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शिव के प्रतीक अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं जिन्हें सभी भक्तजनों को जानना चाहिए। शिव के स्वरूप का विशिष्ट प्रभाव अपनी अलग-अलग प्रकृति को दर्शाता है। पौराणिक मान्यता से देखें तो शिव के प्रतीक हर आभूषण का विशेष प्रभाव तथा महत्व बताया गया है।
पैरों में कड़ा : यह अपने स्थिर तथा एकाग्रता सहित सुनियोजित चरणबद्ध स्थिति को दर्शाता है। योगीजन भी शिव के समान ही एक पैर में कड़ा धारण करते हैं। अघोरी स्वरूप में भी यह देखने को मिलता है।
मृगछाला : इस पर बैठकर साधना का प्रभाव बढ़ता है। मन की अस्थिरता दूर होती है। तपस्वी और साधना करने वाले साधक आज भी मृगासन या मृगछाला के आसन को ही अपनी साधना के लिए श्रेष्ठ मानते हैं।
रुद्राक्ष : यह एक फल की गुठली है। इसका उपयोग आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है। माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आंखों के जलबिंदु (आंसू) से हुई है। इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
नागदेवता : भगवान शिव परम योगी, परम ध्यानी व परम तपस्वी हैं। जब अमृत मंथन हुआ था, तब अमृत कलश के पूर्व गरल (विष) को उन्होंने कंठ में रखा था। जो भी विकार की अग्नि होती है, उन्हें दूर करने के लिए शिव ने विषैले नागों की माला पहनी।
खप्पर : माता अन्न्पूर्णा से शिव ने प्राणियों की क्षुधा शांति के निमित्त भिक्षा मांगी थी। इसका यह आशय है कि यदि हमारे द्वारा किसी प्राणी का कल्याण होता है, तो उसको प्रदान करना चाहिए।
डमरू : संसार का पहला वाद्य। इसके स्वर से वेदों के शब्दों की उत्पत्ति हुई इसलिए इसे नाद ब्रहम या स्वर ब्रह्म कहा गया है।
त्रिशूल : देवी जगदंबा की परम शक्ति त्रिशूल में समाहित है। यह संसार का समस्त परम तेजस्वी अस्त्र है जिसके माध्यम से युग-युगांतर में सृष्टि के विरुद्ध होने सोचने वाले राक्षसों का संहार किया गया है। इसमें राजसी, सात्विक और तामसी तीनों ही गुण समाहित हैं, जो समय-समय पर साधक को उपासना के माध्यम से प्राप्त होते रहते हैं।
शीश पर गंगा : संसार की पवित्र नदियों में से एक गंगा को जब पृथ्वी की विकास यात्रा के लिए आव्हान किया गया तो पृथ्वी की क्षमता गंगा के आवेग को सहने में असमर्थ थी, ऐसे में शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान देकर सिद्ध किया कि आवेग की अवस्था को दृढ़ संकल्प के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है।
चन्द्रमा : चूंकि चन्द्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है, चन्द्र आभा, प्रज्वल, धवल स्थितियों को प्रकाशित करता है, जो मन के शुभ विचारों से उत्पन्न होते हैं। ऐसी अवस्था में प्राणी अपने यथायोग्य श्रेष्ठ विचारों को पल्लवित करते हुए सृष्टि के कल्याण में आगे बढ़े।
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शिव के प्रतीक अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं जिन्हें सभी भक्तजनों को जानना चाहिए। शिव के स्वरूप का विशिष्ट प्रभाव अपनी अलग-अलग प्रकृति को दर्शाता है। पौराणिक मान्यता से देखें तो शिव के प्रतीक हर आभूषण का विशेष प्रभाव तथा महत्व बताया गया है। पैरों में कड़ा : यह अपने स्थिर तथा एकाग्रता सहित सुनियोजित चरणबद्ध स्थिति को दर्शाता है। योगीजन भी शिव के समान ही एक पैर में कड़ा धारण करते हैं। अघोरी स्वरूप में भी यह देखने को मिलता है। मृगछाला : इस पर बैठकर साधना का प्रभाव बढ़ता है। मन की अस्थिरता दूर होती है। तपस्वी और साधना करने वाले साधक आज भी मृगासन या मृगछाला के आसन को ही अपनी साधना के लिए श्रेष्ठ मानते हैं। रुद्राक्ष : यह एक फल की गुठली है। इसका उपयोग आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है। माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आंखों के जलबिंदु से हुई है। इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। नागदेवता : भगवान शिव परम योगी, परम ध्यानी व परम तपस्वी हैं। जब अमृत मंथन हुआ था, तब अमृत कलश के पूर्व गरल को उन्होंने कंठ में रखा था। जो भी विकार की अग्नि होती है, उन्हें दूर करने के लिए शिव ने विषैले नागों की माला पहनी। खप्पर : माता अन्न्पूर्णा से शिव ने प्राणियों की क्षुधा शांति के निमित्त भिक्षा मांगी थी। इसका यह आशय है कि यदि हमारे द्वारा किसी प्राणी का कल्याण होता है, तो उसको प्रदान करना चाहिए। डमरू : संसार का पहला वाद्य। इसके स्वर से वेदों के शब्दों की उत्पत्ति हुई इसलिए इसे नाद ब्रहम या स्वर ब्रह्म कहा गया है। त्रिशूल : देवी जगदंबा की परम शक्ति त्रिशूल में समाहित है। यह संसार का समस्त परम तेजस्वी अस्त्र है जिसके माध्यम से युग-युगांतर में सृष्टि के विरुद्ध होने सोचने वाले राक्षसों का संहार किया गया है। इसमें राजसी, सात्विक और तामसी तीनों ही गुण समाहित हैं, जो समय-समय पर साधक को उपासना के माध्यम से प्राप्त होते रहते हैं। शीश पर गंगा : संसार की पवित्र नदियों में से एक गंगा को जब पृथ्वी की विकास यात्रा के लिए आव्हान किया गया तो पृथ्वी की क्षमता गंगा के आवेग को सहने में असमर्थ थी, ऐसे में शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान देकर सिद्ध किया कि आवेग की अवस्था को दृढ़ संकल्प के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है। चन्द्रमा : चूंकि चन्द्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है, चन्द्र आभा, प्रज्वल, धवल स्थितियों को प्रकाशित करता है, जो मन के शुभ विचारों से उत्पन्न होते हैं। ऐसी अवस्था में प्राणी अपने यथायोग्य श्रेष्ठ विचारों को पल्लवित करते हुए सृष्टि के कल्याण में आगे बढ़े।
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सुपरस्टार अजय देवगन अब डायरेक्टर के साथ-साथ रैपर बन गए हैं. जी हां, अपनी नई फिल्म रनवे 34 के लिए अजय नए-नए अवतार धारण कर रहे हैं. पहले उन्होंने डायरेक्टर की कुर्सी पर राज किया और अब उन्होंने रैप की दुनिया में भी कदम रख दिया है. यह रैप अजय देवगन ने अपनी नई फिल्म के प्रमोशन के लिए किया है. उनके साथ नए रैप वीडियो में सभी के चहेते यशराज मुखाटे भी हैं.
यशराज मुखाटे और अजय देवगन ने बढ़िया रैप वीडियो बनाया है. इस वीडियो में दोनों फिल्म रनवे 34 के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं. यशराज ने फिल्म के ट्रेलर से अजय देवगन का सिगरेट वाला सीन अपने रैप के लिए उठाया है. इस सीन में पायलट अजय होठों में सिगरेट दबाए नजर आ रहे हैं. जब उन्हें सिगरेट पीने के लिए मना किया जाता है, तो वह कहते हैं- जलाया तो नहीं ना. यही रैप वीडियो की हुक लाइन है.
वीडियो में अजय, यशराज से कहते हैं- यशराज चल रनवे 34 के लिए एक ट्रैक बनाते हैं. इसपर यशराज कहते हैं- ठीक है सर. हम गाना स्टार्ट करेंगे और फिर उसमें एक डायलॉग डाला देंगे. मैं डायलॉग पर रील बनाऊंगा और यह मजेदार होगा. ' अजय देवगन का यह मजेदार और स्वैगभरा अवतार फैंस को खूब पसंद आ रहा है. इस वीडियो पर कई फैंस ने कमेंट किए हैं. यूजर्स ने अजय और उनके वीडियो को सुपर कूल, किलर और सुपर्ब बताया है.
फिल्म रनवे 34 की बात करें तो यह 2015 में हुई सच्ची घटना पर आधारित है. फिल्म की कहानी अजय देवगन के किरदार कप्तान विक्रांत खन्ना के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म में अजय के साथ अमिताभ बच्चन, रकुल प्रीत सिंह, अंगीरा धर और बोमन ईरानी हैं. इस फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ अजय देवगन ने इसका निर्देशन और प्रोडक्शन भी किया है. ये फिल्म 29 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
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सुपरस्टार अजय देवगन अब डायरेक्टर के साथ-साथ रैपर बन गए हैं. जी हां, अपनी नई फिल्म रनवे चौंतीस के लिए अजय नए-नए अवतार धारण कर रहे हैं. पहले उन्होंने डायरेक्टर की कुर्सी पर राज किया और अब उन्होंने रैप की दुनिया में भी कदम रख दिया है. यह रैप अजय देवगन ने अपनी नई फिल्म के प्रमोशन के लिए किया है. उनके साथ नए रैप वीडियो में सभी के चहेते यशराज मुखाटे भी हैं. यशराज मुखाटे और अजय देवगन ने बढ़िया रैप वीडियो बनाया है. इस वीडियो में दोनों फिल्म रनवे चौंतीस के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं. यशराज ने फिल्म के ट्रेलर से अजय देवगन का सिगरेट वाला सीन अपने रैप के लिए उठाया है. इस सीन में पायलट अजय होठों में सिगरेट दबाए नजर आ रहे हैं. जब उन्हें सिगरेट पीने के लिए मना किया जाता है, तो वह कहते हैं- जलाया तो नहीं ना. यही रैप वीडियो की हुक लाइन है. वीडियो में अजय, यशराज से कहते हैं- यशराज चल रनवे चौंतीस के लिए एक ट्रैक बनाते हैं. इसपर यशराज कहते हैं- ठीक है सर. हम गाना स्टार्ट करेंगे और फिर उसमें एक डायलॉग डाला देंगे. मैं डायलॉग पर रील बनाऊंगा और यह मजेदार होगा. ' अजय देवगन का यह मजेदार और स्वैगभरा अवतार फैंस को खूब पसंद आ रहा है. इस वीडियो पर कई फैंस ने कमेंट किए हैं. यूजर्स ने अजय और उनके वीडियो को सुपर कूल, किलर और सुपर्ब बताया है. फिल्म रनवे चौंतीस की बात करें तो यह दो हज़ार पंद्रह में हुई सच्ची घटना पर आधारित है. फिल्म की कहानी अजय देवगन के किरदार कप्तान विक्रांत खन्ना के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म में अजय के साथ अमिताभ बच्चन, रकुल प्रीत सिंह, अंगीरा धर और बोमन ईरानी हैं. इस फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ अजय देवगन ने इसका निर्देशन और प्रोडक्शन भी किया है. ये फिल्म उनतीस अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
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देश के नए सीडीएस का ऐलान हो गया है। 9 महीने पहले हेलिकॉप्टर हादसे में तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई थी। उसके बाद से यह पद खाली था। बुधवार शाम को रक्षा मंत्रालय ने CDS पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को नियुक्त करने की घोषणा की।
नई दिल्लीः लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) को बुधवार को नए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) के रूप में नियुक्त किया गया। जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से ही यह पद रिक्त था। पद रिक्त होने के 9 महीने से अधिक समय बाद इस पर नियुक्ति की गई है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर लेफ्टिनेंट जनरल चौहान की नियुक्ति की घोषणा की।
मंत्रालय ने कहा कि 61 वर्षीय चौहान कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सैन्य मामलों से जुड़े विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। लगभग 40 वर्षों से अधिक के अपने करियर में, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कई कमान, स्टॉफ और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्हें जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव हैं। लेफ्टिनेंट जनरल चौहान पिछले साल मई में सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय वह पूर्वी सेना कमांडर के रूप में कार्यरत थे।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान का जन्म 18 मई 1961 को हुआ था। उन्हें 1981 में भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन प्रदान किया गया था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं। मेजर जनरल के रैंक में उन्होंने उत्तरी कमान में महत्वपूर्ण बारामुला सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी।
बाद में लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में, उन्होंने पूर्वोत्तर में एक कोर की कमान संभाली और सितंबर 2019 से पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बने। मई 2021 में सेवानिवृत्ति तक यह पदभार संभाला। इन कमान नियुक्तियों के अलावा वह महानिदेशक, सैन्य अभियान के प्रभार समेत महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। इससे पहले उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के रूप में भी काम किया।
सेवानिवृत्त होने के बाद भी, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रणनीतिक मामलों में योगदान देना जारी रखा। सेना में विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवा के लिए लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) को परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
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देश के नए सीडीएस का ऐलान हो गया है। नौ महीने पहले हेलिकॉप्टर हादसे में तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई थी। उसके बाद से यह पद खाली था। बुधवार शाम को रक्षा मंत्रालय ने CDS पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को नियुक्त करने की घोषणा की। नई दिल्लीः लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को बुधवार को नए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से ही यह पद रिक्त था। पद रिक्त होने के नौ महीने से अधिक समय बाद इस पर नियुक्ति की गई है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर लेफ्टिनेंट जनरल चौहान की नियुक्ति की घोषणा की। मंत्रालय ने कहा कि इकसठ वर्षीय चौहान कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सैन्य मामलों से जुड़े विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। लगभग चालीस वर्षों से अधिक के अपने करियर में, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कई कमान, स्टॉफ और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्हें जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव हैं। लेफ्टिनेंट जनरल चौहान पिछले साल मई में सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय वह पूर्वी सेना कमांडर के रूप में कार्यरत थे। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान का जन्म अट्ठारह मई एक हज़ार नौ सौ इकसठ को हुआ था। उन्हें एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में भारतीय सेना की ग्यारह गोरखा राइफल्स में कमीशन प्रदान किया गया था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं। मेजर जनरल के रैंक में उन्होंने उत्तरी कमान में महत्वपूर्ण बारामुला सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। बाद में लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में, उन्होंने पूर्वोत्तर में एक कोर की कमान संभाली और सितंबर दो हज़ार उन्नीस से पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बने। मई दो हज़ार इक्कीस में सेवानिवृत्ति तक यह पदभार संभाला। इन कमान नियुक्तियों के अलावा वह महानिदेशक, सैन्य अभियान के प्रभार समेत महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। इससे पहले उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के रूप में भी काम किया। सेवानिवृत्त होने के बाद भी, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रणनीतिक मामलों में योगदान देना जारी रखा। सेना में विशिष्ट और उल्लेखनीय सेवा के लिए लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
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किसानों के फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो इसके लिए उन्हें आधुनिक पद्धति से खेती-बाड़ी की जानकारी दी जाएगी. साथ ही इस योजना की शुरुआत कृषि को उद्योग और आजीविका के साथ-साथ संस्कृति से जोड़ने उद्देश्य से किया गया है.
झारखंड में किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके साथ ही आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए तकनीक की पूरी जानकारी हो इसकी कोशिश की जा रही है. इसी योजना के अंतर्गत झारखंड सरकार ने किसानों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. हेमंत सरकार के नये फैसले मुताबिक किसानों के लिए कृषि पाठशाला योजना शुरु की जायेगी, ताकि किसानों के जीवन स्तर में सुधार हो सके.
झारखंड के किसानों को आधुनिक खेती के जोड़ने के लिए कृषि पाठशाला की शुरुआत की गयी है. इसके तहत किसानों को आधुनिक पद्धति के जरिये खेता बारी की जानकारी दी जाएगी. साथ ही जिन जगहों पर कृषि पाठशाला की शुरुआत की जाएगी वहां पर के तीन से चार गांवों को बिरसा गांव के तौर पर स्थापित किया जाएगा. इसके साथ ही किसानों के उत्पाद को भंडारण के लिए पांच से 10 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाये जाएंगे. इन कोल्ड स्टोरेज को सोलर एनर्जी से संचालित किया जाएगा.
झारखंड सरकार कृषि पाठशाला स्थापित के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है. अगले तीन वर्षों में राज्य में 100 कृषि पाठशाला खोलने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में 17 कृषि पाठशाला खोले जाएंगे. इसके साथ ही 17 बीज ग्राम का भी चयन किया जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले से भी झारखंड में बीजग्राम योजना चल रही है. बीजग्राम खोलने और किसान पाठशाला खोलने के लिए कृषि विभाग ने प्रारूप तैयार कर लिया है.
- कृषि पाठशाला के तहत किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.
- किसानों की फसल आसानी से बिक जाए, इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा.
- किसानों के फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो इसके लिए उन्हें आधुनिक पद्धति से खेती-बाड़ी की जानकारी दी जाएगी.
- साथ ही इस योजना की शुरुआत कृषि को उद्योग और आजीविका के साथ-साथ संस्कृति से जोड़ने उद्देश्य से किया गया है.
गौरतलब है कि देश के साथ साथ झारखंड के किसानों के समक्ष भी खेती करने के बाद कई प्रकार की समस्याएं आती है. किसान अपनी मेहनत से फसल उगाते हैं लेकिन कई बार उन्हें उनके उत्पाद के अच्छे दाम नहीं मिल पाता है. इसके कारण कई बार किसान अपने उत्पादों को सड़क पर फेंकने को मजबूर हो जाते हैं. इससे फसल के साथ साथ किसानों को पूंजी और मेहनत की भी बर्बादी होती है. इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां पर कोल्ड स्टोरेज की उचित व्यवस्था नहीं है.किसानों की इन समस्या के समाधान के लिए हेमंत सरकार ने यह योजना लायी है. किसानों को उम्मीद है कि इससे उनकी समस्याओं का समाधान होगा. उनके लिए कोल्ड स्टोरज बनायें जाएंगे, उनके उत्पादों को बेचने के लिए परेशानी नहीं होगी.
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किसानों के फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो इसके लिए उन्हें आधुनिक पद्धति से खेती-बाड़ी की जानकारी दी जाएगी. साथ ही इस योजना की शुरुआत कृषि को उद्योग और आजीविका के साथ-साथ संस्कृति से जोड़ने उद्देश्य से किया गया है. झारखंड में किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके साथ ही आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए तकनीक की पूरी जानकारी हो इसकी कोशिश की जा रही है. इसी योजना के अंतर्गत झारखंड सरकार ने किसानों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. हेमंत सरकार के नये फैसले मुताबिक किसानों के लिए कृषि पाठशाला योजना शुरु की जायेगी, ताकि किसानों के जीवन स्तर में सुधार हो सके. झारखंड के किसानों को आधुनिक खेती के जोड़ने के लिए कृषि पाठशाला की शुरुआत की गयी है. इसके तहत किसानों को आधुनिक पद्धति के जरिये खेता बारी की जानकारी दी जाएगी. साथ ही जिन जगहों पर कृषि पाठशाला की शुरुआत की जाएगी वहां पर के तीन से चार गांवों को बिरसा गांव के तौर पर स्थापित किया जाएगा. इसके साथ ही किसानों के उत्पाद को भंडारण के लिए पांच से दस मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाये जाएंगे. इन कोल्ड स्टोरेज को सोलर एनर्जी से संचालित किया जाएगा. झारखंड सरकार कृषि पाठशाला स्थापित के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है. अगले तीन वर्षों में राज्य में एक सौ कृषि पाठशाला खोलने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में सत्रह कृषि पाठशाला खोले जाएंगे. इसके साथ ही सत्रह बीज ग्राम का भी चयन किया जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले से भी झारखंड में बीजग्राम योजना चल रही है. बीजग्राम खोलने और किसान पाठशाला खोलने के लिए कृषि विभाग ने प्रारूप तैयार कर लिया है. - कृषि पाठशाला के तहत किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. - किसानों की फसल आसानी से बिक जाए, इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा. - किसानों के फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो इसके लिए उन्हें आधुनिक पद्धति से खेती-बाड़ी की जानकारी दी जाएगी. - साथ ही इस योजना की शुरुआत कृषि को उद्योग और आजीविका के साथ-साथ संस्कृति से जोड़ने उद्देश्य से किया गया है. गौरतलब है कि देश के साथ साथ झारखंड के किसानों के समक्ष भी खेती करने के बाद कई प्रकार की समस्याएं आती है. किसान अपनी मेहनत से फसल उगाते हैं लेकिन कई बार उन्हें उनके उत्पाद के अच्छे दाम नहीं मिल पाता है. इसके कारण कई बार किसान अपने उत्पादों को सड़क पर फेंकने को मजबूर हो जाते हैं. इससे फसल के साथ साथ किसानों को पूंजी और मेहनत की भी बर्बादी होती है. इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां पर कोल्ड स्टोरेज की उचित व्यवस्था नहीं है.किसानों की इन समस्या के समाधान के लिए हेमंत सरकार ने यह योजना लायी है. किसानों को उम्मीद है कि इससे उनकी समस्याओं का समाधान होगा. उनके लिए कोल्ड स्टोरज बनायें जाएंगे, उनके उत्पादों को बेचने के लिए परेशानी नहीं होगी.
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प्रधानता' तथा डॉ. भगवतशरण उपाध्याय के लेखों का मार्क्सवादी दृष्टि से तथ्यों को संयोजित करने की क्षमता तथा आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की शोध- गरिमा एक साथ मिलती है। इस सम्बन्ध में डॉ. स्नातक का मत है कि "सांस्कृतिक विषय पर निबन्ध लिखने वालो में डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का नाम अन्यतम है। पुराण, इतिहास, धर्म, दर्शन तथा पुरातत्व को उपजीव्य बना कर भारतीय संस्कृति के विविध पक्षों का उद्घाटन जितना अधिक इन्होंने किया है, उतना निबन्ध के माध्यम से किसी लेखक ने नहीं किया है।"१ वस्तुतः डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल के लेख - सांस्कृतिक तथा साहित्यिक दृष्टि से हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि है। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने भारतीय कला सम्बन्धी गहन तथा मौलिक चिन्तन हिन्दी गद्य में प्रस्तुत किया है। हिन्दी में कला सम्बन्धी शब्दों का निर्माण करने में डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल का महत्व अप्रतिम है।
डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल के प्रयत्नों से हिन्दी में टीका-विधा की पुनस्थापना हुई। इनका हिन्दी में यह कार्य संस्कृत के अभिनव गुप्त की तरह है। मलिक मुहम्मद जायसी ने मध्यकालीन जीवन का जो सांस्कृतिक स्वरूप प्रस्तुत किया था, उसकी अभूतपूर्व व्याख्या करके डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने 'पदमावत्' की टिकाओं में अपना विशिष्ट स्थान बनाया। 'कीर्तिलता' की संजीवनी व्याख्या में प्राकृत, अपभ्रंश तथा अवहट्ठ भाषा के विकासगत स्तरों की छानबीन की गई है। हिन्दी शब्दों की व्युत्पत्तिपरक व्याख्या में वासुदेव शरण अग्रवाल का स्थान विशिष्ट है। आधुनिक युग के यास्क की पदवी से सुशोभित डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने भारत की लोक संस्कृति तथा लोक - शब्दों की व्युत्पत्ति मूलक व्याख्या प्रस्तुत किया। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इस सम्बन्ध में लिखा है - "वे शब्दों के इतिहास के धनी थे। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्होंने सहस्त्रों अर्थ - प्रसू शब्दों का संग्रह किया था। शब्दों के प्रति उनका अपूर्व अनुराग था। लोक भाषा के शब्दों को पाकर उन्हें जैसे निधि मिल जाती थी । '२ डॉ. वासुदेवशरण के ज्येष्ठ पुत्र श्री स्कन्द कुमार ने डॉ. अग्रवाल को 'शब्दों का आचार्य' कहा है। बोली विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का कोई सानी नहीं है। हिन्दी साहित्य के विकास को डॉ. वासुदेव अग्रवाल ने लोकपरकता से जोड़ कर जनपदीय आन्दोलन की व्याख्या की । डॉ वासुदेवशरण अग्रवाल ने जनपदीय साहित्य के लेखन को नवीन चेतना देकर ऐतिहासिक महत्त्व का कार्य किया। 'पृथिवीपुत्र' जनपदीय साहित्य से जुड़ी एक अदभुत पुस्तक है। हिन्दी में जनपदीय अध्ययन पर चलने वाले आन्दोलन के पुरोधा पं. बनारसी दास चतुर्वेदी ने लिखा है कि जनपदों में जाकर लोक कल्याण के लिए कार्य करने वाले को यह पुस्तक पाठय पुस्तक की तरह पढ़ना चाहिए । वस्तुत लोक संस्कृति का पोषण, रक्षण तथा उसके प्रति आदर भावना ही डॉ. वासुदेवशरण के कृतित्व का मूल सन्देश रहा है।
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प्रधानता' तथा डॉ. भगवतशरण उपाध्याय के लेखों का मार्क्सवादी दृष्टि से तथ्यों को संयोजित करने की क्षमता तथा आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की शोध- गरिमा एक साथ मिलती है। इस सम्बन्ध में डॉ. स्नातक का मत है कि "सांस्कृतिक विषय पर निबन्ध लिखने वालो में डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का नाम अन्यतम है। पुराण, इतिहास, धर्म, दर्शन तथा पुरातत्व को उपजीव्य बना कर भारतीय संस्कृति के विविध पक्षों का उद्घाटन जितना अधिक इन्होंने किया है, उतना निबन्ध के माध्यम से किसी लेखक ने नहीं किया है।"एक वस्तुतः डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल के लेख - सांस्कृतिक तथा साहित्यिक दृष्टि से हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि है। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने भारतीय कला सम्बन्धी गहन तथा मौलिक चिन्तन हिन्दी गद्य में प्रस्तुत किया है। हिन्दी में कला सम्बन्धी शब्दों का निर्माण करने में डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल का महत्व अप्रतिम है। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल के प्रयत्नों से हिन्दी में टीका-विधा की पुनस्थापना हुई। इनका हिन्दी में यह कार्य संस्कृत के अभिनव गुप्त की तरह है। मलिक मुहम्मद जायसी ने मध्यकालीन जीवन का जो सांस्कृतिक स्वरूप प्रस्तुत किया था, उसकी अभूतपूर्व व्याख्या करके डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने 'पदमावत्' की टिकाओं में अपना विशिष्ट स्थान बनाया। 'कीर्तिलता' की संजीवनी व्याख्या में प्राकृत, अपभ्रंश तथा अवहट्ठ भाषा के विकासगत स्तरों की छानबीन की गई है। हिन्दी शब्दों की व्युत्पत्तिपरक व्याख्या में वासुदेव शरण अग्रवाल का स्थान विशिष्ट है। आधुनिक युग के यास्क की पदवी से सुशोभित डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने भारत की लोक संस्कृति तथा लोक - शब्दों की व्युत्पत्ति मूलक व्याख्या प्रस्तुत किया। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इस सम्बन्ध में लिखा है - "वे शब्दों के इतिहास के धनी थे। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्होंने सहस्त्रों अर्थ - प्रसू शब्दों का संग्रह किया था। शब्दों के प्रति उनका अपूर्व अनुराग था। लोक भाषा के शब्दों को पाकर उन्हें जैसे निधि मिल जाती थी । 'दो डॉ. वासुदेवशरण के ज्येष्ठ पुत्र श्री स्कन्द कुमार ने डॉ. अग्रवाल को 'शब्दों का आचार्य' कहा है। बोली विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का कोई सानी नहीं है। हिन्दी साहित्य के विकास को डॉ. वासुदेव अग्रवाल ने लोकपरकता से जोड़ कर जनपदीय आन्दोलन की व्याख्या की । डॉ वासुदेवशरण अग्रवाल ने जनपदीय साहित्य के लेखन को नवीन चेतना देकर ऐतिहासिक महत्त्व का कार्य किया। 'पृथिवीपुत्र' जनपदीय साहित्य से जुड़ी एक अदभुत पुस्तक है। हिन्दी में जनपदीय अध्ययन पर चलने वाले आन्दोलन के पुरोधा पं. बनारसी दास चतुर्वेदी ने लिखा है कि जनपदों में जाकर लोक कल्याण के लिए कार्य करने वाले को यह पुस्तक पाठय पुस्तक की तरह पढ़ना चाहिए । वस्तुत लोक संस्कृति का पोषण, रक्षण तथा उसके प्रति आदर भावना ही डॉ. वासुदेवशरण के कृतित्व का मूल सन्देश रहा है।
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सैनिटाइजर, कोरोना से पहले तक अमूमन हम इसे तब ही इस्तेमाल करते थे, जब कभी हॉस्पिटल में किसी मरीज की देखभाल के लिए जाते थे। अब ऐसा बिल्कुल नहीं है। कोविड के दौर में लोग सैनिटाइजर को साबुन से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन, माइक्रो बैक्टीरियल एक्सपर्ट्स ऐसा बिल्कुल नहीं करने की सलाह देते हैं। पुणे में आईसीएमआर के नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में माइक्रो बॉयोलॉजी के एक्सपर्ट राजीव नीमा कहते हैं कि सैनिटाइजर की तुलना में साबुन से हाथ धुलना ज्यादा बेहतर है। सैनिटाइजर का इस्तेमाल तभी करें, जब आपके पास हाथ धुलने का विकल्प न हो।
1. सैनिटाइजर क्या काम करता है?
सागर स्थित हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी में माइक्रोबॉयोलॉजी के प्रोफेसर नवीन कांगो कहते हैं कि सैनिटाइजर का बेसिक कॉन्सेप्ट किसी सतह को स्टेरलाइज्ड करना होता है। सैनिटाइजर किसी भी सतह को वायरस, बैक्टीरिया, फंगस जैसी चीजों से फ्री कर देता। यहां तक डीएन, आरएन जैसी बेहद बारीक चीजें भी साफ हो जाती हैं।
2. बाजार में कितने तरह के सैनिटाइजर बिक रहे हैं?
राजीव नीमा कहते हैं कि बाजार में दो तरह के सैनिटाइजर मौजूद हैं। ये अल्कोहल बेस्ड और ये एंटी बैक्टीरियल होते हैं। अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर्स कोविड में ज्यादा कारगर हैं। सैनिटाइजर में यदि अल्कोहल 70% से ज्यादा है तो सबसे बेहतर है। वैसे 95% वाला अल्कोहल सबसे ज्यादा असरदार होता है।
इसमें 60 से 95% तक अल्कोहल मिला होता है, जोकि एथेनॉल, प्रोपेनॉल और आइसो प्रोपेनॉल से मिलकर बना होता है। यह कीटाणुओं से सुरक्षा करता है। इसका इस्तेमाल मेडिकल डिसइंफेक्टमेंट में भी किया जाता है।
इसमें एंटीसेप्टिक मिला होता है, जो कि एंटी माइक्रोबायल एजेंट्स या बेंजाकोनियम क्लोराइड होते हैं। यह कीटाणुओं का पूरी तरह से सफाया कर देते हैं, इसमें गुल मेंहदी भी मिला होता है, जो हमारे हाथ को सॉफ्ट बनाते हैं, साथ ही अच्छी खुशबू भी आती है।
3. सैनिटाइजर का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
प्रोफेसर नवीन कहते हैं कि यदि पेट में कोई बीमारी होती है तो हम एंटीबॉयोटिक खाते हैं, घाव होता है तो एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह जब हम किसी सरफेस से निर्जीव या डेड सेल्स या बैक्टीरिया-वायरस आदि को हटाना चाहते हैं तो डिसइन्फेक्ट का इस्तेमाल करते हैं, इसमें सैनिटाइजर, लाइजोल जैसी चीजें कारगर होती हैं।
4. दिन में कितनी बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए?
5. सैनिटाइजर को खरीदने से पहले हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
6. सैनिटाइजर का असर कितनी देर तक रहता है?
7. सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बाद क्या आप कुछ खा-पी सकते हैं?
राजीव कहते हैं कि सैनिटाइजर लगे हाथ से खाना खाने या पानी पीने से कोई खतरा नहीं रहता है। क्योंकि, यह लगाने के चंद मिनट बाद ही उड़ जाता है। और वैसे भी अल्कोहल की थोड़ी मात्रा में शरीर के अंदर जाने से कोई खतरा नहीं रहता है। लेकिन, यदि आप दिन में 10 से 20 बार इसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसकी मात्रा बढ़ जाएगी।
8. सैनिटाइजर वायरस को कैसे मारता है?
9. हैंड सैनिटाइजर वायरस से बचाने में कितना कारगर है?
10. नकली सैनिटाइजर को कैसे पहचानें?
11. सैनिटाइजर पर भरोसा कैसे करें?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस वक्त बाजार में तमाम तरह के सैनिटाइजर बिक रहे हैं, इनमें बहुत से नकली या मिलावटी सैनिटाइजर भी हैं। ऐसे में सैनिटाइजर खरीदते वक्त खास सावधानी बरतने की जरूरत है। मिलावटी सैनिटाइजर से वायरस नहीं मरते हैं और संक्रमित होने को खतरा भी बढ़ जाता है।
12. सैनिटाइजर्स कितने समय में एक्सपायर होते हैं?
राजीव नीमा कहते हैं कि सैनिटाइजर वैसे तो खराब कम ही होते हैं। ज्यादातर सैनिटाइजर की एक्सपायरी डेट तीन साल तक होती है। सैनिटाइजर खरीदते वक्त बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए, वह यह है कि इसमें अल्कोहल की मात्रा 60% से कम न हो।
13. सैनिटाइजर के इस्तेमाल के दौरान क्या सावधानी रखें?
14. बाजार में मौजूद टॉप-5 हैंड सैनिटाइजर कौन से हैं?
15. बाजार में सैनिटाइजर की कीमत क्या है?
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सैनिटाइजर, कोरोना से पहले तक अमूमन हम इसे तब ही इस्तेमाल करते थे, जब कभी हॉस्पिटल में किसी मरीज की देखभाल के लिए जाते थे। अब ऐसा बिल्कुल नहीं है। कोविड के दौर में लोग सैनिटाइजर को साबुन से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन, माइक्रो बैक्टीरियल एक्सपर्ट्स ऐसा बिल्कुल नहीं करने की सलाह देते हैं। पुणे में आईसीएमआर के नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में माइक्रो बॉयोलॉजी के एक्सपर्ट राजीव नीमा कहते हैं कि सैनिटाइजर की तुलना में साबुन से हाथ धुलना ज्यादा बेहतर है। सैनिटाइजर का इस्तेमाल तभी करें, जब आपके पास हाथ धुलने का विकल्प न हो। एक. सैनिटाइजर क्या काम करता है? सागर स्थित हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी में माइक्रोबॉयोलॉजी के प्रोफेसर नवीन कांगो कहते हैं कि सैनिटाइजर का बेसिक कॉन्सेप्ट किसी सतह को स्टेरलाइज्ड करना होता है। सैनिटाइजर किसी भी सतह को वायरस, बैक्टीरिया, फंगस जैसी चीजों से फ्री कर देता। यहां तक डीएन, आरएन जैसी बेहद बारीक चीजें भी साफ हो जाती हैं। दो. बाजार में कितने तरह के सैनिटाइजर बिक रहे हैं? राजीव नीमा कहते हैं कि बाजार में दो तरह के सैनिटाइजर मौजूद हैं। ये अल्कोहल बेस्ड और ये एंटी बैक्टीरियल होते हैं। अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर्स कोविड में ज्यादा कारगर हैं। सैनिटाइजर में यदि अल्कोहल सत्तर% से ज्यादा है तो सबसे बेहतर है। वैसे पचानवे% वाला अल्कोहल सबसे ज्यादा असरदार होता है। इसमें साठ से पचानवे% तक अल्कोहल मिला होता है, जोकि एथेनॉल, प्रोपेनॉल और आइसो प्रोपेनॉल से मिलकर बना होता है। यह कीटाणुओं से सुरक्षा करता है। इसका इस्तेमाल मेडिकल डिसइंफेक्टमेंट में भी किया जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक मिला होता है, जो कि एंटी माइक्रोबायल एजेंट्स या बेंजाकोनियम क्लोराइड होते हैं। यह कीटाणुओं का पूरी तरह से सफाया कर देते हैं, इसमें गुल मेंहदी भी मिला होता है, जो हमारे हाथ को सॉफ्ट बनाते हैं, साथ ही अच्छी खुशबू भी आती है। तीन. सैनिटाइजर का इस्तेमाल क्यों करते हैं? प्रोफेसर नवीन कहते हैं कि यदि पेट में कोई बीमारी होती है तो हम एंटीबॉयोटिक खाते हैं, घाव होता है तो एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह जब हम किसी सरफेस से निर्जीव या डेड सेल्स या बैक्टीरिया-वायरस आदि को हटाना चाहते हैं तो डिसइन्फेक्ट का इस्तेमाल करते हैं, इसमें सैनिटाइजर, लाइजोल जैसी चीजें कारगर होती हैं। चार. दिन में कितनी बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए? पाँच. सैनिटाइजर को खरीदने से पहले हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? छः. सैनिटाइजर का असर कितनी देर तक रहता है? सात. सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बाद क्या आप कुछ खा-पी सकते हैं? राजीव कहते हैं कि सैनिटाइजर लगे हाथ से खाना खाने या पानी पीने से कोई खतरा नहीं रहता है। क्योंकि, यह लगाने के चंद मिनट बाद ही उड़ जाता है। और वैसे भी अल्कोहल की थोड़ी मात्रा में शरीर के अंदर जाने से कोई खतरा नहीं रहता है। लेकिन, यदि आप दिन में दस से बीस बार इसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसकी मात्रा बढ़ जाएगी। आठ. सैनिटाइजर वायरस को कैसे मारता है? नौ. हैंड सैनिटाइजर वायरस से बचाने में कितना कारगर है? दस. नकली सैनिटाइजर को कैसे पहचानें? ग्यारह. सैनिटाइजर पर भरोसा कैसे करें? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस वक्त बाजार में तमाम तरह के सैनिटाइजर बिक रहे हैं, इनमें बहुत से नकली या मिलावटी सैनिटाइजर भी हैं। ऐसे में सैनिटाइजर खरीदते वक्त खास सावधानी बरतने की जरूरत है। मिलावटी सैनिटाइजर से वायरस नहीं मरते हैं और संक्रमित होने को खतरा भी बढ़ जाता है। बारह. सैनिटाइजर्स कितने समय में एक्सपायर होते हैं? राजीव नीमा कहते हैं कि सैनिटाइजर वैसे तो खराब कम ही होते हैं। ज्यादातर सैनिटाइजर की एक्सपायरी डेट तीन साल तक होती है। सैनिटाइजर खरीदते वक्त बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए, वह यह है कि इसमें अल्कोहल की मात्रा साठ% से कम न हो। तेरह. सैनिटाइजर के इस्तेमाल के दौरान क्या सावधानी रखें? चौदह. बाजार में मौजूद टॉप-पाँच हैंड सैनिटाइजर कौन से हैं? पंद्रह. बाजार में सैनिटाइजर की कीमत क्या है? This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्ली. पिछले कुछ दिनों में नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद Dogecoin सूर्खियों में लगातार बना हुआ है. कुछ साल पहले महज हंसी-मज़ाक में शुरू हुआ डॉजकॉइन अब एक जाना-माना क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) बन चुका है. हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर शख्स की कुर्सी पर काबिज़ हुए एलन मस्क (Elon Musk) ने इस लेकर एक ट्वीट किया था. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'हू लेट द डॉज आउट. ' बीते एक सप्ताह में यह दूसरी बार था, जब मस्क ने ट्विटर पर डॉजकॉइन का जिक्र किया था. इसके बाद दुनियाभर में डॉजकॉइन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया. ओपेन-सोर्स की यह डिजिटल करंसी बिटकॉइन का एक विकल्प है.
वर्तमान में देखें तो दुनियाभर में करीब 128 अरब से ज्यादा डॉजकॉइन सर्कुलेशन में है. माना जा रहा है कि यह महज एक शुरुआत है. मस्क के ट्वीट के बाद निवेशक अब डॉजकॉइन में विशेष दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ऐसे में हम आपको डॉजकॉइन के बारे में कई जरूरी सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए.
डॉजकॉइन क्या है?
दिसंबर 2013 में डॉजकॉइन को एक जोक के तौर पर शुरू किया गया था. बिटकॉइन, इथेरियम या लिटकॉइन की तुलना में देखें तो डॉजकॉइन के बारे में बहुत कम लोगों को पता है. इसे IBM सॉफ्टवेयर इंजीनियर बिली मार्कस और एडोब इंजीनियमर जैक्सन पाल्मर ने पीयर-टू-पीयर ट्रांजैक्शन (Peer-To-Peer Transaction) के लिए शुरू किया था. इन्हाेने डॉजकॉइन के लिए किसी फैन्सी चिन्ह को चुनने के बजाय जापानी कुत्ते की एक ब्रीड शिबा इनू (Shiba Inu) को चुना. यह पहले ही ऑनलाइन पॉपुलर था.
शुरुआत में बिटकॉइन (Bitcoin) और इथेरियम (Etherium)) जितना इसे सफलता नहीं मिली. हालांकि, लॉन्च होने के 72 घंटे के अंदर इस किप्टोकरंसी में 300 फीसदी की उछाल देखने को मिली. लिटकॉइन (Litcoin) और लकीकॉइन (Luckycoin) की तर्ज पर ही डॉजकॉइन भी पासवर्ड आधारित स्क्रिप्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है. यही खूबी इसे बिटकॉइन से अलग बनाती है, जिसमें एसएचए-256 इनक्रिप्शन का इस्तेमाल किया जाता है.
रोचक बात है कि डॉजकॉइन को सूर्खियों में लाने वाले मस्क बिटकॉइन के सपोर्टर रहे हैं. 49 वर्षीय इस उद्यमी ने पिछले सप्ताह ही ट्वीट किया था, 'बिटकॉइन इज़ ए गुड थिंग' यानी बिटकॉइन एक अच्छी चीज़ है. उन्होंने अपना ट्विटर बायो भी बदलकर #Bitcoin लिख दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि क्रिप्टोकरंसी को सपोर्ट करनें में उन्होंने देरी कर दी है. इसके बाद बिटकॉइन के भाव में जबरदस्त तेजी देखने को मिली.
डॉजकॉइन की कीमत कितनी है?
वर्तमान में डॉजकॉइन का भाव करीब 0. 071 अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में यह 5. 21 रुपये होगा. पिछले 24 घंटे से ज्यादा समय में इसमें 17 फीसदी अधिक तेजी देखने को मिली है. हालांकि, बिटकॉइन और इथेरियम की तुलना में यह बहुत कम है. वर्तमान में एक बिटकॉइन की कीमत 48,192. 10 अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में देखें तो यह 35,12,939. 03 रुपये होता है. इसी प्रकार इथेरियम का भाव 1,770. 06 अमेरिकी डॉलर यानी 1,28,573. 28 रुपये है.
कैसे खरीद सकते हैं डॉजकॉइन?
किसी अन्य क्रिप्टोकरंसी तरह ही डॉजकॉइन को भी क्रिप्टोकरंसी वॉलेट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदा जा सकता है. डॉजकॉइन के लिए डेडिकेटेड वॉलेट भी है, जिसे स्मार्टफोन या डेस्कटॉप के जरिए खरीदा जा सकता है. भारत में BuyUcoin, Bitbns, या Zebpay के जरिए डॉजकॉइन खरीदा जा सकता है. इन प्लेटफॉर्म्स पर केवाईसी प्रोसेस को पूरा करना होता है.
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नई दिल्ली. पिछले कुछ दिनों में नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद Dogecoin सूर्खियों में लगातार बना हुआ है. कुछ साल पहले महज हंसी-मज़ाक में शुरू हुआ डॉजकॉइन अब एक जाना-माना क्रिप्टोकरंसी बन चुका है. हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर शख्स की कुर्सी पर काबिज़ हुए एलन मस्क ने इस लेकर एक ट्वीट किया था. उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'हू लेट द डॉज आउट. ' बीते एक सप्ताह में यह दूसरी बार था, जब मस्क ने ट्विटर पर डॉजकॉइन का जिक्र किया था. इसके बाद दुनियाभर में डॉजकॉइन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया. ओपेन-सोर्स की यह डिजिटल करंसी बिटकॉइन का एक विकल्प है. वर्तमान में देखें तो दुनियाभर में करीब एक सौ अट्ठाईस अरब से ज्यादा डॉजकॉइन सर्कुलेशन में है. माना जा रहा है कि यह महज एक शुरुआत है. मस्क के ट्वीट के बाद निवेशक अब डॉजकॉइन में विशेष दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ऐसे में हम आपको डॉजकॉइन के बारे में कई जरूरी सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए. डॉजकॉइन क्या है? दिसंबर दो हज़ार तेरह में डॉजकॉइन को एक जोक के तौर पर शुरू किया गया था. बिटकॉइन, इथेरियम या लिटकॉइन की तुलना में देखें तो डॉजकॉइन के बारे में बहुत कम लोगों को पता है. इसे IBM सॉफ्टवेयर इंजीनियर बिली मार्कस और एडोब इंजीनियमर जैक्सन पाल्मर ने पीयर-टू-पीयर ट्रांजैक्शन के लिए शुरू किया था. इन्हाेने डॉजकॉइन के लिए किसी फैन्सी चिन्ह को चुनने के बजाय जापानी कुत्ते की एक ब्रीड शिबा इनू को चुना. यह पहले ही ऑनलाइन पॉपुलर था. शुरुआत में बिटकॉइन और इथेरियम ) जितना इसे सफलता नहीं मिली. हालांकि, लॉन्च होने के बहत्तर घंटाटे के अंदर इस किप्टोकरंसी में तीन सौ फीसदी की उछाल देखने को मिली. लिटकॉइन और लकीकॉइन की तर्ज पर ही डॉजकॉइन भी पासवर्ड आधारित स्क्रिप्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है. यही खूबी इसे बिटकॉइन से अलग बनाती है, जिसमें एसएचए-दो सौ छप्पन इनक्रिप्शन का इस्तेमाल किया जाता है. रोचक बात है कि डॉजकॉइन को सूर्खियों में लाने वाले मस्क बिटकॉइन के सपोर्टर रहे हैं. उनचास वर्षीय इस उद्यमी ने पिछले सप्ताह ही ट्वीट किया था, 'बिटकॉइन इज़ ए गुड थिंग' यानी बिटकॉइन एक अच्छी चीज़ है. उन्होंने अपना ट्विटर बायो भी बदलकर #Bitcoin लिख दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि क्रिप्टोकरंसी को सपोर्ट करनें में उन्होंने देरी कर दी है. इसके बाद बिटकॉइन के भाव में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. डॉजकॉइन की कीमत कितनी है? वर्तमान में डॉजकॉइन का भाव करीब शून्य. इकहत्तर अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में यह पाँच. इक्कीस रुपयापये होगा. पिछले चौबीस घंटाटे से ज्यादा समय में इसमें सत्रह फीसदी अधिक तेजी देखने को मिली है. हालांकि, बिटकॉइन और इथेरियम की तुलना में यह बहुत कम है. वर्तमान में एक बिटकॉइन की कीमत अड़तालीस,एक सौ बानवे. दस अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में देखें तो यह पैंतीस,बारह,नौ सौ उनतालीस. तीन रुपयापये होता है. इसी प्रकार इथेरियम का भाव एक,सात सौ सत्तर. छः अमेरिकी डॉलर यानी एक,अट्ठाईस,पाँच सौ तिहत्तर. अट्ठाईस रुपयापये है. कैसे खरीद सकते हैं डॉजकॉइन? किसी अन्य क्रिप्टोकरंसी तरह ही डॉजकॉइन को भी क्रिप्टोकरंसी वॉलेट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदा जा सकता है. डॉजकॉइन के लिए डेडिकेटेड वॉलेट भी है, जिसे स्मार्टफोन या डेस्कटॉप के जरिए खरीदा जा सकता है. भारत में BuyUcoin, Bitbns, या Zebpay के जरिए डॉजकॉइन खरीदा जा सकता है. इन प्लेटफॉर्म्स पर केवाईसी प्रोसेस को पूरा करना होता है. .
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अपना एनालॉग सिग्नल डाल सकते हैं। यही कारण है कि आपके पास 0 से 7 हैं और यदि आप बाइनरी स्टेट्स में 0 से 7 रखना चाहते हैं, तो आप आसानी से इसका उपयोग कर सकते हैं। क्योंकि हम 3 डिजिट ADC का उपयोग कर रहे हैं। हमारे पास 0 - 000 है, 1-001 है और इसी तरह आपके पास 111 के बराबर 7 हैं। आप लोग इसे जानते हैं। कैसे करना है ? यह 2 ^ 0 1, 2 ^ 1 = 2, 2^2 आदि है। यदि यह 8 बिट एनकोडर है, तो 2^8256 डिजिटल स्टेट्स है।
(Refer Slide Time: 16:48)
Nyquist Theorem
• A bandlimited analog signal that has been sampled can be perfectly reconstructed from an infinite sequence of samples if the sampling rate f. exceeds 2fmax samples per second, where fmax is the highest frequency in the original signal.
If the analog sighat does contain frequency components larger than ( 1 / 2 ) fs, then there will be an aliasing error
Aliasing is when the digital signal appears to have a different frequency than the original analog signal
Valvano Postulate: If fmox is the largest frequency component of the analog signal, then you must sample more than ten times fmax in order for the reconstructed digital samples to look like the original signal when plotted on a voltage versus time graph
Nyquist थ्योरम, यह फिर से बहुत महत्वपूर्ण है। बैंड सीमित एनालॉग सिग्नल जिसे सैंपल किया गया है, सेंपलिंग के अनंत इंपल्सेस से पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया जा सकता है, यदि fs सेंपलिंग दर 2*fmax से अधिक है, जहां fs हमारी सेंपलिंग फ्रीक्वेंसी है। तो, यह क्या कहता है कि एक एनालॉग सिग्नल, जिसे सैंपल किया गया है, यदि आप पूरी तरह से पुनर्निर्माण करना चाहते हैं तो आपके पास एक सेंपलिंग दर होना चाहिए जो 2 * fmax से अधिक हो, जहां fmax मूल सिग्नल में उच्चतम फ्रीक्वेंसी है। इसलिए, यदि एनालॉग सिग्नल की fs फ्रीक्वेंसी 2 * fmax से अधिक नहीं है, तो एलियासिंग एरर होगी। हम देखेंगे कि एलियासिंग एरर क्या है। इसलिए, अलियासिंग तब होता है जब डिजिटल सिग्नल में मूल एनालॉग सिग्नल की तुलना में अलग फ्रीक्वेंसी दिखाई देती हैं .
तो, जब आपके डिजिटल सिग्नल में एक अलग फ्रीक्वेंसी दिखाई देती है । आप देखेंगे कि अगली स्लाइड में क्या है? अब एक Valvano postulate है जो कहता है कि यदि आपका fmax एनालॉग सिग्नल का सबसे बड़ा फ्रीक्वेंसी है, तो आपको 10 * fmax से अधिक का सेंपलिंग करना चाहिए। क्यों? जब वोल्टेज बनाम टाइम ग्राफ को तैयार किया जाता है, तो मूल सिग्नल की तरह दिखने के लिए डिजिटल सेंपलिंग
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अपना एनालॉग सिग्नल डाल सकते हैं। यही कारण है कि आपके पास शून्य से सात हैं और यदि आप बाइनरी स्टेट्स में शून्य से सात रखना चाहते हैं, तो आप आसानी से इसका उपयोग कर सकते हैं। क्योंकि हम तीन डिजिट ADC का उपयोग कर रहे हैं। हमारे पास शून्य - शून्य है, एक-एक है और इसी तरह आपके पास एक सौ ग्यारह के बराबर सात हैं। आप लोग इसे जानते हैं। कैसे करना है ? यह दो ^ शून्य एक, दो ^ एक = दो, दो^दो आदि है। यदि यह आठ बिट एनकोडर है, तो दो^आठ हज़ार दो सौ छप्पन डिजिटल स्टेट्स है। Nyquist Theorem • A bandlimited analog signal that has been sampled can be perfectly reconstructed from an infinite sequence of samples if the sampling rate f. exceeds दोfmax samples per second, where fmax is the highest frequency in the original signal. If the analog sighat does contain frequency components larger than fs, then there will be an aliasing error Aliasing is when the digital signal appears to have a different frequency than the original analog signal Valvano Postulate: If fmox is the largest frequency component of the analog signal, then you must sample more than ten times fmax in order for the reconstructed digital samples to look like the original signal when plotted on a voltage versus time graph Nyquist थ्योरम, यह फिर से बहुत महत्वपूर्ण है। बैंड सीमित एनालॉग सिग्नल जिसे सैंपल किया गया है, सेंपलिंग के अनंत इंपल्सेस से पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया जा सकता है, यदि fs सेंपलिंग दर दो*fmax से अधिक है, जहां fs हमारी सेंपलिंग फ्रीक्वेंसी है। तो, यह क्या कहता है कि एक एनालॉग सिग्नल, जिसे सैंपल किया गया है, यदि आप पूरी तरह से पुनर्निर्माण करना चाहते हैं तो आपके पास एक सेंपलिंग दर होना चाहिए जो दो * fmax से अधिक हो, जहां fmax मूल सिग्नल में उच्चतम फ्रीक्वेंसी है। इसलिए, यदि एनालॉग सिग्नल की fs फ्रीक्वेंसी दो * fmax से अधिक नहीं है, तो एलियासिंग एरर होगी। हम देखेंगे कि एलियासिंग एरर क्या है। इसलिए, अलियासिंग तब होता है जब डिजिटल सिग्नल में मूल एनालॉग सिग्नल की तुलना में अलग फ्रीक्वेंसी दिखाई देती हैं . तो, जब आपके डिजिटल सिग्नल में एक अलग फ्रीक्वेंसी दिखाई देती है । आप देखेंगे कि अगली स्लाइड में क्या है? अब एक Valvano postulate है जो कहता है कि यदि आपका fmax एनालॉग सिग्नल का सबसे बड़ा फ्रीक्वेंसी है, तो आपको दस * fmax से अधिक का सेंपलिंग करना चाहिए। क्यों? जब वोल्टेज बनाम टाइम ग्राफ को तैयार किया जाता है, तो मूल सिग्नल की तरह दिखने के लिए डिजिटल सेंपलिंग
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मनोरंजन जगत के मशहूर गायक मीका सिंह ने घोड़ी चढ़ने की पूरी तैयारी कर ली है। मीका अपने स्वयंवर में अपनी दुल्हनिया की खोज कर रहे हैं। मगर अब लगता है मीका को उनकी पसंद की लड़की मिल गई है। अब ये लड़की कौन है, जिसपर मीका सिंह का दिल आया है, आइए बताते हैं।
मीका सिंह के स्वयंवर- मीका दी वोटी में यूं तो कई खूबसूरत एवं टैलेंटेड लड़कियां मीका सिंह से शादी करने का ख्वाब लेकर आई हैं। सभी मीका को इंप्रेस करने का पूरा प्रयास कर रही हैं। लड़कियां तो खुलेआम मीका के लिए अपने प्यार का इजहार कर रही हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर मीका किस लड़की से सबसे अधिक इंप्रेस हुए हैं। अब इस प्रश्न का उत्तर भी मीका सिंह ने स्वयं ही दे दिया है। मीका के स्यवंयर के नए एपिसोड में फराह खान ने ग्रैंड एंट्री ली। फराह खान मीका सिंह को अपना भाई मानती हैं। ऐसे में फराह खान ने सभी लड़कियों से मिलकर उनका टेस्ट लिया तथा ये जानने का प्रयास किया कि आखिर उनके भाई मीका के लिए कौन सी लड़की सबसे बेस्ट रहेगी।
शो के एक प्रोमो वीडियो में दिखाया गया है कि लड़कियों से मिलने के पश्चात् फराह खान मीका सिंह को सभी लड़कियों की खूबियां एवं खामियां बताती हैं। फराह खान प्रांतिका (स्वयंवर में आई प्रतियोगी) के बारे में बात करते हुए कही हैं कि वो छोटी बच्ची की भांति है। इसपर मीका बोलते हैं- मुझे अभी तक प्रांतिका सबसे बेस्ट लगी है। ये सुनकर फराह खान भी खुश हो जाती हैं।
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मनोरंजन जगत के मशहूर गायक मीका सिंह ने घोड़ी चढ़ने की पूरी तैयारी कर ली है। मीका अपने स्वयंवर में अपनी दुल्हनिया की खोज कर रहे हैं। मगर अब लगता है मीका को उनकी पसंद की लड़की मिल गई है। अब ये लड़की कौन है, जिसपर मीका सिंह का दिल आया है, आइए बताते हैं। मीका सिंह के स्वयंवर- मीका दी वोटी में यूं तो कई खूबसूरत एवं टैलेंटेड लड़कियां मीका सिंह से शादी करने का ख्वाब लेकर आई हैं। सभी मीका को इंप्रेस करने का पूरा प्रयास कर रही हैं। लड़कियां तो खुलेआम मीका के लिए अपने प्यार का इजहार कर रही हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर मीका किस लड़की से सबसे अधिक इंप्रेस हुए हैं। अब इस प्रश्न का उत्तर भी मीका सिंह ने स्वयं ही दे दिया है। मीका के स्यवंयर के नए एपिसोड में फराह खान ने ग्रैंड एंट्री ली। फराह खान मीका सिंह को अपना भाई मानती हैं। ऐसे में फराह खान ने सभी लड़कियों से मिलकर उनका टेस्ट लिया तथा ये जानने का प्रयास किया कि आखिर उनके भाई मीका के लिए कौन सी लड़की सबसे बेस्ट रहेगी। शो के एक प्रोमो वीडियो में दिखाया गया है कि लड़कियों से मिलने के पश्चात् फराह खान मीका सिंह को सभी लड़कियों की खूबियां एवं खामियां बताती हैं। फराह खान प्रांतिका के बारे में बात करते हुए कही हैं कि वो छोटी बच्ची की भांति है। इसपर मीका बोलते हैं- मुझे अभी तक प्रांतिका सबसे बेस्ट लगी है। ये सुनकर फराह खान भी खुश हो जाती हैं।
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ऊना - विधानसभा चुनाव 2017 में जिला ऊना में भाजपा व कांग्रेस के दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। ऊना सदर विस क्षेत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्षव सतपाल सिंह सत्ती को हार का सामना करना पड़ा, वहीं गगरेट विस क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व तीन बार के विधायक राकेश कालिया को बड़ी हार झेलनी पड़ी। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से वेटरन कांग्रेस लीडर कुलदीप कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा। हरोली विस क्षेत्र से निर्वतमान कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे मुकेश अग्निहोत्री लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर पाने में सफल रहे। वहीं, कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर जीत का चौका लगा पाने में कामयाब हुए है। मुकेश अग्निहोत्री व वीरेंद्र कंवर ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर विधानसभा में जोरदार एंट्री की है। जबकि चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से बलबीर चौधरी कांग्रेस के कुलदीप कुमार को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे है। ऊना सदर से सतपाल रायजादा व गगरेट विस क्षेत्र से राजेश ठाकुर पहली दफा जीत दर्ज कर विधानसभा की दहलीज पार करेंगे। जिला की पांच सीटों में से भाजपा कुटलैहड़ के अपने गढ़ को बचा पाने में सफल रही। जबकि भाजपा ने कांग्रेस से गगरेट व चिंतपूर्णी सीट छीनी है। वहीं, कांग्रेस ने हरोली के अपने दुर्ग को अभेद बनाए रखने के अलावा ऊना सदर विस क्षेत्र को भाजपा से छीन लिया। सोमवार को सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ऊना के जीपीजी कालेज व अंब के महाराणा प्रताप कालेज परिसर में मतगणना शुरू हुई। सबसे पहले पांचों विस क्षेत्रों में ईवीएम के राउंड शुरू हुए। ऊना विस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती पहले दो राउंड में 1162 मतों से पिछड़ गए। तीसरे राउंड में सतपाल सत्ती को 681 मतों की बढ़त मिली, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा की बढ़त 481 मतों की रही। इसके बाद अंत तक कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा ने बढ़त बनाए रखी तथा 3196 मतों से जीत दर्ज की। ऊना विस क्षेत्र में कुल पड़े 62556 वैद्य मतों में से सतपाल रायजादा को 31360 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा के सतपाल सत्ती को 28164 मत प्राप्त हुए। बसपा के रवि कुमार को 659, आजाद प्रत्याशी गुलजार सिंह को 306 व राजीव गौतम को 1723 मत मिले। जबकि 256 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। कुल 833 बेलेट पेपर में सतपाल सत्ती को 517 व सतपाल रायजादा को 206 मत मिले। जबकि 88 मत रिजेक्ट व शेष अन्य प्रत्याशियों को मिले। हरोली विस क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश अग्निहोत्री ने शुरू से ही बढ़त बना ली, जोकि अंत तक कायम रही। यहां कुल 64470 मतों में से कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश अग्र्निहोत्री 35095 मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के रामकुमार से 7377 मतों से जीते। रामकुमार को 27718 मत मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी विरेंद्र कुमार को 376 मत, आजाद प्रत्याशी रविंद्र मान को 833 मत मिले। 448 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर ने कांग्रेस के विवेक शर्मा को 5606 मतों से हराया। वीरेंद्र कंवर ने शुरू से ही बढ़त बना ली, जिसे कांग्रेस प्रत्याशी अंत तक तोड़ नहीं पाए। विरेंद्र कंवर को 31101 मत पड़े, जबकि विवेक शर्मा को 25495 मत मिले। इसके अलावा बसपा के मनोहर लाल को 570, आजाद प्रत्याशियों शिव हरिपाल को 1017, स्वर्णदास 363 व संदीप शर्मा को 365 मत प्राप्त हुए। जबकि 311 ने नोटा का प्रयोग किया। गगरेट विस क्षेत्र में भाजपा के नए प्रत्याशी राजेश ठाकुर ने कांग्रेस के दिगगज राकेश कालिया को पटकनी देते हुए 9320 मतों से पराजित किया। भाजपा के राजेश ठाकुर को कुल पड़े 59665 मतों में से 33977 मत मिले। जबकि कांग्रेस के राकेश कालिया को 24657 मत प्राप्त हुए। बसपा के लेखराज कतनौरिया को 260 व आजाद प्रत्याशी सुभाष शर्मा को 379 मत मिले। 392 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र में भाजपा के बलबीर चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप कुमार को 8579 मतों से पराजित किया। भाजपा प्रत्याशी बलबीर चौधरी को कुल वैद्य मतों 57552 में से 32488 मत मिलें। कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप कुमार को 23909, बसपा प्रत्याशी रंजीत सिंह को 621 मत मिलें। 534 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया।
ऊना सदर विस क्षेत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्षव सतपाल सिंह सत्ती को हार का सामना करना पड़ा, वहीं गगरेट विस क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व तीन बार के विधायक राकेश कालिया को बड़ी हार झेलनी पड़ी। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से वेटरन कांग्रेस लीडर कुलदीप कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा। हरोली विस क्षेत्र से निर्वतमान कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे मुकेश अग्निहोत्री लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर पाने में सफल रहे। वहीं, कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर जीत का चौका लगा पाने में कामयाब हुए है। मुकेश अग्निहोत्री व वीरेंद्र कंवर ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर विधानसभा में जोरदार एंट्री की है।
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ऊना - विधानसभा चुनाव दो हज़ार सत्रह में जिला ऊना में भाजपा व कांग्रेस के दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। ऊना सदर विस क्षेत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्षव सतपाल सिंह सत्ती को हार का सामना करना पड़ा, वहीं गगरेट विस क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व तीन बार के विधायक राकेश कालिया को बड़ी हार झेलनी पड़ी। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से वेटरन कांग्रेस लीडर कुलदीप कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा। हरोली विस क्षेत्र से निर्वतमान कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे मुकेश अग्निहोत्री लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर पाने में सफल रहे। वहीं, कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर जीत का चौका लगा पाने में कामयाब हुए है। मुकेश अग्निहोत्री व वीरेंद्र कंवर ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर विधानसभा में जोरदार एंट्री की है। जबकि चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से बलबीर चौधरी कांग्रेस के कुलदीप कुमार को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे है। ऊना सदर से सतपाल रायजादा व गगरेट विस क्षेत्र से राजेश ठाकुर पहली दफा जीत दर्ज कर विधानसभा की दहलीज पार करेंगे। जिला की पांच सीटों में से भाजपा कुटलैहड़ के अपने गढ़ को बचा पाने में सफल रही। जबकि भाजपा ने कांग्रेस से गगरेट व चिंतपूर्णी सीट छीनी है। वहीं, कांग्रेस ने हरोली के अपने दुर्ग को अभेद बनाए रखने के अलावा ऊना सदर विस क्षेत्र को भाजपा से छीन लिया। सोमवार को सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ऊना के जीपीजी कालेज व अंब के महाराणा प्रताप कालेज परिसर में मतगणना शुरू हुई। सबसे पहले पांचों विस क्षेत्रों में ईवीएम के राउंड शुरू हुए। ऊना विस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती पहले दो राउंड में एक हज़ार एक सौ बासठ मतों से पिछड़ गए। तीसरे राउंड में सतपाल सत्ती को छः सौ इक्यासी मतों की बढ़त मिली, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा की बढ़त चार सौ इक्यासी मतों की रही। इसके बाद अंत तक कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा ने बढ़त बनाए रखी तथा तीन हज़ार एक सौ छियानवे मतों से जीत दर्ज की। ऊना विस क्षेत्र में कुल पड़े बासठ हज़ार पाँच सौ छप्पन वैद्य मतों में से सतपाल रायजादा को इकतीस हज़ार तीन सौ साठ मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा के सतपाल सत्ती को अट्ठाईस हज़ार एक सौ चौंसठ मत प्राप्त हुए। बसपा के रवि कुमार को छः सौ उनसठ, आजाद प्रत्याशी गुलजार सिंह को तीन सौ छः व राजीव गौतम को एक हज़ार सात सौ तेईस मत मिले। जबकि दो सौ छप्पन मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। कुल आठ सौ तैंतीस बेलेट पेपर में सतपाल सत्ती को पाँच सौ सत्रह व सतपाल रायजादा को दो सौ छः मत मिले। जबकि अठासी मत रिजेक्ट व शेष अन्य प्रत्याशियों को मिले। हरोली विस क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश अग्निहोत्री ने शुरू से ही बढ़त बना ली, जोकि अंत तक कायम रही। यहां कुल चौंसठ हज़ार चार सौ सत्तर मतों में से कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश अग्र्निहोत्री पैंतीस हज़ार पचानवे मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के रामकुमार से सात हज़ार तीन सौ सतहत्तर मतों से जीते। रामकुमार को सत्ताईस हज़ार सात सौ अट्ठारह मत मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी विरेंद्र कुमार को तीन सौ छिहत्तर मत, आजाद प्रत्याशी रविंद्र मान को आठ सौ तैंतीस मत मिले। चार सौ अड़तालीस मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर ने कांग्रेस के विवेक शर्मा को पाँच हज़ार छः सौ छः मतों से हराया। वीरेंद्र कंवर ने शुरू से ही बढ़त बना ली, जिसे कांग्रेस प्रत्याशी अंत तक तोड़ नहीं पाए। विरेंद्र कंवर को इकतीस हज़ार एक सौ एक मत पड़े, जबकि विवेक शर्मा को पच्चीस हज़ार चार सौ पचानवे मत मिले। इसके अलावा बसपा के मनोहर लाल को पाँच सौ सत्तर, आजाद प्रत्याशियों शिव हरिपाल को एक हज़ार सत्रह, स्वर्णदास तीन सौ तिरेसठ व संदीप शर्मा को तीन सौ पैंसठ मत प्राप्त हुए। जबकि तीन सौ ग्यारह ने नोटा का प्रयोग किया। गगरेट विस क्षेत्र में भाजपा के नए प्रत्याशी राजेश ठाकुर ने कांग्रेस के दिगगज राकेश कालिया को पटकनी देते हुए नौ हज़ार तीन सौ बीस मतों से पराजित किया। भाजपा के राजेश ठाकुर को कुल पड़े उनसठ हज़ार छः सौ पैंसठ मतों में से तैंतीस हज़ार नौ सौ सतहत्तर मत मिले। जबकि कांग्रेस के राकेश कालिया को चौबीस हज़ार छः सौ सत्तावन मत प्राप्त हुए। बसपा के लेखराज कतनौरिया को दो सौ साठ व आजाद प्रत्याशी सुभाष शर्मा को तीन सौ उन्यासी मत मिले। तीन सौ बानवे मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र में भाजपा के बलबीर चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप कुमार को आठ हज़ार पाँच सौ उन्यासी मतों से पराजित किया। भाजपा प्रत्याशी बलबीर चौधरी को कुल वैद्य मतों सत्तावन हज़ार पाँच सौ बावन में से बत्तीस हज़ार चार सौ अठासी मत मिलें। कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप कुमार को तेईस हज़ार नौ सौ नौ, बसपा प्रत्याशी रंजीत सिंह को छः सौ इक्कीस मत मिलें। पाँच सौ चौंतीस मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। ऊना सदर विस क्षेत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्षव सतपाल सिंह सत्ती को हार का सामना करना पड़ा, वहीं गगरेट विस क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व तीन बार के विधायक राकेश कालिया को बड़ी हार झेलनी पड़ी। चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से वेटरन कांग्रेस लीडर कुलदीप कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा। हरोली विस क्षेत्र से निर्वतमान कांग्रेस सरकार में उद्योग मंत्री रहे मुकेश अग्निहोत्री लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर पाने में सफल रहे। वहीं, कुटलैहड़ विस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कंवर जीत का चौका लगा पाने में कामयाब हुए है। मुकेश अग्निहोत्री व वीरेंद्र कंवर ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर विधानसभा में जोरदार एंट्री की है।
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भारतीय रेलवे में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। रेलवे ने गुड्स ट्रेन मैनेजर के 147 पदों भर्ती निकली है। इसमें, अनारक्षित वर्ग के लिए 84 पद, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 21 पद, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 10 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 32 पद शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए ग्रेजुएट उम्मीदवार 25 अप्रैल तक रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट rrchubli. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
गुड्स ट्रेन मैनेजर के पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से बैचलर्स डिग्री होनी जरूरी है।
इन पदों के लिए 18 से 42 वर्ष के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों में ओबीसी के लिए 18 से 45 वर्ष और एससी-एसटी के लिए 18 से 47 वर्ष अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
रेलवे में 147 पदों पर निकली भर्ती के लिए उम्मीदवारों का सिलेक्शन रिटन टेस्ट के साथ डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन और मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया में सिलेक्शन के बाद उम्मीदवार को हर महीने मैट्रिक्स लेवल 5 के तहत सैलरी दी जाएगी। इसके साथ ही उम्मीदवार और उसके परिवार को रेलवे में सफर में रियायत मिलेगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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भारतीय रेलवे में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। रेलवे ने गुड्स ट्रेन मैनेजर के एक सौ सैंतालीस पदों भर्ती निकली है। इसमें, अनारक्षित वर्ग के लिए चौरासी पद, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए इक्कीस पद, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए दस पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए बत्तीस पद शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए ग्रेजुएट उम्मीदवार पच्चीस अप्रैल तक रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट rrchubli. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। गुड्स ट्रेन मैनेजर के पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से बैचलर्स डिग्री होनी जरूरी है। इन पदों के लिए अट्ठारह से बयालीस वर्ष के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों में ओबीसी के लिए अट्ठारह से पैंतालीस वर्ष और एससी-एसटी के लिए अट्ठारह से सैंतालीस वर्ष अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। रेलवे में एक सौ सैंतालीस पदों पर निकली भर्ती के लिए उम्मीदवारों का सिलेक्शन रिटन टेस्ट के साथ डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन और मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद मेरिट के आधार पर किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया में सिलेक्शन के बाद उम्मीदवार को हर महीने मैट्रिक्स लेवल पाँच के तहत सैलरी दी जाएगी। इसके साथ ही उम्मीदवार और उसके परिवार को रेलवे में सफर में रियायत मिलेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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1 कप मिल्क पाउडर, 1/2 कप कोको पाउडर, 1/2 कप पिसी चीनी या गुड, 1/4 चम्मच वनीला एक्सट्रेक्ट, 1/2 कप रोस्टेड बादाम, 1/2 कप रोस्टेड ओट्स, नमक चुटकीभर।
बॉर्नविटा पाउडर बनाने के लिए सबसे पहले बादाम के छिलके निकालकर इसे ड्राई रोस्ट कर लें और ठंडा होने पर पीस लें।
इसी पैन में थोड़े से ओट्स को रोस्ट कर लें और इसे भी साइड में निकाल कर ठंडा करके पीस लें।
अब एक मिक्सिंग बाउल में, मिल्क पाउडर, कोको पाउडर, पाउडर चीनी या गुड, वेनिला एक्सट्रेक्ट, नमक और पिसे हुए बादाम और ओट्स मिलाएं।
इस मिश्रण को एक ब्लेंडर या फूड प्रोसेसर में दोबारा 2-3 मिनट के पीस लें।
मिश्रण को छानने के लिए एक छलनी का उपयोग करें और ताकि आप किसी भी गांठ को हटा सकें।
होममेड बॉर्नविटा पाउडर को एयरटाइट कंटेनर में ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें।
बॉर्नविटा दूध बनाने के लिए एक कप ठंडे या गर्म दूध में 1-2 चम्मच बॉर्नविटा पाउडर डालें और इसे बच्चों को सर्व करें।
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एक कप मिल्क पाउडर, एक/दो कप कोको पाउडर, एक/दो कप पिसी चीनी या गुड, एक/चार चम्मच वनीला एक्सट्रेक्ट, एक/दो कप रोस्टेड बादाम, एक/दो कप रोस्टेड ओट्स, नमक चुटकीभर। बॉर्नविटा पाउडर बनाने के लिए सबसे पहले बादाम के छिलके निकालकर इसे ड्राई रोस्ट कर लें और ठंडा होने पर पीस लें। इसी पैन में थोड़े से ओट्स को रोस्ट कर लें और इसे भी साइड में निकाल कर ठंडा करके पीस लें। अब एक मिक्सिंग बाउल में, मिल्क पाउडर, कोको पाउडर, पाउडर चीनी या गुड, वेनिला एक्सट्रेक्ट, नमक और पिसे हुए बादाम और ओट्स मिलाएं। इस मिश्रण को एक ब्लेंडर या फूड प्रोसेसर में दोबारा दो-तीन मिनट के पीस लें। मिश्रण को छानने के लिए एक छलनी का उपयोग करें और ताकि आप किसी भी गांठ को हटा सकें। होममेड बॉर्नविटा पाउडर को एयरटाइट कंटेनर में ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें। बॉर्नविटा दूध बनाने के लिए एक कप ठंडे या गर्म दूध में एक-दो चम्मच बॉर्नविटा पाउडर डालें और इसे बच्चों को सर्व करें।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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मथुराः यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने जन संवाद कार्यक्रम के तहत लोगों से सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पहल का पहला चरण कुछ दिनों पहले शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम प्राधिकार से भी धन के लिए संपर्क किया जाएगा।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताया कि मथुरावासियों के सहयोग से जिला प्रशासन ने यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक नयी पहल की है। यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि नदी का पानी साफ रहे।
उन्होंने आगे कहा कि पहले चरण में जन संवाद कार्यक्रम के तहत नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं। दूसरे चरण में समस्या वाले क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा और लोगों को मुहिम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
निगम आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि मथुरा जिले में यमुना का प्रवाह लगभग 16 किमी है। इस दूरी में वृन्दावन में केशी घाट, जुगल घाट तथा मथुरा में स्वामी घाट, बंगाली घाट, विश्राम घाट समेत तीन दर्जन घाट हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं नालों से अक्सर प्रदूषित जल यमुना नदी में बिना शुद्धीकरण के बह जाता है।
झा ने कहा कि सरकारी तंत्र लगातार इन नालों के पानी को उपचारित करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि मथुरा और वृन्दावन में 31 नालों के पानी को उपचारित किया गया है जो सीधे पानी और अन्य प्रदूषकों को नदी में बहाते हैं। उन्होंने कहा कि शेष पांच नालों के पानी के उपचार से स्थिति में और सुधार होगा।
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मथुराः यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने जन संवाद कार्यक्रम के तहत लोगों से सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पहल का पहला चरण कुछ दिनों पहले शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम प्राधिकार से भी धन के लिए संपर्क किया जाएगा। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताया कि मथुरावासियों के सहयोग से जिला प्रशासन ने यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक नयी पहल की है। यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि नदी का पानी साफ रहे। उन्होंने आगे कहा कि पहले चरण में जन संवाद कार्यक्रम के तहत नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं। दूसरे चरण में समस्या वाले क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा और लोगों को मुहिम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा। निगम आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि मथुरा जिले में यमुना का प्रवाह लगभग सोलह किमी है। इस दूरी में वृन्दावन में केशी घाट, जुगल घाट तथा मथुरा में स्वामी घाट, बंगाली घाट, विश्राम घाट समेत तीन दर्जन घाट हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं नालों से अक्सर प्रदूषित जल यमुना नदी में बिना शुद्धीकरण के बह जाता है। झा ने कहा कि सरकारी तंत्र लगातार इन नालों के पानी को उपचारित करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि मथुरा और वृन्दावन में इकतीस नालों के पानी को उपचारित किया गया है जो सीधे पानी और अन्य प्रदूषकों को नदी में बहाते हैं। उन्होंने कहा कि शेष पांच नालों के पानी के उपचार से स्थिति में और सुधार होगा।
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ये पाँच छः वर्ष के थे उस समय इन्हें तीन चार सौ लोक और महान्यायी के दो प्रध्याय कंठस्य थे। नौ दस वर्ष की अवस्था में एक बेर इन्होंने संस्कृत का छोटा सा व्याख्यान देकर भारतधर्ममहामंडल के कई उपदेशकों को चकित कर दिया था। प्रसिद्ध मासिक पुस्तक काव्यमाला के संपादक महामहोपाध्याय पंडित दुर्गाप्रसादजी की कृपा से इनके हृदय में देशसेवा, साहित्यप्रेम आदि कई उपयोगी विचारों के अंकुर उत्पन्न हुए थे।
सन् १८६३ में इन्होंने जयपुर के महाराजाज कालेज में अँगरेज़ी पढ़ना प्रारंभ किया। छः ही वर्ष में सन् १८६९ में ये प्रयाग-विश्वविद्यालय की एंट्रेंस परीक्षा में प्रथम हुए और कलकत्ता विश्वविद्यालय की उसी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इनकी इस सफलता के कारण जयपुर-राज्य ने इन्हें एक स्वर्णपदक दिया था। उसी वर्ष इन्होंने महाभाष्य पढ़ना आरंभ किया। सन् १९०२ में इन्होंने जयपुर के मानमंदिर के जीर्णोद्धार में सहायता दी और सम्रासिद्धांत नामक ज्योतिष ग्रंथ के कई अंशों का बहुत योग्यतापूर्वक अनुवाद किया जिसके लिये उस कार्य के अध्यक्ष दो अँगरेज़ मनों ने उनकी बहुत प्रशंसा की। उसी समय लेफ्टिनेंट गैरट
साथ इन्होंने अँगरेज़ी में "दी जयपुर भाबजवेंटरी एंड इट्स विर" नामक ग्रंथ लिखा था। दूसरे वर्ष सन् १९०३ में ये प्रयागविश्वविद्यालय की बी० ए० परीक्षा में प्रथम हुए और इसके लिये इन्हें जयपुर-राज्य से एक स्वर्णपदक और बहुत सी पुस्तकें मिलीं। साथ ही साथ में वेद और प्रस्थानत्रय का भी अभ्यास कर रहे थे । कुमार दर्शनशाक में एम० ए० की परीक्षा देने का था, परंतु जयपुर राज्य के भाग्रह से खेतड़ी के स्वर्गवासी राजा साहब के संरक्षक कर इन्हें मेयो कालेज अजमेर जाना पड़ा। आज कल ये नहीं के सब कुमारों के शिक्षक और निरीचक है।
पंडितजी ने वैदिक साहित्य, भाषावाय, दर्शन और पुरातत्व अनुशीलन किया है और अँगरेज़ी और संस्कृत के अतिरिक्त पाली और बॅगला, मराठी भादि भाषाओं से भी ये परिचित हैं।
सन् १८९७ में इनका परिचय जयपुर के स्वर्गीय जैनवैद्यर्जी से हुआ था। उसी समय इनका भुकाव हिंदी की ओर हुआ। दोनो सज्जनों ने मिल कर हिंदी की सेवा करने की प्रतिज्ञा की थी। तदनुसार सन् १९०० में इन लोगों ने जयपुर का नागरीभवन स्थापित किया था। इन्होंने कई वर्ष तक "समालोचक" का संपादन भी किया था। इसके सिवाय और बहुत से पत्रों में प्रायः इनके लेख निकला
नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के कार्यों से ये बहुत सहानुभूति रखते हैं और बहुत दिनों से उसके सभ्य हैं । सभा द्वारा प्रकाशित 'लेखमाला' का संपादन आज कल ये ही करते हैं। जो काम ये करते हैं वह प्रायः चुपचाप ही करते हैं क्योंकि नाम की इन्हें जवनी इच्छा नहीं रहती । धौरों का शिक्षक बनने की अपेक्षा ये विद्यार्थी बनना अधिक पसंद करते हैं इसीलिये इनके समय अधिकांश पुस्तकाबलोकन में ही बीतता है। कदाचित् यही है कि अब तक हिंदी पाठकों को इनके द्वारा यथेट लाभ नहीं सफा है। इस समय इनके एक पुत्र और दो कन्याएँ हैं।
गुलेरीजी का स्वभाव बहुत ही नम्र और निष्कपट समारन हिंदू धर्म के सिद्धांतों के कट्टर अनुयायी हैं।
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ये पाँच छः वर्ष के थे उस समय इन्हें तीन चार सौ लोक और महान्यायी के दो प्रध्याय कंठस्य थे। नौ दस वर्ष की अवस्था में एक बेर इन्होंने संस्कृत का छोटा सा व्याख्यान देकर भारतधर्ममहामंडल के कई उपदेशकों को चकित कर दिया था। प्रसिद्ध मासिक पुस्तक काव्यमाला के संपादक महामहोपाध्याय पंडित दुर्गाप्रसादजी की कृपा से इनके हृदय में देशसेवा, साहित्यप्रेम आदि कई उपयोगी विचारों के अंकुर उत्पन्न हुए थे। सन् एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ में इन्होंने जयपुर के महाराजाज कालेज में अँगरेज़ी पढ़ना प्रारंभ किया। छः ही वर्ष में सन् एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर में ये प्रयाग-विश्वविद्यालय की एंट्रेंस परीक्षा में प्रथम हुए और कलकत्ता विश्वविद्यालय की उसी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इनकी इस सफलता के कारण जयपुर-राज्य ने इन्हें एक स्वर्णपदक दिया था। उसी वर्ष इन्होंने महाभाष्य पढ़ना आरंभ किया। सन् एक हज़ार नौ सौ दो में इन्होंने जयपुर के मानमंदिर के जीर्णोद्धार में सहायता दी और सम्रासिद्धांत नामक ज्योतिष ग्रंथ के कई अंशों का बहुत योग्यतापूर्वक अनुवाद किया जिसके लिये उस कार्य के अध्यक्ष दो अँगरेज़ मनों ने उनकी बहुत प्रशंसा की। उसी समय लेफ्टिनेंट गैरट साथ इन्होंने अँगरेज़ी में "दी जयपुर भाबजवेंटरी एंड इट्स विर" नामक ग्रंथ लिखा था। दूसरे वर्ष सन् एक हज़ार नौ सौ तीन में ये प्रयागविश्वविद्यालय की बीशून्य एशून्य परीक्षा में प्रथम हुए और इसके लिये इन्हें जयपुर-राज्य से एक स्वर्णपदक और बहुत सी पुस्तकें मिलीं। साथ ही साथ में वेद और प्रस्थानत्रय का भी अभ्यास कर रहे थे । कुमार दर्शनशाक में एमशून्य एशून्य की परीक्षा देने का था, परंतु जयपुर राज्य के भाग्रह से खेतड़ी के स्वर्गवासी राजा साहब के संरक्षक कर इन्हें मेयो कालेज अजमेर जाना पड़ा। आज कल ये नहीं के सब कुमारों के शिक्षक और निरीचक है। पंडितजी ने वैदिक साहित्य, भाषावाय, दर्शन और पुरातत्व अनुशीलन किया है और अँगरेज़ी और संस्कृत के अतिरिक्त पाली और बॅगला, मराठी भादि भाषाओं से भी ये परिचित हैं। सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे में इनका परिचय जयपुर के स्वर्गीय जैनवैद्यर्जी से हुआ था। उसी समय इनका भुकाव हिंदी की ओर हुआ। दोनो सज्जनों ने मिल कर हिंदी की सेवा करने की प्रतिज्ञा की थी। तदनुसार सन् एक हज़ार नौ सौ में इन लोगों ने जयपुर का नागरीभवन स्थापित किया था। इन्होंने कई वर्ष तक "समालोचक" का संपादन भी किया था। इसके सिवाय और बहुत से पत्रों में प्रायः इनके लेख निकला नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के कार्यों से ये बहुत सहानुभूति रखते हैं और बहुत दिनों से उसके सभ्य हैं । सभा द्वारा प्रकाशित 'लेखमाला' का संपादन आज कल ये ही करते हैं। जो काम ये करते हैं वह प्रायः चुपचाप ही करते हैं क्योंकि नाम की इन्हें जवनी इच्छा नहीं रहती । धौरों का शिक्षक बनने की अपेक्षा ये विद्यार्थी बनना अधिक पसंद करते हैं इसीलिये इनके समय अधिकांश पुस्तकाबलोकन में ही बीतता है। कदाचित् यही है कि अब तक हिंदी पाठकों को इनके द्वारा यथेट लाभ नहीं सफा है। इस समय इनके एक पुत्र और दो कन्याएँ हैं। गुलेरीजी का स्वभाव बहुत ही नम्र और निष्कपट समारन हिंदू धर्म के सिद्धांतों के कट्टर अनुयायी हैं।
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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की पैरोल को 17 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने उन्हें सात अप्रैल तक 5092. 6 करोड़ रुपए जमा कराने को कहा है। इसके लिए सहारा को 13 संपत्तियों को बेचने की भी इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने छह फरवरी को सहारा चिटफंड मामले की सुनवाई करते हुए उसके मुंबई स्थित ऐंबी वैली टाउनशिप प्रोजेक्ट को जब्त किए जाने का आदेश दिया था। ऐंबी वैली प्रोजेक्ट बकाया वसूली तक सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगा और वसूली के बाद समूह को सौंप दिया जाएगा। तिहाड़ जेल में दो साल बिताने के बाद सुब्रत रॉय पिछले साल मई में तब बाहर आ पाए थे, जब उनकी मां का निधन हो गया था। उनका पैरोल इस शर्त पर बढ़ाया जाता रहा है कि वह निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए समय-समय पर सेबी के पास रकम जमा कराते रहेंगे।
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नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की पैरोल को सत्रह अप्रैल तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने उन्हें सात अप्रैल तक पाँच हज़ार बानवे. छः करोड़ रुपए जमा कराने को कहा है। इसके लिए सहारा को तेरह संपत्तियों को बेचने की भी इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने छह फरवरी को सहारा चिटफंड मामले की सुनवाई करते हुए उसके मुंबई स्थित ऐंबी वैली टाउनशिप प्रोजेक्ट को जब्त किए जाने का आदेश दिया था। ऐंबी वैली प्रोजेक्ट बकाया वसूली तक सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगा और वसूली के बाद समूह को सौंप दिया जाएगा। तिहाड़ जेल में दो साल बिताने के बाद सुब्रत रॉय पिछले साल मई में तब बाहर आ पाए थे, जब उनकी मां का निधन हो गया था। उनका पैरोल इस शर्त पर बढ़ाया जाता रहा है कि वह निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए समय-समय पर सेबी के पास रकम जमा कराते रहेंगे।
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नोएडा में तीन लोगों ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पहला मामला सेक्टर 34 का है। यहां 16 वर्षीय किशोरी ने रविवार रात अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या की। परिजनों ने सुबह शव को देखा तो घटना की सूचना थाना सेक्टर 24 पुलिस को दी।
किशोरी अपने परिवार के साथ रहती थी। बताया गया है कि रविवार रात को किशोरी एक कमरे में सो रही थी, जबकि उसके माता-पिता और छोटा भाई दूसरे कमरे में सो रहे थे। सुबह परिजनों ने किशोरी का दरवाजा खोलने का प्रयास किया, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक भी दरवाजा नहीं खोला गया।
परिजनों ने खिड़की से देखा तो किशोरी का शव पंखे से फंदे पर लटका हुआ था। घटना के बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा खोल कर शव को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मृतक किशोरी ने आत्महत्या क्यों की फिलहाल पुलिस इसकी जांच करने में जुटी है।
थाना सेक्टर 39 क्षेत्र के भूड़ा कॉलोनी निवासी 24 वर्षीय चंदन ने रविवार रात अपने घर पर पंखे से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने जब शव को देखा तो घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक काफी दिनों से मानसिक तौर पर परेशान था।
थाना फेज 2 थाना क्षेत्र में रहने वाले 31 वर्षीय अशोक ने भी रविवार रात अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक ने आत्महत्या क्यों की पुलिस फिलहाल इसकी जांच कर रही है।
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नोएडा में तीन लोगों ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पहला मामला सेक्टर चौंतीस का है। यहां सोलह वर्षीय किशोरी ने रविवार रात अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या की। परिजनों ने सुबह शव को देखा तो घटना की सूचना थाना सेक्टर चौबीस पुलिस को दी। किशोरी अपने परिवार के साथ रहती थी। बताया गया है कि रविवार रात को किशोरी एक कमरे में सो रही थी, जबकि उसके माता-पिता और छोटा भाई दूसरे कमरे में सो रहे थे। सुबह परिजनों ने किशोरी का दरवाजा खोलने का प्रयास किया, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक भी दरवाजा नहीं खोला गया। परिजनों ने खिड़की से देखा तो किशोरी का शव पंखे से फंदे पर लटका हुआ था। घटना के बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा खोल कर शव को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मृतक किशोरी ने आत्महत्या क्यों की फिलहाल पुलिस इसकी जांच करने में जुटी है। थाना सेक्टर उनतालीस क्षेत्र के भूड़ा कॉलोनी निवासी चौबीस वर्षीय चंदन ने रविवार रात अपने घर पर पंखे से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने जब शव को देखा तो घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक काफी दिनों से मानसिक तौर पर परेशान था। थाना फेज दो थाना क्षेत्र में रहने वाले इकतीस वर्षीय अशोक ने भी रविवार रात अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक ने आत्महत्या क्यों की पुलिस फिलहाल इसकी जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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टीम इंग्लैड की नैट सिवर ने पूरी कोशिश की कि बाउंड्री बचाई जा सके, लेकिन मिताली राज का बल्ला ऐसे चला कि गेंद चौके के लिए ही निकली. इस चौके के साथ ही 38 वर्षीय मिताली राज ने शार्लेट एडवर्ड्स का 10,273 रनों के रिकॉर्ड को तोड़कर इतिहास रचा. मिताली ने अब अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी का खिताब हासिल कर लिया है. ये एक ऐसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि है जहां क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, धर्म है.
लेकिन, भारत के इस क्रिकेट प्रेम में कई खामियां हैं - खास तौर पर जब बात जेंडर की हो. जहां एक ओर पुरुष टीम के खिलाड़ियों को भगवान की उपमा दे दी जाती है वहीं दूसरी ओर महिला क्रिकेट टीम की उपलब्धियों के बारे में लोग बेखर रहते हैं.
ये भेदभाव स्पॉन्सर्स, फैन्स, ब्रॉडकास्टर्स और BCCI सभी की ओर से दिखाई देता है. यही वजह है कि महिला टीम की बड़ी जीत भी कहीं खो सी जाती है. खेद की बात ये है कि जब देशभर में महिला सशक्तिकरण की बात हो रही हो तब कम से कम इन खिलाड़ियों को उनकी मेहनत के बराबर की सराहना और प्रोत्साहन भी मिलना चाहिए.
पुरुष क्रिकेट टीम में ग्रेड-ए कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ियों को 7 करोड़ रुपये मिलते हैं जबकि ग्रेड-सी वालों को 1 करोड़ रुपये. अब इसकी तुलना महिला क्रिकेट टीम से करें. यहां सबसे ऊंचे कॉन्ट्रैक्ट वाली खिलाड़ियों को भी 50 लाख रुपये ही मिलते हैं. ये साफ दर्शाता है कि समानता की बात काल्पनिक ही है. बराबरी का महत्व दने की उम्मीद स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स से कैसे की जाए जब क्रिकेट बोर्ड ही दोनों टीमों की कमाई में इतना बड़ा फासला साफ दिखाए.
बोर्ड को चाहिए कि वे वुमेन टीम की जीत और उपलब्धियों को बेहतर तरीके से सेलिब्रेट करे ताकि स्पॉन्सर्स के साथ उन्हें बेहतर डील मिल सके. ब्रॉडकास्टर्स और क्रिकेट संस्थाओं को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि इतिहास रचने वाले ऐसे खिलाड़ियों की उपल्बधियों पर और फीचर्स बनाए जा सकें और उनकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा इंटरव्यू हो सकें.
सरकार की जिम्मेदारी भी सिर्फ प्रोफार्मा के तौर पर महिला क्रिकेट टीम को बधाई देने या उन्हें सम्मानित करने तक सीमित नहीं है. अगर ऐसा ही रहा तो विराट कोहली के चौके-छक्के अखबारों के फ्रंट पेज पर आते रहेंगे और लोग यूट्यूब के इनकॉग्निटो मोड पर छिपकर स्मृति मंधाना को 'हॉट' टैग के साथ सर्च करते रहेंगे.
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टीम इंग्लैड की नैट सिवर ने पूरी कोशिश की कि बाउंड्री बचाई जा सके, लेकिन मिताली राज का बल्ला ऐसे चला कि गेंद चौके के लिए ही निकली. इस चौके के साथ ही अड़तीस वर्षीय मिताली राज ने शार्लेट एडवर्ड्स का दस,दो सौ तिहत्तर रनों के रिकॉर्ड को तोड़कर इतिहास रचा. मिताली ने अब अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी का खिताब हासिल कर लिया है. ये एक ऐसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि है जहां क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, धर्म है. लेकिन, भारत के इस क्रिकेट प्रेम में कई खामियां हैं - खास तौर पर जब बात जेंडर की हो. जहां एक ओर पुरुष टीम के खिलाड़ियों को भगवान की उपमा दे दी जाती है वहीं दूसरी ओर महिला क्रिकेट टीम की उपलब्धियों के बारे में लोग बेखर रहते हैं. ये भेदभाव स्पॉन्सर्स, फैन्स, ब्रॉडकास्टर्स और BCCI सभी की ओर से दिखाई देता है. यही वजह है कि महिला टीम की बड़ी जीत भी कहीं खो सी जाती है. खेद की बात ये है कि जब देशभर में महिला सशक्तिकरण की बात हो रही हो तब कम से कम इन खिलाड़ियों को उनकी मेहनत के बराबर की सराहना और प्रोत्साहन भी मिलना चाहिए. पुरुष क्रिकेट टीम में ग्रेड-ए कॉन्ट्रैक्ट वाले खिलाड़ियों को सात करोड़ रुपये मिलते हैं जबकि ग्रेड-सी वालों को एक करोड़ रुपये. अब इसकी तुलना महिला क्रिकेट टीम से करें. यहां सबसे ऊंचे कॉन्ट्रैक्ट वाली खिलाड़ियों को भी पचास लाख रुपये ही मिलते हैं. ये साफ दर्शाता है कि समानता की बात काल्पनिक ही है. बराबरी का महत्व दने की उम्मीद स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स से कैसे की जाए जब क्रिकेट बोर्ड ही दोनों टीमों की कमाई में इतना बड़ा फासला साफ दिखाए. बोर्ड को चाहिए कि वे वुमेन टीम की जीत और उपलब्धियों को बेहतर तरीके से सेलिब्रेट करे ताकि स्पॉन्सर्स के साथ उन्हें बेहतर डील मिल सके. ब्रॉडकास्टर्स और क्रिकेट संस्थाओं को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि इतिहास रचने वाले ऐसे खिलाड़ियों की उपल्बधियों पर और फीचर्स बनाए जा सकें और उनकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा इंटरव्यू हो सकें. सरकार की जिम्मेदारी भी सिर्फ प्रोफार्मा के तौर पर महिला क्रिकेट टीम को बधाई देने या उन्हें सम्मानित करने तक सीमित नहीं है. अगर ऐसा ही रहा तो विराट कोहली के चौके-छक्के अखबारों के फ्रंट पेज पर आते रहेंगे और लोग यूट्यूब के इनकॉग्निटो मोड पर छिपकर स्मृति मंधाना को 'हॉट' टैग के साथ सर्च करते रहेंगे.
