तेलों के भाव में 80 से 100 फ़ीसदी की तेजी के बाद 5 से ₹20 प्रति लीटर तक की कमी कितनी राहत देने वाली है?
महंगाई से बेहाल हुआ किचन बढ़ती महंगाई के इस दौर में जब लोगों के किचन का खर्च बेतहाशा तरीके से बढ़ा है, सब्जियों और राशन के साथ दालों के भाव भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में तेल की कीमत में मामूली कमी से उनकी जेब को कितनी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरसों उपजने के बाद ही राहत भारत में खाद्य तेलों की कुल खपत में सरसों तेल की हिस्सेदारी 11 फ़ीसदी के करीब है। केंद्र सरकार का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सरसों तेल के भाव में औसतन ढाई रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। सरकार के मुताबिक आमतौर पर सर्दियों में सरसों के तेल के भाव बढ़ते हैं। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। हालांकि, इस साल सरसों की बुवाई का रकबा 12-15 फ़ीसदी तक बढ़ सकता है। एक बार मार्च-अप्रैल में सरसों की फसल पकने के बाद सरसों तेल के भाव में कमी देखने को मिल सकती है।
और मिल सकती है राहत! मोदी सरकार ने कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक ड्यूटी 2. 5 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है। इसके बाद तेल की कीमतों में और कटौती होने की उम्मीद है।
छोटे शहरों में बड़ी राहत अगर देश के छोटे शहरों की बात करें तो वहां खाद्य तेलों के भाव में तुलनात्मक रूप से अधिक कमी देखी गई है। अलीगढ़ जैसे से शहर में पाम ऑयल के भाव ₹18 प्रति किलो तक कम हो गए हैं। मेघालय जैसे राज्यों में सूर्यमुखी के तेल के भाव में ₹20 तक की कमी दर्ज की गई है। अगर देश भर के लेवल पर बात करें तो palm oil के भाव में प्रति किलो 1 रुपये 45 पैसे की कमी आई है जबकि सोयाबीन के तेल में भी इतनी ही कमी दर्ज की जा रही है।
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mustard Oil: इस साल सरसों की बुवाई का रकबा बारह-पंद्रह फ़ीसदी तक बढ़ सकता है। एक बार मार्च-अप्रैल में सरसों की फसल पकने के बाद सरसों तेल के भाव में कमी देखने को मिल सकती है। नई दिल्ली Mustard Oil Prices: दिल्ली-एनसीआर के नोएडा में पीएस एसोसिएट्स के नाम के कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाने वाले एक बिल्डर राधे चौधरी ने अपने एक सौ से अधिक मजदूरों के लिए इस साल अगस्त में सरसों तेल के पच्चीस टिन खरीदे थे। उस समय राशन बेचने वाले दुकानदार ने उन्हें बताया था कि सरसों तेल के भाव बढ़ने वाले हैं, इसलिए आप अभी थोक में तेल खरीद कर रख सकते हो। इस तेल की खरीदारी से तीन महीने तक उन्हें काफी मदद मिली, लेकिन अब जब सरसों तेल का भाव दो सौ रुपया किलो के पार कर गया है तो अपने कंस्ट्रक्शन मजदूरों को राशन उपलब्ध कराने में उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साल भर में दोगुनी हुई कीमत दिलचस्प तथ्य यह है कि पिछले साल की इसी अवधि में सरसों तेल के भाव एक सौ पच्चीस रुपया लीटर के आसपास थे। इसी तरह रिफाइंड तेल की कीमत नब्बे से एक सौ रुपया के बीच थी जो अभी एक सौ पचास-एक सौ सत्तर रुपयापये के करीब है। पिछले महीने सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए खाद्य तेलों पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी में कमी की थी। उसके बाद देश भर में खाद्य तेलों के भाव में पाँच रुपया से लेकर बीस रुपया प्रति लीटर तक की कमी आई है, लेकिन असल सवाल यह है कि पिछले साल भर में खाद्य तेलों के भाव में अस्सी से एक सौ फ़ीसदी की तेजी के बाद पाँच से बीस रुपया प्रति लीटर तक की कमी कितनी राहत देने वाली है? महंगाई से बेहाल हुआ किचन बढ़ती महंगाई के इस दौर में जब लोगों के किचन का खर्च बेतहाशा तरीके से बढ़ा है, सब्जियों और राशन के साथ दालों के भाव भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में तेल की कीमत में मामूली कमी से उनकी जेब को कितनी राहत मिलने की उम्मीद है। सरसों उपजने के बाद ही राहत भारत में खाद्य तेलों की कुल खपत में सरसों तेल की हिस्सेदारी ग्यारह फ़ीसदी के करीब है। केंद्र सरकार का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सरसों तेल के भाव में औसतन ढाई रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है। सरकार के मुताबिक आमतौर पर सर्दियों में सरसों के तेल के भाव बढ़ते हैं। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। हालांकि, इस साल सरसों की बुवाई का रकबा बारह-पंद्रह फ़ीसदी तक बढ़ सकता है। एक बार मार्च-अप्रैल में सरसों की फसल पकने के बाद सरसों तेल के भाव में कमी देखने को मिल सकती है। और मिल सकती है राहत! मोदी सरकार ने कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक ड्यूटी दो. पाँच फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है। इसके बाद तेल की कीमतों में और कटौती होने की उम्मीद है। छोटे शहरों में बड़ी राहत अगर देश के छोटे शहरों की बात करें तो वहां खाद्य तेलों के भाव में तुलनात्मक रूप से अधिक कमी देखी गई है। अलीगढ़ जैसे से शहर में पाम ऑयल के भाव अट्ठारह रुपया प्रति किलो तक कम हो गए हैं। मेघालय जैसे राज्यों में सूर्यमुखी के तेल के भाव में बीस रुपया तक की कमी दर्ज की गई है। अगर देश भर के लेवल पर बात करें तो palm oil के भाव में प्रति किलो एक रुपयापये पैंतालीस पैसे की कमी आई है जबकि सोयाबीन के तेल में भी इतनी ही कमी दर्ज की जा रही है।
