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मेरा कर्ता । रोकनेसे या आत्मध्यान से सुख शांतिका लाभ होगा। इसलिये यदि आपको सुखशांतिका लाभ करना है तो आत्मध्यान करनेका अभ्यास करना चाहिये । शिष्य गुरुजी ! हम आत्माका ध्यान कैसे करें ? शिक्षक- आप विद्यार्थी हैं। आप ध्यानका थोड़ासा अभ्यास कुछ देर प्रारम्भ कर दीजिये। मैं आपको आत्मध्यानका उपाय बताता हूं । लोग कहते हैं बहुत कठिन है परन्तु आत्माको अभ्यास करने से सुगम मालूम होगा । आत्मध्यान एक तरहका व्यायाम है। जैसे शारीरिक व्यायाम करने से शरीर पुष्ट होता है वैसे आत्मिक व्यायाम करनेसे आत्मा बलवान होता है। जैसे शरीरकी कसरत शुरू करते हुए कठिन मालूम होती है लेकिन एक दफे शुरू कर दी गई और कुछ दिन जारी रक्खी गई तो फिर सुगम होजाती है वही हाल आत्मीक व्यायामका है। आप सबेरे सूर्यके उदयके कुछ पहले जब आकाशमें लाली छारही हो, बिछौना छोड़कर व हाथ पग धोकर यदि कुछ मनमें ग्लानि हो तो बदन पोळकर व कपड़े बदलकर एक आसन या पाटा बिछाकर अलग एकांतमें बैठ जावे । ५, १०, १५ जितने मिनट आप दे सकें उतनी देर के लिये आप यह इरादा करलें कि इतनी देरके लिये मैंने दुनियांके सब कामोंसे छुट्टी लेली है। मैं इनी देर सिर्फ अपने आपसे बातें करूंगा। अपनी ही तरफ देखूंगा। किसी और वस्तुकी तरफ बिल न लगाऊंगा । ऐसा दृढ़ संकल्प करके आप बैठ जाइये और अपना आसन पद्मासन या अर्ध पद्मासन बना लीजिये । दोनों पैर बांधपर रखकर बाएं हाथपर दाहना हाथ रखकर
मेरा कर्ता । रोकनेसे या आत्मध्यान से सुख शांतिका लाभ होगा। इसलिये यदि आपको सुखशांतिका लाभ करना है तो आत्मध्यान करनेका अभ्यास करना चाहिये । शिष्य गुरुजी ! हम आत्माका ध्यान कैसे करें ? शिक्षक- आप विद्यार्थी हैं। आप ध्यानका थोड़ासा अभ्यास कुछ देर प्रारम्भ कर दीजिये। मैं आपको आत्मध्यानका उपाय बताता हूं । लोग कहते हैं बहुत कठिन है परन्तु आत्माको अभ्यास करने से सुगम मालूम होगा । आत्मध्यान एक तरहका व्यायाम है। जैसे शारीरिक व्यायाम करने से शरीर पुष्ट होता है वैसे आत्मिक व्यायाम करनेसे आत्मा बलवान होता है। जैसे शरीरकी कसरत शुरू करते हुए कठिन मालूम होती है लेकिन एक दफे शुरू कर दी गई और कुछ दिन जारी रक्खी गई तो फिर सुगम होजाती है वही हाल आत्मीक व्यायामका है। आप सबेरे सूर्यके उदयके कुछ पहले जब आकाशमें लाली छारही हो, बिछौना छोड़कर व हाथ पग धोकर यदि कुछ मनमें ग्लानि हो तो बदन पोळकर व कपड़े बदलकर एक आसन या पाटा बिछाकर अलग एकांतमें बैठ जावे । पाँच, दस, पंद्रह जितने मिनट आप दे सकें उतनी देर के लिये आप यह इरादा करलें कि इतनी देरके लिये मैंने दुनियांके सब कामोंसे छुट्टी लेली है। मैं इनी देर सिर्फ अपने आपसे बातें करूंगा। अपनी ही तरफ देखूंगा। किसी और वस्तुकी तरफ बिल न लगाऊंगा । ऐसा दृढ़ संकल्प करके आप बैठ जाइये और अपना आसन पद्मासन या अर्ध पद्मासन बना लीजिये । दोनों पैर बांधपर रखकर बाएं हाथपर दाहना हाथ रखकर
चेन्नई, 4 मार्च (आईएएनएस)। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) ने सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) व विदुथलाई चिरुथाइगल कांची (वीसीके) के साथ लोकसभा चुनाव के लिए समझौता किया। तीनों पार्टियों के बीच हुए समझौता हस्ताक्षर के अनुसार, भाकपा व वीसीके को दो-दो सीटें मिली हैं। मीडिया से बातचीत में वीसीके नेता तिरुमावल्वन ने कहा कि दो निर्वाचन क्षेत्रों का फैसला बाद में किया जाएगा। तिरुमावल्वन के अनुसार, द्रमुक की अगुवाई वाला गठबंधन लोकसभा की सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इसमें तमिलनाडु की 39 व पुडुचेरी की एक सीट शामिल है। उन्होंने कहा कि पार्टी यह फैसला करेगी कि वह खुद के चुनाव चिन्ह पर या द्रमुक के 'उगते सूरज' चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी। भाकपा के तमिलनाडु के राज्य सचिव आर. मुथरासन ने कहा कि पहले चरण की बातचीत के बाद दूसरे चरण में समझौता हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी खुद के चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी। मुथरासन ने कहा कि माकपा, द्रमुक को उपचुनावों में समर्थन देगी, जो कि तमिलनाडु की खाली 21 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में कराए जाएंगे। द्रमुक ने कांग्रेस (तमिलनाडु में नौ सीटों व पुडुचेरी की एक सीट), भाकपा, वीसीके (प्रत्येक दो-दो सीट) आईयूएमएल व केडीएमके (दोनों एक-एक सीट पर) के साथ चुनावी गठबंधन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। द्रमुक एमडीएमके, माकपा व डीएमडीके के साथ भी वार्ता कर रही है। डीएमडीके के संस्थापक ए. विजयकांत ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें किस के साथ गठबंधन हो, इस पर फैसला लिया जाएगा।
चेन्नई, चार मार्च । द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व विदुथलाई चिरुथाइगल कांची के साथ लोकसभा चुनाव के लिए समझौता किया। तीनों पार्टियों के बीच हुए समझौता हस्ताक्षर के अनुसार, भाकपा व वीसीके को दो-दो सीटें मिली हैं। मीडिया से बातचीत में वीसीके नेता तिरुमावल्वन ने कहा कि दो निर्वाचन क्षेत्रों का फैसला बाद में किया जाएगा। तिरुमावल्वन के अनुसार, द्रमुक की अगुवाई वाला गठबंधन लोकसभा की सभी चालीस सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इसमें तमिलनाडु की उनतालीस व पुडुचेरी की एक सीट शामिल है। उन्होंने कहा कि पार्टी यह फैसला करेगी कि वह खुद के चुनाव चिन्ह पर या द्रमुक के 'उगते सूरज' चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी। भाकपा के तमिलनाडु के राज्य सचिव आर. मुथरासन ने कहा कि पहले चरण की बातचीत के बाद दूसरे चरण में समझौता हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी खुद के चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी। मुथरासन ने कहा कि माकपा, द्रमुक को उपचुनावों में समर्थन देगी, जो कि तमिलनाडु की खाली इक्कीस विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में कराए जाएंगे। द्रमुक ने कांग्रेस , भाकपा, वीसीके आईयूएमएल व केडीएमके के साथ चुनावी गठबंधन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। द्रमुक एमडीएमके, माकपा व डीएमडीके के साथ भी वार्ता कर रही है। डीएमडीके के संस्थापक ए. विजयकांत ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें किस के साथ गठबंधन हो, इस पर फैसला लिया जाएगा।
मोरना। गांव नंगला बुजुर्ग से तीन माह से लापता ई-रिक्शा चालक की हत्या का पुलिस ने शनिवार को खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार राज मिस्त्री कफील ने ही रूपये देने से बचने को जमशेद का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी तथा शव को ठिकाने लगा दिया। पुलिस पहले ही अमरोहा जिले से जमशेद की ई-रिक्शा को बरामद कर चुकी है, किन्तु अभी जमशेद का शव बरामद नहीं हो सका है। जिससे परिजनों में रोष बना हुआ है। भोपा थाना क्षेत्र के गांव नंगला बुजुर्ग निवासी ई रिक्शा चालक जमशेद सात मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने 10 मार्च को गुमशुदगी दर्ज कराते हुए गांव के ही राज मिस्त्री कफील पर गायब करने का भी आरोप लगाया था। 13 मार्च को कफील के कपड़े व मोबाइल गंगनहर पटरी पर मिले थे। परिजनों ने कफील द्वारा आत्महत्या करने की आशंका जताई थी। कई दिनों तक कफील को गंगनहर में तलाश किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। 27 मार्च को पुलिस ने अमरोहा जिले के नौगांवा सादात में लापता कफील के दूर के रिश्तेदार के घर से जमशेद की ई-रिक्शा को बरामद किया था। रिश्तेदारों का कहना था कि ई रिक्शा को कफील ही उनके घर पर छोड़कर गया था। ई रिक्शा बरामद होने के बाद जमशेद व कफील के लापता होने के सुरागरसी में पुलिस तेजी से जुट गई तथा एक दिन पुलिस ने लापता कफील को धर दबोचा। कफील द्वारा अपनी आत्महत्या का नाटक करने से वह शक के दायरे में आ गया था। प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार शनिवार को घटना का खुलासा करते हुए बताया कि कफील ने ई-रिक्शा चालक जमशेद से शादी कराने के नाम पर लगभग 6० हजार रुपये ले रखे थे, लेकिन शादी नही कराई, जिसके बाद जमशेद ने रुपये वापिस मांगने शुरू किए तो आरोपी कफील ने जमशेद को उसकी शादी के लिए लडकी दिखाने के बहाने सिखेडा थाना क्षेत्र के बिहारी गांव के जंगल में ले गया तथा उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी तथा ई-रिक्शा लेकर भाग गया था। पुलिस ने शव को तलाश करने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिल पाया। वहीं जमशेद का शव न मिलने से परिजनों में रोष व्याप्त है।
मोरना। गांव नंगला बुजुर्ग से तीन माह से लापता ई-रिक्शा चालक की हत्या का पुलिस ने शनिवार को खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार राज मिस्त्री कफील ने ही रूपये देने से बचने को जमशेद का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी तथा शव को ठिकाने लगा दिया। पुलिस पहले ही अमरोहा जिले से जमशेद की ई-रिक्शा को बरामद कर चुकी है, किन्तु अभी जमशेद का शव बरामद नहीं हो सका है। जिससे परिजनों में रोष बना हुआ है। भोपा थाना क्षेत्र के गांव नंगला बुजुर्ग निवासी ई रिक्शा चालक जमशेद सात मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने दस मार्च को गुमशुदगी दर्ज कराते हुए गांव के ही राज मिस्त्री कफील पर गायब करने का भी आरोप लगाया था। तेरह मार्च को कफील के कपड़े व मोबाइल गंगनहर पटरी पर मिले थे। परिजनों ने कफील द्वारा आत्महत्या करने की आशंका जताई थी। कई दिनों तक कफील को गंगनहर में तलाश किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। सत्ताईस मार्च को पुलिस ने अमरोहा जिले के नौगांवा सादात में लापता कफील के दूर के रिश्तेदार के घर से जमशेद की ई-रिक्शा को बरामद किया था। रिश्तेदारों का कहना था कि ई रिक्शा को कफील ही उनके घर पर छोड़कर गया था। ई रिक्शा बरामद होने के बाद जमशेद व कफील के लापता होने के सुरागरसी में पुलिस तेजी से जुट गई तथा एक दिन पुलिस ने लापता कफील को धर दबोचा। कफील द्वारा अपनी आत्महत्या का नाटक करने से वह शक के दायरे में आ गया था। प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार शनिवार को घटना का खुलासा करते हुए बताया कि कफील ने ई-रिक्शा चालक जमशेद से शादी कराने के नाम पर लगभग साठ हजार रुपये ले रखे थे, लेकिन शादी नही कराई, जिसके बाद जमशेद ने रुपये वापिस मांगने शुरू किए तो आरोपी कफील ने जमशेद को उसकी शादी के लिए लडकी दिखाने के बहाने सिखेडा थाना क्षेत्र के बिहारी गांव के जंगल में ले गया तथा उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी तथा ई-रिक्शा लेकर भाग गया था। पुलिस ने शव को तलाश करने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिल पाया। वहीं जमशेद का शव न मिलने से परिजनों में रोष व्याप्त है।
JAMSHEDPUR: जमीन विवाद को लेकर सोमवार की शाम 5. 30 बजे के आस-पास दो पक्षों के लोग भिड़ गए। एक-दूसरे पर फायरिंग भी की। इसमें दोनों पक्षों से एक-एक लोग घायल हो गए। दोनों के दाईं और बाईं हथेली में गोली लगी है। उन्हें इलाज के लिए तत्काल एमजीएम हॉस्पिटल लाया गया। जहां पुलिस की निगरानी में दोनों का ट्रीटमेंट व बयान लिया गया। इस दौरान दोनों ने पुलिस के समक्ष अपने बयान में घटना का कारण तथा घटनास्थल अलग-अलग बताया है। चांडिल थाना क्षेत्र के फदलोगोड़ा निवासी गुड्डू शर्मा ने बताया कि उसने जमीन के लिए 1. 5 लाख रुपए उलीडीह स्थित वीर कुंवर सिंह रोड निवासी विजय गुप्ता को दी थी। गुड्डू बार-बार अपने पैसे विजय से मांगता था। सोमवार की शाम को विजय अपने पांच साथियों के साथ तीन बाइक पर सवार होकर फदलोगोड़ा स्थित गुड्डू शर्मा के घर पहुंचा। यहां सभी लोगों ने मिलकर गुड्डू को पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच विजय ने पिस्तौल निकाल कर गुड्डू के ऊपर फयार कर दिया। गुड्डू ने फायर के दौरान ही विजय का पिस्तौल पकड़ लिया। इसी क्रम में पिस्तौल छिना-झपटी में गोली चल गई। जो कि गुड्डू शर्मा की बाई हथेली में जा लगी। दूसरी ओर, विजय गुप्ता ने पुलिस को बताया कि एनएच-33 स्थित अवध डेंटल कॉलेज के पास उसका कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। सोमवार की शाम को वह अपने कंस्ट्रक्शन साइट पर बाउंड्री करा रहा था। इसी दौरान गुड्डू शर्मा अपने दो साथियों के साथ बाइक पर सवार होकर पहुंचा और उसके साथ मारपीट करना प्रारंभ कर दिया। इसी क्रम में गुड्डू ने अपने कमर से पिस्तौल निकाल कर विजय गुप्ता पर गोली चला दी। फाय¨रग के दौरान ही विजय ने भी अपने हाथ से पिस्तौल के मुंह को पकड़ लिया। इस कारण विजय की भी दाई हथेली में गोली लगी। घटना के बाद दोनों घायलों का इलाज एमजीएम हॉस्पिटल में किया गया। जहां पटमदा डीएसपी अजय कैरकेट्टा, ट्रैफिक डीएसपी विवेकानंद ठाकुर, एमजीएम थाना इंस्पेक्टर एवं साकची इंस्पेक्टर मौजूद थे। घटना के बाद एमजीएम हॉस्पिटल में दोनों पक्ष के लोगों की भीड़ लगी रही। इस बीच कोई विवाद ना हो, इसको लेकर काफी संख्या में पुलिस बल के जवान भी मुस्तैद किए गए थे।
JAMSHEDPUR: जमीन विवाद को लेकर सोमवार की शाम पाँच. तीस बजे के आस-पास दो पक्षों के लोग भिड़ गए। एक-दूसरे पर फायरिंग भी की। इसमें दोनों पक्षों से एक-एक लोग घायल हो गए। दोनों के दाईं और बाईं हथेली में गोली लगी है। उन्हें इलाज के लिए तत्काल एमजीएम हॉस्पिटल लाया गया। जहां पुलिस की निगरानी में दोनों का ट्रीटमेंट व बयान लिया गया। इस दौरान दोनों ने पुलिस के समक्ष अपने बयान में घटना का कारण तथा घटनास्थल अलग-अलग बताया है। चांडिल थाना क्षेत्र के फदलोगोड़ा निवासी गुड्डू शर्मा ने बताया कि उसने जमीन के लिए एक. पाँच लाख रुपए उलीडीह स्थित वीर कुंवर सिंह रोड निवासी विजय गुप्ता को दी थी। गुड्डू बार-बार अपने पैसे विजय से मांगता था। सोमवार की शाम को विजय अपने पांच साथियों के साथ तीन बाइक पर सवार होकर फदलोगोड़ा स्थित गुड्डू शर्मा के घर पहुंचा। यहां सभी लोगों ने मिलकर गुड्डू को पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच विजय ने पिस्तौल निकाल कर गुड्डू के ऊपर फयार कर दिया। गुड्डू ने फायर के दौरान ही विजय का पिस्तौल पकड़ लिया। इसी क्रम में पिस्तौल छिना-झपटी में गोली चल गई। जो कि गुड्डू शर्मा की बाई हथेली में जा लगी। दूसरी ओर, विजय गुप्ता ने पुलिस को बताया कि एनएच-तैंतीस स्थित अवध डेंटल कॉलेज के पास उसका कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। सोमवार की शाम को वह अपने कंस्ट्रक्शन साइट पर बाउंड्री करा रहा था। इसी दौरान गुड्डू शर्मा अपने दो साथियों के साथ बाइक पर सवार होकर पहुंचा और उसके साथ मारपीट करना प्रारंभ कर दिया। इसी क्रम में गुड्डू ने अपने कमर से पिस्तौल निकाल कर विजय गुप्ता पर गोली चला दी। फाय¨रग के दौरान ही विजय ने भी अपने हाथ से पिस्तौल के मुंह को पकड़ लिया। इस कारण विजय की भी दाई हथेली में गोली लगी। घटना के बाद दोनों घायलों का इलाज एमजीएम हॉस्पिटल में किया गया। जहां पटमदा डीएसपी अजय कैरकेट्टा, ट्रैफिक डीएसपी विवेकानंद ठाकुर, एमजीएम थाना इंस्पेक्टर एवं साकची इंस्पेक्टर मौजूद थे। घटना के बाद एमजीएम हॉस्पिटल में दोनों पक्ष के लोगों की भीड़ लगी रही। इस बीच कोई विवाद ना हो, इसको लेकर काफी संख्या में पुलिस बल के जवान भी मुस्तैद किए गए थे।
नई दिल्ली, 22 सितम्बर (आईएएनएस)। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लब केरला ब्लास्टर्स की रिसर्व टीम में शामिल आयूष अधिकारी संतोष ट्रॉफी के लिए होने वाले नॉर्थ जोन क्वालीफाइंग राउंड में भाग लेने वाली दिल्ली की टीम का हिस्सा हैं। दिल्ली ने रविवार को अपने 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की है और अधिकारी इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाना चाहेंगे। क्वालीफाइंग राउंड 22 से 28 सितंबर तक उत्तराखंड के हल्दवानी में खेला जाएगा। पिछले सीजन टीम के उप-कप्तान रहे गोलकीपर आयूष राय को टीम का कप्तान चुना गया है। वह गढ़वाल हीरोज के लिए खेलते हैं। आधिकारी का प्रदर्शन पिछले सीजन दमदार रहा था और उन्होंने संतोष ट्रॉफी में कुल छह गोल दागे थे। उन्हें इस बार टीम का उपकप्तान चुना गया है। दिल्ली ने पिछली बार चार साल के बाद संतोष ट्रॉफी के लिए क्वालीफाई किया था। इस बार क्वालीफाइंग राउंड में उसका सामना उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से होगा। टीम : सायक बराई, आयूष राय, नितिन रावत, राहुल अस्वाल, हरीश करकी, शैलेश मौर्य, सुभम राय, हिमांशु राय, मोहित सिंह, थांगमिनलिएन हाओकिप, गौरव चढ़ा, आयूष अधिकारी, शक्तिनाथ ओराओन, वनलाल झाहामवा, महिप अधिकारी, रिपुदमन पोखरियाल, अनुपम विश्वकर्मा, कुशांत चौहान, अमन थापा, आयूष बिष्ट।
नई दिल्ली, बाईस सितम्बर । इंडियन सुपर लीग क्लब केरला ब्लास्टर्स की रिसर्व टीम में शामिल आयूष अधिकारी संतोष ट्रॉफी के लिए होने वाले नॉर्थ जोन क्वालीफाइंग राउंड में भाग लेने वाली दिल्ली की टीम का हिस्सा हैं। दिल्ली ने रविवार को अपने बीस सदस्यीय टीम की घोषणा की है और अधिकारी इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाना चाहेंगे। क्वालीफाइंग राउंड बाईस से अट्ठाईस सितंबर तक उत्तराखंड के हल्दवानी में खेला जाएगा। पिछले सीजन टीम के उप-कप्तान रहे गोलकीपर आयूष राय को टीम का कप्तान चुना गया है। वह गढ़वाल हीरोज के लिए खेलते हैं। आधिकारी का प्रदर्शन पिछले सीजन दमदार रहा था और उन्होंने संतोष ट्रॉफी में कुल छह गोल दागे थे। उन्हें इस बार टीम का उपकप्तान चुना गया है। दिल्ली ने पिछली बार चार साल के बाद संतोष ट्रॉफी के लिए क्वालीफाई किया था। इस बार क्वालीफाइंग राउंड में उसका सामना उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से होगा। टीम : सायक बराई, आयूष राय, नितिन रावत, राहुल अस्वाल, हरीश करकी, शैलेश मौर्य, सुभम राय, हिमांशु राय, मोहित सिंह, थांगमिनलिएन हाओकिप, गौरव चढ़ा, आयूष अधिकारी, शक्तिनाथ ओराओन, वनलाल झाहामवा, महिप अधिकारी, रिपुदमन पोखरियाल, अनुपम विश्वकर्मा, कुशांत चौहान, अमन थापा, आयूष बिष्ट।
स्मार्टनेस क्या है छरहरी काया और बाह्य सौंदर्य को स्मार्टनेस की निशानी मानना अधूरा है। स्मार्टनेस के लिए यह सब होना भी जरूरी तो है लेकिन असलियत में स्मार्टनेस का पता तभी चलता है जब लोगों से सामना होता है। आपका व्यक्तित्व भीड में कैसा है, घबराहट महसूस करती हैं, नर्वस होती हैं या बिना हिचक किसी भी ग्रुप की शान बन सकती हैं, यह स्मार्टनेस को परखने का अच्छा तरीका है। स्मार्ट महिलाओं को पुरूषों से बात करने में परहेज नहीं होता। पुरूषों के सामने वे नर्वस नहीं होतीं। पुरूषों के प्रति उनके मन में कोई कडवाहट या बुरी भावना नहीं होती। पुरूष उनके लिए पार्टी में हौआ नहीं होते।
स्मार्टनेस क्या है छरहरी काया और बाह्य सौंदर्य को स्मार्टनेस की निशानी मानना अधूरा है। स्मार्टनेस के लिए यह सब होना भी जरूरी तो है लेकिन असलियत में स्मार्टनेस का पता तभी चलता है जब लोगों से सामना होता है। आपका व्यक्तित्व भीड में कैसा है, घबराहट महसूस करती हैं, नर्वस होती हैं या बिना हिचक किसी भी ग्रुप की शान बन सकती हैं, यह स्मार्टनेस को परखने का अच्छा तरीका है। स्मार्ट महिलाओं को पुरूषों से बात करने में परहेज नहीं होता। पुरूषों के सामने वे नर्वस नहीं होतीं। पुरूषों के प्रति उनके मन में कोई कडवाहट या बुरी भावना नहीं होती। पुरूष उनके लिए पार्टी में हौआ नहीं होते।
भुटसावे ने इस पर आँखों ही आँखों में स्वीकृति देदी । कृष्णा अजीम गोविन्दपुरी के पास बैठ गई । क्योंकि माला ने उसे सब कुछ बता दिया था, इसलिए वह उससे चुहलें करने लगी। अज़ीम लड़कियों की-सी लज्जा अनुभव कर रहा था । भुटसावे उसके स्वभाव से परिचित था । इसलिए उसने टैक्सी एक बार सामने ठहराई और केवल अज़ीम को अपने साथ लेकर अन्दर गया । गीतकार ने केवल एक - दो बार पी थी, वह भी कारोबारी सिलसिले में । यह भी कारोबारी सिलसिला था उसने भुटसावे के आग्रह पर दो पैग रम के पी लिए और उसको नशा हो गया । भुटसावे ने एक बोतल खरीद कर अपने साथ रख ली । अब वे फिर टैक्सी में थे । अज़ीम को बाद में मालूम हुआ कि भुटसावे प्लेबैक सिंगर कृष्णा की माँ से यह कह प्राया था कि जो कोरस दिन में लिया गया था, उसके जितने टेक थे, सब खराब निकले हैं । इसलिए रात को फिर रेकर्डिङ्ग होगी। उसकी माँ वैसे कृष्णा को बाहर जाने की आज्ञा कभी न देती । मगर जब भुटसावे ने कहा कि उसे और रुपए मिलेंगे तो उसने अपनी बेटी से कहा कि जल्दी जाओ श्रौर निवृत्त होकर सीधी यहाँ आयो । वहाँ स्टूडियो में मत बैठी रहना । अज़ीम को इस बात का पता नहीं था कि उसका दोस्त भुटसावे दो सोडे की बोतलें साथ ले आया है। टैक्सी वरली पहुँची, यानी समुद्र के किनारे । यह वह स्थान था जहाँ ऐशपरस्त किसी-न-किसी औरत को बग़ल में दबाए आया करते थे । एक पहाड़ी-सी थी । मालूम नहीं नक़ली या क़ुदरती, उस पर चढ़ते । काफ़ी लम्बी चौड़ी समतल जगह थी । उसमें लम्बे फ़ासलों पर बेंचें रखी हुई थीं, जिन पर केवल एक-एक जोड़ा बैठता । सब के बीच में अनलिखा समझौता होता था कि वे एक-दूसरे के मामले में बाधक नहीं होंगे । भुटसावे ने जो कि अज़ीम की दावत करना चाहता था, वरली पहाड़ी पर कृष्णा को उसके सुपुर्द कर दिया और खुद माला के साथ टहलता टहलता एक तरफ़ चला गया । और भुसावे के बीच कोई डेढ़ सौ गज़ का फासला होगा । अज़ीम जिसने और औरत के बीच हज़ारों मील का फ़ासला अनुभव किया था, जब कृष्णा को अपने साथ लगे देखा तो उसका ईमान डोलने लगा । कृष्णा ठेठ मरहठी लड़की थी, साँवली-सलोनी, बड़ी मज़बूत, भरी हुई जवानी और उसमें वे तमाम दावतें थीं जो किसी खुल खेलने वाली लड़की में हो सकती हैं । अमचूँकि नशे में था, इसलिए वह अपनी पत्नी को भूल गया और उसके दिल में इच्छा पैदा हुई कि कृष्णा को थोड़े समय के लिए पत्नी बना ले । उसके दिमाग़ में विभिन्न शरारतें पैदा हो रही थीं । कुछ रम के कारण और कुछ कृष्णा की संगति के कारण । आम तौर पर वह गम्भीर रहता था । बहुत कम बोलता था । लेकिन इस समय उसने कृष्णा के गुदगुदी की । उसको कई चुटकुले अपनी टूटी-फूटी गुजराती में सुनाए । फिर जाने उसे क्या विचार आया कि ज़ोर से भुटसावे को आवाज दी और कहा - "पुलिस ग्रा रही है, पुलिस ग्रा रही है । " जी को मोटी-सी गाली दी और हँसने लगा । वह समझ गया था कि अज़ीम ने उससे मजाक किया था । लेकिन उसने सोचा कि बेहतर यही है कि किसी होटल में चलें जहाँ पुलिस का खतरा न हो । चारों उठ रहे थे कि पीली पगड़ी वाला प्रकट हुआ । उसने ठेठ सिपाहियाना ढंग से पूछा- "तुम लोग रात के ग्यारह बजे यहाँ क्या कर रहा है ? मालूम नहीं दस बजे से पीछे यहाँ बैठना ठीक नहीं, कानून है । " अज़ीम ने सन्तरी से कहा - "जनाब, अपन फिल्म का आदमी है । यह छोकरी, " उसने कृष्णा की तरफ़ देखा, "यह भी फ़िल्म में काम करती 1 हम लोग किसी बुरे विचार से यहाँ नहीं आये । यहाँ पास ही जो स्टूडियो है, उसमें काम करते हैं । थक जाते हैं तो यहाँ चले आते हैं कि थोड़ा दिल बहल जाय । बारह बजे हमारी शूटिङ्ग फिर शुरू होने वाली है ।" पीली पगड़ी वाला सन्तुष्ट हो गया । फिर भुटसावे से सम्बोधित हुआ - "तुम इधर क्यों बैठा है ?" भुटसावे पहले घबराया । लेकिन फ़ौरन सम्भल कर उसने माला का हाथ अपने हाथ में लिया और सन्तरी से कहा - "यह हमारा वाइफ़ है । हमारी टैक्सी नीचे खड़ी है।" थोड़ी-सी और बातचीत हुई और चारों का पीछा छूटा । इसके बाद उन्होंने टैक्सी में बैठकर सोचा कि किस होटल में चलें । अज़ीम को ऐसे होटलों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जहाँ आदमी कुछ घण्टों के लिए किसी गैर औरत के साथ एकान्त में रह सके । भुटसावे ने बेकार उससे सलाह ली । उसे फ़ौरन डाक यार्ड का 'सी व्यू' होटल याद आया और उसने टैक्सी वाले से कहा. कि वहाँ ले चलो । 'सी व्यू' होटल में भुटसावे ने दो कमरे लिए । एक में अज़ीमः और कृष्णा चले गए, दूसरे में मिस माला खाण्डेकर और भुटसावे । कृष्णा उसी तरह मुजस्सिम दावत थी, लेकिन अजीम जिसने दो पैग और पी लिए थे, दार्शनिक रंग में आ गया था । उसने कृष्णा को ग़ौर से देखा और सोचा कि इतनी कम उम्र की लड़की ने पाप का यह भयानक रास्ता क्यों पकड़ा है ? खून की कमी के बावजूद, उसमें इतनी गर्मी क्यों है ? कब तक यह कोमल और नाजुक्र लड़की जो गोश्त नहीं खाती, अपना पोस्त बेचती रहेगी ? अज़ीम को उस पर बड़ा तरस आया । अतएव उसने उपदेशक बन कर उससे कहना शुरू किया - "कृष्णा, पाप के जीवन से हट जाओ। खुदा के लिए इस रास्ते से, जिस पर तुम आगे बढ़ रही हो, अपने क़दम हटा लो । यह तुम्हें ऐसे अंधेरे में ले जायगा जहाँ से तुम निकल न सकोगी । सतीत्व बेचना इंसान का सबसे गिरा हुआ काम है । यह रात अपने जीवन की उज्ज्वल रात समझो; इसलिए कि मैंने तुम्हें अच्छा बुरा समझा दिया है ।' कृष्णा ने इसका जो मतलब समझा वह यह था कि अज़ीम उससे प्रेम कर रहा है । अतएव वह उसके साथ चिमट गई और अजीम अपने पाप और पुण्य का उपदेश भूल गया । बाद में वह बड़ा लज्जित हुआ । कमरे से बाहर निकला तो भुटसावे बरामदे में टहल रहा था । कुछ इस ढंग से जैसे उसे भिड़ों के पूरे छत्ते ने काट लिया है और उनके डंक उसके सारे शरीर में चुभे हुए हैं। अज़ीम को देख कर वह रुक गया । सन्तुष्ट कृष्णा की ओर एक दृष्टि डाली और क्रोध-भरे स्वर में अजीम से कहा - "वह साली चली गई । " अजीम जो अपनी लज्जा में डूबा हुआ था, चौंका-"कौन ?" "वही माला !" "क्यों ?" भुटसावे के स्वर में एक विचित्र भुझलाहट थी - "हम उसको इतना चखत चूमते रहे । जब बोला कि आश्रो, तो साली कहने लगी, "तुम हमारा भाई है । हमने किसी से शादी करली है" - प्रौर बाहर निकल गई, "कि वह साला घर में आ गया होगा।"
भुटसावे ने इस पर आँखों ही आँखों में स्वीकृति देदी । कृष्णा अजीम गोविन्दपुरी के पास बैठ गई । क्योंकि माला ने उसे सब कुछ बता दिया था, इसलिए वह उससे चुहलें करने लगी। अज़ीम लड़कियों की-सी लज्जा अनुभव कर रहा था । भुटसावे उसके स्वभाव से परिचित था । इसलिए उसने टैक्सी एक बार सामने ठहराई और केवल अज़ीम को अपने साथ लेकर अन्दर गया । गीतकार ने केवल एक - दो बार पी थी, वह भी कारोबारी सिलसिले में । यह भी कारोबारी सिलसिला था उसने भुटसावे के आग्रह पर दो पैग रम के पी लिए और उसको नशा हो गया । भुटसावे ने एक बोतल खरीद कर अपने साथ रख ली । अब वे फिर टैक्सी में थे । अज़ीम को बाद में मालूम हुआ कि भुटसावे प्लेबैक सिंगर कृष्णा की माँ से यह कह प्राया था कि जो कोरस दिन में लिया गया था, उसके जितने टेक थे, सब खराब निकले हैं । इसलिए रात को फिर रेकर्डिङ्ग होगी। उसकी माँ वैसे कृष्णा को बाहर जाने की आज्ञा कभी न देती । मगर जब भुटसावे ने कहा कि उसे और रुपए मिलेंगे तो उसने अपनी बेटी से कहा कि जल्दी जाओ श्रौर निवृत्त होकर सीधी यहाँ आयो । वहाँ स्टूडियो में मत बैठी रहना । अज़ीम को इस बात का पता नहीं था कि उसका दोस्त भुटसावे दो सोडे की बोतलें साथ ले आया है। टैक्सी वरली पहुँची, यानी समुद्र के किनारे । यह वह स्थान था जहाँ ऐशपरस्त किसी-न-किसी औरत को बग़ल में दबाए आया करते थे । एक पहाड़ी-सी थी । मालूम नहीं नक़ली या क़ुदरती, उस पर चढ़ते । काफ़ी लम्बी चौड़ी समतल जगह थी । उसमें लम्बे फ़ासलों पर बेंचें रखी हुई थीं, जिन पर केवल एक-एक जोड़ा बैठता । सब के बीच में अनलिखा समझौता होता था कि वे एक-दूसरे के मामले में बाधक नहीं होंगे । भुटसावे ने जो कि अज़ीम की दावत करना चाहता था, वरली पहाड़ी पर कृष्णा को उसके सुपुर्द कर दिया और खुद माला के साथ टहलता टहलता एक तरफ़ चला गया । और भुसावे के बीच कोई डेढ़ सौ गज़ का फासला होगा । अज़ीम जिसने और औरत के बीच हज़ारों मील का फ़ासला अनुभव किया था, जब कृष्णा को अपने साथ लगे देखा तो उसका ईमान डोलने लगा । कृष्णा ठेठ मरहठी लड़की थी, साँवली-सलोनी, बड़ी मज़बूत, भरी हुई जवानी और उसमें वे तमाम दावतें थीं जो किसी खुल खेलने वाली लड़की में हो सकती हैं । अमचूँकि नशे में था, इसलिए वह अपनी पत्नी को भूल गया और उसके दिल में इच्छा पैदा हुई कि कृष्णा को थोड़े समय के लिए पत्नी बना ले । उसके दिमाग़ में विभिन्न शरारतें पैदा हो रही थीं । कुछ रम के कारण और कुछ कृष्णा की संगति के कारण । आम तौर पर वह गम्भीर रहता था । बहुत कम बोलता था । लेकिन इस समय उसने कृष्णा के गुदगुदी की । उसको कई चुटकुले अपनी टूटी-फूटी गुजराती में सुनाए । फिर जाने उसे क्या विचार आया कि ज़ोर से भुटसावे को आवाज दी और कहा - "पुलिस ग्रा रही है, पुलिस ग्रा रही है । " जी को मोटी-सी गाली दी और हँसने लगा । वह समझ गया था कि अज़ीम ने उससे मजाक किया था । लेकिन उसने सोचा कि बेहतर यही है कि किसी होटल में चलें जहाँ पुलिस का खतरा न हो । चारों उठ रहे थे कि पीली पगड़ी वाला प्रकट हुआ । उसने ठेठ सिपाहियाना ढंग से पूछा- "तुम लोग रात के ग्यारह बजे यहाँ क्या कर रहा है ? मालूम नहीं दस बजे से पीछे यहाँ बैठना ठीक नहीं, कानून है । " अज़ीम ने सन्तरी से कहा - "जनाब, अपन फिल्म का आदमी है । यह छोकरी, " उसने कृष्णा की तरफ़ देखा, "यह भी फ़िल्म में काम करती एक हम लोग किसी बुरे विचार से यहाँ नहीं आये । यहाँ पास ही जो स्टूडियो है, उसमें काम करते हैं । थक जाते हैं तो यहाँ चले आते हैं कि थोड़ा दिल बहल जाय । बारह बजे हमारी शूटिङ्ग फिर शुरू होने वाली है ।" पीली पगड़ी वाला सन्तुष्ट हो गया । फिर भुटसावे से सम्बोधित हुआ - "तुम इधर क्यों बैठा है ?" भुटसावे पहले घबराया । लेकिन फ़ौरन सम्भल कर उसने माला का हाथ अपने हाथ में लिया और सन्तरी से कहा - "यह हमारा वाइफ़ है । हमारी टैक्सी नीचे खड़ी है।" थोड़ी-सी और बातचीत हुई और चारों का पीछा छूटा । इसके बाद उन्होंने टैक्सी में बैठकर सोचा कि किस होटल में चलें । अज़ीम को ऐसे होटलों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जहाँ आदमी कुछ घण्टों के लिए किसी गैर औरत के साथ एकान्त में रह सके । भुटसावे ने बेकार उससे सलाह ली । उसे फ़ौरन डाक यार्ड का 'सी व्यू' होटल याद आया और उसने टैक्सी वाले से कहा. कि वहाँ ले चलो । 'सी व्यू' होटल में भुटसावे ने दो कमरे लिए । एक में अज़ीमः और कृष्णा चले गए, दूसरे में मिस माला खाण्डेकर और भुटसावे । कृष्णा उसी तरह मुजस्सिम दावत थी, लेकिन अजीम जिसने दो पैग और पी लिए थे, दार्शनिक रंग में आ गया था । उसने कृष्णा को ग़ौर से देखा और सोचा कि इतनी कम उम्र की लड़की ने पाप का यह भयानक रास्ता क्यों पकड़ा है ? खून की कमी के बावजूद, उसमें इतनी गर्मी क्यों है ? कब तक यह कोमल और नाजुक्र लड़की जो गोश्त नहीं खाती, अपना पोस्त बेचती रहेगी ? अज़ीम को उस पर बड़ा तरस आया । अतएव उसने उपदेशक बन कर उससे कहना शुरू किया - "कृष्णा, पाप के जीवन से हट जाओ। खुदा के लिए इस रास्ते से, जिस पर तुम आगे बढ़ रही हो, अपने क़दम हटा लो । यह तुम्हें ऐसे अंधेरे में ले जायगा जहाँ से तुम निकल न सकोगी । सतीत्व बेचना इंसान का सबसे गिरा हुआ काम है । यह रात अपने जीवन की उज्ज्वल रात समझो; इसलिए कि मैंने तुम्हें अच्छा बुरा समझा दिया है ।' कृष्णा ने इसका जो मतलब समझा वह यह था कि अज़ीम उससे प्रेम कर रहा है । अतएव वह उसके साथ चिमट गई और अजीम अपने पाप और पुण्य का उपदेश भूल गया । बाद में वह बड़ा लज्जित हुआ । कमरे से बाहर निकला तो भुटसावे बरामदे में टहल रहा था । कुछ इस ढंग से जैसे उसे भिड़ों के पूरे छत्ते ने काट लिया है और उनके डंक उसके सारे शरीर में चुभे हुए हैं। अज़ीम को देख कर वह रुक गया । सन्तुष्ट कृष्णा की ओर एक दृष्टि डाली और क्रोध-भरे स्वर में अजीम से कहा - "वह साली चली गई । " अजीम जो अपनी लज्जा में डूबा हुआ था, चौंका-"कौन ?" "वही माला !" "क्यों ?" भुटसावे के स्वर में एक विचित्र भुझलाहट थी - "हम उसको इतना चखत चूमते रहे । जब बोला कि आश्रो, तो साली कहने लगी, "तुम हमारा भाई है । हमने किसी से शादी करली है" - प्रौर बाहर निकल गई, "कि वह साला घर में आ गया होगा।"
दुनिया के तमाम देशों में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले 9 नवंबर को कोरोना के इस घातक वैरिएंट के संक्रमण के बारे में पता चला था, तब से अबतक यह कई देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इतना ही नहीं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह कम्युनिटी स्प्रेड जैसी स्थिति का कारण बन चुका है। भारत की बात करें तो पिछले तीन दिनों में यहां भी तेजी से मामलों में इजाफा देखने को मिला है, यहां अब तक 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में सामने आए ओमिक्रॉन के पहले मामले के बाद से अब तक कई देशों से इसके संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना के इस वैरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी प्रकृति को बेहद संक्रामक बना रहे हैं। आइए आगे की स्लाइडों में दुनिया के तमाम देशों में इसकी स्थिति और इसके फैलने के प्रमुख कारणों के बारे में जानते हैं। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल वैक्सीनेशन को इसके गंभीर संक्रमण से बचाव के लिए सबसे उपयुक्त उपाय बताया जा रहा है। इस बीच वैक्सीनेशन प्रचारकों का कहना है कि कोरोना के पिछले लहर की रफ्तार के थमने के बाद लोगों की लापरवाही और दुनियाभर के लोगों को टीका लगाने में विफलता ने ओमिक्रॉन के लिए आदर्श प्रजनन स्थल बनाया है। अगर पहले ही नीतियों को सही ढंग से प्रयोग में लाया गया होता तो इस संकट को रोका जा सकता था। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में कोरोनावायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट तेजी से अपना पैर फैला रहा है। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक यहां कम्युनिटी स्प्रेड जैसी स्थिति बनने लगी है। सिडनी के क्लस्टर न्यू साउथ वेल्स में कम से कम 15 लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामलों की पहचान हुई है। एहतियात के तौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात के नियमों को सख्त करने का फैसला किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना के मामलों में एक दिन में ही 50 फीसदी से अधिक का उछाल देखने को मिला है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का यह नया वैरिएंट 23 से अधिक देशों में फैल चुका है। सभी सरकारों को जल्द से जल्द सख्त कदम उठाते हुए संक्रमण की रफ्तार को कम करने के प्रयास करने चाहिए। डेल्टा से खतरनाक नहीं है ओमिक्रॉन? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार, डॉ. एंथनी फौसी कहते हैं, ओमिक्रॉन की गंभीरता के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले वैज्ञानिकों को विस्तृत रूप से इसका अध्ययन करना आवश्यक है। कोरोना का यह वैरिएंट बहुत तेजी से देशभर में फैल रहा है, हालांकि इसके शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह डेल्टा से कम खतरनाक हो सकता है। फिलहाल ओमिक्रॉन के खतरे से बचे रहने के लिए लोगों को सभी आवश्यक उपायों का पालन करते रहना बहुत जरूरी है। नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
दुनिया के तमाम देशों में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले नौ नवंबर को कोरोना के इस घातक वैरिएंट के संक्रमण के बारे में पता चला था, तब से अबतक यह कई देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। इतना ही नहीं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह कम्युनिटी स्प्रेड जैसी स्थिति का कारण बन चुका है। भारत की बात करें तो पिछले तीन दिनों में यहां भी तेजी से मामलों में इजाफा देखने को मिला है, यहां अब तक बीस से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में सामने आए ओमिक्रॉन के पहले मामले के बाद से अब तक कई देशों से इसके संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना के इस वैरिएंट में तीस से अधिक म्यूटेशनों के बारे में पता चला है जो इसकी प्रकृति को बेहद संक्रामक बना रहे हैं। आइए आगे की स्लाइडों में दुनिया के तमाम देशों में इसकी स्थिति और इसके फैलने के प्रमुख कारणों के बारे में जानते हैं। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल वैक्सीनेशन को इसके गंभीर संक्रमण से बचाव के लिए सबसे उपयुक्त उपाय बताया जा रहा है। इस बीच वैक्सीनेशन प्रचारकों का कहना है कि कोरोना के पिछले लहर की रफ्तार के थमने के बाद लोगों की लापरवाही और दुनियाभर के लोगों को टीका लगाने में विफलता ने ओमिक्रॉन के लिए आदर्श प्रजनन स्थल बनाया है। अगर पहले ही नीतियों को सही ढंग से प्रयोग में लाया गया होता तो इस संकट को रोका जा सकता था। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में कोरोनावायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट तेजी से अपना पैर फैला रहा है। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक यहां कम्युनिटी स्प्रेड जैसी स्थिति बनने लगी है। सिडनी के क्लस्टर न्यू साउथ वेल्स में कम से कम पंद्रह लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामलों की पहचान हुई है। एहतियात के तौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात के नियमों को सख्त करने का फैसला किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना के मामलों में एक दिन में ही पचास फीसदी से अधिक का उछाल देखने को मिला है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का यह नया वैरिएंट तेईस से अधिक देशों में फैल चुका है। सभी सरकारों को जल्द से जल्द सख्त कदम उठाते हुए संक्रमण की रफ्तार को कम करने के प्रयास करने चाहिए। डेल्टा से खतरनाक नहीं है ओमिक्रॉन? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार, डॉ. एंथनी फौसी कहते हैं, ओमिक्रॉन की गंभीरता के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले वैज्ञानिकों को विस्तृत रूप से इसका अध्ययन करना आवश्यक है। कोरोना का यह वैरिएंट बहुत तेजी से देशभर में फैल रहा है, हालांकि इसके शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह डेल्टा से कम खतरनाक हो सकता है। फिलहाल ओमिक्रॉन के खतरे से बचे रहने के लिए लोगों को सभी आवश्यक उपायों का पालन करते रहना बहुत जरूरी है। नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
छठ महापर्व का आरम्भ हो चूका है। यूं तो छठ का जश्न बिहार में अधिक मनाया जाता है, मगर अब देशभर में लोग इसे मनाते हैं। चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व के वक़्त भोजपुरी फिल्म जगत भी बहुत एक्टिव रहती है। कई छठ स्पेशल सांग्स रिलीज होते हैं, जिन्हें लोग पर्व के समय सुनते हैं तथा दूसरों को सुनाते हैं। वही दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', पवन सिंह, रितेश पांडे सहित कई ऐसे सिंगर हैं, जो भोजपुरी फिल्मों में बहुत लोकप्रिय हैं। निरहुआ का हाल ही में एक छठ गीत रिलीज हुआ है, जोकि बहुत पसंद किया जा रहा है। निरहुआ के साथ सांग में आम्रपाली दुबे भी हैं। दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' तथा आम्रपाली का यह सांग 'दउरा में दिया बारा बलम' है। इसे एजीएफ म्यूजिक भोजपुरी यू-ट्यूब चैनल पर लॉन्च किया गया है। यूट्यूब पर इसे रविवार को ही रिलीज किया गया तथा अब तक कई लोग इसे देख भी चुके हैं। इसे भोजपुरी फिल्मों की मशहूर गायिका शिल्पी राज ने गाया है। इसका म्यूजिक आर्या शर्मा ने दिया है तथा लिरिक्स विजय चौहान ने लिखे हैं। वही दिनेश और आम्रपाली के इस सांग का निर्देशन आर्यन देव ने किया है। प्रोडक्शन गुड्डू द्वारा किया गया है। बता दें कि आम्रपाली दुबे भोजपुरी फिल्मों का जाना-माना नाम हैं। केवल भोजपुरी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि पूरे देशभर में आम्रपाली के प्रशंसक हैं, जो उनके एक-एक वीडियो की बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं। इसी प्रकार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को भी लोग बहुत पसंद करते हैं। फैंस को वीडियो इस तरह पसंद आ रहा है कि वे इस पर बहुत टिप्पणी भी कर रहे हैं। एक व्यक्ति ने सांग को गजब तक बता दिया।
छठ महापर्व का आरम्भ हो चूका है। यूं तो छठ का जश्न बिहार में अधिक मनाया जाता है, मगर अब देशभर में लोग इसे मनाते हैं। चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व के वक़्त भोजपुरी फिल्म जगत भी बहुत एक्टिव रहती है। कई छठ स्पेशल सांग्स रिलीज होते हैं, जिन्हें लोग पर्व के समय सुनते हैं तथा दूसरों को सुनाते हैं। वही दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', पवन सिंह, रितेश पांडे सहित कई ऐसे सिंगर हैं, जो भोजपुरी फिल्मों में बहुत लोकप्रिय हैं। निरहुआ का हाल ही में एक छठ गीत रिलीज हुआ है, जोकि बहुत पसंद किया जा रहा है। निरहुआ के साथ सांग में आम्रपाली दुबे भी हैं। दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' तथा आम्रपाली का यह सांग 'दउरा में दिया बारा बलम' है। इसे एजीएफ म्यूजिक भोजपुरी यू-ट्यूब चैनल पर लॉन्च किया गया है। यूट्यूब पर इसे रविवार को ही रिलीज किया गया तथा अब तक कई लोग इसे देख भी चुके हैं। इसे भोजपुरी फिल्मों की मशहूर गायिका शिल्पी राज ने गाया है। इसका म्यूजिक आर्या शर्मा ने दिया है तथा लिरिक्स विजय चौहान ने लिखे हैं। वही दिनेश और आम्रपाली के इस सांग का निर्देशन आर्यन देव ने किया है। प्रोडक्शन गुड्डू द्वारा किया गया है। बता दें कि आम्रपाली दुबे भोजपुरी फिल्मों का जाना-माना नाम हैं। केवल भोजपुरी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि पूरे देशभर में आम्रपाली के प्रशंसक हैं, जो उनके एक-एक वीडियो की बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं। इसी प्रकार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को भी लोग बहुत पसंद करते हैं। फैंस को वीडियो इस तरह पसंद आ रहा है कि वे इस पर बहुत टिप्पणी भी कर रहे हैं। एक व्यक्ति ने सांग को गजब तक बता दिया।
प्रयागराज : हाईकोर्ट के जज का अर्दली हुआ निलंबित... पेटीएम के QR से वकीलों से लेता था रुपए. वायरल फोटो पर मुख्य न्यायाधीश गंभीर. मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर हुई कार्रवाई. अर्दली राजेन्द्र कुमार को महानिबंधक ने निलंबित किया. निलंबन अवधि में नजारत सेक्शन से संबद्ध किया.
प्रयागराज : हाईकोर्ट के जज का अर्दली हुआ निलंबित... पेटीएम के QR से वकीलों से लेता था रुपए. वायरल फोटो पर मुख्य न्यायाधीश गंभीर. मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर हुई कार्रवाई. अर्दली राजेन्द्र कुमार को महानिबंधक ने निलंबित किया. निलंबन अवधि में नजारत सेक्शन से संबद्ध किया.
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः हल्दी को गुणों को अंबार कहा जाता है। सब्जी में हल्दी मिलाने से न केवल उसका स्वाद बढ़ जाता है बल्कि आप उसे आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। काफी सारे लोग विशेषकर महिलाएं त्वचा के निखार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन कुछ गलतियां आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में। अगर आप अपनी स्किन पर हल्दी लगा रहे हैं तो तो कुछ समय बाद उसे पानी से धोना पड़ता है। लेकिन कई लोग उस सूखी हल्दी को धोने के लिए साबुन या फेस वाश का इस्तेमाल करने लगते हैं। अगर आप भी ऐसी गलती करते हैं तो आज ही उसे बंद कर दें। साबुन से धोने पर हल्दी का असर खत्म हो जाता है। जिससे आपको हल्दी लगाने का कोई फायदा नहीं मिलता। अगर आप स्किन पर लगाने के लिए हल्दी में कुछ और चीज भी मिला रहे हैं तो पहले उसका असर देख लें। अगर आपको उस मिश्रण से शरीर में कहीं एलर्जी महसूस होती है तो तुरंत साफ पानी से उस हिस्से को धो दें। देर करने पर आपके शरीर के उस हिस्से में खुजली और निशान पड़ सकते हैं। साथ ही आपको हेल्थ से जुड़ी दूसरी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कई महिलाएं बॉडी में निखार लाने के लिए लंबे वक्त तक हल्दी लगाना पसंद करती हैं। यह हल्दी लगाने का गलत तरीका होता है। हमें इस बात को समझना होगा कि हल्दी की तासीर गर्म होती है। ऐसे में लंबे वक्त तक त्वचा पर हल्दी लगाने से वहां पर दाग बनने शुरू हो सकते हैं। इसलिए आप कुछ समय बाद हल्दी के सूखते ही उसे साफ पानी से धो दें। ऐसा करने से आपको ज्यादा फायदा होगा। सबसे जरूरी और अहम बात। गर्मियों में हल्दी को लेप के रूप में शरीर पर कम से कम लगाएं। अगर लगाना भी हो तो उसमें दही या थोड़ा बेसन मिला लें। ऐसा करने से उसकी गर्म तासीर में कुछ हद तक ठंडापन आ जाता है, जो गर्मियों में सही रहता है। इसके बाद आप उस मिश्रण को कुछ समय के लिए बॉडी पर लगाकर खिली-खिली त्वचा पा सकते हैं। स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः हल्दी को गुणों को अंबार कहा जाता है। सब्जी में हल्दी मिलाने से न केवल उसका स्वाद बढ़ जाता है बल्कि आप उसे आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। काफी सारे लोग विशेषकर महिलाएं त्वचा के निखार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन कुछ गलतियां आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः हल्दी को गुणों को अंबार कहा जाता है। सब्जी में हल्दी मिलाने से न केवल उसका स्वाद बढ़ जाता है बल्कि आप उसे आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। काफी सारे लोग विशेषकर महिलाएं त्वचा के निखार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन कुछ गलतियां आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में। अगर आप अपनी स्किन पर हल्दी लगा रहे हैं तो तो कुछ समय बाद उसे पानी से धोना पड़ता है। लेकिन कई लोग उस सूखी हल्दी को धोने के लिए साबुन या फेस वाश का इस्तेमाल करने लगते हैं। अगर आप भी ऐसी गलती करते हैं तो आज ही उसे बंद कर दें। साबुन से धोने पर हल्दी का असर खत्म हो जाता है। जिससे आपको हल्दी लगाने का कोई फायदा नहीं मिलता। अगर आप स्किन पर लगाने के लिए हल्दी में कुछ और चीज भी मिला रहे हैं तो पहले उसका असर देख लें। अगर आपको उस मिश्रण से शरीर में कहीं एलर्जी महसूस होती है तो तुरंत साफ पानी से उस हिस्से को धो दें। देर करने पर आपके शरीर के उस हिस्से में खुजली और निशान पड़ सकते हैं। साथ ही आपको हेल्थ से जुड़ी दूसरी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कई महिलाएं बॉडी में निखार लाने के लिए लंबे वक्त तक हल्दी लगाना पसंद करती हैं। यह हल्दी लगाने का गलत तरीका होता है। हमें इस बात को समझना होगा कि हल्दी की तासीर गर्म होती है। ऐसे में लंबे वक्त तक त्वचा पर हल्दी लगाने से वहां पर दाग बनने शुरू हो सकते हैं। इसलिए आप कुछ समय बाद हल्दी के सूखते ही उसे साफ पानी से धो दें। ऐसा करने से आपको ज्यादा फायदा होगा। सबसे जरूरी और अहम बात। गर्मियों में हल्दी को लेप के रूप में शरीर पर कम से कम लगाएं। अगर लगाना भी हो तो उसमें दही या थोड़ा बेसन मिला लें। ऐसा करने से उसकी गर्म तासीर में कुछ हद तक ठंडापन आ जाता है, जो गर्मियों में सही रहता है। इसके बाद आप उस मिश्रण को कुछ समय के लिए बॉडी पर लगाकर खिली-खिली त्वचा पा सकते हैं। स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः हल्दी को गुणों को अंबार कहा जाता है। सब्जी में हल्दी मिलाने से न केवल उसका स्वाद बढ़ जाता है बल्कि आप उसे आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। काफी सारे लोग विशेषकर महिलाएं त्वचा के निखार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन कुछ गलतियां आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में।
नई दिल्ली. रूप से घायल करने की तैयारी हो गई है. आर्थिक मोर्चे पर भी चीन को उसकी हरकतों की सजा देने की शुरुआत हो गई है. कंपनियों को दूर रखा जाएगा. MTNL से कहा गया है कि वे अपने टेंडर में बदलाव करें. नोकिया और साउथ कोरिया की सैमसंग शामिल है. भारतीय एयरटेल और वोडाफोन, दोनों ही Huawei और ZTE के साथ काम करते हैं.
नई दिल्ली. रूप से घायल करने की तैयारी हो गई है. आर्थिक मोर्चे पर भी चीन को उसकी हरकतों की सजा देने की शुरुआत हो गई है. कंपनियों को दूर रखा जाएगा. MTNL से कहा गया है कि वे अपने टेंडर में बदलाव करें. नोकिया और साउथ कोरिया की सैमसंग शामिल है. भारतीय एयरटेल और वोडाफोन, दोनों ही Huawei और ZTE के साथ काम करते हैं.