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हिमाचल में साहित्यिक लेखन अनेक उतार-चढ़ावों एवं प्रकाशन की अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी विलक्षणता एवं प्रभविष्णुता को निरंतर बनाए हुए है, प्रादेशिक स्तर पर भी और राष्ट्रीय स्तर पर भी। गद्य, पद्य एवं लोक संस्कृति तीनों क्षेत्रों में हिमाचली लेखकों की सक्रियता जहां आश्वस्त करती है, वहीं प्रकाशन की सहज सुविधाओं की हिमाचल में अपेक्षा फिर भी बनी हुई है। वर्ष 2018 सृजन की दृष्टि से सार्थक वर्ष रहा है क्योंकि न केवल युवा लेखक सक्रिय रहे हैं अपितु डा सत्यपाल शर्मा, रमेशचंद्र शर्मा व प्रिंसिपल परमानंद शर्मा जैसे वयोवृद्ध लेखक भी साहित्य सृजन में गतिशील रहे हैं। डा. सत्यपाल शर्मा की निबंधों की पुस्तक 'साहित्य में अश्लीलता का प्रश्न' तथा अन्य निबंध उनकी विद्वता के परिचायक हैं, भले ही हम गुलेरी की कहानी बुद्धू का कांटा में 'लहंगा पसारने या न पसारने' की बात को मांसलता न मानने से सहमत न हों, परंतु उन्होंने कई उदाहरण देकर अपने अश्लीलता के प्रसंग को स्पष्ट किया है। रमेशचंद्र शर्मा निरंतर लिख रहे हैं। उनका नवप्रकाशित उपन्यास 'परिग्रह' उनकी साहित्यिक जिजीविषा का ही प्रमाण है। साधुराम दर्शक का कहानी संग्रह 'मेरी प्रगतिशील कहानियां' और इसकी भूमिका सृजन के प्रेमचंद युगीन बिंदुओं को मर्मज्ञता से उठाती है । उधर पीएन शर्मा जी अपनी साधना में पूरे उत्साह एवं प्रासंगिकता से तल्लीन हैं। जयदेव विद्रोही की हुंकार भी इस वर्ष बराबर सुनाई देती रही है। बाल साहित्य में पवन चौहान की 'भोलू भालू सुधर गया' बाल कहानियों का रोचक एवं अर्थपूर्ण संग्रह बोधि प्रकाशन से आया है। पवन देशभर की बाल पत्रिकाओं में निरंतर उपस्थित रहते हैं, यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है। पवन चौहान की ही भांति डा. प्रत्यूष गुलेरी का संग्रह 'मेरे 57 बालगीत' आत्मा राम एंड सन्स से प्रकाशित हुआ है। दोनों लेखकों में बच्चों की बाल सुलभ प्रवृत्तियों का मनोवैज्ञानिक चित्रण मिलता है। संस्कृति से संबद्ध पुस्तकों में सुदर्शन वशिष्ठ की 'पर्वतीय संस्कृति में शिवशक्ति' तथा 'पुरातन नगरी चंबा' उल्लेखनीय हैं। इस संदर्भ में स्व. देवल की 'चम्बा अचम्भा' भी एक महत्त्वपूर्ण कृति रही है। रमेश चंद्र मस्ताना एवं प्रभात शर्मा की पांगी घाटी से संबद्ध दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं जो यात्रा के साथ-साथ वहां की गंभीर एवं सही जानकारी प्रस्तुत करती हैं। पंगवाल पर केआर भारती की अंग्रेजी में पुस्तक भी काफी चर्चित रही है। 'नदी गायब है'-पर्यावरण से संबद्ध 12 कहानियां समेटे हुए एसआर हरनोट की सद्य प्रकाशित पुस्तक है जिसकी लंबी भूमिका श्रीनिवास श्रीकांत ने लिखी है। राम मूर्ति वासुदेव प्रशांत की हिमाचल की रोचक लोक कथाएं तथा प्रस्तुत पंक्तियों के लेखक की हिमाचल की श्रेष्ठ लोक कथाएं भी इसी काल खंड में प्रकाशित हुई हैं। डा. सत्यनारायण स्नेही की पुस्तक 'अनुवाद विज्ञान' का उल्लेख करना भी उचित होगा क्योंकि यह किसी हिमाचली द्वारा लिखित विषय की पहली पुस्तक कही गई है । इन्हीं की 'समकालीन कविता का लोक' पुस्तक जो हिमाचल की हिंदी कविता का आलोड़न करती है, चर्चित पुस्तक रही है। इसी वर्ष आलोचना के क्षेत्र में स्व. डा. पीयूष गुलेरी के शोध प्रबंध 'चंद्रधर शर्मा गुलेरी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व' का पुनर्प्रकाशन गुंजन समिति द्वारा किया गया है, जिसका विमोचन डा. पीयूष के घर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने अनेक लेखकों की उपस्थिति में किया। कविता सृजन में हिमाचल पर्याप्त उर्वरा रहा है और वर्ष 2018 भी इसका अपवाद नहीं है। सिरमौर के दिलीप वशिष्ठ की दो पुस्तकें 'मेरा कर्म यहां लोक जीवन रचना है' तथा 'अनंत प्रेम की वैदिक रचनाएं', किशन सिंह गतवाल की 'गिरी गंगा की लहरें', प्रभातकुमार की 'ऐसा देश है मेरा', दीन दयाल वर्मा की 'गुरु दक्षिणा' उल्लेखनीय संग्रह हैं, जिनमें कल्पना की उड़ान यथार्थ की विभीषिका के साथ मिलती है। 'गीत गाता हूं मैं' एक कृषि वैज्ञानिक की सुरीली, भावपूर्ण कविताओं का संग्रह है। जैसे रवि सिंह मधोत्रा ने हिमाचली में 'जांडा' उपन्यास लिख कर ख्याति अर्जित की, उसी प्रकार जस्सूर के मेधावी वैज्ञानिक ने कविता एवं कहानी के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमाया है। यहां सहज भाषा में सहज अभिव्यक्ति है। एक अपनी ही तरह का अलमस्त, धींगामुश्त आलोचक कवि है गणेश गनी, जिसकी पुस्तक 'किस्से चलते हैं बिल्ली के पांव पर' में देश के 50 कवियों की कविताओं पर किस्ससागोई के माध्यम से आत्मीय परंतु आलोचनात्मक टिप्पणियां हैं जिन्हें लेखक ने साहित्य संवाद का नाम दिया है। इसमें हिमाचल के भी पंद्रह कवियों की कविताओं पर आलोचकीय किस्सागोई विद्यमान है। विक्रम गथानिया की पुस्तक 'इस नए वक्त में' अपने ही अंदाज की कविताओं का महत्त्वपूर्ण संग्रह है, जो अपनी विषयवस्तु की प्रासंगिकता के कारण सहज ही आकर्षित करता है। एक अन्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण कविता संग्रह है 'सोलन काव्य सरिता' जिसका संपादन डा. प्रेमलाल गौतम और शंकरलाल वासिष्ठ ने किया है। इसमें सोलन जिला के 77 कवियों की रचनाएं उनके परिचय सहित संकलित हैं। इस परंपरा का अनुसरण अन्य जिलों के लेखकों को भी करना चाहिए। यह एक ऐतिहासिक प्रयास है। कथा के क्षेत्र में भी हिमाचल के लेखक सदा अग्रणी रहे हैं। जय नारायण कश्यप का उपन्यास 'उल्लूकपुर का साम्राज्य' एक प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया उपन्यास है, जिसमें उल्लू अपना प्राकृतिक जीवन जीते हुए मानव समाज पर टिप्पणियां करते जाते हैं। चमगादड़, मकडि़यां आदि इनके सहयोगी हैं। प्रिया आनंद की 'फिर मिलेंगे' व 'सुनो केया' नामक दो कृतियां अभी प्रकाशित हुई हैं। उनका अंदाज रास्टेल्जिक कथा भाष्य का है, एकदम सम्मोहक। राजकुमार राकेश का कहानी संग्रह 'आपात डायरी' 6 कहानियों का सग्रह है, जिसमें सामाजिक विषयों पर लेखक की कथाएं हैं। शेर सिंह का कहानी संग्रह 'शहर की शराफत' भावना प्रकाशन से आया है। लेखक नौकरी के सिलसिले में सेवानिवृत्ति तक भारत भर में यहां-वहां कार्यरत रहा, इसलिए रचनाओं में व्यापक अनुभव के दर्शन होते हैं। गंगाराम राजी बहुत ही कुशल कहानीकार हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सृजनात्मक गति पकड़ी है और बड़े-बड़ों को पीछे छोड़ गए हैं। कृष्णदेव महादेविया का लघुकथा संग्रह 'तुम्हारे लिए' अपनी विषयवस्तु एवं सुघड़ शिल्प कौशल के कारण आकर्षित करता है। ओम भारद्वाज का कहानी संग्रह भा स्वागत योग्य है। राजेंद्र राजन का मौन से संवाद एक रोचक उपन्यास है। एड्स पर आधारित कहानियों 'मैं जीना सिखाता हूं' के ख्यात लेखक अजय पाराशर का कहानी संग्रह 'एक पापा की मौत' उल्लेखनीय है। राष्ट्रीय कथा शृंखला में हरनोट की किताबघर से 'दस प्रतिनिधि कहानियां' और सुशील कुमार फुल्ल की प्रभात प्रकाशन से 'सुशील कुमार फुल्ल की लोकप्रिय कहानियां' का प्रकाशन हिमाचल की राष्ट्रीय पहचान का सूचक है। जनसत्ता के कोलकाता से प्रकाशित वार्षिक विशेषांक में भी दस में से दो हिमाचली लेखकों की कथाएं हैं । बया पत्रिका में चंद्ररेखा ढडवाल का लघु उपन्यास भी प्रकाशित हुआ है। खंड काव्य लेखक स्व. राजेंद्रपाल सूद की बेटी भारती कुठियाला की पुस्तक का प्रकाशन भी आश्वस्त करता है। नए कथा लेखकों में संदीप शर्मा का कहानी संग्रह एक परिपक्व लेखक का एहसास करवाता है। इसी तरह भवारना के त्रिलोक मेहरा का कहानी संग्रह 'अंतिम राय का सच' में 16 कहानियां संकलित की गई हैं। यह संग्रह कहानी के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर है। यहां वर्ष भर के साहित्य पर एक विहंगम दृष्टिपात किया गया है। संभव है और भी पुस्तकें प्रकाशित हुई हों, जो मेरी नजर में न आई हों, उन पर फिर कभी चर्चा होगी, ऐसा मेरा प्रयत्न रहेगा।
साहित्यकारों की दृष्टि में वर्ष 2018 किस प्रकार रहा तथा इस वर्ष में उनकी गतिविधियां क्या-क्या रहीं, इस विषय में हमने प्रदेश भर के कई साहित्यकारों से बातचीत की। कई साहित्यकारों ने कहानी का आनंद लिया तो कुछ ने कविता का रसास्वादन किया। साथ ही साहित्यकारों ने अगले वर्ष की अपनी योजनाएं भी साझा की। पेश है साहित्यकारों की गतिविधियों पर पहली किस्त :
जिला बिलासपुर के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कलोल गांव से साहित्यकार कर्नल जसवंत सिंह चंदेल से इन्हीं प्रश्नों को लेकर बातचीत हुई। वर्ष 2018 में उन्होंने नरैणु राम हितैषी की लिखी बिलासपुर की कहानी नामक किताब पढ़ी जिससे बिलासपुर जिले से जुड़ी हुई भौगोलिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक व सामाजिक जानकारी मिली। यह किताब शोध किस्म की है। दूसरी किताब है 300 पन्नों की रूप शर्मा सेवानिवृत्त हेड मास्टर द्वारा लिखी शिव पुराण कथा जिसका कैहलूरी बोली में कविता के माध्यम से वर्णन किया गया है। यह किताब अपने अंदाज में उम्दा किस्म की किताबों की गिनती में आएगी, इससे भरपूर आनंद मिला। कर्नल जसवंत भविष्य में कैहलूरी बोली में सौ कविताओं के माध्यम से जानकारी देने की योजना पर कार्य कर रहे हैं।
जिला बिलासपुर के हटवाड़ देहरा गांव में बसे हिमाचल सरकारी प्रेस से सेवानिवृत्त अक्षर संयोजक भीम सिंह नेगी से साहित्य को लेकर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि शुभ तारिका अंबाला से छपने वाली पत्रिका को पढ़कर लघु कथाएं, कविताएं इत्यादि से काफी आनंद मिलता है। बिलासपुर लेखक संघ की ओर से गुगा जाहर पीर किताब को पढ़कर भी काफी जानकारी हासिल हो रही है। इसके अलावा वह मैगजीन का अध्ययन कर अपने जीवन को साहित्य से आनंदित करते हैं। गांव की घटनाओं को लेकर पहाड़ी भाषा में कहानियों की एक किताब लिखने के लिए मन में सोच चली हुई है। वह शीघ्र ही एक किताब पहाड़ी भाषा में लिखने जा रहे हैं। इसके अलावा अपनी लघु कथाएं व कविताएं शुभ तारिका में लगातार भेज रहे हैं।
बीबीएमबी के अधिकारी डा. रविंद्र कुमार ठाकुर, जो साहित्य में गहन रुचि रखते हैं, ने बताया कि उन्होंने बिलासपुर के साहित्यकारों द्वारा लिखित बिलासपुर के दर्शनीय स्थल गुगा जाहर पीर किताब के अलावा रूप सिंह शर्मा द्वारा अनुवादित पहाड़ी भाषा में शिव पुराण को पढ़ने का आनंद लिया। उनकी कई कविताएं कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। प्रथम भारत आरक्षित वाहिनी वनगढ़ जिला ऊना की पत्रिका उड़ान इत्यादि में भी वह अपने लेख लिख चुके हैं और भविष्य में एक सिपाही की डायरी नामक पुस्तक लिख रहे हैं।
साहित्य ही समाज का समुचित दर्पण है। वर्ष 2018 में हिमाचल के नवोदित व युवा लेखकों ने अपनी लेखनी से प्रयास जारी रखे। हमीरपुर के संदीप शर्मा का कहानी संग्रह 'अपने हिस्से का आसमान', सुंदरनगर के पवन चौहान का बाल कहानी संग्रह 'भोलू भालू सुधर गया' व कुल्लू के गणेश गनी का साहित्य संवाद संग्रह 'किस्से चलते हैं बिल्ली के पांव पर' प्रकाशित हुए। चंबा जनपद से जगजीत आजाद के संपादन में बाइस कवियों का काव्य संग्रह, 'वो आवाज किसकी थी' प्रकाशित हुआ, जिसमें सुभाष साहिल, अशोक दर्द, बलदेव मोहन खोसला, वीरेंद्र शर्मा वीर, डा. विजय कुमार पुरी, फिरोज कुमार रोज, शाम अजनबी, आशीष बहल, तिलक राज, जगदीश उपासक, प्रभात सिंह, विनय कुमार शर्मा, प्रीतम शर्मा प्रीत, जग्गू नौहरिया, अंकित राही, उत्तम सूर्यवंशी, उपासना पुष्प, विक्रम कौशल, लक्ष्य, काव्य, जगजीत आजाद व केवल सिंह भारती की कविताएं शामिल हैं। हमीरपुर से मोनिका सारथी की गजलें बाद ए सबा भाग-दो गजल संग्रह में शामिल की गई हैं। पालमपुर से प्रकाशित त्रैमासिक सृजन सरिता के दक्षिण भारत विशेषांक में बेहतर रचनाकारों को शामिल किया गया है। सिरमौर से दिलीप वशिष्ठ का काव्य संग्रह-मेरा कर्म यहां लोक जीव रचता है, बिलासपुर से अनिल शर्मा नील का निबंध संग्रह दृष्टिकोण भी प्रकाशित हुए हैं। बिलासपुर से मनोज कुमार शिव व नादौन से अतुल अंशुमाली की कहानियां भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही हैं। लघु कथा में अशोक दर्द, मनोज चौहान, नरेंद्र भारती आदि प्रकाशित हो रहे हैं। इसके अलावा जगदीश जमथली, दिनेश संवत, जावेद इकबाल, ओंकार धीमान, सीताराम शर्मा, सरस्वती स्वाती, विशाल ठाकुर लक्की, अरविंद मोदगिल, विनोद भावुक, विपिन चंदेल, मनोज शैल, वीनावर्धन, सुनीता भारद्वाज, मुनीष तन्हा, किरण गुलेरिया, हेमंत अत्री, विजय कुमारी सहगल, कौशल मुंगटा, पौरुष ठाकुर, दीपक भारद्वाज, विक्रम गथानिया, यशपाल कपूर, सुखदर्शन ठाकुर, राकेश रघुवंशी, टीसी सावन, शशि हरनोट, पंकज तन्हा, श्रीकांत अकेला, शैली किरण, सोनिया दत्त पखरोलवी, अनंत आलोक, शिवा दरवेश, प्रियंवदा, अजय, विजय, भारत दीक्षित आदि साहित्य सृजन में सक्रिय रहे। नवोदितों में रविंद्र चंदेल, डा. शकुंतला राणा, कुमार पंकज, विश्वजीत सहित अनेक अपने-अपने जनपदों के साहित्यिक आयोजनों में भाग लेते रहे। हिमाचल प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल भाषा कला संस्कृति अकादमी, विभिन्न जनपदों में स्थापित साहित्य प्रेमी संस्थाएं, समाचार पत्रों के साहित्यिक परिशिष्ट व रेडियो-दूरदर्शन के द्वारा भी नवोदित व युवा रचनाकारों को साहित्य लेखन, पठन-पाठन में समुचित वृद्धि होती रही। नवोदित व युवा कवियों ने ऑनलाइन पत्रिका-यू ट्यूब पर भी साहित्य सृजन जारी रखा।
समय-चक्र अद्भुत है। आप क्या हैं, क्या करना चाहते हैं, किंतु होता क्या है, यह कोई नहीं जानता। समय चक्र अपनी गति से चलता रहता है। इसी बीच होता वही है जो पहले से तय है। जैसे गीता में कहा गया है-'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' अर्थात कर्म पर तेरा अधिकार है, फल पर नहीं, यही जि़ंदगी का सार है। रामायण में गोस्वामी तुलसी दास के कहे को याद कर लें 'होई है सोई जो राम रचि राखा' अर्थात जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। समय के साथ-साथ जीवन चक्र में अद्भुत घटनाएं होती रहती हैं। वर्ष 2018 में साहित्यिक दृष्टि से कुछ ऐसा घटित हुआ जो सोचा भी नहीं था। साहित्य में गहरी आस्था होने के बावजूद 1982 में छूटता दिखना शुरू हो गया तो 1984 आते-आते बिल्कुल ही छूट गया। कथा-कहानियों का स्थान खबरों ने ले लिया और उपन्यास लेखन, लेखों-आलेखों में परिवर्तित हो गया। भीतर का लेखक पीछे छूट गया और एक दबंग पत्रकार सामने रह गया। धीरे-धीरे पत्रकारिता व्यवसाय में बदलती गई और हम उसी में समाहित होने लगे। एक समय ऐसा भी आ गया जब पत्रकारिता विशुद्ध रोजी-रोटी का पर्याय हो गई। पत्रकारिता का यह बहुत कठिन समय था, जिसमें साहित्य फिर याद आने लगा। वह साहित्य जिसमें खुलापन रहता है, लोकतंत्र बसता है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रहती है। मन एक बार फिर कहानियों में डूब जाने को होने लगा। अखबारें बहुत हो गई थीं, किंतु साहित्य संपादक और साहित्य परिशिष्ट गुम गए । यही वजह रही होगी कि अधिकांश दैनिक अखबारें साहित्य से दूर चली गईं। नए लेखकों, कवियों के लिए उम्मीदों के किवाड़ जब बंद हो गए तो साहित्य पिछड़ने लगा। किताबें छापने-छपवाने का पुराना कटु तजुर्बा सामने था। अर्थात धन दो, किताबें छपवाओ। यह स्थिति 1982-83 में भी थी, आज भी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर जाकर दृष्टि टिक गई। यह ऐसा माध्यम दिखाई देने लगा जिसमें आप अपनी बात बिना धन व्यय किए धड़ल्ले के साथ कह सकते थे। कोई रोक-टोक नहीं, कोई मठाधीश नहीं, संपादन या काट-छांट की वेदना नहीं। हालांकि हम संपादन और काट-छांट को किसी भी रचना के लिए शुभ मानते रहे हैं, लेकिन किसी विद्वान के हाथों ऐसा हो तो। सोशल मीडिया में बहुत लोकतंत्र है। स्पेस भी अनंत है। यही वजह है कि बहुत सारा कचरा भी परोसा जाता है। कारण यह कि इसमें गुणवत्ता जांचने के लिए अभी कोई तंत्र नहीं बन सका है। लेकिन कचरा तो किताबों में भी मिल जाता है। बहुत लोग किताबों की शक्ल में कूड़ा परोस रहे हैं। इस स्थिति में सोशल मीडिया को हल्का नहीं कहा जा सकता। जो अच्छा लिख रहा है, उसे स्वीकार किया जा रहा है। नए लेखकों को एक मंच मिल गया है और वे प्रयोग कर रहे हैं। जो भी प्रयोग हो रहे हैं, वे एक दिन किताब का रूप भी लेंगे। जो कचरा होगा वह फेंक दिया जाएगा, जो शुद्ध-विशुद्ध होगा, उसकी किताब बन जाएगी। कहीं कोई घाटे का सौदा नहीं दिखता। यही सोचते हुए हम भी तीन दशक बाद साहित्य की दुनिया में लौटने लगे हैं आहिस्ता-आहिस्ता। पत्रकारिता से ऊब होने लगी थी। नतीजतन कथा-कहानियों में दोबारा दिलचस्पी बढ़ गई। सोशल मीडिया में हर वर्ग ने जब हाथों-हाथ उठा लिया तो उत्साह ऊंचा हो गया। जब कुछ विद्वान लेखकों, कवियों और गुणी संपादकों ने खुलकर सराहना की तो मनोबल लौट आया। साहित्य गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों में भी आमंत्रित किया जाने लगा है। यानी बड़े साहित्यकारों से मान्यता मिल गई है। अतः लगने लगा है कि साहित्य सेवा के लिए अब भी फिट हैं। बल्कि अनुभव की दृष्टि से पहले से बेहतर सेवा की जा सकती है। अतएव हम तीन दशक बाद साहित्यिक क्षेत्र में लौटने लगे हैं और इसका पूरा श्रेय सोशल मीडिया को देते हैं। इरादा यह है कि पढ़-लिख लेने के बाद जीवन की शुरुआत जो साहित्य के साथ शुरू हुई थी, अंत भी इसी की गोद में हो।
किसी भी प्रदेश की छवि-निर्माण में वहां के साहित्य, कला और संस्कृति का विशेष योगदान रहता है। इनके समुचित विकास के लिए प्रदेश सरकार के पास मंत्री से लेकर सचिव व निदेशक नियुक्त रहते हैं। हिमाचल में हालांकि किसी मंत्री के पास संस्कृति का कोई स्वतंत्र कार्यभार नहीं होता, फिर भी इस विभाग का मंत्री होता है जिसके नीचे सचिवालय स्तर पर सचिव होते हैं जिनके अंतर्गत भाषा एवं संस्कृति विभाग और कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी आते हैं। इन दो संस्थानों के पास प्रदेश में साहित्य, कला, भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देते रहने का त्तरदायित्व रहता है। लेकिन पिछले कई सालों से जिस तरह ये दोनों संस्थान इस दृष्टि से नाकामयाब रहे हैं, वह चौंकाता है। भाषा विभाग के पास करोड़ों का बजट होता है, लेकिन पिछले एक साल में देखा गया है कि वह बिना किसी तयशुदा विजन के बांट दिया जा रहा है और वह भी हिमाचल से बाहर के लोगों में या बिचौलियों के माध्यम से। कुछ जानकार तो यह मानते हैं कि कुल बजट का 80 फीसदी खर्च प्रदेश के बाहर के या व्यर्थ के आयोजनों के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए इस वर्ष बहुत से ऐसे आयोजन हुए जिनका न तो यहां के साहित्यकारों को और न ही कलाकारों के साथ संस्कृति के लिए कोई विशेष लाभ हुआ। शिमला में साहित्य के उत्थान के नाम पर दिल्ली की एक प्राइवेट संस्था द्वारा शिमला लिटरेचर फेस्टिवल किया गया जो शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया। इसके लिए आंखें मूंद कर प्रदेश सरकार ने बिना हिमाचल प्रदेश के लेखकों की सहभागिता के पांच लाख दे दिया। पहला विवाद देश के कुछ बुद्धिजीवियों के आमंत्रण पर हुआ और दूसरा प्रदेश के लेखकों को उचित मंच व उनकी नगण्य सहभागिता को लेकर। आयोजकों ने प्रदेश सरकार से लेकर विभिन्न निजी क्षेत्रों से लाखों की स्पांसरशिप ले ली, लेकिन गेयटी का जो बड़ा हाल था, वह पूरे उत्सव में खाली रहा और जो कुछ आयोजन हुए, वह आती-जाती भीड़ के बीच बाहर खुले में किए गए जिसके आवरण में इस लिटरेचर फेस्टिवल को बेहद सफल मान लिया गया। आश्चर्य की बात थी कि हिंदी व हिमाचल प्रदेश के जाने-माने कथाकार एसआर हरनोट ने खाली सभागार देखकर अपनी कहानी पढ़ने से इनकार कर दिया। दूसरी अचंभित करने वाली बात यह रही कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने न केवल इस फेस्टिवल में आने से मना कर दिया, बल्कि उन्होंने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में साहित्य और संस्कृति से दूरियां बनाए रखी जिसका कारण भी यही विभाग और इनका कमजोर प्रबंधन ही रहा। अन्यथा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बहुत विनम्र और साहित्य प्रेमी माने जाते हैं। लेकिन उनके सलाहकार पता नहीं कौन लोग हैं....... ?
इसी तरह भाषा विभाग और अकादमी की जो योजनाएं लेखकों, कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए बरसों से घोषित की गई हैं उनमें से 90 फीसदी बंद कर दी गई हैं। भाषा विभाग पिछले 15 सालों से किसी भी लेखक को राज्य सम्मान नहीं दे पा रहा है। ये पांच सम्मान हैं जो प्रति वर्ष दिए जाने चाहिए। आखिरी सम्मान वर्ष 2005 से वर्ष 2007 में दिए गए थे। पूर्व सरकार ने कई बार घोषणाएं कीं लेकिन विभाग के कानों में जूं तक न रेंगी। वर्तमान सरकार से भी बराबर यह मामला उठाया जाता रहा है। अकादमी ने लंबित अकादमी पुरस्कार और शिखर सम्मान 2014 तक तो पूर्ण कर लिए, परंतु उसके बाद आज तक वह भी भाषा विभाग के पदचिन्हों पर चल रही है। सरकार के बदलने से अकादमी ने अपना पूर्णतः सरकारीकरण कर लिया है और संघ की एक साहित्यिक संस्था 'साहित्य परिषद' के साथ जैसे अपने को समाहित ही कर दिया। अब मंचों पर एक विशेष विचारधारा के असाहित्यिक लोग ही बार-बार नजर आने लगे हैं जिससे बहुत से नामी साहित्यकारों ने किनारा करना ही उचित समझा है। जिन लेखकों के नाम से हिमाचल जाना जाता है, उनको किसी आयोजन में नहीं बुलाया जाता। उधर करोड़ों रुपए का बजट खर्च करने पर भी हिमाचल सरकार का भाषा विभाग पूर्व निर्धारित जयंतियों के सिवा कोई उल्लेखनीय आयोजन नहीं कर पाया। जो आयोजन हुए वे सारे फ्लाप शो थे जिनमें हिमाचल की भागीदारी नगण्य रही और लेखकों, कलाकारों, रंगकर्मियों के हाथ केवल मायूसी ही लगती रही। भाषा विभाग ने तो कई पंजीकृत संस्थाओं को अनुदान तक नहीं दिए, जबकि इन संस्थाओं ने अपने स्तर पर सफल आयोजन किए। इधर भाषा अकादमी भी एक विशेष संस्था की बैसाखियों पर अपना मान-सम्मान बचाने में जुटी है और अकादमी एक वर्ष में कोई स्वतंत्र साहित्यिक आयोजन नहीं कर पाई है।
वर्ष 2018 की सरकारी साहित्यिक गतिविधियों को लेकर हमने भाषा अकादमी के सचिव डा. कर्म सिंह से बातचीत की। यहां प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अंश :
दिहि : साहित्य की दृष्टि से पिछले साल को कैसे देखते हैं?
कर्म सिंह : अकादमी ने पूर्व स्वीकृत साहित्यिक योजनाआें का सफलतापूर्वक संचालन किया है। विभिन्न राज्यस्तीय कार्यक्रमों, साहित्य संगोष्ठियों तथा बहुभाषी कवि सम्मेलनों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के सभी भागों के वरिष्ठ लेखकों, साहित्यकारों, कवियों तथा नवोदित लेखकों को अवसर प्रदान किया गया है। इस वर्ष प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं के साथ भी अकादमी ने स्तरीय साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है। साहित्यिक दृष्टि से वर्ष 2018 में अकादमी की गतिविधियां संतोषजनक रही हैं जिनमें संस्थाओं तथा लेखकों की बराबर भागीदारी रही है।
दिहि : कोई खास योजना जिस पर विचार हुआ?
कर्म सिंह : आकदमी द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ साहित्यकारों तथा कलाकारों के सम्मान और नवोदित साहित्यकारों तथा कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राजकीय महाविद्यालय संजौली तथा राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में कालेजों तथा विश्वविद्यालयों के छात्रा-छात्राओं को मंच प्रदान करने के लिए कविता पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दस जमा दो स्तर के विद्याथियों को साहित्य के साथ जोड़ने के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला में निबंध लेखन, कविता पाठ तथा चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। अकादमी के विभिन्न जिला स्तरीय तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में वरिष्ठ लेखकों के साथ नवोदित कलाकारों को भी बराबर के अवसर प्रदान किए गए। अकादमी द्वारा इस वर्ष दिवंगत साहित्यकारों तथा कलाकारों के जीवन वृत्त और लेखन तथा कला में उनके योगदान पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किया गया। इस वर्ष प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकारों तथा कलाकारों के जीवन वृत्त पर आधारित डाक्यूमेंटरी बनाने का काम प्रारंभ किया गया है। अकादमी द्वारा अब तक किए गए सांस्कृतिक प्रलेखन के अंतर्गत मेले, पर्व, त्योहार, विशिष्ट आयोजन आदि पर किए गए प्रलेखन कार्य का संपादन करके लगभग 20 वृत्त चित्र तैयार किए गए हैं।
दिहि : हिमाचल भाषा अकादमी की उपलब्धियां क्या रहीं?
कर्म सिंह : हिमाचल भाषा अकादमी द्वारा विश्व पुस्तक मेला 2018 के अवसर पर लेखक मंच पर हिमाचल प्रदेश के समकालीन साहित्य पर एक संगोष्ठी तथा कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। अकादमी द्वारा इस वर्ष पहली बार 15 व 16 फरवरी 2018 को माननीय मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इतिहासकार ठाकुर रामसिंह की जयंती का राज्यस्तरीय समारोह शोध संस्थान नेरी, हमीरपुर में संपन्न किया गया। अकादमी द्वारा मंडी शिवरात्रि मेला 2018 तथा सुकेत उत्सव के अवसर पर सभी देवी-देवताओं का सर्वेक्षण तथा वीडियोकरण किया गया। इस योजना में अकादमी द्वारा मंडी जिला के सभी देवी-देवताओं के इतिहास तथा परंपराओं पर आधारित मोनोग्राफ प्रकाशित किया जा रहा है। जनजातीय उत्सव किन्नौर का प्रलेखन किया गया है। श्री रेणुका मेले के अवसर पर सिरमौरी लोक संस्कृति तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति का फिल्मांकन किया गया है। इस वर्ष गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत बंजार क्षेत्र में वाद्ययंत्र निर्माण केंद्र स्थापित किया गया। इस योजना के तहत शिमला में पहाड़ी चित्रकला प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाने की भी योजना है।
दिहि : लेखकों को वित्तीय मदद का ब्यौरा दें।
कर्म सिंह : वर्ष 2016 में प्रकाशित 28 पुस्तकों का थोक खरीद योजना के अंतर्गत प्रत्येक पुस्तक का 15000 रुपए का क्रय किया गया तथा वर्ष 2017 में प्रकाशित पुस्तकें खरीद के लिए आमंत्रित कर ली गई हैं। इस वर्ष अकादमी द्वारा विभिन्न कायक्रमों के आयोजन के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं को लगभग डेढ़ लाख रुपए का अनुदान दिया गया है। इतिहास दिवाकर, सरसबज, हिमखंड, शैलसूत्रा तथा हाईफन आदि साहित्यिक पत्रिकाओं को वित्तीय अनुदान प्रदान किया गया है। वर्ष 2012-14, 2015 और 2016 के 8 साहित्य पुरस्कार देने हेतु प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। ये पुरस्कार मार्च 2019 से पूर्व दिए जाने का प्रयास है। वर्ष 2017 के शिखर सम्मान तथा कला सम्मान स्वैच्छिक संस्था सम्मान, चंबा रूमाल तथा पहाड़ी चित्रकला प्रतियोगिता सम्मान दिए जाने का मसला विचाराधीन है।
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हिमाचल में साहित्यिक लेखन अनेक उतार-चढ़ावों एवं प्रकाशन की अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी विलक्षणता एवं प्रभविष्णुता को निरंतर बनाए हुए है, प्रादेशिक स्तर पर भी और राष्ट्रीय स्तर पर भी। गद्य, पद्य एवं लोक संस्कृति तीनों क्षेत्रों में हिमाचली लेखकों की सक्रियता जहां आश्वस्त करती है, वहीं प्रकाशन की सहज सुविधाओं की हिमाचल में अपेक्षा फिर भी बनी हुई है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह सृजन की दृष्टि से सार्थक वर्ष रहा है क्योंकि न केवल युवा लेखक सक्रिय रहे हैं अपितु डा सत्यपाल शर्मा, रमेशचंद्र शर्मा व प्रिंसिपल परमानंद शर्मा जैसे वयोवृद्ध लेखक भी साहित्य सृजन में गतिशील रहे हैं। डा. सत्यपाल शर्मा की निबंधों की पुस्तक 'साहित्य में अश्लीलता का प्रश्न' तथा अन्य निबंध उनकी विद्वता के परिचायक हैं, भले ही हम गुलेरी की कहानी बुद्धू का कांटा में 'लहंगा पसारने या न पसारने' की बात को मांसलता न मानने से सहमत न हों, परंतु उन्होंने कई उदाहरण देकर अपने अश्लीलता के प्रसंग को स्पष्ट किया है। रमेशचंद्र शर्मा निरंतर लिख रहे हैं। उनका नवप्रकाशित उपन्यास 'परिग्रह' उनकी साहित्यिक जिजीविषा का ही प्रमाण है। साधुराम दर्शक का कहानी संग्रह 'मेरी प्रगतिशील कहानियां' और इसकी भूमिका सृजन के प्रेमचंद युगीन बिंदुओं को मर्मज्ञता से उठाती है । उधर पीएन शर्मा जी अपनी साधना में पूरे उत्साह एवं प्रासंगिकता से तल्लीन हैं। जयदेव विद्रोही की हुंकार भी इस वर्ष बराबर सुनाई देती रही है। बाल साहित्य में पवन चौहान की 'भोलू भालू सुधर गया' बाल कहानियों का रोचक एवं अर्थपूर्ण संग्रह बोधि प्रकाशन से आया है। पवन देशभर की बाल पत्रिकाओं में निरंतर उपस्थित रहते हैं, यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है। पवन चौहान की ही भांति डा. प्रत्यूष गुलेरी का संग्रह 'मेरे सत्तावन बालगीत' आत्मा राम एंड सन्स से प्रकाशित हुआ है। दोनों लेखकों में बच्चों की बाल सुलभ प्रवृत्तियों का मनोवैज्ञानिक चित्रण मिलता है। संस्कृति से संबद्ध पुस्तकों में सुदर्शन वशिष्ठ की 'पर्वतीय संस्कृति में शिवशक्ति' तथा 'पुरातन नगरी चंबा' उल्लेखनीय हैं। इस संदर्भ में स्व. देवल की 'चम्बा अचम्भा' भी एक महत्त्वपूर्ण कृति रही है। रमेश चंद्र मस्ताना एवं प्रभात शर्मा की पांगी घाटी से संबद्ध दो महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं जो यात्रा के साथ-साथ वहां की गंभीर एवं सही जानकारी प्रस्तुत करती हैं। पंगवाल पर केआर भारती की अंग्रेजी में पुस्तक भी काफी चर्चित रही है। 'नदी गायब है'-पर्यावरण से संबद्ध बारह कहानियां समेटे हुए एसआर हरनोट की सद्य प्रकाशित पुस्तक है जिसकी लंबी भूमिका श्रीनिवास श्रीकांत ने लिखी है। राम मूर्ति वासुदेव प्रशांत की हिमाचल की रोचक लोक कथाएं तथा प्रस्तुत पंक्तियों के लेखक की हिमाचल की श्रेष्ठ लोक कथाएं भी इसी काल खंड में प्रकाशित हुई हैं। डा. सत्यनारायण स्नेही की पुस्तक 'अनुवाद विज्ञान' का उल्लेख करना भी उचित होगा क्योंकि यह किसी हिमाचली द्वारा लिखित विषय की पहली पुस्तक कही गई है । इन्हीं की 'समकालीन कविता का लोक' पुस्तक जो हिमाचल की हिंदी कविता का आलोड़न करती है, चर्चित पुस्तक रही है। इसी वर्ष आलोचना के क्षेत्र में स्व. डा. पीयूष गुलेरी के शोध प्रबंध 'चंद्रधर शर्मा गुलेरी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व' का पुनर्प्रकाशन गुंजन समिति द्वारा किया गया है, जिसका विमोचन डा. पीयूष के घर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने अनेक लेखकों की उपस्थिति में किया। कविता सृजन में हिमाचल पर्याप्त उर्वरा रहा है और वर्ष दो हज़ार अट्ठारह भी इसका अपवाद नहीं है। सिरमौर के दिलीप वशिष्ठ की दो पुस्तकें 'मेरा कर्म यहां लोक जीवन रचना है' तथा 'अनंत प्रेम की वैदिक रचनाएं', किशन सिंह गतवाल की 'गिरी गंगा की लहरें', प्रभातकुमार की 'ऐसा देश है मेरा', दीन दयाल वर्मा की 'गुरु दक्षिणा' उल्लेखनीय संग्रह हैं, जिनमें कल्पना की उड़ान यथार्थ की विभीषिका के साथ मिलती है। 'गीत गाता हूं मैं' एक कृषि वैज्ञानिक की सुरीली, भावपूर्ण कविताओं का संग्रह है। जैसे रवि सिंह मधोत्रा ने हिमाचली में 'जांडा' उपन्यास लिख कर ख्याति अर्जित की, उसी प्रकार जस्सूर के मेधावी वैज्ञानिक ने कविता एवं कहानी के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमाया है। यहां सहज भाषा में सहज अभिव्यक्ति है। एक अपनी ही तरह का अलमस्त, धींगामुश्त आलोचक कवि है गणेश गनी, जिसकी पुस्तक 'किस्से चलते हैं बिल्ली के पांव पर' में देश के पचास कवियों की कविताओं पर किस्ससागोई के माध्यम से आत्मीय परंतु आलोचनात्मक टिप्पणियां हैं जिन्हें लेखक ने साहित्य संवाद का नाम दिया है। इसमें हिमाचल के भी पंद्रह कवियों की कविताओं पर आलोचकीय किस्सागोई विद्यमान है। विक्रम गथानिया की पुस्तक 'इस नए वक्त में' अपने ही अंदाज की कविताओं का महत्त्वपूर्ण संग्रह है, जो अपनी विषयवस्तु की प्रासंगिकता के कारण सहज ही आकर्षित करता है। एक अन्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण कविता संग्रह है 'सोलन काव्य सरिता' जिसका संपादन डा. प्रेमलाल गौतम और शंकरलाल वासिष्ठ ने किया है। इसमें सोलन जिला के सतहत्तर कवियों की रचनाएं उनके परिचय सहित संकलित हैं। इस परंपरा का अनुसरण अन्य जिलों के लेखकों को भी करना चाहिए। यह एक ऐतिहासिक प्रयास है। कथा के क्षेत्र में भी हिमाचल के लेखक सदा अग्रणी रहे हैं। जय नारायण कश्यप का उपन्यास 'उल्लूकपुर का साम्राज्य' एक प्रतीकात्मक शैली में लिखा गया उपन्यास है, जिसमें उल्लू अपना प्राकृतिक जीवन जीते हुए मानव समाज पर टिप्पणियां करते जाते हैं। चमगादड़, मकडि़यां आदि इनके सहयोगी हैं। प्रिया आनंद की 'फिर मिलेंगे' व 'सुनो केया' नामक दो कृतियां अभी प्रकाशित हुई हैं। उनका अंदाज रास्टेल्जिक कथा भाष्य का है, एकदम सम्मोहक। राजकुमार राकेश का कहानी संग्रह 'आपात डायरी' छः कहानियों का सग्रह है, जिसमें सामाजिक विषयों पर लेखक की कथाएं हैं। शेर सिंह का कहानी संग्रह 'शहर की शराफत' भावना प्रकाशन से आया है। लेखक नौकरी के सिलसिले में सेवानिवृत्ति तक भारत भर में यहां-वहां कार्यरत रहा, इसलिए रचनाओं में व्यापक अनुभव के दर्शन होते हैं। गंगाराम राजी बहुत ही कुशल कहानीकार हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सृजनात्मक गति पकड़ी है और बड़े-बड़ों को पीछे छोड़ गए हैं। कृष्णदेव महादेविया का लघुकथा संग्रह 'तुम्हारे लिए' अपनी विषयवस्तु एवं सुघड़ शिल्प कौशल के कारण आकर्षित करता है। ओम भारद्वाज का कहानी संग्रह भा स्वागत योग्य है। राजेंद्र राजन का मौन से संवाद एक रोचक उपन्यास है। एड्स पर आधारित कहानियों 'मैं जीना सिखाता हूं' के ख्यात लेखक अजय पाराशर का कहानी संग्रह 'एक पापा की मौत' उल्लेखनीय है। राष्ट्रीय कथा शृंखला में हरनोट की किताबघर से 'दस प्रतिनिधि कहानियां' और सुशील कुमार फुल्ल की प्रभात प्रकाशन से 'सुशील कुमार फुल्ल की लोकप्रिय कहानियां' का प्रकाशन हिमाचल की राष्ट्रीय पहचान का सूचक है। जनसत्ता के कोलकाता से प्रकाशित वार्षिक विशेषांक में भी दस में से दो हिमाचली लेखकों की कथाएं हैं । बया पत्रिका में चंद्ररेखा ढडवाल का लघु उपन्यास भी प्रकाशित हुआ है। खंड काव्य लेखक स्व. राजेंद्रपाल सूद की बेटी भारती कुठियाला की पुस्तक का प्रकाशन भी आश्वस्त करता है। नए कथा लेखकों में संदीप शर्मा का कहानी संग्रह एक परिपक्व लेखक का एहसास करवाता है। इसी तरह भवारना के त्रिलोक मेहरा का कहानी संग्रह 'अंतिम राय का सच' में सोलह कहानियां संकलित की गई हैं। यह संग्रह कहानी के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर है। यहां वर्ष भर के साहित्य पर एक विहंगम दृष्टिपात किया गया है। संभव है और भी पुस्तकें प्रकाशित हुई हों, जो मेरी नजर में न आई हों, उन पर फिर कभी चर्चा होगी, ऐसा मेरा प्रयत्न रहेगा। साहित्यकारों की दृष्टि में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह किस प्रकार रहा तथा इस वर्ष में उनकी गतिविधियां क्या-क्या रहीं, इस विषय में हमने प्रदेश भर के कई साहित्यकारों से बातचीत की। कई साहित्यकारों ने कहानी का आनंद लिया तो कुछ ने कविता का रसास्वादन किया। साथ ही साहित्यकारों ने अगले वर्ष की अपनी योजनाएं भी साझा की। पेश है साहित्यकारों की गतिविधियों पर पहली किस्त : जिला बिलासपुर के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कलोल गांव से साहित्यकार कर्नल जसवंत सिंह चंदेल से इन्हीं प्रश्नों को लेकर बातचीत हुई। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में उन्होंने नरैणु राम हितैषी की लिखी बिलासपुर की कहानी नामक किताब पढ़ी जिससे बिलासपुर जिले से जुड़ी हुई भौगोलिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक व सामाजिक जानकारी मिली। यह किताब शोध किस्म की है। दूसरी किताब है तीन सौ पन्नों की रूप शर्मा सेवानिवृत्त हेड मास्टर द्वारा लिखी शिव पुराण कथा जिसका कैहलूरी बोली में कविता के माध्यम से वर्णन किया गया है। यह किताब अपने अंदाज में उम्दा किस्म की किताबों की गिनती में आएगी, इससे भरपूर आनंद मिला। कर्नल जसवंत भविष्य में कैहलूरी बोली में सौ कविताओं के माध्यम से जानकारी देने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। जिला बिलासपुर के हटवाड़ देहरा गांव में बसे हिमाचल सरकारी प्रेस से सेवानिवृत्त अक्षर संयोजक भीम सिंह नेगी से साहित्य को लेकर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि शुभ तारिका अंबाला से छपने वाली पत्रिका को पढ़कर लघु कथाएं, कविताएं इत्यादि से काफी आनंद मिलता है। बिलासपुर लेखक संघ की ओर से गुगा जाहर पीर किताब को पढ़कर भी काफी जानकारी हासिल हो रही है। इसके अलावा वह मैगजीन का अध्ययन कर अपने जीवन को साहित्य से आनंदित करते हैं। गांव की घटनाओं को लेकर पहाड़ी भाषा में कहानियों की एक किताब लिखने के लिए मन में सोच चली हुई है। वह शीघ्र ही एक किताब पहाड़ी भाषा में लिखने जा रहे हैं। इसके अलावा अपनी लघु कथाएं व कविताएं शुभ तारिका में लगातार भेज रहे हैं। बीबीएमबी के अधिकारी डा. रविंद्र कुमार ठाकुर, जो साहित्य में गहन रुचि रखते हैं, ने बताया कि उन्होंने बिलासपुर के साहित्यकारों द्वारा लिखित बिलासपुर के दर्शनीय स्थल गुगा जाहर पीर किताब के अलावा रूप सिंह शर्मा द्वारा अनुवादित पहाड़ी भाषा में शिव पुराण को पढ़ने का आनंद लिया। उनकी कई कविताएं कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। प्रथम भारत आरक्षित वाहिनी वनगढ़ जिला ऊना की पत्रिका उड़ान इत्यादि में भी वह अपने लेख लिख चुके हैं और भविष्य में एक सिपाही की डायरी नामक पुस्तक लिख रहे हैं। साहित्य ही समाज का समुचित दर्पण है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में हिमाचल के नवोदित व युवा लेखकों ने अपनी लेखनी से प्रयास जारी रखे। हमीरपुर के संदीप शर्मा का कहानी संग्रह 'अपने हिस्से का आसमान', सुंदरनगर के पवन चौहान का बाल कहानी संग्रह 'भोलू भालू सुधर गया' व कुल्लू के गणेश गनी का साहित्य संवाद संग्रह 'किस्से चलते हैं बिल्ली के पांव पर' प्रकाशित हुए। चंबा जनपद से जगजीत आजाद के संपादन में बाइस कवियों का काव्य संग्रह, 'वो आवाज किसकी थी' प्रकाशित हुआ, जिसमें सुभाष साहिल, अशोक दर्द, बलदेव मोहन खोसला, वीरेंद्र शर्मा वीर, डा. विजय कुमार पुरी, फिरोज कुमार रोज, शाम अजनबी, आशीष बहल, तिलक राज, जगदीश उपासक, प्रभात सिंह, विनय कुमार शर्मा, प्रीतम शर्मा प्रीत, जग्गू नौहरिया, अंकित राही, उत्तम सूर्यवंशी, उपासना पुष्प, विक्रम कौशल, लक्ष्य, काव्य, जगजीत आजाद व केवल सिंह भारती की कविताएं शामिल हैं। हमीरपुर से मोनिका सारथी की गजलें बाद ए सबा भाग-दो गजल संग्रह में शामिल की गई हैं। पालमपुर से प्रकाशित त्रैमासिक सृजन सरिता के दक्षिण भारत विशेषांक में बेहतर रचनाकारों को शामिल किया गया है। सिरमौर से दिलीप वशिष्ठ का काव्य संग्रह-मेरा कर्म यहां लोक जीव रचता है, बिलासपुर से अनिल शर्मा नील का निबंध संग्रह दृष्टिकोण भी प्रकाशित हुए हैं। बिलासपुर से मनोज कुमार शिव व नादौन से अतुल अंशुमाली की कहानियां भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही हैं। लघु कथा में अशोक दर्द, मनोज चौहान, नरेंद्र भारती आदि प्रकाशित हो रहे हैं। इसके अलावा जगदीश जमथली, दिनेश संवत, जावेद इकबाल, ओंकार धीमान, सीताराम शर्मा, सरस्वती स्वाती, विशाल ठाकुर लक्की, अरविंद मोदगिल, विनोद भावुक, विपिन चंदेल, मनोज शैल, वीनावर्धन, सुनीता भारद्वाज, मुनीष तन्हा, किरण गुलेरिया, हेमंत अत्री, विजय कुमारी सहगल, कौशल मुंगटा, पौरुष ठाकुर, दीपक भारद्वाज, विक्रम गथानिया, यशपाल कपूर, सुखदर्शन ठाकुर, राकेश रघुवंशी, टीसी सावन, शशि हरनोट, पंकज तन्हा, श्रीकांत अकेला, शैली किरण, सोनिया दत्त पखरोलवी, अनंत आलोक, शिवा दरवेश, प्रियंवदा, अजय, विजय, भारत दीक्षित आदि साहित्य सृजन में सक्रिय रहे। नवोदितों में रविंद्र चंदेल, डा. शकुंतला राणा, कुमार पंकज, विश्वजीत सहित अनेक अपने-अपने जनपदों के साहित्यिक आयोजनों में भाग लेते रहे। हिमाचल प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल भाषा कला संस्कृति अकादमी, विभिन्न जनपदों में स्थापित साहित्य प्रेमी संस्थाएं, समाचार पत्रों के साहित्यिक परिशिष्ट व रेडियो-दूरदर्शन के द्वारा भी नवोदित व युवा रचनाकारों को साहित्य लेखन, पठन-पाठन में समुचित वृद्धि होती रही। नवोदित व युवा कवियों ने ऑनलाइन पत्रिका-यू ट्यूब पर भी साहित्य सृजन जारी रखा। समय-चक्र अद्भुत है। आप क्या हैं, क्या करना चाहते हैं, किंतु होता क्या है, यह कोई नहीं जानता। समय चक्र अपनी गति से चलता रहता है। इसी बीच होता वही है जो पहले से तय है। जैसे गीता में कहा गया है-'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' अर्थात कर्म पर तेरा अधिकार है, फल पर नहीं, यही जि़ंदगी का सार है। रामायण में गोस्वामी तुलसी दास के कहे को याद कर लें 'होई है सोई जो राम रचि राखा' अर्थात जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। समय के साथ-साथ जीवन चक्र में अद्भुत घटनाएं होती रहती हैं। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में साहित्यिक दृष्टि से कुछ ऐसा घटित हुआ जो सोचा भी नहीं था। साहित्य में गहरी आस्था होने के बावजूद एक हज़ार नौ सौ बयासी में छूटता दिखना शुरू हो गया तो एक हज़ार नौ सौ चौरासी आते-आते बिल्कुल ही छूट गया। कथा-कहानियों का स्थान खबरों ने ले लिया और उपन्यास लेखन, लेखों-आलेखों में परिवर्तित हो गया। भीतर का लेखक पीछे छूट गया और एक दबंग पत्रकार सामने रह गया। धीरे-धीरे पत्रकारिता व्यवसाय में बदलती गई और हम उसी में समाहित होने लगे। एक समय ऐसा भी आ गया जब पत्रकारिता विशुद्ध रोजी-रोटी का पर्याय हो गई। पत्रकारिता का यह बहुत कठिन समय था, जिसमें साहित्य फिर याद आने लगा। वह साहित्य जिसमें खुलापन रहता है, लोकतंत्र बसता है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रहती है। मन एक बार फिर कहानियों में डूब जाने को होने लगा। अखबारें बहुत हो गई थीं, किंतु साहित्य संपादक और साहित्य परिशिष्ट गुम गए । यही वजह रही होगी कि अधिकांश दैनिक अखबारें साहित्य से दूर चली गईं। नए लेखकों, कवियों के लिए उम्मीदों के किवाड़ जब बंद हो गए तो साहित्य पिछड़ने लगा। किताबें छापने-छपवाने का पुराना कटु तजुर्बा सामने था। अर्थात धन दो, किताबें छपवाओ। यह स्थिति एक हज़ार नौ सौ बयासी-तिरासी में भी थी, आज भी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर जाकर दृष्टि टिक गई। यह ऐसा माध्यम दिखाई देने लगा जिसमें आप अपनी बात बिना धन व्यय किए धड़ल्ले के साथ कह सकते थे। कोई रोक-टोक नहीं, कोई मठाधीश नहीं, संपादन या काट-छांट की वेदना नहीं। हालांकि हम संपादन और काट-छांट को किसी भी रचना के लिए शुभ मानते रहे हैं, लेकिन किसी विद्वान के हाथों ऐसा हो तो। सोशल मीडिया में बहुत लोकतंत्र है। स्पेस भी अनंत है। यही वजह है कि बहुत सारा कचरा भी परोसा जाता है। कारण यह कि इसमें गुणवत्ता जांचने के लिए अभी कोई तंत्र नहीं बन सका है। लेकिन कचरा तो किताबों में भी मिल जाता है। बहुत लोग किताबों की शक्ल में कूड़ा परोस रहे हैं। इस स्थिति में सोशल मीडिया को हल्का नहीं कहा जा सकता। जो अच्छा लिख रहा है, उसे स्वीकार किया जा रहा है। नए लेखकों को एक मंच मिल गया है और वे प्रयोग कर रहे हैं। जो भी प्रयोग हो रहे हैं, वे एक दिन किताब का रूप भी लेंगे। जो कचरा होगा वह फेंक दिया जाएगा, जो शुद्ध-विशुद्ध होगा, उसकी किताब बन जाएगी। कहीं कोई घाटे का सौदा नहीं दिखता। यही सोचते हुए हम भी तीन दशक बाद साहित्य की दुनिया में लौटने लगे हैं आहिस्ता-आहिस्ता। पत्रकारिता से ऊब होने लगी थी। नतीजतन कथा-कहानियों में दोबारा दिलचस्पी बढ़ गई। सोशल मीडिया में हर वर्ग ने जब हाथों-हाथ उठा लिया तो उत्साह ऊंचा हो गया। जब कुछ विद्वान लेखकों, कवियों और गुणी संपादकों ने खुलकर सराहना की तो मनोबल लौट आया। साहित्य गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों में भी आमंत्रित किया जाने लगा है। यानी बड़े साहित्यकारों से मान्यता मिल गई है। अतः लगने लगा है कि साहित्य सेवा के लिए अब भी फिट हैं। बल्कि अनुभव की दृष्टि से पहले से बेहतर सेवा की जा सकती है। अतएव हम तीन दशक बाद साहित्यिक क्षेत्र में लौटने लगे हैं और इसका पूरा श्रेय सोशल मीडिया को देते हैं। इरादा यह है कि पढ़-लिख लेने के बाद जीवन की शुरुआत जो साहित्य के साथ शुरू हुई थी, अंत भी इसी की गोद में हो। किसी भी प्रदेश की छवि-निर्माण में वहां के साहित्य, कला और संस्कृति का विशेष योगदान रहता है। इनके समुचित विकास के लिए प्रदेश सरकार के पास मंत्री से लेकर सचिव व निदेशक नियुक्त रहते हैं। हिमाचल में हालांकि किसी मंत्री के पास संस्कृति का कोई स्वतंत्र कार्यभार नहीं होता, फिर भी इस विभाग का मंत्री होता है जिसके नीचे सचिवालय स्तर पर सचिव होते हैं जिनके अंतर्गत भाषा एवं संस्कृति विभाग और कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी आते हैं। इन दो संस्थानों के पास प्रदेश में साहित्य, कला, भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देते रहने का त्तरदायित्व रहता है। लेकिन पिछले कई सालों से जिस तरह ये दोनों संस्थान इस दृष्टि से नाकामयाब रहे हैं, वह चौंकाता है। भाषा विभाग के पास करोड़ों का बजट होता है, लेकिन पिछले एक साल में देखा गया है कि वह बिना किसी तयशुदा विजन के बांट दिया जा रहा है और वह भी हिमाचल से बाहर के लोगों में या बिचौलियों के माध्यम से। कुछ जानकार तो यह मानते हैं कि कुल बजट का अस्सी फीसदी खर्च प्रदेश के बाहर के या व्यर्थ के आयोजनों के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए इस वर्ष बहुत से ऐसे आयोजन हुए जिनका न तो यहां के साहित्यकारों को और न ही कलाकारों के साथ संस्कृति के लिए कोई विशेष लाभ हुआ। शिमला में साहित्य के उत्थान के नाम पर दिल्ली की एक प्राइवेट संस्था द्वारा शिमला लिटरेचर फेस्टिवल किया गया जो शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया। इसके लिए आंखें मूंद कर प्रदेश सरकार ने बिना हिमाचल प्रदेश के लेखकों की सहभागिता के पांच लाख दे दिया। पहला विवाद देश के कुछ बुद्धिजीवियों के आमंत्रण पर हुआ और दूसरा प्रदेश के लेखकों को उचित मंच व उनकी नगण्य सहभागिता को लेकर। आयोजकों ने प्रदेश सरकार से लेकर विभिन्न निजी क्षेत्रों से लाखों की स्पांसरशिप ले ली, लेकिन गेयटी का जो बड़ा हाल था, वह पूरे उत्सव में खाली रहा और जो कुछ आयोजन हुए, वह आती-जाती भीड़ के बीच बाहर खुले में किए गए जिसके आवरण में इस लिटरेचर फेस्टिवल को बेहद सफल मान लिया गया। आश्चर्य की बात थी कि हिंदी व हिमाचल प्रदेश के जाने-माने कथाकार एसआर हरनोट ने खाली सभागार देखकर अपनी कहानी पढ़ने से इनकार कर दिया। दूसरी अचंभित करने वाली बात यह रही कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने न केवल इस फेस्टिवल में आने से मना कर दिया, बल्कि उन्होंने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में साहित्य और संस्कृति से दूरियां बनाए रखी जिसका कारण भी यही विभाग और इनका कमजोर प्रबंधन ही रहा। अन्यथा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बहुत विनम्र और साहित्य प्रेमी माने जाते हैं। लेकिन उनके सलाहकार पता नहीं कौन लोग हैं....... ? इसी तरह भाषा विभाग और अकादमी की जो योजनाएं लेखकों, कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए बरसों से घोषित की गई हैं उनमें से नब्बे फीसदी बंद कर दी गई हैं। भाषा विभाग पिछले पंद्रह सालों से किसी भी लेखक को राज्य सम्मान नहीं दे पा रहा है। ये पांच सम्मान हैं जो प्रति वर्ष दिए जाने चाहिए। आखिरी सम्मान वर्ष दो हज़ार पाँच से वर्ष दो हज़ार सात में दिए गए थे। पूर्व सरकार ने कई बार घोषणाएं कीं लेकिन विभाग के कानों में जूं तक न रेंगी। वर्तमान सरकार से भी बराबर यह मामला उठाया जाता रहा है। अकादमी ने लंबित अकादमी पुरस्कार और शिखर सम्मान दो हज़ार चौदह तक तो पूर्ण कर लिए, परंतु उसके बाद आज तक वह भी भाषा विभाग के पदचिन्हों पर चल रही है। सरकार के बदलने से अकादमी ने अपना पूर्णतः सरकारीकरण कर लिया है और संघ की एक साहित्यिक संस्था 'साहित्य परिषद' के साथ जैसे अपने को समाहित ही कर दिया। अब मंचों पर एक विशेष विचारधारा के असाहित्यिक लोग ही बार-बार नजर आने लगे हैं जिससे बहुत से नामी साहित्यकारों ने किनारा करना ही उचित समझा है। जिन लेखकों के नाम से हिमाचल जाना जाता है, उनको किसी आयोजन में नहीं बुलाया जाता। उधर करोड़ों रुपए का बजट खर्च करने पर भी हिमाचल सरकार का भाषा विभाग पूर्व निर्धारित जयंतियों के सिवा कोई उल्लेखनीय आयोजन नहीं कर पाया। जो आयोजन हुए वे सारे फ्लाप शो थे जिनमें हिमाचल की भागीदारी नगण्य रही और लेखकों, कलाकारों, रंगकर्मियों के हाथ केवल मायूसी ही लगती रही। भाषा विभाग ने तो कई पंजीकृत संस्थाओं को अनुदान तक नहीं दिए, जबकि इन संस्थाओं ने अपने स्तर पर सफल आयोजन किए। इधर भाषा अकादमी भी एक विशेष संस्था की बैसाखियों पर अपना मान-सम्मान बचाने में जुटी है और अकादमी एक वर्ष में कोई स्वतंत्र साहित्यिक आयोजन नहीं कर पाई है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह की सरकारी साहित्यिक गतिविधियों को लेकर हमने भाषा अकादमी के सचिव डा. कर्म सिंह से बातचीत की। यहां प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अंश : दिहि : साहित्य की दृष्टि से पिछले साल को कैसे देखते हैं? कर्म सिंह : अकादमी ने पूर्व स्वीकृत साहित्यिक योजनाआें का सफलतापूर्वक संचालन किया है। विभिन्न राज्यस्तीय कार्यक्रमों, साहित्य संगोष्ठियों तथा बहुभाषी कवि सम्मेलनों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के सभी भागों के वरिष्ठ लेखकों, साहित्यकारों, कवियों तथा नवोदित लेखकों को अवसर प्रदान किया गया है। इस वर्ष प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं के साथ भी अकादमी ने स्तरीय साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है। साहित्यिक दृष्टि से वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में अकादमी की गतिविधियां संतोषजनक रही हैं जिनमें संस्थाओं तथा लेखकों की बराबर भागीदारी रही है। दिहि : कोई खास योजना जिस पर विचार हुआ? कर्म सिंह : आकदमी द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ साहित्यकारों तथा कलाकारों के सम्मान और नवोदित साहित्यकारों तथा कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राजकीय महाविद्यालय संजौली तथा राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में कालेजों तथा विश्वविद्यालयों के छात्रा-छात्राओं को मंच प्रदान करने के लिए कविता पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दस जमा दो स्तर के विद्याथियों को साहित्य के साथ जोड़ने के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला में निबंध लेखन, कविता पाठ तथा चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। अकादमी के विभिन्न जिला स्तरीय तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में वरिष्ठ लेखकों के साथ नवोदित कलाकारों को भी बराबर के अवसर प्रदान किए गए। अकादमी द्वारा इस वर्ष दिवंगत साहित्यकारों तथा कलाकारों के जीवन वृत्त और लेखन तथा कला में उनके योगदान पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किया गया। इस वर्ष प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकारों तथा कलाकारों के जीवन वृत्त पर आधारित डाक्यूमेंटरी बनाने का काम प्रारंभ किया गया है। अकादमी द्वारा अब तक किए गए सांस्कृतिक प्रलेखन के अंतर्गत मेले, पर्व, त्योहार, विशिष्ट आयोजन आदि पर किए गए प्रलेखन कार्य का संपादन करके लगभग बीस वृत्त चित्र तैयार किए गए हैं। दिहि : हिमाचल भाषा अकादमी की उपलब्धियां क्या रहीं? कर्म सिंह : हिमाचल भाषा अकादमी द्वारा विश्व पुस्तक मेला दो हज़ार अट्ठारह के अवसर पर लेखक मंच पर हिमाचल प्रदेश के समकालीन साहित्य पर एक संगोष्ठी तथा कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। अकादमी द्वारा इस वर्ष पहली बार पंद्रह व सोलह फरवरी दो हज़ार अट्ठारह को माननीय मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इतिहासकार ठाकुर रामसिंह की जयंती का राज्यस्तरीय समारोह शोध संस्थान नेरी, हमीरपुर में संपन्न किया गया। अकादमी द्वारा मंडी शिवरात्रि मेला दो हज़ार अट्ठारह तथा सुकेत उत्सव के अवसर पर सभी देवी-देवताओं का सर्वेक्षण तथा वीडियोकरण किया गया। इस योजना में अकादमी द्वारा मंडी जिला के सभी देवी-देवताओं के इतिहास तथा परंपराओं पर आधारित मोनोग्राफ प्रकाशित किया जा रहा है। जनजातीय उत्सव किन्नौर का प्रलेखन किया गया है। श्री रेणुका मेले के अवसर पर सिरमौरी लोक संस्कृति तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति का फिल्मांकन किया गया है। इस वर्ष गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत बंजार क्षेत्र में वाद्ययंत्र निर्माण केंद्र स्थापित किया गया। इस योजना के तहत शिमला में पहाड़ी चित्रकला प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाने की भी योजना है। दिहि : लेखकों को वित्तीय मदद का ब्यौरा दें। कर्म सिंह : वर्ष दो हज़ार सोलह में प्रकाशित अट्ठाईस पुस्तकों का थोक खरीद योजना के अंतर्गत प्रत्येक पुस्तक का पंद्रह हज़ार रुपयापए का क्रय किया गया तथा वर्ष दो हज़ार सत्रह में प्रकाशित पुस्तकें खरीद के लिए आमंत्रित कर ली गई हैं। इस वर्ष अकादमी द्वारा विभिन्न कायक्रमों के आयोजन के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं को लगभग डेढ़ लाख रुपए का अनुदान दिया गया है। इतिहास दिवाकर, सरसबज, हिमखंड, शैलसूत्रा तथा हाईफन आदि साहित्यिक पत्रिकाओं को वित्तीय अनुदान प्रदान किया गया है। वर्ष दो हज़ार बारह-चौदह, दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सोलह के आठ साहित्य पुरस्कार देने हेतु प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। ये पुरस्कार मार्च दो हज़ार उन्नीस से पूर्व दिए जाने का प्रयास है। वर्ष दो हज़ार सत्रह के शिखर सम्मान तथा कला सम्मान स्वैच्छिक संस्था सम्मान, चंबा रूमाल तथा पहाड़ी चित्रकला प्रतियोगिता सम्मान दिए जाने का मसला विचाराधीन है।
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अध्याय 2
मुहम्मद के बारे में हजारों की संख्या में छोटे-छोटे किस्से हैं । इनमें से अधिकांश किस्से मनगढ़ंत और झूठ पर आधारित हैं और बहुत सारे किस्से कमजोर व संदेहास्पद । हालांकि कुछ किस्से सही (प्रामाणिक) हदीस (मौखिक रिवायत) माने जाते हैं। सही हदीस पढ़ने पर मुहम्मद के बारे में ठोस तस्वीर सामने आती है, जिससे मुहम्मद के चरित्र और मनोवैज्ञानिक पहलू को समझा जा सकता है।
इससे मुहम्मद का चित्र एक नार्सिसिस्ट (आत्मकेंद्रित अहंकारी यानी स्वार्थी चरित्र) का उभरकर आता है। इस अध्याय में मैं नार्सिसिज्म पर प्रामाणिक स्रोतों के माध्यम से प्रकाश डालूंगा और फिर दिखाने का प्रयास करूंगा कि किस तरह मुहम्मद पर यह चरित्र सटीक बैठता है।
इस विषय पर विद्वानों और अनुसंधानकर्ताओं ने बहुत कम काम किया है। क्योंकि मुसलमान कुरान और मुहम्मद के जीवन के बारे में अनुसंधान करने की अनुमति न स्वयं को देते हैं और न दूसरों को । हालांकि उसके बारे में जो भी लिखा गया है, वो न केवल नार्सिसिज्म की परिभाषा से मिलता है, बल्कि आज मुसलमान दुनियाभर में जो विचित्र कार्य और आचरण कर रहे हैं, उसमें भी इसे देखा जा सकता है । इस तरह किसी व्यक्ति की व्यक्तित्व विकृति उसके अनुयायियों में विरासत के रूप में इस तरह समा गई है कि इस व्यक्ति का पागलपन करोड़ों अनुयायियों में न केवल फैल रहा है, बल्कि उसकी तरह इन्हें भी स्वकेंद्रित, विवेकहीन और खतरनाक बना रहा है।
मुहम्मद के मनोविज्ञान, उसके चरित्र के मूल तत्व क्रूरता और स्थितिजन्य नीति को समझकर जानने का प्रयास करते हैं कि मुसलमान इतने असहिष्णु, हिंसक और पागल क्यों हैं? वे हमलावर और अत्याचारी होते हुए भी वे खुद को पीड़ित के रूप में क्यों देखते हैं?
नार्सिसिज्म क्या है ?
द डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल आफ मेंटल डिस्ऑर्डर (डीएसएम) 'नार्सिसिज्म को ऐसी व्यक्तित्व विकृति के रूप में परिभाषित करता है, जो एक प्रकार के आडम्बर, प्रशंसा की भूख और अधिकार के भाव के आसपास घूमता है। इससे पीड़ित मनुष्य अक्सर स्वयं को आवश्यकता से अधिक महत्वपूर्ण समझता है और अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है, अक्सर कोई न कोई फरमाइश करता है, किसी लायक न होने पर भी अपनी प्रशंसा व सराहना चाहता है । ०
डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल (डीएसएम) के तीसरे (1980) और चौथे संस्करण (1994) और यूरोपियन आईसीडी-1091 में इस समस्या को इसी तरह परिभाषित किया गया हैः
आडम्बर (कल्पना या व्यवहार में) का व्याप्त प्रारूप, आत्मश्लाघा अथवा चापलूसी की आवश्यकता और समानुभूति का अभाव, सामान्यतः वयस्कता की अवस्था आने की शुरुआती समय में और विभिन्न परिस्थितियों में उपस्थित रहने में । निम्नलिखित में से पांच (या अधिक) कसौटी पर आवश्यक परखेंः
महान महसूस करता है और स्वयं को महत्वपूर्ण समझता है (उदाहरण के लिए, अपनी उपलब्धियों को बढ़ाचढ़ाकर पेश करता है, झूठ को भी सच की तरह पेश करने में माहिर है, आनुपातिक उपलब्धि के बिना भी स्वयं को उत्कृष्ट के रूप में मान्यता चाहता है)
असीमित सफलता, नाम, रौब या सबसे ताकतवर होने, अतुलनीय बुद्धिमत्ता (प्रमस्तिष्कीय नार्सिसिस्ट), शारीरिक सौष्ठव या काम क्षमता (दैहिक नार्सिसिस्ट), आदर्श, चिरस्थायी, सबका हृदय जीतने वाले प्यार या करुणा की कल्पना में खोया रहता है ।
आश्वस्त रहता है कि वह विशिष्ट है और ऊंचे दर्जे के विशिष्ट व अद्वितीय लोग (संस्थाएं) ही उसकी विशिष्टता समझ सकते हैं, केवल ऐसे ही लोगों से उसका संबंध होना चाहिए, केवल ऐसे ही लोगों से उसे जुड़ना चाहिए । आवश्यकता से अधिक सराहना, चाटुकारिता, प्रमुखता और रौब चाहता है। ये सब नहीं मिलने पर दूसरों में भय उत्पन्न करना और कुख्यात होना चाहता है। (नार्सिस्टिक सप्लाई)।
अधिकारसम्पन्न समझता है। अपने साथ विशेष, अनुकूल वरीयता का व्यवहार चाहता है। अपनी अपेक्षाओं को स्वतः एवं शतप्रतिशत पूरा करने की मांग करता है।
पारस्परिक संबंधों में शोषक होता है। इसका अर्थ है, अपने काम दूसरों से कराना चाहता है।
समानुभूति का अभाव। दूसरों की भावनाओं व जरूरतों को महसूस करने की क्षमता का अभाव होना । दूसरों से द्वेष रखता है और समझता है कि दूसरे लोग उससे ईर्ष्या करते हैं ।
घमंडी होता है, अहंकारपूर्ण व्यवहार करता है । हताशानिराशा की स्थिति में, या दूसरों द्वारा उसकी बात काटने पर अथवा चुनौती मिलने पर गुस्से क्रोध में आ जाता है।2
मुहम्मद में ये सभी लक्षण थे। अपने विचारों के अतिरिक्त वह अल्लाह का चापलूस पैगम्बर था और पैगम्बरों का प्रतीक चिह्न (seal) था । (कुरान 33:40) जिसका मतलब हुआ कि मुहम्मद के बाद अल्लाह किसी और को पैगम्बर नहीं बनाएगा। मुहम्मद स्वयं को खैर - उल - खल्क (ब्रह्मांड में सर्वोत्तम ), 'उत्कृष्ट मिसाल' मानता था । (कुरान.33:21)। वह स्पष्ट रूप से कहता है कि उसका दर्जा अन्य पैगम्बरों से ऊंचा है। (कुरानः 2:253)। उसने स्वयं के 'वरीय' होने (कुरान : 17:55) और 'दुनिया के लिए रहमत' (कुरानः 21:107) के रूप में भेजे जाने का दावा किया। उसने दावा किया कि उसे 'प्रशस्त चौकी' पर जगह दी गई है और किसी अन्य को यह स्थान नहीं मिलेगाः अल्लाह के सिंहासन के बगल में दाहिनी ओर स्थित यह 'मध्यस्थ' की चौकी है। (कुरान. 17:79) । अन्य शब्दों में वह ऐसा व्यक्ति होगा, जो अल्लाह को सलाह देगा कि किसे जन्नत और किसे जहन्नुम भेजना है। अपने इस ऊंचे स्थान को लेकर मुहम्मद के कुछ ऐसे अहंकारोन्मादी दावे हैं, जो कुरान में दिए गए हैं।
नीचे लिखी दो आयतें मुहम्मद द्वारा केवल खुद को महत्व देने और आडम्बर को बयान करती हैंः
इसमें भी शक नहीं कि अल्लाह और उसके फरिश्ते पैगम्बर (मुहम्मद ) पर दुआएं व रहमत (हमेशा) भेजते हैं। ऐ ईमानवालो! तुम भी पैगम्बर के गुणगान करो और दुआएं दो । (कुरान 33:56)
(मुसलमानो) ! तुम लोग अल्लाह और उसके रसूल (मुहम्मद) पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बड़ा समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो (कुरान. 48:9)।
मुहम्मद अपने आप पर इतना आत्ममुग्ध था कि उसने अपनी कठपुतली अल्लाह के मुंह से कहलवायाः बेशक रसूल, तुम्हारे अख्लाक़ (चरित्र) बड़े आला दर्जे के हैं। (कुरान. 68:4) तुम्हें (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग बनाकर भेजा है। (कुरान 33:46) इब्ने-साद मुहम्मद के हवाले से कहता हैः
अल्लाह ने दुनियाभर में अरब को चुना। अरबियों में उसने किनाना को चुना। किनाना में से भी कुरैश कबीले ( मुहम्मद की जनजाति) को चुना । कुरैशों में से बनी हाशिम कुनबे को चुना और इस कुनबे से मुझे चुना 3 नीचे हदीसों में मुहम्मद द्वारा अपने बारे में किए गए कुछ दावे दिए गए हैंः
अल्लाह ने कायनात में जो चीज सबसे पहले रची, वह थी मेरी रूह।।4
- अल्लाह की बनाई हुई सभी चीजों में पहली चीज थी मेरा दिमाग 195
- मैं अल्लाह से हूं और मुसलमान मुझसे हैं।"
- जिस तरह अल्लाह ने मुझे महान बनाया, उसी तरह उसने मुझे अख्लाक़ बख्शा।7
ओ मुहम्मद, यदि यह दुनिया तुम्हारे लिए न होती तो मैं कायनात नहीं बनाता 98
जरा मुहम्मद के इन शब्दों को जीसस द्वारा कही गई बातों से तुलना कीजिए। किसी ने जीसस को ' श्रेष्ठ स्वामी' कहकर पुकारा तो वे बोले, 'तुमने मुझे श्रेष्ठ क्यों कहा? ईश्वर के अलावा कोई और श्रेष्ठ नहीं है । " एक मनोविकृत नार्सिसिस्ट ही वास्तविकता से दूर होकर यह दावा कर सकता है कि ब्रह्मांड उसके कारण बनाया गया है।
नार्सिसिस्ट जब भी अपने बारे में डींगें हांकता है तो वह विशिष्ट रूप से विनम्र होने का ढोंग करता है । अबू सईद अल-खुद्री ने लिखा है कि रसूल बोलेः 'मैं सम्पूर्ण मानव का नेता हूं और यह मैं बिना किसी गुरूर के कह रहा हूं।' अल-तिरमिजी बताता हैः
'रसूल ने कहाः 'मैंने तुम्हारी बातें सुनीं और तुमने जो भी कहा, वो सच है। मैं खुद अल्लाह का प्यारा (हबीबुल्लाह) हूं और इस बात को कहने में मुझे कोई गुरूर नहीं है । कयामत के दिन मैं यशपताका (लिवा उलहम्द) लेकर आगे चलूंगा। मैं पहली इबादत करने वाला हूं और पहला ऐसा इंसान हूं, जिसकी इबादत अल्लाह ने कबूल की है। मैं ही वह पहला इंसान हूं, जो जन्नत के दरवाजे पर दस्तक देगा । अल्लाह मेरे लिए दरवाजा खोलेगा, फिर मैं अपनी कौम के लोगों के साथ जन्नत में प्रवेश करूंगा। मैं ही दुनिया का सबसे सम्मानित व्यक्ति हूं और मैं ही वह पहला और आखिरी व्यक्ति हूं, जो दुनिया में सबसे अधिक इज्जतदार है। ये सब मैं बिना किसी गुरूर के कह रहा हूं।'
नार्सिसिस्ट आत्मविश्वास से भरा हुआ और निपुण दिखता है। जबकि सच्चाई यह है कि ऐसा व्यक्ति (मनोविकृत नार्सिसिस्ट अधिकांशतः पुरुष होते हैं) आत्मसम्मान की कमी की समस्या से जूझ रहा होता है, और उसे अपनी नार्सिस्टिक भूख शांत करने के लिए दूसरों से अपनी वाहवाही और चापलूसी कराने की आवश्यकता पड़ती है।
डॉ. सैम वैकनिन मैलिग्रैंट सैल्फ-लव नामक पुस्तक के लेखक हैं। वो इस विषय के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वो नार्सिसिस्ट के मस्तिष्क को समझते हैं और परिभाषित करते हैं । वैकनिन वर्णन करते हैंः
प्रत्येक व्यक्ति नार्सिसिस्ट होता है, कोई कम तो कोई अधिक । यह एक स्वस्थ परिघटना होती है । यह उत्तरजीविता में मददगार होती है। पर स्वस्थ नार्सिसिज्म और विकृत नार्सिसिज्म में फर्क होता है । विकृत नार्सिसिज्म की विशेषता यह होती है कि इससे पीड़ित इंसान में समानुभूति का पूर्णतः अभाव होता है। ऐसा नार्सिसिस्ट दूसरों को वस्तु समझकर उनका शोषण करने की मानसिकता रखता है । वह दूसरों को अपनी सनक पूरी करने का साधन (नार्सिस्टिक सप्लाई) बनाता है । वह स्वयं को विशिष्ट आदर व सम्मान प्राप्त करने का अधिकारी मानता है, क्योंकि ऐसा इंसान अपने भीतर कपोल कल्पित आडम्बर पाले रहता है । विकृत नार्सिसिस्ट आत्म-भिज्ञ नहीं होता है । उसकी अनुभूति और भावनाएं विकृत होती हैं। ऐसा इंसान 'अस्पृश्यता', भावनात्मक प्रतिरोध और अपराजेयता का बोध रखते हुए स्वयं से भी और दूसरों से भी झूठ बोलता है। नार्सिसिस्ट के लिए हर चीज जीवन से बड़ी होती है। वह जितना विनम्र होता है, उतना ही आक्रामक भी । उसके वादे विचित्र, उसकी आलोचना हिंसक व अनिष्टसूचक,
और उसकी उदारता मूर्खतापूर्ण होती है। नार्सिसिस्ट छद्म रूप धारण करने में माहिर होता है । वह दिलकश, प्रतिभाशाली अभिनेता, जादूगर और अपने परिवेश को उंगलियों पर नचाने वाला होता है। पहली मुलाकात में ऐसे व्यक्ति को पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है। 102
नार्सिसिस्ट संप्रदाय
नार्सिसिस्ट को प्रशंसकों की आवश्यकता होती है। वह अपने आसपास काल्पनिक दायरा बनाता है, जहां वह केंद्र बिंदु होता है। वह अपने प्रशंसकों और अनुयायियों को उस दायरे में इकट्ठा करता है, उन्हें पुरस्कृत करता है और अपनी चापलूसी के लिए उनको प्रोत्साहित करता है। जो व्यक्ति उसके इस कृत्रिम दायरे से बाहर होते हैं, उन्हें वह अपना दुश्मन मानता है । वैकनिन लिखते हैंः
नार्सिसिस्ट संप्रदाय के केंद्र में गुरु होता है । अन्य गुरुओं की तरह वह अपने शिष्यों, अपनी पत्नी, बच्चों, परिवार के सदस्यों, दोस्तों व सहकर्मियों से अपनी आज्ञा का सम्पूर्ण अनुपालन चाहता है । वह अनुयायियों से विशिष्ट व्यवहार व सम्मान प्राप्त करना अपना अधिकार मानता है। समझता है कि उसके अनुयायी उसे विशिष्ट समझकर व्यवहार करें और यह सम्मान प्राप्त करना उसका अधिकार है । वह अवज्ञा करने वालों और उससे दूर भागने वालों को दंड देता है। वह अनुशासन, अपनी शिक्षाओं के प्रति निष्ठा और सब पर एक लक्ष्य थोपता है। वास्तव में वह जितना कम निपुण होगा, उतना ही कठोर नियंत्रण और व्यापक ब्रेनवाशिंग करेगा।
विकृत नार्सिसिस्ट का नियंत्रण दुविधा, अनिश्चितता, अस्पष्टता और अपने परिवेश के दुरुपयोग पर आधारित होता है।103 उसकी हर समय बदलती सनक ही किसी बात को सही अथवा गलत, वांछनीय या अवांछनीय अथवा 'क्या करना या क्या नहीं करना' को निर्धारित करती है । वही अपने अनुयायियों के अधिकार और सीमाएं तय करता है और जब इच्छा होती है तो इन्हें बदल देता है ।
विकृत नार्सिसिस्ट माइक्रो मैनेजर होता है । वह अपने अनुयायियों के छोटे से छोटे कार्य या व्यवहार पर नियंत्रण रखता है। उसकी इच्छाओं और लक्ष्य पर नहीं चलने वाले को वह सख्त सजा देता है और सूचनाओं का दमन करता है। ऐसा नार्सिसिस्ट समर्थकों अथवा अनुयायियों की इच्छाओं या अनिच्छाओं का ध्यान नहीं रखता और न ही उनकी निजता और मर्यादा का सम्मान करता है। वह अपने समर्थकों की इच्छाओं की उपेक्षा करता है और उन्हें अपनी संतुष्टि का साधन या वस्तु मानता है । वह व्यक्तियों और परिस्थितियों दोनों पर अनिवार्य रूप से नियंत्रण करना चाहता है।
वह दूसरों की स्वायतत्ता एवं स्वतंत्रता को अस्वीकार करता है । वह चाहता है कि दोस्त अथवा परिवार के किसी सदस्य से मिलने जैसी मामूली बातों के लिए भी उससे अनुमति ली जाए । धीरे-धीरे वह अनुयायियों को उनके करीबी और प्रिय लोगों से अलग-थलग कर देता है, ताकि ये लोग उसके ऊपर भावनात्मक, यौनिक, वित्तीय व सामाजिक रूप से निर्भर होने को मजबूर हो जाएं।
वह संरक्षक व कृपा बरसाने वाले के रूप में अभिनय करते हुए बर्ताव करता है और अक्सर नसीहत देता रहता है। वह कभी अपने संप्रदाय के सदस्यों की मामूली गलतियों पर बरस पड़ता है तो कभी उनकी प्रतिभा, गुण व कौशल की झूठी तारीफ करने लगता है। उसकी इच्छाएं अव्यवहारिक होती हैं और इसलिए वह बाद में अपने दुर्व्यवहार को वैध करार देने लगता है।104
मुहम्मद ने बड़ा झूठ गढ़ा कि उसके अनुयायी परम सत्य पर भरोसा करते हैं । खतरनाक बात यह है कि हिटलर के झूठ को सच मानने वालों की तरह ही इस्लाम के अनुयायी भी झूठ को सच मानने के लिए स्वेच्छा से तत्पर रहते हैं।
पिछले अध्याय में हमने मुहम्मद का परिचय जाना। हमने देखा कि किस तरह उसने अपने अनुयायियों को उनके परिवारों से अलग-थलग कर दिया और उनके निजी जीवन तक पर नियंत्रण कर लिया । दुख इस बात का है कि 1400 साल बीतने के बावजूद स्थिति बहुत नहीं बदली है। मुझे तमाम ऐसी हृदय विदारक घटनाएं सुनने को मिली हैं, जिसमें अभिभावकों ने बताया कि उनके पुत्र या पुत्री ने इस्लाम कबूल कर लिया है। मुसलमान इन बच्चों को घेरे रहते हैं और अभिभावकों से न मिलने की सलाह देते हैं ।
विकृत नार्सिसिस्ट का हेतु
विकृत नार्सिसिस्ट जानता है कि अपना प्रत्यक्ष महिमा मंडन कराना उल्टा पड़ सकता है और उसकी स्वीकार्यता खतरे में पड़ सकती है। इसलिए वह इसके बजाय अपने को उदारवादी, त्यागी पुरुष, ईश्वर, राष्ट्र अथवा मानवता की सेवा में रत होने का ढोंग करते हुए पेश करता है। उसके इस मुखौटे के पीछे सोची-समझी चतुराई होती है। ऐसा इंसान अपने अनुयायियों के समक्ष ऐसे महान व प्रतापी उद्देश्य रखता है, जिससे लगे कि वे इसके बिना नहीं रह सकते। वह खुद को क्रांतिकारी, परिवर्तन लाने वाला और आशा की किरण देने वाला नेता मानता है। प्रचार और तिकड़म के जरिए वह उस उद्देश्य को इतना महत्वपूर्ण बना देता है कि जो उस पर भरोसा करते हैं, उन्हें उस उद्देश्य के आगे अपना जीवन गौण लगने लगता है। इसी ब्रेनवाश में अनुयायी मरने और मारने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसा नार्सिसिस्ट त्याग और बलिदान जैसी भावनाओं को प्रोत्साहित करता है । फिर इसके बाद वह खुद को इन उद्देश्यों की धुरी के रूप में प्रस्तुत करता है । यह उद्देश्य इसके इर्दगिर्द घूमता है । वह ऐसी तस्वीर पेश करता है, जैसे कि केवल वही उस उद्देश्य को पूरा कर सकता है और अपने अनुयायियों का नेतृत्व कर सकता है। इसलिए ऐसा व्यक्ति अपने समर्थकों के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत हो जाता है। एक ऐसी शख्सियत जिसके पास उनके मोक्ष व यश-पराक्रम की कुंजी है ।
यह उद्देश्य अस्ल में ऐसे नार्सिसिस्ट के निजी अरमानों को पूरा करने का साधन होता है। उदाहरण के रूप में, जोन्स ने गुयाना में उन 900 लोगों का नेतृत्व किया, जिन्होंने सामूहिक आत्महत्या की । इस इंसान ने लोगों को सामूहिक आत्महत्या के लिए उकसाते हुए सामाजिक न्याय का हेतु बताया और समर्थक उसे मसीहा मानते थे ।
हिटलर ने आर्यों की सर्वोत्कृष्टता का उद्देश्य दिया था। उसने हालांकि अपना प्रत्यक्ष महिमा मंडन नहीं किया, बल्कि जर्मनी की श्रेष्ठता हासिल करने की बात कही । वह निस्संदेह अपरिहार्य प्रेरणास्रोत था और अपने मकसद का फ्यूहरर था । इसी तरह स्टालिन ने साम्यवाद का उद्देश्य सामने रखा था और जो उसकी बातों से इत्तिफाक नहीं रखता था, उसे वह सर्वहारा के खिलाफ मानता था और कत्ल करवा देता था।
मुहम्मद ने अपने अनुयायियों से स्वयं की इबादत के लिए नहीं कहा । अस्ल में उसने दावा किया कि वह केवल अल्लाह का संदेशवाहक अर्थात पैगम्बर है । फिर उसने होशियारी दिखाते हुए अपने अनुयायियों को कहा कि वे अल्लाह व उसके पैगम्बर के हुक्म को मानें । कुरान की एक आयत में उसने अपने कथित अल्लाह के जरिए
ऐ रसूल ! तुमसे लोग पूछेंगे जंग से क्या आया और क्या गया ? उनसे कहो कि जंग का अनफ़ाल यानी मालेगनीमत अल्लाह और रसूल के लिए है। अल्लाह के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास करो । अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इस्लाह (ठीक) करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो अल्लाह का और उसके रसूल का हुक्म मानो। (कुरान. 8:1)
चूंकि अल्लाह के लिए अरब के लोगों से ठगे और चुराए गए माल का कोई उपयोग नहीं था, इसलिए ये सारे
माल उसके प्रतिनिधि (मुहम्मद) के हो गए। चूंकि कोई भी अल्लाह को न तो देख सकता है और न सुन सकता है, इसलिए सारी कर्तव्यपरायणता मुहम्मद के प्रति थी । मुहम्मद से ही लोगों को डरना चाहिए, क्योंकि वह दुनिया के सबसे भयानक ईश्वर का एकमात्र मध्यस्थ था। प्रभुत्व जमाने के लिए अल्लाह के नाम का बहाना मुहम्मद के लिए जरूरी था। क्या यह संभव था कि अल्लाह के भय के बिना मुहम्मद के अनुयायी अपनी जिंदगी कुर्बान कर देते, दूसरे लोगों और अपने परिजनों तक की हत्याएं कर देते, उनकी धन-संपत्ति लूट लेते और सबकुछ मुहम्मद को सौंप देते ? यह काल्पनिक अल्लाह और कुछ नहीं, बल्कि मुहम्मद की सनक और अपना प्रभुत्व स्थापित करने का औजार था। विडम्बना यह है कि मुहम्मद हमेशा और किसी को अल्लाह के बराबर नहीं मानने का उपदेश देता रहा और एक तरह से खुद ही अल्लाह का एक ऐसा जोड़ीदार बन बैठा कि उसे व्यवहारिक एवं तार्किक रूप से अल्लाह से अलग रखना असंभव हो गया ।
ऐसे नार्सिसिस्टों को अपने अनुयायियों का इस्तेमाल करने के लिए किसी उद्देश्य की आवश्यकता होती है। जर्मनों ने युद्ध की शुरुआत हिटलर के लिए नहीं की थी । इन्होंने युद्ध उस हेतु के लिए शुरू किया था, जिसे हिटलर ने उनके दिमाग में भरा था।
डॉ. सैम वैकनिन लिखते हैंः नार्सिसिस्ट (आत्मपूजक) हर उस चीज का इस्तेमाल करते हैं जो उनकी मनोविकारी सनक पूरी करने में सहायक होता है। यदि ईश्वर, नस्ल, जाति, चर्च, विश्वास, संस्थागत धर्म आदि उनकी नार्सिस्टिक भूख को शांत करें तो वे धर्मपरायण बनने का ढोंग करते हैं और यदि इससे उसका मकसद हल न हो तो वे धर्म छोड़ देंगे। '105
इस्लाम प्रभुत्व जमाने का साधन था । मुहम्मद के बाद मुसलमानों के दूसरे नेताओं ने भी इस्लाम का उपयोग इसी तरह किया । मुसलमान इन नेताओं की स्वार्थ सिद्धि के साधन बन गए ।
एक अमरीकी मुसलमान मिर्जा मलकम खान (1831-1908) ने अफगानी मुसलमान जमालुद्दीन अफगानी के साथ मिलकर इस्लामिक पुनर्जागरण (अन-नहज़ा) शुरू किया और उन्होंने एक कुटिल नारा दिया, जिसमें कहाः 'मुसलमानों को कुरान की बातें बताइए, वे आपके लिए जान दे देंगे।'106
विकृत नार्सिसिस्ट की वसीयत
मरते समय भी मुहम्मद ने मुसलमानों से आगे बढ़ने और उसके जिहाद को जारी रखने का आह्वान किया था । चंगेज खान ने भी मरते समय अपने बेटों को ऐसा ही आदेश दिया था। उसने अपने बेटों से कहा कि पूरी दुनिया को अपने कब्जे में लेने की उसकी इच्छा थी, लेकिन अब वह यह नहीं कर पाएगा, इसलिए वे उसके इस सपने को पूरा करें। मुसलमानों की तरह मंगोल भी आतंक फैलाने वाले थे। किसी विकृत नार्सिसिस्ट के लिए फतह ही सबकुछ होता है। ऐसे लोगों के पास दिल नहीं होता है और दूसरों की जिंदगी उनके लिए मायने नहीं रखती।
51 साल की उम्र में हिटलर को अपने बांये हाथ में कुछ अजीब हरकत महसूस हुई । सामान्यतः वह इसे छिपा लेता था, लेकिन रोग बढ़ गया तो वह दुनिया की नजरों से दूर हो गया। उसे अहसास हो गया कि उसकी मौत करीब है। अब वह अपने संकल्प में और दृढ़ हो गया तथा उसने नए सिरे से हमले और तेज कर दिए, जबकि वह जानता था कि उसकी सांसें बहुत कम बची हैं । विकृत नार्सिसिस्ट अर्थात आत्म-कामी अपने पीछे पूरा साम्राज्य छोड़कर जाना चाहते हैं ।
यह सोचना भूल है कि इस्लाम केवल एक धर्म है । इस्लाम का एक गुप्त पहलू यह है कि इसे उन मुस्लिम विद्वानों व दार्शनिकों द्वारा बाद में रचा गया, जिन्होंने मुहम्मद की बेतुकी बातों की गूढ़ व्याख्या की । मुहम्मद के
अनुयायियों ने मजहब को अपनी रुचि के अनुसार ढाला और कालक्रम में इन व्याख्याओं पर प्राचीन होने की मुहर लग गई, जिससे इनकी विश्वसनीयता बन गई ।
यदि इस्लाम एक धर्म है तो नाजीवाद, साम्यवाद, शैतानवाद, हैवन्स गेट, पीपुल्स टैम्पल, ब्रांच डेविडियन आदि भी धर्म की श्रेणी में आएंगे । किंतु यदि हम यह मानते हैं कि जीवन को शिक्षित बनाने, मानव के विकास की संभावनाएं बाहर लाने, आत्मोत्थान, आध्यात्मिकता का बीज बोने, सद्भावना बढ़ाने और मानवता को प्रकाशित करने को धर्म कहते हैं तो इस्लाम इस कसौटी पर पूरी तरह विफल होगा। इस पैमाने पर इस्लाम को न तो धर्म की श्रेणी में रखा जा सकता है और न ही इसे इस श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
नार्सिसिस्ट ईश्वर बनना चाहते हैं
किसी नार्सिसिस्ट के लिए जो चीज सबसे महत्वपूर्ण होती है, वह है ताकत । वह नाम व सम्मान पाना चाहता है और उपेक्षा बिलकुल नहीं बर्दाश्त कर सकता है। ऐसे लोग मन ही मन अकेला और असुरक्षित भी महसूस करते हैं, इसीलिए वे खुद को क्रांतिकारी नेता, आशा जगाने वाली शख्सियत और महान उद्देश्यों के दूत के रूप में प्रस्तुत में करते हैं। उनका उद्देश्य तो बस एक बहाना होता है। ऐसा करके वे समर्थकों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। ये लोग काल्पनिक ईश्वर और मिथ्या उद्देश्य गढ़ते हैं। जितना ही वे अपने फर्जी ईश्वर को महिमामंडित करते हैं, उतनी ही ताकत उनके पास आती जाती है । मुहम्मद के लिए अल्लाह एक सुविधाजनक औजार था । इस औजार के जरिए वह अपने अनुयायियों पर असीमित प्रभुत्व जमा सकता था और उनकी जिंदगी का मालिक बन सकता था।
केवल एक अल्लाह था, भयानक भी और उदार व रहम करने वाला भी । मुहम्मद उसका एकमात्र प्रतिनिधि था। इस हिकमत से मुहम्मद अल्लाह बन गया। हालांकि दावा किया गया कि अल्लाह का पैगाम मुहम्मद के माध्यम से दुनिया में आता है, पर सच्चाई यह थी कि कोई अल्लाह था ही नहीं, बल्कि यह मुहम्मद और उसकी सनक मात्र थी, जिसे संतुष्ट करना मुसलमानों से अपेक्षित था । वैकनिन इस पहलू को अपने लेख 'फॉर द लव ऑफ गॉडनार्सिसिस्ट एंड रिलीजन' में बखूबी समझाते हैं : 107
नार्सिसिस्ट सदा ईश्वर की तरह होना चाहता है, जो सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सदा आदरणीय, चर्चा में बना रहने वाला और प्रेरणास्त्रोत हो । ईश्वर नार्सिसिस्ट का उन्मादभरा सपना होता है, उसकी परम आडम्बरपूर्ण कल्पना होती है। लेकिन ईश्वर उसके लिए कई और मायनों में सुविधाजनक होता है।
ऐसा व्यक्ति कभी प्रभावशाली व्यक्तियों की तारीफों के पुल बांधेगा तो कभी उन्हें नीचा दिखाएगा। शुरुआत में वह प्रभावशाली व्यक्तियों का (अक्सर हास्यास्प्रद तरीके से) अनुकरण करेगा और उनकी हर बात की प्रशंसा करेगा, उनकी हर बात का बचाव करेगा। वह उनके बारे में कहेगा कि वे न तो गलत कर सकते हैं और न ही गलत हो सकते हैं। नार्सिसिस्ट उन शख्सियतों को जीवन से बड़ा, सम्पूर्ण, निर्विकार एवं बुद्धिमान मानेगा । पर ज्यों ही उसकी अव्यवहारिक व हवाहवाई आकांक्षाएं हिलोर मारेंगी तो वह कुंठित होगा ।
इसके बाद वह उन व्यक्तियों की निंदा करना शुरू कर देगा, जिन्हें अब तक अपना आदर्श मानता रहा है। ऐसा व्यक्ति जिन्हें अब तक महान बताता था, उन्हें अब वह सामान्य मनुष्य कहने लगेगा। अब उसकी नजर में वो शख्सियतें बहुत छोटी, कमजोर, गलतियां करने वाली, कायर, मूर्ख और मामूली हो जाती हैं। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति तत्वदर्शी ईश्वर से संबंधों को लेकर भी इसी चक्र को अपनाता है । पर अक्सर, मोहभंग या ईश्वर की छवि को लेकर निराशा का भाव पैदा होने के बाद भी वह उसे चाहने और उसके अनुसरण का बहाना करता रहता है । वह इस धोखे को बनाए रखता है क्योंकि ईश्वर से निकटता दिखाने के बहाने वह एक विशेष प्रकार का रौबदाब हासिल करता है।
पुजारी, जनसमूहों के नेता, उपदेशक, धर्मप्रचारक, पंथों के मुखिया, राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवी ईश्वर के साथ
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अध्याय दो मुहम्मद के बारे में हजारों की संख्या में छोटे-छोटे किस्से हैं । इनमें से अधिकांश किस्से मनगढ़ंत और झूठ पर आधारित हैं और बहुत सारे किस्से कमजोर व संदेहास्पद । हालांकि कुछ किस्से सही हदीस माने जाते हैं। सही हदीस पढ़ने पर मुहम्मद के बारे में ठोस तस्वीर सामने आती है, जिससे मुहम्मद के चरित्र और मनोवैज्ञानिक पहलू को समझा जा सकता है। इससे मुहम्मद का चित्र एक नार्सिसिस्ट का उभरकर आता है। इस अध्याय में मैं नार्सिसिज्म पर प्रामाणिक स्रोतों के माध्यम से प्रकाश डालूंगा और फिर दिखाने का प्रयास करूंगा कि किस तरह मुहम्मद पर यह चरित्र सटीक बैठता है। इस विषय पर विद्वानों और अनुसंधानकर्ताओं ने बहुत कम काम किया है। क्योंकि मुसलमान कुरान और मुहम्मद के जीवन के बारे में अनुसंधान करने की अनुमति न स्वयं को देते हैं और न दूसरों को । हालांकि उसके बारे में जो भी लिखा गया है, वो न केवल नार्सिसिज्म की परिभाषा से मिलता है, बल्कि आज मुसलमान दुनियाभर में जो विचित्र कार्य और आचरण कर रहे हैं, उसमें भी इसे देखा जा सकता है । इस तरह किसी व्यक्ति की व्यक्तित्व विकृति उसके अनुयायियों में विरासत के रूप में इस तरह समा गई है कि इस व्यक्ति का पागलपन करोड़ों अनुयायियों में न केवल फैल रहा है, बल्कि उसकी तरह इन्हें भी स्वकेंद्रित, विवेकहीन और खतरनाक बना रहा है। मुहम्मद के मनोविज्ञान, उसके चरित्र के मूल तत्व क्रूरता और स्थितिजन्य नीति को समझकर जानने का प्रयास करते हैं कि मुसलमान इतने असहिष्णु, हिंसक और पागल क्यों हैं? वे हमलावर और अत्याचारी होते हुए भी वे खुद को पीड़ित के रूप में क्यों देखते हैं? नार्सिसिज्म क्या है ? द डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल आफ मेंटल डिस्ऑर्डर 'नार्सिसिज्म को ऐसी व्यक्तित्व विकृति के रूप में परिभाषित करता है, जो एक प्रकार के आडम्बर, प्रशंसा की भूख और अधिकार के भाव के आसपास घूमता है। इससे पीड़ित मनुष्य अक्सर स्वयं को आवश्यकता से अधिक महत्वपूर्ण समझता है और अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है, अक्सर कोई न कोई फरमाइश करता है, किसी लायक न होने पर भी अपनी प्रशंसा व सराहना चाहता है । शून्य डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल के तीसरे और चौथे संस्करण और यूरोपियन आईसीडी-एक हज़ार इक्यानवे में इस समस्या को इसी तरह परिभाषित किया गया हैः आडम्बर का व्याप्त प्रारूप, आत्मश्लाघा अथवा चापलूसी की आवश्यकता और समानुभूति का अभाव, सामान्यतः वयस्कता की अवस्था आने की शुरुआती समय में और विभिन्न परिस्थितियों में उपस्थित रहने में । निम्नलिखित में से पांच कसौटी पर आवश्यक परखेंः महान महसूस करता है और स्वयं को महत्वपूर्ण समझता है असीमित सफलता, नाम, रौब या सबसे ताकतवर होने, अतुलनीय बुद्धिमत्ता , शारीरिक सौष्ठव या काम क्षमता , आदर्श, चिरस्थायी, सबका हृदय जीतने वाले प्यार या करुणा की कल्पना में खोया रहता है । आश्वस्त रहता है कि वह विशिष्ट है और ऊंचे दर्जे के विशिष्ट व अद्वितीय लोग ही उसकी विशिष्टता समझ सकते हैं, केवल ऐसे ही लोगों से उसका संबंध होना चाहिए, केवल ऐसे ही लोगों से उसे जुड़ना चाहिए । आवश्यकता से अधिक सराहना, चाटुकारिता, प्रमुखता और रौब चाहता है। ये सब नहीं मिलने पर दूसरों में भय उत्पन्न करना और कुख्यात होना चाहता है। । अधिकारसम्पन्न समझता है। अपने साथ विशेष, अनुकूल वरीयता का व्यवहार चाहता है। अपनी अपेक्षाओं को स्वतः एवं शतप्रतिशत पूरा करने की मांग करता है। पारस्परिक संबंधों में शोषक होता है। इसका अर्थ है, अपने काम दूसरों से कराना चाहता है। समानुभूति का अभाव। दूसरों की भावनाओं व जरूरतों को महसूस करने की क्षमता का अभाव होना । दूसरों से द्वेष रखता है और समझता है कि दूसरे लोग उससे ईर्ष्या करते हैं । घमंडी होता है, अहंकारपूर्ण व्यवहार करता है । हताशानिराशा की स्थिति में, या दूसरों द्वारा उसकी बात काटने पर अथवा चुनौती मिलने पर गुस्से क्रोध में आ जाता है।दो मुहम्मद में ये सभी लक्षण थे। अपने विचारों के अतिरिक्त वह अल्लाह का चापलूस पैगम्बर था और पैगम्बरों का प्रतीक चिह्न था । जिसका मतलब हुआ कि मुहम्मद के बाद अल्लाह किसी और को पैगम्बर नहीं बनाएगा। मुहम्मद स्वयं को खैर - उल - खल्क , 'उत्कृष्ट मिसाल' मानता था । । वह स्पष्ट रूप से कहता है कि उसका दर्जा अन्य पैगम्बरों से ऊंचा है। । उसने स्वयं के 'वरीय' होने और 'दुनिया के लिए रहमत' के रूप में भेजे जाने का दावा किया। उसने दावा किया कि उसे 'प्रशस्त चौकी' पर जगह दी गई है और किसी अन्य को यह स्थान नहीं मिलेगाः अल्लाह के सिंहासन के बगल में दाहिनी ओर स्थित यह 'मध्यस्थ' की चौकी है। । अन्य शब्दों में वह ऐसा व्यक्ति होगा, जो अल्लाह को सलाह देगा कि किसे जन्नत और किसे जहन्नुम भेजना है। अपने इस ऊंचे स्थान को लेकर मुहम्मद के कुछ ऐसे अहंकारोन्मादी दावे हैं, जो कुरान में दिए गए हैं। नीचे लिखी दो आयतें मुहम्मद द्वारा केवल खुद को महत्व देने और आडम्बर को बयान करती हैंः इसमें भी शक नहीं कि अल्लाह और उसके फरिश्ते पैगम्बर पर दुआएं व रहमत भेजते हैं। ऐ ईमानवालो! तुम भी पैगम्बर के गुणगान करो और दुआएं दो । ! तुम लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बड़ा समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो । मुहम्मद अपने आप पर इतना आत्ममुग्ध था कि उसने अपनी कठपुतली अल्लाह के मुंह से कहलवायाः बेशक रसूल, तुम्हारे अख्लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं। तुम्हें रौशन चिराग बनाकर भेजा है। इब्ने-साद मुहम्मद के हवाले से कहता हैः अल्लाह ने दुनियाभर में अरब को चुना। अरबियों में उसने किनाना को चुना। किनाना में से भी कुरैश कबीले को चुना । कुरैशों में से बनी हाशिम कुनबे को चुना और इस कुनबे से मुझे चुना तीन नीचे हदीसों में मुहम्मद द्वारा अपने बारे में किए गए कुछ दावे दिए गए हैंः अल्लाह ने कायनात में जो चीज सबसे पहले रची, वह थी मेरी रूह।।चार - अल्लाह की बनाई हुई सभी चीजों में पहली चीज थी मेरा दिमाग एक सौ पचानवे - मैं अल्लाह से हूं और मुसलमान मुझसे हैं।" - जिस तरह अल्लाह ने मुझे महान बनाया, उसी तरह उसने मुझे अख्लाक़ बख्शा।सात ओ मुहम्मद, यदि यह दुनिया तुम्हारे लिए न होती तो मैं कायनात नहीं बनाता अट्ठानवे जरा मुहम्मद के इन शब्दों को जीसस द्वारा कही गई बातों से तुलना कीजिए। किसी ने जीसस को ' श्रेष्ठ स्वामी' कहकर पुकारा तो वे बोले, 'तुमने मुझे श्रेष्ठ क्यों कहा? ईश्वर के अलावा कोई और श्रेष्ठ नहीं है । " एक मनोविकृत नार्सिसिस्ट ही वास्तविकता से दूर होकर यह दावा कर सकता है कि ब्रह्मांड उसके कारण बनाया गया है। नार्सिसिस्ट जब भी अपने बारे में डींगें हांकता है तो वह विशिष्ट रूप से विनम्र होने का ढोंग करता है । अबू सईद अल-खुद्री ने लिखा है कि रसूल बोलेः 'मैं सम्पूर्ण मानव का नेता हूं और यह मैं बिना किसी गुरूर के कह रहा हूं।' अल-तिरमिजी बताता हैः 'रसूल ने कहाः 'मैंने तुम्हारी बातें सुनीं और तुमने जो भी कहा, वो सच है। मैं खुद अल्लाह का प्यारा हूं और इस बात को कहने में मुझे कोई गुरूर नहीं है । कयामत के दिन मैं यशपताका लेकर आगे चलूंगा। मैं पहली इबादत करने वाला हूं और पहला ऐसा इंसान हूं, जिसकी इबादत अल्लाह ने कबूल की है। मैं ही वह पहला इंसान हूं, जो जन्नत के दरवाजे पर दस्तक देगा । अल्लाह मेरे लिए दरवाजा खोलेगा, फिर मैं अपनी कौम के लोगों के साथ जन्नत में प्रवेश करूंगा। मैं ही दुनिया का सबसे सम्मानित व्यक्ति हूं और मैं ही वह पहला और आखिरी व्यक्ति हूं, जो दुनिया में सबसे अधिक इज्जतदार है। ये सब मैं बिना किसी गुरूर के कह रहा हूं।' नार्सिसिस्ट आत्मविश्वास से भरा हुआ और निपुण दिखता है। जबकि सच्चाई यह है कि ऐसा व्यक्ति आत्मसम्मान की कमी की समस्या से जूझ रहा होता है, और उसे अपनी नार्सिस्टिक भूख शांत करने के लिए दूसरों से अपनी वाहवाही और चापलूसी कराने की आवश्यकता पड़ती है। डॉ. सैम वैकनिन मैलिग्रैंट सैल्फ-लव नामक पुस्तक के लेखक हैं। वो इस विषय के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वो नार्सिसिस्ट के मस्तिष्क को समझते हैं और परिभाषित करते हैं । वैकनिन वर्णन करते हैंः प्रत्येक व्यक्ति नार्सिसिस्ट होता है, कोई कम तो कोई अधिक । यह एक स्वस्थ परिघटना होती है । यह उत्तरजीविता में मददगार होती है। पर स्वस्थ नार्सिसिज्म और विकृत नार्सिसिज्म में फर्क होता है । विकृत नार्सिसिज्म की विशेषता यह होती है कि इससे पीड़ित इंसान में समानुभूति का पूर्णतः अभाव होता है। ऐसा नार्सिसिस्ट दूसरों को वस्तु समझकर उनका शोषण करने की मानसिकता रखता है । वह दूसरों को अपनी सनक पूरी करने का साधन बनाता है । वह स्वयं को विशिष्ट आदर व सम्मान प्राप्त करने का अधिकारी मानता है, क्योंकि ऐसा इंसान अपने भीतर कपोल कल्पित आडम्बर पाले रहता है । विकृत नार्सिसिस्ट आत्म-भिज्ञ नहीं होता है । उसकी अनुभूति और भावनाएं विकृत होती हैं। ऐसा इंसान 'अस्पृश्यता', भावनात्मक प्रतिरोध और अपराजेयता का बोध रखते हुए स्वयं से भी और दूसरों से भी झूठ बोलता है। नार्सिसिस्ट के लिए हर चीज जीवन से बड़ी होती है। वह जितना विनम्र होता है, उतना ही आक्रामक भी । उसके वादे विचित्र, उसकी आलोचना हिंसक व अनिष्टसूचक, और उसकी उदारता मूर्खतापूर्ण होती है। नार्सिसिस्ट छद्म रूप धारण करने में माहिर होता है । वह दिलकश, प्रतिभाशाली अभिनेता, जादूगर और अपने परिवेश को उंगलियों पर नचाने वाला होता है। पहली मुलाकात में ऐसे व्यक्ति को पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है। एक सौ दो नार्सिसिस्ट संप्रदाय नार्सिसिस्ट को प्रशंसकों की आवश्यकता होती है। वह अपने आसपास काल्पनिक दायरा बनाता है, जहां वह केंद्र बिंदु होता है। वह अपने प्रशंसकों और अनुयायियों को उस दायरे में इकट्ठा करता है, उन्हें पुरस्कृत करता है और अपनी चापलूसी के लिए उनको प्रोत्साहित करता है। जो व्यक्ति उसके इस कृत्रिम दायरे से बाहर होते हैं, उन्हें वह अपना दुश्मन मानता है । वैकनिन लिखते हैंः नार्सिसिस्ट संप्रदाय के केंद्र में गुरु होता है । अन्य गुरुओं की तरह वह अपने शिष्यों, अपनी पत्नी, बच्चों, परिवार के सदस्यों, दोस्तों व सहकर्मियों से अपनी आज्ञा का सम्पूर्ण अनुपालन चाहता है । वह अनुयायियों से विशिष्ट व्यवहार व सम्मान प्राप्त करना अपना अधिकार मानता है। समझता है कि उसके अनुयायी उसे विशिष्ट समझकर व्यवहार करें और यह सम्मान प्राप्त करना उसका अधिकार है । वह अवज्ञा करने वालों और उससे दूर भागने वालों को दंड देता है। वह अनुशासन, अपनी शिक्षाओं के प्रति निष्ठा और सब पर एक लक्ष्य थोपता है। वास्तव में वह जितना कम निपुण होगा, उतना ही कठोर नियंत्रण और व्यापक ब्रेनवाशिंग करेगा। विकृत नार्सिसिस्ट का नियंत्रण दुविधा, अनिश्चितता, अस्पष्टता और अपने परिवेश के दुरुपयोग पर आधारित होता है।एक सौ तीन उसकी हर समय बदलती सनक ही किसी बात को सही अथवा गलत, वांछनीय या अवांछनीय अथवा 'क्या करना या क्या नहीं करना' को निर्धारित करती है । वही अपने अनुयायियों के अधिकार और सीमाएं तय करता है और जब इच्छा होती है तो इन्हें बदल देता है । विकृत नार्सिसिस्ट माइक्रो मैनेजर होता है । वह अपने अनुयायियों के छोटे से छोटे कार्य या व्यवहार पर नियंत्रण रखता है। उसकी इच्छाओं और लक्ष्य पर नहीं चलने वाले को वह सख्त सजा देता है और सूचनाओं का दमन करता है। ऐसा नार्सिसिस्ट समर्थकों अथवा अनुयायियों की इच्छाओं या अनिच्छाओं का ध्यान नहीं रखता और न ही उनकी निजता और मर्यादा का सम्मान करता है। वह अपने समर्थकों की इच्छाओं की उपेक्षा करता है और उन्हें अपनी संतुष्टि का साधन या वस्तु मानता है । वह व्यक्तियों और परिस्थितियों दोनों पर अनिवार्य रूप से नियंत्रण करना चाहता है। वह दूसरों की स्वायतत्ता एवं स्वतंत्रता को अस्वीकार करता है । वह चाहता है कि दोस्त अथवा परिवार के किसी सदस्य से मिलने जैसी मामूली बातों के लिए भी उससे अनुमति ली जाए । धीरे-धीरे वह अनुयायियों को उनके करीबी और प्रिय लोगों से अलग-थलग कर देता है, ताकि ये लोग उसके ऊपर भावनात्मक, यौनिक, वित्तीय व सामाजिक रूप से निर्भर होने को मजबूर हो जाएं। वह संरक्षक व कृपा बरसाने वाले के रूप में अभिनय करते हुए बर्ताव करता है और अक्सर नसीहत देता रहता है। वह कभी अपने संप्रदाय के सदस्यों की मामूली गलतियों पर बरस पड़ता है तो कभी उनकी प्रतिभा, गुण व कौशल की झूठी तारीफ करने लगता है। उसकी इच्छाएं अव्यवहारिक होती हैं और इसलिए वह बाद में अपने दुर्व्यवहार को वैध करार देने लगता है।एक सौ चार मुहम्मद ने बड़ा झूठ गढ़ा कि उसके अनुयायी परम सत्य पर भरोसा करते हैं । खतरनाक बात यह है कि हिटलर के झूठ को सच मानने वालों की तरह ही इस्लाम के अनुयायी भी झूठ को सच मानने के लिए स्वेच्छा से तत्पर रहते हैं। पिछले अध्याय में हमने मुहम्मद का परिचय जाना। हमने देखा कि किस तरह उसने अपने अनुयायियों को उनके परिवारों से अलग-थलग कर दिया और उनके निजी जीवन तक पर नियंत्रण कर लिया । दुख इस बात का है कि एक हज़ार चार सौ साल बीतने के बावजूद स्थिति बहुत नहीं बदली है। मुझे तमाम ऐसी हृदय विदारक घटनाएं सुनने को मिली हैं, जिसमें अभिभावकों ने बताया कि उनके पुत्र या पुत्री ने इस्लाम कबूल कर लिया है। मुसलमान इन बच्चों को घेरे रहते हैं और अभिभावकों से न मिलने की सलाह देते हैं । विकृत नार्सिसिस्ट का हेतु विकृत नार्सिसिस्ट जानता है कि अपना प्रत्यक्ष महिमा मंडन कराना उल्टा पड़ सकता है और उसकी स्वीकार्यता खतरे में पड़ सकती है। इसलिए वह इसके बजाय अपने को उदारवादी, त्यागी पुरुष, ईश्वर, राष्ट्र अथवा मानवता की सेवा में रत होने का ढोंग करते हुए पेश करता है। उसके इस मुखौटे के पीछे सोची-समझी चतुराई होती है। ऐसा इंसान अपने अनुयायियों के समक्ष ऐसे महान व प्रतापी उद्देश्य रखता है, जिससे लगे कि वे इसके बिना नहीं रह सकते। वह खुद को क्रांतिकारी, परिवर्तन लाने वाला और आशा की किरण देने वाला नेता मानता है। प्रचार और तिकड़म के जरिए वह उस उद्देश्य को इतना महत्वपूर्ण बना देता है कि जो उस पर भरोसा करते हैं, उन्हें उस उद्देश्य के आगे अपना जीवन गौण लगने लगता है। इसी ब्रेनवाश में अनुयायी मरने और मारने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसा नार्सिसिस्ट त्याग और बलिदान जैसी भावनाओं को प्रोत्साहित करता है । फिर इसके बाद वह खुद को इन उद्देश्यों की धुरी के रूप में प्रस्तुत करता है । यह उद्देश्य इसके इर्दगिर्द घूमता है । वह ऐसी तस्वीर पेश करता है, जैसे कि केवल वही उस उद्देश्य को पूरा कर सकता है और अपने अनुयायियों का नेतृत्व कर सकता है। इसलिए ऐसा व्यक्ति अपने समर्थकों के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत हो जाता है। एक ऐसी शख्सियत जिसके पास उनके मोक्ष व यश-पराक्रम की कुंजी है । यह उद्देश्य अस्ल में ऐसे नार्सिसिस्ट के निजी अरमानों को पूरा करने का साधन होता है। उदाहरण के रूप में, जोन्स ने गुयाना में उन नौ सौ लोगों का नेतृत्व किया, जिन्होंने सामूहिक आत्महत्या की । इस इंसान ने लोगों को सामूहिक आत्महत्या के लिए उकसाते हुए सामाजिक न्याय का हेतु बताया और समर्थक उसे मसीहा मानते थे । हिटलर ने आर्यों की सर्वोत्कृष्टता का उद्देश्य दिया था। उसने हालांकि अपना प्रत्यक्ष महिमा मंडन नहीं किया, बल्कि जर्मनी की श्रेष्ठता हासिल करने की बात कही । वह निस्संदेह अपरिहार्य प्रेरणास्रोत था और अपने मकसद का फ्यूहरर था । इसी तरह स्टालिन ने साम्यवाद का उद्देश्य सामने रखा था और जो उसकी बातों से इत्तिफाक नहीं रखता था, उसे वह सर्वहारा के खिलाफ मानता था और कत्ल करवा देता था। मुहम्मद ने अपने अनुयायियों से स्वयं की इबादत के लिए नहीं कहा । अस्ल में उसने दावा किया कि वह केवल अल्लाह का संदेशवाहक अर्थात पैगम्बर है । फिर उसने होशियारी दिखाते हुए अपने अनुयायियों को कहा कि वे अल्लाह व उसके पैगम्बर के हुक्म को मानें । कुरान की एक आयत में उसने अपने कथित अल्लाह के जरिए ऐ रसूल ! तुमसे लोग पूछेंगे जंग से क्या आया और क्या गया ? उनसे कहो कि जंग का अनफ़ाल यानी मालेगनीमत अल्लाह और रसूल के लिए है। अल्लाह के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास करो । अपने बाहमी मामलात की इस्लाह करो और अगर तुम सच्चे हो तो अल्लाह का और उसके रसूल का हुक्म मानो। चूंकि अल्लाह के लिए अरब के लोगों से ठगे और चुराए गए माल का कोई उपयोग नहीं था, इसलिए ये सारे माल उसके प्रतिनिधि के हो गए। चूंकि कोई भी अल्लाह को न तो देख सकता है और न सुन सकता है, इसलिए सारी कर्तव्यपरायणता मुहम्मद के प्रति थी । मुहम्मद से ही लोगों को डरना चाहिए, क्योंकि वह दुनिया के सबसे भयानक ईश्वर का एकमात्र मध्यस्थ था। प्रभुत्व जमाने के लिए अल्लाह के नाम का बहाना मुहम्मद के लिए जरूरी था। क्या यह संभव था कि अल्लाह के भय के बिना मुहम्मद के अनुयायी अपनी जिंदगी कुर्बान कर देते, दूसरे लोगों और अपने परिजनों तक की हत्याएं कर देते, उनकी धन-संपत्ति लूट लेते और सबकुछ मुहम्मद को सौंप देते ? यह काल्पनिक अल्लाह और कुछ नहीं, बल्कि मुहम्मद की सनक और अपना प्रभुत्व स्थापित करने का औजार था। विडम्बना यह है कि मुहम्मद हमेशा और किसी को अल्लाह के बराबर नहीं मानने का उपदेश देता रहा और एक तरह से खुद ही अल्लाह का एक ऐसा जोड़ीदार बन बैठा कि उसे व्यवहारिक एवं तार्किक रूप से अल्लाह से अलग रखना असंभव हो गया । ऐसे नार्सिसिस्टों को अपने अनुयायियों का इस्तेमाल करने के लिए किसी उद्देश्य की आवश्यकता होती है। जर्मनों ने युद्ध की शुरुआत हिटलर के लिए नहीं की थी । इन्होंने युद्ध उस हेतु के लिए शुरू किया था, जिसे हिटलर ने उनके दिमाग में भरा था। डॉ. सैम वैकनिन लिखते हैंः नार्सिसिस्ट हर उस चीज का इस्तेमाल करते हैं जो उनकी मनोविकारी सनक पूरी करने में सहायक होता है। यदि ईश्वर, नस्ल, जाति, चर्च, विश्वास, संस्थागत धर्म आदि उनकी नार्सिस्टिक भूख को शांत करें तो वे धर्मपरायण बनने का ढोंग करते हैं और यदि इससे उसका मकसद हल न हो तो वे धर्म छोड़ देंगे। 'एक सौ पाँच इस्लाम प्रभुत्व जमाने का साधन था । मुहम्मद के बाद मुसलमानों के दूसरे नेताओं ने भी इस्लाम का उपयोग इसी तरह किया । मुसलमान इन नेताओं की स्वार्थ सिद्धि के साधन बन गए । एक अमरीकी मुसलमान मिर्जा मलकम खान ने अफगानी मुसलमान जमालुद्दीन अफगानी के साथ मिलकर इस्लामिक पुनर्जागरण शुरू किया और उन्होंने एक कुटिल नारा दिया, जिसमें कहाः 'मुसलमानों को कुरान की बातें बताइए, वे आपके लिए जान दे देंगे।'एक सौ छः विकृत नार्सिसिस्ट की वसीयत मरते समय भी मुहम्मद ने मुसलमानों से आगे बढ़ने और उसके जिहाद को जारी रखने का आह्वान किया था । चंगेज खान ने भी मरते समय अपने बेटों को ऐसा ही आदेश दिया था। उसने अपने बेटों से कहा कि पूरी दुनिया को अपने कब्जे में लेने की उसकी इच्छा थी, लेकिन अब वह यह नहीं कर पाएगा, इसलिए वे उसके इस सपने को पूरा करें। मुसलमानों की तरह मंगोल भी आतंक फैलाने वाले थे। किसी विकृत नार्सिसिस्ट के लिए फतह ही सबकुछ होता है। ऐसे लोगों के पास दिल नहीं होता है और दूसरों की जिंदगी उनके लिए मायने नहीं रखती। इक्यावन साल की उम्र में हिटलर को अपने बांये हाथ में कुछ अजीब हरकत महसूस हुई । सामान्यतः वह इसे छिपा लेता था, लेकिन रोग बढ़ गया तो वह दुनिया की नजरों से दूर हो गया। उसे अहसास हो गया कि उसकी मौत करीब है। अब वह अपने संकल्प में और दृढ़ हो गया तथा उसने नए सिरे से हमले और तेज कर दिए, जबकि वह जानता था कि उसकी सांसें बहुत कम बची हैं । विकृत नार्सिसिस्ट अर्थात आत्म-कामी अपने पीछे पूरा साम्राज्य छोड़कर जाना चाहते हैं । यह सोचना भूल है कि इस्लाम केवल एक धर्म है । इस्लाम का एक गुप्त पहलू यह है कि इसे उन मुस्लिम विद्वानों व दार्शनिकों द्वारा बाद में रचा गया, जिन्होंने मुहम्मद की बेतुकी बातों की गूढ़ व्याख्या की । मुहम्मद के अनुयायियों ने मजहब को अपनी रुचि के अनुसार ढाला और कालक्रम में इन व्याख्याओं पर प्राचीन होने की मुहर लग गई, जिससे इनकी विश्वसनीयता बन गई । यदि इस्लाम एक धर्म है तो नाजीवाद, साम्यवाद, शैतानवाद, हैवन्स गेट, पीपुल्स टैम्पल, ब्रांच डेविडियन आदि भी धर्म की श्रेणी में आएंगे । किंतु यदि हम यह मानते हैं कि जीवन को शिक्षित बनाने, मानव के विकास की संभावनाएं बाहर लाने, आत्मोत्थान, आध्यात्मिकता का बीज बोने, सद्भावना बढ़ाने और मानवता को प्रकाशित करने को धर्म कहते हैं तो इस्लाम इस कसौटी पर पूरी तरह विफल होगा। इस पैमाने पर इस्लाम को न तो धर्म की श्रेणी में रखा जा सकता है और न ही इसे इस श्रेणी में रखा जाना चाहिए। नार्सिसिस्ट ईश्वर बनना चाहते हैं किसी नार्सिसिस्ट के लिए जो चीज सबसे महत्वपूर्ण होती है, वह है ताकत । वह नाम व सम्मान पाना चाहता है और उपेक्षा बिलकुल नहीं बर्दाश्त कर सकता है। ऐसे लोग मन ही मन अकेला और असुरक्षित भी महसूस करते हैं, इसीलिए वे खुद को क्रांतिकारी नेता, आशा जगाने वाली शख्सियत और महान उद्देश्यों के दूत के रूप में प्रस्तुत में करते हैं। उनका उद्देश्य तो बस एक बहाना होता है। ऐसा करके वे समर्थकों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। ये लोग काल्पनिक ईश्वर और मिथ्या उद्देश्य गढ़ते हैं। जितना ही वे अपने फर्जी ईश्वर को महिमामंडित करते हैं, उतनी ही ताकत उनके पास आती जाती है । मुहम्मद के लिए अल्लाह एक सुविधाजनक औजार था । इस औजार के जरिए वह अपने अनुयायियों पर असीमित प्रभुत्व जमा सकता था और उनकी जिंदगी का मालिक बन सकता था। केवल एक अल्लाह था, भयानक भी और उदार व रहम करने वाला भी । मुहम्मद उसका एकमात्र प्रतिनिधि था। इस हिकमत से मुहम्मद अल्लाह बन गया। हालांकि दावा किया गया कि अल्लाह का पैगाम मुहम्मद के माध्यम से दुनिया में आता है, पर सच्चाई यह थी कि कोई अल्लाह था ही नहीं, बल्कि यह मुहम्मद और उसकी सनक मात्र थी, जिसे संतुष्ट करना मुसलमानों से अपेक्षित था । वैकनिन इस पहलू को अपने लेख 'फॉर द लव ऑफ गॉडनार्सिसिस्ट एंड रिलीजन' में बखूबी समझाते हैं : एक सौ सात नार्सिसिस्ट सदा ईश्वर की तरह होना चाहता है, जो सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सदा आदरणीय, चर्चा में बना रहने वाला और प्रेरणास्त्रोत हो । ईश्वर नार्सिसिस्ट का उन्मादभरा सपना होता है, उसकी परम आडम्बरपूर्ण कल्पना होती है। लेकिन ईश्वर उसके लिए कई और मायनों में सुविधाजनक होता है। ऐसा व्यक्ति कभी प्रभावशाली व्यक्तियों की तारीफों के पुल बांधेगा तो कभी उन्हें नीचा दिखाएगा। शुरुआत में वह प्रभावशाली व्यक्तियों का अनुकरण करेगा और उनकी हर बात की प्रशंसा करेगा, उनकी हर बात का बचाव करेगा। वह उनके बारे में कहेगा कि वे न तो गलत कर सकते हैं और न ही गलत हो सकते हैं। नार्सिसिस्ट उन शख्सियतों को जीवन से बड़ा, सम्पूर्ण, निर्विकार एवं बुद्धिमान मानेगा । पर ज्यों ही उसकी अव्यवहारिक व हवाहवाई आकांक्षाएं हिलोर मारेंगी तो वह कुंठित होगा । इसके बाद वह उन व्यक्तियों की निंदा करना शुरू कर देगा, जिन्हें अब तक अपना आदर्श मानता रहा है। ऐसा व्यक्ति जिन्हें अब तक महान बताता था, उन्हें अब वह सामान्य मनुष्य कहने लगेगा। अब उसकी नजर में वो शख्सियतें बहुत छोटी, कमजोर, गलतियां करने वाली, कायर, मूर्ख और मामूली हो जाती हैं। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति तत्वदर्शी ईश्वर से संबंधों को लेकर भी इसी चक्र को अपनाता है । पर अक्सर, मोहभंग या ईश्वर की छवि को लेकर निराशा का भाव पैदा होने के बाद भी वह उसे चाहने और उसके अनुसरण का बहाना करता रहता है । वह इस धोखे को बनाए रखता है क्योंकि ईश्वर से निकटता दिखाने के बहाने वह एक विशेष प्रकार का रौबदाब हासिल करता है। पुजारी, जनसमूहों के नेता, उपदेशक, धर्मप्रचारक, पंथों के मुखिया, राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवी ईश्वर के साथ
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ब्यावरा। माहेश्वरी समाज ने महेश नवमी 2022 का पारितोषिक वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया। यह आयोजन वल्लभा परिसर में दोपहर 1 बजे से शुरू हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष पश्चिम बंगाल प्रादेशिक माहेश्वरी सभा मंत्री अजय झावर थे। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य अशोक ईनानी थे। साथ ही विशेष अतिथि के रुप में राष्ट्रीय युवा संगठन मंत्री भरत तोतला, संभागीय उपाध्यक्ष विनय मालानी, वंदना मालानी, संभागीय संयुक्त मंत्री रंजना परवाल, जिलाध्यक्ष बड़वानी अर्पणा झूमर शामिल हुए। सांस्कृतिक विधाओं के विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही 10 वीं और 12 वीं के परीक्षा परिणामों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों का भी सम्मान किया गया। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में शमिता झंवर ने पहला, ज्योति चौखड़ा ने दूसरा और प्रेमलता चौखड़ा प्रतिभा काकानी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वाद विवाद प्रतियोगिता के पहले विषय, दो संतान होना समाज के हित में है , पर पक्ष में मोनिका चौखड़ा और डॉ. सच्चिदानंद माहेश्वरी ने पुरस्कार प्राप्त किया। विपक्ष में नंदिनी बाहेती और श्याम सुंदर राठी ने पुरस्कार प्राप्त किया। दूसरे विषय मोबाइल का उपयोग बच्चों के विकास में बाधक पर पक्ष में भूमिका माहेश्वरी ने पुरस्कार प्राप्त किया साथ ही विपक्ष में हिमजा माहेश्र्वरी और कृति भट्टर ने पुरस्कार प्राप्त किया। मिमिक्री में आध्या माहेश्वरी ने पहला , अवनी माहेश्र्वरी ने दूसरा और कुंज भट्टर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। स्टैंडअप कमेडी में तनिष्क झंवर ने पहला , सुनील चोखड़ा ने दूसरा और जानकी चोखड़ा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। हाईस्कूल परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों में अंजली मूंदडा, प्रियल चांडक, मृदुल चांडक, खुशी चांडक, अनुज सोमानी, तनिष राठी और भूमिका माहेश्र्वरी आदि को पुरस्कार प्रदान किया गया। हायर सेकंडरी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों में शिवानी चांडक, रिया सिंगी, तनिष्क झंवर, अंजली सोमानी, कांची बल्दवा, सार्थक काबरा, नंदिनी राठी, शौर्य बिहानी और तनिष्क माहेश्वरी को पुरस्कार प्रदान किया गया। सीए परीक्षा पास करने पर गरिमा डांगरा और सीएस परीक्षा पास करने पर सुमित डांगरा को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अशोक काकानी, जिला अध्यक्ष रामप्रसाद गगरानी, संपत मोदानी, ब्लॉक अध्यक्ष रमेश खटोड़, नवयुवक जिला अध्यक्ष शुभम चांडक, मोनू बाहेती, राजेंद्र सोमानी, महिला मंडल जिलाध्यक्ष कुमुद बियानी, जिला सचिव शालिनी भट्टर, राजगढ़ जिला नवयुवक मंडल से सतीश माहेश्र्वरी, मनीष काकानी, नितेश बाहेती, महेंद्र दुदानी, बृजेश बजाज, रामबाबू डांगरा, प्रदीप मूंदड़ा, विशाल बजाज, द्वारका मोदानी, राजेंद्र सिंघी, दीपक चांडक, मधु मूंदड़ा, सुधा दुदानी, मीना मोदानी, महिला ब्लॉक अध्यक्ष सोनिका चांडक, सचिव प्रमिला मूंदड़ा, रानी डांगरा, कमलेश बजाज सहित समाज के अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मनीष गगरानी और अनु-ति राठी ने किया।
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ब्यावरा। माहेश्वरी समाज ने महेश नवमी दो हज़ार बाईस का पारितोषिक वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया। यह आयोजन वल्लभा परिसर में दोपहर एक बजे से शुरू हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष पश्चिम बंगाल प्रादेशिक माहेश्वरी सभा मंत्री अजय झावर थे। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य अशोक ईनानी थे। साथ ही विशेष अतिथि के रुप में राष्ट्रीय युवा संगठन मंत्री भरत तोतला, संभागीय उपाध्यक्ष विनय मालानी, वंदना मालानी, संभागीय संयुक्त मंत्री रंजना परवाल, जिलाध्यक्ष बड़वानी अर्पणा झूमर शामिल हुए। सांस्कृतिक विधाओं के विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही दस वीं और बारह वीं के परीक्षा परिणामों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों का भी सम्मान किया गया। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में शमिता झंवर ने पहला, ज्योति चौखड़ा ने दूसरा और प्रेमलता चौखड़ा प्रतिभा काकानी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। वाद विवाद प्रतियोगिता के पहले विषय, दो संतान होना समाज के हित में है , पर पक्ष में मोनिका चौखड़ा और डॉ. सच्चिदानंद माहेश्वरी ने पुरस्कार प्राप्त किया। विपक्ष में नंदिनी बाहेती और श्याम सुंदर राठी ने पुरस्कार प्राप्त किया। दूसरे विषय मोबाइल का उपयोग बच्चों के विकास में बाधक पर पक्ष में भूमिका माहेश्वरी ने पुरस्कार प्राप्त किया साथ ही विपक्ष में हिमजा माहेश्र्वरी और कृति भट्टर ने पुरस्कार प्राप्त किया। मिमिक्री में आध्या माहेश्वरी ने पहला , अवनी माहेश्र्वरी ने दूसरा और कुंज भट्टर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। स्टैंडअप कमेडी में तनिष्क झंवर ने पहला , सुनील चोखड़ा ने दूसरा और जानकी चोखड़ा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। हाईस्कूल परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों में अंजली मूंदडा, प्रियल चांडक, मृदुल चांडक, खुशी चांडक, अनुज सोमानी, तनिष राठी और भूमिका माहेश्र्वरी आदि को पुरस्कार प्रदान किया गया। हायर सेकंडरी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले समाज के विद्यार्थियों में शिवानी चांडक, रिया सिंगी, तनिष्क झंवर, अंजली सोमानी, कांची बल्दवा, सार्थक काबरा, नंदिनी राठी, शौर्य बिहानी और तनिष्क माहेश्वरी को पुरस्कार प्रदान किया गया। सीए परीक्षा पास करने पर गरिमा डांगरा और सीएस परीक्षा पास करने पर सुमित डांगरा को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अशोक काकानी, जिला अध्यक्ष रामप्रसाद गगरानी, संपत मोदानी, ब्लॉक अध्यक्ष रमेश खटोड़, नवयुवक जिला अध्यक्ष शुभम चांडक, मोनू बाहेती, राजेंद्र सोमानी, महिला मंडल जिलाध्यक्ष कुमुद बियानी, जिला सचिव शालिनी भट्टर, राजगढ़ जिला नवयुवक मंडल से सतीश माहेश्र्वरी, मनीष काकानी, नितेश बाहेती, महेंद्र दुदानी, बृजेश बजाज, रामबाबू डांगरा, प्रदीप मूंदड़ा, विशाल बजाज, द्वारका मोदानी, राजेंद्र सिंघी, दीपक चांडक, मधु मूंदड़ा, सुधा दुदानी, मीना मोदानी, महिला ब्लॉक अध्यक्ष सोनिका चांडक, सचिव प्रमिला मूंदड़ा, रानी डांगरा, कमलेश बजाज सहित समाज के अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मनीष गगरानी और अनु-ति राठी ने किया।
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भोपाल। राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एकमात्र ऐसे किसान पुत्र मुख्यमंत्री है, जिन्होंने किसानों के दर्द को समझा, उनके महत्व को जाना और उनके कल्याण के लिए एक नहीं अनेक ऐसी योजनाएं क्रियान्वित की जिससे प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान जानते हैं कि किसान मानसून पर निर्भर रहता है। मौसम की अनिश्चितता से किसान कभी अतिवृष्टि से तो कभी फसलों की बीमारी के कारण आर्थिक रूप से चिन्ताग्रस्त रहता है। प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना में सम्मान निधि पाने वाले हितग्राहियों के लिए यह योजना सोने पे सुहागा सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से किसानों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने यह बात मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के राज्य-स्तरीय शुभारंभ अवसर पर कही।
राजस्व मंत्री राजपूत ने कहा कि किसान कल्याण योजना का लाभ प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के पात्र हितग्राहियों को ही दिया जाएगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के अंतर्गत किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रूपये तीन समान किश्तों में प्रदान किया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 4 हजार रूपए दो समान किश्तों में किसानों को अतिरिक्त रूप से दिए जाएंगे। इस प्रकार प्रदेश के 77 लाख कृषक परिवारों को वर्ष में 10 हजार रूपये सम्मान निधि के रूप में मिलेगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 3200 करोड़ रूपये किसानों को वितरित किये जायेंगे।
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भोपाल। राजस्व मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एकमात्र ऐसे किसान पुत्र मुख्यमंत्री है, जिन्होंने किसानों के दर्द को समझा, उनके महत्व को जाना और उनके कल्याण के लिए एक नहीं अनेक ऐसी योजनाएं क्रियान्वित की जिससे प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान जानते हैं कि किसान मानसून पर निर्भर रहता है। मौसम की अनिश्चितता से किसान कभी अतिवृष्टि से तो कभी फसलों की बीमारी के कारण आर्थिक रूप से चिन्ताग्रस्त रहता है। प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना में सम्मान निधि पाने वाले हितग्राहियों के लिए यह योजना सोने पे सुहागा सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से किसानों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने यह बात मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के राज्य-स्तरीय शुभारंभ अवसर पर कही। राजस्व मंत्री राजपूत ने कहा कि किसान कल्याण योजना का लाभ प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के पात्र हितग्राहियों को ही दिया जाएगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के अंतर्गत किसान परिवारों को प्रतिवर्ष छः हजार रूपये तीन समान किश्तों में प्रदान किया जा रहा है। अब मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष चार हजार रूपए दो समान किश्तों में किसानों को अतिरिक्त रूप से दिए जाएंगे। इस प्रकार प्रदेश के सतहत्तर लाख कृषक परिवारों को वर्ष में दस हजार रूपये सम्मान निधि के रूप में मिलेगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में तीन हज़ार दो सौ करोड़ रूपये किसानों को वितरित किये जायेंगे।
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राजगढ़ - भारतीय जनता पार्टी पच्छाद मंडल का 37वां स्थापना दिवस सभी 109 बूथों पर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी पच्छाद मंडल अध्यक्ष प्रताप ठाकुर व किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सुनील शर्मा ने बताया कि पार्टी के स्थापना दिवस पर राजगढ़ सहित हर बूथ पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता, बूथ अध्यक्ष, बूथपालक, बूथ लेवल एजेंट व बूथ समितियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उपरोक्त नेताओं ने बताया कि आज भाजपा प्रदेश ही नहीं अपितु देश का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बन चुका है और यह राष्ट्रहित के साथ-साथ समाजहित में कार्य करने वाला अग्रणी संगठन है। केंद्र की मोदी सरकार बड़े-बड़े कार्य करके देश को विश्व गुरु बनाने का प्रयास कर रही है जिसके लिए प्रधानमंत्री को पूरे देशवासियों का साथ चाहिए। हर बूथ पर बैठक का आयोजन भी किया गया है, जिसमें विधानसभा चुनाव पर विस्तृत चर्चा भी की गई। सभी कार्यकर्ताओं से मिलकर कार्य करने का आग्रह करते हुए पच्छाद को कांग्रेस मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर प्रधान संजीव ठाकुर, नगर पंचायत पार्षद अशोक सूद, मंडल प्रवक्ता नवीन शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय भारद्वाज, रनजोत ठाकुर, पूर्व प्रधान सोमदत्त ठाकुर, वीरेंद्र कंवर, जय प्रकाश, कुलदीप सिंह, बब्बू सूद, अंशुल पुंडीर, रजनीश आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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राजगढ़ - भारतीय जनता पार्टी पच्छाद मंडल का सैंतीसवां स्थापना दिवस सभी एक सौ नौ बूथों पर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी पच्छाद मंडल अध्यक्ष प्रताप ठाकुर व किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सुनील शर्मा ने बताया कि पार्टी के स्थापना दिवस पर राजगढ़ सहित हर बूथ पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता, बूथ अध्यक्ष, बूथपालक, बूथ लेवल एजेंट व बूथ समितियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उपरोक्त नेताओं ने बताया कि आज भाजपा प्रदेश ही नहीं अपितु देश का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बन चुका है और यह राष्ट्रहित के साथ-साथ समाजहित में कार्य करने वाला अग्रणी संगठन है। केंद्र की मोदी सरकार बड़े-बड़े कार्य करके देश को विश्व गुरु बनाने का प्रयास कर रही है जिसके लिए प्रधानमंत्री को पूरे देशवासियों का साथ चाहिए। हर बूथ पर बैठक का आयोजन भी किया गया है, जिसमें विधानसभा चुनाव पर विस्तृत चर्चा भी की गई। सभी कार्यकर्ताओं से मिलकर कार्य करने का आग्रह करते हुए पच्छाद को कांग्रेस मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर प्रधान संजीव ठाकुर, नगर पंचायत पार्षद अशोक सूद, मंडल प्रवक्ता नवीन शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय भारद्वाज, रनजोत ठाकुर, पूर्व प्रधान सोमदत्त ठाकुर, वीरेंद्र कंवर, जय प्रकाश, कुलदीप सिंह, बब्बू सूद, अंशुल पुंडीर, रजनीश आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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स्वीडन इंस्टीट्यूट वी-डेम के अनुसार भारत अब 'चुनावी लोकतंत्र' नहीं रहा, बल्कि 'चुनावी तानाशाही में बदल गया है।
उत्तराखंड विधानसभा में पिछले हफ्ते शनिवार को पेश की गई एक कैग रिपोर्ट में राज्य की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कड़ी आलोचना की गयी है।
तीरथ सिंह रावत को उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है।
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि भारत के वैश्विक नेता होने के दावे की हवा निकल गयी है।
कुछ शहरों में पेट्रोल और डीज़ल के मूल्यों में अंतर की वजह क्या है?