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ईज आफ डूइंग बिजनेस में वाराणसी प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। यह जानकारी मण्डलायुक्त दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में दी गई। औद्योगिक क्षेत्र चांदपुर में १० करोड़ रुपए से सड़क, नाली, पटरी आदि निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कार्यों को मानक के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मण्डलायुक्त ने निर्माण कार्यों का थर्ड पार्टी से जांच कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ईट भ_ा उद्यमियों की मांग पर अब भक्तों का पंजीयन जो एक वर्ष तक किया जाता था, उसे अब पांच वर्ष तक के लिए एक बार में ही करने का जिला पंचायत बोर्ड में पारित कर लिया गया है। इंडस्ट्रियल एरिया के विद्युत बिलों की समस्या समाधान हेतु सुनील यादव अधिशासी अभियंता को नोडल बना दिया गया है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना में शत. प्रतिशत की उपलब्धि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार व ओडीओपी में मंडल में ५६९ इकाइयां स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष ३२२ प्रोजेक्ट स्वीकृत हो चुके हैं। शेष के लिए आवेदन बैंकों को भेज दिए गए हैं। कमिश्नर ने अग्रणी बैंक प्रबंधक से कहा कि आगामी १० दिन में लक्ष्य के सापेक्ष १०० फ ीसदी की स्वीकृतियां कराई जाए तथा स्वीकृत प्रोजेक्ट में तत्काल धनराशि वितरित की जाए। औद्योगिक एरिया फेज-१ के निकट निजी भूमि पर स्थापित उद्योगों को जोडऩे वाली सड़कों के मरम्मत हेतु प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए गए। कमिश्नर ने कहा कि इस सड़कों पर हैवी ट्रैफिक चलता हैए इसलिए उसे ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट बनाएं ताकि सड़के चलें। सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र जौनपुर में १०० लाइटे शीघ्र एक सप्ताह में लगा दी जाएंगी। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने उद्यमियों से अपेक्षा भी की कि कड़ाके की ठंड एवं शीतलहर का समय हैए उनके यहां जो कामगार हैं उन्हें उनकी अवस्था व के अनुरूप गरिमामय व्यवस्था प्रदान करें। ताकि सर्दी में दिक्कत नहीं हो। ईज आफ लिविंग अनिवार्य है। इसके हर पहलू को ध्यान में रखा जाए। विशेषकर प्रदूषण नियंत्रण कार्यों को। इस अवसर पर संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश सिंह सहित विभिन्न उद्यमीगण व अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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ईज आफ डूइंग बिजनेस में वाराणसी प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। यह जानकारी मण्डलायुक्त दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में दी गई। औद्योगिक क्षेत्र चांदपुर में दस करोड़ रुपए से सड़क, नाली, पटरी आदि निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कार्यों को मानक के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मण्डलायुक्त ने निर्माण कार्यों का थर्ड पार्टी से जांच कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ईट भ_ा उद्यमियों की मांग पर अब भक्तों का पंजीयन जो एक वर्ष तक किया जाता था, उसे अब पांच वर्ष तक के लिए एक बार में ही करने का जिला पंचायत बोर्ड में पारित कर लिया गया है। इंडस्ट्रियल एरिया के विद्युत बिलों की समस्या समाधान हेतु सुनील यादव अधिशासी अभियंता को नोडल बना दिया गया है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना में शत. प्रतिशत की उपलब्धि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार व ओडीओपी में मंडल में पाँच सौ उनहत्तर इकाइयां स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष तीन सौ बाईस प्रोजेक्ट स्वीकृत हो चुके हैं। शेष के लिए आवेदन बैंकों को भेज दिए गए हैं। कमिश्नर ने अग्रणी बैंक प्रबंधक से कहा कि आगामी दस दिन में लक्ष्य के सापेक्ष एक सौ फ ीसदी की स्वीकृतियां कराई जाए तथा स्वीकृत प्रोजेक्ट में तत्काल धनराशि वितरित की जाए। औद्योगिक एरिया फेज-एक के निकट निजी भूमि पर स्थापित उद्योगों को जोडऩे वाली सड़कों के मरम्मत हेतु प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए गए। कमिश्नर ने कहा कि इस सड़कों पर हैवी ट्रैफिक चलता हैए इसलिए उसे ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट बनाएं ताकि सड़के चलें। सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र जौनपुर में एक सौ लाइटे शीघ्र एक सप्ताह में लगा दी जाएंगी। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने उद्यमियों से अपेक्षा भी की कि कड़ाके की ठंड एवं शीतलहर का समय हैए उनके यहां जो कामगार हैं उन्हें उनकी अवस्था व के अनुरूप गरिमामय व्यवस्था प्रदान करें। ताकि सर्दी में दिक्कत नहीं हो। ईज आफ लिविंग अनिवार्य है। इसके हर पहलू को ध्यान में रखा जाए। विशेषकर प्रदूषण नियंत्रण कार्यों को। इस अवसर पर संयुक्त आयुक्त उद्योग उमेश सिंह सहित विभिन्न उद्यमीगण व अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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सोने चाँदी के जेवरात और लाखो की नकदी की चोरी कर फरार होने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस अज्ञात चोरों के खिलाफ 454,457,380 ,34 के तहत मामला दर्ज कर आरोपीओ की तलाश में जुटी है।
अंनत नारसुंगा राजा नकास (32) एक प्राइवेट कम्पनी में कार्यरत है। 21 दिसंबर की रात को अंनत अपने बेडरूम में सोये हुए थे। रात करीब 12:30 और 2:30 के दरमियान अज्ञात चोर ने मुख्यदारवाजा का ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया । किचन में रखे दोनों कपाट के लोकर को खोलकर अंदर रखे सोने चाँदी के जेवरात व् नकदी सब गायब थे। घर घटी चोरी की घटना की जानकारी क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को दी। सुचना पर पहुची पुलिस ने घटनास्थल का पंचानामा किया। अंनत ने पुलिस को अपनी शिकायत में बतया की चोरी हुए जेवारत और नकदी 9 लाख 23 हजार के आसपास की थी। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर फरार आरोपीओ की तलाश में जुटी है।मामले की जाँच सहा पुलिस निरीक्षक राकेश पगारे कर रहे है।
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सोने चाँदी के जेवरात और लाखो की नकदी की चोरी कर फरार होने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस अज्ञात चोरों के खिलाफ चार सौ चौवन,चार सौ सत्तावन,तीन सौ अस्सी ,चौंतीस के तहत मामला दर्ज कर आरोपीओ की तलाश में जुटी है। अंनत नारसुंगा राजा नकास एक प्राइवेट कम्पनी में कार्यरत है। इक्कीस दिसंबर की रात को अंनत अपने बेडरूम में सोये हुए थे। रात करीब बारह:तीस और दो:तीस के दरमियान अज्ञात चोर ने मुख्यदारवाजा का ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया । किचन में रखे दोनों कपाट के लोकर को खोलकर अंदर रखे सोने चाँदी के जेवरात व् नकदी सब गायब थे। घर घटी चोरी की घटना की जानकारी क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को दी। सुचना पर पहुची पुलिस ने घटनास्थल का पंचानामा किया। अंनत ने पुलिस को अपनी शिकायत में बतया की चोरी हुए जेवारत और नकदी नौ लाख तेईस हजार के आसपास की थी। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर फरार आरोपीओ की तलाश में जुटी है।मामले की जाँच सहा पुलिस निरीक्षक राकेश पगारे कर रहे है।
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यह कैसे हो सकता है उसे समझने के लिये इन गोलियों की पेकिंग को ध्यान से देखिये । अधिकतर पेकिंग में 28 गोलियां होती हैं; जिनमें से 21 एक्टिव (हार्मोन वाली) और 7 इनेक्टिव (हार्मोन रहित) होती हैं । समान्यतः जिन दिनों इनेक्टिव पिल्स ली जाती हैं, उन्हीं दिनों में पीरियड्स होते हैं । इसलिए महिलाएं चाहे तो अधिक दिन एक्टिव पिल्स लेकर पीरियड्स को और अधिक टाल सकती हैं ।
गर्भाशय में प्रोस्टेग्लेडीन नामक एक हार्मोन का स्राव होता है । इस हार्मोन का अधिक स्राव होने से पीरियड्स के दिनों में दर्द रहता है । क्योंकि इससे गर्भाशय में संकुचन होता है और क्रेम्प्स बनते हैं गर्भनिरोधक गोलियां लेने से ओवुलेशन कम होता है और इस हार्मोन का स्राव भी कम होता है । इसलिए पीरियड्स में होने वाला दर्द भी कम होता है ।
ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित एक शोध के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियां और गर्भावस्था दोनों शरीर में हार्मोन के संतुलन पर सकारात्मक असर डालती हैं । इससे विशेषकर डिंबाशय के कैंसर का खतरा कम हो सकता है । इस शोध की अध्ययनकर्ता नाओमी एलेन ने बीबीसी केई माध्यम से कहा है कि अध्ययन के ये परिणाम बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अधिकांश महिलाओं को यह मालूम नहीं है कि गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से और उनके गर्भ-धरण करने से उनकी डिंबाशय के कैंसर से सुरक्षा होती है; और यह कैंसर ऐसा है कि इसका जल्दी पता लगना मुश्किल होता है; इसलिए इससे यथासंभव बचाव ही अच्छा उपाय है ।
