raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
२६१ । श्री उपेन्द्रनाथ अश्क
है, तू किसी चांडाल के घर उत्पन्न नही हुई ।" संक्षेप में, ताराचन्द चाहता है कि रानी त्रिलोक के घर वापस जाये। लेकिन रानी नव-जागरित नारी समाज की विद्रोहवारगी है, जो पिता को उसी लहजे में यह उत्तर दे कर कि, 'आपके धर्म की बातें मैंने बहुत सुन लीं पिताजी, आपका धर्म भी पुरुषों का धर्म है ! २ चुप कर देती है । रानी पूरन के साथ वहाँ चली जाती है, जहाँ उसके सींग समायेंगे। पूरन ने अनुभव कर लिया है कि जब तक उसकी बहनें अपने पैरों पर खड़े हो सकने की स्थिति में नहीं आतीं, उन पर पिता और पति का अत्याचार होता रहेगा। इससे वह रानी को शिक्षिता बनाने के लिए घर छोड़ कर चल देता है । घर छोड़ते समय रानी एक वाक्य कहती है - 'स्वभिमानियों के लिए आदि काल से यह मार्ग खुला है, राज ।'३ इस एक वाक्य से उसके चरित्र का पूर्ण परिचय प्राप्त हो जाता है ।
लेकिन वहीं राजो है, जो प्राचीन भारतीय नारी समाज के आदर्शों से चिपकी हुई है । वह टूट जायेगी पर तनेगी नहीं। पति ने घर में एक दूसरी को बिठा लिया है । तो भी वह अपने ससुर के वात्सल्य के भरोसे जीवन की नाव को खींचे लिये जाने में लगी हुई है । वह रानी की तरह विद्रोह नहीं कर सकती । रानी यदि स्वाभिमानियों के आदि मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रस्तुत है तो राज का मार्ग भी उसकी भावना में 'सनातन' है । ' पूरन के क्रान्ति के आवाहन का कुछ भी असर उस पर नहीं पड़
सकता ।
इस तरह ये दोनों बहनें समान परिस्थितियों में पड़ती तो हैं लेकिन इनकी प्रतिक्रियाएँ भिन्न भिन्न हैं । रानी यदि सतेज और सप्रारण है तो राज शान्त और निस्पन्द; रानी सक्रिय है और राज निष्क्रिय ।
विवाह की इस बड़ी समस्या के साथ ही अश्क ने कतिपय अन्य समस्याओं को भी इस नाटक में प्रस्तुत किया है । रायबहादुर कुंजबिहारी का बड़ा-सा परिवार है । रानी को इस परिवार में आ कर इसमें मिल खप जाना है । आज के इस युग में संयुक्त परिवार की संस्था टूट रही है । व्यक्तिवाद के उदय के साथ संयुक्त परिवार की कड़ियाँ टूटने लगी हैं । नव-विवाहित दम्पति के आगे आज यह पहला प्रश्न होता है कि किस तरह संयुक्त परिवार की मर्यादा निभाएँ । त्रिलोक ने कहा ही है कि आज का कौन युवक नहीं चाहता कि अपनी पत्नी को साथ ले कर स्वतंत्रता से रहे; जब चाहे उठे, सैर को जाय, ताश खेले या सिनेमा देखे, किन्तु गर्दन तक दलदल में धँसे आदमी को बाहर निकलने के लिए उतना ज़ोर नहीं लगाना पड़ता, जितना सम्मिलित परिवार के कीचड़ में टखनों तक धँसे आदमी को । संयुक्त परिवार में निभने के लिए सचमुच बड़ा 'सबर और सन्तोष चाहिए ।१६
बात यह है कि जिन घरों में माँ-बाप, भाई-भाई, देवरानियाँ-जेठानियाँ और
हिन्दी के समस्या नाटक । २६२
ननद-भौजाइयाँ इकट्ठी रहती हैं, एक-न- एक झगड़ा-टंटा वहाँ लगा ही रहता है । रानी को ऐसे संयुक्त परिवार में रहने की आदत नहीं है । दूसरी ओर वह बड़ी भाव-प्रवरण है, ज़रा-सी बात उसे लग जाती है ।' प्रश्न है, त्रिलोक और रानी संयुक्त परिवार में आखिर रहें ही क्यों ? नाटककार ने इसी 'क्यों' का उत्तर दिलाया है त्रिलोक से, जो कहता है कि जहाँ पेड़ (संयुक्त परिवार का ) हरा-भरा और छायादार है, वहाँ कई बेकार युवक, छोटे-मोटे क्लर्क और महत्वाकांक्षी नये वकील इसकी छाया का आनन्द लेते हैं । संयुक्त परिवार की सचमुच यह बड़ी शक्ति है कि उसमे कम आमदनी वालों और यहाँ तक कि निठल्ले लोगों की भी गुज़र चल जाती है । रानी त्रिलोक के संयुक्त परिवार में निभ नहीं सकती और उसे ले कर अलग दुनिया बसाना भी त्रिलोक के लिए आसान काम नहीं है । संयुक्त परिवार का दुर्ग बड़ा दुर्गम है । माता-पिता के उपकार, भाई-बहनों का प्यार, कुल को लाज, पुरखों का नाम, गत की महत्ता ओर गत की सम्मलित शक्ति के सपने न जाने कितनो दीवारें सम्मिलित परिवार की चहार • दीवारी को छोड़ भागने वाले के रास्ते में आ खड़ी होती हैं । सिद्ध यह है कि संयुक्त परिवार तभी निभ सकता है, जब घर की बहुऍ समझदार हों और बात का बतंगड़ न बनायें, चुपचाप अपने काम में लगी रहें । यह सब्र, यह सहिष्णुता यदि हो तो सयुक्त परिवार चले । अन्यथा पागल हो जाने का कितना ख़तरा है ।
पूरन की भी एक अपनी समस्या है, जिसकी ओर अश्क ने इशारा किया है । शिक्षित पूरन को अपनी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप नौकरी नही मिलतो । यों वह रेडियो का प्रोग्राम एक्जेक्यूटिव, फिर लाला गुलज़ारी लाल फ़र्म का चीफ़ एजेन्ट और सर सीताराम की मिल का मैनेजर होता है । पर इन धन्धों में उसकी वृत्ति रमती नहीं है और उसे नौकरी छोड़ देनी पड़ती है । इधर पिता है, जो समझता है कि पूरन निकम्मा है, निठल्ला, आवारा । पूरन का सूझ-बूझ को देखते हुए यह मज़े में कहा जा सकता है कि यदि समाज ने उपयुक्त स्थान पर रह कर सेवा करने का अवसर पूरन को दिया होता तो वह समाज का एक कीमती सदस्य सिद्ध होता ।
अंजो दीदी
'अंजो दीदी' नाटक में जिस अंजो दीदी अथवा अंजली की दो पीढ़ियों का वर्णन किया गया है, उसने अपने नाना से केवल उनकी विशाल काठी का (जिसे उन्होंने किसी अंग्रेज इन्जोनियर से खरीदा था ) उत्तराधिकार हो प्राप्त नही किया वरन् उनका अहम् भी विरासत में पाया है । अंजो के नाना जी के जीवन विषयक निश्चित आदर्श थे, निश्चित मान्यताएँ थी । वे अपने घर के 'किंग कैन्यूट' थे । अंजली को अपने उस नाना जी से विरासत में जो स्वभाव मिला है, उसका स्वाभाविक गुरग है - दूसरों पर छा जाना । अंजो अपने सारे घर को अपनो मर्जी के अनुसार चलाया करती है। उसका रोब कुछ ऐसा
|
दो सौ इकसठ । श्री उपेन्द्रनाथ अश्क है, तू किसी चांडाल के घर उत्पन्न नही हुई ।" संक्षेप में, ताराचन्द चाहता है कि रानी त्रिलोक के घर वापस जाये। लेकिन रानी नव-जागरित नारी समाज की विद्रोहवारगी है, जो पिता को उसी लहजे में यह उत्तर दे कर कि, 'आपके धर्म की बातें मैंने बहुत सुन लीं पिताजी, आपका धर्म भी पुरुषों का धर्म है ! दो चुप कर देती है । रानी पूरन के साथ वहाँ चली जाती है, जहाँ उसके सींग समायेंगे। पूरन ने अनुभव कर लिया है कि जब तक उसकी बहनें अपने पैरों पर खड़े हो सकने की स्थिति में नहीं आतीं, उन पर पिता और पति का अत्याचार होता रहेगा। इससे वह रानी को शिक्षिता बनाने के लिए घर छोड़ कर चल देता है । घर छोड़ते समय रानी एक वाक्य कहती है - 'स्वभिमानियों के लिए आदि काल से यह मार्ग खुला है, राज ।'तीन इस एक वाक्य से उसके चरित्र का पूर्ण परिचय प्राप्त हो जाता है । लेकिन वहीं राजो है, जो प्राचीन भारतीय नारी समाज के आदर्शों से चिपकी हुई है । वह टूट जायेगी पर तनेगी नहीं। पति ने घर में एक दूसरी को बिठा लिया है । तो भी वह अपने ससुर के वात्सल्य के भरोसे जीवन की नाव को खींचे लिये जाने में लगी हुई है । वह रानी की तरह विद्रोह नहीं कर सकती । रानी यदि स्वाभिमानियों के आदि मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रस्तुत है तो राज का मार्ग भी उसकी भावना में 'सनातन' है । ' पूरन के क्रान्ति के आवाहन का कुछ भी असर उस पर नहीं पड़ सकता । इस तरह ये दोनों बहनें समान परिस्थितियों में पड़ती तो हैं लेकिन इनकी प्रतिक्रियाएँ भिन्न भिन्न हैं । रानी यदि सतेज और सप्रारण है तो राज शान्त और निस्पन्द; रानी सक्रिय है और राज निष्क्रिय । विवाह की इस बड़ी समस्या के साथ ही अश्क ने कतिपय अन्य समस्याओं को भी इस नाटक में प्रस्तुत किया है । रायबहादुर कुंजबिहारी का बड़ा-सा परिवार है । रानी को इस परिवार में आ कर इसमें मिल खप जाना है । आज के इस युग में संयुक्त परिवार की संस्था टूट रही है । व्यक्तिवाद के उदय के साथ संयुक्त परिवार की कड़ियाँ टूटने लगी हैं । नव-विवाहित दम्पति के आगे आज यह पहला प्रश्न होता है कि किस तरह संयुक्त परिवार की मर्यादा निभाएँ । त्रिलोक ने कहा ही है कि आज का कौन युवक नहीं चाहता कि अपनी पत्नी को साथ ले कर स्वतंत्रता से रहे; जब चाहे उठे, सैर को जाय, ताश खेले या सिनेमा देखे, किन्तु गर्दन तक दलदल में धँसे आदमी को बाहर निकलने के लिए उतना ज़ोर नहीं लगाना पड़ता, जितना सम्मिलित परिवार के कीचड़ में टखनों तक धँसे आदमी को । संयुक्त परिवार में निभने के लिए सचमुच बड़ा 'सबर और सन्तोष चाहिए ।सोलह बात यह है कि जिन घरों में माँ-बाप, भाई-भाई, देवरानियाँ-जेठानियाँ और हिन्दी के समस्या नाटक । दो सौ बासठ ननद-भौजाइयाँ इकट्ठी रहती हैं, एक-न- एक झगड़ा-टंटा वहाँ लगा ही रहता है । रानी को ऐसे संयुक्त परिवार में रहने की आदत नहीं है । दूसरी ओर वह बड़ी भाव-प्रवरण है, ज़रा-सी बात उसे लग जाती है ।' प्रश्न है, त्रिलोक और रानी संयुक्त परिवार में आखिर रहें ही क्यों ? नाटककार ने इसी 'क्यों' का उत्तर दिलाया है त्रिलोक से, जो कहता है कि जहाँ पेड़ हरा-भरा और छायादार है, वहाँ कई बेकार युवक, छोटे-मोटे क्लर्क और महत्वाकांक्षी नये वकील इसकी छाया का आनन्द लेते हैं । संयुक्त परिवार की सचमुच यह बड़ी शक्ति है कि उसमे कम आमदनी वालों और यहाँ तक कि निठल्ले लोगों की भी गुज़र चल जाती है । रानी त्रिलोक के संयुक्त परिवार में निभ नहीं सकती और उसे ले कर अलग दुनिया बसाना भी त्रिलोक के लिए आसान काम नहीं है । संयुक्त परिवार का दुर्ग बड़ा दुर्गम है । माता-पिता के उपकार, भाई-बहनों का प्यार, कुल को लाज, पुरखों का नाम, गत की महत्ता ओर गत की सम्मलित शक्ति के सपने न जाने कितनो दीवारें सम्मिलित परिवार की चहार • दीवारी को छोड़ भागने वाले के रास्ते में आ खड़ी होती हैं । सिद्ध यह है कि संयुक्त परिवार तभी निभ सकता है, जब घर की बहुऍ समझदार हों और बात का बतंगड़ न बनायें, चुपचाप अपने काम में लगी रहें । यह सब्र, यह सहिष्णुता यदि हो तो सयुक्त परिवार चले । अन्यथा पागल हो जाने का कितना ख़तरा है । पूरन की भी एक अपनी समस्या है, जिसकी ओर अश्क ने इशारा किया है । शिक्षित पूरन को अपनी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप नौकरी नही मिलतो । यों वह रेडियो का प्रोग्राम एक्जेक्यूटिव, फिर लाला गुलज़ारी लाल फ़र्म का चीफ़ एजेन्ट और सर सीताराम की मिल का मैनेजर होता है । पर इन धन्धों में उसकी वृत्ति रमती नहीं है और उसे नौकरी छोड़ देनी पड़ती है । इधर पिता है, जो समझता है कि पूरन निकम्मा है, निठल्ला, आवारा । पूरन का सूझ-बूझ को देखते हुए यह मज़े में कहा जा सकता है कि यदि समाज ने उपयुक्त स्थान पर रह कर सेवा करने का अवसर पूरन को दिया होता तो वह समाज का एक कीमती सदस्य सिद्ध होता । अंजो दीदी 'अंजो दीदी' नाटक में जिस अंजो दीदी अथवा अंजली की दो पीढ़ियों का वर्णन किया गया है, उसने अपने नाना से केवल उनकी विशाल काठी का उत्तराधिकार हो प्राप्त नही किया वरन् उनका अहम् भी विरासत में पाया है । अंजो के नाना जी के जीवन विषयक निश्चित आदर्श थे, निश्चित मान्यताएँ थी । वे अपने घर के 'किंग कैन्यूट' थे । अंजली को अपने उस नाना जी से विरासत में जो स्वभाव मिला है, उसका स्वाभाविक गुरग है - दूसरों पर छा जाना । अंजो अपने सारे घर को अपनो मर्जी के अनुसार चलाया करती है। उसका रोब कुछ ऐसा
|
UP Police Bharti 2022 Vacancy Details: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने सहायक ऑपरेटर, हेड ऑपरेटर और अन्य सहित विभिन्न पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। उपरोक्त पदों के लिए आवेदन आधिकारिक वेबसाइट uppbpb. gov. in के माध्यम से 15 मार्च, 2022 तक या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
यूपीपीआरपीबी इस भर्ती अभियान के साथ 2430 पदों को भरना चाहता है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है।
असिस्टेंट ऑपरेटर - फिजिक्स और मैथ्स विषयों के साथ इंटरमीडिएट या समकक्ष पूरा किया हो.
हेड ऑपरेटर - इलेक्ट्रॉनिक्स / टेलीकम्युनिकेशन / इलेक्ट्रिकल / कंप्यूटर साइंस / आईटी / मैकेनिकल में तीन साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा पूरा किया होना चाहिए।
वर्कशॉप स्टाफ- उम्मीदवार को संबंधित विषय में 12वीं और आईटीआई पास होना चाहिए।
सहायक संचालक - 18 से 22 वर्ष की आयु के बीच।
वर्कशॉप स्टाफ, हेड रेडियो ऑपरेटर / हेड मैकेनिक ऑपरेटर - 20 से 28 वर्ष की आयु के बीच।
उम्मीदवारों का चयन एक ऑनलाइन लिखित परीक्षा, उसके बाद पीएसटी, उसके बाद पीईटी, अंतिम सूची और मेडिकल परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
|
UP Police Bharti दो हज़ार बाईस Vacancy Details: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड ने सहायक ऑपरेटर, हेड ऑपरेटर और अन्य सहित विभिन्न पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। उपरोक्त पदों के लिए आवेदन आधिकारिक वेबसाइट uppbpb. gov. in के माध्यम से पंद्रह मार्च, दो हज़ार बाईस तक या उससे पहले जमा किया जा सकता है। यूपीपीआरपीबी इस भर्ती अभियान के साथ दो हज़ार चार सौ तीस पदों को भरना चाहता है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। असिस्टेंट ऑपरेटर - फिजिक्स और मैथ्स विषयों के साथ इंटरमीडिएट या समकक्ष पूरा किया हो. हेड ऑपरेटर - इलेक्ट्रॉनिक्स / टेलीकम्युनिकेशन / इलेक्ट्रिकल / कंप्यूटर साइंस / आईटी / मैकेनिकल में तीन साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा पूरा किया होना चाहिए। वर्कशॉप स्टाफ- उम्मीदवार को संबंधित विषय में बारहवीं और आईटीआई पास होना चाहिए। सहायक संचालक - अट्ठारह से बाईस वर्ष की आयु के बीच। वर्कशॉप स्टाफ, हेड रेडियो ऑपरेटर / हेड मैकेनिक ऑपरेटर - बीस से अट्ठाईस वर्ष की आयु के बीच। उम्मीदवारों का चयन एक ऑनलाइन लिखित परीक्षा, उसके बाद पीएसटी, उसके बाद पीईटी, अंतिम सूची और मेडिकल परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
|
Don't Miss!
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
दो एक्ट्रेस. . एक रंग और कोल्ड वॉर 'खूबसूरत' लगने की!
कान्स में दो एक्ट्रेस के रेड कार्पेट पर चलने का हमारे देश में सबको इंतजार रहता है। वो दो कौन हैं ये तो आप भी जानते होंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं सोनम कपूर और ऐश्वर्या राय की। ऐश्वर्या राय पिछले 15 सालों से लगातार कान्स में जा रही हैं।
लोग ऐश्वर्या राय के चलने का इसलिए इंतजार करते हैं क्योंकि वो देश क्या दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक हैं तो जाहिर है लोगों को और उनके फैन्स को इंतजार रहता है कि वो कैसे इतने बड़े मंच पर खुद को प्रजेंट करती हैं तो वहीं सोनम कपूर अपने ड्रेसिंग और स्टाइल के लिए जानी जाती हैं तो उनका भी इंतजार रहना स्वाभिक है।
कल ऐश्वर्या राय और सोनम कपूर दोनों कान्स के लिए आई। सोनम का पहला लुक प्रेस कॉन्फ्रेंस तो ऐश रेड कार्पेट पर चलीं। सोनम कपूर और ऐश में जो एक बात कॉमन थी वो थी पर्पल कलर। अब आप सोच रहे होंगे कि पर्पल कलर कॉमन कैसे है। असल में पर्पल कलर की साड़ी सोनम ने कॉन्फ्रेंस के लिए पहनी और ऐश्वर्या राय ने लगाई पर्पल कलर की लिपस्टिक।
जी हां 42 साल की ऐश जब पर्पल लिपस्टिक में दिखीं तो कई शॉक्ड हो गए इसिलए नहीं कुछ बोल पाए तो कई को ऐश इतनी सुंदर लगी इसलिए बोल पाए। बहरहाल देखिए स्लाइड्स में कि कौन कैसा लगा।
|
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? दो एक्ट्रेस. . एक रंग और कोल्ड वॉर 'खूबसूरत' लगने की! कान्स में दो एक्ट्रेस के रेड कार्पेट पर चलने का हमारे देश में सबको इंतजार रहता है। वो दो कौन हैं ये तो आप भी जानते होंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं सोनम कपूर और ऐश्वर्या राय की। ऐश्वर्या राय पिछले पंद्रह सालों से लगातार कान्स में जा रही हैं। लोग ऐश्वर्या राय के चलने का इसलिए इंतजार करते हैं क्योंकि वो देश क्या दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक हैं तो जाहिर है लोगों को और उनके फैन्स को इंतजार रहता है कि वो कैसे इतने बड़े मंच पर खुद को प्रजेंट करती हैं तो वहीं सोनम कपूर अपने ड्रेसिंग और स्टाइल के लिए जानी जाती हैं तो उनका भी इंतजार रहना स्वाभिक है। कल ऐश्वर्या राय और सोनम कपूर दोनों कान्स के लिए आई। सोनम का पहला लुक प्रेस कॉन्फ्रेंस तो ऐश रेड कार्पेट पर चलीं। सोनम कपूर और ऐश में जो एक बात कॉमन थी वो थी पर्पल कलर। अब आप सोच रहे होंगे कि पर्पल कलर कॉमन कैसे है। असल में पर्पल कलर की साड़ी सोनम ने कॉन्फ्रेंस के लिए पहनी और ऐश्वर्या राय ने लगाई पर्पल कलर की लिपस्टिक। जी हां बयालीस साल की ऐश जब पर्पल लिपस्टिक में दिखीं तो कई शॉक्ड हो गए इसिलए नहीं कुछ बोल पाए तो कई को ऐश इतनी सुंदर लगी इसलिए बोल पाए। बहरहाल देखिए स्लाइड्स में कि कौन कैसा लगा।
|
किशोरी ने बताया था कि उसकी बहन निशा व उसका प्रेमी राहुल कुमार निवासी टिमरख उसे ले गए थे। बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों को आरोपी बनाया है।
सांकेतिक तस्वीर।
मैनपुरी के थाना कुर्रा क्षेत्र से एक किशोरी को अगवा किए जाने के मामले में पुलिस ने सगी बहन व प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पूर्व पिता की ओर से तीन पुत्रियों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। एक किशोरी को पुलिस ने बीकानेर से ढूंढ निकाला था, वहीं दूसरी को गिरफ्तार किया है, तीसरी नाबलिग की पुलिस तलाश कर रही है।
कुर्रा थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी तीन पुत्री एक बालिग व दो नाबालिग के गायब होने का मामला दर्ज कराया था। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने एक किशोरी को बीकानेर से ढूंढने के बाद परिजन को सौंप दिया था। वहीं अगवा करने के मामले में आरोपी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
किशोरी ने बताया था कि उसकी बहन निशा व उसका प्रेमी राहुल कुमार निवासी टिमरख उसे ले गए थे। बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों को आरोपी बनाया है। रविवार को पुलिस ने बहन और प्रेमी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया। प्रभारी निरीक्षक जय श्याम शुक्ला ने बताया कि अब एक किशोरी शेष है, पुलिस उसकी भी तलाश कर रही है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
किशोरी ने बताया था कि उसकी बहन निशा व उसका प्रेमी राहुल कुमार निवासी टिमरख उसे ले गए थे। बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों को आरोपी बनाया है। सांकेतिक तस्वीर। मैनपुरी के थाना कुर्रा क्षेत्र से एक किशोरी को अगवा किए जाने के मामले में पुलिस ने सगी बहन व प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पूर्व पिता की ओर से तीन पुत्रियों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। एक किशोरी को पुलिस ने बीकानेर से ढूंढ निकाला था, वहीं दूसरी को गिरफ्तार किया है, तीसरी नाबलिग की पुलिस तलाश कर रही है। कुर्रा थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी तीन पुत्री एक बालिग व दो नाबालिग के गायब होने का मामला दर्ज कराया था। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने एक किशोरी को बीकानेर से ढूंढने के बाद परिजन को सौंप दिया था। वहीं अगवा करने के मामले में आरोपी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। किशोरी ने बताया था कि उसकी बहन निशा व उसका प्रेमी राहुल कुमार निवासी टिमरख उसे ले गए थे। बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों को आरोपी बनाया है। रविवार को पुलिस ने बहन और प्रेमी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया। प्रभारी निरीक्षक जय श्याम शुक्ला ने बताया कि अब एक किशोरी शेष है, पुलिस उसकी भी तलाश कर रही है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
(प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन से पुनर्निर्देशित)
पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन वर्ष 1975 में 10 जनवरी से 12 जनवरी तक नागपुर, भारत में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का आयोजन 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति', वर्धा के तत्वावधान में हुआ था।
- इस सम्मेलन से सम्बन्धित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन महामहिम उपराष्ट्रपति बी. डी. जत्ती थे।
- 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति', वर्धा के अध्यक्ष मधुकर राव चौधरी उस समय महाराष्ट्र के वित्त, नियोजन व अल्पबचत मन्त्री थे।
- पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का बोधवाक्य था- वसुधैव कुटुम्बकम।
- इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि मॉरीशस के प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम थे, जिनकी अध्यक्षता में मॉरीशस से आये एक प्रतिनिधिमण्डल ने भी सम्मेलन में भाग लिया।
- 30 देशों के कुल 122 प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया था।
- संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया जाए।
- वर्धा में 'विश्व हिन्दी विद्यापीठ' की स्थापना हो।
- विश्व हिन्दी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
|
पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में दस जनवरी से बारह जनवरी तक नागपुर, भारत में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का आयोजन 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति', वर्धा के तत्वावधान में हुआ था। - इस सम्मेलन से सम्बन्धित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन महामहिम उपराष्ट्रपति बी. डी. जत्ती थे। - 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति', वर्धा के अध्यक्ष मधुकर राव चौधरी उस समय महाराष्ट्र के वित्त, नियोजन व अल्पबचत मन्त्री थे। - पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का बोधवाक्य था- वसुधैव कुटुम्बकम। - इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि मॉरीशस के प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम थे, जिनकी अध्यक्षता में मॉरीशस से आये एक प्रतिनिधिमण्डल ने भी सम्मेलन में भाग लिया। - तीस देशों के कुल एक सौ बाईस प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया था। - संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया जाए। - वर्धा में 'विश्व हिन्दी विद्यापीठ' की स्थापना हो। - विश्व हिन्दी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
|
द केरल स्टोरी (The Kerala Story) का टीजर रिलीज हो गया है. फिल्म आतंकी घटना पर आधारित है. सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक आतंकवादी आर्गेनाइजेशन की दिल दहला देने वाली कहानी फिल्म का आधार है. फिल्म का ट्रेलर जारी हो गया है.
इस फिल्म को बनाने से पहले निर्देशक सुदीप्तो सेन ने पीड़ितों के रिश्तेदारों से मिलने के लिए केरल में यात्रा की, यही नहीं इस विषय को पूरी ईमानदारी से दर्शकों के बीच रखने के लिए उन्होंने अरब देशों की यात्रा की इस दौरान बहुत दिल दहला देने वाले तथ्य सामने आए. लोग अब भी इस घटना से सहमे हुए है और अपनों की तलाश में हैं.
|
द केरल स्टोरी का टीजर रिलीज हो गया है. फिल्म आतंकी घटना पर आधारित है. सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक आतंकवादी आर्गेनाइजेशन की दिल दहला देने वाली कहानी फिल्म का आधार है. फिल्म का ट्रेलर जारी हो गया है. इस फिल्म को बनाने से पहले निर्देशक सुदीप्तो सेन ने पीड़ितों के रिश्तेदारों से मिलने के लिए केरल में यात्रा की, यही नहीं इस विषय को पूरी ईमानदारी से दर्शकों के बीच रखने के लिए उन्होंने अरब देशों की यात्रा की इस दौरान बहुत दिल दहला देने वाले तथ्य सामने आए. लोग अब भी इस घटना से सहमे हुए है और अपनों की तलाश में हैं.
|
पाठ्यक्रम लिखते समय, डिप्लोमा या अन्यवैज्ञानिक कार्य छात्र अनिवार्य रूप से एक परिचय लिखते हैं अपने विकास में, लेखक को संरचना के ऐसे अनिवार्य तत्वों को विस्तार से वर्णन करना चाहिए, क्योंकि प्रस्तुत विषय, लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्रासंगिकता, साथ ही वस्तु, अनुसंधान का विषय।
कई छात्रों, विशेष रूप से पहले और दूसरे मेंबेशक, इन अवधारणाओं की परिभाषा के साथ कठिनाइयां हैं उनके बिना आप अपना ज्ञान बनाने में सक्षम नहीं होंगे, साथ ही साथ गुणवत्ता के काम भी लिखेंगे। आइए हम समझें कि वस्तु और अनुसंधान का विषय क्या है, किसी भी वैज्ञानिक कार्य के इन तत्वों के उदाहरण और परिभाषा।
शब्दकोशों में, यह स्पष्ट परिभाषा है कि क्या है उद्देश्य और अनुसंधान के विषय उदाहरण प्रथम वर्ष के छात्रों के वैज्ञानिक पत्र यह साबित करते हैंआधिकारिक संदर्भ पुस्तकों में सूखी रेखाएं इन संरचनात्मक तत्वों की समझ को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, परिभाषाओं के साथ शुरू करना आवश्यक है। यह आपको विशिष्ट ज्ञान के साथ अपने ज्ञान को गठबंधन करने और चीजों के दिल को प्राप्त करने की अनुमति देगा।
अध्ययन के उद्देश्य को घटना कहा जाता है, एक प्रक्रिया जो एक विशेष काम में उठाई गई समस्याओं को उत्पन्न करती है। यह वैज्ञानिक ज्ञान का हिस्सा है कि लेखक को इसके साथ काम करना चाहिए।
वैज्ञानिक काम का विषय कहा जाता हैविशेष रूप से अध्ययन के चयनित वस्तु का लिया घटक। यह एक विशिष्ट मुद्दा है जो उठाए गए मुद्दों को संबोधित करते हुए उस पर छू दिया गया है यह एक संकरा अर्थ है। काम के विषय तैयार करने में ज्यादातर बार, अध्ययन का विषय इसके निर्माण में भाग लेता है।
कैसे निजी और सामान्य श्रेणियां एक दूसरे से संबंधित हैं वस्तु और वैज्ञानिक अनुसंधान के विषय उदाहरण इन तत्वों, छात्रों के काम से लिया,उनकी संरचनात्मक प्रकृति की बात करें वस्तु में, शोधकर्ता इस हिस्से की पहचान करते हैं जो बाद में शोध का विषय बन जाएगा। यही है, यह देखने का मुद्दा है, जिस पर प्रस्तुत विषय की समस्याओं पर विचार किया जाएगा।
यह याद रखना चाहिए कि उन श्रेणियां हैं जोएक विषय के प्रकटीकरण में वस्तु, अन्य समस्याओं के अध्ययन में विषय हो सकता है सब कुछ जानकारी के अध्ययन के दृष्टिकोण और दृष्टिकोण के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
विषय लिखने की प्रक्रिया में, लेखक को स्पष्ट रूप से बताएंऑब्जेक्ट, ऑब्जेक्ट, अध्ययन का उद्देश्य निर्दिष्ट करें। उदाहरण आपको प्रत्येक श्रेणी के लिए प्रासंगिक समझने की अनुमति देते हैं। वस्तु का आमतौर पर अर्थहीन या भौतिक दुनिया का कुछ हिस्सा है जो हमारे चारों ओर से घिरा हुआ है। यह वास्तविकता मौजूद है, इसके बावजूद हम इसके बारे में क्या जानते हैं।
वैज्ञानिक कार्य के संचालन में यह अंत में आवश्यक हैएक निश्चित परिणाम प्राप्त करें, निष्कर्ष निकालें ऑब्जेक्ट के घटकों में काफी कुछ हो सकता है। एक ही दिशा में सेनाओं को ध्यान में रखने के लिए, यह स्पष्ट रूप से उन सीमाओं को समझना आवश्यक है जो इस सेट को परिभाषित करते हैं। किसी वस्तु को शामिल करने वाली घटनाओं की सीमा स्पष्ट रूप से समझी जानी चाहिए, जब उसका काम पूरा हो जाए।
कुछ नए ज्ञान प्राप्त करने के लिए,यह गतिविधि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षण को उजागर करने के लिए आवश्यक है जिसमें अनुसंधान किया जाता है। किसी विशेष विषय में छुआ समस्या ऑब्जेक्ट के किसी एक पक्ष के एक विशिष्ट रूप में परिवर्तित होनी चाहिए।
वैज्ञानिक काम का विषय केवल इसमें ही हैलेखक की चेतना यह शोधकर्ता के ज्ञान पर पूरी तरह निर्भर करता है ऑब्जेक्ट के एक या एक से अधिक पक्ष का चयन केवल विशुद्ध रूप से सार हो सकता है। और शेष प्रक्रिया जो ऑब्जेक्ट के अस्तित्व को चिह्नित करते हैं, जबकि आप विचार कर सकते हैं या खाते में नहीं ले सकते हैं।
मान लें कि एक शोधकर्ता एक छात्र है वह पढ़ाई, चलता है, छात्रावास में रहता है, भोजन कक्ष में हर दिन खाती है। यह आज उनके जीवन का एक आलंकारिक मॉडल है छात्र के साथ अब जो कुछ हो रहा है, वह अध्ययन का उद्देश्य है।
समय के साथ, उसका जीवन बदल सकता है। मान लें कि एक छात्र दूसरे शहर में चले गए एक विश्वविद्यालय भी है जो वह दौरा करता है, अन्य आवास और संचार। लेकिन, फिर भी, वह उसी जीवन की तरह पहले की ओर जाता है अध्ययन का उद्देश्य बदल नहीं गया है, लेकिन केवल आज की वास्तविकताओं को समायोजित किया गया है।
उदाहरण के लिए, छात्र को विषय "सिस्टम" प्राप्त हुआराज्य के विदेशी मुद्रा संसाधनों का प्रबंधन " इस मामले में, ऑब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट का चुनाव स्पष्ट रूप से परिभाषित सीमाओं में नहीं है। इसलिए, प्रस्तुत करने वाली श्रेणियों को बताते हुए प्रत्येक शोधकर्ता को चुनने का अधिकार है शिक्षक यह सलाह दे सकता है कि किस तरफ से प्रस्तुत विषय पर बेहतर विचार करना चाहिए, लेकिन विद्यार्थियों को यह तय करना होगा कि समस्याओं का अध्ययन करने के लिए किस दृष्टिकोण का अध्ययन किया जाए।
प्रस्तुत विषय के एक वस्तु के रूप में हो सकता हैउदाहरण के लिए, राज्य में वित्तीय संबंधों की सेवा करें यह कुछ बड़े पैमाने पर है लेकिन एक विषय का बयान फिर भी भविष्य के अनुसंधान की सीमाओं को नामित करेगा।
पाया वस्तु का कोई भी हिस्सा शोध का विषय हो सकता है। उदाहरण के लिए, संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों के कार्यान्वयन में यह सेंट्रल बैंक की भूमिका हो सकती है।
व्यावहारिक रूप से किसी भी विषय के लिए यह चुनना आसान होगा उद्देश्य और अनुसंधान के विषय सही से उदाहरण भी काफी जानकारीपूर्ण विषय "परिवार और विवाह" हो सकता है इस मामले में अनुसंधान का उद्देश्य परिवार के सदस्यों के अधिकार और कर्तव्यों का हो सकता है। अध्ययन का विषय बच्चों के अधिकार और कर्तव्यों है।
यदि, उदाहरण के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी का विषय "ई-मेल की विशेषताएं और सिद्धांत" दिया जाता है, तो वस्तु ई-मेल होगी, और विषय - इसके संचालन के मूल सिद्धांत।
जब अनुसंधान के एक वस्तु को निर्दिष्ट करते हुए,विभिन्न शैक्षिक और वैज्ञानिक संस्थानों के शिक्षकों की राय, कुछ विचलन हो सकते हैं। विशिष्ट त्रुटियों को श्रेणी बेमेल कहा जाता है, साथ ही बहुत संकीर्ण सीमाएं भी हैं। यह पूर्ण अध्ययन की अनुमति नहीं देता है।
अध्ययन के विषय को निर्धारित करने में, लेखकसामान्य त्रुटियों को भी अनुमति दें सबसे अधिक का सामना करना पड़ता है उसके चुने हुए वस्तु की असंगति है। कभी-कभी वस्तु अपनी सीमाओं से परे जाती है। बहुत व्यापक अध्ययन को परिभाषित करने की भी गलती है। एक पूर्ण वैज्ञानिक समूह को इस तरह के सर्वेक्षणों को पूरी तरह से कवर करने के लिए आवश्यक है।
|
पाठ्यक्रम लिखते समय, डिप्लोमा या अन्यवैज्ञानिक कार्य छात्र अनिवार्य रूप से एक परिचय लिखते हैं अपने विकास में, लेखक को संरचना के ऐसे अनिवार्य तत्वों को विस्तार से वर्णन करना चाहिए, क्योंकि प्रस्तुत विषय, लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्रासंगिकता, साथ ही वस्तु, अनुसंधान का विषय। कई छात्रों, विशेष रूप से पहले और दूसरे मेंबेशक, इन अवधारणाओं की परिभाषा के साथ कठिनाइयां हैं उनके बिना आप अपना ज्ञान बनाने में सक्षम नहीं होंगे, साथ ही साथ गुणवत्ता के काम भी लिखेंगे। आइए हम समझें कि वस्तु और अनुसंधान का विषय क्या है, किसी भी वैज्ञानिक कार्य के इन तत्वों के उदाहरण और परिभाषा। शब्दकोशों में, यह स्पष्ट परिभाषा है कि क्या है उद्देश्य और अनुसंधान के विषय उदाहरण प्रथम वर्ष के छात्रों के वैज्ञानिक पत्र यह साबित करते हैंआधिकारिक संदर्भ पुस्तकों में सूखी रेखाएं इन संरचनात्मक तत्वों की समझ को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, परिभाषाओं के साथ शुरू करना आवश्यक है। यह आपको विशिष्ट ज्ञान के साथ अपने ज्ञान को गठबंधन करने और चीजों के दिल को प्राप्त करने की अनुमति देगा। अध्ययन के उद्देश्य को घटना कहा जाता है, एक प्रक्रिया जो एक विशेष काम में उठाई गई समस्याओं को उत्पन्न करती है। यह वैज्ञानिक ज्ञान का हिस्सा है कि लेखक को इसके साथ काम करना चाहिए। वैज्ञानिक काम का विषय कहा जाता हैविशेष रूप से अध्ययन के चयनित वस्तु का लिया घटक। यह एक विशिष्ट मुद्दा है जो उठाए गए मुद्दों को संबोधित करते हुए उस पर छू दिया गया है यह एक संकरा अर्थ है। काम के विषय तैयार करने में ज्यादातर बार, अध्ययन का विषय इसके निर्माण में भाग लेता है। कैसे निजी और सामान्य श्रेणियां एक दूसरे से संबंधित हैं वस्तु और वैज्ञानिक अनुसंधान के विषय उदाहरण इन तत्वों, छात्रों के काम से लिया,उनकी संरचनात्मक प्रकृति की बात करें वस्तु में, शोधकर्ता इस हिस्से की पहचान करते हैं जो बाद में शोध का विषय बन जाएगा। यही है, यह देखने का मुद्दा है, जिस पर प्रस्तुत विषय की समस्याओं पर विचार किया जाएगा। यह याद रखना चाहिए कि उन श्रेणियां हैं जोएक विषय के प्रकटीकरण में वस्तु, अन्य समस्याओं के अध्ययन में विषय हो सकता है सब कुछ जानकारी के अध्ययन के दृष्टिकोण और दृष्टिकोण के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। विषय लिखने की प्रक्रिया में, लेखक को स्पष्ट रूप से बताएंऑब्जेक्ट, ऑब्जेक्ट, अध्ययन का उद्देश्य निर्दिष्ट करें। उदाहरण आपको प्रत्येक श्रेणी के लिए प्रासंगिक समझने की अनुमति देते हैं। वस्तु का आमतौर पर अर्थहीन या भौतिक दुनिया का कुछ हिस्सा है जो हमारे चारों ओर से घिरा हुआ है। यह वास्तविकता मौजूद है, इसके बावजूद हम इसके बारे में क्या जानते हैं। वैज्ञानिक कार्य के संचालन में यह अंत में आवश्यक हैएक निश्चित परिणाम प्राप्त करें, निष्कर्ष निकालें ऑब्जेक्ट के घटकों में काफी कुछ हो सकता है। एक ही दिशा में सेनाओं को ध्यान में रखने के लिए, यह स्पष्ट रूप से उन सीमाओं को समझना आवश्यक है जो इस सेट को परिभाषित करते हैं। किसी वस्तु को शामिल करने वाली घटनाओं की सीमा स्पष्ट रूप से समझी जानी चाहिए, जब उसका काम पूरा हो जाए। कुछ नए ज्ञान प्राप्त करने के लिए,यह गतिविधि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षण को उजागर करने के लिए आवश्यक है जिसमें अनुसंधान किया जाता है। किसी विशेष विषय में छुआ समस्या ऑब्जेक्ट के किसी एक पक्ष के एक विशिष्ट रूप में परिवर्तित होनी चाहिए। वैज्ञानिक काम का विषय केवल इसमें ही हैलेखक की चेतना यह शोधकर्ता के ज्ञान पर पूरी तरह निर्भर करता है ऑब्जेक्ट के एक या एक से अधिक पक्ष का चयन केवल विशुद्ध रूप से सार हो सकता है। और शेष प्रक्रिया जो ऑब्जेक्ट के अस्तित्व को चिह्नित करते हैं, जबकि आप विचार कर सकते हैं या खाते में नहीं ले सकते हैं। मान लें कि एक शोधकर्ता एक छात्र है वह पढ़ाई, चलता है, छात्रावास में रहता है, भोजन कक्ष में हर दिन खाती है। यह आज उनके जीवन का एक आलंकारिक मॉडल है छात्र के साथ अब जो कुछ हो रहा है, वह अध्ययन का उद्देश्य है। समय के साथ, उसका जीवन बदल सकता है। मान लें कि एक छात्र दूसरे शहर में चले गए एक विश्वविद्यालय भी है जो वह दौरा करता है, अन्य आवास और संचार। लेकिन, फिर भी, वह उसी जीवन की तरह पहले की ओर जाता है अध्ययन का उद्देश्य बदल नहीं गया है, लेकिन केवल आज की वास्तविकताओं को समायोजित किया गया है। उदाहरण के लिए, छात्र को विषय "सिस्टम" प्राप्त हुआराज्य के विदेशी मुद्रा संसाधनों का प्रबंधन " इस मामले में, ऑब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट का चुनाव स्पष्ट रूप से परिभाषित सीमाओं में नहीं है। इसलिए, प्रस्तुत करने वाली श्रेणियों को बताते हुए प्रत्येक शोधकर्ता को चुनने का अधिकार है शिक्षक यह सलाह दे सकता है कि किस तरफ से प्रस्तुत विषय पर बेहतर विचार करना चाहिए, लेकिन विद्यार्थियों को यह तय करना होगा कि समस्याओं का अध्ययन करने के लिए किस दृष्टिकोण का अध्ययन किया जाए। प्रस्तुत विषय के एक वस्तु के रूप में हो सकता हैउदाहरण के लिए, राज्य में वित्तीय संबंधों की सेवा करें यह कुछ बड़े पैमाने पर है लेकिन एक विषय का बयान फिर भी भविष्य के अनुसंधान की सीमाओं को नामित करेगा। पाया वस्तु का कोई भी हिस्सा शोध का विषय हो सकता है। उदाहरण के लिए, संस्थाओं के बीच वित्तीय संबंधों के कार्यान्वयन में यह सेंट्रल बैंक की भूमिका हो सकती है। व्यावहारिक रूप से किसी भी विषय के लिए यह चुनना आसान होगा उद्देश्य और अनुसंधान के विषय सही से उदाहरण भी काफी जानकारीपूर्ण विषय "परिवार और विवाह" हो सकता है इस मामले में अनुसंधान का उद्देश्य परिवार के सदस्यों के अधिकार और कर्तव्यों का हो सकता है। अध्ययन का विषय बच्चों के अधिकार और कर्तव्यों है। यदि, उदाहरण के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी का विषय "ई-मेल की विशेषताएं और सिद्धांत" दिया जाता है, तो वस्तु ई-मेल होगी, और विषय - इसके संचालन के मूल सिद्धांत। जब अनुसंधान के एक वस्तु को निर्दिष्ट करते हुए,विभिन्न शैक्षिक और वैज्ञानिक संस्थानों के शिक्षकों की राय, कुछ विचलन हो सकते हैं। विशिष्ट त्रुटियों को श्रेणी बेमेल कहा जाता है, साथ ही बहुत संकीर्ण सीमाएं भी हैं। यह पूर्ण अध्ययन की अनुमति नहीं देता है। अध्ययन के विषय को निर्धारित करने में, लेखकसामान्य त्रुटियों को भी अनुमति दें सबसे अधिक का सामना करना पड़ता है उसके चुने हुए वस्तु की असंगति है। कभी-कभी वस्तु अपनी सीमाओं से परे जाती है। बहुत व्यापक अध्ययन को परिभाषित करने की भी गलती है। एक पूर्ण वैज्ञानिक समूह को इस तरह के सर्वेक्षणों को पूरी तरह से कवर करने के लिए आवश्यक है।
|
भारत देश आज 26 जनवरी को इस बार अपना 74वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मना रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बधाई देते हुए नागरिकों से देश और प्रदेश की उन्नति में योगदान के संकल्प का आव्हान किया है।
मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट कर अपने शुभकामना संदेश में कहा 'आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रगतिरत भारत में मध्यप्रदेश भी विकास पथ पर तीव्रतम गति से अग्रसर है। समाज और सरकार के प्रयास से मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर प्रदेश बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट कर लिखा 'मध्यप्रदेश को दुनिया का श्रेष्ठतम राज्य बनाने के लिए हम संकल्पित हैं। इस ध्येय की प्राप्ति के लिए नागरिकों को योजनाओं का लाभ सुगमता से समय सीमा में दिलाने हेतु हम सुशासन को निरंतर प्रभावी बना रहे हैं। आइये, गणतंत्र दिवस 2023 पर प्रदेश व देश की उन्नति में योगदान का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस, संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सहित संविधान सभा के सदस्यों के योगदान और संविधान के आदर्शों के प्रति आस्था व्यक्त करने का दिन है। सबका साथ, सबका विश्वास और सबके प्रयास से ही हम सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।
|
भारत देश आज छब्बीस जनवरी को इस बार अपना चौहत्तरवां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मना रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बधाई देते हुए नागरिकों से देश और प्रदेश की उन्नति में योगदान के संकल्प का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री चौहान ने ट्वीट कर अपने शुभकामना संदेश में कहा 'आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रगतिरत भारत में मध्यप्रदेश भी विकास पथ पर तीव्रतम गति से अग्रसर है। समाज और सरकार के प्रयास से मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर प्रदेश बन रहा है। मुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट कर लिखा 'मध्यप्रदेश को दुनिया का श्रेष्ठतम राज्य बनाने के लिए हम संकल्पित हैं। इस ध्येय की प्राप्ति के लिए नागरिकों को योजनाओं का लाभ सुगमता से समय सीमा में दिलाने हेतु हम सुशासन को निरंतर प्रभावी बना रहे हैं। आइये, गणतंत्र दिवस दो हज़ार तेईस पर प्रदेश व देश की उन्नति में योगदान का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस, संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सहित संविधान सभा के सदस्यों के योगदान और संविधान के आदर्शों के प्रति आस्था व्यक्त करने का दिन है। सबका साथ, सबका विश्वास और सबके प्रयास से ही हम सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।
|
20 देशों की इनोवेशन एडाप्टर सूची में भारत को 17वां स्थान मिला है। टेलीहेल्थ व ड्रोन सहित कुल चार बिंदु ऐसे हैं, जिनमें भारत को ए या ए प्लस मिला है। टेलीहेल्थ में भारत को ए प्लस मिला है। ड्रोन, डिजिटल संपत्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ए मिला है।
भारत भविष्य में ड्रोन गुरु बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर देश पिछड़ रहा है। कंज्यूमर इलेक्ट्रिक शो (सीईएस) की ओर से जारी रैंकिंग में यह बात सामने आई है। अमेरिकी शहर लास वेगस में कंज्यूमर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन (सीटीए) ने इंटरनेशनल इनोवेशन (अंतरराष्ट्रीय नवाचार) स्कोरकार्ड जारी किया।
20 देशों की इनोवेशन एडाप्टर सूची में भारत को 17वां स्थान मिला है। टेलीहेल्थ व ड्रोन सहित कुल चार बिंदु ऐसे हैं, जिनमें भारत को ए या ए प्लस मिला है। टेलीहेल्थ में भारत को ए प्लस मिला है। ड्रोन, डिजिटल संपत्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ए मिला है। वहीं, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भारत फेल होने वाले देशों में शामिल है। तकनीक, नवाचार, नीति और बुनियादी ढांचे जैसे 15 बिंदुओं पर आधारित स्कोर कार्ड में भारत ने कुल 2. 186 अंक हासिल किए हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, 2027 तक भारत में पांच लाख ड्रोन पायलट की जरूरत होगी। भारत 2030 तक अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ड्रोन बाजार बन जाएगा।
नीतियों के क्षेत्र में स्वतंत्रता के लिए भारत को बी प्लस, मानव संसाधन के लिए सी, कर अनुकूलता के लिए डी प्लस और विविधता के लिए डी माइनस स्कोर मिला है। शोध व विकास में निवेश को लेकर भारत को सी स्कोर दिया गया है। भारत में अगस्त 2021 से फरवरी 2022 के बीच ड्रोन स्टार्टअप 34. 4 फीसदी बढ़े हैं। फिलहाल देश में करीब 221 पंजीकृत ड्रोन स्टार्टअप काम कर रहे हैं।
सीटीए का यह स्कोरकार्ड दुनियाभर में शोध, विकास, तकनीक और नवोन्मेष को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे तौर-तरीकों का आकलन करता है और बताता है कि कहां किन क्षेत्रों में अच्छा काम हो रहा है।
स्कोरकार्ड में कुल 70 देशों को जगह मिली है। इसमें सर्वोच्च श्रेणी इनोवेशन चैंपियन की है। इसके बाद लीडर, एडाप्टर व इन्वेस्टर सूची है।
2022 में वैश्विक ड्रोन उद्योग करीब 30 अरब डॉलर का हो गया। इसमें 2. 2 अरब डॉलर के साथ भारत की हिस्सेदारी करीब सात फीसदी है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
बीस देशों की इनोवेशन एडाप्टर सूची में भारत को सत्रहवां स्थान मिला है। टेलीहेल्थ व ड्रोन सहित कुल चार बिंदु ऐसे हैं, जिनमें भारत को ए या ए प्लस मिला है। टेलीहेल्थ में भारत को ए प्लस मिला है। ड्रोन, डिजिटल संपत्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ए मिला है। भारत भविष्य में ड्रोन गुरु बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर देश पिछड़ रहा है। कंज्यूमर इलेक्ट्रिक शो की ओर से जारी रैंकिंग में यह बात सामने आई है। अमेरिकी शहर लास वेगस में कंज्यूमर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ने इंटरनेशनल इनोवेशन स्कोरकार्ड जारी किया। बीस देशों की इनोवेशन एडाप्टर सूची में भारत को सत्रहवां स्थान मिला है। टेलीहेल्थ व ड्रोन सहित कुल चार बिंदु ऐसे हैं, जिनमें भारत को ए या ए प्लस मिला है। टेलीहेल्थ में भारत को ए प्लस मिला है। ड्रोन, डिजिटल संपत्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ए मिला है। वहीं, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भारत फेल होने वाले देशों में शामिल है। तकनीक, नवाचार, नीति और बुनियादी ढांचे जैसे पंद्रह बिंदुओं पर आधारित स्कोर कार्ड में भारत ने कुल दो. एक सौ छियासी अंक हासिल किए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दो हज़ार सत्ताईस तक भारत में पांच लाख ड्रोन पायलट की जरूरत होगी। भारत दो हज़ार तीस तक अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ड्रोन बाजार बन जाएगा। नीतियों के क्षेत्र में स्वतंत्रता के लिए भारत को बी प्लस, मानव संसाधन के लिए सी, कर अनुकूलता के लिए डी प्लस और विविधता के लिए डी माइनस स्कोर मिला है। शोध व विकास में निवेश को लेकर भारत को सी स्कोर दिया गया है। भारत में अगस्त दो हज़ार इक्कीस से फरवरी दो हज़ार बाईस के बीच ड्रोन स्टार्टअप चौंतीस. चार फीसदी बढ़े हैं। फिलहाल देश में करीब दो सौ इक्कीस पंजीकृत ड्रोन स्टार्टअप काम कर रहे हैं। सीटीए का यह स्कोरकार्ड दुनियाभर में शोध, विकास, तकनीक और नवोन्मेष को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे तौर-तरीकों का आकलन करता है और बताता है कि कहां किन क्षेत्रों में अच्छा काम हो रहा है। स्कोरकार्ड में कुल सत्तर देशों को जगह मिली है। इसमें सर्वोच्च श्रेणी इनोवेशन चैंपियन की है। इसके बाद लीडर, एडाप्टर व इन्वेस्टर सूची है। दो हज़ार बाईस में वैश्विक ड्रोन उद्योग करीब तीस अरब डॉलर का हो गया। इसमें दो. दो अरब डॉलर के साथ भारत की हिस्सेदारी करीब सात फीसदी है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
ये तो आपको पता ही होगा कि मेंहदी को भी सुहाग की निशानी के रूप में देखा जाता है। श्रावण मास में मेंहदी लगाने का काफ़ी महत्व माना गया है। खासतौर पर जब हरियाली तीज के समय मेंहदी लगाई जाए तो वो और भी शुभ होता है। श्रावण मास में सभी स्त्रियों की एक बार तो मेंहदी लगानी ही चाहिए।
|
ये तो आपको पता ही होगा कि मेंहदी को भी सुहाग की निशानी के रूप में देखा जाता है। श्रावण मास में मेंहदी लगाने का काफ़ी महत्व माना गया है। खासतौर पर जब हरियाली तीज के समय मेंहदी लगाई जाए तो वो और भी शुभ होता है। श्रावण मास में सभी स्त्रियों की एक बार तो मेंहदी लगानी ही चाहिए।
|
रेलवे ने 40,000 से अधिक रूट किमी (आरकेएम) का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जिसमें 2014-20 के दौरान 18,605 किलोमीटर का विद्युतीकरण कार्य किया गया है. इससे पहले, 2009-14 की अवधि के दौरान केवल 3,835 किमी विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ था.
भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक ग्रीन रेलवे में बदलने का लक्ष्य रखा है. ऐसा मकाम हासिल करने वाली भारतीय रेल दुनिया की पहली रेलवे होगी. रेलवे सीईओ वी के यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारतीय रेलवे ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की है. भारतीय रेलवे रूफटॉप सोलर पैनल (डेवलपर मॉडल) के माध्यम से 500 मेगा वाट ऊर्जा की क्षमता पर काम कर रहे हैं. अब तक 900 स्टेशनों सहित विभिन्न इमारतों की छत पर 100 मेगावाट के सोलर प्लांट लगाए गए हैं. 400 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले सौर संयंत्र निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं. निविदाएं पहले से ही 245 मेगावाट के लिए प्रदान की जाती हैं और इन संयंत्रों को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2022 है.
खुद से बंद हो जाएंगी स्टेशन की लाइट्स- रेलवे सीईओ ने बताया कि स्मार्ट स्टेशन पर तेजी से काम हो रहा है. भारतीय रेलवे ने बिजली बचाने के लिए कई अनूठी पहल शुरू की है. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने पर 100 फीसदी लाइट्स जलेंगी और जाने पर 50 फीसदी लाइट्स खुद से बंद हो जाएंगी. पश्चिम रेलवे के जबलपुर, भोपाल और नरसिंहपुर स्टेशन पर यह व्यवस्था शुरू की गई है. इससे ऊर्जा की खपत कम होगी और बचत ज्यादा होगी. रेलवे मंत्रालय ने ट्वीट कर यह जानकारी दी.
पवन ऊर्जा पर भी काम चालू-पवन ऊर्जा क्षेत्र में 103 मेगावाट पवन आधारित बिजली संयंत्रों को पहले ही चालू कर दिया गया है. इनमें 26 मेगावाट राजस्थान (जैसलमेर) में, 21 मेगावाट तमिलनाडु में और 56.4 मेगावाट महाराष्ट्र (सांगली) में है. भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक में अगले दो वर्षों में 200 मेगावाट पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है.
जलवायु परिवर्तन में अपनी भूमिका का एहसास करते हुए भारतीय रेलवे ने इमारतों और स्टेशनों की 100 प्रतिशत एलईडी रोशनी जैसी अन्य हरित पहल शुरू की है. ग्रीन इनिशिएटिव्स के क्षेत्र में भारतीय रेलवे में 2,44,000 से अधिक जैव-शौचालयों के साथ कुल 69,000 कोच लगाए गए हैं.
|
रेलवे ने चालीस,शून्य से अधिक रूट किमी का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जिसमें दो हज़ार चौदह-बीस के दौरान अट्ठारह,छः सौ पाँच किलोग्राममीटर का विद्युतीकरण कार्य किया गया है. इससे पहले, दो हज़ार नौ-चौदह की अवधि के दौरान केवल तीन,आठ सौ पैंतीस किमी विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ था. भारतीय रेलवे ने साल दो हज़ार तीस तक ग्रीन रेलवे में बदलने का लक्ष्य रखा है. ऐसा मकाम हासिल करने वाली भारतीय रेल दुनिया की पहली रेलवे होगी. रेलवे सीईओ वी के यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारतीय रेलवे ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की है. भारतीय रेलवे रूफटॉप सोलर पैनल के माध्यम से पाँच सौ मेगा वाट ऊर्जा की क्षमता पर काम कर रहे हैं. अब तक नौ सौ स्टेशनों सहित विभिन्न इमारतों की छत पर एक सौ मेगावाट के सोलर प्लांट लगाए गए हैं. चार सौ मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले सौर संयंत्र निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं. निविदाएं पहले से ही दो सौ पैंतालीस मेगावाट के लिए प्रदान की जाती हैं और इन संयंत्रों को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर दो हज़ार बाईस है. खुद से बंद हो जाएंगी स्टेशन की लाइट्स- रेलवे सीईओ ने बताया कि स्मार्ट स्टेशन पर तेजी से काम हो रहा है. भारतीय रेलवे ने बिजली बचाने के लिए कई अनूठी पहल शुरू की है. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने पर एक सौ फीसदी लाइट्स जलेंगी और जाने पर पचास फीसदी लाइट्स खुद से बंद हो जाएंगी. पश्चिम रेलवे के जबलपुर, भोपाल और नरसिंहपुर स्टेशन पर यह व्यवस्था शुरू की गई है. इससे ऊर्जा की खपत कम होगी और बचत ज्यादा होगी. रेलवे मंत्रालय ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. पवन ऊर्जा पर भी काम चालू-पवन ऊर्जा क्षेत्र में एक सौ तीन मेगावाट पवन आधारित बिजली संयंत्रों को पहले ही चालू कर दिया गया है. इनमें छब्बीस मेगावाट राजस्थान में, इक्कीस मेगावाट तमिलनाडु में और छप्पन.चार मेगावाट महाराष्ट्र में है. भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक में अगले दो वर्षों में दो सौ मेगावाट पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है. जलवायु परिवर्तन में अपनी भूमिका का एहसास करते हुए भारतीय रेलवे ने इमारतों और स्टेशनों की एक सौ प्रतिशत एलईडी रोशनी जैसी अन्य हरित पहल शुरू की है. ग्रीन इनिशिएटिव्स के क्षेत्र में भारतीय रेलवे में दो,चौंतालीस,शून्य से अधिक जैव-शौचालयों के साथ कुल उनहत्तर,शून्य कोच लगाए गए हैं.
|
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। राज्यसभा में आज सीमावर्ती इलाकों में सड़क संबंधी ढांचागत सुविधाओं के विकास का मुद्दा उ"ाते हुए एक सदस्य ने कहा कि इससे न केवल देश की सुरक्षा में मदद मिलेगी बल्कि सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों का विकास भी होगा। राकांपा के गोविंद राव आदिक ने विशेष उल्लेख के जरिये सीमावर्ती इलाकों में सड़क संबंधी ढांचागत सुविधाओं के विकास का मुद्दा उ"ाया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती सड़कें देश के लिए और वहां रहने वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होती है बल्कि सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों का भी विकास होगा। उन्होंने कहा कि खबरें हैं कि सीमाई इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए वन विभाग से मंजूरी लेने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में इतना विलंब हो जाता है कि कई बार परियोजना की तय लागत ही दोगुनी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सड़कों के समुचित विकास से सीमाई इलाकों के लोगों को दैनिक जरूरत का सामान मिलने में आसानी होगी और उन्हें रोजगार भी मिल सकेगा। आदिक ने इसके लिए एकल प्राधिकार बनाए जाने की मांग की जो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर सड़क संबंधी ढांचागत परियोजनाओं के निर्माण को सुगम बनाने का प्रयास करे। भाजपा के श्रीगोपाल व्यास ने गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली विधवाओं को राष्ट्रीय परिवार आर्थिक सहायता योजना के तहत दी जाने वाली 10,000 रूपये की एकमुश्त राशि में वृद्धि करने की मांग की। व्यास ने कहा कि आज महंगाई का जो विकराल रूप है, उसे देखते हुए 10,000 रूपये की राशि बहुत ही कम है। सामाजिक व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विधवाओं को आज भी सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है और ऐसे में उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए 10,000 रूपये की राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह राशि बढ़ाए जाने की मांग की। भाजपा की ही बिमला कश्यप सूद ने हिमाचल प्रदेश के लिए वर्ष 2012. 13 का रेल बजट बढ़ाए जाने तथा नंगल तलवाड़ा रेल लाइन को यथाशीघ्र पूरा किए जाने की मांग विशेष उल्लेख के जरिये की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं जबकि वहां की भौगोलिक स्थिति के अनुसार, आवागमन के लिए सड़क एवं रेल संपर्क ही प्रमुख साधन हैं। असम गण परिषद के कुमार दीपक दास ने राज्य में केरोसिन के लैंप और स्टोव फटने की घटनाओं में वृद्धि का मुद्दा विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाया। उन्होंने मांग की कि इन घटनाओं की जांच कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए और बिजली एवं रसोई गैस की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि लोग केरोसिन का इस्तेमाल न करें। बसपा के जुगल किशोर ने उत्तर प्रदेश में बुनकरों की हालत का मुद्दा विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाया और उन्हें पर्याप्त सहूलियत तथा सब्सिडी दिए जाने की मांग की। लोजपा के रामविलास पासवान ने अन्य पिछड़ा वर्ग को राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के दायरे से बाहर रखे जाने की मांग विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाई।
|
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। राज्यसभा में आज सीमावर्ती इलाकों में सड़क संबंधी ढांचागत सुविधाओं के विकास का मुद्दा उ"ाते हुए एक सदस्य ने कहा कि इससे न केवल देश की सुरक्षा में मदद मिलेगी बल्कि सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों का विकास भी होगा। राकांपा के गोविंद राव आदिक ने विशेष उल्लेख के जरिये सीमावर्ती इलाकों में सड़क संबंधी ढांचागत सुविधाओं के विकास का मुद्दा उ"ाया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती सड़कें देश के लिए और वहां रहने वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होती है बल्कि सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों का भी विकास होगा। उन्होंने कहा कि खबरें हैं कि सीमाई इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए वन विभाग से मंजूरी लेने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में इतना विलंब हो जाता है कि कई बार परियोजना की तय लागत ही दोगुनी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सड़कों के समुचित विकास से सीमाई इलाकों के लोगों को दैनिक जरूरत का सामान मिलने में आसानी होगी और उन्हें रोजगार भी मिल सकेगा। आदिक ने इसके लिए एकल प्राधिकार बनाए जाने की मांग की जो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर सड़क संबंधी ढांचागत परियोजनाओं के निर्माण को सुगम बनाने का प्रयास करे। भाजपा के श्रीगोपाल व्यास ने गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली विधवाओं को राष्ट्रीय परिवार आर्थिक सहायता योजना के तहत दी जाने वाली दस,शून्य रूपये की एकमुश्त राशि में वृद्धि करने की मांग की। व्यास ने कहा कि आज महंगाई का जो विकराल रूप है, उसे देखते हुए दस,शून्य रूपये की राशि बहुत ही कम है। सामाजिक व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विधवाओं को आज भी सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है और ऐसे में उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए दस,शून्य रूपये की राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह राशि बढ़ाए जाने की मांग की। भाजपा की ही बिमला कश्यप सूद ने हिमाचल प्रदेश के लिए वर्ष दो हज़ार बारह. तेरह का रेल बजट बढ़ाए जाने तथा नंगल तलवाड़ा रेल लाइन को यथाशीघ्र पूरा किए जाने की मांग विशेष उल्लेख के जरिये की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं जबकि वहां की भौगोलिक स्थिति के अनुसार, आवागमन के लिए सड़क एवं रेल संपर्क ही प्रमुख साधन हैं। असम गण परिषद के कुमार दीपक दास ने राज्य में केरोसिन के लैंप और स्टोव फटने की घटनाओं में वृद्धि का मुद्दा विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाया। उन्होंने मांग की कि इन घटनाओं की जांच कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए और बिजली एवं रसोई गैस की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि लोग केरोसिन का इस्तेमाल न करें। बसपा के जुगल किशोर ने उत्तर प्रदेश में बुनकरों की हालत का मुद्दा विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाया और उन्हें पर्याप्त सहूलियत तथा सब्सिडी दिए जाने की मांग की। लोजपा के रामविलास पासवान ने अन्य पिछड़ा वर्ग को राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के दायरे से बाहर रखे जाने की मांग विशेष उल्लेख के जरिये उ"ाई।
|
मुंबई, 10 मई (आईएएनएस)। दिग्गज फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह आद भी विभिन्न कामों में व्यस्त हैं, उनका कहना है कि रचनात्मक बदलावों को कभी आराम नहीं करना चाहिए।
अमिताभ बच्चन ने गुरुवार को ट्विटर पर अपने काम के शेड्यूल के बारे में जानकारी दी।
'पा' और '102 नॉट आउट' जैसी फिल्मों के लिए प्रोस्थेटिक मेकअप कर चुके 76 वर्षीय अभिनेता ने इसे 'लंबा और कठिन' बताया।
अमिताभ ने बताया, "ये (प्रोस्थेटिक मेकअप टेस्ट) शूजित सिरकार की अगली फिल्म के लिए हैं।" हालांकि अमिताभ ने इसके बारे में और ज्यादा कुछ नहीं बताया।
अमिताभ बच्चन, अभिनेता इमरान हाशमी संग एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नजर आएंगे जिसे रूमी जाफरी द्वारा निर्देशित किया जाएगा। इसके साथ ही फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में भी वह रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ दिखने वाले हैं।
|
मुंबई, दस मई । दिग्गज फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह आद भी विभिन्न कामों में व्यस्त हैं, उनका कहना है कि रचनात्मक बदलावों को कभी आराम नहीं करना चाहिए। अमिताभ बच्चन ने गुरुवार को ट्विटर पर अपने काम के शेड्यूल के बारे में जानकारी दी। 'पा' और 'एक सौ दो नॉट आउट' जैसी फिल्मों के लिए प्रोस्थेटिक मेकअप कर चुके छिहत्तर वर्षीय अभिनेता ने इसे 'लंबा और कठिन' बताया। अमिताभ ने बताया, "ये शूजित सिरकार की अगली फिल्म के लिए हैं।" हालांकि अमिताभ ने इसके बारे में और ज्यादा कुछ नहीं बताया। अमिताभ बच्चन, अभिनेता इमरान हाशमी संग एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नजर आएंगे जिसे रूमी जाफरी द्वारा निर्देशित किया जाएगा। इसके साथ ही फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में भी वह रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ दिखने वाले हैं।
|
जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है. यासीन मिलक को अब जम्मू -कश्मीर के भलवाल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीएसए के तहत उन्हें दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. गौरतलब है कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक को 22 फरवरी को हिरासत में लिया गया था.
जम्मू-कश्मीर में माहौल खराब करने के आरोप में यासीन मलिक के खिलाफ कोठी बाग पुलिस स्टेशन मामला दर्ज किया गया था. जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रवक्ता ने कहा कि हमें आज पता चला कि यासीन मिलक पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाया गया है. यासीन को अब कोट भलवाल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि हमारी पार्टी इस मनमानी गिरफ्तारी और एक राजनीतिक नेता के खिलाफ PSA के उपयोग की कड़ी निंदा करती हैं.
गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार ने यासीन मलिक और कट्टरपंथी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली थी. बाद में मलिक ने कहा था कि उन्हें राज्य से कभी कोई सुरक्षा नहीं मिली. मलिक ने कहा था, 'मेरे पास पिछले 30 सालों से कोई सुरक्षा नहीं है. ऐसे में जब सुरक्षा मिली ही नहीं तो वे किस वापसी की बात कर रहे हैं. ये सरकार की तरफ से बिल्कुल बेईमानी है. ' मलिक ने संबंधित सरकारी अधिसूचना को 'झूठ' करार दिया. सरकार ने बुधवार को कहा था कि मलिक और गिलानी समेत 18 अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली गई है.
.
|
जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है. यासीन मिलक को अब जम्मू -कश्मीर के भलवाल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पीएसए के तहत उन्हें दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. गौरतलब है कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक को बाईस फरवरी को हिरासत में लिया गया था. जम्मू-कश्मीर में माहौल खराब करने के आरोप में यासीन मलिक के खिलाफ कोठी बाग पुलिस स्टेशन मामला दर्ज किया गया था. जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रवक्ता ने कहा कि हमें आज पता चला कि यासीन मिलक पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाया गया है. यासीन को अब कोट भलवाल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि हमारी पार्टी इस मनमानी गिरफ्तारी और एक राजनीतिक नेता के खिलाफ PSA के उपयोग की कड़ी निंदा करती हैं. गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार ने यासीन मलिक और कट्टरपंथी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली थी. बाद में मलिक ने कहा था कि उन्हें राज्य से कभी कोई सुरक्षा नहीं मिली. मलिक ने कहा था, 'मेरे पास पिछले तीस सालों से कोई सुरक्षा नहीं है. ऐसे में जब सुरक्षा मिली ही नहीं तो वे किस वापसी की बात कर रहे हैं. ये सरकार की तरफ से बिल्कुल बेईमानी है. ' मलिक ने संबंधित सरकारी अधिसूचना को 'झूठ' करार दिया. सरकार ने बुधवार को कहा था कि मलिक और गिलानी समेत अट्ठारह अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली गई है. .
|
रिलायंस कैपिटल की परिसंपत्ति बिक्री की राह में बड़ी बाधा दूर हो गई है। आरबीआई दिशा-निर्देशों के अनुसार येस बैंक और ऐक्सिस बैंक ने रिलायंस कैपिटल (आर-कैप) के रेड फ्लैग अकाउंट स्टेटस को समाप्त कर दिया है। दोनों बैंकों का संयुक्त रूप से 1,575 करोड़ रुपये का ऋण है और उन्होंने ऋण भुगतान नहीं किए जाने तक रिलायंस कैपिटल की परिसंपित्त बिक्री योजनाओं को लेकर आपत्ति जताई थी। महज कुछ दिन पहले, येस बैंक ने अंबानी समूह कंपनियों से ऋण वसूलने के प्रयास में मुंबई के सांता क्रूज में अनिल अंबानी समूह के मुख्यालयों पर दस्तक दी थी। येस बैंक से 987 करोड़ रुपये और ऐक्सिस बैंक से 588 करोड़ रुपये का कर्ज लेने वाली रिलायंस कैपिटल को पिछले साल जनवरी और नवंबर 2019 में रेड फ्लैग अकाउंट के तौर पर वर्गीकृत किया था। इस खाते को आरबीआई मास्टर डायरेक्शंस ऑफ 2016 ऑन क्लासीफिकेशन ऐंड रिपोर्टिंग ऑफ अकाउंट्स के तहत रेड फ्लैग की श्रेणी में डाला गया था। डिबेंचर धारक रिलायंस कैपिटल की परिसंपत्तियां बेच रहे हैं और उसने 70 से ज्यादा बोलीदाताओं को आकर्षित किया है जिनमें ब्लैकस्टोन, ओकट्री, बु्रकफील्ड, अपोलो ग्लोबल, बेन कैपिटल, सीवीसी पार्टनर्स, क्रिसकैपिटल, जेसी फ्लॉवर और कई महत्वपूर्ण घरेलू कंपनियां शामिल हैं। बिक्री के लिए परिसंपत्तियों में रिलायंस कैपिटल के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियां शामिल हैं। इनमें रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस सिक्योरिटीज लिमिटेड, रिलायंस फाइनैंशियल लिमिटेड, रिलायंस एआरसी, रिलायंस हेल्थ इंश्योरेंस, इंडियन कमोडिटीज एक्सचेंज और निजी इक्विटी निवेशक पेटीएम ईकॉमर्स और नफा इनोवेशंस मुख्य रूप से शामिल हैं। जेएम फाइनैंशियल कंपनी के ऋणदाताओं की तरफ से परिसंपत्ति बिक्री प्रक्रिया का संचालन कर रही है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर समेत अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियां प्रवर्तक, अनिल अंबानी परिवार और वार्डो पार्टनर्स से ताजा कोष आकर्षित कर रही हैं।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
|
रिलायंस कैपिटल की परिसंपत्ति बिक्री की राह में बड़ी बाधा दूर हो गई है। आरबीआई दिशा-निर्देशों के अनुसार येस बैंक और ऐक्सिस बैंक ने रिलायंस कैपिटल के रेड फ्लैग अकाउंट स्टेटस को समाप्त कर दिया है। दोनों बैंकों का संयुक्त रूप से एक,पाँच सौ पचहत्तर करोड़ रुपये का ऋण है और उन्होंने ऋण भुगतान नहीं किए जाने तक रिलायंस कैपिटल की परिसंपित्त बिक्री योजनाओं को लेकर आपत्ति जताई थी। महज कुछ दिन पहले, येस बैंक ने अंबानी समूह कंपनियों से ऋण वसूलने के प्रयास में मुंबई के सांता क्रूज में अनिल अंबानी समूह के मुख्यालयों पर दस्तक दी थी। येस बैंक से नौ सौ सत्तासी करोड़ रुपये और ऐक्सिस बैंक से पाँच सौ अठासी करोड़ रुपये का कर्ज लेने वाली रिलायंस कैपिटल को पिछले साल जनवरी और नवंबर दो हज़ार उन्नीस में रेड फ्लैग अकाउंट के तौर पर वर्गीकृत किया था। इस खाते को आरबीआई मास्टर डायरेक्शंस ऑफ दो हज़ार सोलह ऑन क्लासीफिकेशन ऐंड रिपोर्टिंग ऑफ अकाउंट्स के तहत रेड फ्लैग की श्रेणी में डाला गया था। डिबेंचर धारक रिलायंस कैपिटल की परिसंपत्तियां बेच रहे हैं और उसने सत्तर से ज्यादा बोलीदाताओं को आकर्षित किया है जिनमें ब्लैकस्टोन, ओकट्री, बु्रकफील्ड, अपोलो ग्लोबल, बेन कैपिटल, सीवीसी पार्टनर्स, क्रिसकैपिटल, जेसी फ्लॉवर और कई महत्वपूर्ण घरेलू कंपनियां शामिल हैं। बिक्री के लिए परिसंपत्तियों में रिलायंस कैपिटल के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियां शामिल हैं। इनमें रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, रिलायंस सिक्योरिटीज लिमिटेड, रिलायंस फाइनैंशियल लिमिटेड, रिलायंस एआरसी, रिलायंस हेल्थ इंश्योरेंस, इंडियन कमोडिटीज एक्सचेंज और निजी इक्विटी निवेशक पेटीएम ईकॉमर्स और नफा इनोवेशंस मुख्य रूप से शामिल हैं। जेएम फाइनैंशियल कंपनी के ऋणदाताओं की तरफ से परिसंपत्ति बिक्री प्रक्रिया का संचालन कर रही है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर समेत अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियां प्रवर्तक, अनिल अंबानी परिवार और वार्डो पार्टनर्स से ताजा कोष आकर्षित कर रही हैं। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
|
liver को हिंदी में जिगर कहते हैं। यह हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है और यह शरीर के कई कामों को नियंत्रित करता है। यदि इसमें कोई खराबी आ जाये तो हमारे शरीर की काम करने की क्षमता न के बराबर हो जाती है। यदि liver damage का सही समय पर इलाज न कराया जाये तो यह काफी गंभीर समस्या का रूप ले सकता है।
Liver ख़राब होने का सबसे बड़ा कारन होता है हमारी गलत आदतें जैसे धुम्रपान, शराब, अधिक खट्टा और नमक का सेवन। सबसे पहले लिवर ख़राब होने के लक्षण को जानना जरुरी है तभी इसका उपाय किया जा सकता है। इससे समय रहते आपको समस्या का पता चल जायगा और आप सही इलाज करा पाएंगे।
गन्दा पानी पीना, दूषित मांस का सेवन, अधिक चटपटे और मसालेदार खाने का सेवन करना।
पीने के पानी में chlorine की मात्रा अधिक होना।
Vitamin B की कमी।
Antibiotic दवायों का अधिक सेवन करना।
घर में साफ़-सफाई न रखना।
पेट के right side में दबाने पर दर्द होना।
छाती में जलन और भारीपन महसूस होने।
पेट में gas, भूख न लगना, बदहजमी की समस्या होना।
आलस्य और कमजोरी महसूस होना।
मुह का स्वाद ख़राब होना।
कैफीन और शराब का सेवन कम से कम करेंः शराब और कैफीन आपके लिवर में विषयुक्त पदार्थों को जमाने के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं, और आपको पूरी क्षमता से काम करने से रोकते हैं। अलकोहल और केफ़िनेनेटेड पेयों को कम करके अपने लिवर को साफ़ करें। इन पेयों को नॉन-अल्कोहलिक पेयों से बदलें ताकि आपका लिवर पुनर्निर्माण कर सके। वैसे हाल ही की रिसर्च बताती हैं कि कैफीनरहित कॉफ़ी आपके बड़े हुए लिवर एंजाइमों को घटाने में सहायक हो सकती है। कौन से तरल आपके लिवर एक लिए अच्छे है जानने के लिए आगे पढ़ें।
बह उठकर सबसे पहले 3-4 गिलास साफ़ पानी का सेवन करें फिर खुली हवा में टहलें।
दिन में कम से कम 2 बार निम्बू पानी का सेवन करें।
आलस्य और काम न करने की आदत से भी liver कमजोर होता है। इसलिए नियमित शारीरिक कार्य करें।
भोजन करने के दौरान पानी का सेवन न करें। भोजन करने के लगभग 1 घंटे के बाद पानी पियें।
धुम्रपान, शराब, कॉफ़ी, चाय, junk food आदि का सेवन कम से कम करें।
नियमित योग और व्यायाम करें।
ग्रीन टी पिएंः ग्रीन टी में काफी मात्रा में केटेकाइन्स (catechins) पाए जाते हैं, ये एक प्रकार का प्लांट एंटीऑक्सीडेंट होता है जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता हैं और लिवर में वसा के जमाव को कम करने में सहायक होता है।
|
liver को हिंदी में जिगर कहते हैं। यह हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है और यह शरीर के कई कामों को नियंत्रित करता है। यदि इसमें कोई खराबी आ जाये तो हमारे शरीर की काम करने की क्षमता न के बराबर हो जाती है। यदि liver damage का सही समय पर इलाज न कराया जाये तो यह काफी गंभीर समस्या का रूप ले सकता है। Liver ख़राब होने का सबसे बड़ा कारन होता है हमारी गलत आदतें जैसे धुम्रपान, शराब, अधिक खट्टा और नमक का सेवन। सबसे पहले लिवर ख़राब होने के लक्षण को जानना जरुरी है तभी इसका उपाय किया जा सकता है। इससे समय रहते आपको समस्या का पता चल जायगा और आप सही इलाज करा पाएंगे। गन्दा पानी पीना, दूषित मांस का सेवन, अधिक चटपटे और मसालेदार खाने का सेवन करना। पीने के पानी में chlorine की मात्रा अधिक होना। Vitamin B की कमी। Antibiotic दवायों का अधिक सेवन करना। घर में साफ़-सफाई न रखना। पेट के right side में दबाने पर दर्द होना। छाती में जलन और भारीपन महसूस होने। पेट में gas, भूख न लगना, बदहजमी की समस्या होना। आलस्य और कमजोरी महसूस होना। मुह का स्वाद ख़राब होना। कैफीन और शराब का सेवन कम से कम करेंः शराब और कैफीन आपके लिवर में विषयुक्त पदार्थों को जमाने के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं, और आपको पूरी क्षमता से काम करने से रोकते हैं। अलकोहल और केफ़िनेनेटेड पेयों को कम करके अपने लिवर को साफ़ करें। इन पेयों को नॉन-अल्कोहलिक पेयों से बदलें ताकि आपका लिवर पुनर्निर्माण कर सके। वैसे हाल ही की रिसर्च बताती हैं कि कैफीनरहित कॉफ़ी आपके बड़े हुए लिवर एंजाइमों को घटाने में सहायक हो सकती है। कौन से तरल आपके लिवर एक लिए अच्छे है जानने के लिए आगे पढ़ें। बह उठकर सबसे पहले तीन-चार गिलास साफ़ पानी का सेवन करें फिर खुली हवा में टहलें। दिन में कम से कम दो बार निम्बू पानी का सेवन करें। आलस्य और काम न करने की आदत से भी liver कमजोर होता है। इसलिए नियमित शारीरिक कार्य करें। भोजन करने के दौरान पानी का सेवन न करें। भोजन करने के लगभग एक घंटाटे के बाद पानी पियें। धुम्रपान, शराब, कॉफ़ी, चाय, junk food आदि का सेवन कम से कम करें। नियमित योग और व्यायाम करें। ग्रीन टी पिएंः ग्रीन टी में काफी मात्रा में केटेकाइन्स पाए जाते हैं, ये एक प्रकार का प्लांट एंटीऑक्सीडेंट होता है जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता हैं और लिवर में वसा के जमाव को कम करने में सहायक होता है।
|
पश्चिमी विदर्भ में ज्यादा बारिश होने के कारण कई किसानों के खेत और घर दोनों तबाह हो गए हैं. बुवाई करने का पूरा नुकसान हो गया है. खेतों में पानी भर जाने से अंकुरित बीज खराब हो रहे हैं. अगले तीन दिनों तक मौसम विभाग ने विदर्भ में रेड अलर्ट जारी किया है.