भारत में किसान आंदोलन जारी है जिसके 100 दिन पूरे हो चुके हैं। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता, आंदोलन को देशव्यापी करने की कोशिश के तहत अलग अलग राज्यों में रैलियाँ कर रहे हैं।
भारत से रोहिग्या मुसलमानों के निष्कासन पर राष्ट्रसंघ ने गहरी चिंता जताई है।
महाराष्ट्र के कई शहरों में कोरोना वायरस का क़हर फ़िलहाल थमता नज़र नहीं आ रहा है। ठाणे में कोविड-19 के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं।
भारत ने चाबहार बंदरगाह के महत्व के दृषटिगत इसको क्षेत्रीय देशों के लिए संपर्क राजमार्ग बताया है।
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स्वीडन इंस्टीट्यूट वी-डेम के अनुसार भारत अब 'चुनावी लोकतंत्र' नहीं रहा, बल्कि 'चुनावी तानाशाही में बदल गया है। उत्तराखंड विधानसभा में पिछले हफ्ते शनिवार को पेश की गई एक कैग रिपोर्ट में राज्य की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कड़ी आलोचना की गयी है। तीरथ सिंह रावत को उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि भारत के वैश्विक नेता होने के दावे की हवा निकल गयी है। कुछ शहरों में पेट्रोल और डीज़ल के मूल्यों में अंतर की वजह क्या है? भारत में किसान आंदोलन जारी है जिसके एक सौ दिन पूरे हो चुके हैं। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता, आंदोलन को देशव्यापी करने की कोशिश के तहत अलग अलग राज्यों में रैलियाँ कर रहे हैं। भारत से रोहिग्या मुसलमानों के निष्कासन पर राष्ट्रसंघ ने गहरी चिंता जताई है। महाराष्ट्र के कई शहरों में कोरोना वायरस का क़हर फ़िलहाल थमता नज़र नहीं आ रहा है। ठाणे में कोविड-उन्नीस के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। भारत ने चाबहार बंदरगाह के महत्व के दृषटिगत इसको क्षेत्रीय देशों के लिए संपर्क राजमार्ग बताया है।
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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि कांग्रेस के शासन में पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ को सिवाय छलावे, धोखाधड़ी, दग़ाबाजी और वादाख़िलाफ़ी के और क्या मिला? जो सरकार हर किसान का हर कर्ज़ माफ़ करने, दो साल का बकाया बोनस देने और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा करके सत्ता में आई है, उसने न तो कर्ज़माफी का वादा निभाया, न दोसाल के बकाया बोनस भुगतान की फ़िक्र की और अब दिसंबर में खरीदे धान का पूरा भुगतान अभी जून तक भी नहीं कर पाई है। यह भुगतान भी चार किश्तों में सरकार कब तक करेगी, कुछ तय नहीं है। अग्रवाल बुधवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति परिसर में भाजपा द्वारा आहूत जिला जनसंवाद कार्यक्रम के तहत बालोद ग्रामीण ज़िला की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सभा को संबोधित कर रहे थे। विदित रहे, प्रदेश भाजपा द्वारा केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने पर जिला स्तर पर इन सभाओं का आयोजन रखा जा रहा है और यह सभा इस क्रम में गुरुवार की दूसरी सभा थी।
भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अग्रवाल ने बेरोज़गारी भत्ता देने और महिला स्व-सहायता समूहों के कर्ज़ माफ़ करने के वादे को भुला चुकी प्रदेश सरकार किसानों को उनके धान के मूल्य का एकमुश्त भुगतान नहीं करके किसानों के पैसों पर डाका डाल रही है। प्रदेश का किसान इस सरकार को कभी माफ़ नहीं करेगा। अपने किसी भी वादे पर यह सरकार खरी नहीं उतरी है। अग्रवाल ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे लूटमार वाली सरकार बताया और कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को प्रदेश की जनता नहीं, केवल अपनी ही चिंता है। आज प्रदेश में हर कोई परेशान है। शराबबंदी के बजाय प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन अवधि में भी शराब की नदियाँ बहाई और प्रदेश के जन-स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का काम किया। अग्रवाल ने अब सरकारी घास ज़मीन बेचने के प्रदेश सरकार के फैसले को उसके दीवालिया होने का परिचायक बताया और कहा कि प्रदेश में विकास के सारे काम ठप पड़े हैं और कांग्रेस के लोग चाहे जिस तरह पैसा कमाने के इकलौते एजेंडे में लगे हुए हैं। अग्रवाल ने कहा कि नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी के बाद अब मुख्यमंत्री 'रोका-छेका' की बात कहकर प्रदेश को भरमाने में लग गए हैं, लेकिन गौठानों में चारे का इंतज़ाम उनकी सरकार नहीं कर रही है। कोरोना के मोर्चे पर प्रदेश सरकार को पूरी तरह विफल बताते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार से विभिन्न मदों में आई करोड़ों की राशि प्रदेश सरकार खर्च तक नहीं कर रही है और उस राशि का ठेका-टेंडर में इस्तेमाल करने की नीयत रख रही है। प्रदेश सरकार आदमियों की सुरक्षा तो कर ही नहीं पा रही है, अब प्रदेश के ज़ंगल भी शिकारगाह बन गए हैं। हाल ही प्रदेश में छह हाथियों की हुई मौत को प्रदेश सरकार के लिए शर्मनाक बताते हुए अग्रवाल ने भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के पाँच वर्षों और दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की उपलब्धियों के साथ-साथ प्रदेश सरकार की नाकामियों से भी प्रदेश की जनता को अवगत कराएँ।
भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए पिछले छह वर्षों में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक, साहसिक व क्रांतिकारी निर्णयों से देश की दशा सुधारकर एक नई दिशा देने का काम किया है। आपातकाल की बरसी को काला दिन बताते हुए अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस ने 1975 में लोकतंत्र की हत्या कर दी थी और लाखों निर्दोष लोगों के न केवल ज़ेलों में बंद किया, अपितु नागरिक अधिकारों का हनन कर, अमानवीय यातनाएँ देकर, प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोटकर पूरे देश को ही ज़ेल में तब्दील कर दिया था। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय लोकतंत्र न केवल सुरक्षित है, अपितु विश्व मंच पर अपने समृद्ध, शक्तिशाली और स्वाभिमानी होने की हुँकार भर रहा है। भाजपा कार्यकर्ता आपातकाल के बारे में बताकर कांग्रेस की काली करतूत की जानकारी दें। अग्रवाल ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक सशक्त नेतृत्व मिला है। कोरोना संकट के मुक़ाबले में केंद्र सरकार के दूरदर्शी निर्णयों व रणनीतिक उपायों के साथ ही ग़रीब कल्याण योजना और आर्थिक पैकेज घोषित करना प्रधानमंत्री मोदी के संवेदनक्षम नेतृत्व का परिचायक है। धारा 370 और अनुच्छेद 35-ए को समाप्त कर कश्मीर को देश की जनता के लिए खोल दिया। केंद्र सरकार तीन तलाक़ को समाप्त कर मुस्लिम बहनों के जीवन में नई रोशनी लाई है। नागरिकता संशोधन क़ानून बनाकर देश के शरणार्थीयों को देश की नागरिकता देकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने की व्यवस्था की। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर केंद्र सरकार ने सदियों के बलिदानी संतों-कार्यकर्ताओं की शहादत का सम्मान किया है।
सभा की शुरुआत ज़िला भाजपा अध्यक्ष कृष्णकांत पवार के संबोधन से हुई। कांकेर संसदीय क्षेत्र के सांसद मोहन मंडावी ने भी अपने विचार रखे। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने सभा की कार्यवाही संचालित करते हुए आगामी 28 जून को आहूत भाजपा की प्रदेशस्तरीय वर्चुअल रैली के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उसे व्यापक सफलता दिलाने के लिए जुट जाने की अपील कार्यकर्ताओं से की। इस रैली को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संबोधित करेंगे। इस मौके पर विधायक, क्षेत्र के पूर्व सांसद व पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, प्रीतम साहू, मदन साहू, निरंजन सिन्हा, वीरेंद्र साहू, लाल सिंह टेकाम, नंदकिसोर शर्मा, यज्ञदत्त शर्मा, संध्या भारद्वाज, प्रतिभा चौधरी सहित काफी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता वर्चुअली जुड़े थे।
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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि कांग्रेस के शासन में पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ को सिवाय छलावे, धोखाधड़ी, दग़ाबाजी और वादाख़िलाफ़ी के और क्या मिला? जो सरकार हर किसान का हर कर्ज़ माफ़ करने, दो साल का बकाया बोनस देने और पच्चीस सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा करके सत्ता में आई है, उसने न तो कर्ज़माफी का वादा निभाया, न दोसाल के बकाया बोनस भुगतान की फ़िक्र की और अब दिसंबर में खरीदे धान का पूरा भुगतान अभी जून तक भी नहीं कर पाई है। यह भुगतान भी चार किश्तों में सरकार कब तक करेगी, कुछ तय नहीं है। अग्रवाल बुधवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति परिसर में भाजपा द्वारा आहूत जिला जनसंवाद कार्यक्रम के तहत बालोद ग्रामीण ज़िला की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सभा को संबोधित कर रहे थे। विदित रहे, प्रदेश भाजपा द्वारा केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने पर जिला स्तर पर इन सभाओं का आयोजन रखा जा रहा है और यह सभा इस क्रम में गुरुवार की दूसरी सभा थी। भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अग्रवाल ने बेरोज़गारी भत्ता देने और महिला स्व-सहायता समूहों के कर्ज़ माफ़ करने के वादे को भुला चुकी प्रदेश सरकार किसानों को उनके धान के मूल्य का एकमुश्त भुगतान नहीं करके किसानों के पैसों पर डाका डाल रही है। प्रदेश का किसान इस सरकार को कभी माफ़ नहीं करेगा। अपने किसी भी वादे पर यह सरकार खरी नहीं उतरी है। अग्रवाल ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे लूटमार वाली सरकार बताया और कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को प्रदेश की जनता नहीं, केवल अपनी ही चिंता है। आज प्रदेश में हर कोई परेशान है। शराबबंदी के बजाय प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन अवधि में भी शराब की नदियाँ बहाई और प्रदेश के जन-स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का काम किया। अग्रवाल ने अब सरकारी घास ज़मीन बेचने के प्रदेश सरकार के फैसले को उसके दीवालिया होने का परिचायक बताया और कहा कि प्रदेश में विकास के सारे काम ठप पड़े हैं और कांग्रेस के लोग चाहे जिस तरह पैसा कमाने के इकलौते एजेंडे में लगे हुए हैं। अग्रवाल ने कहा कि नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी के बाद अब मुख्यमंत्री 'रोका-छेका' की बात कहकर प्रदेश को भरमाने में लग गए हैं, लेकिन गौठानों में चारे का इंतज़ाम उनकी सरकार नहीं कर रही है। कोरोना के मोर्चे पर प्रदेश सरकार को पूरी तरह विफल बताते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार से विभिन्न मदों में आई करोड़ों की राशि प्रदेश सरकार खर्च तक नहीं कर रही है और उस राशि का ठेका-टेंडर में इस्तेमाल करने की नीयत रख रही है। प्रदेश सरकार आदमियों की सुरक्षा तो कर ही नहीं पा रही है, अब प्रदेश के ज़ंगल भी शिकारगाह बन गए हैं। हाल ही प्रदेश में छह हाथियों की हुई मौत को प्रदेश सरकार के लिए शर्मनाक बताते हुए अग्रवाल ने भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के पाँच वर्षों और दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की उपलब्धियों के साथ-साथ प्रदेश सरकार की नाकामियों से भी प्रदेश की जनता को अवगत कराएँ। भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए पिछले छह वर्षों में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक, साहसिक व क्रांतिकारी निर्णयों से देश की दशा सुधारकर एक नई दिशा देने का काम किया है। आपातकाल की बरसी को काला दिन बताते हुए अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस ने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में लोकतंत्र की हत्या कर दी थी और लाखों निर्दोष लोगों के न केवल ज़ेलों में बंद किया, अपितु नागरिक अधिकारों का हनन कर, अमानवीय यातनाएँ देकर, प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोटकर पूरे देश को ही ज़ेल में तब्दील कर दिया था। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय लोकतंत्र न केवल सुरक्षित है, अपितु विश्व मंच पर अपने समृद्ध, शक्तिशाली और स्वाभिमानी होने की हुँकार भर रहा है। भाजपा कार्यकर्ता आपातकाल के बारे में बताकर कांग्रेस की काली करतूत की जानकारी दें। अग्रवाल ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक सशक्त नेतृत्व मिला है। कोरोना संकट के मुक़ाबले में केंद्र सरकार के दूरदर्शी निर्णयों व रणनीतिक उपायों के साथ ही ग़रीब कल्याण योजना और आर्थिक पैकेज घोषित करना प्रधानमंत्री मोदी के संवेदनक्षम नेतृत्व का परिचायक है। धारा तीन सौ सत्तर और अनुच्छेद पैंतीस-ए को समाप्त कर कश्मीर को देश की जनता के लिए खोल दिया। केंद्र सरकार तीन तलाक़ को समाप्त कर मुस्लिम बहनों के जीवन में नई रोशनी लाई है। नागरिकता संशोधन क़ानून बनाकर देश के शरणार्थीयों को देश की नागरिकता देकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने की व्यवस्था की। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर केंद्र सरकार ने सदियों के बलिदानी संतों-कार्यकर्ताओं की शहादत का सम्मान किया है। सभा की शुरुआत ज़िला भाजपा अध्यक्ष कृष्णकांत पवार के संबोधन से हुई। कांकेर संसदीय क्षेत्र के सांसद मोहन मंडावी ने भी अपने विचार रखे। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने सभा की कार्यवाही संचालित करते हुए आगामी अट्ठाईस जून को आहूत भाजपा की प्रदेशस्तरीय वर्चुअल रैली के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उसे व्यापक सफलता दिलाने के लिए जुट जाने की अपील कार्यकर्ताओं से की। इस रैली को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संबोधित करेंगे। इस मौके पर विधायक, क्षेत्र के पूर्व सांसद व पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, प्रीतम साहू, मदन साहू, निरंजन सिन्हा, वीरेंद्र साहू, लाल सिंह टेकाम, नंदकिसोर शर्मा, यज्ञदत्त शर्मा, संध्या भारद्वाज, प्रतिभा चौधरी सहित काफी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता वर्चुअली जुड़े थे।
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जार्ज बर्डउड की राय में सूर्य के रथ के बाहर धुरीवाले पहिये की चार धुरियों को लेकर ही स्वस्तिक प्रतीक बना है। थ्रेसिया में मेसेम्ब्रिया नामक एक नगर था । इस शब्द का अर्थ ही है "दोपहर का सूर्य" । यहाँ के जो प्राचीन सिक्के मिले हैं, उन पर स्वस्तिक बना हुआ है । दसवीं सदी में अबू-सफ़ैन का एक गिर्जा था जिसमें बीच में एक आटे की चक्की है । इसमें एक लम्बा खम्भ ऊपर निकला हुआ है जिस पर ईसाइयों की "त्रिमूर्ति का प्रतीक है और बगल में स्वस्तिक बना हुआ है । वह सम्भवतः इस बात को व्यक्त करता है कि "इस संसार में प्रत्येक सजीव वस्तु गतिशील है और सबकी सत्ता ईश्वर में निहित है ।" यह बड़े मार्के का प्रतीक है । ३
पश्चिमी हों या पूर्वी, जिन देशों में ईश्वर के प्रति विश्वास उत्पन्न हुआ और बढ़ता गया, वहाँ पर ईश्वरीय सत्ता तथा विभृति का सबसे निकटतम प्रतीक सूर्य माना गया और सूर्य की पूजा शुरू हुई । किन्तु इस सीधी-सादी बात को न मानकर जो लोग हर एक चीज़ को विज्ञान तथा शास्त्र के तराजू पर तौलना चाहते हैं, उनके विषय में आज से १७०० वर्ष पूर्व यूनानी विद्वान् सेनेका ने लिखा था कि "दार्शनिक पोसोडोनियस तो करीब-करीब यहाँ तक कह गये कि जूता मरम्मत करने का पेशा भी दार्शनिकों की ईजाद है । " बात भी कुछ ऐसी है । सभी बातें तर्क से सिद्ध नहीं की जा सकतीं । ईश्वर भी ऐसा ही कठोर सत्य है । प्रसिद्ध विज्ञानाचार्य तथा पश्चिमी देशों को "गुरुत्वाकर्षण - शक्ति" - पृथ्वी की आकर्षण शक्ति की जानकारी कराने वाले आइज़क न्यूटन ने लिखा था कि संसार में सभी वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान को हट सकती हैं, पर परम पिता ही एक मात्र अचल वस्तु है । ऐसा कोई स्थान नहीं जो उससे "खाली " हो जाय या "भर" जाय । वह सबमें प्याप्त है और प्रकृति की अनन्त आवश्यकता के अनुसार हर एक पदार्थ में जितना होना चाहिए, वर्तमान है । "५
साधारण जीवन में भी हम सर्व गुण सम्पन्न तथा प्रतिभाशाली व्यक्ति को "सूर्य" के समान तेजस्वी कहते हैं, यानी सूर्य तेजस्विता का प्रतीक हुआ । ऐसे प्रतीक में वैज्ञानिक लोग भी विश्वास करते हैं । रक्त संचार के सिद्धान्त को हमारे शरीर के भीतर
१. वही, पृष्ठ XVI.
२ ईश्वर, मरियम, ईसा (पिता-माता-पुत्र) ।
३. वही पुस्तक, पृष्ठ XVII.
४. Seneca जन्म ईसवी सन् २, मृत्यु ६५ । quoted by Dr. S. F. Mason - "A History of the Sciences"- Pub. Kegan Paul-250, Londonpage 252.
५. वही, पृष्ठ १६३ । Isaac Newton जन्म सन् १६२४, मृत्यु १७२७।
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जार्ज बर्डउड की राय में सूर्य के रथ के बाहर धुरीवाले पहिये की चार धुरियों को लेकर ही स्वस्तिक प्रतीक बना है। थ्रेसिया में मेसेम्ब्रिया नामक एक नगर था । इस शब्द का अर्थ ही है "दोपहर का सूर्य" । यहाँ के जो प्राचीन सिक्के मिले हैं, उन पर स्वस्तिक बना हुआ है । दसवीं सदी में अबू-सफ़ैन का एक गिर्जा था जिसमें बीच में एक आटे की चक्की है । इसमें एक लम्बा खम्भ ऊपर निकला हुआ है जिस पर ईसाइयों की "त्रिमूर्ति का प्रतीक है और बगल में स्वस्तिक बना हुआ है । वह सम्भवतः इस बात को व्यक्त करता है कि "इस संसार में प्रत्येक सजीव वस्तु गतिशील है और सबकी सत्ता ईश्वर में निहित है ।" यह बड़े मार्के का प्रतीक है । तीन पश्चिमी हों या पूर्वी, जिन देशों में ईश्वर के प्रति विश्वास उत्पन्न हुआ और बढ़ता गया, वहाँ पर ईश्वरीय सत्ता तथा विभृति का सबसे निकटतम प्रतीक सूर्य माना गया और सूर्य की पूजा शुरू हुई । किन्तु इस सीधी-सादी बात को न मानकर जो लोग हर एक चीज़ को विज्ञान तथा शास्त्र के तराजू पर तौलना चाहते हैं, उनके विषय में आज से एक हज़ार सात सौ वर्ष पूर्व यूनानी विद्वान् सेनेका ने लिखा था कि "दार्शनिक पोसोडोनियस तो करीब-करीब यहाँ तक कह गये कि जूता मरम्मत करने का पेशा भी दार्शनिकों की ईजाद है । " बात भी कुछ ऐसी है । सभी बातें तर्क से सिद्ध नहीं की जा सकतीं । ईश्वर भी ऐसा ही कठोर सत्य है । प्रसिद्ध विज्ञानाचार्य तथा पश्चिमी देशों को "गुरुत्वाकर्षण - शक्ति" - पृथ्वी की आकर्षण शक्ति की जानकारी कराने वाले आइज़क न्यूटन ने लिखा था कि संसार में सभी वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान को हट सकती हैं, पर परम पिता ही एक मात्र अचल वस्तु है । ऐसा कोई स्थान नहीं जो उससे "खाली " हो जाय या "भर" जाय । वह सबमें प्याप्त है और प्रकृति की अनन्त आवश्यकता के अनुसार हर एक पदार्थ में जितना होना चाहिए, वर्तमान है । "पाँच साधारण जीवन में भी हम सर्व गुण सम्पन्न तथा प्रतिभाशाली व्यक्ति को "सूर्य" के समान तेजस्वी कहते हैं, यानी सूर्य तेजस्विता का प्रतीक हुआ । ऐसे प्रतीक में वैज्ञानिक लोग भी विश्वास करते हैं । रक्त संचार के सिद्धान्त को हमारे शरीर के भीतर एक. वही, पृष्ठ XVI. दो ईश्वर, मरियम, ईसा । तीन. वही पुस्तक, पृष्ठ XVII. चार. Seneca जन्म ईसवी सन् दो, मृत्यु पैंसठ । quoted by Dr. S. F. Mason - "A History of the Sciences"- Pub. Kegan Paul-दो सौ पचास, Londonpage दो सौ बावन. पाँच. वही, पृष्ठ एक सौ तिरेसठ । Isaac Newton जन्म सन् एक हज़ार छः सौ चौबीस, मृत्यु एक हज़ार सात सौ सत्ताईस।
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चर्चा में क्यों?
11 अक्टूबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 'श्री महाकाल लोक'का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया।
- प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रिमोट का बटन दबाते ही रंगीन कलावे (रक्षा सूत्र) निर्मित शिवलिंग के रूप में भगवान महाकाल मानों स्वयं प्रकट हो गए। साथ ही पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
- प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्री महाकाल लोक में निर्मित भित्ति-चित्रों, स्तंभों एवं प्रतिमाओं में वर्णित शिव-लीलाओं की जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी उपस्थित थे।
- प्रधानमंत्री ने श्री महाकाल लोक में भगवान श्री शंकर की ध्यानस्थ प्रतिमा, सप्तर्षि मंडल आदि का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने ई-कार्ट में बैठ कर 900 मीटर लंबे 'श्री महाकाल लोक'परिसर में निर्मित नयनाभिराम धार्मिक-आध्यात्मिक और शिव लीला पर आधारित कला रूपों का अवलोकन किया।
- भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 700 कलाकारों ने अपने नृत्य, गीत और अभिनय से भगवान शिव की लीलाओं की प्रस्तुति दी। भारत सहित दुनिया के 40 देश इस आध्यात्मिक, अलौकिक, अद्वितीय एवं अद्भुत अनुभूति के साक्षी बने।
- राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में सिंहस्थ कुंभ-2016 में उज्जैन में विश्वस्तरीय अधो-संरचना का विकास किया गया था। मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में 'बनारस कॉरीडोर'की तर्ज पर 'श्री महाकाल लोक'बनाया जा रहा है। 'श्री महाकाल लोक क्षेत्र विकास परियोजना की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपए है।
- योजना के प्रथम चरण में भगवान श्री महाकालेश्वर के आँगन में छोटे और बड़े रूद्र सागर, हरसिद्धि मंदिर, चारधाम मंदिर, विक्रम टीला आदि का विकास किया गया है।
- लोकार्पित प्रथम चरण में 350 करोड़ रुपए से महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिड-वे जोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्प्लेक्स, गणेश स्कूल कॉम्प्लेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है।
- महाकाल कॉरिडोर के प्रथम घटक में पैदल चलने के लिये उपयुक्त 200 मीटर लंबा मार्ग बनाया गया है। इसमें 25 फीट ऊँची एवं 500 मीटर लंबी म्युरल वाल बनाई गई है। साथ ही, 108 शिव स्तंभ, शिव की मुद्राओं सहित विविध प्रतिमाएँ निर्मित हो चुकी हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रही हैं।
- लोटस पोंड, ओपन एरिया थिएटर तथा लेक फ्रंट एरिया, ई-रिक्शा एवं आकस्मिक वाहनों के लिये मार्ग भी बनाए गए हैं। बड़े रुद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा गया है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि यह पानी स्वच्छ भी रहे।
- श्री महाकाल लोक के दूसरे चरण में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जाएगा, जिसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनः उपयोग, कुंभ संग्रहालय के रूप में पुराने अवशेषों का समावेश कर महाकाल मंदिर परिसर से एकीकरण किया जाएगा। दूसरे चरण के कार्य 2023-24 में पूर्ण होंगे।
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चर्चा में क्यों? ग्यारह अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 'श्री महाकाल लोक'का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। - प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रिमोट का बटन दबाते ही रंगीन कलावे निर्मित शिवलिंग के रूप में भगवान महाकाल मानों स्वयं प्रकट हो गए। साथ ही पूरा वातावरण शिवमय हो गया। - प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्री महाकाल लोक में निर्मित भित्ति-चित्रों, स्तंभों एवं प्रतिमाओं में वर्णित शिव-लीलाओं की जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी उपस्थित थे। - प्रधानमंत्री ने श्री महाकाल लोक में भगवान श्री शंकर की ध्यानस्थ प्रतिमा, सप्तर्षि मंडल आदि का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने ई-कार्ट में बैठ कर नौ सौ मीटर लंबे 'श्री महाकाल लोक'परिसर में निर्मित नयनाभिराम धार्मिक-आध्यात्मिक और शिव लीला पर आधारित कला रूपों का अवलोकन किया। - भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग सात सौ कलाकारों ने अपने नृत्य, गीत और अभिनय से भगवान शिव की लीलाओं की प्रस्तुति दी। भारत सहित दुनिया के चालीस देश इस आध्यात्मिक, अलौकिक, अद्वितीय एवं अद्भुत अनुभूति के साक्षी बने। - राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में सिंहस्थ कुंभ-दो हज़ार सोलह में उज्जैन में विश्वस्तरीय अधो-संरचना का विकास किया गया था। मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में 'बनारस कॉरीडोर'की तर्ज पर 'श्री महाकाल लोक'बनाया जा रहा है। 'श्री महाकाल लोक क्षेत्र विकास परियोजना की अनुमानित लागत आठ सौ करोड़ रुपए है। - योजना के प्रथम चरण में भगवान श्री महाकालेश्वर के आँगन में छोटे और बड़े रूद्र सागर, हरसिद्धि मंदिर, चारधाम मंदिर, विक्रम टीला आदि का विकास किया गया है। - लोकार्पित प्रथम चरण में तीन सौ पचास करोड़ रुपए से महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिड-वे जोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्प्लेक्स, गणेश स्कूल कॉम्प्लेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। - महाकाल कॉरिडोर के प्रथम घटक में पैदल चलने के लिये उपयुक्त दो सौ मीटर लंबा मार्ग बनाया गया है। इसमें पच्चीस फीट ऊँची एवं पाँच सौ मीटर लंबी म्युरल वाल बनाई गई है। साथ ही, एक सौ आठ शिव स्तंभ, शिव की मुद्राओं सहित विविध प्रतिमाएँ निर्मित हो चुकी हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रही हैं। - लोटस पोंड, ओपन एरिया थिएटर तथा लेक फ्रंट एरिया, ई-रिक्शा एवं आकस्मिक वाहनों के लिये मार्ग भी बनाए गए हैं। बड़े रुद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा गया है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि यह पानी स्वच्छ भी रहे। - श्री महाकाल लोक के दूसरे चरण में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जाएगा, जिसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनः उपयोग, कुंभ संग्रहालय के रूप में पुराने अवशेषों का समावेश कर महाकाल मंदिर परिसर से एकीकरण किया जाएगा। दूसरे चरण के कार्य दो हज़ार तेईस-चौबीस में पूर्ण होंगे।
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1 . हाई कोर्ट ऑफ पटना में कई पदों पर निकली भर्तियां।
पद का नाम : कंप्यूटर ऑपरेटर कुम डिपिस्ट।
योग्यता : ग्रेजुएट्स।
पदों की संख्या : 30 पद।
नौकरी करने का स्थान : पटना।
चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा।
2 . सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीसाइकाइट्री में निकली भर्तियां।
पद का नाम : पुस्तकालय और सूचना अधिकारी, प्रोफेसर, अन्य पद।
योग्यता : पदों के अनुसार।
पदों की संख्या : 4 पद।
नौकरी करने का स्थान : रांची।
3 . इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस धनबाद में निकली भर्तियां।
योग्यता : पदों के अनुसार।
पदों की संख्या : 24 पद।
चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा।
ऐसे करें अप्लाई : अगर आप पटना, रांची और धनबाद में नौकरी करना चाहते हैं तो आप सबसे पहले इन संस्थानों के आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल पर जाए और प्रकाशित नोटिफिकेशन को पढ़ें। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
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एक . हाई कोर्ट ऑफ पटना में कई पदों पर निकली भर्तियां। पद का नाम : कंप्यूटर ऑपरेटर कुम डिपिस्ट। योग्यता : ग्रेजुएट्स। पदों की संख्या : तीस पद। नौकरी करने का स्थान : पटना। चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा। दो . सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पीसाइकाइट्री में निकली भर्तियां। पद का नाम : पुस्तकालय और सूचना अधिकारी, प्रोफेसर, अन्य पद। योग्यता : पदों के अनुसार। पदों की संख्या : चार पद। नौकरी करने का स्थान : रांची। तीन . इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस धनबाद में निकली भर्तियां। योग्यता : पदों के अनुसार। पदों की संख्या : चौबीस पद। चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा। ऐसे करें अप्लाई : अगर आप पटना, रांची और धनबाद में नौकरी करना चाहते हैं तो आप सबसे पहले इन संस्थानों के आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल पर जाए और प्रकाशित नोटिफिकेशन को पढ़ें। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
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भरावन। अतरौली थाना क्षेत्र लौलीखेड़ा में रविवार सुबह एक घर की कच्ची दीवार ढहने से मलबे में दबकर बच्ची की मौत हो गई। वहीं पिता गंभीर रूप से घायल हो गया। पड़ोसियों ने मलबा हटाकर शव को बाहर निकाला। घायल का परिजन ने सीएचसी में भर्ती कराया।
गांव लौलीखेड़ा निवासी राजेंद्र पाल खेती करता है। उसका कच्चा मकान बना है। राजेंद्र के मुताबिक रविवार सुबह उसकी पत्नी किरन रसोईं में खाना बना रही थी। दीवार के पास बेटी पूजा (12) के साथ वह बैठा था। इस दौरान कच्ची दीवार दोनों के ऊपर ढह गई। दोनों मलबे में दब गए।
पत्नी के चीखने की आवाज सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। जब तक पूजा की मौत हो चुकी थी। राजेंद्र को परिजनों ने एंबुलेंस से सीएचसी में भर्ती कराया।
परिजनों ने बताया कि पूजा कक्षा चार की छात्रा थी। वह पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर पर थी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रभारी निरीक्षक दीपक शुक्ला ने बताया कि राजस्व विभाग को सूचना दी गई है।
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भरावन। अतरौली थाना क्षेत्र लौलीखेड़ा में रविवार सुबह एक घर की कच्ची दीवार ढहने से मलबे में दबकर बच्ची की मौत हो गई। वहीं पिता गंभीर रूप से घायल हो गया। पड़ोसियों ने मलबा हटाकर शव को बाहर निकाला। घायल का परिजन ने सीएचसी में भर्ती कराया। गांव लौलीखेड़ा निवासी राजेंद्र पाल खेती करता है। उसका कच्चा मकान बना है। राजेंद्र के मुताबिक रविवार सुबह उसकी पत्नी किरन रसोईं में खाना बना रही थी। दीवार के पास बेटी पूजा के साथ वह बैठा था। इस दौरान कच्ची दीवार दोनों के ऊपर ढह गई। दोनों मलबे में दब गए। पत्नी के चीखने की आवाज सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। जब तक पूजा की मौत हो चुकी थी। राजेंद्र को परिजनों ने एंबुलेंस से सीएचसी में भर्ती कराया। परिजनों ने बताया कि पूजा कक्षा चार की छात्रा थी। वह पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर पर थी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रभारी निरीक्षक दीपक शुक्ला ने बताया कि राजस्व विभाग को सूचना दी गई है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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मुंबई (पीटरीआई)। दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म 'शर्माजी नमकीन' के निर्माताओं ने शनिवार को अभिनेता की बर्थ एनिवर्सरी पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी कर दिया। ऋषि का 67 वर्ष की आयु में 30 अप्रैल 2020 को दक्षिण मुंबई के एच एन रिलायंस अस्पताल में निधन हो गया था। "शर्माजी नमकीन", कपूर की आखिरी फिल्म है, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा फिल्म निर्माता हनी त्रेहान और अभिषेक चौबे के साथ उनके बैनर मैकगफिन पिक्चर्स के तहत इसका निर्माण किया है।
फरहान अख्तर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर शेयर किया, जिसमें एक चश्मा पहने कपूर, गले में स्वेटर और मफलर पहने, लापरवाही से चलते हुए और अपनी बाहों में एक ब्रीफकेस पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ में दिए गए बयान में, टीम ने कहा, "हमें एक बहुत ही खास फिल्म- शर्माजी नमकीन का पोस्टर पेश करते हुए गर्व हो रहा है, जिसमें हिंदी फिल्म उद्योग में सबसे प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक है, जिनके अद्वितीय काम और शानदार करियर को हम हमेशा संजो कर रखेंगे, मि. ऋषि कपूर। " उन्होंने कहा, "उनके प्यार, सम्मान और याद के प्रतीक के रूप में और उनके लाखों प्रशंसकों को उपहार के रूप में, यहां उनकी अंतिम फिल्म का पहला लुक है। "
नवोदित हितेश भाटिया द्वारा निर्देशित, यह फिल्म एक 60 वर्षीय व्यक्ति की हल्की-फुल्की जिंदगी की कहानी है। इसमें जूही चावला भी हैं, जिन्होंने 1990 के दशक में कपूर के साथ "बोल राधा बोल", "ईना मीना डीका" और "दारार" जैसी फिल्मों में काम किया था। ऋषि कपूर के निधन के बाद, निर्माताओं ने फिल्म के शेष हिस्सों को पूरा करने के लिए अभिनेता परेश रावल को उनकी जगह लिया। शनिवार को, उन्होंने उसी अवतार में फिल्म से रावल के लुक को भी साझा किया, फिल्म में कदम रखने और फिल्म को पूरा करने के लिए अभिनेता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "श्री परेश रावल का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने ऋषि-जी द्वारा निभाए गए उसी चरित्र को चित्रित करने के संवेदनशील कदम को उठाने के लिए सहमत होकर फिल्म को पूरा किया। "
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मुंबई । दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म 'शर्माजी नमकीन' के निर्माताओं ने शनिवार को अभिनेता की बर्थ एनिवर्सरी पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी कर दिया। ऋषि का सरसठ वर्ष की आयु में तीस अप्रैल दो हज़ार बीस को दक्षिण मुंबई के एच एन रिलायंस अस्पताल में निधन हो गया था। "शर्माजी नमकीन", कपूर की आखिरी फिल्म है, फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा फिल्म निर्माता हनी त्रेहान और अभिषेक चौबे के साथ उनके बैनर मैकगफिन पिक्चर्स के तहत इसका निर्माण किया है। फरहान अख्तर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर शेयर किया, जिसमें एक चश्मा पहने कपूर, गले में स्वेटर और मफलर पहने, लापरवाही से चलते हुए और अपनी बाहों में एक ब्रीफकेस पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ में दिए गए बयान में, टीम ने कहा, "हमें एक बहुत ही खास फिल्म- शर्माजी नमकीन का पोस्टर पेश करते हुए गर्व हो रहा है, जिसमें हिंदी फिल्म उद्योग में सबसे प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक है, जिनके अद्वितीय काम और शानदार करियर को हम हमेशा संजो कर रखेंगे, मि. ऋषि कपूर। " उन्होंने कहा, "उनके प्यार, सम्मान और याद के प्रतीक के रूप में और उनके लाखों प्रशंसकों को उपहार के रूप में, यहां उनकी अंतिम फिल्म का पहला लुक है। " नवोदित हितेश भाटिया द्वारा निर्देशित, यह फिल्म एक साठ वर्षीय व्यक्ति की हल्की-फुल्की जिंदगी की कहानी है। इसमें जूही चावला भी हैं, जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में कपूर के साथ "बोल राधा बोल", "ईना मीना डीका" और "दारार" जैसी फिल्मों में काम किया था। ऋषि कपूर के निधन के बाद, निर्माताओं ने फिल्म के शेष हिस्सों को पूरा करने के लिए अभिनेता परेश रावल को उनकी जगह लिया। शनिवार को, उन्होंने उसी अवतार में फिल्म से रावल के लुक को भी साझा किया, फिल्म में कदम रखने और फिल्म को पूरा करने के लिए अभिनेता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "श्री परेश रावल का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने ऋषि-जी द्वारा निभाए गए उसी चरित्र को चित्रित करने के संवेदनशील कदम को उठाने के लिए सहमत होकर फिल्म को पूरा किया। "
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फिरोजाबाद (उप्र), 13 जुलाई फिरोजाबाद के राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर मंगलवार सुबह इटावा की ओर से आ रही एक स्लीपर कोच बस ने मंदिर से लौट रहे मोटरसाइकिल सवार एक पुरूष, दो महिलाओं व एक बच्चे को कुचल दिया जिससे मौके पर ही तीनों वयस्कों की मौत हो गयी। बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे आगरा के अस्पताल भेजा गया है।
थाना प्रभारी शिकोहाबाद प्रमोद कुमार मलिक ने बताया कि थाना खैरगढ़ निवासी सनी (26) मोटरसाइकिल पर अपने साथ नीरज (25) एवं रेशू (24) तथा तीन साल के मयंक को लेकर बालाजी मंदिर शिकोहाबाद से लौट रहे थे।
उन्होंने बताया कि तेज गति से आ रही बस की चपेट में मोटरसाइकिल आने से सनी तथा दोनों महिलाओं नीरज एवं रेशू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे में नीरज का तीन वर्षीय बेटा मयंक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल से आगरा भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बस चालक बस लेकर फरार हो गया।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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फिरोजाबाद , तेरह जुलाई फिरोजाबाद के राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर मंगलवार सुबह इटावा की ओर से आ रही एक स्लीपर कोच बस ने मंदिर से लौट रहे मोटरसाइकिल सवार एक पुरूष, दो महिलाओं व एक बच्चे को कुचल दिया जिससे मौके पर ही तीनों वयस्कों की मौत हो गयी। बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे आगरा के अस्पताल भेजा गया है। थाना प्रभारी शिकोहाबाद प्रमोद कुमार मलिक ने बताया कि थाना खैरगढ़ निवासी सनी मोटरसाइकिल पर अपने साथ नीरज एवं रेशू तथा तीन साल के मयंक को लेकर बालाजी मंदिर शिकोहाबाद से लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि तेज गति से आ रही बस की चपेट में मोटरसाइकिल आने से सनी तथा दोनों महिलाओं नीरज एवं रेशू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे में नीरज का तीन वर्षीय बेटा मयंक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल से आगरा भेजा गया है। उन्होंने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बस चालक बस लेकर फरार हो गया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पटनाः अवैध संबंध के कारण पटना में एक भांजे ने अपने सगे मामा का क़त्ल कर दिया। मामी से प्यार होने के पश्चात् भांजे ने मामा की गला रेतकर क़त्ल कर दिया। दरअसल भांजे को अपनी मामी से इस तरह प्यार हुआ कि उसने प्रेम के मार्ग में अड़चन बन रहे मामा का क़त्ल कर दिया। पटना सिटी के दीदारगंज थाना इलाके के फतेहपुर बगीचा से पिछले मंगलवार को गर्दन कटे शख्स का शव मिला था।
वही इस ब्लाइंड मर्डर केस की जब पुलिस ने तहकीकात की तो वो भी दंग रह गई। मृतक की पहचान फतुहा थाना इलाके के नोहटा गांव निवासी सूरज कुमार के तौर पर हुई है। सूरज कुमार रेलवे यार्ड में पोलदार का काम करता थे। उनकी बीवी का सगे भांजे के साथ अवैध रिश्ता था जिसका उन्होंने विरोध किया भांजे ने गला रेतकर क़त्ल कर दिया है। पत्नी के अवैध संबंध का विरोध करने पर ही गला रेतकर सूरज का क़त्ल कर दिया।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध संबंध का विरोध करने पर उसकी बीवी काजल कुमारी एवं भांजे आकाश कुमार को पसंद नहीं आया है दोनों ने मित्र के साथ मिलकर धारदार हथियार से उसका क़त्ल कर दिया था। फिर शव को फतेहपुर बगीचे में फेंक दिया। पुलिस ने मर्डर केस में उपयोग चाकू भी जब्त कर लिया है। पुलिस ने दोनों हत्या अपराधी को अरेस्ट कर लिया है। पुलिस के सामने मामा का क़त्ल करने वाले भांजे ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। फतुहा DSP राजेश कुमार मांझी ने कहा कि मृतक सूरज कुमार की बीवी काजल कुमारी का मृतक के भांजे आकाश कुमार के साथ अवैध रिश्ता था, तथा वह उससे विवाह करना चाहती थी। सूरज कुमार ने इस अवैध संबंध का विरोध किया तो दोनों ने मिलकर मार्ग से हटाने लिए उनका क़त्ल कर दिया।
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पटनाः अवैध संबंध के कारण पटना में एक भांजे ने अपने सगे मामा का क़त्ल कर दिया। मामी से प्यार होने के पश्चात् भांजे ने मामा की गला रेतकर क़त्ल कर दिया। दरअसल भांजे को अपनी मामी से इस तरह प्यार हुआ कि उसने प्रेम के मार्ग में अड़चन बन रहे मामा का क़त्ल कर दिया। पटना सिटी के दीदारगंज थाना इलाके के फतेहपुर बगीचा से पिछले मंगलवार को गर्दन कटे शख्स का शव मिला था। वही इस ब्लाइंड मर्डर केस की जब पुलिस ने तहकीकात की तो वो भी दंग रह गई। मृतक की पहचान फतुहा थाना इलाके के नोहटा गांव निवासी सूरज कुमार के तौर पर हुई है। सूरज कुमार रेलवे यार्ड में पोलदार का काम करता थे। उनकी बीवी का सगे भांजे के साथ अवैध रिश्ता था जिसका उन्होंने विरोध किया भांजे ने गला रेतकर क़त्ल कर दिया है। पत्नी के अवैध संबंध का विरोध करने पर ही गला रेतकर सूरज का क़त्ल कर दिया। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध संबंध का विरोध करने पर उसकी बीवी काजल कुमारी एवं भांजे आकाश कुमार को पसंद नहीं आया है दोनों ने मित्र के साथ मिलकर धारदार हथियार से उसका क़त्ल कर दिया था। फिर शव को फतेहपुर बगीचे में फेंक दिया। पुलिस ने मर्डर केस में उपयोग चाकू भी जब्त कर लिया है। पुलिस ने दोनों हत्या अपराधी को अरेस्ट कर लिया है। पुलिस के सामने मामा का क़त्ल करने वाले भांजे ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। फतुहा DSP राजेश कुमार मांझी ने कहा कि मृतक सूरज कुमार की बीवी काजल कुमारी का मृतक के भांजे आकाश कुमार के साथ अवैध रिश्ता था, तथा वह उससे विवाह करना चाहती थी। सूरज कुमार ने इस अवैध संबंध का विरोध किया तो दोनों ने मिलकर मार्ग से हटाने लिए उनका क़त्ल कर दिया।
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एक रात नैनसुख पूरी रात चमेली बाई का मुजरा देखता रहा।
सुबह होने पर चमेली बाई बोली-हमने कल रातभर आपको खुश किया, अब आप हमको खुश कीजिए।
नैनसुखः- तो चल यहां बैठ जा, अब मैं नाचता हूं और तू देख।
दो लड़कियां बस में सीट के लिए झगड़ रही थीं। झगड़ा रुके नहीं रुक रहा था।
झगड़ा बढ़ता देख ड्राइवर ने दिमाग लगाया। बोला, आप दोनों में से जो उम्र में ज्यादा हो, बैठ जाए।
झगड़ा रोक कर दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और सीट खाली रह गई।
और आवाज बाद में सुनाई देती है।
सोनूः- सर क्योंकि हमारी आंखें आगे होती हैं और कान पीछे!
सोनूः- यार, इंगलिश में झोपड़ी को क्या कहते हैं?
सोनूः- अब इंगलिश नहीं आती तो साफ- साफ बोल ना. . हट हट क्या बोल रहा है।
एक छोटा बच्चा लगातार चॉकलेट खा रहा था। एक व्यक्ति ने कहा, बेटे इतनी चॉकलेट खाना अच्छी बात नहीं होती. .
बच्चे ने मुस्कुराते हुए कहाः- अंकल क्या आप जानते हैं, मेरे दादाजी जब गुजरे, उनकी उम्र 105 साल थी. .
व्यक्तिः- क्या वे भी ऐसे ही चॉकलेट खाते थे?
बच्चे ने तपाक से कहाः- नहीं, वह अपने काम से काम रखते थे।
टीचरः- सोचो, तुम डायनासोर की दुनिया में हो और एक डायनासोर तुम्हें खाने वाला है. . तो तुम क्या करोगे!
छात्रः- सोचना तुरंत बंद कर दूंगा।
प्रेमीः- तुम मुझसे शादी कर लो, नहीं तो मैं तुम्हारे प्यार में मर जाऊंगा, मिट जाऊंगा, पागल हो जाऊंगा।
प्रेमिकाः- हम्म. . देख ले अब जैसा तुझे ठीक लगे।
चिंटू तैराकी सीख रहा था। गलती से वह ज्यादा गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा।
तभी उसके हाथ में मछली आ गई।
उसने मछली को यह कहते हुए पानी से बाहर फेंक दिया कि जा तू अपनी जिंदगी जी ले। मुझे तो डूबना ही पड़ेगा।
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एक रात नैनसुख पूरी रात चमेली बाई का मुजरा देखता रहा। सुबह होने पर चमेली बाई बोली-हमने कल रातभर आपको खुश किया, अब आप हमको खुश कीजिए। नैनसुखः- तो चल यहां बैठ जा, अब मैं नाचता हूं और तू देख। दो लड़कियां बस में सीट के लिए झगड़ रही थीं। झगड़ा रुके नहीं रुक रहा था। झगड़ा बढ़ता देख ड्राइवर ने दिमाग लगाया। बोला, आप दोनों में से जो उम्र में ज्यादा हो, बैठ जाए। झगड़ा रोक कर दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और सीट खाली रह गई। और आवाज बाद में सुनाई देती है। सोनूः- सर क्योंकि हमारी आंखें आगे होती हैं और कान पीछे! सोनूः- यार, इंगलिश में झोपड़ी को क्या कहते हैं? सोनूः- अब इंगलिश नहीं आती तो साफ- साफ बोल ना. . हट हट क्या बोल रहा है। एक छोटा बच्चा लगातार चॉकलेट खा रहा था। एक व्यक्ति ने कहा, बेटे इतनी चॉकलेट खाना अच्छी बात नहीं होती. . बच्चे ने मुस्कुराते हुए कहाः- अंकल क्या आप जानते हैं, मेरे दादाजी जब गुजरे, उनकी उम्र एक सौ पाँच साल थी. . व्यक्तिः- क्या वे भी ऐसे ही चॉकलेट खाते थे? बच्चे ने तपाक से कहाः- नहीं, वह अपने काम से काम रखते थे। टीचरः- सोचो, तुम डायनासोर की दुनिया में हो और एक डायनासोर तुम्हें खाने वाला है. . तो तुम क्या करोगे! छात्रः- सोचना तुरंत बंद कर दूंगा। प्रेमीः- तुम मुझसे शादी कर लो, नहीं तो मैं तुम्हारे प्यार में मर जाऊंगा, मिट जाऊंगा, पागल हो जाऊंगा। प्रेमिकाः- हम्म. . देख ले अब जैसा तुझे ठीक लगे। चिंटू तैराकी सीख रहा था। गलती से वह ज्यादा गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। तभी उसके हाथ में मछली आ गई। उसने मछली को यह कहते हुए पानी से बाहर फेंक दिया कि जा तू अपनी जिंदगी जी ले। मुझे तो डूबना ही पड़ेगा।
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बिग बॉस 11 के फिनाले में ढिंचैक पूजा ने अपने बिग बॉस के मंच पर जमकर धमाल मचाया. उनका गाना सुनने के बाद अक्षय कुमार ने गाना सुनने के बाद अक्षय मजाकिया अंदाज में पूजा की तारीफ़ की.
अक्षय ने पूछा- यहां कौन है जिसने पूजा के गाने सेल्फी. . लो नहीं सुना है. अक्षय ने कहा, अगर ऐसा कोई है तो वो निकल कर यहां से चला जाए.
अक्षय पूजा का गाना सुनने वाले मौजूद लोगों को सलाह दी कि इसे घर जाकर दोहराएं नहीं. ये गाना आपके दिमाग में रह जाता है और सिर का दर्द कराता है.
इसके बाद सलमान खान पूछते हैं कि पूजा तुम्हारा वो गाना कौन सा है, जो हाल में मशहूर हुआ है? तो ढिंचैक पूजा कहती है.... 'आफरीन तो बेवफा है, आफरीन तो बेवफा है....
अक्षय कुमार और सलमान खान ने ढिंचैक पूजा को स्कूटर पर बिठाकर मशहूर गाना 'दिलों का शूटर है मेरा स्कूटर' गाते हुए पूरे स्टेज पर भी घुमाया.
ढिंचैक पूजा बिग बॉस शो में वाइल्ड एंट्री के साथ आईं थीं. हालांकि घर में रहकर वो कोई धमाल तो नहीं कर सकीें लेकिन घर के बाहर उनके गाने वायरल हैं.
अक्षय ने इस शो में पैडमैन के प्रमोशन के साथ सस्ता सैनेटरी पैड बनाकर दिखाया. पैडमैन सिनेमाघरों में 25 जनवरी 2018 को रिलीज हो रही है.
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बिग बॉस ग्यारह के फिनाले में ढिंचैक पूजा ने अपने बिग बॉस के मंच पर जमकर धमाल मचाया. उनका गाना सुनने के बाद अक्षय कुमार ने गाना सुनने के बाद अक्षय मजाकिया अंदाज में पूजा की तारीफ़ की. अक्षय ने पूछा- यहां कौन है जिसने पूजा के गाने सेल्फी. . लो नहीं सुना है. अक्षय ने कहा, अगर ऐसा कोई है तो वो निकल कर यहां से चला जाए. अक्षय पूजा का गाना सुनने वाले मौजूद लोगों को सलाह दी कि इसे घर जाकर दोहराएं नहीं. ये गाना आपके दिमाग में रह जाता है और सिर का दर्द कराता है. इसके बाद सलमान खान पूछते हैं कि पूजा तुम्हारा वो गाना कौन सा है, जो हाल में मशहूर हुआ है? तो ढिंचैक पूजा कहती है.... 'आफरीन तो बेवफा है, आफरीन तो बेवफा है.... अक्षय कुमार और सलमान खान ने ढिंचैक पूजा को स्कूटर पर बिठाकर मशहूर गाना 'दिलों का शूटर है मेरा स्कूटर' गाते हुए पूरे स्टेज पर भी घुमाया. ढिंचैक पूजा बिग बॉस शो में वाइल्ड एंट्री के साथ आईं थीं. हालांकि घर में रहकर वो कोई धमाल तो नहीं कर सकीें लेकिन घर के बाहर उनके गाने वायरल हैं. अक्षय ने इस शो में पैडमैन के प्रमोशन के साथ सस्ता सैनेटरी पैड बनाकर दिखाया. पैडमैन सिनेमाघरों में पच्चीस जनवरी दो हज़ार अट्ठारह को रिलीज हो रही है.
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जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक घुसपैठिए आतंकवादी को पकड़ा गया, जिसे लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने 'फिदायीन' (आत्मघाती हमलावर) के रूप में भेजा था। नौशेरा सेक्टर के सहर मकरी क्षेत्र में रविवार को सेना के जवानों को किसी घुसपैठिये की संदिग्ध गतिविधि नजर आई। जब वह वहां पहुंचे, तो आतंकवादी एलओसी के पाकिस्तानी हिस्से की ओर वापस भागने लगा।
इस पर सैनिकों ने घुसपैठिये पर गोली चला दी, जिसमें वह घायल हो गया। जवानों ने उसे स्थानीय सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे राजौरी स्थित सेना के अस्पताल में भेज दिया गया है। आतंकवादी की पहचान तबारक हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ करने पर उसने खुलासा किया कि उसे एलओसी पर सेना के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए लश्कर के आत्मघाती दस्ते के हिस्से के रूप में भेजा गया था।
वही, यह दूसरी बार है जब उसने एलओसी पार किया है। उसने पूछताछ में बताया कि उसे और उसके भाई हारून अली को अप्रैल 2016 में नौशेरा सेक्टर में ही घुसपैठ पर गिरफ्तार किया गया था। 26 महीने जेल में रहने के बाद उनको वाघा-अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान को लौटाया गया था। उसने खुलासा किया कि वह आईएसआई के साथ लगभग 2 सालों तक जुड़ा रहा।
पुलिस ने कहा, 'इस अवधि के दौरान उन्हें दुश्मन की जानकारी हासिल करने और कभी भी पकड़े जाने की स्थिति में बचने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। उसने भीमबेर में एलओसी के पास लश्कर के प्रशिक्षण शिविर में छह हफ्ते की ट्रेनिंग ली थी। '
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जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा पर एक घुसपैठिए आतंकवादी को पकड़ा गया, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने 'फिदायीन' के रूप में भेजा था। नौशेरा सेक्टर के सहर मकरी क्षेत्र में रविवार को सेना के जवानों को किसी घुसपैठिये की संदिग्ध गतिविधि नजर आई। जब वह वहां पहुंचे, तो आतंकवादी एलओसी के पाकिस्तानी हिस्से की ओर वापस भागने लगा। इस पर सैनिकों ने घुसपैठिये पर गोली चला दी, जिसमें वह घायल हो गया। जवानों ने उसे स्थानीय सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे राजौरी स्थित सेना के अस्पताल में भेज दिया गया है। आतंकवादी की पहचान तबारक हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ करने पर उसने खुलासा किया कि उसे एलओसी पर सेना के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए लश्कर के आत्मघाती दस्ते के हिस्से के रूप में भेजा गया था। वही, यह दूसरी बार है जब उसने एलओसी पार किया है। उसने पूछताछ में बताया कि उसे और उसके भाई हारून अली को अप्रैल दो हज़ार सोलह में नौशेरा सेक्टर में ही घुसपैठ पर गिरफ्तार किया गया था। छब्बीस महीने जेल में रहने के बाद उनको वाघा-अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान को लौटाया गया था। उसने खुलासा किया कि वह आईएसआई के साथ लगभग दो सालों तक जुड़ा रहा। पुलिस ने कहा, 'इस अवधि के दौरान उन्हें दुश्मन की जानकारी हासिल करने और कभी भी पकड़े जाने की स्थिति में बचने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। उसने भीमबेर में एलओसी के पास लश्कर के प्रशिक्षण शिविर में छह हफ्ते की ट्रेनिंग ली थी। '
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समय की एक लंबी अवधि के लिए यह एक लोकप्रिय स्नोमोबाइल "Buran" बनी हुई है। मालिकों की समीक्षा का कहना है कि यह एक आधुनिक वाहन है कि, उच्च लागत के बावजूद, खरीदारों के बीच बहुत लोकप्रिय है। हम इन इकाइयों के मुख्य विशेषताओं को समझने की कोशिश करो।
इस ब्रांड के लगभग 40 वर्षों के लिए ग्राहकों को खुश स्नोमोबाइलिंग। इस समय के दौरान, ब्रांड में कुछ मॉडल है कि अभी भी बहुत लोकप्रिय हैं जारी किया गया था। रूस शिकारी, खोजकर्ता लंबे सराहना की कितना अच्छा और विश्वसनीय स्नोमोबाइल "Buran"। यह के मालिकों की समीक्षा मूल रूप से, अच्छा के अलावा अभी हाल ही में हमारे देश में यह समान धन के अन्य मॉडलों को खरीदने के लिए असंभव था कर रहे हैं।
पहले "Buran" XX सदी के देर से 60-ies में कनाडा की स्नोमोबाइल की एक प्रति के रूप में बनाया गया था। और उत्तरी अमेरिका में, इस तरह के परिवहन मनोरंजन के लिए बनाया गया था, जबकि रूस स्नोमोबाइल के कुछ क्षेत्रों की जरूरत में हर रोज इस्तेमाल के सख्त थे।
एक स्नोमोबाइल का चयन करने के लिए उन्हें अपनी आवश्यकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए। इन मॉडलों क्षेत्रों में उपयोग जहां उच्च पारगम्यता के लिए आदर्श हैं। 2 स्ट्रोक इंजन के साथ मॉडल हर रोज इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है। मछुआरों और शिकारी स्नोमोबाइल के लिए - सबसे अच्छा विकल्प न केवल परिचालन गुणों के लिए, लेकिन यह भी मूल्य में।
विशेषताएं मॉडल "Buran"
एक स्नोमोबाइल "Buran" की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता - एक महान चेसिस है। मुख्य रोटरी स्की और शक्तिशाली कैटरपिलर मशीन के कारण किसी भी यातायात समस्याओं से निपटने के लिए आसान है। उच्च मार्जिन इलाके भी परिवहन, जो आसानी से पत्थर, खाइयों, लकीरें, पास और अन्य कठोर पर काबू पा के बुनियादी विशेषताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता स्थानों, हमारे देश में पर्याप्त जो तक पहुँचने के लिए है।
आधुनिक स्नोमोबाइल "Buran" कई संस्करण में उपलब्ध हैंः
- और - इस लाइनअप में बेस मॉडल है और एक छोटी फ्रेम है।
- ई - एई और एडीए, जो बिजली शुरुआत का एक मॉडल है।
- डी - विस्तारित आधार के साथ विज्ञापन और एडीई के एक मॉडल।
- 4T और 4TD 4 स्ट्रोक इंजन अद्यतन, अलग क्षमता और गतिशीलता के साथ सुसज्जित।
स्नोमोबाइल "Buran ए '
यह सबसे लोकप्रिय स्नोमोबाइल "Buran" है, यह के मालिकों की समीक्षा सबसे आम हैं। मॉडल कम फ्रेम पर आधारित है, यह सादगी और आपरेशन में असभ्यता, लोगों और माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया की विशेषता है, और कम तापमान पर ऑपरेशन के लिए अपरिहार्य है। इस तरह के एक "Buran" संभाल करने के लिए आसान और जंगली नालों, और अंतहीन टुंड्रा की चिकनी सतह, और गहरी बर्फ और बर्फ hummocks के साथ है।
यह स्नोमोबाइल एक स्की और दो पटरियों के साथ सुसज्जित है, इसलिए कम से कम शाखाओं और समुद्री मील चेसिस मॉडल में झाड़ियों बंद हो जाता है के साथ कि उत्कृष्ट पारगम्यता को दर्शाता है। पटरियों के कुल क्षेत्रफल के कारण जमीन पर न्यूनतम दबाव प्रदान करता है, और केवल स्की एक जंगली इलाके पर युद्धाभ्यास के साथ copes। फ़्रेम आधुनिकीकरण - यह सुरंग है, जो वृद्धि हुई निकासी के साथ संयोजन में गहरी बर्फ में आरामदायक आंदोलन प्रदान करता है में एक सामने बेवल है। यह मॉडल - सबसे सस्ती स्नोमोबाइल "Buran"। समीक्षा मालिकों सबसे महत्वपूर्ण में से एक के रूप में यह आंकड़ा का कहना है। आप 100 000 रूबल की सीमा में इसे खरीद सकते हैं।
"Buran एई" - यह इस ब्रांड के वाहनों की संख्या में एक और बुनियादी मॉडल है। इस संस्करण में बिजली के शुरू और दो पटरियों के साथ सुसज्जित है, तो यह किसी भी सड़क की स्थिति के साथ copes।
"Buran ई और एडीए"
स्नोमोबाइल के बारे में "Buran" लंबी व्हीलबेस समीक्षा का कहना है कि लम्बी फ्रेम समर्थन सतह क्षेत्र के लिए धन्यवाद अधिक बन गया है और इसलिए पारगम्यता अधिक था। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब भुरभुरा और गहरी बर्फ पर एक स्नोमोबाइल संचालित हो रहा है। उपकरण मॉडल के संदर्भ में कुछ भी नया नहीं हैः
- 2 सिलेंडर 2 स्ट्रोक इंजन।
- वॉल्यूम - 635 सेमी 3।
आधार "Buran ई" के बढ़ाव के कारण कार्गो क्षेत्र मिला है। पैकेज एक युग्मन उपकरण है, जो एक ट्रेलर 500 किलो वजन तक टो कर सकते हैं शामिल हैं। स्टैंडर्ड किट एक घूर्णन योग्य सुर्खियों सुर्खियों कि प्रकाश क्षेत्रों के बिना क्षेत्रों को उजागर करता भी शामिल है।
एक स्नोमोबाइल "Buran एडीए" के रूप में एक मॉडल के इस तरह के बारे में, टिप्पणियाँ दिलचस्प हैं। उदाहरण के लिए, यह उल्लेख किया है कि मशीन खराबी के बिना उत्कृष्ट पारगम्यता और लंबी अवधि के संचालन से पता चलता है। दूसरी ओर, अक्सर श्रृंखला है, जो बहुत सुविधाजनक नहीं है, इसके अलावा में, बहुत शोर मोटर चल बदलना होगा। एक तकनीकी दृष्टि से, इस मॉडल एक लम्बी फ्रेम, बिजली के शुरू, लोड मंच और पिवट हेडलाइट है।
"Buran 4T / 4D"
इस मॉडल की विशिष्ट सुविधाओं निम्नलिखित शामिल हैंः
- ईंधन की खपत क्षमता।
- 4 स्ट्रोक इंजन, जो एक उच्च शक्ति बन गया है।
- बहुत बढ़िया कर्षण गुणों।
यह स्नोमोबाइल "Buran 4T" उचित उपकरण की वजह से मालिकों की अच्छी समीक्षाएँ प्राप्त,। मॉडल अच्छा कारबुरेटेड इंजन उच्च शक्ति अद्यतन, जबकि निर्माताओं में से स्तर को कम कर दिया ईंधन की खपत। निकास प्रणाली भी अलग था - एक संशोधित पोर्ट के साथ और फ्रेम स्नोमोबाइल साइलेंसर के लिए स्थानांतरित कर दिया। वहाँ एक दो गति गियरबॉक्स है, जो आप इष्टतम ड्राइविंग मोड चुनने के लिए अनुमति देता है।
स्नोमोबाइल की समीक्षा "Buran 4T" मार्क serviceability मॉडलः ताकि आप आसानी से हुड अंतरिक्ष बनाए रख सकते हैं हुड के विशेष डिजाइन, एक hinged आधार है। सीट के नीचे एक विशाल सामान कम्पार्टमेंट है, जो भी "Burana 4T" के कई मालिकों द्वारा नोट जाती है। एक और नवीनता - सही स्टीयरिंग इकाई एक लम्बी प्लास्टिक लीवर फ़ीड गैस से सुसज्जित है। यह हीटिंग है, जो नियंत्रण मॉडल के आराम बढ़ जाती है है।
देखा जा सकता है, यह बहुत कार्यात्मक है और अच्छी तरह से सोचा स्नोमोबाइल "Buran 4T" - समीक्षा के मालिकों गलती से न केवल इलाके पर, लेकिन यह भी आपरेशन मॉडल की अधिकतम सुविधा पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर रहे हैं।
"Buran 4T / 4D" - एक अद्वितीय स्नोमोबाइल, जो सबसे चरम स्थितियों में व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता। अपने छोटे से आकार और आयामों के बावजूद, यह उत्कृष्ट प्रदर्शन गुण को दर्शाता है। और इसलिए विशेष रूप से शिकारी और anglers सर्दियों मछली पकड़ने से प्यार करता था। कई के लिए आगे देख रहे थे, लेकिन जब होगा अद्यतन स्नोमोबाइल "Buran 4T / 4TD"। समीक्षा का कहना है कि नए मॉडल के लिए एक बेहतर इंजन सेट हो जाएगा, और कार में ही अधिक टिकाऊ और किफायती हो जाता है।
लागत मॉडल - 250 000 अप करने के लिए है, जो भी कई उपभोक्ताओं द्वारा विख्यात है। इस तरह के उन्मुखीकरण के वाहनों के लिए एक उचित मूल्य माना जाता है।
टेस्ट ड्राइव क्या करते हैं?