मुहांसों की समस्या और त्वचा की कुछ और समस्याओं का मुख्य कारण हार्मोन्स का असंतुलन होता है । गर्भनिरोधक गोलियां हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करती हैं इसलिए ये ऐसी समस्याओं को भी कम करती हैं । यह मुहांसों आदि के दूसरे कई इलाजों से बेहतर विकल्प है।
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यह कैसे हो सकता है उसे समझने के लिये इन गोलियों की पेकिंग को ध्यान से देखिये । अधिकतर पेकिंग में अट्ठाईस गोलियां होती हैं; जिनमें से इक्कीस एक्टिव और सात इनेक्टिव होती हैं । समान्यतः जिन दिनों इनेक्टिव पिल्स ली जाती हैं, उन्हीं दिनों में पीरियड्स होते हैं । इसलिए महिलाएं चाहे तो अधिक दिन एक्टिव पिल्स लेकर पीरियड्स को और अधिक टाल सकती हैं । गर्भाशय में प्रोस्टेग्लेडीन नामक एक हार्मोन का स्राव होता है । इस हार्मोन का अधिक स्राव होने से पीरियड्स के दिनों में दर्द रहता है । क्योंकि इससे गर्भाशय में संकुचन होता है और क्रेम्प्स बनते हैं गर्भनिरोधक गोलियां लेने से ओवुलेशन कम होता है और इस हार्मोन का स्राव भी कम होता है । इसलिए पीरियड्स में होने वाला दर्द भी कम होता है । ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित एक शोध के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियां और गर्भावस्था दोनों शरीर में हार्मोन के संतुलन पर सकारात्मक असर डालती हैं । इससे विशेषकर डिंबाशय के कैंसर का खतरा कम हो सकता है । इस शोध की अध्ययनकर्ता नाओमी एलेन ने बीबीसी केई माध्यम से कहा है कि अध्ययन के ये परिणाम बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अधिकांश महिलाओं को यह मालूम नहीं है कि गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से और उनके गर्भ-धरण करने से उनकी डिंबाशय के कैंसर से सुरक्षा होती है; और यह कैंसर ऐसा है कि इसका जल्दी पता लगना मुश्किल होता है; इसलिए इससे यथासंभव बचाव ही अच्छा उपाय है । मुहांसों की समस्या और त्वचा की कुछ और समस्याओं का मुख्य कारण हार्मोन्स का असंतुलन होता है । गर्भनिरोधक गोलियां हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करती हैं इसलिए ये ऐसी समस्याओं को भी कम करती हैं । यह मुहांसों आदि के दूसरे कई इलाजों से बेहतर विकल्प है।
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Sarkari Naukri 2021: डायरेक्टरेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (DSE), ओडीशा ने शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इन पदों पर कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर भर्ती की जाएगी। योग्य उम्मीदवार भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट dseodisha. in पर 23 अगस्त 2021 से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 14 सितंबर 2021है। वहीं, भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाने की संभावना है।
इस प्रक्रिया के माध्यम से कुल 4619 पदों पर भर्ती की जाएगी। जिसमें, हिंदी टीचर के 2055 पद, संस्कृत टीचर के 1304 पद और फिजिकल एजुकेशन टीचर के 1260 पद शामिल हैं। संस्कृत टीचर और हिंदी टीचर पद पर भर्ती के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 50% अंकों के साथ बैचलर्स पास होना चाहिए। जबकि, फिजिकल एजुकेशन टीचर पद के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 पास होना चाहिए। इसके साथ ही C. P. Ed, B. P. Ed या M. P. Ed पास होना चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 21 साल से 31 साल के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी। विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवार आधिकारिक नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं।
शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। यह टेस्ट पास करने के लिए उम्मीदवारों को पेपर 1 में न्यूनतम 25% अंक और पेपर 2 में न्यूनतम 35% अंक प्राप्त करना होगा। यह परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने वाले उम्मीदवारों की रैंक लिस्ट तैयार की जाएगी। बता दें कि हिंदी टीचर और संस्कृत टीचर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 16,880 रुपए और फिजिकल एजुकेशन टीचर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 10,000 रुपए महीने तक का वेतन दिया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य मोड से किए गए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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Sarkari