महाराष्ट्र में अब मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है. कई जिलों में अत्यधिक बारिश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. पिछले तीन दिन से पश्चिमी विदर्भ में मूसलाधार बारिश (Rain) हो रही है, जिसके कारण फसलों को क्षति पहुंच रही है. एक जून से आठ जुलाई के बीच हुई बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम जिलों में 35 किसानों की करंट लगने से मौत हो गई है. जबकि करीब 18,000 हेक्टेयर में फसल पानी में डूब गई है. यूं कहिए कि किसानों की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया. वहीं नाशिक जिले में भी भारी बारिश से अंकुरित सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई है. किसानों को अब दोहरी बुवाई का संकट झेलना पड़ रहा है.
कई जगहों पर एक जुलाई से हो रही लगातार बारिश ने किसानों को झकझोर कर रख दिया है. भारी बारिश ने कई घर बहा दिए ,खेती भी चौपट हो गई है. मंडलीय आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी विदर्भ में 18,000 हेक्टेयर से ज्यादा फसल को नुकसान पहुंचा है. बारिश से करीब 30 घरों को भारी नुकसान हुआ है. जबकि बुलढाणा जिले का एक व्यक्ति बाढ़ में बह गया है.
ऐसे में लगातार हो रही बारिश नुकसानदायक साबित हो रही है. किसानों को कहना कुछ दिन पहले ही औसत बारिश में सोयाबीन और कपास की बुवाई की थी. बीजों का अंकुरण होना भी शुरू हो गया था. लेकिन पिछले तीन दिन से हो रही ज्यादा बारिश ने बुवाई को नष्ट कर दिया है. अब दोबारा बुवाई के लिए कहां से पैसे लाएंगे, इस बार खरीफ में कैसे उत्पादन होगा? यह बड़ा सवाल है.
पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम जिलों में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है. नदियां और नाले उफान पर हैं. इस समय खरीफ की बोई गई फसल पानी में हैं. ऐसे में खरीफ फसलों के भविष्य का सवाल किसानों के सामने है. अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहेगी. ऐसा मौसम विभाग ने रेड अलर्ट भी किया है.
जून में बारिश नहीं हो रही थी तो सोयाबीन, कपास और मक्के की बुवाई में देरी हो रही थी और अब अचानक ज्यादा बारिश हो गई है. ऐसे में कई डैम का जलस्तर भी बढ़ गया है. हालांकि छोटी-बड़ी नदियां और झीलें पानी से भरी हुई हैं, ऊपरी वर्धा बांध का जल स्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. वहीं नाशिक में भी नदी का जल स्तर बढ़ गया है. बारिश ने पश्चिमी विदर्भ के 111 गांवों को भी प्रभावित किया है. अब पानी कम होगा तब जाकर किसान खेतों में कुछ कर पाएंगे. किसानों के सामने समस्या यह है कि या तो बहुत बारिश हो रही है या फिर नाम मात्र की.
|
पश्चिमी विदर्भ में ज्यादा बारिश होने के कारण कई किसानों के खेत और घर दोनों तबाह हो गए हैं. बुवाई करने का पूरा नुकसान हो गया है. खेतों में पानी भर जाने से अंकुरित बीज खराब हो रहे हैं. अगले तीन दिनों तक मौसम विभाग ने विदर्भ में रेड अलर्ट जारी किया है. महाराष्ट्र में अब मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है. कई जिलों में अत्यधिक बारिश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. पिछले तीन दिन से पश्चिमी विदर्भ में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिसके कारण फसलों को क्षति पहुंच रही है. एक जून से आठ जुलाई के बीच हुई बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम जिलों में पैंतीस किसानों की करंट लगने से मौत हो गई है. जबकि करीब अट्ठारह,शून्य हेक्टेयर में फसल पानी में डूब गई है. यूं कहिए कि किसानों की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया. वहीं नाशिक जिले में भी भारी बारिश से अंकुरित सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई है. किसानों को अब दोहरी बुवाई का संकट झेलना पड़ रहा है. कई जगहों पर एक जुलाई से हो रही लगातार बारिश ने किसानों को झकझोर कर रख दिया है. भारी बारिश ने कई घर बहा दिए ,खेती भी चौपट हो गई है. मंडलीय आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी विदर्भ में अट्ठारह,शून्य हेक्टेयर से ज्यादा फसल को नुकसान पहुंचा है. बारिश से करीब तीस घरों को भारी नुकसान हुआ है. जबकि बुलढाणा जिले का एक व्यक्ति बाढ़ में बह गया है. ऐसे में लगातार हो रही बारिश नुकसानदायक साबित हो रही है. किसानों को कहना कुछ दिन पहले ही औसत बारिश में सोयाबीन और कपास की बुवाई की थी. बीजों का अंकुरण होना भी शुरू हो गया था. लेकिन पिछले तीन दिन से हो रही ज्यादा बारिश ने बुवाई को नष्ट कर दिया है. अब दोबारा बुवाई के लिए कहां से पैसे लाएंगे, इस बार खरीफ में कैसे उत्पादन होगा? यह बड़ा सवाल है. पश्चिम विदर्भ के अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम जिलों में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है. नदियां और नाले उफान पर हैं. इस समय खरीफ की बोई गई फसल पानी में हैं. ऐसे में खरीफ फसलों के भविष्य का सवाल किसानों के सामने है. अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहेगी. ऐसा मौसम विभाग ने रेड अलर्ट भी किया है. जून में बारिश नहीं हो रही थी तो सोयाबीन, कपास और मक्के की बुवाई में देरी हो रही थी और अब अचानक ज्यादा बारिश हो गई है. ऐसे में कई डैम का जलस्तर भी बढ़ गया है. हालांकि छोटी-बड़ी नदियां और झीलें पानी से भरी हुई हैं, ऊपरी वर्धा बांध का जल स्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. वहीं नाशिक में भी नदी का जल स्तर बढ़ गया है. बारिश ने पश्चिमी विदर्भ के एक सौ ग्यारह गांवों को भी प्रभावित किया है. अब पानी कम होगा तब जाकर किसान खेतों में कुछ कर पाएंगे. किसानों के सामने समस्या यह है कि या तो बहुत बारिश हो रही है या फिर नाम मात्र की.
|
DELHI: कुछ दिनों से दिल्ली-NCR के इलाके में धूल भरी हवा चल रही है. इस हवा की वजह से गर्मी और बढ़ती ही जा रही है. यह धूल भरी हवा राजस्थान से उठी थी जो कि दिल्ली तक आ पहुंची जिसके कारण पूरा शहर प्रदुषण का शिकार हो रहा. शुक्रवार को दिल्ली की अधिकतम तापमान 40. 6 और न्यूनतम तापमान 33. 4 डिग्री सेल्सियस रहा. पर राहत की बात यह है कि शनिवार को हल्की बारिश लोगों को धूल भरी हवा से राहत दिला सकती है.
पिछले तीन दिनों से तापमान में तीन से चार डिग्री की बढ़त हुई है. मौसम विभाग की माने तो शनिवार को तापमान 32 और 40 के आसपास हो सकता है. रविवार को भी मौसम ऐसा ही बना रहेगा. तेज हवाओं के साथ कुछ जगहों पर बारिश भी हो सकती है और तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है. लेकिन 19 जून के बाद तापमान फिर से 40 डिग्री के उपर होगा और 22 जून तक यह 43 डिग्री तक पहुंच सकता है.
अगले 24 घंटों में दिल्ली की मौसम में काफी बदलाव दिखने को मिलेंगी. मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि यह बारिश काफी कम समय के लिए होगी पर मौसम में काफी सुधार होंगी और तापमान में 3 से 4 डिग्री कम हो सकती है. दक्षिण और पश्चिम से उठने वाली हवाओं के कारण जल्दी ही दिल्ली में इसका प्रभाव दिखना शुरू हो जाएंगा, जिसकी वजह से सोमवार और मंगलवार से फिर गर्मी उभर आएगा. प्रदूषण के कारण इस शहर लोगों का रहना बन गया है जानलेवा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुशार, बुधवार और शुक्रवार का दिन सबसे प्रदूषित रहा. तीन दिनों तक प्रदूषित धूल से ढ़का रहा दिल्ली और एयर इंडेक्स 462 तक पहूँच गया.
शुक्रवार को पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन नें प्रदूषण को लेकर बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने प्रदूषण को ख़त्म करने का सख्त आदेश दिया. हालाँकि इससे पहले उपराज्यपाल के साथ भी इनकी बैठक हुई थी. प्रदूषण ख़त्म करने कि कार्यवाई अभी से ही शुरू कर दी गयी है. फुटपाथ पर गिरी हुई मिट्टी पर पानी का छिरकाव किया गया और सड़क किनारे गिरी मिट्टी की मशीनों से सफाई की गयी. प्रदूषण फ़ैलाने वाले लोगों के साथ भी सख्त कार्यवाई की जाएगी.
|
DELHI: कुछ दिनों से दिल्ली-NCR के इलाके में धूल भरी हवा चल रही है. इस हवा की वजह से गर्मी और बढ़ती ही जा रही है. यह धूल भरी हवा राजस्थान से उठी थी जो कि दिल्ली तक आ पहुंची जिसके कारण पूरा शहर प्रदुषण का शिकार हो रहा. शुक्रवार को दिल्ली की अधिकतम तापमान चालीस. छः और न्यूनतम तापमान तैंतीस. चार डिग्री सेल्सियस रहा. पर राहत की बात यह है कि शनिवार को हल्की बारिश लोगों को धूल भरी हवा से राहत दिला सकती है. पिछले तीन दिनों से तापमान में तीन से चार डिग्री की बढ़त हुई है. मौसम विभाग की माने तो शनिवार को तापमान बत्तीस और चालीस के आसपास हो सकता है. रविवार को भी मौसम ऐसा ही बना रहेगा. तेज हवाओं के साथ कुछ जगहों पर बारिश भी हो सकती है और तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है. लेकिन उन्नीस जून के बाद तापमान फिर से चालीस डिग्री के उपर होगा और बाईस जून तक यह तैंतालीस डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले चौबीस घंटाटों में दिल्ली की मौसम में काफी बदलाव दिखने को मिलेंगी. मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि यह बारिश काफी कम समय के लिए होगी पर मौसम में काफी सुधार होंगी और तापमान में तीन से चार डिग्री कम हो सकती है. दक्षिण और पश्चिम से उठने वाली हवाओं के कारण जल्दी ही दिल्ली में इसका प्रभाव दिखना शुरू हो जाएंगा, जिसकी वजह से सोमवार और मंगलवार से फिर गर्मी उभर आएगा. प्रदूषण के कारण इस शहर लोगों का रहना बन गया है जानलेवा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुशार, बुधवार और शुक्रवार का दिन सबसे प्रदूषित रहा. तीन दिनों तक प्रदूषित धूल से ढ़का रहा दिल्ली और एयर इंडेक्स चार सौ बासठ तक पहूँच गया. शुक्रवार को पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन नें प्रदूषण को लेकर बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने प्रदूषण को ख़त्म करने का सख्त आदेश दिया. हालाँकि इससे पहले उपराज्यपाल के साथ भी इनकी बैठक हुई थी. प्रदूषण ख़त्म करने कि कार्यवाई अभी से ही शुरू कर दी गयी है. फुटपाथ पर गिरी हुई मिट्टी पर पानी का छिरकाव किया गया और सड़क किनारे गिरी मिट्टी की मशीनों से सफाई की गयी. प्रदूषण फ़ैलाने वाले लोगों के साथ भी सख्त कार्यवाई की जाएगी.
|
फास्टलेन (Fastlane) 2021 पीपीवी के समाप्त होने के बाद WWE का पूरा फोकस रेसलमेनिया (Wrestlemania) 37 के बिल्ड-अप पर आ टिका है। साल के सबसे बड़े शो के बिल्ड-अप के लिए अब WWE के पास केवल 3 रॉ (Raw) और 3 स्मैकडाउन (SmackDown) बाकी रह गए हैं।
Fastlane 2021 में जितने भी चैंपियनशिप मैच हुए, उन सभी में टाइटल्स को सफलतापूर्वक डिफेंड किया गया है। इन्हीं में से एक में रोमन रेंस (Roman Reigns) ने ऐज (Edge) और जे उसो (Jey Uso) के दखल के बाद डेनियल ब्रायन (Daniel Bryan) को हराकर अपने यूनिवर्सल टाइटल को डिफेंड किया।
अब Wrestlemaia में रोमन को 2021 मेंस रॉयल रंबल (Royal Rumble) विनर ऐज के खिलाफ अपनी WWE यूनिवर्सल चैंपियनशिप बेल्ट को डिफेंड करना है। इस आर्टिकल में हम ऐसे 4 बड़े कारणों से आपको अवगत कराएंगे कि क्यों Wrestlemania 37 के यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच में ब्रायन को जगह जरूर मिलनी चाहिए।
WWE Fastlane 2021 से जुड़े बहुचर्चित विषयों में से एक यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच में रोमन रेंस का टैप आउट करना रहा। ब्रायन द्वारा रेफरी को गलती से लगी रनिंग नी के बाद ऐज ने स्पेशल गेस्ट एंफोर्सर होने के नाते रिंग में रेफरी की भूमिका निभाई।
इस बीच ब्रायन के ही हाथों ऐज चेयर शॉट खा बैठे, इसलिए WWE हॉल ऑफ फेमर रिंग कॉर्नर पर लेटे रहे। रिंग में कोई रेफरी मौजूद नहीं था, इसी दौरान ब्रायन ने रेंस को येस लॉक लगाया, जिसके खिलाफ ट्राइबल चीफ ने टैप आउट भी कर दिया था।
कायदे से ब्रायन को नया यूनिवर्सल चैंपियन घोषित किया जाना चाहिए था, इसके बावजूद रेंस चैंपियन बने रहे। येस मूवमेंट के लीडर के साथ ये बहुत बड़ी नाइंसाफ़ी हुई है, इसलिए Wrestlemania 37 में एक बार खुद को साबित करने के लिए उन्हें रीमैच जरूर मिलना चाहिए।
WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
WWE Fastlane 2021 के यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच की स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए तो डेनियल ब्रायन को ऐज के कारण ही हार मिली है। रोमन रेंस के टैप आउट करने के समय वो रिंग कॉर्नर पर पड़े हुए थे, वहीं ब्रायन के प्रति सांत्वना प्रकट करने के बजाय ऐज ने स्टील चेयर से अटैक कर दिया था।
ये हील टर्न WWE हॉल ऑफ फेमर पर भारी पड़ सकता है और डेनियल ब्रायन इसका बदला लेने की कोशिश जरूर करेंगे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए Wrestlemania 37 ही ब्रायन के बदले का मौका देने के लिए सबसे सही जगह नजर आ रही है।
डेनियल ब्रायन WWE Elimination Chamber 2021 पीपीवी के बाद से ही यूनिवर्सल चैंपियनशिप स्टोरीलाइन का हिस्सा बने हुए हैं। Elimination Chamber मैच में ब्रायन को जीत तो मिली, लेकिन वो बहुत थक चुके थे, जिसका फायदा उठाकर रोमन ने उन्हें आसान हार का शिकार बनाया था।
अब Wrestlemania 37 के आयोजन से पूर्व केवल 3 हफ्ते बाकी हैं। अब ब्रायन को इस स्टोरीलाइन से बाहर किया गया, तो उन्हें केवल 3 हफ्तों में नया प्रतिद्वंदी दे पाना असंभव सा काम है। इसलिए फिलहाल मौजूदा हालातों के अनुसार उनका Wrestlemania तक इस स्टोरीलाइन में बने रहना ही WWE द्वारा लिया गया सबसे सही फैसला होगा।
रोमन रेंस पिछले साल अगस्त में WWE में वापसी के बाद से ही हील किरदार निभाते आ रहे हैं। वहीं ऐज ने हाल ही में डेनियल ब्रायन पर अटैक कर हील टर्न लिया है। ऐसा बहुत कम मौकों पर देखा गया है जब हील vs हील सुपरस्टार की भिड़ंत फैंस को पसंद आई हो।
इस स्टोरीलाइन में WWE के पास बेबीफेस डेनियल ब्रायन को शामिल किए रखने का विकल्प खुला हुआ है। महत्वपूर्ण पहलू ये है कि यह यूनिवर्सल चैंपियनशिप स्टोरीलाइन है, वो भी Wrestlemania के लिए। इसलिए फैंस के लिए मैच को दिलचस्प बनाने के लिए इसमें एक बड़े बेबीफेस सुपरस्टार का शामिल होना जरूरी है।
|
फास्टलेन दो हज़ार इक्कीस पीपीवी के समाप्त होने के बाद WWE का पूरा फोकस रेसलमेनिया सैंतीस के बिल्ड-अप पर आ टिका है। साल के सबसे बड़े शो के बिल्ड-अप के लिए अब WWE के पास केवल तीन रॉ और तीन स्मैकडाउन बाकी रह गए हैं। Fastlane दो हज़ार इक्कीस में जितने भी चैंपियनशिप मैच हुए, उन सभी में टाइटल्स को सफलतापूर्वक डिफेंड किया गया है। इन्हीं में से एक में रोमन रेंस ने ऐज और जे उसो के दखल के बाद डेनियल ब्रायन को हराकर अपने यूनिवर्सल टाइटल को डिफेंड किया। अब Wrestlemaia में रोमन को दो हज़ार इक्कीस मेंस रॉयल रंबल विनर ऐज के खिलाफ अपनी WWE यूनिवर्सल चैंपियनशिप बेल्ट को डिफेंड करना है। इस आर्टिकल में हम ऐसे चार बड़े कारणों से आपको अवगत कराएंगे कि क्यों Wrestlemania सैंतीस के यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच में ब्रायन को जगह जरूर मिलनी चाहिए। WWE Fastlane दो हज़ार इक्कीस से जुड़े बहुचर्चित विषयों में से एक यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच में रोमन रेंस का टैप आउट करना रहा। ब्रायन द्वारा रेफरी को गलती से लगी रनिंग नी के बाद ऐज ने स्पेशल गेस्ट एंफोर्सर होने के नाते रिंग में रेफरी की भूमिका निभाई। इस बीच ब्रायन के ही हाथों ऐज चेयर शॉट खा बैठे, इसलिए WWE हॉल ऑफ फेमर रिंग कॉर्नर पर लेटे रहे। रिंग में कोई रेफरी मौजूद नहीं था, इसी दौरान ब्रायन ने रेंस को येस लॉक लगाया, जिसके खिलाफ ट्राइबल चीफ ने टैप आउट भी कर दिया था। कायदे से ब्रायन को नया यूनिवर्सल चैंपियन घोषित किया जाना चाहिए था, इसके बावजूद रेंस चैंपियन बने रहे। येस मूवमेंट के लीडर के साथ ये बहुत बड़ी नाइंसाफ़ी हुई है, इसलिए Wrestlemania सैंतीस में एक बार खुद को साबित करने के लिए उन्हें रीमैच जरूर मिलना चाहिए। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं। WWE Fastlane दो हज़ार इक्कीस के यूनिवर्सल चैंपियनशिप मैच की स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए तो डेनियल ब्रायन को ऐज के कारण ही हार मिली है। रोमन रेंस के टैप आउट करने के समय वो रिंग कॉर्नर पर पड़े हुए थे, वहीं ब्रायन के प्रति सांत्वना प्रकट करने के बजाय ऐज ने स्टील चेयर से अटैक कर दिया था। ये हील टर्न WWE हॉल ऑफ फेमर पर भारी पड़ सकता है और डेनियल ब्रायन इसका बदला लेने की कोशिश जरूर करेंगे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए Wrestlemania सैंतीस ही ब्रायन के बदले का मौका देने के लिए सबसे सही जगह नजर आ रही है। डेनियल ब्रायन WWE Elimination Chamber दो हज़ार इक्कीस पीपीवी के बाद से ही यूनिवर्सल चैंपियनशिप स्टोरीलाइन का हिस्सा बने हुए हैं। Elimination Chamber मैच में ब्रायन को जीत तो मिली, लेकिन वो बहुत थक चुके थे, जिसका फायदा उठाकर रोमन ने उन्हें आसान हार का शिकार बनाया था। अब Wrestlemania सैंतीस के आयोजन से पूर्व केवल तीन हफ्ते बाकी हैं। अब ब्रायन को इस स्टोरीलाइन से बाहर किया गया, तो उन्हें केवल तीन हफ्तों में नया प्रतिद्वंदी दे पाना असंभव सा काम है। इसलिए फिलहाल मौजूदा हालातों के अनुसार उनका Wrestlemania तक इस स्टोरीलाइन में बने रहना ही WWE द्वारा लिया गया सबसे सही फैसला होगा। रोमन रेंस पिछले साल अगस्त में WWE में वापसी के बाद से ही हील किरदार निभाते आ रहे हैं। वहीं ऐज ने हाल ही में डेनियल ब्रायन पर अटैक कर हील टर्न लिया है। ऐसा बहुत कम मौकों पर देखा गया है जब हील vs हील सुपरस्टार की भिड़ंत फैंस को पसंद आई हो। इस स्टोरीलाइन में WWE के पास बेबीफेस डेनियल ब्रायन को शामिल किए रखने का विकल्प खुला हुआ है। महत्वपूर्ण पहलू ये है कि यह यूनिवर्सल चैंपियनशिप स्टोरीलाइन है, वो भी Wrestlemania के लिए। इसलिए फैंस के लिए मैच को दिलचस्प बनाने के लिए इसमें एक बड़े बेबीफेस सुपरस्टार का शामिल होना जरूरी है।
|
मुंबई. भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह फिल्मों के अलावा अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में बनी रहती हैं। पवन सिंह के साथ रिलेशनशिप में रह चुकीं अक्षरा का एक्टर के साथ ब्रेकअप के समय भी बड़ा बवाल मचा था। उन्होंने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन, अब दोनों अलग हो चुके हैं और अपनी-अपनी जिंदगी जी रहे हैं। अक्षरा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो अक्सर फोटो और वीडियोड शेयर करती रहती हैं। ऐसे में उन्होंने बर्थडे सेलिब्रेशन की कुछ फोटोज शेयर की है।
अक्षरा सिंह का बर्थडे 30 अगस्त को था। इस दिन उन्होंने अपना 27वां बर्थडे सेलिब्रेट किया था। उनका जन्म 30 अगस्त, 1993 को पटना में हुआ था। ऐसे में सेलिब्रेशन की कुछ फोटोज एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए हैं।
इसमें वो एक विशाल सिंह नाम के शख्स को केक खिलाने के बाद kiss करते हुए नजर आ रही हैं। इस फोटो को शेयर करने के साथ ही एक्ट्रेस ने कैप्शन लिखा, 'तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे। '
वहीं, विशाल सिंह ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यही फोटो शेयर की है और उन्होंने भी सेम कैप्शन लिखा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या अक्षरा सिंह उनके साथ रिलेशनशिप में है?
इसके अलावा विशाल सिंह ने अक्षरा सिंह के साथ कुछ और फोटोज भी शेयर किए हैं। इसमें वो दोनों ही केक में सने हुए नजर आ रहे हैं। इस फोटो को शेयर करने के साथ ही एक्टर ने कैप्शन लिखा, 'मैं इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था और आखिरकार ये आ ही गया। मैं उस हर चीज के लिए तुम्हारा शुक्रगुजार जो तुमने मेरे लिए आजतक किया है। मैं जानता हूं कि मैं कभी भी इसकी कीमत नहीं चुका पाऊंगा। '
बता दें, अक्षरा सिंह और विशाल सिंह साथ में एक वीडियो सॉन्ग भी शूट कर चुके हैं। उसके लिरिक्स हैं, 'कोरा में आजा छोरा। ' इस गाने को अक्षरा सिंह ने ही आवाज दी है।
गौरतलब है कि अक्षरा सिंह एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ-साथ एक सिंगर भी हैं। उनके गाने अक्सर यूट्यूब पर वायरल होते रहते हैं। फैंस उनकी एक्टिंग और सिंगिंग को बहुत पसंद करते हैं।
फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम।
|
मुंबई. भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह फिल्मों के अलावा अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में बनी रहती हैं। पवन सिंह के साथ रिलेशनशिप में रह चुकीं अक्षरा का एक्टर के साथ ब्रेकअप के समय भी बड़ा बवाल मचा था। उन्होंने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन, अब दोनों अलग हो चुके हैं और अपनी-अपनी जिंदगी जी रहे हैं। अक्षरा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो अक्सर फोटो और वीडियोड शेयर करती रहती हैं। ऐसे में उन्होंने बर्थडे सेलिब्रेशन की कुछ फोटोज शेयर की है। अक्षरा सिंह का बर्थडे तीस अगस्त को था। इस दिन उन्होंने अपना सत्ताईसवां बर्थडे सेलिब्रेट किया था। उनका जन्म तीस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ तिरानवे को पटना में हुआ था। ऐसे में सेलिब्रेशन की कुछ फोटोज एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए हैं। इसमें वो एक विशाल सिंह नाम के शख्स को केक खिलाने के बाद kiss करते हुए नजर आ रही हैं। इस फोटो को शेयर करने के साथ ही एक्ट्रेस ने कैप्शन लिखा, 'तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे। ' वहीं, विशाल सिंह ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यही फोटो शेयर की है और उन्होंने भी सेम कैप्शन लिखा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या अक्षरा सिंह उनके साथ रिलेशनशिप में है? इसके अलावा विशाल सिंह ने अक्षरा सिंह के साथ कुछ और फोटोज भी शेयर किए हैं। इसमें वो दोनों ही केक में सने हुए नजर आ रहे हैं। इस फोटो को शेयर करने के साथ ही एक्टर ने कैप्शन लिखा, 'मैं इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था और आखिरकार ये आ ही गया। मैं उस हर चीज के लिए तुम्हारा शुक्रगुजार जो तुमने मेरे लिए आजतक किया है। मैं जानता हूं कि मैं कभी भी इसकी कीमत नहीं चुका पाऊंगा। ' बता दें, अक्षरा सिंह और विशाल सिंह साथ में एक वीडियो सॉन्ग भी शूट कर चुके हैं। उसके लिरिक्स हैं, 'कोरा में आजा छोरा। ' इस गाने को अक्षरा सिंह ने ही आवाज दी है। गौरतलब है कि अक्षरा सिंह एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ-साथ एक सिंगर भी हैं। उनके गाने अक्सर यूट्यूब पर वायरल होते रहते हैं। फैंस उनकी एक्टिंग और सिंगिंग को बहुत पसंद करते हैं। फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम।
|
क्या है ? यह कि भगवान् ने मनुष्य को केवल बिना सोचे-विचारे बुरे कर्मों के लिए परिश्रम करने के लिए नहीं बनाया; चोरियाँ करने, डाके डालने, दूसरों को लूटने और उनके घरों को आग लगाने के लिए नहीं बनाया । परिश्रम यह भी है, परन्तु यह गलत परिश्रम है। भगवान् मनुष्य को बनाया इसलिए कि वह तप की भावना से परिश्रम करे । दुःखो और कष्टों को हँसता हुआ सहन करे । और दूसरे के
कल्याण के लिए, सुख के लिए परिश्रम करे । सत्य के लिए, न्याय के लिए, धर्म के लिए देश के लिए, मानवता के उद्धार के लिए परिश्रम करे ।
यह है प्रभु की आज्ञा । जो लोग समझ बैठे कि यह संसार विश्रामस्थल है, वे गलत समझे। यह विश्राम स्थल नही है । लगातार सघर्ष, निरन्तर कर्म, अनवरत परिश्रम का स्थान है यह ! परमात्मा को आधार बनाने का तात्पर्य यह नही कि निकम्मे होकर बैठ जाओ; उसे आधार या सहारा बनाने का तात्पर्य केवल यह है - उस महाशक्ति से अपना सम्बन्ध जोड़ो । उस महान् एव विशाल पॉवर हाउस (Power House ) से अपना सम्बन्ध ( Connection) जोड़ लो जिसकी शक्ति से यह सब-कुछ चलता है। सर्दी लगती है तो पहले हीटर को अपने सामने रख लो । गर्मी लगती है तो ठण्डे कमरे में चले जाओ । मन में दुःख है, अशान्ति है तो उस प्रभु का आश्रय लो जिसमें अनन्त शान्ति है, अनन्त आनन्द है; जिसके निकट दर्द, चिन्ता, दुःख, कष्ट, क्लेश फटक भी नहीं पाते । वह महा शक्ति है । जो अनन्त ग्रह, सौर मण्डल और ब्रह्माण्ड है, वेद भगवान् ने ईश्वर को इन सबकी नाभि कहा है । उसके आधार पर, उसके प्राश्रय पर, उसके सहारे पर ये सब चल रहे है । दो अरब वर्ष से चले आये है और अभी दो अरब वर्ष तक चलेंगे । ईश्वर को सहारा बनाया है उन्होंने । परन्तु सहारा बनाने के पश्चात् बैठ नहीं गये, रुक नहीं गये । यह सूर्य है न ! प्रत्येक शाम को आँखों से ओझल होता है, प्रातः फिर विद्यमान । दो अरब वर्ष से निरन्तर यही कर रहा है । यदि कभी यह सुस्त पड़ जाय, यदि यह भी ज यूनियन ( Union ) में सम्मिलित हो जाय, क्योंकि आजकल यूनियन बनाने का रिवाज बहुत हुआ जाता है, तो सोचो कि होगा क्या ?
आजकल तो घरेलू कर्मचारी भी यूनियन बनाकर छुट्टी माँगते हैं । सबको छुट्टी चाहिये और अधिक चाहिये। पंडित जवाहरलाल जी ने कहा था- 'आराम हराम है ।' हम लोगों ने समझ लिया - 'काम हराम है ।' यदि यह सूर्य भी ऐसा समझ ले और कहे कि 'बाबा / दो वर्ष हो गये मुझे कार्य करते हुए, अब मुझे भी छुट्टी चाहिये, वर्ष मे मैं भी १५ दिन की छुट्टी किया करूँगा' तो पन्द्रह दिन में ही सबका 'प्रोम् तत् सत्' हो जायेगा । सब कुछ ठप्प हो जायेगा, अन्धकार छा जायेगा हर ओर । उसी अन्धकार में प्रलय जाग उठेगी । परन्तु नही, सूर्य कभी ऐसा नही कहता, वह छुट्टी नहीं मांगता, निरन्तर काम किये जाता है। इसलिए वेद ने कहास्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव ।
ऋ० ५ । ५१ । १५ ॥ अरे ! ओ मानव ! यदि तू कल्याण चाहता है, अपनी भलाई चाहता है, तो सूर्य और चन्द्रमा की भाँति निरन्तर कर्म करता चल ! चन्द्रमा घटता है, बढता है, परन्तु कभी भी अपने काम को रुकने नहीं देता । अमावास्या से पूर्णमासी तक और पूर्णमासी से अमावास्या तक निरन्तर चलता ही रहता है वह । रुकना और ठहरना उसके लिए नही । यही दशा सूर्य की भी है। निरन्तर वह अपना कार्य कर रहा है । इसलिए वेद भगवान् ने कहा- सूर्य के पीछे चल ! सूर्य का नाम है भानु । वेद कहता है - भानु की भाँति चल । हमारे ये चन्द्रभानु है न ! (आर्यसमाज हनुमान रोड, नई दिल्ली के पुरोहित श्री चन्द्रभानु जी हैं) इन्होंने अपने नाम में सूर्य और चन्द्र दोनों ही एकत्र कर रक्खे है । इसलिए दिन-रात काम करते हैं। पता नहीं अब तक कितने विवाह इन्होंने कराये है । (सब लोग बहुत जोर से हँस उठे। स्वामीजी ने कहा- ) अपने नहीं कराये, दूसरों के कराये हैं। अपना तो एक ही कराया है, लोगों के बहुत कराये । (सारा हाल हँसी से गूंज उठा। स्वामी जी भी जोर से हँस उठे ।)
तो यह पहली बात है मेरे भाई ! भगवान् का सहारा ले, भगवान् को अपना आधार बना ! यह आधारभूत बात है और कमाल यह है कि श्राज का मानव इस आधारभूत बात को भूल गया है। युक्तियाँ
|
क्या है ? यह कि भगवान् ने मनुष्य को केवल बिना सोचे-विचारे बुरे कर्मों के लिए परिश्रम करने के लिए नहीं बनाया; चोरियाँ करने, डाके डालने, दूसरों को लूटने और उनके घरों को आग लगाने के लिए नहीं बनाया । परिश्रम यह भी है, परन्तु यह गलत परिश्रम है। भगवान् मनुष्य को बनाया इसलिए कि वह तप की भावना से परिश्रम करे । दुःखो और कष्टों को हँसता हुआ सहन करे । और दूसरे के कल्याण के लिए, सुख के लिए परिश्रम करे । सत्य के लिए, न्याय के लिए, धर्म के लिए देश के लिए, मानवता के उद्धार के लिए परिश्रम करे । यह है प्रभु की आज्ञा । जो लोग समझ बैठे कि यह संसार विश्रामस्थल है, वे गलत समझे। यह विश्राम स्थल नही है । लगातार सघर्ष, निरन्तर कर्म, अनवरत परिश्रम का स्थान है यह ! परमात्मा को आधार बनाने का तात्पर्य यह नही कि निकम्मे होकर बैठ जाओ; उसे आधार या सहारा बनाने का तात्पर्य केवल यह है - उस महाशक्ति से अपना सम्बन्ध जोड़ो । उस महान् एव विशाल पॉवर हाउस से अपना सम्बन्ध जोड़ लो जिसकी शक्ति से यह सब-कुछ चलता है। सर्दी लगती है तो पहले हीटर को अपने सामने रख लो । गर्मी लगती है तो ठण्डे कमरे में चले जाओ । मन में दुःख है, अशान्ति है तो उस प्रभु का आश्रय लो जिसमें अनन्त शान्ति है, अनन्त आनन्द है; जिसके निकट दर्द, चिन्ता, दुःख, कष्ट, क्लेश फटक भी नहीं पाते । वह महा शक्ति है । जो अनन्त ग्रह, सौर मण्डल और ब्रह्माण्ड है, वेद भगवान् ने ईश्वर को इन सबकी नाभि कहा है । उसके आधार पर, उसके प्राश्रय पर, उसके सहारे पर ये सब चल रहे है । दो अरब वर्ष से चले आये है और अभी दो अरब वर्ष तक चलेंगे । ईश्वर को सहारा बनाया है उन्होंने । परन्तु सहारा बनाने के पश्चात् बैठ नहीं गये, रुक नहीं गये । यह सूर्य है न ! प्रत्येक शाम को आँखों से ओझल होता है, प्रातः फिर विद्यमान । दो अरब वर्ष से निरन्तर यही कर रहा है । यदि कभी यह सुस्त पड़ जाय, यदि यह भी ज यूनियन में सम्मिलित हो जाय, क्योंकि आजकल यूनियन बनाने का रिवाज बहुत हुआ जाता है, तो सोचो कि होगा क्या ? आजकल तो घरेलू कर्मचारी भी यूनियन बनाकर छुट्टी माँगते हैं । सबको छुट्टी चाहिये और अधिक चाहिये। पंडित जवाहरलाल जी ने कहा था- 'आराम हराम है ।' हम लोगों ने समझ लिया - 'काम हराम है ।' यदि यह सूर्य भी ऐसा समझ ले और कहे कि 'बाबा / दो वर्ष हो गये मुझे कार्य करते हुए, अब मुझे भी छुट्टी चाहिये, वर्ष मे मैं भी पंद्रह दिन की छुट्टी किया करूँगा' तो पन्द्रह दिन में ही सबका 'प्रोम् तत् सत्' हो जायेगा । सब कुछ ठप्प हो जायेगा, अन्धकार छा जायेगा हर ओर । उसी अन्धकार में प्रलय जाग उठेगी । परन्तु नही, सूर्य कभी ऐसा नही कहता, वह छुट्टी नहीं मांगता, निरन्तर काम किये जाता है। इसलिए वेद ने कहास्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव । ऋशून्य पाँच । इक्यावन । पंद्रह ॥ अरे ! ओ मानव ! यदि तू कल्याण चाहता है, अपनी भलाई चाहता है, तो सूर्य और चन्द्रमा की भाँति निरन्तर कर्म करता चल ! चन्द्रमा घटता है, बढता है, परन्तु कभी भी अपने काम को रुकने नहीं देता । अमावास्या से पूर्णमासी तक और पूर्णमासी से अमावास्या तक निरन्तर चलता ही रहता है वह । रुकना और ठहरना उसके लिए नही । यही दशा सूर्य की भी है। निरन्तर वह अपना कार्य कर रहा है । इसलिए वेद भगवान् ने कहा- सूर्य के पीछे चल ! सूर्य का नाम है भानु । वेद कहता है - भानु की भाँति चल । हमारे ये चन्द्रभानु है न ! इन्होंने अपने नाम में सूर्य और चन्द्र दोनों ही एकत्र कर रक्खे है । इसलिए दिन-रात काम करते हैं। पता नहीं अब तक कितने विवाह इन्होंने कराये है । अपने नहीं कराये, दूसरों के कराये हैं। अपना तो एक ही कराया है, लोगों के बहुत कराये । तो यह पहली बात है मेरे भाई ! भगवान् का सहारा ले, भगवान् को अपना आधार बना ! यह आधारभूत बात है और कमाल यह है कि श्राज का मानव इस आधारभूत बात को भूल गया है। युक्तियाँ
|
राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से चलाए जा रहे जय भारत सत्याग्रह अभियान के तहत शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने बिलावर तहसील मुख्यालय में धरना देकर भाजपा सरकार पर तानाशाही करने और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया।
बिलावर, संवाद सहयोगी : कांग्रेस ने राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में शुक्रवार को 'जय भारत सत्याग्रह' किया गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव पवन रैना के नेतृत्व में पार्टी ने अडानी मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की भी मांग की।
राहुल गांधी को 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा उनकी सजा और दो साल की सजा के बाद एक सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए, रैना ने गांधी द्वारा उठाए गए अडानी मुद्दे पर आपराधिक चुप्पी और जेपीसी जांच की मांग को स्वीकार नहीं करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से चलाए जा रहे जय भारत सत्याग्रह अभियान के तहत शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने बिलावर तहसील मुख्यालय में धरना देकर भाजपा सरकार पर तानाशाही करने और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डोगरा के नेतृत्व में काली पट्टियां बांधकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज बनने की कोशिश करता है, भाजपा सरकार साम, दाम, दंड, भेद लगाकर उसको दबाने का प्रयास करती है। पिछले दिनों राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को रद करवाकर भाजपा ने यही किया है। राहुल गांधी जनता के साथ हो रहे अन्याय खिलाफ भाजपा की दमनकारी नीति के विरोध में आवाज उठा रहे थे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डोगरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। कांग्रेस की जिला सचिव काजल राजपूत ने कहा कि राहुल गांधी जनता की आवाज उठा रहे थे। जनता भाजपा से हिसाब लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया उसकी तानाशाही को दर्शाता है।
जम्मू कश्मीर की जनता राहुल गांधी के साथ है और हमेशा रहेगी और आने वाले चुनाव में इसका जवाब भाजपा को दिया जाएगा। जय भारत सत्याग्रह को लेकर दिए गए धरने में कांग्रेस के विशु अंडोत्रा, जगदेव सिंह, श्याम लाल गुप्ता, कांग्रेस पार्षद सुनीता शर्मा, ज्योति प्रसाद गौड़ के अलावा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
|
राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से चलाए जा रहे जय भारत सत्याग्रह अभियान के तहत शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने बिलावर तहसील मुख्यालय में धरना देकर भाजपा सरकार पर तानाशाही करने और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया। बिलावर, संवाद सहयोगी : कांग्रेस ने राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में शुक्रवार को 'जय भारत सत्याग्रह' किया गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव पवन रैना के नेतृत्व में पार्टी ने अडानी मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की भी मांग की। राहुल गांधी को दो हज़ार उन्नीस के आपराधिक मानहानि मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा उनकी सजा और दो साल की सजा के बाद एक सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए, रैना ने गांधी द्वारा उठाए गए अडानी मुद्दे पर आपराधिक चुप्पी और जेपीसी जांच की मांग को स्वीकार नहीं करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से चलाए जा रहे जय भारत सत्याग्रह अभियान के तहत शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने बिलावर तहसील मुख्यालय में धरना देकर भाजपा सरकार पर तानाशाही करने और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डोगरा के नेतृत्व में काली पट्टियां बांधकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज बनने की कोशिश करता है, भाजपा सरकार साम, दाम, दंड, भेद लगाकर उसको दबाने का प्रयास करती है। पिछले दिनों राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को रद करवाकर भाजपा ने यही किया है। राहुल गांधी जनता के साथ हो रहे अन्याय खिलाफ भाजपा की दमनकारी नीति के विरोध में आवाज उठा रहे थे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डोगरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। कांग्रेस की जिला सचिव काजल राजपूत ने कहा कि राहुल गांधी जनता की आवाज उठा रहे थे। जनता भाजपा से हिसाब लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया उसकी तानाशाही को दर्शाता है। जम्मू कश्मीर की जनता राहुल गांधी के साथ है और हमेशा रहेगी और आने वाले चुनाव में इसका जवाब भाजपा को दिया जाएगा। जय भारत सत्याग्रह को लेकर दिए गए धरने में कांग्रेस के विशु अंडोत्रा, जगदेव सिंह, श्याम लाल गुप्ता, कांग्रेस पार्षद सुनीता शर्मा, ज्योति प्रसाद गौड़ के अलावा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
|
हिमाचल फुटबाल एसोसिएशन द्वारा गांव नगनोली मैदान में चल रही हिमाचल फुटबाल लीग में शनिवार को फुुटबाल क्लब खडड व विल्स फुटबाल क्लब के बीच खेला गया मैच बराबरी पर रहा। दोनों टीमें निर्धारित समय तक एक-एक गोल ही दाग पाई। प्रतियोगिता में एचआरटीसी के डायरेक्टर व जिला कांग्रेस के प्रधान रंजीत राणा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्य अतिथि ने दोनों टीमों के खिलाडिय़ों के साथ परिचय किया और मैच का शुभारंभ किया।
दोनों टीमों के बीच शानदार मैच खेला गया। खडड फुटबाल क्लब की और से प्रमोद लाला ने 55वें मिनट में गोल दागकर अपनी टीम को एक-शून्य की बढ़त दिला दी। इसके बाद विल्स फुटबाल क्लब ने मैच के अंतिम क्षणों में 90 मिनट में एक गोल दागकर बराबरी कर ली। समय समाप्ति तक दोनों टीमों का स्कोर 1-1 रहने पर मैच बराबरी पर छूटा। मैच के दौरान भारी संख्या में दर्शक मैदान में पहुंचे हुए थे और दर्शकों ने मैच का खूब लुत्फ उठाया। इस दौरान युवाओ ने अपनी-अपनी पंसदीदा टीम को स्पोर्ट भी किया।
|
हिमाचल फुटबाल एसोसिएशन द्वारा गांव नगनोली मैदान में चल रही हिमाचल फुटबाल लीग में शनिवार को फुुटबाल क्लब खडड व विल्स फुटबाल क्लब के बीच खेला गया मैच बराबरी पर रहा। दोनों टीमें निर्धारित समय तक एक-एक गोल ही दाग पाई। प्रतियोगिता में एचआरटीसी के डायरेक्टर व जिला कांग्रेस के प्रधान रंजीत राणा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्य अतिथि ने दोनों टीमों के खिलाडिय़ों के साथ परिचय किया और मैच का शुभारंभ किया। दोनों टीमों के बीच शानदार मैच खेला गया। खडड फुटबाल क्लब की और से प्रमोद लाला ने पचपनवें मिनट में गोल दागकर अपनी टीम को एक-शून्य की बढ़त दिला दी। इसके बाद विल्स फुटबाल क्लब ने मैच के अंतिम क्षणों में नब्बे मिनट में एक गोल दागकर बराबरी कर ली। समय समाप्ति तक दोनों टीमों का स्कोर एक-एक रहने पर मैच बराबरी पर छूटा। मैच के दौरान भारी संख्या में दर्शक मैदान में पहुंचे हुए थे और दर्शकों ने मैच का खूब लुत्फ उठाया। इस दौरान युवाओ ने अपनी-अपनी पंसदीदा टीम को स्पोर्ट भी किया।
|
जहांगीर बाद्शाहकी तरफ से सवत मेघसिंहकी मन्सबी जागीरका फुर्मान.
लाहु अकबर.
तारीख दिन आज शुरू मिहर इलाही सन् १३ जुलूस, मुवाफिक सोमवार महीना शव्वाल् सन् १०२७ हिजी को जुम्दतुल्मुल्क मदारुल्महाम बादशाही सर्दार एतिमादुद्दौला वज़ीरके रिसालेमें और बड़ेदरजेके सर्दार मोतमदखांकी चौकी, और बादशाही तावेदार अलीनकी की वाकिआ नवीसीमें, बुजुर्ग हुक्म जारी हुआ कि, रावत मेघ वगैरह की जागीर ५०० पांचसो जात, २५० सवारकी बाबत, नीचे लिखी तफ्सीलके मुवाफिक मुकुर्रर की जावे -- बादशाही याद्दाइतके मुवाफिक लिखा गया.
मी जान. मुक़र्ररा तनख्वाह - ३२५८२०० दाम. अगले दस्तूरके मुवाफिक २५०४७०० दाम.
२३००० दाम हाथियोंकी खुराक.
वीरविनोद [ रावत मेघसिंहकी बाबत फर्मान - २५९
५०० पाँचसौ जात. २४४० दाम.
जागीरजात ५०० पांचसो
२५१ सवार मए खास
मुक़र्रर दरमाहा -
इन दिनोंकी तरक्की, मुवाफिक १३ उर्दी बिहिश्त इलाही सन् १३ जुलूस के७०४५०० दाम.
सवार २५० ढाईसौ.
मातहत जमइयत
|
जहांगीर बाद्शाहकी तरफ से सवत मेघसिंहकी मन्सबी जागीरका फुर्मान. लाहु अकबर. तारीख दिन आज शुरू मिहर इलाही सन् तेरह जुलूस, मुवाफिक सोमवार महीना शव्वाल् सन् एक हज़ार सत्ताईस हिजी को जुम्दतुल्मुल्क मदारुल्महाम बादशाही सर्दार एतिमादुद्दौला वज़ीरके रिसालेमें और बड़ेदरजेके सर्दार मोतमदखांकी चौकी, और बादशाही तावेदार अलीनकी की वाकिआ नवीसीमें, बुजुर्ग हुक्म जारी हुआ कि, रावत मेघ वगैरह की जागीर पाँच सौ पांचसो जात, दो सौ पचास सवारकी बाबत, नीचे लिखी तफ्सीलके मुवाफिक मुकुर्रर की जावे -- बादशाही याद्दाइतके मुवाफिक लिखा गया. मी जान. मुक़र्ररा तनख्वाह - बत्तीस लाख अट्ठावन हज़ार दो सौ दाम. अगले दस्तूरके मुवाफिक पच्चीस लाख चार हज़ार सात सौ दाम. तेईस हज़ार दाम हाथियोंकी खुराक. वीरविनोद [ रावत मेघसिंहकी बाबत फर्मान - दो सौ उनसठ पाँच सौ पाँचसौ जात. दो हज़ार चार सौ चालीस दाम. जागीरजात पाँच सौ पांचसो दो सौ इक्यावन सवार मए खास मुक़र्रर दरमाहा - इन दिनोंकी तरक्की, मुवाफिक तेरह उर्दी बिहिश्त इलाही सन् तेरह जुलूस केसात लाख चार हज़ार पाँच सौ दाम. सवार दो सौ पचास ढाईसौ. मातहत जमइयत
|
गौहर खान लंबे समय से ग्लैमर की दुनिया में हैं। वो टीवी की दुनिया में मशहूर हैं, साथ ही वो फिल्मों में भी काफी वक्त से हैं लेकिन उनकी कोई खास पहचान नहीं है। अब लगता हैं गौहर हालात को बदल देना चाहती हैं।
'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है'
बिग-बॉस जीत चुकी गौहर खान इन दिनों अपनी फिल्म फीवर को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके जबरदस्त बोल्ड सीन हैं। पहली बार ऐसा है कि वो लीड रोल में दिखेंगी, ऐसे में गौहर की ख्वाहिशें भी बड़ी हैं।
'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है'
गौहर चाहती हैं कि इस फिल्म में उनके काम की तारीफ हो। उनका कहना है कि फिल्म देखने के बाद लोग कहें कि इस लड़की में दम है, ये अपने दम पर भी फिल्म को चला सकती है। इस सबके बावजूद गौहर के सामने मुश्किल भी कम नहीं है।
'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है'
फिल्म मे जहां एक तरफ गौहर के राजीव खंडेलवाल के साथ काफी अंतरंग सीन हैं, वहीं दूसरी हीरोइन जेम्मा एटिंक्सन ने भी फिल्म में जबरदस्त बोल्ड सीन किए हैं।
'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है'
ऐसे में गौहर के सामने चुनौती है कि वो खुद को साबित करें। कहीं ऐसा ना हो कि जेम्मी अपनी बोल्डनेस के दम पर महफिल लूट लें।
|
गौहर खान लंबे समय से ग्लैमर की दुनिया में हैं। वो टीवी की दुनिया में मशहूर हैं, साथ ही वो फिल्मों में भी काफी वक्त से हैं लेकिन उनकी कोई खास पहचान नहीं है। अब लगता हैं गौहर हालात को बदल देना चाहती हैं। 'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है' बिग-बॉस जीत चुकी गौहर खान इन दिनों अपनी फिल्म फीवर को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके जबरदस्त बोल्ड सीन हैं। पहली बार ऐसा है कि वो लीड रोल में दिखेंगी, ऐसे में गौहर की ख्वाहिशें भी बड़ी हैं। 'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है' गौहर चाहती हैं कि इस फिल्म में उनके काम की तारीफ हो। उनका कहना है कि फिल्म देखने के बाद लोग कहें कि इस लड़की में दम है, ये अपने दम पर भी फिल्म को चला सकती है। इस सबके बावजूद गौहर के सामने मुश्किल भी कम नहीं है। 'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है' फिल्म मे जहां एक तरफ गौहर के राजीव खंडेलवाल के साथ काफी अंतरंग सीन हैं, वहीं दूसरी हीरोइन जेम्मा एटिंक्सन ने भी फिल्म में जबरदस्त बोल्ड सीन किए हैं। 'मैं चाहती हूं, सब कहें कि हां ये लड़की कर सकती है' ऐसे में गौहर के सामने चुनौती है कि वो खुद को साबित करें। कहीं ऐसा ना हो कि जेम्मी अपनी बोल्डनेस के दम पर महफिल लूट लें।
|
इसराइल ने लेबनान पर अपने हमलों में ढिलाई करने के कोई संकेत नहीं दिखाए हैं और गुरूवार को लेबनान का एक सैनिक अड्डा और राजधानी बेरूत के उत्तर में एक रेडियो रिले स्टेशन को निशाना बनाया गया है.
उधर इसराइली सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख कमांडर मेजर जनरल उदी ऐडम ने कहा है कि लेबनान में हिज़्बुल्ला के ख़िलाफ़ इसराइली हमले अभी कई सप्ताह तक चल सकते हैं.
जनरल ऐडम ने पत्रकारों से कहा कि इसराइल को इस संघर्ष में अपनी जीत घोषित करने से पहले कम से कम कुछ सप्ताह का समय तो लग सकता है.
गुरूवार को इसराइली मंत्रिमंडल की बैठक होगी जिसमें इस बारे में कोई फ़ैसला किया जाएगा कि लेबनान में हमलों को कितने दिन तक चलाया जाए.
उधर दक्षिणी लेबनान में बिंत जबाइल शहर के आसपास तेज़ लड़ाई हो रही है जहाँ बुधवार को नौ इसराइली सैनिक मारे गए थे और 22 घायल हुए थे.
बिंत जबाइल शहर में हिज़्बुल्ला के ठिकानों पर इसराइली सैनिक अभी क़ब्ज़ा नहीं कर पाए हैं और वहीं उन्हें ज़्यादा नुक़सान भी उठाना पड़ा है.
इसराइली सेनाओं ने रात में भी लेबनान में अनेक ठिकानों पर बमबारी जारी रखी.
लेबनान के टायर शहर में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुइर का कहना है कि आसपास के इलाक़ों और शहर के भीतर कुछ मकानों पर बमबारी होने की वजह से बहुत से लोग वहाँ से निकलकर भाग रहे हैं.
उधर बुधवार को इसराइली हमले में संयुक्त राष्ट्र के चार पर्यवेक्षकों के मारे जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैनिक दक्षिणी लेबनान से हटाने का फ़ैसला किया है.
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ब्रेंडन नेल्सन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के 12 सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से हटाकर से हटाकर बेरुत लाने का निर्णय लिया गया है.
जबकि ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री अलेक्ज़ेंडर डॉउनर ने कहा है कि इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच तत्काल युद्धविराम की आवश्यकता है.
इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस पहुँच रही हैं.
वे वहाँ क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने जा रही हैं.
उन्हें वहाँ मध्यपूर्व को लेकर विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
वहाँ की बैठक में जो देश भाग ले रहे हें उनमें ईरान भी है जिसे हिज़्बुल्ला के मुख्य समर्थकों में से एक माना जाता है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके अलावा पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों से भी विरोध के स्वर सुनाई पड़ सकते हैं.
|
इसराइल ने लेबनान पर अपने हमलों में ढिलाई करने के कोई संकेत नहीं दिखाए हैं और गुरूवार को लेबनान का एक सैनिक अड्डा और राजधानी बेरूत के उत्तर में एक रेडियो रिले स्टेशन को निशाना बनाया गया है. उधर इसराइली सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख कमांडर मेजर जनरल उदी ऐडम ने कहा है कि लेबनान में हिज़्बुल्ला के ख़िलाफ़ इसराइली हमले अभी कई सप्ताह तक चल सकते हैं. जनरल ऐडम ने पत्रकारों से कहा कि इसराइल को इस संघर्ष में अपनी जीत घोषित करने से पहले कम से कम कुछ सप्ताह का समय तो लग सकता है. गुरूवार को इसराइली मंत्रिमंडल की बैठक होगी जिसमें इस बारे में कोई फ़ैसला किया जाएगा कि लेबनान में हमलों को कितने दिन तक चलाया जाए. उधर दक्षिणी लेबनान में बिंत जबाइल शहर के आसपास तेज़ लड़ाई हो रही है जहाँ बुधवार को नौ इसराइली सैनिक मारे गए थे और बाईस घायल हुए थे. बिंत जबाइल शहर में हिज़्बुल्ला के ठिकानों पर इसराइली सैनिक अभी क़ब्ज़ा नहीं कर पाए हैं और वहीं उन्हें ज़्यादा नुक़सान भी उठाना पड़ा है. इसराइली सेनाओं ने रात में भी लेबनान में अनेक ठिकानों पर बमबारी जारी रखी. लेबनान के टायर शहर में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुइर का कहना है कि आसपास के इलाक़ों और शहर के भीतर कुछ मकानों पर बमबारी होने की वजह से बहुत से लोग वहाँ से निकलकर भाग रहे हैं. उधर बुधवार को इसराइली हमले में संयुक्त राष्ट्र के चार पर्यवेक्षकों के मारे जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैनिक दक्षिणी लेबनान से हटाने का फ़ैसला किया है. ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ब्रेंडन नेल्सन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के बारह सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से हटाकर से हटाकर बेरुत लाने का निर्णय लिया गया है. जबकि ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री अलेक्ज़ेंडर डॉउनर ने कहा है कि इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच तत्काल युद्धविराम की आवश्यकता है. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस पहुँच रही हैं. वे वहाँ क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने जा रही हैं. उन्हें वहाँ मध्यपूर्व को लेकर विरोध का सामना करना पड़ सकता है. वहाँ की बैठक में जो देश भाग ले रहे हें उनमें ईरान भी है जिसे हिज़्बुल्ला के मुख्य समर्थकों में से एक माना जाता है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके अलावा पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों से भी विरोध के स्वर सुनाई पड़ सकते हैं.
|
Birds dead: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बदायूं जिले के हजरतपुर क्षेत्र के गांव वमनपुरा में गुरूवार दोपहर बाद सैकड़ों पक्षी (Birds) तालाब (Pond) में मृत (Dead) अवस्था में उतराते मिले। ग्रामीणों ने डायल 112 को इस घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस (Police) ने जाँच पड़ताल की।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले की एक विशेष अदालत (Special Court) ने बृहस्पतिवार को नाबालिग लड़की (Minor Girl) से दुष्कर्म (Rape) के आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 32 हजार रुपए जुर्माना लगाया।
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर यूपी के छह जिलों समेत 9 राज्यों के 324 ठिकानों पर एनआईए ने छापेमारी की है, जानकारी मिली है कि लारेंस बिश्नोई और उसके गैंग का कनेक्शन अयोध्या के नेता विकास सिंह भी है। आरोपी ने विकास सिंह से संबंध होने की बता कबूला है।
उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-96 में बृहस्पतिवार को नीम के पेड़ से एक युवक का शव लटका हुआ मिला। मृतक के परिजनों ने उसकी हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस उपायुक्त (जोन प्रथम) हरिश चंदर ने बताया कि सुबह थाना सेक्टर-39 पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-96 के ग्रीन बेल्ट इलाके में एक नीम के पेड़ से 22 वर्षीय युवक का शव लटका हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके बाद पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम वहां पहुंची।
मेष राशि वालों आज आपको कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। धर्म-कर्म के कामों में आपका मन लगेगा।
मिथुन राशि वाले जो पारिवारिक बिजनेस से जुड़े हैं उन्हें सफलता मिलने की पूरी संभावना है।
सिंह राशि वालों व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए दिन मुनाफा कमाने वाला रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी।
कन्या राशि वालों ऑफिस में आपके प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता अधिक रहेगी।
तुला राशि वालों आपके दिन की शुरुआत बेहद सुखद रहेगी। काफी समय से रुका हुआ काम आज संपन्न हो सकता है।
वृश्चिक राशि वालों आज घर की सुख सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
मकर राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे।
कुंभ राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा।
Be on the top of everything happening around the world.
Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
|
Birds dead: उत्तर प्रदेश में बदायूं जिले के हजरतपुर क्षेत्र के गांव वमनपुरा में गुरूवार दोपहर बाद सैकड़ों पक्षी तालाब में मृत अवस्था में उतराते मिले। ग्रामीणों ने डायल एक सौ बारह को इस घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जाँच पड़ताल की। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार देते हुए बीस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई और बत्तीस हजार रुपए जुर्माना लगाया। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर यूपी के छह जिलों समेत नौ राज्यों के तीन सौ चौबीस ठिकानों पर एनआईए ने छापेमारी की है, जानकारी मिली है कि लारेंस बिश्नोई और उसके गैंग का कनेक्शन अयोध्या के नेता विकास सिंह भी है। आरोपी ने विकास सिंह से संबंध होने की बता कबूला है। उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-छियानवे में बृहस्पतिवार को नीम के पेड़ से एक युवक का शव लटका हुआ मिला। मृतक के परिजनों ने उसकी हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस उपायुक्त हरिश चंदर ने बताया कि सुबह थाना सेक्टर-उनतालीस पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-छियानवे के ग्रीन बेल्ट इलाके में एक नीम के पेड़ से बाईस वर्षीय युवक का शव लटका हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके बाद पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम वहां पहुंची। मेष राशि वालों आज आपको कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। धर्म-कर्म के कामों में आपका मन लगेगा। मिथुन राशि वाले जो पारिवारिक बिजनेस से जुड़े हैं उन्हें सफलता मिलने की पूरी संभावना है। सिंह राशि वालों व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए दिन मुनाफा कमाने वाला रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी। कन्या राशि वालों ऑफिस में आपके प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता अधिक रहेगी। तुला राशि वालों आपके दिन की शुरुआत बेहद सुखद रहेगी। काफी समय से रुका हुआ काम आज संपन्न हो सकता है। वृश्चिक राशि वालों आज घर की सुख सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। मकर राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। कुंभ राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
|
भारतीय रसोईघर में अलग-अलग तरह के मसाले देखने को मिलेंगे। खाने को लजीज बनाने के अलावा इन मसालों में स्वास्थ्य से जुड़े लाभ छिपे होते हैं। इन्हीं मसालों में से एक है जीरा। जीरा तड़के या फिर सब्जियों में हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके अंदर छिपे गुण से लोग अब तक अनजान हैं। बता दें कि जीरे में औषधीय गुण हैं, जिसकी मदद से हम कई गंभीर बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। इसके अलावा यह पेट से जुड़ी कई बीमारियों से भी राहत दिलाता है। वहीं अक्सर होने वाली छोटी-छोटी समस्याओं को भी जीरे का सेवन कर ठीक कर सकते हैं, जिसकी वजह से हमें दवाइयों का सेवन भी नहीं करना पड़ता है।
(डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए है, इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रुप में नहीं लिया जा सकता। कोई भी स्टेप लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर कर लें। )
|
भारतीय रसोईघर में अलग-अलग तरह के मसाले देखने को मिलेंगे। खाने को लजीज बनाने के अलावा इन मसालों में स्वास्थ्य से जुड़े लाभ छिपे होते हैं। इन्हीं मसालों में से एक है जीरा। जीरा तड़के या फिर सब्जियों में हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके अंदर छिपे गुण से लोग अब तक अनजान हैं। बता दें कि जीरे में औषधीय गुण हैं, जिसकी मदद से हम कई गंभीर बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। इसके अलावा यह पेट से जुड़ी कई बीमारियों से भी राहत दिलाता है। वहीं अक्सर होने वाली छोटी-छोटी समस्याओं को भी जीरे का सेवन कर ठीक कर सकते हैं, जिसकी वजह से हमें दवाइयों का सेवन भी नहीं करना पड़ता है।
|
Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किए एक गए सर्वे के मुताबिक भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक, नौकरियों में आरक्षण और किसानों के खातो में पैसे भेजे जाने जैसे तीन बड़े निर्णयों की वजह से पीएम नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है। सर्वे के मुताबिक करीब 43 फीसदी लोग चाहते हैं की मोदी फिर से पीएम बने और 2014 के चुनावों की तुलना में पीएम मोदी के जीतने का प्रतिशत सात फीसदी अधिक हो सकता है, जबकि एक तिहाई से अधिक लोग चाहते हैं कि वह देश का नेतृत्व फिर से करें। बता दें कि ये सर्वे नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में लोकनीति अनुसंधान कार्यक्रम के तहत किया गया था।
दरअसल, 24 मार्च से 31 मार्च तक सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में लोकनीति अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा आयोजित सर्वेक्षण में देश के कुल 29 राज्यों में से 19 राज्यों के करीब 10,010 लोगों से बात की गई। जिसमें बताया गया है कि मोदी सरकार ने 7 जनवरी और 26 फरवरी के बीच जो निर्णय लिया है, उससे चुनाव की दिशा बदली जा सकती है। बता दें कि देश में 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में मतदान होना है। चुनाव परिणाम 23 मई को घोषित किए जाएंगे। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि लोकप्रियता में वृद्धि और इसे सीटों में तब्दील करना दो अलग बातें हैं।
इन तीन मुद्दों से बढ़ी लोकप्रियताः सर्वे के मुताबिक साल 2019 की पहली तिमाही में बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने भारत द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत कोटा देने का फैसला किया गया। इसके बाद किसानों के बैंक खातों में एक निश्चित राशि ट्रांसफर करने का वादा किया गया और पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर घुसकर एयर स्ट्राइक की गई। इन मुद्दों से पीएम मोदी की लोकप्रियता बहुत बढ़ी है। हालांकि सर्वे में काफी लोगों ने दबी जुबान से ये भी कहा कि फिर भी हमारे लिए बेरोजगारी, विकास आदि मुद्दे ही प्रमुख रहेंगे।
गौरतलब है कि लोकनीति सर्वे के मुताबिक मोदी सरकार के तीन लगातार फैसलों ने एयर स्ट्राइक, आरक्षण और किसानों को नकद पैसे ट्रांसफर का जितना असर लोगों के बीच हुआ है उतना असर कांग्रेस के वादों का नहीं हुआ है। चाहे वो पीएम मोदी पर राफेल सौदे में गड़बड़ी का आरोप हो या फिर कांग्रेस द्वारा गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी का आश्वासन देना हो।
|
Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किए एक गए सर्वे के मुताबिक भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक, नौकरियों में आरक्षण और किसानों के खातो में पैसे भेजे जाने जैसे तीन बड़े निर्णयों की वजह से पीएम नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है। सर्वे के मुताबिक करीब तैंतालीस फीसदी लोग चाहते हैं की मोदी फिर से पीएम बने और दो हज़ार चौदह के चुनावों की तुलना में पीएम मोदी के जीतने का प्रतिशत सात फीसदी अधिक हो सकता है, जबकि एक तिहाई से अधिक लोग चाहते हैं कि वह देश का नेतृत्व फिर से करें। बता दें कि ये सर्वे नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में लोकनीति अनुसंधान कार्यक्रम के तहत किया गया था। दरअसल, चौबीस मार्च से इकतीस मार्च तक सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में लोकनीति अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा आयोजित सर्वेक्षण में देश के कुल उनतीस राज्यों में से उन्नीस राज्यों के करीब दस,दस लोगों से बात की गई। जिसमें बताया गया है कि मोदी सरकार ने सात जनवरी और छब्बीस फरवरी के बीच जो निर्णय लिया है, उससे चुनाव की दिशा बदली जा सकती है। बता दें कि देश में ग्यारह अप्रैल से उन्नीस मई तक सात चरणों में मतदान होना है। चुनाव परिणाम तेईस मई को घोषित किए जाएंगे। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि लोकप्रियता में वृद्धि और इसे सीटों में तब्दील करना दो अलग बातें हैं। इन तीन मुद्दों से बढ़ी लोकप्रियताः सर्वे के मुताबिक साल दो हज़ार उन्नीस की पहली तिमाही में बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने भारत द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दस प्रतिशत कोटा देने का फैसला किया गया। इसके बाद किसानों के बैंक खातों में एक निश्चित राशि ट्रांसफर करने का वादा किया गया और पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर घुसकर एयर स्ट्राइक की गई। इन मुद्दों से पीएम मोदी की लोकप्रियता बहुत बढ़ी है। हालांकि सर्वे में काफी लोगों ने दबी जुबान से ये भी कहा कि फिर भी हमारे लिए बेरोजगारी, विकास आदि मुद्दे ही प्रमुख रहेंगे। गौरतलब है कि लोकनीति सर्वे के मुताबिक मोदी सरकार के तीन लगातार फैसलों ने एयर स्ट्राइक, आरक्षण और किसानों को नकद पैसे ट्रांसफर का जितना असर लोगों के बीच हुआ है उतना असर कांग्रेस के वादों का नहीं हुआ है। चाहे वो पीएम मोदी पर राफेल सौदे में गड़बड़ी का आरोप हो या फिर कांग्रेस द्वारा गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी का आश्वासन देना हो।
|
जालौन : नवनियुक्त एसपी रविकुमार ने जिले में अपराध पर लगाम और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप स लागू करना और जिले के प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाने की बात पहले दिन ही कह दी थी. जिले की पुलिस को आगाह करते हुए भी ठीक प्रकार से कार्य करने की सलाह दी थी.
इस क्रम में जिले की उरई कोतवाली पुलिस ने आरोपी सरीफ मोहमद से साढ़े चार कुंटल गांजा बरामद किया है. पुलिस ने यह बरामदगी सर्विलांस टीम के लगकार की ताकि इस गेंग का खुलासा हो सके कि यह लोग मादक पदार्थ कहाँ कहां भेजकर युवा पीढ़ी को बर्बाद करने का काम कर रहे है.
एसपी रविकुमार ने जिले की पुलिस को हिदायत देते हुए कहा कि अच्छे काम करने वाले पुलिसकर्मी पुरस्कृत किये जायेंगे जबकि गलत काम करते या किसी तरह की शिकायत मिलने पर आपके खिलाफ कार्यवाही करने में भी नहीं हिचकूंगा. वैसे पूरे जिले की पुलिस मेरा परिवार है. परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी है कि में जालौन में पुलिस और जनता के रिश्ते में एक नया आयाम स्थापित कर सकूं.
|
जालौन : नवनियुक्त एसपी रविकुमार ने जिले में अपराध पर लगाम और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप स लागू करना और जिले के प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाने की बात पहले दिन ही कह दी थी. जिले की पुलिस को आगाह करते हुए भी ठीक प्रकार से कार्य करने की सलाह दी थी. इस क्रम में जिले की उरई कोतवाली पुलिस ने आरोपी सरीफ मोहमद से साढ़े चार कुंटल गांजा बरामद किया है. पुलिस ने यह बरामदगी सर्विलांस टीम के लगकार की ताकि इस गेंग का खुलासा हो सके कि यह लोग मादक पदार्थ कहाँ कहां भेजकर युवा पीढ़ी को बर्बाद करने का काम कर रहे है. एसपी रविकुमार ने जिले की पुलिस को हिदायत देते हुए कहा कि अच्छे काम करने वाले पुलिसकर्मी पुरस्कृत किये जायेंगे जबकि गलत काम करते या किसी तरह की शिकायत मिलने पर आपके खिलाफ कार्यवाही करने में भी नहीं हिचकूंगा. वैसे पूरे जिले की पुलिस मेरा परिवार है. परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी है कि में जालौन में पुलिस और जनता के रिश्ते में एक नया आयाम स्थापित कर सकूं.
|
एसआईटी ने अदालत में दाखिल रिपोर्ट में घटनास्थल पर आशीष की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए गवाहों के बयानों का हवाला दिया गया।
एसआईटी ने आरोपपत्र में स्वतंत्र गवाहों द्वारा घटना की 24 तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो शूट की घटना के दिन की घटनाओं के क्रम को स्थापित करने के लिए शामिल किया था। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार को कथित रूप से कुचल दिया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य ने कार किसानों पर चढ़ा दी थी। लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के दौरान कुल आठ लोग मारे गए थे। एक अधिकारी ने कहा कि 17 वैज्ञानिक साक्ष्य, जिसमें तीन हथियारों की बैलिस्टिक रिपोर्ट के साथ-साथ छूटी हुई गोलियों की फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से बरामद किए गए जले हुए वाहन भी शामिल थे, चार्जशीट में जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी की कॉल डिटेल रिपोर्ट और मोबाइल लोकेशन को भी चार्जशीट में सहायक साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया था।
"इसके अलावा, एसआईटी ने मौके पर आशीष मिश्रा और अन्य की उपस्थिति साबित करने के लिए 208 चश्मदीद गवाहों और गवाहों के बयान शामिल किए थे। इनमें से 90 से अधिक गवाहों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए गए हैं ताकि वे बाद में अपने बयान से पीछे न हटें।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने कहा कि मामले में शुरुआती शिकायत में केवल आशीष मिश्रा और अज्ञात लोगों का नाम था। बाद की जांच के बाद, एसआईटी ने 13 आरोपियों को धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 307 (हत्या का प्रयास), 326 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना), 302 (हत्या) के तहत आरोप पत्र दायर किया। , 120B (आपराधिक साजिश), 427 (नुकसान पहुंचाना), 34 (सामान्य इरादे से किए गए कार्य) भारतीय दंड संहिता (IPC) और धारा 177 (जानबूझकर निर्देशों की अवहेलना करना) और मोटर वाहन अधिनियम की B177।
|
एसआईटी ने अदालत में दाखिल रिपोर्ट में घटनास्थल पर आशीष की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए गवाहों के बयानों का हवाला दिया गया। एसआईटी ने आरोपपत्र में स्वतंत्र गवाहों द्वारा घटना की चौबीस तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो शूट की घटना के दिन की घटनाओं के क्रम को स्थापित करने के लिए शामिल किया था। इस घटना में चार किसानों और एक पत्रकार को कथित रूप से कुचल दिया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य ने कार किसानों पर चढ़ा दी थी। लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा के दौरान कुल आठ लोग मारे गए थे। एक अधिकारी ने कहा कि सत्रह वैज्ञानिक साक्ष्य, जिसमें तीन हथियारों की बैलिस्टिक रिपोर्ट के साथ-साथ छूटी हुई गोलियों की फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से बरामद किए गए जले हुए वाहन भी शामिल थे, चार्जशीट में जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी की कॉल डिटेल रिपोर्ट और मोबाइल लोकेशन को भी चार्जशीट में सहायक साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया था। "इसके अलावा, एसआईटी ने मौके पर आशीष मिश्रा और अन्य की उपस्थिति साबित करने के लिए दो सौ आठ चश्मदीद गवाहों और गवाहों के बयान शामिल किए थे। इनमें से नब्बे से अधिक गवाहों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किए गए हैं ताकि वे बाद में अपने बयान से पीछे न हटें। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने कहा कि मामले में शुरुआती शिकायत में केवल आशीष मिश्रा और अज्ञात लोगों का नाम था। बाद की जांच के बाद, एसआईटी ने तेरह आरोपियों को धारा एक सौ सैंतालीस , एक सौ अड़तालीस , एक सौ उनचास , तीन सौ सात , तीन सौ छब्बीस , तीन सौ दो के तहत आरोप पत्र दायर किया। , एक सौ बीसB , चार सौ सत्ताईस , चौंतीस भारतीय दंड संहिता और धारा एक सौ सतहत्तर और मोटर वाहन अधिनियम की Bएक सौ सतहत्तर।
|
परिभाषा के अनुसार, विकिपीडिया विश्व विश्वकोश से, मिट्टी का रंग, भूरे रंग का लाल रंग की छाया है।
इस मौसम में कपड़े, सहायक उपकरण और पाठ्यक्रम में फिर से लोकप्रिय है ... बाल डाई में!
टेराकोट्टा रंग, हालांकि यह बिल्कुल स्पष्ट हैनाम, प्रथा में, बड़ी संख्या में रंग और विविधताएं हैं। सब समझने में कैसे? उदाहरण के लिए, टेराकोटा बाल का रंग लें सबसे रंग निर्माताओं का क्या मतलब है? भूरे रंग से चमकदार लाल रंग की पूरी रेंज! पीछे पीछे नहीं रहें और कपड़ों के निर्माताओं - कम स्वाधीनताएं हैं, लेकिन कोई भी मादक द्रव्यों के सटीक समकक्ष नहीं देगा। इस प्रकार, मिट्टी का रंग लाल-भूरे रंग के दस्ताने और एक ईंट-रंगीन पोशाक दोनों है। यह आंकड़ा जाओ!