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के 14वें दिन सरकार ने आज सिंघु बॉर्डर पर किसानों को जो प्रस्ताव भेजा था, चर्चा करने के बाद किसान नेताओं ने उसे खारिज कर आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को 13 किसान नेताओं की गृहमंत्री अमित शाह के साथ चार घंटे तक चली बातचीत में किसी हल की उम्मीद की जा रही थी लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। किसान नेताओं ने कहा कि जियो के जितने में प्रोडक्ट्स और मॉल हैं, उनका बहिष्कार करेंगे। पूरे देश में प्रदर्शन जारी रहेंगे। 14 दिसंबर को धरना देंगे। जयपुर और दिल्ली हाईवे को 12 तारीख तक रोक देंगे। अडानी और अंबानी के टोल प्लाजा । बीजेपी के नेताओं का घेराव करेंगे। किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। साथ ही आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। यह हमारी मांग है। प्रस्ताव में सिर्फ संशोधन की बात है तो फिर हम उसे खारिज कर देंगे।
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के चौदहवें दिन सरकार ने आज सिंघु बॉर्डर पर किसानों को जो प्रस्ताव भेजा था, चर्चा करने के बाद किसान नेताओं ने उसे खारिज कर आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को तेरह किसान नेताओं की गृहमंत्री अमित शाह के साथ चार घंटे तक चली बातचीत में किसी हल की उम्मीद की जा रही थी लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। किसान नेताओं ने कहा कि जियो के जितने में प्रोडक्ट्स और मॉल हैं, उनका बहिष्कार करेंगे। पूरे देश में प्रदर्शन जारी रहेंगे। चौदह दिसंबर को धरना देंगे। जयपुर और दिल्ली हाईवे को बारह तारीख तक रोक देंगे। अडानी और अंबानी के टोल प्लाजा । बीजेपी के नेताओं का घेराव करेंगे। किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। साथ ही आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। यह हमारी मांग है। प्रस्ताव में सिर्फ संशोधन की बात है तो फिर हम उसे खारिज कर देंगे।
करने को फ़रमाया। और इसका नफा भी बतलाया कि दुनिया व आख़िरत की बुराईयाँ इससे दूर हो जायेंगी और दोनों जहान की नेमतें इससे मिल जायेंगी। साथ ही उन्हें बतलाया कि जिन बुतों की तुम पूजा कर रहे हो ये तो न कोई नफा दे सकते हैं न कोई नुकसान पहुँचा सकते हैं। तुमने खुद ही इनके नाम और इनके हुलिये और शक्लें बना ली हैं। वे तो तुम्हारी तरह मलूक हैं, बल्कि तुमसे भी कमज़ोर हैं। ये तो तुम्हारी । रोज़ियों के भी मुख़्तार नहीं । अल्लाह ही से रोज़ी तलब करो। इसी का ख़ास करके इस आयत में बयान कि हम सब तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं। यही हज़रत आसिया रज़ियल्लाहु अन्हा की दुआ में हैः क्या उन लोगों को यह मालूम नहीं कि अल्लाह तआला किस तरह मलूक को अव्वल बार पैदा करता है ( कि नापैदी की हालत से वजूद में लाता है), फिर वही दोबारा उसको पैदा करेगा, यह अल्लाह के नज़दीक बहुत ही आसान बात है। (19) आप ( उन लोगों से ) कहिए कि तुम लोग मुल्क में चलो-फिरो और देखो कि ख़ुदा तआला ने मखलूक को किस तौर पर अव्वल बार पैदा किया है। फिर अल्लाह तआला पिछली बार भी पैदा करेगा। बेशक अल्लाह إياك نعبد وإياك نستعين رب ابن لي عندك بيتافي الجنة. ऐ मेरे अल्लाह ! मेरे लिये अपने पास ही जन्नत में मकान बना । चूँकि उसके सिवा कोई रिज़्क नहीं दे सकता इसलिये तुम उससे रोज़ी तलब करो, और जब उसकी दी रोज़ी खाओ तो उसके सिवा दूसरे की इबादत भी न करो। उसकी नेमतों का शुक्र भी बजा लाओ, तुम में से हर एक उसी की तरफ लौटने वाला है। वह हर आमिल ( अमल करने वाले) को उसी के अमल का बदला देगा । देखो मुझे झूठा कहकर खुश न हो लो, नज़रें डालो कि तुमसे पहले जिन्होंने नबियों को झूठा कहा उनकी कैसी दुर्गत बनी। याद रखो नबियों का काम सिर्फ पैग़ामे इलाही पहुँचा देना है। हिदायत का 1 देना या न देना खुदा के हाथ में है। खुद को सआदत- मन्दों (नेकबख़्तों) में बनाओ, बदबख़्तों में शामिल न करो । हज़रत कृतादा रह. तो फ़रमाते हैं कि इसमें नबी करीम सल्ल. की और ज़्यादा तसल्ली की गई है। इस मतलब का तकाज़ा तो यह है कि पहला कलाम तो ख़त्म हुआ और यहाँ से लेकर 'फुमा का- न जवा-ब क़ौमिही' तक यह सब इबारत एक अलग मज़मून के तौर पर है । इब्ने जरीर रह. ने तो खुले लफ़्ज़ों में यही कहा है, लेकिन क़ुरआन के अलफ़ाज़ से तो बज़ाहिर मालूम होता है कि यह सब कलाम हज़रत इब्राहीम खलीलुर्रहमान अलैहिस्सलाम का है। आप कियामत के कायम होने की दलीलें पेश कर रहे हैं, क्योंकि इस तमाम कलाम के बाद आपकी क़ौम का जवाब ज़िक्र हुआ है । أولـم يـرواكيف يبدى الله الخلق ثه الله يسيره قل إن ذلك على بیده سيروا في الأرض فانظرواكيف بدا الـخـلـق ثم الله ينشئ النشأة الأخرة إن الله على كل شيء قديرة يعذب
करने को फ़रमाया। और इसका नफा भी बतलाया कि दुनिया व आख़िरत की बुराईयाँ इससे दूर हो जायेंगी और दोनों जहान की नेमतें इससे मिल जायेंगी। साथ ही उन्हें बतलाया कि जिन बुतों की तुम पूजा कर रहे हो ये तो न कोई नफा दे सकते हैं न कोई नुकसान पहुँचा सकते हैं। तुमने खुद ही इनके नाम और इनके हुलिये और शक्लें बना ली हैं। वे तो तुम्हारी तरह मलूक हैं, बल्कि तुमसे भी कमज़ोर हैं। ये तो तुम्हारी । रोज़ियों के भी मुख़्तार नहीं । अल्लाह ही से रोज़ी तलब करो। इसी का ख़ास करके इस आयत में बयान कि हम सब तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं। यही हज़रत आसिया रज़ियल्लाहु अन्हा की दुआ में हैः क्या उन लोगों को यह मालूम नहीं कि अल्लाह तआला किस तरह मलूक को अव्वल बार पैदा करता है , फिर वही दोबारा उसको पैदा करेगा, यह अल्लाह के नज़दीक बहुत ही आसान बात है। आप कहिए कि तुम लोग मुल्क में चलो-फिरो और देखो कि ख़ुदा तआला ने मखलूक को किस तौर पर अव्वल बार पैदा किया है। फिर अल्लाह तआला पिछली बार भी पैदा करेगा। बेशक अल्लाह إياك نعبد وإياك نستعين رب ابن لي عندك بيتافي الجنة. ऐ मेरे अल्लाह ! मेरे लिये अपने पास ही जन्नत में मकान बना । चूँकि उसके सिवा कोई रिज़्क नहीं दे सकता इसलिये तुम उससे रोज़ी तलब करो, और जब उसकी दी रोज़ी खाओ तो उसके सिवा दूसरे की इबादत भी न करो। उसकी नेमतों का शुक्र भी बजा लाओ, तुम में से हर एक उसी की तरफ लौटने वाला है। वह हर आमिल को उसी के अमल का बदला देगा । देखो मुझे झूठा कहकर खुश न हो लो, नज़रें डालो कि तुमसे पहले जिन्होंने नबियों को झूठा कहा उनकी कैसी दुर्गत बनी। याद रखो नबियों का काम सिर्फ पैग़ामे इलाही पहुँचा देना है। हिदायत का एक देना या न देना खुदा के हाथ में है। खुद को सआदत- मन्दों में बनाओ, बदबख़्तों में शामिल न करो । हज़रत कृतादा रह. तो फ़रमाते हैं कि इसमें नबी करीम सल्ल. की और ज़्यादा तसल्ली की गई है। इस मतलब का तकाज़ा तो यह है कि पहला कलाम तो ख़त्म हुआ और यहाँ से लेकर 'फुमा का- न जवा-ब क़ौमिही' तक यह सब इबारत एक अलग मज़मून के तौर पर है । इब्ने जरीर रह. ने तो खुले लफ़्ज़ों में यही कहा है, लेकिन क़ुरआन के अलफ़ाज़ से तो बज़ाहिर मालूम होता है कि यह सब कलाम हज़रत इब्राहीम खलीलुर्रहमान अलैहिस्सलाम का है। आप कियामत के कायम होने की दलीलें पेश कर रहे हैं, क्योंकि इस तमाम कलाम के बाद आपकी क़ौम का जवाब ज़िक्र हुआ है । أولـم يـرواكيف يبدى الله الخلق ثه الله يسيره قل إن ذلك على بیده سيروا في الأرض فانظرواكيف بدا الـخـلـق ثم الله ينشئ النشأة الأخرة إن الله على كل شيء قديرة يعذب
नेशनल पार्क का अर्थ है एक ऐसा क्षेत्र जो विशेष रूप से वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण नामित किया गया है। इसे सरकार के सख्त नियमों के तहत संरक्षित किया जाता है। इसमें जानवरों को रखा जाता है और पर्यटकों को आने की अनुमति नहीं दी जाती है। ये पूरी तरह से सरकार के द्वारा चलाया जाता है इसमें किसी भी व्यक्ति की कोई पर्सनल भागीदारी नहीं होती है। यह विभिन्न जीवों और प्रजातियों के लाखों जानवरों, पक्षियों, कीटों, सूक्ष्मजीवों आदि का घर है, जो उन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है। यह वो जगह होती है जहां पर वनजीव बिना किसी डर के घूम सकते हैं। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को हिन्दी में वन्यजीव अभयारण्य कहते हैं। अभयारण्य शब्द की उत्पत्ति ही अभय-अरण्य से हुई है, जिसमे दो शब्द उपयोग किये गए हैं अभय जिसका मतलब होता है जहां जानवर घूम सके और अरण्य का मतलब वन होता है। यह एक तरह से सरकार या किसी संस्था द्वारा संरक्षित वन, पशु-विहार या पक्षी विहार होता है उसे हम वाइल्ड लाइफ सेंचुरी कहते हैं। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य जीव-जंतु, पक्षी या फिर वन संपदा को संरक्षित करना होता है। सेंचुरी के उचित प्रबंधन के लिए रेंजर या गार्ड को इस क्षेत्र में गश्त के लिए नियुक्त किया जाता है। वे अवैध शिकार, शिकार या उत्पीड़न से लेकर जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। - नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी दोनों ही जानवरों के संरक्षण के लिए बनाया गया है, जिसमे हम जानवरों की जान मान का ख्याल रख उन्हें बचा सके। - नेशनल पार्कों का दौरा करने के लिए, अधिकारियों से आधिकारिक अनुमति लेनी होती है। इसके विपरीत, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यात्रा करने के लिए कोई अधिकारिक अनुमति नहीं ली जाती है। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल हैं। अधिकांश नेशनल पार्कों में शुरू में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी थे, जिन्हें तब नेशनल पार्क में अपग्रेड किया गया था। - नेशनल पार्क आम लोगों के लिए पूरी तरह बंद होता है, इसमें आप अपने जानवरों जैसे कि गाय, बकरी, भैंस, भेड़ आदि को नहीं चरा सकते जबकि आप वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में कुछ समय के लिए इन्हे चरा सकते हैं। - नेशनल पार्क में कोई पर्यटक न जा सकता है न रह सकता है जबकि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में लोग रह नहीं सकते लेकिन कुछ समय के लिए घूमने जा सकते हैं लेकिन किसी प्रकार का शिकार नहीं कर सकते। - आम लोगों व जानवरों के लिए नेशनल पार्क ज्यादा सुरक्षित होता है जबकि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी उतना अधिक सुरक्षित नहीं होता है। - नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होता है। - नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी यदि बनाये जा रहे हैं और आपकी जमीन उसके अंदर आ रही है तो सरकार आपसे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में उसके लिए आपसे कुछ प्रकार के नियम के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करते हैं जबकि नेशनल पार्क में वो आपको पैसे या मुआवजा देके पहले ही अलग कर देती है, यह पूरी तरह से सरकार के आधीन होता है। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को नेशनल पार्क में बदला जा सकता है लेकिन नेशनल पार्क को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में नहीं बदला जा सकता। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में लकड़ी आदि को लेने के लिए गांव के लोग जा सकते हैं जबकि नेशनल पार्क में नहीं जा सकते। - नेशनल पार्क किसी एक विशेष प्रकार के जानवर के लिए नहीं बनाया जाता है इसमें हर प्रकार के जानवर रहते हैं, वहीं वाइल्ड लाइफ सेंचुरी किसी भी विशेष जानवर के लिए बनाया जा सकता है।
नेशनल पार्क का अर्थ है एक ऐसा क्षेत्र जो विशेष रूप से वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण नामित किया गया है। इसे सरकार के सख्त नियमों के तहत संरक्षित किया जाता है। इसमें जानवरों को रखा जाता है और पर्यटकों को आने की अनुमति नहीं दी जाती है। ये पूरी तरह से सरकार के द्वारा चलाया जाता है इसमें किसी भी व्यक्ति की कोई पर्सनल भागीदारी नहीं होती है। यह विभिन्न जीवों और प्रजातियों के लाखों जानवरों, पक्षियों, कीटों, सूक्ष्मजीवों आदि का घर है, जो उन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है। यह वो जगह होती है जहां पर वनजीव बिना किसी डर के घूम सकते हैं। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को हिन्दी में वन्यजीव अभयारण्य कहते हैं। अभयारण्य शब्द की उत्पत्ति ही अभय-अरण्य से हुई है, जिसमे दो शब्द उपयोग किये गए हैं अभय जिसका मतलब होता है जहां जानवर घूम सके और अरण्य का मतलब वन होता है। यह एक तरह से सरकार या किसी संस्था द्वारा संरक्षित वन, पशु-विहार या पक्षी विहार होता है उसे हम वाइल्ड लाइफ सेंचुरी कहते हैं। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य जीव-जंतु, पक्षी या फिर वन संपदा को संरक्षित करना होता है। सेंचुरी के उचित प्रबंधन के लिए रेंजर या गार्ड को इस क्षेत्र में गश्त के लिए नियुक्त किया जाता है। वे अवैध शिकार, शिकार या उत्पीड़न से लेकर जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। - नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी दोनों ही जानवरों के संरक्षण के लिए बनाया गया है, जिसमे हम जानवरों की जान मान का ख्याल रख उन्हें बचा सके। - नेशनल पार्कों का दौरा करने के लिए, अधिकारियों से आधिकारिक अनुमति लेनी होती है। इसके विपरीत, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यात्रा करने के लिए कोई अधिकारिक अनुमति नहीं ली जाती है। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल हैं। अधिकांश नेशनल पार्कों में शुरू में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी थे, जिन्हें तब नेशनल पार्क में अपग्रेड किया गया था। - नेशनल पार्क आम लोगों के लिए पूरी तरह बंद होता है, इसमें आप अपने जानवरों जैसे कि गाय, बकरी, भैंस, भेड़ आदि को नहीं चरा सकते जबकि आप वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में कुछ समय के लिए इन्हे चरा सकते हैं। - नेशनल पार्क में कोई पर्यटक न जा सकता है न रह सकता है जबकि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में लोग रह नहीं सकते लेकिन कुछ समय के लिए घूमने जा सकते हैं लेकिन किसी प्रकार का शिकार नहीं कर सकते। - आम लोगों व जानवरों के लिए नेशनल पार्क ज्यादा सुरक्षित होता है जबकि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी उतना अधिक सुरक्षित नहीं होता है। - नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होता है। - नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी यदि बनाये जा रहे हैं और आपकी जमीन उसके अंदर आ रही है तो सरकार आपसे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में उसके लिए आपसे कुछ प्रकार के नियम के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करते हैं जबकि नेशनल पार्क में वो आपको पैसे या मुआवजा देके पहले ही अलग कर देती है, यह पूरी तरह से सरकार के आधीन होता है। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को नेशनल पार्क में बदला जा सकता है लेकिन नेशनल पार्क को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में नहीं बदला जा सकता। - वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में लकड़ी आदि को लेने के लिए गांव के लोग जा सकते हैं जबकि नेशनल पार्क में नहीं जा सकते। - नेशनल पार्क किसी एक विशेष प्रकार के जानवर के लिए नहीं बनाया जाता है इसमें हर प्रकार के जानवर रहते हैं, वहीं वाइल्ड लाइफ सेंचुरी किसी भी विशेष जानवर के लिए बनाया जा सकता है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा घोषित जेईई मेन्स की ऑल इंडिया रैंक व सेशन-4 के परिणामों में एलन करियर इंस्टीच्यूट के स्टूडेंट्स ने एक बार फिर श्रेष्ठता साबित की है। एलन के निदेशक बृजेश माहेश्वरी ने बताया कि रिजल्ट्स में 18 स्टूडेंट्स को रैंक-1 घोषित किया गया। इसमें छह स्टूडेंट्स एलन करियर इंस्टीच्यूट के क्लासरूम से है, जो कि अंशुल वर्मा, सिद्धांत मुखर्जी, मृदुल गोयल, काव्या चौपड़ा, पुलकित गोयल और गुराम्रित सिंह है, जिन्होंने अलग-अलग जेईई मेन्स सेशन में 300 में से 300 अंक प्राप्त किए। टॉप 10 में आल इंडिया रैंक-7 पर जैनिथ मल्होत्रा, रैंक-8 पर प्रथम गर्ग तथा रैंक-10 पर अनंत किदांबी ने स्थान हासिल किया। इसके साथ ही टॉप-50 में एलन के 22, टॉप-100 में 43 स्टूडेंट्स, टॉप-200 में 81 तथा टॉप-500 में 159 स्टूडेंट्स शामिल हैं। माहेश्वरी ने बताया कि एलन के 13 स्टूडेंट्स ने 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया है। इसके साथ ही 17444 स्टूडेंट्स जेईई-एडवांस्ड के लिए क्वॉलिफाई हुए हैं। इसमें 10298 क्लासरूम कोचिंग से तथा 7146 दूरस्थ शिक्षा से एलन से जुड़े हैं। एलन इंस्टीच्यूट के 18 स्टूडेंट्स ने स्टेट टॉप किए हैं। माहेश्वरी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्टूडेंट्स श्रेष्ठ परिणाम दिए हैं। एलन ने लॉकडाउन में भी स्टूडेंट्स की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा घोषित जेईई मेन्स की ऑल इंडिया रैंक व सेशन-चार के परिणामों में एलन करियर इंस्टीच्यूट के स्टूडेंट्स ने एक बार फिर श्रेष्ठता साबित की है। एलन के निदेशक बृजेश माहेश्वरी ने बताया कि रिजल्ट्स में अट्ठारह स्टूडेंट्स को रैंक-एक घोषित किया गया। इसमें छह स्टूडेंट्स एलन करियर इंस्टीच्यूट के क्लासरूम से है, जो कि अंशुल वर्मा, सिद्धांत मुखर्जी, मृदुल गोयल, काव्या चौपड़ा, पुलकित गोयल और गुराम्रित सिंह है, जिन्होंने अलग-अलग जेईई मेन्स सेशन में तीन सौ में से तीन सौ अंक प्राप्त किए। टॉप दस में आल इंडिया रैंक-सात पर जैनिथ मल्होत्रा, रैंक-आठ पर प्रथम गर्ग तथा रैंक-दस पर अनंत किदांबी ने स्थान हासिल किया। इसके साथ ही टॉप-पचास में एलन के बाईस, टॉप-एक सौ में तैंतालीस स्टूडेंट्स, टॉप-दो सौ में इक्यासी तथा टॉप-पाँच सौ में एक सौ उनसठ स्टूडेंट्स शामिल हैं। माहेश्वरी ने बताया कि एलन के तेरह स्टूडेंट्स ने एक सौ पर्सेंटाइल स्कोर किया है। इसके साथ ही सत्रह हज़ार चार सौ चौंतालीस स्टूडेंट्स जेईई-एडवांस्ड के लिए क्वॉलिफाई हुए हैं। इसमें दस हज़ार दो सौ अट्ठानवे क्लासरूम कोचिंग से तथा सात हज़ार एक सौ छियालीस दूरस्थ शिक्षा से एलन से जुड़े हैं। एलन इंस्टीच्यूट के अट्ठारह स्टूडेंट्स ने स्टेट टॉप किए हैं। माहेश्वरी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्टूडेंट्स श्रेष्ठ परिणाम दिए हैं। एलन ने लॉकडाउन में भी स्टूडेंट्स की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी।
ताज नगरी आगरा में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 241 हो चुकी है लगातार कोरोना पॉजिटिव की संख्या में इजाफा हो रहा है सभी लोग लोक डाउन का पालन कर रहे हैं वही आगरा में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ना तो सैनिटाइजर खरीद सकते हैं और ना ही मास्क ले सकते हैं। ताज नगरी आगरा में वरिष्ठ समाजसेवी बबिता चौहान ने अपने हाथों से मास्क बनाकर व खरीद कर लोगों को वितरण किए। इसके साथ उन्होंने सेनीटाइजर भी वितरण किए। बताया जा रहा है कि, बबिता चौहान एक ऐसी समाज सेविका है जिन्होंने हजारों की संख्या में लोगों को सैनिटाइजर और मास्क वितरण करें हैं वही कुछ दिन पहले जो दूर दराज से लोग आईएसबीटी बस अड्डे पर अपने-अपने घर जाने के लिए आए थे। उन हजारों की संख्या में लोगों को जितेंद्र चौहान वरिष्ठ समाजसेवी ने खाने की व्यवस्था भी कराई थी।
ताज नगरी आगरा में कोरोना पॉजिटिव की संख्या दो सौ इकतालीस हो चुकी है लगातार कोरोना पॉजिटिव की संख्या में इजाफा हो रहा है सभी लोग लोक डाउन का पालन कर रहे हैं वही आगरा में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ना तो सैनिटाइजर खरीद सकते हैं और ना ही मास्क ले सकते हैं। ताज नगरी आगरा में वरिष्ठ समाजसेवी बबिता चौहान ने अपने हाथों से मास्क बनाकर व खरीद कर लोगों को वितरण किए। इसके साथ उन्होंने सेनीटाइजर भी वितरण किए। बताया जा रहा है कि, बबिता चौहान एक ऐसी समाज सेविका है जिन्होंने हजारों की संख्या में लोगों को सैनिटाइजर और मास्क वितरण करें हैं वही कुछ दिन पहले जो दूर दराज से लोग आईएसबीटी बस अड्डे पर अपने-अपने घर जाने के लिए आए थे। उन हजारों की संख्या में लोगों को जितेंद्र चौहान वरिष्ठ समाजसेवी ने खाने की व्यवस्था भी कराई थी।
उनके इस दावे का जनता दल यूनाइटेड (जद-यू), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के सदस्यों ने जोरदार प्रतिकार किया। शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए दुबे ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में बिहार में हत्या, डकैती और बलात्कार की कुछ घटनाओं की तरफ सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि अपराध की घटनाओं से जनता में भय का माहौल है। इस दौरान जनता दल (यू), राजद और कांग्रेस कुछ सदस्यों ने उनका विरोध किया। उन्हें इसमें समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के सदस्यों का भी साथ मिला। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने हंगामा कर रहे सदस्यों को शांत कराया और उन्हें सलाद दी कि वे सदन की गरिमा को बनाए रखें। शून्यकाल में बीजू जनता दल के सांसद अमर पटनायक ने एम्स के सर्वर को प्रभावित करने वाले कथित रैनसमवेयर हमले का मुद्दा उठाया और कहा कि इसे एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वाईएसआरसीपी के वी विजयसाई रेड्डी ने पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया और दावा किया कि स्वतंत्र भारत आबादी के इस वर्ग के सार्थक उत्थान को सुनिश्चित करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी पिछड़े वर्गों की जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसरों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा अधूरी है। वाईएसआरसीपी सदस्य ने कहा कि भले ही पिछड़े वर्ग की आबादी भारत की आबादी का 50 प्रतिशत है जबकि उसे आरक्षण 27 प्रतिशत ही है। रेड्डी ने कहा कि पिछले महीने, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा लचीली है और इसका उल्लंघन करना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करना नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए जहां तक आबादी के अनुपात में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का सवाल है, सरकार के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं है।
उनके इस दावे का जनता दल यूनाइटेड , राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के सदस्यों ने जोरदार प्रतिकार किया। शून्यकाल में इस मामले को उठाते हुए दुबे ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में बिहार में हत्या, डकैती और बलात्कार की कुछ घटनाओं की तरफ सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि अपराध की घटनाओं से जनता में भय का माहौल है। इस दौरान जनता दल , राजद और कांग्रेस कुछ सदस्यों ने उनका विरोध किया। उन्हें इसमें समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के सदस्यों का भी साथ मिला। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने हंगामा कर रहे सदस्यों को शांत कराया और उन्हें सलाद दी कि वे सदन की गरिमा को बनाए रखें। शून्यकाल में बीजू जनता दल के सांसद अमर पटनायक ने एम्स के सर्वर को प्रभावित करने वाले कथित रैनसमवेयर हमले का मुद्दा उठाया और कहा कि इसे एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वाईएसआरसीपी के वी विजयसाई रेड्डी ने पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया और दावा किया कि स्वतंत्र भारत आबादी के इस वर्ग के सार्थक उत्थान को सुनिश्चित करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी पिछड़े वर्गों की जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसरों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा अधूरी है। वाईएसआरसीपी सदस्य ने कहा कि भले ही पिछड़े वर्ग की आबादी भारत की आबादी का पचास प्रतिशत है जबकि उसे आरक्षण सत्ताईस प्रतिशत ही है। रेड्डी ने कहा कि पिछले महीने, उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आरक्षण पर पचास प्रतिशत की सीमा लचीली है और इसका उल्लंघन करना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करना नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए जहां तक आबादी के अनुपात में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का सवाल है, सरकार के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं है।
भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी धाकड़ ओपनर्स की बात होगी तो उसमें शिखर धवन (Shikhar Dhawan) का नाम भी हमेशा लिया जाएगा। बेशक राष्ट्रीय टीम से अंदर-बाहर होने का सिलसिला उनके करियर में लगातार जारी रहा लेकिन 'गब्बर' के नाम से ये बल्लेबाज अब भी भारत के शीर्ष बल्लेबाजों में शुमार किया जाता है। इन दिनों धवन आईपीएल 2022 में पंजाब किंग्स के लिए धमाल मचाते नजर आ रहे हैं। वो अपने मजाकिया अंदाज और साथी खिलाड़ियों के साथ मस्ती के लिए भी जाने जाते हैं। हाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। पंजाब किंग्स के आधिकारिक यू-ट्यूब पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में शिखर धवन से जब बातचीत की गई तब उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प वाकया सुनाया। उन दिनों धवन एक लड़की को पसंद करते थे और उन्होंने इस लड़की को प्रपोज करने का मन बनाया था। लेकिन जब धवन ने उस लड़की को प्रपोज किया तो लड़की ने उसे ठुकरा दिया। धवन ने ये भी बताया कि जब लड़की ने उनके प्रपोजल को ठुकराया तो इसके बाद उन्होंने क्या जवाब दिया था। धवन ने उस किस्से के बारे में बात करते हुए कहा, "एक बार मैंने एक लड़की को प्रपोज किया था और उसने मुझे रिजेक्ट कर दिया था। उन दिनों वो भी खेलती थी। तो आपको पता है कि मैंने क्या जवाब दिया? मैंने उससे कहा कि तुमने कोहिनूर हीरे को ठुकरा दिया है। " अगर मैदान पर जलवे की बात करें तो शिखर धवन को आईपीएल 2022 की मेगा नीलामी में पंजाब किंग्स ने 8 करोड़ 25 लाख रुपये की रकम पर खरीदा था। अब तक मौजूदा सीजन में धवन ने पंजाब किंग्स के लिए खेले तीन मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया है। धवन ने पहले मुकाबले में बैंगलोर के खिलाफ टीम को अच्छी शुरुआत देते हुए 43 रन बनाए। दूसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ वो 16 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए, जबकि तीसरे मुकाबले में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ एक बार फिर पंजाब किंग्स को अच्छी शुरुआत देते हुए 33 रनों की पारी खेली थी।
भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी धाकड़ ओपनर्स की बात होगी तो उसमें शिखर धवन का नाम भी हमेशा लिया जाएगा। बेशक राष्ट्रीय टीम से अंदर-बाहर होने का सिलसिला उनके करियर में लगातार जारी रहा लेकिन 'गब्बर' के नाम से ये बल्लेबाज अब भी भारत के शीर्ष बल्लेबाजों में शुमार किया जाता है। इन दिनों धवन आईपीएल दो हज़ार बाईस में पंजाब किंग्स के लिए धमाल मचाते नजर आ रहे हैं। वो अपने मजाकिया अंदाज और साथी खिलाड़ियों के साथ मस्ती के लिए भी जाने जाते हैं। हाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। पंजाब किंग्स के आधिकारिक यू-ट्यूब पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में शिखर धवन से जब बातचीत की गई तब उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प वाकया सुनाया। उन दिनों धवन एक लड़की को पसंद करते थे और उन्होंने इस लड़की को प्रपोज करने का मन बनाया था। लेकिन जब धवन ने उस लड़की को प्रपोज किया तो लड़की ने उसे ठुकरा दिया। धवन ने ये भी बताया कि जब लड़की ने उनके प्रपोजल को ठुकराया तो इसके बाद उन्होंने क्या जवाब दिया था। धवन ने उस किस्से के बारे में बात करते हुए कहा, "एक बार मैंने एक लड़की को प्रपोज किया था और उसने मुझे रिजेक्ट कर दिया था। उन दिनों वो भी खेलती थी। तो आपको पता है कि मैंने क्या जवाब दिया? मैंने उससे कहा कि तुमने कोहिनूर हीरे को ठुकरा दिया है। " अगर मैदान पर जलवे की बात करें तो शिखर धवन को आईपीएल दो हज़ार बाईस की मेगा नीलामी में पंजाब किंग्स ने आठ करोड़ पच्चीस लाख रुपये की रकम पर खरीदा था। अब तक मौजूदा सीजन में धवन ने पंजाब किंग्स के लिए खेले तीन मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया है। धवन ने पहले मुकाबले में बैंगलोर के खिलाफ टीम को अच्छी शुरुआत देते हुए तैंतालीस रन बनाए। दूसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ वो सोलह रन बनाकर जल्दी आउट हो गए, जबकि तीसरे मुकाबले में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ एक बार फिर पंजाब किंग्स को अच्छी शुरुआत देते हुए तैंतीस रनों की पारी खेली थी।
पटना : बोचहां उपचुनाव के नतीजों के बाद आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) जनता के बीच आए। उन्होंने बोचहां की जनता का धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस विश्वास के बाद राष्ट्रीय जनता दल की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। तेजस्वी यादव ने कहा ये जनता की जीत है। इस प्रचंड जीत के लिए हम बोचहां की जनता को धन्यवाद देते हैं। अपनी बात को तेजस्वी यादव ने दोहराते हुए कहा कि ये जनता की जीत है, ये मुद्दों की जीत है, हम जिन मुद्दों को लेकर जनता के बीच गए, उनकी जीत है। ये लोगों की पढ़ाई, दवाई, कमाई और सिंचाई की मांगों की जीत है। तेजस्वी यादव ने कहा, बेरोजगारी इस वक्त चरम पर है। बीजेपी-जेडीयू ने मिलकर बिहार का भट्ठा बैठा दिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बोचहां में जो परिणाम आया है उससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को बहुत खुशी मिली होगी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे जानकारी हुई है कि इस परिणाम से नीतीश जी को खुशी मिली है, लेकिन हम जनता का धन्यवाद करते हैं कि सभी लोगों ने हमें वोट किया है। बताते चलें कि तेजस्वी यादव कहते आ रहे हैं कि नीतीश कुमार पर बीजेपी लगातार दबाव बढ़ा रही थी, जिसका नतीजा है। इस करारी शिकस्त के बाद बीजेपी को अपनी सोशल इंजीनियरिंग को एक बार फिर से दुरुस्त करने की जरूरत है। लगातार जीत से बीजेपी निरंकुश होती जा रही है। जिसका नतीजा है वो अपने सहयोगियों और अपने कोर वोटरों की अनदेखी कर रही है। जीत से उत्साहित नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि बोचहां की जनता ने इतने वोट से किसी को हराया होगा। जनता ने यहां सरकार को डंडा मारने का काम किया है। भ्रष्टाचार, धांधली से जनता त्रस्त है। किसी थाने में किसी की सुनवाई नहीं होती है। बिहार में अफसरशाही इतनी चरम पर है कि पुलिस सत्ता पक्ष के लोगों की भी नहीं सुनती है। विधायकों का भी नहीं सुनती है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता ने सरकार को चेताया, पूछा है कहां गया 19 लाख रोजगार का वादा, जनता ने पूछा है कि चुनाव में जो वादे किए गए वो कब पूरे होंगे। तेजस्वी यादव ने कहा कि इस जीत के बाद मेरी जिम्मेदारी बढ़ गई। खुशी तो है मगर इस खुशी के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। सबके सम्मान, सबके अधिकार की जिम्मेदारी बढ़ गई है। तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम सबका काम करेंगे। पिछड़े, अगड़े, सवर्ण, दलित, गरीब, अमीर, हिंदू, मुसलमान सभी ने हमें खुलकर वोट किया। हमें खुशी से ज्यादा अब इस बात की चिंता और चुनौती है कि हम जनता के पैमाने पर खरे कैसे उतरेंगे। तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता ने हमारे ऊपर जो विश्वास दिखाया, उस विश्वास पर खरा उतरना हमारी चुनौती बन गई है।
पटना : बोचहां उपचुनाव के नतीजों के बाद आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जनता के बीच आए। उन्होंने बोचहां की जनता का धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस विश्वास के बाद राष्ट्रीय जनता दल की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। तेजस्वी यादव ने कहा ये जनता की जीत है। इस प्रचंड जीत के लिए हम बोचहां की जनता को धन्यवाद देते हैं। अपनी बात को तेजस्वी यादव ने दोहराते हुए कहा कि ये जनता की जीत है, ये मुद्दों की जीत है, हम जिन मुद्दों को लेकर जनता के बीच गए, उनकी जीत है। ये लोगों की पढ़ाई, दवाई, कमाई और सिंचाई की मांगों की जीत है। तेजस्वी यादव ने कहा, बेरोजगारी इस वक्त चरम पर है। बीजेपी-जेडीयू ने मिलकर बिहार का भट्ठा बैठा दिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बोचहां में जो परिणाम आया है उससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बहुत खुशी मिली होगी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे जानकारी हुई है कि इस परिणाम से नीतीश जी को खुशी मिली है, लेकिन हम जनता का धन्यवाद करते हैं कि सभी लोगों ने हमें वोट किया है। बताते चलें कि तेजस्वी यादव कहते आ रहे हैं कि नीतीश कुमार पर बीजेपी लगातार दबाव बढ़ा रही थी, जिसका नतीजा है। इस करारी शिकस्त के बाद बीजेपी को अपनी सोशल इंजीनियरिंग को एक बार फिर से दुरुस्त करने की जरूरत है। लगातार जीत से बीजेपी निरंकुश होती जा रही है। जिसका नतीजा है वो अपने सहयोगियों और अपने कोर वोटरों की अनदेखी कर रही है। जीत से उत्साहित नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि बोचहां की जनता ने इतने वोट से किसी को हराया होगा। जनता ने यहां सरकार को डंडा मारने का काम किया है। भ्रष्टाचार, धांधली से जनता त्रस्त है। किसी थाने में किसी की सुनवाई नहीं होती है। बिहार में अफसरशाही इतनी चरम पर है कि पुलिस सत्ता पक्ष के लोगों की भी नहीं सुनती है। विधायकों का भी नहीं सुनती है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता ने सरकार को चेताया, पूछा है कहां गया उन्नीस लाख रोजगार का वादा, जनता ने पूछा है कि चुनाव में जो वादे किए गए वो कब पूरे होंगे। तेजस्वी यादव ने कहा कि इस जीत के बाद मेरी जिम्मेदारी बढ़ गई। खुशी तो है मगर इस खुशी के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। सबके सम्मान, सबके अधिकार की जिम्मेदारी बढ़ गई है। तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम सबका काम करेंगे। पिछड़े, अगड़े, सवर्ण, दलित, गरीब, अमीर, हिंदू, मुसलमान सभी ने हमें खुलकर वोट किया। हमें खुशी से ज्यादा अब इस बात की चिंता और चुनौती है कि हम जनता के पैमाने पर खरे कैसे उतरेंगे। तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता ने हमारे ऊपर जो विश्वास दिखाया, उस विश्वास पर खरा उतरना हमारी चुनौती बन गई है।
(वा, वी, वि, वू , वे ,वो ,ई ,उ, ए ओ) वृष(Taurus): आज खुद के लिए अच्छा सोचिए और आंखें खोल कर नए दिन की शुरुआत कीजिए। इसके साथ साथ आज यह भी आवश्यक है की आप प्रयास करने के साथ प्रयास को फलित होने का भी मौका दें। आज के दिन की सफलता के लिए माता के मंदिर मे कमल का पुष्प अर्पण करे । सुझावः- आज आप घर में खीर का भोग लगवे लाभ होगा। शुभ रंग :- कत्थई।
वृष: आज खुद के लिए अच्छा सोचिए और आंखें खोल कर नए दिन की शुरुआत कीजिए। इसके साथ साथ आज यह भी आवश्यक है की आप प्रयास करने के साथ प्रयास को फलित होने का भी मौका दें। आज के दिन की सफलता के लिए माता के मंदिर मे कमल का पुष्प अर्पण करे । सुझावः- आज आप घर में खीर का भोग लगवे लाभ होगा। शुभ रंग :- कत्थई।
The Role of Artificial Intelligence In Education : इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है। कोरोनावायरस महामारी के बाद भारत में शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। छात्रों और शिक्षकों समेत सभी लोगों ने प्रौद्योगिकी पर अपने भरोसे को मजबूत किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में सीखने और शिक्षण दोनों को अनुकूलित करने की शक्ति है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी से शिक्षा क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। यहां हम आपको कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप यह जान पाएंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी भविष्य में शिक्षण-प्रशिक्षण तंत्र को कैसे मजबूत करेगी। शैक्षिक प्रक्रिया में आज भी काफी हद तक काम मैनुअल तरीके से होता है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद से ग्रेडिंग, मूल्यांकन, एडमिशन प्रोसेस, प्रगति रिपोर्ट और व्याख्यान के लिए संसाधनों को व्यवस्थित करने जैसे नियमित कार्य आसानी से हो जाएंगे। शिक्षकों के समय-समय पर कार्य पूरे होंगे। छात्रों का कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी यह सुनिश्चित कर सकता है कि शिक्षा व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत हो। छात्रों के लिए पहले से ही अनुकूली शिक्षण सॉफ्टवेयर और डिजीटल कार्यक्रम हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी न केवल प्रत्येक छात्र की जरूरतों पूरा कर सकता है, बल्कि उन विशिष्ट विषयों को भी पूरा कर सकता है जिन पर उन्हें जोर देना चाहिए। यह प्रत्येक छात्र के लिए एक अद्वितीय और अनुरूप सीखने का मार्ग तैयार करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी स्मार्ट सामग्री बनाने में मदद करेगी। इससे सभी छात्रों को फायदा होगा, इसमें वह छात्र भी शामिल हैं जो देख या सुन नहीं सकते। यह शिक्षक द्वारा कही गई हर बात के लिए छात्रों को रीयल-टाइम उपशीर्षक प्रदान कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी उन साइलो को तोड़ सकता है जो छात्रों को आगे बढ़ने से रोकती है। छात्रों को प्रभावी ढंग से ज्ञान प्रदान करने में सक्षम होने के लिए शिक्षकों को अपने कौशल को लगातार अपडेट करना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी शिक्षकों को उन चीजों पर खुद को अपडेट रखने की अनुमति देगा जो वह नहीं जानते थे। इसके साथ, उनके पास नई पीढ़ी को सिखाने के लिए अधिक गहन और व्यापक ज्ञान का आधार होगा। छात्र अपने प्रश्नों को अपनी गति से और शिक्षकों की प्रतीक्षा किए बिना हल कर सकते हैं। जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी ट्यूटर और चैटबॉट छात्रों को अपने कौशल को तेज करने और कक्षा के बाहर कमजोर स्थानों में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद से शिक्षक अपने अनुभव अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी न केवल अकादमिक/शैक्षिक बोर्डों को एक पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद कर सकता है, बल्कि यह पाठ्यक्रम की सफलता के बारे में तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त करने में भी मदद कर सकता है। स्कूल, विशेष रूप से ऑनलाइन निगरानी के लिए और छात्रों के प्रदर्शन के साथ कोई समस्या होने पर शिक्षकों को सतर्क करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है। जब कोई शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका के बारे में सोचता है, तो स्मार्ट कंटेंट हमेशा दिमाग में आता है। स्मार्ट सामग्री वैयक्तिकृत होती है और जनसांख्यिकीय, प्रासंगिक और व्यवहारिक डेटा के अनुसार गतिशील रूप से अपडेट हो सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी हमारे दैनिक जीवन के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों में एक बड़ा बदलाव ला रही है।
The Role of Artificial Intelligence In Education : इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है। कोरोनावायरस महामारी के बाद भारत में शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। छात्रों और शिक्षकों समेत सभी लोगों ने प्रौद्योगिकी पर अपने भरोसे को मजबूत किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में सीखने और शिक्षण दोनों को अनुकूलित करने की शक्ति है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी से शिक्षा क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। यहां हम आपको कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप यह जान पाएंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी भविष्य में शिक्षण-प्रशिक्षण तंत्र को कैसे मजबूत करेगी। शैक्षिक प्रक्रिया में आज भी काफी हद तक काम मैनुअल तरीके से होता है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद से ग्रेडिंग, मूल्यांकन, एडमिशन प्रोसेस, प्रगति रिपोर्ट और व्याख्यान के लिए संसाधनों को व्यवस्थित करने जैसे नियमित कार्य आसानी से हो जाएंगे। शिक्षकों के समय-समय पर कार्य पूरे होंगे। छात्रों का कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी यह सुनिश्चित कर सकता है कि शिक्षा व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत हो। छात्रों के लिए पहले से ही अनुकूली शिक्षण सॉफ्टवेयर और डिजीटल कार्यक्रम हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी न केवल प्रत्येक छात्र की जरूरतों पूरा कर सकता है, बल्कि उन विशिष्ट विषयों को भी पूरा कर सकता है जिन पर उन्हें जोर देना चाहिए। यह प्रत्येक छात्र के लिए एक अद्वितीय और अनुरूप सीखने का मार्ग तैयार करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी स्मार्ट सामग्री बनाने में मदद करेगी। इससे सभी छात्रों को फायदा होगा, इसमें वह छात्र भी शामिल हैं जो देख या सुन नहीं सकते। यह शिक्षक द्वारा कही गई हर बात के लिए छात्रों को रीयल-टाइम उपशीर्षक प्रदान कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी उन साइलो को तोड़ सकता है जो छात्रों को आगे बढ़ने से रोकती है। छात्रों को प्रभावी ढंग से ज्ञान प्रदान करने में सक्षम होने के लिए शिक्षकों को अपने कौशल को लगातार अपडेट करना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी शिक्षकों को उन चीजों पर खुद को अपडेट रखने की अनुमति देगा जो वह नहीं जानते थे। इसके साथ, उनके पास नई पीढ़ी को सिखाने के लिए अधिक गहन और व्यापक ज्ञान का आधार होगा। छात्र अपने प्रश्नों को अपनी गति से और शिक्षकों की प्रतीक्षा किए बिना हल कर सकते हैं। जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी ट्यूटर और चैटबॉट छात्रों को अपने कौशल को तेज करने और कक्षा के बाहर कमजोर स्थानों में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद से शिक्षक अपने अनुभव अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी न केवल अकादमिक/शैक्षिक बोर्डों को एक पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद कर सकता है, बल्कि यह पाठ्यक्रम की सफलता के बारे में तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त करने में भी मदद कर सकता है। स्कूल, विशेष रूप से ऑनलाइन निगरानी के लिए और छात्रों के प्रदर्शन के साथ कोई समस्या होने पर शिक्षकों को सतर्क करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है। जब कोई शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका के बारे में सोचता है, तो स्मार्ट कंटेंट हमेशा दिमाग में आता है। स्मार्ट सामग्री वैयक्तिकृत होती है और जनसांख्यिकीय, प्रासंगिक और व्यवहारिक डेटा के अनुसार गतिशील रूप से अपडेट हो सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी हमारे दैनिक जीवन के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों में एक बड़ा बदलाव ला रही है।
दिल्ली । सुभाषचंद्र बोस की 119 वीं जयंती पर उनसे जुड़ी सीक्रेट फाइलें आज सबके सामने आ चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता जी से जुडी गोपनीय फाइलों को बोस फैमिली की मौजूदगी में सार्वजनिक किया। दरअसल प्रधानमंत्री ने नेशनल ओर्काइब्स में डिजिटल वर्जन के ज़रिये 100 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया। यह गोपनीय फाइलें netaji. gov. in वेबसाइट पर देखने को मिलेंगी । गोपनीय फाइलों में से कुछ चिटि्ठयां भी मिली हैं। इन चिठियों में जवाहर लाल नेहरू और इंग्लैंड के तब के पीएम क्लीमेंट एटली को लिखी वो चिट्ठी भी सार्वजनिक हुई है, जिसमें नेहरू ने बोस को वॉर क्रिमिनल कहा गया था। ये चिटि्ठयां नेहरू ने 27 दिसंबर, 1945 को लिखी थीं। लेकिन इसके नीचे नेहरू का सिर्फ नाम लिखा है। उनका सिग्नेचर नहीं है।
दिल्ली । सुभाषचंद्र बोस की एक सौ उन्नीस वीं जयंती पर उनसे जुड़ी सीक्रेट फाइलें आज सबके सामने आ चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता जी से जुडी गोपनीय फाइलों को बोस फैमिली की मौजूदगी में सार्वजनिक किया। दरअसल प्रधानमंत्री ने नेशनल ओर्काइब्स में डिजिटल वर्जन के ज़रिये एक सौ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया। यह गोपनीय फाइलें netaji. gov. in वेबसाइट पर देखने को मिलेंगी । गोपनीय फाइलों में से कुछ चिटि्ठयां भी मिली हैं। इन चिठियों में जवाहर लाल नेहरू और इंग्लैंड के तब के पीएम क्लीमेंट एटली को लिखी वो चिट्ठी भी सार्वजनिक हुई है, जिसमें नेहरू ने बोस को वॉर क्रिमिनल कहा गया था। ये चिटि्ठयां नेहरू ने सत्ताईस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस को लिखी थीं। लेकिन इसके नीचे नेहरू का सिर्फ नाम लिखा है। उनका सिग्नेचर नहीं है।
पिपरी क्षेत्र के दरियापुर गांव के बाहर एक बगीचे में कटहल के पेड़ पर मंगलवार की सुबह शख्स का शव फंदे पर लटकता हुआ मिला। इसकी जानकारी होने पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। बहरहाल, परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। वहीं, फोरेंसिक टीम के साथ पिपरी इंस्पेक्टर श्रवण कुमार ने मौके का निरीक्षण किया और कानूनी औपचारिकता पूरी की। दरियापुर गांव निवासी 45 वर्षीय गुलाब सिंह पुत्र स्वर्गीय राम प्रताप खेती करके तीन बच्चों और पत्नी का भरण-पोषण करते थे। सोमवार की रात में खाना खाने के बाद वह स्वजन के साथ घर में सोए हुए थे। रात में वह संदिग्ध परिस्थितियों में अचानक लापता हो गए। सुबह उठने पर परिजनों ने उन्हें घर में नहीं देखा तो उनकी खोजबीन शुरू कर दी गई। इस बीच उनका शव घर से करीब पांच सौ मीटर की दूर स्थित बाग में कटहल के पेड़ से फंदे पर लटकते हुए मिला। शव के समीप कुर्सी भी पड़ी थी। मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन मौत को कारण नहीं बता सके लेकिन हत्या की आशंका जताई है। हत्या करने को लेकर परिजनों ने किसी पर फिलहाल आरोप नहीं लगाया है। इस संबंध में पिपरी इंस्पेक्टर का कहना है कि स्वजन ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण पता लग सकेगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिपरी क्षेत्र के दरियापुर गांव के बाहर एक बगीचे में कटहल के पेड़ पर मंगलवार की सुबह शख्स का शव फंदे पर लटकता हुआ मिला। इसकी जानकारी होने पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। बहरहाल, परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। वहीं, फोरेंसिक टीम के साथ पिपरी इंस्पेक्टर श्रवण कुमार ने मौके का निरीक्षण किया और कानूनी औपचारिकता पूरी की। दरियापुर गांव निवासी पैंतालीस वर्षीय गुलाब सिंह पुत्र स्वर्गीय राम प्रताप खेती करके तीन बच्चों और पत्नी का भरण-पोषण करते थे। सोमवार की रात में खाना खाने के बाद वह स्वजन के साथ घर में सोए हुए थे। रात में वह संदिग्ध परिस्थितियों में अचानक लापता हो गए। सुबह उठने पर परिजनों ने उन्हें घर में नहीं देखा तो उनकी खोजबीन शुरू कर दी गई। इस बीच उनका शव घर से करीब पांच सौ मीटर की दूर स्थित बाग में कटहल के पेड़ से फंदे पर लटकते हुए मिला। शव के समीप कुर्सी भी पड़ी थी। मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन मौत को कारण नहीं बता सके लेकिन हत्या की आशंका जताई है। हत्या करने को लेकर परिजनों ने किसी पर फिलहाल आरोप नहीं लगाया है। इस संबंध में पिपरी इंस्पेक्टर का कहना है कि स्वजन ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण पता लग सकेगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
'डंडा' ऊंचा रहे हमारा 'जिसकी लाठी उसकी भैम' वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। झंडे को भूलकर लोग अपना-अपना डंडा ऊंचा करने में लगे है। झडे का मामला मटियामेट हो गया है। सोधे-सज्जन आदमी का कोई महत्व नहीं है। उसके साथ कोई कभी भी चोट कर सकता है। सज्जनता उसकी नियति होने से वह सब कुछ बर्दाश्त कर लेता है। झडे को ऊंचा करने के लिहाज से आजादी की यह सालगिरह बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है। इस बार जितनी जोर जबरदस्ती हुई है उतनी पहले कभी नही । पंजाब की समस्या का हल जबरदस्ती पूर्वक करने के बाद आसाम के साथ बलात्कार जारी है। उस पर तुर्रा यह कि चुनाव के समय एकता अखडता के लिए जो वादा किया था - वह पूरा कर दिखाया गया है । कोई चाहे अठारहवी सदी से निकला हो या नही कि इक्कीसवी सदी में चलने की जवरदस्ती का शिकार है । आप घर मे आराम फरमायें, सारा काम कम्प्यूटर दादा निपटा देंगे। आपको कम्प्यूटर की जरूरत है या नहीं, इसकी चिन्ता किसे है-बस जबरेंदस्ती डडे के बल पर कम्प्यूटर से नाता जोडिये । भूख-गरीबी वेकारी की बातें हमें फिसड्डी बनाती हैं। आधुनिक तकनीक, बड़े कल-कारखानी तथा अणु परमाणु की बात करती है । मैं इन सारी बातो से बड़ा बीर अनभिज्ञ-सा प्राणी रहा हू । एक सवेरै मित्र भोदूलालजो ने आ हमला किया और छूटते ही बोले, 'अरे भाई क्या मुह लटकाए बैठे हो । आजादी की सुबह भी तुम 1942 को मुद्रा अपनाएं हुए हो। घबराओ मत भाई, आज तो आजादी का मजा लेने के दिन हैं ये । हम लो- आओ कही डंडा ऊंचा करें ।'
'डंडा' ऊंचा रहे हमारा 'जिसकी लाठी उसकी भैम' वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। झंडे को भूलकर लोग अपना-अपना डंडा ऊंचा करने में लगे है। झडे का मामला मटियामेट हो गया है। सोधे-सज्जन आदमी का कोई महत्व नहीं है। उसके साथ कोई कभी भी चोट कर सकता है। सज्जनता उसकी नियति होने से वह सब कुछ बर्दाश्त कर लेता है। झडे को ऊंचा करने के लिहाज से आजादी की यह सालगिरह बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है। इस बार जितनी जोर जबरदस्ती हुई है उतनी पहले कभी नही । पंजाब की समस्या का हल जबरदस्ती पूर्वक करने के बाद आसाम के साथ बलात्कार जारी है। उस पर तुर्रा यह कि चुनाव के समय एकता अखडता के लिए जो वादा किया था - वह पूरा कर दिखाया गया है । कोई चाहे अठारहवी सदी से निकला हो या नही कि इक्कीसवी सदी में चलने की जवरदस्ती का शिकार है । आप घर मे आराम फरमायें, सारा काम कम्प्यूटर दादा निपटा देंगे। आपको कम्प्यूटर की जरूरत है या नहीं, इसकी चिन्ता किसे है-बस जबरेंदस्ती डडे के बल पर कम्प्यूटर से नाता जोडिये । भूख-गरीबी वेकारी की बातें हमें फिसड्डी बनाती हैं। आधुनिक तकनीक, बड़े कल-कारखानी तथा अणु परमाणु की बात करती है । मैं इन सारी बातो से बड़ा बीर अनभिज्ञ-सा प्राणी रहा हू । एक सवेरै मित्र भोदूलालजो ने आ हमला किया और छूटते ही बोले, 'अरे भाई क्या मुह लटकाए बैठे हो । आजादी की सुबह भी तुम एक हज़ार नौ सौ बयालीस को मुद्रा अपनाएं हुए हो। घबराओ मत भाई, आज तो आजादी का मजा लेने के दिन हैं ये । हम लो- आओ कही डंडा ऊंचा करें ।'
है। " उन्होंने कहा कि पार्टी की प्रतिबद्धता के कारण ही अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है। कांग्रेस ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने टिप्पणी की थी कि यह जल्दबाजी का फैसला है। वे एक के बाद एक स्थगन की तारीखें निकालने में लगे रहे। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने मैसूर में मंदिर के विध्वंस का जिक्र करते हुए कहा कि एक भी गलती के लिए सिद्धारमैया से सीखने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, "सिद्धारमैया एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने वीरशैव-लिंगायत समुदाय को तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने टीपू जयंती (वर्षगांठ) मनाई, जिन्होंने मंदिरों को नष्ट कर दिया। सिद्धारमैया नास्तिक हैं। बीजेपी वह पार्टी है जिसने मंदिरों को सबसे ज्यादा अनुदान दिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर खाली किया गया है। अधिकारियों ने गलती की है। इस पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने फैसला किया है। अब आगे मंदिर तोड़े नहीं जा सकेंगे। कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिया जाएगा। "
है। " उन्होंने कहा कि पार्टी की प्रतिबद्धता के कारण ही अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है। कांग्रेस ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने टिप्पणी की थी कि यह जल्दबाजी का फैसला है। वे एक के बाद एक स्थगन की तारीखें निकालने में लगे रहे। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने मैसूर में मंदिर के विध्वंस का जिक्र करते हुए कहा कि एक भी गलती के लिए सिद्धारमैया से सीखने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, "सिद्धारमैया एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने वीरशैव-लिंगायत समुदाय को तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने टीपू जयंती मनाई, जिन्होंने मंदिरों को नष्ट कर दिया। सिद्धारमैया नास्तिक हैं। बीजेपी वह पार्टी है जिसने मंदिरों को सबसे ज्यादा अनुदान दिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर खाली किया गया है। अधिकारियों ने गलती की है। इस पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने फैसला किया है। अब आगे मंदिर तोड़े नहीं जा सकेंगे। कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिया जाएगा। "
लखीमपुर-खीरी । हिंदू धर्म (gather) में पूरे वर्ष में सावन का महीना बड़ा ही पवित्र महीना माना जाता है। ऐसे में भोले बाबा के प्रत्येक दरबार में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा (gather) पूरे माह बना रहता है। लखीमपुर खीरी की छोटी काशी की एक ऐतिहासिक मंदिर के रूप में मान्यता है। सावन के माह में छोटी काशी गोला में प्रतिदिन कई हजारों से ज्यादा श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है और छोटी काशी बोल बम के जयकारे से गुंजायमान रहता है। छोटी काशी व आसपास के तमाम क्षेत्रों में भोले बाबा के अन्य मंदिरों के आसपास जिले भर के तमाम शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई, जिससे कि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी बात की समस्या न हो पाए। हालांकि प्रशासन के द्वारा काफी व्यवस्था कराई गई लेकिन रविवार सोमवार की मध्यरात्रि में विद्युत की आंख मिचौली के चलते कावड़ियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। एक कंपनी पीएएससी, 40 महिला आरक्षी, 40 सब इंस्पेक्टर, 06 प्रभारी निरीक्षक, 120 आरक्षी सहित सिविल ड्रेस में पुलिस बल की तैनात किया। इसके अलावा सोमवार, अन्य विशेष दिवसों पर और पुलिस बल लगाया जाएगा और सभी जरूरी पॉइंट्स पर एंबुलेंस की उपलब्धता होगी। मालूम हो कि छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ में सावन के माह की तैयारियां पूर्व से ही शुरू हो गई थी। आज सावन के पहले सोमवार पर सुबह से ही शिव मंदिर के कपाट पर श्रद्धालुओं की काफी लंबी लाइन लगी रही। सुबह लगभग 4:00 बजे ही शिव मंदिर के कपाट को खोल दिया गया, जिसके बाद जिसके बाद श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से जलाभिषेक शुरू कर दिया। इस मौके पर प्रत्येक जगह पर भारी पुलिस बल की मुस्तैदी चप्पे-चप्पे पर लगी रही। मन्दिर परिसर के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोपहर तक करीब 15,000 भक्तों ने जलाभिषेक किया।
लखीमपुर-खीरी । हिंदू धर्म में पूरे वर्ष में सावन का महीना बड़ा ही पवित्र महीना माना जाता है। ऐसे में भोले बाबा के प्रत्येक दरबार में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा पूरे माह बना रहता है। लखीमपुर खीरी की छोटी काशी की एक ऐतिहासिक मंदिर के रूप में मान्यता है। सावन के माह में छोटी काशी गोला में प्रतिदिन कई हजारों से ज्यादा श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है और छोटी काशी बोल बम के जयकारे से गुंजायमान रहता है। छोटी काशी व आसपास के तमाम क्षेत्रों में भोले बाबा के अन्य मंदिरों के आसपास जिले भर के तमाम शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई, जिससे कि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी बात की समस्या न हो पाए। हालांकि प्रशासन के द्वारा काफी व्यवस्था कराई गई लेकिन रविवार सोमवार की मध्यरात्रि में विद्युत की आंख मिचौली के चलते कावड़ियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। एक कंपनी पीएएससी, चालीस महिला आरक्षी, चालीस सब इंस्पेक्टर, छः प्रभारी निरीक्षक, एक सौ बीस आरक्षी सहित सिविल ड्रेस में पुलिस बल की तैनात किया। इसके अलावा सोमवार, अन्य विशेष दिवसों पर और पुलिस बल लगाया जाएगा और सभी जरूरी पॉइंट्स पर एंबुलेंस की उपलब्धता होगी। मालूम हो कि छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ में सावन के माह की तैयारियां पूर्व से ही शुरू हो गई थी। आज सावन के पहले सोमवार पर सुबह से ही शिव मंदिर के कपाट पर श्रद्धालुओं की काफी लंबी लाइन लगी रही। सुबह लगभग चार:शून्य बजे ही शिव मंदिर के कपाट को खोल दिया गया, जिसके बाद जिसके बाद श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से जलाभिषेक शुरू कर दिया। इस मौके पर प्रत्येक जगह पर भारी पुलिस बल की मुस्तैदी चप्पे-चप्पे पर लगी रही। मन्दिर परिसर के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोपहर तक करीब पंद्रह,शून्य भक्तों ने जलाभिषेक किया।
चित्रकूटः चित्रकूट में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने रामचरितमानस का अपमान किए जाने के विरोध में पटेल तिराहा पर बुद्धि शुद्धि के लिए हनुमान चालीसा पाठ किया। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से संगीतमयी हनुमान चालीसा का पाठ ढोलक मजीरा के साथ किया। पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि समाजवादी विचारधारा के संस्थापक डॉ राम मनोहर लोहिया जी का समाजवाद राम के चरित्र पर आधारित था। उन्होंने चित्रकूट में रामायण मेला की शुरुआत की थी। भगवान श्रीराम को आदर्श मानकर समाजवादी समाज की परिकल्पना की थी। आज उनके ही अनुवायी रामचरितमानस के रचयिता को गाली दे रहे। रामचरितमानस की प्रतियां जला रहे हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि राम मनोहर लोहिया के समाजवाद को इन्होंने जला दिया। अब नया समाजवाद है। आयोजन में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष आनंद पटेल महामंत्री, आलोक पांडेय, लवकुश चतुर्वेदी, महेंद्र कोटार्य, रामसागर चतुर्वेदी, शिव शंकर सिंह, अर्जुन शुक्ला, सुशील द्विवेदी, श्याम गुप्ता, हीरो मिश्रा, जवाहर सोनी, रवि गुप्ता, अंजू वर्मा, अर्चना सिंह, माया प्रजापति, मोहित मिश्रा, श्रवण पटेल, विनोद पांडेय, दशरथ प्रजापति, सुरेश अनुरागी, जगदीश गुप्ता, शंकर यादव, दरबारी पांडेय, राजेंद्र गुप्ता, विनोद श्रीवास्तव, आशीष पांडेय, विजय शंकर मिश्र, राजेश कुमार पांडेय, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी, जिला मंत्री रामशरण तिवारी, रिशभ, अमित, चंदा सोनी, कपिल, उमाशंकर तिवारी और शिव प्रकाश आदि रहे।
चित्रकूटः चित्रकूट में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने रामचरितमानस का अपमान किए जाने के विरोध में पटेल तिराहा पर बुद्धि शुद्धि के लिए हनुमान चालीसा पाठ किया। कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से संगीतमयी हनुमान चालीसा का पाठ ढोलक मजीरा के साथ किया। पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि समाजवादी विचारधारा के संस्थापक डॉ राम मनोहर लोहिया जी का समाजवाद राम के चरित्र पर आधारित था। उन्होंने चित्रकूट में रामायण मेला की शुरुआत की थी। भगवान श्रीराम को आदर्श मानकर समाजवादी समाज की परिकल्पना की थी। आज उनके ही अनुवायी रामचरितमानस के रचयिता को गाली दे रहे। रामचरितमानस की प्रतियां जला रहे हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि राम मनोहर लोहिया के समाजवाद को इन्होंने जला दिया। अब नया समाजवाद है। आयोजन में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष आनंद पटेल महामंत्री, आलोक पांडेय, लवकुश चतुर्वेदी, महेंद्र कोटार्य, रामसागर चतुर्वेदी, शिव शंकर सिंह, अर्जुन शुक्ला, सुशील द्विवेदी, श्याम गुप्ता, हीरो मिश्रा, जवाहर सोनी, रवि गुप्ता, अंजू वर्मा, अर्चना सिंह, माया प्रजापति, मोहित मिश्रा, श्रवण पटेल, विनोद पांडेय, दशरथ प्रजापति, सुरेश अनुरागी, जगदीश गुप्ता, शंकर यादव, दरबारी पांडेय, राजेंद्र गुप्ता, विनोद श्रीवास्तव, आशीष पांडेय, विजय शंकर मिश्र, राजेश कुमार पांडेय, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी, जिला मंत्री रामशरण तिवारी, रिशभ, अमित, चंदा सोनी, कपिल, उमाशंकर तिवारी और शिव प्रकाश आदि रहे।
उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड (award) से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में 3 अक्टूबर को हिस्सा लिया था। अक्सर देखने में आता है की गर्भवती महिला को डिलीवरी के समय नॉर्मल डिलीवरी (Normal delivery) करवाने की कोशिश चिकित्सकों द्वारा की जाती है लेकिन फिर भी नॉर्मल डिलीवरी ना हो पाने पर चिकित्सकों को सिजेरियन डिलीवरी करने पर मजबूर होना पड़ता है ऐसे में मां व बच्चे को ज्यादा परेशानी ना हो उसके लिए पीजीआईएमएस के चिकित्सकों ने बेहतरीन तरीके का चुनाव किया है। उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया (Deepti dahiya) ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में 3 अक्टूबर को हिस्सा लिया था। डॉ. दीप्ति ने बताया कि डॉक्टर वाणी मल्होत्रा ने उन्हें इस कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करने के लिए हौसला दिया। डॉ. दीप्ति ने इस उपलब्धि का श्रेय विभागाध्यक्ष डॉक्टर समिति नंदा डॉक्टर, डॉ. सविता सिंगल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉक्टर अंजली गुप्ता, डॉ. निशा मलिक को दिया। कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एच के अग्रवाल, निदेशक रोहतास यादव व विभागाध्यक्ष डॉ. समिति नंदा ने डॉ. दीप्ति दहिया को बधाई दी। डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया की इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के सैकड़ों चिकित्सक शामिल हुए थे। कई चिकित्सकों ने अपने पेपर प्रस्तुत किए। डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि उन्होंने भी इस कॉन्फ्रेंस में 'रिलेशंस ऑफ मेथड ऑफ हेड डिलीवरी इन डीपीली इंपैक्टेड इन सेकंड स्टेज सिजेरियन टू मैटरनल फीटल आउटकम' विषय पर पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि करीब 105 मरीजों की अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया था कि जब चिकित्सक कई बार नॉर्मल डिलीवरी करवाने में असमर्थ हो जाता है तो सिजेरियन डिलीवरी ही अंतिम निर्णय रहता है, ऐसे में बच्चा नीचे की तरफ ऐसा होता है और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए चिकित्सकों द्वारा आमतौर पर 3 तरीके अपनाए जाते हैं। उन्होंने अपने रिसर्च में बताया कि इन 3 तरीकों में से सबसे बेहतरीन तरीका कौन सा है जिससे मां और शिशु को नुकसान ना पहुंचे और दोनों सुरक्षित रहें। डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया कि उनके इस पेपर को कॉन्फ्रेंस में काफी सराहा गया और प्रथम स्थान देते हुए उन्हें डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवार्ड से नवाजा गया।
उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में तीन अक्टूबर को हिस्सा लिया था। अक्सर देखने में आता है की गर्भवती महिला को डिलीवरी के समय नॉर्मल डिलीवरी करवाने की कोशिश चिकित्सकों द्वारा की जाती है लेकिन फिर भी नॉर्मल डिलीवरी ना हो पाने पर चिकित्सकों को सिजेरियन डिलीवरी करने पर मजबूर होना पड़ता है ऐसे में मां व बच्चे को ज्यादा परेशानी ना हो उसके लिए पीजीआईएमएस के चिकित्सकों ने बेहतरीन तरीके का चुनाव किया है। उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में तीन अक्टूबर को हिस्सा लिया था। डॉ. दीप्ति ने बताया कि डॉक्टर वाणी मल्होत्रा ने उन्हें इस कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करने के लिए हौसला दिया। डॉ. दीप्ति ने इस उपलब्धि का श्रेय विभागाध्यक्ष डॉक्टर समिति नंदा डॉक्टर, डॉ. सविता सिंगल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉक्टर अंजली गुप्ता, डॉ. निशा मलिक को दिया। कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एच के अग्रवाल, निदेशक रोहतास यादव व विभागाध्यक्ष डॉ. समिति नंदा ने डॉ. दीप्ति दहिया को बधाई दी। डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया की इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के सैकड़ों चिकित्सक शामिल हुए थे। कई चिकित्सकों ने अपने पेपर प्रस्तुत किए। डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि उन्होंने भी इस कॉन्फ्रेंस में 'रिलेशंस ऑफ मेथड ऑफ हेड डिलीवरी इन डीपीली इंपैक्टेड इन सेकंड स्टेज सिजेरियन टू मैटरनल फीटल आउटकम' विषय पर पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि करीब एक सौ पाँच मरीजों की अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया था कि जब चिकित्सक कई बार नॉर्मल डिलीवरी करवाने में असमर्थ हो जाता है तो सिजेरियन डिलीवरी ही अंतिम निर्णय रहता है, ऐसे में बच्चा नीचे की तरफ ऐसा होता है और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए चिकित्सकों द्वारा आमतौर पर तीन तरीके अपनाए जाते हैं। उन्होंने अपने रिसर्च में बताया कि इन तीन तरीकों में से सबसे बेहतरीन तरीका कौन सा है जिससे मां और शिशु को नुकसान ना पहुंचे और दोनों सुरक्षित रहें। डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया कि उनके इस पेपर को कॉन्फ्रेंस में काफी सराहा गया और प्रथम स्थान देते हुए उन्हें डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवार्ड से नवाजा गया।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
रांची/मुंबईः अभिनेता पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ की आने वाली फिल्म सुस्वागतम खुशामदीद में छोटे शहर झारखंड के जमशेदपुर के प्रशांत सिंह भी नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के निर्देशक धीरज कुमार हैं। यह फिल्म दो ऐसे लोगों की कहानी है, जो प्यार, दोस्ती और हमदर्दी का संदेश देने में यकीन करते हैं। इस फिल्म की शूटिंग प्रारंभ हो गई है। फिल्म में प्रशांत, इनाम के किरदार में नजर आएंगें, जो अपने दोस्त सलमान के साथ हमेशा साये की तरह खड़े रहते हैं। प्रशांत इस फिल्म को लेकर एक्साइटेड हैं। उन्होंने बताया, फिल्म की कहानी इसाबेल कैफ के इर्दगिर्द घूमती है। इसमें अमन (पुलकित) और उसका दोस्त एक तरफ है। सलमान और इनाम दूसरी तरफ। पुलकित और इसाबेल कैफ एक दूसरे से प्यार करते हैं, जबकि सलमान इसाबेल कैफ के दीवाने हैं। उन्होंने कहा, यह एक रोमांटिक फिल्म है, जो सभी को हंसाते हुए एक सामाजिक संदेश देने की कोशिश करती नजर आएगी। प्रशांत की एक कन्नड फिल्म भी जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके अलावा वे चार-पांच म्यूजिक वीडियो भी कर चुके हैं। प्रशांत जल्द ही दो वेब सिरीज भी लेकर आने वाले हैं। इसमें एक जमशेदपुर की कहानी पर आधारित है।
रांची/मुंबईः अभिनेता पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ की आने वाली फिल्म सुस्वागतम खुशामदीद में छोटे शहर झारखंड के जमशेदपुर के प्रशांत सिंह भी नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के निर्देशक धीरज कुमार हैं। यह फिल्म दो ऐसे लोगों की कहानी है, जो प्यार, दोस्ती और हमदर्दी का संदेश देने में यकीन करते हैं। इस फिल्म की शूटिंग प्रारंभ हो गई है। फिल्म में प्रशांत, इनाम के किरदार में नजर आएंगें, जो अपने दोस्त सलमान के साथ हमेशा साये की तरह खड़े रहते हैं। प्रशांत इस फिल्म को लेकर एक्साइटेड हैं। उन्होंने बताया, फिल्म की कहानी इसाबेल कैफ के इर्दगिर्द घूमती है। इसमें अमन और उसका दोस्त एक तरफ है। सलमान और इनाम दूसरी तरफ। पुलकित और इसाबेल कैफ एक दूसरे से प्यार करते हैं, जबकि सलमान इसाबेल कैफ के दीवाने हैं। उन्होंने कहा, यह एक रोमांटिक फिल्म है, जो सभी को हंसाते हुए एक सामाजिक संदेश देने की कोशिश करती नजर आएगी। प्रशांत की एक कन्नड फिल्म भी जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके अलावा वे चार-पांच म्यूजिक वीडियो भी कर चुके हैं। प्रशांत जल्द ही दो वेब सिरीज भी लेकर आने वाले हैं। इसमें एक जमशेदपुर की कहानी पर आधारित है।
Adityapur (Sanjeev Mehta) : झारखंड सरकार की अधिसूचना के आधार पर एक अप्रैल 2004 के पूर्व जिनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गयी हो उन्हें ही पुराने पेंशन का लाभ मिलेगा. यानि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति 2004 के बाद हुई है, वे पुराने पेंशन का लाभ नहीं ले पाएंगे. वहीं, इस अधिसूचना को दोषपूर्ण बताते हुए अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता शशांक गांगुली ने कहा कि आखिर कर्मचारियों ने जिस कारण से आंदोलन किया था और सभी जो उम्मीद लगाए बैठे थे, उनके लिए ये आदेश छलावा है. उन्होंने सरकार से अपील की है कि 2004 के बाद बहाल सभी राज्य कर्मचारियों को पुराने पेंशन का लाभ दिया जाए, तभी सभी कर्मियों की मांग पूरी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार के वर्तमान अधिसूचना से चंद कर्मियों को ही लाभ मिलेगा.
Adityapur : झारखंड सरकार की अधिसूचना के आधार पर एक अप्रैल दो हज़ार चार के पूर्व जिनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गयी हो उन्हें ही पुराने पेंशन का लाभ मिलेगा. यानि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति दो हज़ार चार के बाद हुई है, वे पुराने पेंशन का लाभ नहीं ले पाएंगे. वहीं, इस अधिसूचना को दोषपूर्ण बताते हुए अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के नेता शशांक गांगुली ने कहा कि आखिर कर्मचारियों ने जिस कारण से आंदोलन किया था और सभी जो उम्मीद लगाए बैठे थे, उनके लिए ये आदेश छलावा है. उन्होंने सरकार से अपील की है कि दो हज़ार चार के बाद बहाल सभी राज्य कर्मचारियों को पुराने पेंशन का लाभ दिया जाए, तभी सभी कर्मियों की मांग पूरी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार के वर्तमान अधिसूचना से चंद कर्मियों को ही लाभ मिलेगा.