Naukri दो हज़ार इक्कीस: डायरेक्टरेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन , ओडीशा ने शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इन पदों पर कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर भर्ती की जाएगी। योग्य उम्मीदवार भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट dseodisha. in पर तेईस अगस्त दो हज़ार इक्कीस से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख चौदह सितंबर दो हज़ार इक्कीसहै। वहीं, भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाने की संभावना है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कुल चार हज़ार छः सौ उन्नीस पदों पर भर्ती की जाएगी। जिसमें, हिंदी टीचर के दो हज़ार पचपन पद, संस्कृत टीचर के एक हज़ार तीन सौ चार पद और फिजिकल एजुकेशन टीचर के एक हज़ार दो सौ साठ पद शामिल हैं। संस्कृत टीचर और हिंदी टीचर पद पर भर्ती के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पचास% अंकों के साथ बैचलर्स पास होना चाहिए। जबकि, फिजिकल एजुकेशन टीचर पद के लिए उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से दस+दो पास होना चाहिए। इसके साथ ही C. P. Ed, B. P. Ed या M. P. Ed पास होना चाहिए। आयु सीमा की बात करें तो इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु इक्कीस साल से इकतीस साल के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी। विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवार आधिकारिक नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं। शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। यह टेस्ट पास करने के लिए उम्मीदवारों को पेपर एक में न्यूनतम पच्चीस% अंक और पेपर दो में न्यूनतम पैंतीस% अंक प्राप्त करना होगा। यह परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने वाले उम्मीदवारों की रैंक लिस्ट तैयार की जाएगी। बता दें कि हिंदी टीचर और संस्कृत टीचर पद पर चयनित उम्मीदवारों को सोलह,आठ सौ अस्सी रुपयापए और फिजिकल एजुकेशन टीचर पद पर चयनित उम्मीदवारों को दस,शून्य रुपयापए महीने तक का वेतन दिया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य मोड से किए गए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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मंत्रालय परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिये वित्तपोषण (वीजीएफ) के साथ केंद्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसयू) द्वारा ग्रिड से जुड़ी सौर फोटोवोल्टिंग बिजली परियोजनाएं लगाने की योजना क्रियान्वित कर रहा है।
योजना के तहत इन परियोजाओं का क्रियान्वयन देश में विनिर्मित सौर सेल और मॉड्यूल के साथ हो रहा है।
योजना के तहत वीजीएफ उपलब्ध कराने के बारे में एमएनआरई ने कहा कि परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिये वित्तपोषण का मकसद घरेलू रूप से विनिर्मित सौर पीवी सेल और मॉड्यूल तथा आयातित उपकरणों की लागत के बीच अंतर को पाटना है।
एमएनआरई ने यह भी कहा कि सीपीएसयू योजना चरण-दो के तहत शुल्क 'कोट' करने की जरूरत नहीं है और बोलीदाताओं को केवल वीजीएफ के बारे में बताना होता है। इसके तहत अधिकतम स्वीकार्य सीमा 70 लाख रुपये प्रति मेगावॉट है।
योजना के पहले चरण के तहत नौ सीपीएसयू ने इसमें भाग लिया। ये कंपनियां हैं, एनटीपीसी, भेल, राष्ट्रीय इस्पात निगम, एनएचपीसी, ओएनजीसी, गेल, स्कूटर्स इंडिया, दादरा एवं नगर हवेली पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉरपोरेशन और एनएलसी इंडिया।
इस योजना के दूसरे चरण में 12,000 मेगावॉट क्षमता सृजित करने के लक्ष्य के तहत सात सीपीएसयू/सरकारी संगठनों ने इसमें भाग लिया। ये कंपनियां हैं. . . एनएचडीसी, सिंगरेनी कोलियरी कंपनी, असम पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, नालंदा विश्विविद्यालय, एनटीपीसी और इंदौर नगर निगम।
समिति ने यह भी कहा कि छतों पर लगायी जाने वाली सौर परियोजनाओं का लक्ष्य तबतक हासिल नहीं किया जा सकता जबतक समुचित तरीके से 'नेट/ग्रॉस मीटरिंग' व्यवस्था लागू नहीं की जाती। इसके अलावा नियमन/परिचालन प्रक्रिया आदि के संदर्भ में एकरूपता भी जरूरी है।
ग्रॉस मीटरिंग में उपभोक्ताओं की क्षतिपूर्ति निश्चित दर पर कुल सौर बिजली उत्पादन और ग्रिड से उसे जोड़े जाने के आधार पर की जाती है जबकि नेट मीटरिंग में ग्राहकों की खपत के बाद जो सौर बिजली ग्रिड से जोड़ी जाती है, उसका भुगतान किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्य/संयुक्त बिजली नियामक आयोग ने 'नेट मीटरिंग नियमन/शुल्क आदेश जारी किया है लेकिन इस संदर्भ में एकरूपता का अभाव है।