यह उल्लेखनीय है, लेकिन आज आप किसी भी कार का परीक्षण कर सकते हैं। भुगतान नहीं ध्यान और स्नोमोबाइल "Buran" 4 स्ट्रोकः विशेषज्ञ समीक्षा से पता चला कि शिकार और मछली पकड़ने में इस्तेमाल के लिए, इस तरह के मॉडल बस अपूरणीय है। मॉडल के बारे में समीक्षा इंगित करता है कि ब्रांड की स्नोमोबाइल हमारे देश में पहली बार दिखाई दिया, और तुरंत शिकारी के बीच लोकप्रिय बन गया है, विश्वसनीयता और संचालन की सादगी के लिए धन्यवाद। दो पटरियों की उपस्थिति, एक बहुत मदद मिलती है क्योंकि घर के लिए उनमें से एक का टूटना के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंचा जा सकता है। एक और सुविधाजनक डिजाइन समाधान - स्की शरीर के धनुष के बीच में स्थित हैः यह आप आसानी से छोटे पेड़ के साथ क्षेत्रों काबू पाने के लिए अनुमति देता है।
रनिंग स्नोमोबाइल एक मैनुअल स्टार्टर द्वारा किया जाता है, और स्की लीफ स्प्रिंग सस्पेंशन से लैस हैं। ईंधन सभी मॉडलों के लिए - यह अवचक्र शाफ्ट से क्रैंकशाफ्ट से टोक़ संचरण की कीमत पर कम से कम 76 स्नोमोबाइल के आंदोलन का एक ऑक्टेन रेटिंग के साथ पेट्रोल है। इस मामले में, आप को बदलने के द्वारा मशीन की गति बदल सकते गियर अनुपात किसी भी सड़क की स्थिति के तहत variator की।
स्नोमोबाइल "Buran" 2-तार या 4 स्ट्रोक इंजन से लैस है। यह चार पक्षों के साथ फ्रेम से जुड़ा हुआ है, और कंपन को कम करने के लिए - घुड़सवार रबर आघात अवशोषक। variator मोटर के आंदोलन द्वारा नियंत्रित की पुली के बीच की दूरी। एक स्नोमोबाइल शोषण, आप लगातार जांच करने के लिए विश्राम के बन्धन अखरोट तथ्य यह है कि इंजन विस्थापित किया जा सकता है, और चर गति बेल्ट जल्दी से विफल करने के लिए सुराग की जरूरत है।
चेसिस और इन मशीनों के संचरण एक नज़र रखी मोटर slewing स्की, एक वि बेल्ट variator के होते हैं और श्रृंखला ट्रांसमिशन के साथ बॉक्स रिवर्स। आरामदायक डबल तह सीट एक ट्रंक के रूप में उपयोग के लिए विस्तृत संभावनाओं को खोलता है।
कठोर विंडशील्ड बनाने के लिए इस्तेमाल Plexiglass, जो इस प्रकार की मशीनों के लिए एक दोष माना जाता है। आमतौर पर, कांच दरारें पहले से ही पहली यात्रा पर, तो यह की भावना वास्तव में छोटा है। अधिक बार इस तरह के एक परिणाम के पेड़ के लिए नेतृत्व नहीं, बर्फ के भार तले आमादा। आदर्श रूप में, इस तरह के मशीनों एक प्लास्टिक सामग्री से एक गिलास है, जो विभिन्न लोच, बाहरी प्रभावों के लिए लचीलापन और प्रतिरोध किया जाएगा के साथ सुसज्जित किया जाना चाहिए।
प्रतिक्रिया इंगित करता है कि जल्दी "Buranov" संशोधन एक दोष यह है - जब पीछे स्नोमोबाइल स्की बर्फ में फंस और खड़ी खड़ा है। खतरा यह है कि स्की बिल्कुल निलंबन से बाहर आ सकते हैं, और इसे वापस माउंट करने के लिए, वेल्डिंग मशीन के साथ खुद को हाथ होगा। यह बहुत ही पहला मॉडल, एक आधुनिक स्नोमोबाइल "Buran 4TD" अच्छी समीक्षा हो जाता है, तथ्य यह है कि कमियों के कई समाधान हो गया है करने के लिए धन्यवाद अलग करता है। इस प्रकार, स्नोमोबाइल की और अधिक उन्नत मॉडल में हम इस समस्या का एक त्रिकोणीय रबर बफर, जो खड़ी स्की छोड़ देना नहीं है स्थापित करने को हल किया।
डिजाइन "Buran"
ट्रैक स्नोमोबाइल रबर जो आगे overmoulded फाइबरग्लास छड़ के साथ प्रबलित है बुना जाता है। दो पटरियों, उत्कृष्ट प्रवाह क्षमता प्रदान करते हैं, जबकि उच्च आकर्षक प्रयास है, जो यह आसान माल ढोना के लिए बनाता है को प्राप्त करने। पेट्रोल और गैस संघनन के लिए अनुकूलित मोटर्स अतिरिक्त एक इलेक्ट्रिक स्टार्टर के साथ सुसज्जित किया जा सकता है।
स्नोमोबाइल के लिए फ्रेम स्टील से बना है, और संशोधन में "Buran ई" यह एक बड़ा सामान कम्पार्टमेंट है। फाइबरग्लास हुड कुछ पूरा रोशनी के चाहने वालों के साथ सुसज्जित हैं, विश्वसनीय और टिकाऊ है। polyethylene से बना पारदर्शी ईंधन टैंक के लिए धन्यवाद, यह करने के लिए नेत्रहीन उस में ईंधन की स्थिति की निगरानी संभव है।
दो सीट स्लेज विस्तार polypropylene से बना है और अशुद्ध चमड़े में शामिल है। सीट के नीचे एक विशाल ट्रंक है। ट्रांसमिशन के साथ सुसज्जित है एक CVT, मैनुअल श्रृंखला ड्राइव, पीछे और तटस्थ गियर के साथ संचरण, जो मैन्युअल रूप से पर स्विच किया जा सकता। फ्रंट सस्पेंशन वसंत प्रकार, ताकि मशीन किसी भी ऑफ-रोड के साथ सामना करने के लिए आसान है।
चेसिस - एक कैटरपिलर ट्रैक रोलर्स निलंबन, जो एक दोहरी बैलेंसर्स है। यह कैटरपिलर के तनाव को समायोजित करने के लिए संभव है। चेसिस की एक महत्वपूर्ण विशेषता - यह भी एक स्नोमोबाइल बर्फ के उपयोग के बिना।
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समय की एक लंबी अवधि के लिए यह एक लोकप्रिय स्नोमोबाइल "Buran" बनी हुई है। मालिकों की समीक्षा का कहना है कि यह एक आधुनिक वाहन है कि, उच्च लागत के बावजूद, खरीदारों के बीच बहुत लोकप्रिय है। हम इन इकाइयों के मुख्य विशेषताओं को समझने की कोशिश करो। इस ब्रांड के लगभग चालीस वर्षों के लिए ग्राहकों को खुश स्नोमोबाइलिंग। इस समय के दौरान, ब्रांड में कुछ मॉडल है कि अभी भी बहुत लोकप्रिय हैं जारी किया गया था। रूस शिकारी, खोजकर्ता लंबे सराहना की कितना अच्छा और विश्वसनीय स्नोमोबाइल "Buran"। यह के मालिकों की समीक्षा मूल रूप से, अच्छा के अलावा अभी हाल ही में हमारे देश में यह समान धन के अन्य मॉडलों को खरीदने के लिए असंभव था कर रहे हैं। पहले "Buran" XX सदी के देर से साठ-ies में कनाडा की स्नोमोबाइल की एक प्रति के रूप में बनाया गया था। और उत्तरी अमेरिका में, इस तरह के परिवहन मनोरंजन के लिए बनाया गया था, जबकि रूस स्नोमोबाइल के कुछ क्षेत्रों की जरूरत में हर रोज इस्तेमाल के सख्त थे। एक स्नोमोबाइल का चयन करने के लिए उन्हें अपनी आवश्यकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए। इन मॉडलों क्षेत्रों में उपयोग जहां उच्च पारगम्यता के लिए आदर्श हैं। दो स्ट्रोक इंजन के साथ मॉडल हर रोज इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है। मछुआरों और शिकारी स्नोमोबाइल के लिए - सबसे अच्छा विकल्प न केवल परिचालन गुणों के लिए, लेकिन यह भी मूल्य में। विशेषताएं मॉडल "Buran" एक स्नोमोबाइल "Buran" की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता - एक महान चेसिस है। मुख्य रोटरी स्की और शक्तिशाली कैटरपिलर मशीन के कारण किसी भी यातायात समस्याओं से निपटने के लिए आसान है। उच्च मार्जिन इलाके भी परिवहन, जो आसानी से पत्थर, खाइयों, लकीरें, पास और अन्य कठोर पर काबू पा के बुनियादी विशेषताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता स्थानों, हमारे देश में पर्याप्त जो तक पहुँचने के लिए है। आधुनिक स्नोमोबाइल "Buran" कई संस्करण में उपलब्ध हैंः - और - इस लाइनअप में बेस मॉडल है और एक छोटी फ्रेम है। - ई - एई और एडीए, जो बिजली शुरुआत का एक मॉडल है। - डी - विस्तारित आधार के साथ विज्ञापन और एडीई के एक मॉडल। - चारT और चारTD चार स्ट्रोक इंजन अद्यतन, अलग क्षमता और गतिशीलता के साथ सुसज्जित। स्नोमोबाइल "Buran ए ' यह सबसे लोकप्रिय स्नोमोबाइल "Buran" है, यह के मालिकों की समीक्षा सबसे आम हैं। मॉडल कम फ्रेम पर आधारित है, यह सादगी और आपरेशन में असभ्यता, लोगों और माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया की विशेषता है, और कम तापमान पर ऑपरेशन के लिए अपरिहार्य है। इस तरह के एक "Buran" संभाल करने के लिए आसान और जंगली नालों, और अंतहीन टुंड्रा की चिकनी सतह, और गहरी बर्फ और बर्फ hummocks के साथ है। यह स्नोमोबाइल एक स्की और दो पटरियों के साथ सुसज्जित है, इसलिए कम से कम शाखाओं और समुद्री मील चेसिस मॉडल में झाड़ियों बंद हो जाता है के साथ कि उत्कृष्ट पारगम्यता को दर्शाता है। पटरियों के कुल क्षेत्रफल के कारण जमीन पर न्यूनतम दबाव प्रदान करता है, और केवल स्की एक जंगली इलाके पर युद्धाभ्यास के साथ copes। फ़्रेम आधुनिकीकरण - यह सुरंग है, जो वृद्धि हुई निकासी के साथ संयोजन में गहरी बर्फ में आरामदायक आंदोलन प्रदान करता है में एक सामने बेवल है। यह मॉडल - सबसे सस्ती स्नोमोबाइल "Buran"। समीक्षा मालिकों सबसे महत्वपूर्ण में से एक के रूप में यह आंकड़ा का कहना है। आप एक सौ शून्य रूबल की सीमा में इसे खरीद सकते हैं। "Buran एई" - यह इस ब्रांड के वाहनों की संख्या में एक और बुनियादी मॉडल है। इस संस्करण में बिजली के शुरू और दो पटरियों के साथ सुसज्जित है, तो यह किसी भी सड़क की स्थिति के साथ copes। "Buran ई और एडीए" स्नोमोबाइल के बारे में "Buran" लंबी व्हीलबेस समीक्षा का कहना है कि लम्बी फ्रेम समर्थन सतह क्षेत्र के लिए धन्यवाद अधिक बन गया है और इसलिए पारगम्यता अधिक था। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब भुरभुरा और गहरी बर्फ पर एक स्नोमोबाइल संचालित हो रहा है। उपकरण मॉडल के संदर्भ में कुछ भी नया नहीं हैः - दो सिलेंडर दो स्ट्रोक इंजन। - वॉल्यूम - छः सौ पैंतीस सेमी तीन। आधार "Buran ई" के बढ़ाव के कारण कार्गो क्षेत्र मिला है। पैकेज एक युग्मन उपकरण है, जो एक ट्रेलर पाँच सौ किलो वजन तक टो कर सकते हैं शामिल हैं। स्टैंडर्ड किट एक घूर्णन योग्य सुर्खियों सुर्खियों कि प्रकाश क्षेत्रों के बिना क्षेत्रों को उजागर करता भी शामिल है। एक स्नोमोबाइल "Buran एडीए" के रूप में एक मॉडल के इस तरह के बारे में, टिप्पणियाँ दिलचस्प हैं। उदाहरण के लिए, यह उल्लेख किया है कि मशीन खराबी के बिना उत्कृष्ट पारगम्यता और लंबी अवधि के संचालन से पता चलता है। दूसरी ओर, अक्सर श्रृंखला है, जो बहुत सुविधाजनक नहीं है, इसके अलावा में, बहुत शोर मोटर चल बदलना होगा। एक तकनीकी दृष्टि से, इस मॉडल एक लम्बी फ्रेम, बिजली के शुरू, लोड मंच और पिवट हेडलाइट है। "Buran चारT / चारD" इस मॉडल की विशिष्ट सुविधाओं निम्नलिखित शामिल हैंः - ईंधन की खपत क्षमता। - चार स्ट्रोक इंजन, जो एक उच्च शक्ति बन गया है। - बहुत बढ़िया कर्षण गुणों। यह स्नोमोबाइल "Buran चारT" उचित उपकरण की वजह से मालिकों की अच्छी समीक्षाएँ प्राप्त,। मॉडल अच्छा कारबुरेटेड इंजन उच्च शक्ति अद्यतन, जबकि निर्माताओं में से स्तर को कम कर दिया ईंधन की खपत। निकास प्रणाली भी अलग था - एक संशोधित पोर्ट के साथ और फ्रेम स्नोमोबाइल साइलेंसर के लिए स्थानांतरित कर दिया। वहाँ एक दो गति गियरबॉक्स है, जो आप इष्टतम ड्राइविंग मोड चुनने के लिए अनुमति देता है। स्नोमोबाइल की समीक्षा "Buran चारT" मार्क serviceability मॉडलः ताकि आप आसानी से हुड अंतरिक्ष बनाए रख सकते हैं हुड के विशेष डिजाइन, एक hinged आधार है। सीट के नीचे एक विशाल सामान कम्पार्टमेंट है, जो भी "Burana चारT" के कई मालिकों द्वारा नोट जाती है। एक और नवीनता - सही स्टीयरिंग इकाई एक लम्बी प्लास्टिक लीवर फ़ीड गैस से सुसज्जित है। यह हीटिंग है, जो नियंत्रण मॉडल के आराम बढ़ जाती है है। देखा जा सकता है, यह बहुत कार्यात्मक है और अच्छी तरह से सोचा स्नोमोबाइल "Buran चारT" - समीक्षा के मालिकों गलती से न केवल इलाके पर, लेकिन यह भी आपरेशन मॉडल की अधिकतम सुविधा पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर रहे हैं। "Buran चारT / चारD" - एक अद्वितीय स्नोमोबाइल, जो सबसे चरम स्थितियों में व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता। अपने छोटे से आकार और आयामों के बावजूद, यह उत्कृष्ट प्रदर्शन गुण को दर्शाता है। और इसलिए विशेष रूप से शिकारी और anglers सर्दियों मछली पकड़ने से प्यार करता था। कई के लिए आगे देख रहे थे, लेकिन जब होगा अद्यतन स्नोमोबाइल "Buran चारT / चारTD"। समीक्षा का कहना है कि नए मॉडल के लिए एक बेहतर इंजन सेट हो जाएगा, और कार में ही अधिक टिकाऊ और किफायती हो जाता है। लागत मॉडल - दो सौ पचास शून्य अप करने के लिए है, जो भी कई उपभोक्ताओं द्वारा विख्यात है। इस तरह के उन्मुखीकरण के वाहनों के लिए एक उचित मूल्य माना जाता है। टेस्ट ड्राइव क्या करते हैं? यह उल्लेखनीय है, लेकिन आज आप किसी भी कार का परीक्षण कर सकते हैं। भुगतान नहीं ध्यान और स्नोमोबाइल "Buran" चार स्ट्रोकः विशेषज्ञ समीक्षा से पता चला कि शिकार और मछली पकड़ने में इस्तेमाल के लिए, इस तरह के मॉडल बस अपूरणीय है। मॉडल के बारे में समीक्षा इंगित करता है कि ब्रांड की स्नोमोबाइल हमारे देश में पहली बार दिखाई दिया, और तुरंत शिकारी के बीच लोकप्रिय बन गया है, विश्वसनीयता और संचालन की सादगी के लिए धन्यवाद। दो पटरियों की उपस्थिति, एक बहुत मदद मिलती है क्योंकि घर के लिए उनमें से एक का टूटना के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंचा जा सकता है। एक और सुविधाजनक डिजाइन समाधान - स्की शरीर के धनुष के बीच में स्थित हैः यह आप आसानी से छोटे पेड़ के साथ क्षेत्रों काबू पाने के लिए अनुमति देता है। रनिंग स्नोमोबाइल एक मैनुअल स्टार्टर द्वारा किया जाता है, और स्की लीफ स्प्रिंग सस्पेंशन से लैस हैं। ईंधन सभी मॉडलों के लिए - यह अवचक्र शाफ्ट से क्रैंकशाफ्ट से टोक़ संचरण की कीमत पर कम से कम छिहत्तर स्नोमोबाइल के आंदोलन का एक ऑक्टेन रेटिंग के साथ पेट्रोल है। इस मामले में, आप को बदलने के द्वारा मशीन की गति बदल सकते गियर अनुपात किसी भी सड़क की स्थिति के तहत variator की। स्नोमोबाइल "Buran" दो-तार या चार स्ट्रोक इंजन से लैस है। यह चार पक्षों के साथ फ्रेम से जुड़ा हुआ है, और कंपन को कम करने के लिए - घुड़सवार रबर आघात अवशोषक। variator मोटर के आंदोलन द्वारा नियंत्रित की पुली के बीच की दूरी। एक स्नोमोबाइल शोषण, आप लगातार जांच करने के लिए विश्राम के बन्धन अखरोट तथ्य यह है कि इंजन विस्थापित किया जा सकता है, और चर गति बेल्ट जल्दी से विफल करने के लिए सुराग की जरूरत है। चेसिस और इन मशीनों के संचरण एक नज़र रखी मोटर slewing स्की, एक वि बेल्ट variator के होते हैं और श्रृंखला ट्रांसमिशन के साथ बॉक्स रिवर्स। आरामदायक डबल तह सीट एक ट्रंक के रूप में उपयोग के लिए विस्तृत संभावनाओं को खोलता है। कठोर विंडशील्ड बनाने के लिए इस्तेमाल Plexiglass, जो इस प्रकार की मशीनों के लिए एक दोष माना जाता है। आमतौर पर, कांच दरारें पहले से ही पहली यात्रा पर, तो यह की भावना वास्तव में छोटा है। अधिक बार इस तरह के एक परिणाम के पेड़ के लिए नेतृत्व नहीं, बर्फ के भार तले आमादा। आदर्श रूप में, इस तरह के मशीनों एक प्लास्टिक सामग्री से एक गिलास है, जो विभिन्न लोच, बाहरी प्रभावों के लिए लचीलापन और प्रतिरोध किया जाएगा के साथ सुसज्जित किया जाना चाहिए। प्रतिक्रिया इंगित करता है कि जल्दी "Buranov" संशोधन एक दोष यह है - जब पीछे स्नोमोबाइल स्की बर्फ में फंस और खड़ी खड़ा है। खतरा यह है कि स्की बिल्कुल निलंबन से बाहर आ सकते हैं, और इसे वापस माउंट करने के लिए, वेल्डिंग मशीन के साथ खुद को हाथ होगा। यह बहुत ही पहला मॉडल, एक आधुनिक स्नोमोबाइल "Buran चारTD" अच्छी समीक्षा हो जाता है, तथ्य यह है कि कमियों के कई समाधान हो गया है करने के लिए धन्यवाद अलग करता है। इस प्रकार, स्नोमोबाइल की और अधिक उन्नत मॉडल में हम इस समस्या का एक त्रिकोणीय रबर बफर, जो खड़ी स्की छोड़ देना नहीं है स्थापित करने को हल किया। डिजाइन "Buran" ट्रैक स्नोमोबाइल रबर जो आगे overmoulded फाइबरग्लास छड़ के साथ प्रबलित है बुना जाता है। दो पटरियों, उत्कृष्ट प्रवाह क्षमता प्रदान करते हैं, जबकि उच्च आकर्षक प्रयास है, जो यह आसान माल ढोना के लिए बनाता है को प्राप्त करने। पेट्रोल और गैस संघनन के लिए अनुकूलित मोटर्स अतिरिक्त एक इलेक्ट्रिक स्टार्टर के साथ सुसज्जित किया जा सकता है। स्नोमोबाइल के लिए फ्रेम स्टील से बना है, और संशोधन में "Buran ई" यह एक बड़ा सामान कम्पार्टमेंट है। फाइबरग्लास हुड कुछ पूरा रोशनी के चाहने वालों के साथ सुसज्जित हैं, विश्वसनीय और टिकाऊ है। polyethylene से बना पारदर्शी ईंधन टैंक के लिए धन्यवाद, यह करने के लिए नेत्रहीन उस में ईंधन की स्थिति की निगरानी संभव है। दो सीट स्लेज विस्तार polypropylene से बना है और अशुद्ध चमड़े में शामिल है। सीट के नीचे एक विशाल ट्रंक है। ट्रांसमिशन के साथ सुसज्जित है एक CVT, मैनुअल श्रृंखला ड्राइव, पीछे और तटस्थ गियर के साथ संचरण, जो मैन्युअल रूप से पर स्विच किया जा सकता। फ्रंट सस्पेंशन वसंत प्रकार, ताकि मशीन किसी भी ऑफ-रोड के साथ सामना करने के लिए आसान है। चेसिस - एक कैटरपिलर ट्रैक रोलर्स निलंबन, जो एक दोहरी बैलेंसर्स है। यह कैटरपिलर के तनाव को समायोजित करने के लिए संभव है। चेसिस की एक महत्वपूर्ण विशेषता - यह भी एक स्नोमोबाइल बर्फ के उपयोग के बिना।
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बैकस्टोरीः हेली रेनहार्ट ने मूल रूप से अमेरिकी आइडल के सीज़न 9 के लिए कोशिश की, लेकिन उसे अपनी तकनीक पर काम करने और वापस आने के लिए कहा गया। न्यायाधीशों की सलाह पर ध्यान देते हुए, वह सीजन 10 में तीसरे स्थान पर रही।
"ओह! डार्लिंग" (बीटल्स)
हेलि रेनहार्ट ने मूल रूप से अमेरिकी आइडल के सीजन नौ के लिए ऑडिशन किया था और कहा गया था कि वह काफी तैयार नहीं थी लेकिन फिर से कोशिश करने के लिए, जिसने 10 सीज़न में किया था। उसके मिल्वौकी ऑडिशन के लिए, बीटल्स के क्लासिक "ओह! डार्लिंग" का उसका कवर बहुत था स्टाइलिज्ड और थोड़ी सी जगह पर, लेकिन उसने वादा दिखाया जिसने सभी तीन न्यायाधीशों को हॉलीवुड के माध्यम से वोट देने के लिए प्रेरित किया। "ओह! डार्लिंग" एबी रोड पर दिखाई दी, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में कभी भी एक के रूप में रिलीज़ नहीं हुई थी। बी गेज के रॉबिन गिब ने 1 9 70 के दशक में एसजीटी मिर्च के लोनली हार्ट्स क्लब बैंड मूवी के लिए गीत रिकॉर्ड किया और पॉप चार्ट पर गीत # 15 पर लिया। अमेरिकी आइडल पर सीज़न नौ के सेमीफाइनल दौर के दौरान केटलन एपपरलीपर ने गीत का प्रदर्शन किया।
"फॉलिन" "(एलिसिया कीज)
आपके पूरे जीवन में कुछ गाने हैं जिन्हें आप पहली बार याद कर सकते हैं, और आमतौर पर यह गीत अनोखा था और आपके साथ एक तार था। ऐसे कई लोगों के लिए ऐसा मामला है जो पहली बार याद करते हैं कि उन्होंने एलिसिया कीज़ के पहले एकल "फॉलिन" को सुना था, जिसे 2001 में दुनिया में प्रदर्शित किया गया था। यह गीत प्रतिभा के साथ इतना लोकप्रिय रहा है कि इसे इस्तेमाल होने से प्रतिबंधित किया गया है ऑस्ट्रेलियाई आइडल, लेकिन हेली रेनहार्ट ने इसे शीर्ष 24 सप्ताह के दौरान लिया और इसे अपनी सफलता के साथ खुद बनाने की कोशिश की।
"ब्लू" (लीन रेम्स)
"मैं तुम्हारा बच्चा आज रात हूँ" (व्हिटनी ह्यूस्टन)
"ब्लू" के शीर्ष 12 सप्ताह के प्रदर्शन के बाद थोड़ा सा फ्लैट गिरने के बाद हेली रेनहार्ट अपनी छवि को हिलाकर देख रहे थे । न्यायाधीशों ने हेलि रेनहार्ट की संगीत दिशा पर सही तरीके से सवाल उठाया, क्योंकि ऐसा लगता था कि वह हर हफ्ते संगीत की एक अलग शैली करता है, और जेनिफर लोपेज़ ने अपनी अजीब चालों का हवाला दिया। "मैं आपका बच्चा आज रात" शीर्षक ट्रैक था और 1 99 0 में रिलीज हुई व्हिटनी ह्यूस्टन के तीसरे एल्बम से पहला एकल था, और यह व्हिटनी का आठवां नंबर एकल एकल बन गया।
"आप वास्तव में मुझे पकड़ लिया है" (चमत्कार)
हेली रेनहार्ट के शीर्ष 11 सप्ताह में "यू आर रीली गॉट ए होल्ड ऑफ मी" का प्रदर्शन लाइव शो के दौरान पहला था जहां सभी तीन न्यायाधीशों ने अपनी उदासीन, भावनात्मक स्वर वितरण के लिए उच्च प्रशंसा की। जबकि एक अच्छा प्रदर्शन अमेरिकी आइडल पर एक प्रतियोगी को बचाने की दिशा में एक लंबा सफर तय करेगा, सीजन 10 पर गायकों की गुणवत्ता इतनी ऊंची थी कि हैली रेनहार्ट को गायन प्रतियोगिता में अग्रदूत के रूप में परिभाषित करने के लिए एक बड़ा संघर्ष होगा। जबकि अधिकांश लोग स्मोकी रॉबिन्सन के साथ "यू आर रीली गॉट ए होल्ड ऑफ मी" को जोड़ते हैं, लेकिन गीत को केवल चमत्कारों में श्रेय दिया जाता था जब इसे 1 9 62 में रिलीज़ किया गया था और पॉप और आर एंड बी चार्ट दोनों में शीर्ष 10 तक पहुंच गया था।
"बेनी एंड द जेट्स" (एल्टन जॉन)
पीस ऑफ माई हार्ट "(बिग ब्रदर एंड होल्डिंग कंपनी)
हेली रेनहार्ट ने अमेरिकी आइडल सीज़न 10 के शीर्ष 11 रेडक्स सप्ताह के दौरान बहुत सी गति उठाई, जब उन्होंने "बेनी और जेट्स" का प्रदर्शन किया, और न्यायाधीशों ने महसूस किया कि शीर्ष 9 सप्ताह के दौरान गति जारी है, जिसका प्रदर्शन "टुकड़ा" मेरा दिल। " हालांकि गीत को आम तौर पर जेनिस जोप्लिन को श्रेय दिया जाता है, लेकिन उनकी संख्या 12 हिट के लिए उचित क्रेडिट बिग ब्रदर और होल्डिंग कंपनी को जाता है, जो जेनिस जोप्लिन ने नेतृत्व किया था। "पीस ऑफ माई हार्ट" मूल रूप से 1 9 67 में एर्मा फ्रैंकलिन द्वारा दर्ज किया गया था, लेकिन देश के प्रशंसकों को इसे 1 99 4 से फेथ हिल की दूसरी नंबर एक हिट के रूप में पहचाना जाएगा।
"मुझे कॉल करें" (ब्लोंडी)
अमेरिकी आइडल के सीजन 10 में, गायकों की गुणवत्ता इतनी अधिक थी कि न्यायाधीशों की औसत समीक्षा भी चिंता का कारण हो सकती है। हेली रेनहार्ट ने शीर्ष 8 सप्ताह के दौरान ब्लॉन्डी के "कॉल मी" गायन के दौरान दुविधा का सामना किया, जिसमें अमेरिकी गिगोलो फिल्म शामिल थी। जबकि उनका प्रदर्शन ऊर्जावान था और उनके वोकल्स ठीक थे, हेली को दर्शकों से जुड़ने में कोई समस्या हो सकती थी। ब्लोंडी ने 1 9 80 में "कॉल मी" के साथ छह सप्ताह में छह सप्ताह बिताए, जिसने उस गीत में पूरे साल के नंबर एक गीत का योगदान दिया।
"रोलिंग इन द दीप" (एडेल)
जब न्यायाधीश जेनिफर लोपेज़ सीजन दस में अमेरिकी आइडल में शामिल हो गए, तो कुछ चिंता थी कि वह सिर्फ पाउला अब्दुल को "अच्छे न्यायाधीश" के रूप में बदल सकती हैं। हालांकि वह पैनल पर एक दोस्ताना उपस्थिति रही है, जेनिफर लोपेज ने पूरे सत्र में प्रतिभागियों को कुछ स्वागत रचनात्मक प्रतिक्रिया भी जोड़ा है। हेली रेनहार्ट ने उस फीडबैक को प्राप्त किया जब लोपेज़ ने संकेत दिया कि रेनहार्ट " रोलिंग इन द दीप " के शीर्ष 7 सप्ताह की प्रस्तुति में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा रहा था। एडेल ने अपना पहला यूएस नंबर एक "रोलिंग इन दी दीप" के साथ बनाया, जो प्रसारण के समय दस नंबर पर पहुंच गया था। हैली रेनहार्ट ने गीत का प्रदर्शन करने के बाद सुबह आईट्यून्स एकल चार्ट पर नंबर एक पर लौट आया।
"मैं पृथ्वी को महसूस करता हूं" (कैरोल किंग)
अमेरिकन आइडल सीज़न 10 पर शीर्ष 6 रात का पहला युगल हेली रेनहार्ट और केसी अब्राम के पास गया, जिन्होंने "आई महसूस महसूस किया। " केसी अब्राम और हेली रेनहार्ट के बीच रसायन इतनी मजबूत थी कि न्यायाधीश स्टीवन टायलर ने केसी से पूछा कि वह कितने समय से हैली से प्यार कर रहा था, जो दोनों के मित्रता के स्तर के बारे में अफवाहें और अटकलों को बढ़ावा देता था। जबकि "आई फेल द अर्थ मूव" कैरोल किंग के पहले नंबर एक सिंगल के साथ "इट्स टू लेट" के साथ बन गया, इस गीत ने पॉप गायक मार्टिका के लिए 1 9 8 9 में दूसरी बार बिलबोर्ड हॉट 100 को भी मारा, जिसने अपनी तीसरी शीर्ष 40 हिट उनका पहला आत्म-शीर्षक एल्बम।
"खूबसूरत" (कैरोल किंग)
यदि अमेरिकी आइडल ने सबसे बेहतर प्रतियोगी के लिए अतिरिक्त अंक दिए हैं, तो हैली रेनहार्ट फिर से नीचे तीन में दिखाई नहीं देगी। कैरोल किंग के "सुंदर" के शीर्ष 6 प्रदर्शन से पता चला कि उनकी आवाज शक्तिशाली और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य है। "सुंदर" कैरोल किंग की 1 9 71 की उत्कृष्ट कृति टेपेस्ट्री से एक एल्बम काट था, और रिचर्ड मार्क्स और बारब्रा स्ट्रिसेंड जैसे कलाकारों द्वारा कवर किया गया है।
"तुम और मैं" (लेडी गागा)
हेली रेनहार्ट को शीर्ष तीन सप्ताह में गाए जाने के लिए एक निरस्त गीत का चयन करने के लिए सभी तीन न्यायाधीशों से अमेरिकी आइडल सीज़न 10 की सबसे भ्रमित और निराशाजनक प्रतिक्रिया मिली। असल में, रिलीज़ किया गया गीत लेडी गागा की अत्यधिक प्रत्याशित तीसरी सीडी से एक अग्रिम ट्रैक था, लेकिन जेनिफर लोपेज़ और रैंडी जैक्सन दोनों ने केवल अपने गीत की पसंद की आलोचना की बजाय यह उल्लेख किया कि उसके स्वर कितने मजबूत थे या उन्होंने क्या किया अधिक समकालीन गीत। "आप और मैं" लेडी गागा की तीसरी सीडी बोर्न द वे से एक रॉबर्ट जॉन "मठ" लेंज-निर्मित ट्रैक है, जिसे 24 मई, 2011 को हेल रेनहार्ट ने गीत गाए जाने के तीन हफ्ते बाद रिलीज होने वाला था।
"राइजिंग सन का घर" (पशु)
अमेरिकन आइडल सीजन 10 के शीर्ष 5 सप्ताह की हाइलाइट, और संभवतः पूरे सीज़न में, हैली रेनहार्ट द्वारा "हाउस ऑफ द राइजिंग सन" का शक्तिशाली प्रदर्शन था। गीत के पहले नोट्स से जहां हैली ने पूरे बैंड के साथ शक्तिशाली बंद करने के लिए कैपेला गाया था, हैली दो मिनट के भीतर दावेदार से आगे दौड़ने वाली थी, और उन लोगों को भ्रमित कर रहा था जो 10 सत्र के लिए विजेता चुनने की कोशिश कर रहे थे। "राइजिंग हाउस सूर्य "18 वीं शताब्दी में एक लोक गीत के रूप में शुरू हुआ, लेकिन आधुनिक सफलता मिली जब जानवरों ने गीत का एक रॉक संस्करण रिकॉर्ड किया और इसे 1 9 64 में अमेरिका और ब्रिटेन में पॉप चार्ट पर नंबर एक पर ले गया।
"अर्थ गीत" (माइकल जैक्सन)
अमेरिकी आइडल जैसे शो को देखना असंभव है और 100% निष्पक्ष रहता है, और यही वह तरीका है कि वास्तविकता टीवी निर्माता वफादारी बनाने का प्रयास करते हैं जो दर्शकों को हर हफ्ते वापस आते रहते हैं। हेली रेनहार्ट की वफादारी को शीर्ष 4 सप्ताह में परीक्षण में डाल दिया गया था , क्योंकि प्रशंसकों ने जेनिफर लोपेज़ और रैंडी जैक्सन की "अर्थ सॉन्ग" के कवर के बारे में आलोचना की थी। जबकि रैंडी जैक्सन ने कहा कि हैली रेनहार्ट ने गीत के अंत में चिल्लाया और जेनिफर लोपेज़ ने केवल गीत पसंद के बारे में बात की, हैली के प्रशंसकों ने एक प्रभावशाली प्रतिपादन सुना। "पृथ्वी गीत" संयुक्त राज्य अमेरिका में माइकल जैक्सन के लिए केवल एक मामूली सफलता थी, लेकिन यह 1 99 5 के अंत में 14 देशों में नंबर एक रैंकिंग को पीछे छोड़कर कहीं और भारी हिट थी।
"मैं (किसके पास कुछ नहीं है)" (बेन ई किंग)
"क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" (लेड ज़ेपेल्लिन)
अमेरिकी आइडल सीजन 10 में हेली रेनहार्ट के पास एक और शानदार क्षण था, जो शीर्ष 3 सप्ताह के अपने पहले गीत के रूप में लेड ज़ेपेल्लिन गाते थे। हालांकि प्रदर्शन के दौरान हेली रेनहार्ट गिर गया, फिर भी वह वापस आ गई और दर्शकों को उसके जादू के नीचे रखा। हेली रेनहार्ट के स्पिल के नेतृत्व में न्यायाधीश स्टीवन टायलर ने कहा, "यह नहीं है कि आप कितनी बार गिरते हैं, यह कितना बार उठता है," एक उद्धरण जिसने शीर्ष 3 पर हैली के रन को सारांशित किया। "क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" लेड ज़ेप्पेलिन के दूसरे एल्बम पर उचित रूप से शीर्षक दिया गया । भले ही "क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" उस समय एक के रूप में जारी नहीं किया गया था, यह लेड ज़ेप्पेलिन के सबसे सम्मानित गीतों में से एक बन गया है।
"रियानॉन" (फ्लीटवुड मैक)
जिमी इवोइन अमेरिकी आइडल सीजन 10 के शीर्ष 3 प्रतियोगी के लिए अपने गीत विकल्पों के साथ तीन-तीन-तीन गए। हेली रेनहार्ट के लिए उनका "रियानान" का चयन प्रेरित था, और हेली एक कमजोर, परिष्कृत पल के साथ आया। जब "रियानॉन" को अपने स्वयं के शीर्षक वाले एल्बम से 1 9 76 में फ्लीटवुड मैक द्वारा एकल के रूप में रिलीज़ किया गया था, तो यह पॉप चार्ट पर नंबर 11 तक पहुंचने में बड़ी सफलता थी। हालांकि, यह सफलता एक कीमत के साथ आई, क्योंकि कई श्रोताओं ने गीत और उसके लेखक स्टीवी निक्स को जादूगर के साथ जोड़ा।
"आप Oughta पता" (एलानिस Morissette)
शो को लपेटकर और न्यायाधीशों के पसंद के गाने हेली रेनहार्ट थे, जिन्होंने एलानिस मॉरिसेट के "यू ओघटा नो" के एक निश्चित रूप से मिश्रित संस्करण में बदल दिया। सभी तीन न्यायाधीशों ने कोरस को एक हाइलाइट के रूप में उद्धृत किया, लेकिन छंदों पर हैली रेनहार्ट की डिलीवरी थोड़ा सा फ्लैट थी। आश्चर्यजनक रूप से, "आप ओघटा नो" अपने शुरुआती 1995 की रिलीज में कभी भी बिलबोर्ड हॉट 100 तक नहीं पहुंचे क्योंकि मावेरिक / वार्नर ब्रदर्स रिकॉर्ड्स ने गीत के लिए कभी भी एक एकल रिलीज नहीं किया था, जिससे गीत चार्ट के लिए अपात्र था, लेकिन एल्बम जगज्ड लिटिल पिल्ल को बहुपक्षीय स्थिति में कैटापल्ट कर रहा था। यह अगले वर्ष तक नहीं था जब "यू ओग्टा नो" को "यू लर्न" के फ्लिप पक्ष के रूप में शामिल किया गया था, जो अंततः गीत 100 पर दिखाई देता था, जो छः नंबर तक पहुंच गया था।
"ब्रीथेलेस" - कोरिने बेली राय (1 सेंट हॉलीवुड वीक सोलो)
"कैरी ऑन वेवर्ड सोन" - कान्सास (हॉलीवुड समूह)
"भगवान आशीर्वाद बच्चे" - बिली हॉलिडे (अंतिम हॉलीवुड वीक सोलो)
"बेबी इट्स यू" - द शियरलेल्स (टॉप 40)
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बैकस्टोरीः हेली रेनहार्ट ने मूल रूप से अमेरिकी आइडल के सीज़न नौ के लिए कोशिश की, लेकिन उसे अपनी तकनीक पर काम करने और वापस आने के लिए कहा गया। न्यायाधीशों की सलाह पर ध्यान देते हुए, वह सीजन दस में तीसरे स्थान पर रही। "ओह! डार्लिंग" हेलि रेनहार्ट ने मूल रूप से अमेरिकी आइडल के सीजन नौ के लिए ऑडिशन किया था और कहा गया था कि वह काफी तैयार नहीं थी लेकिन फिर से कोशिश करने के लिए, जिसने दस सीज़न में किया था। उसके मिल्वौकी ऑडिशन के लिए, बीटल्स के क्लासिक "ओह! डार्लिंग" का उसका कवर बहुत था स्टाइलिज्ड और थोड़ी सी जगह पर, लेकिन उसने वादा दिखाया जिसने सभी तीन न्यायाधीशों को हॉलीवुड के माध्यम से वोट देने के लिए प्रेरित किया। "ओह! डार्लिंग" एबी रोड पर दिखाई दी, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में कभी भी एक के रूप में रिलीज़ नहीं हुई थी। बी गेज के रॉबिन गिब ने एक नौ सत्तर के दशक में एसजीटी मिर्च के लोनली हार्ट्स क्लब बैंड मूवी के लिए गीत रिकॉर्ड किया और पॉप चार्ट पर गीत # पंद्रह पर लिया। अमेरिकी आइडल पर सीज़न नौ के सेमीफाइनल दौर के दौरान केटलन एपपरलीपर ने गीत का प्रदर्शन किया। "फॉलिन" " आपके पूरे जीवन में कुछ गाने हैं जिन्हें आप पहली बार याद कर सकते हैं, और आमतौर पर यह गीत अनोखा था और आपके साथ एक तार था। ऐसे कई लोगों के लिए ऐसा मामला है जो पहली बार याद करते हैं कि उन्होंने एलिसिया कीज़ के पहले एकल "फॉलिन" को सुना था, जिसे दो हज़ार एक में दुनिया में प्रदर्शित किया गया था। यह गीत प्रतिभा के साथ इतना लोकप्रिय रहा है कि इसे इस्तेमाल होने से प्रतिबंधित किया गया है ऑस्ट्रेलियाई आइडल, लेकिन हेली रेनहार्ट ने इसे शीर्ष चौबीस सप्ताह के दौरान लिया और इसे अपनी सफलता के साथ खुद बनाने की कोशिश की। "ब्लू" "मैं तुम्हारा बच्चा आज रात हूँ" "ब्लू" के शीर्ष बारह सप्ताह के प्रदर्शन के बाद थोड़ा सा फ्लैट गिरने के बाद हेली रेनहार्ट अपनी छवि को हिलाकर देख रहे थे । न्यायाधीशों ने हेलि रेनहार्ट की संगीत दिशा पर सही तरीके से सवाल उठाया, क्योंकि ऐसा लगता था कि वह हर हफ्ते संगीत की एक अलग शैली करता है, और जेनिफर लोपेज़ ने अपनी अजीब चालों का हवाला दिया। "मैं आपका बच्चा आज रात" शीर्षक ट्रैक था और एक निन्यानवे शून्य में रिलीज हुई व्हिटनी ह्यूस्टन के तीसरे एल्बम से पहला एकल था, और यह व्हिटनी का आठवां नंबर एकल एकल बन गया। "आप वास्तव में मुझे पकड़ लिया है" हेली रेनहार्ट के शीर्ष ग्यारह सप्ताह में "यू आर रीली गॉट ए होल्ड ऑफ मी" का प्रदर्शन लाइव शो के दौरान पहला था जहां सभी तीन न्यायाधीशों ने अपनी उदासीन, भावनात्मक स्वर वितरण के लिए उच्च प्रशंसा की। जबकि एक अच्छा प्रदर्शन अमेरिकी आइडल पर एक प्रतियोगी को बचाने की दिशा में एक लंबा सफर तय करेगा, सीजन दस पर गायकों की गुणवत्ता इतनी ऊंची थी कि हैली रेनहार्ट को गायन प्रतियोगिता में अग्रदूत के रूप में परिभाषित करने के लिए एक बड़ा संघर्ष होगा। जबकि अधिकांश लोग स्मोकी रॉबिन्सन के साथ "यू आर रीली गॉट ए होल्ड ऑफ मी" को जोड़ते हैं, लेकिन गीत को केवल चमत्कारों में श्रेय दिया जाता था जब इसे एक नौ बासठ में रिलीज़ किया गया था और पॉप और आर एंड बी चार्ट दोनों में शीर्ष दस तक पहुंच गया था। "बेनी एंड द जेट्स" पीस ऑफ माई हार्ट " हेली रेनहार्ट ने अमेरिकी आइडल सीज़न दस के शीर्ष ग्यारह रेडक्स सप्ताह के दौरान बहुत सी गति उठाई, जब उन्होंने "बेनी और जेट्स" का प्रदर्शन किया, और न्यायाधीशों ने महसूस किया कि शीर्ष नौ सप्ताह के दौरान गति जारी है, जिसका प्रदर्शन "टुकड़ा" मेरा दिल। " हालांकि गीत को आम तौर पर जेनिस जोप्लिन को श्रेय दिया जाता है, लेकिन उनकी संख्या बारह हिट के लिए उचित क्रेडिट बिग ब्रदर और होल्डिंग कंपनी को जाता है, जो जेनिस जोप्लिन ने नेतृत्व किया था। "पीस ऑफ माई हार्ट" मूल रूप से एक नौ सरसठ में एर्मा फ्रैंकलिन द्वारा दर्ज किया गया था, लेकिन देश के प्रशंसकों को इसे एक निन्यानवे चार से फेथ हिल की दूसरी नंबर एक हिट के रूप में पहचाना जाएगा। "मुझे कॉल करें" अमेरिकी आइडल के सीजन दस में, गायकों की गुणवत्ता इतनी अधिक थी कि न्यायाधीशों की औसत समीक्षा भी चिंता का कारण हो सकती है। हेली रेनहार्ट ने शीर्ष आठ सप्ताह के दौरान ब्लॉन्डी के "कॉल मी" गायन के दौरान दुविधा का सामना किया, जिसमें अमेरिकी गिगोलो फिल्म शामिल थी। जबकि उनका प्रदर्शन ऊर्जावान था और उनके वोकल्स ठीक थे, हेली को दर्शकों से जुड़ने में कोई समस्या हो सकती थी। ब्लोंडी ने एक नौ अस्सी में "कॉल मी" के साथ छह सप्ताह में छह सप्ताह बिताए, जिसने उस गीत में पूरे साल के नंबर एक गीत का योगदान दिया। "रोलिंग इन द दीप" जब न्यायाधीश जेनिफर लोपेज़ सीजन दस में अमेरिकी आइडल में शामिल हो गए, तो कुछ चिंता थी कि वह सिर्फ पाउला अब्दुल को "अच्छे न्यायाधीश" के रूप में बदल सकती हैं। हालांकि वह पैनल पर एक दोस्ताना उपस्थिति रही है, जेनिफर लोपेज ने पूरे सत्र में प्रतिभागियों को कुछ स्वागत रचनात्मक प्रतिक्रिया भी जोड़ा है। हेली रेनहार्ट ने उस फीडबैक को प्राप्त किया जब लोपेज़ ने संकेत दिया कि रेनहार्ट " रोलिंग इन द दीप " के शीर्ष सात सप्ताह की प्रस्तुति में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा रहा था। एडेल ने अपना पहला यूएस नंबर एक "रोलिंग इन दी दीप" के साथ बनाया, जो प्रसारण के समय दस नंबर पर पहुंच गया था। हैली रेनहार्ट ने गीत का प्रदर्शन करने के बाद सुबह आईट्यून्स एकल चार्ट पर नंबर एक पर लौट आया। "मैं पृथ्वी को महसूस करता हूं" अमेरिकन आइडल सीज़न दस पर शीर्ष छः रात का पहला युगल हेली रेनहार्ट और केसी अब्राम के पास गया, जिन्होंने "आई महसूस महसूस किया। " केसी अब्राम और हेली रेनहार्ट के बीच रसायन इतनी मजबूत थी कि न्यायाधीश स्टीवन टायलर ने केसी से पूछा कि वह कितने समय से हैली से प्यार कर रहा था, जो दोनों के मित्रता के स्तर के बारे में अफवाहें और अटकलों को बढ़ावा देता था। जबकि "आई फेल द अर्थ मूव" कैरोल किंग के पहले नंबर एक सिंगल के साथ "इट्स टू लेट" के साथ बन गया, इस गीत ने पॉप गायक मार्टिका के लिए एक नौ आठ नौ में दूसरी बार बिलबोर्ड हॉट एक सौ को भी मारा, जिसने अपनी तीसरी शीर्ष चालीस हिट उनका पहला आत्म-शीर्षक एल्बम। "खूबसूरत" यदि अमेरिकी आइडल ने सबसे बेहतर प्रतियोगी के लिए अतिरिक्त अंक दिए हैं, तो हैली रेनहार्ट फिर से नीचे तीन में दिखाई नहीं देगी। कैरोल किंग के "सुंदर" के शीर्ष छः प्रदर्शन से पता चला कि उनकी आवाज शक्तिशाली और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य है। "सुंदर" कैरोल किंग की एक नौ इकहत्तर की उत्कृष्ट कृति टेपेस्ट्री से एक एल्बम काट था, और रिचर्ड मार्क्स और बारब्रा स्ट्रिसेंड जैसे कलाकारों द्वारा कवर किया गया है। "तुम और मैं" हेली रेनहार्ट को शीर्ष तीन सप्ताह में गाए जाने के लिए एक निरस्त गीत का चयन करने के लिए सभी तीन न्यायाधीशों से अमेरिकी आइडल सीज़न दस की सबसे भ्रमित और निराशाजनक प्रतिक्रिया मिली। असल में, रिलीज़ किया गया गीत लेडी गागा की अत्यधिक प्रत्याशित तीसरी सीडी से एक अग्रिम ट्रैक था, लेकिन जेनिफर लोपेज़ और रैंडी जैक्सन दोनों ने केवल अपने गीत की पसंद की आलोचना की बजाय यह उल्लेख किया कि उसके स्वर कितने मजबूत थे या उन्होंने क्या किया अधिक समकालीन गीत। "आप और मैं" लेडी गागा की तीसरी सीडी बोर्न द वे से एक रॉबर्ट जॉन "मठ" लेंज-निर्मित ट्रैक है, जिसे चौबीस मई, दो हज़ार ग्यारह को हेल रेनहार्ट ने गीत गाए जाने के तीन हफ्ते बाद रिलीज होने वाला था। "राइजिंग सन का घर" अमेरिकन आइडल सीजन दस के शीर्ष पाँच सप्ताह की हाइलाइट, और संभवतः पूरे सीज़न में, हैली रेनहार्ट द्वारा "हाउस ऑफ द राइजिंग सन" का शक्तिशाली प्रदर्शन था। गीत के पहले नोट्स से जहां हैली ने पूरे बैंड के साथ शक्तिशाली बंद करने के लिए कैपेला गाया था, हैली दो मिनट के भीतर दावेदार से आगे दौड़ने वाली थी, और उन लोगों को भ्रमित कर रहा था जो दस सत्र के लिए विजेता चुनने की कोशिश कर रहे थे। "राइजिंग हाउस सूर्य "अट्ठारह वीं शताब्दी में एक लोक गीत के रूप में शुरू हुआ, लेकिन आधुनिक सफलता मिली जब जानवरों ने गीत का एक रॉक संस्करण रिकॉर्ड किया और इसे एक नौ चौंसठ में अमेरिका और ब्रिटेन में पॉप चार्ट पर नंबर एक पर ले गया। "अर्थ गीत" अमेरिकी आइडल जैसे शो को देखना असंभव है और एक सौ% निष्पक्ष रहता है, और यही वह तरीका है कि वास्तविकता टीवी निर्माता वफादारी बनाने का प्रयास करते हैं जो दर्शकों को हर हफ्ते वापस आते रहते हैं। हेली रेनहार्ट की वफादारी को शीर्ष चार सप्ताह में परीक्षण में डाल दिया गया था , क्योंकि प्रशंसकों ने जेनिफर लोपेज़ और रैंडी जैक्सन की "अर्थ सॉन्ग" के कवर के बारे में आलोचना की थी। जबकि रैंडी जैक्सन ने कहा कि हैली रेनहार्ट ने गीत के अंत में चिल्लाया और जेनिफर लोपेज़ ने केवल गीत पसंद के बारे में बात की, हैली के प्रशंसकों ने एक प्रभावशाली प्रतिपादन सुना। "पृथ्वी गीत" संयुक्त राज्य अमेरिका में माइकल जैक्सन के लिए केवल एक मामूली सफलता थी, लेकिन यह एक निन्यानवे पाँच के अंत में चौदह देशों में नंबर एक रैंकिंग को पीछे छोड़कर कहीं और भारी हिट थी। "मैं " "क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" अमेरिकी आइडल सीजन दस में हेली रेनहार्ट के पास एक और शानदार क्षण था, जो शीर्ष तीन सप्ताह के अपने पहले गीत के रूप में लेड ज़ेपेल्लिन गाते थे। हालांकि प्रदर्शन के दौरान हेली रेनहार्ट गिर गया, फिर भी वह वापस आ गई और दर्शकों को उसके जादू के नीचे रखा। हेली रेनहार्ट के स्पिल के नेतृत्व में न्यायाधीश स्टीवन टायलर ने कहा, "यह नहीं है कि आप कितनी बार गिरते हैं, यह कितना बार उठता है," एक उद्धरण जिसने शीर्ष तीन पर हैली के रन को सारांशित किया। "क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" लेड ज़ेप्पेलिन के दूसरे एल्बम पर उचित रूप से शीर्षक दिया गया । भले ही "क्या है और क्या कभी नहीं होना चाहिए" उस समय एक के रूप में जारी नहीं किया गया था, यह लेड ज़ेप्पेलिन के सबसे सम्मानित गीतों में से एक बन गया है। "रियानॉन" जिमी इवोइन अमेरिकी आइडल सीजन दस के शीर्ष तीन प्रतियोगी के लिए अपने गीत विकल्पों के साथ तीन-तीन-तीन गए। हेली रेनहार्ट के लिए उनका "रियानान" का चयन प्रेरित था, और हेली एक कमजोर, परिष्कृत पल के साथ आया। जब "रियानॉन" को अपने स्वयं के शीर्षक वाले एल्बम से एक नौ छिहत्तर में फ्लीटवुड मैक द्वारा एकल के रूप में रिलीज़ किया गया था, तो यह पॉप चार्ट पर नंबर ग्यारह तक पहुंचने में बड़ी सफलता थी। हालांकि, यह सफलता एक कीमत के साथ आई, क्योंकि कई श्रोताओं ने गीत और उसके लेखक स्टीवी निक्स को जादूगर के साथ जोड़ा। "आप Oughta पता" शो को लपेटकर और न्यायाधीशों के पसंद के गाने हेली रेनहार्ट थे, जिन्होंने एलानिस मॉरिसेट के "यू ओघटा नो" के एक निश्चित रूप से मिश्रित संस्करण में बदल दिया। सभी तीन न्यायाधीशों ने कोरस को एक हाइलाइट के रूप में उद्धृत किया, लेकिन छंदों पर हैली रेनहार्ट की डिलीवरी थोड़ा सा फ्लैट थी। आश्चर्यजनक रूप से, "आप ओघटा नो" अपने शुरुआती एक हज़ार नौ सौ पचानवे की रिलीज में कभी भी बिलबोर्ड हॉट एक सौ तक नहीं पहुंचे क्योंकि मावेरिक / वार्नर ब्रदर्स रिकॉर्ड्स ने गीत के लिए कभी भी एक एकल रिलीज नहीं किया था, जिससे गीत चार्ट के लिए अपात्र था, लेकिन एल्बम जगज्ड लिटिल पिल्ल को बहुपक्षीय स्थिति में कैटापल्ट कर रहा था। यह अगले वर्ष तक नहीं था जब "यू ओग्टा नो" को "यू लर्न" के फ्लिप पक्ष के रूप में शामिल किया गया था, जो अंततः गीत एक सौ पर दिखाई देता था, जो छः नंबर तक पहुंच गया था। "ब्रीथेलेस" - कोरिने बेली राय "कैरी ऑन वेवर्ड सोन" - कान्सास "भगवान आशीर्वाद बच्चे" - बिली हॉलिडे "बेबी इट्स यू" - द शियरलेल्स
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असदुद्दीन ओवैसी यूपी चुनाव के मद्देनजर तीन दिन का यूपी दौरा करेंगे। इस दौरे पर वह अयोध्या भी जाएंगे।
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 6, 7 व 8 सितंबर को लखनऊ आएंगे। वह यहां रुदौली (अयोध्या) और सुल्तानपुर में होने वाली पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे। यह जानकारी पार्टी प्रवक्ता आसिम वकार ने दी।
बता दें कि जैसे-जैसे यूपी के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं राज्य का सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। ओवैसी यूपी में भागीदारी संकल्प मोर्चा के बैनर तले कई दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे पर अब इस मोर्चे पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों मुरादाबाद में होने वाली सभा में राजभर नहीं पहुंचे जिससे इस मोर्चे के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।
बता दें भाजपा से अलग होने के बाद से ही राजभर ने छोटे राजनीतिक दलों को मिलाकर भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में ओवैसी की पार्टी समेत 9 अन्य दल भी शामिल हैं।
सियासी गलियारों में यह भी चर्चाएं हैं कि सीटों के बंटवारे पर सहमति न बन पाने की वजह से ओवैसी ने मोर्चा के बैनर तले चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। इसी वजह से ओम प्रकाश राजभर ने भी ओवैसी की सभा से दूरी बना ली है।
सियासी चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले दिनों मुरादाबाद के दौरे पर रहे ओम प्रकाश राजभर ने वहां के सर्किट हाउस में प्रदेश के पंचायती राज मंत्री से भूपेन्द्र चौधरी से मुलाकात की थी। इसे लेकर भी दोनों नेताओं के बीच में अनबन पैदा हो गई है। वहीं दूसरी ओर इस मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में भी हलचल मचा दी थी। हालांकि दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को भी निजी मुलाकात बताया था।
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असदुद्दीन ओवैसी यूपी चुनाव के मद्देनजर तीन दिन का यूपी दौरा करेंगे। इस दौरे पर वह अयोध्या भी जाएंगे। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी छः, सात व आठ सितंबर को लखनऊ आएंगे। वह यहां रुदौली और सुल्तानपुर में होने वाली पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे। यह जानकारी पार्टी प्रवक्ता आसिम वकार ने दी। बता दें कि जैसे-जैसे यूपी के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं राज्य का सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। ओवैसी यूपी में भागीदारी संकल्प मोर्चा के बैनर तले कई दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे पर अब इस मोर्चे पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों मुरादाबाद में होने वाली सभा में राजभर नहीं पहुंचे जिससे इस मोर्चे के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें भाजपा से अलग होने के बाद से ही राजभर ने छोटे राजनीतिक दलों को मिलाकर भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में ओवैसी की पार्टी समेत नौ अन्य दल भी शामिल हैं। सियासी गलियारों में यह भी चर्चाएं हैं कि सीटों के बंटवारे पर सहमति न बन पाने की वजह से ओवैसी ने मोर्चा के बैनर तले चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। इसी वजह से ओम प्रकाश राजभर ने भी ओवैसी की सभा से दूरी बना ली है। सियासी चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले दिनों मुरादाबाद के दौरे पर रहे ओम प्रकाश राजभर ने वहां के सर्किट हाउस में प्रदेश के पंचायती राज मंत्री से भूपेन्द्र चौधरी से मुलाकात की थी। इसे लेकर भी दोनों नेताओं के बीच में अनबन पैदा हो गई है। वहीं दूसरी ओर इस मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में भी हलचल मचा दी थी। हालांकि दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को भी निजी मुलाकात बताया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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न्यूजीलैंड 3:49. 821 के समय के साथ शीर्ष पर रही,
भारतीय दल पीवी सिंधू और मनप्रीत सिंह की अगुआई में स्टेडियम में पहुंचा। भारतीय दल के सभी खिलाड़ी पारंपरिक परिधान में थे।
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Begin typing your search above and press return to search. न्यूजीलैंड तीन:उनचास. आठ सौ इक्कीस के समय के साथ शीर्ष पर रही, भारतीय दल पीवी सिंधू और मनप्रीत सिंह की अगुआई में स्टेडियम में पहुंचा। भारतीय दल के सभी खिलाड़ी पारंपरिक परिधान में थे।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के पटपड़गंज विधानसभा सीट पर 8 फरवरी को हुए मतदान की काउंटिंग चल रही है। पटपड़गंज विधानसभा सीट के लिए मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई। छठे राउंड के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री व आप नेता मनीष सिसोदिया 2184 वोटों से पीछे चल रहे हैं। इस सीटे अब भाजपा रविन्द्र सिंह नेगी आगे चल रहे हैं। शनिवार को हुए मतदान में पटपड़गंज विधानसभा सीट में 62. 59 फीसदी वोटिंग हुई थी।
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शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। दिल्ली विधानसभा चुनाव दो हज़ार बीस के पटपड़गंज विधानसभा सीट पर आठ फरवरी को हुए मतदान की काउंटिंग चल रही है। पटपड़गंज विधानसभा सीट के लिए मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई। छठे राउंड के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री व आप नेता मनीष सिसोदिया दो हज़ार एक सौ चौरासी वोटों से पीछे चल रहे हैं। इस सीटे अब भाजपा रविन्द्र सिंह नेगी आगे चल रहे हैं। शनिवार को हुए मतदान में पटपड़गंज विधानसभा सीट में बासठ. उनसठ फीसदी वोटिंग हुई थी।
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अबूधाबी के क्राउन प्रिंस और संयुक्त अरब इमारात के डिप्टी सुप्रिम कमान्डर शैख़ मुहम्मद बिन ज़ाएद अन्नहयान एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल के साथ एक दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे जहां उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से वन आन वन मुलाक़ात भी की।
इस्लामाबाद के नूर ख़ान एयरबेस पर अबूधाबी के क्राउन प्रिंस का हवाई जहाज़ उतरा जहां प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें गुलदस्ता पेश किया गया जिसके बाद इमरान ख़ान ने क्राउन प्रिंस के लिए ख़ुद गाड़ी चलाते हुए एयरपोर्ट से रवाना हुए।
इसके बाद इमरान ख़ान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस की वन आन वन मुलाक़ात हुई जिसमें आपसी रुचि के द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।
इस मुलाक़ात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों सहित आपसी रुचि के मुद्दों तथा क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर विचार विमर्श किया गया।
ज्ञात रहे कि इमाराती क्राउन प्रिंस शैख़ मुहम्मद बिन ज़ाएद अन्नहयान अपना एक दिवसीय दौरा पूरा करके वापस स्वदेश रवाना हो गये। (AK)
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अबूधाबी के क्राउन प्रिंस और संयुक्त अरब इमारात के डिप्टी सुप्रिम कमान्डर शैख़ मुहम्मद बिन ज़ाएद अन्नहयान एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल के साथ एक दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे जहां उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से वन आन वन मुलाक़ात भी की। इस्लामाबाद के नूर ख़ान एयरबेस पर अबूधाबी के क्राउन प्रिंस का हवाई जहाज़ उतरा जहां प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें गुलदस्ता पेश किया गया जिसके बाद इमरान ख़ान ने क्राउन प्रिंस के लिए ख़ुद गाड़ी चलाते हुए एयरपोर्ट से रवाना हुए। इसके बाद इमरान ख़ान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस की वन आन वन मुलाक़ात हुई जिसमें आपसी रुचि के द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। इस मुलाक़ात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों सहित आपसी रुचि के मुद्दों तथा क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर विचार विमर्श किया गया। ज्ञात रहे कि इमाराती क्राउन प्रिंस शैख़ मुहम्मद बिन ज़ाएद अन्नहयान अपना एक दिवसीय दौरा पूरा करके वापस स्वदेश रवाना हो गये।
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काम के लिए खोज हमारे कई उत्तेजितहमवतन। आर्थिक संकट के समय में, भविष्य में आत्मविश्वास से देखने के लिए जब आवास और सांप्रदायिक सेवाओं और भोजन के लिए नियमित रूप से बढ़ रही कीमतों बहुत महत्वपूर्ण है। स्वाभाविक रूप से, यह केवल स्थिर आपरेशन के मामले में संभव है। लेकिन इन समस्याओं के साथ कई आवेदकों से उत्पन्न होती हैं। सब के बाद, पहली साक्षात्कार में यह मुश्किल है कि यह समझने में मुश्किल है कि नियोक्ता कितना भरोसा है और क्या यह नए सदस्य के श्रम को उचित राशि में भुगतान करेगा। तुम भी एक ऐसी ही समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप कर्मचारियों से विभिन्न वेबसाइटों प्रतिक्रिया पर इंटरनेट पर रखा जाएगा। समूह "Guta" कंपनियों की संख्या है, जो अक्सर टिप्पणी लिखने के लिए संदर्भित करता है। हालांकि, ये समझना इतना आसान नहीं है, क्योंकि वे सकारात्मक और नकारात्मक में विभाजित हैं, जो नौकरी चाहने वालों को इस कंपनी पर लागू करने की समझ को काफी जटिल बनाता है। आज हमारे लेख समूह के लिए समर्पित "पेट।" नियोक्ता के बारे में कई समीक्षा पाठकों को अपनी राय लेने और संगठन के साथ सहयोग की संभावनाओं की गणना करने में मदद करेंगे।
कंपनी समूह "गुत", स्टाफ समीक्षाजो विभिन्न शहरों से संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर तैनात हैं, रूस में अच्छी तरह से जाना जाता है। यह पिछली शताब्दी के अंतिम अस्सी के दशक में गठित था और अठारह साल तक सफलतापूर्वक विकसित हो रहा था। तिथि करने के लिए, "Guta" की संपत्ति लगभग दस अरब यूरो है, और संगठन के कार्यालयों और शाखाएं हमारे देश के प्रमुख शहरों में स्थित हैं।
यदि आप जानना चाहते हैं कि वास्तव में क्या कर रहा हैसमूह "गुटा", कर्मचारियों से प्रतिक्रिया आप इस मुद्दे को समझने में मदद करेंगे। तथ्य यह है कि कंपनी सबसे बड़ी निवेश और औद्योगिक संगठनों में से एक है। इसमें पूरी तरह से अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में बहुत छोटी छोटी कंपनियां शामिल हैं।
"गुटा" समूह के कर्मचारियों की समीक्षा कर सकते हैंसंगठन का मुख्य कार्यालय कहां स्थित है, जिसमें सभी साक्षात्कार आयोजित किए गए हैं इसका सुझाव देना। आमतौर पर कर्मियों के विभाग के साथ एक परिचित ऑरलिकोव लेन में घर में नंबर पांच (निर्माण तीन) पर होता है।
हमने पहले ही स्पष्ट किया है कि कंपनियों के समूहगतिविधि के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रुचियों को वितरित करता है तिथि करने के लिए, समूह "गटा" के काम की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (समीक्षा में इस तथ्य के बारे में जानकारी शामिल है कि अधिकांश क्षेत्रों में रिक्त स्थान दिखाई देते हैं) निम्न हैंः
बहुत समय पहले कंपनी आवासीय भवनों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं ले पाई और कई आशाजनक परियोजनाओं को लागू करना शुरू कर दिया।
समूह "गुट्टा" में काम की समीक्षा से किया जा सकता हैनिष्कर्ष और उन सिद्धांतों के बारे में जिन पर संगठन की पूरी गतिविधि आधारित है। सबसे पहले, कंपनी उन उत्पादों का उत्पादन करना चाहती है जो परंपरागत नुस्खा और अभिनव प्रौद्योगिकियों को जोड़ती हैं। यह कन्फेक्शनरी उद्योग में सबसे स्पष्ट रूप से देखा जाता है। कारखानों में जो "गुट्टा" समूह का हिस्सा हैं, पूर्व क्रांतिकारी और सोवियत काल के ध्यान से संरक्षित नुस्खा के अनुसार मिठाई का उत्पादन करते हैं। हालांकि, सभी उत्पादन लाइन आधुनिक उपकरणों से लैस हैं, और कार्यशाला विशेषज्ञ मूल रूप से नई उत्पाद लाइन विकसित करते हैं। यह विशेष रूप से मिठाई पैदा करने का वादा करता है जो एक स्वस्थ आहार के लिए उपयुक्त हैं। कुछ साल पहले, ऐसा उत्पादन बस असंभव था।
नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, समूह "गुटा" ने पायान केवल रूसी संघ के क्षेत्र में बाजार, इसके उत्पादों का उपयोग दुनिया भर के कई देशों में लगभग सौ लाख पचास लाख लोगों द्वारा किया जाता है। अफ्रीका, चीन और यूरोप के बाजारों में प्रवेश करने के लिए बातचीत चल रही है।
यह ध्यान देने योग्य है कि समूह "गुट्टा" में बहुत कुछ हैव्यवसाय के विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने वाले अन्य रूसी संघों के बीच एक अच्छी प्रतिष्ठा। "गुट्टा" बहुत गतिशील रूप से बढ़ रहा है, आज के लिए यह कई बाजार खंडों में मौजूद है। कंपनी नए मेडिकल उपकरण विकसित करती है, खाद्य उत्पादों का उत्पादन करती है, बीमा और विभिन्न दिलचस्प और आशाजनक परियोजनाओं में निवेश करती है।
तेरह साल पहले, समूह "गुट्टा" का सदस्य थाबैंक, लेकिन कुछ समस्याओं के संबंध में इसे किसी तीसरे पक्ष के संगठन द्वारा खरीदा गया था। आज तक, कंपनी के मामले अच्छी तरह से चल रहे हैं, और इसे पेशेवर कर्मचारियों की आवश्यकता है जो इसे विकास के नए स्तर तक पहुंचने में मदद करेंगे।
चूंकि "गुट्टा" में इसकी उपस्थिति पाई जाती हैरूस में पचास शहरों, यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि इस संगठन के लिए कितने लोग काम करते हैं। विभिन्न उद्यमों में आज तीस हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। वे सभी बेहद पेशेवर हैं और काफी गंभीर चयन पारित कर चुके हैं।
मॉस्को में समूह "गुटा" के कर्मचारियों की समीक्षा (2016)वर्ष) कहानियों से भरा हुआ है कि साक्षात्कार में से एक में उन्हें झूठ डिटेक्टर पर भी चेक किया गया था। और केवल निरीक्षण के परिणामों के आधार पर, किसी विशेष कर्मचारी को किराए पर लेने का निर्णय लिया गया था। लेख के निम्नलिखित खंडों में, हम मॉस्को, बेलगोरोड और रोस्तोव से कंपनी के कर्मचारियों द्वारा छोड़ी गई टिप्पणियों की समीक्षा और विश्लेषण करेंगे। यहां संगठन की काफी बड़ी शाखाएं स्थित हैं, इसलिए पाठक इस नियोक्ता पर एक राय बनाने में आसान होगा।
स्वाभाविक रूप से, केवल सकारात्मक तरीके से लिखी गई वास्तविक टिप्पणियों की कल्पना करना मुश्किल है। इसलिए, हम इस संगठन में काम करने के पेशेवरों और विपक्ष दोनों पर विचार करेंगे।
यदि आप समय पर भुगतान में बहुत महत्वपूर्ण हैंमजदूरी, कंपनी जिसे आप निश्चित रूप से पसंद करेंगे। सभी कर्मचारियों ने ध्यान दिया कि बैंक कार्ड में स्थानांतरण का प्रबंधन हमेशा समय पर होता है। जब मजदूरी का दिन दिन बंद हो जाता है, भुगतान पहले किए जाते हैं ताकि लोग पैसे के बिना नहीं रहें। कर्मचारियों की इस तरह की देखभाल आधुनिक उद्यमियों के लिए बहुत ही अनैच्छिक है और "गुट्टा" को विश्वसनीय नियोक्ता के रूप में प्रमाणित करती है।
कंपनी और उन Muscovites के बारे में अच्छी तरह से बात करते हैं,जो तेजी से काम कर रहे टेम्पो और गतिविधियों के निरंतर परिवर्तन पसंद करते हैं। यहां ऐसी लय काफी आम है, इसलिए केवल एक निश्चित चरित्र गोदाम वाले लोग काम से निपट सकते हैं।
जो लोग नौकरी पाने की योजना बनाते हैंकंपनी, इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इसे नए आने वालों के साथ गड़बड़ करने के लिए स्वीकार नहीं किया गया है और उन्हें शुरुआत में उनके व्यवसाय के पेशेवरों के रूप में माना जाता है। इसलिए, उन्हें नई स्थिति में पहले दिन से पूरी तरह से पूछा जाता है। यह, कई कर्मचारियों के अनुसार, तेजी से पेशेवर विकास की ओर जाता है। आखिरकार, हर कोई वह सब दिखाना चाहता है जो वह करने में सक्षम है। यह मत भूलना कि टीम में सफलतापूर्वक किए गए प्रोजेक्ट के लिए आपकी प्रशंसा नहीं की जाएगी, लेकिन असफलता के लिए व्यावहारिक रूप से दुनिया से बाहर रह जाएगी। यह रवैया कई बड़े निगमों के विशिष्ट है।
"गट" Muscovites में काम के minuses के लिए निम्नलिखित अंक शामिल हैंः
बेशक, कुछ के लिए, ये नुकसान महत्वहीन हैं, लेकिन दूसरों के लिए - वे डिवाइस के काम करने के लिए एक गंभीर बाधा बन जाएंगे।
"गुट्टा" रखने की रोस्तोव शाखा में काम के बारे में प्रतिक्रियाओं को ढूंढना काफी आसान है। उनके पास सकारात्मक और नकारात्मक विशेषताएं भी होती हैं। हम दोनों, और दूसरों को उद्धृत करेंगे।
प्लस के लिए, कई कर्मचारी लाभ की बहुतायत का उल्लेख करते हैं। यह इस तथ्य के कारण संभव हो गया कि समूह में कुछ छोटी कंपनियां शामिल हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख पदों पर कब्जा करती हैं।
यह अच्छा है कि कंपनी के बारे में गंभीर हैसुरक्षा सावधानी बरतें। ब्रीफिंग्स और व्यायाम साल में कई बार आयोजित किए जाते हैं। प्रत्येक कर्मचारी जानता है कि कैसे व्यवहार करना है और आग के मामले में या अन्य चरम परिस्थितियों के मामले में कहां जाना है।
कई युवा और दोस्ताना स्टाफ मनाते हैंजो उन कर्मचारियों के लिए अत्यधिक सम्मानित है जो समझौता ढूंढने और अन्य कर्मचारियों के साथ बातचीत करने में सक्षम हैं। ऐसे गुण महत्वपूर्ण होते हैं जब आप एक विशाल होल्डिंग में काम करते हैं, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न पात्रों और महत्वाकांक्षाओं वाले कई लोग इकट्ठे होते हैं।
"Guta" के कुछ पूर्व पेशेवरों, कंपनी में कई वर्षों के लिए काम किया है और आवश्यक अनुभव प्राप्त, अपने स्वयं के व्यवसाय को खोलने के लिए सक्षम थे और इस क्षेत्र में कार्यान्वित किया जा रहा था।
नकारात्मक समीक्षाओं में से पहचान की जा सकती हैकार्यालयों में वीडियो कैमरों की बहुतायत से असंतोष, हमेशा और हर जगह इलेक्ट्रॉनिक पास, इंटरनेट यातायात का सख्त नियंत्रण और मुफ्त नौकरी सुरक्षा सेवाओं के लिए आवेदकों की लंबी जांच के साथ जाना।
बेलगोरोड में समूह "गुटा" के बारे में समीक्षाओं में से एक बड़ा हैभाग सकारात्मक को संदर्भित करता है। कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रसन्न करना सामाजिक पैकेज है, जिसमें वार्षिक वार्षिक छुट्टी और बीमार छुट्टी शामिल है। कंपनी के प्रबंधन और उनके कर्मचारियों की किड्डी को अनदेखा न करें, छुट्टियों पर उन्हें उपहार दिए जाते हैं और विशेष आयोजन आयोजित किए जाते हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि उनके कर्मचारियों की देखभाल करनायह दृश्यमान और कार्यालयों के उपकरणों में है। गलियारे में ताजा पानी के साथ कूलर होते हैं, और वे पहले अनुरोध पर सभी आवश्यक उपकरणों से लैस होते हैं, उनके पास हमेशा एक बुफे, एक डाइनिंग रूम, माइक्रोवेव ओवन और कॉफी निर्माता के साथ आराम कमरे हैं।
कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि chelovekoorientirovannyh मानव संसाधन प्रबंधकों को स्पष्ट रूप से आवेदकों की गरिमा के लिए और उनके समय बर्बाद कर के बिना अपना काम कर रही है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना।
बेलगोरोड में काम के minuses से पहचान की जा सकती हैः
आम तौर पर, कर्मचारी नियोक्ता को जिम्मेदार और भरोसेमंद मानते हैं।
उपर्युक्त सभी को सारांशित करते हुए, हम यह कह सकते हैंसमूह "गुट्टा" युवा, मेहनती और महत्वाकांक्षी कर्मचारियों को किराए पर लेने में प्रसन्न होगा जो कंपनी को अपना खाली समय देने के लिए तैयार हैं। बदले में, होल्डिंग कंपनी अच्छी कामकाजी परिस्थितियों, समय पर मजदूरी, बोनस और सामाजिक गारंटी की गारंटी देती है। यहां पर आप कैरियर की सीढ़ी पर चढ़ाई कर सकते हैं।
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काम के लिए खोज हमारे कई उत्तेजितहमवतन। आर्थिक संकट के समय में, भविष्य में आत्मविश्वास से देखने के लिए जब आवास और सांप्रदायिक सेवाओं और भोजन के लिए नियमित रूप से बढ़ रही कीमतों बहुत महत्वपूर्ण है। स्वाभाविक रूप से, यह केवल स्थिर आपरेशन के मामले में संभव है। लेकिन इन समस्याओं के साथ कई आवेदकों से उत्पन्न होती हैं। सब के बाद, पहली साक्षात्कार में यह मुश्किल है कि यह समझने में मुश्किल है कि नियोक्ता कितना भरोसा है और क्या यह नए सदस्य के श्रम को उचित राशि में भुगतान करेगा। तुम भी एक ऐसी ही समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप कर्मचारियों से विभिन्न वेबसाइटों प्रतिक्रिया पर इंटरनेट पर रखा जाएगा। समूह "Guta" कंपनियों की संख्या है, जो अक्सर टिप्पणी लिखने के लिए संदर्भित करता है। हालांकि, ये समझना इतना आसान नहीं है, क्योंकि वे सकारात्मक और नकारात्मक में विभाजित हैं, जो नौकरी चाहने वालों को इस कंपनी पर लागू करने की समझ को काफी जटिल बनाता है। आज हमारे लेख समूह के लिए समर्पित "पेट।" नियोक्ता के बारे में कई समीक्षा पाठकों को अपनी राय लेने और संगठन के साथ सहयोग की संभावनाओं की गणना करने में मदद करेंगे। कंपनी समूह "गुत", स्टाफ समीक्षाजो विभिन्न शहरों से संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर तैनात हैं, रूस में अच्छी तरह से जाना जाता है। यह पिछली शताब्दी के अंतिम अस्सी के दशक में गठित था और अठारह साल तक सफलतापूर्वक विकसित हो रहा था। तिथि करने के लिए, "Guta" की संपत्ति लगभग दस अरब यूरो है, और संगठन के कार्यालयों और शाखाएं हमारे देश के प्रमुख शहरों में स्थित हैं। यदि आप जानना चाहते हैं कि वास्तव में क्या कर रहा हैसमूह "गुटा", कर्मचारियों से प्रतिक्रिया आप इस मुद्दे को समझने में मदद करेंगे। तथ्य यह है कि कंपनी सबसे बड़ी निवेश और औद्योगिक संगठनों में से एक है। इसमें पूरी तरह से अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में बहुत छोटी छोटी कंपनियां शामिल हैं। "गुटा" समूह के कर्मचारियों की समीक्षा कर सकते हैंसंगठन का मुख्य कार्यालय कहां स्थित है, जिसमें सभी साक्षात्कार आयोजित किए गए हैं इसका सुझाव देना। आमतौर पर कर्मियों के विभाग के साथ एक परिचित ऑरलिकोव लेन में घर में नंबर पांच पर होता है। हमने पहले ही स्पष्ट किया है कि कंपनियों के समूहगतिविधि के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रुचियों को वितरित करता है तिथि करने के लिए, समूह "गटा" के काम की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों निम्न हैंः बहुत समय पहले कंपनी आवासीय भवनों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं ले पाई और कई आशाजनक परियोजनाओं को लागू करना शुरू कर दिया। समूह "गुट्टा" में काम की समीक्षा से किया जा सकता हैनिष्कर्ष और उन सिद्धांतों के बारे में जिन पर संगठन की पूरी गतिविधि आधारित है। सबसे पहले, कंपनी उन उत्पादों का उत्पादन करना चाहती है जो परंपरागत नुस्खा और अभिनव प्रौद्योगिकियों को जोड़ती हैं। यह कन्फेक्शनरी उद्योग में सबसे स्पष्ट रूप से देखा जाता है। कारखानों में जो "गुट्टा" समूह का हिस्सा हैं, पूर्व क्रांतिकारी और सोवियत काल के ध्यान से संरक्षित नुस्खा के अनुसार मिठाई का उत्पादन करते हैं। हालांकि, सभी उत्पादन लाइन आधुनिक उपकरणों से लैस हैं, और कार्यशाला विशेषज्ञ मूल रूप से नई उत्पाद लाइन विकसित करते हैं। यह विशेष रूप से मिठाई पैदा करने का वादा करता है जो एक स्वस्थ आहार के लिए उपयुक्त हैं। कुछ साल पहले, ऐसा उत्पादन बस असंभव था। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, समूह "गुटा" ने पायान केवल रूसी संघ के क्षेत्र में बाजार, इसके उत्पादों का उपयोग दुनिया भर के कई देशों में लगभग सौ लाख पचास लाख लोगों द्वारा किया जाता है। अफ्रीका, चीन और यूरोप के बाजारों में प्रवेश करने के लिए बातचीत चल रही है। यह ध्यान देने योग्य है कि समूह "गुट्टा" में बहुत कुछ हैव्यवसाय के विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने वाले अन्य रूसी संघों के बीच एक अच्छी प्रतिष्ठा। "गुट्टा" बहुत गतिशील रूप से बढ़ रहा है, आज के लिए यह कई बाजार खंडों में मौजूद है। कंपनी नए मेडिकल उपकरण विकसित करती है, खाद्य उत्पादों का उत्पादन करती है, बीमा और विभिन्न दिलचस्प और आशाजनक परियोजनाओं में निवेश करती है। तेरह साल पहले, समूह "गुट्टा" का सदस्य थाबैंक, लेकिन कुछ समस्याओं के संबंध में इसे किसी तीसरे पक्ष के संगठन द्वारा खरीदा गया था। आज तक, कंपनी के मामले अच्छी तरह से चल रहे हैं, और इसे पेशेवर कर्मचारियों की आवश्यकता है जो इसे विकास के नए स्तर तक पहुंचने में मदद करेंगे। चूंकि "गुट्टा" में इसकी उपस्थिति पाई जाती हैरूस में पचास शहरों, यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि इस संगठन के लिए कितने लोग काम करते हैं। विभिन्न उद्यमों में आज तीस हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। वे सभी बेहद पेशेवर हैं और काफी गंभीर चयन पारित कर चुके हैं। मॉस्को में समूह "गुटा" के कर्मचारियों की समीक्षा वर्ष) कहानियों से भरा हुआ है कि साक्षात्कार में से एक में उन्हें झूठ डिटेक्टर पर भी चेक किया गया था। और केवल निरीक्षण के परिणामों के आधार पर, किसी विशेष कर्मचारी को किराए पर लेने का निर्णय लिया गया था। लेख के निम्नलिखित खंडों में, हम मॉस्को, बेलगोरोड और रोस्तोव से कंपनी के कर्मचारियों द्वारा छोड़ी गई टिप्पणियों की समीक्षा और विश्लेषण करेंगे। यहां संगठन की काफी बड़ी शाखाएं स्थित हैं, इसलिए पाठक इस नियोक्ता पर एक राय बनाने में आसान होगा। स्वाभाविक रूप से, केवल सकारात्मक तरीके से लिखी गई वास्तविक टिप्पणियों की कल्पना करना मुश्किल है। इसलिए, हम इस संगठन में काम करने के पेशेवरों और विपक्ष दोनों पर विचार करेंगे। यदि आप समय पर भुगतान में बहुत महत्वपूर्ण हैंमजदूरी, कंपनी जिसे आप निश्चित रूप से पसंद करेंगे। सभी कर्मचारियों ने ध्यान दिया कि बैंक कार्ड में स्थानांतरण का प्रबंधन हमेशा समय पर होता है। जब मजदूरी का दिन दिन बंद हो जाता है, भुगतान पहले किए जाते हैं ताकि लोग पैसे के बिना नहीं रहें। कर्मचारियों की इस तरह की देखभाल आधुनिक उद्यमियों के लिए बहुत ही अनैच्छिक है और "गुट्टा" को विश्वसनीय नियोक्ता के रूप में प्रमाणित करती है। कंपनी और उन Muscovites के बारे में अच्छी तरह से बात करते हैं,जो तेजी से काम कर रहे टेम्पो और गतिविधियों के निरंतर परिवर्तन पसंद करते हैं। यहां ऐसी लय काफी आम है, इसलिए केवल एक निश्चित चरित्र गोदाम वाले लोग काम से निपट सकते हैं। जो लोग नौकरी पाने की योजना बनाते हैंकंपनी, इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इसे नए आने वालों के साथ गड़बड़ करने के लिए स्वीकार नहीं किया गया है और उन्हें शुरुआत में उनके व्यवसाय के पेशेवरों के रूप में माना जाता है। इसलिए, उन्हें नई स्थिति में पहले दिन से पूरी तरह से पूछा जाता है। यह, कई कर्मचारियों के अनुसार, तेजी से पेशेवर विकास की ओर जाता है। आखिरकार, हर कोई वह सब दिखाना चाहता है जो वह करने में सक्षम है। यह मत भूलना कि टीम में सफलतापूर्वक किए गए प्रोजेक्ट के लिए आपकी प्रशंसा नहीं की जाएगी, लेकिन असफलता के लिए व्यावहारिक रूप से दुनिया से बाहर रह जाएगी। यह रवैया कई बड़े निगमों के विशिष्ट है। "गट" Muscovites में काम के minuses के लिए निम्नलिखित अंक शामिल हैंः बेशक, कुछ के लिए, ये नुकसान महत्वहीन हैं, लेकिन दूसरों के लिए - वे डिवाइस के काम करने के लिए एक गंभीर बाधा बन जाएंगे। "गुट्टा" रखने की रोस्तोव शाखा में काम के बारे में प्रतिक्रियाओं को ढूंढना काफी आसान है। उनके पास सकारात्मक और नकारात्मक विशेषताएं भी होती हैं। हम दोनों, और दूसरों को उद्धृत करेंगे। प्लस के लिए, कई कर्मचारी लाभ की बहुतायत का उल्लेख करते हैं। यह इस तथ्य के कारण संभव हो गया कि समूह में कुछ छोटी कंपनियां शामिल हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख पदों पर कब्जा करती हैं। यह अच्छा है कि कंपनी के बारे में गंभीर हैसुरक्षा सावधानी बरतें। ब्रीफिंग्स और व्यायाम साल में कई बार आयोजित किए जाते हैं। प्रत्येक कर्मचारी जानता है कि कैसे व्यवहार करना है और आग के मामले में या अन्य चरम परिस्थितियों के मामले में कहां जाना है। कई युवा और दोस्ताना स्टाफ मनाते हैंजो उन कर्मचारियों के लिए अत्यधिक सम्मानित है जो समझौता ढूंढने और अन्य कर्मचारियों के साथ बातचीत करने में सक्षम हैं। ऐसे गुण महत्वपूर्ण होते हैं जब आप एक विशाल होल्डिंग में काम करते हैं, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न पात्रों और महत्वाकांक्षाओं वाले कई लोग इकट्ठे होते हैं। "Guta" के कुछ पूर्व पेशेवरों, कंपनी में कई वर्षों के लिए काम किया है और आवश्यक अनुभव प्राप्त, अपने स्वयं के व्यवसाय को खोलने के लिए सक्षम थे और इस क्षेत्र में कार्यान्वित किया जा रहा था। नकारात्मक समीक्षाओं में से पहचान की जा सकती हैकार्यालयों में वीडियो कैमरों की बहुतायत से असंतोष, हमेशा और हर जगह इलेक्ट्रॉनिक पास, इंटरनेट यातायात का सख्त नियंत्रण और मुफ्त नौकरी सुरक्षा सेवाओं के लिए आवेदकों की लंबी जांच के साथ जाना। बेलगोरोड में समूह "गुटा" के बारे में समीक्षाओं में से एक बड़ा हैभाग सकारात्मक को संदर्भित करता है। कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रसन्न करना सामाजिक पैकेज है, जिसमें वार्षिक वार्षिक छुट्टी और बीमार छुट्टी शामिल है। कंपनी के प्रबंधन और उनके कर्मचारियों की किड्डी को अनदेखा न करें, छुट्टियों पर उन्हें उपहार दिए जाते हैं और विशेष आयोजन आयोजित किए जाते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि उनके कर्मचारियों की देखभाल करनायह दृश्यमान और कार्यालयों के उपकरणों में है। गलियारे में ताजा पानी के साथ कूलर होते हैं, और वे पहले अनुरोध पर सभी आवश्यक उपकरणों से लैस होते हैं, उनके पास हमेशा एक बुफे, एक डाइनिंग रूम, माइक्रोवेव ओवन और कॉफी निर्माता के साथ आराम कमरे हैं। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि chelovekoorientirovannyh मानव संसाधन प्रबंधकों को स्पष्ट रूप से आवेदकों की गरिमा के लिए और उनके समय बर्बाद कर के बिना अपना काम कर रही है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना। बेलगोरोड में काम के minuses से पहचान की जा सकती हैः आम तौर पर, कर्मचारी नियोक्ता को जिम्मेदार और भरोसेमंद मानते हैं। उपर्युक्त सभी को सारांशित करते हुए, हम यह कह सकते हैंसमूह "गुट्टा" युवा, मेहनती और महत्वाकांक्षी कर्मचारियों को किराए पर लेने में प्रसन्न होगा जो कंपनी को अपना खाली समय देने के लिए तैयार हैं। बदले में, होल्डिंग कंपनी अच्छी कामकाजी परिस्थितियों, समय पर मजदूरी, बोनस और सामाजिक गारंटी की गारंटी देती है। यहां पर आप कैरियर की सीढ़ी पर चढ़ाई कर सकते हैं।
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स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः इंटरनेट ऐसी दुनिया है जहां हर तरह के वीडियो की भरमार है, फिर चाहे वो फनी वीडियो हो या फिर जुगाड़ का वीडियो। सोशल मीडिया पर जुगाड़ के बहुत से वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। जुगाड़ को आप एक तरह का टैलेंट भी कह सकते हैं, क्योंकि जब कोई काम मुश्किल या नामुमकिन होता है, तो लोग इसी जुगाड़ यानी टैलेंट का इस्तेमाल करके अपने काम को आसान और संभव बना लेते हैं और कई बार तो जुगाड़ से ऐसे काम भी कर लेते हैं, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। जैसे कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस जुगाड़ वीडियोको ही देख लीजिए।
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स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः इंटरनेट ऐसी दुनिया है जहां हर तरह के वीडियो की भरमार है, फिर चाहे वो फनी वीडियो हो या फिर जुगाड़ का वीडियो। सोशल मीडिया पर जुगाड़ के बहुत से वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। जुगाड़ को आप एक तरह का टैलेंट भी कह सकते हैं, क्योंकि जब कोई काम मुश्किल या नामुमकिन होता है, तो लोग इसी जुगाड़ यानी टैलेंट का इस्तेमाल करके अपने काम को आसान और संभव बना लेते हैं और कई बार तो जुगाड़ से ऐसे काम भी कर लेते हैं, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। जैसे कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस जुगाड़ वीडियोको ही देख लीजिए।
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G20 Summit: जी20 के तीसरे सत्र में यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने आने वाले भविष्य पर फोकस किया और इसके लिए डिजिटल और एआई की जरूरतें बताईं। इसके साथ ही उन्होंने एआई के खतरे से निपटने के तरीके भी बताया।
जी20 के तीसरे सत्र में यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने संबोधन की शुरुआत डिजिटल पर चर्चा से की। उन्होंने कहा- 'एक बात तो साफ है कि फ्यूचर डिजिटल का है। आज मैं अपना फोकस एआई और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रखना चाहती हूं। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि एआई में रिस्क है, लेकिन उसमें कई अवसर भी दिख रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि तेजी के साथ बदलते हुए तकनीक को कैसे बचा कर रखें? कहा जा रहा है कि एआई को बनाने वाले और उसका आविष्कार करने वाले लोग भी राजनीतिक नेताओं को इसे रेगुलेट करने के लिए कह रहे हैं।'
उन्होंने आगे कहा कि अभी दुनिया की जरूरत है कि हमारे भविष्य को कैसे आकार दें। मुझे विश्वास है कि यूरोप और उसके पार्टनर्स को एक ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाना चाहिए, जिसमें एआई के रिस्क पर बात हो ताकि यह एक साथ हमें सिस्टेमैटिक सोसायटल रिस्क्स, फॉस्टर इन्वेस्टमेंट इन सेफ एंड रिस्पॉन्सिबल एआई सिस्टम से बचा सके। ग्लोबल लेवल पर हमें अंत में यूनाइटेड नेशन्स के ब्रॉडर कम्यूनिटी तक पहुंचना है।
जलवायु के मुद्दे पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा- 'हमें जलवायु के लिए आईपीसीसी के समान एक निकाय की आवश्यकता होगी और इसके लिए हमें वैज्ञानिकों, उद्यमियों और इनोवेटर्स तक अतिरिक्त पहुंच की आवश्यकता है। उन्हें एआई द्वारा उत्पन्न जोखिमों के साथ-साथ मानवता के लिए संभावित लाभों पर ज्ञान प्रदान करने की आवश्यकता है।
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वास्तविक उत्प्रेरक हो सकते हैं। भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हमने पीएम मोदी को सुना और हम उनकी पहल का पूरा समर्थन करते हैं।'
ये भी पढ़ेंः पीएम मोदी के 'मंत्र' पर बाइडेन की मुहर, आखिर वियतनाम रवाना होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान अहम क्यों?
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Quick links: Gबीस Summit: जीबीस के तीसरे सत्र में यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने आने वाले भविष्य पर फोकस किया और इसके लिए डिजिटल और एआई की जरूरतें बताईं। इसके साथ ही उन्होंने एआई के खतरे से निपटने के तरीके भी बताया। जीबीस के तीसरे सत्र में यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने संबोधन की शुरुआत डिजिटल पर चर्चा से की। उन्होंने कहा- 'एक बात तो साफ है कि फ्यूचर डिजिटल का है। आज मैं अपना फोकस एआई और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर रखना चाहती हूं। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि एआई में रिस्क है, लेकिन उसमें कई अवसर भी दिख रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि तेजी के साथ बदलते हुए तकनीक को कैसे बचा कर रखें? कहा जा रहा है कि एआई को बनाने वाले और उसका आविष्कार करने वाले लोग भी राजनीतिक नेताओं को इसे रेगुलेट करने के लिए कह रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि अभी दुनिया की जरूरत है कि हमारे भविष्य को कैसे आकार दें। मुझे विश्वास है कि यूरोप और उसके पार्टनर्स को एक ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाना चाहिए, जिसमें एआई के रिस्क पर बात हो ताकि यह एक साथ हमें सिस्टेमैटिक सोसायटल रिस्क्स, फॉस्टर इन्वेस्टमेंट इन सेफ एंड रिस्पॉन्सिबल एआई सिस्टम से बचा सके। ग्लोबल लेवल पर हमें अंत में यूनाइटेड नेशन्स के ब्रॉडर कम्यूनिटी तक पहुंचना है। जलवायु के मुद्दे पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा- 'हमें जलवायु के लिए आईपीसीसी के समान एक निकाय की आवश्यकता होगी और इसके लिए हमें वैज्ञानिकों, उद्यमियों और इनोवेटर्स तक अतिरिक्त पहुंच की आवश्यकता है। उन्हें एआई द्वारा उत्पन्न जोखिमों के साथ-साथ मानवता के लिए संभावित लाभों पर ज्ञान प्रदान करने की आवश्यकता है। डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वास्तविक उत्प्रेरक हो सकते हैं। भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हमने पीएम मोदी को सुना और हम उनकी पहल का पूरा समर्थन करते हैं।' ये भी पढ़ेंः पीएम मोदी के 'मंत्र' पर बाइडेन की मुहर, आखिर वियतनाम रवाना होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान अहम क्यों?
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बिग बॉस 11: पूर्व विजेता विंदु दारा सिंह के मुताबिक शो के मेकर्स बनाने वाले है इस शख्स को विजेता?
5 दिन का इंतजार और हर किसी के दिल की धड़कन बढ़ती ही जा रही है। हर किसी को इंतजार है बिग बॉस के ग्यारवें सीजन के फिनाले का। जी हाँ आगामी रविवार को इस विवादित शो का फिनाले होने वाला है और इस समय घर में 3 सेलीब्रिटी और 2 कॉमनर के साथ कुल 5 कंटेस्टेंट मौजूद है। वैसे फिनाले में जो भी फैसला आए लेकिन इस शो के दर्शक अपने अपने हिसाब से विजेता की घोषणा करने में लगे हुए हैं। हर कंटेस्टेंट के फैंस ये दलीलें भी देने में लगे हैं कि आखिर उनके फेवरिट कंटेस्टेंट को इस सीजन का खिताब क्यों मिलना चाहिए?
वैसे बात की जाए पिछले कई सीजन्स की तो ऐसा कई बार हो चुका है कि कई कंटेस्टेंट्स को फिजिकल होने की वजह से उनको घर से बाहर कर दिया गया था लेकिन इस सीजन में आखिर विकास को बाहर क्यों नहीं किया गया? क्या वाकई में इस शो के निर्माता विकास को विजेता बनाने का फैसला पहले से कर चुके हैं? क्या आपका भी ऐसा ही मानना है? कमेंटबॉक्स में जरुर बताएं। बाकी बिग बॉस और फिल्मी दुनिया की बारी खबरों के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ।
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बिग बॉस ग्यारह: पूर्व विजेता विंदु दारा सिंह के मुताबिक शो के मेकर्स बनाने वाले है इस शख्स को विजेता? पाँच दिन का इंतजार और हर किसी के दिल की धड़कन बढ़ती ही जा रही है। हर किसी को इंतजार है बिग बॉस के ग्यारवें सीजन के फिनाले का। जी हाँ आगामी रविवार को इस विवादित शो का फिनाले होने वाला है और इस समय घर में तीन सेलीब्रिटी और दो कॉमनर के साथ कुल पाँच कंटेस्टेंट मौजूद है। वैसे फिनाले में जो भी फैसला आए लेकिन इस शो के दर्शक अपने अपने हिसाब से विजेता की घोषणा करने में लगे हुए हैं। हर कंटेस्टेंट के फैंस ये दलीलें भी देने में लगे हैं कि आखिर उनके फेवरिट कंटेस्टेंट को इस सीजन का खिताब क्यों मिलना चाहिए? वैसे बात की जाए पिछले कई सीजन्स की तो ऐसा कई बार हो चुका है कि कई कंटेस्टेंट्स को फिजिकल होने की वजह से उनको घर से बाहर कर दिया गया था लेकिन इस सीजन में आखिर विकास को बाहर क्यों नहीं किया गया? क्या वाकई में इस शो के निर्माता विकास को विजेता बनाने का फैसला पहले से कर चुके हैं? क्या आपका भी ऐसा ही मानना है? कमेंटबॉक्स में जरुर बताएं। बाकी बिग बॉस और फिल्मी दुनिया की बारी खबरों के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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मगरमच्छ तो आप सभी ने देखा ही होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मगरमच्छ के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। सुनकर चौंक गए ना आप लेकिन यह सच है। वैसे तो मगरमच्छ एक बड़ा ही खतरनाक जानवर माना जाता है और यही वजह है कि लोग इसके करीब जाने से पहले सौ बार सोचते हैं। वैसे जिस मगरमच्छ के बारे में हम बात कर रहे हैं वह दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाह एडोल्फ हिटलर का मगरमच्छ है जिसके नाम सैटर्न है।
उसी को ही मरने के बाद रूस के एक म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा जाने वाला है। सामने आने वाली एक खबर के मुताबिक 22 मई 2020 को मॉस्को चिड़ियाघर में सैटर्न की मौत हो गई थी। यह एडोल्फ हिटलर का पालतू मगरमच्छ था। सोवियत यूनियन की सेना ने बाद में इसे मास्को के चिड़ियाघर में रखवा दिया। कहा जाता है साल 1946 से लेकर अब तक वो मास्को के चिड़ियाघर में रह रहा था लेकिन अब उसकी मौत हो गई है। आप जानते ही होंगे इस समय मॉस्को में कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण कई तरह की पाबंदिया लागू हैं और इसी वजह से इसे देख पाना मुश्किल है।
लेकिन जैसे ही हालात सामन्य होंगे वैसे ही यह म्यूजियम में प्रदर्शनी में दिखेगा। आपको बता दें कि सैटर्न मगरमच्छ तानाशाह हिटलर के पसंदीदा जानवरों में शुमार किया जाता था। हाल ही में मास्को चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक दिमित्री वासिलीव ने भी दावा किया है कि 'हिटलर ने कई मौकों पर इस मगरमच्छ की जमकर प्रशंसा भी की है। ' आपको हम यह भी बता दें कि सैटर्न मगरमच्छ का जन्म 1936 में मिसिसिपी के जंगलों में हुआ था और वहां से पकड़कर इसे बर्लिन लाया गया था।
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मगरमच्छ तो आप सभी ने देखा ही होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मगरमच्छ के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। सुनकर चौंक गए ना आप लेकिन यह सच है। वैसे तो मगरमच्छ एक बड़ा ही खतरनाक जानवर माना जाता है और यही वजह है कि लोग इसके करीब जाने से पहले सौ बार सोचते हैं। वैसे जिस मगरमच्छ के बारे में हम बात कर रहे हैं वह दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाह एडोल्फ हिटलर का मगरमच्छ है जिसके नाम सैटर्न है। उसी को ही मरने के बाद रूस के एक म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा जाने वाला है। सामने आने वाली एक खबर के मुताबिक बाईस मई दो हज़ार बीस को मॉस्को चिड़ियाघर में सैटर्न की मौत हो गई थी। यह एडोल्फ हिटलर का पालतू मगरमच्छ था। सोवियत यूनियन की सेना ने बाद में इसे मास्को के चिड़ियाघर में रखवा दिया। कहा जाता है साल एक हज़ार नौ सौ छियालीस से लेकर अब तक वो मास्को के चिड़ियाघर में रह रहा था लेकिन अब उसकी मौत हो गई है। आप जानते ही होंगे इस समय मॉस्को में कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण कई तरह की पाबंदिया लागू हैं और इसी वजह से इसे देख पाना मुश्किल है। लेकिन जैसे ही हालात सामन्य होंगे वैसे ही यह म्यूजियम में प्रदर्शनी में दिखेगा। आपको बता दें कि सैटर्न मगरमच्छ तानाशाह हिटलर के पसंदीदा जानवरों में शुमार किया जाता था। हाल ही में मास्को चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक दिमित्री वासिलीव ने भी दावा किया है कि 'हिटलर ने कई मौकों पर इस मगरमच्छ की जमकर प्रशंसा भी की है। ' आपको हम यह भी बता दें कि सैटर्न मगरमच्छ का जन्म एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में मिसिसिपी के जंगलों में हुआ था और वहां से पकड़कर इसे बर्लिन लाया गया था।
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इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने 30 मई से शुरू होने वाले 2019 विश्व कप के लिए फाइनल 15 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। पहले इंग्लैंड ने प्रारंभिक 15 खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया था, लेकिन अब एलेक्स हेल्स, डेनली और डेविड विली की जगह लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर और जेम्स विंस को टीम में शामिल किया है। इंग्लैंड ने फाइनल विश्व कप टीम में पांच बल्लेबाज़ों, पांच ऑलराउंडर, एक स्पिनर और चार तेज़ गेंदबाज़ों को जगह दी है।
जोफ्रा आर्चर को आयरलैंड के खिलाफ एकमात्र वनडे और पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज़ के 2 मैच खेलने का मौका मिला था। तीनों ही मैचों में आर्चर ने अपनी तेज़ी और लाइन लेंथ से सभी को प्रभावित किया था। जेम्स विंस को भी पाक के खिलाफ सीरीज़ में मौका मिला था, जिसे उन्होंने दोनों हाथ से भुनाया। इसीलिए विश्व कप में उन्हें तीसरे सलामी बल्लेबाज़ के रूप में चुना गया है। विंस ने 2 मैच में 76 रन बनाए थे।
इंग्लैंड ने विश्व कप के लिए स्पिन ऑलराउंडर लियाम डॉसन को टीम में शामिल किया है, जो सभी के लिए चौंकाने वाला फैसला है। इससे पहले प्रारंभिक टीम में जो डेनली को मौका दिया गया था, लेकिन पाक के खिलाफ डेनली के औसत प्रदर्शन के बाद बोर्ड ने ऑलराउंडर लियाम डॉसन फाइनल 15 में शामिल किया है। डॉसन ने आखिरी वनडे पिछले साल खेला था। डॉसन ने इंग्लैंड के लिए तीन टेस्ट, तीन वनडे और 6 टी-20 मैच खेले हैं।
प्रारंभिक विश्व कप टीम में इंग्लैंड की गेंदबाज़ी कुछ कमज़ोर दिख रही थी, लेकिन आर्चर के आने से अब वह कमी भी पूरी हो गई है। विश्व कप के लिए अब इंग्लैंड के पास क्रिस वोक्स, आर्चर, मार्क वुड और प्लंकेट जैसे गेंदबाज़ हैं। साथ ही टीम में मौजूद हरफनमौला खिलाड़ी टीम को संतुलन प्रदान करते हैं। घरेलू कंडीशंस में ये गेंदबाज़ किसी भी टीम के खिलाफ घातक साबित हो सकते हैं।
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इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने तीस मई से शुरू होने वाले दो हज़ार उन्नीस विश्व कप के लिए फाइनल पंद्रह सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। पहले इंग्लैंड ने प्रारंभिक पंद्रह खिलाड़ियों के नामों का ऐलान किया था, लेकिन अब एलेक्स हेल्स, डेनली और डेविड विली की जगह लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर और जेम्स विंस को टीम में शामिल किया है। इंग्लैंड ने फाइनल विश्व कप टीम में पांच बल्लेबाज़ों, पांच ऑलराउंडर, एक स्पिनर और चार तेज़ गेंदबाज़ों को जगह दी है। जोफ्रा आर्चर को आयरलैंड के खिलाफ एकमात्र वनडे और पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज़ के दो मैच खेलने का मौका मिला था। तीनों ही मैचों में आर्चर ने अपनी तेज़ी और लाइन लेंथ से सभी को प्रभावित किया था। जेम्स विंस को भी पाक के खिलाफ सीरीज़ में मौका मिला था, जिसे उन्होंने दोनों हाथ से भुनाया। इसीलिए विश्व कप में उन्हें तीसरे सलामी बल्लेबाज़ के रूप में चुना गया है। विंस ने दो मैच में छिहत्तर रन बनाए थे। इंग्लैंड ने विश्व कप के लिए स्पिन ऑलराउंडर लियाम डॉसन को टीम में शामिल किया है, जो सभी के लिए चौंकाने वाला फैसला है। इससे पहले प्रारंभिक टीम में जो डेनली को मौका दिया गया था, लेकिन पाक के खिलाफ डेनली के औसत प्रदर्शन के बाद बोर्ड ने ऑलराउंडर लियाम डॉसन फाइनल पंद्रह में शामिल किया है। डॉसन ने आखिरी वनडे पिछले साल खेला था। डॉसन ने इंग्लैंड के लिए तीन टेस्ट, तीन वनडे और छः टी-बीस मैच खेले हैं। प्रारंभिक विश्व कप टीम में इंग्लैंड की गेंदबाज़ी कुछ कमज़ोर दिख रही थी, लेकिन आर्चर के आने से अब वह कमी भी पूरी हो गई है। विश्व कप के लिए अब इंग्लैंड के पास क्रिस वोक्स, आर्चर, मार्क वुड और प्लंकेट जैसे गेंदबाज़ हैं। साथ ही टीम में मौजूद हरफनमौला खिलाड़ी टीम को संतुलन प्रदान करते हैं। घरेलू कंडीशंस में ये गेंदबाज़ किसी भी टीम के खिलाफ घातक साबित हो सकते हैं।
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Publish Date: Mon, 11 Jan 2016 13:56:07 (IST)
मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद जम्मू कश्मीर में सरकार गठन एक बार फिर से उलझाव भरा हो गया है। पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को सीएम बनाए जाने की चर्चा के बीच उनके द्वारा भाजपा के सामने कुछ कठिन शर्तें रखने के बाद सरकार बनाने में अब और समय लग सकता है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को श्रीनगर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की और उनके पिता तथा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक-संवेदना प्रकट की। सोनिया के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की सरकार गठन का रास्ता साफ करने की कोशिश की। फिलहाल राज्य में गवर्नर रूल लगा दिया गया है।
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Publish Date: Mon, ग्यारह जनवरी दो हज़ार सोलह तेरह:छप्पन:सात मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद जम्मू कश्मीर में सरकार गठन एक बार फिर से उलझाव भरा हो गया है। पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को सीएम बनाए जाने की चर्चा के बीच उनके द्वारा भाजपा के सामने कुछ कठिन शर्तें रखने के बाद सरकार बनाने में अब और समय लग सकता है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को श्रीनगर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की और उनके पिता तथा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक-संवेदना प्रकट की। सोनिया के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की सरकार गठन का रास्ता साफ करने की कोशिश की। फिलहाल राज्य में गवर्नर रूल लगा दिया गया है। .
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नई दिल्ली, 1 दिसंबर (आईएएनएस)। ग्लोबललॉजिक ने शुक्रवार को अपने भागीदार स्कूलों के लिए 'ग्लोबललॉजिक फाउंडेशन स्पोर्ट्स मीट' का सफल आयोजन किया। इसमें ग्लोबललॉजिक की सीएसआर शाखा जीएल फाउंडेशन ने भी साझेदारी की। इस खेल दिवस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को एथलेटिक्स और ऐसे खेलों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है, जो मानसिक और शारीरिक तौर पर उनके समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हों।
फाउंडेशन इस आयोजन के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। राजधानी दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन 'ग्लोबललॉजिक इंडिया' के प्रबंधन निदेशक सुमित सूद ने किया। इस तरह का आयोजन अभावग्रस्त बच्चों को बुनियादी और सुधारात्मक शिक्षा देने की ओर कंपनी की प्रतिबद्धता को दशार्ता है।
इस खेल दिवस में सुमो रेसलिंग चैलेंज, ह्यूमैन फुसबॉल, क्रॉस फिट ऑब्सटेकल कोर्स प्लान जैसी अंतर-स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के जरिए कई रोमांचक खेल एवं मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
'ग्लोबललॉजिक फाउंडेशन' ने 2015 में अभावग्रस्त बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में काम करने के लिए दिल्ली (एनसीआर) में तीन स्कूलों को गोद लिया और उनके साथ भागीदारी की। तब से ही इस संगठन का 2500 बच्चों पर गहरा प्रभाव है और यही प्रभाव बेंगलुरु तथा नागपुर में मौजूद इसके भागीदार स्कूलों पर भी है।
भव्य समारोह के साथ इस खेल दिवस की शुरुआत हुई, जिसके बाद कई खेल गतिविधियां आयोजित हुईं। इस मौके पर सुमित ने कहा, मेरा ढ़ विश्वास है कि बच्चों की सीखने और जीवन में तरक्की करने की दक्षता बढ़ाने के लिए स्कूलों के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्हें शारीरिक शिक्षा देना बहुत जरूरी होता है। लिहाजा हम इस दिन को खास महत्व देते हैं, जिसमें बच्चों को अपने अंदर की प्रतिभा प्रदर्शित करने का मौका मिलता है और साथ ही वे ऐसे माहौल में एक-दूसरे के साथ स्वस्थ प्रतियोगिता का भी आनंद उठाते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए हम बच्चों और कर्मचारियों को जीवन का मूल्य भी बताते हैं, जिसे वे अपनी सोच में उतार सकें और जिससे उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने में मदद मिले। मुझे यह देखकर अपार खुशी हो रही है कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चों तथा कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
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नई दिल्ली, एक दिसंबर । ग्लोबललॉजिक ने शुक्रवार को अपने भागीदार स्कूलों के लिए 'ग्लोबललॉजिक फाउंडेशन स्पोर्ट्स मीट' का सफल आयोजन किया। इसमें ग्लोबललॉजिक की सीएसआर शाखा जीएल फाउंडेशन ने भी साझेदारी की। इस खेल दिवस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को एथलेटिक्स और ऐसे खेलों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है, जो मानसिक और शारीरिक तौर पर उनके समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हों। फाउंडेशन इस आयोजन के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। राजधानी दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन 'ग्लोबललॉजिक इंडिया' के प्रबंधन निदेशक सुमित सूद ने किया। इस तरह का आयोजन अभावग्रस्त बच्चों को बुनियादी और सुधारात्मक शिक्षा देने की ओर कंपनी की प्रतिबद्धता को दशार्ता है। इस खेल दिवस में सुमो रेसलिंग चैलेंज, ह्यूमैन फुसबॉल, क्रॉस फिट ऑब्सटेकल कोर्स प्लान जैसी अंतर-स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के जरिए कई रोमांचक खेल एवं मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 'ग्लोबललॉजिक फाउंडेशन' ने दो हज़ार पंद्रह में अभावग्रस्त बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में काम करने के लिए दिल्ली में तीन स्कूलों को गोद लिया और उनके साथ भागीदारी की। तब से ही इस संगठन का दो हज़ार पाँच सौ बच्चों पर गहरा प्रभाव है और यही प्रभाव बेंगलुरु तथा नागपुर में मौजूद इसके भागीदार स्कूलों पर भी है। भव्य समारोह के साथ इस खेल दिवस की शुरुआत हुई, जिसके बाद कई खेल गतिविधियां आयोजित हुईं। इस मौके पर सुमित ने कहा, मेरा ढ़ विश्वास है कि बच्चों की सीखने और जीवन में तरक्की करने की दक्षता बढ़ाने के लिए स्कूलों के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्हें शारीरिक शिक्षा देना बहुत जरूरी होता है। लिहाजा हम इस दिन को खास महत्व देते हैं, जिसमें बच्चों को अपने अंदर की प्रतिभा प्रदर्शित करने का मौका मिलता है और साथ ही वे ऐसे माहौल में एक-दूसरे के साथ स्वस्थ प्रतियोगिता का भी आनंद उठाते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए हम बच्चों और कर्मचारियों को जीवन का मूल्य भी बताते हैं, जिसे वे अपनी सोच में उतार सकें और जिससे उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने में मदद मिले। मुझे यह देखकर अपार खुशी हो रही है कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चों तथा कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
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- 42 min ago Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल!
- 1 hr ago हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान!
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कैटरीना कैफ इस आइटम गर्ल को मानती थीं अपना रोल मॉडल? नाम जानकर सलमान खान को लगेगा झटका!
कैटरीना कैफ ने वक्त तक इंडियन फिल्म इंड्स्ट्री पर राज किया है। जिस फिल्म में कैटरीना कैफ होती थीं वो फिल्म लोगों के द्वारा काफी पसंद की जाती थी। इस वक्त एक खबर सामने आ रही है जिसमें कैटरीना कैफ ने अपने रोल मॉडल के नाम का खुलासा किया है।
कैटरीना कैफ की मानें तो मॉडलिंग के दिनों में वो किसी एक्ट्रेस या हॉलीवुड मॉडल को नहीं बल्कि मलाइका अरोड़ा को अपना आइडल मानती थीँ। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कैट ने ये खुलाला किया है।
कैटरीना का कहना था, "जब मैंने बॉम्बे में एक मॉडल के रूप में शुरुआत की, तो मेरा इरादा एक मॉडल बनने का था। मेरी आदर्श मधु सप्रे और लक्ष्मी मेनन थीं। वो उस समय की सुपरमॉडल थीं। और वास्तव में मलाइका अरोड़ा भी। वह उस समय भी मॉडलिंग कर रही थीं।
ये वे महिलाएं थीं जिनकी ओर मैं आदरपूर्वक देखती थी। और मैं एक मॉडल के रूप में यही बनना चाहती थी।" कैटरीना कैफ का ये बयान अब खबरों का हिस्सा है और लोगों को झटका देने के लिए काफी है। आइटम नंबर्स के लिए जानी जाने वाली मलाइका अरोड़ा ने इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस पर अपनी छाप छोड़ी थी।
ये बात भी सच है कि कैटरीना और मलाइका ने कभी साथ काम नहीं किया है। हालांकि एक वक्त था जब सलमान खान को वो डेट करती थीं और उस वक्त मलाइका अरोड़ा अरबाज खान की पत्नी हुआ करती थीं।
दोनों ने काफी वक्त साथ गुजारा है। लेकिन अब कैटरीना कैफ विक्की कौशल से शादी कर चुकी हैं। वहीं मलाइका ने अभिनेता अर्जुन कपूर के साथ डेटिंग शुरू करने से पहले 2017 में अरबाज को तलाक दे दिया।
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- बयालीस मिनट ago Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! - एक hr ago हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान! - दो hrs ago Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?' Don't Miss! - News कैसी होगी भगवान राम लला की मूर्ति? वोटिंग में आज हो जाएगा फैसला, पुरानी प्रतिमा का उसके बाद क्या होगा? कैटरीना कैफ इस आइटम गर्ल को मानती थीं अपना रोल मॉडल? नाम जानकर सलमान खान को लगेगा झटका! कैटरीना कैफ ने वक्त तक इंडियन फिल्म इंड्स्ट्री पर राज किया है। जिस फिल्म में कैटरीना कैफ होती थीं वो फिल्म लोगों के द्वारा काफी पसंद की जाती थी। इस वक्त एक खबर सामने आ रही है जिसमें कैटरीना कैफ ने अपने रोल मॉडल के नाम का खुलासा किया है। कैटरीना कैफ की मानें तो मॉडलिंग के दिनों में वो किसी एक्ट्रेस या हॉलीवुड मॉडल को नहीं बल्कि मलाइका अरोड़ा को अपना आइडल मानती थीँ। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कैट ने ये खुलाला किया है। कैटरीना का कहना था, "जब मैंने बॉम्बे में एक मॉडल के रूप में शुरुआत की, तो मेरा इरादा एक मॉडल बनने का था। मेरी आदर्श मधु सप्रे और लक्ष्मी मेनन थीं। वो उस समय की सुपरमॉडल थीं। और वास्तव में मलाइका अरोड़ा भी। वह उस समय भी मॉडलिंग कर रही थीं। ये वे महिलाएं थीं जिनकी ओर मैं आदरपूर्वक देखती थी। और मैं एक मॉडल के रूप में यही बनना चाहती थी।" कैटरीना कैफ का ये बयान अब खबरों का हिस्सा है और लोगों को झटका देने के लिए काफी है। आइटम नंबर्स के लिए जानी जाने वाली मलाइका अरोड़ा ने इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस पर अपनी छाप छोड़ी थी। ये बात भी सच है कि कैटरीना और मलाइका ने कभी साथ काम नहीं किया है। हालांकि एक वक्त था जब सलमान खान को वो डेट करती थीं और उस वक्त मलाइका अरोड़ा अरबाज खान की पत्नी हुआ करती थीं। दोनों ने काफी वक्त साथ गुजारा है। लेकिन अब कैटरीना कैफ विक्की कौशल से शादी कर चुकी हैं। वहीं मलाइका ने अभिनेता अर्जुन कपूर के साथ डेटिंग शुरू करने से पहले दो हज़ार सत्रह में अरबाज को तलाक दे दिया।
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Punjab Assembly Election 2022: आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
Punjab Assembly Election 2022: आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले 34 साल पुराने रोड रेज (1988 road rage case) के मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिंद्धू (Punjab Congress chief Navjot Singh Sidhu) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिली है. उच्चतम न्यायालय ने 25 फरवरी तक के लिए इस मामले को स्थगित कर दिया है. उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को सुनाई गई सजा के फैसले के लिए दायर पुनर्विचार याचिका पर 25 फरवरी को सुनवाई करेगा. न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति एस. के. कौल ने सिद्धू के वकील के अनुराध पर इस मामले की यह तारीख निर्धारित की. सिद्धू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने पीठ से अनुरोध किया कि वह मामले को सुनवाई के लिए 23 फरवरी के बाद सूचीबद्ध करे. इस पर पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई 25 फरवरी को करेगी. सिद्धू फिलहाल कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष हैं और राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 20 फरवरी को होना है.