४३. पंचिंदि० उ० बं० मणुसग०-देवग० - दोसरी० - दोअंगो०- वज्जरि०-दोआणु० - तिन्थय • सिया० ! तं तु० । तेजा० क० - समचदु० -पमत्थ०४ - अगु० ३ - पसत्थ०तस०४ -थिरादिछ - ० णिमि० णि० । तं तु० । अप्पसत्थ०४ उप० णिय० अनंतगु० । एवं पंचिंद्रियभंगो पसत्थाणं । ४४. एइंदि० उ० वं० तिरिक्वग० - हुंड० - अप्पसन्थ०४ - तिरिक्वाणु० - उप०थावर अधिरादिपंच० णि० । तं तु० । ओगलि०- तेजा० - क० - पसत्थ०४ - अगु० -णिमि० णि० अनंतगु० । पर० - उस्सा० आदाउज्जी० बादर-पज्जत० पत्ते० सिया० अनंतगुणहीणं० । मुहुम० अपज्ज० साधार० सिया० । तं तु० । एवं थावर० । ४५. सुहुम० उ० वं० तिरिक्ख० - एइंदि० हुंड० - अप्पसत्थ०४-तिरिक्खाणु ०उप०-थावर-अपज्ज० - साधार० - अथिरादिपंच० णि० । तं तु ० । ओरालि०-तेजा०-क०मुख्यतासे सन्निकर्प जानना चाहिए । देवगति चतुक की मुख्यतासे सन्निकारिक मिश्रकाययोगी जीवोंके जिसप्रकार कह आये हैं उसप्रकार जानना चाहिए । ४३ पञ्चेन्द्रिय जातिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव मनुष्यगति, देवगति, दो शरीर, दो आङ्गोपाङ्ग, वर्षभनाराच संहनन, दो आनुपूर्वी और तीर्थङ्कर प्रकृतिका कदाचित् बन्ध करता है । यदि बन्ध करता है तो उत्कृष्ट अनुभागका भा बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थानपतित हानिको लिये हुए होता है । तैजसशरीर, कार्मरणशरीर, समचतुरस्त्रसंस्थान, प्रशस्न वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, त्रसचतुष्क, स्थिर आदि छह और निर्माणका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभाग का भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है । अप्रशस्त वर्णचतुष्क और उपघातका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुरणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है। इसी प्रकार पञ्चेन्द्रिय जातिके समान प्रशस्त प्रकृतियों की मुख्यतासे सन्निकप जानना चाहिए । ४४. एकेन्द्रिय जातिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव तिर्यञ्चगति, हुण्डसंस्थान, प्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, स्थावर और स्थिर आदि पाँचका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थानपतित हानिको लिये हुए होता है । औदारिक शरीर, तैजस शरीर, कार्मरण शरीर, प्रशस्त वर्णचतुष्क, गुरुलघु और निर्माणका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है । पर्धात, उच्छ्वास, आतप, उद्यांत, बादर, पर्याप्त और प्रत्येकका कदाचित् बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है। सूक्ष्म अपर्याप्त और साधारणका कदाचित् बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभाग बन्ध भी करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध भी करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभाग बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है। इसी प्रकार अर्थात् एकेन्द्रिय जातिके समान स्थावर प्रकृतिकी मुख्यतासे सन्निकर्ष जानना चाहिए । ४५. सूक्ष्म प्रकृतिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव तिर्यञ्चगति, एकेन्द्रिय जाति, हुण्ड संस्थान, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, स्थावर, अपर्याप्त साधारण और
तैंतालीस. पंचिंदिशून्य उशून्य बंशून्य मणुसगशून्य-देवगशून्य - दोसरीशून्य - दोअंगोशून्य- वज्जरिशून्य-दोआणुशून्य - तिन्थय • सियाशून्य ! तं तुशून्य । तेजाशून्य कशून्य - समचदुशून्य -पमत्थचार - अगुशून्य तीन - पसत्थशून्यतसचार -थिरादिछ - शून्य णिमिशून्य णिशून्य । तं तुशून्य । अप्पसत्थचार उपशून्य णियशून्य अनंतगुशून्य । एवं पंचिंद्रियभंगो पसत्थाणं । चौंतालीस. एइंदिशून्य उशून्य वंशून्य तिरिक्वगशून्य - हुंडशून्य - अप्पसन्थचार - तिरिक्वाणुशून्य - उपशून्यथावर अधिरादिपंचशून्य णिशून्य । तं तुशून्य । ओगलिशून्य- तेजाशून्य - कशून्य - पसत्थचार - अगुशून्य -णिमिशून्य णिशून्य अनंतगुशून्य । परशून्य - उस्साशून्य आदाउज्जीशून्य बादर-पज्जतशून्य पत्तेशून्य सियाशून्य अनंतगुणहीणंशून्य । मुहुमशून्य अपज्जशून्य साधारशून्य सियाशून्य । तं तुशून्य । एवं थावरशून्य । पैंतालीस. सुहुमशून्य उशून्य वंशून्य तिरिक्खशून्य - एइंदिशून्य हुंडशून्य - अप्पसत्थचार-तिरिक्खाणु शून्यउपशून्य-थावर-अपज्जशून्य - साधारशून्य - अथिरादिपंचशून्य णिशून्य । तं तु शून्य । ओरालिशून्य-तेजाशून्य-कशून्यमुख्यतासे सन्निकर्प जानना चाहिए । देवगति चतुक की मुख्यतासे सन्निकारिक मिश्रकाययोगी जीवोंके जिसप्रकार कह आये हैं उसप्रकार जानना चाहिए । तैंतालीस पञ्चेन्द्रिय जातिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव मनुष्यगति, देवगति, दो शरीर, दो आङ्गोपाङ्ग, वर्षभनाराच संहनन, दो आनुपूर्वी और तीर्थङ्कर प्रकृतिका कदाचित् बन्ध करता है । यदि बन्ध करता है तो उत्कृष्ट अनुभागका भा बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थानपतित हानिको लिये हुए होता है । तैजसशरीर, कार्मरणशरीर, समचतुरस्त्रसंस्थान, प्रशस्न वर्णचतुष्क, अगुरुलघुत्रिक, प्रशस्त विहायोगति, त्रसचतुष्क, स्थिर आदि छह और निर्माणका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभाग का भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है । अप्रशस्त वर्णचतुष्क और उपघातका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुरणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है। इसी प्रकार पञ्चेन्द्रिय जातिके समान प्रशस्त प्रकृतियों की मुख्यतासे सन्निकप जानना चाहिए । चौंतालीस. एकेन्द्रिय जातिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव तिर्यञ्चगति, हुण्डसंस्थान, प्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, स्थावर और स्थिर आदि पाँचका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थानपतित हानिको लिये हुए होता है । औदारिक शरीर, तैजस शरीर, कार्मरण शरीर, प्रशस्त वर्णचतुष्क, गुरुलघु और निर्माणका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है । पर्धात, उच्छ्वास, आतप, उद्यांत, बादर, पर्याप्त और प्रत्येकका कदाचित् बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुत्कृष्ट अनुभागको लिये हुए होता है। सूक्ष्म अपर्याप्त और साधारणका कदाचित् बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभाग बन्ध भी करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागबन्ध भी करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभाग बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है। इसी प्रकार अर्थात् एकेन्द्रिय जातिके समान स्थावर प्रकृतिकी मुख्यतासे सन्निकर्ष जानना चाहिए । पैंतालीस. सूक्ष्म प्रकृतिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव तिर्यञ्चगति, एकेन्द्रिय जाति, हुण्ड संस्थान, अप्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, स्थावर, अपर्याप्त साधारण और
एक ज़ोंबी, सरल अर्थ में, एक जीवित शव है। सिनेमाई शब्दों में, यह एक पिशाच से अलग है जिसमें इसकी शक्तियां (आकार देने, फेंग) या कमजोरियां (सूरज की रोशनी, पवित्र पानी, लहसुन) नहीं होती हैं और आमतौर पर उन्नत मस्तिष्क कार्य की कमी होती है। शब्द "ज़ोंबी" को 1 9 2 9 में अमेरिकी सार्वजनिक चेतना में एक हाईटियन क्रेओल शब्द के रूप में पेश किया गया था जो वूडू द्वारा पुनर्मिलन किया गया था; इसके तुरंत बाद, मोशन पिक्चर उद्योग द्वारा डरावनी फिल्मों की एक श्रृंखला में इसका शोषण किया गया। सिनेमाई लाशों का रूप और कार्य पूरे वर्षों में स्थानांतरित हो गया है, लेकिन डरावनी शैली के भीतर ज़ोंबी फिल्म की उपस्थिति शुरुआती '30 के दशक से स्थिर बल बनी हुई है। प्रारंभिक फिल्म लाशियां हैतीयन परंपरा के लिए अपेक्षाकृत सच रहीं। "जीवित मृत" को एक वूडू जादू द्वारा एनिमेटेड माना जाता था, और आमतौर पर उन्हें "मास्टर" के कर्मचारियों के रूप में उपयोग किया जाता था, जिन्होंने उन्हें उठाया था। उनकी उपस्थिति जीवित रहने के समान थी, सिवाय इसके कि उनकी त्वचा राख थी और उनकी आंखों को अंधेरा कर दिया गया था या कभी-कभी चरम आकार में बग किया जाता था। आम तौर पर, वे मूक और धीमी गति से चल रहे थे, दिमाग में अपने गुरु के घृणित आदेशों का पालन करते थे (हालांकि फिल्म के अंत में, मास्टर अक्सर नियंत्रण खो देते थे)। 1 9 32 का व्हाइट ज़ोंबी , बेला लुगोसी अभिनीत एक खलनायक वूडू मास्टर के रूप में हैती में ज़ोंबी की स्थिरता के प्रभारी के रूप में, फिल्म की इस प्रारंभिक शैली के लिए एक आकृति है। इसे आम तौर पर नाम से ज़ोंबी की विशेषता रखने वाली पहली फिल्म माना जाता है, हालांकि 1 9 20 में डॉ कैलिगारी की कैबिनेट में , शीर्षक चरित्र ने स्लीपवाल्कर, या "सोममबुलिस्ट" को नियंत्रित किया, जिसे सीज़ारे नाम से शुरुआती फिल्म लाश के समान ही रखा गया था। '30 और 40 के दशक के दौरान, ज़ोंबी और वूडू फिल्में फैलीं, राजाओं के राजा जैसे लाश , लाश के विद्रोह और लाश का बदला सालाना जारी किया जा रहा है। ब्रॉडवे और द घोस्ट ब्रेकर्स पर लाश जैसे कई लोगों ने इस विषय को हल्के ढंग से व्यवहार किया, जबकि अन्य, जैसे मैं एक ज़ोंबी के साथ चलना , बहुत नाटकीय था। 50 के दशक तक, फिल्म निर्माताओं ने स्थापित ज़ोंबी फिल्म मानकों के साथ खेलना शुरू कर दिया। उदाहरण के लिए, उन्होंने लोगों को ज़ोंबी में बदलने की विधि के साथ प्रयोग किया। वूडू की बजाय, किशोर लाश ने तंत्रिका गैस का उपयोग करके पागल वैज्ञानिक को दिखाया, जबकि बाहरी अंतरिक्ष और अदृश्य आक्रमणकारियों से योजना 9 में एलियंस मरे हुओं को उठाए, और पृथ्वी पर द लास्ट मैन (रिचर्ड मैथेसन पुस्तक आई एम लीजेंड के आधार पर), एक वायरस lumbering, ज़ोंबी की तरह "पिशाच" बनाता है। अदृश्य आक्रमणकारियों और पृथ्वी पर लास्ट मैन ने ज़ोंबी को और भी खतरनाक बना दिया, जिससे उन्हें अपहरण और भारी श्रम जैसे पुरुषों के कार्यों से मुक्त किया गया; इसके बजाय, वे सिंगल-दिमागी हत्या मशीन बन गए, एक भूमिका जो अगली पीढ़ी के जीवित मृतकों में खिलाएगी। द लास्ट मैन ऑन अर्थ एंड इनविज़िबल आक्रमणकारियों (और, हद तक, बॉडी स्नैचर्स के लाल डरावनी प्रेरित आक्रमण और आत्माओं के सपने देखने वाले कार्निवल ) जैसी फिल्मों में हत्यारे लाशों द्वारा ग्रहण किए गए ग्रह का अपोकैल्पिक परिदृश्य एक युवा फिल्म निर्माता को प्रेरित करने में मदद करता है जॉर्ज ए रोमेरो नाम 1 9 68 में, रोमेरो ने अपने निर्देशक पदार्पण, नाइट ऑफ द लिविंग डेड को रिलीज़ किया, जो ज़ोंबी फिल्मों में क्रांतिकारी बदलाव के लिए आगे बढ़ेगा जैसा कि हम उन्हें जानते हैं। हालांकि उन्होंने पूर्व फिल्मों से कुछ तत्व उधार लिया, रोमेरो ने कुछ व्यवहार और नियम बनाए जो अगले तीन दशकों तक ज़ोंबी फिल्मों के लिए मॉडल को अपने जीवित मृतकों को प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले, ज़ोंबी जीवित खाने के लिए एक लालसा भूख से प्रेरित थे। दूसरा, ज़ोंबी हमलों को स्पष्ट विस्तार से दिखाया गया था, जो कि बढ़ी हुई सिनेमाई गोर के युग में उभर रहा था। तीसरा, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाकर लाश को मार दिया जा सकता है। चौथा, ज़ोंबीवाद संक्रामक था और एक काटने से फैल सकता है। प्रारंभिक, क्लासिक ज़ोंबी लोअर से एक बड़ा अंतर वूडू से दूर शिफ्ट और जीवित मृतकों को नियंत्रित करने वाले मास्टर की अवधारणा थी। अन्य तत्व जो रोमेरो द्वारा जरूरी नहीं थे, लेकिन जो रोमेरो-एस्क्यू ज़ोंबी परंपरा का हिस्सा बन गया, उनमें शामिल थेः धीमी, असंतुलित आंदोलन, एक अपोकैल्पिक शून्यवाद जिसमें केवल अस्तित्व एक जीत है और ज़ोंबीवाद को प्लेग के रूप में उपचार है। रोमियो 1 9 78 के डॉन ऑफ द डेड के साथ शुरू होने वाले कई अनुक्रमों के साथ अपनी विरासत में शामिल होगा - जिसने स्पष्ट गोर को और भी आगे बढ़ाया - और 1 9 85 के डेड ऑफ द डेड । कई तेजी से हिंसक और अंधेरे ज़ोंबी फिल्मों ने रोमेरो के कदमों का अनुसरण किया, जिसमें 1 99 0 के रीमेक और नॉटलॉग सह-लेखक जॉन ए रुसो से फिल्मों की ऑफशॉट रिटर्न ऑफ द लिविंग डेड सीरीज़, साथ ही इटली ( ज़ोंबी ) और स्पेन (अंतर्राष्ट्रीय) अंधेरे मृत )। अन्य - जैसे मैं आपका रक्त पीता हूं , डेविड क्रोनबर्ग के शिवर्स और रबीड और रोमेरो के स्वयं के क्रेज़ीज़ - जबकि लाशों को शामिल नहीं करते हुए, रोमेरो के कामों के homicidal contagion संरचना का उपयोग किया। 21 वीं शताब्दी में, फिल्म निर्माताओं ने ज़ोंबी फिल्म सम्मेलनों के साथ तेजी से खिलवाड़ किया है। कुछ, जैसे निवासी ईविल और मृतकों के घर , को उच्च-ऑक्टेन वीडियो गेम एक्शन में प्रेरणा मिली है। अन्य, जैसे कि 28 दिन बाद और आई एम लीजेंड , ने संक्रामक बीमारियों का उपयोग किया है जो ज़ोंबी जैसी राज्य बनाते हैं। शॉन ऑफ द डेड जैसे लाइटहार्टेड फिल्मों और इस बीच, "ज़ोंबी कॉमेडी" या " ज़ोम कॉम " शब्द का निर्माण हुआ है , जबकि अन्य ने इसे रोमांटिक कोण के साथ एक कदम आगे बढ़ाया है जो उन्हें "रोम ज़ॉम कॉम" क्षेत्र। डॉन ऑफ द डेड के 2004 के रीमेक ने परंपरागत ज़ोंबी व्यवहार को भी बदल दिया, जिससे उन्हें धीमी और लकड़ी की बजाय शारीरिक रूप से त्वरित और चुस्त कर दिया गया। और डायरी ऑफ़ दी डेड एंड द ज़ोंबी डायरीज़ ने अन्य सर्वव्यापी 21 वीं शताब्दी की डरावनी प्रवृत्ति के साथ लाश को विलय कर दिया हैः " पाया फुटेज " प्रारूप। आज, ज़ोंबी पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हैं, टी-शर्ट, खिलौने, वीडियो गेम और अन्य व्यापार बाजार में बाढ़ और टेलीविजन पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शो में से एक बनने के साथ। 2013 में, यह भी साबित हुआ कि लाश एक बड़े बजट हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर का समर्थन कर सकते हैं - और उस पर एक सफल, अमेरिका में 200 मिलियन डॉलर और दुनिया भर में $ 500 मिलियन से अधिक कमाई। यदि कोई संदेह है कि ज़ोंबी घटना वैश्विक नहीं है, ऑस्ट्रेलिया ( वार्मवुड ), जर्मनी ( रैमबॉक ), फ्रांस ( द हॉर्डे ), भारत ( ज़ोंबी का उदय) , ग्रेट ब्रिटेन ( कॉकनी बनाम लाश ), जापान से विदेशी प्रविष्टियां ( स्टेसी ), ग्रीस ( एविल ), दक्षिण अफ्रीका ( लास्ट ओन्स आउट ), स्कैंडिनेविया ( डेड स्नो ), हांगकांग ( बायो ज़ोंबी ), न्यूजीलैंड ( ब्लैक भेड़ ), दक्षिण अमेरिका ( प्लागा ज़ोंबी ), चेकोस्लोवाकिया ( चोकिंग हैज़ार्ड ) और यहां तक कि क्यूबा ( मृतकों के जुआन ) को आराम करने के लिए रखना चाहिए (पन इरादा)। उल्लेखनीय ज़ोंबी सिनेमाः - व्हाइट ज़ोंबी (1 9 32) - लाश के विद्रोह (1 9 36) - द वॉकींग डेड (1 9 36) - घोस्ट ब्रेकर्स (1 9 41) - लाश के राजा (1 9 41) - मध्यरात्रि में बोवेरी (1 9 42) - मैं एक ज़ोंबी के साथ चलना (1 9 43) - वूडू मैन (1 9 44) - ब्रॉडवे पर लाश (1 9 45) - मोरा ताऊ की लाश (1 9 57) - द ब्रेन ईटर (1 9 58) - अदृश्य आक्रमणकारियों (1 9 5 9) - योजना 9 से बाहरी अंतरिक्ष (1 9 5 9) - किशोर लाश (1 9 5 9) - ज़ोंबी का रक्त (1 9 61) - मैं आपकी त्वचा खाओ (1 9 64) - अविश्वसनीय रूप से अजीब जीव जो जीवित रह गए और मिश्रित लाश बन गए (1 9 64) - द लास्ट मैन ऑन अर्थ (1 9 64) - लाश का प्लेग (1 9 66) - नाइट ऑफ लिविंग डेड (1 9 68) - टॉम्ब ऑफ़ द ब्लाइंड डेड (1 9 71) - बच्चों को मृत चीजों के साथ नहीं खेलना चाहिए (1 9 72) - चलो स्लीपिंग कॉर्प्स ली (1 9 74) - शुगर हिल (1 9 74) - शॉक वेव्स (1 9 77) - डॉन ऑफ द डेड (1 9 78) - ज़ोंबी (1 9 7 9) - दफन ग्राउंड (1 9 81) - डेड एंड बरीड (1 9 81) - डे डेड डेड (1 9 85) - रिटर्न ऑफ लिविंग डेड (1 9 85) - क्रिप्प्स की नाइट (1 9 86) - नाइट ऑफ द लिविंग डेड (1 99 0) - डेड एलीव (2002) - निवासी ईविल (2002) - हाउस ऑफ द डेड (2003) - अंडेड (2003) - डॉन ऑफ़ द डेड (2004) - शॉन ऑफ़ द डेड (2004) - भूमि की भूमि (2005) - फिडो (2007) - ग्रह आतंक (2007) - डेड ऑफ डेड (2008) - डायरी की डायरी (2008) - डेड स्नो (200 9) - Zombieland (200 9) - गर्म निकाय (2013) - विश्व युद्ध जेड (2013) - ज़ोंबी सर्वनाश के लिए स्काउट्स गाइड (2015) - गौरव और पूर्वाग्रह और लाश (2016)
एक ज़ोंबी, सरल अर्थ में, एक जीवित शव है। सिनेमाई शब्दों में, यह एक पिशाच से अलग है जिसमें इसकी शक्तियां या कमजोरियां नहीं होती हैं और आमतौर पर उन्नत मस्तिष्क कार्य की कमी होती है। शब्द "ज़ोंबी" को एक नौ दो नौ में अमेरिकी सार्वजनिक चेतना में एक हाईटियन क्रेओल शब्द के रूप में पेश किया गया था जो वूडू द्वारा पुनर्मिलन किया गया था; इसके तुरंत बाद, मोशन पिक्चर उद्योग द्वारा डरावनी फिल्मों की एक श्रृंखला में इसका शोषण किया गया। सिनेमाई लाशों का रूप और कार्य पूरे वर्षों में स्थानांतरित हो गया है, लेकिन डरावनी शैली के भीतर ज़ोंबी फिल्म की उपस्थिति शुरुआती 'तीस के दशक से स्थिर बल बनी हुई है। प्रारंभिक फिल्म लाशियां हैतीयन परंपरा के लिए अपेक्षाकृत सच रहीं। "जीवित मृत" को एक वूडू जादू द्वारा एनिमेटेड माना जाता था, और आमतौर पर उन्हें "मास्टर" के कर्मचारियों के रूप में उपयोग किया जाता था, जिन्होंने उन्हें उठाया था। उनकी उपस्थिति जीवित रहने के समान थी, सिवाय इसके कि उनकी त्वचा राख थी और उनकी आंखों को अंधेरा कर दिया गया था या कभी-कभी चरम आकार में बग किया जाता था। आम तौर पर, वे मूक और धीमी गति से चल रहे थे, दिमाग में अपने गुरु के घृणित आदेशों का पालन करते थे । एक नौ बत्तीस का व्हाइट ज़ोंबी , बेला लुगोसी अभिनीत एक खलनायक वूडू मास्टर के रूप में हैती में ज़ोंबी की स्थिरता के प्रभारी के रूप में, फिल्म की इस प्रारंभिक शैली के लिए एक आकृति है। इसे आम तौर पर नाम से ज़ोंबी की विशेषता रखने वाली पहली फिल्म माना जाता है, हालांकि एक नौ बीस में डॉ कैलिगारी की कैबिनेट में , शीर्षक चरित्र ने स्लीपवाल्कर, या "सोममबुलिस्ट" को नियंत्रित किया, जिसे सीज़ारे नाम से शुरुआती फिल्म लाश के समान ही रखा गया था। 'तीस और चालीस के दशक के दौरान, ज़ोंबी और वूडू फिल्में फैलीं, राजाओं के राजा जैसे लाश , लाश के विद्रोह और लाश का बदला सालाना जारी किया जा रहा है। ब्रॉडवे और द घोस्ट ब्रेकर्स पर लाश जैसे कई लोगों ने इस विषय को हल्के ढंग से व्यवहार किया, जबकि अन्य, जैसे मैं एक ज़ोंबी के साथ चलना , बहुत नाटकीय था। पचास के दशक तक, फिल्म निर्माताओं ने स्थापित ज़ोंबी फिल्म मानकों के साथ खेलना शुरू कर दिया। उदाहरण के लिए, उन्होंने लोगों को ज़ोंबी में बदलने की विधि के साथ प्रयोग किया। वूडू की बजाय, किशोर लाश ने तंत्रिका गैस का उपयोग करके पागल वैज्ञानिक को दिखाया, जबकि बाहरी अंतरिक्ष और अदृश्य आक्रमणकारियों से योजना नौ में एलियंस मरे हुओं को उठाए, और पृथ्वी पर द लास्ट मैन , एक वायरस lumbering, ज़ोंबी की तरह "पिशाच" बनाता है। अदृश्य आक्रमणकारियों और पृथ्वी पर लास्ट मैन ने ज़ोंबी को और भी खतरनाक बना दिया, जिससे उन्हें अपहरण और भारी श्रम जैसे पुरुषों के कार्यों से मुक्त किया गया; इसके बजाय, वे सिंगल-दिमागी हत्या मशीन बन गए, एक भूमिका जो अगली पीढ़ी के जीवित मृतकों में खिलाएगी। द लास्ट मैन ऑन अर्थ एंड इनविज़िबल आक्रमणकारियों जैसी फिल्मों में हत्यारे लाशों द्वारा ग्रहण किए गए ग्रह का अपोकैल्पिक परिदृश्य एक युवा फिल्म निर्माता को प्रेरित करने में मदद करता है जॉर्ज ए रोमेरो नाम एक नौ अड़सठ में, रोमेरो ने अपने निर्देशक पदार्पण, नाइट ऑफ द लिविंग डेड को रिलीज़ किया, जो ज़ोंबी फिल्मों में क्रांतिकारी बदलाव के लिए आगे बढ़ेगा जैसा कि हम उन्हें जानते हैं। हालांकि उन्होंने पूर्व फिल्मों से कुछ तत्व उधार लिया, रोमेरो ने कुछ व्यवहार और नियम बनाए जो अगले तीन दशकों तक ज़ोंबी फिल्मों के लिए मॉडल को अपने जीवित मृतकों को प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले, ज़ोंबी जीवित खाने के लिए एक लालसा भूख से प्रेरित थे। दूसरा, ज़ोंबी हमलों को स्पष्ट विस्तार से दिखाया गया था, जो कि बढ़ी हुई सिनेमाई गोर के युग में उभर रहा था। तीसरा, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाकर लाश को मार दिया जा सकता है। चौथा, ज़ोंबीवाद संक्रामक था और एक काटने से फैल सकता है। प्रारंभिक, क्लासिक ज़ोंबी लोअर से एक बड़ा अंतर वूडू से दूर शिफ्ट और जीवित मृतकों को नियंत्रित करने वाले मास्टर की अवधारणा थी। अन्य तत्व जो रोमेरो द्वारा जरूरी नहीं थे, लेकिन जो रोमेरो-एस्क्यू ज़ोंबी परंपरा का हिस्सा बन गया, उनमें शामिल थेः धीमी, असंतुलित आंदोलन, एक अपोकैल्पिक शून्यवाद जिसमें केवल अस्तित्व एक जीत है और ज़ोंबीवाद को प्लेग के रूप में उपचार है। रोमियो एक नौ अठहत्तर के डॉन ऑफ द डेड के साथ शुरू होने वाले कई अनुक्रमों के साथ अपनी विरासत में शामिल होगा - जिसने स्पष्ट गोर को और भी आगे बढ़ाया - और एक नौ पचासी के डेड ऑफ द डेड । कई तेजी से हिंसक और अंधेरे ज़ोंबी फिल्मों ने रोमेरो के कदमों का अनुसरण किया, जिसमें एक निन्यानवे शून्य के रीमेक और नॉटलॉग सह-लेखक जॉन ए रुसो से फिल्मों की ऑफशॉट रिटर्न ऑफ द लिविंग डेड सीरीज़, साथ ही इटली और स्पेन अंधेरे मृत )। अन्य - जैसे मैं आपका रक्त पीता हूं , डेविड क्रोनबर्ग के शिवर्स और रबीड और रोमेरो के स्वयं के क्रेज़ीज़ - जबकि लाशों को शामिल नहीं करते हुए, रोमेरो के कामों के homicidal contagion संरचना का उपयोग किया। इक्कीस वीं शताब्दी में, फिल्म निर्माताओं ने ज़ोंबी फिल्म सम्मेलनों के साथ तेजी से खिलवाड़ किया है। कुछ, जैसे निवासी ईविल और मृतकों के घर , को उच्च-ऑक्टेन वीडियो गेम एक्शन में प्रेरणा मिली है। अन्य, जैसे कि अट्ठाईस दिन बाद और आई एम लीजेंड , ने संक्रामक बीमारियों का उपयोग किया है जो ज़ोंबी जैसी राज्य बनाते हैं। शॉन ऑफ द डेड जैसे लाइटहार्टेड फिल्मों और इस बीच, "ज़ोंबी कॉमेडी" या " ज़ोम कॉम " शब्द का निर्माण हुआ है , जबकि अन्य ने इसे रोमांटिक कोण के साथ एक कदम आगे बढ़ाया है जो उन्हें "रोम ज़ॉम कॉम" क्षेत्र। डॉन ऑफ द डेड के दो हज़ार चार के रीमेक ने परंपरागत ज़ोंबी व्यवहार को भी बदल दिया, जिससे उन्हें धीमी और लकड़ी की बजाय शारीरिक रूप से त्वरित और चुस्त कर दिया गया। और डायरी ऑफ़ दी डेड एंड द ज़ोंबी डायरीज़ ने अन्य सर्वव्यापी इक्कीस वीं शताब्दी की डरावनी प्रवृत्ति के साथ लाश को विलय कर दिया हैः " पाया फुटेज " प्रारूप। आज, ज़ोंबी पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हैं, टी-शर्ट, खिलौने, वीडियो गेम और अन्य व्यापार बाजार में बाढ़ और टेलीविजन पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शो में से एक बनने के साथ। दो हज़ार तेरह में, यह भी साबित हुआ कि लाश एक बड़े बजट हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर का समर्थन कर सकते हैं - और उस पर एक सफल, अमेरिका में दो सौ मिलियन डॉलर और दुनिया भर में पाँच सौ डॉलर मिलियन से अधिक कमाई। यदि कोई संदेह है कि ज़ोंबी घटना वैश्विक नहीं है, ऑस्ट्रेलिया , जर्मनी , फ्रांस , भारत , ग्रेट ब्रिटेन , जापान से विदेशी प्रविष्टियां , ग्रीस , दक्षिण अफ्रीका , स्कैंडिनेविया , हांगकांग , न्यूजीलैंड , दक्षिण अमेरिका , चेकोस्लोवाकिया और यहां तक कि क्यूबा को आराम करने के लिए रखना चाहिए । उल्लेखनीय ज़ोंबी सिनेमाः - व्हाइट ज़ोंबी - लाश के विद्रोह - द वॉकींग डेड - घोस्ट ब्रेकर्स - लाश के राजा - मध्यरात्रि में बोवेरी - मैं एक ज़ोंबी के साथ चलना - वूडू मैन - ब्रॉडवे पर लाश - मोरा ताऊ की लाश - द ब्रेन ईटर - अदृश्य आक्रमणकारियों - योजना नौ से बाहरी अंतरिक्ष - किशोर लाश - ज़ोंबी का रक्त - मैं आपकी त्वचा खाओ - अविश्वसनीय रूप से अजीब जीव जो जीवित रह गए और मिश्रित लाश बन गए - द लास्ट मैन ऑन अर्थ - लाश का प्लेग - नाइट ऑफ लिविंग डेड - टॉम्ब ऑफ़ द ब्लाइंड डेड - बच्चों को मृत चीजों के साथ नहीं खेलना चाहिए - चलो स्लीपिंग कॉर्प्स ली - शुगर हिल - शॉक वेव्स - डॉन ऑफ द डेड - ज़ोंबी - दफन ग्राउंड - डेड एंड बरीड - डे डेड डेड - रिटर्न ऑफ लिविंग डेड - क्रिप्प्स की नाइट - नाइट ऑफ द लिविंग डेड - डेड एलीव - निवासी ईविल - हाउस ऑफ द डेड - अंडेड - डॉन ऑफ़ द डेड - शॉन ऑफ़ द डेड - भूमि की भूमि - फिडो - ग्रह आतंक - डेड ऑफ डेड - डायरी की डायरी - डेड स्नो - Zombieland - गर्म निकाय - विश्व युद्ध जेड - ज़ोंबी सर्वनाश के लिए स्काउट्स गाइड - गौरव और पूर्वाग्रह और लाश
पोलिश कमांड उभयचर सैन्य उपकरणों के विकास पर बहुत ध्यान देता है, जो ऑपरेशन के पूर्वी थिएटर के परिदृश्य की बारीकियों के कारण होता है, जो देश के रक्षा मंत्रालय के लिए प्राथमिकता है। विशेष रूप से, पानी की बाधाओं को पार करने की संभावना वूल्वरिन पहिएदार बख्तरबंद कार्मिक वाहक के निर्माण में मुख्य स्थितियों में से एक थी, जिसे सशस्त्र बलों को बड़े बैचों में आपूर्ति की जाती है। उसी समय, सोवियत बीआरडीएम -2 की टोही के दौरान बख्तरबंद संरचनाओं का उपयोग जारी है। इसे बदलने के लिए, एक नया उत्पाद विकसित किया जा रहा है - प्रकाश LOTR वर्ग का एक टोही बख्तरबंद कार्मिक वाहक। पोलिश संस्करण अल्टेयर के अनुसार, मशीन के एक प्रोटोटाइप का सैन्य परीक्षण अगस्त में हुआ थाः पूरी तरह से सुसज्जित उपकरणों ने ओडर नदी पर पानी की बाधा को दूर करने का प्रयास किया। BRDM-2 के लंबे समय से प्रतीक्षित उत्तराधिकारी की परियोजना [स्थानीय उद्यम] AMZ Kutno द्वारा रक्षा मंत्रालय के परामर्श से कार्यान्वित की जा रही है। परियोजना पर काम 2013 के अंत में शुरू हुआ। वर्तमान में, राज्य योग्यता परीक्षण चल रहे हैं, जो पहले ही 80% पूर्ण हो चुके हैं। उनके 2022 के मध्य में पूरी तरह से पूरा होने की उम्मीद है। LOTR BÓBR-3 स्वतंत्र निलंबन डीजल बख्तरबंद वाहन पर आधारित है, जिसे AMZ Kutno द्वारा भी बनाया गया है। एलओटीआर विशेषताओं जैसे भूमि पर अधिकतम गति, गतिशीलता, चढ़ाई पहाड़ियों और जमीन पर अन्य बाधाओं (खाई या दीवार) का सैन्य प्रतिनिधियों द्वारा सकारात्मक मूल्यांकन किया गया था। - प्रकाशन में नोट किया गया। एलओटीआर 5 सैनिकों की टुकड़ी को लेकर जाएगा। वाहन में साइड दरवाजे और 3 एस्केप हैच हैं। मॉड्यूलर चेसिस डिजाइन अतिरिक्त कवच या बैलिस्टिक सुरक्षा के लिए अनुमति देता है।
पोलिश कमांड उभयचर सैन्य उपकरणों के विकास पर बहुत ध्यान देता है, जो ऑपरेशन के पूर्वी थिएटर के परिदृश्य की बारीकियों के कारण होता है, जो देश के रक्षा मंत्रालय के लिए प्राथमिकता है। विशेष रूप से, पानी की बाधाओं को पार करने की संभावना वूल्वरिन पहिएदार बख्तरबंद कार्मिक वाहक के निर्माण में मुख्य स्थितियों में से एक थी, जिसे सशस्त्र बलों को बड़े बैचों में आपूर्ति की जाती है। उसी समय, सोवियत बीआरडीएम -दो की टोही के दौरान बख्तरबंद संरचनाओं का उपयोग जारी है। इसे बदलने के लिए, एक नया उत्पाद विकसित किया जा रहा है - प्रकाश LOTR वर्ग का एक टोही बख्तरबंद कार्मिक वाहक। पोलिश संस्करण अल्टेयर के अनुसार, मशीन के एक प्रोटोटाइप का सैन्य परीक्षण अगस्त में हुआ थाः पूरी तरह से सुसज्जित उपकरणों ने ओडर नदी पर पानी की बाधा को दूर करने का प्रयास किया। BRDM-दो के लंबे समय से प्रतीक्षित उत्तराधिकारी की परियोजना [स्थानीय उद्यम] AMZ Kutno द्वारा रक्षा मंत्रालय के परामर्श से कार्यान्वित की जा रही है। परियोजना पर काम दो हज़ार तेरह के अंत में शुरू हुआ। वर्तमान में, राज्य योग्यता परीक्षण चल रहे हैं, जो पहले ही अस्सी% पूर्ण हो चुके हैं। उनके दो हज़ार बाईस के मध्य में पूरी तरह से पूरा होने की उम्मीद है। LOTR BÓBR-तीन स्वतंत्र निलंबन डीजल बख्तरबंद वाहन पर आधारित है, जिसे AMZ Kutno द्वारा भी बनाया गया है। एलओटीआर विशेषताओं जैसे भूमि पर अधिकतम गति, गतिशीलता, चढ़ाई पहाड़ियों और जमीन पर अन्य बाधाओं का सैन्य प्रतिनिधियों द्वारा सकारात्मक मूल्यांकन किया गया था। - प्रकाशन में नोट किया गया। एलओटीआर पाँच सैनिकों की टुकड़ी को लेकर जाएगा। वाहन में साइड दरवाजे और तीन एस्केप हैच हैं। मॉड्यूलर चेसिस डिजाइन अतिरिक्त कवच या बैलिस्टिक सुरक्षा के लिए अनुमति देता है।
भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष के आगे झुकने के बाद भी मोदी सरकार को बड़ी सियासी हार का सामना करना पड़ा है। बिल पारित कराने के लिए विरोधियों की सारी शर्तें मानने के बावजूद सोमवार को विपक्ष की दो नई शर्तों ने सरकार को सियासी मोर्चे पर उलझा दिया। बिल पर गठित संसद की संयुक्त समिति में विपक्ष ने 1894 कानून के तहत हुए अधिग्रहण के सभी मामलों में नए कानून के तहत मुआवजा, पुनर्वास तय करने की शर्त रखी। इसके अलावा विपक्ष ने अधिग्रहण के 5 साल बाद तक जमीन का उपयोग न करने की स्थिति में भूस्वामी को अधिग्रहीत जमीन वापस करने का नए बिल में प्रावधान करने की वकालत की। इसके बाद सरकार ने मानसून सत्र की जगह अब बिल को शीतकालीन सत्र में संसद में पेश करने का मन बनाया है। इस बीच नए सिरे से मचे सियासी संग्राम के बीच सरकार बिल पर एक और अध्यादेश लाने को लेकर दुविधा में है।
भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष के आगे झुकने के बाद भी मोदी सरकार को बड़ी सियासी हार का सामना करना पड़ा है। बिल पारित कराने के लिए विरोधियों की सारी शर्तें मानने के बावजूद सोमवार को विपक्ष की दो नई शर्तों ने सरकार को सियासी मोर्चे पर उलझा दिया। बिल पर गठित संसद की संयुक्त समिति में विपक्ष ने एक हज़ार आठ सौ चौरानवे कानून के तहत हुए अधिग्रहण के सभी मामलों में नए कानून के तहत मुआवजा, पुनर्वास तय करने की शर्त रखी। इसके अलावा विपक्ष ने अधिग्रहण के पाँच साल बाद तक जमीन का उपयोग न करने की स्थिति में भूस्वामी को अधिग्रहीत जमीन वापस करने का नए बिल में प्रावधान करने की वकालत की। इसके बाद सरकार ने मानसून सत्र की जगह अब बिल को शीतकालीन सत्र में संसद में पेश करने का मन बनाया है। इस बीच नए सिरे से मचे सियासी संग्राम के बीच सरकार बिल पर एक और अध्यादेश लाने को लेकर दुविधा में है।
Sharad Pawar: शरद पवार ने अजित पवार को फिर नीचा दिखाया, क्या अब NCP में फैसले का वक्त आया? NCP Pawar Politics: पीएम नरेंद्र मोदी का कहना सही है कि देश की सारी पार्टियां अपने बेटे-बेटियों के भविष्य को संभालने में लगी हैं. शरद पवार की पार्टी NCP में एक बात तो तय है कि अजित पवार के साथ बार-बार पक्षपात किया जा रहा है. लेकिन दूसरी बात तय नहीं है कि इसके पीछे मंशा क्या है? अजित दादा से विद्रोह का ब्लंडर करवाना है या सुप्रिया दीदी के आगे सरेंडर करवाना है? Sharad Pawar vs Ajit Pawar: पवार पॉलिटिक्स फिक्स हो चुकी है. सुप्रिया सुले को एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा चुका है. साथ ही अजित पवार के पाले में धीरे-धीरे जाते दिख रहे प्रफुल्ल पटेल को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उन्हें भतीजे से दूर करवा दिया गया है. सुनील तटकरे भी अजित पवार की इस सोच के हामी थे कि बीजेपी के साथ निकटता बढ़ाई जानी चाहिए. उन्हें भी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाकर अजित पवार से दूर कर दिया गया है. साथ ही शरद पवार के करीबी जितेंद्र आव्हाड को ऊंचा पद और कद दे दिया गया है. अजित पवार फिलहाल कमजोर-लाचार हैं. लेकिन अजित पवार जोश में होश गंवाने वाले नेता नहीं हैं, उन्हें अपनी बारी का इंतजार है. तब तक वे एनसीपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की इच्छा रखते हैं. वे मुंबई में एनसीपी की मीटिंग में यह कह चुके हैं कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बने रहने में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे तो संगठन में काम करना चाहते हैं. उन्होंने जयंत पाटील के पांच साल से ज्यादा प्रदेश अध्यक्ष बने रहने पर भी सवाल उठाया. एनसीपी पार्टी के नियम और शर्तों के मुताबिक तीन साल से ज्यादा कोई प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकता. ऐसे में बुधवार को दिल्ली में एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. सुप्रिया सुले के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली मीटिंग थी. कहने को तो आगामी लोकसभा और विधानसभा के चुनावों की रणनीति तैयार करने के लिए यह मीटिंग रखी गई थी, लेकिन अजित पवार के लिए संकेत साफ था. दीदी का दम चलने दें. रिएलिटी को एक्सेप्ट कर लें. सब सह कर एनसीपी में खुशी से रह जाएं. तेवर दिखाना है तो कहीं और जाएं. इस संकेत का आधार यह है कि अजित पवार न मंच पर थे और न ही पोस्टरों और बैनरों पर दिखे. सुप्रिया सुले मस्त तैयार-वैयार होकर जोश-होश में दिखीं. पटना में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में भी वे ही दिखीं. अजित पवार कहीं नहीं दिख रहे. चिंगारी कोई न भड़के, इस वजह से मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से खबर आ गई कि एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अजित पवार के नाम पर विचार हुआ है. नए पदाधिकारियों के चुनाव प्रक्रिया में दादा भाग नहीं ले रहे, या शरद पवार भाग लेने नहीं दे रहे? एनसीपी में तहसील और जिला स्तर पर नए पदाधिकारियों को चुना जा रहा है. आखिर में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना है. लेकिन जानकारी सामने आ रही है कि अजित दादा एनसीपी की इन गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे हैं. अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनना है तो पदाधिकारियों के चुनाव में भाग लेना चाहिए. शरद पवार तो ये कह चुके हैं कि प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव पार्टी पदाधिकारी करेंगे, वे अपनी राय नहीं थोपेंगे. तो फिर अजित पवार इन गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे हैं या उन्हें भाग लेने ही नहीं दिया जा रहा है? शरद पवार की पार्टी में महाराष्ट्र में अब सब सुप्रिया बिटिया ही तय करना शुरू कर चुकी हैं क्या? क्यों नहीं करें? महाराष्ट्र में ज्यादा पकड़ रखने वाले अजित पवार को नजरअंदाज करके शरद पवार उन्हें राज्य का कारभार सौंप ही चुके हैं. पीएम मोदी तो पहले ही कह चुके हैं कि, देश की सभी पार्टियों को अपने-अपने बेटे-बेटियों की फिक्र है. प्रफुल्ल पटेल इन सभी बातों को मीडिया की गढ़ी हुई बातें बताते हैं. उनके मुताबिक दिल्ली की बैठक राष्ट्रीय कार्याकारिणी के पदाधिकारियों की थी. अजित पवार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं, पदाधिकारी नहीं. इसलिए वे कहीं दिखे नहीं. पर एनसीपी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि महाराष्ट्र में अजित पवार की पकड़ ज्यादा मजबूत होते हुए भी सुप्रिया सुले के हाथ राज्य की कमान देना पक्षपात नहीं तो क्या है? एनसीपी में ही अजित पवार के दुश्मन खड़े किए जा रहे हैं. जयंत पाटील प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाते हैं और अजित पवार प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो विलेन कौन होगा? छगन भुजबल ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी जाहिर कर दी है. यह भी पढ़ें- नीतीश कुमार विपक्ष को कर रहे एक, फिर पवार-ठाकरे के लिए क्या बचा? भुजबल का कहना है कि एनसीपी को सिर्फ मराठों की पार्टी समझा जाता है, इसीलिए सिर्फ 40-50 विधायक ही चुने जाते हैं. बीजेपी, कांग्रेस, ठाकरे गुट से लेकर सारी पार्टियों के प्रदेशाध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हैं. एनसीपी भी अगर ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए तो आगे जाएगी. अब अगर भुजबल प्रदेशाध्यक्ष बनते हैं तो अजित पवार और अलग-थलग पड़ते हैं. अगर अजित पवार प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो उनसे भुजबल दूर छिटकते हैं. यानी पद पाकर भी दादा के दुश्मन बढ़ते जाएंगे. वे अकेले पड़ते जाएंगे. पवार पॉलिटिक्स के इस गिमिक्स को समझिए. शरद पवार ने इस्तीफा दिया. अजित पवार को पता था. इस्तीफा वापस लिया, कार्यकर्ताओं की इच्छा थी. सुप्रिया सुले कार्यकारी अध्यक्ष बनीं. शरद पवार ने कहा पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की इच्छा थी. अब नया प्रदेशाध्यक्ष वही चुना जाएगा जो कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों की इच्छा होगी. लेकिन कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक के बाद अशोक चव्हाण महाविकास आघाड़ी में सीट शेयरिंग का फार्मूला तय करने के वास्ते बातचीत करने अजित पवार के पास पहुंचे. इसके बाद अशोक चव्हाण ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, जो सांसद पिछली बार जीत कर आए हैं, उनके टिकट पर तो कोई विचार नहीं होगा, विचार उन सीटों पर होगा जहां से लोग दूसरी पार्टी में गए हैं. यानी सीधा-सीधा ठाकरे गुट का दावा जिन सीटों पर होगा, उस पर नया फार्मूला तय करना है, कांग्रेस-एनसीपी के दावों को नहीं छेड़ना है. जाहिर सी बात है ठाकरे गुट इस पर नाराजगी जताएगा तो शरद पवार मासूमियत से जवाब दे देंगे कि उनका और सुप्रिया सुले का कोई हाथ नहीं है, सब अजित पवार तय कर रहे हैं. शरद पवार पहले भी ऐसा कर चुके हैं. देवेंद्र फडणवीस ने कल ही एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में वही बात दोहराई जो वे पहले TV9 को दिए अपने इंटरव्यू में कह चुके. उन्होंने यही कहा कि 2019 में शरद पवार बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे. बाद में मुकर गए. बदनाम कौन हुआ? फडणवीस के साथ शपथ लेने वाले अजित पवार. इस बार भी एनसीपी के कामों को अंजाम देने में अजित पवार की फिक्र नहीं हो रही है. लेकिन महाविकास आघाड़ी के पेंच वाले कामों में उन्हें शामिल किया जा रहा है. अब आगे जहां-जहां हाथ जलेंंगे वहां अजित पवार का जिक्र होगा. दो महीने में एनसीपी के नए प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की बात चल रही है. कौन चुना जाता है, इससे बहुत कुछ हवा का रुख समझ आ जाएगा. तब तक देखिए एनसीपी में आगे-आगे क्या होता जाता है.
Sharad Pawar: शरद पवार ने अजित पवार को फिर नीचा दिखाया, क्या अब NCP में फैसले का वक्त आया? NCP Pawar Politics: पीएम नरेंद्र मोदी का कहना सही है कि देश की सारी पार्टियां अपने बेटे-बेटियों के भविष्य को संभालने में लगी हैं. शरद पवार की पार्टी NCP में एक बात तो तय है कि अजित पवार के साथ बार-बार पक्षपात किया जा रहा है. लेकिन दूसरी बात तय नहीं है कि इसके पीछे मंशा क्या है? अजित दादा से विद्रोह का ब्लंडर करवाना है या सुप्रिया दीदी के आगे सरेंडर करवाना है? Sharad Pawar vs Ajit Pawar: पवार पॉलिटिक्स फिक्स हो चुकी है. सुप्रिया सुले को एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा चुका है. साथ ही अजित पवार के पाले में धीरे-धीरे जाते दिख रहे प्रफुल्ल पटेल को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उन्हें भतीजे से दूर करवा दिया गया है. सुनील तटकरे भी अजित पवार की इस सोच के हामी थे कि बीजेपी के साथ निकटता बढ़ाई जानी चाहिए. उन्हें भी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाकर अजित पवार से दूर कर दिया गया है. साथ ही शरद पवार के करीबी जितेंद्र आव्हाड को ऊंचा पद और कद दे दिया गया है. अजित पवार फिलहाल कमजोर-लाचार हैं. लेकिन अजित पवार जोश में होश गंवाने वाले नेता नहीं हैं, उन्हें अपनी बारी का इंतजार है. तब तक वे एनसीपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की इच्छा रखते हैं. वे मुंबई में एनसीपी की मीटिंग में यह कह चुके हैं कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बने रहने में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे तो संगठन में काम करना चाहते हैं. उन्होंने जयंत पाटील के पांच साल से ज्यादा प्रदेश अध्यक्ष बने रहने पर भी सवाल उठाया. एनसीपी पार्टी के नियम और शर्तों के मुताबिक तीन साल से ज्यादा कोई प्रदेश अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकता. ऐसे में बुधवार को दिल्ली में एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. सुप्रिया सुले के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली मीटिंग थी. कहने को तो आगामी लोकसभा और विधानसभा के चुनावों की रणनीति तैयार करने के लिए यह मीटिंग रखी गई थी, लेकिन अजित पवार के लिए संकेत साफ था. दीदी का दम चलने दें. रिएलिटी को एक्सेप्ट कर लें. सब सह कर एनसीपी में खुशी से रह जाएं. तेवर दिखाना है तो कहीं और जाएं. इस संकेत का आधार यह है कि अजित पवार न मंच पर थे और न ही पोस्टरों और बैनरों पर दिखे. सुप्रिया सुले मस्त तैयार-वैयार होकर जोश-होश में दिखीं. पटना में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में भी वे ही दिखीं. अजित पवार कहीं नहीं दिख रहे. चिंगारी कोई न भड़के, इस वजह से मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से खबर आ गई कि एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अजित पवार के नाम पर विचार हुआ है. नए पदाधिकारियों के चुनाव प्रक्रिया में दादा भाग नहीं ले रहे, या शरद पवार भाग लेने नहीं दे रहे? एनसीपी में तहसील और जिला स्तर पर नए पदाधिकारियों को चुना जा रहा है. आखिर में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना है. लेकिन जानकारी सामने आ रही है कि अजित दादा एनसीपी की इन गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे हैं. अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनना है तो पदाधिकारियों के चुनाव में भाग लेना चाहिए. शरद पवार तो ये कह चुके हैं कि प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव पार्टी पदाधिकारी करेंगे, वे अपनी राय नहीं थोपेंगे. तो फिर अजित पवार इन गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे हैं या उन्हें भाग लेने ही नहीं दिया जा रहा है? शरद पवार की पार्टी में महाराष्ट्र में अब सब सुप्रिया बिटिया ही तय करना शुरू कर चुकी हैं क्या? क्यों नहीं करें? महाराष्ट्र में ज्यादा पकड़ रखने वाले अजित पवार को नजरअंदाज करके शरद पवार उन्हें राज्य का कारभार सौंप ही चुके हैं. पीएम मोदी तो पहले ही कह चुके हैं कि, देश की सभी पार्टियों को अपने-अपने बेटे-बेटियों की फिक्र है. प्रफुल्ल पटेल इन सभी बातों को मीडिया की गढ़ी हुई बातें बताते हैं. उनके मुताबिक दिल्ली की बैठक राष्ट्रीय कार्याकारिणी के पदाधिकारियों की थी. अजित पवार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं, पदाधिकारी नहीं. इसलिए वे कहीं दिखे नहीं. पर एनसीपी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि महाराष्ट्र में अजित पवार की पकड़ ज्यादा मजबूत होते हुए भी सुप्रिया सुले के हाथ राज्य की कमान देना पक्षपात नहीं तो क्या है? एनसीपी में ही अजित पवार के दुश्मन खड़े किए जा रहे हैं. जयंत पाटील प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाते हैं और अजित पवार प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो विलेन कौन होगा? छगन भुजबल ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी जाहिर कर दी है. यह भी पढ़ें- नीतीश कुमार विपक्ष को कर रहे एक, फिर पवार-ठाकरे के लिए क्या बचा? भुजबल का कहना है कि एनसीपी को सिर्फ मराठों की पार्टी समझा जाता है, इसीलिए सिर्फ चालीस-पचास विधायक ही चुने जाते हैं. बीजेपी, कांग्रेस, ठाकरे गुट से लेकर सारी पार्टियों के प्रदेशाध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हैं. एनसीपी भी अगर ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए तो आगे जाएगी. अब अगर भुजबल प्रदेशाध्यक्ष बनते हैं तो अजित पवार और अलग-थलग पड़ते हैं. अगर अजित पवार प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो उनसे भुजबल दूर छिटकते हैं. यानी पद पाकर भी दादा के दुश्मन बढ़ते जाएंगे. वे अकेले पड़ते जाएंगे. पवार पॉलिटिक्स के इस गिमिक्स को समझिए. शरद पवार ने इस्तीफा दिया. अजित पवार को पता था. इस्तीफा वापस लिया, कार्यकर्ताओं की इच्छा थी. सुप्रिया सुले कार्यकारी अध्यक्ष बनीं. शरद पवार ने कहा पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की इच्छा थी. अब नया प्रदेशाध्यक्ष वही चुना जाएगा जो कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों की इच्छा होगी. लेकिन कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक के बाद अशोक चव्हाण महाविकास आघाड़ी में सीट शेयरिंग का फार्मूला तय करने के वास्ते बातचीत करने अजित पवार के पास पहुंचे. इसके बाद अशोक चव्हाण ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, जो सांसद पिछली बार जीत कर आए हैं, उनके टिकट पर तो कोई विचार नहीं होगा, विचार उन सीटों पर होगा जहां से लोग दूसरी पार्टी में गए हैं. यानी सीधा-सीधा ठाकरे गुट का दावा जिन सीटों पर होगा, उस पर नया फार्मूला तय करना है, कांग्रेस-एनसीपी के दावों को नहीं छेड़ना है. जाहिर सी बात है ठाकरे गुट इस पर नाराजगी जताएगा तो शरद पवार मासूमियत से जवाब दे देंगे कि उनका और सुप्रिया सुले का कोई हाथ नहीं है, सब अजित पवार तय कर रहे हैं. शरद पवार पहले भी ऐसा कर चुके हैं. देवेंद्र फडणवीस ने कल ही एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में वही बात दोहराई जो वे पहले TVनौ को दिए अपने इंटरव्यू में कह चुके. उन्होंने यही कहा कि दो हज़ार उन्नीस में शरद पवार बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे. बाद में मुकर गए. बदनाम कौन हुआ? फडणवीस के साथ शपथ लेने वाले अजित पवार. इस बार भी एनसीपी के कामों को अंजाम देने में अजित पवार की फिक्र नहीं हो रही है. लेकिन महाविकास आघाड़ी के पेंच वाले कामों में उन्हें शामिल किया जा रहा है. अब आगे जहां-जहां हाथ जलेंंगे वहां अजित पवार का जिक्र होगा. दो महीने में एनसीपी के नए प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की बात चल रही है. कौन चुना जाता है, इससे बहुत कुछ हवा का रुख समझ आ जाएगा. तब तक देखिए एनसीपी में आगे-आगे क्या होता जाता है.
द्वारा प्रदत्त सांत्वना आदि ऐसे प्रारूप हैं जिनका रोग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सम्बन्ध हैं । रोग के सामान्य प्रारूप की रोगी की भूमिका को असहानुभूतिपूर्ण अनुमोदित करने से अस्वीकार किया जाता है। रोगी होना व्यवहारों की संकुलता का परिचायक है। परिणामस्वरूप रोग से सम्बन्धित समस्याओं के अध्ययनार्थ उसके विभिन्न स्तरों को दृष्टिगत रखना आवश्यक हैं। रोग के विभिन्न स्तरों मे 'चिरकालिक रोग' अधिक महत्वपूर्ण है। रोग की इस प्रकृति के कारण रोगी के व्यवहार के अनेक रूप सामने आते हैं। अत्यधिक नहीं है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को रोगी प्रमाणित करना भी कठिन हो सकता है। चिकित्सा व्यवसाय में दक्ष चिकित्सक अपने अनुभव एवं विवेकशील ज्ञान के आधार पर ही यह स्पष्ट करने मे समर्थ होते हैं कि व्यक्ति किस रोग से पीडित है। उदाहरणार्थ कैंसर जैसे रोग में रोगी के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोगों के लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सक यह बताने में सक्षम हो पाता है कि व्यक्ति किस रोग से पीडित है । अतः यह आवश्यक है कि व्यक्ति में किसी प्रकार की जैविकीय बेचैनी होने पर उसे स्वयं को पूर्व को 'पूर्व रोगी' मान लेना चाहिए। कभी-कभी रोगी एवं चिकित्सक के समक्ष यह समस्या उत्पन्न होती है कि रोग से बचने के किन - किन मार्गों की खोज करनी चाहिए। अधिकांशतः ऐसा देखा गया है कि व्यक्ति नहीं जानता कि स्वास्थ्य सम्बन्धी उसे कौन कौन से स्रोत उपलब्ध है। अगर व्यक्ति विशेष को स्रोत ज्ञात भी है तो क्या वह अपनी आर्थिक उपलब्धियों के आधार पर उनसे लाभान्वित हो सकता है। व्यक्ति के व्यवहार की संकुलता एवं समाज विशेष की प्रकृति का भी व्यक्ति के ऊपर प्रभाव पड़ता है। किसी भी समाज मे रोग के सन्दर्भ मे व्यक्ति का वर्गीकरण कोई स्वीकार नहीं करता। लोगों की सामान्य धारणा रहती है कि रूग्णावस्था एक विदारित दशा है जिसमें व्यक्ति का 'स्वचित्रकल्प' तो प्रभावित होता है, साथ ही साथ सामजिक भूमिका भी उसी के तदनुरूप निर्धारित होती है। समाज में बीमार व्यक्ति को अनेक प्रकार के कार्यों को करने से रोक दिया जाता है और वह स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अपने को हीन समझने लगता है। रोगी एक व्यक्ति तो है परन्तु पूर्णरूपेण व्यक्ति नहीं है। वह ऐसा व्यक्ति है जिसे पूर्ण उत्तरदायित्व नहीं सौंपा जा सकता । रोगी को असहाय समझ कर सभी व्यक्ति कुछ न कुछ सहयोग देना अपेक्षित समझते हैं । समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रोगी एक विचलनकारी व्यक्ति है। व्यक्ति के विचलन का प्रदर्शन शाररिक रोग की तुलना में मानसिक रोग में अधिक दृष्टिगोचर होता है। रूग्णावस्था की असमर्थता व्यक्ति के सामाजिक भूमिका निष्पादन को व्यर्थ कर देती है तथा व्यक्ति में शारीरिक ह्मस उत्पन्न होने लगता है। ऐसी स्थिति के कारण व्यक्ति पूर्ण उत्तरदायित्व पूर्ण, प्रकार्यों से वंचित कर दिया जाता है। इस संदर्भ में पार्सन्स का कथन तर्कसंगत लगता है कि समाज रोगी की भूमिका के सथानिकमारी एवं महामारी गतिविधियों को सहन नहीं कर सकता। परिणामस्वरूप समाज ऐसे रोगियों की भूमिका को अवांछनीय अस्थायी एवं मूलभूत रूप से विदारण पूर्ण मानता रूग्ण भूमिका की संरचना का पार्सन्स द्वारा विश्लेषण एक महत्वपूर्ण अन्वेषण है जिसके अन्तर्गत वह रोगी की स्थिति के सामाजिक अर्थ को विश्लेषित करता है । पार्सन्स का उपर्युक्त विश्लेषण अमेरिकन समाज के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, आधुनिक औद्योगिक एवं तर्क उन्मेषित समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। पार्सन्स का कथन है कि रूग्ण भूमिका संस्थागत है। प्रत्येक समाज की स्वस्थ जनसंख्या बीमारी के संसर्ग से अपने को पृथक रखने के लिए प्रयत्नशील रहती है। समाज मे बीमार व्यक्ति सहायता के लिए इच्छुक रहता है तथा समाज के सदस्यों द्वारा उपलब्ध सहायता को कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता है। रोगी अरूग्ण समाज पर निम्नलिखित प्रारूपों में अवलम्बित होता है
द्वारा प्रदत्त सांत्वना आदि ऐसे प्रारूप हैं जिनका रोग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सम्बन्ध हैं । रोग के सामान्य प्रारूप की रोगी की भूमिका को असहानुभूतिपूर्ण अनुमोदित करने से अस्वीकार किया जाता है। रोगी होना व्यवहारों की संकुलता का परिचायक है। परिणामस्वरूप रोग से सम्बन्धित समस्याओं के अध्ययनार्थ उसके विभिन्न स्तरों को दृष्टिगत रखना आवश्यक हैं। रोग के विभिन्न स्तरों मे 'चिरकालिक रोग' अधिक महत्वपूर्ण है। रोग की इस प्रकृति के कारण रोगी के व्यवहार के अनेक रूप सामने आते हैं। अत्यधिक नहीं है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को रोगी प्रमाणित करना भी कठिन हो सकता है। चिकित्सा व्यवसाय में दक्ष चिकित्सक अपने अनुभव एवं विवेकशील ज्ञान के आधार पर ही यह स्पष्ट करने मे समर्थ होते हैं कि व्यक्ति किस रोग से पीडित है। उदाहरणार्थ कैंसर जैसे रोग में रोगी के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोगों के लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सक यह बताने में सक्षम हो पाता है कि व्यक्ति किस रोग से पीडित है । अतः यह आवश्यक है कि व्यक्ति में किसी प्रकार की जैविकीय बेचैनी होने पर उसे स्वयं को पूर्व को 'पूर्व रोगी' मान लेना चाहिए। कभी-कभी रोगी एवं चिकित्सक के समक्ष यह समस्या उत्पन्न होती है कि रोग से बचने के किन - किन मार्गों की खोज करनी चाहिए। अधिकांशतः ऐसा देखा गया है कि व्यक्ति नहीं जानता कि स्वास्थ्य सम्बन्धी उसे कौन कौन से स्रोत उपलब्ध है। अगर व्यक्ति विशेष को स्रोत ज्ञात भी है तो क्या वह अपनी आर्थिक उपलब्धियों के आधार पर उनसे लाभान्वित हो सकता है। व्यक्ति के व्यवहार की संकुलता एवं समाज विशेष की प्रकृति का भी व्यक्ति के ऊपर प्रभाव पड़ता है। किसी भी समाज मे रोग के सन्दर्भ मे व्यक्ति का वर्गीकरण कोई स्वीकार नहीं करता। लोगों की सामान्य धारणा रहती है कि रूग्णावस्था एक विदारित दशा है जिसमें व्यक्ति का 'स्वचित्रकल्प' तो प्रभावित होता है, साथ ही साथ सामजिक भूमिका भी उसी के तदनुरूप निर्धारित होती है। समाज में बीमार व्यक्ति को अनेक प्रकार के कार्यों को करने से रोक दिया जाता है और वह स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अपने को हीन समझने लगता है। रोगी एक व्यक्ति तो है परन्तु पूर्णरूपेण व्यक्ति नहीं है। वह ऐसा व्यक्ति है जिसे पूर्ण उत्तरदायित्व नहीं सौंपा जा सकता । रोगी को असहाय समझ कर सभी व्यक्ति कुछ न कुछ सहयोग देना अपेक्षित समझते हैं । समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रोगी एक विचलनकारी व्यक्ति है। व्यक्ति के विचलन का प्रदर्शन शाररिक रोग की तुलना में मानसिक रोग में अधिक दृष्टिगोचर होता है। रूग्णावस्था की असमर्थता व्यक्ति के सामाजिक भूमिका निष्पादन को व्यर्थ कर देती है तथा व्यक्ति में शारीरिक ह्मस उत्पन्न होने लगता है। ऐसी स्थिति के कारण व्यक्ति पूर्ण उत्तरदायित्व पूर्ण, प्रकार्यों से वंचित कर दिया जाता है। इस संदर्भ में पार्सन्स का कथन तर्कसंगत लगता है कि समाज रोगी की भूमिका के सथानिकमारी एवं महामारी गतिविधियों को सहन नहीं कर सकता। परिणामस्वरूप समाज ऐसे रोगियों की भूमिका को अवांछनीय अस्थायी एवं मूलभूत रूप से विदारण पूर्ण मानता रूग्ण भूमिका की संरचना का पार्सन्स द्वारा विश्लेषण एक महत्वपूर्ण अन्वेषण है जिसके अन्तर्गत वह रोगी की स्थिति के सामाजिक अर्थ को विश्लेषित करता है । पार्सन्स का उपर्युक्त विश्लेषण अमेरिकन समाज के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, आधुनिक औद्योगिक एवं तर्क उन्मेषित समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। पार्सन्स का कथन है कि रूग्ण भूमिका संस्थागत है। प्रत्येक समाज की स्वस्थ जनसंख्या बीमारी के संसर्ग से अपने को पृथक रखने के लिए प्रयत्नशील रहती है। समाज मे बीमार व्यक्ति सहायता के लिए इच्छुक रहता है तथा समाज के सदस्यों द्वारा उपलब्ध सहायता को कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता है। रोगी अरूग्ण समाज पर निम्नलिखित प्रारूपों में अवलम्बित होता है
Patna: राजधानी पटना के राजीवनगर थाना के आशियाना स्थित एक अपार्टमेंट में शराब के साथ एक सॉफ्टवेयर कंपनी का सीईओ गिरफ्तार हुआ है. छापेमारी में सीईओ के अपार्टमेंट से एक लीटर शराब भी बरामद की गई है. शराब सॉफ्टड्रिंक की बोतल में छिपाकर रखी थी. गौरतलब है कि उत्पाद विभाग के निरीक्षक मनोज कुमार राय के नेतृत्व में अवर निरीक्षक सकलदेव और पुष्पा कुमारी की टीम ने देर रात राजीव नगर, आशियाना स्थित मुंडेश्वरी एनक्लेव अपार्टमेंट, ब्लॉक डी के फ्लैट नंबर-505 में छापा मारा. इस दौरान अभिषेक कुमार शराब के नशे में मिले. उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त किशोर कुमार शाह ने बताया कि सूचना मिली थी कि अपार्टमेंट में सीईओ शराब पी रहा है. इसके बाद छापेमारी की गई तो उसे नशे की हालत में गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपित के खिलाफ शराब पीने और रखने की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. तलाशी लेने पर फ्लैट के बरामदे से एक लीटर शराब बरामद की गई.
Patna: राजधानी पटना के राजीवनगर थाना के आशियाना स्थित एक अपार्टमेंट में शराब के साथ एक सॉफ्टवेयर कंपनी का सीईओ गिरफ्तार हुआ है. छापेमारी में सीईओ के अपार्टमेंट से एक लीटर शराब भी बरामद की गई है. शराब सॉफ्टड्रिंक की बोतल में छिपाकर रखी थी. गौरतलब है कि उत्पाद विभाग के निरीक्षक मनोज कुमार राय के नेतृत्व में अवर निरीक्षक सकलदेव और पुष्पा कुमारी की टीम ने देर रात राजीव नगर, आशियाना स्थित मुंडेश्वरी एनक्लेव अपार्टमेंट, ब्लॉक डी के फ्लैट नंबर-पाँच सौ पाँच में छापा मारा. इस दौरान अभिषेक कुमार शराब के नशे में मिले. उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त किशोर कुमार शाह ने बताया कि सूचना मिली थी कि अपार्टमेंट में सीईओ शराब पी रहा है. इसके बाद छापेमारी की गई तो उसे नशे की हालत में गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपित के खिलाफ शराब पीने और रखने की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. तलाशी लेने पर फ्लैट के बरामदे से एक लीटर शराब बरामद की गई.
किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं. ताकि वह अपनी सभी जरूरतों को पूरा कर सकें. इस क्रम में सरकार भी इनकी पूरी मदद करती है. लेकिन पशुपालन में किसानों को कईं तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन परेशानी में से एक स्वच्छ दूध का उत्पादन (clean milk production) भी है. आज के समय में पशुओं के स्वच्छ दूध की मात्रा कम होती जा रही है. जिससे पशुपालकों को अधिक मुनाफा नहीं मिलता है. अगर आप भी अपने पशु से स्वच्छ दूध का उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए आवश्यक है कि दुधारू पशु निरोग तथा स्वस्थ हो. पशुओं के कई रोग ऐसे हैं, जो दूध के माध्यम से पशुओं से मनुष्य में फैलते हैं. अतःः केवल निरोग पशुओं को ही दूध उत्पादन के लिए प्रयोग करना चाहिए. पशु की सफाई दोहन से कम से कम एक घंटा पूर्व करें. पिछले भाग को पानी से धोकर साफ करें. थन पर यदि बाल हैं, तो उन्हें काटकर छोटा करें. थन को कीटाणु नाशक घोल (disinfectant solution) से धोकर साफ तौलिए से पोंछ. दुग्धशाला को प्रतिदिन दो बार धोकर साफ करें. दुग्ध दुहान से पूर्व गोबर आदि हटा कर रोगाणुनाशक घोल से दुग्धशाला की सफाई करें. दूध दूहने में स्वस्थ एवं अच्छी आदतों के ग्वालों को ही लगायें. उनके कपड़े साफ, नाखून कटे हुए सिर टोपी से ढका हुआ हो तथा कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व हाथ रोगाणुनाशक घोल से धोयें जाने चाहिए. ग्वाले के लिए दोहन के समय बातचीत करना, थूकना, पान खाना, सिगरेट पीना तथा छींकना वर्जित रखें. स्वच्छ दूध के उत्पादन में बर्तनों की सफाई का बड़ा महत्व है. दूध के प्रयोग में आने वाले बर्तन जोड़ रहित होने चाहिए. जोड़ पर सूक्ष्म जीवाणुओं का जमाव संभव है. ये बर्तन जंग रहित धातु से निर्मित होने चाहिए. चारे में हनिकारक व तेज गन्धु युक्त खरपतवार नहीं होने चाहिए. भूसा या धूल युक्त चारा दूध निकालनने के पश्चात् ही खिलाएं. तीव्र गन्ध युक्त भोज्य पदार्थ जैसे साइलेज आहद पशु को दुग्ध दोहन से कम से कम एक घंटा पहले या दोहन के पश्चात् खाने को दें. दूध दोहने में पूर्ण हस्त विधि सर्वोत्तम है. चुटकी विधि तथा मुट्ठी में अंगूठा दबाकर दूध दोहने की विधि पशु के लिए कष्टकारी है, जिनके इस्तेमाल में पशु को कष्ट होने के कारण उसका उत्पादन घटता है. पूर्ण हस्ता विधि में समस्त थन पर समान दबाव पड़ता है तथा पशु कष्ट की बजाय दूध निकलवाने में आराम महसूस करता है. ग्वालों को दोहन के समय हाथों को सूखा रखना चाहिए. अपने हाथों पर झाग या पानी न लगाएं. हाथों को धोकर तथा पोंछकर दूध दुहे. दूध दोहने के बाद पशु को कम से कम घंटे तक नहीं बैठने देना चाहिए. दूध दोहने के लिए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं. ताकि वह अपनी सभी जरूरतों को पूरा कर सकें. इस क्रम में सरकार भी इनकी पूरी मदद करती है. लेकिन पशुपालन में किसानों को कईं तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन परेशानी में से एक स्वच्छ दूध का उत्पादन भी है. आज के समय में पशुओं के स्वच्छ दूध की मात्रा कम होती जा रही है. जिससे पशुपालकों को अधिक मुनाफा नहीं मिलता है. अगर आप भी अपने पशु से स्वच्छ दूध का उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए आवश्यक है कि दुधारू पशु निरोग तथा स्वस्थ हो. पशुओं के कई रोग ऐसे हैं, जो दूध के माध्यम से पशुओं से मनुष्य में फैलते हैं. अतःः केवल निरोग पशुओं को ही दूध उत्पादन के लिए प्रयोग करना चाहिए. पशु की सफाई दोहन से कम से कम एक घंटा पूर्व करें. पिछले भाग को पानी से धोकर साफ करें. थन पर यदि बाल हैं, तो उन्हें काटकर छोटा करें. थन को कीटाणु नाशक घोल से धोकर साफ तौलिए से पोंछ. दुग्धशाला को प्रतिदिन दो बार धोकर साफ करें. दुग्ध दुहान से पूर्व गोबर आदि हटा कर रोगाणुनाशक घोल से दुग्धशाला की सफाई करें. दूध दूहने में स्वस्थ एवं अच्छी आदतों के ग्वालों को ही लगायें. उनके कपड़े साफ, नाखून कटे हुए सिर टोपी से ढका हुआ हो तथा कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व हाथ रोगाणुनाशक घोल से धोयें जाने चाहिए. ग्वाले के लिए दोहन के समय बातचीत करना, थूकना, पान खाना, सिगरेट पीना तथा छींकना वर्जित रखें. स्वच्छ दूध के उत्पादन में बर्तनों की सफाई का बड़ा महत्व है. दूध के प्रयोग में आने वाले बर्तन जोड़ रहित होने चाहिए. जोड़ पर सूक्ष्म जीवाणुओं का जमाव संभव है. ये बर्तन जंग रहित धातु से निर्मित होने चाहिए. चारे में हनिकारक व तेज गन्धु युक्त खरपतवार नहीं होने चाहिए. भूसा या धूल युक्त चारा दूध निकालनने के पश्चात् ही खिलाएं. तीव्र गन्ध युक्त भोज्य पदार्थ जैसे साइलेज आहद पशु को दुग्ध दोहन से कम से कम एक घंटा पहले या दोहन के पश्चात् खाने को दें. दूध दोहने में पूर्ण हस्त विधि सर्वोत्तम है. चुटकी विधि तथा मुट्ठी में अंगूठा दबाकर दूध दोहने की विधि पशु के लिए कष्टकारी है, जिनके इस्तेमाल में पशु को कष्ट होने के कारण उसका उत्पादन घटता है. पूर्ण हस्ता विधि में समस्त थन पर समान दबाव पड़ता है तथा पशु कष्ट की बजाय दूध निकलवाने में आराम महसूस करता है. ग्वालों को दोहन के समय हाथों को सूखा रखना चाहिए. अपने हाथों पर झाग या पानी न लगाएं. हाथों को धोकर तथा पोंछकर दूध दुहे. दूध दोहने के बाद पशु को कम से कम घंटे तक नहीं बैठने देना चाहिए. दूध दोहने के लिए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
अगर आप घर बैठे पैसा कमाना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद काम की हैं। आप पुरानी करेंसी के जरिए मालामाल हो सकते हैं। 50 पैसे का पुराना सिक्का आपको लखपति बना सकता हैं। कई ऐसी ऑनलाइन वेबसाइट्स हैं, जहां पर आप अपने इस पुराने 50 पैसे के सिक्के को बेच सकते हैं। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्मस पर आप अपने पुराने सिक्के और नोटों की बोलियां लगा सकते हैं। ज्यादा बोली लगाने वाले को आप अपना सिक्का बेच सकते हैं। आपको बता दें कि 50 पैसे के सिक्कों का चलन साल 2011 में बंद हो गया था। उस समय महंगाई इतनी ज्यादा हो गई थी कि लोगों ने इस सिक्के का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। यही वजह थी कि जो धीरे-धीरे चलन से बाहर को गया। लेकिन अब ये बेकार सिक्का आपको अमीर बना सकता हैं। OLX की वेबसाइट पर 50 पैसे का सिक्का एक लाख में बिक रहा है। साल 2011 में बना हुआ ये सिक्का आपकी किस्मत चमका देगा, इस बात की गांरटी ओएलएक्स दे रहा है। आप अपने इस सिक्के को ऑनलाइन सेल कर सकते हैं। से में अगर आपके पास भी इस तरह का 50 पैसे का सिक्का है तो इसे OLX बेचकर आप भी झट से लखपति बन सकते हैं। इसके लिए आपको OLX की साइट पर विजिट करना होगा, जिसके बाद रजिस्टर कर अपने सिक्के की दोनों साइड की पिक्चर क्लिक करके डालना होगा। जो लोग इसे खरीदने के लिए इंट्रस्टेड होंगे, वो आपसे कॉन्टैक्ट कर फौरन इसे खरीद सकते हैं।
अगर आप घर बैठे पैसा कमाना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद काम की हैं। आप पुरानी करेंसी के जरिए मालामाल हो सकते हैं। पचास पैसे का पुराना सिक्का आपको लखपति बना सकता हैं। कई ऐसी ऑनलाइन वेबसाइट्स हैं, जहां पर आप अपने इस पुराने पचास पैसे के सिक्के को बेच सकते हैं। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्मस पर आप अपने पुराने सिक्के और नोटों की बोलियां लगा सकते हैं। ज्यादा बोली लगाने वाले को आप अपना सिक्का बेच सकते हैं। आपको बता दें कि पचास पैसे के सिक्कों का चलन साल दो हज़ार ग्यारह में बंद हो गया था। उस समय महंगाई इतनी ज्यादा हो गई थी कि लोगों ने इस सिक्के का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। यही वजह थी कि जो धीरे-धीरे चलन से बाहर को गया। लेकिन अब ये बेकार सिक्का आपको अमीर बना सकता हैं। OLX की वेबसाइट पर पचास पैसे का सिक्का एक लाख में बिक रहा है। साल दो हज़ार ग्यारह में बना हुआ ये सिक्का आपकी किस्मत चमका देगा, इस बात की गांरटी ओएलएक्स दे रहा है। आप अपने इस सिक्के को ऑनलाइन सेल कर सकते हैं। से में अगर आपके पास भी इस तरह का पचास पैसे का सिक्का है तो इसे OLX बेचकर आप भी झट से लखपति बन सकते हैं। इसके लिए आपको OLX की साइट पर विजिट करना होगा, जिसके बाद रजिस्टर कर अपने सिक्के की दोनों साइड की पिक्चर क्लिक करके डालना होगा। जो लोग इसे खरीदने के लिए इंट्रस्टेड होंगे, वो आपसे कॉन्टैक्ट कर फौरन इसे खरीद सकते हैं।
के नाम से गद्दी पर बैठा । उसन १५४५ से १५५४ तक राज्य किया। इसके दुव्र्व्यवहार से बहुत से पुराने अफगान सरदार और अमीर विद्रोही हो गये। उस ने कठोरता से उनका दमन किया; किन्तु उसके जीवन के अन्त तक विद्रोह होते ही रहे । सलीमशाह के बाद उसका बेटा फीरोज तप्त पर बैठा । फोरोज के मामा ने उसे मार डाला और स्वय मुहम्मद आदिलग्राह के नाम से राज्य करने लगा । उसने हेमू नाम के बनिये को अपना प्रधान मंत्री बनाया। आदिल बहुत ही अयोग्य शासक मानित हुआ। वह विद्रोहों को दवा न पाया और बगाल तथा मालवा के राज्य उसके हाथ से निकल गये । अवसर पाकर उसी के एक चचेरे भाई इब्राहीम खा सूर ने दिल्ली और आगरा पर भी अधिकार कर लिया। फलतः आदिल शाहू को चला जाना पड़ा। किन्तु इब्राहोग तख्त पर बैठा हो था कि पंजाब के सूबेदार शाहजादा अहमद खा ने दिल्ली और आगरा पर धावा कर दिया। इब्राहीम हार कर भाग गया और अहमद सा सिकन्दर शाह के नाम से तस्न पर बैठा (१५५४) । किन्तु उसके भाग्य में भी राज्य करना न वदा था । हुमायूँ का लौटना हम कह आये है कि हुमायू भागता हुआ अन्त में ईरान जा पहुंचा था। वहा के शाह की मदद से उसने १५४५ में संस्करो और कामरान को हरा कर पन्धार व काबुल पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार लगभग चार साल बाद हुमायूको अपने
के नाम से गद्दी पर बैठा । उसन एक हज़ार पाँच सौ पैंतालीस से एक हज़ार पाँच सौ चौवन तक राज्य किया। इसके दुव्र्व्यवहार से बहुत से पुराने अफगान सरदार और अमीर विद्रोही हो गये। उस ने कठोरता से उनका दमन किया; किन्तु उसके जीवन के अन्त तक विद्रोह होते ही रहे । सलीमशाह के बाद उसका बेटा फीरोज तप्त पर बैठा । फोरोज के मामा ने उसे मार डाला और स्वय मुहम्मद आदिलग्राह के नाम से राज्य करने लगा । उसने हेमू नाम के बनिये को अपना प्रधान मंत्री बनाया। आदिल बहुत ही अयोग्य शासक मानित हुआ। वह विद्रोहों को दवा न पाया और बगाल तथा मालवा के राज्य उसके हाथ से निकल गये । अवसर पाकर उसी के एक चचेरे भाई इब्राहीम खा सूर ने दिल्ली और आगरा पर भी अधिकार कर लिया। फलतः आदिल शाहू को चला जाना पड़ा। किन्तु इब्राहोग तख्त पर बैठा हो था कि पंजाब के सूबेदार शाहजादा अहमद खा ने दिल्ली और आगरा पर धावा कर दिया। इब्राहीम हार कर भाग गया और अहमद सा सिकन्दर शाह के नाम से तस्न पर बैठा । किन्तु उसके भाग्य में भी राज्य करना न वदा था । हुमायूँ का लौटना हम कह आये है कि हुमायू भागता हुआ अन्त में ईरान जा पहुंचा था। वहा के शाह की मदद से उसने एक हज़ार पाँच सौ पैंतालीस में संस्करो और कामरान को हरा कर पन्धार व काबुल पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार लगभग चार साल बाद हुमायूको अपने
PSSSB Recruitment 2021: पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ओर से जेल वार्डन और मैट्रन के पद पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी हुई है. PSSSB Recruitment 2021: पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड ने पंजाब पुलिस खेल विभाग में वार्डर (Warder) और मैट्रन (Matron) के खाली पदों को भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी की है. जारी नोटिफिकेशन के अनुसार कुल 847 पदों पर भर्तियां की जाएंगी. पंजाब पुलिस के अंतर्गत आने वाले जेल विभागों में यह भर्तियां होंगी. ऐसे में जो भी उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं वह ऑफिशियल वेबसाइट punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. जेल वार्डन और मैट्रन के पद पर भर्ती के लिए जारी इस नोटिफिकेशन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 10 मई 2021 से शुरू हो चुकी है. नोटिफिकेशन के तहत आवेदन पटिया 31 मई 2021 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी. वही इसमें (PSSSB Recruitment 2021) फीस का भुगतान करने की आखिरी तारीख 2 जून 2021 तय की गई है. इन पदों पर आवेदन की इच्छुक उम्मीदवार आवेदन करने से पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन जरूर चेक कर ले. आवेदन की आखिरी तारीख जाने पर एप्लीकेशन के लिंक ऑफिशियल वेबसाइट से हटा दिए जाएंगे. कौन कर सकता है अप्लाई? इन पदों के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से बारहवीं कक्षा पास कर ली हो. इसके अलावा मैट्रिकुलेशन में अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के तौर पर पंजाबी भाषा का होना अनिवार्य है. बता दें कि इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की उम्र 18 साल से अधिक और 27 साल से कम होनी चाहिए. योग्यता और आयु सीमा की पूरी जानकारी के लिए नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं. इनमें 815 पद जेल वार्डर के और 32 पद मैट्रन के हैं. - इसमें आवेदन करने के लिए सबसे पहले पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट- punjab.gov.in पर जाएं. - वेबसाइट के होम पेज पर Online Applications पर क्लिक करें. - अब 'Online Application of Advertisement No. 08/2021 for the Post of Warder and Matron' के लिंक पर क्लिक करें. - अब New Registration पर जाएं. - यहां नाम, पिता का नाम, डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस डालकर रजिस्ट्रेशन कर ले. - मोबाइल नंबर पर प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ की मदद से एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. - आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट जरूर ले लें. - डायरेक्ट लिंक से अप्लाई करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.