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मंत्रालय परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिये वित्तपोषण के साथ केंद्रीय लोक उपक्रमों द्वारा ग्रिड से जुड़ी सौर फोटोवोल्टिंग बिजली परियोजनाएं लगाने की योजना क्रियान्वित कर रहा है। योजना के तहत इन परियोजाओं का क्रियान्वयन देश में विनिर्मित सौर सेल और मॉड्यूल के साथ हो रहा है। योजना के तहत वीजीएफ उपलब्ध कराने के बारे में एमएनआरई ने कहा कि परियोजना को व्यावहारिक बनाने के लिये वित्तपोषण का मकसद घरेलू रूप से विनिर्मित सौर पीवी सेल और मॉड्यूल तथा आयातित उपकरणों की लागत के बीच अंतर को पाटना है। एमएनआरई ने यह भी कहा कि सीपीएसयू योजना चरण-दो के तहत शुल्क 'कोट' करने की जरूरत नहीं है और बोलीदाताओं को केवल वीजीएफ के बारे में बताना होता है। इसके तहत अधिकतम स्वीकार्य सीमा सत्तर लाख रुपये प्रति मेगावॉट है। योजना के पहले चरण के तहत नौ सीपीएसयू ने इसमें भाग लिया। ये कंपनियां हैं, एनटीपीसी, भेल, राष्ट्रीय इस्पात निगम, एनएचपीसी, ओएनजीसी, गेल, स्कूटर्स इंडिया, दादरा एवं नगर हवेली पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉरपोरेशन और एनएलसी इंडिया। इस योजना के दूसरे चरण में बारह,शून्य मेगावॉट क्षमता सृजित करने के लक्ष्य के तहत सात सीपीएसयू/सरकारी संगठनों ने इसमें भाग लिया। ये कंपनियां हैं. . . एनएचडीसी, सिंगरेनी कोलियरी कंपनी, असम पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, नालंदा विश्विविद्यालय, एनटीपीसी और इंदौर नगर निगम। समिति ने यह भी कहा कि छतों पर लगायी जाने वाली सौर परियोजनाओं का लक्ष्य तबतक हासिल नहीं किया जा सकता जबतक समुचित तरीके से 'नेट/ग्रॉस मीटरिंग' व्यवस्था लागू नहीं की जाती। इसके अलावा नियमन/परिचालन प्रक्रिया आदि के संदर्भ में एकरूपता भी जरूरी है। ग्रॉस मीटरिंग में उपभोक्ताओं की क्षतिपूर्ति निश्चित दर पर कुल सौर बिजली उत्पादन और ग्रिड से उसे जोड़े जाने के आधार पर की जाती है जबकि नेट मीटरिंग में ग्राहकों की खपत के बाद जो सौर बिजली ग्रिड से जोड़ी जाती है, उसका भुगतान किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्य/संयुक्त बिजली नियामक आयोग ने 'नेट मीटरिंग नियमन/शुल्क आदेश जारी किया है लेकिन इस संदर्भ में एकरूपता का अभाव है।
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अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान की टीम को एकतरफा हरा दिया है और साथ ही फ़ाइनल में भी पहुँच गयी है। इस मैच में भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया जो कि भारतीय टीम के लिए बहुत अच्छा रहा और 50 ओवर में 9 विकेट गंवाकर 272 रन बनाये जिसके जवाब पाकिस्तान की टीम ने बहुत शर्मनाक प्रदर्शन किया और 100 रन भी नहीं बना पायी और सिर्फ 69 रन के स्कोर पर ही ऑल आउट हो गयी।
भारत की और से इस मुकाबले में शुबमन गिल ने एक बार फिर से धमाकेदार बल्लेबाजी की और 94 गेंदों का सामना करते हुए 102 रन बनाये जिसमें इन्होंने 7 चौकों की सहायता ली है जबकि कप्तान पृथ्वी शॉ ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 42 गेंदों पर 41 रन बनाये साथ ही इनके साथी ओपनर बल्लेबाज मनोज कालरा ने भी अच्छी बल्लेबाजी की और 59 गेंदों पर 47 रनों की पारी खेली है जिसके चलते भारतीय टीम ने इतना बड़ा टारगेट दिया।
पाकिस्तान की तरफ से किसी भी बल्लेबाज ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और तीन बल्लेबाजों के सिवाय कोई भी दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया है जिसमें सबसे ज्यादा विकेटकीपर बल्लेबाज रोहेल नजीर ने 18 रन बनाए है। अगर हम भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो ईशान पोरेल ने सबसे अच्छी गेंदबाजी करते हुए 6 ओवर में 17 रन देते हुए 4 बड़ी सफलताएं ली, जिसमें इन्होंने 2 ओवर मैडन भी किये है। भारत की तरफ से शानदार शतकीय पारी खेलने वाले शुबमन गिल को मैन ऑफ़ द मैच का अवार्ड दिया गया।
इस तरह भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम का यह शानदार प्रदर्शन जारी है और अब तक इस विश्व कप में एक भी मुकाबला नहीं हारा है जबकि अब फाइनल मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के साथ 3 फरवरी को खेला जाने वाला है। गौरतलब हो कि भारत ने पहला मुकाबला भी ऑस्ट्रेलिया के साथ खेला था जिसमें भारत ने बहुत जबरदस्त प्रदर्शन किया था और ऑस्ट्रेलिया को 100 रनों से हराया था तो अब एक बार फिर इन दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर होने वाली है।
- भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करते हुए 272 रन बनाये।
- शुभमन गिल ने 104 रन बनाये, पाकिस्तान के मोहम्मद मुस्सा ने 4 विकेट लिए।
- पाकिस्तान की टीम 69 रनों पर ऑल आउट हो गयी।
- रोहेल नजीर ने 18 रन बनाये, भारत के ईशान पोरेल ने 4 विकेट लिए।