हालांकि, हम विषय से विचलित नहीं होंगे और बालों के लिए छाया के रूप में टेराकोटा रंग में खोदेंगे। यह कैसा दिखता है, इसके साथ क्या जुड़ता है और इसके आस-पास के लोगों की धारणा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
तो, मिट्टी का रंग फैशन में वापस आ गया है सच्ची टेराकोटा इसकी गहराई और परिष्कार से प्रेरित है। यह रंग क्लासिक सुरुचिपूर्ण शैली और जयजयकार से बरामद बाल दोनों के लिए एकदम सही है।
टेराकोटा का महान लाभ यह है कि इसकी हल्की रंगों से हल्की त्वचा ताज़ा हो जाती है, और अंधेरे गहरे रंग के लिए उत्कृष्ट होते हैं।
टेराकोट्टा रंग इस तरह के साथ संयोजित रूप से संयुक्त हैहरे, हल्के नारंगी, पीले, भूरे रंग के पीले, काले रंगों। लिपस्टिक में आप उज्ज्वल लाल टोन और एक प्राकृतिक-बेज रंग पैलेट के रंगों का उपयोग कर सकते हैं। टेराकोटा स्वयं "गर्म" रंगों को संदर्भित करता है, इसलिए इसके साथ संयोजन उसी श्रेणी से चुना जाना चाहिए।
ठीक है, जैसा कि वे कहते हैं, सौंदर्य की आवश्यकता है बलिदान जब बालों का एक टेराकोटा रंग चुनते हैं, तो इस तथ्य के लिए तैयार रहें कि आपको बहुत अधिक बार टिंट करना होगा, अतिप्रवाह युक्तियों का उल्लेख नहीं करना चाहिए। इस तरह के रंगों के लिए विशेष शैंपू और राइंसर्स द्वारा महान समर्थन प्रदान किया जा सकता है - इस मामले में, उन्हें उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए।
और अंत में अपने स्वास्थ्य के बारे में मत भूलो - लाल रंगों में सबसे कार्सिनोजेनिक होते हैं, इसलिए आपके बाल को हर तीन सप्ताह में एक बार डाई जाने का नियम अभी तक रद्द नहीं किया गया है।
|
परिभाषा के अनुसार, विकिपीडिया विश्व विश्वकोश से, मिट्टी का रंग, भूरे रंग का लाल रंग की छाया है। इस मौसम में कपड़े, सहायक उपकरण और पाठ्यक्रम में फिर से लोकप्रिय है ... बाल डाई में! टेराकोट्टा रंग, हालांकि यह बिल्कुल स्पष्ट हैनाम, प्रथा में, बड़ी संख्या में रंग और विविधताएं हैं। सब समझने में कैसे? उदाहरण के लिए, टेराकोटा बाल का रंग लें सबसे रंग निर्माताओं का क्या मतलब है? भूरे रंग से चमकदार लाल रंग की पूरी रेंज! पीछे पीछे नहीं रहें और कपड़ों के निर्माताओं - कम स्वाधीनताएं हैं, लेकिन कोई भी मादक द्रव्यों के सटीक समकक्ष नहीं देगा। इस प्रकार, मिट्टी का रंग लाल-भूरे रंग के दस्ताने और एक ईंट-रंगीन पोशाक दोनों है। यह आंकड़ा जाओ! हालांकि, हम विषय से विचलित नहीं होंगे और बालों के लिए छाया के रूप में टेराकोटा रंग में खोदेंगे। यह कैसा दिखता है, इसके साथ क्या जुड़ता है और इसके आस-पास के लोगों की धारणा पर क्या प्रभाव पड़ता है? तो, मिट्टी का रंग फैशन में वापस आ गया है सच्ची टेराकोटा इसकी गहराई और परिष्कार से प्रेरित है। यह रंग क्लासिक सुरुचिपूर्ण शैली और जयजयकार से बरामद बाल दोनों के लिए एकदम सही है। टेराकोटा का महान लाभ यह है कि इसकी हल्की रंगों से हल्की त्वचा ताज़ा हो जाती है, और अंधेरे गहरे रंग के लिए उत्कृष्ट होते हैं। टेराकोट्टा रंग इस तरह के साथ संयोजित रूप से संयुक्त हैहरे, हल्के नारंगी, पीले, भूरे रंग के पीले, काले रंगों। लिपस्टिक में आप उज्ज्वल लाल टोन और एक प्राकृतिक-बेज रंग पैलेट के रंगों का उपयोग कर सकते हैं। टेराकोटा स्वयं "गर्म" रंगों को संदर्भित करता है, इसलिए इसके साथ संयोजन उसी श्रेणी से चुना जाना चाहिए। ठीक है, जैसा कि वे कहते हैं, सौंदर्य की आवश्यकता है बलिदान जब बालों का एक टेराकोटा रंग चुनते हैं, तो इस तथ्य के लिए तैयार रहें कि आपको बहुत अधिक बार टिंट करना होगा, अतिप्रवाह युक्तियों का उल्लेख नहीं करना चाहिए। इस तरह के रंगों के लिए विशेष शैंपू और राइंसर्स द्वारा महान समर्थन प्रदान किया जा सकता है - इस मामले में, उन्हें उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए। और अंत में अपने स्वास्थ्य के बारे में मत भूलो - लाल रंगों में सबसे कार्सिनोजेनिक होते हैं, इसलिए आपके बाल को हर तीन सप्ताह में एक बार डाई जाने का नियम अभी तक रद्द नहीं किया गया है।
|
मेहरानगढ़ किला जिसको मेहरान किले के रूप में भी जाना जाता है। इस किले को 1459 में राव जोधा द्वारा जोधपुर में बनवाया गया था। यह किला देश के सबसे बड़े किलों में से एक है और 410 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है। इस किले का प्रवेश द्वार एक पहाड़ी के ऊपर है जो बेहद शाही है। किले में सात द्वार हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, फतेह गेट, मार्टी गेट और लोहा गेट के नाम शामिल है।
मेहरान का अर्थ सूर्य है इसलिए राठोरों ने अपने मुख्य देवता सूर्य के नाम से इस किले को मेहरानगढ़ किले के रूप में नामित किया। इस किले के मुख्य निर्माण के बाद जोधपुर के अन्य शासकों मालदेव महाराजा, अजीत सिंह महाराजा, तखत सिंह और महाराजा हनवंत सिंह द्वारा इस किले में अन्य निर्माण किए, मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण के समय एक व्यक्ति की स्वैच्छिक बलि चाहिए थी जिसके लिए राजाराम मेघवाल ने स्वैच्छिक बलि दी थी ।
500 साल की अवधि में मेहरानगढ़ किले और महलों को बनाया गया था। किले की वास्तुकला में आप 20 वीं शताब्दी की वास्तुकला की विशेषताओं के साथ 5 वीं शताब्दी की बुनियादी वास्तुकला शैली को भी देख सकते हैं। किले में 68 फीट चौड़ी और 117 फीट लंबी दीवारें है। मेहरानगढ़ किले में सात द्वार हैं जिनमें से जयपोली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। किले की वास्तुकला 500 वर्षों की अवधि के विकास से गुजरी है। किले की दीवारों पर जटिल नक्काशी, विशाल प्रांगण, संग्रहालय और दीर्घाएं दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। किले के भीतर, शीश महल और फूल महल जैसे शानदार महल हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण बने हुए है।
|
मेहरानगढ़ किला जिसको मेहरान किले के रूप में भी जाना जाता है। इस किले को एक हज़ार चार सौ उनसठ में राव जोधा द्वारा जोधपुर में बनवाया गया था। यह किला देश के सबसे बड़े किलों में से एक है और चार सौ दस फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है। इस किले का प्रवेश द्वार एक पहाड़ी के ऊपर है जो बेहद शाही है। किले में सात द्वार हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, फतेह गेट, मार्टी गेट और लोहा गेट के नाम शामिल है। मेहरान का अर्थ सूर्य है इसलिए राठोरों ने अपने मुख्य देवता सूर्य के नाम से इस किले को मेहरानगढ़ किले के रूप में नामित किया। इस किले के मुख्य निर्माण के बाद जोधपुर के अन्य शासकों मालदेव महाराजा, अजीत सिंह महाराजा, तखत सिंह और महाराजा हनवंत सिंह द्वारा इस किले में अन्य निर्माण किए, मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण के समय एक व्यक्ति की स्वैच्छिक बलि चाहिए थी जिसके लिए राजाराम मेघवाल ने स्वैच्छिक बलि दी थी । पाँच सौ साल की अवधि में मेहरानगढ़ किले और महलों को बनाया गया था। किले की वास्तुकला में आप बीस वीं शताब्दी की वास्तुकला की विशेषताओं के साथ पाँच वीं शताब्दी की बुनियादी वास्तुकला शैली को भी देख सकते हैं। किले में अड़सठ फीट चौड़ी और एक सौ सत्रह फीट लंबी दीवारें है। मेहरानगढ़ किले में सात द्वार हैं जिनमें से जयपोली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। किले की वास्तुकला पाँच सौ वर्षों की अवधि के विकास से गुजरी है। किले की दीवारों पर जटिल नक्काशी, विशाल प्रांगण, संग्रहालय और दीर्घाएं दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। किले के भीतर, शीश महल और फूल महल जैसे शानदार महल हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण बने हुए है।
|
जॉब, डेस्क रिपोर्ट। सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri 2021)की तलाश (job search 2021) कर रहे शिक्षित बेरोजगार युवाओं (unemployed youth) के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार (Indian Government) के अधीन आने वाली कंपनी NMDC लिमिटेड ने अपनी वेबसाइट nmdc. co. in पर भर्ती निकाली है। NMDC ने कोलियरी इंजीनियर, लाइजनिंग ऑफिसर, माइनिंग इंजीनियर, सर्वेयर, इलेक्ट्रिकल ओवरमैन, माइन ओवरमैन, मैकेनिकल ओवरमैन और माइन सरदार के कुल 89 पदों पर भर्ती निकाली है।
NMDC में जाने के इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन (Onilne) मोड के माध्यम से 22 जून 2021 तक आधिकारिक वेबसाइट nmdc. co. in पर या सीधे नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 02 जून से शुरू हो चुके है।
योग्यता- इन पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स के पास मैकेनिकल/माइनिंग मशीनरी में इंजीनियरिंग डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा 10वीं पास कैंडिडेट्स भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पदानुसार योग्यता की जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देखें।
आयु सीमा- आवेदन की उम्र 65 साल के अंदर होनी चाहिए। आयु सीमा से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं।
चयन प्रक्रिया -सिलेक्शन रिटन टेस्ट, स्किल टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट विजिट कर सकते हैं।
सैलरी- सिलेक्ट हुए कैंडिडेट्स को हर महीने 40,000 रुपए से लेकर 90,000 रुपए तक की सैलरी दी जाएगी।
ऐसे करें आवेदन- इच्छुक और योग्य कैंडिडेट्स इन पदों के लिए NMDC लिमिटेड की ऑफिशियल वेबसाइट www. nmdc. co. in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं।
|
जॉब, डेस्क रिपोर्ट। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार के अधीन आने वाली कंपनी NMDC लिमिटेड ने अपनी वेबसाइट nmdc. co. in पर भर्ती निकाली है। NMDC ने कोलियरी इंजीनियर, लाइजनिंग ऑफिसर, माइनिंग इंजीनियर, सर्वेयर, इलेक्ट्रिकल ओवरमैन, माइन ओवरमैन, मैकेनिकल ओवरमैन और माइन सरदार के कुल नवासी पदों पर भर्ती निकाली है। NMDC में जाने के इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन मोड के माध्यम से बाईस जून दो हज़ार इक्कीस तक आधिकारिक वेबसाइट nmdc. co. in पर या सीधे नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इन पदों के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस दो जून से शुरू हो चुके है। योग्यता- इन पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स के पास मैकेनिकल/माइनिंग मशीनरी में इंजीनियरिंग डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा दसवीं पास कैंडिडेट्स भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पदानुसार योग्यता की जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देखें। आयु सीमा- आवेदन की उम्र पैंसठ साल के अंदर होनी चाहिए। आयु सीमा से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं। चयन प्रक्रिया -सिलेक्शन रिटन टेस्ट, स्किल टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। सैलरी- सिलेक्ट हुए कैंडिडेट्स को हर महीने चालीस,शून्य रुपयापए से लेकर नब्बे,शून्य रुपयापए तक की सैलरी दी जाएगी। ऐसे करें आवेदन- इच्छुक और योग्य कैंडिडेट्स इन पदों के लिए NMDC लिमिटेड की ऑफिशियल वेबसाइट www. nmdc. co. in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं।
|
भारत में वायरस कोरोना से संक्रमण के मामले में हर दिन नया रिकाॅर्ड बन रहा है और पिछले 24 घंटों में लगभग 23 हज़ार नए मरीज़ सामने आए हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि ने एकपक्षीय पाबंदियों को रद्द करने की मांग की है कि जिनकी वजह से दोशों को कोरोना से निपटने में मुश्किल पेश आ रही है।
ईरान में 1 लाख 96 हज़ार से ज़्यादा लोग करोना वायरस से ठीक हो चुके हैं।
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक अजीब ट्वीट में अपने देश में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या में वृद्धि का स्वागत किया है।
भारत में घातक वायरस कोरोना से संक्रमण के मामले सवा छः लाख से ज़्यादा हो गए हैं और पिछले 24 घंटों में लगभग 21 हज़ार नए मामले सामने आए हैं।
कोरोना वायरस फैलने की वजह से बंद किए गए देश के सभी स्मारक 6 जुलाई से खुल जाएंगे।
रुस ने " एवीफेवीर " नाम की कोरोना की दवा निर्यात आरंभ कर दिया है।
ईरान में 1 लाख 94 हज़ार से ज़्यादा लोग करोना वायरस से ठीक हो चुके हैं।
|
भारत में वायरस कोरोना से संक्रमण के मामले में हर दिन नया रिकाॅर्ड बन रहा है और पिछले चौबीस घंटाटों में लगभग तेईस हज़ार नए मरीज़ सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि ने एकपक्षीय पाबंदियों को रद्द करने की मांग की है कि जिनकी वजह से दोशों को कोरोना से निपटने में मुश्किल पेश आ रही है। ईरान में एक लाख छियानवे हज़ार से ज़्यादा लोग करोना वायरस से ठीक हो चुके हैं। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक अजीब ट्वीट में अपने देश में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या में वृद्धि का स्वागत किया है। भारत में घातक वायरस कोरोना से संक्रमण के मामले सवा छः लाख से ज़्यादा हो गए हैं और पिछले चौबीस घंटाटों में लगभग इक्कीस हज़ार नए मामले सामने आए हैं। कोरोना वायरस फैलने की वजह से बंद किए गए देश के सभी स्मारक छः जुलाई से खुल जाएंगे। रुस ने " एवीफेवीर " नाम की कोरोना की दवा निर्यात आरंभ कर दिया है। ईरान में एक लाख चौरानवे हज़ार से ज़्यादा लोग करोना वायरस से ठीक हो चुके हैं।
|
देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जन्म 2 अक्टूबर (2 October) 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. शास्त्री जी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को अपना गुरु मानते थे. उन्हें गांधी जी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते कुल सात वर्षों की जेल हुई थी. गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले शास्त्री देश के रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे.
नेहरू जी के निधन के बाद वह 1964 में देश के प्रधानमंत्री बने. लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) ने 'जय जवान जय किसान' (Jai Jawan Jai Kisan) का नारा दिया था. उनके इस नारे के पीछे बड़ी ही दिलचस्प कहानी है. जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने तब देश में खाने का संकट था. उस समय देश में भयंकर सूखा पड़ा और खाने की चीजों को निर्यात किया जाने लगा. इसी दौरान 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ.
भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के हमलों का जोरदार जवाब दिया भारतीय सेना लाहौर के हवाई अड्डे पर हमला करने की सीमा के भीतर पहुंच गयी थी. घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिए कुछ समय के लिए युद्धविराम की अपील की. उस समय हम अमेरिका की पीएल-480 स्कीम के तहत हासिल लाल गेहूं खाने को बाध्य थे. अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने शास्त्री जी को कहा कि अगर युद्ध नहीं रुका तो गेहूं का निर्यात बंद कर दिया जाएगा. वहीं, शास्त्री जी ने कहा- बंद कर दीजिए गेहूं देना.
इसके बाद अक्टूबर 1965 में दशहरे के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में शास्त्री जी ने देश की जनता को संबोधित किया. उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की. साथ ही कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए उन्होंने पहली बार 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया. शास्त्री जी का ये नारा जवान एवं किसान के श्रम को दर्शाता है.
|
देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ चार को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. शास्त्री जी महात्मा गांधी को अपना गुरु मानते थे. उन्हें गांधी जी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते कुल सात वर्षों की जेल हुई थी. गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले शास्त्री देश के रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे. नेहरू जी के निधन के बाद वह एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में देश के प्रधानमंत्री बने. लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया था. उनके इस नारे के पीछे बड़ी ही दिलचस्प कहानी है. जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने तब देश में खाने का संकट था. उस समय देश में भयंकर सूखा पड़ा और खाने की चीजों को निर्यात किया जाने लगा. इसी दौरान एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के हमलों का जोरदार जवाब दिया भारतीय सेना लाहौर के हवाई अड्डे पर हमला करने की सीमा के भीतर पहुंच गयी थी. घबराकर अमेरिका ने अपने नागरिकों को लाहौर से निकालने के लिए कुछ समय के लिए युद्धविराम की अपील की. उस समय हम अमेरिका की पीएल-चार सौ अस्सी स्कीम के तहत हासिल लाल गेहूं खाने को बाध्य थे. अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने शास्त्री जी को कहा कि अगर युद्ध नहीं रुका तो गेहूं का निर्यात बंद कर दिया जाएगा. वहीं, शास्त्री जी ने कहा- बंद कर दीजिए गेहूं देना. इसके बाद अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में दशहरे के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में शास्त्री जी ने देश की जनता को संबोधित किया. उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की. साथ ही कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए उन्होंने पहली बार 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया. शास्त्री जी का ये नारा जवान एवं किसान के श्रम को दर्शाता है.
|
प्यार की कोई भाषा नहीं होती है। जब दो लोगों में प्यार होता है तो वो झलक ही जाता है। आपने इंसान का इंसान से या फिर जानवर से प्यार का वीडियो देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक वीडियो दिखाने जा रहे हैं, वो सबसे ज्यादा क्यूट है। इसमें एक छोटा सा डॉग मछली के साथ प्यार करता नजर आया। जी हां, ये मछली भी खुद को प्यार करवाने के लिए पानी से बाहर आ जाती है। इसके बाद दुलार लगवाकर वापस पानी में चली जाती है।
इस क्यूट से वीडियो को देखकर आपका खराब दिन भी अच्छा बन जाएगा। एक मछली और डॉग के बीच का ये रिश्ता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो र्था है। वीडियो में सफ़ेद रंग के एक कुत्ते के बच्चे के साथ एक काली रंग की मछली नजर आई। ये दोनों ही एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं। तभी तो मछली भी पानी से निकल कर खुद को प्यार करवाने आती है। इसके बाद डॉग काफी देर तक मछली को चाटता है। उसे प्यार करता है।
आमतौर पर अगर डॉग को मछली दिख जाए, तो शायद वो उसे खा जाए। या फिर उसे तड़पाकर मार दे। लेकिन आज हम जो वीडियो आपको दिखाने जा रहे हैं,उसमें ऐसा कुछ नहीं हुआ। डॉग और मछली दोनों ही एक-दूसरे से काफी प्यार करते हैं। मछली हर रोज खुद को प्यार करवाने के लिए पानी से बाहर आती है। इसके बाद चट्टान पर थोड़ी देर के लिए दोनों एक-दूसरे को किस करते हैं। साथ ही डॉग मछली को अच्छे से चाटता और चूमता है। जब दोनों काफी देर प्यार कर लेते हैं, उसके बाद फिश वापस पानी में चली जाती है।
फिश और डॉगी के प्यार का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया गया। इसे इंस्टाग्राम पर kameshsonekar नाम के शख्स ने शेयर किया। क्यूट लवर्स के कैप्शन के साथ शेयर इस वीडियो को अभी तक लाखों बार देखा जा चुका है। इसी के साथ इसे लाखों लाइक्स भी मिल चुके हैं। लोगों को ये प्यार काफी पसंद आया। कई ने इसपर हार्ट इमोजी कमेंट किया। वहीं एक शख्स ने लिखा कि डॉग ये चेक कर रहा था कि वो मछली को खा सकता है या नहीं? अब चाहे जो भी हो, इस क्यूट वीडियो ने लोगों का काफी मनोरंजन कर दिया है।
|
प्यार की कोई भाषा नहीं होती है। जब दो लोगों में प्यार होता है तो वो झलक ही जाता है। आपने इंसान का इंसान से या फिर जानवर से प्यार का वीडियो देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक वीडियो दिखाने जा रहे हैं, वो सबसे ज्यादा क्यूट है। इसमें एक छोटा सा डॉग मछली के साथ प्यार करता नजर आया। जी हां, ये मछली भी खुद को प्यार करवाने के लिए पानी से बाहर आ जाती है। इसके बाद दुलार लगवाकर वापस पानी में चली जाती है। इस क्यूट से वीडियो को देखकर आपका खराब दिन भी अच्छा बन जाएगा। एक मछली और डॉग के बीच का ये रिश्ता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो र्था है। वीडियो में सफ़ेद रंग के एक कुत्ते के बच्चे के साथ एक काली रंग की मछली नजर आई। ये दोनों ही एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं। तभी तो मछली भी पानी से निकल कर खुद को प्यार करवाने आती है। इसके बाद डॉग काफी देर तक मछली को चाटता है। उसे प्यार करता है। आमतौर पर अगर डॉग को मछली दिख जाए, तो शायद वो उसे खा जाए। या फिर उसे तड़पाकर मार दे। लेकिन आज हम जो वीडियो आपको दिखाने जा रहे हैं,उसमें ऐसा कुछ नहीं हुआ। डॉग और मछली दोनों ही एक-दूसरे से काफी प्यार करते हैं। मछली हर रोज खुद को प्यार करवाने के लिए पानी से बाहर आती है। इसके बाद चट्टान पर थोड़ी देर के लिए दोनों एक-दूसरे को किस करते हैं। साथ ही डॉग मछली को अच्छे से चाटता और चूमता है। जब दोनों काफी देर प्यार कर लेते हैं, उसके बाद फिश वापस पानी में चली जाती है। फिश और डॉगी के प्यार का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया गया। इसे इंस्टाग्राम पर kameshsonekar नाम के शख्स ने शेयर किया। क्यूट लवर्स के कैप्शन के साथ शेयर इस वीडियो को अभी तक लाखों बार देखा जा चुका है। इसी के साथ इसे लाखों लाइक्स भी मिल चुके हैं। लोगों को ये प्यार काफी पसंद आया। कई ने इसपर हार्ट इमोजी कमेंट किया। वहीं एक शख्स ने लिखा कि डॉग ये चेक कर रहा था कि वो मछली को खा सकता है या नहीं? अब चाहे जो भी हो, इस क्यूट वीडियो ने लोगों का काफी मनोरंजन कर दिया है।
|
चार्य ने महाकवियों की उक्ति में श्रभिधेवार्थ के प्रतिरिक्त प्रतीयमानार्थ को आवश्यकता मानी है। उन्होंके व्याख्याता अभिनव गुप्त ने इसका स्पष्टीकरण करते हुए प्रतीयमानार्थ के नियोजन की क्षमता रखने वाले कवि को महाकवि कह दिया है। यहाँ पर इन प्राचार्यों का अभिप्राय इसमें नहीं हूँ कि मुक्तक रचना करनेवाला भी महाकवि हो सकता है। इन दोनों ने तो काव्य में ध्वनि
और रस की प्रधानता का प्रतिपादन भर किया है। उसका तात्पर्य तो केवल इतने से हो प्रतीत होता है कि केवल शास्त्रीय नियमों के निर्वाह-मात्र से महाकवि पद का अधिकारी नहीं हो सकता। उसे अपने काव्य में 'प्रतीयमानायें' की, जो इन दोनों प्राचार्यों को दृष्टि से काव्य को प्रात्मा है, प्रतिष्ठा करने की भी नितान्त आवश्यकता है। ध्वनिकार और अभिनव गुप्त ने महाकवि होने के लिए प्रबन्ध-काव्य की रचना श्रावश्यक नहीं मानी है । पर यह तो कवित्व-शक्ति का सामान्य परिचय है । इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनको यह भेद मान्य नहीं । यह भी हो सकता है कि ऐसा भेद परवर्तीहै काल में अधिक मान्य रहा हो और यही परम्परा हिन्दी में मान्य हो गई हो । पर इस रूढ़िवादिता का खंडन समयानुकूल ही था । आचार्य पद्मसिंह को इस धारणा के पीछे युग को धारणा है। कुछ दिन पूर्व चाहे उसे सूर को भी महाकवि कहने में हिचकिचाहट का अनुभव होता रहा हो। पर पन्त, निराला श्रादि को महाकवि पद से अलंकृत करने के मोह का आज का आलोचक नहीं कर पा रहा है। संस्कृत के कुछ प्राचार्यों ने चाहे महाकवि शब्द को कुछ नियमों में जकड़ दिया हो, पर जन-साधारण तथा कतिपय प्रगति प्रिय प्राचार्यों को यह कैद कभी स्वीकृत नहीं रही है । अपने प्रिय कवियों को महाकवि कहने के अधिकार को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। 'गीत गोविन्द', 'अमर शतक', 'श्रार्यासप्तशती', 'गाथा सप्तशती -जैसी रचनाओं के प्रणेता प्रबन्धकार न होते हुए भो महाकवि माने जाते रहे होंगे। रीति-काल में यह भेद व्यवहार में स्वीकृत नहीं हुआ है। आधुनिक युग भी इस भेद को मानकर नहीं चल सकता है । इस प्रकार प्राचार्य पद्मसिंह जी को यह धारणा युग की प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करने वाली है। इतना ही नहीं बिहारी तथा अन्य मुक्तक काव्य के रचयिताओं का सम्यक् अध्ययन र महत्त्व दर्शन के लिए ऐसी धारणा नितान्त आवश्यक भी थी । मुक्तक और प्रबन्ध के आधार पर फैली हुई इस भ्रान्त धारणा का निवारण करके प्राचार्य ने आलोचक रूप की महत्ता का परिचय दिया है ।
हिन्दी का प्राधुनिक साहित्य बहुत कुछ रीतिकालीन काव्य-परम्पराओं को का परिणाम है । रीति-काल में शृंगार रस के चित्ररण की नग्नता
और अतिशयता के प्रति श्राज के समाज में एक तीव्र प्ररुचि जागृत हो गई घो। लोग उसकी कविता को अश्लील फहफर उससे नाक-भौं सिकोड़ने लगे घे । बिहारी को कविता के सम्बन्ध में प्रालोचकों को जो धारणा बन गई थी, उनके काव्य-सौष्ठव का मूल्य इन छालोचकों की दृष्टि में कम हो गया था ; इसका एक फारण प्रभिसार, रति श्रादि के वन को प्रश्लील मानना भी था । बिहारो की कविता के वास्तविक महत्व को समझने के लिए शृंगार सम्बन्धी इस भ्रान्त धारणा का निवारण करना भी बहुत आवश्यक था। इसी उद्देश्य से प्राचार्य ने शृंगार रस के महत्त्व का भी प्रतिपादन किया है। उनका कहना है कि इस विश्व में शृंगार सम्बन्धी सामग्री उपलब्ध होती है और फवि उसको ओर से प्रांख बन्द नहीं कर सकता है । इस तथाकथित अश्लीलता का वर्णन वेदों तक में मिलता है। इस सम्बन्ध में पंडितजी ने राजशेखर को प्रमाण रूप में उद्धृत किया है ।" शर्माजी को परकीयादि के चित्रण अश्लील तो प्रतीत होते हैं पर कवि का उद्देश्य पाठक को ऐसे वनों द्वारा नीति-भ्रष्ट करना न होकर यदि इन धूर्त सौतामों से उन्हें परिचित कराके सभ्य समाज की इन दुर्गुणों से रक्षा करना हो तो वे उसे भी इलील मानते है । शर्मा जी ने अपने इस मत की पुष्टि के लिए भी द्रंट के काव्यालंकार के मत का श्राश्रय लिया है ।
बिहारी के फाव्य-सौष्ठव के सम्बन्ध में मिश्रवन्धुत्रों की श्रालोचना ने कतिपय भ्रान्त धाररात्रों को प्रोत्साहन दे दिया था। ऐसो धारणाओं का उच्छे• दन करना किसी भी सच्चे समालोचक का कार्य था। बिहारी के मान, गौरव, प्रतिष्ठा और यश की दृष्टि से हो नहीं श्रपितु साहित्य-जगत् को प्रमूल्य निधि के संरक्षरण तथा सहृदय पाठकों को बिहारी के कला-सौन्दर्य से परिचित कराकर शर्माजी ने श्रालोचना - क्षेत्र का एक महान कार्य किया है । कतिपय कटु, पक्षपात और प्रसहृदयतापूर्ण श्रालोचनाओं के घटाटोप को हटाने के लिए तीव्र पवन वेग की श्रावश्यकता थी और इसकी पूर्ति श्राचार्य ने कर दी है। उनके इस प्रयास से बिहारी के चन्द्र का पुनः सहृदयों को सुवा-पान का अवसर प्राप्त हो गया था। इस कार्य के लिए साहित्य को कतिपय सामान्य भ्रान्त धारणाओं का उन्मूलन भी बहुत श्रावश्यक था, इसीलिए मौलिकता, महाकवि और शृंगार रस की उपादेयता के सम्बन्ध में विशद और बहुत कुछ प्रगतिवादी दृष्टिकोण अपनाने के लिए शर्माजो बाध्य हुए थे ।
१. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ ६ । २ वही प ७ ।
चार्य ने महाकवियों को उक्ति में श्रभिधेयायें के अतिरिक्त प्रतीयमानाय की आवश्यकता मानी है । उन्होंके व्याख्याता अभिनय गुप्त ने इसका स्पष्टीकरण करते हुए प्रतीयमानार्य के नियोजन की क्षमता रखने वाले कवि को महाकवि कह दिया है। यहाँ पर इन श्राचार्यो का अभिप्राय इसमें नहीं है कि मुक्तक रचना करनेवाला भी महाकवि हो सकता है। इन दोनों प्रशाओं ने तो काव्य ध्वनि और रस को प्रधानता का प्रतिपादन भर किया है। उसका तात्पर्य तो केवल इतने से हो प्रतीत होता है कि केवल शास्त्रीय नियमों के निर्वाह-मात्र से महाकवि पद का अधिकारी नहीं हो सकता। उसे अपने काव्य में प्रतोयमानायें' की, जो इन दोनों प्राचार्यों की दृष्टि से काव्य की आत्मा है, प्रतिष्ठा करने की भी नितान्त श्रावश्यकता है। ध्वनिकार और अभिनव गुप्त ने महाकवि होने के लिए प्रबन्ध-काव्य की रचना श्रावश्यक नहीं मानी है । पर यह तो कवित्व-शक्ति का सामान्य परिचय है । इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनको यह भेद मान्य नहीं। यह भी हो सकता है कि ऐसा भेद परवर्तीकाल में अधिक मान्य रहा हो और यही परम्परा हिन्दी में मान्य हो गई हो । पर इस रूढ़िवादिता का खंडन समयानुकूल हो था। प्राचार्य पद्मसिंह की इस धारणा के पीछे युग की धारणा है। कुछ दिन पूर्व चाहे उसे सूर को भी महाकवि कहने में हिचकिचाहट का अनुभव होता रहा हो। पर पत्त, निराला श्रादि को महाकवि पद से अलंकृत करने के मोह का संवरण श्राज का आलोचक नहीं . कर पा रहा है । संस्कृत के कुछ प्राचार्यों ने चाहे महाकवि शब्द को कुछ नियमों में जकड़ दिया हो, पर जन-साधारण तथा कतिपय प्रगति प्रिय प्राचार्यों को यह कैद कभी स्वीकृत नहीं रही है। अपने प्रिय कवियों को महाकवि कहने के अधिकार को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। 'गीत गोविन्द', 'अमरु शतक', 'थार्यासप्तशती', 'गाथा सप्तशती -जैसी रचनाओं के प्ररणेता प्रबन्धकार न होते हुए भी महाकवि माने जाते रहे होंगे । रीति-काल में यह भेद व्यवहार में स्वीकृत नहीं हुआ है। आधुनिक युग भी इस भेद को मानकर नहीं चल सकता है । इस प्रकार प्राचार्य पद्मसिंह जो की यह धारणा युग की प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करने वाली है। इतना ही नहीं बिहारी तथा अन्य मुक्तक काव्य के रचयिताओं का सम्यक अध्ययन और महत्त्व- दर्शन के लिए ऐसी धारणा नितान्त आवश्यक भी थी । मुक्तक और प्रबन्ध के आधार पर फैली हुई इस भ्रान्त धारणा का निवारण करके प्राचार्य ने आलोचक रूप को महत्ता का परिचय दिया है ।
हिन्दी का श्राधुनिक साहित्य बहुत कुछ रीतिकालीन काव्य-परम्पराओं की प्रतिक्रियाओं का परिणाम है । रीति-काल में शृंगार रस के चित्ररण की नग्नता
और अतिशयता के प्रति श्राज के समाज में एक तीव्र प्रदचि जागृत हो गई थी। लोग उसको कविता को प्रश्लील कहकर उससे नाक-भौं सिकोड़ने लगे थे। बिहारी को कविता के सम्बन्ध में प्रालोचकों की जो धारणा बन गई थी, उनके काव्य-सौष्ठव का मूल्य इन झालोचकों की दृष्टि में कम हो गया था ; इसका एक कारण अभिसार, रति श्रादि के वरन को अश्लील मानना भी था। बिहारी की कविता के वास्तविक महत्व को समझने के लिए शृंगार सम्बन्धो इस भ्रान्त धारणा का निवारण करना भी बहुत आवश्यक था। इसी उद्देश्य से प्राचार्य ने शृंगार रस के महत्त्व का भी प्रतिपादन किया है। उनका कहना है कि इस विश्व में शृंगार सम्बन्धी सामग्री उपलब्ध होती है और कवि उसकी ओर से प्रांस बन्द नहीं कर सकता है । इस तथाकथित प्रश्लीलता का वर्णन वेदों तक में मिलता है। इस सम्बन्ध में पंडितजी ने राजशेखर को प्रमारण रूप में उद्धृ त किया है ।" शर्माजी को परकीयादि के चित्रण प्रश्लील तो प्रतीत होते हैं पर कवि का उद्देश्य पाठक को ऐसे वनों द्वारा नीति- भ्रष्ट करना न होकर यदि इन धूर्त लीलामों से उन्हें परिचित कराके सभ्य समाज को इन दुर्गुणों से रक्षा करना हो तो वे उसे भो श्लोल मानते है । शर्मा जी ने अपने इस मत की पुष्टि के लिए भी रुद्रट के काव्यालंकार के मत का श्राश्रय लिया है ।
बिहारी के काव्य-सौष्ठव के सम्बन्ध में मिश्रवन्धुत्रों को श्रालोचना ने कतिपय भ्रान्त धारणाओं को प्रोत्साहन दे दिया था। ऐसो धारणाओं का उच्छे• दन करना किसी भी सच्चे समालोचक का कार्य था । बिहारी के मान, गौरव, प्रतिष्ठा और यश की दृष्टि से हो नहीं अपितु साहित्य जगत् को प्रमूल्य निधि के संरक्षण तथा सहृदय पाठकों को बिहारी के फला-सौन्दर्य से परिचित कराकर शर्माजी ने श्रालोचना क्षेत्र का एक महान कार्य किया है । कतिपय कटु, पक्षपात और प्रसहृदयतापूर्ण प्रालोचनाओं के घटाटोप को हटाने के लिए तीव्र पवन वेग को श्रावश्यकता यो प्रौर इसको पूर्ति प्राचार्य ने कर दी है। उनके इस प्रयास से बिहारी के चन्द्र का पुनः सहृदयों को सुवा-पान का अवसर प्राप्त हो गया था। इस कार्य के लिए साहित्य को कतिपय सामान्य भ्रान्त धारणाओं का उन्मूलन भी बहुत श्रावश्यक था, इसीलिए मौलिकता, महाकवि और शृंगार रस की उपादेयता के सम्बन्ध में विशद और बहुत कुछ प्रगतिवादी दृष्टिकोरण अपनाने के लिए शर्माजो बाध्य हुए थे ।
१. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ ६ । २. वही, पृष्ठ ७ ।
जैसा कि ऊपर निर्देश हो चुका है, शर्माजो को तुलनात्मक समालोचना की एक शास्त्रीय पद्धति को जन्म देने का श्रेय है। मौलिकता के वास्तविक अर्य के स्पष्टीकरण के श्रनन्तर दो कवियों के विभिन्न स्वरूपों का शास्त्रीय प्राधार पर विभाग करना अपेक्षित था । कवियों के भाव-साम्य के सिद्धान्त को स्वीकार कर लेने के बाद हमारे प्राचीन श्राचार्य का उसके स्वरूप व उपभेद प्रादि का शास्त्रीय निरूपण न करना और पंडित जो-जैसे प्रकांड विद्वान् का उस विश्लेषरण से परिचित रह जाना कभी संभव ही नहीं था। पंडित जी ने यहां पर भी अपना उपजीव्य प्राचीन प्रलंकार-शास्त्र को ही बनाया है। प्रानन्दवर्द्धनाचार्य ने अपहरण के तीन भेदों की कल्पना की है --१. प्रतिविम्वित २. श्रालेख्यवत् ३. तुल्यदेहिवत् । राजशेखर ने इनमें 'परपुरप्रवेशप्रतिम्' नामक एक और भेद बढ़ा दिया है। इन भेदों की उपादेयता और हेयता पर भी विचार हुआ है । शर्माजी ने बिहारी के दोहों से 'गाया-सप्तशती' श्रादि के छन्दों से तुलना करते समय इन भेदों का उल्लेख किया है। बिहारी का दोहा 'में मिसहा सोचा समुझि मुँह चूम्यो ढिंग जाय' श्रमरुक के प्रसिद्ध श्लोक, 'शून्यं वासगृहे विलोक्य' का तुल्यदेहितुल्य है ।'
पंडित जो का उद्देश्य बिहारी को अन्य कवियों से श्रेष्ठता प्रतिपादित करना है। हिन्दी के प्रत्य कवियों से बिहारी भाव-सौन्दर्य में कहीं अधिक बढ़े हुए हैं, इसमें तो लेखक को कहीं संदेह ही नहीं है। उन्होंने संस्कृत कवियों से भी बिहारी को बढ़ा-चढ़ा हो बताया है । पंडित जो ने बिहारी और संस्कृतकवियों के सम्बन्ध को उपमान श्रौर उपमेय का सम्बन्ध बताया है। उनका कहना है कि संस्कृत के इन महाकवियों से बिहारी का भाव साम्य ही उसके काव्योत्कर्ष का परिचायक है । ऊपर जिस उपमेयोपमान के सम्बन्ध का निर्देश हुआ है, उससे संस्कृत के कवियों में बिहारी से कहीं अधिक सौन्दर्य है और अधिक सुन्दर वस्तु से साम्य का निरूपण करने का उद्देश्य बिहारी के भाव-सौन्दर्य की श्रुतिशयता प्रकट करने का ही है । वस्तुतः पंडितजी को 'व्यतिरेक' सम्बन्ध ही अभीप्सित है। इसमें 'मतिभ्रम' हो सकता है, पर पक्षपात नहीं । 3 संभव है कि यह पक्षपातपूर्ण न हो, पर उन्हें यह मतिभ्रममूलक भी नहीं प्रतीत होता है। बिहारी के श्रेष्ठत्व को वे हृदय से अनुभव
१. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ ६३ । २. वही, पृष्ठ २७३ ।
३, वही, पृष्ठ २७३ ।
तुलनात्मकं आलोचना
करते हुए प्रतीत होते है । व्यतिरेक में उपमान का अपकर्ष भी कल्पित होता है और उसका उद्देश्य केवल उपमेय के सौन्दर्य की प्रतिशयता का प्रतिपादनमात्र रहता है । पर संस्कृत कवियों को दोनता तो पंडितजी अनुभव करते हुए प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहीं भी पंस्कृत कवियों में बिहारी मे उत्कृष्टता नहीं देखी है । इस सारे प्रत्य में उन्होंने जितने भी साम्य के उदाहरण दिये हैं उन सभीमें बिहारो को श्रेष्ठता हो प्रतिपादित हुई है। इतना ही नहीं, दोहा छन्द के निर्वाचन ने तो पंडितजी को धारणा में बिहारी को और भी ऊंचे स्थान पर बैठा दिया है। उनका कहना है कि भाव-गंगा शिव-जटा को तरह बिहारी के दोहों में तो समाई रहती है, पर उससे निकलने के उपरान्त उसके प्रवाह को एक स्थान पर रोके रस देने की क्षमता किसी में भी नहीं है । शिव-जटा के साथ बिहारी के दोहों की तुलना का यही अभिप्राय है। बिहारी को श्रेष्ठता का प्रतिपादन इस आलोचना का प्रधान उद्देश्य होने के कारण इसको हम निर्णयात्मक प्रालोचना मानते हैं । यही इस प्रालोचना को मुख्य भित्ति है । मालोचना की अन्य पद्धतियों का उपयोग हुग्रा है, पर उन सबका उद्देश्य भी निर्णय ही है ।
रोति-काल में काव्य को मूल प्रेरणा शब्द-चमत्कार, उक्ति-वैचित्र्य और कल्पना को सजीवता थी । वैसे रीतिकालीन प्राचार्यों ने प्रायः सभी काव्यांगों का निस्परण किया है और संस्कृत-प्राचार्यो द्वारा मान्य मतों का समर्थन करते हुए रस को ही फाव्य को श्रात्मा भी कहा है, पर रस, भाव, जीवन-दर्शन श्रादि युग की प्रेरणा नहीं थे । कवि लोग रसोषित और स्वभावोक्ति को केवल काव्य-परम्परा से वाध्य होकर हो काव्य कहते थे । वस्तुतः उनके हृदय प्रतिशयोक्ति को श्रेष्ठता को मुक्तकण्ठ से स्वीकार कर चुके थे । कवि के समक्ष यहो श्राव था। सहृदय समाज में इन वक्रोक्तिपूर्ण कविताओं का ही आदर था । बिहारी के प्रादर का भी मूल कारण यही है । रीतिकालीन काव्य-धारणा का श्रादर्श रूप बिहारी में उपलब्ध होता है । उनके समान उक्ति-वैचित्र्य, ऊहोक्तिपूर्ण कल्पना और विशेषतः इन्होंसे पुष्ट भाव-सौंदर्य अन्यत्र दुलभ है । ये हो बिहारी को श्रष्ठता के कारण है। बिहारी के आलोचक पंडित पद्मसिंह जी ने भी युग की इस सामान्य विशेषता की अवहेलना नहीं की है । वे एक युग के मानदण्डों के आधार पर अन्य युगों की कला-कृतियों को श्रालोचना के पक्ष नहीं थे । यही कारण है कि उन्होंने स्वभावोक्ति के मानदण्ड से बिहारी
१. 'विहारी सतसई', पृष्ठ ३१-३२।
हिन्दी-श्रालोचना : उन और विकास
के फाव्य को भालोचना करना अनुपयुक्त समझा है ।' पण्डितजी प्राचार्य भामह के शब्दों में अपने मानदण्ड का स्पष्ट कर रहे हैं। ये सब प्रलंकारों के प्राण प्रतिशयोषित या वक्रोषित को हो मानते हैं। उन्होंने भामह के इस मत का प्रतिपादन करने वाला प्रसिद्ध लोक भी उद्घृत किया है। अपनी काव्य-धारणा का उन्होंने केवल संद्धान्तिक निरूपण ही नहीं किया है, परन्तु व्यवहार में इसका पूरा निर्वाह भी किया है। बिहारी की अन्य कवियों से श्रष्ठता स्थापित करते समय उनको दृष्टि में काव्य का मही स्वरूप है। उन्होंने बिहारी के जिन दोहों को विशद व्याख्या की है। ये सभी किसी-न-किसी प्रकार के चमत्कार से अनुप्राणित है । घालोचक जिस पदावली का प्रयोग अपने श्रालोच्य को प्रशंसा में करते है, उससे भी उनका यह दृष्टिकोण अत्यन्त स्पष्ट है। 'भजमून छीन लिया' श्रादि चाययों का यही अभिप्राय है ।
विहारी के काव्य सौष्ठव का प्रतिपादन करने के लिए लेखक ने नालोच्य कवि के इन दोहों को चुना है और भाव तथा वर्ण्य विषय को दृष्टि से साम्प रखने वाले 'गाथा सप्तशती', 'आर्या सप्तशती', 'विकटनितम्बा' श्रादि के मुक्तक छन्दों से उनकी तुलना की है। कवि अपने उद्देश्य में कितना सफल हुआ है। उसी भाव तथा वस्तु को सहृदय पाठकों के समक्ष उपस्थित करने
१. आजकल सम्भ्रात शिक्षित समाज कोरी स्वभावोक्ति पर फ़िदा है। अन्य अलंकारों की सत्ता इसकी परिष्कृत रुचि की आँखों में काँटा-सी खटकती है, विशेष अतिशयोक्ति से तो उसे कुछ चिढ़-सी है। प्राचीन साहित्य-विधाताओं के मत में जो चीज कविता-कामिनी के लिए नितान्त उपादेय थी, वही इसके मत में सर्वथा हेय है। यह भी एक रुचि वैचित्र्य का दौरात्म्य है। जो कुछ भी हो, प्राचीन काव्य वर्तमान परिष्कृत सुरुचि' के आदर्श पर नहीं रचे गए। उन्हें इस नये गज से नापना चाहिए, प्राचीनता की दृष्टि से परखने पर ही उनकी खूबी समझ में आ सकती है। 'सतसई' भी एक ऐसा ही काव्य है, बिहारी उस प्राचीन मत के अनुयायी थे जिसमें अतिशयोक्ति-शून्य अलंकार चमत्कार-रहित माना गया है उपमा, उत्प्रेक्षा, पर्याय और निदर्शना दियो से अनुप्राणित होकर ही जीवन-लाभ करते हैं अतिशयोक्ति ही उन्हें जिलाकर चमकाती है, मनमोहक बनाती है, उनमें चारुता लाती है, यह न हो तो वे कुछ भी
२. 'विहारी सतसई', पृष्ठ २१७-२१८ ।
में बिहारी ने क्या विशेषता ला दो है ? उसमें अभिव्यंजना का कौन-सा सौंदर्य है, शब्द प्रयोग का क्या चमत्कार और बारोको है, कल्पना को क्या सजीवता है, जिनके कारण उनकी रचना अपने पूर्ववर्ती तथा समकालीन कवियों की रचनामों से इतनी बढ़ गई है ? बिहारी के काव्य-सौष्ठव का प्रतिपादन लेखक ने इन्हीं प्रश्नों का उत्तर देते हुए किया है। इस प्रकार पंडितजी के लिए सहृदयता हो झालोचना का एक मान मानदण्ड हुँ । प्रभिव्यंजना की सूक्ष्म बातों और कल्पना को बारीको पर ध्यान जाने के लिए साधारण प्रतिभा और सहृदयता से काम नहीं चल पाता है। फिर पंडितजी के समक्ष प्राचीन लब्धप्रतिष्ठ ग्रन्थों के वे उत्कृष्ट छन्द्र थे जिनके काव्य सौंदर्य की उत्कृष्टता के प्रमाण-पत्र संस्कृत के श्रानन्दवनाचार्य, मम्मट आादि श्राचार्यो द्वारा मिल चुके थे । अनेक छन्द प्राज से कई शताब्दी पूर्व ही उत्तम-काव्य के उदाहरण घोषित हो गए थे । इनके छन्दों को श्रेष्ठता को गहरी छाप सहृदय समाज पर लग गई थी। सहृदय-समाज चिर काल से इन छन्दों को भाव-विभोर होकर गुनगुनाता और इनका रसास्वाद लेता चला था रहा था । ऐसे छन्दों की तुलना में भाषा के दोहों की श्रेष्ठता का प्रतिपादन कर देना कोई साधारण कार्य नहीं है । इस कार्य में प्रसाधारण पांडित्य के प्रतिरिक्त उच्च कोटि को सहृदयता भी अपेक्षित है । छन्द के भाव-सौंदर्य, उसके ग्रन्तः स्तल में प्रवाहित रस-धारा वर्ण्य - विषय तथा भाव के अनुरूप शैली शब्दार्थ के विलक्षण चमत्कार और प्र गाम्भोयं का साक्षात्कार करने वाला घालोचकही इस सूक्ष्म अन्तर को समझ सकता है । शर्मा जी में हमें ऐसी ही प्रतिभा और सहृदयता के दर्शन होते हैं । पण्डित जो इस सूक्ष्म अन्तर को स्पष्ट अनुभव करते हुए प्रतीत होते हैं । अन्य पाठकों के लिए इसी श्रन्तर का स्पष्ट कर देना उनकी श्रालोचना का उद्देश्य है । इस प्रकार सहृदयता हो उनको श्रालोचना का प्रधान मानदण्ड है । पण्डितजी के प्रालोचक स्वरूप को अमरीका के प्रसिद्ध प्रालोचक जे० ई० स्पिनगार्न के शब्दों में स्पष्ट किया जा सकता है । वे प्रभाववादी श्रालोचक के. कार्य को बतलाते हुए कहते हैं : To have sensations in the presence of a work of art and to exepress them, that is the function of criticism for the impressionist critic."
पंडितजी ने अपनी प्रलोच्य रचनाओं के सौंदर्य से प्रानन्द-विभोर होकर उनको प्रशंसा करने लगते है । 'वाह उस्ताद क्या कहने है', 'कितना माधुर्य है' श्रादि वाक्य उनको श्रानन्दानुभूति को स्पष्ट कर रहे हैं । इस प्रकार के वाक्यों का प्रयोग उनको श्रालोचना में सर्वत्र ही मिलता है। ये वाक्य, निरर्णयात्मक
|
चार्य ने महाकवियों की उक्ति में श्रभिधेवार्थ के प्रतिरिक्त प्रतीयमानार्थ को आवश्यकता मानी है। उन्होंके व्याख्याता अभिनव गुप्त ने इसका स्पष्टीकरण करते हुए प्रतीयमानार्थ के नियोजन की क्षमता रखने वाले कवि को महाकवि कह दिया है। यहाँ पर इन प्राचार्यों का अभिप्राय इसमें नहीं हूँ कि मुक्तक रचना करनेवाला भी महाकवि हो सकता है। इन दोनों ने तो काव्य में ध्वनि और रस की प्रधानता का प्रतिपादन भर किया है। उसका तात्पर्य तो केवल इतने से हो प्रतीत होता है कि केवल शास्त्रीय नियमों के निर्वाह-मात्र से महाकवि पद का अधिकारी नहीं हो सकता। उसे अपने काव्य में 'प्रतीयमानायें' की, जो इन दोनों प्राचार्यों को दृष्टि से काव्य को प्रात्मा है, प्रतिष्ठा करने की भी नितान्त आवश्यकता है। ध्वनिकार और अभिनव गुप्त ने महाकवि होने के लिए प्रबन्ध-काव्य की रचना श्रावश्यक नहीं मानी है । पर यह तो कवित्व-शक्ति का सामान्य परिचय है । इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनको यह भेद मान्य नहीं । यह भी हो सकता है कि ऐसा भेद परवर्तीहै काल में अधिक मान्य रहा हो और यही परम्परा हिन्दी में मान्य हो गई हो । पर इस रूढ़िवादिता का खंडन समयानुकूल ही था । आचार्य पद्मसिंह को इस धारणा के पीछे युग को धारणा है। कुछ दिन पूर्व चाहे उसे सूर को भी महाकवि कहने में हिचकिचाहट का अनुभव होता रहा हो। पर पन्त, निराला श्रादि को महाकवि पद से अलंकृत करने के मोह का आज का आलोचक नहीं कर पा रहा है। संस्कृत के कुछ प्राचार्यों ने चाहे महाकवि शब्द को कुछ नियमों में जकड़ दिया हो, पर जन-साधारण तथा कतिपय प्रगति प्रिय प्राचार्यों को यह कैद कभी स्वीकृत नहीं रही है । अपने प्रिय कवियों को महाकवि कहने के अधिकार को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। 'गीत गोविन्द', 'अमर शतक', 'श्रार्यासप्तशती', 'गाथा सप्तशती -जैसी रचनाओं के प्रणेता प्रबन्धकार न होते हुए भो महाकवि माने जाते रहे होंगे। रीति-काल में यह भेद व्यवहार में स्वीकृत नहीं हुआ है। आधुनिक युग भी इस भेद को मानकर नहीं चल सकता है । इस प्रकार प्राचार्य पद्मसिंह जी को यह धारणा युग की प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करने वाली है। इतना ही नहीं बिहारी तथा अन्य मुक्तक काव्य के रचयिताओं का सम्यक् अध्ययन र महत्त्व दर्शन के लिए ऐसी धारणा नितान्त आवश्यक भी थी । मुक्तक और प्रबन्ध के आधार पर फैली हुई इस भ्रान्त धारणा का निवारण करके प्राचार्य ने आलोचक रूप की महत्ता का परिचय दिया है । हिन्दी का प्राधुनिक साहित्य बहुत कुछ रीतिकालीन काव्य-परम्पराओं को का परिणाम है । रीति-काल में शृंगार रस के चित्ररण की नग्नता और अतिशयता के प्रति श्राज के समाज में एक तीव्र प्ररुचि जागृत हो गई घो। लोग उसकी कविता को अश्लील फहफर उससे नाक-भौं सिकोड़ने लगे घे । बिहारी को कविता के सम्बन्ध में प्रालोचकों को जो धारणा बन गई थी, उनके काव्य-सौष्ठव का मूल्य इन छालोचकों की दृष्टि में कम हो गया था ; इसका एक फारण प्रभिसार, रति श्रादि के वन को प्रश्लील मानना भी था । बिहारो की कविता के वास्तविक महत्व को समझने के लिए शृंगार सम्बन्धी इस भ्रान्त धारणा का निवारण करना भी बहुत आवश्यक था। इसी उद्देश्य से प्राचार्य ने शृंगार रस के महत्त्व का भी प्रतिपादन किया है। उनका कहना है कि इस विश्व में शृंगार सम्बन्धी सामग्री उपलब्ध होती है और फवि उसको ओर से प्रांख बन्द नहीं कर सकता है । इस तथाकथित अश्लीलता का वर्णन वेदों तक में मिलता है। इस सम्बन्ध में पंडितजी ने राजशेखर को प्रमाण रूप में उद्धृत किया है ।" शर्माजी को परकीयादि के चित्रण अश्लील तो प्रतीत होते हैं पर कवि का उद्देश्य पाठक को ऐसे वनों द्वारा नीति-भ्रष्ट करना न होकर यदि इन धूर्त सौतामों से उन्हें परिचित कराके सभ्य समाज की इन दुर्गुणों से रक्षा करना हो तो वे उसे भी इलील मानते है । शर्मा जी ने अपने इस मत की पुष्टि के लिए भी द्रंट के काव्यालंकार के मत का श्राश्रय लिया है । बिहारी के फाव्य-सौष्ठव के सम्बन्ध में मिश्रवन्धुत्रों की श्रालोचना ने कतिपय भ्रान्त धाररात्रों को प्रोत्साहन दे दिया था। ऐसो धारणाओं का उच्छे• दन करना किसी भी सच्चे समालोचक का कार्य था। बिहारी के मान, गौरव, प्रतिष्ठा और यश की दृष्टि से हो नहीं श्रपितु साहित्य-जगत् को प्रमूल्य निधि के संरक्षरण तथा सहृदय पाठकों को बिहारी के कला-सौन्दर्य से परिचित कराकर शर्माजी ने श्रालोचना - क्षेत्र का एक महान कार्य किया है । कतिपय कटु, पक्षपात और प्रसहृदयतापूर्ण श्रालोचनाओं के घटाटोप को हटाने के लिए तीव्र पवन वेग की श्रावश्यकता थी और इसकी पूर्ति श्राचार्य ने कर दी है। उनके इस प्रयास से बिहारी के चन्द्र का पुनः सहृदयों को सुवा-पान का अवसर प्राप्त हो गया था। इस कार्य के लिए साहित्य को कतिपय सामान्य भ्रान्त धारणाओं का उन्मूलन भी बहुत श्रावश्यक था, इसीलिए मौलिकता, महाकवि और शृंगार रस की उपादेयता के सम्बन्ध में विशद और बहुत कुछ प्रगतिवादी दृष्टिकोण अपनाने के लिए शर्माजो बाध्य हुए थे । एक. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ छः । दो वही प सात । चार्य ने महाकवियों को उक्ति में श्रभिधेयायें के अतिरिक्त प्रतीयमानाय की आवश्यकता मानी है । उन्होंके व्याख्याता अभिनय गुप्त ने इसका स्पष्टीकरण करते हुए प्रतीयमानार्य के नियोजन की क्षमता रखने वाले कवि को महाकवि कह दिया है। यहाँ पर इन श्राचार्यो का अभिप्राय इसमें नहीं है कि मुक्तक रचना करनेवाला भी महाकवि हो सकता है। इन दोनों प्रशाओं ने तो काव्य ध्वनि और रस को प्रधानता का प्रतिपादन भर किया है। उसका तात्पर्य तो केवल इतने से हो प्रतीत होता है कि केवल शास्त्रीय नियमों के निर्वाह-मात्र से महाकवि पद का अधिकारी नहीं हो सकता। उसे अपने काव्य में प्रतोयमानायें' की, जो इन दोनों प्राचार्यों की दृष्टि से काव्य की आत्मा है, प्रतिष्ठा करने की भी नितान्त श्रावश्यकता है। ध्वनिकार और अभिनव गुप्त ने महाकवि होने के लिए प्रबन्ध-काव्य की रचना श्रावश्यक नहीं मानी है । पर यह तो कवित्व-शक्ति का सामान्य परिचय है । इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि उनको यह भेद मान्य नहीं। यह भी हो सकता है कि ऐसा भेद परवर्तीकाल में अधिक मान्य रहा हो और यही परम्परा हिन्दी में मान्य हो गई हो । पर इस रूढ़िवादिता का खंडन समयानुकूल हो था। प्राचार्य पद्मसिंह की इस धारणा के पीछे युग की धारणा है। कुछ दिन पूर्व चाहे उसे सूर को भी महाकवि कहने में हिचकिचाहट का अनुभव होता रहा हो। पर पत्त, निराला श्रादि को महाकवि पद से अलंकृत करने के मोह का संवरण श्राज का आलोचक नहीं . कर पा रहा है । संस्कृत के कुछ प्राचार्यों ने चाहे महाकवि शब्द को कुछ नियमों में जकड़ दिया हो, पर जन-साधारण तथा कतिपय प्रगति प्रिय प्राचार्यों को यह कैद कभी स्वीकृत नहीं रही है। अपने प्रिय कवियों को महाकवि कहने के अधिकार को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। 'गीत गोविन्द', 'अमरु शतक', 'थार्यासप्तशती', 'गाथा सप्तशती -जैसी रचनाओं के प्ररणेता प्रबन्धकार न होते हुए भी महाकवि माने जाते रहे होंगे । रीति-काल में यह भेद व्यवहार में स्वीकृत नहीं हुआ है। आधुनिक युग भी इस भेद को मानकर नहीं चल सकता है । इस प्रकार प्राचार्य पद्मसिंह जो की यह धारणा युग की प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करने वाली है। इतना ही नहीं बिहारी तथा अन्य मुक्तक काव्य के रचयिताओं का सम्यक अध्ययन और महत्त्व- दर्शन के लिए ऐसी धारणा नितान्त आवश्यक भी थी । मुक्तक और प्रबन्ध के आधार पर फैली हुई इस भ्रान्त धारणा का निवारण करके प्राचार्य ने आलोचक रूप को महत्ता का परिचय दिया है । हिन्दी का श्राधुनिक साहित्य बहुत कुछ रीतिकालीन काव्य-परम्पराओं की प्रतिक्रियाओं का परिणाम है । रीति-काल में शृंगार रस के चित्ररण की नग्नता और अतिशयता के प्रति श्राज के समाज में एक तीव्र प्रदचि जागृत हो गई थी। लोग उसको कविता को प्रश्लील कहकर उससे नाक-भौं सिकोड़ने लगे थे। बिहारी को कविता के सम्बन्ध में प्रालोचकों की जो धारणा बन गई थी, उनके काव्य-सौष्ठव का मूल्य इन झालोचकों की दृष्टि में कम हो गया था ; इसका एक कारण अभिसार, रति श्रादि के वरन को अश्लील मानना भी था। बिहारी की कविता के वास्तविक महत्व को समझने के लिए शृंगार सम्बन्धो इस भ्रान्त धारणा का निवारण करना भी बहुत आवश्यक था। इसी उद्देश्य से प्राचार्य ने शृंगार रस के महत्त्व का भी प्रतिपादन किया है। उनका कहना है कि इस विश्व में शृंगार सम्बन्धी सामग्री उपलब्ध होती है और कवि उसकी ओर से प्रांस बन्द नहीं कर सकता है । इस तथाकथित प्रश्लीलता का वर्णन वेदों तक में मिलता है। इस सम्बन्ध में पंडितजी ने राजशेखर को प्रमारण रूप में उद्धृ त किया है ।" शर्माजी को परकीयादि के चित्रण प्रश्लील तो प्रतीत होते हैं पर कवि का उद्देश्य पाठक को ऐसे वनों द्वारा नीति- भ्रष्ट करना न होकर यदि इन धूर्त लीलामों से उन्हें परिचित कराके सभ्य समाज को इन दुर्गुणों से रक्षा करना हो तो वे उसे भो श्लोल मानते है । शर्मा जी ने अपने इस मत की पुष्टि के लिए भी रुद्रट के काव्यालंकार के मत का श्राश्रय लिया है । बिहारी के काव्य-सौष्ठव के सम्बन्ध में मिश्रवन्धुत्रों को श्रालोचना ने कतिपय भ्रान्त धारणाओं को प्रोत्साहन दे दिया था। ऐसो धारणाओं का उच्छे• दन करना किसी भी सच्चे समालोचक का कार्य था । बिहारी के मान, गौरव, प्रतिष्ठा और यश की दृष्टि से हो नहीं अपितु साहित्य जगत् को प्रमूल्य निधि के संरक्षण तथा सहृदय पाठकों को बिहारी के फला-सौन्दर्य से परिचित कराकर शर्माजी ने श्रालोचना क्षेत्र का एक महान कार्य किया है । कतिपय कटु, पक्षपात और प्रसहृदयतापूर्ण प्रालोचनाओं के घटाटोप को हटाने के लिए तीव्र पवन वेग को श्रावश्यकता यो प्रौर इसको पूर्ति प्राचार्य ने कर दी है। उनके इस प्रयास से बिहारी के चन्द्र का पुनः सहृदयों को सुवा-पान का अवसर प्राप्त हो गया था। इस कार्य के लिए साहित्य को कतिपय सामान्य भ्रान्त धारणाओं का उन्मूलन भी बहुत श्रावश्यक था, इसीलिए मौलिकता, महाकवि और शृंगार रस की उपादेयता के सम्बन्ध में विशद और बहुत कुछ प्रगतिवादी दृष्टिकोरण अपनाने के लिए शर्माजो बाध्य हुए थे । एक. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ छः । दो. वही, पृष्ठ सात । जैसा कि ऊपर निर्देश हो चुका है, शर्माजो को तुलनात्मक समालोचना की एक शास्त्रीय पद्धति को जन्म देने का श्रेय है। मौलिकता के वास्तविक अर्य के स्पष्टीकरण के श्रनन्तर दो कवियों के विभिन्न स्वरूपों का शास्त्रीय प्राधार पर विभाग करना अपेक्षित था । कवियों के भाव-साम्य के सिद्धान्त को स्वीकार कर लेने के बाद हमारे प्राचीन श्राचार्य का उसके स्वरूप व उपभेद प्रादि का शास्त्रीय निरूपण न करना और पंडित जो-जैसे प्रकांड विद्वान् का उस विश्लेषरण से परिचित रह जाना कभी संभव ही नहीं था। पंडित जी ने यहां पर भी अपना उपजीव्य प्राचीन प्रलंकार-शास्त्र को ही बनाया है। प्रानन्दवर्द्धनाचार्य ने अपहरण के तीन भेदों की कल्पना की है --एक. प्रतिविम्वित दो. श्रालेख्यवत् तीन. तुल्यदेहिवत् । राजशेखर ने इनमें 'परपुरप्रवेशप्रतिम्' नामक एक और भेद बढ़ा दिया है। इन भेदों की उपादेयता और हेयता पर भी विचार हुआ है । शर्माजी ने बिहारी के दोहों से 'गाया-सप्तशती' श्रादि के छन्दों से तुलना करते समय इन भेदों का उल्लेख किया है। बिहारी का दोहा 'में मिसहा सोचा समुझि मुँह चूम्यो ढिंग जाय' श्रमरुक के प्रसिद्ध श्लोक, 'शून्यं वासगृहे विलोक्य' का तुल्यदेहितुल्य है ।' पंडित जो का उद्देश्य बिहारी को अन्य कवियों से श्रेष्ठता प्रतिपादित करना है। हिन्दी के प्रत्य कवियों से बिहारी भाव-सौन्दर्य में कहीं अधिक बढ़े हुए हैं, इसमें तो लेखक को कहीं संदेह ही नहीं है। उन्होंने संस्कृत कवियों से भी बिहारी को बढ़ा-चढ़ा हो बताया है । पंडित जो ने बिहारी और संस्कृतकवियों के सम्बन्ध को उपमान श्रौर उपमेय का सम्बन्ध बताया है। उनका कहना है कि संस्कृत के इन महाकवियों से बिहारी का भाव साम्य ही उसके काव्योत्कर्ष का परिचायक है । ऊपर जिस उपमेयोपमान के सम्बन्ध का निर्देश हुआ है, उससे संस्कृत के कवियों में बिहारी से कहीं अधिक सौन्दर्य है और अधिक सुन्दर वस्तु से साम्य का निरूपण करने का उद्देश्य बिहारी के भाव-सौन्दर्य की श्रुतिशयता प्रकट करने का ही है । वस्तुतः पंडितजी को 'व्यतिरेक' सम्बन्ध ही अभीप्सित है। इसमें 'मतिभ्रम' हो सकता है, पर पक्षपात नहीं । तीन संभव है कि यह पक्षपातपूर्ण न हो, पर उन्हें यह मतिभ्रममूलक भी नहीं प्रतीत होता है। बिहारी के श्रेष्ठत्व को वे हृदय से अनुभव एक. 'बिहारी सतसई', पृष्ठ तिरेसठ । दो. वही, पृष्ठ दो सौ तिहत्तर । तीन, वही, पृष्ठ दो सौ तिहत्तर । तुलनात्मकं आलोचना करते हुए प्रतीत होते है । व्यतिरेक में उपमान का अपकर्ष भी कल्पित होता है और उसका उद्देश्य केवल उपमेय के सौन्दर्य की प्रतिशयता का प्रतिपादनमात्र रहता है । पर संस्कृत कवियों को दोनता तो पंडितजी अनुभव करते हुए प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहीं भी पंस्कृत कवियों में बिहारी मे उत्कृष्टता नहीं देखी है । इस सारे प्रत्य में उन्होंने जितने भी साम्य के उदाहरण दिये हैं उन सभीमें बिहारो को श्रेष्ठता हो प्रतिपादित हुई है। इतना ही नहीं, दोहा छन्द के निर्वाचन ने तो पंडितजी को धारणा में बिहारी को और भी ऊंचे स्थान पर बैठा दिया है। उनका कहना है कि भाव-गंगा शिव-जटा को तरह बिहारी के दोहों में तो समाई रहती है, पर उससे निकलने के उपरान्त उसके प्रवाह को एक स्थान पर रोके रस देने की क्षमता किसी में भी नहीं है । शिव-जटा के साथ बिहारी के दोहों की तुलना का यही अभिप्राय है। बिहारी को श्रेष्ठता का प्रतिपादन इस आलोचना का प्रधान उद्देश्य होने के कारण इसको हम निर्णयात्मक प्रालोचना मानते हैं । यही इस प्रालोचना को मुख्य भित्ति है । मालोचना की अन्य पद्धतियों का उपयोग हुग्रा है, पर उन सबका उद्देश्य भी निर्णय ही है । रोति-काल में काव्य को मूल प्रेरणा शब्द-चमत्कार, उक्ति-वैचित्र्य और कल्पना को सजीवता थी । वैसे रीतिकालीन प्राचार्यों ने प्रायः सभी काव्यांगों का निस्परण किया है और संस्कृत-प्राचार्यो द्वारा मान्य मतों का समर्थन करते हुए रस को ही फाव्य को श्रात्मा भी कहा है, पर रस, भाव, जीवन-दर्शन श्रादि युग की प्रेरणा नहीं थे । कवि लोग रसोषित और स्वभावोक्ति को केवल काव्य-परम्परा से वाध्य होकर हो काव्य कहते थे । वस्तुतः उनके हृदय प्रतिशयोक्ति को श्रेष्ठता को मुक्तकण्ठ से स्वीकार कर चुके थे । कवि के समक्ष यहो श्राव था। सहृदय समाज में इन वक्रोक्तिपूर्ण कविताओं का ही आदर था । बिहारी के प्रादर का भी मूल कारण यही है । रीतिकालीन काव्य-धारणा का श्रादर्श रूप बिहारी में उपलब्ध होता है । उनके समान उक्ति-वैचित्र्य, ऊहोक्तिपूर्ण कल्पना और विशेषतः इन्होंसे पुष्ट भाव-सौंदर्य अन्यत्र दुलभ है । ये हो बिहारी को श्रष्ठता के कारण है। बिहारी के आलोचक पंडित पद्मसिंह जी ने भी युग की इस सामान्य विशेषता की अवहेलना नहीं की है । वे एक युग के मानदण्डों के आधार पर अन्य युगों की कला-कृतियों को श्रालोचना के पक्ष नहीं थे । यही कारण है कि उन्होंने स्वभावोक्ति के मानदण्ड से बिहारी एक. 'विहारी सतसई', पृष्ठ इकतीस-बत्तीस। हिन्दी-श्रालोचना : उन और विकास के फाव्य को भालोचना करना अनुपयुक्त समझा है ।' पण्डितजी प्राचार्य भामह के शब्दों में अपने मानदण्ड का स्पष्ट कर रहे हैं। ये सब प्रलंकारों के प्राण प्रतिशयोषित या वक्रोषित को हो मानते हैं। उन्होंने भामह के इस मत का प्रतिपादन करने वाला प्रसिद्ध लोक भी उद्घृत किया है। अपनी काव्य-धारणा का उन्होंने केवल संद्धान्तिक निरूपण ही नहीं किया है, परन्तु व्यवहार में इसका पूरा निर्वाह भी किया है। बिहारी की अन्य कवियों से श्रष्ठता स्थापित करते समय उनको दृष्टि में काव्य का मही स्वरूप है। उन्होंने बिहारी के जिन दोहों को विशद व्याख्या की है। ये सभी किसी-न-किसी प्रकार के चमत्कार से अनुप्राणित है । घालोचक जिस पदावली का प्रयोग अपने श्रालोच्य को प्रशंसा में करते है, उससे भी उनका यह दृष्टिकोण अत्यन्त स्पष्ट है। 'भजमून छीन लिया' श्रादि चाययों का यही अभिप्राय है । विहारी के काव्य सौष्ठव का प्रतिपादन करने के लिए लेखक ने नालोच्य कवि के इन दोहों को चुना है और भाव तथा वर्ण्य विषय को दृष्टि से साम्प रखने वाले 'गाथा सप्तशती', 'आर्या सप्तशती', 'विकटनितम्बा' श्रादि के मुक्तक छन्दों से उनकी तुलना की है। कवि अपने उद्देश्य में कितना सफल हुआ है। उसी भाव तथा वस्तु को सहृदय पाठकों के समक्ष उपस्थित करने एक. आजकल सम्भ्रात शिक्षित समाज कोरी स्वभावोक्ति पर फ़िदा है। अन्य अलंकारों की सत्ता इसकी परिष्कृत रुचि की आँखों में काँटा-सी खटकती है, विशेष अतिशयोक्ति से तो उसे कुछ चिढ़-सी है। प्राचीन साहित्य-विधाताओं के मत में जो चीज कविता-कामिनी के लिए नितान्त उपादेय थी, वही इसके मत में सर्वथा हेय है। यह भी एक रुचि वैचित्र्य का दौरात्म्य है। जो कुछ भी हो, प्राचीन काव्य वर्तमान परिष्कृत सुरुचि' के आदर्श पर नहीं रचे गए। उन्हें इस नये गज से नापना चाहिए, प्राचीनता की दृष्टि से परखने पर ही उनकी खूबी समझ में आ सकती है। 'सतसई' भी एक ऐसा ही काव्य है, बिहारी उस प्राचीन मत के अनुयायी थे जिसमें अतिशयोक्ति-शून्य अलंकार चमत्कार-रहित माना गया है उपमा, उत्प्रेक्षा, पर्याय और निदर्शना दियो से अनुप्राणित होकर ही जीवन-लाभ करते हैं अतिशयोक्ति ही उन्हें जिलाकर चमकाती है, मनमोहक बनाती है, उनमें चारुता लाती है, यह न हो तो वे कुछ भी दो. 'विहारी सतसई', पृष्ठ दो सौ सत्रह-दो सौ अट्ठारह । में बिहारी ने क्या विशेषता ला दो है ? उसमें अभिव्यंजना का कौन-सा सौंदर्य है, शब्द प्रयोग का क्या चमत्कार और बारोको है, कल्पना को क्या सजीवता है, जिनके कारण उनकी रचना अपने पूर्ववर्ती तथा समकालीन कवियों की रचनामों से इतनी बढ़ गई है ? बिहारी के काव्य-सौष्ठव का प्रतिपादन लेखक ने इन्हीं प्रश्नों का उत्तर देते हुए किया है। इस प्रकार पंडितजी के लिए सहृदयता हो झालोचना का एक मान मानदण्ड हुँ । प्रभिव्यंजना की सूक्ष्म बातों और कल्पना को बारीको पर ध्यान जाने के लिए साधारण प्रतिभा और सहृदयता से काम नहीं चल पाता है। फिर पंडितजी के समक्ष प्राचीन लब्धप्रतिष्ठ ग्रन्थों के वे उत्कृष्ट छन्द्र थे जिनके काव्य सौंदर्य की उत्कृष्टता के प्रमाण-पत्र संस्कृत के श्रानन्दवनाचार्य, मम्मट आादि श्राचार्यो द्वारा मिल चुके थे । अनेक छन्द प्राज से कई शताब्दी पूर्व ही उत्तम-काव्य के उदाहरण घोषित हो गए थे । इनके छन्दों को श्रेष्ठता को गहरी छाप सहृदय समाज पर लग गई थी। सहृदय-समाज चिर काल से इन छन्दों को भाव-विभोर होकर गुनगुनाता और इनका रसास्वाद लेता चला था रहा था । ऐसे छन्दों की तुलना में भाषा के दोहों की श्रेष्ठता का प्रतिपादन कर देना कोई साधारण कार्य नहीं है । इस कार्य में प्रसाधारण पांडित्य के प्रतिरिक्त उच्च कोटि को सहृदयता भी अपेक्षित है । छन्द के भाव-सौंदर्य, उसके ग्रन्तः स्तल में प्रवाहित रस-धारा वर्ण्य - विषय तथा भाव के अनुरूप शैली शब्दार्थ के विलक्षण चमत्कार और प्र गाम्भोयं का साक्षात्कार करने वाला घालोचकही इस सूक्ष्म अन्तर को समझ सकता है । शर्मा जी में हमें ऐसी ही प्रतिभा और सहृदयता के दर्शन होते हैं । पण्डित जो इस सूक्ष्म अन्तर को स्पष्ट अनुभव करते हुए प्रतीत होते हैं । अन्य पाठकों के लिए इसी श्रन्तर का स्पष्ट कर देना उनकी श्रालोचना का उद्देश्य है । इस प्रकार सहृदयता हो उनको श्रालोचना का प्रधान मानदण्ड है । पण्डितजी के प्रालोचक स्वरूप को अमरीका के प्रसिद्ध प्रालोचक जेशून्य ईशून्य स्पिनगार्न के शब्दों में स्पष्ट किया जा सकता है । वे प्रभाववादी श्रालोचक के. कार्य को बतलाते हुए कहते हैं : To have sensations in the presence of a work of art and to exepress them, that is the function of criticism for the impressionist critic." पंडितजी ने अपनी प्रलोच्य रचनाओं के सौंदर्य से प्रानन्द-विभोर होकर उनको प्रशंसा करने लगते है । 'वाह उस्ताद क्या कहने है', 'कितना माधुर्य है' श्रादि वाक्य उनको श्रानन्दानुभूति को स्पष्ट कर रहे हैं । इस प्रकार के वाक्यों का प्रयोग उनको श्रालोचना में सर्वत्र ही मिलता है। ये वाक्य, निरर्णयात्मक
|
जॉन अब्राहम (John Abrahm) की फिल्म सत्यमेवय जयते 2 (Satyamev Jayate 2) में धूम मचाने से पहले अदाकारा दिव्या खोंसला कुमार (Divya Khosla Kumar) ने एक वीडियो सॉन्ग के जरिए सोशल मीडिया पर हंगामा मचाया हुआ है। इस वीडियो को रिलीज हुए महज एक ही दिन हुआ है और ये यू-ट्यूब पर नंबर 1 पर ट्रेंड कर रहा है। इस गाने को नेहा कक्कड़ ने अपनी आवाज दी है। जबकि इसे संगीत से सजाया है तनिष्क बागची (Tanishk Bagchi) ने। ये गाना फाल्गुनी पाठक के सुपरहिट गाने याद पिया की आने लगी का रीमिक्स वर्जन है। लेकिन इस गाने ने रिलीज होने के साथ ही धूम मचा रखी है।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
जॉन अब्राहम की फिल्म सत्यमेवय जयते दो में धूम मचाने से पहले अदाकारा दिव्या खोंसला कुमार ने एक वीडियो सॉन्ग के जरिए सोशल मीडिया पर हंगामा मचाया हुआ है। इस वीडियो को रिलीज हुए महज एक ही दिन हुआ है और ये यू-ट्यूब पर नंबर एक पर ट्रेंड कर रहा है। इस गाने को नेहा कक्कड़ ने अपनी आवाज दी है। जबकि इसे संगीत से सजाया है तनिष्क बागची ने। ये गाना फाल्गुनी पाठक के सुपरहिट गाने याद पिया की आने लगी का रीमिक्स वर्जन है। लेकिन इस गाने ने रिलीज होने के साथ ही धूम मचा रखी है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
रायपुर। सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने जजों के ट्रांसफर को लेकर सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दिया है। अप्रूवल के बाद 13 हाई कोर्ट को नए चीफ जस्टिस मिलेंगे। वहीं, 5 चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट के 17 जजों का तबादला किया जाएगा। इस सिफारिश को वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है।
|
रायपुर। सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने जजों के ट्रांसफर को लेकर सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दिया है। अप्रूवल के बाद तेरह हाई कोर्ट को नए चीफ जस्टिस मिलेंगे। वहीं, पाँच चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट के सत्रह जजों का तबादला किया जाएगा। इस सिफारिश को वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है।
|
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार अपने फैंस के लिए धड़ाधड़ फिल्में लेकर आ रहे हैं। एक्टर की फिल्म 'सूर्यवंशी' 5 नवंबर को रिलीज होने वाली है, तो अब अक्षय ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ओह माय गॉड 2' का पोस्टर रिलीज कर दिया है।
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) अपने फैंस के लिए धड़ाधड़ फिल्में लेकर के आ रहे हैं। एक्टर की फिल्म 'सूर्यवंशी' (Sooryavanshi) 5 नवंबर को रिलीज होनें वाली है तो अब अक्षय ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ओह माय गॉड 2' (Oh My God 2) का पोस्टर रिलीज कर दिया है। एक्टर ने 'ओएमजी 2' (OMG 2) फिल्म से जुड़ी ये खुशखबरी अपने फैंस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दी है।
हाल ही में अक्षय कुमार ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट से अपनी अगली फिल्म ओएमजी 2 के दो पोस्टर शेयर किए हैं। इस पोस्टर में अक्षय का लुक भगवान शिव (Lord Shiva) का है, जिसमें वह अपनी आंखे बंद किए हुए हैं। इस पोस्टर को शेयर करते हुए अक्की ने कैप्शन में लिखा, "'कर्ता करे न कर सके शिव करे सो होय . . 'एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर चिंतन करने का हमारा ईमानदार और विनम्र प्रयास #OMG2 के लिए आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की आवश्यकता है। इस यात्रा के माध्यम से आदियोगी की शाश्वत ऊर्जा हमें आशीर्वाद दे। हर हर महादेव। "
इस फिल्म में अक्षय के साथ यामी गौतम (Yami Gautam) और पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) नजर आने वालें हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डायरेक्टर अमित राय (Amit B Rai) ने अपनी इस सोशल कॉमेडी फिल्म की शूटिंग मुंबई में सितंबर के महीने में शुरु कर दी है। पंकज त्रिपाठी ने फिल्म में अपने रोल की शूटिंग शुरु कर दी है और अक्टूबर के महीने में ही अक्षय भी शूटिंग के लिए टीम को जॉइन करने वाले हैं। 'ओएमजी 2' साल 2012 में आई फिल्म 'ओएमजी- ओह माय गॉड! ' (OMG- Oh My God! ) का सीक्वेल है। इस फिल्म के राइटर और डायरेक्टर उमेश शुक्ला (Umesh Shukla) थे। परेश रावल (Paresh Rawal) फिल्म में मेन रोल में नजर आए थे। जो भूकंप में अपनी दुकान खत्म होनें के बाद भगवान पर मुकदमा दर्ज कर देता है। इस फिल्म में अक्षय कुमार 'भगवान श्री कृष्ण' के रोल में नजर आए थे, जबकि मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty) ने लीलाधर स्वामी का रोल किया था।
|
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार अपने फैंस के लिए धड़ाधड़ फिल्में लेकर आ रहे हैं। एक्टर की फिल्म 'सूर्यवंशी' पाँच नवंबर को रिलीज होने वाली है, तो अब अक्षय ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ओह माय गॉड दो' का पोस्टर रिलीज कर दिया है। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार अपने फैंस के लिए धड़ाधड़ फिल्में लेकर के आ रहे हैं। एक्टर की फिल्म 'सूर्यवंशी' पाँच नवंबर को रिलीज होनें वाली है तो अब अक्षय ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ओह माय गॉड दो' का पोस्टर रिलीज कर दिया है। एक्टर ने 'ओएमजी दो' फिल्म से जुड़ी ये खुशखबरी अपने फैंस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दी है। हाल ही में अक्षय कुमार ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट से अपनी अगली फिल्म ओएमजी दो के दो पोस्टर शेयर किए हैं। इस पोस्टर में अक्षय का लुक भगवान शिव का है, जिसमें वह अपनी आंखे बंद किए हुए हैं। इस पोस्टर को शेयर करते हुए अक्की ने कैप्शन में लिखा, "'कर्ता करे न कर सके शिव करे सो होय . . 'एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर चिंतन करने का हमारा ईमानदार और विनम्र प्रयास #OMGदो के लिए आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की आवश्यकता है। इस यात्रा के माध्यम से आदियोगी की शाश्वत ऊर्जा हमें आशीर्वाद दे। हर हर महादेव। " इस फिल्म में अक्षय के साथ यामी गौतम और पंकज त्रिपाठी नजर आने वालें हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डायरेक्टर अमित राय ने अपनी इस सोशल कॉमेडी फिल्म की शूटिंग मुंबई में सितंबर के महीने में शुरु कर दी है। पंकज त्रिपाठी ने फिल्म में अपने रोल की शूटिंग शुरु कर दी है और अक्टूबर के महीने में ही अक्षय भी शूटिंग के लिए टीम को जॉइन करने वाले हैं। 'ओएमजी दो' साल दो हज़ार बारह में आई फिल्म 'ओएमजी- ओह माय गॉड! ' का सीक्वेल है। इस फिल्म के राइटर और डायरेक्टर उमेश शुक्ला थे। परेश रावल फिल्म में मेन रोल में नजर आए थे। जो भूकंप में अपनी दुकान खत्म होनें के बाद भगवान पर मुकदमा दर्ज कर देता है। इस फिल्म में अक्षय कुमार 'भगवान श्री कृष्ण' के रोल में नजर आए थे, जबकि मिथुन चक्रवर्ती ने लीलाधर स्वामी का रोल किया था।
|
(ब्यूरो कार्यालय)
जबलपुर (साई)। मां नर्मदा का जल अमृत तुल्य है। यह अमृत मध्यप्रदेश सहित अन्य प्रदेशों को भी धन-धान्य और समृद्धि से परिपूर्ण कर रहा है। हम सभी का दायित्व है कि हम मां नर्मदा को कल-कल प्रवाहित होते जीवन पर्यंत देखते रहें। तभी यह आने वाली पीढिय़ों को भी तृप्त करती रहेंगी।
ये विचार स्वामी गिरीशानंद ने रविवार को साकेतधाम से निकली गई नर्मदा पंचकोषीय जनजागरण यात्रा के तिलवारा पहुंचने पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा नर्मदा की शुद्धिकरण और सेवा के लिए है। स्वामी मुक्तानंद पुरी ने कहा कि मां नर्मदा के भौतिक स्वरूप को, जो जल के रुप में प्रवाहित है, उसे प्रदूषण मुक्त रखना है। आम जनमानस के मन में स्वच्छता के प्रति चेतना जागरण करना इस यात्रा का उद्देश्य है। पंचकोषी यात्रा श्री रामेश्वरम् पाटोत्सव महोत्सव के समापन पर निकाली गई थी। श्रृद्धालु संकीर्तन करते हुए नर्मदा की स्वच्छता, अविरलता और प्रदूषण से मुक्ति के लिए लोगों को जागरूक करते हुए चलें। साकेतधाम से प्रारम्भ होकर यात्रा ग्वारीघाट पहुंची। नर्मदा पूजन एवं दुग्धाभिषेक किया गया। वहां से यात्रा नर्मदा नदी के तीरे-तीरे तिलवाराघाट पहुंची। सभा के बाद यात्रा लौटकर साकेतधाम पहुंची।
कुचैनी ट्रस्ट की ओर से संगीतमय श्रीराम कथा का तीन मार्च से आयोजन होगा। प्रतिदिन शाम छह बजे से दमोहनाका मैरेज हॉल में मंदाकिनी दीदी के प्रवचन होंगे। शांति नगर में सुबह भजन होंगे।
स्वामी वासुदेवानंद आज आएंगे-जबलपुर. रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी बनने के बाद स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सोमवार को पहली बार शहर आएंगे। वे बलदेवबाग श्रीराम भवन में रात्रि विश्राम करेंगे। वे मंगलवार सुबह 11 बजे ग्वारीघाट में नर्मदा पूजन करेंगे। शंकराचार्य सेवक मंडल की ओर से स्वामी की पादुका का पूजन होगा।
संत गाडगे की जयंती पर संत गाडगे विचार मंच ने राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह की प्रतिमा के समीप पौधरोपण किया। ग्वारीघाट में रजक धर्मशाला में उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीपदान किया। संत गाडगे के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक नन्हेलाल धुर्वे थे। संयोजक सरमन रजक, रमेश मास्टर, रामरतन यादव, कल्लू खलीफा, सत्तू रजक, राकेश कनौजिया, प्रमोद मरावी, गणेश भलावी, संजू भोजक, अनुराग सिंह, खीरसागर रजक और लक्ष्मण रजक उपस्थित थे।
|
जबलपुर । मां नर्मदा का जल अमृत तुल्य है। यह अमृत मध्यप्रदेश सहित अन्य प्रदेशों को भी धन-धान्य और समृद्धि से परिपूर्ण कर रहा है। हम सभी का दायित्व है कि हम मां नर्मदा को कल-कल प्रवाहित होते जीवन पर्यंत देखते रहें। तभी यह आने वाली पीढिय़ों को भी तृप्त करती रहेंगी। ये विचार स्वामी गिरीशानंद ने रविवार को साकेतधाम से निकली गई नर्मदा पंचकोषीय जनजागरण यात्रा के तिलवारा पहुंचने पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा नर्मदा की शुद्धिकरण और सेवा के लिए है। स्वामी मुक्तानंद पुरी ने कहा कि मां नर्मदा के भौतिक स्वरूप को, जो जल के रुप में प्रवाहित है, उसे प्रदूषण मुक्त रखना है। आम जनमानस के मन में स्वच्छता के प्रति चेतना जागरण करना इस यात्रा का उद्देश्य है। पंचकोषी यात्रा श्री रामेश्वरम् पाटोत्सव महोत्सव के समापन पर निकाली गई थी। श्रृद्धालु संकीर्तन करते हुए नर्मदा की स्वच्छता, अविरलता और प्रदूषण से मुक्ति के लिए लोगों को जागरूक करते हुए चलें। साकेतधाम से प्रारम्भ होकर यात्रा ग्वारीघाट पहुंची। नर्मदा पूजन एवं दुग्धाभिषेक किया गया। वहां से यात्रा नर्मदा नदी के तीरे-तीरे तिलवाराघाट पहुंची। सभा के बाद यात्रा लौटकर साकेतधाम पहुंची। कुचैनी ट्रस्ट की ओर से संगीतमय श्रीराम कथा का तीन मार्च से आयोजन होगा। प्रतिदिन शाम छह बजे से दमोहनाका मैरेज हॉल में मंदाकिनी दीदी के प्रवचन होंगे। शांति नगर में सुबह भजन होंगे। स्वामी वासुदेवानंद आज आएंगे-जबलपुर. रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी बनने के बाद स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सोमवार को पहली बार शहर आएंगे। वे बलदेवबाग श्रीराम भवन में रात्रि विश्राम करेंगे। वे मंगलवार सुबह ग्यारह बजे ग्वारीघाट में नर्मदा पूजन करेंगे। शंकराचार्य सेवक मंडल की ओर से स्वामी की पादुका का पूजन होगा। संत गाडगे की जयंती पर संत गाडगे विचार मंच ने राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह की प्रतिमा के समीप पौधरोपण किया। ग्वारीघाट में रजक धर्मशाला में उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीपदान किया। संत गाडगे के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक नन्हेलाल धुर्वे थे। संयोजक सरमन रजक, रमेश मास्टर, रामरतन यादव, कल्लू खलीफा, सत्तू रजक, राकेश कनौजिया, प्रमोद मरावी, गणेश भलावी, संजू भोजक, अनुराग सिंह, खीरसागर रजक और लक्ष्मण रजक उपस्थित थे।
|
अगस्त में जापान की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने देश के रक्षा बजट में एतिहासिक रूप से वृद्धि का ऐलान किया है. सुगा ने अप्रैल से शुरू हो रहे नए साल के लिए देश का रक्षा बजट 51.7 बिलियन डॉलर करने की जानकारी संसद को दी है.