PSSSB Recruitment दो हज़ार इक्कीस: पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ओर से जेल वार्डन और मैट्रन के पद पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी हुई है. PSSSB Recruitment दो हज़ार इक्कीस: पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड ने पंजाब पुलिस खेल विभाग में वार्डर और मैट्रन के खाली पदों को भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी की है. जारी नोटिफिकेशन के अनुसार कुल आठ सौ सैंतालीस पदों पर भर्तियां की जाएंगी. पंजाब पुलिस के अंतर्गत आने वाले जेल विभागों में यह भर्तियां होंगी. ऐसे में जो भी उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं वह ऑफिशियल वेबसाइट punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. जेल वार्डन और मैट्रन के पद पर भर्ती के लिए जारी इस नोटिफिकेशन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया दस मई दो हज़ार इक्कीस से शुरू हो चुकी है. नोटिफिकेशन के तहत आवेदन पटिया इकतीस मई दो हज़ार इक्कीस को शाम पाँच:शून्य बजे तक जारी रहेगी. वही इसमें फीस का भुगतान करने की आखिरी तारीख दो जून दो हज़ार इक्कीस तय की गई है. इन पदों पर आवेदन की इच्छुक उम्मीदवार आवेदन करने से पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन जरूर चेक कर ले. आवेदन की आखिरी तारीख जाने पर एप्लीकेशन के लिंक ऑफिशियल वेबसाइट से हटा दिए जाएंगे. कौन कर सकता है अप्लाई? इन पदों के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से बारहवीं कक्षा पास कर ली हो. इसके अलावा मैट्रिकुलेशन में अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के तौर पर पंजाबी भाषा का होना अनिवार्य है. बता दें कि इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की उम्र अट्ठारह साल से अधिक और सत्ताईस साल से कम होनी चाहिए. योग्यता और आयु सीमा की पूरी जानकारी के लिए नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं. इनमें आठ सौ पंद्रह पद जेल वार्डर के और बत्तीस पद मैट्रन के हैं. - इसमें आवेदन करने के लिए सबसे पहले पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट- punjab.gov.in पर जाएं. - वेबसाइट के होम पेज पर Online Applications पर क्लिक करें. - अब 'Online Application of Advertisement No. आठ/दो हज़ार इक्कीस for the Post of Warder and Matron' के लिंक पर क्लिक करें. - अब New Registration पर जाएं. - यहां नाम, पिता का नाम, डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस डालकर रजिस्ट्रेशन कर ले. - मोबाइल नंबर पर प्राप्त रजिस्ट्रेशन नंबर और डेट ऑफ बर्थ की मदद से एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. - आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट जरूर ले लें. - डायरेक्ट लिंक से अप्लाई करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.
बहराइच में एक प्रेमी युगल की शादी पुलिस ने थाने में करवाई है। प्रेमिका अपने पिता के साथ थाने में शिकायत लेकर पहुंची थी। जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों और काजी को थाने में बुलाकर दोनों का निकाह संपन्न करवाया है। बहराइचः उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक प्रेमी युगल की शादी पुलिस स्टेशन में करवाई गई है। प्रेमी युगल तो साथ जीने-मरने की खसमें खा चुके थे और शादी करने के लिए राजी थे। लेकिन उन्हें अपने परिजनों की सहमति नहीं मिल पा रही थी। बताया जा रहा है कि युवक के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। इस कारण दिकौलिया गांव निवासी प्रेमिका अपने पिता के साथ बौंडी थाने अपनी शिकायत लेकर पहुंच गई। इस दौरान उसने पुलिस को बताया कि रामगांव थाना क्षेत्र के तारापुर ग्राम पंचायत के भग्गूपुरवा गांव निवासी एखलाक से युवती का दो वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा है। लेकिन एखलाक के पिता की इस रिश्ते पर सहमति नहीं है। जिस कारण उनकी शादी नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने मामला जानने के बाद दोनों पक्षों को तलब किया और एक साथ बैठकर बातचीत कर मामले को सुलझाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद दोनों पक्ष शादी के लिए राजी हो गए। इसके बाद थानाध्यक्ष गणनाथ प्रसाद ने फौरन गांव से काजी अब्दुल कदीर को थाने बुलवाया और प्रेमी युगल का निकाह थाने में ही पढ़वा दिया गया। वहीं थाने में मौजूद पुलिसकर्मी दोनों की शादी के गवाह बने। शादी संपन्न होने के बाद प्रेमी-प्रेमिका और उनके परिजन थाने से हंसी-खुशी अपने घर चले गए। इस दौरान दोनों के निकाह में एसआई वीरेंद्र सिंह शाही, विकास वर्मा, रामआशीष यादव, सर्वदेव सिंह, मुख्य आरक्षी रामेंद्र यादव, शिवसागर यादव, महिला आरक्षी बबिता यादव, अर्चना, आशा वर्मा आदि इस शादी की गवाह व संयोजक रहीं। इससे पहले भी कई बार शादी में परिजनों के अड़चन के चलते थाने में विवाह करवाया जा चुका है। इससे पहले भी एक प्रेमी युगल की शादी थाने में करवाई गई थी। जहां पर परिजनों के खिलाफ रहने पर पुलिस द्वारा प्रेमी जोड़ों को मिलाने का काम किया है।
बहराइच में एक प्रेमी युगल की शादी पुलिस ने थाने में करवाई है। प्रेमिका अपने पिता के साथ थाने में शिकायत लेकर पहुंची थी। जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों और काजी को थाने में बुलाकर दोनों का निकाह संपन्न करवाया है। बहराइचः उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक प्रेमी युगल की शादी पुलिस स्टेशन में करवाई गई है। प्रेमी युगल तो साथ जीने-मरने की खसमें खा चुके थे और शादी करने के लिए राजी थे। लेकिन उन्हें अपने परिजनों की सहमति नहीं मिल पा रही थी। बताया जा रहा है कि युवक के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। इस कारण दिकौलिया गांव निवासी प्रेमिका अपने पिता के साथ बौंडी थाने अपनी शिकायत लेकर पहुंच गई। इस दौरान उसने पुलिस को बताया कि रामगांव थाना क्षेत्र के तारापुर ग्राम पंचायत के भग्गूपुरवा गांव निवासी एखलाक से युवती का दो वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा है। लेकिन एखलाक के पिता की इस रिश्ते पर सहमति नहीं है। जिस कारण उनकी शादी नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने मामला जानने के बाद दोनों पक्षों को तलब किया और एक साथ बैठकर बातचीत कर मामले को सुलझाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद दोनों पक्ष शादी के लिए राजी हो गए। इसके बाद थानाध्यक्ष गणनाथ प्रसाद ने फौरन गांव से काजी अब्दुल कदीर को थाने बुलवाया और प्रेमी युगल का निकाह थाने में ही पढ़वा दिया गया। वहीं थाने में मौजूद पुलिसकर्मी दोनों की शादी के गवाह बने। शादी संपन्न होने के बाद प्रेमी-प्रेमिका और उनके परिजन थाने से हंसी-खुशी अपने घर चले गए। इस दौरान दोनों के निकाह में एसआई वीरेंद्र सिंह शाही, विकास वर्मा, रामआशीष यादव, सर्वदेव सिंह, मुख्य आरक्षी रामेंद्र यादव, शिवसागर यादव, महिला आरक्षी बबिता यादव, अर्चना, आशा वर्मा आदि इस शादी की गवाह व संयोजक रहीं। इससे पहले भी कई बार शादी में परिजनों के अड़चन के चलते थाने में विवाह करवाया जा चुका है। इससे पहले भी एक प्रेमी युगल की शादी थाने में करवाई गई थी। जहां पर परिजनों के खिलाफ रहने पर पुलिस द्वारा प्रेमी जोड़ों को मिलाने का काम किया है।
गरीब और जरूरतमंद बच्चों के इलाज में मदद के लिए मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह के प्रयास से चाइल्ड केयर फंड बनाए जाने का फैसला लिया है। चाइल्ड केयर फंड से कोई भी गरीब परिवार अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद मांग सकता है। मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। गरीब और जरूरतमंद बच्चों के इलाज में मदद के लिए मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह के प्रयास से चाइल्ड केयर फंड बनाए जाने का फैसला लिया है। चाइल्ड केयर फंड से कोई भी गरीब परिवार अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद मांग सकता है। पीड़ित परिवार को डीएम समेत कमेटी के किसी भी अधिकारी के सामने अपना दर्द बताकर मदद मांगनी होगी। रामपुर में बतौर डीएम की जिम्मेदारी निभाने के दौरान मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए चाइल्ड केयर फंड की स्थापना की थी। फंड का एक खाता खुलवाया गया था। डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी फंड के खाते का संचालन करती थी। फंड की शुरुआत अधिकारियों की पत्नियों ने मदद करके की थी। इसके बाद उद्योगपतियों से भी इस फंड में मदद करने का आह्वान किया गया था। इसके बाद चाइल्ड केयर फंड से तमाम गरीब बच्चों के इलाज के लिए मदद की गई। रामपुर के बाद आन्जनेय कुमार सिंह को सरकार ने मुरादाबाद के मंडलायुक्त की जिम्मेदारी दी है। अब उन पर रामपुर के अलावा मुरादाबाद, सम्भल, अमरोहा और बिजनौर जिले की भी जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त ने इन चारों जिलों में चाइल्ड केयर फंड की स्थापना का खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने चारों जिलों के डीएम को चाइल्ड केयर फंड की स्थापना करने की जिम्मेदारी दी है। इसी महीने चाइल्ड केयर फंड की स्थापना होनी है। चाइल्ड केयर फंड में जिले के उद्योगपतियों से मदद ली जाएगी। इस फंड से हर जिले से गरीब बच्चों की इलाज आदि में मदद होगी। ऐसे गरीब बच्चों की भी मदद होगी, जिसे पढ़ाई के लिए दिक्कत हो रही है। मंडलायुक्त की इस अच्छी पहल का मंडल के जिम्मेदार लोग भी सराहना कर रहे हैं। उद्यमियों से ली जाएगी मददद : चाइल्ड केयर फंड में जिलाधिकारी के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, सिटी मजिस्ट्रेट आदि को सदस्य बनाया जाएगा। मदद के धनराशि इकट्ठा करने के लिए संयुक्त खाता खुलेगा। इसमें कोई भी व्यक्ति मदद कर सकता है। मुरादाबाद में निर्यातकों की संख्या काफी है। यहां डीएम के प्रयास से गरीब बच्चों की मदद के लिए काफी धनराशि जमा हो सकती है। तमाम ऐसे जरूरतमंद बच्चे हैं, जो धन के अभाव में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। उन्हें कुछ मदद मिल जाए तो आगे बढ़ सकते हैं। गरीब परिवारों पर बच्चों का इलाज कराने के लिए रुपये नहीं होते हैं। चाइल्ड केयर फंड ऐसे बच्चों के लिए मदद करेगा। रामपुर में इसका प्रयोग सफल रहा है। इसलिए मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में चाइल्ड केयर फंड़ की स्थापना करके बच्चों की मदद की जाएगी।
गरीब और जरूरतमंद बच्चों के इलाज में मदद के लिए मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह के प्रयास से चाइल्ड केयर फंड बनाए जाने का फैसला लिया है। चाइल्ड केयर फंड से कोई भी गरीब परिवार अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद मांग सकता है। मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। गरीब और जरूरतमंद बच्चों के इलाज में मदद के लिए मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह के प्रयास से चाइल्ड केयर फंड बनाए जाने का फैसला लिया है। चाइल्ड केयर फंड से कोई भी गरीब परिवार अपने बच्चे के इलाज के लिए मदद मांग सकता है। पीड़ित परिवार को डीएम समेत कमेटी के किसी भी अधिकारी के सामने अपना दर्द बताकर मदद मांगनी होगी। रामपुर में बतौर डीएम की जिम्मेदारी निभाने के दौरान मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए चाइल्ड केयर फंड की स्थापना की थी। फंड का एक खाता खुलवाया गया था। डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी फंड के खाते का संचालन करती थी। फंड की शुरुआत अधिकारियों की पत्नियों ने मदद करके की थी। इसके बाद उद्योगपतियों से भी इस फंड में मदद करने का आह्वान किया गया था। इसके बाद चाइल्ड केयर फंड से तमाम गरीब बच्चों के इलाज के लिए मदद की गई। रामपुर के बाद आन्जनेय कुमार सिंह को सरकार ने मुरादाबाद के मंडलायुक्त की जिम्मेदारी दी है। अब उन पर रामपुर के अलावा मुरादाबाद, सम्भल, अमरोहा और बिजनौर जिले की भी जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त ने इन चारों जिलों में चाइल्ड केयर फंड की स्थापना का खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने चारों जिलों के डीएम को चाइल्ड केयर फंड की स्थापना करने की जिम्मेदारी दी है। इसी महीने चाइल्ड केयर फंड की स्थापना होनी है। चाइल्ड केयर फंड में जिले के उद्योगपतियों से मदद ली जाएगी। इस फंड से हर जिले से गरीब बच्चों की इलाज आदि में मदद होगी। ऐसे गरीब बच्चों की भी मदद होगी, जिसे पढ़ाई के लिए दिक्कत हो रही है। मंडलायुक्त की इस अच्छी पहल का मंडल के जिम्मेदार लोग भी सराहना कर रहे हैं। उद्यमियों से ली जाएगी मददद : चाइल्ड केयर फंड में जिलाधिकारी के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, सिटी मजिस्ट्रेट आदि को सदस्य बनाया जाएगा। मदद के धनराशि इकट्ठा करने के लिए संयुक्त खाता खुलेगा। इसमें कोई भी व्यक्ति मदद कर सकता है। मुरादाबाद में निर्यातकों की संख्या काफी है। यहां डीएम के प्रयास से गरीब बच्चों की मदद के लिए काफी धनराशि जमा हो सकती है। तमाम ऐसे जरूरतमंद बच्चे हैं, जो धन के अभाव में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। उन्हें कुछ मदद मिल जाए तो आगे बढ़ सकते हैं। गरीब परिवारों पर बच्चों का इलाज कराने के लिए रुपये नहीं होते हैं। चाइल्ड केयर फंड ऐसे बच्चों के लिए मदद करेगा। रामपुर में इसका प्रयोग सफल रहा है। इसलिए मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में चाइल्ड केयर फंड़ की स्थापना करके बच्चों की मदद की जाएगी।
श्रीनगरः केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे, जिसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के लिए रोडमैप देते हुए, जो 2018 में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाले पीडीपी-भाजपा गठबंधन के इस्तीफे के बाद रुकी हुई है, अमित शाह ने यहां युवाओं की एक बड़ी सभा से कहा, पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद चुनाव होंगे। इसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। शाह ने कहा, मैंने यह संसद के पटल पर कहा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, कश्मीर में हमारे भाइयों और बहनों के जीवन को बचाने के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद कर्फ्यू प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा, यह हमारे दीर्घकालिक सुधार के लिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित एक कड़वी गोली की तरह था। शाह ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा, उस तारीख को निर्दोष लोगों का शोषण, वंशवादी शासन, भ्रष्टाचार और कुशासन समाप्त हुआ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, पत्थरबाजी अब अतीत की बात हो गई है। जम्मू-कश्मीर के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, मोदी जी चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर देश का लेने वाला क्षेत्र न हो, बल्कि यह देने वाला (दाता) हो। शाह ने शनिवार दोपहर श्रीनगर में युवाओं की एक सभा से कहा, 5 अगस्त, 2019 से पहले, आजादी के 70 सालों ने जम्मू-कश्मीर को क्या दिया - 87 विधानसभा, 6 लोकसभा सीटें और तीन परिवार। शाह ने कहा, मुझे उन परिवारों के नाम बताने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी ही हैं, जिन्होंने फैसला किया कि आयुष्मान भारत योजना जहां, देश के अन्य हिस्सों में 5 लाख रुपये के चिकित्सा उपचार के लिए समाज के कमजोर वर्गो को अधिकार देती है, वही सुविधा जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि जम्मू-कश्मीर देश के लेने वाले क्षेत्र के बजाय एक दाता बनना चाहिए। उन्होंने कहा, 2019 तक 70 वर्षो के दौरान, केवल 500 मेडिकल सीटें उपलब्ध थीं और 2019 के बाद, यह संख्या बढ़कर 1,120 हो गई और जल्द ही दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा, 70 साल से 2019 तक ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि उन लोगों की विकास में दिलचस्पी नहीं थी, उन्होंने केवल राजनीति की। शाह ने कहा कि अधिकांश राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों ने जम्मू-कश्मीर में अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। स्वच्छ भारत मिशन ने अपना पूरा लक्ष्य हासिल कर लिया है और आज जम्मू-कश्मीर के हर घर में शौचालय है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 100 फीसदी घरों में बिजली और एलपीजी कनेक्शन हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने सुरक्षा स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा, जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति के खिलाफ सबसे दृढ़ता से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, ऐसी ताकतों से किसी प्रकार की कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। शाह ने कहा कि रोजगार प्रक्रियाओं को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया गया है, जिसमें योग्यता ही रोजगार का एकमात्र रास्ता है। वृद्धावस्था पेंशन और अन्य वित्तीय सहायता योजनाएं अब सीधे बैंक हस्तांतरण के माध्यम से लागू की जाती हैं और इन योजनाओं में किसी बिचौलिए के हस्तक्षेप का कोई सवाल ही नहीं है। इससे पहले, एक शीर्ष सुरक्षा समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए, अमित शाह ने विभिन्न सुरक्षा बलों से कहा कि वे पूर्ण तालमेल दिखाएं और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रयास करें।
श्रीनगरः केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे, जिसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के लिए रोडमैप देते हुए, जो दो हज़ार अट्ठारह में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाले पीडीपी-भाजपा गठबंधन के इस्तीफे के बाद रुकी हुई है, अमित शाह ने यहां युवाओं की एक बड़ी सभा से कहा, पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद चुनाव होंगे। इसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। शाह ने कहा, मैंने यह संसद के पटल पर कहा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, कश्मीर में हमारे भाइयों और बहनों के जीवन को बचाने के लिए अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को निरस्त करने के बाद कर्फ्यू प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा, यह हमारे दीर्घकालिक सुधार के लिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित एक कड़वी गोली की तरह था। शाह ने कहा कि पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को जम्मू-कश्मीर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा, उस तारीख को निर्दोष लोगों का शोषण, वंशवादी शासन, भ्रष्टाचार और कुशासन समाप्त हुआ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगस्त दो हज़ार उन्नीस के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, पत्थरबाजी अब अतीत की बात हो गई है। जम्मू-कश्मीर के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, मोदी जी चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर देश का लेने वाला क्षेत्र न हो, बल्कि यह देने वाला हो। शाह ने शनिवार दोपहर श्रीनगर में युवाओं की एक सभा से कहा, पाँच अगस्त, दो हज़ार उन्नीस से पहले, आजादी के सत्तर सालों ने जम्मू-कश्मीर को क्या दिया - सत्तासी विधानसभा, छः लोकसभा सीटें और तीन परिवार। शाह ने कहा, मुझे उन परिवारों के नाम बताने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी ही हैं, जिन्होंने फैसला किया कि आयुष्मान भारत योजना जहां, देश के अन्य हिस्सों में पाँच लाख रुपये के चिकित्सा उपचार के लिए समाज के कमजोर वर्गो को अधिकार देती है, वही सुविधा जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि जम्मू-कश्मीर देश के लेने वाले क्षेत्र के बजाय एक दाता बनना चाहिए। उन्होंने कहा, दो हज़ार उन्नीस तक सत्तर वर्षो के दौरान, केवल पाँच सौ मेडिकल सीटें उपलब्ध थीं और दो हज़ार उन्नीस के बाद, यह संख्या बढ़कर एक,एक सौ बीस हो गई और जल्द ही दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा, सत्तर साल से दो हज़ार उन्नीस तक ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि उन लोगों की विकास में दिलचस्पी नहीं थी, उन्होंने केवल राजनीति की। शाह ने कहा कि अधिकांश राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों ने जम्मू-कश्मीर में अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। स्वच्छ भारत मिशन ने अपना पूरा लक्ष्य हासिल कर लिया है और आज जम्मू-कश्मीर के हर घर में शौचालय है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एक सौ फीसदी घरों में बिजली और एलपीजी कनेक्शन हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने सुरक्षा स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा, जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति के खिलाफ सबसे दृढ़ता से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, ऐसी ताकतों से किसी प्रकार की कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। शाह ने कहा कि रोजगार प्रक्रियाओं को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया गया है, जिसमें योग्यता ही रोजगार का एकमात्र रास्ता है। वृद्धावस्था पेंशन और अन्य वित्तीय सहायता योजनाएं अब सीधे बैंक हस्तांतरण के माध्यम से लागू की जाती हैं और इन योजनाओं में किसी बिचौलिए के हस्तक्षेप का कोई सवाल ही नहीं है। इससे पहले, एक शीर्ष सुरक्षा समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए, अमित शाह ने विभिन्न सुरक्षा बलों से कहा कि वे पूर्ण तालमेल दिखाएं और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रयास करें।
नई दिल्लीः तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) और करण कुंद्रा (Karan Kundra) टीवी के सबसे क्यूट कपल्स में से एक बन चुके हैं. दोनों की पहली मुलाकत रियलिटी टीवी शो 'बिग बॉस 15' में हुई थी. यहीं दोनों दोस्त बने और जल्द ही दोनों का रिश्ता प्यार में बदल गया. इसके बाद से ही इन्हें अक्सर एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हुए देखा जाने लगा है. तेजस्वी और करण कभी अपनी शादी की खबरों के कारण तो कभी ब्रेकअप की खबरों को लेकर अक्सर ही सुर्खियों में रहते हैं. हालांकि, ये दोनों किसी भी अफवाह से इतर एक दूसरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आते हैं. अब तेजस्वी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह करण के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए रो पड़ती हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि तेजस्वी और करण क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं. इसी दौरान तेजस्वी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से रिलेशनशिप पर बात कर रही हैं. एक्ट्रेस कहती हैं, 'मैं अभी अच्छा वक्त बिता रही हूं.' इतना कहते ही वह भावुक हो जाती हैं. वहीं, उनके पास बैठे करण उन्हें चुप कराते हुए उनके माथे पर चूमते हैं. वीडियो में तेजस्वी आगे करण से बात करते हुए कहती हैं, 'मैं सिर्फ फैंस के साथ ये शेयर करना चाहती हूं कि मैं आपके साथ कितनी खुश हूं.' इसके बाद करण उन्हें फिर से दिलासा देते नजर आते हैं. गौरतलब है कि तेजस्वी प्रकाश इन दिनों एकता कपूर के सुपरनैचुरल शो 'नागिन 6' में लीड रोल में नजर आ रही हैं. वहीं, करण कुंद्रा को टीवी शो 'तेरे इश्क में घायल' में देखा जा रहा है.
नई दिल्लीः तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा टीवी के सबसे क्यूट कपल्स में से एक बन चुके हैं. दोनों की पहली मुलाकत रियलिटी टीवी शो 'बिग बॉस पंद्रह' में हुई थी. यहीं दोनों दोस्त बने और जल्द ही दोनों का रिश्ता प्यार में बदल गया. इसके बाद से ही इन्हें अक्सर एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हुए देखा जाने लगा है. तेजस्वी और करण कभी अपनी शादी की खबरों के कारण तो कभी ब्रेकअप की खबरों को लेकर अक्सर ही सुर्खियों में रहते हैं. हालांकि, ये दोनों किसी भी अफवाह से इतर एक दूसरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आते हैं. अब तेजस्वी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह करण के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए रो पड़ती हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि तेजस्वी और करण क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं. इसी दौरान तेजस्वी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से रिलेशनशिप पर बात कर रही हैं. एक्ट्रेस कहती हैं, 'मैं अभी अच्छा वक्त बिता रही हूं.' इतना कहते ही वह भावुक हो जाती हैं. वहीं, उनके पास बैठे करण उन्हें चुप कराते हुए उनके माथे पर चूमते हैं. वीडियो में तेजस्वी आगे करण से बात करते हुए कहती हैं, 'मैं सिर्फ फैंस के साथ ये शेयर करना चाहती हूं कि मैं आपके साथ कितनी खुश हूं.' इसके बाद करण उन्हें फिर से दिलासा देते नजर आते हैं. गौरतलब है कि तेजस्वी प्रकाश इन दिनों एकता कपूर के सुपरनैचुरल शो 'नागिन छः' में लीड रोल में नजर आ रही हैं. वहीं, करण कुंद्रा को टीवी शो 'तेरे इश्क में घायल' में देखा जा रहा है.
The Fact India: विमेंस टी-20 विश्व कप में आयलैंड को पांच रन से हराने के बाद भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया है। आयरलैंड पर भारत की जीत डकवर्थ-लुइस (डीएलएस) मेथड से हुई है। भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में लगातार तीसरी बार जगह बनाई है। इससे पहले 2018 और 2020 में भी टीम अंतिम-4 में पहुंची थी। 2020 में तो भारत ने फाइनल भी खेला, लेकिन तब उसे ऑस्ट्रेलिया से हारकर खिताब गंवाना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका के केबेरा स्थित मैदान पर भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। ओपनर स्मृति मंधाना के 87 रनों के सहायोग से भारत ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 155 रन बनाए। जवाब में आयरलैंड ने 8. 2 ओवर तक दो विकेट पर 54 रन बना लिए थे। तभी बारिश होने लगी। टीम इंडिया डीएलएस मेथड में पांच रन आगे थी। बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो सका और भारत मैच जीत गया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ग्रुप-2 से सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है। मंगलवार को पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच मैच के नतीजे से तय होगा कि टीम इंडिया सेमीफाइनल में किस टीम से भिड़ेगी। 156 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी आयरलैंड ने पहली ही बॉल पर ओपनर एमी हंटर का विकेट गंवा दिया। एमी दूसरा रन लेने की कोशिश में रन आउट हुईं। इसी ओवर की पांचवीं बॉल पर रेणुका सिंह ठाकुर ने ओरला प्रेंडरग्रास्ट को शून्य के स्कोर पर बोल्ड कर दिया। इन 2 विकेट के बाद टीम का कोई और विकेट नहीं गिरा। ओपनर गेबी लुईस और कप्तान लौरा डिलेनी ने शुरुआती झटकों के बाद टीम को उबारा। दोनों ने पारी आगे बढ़ाई और अर्धशतकीय साझेदारी की। उन्होंने अपने शॉट्स खेलने शुरू ही किए थे कि बारिश होने लगी और खेल रोकना पड़ गया। गेबी 32 और लौरा 17 रन बनाकर नाबाद रहीं। साउथ अफ्रीका में केबेरा के सेंट जॉर्जिया मैदान पर टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 155 रन बनाए। स्मृति मंधाना (87 रन) ने करियर की बेस्ट पारी खेली। यह उनका टी-20 इंटरनेशनल में सर्वाधिक स्कोर है। उन्होंने 22वां अर्धशतक जमाया। मंधाना ने पारी में 9 चौके और 3 छक्के जमाए। उनके अलावा शेफाली वर्मा ने 24 और जेमिमा रोड्रिग्ज ने 19 रन का योगदान दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 14 रन बनाए। इसके साथ ही कौर ने टी-20 इंटरनेशनल में 3 हजार रन पूरे कर लिए। आयरलैंड की ओर से लौरा डिलेनी ने 3 विकेट लिए। ओरला प्रेंडरगास्ट को 2 और एरलीन केली को एक विकेट मिला। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का यह 150वां टी-20 मैच था। इसके साथ ही वे 150 टी-20 मैच खेलने वाली दुनिया की इकलौती क्रिकेटर बन गईं। पुरुष क्रिकेट में भारत के रोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा 148 टी-20 खेले हैं।
The Fact India: विमेंस टी-बीस विश्व कप में आयलैंड को पांच रन से हराने के बाद भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया है। आयरलैंड पर भारत की जीत डकवर्थ-लुइस मेथड से हुई है। भारत ने टी-बीस वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में लगातार तीसरी बार जगह बनाई है। इससे पहले दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार बीस में भी टीम अंतिम-चार में पहुंची थी। दो हज़ार बीस में तो भारत ने फाइनल भी खेला, लेकिन तब उसे ऑस्ट्रेलिया से हारकर खिताब गंवाना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका के केबेरा स्थित मैदान पर भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। ओपनर स्मृति मंधाना के सत्तासी रनों के सहायोग से भारत ने बीस ओवर में छः विकेट पर एक सौ पचपन रन बनाए। जवाब में आयरलैंड ने आठ. दो ओवर तक दो विकेट पर चौवन रन बना लिए थे। तभी बारिश होने लगी। टीम इंडिया डीएलएस मेथड में पांच रन आगे थी। बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो सका और भारत मैच जीत गया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ग्रुप-दो से सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है। मंगलवार को पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच मैच के नतीजे से तय होगा कि टीम इंडिया सेमीफाइनल में किस टीम से भिड़ेगी। एक सौ छप्पन रन के टारगेट का पीछा करने उतरी आयरलैंड ने पहली ही बॉल पर ओपनर एमी हंटर का विकेट गंवा दिया। एमी दूसरा रन लेने की कोशिश में रन आउट हुईं। इसी ओवर की पांचवीं बॉल पर रेणुका सिंह ठाकुर ने ओरला प्रेंडरग्रास्ट को शून्य के स्कोर पर बोल्ड कर दिया। इन दो विकेट के बाद टीम का कोई और विकेट नहीं गिरा। ओपनर गेबी लुईस और कप्तान लौरा डिलेनी ने शुरुआती झटकों के बाद टीम को उबारा। दोनों ने पारी आगे बढ़ाई और अर्धशतकीय साझेदारी की। उन्होंने अपने शॉट्स खेलने शुरू ही किए थे कि बारिश होने लगी और खेल रोकना पड़ गया। गेबी बत्तीस और लौरा सत्रह रन बनाकर नाबाद रहीं। साउथ अफ्रीका में केबेरा के सेंट जॉर्जिया मैदान पर टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए एक सौ पचपन रन बनाए। स्मृति मंधाना ने करियर की बेस्ट पारी खेली। यह उनका टी-बीस इंटरनेशनल में सर्वाधिक स्कोर है। उन्होंने बाईसवां अर्धशतक जमाया। मंधाना ने पारी में नौ चौके और तीन छक्के जमाए। उनके अलावा शेफाली वर्मा ने चौबीस और जेमिमा रोड्रिग्ज ने उन्नीस रन का योगदान दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने चौदह रन बनाए। इसके साथ ही कौर ने टी-बीस इंटरनेशनल में तीन हजार रन पूरे कर लिए। आयरलैंड की ओर से लौरा डिलेनी ने तीन विकेट लिए। ओरला प्रेंडरगास्ट को दो और एरलीन केली को एक विकेट मिला। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का यह एक सौ पचासवां टी-बीस मैच था। इसके साथ ही वे एक सौ पचास टी-बीस मैच खेलने वाली दुनिया की इकलौती क्रिकेटर बन गईं। पुरुष क्रिकेट में भारत के रोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा एक सौ अड़तालीस टी-बीस खेले हैं।
भारत के खिलाफ मंगलवार (10 जनवरी) को पहले वनडे में श्रीलंका के कप्तान दसुन शनाका (Dasun Shanaka) ने नाबाद शतक जड़ा। लेकिन शनाका अपना शतक पूरा नहीं कर पाते अगर आखिरी ओवर में कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) नॉन स्ट्राइकर एंड पर रन आउट की अपील वापस नहीं लेते। शमी आखिरी ओवर की चौथी गेंद डालने आ रहे थे लेकिन नॉन स्ट्राइकर छोर पर शनाका को क्रीज से बाहर निकलता हुआ देख उन्होंने गिल्लियां उड़ा दी। जिसके बाद शमी ने हंसते हुए अंपायर की तरफ अपील का ईशारा किया। अंपायर नितिन मेननने इसे थर्ड अंपायर के पास रेफर किया। लेकिन कप्तान रोहित शर्मा बीच में आए और खेलभावना दिखाते हुए उन्होंने शमी से अपील वापस लेने को कहा और उन्होंने वैसा ही किया। जब ये वाकया हुआ तब शनाका 98 रन के निजी स्कोर पर थे, इसके बाद श्रीलंकाई कप्तान ने चौका जड़कर अपना शतक पूरा किया। शनाका के खिलाफ अपील वापस लेने के लिए रोहित की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। मैच के बाद रोहित ने शनाका के खिलाफ अपील वापस लेने की वजह भी बताई। गौरतलब है कि भारत ने श्रीलंका को 67 रन से हराकर तीन मैच की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 373 रन बनाए। जिसमें विराट कोहली ने 113 रन, रोहित शर्मा ने 83 रन और शुभमन गिल ने 70 रन की पारी खेली। इसके जवाब में श्रीलंका की टीम 8 विकेट के नुकसान पर 306 रन ही बना सकी। शनाका ने 88 गेंदों में 12 चौकों और 3 छक्कें की मदद से नाबाद 108 रन की पारी खेली। वहीं पथुम निसांका ने 80 गेंदों में 72 रन बनाए, जिसमें उन्होंने 11 चौके जड़े।
भारत के खिलाफ मंगलवार को पहले वनडे में श्रीलंका के कप्तान दसुन शनाका ने नाबाद शतक जड़ा। लेकिन शनाका अपना शतक पूरा नहीं कर पाते अगर आखिरी ओवर में कप्तान रोहित शर्मा और गेंदबाज मोहम्मद शमी नॉन स्ट्राइकर एंड पर रन आउट की अपील वापस नहीं लेते। शमी आखिरी ओवर की चौथी गेंद डालने आ रहे थे लेकिन नॉन स्ट्राइकर छोर पर शनाका को क्रीज से बाहर निकलता हुआ देख उन्होंने गिल्लियां उड़ा दी। जिसके बाद शमी ने हंसते हुए अंपायर की तरफ अपील का ईशारा किया। अंपायर नितिन मेननने इसे थर्ड अंपायर के पास रेफर किया। लेकिन कप्तान रोहित शर्मा बीच में आए और खेलभावना दिखाते हुए उन्होंने शमी से अपील वापस लेने को कहा और उन्होंने वैसा ही किया। जब ये वाकया हुआ तब शनाका अट्ठानवे रन के निजी स्कोर पर थे, इसके बाद श्रीलंकाई कप्तान ने चौका जड़कर अपना शतक पूरा किया। शनाका के खिलाफ अपील वापस लेने के लिए रोहित की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। मैच के बाद रोहित ने शनाका के खिलाफ अपील वापस लेने की वजह भी बताई। गौरतलब है कि भारत ने श्रीलंका को सरसठ रन से हराकर तीन मैच की सीरीज में एक-शून्य की बढ़त हासिल कर ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित पचास ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर तीन सौ तिहत्तर रन बनाए। जिसमें विराट कोहली ने एक सौ तेरह रन, रोहित शर्मा ने तिरासी रन और शुभमन गिल ने सत्तर रन की पारी खेली। इसके जवाब में श्रीलंका की टीम आठ विकेट के नुकसान पर तीन सौ छः रन ही बना सकी। शनाका ने अठासी गेंदों में बारह चौकों और तीन छक्कें की मदद से नाबाद एक सौ आठ रन की पारी खेली। वहीं पथुम निसांका ने अस्सी गेंदों में बहत्तर रन बनाए, जिसमें उन्होंने ग्यारह चौके जड़े।
अधिकारों में विभक्त किया गया है - विश्व की स्थिति, वंशोत्पत्ति, युद्ध के लिये प्रस्थान, युद्ध, लव और कुश की उत्पत्ति, निर्वाण और अनेक भव । तत्पश्चात् विस्तृत विषयसूची दी हुई है । श्रेणिकचिन्ताविधान नामक दूसरे उद्देशक मे राजगृह, राजा श्रेणिक, महावीर, उनका उपदेश और पद्मचरित के संबंध मे राजा श्रेणिक की शंका आदि का वर्णन है । विद्याधरलोकवर्णन मे राजा श्रेणिक गौतम के पास उपस्थित होकर रामचरित के सबध में प्रश्न करते है । गौतम केवली भगवान् के कथन के अनुसार प्रतिपादन करते हैं कि मूढ कवियों का रावण को राक्षस और मांसभक्षी कहना मिथ्या है । इस प्रसग पर ऋषभदेव के चरित का वर्णन करते हुए बताया है कि उस समय कृतयुग मे क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र केवल यही तीन वर्ण विद्यमान थे । यहाॅ विद्याधरों की उत्पत्ति वताई है । चौथे उद्देशक मे लोकस्थिति, भगवान् ऋषभ का उपदेश, बाहुबलि, की दीक्षा, भरत की ऋद्धि और ब्राह्मणों की उत्पत्ति का प्रतिपादन है । पाँचवे उद्देशक मे इक्ष्वाकु, सोम, विद्याधर और हरिवश नाम के चार महावशों की उत्पत्ति तथा अजितनाथ आदि के चरित का कथन है । छठे उद्देशक मे राक्षस एव वानरों की प्रन्या का वर्णन है । वानरवश की उत्पत्ति के संबंध से कहा है कि वानर लोग विद्यावर वश के थे तथा इनकी ध्वजा आदि पर वानर का चिह्न होने के कारण ये विद्याधर वानर कहे जाते थे । सातवें उद्देशक मे दशमुख ( रावण ) की विद्यासाधना के प्रसग मे इन्द्र, लोकपाल और रत्नवा आदि का वृत्तान्त है । रावण का जन्म, उसकी विद्यासाधना आदि का उल्लेख है। रावण की माता ने अपने पुत्र के गले मे उत्तम हार पहनाया, इस हार मे रावण के नौ मुख प्रतिविम्बित होते थे, इसलिये उसका नाम दशमुख रक्खा गया । भीमारण्य मे जाकर दशमुख ने विद्याओं की साधना की । यहाँ अनेक विद्याओं के नाम उल्लिखित है । आठवें उद्देशक मे रावण का मन्दोदरी के साथ विवाह, कुभकर्ण और विभीषण का विवाह, इन्द्रजीत का जन्म, रावण और
अधिकारों में विभक्त किया गया है - विश्व की स्थिति, वंशोत्पत्ति, युद्ध के लिये प्रस्थान, युद्ध, लव और कुश की उत्पत्ति, निर्वाण और अनेक भव । तत्पश्चात् विस्तृत विषयसूची दी हुई है । श्रेणिकचिन्ताविधान नामक दूसरे उद्देशक मे राजगृह, राजा श्रेणिक, महावीर, उनका उपदेश और पद्मचरित के संबंध मे राजा श्रेणिक की शंका आदि का वर्णन है । विद्याधरलोकवर्णन मे राजा श्रेणिक गौतम के पास उपस्थित होकर रामचरित के सबध में प्रश्न करते है । गौतम केवली भगवान् के कथन के अनुसार प्रतिपादन करते हैं कि मूढ कवियों का रावण को राक्षस और मांसभक्षी कहना मिथ्या है । इस प्रसग पर ऋषभदेव के चरित का वर्णन करते हुए बताया है कि उस समय कृतयुग मे क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र केवल यही तीन वर्ण विद्यमान थे । यहाॅ विद्याधरों की उत्पत्ति वताई है । चौथे उद्देशक मे लोकस्थिति, भगवान् ऋषभ का उपदेश, बाहुबलि, की दीक्षा, भरत की ऋद्धि और ब्राह्मणों की उत्पत्ति का प्रतिपादन है । पाँचवे उद्देशक मे इक्ष्वाकु, सोम, विद्याधर और हरिवश नाम के चार महावशों की उत्पत्ति तथा अजितनाथ आदि के चरित का कथन है । छठे उद्देशक मे राक्षस एव वानरों की प्रन्या का वर्णन है । वानरवश की उत्पत्ति के संबंध से कहा है कि वानर लोग विद्यावर वश के थे तथा इनकी ध्वजा आदि पर वानर का चिह्न होने के कारण ये विद्याधर वानर कहे जाते थे । सातवें उद्देशक मे दशमुख की विद्यासाधना के प्रसग मे इन्द्र, लोकपाल और रत्नवा आदि का वृत्तान्त है । रावण का जन्म, उसकी विद्यासाधना आदि का उल्लेख है। रावण की माता ने अपने पुत्र के गले मे उत्तम हार पहनाया, इस हार मे रावण के नौ मुख प्रतिविम्बित होते थे, इसलिये उसका नाम दशमुख रक्खा गया । भीमारण्य मे जाकर दशमुख ने विद्याओं की साधना की । यहाँ अनेक विद्याओं के नाम उल्लिखित है । आठवें उद्देशक मे रावण का मन्दोदरी के साथ विवाह, कुभकर्ण और विभीषण का विवाह, इन्द्रजीत का जन्म, रावण और
SBI ने ट्वीट कर बताया, YONO SBI आपको अपने एटीएम डेबिट कार्ड की सुविधाओं को नियंत्रित करने की अनुमति देता है. आप अपनी आवश्यकता के अनुसार अपने एटीएम डेबिट कार्ड की विभिन्न विशेषताओं को चालू / बंद कर सकते हैं. ये भी पढ़ें- PNB में सेविंग अकाउंट खुलवाने वाले करोड़ों ग्राहकों को लगा झटका! .
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इंटरनेशनल क्रिकेट परिषद ने भारत में खेले जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप 2023 के शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। इस मेगा इवेंट का पहला मुकाबला 5 अक्टूबर को इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड के बीच होना है। वनडे वर्ल्कप में कुल 10 टीमें हिस्सा लेगी औ हर एक टीम 9 मुकाबले खेलेगी। हालांकि सभी 10 टीमों को राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत अपने मुकाबले खेलने होंगे। चलिए जानते है कि राउंड-रॉबिन फॉर्मेट आखिर होता क्या है। आपको बता दें कि आगामी आईसीसी वनडे वर्ल्डकप 2023 राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत खेला जाना है। जहां सभी टीमें 9 मुकाबले खेलेंगी। वहीं इस फॉर्मेट में ग्रुप बनाकर टीम मुकाबले नहीं खेलती है, जबकि सभी 10 टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी औऱ टॉप-4 में रहने वाली टीमें सीधा सेमीफाइनल में क्वालीफाई करेंगी। उसके बाद टॉप-4 टीमों में से अंक तालिका में नबंर-1 टीम को नंबर 4 टीम से भिड़ना होगा, जबकि नंबर-2 टीम को नंबर-3 टीम के बीच भिड़ंत होगी। इस दौरान जो भी टीम जीत दर्ज करेगी। वो फाइनल में प्रवेश करेगी। हालांकि इस फॉर्मेट से सभी टीमों को एक दूसरे के खिलाफ खेलना पड़ेगा और टॉप-4 में जगह बनाने के लिए कड़ी जंग देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 से पहले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट को पहले भी दो बार खेला जा चुका है। इससे पहले साल 1992 में खेला गया था। हालांकि इस फॉर्मेट के तहत क्रिकेट इतिहास में पहली बार खेला गया था। वहीं इस दौरान टीम इंडिया टॉप-4 में अपनी जगह पक्की नहीं कर सकी थी। वहीं दूसरा बार वनडे वर्ल्ड में राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत साल 2019 में खेला गया था। वहीं अब तीसरी बार इस फॉर्मेट में खेला जाएगा। टीम इंडिया के लिए राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के आंकड़े ज्यादा अच्छे नहीं हैं। क्योंकि टीम इंडिया ने पिछली दो बार में केवल एक बार टॉप-4 में जगह बनाई थी। बता दें कि साल 1992 में पहले बार इस फॉर्मेट को खेला गया और उस दौरान टीम इंडिया टॉपृ4 में जगह नहीं बना सकी। जबकि साल 2019 में इस फॉर्मेट के तहत दूसरी बार टीम इंडिया ने टॉप-4 में जगह प्राप्त की थी, लेकिन टीम को सेमीफाइनल में न्यूलीजैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
इंटरनेशनल क्रिकेट परिषद ने भारत में खेले जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के शेड्यूल का ऐलान कर दिया है। इस मेगा इवेंट का पहला मुकाबला पाँच अक्टूबर को इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड के बीच होना है। वनडे वर्ल्कप में कुल दस टीमें हिस्सा लेगी औ हर एक टीम नौ मुकाबले खेलेगी। हालांकि सभी दस टीमों को राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत अपने मुकाबले खेलने होंगे। चलिए जानते है कि राउंड-रॉबिन फॉर्मेट आखिर होता क्या है। आपको बता दें कि आगामी आईसीसी वनडे वर्ल्डकप दो हज़ार तेईस राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत खेला जाना है। जहां सभी टीमें नौ मुकाबले खेलेंगी। वहीं इस फॉर्मेट में ग्रुप बनाकर टीम मुकाबले नहीं खेलती है, जबकि सभी दस टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी औऱ टॉप-चार में रहने वाली टीमें सीधा सेमीफाइनल में क्वालीफाई करेंगी। उसके बाद टॉप-चार टीमों में से अंक तालिका में नबंर-एक टीम को नंबर चार टीम से भिड़ना होगा, जबकि नंबर-दो टीम को नंबर-तीन टीम के बीच भिड़ंत होगी। इस दौरान जो भी टीम जीत दर्ज करेगी। वो फाइनल में प्रवेश करेगी। हालांकि इस फॉर्मेट से सभी टीमों को एक दूसरे के खिलाफ खेलना पड़ेगा और टॉप-चार में जगह बनाने के लिए कड़ी जंग देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि आईसीसी वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस से पहले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट को पहले भी दो बार खेला जा चुका है। इससे पहले साल एक हज़ार नौ सौ बानवे में खेला गया था। हालांकि इस फॉर्मेट के तहत क्रिकेट इतिहास में पहली बार खेला गया था। वहीं इस दौरान टीम इंडिया टॉप-चार में अपनी जगह पक्की नहीं कर सकी थी। वहीं दूसरा बार वनडे वर्ल्ड में राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के तहत साल दो हज़ार उन्नीस में खेला गया था। वहीं अब तीसरी बार इस फॉर्मेट में खेला जाएगा। टीम इंडिया के लिए राउंड-रॉबिन फॉर्मेट के आंकड़े ज्यादा अच्छे नहीं हैं। क्योंकि टीम इंडिया ने पिछली दो बार में केवल एक बार टॉप-चार में जगह बनाई थी। बता दें कि साल एक हज़ार नौ सौ बानवे में पहले बार इस फॉर्मेट को खेला गया और उस दौरान टीम इंडिया टॉपृचार में जगह नहीं बना सकी। जबकि साल दो हज़ार उन्नीस में इस फॉर्मेट के तहत दूसरी बार टीम इंडिया ने टॉप-चार में जगह प्राप्त की थी, लेकिन टीम को सेमीफाइनल में न्यूलीजैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
केन्द्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन तथा शहरी विकास मंत्री श्री वेंकैया नायडू ने आज 'शहरी शासन में गिरावट' पर गहरी चिंता जताते हुए राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को आगाह किया कि वे इस क्षेत्र में उभर रही चुनौतियों से कड़ाई से निपटे। वह आज यहां राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शहरी बेघर लोगों को छत प्रदान करने से संबंधित समस्याओं पर चर्चा करने की बात कही। श्री नायडू ने 'जनता केंद्रित शहरी योजना' की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को हर शहर का पूर्ण विवरण, राजस्व, व्यय जमीन की उपलब्धता, पानी और ऊर्जा की योजनाएं जो प्रस्तावित हो या लागू हो, संसाधन की जरूरत, कर संरचना और प्रस्तावित प्रोत्साहन जो कि लोगों को शहरी विकास में शामिल कर सके, पर श्वेत पत्र निकालें। 'बेहतरीन निगम प्रशासन' की जरूरत पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा कि इसके लिए विशेष निगम कैडर बनाना होंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निगम प्रशासन को एक विशेष तंत्र बनाना चाहिए जैसे कि भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि अगला वर्ष देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत ही क्रूर साबित हो सकता है क्योंकि इस दौरान बेहतर शहरी शासन को सुदृढ़ करना होगा क्योंकि 75 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद शहरों से ही आते है। इसे ध्यान में रखते हुए शहरी शासन को संस्थागत तौर पर मजबूत करना होगा। इसके अलावा शासकीय बदलाव, शहरी स्थानीय निकायों को ज्यादा कारगर बनाने के लिए ज्यादा शक्तियां देनी होगी। शहरी शासन स्मार्ट और असरकारक बने इसके लिए ये कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, नए शहरों के विकास के लिए भारी मात्रा में निजी निवेश की जरूरत है, आवास के मोर्चे पर उत्तरदायी और पारदर्शी निर्णय लेने होंगे। श्री वेंकैया नायडू ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आह्वान किया कि वे जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन योजना को लागू करने में सक्रियता दिखाएं ताकि शहरी आवास विकास लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि केन्द्र सरकार केंद्र प्रायोजित योजनाओं में छूट देगी। मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शहरी एवं आवास विकास की योजना बनाते समय प्रकृति और स्थानीय संस्कृति का विशेष तौर पर ध्यान रखें ताकि शहरी जीवन बेहतर बनाया जा सके। शहरी बेघरों को छत उपलब्ध कराने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय शीघ्र ही न्यायालय में शपथ पत्र दायर करेगा।
केन्द्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन तथा शहरी विकास मंत्री श्री वेंकैया नायडू ने आज 'शहरी शासन में गिरावट' पर गहरी चिंता जताते हुए राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को आगाह किया कि वे इस क्षेत्र में उभर रही चुनौतियों से कड़ाई से निपटे। वह आज यहां राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शहरी बेघर लोगों को छत प्रदान करने से संबंधित समस्याओं पर चर्चा करने की बात कही। श्री नायडू ने 'जनता केंद्रित शहरी योजना' की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को हर शहर का पूर्ण विवरण, राजस्व, व्यय जमीन की उपलब्धता, पानी और ऊर्जा की योजनाएं जो प्रस्तावित हो या लागू हो, संसाधन की जरूरत, कर संरचना और प्रस्तावित प्रोत्साहन जो कि लोगों को शहरी विकास में शामिल कर सके, पर श्वेत पत्र निकालें। 'बेहतरीन निगम प्रशासन' की जरूरत पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा कि इसके लिए विशेष निगम कैडर बनाना होंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निगम प्रशासन को एक विशेष तंत्र बनाना चाहिए जैसे कि भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि अगला वर्ष देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत ही क्रूर साबित हो सकता है क्योंकि इस दौरान बेहतर शहरी शासन को सुदृढ़ करना होगा क्योंकि पचहत्तर फीसदी सकल घरेलू उत्पाद शहरों से ही आते है। इसे ध्यान में रखते हुए शहरी शासन को संस्थागत तौर पर मजबूत करना होगा। इसके अलावा शासकीय बदलाव, शहरी स्थानीय निकायों को ज्यादा कारगर बनाने के लिए ज्यादा शक्तियां देनी होगी। शहरी शासन स्मार्ट और असरकारक बने इसके लिए ये कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, नए शहरों के विकास के लिए भारी मात्रा में निजी निवेश की जरूरत है, आवास के मोर्चे पर उत्तरदायी और पारदर्शी निर्णय लेने होंगे। श्री वेंकैया नायडू ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आह्वान किया कि वे जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन योजना को लागू करने में सक्रियता दिखाएं ताकि शहरी आवास विकास लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि केन्द्र सरकार केंद्र प्रायोजित योजनाओं में छूट देगी। मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शहरी एवं आवास विकास की योजना बनाते समय प्रकृति और स्थानीय संस्कृति का विशेष तौर पर ध्यान रखें ताकि शहरी जीवन बेहतर बनाया जा सके। शहरी बेघरों को छत उपलब्ध कराने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय शीघ्र ही न्यायालय में शपथ पत्र दायर करेगा।
अरुणाचल प्रदेश में असम राइफल्स का एक और जवान शहीद हो गया है। वह शनिवार (3 दिसंबर) को अरुणाचल प्रदेश के खौंसा में हुए हमले में जख्मी हुआ था। कल हुए हमले में कुल 9 जवान जख्मी थे और एक कल ही शहीद हो गया था। रक्षा अधिकारी ने बताया था कि आतंकियों ने लोंगडिंग जिले में वाका के पास असम राइफल के दस्ते पर हमला किया था। डिफेंस पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल चरनतजीत कंवर ने शनिवार को बताया था कि आतंकियों ने 16 असम राइफल्स के दस्ते पर दोपहर पौने दो बजे के करीब हमला किया। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी शहीद का नाम नहीं बताया है। हमले के पीछे किस ग्रुप का नाम है यह भी नहीं बताया गया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार हमले के पीछे एनएससीएन(के) और उल्फा का हाथ है।
अरुणाचल प्रदेश में असम राइफल्स का एक और जवान शहीद हो गया है। वह शनिवार को अरुणाचल प्रदेश के खौंसा में हुए हमले में जख्मी हुआ था। कल हुए हमले में कुल नौ जवान जख्मी थे और एक कल ही शहीद हो गया था। रक्षा अधिकारी ने बताया था कि आतंकियों ने लोंगडिंग जिले में वाका के पास असम राइफल के दस्ते पर हमला किया था। डिफेंस पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल चरनतजीत कंवर ने शनिवार को बताया था कि आतंकियों ने सोलह असम राइफल्स के दस्ते पर दोपहर पौने दो बजे के करीब हमला किया। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी शहीद का नाम नहीं बताया है। हमले के पीछे किस ग्रुप का नाम है यह भी नहीं बताया गया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार हमले के पीछे एनएससीएन और उल्फा का हाथ है।
कल से वेलेंटाइन वीक शुरू होने जा रहा है। वेलेंटाइन वीक की शुरुआत रोज डे से होगी। इस दिन लव कपल्स रेड रोज देकर एक दूसरे को रोज डे विश करते हैं। अगर आप कल किसी को रोज डे पर विश करने के लिए गुलाब का फूल देना चाहते हैं, तो थोड़ी समझदारी से काम लीजिए। कल की बजाय आज ही बाजार में निकलिए। कल रेड रोज के कई गुना दाम भी चुकाने होंगे और रोज की डिमांड भी ज्यादा रहेगी। ऐसे में कहीं आपको किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आज ही खरीद लें कल देने वाला गुलाब। बाजार में मौजूद फूल व्यापारियों की मानें तो इस पूरे वेलेंटाइन वीक गुलाब की कीमत बेहद ज्यादा रहेगी। यह आम दिनों से कई गुना रहेगी। खास तौर पर लाल गुलाब की कीमत और डिमांड दोनों ही बढ़ेगी। माना जा रहा है कि बीस रुपए में मिलने वाला गुलाब इन दिनों पचास से लेकर अस्सी रुपए तक बेचा जा सकता है। गुलाब में भी रेड रोज की डिमांड सबसे ज्यादा रहेगी। जयपुर के फूल व्यापारी विष्णु सैनी ने बताया कि लाल गुलाब की कीमत अभी बीस रुपए है। रोज डे और वेलेंटाइन डे पर इसकी कीमत ज्यादा रहेगी। बाकी दिन इनके मुकाबले कम रहेगी। लाल गुलाब युवा ज्यादा खरीदते हैं। सिंगल गुलाब के अलावा गुलाब का गुलदस्ता भी डिमाडं पर बनाते हैं। उसकी कीमत दो सौ से लेकर हजारों तक पहुंच जाती है। वे कहते हैं कि बीच में प्लास्टिक के गुलाब का ट्रेंड भी चल गया था लेकिन अब फिर से रियल गुलाब का ट्रेंड चल पड़ा है। युवा अपने दोस्तों को रेड गुलाब देते हैं। हांलाकि यह थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन यह नेचुरल होता है। रेड के अलावा पीला और सफेद रंग का गुलाब भी खरीदा और बेचा जाता है। जानकारों की मानें तो रोज डे पर बाजार ने भी खास तैयारियां कर ली है। दुकानों पर कल के लिए आज से ही तैयारी शुरू हो गई है। फ्लोरिस्ट्स की दुकानें सज गई हैं। अब बस देर है सुबह होने की। इसके बाद गुलाब की बिक्री अपने चरम पर देखने को मिल सकती है।
कल से वेलेंटाइन वीक शुरू होने जा रहा है। वेलेंटाइन वीक की शुरुआत रोज डे से होगी। इस दिन लव कपल्स रेड रोज देकर एक दूसरे को रोज डे विश करते हैं। अगर आप कल किसी को रोज डे पर विश करने के लिए गुलाब का फूल देना चाहते हैं, तो थोड़ी समझदारी से काम लीजिए। कल की बजाय आज ही बाजार में निकलिए। कल रेड रोज के कई गुना दाम भी चुकाने होंगे और रोज की डिमांड भी ज्यादा रहेगी। ऐसे में कहीं आपको किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आज ही खरीद लें कल देने वाला गुलाब। बाजार में मौजूद फूल व्यापारियों की मानें तो इस पूरे वेलेंटाइन वीक गुलाब की कीमत बेहद ज्यादा रहेगी। यह आम दिनों से कई गुना रहेगी। खास तौर पर लाल गुलाब की कीमत और डिमांड दोनों ही बढ़ेगी। माना जा रहा है कि बीस रुपए में मिलने वाला गुलाब इन दिनों पचास से लेकर अस्सी रुपए तक बेचा जा सकता है। गुलाब में भी रेड रोज की डिमांड सबसे ज्यादा रहेगी। जयपुर के फूल व्यापारी विष्णु सैनी ने बताया कि लाल गुलाब की कीमत अभी बीस रुपए है। रोज डे और वेलेंटाइन डे पर इसकी कीमत ज्यादा रहेगी। बाकी दिन इनके मुकाबले कम रहेगी। लाल गुलाब युवा ज्यादा खरीदते हैं। सिंगल गुलाब के अलावा गुलाब का गुलदस्ता भी डिमाडं पर बनाते हैं। उसकी कीमत दो सौ से लेकर हजारों तक पहुंच जाती है। वे कहते हैं कि बीच में प्लास्टिक के गुलाब का ट्रेंड भी चल गया था लेकिन अब फिर से रियल गुलाब का ट्रेंड चल पड़ा है। युवा अपने दोस्तों को रेड गुलाब देते हैं। हांलाकि यह थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन यह नेचुरल होता है। रेड के अलावा पीला और सफेद रंग का गुलाब भी खरीदा और बेचा जाता है। जानकारों की मानें तो रोज डे पर बाजार ने भी खास तैयारियां कर ली है। दुकानों पर कल के लिए आज से ही तैयारी शुरू हो गई है। फ्लोरिस्ट्स की दुकानें सज गई हैं। अब बस देर है सुबह होने की। इसके बाद गुलाब की बिक्री अपने चरम पर देखने को मिल सकती है।
Ranchi : वर्तमान में प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है. कई ऐसे शहर हैं, जहां खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल है. भारत के कई शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किये गये हैं. बढ़ते प्रदूषण को रोकने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है. प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक आपदा के प्रबंधन और नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूकता करना होता है. इसके अलावा हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना और बढ़ते प्रदूषण के प्रति समाज में जागरुकता लाना है. दरअसल, राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस भोपाल गैस त्रासदी में मारे गये लोगों की याद में मनाया जाता है. भोपाल की यूसीआईएल फैक्टरी से मिथाइल गैस के हुए रिसाव ने हजारों लोगों की जान ले ली थी. सरकारी आंकड़े के मुताबिक घटना के तुरंत बाद करीब 2259 लोगों की मौत हुई थी. भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण से दुनिया भर में हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत होती है. स्थिति इतनी दयनीय है कि दस में से नौ लोगों को सांस लेने के लिए शुद्ध हवा भी नहीं मिलती. हवा में मौजूद प्रदूषण शरीर में प्रवेश करती हैं और फेंफड़े, मस्तिष्क एवं हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं. चेंम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कुणाल आजवाणी ने कहा कि संसाधनों का शोषण, धुएं के उत्सर्जन में सावधानी पूर्वक योजना की कमी और उत्पादों के तरल अपशिष्ट पर्यावरण में वापस जाकर बढ़ते है. इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर जोखिम का खतरा बना रहता है. किसी भी राज्य के विकास के लिए वहां के औद्योगिक क्षेत्रों की भूमिका सर्वोपरि होती है. लेकिन इसके बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी भी उद्योग के गठन के साथ वहां के पर्यावरण व वातावरण की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया जाये. क्योंकि पर्यावरण के लिए किसी भी खतरे से मानव आबादी को खतरा हो सकताहै.
Ranchi : वर्तमान में प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है. कई ऐसे शहर हैं, जहां खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल है. भारत के कई शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किये गये हैं. बढ़ते प्रदूषण को रोकने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए हर साल राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है. प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक आपदा के प्रबंधन और नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूकता करना होता है. इसके अलावा हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना और बढ़ते प्रदूषण के प्रति समाज में जागरुकता लाना है. दरअसल, राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस भोपाल गैस त्रासदी में मारे गये लोगों की याद में मनाया जाता है. भोपाल की यूसीआईएल फैक्टरी से मिथाइल गैस के हुए रिसाव ने हजारों लोगों की जान ले ली थी. सरकारी आंकड़े के मुताबिक घटना के तुरंत बाद करीब दो हज़ार दो सौ उनसठ लोगों की मौत हुई थी. भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण से दुनिया भर में हर साल करीब सत्तर लाख लोगों की मौत होती है. स्थिति इतनी दयनीय है कि दस में से नौ लोगों को सांस लेने के लिए शुद्ध हवा भी नहीं मिलती. हवा में मौजूद प्रदूषण शरीर में प्रवेश करती हैं और फेंफड़े, मस्तिष्क एवं हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं. चेंम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कुणाल आजवाणी ने कहा कि संसाधनों का शोषण, धुएं के उत्सर्जन में सावधानी पूर्वक योजना की कमी और उत्पादों के तरल अपशिष्ट पर्यावरण में वापस जाकर बढ़ते है. इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर जोखिम का खतरा बना रहता है. किसी भी राज्य के विकास के लिए वहां के औद्योगिक क्षेत्रों की भूमिका सर्वोपरि होती है. लेकिन इसके बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी भी उद्योग के गठन के साथ वहां के पर्यावरण व वातावरण की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया जाये. क्योंकि पर्यावरण के लिए किसी भी खतरे से मानव आबादी को खतरा हो सकताहै.
नई दिल्ली. कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश में सीएम पद के दावेदार के लिए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम सबसे ऊपर सामने आ रहा है. ऐसे में शीला दीक्षित से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यूपी की बहू हूं और मेरे ख्याल से यही काफी है. दीक्षित ने कहा कि मैं अक्सर ससुराल जाती रहती हूं. इससे पहले दीक्षित ने यूपी की सीएम दावेदारी से पल्ला झाड़ लिया था लेकिन उन्होंने इस बार अपनी राय देकर कहीं न कहीं नई भूमिका को स्वीकार करने का फैसला लिया है. जानकारी के अनुसार शीला ने यह भी कहा है कि अगर पार्टी चाहेगी तो मैं लड़ूंगी. शीला दीक्षित ने पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. बता दें कि इससे पहले भी कांग्रेस नेता कमलनाथ के पंजाब प्रभारी के पद से इस्तीफे के बाद शीला दीक्षित को यह जिम्मा सौंपे जाने की बात कही जा रही थी है. लेकिन शीला ने इसके लिए समय मांगा था और बाद में उन्होंने पंजाब में जिम्मेदारी संभालने से मना कर दिया.