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अंडर-उन्नीस क्रिकेट विश्व कप में दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान की टीम को एकतरफा हरा दिया है और साथ ही फ़ाइनल में भी पहुँच गयी है। इस मैच में भारतीय अंडर-उन्नीस क्रिकेट टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया जो कि भारतीय टीम के लिए बहुत अच्छा रहा और पचास ओवर में नौ विकेट गंवाकर दो सौ बहत्तर रन बनाये जिसके जवाब पाकिस्तान की टीम ने बहुत शर्मनाक प्रदर्शन किया और एक सौ रन भी नहीं बना पायी और सिर्फ उनहत्तर रन के स्कोर पर ही ऑल आउट हो गयी। भारत की और से इस मुकाबले में शुबमन गिल ने एक बार फिर से धमाकेदार बल्लेबाजी की और चौरानवे गेंदों का सामना करते हुए एक सौ दो रन बनाये जिसमें इन्होंने सात चौकों की सहायता ली है जबकि कप्तान पृथ्वी शॉ ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और बयालीस गेंदों पर इकतालीस रन बनाये साथ ही इनके साथी ओपनर बल्लेबाज मनोज कालरा ने भी अच्छी बल्लेबाजी की और उनसठ गेंदों पर सैंतालीस रनों की पारी खेली है जिसके चलते भारतीय टीम ने इतना बड़ा टारगेट दिया। पाकिस्तान की तरफ से किसी भी बल्लेबाज ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और तीन बल्लेबाजों के सिवाय कोई भी दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया है जिसमें सबसे ज्यादा विकेटकीपर बल्लेबाज रोहेल नजीर ने अट्ठारह रन बनाए है। अगर हम भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो ईशान पोरेल ने सबसे अच्छी गेंदबाजी करते हुए छः ओवर में सत्रह रन देते हुए चार बड़ी सफलताएं ली, जिसमें इन्होंने दो ओवर मैडन भी किये है। भारत की तरफ से शानदार शतकीय पारी खेलने वाले शुबमन गिल को मैन ऑफ़ द मैच का अवार्ड दिया गया। इस तरह भारतीय अंडर-उन्नीस क्रिकेट टीम का यह शानदार प्रदर्शन जारी है और अब तक इस विश्व कप में एक भी मुकाबला नहीं हारा है जबकि अब फाइनल मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के साथ तीन फरवरी को खेला जाने वाला है। गौरतलब हो कि भारत ने पहला मुकाबला भी ऑस्ट्रेलिया के साथ खेला था जिसमें भारत ने बहुत जबरदस्त प्रदर्शन किया था और ऑस्ट्रेलिया को एक सौ रनों से हराया था तो अब एक बार फिर इन दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर होने वाली है। - भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करते हुए दो सौ बहत्तर रन बनाये। - शुभमन गिल ने एक सौ चार रन बनाये, पाकिस्तान के मोहम्मद मुस्सा ने चार विकेट लिए। - पाकिस्तान की टीम उनहत्तर रनों पर ऑल आउट हो गयी। - रोहेल नजीर ने अट्ठारह रन बनाये, भारत के ईशान पोरेल ने चार विकेट लिए।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहरी निकाय चुनाव (Urban Body Election) के पहले चरण के मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राज्य चुनाव आयोग (SEC) के अनुसार, 37 जिलों के लोग पहले चरण में 7,593 प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान करेंगे, जिनमें 10 महापौर और 820 नगरसेवक शामिल हैं। दूसरे चरण का मतदान 11 मई को होगा। दो चरणों में होने वाले चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) से पहले पार्टियों के लिए अहम परीक्षा होंगे। अधिकारियों ने कहा कि पहले दौर के मतदान में 2.40 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। सभी पदों पर पार्टी के चुनाव चिह्न् पर चुनाव लड़ा जा रहा है। पहले चरण में 103 नगर पालिका परिषद अध्यक्षों और 2,740 नगर पालिका परिषद सदस्यों के पदों के लिए मतदान होगा।
इसके अलावा, पहले चरण के मतदाता 275 नगर पंचायत अध्यक्षों और 3,645 नगर पंचायत सदस्यों के भाग्य का भी फैसला करेंगे। पहले दौर में कुल 44,232 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार (Manoj Kumar) ने बताया कि 10 पार्षदों समेत 85 प्रतिनिधि पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। जिन जिलों में पहले चरण में मेयर का चुनाव होगा उनमें सहारनपुर, आगरा, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, मथुरा, झांसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी शामिल हैं। दोनों चरणों की मतगणना 13 मई को होगी। पहले चरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 35 कंपनियों और पीएसी की 86 कंपनियों सहित दो लाख जवानों को वर्दी में तैनात किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि 19,880 निरीक्षक, 1.01 लाख हेड कांस्टेबल, 47,985 होमगार्ड और 7,500 प्रशिक्षु उप निरीक्षक भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार (Prasant Kumar) ने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अब तक 1,101 लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जबकि अन्य 14 पर एनएसए लगाया गया है, जो पहले से ही जेल में हैं और मतदान से पहले जमानत चाहते हैं।