अगस्त में जापान की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने देश के रक्षा बजट में एतिहासिक रूप से वृद्धि का ऐलान किया है. सुगा ने अप्रैल से शुरू हो रहे नए साल के लिए देश का रक्षा बजट 51.7 बिलियन डॉलर करने की जानकारी संसद को दी है. साल 2020 की तुलना में रक्षा बजट में 2021 में 1.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. ईस्ट चाइना सी की तरफ चीनी नौसेना की बढ़ती आक्रामकता से जापान खासा परेशान है और किसी भी खतरे से निबटने के लिए उसने सारी तैयारियां कर ली हैं. जापान के इस रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा फाइटर जेट और मिसाइल पर खर्च किया जाएगा.
रक्षा बजट में जापान इजाफा करेगा इस बात के कयास पहले से ही कई विशेषज्ञों की तरफ से लगाए जा चुके थे. सुगा को सदन में बहुमत हासिल है और माना जा रहा है कि इस रक्षा बजट को आसानी से मंजूरी मिल जाएगी. सुगा, पूर्व पीएम शिंजो आबे की ही उन सैन्य नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं जिन पर विवाद हो चुका है. इस विशाल रक्षा बजट से जापान सेनाओं के लिए नए प्लेन, मिसाइल, एयरक्राफ्ट कैरियर्स तैयार करेगा. उसका मकसद पड़ोसी चीन समेत हर संभावित खतरे से निबटने के लिए तैयार होना है. चीन ने साल 2020 में अपने रक्षा बजट में 6.6 प्रतिशत का इजाफा किया है. तीन दशक में रक्षा बजट में हुई यह सबसे कम वृद्धि थी.
चीन और नॉर्थ कोरिया को ध्यान में रखते हुए जापान इस समय लंबी दूरी की मिसाइलों को खरीद रहा है. इसके साथ ही अपनी मिलिट्री को इस तरह से ट्रेनिंग दे रहा है कि वह किसी भी समय चीन और नॉर्थ कोरिया के अलावा एशिया के दूसरे देशों में लैंड टारगेट्स को ध्वस्त कर सके. तीन दशक में जापान पहली बार एक फाइटर जेट को रेडी कर रहा है और इसकी कीमत करीब 40 बिलियन डॉलर होगी.साल 2030 तक यह जेट बनकर तैयार हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट को जापान की कंपनी मित्सबुशी हैवी इंडस्ट्रीज पूरा कर रही है. इसमें उसकी मदद अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन कॉर्प कर रही है. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए नए बजट में 706 मिलियन डॉलर तय किए गए हैं.
इसके अलावा जापान 323 मिलियन डॉलर की रकम से लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें तैयार करेगा. इन मिसाइलों को ओकिनावा द्वीप श्रंखला पर तैनात किया जाएगा. 628 मिलियन डॉलर से जापान अमेरिका से छह लॉकहीड मार्टिन स्टेल्थ फाइटर्स खरीदेगा. इसमें दो शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग वैरीयंट्स होंगे और ये जेट कनवर्टेड हेलीकॉप्टर कैरियर से ऑपरेट करेंगे. इसके अलावा दो वॉरशिप्स खरीदने की भी तैयारी जापान ने कर ली है. ये वॉरशिप 912 मिलियन डॉलर से तैयार होंगी. इन्हें इस तरह से तैयार किया जाएगा कि ये कम नौसैनिकों की संख्या के बाद भी काम कर सकें. जापान में बूढ़ों की बढ़ती संख्या की वजह से नौसेना को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जापान अपनी नई वॉरशिप्स को दो एजीस एयर और बैलेस्टिक मिसाइलों से लैस करेगा. बताया जा रहा है कि इनकी रेंज पुराने मॉडल्स की तुलना में तीन गुना ज्यादा होगी.
|
अगस्त में जापान की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने देश के रक्षा बजट में एतिहासिक रूप से वृद्धि का ऐलान किया है. सुगा ने अप्रैल से शुरू हो रहे नए साल के लिए देश का रक्षा बजट इक्यावन.सात बिलियन डॉलर करने की जानकारी संसद को दी है. अगस्त में जापान की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने देश के रक्षा बजट में एतिहासिक रूप से वृद्धि का ऐलान किया है. सुगा ने अप्रैल से शुरू हो रहे नए साल के लिए देश का रक्षा बजट इक्यावन.सात बिलियन डॉलर करने की जानकारी संसद को दी है. साल दो हज़ार बीस की तुलना में रक्षा बजट में दो हज़ार इक्कीस में एक.एक प्रतिशत का इजाफा हुआ है. ईस्ट चाइना सी की तरफ चीनी नौसेना की बढ़ती आक्रामकता से जापान खासा परेशान है और किसी भी खतरे से निबटने के लिए उसने सारी तैयारियां कर ली हैं. जापान के इस रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा फाइटर जेट और मिसाइल पर खर्च किया जाएगा. रक्षा बजट में जापान इजाफा करेगा इस बात के कयास पहले से ही कई विशेषज्ञों की तरफ से लगाए जा चुके थे. सुगा को सदन में बहुमत हासिल है और माना जा रहा है कि इस रक्षा बजट को आसानी से मंजूरी मिल जाएगी. सुगा, पूर्व पीएम शिंजो आबे की ही उन सैन्य नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं जिन पर विवाद हो चुका है. इस विशाल रक्षा बजट से जापान सेनाओं के लिए नए प्लेन, मिसाइल, एयरक्राफ्ट कैरियर्स तैयार करेगा. उसका मकसद पड़ोसी चीन समेत हर संभावित खतरे से निबटने के लिए तैयार होना है. चीन ने साल दो हज़ार बीस में अपने रक्षा बजट में छः.छः प्रतिशत का इजाफा किया है. तीन दशक में रक्षा बजट में हुई यह सबसे कम वृद्धि थी. चीन और नॉर्थ कोरिया को ध्यान में रखते हुए जापान इस समय लंबी दूरी की मिसाइलों को खरीद रहा है. इसके साथ ही अपनी मिलिट्री को इस तरह से ट्रेनिंग दे रहा है कि वह किसी भी समय चीन और नॉर्थ कोरिया के अलावा एशिया के दूसरे देशों में लैंड टारगेट्स को ध्वस्त कर सके. तीन दशक में जापान पहली बार एक फाइटर जेट को रेडी कर रहा है और इसकी कीमत करीब चालीस बिलियन डॉलर होगी.साल दो हज़ार तीस तक यह जेट बनकर तैयार हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट को जापान की कंपनी मित्सबुशी हैवी इंडस्ट्रीज पूरा कर रही है. इसमें उसकी मदद अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन कॉर्प कर रही है. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए नए बजट में सात सौ छः मिलियन डॉलर तय किए गए हैं. इसके अलावा जापान तीन सौ तेईस मिलियन डॉलर की रकम से लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें तैयार करेगा. इन मिसाइलों को ओकिनावा द्वीप श्रंखला पर तैनात किया जाएगा. छः सौ अट्ठाईस मिलियन डॉलर से जापान अमेरिका से छह लॉकहीड मार्टिन स्टेल्थ फाइटर्स खरीदेगा. इसमें दो शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग वैरीयंट्स होंगे और ये जेट कनवर्टेड हेलीकॉप्टर कैरियर से ऑपरेट करेंगे. इसके अलावा दो वॉरशिप्स खरीदने की भी तैयारी जापान ने कर ली है. ये वॉरशिप नौ सौ बारह मिलियन डॉलर से तैयार होंगी. इन्हें इस तरह से तैयार किया जाएगा कि ये कम नौसैनिकों की संख्या के बाद भी काम कर सकें. जापान में बूढ़ों की बढ़ती संख्या की वजह से नौसेना को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जापान अपनी नई वॉरशिप्स को दो एजीस एयर और बैलेस्टिक मिसाइलों से लैस करेगा. बताया जा रहा है कि इनकी रेंज पुराने मॉडल्स की तुलना में तीन गुना ज्यादा होगी.
|
अगर आपको अपना पहला सृजन याद हो तो आप कुछ बातें गौर सकते हैं। हो सकता है वह किसी कागज पर बनाया आड़ी-तिरछी लकीरों वाला रेखाचित्र हो या फिर कागज को मोड़-तोड़ कर बनाई गई कोई नाव, हवाईजहाज, बत्तख या शेरनुमा कोई आकृति। या फिर हो सकता है अपने ही अल्हड़पन में छेड़ी गई कोई सुरीली तान या फिर सबको थिरका देने वाला कोई नृत्य रहा हो। कविता,गीत, कहानी, लेख, फोटोग्राफी के हुनर से खींचा कोई चित्र, अंकों को जोड़ने-घटाने की कोई अकल्पनीय तरकीब। इन दिनों तो कोडिंग के जरिए भी सृजन होता है डिजिटल ऐप बनाकर, जिससे कई लोगो का जीवन सहज और सुविधाजनक बनाया जा सकता है। और भी कई विविधताओं से भरा रहता है सृजन का हमारा कैनवास।
वैसे प्रकृति में भी कई माहिर कलाकार मौजूद हैं, जो हमें अपनी सृजनात्मकता से पल-पल विस्मित कर देते हैं। बीज में से चुपके से हुआ अंकुरण और उसका हर दिन नया पल्लवन, पौधा, पेड़, फूल, फल, आसमान को छूती उसकी शाखाएं और उन शाखाओं पर तिनका-तिनका जुटाती नन्ही-सी मुनिया का नन्हा-सा घोंसला। पेड़ पर लटका हुआ हवा में डोलता कुशल कारीगरी से बना बया का खूबसूरत घोंसला। कुशल गायक नर्तक पक्षी 'मछरिया' का मोहक प्रदर्शन। नन्ही-सी मधुमक्खी तो कई सृजनात्मक गतिविधियों की कारक बनती है, परागन की अद्भुत प्रक्रिया को अंजाम देकर। नया रचने के इनके अपने जोखिम भी होते हैं, जिसके लिए अपने आरामदायक सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने की हिम्मत करनी होती है। गुरुत्वाकर्षण के विपरीत तो कभी परंपरागत ढर्रे के विरुद्ध ऊंची उड़ान भी भरनी पड़ती है।
कुछ नया रचना हमेशा बेहद रोमांचक होता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि हर नई रचना के साथ कलाकार भी नया होता जाता है। वास्तविक सृजन रोमांचक यात्रा की तरह होता है, जिसका लक्ष्य केवल मुकाम तक पहुंचने भर तक सीमित नहीं होता। जब हम कुछ रचते हैं, तब हमारे अंदर बहुत कुछ बदल जाता है। हम पहले से अधिक कुशल हो जाते हैं और अपनी ही कृति से बेहतर रचने की सामर्थ्य रखने लगते हैं।
बेहतरी की अगली लड़ाई खुद हमें अपने आप से ही लड़नी होती है। लगातार प्रयत्नशील, सीखने-समझने को उत्सुक बने रहने से हम अपनी ही पुरानी कृति को और भी निखारने में समर्थ होते जाते हैं। सृजन हमें हर संदर्भ में पहले से अधिक परिपक्व बनाता है। असल में सृजन जितना बाहरी रूप में नवीन दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक वह हमारे भीतर हमें नवीकृत कर रहा होता है। अगर इस यात्रा को सफलतापूर्वक, लगन और समर्पण के साथ पूरा किया जाए, तब कलाकार और उसकी रचना एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं। कहना मुश्किल होता है कि कलाकार ने कृति की रचना की है या रचना ने कलाकार का रूपांतरण कर दिया है।
सृजन कभी-कभी मनुष्य की सहजता को निगल भी जाता है। यह तब होता है जब हम अपनी बनाई हुई चीज पर गुरूर करने लगते हैं। उसे लेकर एकाधिकार रखने लगते हैं, खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने लगते हैं। यह समझना जरूरी होगा कि कोई भी नई रचना सृजन के बाद समाज की हो जाती है। नवसृजन एक परंपरा का हिस्सा होता है जो पिछले को ग्रहण कर आगे का रास्ता हमेशा बनाता रहता है। श्रेष्ठ कभी सर्वश्रेष्ठ नहीं होता। सर्वश्रेष्ठ की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती।
हमें सोचना चाहिए कि हम समाज द्वारा निर्मित बस कुछ मापदंडों पर खरे उतरने को ही अपने जीवन का लक्ष्य क्यों मान लेते हैं। दूसरों को अपनी उपलब्धि, अपना वैभव दिखाने के लिए लालायित रहते हैं। ऐसी सोच धीरे-धीरे व्यक्ति को आत्मकेंद्रित बनाकर निगल लेती है। जबकि नवसृजन खुशियां बांटता है और नया सीखने, बेहतर रचने की ऊर्जा देता है। व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा देता है और जटिलताओं को समाप्त कर देता है।
सृजन की सही प्रक्रिया का असली सौंदर्य प्रकृति से सीखा जा सकता है जो हर पल कुछ नया रच रही है खामोशी के साथ। रात में दिखी अधखुली कली सुबह मुस्कुराता हुआ फूल बन कर हमसे बातें करने लगती है। दोपहर के बाद धीरे-धीरे फूल कुछ सिमटा हुआ-सा नजर आने लगता है, जैसे इंसान के चेहरे पर भी उम्र की सलवटे दिखने लगती हैं। फूल अपने बदले हुए रूप को सहजता के साथ स्वीकार करता है। पौधा भी अपनी सुंदर कृति को सहजता से विदा कर देता है शाम ढले। ऐसी कई सृजन की प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती है प्रकृति में।
यही कारण है कि प्रकृति हमेशा नई बनी रहती है। सुंदर होती रहती है। अपने काम में लगी हुई है समर्पित भाव से। फर्क नहीं पड़ता उसे कि कितने लोगों को पता चला है उसकी बेमिसाल सृजनधर्मिता का। प्रकृति न किसी तरह के प्रचार-प्रसार में लगी हुई है, न ही अपनी उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए अलग से कोई दिन निर्धारित कर रखा है। लगता है कि जैसे प्रकृति ने सृजन का कोई निरंतर उत्सव जारी रखने का संकल्प लिया हो और सृजन की लंबी यात्रा पर निकल पड़ी हो।
|
अगर आपको अपना पहला सृजन याद हो तो आप कुछ बातें गौर सकते हैं। हो सकता है वह किसी कागज पर बनाया आड़ी-तिरछी लकीरों वाला रेखाचित्र हो या फिर कागज को मोड़-तोड़ कर बनाई गई कोई नाव, हवाईजहाज, बत्तख या शेरनुमा कोई आकृति। या फिर हो सकता है अपने ही अल्हड़पन में छेड़ी गई कोई सुरीली तान या फिर सबको थिरका देने वाला कोई नृत्य रहा हो। कविता,गीत, कहानी, लेख, फोटोग्राफी के हुनर से खींचा कोई चित्र, अंकों को जोड़ने-घटाने की कोई अकल्पनीय तरकीब। इन दिनों तो कोडिंग के जरिए भी सृजन होता है डिजिटल ऐप बनाकर, जिससे कई लोगो का जीवन सहज और सुविधाजनक बनाया जा सकता है। और भी कई विविधताओं से भरा रहता है सृजन का हमारा कैनवास। वैसे प्रकृति में भी कई माहिर कलाकार मौजूद हैं, जो हमें अपनी सृजनात्मकता से पल-पल विस्मित कर देते हैं। बीज में से चुपके से हुआ अंकुरण और उसका हर दिन नया पल्लवन, पौधा, पेड़, फूल, फल, आसमान को छूती उसकी शाखाएं और उन शाखाओं पर तिनका-तिनका जुटाती नन्ही-सी मुनिया का नन्हा-सा घोंसला। पेड़ पर लटका हुआ हवा में डोलता कुशल कारीगरी से बना बया का खूबसूरत घोंसला। कुशल गायक नर्तक पक्षी 'मछरिया' का मोहक प्रदर्शन। नन्ही-सी मधुमक्खी तो कई सृजनात्मक गतिविधियों की कारक बनती है, परागन की अद्भुत प्रक्रिया को अंजाम देकर। नया रचने के इनके अपने जोखिम भी होते हैं, जिसके लिए अपने आरामदायक सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने की हिम्मत करनी होती है। गुरुत्वाकर्षण के विपरीत तो कभी परंपरागत ढर्रे के विरुद्ध ऊंची उड़ान भी भरनी पड़ती है। कुछ नया रचना हमेशा बेहद रोमांचक होता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि हर नई रचना के साथ कलाकार भी नया होता जाता है। वास्तविक सृजन रोमांचक यात्रा की तरह होता है, जिसका लक्ष्य केवल मुकाम तक पहुंचने भर तक सीमित नहीं होता। जब हम कुछ रचते हैं, तब हमारे अंदर बहुत कुछ बदल जाता है। हम पहले से अधिक कुशल हो जाते हैं और अपनी ही कृति से बेहतर रचने की सामर्थ्य रखने लगते हैं। बेहतरी की अगली लड़ाई खुद हमें अपने आप से ही लड़नी होती है। लगातार प्रयत्नशील, सीखने-समझने को उत्सुक बने रहने से हम अपनी ही पुरानी कृति को और भी निखारने में समर्थ होते जाते हैं। सृजन हमें हर संदर्भ में पहले से अधिक परिपक्व बनाता है। असल में सृजन जितना बाहरी रूप में नवीन दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक वह हमारे भीतर हमें नवीकृत कर रहा होता है। अगर इस यात्रा को सफलतापूर्वक, लगन और समर्पण के साथ पूरा किया जाए, तब कलाकार और उसकी रचना एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं। कहना मुश्किल होता है कि कलाकार ने कृति की रचना की है या रचना ने कलाकार का रूपांतरण कर दिया है। सृजन कभी-कभी मनुष्य की सहजता को निगल भी जाता है। यह तब होता है जब हम अपनी बनाई हुई चीज पर गुरूर करने लगते हैं। उसे लेकर एकाधिकार रखने लगते हैं, खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने लगते हैं। यह समझना जरूरी होगा कि कोई भी नई रचना सृजन के बाद समाज की हो जाती है। नवसृजन एक परंपरा का हिस्सा होता है जो पिछले को ग्रहण कर आगे का रास्ता हमेशा बनाता रहता है। श्रेष्ठ कभी सर्वश्रेष्ठ नहीं होता। सर्वश्रेष्ठ की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। हमें सोचना चाहिए कि हम समाज द्वारा निर्मित बस कुछ मापदंडों पर खरे उतरने को ही अपने जीवन का लक्ष्य क्यों मान लेते हैं। दूसरों को अपनी उपलब्धि, अपना वैभव दिखाने के लिए लालायित रहते हैं। ऐसी सोच धीरे-धीरे व्यक्ति को आत्मकेंद्रित बनाकर निगल लेती है। जबकि नवसृजन खुशियां बांटता है और नया सीखने, बेहतर रचने की ऊर्जा देता है। व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा देता है और जटिलताओं को समाप्त कर देता है। सृजन की सही प्रक्रिया का असली सौंदर्य प्रकृति से सीखा जा सकता है जो हर पल कुछ नया रच रही है खामोशी के साथ। रात में दिखी अधखुली कली सुबह मुस्कुराता हुआ फूल बन कर हमसे बातें करने लगती है। दोपहर के बाद धीरे-धीरे फूल कुछ सिमटा हुआ-सा नजर आने लगता है, जैसे इंसान के चेहरे पर भी उम्र की सलवटे दिखने लगती हैं। फूल अपने बदले हुए रूप को सहजता के साथ स्वीकार करता है। पौधा भी अपनी सुंदर कृति को सहजता से विदा कर देता है शाम ढले। ऐसी कई सृजन की प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती है प्रकृति में। यही कारण है कि प्रकृति हमेशा नई बनी रहती है। सुंदर होती रहती है। अपने काम में लगी हुई है समर्पित भाव से। फर्क नहीं पड़ता उसे कि कितने लोगों को पता चला है उसकी बेमिसाल सृजनधर्मिता का। प्रकृति न किसी तरह के प्रचार-प्रसार में लगी हुई है, न ही अपनी उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए अलग से कोई दिन निर्धारित कर रखा है। लगता है कि जैसे प्रकृति ने सृजन का कोई निरंतर उत्सव जारी रखने का संकल्प लिया हो और सृजन की लंबी यात्रा पर निकल पड़ी हो।
|
Quick links:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत पर "लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी" वाले बयान की तारीफ करते हुए एनसीपी नेता नवाब मिलक ने कहा कि "मोहन भागवत का बयान कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का DNA एक है। अगर भागवत जी का हृदय बदल रहा है तो हम उसका स्वागत करते हैं। वर्ण व्यवस्था में विश्वास करने वाला संगठन अगर धर्म की हदों को तोड़ना चाहता है तो ये अच्छी बात है"
इससे पहले ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि इस तरह के बयान आने से देश के अंदर मोहब्बत अमन चैन होगा। उन्होंने वासुदेव कुटुंबकम की बात को पूरा किया है । हमारा फर्ज धर्म नहीं देश के लिए भारत को मजबूत करना है। आपसी भाईचारा मजबुत बनाना है, इससे हमारे देश का बहुत बड़ा फायेदा होगा । हम सब एक है ये बहुत बड़ी बात कही, इसी पैगाम का इंतजार था हम सब भारतीय है हमें गर्व होना चाहिए , भारतीय राष्ट्र हमारी पहचान इसी से है।
डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा 'ये ठीक कहा है गाय के अंदर हिन्दू भाइयो की आस्था है। भगवत जी संघ के प्रमुख ने बहुत जिम्मेदारी से बड़ी बातें की है । जो भी कानून के खिलाफ कुछ करेगा तो वो अपराधी है उसे सजा होनी चाहिए, वो चाहे किसी भी धर्म का हो।'
आपको बता दें, रविवार को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी हैं। उन्होंने राजनीति को एकता खत्म करने का हथियार बताते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है, भले ही वे किसी भी धर्म के हों और मुसलमानों को "डर के इस चक्र" में नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग कहते हैं कि मुसलमान इस देश में नहीं रह सकते, वे हिंदू नहीं हैं।
यह भी पढ़ें- असदुद्दीन ओवैसी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर साधा निशाना, बोले- 'नफ़रत हिंदुत्व की देन'
यह भी पढे़-ं इलियासी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान की तारीफ, बोले- 'हमारा फर्ज धर्म नहीं, भारत को मजबूत करना है'
|
Quick links: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत पर "लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी" वाले बयान की तारीफ करते हुए एनसीपी नेता नवाब मिलक ने कहा कि "मोहन भागवत का बयान कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का DNA एक है। अगर भागवत जी का हृदय बदल रहा है तो हम उसका स्वागत करते हैं। वर्ण व्यवस्था में विश्वास करने वाला संगठन अगर धर्म की हदों को तोड़ना चाहता है तो ये अच्छी बात है" इससे पहले ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि इस तरह के बयान आने से देश के अंदर मोहब्बत अमन चैन होगा। उन्होंने वासुदेव कुटुंबकम की बात को पूरा किया है । हमारा फर्ज धर्म नहीं देश के लिए भारत को मजबूत करना है। आपसी भाईचारा मजबुत बनाना है, इससे हमारे देश का बहुत बड़ा फायेदा होगा । हम सब एक है ये बहुत बड़ी बात कही, इसी पैगाम का इंतजार था हम सब भारतीय है हमें गर्व होना चाहिए , भारतीय राष्ट्र हमारी पहचान इसी से है। डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा 'ये ठीक कहा है गाय के अंदर हिन्दू भाइयो की आस्था है। भगवत जी संघ के प्रमुख ने बहुत जिम्मेदारी से बड़ी बातें की है । जो भी कानून के खिलाफ कुछ करेगा तो वो अपराधी है उसे सजा होनी चाहिए, वो चाहे किसी भी धर्म का हो।' आपको बता दें, रविवार को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी हैं। उन्होंने राजनीति को एकता खत्म करने का हथियार बताते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है, भले ही वे किसी भी धर्म के हों और मुसलमानों को "डर के इस चक्र" में नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग कहते हैं कि मुसलमान इस देश में नहीं रह सकते, वे हिंदू नहीं हैं। यह भी पढ़ें- असदुद्दीन ओवैसी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर साधा निशाना, बोले- 'नफ़रत हिंदुत्व की देन' यह भी पढे़-ं इलियासी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान की तारीफ, बोले- 'हमारा फर्ज धर्म नहीं, भारत को मजबूत करना है'
|
वैज्ञानिकों को मिला ऐसा हीरा... जो धरती की नहीं, अंतरिक्ष की देन है! जानिए इसमें क्या है खास?
OMG! शख्स ने 18 महीने में खोज निकाला आसमान से गिरा चमकीला पत्थर, करोड़ों में हो सकती है कीमत!
|
वैज्ञानिकों को मिला ऐसा हीरा... जो धरती की नहीं, अंतरिक्ष की देन है! जानिए इसमें क्या है खास? OMG! शख्स ने अट्ठारह महीने में खोज निकाला आसमान से गिरा चमकीला पत्थर, करोड़ों में हो सकती है कीमत!
|
आज के दिन देश भर में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में 325 स्थानों पर ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया है ।इसी क्रम में भिवंडी के गोकुल नगर क्षेत्र स्थित सिल्को हाउस में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन प्रात 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक किया गया था।इस कैंप में संकल्प ब्लड बैंक के डॉ राज शेखर नायर ने अपनी टीम के साथ सराहनीय सेवाएं प्रदान कर के 170 बोतल ब्लड जमा किया है ।वहीं कैंप की सारी व्यवस्था तेरापंथ की महिला मंडल ने सुचारू रूप से संभालते हुए कैंप को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उक्त कैंप को रोटरी क्लब भिवंडी, बोहरा समाज भिवंडी, भैरव आई अस्पताल ने अपना सहयोग दिया। तथा अनेक हिंदू मुस्लिम बंधुओं ने इस कैंप में बढचढकर भाग लिया। इस कैंप में भाजपा भिवंडी जिलाध्यक्ष संतोष शेट्टी, भाजपा के भिवंडी पश्चिम विधानसभा विधायक महेश चौघुले, शिवसेना के पूर्व विधानसभा विधायक रुपेश म्हात्रे, नगरसेवक सुमित पाटिल अतिथि के रूप में उपस्थित थे। वहीं तेरापंथ के वरिष्ठ गणमान्य मीठालाल जी शेठिया, जपरमल चौपडा, शांतिलाल राठौड़, अज्ञारी लाल बाफना, महावीर जैन, तेरापंथ अध्यक्ष प्रकाश बाफना, मंत्री रोहित जैन, दिनेश छाजेड, प्रखर युवा नेता व पूर्व तेरापंथ अध्यक्ष राकेश ओस्तवाल जैन आदि ने इस ब्लड डोनेशन कैंप को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उक्त जानकारी देते हुए राकेश ओस्तवाल जैन ने बताया कि ब्लड डोनेशन कैंप में जमा किया गया ब्लड सुरक्षित रूप से संकल्प ब्लड बैंक में जमा रखा जाता है और इसे गरीबों, मजदूरों व जरूरतमंदों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है इस प्रकार की सेवाएं निरंतर जारी हैं जो भविष्य में भी जारी रहेंगी।
|
आज के दिन देश भर में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में तीन सौ पच्चीस स्थानों पर ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया है ।इसी क्रम में भिवंडी के गोकुल नगर क्षेत्र स्थित सिल्को हाउस में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन प्रात नौ बजे से सायंकाल पाँच बजे तक किया गया था।इस कैंप में संकल्प ब्लड बैंक के डॉ राज शेखर नायर ने अपनी टीम के साथ सराहनीय सेवाएं प्रदान कर के एक सौ सत्तर बोतल ब्लड जमा किया है ।वहीं कैंप की सारी व्यवस्था तेरापंथ की महिला मंडल ने सुचारू रूप से संभालते हुए कैंप को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उक्त कैंप को रोटरी क्लब भिवंडी, बोहरा समाज भिवंडी, भैरव आई अस्पताल ने अपना सहयोग दिया। तथा अनेक हिंदू मुस्लिम बंधुओं ने इस कैंप में बढचढकर भाग लिया। इस कैंप में भाजपा भिवंडी जिलाध्यक्ष संतोष शेट्टी, भाजपा के भिवंडी पश्चिम विधानसभा विधायक महेश चौघुले, शिवसेना के पूर्व विधानसभा विधायक रुपेश म्हात्रे, नगरसेवक सुमित पाटिल अतिथि के रूप में उपस्थित थे। वहीं तेरापंथ के वरिष्ठ गणमान्य मीठालाल जी शेठिया, जपरमल चौपडा, शांतिलाल राठौड़, अज्ञारी लाल बाफना, महावीर जैन, तेरापंथ अध्यक्ष प्रकाश बाफना, मंत्री रोहित जैन, दिनेश छाजेड, प्रखर युवा नेता व पूर्व तेरापंथ अध्यक्ष राकेश ओस्तवाल जैन आदि ने इस ब्लड डोनेशन कैंप को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किया। उक्त जानकारी देते हुए राकेश ओस्तवाल जैन ने बताया कि ब्लड डोनेशन कैंप में जमा किया गया ब्लड सुरक्षित रूप से संकल्प ब्लड बैंक में जमा रखा जाता है और इसे गरीबों, मजदूरों व जरूरतमंदों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है इस प्रकार की सेवाएं निरंतर जारी हैं जो भविष्य में भी जारी रहेंगी।
|
पिछले साल Twitter के नए मालिक एलन मस्क द्वारा बर्खास्त किए गए ट्विटर के तीन शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को ट्विटर के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। पूर्व-सीईओ पराग अग्रवाल ने कंपनी के पूर्व मुख्य कानूनी और वित्तीय अधिकारियों के साथ मुकदमे में दावा किया है ट्विटर पर अभी तक उनके 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) से अधिक का बकाया है और ट्विटर उन्हें यह राशि भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
|
पिछले साल Twitter के नए मालिक एलन मस्क द्वारा बर्खास्त किए गए ट्विटर के तीन शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को ट्विटर के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। पूर्व-सीईओ पराग अग्रवाल ने कंपनी के पूर्व मुख्य कानूनी और वित्तीय अधिकारियों के साथ मुकदमे में दावा किया है ट्विटर पर अभी तक उनके एक मिलियन डॉलर से अधिक का बकाया है और ट्विटर उन्हें यह राशि भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
|
19 new district in rajasthan 2023: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के 19 नए जिलों की घोषणा की है। नए जिलों में अनूपगढ़, ब्यावर, बालोतरा, नीमकाथाना, सलूंबर, शाहपुरा, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, गंगापुर सिटी, जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण, कोटपूतली, बहरोड़, फलौदी और कुम्हेर को शामिल किया गया है।
इस अवसर पर अशोक गहलोत ने कहा इस बजट में मैंने प्रदेशवासियों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय किए हैं। मुझे खुशी है कि पूरे प्रदेश की आकांक्षाएं बजट से पूरी हुई हैं। PCC द्वारा अधिवेशन में दिए प्रस्तावों को भी इस बजट में शामिल किया गया है। राजस्थान की जनता के लिए बचत, राहत और बढ़त का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा।
यह चुनावी साल है। इस साल में 19 नए जिलों की घोषणा करना मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। 50 से ज्यादा विधायक पिछले कई साल से नए जिलों के गठन की मांग करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस कार्यकाल में नए जिलों की मांग बड़ी तेजी से उठाई गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों और मंत्रियों ने भी नए जिलों की मांग को पुरजोर तरीके से रखा था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नए जिलों की घोषणा करने के साथ तीन संभाग मुख्यालयों की घोषणा भी कर दी। इससे एक तीर से दो शिकार हो गए। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को खुश भी कर दिया। साथ ही प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और कानून व्यवस्था की स्थिति को मजबूत भी कर दिया।
|
उन्नीस new district in rajasthan दो हज़ार तेईस: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के उन्नीस नए जिलों की घोषणा की है। नए जिलों में अनूपगढ़, ब्यावर, बालोतरा, नीमकाथाना, सलूंबर, शाहपुरा, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, गंगापुर सिटी, जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण, कोटपूतली, बहरोड़, फलौदी और कुम्हेर को शामिल किया गया है। इस अवसर पर अशोक गहलोत ने कहा इस बजट में मैंने प्रदेशवासियों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय किए हैं। मुझे खुशी है कि पूरे प्रदेश की आकांक्षाएं बजट से पूरी हुई हैं। PCC द्वारा अधिवेशन में दिए प्रस्तावों को भी इस बजट में शामिल किया गया है। राजस्थान की जनता के लिए बचत, राहत और बढ़त का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा। यह चुनावी साल है। इस साल में उन्नीस नए जिलों की घोषणा करना मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। पचास से ज्यादा विधायक पिछले कई साल से नए जिलों के गठन की मांग करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस कार्यकाल में नए जिलों की मांग बड़ी तेजी से उठाई गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों और मंत्रियों ने भी नए जिलों की मांग को पुरजोर तरीके से रखा था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नए जिलों की घोषणा करने के साथ तीन संभाग मुख्यालयों की घोषणा भी कर दी। इससे एक तीर से दो शिकार हो गए। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को खुश भी कर दिया। साथ ही प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और कानून व्यवस्था की स्थिति को मजबूत भी कर दिया।
|
काबुलः तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद ने यहां तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने काबुल में जारी एक आधिकारिक बयान के हवाले से बताया कि शनिवार को बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, मानवीय सहायता, आर्थिक और पारगमन सहयोग और अफगानिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव पर चर्चा की।
बयान के अनुसार, उन्होंने कई अफगान-तुर्कमेन संयुक्त परियोजनाओं, फाइबर ऑप्टिक और रेलवे परियोजनाओं के साथ-साथ तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइपलाइन परियोजना के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की।
प्रमुख क्षेत्रीय परियोजना से तुर्कमेनिस्तान से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में गैस ट्रांजिट की उम्मीद है, अफगानिस्तान को रॉयल्टी के रूप में प्रति वर्ष लगभग 500 मिलियन डॉलर मिलते हैं और हजारों अफगानों को परियोजना से काम मिलने की उम्मीद है।
बयान के अनुसार, मेरेडोव ने कहा कि तुर्कमेनिस्तान अफगानों को मानवीय सहायता प्रदान करने और आर्थिक परियोजनाओं के कार्यान्वयन में उनकी मदद करने के लिए तैयार है।
बयान में उनके हवाले से कहा गया, संयुक्त परियोजनाओं का कार्यान्वयन अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लोगों के लिए मददगार होगा और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाएगा।
लंबे समय तक चले युद्ध और असुरक्षा के कारण तापी परियोजना के उद्घाटन में देरी हुई थी, जिसके 2020 में पूरा होने की उम्मीद थी। अफगान और तुर्कमेनिस्तान पक्षों ने मौजूदा सुरक्षा के साथ इस विषय पर बातचीत फिर से शुरू कर दी है।
|
काबुलः तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद ने यहां तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने काबुल में जारी एक आधिकारिक बयान के हवाले से बताया कि शनिवार को बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, मानवीय सहायता, आर्थिक और पारगमन सहयोग और अफगानिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव पर चर्चा की। बयान के अनुसार, उन्होंने कई अफगान-तुर्कमेन संयुक्त परियोजनाओं, फाइबर ऑप्टिक और रेलवे परियोजनाओं के साथ-साथ तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन परियोजना के निर्माण से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की। प्रमुख क्षेत्रीय परियोजना से तुर्कमेनिस्तान से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में गैस ट्रांजिट की उम्मीद है, अफगानिस्तान को रॉयल्टी के रूप में प्रति वर्ष लगभग पाँच सौ मिलियन डॉलर मिलते हैं और हजारों अफगानों को परियोजना से काम मिलने की उम्मीद है। बयान के अनुसार, मेरेडोव ने कहा कि तुर्कमेनिस्तान अफगानों को मानवीय सहायता प्रदान करने और आर्थिक परियोजनाओं के कार्यान्वयन में उनकी मदद करने के लिए तैयार है। बयान में उनके हवाले से कहा गया, संयुक्त परियोजनाओं का कार्यान्वयन अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लोगों के लिए मददगार होगा और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाएगा। लंबे समय तक चले युद्ध और असुरक्षा के कारण तापी परियोजना के उद्घाटन में देरी हुई थी, जिसके दो हज़ार बीस में पूरा होने की उम्मीद थी। अफगान और तुर्कमेनिस्तान पक्षों ने मौजूदा सुरक्षा के साथ इस विषय पर बातचीत फिर से शुरू कर दी है।
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
इंदिरा गोस्वामी (१४ नवम्बर १९४२ - नवम्बर, २०१०) असमिया साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर थीं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती गोस्वामी असम की चरमपंथी संगठन उल्फा यानि युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम और भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की राजनैतिक पहल करने में अहम भूमिका निभाई। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास मामरे धरा तरोवाल अरु दुखन उपन्यास के लिये उन्हें सन् १९८२ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (असमिया) से सम्मानित किया गया। . कृपया इस पृष्ठ को उल्फा पृष्ठ की ओर पुनर्निर्देशित कर दें।.
इंदिरा रायसम गोस्वामी और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
इंदिरा रायसम गोस्वामी 28 संबंध है और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम 0 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (28 + 0)।
यह लेख इंदिरा रायसम गोस्वामी और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंदिरा गोस्वामी असमिया साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर थीं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती गोस्वामी असम की चरमपंथी संगठन उल्फा यानि युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम और भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की राजनैतिक पहल करने में अहम भूमिका निभाई। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास मामरे धरा तरोवाल अरु दुखन उपन्यास के लिये उन्हें सन् एक हज़ार नौ सौ बयासी में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। . कृपया इस पृष्ठ को उल्फा पृष्ठ की ओर पुनर्निर्देशित कर दें।. इंदिरा रायसम गोस्वामी और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम आम में शून्य बातें हैं । इंदिरा रायसम गोस्वामी अट्ठाईस संबंध है और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम शून्य है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख इंदिरा रायसम गोस्वामी और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
उत्तर प्रदेश में किसानों को अन्ना जानवर से छुटकारा दिलाने के लिए योगी सरकार ने सबसे महत्वकांक्षी योजना का ऐलान किया था। जिसमे घर गाँव मे गौशाला और ग्राम पंचायत और नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में कान्हा गौशाला बनने के बजट भेजा गया था। जिसका उद्घाटन 26 जून 2020 को हुआ था। महोबा जिला के कबरई पहरा रोड पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कान्हा गौशाला का निर्माण कराया था। जिसका उद्धघाटन जिले के भाजपा सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने फीता काटकर किया था। जिससे किसानों के फसल बर्बाद ना हो और किसान उन्नति कर सके।
कबरई में कान्हा गौशाला एक करोड़ साठ लाख लागत के बनी हुई है। जो 4 एकड़ जमीन में इसकी स्थापना की गई है। इस गौशाला में लगभग पांच सौ अन्ना जानवर रखने की सुविधा ब्यवस्था की गई थी। पर यह गौशाला किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। लगभग दो महीना बीत जाने के बाद भी उस गौशाला में एक भी अन्ना जानवर नही बन्द किये गए।
सरकार ने भले ही किसानों को अन्ना पशुओ से निजात दिलाने के लिए हर ग्राम पंचायत में गौशाला बनवा दी हो। लेकिन महोबा जिले में किसानों की समस्याएं जैसी की तैसी बनी हुई है। अन्ना जानवर आज भी किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं।
24 अगस्त 2020 को महोबा जिले के कई गाँव के किसानों ने अन्ना जानवरों से परेशान होकर सैकड़ो अन्ना जानवरो को लेकर कानपुर सागर राष्ट्रीय राजमार्ग में खड़ा कर जाम लगा दिया था। जिससे सैकड़ो वाहन जाम में फंस गए थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँच कड़ी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया।
कबरई पहरा रोड पर बनी करोड़ो की लागत से कान्हा गौशाला में डॉक्टरों के लिए रूम बनवाये गए है। उजाले के लिए सोलर लाइट लगवाई गई है। जानवरो को पानी पीने के लिए बोर करवाया गया गया है, छाया के लिए टीन शेड लगवाए गये है।
अन्ना जानवरों के खाने के लिए अभी तक भूसा नही पहुँचा है, और न ही वहां कोई देखरेख के लिए चरवाहों की ब्यवथा की गई है। जिससे यह गौशाला अपने आप मे अनाथ के रूप में शोपीस बनकर खड़ी है। गौशाला का उद्घाटन कर भले ही सरकार वाह वाह लूट रही हो। पर किसान आज भी परेशान है।
महोबा जिला, गाँव मामना के किसान भवानीदीन ने बताया कि जो सड़क पर अन्ना जानवर है, इनके लिए योगी सरकार ने हर ग्राम पंचायत में गौशाला व हर नगर पंचायत व नगर पालिका में करोड़ो रूपये से कान्हा गौशालाएँ बनवाई है। पर ये सब गौशालाएं शोपीस बनकर रह गयी है। क्योकि किसी भी गौशालाओ में अन्ना जानवर नही है। सभी जानवर खुले में घूम रहे है।
मामना गाँव की महिला किसान मायादेवी ने कहा कि ये जानवर जिस किसान के खेत पर पहुँच जाते है पूरी फसल खा जाते हैं। जिससे परेशान होकर हम लोगो ने अन्ना जानवरो को लेकर जाम लगाया था। पर अन्ना जानवरो से छुटकारा पाने के लिए कोई ठोस अस्वाशन नही मिला।
पलका गाँव के किसान दीनदयाल ने कहा कि अन्ना जानवर खुले में घूम रहे है। जिससे खेत की फसल खा रहे है। गाँव की गौशाला में कोई सुविधा नही है। न ही प्रधान कोई बात सुनता है।
मामना गाँव का किसान रामभरोसी ने बताया कि जब गौशाला बन रही थी, तब जानवरों को उसमे रखने की बात कर रहे थे, लेकिन जब गौशाला बन गयी तो अब उसमे अन्ना जानवरो को रखने से मना कर रहे हैं। हम लोग रात दिन भूखे प्यासे खेतो में पड़े रहते है।
बुन्देलखण्ड का किसान वैसे ही एक दशक से दैवीय आपदाओ की मार झेल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सबाल यह उठता है कि कागजी तौर पर अन्ना जानवर गौशालाओ मे बंद है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। आखिर जिला प्रशासन अन्ना जानवरो के लिए सजग क्यो नही है। क्यो किसानो की फसल बर्बाद करने में लगा हुआ है और मजबूरन किसानों को सड़क पर उतरना पड़ता है।
|
उत्तर प्रदेश में किसानों को अन्ना जानवर से छुटकारा दिलाने के लिए योगी सरकार ने सबसे महत्वकांक्षी योजना का ऐलान किया था। जिसमे घर गाँव मे गौशाला और ग्राम पंचायत और नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में कान्हा गौशाला बनने के बजट भेजा गया था। जिसका उद्घाटन छब्बीस जून दो हज़ार बीस को हुआ था। महोबा जिला के कबरई पहरा रोड पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से कान्हा गौशाला का निर्माण कराया था। जिसका उद्धघाटन जिले के भाजपा सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने फीता काटकर किया था। जिससे किसानों के फसल बर्बाद ना हो और किसान उन्नति कर सके। कबरई में कान्हा गौशाला एक करोड़ साठ लाख लागत के बनी हुई है। जो चार एकड़ जमीन में इसकी स्थापना की गई है। इस गौशाला में लगभग पांच सौ अन्ना जानवर रखने की सुविधा ब्यवस्था की गई थी। पर यह गौशाला किसानों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। लगभग दो महीना बीत जाने के बाद भी उस गौशाला में एक भी अन्ना जानवर नही बन्द किये गए। सरकार ने भले ही किसानों को अन्ना पशुओ से निजात दिलाने के लिए हर ग्राम पंचायत में गौशाला बनवा दी हो। लेकिन महोबा जिले में किसानों की समस्याएं जैसी की तैसी बनी हुई है। अन्ना जानवर आज भी किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। चौबीस अगस्त दो हज़ार बीस को महोबा जिले के कई गाँव के किसानों ने अन्ना जानवरों से परेशान होकर सैकड़ो अन्ना जानवरो को लेकर कानपुर सागर राष्ट्रीय राजमार्ग में खड़ा कर जाम लगा दिया था। जिससे सैकड़ो वाहन जाम में फंस गए थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँच कड़ी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया। कबरई पहरा रोड पर बनी करोड़ो की लागत से कान्हा गौशाला में डॉक्टरों के लिए रूम बनवाये गए है। उजाले के लिए सोलर लाइट लगवाई गई है। जानवरो को पानी पीने के लिए बोर करवाया गया गया है, छाया के लिए टीन शेड लगवाए गये है। अन्ना जानवरों के खाने के लिए अभी तक भूसा नही पहुँचा है, और न ही वहां कोई देखरेख के लिए चरवाहों की ब्यवथा की गई है। जिससे यह गौशाला अपने आप मे अनाथ के रूप में शोपीस बनकर खड़ी है। गौशाला का उद्घाटन कर भले ही सरकार वाह वाह लूट रही हो। पर किसान आज भी परेशान है। महोबा जिला, गाँव मामना के किसान भवानीदीन ने बताया कि जो सड़क पर अन्ना जानवर है, इनके लिए योगी सरकार ने हर ग्राम पंचायत में गौशाला व हर नगर पंचायत व नगर पालिका में करोड़ो रूपये से कान्हा गौशालाएँ बनवाई है। पर ये सब गौशालाएं शोपीस बनकर रह गयी है। क्योकि किसी भी गौशालाओ में अन्ना जानवर नही है। सभी जानवर खुले में घूम रहे है। मामना गाँव की महिला किसान मायादेवी ने कहा कि ये जानवर जिस किसान के खेत पर पहुँच जाते है पूरी फसल खा जाते हैं। जिससे परेशान होकर हम लोगो ने अन्ना जानवरो को लेकर जाम लगाया था। पर अन्ना जानवरो से छुटकारा पाने के लिए कोई ठोस अस्वाशन नही मिला। पलका गाँव के किसान दीनदयाल ने कहा कि अन्ना जानवर खुले में घूम रहे है। जिससे खेत की फसल खा रहे है। गाँव की गौशाला में कोई सुविधा नही है। न ही प्रधान कोई बात सुनता है। मामना गाँव का किसान रामभरोसी ने बताया कि जब गौशाला बन रही थी, तब जानवरों को उसमे रखने की बात कर रहे थे, लेकिन जब गौशाला बन गयी तो अब उसमे अन्ना जानवरो को रखने से मना कर रहे हैं। हम लोग रात दिन भूखे प्यासे खेतो में पड़े रहते है। बुन्देलखण्ड का किसान वैसे ही एक दशक से दैवीय आपदाओ की मार झेल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सबाल यह उठता है कि कागजी तौर पर अन्ना जानवर गौशालाओ मे बंद है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। आखिर जिला प्रशासन अन्ना जानवरो के लिए सजग क्यो नही है। क्यो किसानो की फसल बर्बाद करने में लगा हुआ है और मजबूरन किसानों को सड़क पर उतरना पड़ता है।
|
कोंडागांव में स्टॉल का निरीक्षण करतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल.
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला प्रशासन ने जिले के प्रवास पर पहुंची राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को विश्व विख्यात शिल्प कला तो दिखाया, लेकिन जिन हाथों ने मूर्तियों को गढ़ा उसे ही अनदेखा कर दिया. अब शिल्पी अपने आप को अपमानित और ठगा महसूस कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एक दिवसीय प्रवास पर कोंडागांव पहुंचीं थीं. यहां राज्यपाल ने भेलवापदर में शिल्पियों की कला और मूर्ति बनाने का पूरा प्रोसेस देखा.
राज्यपाल के सामने वाहवाही और अपनी पीठ थपथापने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने शिल्पियों को अपनी कला दिखाने के लिए नाली के ऊपर पटरी लगाकर स्टॉल लगवाया. सीधे चेहरे में पड़ती धूप से परेशान शिल्पी टेबल के नीचे घुस गए. उज्ज्वला शिल्प संगठन के अध्यक्ष सोन सिंह विश्वकर्मा ने अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये तो सब्जी मंडी की तरह नाली के ऊपर दूकान लगाकर शिल्पियों का अपमान किया गया है.
ये भी पढ़ेंः छत्तीसगढ़ चुनावः BJP ने की कांग्रेस के इस दिग्गज नेता की हार की 'भविष्यवाणी'
सोन सिंह विश्वकर्मा का कहना है कि शिल्प कलाकार कई तरह की समस्याओं को लेकर परेशान हैं. न तो उन्हें मूर्ति बनाने के लिए रा मटेरियल मिल पाता है और न ही बाजार की सुविधा . अपनी समस्या को लेकर जिले से लेकर प्रदेश सरकार तक अपनी बात रख चुके हैं, पर आज तक उसका निराकरण नहीं हो पाया है. हालांकि मौका मिलते ही शिल्पी रमेश कुमार ने राज्यपाल को एक लिखित आवेदन दिया.
रमेश ने कहा कि इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी आवेदन पत्र दे चुके हैं. इधर शिल्कार संजय कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यहां की कला के कारण ही जिले को शिल्प नगरी कहा जाता है, पर सुविधा और रोजगार न मिलने से लोग अब इस कला को छोड़कर दूसरा काम कर रहे हैं. वहीं विनोद कुमार ने कहा की राज्यपाल को हम अपनी कला दिखाना चाहते थे. पर जिला प्रशासन और शिल्प कला बोर्ड के अधिकारी हम छोटे कलाकारों के साथ पक्षपात कर हमें रोक दिया.
ये भी पढ़ेंः यहां दांव पर गृहमंत्री की साख, क्या रामसेवक पैकरा को मिलेगी तीसरी जीत?
.
|
कोंडागांव में स्टॉल का निरीक्षण करतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल. छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला प्रशासन ने जिले के प्रवास पर पहुंची राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को विश्व विख्यात शिल्प कला तो दिखाया, लेकिन जिन हाथों ने मूर्तियों को गढ़ा उसे ही अनदेखा कर दिया. अब शिल्पी अपने आप को अपमानित और ठगा महसूस कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एक दिवसीय प्रवास पर कोंडागांव पहुंचीं थीं. यहां राज्यपाल ने भेलवापदर में शिल्पियों की कला और मूर्ति बनाने का पूरा प्रोसेस देखा. राज्यपाल के सामने वाहवाही और अपनी पीठ थपथापने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने शिल्पियों को अपनी कला दिखाने के लिए नाली के ऊपर पटरी लगाकर स्टॉल लगवाया. सीधे चेहरे में पड़ती धूप से परेशान शिल्पी टेबल के नीचे घुस गए. उज्ज्वला शिल्प संगठन के अध्यक्ष सोन सिंह विश्वकर्मा ने अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये तो सब्जी मंडी की तरह नाली के ऊपर दूकान लगाकर शिल्पियों का अपमान किया गया है. ये भी पढ़ेंः छत्तीसगढ़ चुनावः BJP ने की कांग्रेस के इस दिग्गज नेता की हार की 'भविष्यवाणी' सोन सिंह विश्वकर्मा का कहना है कि शिल्प कलाकार कई तरह की समस्याओं को लेकर परेशान हैं. न तो उन्हें मूर्ति बनाने के लिए रा मटेरियल मिल पाता है और न ही बाजार की सुविधा . अपनी समस्या को लेकर जिले से लेकर प्रदेश सरकार तक अपनी बात रख चुके हैं, पर आज तक उसका निराकरण नहीं हो पाया है. हालांकि मौका मिलते ही शिल्पी रमेश कुमार ने राज्यपाल को एक लिखित आवेदन दिया. रमेश ने कहा कि इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी आवेदन पत्र दे चुके हैं. इधर शिल्कार संजय कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यहां की कला के कारण ही जिले को शिल्प नगरी कहा जाता है, पर सुविधा और रोजगार न मिलने से लोग अब इस कला को छोड़कर दूसरा काम कर रहे हैं. वहीं विनोद कुमार ने कहा की राज्यपाल को हम अपनी कला दिखाना चाहते थे. पर जिला प्रशासन और शिल्प कला बोर्ड के अधिकारी हम छोटे कलाकारों के साथ पक्षपात कर हमें रोक दिया. ये भी पढ़ेंः यहां दांव पर गृहमंत्री की साख, क्या रामसेवक पैकरा को मिलेगी तीसरी जीत? .
|
न्यूज डेस्कः भारत में लॉकडाउन की वजह से लोगों की जिंदगी में आर्थिक संकट उत्पन हो गयी हैं। इसे देखते हुए पीएम मोदी आज अहम बैठक करने वाले हैं। CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी बैठक में कोरोना (Corona Epidemic) से निपटने के मुद्दों पर चर्चा करेंगे. साथ ही, दूसरे आर्थिक पैकेज पर भी फैसला हो सकता है. आपको बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए देश में 3 मई तक लॉकडाउन (Lockdown Part 2) लागू किया गया है. लॉकडाउन की वजह से कई सेक्टर्स की हालत बहुत खस्ता हो चुकी है.
शुक्रवार को दोपहर 12 बजे होगी अहम बैठम- शुक्रवार को दोपहर 12 बजे प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री के साथ इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल होंगे. इस बैठक में MSMEs के लिए राहत पर भी चर्चा होगी. साथ ही, प्रधानमंत्री किसानों की आमदनी और कृषि संकट पर भी चर्चा करेंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक में दूसरे राहत पैकेज पर फैसला हो सकता है.
राहत पैकेज से MSMEs, एक्सपोर्ट्स, एविएशन, कंस्ट्रक्शन सहित उन सेक्टर को राहत मिलेगी जिनमें बड़ी तादाद में मजदूरों की जरूरत होती है. केंद्र सरकार MSMEs को 20 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज देने की तैयारी कर रही है. कोरोना लॉकडाउन की वजह से इस सेक्टर की हालत बहुत खराब है.
इस पैकेज का उद्देश्य ऐसे ही उद्यमों को राहत देने का है. सरकार ऐसे MSME को 'टर्नअराउंड कैपिटल' देगी जो कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद अपने कारोबार को नए सिरे से शुरू कर सकें.
|
न्यूज डेस्कः भारत में लॉकडाउन की वजह से लोगों की जिंदगी में आर्थिक संकट उत्पन हो गयी हैं। इसे देखते हुए पीएम मोदी आज अहम बैठक करने वाले हैं। CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी बैठक में कोरोना से निपटने के मुद्दों पर चर्चा करेंगे. साथ ही, दूसरे आर्थिक पैकेज पर भी फैसला हो सकता है. आपको बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए देश में तीन मई तक लॉकडाउन लागू किया गया है. लॉकडाउन की वजह से कई सेक्टर्स की हालत बहुत खस्ता हो चुकी है. शुक्रवार को दोपहर बारह बजे होगी अहम बैठम- शुक्रवार को दोपहर बारह बजे प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री के साथ इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल होंगे. इस बैठक में MSMEs के लिए राहत पर भी चर्चा होगी. साथ ही, प्रधानमंत्री किसानों की आमदनी और कृषि संकट पर भी चर्चा करेंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक में दूसरे राहत पैकेज पर फैसला हो सकता है. राहत पैकेज से MSMEs, एक्सपोर्ट्स, एविएशन, कंस्ट्रक्शन सहित उन सेक्टर को राहत मिलेगी जिनमें बड़ी तादाद में मजदूरों की जरूरत होती है. केंद्र सरकार MSMEs को बीस हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज देने की तैयारी कर रही है. कोरोना लॉकडाउन की वजह से इस सेक्टर की हालत बहुत खराब है. इस पैकेज का उद्देश्य ऐसे ही उद्यमों को राहत देने का है. सरकार ऐसे MSME को 'टर्नअराउंड कैपिटल' देगी जो कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद अपने कारोबार को नए सिरे से शुरू कर सकें.
|
अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान कांग्रेस से पीएम के अघोषित कैंडिडेट राहुल गांधी ने सैनिक बाहुल्य प्रदेश कहे जाने उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों को करीब लाने की भरपूर कोशिश की। राजधानी के एक होटल में करीब घंटेभर की अलग मुलाकात में उन्होंने उनकी समस्याएं व मांगें सुनी। इस मौके पर पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन को 2014 की बजाय 2006 से लागू करने की डिमांड की। याद रहे कि राज्य में करीब 14 परसेंट पूर्व सैनिकों व अर्द्धसैनिकों के फैमिलीज का है। जिनका लाभ बीजेपी व कांग्रेस दोनों उठाने के लिए हर बार कोशिश करते हैं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व सैनिकों की तरह अर्द्धसैनिकों को भी कैंटीन सुविधा दिए जाने की भी मांग की।
|
अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान कांग्रेस से पीएम के अघोषित कैंडिडेट राहुल गांधी ने सैनिक बाहुल्य प्रदेश कहे जाने उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों को करीब लाने की भरपूर कोशिश की। राजधानी के एक होटल में करीब घंटेभर की अलग मुलाकात में उन्होंने उनकी समस्याएं व मांगें सुनी। इस मौके पर पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन को दो हज़ार चौदह की बजाय दो हज़ार छः से लागू करने की डिमांड की। याद रहे कि राज्य में करीब चौदह परसेंट पूर्व सैनिकों व अर्द्धसैनिकों के फैमिलीज का है। जिनका लाभ बीजेपी व कांग्रेस दोनों उठाने के लिए हर बार कोशिश करते हैं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व सैनिकों की तरह अर्द्धसैनिकों को भी कैंटीन सुविधा दिए जाने की भी मांग की।
|
मुंबईःअभिनेता दिनेश मेहता अपने आगामी शो बाल कृष्ण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अभिनेता फिर से भगवान शिव का किरदार निभाते नजर आएंगे। एक्टर को आखिरी बार शो संतोषी मां में देखा गया था।
यह पूछे जाने पर कि वह इस तरह के शो में काम करके कैसा महसूस करते हैं, वे कहते हैं कि जब किसी का हृदय भक्ति से भरा होता है, तो उसके मन में अशुद्ध विचारों के लिए कोई जगह नहीं होती है। मेरे जैसा व्यक्ति जो भगवान शिव के प्रति समर्पित है, मैं अवसर का सम्मान भी करता हूं। मैं वास्तव में उत्साहित हूं क्योंकि शिव की भूमिका शक्तिशाली और काफी चुनौतीपूर्ण है। मैं हमेशा इस तरह के अवसर को भगवान को समर्पित कर देता हूं।
दिनेश ने अपने शोबिज करियर की शुरूआत एमटीवी पर प्रसारित होने वाले फैशन आधारित रियलिटी शो से की थी। बाद में वह नागिन, ये है मोहब्बतें, दीया और बाती हम, धर्मक्षेत्र, बुद्ध और सूर्यपुत्र कर्ण जैसे कई शो में नजर आए। उन्हें लगता है कि पौराणिक शो हमारे मूल के बारे में समाज को शिक्षित करने के लिए संस्थान काम करते हैं।
वह आगे कहते हैं कि पौराणिक कथा किसी भी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह समाज में पालन किए जाने वाले अनुष्ठानों में और हमारे समुदाय के सोचने और कार्य करने के तरीके में एक बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए मुझे ऐसी कहानियों का हिस्सा बनकर खुद को शिक्षित करना बहुत अच्छा लगता है। वास्तव में हमें हर रोज कुछ नया सीखने को मिलता है। हमारे देश में, त्यौहार आने पर या जब हम कुछ महत्वपूर्ण मंदिरों या स्थानों पर जाते हैं तो हम सभी रोमांचित होते हैं। हम उनका आनंद लेना पसंद करते हैं लेकिन क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को समझाने के लिए पर्याप्त आश्वस्त हैं? मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे शो से हमारा समाज और खासतौर पर हमारे बच्चे शिक्षित होते है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
|
मुंबईःअभिनेता दिनेश मेहता अपने आगामी शो बाल कृष्ण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अभिनेता फिर से भगवान शिव का किरदार निभाते नजर आएंगे। एक्टर को आखिरी बार शो संतोषी मां में देखा गया था। यह पूछे जाने पर कि वह इस तरह के शो में काम करके कैसा महसूस करते हैं, वे कहते हैं कि जब किसी का हृदय भक्ति से भरा होता है, तो उसके मन में अशुद्ध विचारों के लिए कोई जगह नहीं होती है। मेरे जैसा व्यक्ति जो भगवान शिव के प्रति समर्पित है, मैं अवसर का सम्मान भी करता हूं। मैं वास्तव में उत्साहित हूं क्योंकि शिव की भूमिका शक्तिशाली और काफी चुनौतीपूर्ण है। मैं हमेशा इस तरह के अवसर को भगवान को समर्पित कर देता हूं। दिनेश ने अपने शोबिज करियर की शुरूआत एमटीवी पर प्रसारित होने वाले फैशन आधारित रियलिटी शो से की थी। बाद में वह नागिन, ये है मोहब्बतें, दीया और बाती हम, धर्मक्षेत्र, बुद्ध और सूर्यपुत्र कर्ण जैसे कई शो में नजर आए। उन्हें लगता है कि पौराणिक शो हमारे मूल के बारे में समाज को शिक्षित करने के लिए संस्थान काम करते हैं। वह आगे कहते हैं कि पौराणिक कथा किसी भी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह समाज में पालन किए जाने वाले अनुष्ठानों में और हमारे समुदाय के सोचने और कार्य करने के तरीके में एक बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए मुझे ऐसी कहानियों का हिस्सा बनकर खुद को शिक्षित करना बहुत अच्छा लगता है। वास्तव में हमें हर रोज कुछ नया सीखने को मिलता है। हमारे देश में, त्यौहार आने पर या जब हम कुछ महत्वपूर्ण मंदिरों या स्थानों पर जाते हैं तो हम सभी रोमांचित होते हैं। हम उनका आनंद लेना पसंद करते हैं लेकिन क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को समझाने के लिए पर्याप्त आश्वस्त हैं? मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे शो से हमारा समाज और खासतौर पर हमारे बच्चे शिक्षित होते है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
|
पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है। सिंध प्रांत में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने एक नवजात शिशु का सिर काटकर मां के गर्भ में छोड़ दिया। इस वजह से महिला की जान खतरे में पड़ गई।
पीड़ित महिला हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती है। इसकी उम्र 32 वर्ष है। इस दुखद घटना के मीडिया में आने के बाद सिंध सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले की तह तक जाने और दोषियों का पता लगाने के लिए एक चिकित्सा जांच बोर्ड बनाया है।
प्रोफेसर राहील सिकंदर ने कहा कि यह हिंदू महिला थारपारकर जिले के एक दूर-दराज के गांव की रहने वाली है। वह इलाज के लिए अपने क्षेत्र में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (आरएचसी) गई थी, लेकिन वहां कोई महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी सर्जरी अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी जिस वजह से उसकी जान पर बन आई।
उन्होंने कहा कि आरएचसी के कर्मचारियों ने रविवार को हुई सर्जरी के दौरान मां के गर्भ में पल रहे नवजात शिशु का सिर काट दिया और उसके अंदर छोड़ दिया। इसके बाद महिला की तबियत बिगड़ती जली गई। जब महिला की मरने जैसी हालात हो गई तो उसको मीठी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां भी उसके इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं थी। आखिरकार, उसका परिवार उसे एलयूएमएचएस ले आया, जहां नवजात शिशु के बाकी शरीर को मां के गर्भ से निकाल लिया गया, जिससे उसकी जान बच गई।
प्रोफेसर राहील सिकंदर जमशोरो में लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एलयूएमएचएस) की स्त्री रोग इकाई के प्रमुख हैं। उन्होंने इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। प्रोफेसर सिकंदर ने आगे बताया कि बच्चे का सिर अंदर फंसा हुआ था और मां का गर्भाशय भी चोटिल था और महिला की जान बचाने के लिए उसका पेट खोलना पड़ा और नवजात के सिर को बाहर निकालना पड़ा।
इस भयानक गलती ने सिंध स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ जुमान बहोतो को मामले में अलग से जांच का आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच समितियां पता लगा लेंगी कि क्या हुआ था, खासकर चाचरो में आरएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर जांच होगी।
जुमान ने कहा कि जांच समितियां उन रिपोर्टों पर भी गौर करेंगी कि महिला को स्ट्रेचर पर लेटे हुए उसका वीडियो बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक स्टाफ के कुछ सदस्यों ने स्त्री रोग वार्ड में एक मोबाइल फोन पर महिला की तस्वीरें लीं और उन तस्वीरों को विभिन्न व्हाट्सएप समूहों के साथ साझा किया।
|
पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है। जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है। सिंध प्रांत में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने एक नवजात शिशु का सिर काटकर मां के गर्भ में छोड़ दिया। इस वजह से महिला की जान खतरे में पड़ गई। पीड़ित महिला हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती है। इसकी उम्र बत्तीस वर्ष है। इस दुखद घटना के मीडिया में आने के बाद सिंध सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले की तह तक जाने और दोषियों का पता लगाने के लिए एक चिकित्सा जांच बोर्ड बनाया है। प्रोफेसर राहील सिकंदर ने कहा कि यह हिंदू महिला थारपारकर जिले के एक दूर-दराज के गांव की रहने वाली है। वह इलाज के लिए अपने क्षेत्र में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र गई थी, लेकिन वहां कोई महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी सर्जरी अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी जिस वजह से उसकी जान पर बन आई। उन्होंने कहा कि आरएचसी के कर्मचारियों ने रविवार को हुई सर्जरी के दौरान मां के गर्भ में पल रहे नवजात शिशु का सिर काट दिया और उसके अंदर छोड़ दिया। इसके बाद महिला की तबियत बिगड़ती जली गई। जब महिला की मरने जैसी हालात हो गई तो उसको मीठी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां भी उसके इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं थी। आखिरकार, उसका परिवार उसे एलयूएमएचएस ले आया, जहां नवजात शिशु के बाकी शरीर को मां के गर्भ से निकाल लिया गया, जिससे उसकी जान बच गई। प्रोफेसर राहील सिकंदर जमशोरो में लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज की स्त्री रोग इकाई के प्रमुख हैं। उन्होंने इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। प्रोफेसर सिकंदर ने आगे बताया कि बच्चे का सिर अंदर फंसा हुआ था और मां का गर्भाशय भी चोटिल था और महिला की जान बचाने के लिए उसका पेट खोलना पड़ा और नवजात के सिर को बाहर निकालना पड़ा। इस भयानक गलती ने सिंध स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ जुमान बहोतो को मामले में अलग से जांच का आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच समितियां पता लगा लेंगी कि क्या हुआ था, खासकर चाचरो में आरएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर जांच होगी। जुमान ने कहा कि जांच समितियां उन रिपोर्टों पर भी गौर करेंगी कि महिला को स्ट्रेचर पर लेटे हुए उसका वीडियो बनाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक स्टाफ के कुछ सदस्यों ने स्त्री रोग वार्ड में एक मोबाइल फोन पर महिला की तस्वीरें लीं और उन तस्वीरों को विभिन्न व्हाट्सएप समूहों के साथ साझा किया।
|
प्रदेश में बुधवार को भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। राजधानी में शाम तक आधा इंच पानी बरसा। इससे बड़े तालाब का लेवल बढ़कर 1663. 90 फीट पर पहुंच गया। मौसम केंद्र द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार को सभी 52 जिलों में बारिश होने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिक पीके साहा के मुताबिक गुरुवार को भोपाल, इंदौर सहित 18 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, देवास, शाजापुर सहित 16 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। बुधवार को सीधी और मंडला में 2- 2 इंच, सतना, होशंगाबाद, पचमढ़ी में करीब 1 -1 इंच बारिश हुई। साहा ने बताया कि मध्य प्रदेश के मध्य हिस्से के दक्षिणी की ओर मानसूनी सिस्टम वेल मार्क लो पहुंच गया है। मानसून ट्रफ लाइन का असर भी हो रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
प्रदेश में बुधवार को भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। राजधानी में शाम तक आधा इंच पानी बरसा। इससे बड़े तालाब का लेवल बढ़कर एक हज़ार छः सौ तिरेसठ. नब्बे फीट पर पहुंच गया। मौसम केंद्र द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार को सभी बावन जिलों में बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक पीके साहा के मुताबिक गुरुवार को भोपाल, इंदौर सहित अट्ठारह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, देवास, शाजापुर सहित सोलह जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। बुधवार को सीधी और मंडला में दो- दो इंच, सतना, होशंगाबाद, पचमढ़ी में करीब एक -एक इंच बारिश हुई। साहा ने बताया कि मध्य प्रदेश के मध्य हिस्से के दक्षिणी की ओर मानसूनी सिस्टम वेल मार्क लो पहुंच गया है। मानसून ट्रफ लाइन का असर भी हो रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
कहते है माँ और पिता का प्यार अपने बच्चो के लिए साफ़-साफ़ नज़र आ ही जाता है. माँ-बाप कितने भी गरीब क्यों न हो पर अपने बच्चे की ख़ुशी के लिए अपना कलेजा भी रखने को तयार रहते है. सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है जो आपके दिलों को छू लेगा. साथ ही वीडियो को इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है. जो लोगो की पसंद बन रहा है और इसे अबतक 7 हजार से ज्यादा लाइक्स आ चुके हैं.
|
कहते है माँ और पिता का प्यार अपने बच्चो के लिए साफ़-साफ़ नज़र आ ही जाता है. माँ-बाप कितने भी गरीब क्यों न हो पर अपने बच्चे की ख़ुशी के लिए अपना कलेजा भी रखने को तयार रहते है. सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है जो आपके दिलों को छू लेगा. साथ ही वीडियो को इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है. जो लोगो की पसंद बन रहा है और इसे अबतक सात हजार से ज्यादा लाइक्स आ चुके हैं.