नई दिल्ली. कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश में सीएम पद के दावेदार के लिए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम सबसे ऊपर सामने आ रहा है. ऐसे में शीला दीक्षित से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यूपी की बहू हूं और मेरे ख्याल से यही काफी है. दीक्षित ने कहा कि मैं अक्सर ससुराल जाती रहती हूं. इससे पहले दीक्षित ने यूपी की सीएम दावेदारी से पल्ला झाड़ लिया था लेकिन उन्होंने इस बार अपनी राय देकर कहीं न कहीं नई भूमिका को स्वीकार करने का फैसला लिया है. जानकारी के अनुसार शीला ने यह भी कहा है कि अगर पार्टी चाहेगी तो मैं लड़ूंगी. शीला दीक्षित ने पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. बता दें कि इससे पहले भी कांग्रेस नेता कमलनाथ के पंजाब प्रभारी के पद से इस्तीफे के बाद शीला दीक्षित को यह जिम्मा सौंपे जाने की बात कही जा रही थी है. लेकिन शीला ने इसके लिए समय मांगा था और बाद में उन्होंने पंजाब में जिम्मेदारी संभालने से मना कर दिया.
खुलने लगते । एक समय सुंदर युवती होगी। उस समय पिताजो भी युवक होंगे, और फिर प्रयत्न करती कि उस रूप को अपनी सत्ता को वास्तविकता में अवतरित करके उसके महत्त्व को समझती । क्या यह दुःख आज उसी उन्माद का परिणाम · है ? कुछ नहीं । यह सब कुछ नहीं । फिर विचारों के पत्ते काँपने लगते जैसे अँधेरी रात में पेड़ हिल रहा हो । क्या हो रहा है संसार में, कुछ ज्ञात नहीं। यह गाँव है । इतना वैभव है । वह उसकी एकमात्र स्वामिनी होगी। किंतु क्या होगा उस प्रभुत्व का ? न कोई सिर पर स्नेह से, वात्सल्य से हाथ फेरनेवाला है, न कोई प्यार करनेवाला, न ऐसा हो ज आज एक छोटा-सा तिनका होता जिसपर वह सब कुछ न्यौछावर कर देती कि वह एक पहाड़ बन जाये। फिर उसकी शक्ति देखकर लोग काँप उठें और वह शक्तिमान आकर लवंग के चरणों पर 'मा' कहकर सिर टेक दे । उस समय लवग को कितन हर्ष होता, कितना सुख होता किंतु क्या होगा अब ? किसलिए चाहिए इतना स कुछ ! कुछ भी तो करने का उसे अधिकार नहीं । उसी दिन लवंग ने श्रीकृष्ण के अनुपम चित्र को हाथ जोड़ा । पुरुष के उस सौंदर्य ने लवंग के हृद को सांत्वना दी। मस्तिष्क के निम्न स्तर में उस सांत्वना ने उसे कुछ आभा दिखा और परंपरा ने उसे भक्ति का रूप देकर उसे न्यायपूर्ण बना दिया । इस व्यक्ति को अय समाज में कुछ नहीं करना है । वह एक भार है । उसे भं अपने जीवन के लिए कुछ करना है। समाज ने उसे धकेलकर बाहर कर दिया है उसे चाहिए एक शराब जिसके छल में वह अपने जीवन को उखा देनेवालो नीरवत को काट जाये। और लवंग ने उस दिन यही किया ! शरीर को भूख कल्पनाओं से नहीं चुकतो, अतः लवंग का विक्षोभ दिन पर दिन प्रसर होता गया । वह जाकर पिताजी को साट के पास बैठ गई । वे उस समय चैतन्य थे । कराह उठे । लयंग ने ककर कहा - पिताजी । कैसी तबियत है ? पहले से तो अच्छी है ? हमींदार सादव ने सिर हिलाया। वह अधिक बोलना नहीं चाहते। शहर के दोनों टाक्टर अब गाँव में बस गये हैं। पांच-पांच सौ रुपये से कम नहीं फटकारते । लवंग देर तक उनके हाथ को अपने हाथ में लिये बैठी रहो ।
खुलने लगते । एक समय सुंदर युवती होगी। उस समय पिताजो भी युवक होंगे, और फिर प्रयत्न करती कि उस रूप को अपनी सत्ता को वास्तविकता में अवतरित करके उसके महत्त्व को समझती । क्या यह दुःख आज उसी उन्माद का परिणाम · है ? कुछ नहीं । यह सब कुछ नहीं । फिर विचारों के पत्ते काँपने लगते जैसे अँधेरी रात में पेड़ हिल रहा हो । क्या हो रहा है संसार में, कुछ ज्ञात नहीं। यह गाँव है । इतना वैभव है । वह उसकी एकमात्र स्वामिनी होगी। किंतु क्या होगा उस प्रभुत्व का ? न कोई सिर पर स्नेह से, वात्सल्य से हाथ फेरनेवाला है, न कोई प्यार करनेवाला, न ऐसा हो ज आज एक छोटा-सा तिनका होता जिसपर वह सब कुछ न्यौछावर कर देती कि वह एक पहाड़ बन जाये। फिर उसकी शक्ति देखकर लोग काँप उठें और वह शक्तिमान आकर लवंग के चरणों पर 'मा' कहकर सिर टेक दे । उस समय लवग को कितन हर्ष होता, कितना सुख होता किंतु क्या होगा अब ? किसलिए चाहिए इतना स कुछ ! कुछ भी तो करने का उसे अधिकार नहीं । उसी दिन लवंग ने श्रीकृष्ण के अनुपम चित्र को हाथ जोड़ा । पुरुष के उस सौंदर्य ने लवंग के हृद को सांत्वना दी। मस्तिष्क के निम्न स्तर में उस सांत्वना ने उसे कुछ आभा दिखा और परंपरा ने उसे भक्ति का रूप देकर उसे न्यायपूर्ण बना दिया । इस व्यक्ति को अय समाज में कुछ नहीं करना है । वह एक भार है । उसे भं अपने जीवन के लिए कुछ करना है। समाज ने उसे धकेलकर बाहर कर दिया है उसे चाहिए एक शराब जिसके छल में वह अपने जीवन को उखा देनेवालो नीरवत को काट जाये। और लवंग ने उस दिन यही किया ! शरीर को भूख कल्पनाओं से नहीं चुकतो, अतः लवंग का विक्षोभ दिन पर दिन प्रसर होता गया । वह जाकर पिताजी को साट के पास बैठ गई । वे उस समय चैतन्य थे । कराह उठे । लयंग ने ककर कहा - पिताजी । कैसी तबियत है ? पहले से तो अच्छी है ? हमींदार सादव ने सिर हिलाया। वह अधिक बोलना नहीं चाहते। शहर के दोनों टाक्टर अब गाँव में बस गये हैं। पांच-पांच सौ रुपये से कम नहीं फटकारते । लवंग देर तक उनके हाथ को अपने हाथ में लिये बैठी रहो ।
हेल्थ डेस्क। लहसुन का सेवन हमारे स्वास्थ्य के बेहद लाभकारी है। लहसुन में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व, विटामिन सी बड़ी मात्रा में पाया जाता है। साथ ही, कुछ मात्रा में विटामिन बी कॉम्पलेक्स भी इससे मिलता है। दिल संबंधी तंत्र के लिए लहसुन जादुई काम करता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने में यह खास प्रभावकारी है। लहसुन सीने की जकड़न में और सर्दी-जुकाम से राहत देने में असरदार रहता है। यह सीने की अन्य समस्याओं में भी राहत देता है। पशुओं पर किए गए कई प्रयोगों में यह बात सामने आई है कि लहसुन में ट्यूमर-रोधी गुण भी होते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के संदर्भ में चूहों पर हुए प्रयोगों में पाया गया कि उन्हें ताजे लहसुन से अपने कैंसर से लड़ने में मदद मिली। लहसुन का उपयोग नपुंसकता और यौन कमजोरी आदि के इलाज में भी किया जाता है। स्पेन और इटली में पारंपरिक रूप से लहसुन का बड़े स्तर पर आहार में प्रयोग होता रहा है। संभवतः इसी संदर्भ में यह इन देशों में लोकप्रिय हुआ। लहसुन खाने से हाई बीपी में आराम मिलता है। दरअसल लहसुन ब्लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे लोगों को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्ज से आराम मिलेगा। लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है। लहसुन खाने से सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्थमा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस के इलाज में फायदा है। खाली पेट लहसुन की कलियां चबाने से आपका डाइजेशन अच्छा रहता है और भूख भी खुलती है। लहसुन में विटमिन बी 6 प्रचुर मात्रा में होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है। लहसुन का सेवन पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। नियमित रूप से लहसुन का सही मात्रा में सेवन करें, तो तनाव, चिंता, थकान, अनिद्रा आदि से जुड़ी समस्याओं को आप दूर कर सकते हैं। तनाव, थकान और अनिद्रा भी सेक्स लाइफ को काफी प्रभावित करती है। लहसुन के सेवन से यौन इच्छा उत्तेजित होती है। रक्त परिसंचरण सही होने से जननांगों सहित शरीर के सभी हिस्सों में पर्याप्त रक्त की आपूर्ति होती है, जिससे प्रजनन अंगों के स्वस्थ्य में भी वृद्धि होती है। ऐसे में पुरुष अपनी यौन स्वास्थ्य और सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए लहसुन का इस्तेमाल करें।
हेल्थ डेस्क। लहसुन का सेवन हमारे स्वास्थ्य के बेहद लाभकारी है। लहसुन में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व, विटामिन सी बड़ी मात्रा में पाया जाता है। साथ ही, कुछ मात्रा में विटामिन बी कॉम्पलेक्स भी इससे मिलता है। दिल संबंधी तंत्र के लिए लहसुन जादुई काम करता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने में यह खास प्रभावकारी है। लहसुन सीने की जकड़न में और सर्दी-जुकाम से राहत देने में असरदार रहता है। यह सीने की अन्य समस्याओं में भी राहत देता है। पशुओं पर किए गए कई प्रयोगों में यह बात सामने आई है कि लहसुन में ट्यूमर-रोधी गुण भी होते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के संदर्भ में चूहों पर हुए प्रयोगों में पाया गया कि उन्हें ताजे लहसुन से अपने कैंसर से लड़ने में मदद मिली। लहसुन का उपयोग नपुंसकता और यौन कमजोरी आदि के इलाज में भी किया जाता है। स्पेन और इटली में पारंपरिक रूप से लहसुन का बड़े स्तर पर आहार में प्रयोग होता रहा है। संभवतः इसी संदर्भ में यह इन देशों में लोकप्रिय हुआ। लहसुन खाने से हाई बीपी में आराम मिलता है। दरअसल लहसुन ब्लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करने में काफी मददगार है। हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे लोगों को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे डायरिया और कब्ज की रोकथाम में लहसुन बेहद उपयोगी है। पानी उबालकर उसमें लहसुन की कलियां डाल लें। खाली पेट इस पानी को पीने से डायरिया और कब्ज से आराम मिलेगा। लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है। लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है। लहसुन खाने से सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्थमा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस के इलाज में फायदा है। खाली पेट लहसुन की कलियां चबाने से आपका डाइजेशन अच्छा रहता है और भूख भी खुलती है। लहसुन में विटमिन बी छः प्रचुर मात्रा में होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है। लहसुन का सेवन पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। नियमित रूप से लहसुन का सही मात्रा में सेवन करें, तो तनाव, चिंता, थकान, अनिद्रा आदि से जुड़ी समस्याओं को आप दूर कर सकते हैं। तनाव, थकान और अनिद्रा भी सेक्स लाइफ को काफी प्रभावित करती है। लहसुन के सेवन से यौन इच्छा उत्तेजित होती है। रक्त परिसंचरण सही होने से जननांगों सहित शरीर के सभी हिस्सों में पर्याप्त रक्त की आपूर्ति होती है, जिससे प्रजनन अंगों के स्वस्थ्य में भी वृद्धि होती है। ऐसे में पुरुष अपनी यौन स्वास्थ्य और सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए लहसुन का इस्तेमाल करें।
लॉक डाउन 3 में सरकार की तरफ से कई तरह की रियायत दी गई हैं। इन रियायत में अब लोग सड़कों पर आने लगे हैं। ऐसे में राजधानी दिल्ली में तो सरकारी और प्राइवेट दफ्तर भी खोल दिए गए हैं। इसी के साथ दिल्ली सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी वहीं अब पंजाब सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। पंजाब सरकार ने मध्य रात्रि से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यानी अब पंजाब में लोगों को पेट्रोल और डीजल दोनों पर ही ₹2 ज्यादा देने होंगे। बता दे कि देश की अर्थव्यवस्था कोरोनावायरस की वजह से डगमगा गई है। राज्यों की स्थिति ऐसी हो गई है कि उनको कर्मचारियों का वेतन देने तक के लिए सोचना पड़ रहा है। राजधानी दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह तक कह दिया कि पहले दिल्ली में लगभग साढे तीन हजार करोड़ तक का टैक्स वसूला जाता था लेकिन अब 300 करोड़ भी मुश्किल से हो पा रहा है। इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम इतने में वेतन कैसे देंगे। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्यों की अर्थव्यवस्था किस तरीके से गड़बड़ाई हुई है। ऐसे में अब आम जनता पर भी दबाव बढ़ गया है। पेट्रोल की कीमत में दिल्ली से लेकर पंजाब में भी बढ़ोतरी की गई है।
लॉक डाउन तीन में सरकार की तरफ से कई तरह की रियायत दी गई हैं। इन रियायत में अब लोग सड़कों पर आने लगे हैं। ऐसे में राजधानी दिल्ली में तो सरकारी और प्राइवेट दफ्तर भी खोल दिए गए हैं। इसी के साथ दिल्ली सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी वहीं अब पंजाब सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। पंजाब सरकार ने मध्य रात्रि से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यानी अब पंजाब में लोगों को पेट्रोल और डीजल दोनों पर ही दो रुपया ज्यादा देने होंगे। बता दे कि देश की अर्थव्यवस्था कोरोनावायरस की वजह से डगमगा गई है। राज्यों की स्थिति ऐसी हो गई है कि उनको कर्मचारियों का वेतन देने तक के लिए सोचना पड़ रहा है। राजधानी दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह तक कह दिया कि पहले दिल्ली में लगभग साढे तीन हजार करोड़ तक का टैक्स वसूला जाता था लेकिन अब तीन सौ करोड़ भी मुश्किल से हो पा रहा है। इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम इतने में वेतन कैसे देंगे। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्यों की अर्थव्यवस्था किस तरीके से गड़बड़ाई हुई है। ऐसे में अब आम जनता पर भी दबाव बढ़ गया है। पेट्रोल की कीमत में दिल्ली से लेकर पंजाब में भी बढ़ोतरी की गई है।
TAAI का 67वां सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में है. राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. राष्ट्रपति जहां 6 जुलाई को कार्यक्रम में पहुंचेंगे तो वहीं प्रधानमंत्री 7 जुलाई को इसमें पहुंचेंगे. श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे 6-9 जुलाई, 2023 तक राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले टीएएआई (TAAI) के 67वें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. वह प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे और श्रीलंका में उनका स्वागत करेंगे. श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले भी इसमें उपस्थित रहेंगे और टीएएआई (ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के प्रतिनिधि सदस्यों को संबोधित करते हुए उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाएंगे. श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने 7 जुलाई को इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे. इंडियन ट्रैवल कांग्रेस के सभी प्रतिनिधियों के लिए कार्यक्रम समारोह और रात्रिभोज का आयोजन लेमन ट्रीज़, प्रधानमंत्री आवास में किया जा रहा है. जैसे-जैसे कोलंबो में आगामी 67वें टीएएआई सम्मेलन और प्रदर्शनी की तारीख नजदीक आ रही है, एसोसिएशन ने सत्र और वक्ताओं का एक दिलचस्प मिश्रण तैयार किया है, जो सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों को जोड़े रखेगा. 6 से 9 जुलाई, 2023 तक होने वाले इस सम्मेलन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और प्रतिनिधिमंडल में भारत से 500 सदस्य शामिल हैं. टीएएआई अध्यक्ष ज्योति मयाल ने क्या कहा? कन्वेंशन के फोकस के बारे में बात करते हुए टीएएआई अध्यक्ष ज्योति मयाल ने कहा, इस वर्ष कन्वेंशन का फोकस पूरी तरह से भविष्यवादी है. महामारी खत्म हो गई है. अब हमारे लिए आगे बढ़ने का सही समय है. जब हम सीमाओं के पार जाने के बारे में बात कर रहे हैं तो हम देशों की सीमाओं को पार करने का उल्लेख करते हैं क्योंकि पर्यटन को किसी सीमा की आवश्यकता नहीं होती है. उन्होंने आगे कहा कि पर्यटन हर देश में समृद्धि और शांति लाता है और यह एक अत्यधिक आर्थिक संचालित क्षेत्र है, जो हर देश की रीढ़ है. लेकिन टीएएआई में हम सीमाओं से परे जाना चाहेंगे, क्योंकि जीवन में भी आपको अपने सभी विचारों को पार करना होगा. वह आगे कहती हैं कि पर्यटन काफी तेजी से बदल रहा है. लोगों को एक ही तरह की यात्रा में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे नए रोमांच और नए डेस्टिनेशन की तलाश में रहते हैं. हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि विकास कैसे हो सकता है और अपने अतीत में नहीं जीना चाहिए. हमें जीवन को बदलने के लिए मन से परे जाने की जरूरत है. - 'भारत पर्यटन विजन 2047: अनुभवों और कनेक्शनों का एक परिवर्तित परिदृश्य', आसमान की असीम क्षमता, अनुभवात्मक यात्रा - पर्यटन में एक आदर्श बदलाव, NEXTAAI - TAAI सदस्यों की प्रौद्योगिकी पहल, यात्रा में अंतर करना - उद्योग विशेषज्ञों के दृष्टिकोण, सीमाओं को पार करना - एक परिवर्तित विश्व के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना और टीएएआई - आगे की राह. वक्ताओं में अरविंद सिंह (पूर्व सचिव पर्यटन, भारत सरकार), माधवन मेनन (प्रबंध निदेशक, थॉमस कुक इंडिया लिमिटेड), निपुण अग्रवाल (मुख्य वाणिज्यिक एवं परिवर्तन अधिकारी, एयर इंडिया) और के.बी. कचरू (चेयरमैन एमेरिटस और प्रधान सलाहकार - दक्षिण एशिया रेडिसन होटल्स ग्रुप), आशीष गुप्ता (कंसल्टिंग सीईओ, फेथ) और कई अन्य शामिल हैं. सम्मेलन के अंतिम दिन श्रीलंका के पर्यटन और भूमि मंत्री हरिन फर्नांडो का विशेष संबोधन होगा. टीएएआई के उपाध्यक्ष जय भाटिया ने कहा, हमारा सम्मेलन भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक माध्यम के रूप में काम करेगा. बी2बी सत्रों में भाग लेने वाले लगभग 200 श्रीलंकाई पर्यटन स्टेकहोल्डर्स के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि यह आयोजन नेटवर्किंग और मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित करने के लिए एक उपयोगी स्थल होगा. इस तरह की बातचीत भारत से आने वाली और बाहर जाने वाली यात्रा के विकास को बढ़ाने और इसे नए, रोमांचक अनुभव प्रदान करने वाले गंतव्यों की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण है. अंत में ज्योति मयाल कहती हैं, आउटबाउंड यात्रा की अपार संभावनाओं को देखते हुए भारतीय बाजार निस्संदेह विश्व स्तर पर सबसे अधिक मांग वाले बाजारों में से एक बन जाएगा. जैसा कि हम सभी कोलंबो में इकट्ठा होने की तैयारी कर रहे हैं, आइए हम इन रुझानों का पता लगाने, अपनी अंतर्दृष्टि साझा करने और एक ऐसे भविष्य को आकार देने के लिए मिलकर काम करें जहां यात्रा सीमाओं से परे हो और वास्तव में जीवन को बदल दे.
TAAI का सरसठवां सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में है. राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. राष्ट्रपति जहां छः जुलाई को कार्यक्रम में पहुंचेंगे तो वहीं प्रधानमंत्री सात जुलाई को इसमें पहुंचेंगे. श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे छः-नौ जुलाई, दो हज़ार तेईस तक राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले टीएएआई के सरसठवें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. वह प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे और श्रीलंका में उनका स्वागत करेंगे. श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त गोपाल बागले भी इसमें उपस्थित रहेंगे और टीएएआई के प्रतिनिधि सदस्यों को संबोधित करते हुए उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाएंगे. श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने सात जुलाई को इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे. इंडियन ट्रैवल कांग्रेस के सभी प्रतिनिधियों के लिए कार्यक्रम समारोह और रात्रिभोज का आयोजन लेमन ट्रीज़, प्रधानमंत्री आवास में किया जा रहा है. जैसे-जैसे कोलंबो में आगामी सरसठवें टीएएआई सम्मेलन और प्रदर्शनी की तारीख नजदीक आ रही है, एसोसिएशन ने सत्र और वक्ताओं का एक दिलचस्प मिश्रण तैयार किया है, जो सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों को जोड़े रखेगा. छः से नौ जुलाई, दो हज़ार तेईस तक होने वाले इस सम्मेलन को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और प्रतिनिधिमंडल में भारत से पाँच सौ सदस्य शामिल हैं. टीएएआई अध्यक्ष ज्योति मयाल ने क्या कहा? कन्वेंशन के फोकस के बारे में बात करते हुए टीएएआई अध्यक्ष ज्योति मयाल ने कहा, इस वर्ष कन्वेंशन का फोकस पूरी तरह से भविष्यवादी है. महामारी खत्म हो गई है. अब हमारे लिए आगे बढ़ने का सही समय है. जब हम सीमाओं के पार जाने के बारे में बात कर रहे हैं तो हम देशों की सीमाओं को पार करने का उल्लेख करते हैं क्योंकि पर्यटन को किसी सीमा की आवश्यकता नहीं होती है. उन्होंने आगे कहा कि पर्यटन हर देश में समृद्धि और शांति लाता है और यह एक अत्यधिक आर्थिक संचालित क्षेत्र है, जो हर देश की रीढ़ है. लेकिन टीएएआई में हम सीमाओं से परे जाना चाहेंगे, क्योंकि जीवन में भी आपको अपने सभी विचारों को पार करना होगा. वह आगे कहती हैं कि पर्यटन काफी तेजी से बदल रहा है. लोगों को एक ही तरह की यात्रा में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे नए रोमांच और नए डेस्टिनेशन की तलाश में रहते हैं. हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि विकास कैसे हो सकता है और अपने अतीत में नहीं जीना चाहिए. हमें जीवन को बदलने के लिए मन से परे जाने की जरूरत है. - 'भारत पर्यटन विजन दो हज़ार सैंतालीस: अनुभवों और कनेक्शनों का एक परिवर्तित परिदृश्य', आसमान की असीम क्षमता, अनुभवात्मक यात्रा - पर्यटन में एक आदर्श बदलाव, NEXTAAI - TAAI सदस्यों की प्रौद्योगिकी पहल, यात्रा में अंतर करना - उद्योग विशेषज्ञों के दृष्टिकोण, सीमाओं को पार करना - एक परिवर्तित विश्व के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना और टीएएआई - आगे की राह. वक्ताओं में अरविंद सिंह , माधवन मेनन , निपुण अग्रवाल और के.बी. कचरू , आशीष गुप्ता और कई अन्य शामिल हैं. सम्मेलन के अंतिम दिन श्रीलंका के पर्यटन और भूमि मंत्री हरिन फर्नांडो का विशेष संबोधन होगा. टीएएआई के उपाध्यक्ष जय भाटिया ने कहा, हमारा सम्मेलन भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक माध्यम के रूप में काम करेगा. बीदोबी सत्रों में भाग लेने वाले लगभग दो सौ श्रीलंकाई पर्यटन स्टेकहोल्डर्स के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि यह आयोजन नेटवर्किंग और मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित करने के लिए एक उपयोगी स्थल होगा. इस तरह की बातचीत भारत से आने वाली और बाहर जाने वाली यात्रा के विकास को बढ़ाने और इसे नए, रोमांचक अनुभव प्रदान करने वाले गंतव्यों की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण है. अंत में ज्योति मयाल कहती हैं, आउटबाउंड यात्रा की अपार संभावनाओं को देखते हुए भारतीय बाजार निस्संदेह विश्व स्तर पर सबसे अधिक मांग वाले बाजारों में से एक बन जाएगा. जैसा कि हम सभी कोलंबो में इकट्ठा होने की तैयारी कर रहे हैं, आइए हम इन रुझानों का पता लगाने, अपनी अंतर्दृष्टि साझा करने और एक ऐसे भविष्य को आकार देने के लिए मिलकर काम करें जहां यात्रा सीमाओं से परे हो और वास्तव में जीवन को बदल दे.
लिफाफा लिफाफा पते की खिड़की के साथलिफाफा एक संवेष्ठ (पैकेजिंग) उत्पाद है, जिसको आमतौर पर कागज या गत्ते जैसी सामग्री से बनाया जाता है। इसका प्रयोग चपटी या सपाट वस्तु के संवेष्ठन के लिए किया जाता है, डाक सेवा के संदर्भ में यह वस्तु, एक पत्र, कार्ड या बिल हो सकती है। पारंपरिक प्रकार के लिफाफे एक कागज की चादर को निम्न तीन आकारों में से किसी एक में काट कर बनाया जा सकता हैः समचतुर्भुज (इसे विषमकोण या हीरे का आकार भी कहा जाता है) शॉर्ट-आर्म क्रास और पतंग। यह डिजाइन सुनिश्चित करते हैं कि लिफाफा को बनाते समय जब कटाई के पश्चात कागज को चारों ओर से मोड़ा जाता है तब सामने की ओर एक आयताकार पक्ष तथा दूसरी ओर चार त्रिभुजाकार (या आयताकार) बाहु प्राप्त होती हैं। आमने सामने की बाहु सममित होती हैं। इनमें से तीन बाहुओं को आपस में चिपका कर लिफाफा बनाया जाता है। चौथी बाहु लिफाफे मे पत्र या कार्ड आदि डालने के पश्चात बाकी तीन बाहुओं के ऊपर चिपका दी जाती है या उसे यूं ही छोड़ दिया जाता है। 1876 में विलियम इरविन मार्टिन ने लेखन सामग्री विक्रेता की पुस्तिका प्रकाशित की। वो न्यूयॉर्क में सैमुएल रेनर एंड कंपनी के लिए काम किया करते थे। उन्होने लिफाफों के लिए पहली बार वाणिज्यिक आकारों का सृजन किया और उन्हें 0 से 12 क्रमांक के आधार पर वर्गीकृत किया। . 5 संबंधोंः डाक टिकट, पोस्टकार्ड, लाल लिफ़ाफ़ा, हवाई पत्र, काग़ज़ का आकार। पेनी ब्लैक, विश्व की पहली डाक टिकटडाक टिकट चिपकने वाले कागज से बना एक साक्ष्य है जो यह दर्शाता है कि, डाक सेवाओं के शुल्क का भुगतान हो चुका है। आम तौर पर यह एक छोटा आयताकार कागज का टुकड़ा होता है जो एक लिफाफे पर चिपका रहता है, यह यह दर्शाता है कि प्रेषक ने प्राप्तकर्ता को सुपुर्दगी के लिए डाक सेवाओं का पूरी तरह से या आंशिक रूप से भुगतान किया है। डाक टिकट, डाक भुगतान करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है; इसके अलावा इसके विकल्प हैं, पूर्व प्रदत्त-डाक लिफाफे, पोस्टकार्ड, हवाई पत्र आदि। डाक टिकटों को डाक घर से खरीदा जा सकता है। डाक टिकटों के संग्रह को डाक टिकट संग्रह या फिलेटली कहा जाता है। डाक टिकट इकट्ठा करना एक शौक है। . १८९० में प्रयुक्त एक ब्रिटिश पोस्टल कार्डपोस्टकार्ड एक मोटे कागज या पतले गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, साथ ही इसे बिना किसी लिफाफे में बंद किये, डाक द्वारा भेजा भी जा सकता है। अधिकतर देशों में इसका शुल्क एक लिफाफे के (जिस पर डाक टिकट चिपकाई गयी हो) द्वारा भेजे गये एक पत्र की तुलना में कम होता है। पोस्टकार्ड का आविष्कार ऑस्ट्रिया में १८६९ को हुआ था। आस्ट्रिया में यह इतना लोकप्रिय हुआ कि इसकी देखा देखी अन्य देशों ने भी इसे अपनाने में देरी नहीं की। ब्रिटेन ने १८७२ में अपना पहला पोस्टकार्ड जारी किया तो भारत का पहला पोस्टकार्ड 1879 में जारी किया गया। भारत के पहले पोस्टकार्ड की कीमत तीन पैसे रखी गयी थी। साल की पहली तीन तिमाही में ही लगभग 7.5 लाख रुपए के पोस्टकार्ड बेचे गए थे। पहला चित्रित पोस्टकार्ड फ्रांस ने 1889 में जारी किया था और इस पर एफिल टॉवर अंकित था। पोस्टकार्डों के संग्रहण और अध्ययन को अंग्रेजी में डेल्टियोलॉजी कहते हैं। . लाल लिफ़ाफ़ा (अंग्रेज़ीः Red envelope, चीनीः 红包, कैंटोनी उच्चारणः लाइ सी, मैंडारिन उच्चारणः होंगबाओ) चीन और अन्य पूर्वी एशियाई व दक्षिणपूर्व एशियाई संस्कृतियों में त्यौहारों, जन्मदिनों, शादियों व अन्य विशेष दिनों पर दिए जाने वाले पैसे के उपहार को कहते हैं। यह पैसा अक्सर लाल रंग के लिफ़ाफ़ों में दिया जाता है। सन् २०१४ में "वी चैट" नामक मोबाइल ऐप्प ने पैसे भेजने की एक प्रणाली बनाई जिसमें पैसा मिलने वाले को लाल लिफ़ाफ़ा दिखता था और फिर उसमें से पैसे मिलते थे। . हवाई पत्र या ऐरोग्राम पतले कागज से बने उस कागज के टुकड़े को कहते है जिसका प्रयोग पत्र लिखने और फिर उसे हवाईडाक द्वारा भेजने में किया जाता है। इसके किनारों पर गोंद लगा रहता है ताकि पत्र लिखने के बाद इसे निश्चित मोड़ों से मोड़ कर चिपकाया जा सके। यह एक पत्र और लिफाफे का संगम है और इसके लिए किसी अतिरिक्त लिफाफे की आवश्यकता नहीं होती। इन पत्रों पर डाक टिकट अंकित होती हैं और अलग से टिकट चिपकाने की आवश्यकता नहीं होती। अधिकतर डाक सेवायें इन हल्के भार के पत्रों में किसी भी प्रकार की अन्य सामग्री रख कर भेजने की अनुमति नहीं देतीं, क्योंकि इन्हें अक्सर विदेश में एक विशेष दर पर भेजा जाता है। . A आकार का चार्ट, आईएसओ A श्रृंखला और अमेरिकी लेटर तथा लीगल फौर्मेट्स के साथ तुलना को दर्शाता हुआ। अलग-अलग समय पर और विभिन्न देशों में कागज के कई मानक आकार दिए गए हैं, लेकिन आज एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय आईएसओ मानक (जिसमें A4 और इसके आसपास के आकार शामिल हैं) और उत्तरी अमेरिका में इस्तेमाल किये जाने वाले एक स्थानीय मानक का प्रयोग किया जाता है। .
लिफाफा लिफाफा पते की खिड़की के साथलिफाफा एक संवेष्ठ उत्पाद है, जिसको आमतौर पर कागज या गत्ते जैसी सामग्री से बनाया जाता है। इसका प्रयोग चपटी या सपाट वस्तु के संवेष्ठन के लिए किया जाता है, डाक सेवा के संदर्भ में यह वस्तु, एक पत्र, कार्ड या बिल हो सकती है। पारंपरिक प्रकार के लिफाफे एक कागज की चादर को निम्न तीन आकारों में से किसी एक में काट कर बनाया जा सकता हैः समचतुर्भुज शॉर्ट-आर्म क्रास और पतंग। यह डिजाइन सुनिश्चित करते हैं कि लिफाफा को बनाते समय जब कटाई के पश्चात कागज को चारों ओर से मोड़ा जाता है तब सामने की ओर एक आयताकार पक्ष तथा दूसरी ओर चार त्रिभुजाकार बाहु प्राप्त होती हैं। आमने सामने की बाहु सममित होती हैं। इनमें से तीन बाहुओं को आपस में चिपका कर लिफाफा बनाया जाता है। चौथी बाहु लिफाफे मे पत्र या कार्ड आदि डालने के पश्चात बाकी तीन बाहुओं के ऊपर चिपका दी जाती है या उसे यूं ही छोड़ दिया जाता है। एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में विलियम इरविन मार्टिन ने लेखन सामग्री विक्रेता की पुस्तिका प्रकाशित की। वो न्यूयॉर्क में सैमुएल रेनर एंड कंपनी के लिए काम किया करते थे। उन्होने लिफाफों के लिए पहली बार वाणिज्यिक आकारों का सृजन किया और उन्हें शून्य से बारह क्रमांक के आधार पर वर्गीकृत किया। . पाँच संबंधोंः डाक टिकट, पोस्टकार्ड, लाल लिफ़ाफ़ा, हवाई पत्र, काग़ज़ का आकार। पेनी ब्लैक, विश्व की पहली डाक टिकटडाक टिकट चिपकने वाले कागज से बना एक साक्ष्य है जो यह दर्शाता है कि, डाक सेवाओं के शुल्क का भुगतान हो चुका है। आम तौर पर यह एक छोटा आयताकार कागज का टुकड़ा होता है जो एक लिफाफे पर चिपका रहता है, यह यह दर्शाता है कि प्रेषक ने प्राप्तकर्ता को सुपुर्दगी के लिए डाक सेवाओं का पूरी तरह से या आंशिक रूप से भुगतान किया है। डाक टिकट, डाक भुगतान करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है; इसके अलावा इसके विकल्प हैं, पूर्व प्रदत्त-डाक लिफाफे, पोस्टकार्ड, हवाई पत्र आदि। डाक टिकटों को डाक घर से खरीदा जा सकता है। डाक टिकटों के संग्रह को डाक टिकट संग्रह या फिलेटली कहा जाता है। डाक टिकट इकट्ठा करना एक शौक है। . एक हज़ार आठ सौ नब्बे में प्रयुक्त एक ब्रिटिश पोस्टल कार्डपोस्टकार्ड एक मोटे कागज या पतले गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, साथ ही इसे बिना किसी लिफाफे में बंद किये, डाक द्वारा भेजा भी जा सकता है। अधिकतर देशों में इसका शुल्क एक लिफाफे के द्वारा भेजे गये एक पत्र की तुलना में कम होता है। पोस्टकार्ड का आविष्कार ऑस्ट्रिया में एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर को हुआ था। आस्ट्रिया में यह इतना लोकप्रिय हुआ कि इसकी देखा देखी अन्य देशों ने भी इसे अपनाने में देरी नहीं की। ब्रिटेन ने एक हज़ार आठ सौ बहत्तर में अपना पहला पोस्टकार्ड जारी किया तो भारत का पहला पोस्टकार्ड एक हज़ार आठ सौ उन्यासी में जारी किया गया। भारत के पहले पोस्टकार्ड की कीमत तीन पैसे रखी गयी थी। साल की पहली तीन तिमाही में ही लगभग सात.पाँच लाख रुपए के पोस्टकार्ड बेचे गए थे। पहला चित्रित पोस्टकार्ड फ्रांस ने एक हज़ार आठ सौ नवासी में जारी किया था और इस पर एफिल टॉवर अंकित था। पोस्टकार्डों के संग्रहण और अध्ययन को अंग्रेजी में डेल्टियोलॉजी कहते हैं। . लाल लिफ़ाफ़ा चीन और अन्य पूर्वी एशियाई व दक्षिणपूर्व एशियाई संस्कृतियों में त्यौहारों, जन्मदिनों, शादियों व अन्य विशेष दिनों पर दिए जाने वाले पैसे के उपहार को कहते हैं। यह पैसा अक्सर लाल रंग के लिफ़ाफ़ों में दिया जाता है। सन् दो हज़ार चौदह में "वी चैट" नामक मोबाइल ऐप्प ने पैसे भेजने की एक प्रणाली बनाई जिसमें पैसा मिलने वाले को लाल लिफ़ाफ़ा दिखता था और फिर उसमें से पैसे मिलते थे। . हवाई पत्र या ऐरोग्राम पतले कागज से बने उस कागज के टुकड़े को कहते है जिसका प्रयोग पत्र लिखने और फिर उसे हवाईडाक द्वारा भेजने में किया जाता है। इसके किनारों पर गोंद लगा रहता है ताकि पत्र लिखने के बाद इसे निश्चित मोड़ों से मोड़ कर चिपकाया जा सके। यह एक पत्र और लिफाफे का संगम है और इसके लिए किसी अतिरिक्त लिफाफे की आवश्यकता नहीं होती। इन पत्रों पर डाक टिकट अंकित होती हैं और अलग से टिकट चिपकाने की आवश्यकता नहीं होती। अधिकतर डाक सेवायें इन हल्के भार के पत्रों में किसी भी प्रकार की अन्य सामग्री रख कर भेजने की अनुमति नहीं देतीं, क्योंकि इन्हें अक्सर विदेश में एक विशेष दर पर भेजा जाता है। . A आकार का चार्ट, आईएसओ A श्रृंखला और अमेरिकी लेटर तथा लीगल फौर्मेट्स के साथ तुलना को दर्शाता हुआ। अलग-अलग समय पर और विभिन्न देशों में कागज के कई मानक आकार दिए गए हैं, लेकिन आज एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय आईएसओ मानक और उत्तरी अमेरिका में इस्तेमाल किये जाने वाले एक स्थानीय मानक का प्रयोग किया जाता है। .
लीड रिसर्चर पारियो माओरा के मुताबिक इस स्टडी का ध्यान इस बात पर है कि ये प्रजातियां कहां हैं और क्या हैं? उनका कहना है कि प्रजातियों को बचाने की कवायद में ऐसी प्रजातियां छूट जाती हैं जिन्हें पहचाना ही नहीं गया। वॉशिंगटन धरती पर अभी तक नहीं खोजे गए जीवन का 80% हिस्सा कहां छिपा है, इसे दिखाने वाला एक मैप तैयार किया गया है। येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की मदद से बनाए गए मैप से नई प्रजातियां खोजने को मिलेंगी। इसके मुताबिक अभी तक सिर्फ 10-20% प्रजातियां ही खोजी गई हैं और इनमें से ज्यादातर ब्राजील, इंडोनेशिया और मैडागास्कर में हैं। टीम का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन की वजह से गायब हुईं प्रजातियों को हमेशा के लिए खत्म होने से पहले खोजने की समय के साथ जंग है। बचाई नहीं जा पा रहीं प्रजातियां स्टडी के सह-रिसर्चर प्रफेसर वॉल्टर जेट्स का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि कई प्रजातियां हमारे उन्हें खोजने से पहले ही खत्म हो जाएंगी। लीड रिसर्चर पारियो माओरा के मुताबिक इस स्टडी का ध्यान इस बात पर है कि ये प्रजातियां कहां हैं और क्या हैं? उनका कहना है कि प्रजातियों को बचाने की कवायद में ऐसी प्रजातियां छूट जाती हैं जिन्हें पहचाना ही नहीं गया। यह अनैलेसिस जगह, भौगौलिक रेंज, ऐतिहासिक खोजों की तारीखों और दूसरे पर्यावरण-बायलॉजिकल फीचर्स पर किया गया। इसमें 32,000 जमीन पर रहने वाले vertebrates शामिल किए गए। बड़े जानवर खोजे गए, छोटे गायब इसकी मदद से रिसर्चर समझ सकेंगे कि अभी और किन प्रजातियों को खोजा जा सकता है। माना जा रहा है कि अभी यह संख्या 2. 9 लाख प्रजातियां और हो सकती हैं। टीम का अनुमान है कि बड़े जानवरों को खोजा जा चुका है लेकिन छोटे जानवरों को खोजना मुश्किल रहा है। यह भी समझा जा रहा है कि इन्हें खोजने और पहचानने वाले वैज्ञानिक अलग तरह से दुनिया में फैले हुए हैं। इसका असर भी खोज पर है। आने वाले सालों में इस मैप में और ज्यादा पौधे, जलीय जीव और बिना रीढ़ के जीवों को शामिल किए जाने की योजना है।
लीड रिसर्चर पारियो माओरा के मुताबिक इस स्टडी का ध्यान इस बात पर है कि ये प्रजातियां कहां हैं और क्या हैं? उनका कहना है कि प्रजातियों को बचाने की कवायद में ऐसी प्रजातियां छूट जाती हैं जिन्हें पहचाना ही नहीं गया। वॉशिंगटन धरती पर अभी तक नहीं खोजे गए जीवन का अस्सी% हिस्सा कहां छिपा है, इसे दिखाने वाला एक मैप तैयार किया गया है। येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की मदद से बनाए गए मैप से नई प्रजातियां खोजने को मिलेंगी। इसके मुताबिक अभी तक सिर्फ दस-बीस% प्रजातियां ही खोजी गई हैं और इनमें से ज्यादातर ब्राजील, इंडोनेशिया और मैडागास्कर में हैं। टीम का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन की वजह से गायब हुईं प्रजातियों को हमेशा के लिए खत्म होने से पहले खोजने की समय के साथ जंग है। बचाई नहीं जा पा रहीं प्रजातियां स्टडी के सह-रिसर्चर प्रफेसर वॉल्टर जेट्स का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि कई प्रजातियां हमारे उन्हें खोजने से पहले ही खत्म हो जाएंगी। लीड रिसर्चर पारियो माओरा के मुताबिक इस स्टडी का ध्यान इस बात पर है कि ये प्रजातियां कहां हैं और क्या हैं? उनका कहना है कि प्रजातियों को बचाने की कवायद में ऐसी प्रजातियां छूट जाती हैं जिन्हें पहचाना ही नहीं गया। यह अनैलेसिस जगह, भौगौलिक रेंज, ऐतिहासिक खोजों की तारीखों और दूसरे पर्यावरण-बायलॉजिकल फीचर्स पर किया गया। इसमें बत्तीस,शून्य जमीन पर रहने वाले vertebrates शामिल किए गए। बड़े जानवर खोजे गए, छोटे गायब इसकी मदद से रिसर्चर समझ सकेंगे कि अभी और किन प्रजातियों को खोजा जा सकता है। माना जा रहा है कि अभी यह संख्या दो. नौ लाख प्रजातियां और हो सकती हैं। टीम का अनुमान है कि बड़े जानवरों को खोजा जा चुका है लेकिन छोटे जानवरों को खोजना मुश्किल रहा है। यह भी समझा जा रहा है कि इन्हें खोजने और पहचानने वाले वैज्ञानिक अलग तरह से दुनिया में फैले हुए हैं। इसका असर भी खोज पर है। आने वाले सालों में इस मैप में और ज्यादा पौधे, जलीय जीव और बिना रीढ़ के जीवों को शामिल किए जाने की योजना है।
मुम्बई। इंडियन प्रीमियर लीग आईपीएल का 11 वां शनिवार से शुरु हो रहा है। इस बार आईपीएल कुछ बदलावों के साथ शुरु हो रहा है। इसमें दो साल के बाद चेन्नई और राजस्थान टीमों की वापसी हो रही है। इस बार अंपायरिंग की डीआरएस प्रणाली भी इसमें पहली बार लागू की जा रही है। आईपीएल में इस बार स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर नजर नहीं आयेंगे। इस सीजन का पहला मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई और चेन्नई के बीच रात 8 बजे से शुरू होगा। गत चैंपियन मुंबई की टीम फिर से पुराना प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेगी, वहीं दो साल बाद वापसी कर रही चेन्नई जीत के साथ टूर्नामेंट का आगाज करना चाहेगी। आईपीएल का फाइनल भी मुंबई के इसी स्टेडियम में होगा। इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने के लिए किसी भी टीम को प्लेऑफ में पहुंचना पड़ेगा। आईपीएल में कुल 8 टीमों में से 4 टीमें ही प्ले ऑफ में पहुंच पाएंगी। इस बार इन टीमों का पलड़ा रहेगा भारी। आईपीएल में मुंबई की टीम सबसे ज्यादा सफल टीम रही है। इस टीम ने अब तक 3 बार खिताब जीते हैं। टीम की कमान इस बार भी रोहित शर्मा के ही हाथ में है। सभी टीमों को देखें तो हम पाएंगे कि आईपीएल में जिस तरह के विस्फोटक खिलाड़ी चाहिए वह सभी मुंबई इंडियंस के पास हैं। बल्लेबाजी : कप्तान रोहित शर्मा के साथ ही टीम में कीरोन पोलार्ड, जेपी ड्यूमिनी जैसे बल्लेबाज हैं। ऑलराउंडर : टीम के पास हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या हैं। ये दोनों भाई आईपीएल में शानदार प्रर्दशन के लिए जाने जाते हैं। गेंदबाजी : गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के अलावा अकिला धनंजय और युवा अनुकूल रॉय भी दूसरी टीमों को परेशान कर सकते हैं। इसके अलावा स्पिन में ड्यूमिनी और क्रुणाल रहेंगे। कप्तान विराट कोहली ही इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। विराट ने पहले ही कहा है कि उनका लक्ष्य अपनी टीम को खिताब जिताना है। इसके प्लेऑफ में पहुंचने की काफी उम्मीदें हैं। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली इस टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। करीब चार सप्ताह के आराम के बाद वह मैदान में वापसी के लिए तैयार हैं। विराट के अलावा टीम के पास कई ऐसे बल्लेबाज हैं, जो अपनी टीम को पहली बार ये खिताब दिला सकते हैं। इसमें एबी डिविलियर्स, क्विंटन डिकॉक, कोलिन डि और पार्थिव पटेल ऐसे बल्लेबाज हैं, जो किसी भी टीम के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। बेंगलोर टीम के पास टिम साउदी, उमेश यादव जैसे गेंदबाज हैं वहीं युजवेंद्र चहल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे स्पिनर हैं। दो साल के बैन के बाद चेन्नई की टीम वापस लौटी है। टीम की कमान महेंद्र सिंह धोनी के पास है। उनकी कप्तानी में टीम दो बार आईपीएल का खिताब जीत चुकी है। ऐसे में 11वें संस्करण में भी टीम के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना सबसे ज्यादा है। रविंद्र जडेजा और शेन वॉटसन जैसे हरफनमौला खिलाड़ी चेन्नई सुपर किंग्स की सबसे बड़ी ताकत के रूप में मौजूद हैं. टीम के पास हरभजन सिंह, एंगिडी, इमरात ताहिर और शार्दुल ठाकुर जैसे गेंदबाज हैं, जो टी20 में किसी भी टीम के बल्लेबाजी क्रम को बिखेर सकते हैं। ऐसे में चेन्नई टीम के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना सबसे ज्यादा दिखती है। इस टीम ने अब तक आईपीएल का खिताब नहीं जीता है लेकिन इस बार ये टीम कुछ नया कर सकती है टीम के पास एक बार फिर से गौतम गंभीर जैसे कप्तान हैं वह दो बार कोलकाता की टीम को चैंपियन बना चुके हैं। ऐसे में वह इस टीम के लिए भी इस बार कमाल कर सकते हैं। टीम की सबसे बड़ी ताकत कप्तान गंभीर होंगे। वह आईपीएल में 4 हजार से ज्यादा रन बना चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली के पास कॉलिन मुनरो और ग्लेन मैक्सवेल जैसे धुरंधर बल्लेबाज हैं। श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत भी हैं। युवा सनसनी पृथ्वी शॉ और मनजोत कालरा जैसे खिलाड़ी भी दिल्ली के साथ हैं। दिल्ली की टीम के साथ इस बार दिग्गज गेंदबाज हैं। इसमें टेस्ट क्रिकेट में नंबर वन गेंदबाज कागिसो रबाडा और मोहम्मद शमी शामिल हैं। इसके अलावा ट्रेंट बोल्ट, और क्रिस मौरिस भी टीम के साथ हैं। वहीं स्पिन में अमित मिश्रा टीम के साथ हैं।
मुम्बई। इंडियन प्रीमियर लीग आईपीएल का ग्यारह वां शनिवार से शुरु हो रहा है। इस बार आईपीएल कुछ बदलावों के साथ शुरु हो रहा है। इसमें दो साल के बाद चेन्नई और राजस्थान टीमों की वापसी हो रही है। इस बार अंपायरिंग की डीआरएस प्रणाली भी इसमें पहली बार लागू की जा रही है। आईपीएल में इस बार स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर नजर नहीं आयेंगे। इस सीजन का पहला मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई और चेन्नई के बीच रात आठ बजे से शुरू होगा। गत चैंपियन मुंबई की टीम फिर से पुराना प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेगी, वहीं दो साल बाद वापसी कर रही चेन्नई जीत के साथ टूर्नामेंट का आगाज करना चाहेगी। आईपीएल का फाइनल भी मुंबई के इसी स्टेडियम में होगा। इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने के लिए किसी भी टीम को प्लेऑफ में पहुंचना पड़ेगा। आईपीएल में कुल आठ टीमों में से चार टीमें ही प्ले ऑफ में पहुंच पाएंगी। इस बार इन टीमों का पलड़ा रहेगा भारी। आईपीएल में मुंबई की टीम सबसे ज्यादा सफल टीम रही है। इस टीम ने अब तक तीन बार खिताब जीते हैं। टीम की कमान इस बार भी रोहित शर्मा के ही हाथ में है। सभी टीमों को देखें तो हम पाएंगे कि आईपीएल में जिस तरह के विस्फोटक खिलाड़ी चाहिए वह सभी मुंबई इंडियंस के पास हैं। बल्लेबाजी : कप्तान रोहित शर्मा के साथ ही टीम में कीरोन पोलार्ड, जेपी ड्यूमिनी जैसे बल्लेबाज हैं। ऑलराउंडर : टीम के पास हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या हैं। ये दोनों भाई आईपीएल में शानदार प्रर्दशन के लिए जाने जाते हैं। गेंदबाजी : गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के अलावा अकिला धनंजय और युवा अनुकूल रॉय भी दूसरी टीमों को परेशान कर सकते हैं। इसके अलावा स्पिन में ड्यूमिनी और क्रुणाल रहेंगे। कप्तान विराट कोहली ही इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। विराट ने पहले ही कहा है कि उनका लक्ष्य अपनी टीम को खिताब जिताना है। इसके प्लेऑफ में पहुंचने की काफी उम्मीदें हैं। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली इस टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं। करीब चार सप्ताह के आराम के बाद वह मैदान में वापसी के लिए तैयार हैं। विराट के अलावा टीम के पास कई ऐसे बल्लेबाज हैं, जो अपनी टीम को पहली बार ये खिताब दिला सकते हैं। इसमें एबी डिविलियर्स, क्विंटन डिकॉक, कोलिन डि और पार्थिव पटेल ऐसे बल्लेबाज हैं, जो किसी भी टीम के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। बेंगलोर टीम के पास टिम साउदी, उमेश यादव जैसे गेंदबाज हैं वहीं युजवेंद्र चहल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे स्पिनर हैं। दो साल के बैन के बाद चेन्नई की टीम वापस लौटी है। टीम की कमान महेंद्र सिंह धोनी के पास है। उनकी कप्तानी में टीम दो बार आईपीएल का खिताब जीत चुकी है। ऐसे में ग्यारहवें संस्करण में भी टीम के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना सबसे ज्यादा है। रविंद्र जडेजा और शेन वॉटसन जैसे हरफनमौला खिलाड़ी चेन्नई सुपर किंग्स की सबसे बड़ी ताकत के रूप में मौजूद हैं. टीम के पास हरभजन सिंह, एंगिडी, इमरात ताहिर और शार्दुल ठाकुर जैसे गेंदबाज हैं, जो टीबीस में किसी भी टीम के बल्लेबाजी क्रम को बिखेर सकते हैं। ऐसे में चेन्नई टीम के प्लेऑफ में पहुंचने की संभावना सबसे ज्यादा दिखती है। इस टीम ने अब तक आईपीएल का खिताब नहीं जीता है लेकिन इस बार ये टीम कुछ नया कर सकती है टीम के पास एक बार फिर से गौतम गंभीर जैसे कप्तान हैं वह दो बार कोलकाता की टीम को चैंपियन बना चुके हैं। ऐसे में वह इस टीम के लिए भी इस बार कमाल कर सकते हैं। टीम की सबसे बड़ी ताकत कप्तान गंभीर होंगे। वह आईपीएल में चार हजार से ज्यादा रन बना चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली के पास कॉलिन मुनरो और ग्लेन मैक्सवेल जैसे धुरंधर बल्लेबाज हैं। श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत भी हैं। युवा सनसनी पृथ्वी शॉ और मनजोत कालरा जैसे खिलाड़ी भी दिल्ली के साथ हैं। दिल्ली की टीम के साथ इस बार दिग्गज गेंदबाज हैं। इसमें टेस्ट क्रिकेट में नंबर वन गेंदबाज कागिसो रबाडा और मोहम्मद शमी शामिल हैं। इसके अलावा ट्रेंट बोल्ट, और क्रिस मौरिस भी टीम के साथ हैं। वहीं स्पिन में अमित मिश्रा टीम के साथ हैं।
सच्चे प्रेम और सेवा की मूर्ति ( श्री कपूरचन्द लुहाड़िया ) मेरा बचपन से पूज्य मास्टर साहब से संपर्क रहा। मैंने इनके पास कक्षा ४ से ८ तक अध्ययन किया। इस अध्ययन के पश्चात् भी मेरा उनसे संपर्क बराबर रहा। जब भी मैं उनसे मिलता तब ही मुझको कुछ उपदेश दिया करते थे- उनके उपदेशों का मेरे विचारों तथा जीवन पर भारी असर पड़ा । उनका सब विद्यार्थियों के साथ प्रेम व सेवा का व्यवहार रहता था । जिन विद्यार्थियों की पढ़ाई मास्टर साहब संतोषजनक नहीं समझते थे उनको प्राग्रह के साथ अपने घर पर निःशुल्क पढ़ाया करते थे । पढाई के अतिरिक्त विद्यार्थियों को पाठशाला में ही छुट्टी होने के बाद या घर पर धार्मिक व नैतिक शिक्षा दिया करते थे । प्रत्येक विद्यार्थी को गहन ज्ञान कराने का उनका प्रयत्न रहता था। उन्होंने राज सेवा में रहते हुए ही सन्मति पुस्तकालय की स्थापना की। उस समय उनके पास वेतन के सिवाय कोई आर्थिक साधन नहीं था। इस सीमित साधन से ही उन्होंने पुस्तकालय का शनैः शनैः विस्तार करना प्रारंभ किया । राज्य सेवा से निवृत होने के पश्चात् उन्होंने अपना जीवन श्रात्म चिन्तन व मानव सेवा में ही लगा दिया। घर-घर जाकर धार्मिक व ज्ञानवर्धक कितावें देकर पढ़ने का आग्रह करना व विद्यार्थियों और निःस्सहाय परिवारों को आर्थिक व अन्य प्रकार की सहायता देना ही उनका मुख्य कर्त्तव्य था । वे एक सच्चे प्रेम व सेवा की मूर्ति थे । उन्होंने चारों पुरुषार्थों को साकार रूप दिया ( श्री कबूलचन्द जैन ) स्वर्गीय मास्टर मोतीलाल संघी का जीवन एक आदर्श जीवन था । उन्होंने धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को साकार रूप दिया, जबकि अधिकतर लोग अर्थ और काम के चक्कर में अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। मास्टर साहब ने अपने समय को अर्थ और काम के भंवर से निकाल कर दूसरों को बिना किसी भेद भाव के मार्ग दिखाया और घर जाकर पुस्तके वितरण की तथा वापिस लेते तथा देते रहे। उन्होंने प्रेरणा देकर कौनसी पुस्तक उन्हें पढ़नी चाहिए तथा वह किस पुस्तक के पढ़ने के योग्य हैं, इस बात को भली प्रकार जान कर जनता का अटूट उपकार किया। मैंने स्वयं सन्मति पुस्तकालय से अनेक पुस्तकें प्राप्त करके पढ़ी हैं, जिनके द्वारा मुझे बहुत लाभ हुआ । किन्तु सर्व साधारण लोग बिना किसी मार्गदर्शक के इन पुस्तकों के समुद्र में से चन्द पुस्तकें छांटकर तथा पढकर पूर्ण लाभ नहीं उठा सकते हैं । इसे समझ पाना अति कठिन है। गरीब विद्यार्थियों की मदद की. ( श्री सूरजनारायण सेठी वकील) संघी-मोतीलालजी डिग्री याफ्ता नहीं थे, वे सिर्फ़ मेट्रिक पास थे। मगर गरिणत में खूब प्रवीर थे। मैट्रिक तक के विद्यार्थियों में जो कमी गरिणतः में होती थी उसे वे पूरी करा देते थे । वे गरीबी भोगे हुए विद्यार्थी थे अतः गरीबी की मुसीबतों को जानते थे, इसलिए गरीबी लड़कों को एक घन्टे तक पढ़ाकर सिर्फ १०) रु० माहवार ट्यूशन का लेते थे । इनके सिर्फ एक लड़का व एक लड़की थी । इनकी धर्मपत्नि बहुत जल्दी मर गई थी । लड़की का ब्याह मा. नानूलालजी के भतीजे से किया था । इनकी लड़की भी जल्दी मर गई थी। इसके पश्चात् इनके दामाद ने दूसरा विवाह नहीं किया । वे जयपुर से जाने के पश्चात् गांधीजी की पार्टी में शामिल हो गये व सारी उम्र गान्धी जी के साथ रहे । उनके विचार बड़े शुद्ध थे । वे थोड़े खर्च में अपना जीवन व्यतीत करने. के आदी थे । सर्दी से उनके कानों को ठंड बहुत लगती थी । इसलिए पगड़ी पर ऊनी गुलूबन्द बान्धकर वे रात तक टयूशनों पर जाया करते थे । और एक सप्ताह तक जो नींद में कमी रह जाती उसको रविवार को दिन में सोकर पूरा किया करते थे । मास्टर साहब बहुत दयालु थे । वे गरीब विद्यार्थियों की हर तरह की मदद रुपये आदिव पुस्तकों से देना अपना कर्त्तव्य समझते थे । विद्यार्थियों को पुस्तकों की मदद देने के सिलसिले में उन्होंने श्री सन्मति पुस्तकालय की नींव डाली थी । पास हुए विद्यार्थियों से उनकी पढ़ी हुई पुस्तकें ले लेना और उनको स्टॉक के रूप में पुस्तकालय में जमा करना और जो विद्यार्थी पुस्तकें खरीदने में असमर्थ होते, उन्हें पढ़ने के लिये दे देना और पढ़ाई समाप्त होने पर उनसे वापिस ले लेना और दूसरों को दे देना और इसी रूप में यह पुस्तकालय शुरू में स्थापित किया गया था । गरीब विद्यार्थियों में जिनके पास परीक्षा की फीस देने के लिये नहीं होती थी उनको फीस के लिए स्वयं या किसी के द्वारा सहायता करते थे । मास्टर साहब बड़े विद्या प्रेमी थे । दिगम्बर जैनियों में सन् १९०६ के बाद १६२६ तक कोई B. A. नहीं हुआ, इसका उस समय विद्या प्रेमियों को काफी दुःख हुआ । श्री मालीलाल जी दीवान, श्री अर्जुनलालजी सेठी व स्वयं मैंने विद्या के प्रसार के लिये काफी प्रयत्न किये । मास्टर साहब में सच्चाई थी । बनावट जरा भी न थी । वे घर पर सिर्फ खाना खाने के लिये आते थे, बाकी समय पुस्तकालय में ही व्यतीत करते थे एवं दरी बिछाते थे और सर्दी में एक लिहाफ श्रोढते थे । सादा खाना खाते थे । दूध जरूर पीते थे । सादा वस्त्र धारण करते थे । उनकी तबीयत का झुकाव वैराग्य की ओर था । धर्म की पुस्तकें छपवाने व उनका प्रचार करने में भी काफी मदद देते थे । सर्वार्थ सिद्धि छपवाने में उन्होंने बहुत मदद दी थी । बाबू जुगल किशोर मुखतार ने जो मेरी भावना पुस्तक लिखकर छपवाई उसकी सैकड़ों प्रतियां लोगों में वितरित कीं । यह पुस्तक उन्होंने ठाकुर साहब चौमू को भी भेंट की। उन्होंने इससे प्रभावित होकर करीब ४०० प्रतियां खरीद कर अपने यहां वितरित कराई और यह घोषणा की कि जो व्यक्ति पहिले याद करके मुझे सुनायेगा उसे ५ ) रु० इनाम दिया जायेगा । मास्टर साहब ने कई भजन भी याद कर रखे थे । आत्मा में शक्ति कायम रखने के लिये उन भजनों को भी कभी कभी बोलकर अपनी आत्माः को शांत बनाते थे । सन्मति पुस्तकालय को स्थापित करने के बाद वे पुस्तकों का एक गट्ठा बनाकर घर-घर जाते और लोगों के दिल में किताब पढ़ने का शौक लगाने के लिए किताबें बाँटते तथा पढ़ने के बाद वापिस ले आते थे तथा उनसे पढ़े हुए के बारे में जानकारी प्राप्त करते । • सन्मति पुस्तकालय के लिये पुस्तकों को एकत्रित करने के लिए मास्टर साहब ने आम समाज से चन्दा एकत्रित किया था। इस कार्य में मैं भी उनके साथ रहता था । मास्टर साहब स्वयं समाज के कार्य करते थे तथा दूसरों से भी करवाते थे । मुंशी प्यारेलालजी को सामाजिक कार्यों में सहायता देने का शौक भी उन्होंने दिलाया था । मास्टर साहब जिस किसी बड़े व्यक्ति के पास जाते थे तो मुझे भी वे साथ ले जाते थे । इसलिए मुझे उनके हरएक काम की जानकारी है । चाकसू के चौक में पुस्तकालय के सम्बन्ध में बात यह है कि श्री कपूर. चन्दज़ी काठ ने मास्टर साहब से पुस्तकालय भवन ले लिया था। उस समय इस पर मास्टर साहब को काफी दुःख हुआ था । आदर्श मुनि ( डा० गिरधरलाल अजमेरा ) जयपुर नगर के शिक्षित समुदाय का किसी वर्ग व धर्म का कोई विरला ही व्यक्ति ऐसा होगा जो स्वर्गीय मास्टर साहब को न जानता हो । इस महान आत्मा के परोपकार, उदार हृदय, शिक्षा प्रसार प्रेम को सभी जानते हैं । मेरा सम्पर्क मास्टर साहब से १३ साल उम्र से था । मैं उस समय छठी कक्षा में पढ़ता था । मास्टर साहब ने मुझे पुस्तकालय में बुलाना शुरू किया और जब कभी मैं नहीं जाता तो मेरे पिताजी के पास पत्र लिखा दिया करते थे । वैसे तो उनकी हर बात नसीहत से भरी थी मगर दो-चार बातों का असर मुझ पर जिन्दगी भर पड़ा । दुनियां में सुखी कौन ? एक बार हम चार-पांच बच्चे इनके पास बैठे थे । मास्टर साहब ने हमसे पूछा- बेटा ! बताओ दुनिया में सुखी कौन ? किसी ने कुछ कहा किसी ने कुछ । उन्होंने फरमाया कि दुनिया में सुखी वही है जो मोटा खाये, मोटा पहने । उन्होंने एक दृष्टान्त दिया कि उनके एक मुस्लिम मित्र थे । वे रेल्वे में बुकिंग क्लर्क थे । तनख्वाह २५ ) माहवार थी । घर में वे थे उनकी स्त्री थी और दो बच्चे थे । उनकी स्त्री खुद अपने हाथ से पीसती थी, खाना बनाती थी, बर्तन मांजती थी । ४ प्रारणी इस २५ ) में बहुत सुखी थे। धीरे २ इनकी तरक्की होती गई और आखिर में स्टेशन मास्टर बन गए । उस जमाने में स्टेशन मास्टर को १५० ) मिलते थे । रिश्वत के तौर पर हजार पांचसौ माहवार और आने लगे । जैसे २ तरक्की होती गई उन्होंने अनाब शनाब खर्चे बढ़ा लिए । बंगला, घोड़ा-गाड़ी, नौकर और बच्चों के लिए अलहदा गाड़ी वगैरह होगये । उस जमाने में करीब १५००) माहवार का खर्च बढ़ा लिया। शराब पीने की भी आदत होगई । ऐशो आराम में जिन्दगी काटने लगे। यकायक उन पर रिश्वत का मुकद्दमा कायम होगया । सस्पैंण्ड कर दिए गए और ६ महीने के बाद वे मुकदमा जीत गए मगर पेन्शन होगई । पेन्शन ७५ ) माहवार की हुई । पूरी जिन्दगी बड़े दुख से कटी । एक लड़का भी मर गया । लड़की आवारा हो कर किसी के साथ भाग गई । रह गए दो मियां बीबी । कर्जदार होकर दुःख की जिन्दगी पूरी करके इस संसार से चल बसे । मास्टर साहब फरमाते थे कि जो ४ जीव २५) माहवार में मोटा पहन कर, मोटा खाकर सुखी थे, वे ऐशो इशरत के चक्कर में आकर बहुत दुखी होकर मरे । सबसे ज्यादा कीमती चीज क्या है ? हम से मास्टर साहब ने पूछा- बेटा, दुनियां में सबसे ज्यादा कीमती चीज क्या है ? किसी ने कुछ बताया किसी ने कुछ । मास्टर साहब ने फ़रमाया सबसे ज्यादा कीमती चीज दुनिया में वक्त है । गया हुआ एक मिनट भी फिर इस जिन्दगी में वापस नहीं आता। इस वास्ते एक एक पल मनुष्य को सही उपयोग में लगाना चाहिए और मेहनत की प्रादत डालनी चाहिए । मनसा पाप. ' हम बच्चे लोग सब मिल कर एक दूसरे की बुगई किया करते थे । एक रोज मास्टर साहब ने सुन लिया, बहुत जरूरी काम जा रहे थे मगर करीब आधा घण्टा रुक कर हमको नसीहत की बात सिखाते रहे । असल मकसद मास्टर साहब का यह था कि किसी मनुष्य के प्रति तुम खराब विचार करोगे उसी वक्त मनसा पाप को कर्म तुम पर बंन्ध जावेगा । खराब विचार करने से दूसरे मनुष्य का कुछ नहीं बिगाड़ सकते तो पाप कर्म भी क्यों बांधते हो ? मनसा पाप सबसे बड़ा पाप है । महामना सिद्ध पुरुष ( बसन्तलाल मुकीम) सन्मति पुस्तकालय कहें या मास्टरजी निर्जीव व सजीव एक ही रूप था कहा जाता है एकान्त की साधना साधक को सिद्धि के लिए चाहिए कल्यारण के हेतु । लेकिन मास्टर साहब की साधना जनता के बीच चली, साधक के रूप में । पर कल्याण हेतु और सिद्धियां इस योगी के चरणों में सदैव लोटती रहीं । जनहित की कामनाओं में कंसा समन्वय था, कैसा था यह योग ! कैसी थी यह साधना ! कैसी यह तपस्या इस महर्षि की । जो अपने में एक ज्वलन्त उदाहरण है ! जयपुर नगर को धर्म-तीर्थ बना कर स्वयं धर्म-तीर्थ के स्थापक बन गये । इस महात्मा के लिए हिमालय की कन्दरा में, नदी तालाबों के तट, घने वन-उपवन, सिद्धक्षेत्र, श्रम आदि साधना का क्षेत्र, बड़ा मन्दिर था या वे शिक्षण संस्थाएं थी जहां वे ज्ञान दान देते थे । मैंने दरबार हाई स्कूल में अपने शिक्षण-काल में उन्हें निकट से देखा । मैंने पाया उन्हें अपनी धुन में रमते हुए । धूनी रमाने वाले साधु-सन्यासी आग जला करें ताप सहते हैं । किन्तु उनकी धूनी धुआं रहित अगोचर थी जिसमें प्राग बैठते-उठते, चलते-फिरते थो वे चौबीसों घन्टे लोककल्याण का महामन्त्र जपते हुए साधना रत रहते थे । अपनीधी सादी वेषभूषा में यह निष्काम महान तपस्वी, आचार्य, उपाध्याय, लोक वन्दनीय है क्योंकि उस महापुरुप ने अपने तन, मन और कर्म को किसी जाति विशेष व धर्म विशेष से नहीं जोड़ा । वह सर्व धर्म, सर्व जाति, स्वरूप थे । अनुयायी होने के नाते इन्होंने अपने जीवन दर्शन से बताया कि जैन धर्म किसी एक वर्ग से बंधा नहीं है। यह विश्वधर्म है। पंचपरमेष्टी नमस्कारमन्त्र में किसी विशेष की वन्दना नहीं की है । यह वन्दना सारे विश्व में निहित उस रूप को है जो जहां है । मास्टर साहब का जीवन एक महान वैज्ञानिक के रूप में है जिसने अगोचर को गोचर बनाया अपनी साधना से । मांस्टर साहब की आज गोचर है, नित्य है, प्रेरणादायक है, वन्दनीय है । समाज के कुशल वैद्य ( श्री सन्तोष चन्द्र ) स्व० मास्टर साहब मोतीलाल जी 'सादा जीवन उच्च विचार के आदर्शरूप मूर्तिमान महापुरुष थे । उनका जीवन वास्तव में परोपकार के लिये ही था । उन्होंने अपने जीवन में हजारों विद्यार्थियों एवं सैकड़ों प्रनाथ महिलाओं व बच्चों को गुप्त रूप से स्वयं सहायता पहुंचाने व अन्य धनी-मानी प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रेरणा देकर मदद पहुंचाने के रूप में दोहरे परोपकार का कार्य किया । उनका जोवन ही उनके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को स्वाभाविक रूप से प्रेरणा देने वाला था । उन्होंने अपने जीवन में सबसे महत्वपूर्ण कार्य सन्मति पुस्तकालय जैसी महान संस्था को जन्म देने का किया, जिसके द्वारा अनेक पीढ़ियों तक लाखों व्यक्तियों को सम्यक ज्ञान प्राप्ति का मार्ग मिलता रहेगा, उन्होंने पुस्तकालय में सभी प्रकार के साहित्य का संग्रह किया, लेकिन पाठकों को उनकी योग्यतानुसार पुस्तकें देने का वे विशेष ध्यान रखते थे । जैसे एक कुशल वैद्य अपने औषधालय में सभी प्रकार की प्रौपधियों को रखते हुये भी रोगियों की अवस्था व योग्यता को ध्यान में रख कर ही दवा देता है, उसी प्रकार वे भी छोटे २ बच्चे, युवकों, वृद्धों व महिलाओं को उनकी योग्यतानुसार साहित्य देकर धार्मिक संस्कार डाल कर धर्म रुचि प्रगट करने का तथा अश्लील साहित्य व उपन्यासों के द्वारा नैतिक पतन न होने देने का विशेष ध्यान रखते थे । विद्यार्थियों की सहायता का तो वे विशेषकर ख्याल रखते थे । चाहे वह किसी भी सम्प्रदाय का हो अथवा किसी भी धर्म को मानने वाला हो । उनमें अनुकम्पा का भाव भी उच्च कोटि का था, किसी भी दीन दुःखी प्राणी को देखकर उनका हृदय दया से श्राद्र हो जाता था तथा जब तक वे उसके कष्ट को दूर नहीं कर देते तब तक उनको चैन नहीं पड़ता था । ब्रह्मचर्य ही जीवन है ( श्री घीसीलाल ) मेरी शादी १२ साल खत्म होते ही गई थी। शादी के २-३ साल बाद ही मैं कुसंगति में पड़ गया । सन १९२० में स्वर्गीय श्री मांगीलालजी बोहरा दूदू निवासी ने १५-२० प्रतिष्ठित सज्जनों के समक्ष मेरे सामने ही मेरो बुरी संगति की निन्दा की। मुझे क्षण भर क्रोध आया और वहीं बैठे-बैठे तुरंत मेरे कुकर्मों का दृश्य मेरे सामने आया । यह भी ख्याल आया कि आज तो उन्होंने ही कहा है, अब आगे अगर यही हालत रही तो दुनियां थू केगी। वहां से मैं घर आया, रात को बड़ी देर तक नींद नहीं आई और उसी रात मैंने प्रण कर लिया कि फिर ऐसी संगत नहीं करूंगा और उसके दूसरे ही दिन मैं चौधरी कानूनगो के सरकारी काम को करने के लिए अग्रसर हुआ और मैं उस काम में कुछ अंशों में सफल भी हुआ । जबसे सेटिलमेंट डिपार्टमेंट का नया महकमा जयपुर राज्य में खुला तो पिताजी से यह सुनकर कि अब चौधरी कानूनगो की राज्य सेवा नहीं रहेगी इसलिए सेटिलमेंट डिपार्टमेंट जाकर वहां का काम सीखना चाहिए, मैंने काम सीखकर उस विभाग में नौकरी करली तव मैं जयपुर में ज्यादा रहा । उस जमाने में मेरा यह ख्याल कि । अगरचे पराई स्त्री के त्याग का नियम तो ले चुका हूं मगर मेरी नजर औरतों के सौन्दर्य को देखना नहीं छोड़ती, इसका इलाज मास्टर साहव से पूछू । मैंने मास्टर साहब की सेवा में उपस्थित होकर मेरे मन की बात स्पष्ट निवेदन करदी और उपाय पूछा । मास्टर साहव ने मुझको एक किताब ( ब्रह्मचर्य ही जीवन है, वीर्यनाश ही मृत्यु है) दी और प्रज्ञा दी कि आज ही इसको बहुत ध्यान से पढ़ोगे तो तुम्हें इसका उपाय मिल जाएगा। इसमें एक जगह कथन है कि जब तुम्हारे सामने से कोई स्त्री निकले तो उसको देखो मत और मां का स्मरण करने लगो । फिर कभी तुम्हारे मन में विकार नहीं रहेगा । इस कथन का मेरे मन पर वड़ा प्रभाव पड़ा और मैं अपनी जिन्दगी में इस बीमारी का इलाज इसी तरह करता रहा यह मास्टर साहब की प्रसीम अनुकम्पा का फल है । एक वार में श्री चिमनलालजी बोहरा, तहसीलदार के साथ जलेबी चौक महकमा दीवानी से चलकर बाजार में त्राया । जौहरी वाजार में चौपड़ के पास एक नीम का दरख्त था उसके नीचे तहसीलदार साहव की मास्टर साहब से भेंट हुई । कुशल क्षेम पूछने के बाद मास्टर साहब ने तहसीलदार साहब से पूछा- स्वाध्याय किस ग्रन्थ की करते हैं? तहसील - दार साहब ने जवाब दिया मालपुरा में रहता हूँ तब तो शास्त्र - स्वाध्याय कर लेता हूं, बाहर दौरे में कोई साधन नहीं है । मास्टर साहब ने कहा मैं आपके पास किताबें पहुंचा दूंगा । उनको आप दौरे में साथ ले जावें और ज्ञान वृद्धि करें । उस पर तहसीलदार साहब ने कहा मैं खुद ही आकर किताबें ले जाऊंगा । इतनी बात के बाद दोनों ही अपने अपने काम की तरफ चले गए । शाम को मैं तहसीलदार साहब के साथ ही भोजन कर रहा था कि ३ - ४ किताबें लेकर मास्टर साहब तहसीलदार साहब के मकान पर पहुंचे । हवेली के चौक में खड़े होकर मास्टर साहब ने आवाज दी । मैंने उठकर चौक में देखा तो मास्टर साहब किताबें लिए खड़े थे । मैंने तहसीलदार साहब को यह बात अर्ज की तो तहसीलदार साहब के मन में इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उनकी आंखों में आंसू गए और बोले मास्टर साहब को किस तरह इन्सान बनाने का ध्यान है इनको समाज सेवा और ज्ञान दान का कितना ख्याल है ! मैं अक्सरसन्मति पुस्तकालय से मास्टर साहब से किताबें ले जाया करता था उनमें एक किताब मुझसे गुम हो गई । मैंने मास्टर साहब से निवेदन किया । मास्टर साहब ने कहा कोई बात नहीं । मैंने कहा मास्टर साहब कीमत मैं देना चाहता हूं, क्या टू ? उन्होंने फरमाया कि इसकी क्या जरूरत है ? जब मैने ज्यादा अनुरोध किया तो एक किताब निकाली और तुरंत ही १.२५ रु० उस किताब की कीमत मुझे बताई । मैंने यह रकम जमा करा दी । विद्यार्थियों के सच्चे संरक्षक ( श्री कमलाकर 'कमल') सन्मति पुस्तकालय के संस्थापक एवं संचालक मास्टर मोतीलालजी उन कर्मठ महापुरुषों में थे जिन्होंने प्राजीवन बिना किसी भेदभाव के जयपुर की जिज्ञासु जनता की लगन के साथ सेवा की थी। मैं जब हिन्दी 'एडवांस' की कक्षा लेता था तब इस परीक्षा के अधिकांश विद्यार्थी मास्टर साहब के पास से निःशुल्क पुस्तकें लाया करते थे। उनमें कितने ही विद्यार्थी तो ऐसे थे जो वर्षो से सन्मति पुस्तकालय की पुस्तकें लिये हुए थे । परन्तु उन विद्यार्थियों के प्रति मास्टर साहब को कोई भी शिकायत नहीं थी। मुझे याद है जब में १६४० में एक विद्यार्थी को लेकर मास्टर साहब के पास गया तो उन्होंने उस विद्यार्थी से तुरन्त कहा कि "मोहनलाल तुमको यदि और किसी पुस्तक की आवश्यकता हो तो, लेजाओ और दो साल पहिले जो 'प्रियप्रवास' ले गये थे, वह पढ़ने के बाद लौटा देना ।" मोहनलाल ने यह सोच लिया था कि मास्टर साहब मुझसे व अपरिचित हो गये होंगे। लेकिन ज्योंही मोहनलाल ने अपना और पुस्तक का नाम सुना त्योंही वह लज्जित सा हो गया था । उसी समय उसने मास्टर साहव से क्षमा मांगी और दूसरे दिन वह 'प्रियप्रवास' मास्टर साहब को दे आया । गोविन्दनारायण नामक विद्यार्थी से 'साकेत' महाकाव्य खो गया था । उसने मेरे साथ प्राकर मास्टर साहब से कहा कि 'साकेत' खो गया है । इस पर उन्होंने कहा भाई ! खो नहीं गया है । तुम्हारे साथी हरिनारायण के पास है, जब वह पढ़ लेगा तब जमा करा देगा । तुम्हें कोई पुस्तक चाहिये क्या ? गोविन्दनारायण को हरिनारायण के पास ही वह पुस्तक मिली क्योंकि उसीने उसे वह पुस्तक पढ़ने को दी थी पर वह भूल गया था । हरिनारायण और गोविन्दनारायण दोनों मेरे विद्यार्थी थे तथा साहित्यरत्न के प्रथम खण्ड में पढ़ते थे । 