raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
इंडिया न्यूज़, जयपुर।
Corona Vaccination in Rajasthan : जिला प्रशासन ने सभी विद्यालयों में 12 वर्ष से अधिक आयु के सभी विद्यार्थियों को वैक्सीनेशन लगाने के लिये शत प्रतिशत प्रयास करने के निर्देश दिए है। इसके लिये सभी अधिकारियों को चिकित्सा विभाग की टीमों के साथ समन्वय कर, तिथि निर्धारित कर कैंप आयोजित करने को कहा है। (Corona Vaccination in Rajasthan)
राज्य स्कूल शिक्षा परिषद की विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण के लिए अतिरिक्त जिला कलक्टर (चतुर्थ) शंकर लाल सैनी (Shankar Lal Saini) ने बुधवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में जिले के विभिन्न ब्लॉक के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। बैठक में शाला संबलन विजिट रिपोर्ट, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार रिपोर्ट, खेल मैदानों पर अतिक्रमण पर विस्तृत चर्चा की गई। जिन ब्लॉक की प्रगति कम रही उन्हें अपनी प्रगति को बढ़ाने के लिये निर्देष दिये गये। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के लिए गठित जिला स्तरीय समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। (Corona Vaccination in Rajasthan)
बैठक में विद्यालयों में नामांकन वृद्धि पर विस्तृत चर्चा की गई। शंकर लाल सैनी (Shankar Lal Saini) ने कहा कि फाउंडेशन स्तर पर 05 प्रतिशत से अधिक सत्र 2021-22 में हुई वृद्धि को निरन्तर बनाये रखते हुये 2022-23 में भी नामांकन वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही विद्यालयों आंगनाबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के ठहराव एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में वृद्धि करने, स्वयं सेवक सदस्यों, शिक्षकों के एफएलएन (FLN) कोशल प्राप्त करने के लिये प्रशिक्षित करना, डॉपआउट कम करना, पीईईओ (PEEO) क्षेत्र में मेन्टर शिक्षक नियुक्त करना जिसमें पीईईओ (PEEO) अधीनस्थ आंगनबाड़ी केन्द्रों को इन मेन्टर शिक्षक द्वारा शैक्षिक संबलन दिया जाता है। (Corona Vaccination in Rajasthan)
|
इंडिया न्यूज़, जयपुर। Corona Vaccination in Rajasthan : जिला प्रशासन ने सभी विद्यालयों में बारह वर्ष से अधिक आयु के सभी विद्यार्थियों को वैक्सीनेशन लगाने के लिये शत प्रतिशत प्रयास करने के निर्देश दिए है। इसके लिये सभी अधिकारियों को चिकित्सा विभाग की टीमों के साथ समन्वय कर, तिथि निर्धारित कर कैंप आयोजित करने को कहा है। राज्य स्कूल शिक्षा परिषद की विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण के लिए अतिरिक्त जिला कलक्टर शंकर लाल सैनी ने बुधवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में जिले के विभिन्न ब्लॉक के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। बैठक में शाला संबलन विजिट रिपोर्ट, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार रिपोर्ट, खेल मैदानों पर अतिक्रमण पर विस्तृत चर्चा की गई। जिन ब्लॉक की प्रगति कम रही उन्हें अपनी प्रगति को बढ़ाने के लिये निर्देष दिये गये। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस के क्रियान्वयन के लिए गठित जिला स्तरीय समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों में नामांकन वृद्धि पर विस्तृत चर्चा की गई। शंकर लाल सैनी ने कहा कि फाउंडेशन स्तर पर पाँच प्रतिशत से अधिक सत्र दो हज़ार इक्कीस-बाईस में हुई वृद्धि को निरन्तर बनाये रखते हुये दो हज़ार बाईस-तेईस में भी नामांकन वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही विद्यालयों आंगनाबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के ठहराव एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में वृद्धि करने, स्वयं सेवक सदस्यों, शिक्षकों के एफएलएन कोशल प्राप्त करने के लिये प्रशिक्षित करना, डॉपआउट कम करना, पीईईओ क्षेत्र में मेन्टर शिक्षक नियुक्त करना जिसमें पीईईओ अधीनस्थ आंगनबाड़ी केन्द्रों को इन मेन्टर शिक्षक द्वारा शैक्षिक संबलन दिया जाता है।
|