|
कौशाम्बी गरीबों के नाम पर अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों को दनादन प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं लेकिन सवर्ण बिरादरी के होने के नाते मंझनपुर के नेहरू नगर रामलीला मैदान में रहने वाले बेहद गरीब होरीलाल केशरवानी बाबा जी को 10 वर्षों से मांग के बाद भी एक प्रधानमंत्री आवास नहीं स्वीकृत हो सका है।
-खंडहर नुमा घर में होरी लाल अपनी जिंदगी के दिन गुजार रहे थे लेकिन इसी बीच बारिश के चलते होरी लाल का घर भरभरा कर गिर पड़ा है छत और दीवार गिर गई है अब वह सड़क किनारे दूसरे के चबूतरो में रहकर अपनी जिंदगी के दिन काट रहे हैं उनके पास रहने के लिए दूसरा घर नहीं है खाने के लिए आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है किसी तरह एक टाइम पेट भरते हैं लेकिन 10 वर्षों से आवास मांगने के बाद भी भाजपा सरकार और उनके नेताओं ने होरी लाल को आवास दिलाने में सिफारिश नहीं की है क्योंकि होरीलाल सवर्ण बिरादरी का है और यहां के नेता अनुसूचित जाति के हैं।
जिससे यह नेता सवर्णों का सहयोग करने को तैयार नही है खंडहर नुमा घर गिर जाने के बाद भी नगर पालिका से लेकर जिले के अधिकारियों को होरीलाल बाबा जी की गरीबी पर तनिक भी रहम नहीं आई है जिससे 10 वर्षों से आवास की मांग करने के बाद भी होरीलाल को एक सरकारी आवास नहीं मिल सका है अब सवाल यह है कि होरी लाल अधिकारियों को खुश नहीं कर पा रहा है।
जांच करने वाले लोगों को वह रकम नहीं दे पा रहा है जिससे गरीब होते हुए भी होरी लाल को जांच करने वाले अधिकारी गरीब मानने को तैयार नहीं है बरसात में घर गिर जाने के बाद होरी लाल के सामने मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है लेकिन उसके बाद भी जनपद मुख्यालय में रहने वाले होरी लाल की सुधि लेने वाले अधिकारी जनहित की बात करने वाले बड़े-बड़े नेता उसके घर नहीं पहुंचे हैं जिससे अधिकारी और नेताओं की जनविरोधी नीतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
|
कौशाम्बी गरीबों के नाम पर अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों को दनादन प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं लेकिन सवर्ण बिरादरी के होने के नाते मंझनपुर के नेहरू नगर रामलीला मैदान में रहने वाले बेहद गरीब होरीलाल केशरवानी बाबा जी को दस वर्षों से मांग के बाद भी एक प्रधानमंत्री आवास नहीं स्वीकृत हो सका है। -खंडहर नुमा घर में होरी लाल अपनी जिंदगी के दिन गुजार रहे थे लेकिन इसी बीच बारिश के चलते होरी लाल का घर भरभरा कर गिर पड़ा है छत और दीवार गिर गई है अब वह सड़क किनारे दूसरे के चबूतरो में रहकर अपनी जिंदगी के दिन काट रहे हैं उनके पास रहने के लिए दूसरा घर नहीं है खाने के लिए आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है किसी तरह एक टाइम पेट भरते हैं लेकिन दस वर्षों से आवास मांगने के बाद भी भाजपा सरकार और उनके नेताओं ने होरी लाल को आवास दिलाने में सिफारिश नहीं की है क्योंकि होरीलाल सवर्ण बिरादरी का है और यहां के नेता अनुसूचित जाति के हैं। जिससे यह नेता सवर्णों का सहयोग करने को तैयार नही है खंडहर नुमा घर गिर जाने के बाद भी नगर पालिका से लेकर जिले के अधिकारियों को होरीलाल बाबा जी की गरीबी पर तनिक भी रहम नहीं आई है जिससे दस वर्षों से आवास की मांग करने के बाद भी होरीलाल को एक सरकारी आवास नहीं मिल सका है अब सवाल यह है कि होरी लाल अधिकारियों को खुश नहीं कर पा रहा है। जांच करने वाले लोगों को वह रकम नहीं दे पा रहा है जिससे गरीब होते हुए भी होरी लाल को जांच करने वाले अधिकारी गरीब मानने को तैयार नहीं है बरसात में घर गिर जाने के बाद होरी लाल के सामने मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है लेकिन उसके बाद भी जनपद मुख्यालय में रहने वाले होरी लाल की सुधि लेने वाले अधिकारी जनहित की बात करने वाले बड़े-बड़े नेता उसके घर नहीं पहुंचे हैं जिससे अधिकारी और नेताओं की जनविरोधी नीतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
|
इसके बारे में पूछे जाने पर सलमान ने पत्रकारों से कहा, "ईद पर निश्चित तौर पर फिल्म रिलीज होगी। पहले फिल्म (दबंग 3) 20 दिसंबर को आएगी फिर ईद पर भी एक फिल्म आएगी। " अभिनेता बुधवार रात को 20वें आइफा अवार्ड्स में बोल रहे थे।
इस समारोह में वह अभिनेता-फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर की बेटी सई के साथ आए जो "दंबग 3" से बॉलीवुड में कदम रख रही हैं। प्रभु देवा के निर्देशन वाली "दबंग 3" 20 दिसंबर को रिलीज होनी है।
|
इसके बारे में पूछे जाने पर सलमान ने पत्रकारों से कहा, "ईद पर निश्चित तौर पर फिल्म रिलीज होगी। पहले फिल्म बीस दिसंबर को आएगी फिर ईद पर भी एक फिल्म आएगी। " अभिनेता बुधवार रात को बीसवें आइफा अवार्ड्स में बोल रहे थे। इस समारोह में वह अभिनेता-फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर की बेटी सई के साथ आए जो "दंबग तीन" से बॉलीवुड में कदम रख रही हैं। प्रभु देवा के निर्देशन वाली "दबंग तीन" बीस दिसंबर को रिलीज होनी है।
|
: धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट से था वारंट : मोहनलालगंज पुलिस ने पकड़ा, कोतवाली में प्रदर्शन : लखनऊ : मोहनलालगंज पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में रायबरेली रोड स्थित लखनऊ कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के फाउंडर चेयरमैन विनीत मित्तल को गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर मोहनलालगंज योगेंद्र सिंह के मुताबिक धोखाधड़ी के मामले में सीओ मोहनलालगंज ने विनीत मित्तल व अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। विनीत के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया था।
लखनऊ से खबर आ रही है कि मोहनलालगंज इलाके से विनीत मित्तल को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. विनीत मित्तल सहारा समूह में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हुआ करते थे लेकिन सुब्रत राय से उनकी ऐसी खटकी कि न सिर्फ उन्हें बर्खास्त कर दिया गया बल्कि उनके खिलाफ कई मुकदमें भी दर्ज करा दिए गए थे. उन्हीं मुकदमों के सिलसिले में पुलिस ने मित्तल को अरेस्ट किया है.
|
: धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट से था वारंट : मोहनलालगंज पुलिस ने पकड़ा, कोतवाली में प्रदर्शन : लखनऊ : मोहनलालगंज पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में रायबरेली रोड स्थित लखनऊ कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के फाउंडर चेयरमैन विनीत मित्तल को गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर मोहनलालगंज योगेंद्र सिंह के मुताबिक धोखाधड़ी के मामले में सीओ मोहनलालगंज ने विनीत मित्तल व अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। विनीत के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया था। लखनऊ से खबर आ रही है कि मोहनलालगंज इलाके से विनीत मित्तल को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. विनीत मित्तल सहारा समूह में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हुआ करते थे लेकिन सुब्रत राय से उनकी ऐसी खटकी कि न सिर्फ उन्हें बर्खास्त कर दिया गया बल्कि उनके खिलाफ कई मुकदमें भी दर्ज करा दिए गए थे. उन्हीं मुकदमों के सिलसिले में पुलिस ने मित्तल को अरेस्ट किया है.
|
पश्चिम बंगाल पुलिस भर्ती बोर्ड की नियुक्ति से संबंधित मेरिट लिस्ट पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि ओबीसी श्रेणी में हुई 37 नियुक्तियों में से 35 अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। नियुक्ति में केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को तरजीह देने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंकड़े बताते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक वामदलों को दरकिनार कर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में लामबंद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप ममता बनर्जी को भारी जीत मिली। इसलिए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने राज्य के मुसलमानों को आश्वासन दिया था कि सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। पुलिस महकमे में अल्पसंख्यकों को तरजीह दिये जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि सवाल भी उठने लगे हैं।
जिस मेरिट लिस्ट पर सवाल उठाया गया है, वह पुलिस में ओबीसी श्रेणी से संबंधित है। पश्चिम बंगाल में ओबीसी-ए श्रेणी में कुल 80 समूह सूचीबद्ध हैं। इनमें से 72 मुस्लिम समूह हैं। ओबीसी-बी श्रेणी में मुसलमानों के लगभग 40 समूह हैं। इस प्रकार ओबीसी श्रेणी में सूचीबद्ध 120 समूहों में से 112 मुस्लिम हैं। इस नियुक्ति का उद्देश्य राज्य में ओबीसी विभाग में रिक्त पदों को भरना था। सूची से पता चलता है कि एक या दो को छोड़कर सभी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मेघालय तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी नहीं करने से इनकार कर दिया। प्रदेश भाजपा सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर असीम घोष ने कहा कि ओबीसी का मुद्दा मेरे लिए बहुत स्पष्ट नहीं है। इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
हालांकि, राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इन नियुक्तियों में कुछ भी अवैध नहीं था। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और उसके बाद के कई फैसलों की जांच के बाद राज्य में पुलिस महकमे में बड़े पैमाने पर मुसलमानों की भर्ती की जा रही है।
|
पश्चिम बंगाल पुलिस भर्ती बोर्ड की नियुक्ति से संबंधित मेरिट लिस्ट पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि ओबीसी श्रेणी में हुई सैंतीस नियुक्तियों में से पैंतीस अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। नियुक्ति में केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को तरजीह देने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक वामदलों को दरकिनार कर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में लामबंद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप ममता बनर्जी को भारी जीत मिली। इसलिए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने राज्य के मुसलमानों को आश्वासन दिया था कि सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। पुलिस महकमे में अल्पसंख्यकों को तरजीह दिये जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि सवाल भी उठने लगे हैं। जिस मेरिट लिस्ट पर सवाल उठाया गया है, वह पुलिस में ओबीसी श्रेणी से संबंधित है। पश्चिम बंगाल में ओबीसी-ए श्रेणी में कुल अस्सी समूह सूचीबद्ध हैं। इनमें से बहत्तर मुस्लिम समूह हैं। ओबीसी-बी श्रेणी में मुसलमानों के लगभग चालीस समूह हैं। इस प्रकार ओबीसी श्रेणी में सूचीबद्ध एक सौ बीस समूहों में से एक सौ बारह मुस्लिम हैं। इस नियुक्ति का उद्देश्य राज्य में ओबीसी विभाग में रिक्त पदों को भरना था। सूची से पता चलता है कि एक या दो को छोड़कर सभी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मेघालय तथा त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी नहीं करने से इनकार कर दिया। प्रदेश भाजपा सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर असीम घोष ने कहा कि ओबीसी का मुद्दा मेरे लिए बहुत स्पष्ट नहीं है। इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हालांकि, राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इन नियुक्तियों में कुछ भी अवैध नहीं था। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और उसके बाद के कई फैसलों की जांच के बाद राज्य में पुलिस महकमे में बड़े पैमाने पर मुसलमानों की भर्ती की जा रही है।
|
बीते 10 दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में टमाटर का दाम डेढ़ गुना बढ़ गया है जबकि एक पखवाड़े में टमाटर का भाव दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। दिल्ली में लोगों को एक किलो टमाटर के लिए 80 रुपए से ज्यादा चुकाने पड़ रहे है, जबकि एक पखवाड़े पहले दिल्ली में टमाटर 30-40 रुपए किलो मिल रहा था।
केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक की बाढ़ की वजह से प्याज की आपूर्ति में अड़चन के बीच इसकी जमाखोरी के खिलाफ बुधवार को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उपरोक्त दोनों प्रदेश इस सब्जी के प्रमुख उत्पादक हैं। सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यहां उपभोक्ता मामलों के विभाग के सचिव अविनाश के श्रीवास्तव की अध्यक्षता में विभाग ने प्याज की कीमतों की समीक्षा की।
|
बीते दस दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में टमाटर का दाम डेढ़ गुना बढ़ गया है जबकि एक पखवाड़े में टमाटर का भाव दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। दिल्ली में लोगों को एक किलो टमाटर के लिए अस्सी रुपयापए से ज्यादा चुकाने पड़ रहे है, जबकि एक पखवाड़े पहले दिल्ली में टमाटर तीस-चालीस रुपयापए किलो मिल रहा था। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक की बाढ़ की वजह से प्याज की आपूर्ति में अड़चन के बीच इसकी जमाखोरी के खिलाफ बुधवार को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उपरोक्त दोनों प्रदेश इस सब्जी के प्रमुख उत्पादक हैं। सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यहां उपभोक्ता मामलों के विभाग के सचिव अविनाश के श्रीवास्तव की अध्यक्षता में विभाग ने प्याज की कीमतों की समीक्षा की।
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
डेनिश भारोपिय भाषा के जर्मेनिक शाखा की उप-शाखा उत्तरी जर्मेनिक भाषा (स्केनेडिनेवियन भाषा भी कहा जाता है) में से एक है। यह लगभग साठ लाख लोगों द्वारा बोली जाती है, जिनमें मुख्यतः डेनमार्क में रहने वालों लोग और जर्मनी के उत्तरी हिस्से में रहने वाले करीबन पचास हजार लोग शामिल हैं। डैनिश को डेनमार्क के अधिकार क्षेत्र में आने वाले ग्रीनलैंड और फरो आइलैंड्स में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है, यहां स्कूलों में एक अनिवार्य विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। अर्जेन्टीना, अमेरिका और कनाडा में भी डेनिश बोलने वाले समुदाय विद्यमान हैं। . रूस के मंद्रोगी का वोडका संग्रहालय वोडका (रूसी शब्द водка, вода + ка से) http://www.britannica.com/EBchecked/topic/631781/vodka, एक साफ़ द्रव है जिसका अधिकांश भाग जल और इथेनॉल है जिसे अनाज (आम तौर पर राई या गेहूं), आलू या मीठे चुकंदर के शीरे जैसे किसी किण्वित पदार्थ से आसवन की प्रक्रिया - प्रायः एकाधिक आसवन की प्रक्रिया - द्वारा शुद्ध किया जाता है। इसमें अन्य प्रकार के पदार्थ जैसे अनचाही अशुद्धता या स्वाद की मामूली मात्रा भी शामिल रह सकती है। आमतौर पर वोडका में अल्कोहोल की मात्रा 35% से 50% आयतन के अनुपात में रहती है। क्लासिक रूसी, लिथुआनिया और पोलिश वोडका में 40% (80 प्रूफ) है। वोडका का उत्पादन अलेक्जेंडर III द्वारा 1894 में शुरू किया गया था जिसके लिए रूसी मानकों को श्रेय दिया जा सकता है।मास्को में वोडका संग्रहालय के अनुसार, रूसी रसायनज्ञ दमित्री मेनडिलिव (आवर्त सारणी (periodic table) के विकास में अपने कार्य के लिए अधिक प्रसिद्ध) ने सही प्रतिशत 38% बताया था। हालांकि, उस समय अल्कोहोल की उग्रता शक्ति के आधार पर कर (टैक्स) लगता था परन्तु कर की सरल गणना करने के लिए इस प्रतिशत को पूर्णांक बनाते हुए 40 कर दिया गया। कुछ सरकारों ने अल्कोहोल के लिए मद्यसार की एक न्यूनतम सीमा तय की जिसे 'वोडका' कहा जाने लगा.
डेनिश भाषा और वोदका आम में 4 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): डेनमार्क, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य, जर्मनी।
डेनमार्क या डेनमार्क राजशाही (डैनिशः Danmark या Kongeriget Danmark) स्कैंडिनेविया, उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी भूसीमा केवल जर्मनी से मिलती है, जबकी उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर इसे स्वीडन से अलग करते हैं। यह देश जूटलैंड प्रायद्वीप पर हज़ारों द्वीपों में फैला हुआ है। डेनमार्क ने लंबे समय तक बाल्टिक सागर को जाने वाले मार्गों को नियंत्रित किया है और इस जलराशी को डैनिश खाड़ी के नाम से जाना जाता है। इसके छोटे आकार के विपरीत इसकी समुद्री सीमा बहुत लम्बी है लगभग ७,३१४ किमी। डेनमार्क अधिकांशतः एक समतल देश है और समुद्र तल से अधिकतम ऊँचाई वाला स्थान केवल १७० मीटर ऊँचा है। फ़रो द्वीप समूह और ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीनस्थ है। २००८ के वैश्विक शांति सूचकांक के अनुसार डेनमार्क, आइसलैंड के बाद विश्व का सबसे शांत देश है। २००८ के ही भ्रष्टाचार दृष्टिकोण सूचकांक के अनुसार यह विश्व के सबसे कम भ्रष्ट देशों में से है और न्यूज़ीलैंड और स्वीडन के साथ पहले स्थान पर है। मोनोक्ल पत्रिका के २००८ के एक सर्वेक्षण के अनुसार इसकी राजधानी कॉपनहेगन रहने योग्य सर्वाधिक उपयुक्त नगर है। वर्ष २००९ में देश की अनुमानित जनसंख्या ५५,१९,२५९ है। .
यूरोपियन संघ (यूरोपियन यूनियन) मुख्यतः यूरोप में स्थित 28 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है। इसका अभ्युदय 1957 में रोम की संधि द्वारा यूरोपिय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपिय देशों की आर्थिक भागीदारी से हुआ था। तब से इसमें सदस्य देशों की संख्या में लगातार बढोत्तरी होती रही और इसकी नीतियों में बहुत से परिवर्तन भी शामिल किये गये। 1993 में मास्त्रिख संधि द्वारा इसके आधुनिक वैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी। दिसम्बर 2007 में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया 1 जनवरी 2008 से शुरु की गयी है। यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की चार तरह की स्वतंत्रताएँ सुनिश्चित करता हैः- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी का स्वतंत्र आदान-प्रदान.
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands.
कोई विवरण नहीं।
डेनिश भाषा 10 संबंध है और वोदका 66 है। वे आम 4 में है, समानता सूचकांक 5.26% है = 4 / (10 + 66)।
यह लेख डेनिश भाषा और वोदका के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। डेनिश भारोपिय भाषा के जर्मेनिक शाखा की उप-शाखा उत्तरी जर्मेनिक भाषा में से एक है। यह लगभग साठ लाख लोगों द्वारा बोली जाती है, जिनमें मुख्यतः डेनमार्क में रहने वालों लोग और जर्मनी के उत्तरी हिस्से में रहने वाले करीबन पचास हजार लोग शामिल हैं। डैनिश को डेनमार्क के अधिकार क्षेत्र में आने वाले ग्रीनलैंड और फरो आइलैंड्स में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है, यहां स्कूलों में एक अनिवार्य विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। अर्जेन्टीना, अमेरिका और कनाडा में भी डेनिश बोलने वाले समुदाय विद्यमान हैं। . रूस के मंद्रोगी का वोडका संग्रहालय वोडका http://www.britannica.com/EBchecked/topic/छः लाख इकतीस हज़ार सात सौ इक्यासी/vodka, एक साफ़ द्रव है जिसका अधिकांश भाग जल और इथेनॉल है जिसे अनाज , आलू या मीठे चुकंदर के शीरे जैसे किसी किण्वित पदार्थ से आसवन की प्रक्रिया - प्रायः एकाधिक आसवन की प्रक्रिया - द्वारा शुद्ध किया जाता है। इसमें अन्य प्रकार के पदार्थ जैसे अनचाही अशुद्धता या स्वाद की मामूली मात्रा भी शामिल रह सकती है। आमतौर पर वोडका में अल्कोहोल की मात्रा पैंतीस% से पचास% आयतन के अनुपात में रहती है। क्लासिक रूसी, लिथुआनिया और पोलिश वोडका में चालीस% है। वोडका का उत्पादन अलेक्जेंडर III द्वारा एक हज़ार आठ सौ चौरानवे में शुरू किया गया था जिसके लिए रूसी मानकों को श्रेय दिया जा सकता है।मास्को में वोडका संग्रहालय के अनुसार, रूसी रसायनज्ञ दमित्री मेनडिलिव के विकास में अपने कार्य के लिए अधिक प्रसिद्ध) ने सही प्रतिशत अड़तीस% बताया था। हालांकि, उस समय अल्कोहोल की उग्रता शक्ति के आधार पर कर लगता था परन्तु कर की सरल गणना करने के लिए इस प्रतिशत को पूर्णांक बनाते हुए चालीस कर दिया गया। कुछ सरकारों ने अल्कोहोल के लिए मद्यसार की एक न्यूनतम सीमा तय की जिसे 'वोडका' कहा जाने लगा. डेनिश भाषा और वोदका आम में चार बातें हैं : डेनमार्क, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य, जर्मनी। डेनमार्क या डेनमार्क राजशाही स्कैंडिनेविया, उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है। इसकी भूसीमा केवल जर्मनी से मिलती है, जबकी उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर इसे स्वीडन से अलग करते हैं। यह देश जूटलैंड प्रायद्वीप पर हज़ारों द्वीपों में फैला हुआ है। डेनमार्क ने लंबे समय तक बाल्टिक सागर को जाने वाले मार्गों को नियंत्रित किया है और इस जलराशी को डैनिश खाड़ी के नाम से जाना जाता है। इसके छोटे आकार के विपरीत इसकी समुद्री सीमा बहुत लम्बी है लगभग सात,तीन सौ चौदह किमी। डेनमार्क अधिकांशतः एक समतल देश है और समुद्र तल से अधिकतम ऊँचाई वाला स्थान केवल एक सौ सत्तर मीटर ऊँचा है। फ़रो द्वीप समूह और ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीनस्थ है। दो हज़ार आठ के वैश्विक शांति सूचकांक के अनुसार डेनमार्क, आइसलैंड के बाद विश्व का सबसे शांत देश है। दो हज़ार आठ के ही भ्रष्टाचार दृष्टिकोण सूचकांक के अनुसार यह विश्व के सबसे कम भ्रष्ट देशों में से है और न्यूज़ीलैंड और स्वीडन के साथ पहले स्थान पर है। मोनोक्ल पत्रिका के दो हज़ार आठ के एक सर्वेक्षण के अनुसार इसकी राजधानी कॉपनहेगन रहने योग्य सर्वाधिक उपयुक्त नगर है। वर्ष दो हज़ार नौ में देश की अनुमानित जनसंख्या पचपन,उन्नीस,दो सौ उनसठ है। . यूरोपियन संघ मुख्यतः यूरोप में स्थित अट्ठाईस देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है। इसका अभ्युदय एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में रोम की संधि द्वारा यूरोपिय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपिय देशों की आर्थिक भागीदारी से हुआ था। तब से इसमें सदस्य देशों की संख्या में लगातार बढोत्तरी होती रही और इसकी नीतियों में बहुत से परिवर्तन भी शामिल किये गये। एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में मास्त्रिख संधि द्वारा इसके आधुनिक वैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी। दिसम्बर दो हज़ार सात में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया एक जनवरी दो हज़ार आठ से शुरु की गयी है। यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की चार तरह की स्वतंत्रताएँ सुनिश्चित करता हैः- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी का स्वतंत्र आदान-प्रदान. संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. कोई विवरण नहीं। डेनिश भाषा दस संबंध है और वोदका छयासठ है। वे आम चार में है, समानता सूचकांक पाँच.छब्बीस% है = चार / । यह लेख डेनिश भाषा और वोदका के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
|
सीधी। जिले में बस नहर में गिरने से अब तक के 51 लोगों की मौत हो चुकी है। वही 7 लोगोें को रेस्क्यू कर बचाया गया। इस दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बस हादसे में मौत हुए पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे।
वहीं बस हादसे के आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीएम के घटनास्थल पर पहुंचने के पहले आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है, आश्चर्य़ की बात है कि इतने बड़े हादसे में ड्राइवर को खरोंच तक नहीं आई है। वहीं कुसमी गांव के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत से इलाके में मातम पसर गया है। परिवार के चार सदस्यों की एक साथ जब अर्थी निकली तो पूरा इलाका गमगीन हो गया।
बता दें कि सीएम शिवराज सिंह चौहान आज सीधी के लिए रवाना हुए हैं। सीएम शिवराज पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे। सीधी रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि सीधी में हुआ हादसा बेहद दुःखद है। मैं कल सीधी जाना चाहता था, लेकिन वहां चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में व्यवधान पैदा होता। लेकिन ऐसी परिस्थिति में, मैं बैठा नहीं रह सकता हूं। मैं सीधी जा रहा हूं, वहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात करुंगा।
सीएम ने आगे कहा कि जो चले गए है उन्हें तो हम वापस लेकर नहीं आ सकते है। मैं सीधी में पीड़ित परिवारों से मुलाकात करूंगा। हम किस तरह से पीड़ित परिवारों की मदद कर सकते है इसकी कोशिश करूंगा। साथ ही घटना के मूल में जाने की कोशिश करूंगा।
बता दें कि बस में करीब 60 लोग सवार थे, जिनमें कई नर्सिंग छात्राएं भी शामिल थी। NDRF और SDRF की टीम मंगवार देर रात रेस्क्यू रोक दिया। वहीं आज सुबह से अब तक नहर से तीन लाश बरामद की है। अभी भी लापता लोगों की तलाश जारी है।
जानकाकरी के अनुसार यह नहर करीब 20 फीट गहरी और 20 फीट चौड़ी है, जिसमें बस पूरी तरह से डूब गई। इस बड़ी नहर में काफी तेज पानी बह रहा था। घंटों रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यात्रियों के शव बरामद किया है।
|
सीधी। जिले में बस नहर में गिरने से अब तक के इक्यावन लोगों की मौत हो चुकी है। वही सात लोगोें को रेस्क्यू कर बचाया गया। इस दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बस हादसे में मौत हुए पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। वहीं बस हादसे के आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीएम के घटनास्थल पर पहुंचने के पहले आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है, आश्चर्य़ की बात है कि इतने बड़े हादसे में ड्राइवर को खरोंच तक नहीं आई है। वहीं कुसमी गांव के एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से इलाके में मातम पसर गया है। परिवार के चार सदस्यों की एक साथ जब अर्थी निकली तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। बता दें कि सीएम शिवराज सिंह चौहान आज सीधी के लिए रवाना हुए हैं। सीएम शिवराज पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे। सीधी रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि सीधी में हुआ हादसा बेहद दुःखद है। मैं कल सीधी जाना चाहता था, लेकिन वहां चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में व्यवधान पैदा होता। लेकिन ऐसी परिस्थिति में, मैं बैठा नहीं रह सकता हूं। मैं सीधी जा रहा हूं, वहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात करुंगा। सीएम ने आगे कहा कि जो चले गए है उन्हें तो हम वापस लेकर नहीं आ सकते है। मैं सीधी में पीड़ित परिवारों से मुलाकात करूंगा। हम किस तरह से पीड़ित परिवारों की मदद कर सकते है इसकी कोशिश करूंगा। साथ ही घटना के मूल में जाने की कोशिश करूंगा। बता दें कि बस में करीब साठ लोग सवार थे, जिनमें कई नर्सिंग छात्राएं भी शामिल थी। NDRF और SDRF की टीम मंगवार देर रात रेस्क्यू रोक दिया। वहीं आज सुबह से अब तक नहर से तीन लाश बरामद की है। अभी भी लापता लोगों की तलाश जारी है। जानकाकरी के अनुसार यह नहर करीब बीस फीट गहरी और बीस फीट चौड़ी है, जिसमें बस पूरी तरह से डूब गई। इस बड़ी नहर में काफी तेज पानी बह रहा था। घंटों रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यात्रियों के शव बरामद किया है।
|
बूंदी जिले में तंत्र-मंत्र से रकम दोगुना करने का झांसा देकर एक दंपती से 2 लाख रुपए ठगने का मामला सामने आया है। इस संबंध में केशवरायपाटन थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस फरार ठग का तलाश कर रही है।
थानाधिकारी लोकेंद्र पालीवाल ने बताया कि चामुंडा कॉलोनी निवासी रामस्वरूप कंडारा के साथ ठगी हुई है। रिपोर्ट में बताया कि श्रीपुरा निवासी किशन बिहारी बैरवा ने 12 अक्टूबर को उनके यहां किराए पर रहने आया था। आरोपी किशन बिहारी ने मकान मालिक रामस्वरूप को तंत्र-मंत्र से गरीबी दूर करने का झांसा दिया। बातों में लेकर अलग-अलग समय में 2 लाख रुपए ले लिए। हर बार रुपए लेने के दौरान एक बैग देकर उसमें रखी रकम दोगुनी के लिए 10 दिनों तक बिना हाथ लगाए रखने की कहता था।
समय से पहले खोल कर देखने पर नोट नकली होने की भी बात कहीं। जिसके बाद बैग को देवली रोड पर एक बावड़ी में डालने को कहा। कहे अनुसार बावड़ी में बैग डालने के बाद पीड़ित दंपती घर आए तो किराएदार गायब मिला। ठगी का पता चलने पर पीड़ित दंपती थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
बूंदी जिले में तंत्र-मंत्र से रकम दोगुना करने का झांसा देकर एक दंपती से दो लाख रुपए ठगने का मामला सामने आया है। इस संबंध में केशवरायपाटन थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस फरार ठग का तलाश कर रही है। थानाधिकारी लोकेंद्र पालीवाल ने बताया कि चामुंडा कॉलोनी निवासी रामस्वरूप कंडारा के साथ ठगी हुई है। रिपोर्ट में बताया कि श्रीपुरा निवासी किशन बिहारी बैरवा ने बारह अक्टूबर को उनके यहां किराए पर रहने आया था। आरोपी किशन बिहारी ने मकान मालिक रामस्वरूप को तंत्र-मंत्र से गरीबी दूर करने का झांसा दिया। बातों में लेकर अलग-अलग समय में दो लाख रुपए ले लिए। हर बार रुपए लेने के दौरान एक बैग देकर उसमें रखी रकम दोगुनी के लिए दस दिनों तक बिना हाथ लगाए रखने की कहता था। समय से पहले खोल कर देखने पर नोट नकली होने की भी बात कहीं। जिसके बाद बैग को देवली रोड पर एक बावड़ी में डालने को कहा। कहे अनुसार बावड़ी में बैग डालने के बाद पीड़ित दंपती घर आए तो किराएदार गायब मिला। ठगी का पता चलने पर पीड़ित दंपती थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
Uday Chopra Trolled Social Media: उदय चोपड़ा अपनी मां पामेला चोपड़ा के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। एक्टर ने इस दौरान पैपराजी के सामने हाथ जोड़ा। एक्टर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग उदय को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल कर रहे हैं।
uday chopra and pamela (credit pic: instagram)
Uday Chopra Trolled Social Media: दिवंगत फिल्म मेकर यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा ( Pamela Chopra ) का निधन हो गया है। पामेला ने 74 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। पामेला के निधन से बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर है। पामेला के निधन पर सेलेब्स ने सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दी। पामेला के बेटे फिल्म मेकर आदित्य चोपड़ा ने बताया था कि आज सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। पामेला के अंतिम संस्कार में बहू रानी मुखर्जी, बेटे उदय और आदित्य समेत परिवार के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा पामेला के अंतिम दर्शन में कई बॉलीवुड सितारें भी शामिल हुए थे। इस लिस्ट में शाहरुख खान से लेकर अनिल कपूर तक का नाम शामिल है।
अपनी मां को अंतिम विदाई देने के लिए उदय चोपड़ा (Uday Chopra) भी पहुंचे थे। उदय ने पैपराजी को हाथ जोड़ते हुए पोज दिया। उदय की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उदय व्हाइट आउटफिट में दिखाई दे रहे हैं। एक्टर ने आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ है। लोगों को उदय का ये लुक बिल्कुल पसंद नहीं आया।
सोशल मीडिया पर यूजर्स उदय चोपड़ा को खरी-खोटी सुना रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, मां के अंतिम संस्कार में इतना कौन तैयार होता है। दूसरे यूजर ने लिखा, ये क्या कोई फिल्म प्रमोशन के लिए जारा रहा है। तीसरे यूजर ने लिखा, मां की डेथ हुई है और ये ग्लासेस लगा कर घूम रहा है। अगर किसी की मां मर जाए तो इंसान पागल हो जाता है।
पामेला अपने पति यश चोपड़ा का फिल्म मेकिंग में हमेशा उनका साथ देती थीं। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर सह निर्देशक काम किया था। पामेला को आखिरी बार नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री द रोमांटिक्स में देखा गया था। इस डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बताया था कि कैसे उनके पति यशराज ने इतने बड़े प्रोडक्शन हाउस को शुरू किया था। यश और पैम के दो बेटे उदय और आदित्य चोपड़ा हैं।
ट्रेंडिंगः
|
Uday Chopra Trolled Social Media: उदय चोपड़ा अपनी मां पामेला चोपड़ा के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। एक्टर ने इस दौरान पैपराजी के सामने हाथ जोड़ा। एक्टर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग उदय को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल कर रहे हैं। uday chopra and pamela Uday Chopra Trolled Social Media: दिवंगत फिल्म मेकर यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा का निधन हो गया है। पामेला ने चौहत्तर साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। पामेला के निधन से बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर है। पामेला के निधन पर सेलेब्स ने सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दी। पामेला के बेटे फिल्म मेकर आदित्य चोपड़ा ने बताया था कि आज सुबह ग्यारह बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। पामेला के अंतिम संस्कार में बहू रानी मुखर्जी, बेटे उदय और आदित्य समेत परिवार के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा पामेला के अंतिम दर्शन में कई बॉलीवुड सितारें भी शामिल हुए थे। इस लिस्ट में शाहरुख खान से लेकर अनिल कपूर तक का नाम शामिल है। अपनी मां को अंतिम विदाई देने के लिए उदय चोपड़ा भी पहुंचे थे। उदय ने पैपराजी को हाथ जोड़ते हुए पोज दिया। उदय की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उदय व्हाइट आउटफिट में दिखाई दे रहे हैं। एक्टर ने आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ है। लोगों को उदय का ये लुक बिल्कुल पसंद नहीं आया। सोशल मीडिया पर यूजर्स उदय चोपड़ा को खरी-खोटी सुना रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, मां के अंतिम संस्कार में इतना कौन तैयार होता है। दूसरे यूजर ने लिखा, ये क्या कोई फिल्म प्रमोशन के लिए जारा रहा है। तीसरे यूजर ने लिखा, मां की डेथ हुई है और ये ग्लासेस लगा कर घूम रहा है। अगर किसी की मां मर जाए तो इंसान पागल हो जाता है। पामेला अपने पति यश चोपड़ा का फिल्म मेकिंग में हमेशा उनका साथ देती थीं। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर सह निर्देशक काम किया था। पामेला को आखिरी बार नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री द रोमांटिक्स में देखा गया था। इस डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बताया था कि कैसे उनके पति यशराज ने इतने बड़े प्रोडक्शन हाउस को शुरू किया था। यश और पैम के दो बेटे उदय और आदित्य चोपड़ा हैं। ट्रेंडिंगः
|
बता दें कि सोमवार को शिक्षक दिवस के दिन दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश कुमार ने लालू यादव से मुलाताक की थी. इस दौरान कई मुद्दों पर लालू प्रसाद यादव से बातचीत हुई. उन्होंने लालू से बताया था कि दिल्ली में उनकी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, कांग्रेस नेता राहुल गांधी व अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे.
नीतीश कुमार ने मीडिया से बाते करते हुए कहा था कि बीजेपी द्वारा क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है. मेरा प्रयास आम चुनाव से पहले विपक्ष को एकजुट करना है. मेरा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में खुद को खड़ा करने का कोई इरादा नहीं है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार दिल्ली के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक का भी दौरा करेंगे.
जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार कई प्रमुख विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेंगे. इनमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, जनता दल सेक्युलर (JDS) के अध्यक्ष कुमारस्वामी शामिल हैं. नीतीश कुमार अखिलेश यादव और वाम दलों के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे. नीतीश के साथ उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह और बिहार के मंत्री संजय झा और अशोक चौधरी भी हैं.
|
बता दें कि सोमवार को शिक्षक दिवस के दिन दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश कुमार ने लालू यादव से मुलाताक की थी. इस दौरान कई मुद्दों पर लालू प्रसाद यादव से बातचीत हुई. उन्होंने लालू से बताया था कि दिल्ली में उनकी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, कांग्रेस नेता राहुल गांधी व अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे. नीतीश कुमार ने मीडिया से बाते करते हुए कहा था कि बीजेपी द्वारा क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है. मेरा प्रयास आम चुनाव से पहले विपक्ष को एकजुट करना है. मेरा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में खुद को खड़ा करने का कोई इरादा नहीं है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार दिल्ली के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक का भी दौरा करेंगे. जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार कई प्रमुख विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेंगे. इनमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, जनता दल सेक्युलर के अध्यक्ष कुमारस्वामी शामिल हैं. नीतीश कुमार अखिलेश यादव और वाम दलों के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे. नीतीश के साथ उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह और बिहार के मंत्री संजय झा और अशोक चौधरी भी हैं.
|
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि महरौली पुरातात्विक उद्यान क्षेत्र में एक दिन पहले 'अतिक्रमण विरोधी अभियान' में करीब 1200 वर्गमीटर सरकारी जमीन वापस ली गयी। प्राधिकरण ने पुलिस सुरक्षा में शुक्रवार को यह अभियान चलाया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने अभियान का जबर्दस्त विरोध किया। आम आदमी पार्टी (आप) एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक-दूसरे पर निशाना साधा।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गयी है जो नौ मार्च तक जारी रहेगा। यह कार्रवाई दक्षिण दिल्ली के इस पुरातात्विक उद्यान में होने वाली जी 20 बैठक से एक महीने पहले की गयी है।
डीडीए ने महरौली पुरातात्विक उद्यान में लाडो सराय गांव की डीडीए जमीन पर से अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली पुलिस की मदद से 10 फरवरी को अभियान शुरू किया। प्राधिकरण ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस उद्यान में 55 स्मारक हैं जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दिल्ली के पुरातत्व विभाग और डीडीए के संरक्षण में हैं।
|
दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि महरौली पुरातात्विक उद्यान क्षेत्र में एक दिन पहले 'अतिक्रमण विरोधी अभियान' में करीब एक हज़ार दो सौ वर्गमीटर सरकारी जमीन वापस ली गयी। प्राधिकरण ने पुलिस सुरक्षा में शुक्रवार को यह अभियान चलाया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने अभियान का जबर्दस्त विरोध किया। आम आदमी पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी ने एक-दूसरे पर निशाना साधा। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गयी है जो नौ मार्च तक जारी रहेगा। यह कार्रवाई दक्षिण दिल्ली के इस पुरातात्विक उद्यान में होने वाली जी बीस बैठक से एक महीने पहले की गयी है। डीडीए ने महरौली पुरातात्विक उद्यान में लाडो सराय गांव की डीडीए जमीन पर से अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली पुलिस की मदद से दस फरवरी को अभियान शुरू किया। प्राधिकरण ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस उद्यान में पचपन स्मारक हैं जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दिल्ली के पुरातत्व विभाग और डीडीए के संरक्षण में हैं।
|
नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए चल रहा सस्पेंस लगभग ख़त्म हो चुका है. विधायक दल की बैठक में जयराम ठाकुर को नेता चुना गया है. जयराम ठाकुर 5 बार से विधायक हैं. तो इस तरह हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर होंगे. प्रेम कुमार धूमल के हारने के बाद से जयराम ठाकुर को ही सीएम पद का दावेदार माना जा रहा था.
जयराम ठाकुर मंडी जिले के सिराज से 5 बार विधायक चुने जा चुके हैं. दरअसल बीजेपी चाहती थी कि विधायकों में से ही किसी को नेता चुना जाए क्योंकि इससे किसी भी तरह के उपचुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. जेपी नड्डा का नाम इसलिए आगे नहीं बढ़ाया गया. आपको बता दें कि भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में 68 में से 44 सीटें जीती हैं.
|
नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए चल रहा सस्पेंस लगभग ख़त्म हो चुका है. विधायक दल की बैठक में जयराम ठाकुर को नेता चुना गया है. जयराम ठाकुर पाँच बार से विधायक हैं. तो इस तरह हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर होंगे. प्रेम कुमार धूमल के हारने के बाद से जयराम ठाकुर को ही सीएम पद का दावेदार माना जा रहा था. जयराम ठाकुर मंडी जिले के सिराज से पाँच बार विधायक चुने जा चुके हैं. दरअसल बीजेपी चाहती थी कि विधायकों में से ही किसी को नेता चुना जाए क्योंकि इससे किसी भी तरह के उपचुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. जेपी नड्डा का नाम इसलिए आगे नहीं बढ़ाया गया. आपको बता दें कि भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में अड़सठ में से चौंतालीस सीटें जीती हैं.
|
अहमदाबाद। गुजरात चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मोरबी पहुंच गए हैं। पीएम ने यहां चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गुजरात द्वारा करवाए गए विकास कार्यों का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि समय अच्छा हो या बुरा जनसंघ और बीजेपी हमेशा मोरबी के लोगों के साथ खड़ा रहा है। ये बात कोई कांग्रेस और उसके नेताओं के बारे में नहीं कह सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि मोरबी से सुख-दुख का नाता है।
इस दौरान पीएम ने राहुल गांधी के मकान वाले ट्वीट पर पलटवार करते हुए कहा कि 70 साल तक राज करने वाले हिसाब नहीं दे रहे। हम गरीबों का पैसा किसी को लूटने नहीं देंगे । पीएम ने कहा कि हमने पानी की हर बूंद बचाने के लिए गुजरात में अभियान चलाया क्योंकि हममें पता है कि पानी की कमी से क्यां होता है। हमारे लिए विकास चुनाव जीतना नहीं है बल्कि लोगों की सेवा करना है। बीजेपी ने हमेशा मोरबी के लोगों के लिए काम किया है।
पीएम ने गुजरात में आए भूकंप को याद करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि जब इंदिरा गांधी जी मोरबी आईं थीं, मुझे याद है एक चित्रलेखा मैगजीन में उनकी फोटो थी जिसमें वो बदबू की वजह से मुंह पर रुमाल लगा रखा था, लेकिन हमारे जनसंघ और आरएसएस कार्यकर्ता मोरबी की सड़कों पर थे, यह इंसानीयत की खुशबू है।
बता दें कि पीएम मोदी आज फिर राज्य में चार रैलियों को संबोधित करेंगे। पीएम की यह रैलियां सोमनाथ के आसपास के इलाकों में होंगी। खबरों के मुताबिक मोदी आज सौराष्ट्र के मोरबी और प्राची इलाके के अलावा भावनगर और नवसारी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
गौरतलब है कि सोमवार को रैली के दौरान पीएम मोदी ने भुज में रैली के दौरान कांग्रेस पर कई हमले किए। उन्होंने कहा कि यह चुनाव विकास पर विश्वास और वंशवाद की राजनीति के बीच हो रहे हैं और प्रदेश की जनता गुजरात के बेटे के खिलाफ झूठ फैलाने के कांग्रेस पार्टी के प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में जहां एक ओर विकास में विश्वास है वहीं दूसरी ओर वंशवाद है। गुजरात की जनता ने कभी कांग्रेस को स्वीकार नहीं किया है।
|
अहमदाबाद। गुजरात चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मोरबी पहुंच गए हैं। पीएम ने यहां चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गुजरात द्वारा करवाए गए विकास कार्यों का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि समय अच्छा हो या बुरा जनसंघ और बीजेपी हमेशा मोरबी के लोगों के साथ खड़ा रहा है। ये बात कोई कांग्रेस और उसके नेताओं के बारे में नहीं कह सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि मोरबी से सुख-दुख का नाता है। इस दौरान पीएम ने राहुल गांधी के मकान वाले ट्वीट पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्तर साल तक राज करने वाले हिसाब नहीं दे रहे। हम गरीबों का पैसा किसी को लूटने नहीं देंगे । पीएम ने कहा कि हमने पानी की हर बूंद बचाने के लिए गुजरात में अभियान चलाया क्योंकि हममें पता है कि पानी की कमी से क्यां होता है। हमारे लिए विकास चुनाव जीतना नहीं है बल्कि लोगों की सेवा करना है। बीजेपी ने हमेशा मोरबी के लोगों के लिए काम किया है। पीएम ने गुजरात में आए भूकंप को याद करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि जब इंदिरा गांधी जी मोरबी आईं थीं, मुझे याद है एक चित्रलेखा मैगजीन में उनकी फोटो थी जिसमें वो बदबू की वजह से मुंह पर रुमाल लगा रखा था, लेकिन हमारे जनसंघ और आरएसएस कार्यकर्ता मोरबी की सड़कों पर थे, यह इंसानीयत की खुशबू है। बता दें कि पीएम मोदी आज फिर राज्य में चार रैलियों को संबोधित करेंगे। पीएम की यह रैलियां सोमनाथ के आसपास के इलाकों में होंगी। खबरों के मुताबिक मोदी आज सौराष्ट्र के मोरबी और प्राची इलाके के अलावा भावनगर और नवसारी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। गौरतलब है कि सोमवार को रैली के दौरान पीएम मोदी ने भुज में रैली के दौरान कांग्रेस पर कई हमले किए। उन्होंने कहा कि यह चुनाव विकास पर विश्वास और वंशवाद की राजनीति के बीच हो रहे हैं और प्रदेश की जनता गुजरात के बेटे के खिलाफ झूठ फैलाने के कांग्रेस पार्टी के प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में जहां एक ओर विकास में विश्वास है वहीं दूसरी ओर वंशवाद है। गुजरात की जनता ने कभी कांग्रेस को स्वीकार नहीं किया है।
|
आईपीएल 2021 के दूसरे चरण में आज कोलकाता नाइट राइडर्स केकेआर और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच अबुधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में मुकाबला खेला जाएगा। कोलकाता और बैंगलोर दूसरे चरण में पहली बार मैदान पर उतरेंगी। वहीं, दोनों का 14वें सीजन में यह दूसरे मैच है। इससे पहले विराट कोहली की अगुवाई वाली आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन के बदौलत केकेआर को 38 रन से हराया था। आरसीबी ने सात मैचों में पांच जीतकर अंकतालिका में तीसरे स्थान पर है। वही इयोन मॉर्गन की कप्तानी वाली केकेआर ने पहले चरण में सात मैचों में से सिर्फ 2 जीत हासिल कर टीम अंकतालिका में सातवें स्थान पर है।
केकेआर-आरसीबी आमने-सामनेः
आईपीएल में आरसीबी और केकेआर के बीच अब तक कड़ी टक्कर देखने को मिली है। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 28 मुकाबलें हुए हैं, जिसमें बैंगलोर ने 13 मैचों में जीत हासिल की है। कोलकाता की टीम ने 15 मैचों में जीत का स्वाद चखा है। ऐसे में जब दोनों टीम अबुधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगीं तो एक बार फिर कोलकाता अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश करेंगी।
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की संभावित एकादसः
विराट कोहली (कप्तान), एबी डिविलियर्स, देवदत्त पडिक्कल, ग्लेन मैक्सवेल, रजत पाटीदार, शाहबाज अहमद, वनिन्दु हसरंगा/टिम डेविड, काइल जैमीसन, हर्षल पटेल, युजवेंद्र चहल, मोहम्मद सिराज।
कोलकाता नाइट राइडर्स की संभावित एकादसः
इयोन मोर्गन (कप्तान), दिनेश कार्तिक, शुभमन गिल, नितीश राणा, राहुल त्रिपाठी, आंद्रे रसेल, सुनील नरेन, टिम साउथी, वरुण चक्रवर्ती, प्रसिद्ध कृष्णा, शिवम मावी।
(अन्य खबरों के लिए हमेंफेसबुकपर ज्वॉइन करें। आप हमेंट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हेलो एप्प इस्तेमाल करते हैं तो हमसे जुड़ें। )
|
आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण में आज कोलकाता नाइट राइडर्स केकेआर और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच अबुधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में मुकाबला खेला जाएगा। कोलकाता और बैंगलोर दूसरे चरण में पहली बार मैदान पर उतरेंगी। वहीं, दोनों का चौदहवें सीजन में यह दूसरे मैच है। इससे पहले विराट कोहली की अगुवाई वाली आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन के बदौलत केकेआर को अड़तीस रन से हराया था। आरसीबी ने सात मैचों में पांच जीतकर अंकतालिका में तीसरे स्थान पर है। वही इयोन मॉर्गन की कप्तानी वाली केकेआर ने पहले चरण में सात मैचों में से सिर्फ दो जीत हासिल कर टीम अंकतालिका में सातवें स्थान पर है। केकेआर-आरसीबी आमने-सामनेः आईपीएल में आरसीबी और केकेआर के बीच अब तक कड़ी टक्कर देखने को मिली है। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल अट्ठाईस मुकाबलें हुए हैं, जिसमें बैंगलोर ने तेरह मैचों में जीत हासिल की है। कोलकाता की टीम ने पंद्रह मैचों में जीत का स्वाद चखा है। ऐसे में जब दोनों टीम अबुधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगीं तो एक बार फिर कोलकाता अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश करेंगी। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की संभावित एकादसः विराट कोहली , एबी डिविलियर्स, देवदत्त पडिक्कल, ग्लेन मैक्सवेल, रजत पाटीदार, शाहबाज अहमद, वनिन्दु हसरंगा/टिम डेविड, काइल जैमीसन, हर्षल पटेल, युजवेंद्र चहल, मोहम्मद सिराज। कोलकाता नाइट राइडर्स की संभावित एकादसः इयोन मोर्गन , दिनेश कार्तिक, शुभमन गिल, नितीश राणा, राहुल त्रिपाठी, आंद्रे रसेल, सुनील नरेन, टिम साउथी, वरुण चक्रवर्ती, प्रसिद्ध कृष्णा, शिवम मावी।
|
रखती हैं। इसके लिए एक्ट्रेस आल्मंड ऑयल, नारियल तेल और शिकाकाई से मसाज करती हैं।
आलिया अपने बालों को लंबा और मजबूत बनाए रखने के लिए हेयर स्टाइल टूल और हेयर केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हैं।
खूबसूरत अदाकारा प्रियंका चोपड़ा बालों पर दही, शहद और अंडे का पैक लगाती हैं।
बालों को खूबसूरत बनाने के लिए एक्ट्रेस प्याज का रस लगाती हैं।
बॉलीवुड डीवा दीपिका पादुकोण लंबे और घने बालों के लिए नारियल का तेल लगाती हैं।
अपने बालों को खूबसूरत बनाए रखने के लिए एक्ट्रेस बियर का इस्तेमाल करती हैं। जैकलिन बियर से बालों को धोती हैं।
|
रखती हैं। इसके लिए एक्ट्रेस आल्मंड ऑयल, नारियल तेल और शिकाकाई से मसाज करती हैं। आलिया अपने बालों को लंबा और मजबूत बनाए रखने के लिए हेयर स्टाइल टूल और हेयर केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हैं। खूबसूरत अदाकारा प्रियंका चोपड़ा बालों पर दही, शहद और अंडे का पैक लगाती हैं। बालों को खूबसूरत बनाने के लिए एक्ट्रेस प्याज का रस लगाती हैं। बॉलीवुड डीवा दीपिका पादुकोण लंबे और घने बालों के लिए नारियल का तेल लगाती हैं। अपने बालों को खूबसूरत बनाए रखने के लिए एक्ट्रेस बियर का इस्तेमाल करती हैं। जैकलिन बियर से बालों को धोती हैं।
|
क्या आपने कभी सोचा है कि आप और आपका दूसरा आधा कैसे संगत है? संगतता खाते में सब कुछ लेती हैः चरित्र, स्वभाव , आदतें, शौक, बाहरी डेटा में समानता भी। मुझे लगता है कि अगर मैं कहता हूं कि लोगों के रिश्तों की सफलता, समझ का स्तर, प्रेम संबंध की ताकत, और बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि लोग एक साथ किए गए सभी संभावित गुणों की कुलता में कितने संगत हैं। क्या आप जानना चाहते हैं कि आप अपने आत्मा साथी के साथ कितने संगत हैं? संगतता के लिए विभिन्न प्रकार के अनुमान लगाने में सभी प्रकार की सहायता करें।
सबसे आम और सरल नामों की संगतता पर अनुमान लगा रहा है। नाम किसी व्यक्ति के साथ संवाद करने की तुलना में अधिक जानकारी देता है और इसी तरह। नाम व्यक्ति को पीसता है, उसे अपने मिनी-टोटेम को "उचित" बनाता है, जिसे अक्सर ग्रीक या किसी अन्य भाषा से अनुवादित किया जा सकता है।
नामों के लिए प्रेम योजना में संगतता का विभाजन क्या है, हम ग्राफिक्स के साथ भाग्य के उदाहरण को देखेंगे।
तो, निकितिन अलेक्जेंडर और वोल्कोवा लुडमिला नामों के उदाहरण के साथ, हम आपको बताएंगे कि एक कार्यक्रम तैयार करने के लिए कैसे।
- हम लड़के के नाम पर एक ही अक्षर (जिसे दोहराया जाता है) पार करते हैं (चित्रा ए)।
- वही बात जो हम लड़की के नाम से करते हैं (आकृति बी)।
- हम उसी पत्र को पार करते हैं जो लड़के और लड़की (चित्रा सी) के नाम पर छोड़ा गया था।
इस मामले में, पत्र "के"हम नामों (आकृति डी) के साथ भी ऐसा ही करते हैं।
फिर हम एक ग्राफ तैयार करते हैं। हमें एक बॉक्स में पेपर की एक शीट और एक पेंसिल / पेन / महसूस-टिप कलम आदि की आवश्यकता है। बाद में भ्रमित न होने के क्रम में दो रंग चुनना बेहतर होता है।
संकलन का सिद्धांत हैः
- यदि पत्र पार हो गया है, रेखा को तिरछे रूप से खींचें।
- यदि पार नहीं किया गया है, तो क्षैतिज रूप से दाईं ओर एक रेखा खींचें।
- रेखाएं अंतर नहीं होतीं - आप एक साथ रहने के लिए नहीं हैं।
- रेखाएं समानांतर हैं - वही।
- रेखाएं विलय हो गई हैं - आप एक-दूसरे के लिए हैं।
हालांकि, जैसा कि हमारे उदाहरण में देखा जा सकता है, सभी तीन प्रकार की रेखाएं एक ही ग्राफ में मौजूद हो सकती हैं (और ज्यादातर मामलों में, होगी)। इसलिए, आप इस मामले में परिणाम की व्याख्या कर सकते हैं। सबसे पहले जोड़ी अच्छी तरह से कर रही है, तो कुछ परिस्थितियों के कारण उन्होंने तरीकों का विभाजन किया और थोड़ी देर बाद कभी नहीं जाने के लिए सहमत हो गए। आदमी की रेखा महिला की रेखा से अधिक लंबी है, जिसका मतलब है कि वह जोड़ी में मुख्य है।
टैरो कार्ड की संगतता सीखने के लिए, कार्ड पर संगतता के अनुमान लगाने के सबसे सरल परिदृश्य का उपयोग करें। कार्ड को नीचे से ऊपर और दाएं से बाएं रखें। कुल मिलाकर, डेक से छह कार्ड रखे जाने चाहिए। सभी मानचित्रों की व्याख्या यहां पाई जा सकती है , और परिदृश्य में विघटित छः कार्ड्स का मूल्य जो हमने आपको प्रस्तावित किया है, निम्नानुसार होगाः
- पहले से चौथे तक खाते में टैरो कार्ड का अर्थ संगतता का भौतिक स्तर होगा, यानी, आपके भौतिक निकटता का स्तर;
- दूसरा पांचवां कार्ड आपकी आध्यात्मिक संगतता का स्तर निर्धारित करता है;
- तीसरे से छठे तक के कार्ड एक दूसरे के लिए अपने बौद्धिक स्तर के पत्राचार के स्तर को निर्धारित करने के उद्देश्य से हैं।
यदि सभी कारक सामान्य हैं और एक-दूसरे के निकटतम संभावित मूल्य हैं, तो संगतता काफी अधिक होगी।
|
क्या आपने कभी सोचा है कि आप और आपका दूसरा आधा कैसे संगत है? संगतता खाते में सब कुछ लेती हैः चरित्र, स्वभाव , आदतें, शौक, बाहरी डेटा में समानता भी। मुझे लगता है कि अगर मैं कहता हूं कि लोगों के रिश्तों की सफलता, समझ का स्तर, प्रेम संबंध की ताकत, और बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि लोग एक साथ किए गए सभी संभावित गुणों की कुलता में कितने संगत हैं। क्या आप जानना चाहते हैं कि आप अपने आत्मा साथी के साथ कितने संगत हैं? संगतता के लिए विभिन्न प्रकार के अनुमान लगाने में सभी प्रकार की सहायता करें। सबसे आम और सरल नामों की संगतता पर अनुमान लगा रहा है। नाम किसी व्यक्ति के साथ संवाद करने की तुलना में अधिक जानकारी देता है और इसी तरह। नाम व्यक्ति को पीसता है, उसे अपने मिनी-टोटेम को "उचित" बनाता है, जिसे अक्सर ग्रीक या किसी अन्य भाषा से अनुवादित किया जा सकता है। नामों के लिए प्रेम योजना में संगतता का विभाजन क्या है, हम ग्राफिक्स के साथ भाग्य के उदाहरण को देखेंगे। तो, निकितिन अलेक्जेंडर और वोल्कोवा लुडमिला नामों के उदाहरण के साथ, हम आपको बताएंगे कि एक कार्यक्रम तैयार करने के लिए कैसे। - हम लड़के के नाम पर एक ही अक्षर पार करते हैं । - वही बात जो हम लड़की के नाम से करते हैं । - हम उसी पत्र को पार करते हैं जो लड़के और लड़की के नाम पर छोड़ा गया था। इस मामले में, पत्र "के"हम नामों के साथ भी ऐसा ही करते हैं। फिर हम एक ग्राफ तैयार करते हैं। हमें एक बॉक्स में पेपर की एक शीट और एक पेंसिल / पेन / महसूस-टिप कलम आदि की आवश्यकता है। बाद में भ्रमित न होने के क्रम में दो रंग चुनना बेहतर होता है। संकलन का सिद्धांत हैः - यदि पत्र पार हो गया है, रेखा को तिरछे रूप से खींचें। - यदि पार नहीं किया गया है, तो क्षैतिज रूप से दाईं ओर एक रेखा खींचें। - रेखाएं अंतर नहीं होतीं - आप एक साथ रहने के लिए नहीं हैं। - रेखाएं समानांतर हैं - वही। - रेखाएं विलय हो गई हैं - आप एक-दूसरे के लिए हैं। हालांकि, जैसा कि हमारे उदाहरण में देखा जा सकता है, सभी तीन प्रकार की रेखाएं एक ही ग्राफ में मौजूद हो सकती हैं । इसलिए, आप इस मामले में परिणाम की व्याख्या कर सकते हैं। सबसे पहले जोड़ी अच्छी तरह से कर रही है, तो कुछ परिस्थितियों के कारण उन्होंने तरीकों का विभाजन किया और थोड़ी देर बाद कभी नहीं जाने के लिए सहमत हो गए। आदमी की रेखा महिला की रेखा से अधिक लंबी है, जिसका मतलब है कि वह जोड़ी में मुख्य है। टैरो कार्ड की संगतता सीखने के लिए, कार्ड पर संगतता के अनुमान लगाने के सबसे सरल परिदृश्य का उपयोग करें। कार्ड को नीचे से ऊपर और दाएं से बाएं रखें। कुल मिलाकर, डेक से छह कार्ड रखे जाने चाहिए। सभी मानचित्रों की व्याख्या यहां पाई जा सकती है , और परिदृश्य में विघटित छः कार्ड्स का मूल्य जो हमने आपको प्रस्तावित किया है, निम्नानुसार होगाः - पहले से चौथे तक खाते में टैरो कार्ड का अर्थ संगतता का भौतिक स्तर होगा, यानी, आपके भौतिक निकटता का स्तर; - दूसरा पांचवां कार्ड आपकी आध्यात्मिक संगतता का स्तर निर्धारित करता है; - तीसरे से छठे तक के कार्ड एक दूसरे के लिए अपने बौद्धिक स्तर के पत्राचार के स्तर को निर्धारित करने के उद्देश्य से हैं। यदि सभी कारक सामान्य हैं और एक-दूसरे के निकटतम संभावित मूल्य हैं, तो संगतता काफी अधिक होगी।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
नयी दिल्ली, 28 मई आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारत बायोटेक एवं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को फायदा पहुंचाने के लिये केंद्र सरकार कोविड - 19 टीकों का 'कृत्रिम अभाव' पैदा कर रही है, वहीं दिल्ली भाजपा ने इस आरोप को "बेबुनियाद" करार दिया है ।
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता अतिशी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि सरकार का टीकाकरण अभियान स्कूलों में रूक गया है और यही स्थिति पूरे देश में है जबकि निजी अस्पतालों में टीकाकरण अलग अलग दरों पर जारी है ।
भारत में अभी मुख्य रूप से देश में बने दो टीकों का उपयोग हो रहा है । इनमें से एक कोविशील्ड है और दूसरा कोवैक्सीन है, जिनका निर्माण क्रमशः सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया और भारत बायोटेक कर रही हैं। इसके अलावा छोटे स्तर पर रूसी टीके स्पूतनिक का भी इस्तेमाल हो रहा है ।
आतिशी ने आरोप लगाया, "यह एक बड़ा रैकेट है। एक सरकारी केंद्र जहां युवाओं का टीकाकरण मुफ्त में किया जा रहा है वहां टीकों की कमी हो जाती है जबकि (निजी) अस्पतालों अधिकतम कीमतों पर टीकाकरण जारी है। "
आप प्रवक्ता ने और अधिक टीकों को आपातकालीन मंजूरी नहीं देने के लिये केंद्र पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया में कई टीकों को मंजूरी मिली है । फाइजर के टीके को 85 देशों में मंजूरी मिली है । माडर्ना एवं जानसन एंड जानसन के टीकों को कम्रशः 46 एवं 41 देशों में मंजूरी मिली है ।
आप नेता ने कहा, "इन तीन टीकों को आपताकालीन उपयोग के लिये अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है । जब विश्व स्वास्थ्य संगठन इन टीकों की मंजूरी दे सकती है तो भारत क्यों नहीं दे सकता है । "
उन्होंने आरोप लगाया, 'इससे यह स्पष्ट हो जाता है भारत बायोटेक एवं सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया को फायदा पहुंचाने के लिये केंद्र सरकार ने यह कृत्रिम अभाव पैदा किया है । "
भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आतिशी का आरोप बेबुनियाद एवं आधारहीन हैं क्योंकि सरकार ने कमी पैदा नहीं की है ।
उन्होंने कहा कि आतिशी को पता होना चाहिये कि सीरम इंस्टिट्यूट एवं भारत बायोटेक को इस कमी से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि कमी का मतलब विदेशी निर्माताओं का प्रवेश है।
कपूर ने दावा किया कि कमी पैदा करना और आम लोगों को परेशानी में डालना दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की विशेषता है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
नयी दिल्ली, अट्ठाईस मई आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारत बायोटेक एवं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को फायदा पहुंचाने के लिये केंद्र सरकार कोविड - उन्नीस टीकों का 'कृत्रिम अभाव' पैदा कर रही है, वहीं दिल्ली भाजपा ने इस आरोप को "बेबुनियाद" करार दिया है । आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता अतिशी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि सरकार का टीकाकरण अभियान स्कूलों में रूक गया है और यही स्थिति पूरे देश में है जबकि निजी अस्पतालों में टीकाकरण अलग अलग दरों पर जारी है । भारत में अभी मुख्य रूप से देश में बने दो टीकों का उपयोग हो रहा है । इनमें से एक कोविशील्ड है और दूसरा कोवैक्सीन है, जिनका निर्माण क्रमशः सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया और भारत बायोटेक कर रही हैं। इसके अलावा छोटे स्तर पर रूसी टीके स्पूतनिक का भी इस्तेमाल हो रहा है । आतिशी ने आरोप लगाया, "यह एक बड़ा रैकेट है। एक सरकारी केंद्र जहां युवाओं का टीकाकरण मुफ्त में किया जा रहा है वहां टीकों की कमी हो जाती है जबकि अस्पतालों अधिकतम कीमतों पर टीकाकरण जारी है। " आप प्रवक्ता ने और अधिक टीकों को आपातकालीन मंजूरी नहीं देने के लिये केंद्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया में कई टीकों को मंजूरी मिली है । फाइजर के टीके को पचासी देशों में मंजूरी मिली है । माडर्ना एवं जानसन एंड जानसन के टीकों को कम्रशः छियालीस एवं इकतालीस देशों में मंजूरी मिली है । आप नेता ने कहा, "इन तीन टीकों को आपताकालीन उपयोग के लिये अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है । जब विश्व स्वास्थ्य संगठन इन टीकों की मंजूरी दे सकती है तो भारत क्यों नहीं दे सकता है । " उन्होंने आरोप लगाया, 'इससे यह स्पष्ट हो जाता है भारत बायोटेक एवं सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया को फायदा पहुंचाने के लिये केंद्र सरकार ने यह कृत्रिम अभाव पैदा किया है । " भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आतिशी का आरोप बेबुनियाद एवं आधारहीन हैं क्योंकि सरकार ने कमी पैदा नहीं की है । उन्होंने कहा कि आतिशी को पता होना चाहिये कि सीरम इंस्टिट्यूट एवं भारत बायोटेक को इस कमी से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि कमी का मतलब विदेशी निर्माताओं का प्रवेश है। कपूर ने दावा किया कि कमी पैदा करना और आम लोगों को परेशानी में डालना दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की विशेषता है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
सरकार के चर्चित मंत्री जयपुर की एक लहरिया पार्टी में बोल्ड फोटो शूट में फंस गए। सत्ताधारी पार्टी की महिला कार्यकर्ता का आयोजन था। बतौर मुख्य अतिथि मंत्री मौजूद थे। गेस्ट के साथ कौन फोटो नहीं खिंचवाए? 'बोल्ड लुक' मॉडल के साथ भी कुछ फोटो खिंचवा लिए। अब क्या है। फोटो ग्रुप्स में शेयर होते ही हलचल मच गई। यह फोटो कुछ महिला कार्यकर्ताओं को रास नहीं आए तो कुछ बुरा क्या है, इस विवाद में उतर आईं। ग्रुप्स में बहस-झगड़े तक तो ठीक था। मंत्रीजी सन्नाटे में थे तभी किसी ने बात घर तक पहुंचा दी। कड़क-बेघड़क मंत्रीजी इसके बाद से पछता रहे हैं। कई लोगों को कह चुके इससे अच्छा तो नहीं जाता, लेकिन बीत गई सो तो बात गई।
सचिवालय में पिछले दिनों एक चर्चित महिला आईएएस के चैंबर में एक अनजान व्यक्ति के घुसने के मामले को रफा-दफा किया जा चुका है। सुबह दफ्तर खुलने के कुछ देर बाद महिला आईएएस जैसे ही चैंबर में घुसी, चैंबर के रेस्ट रूम में एक व्यक्ति को पहले से बैठे देख पूछताछ शुरू की। सिक्योरिटी और पुलिस पहुंची, संदिग्ध को पूछताछ के बाद पुलिस ने छोड़ दिया। एक महिला आईएएस के चैंबर में कोई व्यक्ति उनके आने से पहले बिना पास कैसे घुस गया, उसका मकसद क्या था, वह क्यों आया था और बिना पास सचिवालय में एंट्री कैसे कर गया? इन तमाम सवालों के अब जवाब तलाशे जा रहे हैं। पुलिस और सिक्योरिटी ने मामले को रफा दफा कर दिया है। आज तक इस बात का जवाब नहीं मिला कि वह व्यक्ति कौन था और उसका मकसद क्या था?
ब्यूरोक्रेसी का बड़ा ऑफिस मेल मुलाकात से लेकर शिकायतें सुनने तक खूब उदार है, यहां पीड़ित से लेकर पावर सीकर्स तक बेधड़क आते हैं, सबकी सुनी भी जाती है। इसके पीछे ब्यूरोक्रेसी के मुखिया की उदारता बड़ी वजह है, लेकिन उदारता का गलत इस्तेमाल करने वालों की भी कमी नहीं है। सचिवालय के पावर कॉरिडोर्स में एक स्वयंभू मैसेंजर कम मैनेजर का मूवमेंट सबकी जुबां पर है। स्वयंभू मैसेंजर ने सरेआम बड़े ऑफिस से कोई भी काम करवाने की डींग हांककर कई को प्रभावित कर लिया है। इन महाशय के चक्कर में अब बड़े ऑफिस को लेकर चर्चा होने लगी है, लेकिन असलियत अभी सही जगह पहुंची नहीं है। पावर कॉरिडोर्स में मुलाकातों और बैठकों से बहुत कुछ तय हो जाता है।
सरकार के मुखिया के खासमखास नेताजी इन दिनों अपनों पर ही भन्नाए हुए हैं। नेताजी ने वीडियो जारी करके मुखिया के ही दूसरे नजदीकी नेता पर टिकटों में गड़बड़ी करने के आरोप लगाकर जमकर भड़ास निकाली। सियासी घर का झगड़ा इस तरह बाहर आया देख हर कोई चकित था। इस पूरी घटना की पड़ताल में दूसरी बात निकल कर आई। मुखिया के खास नेताजी की बेटी और पोती को तो टिकट मिल गया, लेकिन उनकी सिफारिश पर समधी और पुत्रवधू को टिकट नहीं मिला। प्रभारी की इस जुर्रत पर मुखिया के खास नेताजी भन्ना गए, खानदानी लोकतंत्र खतरे में जो आ गया था। एक जानकार ने इस पर रोचक कमेंट किया-ऐसे ही सगा कांग्रेस थोड़े ही कहते हैं।
राजनीति में सियासी चालें कभी खत्म नहीं होतीं, मामला चुनाव में टिकट का हो तो चालें और कुटिल हो जाती हैं। मामला गोविंदगढ़ पंचायत समिति में सामने आया। प्रभारी ने जिस उम्मीदवार के लिए सिफारिश की उस पर सरकार के मुखिया के नजदीकी चौमूं के हारे हुए पूर्व विधायक सहमत नहीं थे। हारे हुए विधायक उम्मीदवार ने पूर्व मंत्री के रिश्तेदार को टिकट दे दिया, लेकिन सिंबल में जाति के कॉलम में यादव की जगह जाट लिख दिया। स्क्रूटनी में सिंबल रिजेक्ट हो गया। उम्मीदवार भी हार मानने वाला नहीं था, उसने बागी ताल ठोंक दी।
सरकार के मुखिया को भगीरथ की उपमा देने वाले आईएएस इन दिनों उनके ऑफिस में आने वालों को टाइम टेबल के हिसाब से ड्रिंक सर्व करते हैं। सचिवालय के दफ्तर में इन साहब ने मल्टी ड्रिक मेकर मशीन लगाई है। मशीन से कब कौन ड्रिंक पिलाना है उसके हिसाब से टाइम तय है। अब यह आपके जाने के टाइम पर निर्भर करेगा कि आपको गर्म पानी, फ्लेवर्ड टी, लेमन टी, टामेटो सूप में से क्या मिलेगा? ये आईएएस यूडीएच मंत्री की फाइल को लाइफ के रूप में देखने के विजन को भी रख चुके हैं।
पूर्व डिप्टी सीएम के बंगले पर हर हलचल पर निगरानी है। पिछले दिनों कुछ एमएलए उनसे मिलने गए। मुखियाजी ने उनकी पूर्व डिप्टी सीएम से हुई मुलाकात का जिक्र कर दिया। अब दोहरी निष्ठाओं वाले नेताओं के सामने संकट है। मिलने जाए तो बडे घर तक सूचना चली जाती है। चुटकियां ली जा रही है कि 'जागता राजा' है। बिग बॉस सब देख रहे है।
(राजनीति औऱ ब्यूरोक्रेसी जुड़े रोचक किस्से/कानाफूसी पढ़ें हर शनिवार को)
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
सरकार के चर्चित मंत्री जयपुर की एक लहरिया पार्टी में बोल्ड फोटो शूट में फंस गए। सत्ताधारी पार्टी की महिला कार्यकर्ता का आयोजन था। बतौर मुख्य अतिथि मंत्री मौजूद थे। गेस्ट के साथ कौन फोटो नहीं खिंचवाए? 'बोल्ड लुक' मॉडल के साथ भी कुछ फोटो खिंचवा लिए। अब क्या है। फोटो ग्रुप्स में शेयर होते ही हलचल मच गई। यह फोटो कुछ महिला कार्यकर्ताओं को रास नहीं आए तो कुछ बुरा क्या है, इस विवाद में उतर आईं। ग्रुप्स में बहस-झगड़े तक तो ठीक था। मंत्रीजी सन्नाटे में थे तभी किसी ने बात घर तक पहुंचा दी। कड़क-बेघड़क मंत्रीजी इसके बाद से पछता रहे हैं। कई लोगों को कह चुके इससे अच्छा तो नहीं जाता, लेकिन बीत गई सो तो बात गई। सचिवालय में पिछले दिनों एक चर्चित महिला आईएएस के चैंबर में एक अनजान व्यक्ति के घुसने के मामले को रफा-दफा किया जा चुका है। सुबह दफ्तर खुलने के कुछ देर बाद महिला आईएएस जैसे ही चैंबर में घुसी, चैंबर के रेस्ट रूम में एक व्यक्ति को पहले से बैठे देख पूछताछ शुरू की। सिक्योरिटी और पुलिस पहुंची, संदिग्ध को पूछताछ के बाद पुलिस ने छोड़ दिया। एक महिला आईएएस के चैंबर में कोई व्यक्ति उनके आने से पहले बिना पास कैसे घुस गया, उसका मकसद क्या था, वह क्यों आया था और बिना पास सचिवालय में एंट्री कैसे कर गया? इन तमाम सवालों के अब जवाब तलाशे जा रहे हैं। पुलिस और सिक्योरिटी ने मामले को रफा दफा कर दिया है। आज तक इस बात का जवाब नहीं मिला कि वह व्यक्ति कौन था और उसका मकसद क्या था? ब्यूरोक्रेसी का बड़ा ऑफिस मेल मुलाकात से लेकर शिकायतें सुनने तक खूब उदार है, यहां पीड़ित से लेकर पावर सीकर्स तक बेधड़क आते हैं, सबकी सुनी भी जाती है। इसके पीछे ब्यूरोक्रेसी के मुखिया की उदारता बड़ी वजह है, लेकिन उदारता का गलत इस्तेमाल करने वालों की भी कमी नहीं है। सचिवालय के पावर कॉरिडोर्स में एक स्वयंभू मैसेंजर कम मैनेजर का मूवमेंट सबकी जुबां पर है। स्वयंभू मैसेंजर ने सरेआम बड़े ऑफिस से कोई भी काम करवाने की डींग हांककर कई को प्रभावित कर लिया है। इन महाशय के चक्कर में अब बड़े ऑफिस को लेकर चर्चा होने लगी है, लेकिन असलियत अभी सही जगह पहुंची नहीं है। पावर कॉरिडोर्स में मुलाकातों और बैठकों से बहुत कुछ तय हो जाता है। सरकार के मुखिया के खासमखास नेताजी इन दिनों अपनों पर ही भन्नाए हुए हैं। नेताजी ने वीडियो जारी करके मुखिया के ही दूसरे नजदीकी नेता पर टिकटों में गड़बड़ी करने के आरोप लगाकर जमकर भड़ास निकाली। सियासी घर का झगड़ा इस तरह बाहर आया देख हर कोई चकित था। इस पूरी घटना की पड़ताल में दूसरी बात निकल कर आई। मुखिया के खास नेताजी की बेटी और पोती को तो टिकट मिल गया, लेकिन उनकी सिफारिश पर समधी और पुत्रवधू को टिकट नहीं मिला। प्रभारी की इस जुर्रत पर मुखिया के खास नेताजी भन्ना गए, खानदानी लोकतंत्र खतरे में जो आ गया था। एक जानकार ने इस पर रोचक कमेंट किया-ऐसे ही सगा कांग्रेस थोड़े ही कहते हैं। राजनीति में सियासी चालें कभी खत्म नहीं होतीं, मामला चुनाव में टिकट का हो तो चालें और कुटिल हो जाती हैं। मामला गोविंदगढ़ पंचायत समिति में सामने आया। प्रभारी ने जिस उम्मीदवार के लिए सिफारिश की उस पर सरकार के मुखिया के नजदीकी चौमूं के हारे हुए पूर्व विधायक सहमत नहीं थे। हारे हुए विधायक उम्मीदवार ने पूर्व मंत्री के रिश्तेदार को टिकट दे दिया, लेकिन सिंबल में जाति के कॉलम में यादव की जगह जाट लिख दिया। स्क्रूटनी में सिंबल रिजेक्ट हो गया। उम्मीदवार भी हार मानने वाला नहीं था, उसने बागी ताल ठोंक दी। सरकार के मुखिया को भगीरथ की उपमा देने वाले आईएएस इन दिनों उनके ऑफिस में आने वालों को टाइम टेबल के हिसाब से ड्रिंक सर्व करते हैं। सचिवालय के दफ्तर में इन साहब ने मल्टी ड्रिक मेकर मशीन लगाई है। मशीन से कब कौन ड्रिंक पिलाना है उसके हिसाब से टाइम तय है। अब यह आपके जाने के टाइम पर निर्भर करेगा कि आपको गर्म पानी, फ्लेवर्ड टी, लेमन टी, टामेटो सूप में से क्या मिलेगा? ये आईएएस यूडीएच मंत्री की फाइल को लाइफ के रूप में देखने के विजन को भी रख चुके हैं। पूर्व डिप्टी सीएम के बंगले पर हर हलचल पर निगरानी है। पिछले दिनों कुछ एमएलए उनसे मिलने गए। मुखियाजी ने उनकी पूर्व डिप्टी सीएम से हुई मुलाकात का जिक्र कर दिया। अब दोहरी निष्ठाओं वाले नेताओं के सामने संकट है। मिलने जाए तो बडे घर तक सूचना चली जाती है। चुटकियां ली जा रही है कि 'जागता राजा' है। बिग बॉस सब देख रहे है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
Congress President Election: कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे कहा कि सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद के लिए मेरा नाम सुझाना ये सब अफवाह है, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति न तो चुनाव का हिस्सा होगा और न ही किसी उम्मीदवार का समर्थन करेगा। उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि किसी ने यह अफवाह कांग्रेस पार्टी सोनिया गांधी और मुझे बदनाम करने के लिए फैलाई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह (सोनिया गांधी) पार्टी के चुनाव में भाग नहीं लेंगी और न ही किसी उम्मीदवार के समर्थन में आएंगी।
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कहा कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से 18 घंटे पहले पार्टी के शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था, जिसके बाद से सियासी गलियारों में ये बात तैरने लगी थी कि सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया था। वहीं, पार्टी के साथ अपने दशकों लंबे जुड़ाव को गर्व से याद करते हुए खड़गे ने इस विचार के साथ मैदान में प्रवेश किया है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को पदभार संभालना चाहिए था।
बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा, 'मुझे नामांकन पत्र दाखिल करने से 18 घंटे पहले पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था। जब मैंने पूछा कि मुझे मैदान में उतरने के लिए क्यों कहा जा रहा है तो मुझे पता चला कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि उनके परिवार का कोई सदस्य पार्टी के शीर्ष पद पर आसीन हो। ' ऐसा माना जाता है कि गांधी ने कांग्रेस में एक ही परिवार का शासन के बीजेपी के आरोप को कुंद करने के लिए पार्टी अध्यक्ष नहीं बनने का फैसला लिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार (10 अक्टूबर) को कहा था कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह 50 साल से कम उम्र के लोगों के लिए पार्टी के 50 प्रतिशत पदों को आवंटित करने के उदयपुर घोषणा के प्रस्ताव को लागू करेंगे। उन्होंने कहा था कि 50 साल से कम उम्र वालों को 50 फीसदी सीटें दी जाएंगी, महिलाओं, एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों को, और मैं यह भी सुनिश्चित करूंगा कि कोई भी पांच साल से अधिक समय तक किसी पद पर न रहे। बता दें कि मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी इस पद की रेस में हैं।
|
Congress President Election: कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे कहा कि सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद के लिए मेरा नाम सुझाना ये सब अफवाह है, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति न तो चुनाव का हिस्सा होगा और न ही किसी उम्मीदवार का समर्थन करेगा। उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि किसी ने यह अफवाह कांग्रेस पार्टी सोनिया गांधी और मुझे बदनाम करने के लिए फैलाई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह पार्टी के चुनाव में भाग नहीं लेंगी और न ही किसी उम्मीदवार के समर्थन में आएंगी। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कहा कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से अट्ठारह घंटाटे पहले पार्टी के शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था, जिसके बाद से सियासी गलियारों में ये बात तैरने लगी थी कि सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया था। वहीं, पार्टी के साथ अपने दशकों लंबे जुड़ाव को गर्व से याद करते हुए खड़गे ने इस विचार के साथ मैदान में प्रवेश किया है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को पदभार संभालना चाहिए था। बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा, 'मुझे नामांकन पत्र दाखिल करने से अट्ठारह घंटाटे पहले पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था। जब मैंने पूछा कि मुझे मैदान में उतरने के लिए क्यों कहा जा रहा है तो मुझे पता चला कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि उनके परिवार का कोई सदस्य पार्टी के शीर्ष पद पर आसीन हो। ' ऐसा माना जाता है कि गांधी ने कांग्रेस में एक ही परिवार का शासन के बीजेपी के आरोप को कुंद करने के लिए पार्टी अध्यक्ष नहीं बनने का फैसला लिया है। कांग्रेस के राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को कहा था कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह पचास साल से कम उम्र के लोगों के लिए पार्टी के पचास प्रतिशत पदों को आवंटित करने के उदयपुर घोषणा के प्रस्ताव को लागू करेंगे। उन्होंने कहा था कि पचास साल से कम उम्र वालों को पचास फीसदी सीटें दी जाएंगी, महिलाओं, एससी, एसटी और ओबीसी के लोगों को, और मैं यह भी सुनिश्चित करूंगा कि कोई भी पांच साल से अधिक समय तक किसी पद पर न रहे। बता दें कि मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी इस पद की रेस में हैं।
|
ऊहापोह की परिणति नासदीय सूक्त में दर्शाई गई उस स्थिति में हुई, जब कि सृष्टि के प्रारंभ मैन असत् था नसत्, "वही एक था " नासदीय सूक्त का "वही एक" उपनिषदों के ब्रह्म में परिणत हो गया। इस प्रकार वैदिक आर्यों ने इस प्राकृतिक या भौतिक अस्तित्व के अतिरिक्त भी एक ऐसा अस्तित्व स्वीकार किया, जिसका सम्बन्ध आत्मा व परमात्मा से था । आत्मा का अस्तित्व यथार्थ माना गया था, भौतिक अस्तित्व तो क्षणभहर था । आत्मा का अस्तित्व इस भौतिक जगत् के परे भी माना गया । इस तथ्य को पुरुषसूक्त में बहुत ही अच्छे ढङ्ग से समझाया गया है। सहस्रशोपे, सहस्राक्ष, सहस्रपात् पुरुष समस्त भूमि में ध्यात छोकर उससे दस अंगुल ऊपर स्थित है। जो कुछ है, जो कुछ हुआ है व जो कुछ होनेवाला है, वह सब पुरुष ही है, और वह अमृतत्व का व जो कुछ अन्न से वृद्धिंगत होता है उसका शासक है। उस पुरुष की इतनी महिमा है, किन्तु वह इससे भी श्रेष्ठ है। उसके एकचतुर्थांश से ये सब भूत बने, उसका तीन चतुर्थांश, जोकि अमृतत्व है, आकाश में है। उस पुरुष या तीन चतुर्थीश ऊपर गया व एक चतुर्थांश यहां रहा, उसके द्वारा यह इस जड़-चेतन सत्र में व्याप्त हुआ ।" इस प्रकार इन मन्त्रों में भांतिकत्व च आध्यात्मिरुत्य अथवा अमृतत्व के मध्य सुन्दर सामञ्जस्य स्थापित किया गया है, व अमृतत्व को अधिक महत्वपूर्ण व उपादेय बताया गया है।
जीवन मरण की समस्या ने वैदिक आायों के पर संसार हृदय की क्षणभङ्गुरता का भाव अङ्कित किया। इस परिवर्तनशील संसार में उन्होंने आत्मतत्त्व को ही परिवर्तनों से परे पाया, तथा पुनर्जन्म व धर्म के सिद्धान्त का प्रतिपादन कर जीवन मरण की समस्या को सुलझाने का प्रयक्ष किया। उन्होंने यह सिद्धान्त स्थिर किया कि जीवात्मा अपने कर्मों के कारण जीवन मरण के बन्धन में फेंस कर जन्म जन्मान्तर तक विभिन्न योनियों में भटकता फिरना है, व का अनुभव करता है, अतपत्र उसके लिये आवश्यकीय हो जाता है कि वह परम आत्मतत्य का साक्षात्कार कर अमृतत्व को प्राप्त करे । इस प्रकार वैदिक आयों ने ऐदिक व पारलौकिक तत्त्वों के मध्य सामन्जस्य स्थापित करके जीवन के प्रति भौe की आधारशिला पर स्थित विशुद्ध आध्यात्मिक दृष्टिकोण विकसित किया था, जो आज भी भारतीय जन जीवन की विशेषता है ।
१५- लीन समाज
उपरोक्त आध्यात्मिक दृष्टिकोण के विकसित होने पर वैदिक आर्यों के लिये यह भी आवश्यकीय हो गया कि वे मानव जीवन का ध्येय निश्चित करें। उन्होंने अपने आध्यात्मिक विकास के अनुरूप ही वर्गचतुष्टय अर्थात् धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति ही मानव जीवन का ध्येय निश्चित किया। धर्म से उन नैतिक व आध्यात्मिक नियमों का तात्पर्य था, जिनको जीवन में आचरित करने से शारीरिक, मानसिक व आत्मिक शक्तियों के विकास के द्वारा मानव सच्चे अर्थ में मानव वन जाता था। इस प्रकार जीवन की भूमिका तैयार करके अर्थ की और बढ़ना पड़ता था । अर्थ से भौतिक ऐश्वर्य, समृद्धि आदि से तात्पर्य है। धर्म की भूमिका पर कृषि, वाणिज्य, औद्योगिक विकास आदि द्वारा आर्थिक विकास करना मानव जीवन का महान् ध्येय माना गया था । अर्थप्राप्ति के पश्चात् काम अर्थात् जीवन की उदात्त आकांक्षाओं व महत्त्वाकांक्षाओं की ओर ध्यान दिया जाता था। आभ्यात्मिक दृष्टिकोण के विकसित होने के कारण वैदिक आर्य के लिए काम प्राप्ति का अर्थ आध्यात्मिक विकास के मार्ग में अग्रसर होकर लोकसेवा, परोपकार आदि द्वारा आत्मविकास करना पड़ता था। इसी आत्मविकास द्वारा जीवन का अन्तिम ध्येय मोक्ष सिद्ध होता था । मोक्ष का अर्थ जीवात्मा को जीवन-मरण के बन्धनों से मुक्त कर ब्रह्मसाक्षात्कार द्वारा शाश्वत् सुख का अनुभव कराना होता था। यही वैदिक आर्यों के जीवन का अन्तिम ध्येय था । इसी के लिये विचारशील व्यक्ति दारैपणा, वित्तैपणा, लोकैपणा आदि को तिलाञ्जलि देकर वन में प्रवेश कर आत्मविद्यारन होते थे। इस प्रकार वैदिक आर्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति में ही अपने सर्व प्रयत लगा देते थे । धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि का सम्यक् अध्ययन कर वैदिक युग के पश्चात् उन पर आधारित अलग-अलग शास्त्र भी विकसित किये गये थे, जैसे धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र व मोक्ष का शास्त्र अर्थात् ब्रह्मविद्या या वेदान्तादि दर्शन ।
विभिन्न संस्थायें
उपरोक्त चर्मचतुष्टय को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने के लिये वैदिक आर्यों ने जीवन के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक आदि क्षेत्रों से सम्बन्धित विभिन्न संस्थाओं को जन्म दिया था, जिनके कारण
|
ऊहापोह की परिणति नासदीय सूक्त में दर्शाई गई उस स्थिति में हुई, जब कि सृष्टि के प्रारंभ मैन असत् था नसत्, "वही एक था " नासदीय सूक्त का "वही एक" उपनिषदों के ब्रह्म में परिणत हो गया। इस प्रकार वैदिक आर्यों ने इस प्राकृतिक या भौतिक अस्तित्व के अतिरिक्त भी एक ऐसा अस्तित्व स्वीकार किया, जिसका सम्बन्ध आत्मा व परमात्मा से था । आत्मा का अस्तित्व यथार्थ माना गया था, भौतिक अस्तित्व तो क्षणभहर था । आत्मा का अस्तित्व इस भौतिक जगत् के परे भी माना गया । इस तथ्य को पुरुषसूक्त में बहुत ही अच्छे ढङ्ग से समझाया गया है। सहस्रशोपे, सहस्राक्ष, सहस्रपात् पुरुष समस्त भूमि में ध्यात छोकर उससे दस अंगुल ऊपर स्थित है। जो कुछ है, जो कुछ हुआ है व जो कुछ होनेवाला है, वह सब पुरुष ही है, और वह अमृतत्व का व जो कुछ अन्न से वृद्धिंगत होता है उसका शासक है। उस पुरुष की इतनी महिमा है, किन्तु वह इससे भी श्रेष्ठ है। उसके एकचतुर्थांश से ये सब भूत बने, उसका तीन चतुर्थांश, जोकि अमृतत्व है, आकाश में है। उस पुरुष या तीन चतुर्थीश ऊपर गया व एक चतुर्थांश यहां रहा, उसके द्वारा यह इस जड़-चेतन सत्र में व्याप्त हुआ ।" इस प्रकार इन मन्त्रों में भांतिकत्व च आध्यात्मिरुत्य अथवा अमृतत्व के मध्य सुन्दर सामञ्जस्य स्थापित किया गया है, व अमृतत्व को अधिक महत्वपूर्ण व उपादेय बताया गया है। जीवन मरण की समस्या ने वैदिक आायों के पर संसार हृदय की क्षणभङ्गुरता का भाव अङ्कित किया। इस परिवर्तनशील संसार में उन्होंने आत्मतत्त्व को ही परिवर्तनों से परे पाया, तथा पुनर्जन्म व धर्म के सिद्धान्त का प्रतिपादन कर जीवन मरण की समस्या को सुलझाने का प्रयक्ष किया। उन्होंने यह सिद्धान्त स्थिर किया कि जीवात्मा अपने कर्मों के कारण जीवन मरण के बन्धन में फेंस कर जन्म जन्मान्तर तक विभिन्न योनियों में भटकता फिरना है, व का अनुभव करता है, अतपत्र उसके लिये आवश्यकीय हो जाता है कि वह परम आत्मतत्य का साक्षात्कार कर अमृतत्व को प्राप्त करे । इस प्रकार वैदिक आयों ने ऐदिक व पारलौकिक तत्त्वों के मध्य सामन्जस्य स्थापित करके जीवन के प्रति भौe की आधारशिला पर स्थित विशुद्ध आध्यात्मिक दृष्टिकोण विकसित किया था, जो आज भी भारतीय जन जीवन की विशेषता है । पंद्रह- लीन समाज उपरोक्त आध्यात्मिक दृष्टिकोण के विकसित होने पर वैदिक आर्यों के लिये यह भी आवश्यकीय हो गया कि वे मानव जीवन का ध्येय निश्चित करें। उन्होंने अपने आध्यात्मिक विकास के अनुरूप ही वर्गचतुष्टय अर्थात् धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति ही मानव जीवन का ध्येय निश्चित किया। धर्म से उन नैतिक व आध्यात्मिक नियमों का तात्पर्य था, जिनको जीवन में आचरित करने से शारीरिक, मानसिक व आत्मिक शक्तियों के विकास के द्वारा मानव सच्चे अर्थ में मानव वन जाता था। इस प्रकार जीवन की भूमिका तैयार करके अर्थ की और बढ़ना पड़ता था । अर्थ से भौतिक ऐश्वर्य, समृद्धि आदि से तात्पर्य है। धर्म की भूमिका पर कृषि, वाणिज्य, औद्योगिक विकास आदि द्वारा आर्थिक विकास करना मानव जीवन का महान् ध्येय माना गया था । अर्थप्राप्ति के पश्चात् काम अर्थात् जीवन की उदात्त आकांक्षाओं व महत्त्वाकांक्षाओं की ओर ध्यान दिया जाता था। आभ्यात्मिक दृष्टिकोण के विकसित होने के कारण वैदिक आर्य के लिए काम प्राप्ति का अर्थ आध्यात्मिक विकास के मार्ग में अग्रसर होकर लोकसेवा, परोपकार आदि द्वारा आत्मविकास करना पड़ता था। इसी आत्मविकास द्वारा जीवन का अन्तिम ध्येय मोक्ष सिद्ध होता था । मोक्ष का अर्थ जीवात्मा को जीवन-मरण के बन्धनों से मुक्त कर ब्रह्मसाक्षात्कार द्वारा शाश्वत् सुख का अनुभव कराना होता था। यही वैदिक आर्यों के जीवन का अन्तिम ध्येय था । इसी के लिये विचारशील व्यक्ति दारैपणा, वित्तैपणा, लोकैपणा आदि को तिलाञ्जलि देकर वन में प्रवेश कर आत्मविद्यारन होते थे। इस प्रकार वैदिक आर्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति में ही अपने सर्व प्रयत लगा देते थे । धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि का सम्यक् अध्ययन कर वैदिक युग के पश्चात् उन पर आधारित अलग-अलग शास्त्र भी विकसित किये गये थे, जैसे धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र व मोक्ष का शास्त्र अर्थात् ब्रह्मविद्या या वेदान्तादि दर्शन । विभिन्न संस्थायें उपरोक्त चर्मचतुष्टय को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने के लिये वैदिक आर्यों ने जीवन के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक आदि क्षेत्रों से सम्बन्धित विभिन्न संस्थाओं को जन्म दिया था, जिनके कारण
|
PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव में जुबानी जंग तेज हो चुकी है। हर दल या उम्मीदवार चुनाव जीतने को लेकर वैसी बात कह रहे हैं जिससे उन्हें वोट की उम्मीद है। बिहार की आवाम के बीच क्वॉलिटी एजुकेशन की बात तो है। हर कोई अपनी हैसियत से अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं करते हैं। घोषणा पत्र में तो बात करते हैं, लेकिन मंचों पर इस बारे में बात नहीं करते हैं। पहले चरण में भ्8फ् उम्मीदवार मैदान में हैं। इनकी एकेडमिक योग्यता के बारे में एडीआर ने विश्लेषण किया है।
शैक्षणिक योग्यता को देखें तो कुल भ्8फ् उम्मीदवारों में से फ्फ्ख् (भ्7 परसेंट) उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता क्ख् वीं या इससे भी कम है। वहीं ख्ब्क् (ब्क् परसेंट) उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक है।
|
PATNA: बिहार विधानसभा चुनाव में जुबानी जंग तेज हो चुकी है। हर दल या उम्मीदवार चुनाव जीतने को लेकर वैसी बात कह रहे हैं जिससे उन्हें वोट की उम्मीद है। बिहार की आवाम के बीच क्वॉलिटी एजुकेशन की बात तो है। हर कोई अपनी हैसियत से अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं करते हैं। घोषणा पत्र में तो बात करते हैं, लेकिन मंचों पर इस बारे में बात नहीं करते हैं। पहले चरण में भ्आठफ् उम्मीदवार मैदान में हैं। इनकी एकेडमिक योग्यता के बारे में एडीआर ने विश्लेषण किया है। शैक्षणिक योग्यता को देखें तो कुल भ्आठफ् उम्मीदवारों में से फ्फ्ख् उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता क्ख् वीं या इससे भी कम है। वहीं ख्ब्क् उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक है।
|
तेलंगाना राज्य विरासत प्राधिकरण - एक राज्य स्तरीय संस्था - ने कुतुब शाही मकबरे और गोलकुंडा सहित जुड़वां शहरों में 26 ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा के उपायों की समीक्षा करने के लिए प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्य सचिव सोमेश कुमार की अध्यक्षता में अपनी बैठक की।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी संरक्षित स्मारकों की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे. अधिकारियों को इन स्मारकों की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करने और सरकार को कार्रवाई करने में सक्षम बनाने के लिए इसकी सुरक्षा के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
समिति ने कुतुब शाही मकबरे और अन्य विरासत भवनों के आसपास बफर जोन घोषित करने के दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने के भी निर्देश दिए थे।
मुख्य सचिव ने मुल्ग जिले में काकतीय काल के रामप्पा मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए.