'भारतेन्दु का हरिश्चन्द्र नाटक' किसी विद्यार्थी से खोगया था । वह मास्टर साहब से कह रहा था कि मास्टर साहब ! आप कहें तो दूसरा । इस पर उन्होंने उस विद्यार्थी से कहामैं ही दूसरा मंगवा लूंगा । जब वह मिल जावे यहां जमा करा देना । यह मेरे सामने की बात है । एक बार मुझे पद्माकर कविकृत 'जगद्विनोद' की आवश्यकता पड़ी थी । मैं उसके लिये सन्मति पुस्तकालय में ज्योंही पहुंचा त्योंही मास्टर साहब ने मुझसे कहा कि श्रापके पास जो १७ विद्यार्थी हिन्दी एडवांस में पढ़ते हैं उनमें से तीन विद्यार्थियों के पास "एडवांस" का कोर्स नहीं है, ग्राप उनको मेरे पास भेज देना । मैं एक कोर्स की व्यवस्था कर दूंगा। पता नहीं मास्टर साहब को मेरे पास घाने वाले १७ विद्यार्थियों को सूचना किसने दी थी । हजारों नहीं लाखों में एक ( श्री राधेश्याम अग्रवाल) मास्टर मोतीलालजी संघी अपने समय के श्रेष्ठ व्यक्तियों में थे। उनका जीवन सादा व आचरण उच्चकोटि का था । वे मनुष्य मात्र की बिना किसी भेद-भाव के सेवारत रहते थे । विद्यार्थी उनको बहुत प्रिय थे । वे देश के भावी नागरिक होने के नाते उन पर अधिक स्नेह रखते थे, उनकी तरह २ से मदद करते थे । वे हरएक को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहते थे । ऐसे मनुष्य हजारों में नहीं लाखों में कोई एक होता है । दया और करुणा की साक्षात प्रतिमा थे ( श्री विजय चन्द्र जैन ) श्रद्धेय मास्टर मोतीलालजी वास्तव में महान व्यक्ति थे। उन्होंने अपना सारा जीवन जनता की निस्वार्थ सेवा में लगा दिया । वे कुशल अध्यापक भी थे । अध्यापन से उनको जो कुछ मिलता था उसमें से अपने जीवन निर्वाह के लिये कुछ हिस्सा रखकर शेष रकम वे गरीबों की सहायता में लगा देते थे । इतना ही नहीं निस्सहाय विद्यार्थियों और विधवाओं की सहायता के लिये वे सामर्थ्यवान लोगों से चन्दा इकट्ठा करते थे । विद्यार्थियों के लिये पुस्तकें खरीदते थे, उनकी फीस जमा कराते थे । विधवाओं के लिये वे स्वयं बाजार से अनाज खरीदकर उनके घर पर पहुंचाते थे और भी अनेक प्रकार से वे गरीबों की मदद करते थे । जातिवाद की भावना से वे बिल्कुल परे थे, सभी जाति और समाज के लोगों की वे समान रूप से सहायता करते थे । दया और करुणा की वे साक्षात् प्रतिमा थे । उनका हृदय अत्यन्त कोमल था । किन्तु अनुशासन पालन में वे अत्यन्त कठोर थे और छात्रों पर उनके अनुशासन की बड़ी छाप थी - इसी के परिणामस्वरूप जिन कक्षाओं को वे पढ़ाते थे उनके विद्यार्थी बहुत अच्छे अंकों से पास हुआ करते थे । उनमें से अनेक आज ऊंचे पदों पर आसीन हैं। उनमें से प्रत्येक यह अनुभव करता है कि उसके उत्थान में मास्टर साहब का बहुत बड़ा हाथ रहा है । मैंने अपने विद्यार्थी काल के कई वर्प मास्टर साहब के चरणों में विताये। स्कूल के अलावा मेरा काफ़ी समय उनके पास लाईब्रेरी में ही गुजरा करता था । मेरे पिताजी ने मेरी पढ़ाई की सारी देखरेख मास्टर साहब पर ही छोड़ रखी थी । घर पर मैं नहीं पढ़ता था अतः वे मुझे लाईव्रेरी में वुलवाते थे और वहीं उन्होंने मेरे लिए अध्यापक का प्रवन्ध कर दिया था । अतः मेरा बहुत समय मास्टर साहब के पास गुजरा था। मैंने नजदीक से उनकी सभी प्रवृ त्तियों को देखा है। अकेला व्यक्ति जिसमें निष्ठा और लगन हो वह कितना वड़ा रचनात्मक कार्य कर सकता है, इसका मास्टर साहब से अच्छा कोई उदाहरण नहीं मिल सकता । वे अत्यन्त सादा जीवन व्यतीत करते थे । उनका लिवास अत्यन्त सादा था और वे सदैव मोटी खादी ही पहिनते थे । वे निरहंकारी थे और अहिंसा के पूर्णतया पालन करने वाले थे । धर्म में उनकी पूरी श्रद्धा थी और उनका श्रीचरण अत्यन्त शुद्ध और निष्कलंक था। उनकी निश्चित दिनचर्या थी । प्रातःकाल बहुत जल्दी उठकर नित्यक्रम से निवृत्त होकर वे सेवाकार्य में रत हो जाते थे । स्कूल के अलावा उनका सारा समय जन सेवा में ही बीतता था । घर पर केवल नित्यकर्म से निवृत्त होने व भोजन करने के लिए जाते थे - बाकी समय वे लाईब्रेरी में ही रहते थे और बहुत से तक वे वहीं सोते भी थे । वे नियमित स्वाध्याय करते थे और भजन-कीर्तन में उनकी बहुत रुचि थी । चलते फिरते वे मन ही मन भजन गाया करते थे और भजनों की कापी सदा उनके साथ ही रहती थी । रास्ते में जो भी मिल जाता या उससे भी वे यही पूछा करते थे कि वह अपनी आत्मा के उत्थान के लिए क्या करता है ? क्या वह केवल धन कमाने में ही लगा है ? या यह मनुष्य जीवन जो उसने पाया है उसको सार्थक करने के लिए भी वह कुछ करता है। सोनम के उत्थान के लिये सतत् प्रेरणा देते रहते थे । पुस्तकालय के माध्यम से उन्होंने जनता को महान् सेवा की । अच्छी पुस्तकों की कई २ प्रतियां वे खरीदते थे और घरों पर जाकर लोगों को किताबें पढ़नेके लिये देते थे । वास्तव में मास्टर साहब अपने आप में एक संस्था बन गये थे। गृहस्थ में रहकर भी सच्चे अर्थ में साधु थे और उनके जीवन से हमें बहुत बड़ा सबक मिलता है । वे सत्प्रेरणादायक थे ( श्री मालचन्द जैन) प्रातः स्मरणीय मास्टर साहब से मेरा परिचय १९४४ में प्रथम वार हुआ । यद्यपि में उनका शिष्य नहीं रहा पर उनकी सद्प्रेरणा मुझे सदा मिलती रही । उनका त्यागमय जीवन, पुस्तकालय के माध्यम से जनता की मूक सेवा, सादगी, उच्चविचार, धार्मिक आस्था आदि ऐसी बातें उनमें थीं जिससे कोई भी व्यक्ति जो उनके संपर्क में आया प्रभावित हुए बिना नहीं रहा । वे प्रायः सेठ वैजनाथजी सरावगी के पास प्राया जाया करते थे और वहीं उनसे भेंट होती रहती थी । वे पुस्तकें स्वयं दे जाते और लेने के लिए भी प्राते । उस समय यह भी पूछते कि इस पुस्तक में क्या पढ़ा - इससे तुमने क्या शिक्षा ली ? अतः हर व्यक्ति पुस्तक को ध्यानपूर्वक पढ़ता था । वे जब भी मिलते अपने अनुभव सुनाते हुए ऐसी शिक्षाप्रद बातें कहते जो जीवन निर्माण में सहायक होती । जब वे भजन गाते तो उसमें तन्मय हो जाते थे । जैसे कोई सन्त मस्त हो रहा है । वे गृहस्थी होते हुए भी वैरागी के समान थे । पुस्तकालय मास्टर साहब का कार्यक्षेत्र था - पर मैं ऐसे अनेक छात्रों को जानता हूं जिन्हें मास्टर साहब ने संबल देकर खड़ा किया है। सचमुच वे देवता थे । संप्रदायातीत मास्टर साहब ( श्री बंशीधर शास्त्री एम. ए.) बीसवीं सदी के प्रारम्भ में भारतवर्ष में क्रांति का ऐसा दौर आया था जिसमें न केवल भारतीय स्वतंत्रता की भावना जागृत हुई अपितु उस समय के युवकों में निस्वार्थ सेवा वृत्ति का भी विकास हुआ । उन युवकों में अपने २ ढंग से समाज सेवा एवं राष्ट्र सेवा की भावना घर करने लगी थी । उस भावना से अनेक कार्यकर्ता बने जिन्होंने कभी अधिकार एवं यश की कामना नहीं की थी अपितु वे केवल सेवा एवं समाज जागृति में ही लगे रहे । ऐसे युवकों में ही मास्टर मोतीलालजी संघी भी थे। उन्होंने अपना कार्य क्षेत्र जयपुर रखा । वे चौमू भी बरावर जाते रहते थे । मैं जब ७ - ८ वर्ष का हुआ तब मुझे चौमू में ऐसी कई पुस्तकें मिली जिन पर सन्मति पुस्तकालय, जयपुर की रवर स्टाम्प लगी हुई थी। मैंने अपने पिताजी से इसके बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि हमारे पड़ोस में रहने वाले श्री मोतीलालजी संघी द्वारा संचालित पुस्तकालय की ये पुस्तकें हैं । फिर तो मुझे जब तव मास्टर साहब के चौमू में दर्शन होने लगे । वे सफेद खद्दर के कपड़े पहनते थे । मैं यह देखकर आश्चर्य करता था कि वे जव मी चौमूतो पुस्तकों का बण्डल लाते थे । वे उन पुस्तकों को न केवल जैनियों को देते थे अपितु ब्राहरण, वैश्य, मुसलमान, बुनकरों आदि सभी को देते थे । मैंने देखा था कि जो उन पुस्तकों को नहीं पढ़ पाते थे उन्हें वे पुस्तकों के अच्छे अंश पढ़कर सुनाते थे । उन पुस्तकों में गीता, स्वामी रामतीर्थ, विवेकानंद का साहित्य भी रहता था । वे सही मायने में सम्प्रदायातीत व्यक्ति थे । उनके पास जो भी विद्यार्थी या असहाय पहुंचता उसकी वे सहायता अवश्य करते थे । मैंने उनके पास एक २ पुस्तक को १० - २० प्रतियां भी देखी तो मैंने उनसे पूछा कि इतनी प्रतियां क्यों रखते हैं ? उन्होंने बताया कि अच्छी पुस्तक का जितना प्रचार हो उतना ही अच्छा है। एक बार मैंने उनसे पूछा कि पुस्तकालय की कई पुस्तकें लोगों में रहती हैं, उन्हें वापिस क्यों नहीं लेते ? उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि आखिर कोई न कोई उन्हें पढ़ेगा ही । उनके इन दोनों उत्तरों से यह लगा कि वे केवल शिक्षा एवं नैतिकता के प्रसारक थे । वे कभी दुरुपयोग की चिन्ता नहीं करते थे । मैं समझता हूं कि उन्होंने अपने सीमित साधनों के द्वारा समाज की जो सेवा एवं जागृति की उसे अक्षरों में नहीं लिखा जा सकता । उन्होंने ऐसे अनेक युवकों को सहारा देकर आगे बढ़ाया जो उस सहारे के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते । खेद है कि समाज ने ऐसे सेवा भावी, शिक्षा प्रसारक, दीन-दुखियों के सहायक मास्टर साहब को उनके जीवनकाल में कोई बढ़ावा नहीं दिया । उन्होंने वृद्धावस्था में भी अकेले ही 'सन्मति पुस्तकालय' का भारवहन किया । वे स्वयं भी चलते फिरते पुस्तकालय थे । वे पाठकों की रुचि अनुसार पुस्तक उनके घर स्वयं पहुंचाते थे एवं लेते भी आते थे । यह संयोग की बात है कि चोमू निवासी मास्टर साहब के पुस्तकालय का भवन उन 'सेठी जी' के नाम पर बसे हुए नगर में बन रहा है जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता की भावना के वशीभूत चौमू ठिकाने के कामदार का महत्वपूर्ण पद त्याग दिया था ।
सच्चे प्रेम और सेवा की मूर्ति मेरा बचपन से पूज्य मास्टर साहब से संपर्क रहा। मैंने इनके पास कक्षा चार से आठ तक अध्ययन किया। इस अध्ययन के पश्चात् भी मेरा उनसे संपर्क बराबर रहा। जब भी मैं उनसे मिलता तब ही मुझको कुछ उपदेश दिया करते थे- उनके उपदेशों का मेरे विचारों तथा जीवन पर भारी असर पड़ा । उनका सब विद्यार्थियों के साथ प्रेम व सेवा का व्यवहार रहता था । जिन विद्यार्थियों की पढ़ाई मास्टर साहब संतोषजनक नहीं समझते थे उनको प्राग्रह के साथ अपने घर पर निःशुल्क पढ़ाया करते थे । पढाई के अतिरिक्त विद्यार्थियों को पाठशाला में ही छुट्टी होने के बाद या घर पर धार्मिक व नैतिक शिक्षा दिया करते थे । प्रत्येक विद्यार्थी को गहन ज्ञान कराने का उनका प्रयत्न रहता था। उन्होंने राज सेवा में रहते हुए ही सन्मति पुस्तकालय की स्थापना की। उस समय उनके पास वेतन के सिवाय कोई आर्थिक साधन नहीं था। इस सीमित साधन से ही उन्होंने पुस्तकालय का शनैः शनैः विस्तार करना प्रारंभ किया । राज्य सेवा से निवृत होने के पश्चात् उन्होंने अपना जीवन श्रात्म चिन्तन व मानव सेवा में ही लगा दिया। घर-घर जाकर धार्मिक व ज्ञानवर्धक कितावें देकर पढ़ने का आग्रह करना व विद्यार्थियों और निःस्सहाय परिवारों को आर्थिक व अन्य प्रकार की सहायता देना ही उनका मुख्य कर्त्तव्य था । वे एक सच्चे प्रेम व सेवा की मूर्ति थे । उन्होंने चारों पुरुषार्थों को साकार रूप दिया स्वर्गीय मास्टर मोतीलाल संघी का जीवन एक आदर्श जीवन था । उन्होंने धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को साकार रूप दिया, जबकि अधिकतर लोग अर्थ और काम के चक्कर में अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। मास्टर साहब ने अपने समय को अर्थ और काम के भंवर से निकाल कर दूसरों को बिना किसी भेद भाव के मार्ग दिखाया और घर जाकर पुस्तके वितरण की तथा वापिस लेते तथा देते रहे। उन्होंने प्रेरणा देकर कौनसी पुस्तक उन्हें पढ़नी चाहिए तथा वह किस पुस्तक के पढ़ने के योग्य हैं, इस बात को भली प्रकार जान कर जनता का अटूट उपकार किया। मैंने स्वयं सन्मति पुस्तकालय से अनेक पुस्तकें प्राप्त करके पढ़ी हैं, जिनके द्वारा मुझे बहुत लाभ हुआ । किन्तु सर्व साधारण लोग बिना किसी मार्गदर्शक के इन पुस्तकों के समुद्र में से चन्द पुस्तकें छांटकर तथा पढकर पूर्ण लाभ नहीं उठा सकते हैं । इसे समझ पाना अति कठिन है। गरीब विद्यार्थियों की मदद की. संघी-मोतीलालजी डिग्री याफ्ता नहीं थे, वे सिर्फ़ मेट्रिक पास थे। मगर गरिणत में खूब प्रवीर थे। मैट्रिक तक के विद्यार्थियों में जो कमी गरिणतः में होती थी उसे वे पूरी करा देते थे । वे गरीबी भोगे हुए विद्यार्थी थे अतः गरीबी की मुसीबतों को जानते थे, इसलिए गरीबी लड़कों को एक घन्टे तक पढ़ाकर सिर्फ दस) शून्य रुपया माहवार ट्यूशन का लेते थे । इनके सिर्फ एक लड़का व एक लड़की थी । इनकी धर्मपत्नि बहुत जल्दी मर गई थी । लड़की का ब्याह मा. नानूलालजी के भतीजे से किया था । इनकी लड़की भी जल्दी मर गई थी। इसके पश्चात् इनके दामाद ने दूसरा विवाह नहीं किया । वे जयपुर से जाने के पश्चात् गांधीजी की पार्टी में शामिल हो गये व सारी उम्र गान्धी जी के साथ रहे । उनके विचार बड़े शुद्ध थे । वे थोड़े खर्च में अपना जीवन व्यतीत करने. के आदी थे । सर्दी से उनके कानों को ठंड बहुत लगती थी । इसलिए पगड़ी पर ऊनी गुलूबन्द बान्धकर वे रात तक टयूशनों पर जाया करते थे । और एक सप्ताह तक जो नींद में कमी रह जाती उसको रविवार को दिन में सोकर पूरा किया करते थे । मास्टर साहब बहुत दयालु थे । वे गरीब विद्यार्थियों की हर तरह की मदद रुपये आदिव पुस्तकों से देना अपना कर्त्तव्य समझते थे । विद्यार्थियों को पुस्तकों की मदद देने के सिलसिले में उन्होंने श्री सन्मति पुस्तकालय की नींव डाली थी । पास हुए विद्यार्थियों से उनकी पढ़ी हुई पुस्तकें ले लेना और उनको स्टॉक के रूप में पुस्तकालय में जमा करना और जो विद्यार्थी पुस्तकें खरीदने में असमर्थ होते, उन्हें पढ़ने के लिये दे देना और पढ़ाई समाप्त होने पर उनसे वापिस ले लेना और दूसरों को दे देना और इसी रूप में यह पुस्तकालय शुरू में स्थापित किया गया था । गरीब विद्यार्थियों में जिनके पास परीक्षा की फीस देने के लिये नहीं होती थी उनको फीस के लिए स्वयं या किसी के द्वारा सहायता करते थे । मास्टर साहब बड़े विद्या प्रेमी थे । दिगम्बर जैनियों में सन् एक हज़ार नौ सौ छः के बाद एक हज़ार छः सौ छब्बीस तक कोई B. A. नहीं हुआ, इसका उस समय विद्या प्रेमियों को काफी दुःख हुआ । श्री मालीलाल जी दीवान, श्री अर्जुनलालजी सेठी व स्वयं मैंने विद्या के प्रसार के लिये काफी प्रयत्न किये । मास्टर साहब में सच्चाई थी । बनावट जरा भी न थी । वे घर पर सिर्फ खाना खाने के लिये आते थे, बाकी समय पुस्तकालय में ही व्यतीत करते थे एवं दरी बिछाते थे और सर्दी में एक लिहाफ श्रोढते थे । सादा खाना खाते थे । दूध जरूर पीते थे । सादा वस्त्र धारण करते थे । उनकी तबीयत का झुकाव वैराग्य की ओर था । धर्म की पुस्तकें छपवाने व उनका प्रचार करने में भी काफी मदद देते थे । सर्वार्थ सिद्धि छपवाने में उन्होंने बहुत मदद दी थी । बाबू जुगल किशोर मुखतार ने जो मेरी भावना पुस्तक लिखकर छपवाई उसकी सैकड़ों प्रतियां लोगों में वितरित कीं । यह पुस्तक उन्होंने ठाकुर साहब चौमू को भी भेंट की। उन्होंने इससे प्रभावित होकर करीब चार सौ प्रतियां खरीद कर अपने यहां वितरित कराई और यह घोषणा की कि जो व्यक्ति पहिले याद करके मुझे सुनायेगा उसे पाँच ) शून्य रुपया इनाम दिया जायेगा । मास्टर साहब ने कई भजन भी याद कर रखे थे । आत्मा में शक्ति कायम रखने के लिये उन भजनों को भी कभी कभी बोलकर अपनी आत्माः को शांत बनाते थे । सन्मति पुस्तकालय को स्थापित करने के बाद वे पुस्तकों का एक गट्ठा बनाकर घर-घर जाते और लोगों के दिल में किताब पढ़ने का शौक लगाने के लिए किताबें बाँटते तथा पढ़ने के बाद वापिस ले आते थे तथा उनसे पढ़े हुए के बारे में जानकारी प्राप्त करते । • सन्मति पुस्तकालय के लिये पुस्तकों को एकत्रित करने के लिए मास्टर साहब ने आम समाज से चन्दा एकत्रित किया था। इस कार्य में मैं भी उनके साथ रहता था । मास्टर साहब स्वयं समाज के कार्य करते थे तथा दूसरों से भी करवाते थे । मुंशी प्यारेलालजी को सामाजिक कार्यों में सहायता देने का शौक भी उन्होंने दिलाया था । मास्टर साहब जिस किसी बड़े व्यक्ति के पास जाते थे तो मुझे भी वे साथ ले जाते थे । इसलिए मुझे उनके हरएक काम की जानकारी है । चाकसू के चौक में पुस्तकालय के सम्बन्ध में बात यह है कि श्री कपूर. चन्दज़ी काठ ने मास्टर साहब से पुस्तकालय भवन ले लिया था। उस समय इस पर मास्टर साहब को काफी दुःख हुआ था । आदर्श मुनि जयपुर नगर के शिक्षित समुदाय का किसी वर्ग व धर्म का कोई विरला ही व्यक्ति ऐसा होगा जो स्वर्गीय मास्टर साहब को न जानता हो । इस महान आत्मा के परोपकार, उदार हृदय, शिक्षा प्रसार प्रेम को सभी जानते हैं । मेरा सम्पर्क मास्टर साहब से तेरह साल उम्र से था । मैं उस समय छठी कक्षा में पढ़ता था । मास्टर साहब ने मुझे पुस्तकालय में बुलाना शुरू किया और जब कभी मैं नहीं जाता तो मेरे पिताजी के पास पत्र लिखा दिया करते थे । वैसे तो उनकी हर बात नसीहत से भरी थी मगर दो-चार बातों का असर मुझ पर जिन्दगी भर पड़ा । दुनियां में सुखी कौन ? एक बार हम चार-पांच बच्चे इनके पास बैठे थे । मास्टर साहब ने हमसे पूछा- बेटा ! बताओ दुनिया में सुखी कौन ? किसी ने कुछ कहा किसी ने कुछ । उन्होंने फरमाया कि दुनिया में सुखी वही है जो मोटा खाये, मोटा पहने । उन्होंने एक दृष्टान्त दिया कि उनके एक मुस्लिम मित्र थे । वे रेल्वे में बुकिंग क्लर्क थे । तनख्वाह पच्चीस ) माहवार थी । घर में वे थे उनकी स्त्री थी और दो बच्चे थे । उनकी स्त्री खुद अपने हाथ से पीसती थी, खाना बनाती थी, बर्तन मांजती थी । चार प्रारणी इस पच्चीस ) में बहुत सुखी थे। धीरे दो इनकी तरक्की होती गई और आखिर में स्टेशन मास्टर बन गए । उस जमाने में स्टेशन मास्टर को एक सौ पचास ) मिलते थे । रिश्वत के तौर पर हजार पांचसौ माहवार और आने लगे । जैसे दो तरक्की होती गई उन्होंने अनाब शनाब खर्चे बढ़ा लिए । बंगला, घोड़ा-गाड़ी, नौकर और बच्चों के लिए अलहदा गाड़ी वगैरह होगये । उस जमाने में करीब एक हज़ार पाँच सौ) माहवार का खर्च बढ़ा लिया। शराब पीने की भी आदत होगई । ऐशो आराम में जिन्दगी काटने लगे। यकायक उन पर रिश्वत का मुकद्दमा कायम होगया । सस्पैंण्ड कर दिए गए और छः महीने के बाद वे मुकदमा जीत गए मगर पेन्शन होगई । पेन्शन पचहत्तर ) माहवार की हुई । पूरी जिन्दगी बड़े दुख से कटी । एक लड़का भी मर गया । लड़की आवारा हो कर किसी के साथ भाग गई । रह गए दो मियां बीबी । कर्जदार होकर दुःख की जिन्दगी पूरी करके इस संसार से चल बसे । मास्टर साहब फरमाते थे कि जो चार जीव पच्चीस) माहवार में मोटा पहन कर, मोटा खाकर सुखी थे, वे ऐशो इशरत के चक्कर में आकर बहुत दुखी होकर मरे । सबसे ज्यादा कीमती चीज क्या है ? हम से मास्टर साहब ने पूछा- बेटा, दुनियां में सबसे ज्यादा कीमती चीज क्या है ? किसी ने कुछ बताया किसी ने कुछ । मास्टर साहब ने फ़रमाया सबसे ज्यादा कीमती चीज दुनिया में वक्त है । गया हुआ एक मिनट भी फिर इस जिन्दगी में वापस नहीं आता। इस वास्ते एक एक पल मनुष्य को सही उपयोग में लगाना चाहिए और मेहनत की प्रादत डालनी चाहिए । मनसा पाप. ' हम बच्चे लोग सब मिल कर एक दूसरे की बुगई किया करते थे । एक रोज मास्टर साहब ने सुन लिया, बहुत जरूरी काम जा रहे थे मगर करीब आधा घण्टा रुक कर हमको नसीहत की बात सिखाते रहे । असल मकसद मास्टर साहब का यह था कि किसी मनुष्य के प्रति तुम खराब विचार करोगे उसी वक्त मनसा पाप को कर्म तुम पर बंन्ध जावेगा । खराब विचार करने से दूसरे मनुष्य का कुछ नहीं बिगाड़ सकते तो पाप कर्म भी क्यों बांधते हो ? मनसा पाप सबसे बड़ा पाप है । महामना सिद्ध पुरुष सन्मति पुस्तकालय कहें या मास्टरजी निर्जीव व सजीव एक ही रूप था कहा जाता है एकान्त की साधना साधक को सिद्धि के लिए चाहिए कल्यारण के हेतु । लेकिन मास्टर साहब की साधना जनता के बीच चली, साधक के रूप में । पर कल्याण हेतु और सिद्धियां इस योगी के चरणों में सदैव लोटती रहीं । जनहित की कामनाओं में कंसा समन्वय था, कैसा था यह योग ! कैसी थी यह साधना ! कैसी यह तपस्या इस महर्षि की । जो अपने में एक ज्वलन्त उदाहरण है ! जयपुर नगर को धर्म-तीर्थ बना कर स्वयं धर्म-तीर्थ के स्थापक बन गये । इस महात्मा के लिए हिमालय की कन्दरा में, नदी तालाबों के तट, घने वन-उपवन, सिद्धक्षेत्र, श्रम आदि साधना का क्षेत्र, बड़ा मन्दिर था या वे शिक्षण संस्थाएं थी जहां वे ज्ञान दान देते थे । मैंने दरबार हाई स्कूल में अपने शिक्षण-काल में उन्हें निकट से देखा । मैंने पाया उन्हें अपनी धुन में रमते हुए । धूनी रमाने वाले साधु-सन्यासी आग जला करें ताप सहते हैं । किन्तु उनकी धूनी धुआं रहित अगोचर थी जिसमें प्राग बैठते-उठते, चलते-फिरते थो वे चौबीसों घन्टे लोककल्याण का महामन्त्र जपते हुए साधना रत रहते थे । अपनीधी सादी वेषभूषा में यह निष्काम महान तपस्वी, आचार्य, उपाध्याय, लोक वन्दनीय है क्योंकि उस महापुरुप ने अपने तन, मन और कर्म को किसी जाति विशेष व धर्म विशेष से नहीं जोड़ा । वह सर्व धर्म, सर्व जाति, स्वरूप थे । अनुयायी होने के नाते इन्होंने अपने जीवन दर्शन से बताया कि जैन धर्म किसी एक वर्ग से बंधा नहीं है। यह विश्वधर्म है। पंचपरमेष्टी नमस्कारमन्त्र में किसी विशेष की वन्दना नहीं की है । यह वन्दना सारे विश्व में निहित उस रूप को है जो जहां है । मास्टर साहब का जीवन एक महान वैज्ञानिक के रूप में है जिसने अगोचर को गोचर बनाया अपनी साधना से । मांस्टर साहब की आज गोचर है, नित्य है, प्रेरणादायक है, वन्दनीय है । समाज के कुशल वैद्य स्वशून्य मास्टर साहब मोतीलाल जी 'सादा जीवन उच्च विचार के आदर्शरूप मूर्तिमान महापुरुष थे । उनका जीवन वास्तव में परोपकार के लिये ही था । उन्होंने अपने जीवन में हजारों विद्यार्थियों एवं सैकड़ों प्रनाथ महिलाओं व बच्चों को गुप्त रूप से स्वयं सहायता पहुंचाने व अन्य धनी-मानी प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रेरणा देकर मदद पहुंचाने के रूप में दोहरे परोपकार का कार्य किया । उनका जोवन ही उनके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को स्वाभाविक रूप से प्रेरणा देने वाला था । उन्होंने अपने जीवन में सबसे महत्वपूर्ण कार्य सन्मति पुस्तकालय जैसी महान संस्था को जन्म देने का किया, जिसके द्वारा अनेक पीढ़ियों तक लाखों व्यक्तियों को सम्यक ज्ञान प्राप्ति का मार्ग मिलता रहेगा, उन्होंने पुस्तकालय में सभी प्रकार के साहित्य का संग्रह किया, लेकिन पाठकों को उनकी योग्यतानुसार पुस्तकें देने का वे विशेष ध्यान रखते थे । जैसे एक कुशल वैद्य अपने औषधालय में सभी प्रकार की प्रौपधियों को रखते हुये भी रोगियों की अवस्था व योग्यता को ध्यान में रख कर ही दवा देता है, उसी प्रकार वे भी छोटे दो बच्चे, युवकों, वृद्धों व महिलाओं को उनकी योग्यतानुसार साहित्य देकर धार्मिक संस्कार डाल कर धर्म रुचि प्रगट करने का तथा अश्लील साहित्य व उपन्यासों के द्वारा नैतिक पतन न होने देने का विशेष ध्यान रखते थे । विद्यार्थियों की सहायता का तो वे विशेषकर ख्याल रखते थे । चाहे वह किसी भी सम्प्रदाय का हो अथवा किसी भी धर्म को मानने वाला हो । उनमें अनुकम्पा का भाव भी उच्च कोटि का था, किसी भी दीन दुःखी प्राणी को देखकर उनका हृदय दया से श्राद्र हो जाता था तथा जब तक वे उसके कष्ट को दूर नहीं कर देते तब तक उनको चैन नहीं पड़ता था । ब्रह्मचर्य ही जीवन है मेरी शादी बारह साल खत्म होते ही गई थी। शादी के दो-तीन साल बाद ही मैं कुसंगति में पड़ गया । सन एक हज़ार नौ सौ बीस में स्वर्गीय श्री मांगीलालजी बोहरा दूदू निवासी ने पंद्रह-बीस प्रतिष्ठित सज्जनों के समक्ष मेरे सामने ही मेरो बुरी संगति की निन्दा की। मुझे क्षण भर क्रोध आया और वहीं बैठे-बैठे तुरंत मेरे कुकर्मों का दृश्य मेरे सामने आया । यह भी ख्याल आया कि आज तो उन्होंने ही कहा है, अब आगे अगर यही हालत रही तो दुनियां थू केगी। वहां से मैं घर आया, रात को बड़ी देर तक नींद नहीं आई और उसी रात मैंने प्रण कर लिया कि फिर ऐसी संगत नहीं करूंगा और उसके दूसरे ही दिन मैं चौधरी कानूनगो के सरकारी काम को करने के लिए अग्रसर हुआ और मैं उस काम में कुछ अंशों में सफल भी हुआ । जबसे सेटिलमेंट डिपार्टमेंट का नया महकमा जयपुर राज्य में खुला तो पिताजी से यह सुनकर कि अब चौधरी कानूनगो की राज्य सेवा नहीं रहेगी इसलिए सेटिलमेंट डिपार्टमेंट जाकर वहां का काम सीखना चाहिए, मैंने काम सीखकर उस विभाग में नौकरी करली तव मैं जयपुर में ज्यादा रहा । उस जमाने में मेरा यह ख्याल कि । अगरचे पराई स्त्री के त्याग का नियम तो ले चुका हूं मगर मेरी नजर औरतों के सौन्दर्य को देखना नहीं छोड़ती, इसका इलाज मास्टर साहव से पूछू । मैंने मास्टर साहब की सेवा में उपस्थित होकर मेरे मन की बात स्पष्ट निवेदन करदी और उपाय पूछा । मास्टर साहव ने मुझको एक किताब दी और प्रज्ञा दी कि आज ही इसको बहुत ध्यान से पढ़ोगे तो तुम्हें इसका उपाय मिल जाएगा। इसमें एक जगह कथन है कि जब तुम्हारे सामने से कोई स्त्री निकले तो उसको देखो मत और मां का स्मरण करने लगो । फिर कभी तुम्हारे मन में विकार नहीं रहेगा । इस कथन का मेरे मन पर वड़ा प्रभाव पड़ा और मैं अपनी जिन्दगी में इस बीमारी का इलाज इसी तरह करता रहा यह मास्टर साहब की प्रसीम अनुकम्पा का फल है । एक वार में श्री चिमनलालजी बोहरा, तहसीलदार के साथ जलेबी चौक महकमा दीवानी से चलकर बाजार में त्राया । जौहरी वाजार में चौपड़ के पास एक नीम का दरख्त था उसके नीचे तहसीलदार साहव की मास्टर साहब से भेंट हुई । कुशल क्षेम पूछने के बाद मास्टर साहब ने तहसीलदार साहब से पूछा- स्वाध्याय किस ग्रन्थ की करते हैं? तहसील - दार साहब ने जवाब दिया मालपुरा में रहता हूँ तब तो शास्त्र - स्वाध्याय कर लेता हूं, बाहर दौरे में कोई साधन नहीं है । मास्टर साहब ने कहा मैं आपके पास किताबें पहुंचा दूंगा । उनको आप दौरे में साथ ले जावें और ज्ञान वृद्धि करें । उस पर तहसीलदार साहब ने कहा मैं खुद ही आकर किताबें ले जाऊंगा । इतनी बात के बाद दोनों ही अपने अपने काम की तरफ चले गए । शाम को मैं तहसीलदार साहब के साथ ही भोजन कर रहा था कि तीन - चार किताबें लेकर मास्टर साहब तहसीलदार साहब के मकान पर पहुंचे । हवेली के चौक में खड़े होकर मास्टर साहब ने आवाज दी । मैंने उठकर चौक में देखा तो मास्टर साहब किताबें लिए खड़े थे । मैंने तहसीलदार साहब को यह बात अर्ज की तो तहसीलदार साहब के मन में इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उनकी आंखों में आंसू गए और बोले मास्टर साहब को किस तरह इन्सान बनाने का ध्यान है इनको समाज सेवा और ज्ञान दान का कितना ख्याल है ! मैं अक्सरसन्मति पुस्तकालय से मास्टर साहब से किताबें ले जाया करता था उनमें एक किताब मुझसे गुम हो गई । मैंने मास्टर साहब से निवेदन किया । मास्टर साहब ने कहा कोई बात नहीं । मैंने कहा मास्टर साहब कीमत मैं देना चाहता हूं, क्या टू ? उन्होंने फरमाया कि इसकी क्या जरूरत है ? जब मैने ज्यादा अनुरोध किया तो एक किताब निकाली और तुरंत ही एक दशमलव पच्चीस रुपयाशून्य उस किताब की कीमत मुझे बताई । मैंने यह रकम जमा करा दी । विद्यार्थियों के सच्चे संरक्षक सन्मति पुस्तकालय के संस्थापक एवं संचालक मास्टर मोतीलालजी उन कर्मठ महापुरुषों में थे जिन्होंने प्राजीवन बिना किसी भेदभाव के जयपुर की जिज्ञासु जनता की लगन के साथ सेवा की थी। मैं जब हिन्दी 'एडवांस' की कक्षा लेता था तब इस परीक्षा के अधिकांश विद्यार्थी मास्टर साहब के पास से निःशुल्क पुस्तकें लाया करते थे। उनमें कितने ही विद्यार्थी तो ऐसे थे जो वर्षो से सन्मति पुस्तकालय की पुस्तकें लिये हुए थे । परन्तु उन विद्यार्थियों के प्रति मास्टर साहब को कोई भी शिकायत नहीं थी। मुझे याद है जब में एक हज़ार छः सौ चालीस में एक विद्यार्थी को लेकर मास्टर साहब के पास गया तो उन्होंने उस विद्यार्थी से तुरन्त कहा कि "मोहनलाल तुमको यदि और किसी पुस्तक की आवश्यकता हो तो, लेजाओ और दो साल पहिले जो 'प्रियप्रवास' ले गये थे, वह पढ़ने के बाद लौटा देना ।" मोहनलाल ने यह सोच लिया था कि मास्टर साहब मुझसे व अपरिचित हो गये होंगे। लेकिन ज्योंही मोहनलाल ने अपना और पुस्तक का नाम सुना त्योंही वह लज्जित सा हो गया था । उसी समय उसने मास्टर साहव से क्षमा मांगी और दूसरे दिन वह 'प्रियप्रवास' मास्टर साहब को दे आया । गोविन्दनारायण नामक विद्यार्थी से 'साकेत' महाकाव्य खो गया था । उसने मेरे साथ प्राकर मास्टर साहब से कहा कि 'साकेत' खो गया है । इस पर उन्होंने कहा भाई ! खो नहीं गया है । तुम्हारे साथी हरिनारायण के पास है, जब वह पढ़ लेगा तब जमा करा देगा । तुम्हें कोई पुस्तक चाहिये क्या ? गोविन्दनारायण को हरिनारायण के पास ही वह पुस्तक मिली क्योंकि उसीने उसे वह पुस्तक पढ़ने को दी थी पर वह भूल गया था । हरिनारायण और गोविन्दनारायण दोनों मेरे विद्यार्थी थे तथा साहित्यरत्न के प्रथम खण्ड में पढ़ते थे । 'भारतेन्दु का हरिश्चन्द्र नाटक' किसी विद्यार्थी से खोगया था । वह मास्टर साहब से कह रहा था कि मास्टर साहब ! आप कहें तो दूसरा । इस पर उन्होंने उस विद्यार्थी से कहामैं ही दूसरा मंगवा लूंगा । जब वह मिल जावे यहां जमा करा देना । यह मेरे सामने की बात है । एक बार मुझे पद्माकर कविकृत 'जगद्विनोद' की आवश्यकता पड़ी थी । मैं उसके लिये सन्मति पुस्तकालय में ज्योंही पहुंचा त्योंही मास्टर साहब ने मुझसे कहा कि श्रापके पास जो सत्रह विद्यार्थी हिन्दी एडवांस में पढ़ते हैं उनमें से तीन विद्यार्थियों के पास "एडवांस" का कोर्स नहीं है, ग्राप उनको मेरे पास भेज देना । मैं एक कोर्स की व्यवस्था कर दूंगा। पता नहीं मास्टर साहब को मेरे पास घाने वाले सत्रह विद्यार्थियों को सूचना किसने दी थी । हजारों नहीं लाखों में एक मास्टर मोतीलालजी संघी अपने समय के श्रेष्ठ व्यक्तियों में थे। उनका जीवन सादा व आचरण उच्चकोटि का था । वे मनुष्य मात्र की बिना किसी भेद-भाव के सेवारत रहते थे । विद्यार्थी उनको बहुत प्रिय थे । वे देश के भावी नागरिक होने के नाते उन पर अधिक स्नेह रखते थे, उनकी तरह दो से मदद करते थे । वे हरएक को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहते थे । ऐसे मनुष्य हजारों में नहीं लाखों में कोई एक होता है । दया और करुणा की साक्षात प्रतिमा थे श्रद्धेय मास्टर मोतीलालजी वास्तव में महान व्यक्ति थे। उन्होंने अपना सारा जीवन जनता की निस्वार्थ सेवा में लगा दिया । वे कुशल अध्यापक भी थे । अध्यापन से उनको जो कुछ मिलता था उसमें से अपने जीवन निर्वाह के लिये कुछ हिस्सा रखकर शेष रकम वे गरीबों की सहायता में लगा देते थे । इतना ही नहीं निस्सहाय विद्यार्थियों और विधवाओं की सहायता के लिये वे सामर्थ्यवान लोगों से चन्दा इकट्ठा करते थे । विद्यार्थियों के लिये पुस्तकें खरीदते थे, उनकी फीस जमा कराते थे । विधवाओं के लिये वे स्वयं बाजार से अनाज खरीदकर उनके घर पर पहुंचाते थे और भी अनेक प्रकार से वे गरीबों की मदद करते थे । जातिवाद की भावना से वे बिल्कुल परे थे, सभी जाति और समाज के लोगों की वे समान रूप से सहायता करते थे । दया और करुणा की वे साक्षात् प्रतिमा थे । उनका हृदय अत्यन्त कोमल था । किन्तु अनुशासन पालन में वे अत्यन्त कठोर थे और छात्रों पर उनके अनुशासन की बड़ी छाप थी - इसी के परिणामस्वरूप जिन कक्षाओं को वे पढ़ाते थे उनके विद्यार्थी बहुत अच्छे अंकों से पास हुआ करते थे । उनमें से अनेक आज ऊंचे पदों पर आसीन हैं। उनमें से प्रत्येक यह अनुभव करता है कि उसके उत्थान में मास्टर साहब का बहुत बड़ा हाथ रहा है । मैंने अपने विद्यार्थी काल के कई वर्प मास्टर साहब के चरणों में विताये। स्कूल के अलावा मेरा काफ़ी समय उनके पास लाईब्रेरी में ही गुजरा करता था । मेरे पिताजी ने मेरी पढ़ाई की सारी देखरेख मास्टर साहब पर ही छोड़ रखी थी । घर पर मैं नहीं पढ़ता था अतः वे मुझे लाईव्रेरी में वुलवाते थे और वहीं उन्होंने मेरे लिए अध्यापक का प्रवन्ध कर दिया था । अतः मेरा बहुत समय मास्टर साहब के पास गुजरा था। मैंने नजदीक से उनकी सभी प्रवृ त्तियों को देखा है। अकेला व्यक्ति जिसमें निष्ठा और लगन हो वह कितना वड़ा रचनात्मक कार्य कर सकता है, इसका मास्टर साहब से अच्छा कोई उदाहरण नहीं मिल सकता । वे अत्यन्त सादा जीवन व्यतीत करते थे । उनका लिवास अत्यन्त सादा था और वे सदैव मोटी खादी ही पहिनते थे । वे निरहंकारी थे और अहिंसा के पूर्णतया पालन करने वाले थे । धर्म में उनकी पूरी श्रद्धा थी और उनका श्रीचरण अत्यन्त शुद्ध और निष्कलंक था। उनकी निश्चित दिनचर्या थी । प्रातःकाल बहुत जल्दी उठकर नित्यक्रम से निवृत्त होकर वे सेवाकार्य में रत हो जाते थे । स्कूल के अलावा उनका सारा समय जन सेवा में ही बीतता था । घर पर केवल नित्यकर्म से निवृत्त होने व भोजन करने के लिए जाते थे - बाकी समय वे लाईब्रेरी में ही रहते थे और बहुत से तक वे वहीं सोते भी थे । वे नियमित स्वाध्याय करते थे और भजन-कीर्तन में उनकी बहुत रुचि थी । चलते फिरते वे मन ही मन भजन गाया करते थे और भजनों की कापी सदा उनके साथ ही रहती थी । रास्ते में जो भी मिल जाता या उससे भी वे यही पूछा करते थे कि वह अपनी आत्मा के उत्थान के लिए क्या करता है ? क्या वह केवल धन कमाने में ही लगा है ? या यह मनुष्य जीवन जो उसने पाया है उसको सार्थक करने के लिए भी वह कुछ करता है। सोनम के उत्थान के लिये सतत् प्रेरणा देते रहते थे । पुस्तकालय के माध्यम से उन्होंने जनता को महान् सेवा की । अच्छी पुस्तकों की कई दो प्रतियां वे खरीदते थे और घरों पर जाकर लोगों को किताबें पढ़नेके लिये देते थे । वास्तव में मास्टर साहब अपने आप में एक संस्था बन गये थे। गृहस्थ में रहकर भी सच्चे अर्थ में साधु थे और उनके जीवन से हमें बहुत बड़ा सबक मिलता है । वे सत्प्रेरणादायक थे प्रातः स्मरणीय मास्टर साहब से मेरा परिचय एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में प्रथम वार हुआ । यद्यपि में उनका शिष्य नहीं रहा पर उनकी सद्प्रेरणा मुझे सदा मिलती रही । उनका त्यागमय जीवन, पुस्तकालय के माध्यम से जनता की मूक सेवा, सादगी, उच्चविचार, धार्मिक आस्था आदि ऐसी बातें उनमें थीं जिससे कोई भी व्यक्ति जो उनके संपर्क में आया प्रभावित हुए बिना नहीं रहा । वे प्रायः सेठ वैजनाथजी सरावगी के पास प्राया जाया करते थे और वहीं उनसे भेंट होती रहती थी । वे पुस्तकें स्वयं दे जाते और लेने के लिए भी प्राते । उस समय यह भी पूछते कि इस पुस्तक में क्या पढ़ा - इससे तुमने क्या शिक्षा ली ? अतः हर व्यक्ति पुस्तक को ध्यानपूर्वक पढ़ता था । वे जब भी मिलते अपने अनुभव सुनाते हुए ऐसी शिक्षाप्रद बातें कहते जो जीवन निर्माण में सहायक होती । जब वे भजन गाते तो उसमें तन्मय हो जाते थे । जैसे कोई सन्त मस्त हो रहा है । वे गृहस्थी होते हुए भी वैरागी के समान थे । पुस्तकालय मास्टर साहब का कार्यक्षेत्र था - पर मैं ऐसे अनेक छात्रों को जानता हूं जिन्हें मास्टर साहब ने संबल देकर खड़ा किया है। सचमुच वे देवता थे । संप्रदायातीत मास्टर साहब बीसवीं सदी के प्रारम्भ में भारतवर्ष में क्रांति का ऐसा दौर आया था जिसमें न केवल भारतीय स्वतंत्रता की भावना जागृत हुई अपितु उस समय के युवकों में निस्वार्थ सेवा वृत्ति का भी विकास हुआ । उन युवकों में अपने दो ढंग से समाज सेवा एवं राष्ट्र सेवा की भावना घर करने लगी थी । उस भावना से अनेक कार्यकर्ता बने जिन्होंने कभी अधिकार एवं यश की कामना नहीं की थी अपितु वे केवल सेवा एवं समाज जागृति में ही लगे रहे । ऐसे युवकों में ही मास्टर मोतीलालजी संघी भी थे। उन्होंने अपना कार्य क्षेत्र जयपुर रखा । वे चौमू भी बरावर जाते रहते थे । मैं जब सात - आठ वर्ष का हुआ तब मुझे चौमू में ऐसी कई पुस्तकें मिली जिन पर सन्मति पुस्तकालय, जयपुर की रवर स्टाम्प लगी हुई थी। मैंने अपने पिताजी से इसके बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि हमारे पड़ोस में रहने वाले श्री मोतीलालजी संघी द्वारा संचालित पुस्तकालय की ये पुस्तकें हैं । फिर तो मुझे जब तव मास्टर साहब के चौमू में दर्शन होने लगे । वे सफेद खद्दर के कपड़े पहनते थे । मैं यह देखकर आश्चर्य करता था कि वे जव मी चौमूतो पुस्तकों का बण्डल लाते थे । वे उन पुस्तकों को न केवल जैनियों को देते थे अपितु ब्राहरण, वैश्य, मुसलमान, बुनकरों आदि सभी को देते थे । मैंने देखा था कि जो उन पुस्तकों को नहीं पढ़ पाते थे उन्हें वे पुस्तकों के अच्छे अंश पढ़कर सुनाते थे । उन पुस्तकों में गीता, स्वामी रामतीर्थ, विवेकानंद का साहित्य भी रहता था । वे सही मायने में सम्प्रदायातीत व्यक्ति थे । उनके पास जो भी विद्यार्थी या असहाय पहुंचता उसकी वे सहायता अवश्य करते थे । मैंने उनके पास एक दो पुस्तक को दस - बीस प्रतियां भी देखी तो मैंने उनसे पूछा कि इतनी प्रतियां क्यों रखते हैं ? उन्होंने बताया कि अच्छी पुस्तक का जितना प्रचार हो उतना ही अच्छा है। एक बार मैंने उनसे पूछा कि पुस्तकालय की कई पुस्तकें लोगों में रहती हैं, उन्हें वापिस क्यों नहीं लेते ? उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि आखिर कोई न कोई उन्हें पढ़ेगा ही । उनके इन दोनों उत्तरों से यह लगा कि वे केवल शिक्षा एवं नैतिकता के प्रसारक थे । वे कभी दुरुपयोग की चिन्ता नहीं करते थे । मैं समझता हूं कि उन्होंने अपने सीमित साधनों के द्वारा समाज की जो सेवा एवं जागृति की उसे अक्षरों में नहीं लिखा जा सकता । उन्होंने ऐसे अनेक युवकों को सहारा देकर आगे बढ़ाया जो उस सहारे के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते । खेद है कि समाज ने ऐसे सेवा भावी, शिक्षा प्रसारक, दीन-दुखियों के सहायक मास्टर साहब को उनके जीवनकाल में कोई बढ़ावा नहीं दिया । उन्होंने वृद्धावस्था में भी अकेले ही 'सन्मति पुस्तकालय' का भारवहन किया । वे स्वयं भी चलते फिरते पुस्तकालय थे । वे पाठकों की रुचि अनुसार पुस्तक उनके घर स्वयं पहुंचाते थे एवं लेते भी आते थे । यह संयोग की बात है कि चोमू निवासी मास्टर साहब के पुस्तकालय का भवन उन 'सेठी जी' के नाम पर बसे हुए नगर में बन रहा है जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता की भावना के वशीभूत चौमू ठिकाने के कामदार का महत्वपूर्ण पद त्याग दिया था ।
घुमारवीं - हिमाचल प्रदेश स्कूल प्राध्यापक संघ जिला बिलासपुर की बैठक विश्राम गृह घुमारवीं में प्रधान परमजीत शर्मा की अध्यक्षता में हुई। संघ के महासचिव राकेश भारद्वाज ने बताया कि बैठक 22 अप्रैल को होने वाले संघ के चुनावों के बारे में चर्चा की गई। महासचिव राकेश भारद्वाज ने पूर्व कार्यकारिणी के सदस्यों योगदान की सराहना व आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी के सदस्यों ने संघ को अपनी मेहनत से सींचा है संघ हमेशा उनका ऋणी रहेगा। इन लोगों ने अपना सर्वोच्च योगदान प्राध्यापक संघ को मजबूत करने के लिए दिया है। उन्होंने सभी प्राध्यापक एवं पीजीटी साथियों से भी आह्वान किया कि वह आने वाली पीढि़यों के लिए एक साथ मिलकर इस संघ को मजबूत करें साथ ही उन्होंने कहा कि वह मिल-जुलकर सभी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम रहेंगे। महासचिव ने आए दिन समाचार पत्रों में जिस तरह से अध्यापकों के ऊपर अलग-अलग प्रयोगों की बात की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डाक्टर राकेश शर्मा, प्रधानाचार्य अश्वनी शर्मा, प्रधानाचार्य सुखलाल ठाकुर, महासचिव राकेश भारद्वाज, राज्य के पदाधिकारी डाक्टर कविराज, सुनील दत्त शर्मा, कुंदनलाल, शशि चौहान, प्रीतम राज संख्यान व राजीव शर्मा सहित तमाम पदाधिकारी मौजूद थे।
घुमारवीं - हिमाचल प्रदेश स्कूल प्राध्यापक संघ जिला बिलासपुर की बैठक विश्राम गृह घुमारवीं में प्रधान परमजीत शर्मा की अध्यक्षता में हुई। संघ के महासचिव राकेश भारद्वाज ने बताया कि बैठक बाईस अप्रैल को होने वाले संघ के चुनावों के बारे में चर्चा की गई। महासचिव राकेश भारद्वाज ने पूर्व कार्यकारिणी के सदस्यों योगदान की सराहना व आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी के सदस्यों ने संघ को अपनी मेहनत से सींचा है संघ हमेशा उनका ऋणी रहेगा। इन लोगों ने अपना सर्वोच्च योगदान प्राध्यापक संघ को मजबूत करने के लिए दिया है। उन्होंने सभी प्राध्यापक एवं पीजीटी साथियों से भी आह्वान किया कि वह आने वाली पीढि़यों के लिए एक साथ मिलकर इस संघ को मजबूत करें साथ ही उन्होंने कहा कि वह मिल-जुलकर सभी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम रहेंगे। महासचिव ने आए दिन समाचार पत्रों में जिस तरह से अध्यापकों के ऊपर अलग-अलग प्रयोगों की बात की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डाक्टर राकेश शर्मा, प्रधानाचार्य अश्वनी शर्मा, प्रधानाचार्य सुखलाल ठाकुर, महासचिव राकेश भारद्वाज, राज्य के पदाधिकारी डाक्टर कविराज, सुनील दत्त शर्मा, कुंदनलाल, शशि चौहान, प्रीतम राज संख्यान व राजीव शर्मा सहित तमाम पदाधिकारी मौजूद थे।
G-20 जी-20 के भ्रष्टाचार निरोधक कार्य समूह (एसीडब्ल्यूजी) की बैठक में प्रतिनिधियों द्वारा भ्रष्टाचार से निपटने के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। एंटी करप्शन वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक नौ से 11 अगस्त तक कोलकाता में आयोजित होगी। जागरण संवाददाता, ऋषिकेशः G-20 Summit: जी-20 एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप की दूसरी बैठक में एसेट रिकवरी, भगोड़े आर्थिक अपराधियों, सूचना साझा करने के लिए सहयोग के औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों, भ्रष्टाचार से निपटने के लिए संस्थागत ढांचे और आपसी कानूनी सहायता से संबंधित कई प्रमुख विषयों पर गहन विचार-विमर्श के साथ आगे बढ़ी। एंटी करप्शन वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक नौ से 11 अगस्त तक कोलकाता में आयोजित होगी। ऋषिकेश के नरेंद्र नगर स्थित होटल वेस्टिन रिसोर्ट एंड स्पा हिमालयाज में संपन्न हुई। बैठक का उद्घाटन 25 मई को रक्षा और पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने किया था। बैठक में 20 सदस्य देशों, 10 आमंत्रित देशों और यूएनओडीसी, ओईसीडी , एगमॉन्ट ग्रुप, इंटरपोल और आईएमएफ सहित नौ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के 90 प्रतिनिधियों की भागीदारी थी। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त सचिव और जी- 20 एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष राहुल सिंह ने बैठक की अध्यक्षता तथा इटली के टास्क फोर्स के प्रमुख व जी- 20 एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप मीटिंग के सह-अध्यक्ष जियोवन्नी टार्टाग्लिया पोलसिनी तथा इटली के ही पूर्णाधिकारी मंत्री, विदेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री फैब्रिज़ियो मारसेली इस बैठक में सह अध्यक्ष रहे। बैठक में पिछले तीन दिनों में, एसेट रिकवरी, भगोड़े आर्थिक अपराधियों, सूचना साझा करने के लिए सहयोग के औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों, भ्रष्टाचार से निपटने के लिए संस्थागत ढांचे और आपसी कानूनी सहायता से संबंधित कई प्रमुख विषयों और क्षेत्रों पर गहन और उत्पादक विचार-विमर्श हुआ है। प्रतिनिधियों ने बैठक में भ्रष्टाचार को रोकने और उससे मुकाबला करने के लिए तीन उच्च स्तरीय सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की। जिसमें जिम्मेदार सार्वजनिक निकायों और प्राधिकरणों की अखंडता और प्रभावशीलता को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए कानून प्रवर्तन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण को मजबूत करना और भ्रष्टाचार से संबंधित संपत्ति वसूली तंत्र को मजबूत करना। एसीडब्ल्यूजी के पहले दिन, 'लिंग और भ्रष्टाचार' पर एक साइड इवेंट भी आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में माननीय विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री भारत सरकार मीनाक्षी लेखी ने मुख्य भाषण दिया। इस आयोजन के दौरान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार के लैंगिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किय। जिस तरह से महिला सशक्तिकरण आंतरिक रूप से भ्रष्टाचार विरोधी पहलुओं से जुड़ा हुआ है और लैंगिक संवेदनशील शासन और नीति निर्माण की आवश्यकता है। प्रतिनिधियों को ऋषिकेश में प्रवास के दौरान भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और व्यंजनों के स्वाद लेने का भी अवसर प्राप्त हुआ। भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई को मजबूत करने के जी20 एजेंडे को और गति प्रदान करने के लिए भारत अब तक की पहली व्यक्तिगत भ्रष्टाचार विरोधी मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी भी करेगा।
G-बीस जी-बीस के भ्रष्टाचार निरोधक कार्य समूह की बैठक में प्रतिनिधियों द्वारा भ्रष्टाचार से निपटने के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। एंटी करप्शन वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक नौ से ग्यारह अगस्त तक कोलकाता में आयोजित होगी। जागरण संवाददाता, ऋषिकेशः G-बीस Summit: जी-बीस एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप की दूसरी बैठक में एसेट रिकवरी, भगोड़े आर्थिक अपराधियों, सूचना साझा करने के लिए सहयोग के औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों, भ्रष्टाचार से निपटने के लिए संस्थागत ढांचे और आपसी कानूनी सहायता से संबंधित कई प्रमुख विषयों पर गहन विचार-विमर्श के साथ आगे बढ़ी। एंटी करप्शन वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक नौ से ग्यारह अगस्त तक कोलकाता में आयोजित होगी। ऋषिकेश के नरेंद्र नगर स्थित होटल वेस्टिन रिसोर्ट एंड स्पा हिमालयाज में संपन्न हुई। बैठक का उद्घाटन पच्चीस मई को रक्षा और पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने किया था। बैठक में बीस सदस्य देशों, दस आमंत्रित देशों और यूएनओडीसी, ओईसीडी , एगमॉन्ट ग्रुप, इंटरपोल और आईएमएफ सहित नौ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नब्बे प्रतिनिधियों की भागीदारी थी। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त सचिव और जी- बीस एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष राहुल सिंह ने बैठक की अध्यक्षता तथा इटली के टास्क फोर्स के प्रमुख व जी- बीस एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप मीटिंग के सह-अध्यक्ष जियोवन्नी टार्टाग्लिया पोलसिनी तथा इटली के ही पूर्णाधिकारी मंत्री, विदेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री फैब्रिज़ियो मारसेली इस बैठक में सह अध्यक्ष रहे। बैठक में पिछले तीन दिनों में, एसेट रिकवरी, भगोड़े आर्थिक अपराधियों, सूचना साझा करने के लिए सहयोग के औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों, भ्रष्टाचार से निपटने के लिए संस्थागत ढांचे और आपसी कानूनी सहायता से संबंधित कई प्रमुख विषयों और क्षेत्रों पर गहन और उत्पादक विचार-विमर्श हुआ है। प्रतिनिधियों ने बैठक में भ्रष्टाचार को रोकने और उससे मुकाबला करने के लिए तीन उच्च स्तरीय सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की। जिसमें जिम्मेदार सार्वजनिक निकायों और प्राधिकरणों की अखंडता और प्रभावशीलता को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए कानून प्रवर्तन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण को मजबूत करना और भ्रष्टाचार से संबंधित संपत्ति वसूली तंत्र को मजबूत करना। एसीडब्ल्यूजी के पहले दिन, 'लिंग और भ्रष्टाचार' पर एक साइड इवेंट भी आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में माननीय विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री भारत सरकार मीनाक्षी लेखी ने मुख्य भाषण दिया। इस आयोजन के दौरान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार के लैंगिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किय। जिस तरह से महिला सशक्तिकरण आंतरिक रूप से भ्रष्टाचार विरोधी पहलुओं से जुड़ा हुआ है और लैंगिक संवेदनशील शासन और नीति निर्माण की आवश्यकता है। प्रतिनिधियों को ऋषिकेश में प्रवास के दौरान भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और व्यंजनों के स्वाद लेने का भी अवसर प्राप्त हुआ। भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई को मजबूत करने के जीबीस एजेंडे को और गति प्रदान करने के लिए भारत अब तक की पहली व्यक्तिगत भ्रष्टाचार विरोधी मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी भी करेगा।
। भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, औरंगाबाद, महाराष्ट्र" पर 04 मई 2012 से जारी सर्व समावेशी निदेश वापिस लिए हैं। ये निदेश 02 मई 2016 को समाप्त बैंकिंग कारोबार से लागू रहेंगे। ये निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी संस्थाओं पर यथालागू) की धारा 35 क की उप धारा (2) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए वापस लिए गए हैं। निदेश की प्रतिलिपि इच्छुक जन सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है। प्रतिबंधों के वापिस लिए जाने के साथ ही बैंक अपना बैंकिंग कारोबार पुर्ववत जारी रख सकेगा ।
। भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, भारतीय रिज़र्व बैंक ने "डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, औरंगाबाद, महाराष्ट्र" पर चार मई दो हज़ार बारह से जारी सर्व समावेशी निदेश वापिस लिए हैं। ये निदेश दो मई दो हज़ार सोलह को समाप्त बैंकिंग कारोबार से लागू रहेंगे। ये निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा पैंतीस क की उप धारा के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए वापस लिए गए हैं। निदेश की प्रतिलिपि इच्छुक जन सदस्यों के अवलोकनार्थ बैंक परिसर में प्रदर्शित की गई है। प्रतिबंधों के वापिस लिए जाने के साथ ही बैंक अपना बैंकिंग कारोबार पुर्ववत जारी रख सकेगा ।
दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर बुधवार को दाहोद-मेघनगर के बीच देहरादून एक्सप्रेस (19019) से एक महिला और 2 बच्चे के गिरने की सूचना के बाद मेघनगर पुलिस और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चों और महिलाओं का रेलवे कर्मचारियों ने प्राथमिक उपचार किया। जिसके बाद मेघनगर पुलिस द्वारा उन्हें मेघनगर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां से महिला और बच्चों की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें झाबुआ रेफर किया गया। फिलहाल महिला और बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मेघनगर के समीप और नाहरगढ़ व मेघनगर के बीच रेलवे पोल क्रमांक 569/ 16 पर बांद्रा से देहरादून की ओर जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस 19019 से एक महिला और दो छोटे बच्चों को गिरने की सूचना ट्रैकमैन ने संबंधित अधिकारी को दी। जिसके बाद रेलवे पुलिस व मेघनगर पुलिस मौके पर पहुंची। महिला की उम्र करीब 25 वर्ष और बच्चों की उम्र जिसमें बालक की उम्र 4 ,वर्ष बालिका की उम्र 5 वर्ष के करीब बताई जा रही है। महिला खुद कूदी या किसी ने धक्का दिया वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर बुधवार को दाहोद-मेघनगर के बीच देहरादून एक्सप्रेस से एक महिला और दो बच्चे के गिरने की सूचना के बाद मेघनगर पुलिस और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चों और महिलाओं का रेलवे कर्मचारियों ने प्राथमिक उपचार किया। जिसके बाद मेघनगर पुलिस द्वारा उन्हें मेघनगर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां से महिला और बच्चों की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें झाबुआ रेफर किया गया। फिलहाल महिला और बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मेघनगर के समीप और नाहरगढ़ व मेघनगर के बीच रेलवे पोल क्रमांक पाँच सौ उनहत्तर/ सोलह पर बांद्रा से देहरादून की ओर जाने वाली देहरादून एक्सप्रेस उन्नीस हज़ार उन्नीस से एक महिला और दो छोटे बच्चों को गिरने की सूचना ट्रैकमैन ने संबंधित अधिकारी को दी। जिसके बाद रेलवे पुलिस व मेघनगर पुलिस मौके पर पहुंची। महिला की उम्र करीब पच्चीस वर्ष और बच्चों की उम्र जिसमें बालक की उम्र चार ,वर्ष बालिका की उम्र पाँच वर्ष के करीब बताई जा रही है। महिला खुद कूदी या किसी ने धक्का दिया वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
Shamshera to Brahmastra: शमशेरा से लेकर ब्रह्मास्त्र तक ये हैं बड़े बजट की फिल्म, जिन्हें आप देखने का मौका नहीं छोड़ेंगे अगर फिल्म पठान की बात करें तो उसे 250 करोड़ के बजट के साथ बनाया जा रहा है और एटली की फिल्म जवान को भी 200 करोड़ के बजट के आसपास बनाया जा रहा है। Bollywood Actors: जानिए, कौन से बॉलीवुड एक्टर हैं मोस्ट पॉपुलर लिस्ट में नम्बर 1, अक्षय कुमार ने सलमान और शाहरुख को किया पीछे सलमान की फिल्म भी काफी समय से बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिज़नेस नही कर सकी है। ऋतिक रोशन इस लिस्ट में चौथे नम्बर पर हैं वहीं आमिर खान पांचवे नम्बर हैं। Ranveer Singh New Home: रणवीर सिंह के काम की बात करें तो इन दिनों रणवीर अपनी अपकमिंग फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की शूटिंग में व्यस्त हैं। ये फिल्म करण जौहर के डायरेक्शन में बन रही है। इसमें उनके साथ आलिया भट्ट और धर्मेंद्र भी नजर आएंगे। Bollywood Stars Fav. Food: एक्टर्स अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में बनें रहते हैं। फैंस भी अपने फेवरेट स्टार्स की हर छोटी-बड़ी बात जानने को बेहद एक्साइटेड रहते हैं। Rocketry: The Nambi Effect : क्यों माधवन ने कहा, अमेरिका से अच्छे, रियल हीरो भारत में थोक में पड़े हैं, जिनकी हम बात नहीं करते, माधवन ने फिल्म को कड़ी मेहनत, सालों की रिसर्च, घण्टों के विचार-विमर्श के बाद बनाया है। Pathaan motion poster: पठान फिल्म का पोस्टर जारी हुआ, पोस्टर ने फिल्म देखने की उत्सुकता बढ़ा दी, शाहरुख के तीस साल पूरे होने पर शाहरुख ने, अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी "पठान" फिल्म का पोस्टर पोस्ट किया है। Bollywood Controversy: शाहरुख को गौरी का साथ पाने के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़े थे क्योंकि गौरी एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार से हैं और शाहरुख़ एक मुस्लिम परिवार से। इसलिए गौरी का परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था। उस वक्त तक शाहरुख़ की बॉलीवुड में एंट्री भी नहीं हुई थी। Celebrities Instagram Post Fees: फिल्मों के अलावा भी इन सितारों के पास कमाई करने का और भी जरिया होता है। जहां से ये मोटी रकम छापते हैं। इसमें ऐसा ही एक जरिया इंस्टाग्राम है। रिपोर्ट्स की मानें तो ये फिल्मी सितारे अपने इंस्टा पर एक प्रमोशनल पोस्ट करने के करोड़ों रुपये चार्ज करते हैं। Bollywood Controversy: शाहरुख और काजोल ने साथ में कई फिल्मों में काम किया है। इन फिल्मों में कुछ कुछ होता है, बाजीगर, करन अर्जुन, माय नेम इज खान आदि फिल्म्स शामिल है। शाहरुख और काजोल की इस सुपरहिट केमिस्ट्री पर समय-समय पर कई सवाल भी खड़े किये जाते रहे हैं। दोनों ही एक्टर्स पर कई बार एक साथ रिलेशन में रहने की बात भी सामने आ चुकी है। Pan Masala: अजय देवगन, अक्षय कुमार और शाहरुख खान को गुटखा विज्ञापन को लेकर काफी कुछ सुनना पड़ता था। तीनों स्टार्स में से सबसे ज्यादा अक्षय कुमार और अजय देवगन की फजीहत हुई थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि खुद अक्षय कुमार को सोशल मीडिया पर आकर फैंस के लिए माफीनामा लिखना पड़ा था।
Shamshera to Brahmastra: शमशेरा से लेकर ब्रह्मास्त्र तक ये हैं बड़े बजट की फिल्म, जिन्हें आप देखने का मौका नहीं छोड़ेंगे अगर फिल्म पठान की बात करें तो उसे दो सौ पचास करोड़ के बजट के साथ बनाया जा रहा है और एटली की फिल्म जवान को भी दो सौ करोड़ के बजट के आसपास बनाया जा रहा है। Bollywood Actors: जानिए, कौन से बॉलीवुड एक्टर हैं मोस्ट पॉपुलर लिस्ट में नम्बर एक, अक्षय कुमार ने सलमान और शाहरुख को किया पीछे सलमान की फिल्म भी काफी समय से बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिज़नेस नही कर सकी है। ऋतिक रोशन इस लिस्ट में चौथे नम्बर पर हैं वहीं आमिर खान पांचवे नम्बर हैं। Ranveer Singh New Home: रणवीर सिंह के काम की बात करें तो इन दिनों रणवीर अपनी अपकमिंग फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की शूटिंग में व्यस्त हैं। ये फिल्म करण जौहर के डायरेक्शन में बन रही है। इसमें उनके साथ आलिया भट्ट और धर्मेंद्र भी नजर आएंगे। Bollywood Stars Fav. Food: एक्टर्स अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में बनें रहते हैं। फैंस भी अपने फेवरेट स्टार्स की हर छोटी-बड़ी बात जानने को बेहद एक्साइटेड रहते हैं। Rocketry: The Nambi Effect : क्यों माधवन ने कहा, अमेरिका से अच्छे, रियल हीरो भारत में थोक में पड़े हैं, जिनकी हम बात नहीं करते, माधवन ने फिल्म को कड़ी मेहनत, सालों की रिसर्च, घण्टों के विचार-विमर्श के बाद बनाया है। Pathaan motion poster: पठान फिल्म का पोस्टर जारी हुआ, पोस्टर ने फिल्म देखने की उत्सुकता बढ़ा दी, शाहरुख के तीस साल पूरे होने पर शाहरुख ने, अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी "पठान" फिल्म का पोस्टर पोस्ट किया है। Bollywood Controversy: शाहरुख को गौरी का साथ पाने के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़े थे क्योंकि गौरी एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार से हैं और शाहरुख़ एक मुस्लिम परिवार से। इसलिए गौरी का परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था। उस वक्त तक शाहरुख़ की बॉलीवुड में एंट्री भी नहीं हुई थी। Celebrities Instagram Post Fees: फिल्मों के अलावा भी इन सितारों के पास कमाई करने का और भी जरिया होता है। जहां से ये मोटी रकम छापते हैं। इसमें ऐसा ही एक जरिया इंस्टाग्राम है। रिपोर्ट्स की मानें तो ये फिल्मी सितारे अपने इंस्टा पर एक प्रमोशनल पोस्ट करने के करोड़ों रुपये चार्ज करते हैं। Bollywood Controversy: शाहरुख और काजोल ने साथ में कई फिल्मों में काम किया है। इन फिल्मों में कुछ कुछ होता है, बाजीगर, करन अर्जुन, माय नेम इज खान आदि फिल्म्स शामिल है। शाहरुख और काजोल की इस सुपरहिट केमिस्ट्री पर समय-समय पर कई सवाल भी खड़े किये जाते रहे हैं। दोनों ही एक्टर्स पर कई बार एक साथ रिलेशन में रहने की बात भी सामने आ चुकी है। Pan Masala: अजय देवगन, अक्षय कुमार और शाहरुख खान को गुटखा विज्ञापन को लेकर काफी कुछ सुनना पड़ता था। तीनों स्टार्स में से सबसे ज्यादा अक्षय कुमार और अजय देवगन की फजीहत हुई थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि खुद अक्षय कुमार को सोशल मीडिया पर आकर फैंस के लिए माफीनामा लिखना पड़ा था।
वहाँ आ गये। महाराणी जानकी सहम गईं । तब उसने कहा - "देखो भैया ! भाभी का रावण के प्रति कैसा प्रेम है कि अथ तक वे उनका चित्र बनाती रहती है । यह बात सम्पूर्ण महल में और नगर में फैल गयो । विवश होकर भगवान् ने मीताजी को अपने घर से निकाल दिया। वे गंगा जी के कछारों में भटकती रहीं। वहीं किसी नाले में उनके दो पुत्र हुए। इन पुत्रों को गोदी में लिये वे जंगलों से फल तोड़कर पेड़ों के नीचे रह कर निर्वाह करती थीं। अकस्मात् एक दिन आखेट करते हुए रामजी वहाँ पहुँच गये । अत्यन्त कृशगात्र, मलिन वस्त्र पहिने धूप से फाली पड़ी, अपनी प्राणप्रिया को राघवेन्द्र पहिचान बये। वे उनकी ओर दौड़े । बनवासिनी सीता ने कहा - "राजन् ! आप मेरा स्पर्श न करें। आपके में स्पर्श करने योग्य रही नहीं। मुझे कलंक लगा है, मुझ कलंकिनी के स्पर्श करने से आपके विमल यश में धब्बा लगेगा। मैं चाहती हूँ आपकी कीर्ति विमल बनी रहे। इतना सुनने पर भी राने जी से नहीं रहा गया। वे भावावेश में वन विहारिणी जनकनन्दिनी को पकड़ने दौड़े । मैथिली पूरी शक्ति से दौड़ी जिस से राघवेन्द्र उन्हें स्पर्श न कर सकें। जब दोनों अत्यन्त समीप आ गये, तो सीता जी गंगा जी के एक ऊँचे टीले से बड़े भारी नाले में कूद पड़ीं। उनके शरीर का अन्त हो गया। सौ करोड़ रामायण है, किसी न किसी में यह कथा होगी ही परन्तु काल की इसमें कैसी कारुणिक लीला का वर्णन है, जनकनंदिनों के चरित्र को कितना उज्वल बताया गया है, एक वह भी समय था कि भगवान राम एक क्षणको भी सीताजीका वियोग सहन
वहाँ आ गये। महाराणी जानकी सहम गईं । तब उसने कहा - "देखो भैया ! भाभी का रावण के प्रति कैसा प्रेम है कि अथ तक वे उनका चित्र बनाती रहती है । यह बात सम्पूर्ण महल में और नगर में फैल गयो । विवश होकर भगवान् ने मीताजी को अपने घर से निकाल दिया। वे गंगा जी के कछारों में भटकती रहीं। वहीं किसी नाले में उनके दो पुत्र हुए। इन पुत्रों को गोदी में लिये वे जंगलों से फल तोड़कर पेड़ों के नीचे रह कर निर्वाह करती थीं। अकस्मात् एक दिन आखेट करते हुए रामजी वहाँ पहुँच गये । अत्यन्त कृशगात्र, मलिन वस्त्र पहिने धूप से फाली पड़ी, अपनी प्राणप्रिया को राघवेन्द्र पहिचान बये। वे उनकी ओर दौड़े । बनवासिनी सीता ने कहा - "राजन् ! आप मेरा स्पर्श न करें। आपके में स्पर्श करने योग्य रही नहीं। मुझे कलंक लगा है, मुझ कलंकिनी के स्पर्श करने से आपके विमल यश में धब्बा लगेगा। मैं चाहती हूँ आपकी कीर्ति विमल बनी रहे। इतना सुनने पर भी राने जी से नहीं रहा गया। वे भावावेश में वन विहारिणी जनकनन्दिनी को पकड़ने दौड़े । मैथिली पूरी शक्ति से दौड़ी जिस से राघवेन्द्र उन्हें स्पर्श न कर सकें। जब दोनों अत्यन्त समीप आ गये, तो सीता जी गंगा जी के एक ऊँचे टीले से बड़े भारी नाले में कूद पड़ीं। उनके शरीर का अन्त हो गया। सौ करोड़ रामायण है, किसी न किसी में यह कथा होगी ही परन्तु काल की इसमें कैसी कारुणिक लीला का वर्णन है, जनकनंदिनों के चरित्र को कितना उज्वल बताया गया है, एक वह भी समय था कि भगवान राम एक क्षणको भी सीताजीका वियोग सहन
Saraikela : बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एचएसबीसी ने रविवार को एक अनूठी पहल करते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम के बीहड़ और दुर्गम इलाकों में 565 एएनएम के बीच इलेक्ट्रॉनिक स्कूटरों का वितरण करने का फैसला किया है. ये सभी सहिया तथा एएनएम टाटा स्टील फाउंडेशन के मानसी कार्यक्रम से जुड़ी हैं. इन ई-स्कूटरों की मदद से वे गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल में मदद कर सकती हैं. ई-स्कूटर का वितरण तीन चरणों में होगा, जिसकी शुरुआत सरायकेला-खरसावां जिले से हुई. यहां कुल 181 ई-स्कूटरों का वितरण गया. इसके बाद पश्चिमी सिंहभूम में 234 ई-स्कूटर और पूर्वी सिंहभूम में 150 ई-स्कूटर वितरित किये जायेंगे. रविवार को सरायकेला टाउन हॉल में झारखंड के कल्याण मंत्री चंपाई सोरेन, विधायक दशरथ गगराई तथा सबिता महतो, कोल्हान आयुक्त मनीष रंजन, सरायकेला के उपायुक्त अरवा राजकमल, डीसीसी प्रवीण कुमार गगराई, एसपी आनंद प्रकाश, चांडिल के एसडीओ रंजीत लोहरा, तथा सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने 181 एएनएम के बीच इन ई-स्कूटरों का वितरण किया. इस मौके पर टाटा स्टील के सीएसआर चीफ सौरव रॉय ने कहा कि पिछले कई वर्षों में हमारी टीमों ने सहिया और एएनएम दीदी के साथ मिलकर काम किया है और उनकी चुनौतियों को समझा है. इलेक्ट्रिक स्कूटर उनके लिए समय पर जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक पहुंचने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करेंगे. इस अवसर पर एचएसबीसी की हेड, कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी अलोका मजूमदार ने कहा कि एचएसबीसी जरूरतमंद समुदाय का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है.