उच्चतम न्यायालय ने 15 मई, 2018 को सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाने का पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का फैसला निरस्त कर दिया था. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कांग्रेस नेता को वरिष्ठ नागरिक को चोट पहुंचाने का दोषी पाया था. न्यायालय ने सिद्धू को 65 वर्षीय बुजुर्ग को 'जानबूझ कर चोट पहुंचाने' का दोषी करार दिया था, लेकिन उन्हें जेल की सजा नहीं सुनाई और सिर्फ 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (जान बूझकर चोट पहुंचाने की सजा) के तहत दोषी को अधिकतम एक साल कैद, 1000 रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 27 दिसम्बर 1988 को सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू की पटियाला में कार पार्किंग को लेकर उनकी गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ कहासुनी हुई थी. इस झगड़े में गुरनाम की मौत हो गई थी. सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया. पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से मामला दर्ज करवाया गया. साल 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली और केस को खारिज कर दिया गया. कोर्ट का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता. लेकिन साल 2002 में राज्य सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की. 1 दिसम्बर 2006 को हाईकोर्ट बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना.
6 दिसम्बर को सुनाए गए फैसले में सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सजा सुनाई गई और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा. सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 10 जनवरी 2007 तक का समय दिया गया. दोनों आरोपियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और 11 जनवरी को चंडीगढ़ की कोर्ट में सरेंडर किया गया. 12 जनवरी को सिद्धू और उनके दोस्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सज़ा पर रोक लगा दी. वहीं शिकायतकर्ता भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और सिद्धू को हत्या का दोषी करार देने की मांग की.
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Punjab Assembly Election दो हज़ार बाईस: आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. Punjab Assembly Election दो हज़ार बाईस: आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चौंतीस साल पुराने रोड रेज के मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिंद्धू को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. उच्चतम न्यायालय ने पच्चीस फरवरी तक के लिए इस मामले को स्थगित कर दिया है. उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को सुनाई गई सजा के फैसले के लिए दायर पुनर्विचार याचिका पर पच्चीस फरवरी को सुनवाई करेगा. न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति एस. के. कौल ने सिद्धू के वकील के अनुराध पर इस मामले की यह तारीख निर्धारित की. सिद्धू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने पीठ से अनुरोध किया कि वह मामले को सुनवाई के लिए तेईस फरवरी के बाद सूचीबद्ध करे. इस पर पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई पच्चीस फरवरी को करेगी. सिद्धू फिलहाल कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष हैं और राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान बीस फरवरी को होना है. उच्चतम न्यायालय ने पंद्रह मई, दो हज़ार अट्ठारह को सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाने का पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का फैसला निरस्त कर दिया था. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कांग्रेस नेता को वरिष्ठ नागरिक को चोट पहुंचाने का दोषी पाया था. न्यायालय ने सिद्धू को पैंसठ वर्षीय बुजुर्ग को 'जानबूझ कर चोट पहुंचाने' का दोषी करार दिया था, लेकिन उन्हें जेल की सजा नहीं सुनाई और सिर्फ एक,शून्य रुपयापये का जुर्माना लगाया था. भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ तेईस के तहत दोषी को अधिकतम एक साल कैद, एक हज़ार रुपयापये का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है. क्या था पूरा मामला? दरअसल, सत्ताईस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ अठासी को सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू की पटियाला में कार पार्किंग को लेकर उनकी गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ कहासुनी हुई थी. इस झगड़े में गुरनाम की मौत हो गई थी. सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया. पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से मामला दर्ज करवाया गया. साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली और केस को खारिज कर दिया गया. कोर्ट का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता. लेकिन साल दो हज़ार दो में राज्य सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की. एक दिसम्बर दो हज़ार छः को हाईकोर्ट बेंच ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना. छः दिसम्बर को सुनाए गए फैसले में सिद्धू और संधू को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा. सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए दस जनवरी दो हज़ार सात तक का समय दिया गया. दोनों आरोपियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और ग्यारह जनवरी को चंडीगढ़ की कोर्ट में सरेंडर किया गया. बारह जनवरी को सिद्धू और उनके दोस्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सज़ा पर रोक लगा दी. वहीं शिकायतकर्ता भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और सिद्धू को हत्या का दोषी करार देने की मांग की.
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कौन कहता है कि फुटबॉल विश्व कप के साथ भारत का कोई संबंध नहीं है? कोलकाता में जन्मे, संगीत आइकन बप्पी लाहिड़ी कोलकाता में आयोजित होने वाले आगामी विश्व कप फुटबॉल (जूनियर) के लिए बिजवाई भगत द्वारा लिखित एक गीत 'जय हो जय हो बाबा फ़ुटबॉल' को गाती है और गाता है। मुख्य रूप से फुटबॉल और क्रिकेट के खेल का प्रबल प्रेमी, बप्पी लाहिरी ने इस गीत को पूरे विश्व में विशेषकर फुटबॉल आइकन पेले के सभी फुटबॉल आइकनों को समर्पित किया है। अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल स्टार डि.एगो मैराडोना के साथ एक छोटी मुलाकात में, दोनों ने खेल और फुटबॉल के लिए अपने प्यार का आदान-प्रदान किया।
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कौन कहता है कि फुटबॉल विश्व कप के साथ भारत का कोई संबंध नहीं है? कोलकाता में जन्मे, संगीत आइकन बप्पी लाहिड़ी कोलकाता में आयोजित होने वाले आगामी विश्व कप फुटबॉल के लिए बिजवाई भगत द्वारा लिखित एक गीत 'जय हो जय हो बाबा फ़ुटबॉल' को गाती है और गाता है। मुख्य रूप से फुटबॉल और क्रिकेट के खेल का प्रबल प्रेमी, बप्पी लाहिरी ने इस गीत को पूरे विश्व में विशेषकर फुटबॉल आइकन पेले के सभी फुटबॉल आइकनों को समर्पित किया है। अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल स्टार डि.एगो मैराडोना के साथ एक छोटी मुलाकात में, दोनों ने खेल और फुटबॉल के लिए अपने प्यार का आदान-प्रदान किया।
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बिहार के नवादा शहर से दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां एक गुस्साए हाथी ने बुजुर्ग महिला को इतनी खौफनाक मौत दी की नजारा देख लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। युवक के ईंट मारने के बाद जंगली हाथी को गुस्सा आ गया था। जिसके बाद यह खौफनाक घटना हुई।
नवादा (nawada news). बिहार के नवादा शहर के वारिसलीगंज इलाके से सनसनीखेज घटना हुई। इस घटना में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई। महिला की दर्दनाक मौत एक जंगली हाथी ने दी। गुस्साए हाथी ने अपनी सूंड में लपेटकर मृतका को बेरहमी से जमीन पर पटक दिया। इस पूरी घटना के देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बहुत मुश्किल से गुस्साए हाथी को भगाया। पूरा मामला शहर के बल्लोपुर गांव से सामने आया है। हाथी के गुस्साने की वजह थी युवक का उसको ईंट मारना लेकिन इसका शिकार बुजुर्ग महिला हो गई। गांववालों ने इसकी जानकारी वारिसलीगंज पुलिस थाने को दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जंगली हाथी गलती से भटकते हुए जंगल से रिहायसी इलाके में आ गया था जहां उस पर गांव के युवक की नजर पड़ गई तो उसने हाथी को भगाने के लिए ईंट मार दी। ईंट लगने के चलते हाथी भड़क गया और युवक पर हमला करने उसकी तरफ दौड़ने लगा। युवक किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाने लगा इसके लिए वह खेतों की तरफ दौड़ा।
वारिसलीगंज पुलिस थाने के थानाध्यक्ष राजू कुमार ने बताया की युवक का पीछा करते हुए हाथी भी खेत की तरफ दौड़ पड़ा। वहां पर सरयुग प्रसाद अपनी पत्नी शांति देवी के साथ खेत में सब्जी तोड़ रही थी। गुस्साए हाथी को अपनी तरफ आता देख सरयुग और युवक ने तो अपनी जान बचाने में सफल हो गए लेकिन बुजुर्ग महिला भागने में असफल रही और हाथी ने उसे अपनी सूंड में लपेट कर जमीन में पटक दिया। इसके बाद महिला को घायल हालत में छोड़कर हाथी ने गांव के कुछ घरों में भी नुकसान पहुंचाया।
वहीं गुस्साए हाथी के आने और महिला को घायल करने की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया लोग महिला को बचाने के साथ ही साथ हाथी को भगाने के लिए पहुंचे साथ ही घटना की जानकारी वन विभाग को भी दी। घटनास्थल पर पहुंच महिला की हालत देखी तो एक बार को हैरान हो गए। इसके बाद गुस्साए हाथी को भगाने की कोशिश करने लगे। तभी वहां पर फोरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम पहुंची। उन्होंने पटाखे फोड़ और आग लगाकर हाथी को वहां से भगाया। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के बारे में जानकारी नहीं जिसके चलते गांववालों में काफी आक्रोश है।
हाथी के हमले की जानकारी मिलते ही लोकल पुलिस पहुंची तो उन्होंने महिला को इलाज के लिए हॉस्पिटल के लिए भिजवाया। लेकिन महिला की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी उसने इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाने के बाद हॉस्पिटल पहुंचकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। हाथी के हमले के बाद से ही गांव में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अपनी पत्नी की ऐसी मौत देखकर पति सरयुग सदमे में है।
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बिहार के नवादा शहर से दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां एक गुस्साए हाथी ने बुजुर्ग महिला को इतनी खौफनाक मौत दी की नजारा देख लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। युवक के ईंट मारने के बाद जंगली हाथी को गुस्सा आ गया था। जिसके बाद यह खौफनाक घटना हुई। नवादा . बिहार के नवादा शहर के वारिसलीगंज इलाके से सनसनीखेज घटना हुई। इस घटना में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई। महिला की दर्दनाक मौत एक जंगली हाथी ने दी। गुस्साए हाथी ने अपनी सूंड में लपेटकर मृतका को बेरहमी से जमीन पर पटक दिया। इस पूरी घटना के देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बहुत मुश्किल से गुस्साए हाथी को भगाया। पूरा मामला शहर के बल्लोपुर गांव से सामने आया है। हाथी के गुस्साने की वजह थी युवक का उसको ईंट मारना लेकिन इसका शिकार बुजुर्ग महिला हो गई। गांववालों ने इसकी जानकारी वारिसलीगंज पुलिस थाने को दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जंगली हाथी गलती से भटकते हुए जंगल से रिहायसी इलाके में आ गया था जहां उस पर गांव के युवक की नजर पड़ गई तो उसने हाथी को भगाने के लिए ईंट मार दी। ईंट लगने के चलते हाथी भड़क गया और युवक पर हमला करने उसकी तरफ दौड़ने लगा। युवक किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाने लगा इसके लिए वह खेतों की तरफ दौड़ा। वारिसलीगंज पुलिस थाने के थानाध्यक्ष राजू कुमार ने बताया की युवक का पीछा करते हुए हाथी भी खेत की तरफ दौड़ पड़ा। वहां पर सरयुग प्रसाद अपनी पत्नी शांति देवी के साथ खेत में सब्जी तोड़ रही थी। गुस्साए हाथी को अपनी तरफ आता देख सरयुग और युवक ने तो अपनी जान बचाने में सफल हो गए लेकिन बुजुर्ग महिला भागने में असफल रही और हाथी ने उसे अपनी सूंड में लपेट कर जमीन में पटक दिया। इसके बाद महिला को घायल हालत में छोड़कर हाथी ने गांव के कुछ घरों में भी नुकसान पहुंचाया। वहीं गुस्साए हाथी के आने और महिला को घायल करने की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया लोग महिला को बचाने के साथ ही साथ हाथी को भगाने के लिए पहुंचे साथ ही घटना की जानकारी वन विभाग को भी दी। घटनास्थल पर पहुंच महिला की हालत देखी तो एक बार को हैरान हो गए। इसके बाद गुस्साए हाथी को भगाने की कोशिश करने लगे। तभी वहां पर फोरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम पहुंची। उन्होंने पटाखे फोड़ और आग लगाकर हाथी को वहां से भगाया। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के बारे में जानकारी नहीं जिसके चलते गांववालों में काफी आक्रोश है। हाथी के हमले की जानकारी मिलते ही लोकल पुलिस पहुंची तो उन्होंने महिला को इलाज के लिए हॉस्पिटल के लिए भिजवाया। लेकिन महिला की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी उसने इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाने के बाद हॉस्पिटल पहुंचकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। हाथी के हमले के बाद से ही गांव में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अपनी पत्नी की ऐसी मौत देखकर पति सरयुग सदमे में है।
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दिल्ली-एनसीआर वालों को साफ हवा में सांस लेने के मौके काफी कम मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति खराब नजर आ रही है। मॉनसून के दौरान, सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के 6 शहर शामिल हैं।
नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर वालों को साफ हवा में सांस लेने के मौके काफी कम मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति खराब नजर आ रही है। मॉनसून के दौरान, सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के 6 शहर शामिल हैं। देश का सबसे प्रदूषित शहर भी एनसीआर का भिवाड़ी है। जहां शनिवार को भी एयर इंडेक्स 205 रहा, जो खराब है। सीपीसीबी के अनुसार, कम दिन बारिश होने की वजह से ऐसा हो रहा है। साफ हवा के लिए हवा, बारिश और कई अन्य वजहें काम करती हैं।
सीपीसीबी के एयर इंडेक्स के अनुसार, भिवाड़ी सबसे प्रदूषित है। जबकि गुरुग्राम का नंबर दूसरा रहा, जहां एयर इंडेक्स 143 रहा। इसके बाद 132 के साथ फरीदाबाद, 114 के साथ ग्रेटर नोएडा, 112 के साथ नोएडा, 111 के साथ दिल्ली रहे।
एनसीआर में गाजियाबाद की हवा सबसे साफ है यहां एयर इंडेक्स 86 रहा, जो संतोषजनक स्थिति में आता है। सीपीसीबी के एक अधिकारी के अनुसार बरिश इस बार लगातार नहीं हो रही है। बारिश के दिन कम हुए है जिसकी वजह से हवा इस स्तर की बनी हुई है।
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दिल्ली-एनसीआर वालों को साफ हवा में सांस लेने के मौके काफी कम मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति खराब नजर आ रही है। मॉनसून के दौरान, सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के छः शहर शामिल हैं। नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर वालों को साफ हवा में सांस लेने के मौके काफी कम मिल रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति खराब नजर आ रही है। मॉनसून के दौरान, सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के छः शहर शामिल हैं। देश का सबसे प्रदूषित शहर भी एनसीआर का भिवाड़ी है। जहां शनिवार को भी एयर इंडेक्स दो सौ पाँच रहा, जो खराब है। सीपीसीबी के अनुसार, कम दिन बारिश होने की वजह से ऐसा हो रहा है। साफ हवा के लिए हवा, बारिश और कई अन्य वजहें काम करती हैं। सीपीसीबी के एयर इंडेक्स के अनुसार, भिवाड़ी सबसे प्रदूषित है। जबकि गुरुग्राम का नंबर दूसरा रहा, जहां एयर इंडेक्स एक सौ तैंतालीस रहा। इसके बाद एक सौ बत्तीस के साथ फरीदाबाद, एक सौ चौदह के साथ ग्रेटर नोएडा, एक सौ बारह के साथ नोएडा, एक सौ ग्यारह के साथ दिल्ली रहे। एनसीआर में गाजियाबाद की हवा सबसे साफ है यहां एयर इंडेक्स छियासी रहा, जो संतोषजनक स्थिति में आता है। सीपीसीबी के एक अधिकारी के अनुसार बरिश इस बार लगातार नहीं हो रही है। बारिश के दिन कम हुए है जिसकी वजह से हवा इस स्तर की बनी हुई है।
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60 के दशक में बना पीटीपीएस स्थित सीसीएल का वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट रख-रखाव के अभाव में बदहाल हो गयी है। वहीं लॉक डाउन में पानी साफ करने का केमिकल के नहीं होने से जैसे-तैसे फ़िल्टर कर पेयजल के लिए पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसी गन्दे पानी को सीसीएल क्षेत्र के भुरकुंडा, उरीमारी, सयाल, बड़काकाना आदि के सीसीएलकर्मी सहित अन्य लोगों को पीना पड़ रहा है। जिससे लोगों को बीमार होने की संभावना बढ़ गई है। मालूम हो कि इस वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट के केमिकल भवन में रत्तीभर एलम, ब्लाचिंग पाउडर नहीं है। जिसके कारण पतरातू डैम से इस फिल्ट्रेशन प्लांट में आने वाले पानी को बिना केमिकल का ही फिल्टर कर सीधे सप्लाई किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पूरा प्लांट परिसर साफ-सफाई के अभाव में झाड़ियों से भर गया है। जिससे कर्मियों को ड्यूटी करने में पसीना छुट जाता है। क्योंकि ड्यूटी के दौरान झाड़ियों से कब सांप-छुछुंदर निकल जाए उन्हें नहीं पता। दूसरी ओर केमिकल के अभाव में वे केवल बालू के बीट और मशीन से फिल्टर कर पानी को सप्लाई कर रहे हैं। ---फिटकिरी और ब्लाचिंग पाउडर मंगाने के लिए दिया जा चुका है आदेश : एसओ (सिविल)सीसीएल बरका सयाल के एसओ (सिविल) पानी साफ करने वाले केमिकल की कमी होने की बात को स्वीकार करते हुए बताते हैं कि लॉक डाउन के कारण इसकी कमी हुई है। किंतु अब इस समस्या को शीघ्र ही दूर कर लिया जाएगा। क्योंकि फिटकिरी, पोटास और ब्लाचिंग पाउडर आदि के लिए आदेश दे दिया गया। जबकि फोरमैन ने बताया कि यह समस्या पिछले 15 दिनों से चल रहा है। बहरहाल फिल्ट्रेशन प्लांट में पानी साफ करने का केमिकल के कारण हज़ारों सीसीएलकर्मी और उनके परिवार गन्दा पानी पीने को मजबूर हैं। दूसरी ओर सन्डे ड्यूटी नहीं मिलने के कारण रविवार को इस प्लांट से जलापूर्ति बाधित था। वहीं सोमवार को कर्मियों द्वारा जलापूर्ति सुचारु रुप से शुरु कर दी गई है।
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साठ के दशक में बना पीटीपीएस स्थित सीसीएल का वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट रख-रखाव के अभाव में बदहाल हो गयी है। वहीं लॉक डाउन में पानी साफ करने का केमिकल के नहीं होने से जैसे-तैसे फ़िल्टर कर पेयजल के लिए पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसी गन्दे पानी को सीसीएल क्षेत्र के भुरकुंडा, उरीमारी, सयाल, बड़काकाना आदि के सीसीएलकर्मी सहित अन्य लोगों को पीना पड़ रहा है। जिससे लोगों को बीमार होने की संभावना बढ़ गई है। मालूम हो कि इस वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट के केमिकल भवन में रत्तीभर एलम, ब्लाचिंग पाउडर नहीं है। जिसके कारण पतरातू डैम से इस फिल्ट्रेशन प्लांट में आने वाले पानी को बिना केमिकल का ही फिल्टर कर सीधे सप्लाई किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पूरा प्लांट परिसर साफ-सफाई के अभाव में झाड़ियों से भर गया है। जिससे कर्मियों को ड्यूटी करने में पसीना छुट जाता है। क्योंकि ड्यूटी के दौरान झाड़ियों से कब सांप-छुछुंदर निकल जाए उन्हें नहीं पता। दूसरी ओर केमिकल के अभाव में वे केवल बालू के बीट और मशीन से फिल्टर कर पानी को सप्लाई कर रहे हैं। ---फिटकिरी और ब्लाचिंग पाउडर मंगाने के लिए दिया जा चुका है आदेश : एसओ सीसीएल बरका सयाल के एसओ पानी साफ करने वाले केमिकल की कमी होने की बात को स्वीकार करते हुए बताते हैं कि लॉक डाउन के कारण इसकी कमी हुई है। किंतु अब इस समस्या को शीघ्र ही दूर कर लिया जाएगा। क्योंकि फिटकिरी, पोटास और ब्लाचिंग पाउडर आदि के लिए आदेश दे दिया गया। जबकि फोरमैन ने बताया कि यह समस्या पिछले पंद्रह दिनों से चल रहा है। बहरहाल फिल्ट्रेशन प्लांट में पानी साफ करने का केमिकल के कारण हज़ारों सीसीएलकर्मी और उनके परिवार गन्दा पानी पीने को मजबूर हैं। दूसरी ओर सन्डे ड्यूटी नहीं मिलने के कारण रविवार को इस प्लांट से जलापूर्ति बाधित था। वहीं सोमवार को कर्मियों द्वारा जलापूर्ति सुचारु रुप से शुरु कर दी गई है।
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छियासठ ]
चुकी है। कुछ ऐसे विषय है, जिनके सम्बन्ध में मुझे छापको लिखने के लिये कहा गया है
जैसा कि वक्तव्य को हमने समझा है, उसमें विधान निर्मात्री परिषद् के चुनाव तथा संचालन के लिए कुछ सिफारिशें तथा कार्यविधि दी हुई हैं। मेरी समिति के मत से निर्मित हो जाने के बाद परिषद् स्वयं विधान निर्माण के लिए एक सत्ता सम्पन्न ( सावरेन ) संस्था होगी, जिसके कार्य में कोई भी बाहरी शक्ति बाधा न डाल सकेगी और सन्धि में उसके सम्मिलित होने के विषय में भी यही बात लागू रहेगी। साथ ही, मन्त्रि - मिशन द्वारा सुझायी हुई सिफारिशों तथा कार्य विधि में अपनी इच्छानुसार कोई भी परिवर्तन कर सकने के लिये परिषद् स्वतंत्र होगी और विधान सम्बन्धी कार्यों के लिए, विधान परिषद् के एक सत्ता सम्पन्न संस्था होने के कारण, उसके अन्तिम निर्णय स्वयमेव कार्यान्वित होंगे ।
जैसा कि आपको मातम होगा, आपके वक्तव्य में कुछ ऐसी सिफारिशें भी हैं, जो कांग्रेस के उस रुख के विपरीत हैं, जो उसने शिमले में तथा अन्यत्र ग्रहण किया था । स्वभावतः हम · इन सिफारिशों की त्रुटियों को, परिषद् द्वार) हटवाने का यत्न करेंगे । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये हम देश को तथा विधान निर्मात्री परिषद् को अपने विचारों से प्रभावित करने का यत्न भी करेंगे ।
एक बात से, जो गांधीजी ने बताई, मेरी समिति को बात की कोशिश में है कि विभिन्न प्रान्तीय असेम्बलियों में यूरोपियन सदस्य, विधान परिषद् के लिए चुने जानेवाले उम्मेदवार हो और न अपने वोट ही दें ।
प्रसन्नता हुई । वह यह कि श्राप इस विशेषकर बंगाल तथा श्रासाम के प्रतिनिधियों के निर्वाचन में न तो
ब्रिटिश बलोचिस्तान से एक प्रतिनिधि के चुने जाने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं दी गई है । जहाँ तक हमें मालूम है, बलोचिस्तान में कोई निर्वाचित अमेम्बली अथवा अन्य प्रकार की सभा नहीं है, जो इस प्रतिनिधि को चुन सके। ऐसे किसी भी एक व्यक्ति के होने से विधानपरिषद् में अधिक अन्तर भले ही न पड़े. किन्तु यदि वह व्यक्ति एक पूरे सूबे बलोचिस्तान की ओर से बोलने का उपक्रम करे, तो इससे निस्सन्देह भारी श्रन्तर पड़ सकता है, विशेषतः यदि वह उस सूबे का वास्तविक प्रतिनिधि किसी भी प्रकार से न हो । इस प्रकार का प्रतिनिधित्व रखने की अपेक्षा, कोई भी प्रतिनिधि न रखना कहीं अधिक अच्छा है, क्योंकि ऐसे प्रतिनिधि से गलत धारणा पैदा हो सकती है और बलोचिस्तान के भाग्य का ऐसा निर्णय किया जा सकता है, जो उस सूबे के निवासियों की इच्छा के प्रतिकूल हो । यदि बलोचिस्तान से जन-प्रिय प्रतिनिधि चुने जाने की कोई व्यवस्था की जा सकी, तो हम उसका स्वागत करेंगे। अतएव, मेरी समिति को गांधीजी से यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि बलोचिस्तान को श्राप परामर्शदात्री समिति के कार्य- के अन्तर्गत सम्मिलित करना चाहते हैं ।
विधान के मूलस्वरूप से सम्बन्ध रखनेवाली अपनी सिफारिशों में आपने कहा है कि प्रान्तों को कार्यकारिणी तथा व्यवस्थापक सभाओंों से युक्त गुट बनाने की स्वतंत्रता रहनी चाहिये और प्रत्येक गुट इस बात का निर्णय कर सकेगा कि प्रान्तीय विषयों में से कौन-से विषय उसके अधीन रहने चाहियें । ठीक इससे पहले आपने बताया है कि संघ ( यूनियन ) के अधीन रहनेवाले विषयों के सिवा अन्य सारे विषय तथा शेष अधिकार प्रान्तों को मिलने चाहिये । वक्तव्य में इसके बाद, पृष्ठ ५ में आपने कहा है कि विधान परिषद् के प्रान्तीय प्रतिनिधि तीन भागों ( सेक्शनों ) में बिभक्त हो जायेंगे और ये विभाग ( सेक्शन ) हर सेक्शन के प्रांतों के प्रान्तीय
[ सड़सठ
विधान तैयार करने का कार्य शुरू करेंगे और यह भी निर्णय करेंगे कि इन प्रांतों के लिए क्या कोई गुट-विधान भी तैयार किया जायगा ।
इन दोनों पृथक् व्यवस्थाओं में, हमें निश्चित रूप से भारी अन्तर प्रतीत होता है। मूख व्यवस्था द्वारा किसी भी प्रान्त की अपने इच्छानुसार कुछ भी करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है और तदनन्तर इस विषय में बाध्यता भ्रा गई है, जिससे स्पष्टतः उक्त स्वतन्त्रता पर श्राघात होता हे । यह सत्य है कि आगे चलकर प्रांत किसी भी गुट से पृथक् हो सकते हैं, किन्तु किसी भी प्रकार से यह स्पष्ट नहीं होता कि कोई भी प्रांत अथवा उसके प्रतिनिधि, कोई ऐसा कार्य करने के लिए किस प्रकार बाध्य किये जा सकते हैं, जो वे करना नहीं चाहते। कोई भी प्रान्तीय असे म्बली, अपने प्रतिनिधियों को आदेश दे सकती है, कि वे किसी भी 'गुट' में अथवा किसी विशेष गुट में अथवा लेक्शन में सम्मिलित न हों । यूँ कि 'सी' तथा 'बी' सेक्शनों का निर्माण किया गया है, प्रतएव स्पष्ट है कि इन सेक्शनों में एक प्रांत की प्रभुता रहेगी - 'बी' सेक्शन में पंजाब की और 'सी' सेक्शन में बंगाल की। प्रभु प्रान्त इस प्रकार का प्रान्तीय विधान तैयार कर सकता है, जो सिन्ध, उत्तर-पश्चिमी सीमाप्रान्त अथवा आसाम की इच्छाओं के सर्वथा विरुद्ध हो । हो सकता है कि प्रभु प्रान्त विधान के अन्तर्गत निर्वाचन तथा अन्य विषयों के सम्बन्ध में ऐसे नियम भी बना दें, जिनसे किसी भी प्रांत के किसी गुट से पृथक् हो सकने की सारी व्यवस्था बेकार हो जाय। कभी भी ऐसा खयाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा विचार स्वयं योजना के आधारभूत सिद्धांतों तथा नीति के विरुद्ध ठहरेगा ।
देशी राज्यों का प्रश्न अस्पष्ट ही छोड़ दिया गया है, अतएव उस विषय इस समय में अधिक कुछ कहना नहीं चाहता। किन्तु स्पष्ट है कि विधान परिषद् में राज्यों के जो भी प्रतिनिधि सम्मिलित हों, उन्हें न्यूनाधिक उसी रूप में श्रामा चाहिए जिस रूप में प्रांतों के प्रतिनिधि आयेंगे । पूर्णतया भिन्न तत्वों के संयोग से विधान परिषद् का निर्माण नहीं किया जा सकता । ऊपर मैंने, श्रापके वक्तव्य से उत्पन्न होनेवाली कुछ बातों का उल्लेख किया है । सम्भवतः उनमें से कुछ को आप स्पष्ट कर सकते हैं तथा उनको दूर कर सकते हैं। किन्तु मुख्य बात, जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, यही है, कि 'विधान परिषद्' को हम एक सर्व-सत्ता- समान सभा के रूप में देखते हैं, जो अपने सम्मुख उपस्थित किसी भी विषय पर अपने इच्छानुसार निर्णय कर सकती है। एकमात्र प्रतिबन्ध जिसे हम इस विषय में स्वीकार करते हैं यह है कि कुछ बड़े साम्प्रदायिक प्रश्नों के निर्णय दोनों बड़े सम्प्रदायों में से हर दोनों के बहुमत से होने चाहिये । आपकी सिफारिशों के दोष दूर करने के लिए हम जनता तथा विधान परिषद् के सदस्यों के समक्ष स्वयं अपने प्रस्ताब उपस्थित करने का प्रयत्न करेंगे ।
गांधीजी ने मेरी समिति को सूचित किया है कि अापका विचार है कि विधान परिषद्द्वारा दी गई व्यवस्था के अनुसार सरकार की स्थापना हो जाने के बाद तक, ब्रिटिश सेना भारत में रहेगी । मेरी समिति अनुभव करती है कि भारत में विदेशी सेना की उपस्थिति भारतीय स्वाधीनता को नगण्य कर देगी ।
राष्ट्रीय अन्तर्कालीन सरकार की स्थापना के क्षण से भारत को वास्तव में स्वाधीन समझा जाना चाहिये ।
ताकि मेरी समिति आपके वक्तव्य के सम्बन्ध में किसी निर्णय पर पहुँच सके, इस पत्र का उत्तर शीघ्र पाकर मैं कृतज्ञ होऊँगा ।
आपका विश्वासपात्र( इ० ) अबुल कलाम आजाद
अड़सठ ]
मौलाना आजाद के नाम भारत मंत्री का पत्र
तारीख २२ मई
प्रतिनिधि मंडल ने आपके २० मई वाले पत्र पर सोच-विचार किया है और उसका खयाल है कि इसके उत्तर देने का सर्वोत्तम तरीका यह है कि उसे अपनी साधारण स्थिति आपके सम्मुख स्पष्ट रूप से रख देनी चाहिये । चुंकि भारतीय नेता बहुत लम्बे अर्से तक बातचीत करने के बाद भी किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके, इसलिए प्रतिनिधि मंडल ने दोनों ही प्रमुख दलों के दृष्टिकोणों में निकटतम सामंजस्य स्थापित करने के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, इसलिए यह योजना संपूर्ण रूप में ही लागू हो सकती है और यह तभी सफल हो सकती है यदि उस पर समझौते और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर अमल किया जाय।
प्रान्तों की गुटबन्दी के कारणों से आप भली-भांति परिचित हैं और यह बात इस योजना का नितान्त श्रावश्यक पहलू है जिसमें कोई संशोधन केवल दोनों दलों के पारस्परिक समझौते द्वारा हो किया जा सकता
इसके अलावा दो और बातें भी हैं, जिनका हमारा खयाल है कि हमें उल्लेख कर देना चाहिये । प्रथम आपने अपने पत्र में विधान निर्मात्री परिषद् को एक सत्ता सम्पन्न संस्था कहा है जिसके अन्तिम निर्णयों पर स्वतः अमल होने लगेगा। हमारा विचार है कि विधान निर्मात्री परिषद् की अधिकार-सीमा, उसका कार्य क्षेत्र और उसकी कार्यप्रणाली वह जिस पर चलना चाहती है, इन वक्तव्यों द्वारा स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाता है। एक बार विधान निर्मात्री परिषद् के बन जाने पर और उसके द्वारा इस आधार पर काम करने पर स्वभावतः उसकी स्वाधीन विवे चना में हस्तक्षेप करने अथवा उसके निर्णयों पर आपत्ति करने का कोई इरादा नहीं है। जब विधान निर्मात्री परिषद् अपना कार्य समाप्त कर चुकेगी, तो सम्राट् की सरकार पार्लीमेंट से ऐसी कार्रवाई करने की सिफारिश करेगी जैसी कि भारतीय जनता को सत्ता हस्तान्तरित करने के लिये आवश्यक समझी जायगी, परन्तु इस सम्बन्ध में सिर्फ दो ही शर्ते रहेगी, जिनका उल्लेख वक्तव्य में कर दिया गया है और जो हमारा विश्वास है कि विवादास्पद नहीं है - अर्थात् अल्पसंख्यकों की रक्षा की पर्याप्त व्यवस्था और सत्ता हस्तान्तरित करने के परिणामस्वरूप उठनेवाले विषयों के सम्बन्ध में सन्धि करने की सहमति ।
दूसरे, जब कि सम्राट् की सरकार इस बात के लिए अत्यधिक उत्सुक है कि अन्तर्कालीन अवधि यथासंभव कम-से-कम हो, हमें विश्वास है कि आप यह अनुभव करेंगे कि उपर्युक्त कारणों के आधार पर नये विधान के कार्यान्वित होने से पहले स्वाधीनता का प्रादुर्भाव नहीं हो सकता।
आपका - पेथिक लारेंस
नई दिल्ली बुधवार - मंत्रिमिशन के प्रतिनिधि मण्डल ने नरेन्द्र मण्डल को जो स्मृति पत्र भेजा है वह आज प्रकाशित हो गया है। उसमें घोषित किया गया है कि नये विधान के अनुसार सम्राट् की सरकार सर्वोपरि सत्ता का उपयोग समाप्त कर देगी। इस स्थान की पूर्ति या तो देशी राज्य, ब्रिटिश भारत की सरकार या सरकारों के साथ संघीय सम्बन्ध स्थापित करके कर लेंगे या फिर उस सरकार या सरकारों के साथ वह नयी राजनीतिक व्यवस्था कर लेंगे ।
[ उन्हत्तर
यह स्मृति पत्र तभी तैयार कर लिया गया था जब प्रतिनिधि मण्डल भारतीय दलों के नेताओं से बहस कर रहा था और इसका सारांश देशी राज्यों के प्रतिनिधियों को उनकी मुलाकात के समय दे दिया गया था ।
स्मृति पत्र इस प्रकार था :--
देशी राज्यों को सन्धियों तथा सर्वोच्च सत्ता के सम्बन्ध में मन्त्रि प्रतिनिधि मण्डल ने नरेन्द्र मण्डल के चान्सलर के सम्मुख निम्न विचारपत्र उपस्थित किया :कामन्स सभा ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हाल के वक्तव्य देने से पूर्व नरेशों को आश्वासन दे दिया था कि सम्राट् के प्रति उनके सम्बन्धों तथा उनके साथ की गयी सन्धियों और इकरारनामों द्वारा गारंटी किये गये अधिकारों में उनकी स्वीकृति के बिना कोई परिवर्तन करने का सम्राट् का इरादा नहीं है। साथ ही यह भी कह दिया था कि वार्ता के परिणामस्वरूप होनेवाले परिवर्तनों के सिलसिले में स्वीकृति को अनुचित रूप से रोक भी न रखा जायगा। उसके बाद नरेन्द्र मण्डल भी इस बात की पुष्टि कर चुका है कि देशी राज्य भारत द्वारा अपनी पूर्ण स्वतंत्र स्थिति की तात्कालिक प्राप्ति के लिए देश की श्राम इच्छा का पूरी तरह समर्थन करते हैं । सम्राट् की सरकार ने अब घोषणा की है कि यदि ब्रिटिश भारत की उत्तराधिकारी सरकार अथवा सरकारें स्वाधीनता के लिए इच्छा करेंगी तो उनके मार्ग में कोई बाधा न डाली जायगी। इन घोषणाओं का प्रभाव यही होता है कि जिनका भारत के भविष्य से सम्बन्ध है वे सब के सब चाहते हैं कि भारत ब्रिटिश राष्ट्र-मण्डल के भीतर अथवा बाहर स्वाधीनता की स्थिति प्राप्त करे । भारत-द्वारा इस श्राकांक्षा के पूरी करने में जो भी कठिनाइयां हैं, प्रतिनिधि मण्डल उन्हें दूर करने में सहायता प्रदान करने के ही लिए यहां आया हुआ है ।
संक्रान्ति काल में, जिसकी मियाद एक ऐसे नये वैधानिक ढांचे के कार्यान्वित होने से पूर्व श्रवश्य समाप्त हो जानी चाहिए जिसके अन्तर्गत ब्रिटिश भारत स्वतन्त्र अथवा पूर्ण रूप से स्वशासित होगा, सर्वोच्च सत्ता कायम रहेगी; परन्तु ब्रिटिश सरकार किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च सत्ता एक भारतीय सरकार को हस्तान्तरित नहीं कर सकती और न ही करेगी ।
इस बीच देशी राज्य भारत के लिए वैधानिक ढांचे के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण भाग लेने की स्थिति में रहेंगे और देशी राज्यों द्वारा सम्राट् की सरकार को सूचित कर दिया गया है कि वे अपने और समस्त भारत के हितों का दृष्टि से इस नये ढांचे के निर्माण में भाग लेने और उसके पूरा हो जाने पर उसमें अपना उचित स्थान प्राप्त करने के इच्छुक हैं। इसका मार्ग प्रशस्त करने के निमित्त वे अपने शासन-प्रबन्ध को यथाशक्ति उच्चतम मान तक पहुँचाने की व्यवस्था करके निस्संदेह अपनी स्थिति को सुदृद बना लेंगे। जहां-कहीं भो देशी-राज्यों के वर्तमान साधनों के अन्तर्गत इस मान तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा जा सकता, वे निस्सदेह यह प्रबन्ध करेंगे कि शासन : बन्ध की दृष्टि से ऐसे देशी राज्यों के इतने बड़े संगठन बना दिये जायँ अथवा वे ऐसी बड़ी इकाइयों में शामिल हो जायँ जिससे कि वे इस वैधानिक ढांचे में उपयुक्त स्थान प्राप्त कर सकें। इससे विधान निर्माण-काल में देशो राज्यों की स्थिति भी सुध्द हो जायगी, क्योंकि यदि विभिन्न सरकारों ने पहले से ही ऐसा नहीं किया होगा तो उन्हें प्रतिनिधित्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना-द्वारा अपने यहां के जनमत के साथ घनिष्ठ और निरन्तर संपर्क स्थापित करने के लिए सक्रिय भाग लेने का अवसर मिल जायगा ।
सत्तर ]
संक्रान्ति काल में देशी राज्यों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे ब्रिटिश भारत के साथ समान मामलों - विशेषकर श्रौद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्रों से सम्बन्ध रखनेवाले मामलों की भावी व्यवस्था पर ब्रिटिश भारत से बात-चीत चलायें । यह बात चीत जो हर हालत में श्रावश्यक है - चाहे रियासतें नवीन विधान निर्माण में भाग लेना चाहें अथवा नहीं - - सम्भवतः काफी समय लेगी और नये विधान के लागू होने के समय भी कई दिशाओं में प्रधूरी रह सकती है। अत. शासनसम्बन्धी अड़चनों से बचने के लिए यह आवश्यक है कि नई रियासतों तथा सरकार श्रथवा सरकारों के भावी सूत्रधारों के बीच किसी प्रकार का समझौता हो जाय ताकि उस समय तक समान मामलों में वर्तमान अवस्था जारी रह सके अब तक कि नया समझौता सम्पूर्ण नहीं हो जाता। ब्रिटिश सरकार और सम्राट् का प्रतिनिधि इस सम्बन्ध में यथाशक्ति सहायता करने को तत्पर रहेगा ।
जब ब्रिटिश भारत में नई, पूर्ण रूप से स्वाधीन तथा स्वतन्त्र सरकार या सरकारें स्थापित हो जायँगी, तब सम्राट् की सरकार का इन सरकारों पर ऐसा प्रभाव नहीं होगा कि ये सर्वोच्च सत्ता के कर्तव्यों को निभा सकें। इसके अतिरिक्त वे ऐसी कल्पना नहीं कर सकते कि इस कार्य के लिए भारत में ब्रिटिश सेना रख ली जायगी। अतः यह युक्तिसंगत ही है, तथा देशी राज्यों की ओर से जो इच्छा प्रकट की गई है उसके अनुरूप है, कि सम्राट् की सरकार सर्वोच्च सत्ता के रूप में कार्य न करेगी। इसका यह तात्पर्य हुआ कि देशी राज्यों के वे सर्व अधिकार, जो सम्राट् के साथ सम्बन्धों पर आश्रित हैं, अब लुप्त हो जायेंगे और वे सब अधिकार जो इन राज्यों ने सर्वोच्च सत्ता को समर्पित कर दिये थे, अब उन्हें वापस मिल जायेंगे। इसलिए देशी राज्यों तथा ब्रिटिश भारत और सम्राट् के मध्य राजनीतिक व्यवस्था का अब अन्त कर दिया जायगा । इस रिक्त स्थान की पूर्ति या तो देशी राज्यों द्वारा उत्तराधिकारी सरकार से या ब्रिटिश भारत की सरकारों से संघीय सम्बन्ध स्थापित करने पर होगी, अथवा ऐसा न होने पर इस सरकार या सरकारों से विशेष व्यवस्था करने पर होगी ।
एक प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है कि कैबिनेट-शिष्टमंडल यह स्पष्ट कर देना चाहता है, कि बुधवार को "नरेन्द्रमंडल के प्रधान को, रियासतों, सन्धियों तथा सर्वोपरि सत्ता सम्बन्धी पेश किया गया मैमोरेंडम' शीर्षक से जो पत्र जारी किया गया है, वह मिशन ने उस समय तैयार किया था जबकि भिन्न-भिन्न दलों के नेताओं से परामर्श शुरू नहीं हुआ था और यह कि उस वार्तालाप का सारांश मात्र था, जो कि मिशन ने रियासतों के प्रतिनिधियों से पहली बार किया था । इस विज्ञप्ति को "उत्तराधिकारी सरकार या ब्रिटिश इण्डिया की सरकारें" शब्दों के प्रयोग की व्याख्या समझा जाय, जो मंडल के पिछले बयान के बाद प्रयुक्त न किये जाते । मेमोरेंडम के ऊपर दिया गया नोट भूल थी ।
सर एन० जी० आयंगर का वक्तव्य
"यह अफ़सोस की बात है कि कैबिनेट-शिष्टमण्डल ने हिन्दुस्तानी रियासतों से अपने विचार उतने खुले और साफ शब्दों में प्रकट नहीं किए, जितने कि उन्होंने हिन्दुस्तान के विधान को कुछ श्राधार भूत बातों के विषय में किये हैं।
कांग्रेस कार्यकारिणी को शिकायत है कि देशी रियासतों के बारे में जो कहा गया है वह अस्पष्ट है और बहुत कुछ भविष्य के फ़ैसलों पर छोड़ा गया है। महात्मा गांधी ने ठीक ही कहा है, कि शिष्टमंडल ने, सर्वोपरि सत्ता की समस्या को त्रिशंकु के समान छोड़ दिया है। रियास-विषयक निर्णय जानने के लिए, हमें मंडल के १६ मई के वक्तव्य और रियासतों,
[ इकहत्तर
सन्धियों तथा सर्वोपरि सत्ता' पर दिये गये स्मृति पत्र को देखना होगा, जो कि उन्होंने नरेन्द्र मंडल के प्रधान को पेश की थी और २२ मई को प्रकाशनार्थ दी था। इसके बाद मैं पहली बात को 'फैसला' और दूसरी को 'स्मरण-पत्र' नाम से लिखूंगा ।
यदि इन दोनों दस्तावेजों को पूरी छानबीन की जाय, तो मालूम होगा, कि मंडल ने देशी रियासतों के बारे में निम्नलिखित प्रस्तावों को पसंद किया है :(क) हिन्दुस्तान का एक संघ बनाया जाय, जिसमें देशी रियासत तथा अंग्रेज़ी इलाके सभी शामिल हों।
(ख) कोई देशी रियासत या प्रान्त, इस मंत्र के बाहर नहीं रह सकेगा। दूसरे शब्दों में, संघ में शामिल न होने का अधिकार किसी प्रान्त या देशी रियासत को नहीं दिया गया। अलवत्ता संघ का सदस्य बनते वक्त, कोई देशो रियासत, चाई तो बाकी हिन्दुस्तान की सरकार के साथ सम्मिलित संबन्ध रख सकती है और चाहे इसके साथ किसी दूसरी प्रकार का राजनीतिक संबन्ध स्थापित कर सकती है।
(ग) सभी देशों रियासतों को विदेशी विभाग, बचाव तथा रेल-तार-डाक के प्रबन्ध संघ के हाथों में सौंपने होंगे।
(घ) उन देशी रियासतों को, जो शेष हिन्दुस्तान के साथ सम्मिलित सम्बन्ध स्थापित करेंगा, सघ की धारा-सभा तथा प्रबन्ध विभाग में प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा । अतः वे संघ-शासित विभागों में भी पूरा पूरा भाग ले सकेंगी। सम्मिलित सबन्ध के बजाय कोई दूसरी प्रकार का राजनीतिक सम्बन्ध कायम करने की सूरत में भी, संघ-सरकार की सर्वोररि सत्ता को अवश्य स्वीकार करना होगा, क्योंकि प्रस्तावित संघ के विधान के अनुसार, जैसा कि वह इस समय है, विदेशी विभाग और रक्षा-विभाग, हर हालत में सारे हिन्दुस्तान के लिये संघ-केन्द्र ही से निरीक्षित होंगे।
(ङ) 'फ़ैसले' में, प्रान्तों के समूहीकरण सम्बन्धी जो व्यवस्था दी गई है, उसके अनुसार रियासतों के किसी एक समूह - 'ए', 'बी' या 'सी' में शामिल हो सकने की सम्भावना नहीं रहती। रियासतें, केवल अन्तिम अवस्था में, अर्थात् संघ केन्द्र के लिए विधान निर्माण के समय पर ही भाग ले सकेंगी
(घ) 'फ़ैसल' में, किसी भी प्रान्त या रियासत को, संघ से संबन्ध विच्छेद का अधिकार नहीं दिया गया। एक प्रान्त उस वक्त जबकि उसकी पहली निर्वाचित धारासभा बेटे, किसी एक समूह से बाहर निकल सकता है, किन्तु संघ के बाहर नहीं । एक रियासत सम्मिलित संबन्ध न रखने में स्वतन्त्र है, मगर संघ में उसको रहना ही पड़ेगा । इस 'फ़ैसले' के अनुसार, कोई एक प्रान्त, पहले १० माज गुज़रने पर, और बाद में दस-दस साल के अन्तर से भी अपनी धारासभा के बहुमत से, किसी समूह अथवा संघ के विधान पर पुनः विचार की माँग करने का अधिकार रखता है। इसका ता यही मतलब हुश्रा, कि एक प्रान्त, संघ या समूह के विधान के संशोधन का प्रस्ताव रख सकता है; लेकिन, अपनी यकतर्फा इच्छा से, संघ या समूह के बाहर नहीं जा सकता । इसके संशोधन संबन्धी प्रस्ताव पर तभी श्रमल-दरामद हो सकता है, जबकि सारा समूह या संघ स्वीकृति दे दे, और जबतक कि यह उस विशेष व्यवस्था के अनुसार पास न किया जाय, जो कि ऐसे संशोधनों की सूरत में संघ-विधान के लिए निश्चय ही बनाई जायगी।
(छ) अंतरिम सरकार के समय, ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता बदस्तूर रहेगी; हिन्दुस्तान के
बहत्तर ]
स्वतन्त्र होने पर ही इसका अंत होगा ।
(ज) अंतरिम-काल में, अंग्रेजी हिन्दुस्तान और देशी रियासतों के बीच प्रार्थिक तथा पारस्परिक हानि-लाभ के विषयों की आगामी व्यवस्था सम्बन्धी बात-चीत प्रारंभ हो जानी चाहिये । यदि यह बात-चीत, हिन्दुस्तान का विधान बन जाने तक सम्पूर्ण न हो पाये, तो नया प्रबन्ध सम्पूर्ण हो जाने तक, प्रस्तुत अवस्था ही को चालू रखने की व्यवस्था होनी चाहिए ।
३. अंतरिम सरकार के समय में, अनुमानतः देशी रियासतों-संबन्धी ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता पर भी पुनर्विचार होगा, ताकि उन रियासतों के साथ जो सम्मिलित प्रबन्ध में आती हैं या दूसरी रियासतों के साथ, नई सरकार की तरफ से सर्वोपरि सत्ता की जगह कोई दूसरा संबन्ध स्थापित किया जा सके । यह तो यकीनी बात है, कि जब तक, एक न एक तरह की राजनीतिक व्यवस्था ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता का स्थान नहीं लेती, हिन्दुस्तान की एकता कायम नहीं रखी जा सकती।
४. 'स्मरण-पत्र', अनेक रूप से असाधारण राजनीतिक दस्तावेज़ है। जो लोग, सर्वोपरि सत्ता कायम रखने के लिए, हिन्दुस्तानी ब्रिटिश सरकार या ब्रिटिश सम्राट् की सरकार के सलूक के इतिहास से परिचित हैं, उन्हें इस 'स्मरण-पत्र' के कुछ एक बयानों पर भारी श्राश्चर्य हुआ होगा। मुझे सन्देह है, कि 'स्मरण-पत्र' के बयानों को, शिष्टमंडल से मिलनेवाले रियासती प्रतिनिधियों ने स्वीकार भी किया होगा, गोकि यह जरूर कहा जा सकता है, कि यह 'स्मरण-पत्र' उन प्रतिनिधियों के सामने एकदम अचानक नहीं पेश किया गया ।
५. सर्वोपरि सत्ता खाली एक इकरारनामेका-सा सम्बन्ध नहीं है। आजकल के हालात में इसके प्रयोग की सीमा नहीं बांधी जा सकती। इसका अधिकार सन्धियों, सनदों और अन्य बन्धनों से मुक्त रहकर बढ़ता ही रहा है। इन सन्धियों, बन्धनों और समदों द्वारा प्राप्त विशेष अधिकारों से, सर्वोपरि सत्ता के वश में रहकर ही लाभ उठाया जा सकता है। किसी सन्धि या सनद के ऐसे मतलब नहीं लिए जा सकते कि जिससे, कोई रियासत अपने को सर्वोपरि सत्ता से मानने लगे । यहो सत्ता, रिवाज तथा रियासत की विशेष आवश्यकताओं को सामने रखते फैसला करती आई है, कि समस्त भारत या रियासतों तथा उनकी प्रजाओं के हितों की सुरक्षा कैसे की जानी चाहिये। अंग्रेज़ी राज्य और उसकी सरकार की सर्वोपरि सत्ता भले ही बन्द हो जाय, किन्तु, जबतक कि हर रियासत अपने यहाँ वैधानिक शासन स्थापित नहीं कर लेती और अन्य प्रान्तों की तरह भारतीय संघ में शामिल नहीं हो लेती, सर्वोपरि सत्ता की सत्ता सर्वथा रद नहीं की जा सकती। तो विचारणीय समस्या केवल यह रह गई, कि इस देश से अंग्रेजी सत्ता समाप्त हो जाने पर, जबतक कि अनिवार्य हो, यह अनुशासन किस के अधिकार में रहे। ज़ाहिर है कि नये विधान के अनुसार जो भारतीय संघ कायम होगा, यह उसी के हाथों में रहनी चाहिये । इस प्रसंग में यह भी याद रहे कि अबतक, सर्वोपरि सत्ता का सम्बन्ध, कानूनी, नाममात्र या काल्पनिक, जो भी बृटिश सम्राट् या उसकी सरकार से रहा हो, अधिकारों का प्रयोग सदा से हिन्दुस्तान की अंग्रेज़ी सरकार ही करती आई है और कर रही है। हिन्दुस्तान का नवीन संघशासन मौजूदा हिन्दुस्तानी सरकार का उत्तराधिकारी होगा। फ़र्क़ केवल इतना रहेगा, कि यह रियासतें, इस संघ में ख़ुद शामिल हुई होंगी, अतः सामान्यतः हिन्दुस्तान के नये संघ को सर्वोपरि सत्ता अपने आप पहुंचती है। खासकर, जबकि अवस्थाएँ ऐसी हों, कि जिनमें शासन की शान्तिपूर्वक तब्दीली की राह में कोई विशेष अड़चन पढ़ने की सम्भावना न हो। यह तब्दीली, हिन्दुस्तानी रियासतों की अनुमति और सर्वोपरि सत्ता के प्रयोग में हेर-फेर के साथ, भासानी से
[ तिहत्तर
सकेगी। किन्तु, रियासतों के साथ यह सलाह-मशविरा ऐसा परिणाम न निकाते कि जिससे राभ उठाते हुए उन्हें ऐसी मांग पेश करने का मौका मिल जाय कि अंग्रेज़ी सत्ता दूर होने पर, रेक रियासत राजनीतिक रूप से स्वतन्त्र है और यह कि भारतीय संघ में शामिल होने न होने को वह आज़ाद है। कैबिनेट-शिष्टमण्डल का 'स्मरण-पत्र' ख़ुद तो इन विचारों का पोषक नहीं है; केन्तु सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से किये गये श्रथ ने मुझ जैसे कुछ व्यक्तियों को भ्रम में अवश्य दिया है, जो कि 'फैसले' की व्याख्या युक्ति-संगत रूप से करने की चेष्टा करते श्रा
हे हैं ।
'स्मरण-पत्र' में लिखा निम्न पैरा मुझे श्रसाधारण प्रतीत होता है :"अंतरिम काल, ब्रिटिश हिन्दुस्तान के लिए वह नया विधान बनने और लागू होने से पहले ही समाप्त हो जायगा, जिसके अनुसार देश स्वतंत्र होगा और इसमें 'पूर्ण स्वराज' स्थापित होगा। इस काल में सर्वोपरि सत्ता चालू रहेगी। किन्तु, ब्रिटिश सरकार, किमी अवस्था में भी प्रपनी सर्वोपरि सत्ता को हिन्दुस्तानी सरकार के हवाले नहीं कर सकती, और न करेगा।"
यह वाक्य इस बात का उदाहरण है कि विचारों में काफ़ी ढालापोलापन है। अंतरिकाल में ब्रिटिश सम्राट् के प्रतिनिधि के ऑफिस के साथ सम्बन्ध विच्छेद हो जायगा, लेकिन इसी काल में सर्वोपरि सत्ता फिर से श्रा जायगी, जिसको हिन्दुस्तान की अंग्रेजो सरकार चालू रखेगी। यदि हिन्दुस्तान में पूर्णतया स्वतंत्र क़ौमी हुकूमत बन जाती है तो सर्वोपरि पत्ता उसके हवाले करने से इन्कार करना मुझे युक्ति-संगत नज़र नहीं आता। इस हालत में, क्रॉमा सरकार, सर्वोपरि सत्ता को, केवल ब्रिटिश सत्ता का परियाचक मात्र मान कर लागू करेंगो । यह कहना तो हास्यजनक होगा कि समस्त हिन्दुस्तान की एक ऐसी सरकार, जिसके अधीन विदशा मामले, देश-रक्षा इत्यादि होंगे, ब्रिटिश राज्य को अपने मातहत रियासतों के बारे में उचित सलाह देने में श्रममर्थ होगी । मान लिया, कि १६३५ के भारत सरकार एक्ट में ऐसी तबदीली नहीं की जा सकती कि जिससे अंतरिम काल में राजा के प्रतिनिधि के ऑफिस से छुटकारा मिले, लेकिन क्या यह भी असम्भव होगा कि राजा के प्रतिनिधि के लिए एक हिन्दुस्तानी राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर दिया जाय ? ऐसी नियुक्ति से हिन्दुस्तान के लिए ऐसा विधान बनाने में अवश्य सुगमता होगी, जिसमें खुशी से शामिल होकर देशी रियासतें भी सन्तुष्ट रहें । देशी रियासतों के प्रतिनिधि, जिन्होंने अपनी राजनीतिक बुद्धि का प्रशंसनीय प्रमाण देते हुए पहले ही घोषित कर दिया है कि वे कांग्रेस के साथ विधान निर्माण में पूरा पूरा सहयोग करेंगे, अंतिरिम-काल में पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के प्रबन्ध में इस प्रकार की तब्दीली का स्वागत करेंगे। अभी कुछ दिन पहले जबकि मैं दिल्ला में था, मुझे यह जानकर आश्चर्य और दु.ख हुआ था, कि कुछ-एक राजाओं ने वाइसराय से प्रार्थना की है कि अंतरिम काल में किसी अंग्रेज़ का पोलिटिकल सलाहकार रखा जाना उन्हें पसन्द है !
यह धारणा, कि अंग्रेज़ों ने सर्वोपरि सत्ता, बृटिश सम्राट् द्वारा देशी राजाओं को दिये गये इन आश्वासनों से प्राप्त को है, कि बाहरी हमले, भीतरी गड़बड़ और उत्तराधिकारी को गद्दी पर बिठाने में मदद दी जायगी, बटलर कमेटो द्वारा कभी-की धराशायी की जा चुकी है, और बाद में प्रामाणिक अधिकारी द्वारा निर्मूल सिद्ध हो चुकी है। यह आश्चर्य की बात है कि आज, ऐसे अवसर पर 'स्मरण पत्र उन अधिकारों का, जो कि रियासतों ने सर्वोपरि सत्ता को सौपे थे और जिनको अब वे अपनी इच्छा और आज दो से चाहे जिसे दे सकती हैं, फिर से उन्हीं को दिये जाने का जिक्र कर रहा है। अंग्रेजी सत्ता हट जाने पर, यदि देशी रियासतों को इस धारणा के आधार पर
चौहत्तर ]
श्रमल करने दिया गया तो अराजकता फैलेगी। जैसा कि मैं पहले कह चुका हूँ, शिष्ट-मण्डल की सारी स्कीम में सर्वोपरि सत्ता हटायी जाने के पूर्व ही उसकी स्थान- पूर्ति का प्रबन्ध किया गया है । कितना अच्छा हो, यदि, जैसा कि अंग्रेजी शासन शान्तिपूर्वक हिन्दुस्तान को सौंपा जा रहा है, और जैसा कि आर्थिक समझोते कर लिये गये हैं. यह भी स्वीकृत हो जाय कि उत्तराधिकारी सरकार मौजूदा प्रबन्ध क अनुसार सर्वोपरि सत्ता का संचालन तब तक करती जाय, जब तक कि नयी राजनीतिक व्यवस्थाएँ न हो जायँ श्रोर प्रत्येक देश। रियासत संघ में शामिल न हो जाय या संघ में रहते हुए केन्द्र से कोई दूसरा राजनीतिक सम्बन्ध न पैदा कर ले ।
देशी रियासतों को समस्या को हल करने में, शिष्ट-मंडल का एक दोष तो यह है, कि इसने रियासतों के भविष्य का निर्णय करते वक्त हिन्दुस्तानी नेताओं को नज़दीक नहीं आने दिया। आज का ब्रिटिश भारत, इस विषय में कि यह रियासतें नये विधान में क्योंकर बैठाई जायगी, उतनो ही दिलचस्पी रखता है, जितनी कि स्वयं रियासतें रखती हैं। रजवाड़ों का मस्ला केवल अंग्रेज़ी सरकार और राजाओं में बातचीत से हल नहीं हो सकता। विधान निर्माण की प्रारम्भिक बातों में भी अंग्रेजो हिन्दुस्तान तथा रियासतो प्रजा के नेताओं का गइरा सम्बन्ध और मेल-जोल ज़रूरी है। और यह भी आवश्यक है कि अन्तरिम सरकार बनाने की जिम्मेदारी लेनेवाले राजनीतिक दल, यह आश्वासन दिलायं कि अंतरिम काल में सर्वोपरि सत्ता का ऐसा नियंत्रण किया जायगा कि जिससे एक ओर गवर्नर जनरल और दूसरी ओर ब्रिटिश शासक के प्रतिनिधि तथा उसके राजनीतिक सलाहकार में सम्पूर्ण सहयोग और एक जैसी नीति पर अमल होगा; अन्यथा नित-नये विरोध होंगे, खोंचा तानी चलेगी और काम ठप हो जायगा। महात्मा गांधी के अचूक राजनीतिक सहज ज्ञान ने भो, नोचे लिखे शब्दों में, जो उनके 'हरिजन' में छपे लेख से लिये गये हैं, एक ताज़ा उदाहरण खोज निकला है :"यदि इस ( सर्वोपरि सत्ता) का अन्त अंतरिम सरकार की स्थापना के साथ न हो सके, तो इसका नियंत्रण रियासतों की प्रजा के सहयोग और शुद्धतः उन्हों के हितार्थ होना चाहिये । यदि राजालोग अपने कथन और घोषणाओं पर दृढ़ हैं, तो उन्हें सर्वोपरि सत्ता के इस सार्वजनिक प्रयोग का स्वागत करना चाहिये और उसे नयी योजना में विवेचित जनता की सत्ता में उपयोगी सिद्ध होना चाहिये ।"
नरेशगण का शिष्टमण्डल प्रस्ताव स्वीकार
बम्बई, जून १० - हिन्दुस्तान के नरेशों ने आज भारत की भावी वैधानिक उन्नति के लिए शिष्टमण्डल के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया और अंतरिम काल में, जिन विषयों में हेरफेर की आवश्यकता होगी, वाइसराय से उन पर बातचीत करने का फैसला भी कर लिया।
नरेन्द्रमण्डल की स्थायी समिति की ओर से, जिसकी बैठक आज यहाँ हुई, मण्डल के चान्सलर नवाब भूपाल ने शिष्टमण्डल के प्रस्तावों का स्वागत किया। स्थायी समिति के निश्चयों को सूचना इसो सप्ताह वाइसराय को दे दो जायगी ।
स्थायी समिति ने, वाइसराय की ओर से शिष्टमण्डल की तजवीज़ के अनुसार, एक बातचीत करनेवाली कमेटी बनाने को दावत भो क़बूल करती । यह कमेटी, दिल्ली में जून के मध्य से अपना काम चालू कर देगी ।
इस कमेटी में चांसलर नवाब भूपाल, उप-चांसलर महाराजा पटियाला, नवानगर के जामपरिशिष्ट
[ पचहत्तर
साहब, हैदराबाद के नवाब अलीगर जंग, ग्वालियर से सर मनुभाई मेहता, ट्रावनकोर से सो० पी० रामस्वामी अय्यर, चांसलर के सलाहकार सर सुल्तान अहमद, कूचबिहार से सरदार डी० के० सेन, बीकानेर से के० एम० पत्नीकर और दीवान डूगरपुर शामिल होंगे। मीर मक़बूल अहमद इस कमेटी के मन्त्री होंगे ।
ऐसा समझा जाता है, कि यह बातचीत करनेवालो कमेटो यूनियन की विधान परिषद् के लिए रियासतों के प्रतिनिधियों के चुनाव को विधि, विशेषकर राजाओं के राजस्व और राजवंश, रियासतों को हदबन्दी को विश्वस्तता, विधान परिषद् के फ़सलों पर अन्तिम स्वीकृति देने के हक़, संघ के साथ रियासतों को आर्थिक व्यवस्था और संघ केन्द्र को रियासतों के शुल्क इत्यादि विषयों पर रोशनी डालने की मांग करेगी।
यह तजवीज्ञ भी की जा रही है, कि विधान परिषद् में ऐसी विशेष समस्याओं का निश्चय, जिनका सम्बन्ध कि रियासतों से है, उपस्थित प्रतिनिधियों के बहुमत से होना चाहिये ।
बातचीत करनेवाली कमेटी अन्य विषयों पर भी विचार विनिमय करेगा, --जैसे संघ को सौंपे जानेवाले विभाग, भीतरी सुधार और विधान परिषद् के सभापति तथा पदाधिकारियों के चुनाव में रियासती प्रतिनिधियों की स्थिति इत्यादि ।
स्थायी समिति ने रियासतों को आदेश दिया है, कि वे, गत जनवरी की बैठक मे चांसलर द्वारा उपस्थित किये गये सुझावों की रोशनी में, अपने यहां अगले १२ मास में भं तरी सुधार शुरू करदें ।
आज शाम को स्थायी समिति की बैठक की कार्यवाही समाप्त हो गई । वाइसर य के राजनीतिक सलाहकार सर कारनर्ड कोरफ़ोल्ड ने भी अपने विचार प्रकट किये ।
महाराजा ग्वालियर, पटियाला, बीकानेर, नवानगर, अलवर, नाभा, टिहरी गढ़वाल, हूँगरपुर, बघाट और देवास उपस्थित थे । (श्र० प्र० )
रियासती प्रजामण्डल की मांग
अखिल भारतवर्षीय रियासती प्रजामण्डल की स्थायी समिति ने शिष्टमण्डल की सिक्रारिशों के विषय में एक प्रस्ताव द्वारा यह मांग पेश का है कि बातचीत करनेवाली समिति तथा सल्लाहकार समिति में, जो सरिम सरकार, नरेशों और रियासतों की प्रजा के प्रतिनिधियों से बनाई जा रही है, प्रजा के प्रतिनिधि अवश्य लिये जायँ ।
उक्त प्रस्ताव में कहा गया है, कि जब तक नया विधान चालू नहीं हो लेता, यह आवश्यक होगा कि अंतरिम सरकार, प्रांतों और रियासतों के लिए एक जैसो नाति पर श्रमल करे । प्रस्तावित सलाहकार समिति को सभा श्रम मामलों को सम्हालना चाहिये और एकरूपता की ख़ातिर सारी रियासतों को एक ही नीति पर चलाने की चेष्टा करनी चाहिये ।
विधान परिषद् के बारे में प्रस्ताव में कहा गया है, कि जहाँ जहाँ, सुव्यवस्थित धागसभाएं काम कर रही हैं, उनके निर्वाचित सदस्यों में से ही प्रजा के प्रतिनिधियों का चुनाव कर लिया जाय । अन्य स्थानों से, रियासती प्रजामण्डल की प्रादेशिक समितियां विधान परिषद् के लिए प्रतिनिधि चुनेंगी ।
स्थायी समिति ने तीन प्रस्ताव और भो पास किये। पहले में राजगीतिक कैदियों को रिहाई तथा नागरिक आज़ादी की मांग, दूसरे में बलोचिस्तान स्थित कुलात स्टेट को शेष हिन्दुस्तान से पृथक् करने की मांग का विरोध और तोसरे में हैदराबाद रियासती कांग्रेस पर
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छियासठ ] चुकी है। कुछ ऐसे विषय है, जिनके सम्बन्ध में मुझे छापको लिखने के लिये कहा गया है जैसा कि वक्तव्य को हमने समझा है, उसमें विधान निर्मात्री परिषद् के चुनाव तथा संचालन के लिए कुछ सिफारिशें तथा कार्यविधि दी हुई हैं। मेरी समिति के मत से निर्मित हो जाने के बाद परिषद् स्वयं विधान निर्माण के लिए एक सत्ता सम्पन्न संस्था होगी, जिसके कार्य में कोई भी बाहरी शक्ति बाधा न डाल सकेगी और सन्धि में उसके सम्मिलित होने के विषय में भी यही बात लागू रहेगी। साथ ही, मन्त्रि - मिशन द्वारा सुझायी हुई सिफारिशों तथा कार्य विधि में अपनी इच्छानुसार कोई भी परिवर्तन कर सकने के लिये परिषद् स्वतंत्र होगी और विधान सम्बन्धी कार्यों के लिए, विधान परिषद् के एक सत्ता सम्पन्न संस्था होने के कारण, उसके अन्तिम निर्णय स्वयमेव कार्यान्वित होंगे । जैसा कि आपको मातम होगा, आपके वक्तव्य में कुछ ऐसी सिफारिशें भी हैं, जो कांग्रेस के उस रुख के विपरीत हैं, जो उसने शिमले में तथा अन्यत्र ग्रहण किया था । स्वभावतः हम · इन सिफारिशों की त्रुटियों को, परिषद् द्वार) हटवाने का यत्न करेंगे । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये हम देश को तथा विधान निर्मात्री परिषद् को अपने विचारों से प्रभावित करने का यत्न भी करेंगे । एक बात से, जो गांधीजी ने बताई, मेरी समिति को बात की कोशिश में है कि विभिन्न प्रान्तीय असेम्बलियों में यूरोपियन सदस्य, विधान परिषद् के लिए चुने जानेवाले उम्मेदवार हो और न अपने वोट ही दें । प्रसन्नता हुई । वह यह कि श्राप इस विशेषकर बंगाल तथा श्रासाम के प्रतिनिधियों के निर्वाचन में न तो ब्रिटिश बलोचिस्तान से एक प्रतिनिधि के चुने जाने के सम्बन्ध में कोई व्यवस्था नहीं दी गई है । जहाँ तक हमें मालूम है, बलोचिस्तान में कोई निर्वाचित अमेम्बली अथवा अन्य प्रकार की सभा नहीं है, जो इस प्रतिनिधि को चुन सके। ऐसे किसी भी एक व्यक्ति के होने से विधानपरिषद् में अधिक अन्तर भले ही न पड़े. किन्तु यदि वह व्यक्ति एक पूरे सूबे बलोचिस्तान की ओर से बोलने का उपक्रम करे, तो इससे निस्सन्देह भारी श्रन्तर पड़ सकता है, विशेषतः यदि वह उस सूबे का वास्तविक प्रतिनिधि किसी भी प्रकार से न हो । इस प्रकार का प्रतिनिधित्व रखने की अपेक्षा, कोई भी प्रतिनिधि न रखना कहीं अधिक अच्छा है, क्योंकि ऐसे प्रतिनिधि से गलत धारणा पैदा हो सकती है और बलोचिस्तान के भाग्य का ऐसा निर्णय किया जा सकता है, जो उस सूबे के निवासियों की इच्छा के प्रतिकूल हो । यदि बलोचिस्तान से जन-प्रिय प्रतिनिधि चुने जाने की कोई व्यवस्था की जा सकी, तो हम उसका स्वागत करेंगे। अतएव, मेरी समिति को गांधीजी से यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि बलोचिस्तान को श्राप परामर्शदात्री समिति के कार्य- के अन्तर्गत सम्मिलित करना चाहते हैं । विधान के मूलस्वरूप से सम्बन्ध रखनेवाली अपनी सिफारिशों में आपने कहा है कि प्रान्तों को कार्यकारिणी तथा व्यवस्थापक सभाओंों से युक्त गुट बनाने की स्वतंत्रता रहनी चाहिये और प्रत्येक गुट इस बात का निर्णय कर सकेगा कि प्रान्तीय विषयों में से कौन-से विषय उसके अधीन रहने चाहियें । ठीक इससे पहले आपने बताया है कि संघ के अधीन रहनेवाले विषयों के सिवा अन्य सारे विषय तथा शेष अधिकार प्रान्तों को मिलने चाहिये । वक्तव्य में इसके बाद, पृष्ठ पाँच में आपने कहा है कि विधान परिषद् के प्रान्तीय प्रतिनिधि तीन भागों में बिभक्त हो जायेंगे और ये विभाग हर सेक्शन के प्रांतों के प्रान्तीय [ सड़सठ विधान तैयार करने का कार्य शुरू करेंगे और यह भी निर्णय करेंगे कि इन प्रांतों के लिए क्या कोई गुट-विधान भी तैयार किया जायगा । इन दोनों पृथक् व्यवस्थाओं में, हमें निश्चित रूप से भारी अन्तर प्रतीत होता है। मूख व्यवस्था द्वारा किसी भी प्रान्त की अपने इच्छानुसार कुछ भी करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है और तदनन्तर इस विषय में बाध्यता भ्रा गई है, जिससे स्पष्टतः उक्त स्वतन्त्रता पर श्राघात होता हे । यह सत्य है कि आगे चलकर प्रांत किसी भी गुट से पृथक् हो सकते हैं, किन्तु किसी भी प्रकार से यह स्पष्ट नहीं होता कि कोई भी प्रांत अथवा उसके प्रतिनिधि, कोई ऐसा कार्य करने के लिए किस प्रकार बाध्य किये जा सकते हैं, जो वे करना नहीं चाहते। कोई भी प्रान्तीय असे म्बली, अपने प्रतिनिधियों को आदेश दे सकती है, कि वे किसी भी 'गुट' में अथवा किसी विशेष गुट में अथवा लेक्शन में सम्मिलित न हों । यूँ कि 'सी' तथा 'बी' सेक्शनों का निर्माण किया गया है, प्रतएव स्पष्ट है कि इन सेक्शनों में एक प्रांत की प्रभुता रहेगी - 'बी' सेक्शन में पंजाब की और 'सी' सेक्शन में बंगाल की। प्रभु प्रान्त इस प्रकार का प्रान्तीय विधान तैयार कर सकता है, जो सिन्ध, उत्तर-पश्चिमी सीमाप्रान्त अथवा आसाम की इच्छाओं के सर्वथा विरुद्ध हो । हो सकता है कि प्रभु प्रान्त विधान के अन्तर्गत निर्वाचन तथा अन्य विषयों के सम्बन्ध में ऐसे नियम भी बना दें, जिनसे किसी भी प्रांत के किसी गुट से पृथक् हो सकने की सारी व्यवस्था बेकार हो जाय। कभी भी ऐसा खयाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा विचार स्वयं योजना के आधारभूत सिद्धांतों तथा नीति के विरुद्ध ठहरेगा । देशी राज्यों का प्रश्न अस्पष्ट ही छोड़ दिया गया है, अतएव उस विषय इस समय में अधिक कुछ कहना नहीं चाहता। किन्तु स्पष्ट है कि विधान परिषद् में राज्यों के जो भी प्रतिनिधि सम्मिलित हों, उन्हें न्यूनाधिक उसी रूप में श्रामा चाहिए जिस रूप में प्रांतों के प्रतिनिधि आयेंगे । पूर्णतया भिन्न तत्वों के संयोग से विधान परिषद् का निर्माण नहीं किया जा सकता । ऊपर मैंने, श्रापके वक्तव्य से उत्पन्न होनेवाली कुछ बातों का उल्लेख किया है । सम्भवतः उनमें से कुछ को आप स्पष्ट कर सकते हैं तथा उनको दूर कर सकते हैं। किन्तु मुख्य बात, जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, यही है, कि 'विधान परिषद्' को हम एक सर्व-सत्ता- समान सभा के रूप में देखते हैं, जो अपने सम्मुख उपस्थित किसी भी विषय पर अपने इच्छानुसार निर्णय कर सकती है। एकमात्र प्रतिबन्ध जिसे हम इस विषय में स्वीकार करते हैं यह है कि कुछ बड़े साम्प्रदायिक प्रश्नों के निर्णय दोनों बड़े सम्प्रदायों में से हर दोनों के बहुमत से होने चाहिये । आपकी सिफारिशों के दोष दूर करने के लिए हम जनता तथा विधान परिषद् के सदस्यों के समक्ष स्वयं अपने प्रस्ताब उपस्थित करने का प्रयत्न करेंगे । गांधीजी ने मेरी समिति को सूचित किया है कि अापका विचार है कि विधान परिषद्द्वारा दी गई व्यवस्था के अनुसार सरकार की स्थापना हो जाने के बाद तक, ब्रिटिश सेना भारत में रहेगी । मेरी समिति अनुभव करती है कि भारत में विदेशी सेना की उपस्थिति भारतीय स्वाधीनता को नगण्य कर देगी । राष्ट्रीय अन्तर्कालीन सरकार की स्थापना के क्षण से भारत को वास्तव में स्वाधीन समझा जाना चाहिये । ताकि मेरी समिति आपके वक्तव्य के सम्बन्ध में किसी निर्णय पर पहुँच सके, इस पत्र का उत्तर शीघ्र पाकर मैं कृतज्ञ होऊँगा । आपका विश्वासपात्र अबुल कलाम आजाद अड़सठ ] मौलाना आजाद के नाम भारत मंत्री का पत्र तारीख बाईस मई प्रतिनिधि मंडल ने आपके बीस मई वाले पत्र पर सोच-विचार किया है और उसका खयाल है कि इसके उत्तर देने का सर्वोत्तम तरीका यह है कि उसे अपनी साधारण स्थिति आपके सम्मुख स्पष्ट रूप से रख देनी चाहिये । चुंकि भारतीय नेता बहुत लम्बे अर्से तक बातचीत करने के बाद भी किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके, इसलिए प्रतिनिधि मंडल ने दोनों ही प्रमुख दलों के दृष्टिकोणों में निकटतम सामंजस्य स्थापित करने के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, इसलिए यह योजना संपूर्ण रूप में ही लागू हो सकती है और यह तभी सफल हो सकती है यदि उस पर समझौते और सहयोग की भावना से प्रेरित होकर अमल किया जाय। प्रान्तों की गुटबन्दी के कारणों से आप भली-भांति परिचित हैं और यह बात इस योजना का नितान्त श्रावश्यक पहलू है जिसमें कोई संशोधन केवल दोनों दलों के पारस्परिक समझौते द्वारा हो किया जा सकता इसके अलावा दो और बातें भी हैं, जिनका हमारा खयाल है कि हमें उल्लेख कर देना चाहिये । प्रथम आपने अपने पत्र में विधान निर्मात्री परिषद् को एक सत्ता सम्पन्न संस्था कहा है जिसके अन्तिम निर्णयों पर स्वतः अमल होने लगेगा। हमारा विचार है कि विधान निर्मात्री परिषद् की अधिकार-सीमा, उसका कार्य क्षेत्र और उसकी कार्यप्रणाली वह जिस पर चलना चाहती है, इन वक्तव्यों द्वारा स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाता है। एक बार विधान निर्मात्री परिषद् के बन जाने पर और उसके द्वारा इस आधार पर काम करने पर स्वभावतः उसकी स्वाधीन विवे चना में हस्तक्षेप करने अथवा उसके निर्णयों पर आपत्ति करने का कोई इरादा नहीं है। जब विधान निर्मात्री परिषद् अपना कार्य समाप्त कर चुकेगी, तो सम्राट् की सरकार पार्लीमेंट से ऐसी कार्रवाई करने की सिफारिश करेगी जैसी कि भारतीय जनता को सत्ता हस्तान्तरित करने के लिये आवश्यक समझी जायगी, परन्तु इस सम्बन्ध में सिर्फ दो ही शर्ते रहेगी, जिनका उल्लेख वक्तव्य में कर दिया गया है और जो हमारा विश्वास है कि विवादास्पद नहीं है - अर्थात् अल्पसंख्यकों की रक्षा की पर्याप्त व्यवस्था और सत्ता हस्तान्तरित करने के परिणामस्वरूप उठनेवाले विषयों के सम्बन्ध में सन्धि करने की सहमति । दूसरे, जब कि सम्राट् की सरकार इस बात के लिए अत्यधिक उत्सुक है कि अन्तर्कालीन अवधि यथासंभव कम-से-कम हो, हमें विश्वास है कि आप यह अनुभव करेंगे कि उपर्युक्त कारणों के आधार पर नये विधान के कार्यान्वित होने से पहले स्वाधीनता का प्रादुर्भाव नहीं हो सकता। आपका - पेथिक लारेंस नई दिल्ली बुधवार - मंत्रिमिशन के प्रतिनिधि मण्डल ने नरेन्द्र मण्डल को जो स्मृति पत्र भेजा है वह आज प्रकाशित हो गया है। उसमें घोषित किया गया है कि नये विधान के अनुसार सम्राट् की सरकार सर्वोपरि सत्ता का उपयोग समाप्त कर देगी। इस स्थान की पूर्ति या तो देशी राज्य, ब्रिटिश भारत की सरकार या सरकारों के साथ संघीय सम्बन्ध स्थापित करके कर लेंगे या फिर उस सरकार या सरकारों के साथ वह नयी राजनीतिक व्यवस्था कर लेंगे । [ उन्हत्तर यह स्मृति पत्र तभी तैयार कर लिया गया था जब प्रतिनिधि मण्डल भारतीय दलों के नेताओं से बहस कर रहा था और इसका सारांश देशी राज्यों के प्रतिनिधियों को उनकी मुलाकात के समय दे दिया गया था । स्मृति पत्र इस प्रकार था :-- देशी राज्यों को सन्धियों तथा सर्वोच्च सत्ता के सम्बन्ध में मन्त्रि प्रतिनिधि मण्डल ने नरेन्द्र मण्डल के चान्सलर के सम्मुख निम्न विचारपत्र उपस्थित किया :कामन्स सभा ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हाल के वक्तव्य देने से पूर्व नरेशों को आश्वासन दे दिया था कि सम्राट् के प्रति उनके सम्बन्धों तथा उनके साथ की गयी सन्धियों और इकरारनामों द्वारा गारंटी किये गये अधिकारों में उनकी स्वीकृति के बिना कोई परिवर्तन करने का सम्राट् का इरादा नहीं है। साथ ही यह भी कह दिया था कि वार्ता के परिणामस्वरूप होनेवाले परिवर्तनों के सिलसिले में स्वीकृति को अनुचित रूप से रोक भी न रखा जायगा। उसके बाद नरेन्द्र मण्डल भी इस बात की पुष्टि कर चुका है कि देशी राज्य भारत द्वारा अपनी पूर्ण स्वतंत्र स्थिति की तात्कालिक प्राप्ति के लिए देश की श्राम इच्छा का पूरी तरह समर्थन करते हैं । सम्राट् की सरकार ने अब घोषणा की है कि यदि ब्रिटिश भारत की उत्तराधिकारी सरकार अथवा सरकारें स्वाधीनता के लिए इच्छा करेंगी तो उनके मार्ग में कोई बाधा न डाली जायगी। इन घोषणाओं का प्रभाव यही होता है कि जिनका भारत के भविष्य से सम्बन्ध है वे सब के सब चाहते हैं कि भारत ब्रिटिश राष्ट्र-मण्डल के भीतर अथवा बाहर स्वाधीनता की स्थिति प्राप्त करे । भारत-द्वारा इस श्राकांक्षा के पूरी करने में जो भी कठिनाइयां हैं, प्रतिनिधि मण्डल उन्हें दूर करने में सहायता प्रदान करने के ही लिए यहां आया हुआ है । संक्रान्ति काल में, जिसकी मियाद एक ऐसे नये वैधानिक ढांचे के कार्यान्वित होने से पूर्व श्रवश्य समाप्त हो जानी चाहिए जिसके अन्तर्गत ब्रिटिश भारत स्वतन्त्र अथवा पूर्ण रूप से स्वशासित होगा, सर्वोच्च सत्ता कायम रहेगी; परन्तु ब्रिटिश सरकार किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च सत्ता एक भारतीय सरकार को हस्तान्तरित नहीं कर सकती और न ही करेगी । इस बीच देशी राज्य भारत के लिए वैधानिक ढांचे के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण भाग लेने की स्थिति में रहेंगे और देशी राज्यों द्वारा सम्राट् की सरकार को सूचित कर दिया गया है कि वे अपने और समस्त भारत के हितों का दृष्टि से इस नये ढांचे के निर्माण में भाग लेने और उसके पूरा हो जाने पर उसमें अपना उचित स्थान प्राप्त करने के इच्छुक हैं। इसका मार्ग प्रशस्त करने के निमित्त वे अपने शासन-प्रबन्ध को यथाशक्ति उच्चतम मान तक पहुँचाने की व्यवस्था करके निस्संदेह अपनी स्थिति को सुदृद बना लेंगे। जहां-कहीं भो देशी-राज्यों के वर्तमान साधनों के अन्तर्गत इस मान तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा जा सकता, वे निस्सदेह यह प्रबन्ध करेंगे कि शासन : बन्ध की दृष्टि से ऐसे देशी राज्यों के इतने बड़े संगठन बना दिये जायँ अथवा वे ऐसी बड़ी इकाइयों में शामिल हो जायँ जिससे कि वे इस वैधानिक ढांचे में उपयुक्त स्थान प्राप्त कर सकें। इससे विधान निर्माण-काल में देशो राज्यों की स्थिति भी सुध्द हो जायगी, क्योंकि यदि विभिन्न सरकारों ने पहले से ही ऐसा नहीं किया होगा तो उन्हें प्रतिनिधित्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना-द्वारा अपने यहां के जनमत के साथ घनिष्ठ और निरन्तर संपर्क स्थापित करने के लिए सक्रिय भाग लेने का अवसर मिल जायगा । सत्तर ] संक्रान्ति काल में देशी राज्यों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे ब्रिटिश भारत के साथ समान मामलों - विशेषकर श्रौद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्रों से सम्बन्ध रखनेवाले मामलों की भावी व्यवस्था पर ब्रिटिश भारत से बात-चीत चलायें । यह बात चीत जो हर हालत में श्रावश्यक है - चाहे रियासतें नवीन विधान निर्माण में भाग लेना चाहें अथवा नहीं - - सम्भवतः काफी समय लेगी और नये विधान के लागू होने के समय भी कई दिशाओं में प्रधूरी रह सकती है। अत. शासनसम्बन्धी अड़चनों से बचने के लिए यह आवश्यक है कि नई रियासतों तथा सरकार श्रथवा सरकारों के भावी सूत्रधारों के बीच किसी प्रकार का समझौता हो जाय ताकि उस समय तक समान मामलों में वर्तमान अवस्था जारी रह सके अब तक कि नया समझौता सम्पूर्ण नहीं हो जाता। ब्रिटिश सरकार और सम्राट् का प्रतिनिधि इस सम्बन्ध में यथाशक्ति सहायता करने को तत्पर रहेगा । जब ब्रिटिश भारत में नई, पूर्ण रूप से स्वाधीन तथा स्वतन्त्र सरकार या सरकारें स्थापित हो जायँगी, तब सम्राट् की सरकार का इन सरकारों पर ऐसा प्रभाव नहीं होगा कि ये सर्वोच्च सत्ता के कर्तव्यों को निभा सकें। इसके अतिरिक्त वे ऐसी कल्पना नहीं कर सकते कि इस कार्य के लिए भारत में ब्रिटिश सेना रख ली जायगी। अतः यह युक्तिसंगत ही है, तथा देशी राज्यों की ओर से जो इच्छा प्रकट की गई है उसके अनुरूप है, कि सम्राट् की सरकार सर्वोच्च सत्ता के रूप में कार्य न करेगी। इसका यह तात्पर्य हुआ कि देशी राज्यों के वे सर्व अधिकार, जो सम्राट् के साथ सम्बन्धों पर आश्रित हैं, अब लुप्त हो जायेंगे और वे सब अधिकार जो इन राज्यों ने सर्वोच्च सत्ता को समर्पित कर दिये थे, अब उन्हें वापस मिल जायेंगे। इसलिए देशी राज्यों तथा ब्रिटिश भारत और सम्राट् के मध्य राजनीतिक व्यवस्था का अब अन्त कर दिया जायगा । इस रिक्त स्थान की पूर्ति या तो देशी राज्यों द्वारा उत्तराधिकारी सरकार से या ब्रिटिश भारत की सरकारों से संघीय सम्बन्ध स्थापित करने पर होगी, अथवा ऐसा न होने पर इस सरकार या सरकारों से विशेष व्यवस्था करने पर होगी । एक प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है कि कैबिनेट-शिष्टमंडल यह स्पष्ट कर देना चाहता है, कि बुधवार को "नरेन्द्रमंडल के प्रधान को, रियासतों, सन्धियों तथा सर्वोपरि सत्ता सम्बन्धी पेश किया गया मैमोरेंडम' शीर्षक से जो पत्र जारी किया गया है, वह मिशन ने उस समय तैयार किया था जबकि भिन्न-भिन्न दलों के नेताओं से परामर्श शुरू नहीं हुआ था और यह कि उस वार्तालाप का सारांश मात्र था, जो कि मिशन ने रियासतों के प्रतिनिधियों से पहली बार किया था । इस विज्ञप्ति को "उत्तराधिकारी सरकार या ब्रिटिश इण्डिया की सरकारें" शब्दों के प्रयोग की व्याख्या समझा जाय, जो मंडल के पिछले बयान के बाद प्रयुक्त न किये जाते । मेमोरेंडम के ऊपर दिया गया नोट भूल थी । सर एनशून्य जीशून्य आयंगर का वक्तव्य "यह अफ़सोस की बात है कि कैबिनेट-शिष्टमण्डल ने हिन्दुस्तानी रियासतों से अपने विचार उतने खुले और साफ शब्दों में प्रकट नहीं किए, जितने कि उन्होंने हिन्दुस्तान के विधान को कुछ श्राधार भूत बातों के विषय में किये हैं। कांग्रेस कार्यकारिणी को शिकायत है कि देशी रियासतों के बारे में जो कहा गया है वह अस्पष्ट है और बहुत कुछ भविष्य के फ़ैसलों पर छोड़ा गया है। महात्मा गांधी ने ठीक ही कहा है, कि शिष्टमंडल ने, सर्वोपरि सत्ता की समस्या को त्रिशंकु के समान छोड़ दिया है। रियास-विषयक निर्णय जानने के लिए, हमें मंडल के सोलह मई के वक्तव्य और रियासतों, [ इकहत्तर सन्धियों तथा सर्वोपरि सत्ता' पर दिये गये स्मृति पत्र को देखना होगा, जो कि उन्होंने नरेन्द्र मंडल के प्रधान को पेश की थी और बाईस मई को प्रकाशनार्थ दी था। इसके बाद मैं पहली बात को 'फैसला' और दूसरी को 'स्मरण-पत्र' नाम से लिखूंगा । यदि इन दोनों दस्तावेजों को पूरी छानबीन की जाय, तो मालूम होगा, कि मंडल ने देशी रियासतों के बारे में निम्नलिखित प्रस्तावों को पसंद किया है : हिन्दुस्तान का एक संघ बनाया जाय, जिसमें देशी रियासत तथा अंग्रेज़ी इलाके सभी शामिल हों। कोई देशी रियासत या प्रान्त, इस मंत्र के बाहर नहीं रह सकेगा। दूसरे शब्दों में, संघ में शामिल न होने का अधिकार किसी प्रान्त या देशी रियासत को नहीं दिया गया। अलवत्ता संघ का सदस्य बनते वक्त, कोई देशो रियासत, चाई तो बाकी हिन्दुस्तान की सरकार के साथ सम्मिलित संबन्ध रख सकती है और चाहे इसके साथ किसी दूसरी प्रकार का राजनीतिक संबन्ध स्थापित कर सकती है। सभी देशों रियासतों को विदेशी विभाग, बचाव तथा रेल-तार-डाक के प्रबन्ध संघ के हाथों में सौंपने होंगे। उन देशी रियासतों को, जो शेष हिन्दुस्तान के साथ सम्मिलित सम्बन्ध स्थापित करेंगा, सघ की धारा-सभा तथा प्रबन्ध विभाग में प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा । अतः वे संघ-शासित विभागों में भी पूरा पूरा भाग ले सकेंगी। सम्मिलित सबन्ध के बजाय कोई दूसरी प्रकार का राजनीतिक सम्बन्ध कायम करने की सूरत में भी, संघ-सरकार की सर्वोररि सत्ता को अवश्य स्वीकार करना होगा, क्योंकि प्रस्तावित संघ के विधान के अनुसार, जैसा कि वह इस समय है, विदेशी विभाग और रक्षा-विभाग, हर हालत में सारे हिन्दुस्तान के लिये संघ-केन्द्र ही से निरीक्षित होंगे। 'फ़ैसले' में, प्रान्तों के समूहीकरण सम्बन्धी जो व्यवस्था दी गई है, उसके अनुसार रियासतों के किसी एक समूह - 'ए', 'बी' या 'सी' में शामिल हो सकने की सम्भावना नहीं रहती। रियासतें, केवल अन्तिम अवस्था में, अर्थात् संघ केन्द्र के लिए विधान निर्माण के समय पर ही भाग ले सकेंगी 'फ़ैसल' में, किसी भी प्रान्त या रियासत को, संघ से संबन्ध विच्छेद का अधिकार नहीं दिया गया। एक प्रान्त उस वक्त जबकि उसकी पहली निर्वाचित धारासभा बेटे, किसी एक समूह से बाहर निकल सकता है, किन्तु संघ के बाहर नहीं । एक रियासत सम्मिलित संबन्ध न रखने में स्वतन्त्र है, मगर संघ में उसको रहना ही पड़ेगा । इस 'फ़ैसले' के अनुसार, कोई एक प्रान्त, पहले दस माज गुज़रने पर, और बाद में दस-दस साल के अन्तर से भी अपनी धारासभा के बहुमत से, किसी समूह अथवा संघ के विधान पर पुनः विचार की माँग करने का अधिकार रखता है। इसका ता यही मतलब हुश्रा, कि एक प्रान्त, संघ या समूह के विधान के संशोधन का प्रस्ताव रख सकता है; लेकिन, अपनी यकतर्फा इच्छा से, संघ या समूह के बाहर नहीं जा सकता । इसके संशोधन संबन्धी प्रस्ताव पर तभी श्रमल-दरामद हो सकता है, जबकि सारा समूह या संघ स्वीकृति दे दे, और जबतक कि यह उस विशेष व्यवस्था के अनुसार पास न किया जाय, जो कि ऐसे संशोधनों की सूरत में संघ-विधान के लिए निश्चय ही बनाई जायगी। अंतरिम सरकार के समय, ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता बदस्तूर रहेगी; हिन्दुस्तान के बहत्तर ] स्वतन्त्र होने पर ही इसका अंत होगा । अंतरिम-काल में, अंग्रेजी हिन्दुस्तान और देशी रियासतों के बीच प्रार्थिक तथा पारस्परिक हानि-लाभ के विषयों की आगामी व्यवस्था सम्बन्धी बात-चीत प्रारंभ हो जानी चाहिये । यदि यह बात-चीत, हिन्दुस्तान का विधान बन जाने तक सम्पूर्ण न हो पाये, तो नया प्रबन्ध सम्पूर्ण हो जाने तक, प्रस्तुत अवस्था ही को चालू रखने की व्यवस्था होनी चाहिए । तीन. अंतरिम सरकार के समय में, अनुमानतः देशी रियासतों-संबन्धी ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता पर भी पुनर्विचार होगा, ताकि उन रियासतों के साथ जो सम्मिलित प्रबन्ध में आती हैं या दूसरी रियासतों के साथ, नई सरकार की तरफ से सर्वोपरि सत्ता की जगह कोई दूसरा संबन्ध स्थापित किया जा सके । यह तो यकीनी बात है, कि जब तक, एक न एक तरह की राजनीतिक व्यवस्था ब्रिटिश सर्वोपरि सत्ता का स्थान नहीं लेती, हिन्दुस्तान की एकता कायम नहीं रखी जा सकती। चार. 'स्मरण-पत्र', अनेक रूप से असाधारण राजनीतिक दस्तावेज़ है। जो लोग, सर्वोपरि सत्ता कायम रखने के लिए, हिन्दुस्तानी ब्रिटिश सरकार या ब्रिटिश सम्राट् की सरकार के सलूक के इतिहास से परिचित हैं, उन्हें इस 'स्मरण-पत्र' के कुछ एक बयानों पर भारी श्राश्चर्य हुआ होगा। मुझे सन्देह है, कि 'स्मरण-पत्र' के बयानों को, शिष्टमंडल से मिलनेवाले रियासती प्रतिनिधियों ने स्वीकार भी किया होगा, गोकि यह जरूर कहा जा सकता है, कि यह 'स्मरण-पत्र' उन प्रतिनिधियों के सामने एकदम अचानक नहीं पेश किया गया । पाँच. सर्वोपरि सत्ता खाली एक इकरारनामेका-सा सम्बन्ध नहीं है। आजकल के हालात में इसके प्रयोग की सीमा नहीं बांधी जा सकती। इसका अधिकार सन्धियों, सनदों और अन्य बन्धनों से मुक्त रहकर बढ़ता ही रहा है। इन सन्धियों, बन्धनों और समदों द्वारा प्राप्त विशेष अधिकारों से, सर्वोपरि सत्ता के वश में रहकर ही लाभ उठाया जा सकता है। किसी सन्धि या सनद के ऐसे मतलब नहीं लिए जा सकते कि जिससे, कोई रियासत अपने को सर्वोपरि सत्ता से मानने लगे । यहो सत्ता, रिवाज तथा रियासत की विशेष आवश्यकताओं को सामने रखते फैसला करती आई है, कि समस्त भारत या रियासतों तथा उनकी प्रजाओं के हितों की सुरक्षा कैसे की जानी चाहिये। अंग्रेज़ी राज्य और उसकी सरकार की सर्वोपरि सत्ता भले ही बन्द हो जाय, किन्तु, जबतक कि हर रियासत अपने यहाँ वैधानिक शासन स्थापित नहीं कर लेती और अन्य प्रान्तों की तरह भारतीय संघ में शामिल नहीं हो लेती, सर्वोपरि सत्ता की सत्ता सर्वथा रद नहीं की जा सकती। तो विचारणीय समस्या केवल यह रह गई, कि इस देश से अंग्रेजी सत्ता समाप्त हो जाने पर, जबतक कि अनिवार्य हो, यह अनुशासन किस के अधिकार में रहे। ज़ाहिर है कि नये विधान के अनुसार जो भारतीय संघ कायम होगा, यह उसी के हाथों में रहनी चाहिये । इस प्रसंग में यह भी याद रहे कि अबतक, सर्वोपरि सत्ता का सम्बन्ध, कानूनी, नाममात्र या काल्पनिक, जो भी बृटिश सम्राट् या उसकी सरकार से रहा हो, अधिकारों का प्रयोग सदा से हिन्दुस्तान की अंग्रेज़ी सरकार ही करती आई है और कर रही है। हिन्दुस्तान का नवीन संघशासन मौजूदा हिन्दुस्तानी सरकार का उत्तराधिकारी होगा। फ़र्क़ केवल इतना रहेगा, कि यह रियासतें, इस संघ में ख़ुद शामिल हुई होंगी, अतः सामान्यतः हिन्दुस्तान के नये संघ को सर्वोपरि सत्ता अपने आप पहुंचती है। खासकर, जबकि अवस्थाएँ ऐसी हों, कि जिनमें शासन की शान्तिपूर्वक तब्दीली की राह में कोई विशेष अड़चन पढ़ने की सम्भावना न हो। यह तब्दीली, हिन्दुस्तानी रियासतों की अनुमति और सर्वोपरि सत्ता के प्रयोग में हेर-फेर के साथ, भासानी से [ तिहत्तर सकेगी। किन्तु, रियासतों के साथ यह सलाह-मशविरा ऐसा परिणाम न निकाते कि जिससे राभ उठाते हुए उन्हें ऐसी मांग पेश करने का मौका मिल जाय कि अंग्रेज़ी सत्ता दूर होने पर, रेक रियासत राजनीतिक रूप से स्वतन्त्र है और यह कि भारतीय संघ में शामिल होने न होने को वह आज़ाद है। कैबिनेट-शिष्टमण्डल का 'स्मरण-पत्र' ख़ुद तो इन विचारों का पोषक नहीं है; केन्तु सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से किये गये श्रथ ने मुझ जैसे कुछ व्यक्तियों को भ्रम में अवश्य दिया है, जो कि 'फैसले' की व्याख्या युक्ति-संगत रूप से करने की चेष्टा करते श्रा हे हैं । 'स्मरण-पत्र' में लिखा निम्न पैरा मुझे श्रसाधारण प्रतीत होता है :"अंतरिम काल, ब्रिटिश हिन्दुस्तान के लिए वह नया विधान बनने और लागू होने से पहले ही समाप्त हो जायगा, जिसके अनुसार देश स्वतंत्र होगा और इसमें 'पूर्ण स्वराज' स्थापित होगा। इस काल में सर्वोपरि सत्ता चालू रहेगी। किन्तु, ब्रिटिश सरकार, किमी अवस्था में भी प्रपनी सर्वोपरि सत्ता को हिन्दुस्तानी सरकार के हवाले नहीं कर सकती, और न करेगा।" यह वाक्य इस बात का उदाहरण है कि विचारों में काफ़ी ढालापोलापन है। अंतरिकाल में ब्रिटिश सम्राट् के प्रतिनिधि के ऑफिस के साथ सम्बन्ध विच्छेद हो जायगा, लेकिन इसी काल में सर्वोपरि सत्ता फिर से श्रा जायगी, जिसको हिन्दुस्तान की अंग्रेजो सरकार चालू रखेगी। यदि हिन्दुस्तान में पूर्णतया स्वतंत्र क़ौमी हुकूमत बन जाती है तो सर्वोपरि पत्ता उसके हवाले करने से इन्कार करना मुझे युक्ति-संगत नज़र नहीं आता। इस हालत में, क्रॉमा सरकार, सर्वोपरि सत्ता को, केवल ब्रिटिश सत्ता का परियाचक मात्र मान कर लागू करेंगो । यह कहना तो हास्यजनक होगा कि समस्त हिन्दुस्तान की एक ऐसी सरकार, जिसके अधीन विदशा मामले, देश-रक्षा इत्यादि होंगे, ब्रिटिश राज्य को अपने मातहत रियासतों के बारे में उचित सलाह देने में श्रममर्थ होगी । मान लिया, कि एक हज़ार छः सौ पैंतीस के भारत सरकार एक्ट में ऐसी तबदीली नहीं की जा सकती कि जिससे अंतरिम काल में राजा के प्रतिनिधि के ऑफिस से छुटकारा मिले, लेकिन क्या यह भी असम्भव होगा कि राजा के प्रतिनिधि के लिए एक हिन्दुस्तानी राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर दिया जाय ? ऐसी नियुक्ति से हिन्दुस्तान के लिए ऐसा विधान बनाने में अवश्य सुगमता होगी, जिसमें खुशी से शामिल होकर देशी रियासतें भी सन्तुष्ट रहें । देशी रियासतों के प्रतिनिधि, जिन्होंने अपनी राजनीतिक बुद्धि का प्रशंसनीय प्रमाण देते हुए पहले ही घोषित कर दिया है कि वे कांग्रेस के साथ विधान निर्माण में पूरा पूरा सहयोग करेंगे, अंतिरिम-काल में पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के प्रबन्ध में इस प्रकार की तब्दीली का स्वागत करेंगे। अभी कुछ दिन पहले जबकि मैं दिल्ला में था, मुझे यह जानकर आश्चर्य और दु.ख हुआ था, कि कुछ-एक राजाओं ने वाइसराय से प्रार्थना की है कि अंतरिम काल में किसी अंग्रेज़ का पोलिटिकल सलाहकार रखा जाना उन्हें पसन्द है ! यह धारणा, कि अंग्रेज़ों ने सर्वोपरि सत्ता, बृटिश सम्राट् द्वारा देशी राजाओं को दिये गये इन आश्वासनों से प्राप्त को है, कि बाहरी हमले, भीतरी गड़बड़ और उत्तराधिकारी को गद्दी पर बिठाने में मदद दी जायगी, बटलर कमेटो द्वारा कभी-की धराशायी की जा चुकी है, और बाद में प्रामाणिक अधिकारी द्वारा निर्मूल सिद्ध हो चुकी है। यह आश्चर्य की बात है कि आज, ऐसे अवसर पर 'स्मरण पत्र उन अधिकारों का, जो कि रियासतों ने सर्वोपरि सत्ता को सौपे थे और जिनको अब वे अपनी इच्छा और आज दो से चाहे जिसे दे सकती हैं, फिर से उन्हीं को दिये जाने का जिक्र कर रहा है। अंग्रेजी सत्ता हट जाने पर, यदि देशी रियासतों को इस धारणा के आधार पर चौहत्तर ] श्रमल करने दिया गया तो अराजकता फैलेगी। जैसा कि मैं पहले कह चुका हूँ, शिष्ट-मण्डल की सारी स्कीम में सर्वोपरि सत्ता हटायी जाने के पूर्व ही उसकी स्थान- पूर्ति का प्रबन्ध किया गया है । कितना अच्छा हो, यदि, जैसा कि अंग्रेजी शासन शान्तिपूर्वक हिन्दुस्तान को सौंपा जा रहा है, और जैसा कि आर्थिक समझोते कर लिये गये हैं. यह भी स्वीकृत हो जाय कि उत्तराधिकारी सरकार मौजूदा प्रबन्ध क अनुसार सर्वोपरि सत्ता का संचालन तब तक करती जाय, जब तक कि नयी राजनीतिक व्यवस्थाएँ न हो जायँ श्रोर प्रत्येक देश। रियासत संघ में शामिल न हो जाय या संघ में रहते हुए केन्द्र से कोई दूसरा राजनीतिक सम्बन्ध न पैदा कर ले । देशी रियासतों को समस्या को हल करने में, शिष्ट-मंडल का एक दोष तो यह है, कि इसने रियासतों के भविष्य का निर्णय करते वक्त हिन्दुस्तानी नेताओं को नज़दीक नहीं आने दिया। आज का ब्रिटिश भारत, इस विषय में कि यह रियासतें नये विधान में क्योंकर बैठाई जायगी, उतनो ही दिलचस्पी रखता है, जितनी कि स्वयं रियासतें रखती हैं। रजवाड़ों का मस्ला केवल अंग्रेज़ी सरकार और राजाओं में बातचीत से हल नहीं हो सकता। विधान निर्माण की प्रारम्भिक बातों में भी अंग्रेजो हिन्दुस्तान तथा रियासतो प्रजा के नेताओं का गइरा सम्बन्ध और मेल-जोल ज़रूरी है। और यह भी आवश्यक है कि अन्तरिम सरकार बनाने की जिम्मेदारी लेनेवाले राजनीतिक दल, यह आश्वासन दिलायं कि अंतरिम काल में सर्वोपरि सत्ता का ऐसा नियंत्रण किया जायगा कि जिससे एक ओर गवर्नर जनरल और दूसरी ओर ब्रिटिश शासक के प्रतिनिधि तथा उसके राजनीतिक सलाहकार में सम्पूर्ण सहयोग और एक जैसी नीति पर अमल होगा; अन्यथा नित-नये विरोध होंगे, खोंचा तानी चलेगी और काम ठप हो जायगा। महात्मा गांधी के अचूक राजनीतिक सहज ज्ञान ने भो, नोचे लिखे शब्दों में, जो उनके 'हरिजन' में छपे लेख से लिये गये हैं, एक ताज़ा उदाहरण खोज निकला है :"यदि इस का अन्त अंतरिम सरकार की स्थापना के साथ न हो सके, तो इसका नियंत्रण रियासतों की प्रजा के सहयोग और शुद्धतः उन्हों के हितार्थ होना चाहिये । यदि राजालोग अपने कथन और घोषणाओं पर दृढ़ हैं, तो उन्हें सर्वोपरि सत्ता के इस सार्वजनिक प्रयोग का स्वागत करना चाहिये और उसे नयी योजना में विवेचित जनता की सत्ता में उपयोगी सिद्ध होना चाहिये ।" नरेशगण का शिष्टमण्डल प्रस्ताव स्वीकार बम्बई, जून दस - हिन्दुस्तान के नरेशों ने आज भारत की भावी वैधानिक उन्नति के लिए शिष्टमण्डल के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया और अंतरिम काल में, जिन विषयों में हेरफेर की आवश्यकता होगी, वाइसराय से उन पर बातचीत करने का फैसला भी कर लिया। नरेन्द्रमण्डल की स्थायी समिति की ओर से, जिसकी बैठक आज यहाँ हुई, मण्डल के चान्सलर नवाब भूपाल ने शिष्टमण्डल के प्रस्तावों का स्वागत किया। स्थायी समिति के निश्चयों को सूचना इसो सप्ताह वाइसराय को दे दो जायगी । स्थायी समिति ने, वाइसराय की ओर से शिष्टमण्डल की तजवीज़ के अनुसार, एक बातचीत करनेवाली कमेटी बनाने को दावत भो क़बूल करती । यह कमेटी, दिल्ली में जून के मध्य से अपना काम चालू कर देगी । इस कमेटी में चांसलर नवाब भूपाल, उप-चांसलर महाराजा पटियाला, नवानगर के जामपरिशिष्ट [ पचहत्तर साहब, हैदराबाद के नवाब अलीगर जंग, ग्वालियर से सर मनुभाई मेहता, ट्रावनकोर से सोशून्य पीशून्य रामस्वामी अय्यर, चांसलर के सलाहकार सर सुल्तान अहमद, कूचबिहार से सरदार डीशून्य केशून्य सेन, बीकानेर से केशून्य एमशून्य पत्नीकर और दीवान डूगरपुर शामिल होंगे। मीर मक़बूल अहमद इस कमेटी के मन्त्री होंगे । ऐसा समझा जाता है, कि यह बातचीत करनेवालो कमेटो यूनियन की विधान परिषद् के लिए रियासतों के प्रतिनिधियों के चुनाव को विधि, विशेषकर राजाओं के राजस्व और राजवंश, रियासतों को हदबन्दी को विश्वस्तता, विधान परिषद् के फ़सलों पर अन्तिम स्वीकृति देने के हक़, संघ के साथ रियासतों को आर्थिक व्यवस्था और संघ केन्द्र को रियासतों के शुल्क इत्यादि विषयों पर रोशनी डालने की मांग करेगी। यह तजवीज्ञ भी की जा रही है, कि विधान परिषद् में ऐसी विशेष समस्याओं का निश्चय, जिनका सम्बन्ध कि रियासतों से है, उपस्थित प्रतिनिधियों के बहुमत से होना चाहिये । बातचीत करनेवाली कमेटी अन्य विषयों पर भी विचार विनिमय करेगा, --जैसे संघ को सौंपे जानेवाले विभाग, भीतरी सुधार और विधान परिषद् के सभापति तथा पदाधिकारियों के चुनाव में रियासती प्रतिनिधियों की स्थिति इत्यादि । स्थायी समिति ने रियासतों को आदेश दिया है, कि वे, गत जनवरी की बैठक मे चांसलर द्वारा उपस्थित किये गये सुझावों की रोशनी में, अपने यहां अगले बारह मास में भं तरी सुधार शुरू करदें । आज शाम को स्थायी समिति की बैठक की कार्यवाही समाप्त हो गई । वाइसर य के राजनीतिक सलाहकार सर कारनर्ड कोरफ़ोल्ड ने भी अपने विचार प्रकट किये । महाराजा ग्वालियर, पटियाला, बीकानेर, नवानगर, अलवर, नाभा, टिहरी गढ़वाल, हूँगरपुर, बघाट और देवास उपस्थित थे । रियासती प्रजामण्डल की मांग अखिल भारतवर्षीय रियासती प्रजामण्डल की स्थायी समिति ने शिष्टमण्डल की सिक्रारिशों के विषय में एक प्रस्ताव द्वारा यह मांग पेश का है कि बातचीत करनेवाली समिति तथा सल्लाहकार समिति में, जो सरिम सरकार, नरेशों और रियासतों की प्रजा के प्रतिनिधियों से बनाई जा रही है, प्रजा के प्रतिनिधि अवश्य लिये जायँ । उक्त प्रस्ताव में कहा गया है, कि जब तक नया विधान चालू नहीं हो लेता, यह आवश्यक होगा कि अंतरिम सरकार, प्रांतों और रियासतों के लिए एक जैसो नाति पर श्रमल करे । प्रस्तावित सलाहकार समिति को सभा श्रम मामलों को सम्हालना चाहिये और एकरूपता की ख़ातिर सारी रियासतों को एक ही नीति पर चलाने की चेष्टा करनी चाहिये । विधान परिषद् के बारे में प्रस्ताव में कहा गया है, कि जहाँ जहाँ, सुव्यवस्थित धागसभाएं काम कर रही हैं, उनके निर्वाचित सदस्यों में से ही प्रजा के प्रतिनिधियों का चुनाव कर लिया जाय । अन्य स्थानों से, रियासती प्रजामण्डल की प्रादेशिक समितियां विधान परिषद् के लिए प्रतिनिधि चुनेंगी । स्थायी समिति ने तीन प्रस्ताव और भो पास किये। पहले में राजगीतिक कैदियों को रिहाई तथा नागरिक आज़ादी की मांग, दूसरे में बलोचिस्तान स्थित कुलात स्टेट को शेष हिन्दुस्तान से पृथक् करने की मांग का विरोध और तोसरे में हैदराबाद रियासती कांग्रेस पर
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स्कूल परिसर में छात्रों के सामने सिगरेट पीने के मामले में आरोपी शिक्षामित्र की सेवाएं समाप्त की जाएंगी। जांच अधिकारियों ने आरोपी शिक्षा मित्र को दोषी पाया है और इसकी रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी है। बीएसए ने उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा है।
इसके साथ ही काम में लापरवाही और बिना बताए स्कूल से अनुपस्थित रहने के मामले में स्कूल की हेडमास्टर और दो सहायक अध्यापकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। तीनों शिक्षक लगातार काम में लापरवाही कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
नीनामई गांव के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र चंद्रकेश की ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप था कि शिक्षामित्र स्कूल कैंपस के अंदर बच्चों के सामने ही सिगरेट पीते हैं। इससे स्कूल का माहौल खराब हो रहा है और बच्चों पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए बीएसए ने टीम का गठन किया था। जांच अधिकारी जब स्कूल पहुंचे तो शिक्षामित्र बिना सूचना के स्कूल से गायब थे। जिसके बाद इन्हें फोन करके बुलाया गया। जब यह आए तो जांच में अन्य कई खामियां सामने आई। जिसके बाद शिक्षामित्र की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है।
शिक्षामित्र के साथ स्कूल की प्रभारी हेडमास्टर और अन्य दो सहायत अध्यापक भी लापरवाही के दोषी पाए गए। प्रभारी हेडमास्टर पूजा कुमारी, सहायक अध्यापक मनोज कुमार और चूड़ामणि बिना बताए स्कूल से गायब मिलने के दोषी पाए गए।
इसके साथ ही छात्र उपस्थिति रजिस्टर, मिड डे मील और अवकाश पंजिका में गड़बड़ी मिली है। जिसमें जांच अधिकारियों ने तीनों को दोषी पाया है। जांच के आधार पर तीनों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इनके खिलाफ भी विभाग सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
बीएसए सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जांच में हेडमास्टर, सहायक अध्यापक व शिक्षामित्र दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शिक्षामित्र की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है और डीएम को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देश आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूल परिसर में छात्रों के सामने सिगरेट पीने के मामले में आरोपी शिक्षामित्र की सेवाएं समाप्त की जाएंगी। जांच अधिकारियों ने आरोपी शिक्षा मित्र को दोषी पाया है और इसकी रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी है। बीएसए ने उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा है। इसके साथ ही काम में लापरवाही और बिना बताए स्कूल से अनुपस्थित रहने के मामले में स्कूल की हेडमास्टर और दो सहायक अध्यापकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। तीनों शिक्षक लगातार काम में लापरवाही कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नीनामई गांव के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र चंद्रकेश की ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप था कि शिक्षामित्र स्कूल कैंपस के अंदर बच्चों के सामने ही सिगरेट पीते हैं। इससे स्कूल का माहौल खराब हो रहा है और बच्चों पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए बीएसए ने टीम का गठन किया था। जांच अधिकारी जब स्कूल पहुंचे तो शिक्षामित्र बिना सूचना के स्कूल से गायब थे। जिसके बाद इन्हें फोन करके बुलाया गया। जब यह आए तो जांच में अन्य कई खामियां सामने आई। जिसके बाद शिक्षामित्र की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है। शिक्षामित्र के साथ स्कूल की प्रभारी हेडमास्टर और अन्य दो सहायत अध्यापक भी लापरवाही के दोषी पाए गए। प्रभारी हेडमास्टर पूजा कुमारी, सहायक अध्यापक मनोज कुमार और चूड़ामणि बिना बताए स्कूल से गायब मिलने के दोषी पाए गए। इसके साथ ही छात्र उपस्थिति रजिस्टर, मिड डे मील और अवकाश पंजिका में गड़बड़ी मिली है। जिसमें जांच अधिकारियों ने तीनों को दोषी पाया है। जांच के आधार पर तीनों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इनके खिलाफ भी विभाग सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। बीएसए सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जांच में हेडमास्टर, सहायक अध्यापक व शिक्षामित्र दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शिक्षामित्र की सेवा समाप्ति की संस्तुति की गई है और डीएम को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देश आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Valentines Day 2020: अमेरिकी एक्ट्रेस बेला थोर्न (Bella Thorne) सोशल मीडिया पर अपने हॉट (Hot) और बोल्ड वीडियोज (Bold Videos) के चलते अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती हैं. हाल ही में बेला ने सोशल मीडिया पर अपना एक लेटेस्ट वीडियो शेयर किया है जिसमें वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ वैलेंटाइन्स डे मानती हुईं नजर आ रही हैं. इस वीडियो को इंटरनेट पर काफी सारे लाइक्स और कमेंट्स मिल रहे हैं. वीडियो में बेला बाथटब के पास बैठी दिख रही हैं और उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है.