बैठक में प्रमुख सचिव नगर प्रशासन अरविंद कुमार, शिक्षा सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया, आयुक्त जीएचएमसी लोकेश कुमार, सचिव युवा अधिकारी श्रीनिवास राजू, सचिव कानून संतोष रेड्डी, कलेक्टर रंगा रेड्डी जिला कुमार, कलेक्टर मुल्ग कृष्ण आदित्य, विशेष अधिकारी कुली कुतुब शामिल थे. शाह शहरी विकास प्राधिकरण संतोष, प्रबंध निदेशक तेलंगाना पर्यटन विकास निगम मनोहर, मुख्य शहर योजनाकार जीएचएमसी देवेंद्र रेड्डी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिकारी सोमती।
|
तेलंगाना राज्य विरासत प्राधिकरण - एक राज्य स्तरीय संस्था - ने कुतुब शाही मकबरे और गोलकुंडा सहित जुड़वां शहरों में छब्बीस ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा के उपायों की समीक्षा करने के लिए प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्य सचिव सोमेश कुमार की अध्यक्षता में अपनी बैठक की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी संरक्षित स्मारकों की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे. अधिकारियों को इन स्मारकों की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करने और सरकार को कार्रवाई करने में सक्षम बनाने के लिए इसकी सुरक्षा के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। समिति ने कुतुब शाही मकबरे और अन्य विरासत भवनों के आसपास बफर जोन घोषित करने के दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने के भी निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव ने मुल्ग जिले में काकतीय काल के रामप्पा मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए. बैठक में प्रमुख सचिव नगर प्रशासन अरविंद कुमार, शिक्षा सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया, आयुक्त जीएचएमसी लोकेश कुमार, सचिव युवा अधिकारी श्रीनिवास राजू, सचिव कानून संतोष रेड्डी, कलेक्टर रंगा रेड्डी जिला कुमार, कलेक्टर मुल्ग कृष्ण आदित्य, विशेष अधिकारी कुली कुतुब शामिल थे. शाह शहरी विकास प्राधिकरण संतोष, प्रबंध निदेशक तेलंगाना पर्यटन विकास निगम मनोहर, मुख्य शहर योजनाकार जीएचएमसी देवेंद्र रेड्डी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिकारी सोमती।
|
बतखपालन का काम बेरोजगार युवाओं के लिए आय का अच्छा साधन साबित हो सकता है. मुरगीपालन के मुकाबले बतखपालन कम जोखिम वाला होता है. बतख के मांस और अंडों के रोग प्रतिरोधी होने के कारण मुरगी के मुकाबले बतख की मांग अधिक है. बतख का मांस और अंडे प्रोटीन से भरपूर होते हैं. बतखों में मुरगी के मुकाबले मृत्युदर बेहद कम है. इस का कारण बतखों का रोगरोधी होना भी है. अगर बतखपालन का काम बड़े पैमाने पर किया जाए तो यह बेहद लाभदायी साबित हो सकता है.
बतखपालन शुरू करने के लिए शांत जगह बेहतर होती है. अगर यह जगह किसी तालाब के पास हो तो बहुत अच्छा होता है, क्योंकि बतखों को तालाब में तैरने के लिए जगह मिल जाती है. अगर बतखपालन की जगह पर तालाब नहीं है, तो जरूरत के मुताबिक तालाब की खुदाई करा लेना जरूरी होता है. तालाब में बतखों के साथ मछलीपालन भी किया जा सकता है. अगर तालाब की खुदाई नहीं करवाना चाहते हैं तो टीनशेड के चारों तरफ 2-3 फुट गहरी व चौड़ी नाली बनवा लेनी चाहिए, जिस में तैर कर बतखें अपना विकास कर सकती हैं. बतखपालन के लिए प्रति बतख डेढ़ वर्ग फुट जमीन की आवश्यकता पड़ती है. इस तरह 5 हजार बतखों के फार्म को शुरू करने के लिए 3750 वर्ग फुट के 2 टीनशेडों की आवश्यकता पड़ती है. इतनी ही बतखों के लिए करीब 13 हजार वर्ग फुट का तालाब होना जरूरी होता है.
बतखपालन के लिए सब से अच्छी प्रजाति खाकी कैंपवेल है, जो खाकी रंग की होती है. ये बतखें पहले साल में 300 अंडे देती हैं. 2-3 सालों में भी इन की अंडा देने की कूवत अच्छी होती है. तीसरे साल के बाद इन बतखों का इस्तेमाल मांस के लिए किया जाता है. इन बतखों की खासीयत यह है कि ये बहुत शोर मचाने वाली होती हैं. शेड में किसी जंगली जानवर या चोर के घुसने पर शोर मचा कर ये मालिक का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती हैं. इस प्रजाति की बतखों के अंडों का वजन 65 से 70 ग्राम तक होता है, जो मुरगी के अंडों के वजन से 15-20 ग्राम ज्यादा है. बतखों केअंडे देने का समय तय होता है. ये सुबह 9 बजे तक अंडे दे देती हैं, जिस से इन्हें बेफिक्र हो कर दाना चुगने के लिए छोड़ा जा सकता है. खाकी कैंपवेल बतख की उम्र 3-4 साल तक की होती है, जो 90-120 दिनों के बाद रोजाना 1 अंडा देती है.
|
बतखपालन का काम बेरोजगार युवाओं के लिए आय का अच्छा साधन साबित हो सकता है. मुरगीपालन के मुकाबले बतखपालन कम जोखिम वाला होता है. बतख के मांस और अंडों के रोग प्रतिरोधी होने के कारण मुरगी के मुकाबले बतख की मांग अधिक है. बतख का मांस और अंडे प्रोटीन से भरपूर होते हैं. बतखों में मुरगी के मुकाबले मृत्युदर बेहद कम है. इस का कारण बतखों का रोगरोधी होना भी है. अगर बतखपालन का काम बड़े पैमाने पर किया जाए तो यह बेहद लाभदायी साबित हो सकता है. बतखपालन शुरू करने के लिए शांत जगह बेहतर होती है. अगर यह जगह किसी तालाब के पास हो तो बहुत अच्छा होता है, क्योंकि बतखों को तालाब में तैरने के लिए जगह मिल जाती है. अगर बतखपालन की जगह पर तालाब नहीं है, तो जरूरत के मुताबिक तालाब की खुदाई करा लेना जरूरी होता है. तालाब में बतखों के साथ मछलीपालन भी किया जा सकता है. अगर तालाब की खुदाई नहीं करवाना चाहते हैं तो टीनशेड के चारों तरफ दो-तीन फुट गहरी व चौड़ी नाली बनवा लेनी चाहिए, जिस में तैर कर बतखें अपना विकास कर सकती हैं. बतखपालन के लिए प्रति बतख डेढ़ वर्ग फुट जमीन की आवश्यकता पड़ती है. इस तरह पाँच हजार बतखों के फार्म को शुरू करने के लिए तीन हज़ार सात सौ पचास वर्ग फुट के दो टीनशेडों की आवश्यकता पड़ती है. इतनी ही बतखों के लिए करीब तेरह हजार वर्ग फुट का तालाब होना जरूरी होता है. बतखपालन के लिए सब से अच्छी प्रजाति खाकी कैंपवेल है, जो खाकी रंग की होती है. ये बतखें पहले साल में तीन सौ अंडे देती हैं. दो-तीन सालों में भी इन की अंडा देने की कूवत अच्छी होती है. तीसरे साल के बाद इन बतखों का इस्तेमाल मांस के लिए किया जाता है. इन बतखों की खासीयत यह है कि ये बहुत शोर मचाने वाली होती हैं. शेड में किसी जंगली जानवर या चोर के घुसने पर शोर मचा कर ये मालिक का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती हैं. इस प्रजाति की बतखों के अंडों का वजन पैंसठ से सत्तर ग्राम तक होता है, जो मुरगी के अंडों के वजन से पंद्रह-बीस ग्राम ज्यादा है. बतखों केअंडे देने का समय तय होता है. ये सुबह नौ बजे तक अंडे दे देती हैं, जिस से इन्हें बेफिक्र हो कर दाना चुगने के लिए छोड़ा जा सकता है. खाकी कैंपवेल बतख की उम्र तीन-चार साल तक की होती है, जो नब्बे-एक सौ बीस दिनों के बाद रोजाना एक अंडा देती है.
|
अभिनव कुछ नवाचार है, इसकीएक निश्चित उद्योग में लागू होने की उम्मीद है। इस तरह के नवाचारों के परिचय में एक विशेष प्रक्रिया के कार्यान्वयन शामिल है जिसमें इसकी शुरुआत, आगे की आवाजाही और समाप्ति है।
- वर्तमान दिन की स्थिति से और नवाचार के विकास के दृष्टिकोण से गतिविधि का विश्लेषण करने के लिए व्यावसायिक इकाई के प्रमुख को मजबूर करना;
- नवाचार उत्पादन की व्यवस्थित योजना की आवश्यकता को न्यायसंगत बनाने के लिए;
- नवाचार के विश्लेषण और योजना के आधार के रूप में जीवन चक्र की अवधारणा की परिभाषा में परिभाषा।
जीवन चक्र नवाचार द्वारा विशेषता है। यह पहचाने गए विशिष्ट मतभेदों को प्रभावित कर सकता है, सबसे पहले, चक्र समय, अंदर प्रत्येक विशेष चरण की अवधि और चरणों की विभिन्न संख्या को प्रभावित कर सकता है। जीवन चक्र के चरणों और संख्याओं को एक विशेष नवाचार के विनिर्देशों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। इस मामले में, प्रत्येक ऐसी अवधारणा को स्पष्ट रूप से परिभाषित चरणों के साथ "कोर" (आधार) आधार के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए।
- इसे सीधे विकसित करें;
- बाजार में प्रवेश;
- बाजार के विकास और वसूली;
- बाजार की स्थिरीकरण या गिरावट।
नवाचार प्रक्रिया के निर्माता द्वारा पूरी तरह से नए उत्पाद के विकास का मंच आयोजित किया जाता है। यह इस स्तर पर है और एक निवेश है।
उत्पाद के सफल मार्ग के लिएबाजार नवाचार के लिए सीधे जिम्मेदार है। यह, एक तरह से, बाजार में एक बिल्कुल नया उत्पाद पेश करने की अवधि है। नतीजतन, इस उत्पाद को पैसा लाने शुरू करना चाहिए, और इस चरण की अवधि सीधे विज्ञापन अभियान की गुणवत्ता, मुद्रास्फीति का स्तर और इन नवाचारों की बिक्री के बिंदुओं की दक्षता पर निर्भर करती है।
निम्नलिखित चरणों - बाजार के विकास और वसूली -शुरू की उत्पाद की बिक्री में वृद्धि से जोड़ा। उनकी अवधि एक समय अवधि के दौरान एक नए उत्पाद को सक्रिय रूप से बिक्री की जा सकती है, जो निश्चित सीमा उत्पाद की अपनी संतृप्ति की उपलब्धि के लिए योगदान है।
ऐसे संगठनों के लिए, नवाचार सिर्फ नहीं हैशब्दों, यह एक आवश्यकता है जो बिजली इंजीनियरों के काम को और भी प्रभावी बना सकती है। अपने काम में कुछ नवाचारों के उपयोग के लिए, ऊर्जा कंपनियां अपने स्वयं के वैज्ञानिक विकास को प्रोत्साहित करती हैं और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करती हैं। वे सक्रिय रूप से अभिनव समाधानों की निगरानी और कार्यान्वयन भी करते हैं।
|
अभिनव कुछ नवाचार है, इसकीएक निश्चित उद्योग में लागू होने की उम्मीद है। इस तरह के नवाचारों के परिचय में एक विशेष प्रक्रिया के कार्यान्वयन शामिल है जिसमें इसकी शुरुआत, आगे की आवाजाही और समाप्ति है। - वर्तमान दिन की स्थिति से और नवाचार के विकास के दृष्टिकोण से गतिविधि का विश्लेषण करने के लिए व्यावसायिक इकाई के प्रमुख को मजबूर करना; - नवाचार उत्पादन की व्यवस्थित योजना की आवश्यकता को न्यायसंगत बनाने के लिए; - नवाचार के विश्लेषण और योजना के आधार के रूप में जीवन चक्र की अवधारणा की परिभाषा में परिभाषा। जीवन चक्र नवाचार द्वारा विशेषता है। यह पहचाने गए विशिष्ट मतभेदों को प्रभावित कर सकता है, सबसे पहले, चक्र समय, अंदर प्रत्येक विशेष चरण की अवधि और चरणों की विभिन्न संख्या को प्रभावित कर सकता है। जीवन चक्र के चरणों और संख्याओं को एक विशेष नवाचार के विनिर्देशों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। इस मामले में, प्रत्येक ऐसी अवधारणा को स्पष्ट रूप से परिभाषित चरणों के साथ "कोर" आधार के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए। - इसे सीधे विकसित करें; - बाजार में प्रवेश; - बाजार के विकास और वसूली; - बाजार की स्थिरीकरण या गिरावट। नवाचार प्रक्रिया के निर्माता द्वारा पूरी तरह से नए उत्पाद के विकास का मंच आयोजित किया जाता है। यह इस स्तर पर है और एक निवेश है। उत्पाद के सफल मार्ग के लिएबाजार नवाचार के लिए सीधे जिम्मेदार है। यह, एक तरह से, बाजार में एक बिल्कुल नया उत्पाद पेश करने की अवधि है। नतीजतन, इस उत्पाद को पैसा लाने शुरू करना चाहिए, और इस चरण की अवधि सीधे विज्ञापन अभियान की गुणवत्ता, मुद्रास्फीति का स्तर और इन नवाचारों की बिक्री के बिंदुओं की दक्षता पर निर्भर करती है। निम्नलिखित चरणों - बाजार के विकास और वसूली -शुरू की उत्पाद की बिक्री में वृद्धि से जोड़ा। उनकी अवधि एक समय अवधि के दौरान एक नए उत्पाद को सक्रिय रूप से बिक्री की जा सकती है, जो निश्चित सीमा उत्पाद की अपनी संतृप्ति की उपलब्धि के लिए योगदान है। ऐसे संगठनों के लिए, नवाचार सिर्फ नहीं हैशब्दों, यह एक आवश्यकता है जो बिजली इंजीनियरों के काम को और भी प्रभावी बना सकती है। अपने काम में कुछ नवाचारों के उपयोग के लिए, ऊर्जा कंपनियां अपने स्वयं के वैज्ञानिक विकास को प्रोत्साहित करती हैं और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करती हैं। वे सक्रिय रूप से अभिनव समाधानों की निगरानी और कार्यान्वयन भी करते हैं।
|
जितेंद्र कंवर/जांजगीर-चांपाः जिले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण संरक्षण मंडल के मापदंडों की अवधि खत्म हो गई है। वर्तमान में सिर्फ सात स्वीकृत रेतघाट की ही अवधि बची है। जबकि शेष रेत घाटों का ठेका खत्म हो चुका है। ठेका खत्म हो चुके रेत घाटों से रेत का गैर कानूनी खनन हो रहा है। लेकिन इसे रोकने के लिए न जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और न खनिज विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है।
बरसात के बाद नदियों में पानी कम होने और प्रतिबंध की अवधि खत्म होने के बाद से महानदी, हसदेव और सहायक नदियों की रेतघाटों में गैर कानूनी उत्खनन का कार्य जोरों पर है। जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले को मिलाकर शासन द्वारा 33 रेतघाटों को उत्खनन के लिए ठेके पर दिए गए थे। इसमें से 26 रेत घाटों का ठेका खत्म हो चुका है, जबकि शेष सात रेत घाटों का ठेका जनवरी 2023 तक पूरा हो जाएगा। जिन घाटों की निविदा अवधि खत्म हो गई है। उसके लिए खनिज विभाग द्वारा तय मापदंडों के मुताबिक नए सिरे से निविदा की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। मगर अभी इसमें समय लगेगा। लेकिन इसका पुरा लाभ रेत माफिया उठा रहे हैं।
बता दें कि निविदा अवधि खत्म हो चुके घाटों से धड़ल्ले से रेत उत्खनन कर बिक्री की जा रही है। मगर इसे रोकने न तो जिला प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जा रहा है और न ही खनिज विभाग कोई कार्रवाई कर रही है। रेतघाट बंद होने का बहाना बनाकर रेत माफिया की कालाबाजारी कर रहे हैं। खनिज विभाग द्वारा मानसून के दौरान 15 जून से 15 अक्टूबर तक चार महीने के लिए रेतघाट को बंद कर उत्खनन और परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। हालांकि इसके बाद भी जिले के अधिकतर रेतघाटों में पूरे समय रेत का गैर कानूनी उत्खनन और परिवहन होते रहता है। इसको रोक पाने में जिला खनिज विभाग पूरी तरह से असफल रहा है।
राज्य गवर्नमेंट द्वारा तीन वर्ष पहले नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों से घाट लेकर निजी लोगों को दो वर्ष के लिए ठेका में दिया गया था। इस पर दिया गया एक्सटेंशन भी अब खत्म हो गया है। वर्तमान में सिर्फ सात रेतघाटों की अवधि 2023 तक बची है। दूसरी तरफ,स्वीकृत घाट के अतिरिक्त भी कई स्थानों पर गैर कानूनी रेतघाट चल रहे हैं। जिले के शिवरीनारायण, देवरी, खोरसी, तनौद, बलौदा, चांपा, बम्हनीडीह, केबिर्रा, डभरा, चंद्रपुर क्षेत्र के अधिकतर रेतघाटों के ठेके खत्म हो चुके है। लेकिन इन घाटों से रेत का गैर कानूनी उत्खनन और परिवहन का कार्य जोरों से चल रहा है।
|
जितेंद्र कंवर/जांजगीर-चांपाः जिले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण संरक्षण मंडल के मापदंडों की अवधि खत्म हो गई है। वर्तमान में सिर्फ सात स्वीकृत रेतघाट की ही अवधि बची है। जबकि शेष रेत घाटों का ठेका खत्म हो चुका है। ठेका खत्म हो चुके रेत घाटों से रेत का गैर कानूनी खनन हो रहा है। लेकिन इसे रोकने के लिए न जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और न खनिज विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है। बरसात के बाद नदियों में पानी कम होने और प्रतिबंध की अवधि खत्म होने के बाद से महानदी, हसदेव और सहायक नदियों की रेतघाटों में गैर कानूनी उत्खनन का कार्य जोरों पर है। जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले को मिलाकर शासन द्वारा तैंतीस रेतघाटों को उत्खनन के लिए ठेके पर दिए गए थे। इसमें से छब्बीस रेत घाटों का ठेका खत्म हो चुका है, जबकि शेष सात रेत घाटों का ठेका जनवरी दो हज़ार तेईस तक पूरा हो जाएगा। जिन घाटों की निविदा अवधि खत्म हो गई है। उसके लिए खनिज विभाग द्वारा तय मापदंडों के मुताबिक नए सिरे से निविदा की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। मगर अभी इसमें समय लगेगा। लेकिन इसका पुरा लाभ रेत माफिया उठा रहे हैं। बता दें कि निविदा अवधि खत्म हो चुके घाटों से धड़ल्ले से रेत उत्खनन कर बिक्री की जा रही है। मगर इसे रोकने न तो जिला प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जा रहा है और न ही खनिज विभाग कोई कार्रवाई कर रही है। रेतघाट बंद होने का बहाना बनाकर रेत माफिया की कालाबाजारी कर रहे हैं। खनिज विभाग द्वारा मानसून के दौरान पंद्रह जून से पंद्रह अक्टूबर तक चार महीने के लिए रेतघाट को बंद कर उत्खनन और परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। हालांकि इसके बाद भी जिले के अधिकतर रेतघाटों में पूरे समय रेत का गैर कानूनी उत्खनन और परिवहन होते रहता है। इसको रोक पाने में जिला खनिज विभाग पूरी तरह से असफल रहा है। राज्य गवर्नमेंट द्वारा तीन वर्ष पहले नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों से घाट लेकर निजी लोगों को दो वर्ष के लिए ठेका में दिया गया था। इस पर दिया गया एक्सटेंशन भी अब खत्म हो गया है। वर्तमान में सिर्फ सात रेतघाटों की अवधि दो हज़ार तेईस तक बची है। दूसरी तरफ,स्वीकृत घाट के अतिरिक्त भी कई स्थानों पर गैर कानूनी रेतघाट चल रहे हैं। जिले के शिवरीनारायण, देवरी, खोरसी, तनौद, बलौदा, चांपा, बम्हनीडीह, केबिर्रा, डभरा, चंद्रपुर क्षेत्र के अधिकतर रेतघाटों के ठेके खत्म हो चुके है। लेकिन इन घाटों से रेत का गैर कानूनी उत्खनन और परिवहन का कार्य जोरों से चल रहा है।
|
काला हिरण शिकार के दोषी सलमान खान की सुनवाई हाल ही में 17 जुलाई को जोधपुर सेशन कोर्ट में हुई थी। बता दें, तीन घंटे चली बहस के बाद इस केस की अगली सुनवाई की डेट 3 और 4 अगस्त तय की गई थी। लेकिन अब कुछ इसमें बदलाव किए गए हैं।
सलमान खान को काला हिरण केस में दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई गई थी। सलमान को जेल में 2 दिन रहने के बाद तीसरे दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया जिसकी वजह से फैंस काफी खुश हैं और फैमिली वाले जश्न मना रहे हैं।
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के फैंस खुश हैं और फैमिली वाले जश्न मना रहे हैं। सलमान को काला हिरण केस में दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई गई थी। सलमान को जेल में 2 दिन रहने के बाद तीसरे दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया।
|
काला हिरण शिकार के दोषी सलमान खान की सुनवाई हाल ही में सत्रह जुलाई को जोधपुर सेशन कोर्ट में हुई थी। बता दें, तीन घंटे चली बहस के बाद इस केस की अगली सुनवाई की डेट तीन और चार अगस्त तय की गई थी। लेकिन अब कुछ इसमें बदलाव किए गए हैं। सलमान खान को काला हिरण केस में दोषी करार देते हुए पाँच साल की सजा सुनाई गई थी। सलमान को जेल में दो दिन रहने के बाद तीसरे दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया जिसकी वजह से फैंस काफी खुश हैं और फैमिली वाले जश्न मना रहे हैं। बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के फैंस खुश हैं और फैमिली वाले जश्न मना रहे हैं। सलमान को काला हिरण केस में दोषी करार देते हुए पाँच साल की सजा सुनाई गई थी। सलमान को जेल में दो दिन रहने के बाद तीसरे दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया।
|
3-4 अंडे, मेथीदाने, तौलिया, कंडीशनर।
मेथीदानें को क्रश कर लें, अंडे की सफेदी में इसे मिला लें।
ब्रश की सहायता से इस पेस्ट को बालों मे लगा लें।
30 मिनट तक लगाकर सुखाएं।
बालों को ठडें पानी से धो लें।
15 मिनट तक गर्म तौलिया बालों में लपेटें और फिर दो दिन बाद कंडीशनर लगाएं। यह पैक ड्राई और डिसकलर्ड हेयर के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
|
तीन-चार अंडे, मेथीदाने, तौलिया, कंडीशनर। मेथीदानें को क्रश कर लें, अंडे की सफेदी में इसे मिला लें। ब्रश की सहायता से इस पेस्ट को बालों मे लगा लें। तीस मिनट तक लगाकर सुखाएं। बालों को ठडें पानी से धो लें। पंद्रह मिनट तक गर्म तौलिया बालों में लपेटें और फिर दो दिन बाद कंडीशनर लगाएं। यह पैक ड्राई और डिसकलर्ड हेयर के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
|
रीति काव्य की परम्भरा
इसमें प्रकृति की क्रियाशीलता में मानवीय आरोपों से उद्दीपन का वातावरण प्रस्तुत किया गया है; परन्तु इसमें प्राचीन कवियों से ग्रहीत सरल चित्र हैं । देव की प्रतिभा अधिकतर मानवीय भावों और संचारियों की योजना में प्रकट होती है, परन्तु प्रकृति के परम्परा प्राप्त रूप में भी इन्होंने कुछ स्थलों पर भाव-व्यंजना सन्निहित की है । इस सीमा पर उसमें उद्दीपन का रूप प्रत्यक्ष हैसुनि के घुनि चातक मोरनि की चहु ओोरनि कोकिल कूकनि सों । अनुराग भरे हरि बागन में सखि रागत राग अचूकनि सो ।। कवि देव घटा उनई जु नई बन भूमि भई दल दूकनि सों । रंगराति हरी हहराती लता झुकि जाती समीर के भूकनि सों ॥' इस वर्षा के वर्णन में यथार्थ की चित्रमयता है; साथ ही प्रकृति में जो क्रिया और गति द्वारा भावोल्लास व्यंजित किया गया है वह 'अनुराग भरी वेणु' के साथ मानवीय भावों को अपने में छिपाए है । परन्तु इन कवियों के अधिकांश चित्रण उद्दीपन के अन्तर्गत ही आते हैं । नायिका के वर्णनों में प्रोषितपतिका, उत्कंठिता तथा अभि सारिका नायिकाओं के प्रसंग में प्रकृति के उद्दीपन-रूप को अधिक अवसर मिला है । इन रूपों की विवेचना अगले प्रकरण के अन्तर्गत की जायगी। इनमें प्रकृति का चित्रण अधिक उल्लेखनीय हुआ है। मतिराम की नायिका के लिये अपने प्रिय के वियोग में प्रकृति केवल उद्दीपन का कारण है -
चंद के उदोत होत नॅन-कंज तपे कंत,
छायो परदेस देव दाहनि दगतु है । कहा करो ? मेरी बीर ! उठी है अधिक पोर;
सुरभी समोर सोरो तीर सौ लगतु है ॥
इसमें प्रकृति का उल्लेख केवल नाम मात्र को कर दिया गया है । अभिसारिकाओं के प्रसंग में उक्ति के लिए कवियों ने प्रकृति और नायिकाओं के सम-रूप दिखाने का प्रयास किया है । परन्तु इसमें ऊहात्मक वैचित्र्य से अधिक कुछ नहीं है। मतिराम कृष्णाभिसारिका का अँधेरी रात के साथ वर्णन करते हैं --
दिग-मंडल-मंडि रहे,
भूमि-भूमि बादर कुहू को निसिकारी मैं । अंगति मैं कोनो मृगमद अंगराग तैसो,
श्रानन श्रोढाय लोनो स्याम रंग सारी में ॥
१. भाव-विलास ; देव ; प्रम० । २. रसराज; मतिराम, छं० ११४ । ३. वही; वही, छं० १६७ ।
प्रकृति को यहाँ पृष्ठभूमि के रूप में माना जा सकता है, परन्तु न तो इसमें किसी स्थिति का रूप प्रत्यक्ष है और न किसी भाव की व्यंजना ही निहित है । इन वर्णनों से इन कवियों ने परम्परा के अनुसरण के साथ चमत्कार मात्र उत्पन्न किया है ।
बिहारी के संक्षिप्त चित्र - रीति- परम्परा के स्वतंत्र कवियों में से बिहारी तथा सेनापति ही प्रमुख हैं जिनके काव्य में प्रकृति का उल्लेखनीय प्रयोग हुआ । अन्य कत्रियों में किसी ने प्रकृति का किसी भी सीमा तक स्वतंत्र रूप नहीं दिया है। इनके रूढ़िगत उद्दीपन रूपों का उल्लेख प्रसंग के अन्तर्गत आवश्यकता के अनुसार किया जायगा । इन दोनों कवियों के ग्रंथ लक्षण-ग्रंथ नहीं है, फिर भी अपनी प्रवृत्ति में ये कवि रीति परम्परा में आते हैं। उद्दीपन विभाव में आने वाले प्रकृति के विभिन्न रूपों के अतिरिक्त इन कवियों में कुछ स्वाभाविक चित्र हैं। इस दृष्टि से इस परम्परा में इनका महत्त्व अधिक है। बिहारी ने उक्ति-वैचित्र्य के निर्वाह के साथ ग्रीष्म का स्वाभाविक चित्र उपस्थित किया है -
कहलाने एकत बसत, अहि मयूर मृग बाघ । जगत तपोवन सो कियो, दीरघ दाघ निदाघ ।।
अगला पावस का वर्णन भी अपनी युक्ति में अंधकार के साथ घनी घटाओं का संकेत देता है, यद्यपि इसमें कवि का ध्यान अपनी उक्ति निर्वाह की ओर हैपावस निसि अँधियार में रह्यो भेद नहि आन ।
राति द्यौस जान्यो परत, लखि चकई चकवान ।।
वस्तुतः इन कवियों का आदर्श अलंकार का निर्वाह है अथवा रस के अंगों की योजना है। इस कारण इनसे प्रकृति के नितान्त यथार्थ तथा स्वाभाविक चित्रों को आशा नहीं की जा सकती। कुछ दोहों में प्रकृति पर मानवीय क्रीड़ाओं के आरोप से भाव- व्यंजना की गई है । इस चित्र में इसी प्रकार चैत्र मास का वातावरण उपस्थित हुआ हैछकि रसाल सौरभ सने, मधुर माधवी गंध ।
ठौर ठौर भूमत झपत, भौर झर मधुगंध ॥ इस चित्र में उपवन, लताकुंज तथा भ्रमर-गुञ्जार की संक्षिप्त योजना में एक रूप उभरता है जिसमें भाव-व्यंजना भी निहित है। दक्षिण पवन का चित्र बड़ी सजीव कल्पना में बिहारी ने उपस्थित किया है । पवन का प्रवाह मानवीय भावों के आरोप के साथ व्यंजक हो गया है -
चुवत सेद मकरंद कन, तरु तरु तर बिरमाय । श्रावत दक्षिरण देस ते, थक्यो बटोही बाय ॥
इस थके बटोही के रूपक से पवन का चित्र भावमय हो उठा है । नायक रूप में पवन
की कल्पना अनेक संस्कृत तथा हिन्दी कवियों ने की है, परन्तु श्रांत पथिक का यह चित्र अधिक स्वाभाविक और सुन्दर है । एक स्थल पर बिहारी ने प्रकृति के प्रति मानवीय सहानुभूति को व्यक्त किया है। स्मृति के आधार पर प्रकृति के पूर्व सुखद सहचरण की भावना इस दोहे में व्यक्त होती है -
सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समोर ।
मन ह्व जात प्रजों वहै, वा जमुना के तीर ॥ सेनापति - प्रकृति वर्णन की दृष्टि से रीति परम्परा में सेनापति का विशेष स्थान है। हम देख चुके हैं कि मध्ययुग में प्रकृति-चित्ररण को स्वतन्त्र स्थान नहीं मिला है । सेनापति का प्रकृति वर्णन ऋतु वर्णन परम्परा के अन्तर्गत ही है; परन्तु इन्होंने कुछ स्थलों पर प्रकृति का स्वतन्त्र रूप उपस्थित किया है । लेकिन ये वर्णन नितान्त स्वतंत्र नहीं हैं, इनके अन्दर भी उद्दीपन के सकेत छिपे हुए हैं। वस्तुतः ऋतु सम्बन्धी वनों की सीमा विस्तृत है। इनके अन्तर्गत स्वतन्त्र काल परिवर्तन के रूपों से लेकर ऋतु सम्बन्धी सामन्ती प्रायोजनों तक का वर्णन रहता है । परन्तु इनकी समस्त भावधारा में शृंगार की भावना का आधार रहता है, उसके आलम्बन और आश्रय कभी प्रत्यक्ष रहते हैं और कभी अप्रत्यक्ष । सेनापति इस सीमा में ही रहे हैं । इनके वर्णनों में जो स्वतंत्र चित्र लगते हैं, उनमें शृंगार की भावना का आधार बहुत हलका है और कुछ में आलम्बन तथा प्राश्रय परोक्ष में हैं । सेनापति में कवित्व प्रतिभा के साथ प्रकृति का निरीक्षण भी है। इन्होंने प्रकृति के रूपों को यथार्थ रंग-रूपों में उपस्थित किया है। फिर भी सेनापति अलंकारवादी कवि हैं, कविता का चरम उक्तिवैचित्र्य में मानते हैं । उनके कुछ चित्रों की रमणीयता का कारण यही है कि इन स्थलों पर उक्ति से यथार्थ तथा कला का सामंजस्य हो सका है। इसी प्रवृत्ति के कारण सेनापति में प्रकृति के प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं है; इनकी प्रकृति में भावव्यंजना के स्थल भी बहुत कम हैं। इस क्षेत्र में अन्य रीति परम्परा के कवि इनसे आगे हैं। इन्होंने ऋतु - वर्णन में श्लेत्र का निर्वाह किया है और ऐश्वर्यशालियों के ऋतु सम्बन्धी प्रायोजनों तथा आमोद-प्रमोद का वर्णन किया है । यह सब इसी प्रवृत्ति का परिचायक है। फिर भी सेनापति ने प्रकृति को उसके यथार्थ रूप में देखा है और उसके कुछ कलापूर्ण चित्र उपस्थित किए हैं ।
यथार्थ वरन ( क ) - सेनापति ने यथार्थ चित्रों को दो प्रकार से उपस्थित
१. सतसई; बिहारी; दो० ५६८, ५६०, ५६५, ११, ५६२ । इसी प्रकार पवन का हाथो के रूप में वर्णन भी चित्रमय है -
रुनित भृङ्ग घंटावली, भरत दान मधुनीर ।
मंद मंद आचल्यो, कुंजर कुंज समीर ।।५६०।।
किया है । एक प्रकार के चित्रों में प्रकृति सम्बन्धी रूप-रंगों को अधिक व्यक्त किया गया है और दूसरे में प्रकृति की प्रभावशीलता को अधिक भावगम्य बनाया गया है । शरद् ऋतु का वर्णन कवि उसके दृश्यों की व्यापक संश्लिष्टता के आधार पर उपस्थित करता है - 'पावस ऋतु के समाप्त होने पर जैसे अवकाश मिल गया; शशि की शोभा रमणीय हो गई है और ज्योत्स्ना का प्रकाश छा गया है; आकाश निर्मल है; कमल विकसित हो रहे हैं; काँस चारों ओर फूले हुए हैं; हंसों को मन भावनी प्रसन्नता है, पृथ्वी पर धूल का नाम नहीं है; हल्दी जैसे रंगवाले जड़हन धान शोभित हैं, हाथो मस्त हैं और खंजन का कष्ट दूर हो गया है । यह शरद ऋतु तो सभी को सुख देने आई है। इस वर्णन में एक दृश्य नहीं है, केवल व्यापक योजना है, साथ ही ' को मिलावै हरि पीय को' के द्वारा उद्दीपन की पृष्ठभूमि का संकेत भी है । वर्षा का प्रभाव भारतीय जीवन पर अधिक है। सेनापति इस ऋतु से, विशेष कर इसके अंधकार से अधिक आकर्षित हैं। वर्षा में भारतीय प्रकाश में मेत्रों की निविड़ सघनता और बिजली का चंचल प्रकाश ही अधिक प्रमुख है; कवि इन्हीं का चित्र उपस्थित करता है-घनाघन तैं सघन तम, सेनापति बैंक हू न नैन मटकत हैं । दीप को दमक, जोगनोन की झमक झाँड़ि,
चपला चमक और सौं न भ्रटत हैं । रबि गयौ दबि भानौं ससि सोऊ घसि गयौ,
तारे तोरि डारे से न कहूँ फटकत हैं। हैं मानौं महा तिमिर तें भूलि परी बाट तातें,
रबि ससि तारे कहूँ भूले भटकत हैं । ' इस घने अंधकार ने रवि, शशि, तारे सभी को प्राच्छादित कर लिया है। इसी प्रकार कवि एक और भी चित्र अंधकार को लेकर उपस्थित करता है - 'यह भादौं श्रा गया । सघन श्याम वर्ग के मेघ वर्षा करते हैं । इन घुमड़ती घटाओं में रवि अदृश्य हो गया है, अंजन के समान तिमिर प्रवृत्त हो रहा है । चपला चमक कर अपने प्रकाश से नेत्रों को चौंधा देती है, उसके बाद तो कुछ और भी नहीं दिखाई देता, मानों धंधा कर देती है । प्रकाश के प्रसार में काजल से अधिक घना काला अधंकार छाया हुआ है और घन घुमड़-घुमड़ कर घोर गर्जन करते हैं ।" इस चित्र में यथार्थ वरना का रूप अधिक
१. कवित्त रत्नाकर; सेनापति ; ती० तरङ्ग, छं० ३७ ।
३. घही वही ; वही, छ० ३३ ।
प्रत्यक्ष और भाव-गम्य है । इसमें भी उद्दीपन का संकेत - 'सेनापति जादोपति बिना क्यों बिहात है' के द्वारा निहित किया गया है, परन्तु वर्णना के प्रत्यक्ष के सामने उसकी ओर ध्यान नहीं जाता । ग्रीम ऋतु में सेनापति ने प्रभाव का अधिक समावेश किया है । वस्तुतः ग्रीष्म के वातावरण में उसका प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण हो उठता है - 'वृष राशि पर सूर्य सहस्रों किरणों से प्रत्यधिक संतप्त होता है, जैसे ज्वालाओं के समूह की वर्षा करता हो । पृथ्वी नाच उठती है; ताप के कारण जगत् जल उठता है । परिपक्षी किसी शीतल छाया में विश्राम करते हैं । दोपहर के ढलने पर ऐसी उमस होती है कि पत्ता तक नहीं हिलता; ऐसा लगता है पवन किसी शीतल स्थान पर क्षरण भर के लिए ठहर कर घाम को बिता रहा है।" सारा चित्र यथार्थ का रूप प्रभावात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है, साथ ही कवि की कल्पना ने उसे और भी व्यंजक कर दिया है। यहाँ कवि की उक्ति सुन्दर कलात्मक रूप धारण करती है। इसी के साथ कवि ग्रीष्म का व्यापक वर्णन भी करता है.
सेनापति ऊँचे दिनकर के चलति लुवें,
नद नदी कुवँ कोपि डारत सुखाइ कै i
चलत पवन मुरझात उपबन बन,
लाग्यो है तपन डार्यो भूतलौ तचाइ कं । भोषम तपत रितु ग्रीषम सकुचि तातें,
सोरक छिपा है तहखानन में जाइ कँ । मानौं शीतकाल सोत लता के जमाइब कौं,
राखे हैं बिरंचि बीच धरा मैं धराइ कै ॥
इसमें उल्लेखों के आधार पर ऋतु का रूप ग्रहण कराया गया है; साथ ही इसकी उत्प्रेक्षा में उक्ति अधिक है पहले जैसा सौन्दर्य कम है ।
कलात्मक चित्ररण (ख) - सेनापति ने कुछ वर्णनों में अधिक कलात्मक शैली अपनाई है। ऊपर के चित्रों को उत्प्रेक्षाओं द्वारा व्यंजक बनाया गया है; परन्तु अगले चित्रों में रूपको अधिक बिम्बात्मक करने के लिए अलंकारों का प्राश्रय ग्रहण किया गया है । सेनापति शरद् - कालीन आकाश और उसमें दौड़ते हुए बादलों का वर्णन इसी प्रकार करते हैं - आकाश मंडल में श्वेत मेघों के खंड फैले हुए हैं मानों स्फटिक पर्वत की शृंखलाएँ फैली हों । वे प्रकाश में उमड़-घुमड़ कर क्षरण में तेज़ बूंदों से पृथ्वी को छिड़क देते हैं । और उन बादलों की उमड़न-घुमड़न के विषय में कवि शब्द - चित्र हो प्रस्तुत करता है१. वहा; वही; वही; छन्द ११ । २. वही; वही; वही; छन्द १२ ।
पूरब कौं भाजत हैं, रजत से राजत हैं,
गग गग गाजत गगन धन क्वॉर के ।
वर्षा का वर्णन भी कवि इसी शैली में करता है - 'सावन के नव जलद उमड़ आए हैं, वे जल से आपूरित चारों दिशाओं में घुमड़ने लगे हैं। उनकी सरस लगने वाली शोभा किसी प्रकार भी वर्णन नहीं की जाती, लगता है काजल के पहाड़ ही ढोकर लाए गए हैं । प्रकाश घनाच्छादित हो रहा है और सघन अन्धकार छाया हुप्रा है। रवि दिखाई ही नहीं पड़ता है, मानों खो गया है । भगवान् जो चार मास सोते रहते हैं, वह जान पड़ता है निशा के भ्रम से ही ।" इस वर्णना में उत्प्रेक्षात्रों से चित्र को अधिक प्रत्यक्ष किया गया है ।
आलंकारिक वैचित्र्य (ग ) - सेनापति की अलंकार सम्बन्धी प्रवृत्ति ऋतु-वर्णनों में भी प्रत्यक्ष हुई है। वैसे तो उनके सभी वर्णनों में उक्ति और चमत्कार का योग है, लेकिन ऊपर के वनों में वे रूप और भाव के सहायक होकर चित्र को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्त करते हैं । परन्तु बहुत से वर्णनों में कवि ने श्लेष के द्वारा ऋतुओं का वर्णन किया है और न वर्णनों में केवल चमत्कार है । इनके अन्तर्गत में कवि ने यह स्वीकार भी किया हैदारुन तरनि तरें नदी सुख पावें सब,
सोरी घनछाँह चाहिबोई चित धर्यो है । देखौ चतुराई सेनापति कबिताई की जु,
ग्रोषम बिषम बरषा की सम कर्यो है ।'
इनके अतिरिक्त प्रतिशयोक्ति और अत्युक्तियों का प्राश्रय भी लिया गया है । एक स्थान पर जाड़े की रात्रि के छोटे होने के विषय में कवि कल्पना करता है.
सीत तैं सहस कर सहस-चरन ह्व कें,
ऐसे जाति भाजि तम
जौ लौं कोक कोको कौं मिलत तौ लौं होति राति,
कोक प्रधबीच ही तैं श्राव है फिरि कै ।
है धेरि के
और सेनापति की यह प्रमुख प्रवृत्ति है, ऐसा कहा जा चुका है।
१. वही; वहीः वही; छन्द ३८ ।
२. वही; वही; वही; छन्द ३१ ।
३. वही; वही; तरंग; छन्द ५३ ।
४. वही; वद्दी; ती० तरंग; छन्द ५१ ।
भाव - व्यंजना (घ) - अपनी इसी भावना के कारण सेनापति प्रकृति से निकट
का सम्बन्ध नहीं उपस्थित कर सके । प्रकृति उनके लिए केवल वर्णन का विषय है
या विशुद्ध उद्दीपन की प्रेरक है। ऐसे स्थल भी कम हैं जहाँ कवि ने प्रकृति के माध्यम से भाव-साम्य की व्यंजना की हो । एक स्थल पर प्रकृति के चित्र से मानवीय भावोल्लास का साम्य प्रस्तुत किया गया हैफूले हैं कुमुद फूली मालती सघन बन,
फूलि रहे तारे मानों मोती श्रनगन हैं । हरन भयो सेत है बरन सब
मानहु जगत छोर-सागर मगन है ।'
इस चित्र के सम पर कवि ने कहा है 'सुहाति सुखी जीवन के गन हैं । और इस प्रकार इस वर्णन में प्रकृति की भावमग्नता मानवीय सुख की व्यंजक हो उठी है । सेनापति ने अधिकतर सामन्ती तथा ऐश्वर्य पूर्ण वातावरण ही प्रस्तुत किया है, इस कारण इनके काव्य में मानव और प्रकृति दोनों ही के सम्बन्ध में उन्मुक्त वातावरण का निर्माण नहीं हो सका है । साथ ही ऋतु - वर्णनों में आमोद-प्रमोद का वर्णन विस्तार से करने का अवसर मिला है । एक स्थल पर साधारण जीवन का चित्र कवि ने बहुत स्वाभाविक उपस्थित किया है। इसमें अलाव तापते हुए लोगों का वर्णन किया गया है और कवि की प्रौढ़ोक्ति ने इसे और भी व्यंजक बना दिया है. सोत कौं प्रबल सेनापति कोपि चढ़ यौ दल,
निबल अनल गयौ सूर सियराइ के । हिम के समीर तेई बरसै विषम नीर,
रही है गरम भौन कोनन में जाइ कै । घूम मैंन बहैं लोग आागि पर गिरे रहें,
हिए सौ लगाइ रहें नैंक सुलगाइ कं । मानौं भीत जानि महा सोत तैं पसारि पानि,
छतियाँ को छाँह राख्यौ पाउक छिपाइ कै ॥'
सेनापति ने अन्य अनेक प्रकार से प्रकृति की परिकल्पना की है जिनका उल्लेख अगले प्रकरण में किया गया है ।
१. वही; वही; वही; छं० ४० । २. वही; वही; वही; छं० ४५ ।
श्रष्टम प्रकरण
आलम्बन और उद्दीपन का रूप - प्रथम प्रकरण में संस्कृत काव्याचार्यों के प्रकृति सम्बन्धी संकीर्ण मत की ओर संकेत किया गया है और यह भी कहा गया है कि शास्त्रीय दृष्टि से हिन्दी साहित्य में इसीका अनुसरण हुआ । परन्तु जैसा उल्लेख किया गया था काव्य में प्रकृति विषयक शास्त्रियों का यह मत व्यापक अर्थ में ठीक है। काव्य में उपस्थित होने की स्थिति में प्रकृति का प्रत्येक रूप मानवीय भावों से प्रभावित होकर ही है। फिर ऐसी परिस्थिति में काव्य में प्रकृति रूप मानवीय भावों की स्थायी स्थितियों के माध्यम से ग्रहरण किया जा सकेगा। इस व्याख्या के अनुसार माना जा सकता है कि प्रकृति काव्य में उद्दीपन विभाव के अन्तर्गत आती है, क्योंकि वह अपनी समस्त भावशीलता और प्रभावशीलता मानव से ग्रहरण करती है। परन्तु इस प्रकार आलम्बन भी उद्दीपन माना जा सकता है । कोई भी आलम्बन ग्राश्रय की स्थायी भावस्थिति पर ही तो क्रियाशील होता है । प्रकृति सम्बन्धी इस भ्रम का एक कारण है । यह कहा जा सकता है कि मानवीय भावस्थिति के सामाजिक धरातल पर हम अपने ही सम्बन्धों में देख और समझ पाते हैं । इसलिए इस सीमा पर मानवीय स्थायी भावों का आलम्बन सामाजिक सम्बन्धों में माना जाता है । अद्भुत तथा भयानक रसों में प्रकृति को परम्परा ने भी आलम्बन माना है, क्योंकि इन रसों का सम्बन्ध सामाजिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है । इसलिए यह स्थिति शृङ्गार तथा शांत रसों को लेकर है। प्रथम भाग में मनोभावों के विकास में प्रकृति तथा समाज का क्या योग रहा है इस पर विचार
१. संस्कृत आचार्यों के अनुकरण पर केशव ने 'कविप्रिया' में प्रकृति वर्णन के लिए विभिन्न वस्तुओं को गिनाया है । सरिता, वाटिका, आश्रम, सरोवर तथा ऋतुओं आदि के विषय में इसी प्रकार वस्तुओं को गिनाया गया है । सरोवर-वर्णन की सूची इस प्रकार है-"ललित लहर बग पुष्प पशु, सुरभि समीर तमाल । करभ केलि पंथी प्रगट, जलचर बरनहु ताल ।। "
किया गया है । हम देख चुके हैं कि सौन्दर्यानुभूति जो काव्य का आधार है प्रकृति से सम्बन्धित है, यद्यपि उसमें अनेक सामाजिक भावस्थितियों का योग हो चुका है। इस प्रकार प्रकृति सौन्दर्य भाव का आलम्बन है, परन्तु इस स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि सम्पूर्ण भाव-स्थिति प्रकृति को लेकर है । स्थायी भावों में अनेक विषमताएँ प्रा चुकी हैं जिनको एक ही प्रकार से समझना सम्भव नहीं है । शृंगार रस में रति स्थायी भाव का प्रत्यक्ष रूप से नायक-नायिका हो सकते हैं, पर इस भाव का रूप केवल मांसल शारीरिकता के आधार पर नहीं है, उसमें अनेक स्थितियों की स्वीकृति है । जिस प्रकार भाव केन्द्र में प्रमुख रूप से आने के कारण किमी वस्तु या व्यक्ति को आलम्बन स्वीकार किया जाता है, उसी प्रमुखता की दृष्टि से प्रकृति को आलम्बन स्वीकार किया जा सकता है । इसी विचार से प्रकृति को सौन्दर्य तथा शांत के लम्बन रूप में स्वी कार किया गया था ।
विभाजन की सीमा ( क ) - हिन्दी साहित्य के मध्ययुग में प्रकृति के स्वतन्त्र आलम्बन रूप को स्थान नहीं मिल सका। पिछने प्रकरणों में इसपर विचार किया गया है। परन्तु यह भी देखा गया है कि प्रमुखता न मिलने पर भी प्रकृति मानवीय भावों से सम स्थापित कर सकी है। वस्तुतः जब प्रकृति मानवीय भावों के समानान्तर भावात्मक व्यंजना अथवा सहचरण के आधार पर प्रस्तुत की जाती है, उस समय उसको विशुद्ध उद्दीपन के अन्तर्गत नहीं रखा जा सकता । वैसे प्रकृति को लेकर भाव प्रक्रिया का आधार मानव है। आलम्बन की स्थिति में, व्यक्ति अपनी मनःस्थिति का आरोप प्रकृति पर करके उसे इस रूप में स्वीकार करता है, जब कि उद्दीपन में आलम्बन प्रत्यक्ष रूप से दूसरा व्यक्ति रहता है । ऊपर की स्थिति मध्य में मानी जा सकती है। का आलम्बन परोक्ष में है और प्रकृति के माध्यम से भाव व्यंजना की जाती है । इस सीमा पर प्रकृति पर प्राश्रय की भाव-स्थिति का आरोप होता है, पर वह किसी अन्य आलम्बन की संभावना को लेकर । प्रकृति के प्रति साहचर्य की भावना भी मानवीय सम्बन्ध का आरोप है, परन्तु उसमें सहानुभूति की निकटता के कारण प्रकृति आश्रय से सीधे ही सम्बन्धित है । इसी कारण 'आध्यात्मिक साधना' तथा 'विभिन्न काव्य-रूपों' की विवेचना के अन्तर्गत प्रकृति पर अप्रत्यक्ष लम्बन का आरोप, उसके माध्यम से भाव- व्यंजना तथा उसके प्रति सहचरण की भावना को लिया गया है । प्रस्तुत प्रकरण में विशुद्ध उद्दीपन की दृष्टि से प्रकृति पर विचार करना है। हम कह चुके हैं कि मध्ययुग के साहित्य में लोक-गीतियों की स्वच्छन्द प्रवृत्ति को स्थान मिल सका है और साहित्यिक परम्पराओं को भी अपनाया गया है । संस्कृत साहित्य में उद्दीपन विभाव के अन्तर्गत प्रकृति का रूप रूढ़िवादी हो चुका था । इस कारण मध्ययुग के काव्य की सभी पर स्पराओं में उद्दीपन की विभिन्न प्रवृत्तियाँ फैली हुई हैं ।
उद्दीपन को सीमा - मध्ययुग के काव्य ने लोक-जीवन से प्रेरणा ग्रहरण की है और वह लोक भावना के अभिव्यक्त रूप लोक-गीतिप्रों तथा कथानों से प्रभावित भी हुआ है । लोक-जीवन से प्रकृति का रूप ऐसा हिला-मिला रहता है कि वहाँ जीवन और प्रकृति में विभाजन रेखा नहीं खींची जा सकती है । लोक-गायक अपने भावोच्छ्वासों को, अपने को, प्रमुख मानकर अभिव्यक्ति की भाषा में गाता है; पर वह अपने वातावरण को, अपने चारो ओर फैली हुई प्रकृति को अलग नहीं कर पाता है । वह अपनी सामाजिक अनुभूतियों को अपने चारों ओर की वातावरण बनकर फैली हुई प्रकृति के साथ ही प्राप्त करता है । और जब वह उन्हें अभिव्यक्त करता है, तब भी वह प्रकृति के रूप को अलग नहीं कर पाता । लोक-गीतिकार अपनी दुःख-सुखमयी भावनाओं से अलग प्रकृति को कोई रूप नहीं दे पाता और न अपनी भावनाओं को बिना प्रकृति का प्रश्रय लिए व्यक्त ही कर पाता । इसी स्पष्ट विभाजक रेखा के प्रभाव में इन गीतियों की भावधारा में प्रकृति का रूप मिलकर उद्दीस करता जान पड़ता है। वस्तुतः चेतनशील प्रकृति की गति के साथ मानवी भाव-स्थिति में सम प्राप्त करता है और इस सीमा में प्रकृति शांत तथा सौन्दर्य भाव का आलम्बन आरोप के माध्यम से मानी गई है। यही सम जब किसी निश्चित भाव-स्थिति से समता या विरोध उपस्थित करता है, उस समय उसको प्रभावित करता है और प्रकृति की यह स्थिति उद्दीपन की सीमा है । प्रकृति के विभिन्न दृश्यों और उनकी परिवर्तित होती स्थितियों में जो संचलन तथा गति का भाव छिपा है वही सम विषम होकर भावों को उद्दीप्त करता है । यही कारण है कि लोक-गीतियों में ऋके आधार पर भावाभिव्यक्ति हुई है ।
जीवन और प्रकृति का सम-तल ( क ) - इस सीमा पर प्रकृत तथा जीवन समान आधार पर अभिव्यक्त होते हैं। जीवन की भावात्मकता और प्रकृति पर उसी का प्रतिबिम्बित प्रथवा प्रतिघटिन रूप साथ-साथ उपस्थित होते हैं । इस सीमा पर मानवीय भावों और प्रकृति के जीवन से सम्बन्धित भावों में विरोध भी सम्भव है । जीवन की सुखमयी स्थिति में प्रकृति की कठोरता तथा उससे सम्बन्धित कष्टों की भावना से सुरक्षा का विचार उसे अधिक बढ़ाता है। इसी प्रकार प्रकृति में प्रकट होता हुम्रा उल्लास जीवन की वेदना को तीव्र ही करता है । परन्तु प्रकृति का उल्लास या अवसाद उसका अपना तो कुछ है नहीं । यदि मानव जीवन की भावमयता ही प्रकृति पर प्रसारित है, तो ऐसा क्यों होता है ? लेकिन प्रथम भाग के द्वितीय प्रकरण में हम कह चुके हैं कि प्रकृति को भावों से युक्त करने वाला मन ही है । इस कारण यह विरोध प्रकृति और जीवन का न होकर जीवन की अपनी ही दो विभिन्न स्थितियों का है । एक वर्तमान स्थिति है जिसका अनुभव वह अपने चेतन मन से कर रहा है और दूसरी किसी परोक्षकाल से सम्बन्धित है जिसको उसका अवचेतन मन प्रकृति पर चुपचाप छा
देता है । मन का यह विभाजन उद्दीपन के अगले रूप में अधिक प्रत्यक्ष होता है । इस स्थिति में प्रकृति और जीवन लगभग समान तल पर होते हैं। इन्हीं में किंचित भेद पड़ जाने से दो रूपों का विकास होता है ।
भाव के आधार पर प्रकृति ( i ) - एक स्थिति में भाव आधार रूप में उपस्थित होता है । भाव की स्थिति संयोग-वियोग की दुःख-सुखमयी भावना होती है । और इसका प्राधार होता है संयोग, साम्य अथवा स्मृति का रूप । इन भावों की पृष्ठभूमि रूप में उपस्थित होने पर प्रकृति का रूप अनेक प्रकार से इन्हीं भावनाओं की व्यंजना करता हुआ उपस्थित होता है। प्रकृति का यह चित्र भावों के रंग से रंजित होता है। इस स्थिति में मानवीय भाव की एक ही स्थिति रहती है, क्योंकि जीवन और प्रकृति में भावों का प्राधार समान है। जिस प्रकार अनेक व्यभिचारियों से तथा अनुभावों से स्थायी भावों की स्थिति व्यक्त होती है; उसी प्रकार उनके आधार पर प्रकृति की भावात्मकता व्यंजित होती है। प्रकृतिवादी की दृष्टि से इस प्रकृति रूप में कवि उसके समक्ष अपनी स्थिति को, अपने भावों को, उसीके माध्यम से समझता और व्यक्त करता है । इन क्षरणों में वह अपने को विस्मृत कर देता है ।
प्रकृति का आधार (ii) - इसी की दूसरी स्थिति में प्रकृति केवल आधार रूप से प्रस्तुत रहती है प्रौर प्रमुखतः भावों को अभिव्यक्त किया जाता है। प्रकृति के इन उल्लेखों में वर्तमान संयोग या वियोग की स्थिति के प्रति तीव्र व्यंजना छिपी रहती है और इसी आधार पर भावों का अभिव्यक्तीकरण होता है । इस स्थिति के समान प्रकृतिवादी की वह दृष्टि है जिसमें कवि उसके समक्ष उससे प्रभाव ग्रहण करता हुआ भी अपनी भाव-स्थिति को अधिक सामने रखता है। और हम प्रकृति के उद्दीपन रूप और आलम्बन - रूप में यही भेद मान कर चले हैं । स्थिति समान है, लेकिन एक में प्रकृति किसी प्रत्यक्ष ( वह स्मृति में या परोक्ष में भी हो सकता है ) आलम्बन के माध्यम को लेकर भाव-स्थिति से सम्बन्ध स्थापित करती है । जब कि दूसरी प्रकृतिवादी दृष्टि से प्रकृति ही प्रत्यक्ष आलम्बन रहती है और उसपर प्रश्रय की भाव-स्थिति का आरोप अदृश्य रूप से रहता है ।
अनुभावों का माध्यम ( ख ) - इस सीमा के आगे प्रकृति के उद्दीपन- रूप में अन्य भेद भी किए जा सकते हैं । इन रूपों में प्रकृति और भावों का सम्बन्ध और भी दूर तथा अलग का है । इस सीमा पर भी दो प्रकार के प्रकृति रूप सामने आते हैं । इनमें से एक में प्रकृति को प्रधानता दी गई है और दूसरे में भावों की प्रमुखता है । वस्तुतः मध्ययुग में काव्य की प्रवृत्ति भावों को अनुभावों के माध्यम से व्यक्त करने की ओर अधिक होती गई है । ऐसा संस्कृत के महाकाव्यों में देखा जा सकता है; बाद के काव्यों में अनुभावों को प्रमुखता मिलती गई है। जहां तक प्रकृति-वरगंनों के माध्यम से भाव२६२
व्यंजना का प्रश्न है, इस सीमा पर भावों की स्थिति, कभी-कभी किसी विशेष प्रालम्बन कोन स्वीकार कर व्यापक लगती है । इस रूप में अपनी व्यापक सीमाओं में भाव को व्यक्त करती हुई भी प्रकृति प्रत्यक्ष तथा व्यक्त लगने लगती है । परन्तु इस रूप में भाव- व्यंजना का रूप अनुभवों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, जबकि ऊपर के रूप में भावों की व्यंजना मात्र रहती थी । इसी रूप के दूसरे पक्ष में प्रकृति की हलकी उल्लेखात्मक पृष्ठभूमि पर भावों को व्यक्त किया जाता है; और इसमें भी अनुभावों का श्राश्रय ही अधिक लिया गया है । हम पहले ही कह चुके हैं कि प्रकृतिवादी आलम्बन रूप प्रकृति को लेकर अपनी भाव-व्यंजना करता है, और इसको अनुभावों के माध्यम से भी उपस्थित कर सकते हैं । पर उस समय ये भाव या अनुभाव आश्रय की मनःस्थिति से रूप पाकर व्यक्तिगत नहीं रह जाते, और इस सीमा पर प्रकृति अधिक प्रत्यक्ष रहती है । इसी भेद के कारण प्रकृतिवादी सीमा में भावों और अनुभावों को प्रधानता देकर उपस्थित होने वाले प्रकृति-चित्रों में प्रकृति ही प्रमुख लगती है, जबकि अन्य कवियों में भावों को पृष्ठभूमि में रख कर उपस्थित हुए प्रकृति-चित्रों में भी मानवाय दृष्टि - विन्दु सामने आ जाता है । इसका कारण यह भी है कि इन कवियों ने प्रकृतिरूपों के माध्यम से शृंगर की रति भावना की व्यंजना की है जो सामाजिकों का दृढ़मूल स्थायी भाव है ।
आरोपवाद (ग ) - अभी तक उद्दीपन के अन्तर्गत जिन प्रकृति-रूपों की बात कही गई है उनमें जीवन और प्रकृति एक दूसरे से प्रभावित होकर भी अपने अस्तित्व से अलग हैं । परन्तु जिस मानवीय जीवन तथा भावनाओं के आधार पर यह व्यंजना होती है, उसका प्रत्यक्ष आरोप भी किया जाता है। और इस आरोपवाद के मूल में यही भावना सन्निहित है । प्रकृति पर यह आरोप उद्दीपन की सीमा में माना जा सकता है । यहाँ फिर हम आलम्बन रूप प्रकृति से इसका भेद कर सकते हैं । प्रकृतिवादी कवि आरोप के रूप में ही प्रकृति को जीवन व्यापार में संलग्न पाता है । उद्दीपन-विभाव में आरोप सामाजिक स्थायी भाव की दृष्टि से किया जाता है, जबकि प्रकृतिवादी का आरोप व्यापक रूप से अपनी मानसिक चेतना से सम्बन्धित है; और बाद में प्रत्यक्ष सामाजिक आधार के अभाव में उनकी अभिव्यक्ति का रूप व्यक्तिगत सीमाओं से अलग हो जाता है । मानवीय भावों की प्रधानता से प्रकृति का आरोप रूपात्मक तथा संकुचित होकर व्यक्तिगत सीमाओं में अधिक बंधा रहता है । इस कारण सामाजिक सम्बन्ध और माव ही प्रत्यक्षरहता है, प्रकृति गौण हो जाती है । इस आरोप में भावों अनुभावों के साथ शारीरिक आरोप भी सम्मिलित है, जिसे मानवीकरण कहा गया है। रीतिपरम्परा की अलंकार वादी प्रवृत्ति के फल स्वरूप अन्य आरोपों का आश्रय भी प्रकृति-वर्णनों में लिया गया है । वस्तुतः प्रकृति के रूप जिस प्रकार अलग अलग विभाजित किए गए हैं,
उस प्रकार उनकी स्थिति नहीं रहती । ये रूप अनेक प्रकार से मिल-जुल कर उपस्थित होते हैं । इन समस्त रूपों को यहाँ गिनाना सम्भव नहीं है। आगे की विवेचना में मध्ययुग के काव्य विस्तार में प्रकृति के उद्दीपन-विभाव में आने वाले रूपों पर विचार किया जाएगा।
पिछले प्रकरणों में काव्य-रूपों का उनकी परम्परा के अनुसार विचार किया गया था । यहाँ उद्दीपन - विभाव के अन्तर्गत आने वाले प्रकृति रूपों पर विचार किया जाएगा, इसलिए आवश्यक नहीं है कि उनके अनुसार यहाँ भी क्रम का अनुसरण किया जाय । वातावरण की दृष्टि से राजस्थानी काव्यों को यहाँ एक साथ लेना उचित है, यद्यपि 'वेलि क्रिसन रुकमरगीरी' अपनी परम्परा में 'ढोला मारूरा दूहा' से भिन्न है । ऋतु प्रकृति के परिवर्तित रूपों को लेकर उपस्थित होती है। इन परिवर्तनों में मानवीय भावों को प्रकृति से सम तथा विरोध की स्थितियाँ प्राप्त करने का अधिक अवसर रहता है । यही कारण है कि लोक गायक ऋतुओं से अधिक प्रेरणा ग्रहण करता है । लोकगीतियों के प्रभाव के कारण हिन्दी मध्ययुग के काव्य में ऋतुओं के दृश्यों से उद्दीपन का कार्य अधिक लिया गया है । युग की प्रवृत्तियों तथा युग के काव्य-रूपों के अध्ययन से यह सिद्ध है कि मध्ययुग के काव्य में रति स्थायी भाव की ही प्रमुखता है । इस युग का समस्त काव्य मानवीय रति भावना को लेकर चला है । इस कारण प्रकृति का रूप मानवीय भावों के आधार पर उपस्थित हुआ है । उद्दीपन की मूल भावना लोक-गीतियों से विकसित हुई है, इसलिए यहाँ लोक-गीतिपरक कथाकाव्य से प्रारम्भ करना अधिक उचित होगा ।
ढोला मारूरा दूहा -- संयोग की स्थिति में प्रकृति की क्रियाशीलता सुन्दर और आकर्षक लगती है; और वह मानवीय रति-संयोग के समानान्तर भी जान पड़ती है । इसी भाव-स्थिति में मालवणी ढोला से कहती है, इस प्रकृति के उल्लासमय वातावरण को छोड़ कर कौन विदेश जाना चाहेगा - 'पिउपिउ पपीहा कर रहा है; कोयल सुरंगा शब्द बोल रही है । हे प्रिय, ऐसी ऋतु में प्रवास में रहने से क्या सुख मिलेगा ?" इसमें प्रकृति का उल्लास वियोग की दुःखद स्मृति के विरोध में वर्तमान भाव-स्थिति के उद्दीपन-रूप में है । लोक-गीति की स्वच्छंद भावना में प्रकृति का कष्टप्रद रूप अपने यथार्थ में संयोग सुख की आकांक्षा को अधिक तीव्र करता है - 'जिन दिनों जाड़ा कड़ाके का पड़ता है, तिलों की फलियाँ फटने लगती हैं तथा कुंभ पक्षी करुरण शब्द करता है; उन दिनों कोई पाहुन होकर कहीं जाता है ?' इस कथा - गीति में प्रकृति केवल मानवीय भावों का अनुसरण ही नहीं करती; उसकी सहानुभूति के विस्तार में प्रकृति अपनी वस्तुस्थिति के यथार्थ रूप में उपस्थित होती है। यहाँ कुंभ पक्षी का शब्द संयोगिनी नायिका
सुन रही है और अपनी सहानुभूति के कारण प्रकृति का रूप उसे वियोग की स्मृति दिलाता है । लोक-गीति की संयोगिनी भी वियोग की व्यथा से परिचित है; और तभी वह प्रकृति के आन्दोलन तथा उसको उमड़न के प्रभाव को जानती है - चारो ओर घने बादल छाए है; आकाश में बिजली चमक रही है। ऐसी हरियाली की ऋतु तभी भली लगती है जब घर में सम्पत्ति और प्रिय पास हो ।" वस्तुतः गीत के वातावरण में गायिका अपने संयोग-सुख और अपनी वियोग-वेदना दोनों से परिचित है। साथ ही सहानुभूति के वातावरण में उसको प्रकृति अपनी सहचरी लगती है। इस कारण प्रकृति के दोनों रूपों को वह स्वाभाविक भाव-स्थिति में ग्रहण कर लेती है । केवल संयोग तथा वियोग की परिवर्तित स्थितियों में वह उन रूपों से पूर्व सम्पर्क के आधार पर भिन्न प्रभाव ग्रहण करती है । प्रकृति में उल्लास छाया हुआ है और वह अपने उल्लास से वंचित है; मारवरगी इसी प्रकार विकल हो उठी है - 'हे प्रिय, वर्षा ऋतु प्रा गई, मोर बोलने लगे । हे कन्त, तू घर आ । यौवन आन्दोलित है ।' विरहिणी मारवरणी प्रकृति के आनन्दोल्लास को अपनी वेदना के विरोध में पाकर विह्वल हो उठी है । यह संयोग के सुख की स्थिति को स्मरण कराने वाली प्रकृति ही तो कष्टकर हो गई है'पावस के बरसते ही पर्वतों पर मोर उल्लास में भर उठे । वर्षा ऋतु ने तरुवरों को पत्ते दिए और वियोगिनियों को पति की याद सालने लगी ।' विरहिणी अपनी अव्यक्त भावना का आरोप करके जैसे विकल है -- 'बादल बादल में एक-एक करके बिजलियों की चहल-पहल हो रही है। मैं भी नेत्रों में काजल की रेखा लगाकर अपने प्रियतम से कब मिलूंगी ?" इस गीति की प्रमुख प्रवृत्ति यही है, पर इसमें अन्य उद्दीपन सम्बन्धी रूप भी मिल जाते हैं। मारवणी प्रकृति के माध्यम से अपने भावों की उद्दीत स्थिति को व्यक्त करती है । इस चित्र में प्रकृति की सम-स्थिति का रूप सन्निहित है - 'आज उत्तर का पवन प्रवाहित होना शुरू हो गया - प्रवासी को जाते देख प्रेमियों का हृदय फट जायगा । वह स्थल को जलाकर और को झुलसाकर कुमारियों का गात भस्म कर देगा।" इस अभिव्यक्ति में 'हृदय फटने' तथा 'गात भस्माने' की बात व्यथा को व्यक्त करती है, पर साथ ही इसमें प्रकृति का समानान्तर रूप भी प्रस्तुत है । इस कथा - गीति पर साहित्यिक प्रभाव भी है, इस कारण प्रकृति के एक उद्दीपक रूप में प्रारोप की भावना भी है। इसका यह अर्थ नहीं है कि लोकगीतिकार आरोप करता ही नहीं है, पर आरोप का ऐसा रूपात्मक चित्र उनमें कम ही होता है - 'बादलों की घटाएँ सेना है, बिजली तलवार है और वर्षा की बूँदें बारणों की तरह
लगती हैं। हे प्रियतम, ऐसी वर्षा ऋतु में प्यारे बिना कहो कैसे जिया जाय ?"