उन्होंने कहा, राज्य के विभिन्न जिलों से 2,012 उपद्रवियों को बाहर निकाला गया है। इसी तरह, पिछले 15 दिनों में 6.48 लाख अन्य लोगों पर शांति भंग करने का मामला दर्ज किया गया है। स्पेशल डीजी ने कहा कि कवायद के तहत देसी पिस्टल बनाने वाली 42 अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें 2,958 हथियार और 4,500 कारतूस बरामद किए गए। इसी तरह 3,470 किलोग्राम वजनी कम तीव्रता का विस्फोटक (Explosive) जब्त किया गया। पुलिस ने 37 करोड़ रुपये के ड्रग्स की तस्करी करने वाले 987 व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया, जबकि 2.99 लाख लीटर अवैध शराब (Illegal Liquor) जब्त की गई और 766 लोगों पर अवैध शराब बनाने/तस्करी करने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि 8.19 लाख वाहन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए हैं, जबकि 7,426 अन्य वाहनों को राज्य भर में चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में जब्त किया गया है। उन्होंने कहा, मतदान केंद्रों के पास और गुरुवार को मतदान वाले जिलों में भी गश्त तेज कर दी गई है। (आईएएनएस)
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहरी निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, सैंतीस जिलों के लोग पहले चरण में सात,पाँच सौ तिरानवे प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान करेंगे, जिनमें दस महापौर और आठ सौ बीस नगरसेवक शामिल हैं। दूसरे चरण का मतदान ग्यारह मई को होगा। दो चरणों में होने वाले चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टियों के लिए अहम परीक्षा होंगे। अधिकारियों ने कहा कि पहले दौर के मतदान में दो.चालीस करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। सभी पदों पर पार्टी के चुनाव चिह्न् पर चुनाव लड़ा जा रहा है। पहले चरण में एक सौ तीन नगर पालिका परिषद अध्यक्षों और दो,सात सौ चालीस नगर पालिका परिषद सदस्यों के पदों के लिए मतदान होगा। इसके अलावा, पहले चरण के मतदाता दो सौ पचहत्तर नगर पंचायत अध्यक्षों और तीन,छः सौ पैंतालीस नगर पंचायत सदस्यों के भाग्य का भी फैसला करेंगे। पहले दौर में कुल चौंतालीस,दो सौ बत्तीस उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि दस पार्षदों समेत पचासी प्रतिनिधि पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। जिन जिलों में पहले चरण में मेयर का चुनाव होगा उनमें सहारनपुर, आगरा, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, मथुरा, झांसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी शामिल हैं। दोनों चरणों की मतगणना तेरह मई को होगी। पहले चरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की पैंतीस कंपनियों और पीएसी की छियासी कंपनियों सहित दो लाख जवानों को वर्दी में तैनात किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्नीस,आठ सौ अस्सी निरीक्षक, एक.एक लाख हेड कांस्टेबल, सैंतालीस,नौ सौ पचासी होमगार्ड और सात,पाँच सौ प्रशिक्षु उप निरीक्षक भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अब तक एक,एक सौ एक लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जबकि अन्य चौदह पर एनएसए लगाया गया है, जो पहले से ही जेल में हैं और मतदान से पहले जमानत चाहते हैं। उन्होंने कहा, राज्य के विभिन्न जिलों से दो,बारह उपद्रवियों को बाहर निकाला गया है। इसी तरह, पिछले पंद्रह दिनों में छः.अड़तालीस लाख अन्य लोगों पर शांति भंग करने का मामला दर्ज किया गया है। स्पेशल डीजी ने कहा कि कवायद के तहत देसी पिस्टल बनाने वाली बयालीस अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें दो,नौ सौ अट्ठावन हथियार और चार,पाँच सौ कारतूस बरामद किए गए। इसी तरह तीन,चार सौ सत्तर किलोग्रामग्राम वजनी कम तीव्रता का विस्फोटक जब्त किया गया। पुलिस ने सैंतीस करोड़ रुपये के ड्रग्स की तस्करी करने वाले नौ सौ सत्तासी व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया, जबकि दो.निन्यानवे लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई और सात सौ छयासठ लोगों पर अवैध शराब बनाने/तस्करी करने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आठ.उन्नीस लाख वाहन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए हैं, जबकि सात,चार सौ छब्बीस अन्य वाहनों को राज्य भर में चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में जब्त किया गया है। उन्होंने कहा, मतदान केंद्रों के पास और गुरुवार को मतदान वाले जिलों में भी गश्त तेज कर दी गई है।
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