Got babe a few roses for Valentine's Day @doseofroses 🌹👼 So lucky to share my life with this amazing young woman. . there will never be enough flowers for me to show how much I care about you.
बेंजामिन ने भी बेला के साथ अपनी फोटोज को शेयर करते हुए लिखा, "अपनी वैलेंटाइन के लिए कुछ गुलाब लेकर आया. मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि इस युवा महिला के साथ अपनी जिंदगी को शेयर कर रहा हूं. मैं तुम्हारी कितनी फिक्र करता हूं ये बताने के लिए चाहे जितने भी फूल हो वो कम ही पड़ेंगे. "
आपको बता दें कि बेला थोर्न ने मशहूर एडल्ट वेबसाइट पोर्नहब (Pornhub) के लिए XXX फिल्म 'हिम एंड हर' को डायरेक्ट करके मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थी. इस फिल्म के लिए पोर्नहब द्वारा उन्हें अवॉर्ड भी दिया गया था.
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Valentines Day दो हज़ार बीस: अमेरिकी एक्ट्रेस बेला थोर्न सोशल मीडिया पर अपने हॉट और बोल्ड वीडियोज के चलते अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती हैं. हाल ही में बेला ने सोशल मीडिया पर अपना एक लेटेस्ट वीडियो शेयर किया है जिसमें वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ वैलेंटाइन्स डे मानती हुईं नजर आ रही हैं. इस वीडियो को इंटरनेट पर काफी सारे लाइक्स और कमेंट्स मिल रहे हैं. वीडियो में बेला बाथटब के पास बैठी दिख रही हैं और उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है. Got babe a few roses for Valentine's Day @doseofroses 🌹👼 So lucky to share my life with this amazing young woman. . there will never be enough flowers for me to show how much I care about you. बेंजामिन ने भी बेला के साथ अपनी फोटोज को शेयर करते हुए लिखा, "अपनी वैलेंटाइन के लिए कुछ गुलाब लेकर आया. मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि इस युवा महिला के साथ अपनी जिंदगी को शेयर कर रहा हूं. मैं तुम्हारी कितनी फिक्र करता हूं ये बताने के लिए चाहे जितने भी फूल हो वो कम ही पड़ेंगे. " आपको बता दें कि बेला थोर्न ने मशहूर एडल्ट वेबसाइट पोर्नहब के लिए XXX फिल्म 'हिम एंड हर' को डायरेक्ट करके मीडिया में काफी सुर्खियां बटोरी थी. इस फिल्म के लिए पोर्नहब द्वारा उन्हें अवॉर्ड भी दिया गया था.
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Sharda suman (चर्चा । योगदान)
('{{GKGlobal}} {{GKRachna ।रचनाकार=चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' }} एक मनुष्...' के साथ नया पन्ना बनाया)
Lalit Kumar (चर्चा । योगदान)
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।रचनाकार=चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
।रचनाकार=चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा।
एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा।
एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा।
वह पहला मनुष्य जहाँ गया था वहीं सब कोई जाने लगे। कुछ काल में वह स्थान पूज्य हो गया और पहला आदमी चाहे वहाँ किसी उद्देश्य से आया हो, अब वहाँ जाना ही लोगों का उद्देश्य रह गया। बड़े आदमी वहाँ घोड़ों, हाथियों पर आते, मखमल कनात बिछाते जाते, और अपने को धन्य मानते आते। गरीब आदमी कण-कण माँगते वहाँ आते और जो अभागे वहाँ न आ सकते वे मरती बेला अपने पुत्र को थीजी कि आन दिला कर वहाँ जाने का निवेदन कर जाते। प्रयोजन यह है कि वहाँ मनुष्यों का प्रवाह बढ़ता ही गया।
एक सज्जन ने वहाँ आनेवाले लोगों को कठिनाई न हो, इसलिए उस पवित्र स्थान के चारों ओर, जहाँ वह प्रथम मनुष्य आया था, हाता खिंचवा दिया। दूसरे ने, पहले के काम में कुछ जोड़ने, या अपने नाम में कुछ जोड़ने के लोभ से उस पर एक छप्पर डलवा दिया। तीसरे ने, जो इन दोनों से पीछे रहना न चाहता था, एक सुंदर मकान से उस भूमि को ढक दिया, इस पर सोने का कलश चढ़ा दिया, चारों ओर से बेल छवा दी। अब वह यात्रा, जो उस स्थान तक होती थी, उसकी सीमा की दीवारों और टट्टियों तक रह गई, क्योंकि प्रत्येक मनुष्य भीतर नहीं जा सकता। इस 'इनर सर्कल' के पुजारी बने, भीतर जाने की भेंट हुई, यात्रा का चरम उद्देश्य बाहर की दीवार को स्पर्श करना ही रह गया, क्योंकि वह भी भाग्यवानों को ही मिलने लगा।
कहना नहीं होगा, आनेवालों के विश्राम के लिए धर्मशालाएँ, कूप और तड़ाग, विलासों के लिए शुंडा और सूणा, रमणिएँ और आमोद जमने लगे, और प्रति वर्ष जैसे भीतर जाने की योग्यता घटने लगी, बाहर रहने की योग्यता, और इन विलासों में भाग लेने की योग्यता बढ़ी। उस भीड़ में ऐसे वेदांती भी पाए जाने लगे जो दूसरे की जेब को अपनी ही समझ कर रुपया निकाल लेते। कभी-कभी ब्रह्मा एक ही है उससे जार और पति में भेद के अध्यास को मिटा देनेवाली अद्वैतवादिनी और स्वकीया-परकीया के भ्रम से अवधूत विधूत सदाचारों के शुद्ध द्वैत(=झगड़ा) के कारण रक्तपात भी होने लगा। पहले यात्राएँ दिन-ही-दिन में होती थीं, मन से होती थीं, अब चार-चार दिन में नाच-गान के साथ और आफिस के काम को करते सवारी आने लगी।
एक सज्जन ने देखा की यहाँ आनेवालों को समय के ज्ञान के बिना बड़ा कष्ट होता है। अतएव उस पुण्यात्मा ने बड़े व्यय से एक घंटाघर उस नए बने मकान के ऊपर लगवा दिया। रात के अंधकार में उसका प्रकाश, और सुनसानी में उसका मधुर स्वर क्या पास के और क्या दूर के, सबके चित्त को सुखी करता था। वास्तव में ठीक समय पर उठा देने और सुला देने के लिए, एकांत में पापियों को डराने और साधुओं को आश्वासन करने के लिए वह काम देने लगा। एक सेठ ने इस घंटे की (हाथ) (सूइयाँ) सोने की बनवा दीं और दूसरे ने रोज उसकी आरती उतारने का प्रबंध कर दिया।
कुछ काल बीत गया। लोग पुरानी बातों को भूलने लग गए। भीतर जाने की बात तो किसी को याद नहीं रही। लोग मंदिर की दीवार का छूना ही ठीक मानने लगे। एक फिर्का खड़ा हो गया जो कहता था कि मंदिर की दक्षिण दीवाल छूनी चाहिए, दूसरा कहता कि उत्तर दीवाल को बिना छुए जाना पाप है। पंद्रह पंडितों ने अपने मस्तिष्क, दूसरों की रोटियाँ और तीसरों के धैर्य का नाश करके दस पर्वों के एक ग्रंथ में सिद्ध कर दिया या सिद्ध करके अपने को धोखा देना चाहा कि दोनों झूठे हैं। पवित्रता प्राप्त करने के लिए घंटे की मधुर ध्वनि का सुनना मात्र पर्याप्त है। मंदिर के भीतर जाने का तो किसी को अधिकार ही नहीं है, बाहर की शुंडा और सूणा में बैठने से भी पुन्य होता है, क्योंकि घंटे का पवित्र स्वर उन्हें पूत कर चुका है। इस सिद्ध करने या सिद्ध करने के मिस का बड़ा फल हुआ। गाहक अधिक जुटने लगे। और उन्हें अनुकूल देख कर नियम किए गए कि रास्ते में इतने पैंड़ रखने, घंटा बजे तो यों कान खड़ा करके सुनना, अमुक स्थान पर वाम चरण से खड़े होना, और अमुक पर दक्षिण से। यहाँ तक कि मार्ग में छींकने तक का कर्मकांड बन गया।
और भी समय बीता। घंटाघर सूर्य के पीछे रह गया। सूर्य क्षितिज पर आ कर लोगों को उठाता और काम में लगता, घंटाघर कहा करता कि अभी सोए रहो। इसी से घंटाघर के पास कई छोटी-मोटी घड़ियाँ बन गईं। प्रत्येक में की टिक-टिक बकरी और झलटी को मात करती। उन छोटी-मोटियों से घबरा के लोग सूर्य की ओर देखते और घंटाघर की ओर देख कर आह भर देते। अब यदि वह पुराना घंटाघर, वह प्यारा पाला-पोसा घंटा ठीक समय न बतावे तो चारों दिशाएँ उससे प्रतिध्वनि के मिस से पूछती हैं कि तू यहाँ क्यों है? वह घृणा से उत्तर देता है कि मैं जो कहूँ वही समय है। वह इतने ही में संतुष्ट नहीं है कि उसका काम वह नहीं कर सकता और दूसरे अपने आप उसका काम दे रहे हैं, वह इसी में तृप्त नहीं है कि उसका ऊंचा सिर वैसे ही खड़ा है, उसके मांजने को वही वेतन मिलता है, और लोग उसके यहाँ आना नहीं भूले हैं। अब यदि वह इतने पर भी संतुष्ट नहीं, और चाहे कि लोग अपनी घड़ियों के ठीक समय को बिगाड़ उनकी गति को रोकें ही नहीं, प्रत्युत उन्हें उल्टी चलावें, सूर्य उनकी आज्ञानुसार एक मिनट में चार डिग्री पीछे हटे, और लोग जाग कर भी उसे देख कर सोना ठीक समझें, उसका बिगड़ा और पुराना काल सबको संतोष दे, तो वज्र निर्घोष से अपने संपूर्ण तेज से, सत्य के वेग से मैं कहूँगा - 'भगवन, नहीं कभी नहीं। हमारी आँखों को तुम ठग सकते हो, किंतु हमारी आत्मा को नहीं। वह हमारी नहीं है। जिस काम के लिए आप आए थे वह हो चुका, सच्चे या झूठे, तुमने अपने नौकरों का पेट पाला। यदि चुपचाप खड़े रहना चाहो तो खड़े रहो, नहीं तो यदि तुम हमारी घड़ियों के बदलने का हठ करोगे तो, सत्यों के पिता और मिथ्याओं के परम शत्रु के नाम पर मेरा-सा तुमारा शत्रु और कोई नहीं है। आज से तुम्हारे मेरे में अंधकार और प्रकाश की-सी शत्रुता है, क्योंकि यहाँ मित्रता नहीं हो सकती। तुम बिना आत्मा की देह हो, बिना देह का कपड़ा हो, बिना सत्य के झूठे हो! तुम जगदीश्वर के नहीं हो, और न तुम पर उसकी सम्मति है, यह व्यवस्था किसी और को दी हुई है। जो उचक्का मुझे तमंचा दिखा दे, मेरी थैली उसी की, जो दुष्ट मेरी आँख में सूई डाल दे, वह उसे फोड़ सकता है, किंतु मेरी आत्मा मेरी और जगदीश्वर की है, उसे तू, हे बेतुके घंटाघर, नहीं छल सकता अपनी भलाई चाहे तो हमारा धन्यवाद ले, और-और और चला जा!!'
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Sharda suman Lalit Kumar ।पंक्ति तीन: ।पंक्ति तीन: ।रचनाकार=चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' ।रचनाकार=चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा। एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा। एक मनुष्य को कहीं जाना था। उसने अपने पैरों से उपजाऊ भूमि को बंध्या करके पगडंडी काटी और वह वहाँ पर पहला पहुँचने वाला हुआ। दूसरे, तीसरे और चौथे ने वास्तव में उस पगडंडी को चौड़ी किया और कुछ वर्षों तक यों ही लगातार जाते रहने से वह पगडंडी चौड़ा राजमार्ग बन गई, उस पर पत्थर या संगमरमर तक बिछा दिया गया, और कभी-कभी उस पर छिड़काव भी होने लगा। वह पहला मनुष्य जहाँ गया था वहीं सब कोई जाने लगे। कुछ काल में वह स्थान पूज्य हो गया और पहला आदमी चाहे वहाँ किसी उद्देश्य से आया हो, अब वहाँ जाना ही लोगों का उद्देश्य रह गया। बड़े आदमी वहाँ घोड़ों, हाथियों पर आते, मखमल कनात बिछाते जाते, और अपने को धन्य मानते आते। गरीब आदमी कण-कण माँगते वहाँ आते और जो अभागे वहाँ न आ सकते वे मरती बेला अपने पुत्र को थीजी कि आन दिला कर वहाँ जाने का निवेदन कर जाते। प्रयोजन यह है कि वहाँ मनुष्यों का प्रवाह बढ़ता ही गया। एक सज्जन ने वहाँ आनेवाले लोगों को कठिनाई न हो, इसलिए उस पवित्र स्थान के चारों ओर, जहाँ वह प्रथम मनुष्य आया था, हाता खिंचवा दिया। दूसरे ने, पहले के काम में कुछ जोड़ने, या अपने नाम में कुछ जोड़ने के लोभ से उस पर एक छप्पर डलवा दिया। तीसरे ने, जो इन दोनों से पीछे रहना न चाहता था, एक सुंदर मकान से उस भूमि को ढक दिया, इस पर सोने का कलश चढ़ा दिया, चारों ओर से बेल छवा दी। अब वह यात्रा, जो उस स्थान तक होती थी, उसकी सीमा की दीवारों और टट्टियों तक रह गई, क्योंकि प्रत्येक मनुष्य भीतर नहीं जा सकता। इस 'इनर सर्कल' के पुजारी बने, भीतर जाने की भेंट हुई, यात्रा का चरम उद्देश्य बाहर की दीवार को स्पर्श करना ही रह गया, क्योंकि वह भी भाग्यवानों को ही मिलने लगा। कहना नहीं होगा, आनेवालों के विश्राम के लिए धर्मशालाएँ, कूप और तड़ाग, विलासों के लिए शुंडा और सूणा, रमणिएँ और आमोद जमने लगे, और प्रति वर्ष जैसे भीतर जाने की योग्यता घटने लगी, बाहर रहने की योग्यता, और इन विलासों में भाग लेने की योग्यता बढ़ी। उस भीड़ में ऐसे वेदांती भी पाए जाने लगे जो दूसरे की जेब को अपनी ही समझ कर रुपया निकाल लेते। कभी-कभी ब्रह्मा एक ही है उससे जार और पति में भेद के अध्यास को मिटा देनेवाली अद्वैतवादिनी और स्वकीया-परकीया के भ्रम से अवधूत विधूत सदाचारों के शुद्ध द्वैत के कारण रक्तपात भी होने लगा। पहले यात्राएँ दिन-ही-दिन में होती थीं, मन से होती थीं, अब चार-चार दिन में नाच-गान के साथ और आफिस के काम को करते सवारी आने लगी। एक सज्जन ने देखा की यहाँ आनेवालों को समय के ज्ञान के बिना बड़ा कष्ट होता है। अतएव उस पुण्यात्मा ने बड़े व्यय से एक घंटाघर उस नए बने मकान के ऊपर लगवा दिया। रात के अंधकार में उसका प्रकाश, और सुनसानी में उसका मधुर स्वर क्या पास के और क्या दूर के, सबके चित्त को सुखी करता था। वास्तव में ठीक समय पर उठा देने और सुला देने के लिए, एकांत में पापियों को डराने और साधुओं को आश्वासन करने के लिए वह काम देने लगा। एक सेठ ने इस घंटे की सोने की बनवा दीं और दूसरे ने रोज उसकी आरती उतारने का प्रबंध कर दिया। कुछ काल बीत गया। लोग पुरानी बातों को भूलने लग गए। भीतर जाने की बात तो किसी को याद नहीं रही। लोग मंदिर की दीवार का छूना ही ठीक मानने लगे। एक फिर्का खड़ा हो गया जो कहता था कि मंदिर की दक्षिण दीवाल छूनी चाहिए, दूसरा कहता कि उत्तर दीवाल को बिना छुए जाना पाप है। पंद्रह पंडितों ने अपने मस्तिष्क, दूसरों की रोटियाँ और तीसरों के धैर्य का नाश करके दस पर्वों के एक ग्रंथ में सिद्ध कर दिया या सिद्ध करके अपने को धोखा देना चाहा कि दोनों झूठे हैं। पवित्रता प्राप्त करने के लिए घंटे की मधुर ध्वनि का सुनना मात्र पर्याप्त है। मंदिर के भीतर जाने का तो किसी को अधिकार ही नहीं है, बाहर की शुंडा और सूणा में बैठने से भी पुन्य होता है, क्योंकि घंटे का पवित्र स्वर उन्हें पूत कर चुका है। इस सिद्ध करने या सिद्ध करने के मिस का बड़ा फल हुआ। गाहक अधिक जुटने लगे। और उन्हें अनुकूल देख कर नियम किए गए कि रास्ते में इतने पैंड़ रखने, घंटा बजे तो यों कान खड़ा करके सुनना, अमुक स्थान पर वाम चरण से खड़े होना, और अमुक पर दक्षिण से। यहाँ तक कि मार्ग में छींकने तक का कर्मकांड बन गया। और भी समय बीता। घंटाघर सूर्य के पीछे रह गया। सूर्य क्षितिज पर आ कर लोगों को उठाता और काम में लगता, घंटाघर कहा करता कि अभी सोए रहो। इसी से घंटाघर के पास कई छोटी-मोटी घड़ियाँ बन गईं। प्रत्येक में की टिक-टिक बकरी और झलटी को मात करती। उन छोटी-मोटियों से घबरा के लोग सूर्य की ओर देखते और घंटाघर की ओर देख कर आह भर देते। अब यदि वह पुराना घंटाघर, वह प्यारा पाला-पोसा घंटा ठीक समय न बतावे तो चारों दिशाएँ उससे प्रतिध्वनि के मिस से पूछती हैं कि तू यहाँ क्यों है? वह घृणा से उत्तर देता है कि मैं जो कहूँ वही समय है। वह इतने ही में संतुष्ट नहीं है कि उसका काम वह नहीं कर सकता और दूसरे अपने आप उसका काम दे रहे हैं, वह इसी में तृप्त नहीं है कि उसका ऊंचा सिर वैसे ही खड़ा है, उसके मांजने को वही वेतन मिलता है, और लोग उसके यहाँ आना नहीं भूले हैं। अब यदि वह इतने पर भी संतुष्ट नहीं, और चाहे कि लोग अपनी घड़ियों के ठीक समय को बिगाड़ उनकी गति को रोकें ही नहीं, प्रत्युत उन्हें उल्टी चलावें, सूर्य उनकी आज्ञानुसार एक मिनट में चार डिग्री पीछे हटे, और लोग जाग कर भी उसे देख कर सोना ठीक समझें, उसका बिगड़ा और पुराना काल सबको संतोष दे, तो वज्र निर्घोष से अपने संपूर्ण तेज से, सत्य के वेग से मैं कहूँगा - 'भगवन, नहीं कभी नहीं। हमारी आँखों को तुम ठग सकते हो, किंतु हमारी आत्मा को नहीं। वह हमारी नहीं है। जिस काम के लिए आप आए थे वह हो चुका, सच्चे या झूठे, तुमने अपने नौकरों का पेट पाला। यदि चुपचाप खड़े रहना चाहो तो खड़े रहो, नहीं तो यदि तुम हमारी घड़ियों के बदलने का हठ करोगे तो, सत्यों के पिता और मिथ्याओं के परम शत्रु के नाम पर मेरा-सा तुमारा शत्रु और कोई नहीं है। आज से तुम्हारे मेरे में अंधकार और प्रकाश की-सी शत्रुता है, क्योंकि यहाँ मित्रता नहीं हो सकती। तुम बिना आत्मा की देह हो, बिना देह का कपड़ा हो, बिना सत्य के झूठे हो! तुम जगदीश्वर के नहीं हो, और न तुम पर उसकी सम्मति है, यह व्यवस्था किसी और को दी हुई है। जो उचक्का मुझे तमंचा दिखा दे, मेरी थैली उसी की, जो दुष्ट मेरी आँख में सूई डाल दे, वह उसे फोड़ सकता है, किंतु मेरी आत्मा मेरी और जगदीश्वर की है, उसे तू, हे बेतुके घंटाघर, नहीं छल सकता अपनी भलाई चाहे तो हमारा धन्यवाद ले, और-और और चला जा!!'
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शहर की समस्याओं को हल करने और प्लान बनाने में अब देरी नहीं होगी। दफ्तर या घर में बैठे ही अफसर समस्या की लोकेशन और उसके समाधान का तरीका देख सकेंगे। मोबाइल पर ही शहर के हर सेक्टर, गली, नाली, सीवर, बिजली की लाइन व हर घर की कुंडली मिल जाएगी। इसके लिए अथॉरिटी ने जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) से लैस पोर्टल बनवाया है। इसका पहला ड्राफ्ट तैयार हो गया है। इसमें अभी कुछ और सुधार किए जाएंगे। जियो टैगिंग होगा और अथॉरिटी से डाटा अपलोड किया जाएगा। पूरे शहर का ड्रोन से सर्वे भी किया जाएगा। 3-4 महीने में कुछ सुविधाएं मिलने लगेंगी। परियोजना पूरी होने में करीब डेढ़ साल का वक्त लगेगा।
सीवर में उफान, पीने के पानी की पाइपलाइन टूटने, बिजली की लाइन, नाली और इसी तरह की अन्य समस्याएं आए दिन सामने आती हैं। मैप मिलने में देरी होने के कारण इन्हें सही करने में समस्या आती है। सीवर के बारे में पता नहीं चल पाता है कि वह कहां से कनेक्ट है। इसी तरह पानी की पाइपलाइन को लेकर भी परेशानी आती है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि आने वाले समय में शहर की समस्याओं को हल करने और प्लानिंग में देरी नहीं होगी। इसके लिए http://umd. nic. in/gnida के नाम से जीआईएस पोर्टल का पहला ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया है। इसमें सीवर, नाली, ड्रेनेज नेटवर्क, बिजली की लाइन का नेटवर्क, सेक्टरों का लेआउट, नहर, नाले, कमर्शल, फेसिलिटी एरिया, वन क्षेत्र, भविष्य में यूज होने वाली जमीन का विवरण, खाली प्लॉट, बने हुए मकान, मकानों के स्वामी का विवरण, इंस्टिट्यूशनल, इंडस्ट्रियल एरिया, रिक्रेशनल ग्रीन एरिया, रेजिडेंशल एरिया, ट्रांसपोर्ट के लिए रिजर्व एरिया, गांवों की आबादी, तालाब, शहर का मास्टर प्लान, सड़क, खसरा-खतौनी और दीवार आदि तक का ब्योरा दिया जा रहा है। हर सेक्टर के मकान नंबर के आधार पर देखा जा सकेगा कि कहां क्या दिक्कत है।
हर पॉइंट, नाले, सीवर और पोल आदि तक को जियो टैग से लैस किया जाएगा। इसके जरिए एक क्लिक पर संबंधित जगह की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी। पता चल जाएगा कि कहां पर सीवर जाम हुआ है और उसका हल कहां से निकलेगा। सीवर व नालों की कनेक्टिविटी के बारे में दफ्तर या घर बैठे ही मोबाइल या टैबलेट पर इस पोर्टल के जरिए पता चल जाएगा। भविष्य में मैप की जरूरत खत्म हो जाएगी। तब इसी पोर्टल के जरिए समस्या का पता लगाकर समाधान तलाश लिया जाएगा। इसके लिए अथॉरिटी के रेकॉर्ड को भी इसमें अपलोड किया जाएगा। ड्रोन से पूरे शहर का सर्वे होगा।
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शहर की समस्याओं को हल करने और प्लान बनाने में अब देरी नहीं होगी। दफ्तर या घर में बैठे ही अफसर समस्या की लोकेशन और उसके समाधान का तरीका देख सकेंगे। मोबाइल पर ही शहर के हर सेक्टर, गली, नाली, सीवर, बिजली की लाइन व हर घर की कुंडली मिल जाएगी। इसके लिए अथॉरिटी ने जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम से लैस पोर्टल बनवाया है। इसका पहला ड्राफ्ट तैयार हो गया है। इसमें अभी कुछ और सुधार किए जाएंगे। जियो टैगिंग होगा और अथॉरिटी से डाटा अपलोड किया जाएगा। पूरे शहर का ड्रोन से सर्वे भी किया जाएगा। तीन-चार महीने में कुछ सुविधाएं मिलने लगेंगी। परियोजना पूरी होने में करीब डेढ़ साल का वक्त लगेगा। सीवर में उफान, पीने के पानी की पाइपलाइन टूटने, बिजली की लाइन, नाली और इसी तरह की अन्य समस्याएं आए दिन सामने आती हैं। मैप मिलने में देरी होने के कारण इन्हें सही करने में समस्या आती है। सीवर के बारे में पता नहीं चल पाता है कि वह कहां से कनेक्ट है। इसी तरह पानी की पाइपलाइन को लेकर भी परेशानी आती है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि आने वाले समय में शहर की समस्याओं को हल करने और प्लानिंग में देरी नहीं होगी। इसके लिए http://umd. nic. in/gnida के नाम से जीआईएस पोर्टल का पहला ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया है। इसमें सीवर, नाली, ड्रेनेज नेटवर्क, बिजली की लाइन का नेटवर्क, सेक्टरों का लेआउट, नहर, नाले, कमर्शल, फेसिलिटी एरिया, वन क्षेत्र, भविष्य में यूज होने वाली जमीन का विवरण, खाली प्लॉट, बने हुए मकान, मकानों के स्वामी का विवरण, इंस्टिट्यूशनल, इंडस्ट्रियल एरिया, रिक्रेशनल ग्रीन एरिया, रेजिडेंशल एरिया, ट्रांसपोर्ट के लिए रिजर्व एरिया, गांवों की आबादी, तालाब, शहर का मास्टर प्लान, सड़क, खसरा-खतौनी और दीवार आदि तक का ब्योरा दिया जा रहा है। हर सेक्टर के मकान नंबर के आधार पर देखा जा सकेगा कि कहां क्या दिक्कत है। हर पॉइंट, नाले, सीवर और पोल आदि तक को जियो टैग से लैस किया जाएगा। इसके जरिए एक क्लिक पर संबंधित जगह की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी। पता चल जाएगा कि कहां पर सीवर जाम हुआ है और उसका हल कहां से निकलेगा। सीवर व नालों की कनेक्टिविटी के बारे में दफ्तर या घर बैठे ही मोबाइल या टैबलेट पर इस पोर्टल के जरिए पता चल जाएगा। भविष्य में मैप की जरूरत खत्म हो जाएगी। तब इसी पोर्टल के जरिए समस्या का पता लगाकर समाधान तलाश लिया जाएगा। इसके लिए अथॉरिटी के रेकॉर्ड को भी इसमें अपलोड किया जाएगा। ड्रोन से पूरे शहर का सर्वे होगा।
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सूर्यदेव के गुरु की राशि में प्रवेश करते ही 15 मार्च 2018 से खरमास शुरू हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य जब गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते है तो उस घड़ी को खरमास माना जाता है और खरमास में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। यह मास 14 अप्रैल 2018 तक रहेगा।
खरमास की इस अवधि में जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, नव गृह प्रवेश, विवाह आदि नहीं करना चाहिए। इसे शुभ नही माना गया है। वहीं विवाह आदि शुभ संस्कारों में गुरु एवं शुक्र की उपस्थिति आवश्यक बतायी गई है। ये सुख और समृद्धि के कारक माने गए हैं। खरमास में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, किंतु मंगल शहनाई नहीं बजती। इस माह में सभी राशि वालों को सूर्यदेव की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
गुरु का ध्यान सूर्यदेव पर :
इसका एक धार्मिक पक्ष यह भी माना जाता है कि जब सूर्यदेव बृहस्पति के घर में प्रवेश करते हैं जो देव गुरु का ध्यान एवं संपूर्ण समर्पण उन पर ही केंद्रित हो जाता है। इससे मांगलिक कार्यों पर उनका प्रभाव सूक्ष्म ही रह जाता है जिससे इस दौरान शुभ कार्यों का विशेष लाभ नहीं होता। इसलिए भी खरमास में मंगल कार्यों को करना उत्तम नहीं बताया गया है।
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सूर्यदेव के गुरु की राशि में प्रवेश करते ही पंद्रह मार्च दो हज़ार अट्ठारह से खरमास शुरू हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य जब गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते है तो उस घड़ी को खरमास माना जाता है और खरमास में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। यह मास चौदह अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह तक रहेगा। खरमास की इस अवधि में जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, नव गृह प्रवेश, विवाह आदि नहीं करना चाहिए। इसे शुभ नही माना गया है। वहीं विवाह आदि शुभ संस्कारों में गुरु एवं शुक्र की उपस्थिति आवश्यक बतायी गई है। ये सुख और समृद्धि के कारक माने गए हैं। खरमास में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, किंतु मंगल शहनाई नहीं बजती। इस माह में सभी राशि वालों को सूर्यदेव की उपासना अवश्य करनी चाहिए। गुरु का ध्यान सूर्यदेव पर : इसका एक धार्मिक पक्ष यह भी माना जाता है कि जब सूर्यदेव बृहस्पति के घर में प्रवेश करते हैं जो देव गुरु का ध्यान एवं संपूर्ण समर्पण उन पर ही केंद्रित हो जाता है। इससे मांगलिक कार्यों पर उनका प्रभाव सूक्ष्म ही रह जाता है जिससे इस दौरान शुभ कार्यों का विशेष लाभ नहीं होता। इसलिए भी खरमास में मंगल कार्यों को करना उत्तम नहीं बताया गया है।
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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा हुआ है। पीएसी जवानों ने भरा एक ट्रक बेकाबू होकर पलट गया है। हादसे में करीब 30 जवानों के घायल होने की खबर है। वहीं 12 जवानों की हालत बेहद गंभीर है। जानकारी के अनुसार पीएसी जवान गाजियाबद की 47 बटालियन जा रहे थे। स्टेयरिंग फेल होने से ये दर्दनाक हादसा हुआ है। घायल जवानों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसा इस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस- वे पर काठा गांव के पास हुआ है।
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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा हुआ है। पीएसी जवानों ने भरा एक ट्रक बेकाबू होकर पलट गया है। हादसे में करीब तीस जवानों के घायल होने की खबर है। वहीं बारह जवानों की हालत बेहद गंभीर है। जानकारी के अनुसार पीएसी जवान गाजियाबद की सैंतालीस बटालियन जा रहे थे। स्टेयरिंग फेल होने से ये दर्दनाक हादसा हुआ है। घायल जवानों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसा इस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस- वे पर काठा गांव के पास हुआ है।
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वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्दीय कृषि मंत्री शरद पवार से भेंट कर आज यहां मांग की है कि बाजरे की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से कराने का फैसला जल्दी किया जाए। इसके लिये राज्य सरकार एक सहयोगी की भूमिका निभाने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने पवार से आज एक स्थानीय पांच सितारा होटल में जाकर मुलाकात की। पवार कृषि, खाद्य और पशुपालन मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए जयपुर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री को अवगत कराया कि पिछले वर्ष अकाल सूखा पड जाने से पहली बार पदेश के लघु व सीमांत किसानों को 750 करोड़ रूपये का भारत सरकार के सहयोग से अनुदान बांटा गया था। उससे किसानों को बहुत राहत मिली थी एवं बाजरे व मक्का के बीज का निःशुल्क वितरण का कार्यकम भी सफल रहा था। मुख्यमंत्री ने पवार को बताया कि इस बार अच्छे मानसून के कारण करीब 45 लाख टन बाजरे का उत्पादन होने की संभावना है। बाजरे का अत्यधिक उत्पादन होने के कारण बाजार भाव 700 से 750 रूपये पति क्विंटल तक चल रहा है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 880 रूपये पति क्विंटल है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री से मांग की है कि किसानों के हित में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद की जाए, ताकि वे अपने उत्पादन का समुचित लाभ पाप्त कर सपें। उन्होंने बताया कि अच्छे मानसून के कारण इस वर्ष पदेश में रबी की फसल भी बहुत अच्छी रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री से यह मांग भी की है कि किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की उपलब्धता के लिए रेल्वे के पांच रैक पतिदिन उपलब्ध करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि अभी तक एक रैक खाद उपलब्ध करवाई जा रही है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इस पर फैसला किया जाए। मुख्यमंत्री ने पशुपालन से सम्बन्धित सम्मेलन भी भविष्य में राजस्थान में ही आयोजित करने का आग्रह किया, जो यहां 20 अक्टूबर को आयोजित किया जाने वाला था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया गया है। गहलोत ने राजस्थान के दोनो कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर एवं उदयपुर के आधारभूत ढांचों को मजबूत करने के लिए भी केन्दीय सहायता की मांग की है।
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वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्दीय कृषि मंत्री शरद पवार से भेंट कर आज यहां मांग की है कि बाजरे की खरीद भारतीय खाद्य निगम से कराने का फैसला जल्दी किया जाए। इसके लिये राज्य सरकार एक सहयोगी की भूमिका निभाने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने पवार से आज एक स्थानीय पांच सितारा होटल में जाकर मुलाकात की। पवार कृषि, खाद्य और पशुपालन मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए जयपुर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री को अवगत कराया कि पिछले वर्ष अकाल सूखा पड जाने से पहली बार पदेश के लघु व सीमांत किसानों को सात सौ पचास करोड़ रूपये का भारत सरकार के सहयोग से अनुदान बांटा गया था। उससे किसानों को बहुत राहत मिली थी एवं बाजरे व मक्का के बीज का निःशुल्क वितरण का कार्यकम भी सफल रहा था। मुख्यमंत्री ने पवार को बताया कि इस बार अच्छे मानसून के कारण करीब पैंतालीस लाख टन बाजरे का उत्पादन होने की संभावना है। बाजरे का अत्यधिक उत्पादन होने के कारण बाजार भाव सात सौ से सात सौ पचास रूपये पति क्विंटल तक चल रहा है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य आठ सौ अस्सी रूपये पति क्विंटल है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री से मांग की है कि किसानों के हित में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद की जाए, ताकि वे अपने उत्पादन का समुचित लाभ पाप्त कर सपें। उन्होंने बताया कि अच्छे मानसून के कारण इस वर्ष पदेश में रबी की फसल भी बहुत अच्छी रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने केन्दीय कृषि मंत्री से यह मांग भी की है कि किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की उपलब्धता के लिए रेल्वे के पांच रैक पतिदिन उपलब्ध करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि अभी तक एक रैक खाद उपलब्ध करवाई जा रही है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इस पर फैसला किया जाए। मुख्यमंत्री ने पशुपालन से सम्बन्धित सम्मेलन भी भविष्य में राजस्थान में ही आयोजित करने का आग्रह किया, जो यहां बीस अक्टूबर को आयोजित किया जाने वाला था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया गया है। गहलोत ने राजस्थान के दोनो कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर एवं उदयपुर के आधारभूत ढांचों को मजबूत करने के लिए भी केन्दीय सहायता की मांग की है।
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Baba Bageshwar Dham : पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी बयान आ गया है। हिंदू राष्ट्र को लेकर सीधी बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने बिहार के सवाल पर देश के हिसाब से दिया जवाब।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब देश की बात कर रहे हैं। बालेश्वर धाम वाले बाबा की बातों से राज्य के अंदर धर्म या जातियों के बीच में कटुता आ सकती है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मत सोचिए कि बिहार की बात कर रहे हैं, पूरे देश में एकता बनी रहेगी। हिंदू राष्ट्र को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की बातों के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में संविधान के खिलाफ कोई क्या माहौल बनाएगा? लोकसभा और राज्यसभा में पूर्ण बहुमत से ही संविधान में संशोधन होता है। जिन्होंने इस देश की आजादी की लड़ाई लड़ी, संविधान बनाया; उनसे अलग कोई कुछ नहीं कर सकता।
हिन्दू राष्ट्र के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई कौन लोग लड़े थे। आजादी मिलने के बाद सभी की सहमति से देश का संविधान बना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समेत सभी लोगों ने नामकरण किया। उसे सबों को स्वीकार करना चाहिए, उसको बदलना नहीं चाहिए। आजकल यह सब देखकर मुझे आश्चर्य होता है। दिल्ली वाले देश भर की मीडिया पर कब्जा किये हुए हैं, इस कारण इन सब चीजों का प्रचार होता है। देश के नाम को आपलोग बदल दीजिएगा? अभी जो लोग बोल रहे हैं उनका जन्म भी आजादी की लड़ाई के समय नहीं हुआ था। हमलोगों का भी जन्म आजादी मिलने के बाद हुआ है। हमारे पिताजी आजादी की लड़ाई में बहुत सक्रिय थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक-एक चीज हमें बचपन में ही बतायी थी। हमलोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके साथ काम करने वाले सभी लोगों को मानते हैं। उसी के आधार पर हमलोग विकास का काम कर रहे हैं। आप किसी भी धर्म को मानिए और अपने ढंग से उसे कीजिए। इसमें कोई रुकावट नहीं है। राम हों या कृष्ण हों, जिनको मानना है, वे मानें, इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं है। किसी भी धर्म को मानना है, वे मानें इस देश में सात धर्म हैं। पारसी धर्म को मानने वाले कम लोग हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म, बौद्ध, जैन को मानने वाले लोग देश में हैं।
भगवान बुद्ध को बिहार में ज्ञान प्राप्त हुआ। कई धर्मों के मानने वाले लोग बिहार आते हैं। देश के बाहर से भी लोग बिहार आते हैं। हमलोग सभी लोगों के हित में काम करते हैं। मंदिर हो या मस्जिद, किसी को कोई असुविधा न हो, इसका ख्याल रखा जाता है। आपस में किसी तरह का कोई विवाद नहीं होना चाहिये। सभी को अपने ढंग से पूजा करने एवं काम करने का अधिकार है, इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। सभी धर्मों के माननेवालों को इसकी इजाजत है। किसी को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये। कोई कुछ बोल रहा है तो अपनी मर्जी से बोल रहा है। उसका कोई वैल्यू नहीं है। देश के संविधान को सभी लोगों को समझना चाहिए। अगर देश के संविधान का कोई उल्लंघन कर रहा है तो मीडिया को उसे देखना चाहिए।
सनातन धर्म से कोई मतलब के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ जो अंड बंड बोलता है, उसको बोलने से अगर पार्टी में कुछ मिल जाता है तो मिल जाए। यह मत सोचिए कि बिहार की बात कर रहे हैं। जाति धर्म को लेकर एकता पूरे देश में बना रहेगा। बार-बार दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का नाम लेते हुए कहा कि श्रद्धा अटल बिहारी वाजपेई जी के समय ऐसा होता था क्या? वाजपेई जी के समय ऐसा हुआ। मैंने उनके समय ऐसा किया।
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Baba Bageshwar Dham : पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी बयान आ गया है। हिंदू राष्ट्र को लेकर सीधी बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने बिहार के सवाल पर देश के हिसाब से दिया जवाब। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब देश की बात कर रहे हैं। बालेश्वर धाम वाले बाबा की बातों से राज्य के अंदर धर्म या जातियों के बीच में कटुता आ सकती है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मत सोचिए कि बिहार की बात कर रहे हैं, पूरे देश में एकता बनी रहेगी। हिंदू राष्ट्र को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की बातों के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में संविधान के खिलाफ कोई क्या माहौल बनाएगा? लोकसभा और राज्यसभा में पूर्ण बहुमत से ही संविधान में संशोधन होता है। जिन्होंने इस देश की आजादी की लड़ाई लड़ी, संविधान बनाया; उनसे अलग कोई कुछ नहीं कर सकता। हिन्दू राष्ट्र के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई कौन लोग लड़े थे। आजादी मिलने के बाद सभी की सहमति से देश का संविधान बना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समेत सभी लोगों ने नामकरण किया। उसे सबों को स्वीकार करना चाहिए, उसको बदलना नहीं चाहिए। आजकल यह सब देखकर मुझे आश्चर्य होता है। दिल्ली वाले देश भर की मीडिया पर कब्जा किये हुए हैं, इस कारण इन सब चीजों का प्रचार होता है। देश के नाम को आपलोग बदल दीजिएगा? अभी जो लोग बोल रहे हैं उनका जन्म भी आजादी की लड़ाई के समय नहीं हुआ था। हमलोगों का भी जन्म आजादी मिलने के बाद हुआ है। हमारे पिताजी आजादी की लड़ाई में बहुत सक्रिय थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक-एक चीज हमें बचपन में ही बतायी थी। हमलोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके साथ काम करने वाले सभी लोगों को मानते हैं। उसी के आधार पर हमलोग विकास का काम कर रहे हैं। आप किसी भी धर्म को मानिए और अपने ढंग से उसे कीजिए। इसमें कोई रुकावट नहीं है। राम हों या कृष्ण हों, जिनको मानना है, वे मानें, इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं है। किसी भी धर्म को मानना है, वे मानें इस देश में सात धर्म हैं। पारसी धर्म को मानने वाले कम लोग हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्म, बौद्ध, जैन को मानने वाले लोग देश में हैं। भगवान बुद्ध को बिहार में ज्ञान प्राप्त हुआ। कई धर्मों के मानने वाले लोग बिहार आते हैं। देश के बाहर से भी लोग बिहार आते हैं। हमलोग सभी लोगों के हित में काम करते हैं। मंदिर हो या मस्जिद, किसी को कोई असुविधा न हो, इसका ख्याल रखा जाता है। आपस में किसी तरह का कोई विवाद नहीं होना चाहिये। सभी को अपने ढंग से पूजा करने एवं काम करने का अधिकार है, इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। सभी धर्मों के माननेवालों को इसकी इजाजत है। किसी को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये। कोई कुछ बोल रहा है तो अपनी मर्जी से बोल रहा है। उसका कोई वैल्यू नहीं है। देश के संविधान को सभी लोगों को समझना चाहिए। अगर देश के संविधान का कोई उल्लंघन कर रहा है तो मीडिया को उसे देखना चाहिए। सनातन धर्म से कोई मतलब के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ जो अंड बंड बोलता है, उसको बोलने से अगर पार्टी में कुछ मिल जाता है तो मिल जाए। यह मत सोचिए कि बिहार की बात कर रहे हैं। जाति धर्म को लेकर एकता पूरे देश में बना रहेगा। बार-बार दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का नाम लेते हुए कहा कि श्रद्धा अटल बिहारी वाजपेई जी के समय ऐसा होता था क्या? वाजपेई जी के समय ऐसा हुआ। मैंने उनके समय ऐसा किया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने गुरुवार को कहा कि जब तक नवाज़ शरीफ़ इस्तीफ़ा नहीं दे देते वह सरकार से बातचीत नहीं करेंगे.
वहीं पाकिस्तान की संसद में पारित हुए एक प्रस्ताव में उनकी इस मांग को असंवैधानिक बताया गया है.
बुधवार की रात सरकार और इमरान की पार्टी के बीच बातचीत हुई थी.
गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने की उम्मीद जताई जा रही थी.
इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादिरी के समर्थक संसद के बाहर दो दिन से प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के इस्तीफ़े की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ इमरान ने कहा, "नवाज़ शरीफ़ मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब तक आप इस्तीफ़ा नहीं दे देते मैं यह जगह नहीं छोड़ुंगा. "
वहीं कादरी की पाकिस्तान अवामी तहरीक पार्टी ने कहा कि वह 'सार्थक बातचीत' चाहती है.
(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
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तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने गुरुवार को कहा कि जब तक नवाज़ शरीफ़ इस्तीफ़ा नहीं दे देते वह सरकार से बातचीत नहीं करेंगे. वहीं पाकिस्तान की संसद में पारित हुए एक प्रस्ताव में उनकी इस मांग को असंवैधानिक बताया गया है. बुधवार की रात सरकार और इमरान की पार्टी के बीच बातचीत हुई थी. गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने की उम्मीद जताई जा रही थी. इमरान ख़ान और ताहिरुल क़ादिरी के समर्थक संसद के बाहर दो दिन से प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के इस्तीफ़े की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ इमरान ने कहा, "नवाज़ शरीफ़ मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब तक आप इस्तीफ़ा नहीं दे देते मैं यह जगह नहीं छोड़ुंगा. " वहीं कादरी की पाकिस्तान अवामी तहरीक पार्टी ने कहा कि वह 'सार्थक बातचीत' चाहती है.
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काइनेटिक ग्रीन हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सस्ती इंजीनियरिंग मॉडल की राह पर आगे बढऩे की योजना बना रही है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक तिपहिया से अपनी शुरुआत की थी और बाद में गोल्फ कार्ट एवं दोपहिया वाहनों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया था। काइनेटिक ग्रीन की संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी सुलाजा फिरोदिया मोटवानी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को पसंद कर रहे हैं क्योंकि ये पर्यावरण के लिए अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों की स्थानीयकरण योजनाएं प्रभावित हुई हैं क्योंकि वे फिलहाल अपने कारोबार को बचाने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी कंपनी ने स्थानीयकरण किया है क्योंकि हमारे पास विशेषज्ञता और अपने संयंत्र मौजूद हैं। लेकिन कई अन्य कंपनियां अपनी स्थानीयकरण योजनाओं को पूरा नहीं कर पाई हैं। ' मोटवानी के अनुसार, ग्रीन एजेंडे के साथ लागत संबंधी फायदे और प्रौद्योगिकी ढांचे के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य उज्ज्वल है। हालांकि उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारतीय दृष्टिकोण में अंतर का हवाला देते हुए कहा कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका के विपरीत है क्योंकि अमेरिका में टेस्ला इस क्षेत्र में काफी आगे है। भारत में 85 फीसदी लोग दोपहिया, तिपहिया और बसों में सफर करते हैं। उन्होंने कहा कि यहां 10 से 15 फीसदी लोग ही कार खरीद सकते हैं। मोटवानी ने कहा, 'सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, तिपहिया और दोपहिया वाहनों के विद्युतिकरण का सही फैसला लिया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों का फायदा न केवल पूरे समाज को मिलेगा बल्कि उससे प्रदूषण भी कम होंगे। सबसे अहम बात यह है कि इससे परिवहन की लागत भी कम होगी। हमारे जैसे विकासशील देश के लिए सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण करना बिल्कुल उपयुक्त है। ' मोटवानी के अनुसार, इस श्रेणी में विद्युतीकरण पर जोर देने का एक अन्य फायदा है। चूंकि शहर के भीतर दोपहिया और तिपहिया वाहनों का परिचालन होता है और इसलिए उन्हें ज्यादा चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। उन्हें एक बार चार्ज किया जा सकता है और फिर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'यदि आप इस श्रेणी का विद्युतीकरण करेंगे आप एक पैमाना निर्धारित करेंगे जो चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेगा। इससे अगले चरण के विद्युतीकरण की शुरुआत होगी जो कार है। इसलिए यह विद्युतीकरण की एक दिशा है जो भारत में स्पष्ट रूप से विकसित हो रही है। ' पिछले कुछ वर्षों में करीब 350 करोड़ रुपये कमाने के बाद कंपनी की नजर 2021-22 में 200 करोड़ रुपये के राजस्व पर रहेगी। कंपनी हाईएंड गोल्फ कार्ट और लैम्बोर्गिनी परिवार संग ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ वैश्विक बाजार की ओर रुख करेगी। लैम्बोर्गिनी काइनेटिक ग्रीन के मौजूदा आरऐंडडी और अहमदनगर के विनिर्माण संयंत्र का फायदा उठाएगी। इस संयुक्त उद्यम की नजर अगले चार से पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये के राजस्व पर है।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
डिज्नी का कारोबार खरीदने में प्राइवेट इक्विटी कंपनियों की रुचि!
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काइनेटिक ग्रीन हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सस्ती इंजीनियरिंग मॉडल की राह पर आगे बढऩे की योजना बना रही है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक तिपहिया से अपनी शुरुआत की थी और बाद में गोल्फ कार्ट एवं दोपहिया वाहनों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया था। काइनेटिक ग्रीन की संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी सुलाजा फिरोदिया मोटवानी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को पसंद कर रहे हैं क्योंकि ये पर्यावरण के लिए अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों की स्थानीयकरण योजनाएं प्रभावित हुई हैं क्योंकि वे फिलहाल अपने कारोबार को बचाने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी कंपनी ने स्थानीयकरण किया है क्योंकि हमारे पास विशेषज्ञता और अपने संयंत्र मौजूद हैं। लेकिन कई अन्य कंपनियां अपनी स्थानीयकरण योजनाओं को पूरा नहीं कर पाई हैं। ' मोटवानी के अनुसार, ग्रीन एजेंडे के साथ लागत संबंधी फायदे और प्रौद्योगिकी ढांचे के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य उज्ज्वल है। हालांकि उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारतीय दृष्टिकोण में अंतर का हवाला देते हुए कहा कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका के विपरीत है क्योंकि अमेरिका में टेस्ला इस क्षेत्र में काफी आगे है। भारत में पचासी फीसदी लोग दोपहिया, तिपहिया और बसों में सफर करते हैं। उन्होंने कहा कि यहां दस से पंद्रह फीसदी लोग ही कार खरीद सकते हैं। मोटवानी ने कहा, 'सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, तिपहिया और दोपहिया वाहनों के विद्युतिकरण का सही फैसला लिया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों का फायदा न केवल पूरे समाज को मिलेगा बल्कि उससे प्रदूषण भी कम होंगे। सबसे अहम बात यह है कि इससे परिवहन की लागत भी कम होगी। हमारे जैसे विकासशील देश के लिए सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण करना बिल्कुल उपयुक्त है। ' मोटवानी के अनुसार, इस श्रेणी में विद्युतीकरण पर जोर देने का एक अन्य फायदा है। चूंकि शहर के भीतर दोपहिया और तिपहिया वाहनों का परिचालन होता है और इसलिए उन्हें ज्यादा चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है। उन्हें एक बार चार्ज किया जा सकता है और फिर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'यदि आप इस श्रेणी का विद्युतीकरण करेंगे आप एक पैमाना निर्धारित करेंगे जो चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेगा। इससे अगले चरण के विद्युतीकरण की शुरुआत होगी जो कार है। इसलिए यह विद्युतीकरण की एक दिशा है जो भारत में स्पष्ट रूप से विकसित हो रही है। ' पिछले कुछ वर्षों में करीब तीन सौ पचास करोड़ रुपये कमाने के बाद कंपनी की नजर दो हज़ार इक्कीस-बाईस में दो सौ करोड़ रुपये के राजस्व पर रहेगी। कंपनी हाईएंड गोल्फ कार्ट और लैम्बोर्गिनी परिवार संग ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ वैश्विक बाजार की ओर रुख करेगी। लैम्बोर्गिनी काइनेटिक ग्रीन के मौजूदा आरऐंडडी और अहमदनगर के विनिर्माण संयंत्र का फायदा उठाएगी। इस संयुक्त उद्यम की नजर अगले चार से पांच वर्षों में पाँच सौ करोड़ रुपये के राजस्व पर है। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक ! डिज्नी का कारोबार खरीदने में प्राइवेट इक्विटी कंपनियों की रुचि!
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रायपुर। ट्रेन में सवार होते समय यात्री का पर्स पार करने वाले युवक को शनिवार को रेलवे पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। पर्स में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस की ओरिजिनल कॉपी नगदी -2900 रुपए थे। पर्स में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस की ओरिजिनल कॉपी नगदी -2900 रुपए थे।
यात्री प्रेम लाल वर्मा ( 33) केवतरा, बजरंग चौक रायपुर निवासी 14 फरवरी को अमरकंटक एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में चढ़ रहा था, इस दौरान आरोपी ने पर्स पार किया था। यात्री ने मामले की शिकायत शासकीय रेलवे पुलिस थाना में की। इस पर मंडल टास्क टीम रायपुर ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को पकड़ा। आरोपी दुर्गेश गुप्ता (20 ) कैलाशपुरी ,पुजारी वाटिका के पास रायपुर का रहने वाला है। आरोपी के विरुद्ध धारा 379 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
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रायपुर। ट्रेन में सवार होते समय यात्री का पर्स पार करने वाले युवक को शनिवार को रेलवे पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। पर्स में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस की ओरिजिनल कॉपी नगदी -दो हज़ार नौ सौ रुपयापए थे। पर्स में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस की ओरिजिनल कॉपी नगदी -दो हज़ार नौ सौ रुपयापए थे। यात्री प्रेम लाल वर्मा केवतरा, बजरंग चौक रायपुर निवासी चौदह फरवरी को अमरकंटक एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में चढ़ रहा था, इस दौरान आरोपी ने पर्स पार किया था। यात्री ने मामले की शिकायत शासकीय रेलवे पुलिस थाना में की। इस पर मंडल टास्क टीम रायपुर ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को पकड़ा। आरोपी दुर्गेश गुप्ता कैलाशपुरी ,पुजारी वाटिका के पास रायपुर का रहने वाला है। आरोपी के विरुद्ध धारा तीन सौ उन्यासी आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
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बारहवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के उद्देश्य से सीबीएसई ने वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने के लिए 13 सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति 10 दिनों के भीतर 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के मूल्यांकन मानदंड पर रिपोर्ट सौंपेगी।
नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के उद्देश्य से वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने के लिए 13 सदस्यीय समिति का गठन किया है और यह समिति 10 दिनों में रिपोर्ट पेश करेगी।
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई थी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, " कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न अनिश्चित स्थिति और विभिन्न पक्षकारों की राय के आधार पर यह फैसला किया गया था कि इस वर्ष सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द करने का फैसला किया था। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 'छात्रों का स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
छात्रों को अंक किस आधार पर मिलेंगे और परिणाम कैसे तैयार होगा, इस बारे में सीबीएसई ने कहा था कि समय के अनुसार उचित मानदंड के तहत अंक दिये जायेंगे और परिणाम तैयार होगा। वहीं छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प भी दिया जाएगा। जो छात्र अपने अंक से संतुष्ट नहीं होंगे वे बाद में परीक्षा देने का विकल्प चुन सकेंगे। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में भी इस मामले पर सुनवाई चल रही है ।
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बारहवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के उद्देश्य से सीबीएसई ने वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने के लिए तेरह सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति दस दिनों के भीतर बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के मूल्यांकन मानदंड पर रिपोर्ट सौंपेगी। नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारहवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के उद्देश्य से वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने के लिए तेरह सदस्यीय समिति का गठन किया है और यह समिति दस दिनों में रिपोर्ट पेश करेगी। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई थी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, " कोविड-उन्नीस महामारी के कारण उत्पन्न अनिश्चित स्थिति और विभिन्न पक्षकारों की राय के आधार पर यह फैसला किया गया था कि इस वर्ष सीबीएसई की बारहवीं बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारहवीं की बोर्ड परीक्षा रद्द करने का फैसला किया था। सीबीएसई बारहवीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 'छात्रों का स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। छात्रों को अंक किस आधार पर मिलेंगे और परिणाम कैसे तैयार होगा, इस बारे में सीबीएसई ने कहा था कि समय के अनुसार उचित मानदंड के तहत अंक दिये जायेंगे और परिणाम तैयार होगा। वहीं छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प भी दिया जाएगा। जो छात्र अपने अंक से संतुष्ट नहीं होंगे वे बाद में परीक्षा देने का विकल्प चुन सकेंगे। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में भी इस मामले पर सुनवाई चल रही है ।
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तुर्की के की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। बताया गया कि शुक्रवार को बार्टिन के अमासरा शहर की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। यह धमाका इतना भयंकर था कि इसमें 25 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 28 लोग घायल हो गए है।
तुर्की के की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। बताया गया कि शुक्रवार को बार्टिन के अमासरा शहर की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। यह धमाका इतना भयंकर था कि इसमें 25 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 28 लोग घायल हो गए है।
बताया जा रहा है कि करीब 50 लोग अभी भी कोयला खदान में फंसे हुए है। रिपोर्ट के मुताबिक, खदान में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
वहीं तुर्की के गृह मंत्री सुलेमान सोयलू के ने बताया कि घटनास्थल पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है और खदान में फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकाल लिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि कोयला खदानों में पाई जाने वाली ज्वलनशील गैसों के कारण यह धमाका हुआ होगा। जानकारी के अनुसार, जिस समय खदान में विस्फोट हुआ उस दौरान खदान के अंदर 110 लोग मौजूद थे।
कोयल खदान में धमाका होने के बाद सूचना मिलने ही हजारों की संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।
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तुर्की के की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। बताया गया कि शुक्रवार को बार्टिन के अमासरा शहर की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। यह धमाका इतना भयंकर था कि इसमें पच्चीस लोगों की मौत हो गई है, जबकि अट्ठाईस लोग घायल हो गए है। तुर्की के की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। बताया गया कि शुक्रवार को बार्टिन के अमासरा शहर की एक कोयला खदान में धमाका हो गया है। यह धमाका इतना भयंकर था कि इसमें पच्चीस लोगों की मौत हो गई है, जबकि अट्ठाईस लोग घायल हो गए है। बताया जा रहा है कि करीब पचास लोग अभी भी कोयला खदान में फंसे हुए है। रिपोर्ट के मुताबिक, खदान में फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। वहीं तुर्की के गृह मंत्री सुलेमान सोयलू के ने बताया कि घटनास्थल पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है और खदान में फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकाल लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कोयला खदानों में पाई जाने वाली ज्वलनशील गैसों के कारण यह धमाका हुआ होगा। जानकारी के अनुसार, जिस समय खदान में विस्फोट हुआ उस दौरान खदान के अंदर एक सौ दस लोग मौजूद थे। कोयल खदान में धमाका होने के बाद सूचना मिलने ही हजारों की संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।
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तीव्र इच्छा का भयकर सताप होता है, वह सताप ऐसा है, जैसे मिट्टी के दो वर्तनों के बीच में औषध रख कर उनका मुह भलीभाति वन्द करके चारो तरफ आग लगाई जाती है, वैसे मानो इन्द्रियाँ पुटपाकत्व को प्राप्त हो गई हो, ऐसा होने पर भी दुख से उत्पन्न हुए ताप के बढ़ जाने से इन्द्रियगरण का सताप ( दुःख ) फलता ही जाता है, परन्तु निवृति यानी सुख-शान्ति होती ही नहीं । अथवा प्रथम यानी भोग के समय देहादि के खेद से और बाद में विपाक के समय गत्यन्तर मे होने वाले दुख से आत्मा को होने वाले सताप से इन्द्रियाँ ऐसी संतप्त हो जाती है, जैसे पुटपाक से औषध सतप्त हो जाती है । सदा यत्र स्थितो द्वषोल्लेख : स्वप्रतिपन्थिषु ।
सुखानुभवकोलेऽपि तत्र तापहत मन. ॥६६॥
जहाँ सुख का अनुभव करने के समय मे भी निरन्तर अपने शत्रुओं के प्रति द्वोष का चिन्तन (उल्लेख) रहता है, वहीं उसका मन घर मे शान्त बैठा रहने पर भी ताप से आहत (व्यथित) रहता है ।
पुण्यफल के सयोग से घर में शान्त बैठे हुए भी निरन्तर अपने मन मे शत्रुओं के प्रति द्वेष का चिन्तनरूप सता रहता है। ऐसे पुण्यफल के भोग मे सुख के अनुभवकाल मे भी (सुखभोग के समय भी ) मे उसका चित्त सताप (सक्लेश) से आहत (व्याप्त) रहता है, ऐसी स्थिति सुख कहाँ से हो
स्कन्धात्स्कन्धान्तरारोपे भारस्येव न तत्त्वत । अक्षाह्लादेऽपि दु खस्य सस्कारो विनितर्तते ॥७०॥
एक स्कन्ध से दूसरे स्कन्ध पर भार रख देने से जैसे भार कम नही होता, वैसे ही इन्द्रियों के आनन्द से भी वस्तुत दुःख के संस्कार नष्ट (निवृत्त) नही होते ।
अनाज वगैरह को वजनदार गठडी एक कन्धे के यक जाने पर जव दूसरे कन्धे पर रखी जाती है, तब ऐसा मालूम होता है कि भार कम हो गया, किन्तु वास्तव मे उस वजन का संस्कार कम नहीं होता, इसी
प्रकार इन्द्रियसुखो को भोगते समय भी विवेकहीन व्यक्ति मानता है कि इहलोक-परलोक-सम्बन्धी दुख नष्ट हो गया है, लेकिन दुख के सस्कार नष्ट नहीं होते । नये कर्मरूपी दुखों के सस्कारवीज और वोदिये जाते हैं । अत. इन्द्रियसुखानुभव में भी दुख के संस्कार जमे रहते हैं ; जो दोनो लोको में दुख देते रहते हैं ।
सुखं दुःखं च मोहश्च तिलोऽपि गुणवृत्तय । વિસ્તા વિ વર્તન્ત કુ.ધનાત્યતિષાત્ ૫૭૧૫
सुख, दुख और मोह इन तीनो गुरणों की वृत्तियां विरुद्ध हैं, तो भी ये तीनो दुख की जाति का अतिक्रमण ( उल्लघन) नहीं करती, इसलिए दु.खरूप ही हैं।
सुख और दुख ये दोनो क्रमशः पुण्य और पाप के फल है । तथा मोह = मोहनीय कर्म के उदय से उत्पन्न हुआ। जीव का परिणाम अथवा अज्ञान, इन तीनो गुणों को वृत्तियां यानी सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण की प्रवृत्तियाँ क्रमश. विरुद्ध है । अर्थात् एक का प्राधान्य होने पर दूसरे दो की गौणता, इस प्रकार परस्पर विपरीत स्वभाव वाले सुख, दुःख तथा मोहरूप में प्रवर्तमान हैं। फिर भी ये दुख की जाति (धर्म) का उल्लघंन नहीं करती, इसलिए ये तीनो दु.खरून ही हैं ।
कुद्धनगणगोपनो भोगोद्भवोऽखिलः । વિજારિશ્વત્રરૂપોડપિ સૈંયહે વવેનાનુ ૫૭૫
सारे ही भोगों से उत्पन्न हुआ सुख का अनुभव क्रोध मे उफनते हुए सर्प के फन के फैलाव सरीखा है, ऐसा विचित्र प्रकार का विलास भी विवेकीजनों के लिऐ भय का कारण है ।
समग्र शब्दादि विषयभोगो से उत्पन्न सुखानुभव क्रुद्ध सर्प के फ के फैलाव की तरह भयकर है, विचित्र प्रकार का विलास (शृंगार, आडम्बर क्रीड़ा विनोद आदि आमोद-प्रमोद ) के प्रकार भी विवेकीजनो (वस्तुस्वरूप का विश्लेषण करने वाले पुरुषो) के लिए भय के कारण
हैं - यानी दुर्गतिगमनरूप भय को पैदा करने वाले है, क्योंकि वे उसके कारण है।
इत्यमेकत्वमापन फलत पुण्यपापयो ।
मन्यते यो न मूढ़ात्मा नान्तस्तस्य भवोदधे ।॥७३॥ इस प्रकार पुण्य-पाप का फल की दृष्टि से एकत्व प्राप्त (सिद्ध ) हुआ । मगर जो मुढात्मा इस बात को नहीं मानता, उसके भवसागर का अन्त नहीं आता ।
पूर्वोक्त कथनानुसार फल ( अपने द्वारा साध्य कार्य के सम्पादन करने) से पुण्य और पाप की एकता (अभिन्नता ) प्राप्त (सिद्ध ) होती है, जिसे वस्तुस्वरूप से अनभिज्ञ मुढात्मा (मोहकृत व्यामोह से विक्षिप्तचित्त) इन दोनों का एकत्व नही मानता (स्वीकारता ) । उस मूढ के ससाररूपी सागर का अन्त नहीं आता, क्योंकि वह बोधके रहित है।
दु'खैकरूपयोमिन्नस्तेनात्मा पुण्यपापयो ।
शुद्धनिश्चयत सत्यचिदानन्दमय सदा ॥७४ ।।
इस पूर्वोक्त कारण से दु ख के ही एकस्वरूप वाले पुण्य और पाप दोनो से आत्मा पृथक् है । क्योकि शुद्ध निश्चयनय को दृष्टि से आत्मा सदा सत्-चित्- आनन्दमय है ।
पूर्वकयनानुसार यह सिद्ध हुआ कि पुण्य और पाप दोनो दुखरूप एक स्वभाव वाले है, इसलिए आत्मा पुण्य और पाप से भिन्न है। आत्मा उत्पाद और व्यय से रहित शुद्धवस्तु के ग्राही निश्चय (निश्चय स्वरूप का निश्चय करने वाले) नय से सत्-चित्-आनन्दभय अर्थात् परब्रह्मस्त्ररूप है।
तत्तु रीयदशाव्यग्यरूपमावर रणक्षयात् । भात्युषणोद्योतशीलस्य घननाशाद् खेरिव ॥७५॥
जैसे वादलो के मिट (फट) जाने से उष्णप्रकाश के स्वभाववाले सूर्य का रूप दिखाई देने लगता है, वैसे ही आवरण का क्षय होने से दशा में जाना जा सके ऐसा आत्मा का रूप दिखाई देता है ।
पूर्वोक्त आत्मस्वरूप तुर्यदशा का यानी स्वप्न, जाग्रत, सुषुप्ति इन तीन दशाओं को लाभ कर केवलज्ञान के प्रकाश वाली चौथी उजागरदशा, जो विशेष प्रकार के दोध से हुई अवस्था है । वह जान सकते योग्य चैतन्यस्वभाव आवरण के क्षय मे (ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीयरूप) कर्म के आच्छादन के विनष्ट होने से जाना जा सकता है। सूर्य के प्रकाश की तरह सर्वपदार्थ समूह को प्रकाशित करने के स्वभाव वाले आत्मा का स्वरूप प्रतिभासित होता है। किसकी तरह ? यह बताते है-मेघसमूह के नष्ट हो जाने से जंसे सूर्य का निर्मल विम्व मुशोभित होता है ।
जायन्ते जाग्रतोऽक्ष भ्यश्चित्राधिसुखवृत्तय । सामान्य तु चिदानन्दरूप सर्वदशान्वयि ॥७६॥
जागृत आत्मा को इन्द्रियों से अनेक प्रकार की आधि (मानसिक व्यथा) वाली सुख की वृत्तियाँ उत्पन्न होती है, जबकि सामान्यतया तो सर्वदशा मे सम्बन्ध वाला चिदानन्दरूप प्रतिभासित होता है ।
जागृत यानी द्रव्यनिद्रा से रहित आत्मा को श्रोत्रादि इन्द्रियों से अनेक प्रकार की आधियो ( मानसिक पीडाओ) वाली, तथा आशा से उत्पन्न किये हुए आर्तस्वभाव वाली सुख की वृत्तियाँ उत्पन्न होती है । और सामान्यदृष्टि से सबमे रही हुई केवल चेतना तो सर्वदेशा ( अवस्था) मे सम्बन्ध वाला चिदानन्दरूप सत्यज्ञानमय ब्रह्मस्वरूप उसी से रहा हुआ है । जीव की सत्तामात्र का ही आश्रय ले कर सब दशाओ' मे समान रूप से रही हुई है ।
स्फुलिगर्नयया वह्निदीप्यते ताप्यतेऽथवा । नानुभूतिपराभूती, तथैताभि किलात्मनः ॥७७।। जैसे अग्नि तिनके से नही जलती, अथवा उस हालत मे वह गर्मी भी नहीं देती, वैसे ही इन सुख की वृत्तियों से आत्मा का अनुभव अथवा पराभव नहीं होता ।
जैसे आग की चिनगारियो से अग्नि प्रज्वलित नहीं होती, वैसे ही घी आदि को भी गर्म करके पिघाल नही सकती, उसी प्रकार पूर्वोक्त
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तीव्र इच्छा का भयकर सताप होता है, वह सताप ऐसा है, जैसे मिट्टी के दो वर्तनों के बीच में औषध रख कर उनका मुह भलीभाति वन्द करके चारो तरफ आग लगाई जाती है, वैसे मानो इन्द्रियाँ पुटपाकत्व को प्राप्त हो गई हो, ऐसा होने पर भी दुख से उत्पन्न हुए ताप के बढ़ जाने से इन्द्रियगरण का सताप फलता ही जाता है, परन्तु निवृति यानी सुख-शान्ति होती ही नहीं । अथवा प्रथम यानी भोग के समय देहादि के खेद से और बाद में विपाक के समय गत्यन्तर मे होने वाले दुख से आत्मा को होने वाले सताप से इन्द्रियाँ ऐसी संतप्त हो जाती है, जैसे पुटपाक से औषध सतप्त हो जाती है । सदा यत्र स्थितो द्वषोल्लेख : स्वप्रतिपन्थिषु । सुखानुभवकोलेऽपि तत्र तापहत मन. ॥छयासठ॥ जहाँ सुख का अनुभव करने के समय मे भी निरन्तर अपने शत्रुओं के प्रति द्वोष का चिन्तन रहता है, वहीं उसका मन घर मे शान्त बैठा रहने पर भी ताप से आहत रहता है । पुण्यफल के सयोग से घर में शान्त बैठे हुए भी निरन्तर अपने मन मे शत्रुओं के प्रति द्वेष का चिन्तनरूप सता रहता है। ऐसे पुण्यफल के भोग मे सुख के अनुभवकाल मे भी मे उसका चित्त सताप से आहत रहता है, ऐसी स्थिति सुख कहाँ से हो स्कन्धात्स्कन्धान्तरारोपे भारस्येव न तत्त्वत । अक्षाह्लादेऽपि दु खस्य सस्कारो विनितर्तते ॥सत्तर॥ एक स्कन्ध से दूसरे स्कन्ध पर भार रख देने से जैसे भार कम नही होता, वैसे ही इन्द्रियों के आनन्द से भी वस्तुत दुःख के संस्कार नष्ट नही होते । अनाज वगैरह को वजनदार गठडी एक कन्धे के यक जाने पर जव दूसरे कन्धे पर रखी जाती है, तब ऐसा मालूम होता है कि भार कम हो गया, किन्तु वास्तव मे उस वजन का संस्कार कम नहीं होता, इसी प्रकार इन्द्रियसुखो को भोगते समय भी विवेकहीन व्यक्ति मानता है कि इहलोक-परलोक-सम्बन्धी दुख नष्ट हो गया है, लेकिन दुख के सस्कार नष्ट नहीं होते । नये कर्मरूपी दुखों के सस्कारवीज और वोदिये जाते हैं । अत. इन्द्रियसुखानुभव में भी दुख के संस्कार जमे रहते हैं ; जो दोनो लोको में दुख देते रहते हैं । सुखं दुःखं च मोहश्च तिलोऽपि गुणवृत्तय । વિસ્તા વિ વર્તન્ત કુ.ધનાત્યતિષાત્ पाँच हज़ार सात सौ पंद्रह सुख, दुख और मोह इन तीनो गुरणों की वृत्तियां विरुद्ध हैं, तो भी ये तीनो दुख की जाति का अतिक्रमण नहीं करती, इसलिए दु.खरूप ही हैं। सुख और दुख ये दोनो क्रमशः पुण्य और पाप के फल है । तथा मोह = मोहनीय कर्म के उदय से उत्पन्न हुआ। जीव का परिणाम अथवा अज्ञान, इन तीनो गुणों को वृत्तियां यानी सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण की प्रवृत्तियाँ क्रमश. विरुद्ध है । अर्थात् एक का प्राधान्य होने पर दूसरे दो की गौणता, इस प्रकार परस्पर विपरीत स्वभाव वाले सुख, दुःख तथा मोहरूप में प्रवर्तमान हैं। फिर भी ये दुख की जाति का उल्लघंन नहीं करती, इसलिए ये तीनो दु.खरून ही हैं । कुद्धनगणगोपनो भोगोद्भवोऽखिलः । વિજારિશ્વત્રરૂપોડપિ સૈંયહે વવેનાનુ पाँच सौ पचहत्तर सारे ही भोगों से उत्पन्न हुआ सुख का अनुभव क्रोध मे उफनते हुए सर्प के फन के फैलाव सरीखा है, ऐसा विचित्र प्रकार का विलास भी विवेकीजनों के लिऐ भय का कारण है । समग्र शब्दादि विषयभोगो से उत्पन्न सुखानुभव क्रुद्ध सर्प के फ के फैलाव की तरह भयकर है, विचित्र प्रकार का विलास के प्रकार भी विवेकीजनो के लिए भय के कारण हैं - यानी दुर्गतिगमनरूप भय को पैदा करने वाले है, क्योंकि वे उसके कारण है। इत्यमेकत्वमापन फलत पुण्यपापयो । मन्यते यो न मूढ़ात्मा नान्तस्तस्य भवोदधे ।॥तिहत्तर॥ इस प्रकार पुण्य-पाप का फल की दृष्टि से एकत्व प्राप्त हुआ । मगर जो मुढात्मा इस बात को नहीं मानता, उसके भवसागर का अन्त नहीं आता । पूर्वोक्त कथनानुसार फल से पुण्य और पाप की एकता प्राप्त होती है, जिसे वस्तुस्वरूप से अनभिज्ञ मुढात्मा इन दोनों का एकत्व नही मानता । उस मूढ के ससाररूपी सागर का अन्त नहीं आता, क्योंकि वह बोधके रहित है। दु'खैकरूपयोमिन्नस्तेनात्मा पुण्यपापयो । शुद्धनिश्चयत सत्यचिदानन्दमय सदा ॥चौहत्तर ।। इस पूर्वोक्त कारण से दु ख के ही एकस्वरूप वाले पुण्य और पाप दोनो से आत्मा पृथक् है । क्योकि शुद्ध निश्चयनय को दृष्टि से आत्मा सदा सत्-चित्- आनन्दमय है । पूर्वकयनानुसार यह सिद्ध हुआ कि पुण्य और पाप दोनो दुखरूप एक स्वभाव वाले है, इसलिए आत्मा पुण्य और पाप से भिन्न है। आत्मा उत्पाद और व्यय से रहित शुद्धवस्तु के ग्राही निश्चय नय से सत्-चित्-आनन्दभय अर्थात् परब्रह्मस्त्ररूप है। तत्तु रीयदशाव्यग्यरूपमावर रणक्षयात् । भात्युषणोद्योतशीलस्य घननाशाद् खेरिव ॥पचहत्तर॥ जैसे वादलो के मिट जाने से उष्णप्रकाश के स्वभाववाले सूर्य का रूप दिखाई देने लगता है, वैसे ही आवरण का क्षय होने से दशा में जाना जा सके ऐसा आत्मा का रूप दिखाई देता है । पूर्वोक्त आत्मस्वरूप तुर्यदशा का यानी स्वप्न, जाग्रत, सुषुप्ति इन तीन दशाओं को लाभ कर केवलज्ञान के प्रकाश वाली चौथी उजागरदशा, जो विशेष प्रकार के दोध से हुई अवस्था है । वह जान सकते योग्य चैतन्यस्वभाव आवरण के क्षय मे कर्म के आच्छादन के विनष्ट होने से जाना जा सकता है। सूर्य के प्रकाश की तरह सर्वपदार्थ समूह को प्रकाशित करने के स्वभाव वाले आत्मा का स्वरूप प्रतिभासित होता है। किसकी तरह ? यह बताते है-मेघसमूह के नष्ट हो जाने से जंसे सूर्य का निर्मल विम्व मुशोभित होता है । जायन्ते जाग्रतोऽक्ष भ्यश्चित्राधिसुखवृत्तय । सामान्य तु चिदानन्दरूप सर्वदशान्वयि ॥छिहत्तर॥ जागृत आत्मा को इन्द्रियों से अनेक प्रकार की आधि वाली सुख की वृत्तियाँ उत्पन्न होती है, जबकि सामान्यतया तो सर्वदशा मे सम्बन्ध वाला चिदानन्दरूप प्रतिभासित होता है । जागृत यानी द्रव्यनिद्रा से रहित आत्मा को श्रोत्रादि इन्द्रियों से अनेक प्रकार की आधियो वाली, तथा आशा से उत्पन्न किये हुए आर्तस्वभाव वाली सुख की वृत्तियाँ उत्पन्न होती है । और सामान्यदृष्टि से सबमे रही हुई केवल चेतना तो सर्वदेशा मे सम्बन्ध वाला चिदानन्दरूप सत्यज्ञानमय ब्रह्मस्वरूप उसी से रहा हुआ है । जीव की सत्तामात्र का ही आश्रय ले कर सब दशाओ' मे समान रूप से रही हुई है । स्फुलिगर्नयया वह्निदीप्यते ताप्यतेऽथवा । नानुभूतिपराभूती, तथैताभि किलात्मनः ॥सतहत्तर।। जैसे अग्नि तिनके से नही जलती, अथवा उस हालत मे वह गर्मी भी नहीं देती, वैसे ही इन सुख की वृत्तियों से आत्मा का अनुभव अथवा पराभव नहीं होता । जैसे आग की चिनगारियो से अग्नि प्रज्वलित नहीं होती, वैसे ही घी आदि को भी गर्म करके पिघाल नही सकती, उसी प्रकार पूर्वोक्त
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वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। केन्दीय मंत्री और कांग्रेस के पदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी द्वारा एक सीट अधिक जीतने के लिए धर्म निरपेक्ष पार्टियों से सम्पर्प करने का तुर्रा छोडक्वने के बाद भाजपा सतर्प हो गई है और उसने अपनी साख राज्यसभा चुनाव में बचाने के लिए पयास शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस से पहले वह सभी दूसरी पार्टियों से सम्पर्प करने में जुट गई है। उन्हें विपक्ष की दुहाई देकर राज्यसभा चुनाव में भाजपा की मदद करने का आग्रह करना शुरू कर दिया है। उधर पता चला है कि राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे कांग्रेस के ख्वाबों पर पानी फेरने के लिए राजनीतिक पयास शुरू कर दें। उधर इन सबके बावजूद लग ऐसा रहा है कि दूसरे दल भी सत्ता के साथ होना ही अधिक पसन्द करेंगे। कारण साफ है कि पदेश में भी कांग्रेस की सरकार है और केन्द में भी। जो छोटे दल हैं वे राष्ट्रीय परिपेक्ष्य और गठबंधन के अनुसार कदम उठाएंगे। ऐसे में पदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा के बाद कांग्रेस ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। केन्दीय मंत्री आनन्द शर्मा को राजस्थान से राज्यसभा का चुनाव लडक्वाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव 17 जून को होने हैं और इसके लिए दोनों दलों में सरगर्मियां तेज हो गई है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य में पांच सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को सीधे-सीधे तीन और भाजपा को सीधे-सीधे एक सीट मिल रही है। पांचवी सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला है, जिसके लिए दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। एक सीट पर वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेन्द बुढक्वानिया को वापिस भेजा जाएगा। दूसरी सीट के लिए केन्दीय मंत्री आनन्द शर्मा को नाम तय कर लिया गया है। उद्योगपति के रूप में संतोष बागडक्वोदिया को फिर से मैदान में उतारने की तैयारी है। जबकि एक सीट अल्पसंख्यक उम्मीदवार के लिए आरक्षित करने का तय कर लिया गया है। अल्पसंख्यक के लिए नाम तय करने की कवायद की जा रही है। इस दौडक्व में अश्कअली टाक, माहिर आजाद, सलीम कागजी, यास्मिन अबरार और मुमताज मसीह के नाम चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि अश्कअली और माहिर आजाद के पिछला विधानसभा चुनाव हार जाने के बाद राज्यसभा के लिए नम्बर आना कुछ मुश्किल लग रहा है। उधर सलीम कागजी शहर अध्यक्ष हैं लेकिन उनको राज्यसभा में भेजकर कांग्रेस को कोई फायदा होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस ने यदि इस बार अल्पसंख्यक वर्ग में इसाई वर्ग को वरियता दी तो मुमताज मसीह का नाम लगभग तय हो सकता है। मसीह आज तक किसी लाभ के पद पर नहीं रहे हैं और चालीस साल पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता होने के कारण उनके नाम पर आम कांग्रेस कार्यकर्ता राजी हो सकता है। उधर भाजपा में एक सीट पर पदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को टिकट मिलना तय हो गया है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 17 नवम्बर को चुनाव होना है। इनमें से चार सीटों पर नियमित चुनाव है और एक सीट भाजपा के कृष्णकुमार वाल्मीकि के निधन से खाली हुई थी, उस पर उपचुनाव है।
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वीर अर्जुन संवाददाता जयपुर। केन्दीय मंत्री और कांग्रेस के पदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी द्वारा एक सीट अधिक जीतने के लिए धर्म निरपेक्ष पार्टियों से सम्पर्प करने का तुर्रा छोडक्वने के बाद भाजपा सतर्प हो गई है और उसने अपनी साख राज्यसभा चुनाव में बचाने के लिए पयास शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस से पहले वह सभी दूसरी पार्टियों से सम्पर्प करने में जुट गई है। उन्हें विपक्ष की दुहाई देकर राज्यसभा चुनाव में भाजपा की मदद करने का आग्रह करना शुरू कर दिया है। उधर पता चला है कि राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे कांग्रेस के ख्वाबों पर पानी फेरने के लिए राजनीतिक पयास शुरू कर दें। उधर इन सबके बावजूद लग ऐसा रहा है कि दूसरे दल भी सत्ता के साथ होना ही अधिक पसन्द करेंगे। कारण साफ है कि पदेश में भी कांग्रेस की सरकार है और केन्द में भी। जो छोटे दल हैं वे राष्ट्रीय परिपेक्ष्य और गठबंधन के अनुसार कदम उठाएंगे। ऐसे में पदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा के बाद कांग्रेस ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। केन्दीय मंत्री आनन्द शर्मा को राजस्थान से राज्यसभा का चुनाव लडक्वाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव सत्रह जून को होने हैं और इसके लिए दोनों दलों में सरगर्मियां तेज हो गई है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य में पांच सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को सीधे-सीधे तीन और भाजपा को सीधे-सीधे एक सीट मिल रही है। पांचवी सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला है, जिसके लिए दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। एक सीट पर वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेन्द बुढक्वानिया को वापिस भेजा जाएगा। दूसरी सीट के लिए केन्दीय मंत्री आनन्द शर्मा को नाम तय कर लिया गया है। उद्योगपति के रूप में संतोष बागडक्वोदिया को फिर से मैदान में उतारने की तैयारी है। जबकि एक सीट अल्पसंख्यक उम्मीदवार के लिए आरक्षित करने का तय कर लिया गया है। अल्पसंख्यक के लिए नाम तय करने की कवायद की जा रही है। इस दौडक्व में अश्कअली टाक, माहिर आजाद, सलीम कागजी, यास्मिन अबरार और मुमताज मसीह के नाम चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि अश्कअली और माहिर आजाद के पिछला विधानसभा चुनाव हार जाने के बाद राज्यसभा के लिए नम्बर आना कुछ मुश्किल लग रहा है। उधर सलीम कागजी शहर अध्यक्ष हैं लेकिन उनको राज्यसभा में भेजकर कांग्रेस को कोई फायदा होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस ने यदि इस बार अल्पसंख्यक वर्ग में इसाई वर्ग को वरियता दी तो मुमताज मसीह का नाम लगभग तय हो सकता है। मसीह आज तक किसी लाभ के पद पर नहीं रहे हैं और चालीस साल पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता होने के कारण उनके नाम पर आम कांग्रेस कार्यकर्ता राजी हो सकता है। उधर भाजपा में एक सीट पर पदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को टिकट मिलना तय हो गया है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सत्रह नवम्बर को चुनाव होना है। इनमें से चार सीटों पर नियमित चुनाव है और एक सीट भाजपा के कृष्णकुमार वाल्मीकि के निधन से खाली हुई थी, उस पर उपचुनाव है।
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परिवार में जब किसी का निधन हो जाता है तो बहुत दुख होता है। यह दुख तब और भी बढ़ जाता है जब हम कुछ ही समय में अपने दो करीबी लोगों को खो देते हैं। अब बॉलीवुड के फेमस कपूर परिवार (Kapoor Family) को ही ले लीजिए। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) के निधन के बाद से ही कपूर परिवार में दुख का माहौल था।
बाकी लोग तो फिर भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा कपूर सहानी (Riddhima Kapoor Sahni) अपने पिता के जाने का गम अभी भी दिल से नहीं निकाल पाई। पिता की यादें उनके दिलों में अभी तक जिंदा है।
इस बीच रिद्धिमा कपूर को एक और बड़ा झटका लगा है। उनके ससुर श्रवण साहनी (Shrawan Sahni) अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। रिद्धिमा के ससुर का निधन (Riddhima Kapoor Sahni Father In Law passed away) सोमवार 27 दिसंबर को हो गया।
इसकी जानकारी रिद्धिमा ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी। उन्होंने अपने ससुर श्रवण साहनी की एक फोटो साझा कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने लिखा "हम आपको बहुत मिस करेंगे"। इसके साथ ही उन्होंने दिल टूटने वाली एक इमोजी भी साझा की।
ऋद्धिमा के अलावा उनके पति भरत साहनी ने भी सोशल मीडिया पर अपने पापा की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी।
भरत ने लिखा कि "हम आपको हमेशा मिस करेंगे पापा। " नीतू और भारत की इस पोस्ट पर नीतू कपूर से लेकर आलिया भट्ट की मम्मी सोनी राजदान, सोफी चौधरी, अमीषा पटेल, अदिति गोवितकर जैसे कई सितारों ने शोक व्यक्त किया।
श्रवण साहनी के निधन के बाद से ऋद्धिमा और भरत के घर दुख का माहौल है। बताया जा रहा है कि ऋद्धिमा भी अपने ससुर के काफी करीब थी। ससुर उन्हें बेटी की तरह रखते थे। ऐसे में ऋद्धिमा को भी उनके जाने का दुख है। गौरतलब है कि इसके पहले ऋद्धिमा अपने पिता ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) के निधन से बड़ी दुखी हो गई थी।
ऋषि कपूर ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। वे विदेश में अपना इलाज भी करवा रहे थे। लेकिन 30 अप्रैल 2020 को कपूर परिवार ने उन्हें हमेशा के लिए खो दिया। यह सिर्फ कपूर परिवार का ही नहीं बल्कि बॉलीवुड का भी बड़ा नुकसान था। ऋषि कपूर के गुजरने के ठीक एक दिन बाद बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का भी निधन हो गया था।
अपने प्यारे पिता की याद में ऋद्धिमा ने उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था "पापा मैं आप से प्यार करती हूँ, हमेशा करती रहूँगी। मेरे सबसे बहादुर योद्धा की आत्मा को शांति मिले। मैं आपको रोजाना मिस करूंगी। मैं आपके वीडियो कॉल मिस करूंगी। काश मैं आपको गुड बाय कहने के लिए वहां मौजूद होती। जब तक हम दोबारा मिले। आई लव यू पापा। आपकी मुश्क।
बताते चलें कि ऋषि कपूर के निधन के समय देश में लॉकडाउन था जिसकी वजह से ऋद्धिमा दिल्ली से मुंबई पापा के अंतिम संस्कार में नहीं आ पाई थी। ऐसे में उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से ही पापा का अंतिम संस्कार देखा था।
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परिवार में जब किसी का निधन हो जाता है तो बहुत दुख होता है। यह दुख तब और भी बढ़ जाता है जब हम कुछ ही समय में अपने दो करीबी लोगों को खो देते हैं। अब बॉलीवुड के फेमस कपूर परिवार को ही ले लीजिए। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के निधन के बाद से ही कपूर परिवार में दुख का माहौल था। बाकी लोग तो फिर भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा कपूर सहानी अपने पिता के जाने का गम अभी भी दिल से नहीं निकाल पाई। पिता की यादें उनके दिलों में अभी तक जिंदा है। इस बीच रिद्धिमा कपूर को एक और बड़ा झटका लगा है। उनके ससुर श्रवण साहनी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। रिद्धिमा के ससुर का निधन सोमवार सत्ताईस दिसंबर को हो गया। इसकी जानकारी रिद्धिमा ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी। उन्होंने अपने ससुर श्रवण साहनी की एक फोटो साझा कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने लिखा "हम आपको बहुत मिस करेंगे"। इसके साथ ही उन्होंने दिल टूटने वाली एक इमोजी भी साझा की। ऋद्धिमा के अलावा उनके पति भरत साहनी ने भी सोशल मीडिया पर अपने पापा की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी। भरत ने लिखा कि "हम आपको हमेशा मिस करेंगे पापा। " नीतू और भारत की इस पोस्ट पर नीतू कपूर से लेकर आलिया भट्ट की मम्मी सोनी राजदान, सोफी चौधरी, अमीषा पटेल, अदिति गोवितकर जैसे कई सितारों ने शोक व्यक्त किया। श्रवण साहनी के निधन के बाद से ऋद्धिमा और भरत के घर दुख का माहौल है। बताया जा रहा है कि ऋद्धिमा भी अपने ससुर के काफी करीब थी। ससुर उन्हें बेटी की तरह रखते थे। ऐसे में ऋद्धिमा को भी उनके जाने का दुख है। गौरतलब है कि इसके पहले ऋद्धिमा अपने पिता ऋषि कपूर के निधन से बड़ी दुखी हो गई थी। ऋषि कपूर ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। वे विदेश में अपना इलाज भी करवा रहे थे। लेकिन तीस अप्रैल दो हज़ार बीस को कपूर परिवार ने उन्हें हमेशा के लिए खो दिया। यह सिर्फ कपूर परिवार का ही नहीं बल्कि बॉलीवुड का भी बड़ा नुकसान था। ऋषि कपूर के गुजरने के ठीक एक दिन बाद बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का भी निधन हो गया था। अपने प्यारे पिता की याद में ऋद्धिमा ने उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था "पापा मैं आप से प्यार करती हूँ, हमेशा करती रहूँगी। मेरे सबसे बहादुर योद्धा की आत्मा को शांति मिले। मैं आपको रोजाना मिस करूंगी। मैं आपके वीडियो कॉल मिस करूंगी। काश मैं आपको गुड बाय कहने के लिए वहां मौजूद होती। जब तक हम दोबारा मिले। आई लव यू पापा। आपकी मुश्क। बताते चलें कि ऋषि कपूर के निधन के समय देश में लॉकडाउन था जिसकी वजह से ऋद्धिमा दिल्ली से मुंबई पापा के अंतिम संस्कार में नहीं आ पाई थी। ऐसे में उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से ही पापा का अंतिम संस्कार देखा था।
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अतीत में कांग्रेस का मतलब गांधी परिवार से ही जाना जाता रहा है. यानी गांधी परिवार के इशारे पर कांग्रेस में सबकुछ होता आया है. पार्टी के अंदर जिसने भी गांधी परिवार की बुराई की उसको चलता कर दिया गया. बड़े-बड़े दिग्गज इस बात को लेकर कांग्रे से बाहर हो गए. अब एक बार फिर से कांग्रेस में बड़ी टूट के आसार साफ दिख रहे हैं. कांग्रेस में सोनिया-राहुल के खिलाफ करीब दो दर्जन बड़े कांग्रेसी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. नेतृत्व परिवर्तन की मांग की जा रही है. इस मामले में गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा समेत कई नेताओं ने जम्मू में शांति सम्मेलन कर कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधा. इस दौरान इन नेताओं को भगवा पगड़ी पहने हुए देखा गया. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रहते हुए जब भी उन्होंने हिंदू बहुल इलाकों का दौरा किया, उन्होंने ये पगड़ी पहनी. लेकिन शनिवार को जब आजाद के साथ सात और नेताओं ने ये पगड़ी पहनी तो इसके कई तरह के मायने निकाले जाने लगे. भगवा रंग का ताल्लुक बीजेपी से है. लिहाजा कांग्रेस की मौजूदा हालात को लेकर अटकलें लगने लगी हैं.
बता दें कि पिछले साल कांग्रेस के 23 असंतुष्ट नेताओं (G-23) ने पार्टी में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी और अब 8 नेताओं ने भगवा पगड़ी पहनकर एक तरह से नई हलचल पैदा कर दी है. इन नेताओं ने साफ-साफ कहा है कि वो कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन पार्टी की मौजूदा हालत उन्हें मंजूर नहीं हैं. कांग्रेस की तरफ से इस घटना को लेकर अधिकारिक बयान भी आया, जिसमें कहा गया कि ये सारे सीनियर नेता हैं और इन्हें ये सारी चीजें छोड़कर पार्टी के लिए उन राज्यों में प्रचार करना चाहिए जहां चुनाव होने वाले हैं.
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कांग्रेस में आगे क्या होगा. कहा जा रहा है कि सिर्फ जम्मू ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी बागी नेता बैठक करने वाले हैं. इन नेताओं की अगली बैठक हिमाचल प्रदेश में हो सकती है. आनंद शर्मा इसी राज्य से आते हैं. शर्मा को पार्टी से फिलहाल कई तरह की शिकायतें हैं. बता दें कि आनंद शर्मा गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं. उनकी तात्कालिक चिंता ये है कि राज्यसभा में उनका अब एक साल का कार्यकाल बचा है. इसके बावजूद उन्हें विपक्ष के नेता के पद के लिए नजरअंदाज किया गया. फिलहाल राहुल गांधी के करीबी मल्लिकार्जुन खड़गे का इस पद पर कब्जा है. शर्मा के करीबी सूत्र ने कहा, 'खड़गे के आदेशों को सुनना उनके लिए अस्वीकार्य होगा. ' शर्मा राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता हैं.
कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश के बाद इस तरह की बैठक हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में भी होगी. इतना ही नहीं 'ग्रुप-23' के असंतुष्ट नेता जून में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में अपना उम्मीदवार भी खड़ा कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी भी इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर दावेदारी पेश कर सकते हैं. ऐसे में अध्यक्ष पद पर राहुल को सीधी चुनौती देने वाले जी-23 नेताओं के इस कदम से बागवती तेवर खुल कर सामने आ सकते हैं.
जी -23 के नेताओं ने पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर कई सवाल खड़े किए थे. इन सबने उस समय कहा था कि उनकी पार्टी में कोई नेता नहीं है. अब भी वे पूछते हैं कि फुलटाइम अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पार्टी के लिए कौन फैसले ले रहा है, क्योंकि सोनिया गांधी अब रोज के मामलों में शामिल नहीं हैं. साफ है कि ये नेता राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं और यही वजह है कि जी-23 पर मौजूदा कांग्रेस नेताओं द्वारा हमला किया जा रहा है जो कहते हैं कि चुनाव के बीच में ये सब पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
जम्मू की बैठक के बाद कांग्रेस की तरफ से असंतुष्टों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की संभावना नहीं है. दरअसल पार्टी नहीं चाहती है कि इससे आने वाले चुनावों से लोगों का ध्यान भंग हो, जबकि विद्रोही पार्टी से अलग होने की बात नहीं कर रहे हैं. वे जानते हैं कि ऐसा होना ही है. कांग्रेस में फूट की पूरी संभावना दिख रही है.