Saraikela : बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एचएसबीसी ने रविवार को एक अनूठी पहल करते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम के बीहड़ और दुर्गम इलाकों में पाँच सौ पैंसठ एएनएम के बीच इलेक्ट्रॉनिक स्कूटरों का वितरण करने का फैसला किया है. ये सभी सहिया तथा एएनएम टाटा स्टील फाउंडेशन के मानसी कार्यक्रम से जुड़ी हैं. इन ई-स्कूटरों की मदद से वे गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल में मदद कर सकती हैं. ई-स्कूटर का वितरण तीन चरणों में होगा, जिसकी शुरुआत सरायकेला-खरसावां जिले से हुई. यहां कुल एक सौ इक्यासी ई-स्कूटरों का वितरण गया. इसके बाद पश्चिमी सिंहभूम में दो सौ चौंतीस ई-स्कूटर और पूर्वी सिंहभूम में एक सौ पचास ई-स्कूटर वितरित किये जायेंगे. रविवार को सरायकेला टाउन हॉल में झारखंड के कल्याण मंत्री चंपाई सोरेन, विधायक दशरथ गगराई तथा सबिता महतो, कोल्हान आयुक्त मनीष रंजन, सरायकेला के उपायुक्त अरवा राजकमल, डीसीसी प्रवीण कुमार गगराई, एसपी आनंद प्रकाश, चांडिल के एसडीओ रंजीत लोहरा, तथा सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने एक सौ इक्यासी एएनएम के बीच इन ई-स्कूटरों का वितरण किया. इस मौके पर टाटा स्टील के सीएसआर चीफ सौरव रॉय ने कहा कि पिछले कई वर्षों में हमारी टीमों ने सहिया और एएनएम दीदी के साथ मिलकर काम किया है और उनकी चुनौतियों को समझा है. इलेक्ट्रिक स्कूटर उनके लिए समय पर जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक पहुंचने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करेंगे. इस अवसर पर एचएसबीसी की हेड, कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी अलोका मजूमदार ने कहा कि एचएसबीसी जरूरतमंद समुदाय का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है.
Viral Video: कई लोग ज्वेलरी शॉप या दुकानों में खरीदारी के दौरान अपने हाथ की सफाई दिखाते हुए चोरी की घटना को अंजाम देते हैं, लेकिन वो इस बात को शायद भूल जाते हैं कि उनकी करतूत सीसीटीवी (CCTV) कैमरे से बच नहीं पाती है. बहुत ही शातिराना तरीके से चोरी की घटना को अंजाम देने के बावजूद उनकी चोरी पकड़ी जाती है. इस बीच सोशल मीडिया (Social Media) पर मेरठ (Meerut) से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शख्स गारमेंट्स शॉप (Garments Shop) में जींस (Jeans) खरीदने के बहाने से पहुंचता है, लेकिन भीड़ के बीच दिनदहाड़े वो सबकी नजरों से बचते हुए पैंट चोरी करके अपने बैग में डाल लेता है. हालांकि उसकी यह करतूत वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाती है. घटना थाना किठौर की बताई जा रही है. (SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
Viral Video: कई लोग ज्वेलरी शॉप या दुकानों में खरीदारी के दौरान अपने हाथ की सफाई दिखाते हुए चोरी की घटना को अंजाम देते हैं, लेकिन वो इस बात को शायद भूल जाते हैं कि उनकी करतूत सीसीटीवी कैमरे से बच नहीं पाती है. बहुत ही शातिराना तरीके से चोरी की घटना को अंजाम देने के बावजूद उनकी चोरी पकड़ी जाती है. इस बीच सोशल मीडिया पर मेरठ से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शख्स गारमेंट्स शॉप में जींस खरीदने के बहाने से पहुंचता है, लेकिन भीड़ के बीच दिनदहाड़े वो सबकी नजरों से बचते हुए पैंट चोरी करके अपने बैग में डाल लेता है. हालांकि उसकी यह करतूत वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाती है. घटना थाना किठौर की बताई जा रही है.
Gurugram News: जारी विरोध के बीच एक हिन्दू समुदाय के शख्स ने अपनी दुकान की जगह नमाज पढ़ने के लिए दे दी है। उधर अहमदाबाद में वीएचपी के सदस्य नमाज के बाद पार्क को शुद्ध करने के लिए पहुंच गए। खुले में नमाज के खिलाफ गुड़गांव के कुछ निवासियों और राइटविंग समूहों के विरोध के बीच, एक व्यक्ति अक्षय यादव ने नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय को अपनी खाली दुकान दे दी। शख्स के अनुसार पिछले शुक्रवार को यहां कम से कम 15 लोगों ने नमाज अदा की थी। अक्षय यादव ने कहा कि वह अखबारों में पढ़ रहे थे कि जुमे की नमाज बाधित हो रही है। जिसके बाद इस मुद्दे पर उन्होंने अपने एक किरायेदार तौफीक अहमद से बात की। उन्होंने कहा- "मैंने उनसे कहा कि मेरे घर के पास एक खाली दुकान है, जिसका इस्तेमाल नमाज के लिए किया जा सकता है। इस इलाके में मुस्लिम समुदाय के काफी लोग ऑटो मार्केट और पास के सर्विस स्टेशनों में काम करते हैं। मैं बस समुदायों के बीच शांति और सद्भाव की आशा करता हूं। संविधान कहता है कि प्रत्येक नागरिक को प्रार्थना करने का अधिकार है और किसी को भी इस पर आपत्ति नहीं हो सकती है"। पिछले 12 नवंबर को राइटविंग संगठन ने सेक्टर 12 ए में नमाज स्थल पर यह कहते हुए डेरा डाला दिया था कि वे वहां पर वॉलीबॉल कोर्ट बनाएंगे। जबकि सरहौल में 80 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने एक पार्क पर कब्जा कर नमाज को बाधित कर दिया था। गुरुग्राम के सेक्टर 12 ए की साइट उन 37 जगहों में शामिल थी, जहां पर प्रशासन ने नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां पर कुछ हिन्दूवादी संगठन खुले में नमाज का विरोध करते हुए इस साइट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। काफी विवादों के बाद आखिरकार प्रशासन ने इस साइट पर से नमाज पढ़ने की अनुमति वापस ले ली थी। अहमदाबाद में वीएचपी के कार्यकर्ता उस पार्क का शुद्धिकरण करने पहुंच गए, जहां कुछ लोगों ने नमाज पढ़ी थी। जानकारी के अनुसार 16 नवंबर को विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने अहमदाबाद के वस्त्रपुर इलाके में स्थित एक बगीचे में "शुद्धिकरण अनुष्ठान" किया। इस घटना के वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग नारा लगाते हुए फूल और गंगाजल का छिड़काव कर रहे हैं।
Gurugram News: जारी विरोध के बीच एक हिन्दू समुदाय के शख्स ने अपनी दुकान की जगह नमाज पढ़ने के लिए दे दी है। उधर अहमदाबाद में वीएचपी के सदस्य नमाज के बाद पार्क को शुद्ध करने के लिए पहुंच गए। खुले में नमाज के खिलाफ गुड़गांव के कुछ निवासियों और राइटविंग समूहों के विरोध के बीच, एक व्यक्ति अक्षय यादव ने नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय को अपनी खाली दुकान दे दी। शख्स के अनुसार पिछले शुक्रवार को यहां कम से कम पंद्रह लोगों ने नमाज अदा की थी। अक्षय यादव ने कहा कि वह अखबारों में पढ़ रहे थे कि जुमे की नमाज बाधित हो रही है। जिसके बाद इस मुद्दे पर उन्होंने अपने एक किरायेदार तौफीक अहमद से बात की। उन्होंने कहा- "मैंने उनसे कहा कि मेरे घर के पास एक खाली दुकान है, जिसका इस्तेमाल नमाज के लिए किया जा सकता है। इस इलाके में मुस्लिम समुदाय के काफी लोग ऑटो मार्केट और पास के सर्विस स्टेशनों में काम करते हैं। मैं बस समुदायों के बीच शांति और सद्भाव की आशा करता हूं। संविधान कहता है कि प्रत्येक नागरिक को प्रार्थना करने का अधिकार है और किसी को भी इस पर आपत्ति नहीं हो सकती है"। पिछले बारह नवंबर को राइटविंग संगठन ने सेक्टर बारह ए में नमाज स्थल पर यह कहते हुए डेरा डाला दिया था कि वे वहां पर वॉलीबॉल कोर्ट बनाएंगे। जबकि सरहौल में अस्सी से अधिक प्रदर्शनकारियों ने एक पार्क पर कब्जा कर नमाज को बाधित कर दिया था। गुरुग्राम के सेक्टर बारह ए की साइट उन सैंतीस जगहों में शामिल थी, जहां पर प्रशासन ने नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां पर कुछ हिन्दूवादी संगठन खुले में नमाज का विरोध करते हुए इस साइट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। काफी विवादों के बाद आखिरकार प्रशासन ने इस साइट पर से नमाज पढ़ने की अनुमति वापस ले ली थी। अहमदाबाद में वीएचपी के कार्यकर्ता उस पार्क का शुद्धिकरण करने पहुंच गए, जहां कुछ लोगों ने नमाज पढ़ी थी। जानकारी के अनुसार सोलह नवंबर को विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने अहमदाबाद के वस्त्रपुर इलाके में स्थित एक बगीचे में "शुद्धिकरण अनुष्ठान" किया। इस घटना के वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग नारा लगाते हुए फूल और गंगाजल का छिड़काव कर रहे हैं।
JAMSHEDPUR: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मंडे को सिटी के बड़े ज्वेलर छगनलाल दयालजी के आधा दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान टीम को कई महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स भी मिले, जिसे सीज कर लिया गया है। आईटी अधिकारियों मंडे मार्निग से जांच शुरू की जो देर शाम तक चलती रही। मंडे की मार्निग इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम ने बिष्टुपुर सिग्नल स्थित छगनलाल दयालजी की ज्वेलरी शॉप के अलावा सीएच एरिया, कांट्रेक्टर्स एरिया स्थित आवास के अलावा सरायकेला व चाईबासा स्थित ठिकानों के साथ ही कोल्हान के क्ख् समेत कंट्री में पूरे क्म् जगहों पर एक साथ छापेमारी की। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की क्ख् सदस्यीय टीम ने सिटी स्थित विभिन्न ठिकानों पर रेड किया। इस दौरान टीम ने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। इसके अलावा टीम ने अकाउंट्स के दस्तावेज सहित कई दूसरे डॉक्यूमेंट्स को देखा और उसे जब्त कर लिया। इस दौरान सिक्योरिटी के भी पूरे अरेंजमेंट किए गए थे, ताकि किसी तरह की कोई प्रॉब्लम न हो। ज्वेलरी के असेस्मेंट के लिए रांची से टीम बुलाई गई है। जो इनकी कीमत का आकलन कर रही है। मालूम हो कि छगनलाल ज्वेलर्स के बिष्टुपुर स्थित प्रतिष्ठान पर ही तीन साल पहले आयकर विभाग, जमशेदपुर के तत्कालीन उपनिदेशक संजय कुमार ने छापेमारी की थी। इसके बाद से विभाग को कई नई जानकारियां मिल रही थीं। उन्ही जानकारियों के आधार पर उक्त छापेमारी की जा रही है। छापेमारी में नगदी के अलावा भारी मात्रा में सोने, चांदी और हीरे मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। छापेमारी मंगलवार को भी जारी रहने की संभावना है।
JAMSHEDPUR: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मंडे को सिटी के बड़े ज्वेलर छगनलाल दयालजी के आधा दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान टीम को कई महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स भी मिले, जिसे सीज कर लिया गया है। आईटी अधिकारियों मंडे मार्निग से जांच शुरू की जो देर शाम तक चलती रही। मंडे की मार्निग इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम ने बिष्टुपुर सिग्नल स्थित छगनलाल दयालजी की ज्वेलरी शॉप के अलावा सीएच एरिया, कांट्रेक्टर्स एरिया स्थित आवास के अलावा सरायकेला व चाईबासा स्थित ठिकानों के साथ ही कोल्हान के क्ख् समेत कंट्री में पूरे क्म् जगहों पर एक साथ छापेमारी की। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की क्ख् सदस्यीय टीम ने सिटी स्थित विभिन्न ठिकानों पर रेड किया। इस दौरान टीम ने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। इसके अलावा टीम ने अकाउंट्स के दस्तावेज सहित कई दूसरे डॉक्यूमेंट्स को देखा और उसे जब्त कर लिया। इस दौरान सिक्योरिटी के भी पूरे अरेंजमेंट किए गए थे, ताकि किसी तरह की कोई प्रॉब्लम न हो। ज्वेलरी के असेस्मेंट के लिए रांची से टीम बुलाई गई है। जो इनकी कीमत का आकलन कर रही है। मालूम हो कि छगनलाल ज्वेलर्स के बिष्टुपुर स्थित प्रतिष्ठान पर ही तीन साल पहले आयकर विभाग, जमशेदपुर के तत्कालीन उपनिदेशक संजय कुमार ने छापेमारी की थी। इसके बाद से विभाग को कई नई जानकारियां मिल रही थीं। उन्ही जानकारियों के आधार पर उक्त छापेमारी की जा रही है। छापेमारी में नगदी के अलावा भारी मात्रा में सोने, चांदी और हीरे मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। छापेमारी मंगलवार को भी जारी रहने की संभावना है।
चंडीगढ़/पंचकूला, 27 अक्तूबर (नस) पंजाब के राज्यपाल व यूटी के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित से नगर निगम में प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स को भी मनोनीत करके रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों को भी सदन में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गयी। प्रतिनिधित्व मिलने से इस क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को उठाने के लिए सही मंच मिल सकेगा। बुधवार को प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन चंडीगढ़ की एक बैठक एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल गुप्ता की अगुवाई में हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि एस्टेट ऑफिस, हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ नगर निगम में राइट टू सर्विस एक्ट लागू किये जाने व तीनों दफ्तरों को संपत्ति मामलों के संबंध में मानक कार्य निर्देश जारी किए जाने आदि जैसी कई मांगें लंबित हैं। संस्था के सदस्यों का कहना था कि आज तक नगर निगम में उनके पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिस कारण यह वर्ग हमेशा से उपेक्षित रहा है। यूटी के प्रशासक से चंडीगढ़ में अपार्टमेंट एक्ट लागू करने, ब्लड रिलेशन में जीपीए के निष्पादन के लिए स्टाम्प शुल्क की वसूली बंद किये जाने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार स्थानीय निवासियों की संपत्ति जरूरतों के लिए एक पैनल बनाने की आवश्यकता आदि अहम मुद्दों पर चर्चा की।
चंडीगढ़/पंचकूला, सत्ताईस अक्तूबर पंजाब के राज्यपाल व यूटी के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित से नगर निगम में प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स को भी मनोनीत करके रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों को भी सदन में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गयी। प्रतिनिधित्व मिलने से इस क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को उठाने के लिए सही मंच मिल सकेगा। बुधवार को प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन चंडीगढ़ की एक बैठक एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल गुप्ता की अगुवाई में हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि एस्टेट ऑफिस, हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ नगर निगम में राइट टू सर्विस एक्ट लागू किये जाने व तीनों दफ्तरों को संपत्ति मामलों के संबंध में मानक कार्य निर्देश जारी किए जाने आदि जैसी कई मांगें लंबित हैं। संस्था के सदस्यों का कहना था कि आज तक नगर निगम में उनके पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिस कारण यह वर्ग हमेशा से उपेक्षित रहा है। यूटी के प्रशासक से चंडीगढ़ में अपार्टमेंट एक्ट लागू करने, ब्लड रिलेशन में जीपीए के निष्पादन के लिए स्टाम्प शुल्क की वसूली बंद किये जाने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार स्थानीय निवासियों की संपत्ति जरूरतों के लिए एक पैनल बनाने की आवश्यकता आदि अहम मुद्दों पर चर्चा की।
इस साल आईपीएल सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेलने वाले युवराज सिंह को उनकी फ्रेंचाइज़ी ने कुछ दिन पहले ही टीम से रिलीज़ कर दिया है। वह आरोन फिंच के साथ उन ग्यारह खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें टीम मैनेजमेंट द्वारा रिलीज़ किया गया है। युवराज सिंह ने 2018 के आईपीएल सीजन में अपनी 6 पारियों में केवल 65 रन बनाए थे। खराब फॉर्म और फिटनेस समस्याओं की वजह से युवराज को टीम से बाहर रखने का फैसला किया गया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए आईपीएल सीज़न 2018 बहुत निराशाजनक रहा था और टीम 14 मैचों में से सिर्फ 6 में जीत दर्ज कर छठे स्थान पर रही थी। इस सीज़न में आरसीबी का कोई भी बल्लेबाज़ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया जिसकी वजह से वे प्ले-ऑफ में भी जगह नहीं बना पाए। इस सप्ताह बैंगलोर फ्रैंचाइज़ी ने ब्रेंडन मैकलम, कोरी एंडरसन और क्रिस वोक्स जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को टीम से रिलीज़ कर दिया है। ऐसे में टीम प्रबंधन किसी भारतीय ऑलराउंडर को टीम में शामिल करना चाहेगा और इस स्थिति में युवराज सिंह आरसीबी के लिए एक संभावित विकल्प हो सकते हैं। इससे पहले युवराज ने आईपीएल सीज़न 2014 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का प्रतिनिधित्व किया था, जहां उन्होंने 14 मैचों में 376 रन बनाए थे। उन्होंने 83 के उच्चतम स्कोर के साथ उस सीज़न में तीन अर्धशतक लगाए थे। चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच युवराज के लिए हमेशा अच्छी साबित हुई है और अगर वह आईपीएल सीज़न 2019 में अच्छा प्रदर्शन कर पाए तो उनको विश्वकप 2019 में भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मौका भी मिल सकता है। आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स का बूरा दौर अभी ख़त्म नहीं हुआ है। डीडी टीम प्रबंधन ने हर सीजन में अपनी टीम में कई बदलाव किए लेकिन फिर भी टीम आवश्यक परिणाम नहीं दे सकी। पिछले सीज़न में टीम को टूर्नामेंट के मध्य में कप्तान बदलना पड़ा लेकिन फिर भी टीम प्ले-ऑफ में जगह नहीं बना पाई। इसके परिणामस्वरूप, टीम प्रबंधन ने अगले सीज़न के लिए भी टीम में कई बदलाव किये हैं। उन्होंने गौतम गंभीर, जेसन रॉय, जूनियर डाला, लिआम प्लंकेट, मोहम्मद शमी, सायन घोष, डैनियल क्रिश्चियन, ग्लेन मैक्सवेल, गुरकीरत सिंह मान और नमन ओझा को टीम से रिलीज़ किया है। ऐसे में टीम में कोई भी अनुभवी खिलाड़ी नहीं होने के कारण, दिल्ली डेयरडेविल्स आगामी सीज़न के लिए युवराज सिंह को टीम में शामिल कर सकते हैं। इससे पहले आईपीएल सीज़न 2015 में युवराज ने दिल्ली डेयरडेविल्स का प्रतिनिधित्व किया और 14 मैचों में 19. 15 की औसत से 249 रन बनाए थे। कोलकाता नाइट राइडर्स के पास इस साल हुए आईपीएल में दिनेश कार्तिक की कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका था और टीम 14 मैचों से 8 जीत में जीत दर्ज कर तीसरे स्थान पर रही थी। अगले महीने होने वाली आईपीएल नीलामी से ठीक एक महीने पहले केकेआर टीम प्रबंधन ने अपने कुछ बड़े खिलाड़ियों को टीम से रिलीज़ किया है जिनमें मिचेल स्टार्क, मिचेल जॉनसन और टॉम करन के नाम शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क 11वें सीजन में केकेआर के लिए एक भी मैच नहीं खेल पाए जबकि मिचेल जॉनसन ने 6 मैचों में केवल 2 विकेट लिए थे। टीम में आंद्रे रसेल और सुनील नारेन जैसे ऑलराउंडर्स के साथ, केकेआर प्रबंधन एक भारतीय ऑलराउंडर को टीम में शामिल करना चाहेगा। ऐसे में भारतीय टीम के आलराउंडर युवराज सिंह एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं और कोलकाता फ्रैंचाइज़ी उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार कर सकती है।
इस साल आईपीएल सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेलने वाले युवराज सिंह को उनकी फ्रेंचाइज़ी ने कुछ दिन पहले ही टीम से रिलीज़ कर दिया है। वह आरोन फिंच के साथ उन ग्यारह खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्हें टीम मैनेजमेंट द्वारा रिलीज़ किया गया है। युवराज सिंह ने दो हज़ार अट्ठारह के आईपीएल सीजन में अपनी छः पारियों में केवल पैंसठ रन बनाए थे। खराब फॉर्म और फिटनेस समस्याओं की वजह से युवराज को टीम से बाहर रखने का फैसला किया गया। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए आईपीएल सीज़न दो हज़ार अट्ठारह बहुत निराशाजनक रहा था और टीम चौदह मैचों में से सिर्फ छः में जीत दर्ज कर छठे स्थान पर रही थी। इस सीज़न में आरसीबी का कोई भी बल्लेबाज़ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया जिसकी वजह से वे प्ले-ऑफ में भी जगह नहीं बना पाए। इस सप्ताह बैंगलोर फ्रैंचाइज़ी ने ब्रेंडन मैकलम, कोरी एंडरसन और क्रिस वोक्स जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को टीम से रिलीज़ कर दिया है। ऐसे में टीम प्रबंधन किसी भारतीय ऑलराउंडर को टीम में शामिल करना चाहेगा और इस स्थिति में युवराज सिंह आरसीबी के लिए एक संभावित विकल्प हो सकते हैं। इससे पहले युवराज ने आईपीएल सीज़न दो हज़ार चौदह में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का प्रतिनिधित्व किया था, जहां उन्होंने चौदह मैचों में तीन सौ छिहत्तर रन बनाए थे। उन्होंने तिरासी के उच्चतम स्कोर के साथ उस सीज़न में तीन अर्धशतक लगाए थे। चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच युवराज के लिए हमेशा अच्छी साबित हुई है और अगर वह आईपीएल सीज़न दो हज़ार उन्नीस में अच्छा प्रदर्शन कर पाए तो उनको विश्वकप दो हज़ार उन्नीस में भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मौका भी मिल सकता है। आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स का बूरा दौर अभी ख़त्म नहीं हुआ है। डीडी टीम प्रबंधन ने हर सीजन में अपनी टीम में कई बदलाव किए लेकिन फिर भी टीम आवश्यक परिणाम नहीं दे सकी। पिछले सीज़न में टीम को टूर्नामेंट के मध्य में कप्तान बदलना पड़ा लेकिन फिर भी टीम प्ले-ऑफ में जगह नहीं बना पाई। इसके परिणामस्वरूप, टीम प्रबंधन ने अगले सीज़न के लिए भी टीम में कई बदलाव किये हैं। उन्होंने गौतम गंभीर, जेसन रॉय, जूनियर डाला, लिआम प्लंकेट, मोहम्मद शमी, सायन घोष, डैनियल क्रिश्चियन, ग्लेन मैक्सवेल, गुरकीरत सिंह मान और नमन ओझा को टीम से रिलीज़ किया है। ऐसे में टीम में कोई भी अनुभवी खिलाड़ी नहीं होने के कारण, दिल्ली डेयरडेविल्स आगामी सीज़न के लिए युवराज सिंह को टीम में शामिल कर सकते हैं। इससे पहले आईपीएल सीज़न दो हज़ार पंद्रह में युवराज ने दिल्ली डेयरडेविल्स का प्रतिनिधित्व किया और चौदह मैचों में उन्नीस. पंद्रह की औसत से दो सौ उनचास रन बनाए थे। कोलकाता नाइट राइडर्स के पास इस साल हुए आईपीएल में दिनेश कार्तिक की कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका था और टीम चौदह मैचों से आठ जीत में जीत दर्ज कर तीसरे स्थान पर रही थी। अगले महीने होने वाली आईपीएल नीलामी से ठीक एक महीने पहले केकेआर टीम प्रबंधन ने अपने कुछ बड़े खिलाड़ियों को टीम से रिलीज़ किया है जिनमें मिचेल स्टार्क, मिचेल जॉनसन और टॉम करन के नाम शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क ग्यारहवें सीजन में केकेआर के लिए एक भी मैच नहीं खेल पाए जबकि मिचेल जॉनसन ने छः मैचों में केवल दो विकेट लिए थे। टीम में आंद्रे रसेल और सुनील नारेन जैसे ऑलराउंडर्स के साथ, केकेआर प्रबंधन एक भारतीय ऑलराउंडर को टीम में शामिल करना चाहेगा। ऐसे में भारतीय टीम के आलराउंडर युवराज सिंह एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं और कोलकाता फ्रैंचाइज़ी उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार कर सकती है।
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बुधवार को लोकसभा में प्रस्तुत बजट को गरीब के लिए समर्पित बजट एवं देश के समग्र विकास का बजट बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में स्वास्थ्य योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। सराफ ने देशभर की मेडिकल सीटों में 5 हजार की वृद्धि की घोषणा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे देश में चिकित्सकों की कमी दूर होगी एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुलभ कराई जा सकेंगी। उन्होंने गर्भवती महिला को 6 हजार रुपए देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गर्भवती महिला का समुचित पोषण हो सकेगा एवं मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। उन्होंने वर्ष 2025 तक देश में टीबी रोग का उन्मूलन करने की घोषणा का भी स्वागत किया। चिकित्सा मंत्री ने बजट में प्रस्तावित 5 हजार करोड़ रुपए की सिंचाई फंड व 8 हजार करोड़ रुपए के डेयरी विकास फंड की घोषणा को सराहनीय बताया और कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता व डेयरी उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक सुधार होगा। उन्होंने आगामी 5 वर्षों में किसानों की आय दोगना करने के लक्ष्य की प्रशंसा की। ग्रामीण क्षेत्रों में 1 लाख तालाब बनाने की घोषणा का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक तरह से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की बढ़ोतरी है।
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बुधवार को लोकसभा में प्रस्तुत बजट को गरीब के लिए समर्पित बजट एवं देश के समग्र विकास का बजट बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में स्वास्थ्य योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। सराफ ने देशभर की मेडिकल सीटों में पाँच हजार की वृद्धि की घोषणा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे देश में चिकित्सकों की कमी दूर होगी एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुलभ कराई जा सकेंगी। उन्होंने गर्भवती महिला को छः हजार रुपए देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गर्भवती महिला का समुचित पोषण हो सकेगा एवं मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। उन्होंने वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक देश में टीबी रोग का उन्मूलन करने की घोषणा का भी स्वागत किया। चिकित्सा मंत्री ने बजट में प्रस्तावित पाँच हजार करोड़ रुपए की सिंचाई फंड व आठ हजार करोड़ रुपए के डेयरी विकास फंड की घोषणा को सराहनीय बताया और कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता व डेयरी उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक सुधार होगा। उन्होंने आगामी पाँच वर्षों में किसानों की आय दोगना करने के लक्ष्य की प्रशंसा की। ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाख तालाब बनाने की घोषणा का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक तरह से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की बढ़ोतरी है।
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बार फिर खुशखबरी सामने आई है। दीया मिर्जा के बाद अब साउथ के सुपरस्टार आर्या पापा बन गए है। आर्या की पत्नी और एक्ट्रेस सायशा सहगल ने बीती रात यानी 23 जुलाई को बेटी को जन्म दिया। मुंबई. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बार फिर खुशखबरी सामने आई है। दीया मिर्जा के बाद अब साउथ के सुपरस्टार आर्या (Arya) पापा बन गए है। आर्या की पत्नी और एक्ट्रेस सायशा सहगल (Sayesha Saigal) ने बीती रात यानी 23 जुलाई को बेटी को जन्म दिया। आर्या के भाई एक्टर विशाल ने अंकल बनने की यह गुड न्यूज फैन्स के साथ ट्विटर के जरिए शेयर की। उन्होंने लिखा- इस खबर को ब्रेक करने में बहुत खुशी हो रही है, मुझे अंकल बनकर बहुत अच्छा लग रहा है, मेरे भाई जैमी और सायशा ने एक बेबीगर्ल पेरेंट्स बने हैं, अब शूटिंग के बीच में अपनी बेकाबू भावनाओं को संभाल नहीं पा रहा हीं। ढेर सारी शुभकामनाएं, इंशाअल्लाह, जीबी डे न्यू बॉर्न, माय बेबी एक पिता के रूप में नई जिम्मेदारी लेने के लिए बधाई। बता दें कि आर्या और सायशा सहगल ने 2019 में हैदराबाद में शादी की थी। दोनों की उम्र में करीब 17 साल का अंतर है। बता दें कि सायशा दिलीप कुमार और सायरा बानो की नातिन है। सायशा खुद भी टॉलीवुड फिल्म एक्ट्रेस हैं । वे फिल्म शिवाय में अजय देवगन के साथ भी नजर आ चुकी हैं। सायशा जाने-माने एक्टर और प्रोड्यूसर सुमित सहगल और शाहीन बानो की बेटी हैं। हालांकि, शाहीन और सुमित अलग हो चुके हैं। बता दें कि शाहीन एक्ट्रेस सायरा बानो के भाई की बेटी हैं। इस लिहाज से सायशा, सायरा और दिलीप कुमार की नातिन हुईं। सायशा ने अपने करियर की शुरुआत तेलुगु फिल्म अखिलः द पावर ऑफ जुआ से की थी। वहीं, आर्या चेन्नई की होटल शी सेल के मालिक है। इसके अलावा उनकी प्रोडक्शन कंपनी भी है द शो पीपल के नाम से। इस कंपनी के तहत वे न्यू टेलेंट को आगे आने का मौका देते हैं। उन्होंने 'कलभा कधलन' (2006), 'माय कन्नाडी' (2007), 'सर्वम' (2009), 'राजा रानी' (2013), 'जीवा' (2014) सहित कई फिल्मों में काम किया है।
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बार फिर खुशखबरी सामने आई है। दीया मिर्जा के बाद अब साउथ के सुपरस्टार आर्या पापा बन गए है। आर्या की पत्नी और एक्ट्रेस सायशा सहगल ने बीती रात यानी तेईस जुलाई को बेटी को जन्म दिया। मुंबई. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बार फिर खुशखबरी सामने आई है। दीया मिर्जा के बाद अब साउथ के सुपरस्टार आर्या पापा बन गए है। आर्या की पत्नी और एक्ट्रेस सायशा सहगल ने बीती रात यानी तेईस जुलाई को बेटी को जन्म दिया। आर्या के भाई एक्टर विशाल ने अंकल बनने की यह गुड न्यूज फैन्स के साथ ट्विटर के जरिए शेयर की। उन्होंने लिखा- इस खबर को ब्रेक करने में बहुत खुशी हो रही है, मुझे अंकल बनकर बहुत अच्छा लग रहा है, मेरे भाई जैमी और सायशा ने एक बेबीगर्ल पेरेंट्स बने हैं, अब शूटिंग के बीच में अपनी बेकाबू भावनाओं को संभाल नहीं पा रहा हीं। ढेर सारी शुभकामनाएं, इंशाअल्लाह, जीबी डे न्यू बॉर्न, माय बेबी एक पिता के रूप में नई जिम्मेदारी लेने के लिए बधाई। बता दें कि आर्या और सायशा सहगल ने दो हज़ार उन्नीस में हैदराबाद में शादी की थी। दोनों की उम्र में करीब सत्रह साल का अंतर है। बता दें कि सायशा दिलीप कुमार और सायरा बानो की नातिन है। सायशा खुद भी टॉलीवुड फिल्म एक्ट्रेस हैं । वे फिल्म शिवाय में अजय देवगन के साथ भी नजर आ चुकी हैं। सायशा जाने-माने एक्टर और प्रोड्यूसर सुमित सहगल और शाहीन बानो की बेटी हैं। हालांकि, शाहीन और सुमित अलग हो चुके हैं। बता दें कि शाहीन एक्ट्रेस सायरा बानो के भाई की बेटी हैं। इस लिहाज से सायशा, सायरा और दिलीप कुमार की नातिन हुईं। सायशा ने अपने करियर की शुरुआत तेलुगु फिल्म अखिलः द पावर ऑफ जुआ से की थी। वहीं, आर्या चेन्नई की होटल शी सेल के मालिक है। इसके अलावा उनकी प्रोडक्शन कंपनी भी है द शो पीपल के नाम से। इस कंपनी के तहत वे न्यू टेलेंट को आगे आने का मौका देते हैं। उन्होंने 'कलभा कधलन' , 'माय कन्नाडी' , 'सर्वम' , 'राजा रानी' , 'जीवा' सहित कई फिल्मों में काम किया है।
अपराध नियंत्रण को लेकर आयोजित बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने चेताया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब कठोर कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. राज्य के विभिन्न इलाकों में हुए हादसों में डूब जाने से आठ लोगों की मौत हो गई. बारिश के बाद जयपुर रिंग रोड बदहाल हो चुकी है. जयपुर के आमेर में एक प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर जान दे दी. जयपुर से सोमवार को प्रकाशित विभिन्न समाचार-पत्रों में आज ये अहम सुर्खियां छाई हुई हैं. दैनिक भास्कर ने सीएम अशोक गहलोत की ओर से रविवार को अपराध नियंत्रण को लेकर गृह विभाग, सीएमओ और पुलिस के आला अधिकारियों की ली गई बैठक के समाचार को प्रमुखता दी है. अखबार ने गहलोत के हवाले से कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. बैठक में सीएम ने मॉब लिचिंग को लेकर भी कहा कि असामाजिक तत्वों को सूचीबद्ध करें. प्रदेश के बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर में रविवार को हुए अलग-अलग हादसों में पांच भाई-बहनों समेत आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई है. राजस्थान पत्रिका ने बारिश के बाद बदहाल हुई जयपुर रिंग रोड के समाचार में बताया है कि रोड का निर्माण कार्य इतना घटिया था कि वह एक बारिश भी नहीं झेल पाई. बारिश के कारण सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है. जगह-जगह से मिट्टी खिसकने से रोड को काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं अखबार ने अपराध से जुड़ी अहम खबर में बताया है कि जयपुर के आमेर में विवाहित प्रेमी जोड़े ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है. अखबार ने बारिश से जुड़े समाचार में बताया है कि बांसवाड़ा के बागीदौरा में पांच इंच पानी गिरा है. इससे माही का जलस्तर भी बढ़ा है. अंग्रेजी समाचार-पत्र Hindustan Times ने राजस्थान रोडवेज के बेड़े में शामिल की जा रही इलेक्ट्रिक बसों के समाचार में बताया है कि जल्द ही जयपुर की सड़कों पर ये बसें दौड़ेंगी. रोडवेज के अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल लिया है. अखबार ने नागौर में एक नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले के फॉलोअप में बताया है कि नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसमें सीबीआई जांच की मांग की है. .
अपराध नियंत्रण को लेकर आयोजित बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने चेताया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब कठोर कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. राज्य के विभिन्न इलाकों में हुए हादसों में डूब जाने से आठ लोगों की मौत हो गई. बारिश के बाद जयपुर रिंग रोड बदहाल हो चुकी है. जयपुर के आमेर में एक प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर जान दे दी. जयपुर से सोमवार को प्रकाशित विभिन्न समाचार-पत्रों में आज ये अहम सुर्खियां छाई हुई हैं. दैनिक भास्कर ने सीएम अशोक गहलोत की ओर से रविवार को अपराध नियंत्रण को लेकर गृह विभाग, सीएमओ और पुलिस के आला अधिकारियों की ली गई बैठक के समाचार को प्रमुखता दी है. अखबार ने गहलोत के हवाले से कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. बैठक में सीएम ने मॉब लिचिंग को लेकर भी कहा कि असामाजिक तत्वों को सूचीबद्ध करें. प्रदेश के बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर में रविवार को हुए अलग-अलग हादसों में पांच भाई-बहनों समेत आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई है. राजस्थान पत्रिका ने बारिश के बाद बदहाल हुई जयपुर रिंग रोड के समाचार में बताया है कि रोड का निर्माण कार्य इतना घटिया था कि वह एक बारिश भी नहीं झेल पाई. बारिश के कारण सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है. जगह-जगह से मिट्टी खिसकने से रोड को काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं अखबार ने अपराध से जुड़ी अहम खबर में बताया है कि जयपुर के आमेर में विवाहित प्रेमी जोड़े ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है. अखबार ने बारिश से जुड़े समाचार में बताया है कि बांसवाड़ा के बागीदौरा में पांच इंच पानी गिरा है. इससे माही का जलस्तर भी बढ़ा है. अंग्रेजी समाचार-पत्र Hindustan Times ने राजस्थान रोडवेज के बेड़े में शामिल की जा रही इलेक्ट्रिक बसों के समाचार में बताया है कि जल्द ही जयपुर की सड़कों पर ये बसें दौड़ेंगी. रोडवेज के अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल लिया है. अखबार ने नागौर में एक नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले के फॉलोअप में बताया है कि नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसमें सीबीआई जांच की मांग की है. .
पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी का कहर बढ़ रहा है। देश में कुल केस बढ़कर 61,227 पहुंच गए हैं। वहीं मरने वाले की संख्या बढ़कर 1260 है। पाकिस्तान में लॉकडाउन खत्म कर दिया गया है। इस्लामाबादः पाकिस्तान में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 2,076 नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या 61 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस खतरनाक वायरस से 36 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या 1,260 तक पहुंच गई है। संक्रमण के 2,076 नए मामलों के साथ ही देश भर में संक्रमण के कुल मामले 61,227 पहुंच गए हैं। सिंध प्रांत में सबसे ज्यादा 24,206 मामले हैं। इसके बाद पंजाब में 22,037, खैबर पख्तूनख्वा में 8,483, बलूचिस्तान में 3,616, इस्लामाबाद में 2,015, गिलगित-बाल्टिस्तान में 651 और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 219 मामले हैं। मंत्रालय ने बताया कि अब तक 20,231 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीच, विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व में, विकासशील और विकसित देशों तथा प्रमुख वित्तीय संस्थानों के एक प्रतिनिधि समूह ने संयुक्त राष्ट्र से इतर अनौपचारिक बैठक की शुरुआत की है, जिससे विकासशील देशों की ऋण चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके। कोविड-19 के प्रसार पर रोक के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण भारत में फंसे 179 पाकिस्तानी नागरिक को यहां अटारी सीमा से अपने देश में प्रवेश कर गए। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले सभी पाकिस्तानी नागरिकों की चिकित्सकों की टीम ने जांच की। इन 179 पाकिस्तानी नागरिकों में बच्चे भी शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि 179 पाकिस्तानी नागरिकों में से कुछ हृदय, किडनी और लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल वीजा पर भारत आये थे, वहीं कुछ अपने रिश्तेदारों से मिलने और कुछ तीर्थयात्रा पर आये थे। उन्होंने कहा कि कुल पाकिस्तानी नागरिकों में से 120 हिंदू, दो सिख और बाकी मुस्लिम थे। अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में रह रहे थे। गत पांच मई को 193 पाकिस्तानियों को लॉकडाउन के दौरान पाकिस्तान जाने की अनुमति दी गई थी।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी का कहर बढ़ रहा है। देश में कुल केस बढ़कर इकसठ,दो सौ सत्ताईस पहुंच गए हैं। वहीं मरने वाले की संख्या बढ़कर एक हज़ार दो सौ साठ है। पाकिस्तान में लॉकडाउन खत्म कर दिया गया है। इस्लामाबादः पाकिस्तान में पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना वायरस संक्रमण के दो,छिहत्तर नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या इकसठ हजार का आंकड़ा पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस खतरनाक वायरस से छत्तीस और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या एक,दो सौ साठ तक पहुंच गई है। संक्रमण के दो,छिहत्तर नए मामलों के साथ ही देश भर में संक्रमण के कुल मामले इकसठ,दो सौ सत्ताईस पहुंच गए हैं। सिंध प्रांत में सबसे ज्यादा चौबीस,दो सौ छः मामले हैं। इसके बाद पंजाब में बाईस,सैंतीस, खैबर पख्तूनख्वा में आठ,चार सौ तिरासी, बलूचिस्तान में तीन,छः सौ सोलह, इस्लामाबाद में दो,पंद्रह, गिलगित-बाल्टिस्तान में छः सौ इक्यावन और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में दो सौ उन्नीस मामले हैं। मंत्रालय ने बताया कि अब तक बीस,दो सौ इकतीस मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीच, विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व में, विकासशील और विकसित देशों तथा प्रमुख वित्तीय संस्थानों के एक प्रतिनिधि समूह ने संयुक्त राष्ट्र से इतर अनौपचारिक बैठक की शुरुआत की है, जिससे विकासशील देशों की ऋण चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके। कोविड-उन्नीस के प्रसार पर रोक के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण भारत में फंसे एक सौ उन्यासी पाकिस्तानी नागरिक को यहां अटारी सीमा से अपने देश में प्रवेश कर गए। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले सभी पाकिस्तानी नागरिकों की चिकित्सकों की टीम ने जांच की। इन एक सौ उन्यासी पाकिस्तानी नागरिकों में बच्चे भी शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि एक सौ उन्यासी पाकिस्तानी नागरिकों में से कुछ हृदय, किडनी और लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल वीजा पर भारत आये थे, वहीं कुछ अपने रिश्तेदारों से मिलने और कुछ तीर्थयात्रा पर आये थे। उन्होंने कहा कि कुल पाकिस्तानी नागरिकों में से एक सौ बीस हिंदू, दो सिख और बाकी मुस्लिम थे। अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में रह रहे थे। गत पांच मई को एक सौ तिरानवे पाकिस्तानियों को लॉकडाउन के दौरान पाकिस्तान जाने की अनुमति दी गई थी।
अम्बेडकरनगर। पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित चार विकास खंडों के 336 मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विकास खंडों के निर्वाचन अधिकारियों ने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा है। शेष पांच विकास खंडों के भी अनुपस्थित मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए उनका ब्यौरा लिया जा रहा है। कोरोनावायरस के चलते इस बार मतदान प्रक्रिया में लगे कार्मिक बड़ी संख्या में अनुपस्थित रहे। इससे तमाम तो ऐसे भी रहे जो बुखार या अन्य बीमारी से पीड़ित थे। जब भी कुछ ऐसे भी थे जो कोरोनावायरस के डर से ड्यूटी करने ही नहीं गए। इसके चलते इस बार जिला प्रशासन को पंचायत चुनाव को संपन्न कराने में भारी दुश्वारियां का सामना करना पड़ा। स्थिति इस तरह बिगड़ गई कि अत्यधिक अनुपस्थिति के चलते पूरी रिजर्व पार्टी को भी ड्यूटी करनी पड़ी। यहां तक की जिले के राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य को भी रिजर्व ड्यूटी के रूप में रखा गया था। इस बार मतदान कार्मिकों की अनुपस्थिति के कारण पोलिंग पार्टियां ज्यादातर मतदान केंद्रों पर शाम को या रात में पहुंची। प्रशासन की तरफ से ही बरती की तमाम अव्यवस्था के कारण कोरोना की गाइडलाइन जगह-जगह टूटी। पंचायत चुनाव जैसे तैसे निपटने के बाद प्रशासन ने अनुपस्थित मतदान कार्मिकों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिले के चार विकास खंडों बसखारी, टांडा, रामनगर और भियांव के अनुपस्थित 336 मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए विभिन्न थानों में तहरीर दी गई है। हालांकि अभी कहीं पर मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सका है। कार्मिकों के न आने से व्यवस्था बिगड़ीः परियोजना निदेशक डीआरडीए/सह प्रभारी प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि तमाम मतदान कार्मिकों की तरफ से पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी होने के बाद भी लापरवाही बरती गई। कुछ ने जानबूझकर अपने दायित्वों का पालन नहीं किया गया। इससे व्यवस्था बिगड़ी। उन्होंने बताया कि पांच अन्य विकास खंडों के अनुपस्थित मतदान कार्मिकों का विवरण जुटाया जा रहा है। जल्द ही उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के लिए निर्वाचन अधिकारी की तरफ से तहरीर थाने में दी जाएगी। शिक्षक कर्मचारी करेंगे विरोधः प्रशासन की तरफ से मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राजाराम वर्मा उदय राज मिश्रा, अरुण सिंह व देवेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। तमाम शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी जिंदगी से भी हाथ धो बैठे हैं। ऐसे समय में इस तरह की कार्रवाई प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। बिना स्पष्टीकरण लिए किसी भी शिक्षक और कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज किया जाना चाहिए। अन्यथा प्रशासन को शिक्षकों और कर्मचारियों का विरोध झेलना पड़ेगा।
अम्बेडकरनगर। पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित चार विकास खंडों के तीन सौ छत्तीस मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विकास खंडों के निर्वाचन अधिकारियों ने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा है। शेष पांच विकास खंडों के भी अनुपस्थित मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए उनका ब्यौरा लिया जा रहा है। कोरोनावायरस के चलते इस बार मतदान प्रक्रिया में लगे कार्मिक बड़ी संख्या में अनुपस्थित रहे। इससे तमाम तो ऐसे भी रहे जो बुखार या अन्य बीमारी से पीड़ित थे। जब भी कुछ ऐसे भी थे जो कोरोनावायरस के डर से ड्यूटी करने ही नहीं गए। इसके चलते इस बार जिला प्रशासन को पंचायत चुनाव को संपन्न कराने में भारी दुश्वारियां का सामना करना पड़ा। स्थिति इस तरह बिगड़ गई कि अत्यधिक अनुपस्थिति के चलते पूरी रिजर्व पार्टी को भी ड्यूटी करनी पड़ी। यहां तक की जिले के राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य को भी रिजर्व ड्यूटी के रूप में रखा गया था। इस बार मतदान कार्मिकों की अनुपस्थिति के कारण पोलिंग पार्टियां ज्यादातर मतदान केंद्रों पर शाम को या रात में पहुंची। प्रशासन की तरफ से ही बरती की तमाम अव्यवस्था के कारण कोरोना की गाइडलाइन जगह-जगह टूटी। पंचायत चुनाव जैसे तैसे निपटने के बाद प्रशासन ने अनुपस्थित मतदान कार्मिकों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिले के चार विकास खंडों बसखारी, टांडा, रामनगर और भियांव के अनुपस्थित तीन सौ छत्तीस मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए विभिन्न थानों में तहरीर दी गई है। हालांकि अभी कहीं पर मुकदमा नहीं दर्ज किया जा सका है। कार्मिकों के न आने से व्यवस्था बिगड़ीः परियोजना निदेशक डीआरडीए/सह प्रभारी प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि तमाम मतदान कार्मिकों की तरफ से पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी होने के बाद भी लापरवाही बरती गई। कुछ ने जानबूझकर अपने दायित्वों का पालन नहीं किया गया। इससे व्यवस्था बिगड़ी। उन्होंने बताया कि पांच अन्य विकास खंडों के अनुपस्थित मतदान कार्मिकों का विवरण जुटाया जा रहा है। जल्द ही उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के लिए निर्वाचन अधिकारी की तरफ से तहरीर थाने में दी जाएगी। शिक्षक कर्मचारी करेंगे विरोधः प्रशासन की तरफ से मतदान कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राजाराम वर्मा उदय राज मिश्रा, अरुण सिंह व देवेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। तमाम शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी जिंदगी से भी हाथ धो बैठे हैं। ऐसे समय में इस तरह की कार्रवाई प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। बिना स्पष्टीकरण लिए किसी भी शिक्षक और कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज किया जाना चाहिए। अन्यथा प्रशासन को शिक्षकों और कर्मचारियों का विरोध झेलना पड़ेगा।
- 6 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 6 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? आमिर खान की बेटी इरा खान ने काटे बॉयफ्रेंड के बाल, धड़ल्ले से वायरल हुई तस्वीर! सुपरस्टार आमिर खान की बेटी इरा खान सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव हैं और अपनी हर एक्टिविटी वो साझा करती रहती हैं। यही कारण है कि बिना किसी फिल्म में काम किए वो काफी ज्यादा पॉपुलर हैं और उनकी फैन फॉलोविंग काफी शानदार है। इस समय वो फिर से चर्चा में चल रही हैं और इस बार कारण काफी मजेदार है। दरअसल इरा खान की एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है. . और इस तस्वीर में वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ नजर आ रही हैँ। इरा खान इस तस्वीर में अपने बॉयफ्रेंड का हेयर कट कर रही हैं। जी हां बाल काटती हुईं इरा खान ये तस्वीर फैंस काफी पसंद कर रहे हैँ। इरा खान ने एक हाथ में कैंची और दूसरे हाथ में मोबाइल लिया हुआ है। इस तस्वीर को इरा खान के बॉयफ्रेंड नुपुर शिखरे ने इंस्टा स्टोरी पर साझा किया है। दोनों काफी अच्छे लग रहे हैं। पांडे, तुलना' जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
- छः hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - छः hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? आमिर खान की बेटी इरा खान ने काटे बॉयफ्रेंड के बाल, धड़ल्ले से वायरल हुई तस्वीर! सुपरस्टार आमिर खान की बेटी इरा खान सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव हैं और अपनी हर एक्टिविटी वो साझा करती रहती हैं। यही कारण है कि बिना किसी फिल्म में काम किए वो काफी ज्यादा पॉपुलर हैं और उनकी फैन फॉलोविंग काफी शानदार है। इस समय वो फिर से चर्चा में चल रही हैं और इस बार कारण काफी मजेदार है। दरअसल इरा खान की एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हो रही है. . और इस तस्वीर में वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ नजर आ रही हैँ। इरा खान इस तस्वीर में अपने बॉयफ्रेंड का हेयर कट कर रही हैं। जी हां बाल काटती हुईं इरा खान ये तस्वीर फैंस काफी पसंद कर रहे हैँ। इरा खान ने एक हाथ में कैंची और दूसरे हाथ में मोबाइल लिया हुआ है। इस तस्वीर को इरा खान के बॉयफ्रेंड नुपुर शिखरे ने इंस्टा स्टोरी पर साझा किया है। दोनों काफी अच्छे लग रहे हैं। पांडे, तुलना' जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
Ranchi : कोरोना काल के दौरान जान जोखिम में डाल काम करने के बावजूद भी हम अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. यह कहते हुए उज्जवल की आंखें डबडबा जाती है. कहते है कि पिछले तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है और कार्यालय का चक्कर लगा कर थक चुके हैं. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के वक्त(VLE) कोविड टेस्टिंग समेत अन्य कामों के लिए आउटसोर्सिंग पर लिए गए कर्मचारी जिला प्रशासन के आदेश पर बहाल किए गए थे. 250 लोगों की बहाली रांची सदर अस्पताल में हुई थी. ये सभी कर्मी रांची-हटिया रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टैंड समेत कोविड स्टेटिक बूथ पर तैनात किए गए थे. शुरुआत के महीने में वेतन मिला, लेकिन जैसे ही महामारी खत्म हुई इन्हें काम से हटा दिया गया, वो भी बिना पैसे के भुगतान किये. दरअसल इन्हें 400 रुपया प्रतिदिन(12000) रुपए प्रतिमाह भुगतान की बात कहकर काम पर रखा गया था. 35 कर्मचारी वैसे है जिन्हें 6 महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है. जबकि 215 के करीब कर्मचारीयों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. इनके बकाये मद की राशि 95. 12 लाख रुपए है. कोरोना काल के दौरान काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि महामारी के समय जब लोग अपने घरों में कैद थे. उस वक्त हमलोगों ने फ्रंट लाइन पर रहकर काम किया है. आज अपने हक के पैसे के लिए अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं. जैसे की हम अधिकारियों से भीख मांग रहे हो. वहीं खुशबू लकड़ा ने कहा कि हमलोग बकाये वेतन की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का दरवाजा खटखटा चुके है. दो दिन में पैसा देने की बात कहकर हमलोग को वापस भेज दिया गया था. आज महीनों गुजर गए, लेकिन पैसा मिला नहीं. खुशबू ने कहा कि बाहर से आकर काम करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. खाने तक का पैसा नहीं है. उधार लेकर सभी लोग काम चला रहे हैं. कुछ ऐसी ही समस्या से गुजर रही दीपिका कच्छप ने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण मकान का किराया नहीं दे पायी हूं. मकान मालिक ने घर खाली करवा दिया. अब रहना भी मेरे लिए चुनौती बन गयी है. वहीं इस मामले पर सिविल सर्जन रांची डॉ विनोद कुमार ने कहा कि डीसी ऑफिस से आवंटन आएगा तभी वेतन का भुगतान किया जाएगा. फिलहाल आवंटन नहीं है. उन्होंने कहा कि ये सभी कर्मचारी कोविड के वक्त काम पर लगाये थे. इनकी मांग है कि वेतन दिया जाए और ये सभी वेतन भुगतान का तय समय मांग रहे हैं जो कि मुश्किल है.