माधवानल कामकन्दला प्रबन्ध - गुजराती परम्परा में आनेवाला गणपति कृत 'माधवानल कामकन्दला प्रबन्ध भाषा की दृष्टि से राजस्थानी काव्यों के निकट है । साथ ही लोक-कथा-गीति के रूप में होने के कारण भी इसका यहीं उल्लेख करना उचित होगा । उद्दीपन विभाव की दृष्टि से इसमें लोक-गीति का वातावरण है जिसकी ओर 'ढोला मारूराहा' में संकेत किया गया है । वैशाख में प्रकृति विरहिरगी को उद्दीत करती है -
विरह हुताशनि हूँ दही, सही करू छंड़ राख । तेहवा महि तु तापवइ, वारू भई वैशाख ।
इस ऋतु का समस्त वातावरण उसके मन को विकल करता है, उसकी विरहाग्नि में सभी कुछ दाहक है । पृथ्वी संतप्त हो उठी है, मलयाचत्र से आने वाला पवन तेज झोंकों में प्रकुल कर देता है । इसी प्रकार शरत्कालीन चन्द्रिका भी वियोगिनी के लिये विष के समान है । उसका समस्त सौन्दर्य और उल्लास उसके लिये दाहक है । एक स्थल पर विरहिणी आरोप के आधार पर प्रकृति के उद्दीपन-रूप को प्रस्तुत करती है -
हेमागिरियो हाथिरणी, आव पवन परारिग । ऊँमाड़ी ऊपर चढ़ी, मारइ मन्मथ बारग ।।
माधव के विरह प्रसंग के बारहमासा में ऋतु सम्बन्धी आमोद का वर्णन भी विरह के विरोध में प्रस्तुत किया गया है । परन्तु यह आमोद लोक-जीवन के उन्मुक्त उल्लास से अधिक सम्बन्धित है । कवि फाग का उल्लेख इस प्रकार करता हैफागुण केरॉ फरणगराँ, फिरि फिर गाइ फाग । चंग बजावइ जंगपरि, श्रालवइ पंचम राग ।
इस प्रकार इस गीति की प्रवृत्ति स्वच्छन्द हैवेलि क्रिसन रुकमरगी री- पिछले प्रकरण में देख चुके हैं कि 'बेलि क्रिसन रुकमणी री परम्परा के अनुसार इन उल्लिखित काव्यों से अलग है । परन्तु इन काव्यों
२. माधवानल कामक्रंदला प्रबन्ध ; गणपति ; छ० ५६६ । ३. वही ; वही ; छ० ५८०"शरद निशाकर समसमइ, भै महँ जाणिउ भेउ ।
उहाँ सरी तिहाँ असो जिमइ, विरहणीयाँ विष देय ।।"
५. बही ; वही ; छ० १६ ।
|
रीति काव्य की परम्भरा इसमें प्रकृति की क्रियाशीलता में मानवीय आरोपों से उद्दीपन का वातावरण प्रस्तुत किया गया है; परन्तु इसमें प्राचीन कवियों से ग्रहीत सरल चित्र हैं । देव की प्रतिभा अधिकतर मानवीय भावों और संचारियों की योजना में प्रकट होती है, परन्तु प्रकृति के परम्परा प्राप्त रूप में भी इन्होंने कुछ स्थलों पर भाव-व्यंजना सन्निहित की है । इस सीमा पर उसमें उद्दीपन का रूप प्रत्यक्ष हैसुनि के घुनि चातक मोरनि की चहु ओोरनि कोकिल कूकनि सों । अनुराग भरे हरि बागन में सखि रागत राग अचूकनि सो ।। कवि देव घटा उनई जु नई बन भूमि भई दल दूकनि सों । रंगराति हरी हहराती लता झुकि जाती समीर के भूकनि सों ॥' इस वर्षा के वर्णन में यथार्थ की चित्रमयता है; साथ ही प्रकृति में जो क्रिया और गति द्वारा भावोल्लास व्यंजित किया गया है वह 'अनुराग भरी वेणु' के साथ मानवीय भावों को अपने में छिपाए है । परन्तु इन कवियों के अधिकांश चित्रण उद्दीपन के अन्तर्गत ही आते हैं । नायिका के वर्णनों में प्रोषितपतिका, उत्कंठिता तथा अभि सारिका नायिकाओं के प्रसंग में प्रकृति के उद्दीपन-रूप को अधिक अवसर मिला है । इन रूपों की विवेचना अगले प्रकरण के अन्तर्गत की जायगी। इनमें प्रकृति का चित्रण अधिक उल्लेखनीय हुआ है। मतिराम की नायिका के लिये अपने प्रिय के वियोग में प्रकृति केवल उद्दीपन का कारण है - चंद के उदोत होत नॅन-कंज तपे कंत, छायो परदेस देव दाहनि दगतु है । कहा करो ? मेरी बीर ! उठी है अधिक पोर; सुरभी समोर सोरो तीर सौ लगतु है ॥ इसमें प्रकृति का उल्लेख केवल नाम मात्र को कर दिया गया है । अभिसारिकाओं के प्रसंग में उक्ति के लिए कवियों ने प्रकृति और नायिकाओं के सम-रूप दिखाने का प्रयास किया है । परन्तु इसमें ऊहात्मक वैचित्र्य से अधिक कुछ नहीं है। मतिराम कृष्णाभिसारिका का अँधेरी रात के साथ वर्णन करते हैं -- दिग-मंडल-मंडि रहे, भूमि-भूमि बादर कुहू को निसिकारी मैं । अंगति मैं कोनो मृगमद अंगराग तैसो, श्रानन श्रोढाय लोनो स्याम रंग सारी में ॥ एक. भाव-विलास ; देव ; प्रमशून्य । दो. रसराज; मतिराम, छंशून्य एक सौ चौदह । तीन. वही; वही, छंशून्य एक सौ सरसठ । प्रकृति को यहाँ पृष्ठभूमि के रूप में माना जा सकता है, परन्तु न तो इसमें किसी स्थिति का रूप प्रत्यक्ष है और न किसी भाव की व्यंजना ही निहित है । इन वर्णनों से इन कवियों ने परम्परा के अनुसरण के साथ चमत्कार मात्र उत्पन्न किया है । बिहारी के संक्षिप्त चित्र - रीति- परम्परा के स्वतंत्र कवियों में से बिहारी तथा सेनापति ही प्रमुख हैं जिनके काव्य में प्रकृति का उल्लेखनीय प्रयोग हुआ । अन्य कत्रियों में किसी ने प्रकृति का किसी भी सीमा तक स्वतंत्र रूप नहीं दिया है। इनके रूढ़िगत उद्दीपन रूपों का उल्लेख प्रसंग के अन्तर्गत आवश्यकता के अनुसार किया जायगा । इन दोनों कवियों के ग्रंथ लक्षण-ग्रंथ नहीं है, फिर भी अपनी प्रवृत्ति में ये कवि रीति परम्परा में आते हैं। उद्दीपन विभाव में आने वाले प्रकृति के विभिन्न रूपों के अतिरिक्त इन कवियों में कुछ स्वाभाविक चित्र हैं। इस दृष्टि से इस परम्परा में इनका महत्त्व अधिक है। बिहारी ने उक्ति-वैचित्र्य के निर्वाह के साथ ग्रीष्म का स्वाभाविक चित्र उपस्थित किया है - कहलाने एकत बसत, अहि मयूर मृग बाघ । जगत तपोवन सो कियो, दीरघ दाघ निदाघ ।। अगला पावस का वर्णन भी अपनी युक्ति में अंधकार के साथ घनी घटाओं का संकेत देता है, यद्यपि इसमें कवि का ध्यान अपनी उक्ति निर्वाह की ओर हैपावस निसि अँधियार में रह्यो भेद नहि आन । राति द्यौस जान्यो परत, लखि चकई चकवान ।। वस्तुतः इन कवियों का आदर्श अलंकार का निर्वाह है अथवा रस के अंगों की योजना है। इस कारण इनसे प्रकृति के नितान्त यथार्थ तथा स्वाभाविक चित्रों को आशा नहीं की जा सकती। कुछ दोहों में प्रकृति पर मानवीय क्रीड़ाओं के आरोप से भाव- व्यंजना की गई है । इस चित्र में इसी प्रकार चैत्र मास का वातावरण उपस्थित हुआ हैछकि रसाल सौरभ सने, मधुर माधवी गंध । ठौर ठौर भूमत झपत, भौर झर मधुगंध ॥ इस चित्र में उपवन, लताकुंज तथा भ्रमर-गुञ्जार की संक्षिप्त योजना में एक रूप उभरता है जिसमें भाव-व्यंजना भी निहित है। दक्षिण पवन का चित्र बड़ी सजीव कल्पना में बिहारी ने उपस्थित किया है । पवन का प्रवाह मानवीय भावों के आरोप के साथ व्यंजक हो गया है - चुवत सेद मकरंद कन, तरु तरु तर बिरमाय । श्रावत दक्षिरण देस ते, थक्यो बटोही बाय ॥ इस थके बटोही के रूपक से पवन का चित्र भावमय हो उठा है । नायक रूप में पवन की कल्पना अनेक संस्कृत तथा हिन्दी कवियों ने की है, परन्तु श्रांत पथिक का यह चित्र अधिक स्वाभाविक और सुन्दर है । एक स्थल पर बिहारी ने प्रकृति के प्रति मानवीय सहानुभूति को व्यक्त किया है। स्मृति के आधार पर प्रकृति के पूर्व सुखद सहचरण की भावना इस दोहे में व्यक्त होती है - सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समोर । मन ह्व जात प्रजों वहै, वा जमुना के तीर ॥ सेनापति - प्रकृति वर्णन की दृष्टि से रीति परम्परा में सेनापति का विशेष स्थान है। हम देख चुके हैं कि मध्ययुग में प्रकृति-चित्ररण को स्वतन्त्र स्थान नहीं मिला है । सेनापति का प्रकृति वर्णन ऋतु वर्णन परम्परा के अन्तर्गत ही है; परन्तु इन्होंने कुछ स्थलों पर प्रकृति का स्वतन्त्र रूप उपस्थित किया है । लेकिन ये वर्णन नितान्त स्वतंत्र नहीं हैं, इनके अन्दर भी उद्दीपन के सकेत छिपे हुए हैं। वस्तुतः ऋतु सम्बन्धी वनों की सीमा विस्तृत है। इनके अन्तर्गत स्वतन्त्र काल परिवर्तन के रूपों से लेकर ऋतु सम्बन्धी सामन्ती प्रायोजनों तक का वर्णन रहता है । परन्तु इनकी समस्त भावधारा में शृंगार की भावना का आधार रहता है, उसके आलम्बन और आश्रय कभी प्रत्यक्ष रहते हैं और कभी अप्रत्यक्ष । सेनापति इस सीमा में ही रहे हैं । इनके वर्णनों में जो स्वतंत्र चित्र लगते हैं, उनमें शृंगार की भावना का आधार बहुत हलका है और कुछ में आलम्बन तथा प्राश्रय परोक्ष में हैं । सेनापति में कवित्व प्रतिभा के साथ प्रकृति का निरीक्षण भी है। इन्होंने प्रकृति के रूपों को यथार्थ रंग-रूपों में उपस्थित किया है। फिर भी सेनापति अलंकारवादी कवि हैं, कविता का चरम उक्तिवैचित्र्य में मानते हैं । उनके कुछ चित्रों की रमणीयता का कारण यही है कि इन स्थलों पर उक्ति से यथार्थ तथा कला का सामंजस्य हो सका है। इसी प्रवृत्ति के कारण सेनापति में प्रकृति के प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं है; इनकी प्रकृति में भावव्यंजना के स्थल भी बहुत कम हैं। इस क्षेत्र में अन्य रीति परम्परा के कवि इनसे आगे हैं। इन्होंने ऋतु - वर्णन में श्लेत्र का निर्वाह किया है और ऐश्वर्यशालियों के ऋतु सम्बन्धी प्रायोजनों तथा आमोद-प्रमोद का वर्णन किया है । यह सब इसी प्रवृत्ति का परिचायक है। फिर भी सेनापति ने प्रकृति को उसके यथार्थ रूप में देखा है और उसके कुछ कलापूर्ण चित्र उपस्थित किए हैं । यथार्थ वरन - सेनापति ने यथार्थ चित्रों को दो प्रकार से उपस्थित एक. सतसई; बिहारी; दोशून्य पाँच सौ अड़सठ, पाँच सौ साठ, पाँच सौ पैंसठ, ग्यारह, पाँच सौ बासठ । इसी प्रकार पवन का हाथो के रूप में वर्णन भी चित्रमय है - रुनित भृङ्ग घंटावली, भरत दान मधुनीर । मंद मंद आचल्यो, कुंजर कुंज समीर ।।पाँच सौ साठ।। किया है । एक प्रकार के चित्रों में प्रकृति सम्बन्धी रूप-रंगों को अधिक व्यक्त किया गया है और दूसरे में प्रकृति की प्रभावशीलता को अधिक भावगम्य बनाया गया है । शरद् ऋतु का वर्णन कवि उसके दृश्यों की व्यापक संश्लिष्टता के आधार पर उपस्थित करता है - 'पावस ऋतु के समाप्त होने पर जैसे अवकाश मिल गया; शशि की शोभा रमणीय हो गई है और ज्योत्स्ना का प्रकाश छा गया है; आकाश निर्मल है; कमल विकसित हो रहे हैं; काँस चारों ओर फूले हुए हैं; हंसों को मन भावनी प्रसन्नता है, पृथ्वी पर धूल का नाम नहीं है; हल्दी जैसे रंगवाले जड़हन धान शोभित हैं, हाथो मस्त हैं और खंजन का कष्ट दूर हो गया है । यह शरद ऋतु तो सभी को सुख देने आई है। इस वर्णन में एक दृश्य नहीं है, केवल व्यापक योजना है, साथ ही ' को मिलावै हरि पीय को' के द्वारा उद्दीपन की पृष्ठभूमि का संकेत भी है । वर्षा का प्रभाव भारतीय जीवन पर अधिक है। सेनापति इस ऋतु से, विशेष कर इसके अंधकार से अधिक आकर्षित हैं। वर्षा में भारतीय प्रकाश में मेत्रों की निविड़ सघनता और बिजली का चंचल प्रकाश ही अधिक प्रमुख है; कवि इन्हीं का चित्र उपस्थित करता है-घनाघन तैं सघन तम, सेनापति बैंक हू न नैन मटकत हैं । दीप को दमक, जोगनोन की झमक झाँड़ि, चपला चमक और सौं न भ्रटत हैं । रबि गयौ दबि भानौं ससि सोऊ घसि गयौ, तारे तोरि डारे से न कहूँ फटकत हैं। हैं मानौं महा तिमिर तें भूलि परी बाट तातें, रबि ससि तारे कहूँ भूले भटकत हैं । ' इस घने अंधकार ने रवि, शशि, तारे सभी को प्राच्छादित कर लिया है। इसी प्रकार कवि एक और भी चित्र अंधकार को लेकर उपस्थित करता है - 'यह भादौं श्रा गया । सघन श्याम वर्ग के मेघ वर्षा करते हैं । इन घुमड़ती घटाओं में रवि अदृश्य हो गया है, अंजन के समान तिमिर प्रवृत्त हो रहा है । चपला चमक कर अपने प्रकाश से नेत्रों को चौंधा देती है, उसके बाद तो कुछ और भी नहीं दिखाई देता, मानों धंधा कर देती है । प्रकाश के प्रसार में काजल से अधिक घना काला अधंकार छाया हुआ है और घन घुमड़-घुमड़ कर घोर गर्जन करते हैं ।" इस चित्र में यथार्थ वरना का रूप अधिक एक. कवित्त रत्नाकर; सेनापति ; तीशून्य तरङ्ग, छंशून्य सैंतीस । तीन. घही वही ; वही, छशून्य तैंतीस । प्रत्यक्ष और भाव-गम्य है । इसमें भी उद्दीपन का संकेत - 'सेनापति जादोपति बिना क्यों बिहात है' के द्वारा निहित किया गया है, परन्तु वर्णना के प्रत्यक्ष के सामने उसकी ओर ध्यान नहीं जाता । ग्रीम ऋतु में सेनापति ने प्रभाव का अधिक समावेश किया है । वस्तुतः ग्रीष्म के वातावरण में उसका प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण हो उठता है - 'वृष राशि पर सूर्य सहस्रों किरणों से प्रत्यधिक संतप्त होता है, जैसे ज्वालाओं के समूह की वर्षा करता हो । पृथ्वी नाच उठती है; ताप के कारण जगत् जल उठता है । परिपक्षी किसी शीतल छाया में विश्राम करते हैं । दोपहर के ढलने पर ऐसी उमस होती है कि पत्ता तक नहीं हिलता; ऐसा लगता है पवन किसी शीतल स्थान पर क्षरण भर के लिए ठहर कर घाम को बिता रहा है।" सारा चित्र यथार्थ का रूप प्रभावात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है, साथ ही कवि की कल्पना ने उसे और भी व्यंजक कर दिया है। यहाँ कवि की उक्ति सुन्दर कलात्मक रूप धारण करती है। इसी के साथ कवि ग्रीष्म का व्यापक वर्णन भी करता है. सेनापति ऊँचे दिनकर के चलति लुवें, नद नदी कुवँ कोपि डारत सुखाइ कै i चलत पवन मुरझात उपबन बन, लाग्यो है तपन डार्यो भूतलौ तचाइ कं । भोषम तपत रितु ग्रीषम सकुचि तातें, सोरक छिपा है तहखानन में जाइ कँ । मानौं शीतकाल सोत लता के जमाइब कौं, राखे हैं बिरंचि बीच धरा मैं धराइ कै ॥ इसमें उल्लेखों के आधार पर ऋतु का रूप ग्रहण कराया गया है; साथ ही इसकी उत्प्रेक्षा में उक्ति अधिक है पहले जैसा सौन्दर्य कम है । कलात्मक चित्ररण - सेनापति ने कुछ वर्णनों में अधिक कलात्मक शैली अपनाई है। ऊपर के चित्रों को उत्प्रेक्षाओं द्वारा व्यंजक बनाया गया है; परन्तु अगले चित्रों में रूपको अधिक बिम्बात्मक करने के लिए अलंकारों का प्राश्रय ग्रहण किया गया है । सेनापति शरद् - कालीन आकाश और उसमें दौड़ते हुए बादलों का वर्णन इसी प्रकार करते हैं - आकाश मंडल में श्वेत मेघों के खंड फैले हुए हैं मानों स्फटिक पर्वत की शृंखलाएँ फैली हों । वे प्रकाश में उमड़-घुमड़ कर क्षरण में तेज़ बूंदों से पृथ्वी को छिड़क देते हैं । और उन बादलों की उमड़न-घुमड़न के विषय में कवि शब्द - चित्र हो प्रस्तुत करता हैएक. वहा; वही; वही; छन्द ग्यारह । दो. वही; वही; वही; छन्द बारह । पूरब कौं भाजत हैं, रजत से राजत हैं, गग गग गाजत गगन धन क्वॉर के । वर्षा का वर्णन भी कवि इसी शैली में करता है - 'सावन के नव जलद उमड़ आए हैं, वे जल से आपूरित चारों दिशाओं में घुमड़ने लगे हैं। उनकी सरस लगने वाली शोभा किसी प्रकार भी वर्णन नहीं की जाती, लगता है काजल के पहाड़ ही ढोकर लाए गए हैं । प्रकाश घनाच्छादित हो रहा है और सघन अन्धकार छाया हुप्रा है। रवि दिखाई ही नहीं पड़ता है, मानों खो गया है । भगवान् जो चार मास सोते रहते हैं, वह जान पड़ता है निशा के भ्रम से ही ।" इस वर्णना में उत्प्रेक्षात्रों से चित्र को अधिक प्रत्यक्ष किया गया है । आलंकारिक वैचित्र्य - सेनापति की अलंकार सम्बन्धी प्रवृत्ति ऋतु-वर्णनों में भी प्रत्यक्ष हुई है। वैसे तो उनके सभी वर्णनों में उक्ति और चमत्कार का योग है, लेकिन ऊपर के वनों में वे रूप और भाव के सहायक होकर चित्र को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्त करते हैं । परन्तु बहुत से वर्णनों में कवि ने श्लेष के द्वारा ऋतुओं का वर्णन किया है और न वर्णनों में केवल चमत्कार है । इनके अन्तर्गत में कवि ने यह स्वीकार भी किया हैदारुन तरनि तरें नदी सुख पावें सब, सोरी घनछाँह चाहिबोई चित धर्यो है । देखौ चतुराई सेनापति कबिताई की जु, ग्रोषम बिषम बरषा की सम कर्यो है ।' इनके अतिरिक्त प्रतिशयोक्ति और अत्युक्तियों का प्राश्रय भी लिया गया है । एक स्थान पर जाड़े की रात्रि के छोटे होने के विषय में कवि कल्पना करता है. सीत तैं सहस कर सहस-चरन ह्व कें, ऐसे जाति भाजि तम जौ लौं कोक कोको कौं मिलत तौ लौं होति राति, कोक प्रधबीच ही तैं श्राव है फिरि कै । है धेरि के और सेनापति की यह प्रमुख प्रवृत्ति है, ऐसा कहा जा चुका है। एक. वही; वहीः वही; छन्द अड़तीस । दो. वही; वही; वही; छन्द इकतीस । तीन. वही; वही; तरंग; छन्द तिरेपन । चार. वही; वद्दी; तीशून्य तरंग; छन्द इक्यावन । भाव - व्यंजना - अपनी इसी भावना के कारण सेनापति प्रकृति से निकट का सम्बन्ध नहीं उपस्थित कर सके । प्रकृति उनके लिए केवल वर्णन का विषय है या विशुद्ध उद्दीपन की प्रेरक है। ऐसे स्थल भी कम हैं जहाँ कवि ने प्रकृति के माध्यम से भाव-साम्य की व्यंजना की हो । एक स्थल पर प्रकृति के चित्र से मानवीय भावोल्लास का साम्य प्रस्तुत किया गया हैफूले हैं कुमुद फूली मालती सघन बन, फूलि रहे तारे मानों मोती श्रनगन हैं । हरन भयो सेत है बरन सब मानहु जगत छोर-सागर मगन है ।' इस चित्र के सम पर कवि ने कहा है 'सुहाति सुखी जीवन के गन हैं । और इस प्रकार इस वर्णन में प्रकृति की भावमग्नता मानवीय सुख की व्यंजक हो उठी है । सेनापति ने अधिकतर सामन्ती तथा ऐश्वर्य पूर्ण वातावरण ही प्रस्तुत किया है, इस कारण इनके काव्य में मानव और प्रकृति दोनों ही के सम्बन्ध में उन्मुक्त वातावरण का निर्माण नहीं हो सका है । साथ ही ऋतु - वर्णनों में आमोद-प्रमोद का वर्णन विस्तार से करने का अवसर मिला है । एक स्थल पर साधारण जीवन का चित्र कवि ने बहुत स्वाभाविक उपस्थित किया है। इसमें अलाव तापते हुए लोगों का वर्णन किया गया है और कवि की प्रौढ़ोक्ति ने इसे और भी व्यंजक बना दिया है. सोत कौं प्रबल सेनापति कोपि चढ़ यौ दल, निबल अनल गयौ सूर सियराइ के । हिम के समीर तेई बरसै विषम नीर, रही है गरम भौन कोनन में जाइ कै । घूम मैंन बहैं लोग आागि पर गिरे रहें, हिए सौ लगाइ रहें नैंक सुलगाइ कं । मानौं भीत जानि महा सोत तैं पसारि पानि, छतियाँ को छाँह राख्यौ पाउक छिपाइ कै ॥' सेनापति ने अन्य अनेक प्रकार से प्रकृति की परिकल्पना की है जिनका उल्लेख अगले प्रकरण में किया गया है । एक. वही; वही; वही; छंशून्य चालीस । दो. वही; वही; वही; छंशून्य पैंतालीस । श्रष्टम प्रकरण आलम्बन और उद्दीपन का रूप - प्रथम प्रकरण में संस्कृत काव्याचार्यों के प्रकृति सम्बन्धी संकीर्ण मत की ओर संकेत किया गया है और यह भी कहा गया है कि शास्त्रीय दृष्टि से हिन्दी साहित्य में इसीका अनुसरण हुआ । परन्तु जैसा उल्लेख किया गया था काव्य में प्रकृति विषयक शास्त्रियों का यह मत व्यापक अर्थ में ठीक है। काव्य में उपस्थित होने की स्थिति में प्रकृति का प्रत्येक रूप मानवीय भावों से प्रभावित होकर ही है। फिर ऐसी परिस्थिति में काव्य में प्रकृति रूप मानवीय भावों की स्थायी स्थितियों के माध्यम से ग्रहरण किया जा सकेगा। इस व्याख्या के अनुसार माना जा सकता है कि प्रकृति काव्य में उद्दीपन विभाव के अन्तर्गत आती है, क्योंकि वह अपनी समस्त भावशीलता और प्रभावशीलता मानव से ग्रहरण करती है। परन्तु इस प्रकार आलम्बन भी उद्दीपन माना जा सकता है । कोई भी आलम्बन ग्राश्रय की स्थायी भावस्थिति पर ही तो क्रियाशील होता है । प्रकृति सम्बन्धी इस भ्रम का एक कारण है । यह कहा जा सकता है कि मानवीय भावस्थिति के सामाजिक धरातल पर हम अपने ही सम्बन्धों में देख और समझ पाते हैं । इसलिए इस सीमा पर मानवीय स्थायी भावों का आलम्बन सामाजिक सम्बन्धों में माना जाता है । अद्भुत तथा भयानक रसों में प्रकृति को परम्परा ने भी आलम्बन माना है, क्योंकि इन रसों का सम्बन्ध सामाजिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है । इसलिए यह स्थिति शृङ्गार तथा शांत रसों को लेकर है। प्रथम भाग में मनोभावों के विकास में प्रकृति तथा समाज का क्या योग रहा है इस पर विचार एक. संस्कृत आचार्यों के अनुकरण पर केशव ने 'कविप्रिया' में प्रकृति वर्णन के लिए विभिन्न वस्तुओं को गिनाया है । सरिता, वाटिका, आश्रम, सरोवर तथा ऋतुओं आदि के विषय में इसी प्रकार वस्तुओं को गिनाया गया है । सरोवर-वर्णन की सूची इस प्रकार है-"ललित लहर बग पुष्प पशु, सुरभि समीर तमाल । करभ केलि पंथी प्रगट, जलचर बरनहु ताल ।। " किया गया है । हम देख चुके हैं कि सौन्दर्यानुभूति जो काव्य का आधार है प्रकृति से सम्बन्धित है, यद्यपि उसमें अनेक सामाजिक भावस्थितियों का योग हो चुका है। इस प्रकार प्रकृति सौन्दर्य भाव का आलम्बन है, परन्तु इस स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि सम्पूर्ण भाव-स्थिति प्रकृति को लेकर है । स्थायी भावों में अनेक विषमताएँ प्रा चुकी हैं जिनको एक ही प्रकार से समझना सम्भव नहीं है । शृंगार रस में रति स्थायी भाव का प्रत्यक्ष रूप से नायक-नायिका हो सकते हैं, पर इस भाव का रूप केवल मांसल शारीरिकता के आधार पर नहीं है, उसमें अनेक स्थितियों की स्वीकृति है । जिस प्रकार भाव केन्द्र में प्रमुख रूप से आने के कारण किमी वस्तु या व्यक्ति को आलम्बन स्वीकार किया जाता है, उसी प्रमुखता की दृष्टि से प्रकृति को आलम्बन स्वीकार किया जा सकता है । इसी विचार से प्रकृति को सौन्दर्य तथा शांत के लम्बन रूप में स्वी कार किया गया था । विभाजन की सीमा - हिन्दी साहित्य के मध्ययुग में प्रकृति के स्वतन्त्र आलम्बन रूप को स्थान नहीं मिल सका। पिछने प्रकरणों में इसपर विचार किया गया है। परन्तु यह भी देखा गया है कि प्रमुखता न मिलने पर भी प्रकृति मानवीय भावों से सम स्थापित कर सकी है। वस्तुतः जब प्रकृति मानवीय भावों के समानान्तर भावात्मक व्यंजना अथवा सहचरण के आधार पर प्रस्तुत की जाती है, उस समय उसको विशुद्ध उद्दीपन के अन्तर्गत नहीं रखा जा सकता । वैसे प्रकृति को लेकर भाव प्रक्रिया का आधार मानव है। आलम्बन की स्थिति में, व्यक्ति अपनी मनःस्थिति का आरोप प्रकृति पर करके उसे इस रूप में स्वीकार करता है, जब कि उद्दीपन में आलम्बन प्रत्यक्ष रूप से दूसरा व्यक्ति रहता है । ऊपर की स्थिति मध्य में मानी जा सकती है। का आलम्बन परोक्ष में है और प्रकृति के माध्यम से भाव व्यंजना की जाती है । इस सीमा पर प्रकृति पर प्राश्रय की भाव-स्थिति का आरोप होता है, पर वह किसी अन्य आलम्बन की संभावना को लेकर । प्रकृति के प्रति साहचर्य की भावना भी मानवीय सम्बन्ध का आरोप है, परन्तु उसमें सहानुभूति की निकटता के कारण प्रकृति आश्रय से सीधे ही सम्बन्धित है । इसी कारण 'आध्यात्मिक साधना' तथा 'विभिन्न काव्य-रूपों' की विवेचना के अन्तर्गत प्रकृति पर अप्रत्यक्ष लम्बन का आरोप, उसके माध्यम से भाव- व्यंजना तथा उसके प्रति सहचरण की भावना को लिया गया है । प्रस्तुत प्रकरण में विशुद्ध उद्दीपन की दृष्टि से प्रकृति पर विचार करना है। हम कह चुके हैं कि मध्ययुग के साहित्य में लोक-गीतियों की स्वच्छन्द प्रवृत्ति को स्थान मिल सका है और साहित्यिक परम्पराओं को भी अपनाया गया है । संस्कृत साहित्य में उद्दीपन विभाव के अन्तर्गत प्रकृति का रूप रूढ़िवादी हो चुका था । इस कारण मध्ययुग के काव्य की सभी पर स्पराओं में उद्दीपन की विभिन्न प्रवृत्तियाँ फैली हुई हैं । उद्दीपन को सीमा - मध्ययुग के काव्य ने लोक-जीवन से प्रेरणा ग्रहरण की है और वह लोक भावना के अभिव्यक्त रूप लोक-गीतिप्रों तथा कथानों से प्रभावित भी हुआ है । लोक-जीवन से प्रकृति का रूप ऐसा हिला-मिला रहता है कि वहाँ जीवन और प्रकृति में विभाजन रेखा नहीं खींची जा सकती है । लोक-गायक अपने भावोच्छ्वासों को, अपने को, प्रमुख मानकर अभिव्यक्ति की भाषा में गाता है; पर वह अपने वातावरण को, अपने चारो ओर फैली हुई प्रकृति को अलग नहीं कर पाता है । वह अपनी सामाजिक अनुभूतियों को अपने चारों ओर की वातावरण बनकर फैली हुई प्रकृति के साथ ही प्राप्त करता है । और जब वह उन्हें अभिव्यक्त करता है, तब भी वह प्रकृति के रूप को अलग नहीं कर पाता । लोक-गीतिकार अपनी दुःख-सुखमयी भावनाओं से अलग प्रकृति को कोई रूप नहीं दे पाता और न अपनी भावनाओं को बिना प्रकृति का प्रश्रय लिए व्यक्त ही कर पाता । इसी स्पष्ट विभाजक रेखा के प्रभाव में इन गीतियों की भावधारा में प्रकृति का रूप मिलकर उद्दीस करता जान पड़ता है। वस्तुतः चेतनशील प्रकृति की गति के साथ मानवी भाव-स्थिति में सम प्राप्त करता है और इस सीमा में प्रकृति शांत तथा सौन्दर्य भाव का आलम्बन आरोप के माध्यम से मानी गई है। यही सम जब किसी निश्चित भाव-स्थिति से समता या विरोध उपस्थित करता है, उस समय उसको प्रभावित करता है और प्रकृति की यह स्थिति उद्दीपन की सीमा है । प्रकृति के विभिन्न दृश्यों और उनकी परिवर्तित होती स्थितियों में जो संचलन तथा गति का भाव छिपा है वही सम विषम होकर भावों को उद्दीप्त करता है । यही कारण है कि लोक-गीतियों में ऋके आधार पर भावाभिव्यक्ति हुई है । जीवन और प्रकृति का सम-तल - इस सीमा पर प्रकृत तथा जीवन समान आधार पर अभिव्यक्त होते हैं। जीवन की भावात्मकता और प्रकृति पर उसी का प्रतिबिम्बित प्रथवा प्रतिघटिन रूप साथ-साथ उपस्थित होते हैं । इस सीमा पर मानवीय भावों और प्रकृति के जीवन से सम्बन्धित भावों में विरोध भी सम्भव है । जीवन की सुखमयी स्थिति में प्रकृति की कठोरता तथा उससे सम्बन्धित कष्टों की भावना से सुरक्षा का विचार उसे अधिक बढ़ाता है। इसी प्रकार प्रकृति में प्रकट होता हुम्रा उल्लास जीवन की वेदना को तीव्र ही करता है । परन्तु प्रकृति का उल्लास या अवसाद उसका अपना तो कुछ है नहीं । यदि मानव जीवन की भावमयता ही प्रकृति पर प्रसारित है, तो ऐसा क्यों होता है ? लेकिन प्रथम भाग के द्वितीय प्रकरण में हम कह चुके हैं कि प्रकृति को भावों से युक्त करने वाला मन ही है । इस कारण यह विरोध प्रकृति और जीवन का न होकर जीवन की अपनी ही दो विभिन्न स्थितियों का है । एक वर्तमान स्थिति है जिसका अनुभव वह अपने चेतन मन से कर रहा है और दूसरी किसी परोक्षकाल से सम्बन्धित है जिसको उसका अवचेतन मन प्रकृति पर चुपचाप छा देता है । मन का यह विभाजन उद्दीपन के अगले रूप में अधिक प्रत्यक्ष होता है । इस स्थिति में प्रकृति और जीवन लगभग समान तल पर होते हैं। इन्हीं में किंचित भेद पड़ जाने से दो रूपों का विकास होता है । भाव के आधार पर प्रकृति - एक स्थिति में भाव आधार रूप में उपस्थित होता है । भाव की स्थिति संयोग-वियोग की दुःख-सुखमयी भावना होती है । और इसका प्राधार होता है संयोग, साम्य अथवा स्मृति का रूप । इन भावों की पृष्ठभूमि रूप में उपस्थित होने पर प्रकृति का रूप अनेक प्रकार से इन्हीं भावनाओं की व्यंजना करता हुआ उपस्थित होता है। प्रकृति का यह चित्र भावों के रंग से रंजित होता है। इस स्थिति में मानवीय भाव की एक ही स्थिति रहती है, क्योंकि जीवन और प्रकृति में भावों का प्राधार समान है। जिस प्रकार अनेक व्यभिचारियों से तथा अनुभावों से स्थायी भावों की स्थिति व्यक्त होती है; उसी प्रकार उनके आधार पर प्रकृति की भावात्मकता व्यंजित होती है। प्रकृतिवादी की दृष्टि से इस प्रकृति रूप में कवि उसके समक्ष अपनी स्थिति को, अपने भावों को, उसीके माध्यम से समझता और व्यक्त करता है । इन क्षरणों में वह अपने को विस्मृत कर देता है । प्रकृति का आधार - इसी की दूसरी स्थिति में प्रकृति केवल आधार रूप से प्रस्तुत रहती है प्रौर प्रमुखतः भावों को अभिव्यक्त किया जाता है। प्रकृति के इन उल्लेखों में वर्तमान संयोग या वियोग की स्थिति के प्रति तीव्र व्यंजना छिपी रहती है और इसी आधार पर भावों का अभिव्यक्तीकरण होता है । इस स्थिति के समान प्रकृतिवादी की वह दृष्टि है जिसमें कवि उसके समक्ष उससे प्रभाव ग्रहण करता हुआ भी अपनी भाव-स्थिति को अधिक सामने रखता है। और हम प्रकृति के उद्दीपन रूप और आलम्बन - रूप में यही भेद मान कर चले हैं । स्थिति समान है, लेकिन एक में प्रकृति किसी प्रत्यक्ष आलम्बन के माध्यम को लेकर भाव-स्थिति से सम्बन्ध स्थापित करती है । जब कि दूसरी प्रकृतिवादी दृष्टि से प्रकृति ही प्रत्यक्ष आलम्बन रहती है और उसपर प्रश्रय की भाव-स्थिति का आरोप अदृश्य रूप से रहता है । अनुभावों का माध्यम - इस सीमा के आगे प्रकृति के उद्दीपन- रूप में अन्य भेद भी किए जा सकते हैं । इन रूपों में प्रकृति और भावों का सम्बन्ध और भी दूर तथा अलग का है । इस सीमा पर भी दो प्रकार के प्रकृति रूप सामने आते हैं । इनमें से एक में प्रकृति को प्रधानता दी गई है और दूसरे में भावों की प्रमुखता है । वस्तुतः मध्ययुग में काव्य की प्रवृत्ति भावों को अनुभावों के माध्यम से व्यक्त करने की ओर अधिक होती गई है । ऐसा संस्कृत के महाकाव्यों में देखा जा सकता है; बाद के काव्यों में अनुभावों को प्रमुखता मिलती गई है। जहां तक प्रकृति-वरगंनों के माध्यम से भावदो सौ बासठ व्यंजना का प्रश्न है, इस सीमा पर भावों की स्थिति, कभी-कभी किसी विशेष प्रालम्बन कोन स्वीकार कर व्यापक लगती है । इस रूप में अपनी व्यापक सीमाओं में भाव को व्यक्त करती हुई भी प्रकृति प्रत्यक्ष तथा व्यक्त लगने लगती है । परन्तु इस रूप में भाव- व्यंजना का रूप अनुभवों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, जबकि ऊपर के रूप में भावों की व्यंजना मात्र रहती थी । इसी रूप के दूसरे पक्ष में प्रकृति की हलकी उल्लेखात्मक पृष्ठभूमि पर भावों को व्यक्त किया जाता है; और इसमें भी अनुभावों का श्राश्रय ही अधिक लिया गया है । हम पहले ही कह चुके हैं कि प्रकृतिवादी आलम्बन रूप प्रकृति को लेकर अपनी भाव-व्यंजना करता है, और इसको अनुभावों के माध्यम से भी उपस्थित कर सकते हैं । पर उस समय ये भाव या अनुभाव आश्रय की मनःस्थिति से रूप पाकर व्यक्तिगत नहीं रह जाते, और इस सीमा पर प्रकृति अधिक प्रत्यक्ष रहती है । इसी भेद के कारण प्रकृतिवादी सीमा में भावों और अनुभावों को प्रधानता देकर उपस्थित होने वाले प्रकृति-चित्रों में प्रकृति ही प्रमुख लगती है, जबकि अन्य कवियों में भावों को पृष्ठभूमि में रख कर उपस्थित हुए प्रकृति-चित्रों में भी मानवाय दृष्टि - विन्दु सामने आ जाता है । इसका कारण यह भी है कि इन कवियों ने प्रकृतिरूपों के माध्यम से शृंगर की रति भावना की व्यंजना की है जो सामाजिकों का दृढ़मूल स्थायी भाव है । आरोपवाद - अभी तक उद्दीपन के अन्तर्गत जिन प्रकृति-रूपों की बात कही गई है उनमें जीवन और प्रकृति एक दूसरे से प्रभावित होकर भी अपने अस्तित्व से अलग हैं । परन्तु जिस मानवीय जीवन तथा भावनाओं के आधार पर यह व्यंजना होती है, उसका प्रत्यक्ष आरोप भी किया जाता है। और इस आरोपवाद के मूल में यही भावना सन्निहित है । प्रकृति पर यह आरोप उद्दीपन की सीमा में माना जा सकता है । यहाँ फिर हम आलम्बन रूप प्रकृति से इसका भेद कर सकते हैं । प्रकृतिवादी कवि आरोप के रूप में ही प्रकृति को जीवन व्यापार में संलग्न पाता है । उद्दीपन-विभाव में आरोप सामाजिक स्थायी भाव की दृष्टि से किया जाता है, जबकि प्रकृतिवादी का आरोप व्यापक रूप से अपनी मानसिक चेतना से सम्बन्धित है; और बाद में प्रत्यक्ष सामाजिक आधार के अभाव में उनकी अभिव्यक्ति का रूप व्यक्तिगत सीमाओं से अलग हो जाता है । मानवीय भावों की प्रधानता से प्रकृति का आरोप रूपात्मक तथा संकुचित होकर व्यक्तिगत सीमाओं में अधिक बंधा रहता है । इस कारण सामाजिक सम्बन्ध और माव ही प्रत्यक्षरहता है, प्रकृति गौण हो जाती है । इस आरोप में भावों अनुभावों के साथ शारीरिक आरोप भी सम्मिलित है, जिसे मानवीकरण कहा गया है। रीतिपरम्परा की अलंकार वादी प्रवृत्ति के फल स्वरूप अन्य आरोपों का आश्रय भी प्रकृति-वर्णनों में लिया गया है । वस्तुतः प्रकृति के रूप जिस प्रकार अलग अलग विभाजित किए गए हैं, उस प्रकार उनकी स्थिति नहीं रहती । ये रूप अनेक प्रकार से मिल-जुल कर उपस्थित होते हैं । इन समस्त रूपों को यहाँ गिनाना सम्भव नहीं है। आगे की विवेचना में मध्ययुग के काव्य विस्तार में प्रकृति के उद्दीपन-विभाव में आने वाले रूपों पर विचार किया जाएगा। पिछले प्रकरणों में काव्य-रूपों का उनकी परम्परा के अनुसार विचार किया गया था । यहाँ उद्दीपन - विभाव के अन्तर्गत आने वाले प्रकृति रूपों पर विचार किया जाएगा, इसलिए आवश्यक नहीं है कि उनके अनुसार यहाँ भी क्रम का अनुसरण किया जाय । वातावरण की दृष्टि से राजस्थानी काव्यों को यहाँ एक साथ लेना उचित है, यद्यपि 'वेलि क्रिसन रुकमरगीरी' अपनी परम्परा में 'ढोला मारूरा दूहा' से भिन्न है । ऋतु प्रकृति के परिवर्तित रूपों को लेकर उपस्थित होती है। इन परिवर्तनों में मानवीय भावों को प्रकृति से सम तथा विरोध की स्थितियाँ प्राप्त करने का अधिक अवसर रहता है । यही कारण है कि लोक गायक ऋतुओं से अधिक प्रेरणा ग्रहण करता है । लोकगीतियों के प्रभाव के कारण हिन्दी मध्ययुग के काव्य में ऋतुओं के दृश्यों से उद्दीपन का कार्य अधिक लिया गया है । युग की प्रवृत्तियों तथा युग के काव्य-रूपों के अध्ययन से यह सिद्ध है कि मध्ययुग के काव्य में रति स्थायी भाव की ही प्रमुखता है । इस युग का समस्त काव्य मानवीय रति भावना को लेकर चला है । इस कारण प्रकृति का रूप मानवीय भावों के आधार पर उपस्थित हुआ है । उद्दीपन की मूल भावना लोक-गीतियों से विकसित हुई है, इसलिए यहाँ लोक-गीतिपरक कथाकाव्य से प्रारम्भ करना अधिक उचित होगा । ढोला मारूरा दूहा -- संयोग की स्थिति में प्रकृति की क्रियाशीलता सुन्दर और आकर्षक लगती है; और वह मानवीय रति-संयोग के समानान्तर भी जान पड़ती है । इसी भाव-स्थिति में मालवणी ढोला से कहती है, इस प्रकृति के उल्लासमय वातावरण को छोड़ कर कौन विदेश जाना चाहेगा - 'पिउपिउ पपीहा कर रहा है; कोयल सुरंगा शब्द बोल रही है । हे प्रिय, ऐसी ऋतु में प्रवास में रहने से क्या सुख मिलेगा ?" इसमें प्रकृति का उल्लास वियोग की दुःखद स्मृति के विरोध में वर्तमान भाव-स्थिति के उद्दीपन-रूप में है । लोक-गीति की स्वच्छंद भावना में प्रकृति का कष्टप्रद रूप अपने यथार्थ में संयोग सुख की आकांक्षा को अधिक तीव्र करता है - 'जिन दिनों जाड़ा कड़ाके का पड़ता है, तिलों की फलियाँ फटने लगती हैं तथा कुंभ पक्षी करुरण शब्द करता है; उन दिनों कोई पाहुन होकर कहीं जाता है ?' इस कथा - गीति में प्रकृति केवल मानवीय भावों का अनुसरण ही नहीं करती; उसकी सहानुभूति के विस्तार में प्रकृति अपनी वस्तुस्थिति के यथार्थ रूप में उपस्थित होती है। यहाँ कुंभ पक्षी का शब्द संयोगिनी नायिका सुन रही है और अपनी सहानुभूति के कारण प्रकृति का रूप उसे वियोग की स्मृति दिलाता है । लोक-गीति की संयोगिनी भी वियोग की व्यथा से परिचित है; और तभी वह प्रकृति के आन्दोलन तथा उसको उमड़न के प्रभाव को जानती है - चारो ओर घने बादल छाए है; आकाश में बिजली चमक रही है। ऐसी हरियाली की ऋतु तभी भली लगती है जब घर में सम्पत्ति और प्रिय पास हो ।" वस्तुतः गीत के वातावरण में गायिका अपने संयोग-सुख और अपनी वियोग-वेदना दोनों से परिचित है। साथ ही सहानुभूति के वातावरण में उसको प्रकृति अपनी सहचरी लगती है। इस कारण प्रकृति के दोनों रूपों को वह स्वाभाविक भाव-स्थिति में ग्रहण कर लेती है । केवल संयोग तथा वियोग की परिवर्तित स्थितियों में वह उन रूपों से पूर्व सम्पर्क के आधार पर भिन्न प्रभाव ग्रहण करती है । प्रकृति में उल्लास छाया हुआ है और वह अपने उल्लास से वंचित है; मारवरगी इसी प्रकार विकल हो उठी है - 'हे प्रिय, वर्षा ऋतु प्रा गई, मोर बोलने लगे । हे कन्त, तू घर आ । यौवन आन्दोलित है ।' विरहिणी मारवरणी प्रकृति के आनन्दोल्लास को अपनी वेदना के विरोध में पाकर विह्वल हो उठी है । यह संयोग के सुख की स्थिति को स्मरण कराने वाली प्रकृति ही तो कष्टकर हो गई है'पावस के बरसते ही पर्वतों पर मोर उल्लास में भर उठे । वर्षा ऋतु ने तरुवरों को पत्ते दिए और वियोगिनियों को पति की याद सालने लगी ।' विरहिणी अपनी अव्यक्त भावना का आरोप करके जैसे विकल है -- 'बादल बादल में एक-एक करके बिजलियों की चहल-पहल हो रही है। मैं भी नेत्रों में काजल की रेखा लगाकर अपने प्रियतम से कब मिलूंगी ?" इस गीति की प्रमुख प्रवृत्ति यही है, पर इसमें अन्य उद्दीपन सम्बन्धी रूप भी मिल जाते हैं। मारवणी प्रकृति के माध्यम से अपने भावों की उद्दीत स्थिति को व्यक्त करती है । इस चित्र में प्रकृति की सम-स्थिति का रूप सन्निहित है - 'आज उत्तर का पवन प्रवाहित होना शुरू हो गया - प्रवासी को जाते देख प्रेमियों का हृदय फट जायगा । वह स्थल को जलाकर और को झुलसाकर कुमारियों का गात भस्म कर देगा।" इस अभिव्यक्ति में 'हृदय फटने' तथा 'गात भस्माने' की बात व्यथा को व्यक्त करती है, पर साथ ही इसमें प्रकृति का समानान्तर रूप भी प्रस्तुत है । इस कथा - गीति पर साहित्यिक प्रभाव भी है, इस कारण प्रकृति के एक उद्दीपक रूप में प्रारोप की भावना भी है। इसका यह अर्थ नहीं है कि लोकगीतिकार आरोप करता ही नहीं है, पर आरोप का ऐसा रूपात्मक चित्र उनमें कम ही होता है - 'बादलों की घटाएँ सेना है, बिजली तलवार है और वर्षा की बूँदें बारणों की तरह लगती हैं। हे प्रियतम, ऐसी वर्षा ऋतु में प्यारे बिना कहो कैसे जिया जाय ?" माधवानल कामकन्दला प्रबन्ध - गुजराती परम्परा में आनेवाला गणपति कृत 'माधवानल कामकन्दला प्रबन्ध भाषा की दृष्टि से राजस्थानी काव्यों के निकट है । साथ ही लोक-कथा-गीति के रूप में होने के कारण भी इसका यहीं उल्लेख करना उचित होगा । उद्दीपन विभाव की दृष्टि से इसमें लोक-गीति का वातावरण है जिसकी ओर 'ढोला मारूराहा' में संकेत किया गया है । वैशाख में प्रकृति विरहिरगी को उद्दीत करती है - विरह हुताशनि हूँ दही, सही करू छंड़ राख । तेहवा महि तु तापवइ, वारू भई वैशाख । इस ऋतु का समस्त वातावरण उसके मन को विकल करता है, उसकी विरहाग्नि में सभी कुछ दाहक है । पृथ्वी संतप्त हो उठी है, मलयाचत्र से आने वाला पवन तेज झोंकों में प्रकुल कर देता है । इसी प्रकार शरत्कालीन चन्द्रिका भी वियोगिनी के लिये विष के समान है । उसका समस्त सौन्दर्य और उल्लास उसके लिये दाहक है । एक स्थल पर विरहिणी आरोप के आधार पर प्रकृति के उद्दीपन-रूप को प्रस्तुत करती है - हेमागिरियो हाथिरणी, आव पवन परारिग । ऊँमाड़ी ऊपर चढ़ी, मारइ मन्मथ बारग ।। माधव के विरह प्रसंग के बारहमासा में ऋतु सम्बन्धी आमोद का वर्णन भी विरह के विरोध में प्रस्तुत किया गया है । परन्तु यह आमोद लोक-जीवन के उन्मुक्त उल्लास से अधिक सम्बन्धित है । कवि फाग का उल्लेख इस प्रकार करता हैफागुण केरॉ फरणगराँ, फिरि फिर गाइ फाग । चंग बजावइ जंगपरि, श्रालवइ पंचम राग । इस प्रकार इस गीति की प्रवृत्ति स्वच्छन्द हैवेलि क्रिसन रुकमरगी री- पिछले प्रकरण में देख चुके हैं कि 'बेलि क्रिसन रुकमणी री परम्परा के अनुसार इन उल्लिखित काव्यों से अलग है । परन्तु इन काव्यों दो. माधवानल कामक्रंदला प्रबन्ध ; गणपति ; छशून्य पाँच सौ छयासठ । तीन. वही ; वही ; छशून्य पाँच सौ अस्सी"शरद निशाकर समसमइ, भै महँ जाणिउ भेउ । उहाँ सरी तिहाँ असो जिमइ, विरहणीयाँ विष देय ।।" पाँच. बही ; वही ; छशून्य सोलह ।
|
बक़िया तफ़सीर
(पिछले पृष्ठ का शेष) 5. मतलब यह कि हमने ऐसी हैअतों और सिफ्तों के साथ पैदा किया कि उसमें मुकल्लफ़ बनने की काबलियत हो । ( तफसीर पृष्ठ 1060 ) 1. यानी सबपर कम या ज्यादा उसकी सख़्ती का असर होगा, मुराद कियामत का दिन है।
2. कैदी अगर मज़लूम है तब तो उसकी रियायत का अच्छा होना ज़ाहिर है, और अगर ज़ालिम है तो सख़्त ज़रूरत के वक़्त उसको खाना खिलाना भी अच्छा है।
इससे मालूम हुआ कि आख़िरत के ख़ौफ़ से कोई काम करना इख़्लास और अल्लाह की रिज़ा तलब करने के ख़िलाफ़ नहीं ।
4. यानी उसमें पीने की चीज़ ऐसे अन्दाज़ से भरी होगी कि न उस वक़्त की इच्छा में कमी रहे और न उससे बचे कि दोनों में बेलुत्फ़ी होती है। और चाँदी के शीशे के यह मायने हैं कि सफेदी तो चाँदी जैसी होगी और सफाई व चमक शीशे के जैसी, और दुनिया की चाँदी में आरपार नज़र नहीं आता, और शीशे में यहाँ ऐसी सफेदी नहीं होती, पस यह एक अजीब चीज़ होगी।
5. मोती से तो उनके बाहर आने और सफाई की वजह से तश्बीह दी और बिखरे हुए का वस्फ़ उनके चलने-फिरने के लिहाज़ से, जैसे बिखरे मोती अलग-अलग होकर कोई इधर जा रहा है और कोई उधर जा रहा है, और यह आला दर्जे की तश्बीह है।
6. एक बार हज़रत फारूके आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु बारगाहे नबवी में हाज़िर हुए और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा कि एक चटाई पर लेटे हुए हैं और चटाई के पठ्ठे के निशान मुबारक जिस्म पर नक़्श हो गए हैं। यह देखकर हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की आँखों में आँसू आ गए। हज़रत रसूले मकबूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका सबब पूछा तो उन्होंने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह! मेरे दिल में यह ख़्याल आया कि 'कैसर' व 'किसरा' तो काफिर होने के बावजूद कैसे ऐश-आराम में हैं और अल्लाह के हबीब दोनों जहाँ के सरदार एक सख़्त चटाई पर आराम फरमा हैं, जिसपर कोई कपड़ा भी नहीं। आपने फ़रमाया ऐ उमर ! क्या तुम इसपर राज़ी नहीं कि गैर-मुस्लिमों की फानी नेमतें दुनिया की ज़िन्दगी तक सीमित हैं और हम लोगों को खुदा तआला आख़िरत में कभी ख़त्म न होने वाली हमेशा की नेमतें अता फरमाएगा।
1. यानी ये ज़िक्र हुई हवाएँ कुदरत पर दलालत करने वाली होने की वजह से अपने बनाने वाले और पैदा करने वाले की तरफ़ मुतवज्जह होने का सबब हो जाती हैं।
2. इस सवाल व जवाब का मतलब यह मालूम होता है कि काफिर लोग जो रसूलों को झुठलाते आए हैं और अब भी इस उम्मत के काफिर लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठला रहे हैं । और जब इस झुठलाने पर आख़िरत के अज़ाब से डराए जाते हैं तो आख़िरत को भी झुठलाते हैं। इस वक़्त यह झुठलाना अपने आपमें इसको चाहता है कि रसूलों का जो किस्सा काफिरों से पेश आ रहा है उसका फैसला अभी हो जाए, और उसकी ताख़ीर और देरी होने से काफिरों को जल्दी होने से इनकार और मुसलमानों को तबई तौर पर जल्दी से हो जाने की तमन्ना होती है। इस आयत में इस जल्दी का जवाब है कि हक तआला ने बाज़ हिक्मतों से उसको मुअख्ख़र कर रखा है, लेकिन वाकेअ ज़रूर होगा ।
1. उस सायबान से एक धुआँ मुराद है जो जहन्नम से निकलेगा । और यह चूँकि कसरत से होगा इसलिए ऊँचा होगा, फटकर कई टुकड़े हो जाएगा । काफ़िर लोग हिसाब से फारिग होने तक उसी धुएँ के घेरे में रहेंगे, जबकि अल्लाह के मक़बूल बन्दे अर्श के साये के नीचे होंगे।
2. क़ायदा है कि जब आग से चिंगारी झड़ती है तो बड़ी होती है, फिर पहली तश्बीह शुरू की हालत के एतिबार से है और दूसरी तश्बीह आख़िरी और इन्तिहाई हालत के एतिबार से है।
3. इन धमकियों और झंझोड़ने का तकाज़ा यह था कि ये सुनते ही डरकर ईमान ले आते मगर जब इसपर भी उनको असर नहीं तो फिर इस डराने वाले और आलीशान अल्फाज़ वाले कुरआन के बाद और किस बात पर ईमान लाएँगे? इसमें काफिरों को झिड़की का सबब आपका उनके ईमान से नाउम्मीद होना है।
सूरः नबा 78
तीसवाँ पारः अम्-म य-तसा अलून
78 सूरः नबा 80
सूरः नबा' मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 40 आयतें और 2 रुकूअ हैं। शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बड़े रहम वाले हैं।
ये (क़ियामत का इनकार करने वाले ) लोग किस चीज़ का हाल पूछते हैं । (1) उस बड़े वाकिए का हाल पूछते हैं (2) जिसमें ये लोग ( अहले हक़ के साथ) इख़्तिलाफ़ कर रहे हैं । ( 3 ) हरगिज़ ऐसा नहीं बल्कि क़ियामत आएगी और) उनको अभी मालूम हुआ जाता है । ( 4 ) ( दोबारा कहते हैं कि जैसा ये लोग समझते हैं ) हरगिज़ ऐसा नहीं (बल्कि आएगी) उनको अभी मालूम हुआ जाता है । ( 5 ) क्या हमने ज़मीन को फर्श (6) और पहाड़ों को ( ज़मीन की) मेखें नहीं बनाया । ( 7 ) और ( इसके अलावा हमने और भी कुदरत ज़ाहिर फ़रमाई, चुनाँचे) हमने ही तुमको जोड़ा जोड़ा (यानी मर्द व औरत ) बनाया । ( 8 ) और हम ही ने तुम्हारे सोने को राहत की चीज़ बनाया । (9) और हम ही ने रात को पर्दे की चीज़ बनाया (10) और हम ही ने दिन को रोज़गार का वक़्त बनाया। ( 11 ) और हम ही ने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत आसमान बनाए । (12) और हम ही ने ( आसमान में ) एक रोशन चिराग़ बनाया (मुराद सूरज है ) । (13) और हम ही ने पानी भरे बादलों से कसरत से पानी बरसाया । ( 14 ) ताकि हम उस पानी के ज़रिये से पैदा करें ग़ल्ला और सब्ज़ी ( 15 ) और घने बाग़। (16) बेशक फैसले का दिन एक मुतैयन वक़्त है । ( 17 ) यानी जिस दिन सूर फूँका जाएगा, फिर तुम लोग गिरोह-गिरोह होकर आओगे । (18) और आसमान खुल जाएगा, फिर उसमें दरवाज़े ही दरवाज़े हो जाएँगे ' (19) और पहाड़ ( अपनी जगह से ) हटा दिए जाएँगे, सो वे रेत की तरह हो जाएँगे । (20) (आगे उस फैसले के दिन में जो फैसला होगा उसका बयान है, यानी ) बेशक दोज़ख़ एक घात की जगह है ( 21 ) सरकशों का ठिकाना (है) (22) जिसमें वे बेइन्तिहा ज़मानों ( तक पड़े) रहेंगे। (23) (और) उसमें न तो वे किसी ठंडक (यानी राहत) का मज़ा चखेंगे और न पीने की चीज़ का ( जो कि प्यास को बुझाने वाली हो ) (24) सिवाय गर्म पानी और पीप के । (25) और (उनको) पूरा-पूरा बदला मिलेगा । (26) (और वे आमाल जिनका यह बदला है, यह हैं कि ) वे लोग ( कियामत के हिसाब का अन्देशा न रखते थे। ( 27 ) और हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाते थे। (28) और हमने ( उनके आमाल में से ) हर चीज़ को (उनके आमालनामे में) लिखकर ज़ब्त कर रखा है। (29) सो मज़ा चखो कि हम तुम्हारी सज़ा ही बढ़ाते जाएँगे । (30)
खुदा से डरने वालों के लिए बेशक कामयाबी है। (31) यानी (खाने और सैर को) बाग़ (जिनमें तरह-तरह के मेवे होंगे) और अंगूर (32) और ( दिल बहलाने को ) नौजवान हमउम्र औरतें (33) और ( पीने को) लबालब भरे हुए शराब के जाम । ( 34 ) (और) वहाँ न कोई बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ (क्योंकि ये
1. इसमें भी पिछली मिली हुई सूरः की तरह कियामत के जल्द आने की संभावना और जज़ा व सज़ा के वाकिआत ज़िक्र किए गए हैं। 2. मुराद कियामत है और पूछने से मकसद इनकार करने के तौर पर पूछना है। और इस सवाल व जवाब से मकसद ज़ेहनों का उधर मुतवज्जह करना और जो बात गैर-वाज़ेह थी उसकी तफसीर से उसका अहम होना ज़ाहिर है।
3. यानी जब दुनिया से जाने के बाद उनपर अज़ाब वाकेअ होगा तब असल हकीकृत और (शेष तफसीर पृष्ठ 1070 पर )
सूरः नाज़िआत 79
बातें वहाँ बिलकुल नापैद हैं ) (35) यह ( उनको उनकी नेकियों का ) बदला मिलेगा जो कि काफी इनाम होगा ( आपके ) रब की तरफ से (36) जो मालिक है आसमानों का और ज़मीन का और उन चीज़ों का जो उन दोनों के दरमियान में हैं। (और जो ) रहमान है, (और) किसी को उसकी तरफ से (मुस्तकिल ) इख़्तियार न होगा ( कि उसके सामने कुछ कह सुन सके) 1 ( 37 ) जिस दिन तमाम रूहों वाले और फरिश्ते ( खुदा के सामने ) सफ़ बाँधे हुए ( आजिज़ी के साथ झुके हुए) खड़े होंगे, ( उस दिन ) कोई न बोल सकेगा सिवाय उसके जिसको रहमान (बोलने की) इजाज़त दे दे और वह शख़्स बात भी ठीक कहे । ( 38 ) यह (दिन जिसका ऊपर ज़िक्र हुआ) यकीनी दिन है, सो जिसका जी चाहे ( उसके हालात सुनकर ) अपने रब के पास (अपना) ठिकाना बना ले । (39) हमने तुमको एक नज़दीक आने वाले अज़ाब से डरा दिया है (जो कि ऐसे दिन में होने वाला है ) जिस दिन हर शख़्स उन आमाल को (अपने सामने हाज़िर ) देख लेगा जो उसने अपने हाथों किए होंगे, और काफ़िर (हसरत से) कहेगा कि काश ! मैं मिट्टी हो जाता ( ताकि सज़ा से बच जाता ) । (40) *
79 सूरः नाज़िआत 81
सूरः नाज़िआत मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 46 आयतें और 2 रुकूअ हैं ।
कुसम है उन फ़रिश्तों की जो (काफिरों की) जान सख्ती से निकालते हैं। (1) और जो ( मुसलमानों की रूह आसानी से निकालते हैं, गोया उनका ) बन्द खोल देते हैं । ( 2 ) और जो तैरते हुए चलते हैं । (3) फिर तेज़ी के साथ दौड़ते हैं। (4) फिर हर मामले की तदबीर करते हैं । ( 5 ) ( उन सबकी कसमें खाकर कहते हैं कि क़ियामत ज़रूर आएगी) जिस दिन हिला देने वाली चीज़ हिला डालेगी ( इससे सूर का पहली बार फूँका जाना मुराद है)। (6) जिसके बाद एक पीछे आने वाली चीज़ आएगी ( इससे सूर का दूसरी बार फूँका जाना मुराद है)। (7) बहुत-से दिल उस दिन धड़क रहे होंगे । (8) उनकी आँखें शर्म के मारे झुक रही होंगी । (9) कहते हैं, क्या हम पहली हालत में फिर वापस होंगे ? ( पहली से मुराद मौत से पहले की ज़िन्दगी है )5 (10) क्या जब हम बोसीदा हड्डियाँ हो जाएँगे (11) फिर (ज़िन्दगी की तरफ़ ) वापस होंगे? ( अगर ऐसा हुआ तो ) उस सूरत में यह वापसी (हमारे लिए) बड़े घाटे की चीज़ होगी ' (12) तो ( यह समझ लें कि हमको कुछ मुश्किल नहीं, बल्कि) बस वह एक ही सख़्त आवाज़ होगी (13) जिससे लोग फ़ौरन ही मैदान में आ मौजूद होंगे। (14) क्या आपको मूसा (अलैहिस्सलाम ) का किस्सा पहुँचा है ? (15) जबकि उनको उनके परवर्दिगार ने एक पाक मैदान यानी तुवा में ( यह उसका नाम है ) पुकारा (16) कि तुम फिरऔन के पास जाओ, उसने बड़ी शरारत इख़्तियार की है। (17) सो उससे (जाकर ) कहो कि क्या तुझको इस बात की ख़ाहिश है कि तू दुरुस्त हो जाए ? (18) और ( तेरी दुरुस्ती की ग़रज़ से ) मैं तुझको तेरे रब की तरफ़ (जात व सिफात की) रहनुमाई करूँ तो तू ( यह सुनकर उससे) डरने लगे? (19) फिर ( जब उसने नुबुव्वत की दलील तलब की तो ) उसको ( नुबुब्बत की) बड़ी
(पृष्ठ 1068 का शेष) क़ियामत का हक होना सामने आएगा। ये लोग उसको नामुम्किन और मुहाल समझते हैं हालाँकि उसको नामुम्किन समझने से हमारी कुदरत का इनकार लाज़िम आता है, और हमारी कुदरत का इनकार निहायत अजीब है क्योंकि.....(आगे देखो तर्जुमा) (पृष्ठ 1068 की बकिया तफसीर और पृष्ठ 1070 की तफसीर पृष्ठ 1072-1080 पर )
निशानी. दिखलाई। (20) तो उस (फ़िरऔन) ने उनको झुठलाया और उनका ) कहना न माना । (21) फिर ( मूसा अलैहिस्सलाम से अलग होकर ( उनके ख़िलाफ़ ) कोशिश करने लगा (22) और ( लोगों को ) जमा किया फिर (उनके सामने) बुलन्द आवाज़ से तकरीर की ( 23 ) और कहा कि मैं तुम्हारा आला रब हूँ । (24) सो अल्लाह तआला ने उसको आख़िरत के और दुनिया के अज़ाब में पकड़ा । ( 25 ) बेशक (इस वाकिए में) ऐसे शख़्स के लिए बड़ी इबरत है जो अल्लाह तआला से डरे । ( 26 ) *
भला तुम्हारा ( दूसरी बार ) पैदा करना ( अपने आप में) ज़्यादा सख़्त है या आसमान का ?? अल्लाह तआला ने उसको बनाया । ( 27 ) ( इस तरह से कि) उसकी छत को बुलन्द किया और उसको दुरुस्त बनाया ( कि कहीं उसमें नुक्स और दरार नहीं) (28) और उसकी रात को अंधेरी बनाया और उसके दिन को ज़ाहिर किया' (29) और उसके बाद ज़मीन को बिछाया ( 30 ) ( और बिछाकर ) उससे उसका पानी और चारा निकाला। (31) और पहाड़ों को ( उसपर ) कायम कर दिया (32) तुम्हारे और तुम्हारे मवेशियों के फ़ायदा पहुँचाने के लिए। (33) सो जब वह बड़ा हंगामा आएगा (34) यानी जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा (35) और देखने वालों के सामने दोज़ख़ ज़ाहिर की जाएगी (36) तो ( उस दिन यह हालत होगी कि ) जिस शख़्स ने (हक़ से) सरकशी की होगी (37) और (आख़िरत का मुन्किर होकर ) दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी होगी (38) सो दोज़ख़ ( उसका ) ठिकाना होगा । (39) और जो शख़्स (दुनिया में) अपने परवर्दिगार के सामने खड़ा होने से डरा होगा और नफ़्स को (हराम ) ख़्वाहिश से रोका होगा (40) सो जन्नत उसका ठिकाना होगा। (41) ये लोग आपसे कियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब आएगी? 5 ( 42 ) (सो) उसके बयान करने से आपका क्या ताल्लुक (43) उस ( के इल्म को मुतैयन करने ) का मदार सिर्फ आपके परवर्दिगार की तरफ़ है (44) (और) आप तो सिर्फ ( उसकी मुख़्तसर ख़बर देकर ) ऐसे शख़्स को डराने वाले हैं जो उससे डरता हो। (45) जिस दिन ये उसको देखेंगे तो (उनको) ऐसा मालूम होगा कि गोया (दुनिया में) सिर्फ एक दिन के आख़िरी हिस्से में या उसके अव्वल हिस्से में रहे हैं।' (46)
80 सूरः अ-ब-स 24
सूरः अ-ब-स मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 42 आयतें और 1 रुकूअ है । (नोटः- अब पारे के आख़िर तक हर सूरः एक ही रुकूअ की है । )
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बड़े रहम वाले हैं। पैग़म्बर' (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के चेहरे पर नागवारी के असरात ज़ाहिर हो गए और मुतवज्जह न हुए (1) इस बात से कि उनके पास अंधा आया । 8 (2) और आपको क्या ख़बर शायद नाबीना " यानी अंधा" ( आपकी तालीम से पूरे तौर पर ) सँवर जाता । ( 3 ) या (किसी ख़ास मामले में) नसीहत क़बूल करता,
( पिछले पृष्ठ का शेष) 4. मुराद सूरज है, जैसे कि अल्लाह तआला का कौल है- 'व ज-अलश्शम् - स सिराजन्' ।
5. और इन सबसे हमारा कामिल कुदरत वाला होना ज़ाहिर है । फिर क़ियामत पर हमारे क़ादिर होने का क्यों इनकार किया जाता है?