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अतीत में कांग्रेस का मतलब गांधी परिवार से ही जाना जाता रहा है. यानी गांधी परिवार के इशारे पर कांग्रेस में सबकुछ होता आया है. पार्टी के अंदर जिसने भी गांधी परिवार की बुराई की उसको चलता कर दिया गया. बड़े-बड़े दिग्गज इस बात को लेकर कांग्रे से बाहर हो गए. अब एक बार फिर से कांग्रेस में बड़ी टूट के आसार साफ दिख रहे हैं. कांग्रेस में सोनिया-राहुल के खिलाफ करीब दो दर्जन बड़े कांग्रेसी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. नेतृत्व परिवर्तन की मांग की जा रही है. इस मामले में गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा समेत कई नेताओं ने जम्मू में शांति सम्मेलन कर कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधा. इस दौरान इन नेताओं को भगवा पगड़ी पहने हुए देखा गया. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रहते हुए जब भी उन्होंने हिंदू बहुल इलाकों का दौरा किया, उन्होंने ये पगड़ी पहनी. लेकिन शनिवार को जब आजाद के साथ सात और नेताओं ने ये पगड़ी पहनी तो इसके कई तरह के मायने निकाले जाने लगे. भगवा रंग का ताल्लुक बीजेपी से है. लिहाजा कांग्रेस की मौजूदा हालात को लेकर अटकलें लगने लगी हैं. बता दें कि पिछले साल कांग्रेस के तेईस असंतुष्ट नेताओं ने पार्टी में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी और अब आठ नेताओं ने भगवा पगड़ी पहनकर एक तरह से नई हलचल पैदा कर दी है. इन नेताओं ने साफ-साफ कहा है कि वो कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन पार्टी की मौजूदा हालत उन्हें मंजूर नहीं हैं. कांग्रेस की तरफ से इस घटना को लेकर अधिकारिक बयान भी आया, जिसमें कहा गया कि ये सारे सीनियर नेता हैं और इन्हें ये सारी चीजें छोड़कर पार्टी के लिए उन राज्यों में प्रचार करना चाहिए जहां चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कांग्रेस में आगे क्या होगा. कहा जा रहा है कि सिर्फ जम्मू ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी बागी नेता बैठक करने वाले हैं. इन नेताओं की अगली बैठक हिमाचल प्रदेश में हो सकती है. आनंद शर्मा इसी राज्य से आते हैं. शर्मा को पार्टी से फिलहाल कई तरह की शिकायतें हैं. बता दें कि आनंद शर्मा गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं. उनकी तात्कालिक चिंता ये है कि राज्यसभा में उनका अब एक साल का कार्यकाल बचा है. इसके बावजूद उन्हें विपक्ष के नेता के पद के लिए नजरअंदाज किया गया. फिलहाल राहुल गांधी के करीबी मल्लिकार्जुन खड़गे का इस पद पर कब्जा है. शर्मा के करीबी सूत्र ने कहा, 'खड़गे के आदेशों को सुनना उनके लिए अस्वीकार्य होगा. ' शर्मा राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता हैं. कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश के बाद इस तरह की बैठक हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में भी होगी. इतना ही नहीं 'ग्रुप-तेईस' के असंतुष्ट नेता जून में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में अपना उम्मीदवार भी खड़ा कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी भी इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर दावेदारी पेश कर सकते हैं. ऐसे में अध्यक्ष पद पर राहुल को सीधी चुनौती देने वाले जी-तेईस नेताओं के इस कदम से बागवती तेवर खुल कर सामने आ सकते हैं. जी -तेईस के नेताओं ने पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर कई सवाल खड़े किए थे. इन सबने उस समय कहा था कि उनकी पार्टी में कोई नेता नहीं है. अब भी वे पूछते हैं कि फुलटाइम अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पार्टी के लिए कौन फैसले ले रहा है, क्योंकि सोनिया गांधी अब रोज के मामलों में शामिल नहीं हैं. साफ है कि ये नेता राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं और यही वजह है कि जी-तेईस पर मौजूदा कांग्रेस नेताओं द्वारा हमला किया जा रहा है जो कहते हैं कि चुनाव के बीच में ये सब पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जम्मू की बैठक के बाद कांग्रेस की तरफ से असंतुष्टों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की संभावना नहीं है. दरअसल पार्टी नहीं चाहती है कि इससे आने वाले चुनावों से लोगों का ध्यान भंग हो, जबकि विद्रोही पार्टी से अलग होने की बात नहीं कर रहे हैं. वे जानते हैं कि ऐसा होना ही है. कांग्रेस में फूट की पूरी संभावना दिख रही है.
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Wednesday March 02, 2022,
ब्यूटी इंडस्ट्री के एक गुप्त रहस्य को लेकर आरती रघुराम हमेशा से बहुत परेशान थीं। रहस्य ये कि कई मान्यता प्राप्त ब्रांड प्राकृतिक होने का दावा करते हैं लेकिन फिर भी कई हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल करते हैं।
इसने एमबीए ग्रेजुएट को 2018 में एक नेचुरल पर्सनल केयर ब्रांड, Deyga शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
आरती कहती हैं कि उनका D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड Deyga न केवल नेचुरल प्रोडक्ट बनाता है, बल्कि स्थिरता, वनीकरण और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली के बारे में जागरूकता भी फैलाता है।
प्रत्येक प्रोडक्ट की अपनी यात्रा होती है जो विभिन्न चरणों में आयुर्वेद द्वारा अपनाई गई विभिन्न पारंपरिक तकनीकों से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए, ब्रांड के बालों के तेल केवल कुछ बालों के अनुकूल इनग्रेडिएंट्स का सामान्य संयोजन नहीं होते हैं, लेकिन विशेष रूप से आयुर्वेद अवधारणाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं और उन बर्तनों में तैयार किया जाता है जिन्हें सामग्री के गुणों को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।
आरती का कहना है कि Deyga प्रोडक्ट स्थानीय किसानों या Deyga के अपने खेत से प्राप्त कच्चे माल से बनाए जाते हैं। फिर इन सामग्रियों की सावधानीपूर्वक जाँच की जाती है और अंतिम प्रोडक्ट बनाने के लिए केवल उच्च गुणवत्ता वाले का ही इस्तेमाल किया जाता है।
आरती कहती हैं, "जहां तक डिस्ट्रीब्यूशन और लॉजिस्टिक्स का सवाल है, हमारी टीम इसे बेहतरीन तरीके से हैंडल करती है।"
उद्यमी का कहना है कि उनका सपोर्ट सिस्टम - ससुराल, पति और बच्चे - ने उनकी यात्रा में उनकी मदद की।
फाउंडर कहती हैं कि यात्रा चुनौतीपूर्ण रही है। टीम बनाने में पहली बाधा थी।
औसत बास्केट साइज 3-5 प्रोडक्ट है और प्राइस रेंज भी 250 रुपये से 1100 रुपये तक काफी सस्ती है। फाउंडर के अनुसार, Deyga 20 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमा रहा है।
सभी महिला नेताओं को सलाह देते हुए वह कहती हैं, "महिलाओं को मैं जो सबसे अच्छी सलाह दे सकती हूं, वह है चिन अप क्वीन्स! हमें एक दूसरे के लिए खड़े होने की जरूरत है। अगर #womenforwomen हर तरह से एक हकीकत बन जाती है, तो हमें कोई नहीं रोक सकता! इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है और हजारों मील की यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है। इसलिए अपने ताज को गिरने न दें और खुद को अपना सबसे बड़ा समर्थक बनने दें। जब आप खुद पर विश्वास करते हैं तो आप चमत्कार कर सकते हैं!"
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Wednesday March दो, दो हज़ार बाईस, ब्यूटी इंडस्ट्री के एक गुप्त रहस्य को लेकर आरती रघुराम हमेशा से बहुत परेशान थीं। रहस्य ये कि कई मान्यता प्राप्त ब्रांड प्राकृतिक होने का दावा करते हैं लेकिन फिर भी कई हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इसने एमबीए ग्रेजुएट को दो हज़ार अट्ठारह में एक नेचुरल पर्सनल केयर ब्रांड, Deyga शुरू करने के लिए प्रेरित किया। आरती कहती हैं कि उनका Dदो डिग्री सेल्सियस ब्रांड Deyga न केवल नेचुरल प्रोडक्ट बनाता है, बल्कि स्थिरता, वनीकरण और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली के बारे में जागरूकता भी फैलाता है। प्रत्येक प्रोडक्ट की अपनी यात्रा होती है जो विभिन्न चरणों में आयुर्वेद द्वारा अपनाई गई विभिन्न पारंपरिक तकनीकों से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए, ब्रांड के बालों के तेल केवल कुछ बालों के अनुकूल इनग्रेडिएंट्स का सामान्य संयोजन नहीं होते हैं, लेकिन विशेष रूप से आयुर्वेद अवधारणाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं और उन बर्तनों में तैयार किया जाता है जिन्हें सामग्री के गुणों को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। आरती का कहना है कि Deyga प्रोडक्ट स्थानीय किसानों या Deyga के अपने खेत से प्राप्त कच्चे माल से बनाए जाते हैं। फिर इन सामग्रियों की सावधानीपूर्वक जाँच की जाती है और अंतिम प्रोडक्ट बनाने के लिए केवल उच्च गुणवत्ता वाले का ही इस्तेमाल किया जाता है। आरती कहती हैं, "जहां तक डिस्ट्रीब्यूशन और लॉजिस्टिक्स का सवाल है, हमारी टीम इसे बेहतरीन तरीके से हैंडल करती है।" उद्यमी का कहना है कि उनका सपोर्ट सिस्टम - ससुराल, पति और बच्चे - ने उनकी यात्रा में उनकी मदद की। फाउंडर कहती हैं कि यात्रा चुनौतीपूर्ण रही है। टीम बनाने में पहली बाधा थी। औसत बास्केट साइज तीन-पाँच प्रोडक्ट है और प्राइस रेंज भी दो सौ पचास रुपयापये से एक हज़ार एक सौ रुपयापये तक काफी सस्ती है। फाउंडर के अनुसार, Deyga बीस करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमा रहा है। सभी महिला नेताओं को सलाह देते हुए वह कहती हैं, "महिलाओं को मैं जो सबसे अच्छी सलाह दे सकती हूं, वह है चिन अप क्वीन्स! हमें एक दूसरे के लिए खड़े होने की जरूरत है। अगर #womenforwomen हर तरह से एक हकीकत बन जाती है, तो हमें कोई नहीं रोक सकता! इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है और हजारों मील की यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है। इसलिए अपने ताज को गिरने न दें और खुद को अपना सबसे बड़ा समर्थक बनने दें। जब आप खुद पर विश्वास करते हैं तो आप चमत्कार कर सकते हैं!"
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आम आदमी पाटी के सांसद राघव चड्डा भाजपा में शामिल होते हैं या नहीं यह तो इंतज़ार की बात है पर शहर में यह चर्चा ज़रूर शुरू हो गई है। या यूँ कहिए कि मायानगरी मुंबई में चलने के बाद अब यह खबर दिल्ली में भाजपाईयों के बीच चर्चा बन गई है। ख़ासतौर से उनके विधानसभा क्षेत्र राजेंद्र नगर में। शालीनता से राजनीति करने वाले चड्ढा के भाजपा में शामिल होने की खबर परणीति चोपडा से सगाई के बाद से शुरू हुई। परणीति जानी -मानी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की बहन हैं और परिवार के भाजपा में अच्छे संबंध बताए जाते हैं और तभी ऐसी चर्चा राजनीति और आम जनता के बीच होनी शुरू हुई। सांसद होने के बाद से चड्डा सोशल मीडिया और चैनल पर भाजपा के तमाम नेताओं को अक्सर कोसते देखे गए पर प्रधानमंत्री को लेकर शायद ही कभी एग्रेसिव हुए होंगे।यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री विवाद पर उनके आका और दिल्ली के ज़्यादातर आप नेताओं ने शोर -शराबा किया पर राघव चड्डा शांत ही देखे गए।
राजेंद्र नगर विधानसभा से विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीति शुरू करने वाले चड्डा जल्दी ही आप पारी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इतने नज़दीक आ गए केजरीवाल उनसे व्यक्तिगत संबंधों पर भी सलाह-मशविरा लगे। बाद में पंजाब में आप पार्टी की सरकार बनी तो चड्ढा को यहाँ से राज्यसभा भेज दिया गया। अब भला ने क्या गुल खिलाया केजरीवाल को खुश करने के लिए यह बात अलग है पर दोनों इतने नज़दीक आ गए कि शहर में यहाँ तक अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया कि केजरीवाल अपनी बेटी की शादी चड्डा से कर सकते हैं।और इस खबर को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया गया। अब चड्डा के भाजपा में शामिल की बातें कितनी सही और कितनी होगीं ग़लत यह अपन को नहीं पता पर यह सवाल ज़रूर रहेगा कि जिस भाजपा या मोदी को केजरीवाल या फिर दिल्ली में उनकी सरकार कालोनी फूटी आँख नहीं सुहाता आख़िर चड्डा ऐसी पार्टी का दामन थामने की हिम्मत भी कैसे कर पाएँगे। हाँ यह बात अलग है कि भाजपा आलाकमान चड्डा को अगर विभीषण मानकर उन्हें पार्टी में लाने की जुगत में है तब तो बात ही दूसरी होगी। पर क्या तब चड्डा की केजरीवाल से बफादारी कही जाएगी ?
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आम आदमी पाटी के सांसद राघव चड्डा भाजपा में शामिल होते हैं या नहीं यह तो इंतज़ार की बात है पर शहर में यह चर्चा ज़रूर शुरू हो गई है। या यूँ कहिए कि मायानगरी मुंबई में चलने के बाद अब यह खबर दिल्ली में भाजपाईयों के बीच चर्चा बन गई है। ख़ासतौर से उनके विधानसभा क्षेत्र राजेंद्र नगर में। शालीनता से राजनीति करने वाले चड्ढा के भाजपा में शामिल होने की खबर परणीति चोपडा से सगाई के बाद से शुरू हुई। परणीति जानी -मानी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की बहन हैं और परिवार के भाजपा में अच्छे संबंध बताए जाते हैं और तभी ऐसी चर्चा राजनीति और आम जनता के बीच होनी शुरू हुई। सांसद होने के बाद से चड्डा सोशल मीडिया और चैनल पर भाजपा के तमाम नेताओं को अक्सर कोसते देखे गए पर प्रधानमंत्री को लेकर शायद ही कभी एग्रेसिव हुए होंगे।यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री विवाद पर उनके आका और दिल्ली के ज़्यादातर आप नेताओं ने शोर -शराबा किया पर राघव चड्डा शांत ही देखे गए। राजेंद्र नगर विधानसभा से विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीति शुरू करने वाले चड्डा जल्दी ही आप पारी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इतने नज़दीक आ गए केजरीवाल उनसे व्यक्तिगत संबंधों पर भी सलाह-मशविरा लगे। बाद में पंजाब में आप पार्टी की सरकार बनी तो चड्ढा को यहाँ से राज्यसभा भेज दिया गया। अब भला ने क्या गुल खिलाया केजरीवाल को खुश करने के लिए यह बात अलग है पर दोनों इतने नज़दीक आ गए कि शहर में यहाँ तक अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया कि केजरीवाल अपनी बेटी की शादी चड्डा से कर सकते हैं।और इस खबर को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया गया। अब चड्डा के भाजपा में शामिल की बातें कितनी सही और कितनी होगीं ग़लत यह अपन को नहीं पता पर यह सवाल ज़रूर रहेगा कि जिस भाजपा या मोदी को केजरीवाल या फिर दिल्ली में उनकी सरकार कालोनी फूटी आँख नहीं सुहाता आख़िर चड्डा ऐसी पार्टी का दामन थामने की हिम्मत भी कैसे कर पाएँगे। हाँ यह बात अलग है कि भाजपा आलाकमान चड्डा को अगर विभीषण मानकर उन्हें पार्टी में लाने की जुगत में है तब तो बात ही दूसरी होगी। पर क्या तब चड्डा की केजरीवाल से बफादारी कही जाएगी ?
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इसके बाद १३ जनवरी २८६६ ई० को जन्छेड़ा सममपुर के चौ० रामनिवास सिंह के सुपुत्र श्री अनन्त सिंह (जन्म सन् १३३६ चैत शुद्धि ३ सोमवार) को गोद लिया गया। जिसे बाद में विरोध होने पर भी हाई कोर्ट तथा मीत्री कौन्सिल द्वारा स्वीकार किया गया । १६०६ ई० मे ४६ गात्र और ४२ गावों में जिले सहारनपुर में लढौरा की जमीदारी रह गई, जो २६,५३५ एकड़ थी, जिसकी मालगुवारी ३७,७०६ रुपया रही। इसके अतिरिक्त राज्य की जमीदारी ४२,१२-) स्पये की मालगुजारी की जायदाद जिले मेरठ मे, १०,८२३) रुपये की जिले बिजनौर मे ७६४५) रुपये की निले मुजफरनगर में और =,०६०) रुपये को मिले सहारनपुर में रही, २०३ जो अब जमीदारी उन्मूलन के बाद बहुत सीमित रह गई है।
रानी धम कुअरी मेरठ जिले के उत्कृष्ट घरान पीरनगर के प्रधान नारायण सिंह प्रधान, खडक सिंह को महोदग वहिन यो । प्रधान जयकरण सिंह, प्रधान पीतम सिंह ची० ए० एलएल० बी० ख्यातनामा प्रतिधित पीर नगर के घरान के पुरुष है सदा से ही यह मावई घराना अपन रहन सहन एव उच्चस्थिति के लिय प्रसिद्ध है । दिवगत प्रात्माधो के लिन जो लडौरा गुडलाना-पीरनगर जैस एतिहासिक परिवारों से सम्वधित थी, एमो निर्मूल कल्पना निस्सार एवं प्रमाण रहित है।
Saharanpur Gazetter Vol II by HR Nevill I C S TRGS, FSS,RAS
IANDHAURA -
'Though now comprising but a fraction of its former area the Landl aura estate 29 stall the largest in tle district Ofota origin no certain information has been preserved but it seems probable that for a long period there exis cd a Gujar princi pality in tle western parganas, headed by clieftains of the Khubar Got At all events it appears that the frst of these to obtain recognition from the ruling authority was Chaudhri Manol ar Singh, who in 1739 obtained a granm of 50s villages an 1 31 fhamlets at a fixedr venue from the Rof alla governor Najibud
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इसके बाद तेरह जनवरी दो हज़ार आठ सौ छयासठ ईशून्य को जन्छेड़ा सममपुर के चौशून्य रामनिवास सिंह के सुपुत्र श्री अनन्त सिंह को गोद लिया गया। जिसे बाद में विरोध होने पर भी हाई कोर्ट तथा मीत्री कौन्सिल द्वारा स्वीकार किया गया । एक हज़ार छः सौ छः ईशून्य मे छियालीस गात्र और बयालीस गावों में जिले सहारनपुर में लढौरा की जमीदारी रह गई, जो छब्बीस,पाँच सौ पैंतीस एकड़ थी, जिसकी मालगुवारी सैंतीस,सात सौ छः रुपयापया रही। इसके अतिरिक्त राज्य की जमीदारी बयालीस,बारह-) स्पये की मालगुजारी की जायदाद जिले मेरठ मे, दस,आठ सौ तेईस) रुपये की जिले बिजनौर मे सात हज़ार छः सौ पैंतालीस) रुपये की निले मुजफरनगर में और =,साठ) रुपये को मिले सहारनपुर में रही, दो सौ तीन जो अब जमीदारी उन्मूलन के बाद बहुत सीमित रह गई है। रानी धम कुअरी मेरठ जिले के उत्कृष्ट घरान पीरनगर के प्रधान नारायण सिंह प्रधान, खडक सिंह को महोदग वहिन यो । प्रधान जयकरण सिंह, प्रधान पीतम सिंह चीशून्य एशून्य एलएलशून्य बीशून्य ख्यातनामा प्रतिधित पीर नगर के घरान के पुरुष है सदा से ही यह मावई घराना अपन रहन सहन एव उच्चस्थिति के लिय प्रसिद्ध है । दिवगत प्रात्माधो के लिन जो लडौरा गुडलाना-पीरनगर जैस एतिहासिक परिवारों से सम्वधित थी, एमो निर्मूल कल्पना निस्सार एवं प्रमाण रहित है। Saharanpur Gazetter Vol II by HR Nevill I C S TRGS, FSS,RAS IANDHAURA - 'Though now comprising but a fraction of its former area the Landl aura estate उनतीस stall the largest in tle district Ofota origin no certain information has been preserved but it seems probable that for a long period there exis cd a Gujar princi pality in tle western parganas, headed by clieftains of the Khubar Got At all events it appears that the frst of these to obtain recognition from the ruling authority was Chaudhri Manol ar Singh, who in एक हज़ार सात सौ उनतालीस obtained a granm of पचास सेकंड villages an एक इकतीस fhamlets at a fixedr venue from the Rof alla governor Najibud
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अक्षय कुमार की'मिशन मंगल' का एक और ट्रेलर सामने आया है। फिल्म के नए ट्रेलर में इसरो ( ISRO) टीम को चंद्रयान मिशन पूरा करने की तैयारी करते हुए दिखाया गया है। ट्रेलर में अविश्वसनीय-अकल्पनीय सपने को भारतीय वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने सफल कर दिखाया है। वैज्ञानिकों की इस तैयारी के दौरान ऐसा भी मौका आता है जब अक्षय कुमार विद्या बालन के पैरों पर गिरने पर मजबूर हो जाते हैं। अक्षय कुमार के पैरों पर गिरने पर विद्या बालन हैरानी भरा रिएक्शन देती हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. .
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अक्षय कुमार की'मिशन मंगल' का एक और ट्रेलर सामने आया है। फिल्म के नए ट्रेलर में इसरो टीम को चंद्रयान मिशन पूरा करने की तैयारी करते हुए दिखाया गया है। ट्रेलर में अविश्वसनीय-अकल्पनीय सपने को भारतीय वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने सफल कर दिखाया है। वैज्ञानिकों की इस तैयारी के दौरान ऐसा भी मौका आता है जब अक्षय कुमार विद्या बालन के पैरों पर गिरने पर मजबूर हो जाते हैं। अक्षय कुमार के पैरों पर गिरने पर विद्या बालन हैरानी भरा रिएक्शन देती हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. .
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थोड़ी देर बाद एक छोटी सी टेबलेट लाकर मेरे दायें हाथ पर रख दिए-लो बेटा,इसे खा लो.
मैं टेबलेट मुह में डाल प्रिया के हाथ से पानी का गिलास लेकर गोली गले के नीचे उतार दिया और पूरे गिलास का गर्म पानी पी गया. खाली गिलास मेरे हाथ से प्रिया ले ली.
बेटा,अगर तुम्हे बाथरूम जाना हो तो जा के हो आओ,क्योंकि अब तुम्हारी नींद सुबह ही खुलेगी. दस-बीस मिनट में तुम गहरी नींद में सो जाओगे-अर्पिता के पिताजी बोले.
अर्पिता मुझे नींद की गोली दिए जाने से खुश नजर नहीं आ रही थी,लेकिन वो गुमसुम सी चुपचाप खड़ी रही.
जी,मैं बाथरूम जाना चाहता हूँ. मुझे एक तौलिया चाहिए. मेरे थैले में होगा-मैं बोला.
साहिबजी,आपके लिए नया तौलिया धोके रखा हुआ है. मैं अभी लती हूँ-प्रिया बोली. वो तौलिया लेने के लिए कमरे के बाहर चली गई.
अर्पिता के पिताजी अपनी जेब से एक आईड्रॉप निकाल उसका ढक्कन खोलते हुए बोले-सिर ऊपर की ओर करो. .
मैं सिर ऊपर की ओर किया. वो दो-दो बूंद दवा दोनों आँखों में डाल दिए. दवा पड़ते ही आँखे ठंडी होने लगीं. वो ढक्कन बंद कर आईड्रॉप अपनी जेब में रख लिए.
प्रिया पिंक कलर का एक बहुत खूबसूरत ओर मुलायम सा तौलिया ले के आ गई. मैं पैंट के ऊपर से तौलिया लपेटना लगा.
ये क्या कर रहे हो. . पैंट के ऊपर तौलिया लपेट रहे हो. . चलो पैंट उतारो और तौलिया लपेट के सोना. . अपने पैर के मोज़े भी उतार दो. इससे तुम्हे बहुत आराम मिलेगा-अर्पिता के पिताजी बोले.
मैं अपनी कमर में तौलिया लपेटकर दीवार की तरफ मुंह कर लिया और अपनी नीले रंग की पैंट खोलकर जल्दी से तौलिया लपेट लिया. अत्यधिक उतेजना के कारण अपने बादामी रंग के अंडरवियर की हो रही दुर्दशा देख मैं स्वयं ही शर्मा गया. मैं अपनी पैंट टांगों से बाहर कर मैं कुर्सी पर रख दिया. दोनों पैर के काले मोज़े उतार मई कुर्सी पर रख दिया.
अर्पिता के पिताजी प्रिया से बोले-ये सब कपडे ले जाओ और हैंगर में कायदे से टांग देना. प्रिया कुर्सी से सब कपडे उठाई और कमरे से बाहर ले के चली गई.
मैं बाथरूम जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ा. अर्पिता तेजी से चलकर मेरे पास आ बोली -रुको,मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ. कहीं तुम चक्कर खा के गिर गए तो. .
अर्पिता मेरे साथ कमरे के बाहर आ गई. मेरे साथ साथ वो भी बाथरूम की तरफ चल पड़ी.
मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती हूँ-अर्पिता अपने दाहिने हाथ से मेरा बायां हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए बोली.
वो लोग हमें देख रहे होंगे. अभी हाथ मत पकड़ों-मैं अपने दायें हाथ से अपना बायां हाथ उसकी पकड़ से छुड़ाते हुए बोला.
बाथरूम के पास पहुंचे तो अपने दायें हाथ से मेरा बायां हाथ पकड़ बोली-ठहरो पहले मुझे हो आने दो. तुम बाद में जाना.
वो मेरा हाथ छोड़ बाथरूम के बाहर रखी हरे रंगवाली हवाईचप्पल अपने पैरों में डाल बाथरूम के भीतर घुस गई. वो बाथरूम के अंदर जा दरवाजा बंद कर ली. कुछ देर बाद वो दरवाजा खोली. वो दरवाजा खोलकर बाथरूम के अंदर ही खड़ी रही और धीमे स्वर में बोली-तुम कैसे पति हो. . अपने मुंह से बोल नहीं सकते हो कि मेरी पत्नी को मेरे कमरे में रहने दो. .
मैं धीमे से बोला-मैं क्या कहूं. . सारे फैसले तो तुम्हारे माताजी और पिताजी ले रहे हैं. . मैं इस समय ससुराल में हूँ. इसीलिए मुझे तुम्हारे माताजी और पिताजी की सभी बाते माननी ही पड़ेंगी. . मैं उनकी बातों का विरोध कर पाने की स्थिति में नहीं हूँ.
मैं दूसरे कमरे में नहीं जाउंगी,चाहे कोई कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले ले. . कितनी मुश्किल से तो मैंने तुम्हे पाया है. . अपने वैवाहिक जीवन की पहली रात मैं व्यर्थ नहीं जाने दूंगी. . मैं आज की रात का हरपल तुम्हारे साथ बिताउंगी-अर्पिता बहुत दृढ स्वर में बोली.
क्या वो लोग तुम्हारी बात मानेंगे ? -मैं उधर उधर देखते हुए पूछा. प्रिया इसी तरफ आते दिखी.
अर्पिता गम्भीर होकर बोली-अर्पिता अपने पर उतर आये तो किसी की नहीं सुनती. . तुम्हारी खराब हालत देख के मैं परेशान थी,इसलिए चुप थी और सबकी सुन रही थी. .
फिर वो मुस्कुराते हुए बोली-अब तुम ठीक हो. . स्वस्थ हो. . और इतने अच्छे लग रहे हो कि. .
आगे कुछ न बोल वो अपने दोनों हाथों से से मेरा दायां हाथ पकड़ी और एक झटके से बाथरूम के भीतर खिंच ली. मैं लड़खड़ाते हुए उससे जा टकराया. वो मुझे पूरे जोश से अपनी बाँहों में भर ली और अपने बाएं पैर से दरवाजा जोर से ढकेलकर अंदर से भिड़ा दी.
तुम इतनी जोर से मुझे मत भींचो. . मेरी छाती में कुछ चुभ सा रहा है. . और मुझे अपने को सँभालने में बहुत दिक्कत हो रही है. . तुम ये क्या कर रही हो. . प्लीज ये सब मत करो. . प्रिया इसी तरफ आ रही है-मैं उसके अचनाक हमला करने से परेशान हो गया था. मेरे दिल कि धड़कने और घबराहट दोनों बेकाबू होने लगी.
आती है तो आने दो. . तुम प्रिया की चिंता मत करो. . इस समय मुझे छोड़कर सब भूल जाओ-अर्पिता प्यार में मदहोश सी होते हुए बोली.
मुझे बहुत दिक्कत हो रही है. . तुम मेरी दिक्क्त बढाती जा रही हो-मैं उतेजना से परेशान होकर बोला.
वो मुस्कुराते हुए हुए बोली-तुम्हारी दिक्कत मेरे तन मन में चुभ रही है. मुझे तो बहुत अच्छी लग रही है. वो मुझे और भी जोर से अपनी बाँहों में भींच ली.
अर्पिता अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब लाई और वो जलती हुई आग में घी डालना शुरू कर दी. उसने अपने नरम मुलायम गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को छुआ. . मेरे गालों को छुआ. . इतनी बार छुआ कि मैं अपनेआप को भी भूल गया,केवल बस वो थी.
उधर प्रिया बाथरूम के बाहर धीमे से दरवाजा खटखटाते हुए बोली-दीदी,दरवाजा खोलिए आपको एक बहुत जरुरी बात बतानी है.
प्लीज. . अब मुझे छोड़ दो. . और प्रिया की बात सुनते हुए उसके साथ जाओ. . मैं बाथरूम करके आता हूँ-मैं बहुत घबराते हुए बोला. मुझे भय था कि कहीं उसके माता पिता न आ जाएँ.
एकदम अनाड़ी हो. . और डरपोक भी,,-वो हँसते हुए बोली. मेरे होंठों को अपने होंठों से दो बार पूरे जोश से छूने के बाद वो मुझे छोड़ दी और पैरो में पहनी हवाईचप्पल मुझे दे बाथरूम के बाहर निकल गई.
मैं राहत की गहरी साँस लिया और पैरों में हवाईचप्पल डाल बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. कुछ देर बाद मैं बाथरूम से बाहर निकला. बाथरूम के बाहर कोई नहीं था. मैं हवाईचप्पल बाथरूम के बाहर छोड़ अर्पिता के कमरे की तरफ चल पड़ा.
मैं अर्पिता के कमरे प्रेवेश किया. उसके पिताजी दो टेबलेट अर्पिता के दायें हाथ में रखते हुए बोले-ठीक है,तुम्हारी जिद है तो तुम इसी कमरे में सोवो,लेकिन तुम्हे ये टेबलेट खानी पड़ेगी.
ठीक है,मैं ये नींद की गोलिया खा लेती हूँ. . मैं होश में न सही,नींद में बेहोश ही सही,लेकिन मैं उसके पास तो रहूंगी. . -ये कहकर अर्पिता अपनी बायीं और घूम गई,जहाँ पर प्रिया पानी का गिलास लिए खड़ी थी. वो गुस्से से भरी हुई थी. गोली अपने मुंह में रख वो प्रिया के हाथ से पानी का गिलास ली और आधा गिलास पानी पीकर शीशे का गिलास प्रिया को पकड़ा दी.
अब तुम इस कमरे में सो सकती हो और चाहो तो भीतर से दरवाजा भी बंद कर सकती हो- पिताजी बोले. उनके चेहरे पर विजय से भरी मुस्कान थी.
मैं जाकर बिस्तर पर बैठ गया. मुझे नींद आ रही थी. मेरी पलकें बार बार बंद हो जा रहीं थीं. अर्पिता के पिताजी मेरे पास आ बोले-बेटे,तुम्हे नींद आ रही है. चलो अब बिस्तर पर लेट जाओ.
मैं जोर से नींद आ रही थी. मैं दोनों पांव बिस्तर पर उठा लेटने को हुआ,परन्तु तभी मुझे अर्पिता का ख्याल आ गया. उसके ही सिंगल बेड पर मैं लेटने जा रहा था.
अर्पिता कहाँ लेटेगी. . मैं नीचे सो जाता हूँ. . -मैं बिस्तर पर बैठते हुए बोला.
तुम उसकी चिंता मत करो. . वो सो जायेगी. . पहले तुम सोवो. . तुम्हे आराम की बहुत जरुरत है-ये कहकर अर्पिता के पिताजी मुझे बिस्तर पर लिटा दिए. वो पैर की तरफ रखा हुआ गुलाबी कम्बल मुझे ओढ़ाते हुए बोले-रात को अब ठंडक बढ़ गई है,पर तुम्हे दवा के रिएक्शन के कारण पता नहीं चल रहा है. ये कम्बल ओढ़ लो. रात को कोई भी दिक्कत महसूस हो मुझे बुला लेना. कोई संकोच मत करना. . ये कहकर वो मेरे माथे और सिर पर प्यार से हाथ फेरे और फिर अर्पिता के माँ के पास जा बोले-चलो,रात काफी हो गई है. अब तुम इन बच्चो को आराम करने दो.
प्रिया शीशे का दो गिलास और स्टील के एक ढक्कन लगे जग में पानी लाके मेज पर रख दी.
मेज पर प्रिया गिलास और जग रखी तो हल्की से आवाज हुई. मैं उसकी तरफ देखा वो बहुत भयभीत और उदास लग रही थी. मैं अर्पिता की ओर देखने लगा. अर्पिता अपने मुंह पर हाथ रख उबासी ले रही थी. उसकी बार बार झपकती हुई पलकों से लग रहा था की उसे भी बहुत तेज नींद आ रही थी.
अर्पिता की माँ अर्पिता की ओर देखते हुए बोलीं-अब तो सोने का समय हो गया है. रात के साढ़े ग्यारह बज रहे हैं. कल सुबह तुम और प्रिया मेरे पास आ जाना. मुझे तुम दोनों से कुछ जरुरी बात करनी है. और एक बात मेरी ध्यान से सुन ले. रात को तू अगर इस बच्चे को परेशान की और अगर इस बार उसकी तबियत ख़राब हुई तो मैं तुझे इस बार नहीं छोड़ूंगी.
चलो. . बच्चे हैं. . जाने दो. . -ये कहते हुए अर्पिता के पिताजी अर्पिता की माँ ,मौसी और बुआ को लेकर कमरे से बाहर निकल गए.
भैया,तुम्ही इसे इतना लाड़ दुलार देके बिगाड़े हो. लड़कियों को इतना भी छूट देना ठीक नहीं. .
अर्पिता के बुआ जी की आवाज मुझे सुनाई दी.
ये सब इन्ही की छूट का नतीजा है कि आज वो मेरे कंट्रोल के बाहर हो गई है,नहीं तो मेरा घूरना ही उसके लिए काफी था-अर्पिता कि माँ की आवाज सुनाई दी. मैं आँखे बंद किये जबर्दस्ती जागने की कोशिश कर रहा था,केवल इसलिए की अर्पिता को शुभरात्रि बोल सकूँ.
अर्पिता के पिताजी डोगरी भाषा में कुछ बोले,जो मुझे समझ में नहीं आया. वो लोग अपनी भाषा में बातें करते हुए कमरे से बाहर निकल गए.
दीदी,. कैसे जल्लाद लोग हैं,दो प्रेमियों को शादी के बाद भी मिलने भी नहीं दे रहे हैं. . -प्रिया की आवाज कानो में पड़ी.
अपनी नींद से बोझिल आँखे खोल के देखा तो प्रिया अपनी आँखे पोंछ रही थी. वो रो रही थी.
तू जा. . मेरी सुहागरात तो ख़राब हो ही गई. . क्या क्या अरमान संजोये थे मन में. . सब मेरे मन में ही धरे रह गए. . फिर कुछ रूककर बोली-अब इतनी रात को अपने घर मत जाना. . जा के सो जा. . मुझे भी नींद आ रही है. .
प्रिया कमरे के बाहर निकल गई. अर्पिता दरवाजा अंदर से बंद कर नाइट बल्ब जला दी और टुबलाइट बुझा दी. कमरे में लाल रंग की मद्धिम रौशनी फैली हुई थी. सबकुछ लाल नजर आ रहा था. मेरा दिल धड़कने लगा. मैंने अपनी आँखे बंद कर लीं.
ऐ. . सो गए क्या. . -अर्पिता का हाथ मैं अपने सिर पर महसूस किया.
तुम्हे गुडनाईट कहने को जबर्दस्ती जाग रहा हूँ-मैं नींद से मींचमींचती हुई आँखे खोल बोला.
मुझे भी बहुत तेज नींद आ रही है. वो बिस्तर पर बैठकर पहले सिर से अपनी मांगटीका उतार बिस्तर पर रखी और फिर अपने कान और गले के गहने उतार कर बिस्तर पर रखने लगी. उसके हाथों की चूड़ियाँ बहुत तेज खनक थीं. वो दोनों हाथों की सारी चूड़ियाँ भी उतार बिस्तर पर रख दी. वो बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई और अपने सभी गहने और चूड़ियाँ उठाकर मेज पर रखने लगी.
बहुत तेज नींद आने के वावजूद भी मैं धड़कते और घबड़ाते हुए दिल से उसे देखे जा रहा था कि अब ये क्या करेगी. वो अपने सब गहने और चूड़ियाँ मेज पर रख बिस्तर के पास आई और बोली-तुम जरा उठ के बैठो. .
मगर क्यों. . -मैं घबड़ाते हुए बोला.
तुम उठो तो सही. . -वो बोली.
मैं डरते हुए कम्बल हटा बिस्तर पर उठकर बैठ गया. वो मेरे पैरो के तरफ आकर अपने गुलाबी साड़ी का आँचल अपने सिर पर रख अपने दोनों हाथों से दो बार मेरे दोनों पांव छूकर अपने माथे लगाई और बोली-मुझे आशीर्वाद दो कि आजीवन तुम्हारी सेवा करती रहूँ. . दुनियां से लड झगड़कर बहुत मुश्किल से तुम्हे पाईं हूँ. . हमेशा मैं तुम्हारी प्रिय बनी रहूँ. .
मैं कुछ बोला नहीं. बस आश्चर्य से आँखे मींचमींचाते हुए उसे देख रहा था. मुझे समझ में ही नहीं आया कि क्या आशीर्वाद दूँ.
अब तुम सो जाओ. . मैं भी सोउंगी. . बहुत तेज नींद आ रही है-अर्पिता बोली.
मुझे पानी पीना है. . प्यास लगी है. . -मैं बोला.
पानी तो मैं भी पिउँगीं. . मुझे भी प्यास लगी है. . -अर्पिता ये कहकर अपने दायें हाथ से मेज से जग उठाई और दोनों गिलास में पानी भर दी. जग को मेज पर रख वो एक गिलास पानी मेज पर से उठाकर मुझे दी और दूसरा गिलास मेज से उठाकर अपने मुंह से लगा ली. पानी पीकर वो अपना गिलास मेज पर रख दी. मैंने पानी पीकर उसे खाली गिलास थमा दिया. गिलास मेज पर रख वो मेरे पास आकर बिस्तर पर मेरे दायीं तरफ बैठ गई और अपने दोनों पांव उठाकर बिस्तर पर रख ली. वो कम्बल उठकर अपने और मेरे परों पर डालते हुए बोली-तुम ये तौलिया उतार दो. . तुम्हे सोने में आराम मिलेगा. .
नहीं,मैं तौलिया नहीं उतारूंगा. . और तुम क्या मेरे साथ सोवोगी. . नहीं तुम और कही सोवो. . या फिर मैं फर्श पर बिछी कालीन पर लेट जाता हूँ. -मैं परेशान होकर बोला.
मैं और कहाँ जाऊं. . तुम्हारी पत्नी हूँ,इसीलिए अब आजीवन तुम्हारे साथ सोउंगी. . और तुम भी कहीं नहीं जाओगे. . चलो लेट जाओ अब. . -अर्पिता ये कहकर मुझे लिटा दी और खुद भी मेरे बगल में लेट गई. दोनों पीठ के बल चुपचाप लेटे थे और अपनी नींद से बंद होती आँखें जबर्दस्ती खोलने की कोशिश कर राहे थे. . तभी वो मेरी तरफ करवट बदली और थोडा सा उठकर मेरे चेहरे पर झुक गई. मैं घबड़ाकर अपनी आँखें बंद कर लिया. उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को छुआ और अपना दाहिना हाथ मेरे सिर पर रख मेरे सिर के बालों में अपने हाथ की अंगुलियां फेरते हुए बोली-सो जाओ. गुडनाईट. इतना कहकर वो फिर पीठ के बल लेट गई.
मैं मुंह से बस इतना ही बोल सका-गुडनाईट. .
मेरी हिम्मत नहीं हुई की मैं और कुछ करूँ. या उसे छुऊँ भी,क्योंकि वो बहुत खिन्न लग रही थी और नींद की गोली खाने के कारण उसे बहुत तेज नींद भी आ रही थी. अर्पिता अपनी आँखें बंद किये हुए थी. कुछ ही देर में उसकी नाक से गहरी साँस लेने की हल्की आवाज आने लगी. मैं समझ गया कि ये सो गई है. मैंने भी अपनी आँखें बंद कर लीं. बहुत देर से उत्तेजित होने के कारण अब मुझे वहाँ की नसों में दर्द महसूस हो रहा था. तभी मुझे अर्चना की याद आई. जो उसी समय अपने घर चली गई थी,जब मुझे अर्पिता के कमरे में लाया जा रहा था. मुझे उसपर गुस्सा आ रहा था,लेकिन बहुत पछतावा हो रहा था कि मैंने उसको दो थप्पड़ मारा. उसके बारे में और अर्पिता के बारे में सोचते सोचते मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया.
शेष अगले ब्लॉग में. .
(सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी,प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम,ग्राम-घमहापुर,पोस्ट-कंदवा,जिला-वाराणसी. पिन-२२११०६)
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थोड़ी देर बाद एक छोटी सी टेबलेट लाकर मेरे दायें हाथ पर रख दिए-लो बेटा,इसे खा लो. मैं टेबलेट मुह में डाल प्रिया के हाथ से पानी का गिलास लेकर गोली गले के नीचे उतार दिया और पूरे गिलास का गर्म पानी पी गया. खाली गिलास मेरे हाथ से प्रिया ले ली. बेटा,अगर तुम्हे बाथरूम जाना हो तो जा के हो आओ,क्योंकि अब तुम्हारी नींद सुबह ही खुलेगी. दस-बीस मिनट में तुम गहरी नींद में सो जाओगे-अर्पिता के पिताजी बोले. अर्पिता मुझे नींद की गोली दिए जाने से खुश नजर नहीं आ रही थी,लेकिन वो गुमसुम सी चुपचाप खड़ी रही. जी,मैं बाथरूम जाना चाहता हूँ. मुझे एक तौलिया चाहिए. मेरे थैले में होगा-मैं बोला. साहिबजी,आपके लिए नया तौलिया धोके रखा हुआ है. मैं अभी लती हूँ-प्रिया बोली. वो तौलिया लेने के लिए कमरे के बाहर चली गई. अर्पिता के पिताजी अपनी जेब से एक आईड्रॉप निकाल उसका ढक्कन खोलते हुए बोले-सिर ऊपर की ओर करो. . मैं सिर ऊपर की ओर किया. वो दो-दो बूंद दवा दोनों आँखों में डाल दिए. दवा पड़ते ही आँखे ठंडी होने लगीं. वो ढक्कन बंद कर आईड्रॉप अपनी जेब में रख लिए. प्रिया पिंक कलर का एक बहुत खूबसूरत ओर मुलायम सा तौलिया ले के आ गई. मैं पैंट के ऊपर से तौलिया लपेटना लगा. ये क्या कर रहे हो. . पैंट के ऊपर तौलिया लपेट रहे हो. . चलो पैंट उतारो और तौलिया लपेट के सोना. . अपने पैर के मोज़े भी उतार दो. इससे तुम्हे बहुत आराम मिलेगा-अर्पिता के पिताजी बोले. मैं अपनी कमर में तौलिया लपेटकर दीवार की तरफ मुंह कर लिया और अपनी नीले रंग की पैंट खोलकर जल्दी से तौलिया लपेट लिया. अत्यधिक उतेजना के कारण अपने बादामी रंग के अंडरवियर की हो रही दुर्दशा देख मैं स्वयं ही शर्मा गया. मैं अपनी पैंट टांगों से बाहर कर मैं कुर्सी पर रख दिया. दोनों पैर के काले मोज़े उतार मई कुर्सी पर रख दिया. अर्पिता के पिताजी प्रिया से बोले-ये सब कपडे ले जाओ और हैंगर में कायदे से टांग देना. प्रिया कुर्सी से सब कपडे उठाई और कमरे से बाहर ले के चली गई. मैं बाथरूम जाने के लिए दरवाजे की तरफ बढ़ा. अर्पिता तेजी से चलकर मेरे पास आ बोली -रुको,मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ. कहीं तुम चक्कर खा के गिर गए तो. . अर्पिता मेरे साथ कमरे के बाहर आ गई. मेरे साथ साथ वो भी बाथरूम की तरफ चल पड़ी. मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती हूँ-अर्पिता अपने दाहिने हाथ से मेरा बायां हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए बोली. वो लोग हमें देख रहे होंगे. अभी हाथ मत पकड़ों-मैं अपने दायें हाथ से अपना बायां हाथ उसकी पकड़ से छुड़ाते हुए बोला. बाथरूम के पास पहुंचे तो अपने दायें हाथ से मेरा बायां हाथ पकड़ बोली-ठहरो पहले मुझे हो आने दो. तुम बाद में जाना. वो मेरा हाथ छोड़ बाथरूम के बाहर रखी हरे रंगवाली हवाईचप्पल अपने पैरों में डाल बाथरूम के भीतर घुस गई. वो बाथरूम के अंदर जा दरवाजा बंद कर ली. कुछ देर बाद वो दरवाजा खोली. वो दरवाजा खोलकर बाथरूम के अंदर ही खड़ी रही और धीमे स्वर में बोली-तुम कैसे पति हो. . अपने मुंह से बोल नहीं सकते हो कि मेरी पत्नी को मेरे कमरे में रहने दो. . मैं धीमे से बोला-मैं क्या कहूं. . सारे फैसले तो तुम्हारे माताजी और पिताजी ले रहे हैं. . मैं इस समय ससुराल में हूँ. इसीलिए मुझे तुम्हारे माताजी और पिताजी की सभी बाते माननी ही पड़ेंगी. . मैं उनकी बातों का विरोध कर पाने की स्थिति में नहीं हूँ. मैं दूसरे कमरे में नहीं जाउंगी,चाहे कोई कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले ले. . कितनी मुश्किल से तो मैंने तुम्हे पाया है. . अपने वैवाहिक जीवन की पहली रात मैं व्यर्थ नहीं जाने दूंगी. . मैं आज की रात का हरपल तुम्हारे साथ बिताउंगी-अर्पिता बहुत दृढ स्वर में बोली. क्या वो लोग तुम्हारी बात मानेंगे ? -मैं उधर उधर देखते हुए पूछा. प्रिया इसी तरफ आते दिखी. अर्पिता गम्भीर होकर बोली-अर्पिता अपने पर उतर आये तो किसी की नहीं सुनती. . तुम्हारी खराब हालत देख के मैं परेशान थी,इसलिए चुप थी और सबकी सुन रही थी. . फिर वो मुस्कुराते हुए बोली-अब तुम ठीक हो. . स्वस्थ हो. . और इतने अच्छे लग रहे हो कि. . आगे कुछ न बोल वो अपने दोनों हाथों से से मेरा दायां हाथ पकड़ी और एक झटके से बाथरूम के भीतर खिंच ली. मैं लड़खड़ाते हुए उससे जा टकराया. वो मुझे पूरे जोश से अपनी बाँहों में भर ली और अपने बाएं पैर से दरवाजा जोर से ढकेलकर अंदर से भिड़ा दी. तुम इतनी जोर से मुझे मत भींचो. . मेरी छाती में कुछ चुभ सा रहा है. . और मुझे अपने को सँभालने में बहुत दिक्कत हो रही है. . तुम ये क्या कर रही हो. . प्लीज ये सब मत करो. . प्रिया इसी तरफ आ रही है-मैं उसके अचनाक हमला करने से परेशान हो गया था. मेरे दिल कि धड़कने और घबराहट दोनों बेकाबू होने लगी. आती है तो आने दो. . तुम प्रिया की चिंता मत करो. . इस समय मुझे छोड़कर सब भूल जाओ-अर्पिता प्यार में मदहोश सी होते हुए बोली. मुझे बहुत दिक्कत हो रही है. . तुम मेरी दिक्क्त बढाती जा रही हो-मैं उतेजना से परेशान होकर बोला. वो मुस्कुराते हुए हुए बोली-तुम्हारी दिक्कत मेरे तन मन में चुभ रही है. मुझे तो बहुत अच्छी लग रही है. वो मुझे और भी जोर से अपनी बाँहों में भींच ली. अर्पिता अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब लाई और वो जलती हुई आग में घी डालना शुरू कर दी. उसने अपने नरम मुलायम गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को छुआ. . मेरे गालों को छुआ. . इतनी बार छुआ कि मैं अपनेआप को भी भूल गया,केवल बस वो थी. उधर प्रिया बाथरूम के बाहर धीमे से दरवाजा खटखटाते हुए बोली-दीदी,दरवाजा खोलिए आपको एक बहुत जरुरी बात बतानी है. प्लीज. . अब मुझे छोड़ दो. . और प्रिया की बात सुनते हुए उसके साथ जाओ. . मैं बाथरूम करके आता हूँ-मैं बहुत घबराते हुए बोला. मुझे भय था कि कहीं उसके माता पिता न आ जाएँ. एकदम अनाड़ी हो. . और डरपोक भी,,-वो हँसते हुए बोली. मेरे होंठों को अपने होंठों से दो बार पूरे जोश से छूने के बाद वो मुझे छोड़ दी और पैरो में पहनी हवाईचप्पल मुझे दे बाथरूम के बाहर निकल गई. मैं राहत की गहरी साँस लिया और पैरों में हवाईचप्पल डाल बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. कुछ देर बाद मैं बाथरूम से बाहर निकला. बाथरूम के बाहर कोई नहीं था. मैं हवाईचप्पल बाथरूम के बाहर छोड़ अर्पिता के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैं अर्पिता के कमरे प्रेवेश किया. उसके पिताजी दो टेबलेट अर्पिता के दायें हाथ में रखते हुए बोले-ठीक है,तुम्हारी जिद है तो तुम इसी कमरे में सोवो,लेकिन तुम्हे ये टेबलेट खानी पड़ेगी. ठीक है,मैं ये नींद की गोलिया खा लेती हूँ. . मैं होश में न सही,नींद में बेहोश ही सही,लेकिन मैं उसके पास तो रहूंगी. . -ये कहकर अर्पिता अपनी बायीं और घूम गई,जहाँ पर प्रिया पानी का गिलास लिए खड़ी थी. वो गुस्से से भरी हुई थी. गोली अपने मुंह में रख वो प्रिया के हाथ से पानी का गिलास ली और आधा गिलास पानी पीकर शीशे का गिलास प्रिया को पकड़ा दी. अब तुम इस कमरे में सो सकती हो और चाहो तो भीतर से दरवाजा भी बंद कर सकती हो- पिताजी बोले. उनके चेहरे पर विजय से भरी मुस्कान थी. मैं जाकर बिस्तर पर बैठ गया. मुझे नींद आ रही थी. मेरी पलकें बार बार बंद हो जा रहीं थीं. अर्पिता के पिताजी मेरे पास आ बोले-बेटे,तुम्हे नींद आ रही है. चलो अब बिस्तर पर लेट जाओ. मैं जोर से नींद आ रही थी. मैं दोनों पांव बिस्तर पर उठा लेटने को हुआ,परन्तु तभी मुझे अर्पिता का ख्याल आ गया. उसके ही सिंगल बेड पर मैं लेटने जा रहा था. अर्पिता कहाँ लेटेगी. . मैं नीचे सो जाता हूँ. . -मैं बिस्तर पर बैठते हुए बोला. तुम उसकी चिंता मत करो. . वो सो जायेगी. . पहले तुम सोवो. . तुम्हे आराम की बहुत जरुरत है-ये कहकर अर्पिता के पिताजी मुझे बिस्तर पर लिटा दिए. वो पैर की तरफ रखा हुआ गुलाबी कम्बल मुझे ओढ़ाते हुए बोले-रात को अब ठंडक बढ़ गई है,पर तुम्हे दवा के रिएक्शन के कारण पता नहीं चल रहा है. ये कम्बल ओढ़ लो. रात को कोई भी दिक्कत महसूस हो मुझे बुला लेना. कोई संकोच मत करना. . ये कहकर वो मेरे माथे और सिर पर प्यार से हाथ फेरे और फिर अर्पिता के माँ के पास जा बोले-चलो,रात काफी हो गई है. अब तुम इन बच्चो को आराम करने दो. प्रिया शीशे का दो गिलास और स्टील के एक ढक्कन लगे जग में पानी लाके मेज पर रख दी. मेज पर प्रिया गिलास और जग रखी तो हल्की से आवाज हुई. मैं उसकी तरफ देखा वो बहुत भयभीत और उदास लग रही थी. मैं अर्पिता की ओर देखने लगा. अर्पिता अपने मुंह पर हाथ रख उबासी ले रही थी. उसकी बार बार झपकती हुई पलकों से लग रहा था की उसे भी बहुत तेज नींद आ रही थी. अर्पिता की माँ अर्पिता की ओर देखते हुए बोलीं-अब तो सोने का समय हो गया है. रात के साढ़े ग्यारह बज रहे हैं. कल सुबह तुम और प्रिया मेरे पास आ जाना. मुझे तुम दोनों से कुछ जरुरी बात करनी है. और एक बात मेरी ध्यान से सुन ले. रात को तू अगर इस बच्चे को परेशान की और अगर इस बार उसकी तबियत ख़राब हुई तो मैं तुझे इस बार नहीं छोड़ूंगी. चलो. . बच्चे हैं. . जाने दो. . -ये कहते हुए अर्पिता के पिताजी अर्पिता की माँ ,मौसी और बुआ को लेकर कमरे से बाहर निकल गए. भैया,तुम्ही इसे इतना लाड़ दुलार देके बिगाड़े हो. लड़कियों को इतना भी छूट देना ठीक नहीं. . अर्पिता के बुआ जी की आवाज मुझे सुनाई दी. ये सब इन्ही की छूट का नतीजा है कि आज वो मेरे कंट्रोल के बाहर हो गई है,नहीं तो मेरा घूरना ही उसके लिए काफी था-अर्पिता कि माँ की आवाज सुनाई दी. मैं आँखे बंद किये जबर्दस्ती जागने की कोशिश कर रहा था,केवल इसलिए की अर्पिता को शुभरात्रि बोल सकूँ. अर्पिता के पिताजी डोगरी भाषा में कुछ बोले,जो मुझे समझ में नहीं आया. वो लोग अपनी भाषा में बातें करते हुए कमरे से बाहर निकल गए. दीदी,. कैसे जल्लाद लोग हैं,दो प्रेमियों को शादी के बाद भी मिलने भी नहीं दे रहे हैं. . -प्रिया की आवाज कानो में पड़ी. अपनी नींद से बोझिल आँखे खोल के देखा तो प्रिया अपनी आँखे पोंछ रही थी. वो रो रही थी. तू जा. . मेरी सुहागरात तो ख़राब हो ही गई. . क्या क्या अरमान संजोये थे मन में. . सब मेरे मन में ही धरे रह गए. . फिर कुछ रूककर बोली-अब इतनी रात को अपने घर मत जाना. . जा के सो जा. . मुझे भी नींद आ रही है. . प्रिया कमरे के बाहर निकल गई. अर्पिता दरवाजा अंदर से बंद कर नाइट बल्ब जला दी और टुबलाइट बुझा दी. कमरे में लाल रंग की मद्धिम रौशनी फैली हुई थी. सबकुछ लाल नजर आ रहा था. मेरा दिल धड़कने लगा. मैंने अपनी आँखे बंद कर लीं. ऐ. . सो गए क्या. . -अर्पिता का हाथ मैं अपने सिर पर महसूस किया. तुम्हे गुडनाईट कहने को जबर्दस्ती जाग रहा हूँ-मैं नींद से मींचमींचती हुई आँखे खोल बोला. मुझे भी बहुत तेज नींद आ रही है. वो बिस्तर पर बैठकर पहले सिर से अपनी मांगटीका उतार बिस्तर पर रखी और फिर अपने कान और गले के गहने उतार कर बिस्तर पर रखने लगी. उसके हाथों की चूड़ियाँ बहुत तेज खनक थीं. वो दोनों हाथों की सारी चूड़ियाँ भी उतार बिस्तर पर रख दी. वो बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई और अपने सभी गहने और चूड़ियाँ उठाकर मेज पर रखने लगी. बहुत तेज नींद आने के वावजूद भी मैं धड़कते और घबड़ाते हुए दिल से उसे देखे जा रहा था कि अब ये क्या करेगी. वो अपने सब गहने और चूड़ियाँ मेज पर रख बिस्तर के पास आई और बोली-तुम जरा उठ के बैठो. . मगर क्यों. . -मैं घबड़ाते हुए बोला. तुम उठो तो सही. . -वो बोली. मैं डरते हुए कम्बल हटा बिस्तर पर उठकर बैठ गया. वो मेरे पैरो के तरफ आकर अपने गुलाबी साड़ी का आँचल अपने सिर पर रख अपने दोनों हाथों से दो बार मेरे दोनों पांव छूकर अपने माथे लगाई और बोली-मुझे आशीर्वाद दो कि आजीवन तुम्हारी सेवा करती रहूँ. . दुनियां से लड झगड़कर बहुत मुश्किल से तुम्हे पाईं हूँ. . हमेशा मैं तुम्हारी प्रिय बनी रहूँ. . मैं कुछ बोला नहीं. बस आश्चर्य से आँखे मींचमींचाते हुए उसे देख रहा था. मुझे समझ में ही नहीं आया कि क्या आशीर्वाद दूँ. अब तुम सो जाओ. . मैं भी सोउंगी. . बहुत तेज नींद आ रही है-अर्पिता बोली. मुझे पानी पीना है. . प्यास लगी है. . -मैं बोला. पानी तो मैं भी पिउँगीं. . मुझे भी प्यास लगी है. . -अर्पिता ये कहकर अपने दायें हाथ से मेज से जग उठाई और दोनों गिलास में पानी भर दी. जग को मेज पर रख वो एक गिलास पानी मेज पर से उठाकर मुझे दी और दूसरा गिलास मेज से उठाकर अपने मुंह से लगा ली. पानी पीकर वो अपना गिलास मेज पर रख दी. मैंने पानी पीकर उसे खाली गिलास थमा दिया. गिलास मेज पर रख वो मेरे पास आकर बिस्तर पर मेरे दायीं तरफ बैठ गई और अपने दोनों पांव उठाकर बिस्तर पर रख ली. वो कम्बल उठकर अपने और मेरे परों पर डालते हुए बोली-तुम ये तौलिया उतार दो. . तुम्हे सोने में आराम मिलेगा. . नहीं,मैं तौलिया नहीं उतारूंगा. . और तुम क्या मेरे साथ सोवोगी. . नहीं तुम और कही सोवो. . या फिर मैं फर्श पर बिछी कालीन पर लेट जाता हूँ. -मैं परेशान होकर बोला. मैं और कहाँ जाऊं. . तुम्हारी पत्नी हूँ,इसीलिए अब आजीवन तुम्हारे साथ सोउंगी. . और तुम भी कहीं नहीं जाओगे. . चलो लेट जाओ अब. . -अर्पिता ये कहकर मुझे लिटा दी और खुद भी मेरे बगल में लेट गई. दोनों पीठ के बल चुपचाप लेटे थे और अपनी नींद से बंद होती आँखें जबर्दस्ती खोलने की कोशिश कर राहे थे. . तभी वो मेरी तरफ करवट बदली और थोडा सा उठकर मेरे चेहरे पर झुक गई. मैं घबड़ाकर अपनी आँखें बंद कर लिया. उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को छुआ और अपना दाहिना हाथ मेरे सिर पर रख मेरे सिर के बालों में अपने हाथ की अंगुलियां फेरते हुए बोली-सो जाओ. गुडनाईट. इतना कहकर वो फिर पीठ के बल लेट गई. मैं मुंह से बस इतना ही बोल सका-गुडनाईट. . मेरी हिम्मत नहीं हुई की मैं और कुछ करूँ. या उसे छुऊँ भी,क्योंकि वो बहुत खिन्न लग रही थी और नींद की गोली खाने के कारण उसे बहुत तेज नींद भी आ रही थी. अर्पिता अपनी आँखें बंद किये हुए थी. कुछ ही देर में उसकी नाक से गहरी साँस लेने की हल्की आवाज आने लगी. मैं समझ गया कि ये सो गई है. मैंने भी अपनी आँखें बंद कर लीं. बहुत देर से उत्तेजित होने के कारण अब मुझे वहाँ की नसों में दर्द महसूस हो रहा था. तभी मुझे अर्चना की याद आई. जो उसी समय अपने घर चली गई थी,जब मुझे अर्पिता के कमरे में लाया जा रहा था. मुझे उसपर गुस्सा आ रहा था,लेकिन बहुत पछतावा हो रहा था कि मैंने उसको दो थप्पड़ मारा. उसके बारे में और अर्पिता के बारे में सोचते सोचते मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया. शेष अगले ब्लॉग में. .
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कह देते हैं क्या हो मधुर सुगन्ध है । 'प्रियजनों' का स्पर्श भी त्वगिन्द्रिय को कैसा मधुर जँचता है इसी प्रकार किसी व्यक्ति का सुन्दर चेहरा (अथवा कोई सुन्दर प्राकृतिक दृश्य या उनकी प्रतिकृति ही हमारे नेत्रों ^को सुहावनी जान पड़ती है तो हमारा मन विवश होकर उसकी
रूपमाधुरी की ओर आकृष्ट हो ही जाता है। कर्या प्रिय बातों में भी मधुर विशेषण जोड़ा जाता है। किसी चालक को तुतली एव अस्फुट बोली कैसी मधुर जान पड़ती है। प्यार और नम्रता के वचन भी सबका मधुर जान पड़ते हैं। किसी के श्रुति मधुर संगीत को सुनकर हमारा मन मुग्ध होकर सहसा कह बैठता है कि अहा ! कैसा मधुर कंट है। सारांश यह कि कोई भी वस्तु जो हमको हमारे मन को अच्छी गती है, जिससे हमारा चित्त प्रफुल्ल हो जाता है, उसे हम मधुर कह सकते हैं । इस 'माधुरी' में एक बड़ी भारी विशेषता तो यह है कि चाहे हमें कितने ही प्रचुर परिमाण में यह पदार्थ क्यों न मिल जाय हमारे मन का तृति नहीं होती, हम अघाते ही नहीं। और पदार्थों की भाँति हम इसकी प्रति से कवते नहीं, प्रत्युत ज्यों ज्यों इसकी प्राप्ति होती जाती है. हमारा चित्त, इसकी ओर आकृष्ट होता जाता है और यही चाहता है कि वह अधिक मिलती जाय तो अच्छा । सूरसागर में इस प्रकार की 'माधुरी' की कमी नहीं है। इसलिये हमने ' रूप माधुरी' और 'मुरलीआधुरी इन दो पूर्वरत्नों को सूरसागर से मथ कर निकाला है । इम " संक्षेप में दोनों का विवेचन करेंगे । पहिले ' रूप माधुरी ' लीजिये ।
३-रूप- माधुरी
रूप नेत्रों का विषय है। किसी सुन्दर दर्शनीय व्यक्ति का स्वरूप अथवा प्राकृतिक दृश्य हमारे नेत्रों को खूब सुहाता है। अतः हम इनकी गणना 'रूप माधुरी' में करते हैं। अब प्रश्न यह हो सकता है कि 'रूपमाधुरी ' या मनोहरता श्राखिर है क्या पदार्थ ? केवल सुन्दर आकार यां सुरत शक्ल को ही तो हम मनोहर कदापि नहीं मान सकते । सुडौलपन अर्थात् शारीरिक अवयवों का समुचित अनुपात से होना सुन्दरता में
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कह देते हैं क्या हो मधुर सुगन्ध है । 'प्रियजनों' का स्पर्श भी त्वगिन्द्रिय को कैसा मधुर जँचता है इसी प्रकार किसी व्यक्ति का सुन्दर चेहरा (अथवा कोई सुन्दर प्राकृतिक दृश्य या उनकी प्रतिकृति ही हमारे नेत्रों ^को सुहावनी जान पड़ती है तो हमारा मन विवश होकर उसकी रूपमाधुरी की ओर आकृष्ट हो ही जाता है। कर्या प्रिय बातों में भी मधुर विशेषण जोड़ा जाता है। किसी चालक को तुतली एव अस्फुट बोली कैसी मधुर जान पड़ती है। प्यार और नम्रता के वचन भी सबका मधुर जान पड़ते हैं। किसी के श्रुति मधुर संगीत को सुनकर हमारा मन मुग्ध होकर सहसा कह बैठता है कि अहा ! कैसा मधुर कंट है। सारांश यह कि कोई भी वस्तु जो हमको हमारे मन को अच्छी गती है, जिससे हमारा चित्त प्रफुल्ल हो जाता है, उसे हम मधुर कह सकते हैं । इस 'माधुरी' में एक बड़ी भारी विशेषता तो यह है कि चाहे हमें कितने ही प्रचुर परिमाण में यह पदार्थ क्यों न मिल जाय हमारे मन का तृति नहीं होती, हम अघाते ही नहीं। और पदार्थों की भाँति हम इसकी प्रति से कवते नहीं, प्रत्युत ज्यों ज्यों इसकी प्राप्ति होती जाती है. हमारा चित्त, इसकी ओर आकृष्ट होता जाता है और यही चाहता है कि वह अधिक मिलती जाय तो अच्छा । सूरसागर में इस प्रकार की 'माधुरी' की कमी नहीं है। इसलिये हमने ' रूप माधुरी' और 'मुरलीआधुरी इन दो पूर्वरत्नों को सूरसागर से मथ कर निकाला है । इम " संक्षेप में दोनों का विवेचन करेंगे । पहिले ' रूप माधुरी ' लीजिये । तीन-रूप- माधुरी रूप नेत्रों का विषय है। किसी सुन्दर दर्शनीय व्यक्ति का स्वरूप अथवा प्राकृतिक दृश्य हमारे नेत्रों को खूब सुहाता है। अतः हम इनकी गणना 'रूप माधुरी' में करते हैं। अब प्रश्न यह हो सकता है कि 'रूपमाधुरी ' या मनोहरता श्राखिर है क्या पदार्थ ? केवल सुन्दर आकार यां सुरत शक्ल को ही तो हम मनोहर कदापि नहीं मान सकते । सुडौलपन अर्थात् शारीरिक अवयवों का समुचित अनुपात से होना सुन्दरता में
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आगरा मंडल में अब पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग की लगातार तीन तारीख में न उपस्थित होने पर पुलिस मुकदमा दर्ज कराएगी। आज आगरा मंडल के एडीजी राजीव कृष्ण ने परिवार परामर्श केंद्र व ए एच टी यू थाना का निरीक्षण करने के बाद यह आदेश दिया है। इसके साथ ही काउंसलर्स में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी और एक बैंच द्वारा एक दिन में तीन केसों की सुनवाई के आदेश दिए गए। इस दौरान एसएसपी मुनिराज समेत कई पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
एडीजी आगरा मंडल राजीव कृष्ण आज अधीनस्थ अधिकारियों के साथ पुलिस लाइन स्थित परिवार परामर्श केंद्र और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने निशुल्क काउंसलिंग का काम कर रहे काउंसलर डॉ अमित गौड़, डॉ विजय कुमार, डॉ आलोक सिंह ,डॉ शिव सिंह, डॉ सोमनाथ, डॉ आशुतोष भंडारी, डॉ पी के उपाध्याय, डॉ राजेश गोस्वामी, नाजिया खान, प्रतिभा जिंदल, मंजू यादव, से बातचीत की और काउंसलिंग की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। पारिवारिक मामलों में सुलह, कार्यवाही और निस्तारण के आंकड़े देख एडीजी ने मामलों को जल्द निपटाने के लिए तीन तारीख पर न आने पर एफआईआर के आदेश जारी किए, क्योंकि ज्यादातर मामलों में एक पक्ष के न आने के कारण निस्तारण में देरी हो रही थी। काउंसलर्स का मानना है कि इस आदेश से मामलों के जल्द निस्तारण होने में मदद मिलेगी।
एडीजी राजीव कृष्ण के मुताबिक आगरा में इस वर्ष 986 शिकायतें सामने आई हैं और उनमें से 137 मामलों का निस्तारण हुआ है और 45 मामलों में एफआईआर हुई है लेकिन शेष 704 मामलों में अभी तक सुनवाई चल रही है ।
एडीजी आगरा के अनुसार आगरा मंडल के आठों जिलों के परिवार परामर्श केंद्रों के काउंसलरों और अधिकारियों को वाट्सअप के माध्यम से जुड़ने के निर्देश दिए हैं। प्रतिमाह बेस्ट काउंसलर को अवार्ड देने की व्यवस्था की गई है।
निरीक्षण के दौरान एडीजी आगरा राजीव कृष्ण द्वारा देखा गया कि काउंसलर एक या दो केसों की सुनवाई की जा रही है। इसको लेकर उन्होंने रोजाना एक बेंच द्वारा तीन मामलों की सुनवाई के आदेश दिए हैं और काउंसलर्स की संख्या में 50 प्रतिशत महिलओं की अनिवार्यता के आदेश दिए हैं।
एडीजी राजीव कृष्ण ने यह तय किया है की काउंसलर भले ही अवैतनिक हैं पर उनकी परफार्मेंस की जांच हही जरूरी है। इस लिए सभी काउंसलर की महीने की रिपोर्ट के आधार पर बेस्ट काउंसलर का अवार्ड भी दिया जाएगा।
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आगरा मंडल में अब पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग की लगातार तीन तारीख में न उपस्थित होने पर पुलिस मुकदमा दर्ज कराएगी। आज आगरा मंडल के एडीजी राजीव कृष्ण ने परिवार परामर्श केंद्र व ए एच टी यू थाना का निरीक्षण करने के बाद यह आदेश दिया है। इसके साथ ही काउंसलर्स में महिलाओं की पचास प्रतिशत भागीदारी और एक बैंच द्वारा एक दिन में तीन केसों की सुनवाई के आदेश दिए गए। इस दौरान एसएसपी मुनिराज समेत कई पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। एडीजी आगरा मंडल राजीव कृष्ण आज अधीनस्थ अधिकारियों के साथ पुलिस लाइन स्थित परिवार परामर्श केंद्र और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने निशुल्क काउंसलिंग का काम कर रहे काउंसलर डॉ अमित गौड़, डॉ विजय कुमार, डॉ आलोक सिंह ,डॉ शिव सिंह, डॉ सोमनाथ, डॉ आशुतोष भंडारी, डॉ पी के उपाध्याय, डॉ राजेश गोस्वामी, नाजिया खान, प्रतिभा जिंदल, मंजू यादव, से बातचीत की और काउंसलिंग की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। पारिवारिक मामलों में सुलह, कार्यवाही और निस्तारण के आंकड़े देख एडीजी ने मामलों को जल्द निपटाने के लिए तीन तारीख पर न आने पर एफआईआर के आदेश जारी किए, क्योंकि ज्यादातर मामलों में एक पक्ष के न आने के कारण निस्तारण में देरी हो रही थी। काउंसलर्स का मानना है कि इस आदेश से मामलों के जल्द निस्तारण होने में मदद मिलेगी। एडीजी राजीव कृष्ण के मुताबिक आगरा में इस वर्ष नौ सौ छियासी शिकायतें सामने आई हैं और उनमें से एक सौ सैंतीस मामलों का निस्तारण हुआ है और पैंतालीस मामलों में एफआईआर हुई है लेकिन शेष सात सौ चार मामलों में अभी तक सुनवाई चल रही है । एडीजी आगरा के अनुसार आगरा मंडल के आठों जिलों के परिवार परामर्श केंद्रों के काउंसलरों और अधिकारियों को वाट्सअप के माध्यम से जुड़ने के निर्देश दिए हैं। प्रतिमाह बेस्ट काउंसलर को अवार्ड देने की व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान एडीजी आगरा राजीव कृष्ण द्वारा देखा गया कि काउंसलर एक या दो केसों की सुनवाई की जा रही है। इसको लेकर उन्होंने रोजाना एक बेंच द्वारा तीन मामलों की सुनवाई के आदेश दिए हैं और काउंसलर्स की संख्या में पचास प्रतिशत महिलओं की अनिवार्यता के आदेश दिए हैं। एडीजी राजीव कृष्ण ने यह तय किया है की काउंसलर भले ही अवैतनिक हैं पर उनकी परफार्मेंस की जांच हही जरूरी है। इस लिए सभी काउंसलर की महीने की रिपोर्ट के आधार पर बेस्ट काउंसलर का अवार्ड भी दिया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आज अश्विनी शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और शनिवार का दिन है। तृतीया तिथि आज सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। चतुर्थी तिथि आज सुबह 4 बजकर 55 मिनट तक ही रहेगी। लिहाजा आज शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा और कूष्मांडा दोनों ही स्वरूपों की पूजा की जाएगी। आज वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी किया जाएगा। आज शाम 6 बजकर 30 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही आज शाम 4 बजकर 47 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल।
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आज अश्विनी शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और शनिवार का दिन है। तृतीया तिथि आज सुबह सात बजकर अड़तालीस मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। चतुर्थी तिथि आज सुबह चार बजकर पचपन मिनट तक ही रहेगी। लिहाजा आज शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा और कूष्मांडा दोनों ही स्वरूपों की पूजा की जाएगी। आज वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी किया जाएगा। आज शाम छः बजकर तीस मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही आज शाम चार बजकर सैंतालीस मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल।
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बार्सीलोना, सात दिसंबर (एपी) चैम्पियंस लीग धुरंधर रीयाल मैड्रिड को लीग के इतिहास में पहली बार ग्रुप चरण से बाहर होने से बचने के लिये बुधवार को हर हालत में बोरूसिया मोंशेंग्लाबाख को हराना होगा ।
जिनेदीन जिदान की टीम ने इस सत्र में बहुत ही खराब प्रदर्शन किया है । अगर अगला मैच बोरूसिया जीतती है तो 13 बार की यूरोपीय चैम्पियन मैड्रड पहली बार ग्रुप चरण से ही बाहर हो जायेगी ।
मैच ड्रॉ रहने पर भी वह अंतिम 16 में पहुंच सकती है बशर्ते शखतार दोनेत्स्क को इंटर मिलान हरा दी ।
पिछले 25 सत्रों में मैड्रिड कभी भी ग्रुप चरण से बाहर नहीं हुआ । वह पिछले सत्र में अंतिम 16 से बाहर हुआ और उससे पहले लगातार आठ सत्र में सेमीफाइनल खेला और चार में खिताब जीता ।
ग्रुप चरण के आखिरी मैच में क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेस्सी का मुकाबला भी रोचक होगा जब बार्सीलोना का सामना युवेंटस से होगा । दोनों टीमें अंतिम 16 में पहुंच चुकी है ।
पिछली बार दोनों टीमों के मुकाबले में बार्सीलोना ने 2 . 0 से जीत दर्ज की थी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण रोनाल्डो ने वह मैच नहीं खेला था । मेस्सी और रोनाल्डो का आखिरी बार सामना 2018 में हुआ था जब रोनाल्डो रीयाल मैड्रिड के लिये खेलते थे ।
ग्रुप बी में मोंशेंग्लाबाख आठ अंक लेकर शीर्ष पर है । मैड्रिड और शखतार के सात अंक है जबकि इंटर मिलान के पांच अंक है । अभी चारों टीमों के लिये दरवाजे खुले हैं ।
ग्रुप एच में पेरिस सेंट जर्मेन, मैनचेस्टर युनाइटेड और लेइपजिग में से एक ही टीम आगे बढेगी । तीनों के नौ अंक हैं । पीएसजी को इस्तांबुल बासाकसेहिर से खेलना है जबकि युनाइटेड का सामना लेइपजिग से होगा ।
ग्रुप ई से चेलसी और सेविला अगले दौर में पहुंच चुके हैं । वहीं ग्रुप एफ से बोरूसिया डॉर्टमंड ने अंतिम 16 में जगह बना ली है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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बार्सीलोना, सात दिसंबर चैम्पियंस लीग धुरंधर रीयाल मैड्रिड को लीग के इतिहास में पहली बार ग्रुप चरण से बाहर होने से बचने के लिये बुधवार को हर हालत में बोरूसिया मोंशेंग्लाबाख को हराना होगा । जिनेदीन जिदान की टीम ने इस सत्र में बहुत ही खराब प्रदर्शन किया है । अगर अगला मैच बोरूसिया जीतती है तो तेरह बार की यूरोपीय चैम्पियन मैड्रड पहली बार ग्रुप चरण से ही बाहर हो जायेगी । मैच ड्रॉ रहने पर भी वह अंतिम सोलह में पहुंच सकती है बशर्ते शखतार दोनेत्स्क को इंटर मिलान हरा दी । पिछले पच्चीस सत्रों में मैड्रिड कभी भी ग्रुप चरण से बाहर नहीं हुआ । वह पिछले सत्र में अंतिम सोलह से बाहर हुआ और उससे पहले लगातार आठ सत्र में सेमीफाइनल खेला और चार में खिताब जीता । ग्रुप चरण के आखिरी मैच में क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेस्सी का मुकाबला भी रोचक होगा जब बार्सीलोना का सामना युवेंटस से होगा । दोनों टीमें अंतिम सोलह में पहुंच चुकी है । पिछली बार दोनों टीमों के मुकाबले में बार्सीलोना ने दो . शून्य से जीत दर्ज की थी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण रोनाल्डो ने वह मैच नहीं खेला था । मेस्सी और रोनाल्डो का आखिरी बार सामना दो हज़ार अट्ठारह में हुआ था जब रोनाल्डो रीयाल मैड्रिड के लिये खेलते थे । ग्रुप बी में मोंशेंग्लाबाख आठ अंक लेकर शीर्ष पर है । मैड्रिड और शखतार के सात अंक है जबकि इंटर मिलान के पांच अंक है । अभी चारों टीमों के लिये दरवाजे खुले हैं । ग्रुप एच में पेरिस सेंट जर्मेन, मैनचेस्टर युनाइटेड और लेइपजिग में से एक ही टीम आगे बढेगी । तीनों के नौ अंक हैं । पीएसजी को इस्तांबुल बासाकसेहिर से खेलना है जबकि युनाइटेड का सामना लेइपजिग से होगा । ग्रुप ई से चेलसी और सेविला अगले दौर में पहुंच चुके हैं । वहीं ग्रुप एफ से बोरूसिया डॉर्टमंड ने अंतिम सोलह में जगह बना ली है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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कानूनी विषय में नहीं पड़ना चाहिए। गैरजरूरी काम भी टालना होंगे। ज्यादा लाभ पाने के विचार में आप फंस सकते हैं। मानसिक रूप से आप की एकाग्रता में कमी रहेगी। शारीरिक स्वास्थ्य के मामले में संभलकर रहें। धन सम्बंधित लेन-देन में ध्यान रखें। किसी से बहस हो सकती है, वाहन धीमें चलाएं। संध्या के बाद स्थितियां बदल सकती है। धार्मिक यात्रा करेंगे।
संतान के साथ संबंध अच्छे बने रहेंगे। व्यापार में आपको लाभ होगा। दोपहर के बाद मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखें। किसी बात को लेकर ज्यादा भावुक ना हो। कन्फ्यूजन दूर होगा। कानूनी विषयों में आपको अधिक सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। नए दोस्त बनने से आपको खुशी मिलेगी। कुछ लोग आपको मदद करेंगे।
अफसर आपके काम से खुश रह सकते हैं। व्यापार में भी आय बढ़ने की आशा है। दिन शुभ रहेगा। पिता और बड़ों के आशीर्वाद से लाभ होगा। मित्रों से लाभ हो सकता है। किसी सामाजिक प्रसंग में उपस्थित रहना पड़ सकता है। बड़ा धन लाभ होने की संभावना है।
वाणी और व्यवहार में संभलकर चलें। सेहत को लेकर चिंता बनी रहेगी। किसी से बहस न करें। कारोबार में विघ्न आ सकता है। दोपहर के बाद व्यवसाय के क्षेत्र में आप के लिए परिस्थिति अनुकूल रहेगी। अधिकारी आप के काम से संतोष का अनुभव करेंगे। आर्थिक दृष्टि फायदा होगा।
कारोबार के मामले में संभलकर चलना होगा। नियम विरोधी कामों से दूर रहें। क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। मानसिक रूप से व्यग्रता बनी रहेगी। किसी करीबी के साथ विवाद हो सकता है। आध्यात्मिक काम में रुचि लेने से मन शांत रह सकता है। विरोधियों के साथ वाद-विवाद में न उतरें। गलत विचारों से दूर रहें।
मन को प्रसन्न रखने के लिए आप मनोरंजन का सहारा लेंगे। कुछ ज्यादा ही व्यस्त रह सकते हैं। दोस्तों के साथ बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। मन चिंताग्रस्त रहेगा। कुछ ज्यादा ही इमोशनल रहेंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। सेहत का ध्यान रखें। वाहन का सावधानी से इस्तेमाल करें।
बिजनेस बढ़ाने का प्रयास करेंगे। रोजाना की आय बढ़ाने के आपके प्रयास सार्थक हो सकते हैं। कारोबार में धन लगाने की योजना पूरी कर पाएंगे। उचित कारणों पर धन खर्च होगा। विदेश के कामों से लाभ होने की संभावना है। किसी बात को लेकर परिजनों से विवाद हो सकता है। आकस्मिक खर्च होगा। पार्टनरशिप के काम में आंतरिक मतभेद रहेंगे, फिर भी परिस्थिति अनुकूल रहेगी। मैरिड कपल के बीच रोमांस बना रहेगा।
आप कोई कहानी-कविता लिखने के लिए योजना बना सकते हैं। साहित्यिक गतिविधियों के लिए दिन शुभ फलदायक है। किसी सामाजिक या राजनीतिक चर्चा में भाग ले सकते हैं। नौकरीपेशा लोग कुछ अच्छा काम कर पाएंगे। आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। कारोबार में वातावरण अनुकूल रहेगा। आनंद का वातावरण बनेगा।
माता की सेहत में हो रहा परिवर्तन आपके विचारों को नकारात्मक कर सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामले में सावधान रहें। आपका मन नहीं लगेगा। शुरुआत में धन और कीर्ति में कमी आएगी। गलत गतिविधियों की ओर आकर्षित होगा और प्रसन्नता का अनुभव करेगा। छात्रों के लिए आज का दिन शुभ है।
पर्यटन पर जाने का कार्यक्रम बना पाएंगे। भाइयों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। लाइफ पार्टनर से आपका व्यवहार अधिक मधुरतापूर्ण होगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी। दोपहर के बाद आकस्मिक दुर्घटना से आप चिंता में जा सकते हैं। माता-पिता के सेहत की चिंता रह सकती है। कारोबार में भागीदारी के काम में सावधानी रखें। कानूनी मामलों को लेकर सतर्क रहें।
किसी मामले को प्यार से सुलझाएं। नकारात्मक विचार आपको परेशान कर सकते हैं। अपने खर्च पर नियंत्रण रखना होगा। दोपहर के बाद आपके विचारों में मजबूती दिखाई देगी। किसी रचनात्मक गतिविधि की ओर आपका ध्यान रहेगा। परिवार में सुख-शांति रहेगी।
आप उत्साही बने रहेंगे। नए काम की शुरुआत करने के लिए समय अच्छा है। दिन शुभ रहेगी। परिजनों के साथ समय आनंदपूर्वक गुजरेगा। धार्मिक कामों में खर्च होगा। प्रवास या पर्यटन का योग है। दोपहर के बाद अपने पर संयम रखें, नहीं तो किसी के साथ वाद-विवाद होने की आशंका बनी रहेगी। धन संबंधित लेनदेन में सावधानी रहें।
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कानूनी विषय में नहीं पड़ना चाहिए। गैरजरूरी काम भी टालना होंगे। ज्यादा लाभ पाने के विचार में आप फंस सकते हैं। मानसिक रूप से आप की एकाग्रता में कमी रहेगी। शारीरिक स्वास्थ्य के मामले में संभलकर रहें। धन सम्बंधित लेन-देन में ध्यान रखें। किसी से बहस हो सकती है, वाहन धीमें चलाएं। संध्या के बाद स्थितियां बदल सकती है। धार्मिक यात्रा करेंगे। संतान के साथ संबंध अच्छे बने रहेंगे। व्यापार में आपको लाभ होगा। दोपहर के बाद मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखें। किसी बात को लेकर ज्यादा भावुक ना हो। कन्फ्यूजन दूर होगा। कानूनी विषयों में आपको अधिक सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। नए दोस्त बनने से आपको खुशी मिलेगी। कुछ लोग आपको मदद करेंगे। अफसर आपके काम से खुश रह सकते हैं। व्यापार में भी आय बढ़ने की आशा है। दिन शुभ रहेगा। पिता और बड़ों के आशीर्वाद से लाभ होगा। मित्रों से लाभ हो सकता है। किसी सामाजिक प्रसंग में उपस्थित रहना पड़ सकता है। बड़ा धन लाभ होने की संभावना है। वाणी और व्यवहार में संभलकर चलें। सेहत को लेकर चिंता बनी रहेगी। किसी से बहस न करें। कारोबार में विघ्न आ सकता है। दोपहर के बाद व्यवसाय के क्षेत्र में आप के लिए परिस्थिति अनुकूल रहेगी। अधिकारी आप के काम से संतोष का अनुभव करेंगे। आर्थिक दृष्टि फायदा होगा। कारोबार के मामले में संभलकर चलना होगा। नियम विरोधी कामों से दूर रहें। क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। मानसिक रूप से व्यग्रता बनी रहेगी। किसी करीबी के साथ विवाद हो सकता है। आध्यात्मिक काम में रुचि लेने से मन शांत रह सकता है। विरोधियों के साथ वाद-विवाद में न उतरें। गलत विचारों से दूर रहें। मन को प्रसन्न रखने के लिए आप मनोरंजन का सहारा लेंगे। कुछ ज्यादा ही व्यस्त रह सकते हैं। दोस्तों के साथ बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। मन चिंताग्रस्त रहेगा। कुछ ज्यादा ही इमोशनल रहेंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। सेहत का ध्यान रखें। वाहन का सावधानी से इस्तेमाल करें। बिजनेस बढ़ाने का प्रयास करेंगे। रोजाना की आय बढ़ाने के आपके प्रयास सार्थक हो सकते हैं। कारोबार में धन लगाने की योजना पूरी कर पाएंगे। उचित कारणों पर धन खर्च होगा। विदेश के कामों से लाभ होने की संभावना है। किसी बात को लेकर परिजनों से विवाद हो सकता है। आकस्मिक खर्च होगा। पार्टनरशिप के काम में आंतरिक मतभेद रहेंगे, फिर भी परिस्थिति अनुकूल रहेगी। मैरिड कपल के बीच रोमांस बना रहेगा। आप कोई कहानी-कविता लिखने के लिए योजना बना सकते हैं। साहित्यिक गतिविधियों के लिए दिन शुभ फलदायक है। किसी सामाजिक या राजनीतिक चर्चा में भाग ले सकते हैं। नौकरीपेशा लोग कुछ अच्छा काम कर पाएंगे। आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। कारोबार में वातावरण अनुकूल रहेगा। आनंद का वातावरण बनेगा। माता की सेहत में हो रहा परिवर्तन आपके विचारों को नकारात्मक कर सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामले में सावधान रहें। आपका मन नहीं लगेगा। शुरुआत में धन और कीर्ति में कमी आएगी। गलत गतिविधियों की ओर आकर्षित होगा और प्रसन्नता का अनुभव करेगा। छात्रों के लिए आज का दिन शुभ है। पर्यटन पर जाने का कार्यक्रम बना पाएंगे। भाइयों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। लाइफ पार्टनर से आपका व्यवहार अधिक मधुरतापूर्ण होगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी। दोपहर के बाद आकस्मिक दुर्घटना से आप चिंता में जा सकते हैं। माता-पिता के सेहत की चिंता रह सकती है। कारोबार में भागीदारी के काम में सावधानी रखें। कानूनी मामलों को लेकर सतर्क रहें। किसी मामले को प्यार से सुलझाएं। नकारात्मक विचार आपको परेशान कर सकते हैं। अपने खर्च पर नियंत्रण रखना होगा। दोपहर के बाद आपके विचारों में मजबूती दिखाई देगी। किसी रचनात्मक गतिविधि की ओर आपका ध्यान रहेगा। परिवार में सुख-शांति रहेगी। आप उत्साही बने रहेंगे। नए काम की शुरुआत करने के लिए समय अच्छा है। दिन शुभ रहेगी। परिजनों के साथ समय आनंदपूर्वक गुजरेगा। धार्मिक कामों में खर्च होगा। प्रवास या पर्यटन का योग है। दोपहर के बाद अपने पर संयम रखें, नहीं तो किसी के साथ वाद-विवाद होने की आशंका बनी रहेगी। धन संबंधित लेनदेन में सावधानी रहें।
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गजलसंग्रह S
तनसे निकले जान निकले मुँह से उस ईश्वर का नाम । रूह खुश जब हो मेरी पूरन देश जब होय काम ।। है यही इच्छा हे दीनानाथ मुझ आधीनकी । पाऊँ पर पदवी तो बन पाऊँ तुम्हारे धामकी । में में बड़ा पापी हूँ शिडी ख्वार हो मेरी बहुत तू न सुध लेगा तो लगा कौन मुझ नाकाम की । जाने क्या उसदन हो जिसदमनसे निकले जामये । हो विमुख तुझ से उमर भर खोई है व्यारामकी । ऐ 'गिरंदा' मुख तो वो पाता है इस संसार में । जो समरनी फेरता निशदिन है सीताराम की
गुज़ख ॥ २४ ॥
U जो नहीं हरनाम लेता है बहुत पछतायगा : अंत यमदूत पकड़ेंगे तो होश उड़जायगा ।। उस घड़ी माता पिता साथी न स्त्री पुत्र हो । जिस घड़ीयेप्राणरुखसत होके तन से जायगा ॥ जिसका उस परमात्मा के नाम से ही ध्यान है। पार भव से प्राण कुटतेशीः वो जन होजायगा ॥ हे पदारथ हरु के. सुमरनसे न बढ़करमन्त में 1जो रटेगा इसको सुरपुर की वो पदवी - पायगा ।। कर 'गिरंदा' जानतेन उसनामपर अपनायेवार। नाम-तेरा लोक तीनों अमर होजायगा ।॥
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गजलसंग्रह S तनसे निकले जान निकले मुँह से उस ईश्वर का नाम । रूह खुश जब हो मेरी पूरन देश जब होय काम ।। है यही इच्छा हे दीनानाथ मुझ आधीनकी । पाऊँ पर पदवी तो बन पाऊँ तुम्हारे धामकी । में में बड़ा पापी हूँ शिडी ख्वार हो मेरी बहुत तू न सुध लेगा तो लगा कौन मुझ नाकाम की । जाने क्या उसदन हो जिसदमनसे निकले जामये । हो विमुख तुझ से उमर भर खोई है व्यारामकी । ऐ 'गिरंदा' मुख तो वो पाता है इस संसार में । जो समरनी फेरता निशदिन है सीताराम की गुज़ख ॥ चौबीस ॥ U जो नहीं हरनाम लेता है बहुत पछतायगा : अंत यमदूत पकड़ेंगे तो होश उड़जायगा ।। उस घड़ी माता पिता साथी न स्त्री पुत्र हो । जिस घड़ीयेप्राणरुखसत होके तन से जायगा ॥ जिसका उस परमात्मा के नाम से ही ध्यान है। पार भव से प्राण कुटतेशीः वो जन होजायगा ॥ हे पदारथ हरु के. सुमरनसे न बढ़करमन्त में एकजो रटेगा इसको सुरपुर की वो पदवी - पायगा ।। कर 'गिरंदा' जानतेन उसनामपर अपनायेवार। नाम-तेरा लोक तीनों अमर होजायगा ।॥
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एमजी पॉलिटेक्निक में मतगणना स्थल का निरीक्षण करते डीएम व एडीएम।
चुनाव परिणाम आने में अब केवल चार दिन शेष बचे हैं। यह चार दिन प्रत्याशियों व उनके समर्थकों को काटे नहीं कट रहे। हर खेमे में खासी बेचैनी है। प्रशासन जहां अपनी तरफ से मतगणना की तैयारी कर रहा है तो प्रत्याशी भी मतगणना की तैयारी में लगे हैं। वैसे चुनाव परिणाम में कौन पास होगा और कौन फेल, सभी की नजर इसी पर लगी है।
चुनाव परिणाम चार दिन बाद सामने आ जाएगा। यह संसदीय सीट दो जिलों में विभक्त है। इस जिले की मतगणना एमजी पॉलीटेक्निक में होगी। चार दिन के लिए अब फिर पार्टियों के खेमों में चहल-पहल शुरू हो गई है। एजेंटों की सूची सभी मुख्य प्रत्याशी तैयार कर रहे हैं।
प्रत्याशियों की कोशिश है कि उनके यह समर्थक हर स्थिति को संभाल लें और मतगणना के दौरान दूसरा पक्ष उन पर हावी न हो। वैसे, प्रत्याशियों व उनके समर्थकों के लिए यह चार दिन खासे भारी हैं। लोग जहां परिणाम जानने को उत्सुक हैं तो प्रत्याशी व उनके समर्थक बैचेन हैं।
लाखों के सट्टे लग रहे चुनाव परिणाम परः चुनाव समाप्त होने के बाद अब सटोरिए और ज्यादा सक्रिय हो गए। किसकी बनेगी सरकार। कौन चुना जाएगा यहां से सांसद। क्या होगा जीत का अंतर। किस पार्टी को मिलेेंगी कितनी सीटें। इसे लेकर सटोरियों का आंकलन वैसे तो काफी समय से लग रहा था लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद अब इसमें रविवार की शाम से और ज्यादा तेजी आ गई। लाखों के सट्टे लगाए गए। चुनाव परिणाम तक यही स्थिति रहेगी। लोगों बेसब्री से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के सभी चरणों का मतदान होने के बाद अब मतगणना की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। डीएम, एडीएम ने मतगणना स्थल एमजी पॉलीटेक्निक का निरीक्षण किया और वहां सुरक्षा के अलावा अन्य तैयारियों का जायजा लिया। चुनाव प्रेक्षक सोमवार को यहां आकर मतगणना को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक लेेंगे और दिशा निर्देश देंगे।
हाथरस जिले की लोकसभा सीट दो सीटों में विभक्त है। मतगणना 23 मई को यहां एमजी पॉलीटेक्निक में होगी। मतदान के बाद ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच यहीं रखवा दिया गया था। लगातार अधिकारी यहां आ रहे हैं और निरीक्षण कर रहे हैं। रविवार को फिर डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार, एडीएम अशोक कुमार शुक्ल एमजी पॉलीटेक्निक पहुंचे और वहां निरीक्षण किया। उक्त अधिकारियों ने तैयारियां का जायजा लिया।
वहां बेरीकेडिंग लगाई जा रही हैं और टेबल आदि भी लगाई जा रही है। कर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इसके बाद उक्त अधिकारी वहां से चले आए। इधर, मतगणना को लेकर सामान्य प्रेक्षक रजत कुमार बोस सोमवार को यहां आएंगे और अधिकारियों के साथ बैठक लेंगे। एडीएम अशोक कुमार शुक्ल ने बताया कि मतणना की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
हाथरस। आखिरी चरण का मतदान भी रविवार को समाप्त हो गया। इसके बाद जब एग्जिट पोल के अनुमान शुरू हुए तो इसे लेकर लोग चर्चा करते दिखे। इससे पहले लोग यह जानने को उत्सुक रहे कि आखिरी चरण के मतदान में कहीं कोई बबाल तो नहीं हुआ। चुनाव समाप्त होने के बाद जब शाम को चर्चा शुरू हुई तो लोग हाथरस सीट के अलावा देश के चुनाव परिणाम पर भी चौराहों-चौराहों पर चर्चा शुरू हो गई। एक्जिट पोल के तरह-तरह के अनुमानों को लेकर भी लोग चर्चाओं में मशगूल रहे। अधिकतर घरों में लोगो टीवी पर न्यूज चैनलों से चिपके रहे।
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एमजी पॉलिटेक्निक में मतगणना स्थल का निरीक्षण करते डीएम व एडीएम। चुनाव परिणाम आने में अब केवल चार दिन शेष बचे हैं। यह चार दिन प्रत्याशियों व उनके समर्थकों को काटे नहीं कट रहे। हर खेमे में खासी बेचैनी है। प्रशासन जहां अपनी तरफ से मतगणना की तैयारी कर रहा है तो प्रत्याशी भी मतगणना की तैयारी में लगे हैं। वैसे चुनाव परिणाम में कौन पास होगा और कौन फेल, सभी की नजर इसी पर लगी है। चुनाव परिणाम चार दिन बाद सामने आ जाएगा। यह संसदीय सीट दो जिलों में विभक्त है। इस जिले की मतगणना एमजी पॉलीटेक्निक में होगी। चार दिन के लिए अब फिर पार्टियों के खेमों में चहल-पहल शुरू हो गई है। एजेंटों की सूची सभी मुख्य प्रत्याशी तैयार कर रहे हैं। प्रत्याशियों की कोशिश है कि उनके यह समर्थक हर स्थिति को संभाल लें और मतगणना के दौरान दूसरा पक्ष उन पर हावी न हो। वैसे, प्रत्याशियों व उनके समर्थकों के लिए यह चार दिन खासे भारी हैं। लोग जहां परिणाम जानने को उत्सुक हैं तो प्रत्याशी व उनके समर्थक बैचेन हैं। लाखों के सट्टे लग रहे चुनाव परिणाम परः चुनाव समाप्त होने के बाद अब सटोरिए और ज्यादा सक्रिय हो गए। किसकी बनेगी सरकार। कौन चुना जाएगा यहां से सांसद। क्या होगा जीत का अंतर। किस पार्टी को मिलेेंगी कितनी सीटें। इसे लेकर सटोरियों का आंकलन वैसे तो काफी समय से लग रहा था लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद अब इसमें रविवार की शाम से और ज्यादा तेजी आ गई। लाखों के सट्टे लगाए गए। चुनाव परिणाम तक यही स्थिति रहेगी। लोगों बेसब्री से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के सभी चरणों का मतदान होने के बाद अब मतगणना की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। डीएम, एडीएम ने मतगणना स्थल एमजी पॉलीटेक्निक का निरीक्षण किया और वहां सुरक्षा के अलावा अन्य तैयारियों का जायजा लिया। चुनाव प्रेक्षक सोमवार को यहां आकर मतगणना को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक लेेंगे और दिशा निर्देश देंगे। हाथरस जिले की लोकसभा सीट दो सीटों में विभक्त है। मतगणना तेईस मई को यहां एमजी पॉलीटेक्निक में होगी। मतदान के बाद ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच यहीं रखवा दिया गया था। लगातार अधिकारी यहां आ रहे हैं और निरीक्षण कर रहे हैं। रविवार को फिर डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार, एडीएम अशोक कुमार शुक्ल एमजी पॉलीटेक्निक पहुंचे और वहां निरीक्षण किया। उक्त अधिकारियों ने तैयारियां का जायजा लिया। वहां बेरीकेडिंग लगाई जा रही हैं और टेबल आदि भी लगाई जा रही है। कर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इसके बाद उक्त अधिकारी वहां से चले आए। इधर, मतगणना को लेकर सामान्य प्रेक्षक रजत कुमार बोस सोमवार को यहां आएंगे और अधिकारियों के साथ बैठक लेंगे। एडीएम अशोक कुमार शुक्ल ने बताया कि मतणना की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हाथरस। आखिरी चरण का मतदान भी रविवार को समाप्त हो गया। इसके बाद जब एग्जिट पोल के अनुमान शुरू हुए तो इसे लेकर लोग चर्चा करते दिखे। इससे पहले लोग यह जानने को उत्सुक रहे कि आखिरी चरण के मतदान में कहीं कोई बबाल तो नहीं हुआ। चुनाव समाप्त होने के बाद जब शाम को चर्चा शुरू हुई तो लोग हाथरस सीट के अलावा देश के चुनाव परिणाम पर भी चौराहों-चौराहों पर चर्चा शुरू हो गई। एक्जिट पोल के तरह-तरह के अनुमानों को लेकर भी लोग चर्चाओं में मशगूल रहे। अधिकतर घरों में लोगो टीवी पर न्यूज चैनलों से चिपके रहे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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बहराइच शहर, नानपारा व रिसिया में संचालित आठ क्लीनिक व पैथॉलाजी पर प्रदूषण नियंत्रण तथा बायो वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था न होने पर संचालक चिकित्सकों को सीएमओ ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही कहा कि जवाब न मिलने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। सीएमओ के नोटिस के बाद निजी क्लीनिक व पैथॉलाजी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले में संचालित अधिकांश क्लीनिक व पैथॉलाजी पर प्रदूषण व बायो बेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है। कुछ क्लीनिक बिना लाइसेंस के संचालित हो रही हैं। इन सबके खिलाफ स्पेशल सेल गठित कर चेकिंग शुरू की गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि सेल के सदस्य उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार, प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ पांडेय व शशिकांत की ओर से बहराइच शहर, नानपारा व रिसिया में चेकिंग अभियान चलाया गया।
सीएमओ ने कहा कि चेकिंग के दौरान नानपारा बाईपास पर स्टार पैथालॉजी, बहराइच शहर में जिला महिला अस्पताल के सामने माडर्न पैथॉलाजी, बिलासपुर में शिफा क्लीनिक, कटिलिया मिर्जापुर रोड पर खान डेंटल क्लीनिक, कटिलिया चौराहा पर सिटी केयर क्लीनिक, नंदिनी चिकित्सालय, रजा हास्पिटल व मछली मंडी रिसिया के निकट सरोज क्लीनिक में प्रदूषण व बायो बेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था नहीं मिली।
इस पर सीएमओ ने चिन्हित सभी क्लीनिक और पैथॉलाजी संचालक को नोटिस जारी किया है। इन सभी एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। सप्ताह भर में जवाब न मिलने पर विभागीय वैधानिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। जरूरत पड़ी तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी।
डॉ. असलम खान बिलासपुर, जैनुल आब्दीन कटिलिया मिर्जापुर, डॉ. गीता अवस्थी, डॉ. मोहम्मद लईक कटिलिया चौराहा, डॉ. महेश नारायण कटिलिया चौराहा, डॉ. डीके तिवारी मछली मंडी रिसिया, डॉ. एमए हाशमी व डॉ. ए खान कटिलिया चौराहा को नोटिस भेजी गई है।
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बहराइच शहर, नानपारा व रिसिया में संचालित आठ क्लीनिक व पैथॉलाजी पर प्रदूषण नियंत्रण तथा बायो वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था न होने पर संचालक चिकित्सकों को सीएमओ ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही कहा कि जवाब न मिलने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। सीएमओ के नोटिस के बाद निजी क्लीनिक व पैथॉलाजी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। जिले में संचालित अधिकांश क्लीनिक व पैथॉलाजी पर प्रदूषण व बायो बेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है। कुछ क्लीनिक बिना लाइसेंस के संचालित हो रही हैं। इन सबके खिलाफ स्पेशल सेल गठित कर चेकिंग शुरू की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि सेल के सदस्य उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार, प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ पांडेय व शशिकांत की ओर से बहराइच शहर, नानपारा व रिसिया में चेकिंग अभियान चलाया गया। सीएमओ ने कहा कि चेकिंग के दौरान नानपारा बाईपास पर स्टार पैथालॉजी, बहराइच शहर में जिला महिला अस्पताल के सामने माडर्न पैथॉलाजी, बिलासपुर में शिफा क्लीनिक, कटिलिया मिर्जापुर रोड पर खान डेंटल क्लीनिक, कटिलिया चौराहा पर सिटी केयर क्लीनिक, नंदिनी चिकित्सालय, रजा हास्पिटल व मछली मंडी रिसिया के निकट सरोज क्लीनिक में प्रदूषण व बायो बेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था नहीं मिली। इस पर सीएमओ ने चिन्हित सभी क्लीनिक और पैथॉलाजी संचालक को नोटिस जारी किया है। इन सभी एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। सप्ताह भर में जवाब न मिलने पर विभागीय वैधानिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। जरूरत पड़ी तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। डॉ. असलम खान बिलासपुर, जैनुल आब्दीन कटिलिया मिर्जापुर, डॉ. गीता अवस्थी, डॉ. मोहम्मद लईक कटिलिया चौराहा, डॉ. महेश नारायण कटिलिया चौराहा, डॉ. डीके तिवारी मछली मंडी रिसिया, डॉ. एमए हाशमी व डॉ. ए खान कटिलिया चौराहा को नोटिस भेजी गई है।
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कटिहार में फोर लाइन निर्माण में काम कर रहे एक मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई है। मजदूर सरिया लेकर पुल के ऊपर जा रहा था। इसी दौरान 11000 वोल्ट वाले तार में लोहे का सरिया सट गया। जिसके कारण मजदूर को करंट लग गई। इधर घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। जहां शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज घटना की जांच में जुट गई है। घटना मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर के समीप की है। जहां डीबीएल कंपनी के तरफ से कटिहार पूर्णिया फोर लाइन सड़क निर्माण का कार्य कर रहे है।
घटना के बाद मृतक के परिजन कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगा रहे है। परिजनों ने बताया कि कंपनी के द्वारा मजदूरों को सेफ्टी का कोई समान नहीं दिया जाता है। बिना सेफ्टी सामान के ही सभी मजदूर काम करते है। जिसके कारण यह हादसा हुआ है और उनकी मौत हो गई। अगर उनके पास भी काम करते दौरान अगर सेफ्टी समान पहने हुए रहते तो शायद उनकी जान बच जाती।
मृतक 50 वर्षीय सुशील सहनी के परिजनों ने बताया वे लोग बरारी थाना क्षेत्र के मझेली गांव के रहने वाले है। मृतक डीबीएल कंपनी में काम करता था। फिलहाल में वह मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर में काम कर रहे थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ। जिससे उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि कंपनी के लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। परिजनों ने उचित मुआवजा देने की मांग कंपनी से किया है।
कंपनी के सुपरवाइजर रमेश कुमार ने इस घटना पर अपने ही कंपनी का लापरवाही बताया है। सुपरवाइजर ने कहा कि लापरवाही के कारण मजदूर की मौत हो गई। उन्होंने ने बताया कि पुल का काम चल रहा था। मजदूर सरिया उठाकर पुल के ऊपर जा रहा था। इसी दौरान सरिया 11000 बोल्ट वाले तार में छू गया। जिसके कारण उन्हें करंट लगी और उनकी मौत हो गई।