Ranchi : कोरोना काल के दौरान जान जोखिम में डाल काम करने के बावजूद भी हम अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. यह कहते हुए उज्जवल की आंखें डबडबा जाती है. कहते है कि पिछले तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है और कार्यालय का चक्कर लगा कर थक चुके हैं. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के वक्त कोविड टेस्टिंग समेत अन्य कामों के लिए आउटसोर्सिंग पर लिए गए कर्मचारी जिला प्रशासन के आदेश पर बहाल किए गए थे. दो सौ पचास लोगों की बहाली रांची सदर अस्पताल में हुई थी. ये सभी कर्मी रांची-हटिया रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टैंड समेत कोविड स्टेटिक बूथ पर तैनात किए गए थे. शुरुआत के महीने में वेतन मिला, लेकिन जैसे ही महामारी खत्म हुई इन्हें काम से हटा दिया गया, वो भी बिना पैसे के भुगतान किये. दरअसल इन्हें चार सौ रुपयापया प्रतिदिन रुपए प्रतिमाह भुगतान की बात कहकर काम पर रखा गया था. पैंतीस कर्मचारी वैसे है जिन्हें छः महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है. जबकि दो सौ पंद्रह के करीब कर्मचारीयों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. इनके बकाये मद की राशि पचानवे. बारह लाख रुपए है. कोरोना काल के दौरान काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि महामारी के समय जब लोग अपने घरों में कैद थे. उस वक्त हमलोगों ने फ्रंट लाइन पर रहकर काम किया है. आज अपने हक के पैसे के लिए अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं. जैसे की हम अधिकारियों से भीख मांग रहे हो. वहीं खुशबू लकड़ा ने कहा कि हमलोग बकाये वेतन की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का दरवाजा खटखटा चुके है. दो दिन में पैसा देने की बात कहकर हमलोग को वापस भेज दिया गया था. आज महीनों गुजर गए, लेकिन पैसा मिला नहीं. खुशबू ने कहा कि बाहर से आकर काम करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. खाने तक का पैसा नहीं है. उधार लेकर सभी लोग काम चला रहे हैं. कुछ ऐसी ही समस्या से गुजर रही दीपिका कच्छप ने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण मकान का किराया नहीं दे पायी हूं. मकान मालिक ने घर खाली करवा दिया. अब रहना भी मेरे लिए चुनौती बन गयी है. वहीं इस मामले पर सिविल सर्जन रांची डॉ विनोद कुमार ने कहा कि डीसी ऑफिस से आवंटन आएगा तभी वेतन का भुगतान किया जाएगा. फिलहाल आवंटन नहीं है. उन्होंने कहा कि ये सभी कर्मचारी कोविड के वक्त काम पर लगाये थे. इनकी मांग है कि वेतन दिया जाए और ये सभी वेतन भुगतान का तय समय मांग रहे हैं जो कि मुश्किल है.
एएनएम न्यूज़, ब्यूरोः पश्चिम बंगाल उत्तर बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से 13 लोगों को पकड़ा गया है जिनके अवैध रोहिंग्या प्रवासी होने का संदेह जताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों की माने तो उनमें से छह बच्चे और दो महिलाएं भी थीं। वे शुक्रवार शाम नई दिल्ली और जम्मू से दो समूहों में न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर असम के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंचे थे, जब सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने उन्हें देखा। पूछताछ के बाद, उन्हें पकड़ लिया गया और विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारी ने कहा, "वे असम और त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों के रास्ते में थे।
एएनएम न्यूज़, ब्यूरोः पश्चिम बंगाल उत्तर बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से तेरह लोगों को पकड़ा गया है जिनके अवैध रोहिंग्या प्रवासी होने का संदेह जताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों की माने तो उनमें से छह बच्चे और दो महिलाएं भी थीं। वे शुक्रवार शाम नई दिल्ली और जम्मू से दो समूहों में न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर असम के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंचे थे, जब सरकारी रेलवे पुलिस ने उन्हें देखा। पूछताछ के बाद, उन्हें पकड़ लिया गया और विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारी ने कहा, "वे असम और त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों के रास्ते में थे।
राम की पावन भूमि अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण क्योंकर साम्प्रदायिक हो सकता है? उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बनाए जा रहे मंदिर का विरोध क्यों? आरपी तिवारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में य़ूजीसी से प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा लागू करने की माँग की है। यह 'डर' अच्छा है और यह 'डर' तब तक बना रहना चाहिए, जब तक घर की सफाई पूरी नहीं हो जाती है। क्या यह विचित्र नहीं है कि इस देश में हिंदू अराध्यों को गाली दी जा सकती है, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात हो सकती है. . . पर गाँधी पर सवाल नहीं किया जा सकता। मुगलों को बताया शरणार्थी, औरंगजेब की आलोचना से दिक्कतः फ़िल्में न मिलने की खुन्नस मोदी सरकार पर निकाल रहे नसीरुद्दीन शाह? भारतीय राजाओं, भारतीय सनातन धर्म और भारतीय इतिहास को लेकर नसीरुद्दीन शाह हिन्दुओं में हीन भावना भरना चाहते हैं। मुगलों का गुणगान क्यों? औरंगजेब की आलोचना से दिक्कत क्यों? पहले 'मैं हिंदुत्ववादी नहीं हूँ', अब महात्मा गाँधी पर बदजुबानीः रायपुर 'धर्म संसद' की पटकथा कॉन्ग्रेस की लिखी? आखिर क्या कारण है कि चित्रकूट के हिंदू महाकुंभ की उपेक्षा करने वाले हरिद्वार और रायपुर के 'धर्म संसद' पर इतना हल्ला मचा रहे? गुलाम नबी आज़ाद बता दें कि धर्मांतरण अगर प्यार-पुचकार से होता है तो गुरु तेग बहादुर को क्यों बलिदान देना पड़ा था? मामला उनके ही राज्य का है। ईसाई नेता दीवान बहादुर सिन्हा ने जिन्ना का समर्थन कर पंजाब का बँटवारा करा दिया। उसी पाकिस्तान में उनका और ईसाईयों का बुरा हश्र हुआ। इस्लामिक मकतूब मीडिया के पत्रकार ने ट्विटर पर मेवात में बजरंग दल की रैली का वीडियो डाल कहा कि हिंदू-मुस्लिम में दरार पैदा की जा रही है। संस्कृति आज भी उसी मार्ग का गमन करती दिख रही है जिस मार्ग से वह हर युग से चलती रही है - स्त्री अपमान का मार्ग।
राम की पावन भूमि अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण क्योंकर साम्प्रदायिक हो सकता है? उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बनाए जा रहे मंदिर का विरोध क्यों? आरपी तिवारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में य़ूजीसी से प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा लागू करने की माँग की है। यह 'डर' अच्छा है और यह 'डर' तब तक बना रहना चाहिए, जब तक घर की सफाई पूरी नहीं हो जाती है। क्या यह विचित्र नहीं है कि इस देश में हिंदू अराध्यों को गाली दी जा सकती है, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात हो सकती है. . . पर गाँधी पर सवाल नहीं किया जा सकता। मुगलों को बताया शरणार्थी, औरंगजेब की आलोचना से दिक्कतः फ़िल्में न मिलने की खुन्नस मोदी सरकार पर निकाल रहे नसीरुद्दीन शाह? भारतीय राजाओं, भारतीय सनातन धर्म और भारतीय इतिहास को लेकर नसीरुद्दीन शाह हिन्दुओं में हीन भावना भरना चाहते हैं। मुगलों का गुणगान क्यों? औरंगजेब की आलोचना से दिक्कत क्यों? पहले 'मैं हिंदुत्ववादी नहीं हूँ', अब महात्मा गाँधी पर बदजुबानीः रायपुर 'धर्म संसद' की पटकथा कॉन्ग्रेस की लिखी? आखिर क्या कारण है कि चित्रकूट के हिंदू महाकुंभ की उपेक्षा करने वाले हरिद्वार और रायपुर के 'धर्म संसद' पर इतना हल्ला मचा रहे? गुलाम नबी आज़ाद बता दें कि धर्मांतरण अगर प्यार-पुचकार से होता है तो गुरु तेग बहादुर को क्यों बलिदान देना पड़ा था? मामला उनके ही राज्य का है। ईसाई नेता दीवान बहादुर सिन्हा ने जिन्ना का समर्थन कर पंजाब का बँटवारा करा दिया। उसी पाकिस्तान में उनका और ईसाईयों का बुरा हश्र हुआ। इस्लामिक मकतूब मीडिया के पत्रकार ने ट्विटर पर मेवात में बजरंग दल की रैली का वीडियो डाल कहा कि हिंदू-मुस्लिम में दरार पैदा की जा रही है। संस्कृति आज भी उसी मार्ग का गमन करती दिख रही है जिस मार्ग से वह हर युग से चलती रही है - स्त्री अपमान का मार्ग।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की मुसीबत बढ़ती जा रही है। सोमवार को उनके व उनके सहयोगियों के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापामारी की। इस दौरान ईडी ने 2. 82 करोड़ की अघोषित नकदी व 1. 80 किग्रा सोना बरामद किया है।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की मुसीबत बढ़ती जा रही है। सोमवार को उनके व उनके सहयोगियों के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापामारी की। इस दौरान ईडी ने दो. बयासी करोड़ की अघोषित नकदी व एक. अस्सी किग्रा सोना बरामद किया है।
भाजपा की ओर से इसे जवाबी प्रदर्शन माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सीएम एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद एमवीए घटकों की ताकत का यह पहला संयुक्त प्रदर्शन है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महा विकास अघाड़ी (MVA) ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मुंबई में एक विशाल 'हल्ला बोल' रैली बुलाई है। MVA की रैली के अलावा भाजपा ने भी विशाल रैली का आयोजन किया है। भाजपा की ओर से इसे जवाबी प्रदर्शन माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सीएम एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद एमवीए घटकों की ताकत का यह पहला संयुक्त प्रदर्शन है। अधिकारियों ने बताया कि करीब 2,500 पुलिसकर्मी यह सुनिश्चित करने के लिए सड़कों पर मौजूद हैं कि कोई अप्रिय घटना ना हो। MVA का 'हल्ला बोल' मार्च रिचर्डसन एंड क्रूडास कंपनी, बायकुला से जेजे फ्लाईओवर के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पहुंचा। जबकि शिंदे कैंप का 'माफी मांगो आंदोलन' पूरे मुंबई में आयोजित किया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद से यह सबसे बड़ा मोर्चा है। इससे दिल्ली को एक संदेश जाएगा। यह रैली दिखाती है कि सभी विपक्षी दल महाराष्ट्र के गौरव की रक्षा के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र से नफरत करने वालों को छोड़कर, सभी राजनीतिक दलों ने मार्च में भाग लिया है। हम महाराष्ट्र के महापुरूषों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ अम्बेडकर के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। राज्य की जनता महाराष्ट्र विरोधी रुख अपनाने वाली पार्टियों को सत्ता से बेदखल कर देगी। " क्यों रैली निकाल रहे हैं MVA घटक? महाराष्ट्र के साथ किए गए 'अन्याय', शिवाजी महाराज और महात्मा फुले जैसे राज्य की महान हस्तियों के 'अपमान' और कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में मराठी भाषियों के खिलाफ 'अत्याचार' के साथ ही औद्योगिक परियोजनाओं को राज्य से बाहर ले जाने के खिलाफ एमवीए सहयोगी दल शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस 'मोर्चा' (विरोध मार्च) निकाल रहे हैं। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना खेमे की सरकार और भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा मोर्चा के माध्यम से व्यक्त किया जाएगा। मार्च जे जे अस्पताल के पास से शुरू हुआ और दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर समाप्त होगा। एमवीए के विरोध प्रदर्शन को इस साल जून में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिराए जाने के बाद सहयोगी दलों को एकजुट करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार ने घोषणा की कि डॉ. बी आर आंबेडकर और हिंदू देवी-देवताओं का 'अपमान' करने के लिए एमवीए से माफी की मांग को लेकर उनकी पार्टी भी मुंबई में 'माफी मांगो' विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने आंबेडकर की जन्मभूमि पर विवाद उत्पन्न करने की कोशिश की, जबकि एक अन्य नेता सुषमा अंधारे ने भगवान राम, भगवान कृष्ण, संत ज्ञानेश्वर और संत एकनाथ के साथ-साथ वारकरी समुदाय का भी अपमान किया।
भाजपा की ओर से इसे जवाबी प्रदर्शन माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सीएम एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद एमवीए घटकों की ताकत का यह पहला संयुक्त प्रदर्शन है। शिवसेना , राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महा विकास अघाड़ी ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मुंबई में एक विशाल 'हल्ला बोल' रैली बुलाई है। MVA की रैली के अलावा भाजपा ने भी विशाल रैली का आयोजन किया है। भाजपा की ओर से इसे जवाबी प्रदर्शन माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सीएम एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद एमवीए घटकों की ताकत का यह पहला संयुक्त प्रदर्शन है। अधिकारियों ने बताया कि करीब दो,पाँच सौ पुलिसकर्मी यह सुनिश्चित करने के लिए सड़कों पर मौजूद हैं कि कोई अप्रिय घटना ना हो। MVA का 'हल्ला बोल' मार्च रिचर्डसन एंड क्रूडास कंपनी, बायकुला से जेजे फ्लाईओवर के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचा। जबकि शिंदे कैंप का 'माफी मांगो आंदोलन' पूरे मुंबई में आयोजित किया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद से यह सबसे बड़ा मोर्चा है। इससे दिल्ली को एक संदेश जाएगा। यह रैली दिखाती है कि सभी विपक्षी दल महाराष्ट्र के गौरव की रक्षा के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र से नफरत करने वालों को छोड़कर, सभी राजनीतिक दलों ने मार्च में भाग लिया है। हम महाराष्ट्र के महापुरूषों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ अम्बेडकर के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। राज्य की जनता महाराष्ट्र विरोधी रुख अपनाने वाली पार्टियों को सत्ता से बेदखल कर देगी। " क्यों रैली निकाल रहे हैं MVA घटक? महाराष्ट्र के साथ किए गए 'अन्याय', शिवाजी महाराज और महात्मा फुले जैसे राज्य की महान हस्तियों के 'अपमान' और कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में मराठी भाषियों के खिलाफ 'अत्याचार' के साथ ही औद्योगिक परियोजनाओं को राज्य से बाहर ले जाने के खिलाफ एमवीए सहयोगी दल शिवसेना , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस 'मोर्चा' निकाल रहे हैं। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना खेमे की सरकार और भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा मोर्चा के माध्यम से व्यक्त किया जाएगा। मार्च जे जे अस्पताल के पास से शुरू हुआ और दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर समाप्त होगा। एमवीए के विरोध प्रदर्शन को इस साल जून में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिराए जाने के बाद सहयोगी दलों को एकजुट करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार ने घोषणा की कि डॉ. बी आर आंबेडकर और हिंदू देवी-देवताओं का 'अपमान' करने के लिए एमवीए से माफी की मांग को लेकर उनकी पार्टी भी मुंबई में 'माफी मांगो' विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना के नेता संजय राउत ने आंबेडकर की जन्मभूमि पर विवाद उत्पन्न करने की कोशिश की, जबकि एक अन्य नेता सुषमा अंधारे ने भगवान राम, भगवान कृष्ण, संत ज्ञानेश्वर और संत एकनाथ के साथ-साथ वारकरी समुदाय का भी अपमान किया।
अपने अनुभव और उन मनचली छोकरियों को रस भरी बातों की चर्चा........ एकाएक सैनिकों ने एक गीत गाना शुरू कर दिया - प्राजादी का •साला गया, भाइयों भरती हो जायेंगे ! साथियों चलो भरतो हो जायेंगे, आजादी के लिये मरना पड़ेगा, साथियों चलो भरती हो जावेंगे, शेर हिन्द फौज इम्फाल पहुँच गई है, वह लड़ लड़कर दिल्ली के तख्त पर पहुँच जावेगी, साथियों चलो भरती हो जावेंगे ! लाल किले पर आजादी का झण्डा लगाने बढ़े !! वह गीत उस होटल के कोने-कोने में गूञ्ज उठा। कुछ सैनिकों ने थालियाँ बजानी शुरू करदीं । कोई सीटी बजा रहा था । कुछ ताल देने लगे । जो बचे त्रे मेजों को ही थपथपाने लगे । कुछ सैनिक कतारो में खड़े होकर मस्ती से झूम रहे थे । कुछ नाचने लगे । एक नया समा बँध गया । लगता था कि आजादी का प्रलय शुरू हो गया हो । मानों सच ही वे सैनिक दिल्ली का तख्त ले लेने के लिये आगे बढ़ रहे हों । उनका वह उत्साह और कुर्बानी के लिये पिया हुआ नशा - सब नूतन और नवीन लगता था । हरएक की आँखों की लाल-लाल डोरियों में के लिये नफरत भरी हुई थी । साम्राज्यवादी प्रतीक यूनियन जैक को हटाकर वे वहाँ आजादी का झंडा फहराना चाहते थे। अब हरएक का दिल भर आया । सब इस गीत को गा गा कर, एक बार अपने को भूल जाना चाहते थे । एकाएक वह गीत बन्द हो गया। वे सब थक गये थे। होटल में सन्नाटा छा गया । कोने की मेज पर बैठे हुये दो साधारण मुसाफिर
अपने अनुभव और उन मनचली छोकरियों को रस भरी बातों की चर्चा........ एकाएक सैनिकों ने एक गीत गाना शुरू कर दिया - प्राजादी का •साला गया, भाइयों भरती हो जायेंगे ! साथियों चलो भरतो हो जायेंगे, आजादी के लिये मरना पड़ेगा, साथियों चलो भरती हो जावेंगे, शेर हिन्द फौज इम्फाल पहुँच गई है, वह लड़ लड़कर दिल्ली के तख्त पर पहुँच जावेगी, साथियों चलो भरती हो जावेंगे ! लाल किले पर आजादी का झण्डा लगाने बढ़े !! वह गीत उस होटल के कोने-कोने में गूञ्ज उठा। कुछ सैनिकों ने थालियाँ बजानी शुरू करदीं । कोई सीटी बजा रहा था । कुछ ताल देने लगे । जो बचे त्रे मेजों को ही थपथपाने लगे । कुछ सैनिक कतारो में खड़े होकर मस्ती से झूम रहे थे । कुछ नाचने लगे । एक नया समा बँध गया । लगता था कि आजादी का प्रलय शुरू हो गया हो । मानों सच ही वे सैनिक दिल्ली का तख्त ले लेने के लिये आगे बढ़ रहे हों । उनका वह उत्साह और कुर्बानी के लिये पिया हुआ नशा - सब नूतन और नवीन लगता था । हरएक की आँखों की लाल-लाल डोरियों में के लिये नफरत भरी हुई थी । साम्राज्यवादी प्रतीक यूनियन जैक को हटाकर वे वहाँ आजादी का झंडा फहराना चाहते थे। अब हरएक का दिल भर आया । सब इस गीत को गा गा कर, एक बार अपने को भूल जाना चाहते थे । एकाएक वह गीत बन्द हो गया। वे सब थक गये थे। होटल में सन्नाटा छा गया । कोने की मेज पर बैठे हुये दो साधारण मुसाफिर
इराक़ की सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने मूसिल सिटी की स्वतंत्रता के अवसर पर वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तान को उनके घर पर जाकर बधाई दी। सेना और स्वयंसेवी बल के जवानों ने आयतुल्लाह सीस्तानी के समर्थन में ज़बरदस्त नारे लगाए। इराक़ी बल नारे लगा रहे थे कि हमारी जानें क़ुरबान आयतुल्लाह सीस्तानी पर, देश को बचाने वाले आयतुल्लाह सीस्तानी, देश की अखंडता की रक्षा करने वाले आयतुल्लाह सीस्तानी। इराक़ी सैनिकों द्वारा दी गयी बधाई के अंदाज़ को देखने के लिए चारों ओर से जनता की भीड़ उमड़ पड़ी और एक अलग ही प्रकार का वातावरण बन गया। 2014 में दाइश से मुक़ाबले के लिए इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़त्वे के बाद स्वयं सेवीबल का गठन किया गया। इराक़ी संसद में पेश होने वाले इस प्रस्ताव का इराक़ी जनता और सरकार ने व्यापक स्तर पर स्वागत किया। इराक़ के समस्त नेताओं और धार्मिक हस्तियों ने इस योजना को इराक़ में राष्ट्रीय एकता की योजना की भूमिका बताया। (AK)
इराक़ की सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने मूसिल सिटी की स्वतंत्रता के अवसर पर वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तान को उनके घर पर जाकर बधाई दी। सेना और स्वयंसेवी बल के जवानों ने आयतुल्लाह सीस्तानी के समर्थन में ज़बरदस्त नारे लगाए। इराक़ी बल नारे लगा रहे थे कि हमारी जानें क़ुरबान आयतुल्लाह सीस्तानी पर, देश को बचाने वाले आयतुल्लाह सीस्तानी, देश की अखंडता की रक्षा करने वाले आयतुल्लाह सीस्तानी। इराक़ी सैनिकों द्वारा दी गयी बधाई के अंदाज़ को देखने के लिए चारों ओर से जनता की भीड़ उमड़ पड़ी और एक अलग ही प्रकार का वातावरण बन गया। दो हज़ार चौदह में दाइश से मुक़ाबले के लिए इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़त्वे के बाद स्वयं सेवीबल का गठन किया गया। इराक़ी संसद में पेश होने वाले इस प्रस्ताव का इराक़ी जनता और सरकार ने व्यापक स्तर पर स्वागत किया। इराक़ के समस्त नेताओं और धार्मिक हस्तियों ने इस योजना को इराक़ में राष्ट्रीय एकता की योजना की भूमिका बताया।
श्रमिक स्पेशल ट्रेन रविवार को राजस्थान के रेवाड़ी जिले से 1267 मजदूरों को लेकर 1खगड़िया पहुंची। ट्रेन अपने निर्धारित समय से लगभग सवा घंटा लेट पहुंची। श्रमिक स्पेशल ट्रेन की 24 बोगी मे अररिया, किशनगंज, पूर्णिया आदि जिले के रहने वाले थे। इस् ट्रेन में खगड़िया के एक भी मजदूर नहीं थे। प्रवासी मजदूरों के खगड़िया आने को लेकर 24 अलग-अलग काउंटर थर्मल स्क्रीनिंग के लिए लगाए गए थे। विधि व्यवस्था की कमान खुद डीएम आलोक रंजन घोष संभाले हुए थे। सभी प्रवासी मजदूरों को संबंधित जिले बसों से भेज दिए गए। भेजने से पहले सभी बसों को सेनेटाइज किया गया था। बस से अपने जिले पहुंचने पर सभी मजदूरों को गृह प्रखंड के क्वारंटाइन सेंटर में 21 दिनों के लिए भेजे जाएंगे। श्रमिक स्पेशल ट्रेन आने को लेकर सुबह से ही रेलवे स्टेशन के आसपास के एरिया को सील कर दिया गया था। इससे पहले गत 6 मई को 1276 मजदूरों को लेकर भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन तेलंगाना से आई थी।
श्रमिक स्पेशल ट्रेन रविवार को राजस्थान के रेवाड़ी जिले से एक हज़ार दो सौ सरसठ मजदूरों को लेकर एकखगड़िया पहुंची। ट्रेन अपने निर्धारित समय से लगभग सवा घंटा लेट पहुंची। श्रमिक स्पेशल ट्रेन की चौबीस बोगी मे अररिया, किशनगंज, पूर्णिया आदि जिले के रहने वाले थे। इस् ट्रेन में खगड़िया के एक भी मजदूर नहीं थे। प्रवासी मजदूरों के खगड़िया आने को लेकर चौबीस अलग-अलग काउंटर थर्मल स्क्रीनिंग के लिए लगाए गए थे। विधि व्यवस्था की कमान खुद डीएम आलोक रंजन घोष संभाले हुए थे। सभी प्रवासी मजदूरों को संबंधित जिले बसों से भेज दिए गए। भेजने से पहले सभी बसों को सेनेटाइज किया गया था। बस से अपने जिले पहुंचने पर सभी मजदूरों को गृह प्रखंड के क्वारंटाइन सेंटर में इक्कीस दिनों के लिए भेजे जाएंगे। श्रमिक स्पेशल ट्रेन आने को लेकर सुबह से ही रेलवे स्टेशन के आसपास के एरिया को सील कर दिया गया था। इससे पहले गत छः मई को एक हज़ार दो सौ छिहत्तर मजदूरों को लेकर भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन तेलंगाना से आई थी।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मामले को जिला जज के पास भेज दिया। 8 हफ्ते तक निचली अदालत के फैसले पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद 8 हफ्तों ने जिला जज इस मामले में सुनवाई करेंगे। जिला जज अपने अनुभव और तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेंगे। हमारी टिप्पणियों का सुनवाई पर असर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने तीन सुझाव देते हुए कहा कि हम निचली अदालत से कहें कि मुस्लिम पक्ष के आवेदन पर जल्द सुनवाई कर निपटारा करे। जब तक ट्रायल कोर्ट इस आवेदन पर फैसला लेता है, तब तक हमारा अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। शीर्ष अदालत ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि हम आपके पक्ष में ही सुझाव रख रहे हैं। अगर 1991 के कानून के तहत केस की वैधता तय की जायेगी, तो फिर मुश्किल होगी। हम ट्रायल जज को नहीं कह सकते हैं कि वो कमीशन की रिपोर्ट का क्या करें, वो अपने आप में सक्षम है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मामले को जिला जज के पास भेज दिया। आठ हफ्ते तक निचली अदालत के फैसले पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद आठ हफ्तों ने जिला जज इस मामले में सुनवाई करेंगे। जिला जज अपने अनुभव और तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेंगे। हमारी टिप्पणियों का सुनवाई पर असर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने तीन सुझाव देते हुए कहा कि हम निचली अदालत से कहें कि मुस्लिम पक्ष के आवेदन पर जल्द सुनवाई कर निपटारा करे। जब तक ट्रायल कोर्ट इस आवेदन पर फैसला लेता है, तब तक हमारा अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। शीर्ष अदालत ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि हम आपके पक्ष में ही सुझाव रख रहे हैं। अगर एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के कानून के तहत केस की वैधता तय की जायेगी, तो फिर मुश्किल होगी। हम ट्रायल जज को नहीं कह सकते हैं कि वो कमीशन की रिपोर्ट का क्या करें, वो अपने आप में सक्षम है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
- 10 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - 10 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? इस साल सोशल मीडिया पर अगर किसी ने सनसनी मचाई है तो वह और कोई नहीं बल्कि टीवी की कई स्टार एक्ट्रेस रही हैं। 2018 वायरल तस्वीरों के मामले में काफी बोल्ड रहा है। टीवी की कई संस्कारी स्टार्स ने अपने किरदार से अलग हटकर सोशल मीडिया की दुनिया में सनसनी फैला दी। टीवी पर भले ही ये सब मां, बेटी और सास की भूमिका निभाती हों। लेकिन असल जिंदगी में इनकी सेक्सी तस्वीरों ने फैंस को पूरी तरह से चौंका कर रख दिया है। बॅालीवुड एक्ट्रेस को कड़ी टक्कर देती आयी इन 10 सुपरस्टार एक्ट्रेस की बिकिनी तस्वीरों ने आग लगा दी। कई स्टार्स ऐसी भी रही कि जो कि इस साल सिर्फ और सिर्फ अपनी बोल्ड तस्वीरों के कारण खबरों का हिस्सा बनने में कामयाब हुई हैं। चलिए फिर इंतजार किस बात का यहां देखते हैं 2018 की सबसे बोल्ड वायरल तस्वीरें। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
- दस hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - दस hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? इस साल सोशल मीडिया पर अगर किसी ने सनसनी मचाई है तो वह और कोई नहीं बल्कि टीवी की कई स्टार एक्ट्रेस रही हैं। दो हज़ार अट्ठारह वायरल तस्वीरों के मामले में काफी बोल्ड रहा है। टीवी की कई संस्कारी स्टार्स ने अपने किरदार से अलग हटकर सोशल मीडिया की दुनिया में सनसनी फैला दी। टीवी पर भले ही ये सब मां, बेटी और सास की भूमिका निभाती हों। लेकिन असल जिंदगी में इनकी सेक्सी तस्वीरों ने फैंस को पूरी तरह से चौंका कर रख दिया है। बॅालीवुड एक्ट्रेस को कड़ी टक्कर देती आयी इन दस सुपरस्टार एक्ट्रेस की बिकिनी तस्वीरों ने आग लगा दी। कई स्टार्स ऐसी भी रही कि जो कि इस साल सिर्फ और सिर्फ अपनी बोल्ड तस्वीरों के कारण खबरों का हिस्सा बनने में कामयाब हुई हैं। चलिए फिर इंतजार किस बात का यहां देखते हैं दो हज़ार अट्ठारह की सबसे बोल्ड वायरल तस्वीरें। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
क्या वाकई उबाऊ था विश्व कप 2015? मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के एक बार फिर चैंपियन बनने के साथ ही विश्व कप क्रिकेट 2015 समाप्त हो गया है। अब कुछ लोग इसे बोरिंग यानी उबाऊ विश्व कप बता रहे हैं। उनकी दलील है कि 49 में से महज पांच मैच ही ऐसे रहे जिनमें क्रिकेट का रोमांच नजर आया। द. अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया सेमीफाइनल इस विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ मैच करार दिया जा रहा है। इसके अलावा समूह चरण में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड का मुकाबला भी खासा रोचक रहा था। इसी सूची में जिम्बाब्वे बनाम आयरलैंड, स्कॉटलैंड बनाम अफगानिस्तान और इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया मुकाबलों को गिना जा रहा है। इनके अलावा कोई मैच ऐसा नहीं रहा, जब दर्शक अपने पैसे वसूल कर सके। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया फाइनल मुकाबला भी एक तरफा रहा। एक बार भी नहीं लगा कि दो बराबर की टीमों का मुकाबला हो रहा है। कुछ व्यक्तिगत प्रदर्शनों से जरूर रोमांच कायम रहा। वहाब रियाज बनाम शेन वॉटसन मुकाबला शानदार रहा। एबी डीविलियर्स की 162 रनों का पारी, क्रिस गेल के 215 रन, गप्टिल के 237 रन शानदार रहे। गेंदबाजों में टिम साउदी ने 7-33 और स्टार्क ने 6-28 के शानदार स्पेल डाले। आईसीसी भी दावे कर रहा है कि इस विश्व कप में दो दोहरे शतक लगे, सात बार बल्लेबाजों ने 150 से अधिक का निजी स्कोर बनाया, 38 शतक लगे, 28 बार गेंदबाजों ने एक पार में चार विकेट लिए, इसमें दो हेटट्रिक भी शामिल है। साथ ही दर्शक संख्या के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। इसके बावजूद क्रिकेट में असली रोमांच तलाशने वाले निराश हैं।
क्या वाकई उबाऊ था विश्व कप दो हज़ार पंद्रह? मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के एक बार फिर चैंपियन बनने के साथ ही विश्व कप क्रिकेट दो हज़ार पंद्रह समाप्त हो गया है। अब कुछ लोग इसे बोरिंग यानी उबाऊ विश्व कप बता रहे हैं। उनकी दलील है कि उनचास में से महज पांच मैच ही ऐसे रहे जिनमें क्रिकेट का रोमांच नजर आया। द. अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया सेमीफाइनल इस विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ मैच करार दिया जा रहा है। इसके अलावा समूह चरण में ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड का मुकाबला भी खासा रोचक रहा था। इसी सूची में जिम्बाब्वे बनाम आयरलैंड, स्कॉटलैंड बनाम अफगानिस्तान और इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया मुकाबलों को गिना जा रहा है। इनके अलावा कोई मैच ऐसा नहीं रहा, जब दर्शक अपने पैसे वसूल कर सके। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया फाइनल मुकाबला भी एक तरफा रहा। एक बार भी नहीं लगा कि दो बराबर की टीमों का मुकाबला हो रहा है। कुछ व्यक्तिगत प्रदर्शनों से जरूर रोमांच कायम रहा। वहाब रियाज बनाम शेन वॉटसन मुकाबला शानदार रहा। एबी डीविलियर्स की एक सौ बासठ रनों का पारी, क्रिस गेल के दो सौ पंद्रह रन, गप्टिल के दो सौ सैंतीस रन शानदार रहे। गेंदबाजों में टिम साउदी ने सात-तैंतीस और स्टार्क ने छः-अट्ठाईस के शानदार स्पेल डाले। आईसीसी भी दावे कर रहा है कि इस विश्व कप में दो दोहरे शतक लगे, सात बार बल्लेबाजों ने एक सौ पचास से अधिक का निजी स्कोर बनाया, अड़तीस शतक लगे, अट्ठाईस बार गेंदबाजों ने एक पार में चार विकेट लिए, इसमें दो हेटट्रिक भी शामिल है। साथ ही दर्शक संख्या के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। इसके बावजूद क्रिकेट में असली रोमांच तलाशने वाले निराश हैं।
बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी प्रवेश अवलोकनः बोवी राज्य में आवेदन करने वाले 57% छात्र हर साल स्वीकार किए जाते हैं - इससे स्कूल न तो अत्यधिक चुनिंदा होता है और न ही सभी के लिए खुला रहता है। आवेदन करने वाले छात्रों को एसएटी या अधिनियम से स्कोर जमा करने की आवश्यकता होती है, साथ ही ऑनलाइन आवेदन जमा करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, आवेदकों को एक हाईस्कूल प्रतिलेख और एक आवेदन शुल्क जमा करने की आवश्यकता है। क्या आप अंदर आ जाएंगे? प्रवेश डेटा (2016): बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी विवरणः 1865 में स्थापित, बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी देश के सबसे पुराने ऐतिहासिक रूप से काले कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में से एक है। 2 9 5 एकड़ परिसर बाल्टी, मैरीलैंड, बाल्टीमोर और वाशिंगटन, डीसी ( अन्य डीसी कॉलेजों को देखें ) के बीच एक शहर के बीच में रणनीतिक रूप से स्थित है। बॉवी स्टेट एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है और मैरीलैंड विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय का हिस्सा है। स्नातक 235 प्रमुखों में से चुन सकते हैं, और विश्वविद्यालय 35 मास्टर, डॉक्टरेट और उन्नत प्रमाणपत्र कार्यक्रम भी प्रदान करता है। अकादमिक टा 16 से 1 छात्र / संकाय अनुपात द्वारा समर्थित हैं। कैंपस में 2013 में खोले गए एक नए छात्र केंद्र सहित कई हालिया उन्नयन हुए हैं। बोवी राज्य में एक महत्वपूर्ण पारंपरिक आवासीय छात्र आबादी है, लेकिन काम करने वाले वयस्कों के लिए शाम और ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है। सबसे लोकप्रिय स्नातक की डिग्री प्रोग्राम व्यवसाय में है। एथलेटिक्स में, बॉवी स्टेट बुलडॉग एनसीएए डिवीजन II सेंट्रल इंटरकॉलेजियेट एथलेटिक एसोसिएशन में प्रतिस्पर्धा करते हैं। विश्वविद्यालय में पांच पुरुष और आठ महिला खेल खेले जाते हैं। नामांकन (2016): - कुल नामांकनः 5,66 9 (4,711 स्नातक) लागत (2016 - 17): - ट्यूशन और फीसः $ 7,880 (इन-स्टेट); $ 18,416 (बाहर राज्य) - किताबेंः $ 2,200 ( इतना क्यों? ) - कुल लागतः $ 21,880 (राज्य में); $ 32,416 (बाहर राज्य) बॉवी स्टेट यूनिवर्सिटी वित्तीय सहायता (2015 - 16): अकादमिक कार्यक्रमः - आपके लिए कौन सा प्रमुख सही है? Cappex में मुफ्त "माई करियर और मेजर क्विज़" लेने के लिए साइन अप करें। स्थानांतरण, स्नातक और प्रतिधारण दरेंः Intercollegiate एथलेटिक कार्यक्रमः डेटा स्रोतः यदि आपको बॉवी स्टेट यूनिवर्सिटी पसंद है, तो आप इन स्कूलों को भी पसंद कर सकते हैंः अन्य मध्यम आकार के एचबीसीयू की तलाश करने वाले छात्रों को ग्राम्बलिंग स्टेट यूनिवर्सिटी , अल्कोर्न स्टेट यूनिवर्सिटी , स्पेलमैन कॉलेज और लिंकन विश्वविद्यालय की भी जांच करनी चाहिए। मैरीलैंड या वाशिंगटन डीसी में स्थित सार्वजनिक कॉलेज या विश्वविद्यालय में रुचि रखने वालों के लिए, बोवी राज्य के समान विकल्प में बाल्टीमोर विश्वविद्यालय , फ्रॉस्टबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी , कॉपिन स्टेट यूनिवर्सिटी और मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी शामिल हैं ।
बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी प्रवेश अवलोकनः बोवी राज्य में आवेदन करने वाले सत्तावन% छात्र हर साल स्वीकार किए जाते हैं - इससे स्कूल न तो अत्यधिक चुनिंदा होता है और न ही सभी के लिए खुला रहता है। आवेदन करने वाले छात्रों को एसएटी या अधिनियम से स्कोर जमा करने की आवश्यकता होती है, साथ ही ऑनलाइन आवेदन जमा करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, आवेदकों को एक हाईस्कूल प्रतिलेख और एक आवेदन शुल्क जमा करने की आवश्यकता है। क्या आप अंदर आ जाएंगे? प्रवेश डेटा : बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी विवरणः एक हज़ार आठ सौ पैंसठ में स्थापित, बोवी स्टेट यूनिवर्सिटी देश के सबसे पुराने ऐतिहासिक रूप से काले कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में से एक है। दो नौ पाँच एकड़ परिसर बाल्टी, मैरीलैंड, बाल्टीमोर और वाशिंगटन, डीसी के बीच एक शहर के बीच में रणनीतिक रूप से स्थित है। बॉवी स्टेट एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है और मैरीलैंड विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय का हिस्सा है। स्नातक दो सौ पैंतीस प्रमुखों में से चुन सकते हैं, और विश्वविद्यालय पैंतीस मास्टर, डॉक्टरेट और उन्नत प्रमाणपत्र कार्यक्रम भी प्रदान करता है। अकादमिक टा सोलह से एक छात्र / संकाय अनुपात द्वारा समर्थित हैं। कैंपस में दो हज़ार तेरह में खोले गए एक नए छात्र केंद्र सहित कई हालिया उन्नयन हुए हैं। बोवी राज्य में एक महत्वपूर्ण पारंपरिक आवासीय छात्र आबादी है, लेकिन काम करने वाले वयस्कों के लिए शाम और ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है। सबसे लोकप्रिय स्नातक की डिग्री प्रोग्राम व्यवसाय में है। एथलेटिक्स में, बॉवी स्टेट बुलडॉग एनसीएए डिवीजन II सेंट्रल इंटरकॉलेजियेट एथलेटिक एसोसिएशन में प्रतिस्पर्धा करते हैं। विश्वविद्यालय में पांच पुरुष और आठ महिला खेल खेले जाते हैं। नामांकन : - कुल नामांकनः पाँच,छयासठ नौ लागत : - ट्यूशन और फीसः सात डॉलर,आठ सौ अस्सी ; अट्ठारह डॉलर,चार सौ सोलह - किताबेंः दो डॉलर,दो सौ - कुल लागतः इक्कीस डॉलर,आठ सौ अस्सी ; बत्तीस डॉलर,चार सौ सोलह बॉवी स्टेट यूनिवर्सिटी वित्तीय सहायता : अकादमिक कार्यक्रमः - आपके लिए कौन सा प्रमुख सही है? Cappex में मुफ्त "माई करियर और मेजर क्विज़" लेने के लिए साइन अप करें। स्थानांतरण, स्नातक और प्रतिधारण दरेंः Intercollegiate एथलेटिक कार्यक्रमः डेटा स्रोतः यदि आपको बॉवी स्टेट यूनिवर्सिटी पसंद है, तो आप इन स्कूलों को भी पसंद कर सकते हैंः अन्य मध्यम आकार के एचबीसीयू की तलाश करने वाले छात्रों को ग्राम्बलिंग स्टेट यूनिवर्सिटी , अल्कोर्न स्टेट यूनिवर्सिटी , स्पेलमैन कॉलेज और लिंकन विश्वविद्यालय की भी जांच करनी चाहिए। मैरीलैंड या वाशिंगटन डीसी में स्थित सार्वजनिक कॉलेज या विश्वविद्यालय में रुचि रखने वालों के लिए, बोवी राज्य के समान विकल्प में बाल्टीमोर विश्वविद्यालय , फ्रॉस्टबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी , कॉपिन स्टेट यूनिवर्सिटी और मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी शामिल हैं ।
Cuttack civic polls 2022 आगामी 24 मार्च को ओडिशा में नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं। कटक नगर निगम से इस बार 28 वर्षीय तनुश्री बेहरा चुनाव लड़ने जा रही हैं। तनुश्री ट्रांसजेंडर समुदाय की हैं। उनका पालन पोषण झुग्गी-झोपड़ी वालों के साथ ही हुआ है। कटक, जागरण संवाददाता। आगामी 24 मार्च होगी कटक नगर निगम चुनाव। इस चुनाव में मेयर पदवी के लिए 16 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। जबकि निगम के कुल 59 वार्ड के पार्षद उम्मीदवार के तौर पर 268 उम्मीद्वार चुनावी मैदान में उतरे हैं। लेकिन 59 वार्ड में 38 नंबर वार्ड को लेकर पूरे शहर भर में चर्चा जारी है। इस वार्ड में एक प्रमुख निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ट्रांसजेंडर तनुश्री बेहेरा ने कमर कसी हैं। पहली बार किसी ट्रांसजेंडर को चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि तनुश्री को यह मौका आसानी से नहीं मिला है। उनके मुताबिक, इसके लिए उन्हें कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा है। तब जाकर कहीं उन्हें यह मौका मिला है। अगर इस वार्ड के लोग उन्हें आशीर्वाद करेंगे और उनके सपक्ष में मतदान करेंगे तो वह जीतने के बाद लोगों की सेवा में खुद को पूरी तरह से समर्पित करने की बात कही है तनुश्री ने। जागरण से तनुश्री ने बात करते हुए कहा कि, वह काफी सालों से कटक शहर में समाज सेवा का कार्य करते आ रहे हैं। खासतौर पर गरीबी की सीमा के नीचे रहने वाले लोगों के साथ काफी सालों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि, आप बीती बातों के बारे में जानकारी देते हुए कहा की, जब उनके परिवार वालों को यह पता चला कि वह एक ट्रांसजेंडर हैं। तो उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया। वह महज 14 साल की उम्र से ही झुग्गी झोपड़ी में पली बढ़ी है। 28 वर्षीय तनुश्री 38 नंबर वार्ड में छत्र बाजार, मालगोदाम, बहरा साही बस्ती, दास साही बस्ती, नुआ साही सूर्य नगर बस्ती, सागर साही बस्ती कोयला डिपो बस्ती आदि मौजूद झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बस्ती वासियों को न्याय और आजीविका प्रदान करने के लिए पिछले 10 सालों से लड़ रही है। उनकी अधिकारों को उन्हें प्रदान करने के लिए मैं चुनाव में उतरी हूं यह कहा है तनुश्री ने। राजनीति ही समाज सेवा करने का एक अच्छा माध्यम है। जिस तरह से बस्ती वासियों को बेदखल किया गया और उन्हें एक अलग जगह पर रखा गया। फिर महज 50 हजार रुपए देकर उन्हे घर बना कर रहने के लिए कहा गया। हालांकि वह रकम घर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। चुनाव में उतरने का मेरा उद्देश्य है कि, बस्ती वासियों को भूमि दस्तावेज यां पट्टा मुहैया कराना, बेदखल होने के बाद रोजगार होने वाले लोगों को रोजगार मुहैया कराना, शिक्षा से महरूम रहने वाले बस्ती के बच्चों बच्चों को शिक्षा की व्यवस्था करना, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना, काफी सालों से कॉलेज चौक, मालगोदाम इलाके में रहकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले बस्ती वासियों को जब बेदखल कर दूसरे जगह ले जाया गया अब उन्हें रोजगार की समस्या भी हो रही है। ऐसे में उनकी यातायात के लिए बस सेवा मुहैया कराने के लिए मैं कोशिश करूंगी। अगर यहां के लोगों ने ही मुझे इस चुनाव में जिताया तो उनकी सहमति से ही मैं नगर निकाय चुनाव में पार्षद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरी हूं। उनका कहना है कि, इस चुनाव में प्रमुख राजनैतिक दल बीजू जनता दल, कांग्रेस , आम आदमी पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार को मिलाकर कुल वह पांच उम्मीदवार ही 38 नंबर वार्ड में चुनाव लड़ रहे हैं। उनका किसी के साथ किसी भी तरह की लड़ाई नहीं है वह अपने मुद्दों को लेकर लोगों के पास जा रहे हैं और ट्रांसजेंडर होने के बावजूद केवल बस्ती के लोग ही नहीं बल्कि रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोग और दूसरे साधारण लोग भी उन्हें भरपूर सहयोग दे रहे हैं। कटक के एबीआईटी से आईटीआई की डिग्री हासिल करने वाली तनुश्री का कहना है कि, दूसरे उम्मीदवार बाहुबल, रुपए आदि की बेशुमार खर्च कर रहे हैं। लेकिन मैं 38 नंबर वार्ड के लोगों के साथ सालों साल जुड़ा हुआ हूं। मेरे पास वह सब कुछ नहीं है लेकिन लोगों का प्यार और समर्थन है। बस्ती के नेता, उच्च शिक्षित वर्ग के लोग मुझे अपना समर्थन दे रहे हैं। ऐसे में निश्चित तौर पर मैं जीतने के लिए काफी उम्मीद रखी हूं। ट्रांसजेंडर को लेकर लोगों के बीच धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। लेकिन यह बदलाव जरूरी है और हमें हर क्षेत्र में मौका बराबर का मौका मिलना चाहिए। जैसे महिलाओं के लिए 2017 से 5 फ़ीसदी आरक्षण हर क्षेत्र में किया जा रहा है। उसी हिसाब से हम लोगों के लिए कम से कम 2 फ़ीसदी का आरक्षण की जानी चाहिए। ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए भी मैं बहुत कुछ करना चाहती हूं। क्योंकि वह लोग मुझे बेहतर समझते हैं और हम लोग मिलजुलकर जिन-जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें निश्चित तौर पर सरकार तक पहुंचाने का काम करूंगी और बदलाव का एक मिसाल बनूंगी। अपने वार्ड में बहुत ही अच्छी तरह से प्रचार कार्य किया हूं। हर एक लोगों तक पहुंच कर मुद्दा उनके समक्ष रखा हूं। मुझे पता है कि, लोग बदलाव चाहते हैं और निश्चित तौर पर 38 नंबर वार्ड में बदलाव आएगा और इस बदलाव की धारा विकास से निश्चित तौर पर जुड़ेगा। 22 मार्च को तनुश्री अपना प्रचार कार्य खत्म किया है और उन्हें पूरी तरह से विश्वास है कि लोग उन पर भरोसा कर पूर्ण समर्थन देंगे और उन्हें इस चुनाव में जितायेंगे।
Cuttack civic polls दो हज़ार बाईस आगामी चौबीस मार्च को ओडिशा में नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं। कटक नगर निगम से इस बार अट्ठाईस वर्षीय तनुश्री बेहरा चुनाव लड़ने जा रही हैं। तनुश्री ट्रांसजेंडर समुदाय की हैं। उनका पालन पोषण झुग्गी-झोपड़ी वालों के साथ ही हुआ है। कटक, जागरण संवाददाता। आगामी चौबीस मार्च होगी कटक नगर निगम चुनाव। इस चुनाव में मेयर पदवी के लिए सोलह उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। जबकि निगम के कुल उनसठ वार्ड के पार्षद उम्मीदवार के तौर पर दो सौ अड़सठ उम्मीद्वार चुनावी मैदान में उतरे हैं। लेकिन उनसठ वार्ड में अड़तीस नंबर वार्ड को लेकर पूरे शहर भर में चर्चा जारी है। इस वार्ड में एक प्रमुख निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ट्रांसजेंडर तनुश्री बेहेरा ने कमर कसी हैं। पहली बार किसी ट्रांसजेंडर को चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि तनुश्री को यह मौका आसानी से नहीं मिला है। उनके मुताबिक, इसके लिए उन्हें कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा है। तब जाकर कहीं उन्हें यह मौका मिला है। अगर इस वार्ड के लोग उन्हें आशीर्वाद करेंगे और उनके सपक्ष में मतदान करेंगे तो वह जीतने के बाद लोगों की सेवा में खुद को पूरी तरह से समर्पित करने की बात कही है तनुश्री ने। जागरण से तनुश्री ने बात करते हुए कहा कि, वह काफी सालों से कटक शहर में समाज सेवा का कार्य करते आ रहे हैं। खासतौर पर गरीबी की सीमा के नीचे रहने वाले लोगों के साथ काफी सालों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि, आप बीती बातों के बारे में जानकारी देते हुए कहा की, जब उनके परिवार वालों को यह पता चला कि वह एक ट्रांसजेंडर हैं। तो उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया। वह महज चौदह साल की उम्र से ही झुग्गी झोपड़ी में पली बढ़ी है। अट्ठाईस वर्षीय तनुश्री अड़तीस नंबर वार्ड में छत्र बाजार, मालगोदाम, बहरा साही बस्ती, दास साही बस्ती, नुआ साही सूर्य नगर बस्ती, सागर साही बस्ती कोयला डिपो बस्ती आदि मौजूद झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बस्ती वासियों को न्याय और आजीविका प्रदान करने के लिए पिछले दस सालों से लड़ रही है। उनकी अधिकारों को उन्हें प्रदान करने के लिए मैं चुनाव में उतरी हूं यह कहा है तनुश्री ने। राजनीति ही समाज सेवा करने का एक अच्छा माध्यम है। जिस तरह से बस्ती वासियों को बेदखल किया गया और उन्हें एक अलग जगह पर रखा गया। फिर महज पचास हजार रुपए देकर उन्हे घर बना कर रहने के लिए कहा गया। हालांकि वह रकम घर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। चुनाव में उतरने का मेरा उद्देश्य है कि, बस्ती वासियों को भूमि दस्तावेज यां पट्टा मुहैया कराना, बेदखल होने के बाद रोजगार होने वाले लोगों को रोजगार मुहैया कराना, शिक्षा से महरूम रहने वाले बस्ती के बच्चों बच्चों को शिक्षा की व्यवस्था करना, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना, काफी सालों से कॉलेज चौक, मालगोदाम इलाके में रहकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले बस्ती वासियों को जब बेदखल कर दूसरे जगह ले जाया गया अब उन्हें रोजगार की समस्या भी हो रही है। ऐसे में उनकी यातायात के लिए बस सेवा मुहैया कराने के लिए मैं कोशिश करूंगी। अगर यहां के लोगों ने ही मुझे इस चुनाव में जिताया तो उनकी सहमति से ही मैं नगर निकाय चुनाव में पार्षद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरी हूं। उनका कहना है कि, इस चुनाव में प्रमुख राजनैतिक दल बीजू जनता दल, कांग्रेस , आम आदमी पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार को मिलाकर कुल वह पांच उम्मीदवार ही अड़तीस नंबर वार्ड में चुनाव लड़ रहे हैं। उनका किसी के साथ किसी भी तरह की लड़ाई नहीं है वह अपने मुद्दों को लेकर लोगों के पास जा रहे हैं और ट्रांसजेंडर होने के बावजूद केवल बस्ती के लोग ही नहीं बल्कि रेलवे कॉलोनी में रहने वाले लोग और दूसरे साधारण लोग भी उन्हें भरपूर सहयोग दे रहे हैं। कटक के एबीआईटी से आईटीआई की डिग्री हासिल करने वाली तनुश्री का कहना है कि, दूसरे उम्मीदवार बाहुबल, रुपए आदि की बेशुमार खर्च कर रहे हैं। लेकिन मैं अड़तीस नंबर वार्ड के लोगों के साथ सालों साल जुड़ा हुआ हूं। मेरे पास वह सब कुछ नहीं है लेकिन लोगों का प्यार और समर्थन है। बस्ती के नेता, उच्च शिक्षित वर्ग के लोग मुझे अपना समर्थन दे रहे हैं। ऐसे में निश्चित तौर पर मैं जीतने के लिए काफी उम्मीद रखी हूं। ट्रांसजेंडर को लेकर लोगों के बीच धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। लेकिन यह बदलाव जरूरी है और हमें हर क्षेत्र में मौका बराबर का मौका मिलना चाहिए। जैसे महिलाओं के लिए दो हज़ार सत्रह से पाँच फ़ीसदी आरक्षण हर क्षेत्र में किया जा रहा है। उसी हिसाब से हम लोगों के लिए कम से कम दो फ़ीसदी का आरक्षण की जानी चाहिए। ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए भी मैं बहुत कुछ करना चाहती हूं। क्योंकि वह लोग मुझे बेहतर समझते हैं और हम लोग मिलजुलकर जिन-जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें निश्चित तौर पर सरकार तक पहुंचाने का काम करूंगी और बदलाव का एक मिसाल बनूंगी। अपने वार्ड में बहुत ही अच्छी तरह से प्रचार कार्य किया हूं। हर एक लोगों तक पहुंच कर मुद्दा उनके समक्ष रखा हूं। मुझे पता है कि, लोग बदलाव चाहते हैं और निश्चित तौर पर अड़तीस नंबर वार्ड में बदलाव आएगा और इस बदलाव की धारा विकास से निश्चित तौर पर जुड़ेगा। बाईस मार्च को तनुश्री अपना प्रचार कार्य खत्म किया है और उन्हें पूरी तरह से विश्वास है कि लोग उन पर भरोसा कर पूर्ण समर्थन देंगे और उन्हें इस चुनाव में जितायेंगे।
छिंदवाड़ा। बालाजी अस्पताल के मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन वॉयल को चुराकर बाजार में बेचने वाले मेल नर्स को जेल भेज दिया गया है, उसने अस्पताल से पांच नहीं, बल्कि छह वॉयल चुराए थे, जिसे वो तीस हजार रुपए प्रति इंजेक्शन के हिसाब से बेचने वाला था। लेकिन एक इंजेक्शन फूटने के बाद वो पांच को बेचने की फिराक में था, इसके पूर्व ही कोतवाली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। यहां बता दें कि एक दिन पूर्व कोतवाली पुलिस ने मुखबिरी के बाद बालाजी अस्पताल के मेल नर्स चंदनगांव यादव कॉलोनी निवासी ३० वर्षीय ओमप्रकाश पिता करण नागवंशी, उसके साथी नरसिंगपुर नाका निवासी अखिलेश पिता कैलाश शर्मा और रावनवाड़ा ढाला निवासी राजा पिता प्रहलाद तिवारी रेमडेसिविर इंजेक्शन को ब्लैक में बेचते हुए पकड़ा था, जिनके पास से पांच वॉयल बरामद किए गए थे। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ धारा 3/7 अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, 51 (बी) आपदा प्रबंधन अधिनियम, तीन महामारी अधिनियम और धारा 188, 268, 369, 201, 34 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज कर ओमप्रकाश को रिमांड पर लिया गया था, जिससे पूछताछ में छह इंजेक्शन चुराने की बात सामने आई है। इसके बाद उसे रिमांड खत्म होने पर देर शाम जेल भेज दिया गया। कोतवाली टीआई मनीष राज सिंह भदौरिया ने बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। रासुका के तहत भी होगी कार्यवाहीकोतवाली पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के वॉयल की कालाबाजारी के मामले में जिन तीन युवकों मेल नर्स ओमप्रकाश नागवंशी, अखिल शर्मा और राजा तिवारी को गिरफ्तार किया है, उनके खिलाफ अब रासुका के तहत कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। टीआई श्री भदौरिया के अनुसार ओमप्रकाश के खिलाफ राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण तैयार कर लिया गया है, जिसे कलेक्टर के पास गुरुवार को प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि दो अन्य पर भी रासुका की कार्यवाही होगी। अस्पताल को कैसे मिल क्लीनचिटइस पूरे मामले में पुलिस की कार्यवाही तारिफ के काबिल है, लेकिन एक सवाल ये उठता है कि आखिर अस्पताल प्रबंधन केा क्लीनचिट क्यों? दरअसल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वहां भर्ती हर मरीज को लिखी जाने वाली दवा सहीं वक्त पर मिले, लेकिन वहां का कर्मचारी ही दवाएं चुरा ले और बिल में बकायदा उसका पेमेंट लिया जाए? तो इसमें गलती तो प्रबंधन की भी है। वैसे भी बालाजी अस्पताल प्रबंधन प्रशासन को धमकी देकर मुंह बंद करा देता है, पूर्व में अधिक बिल मामले में कुछ ऐसा ही हुआ था। पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि बालाजी अस्पताल का मेल नर्स ओमप्रकाश नागवंशी वहां से दवाएं चुराता था। दरअसल पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि ये इंजेक्शन उसने मरीजों के परिजनों और जिन मरीजों की मौत हो जाती थी, उनके नाम पर आए थे और उसे चुरा लिया था। इसके अलावा ये भी दावा किया जा रहा है कि ये दवाओं में भी जमकर हेरफेर किया करता था, लेकिन अभी तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है, वहीं बालाजी अस्पताल प्रबंधन ने कोई सफाई नहीं दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छिंदवाड़ा। बालाजी अस्पताल के मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन वॉयल को चुराकर बाजार में बेचने वाले मेल नर्स को जेल भेज दिया गया है, उसने अस्पताल से पांच नहीं, बल्कि छह वॉयल चुराए थे, जिसे वो तीस हजार रुपए प्रति इंजेक्शन के हिसाब से बेचने वाला था। लेकिन एक इंजेक्शन फूटने के बाद वो पांच को बेचने की फिराक में था, इसके पूर्व ही कोतवाली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। यहां बता दें कि एक दिन पूर्व कोतवाली पुलिस ने मुखबिरी के बाद बालाजी अस्पताल के मेल नर्स चंदनगांव यादव कॉलोनी निवासी तीस वर्षीय ओमप्रकाश पिता करण नागवंशी, उसके साथी नरसिंगपुर नाका निवासी अखिलेश पिता कैलाश शर्मा और रावनवाड़ा ढाला निवासी राजा पिता प्रहलाद तिवारी रेमडेसिविर इंजेक्शन को ब्लैक में बेचते हुए पकड़ा था, जिनके पास से पांच वॉयल बरामद किए गए थे। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ धारा तीन/सात अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, इक्यावन आपदा प्रबंधन अधिनियम, तीन महामारी अधिनियम और धारा एक सौ अठासी, दो सौ अड़सठ, तीन सौ उनहत्तर, दो सौ एक, चौंतीस भादवि के तहत प्रकरण दर्ज कर ओमप्रकाश को रिमांड पर लिया गया था, जिससे पूछताछ में छह इंजेक्शन चुराने की बात सामने आई है। इसके बाद उसे रिमांड खत्म होने पर देर शाम जेल भेज दिया गया। कोतवाली टीआई मनीष राज सिंह भदौरिया ने बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। रासुका के तहत भी होगी कार्यवाहीकोतवाली पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के वॉयल की कालाबाजारी के मामले में जिन तीन युवकों मेल नर्स ओमप्रकाश नागवंशी, अखिल शर्मा और राजा तिवारी को गिरफ्तार किया है, उनके खिलाफ अब रासुका के तहत कार्यवाही की तैयारी की जा रही है। टीआई श्री भदौरिया के अनुसार ओमप्रकाश के खिलाफ राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण तैयार कर लिया गया है, जिसे कलेक्टर के पास गुरुवार को प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि दो अन्य पर भी रासुका की कार्यवाही होगी। अस्पताल को कैसे मिल क्लीनचिटइस पूरे मामले में पुलिस की कार्यवाही तारिफ के काबिल है, लेकिन एक सवाल ये उठता है कि आखिर अस्पताल प्रबंधन केा क्लीनचिट क्यों? दरअसल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वहां भर्ती हर मरीज को लिखी जाने वाली दवा सहीं वक्त पर मिले, लेकिन वहां का कर्मचारी ही दवाएं चुरा ले और बिल में बकायदा उसका पेमेंट लिया जाए? तो इसमें गलती तो प्रबंधन की भी है। वैसे भी बालाजी अस्पताल प्रबंधन प्रशासन को धमकी देकर मुंह बंद करा देता है, पूर्व में अधिक बिल मामले में कुछ ऐसा ही हुआ था। पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि बालाजी अस्पताल का मेल नर्स ओमप्रकाश नागवंशी वहां से दवाएं चुराता था। दरअसल पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि ये इंजेक्शन उसने मरीजों के परिजनों और जिन मरीजों की मौत हो जाती थी, उनके नाम पर आए थे और उसे चुरा लिया था। इसके अलावा ये भी दावा किया जा रहा है कि ये दवाओं में भी जमकर हेरफेर किया करता था, लेकिन अभी तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है, वहीं बालाजी अस्पताल प्रबंधन ने कोई सफाई नहीं दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सीकर में क्राइम की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही है। गुरुवार 21 जुलाई की सुबह जब पीड़ित दौड़ लगाने के लिए घर से निकला तभी किसी अंजान आरोपी ने उस पर एसिड फेंक दिया। बता दे कि पीड़ित कल सुबह सेना भर्ती में जाने वाला था। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी। सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर थाना इलाके के पुजारी का बास गांव में आज सेना भर्ती की तैयारी कर रहे एक युवक पर अज्ञात शख्स ने एसिड अटैक कर दिया। पीडि़त विकास शर्मा अल सुबह दौड़ लगाने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान उस पर एसिड फेंक दिया गया। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे श्रीमाधोपुर के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच व आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पीडि़त विकास ने बताया कि वह दौड़ लगाने जयरामपुरा जाता है। आज भी सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर जयरामपुरा के लिए साइकिल से रवाना हुआ था। इसी दौरान गांव की सड़क के पास ही एक अज्ञात शख्स ने पीछे से आकर उस पर एसिड फेंक दिया। उसने बताया कि जब वह घर से निकला था तो उसने उस शख्स को काले कपड़ों में देखा था। लेकिन, नजरअंदाज करते हुए वह आगे निकल गया। पर इसी दौरान पीछा करते हुए उसने उस पर एसिड फेंक दिया। जिसके बाद परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। घटना में पीडि़त विकास शर्मा की पूरी पीठ, हाथ के पीछे का हिस्सा व पैर झुलस गया। जिसका चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। लेकिन, हालत गंभीर जान उन्होंने उसे जयपुर रेफर कर दिया। जिसके बाद उसे जयपुर एसएमएस अस्पताल भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार विकास शर्मा सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था। इसके लिए ही वह रोज सुबह दौड़ लगाने जाता था। शुक्रवार को बीएसएफ की भर्ती के लिए वह जैसलमेर भी जाने वाला था। लेकिन, इससे पहले ही उस पर तेजाब से हमला कर दिया गया। इधर, पुलिस ने तेजाब से हमला करने वाले शख्स की तलाश शुरू कर दी है। सीओ सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि घटना स्थल का जायजा लेने साथ पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए तीन टीमों का गठन किया है। जिन्होंने आसपास के लोगों व मुखबिर की मदद से आरोपी को ढूंढना शुरू कर दिया है।
सीकर में क्राइम की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही है। गुरुवार इक्कीस जुलाई की सुबह जब पीड़ित दौड़ लगाने के लिए घर से निकला तभी किसी अंजान आरोपी ने उस पर एसिड फेंक दिया। बता दे कि पीड़ित कल सुबह सेना भर्ती में जाने वाला था। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी। सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर थाना इलाके के पुजारी का बास गांव में आज सेना भर्ती की तैयारी कर रहे एक युवक पर अज्ञात शख्स ने एसिड अटैक कर दिया। पीडि़त विकास शर्मा अल सुबह दौड़ लगाने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान उस पर एसिड फेंक दिया गया। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे श्रीमाधोपुर के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच व आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पीडि़त विकास ने बताया कि वह दौड़ लगाने जयरामपुरा जाता है। आज भी सुबह चार बजकर पचास मिनट पर जयरामपुरा के लिए साइकिल से रवाना हुआ था। इसी दौरान गांव की सड़क के पास ही एक अज्ञात शख्स ने पीछे से आकर उस पर एसिड फेंक दिया। उसने बताया कि जब वह घर से निकला था तो उसने उस शख्स को काले कपड़ों में देखा था। लेकिन, नजरअंदाज करते हुए वह आगे निकल गया। पर इसी दौरान पीछा करते हुए उसने उस पर एसिड फेंक दिया। जिसके बाद परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। घटना में पीडि़त विकास शर्मा की पूरी पीठ, हाथ के पीछे का हिस्सा व पैर झुलस गया। जिसका चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। लेकिन, हालत गंभीर जान उन्होंने उसे जयपुर रेफर कर दिया। जिसके बाद उसे जयपुर एसएमएस अस्पताल भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार विकास शर्मा सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था। इसके लिए ही वह रोज सुबह दौड़ लगाने जाता था। शुक्रवार को बीएसएफ की भर्ती के लिए वह जैसलमेर भी जाने वाला था। लेकिन, इससे पहले ही उस पर तेजाब से हमला कर दिया गया। इधर, पुलिस ने तेजाब से हमला करने वाले शख्स की तलाश शुरू कर दी है। सीओ सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि घटना स्थल का जायजा लेने साथ पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए तीन टीमों का गठन किया है। जिन्होंने आसपास के लोगों व मुखबिर की मदद से आरोपी को ढूंढना शुरू कर दिया है।
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश चौधरी ने कहा कि प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। पिछले पांच वर्षों के असफ ल कार्यकाल व भ्रष्टाचार के चलते भाजपा को मतदाताओं की नाराजगी का कड़ा सामना करना पड़ रहा है। अब चाहे जितने मर्जी मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री जितनी मर्जी रैलियां कर लें जय राम सरकार के डूबते जहाज को कोई नहीं बचा सकता। जिला मंडी के पड्डल मैदान में सोमवार को आयोजित प्रियंका गांधी की रैली में लोगों का भारी जनसैलाब इस बात की गवाही दे रही है कि जयराम सरकार को सत्ता से बेदखल करने का जनता पूरी तरह से मन बना चुकी है। जनता जनार्दन 12 नवंबर का बेसब्री से इंतजार कर रही है। कब वे इस भ्रष्टाचारी सरकार को बेदखल करें और कांग्रेस के पुणसत्ता की बागडोर सौंपे। जिससे हिमाचल प्रदेश का समग्र विकास हो सके। मंडी में प्रियंका गांधी की रैली के आयोजन के उपरांत बल्ह विधानसभा की पंचायत दूसरा खाबू में अपने जनसंपर्क अभियान के दौरान नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। बल्ह को तहसीलए उप. तहसील तथा उपमंडल का दर्जा भी उन्होंने अपने ही कार्यकाल में लाया गया, लेकिन भाजपा के निठल्ले विधायक ने बल्ह विधानसभा को अपने कार्यकाल में 10 साल पीछे धकेल दिया। वे मंडी का मुख्यमंत्री होते हुए भी बल्ह के लिए एक भी नई सैगात नहीं ला पाए, जोकि बेहद शर्मसार करने वाली बात है। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही उन्होंने अपने जहन में कुछ और विकास कार्यों को करवाना उनका लक्ष्य है। बल्ह में भाजपा को झटका लगा है। बीडीसी की चैयरमैन मंजू नायक भाजपा को छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गई है। उन्होंने समर्थकों सहित पूर्व प्रकाश चौधरी की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ली। वहीं बल्ह विधानसभा क्षेत्र के दूसरा खाबू पंचायत के मुरारीलाल, यशवंत कुमार, योगराज, डिंपल ठाकुर, कमल देव, महेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, विनोद कुमार, योगराज ठाकुर, पितांबर शर्मा, कोमल शर्मा, लक्ष्मण शास्त्री, सोनू शर्मा, बिट्टू, निधि व अन्य महिलाओं ने अपने परिवार सहित भाजपा को अलविदा कह प्रकाश चौधरी का साथ देने का वचन दिया। चौधरी ने उन्हें कांग्रेस चिन्ह के मफलर पहनाकर उनका स्वागत किया तथा उन्हें आश्वासन दिया कि जिस तरह से उन्होंने उन पर विश्वास जताया है, वे उस पर पूरा उतरने का उन्हें वचन देते हैं।
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश चौधरी ने कहा कि प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। पिछले पांच वर्षों के असफ ल कार्यकाल व भ्रष्टाचार के चलते भाजपा को मतदाताओं की नाराजगी का कड़ा सामना करना पड़ रहा है। अब चाहे जितने मर्जी मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री जितनी मर्जी रैलियां कर लें जय राम सरकार के डूबते जहाज को कोई नहीं बचा सकता। जिला मंडी के पड्डल मैदान में सोमवार को आयोजित प्रियंका गांधी की रैली में लोगों का भारी जनसैलाब इस बात की गवाही दे रही है कि जयराम सरकार को सत्ता से बेदखल करने का जनता पूरी तरह से मन बना चुकी है। जनता जनार्दन बारह नवंबर का बेसब्री से इंतजार कर रही है। कब वे इस भ्रष्टाचारी सरकार को बेदखल करें और कांग्रेस के पुणसत्ता की बागडोर सौंपे। जिससे हिमाचल प्रदेश का समग्र विकास हो सके। मंडी में प्रियंका गांधी की रैली के आयोजन के उपरांत बल्ह विधानसभा की पंचायत दूसरा खाबू में अपने जनसंपर्क अभियान के दौरान नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। बल्ह को तहसीलए उप. तहसील तथा उपमंडल का दर्जा भी उन्होंने अपने ही कार्यकाल में लाया गया, लेकिन भाजपा के निठल्ले विधायक ने बल्ह विधानसभा को अपने कार्यकाल में दस साल पीछे धकेल दिया। वे मंडी का मुख्यमंत्री होते हुए भी बल्ह के लिए एक भी नई सैगात नहीं ला पाए, जोकि बेहद शर्मसार करने वाली बात है। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही उन्होंने अपने जहन में कुछ और विकास कार्यों को करवाना उनका लक्ष्य है। बल्ह में भाजपा को झटका लगा है। बीडीसी की चैयरमैन मंजू नायक भाजपा को छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गई है। उन्होंने समर्थकों सहित पूर्व प्रकाश चौधरी की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ली। वहीं बल्ह विधानसभा क्षेत्र के दूसरा खाबू पंचायत के मुरारीलाल, यशवंत कुमार, योगराज, डिंपल ठाकुर, कमल देव, महेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, विनोद कुमार, योगराज ठाकुर, पितांबर शर्मा, कोमल शर्मा, लक्ष्मण शास्त्री, सोनू शर्मा, बिट्टू, निधि व अन्य महिलाओं ने अपने परिवार सहित भाजपा को अलविदा कह प्रकाश चौधरी का साथ देने का वचन दिया। चौधरी ने उन्हें कांग्रेस चिन्ह के मफलर पहनाकर उनका स्वागत किया तथा उन्हें आश्वासन दिया कि जिस तरह से उन्होंने उन पर विश्वास जताया है, वे उस पर पूरा उतरने का उन्हें वचन देते हैं।