6. यानी आसमान इस क़द्र बहुत सारा खुल जाएगा जैसे बहुत से दरवाज़े मिलाकर बहुत-सी जगह खुली होती है । पस यह कलाम तश्बीह पर आधारित है, अब यह शुब्हा नहीं हो सकता कि आसमान में दरवाज़े तो अब भी हैं फिर उस दिन दरवाज़े होने के क्या मायने? और यह खुलना फरिश्तों के नाज़िल होने के लिए होगा जैसा कि सूरः फुरकान में 'त-शक्कुकुस्समा उ' से ताबीर फ़रमाया है ।
( पृष्ठ 1068 की बकिया तफ़सीर और पृष्ठ 1070, 1072 की तफसीर पृष्ठ 1074-1081 पर )
सो उसको नसीहत करना ( कुछ न कुछ ) फायदा पहुँचाता । (4) तो जो शख़्स ( दीन से ) बेपरवाई करता है (5) आप उसकी तो फ़िक्र में पड़ते हैं ( 6 ) हालाँकि आप पर कोई इल्ज़ाम नहीं कि वह न सँवरे। (7) और जो शख़्स आपके पास (दीन के शौक़ में) दौड़ता हुआ आता है (8) और वह ( ख़ुदा से) डरता है (9) आप उससे बेतवज्जोही करते हैं । ( 10 ) ( आप आइन्दा ) हरगिज़ ऐसा न कीजिए । कुरआन (सिर्फ एक ) नसीहत की चीज़ है। (11) सो जिसका जी चाहे उसको कुबूल कर ले । ( 12 ) वह (कुरआन लौहे महफूज़ के ऐसे सहीफों में (लिखा हुआ ) है जो ( अल्लाह के नज़दीक ) मुकर्रम " यानी सम्मानित" हैं। (13) बुलन्द रुतबे वाले हैं, मुक़द्दस हैं। (14) जो ऐसे लिखने वालों (यानी फरिश्तों) के हाथों में (रहते ) हैं ( 15 ) कि वे मुकर्रम (और) नेक हैं । ( 16 ) आदमी पर ( जो ऐसे तज़िकरे से नसीहत हासिल न करे ) खुदा की मार, वह कैसा नाशुक्रा है । ( 17 ) (वह देखता नहीं कि) अल्लाह ने उसको कैसी ( बेवक़्अत ) चीज़ से पैदा किया । (18) (आगे जवाब है कि) नुत्फे से ( पैदा किया। आगे उसकी कैफियत का ज़िक्र है कि) उसकी सूरत बनाई, फिर उस ( के जिस्मानी अंगों) को अन्दाज़ से बनाया । ( 19 ) फिर उसके ( निकलने का ) रास्ता आसान कर दिया। (20) फिर ( उम्र ख़त्म होने के बाद) उसको मौत दी, फिर उसको कब्र में ले गया । (21) फिर जब अल्लाह चाहेगा उसको दोबारा ज़िन्दा करेगा । (22) हरगिज़ ( शुक्र नहीं अदा किया और उसको जो हुक्म किया था उसपर अमल नहीं किया । (23) सो इनसान को चाहिए कि अपने खाने की तरफ़ नज़र करे (24) कि हमने अजीब तौर पर पानी बरसाया । (25) फिर अजीब तौर पर ज़मीन को फाड़ा ( 26 ) फिर हमने पैदा किया उसमें ग़ल्ला ( 27 ) और अंगूर और तरकारी (28) और जैतून और खजूर (29) और घने बाग़ ( 30 ) और मेवे और चारा । (31) (बाज़ चीजें ) तुम्हारे और (बाज़ चीजें ) तुम्हारे मवेशियों के फ़ायदे के लिए । ( 32 ) ( अब तो ये नाशुक्री और कुफ़ करते हैं) फिर जिस वक़्त कानों को बहरा कर देने वाला शोर बर्पा होगा (33) जिस दिन ऐसा आदमी भागेगा (जिसका ऊपर बयान हुआ), अपने भाई से (34) और अपनी माँ से और अपने बाप से (35) और अपनी बीवी से और अपनी औलाद से । (यानी कोई किसी की हमदर्दी न करेगा) । (36) उनमें हर शख़्स को (अपना ही) ऐसा मश्ग़ला होगा जो उसको दूसरी तरफ मुतवज्जह न होने देगा । (37) ( यह तो काफ़िरों का हाल हुआ, आगे मजमूई तौर पर मोमिनों और काफ़िरों की तफ़सील है कि बहुत से चेहरे उस दिन ( ईमान की वजह से ) रोशन (38) (और खुशी से ) खिले हुए होंगे (39) और बहुत से चेहरों पर उस दिन ( कुफ़ की वजह से ) स्याही छाई होगी। (40) ( और उस स्याही के साथ ) उनपर ( ग़म की ) कदूरत " यानी मलाल व रन्जीदगी" छाई होगी । (41) यही लोग काफ़िर फ़ाजिर हैं। (42)
(पिछले पृष्ठ का शेष) 7. और ये वाकिआत दूसरी बार सूर फूँकने के वक़्त होंगे। अलबत्ता पहाड़ चलाए जाने में इस सूरः में भी और दूसरी जगह भी जहाँ-जहाँ आया है दोनों एहतिमाल हैं, या तो दूसरी बार सूर फूँकने के बाद कि उससे पूरी दुनिया फिर अपनी हालत पर वापस आ जाएगी, जब हिसाब का वक़्त आएगा तो पहाड़ों को ज़मीन के बराबर कर दिया जाएगा, ताकि ज़मीन पर कोई पहाड़ आड़ न रहे, सब एक ही मैदान में नज़र आएँ । और या यह कि पहली बार सूर फूँकने से दूसरी बार सूर फूँकने तक के मजमूए को एक दिन क़रार दे लिया गया। अल्लाह ही ख़ूब जानते हैं।
1. यहाँ कई सिफ़तें इरशाद फ़रमाई हैं- 'रब्बिस्समावाति ..... आखिर तक' जो दलालत करता है क़ियामत के दिन के वाक़िए पर मालिक और कब्ज़ा व इख़्तियार वाला होने पर, और रहमान जो मोमिनों को जज़ा देने के मुनासिब है। और 'ला यम्लिकू-न.....आख़िर तक' जो काफिरों को ख़ौफ़ दिलाने के मुनासिब है।
2. ठीक बात से वह बात मुराद है जिसकी इजाज़त दी गई हो, यानी बोलना भी सीमित और शर्त के साथ होगा, यह नहीं कि जो चाहे
3. और यह उस वक़्त कहेगा जबकि इनसान व जिन्नात के अलावा दूसरे जानदारों को आपस में बदला दिलाने के बाद मिट्टी कर दिया ( पृष्ठ 1070 की बकिया तफसीर और पृष्ठ 1072 की तफसीर पृष्ठ 1076-1081 पर )
सूरः तक्वीर 81, इन्फ़ितार 82
81 सूरः तक्वीर 7
सूरः तक्वीर मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 29 आयतें हैं।
जब सूरज बेनूर हो जाएगा । ( 1 ) और जब सितारे टूट-टूटकर गिर पड़ेंगे । (2) और जब पहाड़ चलाए जाएँगे। (3) और जब दस महीने की गाभन ऊँटनियाँ छुटी फिरेंगी । (4) और जब जंगली जानवर (घबराहट के मारे ) सब जमा हो जाएँगे । (5) और जब दरिया भड़काए जाएँगे ।' (6) और जब एक - एक किस्म के लोग इकट्ठे किए जाएँगे। (7) और जब ज़िन्दा गाड़ी हुई लड़की से पूछा जाएगा (8) कि वह किस गुनाह पर कुल की गई थी। (9) और जब आमालनामे खोले जाएँगे (ताकि सब अपने-अपने अमल देख लें ) । ( 10 ) और जब आसमान खुल जाएगा (और उसके खुलने से आसमान की ऊपर की चीजें नज़र आने लगेंगी) । (11) और जब दोज़ख़ (और ज़्यादा ) दंहकाई जाएगी । ( 12 ) और जब जन्नत क़रीब कर दी जाएगी । ( 13 ) ( तो उस वक़्त) हर शख़्स उन आमाल को जान लेगा जो लेकर आया है । ( 14 ) (और जब ऐसा होलनाक वाकआ होने वाला है) तो मैं क़सम खाता हूँ उन सितारों की जो (सीधे चलते-चलते) पीछे को हटने लगते हैं। (15) (और फिर पीछे ही को) चलते रहते हैं और अपने निकलने की जगहों में ) जा छुपते हैं । (16) और क़सम है रात की जब वह जाने लगे। (17) और क़सम है सुबह की जब वह आने लगे । (18) (आगे कसम का जवाब है ) कि यह कुरआन (अल्लाह तआला का ) कलाम है । ( 19 ) एक इज़्ज़त वाला फ़रिश्ते (यानी जिबराईल अलैहिस्सलाम का लाया हुआ जो कुव्वत वाला है और ) अर्श के मालिक के नज़दीक रुतबे वाला है। (20) (और) वहाँ (यानी आसमानों में) उसका कहना माना जाता है? ( और वह ) अमानतदार हैं ? (21) कि (वह्य को सही-सही पहुँचा देते हैं।) और यह तुम्हारे साथ के रहने वाले ( मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मजनूँ नहीं हैं। (22) उन्होंने उस फ़रिश्ते को (असली सूरत में आसमान के) साफ़ किनारे पर देखा भी है । (23) और यह पैग़म्बर पोशीदा ( बतलाई हुई वह्य की ) बातों पर कन्जूसी करने वाले भी नहीं 5 (24) और यह । कुरआन किसी शैतान मरदूद की कही हुई बात नहीं है । ( 25 ) ( जब यह साबित है) तो तुम लोग ( इस बारे में) किधर को चले जा रहे हो ? (26) बस यह तो ( उमूमन) दुनिया जहान वालों के लिए एक बड़ा नसीहत किताब है। (27) (और ख़ास तौर से ) ऐसे शख़्स के लिए जो तुममें से सीधा चलना चाहे । (28) औरे तुम बगैर खुदा - ए - रब्बुल आलमीन के चाहे कुछ नहीं चाह सकते।' (29)
82 सूरः इन्फ़ितार 82
सूरः इन्फितार मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 19 आयतें हैं।
जब आसमान फट जाएगा । (1) और जब सितारे ( टूटकर ) झड़ पड़ेंगे (2) और सब दरिया ( मीठे व
(पिछले पृष्ठ का शेष) यह रिवायत हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से दुर्रे मन्सूर में बयान की गई है। या वह मायने मुराद हों जो सूरः निसा में "लौ तुसव्वा बिहिमुल अर्जु" ( कि काश ! हम ज़मीन के पैवन्द हो जाते) में गुज़रे हैं।
4. "वन्नाज़िआति, वन्नाशिताति" से यह शुब्हा न किया जाए कि कभी-कभी काफिरों का मौत का वक़्त आसान और मोमिनों का सख़्त देखा जाता है । ( पृष्ठ 1070 की बकिया तफसीर और पृष्ठ 1072, 1076 की तफसीर पृष्ठ 1078-1081 पर )
न्ज़िल 7
सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन 83
नमकीले) बह पड़ेंगे (3) और जब कब्रें उखाड़ी जाएँगी (यानी उनके मुर्दे निकल खड़े होंगे ) । ( 4 ) ( उस वक़्त ) हर शख़्स अपने अगले और पिछले आमाल को जान लेगा । (5) ऐ इनसान ! तुझको किस चीज़ ने तेरे ऐसे रब्बे करीम के साथ भूल में डाल रखा है (6) जिसने तुझको (इनसान ) बनाया, फिर तेरे जिस्मानी अंगों को दुरुस्त किया, फिर तुझको ( मुनासिब ) एतिदाल पर बनाया । ( 7 ) (और) जिस सूरत में चाहा तुझको तरकीब दे दिया।' (8) (इन सब उमूर का तकाज़ा यह है कि तुमको) हरगिज़ ( मग़रूर ) नहीं होना चाहिए, मगर तुम बाज़ नहीं आते) बल्कि तुम (इस वजह से धोखे में पड़ गए हो कि तुम ) जज़ा व सज़ा (ही) को झुठलाते हो । (9) और तुमपर ( तुम्हारे सब आमाल) याद रखने वाले, (10) इज्ज़त वाले, लिखने वाले मुक़र्रर हैं। (11) जो तुम्हारे सब कामों को जानते हैं । (12) नेक लोग बेशक आराम में होंगे (13) और बदकार (यानी काफ़िर ) लोग बेशक दोज़ख़ में होंगे। (14) बदले के दिन उसमें दाख़िल होंगे। (15) और ( फिर दाख़िल होकर ) उससे बाहर न होंगे (बल्कि उसमें हमेशा रहना होगा ) । (16) और आपको कुछ ख़बर है कि वह बदले का दिन कैसा है? (17) (और हम) फिर ( दोबारा कहते हैं कि आपको कुछ ख़बर है कि वह बदले का दिन कैसा है ? (18) वह दिन ऐसा है जिसमें किसी शख़्स के नफे के लिए कुछ बस न चलेगा और पूरी की पूरी हुकूमत उस दिन अल्लाह ही की होगी। ● (19)
83 सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन 86
सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन मक्का में नाज़िल हुई। इसमें 36 आयतें हैं।
बड़ी ख़राबी है नाप-तौल में कमी करने वालों की (1) कि जब लोगों से ( अपना हक ) नापकर लें तो पूरा लें (2) और जब उनको नापकर या तौलकर दें तो घटा कर दें ? ( 3 ) (आगे नाप-तौल में कमी करने वालों को धमकाया और तंबीह की जा रही है कि ) क्या उन लोगों को इसका यकीन नहीं है कि ज़िन्दा करके उठाए जाएँगे (4) एक बड़े दिन में । (5) जिस दिन तमाम आदमी रब्बुल आलमीन के सामने खड़े होंगे। (6) हरगिज़ (ऐसा) नहीं होगा, (यानी काफ़िर) लोगों का आमालनामा 'सिज्जीन' में रहेगा ३ (7) और (आगे डराने के लिए सवाल है कि) आपको कुछ मालूम है कि 'सिज्जीन' में रखा हुआ आमालनामा क्या चीज़ है ? (8) वह एक निशान किया हुआ दफ़्तर है। (9) उस दिन (यानी कियामत के दिन ) झुठलाने वालों को बड़ी ख़राबी होगी। (10) जो जज़ा के दिन को झुठलाते हैं । (11) और उस (बदले के दिन को तो वही शख़्स झुठलाता है है जो बन्दगी की हद) से गुज़रने वाला हो (और) मुज्रिम हो । (12) (और) जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाएँ तो यूँ कह देता हो कि बे - सनद बातें हैं, अगलों से नकुल होती हुई चली आती हैं । ( 13 ) हरगिज़ ( ऐसा )
(पिछले पृष्ठ का शेष) असल यह है कि यह सख़्ती और सहूलत जाहिरी जिस्म पर होती है और आयत में रूहानी व हकीकी सख़्ती और सहूलत मुराद है।
5. यानी क्या मरने के बाद फिर दोबारा ज़िन्दा होना होगा ? असल इसका मुहाल होना ज़ाहिर करना मक़संद है।
6. क्योंकि हमने तो उसके लिए कुछ सामान नहीं किया । मक़सद इससे अहले हक के इस अकीदे का मज़ाक और हँसी उड़ाना था। यानी मुसलमानों के अक़ीदे पर तो हम बड़े ख़सारे में होंगे। जैसे कोई शख़्स किसी को ख़ैरख़्वाही से डराए कि इस रास्ते से मत जाना शेर मिलेगा ( पृष्ठ 1070 की बकिया तफसीर और पृष्ठ 1072, 1076, 1078 की तफुसीर पृष्ठ 1080-1082 पर )
|
बक़िया तफ़सीर पाँच. मतलब यह कि हमने ऐसी हैअतों और सिफ्तों के साथ पैदा किया कि उसमें मुकल्लफ़ बनने की काबलियत हो । एक. यानी सबपर कम या ज्यादा उसकी सख़्ती का असर होगा, मुराद कियामत का दिन है। दो. कैदी अगर मज़लूम है तब तो उसकी रियायत का अच्छा होना ज़ाहिर है, और अगर ज़ालिम है तो सख़्त ज़रूरत के वक़्त उसको खाना खिलाना भी अच्छा है। इससे मालूम हुआ कि आख़िरत के ख़ौफ़ से कोई काम करना इख़्लास और अल्लाह की रिज़ा तलब करने के ख़िलाफ़ नहीं । चार. यानी उसमें पीने की चीज़ ऐसे अन्दाज़ से भरी होगी कि न उस वक़्त की इच्छा में कमी रहे और न उससे बचे कि दोनों में बेलुत्फ़ी होती है। और चाँदी के शीशे के यह मायने हैं कि सफेदी तो चाँदी जैसी होगी और सफाई व चमक शीशे के जैसी, और दुनिया की चाँदी में आरपार नज़र नहीं आता, और शीशे में यहाँ ऐसी सफेदी नहीं होती, पस यह एक अजीब चीज़ होगी। पाँच. मोती से तो उनके बाहर आने और सफाई की वजह से तश्बीह दी और बिखरे हुए का वस्फ़ उनके चलने-फिरने के लिहाज़ से, जैसे बिखरे मोती अलग-अलग होकर कोई इधर जा रहा है और कोई उधर जा रहा है, और यह आला दर्जे की तश्बीह है। छः. एक बार हज़रत फारूके आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु बारगाहे नबवी में हाज़िर हुए और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा कि एक चटाई पर लेटे हुए हैं और चटाई के पठ्ठे के निशान मुबारक जिस्म पर नक़्श हो गए हैं। यह देखकर हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की आँखों में आँसू आ गए। हज़रत रसूले मकबूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका सबब पूछा तो उन्होंने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह! मेरे दिल में यह ख़्याल आया कि 'कैसर' व 'किसरा' तो काफिर होने के बावजूद कैसे ऐश-आराम में हैं और अल्लाह के हबीब दोनों जहाँ के सरदार एक सख़्त चटाई पर आराम फरमा हैं, जिसपर कोई कपड़ा भी नहीं। आपने फ़रमाया ऐ उमर ! क्या तुम इसपर राज़ी नहीं कि गैर-मुस्लिमों की फानी नेमतें दुनिया की ज़िन्दगी तक सीमित हैं और हम लोगों को खुदा तआला आख़िरत में कभी ख़त्म न होने वाली हमेशा की नेमतें अता फरमाएगा। एक. यानी ये ज़िक्र हुई हवाएँ कुदरत पर दलालत करने वाली होने की वजह से अपने बनाने वाले और पैदा करने वाले की तरफ़ मुतवज्जह होने का सबब हो जाती हैं। दो. इस सवाल व जवाब का मतलब यह मालूम होता है कि काफिर लोग जो रसूलों को झुठलाते आए हैं और अब भी इस उम्मत के काफिर लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठला रहे हैं । और जब इस झुठलाने पर आख़िरत के अज़ाब से डराए जाते हैं तो आख़िरत को भी झुठलाते हैं। इस वक़्त यह झुठलाना अपने आपमें इसको चाहता है कि रसूलों का जो किस्सा काफिरों से पेश आ रहा है उसका फैसला अभी हो जाए, और उसकी ताख़ीर और देरी होने से काफिरों को जल्दी होने से इनकार और मुसलमानों को तबई तौर पर जल्दी से हो जाने की तमन्ना होती है। इस आयत में इस जल्दी का जवाब है कि हक तआला ने बाज़ हिक्मतों से उसको मुअख्ख़र कर रखा है, लेकिन वाकेअ ज़रूर होगा । एक. उस सायबान से एक धुआँ मुराद है जो जहन्नम से निकलेगा । और यह चूँकि कसरत से होगा इसलिए ऊँचा होगा, फटकर कई टुकड़े हो जाएगा । काफ़िर लोग हिसाब से फारिग होने तक उसी धुएँ के घेरे में रहेंगे, जबकि अल्लाह के मक़बूल बन्दे अर्श के साये के नीचे होंगे। दो. क़ायदा है कि जब आग से चिंगारी झड़ती है तो बड़ी होती है, फिर पहली तश्बीह शुरू की हालत के एतिबार से है और दूसरी तश्बीह आख़िरी और इन्तिहाई हालत के एतिबार से है। तीन. इन धमकियों और झंझोड़ने का तकाज़ा यह था कि ये सुनते ही डरकर ईमान ले आते मगर जब इसपर भी उनको असर नहीं तो फिर इस डराने वाले और आलीशान अल्फाज़ वाले कुरआन के बाद और किस बात पर ईमान लाएँगे? इसमें काफिरों को झिड़की का सबब आपका उनके ईमान से नाउम्मीद होना है। सूरः नबा अठहत्तर तीसवाँ पारः अम्-म य-तसा अलून अठहत्तर सूरः नबा अस्सी सूरः नबा' मक्का में नाज़िल हुई। इसमें चालीस आयतें और दो रुपयाकूअ हैं। शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बड़े रहम वाले हैं। ये लोग किस चीज़ का हाल पूछते हैं । उस बड़े वाकिए का हाल पूछते हैं जिसमें ये लोग इख़्तिलाफ़ कर रहे हैं । हरगिज़ ऐसा नहीं बल्कि क़ियामत आएगी और) उनको अभी मालूम हुआ जाता है । हरगिज़ ऐसा नहीं उनको अभी मालूम हुआ जाता है । क्या हमने ज़मीन को फर्श और पहाड़ों को मेखें नहीं बनाया । और हमने ही तुमको जोड़ा जोड़ा बनाया । और हम ही ने तुम्हारे सोने को राहत की चीज़ बनाया । और हम ही ने रात को पर्दे की चीज़ बनाया और हम ही ने दिन को रोज़गार का वक़्त बनाया। और हम ही ने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत आसमान बनाए । और हम ही ने एक रोशन चिराग़ बनाया । और हम ही ने पानी भरे बादलों से कसरत से पानी बरसाया । ताकि हम उस पानी के ज़रिये से पैदा करें ग़ल्ला और सब्ज़ी और घने बाग़। बेशक फैसले का दिन एक मुतैयन वक़्त है । यानी जिस दिन सूर फूँका जाएगा, फिर तुम लोग गिरोह-गिरोह होकर आओगे । और आसमान खुल जाएगा, फिर उसमें दरवाज़े ही दरवाज़े हो जाएँगे ' और पहाड़ हटा दिए जाएँगे, सो वे रेत की तरह हो जाएँगे । बेशक दोज़ख़ एक घात की जगह है सरकशों का ठिकाना जिसमें वे बेइन्तिहा ज़मानों रहेंगे। उसमें न तो वे किसी ठंडक का मज़ा चखेंगे और न पीने की चीज़ का सिवाय गर्म पानी और पीप के । और पूरा-पूरा बदला मिलेगा । वे लोग और हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाते थे। और हमने हर चीज़ को लिखकर ज़ब्त कर रखा है। सो मज़ा चखो कि हम तुम्हारी सज़ा ही बढ़ाते जाएँगे । खुदा से डरने वालों के लिए बेशक कामयाबी है। यानी बाग़ और अंगूर और नौजवान हमउम्र औरतें और लबालब भरे हुए शराब के जाम । वहाँ न कोई बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ सूरः नाज़िआत उन्यासी बातें वहाँ बिलकुल नापैद हैं ) यह बदला मिलेगा जो कि काफी इनाम होगा रब की तरफ से जो मालिक है आसमानों का और ज़मीन का और उन चीज़ों का जो उन दोनों के दरमियान में हैं। रहमान है, किसी को उसकी तरफ से इख़्तियार न होगा एक जिस दिन तमाम रूहों वाले और फरिश्ते सफ़ बाँधे हुए खड़े होंगे, कोई न बोल सकेगा सिवाय उसके जिसको रहमान इजाज़त दे दे और वह शख़्स बात भी ठीक कहे । यह यकीनी दिन है, सो जिसका जी चाहे अपने रब के पास ठिकाना बना ले । हमने तुमको एक नज़दीक आने वाले अज़ाब से डरा दिया है जिस दिन हर शख़्स उन आमाल को देख लेगा जो उसने अपने हाथों किए होंगे, और काफ़िर कहेगा कि काश ! मैं मिट्टी हो जाता । * उन्यासी सूरः नाज़िआत इक्यासी सूरः नाज़िआत मक्का में नाज़िल हुई। इसमें छियालीस आयतें और दो रुपयाकूअ हैं । कुसम है उन फ़रिश्तों की जो जान सख्ती से निकालते हैं। और जो बन्द खोल देते हैं । और जो तैरते हुए चलते हैं । फिर तेज़ी के साथ दौड़ते हैं। फिर हर मामले की तदबीर करते हैं । जिस दिन हिला देने वाली चीज़ हिला डालेगी । जिसके बाद एक पीछे आने वाली चीज़ आएगी । बहुत-से दिल उस दिन धड़क रहे होंगे । उनकी आँखें शर्म के मारे झुक रही होंगी । कहते हैं, क्या हम पहली हालत में फिर वापस होंगे ? पाँच क्या जब हम बोसीदा हड्डियाँ हो जाएँगे फिर वापस होंगे? उस सूरत में यह वापसी बड़े घाटे की चीज़ होगी ' तो बस वह एक ही सख़्त आवाज़ होगी जिससे लोग फ़ौरन ही मैदान में आ मौजूद होंगे। क्या आपको मूसा का किस्सा पहुँचा है ? जबकि उनको उनके परवर्दिगार ने एक पाक मैदान यानी तुवा में पुकारा कि तुम फिरऔन के पास जाओ, उसने बड़ी शरारत इख़्तियार की है। सो उससे कहो कि क्या तुझको इस बात की ख़ाहिश है कि तू दुरुस्त हो जाए ? और मैं तुझको तेरे रब की तरफ़ रहनुमाई करूँ तो तू डरने लगे? फिर उसको बड़ी क़ियामत का हक होना सामने आएगा। ये लोग उसको नामुम्किन और मुहाल समझते हैं हालाँकि उसको नामुम्किन समझने से हमारी कुदरत का इनकार लाज़िम आता है, और हमारी कुदरत का इनकार निहायत अजीब है क्योंकि..... निशानी. दिखलाई। तो उस ने उनको झुठलाया और उनका ) कहना न माना । फिर कोशिश करने लगा और जमा किया फिर बुलन्द आवाज़ से तकरीर की और कहा कि मैं तुम्हारा आला रब हूँ । सो अल्लाह तआला ने उसको आख़िरत के और दुनिया के अज़ाब में पकड़ा । बेशक ऐसे शख़्स के लिए बड़ी इबरत है जो अल्लाह तआला से डरे । * भला तुम्हारा पैदा करना ज़्यादा सख़्त है या आसमान का ?? अल्लाह तआला ने उसको बनाया । उसकी छत को बुलन्द किया और उसको दुरुस्त बनाया और उसकी रात को अंधेरी बनाया और उसके दिन को ज़ाहिर किया' और उसके बाद ज़मीन को बिछाया उससे उसका पानी और चारा निकाला। और पहाड़ों को कायम कर दिया तुम्हारे और तुम्हारे मवेशियों के फ़ायदा पहुँचाने के लिए। सो जब वह बड़ा हंगामा आएगा यानी जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा और देखने वालों के सामने दोज़ख़ ज़ाहिर की जाएगी तो जिस शख़्स ने सरकशी की होगी और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी होगी सो दोज़ख़ ठिकाना होगा । और जो शख़्स अपने परवर्दिगार के सामने खड़ा होने से डरा होगा और नफ़्स को ख़्वाहिश से रोका होगा सो जन्नत उसका ठिकाना होगा। ये लोग आपसे कियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब आएगी? पाँच उसके बयान करने से आपका क्या ताल्लुक उस का मदार सिर्फ आपके परवर्दिगार की तरफ़ है आप तो सिर्फ ऐसे शख़्स को डराने वाले हैं जो उससे डरता हो। जिस दिन ये उसको देखेंगे तो ऐसा मालूम होगा कि गोया सिर्फ एक दिन के आख़िरी हिस्से में या उसके अव्वल हिस्से में रहे हैं।' अस्सी सूरः अ-ब-स चौबीस सूरः अ-ब-स मक्का में नाज़िल हुई। इसमें बयालीस आयतें और एक रुपयाकूअ है । शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बड़े रहम वाले हैं। पैग़म्बर' के चेहरे पर नागवारी के असरात ज़ाहिर हो गए और मुतवज्जह न हुए इस बात से कि उनके पास अंधा आया । आठ और आपको क्या ख़बर शायद नाबीना " यानी अंधा" सँवर जाता । या नसीहत क़बूल करता, चार. मुराद सूरज है, जैसे कि अल्लाह तआला का कौल है- 'व ज-अलश्शम् - स सिराजन्' । पाँच. और इन सबसे हमारा कामिल कुदरत वाला होना ज़ाहिर है । फिर क़ियामत पर हमारे क़ादिर होने का क्यों इनकार किया जाता है? छः. यानी आसमान इस क़द्र बहुत सारा खुल जाएगा जैसे बहुत से दरवाज़े मिलाकर बहुत-सी जगह खुली होती है । पस यह कलाम तश्बीह पर आधारित है, अब यह शुब्हा नहीं हो सकता कि आसमान में दरवाज़े तो अब भी हैं फिर उस दिन दरवाज़े होने के क्या मायने? और यह खुलना फरिश्तों के नाज़िल होने के लिए होगा जैसा कि सूरः फुरकान में 'त-शक्कुकुस्समा उ' से ताबीर फ़रमाया है । सो उसको नसीहत करना फायदा पहुँचाता । तो जो शख़्स बेपरवाई करता है आप उसकी तो फ़िक्र में पड़ते हैं हालाँकि आप पर कोई इल्ज़ाम नहीं कि वह न सँवरे। और जो शख़्स आपके पास दौड़ता हुआ आता है और वह डरता है आप उससे बेतवज्जोही करते हैं । हरगिज़ ऐसा न कीजिए । कुरआन नसीहत की चीज़ है। सो जिसका जी चाहे उसको कुबूल कर ले । वह है जो मुकर्रम " यानी सम्मानित" हैं। बुलन्द रुतबे वाले हैं, मुक़द्दस हैं। जो ऐसे लिखने वालों के हाथों में हैं कि वे मुकर्रम नेक हैं । आदमी पर खुदा की मार, वह कैसा नाशुक्रा है । अल्लाह ने उसको कैसी चीज़ से पैदा किया । नुत्फे से उसकी सूरत बनाई, फिर उस को अन्दाज़ से बनाया । फिर उसके रास्ता आसान कर दिया। फिर उसको मौत दी, फिर उसको कब्र में ले गया । फिर जब अल्लाह चाहेगा उसको दोबारा ज़िन्दा करेगा । हरगिज़ सो इनसान को चाहिए कि अपने खाने की तरफ़ नज़र करे कि हमने अजीब तौर पर पानी बरसाया । फिर अजीब तौर पर ज़मीन को फाड़ा फिर हमने पैदा किया उसमें ग़ल्ला और अंगूर और तरकारी और जैतून और खजूर और घने बाग़ और मेवे और चारा । तुम्हारे और तुम्हारे मवेशियों के फ़ायदे के लिए । फिर जिस वक़्त कानों को बहरा कर देने वाला शोर बर्पा होगा जिस दिन ऐसा आदमी भागेगा , अपने भाई से और अपनी माँ से और अपने बाप से और अपनी बीवी से और अपनी औलाद से । । उनमें हर शख़्स को ऐसा मश्ग़ला होगा जो उसको दूसरी तरफ मुतवज्जह न होने देगा । रोशन खिले हुए होंगे और बहुत से चेहरों पर उस दिन स्याही छाई होगी। उनपर कदूरत " यानी मलाल व रन्जीदगी" छाई होगी । यही लोग काफ़िर फ़ाजिर हैं। सात. और ये वाकिआत दूसरी बार सूर फूँकने के वक़्त होंगे। अलबत्ता पहाड़ चलाए जाने में इस सूरः में भी और दूसरी जगह भी जहाँ-जहाँ आया है दोनों एहतिमाल हैं, या तो दूसरी बार सूर फूँकने के बाद कि उससे पूरी दुनिया फिर अपनी हालत पर वापस आ जाएगी, जब हिसाब का वक़्त आएगा तो पहाड़ों को ज़मीन के बराबर कर दिया जाएगा, ताकि ज़मीन पर कोई पहाड़ आड़ न रहे, सब एक ही मैदान में नज़र आएँ । और या यह कि पहली बार सूर फूँकने से दूसरी बार सूर फूँकने तक के मजमूए को एक दिन क़रार दे लिया गया। अल्लाह ही ख़ूब जानते हैं। एक. यहाँ कई सिफ़तें इरशाद फ़रमाई हैं- 'रब्बिस्समावाति ..... आखिर तक' जो दलालत करता है क़ियामत के दिन के वाक़िए पर मालिक और कब्ज़ा व इख़्तियार वाला होने पर, और रहमान जो मोमिनों को जज़ा देने के मुनासिब है। और 'ला यम्लिकू-न.....आख़िर तक' जो काफिरों को ख़ौफ़ दिलाने के मुनासिब है। दो. ठीक बात से वह बात मुराद है जिसकी इजाज़त दी गई हो, यानी बोलना भी सीमित और शर्त के साथ होगा, यह नहीं कि जो चाहे तीन. और यह उस वक़्त कहेगा जबकि इनसान व जिन्नात के अलावा दूसरे जानदारों को आपस में बदला दिलाने के बाद मिट्टी कर दिया सूरः तक्वीर इक्यासी, इन्फ़ितार बयासी इक्यासी सूरः तक्वीर सात सूरः तक्वीर मक्का में नाज़िल हुई। इसमें उनतीस आयतें हैं। जब सूरज बेनूर हो जाएगा । और जब सितारे टूट-टूटकर गिर पड़ेंगे । और जब पहाड़ चलाए जाएँगे। और जब दस महीने की गाभन ऊँटनियाँ छुटी फिरेंगी । और जब जंगली जानवर सब जमा हो जाएँगे । और जब दरिया भड़काए जाएँगे ।' और जब एक - एक किस्म के लोग इकट्ठे किए जाएँगे। और जब ज़िन्दा गाड़ी हुई लड़की से पूछा जाएगा कि वह किस गुनाह पर कुल की गई थी। और जब आमालनामे खोले जाएँगे । और जब आसमान खुल जाएगा । और जब दोज़ख़ दंहकाई जाएगी । और जब जन्नत क़रीब कर दी जाएगी । हर शख़्स उन आमाल को जान लेगा जो लेकर आया है । तो मैं क़सम खाता हूँ उन सितारों की जो पीछे को हटने लगते हैं। चलते रहते हैं और अपने निकलने की जगहों में ) जा छुपते हैं । और क़सम है रात की जब वह जाने लगे। और क़सम है सुबह की जब वह आने लगे । कि यह कुरआन कलाम है । एक इज़्ज़त वाला फ़रिश्ते अर्श के मालिक के नज़दीक रुतबे वाला है। वहाँ उसका कहना माना जाता है? अमानतदार हैं ? कि और यह तुम्हारे साथ के रहने वाले मजनूँ नहीं हैं। उन्होंने उस फ़रिश्ते को साफ़ किनारे पर देखा भी है । और यह पैग़म्बर पोशीदा बातों पर कन्जूसी करने वाले भी नहीं पाँच और यह । कुरआन किसी शैतान मरदूद की कही हुई बात नहीं है । तो तुम लोग किधर को चले जा रहे हो ? बस यह तो दुनिया जहान वालों के लिए एक बड़ा नसीहत किताब है। ऐसे शख़्स के लिए जो तुममें से सीधा चलना चाहे । औरे तुम बगैर खुदा - ए - रब्बुल आलमीन के चाहे कुछ नहीं चाह सकते।' बयासी सूरः इन्फ़ितार बयासी सूरः इन्फितार मक्का में नाज़िल हुई। इसमें उन्नीस आयतें हैं। जब आसमान फट जाएगा । और जब सितारे झड़ पड़ेंगे और सब दरिया यह रिवायत हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु से दुर्रे मन्सूर में बयान की गई है। या वह मायने मुराद हों जो सूरः निसा में "लौ तुसव्वा बिहिमुल अर्जु" में गुज़रे हैं। चार. "वन्नाज़िआति, वन्नाशिताति" से यह शुब्हा न किया जाए कि कभी-कभी काफिरों का मौत का वक़्त आसान और मोमिनों का सख़्त देखा जाता है । न्ज़िल सात सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन तिरासी नमकीले) बह पड़ेंगे और जब कब्रें उखाड़ी जाएँगी । हर शख़्स अपने अगले और पिछले आमाल को जान लेगा । ऐ इनसान ! तुझको किस चीज़ ने तेरे ऐसे रब्बे करीम के साथ भूल में डाल रखा है जिसने तुझको बनाया, फिर तेरे जिस्मानी अंगों को दुरुस्त किया, फिर तुझको एतिदाल पर बनाया । जिस सूरत में चाहा तुझको तरकीब दे दिया।' हरगिज़ नहीं होना चाहिए, मगर तुम बाज़ नहीं आते) बल्कि तुम जज़ा व सज़ा को झुठलाते हो । और तुमपर याद रखने वाले, इज्ज़त वाले, लिखने वाले मुक़र्रर हैं। जो तुम्हारे सब कामों को जानते हैं । नेक लोग बेशक आराम में होंगे और बदकार लोग बेशक दोज़ख़ में होंगे। बदले के दिन उसमें दाख़िल होंगे। और उससे बाहर न होंगे । और आपको कुछ ख़बर है कि वह बदले का दिन कैसा है? फिर वह दिन ऐसा है जिसमें किसी शख़्स के नफे के लिए कुछ बस न चलेगा और पूरी की पूरी हुकूमत उस दिन अल्लाह ही की होगी। ● तिरासी सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन छियासी सूरः मुतफ़्फ़िफ़ीन मक्का में नाज़िल हुई। इसमें छत्तीस आयतें हैं। बड़ी ख़राबी है नाप-तौल में कमी करने वालों की कि जब लोगों से नापकर लें तो पूरा लें और जब उनको नापकर या तौलकर दें तो घटा कर दें ? क्या उन लोगों को इसका यकीन नहीं है कि ज़िन्दा करके उठाए जाएँगे एक बड़े दिन में । जिस दिन तमाम आदमी रब्बुल आलमीन के सामने खड़े होंगे। हरगिज़ नहीं होगा, लोगों का आमालनामा 'सिज्जीन' में रहेगा तीन और आपको कुछ मालूम है कि 'सिज्जीन' में रखा हुआ आमालनामा क्या चीज़ है ? वह एक निशान किया हुआ दफ़्तर है। उस दिन झुठलाने वालों को बड़ी ख़राबी होगी। जो जज़ा के दिन को झुठलाते हैं । और उस से गुज़रने वाला हो मुज्रिम हो । जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाएँ तो यूँ कह देता हो कि बे - सनद बातें हैं, अगलों से नकुल होती हुई चली आती हैं । हरगिज़ असल यह है कि यह सख़्ती और सहूलत जाहिरी जिस्म पर होती है और आयत में रूहानी व हकीकी सख़्ती और सहूलत मुराद है। पाँच. यानी क्या मरने के बाद फिर दोबारा ज़िन्दा होना होगा ? असल इसका मुहाल होना ज़ाहिर करना मक़संद है। छः. क्योंकि हमने तो उसके लिए कुछ सामान नहीं किया । मक़सद इससे अहले हक के इस अकीदे का मज़ाक और हँसी उड़ाना था। यानी मुसलमानों के अक़ीदे पर तो हम बड़े ख़सारे में होंगे। जैसे कोई शख़्स किसी को ख़ैरख़्वाही से डराए कि इस रास्ते से मत जाना शेर मिलेगा
|
क्या दिल्लीवासियों को नहीं चाहिए बिजली पर सब्सिडी ?
Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 पर आया है इतना खर्च. . जानें चंद्रयान-2 से क्यों सस्ता है ये मिशन?
|
क्या दिल्लीवासियों को नहीं चाहिए बिजली पर सब्सिडी ? Chandrayaan-तीन: चंद्रयान-तीन पर आया है इतना खर्च. . जानें चंद्रयान-दो से क्यों सस्ता है ये मिशन?
|
अभिनेता संजय दत्त की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब संजय की नई परेशानी का कारण उनकी पत्नी के बाल हैं. जैसा की आप जानते हैं कि संजय दत्त की पत्नी मान्यता इन दिनों बीमार हैं. जिसे लेकर वे पैरोल पर बाहर भी हैं. डॉक्टरों का कहना था है कि उनके ट्यूमर का आपरेशन हुआ है. उन्हें टीबी की शिकायत भी थी. इस बीमारी के साइड इफेक्ट भी होते हैं जो कि संजय की पत्नी में दिखने लगे हैं वे आजकल बालों के गिरने से बेहद परेशान है.
|
अभिनेता संजय दत्त की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब संजय की नई परेशानी का कारण उनकी पत्नी के बाल हैं. जैसा की आप जानते हैं कि संजय दत्त की पत्नी मान्यता इन दिनों बीमार हैं. जिसे लेकर वे पैरोल पर बाहर भी हैं. डॉक्टरों का कहना था है कि उनके ट्यूमर का आपरेशन हुआ है. उन्हें टीबी की शिकायत भी थी. इस बीमारी के साइड इफेक्ट भी होते हैं जो कि संजय की पत्नी में दिखने लगे हैं वे आजकल बालों के गिरने से बेहद परेशान है.
|
कुंभ राशिः कुंभ राशि के जातकों के लिये सप्ताह के शुरुआती दिनों में चंद्रमा धन भाव में विराजमान रहेंगें जो कि आपको संचित धन के लिये चिंतित कर सकते हैं। अष्टम दृष्टि चंद्रमा की होने के कारण मन में निराशा व नकारात्मक विचार उत्पन्न हो सकते हैं। किसी क्षेत्र में अगर निवेश कर रहे हैं तो अपने से बड़े व्यक्ति की सलाह के अनुसार ही करें। सप्ताह के मध्य में चंद्रमा पराक्रम भाव में विचरण करेंगें। इस समय आपकी मेहनत रंग ला सकती है। कम समय में कम मेहनत करके भी आपको अच्छा लाभ मिल सकता है। भाई-बहनों का प्यार व अपेक्षित सहयोग भी आपको इसम समय मिल सकता है। सप्ताह के उतरते दो दिनों में चंद्रमा आपके सुख भाव में विचरण करेंगें जो आपको सफलता का आभास और एक सूक्ष्म योग देगा। अपनी बुद्धिमता से इस अवसर का लाभ आप उठा सकते हैं। सप्ताह के अंतिम दिनों में पंचम चंद्रमा आपको संतान के साथ समय बिताने, उनके बारे में सोचते रहने के योग बना रहे हैं।
|
कुंभ राशिः कुंभ राशि के जातकों के लिये सप्ताह के शुरुआती दिनों में चंद्रमा धन भाव में विराजमान रहेंगें जो कि आपको संचित धन के लिये चिंतित कर सकते हैं। अष्टम दृष्टि चंद्रमा की होने के कारण मन में निराशा व नकारात्मक विचार उत्पन्न हो सकते हैं। किसी क्षेत्र में अगर निवेश कर रहे हैं तो अपने से बड़े व्यक्ति की सलाह के अनुसार ही करें। सप्ताह के मध्य में चंद्रमा पराक्रम भाव में विचरण करेंगें। इस समय आपकी मेहनत रंग ला सकती है। कम समय में कम मेहनत करके भी आपको अच्छा लाभ मिल सकता है। भाई-बहनों का प्यार व अपेक्षित सहयोग भी आपको इसम समय मिल सकता है। सप्ताह के उतरते दो दिनों में चंद्रमा आपके सुख भाव में विचरण करेंगें जो आपको सफलता का आभास और एक सूक्ष्म योग देगा। अपनी बुद्धिमता से इस अवसर का लाभ आप उठा सकते हैं। सप्ताह के अंतिम दिनों में पंचम चंद्रमा आपको संतान के साथ समय बिताने, उनके बारे में सोचते रहने के योग बना रहे हैं।
|
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने गुरुवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को उनकी 'कोई यूपीए नहीं है' टिप्पणी के लिए लताड़ा और कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम 'पीएम मोदी की मुखबिर' हैं और विपक्ष की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के पास लोकप्रिय वोटों का केवल 4% है, जबकि कांग्रेस के पास अभी भी देश के लोकप्रिय वोटों का 20% है। उन्होंने आगे टीएमसी सुप्रीमो से सवाल भी किया और कहा- "क्या आप 20% वोटों के इस हिस्से के बिना मोदी से लड़ सकते हैं'" उन्होंने कहा, "वह मोदी की मुखबिर बनकर कांग्रेस और विपक्ष को तोड़ना और कमजोर करना चाहती हैं।"
जब उनसे ममता द्वारा मुंबई दौरे पर कथित तौर पर राष्ट्रगान का अपमान करने के बारे में पूछा गया तो कांग्रेस नेता ने कहा कि "वह नहीं जानती कि राष्ट्रगान का सम्मान कैसे किया जाता है। वह देश के लिए कुछ करने की तुलना में अपने भतीजे की तारीफ करने में ज्यादा रुचि रखती हैं। कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और इसी तरह वह विभिन्न राज्यों में मुद्दों को देखती है।"
इससे पहले बुधवार को चौधरी ने आरोप लगाया था कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी कांग्रेस पार्टी को कमजोर करना चाहती हैं और एनसीपी प्रमुख शरद पवार (NCP chief Sharad Pawar) को मामले में घसीटा जा रहा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और शरद पवार ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और एनडीए के खिलाफ तीसरे मोर्चे के गठन का संकेत दिया था।
यह पूछे जाने पर कि इस मामले में शरद पवार का नाम क्यों घसीटा जा रहा है, अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से कहा, "यह पवार को बदनाम करने की ममता की साजिश है।"
पार्टियों को एकजुट करने और बीजेपी से निपटने के लिए ममता की मंशा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "बीजेपी अपनी जमीन खो चुकी है लेकिन ममता ने उन्हें ऑक्सीजन देने का फैसला किया है।" उन्होंने आगे दावा किया कि 'ममता बनर्जी का दृष्टिकोण हमेशा कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने का रहा है'।
गौरतलब है कि ये विवाद बुधवार को सामने आया था जब शरद पवार से मुलाकात करने के बाद ममता बनर्जी ने कहा, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) क्या है' कोई यूपीए नहीं है।"
|
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को उनकी 'कोई यूपीए नहीं है' टिप्पणी के लिए लताड़ा और कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम 'पीएम मोदी की मुखबिर' हैं और विपक्ष की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के पास लोकप्रिय वोटों का केवल चार% है, जबकि कांग्रेस के पास अभी भी देश के लोकप्रिय वोटों का बीस% है। उन्होंने आगे टीएमसी सुप्रीमो से सवाल भी किया और कहा- "क्या आप बीस% वोटों के इस हिस्से के बिना मोदी से लड़ सकते हैं'" उन्होंने कहा, "वह मोदी की मुखबिर बनकर कांग्रेस और विपक्ष को तोड़ना और कमजोर करना चाहती हैं।" जब उनसे ममता द्वारा मुंबई दौरे पर कथित तौर पर राष्ट्रगान का अपमान करने के बारे में पूछा गया तो कांग्रेस नेता ने कहा कि "वह नहीं जानती कि राष्ट्रगान का सम्मान कैसे किया जाता है। वह देश के लिए कुछ करने की तुलना में अपने भतीजे की तारीफ करने में ज्यादा रुचि रखती हैं। कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और इसी तरह वह विभिन्न राज्यों में मुद्दों को देखती है।" इससे पहले बुधवार को चौधरी ने आरोप लगाया था कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी कांग्रेस पार्टी को कमजोर करना चाहती हैं और एनसीपी प्रमुख शरद पवार को मामले में घसीटा जा रहा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और शरद पवार ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और एनडीए के खिलाफ तीसरे मोर्चे के गठन का संकेत दिया था। यह पूछे जाने पर कि इस मामले में शरद पवार का नाम क्यों घसीटा जा रहा है, अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से कहा, "यह पवार को बदनाम करने की ममता की साजिश है।" पार्टियों को एकजुट करने और बीजेपी से निपटने के लिए ममता की मंशा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "बीजेपी अपनी जमीन खो चुकी है लेकिन ममता ने उन्हें ऑक्सीजन देने का फैसला किया है।" उन्होंने आगे दावा किया कि 'ममता बनर्जी का दृष्टिकोण हमेशा कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने का रहा है'। गौरतलब है कि ये विवाद बुधवार को सामने आया था जब शरद पवार से मुलाकात करने के बाद ममता बनर्जी ने कहा, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन क्या है' कोई यूपीए नहीं है।"
|
अलवरः लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ता देख राजस्थान में शासन और प्रशासन के साथ अब वहां के ग्रामीण भी एकजुट होकर खड़े हो गए है जहां पर ग्रामीणों ने खुद ही पांच दिन के लॉकडाउन का फैसला लिया है जो एक सरहानीय कदम है।
आपको बता दें कि राजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ उपखंड क्षेत्र के नोगाँवा कस्बे में कोरोना के आठ मरीज सामने आने के बाद ग्रामीणों ने खुद पांच दिन का लॉक डाउन करने का फैसला लिया है।
सूत्रों ने बताया कि यह लॅाक डाउन रविवार से शुरू हो गया। इस लॉकडाउन के दौरान कस्बे की हर दुकान बंद रहेगीं। यहाँ तक कि मेडिकल की दुकानें भी नहीं खुलेंगी। सभी को पांच दिन तक घरों में ही रहने के लिए कहा गया है। पांच दिन तक लॉक डाउन करने का फैसला शनिवार को व्यापारियों की हुई बैठक में लिया गया। बैठक में कोरोना के मरीजों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि नोगाँवा कस्बे में जिस सरकारी कर्मचारी के यह कोरोना संक्रमण पाया गया उसी कर्मचारी के संपर्क में आने से बाद ही इतने मामले बढ़े हैं।
|
अलवरः लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ता देख राजस्थान में शासन और प्रशासन के साथ अब वहां के ग्रामीण भी एकजुट होकर खड़े हो गए है जहां पर ग्रामीणों ने खुद ही पांच दिन के लॉकडाउन का फैसला लिया है जो एक सरहानीय कदम है। आपको बता दें कि राजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ उपखंड क्षेत्र के नोगाँवा कस्बे में कोरोना के आठ मरीज सामने आने के बाद ग्रामीणों ने खुद पांच दिन का लॉक डाउन करने का फैसला लिया है। सूत्रों ने बताया कि यह लॅाक डाउन रविवार से शुरू हो गया। इस लॉकडाउन के दौरान कस्बे की हर दुकान बंद रहेगीं। यहाँ तक कि मेडिकल की दुकानें भी नहीं खुलेंगी। सभी को पांच दिन तक घरों में ही रहने के लिए कहा गया है। पांच दिन तक लॉक डाउन करने का फैसला शनिवार को व्यापारियों की हुई बैठक में लिया गया। बैठक में कोरोना के मरीजों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि नोगाँवा कस्बे में जिस सरकारी कर्मचारी के यह कोरोना संक्रमण पाया गया उसी कर्मचारी के संपर्क में आने से बाद ही इतने मामले बढ़े हैं।
|
वेगवती अनर्गल व्यंजना और वेदना के अधिक विद्युत स्वरूप की आकांक्षा भी बढ़ने लगी। पर इसके साथ ही बिल्कुल पुराने ढंग की ओर भी लोग नहीं चाहते थे जिसमें परंपरागत ( Conventional ) वाव्य उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक आदि की प्रधानता हो गई थी। वे मूर्तिमा अवश्य चाहते थे, पर वाच्य अलंकारों के रूप में नहीं, लक्षणा के रूप में, जैसी कि अंगरेज़ी की कविताओं में रहती है। इसी प्रकार तथ्यों के सादृश्यविधान के लिये भी परिष्कृत रुचि के अनुसार 'दृष्टांत आदि का स्थूल विधान वांछित न था, अन्योक्ति-पद्धति ही समीचीन समझ पड़ती थी।
नारी-शिक्षा अनादरत जे लोग अनारी । स्वदेश-अवनति प्रचंड पातक-अधिकारी ।। निरखि हाल मेरो प्रथम लेहु समुझि सब कोइ । विद्या-बल लहि मति परम अवला सबला होइ ॥ लखौ अजमाइ
श्रीवियोगी हरि व्रजभूमि, ब्रजभाषा और वजपति के अनन्य उपासक हैं। ऐसे प्रेमी रसिक जीव इस रूखे ज़माने में बहुत कम दिखाई पड़ते हैं। इन्होंने अधिकतर पुराने कृष्णोपासक भक्त कवियों की पद्धति पर बहुत से रसीले पदों की रचना की है जिन्हें पढ़कर आजकल के रसिक भक्त भी "बलिहारी है !" बिना कहे नहीं रह सकते। अपनी अनन्य प्रेमधारा से सिर निकाल कर कभी कभी ये देश की दशा पर भी दृष्टिपात करते हैं। अभी हाल में आपने "बीरसतसई" नामक एक बड़ा काव्य दोहों में लिखा है जिसमें भारत के प्रसिद्ध प्रसिद्ध वीरों की प्रशस्तियाँ हैं। इस पर साहित्य सम्मेलन से इन्हें १२००) का पुरस्कार मिला है। इसके कुछ दोहे देखिएपावस ही में धनुष अज, नदी तीर ही तीर । रोदन ही में लाल हग, नौरस ही में वीर ।। जोरि नावँ सँग 'सिंह' पद करत सिंह बदनाम । हैहौ कैसे सिंह तुम करि सृगाल के काम ? ॥ या तेरी तरवार में नहिं कायर अब आब । दिल हू तेरो बुझि गयो वामें नेक नताब ।
इन सब आकांक्षाओं की चटपट पूर्ति के लिये कुछ लोगों ने इधर उधर आँखें दौड़ाई। कोमल पद-विन्यास के लिये तो बँगला काफ़ी दिखाई पड़ी। साथ ही रवींद्र बाबू के रहस्यवाद की रचनाएँ भी सामने आ रही थीं जिनमें अन्योक्ति-पद्धति पर बहुत ही सार्मिक मूर्त्तिमता थी । रही अनूठी लाक्षणिकता, वह अंगरेज़ी-साहित्य में लबालय भरी दिखाई पड़ी। वेदना की विवृति के लिये उर्दू साहित्य बहुत दूर नहीं था। फल यह हुआ कि जो जिधर दौड़ा, वह उधर हो ।
'प्रतिवर्त्तन' का सुसंगत और उचित रूप इस तृतीय उत्थान के कुछ पहले ही बा० जयशंकर प्रसाद की रच नाओं में दिखाई पड़ने लगा था । वेदना की विकृति थोड़ी बहुत मूर्णिमा के साथ उनकी कविताओं में आने लगी थी। पर और लोग जो इधर उधर दौड़ लगाने लगे हैं, उसके कारण एक विलक्षण साहित्यिक दृश्य हमारी हिंदी में खड़ा होता दिखाई दे रहा है। लाक्षणिकता लाने के लिये कुछ लोगों ने अंगरेज़ी- कविता का पहा पकड़ा है और उसकी लाक्षणिक पदावलियों का ज्यों है का त्यों अनुवाद करके हिंदीवालों को चमकृत करने का प्रयत्न करने लगे हैं। कहीं "अतीत का स्वप्न अनिल" है, कहीं "स्वमिल आभा"। कहीं "स्वर्ण-स्वप्न' है, कहीं "कनक-छाया" । इसी प्रकार अंगरेज़ी के विशेषण विप. ययय अलंकार की भी बड़ी खींच है। इन विलक्षणताओं से युक्त जो कविता होती है, वह 'छायावाद' की कविता
तृतीय उत्थान
द्विवेदी जी के प्रभाव से जिस प्रकार के गद्यवत् और इतिवृत्तात्मक (Matter of fact ) पद्यों का खड़ी . बोली में ढेर लग रहा था, उसके विरुद्ध प्रतिवर्त्तन _(Reaction ) होना अवश्यम्भावी था। इस तृतीय उत्थान के पहले ही उसके लक्षण दिखाई पड़ने लगे । कुछ लोग खड़ी बोली की कविता में कोमल पदविन्यास तथा कुछ अनूठी लाक्षणिकता और मूर्सिंमत्ता के लिये आकुल होने लगे। इसके अतिरिक्त जिस दबी हुई और अशक्त भाषा में भावों की व्यंजना होने लगी थी, उससे भी सन्तोष नहीं था। कल्पना की ऊँची उड़ान, भाव की
कहलाती है; और साधारणतः लोग ऐसी सब कविताओं को 'रहस्यवाद' के अंतर्गत समझा करते हैं। पर अलत में अधिकतर का प्रकृत 'रहस्यवाद' से कोई संबंध नहीं रहस्यवाद की वास्तविक कविता का हिंदी जगत् को अवश्य स्वागत करना चाहिए। जैसे कविता के और कई विभाग हैं, वैसे ही एक 'रहस्यवाद' का होना भी परम आवश्यक है। पर यह कहना कि 'रहस्यवाद' की कविता वर्तमान की एक मात्र कविता है, लोगों को भ्रम में डालना है अंगरेज़ी के वर्तमान कवियों में रहस्यवाद की कविता लिखनेवाले कितने हैं ?
इस तृतीय उत्थान में 'प्रतिवर्त्तन' की गहरी आव श्यकता थी, इसमें तो कोई सन्देह नहीं। हम चाहते है कि प्रतिवर्तन का आरम्भ हो, पर अपने स्वतंत्र ढंग पर। इधर उधर की लपक रूपक से काम न चलेगा । 'प्रतिवर्त्तन' का होना 'रहस्यवाद' की कविताओं में ही नहीं, और प्रकार की कविताओं में भी आवश्यक है। पर यह नकूल के रूप में न हो। हिंदी में लाक्षणिक शक्ति किसी भाषा से कम नहीं है। इसके भीतर स्वतंत्र व्यंजन-प्रणालियों का विकास बहुत अच्छी तरह हो
रामचंद्र शुक्ल
Printed by G. K. Gurjar, at Sri Lakshmi Narayan Press, Benazes City.
|
वेगवती अनर्गल व्यंजना और वेदना के अधिक विद्युत स्वरूप की आकांक्षा भी बढ़ने लगी। पर इसके साथ ही बिल्कुल पुराने ढंग की ओर भी लोग नहीं चाहते थे जिसमें परंपरागत वाव्य उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक आदि की प्रधानता हो गई थी। वे मूर्तिमा अवश्य चाहते थे, पर वाच्य अलंकारों के रूप में नहीं, लक्षणा के रूप में, जैसी कि अंगरेज़ी की कविताओं में रहती है। इसी प्रकार तथ्यों के सादृश्यविधान के लिये भी परिष्कृत रुचि के अनुसार 'दृष्टांत आदि का स्थूल विधान वांछित न था, अन्योक्ति-पद्धति ही समीचीन समझ पड़ती थी। नारी-शिक्षा अनादरत जे लोग अनारी । स्वदेश-अवनति प्रचंड पातक-अधिकारी ।। निरखि हाल मेरो प्रथम लेहु समुझि सब कोइ । विद्या-बल लहि मति परम अवला सबला होइ ॥ लखौ अजमाइ श्रीवियोगी हरि व्रजभूमि, ब्रजभाषा और वजपति के अनन्य उपासक हैं। ऐसे प्रेमी रसिक जीव इस रूखे ज़माने में बहुत कम दिखाई पड़ते हैं। इन्होंने अधिकतर पुराने कृष्णोपासक भक्त कवियों की पद्धति पर बहुत से रसीले पदों की रचना की है जिन्हें पढ़कर आजकल के रसिक भक्त भी "बलिहारी है !" बिना कहे नहीं रह सकते। अपनी अनन्य प्रेमधारा से सिर निकाल कर कभी कभी ये देश की दशा पर भी दृष्टिपात करते हैं। अभी हाल में आपने "बीरसतसई" नामक एक बड़ा काव्य दोहों में लिखा है जिसमें भारत के प्रसिद्ध प्रसिद्ध वीरों की प्रशस्तियाँ हैं। इस पर साहित्य सम्मेलन से इन्हें एक हज़ार दो सौ) का पुरस्कार मिला है। इसके कुछ दोहे देखिएपावस ही में धनुष अज, नदी तीर ही तीर । रोदन ही में लाल हग, नौरस ही में वीर ।। जोरि नावँ सँग 'सिंह' पद करत सिंह बदनाम । हैहौ कैसे सिंह तुम करि सृगाल के काम ? ॥ या तेरी तरवार में नहिं कायर अब आब । दिल हू तेरो बुझि गयो वामें नेक नताब । इन सब आकांक्षाओं की चटपट पूर्ति के लिये कुछ लोगों ने इधर उधर आँखें दौड़ाई। कोमल पद-विन्यास के लिये तो बँगला काफ़ी दिखाई पड़ी। साथ ही रवींद्र बाबू के रहस्यवाद की रचनाएँ भी सामने आ रही थीं जिनमें अन्योक्ति-पद्धति पर बहुत ही सार्मिक मूर्त्तिमता थी । रही अनूठी लाक्षणिकता, वह अंगरेज़ी-साहित्य में लबालय भरी दिखाई पड़ी। वेदना की विवृति के लिये उर्दू साहित्य बहुत दूर नहीं था। फल यह हुआ कि जो जिधर दौड़ा, वह उधर हो । 'प्रतिवर्त्तन' का सुसंगत और उचित रूप इस तृतीय उत्थान के कुछ पहले ही बाशून्य जयशंकर प्रसाद की रच नाओं में दिखाई पड़ने लगा था । वेदना की विकृति थोड़ी बहुत मूर्णिमा के साथ उनकी कविताओं में आने लगी थी। पर और लोग जो इधर उधर दौड़ लगाने लगे हैं, उसके कारण एक विलक्षण साहित्यिक दृश्य हमारी हिंदी में खड़ा होता दिखाई दे रहा है। लाक्षणिकता लाने के लिये कुछ लोगों ने अंगरेज़ी- कविता का पहा पकड़ा है और उसकी लाक्षणिक पदावलियों का ज्यों है का त्यों अनुवाद करके हिंदीवालों को चमकृत करने का प्रयत्न करने लगे हैं। कहीं "अतीत का स्वप्न अनिल" है, कहीं "स्वमिल आभा"। कहीं "स्वर्ण-स्वप्न' है, कहीं "कनक-छाया" । इसी प्रकार अंगरेज़ी के विशेषण विप. ययय अलंकार की भी बड़ी खींच है। इन विलक्षणताओं से युक्त जो कविता होती है, वह 'छायावाद' की कविता तृतीय उत्थान द्विवेदी जी के प्रभाव से जिस प्रकार के गद्यवत् और इतिवृत्तात्मक पद्यों का खड़ी . बोली में ढेर लग रहा था, उसके विरुद्ध प्रतिवर्त्तन _ होना अवश्यम्भावी था। इस तृतीय उत्थान के पहले ही उसके लक्षण दिखाई पड़ने लगे । कुछ लोग खड़ी बोली की कविता में कोमल पदविन्यास तथा कुछ अनूठी लाक्षणिकता और मूर्सिंमत्ता के लिये आकुल होने लगे। इसके अतिरिक्त जिस दबी हुई और अशक्त भाषा में भावों की व्यंजना होने लगी थी, उससे भी सन्तोष नहीं था। कल्पना की ऊँची उड़ान, भाव की कहलाती है; और साधारणतः लोग ऐसी सब कविताओं को 'रहस्यवाद' के अंतर्गत समझा करते हैं। पर अलत में अधिकतर का प्रकृत 'रहस्यवाद' से कोई संबंध नहीं रहस्यवाद की वास्तविक कविता का हिंदी जगत् को अवश्य स्वागत करना चाहिए। जैसे कविता के और कई विभाग हैं, वैसे ही एक 'रहस्यवाद' का होना भी परम आवश्यक है। पर यह कहना कि 'रहस्यवाद' की कविता वर्तमान की एक मात्र कविता है, लोगों को भ्रम में डालना है अंगरेज़ी के वर्तमान कवियों में रहस्यवाद की कविता लिखनेवाले कितने हैं ? इस तृतीय उत्थान में 'प्रतिवर्त्तन' की गहरी आव श्यकता थी, इसमें तो कोई सन्देह नहीं। हम चाहते है कि प्रतिवर्तन का आरम्भ हो, पर अपने स्वतंत्र ढंग पर। इधर उधर की लपक रूपक से काम न चलेगा । 'प्रतिवर्त्तन' का होना 'रहस्यवाद' की कविताओं में ही नहीं, और प्रकार की कविताओं में भी आवश्यक है। पर यह नकूल के रूप में न हो। हिंदी में लाक्षणिक शक्ति किसी भाषा से कम नहीं है। इसके भीतर स्वतंत्र व्यंजन-प्रणालियों का विकास बहुत अच्छी तरह हो रामचंद्र शुक्ल Printed by G. K. Gurjar, at Sri Lakshmi Narayan Press, Benazes City.
|
International Yoga Day मूल रूप से रूस में जन्मी यूजिनी पीटरसन भारत आकर इंद्रा देवी बनीं और इसके बाद पश्चिमी देशों की पहली महिला योग-शिक्षिका बनकर उन्होंने 1930 के दशक से लेकर 2002 में अपनी मृत्यु तक चीन भारत मैक्सिको रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में योग सिखाया।
नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। International Yoga Day: इंद्रा देवी नाम पढ़ के आपने इन्हें भारतीय ही माना होगा लेकिन मैं आपको बता दूं कि आप गलत हैं। आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि इंद्रा देवी भारतीय नहीं बल्कि एक विदेशी थीं।
हम लोगों के लिए भेले ही यूजीन पीटरसन का नाम नया और अनसुना हो, लेकिन, योगा के चाहने वालों के यह नाम कोई नया नहीं है। यह वो नाम है जिसमें जिसने शरीर को स्वस्थ रखने की योग पद्धति को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने में मदद की।
12 मई 1899 को लातविया की राजधानी रीगा में जन्मी इंद्रा देवी का असली नाम यूजिनी पीटरसन था। इंद्रा की मां एक कुलीन घराने की रूसी थीं तो पिता एक स्वीडिश बैंकर थे। 15 साल की उम्र में इंद्रा ने योग पर लिखी एक किताब को पढ़कर भारत के प्रति इस कदर मुग्ध हुईं कि भारत आने से वह खुद को रोक नहीं पाईं। यहीं से उन्हें वर्षों पुरानी भारतीय योग पद्धति के बारे में भी पता चला। उनके लिए यह जुड़ाव इतना गहरा हो गया कि महज पंद्रह वर्ष की आयु में ही उन्होंने भारत आने का मन बना लिया था। इसका मकसद था भारत जाकर योग सीखना और सिखाना।
जब रूस में गृह युद्ध जैसी हालात पैदा हो गए तो इंद्रा मां के साथ 1917 में वहां से भागकर लातविया चली गईं। फिर पोलैंड, जहां उन्होंने एक एक्ट्रैस और डांसर के तौर पर नाम कमाना शुरू किया। 1926 में उन्होंने थियोसोफिकल सोसायटी की एक मीटिंग में जिद्दू कृष्णामूर्ति को मंत्रोच्चार करते सुना। संस्कृत मंत्रों का उनके ऊपर ऐसा असर हुआ कि उन्हें कोई ताकत अपने पास बुला रही है। बस उसी दिन से उनका जीवन बदल गया। वो भारत के प्रति मंत्रमुग्ध होती चल गईं।
1927 में जब एक धनी जर्मन बैंकर हेर्मन बोल्म ने इंद्रा के सामने विवाह-प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने हां कह दिया लेकिन, इस शर्त पर कि पहले वह उनकी भारत-यात्रा का ख़र्च उठाएगा। बोल्म की दी हुई सगाई की अंगूठी पहन कर इंद्रा भारत गईं। तीन महीने बाद भारत से लौटते ही उन्होंने बैंकर को अंगूठी लौटा दी। कहा, 'क्षमा करना, मेरी जगह तो भारत में है। ' इंद्रा ने अपने सारे गहने-ज़ेवर बेचे और एक बार फिर चल पड़ीं भारत की ओर। इंद्रा भले ही भारतीय नहीं थीं, लेकिन भारतीयता उनके मन में बसती थी।
भारत पहुंचते ही उन्होंने अपना एक नया नाम रख लिया- इंद्रा देवी। वे बंबई के फ़िल्म जगत में नर्तकी और अभिनेत्री का काम करने लगीं। वहीं, उनका चेकोस्लोवाक वाणिज्य दूतावास के एक अताशी यान स्त्राकाती से परिचय हुआ। 1930 में दोनों ने शादी भी कर ली। अपने पति के माध्यम से ही इंद्रा देवी मैसूर के महाराजा कृष्णराजेंद्र वड़ेयार से मिलीं।
योगगुरु तिरुमलाई कृष्णमाचार्य उनके राजमहल में ही योगशिक्षा दिया करते थे। इंद्रा देवी ने जब उनसे कहा कि वे भी उनसे योगसाधना सीखना चाहती हैं, तो कृष्णमाचार्य ने यह कह कर मना कर दिया कि वे एक विदेशी और महिला हैं। मैसूर के महाराजा कृष्णराजेंद्र वड़ेयार के अनुरोध करने पर ही मशहूर योग गुरू कृष्णमाचार्य ने उन्हें छात्रा के रूप में स्वीकार किया। मैसूर पैलेस की योगशाला में योग सीखने वाली वो पहली विदेशी महिला थीं।
योग सीखने के बाद 1938 में पति के साथ वो शंघाई चली गईं। द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने तक वे शंघाई में ही रहीं। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रवादी नेता च्यांग काइ-शेक की पत्नी के घर में योगशिक्षा का स्कूल चलाने लगीं। चीन में यह पहला योग स्कूल था। युद्ध के अंत के बाद वे एक बार फिर भारत लौटीं।
- 1939 में उन्होंने चीन में पहला योग स्कूल शंघाई में खोला।
- यह स्कूल राष्ट्रवादी नेता च्यांग काई शेक की पत्नी के घर पर खोला गया था।
- कैलिफोर्निया में भी उन्होंने योगा स्टूडियो खोला।
- इंद्रा देवी साड़ी पहनती थीं और खास तरीके से योगा सिखाती थीं।
- हॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी को उन्होंने योगा सिखाया जिसमें ग्रेटा गार्बो, इवा गेबोर और ग्लोरिया स्वेंसन जैसी हस्तियां शामिल हैं।
- हॉलीवुड सेलिब्रिटी उनके पास योगा सीखने आने लगीं. इंद्रा देवी फेमस होने लगीं. वो हठ योग से लेकर प्राणायाम तक सिखाती थीं।
- इंद्रा देवी पांच भाषाएं धाराप्रवाह तरीके से बोलती थीं- मातृभाषा रूसी के अलावा अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रेंच और स्पेनिश।
- 1960 में उन्होंने मॉस्को जाकर तत्कालीन सोवियत संघ की कम्युनिस्ट सरकार से अनुरोध की थी कि वह भी सोवियत जनता को योग सीखने-करने की अनुमति प्रदान करे।
- वर्ष 2002 में योग शिक्षिका इंद्रा देवी का निधन हो गया।
इंद्रा देवी एक प्रेरक शिक्षक और योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थीं। उनके काम ने योग के अभ्यास को दुनिया भर में फैलाने और इसे सभी के लिए सुलभ बनाने में मदद की। वह एक सच्ची शिक्षिका थीं और उन सभी के लिए प्रेरणा थीं जो उन्हें जानते थे। उनकी विरासत उनके छात्रों और उन लोगों के माध्यम से जीवित रहेगी जो आज भी योग का अभ्यास कर रहे हैं।
योग का इतिहास काफी पुराना है। इसका इतिहास सिन्धु घाटी सभ्यता जितना पुराना है अगर हम ऐसा कहें तो यह गलत नहीं होगा। लेकिन वक़्त के साथ-साथ योग ने अपने को बहुत बदला है। आज हम जिस रूप में योग को जानते हैं उसका श्रेय तिरुमलाई कृष्णमाचार्य को जाता है जिन्हें मॉडर्न योग का आविष्कारक भी कहा जाता है। आज हम योग को जिस रूप में, जिन मुद्राओं, जिन आसनों के लिए जानते हैं उसमे शायद ही ऐसा कुछ हो जिस पर कृष्णमाचार्य की छाप न हो।
|
International Yoga Day मूल रूप से रूस में जन्मी यूजिनी पीटरसन भारत आकर इंद्रा देवी बनीं और इसके बाद पश्चिमी देशों की पहली महिला योग-शिक्षिका बनकर उन्होंने एक हज़ार नौ सौ तीस के दशक से लेकर दो हज़ार दो में अपनी मृत्यु तक चीन भारत मैक्सिको रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में योग सिखाया। नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। International Yoga Day: इंद्रा देवी नाम पढ़ के आपने इन्हें भारतीय ही माना होगा लेकिन मैं आपको बता दूं कि आप गलत हैं। आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि इंद्रा देवी भारतीय नहीं बल्कि एक विदेशी थीं। हम लोगों के लिए भेले ही यूजीन पीटरसन का नाम नया और अनसुना हो, लेकिन, योगा के चाहने वालों के यह नाम कोई नया नहीं है। यह वो नाम है जिसमें जिसने शरीर को स्वस्थ रखने की योग पद्धति को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने में मदद की। बारह मई एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे को लातविया की राजधानी रीगा में जन्मी इंद्रा देवी का असली नाम यूजिनी पीटरसन था। इंद्रा की मां एक कुलीन घराने की रूसी थीं तो पिता एक स्वीडिश बैंकर थे। पंद्रह साल की उम्र में इंद्रा ने योग पर लिखी एक किताब को पढ़कर भारत के प्रति इस कदर मुग्ध हुईं कि भारत आने से वह खुद को रोक नहीं पाईं। यहीं से उन्हें वर्षों पुरानी भारतीय योग पद्धति के बारे में भी पता चला। उनके लिए यह जुड़ाव इतना गहरा हो गया कि महज पंद्रह वर्ष की आयु में ही उन्होंने भारत आने का मन बना लिया था। इसका मकसद था भारत जाकर योग सीखना और सिखाना। जब रूस में गृह युद्ध जैसी हालात पैदा हो गए तो इंद्रा मां के साथ एक हज़ार नौ सौ सत्रह में वहां से भागकर लातविया चली गईं। फिर पोलैंड, जहां उन्होंने एक एक्ट्रैस और डांसर के तौर पर नाम कमाना शुरू किया। एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में उन्होंने थियोसोफिकल सोसायटी की एक मीटिंग में जिद्दू कृष्णामूर्ति को मंत्रोच्चार करते सुना। संस्कृत मंत्रों का उनके ऊपर ऐसा असर हुआ कि उन्हें कोई ताकत अपने पास बुला रही है। बस उसी दिन से उनका जीवन बदल गया। वो भारत के प्रति मंत्रमुग्ध होती चल गईं। एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में जब एक धनी जर्मन बैंकर हेर्मन बोल्म ने इंद्रा के सामने विवाह-प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने हां कह दिया लेकिन, इस शर्त पर कि पहले वह उनकी भारत-यात्रा का ख़र्च उठाएगा। बोल्म की दी हुई सगाई की अंगूठी पहन कर इंद्रा भारत गईं। तीन महीने बाद भारत से लौटते ही उन्होंने बैंकर को अंगूठी लौटा दी। कहा, 'क्षमा करना, मेरी जगह तो भारत में है। ' इंद्रा ने अपने सारे गहने-ज़ेवर बेचे और एक बार फिर चल पड़ीं भारत की ओर। इंद्रा भले ही भारतीय नहीं थीं, लेकिन भारतीयता उनके मन में बसती थी। भारत पहुंचते ही उन्होंने अपना एक नया नाम रख लिया- इंद्रा देवी। वे बंबई के फ़िल्म जगत में नर्तकी और अभिनेत्री का काम करने लगीं। वहीं, उनका चेकोस्लोवाक वाणिज्य दूतावास के एक अताशी यान स्त्राकाती से परिचय हुआ। एक हज़ार नौ सौ तीस में दोनों ने शादी भी कर ली। अपने पति के माध्यम से ही इंद्रा देवी मैसूर के महाराजा कृष्णराजेंद्र वड़ेयार से मिलीं। योगगुरु तिरुमलाई कृष्णमाचार्य उनके राजमहल में ही योगशिक्षा दिया करते थे। इंद्रा देवी ने जब उनसे कहा कि वे भी उनसे योगसाधना सीखना चाहती हैं, तो कृष्णमाचार्य ने यह कह कर मना कर दिया कि वे एक विदेशी और महिला हैं। मैसूर के महाराजा कृष्णराजेंद्र वड़ेयार के अनुरोध करने पर ही मशहूर योग गुरू कृष्णमाचार्य ने उन्हें छात्रा के रूप में स्वीकार किया। मैसूर पैलेस की योगशाला में योग सीखने वाली वो पहली विदेशी महिला थीं। योग सीखने के बाद एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में पति के साथ वो शंघाई चली गईं। द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने तक वे शंघाई में ही रहीं। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रवादी नेता च्यांग काइ-शेक की पत्नी के घर में योगशिक्षा का स्कूल चलाने लगीं। चीन में यह पहला योग स्कूल था। युद्ध के अंत के बाद वे एक बार फिर भारत लौटीं। - एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में उन्होंने चीन में पहला योग स्कूल शंघाई में खोला। - यह स्कूल राष्ट्रवादी नेता च्यांग काई शेक की पत्नी के घर पर खोला गया था। - कैलिफोर्निया में भी उन्होंने योगा स्टूडियो खोला। - इंद्रा देवी साड़ी पहनती थीं और खास तरीके से योगा सिखाती थीं। - हॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी को उन्होंने योगा सिखाया जिसमें ग्रेटा गार्बो, इवा गेबोर और ग्लोरिया स्वेंसन जैसी हस्तियां शामिल हैं। - हॉलीवुड सेलिब्रिटी उनके पास योगा सीखने आने लगीं. इंद्रा देवी फेमस होने लगीं. वो हठ योग से लेकर प्राणायाम तक सिखाती थीं। - इंद्रा देवी पांच भाषाएं धाराप्रवाह तरीके से बोलती थीं- मातृभाषा रूसी के अलावा अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रेंच और स्पेनिश। - एक हज़ार नौ सौ साठ में उन्होंने मॉस्को जाकर तत्कालीन सोवियत संघ की कम्युनिस्ट सरकार से अनुरोध की थी कि वह भी सोवियत जनता को योग सीखने-करने की अनुमति प्रदान करे। - वर्ष दो हज़ार दो में योग शिक्षिका इंद्रा देवी का निधन हो गया। इंद्रा देवी एक प्रेरक शिक्षक और योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थीं। उनके काम ने योग के अभ्यास को दुनिया भर में फैलाने और इसे सभी के लिए सुलभ बनाने में मदद की। वह एक सच्ची शिक्षिका थीं और उन सभी के लिए प्रेरणा थीं जो उन्हें जानते थे। उनकी विरासत उनके छात्रों और उन लोगों के माध्यम से जीवित रहेगी जो आज भी योग का अभ्यास कर रहे हैं। योग का इतिहास काफी पुराना है। इसका इतिहास सिन्धु घाटी सभ्यता जितना पुराना है अगर हम ऐसा कहें तो यह गलत नहीं होगा। लेकिन वक़्त के साथ-साथ योग ने अपने को बहुत बदला है। आज हम जिस रूप में योग को जानते हैं उसका श्रेय तिरुमलाई कृष्णमाचार्य को जाता है जिन्हें मॉडर्न योग का आविष्कारक भी कहा जाता है। आज हम योग को जिस रूप में, जिन मुद्राओं, जिन आसनों के लिए जानते हैं उसमे शायद ही ऐसा कुछ हो जिस पर कृष्णमाचार्य की छाप न हो।
|
अबु धाबी। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की तरह भारत के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव का भी कहना है कि उनमें भविष्यवाणी करने की क्षमता है और इसमें उनकी दूसरी एकदिवसीय हैट्रिक की भविष्यवाणी भी शामिल है। कुलदीप देश के एकमात्र गेंदबाज हैं जिन्होंने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में दो हैट्रिक बनाई हैं। उन्होंने 2017 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैट्रिक के दो साल बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की।
|
अबु धाबी। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की तरह भारत के चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव का भी कहना है कि उनमें भविष्यवाणी करने की क्षमता है और इसमें उनकी दूसरी एकदिवसीय हैट्रिक की भविष्यवाणी भी शामिल है। कुलदीप देश के एकमात्र गेंदबाज हैं जिन्होंने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में दो हैट्रिक बनाई हैं। उन्होंने दो हज़ार सत्रह में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैट्रिक के दो साल बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की।
|
सर्दियों के साथ - साथ यह कोरोना वायरस (Coronavirus) का भी मौसम है। हर रोज़ हमें कोविड - 19 ओमिक्रोन (Covid - 19 Omicron) के हजारों केसेस सुनने को मिल रहे हैं। ऐसे में सेहत का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि एक छोटा सा जुकाम भी आपके कोविड - 19 (Covid - 19) से संक्रमित होने के जोखिम को बढ़ा सकता है।
बीते दिनों मुझे भी हल्की सर्दी खांसी हो गई। वैसे तो सर्दी - खांसी (Cough And Cold) के इलाज के लिए कई दवाएं हैं, लेकिन मेरी मम्मी ने मुझे घी (Ghee) और काली मिर्च (Black Pepper) खिलाया। यह कहकर कि इससे सर्दी जड़ से चली जाएगी। पहले तो मुझे यकीन नहीं था मगर फिर अगले दिन मुझे बेहतर महसूस हुआ।
जब घी और काली मिर्च के कॉम्बिनेशन के बारे में अधिक जानने की कोशिश की तो पता चला कि यह एक पुराना आयुर्वेदिक नुस्खा है। इसके फायदे जानने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।
अधिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए लॉगइन करें - हेल्थ शॉट्स हिन्दी।
|
सर्दियों के साथ - साथ यह कोरोना वायरस का भी मौसम है। हर रोज़ हमें कोविड - उन्नीस ओमिक्रोन के हजारों केसेस सुनने को मिल रहे हैं। ऐसे में सेहत का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि एक छोटा सा जुकाम भी आपके कोविड - उन्नीस से संक्रमित होने के जोखिम को बढ़ा सकता है। बीते दिनों मुझे भी हल्की सर्दी खांसी हो गई। वैसे तो सर्दी - खांसी के इलाज के लिए कई दवाएं हैं, लेकिन मेरी मम्मी ने मुझे घी और काली मिर्च खिलाया। यह कहकर कि इससे सर्दी जड़ से चली जाएगी। पहले तो मुझे यकीन नहीं था मगर फिर अगले दिन मुझे बेहतर महसूस हुआ। जब घी और काली मिर्च के कॉम्बिनेशन के बारे में अधिक जानने की कोशिश की तो पता चला कि यह एक पुराना आयुर्वेदिक नुस्खा है। इसके फायदे जानने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें। अधिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए लॉगइन करें - हेल्थ शॉट्स हिन्दी।
|
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः टीवी एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। इतना ही नहीं तुनिशा मामले में फिर एक नया खुलासा हुआ है। आरोपी शीजान ने पुलिस को बताया है कि उनका और तुनिशा का ब्रेकअप तीन महीने के अंदर ही हो गया था और दोनों के बीच में उम्र का भी फासला था। कुछ देर पहले खबर आई थी कि तुनिशा शर्मा का अंतिम संस्कार आज दोपहर तीन बजे होगा। लेकिन लेटेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब अंतिम संस्कार शाम को होगा।
|
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः टीवी एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। इतना ही नहीं तुनिशा मामले में फिर एक नया खुलासा हुआ है। आरोपी शीजान ने पुलिस को बताया है कि उनका और तुनिशा का ब्रेकअप तीन महीने के अंदर ही हो गया था और दोनों के बीच में उम्र का भी फासला था। कुछ देर पहले खबर आई थी कि तुनिशा शर्मा का अंतिम संस्कार आज दोपहर तीन बजे होगा। लेकिन लेटेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब अंतिम संस्कार शाम को होगा।
|
जानकारी के मुताबिक, एलओसी पर कितने जवानों की तैनाती की गई है, इसका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं मिल पाया लेकिन यह संख्या हजारो में है।
जम्मूः भीषण गर्मी के कारण इस बार एलओसी पर बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण, घुसपैठ का खतरा भयानक रूप से मंडराने लगा है। अधिकारियों ने इसे माना है कि कश्मीर के कई सेक्टरों से कई दर्जन आतंकी पिछले दिनों घुसने में कामयाब रहे थे और उनके खात्मे के लिए सेना बहुत बडे़ अभियान को भी छेड़ चुकी है। हालांकि कश्मीर की घुसपैठ के बाद आरंभ हुई सैनिक कार्रवाई की सच्चाई यह है कि सेना अभी तक इन आतंकियों को खोज नहीं पाई है।
रक्षाधिकारियों के बकौल, ऐसी की घटना पुनः न हो इसके लिए पूरी बर्फ के पिघलने से पहले ही पारंपारिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात कर देना जरूरी है। कितने अतिरिक्त सैनिकों को एलओसी और बार्डर पर भेजा गया है कोई आंकड़ा सरकारी तौर पर मुहैया नहीं करवाया गया है पर सूत्र कहते हैं कि ये संख्या हजारों में है।
इतना जरूर है कि सेना को एलओसी पर घुसपैठ तथा कश्मीर के भीतर आंतरिक आतंकवाद विरोधी अभियानों के दोहरे मोर्चे पर जूझने के लिए अब सेना सैनिकों की कमी इसलिए महसूस कर रही है क्योंकि उसकी सूचनाएं कहती हैं कि आतंकवादी एकसाथ दोहरा मोर्चा खोल सेना के लिए मुसीबतें पैदा कर सकते हैं। इसकी खातिर सेना को आतंकवाद विरोधी अभियानों में जुटे हुए सैनिकों को भी हटा कर एलओसी पर भेजने की मजूबरी के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
|
जानकारी के मुताबिक, एलओसी पर कितने जवानों की तैनाती की गई है, इसका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं मिल पाया लेकिन यह संख्या हजारो में है। जम्मूः भीषण गर्मी के कारण इस बार एलओसी पर बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण, घुसपैठ का खतरा भयानक रूप से मंडराने लगा है। अधिकारियों ने इसे माना है कि कश्मीर के कई सेक्टरों से कई दर्जन आतंकी पिछले दिनों घुसने में कामयाब रहे थे और उनके खात्मे के लिए सेना बहुत बडे़ अभियान को भी छेड़ चुकी है। हालांकि कश्मीर की घुसपैठ के बाद आरंभ हुई सैनिक कार्रवाई की सच्चाई यह है कि सेना अभी तक इन आतंकियों को खोज नहीं पाई है। रक्षाधिकारियों के बकौल, ऐसी की घटना पुनः न हो इसके लिए पूरी बर्फ के पिघलने से पहले ही पारंपारिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात कर देना जरूरी है। कितने अतिरिक्त सैनिकों को एलओसी और बार्डर पर भेजा गया है कोई आंकड़ा सरकारी तौर पर मुहैया नहीं करवाया गया है पर सूत्र कहते हैं कि ये संख्या हजारों में है। इतना जरूर है कि सेना को एलओसी पर घुसपैठ तथा कश्मीर के भीतर आंतरिक आतंकवाद विरोधी अभियानों के दोहरे मोर्चे पर जूझने के लिए अब सेना सैनिकों की कमी इसलिए महसूस कर रही है क्योंकि उसकी सूचनाएं कहती हैं कि आतंकवादी एकसाथ दोहरा मोर्चा खोल सेना के लिए मुसीबतें पैदा कर सकते हैं। इसकी खातिर सेना को आतंकवाद विरोधी अभियानों में जुटे हुए सैनिकों को भी हटा कर एलओसी पर भेजने की मजूबरी के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.