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कटिहार में फोर लाइन निर्माण में काम कर रहे एक मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई है। मजदूर सरिया लेकर पुल के ऊपर जा रहा था। इसी दौरान ग्यारह हज़ार वोल्ट वाले तार में लोहे का सरिया सट गया। जिसके कारण मजदूर को करंट लग गई। इधर घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। जहां शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज घटना की जांच में जुट गई है। घटना मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर के समीप की है। जहां डीबीएल कंपनी के तरफ से कटिहार पूर्णिया फोर लाइन सड़क निर्माण का कार्य कर रहे है। घटना के बाद मृतक के परिजन कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगा रहे है। परिजनों ने बताया कि कंपनी के द्वारा मजदूरों को सेफ्टी का कोई समान नहीं दिया जाता है। बिना सेफ्टी सामान के ही सभी मजदूर काम करते है। जिसके कारण यह हादसा हुआ है और उनकी मौत हो गई। अगर उनके पास भी काम करते दौरान अगर सेफ्टी समान पहने हुए रहते तो शायद उनकी जान बच जाती। मृतक पचास वर्षीय सुशील सहनी के परिजनों ने बताया वे लोग बरारी थाना क्षेत्र के मझेली गांव के रहने वाले है। मृतक डीबीएल कंपनी में काम करता था। फिलहाल में वह मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर में काम कर रहे थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ। जिससे उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि कंपनी के लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। परिजनों ने उचित मुआवजा देने की मांग कंपनी से किया है। कंपनी के सुपरवाइजर रमेश कुमार ने इस घटना पर अपने ही कंपनी का लापरवाही बताया है। सुपरवाइजर ने कहा कि लापरवाही के कारण मजदूर की मौत हो गई। उन्होंने ने बताया कि पुल का काम चल रहा था। मजदूर सरिया उठाकर पुल के ऊपर जा रहा था। इसी दौरान सरिया ग्यारह हज़ार बोल्ट वाले तार में छू गया। जिसके कारण उन्हें करंट लगी और उनकी मौत हो गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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जगत् जननी परम साध्वी भगवती माँ दुर्गा की कृपा से तथा अपने चिकित्सकीय व्यवसाय से सम्बधित मित्रों से रुद्राक्ष विषय पर लिखने की प्रेरणा प्राप्त हुई। इस विषय पर बहुत से ग्रंथों में अध्याय पर अध्याय लिखे हुए हैं। किन्तु कोई भी एक ऐसी पुस्तक देखने को नहीं मिली जिसके द्वारा इस पर सर्वांगीण प्रकाश पड़ता हो आयुर्वेदिक निघण्टुओं तथा अनुसंधान पत्रकों में इस विषय पर बहुत ही स्वल्प में सामग्री उपलब्ध है। बाजार में रुद्राक्ष की मांग बहुत है । धार्मिक जनता में इसका सम्मान और श्रद्धा करने की प्रवृत्ति दिनोदिन वृद्धि पर है । लोग बिना जाने समझे हुए, बिना पहचान के, बिना किसी विधि के रुद्राक्ष धारण कर लेते हैं। उनमें से ही कुछ लोग इसके प्रति कुछ जानकारी रखने की उत्सुकता भी रखते हैं किन्तु उन्हें जो जानकारी दी जाती है; वह प्रायः सब भ्रामक और असन्तोषकर होती है। मेरे कई मित्रों ने इसी विषय में मुझ से जिज्ञासा की । आयुर्वेद सम्मेलनों में भी इस विषय पर कुछ चर्चाएँ चलीं। फलतः मेरे मन में विचार आया क्यों न एक ऐसी पुस्तक प्रकाशित की जाए जिससे रुद्राक्ष पर सर्वांगीण सामग्री एक ही स्थान पर एवं प्रामाणिक रूप में उपलब्ध हो सके। मुझे यह ज्ञात नहीं कि इस तरह की कोई पुस्तक पहले से वर्तमान है या नहीं । यदि कोई पुस्तक इस तरह की प्रकाशित हो भी चुकी है तो वह सम्भवतः कम प्रचलित होगी क्योंकि बाजार में देखने को वह नहीं मिली। मैंने प्रमुख प्रकाशकों के सूचीपत्र देखे, पुस्तक विक्रेताओं से जानकारी प्राप्त की। हरिद्वार और
काशी के पुस्तकालयों की खाक छानी किन्तु मुझे रुद्राक्ष पर प्रामाणिक सामग्री देने वाली कोई पुस्तक न मिली । जो मिले वे संहिता ग्रंथों, पुराणों के ही छुटपुट अंश थे अथवा उन्हीं में से कुछ लेकर कुछ अपनी ओर से बढ़ाकर लिखे गए थे । अतः मैंने सर्वमान्य से एवं पूर्णतः प्रामाणिक संहिता ग्रंथों और पुराणों को ही अपनी पुस्तक का आधार विषय बनाया। इस पूरी पुस्तक में मेरे अपने विचार और अनुभव जहाँ तहाँ विमर्श के रूप में या टिप्पणियों के रूप में ही हैं । मैंने कोई अनुसंधान नहीं किया है और न किसी नये तथ्य पर प्रकाश ही डाला है। मेरा तो यह प्रयास रहा है कि बिना अधिक विस्तार किए हुए जो भी अधिक से अधिक प्रामाणिक सामग्री प्राप्त हो सके एक ही छोटी पुस्तिका में संग्रहीत कर दूँ ताकि जन सामान्य अपनी रुद्राक्ष विषयक जिज्ञासा मेरी पुस्तक पढ़ कर शान्त कर सके । उसे सही जानकारी पाने का सन्तोष हो । मैंने यह भी प्रयास किया है कि मेरी पुस्तक की भाषा क्लिष्टता से रहित और आसानी से समझ पाने के योग्य हो। साथ ही पुस्तक का मूल्य भी उतना ही रखा जा सके जिससे कि प्रकाशक को भी घाटा न हो और साधारण पाठक भी उसे सरलता से खरीद सके ।
पुस्तक लेखन के रूप में ये मेरा प्रथम प्रयास है। मैं अपने विषय को प्रस्तुत करने में कितना सक्षम और सफल हुआ हूँ यह तो पाठक बता सकेंगे। अधिकारी विद्वानों से मेरी विनम्र अपेक्षा रहेगी कि वे अनुग्रहपूर्वक अपने सम्मति परामर्शं से मुझे लाभान्वित करेंगे । सुझावों और उपयोगी सामग्रियों का प्रयोग पुस्तक के अगले संस्करण में किया जा सकेगा ।
-डा० राम कृष्ण उपाध्याय
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जगत् जननी परम साध्वी भगवती माँ दुर्गा की कृपा से तथा अपने चिकित्सकीय व्यवसाय से सम्बधित मित्रों से रुद्राक्ष विषय पर लिखने की प्रेरणा प्राप्त हुई। इस विषय पर बहुत से ग्रंथों में अध्याय पर अध्याय लिखे हुए हैं। किन्तु कोई भी एक ऐसी पुस्तक देखने को नहीं मिली जिसके द्वारा इस पर सर्वांगीण प्रकाश पड़ता हो आयुर्वेदिक निघण्टुओं तथा अनुसंधान पत्रकों में इस विषय पर बहुत ही स्वल्प में सामग्री उपलब्ध है। बाजार में रुद्राक्ष की मांग बहुत है । धार्मिक जनता में इसका सम्मान और श्रद्धा करने की प्रवृत्ति दिनोदिन वृद्धि पर है । लोग बिना जाने समझे हुए, बिना पहचान के, बिना किसी विधि के रुद्राक्ष धारण कर लेते हैं। उनमें से ही कुछ लोग इसके प्रति कुछ जानकारी रखने की उत्सुकता भी रखते हैं किन्तु उन्हें जो जानकारी दी जाती है; वह प्रायः सब भ्रामक और असन्तोषकर होती है। मेरे कई मित्रों ने इसी विषय में मुझ से जिज्ञासा की । आयुर्वेद सम्मेलनों में भी इस विषय पर कुछ चर्चाएँ चलीं। फलतः मेरे मन में विचार आया क्यों न एक ऐसी पुस्तक प्रकाशित की जाए जिससे रुद्राक्ष पर सर्वांगीण सामग्री एक ही स्थान पर एवं प्रामाणिक रूप में उपलब्ध हो सके। मुझे यह ज्ञात नहीं कि इस तरह की कोई पुस्तक पहले से वर्तमान है या नहीं । यदि कोई पुस्तक इस तरह की प्रकाशित हो भी चुकी है तो वह सम्भवतः कम प्रचलित होगी क्योंकि बाजार में देखने को वह नहीं मिली। मैंने प्रमुख प्रकाशकों के सूचीपत्र देखे, पुस्तक विक्रेताओं से जानकारी प्राप्त की। हरिद्वार और काशी के पुस्तकालयों की खाक छानी किन्तु मुझे रुद्राक्ष पर प्रामाणिक सामग्री देने वाली कोई पुस्तक न मिली । जो मिले वे संहिता ग्रंथों, पुराणों के ही छुटपुट अंश थे अथवा उन्हीं में से कुछ लेकर कुछ अपनी ओर से बढ़ाकर लिखे गए थे । अतः मैंने सर्वमान्य से एवं पूर्णतः प्रामाणिक संहिता ग्रंथों और पुराणों को ही अपनी पुस्तक का आधार विषय बनाया। इस पूरी पुस्तक में मेरे अपने विचार और अनुभव जहाँ तहाँ विमर्श के रूप में या टिप्पणियों के रूप में ही हैं । मैंने कोई अनुसंधान नहीं किया है और न किसी नये तथ्य पर प्रकाश ही डाला है। मेरा तो यह प्रयास रहा है कि बिना अधिक विस्तार किए हुए जो भी अधिक से अधिक प्रामाणिक सामग्री प्राप्त हो सके एक ही छोटी पुस्तिका में संग्रहीत कर दूँ ताकि जन सामान्य अपनी रुद्राक्ष विषयक जिज्ञासा मेरी पुस्तक पढ़ कर शान्त कर सके । उसे सही जानकारी पाने का सन्तोष हो । मैंने यह भी प्रयास किया है कि मेरी पुस्तक की भाषा क्लिष्टता से रहित और आसानी से समझ पाने के योग्य हो। साथ ही पुस्तक का मूल्य भी उतना ही रखा जा सके जिससे कि प्रकाशक को भी घाटा न हो और साधारण पाठक भी उसे सरलता से खरीद सके । पुस्तक लेखन के रूप में ये मेरा प्रथम प्रयास है। मैं अपने विषय को प्रस्तुत करने में कितना सक्षम और सफल हुआ हूँ यह तो पाठक बता सकेंगे। अधिकारी विद्वानों से मेरी विनम्र अपेक्षा रहेगी कि वे अनुग्रहपूर्वक अपने सम्मति परामर्शं से मुझे लाभान्वित करेंगे । सुझावों और उपयोगी सामग्रियों का प्रयोग पुस्तक के अगले संस्करण में किया जा सकेगा । -डाशून्य राम कृष्ण उपाध्याय
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम ओलंपिक की बात कर रहे हों तो भला मिल्खा सिंह को कैसे भूल सकते हैं। कुछ दिन पहले ही कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आज यानी 27 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) 'मन की बात' (Mann Ki Baat) कार्यक्रम के दौरान सुबह 11 बजे देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कोरोना से जान गंवाने वाले उड़नसिख मिल्खा सिंह (Flying Sikh Milkha Singh) को याद किया। मिल्खा सिंह का हाल ही में 18 जून को चंडीगढ़ पीजीआइ में कोरोना संक्रमण के चलते निधन हुआ था। वहीं, उनके देहांत से पांच दिन पहले उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का भी कोरोना के कारण स्वर्गवास हुआ था। निर्मल मिल्खा सिंह पूर्व नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं। वहीं, पदमश्री मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह इंटरनेशनल गोल्फर हैं। मिल्खा सिंह परिवार के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित कोठी में रहते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम ओलंपिक की बात कर रहे हों तो भला मिल्खा सिंह को कैसे भूल सकते हैं। कुछ दिन पहले ही कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया।
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिल्खा सिंह को याद करते हुए कहा कि मिल्खा सिंह को कौन भूल सकता है। उन्होंने कहा कि जिस समय मिल्खा सिंह पीजीआइ चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण के कारण भर्ती थे तब उनसे बात करने का मौका मिला। प्रधानमंत्री ने मिल्खा सिंह को ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि मिल्खा सिंह भारत का गौरव थे।
पीएम ने आगे कहा, वो खेल को लेकर इतना समर्पित और भावुक थे कि बीमारी में भी उन्होंने तुरंत ही इसके लिए हामी भर दी। लेकिन, दुर्भाग्य से नियति को कुछ और मंजूर था। पीएम मोदी ने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि मुझे आज भी याद है 2014 में मिल्खा सिंह सूरत आए थे। हम लोगों ने एक मैराथन का उद्घाटन किया था। उस समय उनके साथ खेलों के बारे में जो बात हुई, उससे मुझे भी बहुत प्रेरणा मिली थी। हम सब जानते हैं कि मिल्खा सिंह जी का पूरा परिवार खेल के प्रति समर्पित रहा है, भारत का गौरव बढ़ाता रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में टोक्यो ओलंपिक का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम ओलंपिक की बात कर रहे हों तो भला मिल्खा सिंह को कैसे भूल सकते हैं। कुछ दिन पहले ही कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया। जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आज यानी सत्ताईस जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान सुबह ग्यारह बजे देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कोरोना से जान गंवाने वाले उड़नसिख मिल्खा सिंह को याद किया। मिल्खा सिंह का हाल ही में अट्ठारह जून को चंडीगढ़ पीजीआइ में कोरोना संक्रमण के चलते निधन हुआ था। वहीं, उनके देहांत से पांच दिन पहले उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का भी कोरोना के कारण स्वर्गवास हुआ था। निर्मल मिल्खा सिंह पूर्व नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं। वहीं, पदमश्री मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह इंटरनेशनल गोल्फर हैं। मिल्खा सिंह परिवार के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-आठ स्थित कोठी में रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में टोक्यो ओलंपिक का जिक्र करते हुए कहा कि जब हम ओलंपिक की बात कर रहे हों तो भला मिल्खा सिंह को कैसे भूल सकते हैं। कुछ दिन पहले ही कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिल्खा सिंह को याद करते हुए कहा कि मिल्खा सिंह को कौन भूल सकता है। उन्होंने कहा कि जिस समय मिल्खा सिंह पीजीआइ चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण के कारण भर्ती थे तब उनसे बात करने का मौका मिला। प्रधानमंत्री ने मिल्खा सिंह को ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि मिल्खा सिंह भारत का गौरव थे। पीएम ने आगे कहा, वो खेल को लेकर इतना समर्पित और भावुक थे कि बीमारी में भी उन्होंने तुरंत ही इसके लिए हामी भर दी। लेकिन, दुर्भाग्य से नियति को कुछ और मंजूर था। पीएम मोदी ने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि मुझे आज भी याद है दो हज़ार चौदह में मिल्खा सिंह सूरत आए थे। हम लोगों ने एक मैराथन का उद्घाटन किया था। उस समय उनके साथ खेलों के बारे में जो बात हुई, उससे मुझे भी बहुत प्रेरणा मिली थी। हम सब जानते हैं कि मिल्खा सिंह जी का पूरा परिवार खेल के प्रति समर्पित रहा है, भारत का गौरव बढ़ाता रहा है।
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यह अध्ययन अर्थव्यवस्था के वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतराल (एफएनओजी) का संदर्भ, औचित्य और विश्लेषणात्मक ढांचा उपलब्ध कराता है। पारंपरिक (मुद्रास्फीति-तटस्थ) उपाय में, मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था की स्थिति का मुख्य संकेतक है, अन्य शब्दों में इस उपाय में अर्थव्यवस्था में असंतुलन मुख्य रूप से उच्च या न्यून मुद्रास्फीति में प्रतिबिंबित होता है। तथापि, एफएनओजी में, आधिक्य क्रेडिट वृद्धि और असंधारणीय आस्ति बाजार प्रतिफल के रूप में वित्तीय चरों के उच्च स्तर मुद्रास्फीति की अपेक्षा असंतुलन के मुख्य स्रोत हैं। भारतीय संदर्भ में पारंपरिक आउटपुट अंतराल बनाम एफएनओजी दोनों के बीच उल्लेखनीय विचलन दर्शाता है। नवीनतम आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में एफएनओजी हाल की तिमाहियों में क्रेडिट वृद्धि में अभिवृद्धि और गतिशील आस्ति बाजार स्थितियों के कारण पारंपरिक आउटपुट अंतराल की तुलना में तेजी से बंद हुआ है।
आउटपुट अंतराल "संभावित आउटपुट" से वास्तविक आउटपुट का विचलन दर्शाता है, संभावित आउटपुट को आर्थिक गतिविधि के अधिकतम स्तर के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे पूरी क्षमता से परिचालित होने पर कोई अर्थव्यवस्था हासिल कर सकती है। आउटपुट अंतराल सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है तथा यह अर्थव्यवस्था की चक्रीय स्थिति बताता है। सकारात्मक आउटपुट जो वास्तविक आउटपुट के संभावित आउटपुट से ऊपर होने पर होता है, अर्थव्यवस्था में आधिक्य मांग दर्शाता है जो मुद्रास्फीतिकारी दबाव उत्पन्न कर सकता है। इसके विपरीत, नकारात्मक आउटपुट जो संभावित आउटपुट की तुलना में अंतराल-वास्तविक आउटपुट से कम होता है, उस समय उत्पन्न होता है जब अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं होता है और यह कम मांग दर्शाता है।
आउटपुट अंतराल जो अर्थव्यवस्था में मांग स्थितियों का सारांश उपाय है, मेक्रो अर्थव्यवस्था की स्थिति का उपयोग संकेतक उपलब्ध कराता है और इसका मौद्रिक नीति के लिए महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में उपयोग किया जाता है। पारंपरिक रूप से, मुद्रास्फीति को अर्थव्यवस्था में समष्टि-आर्थिक असंतुलन के मुख्य लक्षण के रूप में देखा गया है जिसे आउटपुट अंतराल के विभिन्न मापों में उतार-चढ़ावों द्वारा प्राप्ति किया गया है। तथापि, इतिहास में ऐसे उदाहरण देखे गए हैं जब मुद्रास्फीति कम और स्थायी थी, चाहे आउटपुट असंधारणीय रूप से बढ़ रहा था।
वित्तीय असंतुलन के बड़े निर्माण का मामला था जैसाकि अगस्त 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट (जीएफसी) से पहले आधिक्य क्रेडिट वृद्धि और उच्च आस्ति कीमतों में प्रदर्शित हुआ। बड़े क्रेडिट की वृद्धि से आवास और अन्य आस्तियों के लिए मांग बढ़ी, जिससे उनके मूल्य में बढ़ोतरी हो गई और घरेलू तथा फर्मों की आय में वृद्धि हुई। इसने बैंकों को अधिक निवेश का वित्तपोषण करने के लिए क्रेडिट प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित किया। नए क्षमता संवर्धन से आर्थिक विस्तार ने आपूर्ति प्रतिबंधों को सहज बनाया और कई अर्थव्यवस्थाओं में समग्र वृद्धि दर में बढ़ोतरी की। इसके अतिरिक्त, इस मजबूत वित्तीय उछाल के परिणामस्वरूप उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी मात्रा में पूंजीगत प्रवाह हुआ जिसके कारण उनकी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि हुई। इन कारकों ने मुद्रास्फीति को उदार रखते हुए मूल्य पर नीचे की ओर दबाव डाला। पारंपरिक ज्ञान से, व्यक्ति अर्थ निकाल सकता है कि उदार मुद्रास्फीति से मिली हुई यह उच्च आर्थिक वृद्धि संधारणीय थी। तथापि, वित्तीय क्षेत्र के आंकड़ों पर निकट दृष्टि से पता चला कि यह तेज आर्थिक वृद्धि वित्तीय उछाल के कारण थी जिसका परिणाम संसाधनों के त्रुटिपूर्ण आबंटन और असंधारणीय आस्ति कीमतों के रूप में हुआ। संकट आने और वित्तीय स्थिति कठोर होने के बाद, समग्र मांग बदतर हो गई और इनमें से कई अर्थव्यवस्थाएं अंततः लंबी मंदी के दौर में चली गई।
उपर्युक्त संदर्भित गतिविधियों ने नए आउटपुट अंतराल की माप को जन्म दिया जिसे लोकप्रिय रूप से वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतराल या एफएनओजी के रूप में जाना जाता है जो मुद्रास्फीति की अपेक्षा बैंक क्रेडिट और आस्ति बाजारों में हुई हलचल से वित्तीय गतिविधियों पर आधारित आर्थिक वृद्धि की संधारणीयता का मूल्यांकन करता है। इस माप में, सकारात्मक आउटपुट अंतराल वित्तीय बाजार में अधिक गतिविधियों के कारण अर्थव्यवस्था में अति-उष्णता (ओवरहीटिंग) दर्शाता है जबकि नकारात्मक आउटपुट अंतराल दबावग्रस्त वित्तीय स्थितियों के चलते अर्थव्यवस्था में सुस्ती दर्शाता है। अग्रणी केंद्रीय बैंक जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड, दि यूरोपीयन सेंट्रल बैंक, बैंको डी एसपाना आदि हैं, मौद्रिक नीति के लिए एफएनओजी का एक इनपुट के रूप में उपयोग करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) और एशियन विकास बैंक (एडीबी) ने भी मौद्रिक नीति के लिए एफएनओजी की उपयोगिता पर जोर डाला है।
एफएनओजी का भारतीय संदर्भ में भी अनुमान लगाया गया है। इस अनुमान को अब अक्टूबर 2017 से रिज़र्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में आउटपुट अंतराल के पारंपरिक उपायों के साथ सम्मिलित किया गया है। एफएनओजी का अनुमान लगाने के लिए पद्धति और भारतीय संदर्भ में अनुभनजन्य अनुमान नीचे दिए गए हैं। तकनीकी ब्यौरे अनुलग्नक में हैं।
वास्तविक आउटपुट से भिन्न, संभावित आउटपुट का स्तर और इस प्रकार आउटपुट अंतराल सीधे नहीं देखा जा सकता और इसका अनुमान अन्य उपलब्ध समष्टि आर्थिक आंकड़ों से लगाया जाता है। संभावित आउटपुट का अनुमान लगाने के लिए विभिन्न पद्धतियों का उपयोग किया गया है, किंतु वे सभी मानती हैं कि आउटपुट को प्रवृत्ति (संभावित आउटपुट की माप) और चक्रीय संघटक (आउटपुट अंतराल की माप) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
संभावित आउटपुट और आउटपुट अंतराल का अनुमान लगाने का सबसे सामान्य सांख्यिकीय दृष्टिकोण एकल चरीय सांख्यिकीय फिल्टर जैसे होडरिक-प्रेसकॉट (एचपी) फिल्टर का उपयोग करना है जो देखे गए आउटपुट आंकड़ों (अनुलग्नक) से चक्र (आउटपुट अंतराल) और प्रवृत्ति (संभावित आउटपुट) निकालने में मददगार होता है। एकल चरीय दृष्टिकोण का लाभ है कि यह सरल है और इसे आउटपुट आंकड़ों अर्थात सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिए सीधा उपयोग किया जा सकता है।
तथापि, एकल चरीय फिल्टरों से आउटपुट अंतराल अनुमानों की अनेक सीमाएं हैं। वे स्वरूप में पूरी तरह से सांख्यिकीय हैं और किसी प्रकार की आर्थिक संरचना को सम्मिलित नहीं करते हैं तथा किसी संभावित आउटपुट या आउटपुट अंतराल का आर्थिक परिकल्पना के अनुरूप नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त, एकल चरीय सांख्यिकीय फिल्टर स्वाभाविक रूप से एंड-पॉइंट समस्या से ग्रस्त होते हैं जबकि प्रवृत्ति और चक्र के नवीनतम अनुमानों में नई सूचना के आने से काफी संशोधन होता है। इस प्रकार, वे नवीनतम अवधि के लिए कम सटीक अनुमान उपलब्ध करा सकते हैं जिनका नीति निर्माण में अधिक महत्व होता है।
एकल चरीय दृष्टिकोणों के साथ जुड़ी उपर्युक्त संदर्भित समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए बहु-चरीय कॉलमैन फिल्टर (एमवीकेएफ) तकनीक का पालन किया जाता है जिसमें अन्य समष्टि-आर्थिक आंकड़ों का उपयोग होता है जो उल्लेखनीय हैं। एमवीकेएफ का उपयोग करते हुए पारंपरिक आउटपुट अंतराल की माप करने के लिए, अनुसंधानकर्ताओं ने मुद्रास्फीति को अतिरिक्त चर के रूप में शामिल किया है क्योंकि इसे असंधारणीयता का मुख्य स्रोत माना जाता है। इस प्रकार प्राप्त आउटपुट अंतराल को मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतराल कहा जाता है। एमवीकेएफ के साथ मापे जाने वाले एफएनओजी में, अनुसंधानकर्ताओं ने मुद्रास्फीति की बजाय वित्तीय चरों के एक सेट का उपयोग किया है। उपयोग किए गए वित्तीय चर मुख्य रूप से बैंक क्रेडिट वृद्धि और रियल स्टॉक बाजार प्रतिफल (अनुलग्नक) हैं। इस प्रकार मुद्रास्फीति-तटस्थ माप के प्रति जो मुद्रास्फीति को असंधारणीयता के स्रोत के रूप में सम्मिलित करती है, एफएनओजी में वित्तीय चरों का उपयोग आउटपुट अंतराल का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है (अनुलग्नक)।
सारणी 1 में प्रस्तुत अनुमानित परिणाम दर्शाते हैं कि वास्तविक नीति दर चार तिमाहियों के अंतराल के साथ एफएनओजी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। वास्तविक क्रेडिट वृद्धि और वास्तविक स्टॉक बाजार प्रतिफल क्रमशः दो तिमाहियों और एक तिमाही के अंतराल के साथ एफएनओजी को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।
।तालिका 1: रिग्रेशन अनुमान - निर्भर चरः आउटपुट गैप (yt)
yt : आउटपुट अंतर; rt: वास्तविक ब्याज दर; bct: असली बैंक क्रेडिट वृद्धि;
स्रोतः भारतीय अर्थव्यवस्था पर डाटाबेस (डीबीआईई), आरबीआई और लेखकों की गणना।
तालिका 1 में एफएनओजी अनुमानों की समयबद्ध योजना संकेत देती है कि पूर्व जीएफसी अवधि (क्यू 2: 2008-09 से पहले) में एफएनओजी सकारात्मक था - वास्तविक उत्पादन संभावित उत्पादन से ऊपर था जो वित्तीय क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में कुछ असंतुलन का सूचक है।
यह उल्लेखनीय है कि 2005-06 से क्यू 1: 2008-09 की अवधि के दौरान वास्तविक गैर-खाद्य ऋण और वास्तविक शेयर बाजार (बीएसई सेंसेक्स) प्रतिफल क्रमशः 23.8 प्रतिशत और 34.9 प्रतिशत की वार्षिक औसत दर से बढ़ा, जो औसत वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत (चार्ट 2 ए और 2 बी) की तुलना में बहुत तेज है।
जीएफसी के दौरान, एफओएनजी कुछ वर्षों तक सकारात्मक आउटपुट अंतर देखने के लिए उबरने के पहले मुख्य रूप से परिसंपत्तियों की कीमतों में तेज गिरावट के कारण नकारात्मक हो गया। हालांकि, 2013-14 के बाद, एफएनओजी कम क्रेडिट वृद्धि और निराशाजनक शेयर बाजार स्थितियों के कारण नकारात्मक बना रहा, यह 2017-18 से धीरे-धीरे सीमित हो गया।
भारत के लिए एफएनओजी बनाम मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर की एक और विस्तृत तुलना से पता चलता है कि दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर हैं जोकि तीन चरणों (चार्ट 3 और 4) से स्पष्ट हो जाता है।
चरण I (क्यू 1: 2012-13 से क्यू 4: 2014-15) में, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर से अधिक था और अधिकतर सकारात्मक क्योंकि इस अवधि में उच्च क्रेडिट वृद्धि और वास्तविक शेयर बाजार प्रतिफल की घटनाएं देखी गई। हालांकि, मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर पूरी अवधि में नकारात्मक रहा।
चरण II (क्यू 1: 2015-16 से क्यू 4: 2016-17) में, मुख्य रूप से बैंकों और निगमों की तनावग्रस्त बैलेंस शीट के साथ-साथ वास्तविक शेयर बाजार के नकारात्मक प्रतिफल के रूप में प्रतिबिंबित निराशाजनक शेयर बाजार के कारण कम क्रेडिट वृद्धि के रूप में कमजोर वित्तीय स्थितियों के कारण एफएनओजी नकारात्मक क्षेत्र में रहा और मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर से काफी कम रहा।
चरण III (2017-18) में, एफएनओजी नकारात्मक रहा लेकिन क्रेडिट वृद्धि और उत्साहजनक शेयर बाजार स्थितियों के पुनरुत्थान को दर्शाते हुए,समाप्ति के करीब रहा। इस चरण के दौरान, मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतराल भी नकारात्मक रहा और समाप्त होने के लिए प्रतिबद्ध रहा, लेकिन एफएनओजी की तुलना में धीमी गति से।
एफएनओजी को समझाने में वित्तीय चर की भूमिका एफएनजीजी के ऐतिहासिक परिवर्तनीय विश्लेषण से भी स्पष्ट है,जो इसके विकास (चार्ट 5) पर विभिन्न कारकों के योगदान को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, क्रेडिट वृद्धि और शेयर बाजार प्रतिफल ने चरण II (Q1: 2015-16 से Q4: 2016-17) में एफएनओजी के विकास के लिए नकारात्मक योगदान दिया। हालांकि, चरण III (2017-18) में, वित्तीय बाजार चरों ने एफएनजीजी को सकारात्मक योगदान दिया है।
वित्तीय बाजार की जानकारी को शामिल करने वाले आउटपुट अंतर के आकलन ने हाल के वर्षों में लोकप्रियता हासिल की है। एफएनओजी उपाय, जो वित्तीय बाजार संकेतकों को शामिल करता है, नीति उद्देश्यों के लिए अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए उपयोग किए गए संकेतकों के सेट के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर माप मुद्रास्फीति पर अर्थव्यवस्था में असंतुलन के स्रोत के रूप में निर्भर है। तथापि, यह उपाय प्री-जीएफसी अवधि में उच्च क्रेडिट वृद्धि और परिसंपत्ति बाजार रिटर्न से उत्पन्न असंतुलन को पकड़ने में असफल रहा। एफएनओजी आउटपुट अंतर का आकलन करने के लिए एफएनओजी वित्तीय क्षेत्र के संकेतकों को ध्यान में रखता है, जैसे कि क्रेडिट और परिसंपत्ति बाजार चर ।
भारतीय परिपेक्ष्य में ति1:2006-07 से ति3: 2017-18 की अवधि के लिए अनुमानित एफएनओजी उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, खासकर उच्च / निम्न क्रेडिट वृद्धि और शेयर बाजार रिटर्न की अवधि में, जो कि पारंपरिक उपाय नहीं प्रदान करते। एफओएनजी ति3: 2014:15 के बाद से नकारात्मक रहा, लेकिन ति2: 2017:18 तक लगभग बंद हुआ। मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के साथ एफएनओजी की तुलना से पता चलता है कि ति1: 2012-13 से ति4: 2014-15 के दौरान, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर से ऊपर रहा। तथापि, ति1:2015-16 से ति4:2016-17 के दौरान, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर से काफी नीचे रहा, जो ज्यादातर कम क्रेडिट वृद्धि के कारण था। ति1:2017-18 से, दोनों मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर और एफएनओजी नकारात्मक बने रहे लेकिन धीरे-धीरे बंद होने की तरफ झुके। हालांकि, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के मुकाबले तेजी से बंद हो गया।
संभावित आउटपुट और आउटपुट अंतर दोनों के अनुमान असुरक्षित चर हैं, और उनके अनुमान चयनित दृष्टिकोण के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। इसलिए, आरबीआई स्टाफ, वैकल्पिक अनुमान दृष्टिकोण का उपयोग करके, विभिन्न सर्वेक्षणों और अन्य समष्टि आर्थिक चर से प्राप्त जानकारी के पूरक, कारोबार चक्र के चरण पर अधिक मजबूत संदर्भ आकर्षित करने के लिए आउटपुट अंतराल का मूल्यांकन करता है।
सी. बोरियो. पी. डिसयाटैट और एम. जुसेलियस, "रिथिंकिंग पोटेंशियल आउटपुटः एमबेडिंग इनफॉर्मेशन एबाउट द फाइनेंशियल साइकल," बीआईएस वर्किंग पेपर, 404, (फरवरी 2013)।
ए ओकुन, "पोटेंशियल जीएनपीः इट्स मेजेरमेंट एण्ड सिगनिफिकेंट," बिजनेस और इकॉनामिक स्टेटिस्टिक्स सेक्शन, वाशिंगटनःअमेरिकन स्टेटिकल एसोशिएसन, (1962), पीपी 98-104।
डी.पी. रथ, पी. मित्रा, और जे. जॉन, "ए मेजर ऑफ फाइनेंस-न्यूट्रल आउटपुट गैप फॉर इंडिया", आरबीआई वर्किंग पेपर सीरीज़, डब्ल्यूपीएस (डीईपीआर), मार्च (2017)।
यह तकनीकी अनुबंध आउटपुट अंतर के यूनिवेरिएट स्टेटिकल फ़िल्टर, मुद्रास्फीति-तटस्थ और वित्त-तटस्थ उपायों के विश्लेषणात्मक सेटअप का विवरण देता है।
होड्रिक-प्रेस्कॉट (एचपी) फ़िल्टर आउटपुट अंतर का आकलन करने के लिए सबसे लोकप्रिय रूप से उपयोग किया जानेवाला यूनिवेरिएट स्टेटिकल फ़िल्टर में से एक है। यह फ़िल्टर पर्यवेक्षण के भारित चल औसत पर आधारित है जो नमूना अवधि की शुरुआत और अंत के करीब पर्यवेक्षण पर अधिक भार डालता है। यह विधि निम्न फ़ंक्शन को कम करके संभावित आउटपुट (Ȳt) प्राप्त करती है,
पहला शब्द प्रवृत्ति से Yt के वर्ग विचलन का योग है, अर्थात संभावित उत्पादन (Ȳt), जो चक्रीय घटक को दंडित करता है। दूसरा शब्द संभावित आउटपुट (Ȳt) के दूसरे अंतर के वर्गों के योग के एकाधिक λ है। दूसरा शब्द संभावित आउटपुट (Ȳt) की वृद्धि दर में परिवर्तन को दंडित करता है। पॉजिटिव पैरामीटर λ जितना बड़ा होगा, उतना अधिक जुर्माना और परिणामस्वरूप संभावित अनुमान बराबर होगा। इसलिए, सीमित मामले में अगर λ = 0 तब नरमी के लिए कोई दंड नहीं है, फिल्टर इस श्रृंखला के रूप में ही झुकाव उत्पन्न करता है। दूसरी तरफ, यदि λ बहुत उंचाई पर है, तो नरमी के लिए वहां एक उच्च वेटेज होगा और झुकाव एक सीधी रेखा होगी।
आउटपुट अंतर (yt) को लॉग टर्म (Yt) में वास्तविक आउटपुट4 के विचलन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो इसके संभावित स्तर (Ȳt) से होता है।
समीकरणों (2) और (3) के अतिरिक्त, आउटपुट अंतर को निम्नानुसार एक ऑटो रेग्रेसिव प्रक्रिया के रूप में मॉडलिंग किया गया है :
मुद्रास्फीति-तटस्थ दृष्टिकोण में, आउटपुट के टिकाऊ स्तर को संगत आउटपुट के स्तर के रूप में कम और स्थिर मुद्रास्फीति (ओकुन, 1962) के साथ परिभाषित किया गया है। इसलिए, मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर माप का अनुमान लगाने के लिए, मुद्रास्फीति के लिए फिलिप्स कर्व इक्वेशन को शामिल किया गया, जो निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार मुद्रास्फीति (πt) पर देखने योग्य डेटा के आउटपुट अंतर के विकास को जोड़ता है।
इस ढांचे से अनुमानित आउटपुट अंतर (समीकरण 2 से 5 का उपयोग करके) मुद्रास्फीति स्तर के अनुरूप है और मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के रूप में जाना जाता है।
इस ढांचे में, वास्तविक ब्याज दर के साथ वित्तीय चर (वास्तविक बैंक क्रेडिट वृद्धि और वास्तविक शेयर बाजार वापसी) आउटपुट अंतर के लिए विवरणात्मक चर के रूप में उपयोग किया जाता है। इन चरों को शामिल करने के बाद संशोधित आउटपुट अंतर समीकरण नीचे दिया गया हैः
जहां Xt = (rt, bct, sensext) ; rt : वास्तविक पोलिसी रेट; bct : वास्तविक बैंक क्रेडिट वृद्धि; sensext : बीएसई सेंसेक्स द्वारा वास्तविक स्टॉक मार्केट रिटर्न प्रॉक्सी। इस ढांचे से अनुमानित आउटपुट अंतर (समीकरण 2, 3 और 6 का उपयोग करके) वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतर के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह माप वित्तीय चर में गतिविधि के लिए नियंत्रण करता है।
बहुविकल्पीय कलमैन फ़िल्टर लागू करके राज्य स्पेस ढांचे में क्वासी मैक्सिमम लाइकलीहुड (क्यूएमएल) मैथड का उपयोग करके समीकरणों की प्रणाली का अनुमान लगाया जाता है। रूडोल्फ ई. काल्मन के नाम पर रखा गया कलमैन फ़िल्टरिंग, एक एल्गोरिथम है जो समय के साथ देखे गए माप चर की एक श्रृंखला का उपयोग करता है, जिसमें सांख्यिकीय नॉइज़ और अन्य त्रुटियां होती हैं, और अप्रत्यक्ष चर के अनुमान उत्पन्न करती हैं।
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यह अध्ययन अर्थव्यवस्था के वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतराल का संदर्भ, औचित्य और विश्लेषणात्मक ढांचा उपलब्ध कराता है। पारंपरिक उपाय में, मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था की स्थिति का मुख्य संकेतक है, अन्य शब्दों में इस उपाय में अर्थव्यवस्था में असंतुलन मुख्य रूप से उच्च या न्यून मुद्रास्फीति में प्रतिबिंबित होता है। तथापि, एफएनओजी में, आधिक्य क्रेडिट वृद्धि और असंधारणीय आस्ति बाजार प्रतिफल के रूप में वित्तीय चरों के उच्च स्तर मुद्रास्फीति की अपेक्षा असंतुलन के मुख्य स्रोत हैं। भारतीय संदर्भ में पारंपरिक आउटपुट अंतराल बनाम एफएनओजी दोनों के बीच उल्लेखनीय विचलन दर्शाता है। नवीनतम आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में एफएनओजी हाल की तिमाहियों में क्रेडिट वृद्धि में अभिवृद्धि और गतिशील आस्ति बाजार स्थितियों के कारण पारंपरिक आउटपुट अंतराल की तुलना में तेजी से बंद हुआ है। आउटपुट अंतराल "संभावित आउटपुट" से वास्तविक आउटपुट का विचलन दर्शाता है, संभावित आउटपुट को आर्थिक गतिविधि के अधिकतम स्तर के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे पूरी क्षमता से परिचालित होने पर कोई अर्थव्यवस्था हासिल कर सकती है। आउटपुट अंतराल सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है तथा यह अर्थव्यवस्था की चक्रीय स्थिति बताता है। सकारात्मक आउटपुट जो वास्तविक आउटपुट के संभावित आउटपुट से ऊपर होने पर होता है, अर्थव्यवस्था में आधिक्य मांग दर्शाता है जो मुद्रास्फीतिकारी दबाव उत्पन्न कर सकता है। इसके विपरीत, नकारात्मक आउटपुट जो संभावित आउटपुट की तुलना में अंतराल-वास्तविक आउटपुट से कम होता है, उस समय उत्पन्न होता है जब अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं होता है और यह कम मांग दर्शाता है। आउटपुट अंतराल जो अर्थव्यवस्था में मांग स्थितियों का सारांश उपाय है, मेक्रो अर्थव्यवस्था की स्थिति का उपयोग संकेतक उपलब्ध कराता है और इसका मौद्रिक नीति के लिए महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में उपयोग किया जाता है। पारंपरिक रूप से, मुद्रास्फीति को अर्थव्यवस्था में समष्टि-आर्थिक असंतुलन के मुख्य लक्षण के रूप में देखा गया है जिसे आउटपुट अंतराल के विभिन्न मापों में उतार-चढ़ावों द्वारा प्राप्ति किया गया है। तथापि, इतिहास में ऐसे उदाहरण देखे गए हैं जब मुद्रास्फीति कम और स्थायी थी, चाहे आउटपुट असंधारणीय रूप से बढ़ रहा था। वित्तीय असंतुलन के बड़े निर्माण का मामला था जैसाकि अगस्त दो हज़ार आठ में वैश्विक वित्तीय संकट से पहले आधिक्य क्रेडिट वृद्धि और उच्च आस्ति कीमतों में प्रदर्शित हुआ। बड़े क्रेडिट की वृद्धि से आवास और अन्य आस्तियों के लिए मांग बढ़ी, जिससे उनके मूल्य में बढ़ोतरी हो गई और घरेलू तथा फर्मों की आय में वृद्धि हुई। इसने बैंकों को अधिक निवेश का वित्तपोषण करने के लिए क्रेडिट प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित किया। नए क्षमता संवर्धन से आर्थिक विस्तार ने आपूर्ति प्रतिबंधों को सहज बनाया और कई अर्थव्यवस्थाओं में समग्र वृद्धि दर में बढ़ोतरी की। इसके अतिरिक्त, इस मजबूत वित्तीय उछाल के परिणामस्वरूप उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी मात्रा में पूंजीगत प्रवाह हुआ जिसके कारण उनकी मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि हुई। इन कारकों ने मुद्रास्फीति को उदार रखते हुए मूल्य पर नीचे की ओर दबाव डाला। पारंपरिक ज्ञान से, व्यक्ति अर्थ निकाल सकता है कि उदार मुद्रास्फीति से मिली हुई यह उच्च आर्थिक वृद्धि संधारणीय थी। तथापि, वित्तीय क्षेत्र के आंकड़ों पर निकट दृष्टि से पता चला कि यह तेज आर्थिक वृद्धि वित्तीय उछाल के कारण थी जिसका परिणाम संसाधनों के त्रुटिपूर्ण आबंटन और असंधारणीय आस्ति कीमतों के रूप में हुआ। संकट आने और वित्तीय स्थिति कठोर होने के बाद, समग्र मांग बदतर हो गई और इनमें से कई अर्थव्यवस्थाएं अंततः लंबी मंदी के दौर में चली गई। उपर्युक्त संदर्भित गतिविधियों ने नए आउटपुट अंतराल की माप को जन्म दिया जिसे लोकप्रिय रूप से वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतराल या एफएनओजी के रूप में जाना जाता है जो मुद्रास्फीति की अपेक्षा बैंक क्रेडिट और आस्ति बाजारों में हुई हलचल से वित्तीय गतिविधियों पर आधारित आर्थिक वृद्धि की संधारणीयता का मूल्यांकन करता है। इस माप में, सकारात्मक आउटपुट अंतराल वित्तीय बाजार में अधिक गतिविधियों के कारण अर्थव्यवस्था में अति-उष्णता दर्शाता है जबकि नकारात्मक आउटपुट अंतराल दबावग्रस्त वित्तीय स्थितियों के चलते अर्थव्यवस्था में सुस्ती दर्शाता है। अग्रणी केंद्रीय बैंक जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड, दि यूरोपीयन सेंट्रल बैंक, बैंको डी एसपाना आदि हैं, मौद्रिक नीति के लिए एफएनओजी का एक इनपुट के रूप में उपयोग करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष , अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक और एशियन विकास बैंक ने भी मौद्रिक नीति के लिए एफएनओजी की उपयोगिता पर जोर डाला है। एफएनओजी का भारतीय संदर्भ में भी अनुमान लगाया गया है। इस अनुमान को अब अक्टूबर दो हज़ार सत्रह से रिज़र्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में आउटपुट अंतराल के पारंपरिक उपायों के साथ सम्मिलित किया गया है। एफएनओजी का अनुमान लगाने के लिए पद्धति और भारतीय संदर्भ में अनुभनजन्य अनुमान नीचे दिए गए हैं। तकनीकी ब्यौरे अनुलग्नक में हैं। वास्तविक आउटपुट से भिन्न, संभावित आउटपुट का स्तर और इस प्रकार आउटपुट अंतराल सीधे नहीं देखा जा सकता और इसका अनुमान अन्य उपलब्ध समष्टि आर्थिक आंकड़ों से लगाया जाता है। संभावित आउटपुट का अनुमान लगाने के लिए विभिन्न पद्धतियों का उपयोग किया गया है, किंतु वे सभी मानती हैं कि आउटपुट को प्रवृत्ति और चक्रीय संघटक में वर्गीकृत किया जा सकता है। संभावित आउटपुट और आउटपुट अंतराल का अनुमान लगाने का सबसे सामान्य सांख्यिकीय दृष्टिकोण एकल चरीय सांख्यिकीय फिल्टर जैसे होडरिक-प्रेसकॉट फिल्टर का उपयोग करना है जो देखे गए आउटपुट आंकड़ों से चक्र और प्रवृत्ति निकालने में मददगार होता है। एकल चरीय दृष्टिकोण का लाभ है कि यह सरल है और इसे आउटपुट आंकड़ों अर्थात सकल घरेलू उत्पाद के लिए सीधा उपयोग किया जा सकता है। तथापि, एकल चरीय फिल्टरों से आउटपुट अंतराल अनुमानों की अनेक सीमाएं हैं। वे स्वरूप में पूरी तरह से सांख्यिकीय हैं और किसी प्रकार की आर्थिक संरचना को सम्मिलित नहीं करते हैं तथा किसी संभावित आउटपुट या आउटपुट अंतराल का आर्थिक परिकल्पना के अनुरूप नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त, एकल चरीय सांख्यिकीय फिल्टर स्वाभाविक रूप से एंड-पॉइंट समस्या से ग्रस्त होते हैं जबकि प्रवृत्ति और चक्र के नवीनतम अनुमानों में नई सूचना के आने से काफी संशोधन होता है। इस प्रकार, वे नवीनतम अवधि के लिए कम सटीक अनुमान उपलब्ध करा सकते हैं जिनका नीति निर्माण में अधिक महत्व होता है। एकल चरीय दृष्टिकोणों के साथ जुड़ी उपर्युक्त संदर्भित समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए बहु-चरीय कॉलमैन फिल्टर तकनीक का पालन किया जाता है जिसमें अन्य समष्टि-आर्थिक आंकड़ों का उपयोग होता है जो उल्लेखनीय हैं। एमवीकेएफ का उपयोग करते हुए पारंपरिक आउटपुट अंतराल की माप करने के लिए, अनुसंधानकर्ताओं ने मुद्रास्फीति को अतिरिक्त चर के रूप में शामिल किया है क्योंकि इसे असंधारणीयता का मुख्य स्रोत माना जाता है। इस प्रकार प्राप्त आउटपुट अंतराल को मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतराल कहा जाता है। एमवीकेएफ के साथ मापे जाने वाले एफएनओजी में, अनुसंधानकर्ताओं ने मुद्रास्फीति की बजाय वित्तीय चरों के एक सेट का उपयोग किया है। उपयोग किए गए वित्तीय चर मुख्य रूप से बैंक क्रेडिट वृद्धि और रियल स्टॉक बाजार प्रतिफल हैं। इस प्रकार मुद्रास्फीति-तटस्थ माप के प्रति जो मुद्रास्फीति को असंधारणीयता के स्रोत के रूप में सम्मिलित करती है, एफएनओजी में वित्तीय चरों का उपयोग आउटपुट अंतराल का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है । सारणी एक में प्रस्तुत अनुमानित परिणाम दर्शाते हैं कि वास्तविक नीति दर चार तिमाहियों के अंतराल के साथ एफएनओजी को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। वास्तविक क्रेडिट वृद्धि और वास्तविक स्टॉक बाजार प्रतिफल क्रमशः दो तिमाहियों और एक तिमाही के अंतराल के साथ एफएनओजी को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। ।तालिका एक: रिग्रेशन अनुमान - निर्भर चरः आउटपुट गैप yt : आउटपुट अंतर; rt: वास्तविक ब्याज दर; bct: असली बैंक क्रेडिट वृद्धि; स्रोतः भारतीय अर्थव्यवस्था पर डाटाबेस , आरबीआई और लेखकों की गणना। तालिका एक में एफएनओजी अनुमानों की समयबद्ध योजना संकेत देती है कि पूर्व जीएफसी अवधि में एफएनओजी सकारात्मक था - वास्तविक उत्पादन संभावित उत्पादन से ऊपर था जो वित्तीय क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में कुछ असंतुलन का सूचक है। यह उल्लेखनीय है कि दो हज़ार पाँच-छः से क्यू एक: दो हज़ार आठ-नौ की अवधि के दौरान वास्तविक गैर-खाद्य ऋण और वास्तविक शेयर बाजार प्रतिफल क्रमशः तेईस.आठ प्रतिशत और चौंतीस.नौ प्रतिशत की वार्षिक औसत दर से बढ़ा, जो औसत वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर नौ.तीन प्रतिशत की तुलना में बहुत तेज है। जीएफसी के दौरान, एफओएनजी कुछ वर्षों तक सकारात्मक आउटपुट अंतर देखने के लिए उबरने के पहले मुख्य रूप से परिसंपत्तियों की कीमतों में तेज गिरावट के कारण नकारात्मक हो गया। हालांकि, दो हज़ार तेरह-चौदह के बाद, एफएनओजी कम क्रेडिट वृद्धि और निराशाजनक शेयर बाजार स्थितियों के कारण नकारात्मक बना रहा, यह दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से धीरे-धीरे सीमित हो गया। भारत के लिए एफएनओजी बनाम मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर की एक और विस्तृत तुलना से पता चलता है कि दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर हैं जोकि तीन चरणों से स्पष्ट हो जाता है। चरण I में, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर से अधिक था और अधिकतर सकारात्मक क्योंकि इस अवधि में उच्च क्रेडिट वृद्धि और वास्तविक शेयर बाजार प्रतिफल की घटनाएं देखी गई। हालांकि, मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर पूरी अवधि में नकारात्मक रहा। चरण II में, मुख्य रूप से बैंकों और निगमों की तनावग्रस्त बैलेंस शीट के साथ-साथ वास्तविक शेयर बाजार के नकारात्मक प्रतिफल के रूप में प्रतिबिंबित निराशाजनक शेयर बाजार के कारण कम क्रेडिट वृद्धि के रूप में कमजोर वित्तीय स्थितियों के कारण एफएनओजी नकारात्मक क्षेत्र में रहा और मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतर से काफी कम रहा। चरण III में, एफएनओजी नकारात्मक रहा लेकिन क्रेडिट वृद्धि और उत्साहजनक शेयर बाजार स्थितियों के पुनरुत्थान को दर्शाते हुए,समाप्ति के करीब रहा। इस चरण के दौरान, मुद्रास्फीति-तटस्थ उत्पादन अंतराल भी नकारात्मक रहा और समाप्त होने के लिए प्रतिबद्ध रहा, लेकिन एफएनओजी की तुलना में धीमी गति से। एफएनओजी को समझाने में वित्तीय चर की भूमिका एफएनजीजी के ऐतिहासिक परिवर्तनीय विश्लेषण से भी स्पष्ट है,जो इसके विकास पर विभिन्न कारकों के योगदान को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, क्रेडिट वृद्धि और शेयर बाजार प्रतिफल ने चरण II में एफएनओजी के विकास के लिए नकारात्मक योगदान दिया। हालांकि, चरण III में, वित्तीय बाजार चरों ने एफएनजीजी को सकारात्मक योगदान दिया है। वित्तीय बाजार की जानकारी को शामिल करने वाले आउटपुट अंतर के आकलन ने हाल के वर्षों में लोकप्रियता हासिल की है। एफएनओजी उपाय, जो वित्तीय बाजार संकेतकों को शामिल करता है, नीति उद्देश्यों के लिए अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए उपयोग किए गए संकेतकों के सेट के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर माप मुद्रास्फीति पर अर्थव्यवस्था में असंतुलन के स्रोत के रूप में निर्भर है। तथापि, यह उपाय प्री-जीएफसी अवधि में उच्च क्रेडिट वृद्धि और परिसंपत्ति बाजार रिटर्न से उत्पन्न असंतुलन को पकड़ने में असफल रहा। एफएनओजी आउटपुट अंतर का आकलन करने के लिए एफएनओजी वित्तीय क्षेत्र के संकेतकों को ध्यान में रखता है, जैसे कि क्रेडिट और परिसंपत्ति बाजार चर । भारतीय परिपेक्ष्य में तिएक:दो हज़ार छः-सात से तितीन: दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह की अवधि के लिए अनुमानित एफएनओजी उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, खासकर उच्च / निम्न क्रेडिट वृद्धि और शेयर बाजार रिटर्न की अवधि में, जो कि पारंपरिक उपाय नहीं प्रदान करते। एफओएनजी तितीन: दो हज़ार चौदह:पंद्रह के बाद से नकारात्मक रहा, लेकिन तिदो: दो हज़ार सत्रह:अट्ठारह तक लगभग बंद हुआ। मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के साथ एफएनओजी की तुलना से पता चलता है कि तिएक: दो हज़ार बारह-तेरह से तिचार: दो हज़ार चौदह-पंद्रह के दौरान, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर से ऊपर रहा। तथापि, तिएक:दो हज़ार पंद्रह-सोलह से तिचार:दो हज़ार सोलह-सत्रह के दौरान, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर से काफी नीचे रहा, जो ज्यादातर कम क्रेडिट वृद्धि के कारण था। तिएक:दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से, दोनों मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर और एफएनओजी नकारात्मक बने रहे लेकिन धीरे-धीरे बंद होने की तरफ झुके। हालांकि, एफएनओजी मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के मुकाबले तेजी से बंद हो गया। संभावित आउटपुट और आउटपुट अंतर दोनों के अनुमान असुरक्षित चर हैं, और उनके अनुमान चयनित दृष्टिकोण के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। इसलिए, आरबीआई स्टाफ, वैकल्पिक अनुमान दृष्टिकोण का उपयोग करके, विभिन्न सर्वेक्षणों और अन्य समष्टि आर्थिक चर से प्राप्त जानकारी के पूरक, कारोबार चक्र के चरण पर अधिक मजबूत संदर्भ आकर्षित करने के लिए आउटपुट अंतराल का मूल्यांकन करता है। सी. बोरियो. पी. डिसयाटैट और एम. जुसेलियस, "रिथिंकिंग पोटेंशियल आउटपुटः एमबेडिंग इनफॉर्मेशन एबाउट द फाइनेंशियल साइकल," बीआईएस वर्किंग पेपर, चार सौ चार, । ए ओकुन, "पोटेंशियल जीएनपीः इट्स मेजेरमेंट एण्ड सिगनिफिकेंट," बिजनेस और इकॉनामिक स्टेटिस्टिक्स सेक्शन, वाशिंगटनःअमेरिकन स्टेटिकल एसोशिएसन, , पीपी अट्ठानवे-एक सौ चार। डी.पी. रथ, पी. मित्रा, और जे. जॉन, "ए मेजर ऑफ फाइनेंस-न्यूट्रल आउटपुट गैप फॉर इंडिया", आरबीआई वर्किंग पेपर सीरीज़, डब्ल्यूपीएस , मार्च । यह तकनीकी अनुबंध आउटपुट अंतर के यूनिवेरिएट स्टेटिकल फ़िल्टर, मुद्रास्फीति-तटस्थ और वित्त-तटस्थ उपायों के विश्लेषणात्मक सेटअप का विवरण देता है। होड्रिक-प्रेस्कॉट फ़िल्टर आउटपुट अंतर का आकलन करने के लिए सबसे लोकप्रिय रूप से उपयोग किया जानेवाला यूनिवेरिएट स्टेटिकल फ़िल्टर में से एक है। यह फ़िल्टर पर्यवेक्षण के भारित चल औसत पर आधारित है जो नमूना अवधि की शुरुआत और अंत के करीब पर्यवेक्षण पर अधिक भार डालता है। यह विधि निम्न फ़ंक्शन को कम करके संभावित आउटपुट प्राप्त करती है, पहला शब्द प्रवृत्ति से Yt के वर्ग विचलन का योग है, अर्थात संभावित उत्पादन , जो चक्रीय घटक को दंडित करता है। दूसरा शब्द संभावित आउटपुट के दूसरे अंतर के वर्गों के योग के एकाधिक λ है। दूसरा शब्द संभावित आउटपुट की वृद्धि दर में परिवर्तन को दंडित करता है। पॉजिटिव पैरामीटर λ जितना बड़ा होगा, उतना अधिक जुर्माना और परिणामस्वरूप संभावित अनुमान बराबर होगा। इसलिए, सीमित मामले में अगर λ = शून्य तब नरमी के लिए कोई दंड नहीं है, फिल्टर इस श्रृंखला के रूप में ही झुकाव उत्पन्न करता है। दूसरी तरफ, यदि λ बहुत उंचाई पर है, तो नरमी के लिए वहां एक उच्च वेटेज होगा और झुकाव एक सीधी रेखा होगी। आउटपुट अंतर को लॉग टर्म में वास्तविक आउटपुटचार के विचलन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो इसके संभावित स्तर से होता है। समीकरणों और के अतिरिक्त, आउटपुट अंतर को निम्नानुसार एक ऑटो रेग्रेसिव प्रक्रिया के रूप में मॉडलिंग किया गया है : मुद्रास्फीति-तटस्थ दृष्टिकोण में, आउटपुट के टिकाऊ स्तर को संगत आउटपुट के स्तर के रूप में कम और स्थिर मुद्रास्फीति के साथ परिभाषित किया गया है। इसलिए, मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर माप का अनुमान लगाने के लिए, मुद्रास्फीति के लिए फिलिप्स कर्व इक्वेशन को शामिल किया गया, जो निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार मुद्रास्फीति पर देखने योग्य डेटा के आउटपुट अंतर के विकास को जोड़ता है। इस ढांचे से अनुमानित आउटपुट अंतर मुद्रास्फीति स्तर के अनुरूप है और मुद्रास्फीति-तटस्थ आउटपुट अंतर के रूप में जाना जाता है। इस ढांचे में, वास्तविक ब्याज दर के साथ वित्तीय चर आउटपुट अंतर के लिए विवरणात्मक चर के रूप में उपयोग किया जाता है। इन चरों को शामिल करने के बाद संशोधित आउटपुट अंतर समीकरण नीचे दिया गया हैः जहां Xt = ; rt : वास्तविक पोलिसी रेट; bct : वास्तविक बैंक क्रेडिट वृद्धि; sensext : बीएसई सेंसेक्स द्वारा वास्तविक स्टॉक मार्केट रिटर्न प्रॉक्सी। इस ढांचे से अनुमानित आउटपुट अंतर वित्त-तटस्थ आउटपुट अंतर के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह माप वित्तीय चर में गतिविधि के लिए नियंत्रण करता है। बहुविकल्पीय कलमैन फ़िल्टर लागू करके राज्य स्पेस ढांचे में क्वासी मैक्सिमम लाइकलीहुड मैथड का उपयोग करके समीकरणों की प्रणाली का अनुमान लगाया जाता है। रूडोल्फ ई. काल्मन के नाम पर रखा गया कलमैन फ़िल्टरिंग, एक एल्गोरिथम है जो समय के साथ देखे गए माप चर की एक श्रृंखला का उपयोग करता है, जिसमें सांख्यिकीय नॉइज़ और अन्य त्रुटियां होती हैं, और अप्रत्यक्ष चर के अनुमान उत्पन्न करती हैं।
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(22.1) मनः कर्म-मयं नृणां इंद्रियैः पंचभिर् युतम् ।
मरने के बाद मनुष्य एक लोक से दूसरे लोक में जाता है। लोकात् लोकं प्रयाति - एक लोक को छोड़कर अन्य लोक में प्रयाण करता है, यानी चला जाता है। 'प्रयाति' यानी प्रयाण करना। मन अकेला नहीं जाता। अपने साथ और भी कुछ लेकर जाता है। कह रहे हैं कि मन कर्म को लेकर जाता है और पाँच इन्द्रियों को लेकर जाता है। कोई कहेगा : 'मरने के बाद इन्द्रियाँ तो जैसी-की-तैसी देह के साथ जुड़ी रहती हैं। देह के साथ ही आँख, कान, नाक - सारी इन्द्रियाँ चलायी जाती हैं। मन के साथ तो इन्द्रियाँ जाती नहीं!' लेकिन बात ऐसी नहीं है। हम इन्द्रियों को नहीं जलाते। हम जलाते हैं, देह को। मरने के बाद आँखें तो रहत हैं, पर दर्शन-शक्ति नहीं रहती, दर्शन की वासना नहीं रहती। कान हैं, लेकिन कान की शक्ति नहीं, श्रवण की वासना नहीं। मन के कारण वासना रहती है और प्राण के कारण शक्ति। सुनने और देखने की वासना लेकर मन जाता है। फिर कर्म क्या चीज है? कर्म का फल भोगना पड़ेगा। यह संसार-प्रवाह का अध्याय है। संसार यानी बहाव। संसार सतत् बह रहा है। 'संसरण्म्' यानी बहाव। कर्म और इन्द्रियों के साथ मन कहाँ-से-कहा जाता है? ते कहते हैं : 'लोकात् लोकम् ।' आत्मा क्या करता है? आत्मा बिलकुल अलग है - अन्यः । आत्मा तदनुवर्तते - आत्मा मन के पीछे-पीछे जाता है। आत्मा यानी जीवात्मा। 'क़ुरआन' में इसे 'रूह' कहा है। मुहम्मद पैगम्बर से पूछा गया : 'क्या तुम रूह जानते हो?' तो उन्होंने उत्तर दिया : 'यदि मैं जानता, तो कुल दुनिया पर मेरी सत्ता चलती।' इसका अर्थ है कि जीव-विषय हमारे हाथ में नहीं। यह बात सही है।
(22.2) नित्यदा ह्यंग! भूतानि भवन्ति न भवन्ति च ।
अंग संबोधन जैसा दीखता है, लेकिन यह संबोधन नहीं, अव्यय है। अरे! ये प्राणी सतत् प्रकट होते और लुप्त हो जाते हैं - भूतानि भवन्ति न भवन्ति च । अभी हम यहाँ बैठे हैं। घण्टेभर बैठे ही रहेंगे यानी हम कायम रहेंगे। लेकिन भागवत कहती है कि ऐसी बात नहीं। मनुष्य प्रतिक्षण मरता और पैदा होता है। मरने और पैदा होने की यह क्रिया अतिशय वेग से चल रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिसे हम निद्रा कहते हैं, उसमें भी एक क्षण निद्रा रहती है और दूसरे क्षण जागृति। इसी तरह जिसे जागृति कहते हैं, उसमें एक क्षण जागृति तो दूसरे क्षण निद्रा रहती है। निद्रा में निद्रा के क्षण अधिक होते हैं, इसलिए उसे 'निद्रा' कहते हैं और जागृति में अधिक क्षण जागृति रहती है, इसलिए उसे 'जागृति' कहते हैं। इसी तरह भागवत कहती है कि प्रत्येक वाणी प्रतिक्षण मरता और जन्म पाता है। पर यह क्रिया समझ में नहीं आती, क्योंकि यह सूक्ष्म है और काल का वेग है तीव्र - कालेन अलक्ष्य-वेगेन सूक्ष्मत्वात्। इसलिए हमें भास नहीं होता कि प्राणि प्रतिक्षण मरता और पैदा होता है। इसी का अधिक स्पष्टीकरण आगे के श्लोक में किया जाता है :
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मनः कर्म-मयं नृणां इंद्रियैः पंचभिर् युतम् । मरने के बाद मनुष्य एक लोक से दूसरे लोक में जाता है। लोकात् लोकं प्रयाति - एक लोक को छोड़कर अन्य लोक में प्रयाण करता है, यानी चला जाता है। 'प्रयाति' यानी प्रयाण करना। मन अकेला नहीं जाता। अपने साथ और भी कुछ लेकर जाता है। कह रहे हैं कि मन कर्म को लेकर जाता है और पाँच इन्द्रियों को लेकर जाता है। कोई कहेगा : 'मरने के बाद इन्द्रियाँ तो जैसी-की-तैसी देह के साथ जुड़ी रहती हैं। देह के साथ ही आँख, कान, नाक - सारी इन्द्रियाँ चलायी जाती हैं। मन के साथ तो इन्द्रियाँ जाती नहीं!' लेकिन बात ऐसी नहीं है। हम इन्द्रियों को नहीं जलाते। हम जलाते हैं, देह को। मरने के बाद आँखें तो रहत हैं, पर दर्शन-शक्ति नहीं रहती, दर्शन की वासना नहीं रहती। कान हैं, लेकिन कान की शक्ति नहीं, श्रवण की वासना नहीं। मन के कारण वासना रहती है और प्राण के कारण शक्ति। सुनने और देखने की वासना लेकर मन जाता है। फिर कर्म क्या चीज है? कर्म का फल भोगना पड़ेगा। यह संसार-प्रवाह का अध्याय है। संसार यानी बहाव। संसार सतत् बह रहा है। 'संसरण्म्' यानी बहाव। कर्म और इन्द्रियों के साथ मन कहाँ-से-कहा जाता है? ते कहते हैं : 'लोकात् लोकम् ।' आत्मा क्या करता है? आत्मा बिलकुल अलग है - अन्यः । आत्मा तदनुवर्तते - आत्मा मन के पीछे-पीछे जाता है। आत्मा यानी जीवात्मा। 'क़ुरआन' में इसे 'रूह' कहा है। मुहम्मद पैगम्बर से पूछा गया : 'क्या तुम रूह जानते हो?' तो उन्होंने उत्तर दिया : 'यदि मैं जानता, तो कुल दुनिया पर मेरी सत्ता चलती।' इसका अर्थ है कि जीव-विषय हमारे हाथ में नहीं। यह बात सही है। नित्यदा ह्यंग! भूतानि भवन्ति न भवन्ति च । अंग संबोधन जैसा दीखता है, लेकिन यह संबोधन नहीं, अव्यय है। अरे! ये प्राणी सतत् प्रकट होते और लुप्त हो जाते हैं - भूतानि भवन्ति न भवन्ति च । अभी हम यहाँ बैठे हैं। घण्टेभर बैठे ही रहेंगे यानी हम कायम रहेंगे। लेकिन भागवत कहती है कि ऐसी बात नहीं। मनुष्य प्रतिक्षण मरता और पैदा होता है। मरने और पैदा होने की यह क्रिया अतिशय वेग से चल रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिसे हम निद्रा कहते हैं, उसमें भी एक क्षण निद्रा रहती है और दूसरे क्षण जागृति। इसी तरह जिसे जागृति कहते हैं, उसमें एक क्षण जागृति तो दूसरे क्षण निद्रा रहती है। निद्रा में निद्रा के क्षण अधिक होते हैं, इसलिए उसे 'निद्रा' कहते हैं और जागृति में अधिक क्षण जागृति रहती है, इसलिए उसे 'जागृति' कहते हैं। इसी तरह भागवत कहती है कि प्रत्येक वाणी प्रतिक्षण मरता और जन्म पाता है। पर यह क्रिया समझ में नहीं आती, क्योंकि यह सूक्ष्म है और काल का वेग है तीव्र - कालेन अलक्ष्य-वेगेन सूक्ष्मत्वात्। इसलिए हमें भास नहीं होता कि प्राणि प्रतिक्षण मरता और पैदा होता है। इसी का अधिक स्पष्टीकरण आगे के श्लोक में किया जाता है :
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गोखले ने कहा,"इसके पीछे जरूरी सोच यह है कि हर बार जब कोई बड़ी आपदा आती है तो तत्काल राहत पहुंचाई जा सके तथा लोगों को जल्द से जल्द पुनर्वासित किया जा सके। जबकि ऐसे हादसों के बाद छोटे देशों, कमजोर देशों और विकासशील देशों में पुनर्वास के कामों को छोड़ दिया जाता है। "विदेश सचिव ने कहा, "यह एक ऐसा स्थान है जो अभी तक किसी के द्वारा नहीं भरा गया है। यह संयुक्त राष्ट्र के संगठनों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करता है जो राहत या पुनर्वास कार्याें में संलग्न हैं।
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गोखले ने कहा,"इसके पीछे जरूरी सोच यह है कि हर बार जब कोई बड़ी आपदा आती है तो तत्काल राहत पहुंचाई जा सके तथा लोगों को जल्द से जल्द पुनर्वासित किया जा सके। जबकि ऐसे हादसों के बाद छोटे देशों, कमजोर देशों और विकासशील देशों में पुनर्वास के कामों को छोड़ दिया जाता है। "विदेश सचिव ने कहा, "यह एक ऐसा स्थान है जो अभी तक किसी के द्वारा नहीं भरा गया है। यह संयुक्त राष्ट्र के संगठनों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करता है जो राहत या पुनर्वास कार्याें में संलग्न हैं।
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इस नक्सली सरेंडर करने के बाद पुलिस को नक्सलियों के कई अहम राज़ बताए। जिसके चलते पुलिस वक्त रहते नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम करने में सफल रही।
पुलिस ने राजेंद्र को 10 लाख रुपए का इनामी घोषित किया था।
वो घर से यह सोच कर निकला था कि कोई रहबर उसके और उसके परिवार की आर्थिक परेशानियों को समझेगा और उसे नौकरी दिलाएगा। लेकिन रास्ते में उसे रहबर तो नहीं मिला पर राह भटकाने वाला एक साथी जरूर मिल गया। वो उसे अपने साथ लेकर उसे गांव की गलियों से बहुत दूर जंगल और पहाड़ों की खौफनाक दुनिया में ले गया। उसने उसे नक्सलियों से मिलवाया और तब से लेकर कई सालों तक वो लाल आतंक का गुलाम बना रहा। आज बात हो रही है झारखंड के गुमला जिले के आदिवासी इलाकों में रहने वाले राजेंद्र उरांव की।
बात 90 के दशक की है जब बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र को पैसों का लालच देकर नक्सली संगठन में शामिल कर लिया गया। करीब 10 साल तक राजेंद्र ने झारखंड से सटे छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के बीहड़ों में नक्सली ट्रेनिंग ली। इस दौरान उसे हथियार चलाने, गुरिल्ला युद्ध और पुलिस को चकमा देने के गुर सिखाए गए। लेकिन इतने सालों तक नक्सलियों के साथ रहने के बावजूद राजेंद्र का दिल कभी भी खौफ और दहशत के कामों में नहीं लगा। एक दिन अचानक वो संगठन छोड़ नए रोजगार की तलाश में रांची आ गया। लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी उसे कोई रोजगार नहीं मिला। थक-हार कर राजेंद्र ने असम के चाय बगानों में मजदूरी शुरू कर दी। उस वक्त बड़ी मुश्किल से राजेंद्र ने खुद को जुर्म के रास्ते से अलग किया था।
लेकिन राजेंद्र की किस्मत एक बार फिर उसे दगा दे गई। मजदूरी करने में उसका जी नहीं लगा और वो अपने घर वापस आ गया। यहां उसकी मुलाकात विनोद उरांव नाम के एक शख्स से हुई। दरअसल विनोद नक्सलियों के लिए आदमी ढूंढने का काम करता था। लिहाजा विनोद एक बार फिर राजेंद्र को उसी खून-खराबे के रास्ते पर ले गया जहां से वो कभी लौटा था। दोबारा नक्सलवाद के रास्ते पर लौटे राजेंद्र को इस बार नक्सलियों ने संगठन में काफी तरजीह दी। जल्दी ही उसे खूंखार नक्सली संगठन झारखंड जन मुक्ति परिषद का जोनल कमांडर बना दिया गया।
इसके बाद राजेंद्र ने नक्सली दस्ते के साथ मिलकर गुमला, लोहरदग्गा, एवं पलामू जिले में ठेकेदारों से मोटी लेवी वसूली। इतना ही नहीं उसने कई बम ब्लास्ट भी किए और कई बार उसका सामना पुलिस वालों से भी हुआ। झारखंड के कई जिलों में राजेंद्र ने अपने गैंग के साथ मिलकर कई गंभीर वारदातों को अंजाम दिया। देखते ही देखते नक्सली राजेन्द्र उरांव पुलिस के लिए सिरदर्द साबित होने लगा। लिहाजा झारखण्ड पुलिस ने इस नक्सली पर 10 लाख रुपए इनाम की घोषणा कर दी तथा इसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज़ कर दिया।
पुलिस की सख्ती ने राजेंद्र को हिला कर रख दिया। अब राजेंद्र किसी तरह वापस मुख्यधारा में लौटने के लिए बेचैन हो उठा। आखिरकार झारखंड पुलिस की सरेंडर पॉलिसी 'नई दिशा' के तहत 15 फरवरी, 2018 को झारखंड जनमुक्ति परिषद-जेजेएमपी के उग्रवादी राजेंद्र उरांव उर्फ संतोष ने आत्मसमर्पण कर दिया।
राजेंद्र के सरेंडर के बाद उनकी पत्नी लीला देवी का कहना है, 'मैंने घने जंगलों से अपने पति को खोज निकाला और उन्हें खूब समझाया, बच्चों का वास्ता देने पर वो आत्म समर्पण के लिए मान गए।' इसके बाद पुलिस से संपर्क कर राजेंद्र ने गुमला डीसी विनोद कुमार व एसपी राजकुमार लकड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद पुलिस द्वारा नई दिशा के प्रावधन अन्तर्गत 10 लाख रुपए का चेक भी उसे दिया गया।
सरेंडर करने के बाद राजेंद्र उरांव ने पुलिस को कई राज बताए। जिसमें मुख्य रूप से भगवान हनुमान की जन्मस्थली आंजनधाम को भाकपा माओवादियों द्वारा दहलाने की योजना का खुलासा था। पुलिस ने इस साजिश का भेद जानने के बाद इसे नाकाम कर दिया था। इतना नहीं राजेंद्र ने पुलिस वालों को कई जगह जमीन में छिपे लैंड माइंस की भी जानकारी दी थी। जिसे पुलिस ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया। आज राजेंद्र का परिवार शांतिपूर्ण जीवन जी रहा है।
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इस नक्सली सरेंडर करने के बाद पुलिस को नक्सलियों के कई अहम राज़ बताए। जिसके चलते पुलिस वक्त रहते नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम करने में सफल रही। पुलिस ने राजेंद्र को दस लाख रुपए का इनामी घोषित किया था। वो घर से यह सोच कर निकला था कि कोई रहबर उसके और उसके परिवार की आर्थिक परेशानियों को समझेगा और उसे नौकरी दिलाएगा। लेकिन रास्ते में उसे रहबर तो नहीं मिला पर राह भटकाने वाला एक साथी जरूर मिल गया। वो उसे अपने साथ लेकर उसे गांव की गलियों से बहुत दूर जंगल और पहाड़ों की खौफनाक दुनिया में ले गया। उसने उसे नक्सलियों से मिलवाया और तब से लेकर कई सालों तक वो लाल आतंक का गुलाम बना रहा। आज बात हो रही है झारखंड के गुमला जिले के आदिवासी इलाकों में रहने वाले राजेंद्र उरांव की। बात नब्बे के दशक की है जब बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र को पैसों का लालच देकर नक्सली संगठन में शामिल कर लिया गया। करीब दस साल तक राजेंद्र ने झारखंड से सटे छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के बीहड़ों में नक्सली ट्रेनिंग ली। इस दौरान उसे हथियार चलाने, गुरिल्ला युद्ध और पुलिस को चकमा देने के गुर सिखाए गए। लेकिन इतने सालों तक नक्सलियों के साथ रहने के बावजूद राजेंद्र का दिल कभी भी खौफ और दहशत के कामों में नहीं लगा। एक दिन अचानक वो संगठन छोड़ नए रोजगार की तलाश में रांची आ गया। लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी उसे कोई रोजगार नहीं मिला। थक-हार कर राजेंद्र ने असम के चाय बगानों में मजदूरी शुरू कर दी। उस वक्त बड़ी मुश्किल से राजेंद्र ने खुद को जुर्म के रास्ते से अलग किया था। लेकिन राजेंद्र की किस्मत एक बार फिर उसे दगा दे गई। मजदूरी करने में उसका जी नहीं लगा और वो अपने घर वापस आ गया। यहां उसकी मुलाकात विनोद उरांव नाम के एक शख्स से हुई। दरअसल विनोद नक्सलियों के लिए आदमी ढूंढने का काम करता था। लिहाजा विनोद एक बार फिर राजेंद्र को उसी खून-खराबे के रास्ते पर ले गया जहां से वो कभी लौटा था। दोबारा नक्सलवाद के रास्ते पर लौटे राजेंद्र को इस बार नक्सलियों ने संगठन में काफी तरजीह दी। जल्दी ही उसे खूंखार नक्सली संगठन झारखंड जन मुक्ति परिषद का जोनल कमांडर बना दिया गया। इसके बाद राजेंद्र ने नक्सली दस्ते के साथ मिलकर गुमला, लोहरदग्गा, एवं पलामू जिले में ठेकेदारों से मोटी लेवी वसूली। इतना ही नहीं उसने कई बम ब्लास्ट भी किए और कई बार उसका सामना पुलिस वालों से भी हुआ। झारखंड के कई जिलों में राजेंद्र ने अपने गैंग के साथ मिलकर कई गंभीर वारदातों को अंजाम दिया। देखते ही देखते नक्सली राजेन्द्र उरांव पुलिस के लिए सिरदर्द साबित होने लगा। लिहाजा झारखण्ड पुलिस ने इस नक्सली पर दस लाख रुपए इनाम की घोषणा कर दी तथा इसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज़ कर दिया। पुलिस की सख्ती ने राजेंद्र को हिला कर रख दिया। अब राजेंद्र किसी तरह वापस मुख्यधारा में लौटने के लिए बेचैन हो उठा। आखिरकार झारखंड पुलिस की सरेंडर पॉलिसी 'नई दिशा' के तहत पंद्रह फरवरी, दो हज़ार अट्ठारह को झारखंड जनमुक्ति परिषद-जेजेएमपी के उग्रवादी राजेंद्र उरांव उर्फ संतोष ने आत्मसमर्पण कर दिया। राजेंद्र के सरेंडर के बाद उनकी पत्नी लीला देवी का कहना है, 'मैंने घने जंगलों से अपने पति को खोज निकाला और उन्हें खूब समझाया, बच्चों का वास्ता देने पर वो आत्म समर्पण के लिए मान गए।' इसके बाद पुलिस से संपर्क कर राजेंद्र ने गुमला डीसी विनोद कुमार व एसपी राजकुमार लकड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद पुलिस द्वारा नई दिशा के प्रावधन अन्तर्गत दस लाख रुपए का चेक भी उसे दिया गया। सरेंडर करने के बाद राजेंद्र उरांव ने पुलिस को कई राज बताए। जिसमें मुख्य रूप से भगवान हनुमान की जन्मस्थली आंजनधाम को भाकपा माओवादियों द्वारा दहलाने की योजना का खुलासा था। पुलिस ने इस साजिश का भेद जानने के बाद इसे नाकाम कर दिया था। इतना नहीं राजेंद्र ने पुलिस वालों को कई जगह जमीन में छिपे लैंड माइंस की भी जानकारी दी थी। जिसे पुलिस ने समय रहते निष्क्रिय कर दिया। आज राजेंद्र का परिवार शांतिपूर्ण जीवन जी रहा है।
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अगर आप चाहती हैं कि आपकी जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल हमेशा ही नई बनी रहे तो आप उसकी देखरेख कुछ इस तरह करें।
जब मौसम बदलता है तो कपड़ों के साथ-साथ फुटवियर की च्वॉइस में भी परिवर्तन आता है। जहां विंटर्स में अधिकतर महिलाएं तरह-तरह के शूज पहनना पसंद करती हैं, वहीं समर्स में जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल पहनती हैं। चाहे सूट हो या जींस, यह हर तरह के आउटफिट के साथ अच्छी लगती हैं। अगर स्टाइलिश फुटवियर की बात हो तो हैंडक्राफ्ट जूतियां और कोल्हापुरी चप्पल एक परफेक्ट च्वॉइस साबित हो सकती हैं। एक अच्छी क्वालिटी की जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल को लेदर से बनाया जाता है। अगर इनकी सही तरह से देखरेख ना की जाए तो यह फंगस का कारण बन सकता है। इसके अलावा यह देखने में पुराने लगते हैं।
एक बार जब आप अपने कोल्हापुरी चप्पलों पर तेल लगाती हैं, तो उसके बाद आप एक पुराने अखबार में लपेट दें। चप्पल को अखबार में लपेटते समय आप इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्हें विपरीत दिशाओं में रखें। अब आप इसके बाद आप अखबार के उपर रबर लगाएं ताकि यह अच्छी तरह फिक्स हो जाए। अब इस रैप्ड चप्पल को कॉटन बैग में रखें और किसी सूखी जगह पर रखें। अगर आप इस तरह से अपनी कोल्हापुरी चप्पल या जूतियों को इस तरह रखती हैं तो इससे आपकी चप्पल कभी भी खराब नहीं होंगी।
अपनी कोल्हापुरी चप्पल को लंबे समय तक पैक करने से बचें क्योंकि इससे आपके चप्पल को ढकने वाले पदार्थ पर भी फंगस लगने का खतरा रहेगा। बेहतर होगा कि आप अपनी चप्पल को कभी-कभी एक घंटे के लिए धूप में रखें।
कोल्हापुरी चप्पल को पहनने पर कभी-कभी आपको हार्ड फील होता है, जिससे परेशानी होती है। इससे बचने के लिए आप इस पर मॉइस्चराइजर की एक बूंद अप्लाई करें। हालांकि बहुत अधिक ऐसा ना करें, क्योंकि इससे चप्पल स्लिपी हो जाएगी। आप अपनी कोल्हापुरी चप्पल को सप्ताह में एक या दो बार पॉलिश भी कर सकती हैं। इससे उनकी शाइन बनी रहती है।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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अगर आप चाहती हैं कि आपकी जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल हमेशा ही नई बनी रहे तो आप उसकी देखरेख कुछ इस तरह करें। जब मौसम बदलता है तो कपड़ों के साथ-साथ फुटवियर की च्वॉइस में भी परिवर्तन आता है। जहां विंटर्स में अधिकतर महिलाएं तरह-तरह के शूज पहनना पसंद करती हैं, वहीं समर्स में जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल पहनती हैं। चाहे सूट हो या जींस, यह हर तरह के आउटफिट के साथ अच्छी लगती हैं। अगर स्टाइलिश फुटवियर की बात हो तो हैंडक्राफ्ट जूतियां और कोल्हापुरी चप्पल एक परफेक्ट च्वॉइस साबित हो सकती हैं। एक अच्छी क्वालिटी की जूतियां व कोल्हापुरी चप्पल को लेदर से बनाया जाता है। अगर इनकी सही तरह से देखरेख ना की जाए तो यह फंगस का कारण बन सकता है। इसके अलावा यह देखने में पुराने लगते हैं। एक बार जब आप अपने कोल्हापुरी चप्पलों पर तेल लगाती हैं, तो उसके बाद आप एक पुराने अखबार में लपेट दें। चप्पल को अखबार में लपेटते समय आप इस बात का ध्यान रखें कि आप इन्हें विपरीत दिशाओं में रखें। अब आप इसके बाद आप अखबार के उपर रबर लगाएं ताकि यह अच्छी तरह फिक्स हो जाए। अब इस रैप्ड चप्पल को कॉटन बैग में रखें और किसी सूखी जगह पर रखें। अगर आप इस तरह से अपनी कोल्हापुरी चप्पल या जूतियों को इस तरह रखती हैं तो इससे आपकी चप्पल कभी भी खराब नहीं होंगी। अपनी कोल्हापुरी चप्पल को लंबे समय तक पैक करने से बचें क्योंकि इससे आपके चप्पल को ढकने वाले पदार्थ पर भी फंगस लगने का खतरा रहेगा। बेहतर होगा कि आप अपनी चप्पल को कभी-कभी एक घंटे के लिए धूप में रखें। कोल्हापुरी चप्पल को पहनने पर कभी-कभी आपको हार्ड फील होता है, जिससे परेशानी होती है। इससे बचने के लिए आप इस पर मॉइस्चराइजर की एक बूंद अप्लाई करें। हालांकि बहुत अधिक ऐसा ना करें, क्योंकि इससे चप्पल स्लिपी हो जाएगी। आप अपनी कोल्हापुरी चप्पल को सप्ताह में एक या दो बार पॉलिश भी कर सकती हैं। इससे उनकी शाइन बनी रहती है। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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मुंबई महानगरपालिका आयुक्त इकबाल सिंह चहल पर भ्रष्टाचार करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मोहित कंबोज भारतीय ने दावा किया है कि अगर स्थाई समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव इतना बड़ा भ्रष्टाचार कर सकता है तो स्वाभाविक तौर पर सारी योजनाओं को मंजूर करने वाला बीएमसी आयुक्त भी भ्रष्टाचार कर सकता है। चहल ने तो अमेरिका में संपत्ति खरीदी है और जल्द ही इस संबंध में दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे।
संवाददाता सम्मेलन में मोहित भारतीय ने कहा कि बीएमसी के इतिहास में पहली बार किसी कमिश्नर को आयकर विभाग का नोटिस जारी हुआ। आईटी नोटिस उन्हें तीन मार्च को जारी हुआ। चार मार्च को सुमित ठक्कर ने ट्वीट में इसका खुलासा कर दिया तो चहल ने प्रकरण को दबाने के लिए सुमित के खिलाफ एनसी दर्ज करवा दी। 8 मार्च को आज़ाद मैदान पुलिस ने कोर्ट में जाकर एनसी को एफआईआर में बदले की मांग की, लेकिन कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। इससे लग रहा है कि इसमें कुछ न कुछ झोल हुआ है और कहीं न कहीं चहल घबराए हुए हैं।
श्री भारतीय ने कहा कि स्थाई समिति के फैसले को अंततः कमिश्नर ही मंजूरी प्रदान करता है और बैगर कमिश्नर की मिली-भगत के इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। भाजपा विधायक अमित साटम बीएमसी के भ्रष्टाचार पर किताब तैयार कर रहे हैं जो 15 दिनों में प्रकाशित हो जाएगी। इसमें बीएमसी में दो साल में हुए भ्रष्टाचार का जिक्र होगा। इसलिए जांच को सिर्फ यशवंत जाधव तक ही सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इसमें शामिल सभी अधिकारियों की जांच होनी चाहिए।
मस्जिदों से अजान संवेदनशील मुद्दे श्री भारतीय ने कहा कि मस्जिदों गैरकानूनी ढंग से लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। यह बात इस्लाम की किसी किताब में नहीं लिखी है कि अजान लाउडस्पीकर पर होना चाहिए। देश की कई अदालतों ने इस पर रोक लगाने की बात कही है। मुंबई के पुलिस कमिश्नर को मस्जिद में लगे अवैध लाउडस्पीकर हटाने का आदेश जारी करना चाहिए। लाउडस्पीकर से लोगों को बहुत परेशानी होती है। मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगलप्रभात लोढ़ा शीघ्र ही एक प्रतिनिधि मंडल के साथ पुलिस आयुक्त से मिलने वाले हैं।
महाविकास अघाड़ी सरकार द्वार आए दिन भेजी जा रही नोटिस के बाद मोहित भारतीय ने अपने आवास के बाहर एक नोटिस बॉक्स लगवा दिया है। उन्होंने लिखा है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को सूचित किया जाता है कि यदि आपको किसी भी तरह की नोटिस मुझे भेजवानी हो तो बार बार परेशान होने से बचने के लिए आप मुझे मैसेज करें , मैं तत्काल अपना साथी भेजकर संबंधित विभाग से मँगवा लूँगा या इस बॉक्स में नोटिस भेजे, उसे 24 घंटे में जवाब मिल जाएंगा।
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मुंबई महानगरपालिका आयुक्त इकबाल सिंह चहल पर भ्रष्टाचार करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मोहित कंबोज भारतीय ने दावा किया है कि अगर स्थाई समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव इतना बड़ा भ्रष्टाचार कर सकता है तो स्वाभाविक तौर पर सारी योजनाओं को मंजूर करने वाला बीएमसी आयुक्त भी भ्रष्टाचार कर सकता है। चहल ने तो अमेरिका में संपत्ति खरीदी है और जल्द ही इस संबंध में दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे। संवाददाता सम्मेलन में मोहित भारतीय ने कहा कि बीएमसी के इतिहास में पहली बार किसी कमिश्नर को आयकर विभाग का नोटिस जारी हुआ। आईटी नोटिस उन्हें तीन मार्च को जारी हुआ। चार मार्च को सुमित ठक्कर ने ट्वीट में इसका खुलासा कर दिया तो चहल ने प्रकरण को दबाने के लिए सुमित के खिलाफ एनसी दर्ज करवा दी। आठ मार्च को आज़ाद मैदान पुलिस ने कोर्ट में जाकर एनसी को एफआईआर में बदले की मांग की, लेकिन कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। इससे लग रहा है कि इसमें कुछ न कुछ झोल हुआ है और कहीं न कहीं चहल घबराए हुए हैं। श्री भारतीय ने कहा कि स्थाई समिति के फैसले को अंततः कमिश्नर ही मंजूरी प्रदान करता है और बैगर कमिश्नर की मिली-भगत के इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। भाजपा विधायक अमित साटम बीएमसी के भ्रष्टाचार पर किताब तैयार कर रहे हैं जो पंद्रह दिनों में प्रकाशित हो जाएगी। इसमें बीएमसी में दो साल में हुए भ्रष्टाचार का जिक्र होगा। इसलिए जांच को सिर्फ यशवंत जाधव तक ही सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि इसमें शामिल सभी अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। मस्जिदों से अजान संवेदनशील मुद्दे श्री भारतीय ने कहा कि मस्जिदों गैरकानूनी ढंग से लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। यह बात इस्लाम की किसी किताब में नहीं लिखी है कि अजान लाउडस्पीकर पर होना चाहिए। देश की कई अदालतों ने इस पर रोक लगाने की बात कही है। मुंबई के पुलिस कमिश्नर को मस्जिद में लगे अवैध लाउडस्पीकर हटाने का आदेश जारी करना चाहिए। लाउडस्पीकर से लोगों को बहुत परेशानी होती है। मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगलप्रभात लोढ़ा शीघ्र ही एक प्रतिनिधि मंडल के साथ पुलिस आयुक्त से मिलने वाले हैं। महाविकास अघाड़ी सरकार द्वार आए दिन भेजी जा रही नोटिस के बाद मोहित भारतीय ने अपने आवास के बाहर एक नोटिस बॉक्स लगवा दिया है। उन्होंने लिखा है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को सूचित किया जाता है कि यदि आपको किसी भी तरह की नोटिस मुझे भेजवानी हो तो बार बार परेशान होने से बचने के लिए आप मुझे मैसेज करें , मैं तत्काल अपना साथी भेजकर संबंधित विभाग से मँगवा लूँगा या इस बॉक्स में नोटिस भेजे, उसे चौबीस घंटाटे में जवाब मिल जाएंगा।
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शुक्रवार को अखिलेश यादव ने दिल्ली में जानबूझ कर हेलिकॉप्टर रोकने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले हर तरह के हथकंडे अपनाएगी। उनके इस आरोप पर भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि फिर आप कहने लगेंगे की किसी ने हमारी साइकिल पंचर कर दी।
दरअसल शुक्रवार को दोपहर 1 बजे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुज़फ्फरनगर में एक प्रेस कांफ्रेंस करना था। इसके लिए वे दिल्ली से उड़ान भरने वाले थे लेकिन उनका हेलिकॉप्टर काफी देर तक रुका रहा। हेलिकॉप्टर रुकने की जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से दी और कहा कि मेरे हेलिकॉप्टर को अभी भी बिना कारण बताए दिल्ली में रोककर रखा गया है और मुजफ्फरनगर नहीं जाने दिया जा रहा है। जबकि भाजपा के एक शीर्ष नेता अभी यहां से उड़े हैं। हारती हुई भाजपा की ये हताशा भरी साजिश है। जनता सब समझ रही है।
हालांकि थोड़े देर बाद अखिलेश यादव ने मुज़फ्फरनगर के लिए उड़ान भरी। बाद में जब उनसे हेलिकॉप्टर उड़ने में हुई देरी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं हेलीकॉप्टर में बैठा था तो मुझे कैसे पता होगा कि क्या कारण था, मुझे 2-2:30 घंटे रोका गया। भाजपा चुनाव से पहले हर तरह के हथकंडे अपनाएगी। मुझे ये बताया गया कि आपके पहले भाजपा ने उड़ान भरी है तो उनके लिए एयर ट्रैफिक नहीं है लेकिन सपा के लिए एयर ट्रैफिक रहता है।
अखिलेश यादव के इन आरोपों पर भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने पलटवार किया। नकवी ने कहा कि समाजवादी पार्टी चुनावी चौपाल पर चकल्लस कर रही है, टेक्निकल काम पर पॉलिटिकल पाखंड। अब आप कहने लगेंगे कि हमारा हेलीकॉप्टर 10 मिनट देर से उड़ा, फिर आप कहने लगेंगे की हमारी साइकिल पंचर हो गई वो भाजपा ने कर दिया।
हालांकि अखिलेश के आरोपों पर एयरपोर्ट के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि हाई एयर ट्रैफिक के कारण उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने में देरी हुई। इस दौरान अखिलेश यादव के हेलिकॉप्टर की रिफ्यूलिंग हुई और इसके बाद हेलिकॉप्टर को तुरंत उड़ान भरने की इजाजत दे दी गई।
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शुक्रवार को अखिलेश यादव ने दिल्ली में जानबूझ कर हेलिकॉप्टर रोकने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले हर तरह के हथकंडे अपनाएगी। उनके इस आरोप पर भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि फिर आप कहने लगेंगे की किसी ने हमारी साइकिल पंचर कर दी। दरअसल शुक्रवार को दोपहर एक बजे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुज़फ्फरनगर में एक प्रेस कांफ्रेंस करना था। इसके लिए वे दिल्ली से उड़ान भरने वाले थे लेकिन उनका हेलिकॉप्टर काफी देर तक रुका रहा। हेलिकॉप्टर रुकने की जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से दी और कहा कि मेरे हेलिकॉप्टर को अभी भी बिना कारण बताए दिल्ली में रोककर रखा गया है और मुजफ्फरनगर नहीं जाने दिया जा रहा है। जबकि भाजपा के एक शीर्ष नेता अभी यहां से उड़े हैं। हारती हुई भाजपा की ये हताशा भरी साजिश है। जनता सब समझ रही है। हालांकि थोड़े देर बाद अखिलेश यादव ने मुज़फ्फरनगर के लिए उड़ान भरी। बाद में जब उनसे हेलिकॉप्टर उड़ने में हुई देरी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं हेलीकॉप्टर में बैठा था तो मुझे कैसे पता होगा कि क्या कारण था, मुझे दो-दो:तीस घंटाटे रोका गया। भाजपा चुनाव से पहले हर तरह के हथकंडे अपनाएगी। मुझे ये बताया गया कि आपके पहले भाजपा ने उड़ान भरी है तो उनके लिए एयर ट्रैफिक नहीं है लेकिन सपा के लिए एयर ट्रैफिक रहता है। अखिलेश यादव के इन आरोपों पर भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने पलटवार किया। नकवी ने कहा कि समाजवादी पार्टी चुनावी चौपाल पर चकल्लस कर रही है, टेक्निकल काम पर पॉलिटिकल पाखंड। अब आप कहने लगेंगे कि हमारा हेलीकॉप्टर दस मिनट देर से उड़ा, फिर आप कहने लगेंगे की हमारी साइकिल पंचर हो गई वो भाजपा ने कर दिया। हालांकि अखिलेश के आरोपों पर एयरपोर्ट के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि हाई एयर ट्रैफिक के कारण उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने में देरी हुई। इस दौरान अखिलेश यादव के हेलिकॉप्टर की रिफ्यूलिंग हुई और इसके बाद हेलिकॉप्टर को तुरंत उड़ान भरने की इजाजत दे दी गई।
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बॉलीवुड अभिनेता दिवंगत ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म "शर्माजी नमकीन" के निर्माताओं ने कपूर की 69वीं जयंती पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया। कपूर का दक्षिण मुंबई में एच एन रिलायंस अस्पताल में ल्यूकेमिया से दो साल लंबी जंग के बाद 30 अप्रैल 2020 को 67 साल की उम्र में निधन हो गया था। कपूर की आखिरी फिल्म "शर्माजी नमकीन" का प्रोडक्शन फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट ने फिल्म निर्माता हनी त्रेहान और अभिषेक चौबे की मैकगफिन पिक्चर्स के साथ मिलकर किया है। अख्तर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए किया जिसमें कपूर ने ऐनक लगा रखी है, स्वेटर और मफलर पहन रखा है तथा अपने हाथ में एक सूटकेस लिया हुआ है। टीम ने एक बयान में कहा, "हमें एक बहुत खास फिल्म शर्माजी नमकीन का पोस्टर जारी करते हुए गर्व हो रहा है जिसमें हिंदी फिल्म उद्योग के मशहूर अभिनेताओं में से एक श्री ऋषि कपूर ने अभिनय किया जिनके अद्वितीय काम और शानदार करियर को हम हमेशा संजो कर रखेंगे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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बॉलीवुड अभिनेता दिवंगत ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म "शर्माजी नमकीन" के निर्माताओं ने कपूर की उनहत्तरवीं जयंती पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया। कपूर का दक्षिण मुंबई में एच एन रिलायंस अस्पताल में ल्यूकेमिया से दो साल लंबी जंग के बाद तीस अप्रैल दो हज़ार बीस को सरसठ साल की उम्र में निधन हो गया था। कपूर की आखिरी फिल्म "शर्माजी नमकीन" का प्रोडक्शन फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट ने फिल्म निर्माता हनी त्रेहान और अभिषेक चौबे की मैकगफिन पिक्चर्स के साथ मिलकर किया है। अख्तर ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए किया जिसमें कपूर ने ऐनक लगा रखी है, स्वेटर और मफलर पहन रखा है तथा अपने हाथ में एक सूटकेस लिया हुआ है। टीम ने एक बयान में कहा, "हमें एक बहुत खास फिल्म शर्माजी नमकीन का पोस्टर जारी करते हुए गर्व हो रहा है जिसमें हिंदी फिल्म उद्योग के मशहूर अभिनेताओं में से एक श्री ऋषि कपूर ने अभिनय किया जिनके अद्वितीय काम और शानदार करियर को हम हमेशा संजो कर रखेंगे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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मौनी रॉय (Mouni Roy) विदेश में नए साल का जश्न मना रही हैं. उन्होंने यूएई में छुट्टियां मनाते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जिनमें से एक फोटो में मौनी राय समुद्र किनारे टहलती दिखाई दे रही हैं. लोग उन्हें छरहरी काया की वजह से ट्रोल कर रहे हैं.
नई दिल्लीः मौनी रॉय (Mouni Roy) ने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया है. उन्हें आखिरी बार फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए देखा गया था. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
मौनी रॉय डांस रियलिटी शो में जज के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. वे फिलहाल अपनी शादीशुदा जिंदगी का लुत्फ उठा रही हैं और यूएई में पति के साथ छुट्टियों को शानदार तरीके से बिता रही हैं. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
मौनी रॉय ने इंस्टाग्राम पर काले रंग की बिकिनी पहने हुए अपनी दिलकश फोटो शेयर की है, जिसमें उन्हें हाथ में वाइन ग्लास पकड़े हुए बड़ी अदा के साथ समुद्र किनारे टहलते हुए देखा जा सकता है. उन्होंने काले चश्मे से अपने लुक को कंप्लीट किया है. एक्ट्रेस की फोटो को काफी लोगों ने पसंद किया, पर कुछ लोगों ने उन्हें पतले बदन की वजह से ट्रोल भी किया. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
मौनी की फोटो पर एक यूजर कमेंट करता है, 'कोई इन्हें खाना दे दो. ' दूसरे यूजर ने लिखा, 'एलिमिनेट हो चुकी पबजी गर्ल. ' तीसरा यूजर बोला, 'हड्डियों का ढांचा लग रही हो. ' (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
'ब्रह्मास्त्र पार्ट वनः शिवा' में मौनी रॉय के काम को काफी सराहा गया था. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
मौनी ने टीवी पर भी सुपरनैचुरल किरदार निभाया है. वे संजय दत्त के साथ 'द वर्जिन ट्री' में नजर आएंगी. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
मौनी को हनी सिंह के एक म्यूजिक वीडियो 'गतिविधि' में भी देखा गया था. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
नई दिल्लीः मौनी रॉय (Mouni Roy) ने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया है. उन्हें आखिरी बार फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए देखा गया था. (फोटो साभारः Instagram@imouniroy)
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मौनी रॉय विदेश में नए साल का जश्न मना रही हैं. उन्होंने यूएई में छुट्टियां मनाते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जिनमें से एक फोटो में मौनी राय समुद्र किनारे टहलती दिखाई दे रही हैं. लोग उन्हें छरहरी काया की वजह से ट्रोल कर रहे हैं. नई दिल्लीः मौनी रॉय ने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया है. उन्हें आखिरी बार फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए देखा गया था. मौनी रॉय डांस रियलिटी शो में जज के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. वे फिलहाल अपनी शादीशुदा जिंदगी का लुत्फ उठा रही हैं और यूएई में पति के साथ छुट्टियों को शानदार तरीके से बिता रही हैं. मौनी रॉय ने इंस्टाग्राम पर काले रंग की बिकिनी पहने हुए अपनी दिलकश फोटो शेयर की है, जिसमें उन्हें हाथ में वाइन ग्लास पकड़े हुए बड़ी अदा के साथ समुद्र किनारे टहलते हुए देखा जा सकता है. उन्होंने काले चश्मे से अपने लुक को कंप्लीट किया है. एक्ट्रेस की फोटो को काफी लोगों ने पसंद किया, पर कुछ लोगों ने उन्हें पतले बदन की वजह से ट्रोल भी किया. मौनी की फोटो पर एक यूजर कमेंट करता है, 'कोई इन्हें खाना दे दो. ' दूसरे यूजर ने लिखा, 'एलिमिनेट हो चुकी पबजी गर्ल. ' तीसरा यूजर बोला, 'हड्डियों का ढांचा लग रही हो. ' 'ब्रह्मास्त्र पार्ट वनः शिवा' में मौनी रॉय के काम को काफी सराहा गया था. मौनी ने टीवी पर भी सुपरनैचुरल किरदार निभाया है. वे संजय दत्त के साथ 'द वर्जिन ट्री' में नजर आएंगी. मौनी को हनी सिंह के एक म्यूजिक वीडियो 'गतिविधि' में भी देखा गया था. नई दिल्लीः मौनी रॉय ने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया है. उन्हें आखिरी बार फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए देखा गया था.
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लखनऊ, आठ जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने सेना की गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को भेजने के आरोप में एक भूतपूर्व सैनिक और एक अन्य व्यक्ति को शुक्रवार को गिरफ़्तार किया। यह जानकारी पुलिस के एक अधिकारी ने दी।
अधिकारी ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ लखनऊ के एटीएस थाने में सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने एटीएस द्वारा सेना के पूर्व जवान और एक अन्य आरोपी को गिरफ़्तार किये जाने की पुष्टि की है।
इस संदर्भ में शुक्रवार को एटीएस मुख्यालय से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि उत्तर प्रदेश एटीएस को यह सूचना मिली थी कि हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के बिहुनी गांव निवासी पूर्व सैनिक सौरभ शर्मा पैसों के लालच में सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेजता है और जासूसी करता है।
विज्ञप्ति के मुताबिक सौरभ शर्मा को आज लखनऊ, एटीएस मुख्यालय में बुलाकर पूछताछ की गई। विज्ञप्ति के मुताबिक सौरभ शर्मा ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार किया और बताया कि उसके द्वारा समय-समय पर सेना की गोपनीय सूचनाएं पैसों की लालच में पाकिस्तानी महिला को दी गई जिसके बदले में उसके खाते में पैसे मिले।
विज्ञप्ति के अनुसार पूछताछ में सौरभ शर्मा से मिली जानकारी के आधार पर एटीएस की टीम ने गुजरात के गोधरा के पंचमहाल निवासी अनस गितैली को गिरफ़्तार कर लिया है। विज्ञप्ति के अनुसार अनस भी सौरभ शर्मा को पैसे भेजता था।
एटीएस के अनुसार अनस गितैली के बड़े भाई इमरान गितैली को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने के आरोप में पिछले वर्ष 14 सितंबर को गिरफ़्तार किया गया था।
एटीएस के अनुसार आरोपी सौरभ शर्मा को अदालत के समक्ष पेश करके पुलिस हिरासत ली जाएगी जबकि गुजरात में पकड़े गये अनस गितैली को एटीएस टीम ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ आएगी।
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लखनऊ, आठ जनवरी उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता ने सेना की गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को भेजने के आरोप में एक भूतपूर्व सैनिक और एक अन्य व्यक्ति को शुक्रवार को गिरफ़्तार किया। यह जानकारी पुलिस के एक अधिकारी ने दी। अधिकारी ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ लखनऊ के एटीएस थाने में सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने एटीएस द्वारा सेना के पूर्व जवान और एक अन्य आरोपी को गिरफ़्तार किये जाने की पुष्टि की है। इस संदर्भ में शुक्रवार को एटीएस मुख्यालय से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि उत्तर प्रदेश एटीएस को यह सूचना मिली थी कि हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के बिहुनी गांव निवासी पूर्व सैनिक सौरभ शर्मा पैसों के लालच में सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेजता है और जासूसी करता है। विज्ञप्ति के मुताबिक सौरभ शर्मा को आज लखनऊ, एटीएस मुख्यालय में बुलाकर पूछताछ की गई। विज्ञप्ति के मुताबिक सौरभ शर्मा ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार किया और बताया कि उसके द्वारा समय-समय पर सेना की गोपनीय सूचनाएं पैसों की लालच में पाकिस्तानी महिला को दी गई जिसके बदले में उसके खाते में पैसे मिले। विज्ञप्ति के अनुसार पूछताछ में सौरभ शर्मा से मिली जानकारी के आधार पर एटीएस की टीम ने गुजरात के गोधरा के पंचमहाल निवासी अनस गितैली को गिरफ़्तार कर लिया है। विज्ञप्ति के अनुसार अनस भी सौरभ शर्मा को पैसे भेजता था। एटीएस के अनुसार अनस गितैली के बड़े भाई इमरान गितैली को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने के आरोप में पिछले वर्ष चौदह सितंबर को गिरफ़्तार किया गया था। एटीएस के अनुसार आरोपी सौरभ शर्मा को अदालत के समक्ष पेश करके पुलिस हिरासत ली जाएगी जबकि गुजरात में पकड़े गये अनस गितैली को एटीएस टीम ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ आएगी।
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