नॉर्वेजियन डांस ग्रुप क्विक स्टाइल ने क्रिकेटर विराट कोहली के साथ डांस करने से लेकर मुंबई की लोकल ट्रेन के अंदर इंप्रोमेप्टू डांस सेशनसे सबको हैरान कर दिया है । ग्रुप ने बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन से भी मुलाकात की और उनके साथ उनके ब्लॉकबस्टर गीत 'टिप टिप बरसा पानी' पर डांस किया।
इंस्टाग्राम पर क्विक स्टाइल ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें लड़के रवीना के साथ `टिप टिप बरसा पानी` स्टेप्स को बहुत खुशी के साथ मैच करते नजर आ रहे हैं। ब्लैक शर्ट और ब्लू डेनिम पैंट में रवीना बेहद खूबसूरत लग रही थीं। दूसरी ओर, क्रू मेंबर्स रवीना के साथ डांस स्टेप्स करते हुए हमेशा की तरह डैपर दिखे। क्विक स्टाइल्स ने क्लिप को कैप्शन दिया, "जब आप इसे ओरिजनल के साथ करते हैं तो अलग होता है। "
फिल्म 'तनु वेड्स मनु' से 'सादी गली' और 'बार बार देखो' से 'काला चश्मा' जैसे पॉपुलर बॉलीवुड सांग्स के हुक स्टेप्स को फिर से बनाने के बाद ग्रुप प्रसिद्धि में आया। क्विक स्टाइल ने अपनी भारत यात्रा के दौरान एएनआई से भी बात की।
उन्होंने भारतीय गानों के प्रति अपने प्यार का इजहार किया। ग्रुप ने कहा-"हमारे लिए, काला चश्मा गाना और हर वो गाना जो इस दुनिया में पॉपुलर है. . यह किसी का नहीं है, यह सबका है। और जो लोग हमारा शो देखते हैं, हमें लगता है कि वे हमारा परिवार, हमारा ग्रुप , हमारे समर्थक हैं, इसलिए हम हैं एक साथ। तो गाना हमारा है,"
Copyright @ 2023 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
|
नॉर्वेजियन डांस ग्रुप क्विक स्टाइल ने क्रिकेटर विराट कोहली के साथ डांस करने से लेकर मुंबई की लोकल ट्रेन के अंदर इंप्रोमेप्टू डांस सेशनसे सबको हैरान कर दिया है । ग्रुप ने बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन से भी मुलाकात की और उनके साथ उनके ब्लॉकबस्टर गीत 'टिप टिप बरसा पानी' पर डांस किया। इंस्टाग्राम पर क्विक स्टाइल ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें लड़के रवीना के साथ `टिप टिप बरसा पानी` स्टेप्स को बहुत खुशी के साथ मैच करते नजर आ रहे हैं। ब्लैक शर्ट और ब्लू डेनिम पैंट में रवीना बेहद खूबसूरत लग रही थीं। दूसरी ओर, क्रू मेंबर्स रवीना के साथ डांस स्टेप्स करते हुए हमेशा की तरह डैपर दिखे। क्विक स्टाइल्स ने क्लिप को कैप्शन दिया, "जब आप इसे ओरिजनल के साथ करते हैं तो अलग होता है। " फिल्म 'तनु वेड्स मनु' से 'सादी गली' और 'बार बार देखो' से 'काला चश्मा' जैसे पॉपुलर बॉलीवुड सांग्स के हुक स्टेप्स को फिर से बनाने के बाद ग्रुप प्रसिद्धि में आया। क्विक स्टाइल ने अपनी भारत यात्रा के दौरान एएनआई से भी बात की। उन्होंने भारतीय गानों के प्रति अपने प्यार का इजहार किया। ग्रुप ने कहा-"हमारे लिए, काला चश्मा गाना और हर वो गाना जो इस दुनिया में पॉपुलर है. . यह किसी का नहीं है, यह सबका है। और जो लोग हमारा शो देखते हैं, हमें लगता है कि वे हमारा परिवार, हमारा ग्रुप , हमारे समर्थक हैं, इसलिए हम हैं एक साथ। तो गाना हमारा है," Copyright @ दो हज़ार तेईस Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.
|
इंस्टाग्राम नए टूल पर टेस्टिंग कर रहा है. इस टूल के जरिए इंस्टाग्राम फेस स्कैनिंग के जरिए यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगा. इसके अलावा इस तरह से यूजर्स इंस्टाग्राम पर अपनी आइडेंडिटी का प्रूफ दे सकेंगे. अमेरिका में इस टूल की शुरुआत कर दी गई है.
इंस्टाग्राम नए टूल पर टेस्टिंग कर रहा है. इस टूल के जरिए इंस्टाग्राम फेस स्कैनिंग (Face Scanning) के जरिए यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगा. ऐसा करने के पीछे इंस्टाग्राम के दो मकसद हैं. पहला मकसद यूजर्स की असली उम्र का अंदाजा लगाना और दूसरा उनकी ऑनलाइन आइडेंडिटी प्रूफ करना है. इंस्टाग्राम ने अमेरिकी यूजर्स के साथ इसकी टेस्टिंग की शुरुआत कर दी है. अभी भारत में इस फीचर की शुरुआत नहीं हुई लेकिन माना जा रहा है कि ये फीचर जल्द ही इंस्टाग्राम भारतीय यूजर्स के लिए भी शुरू कर सकता है.
मेटा प्लेटफार्म के मुताबिक उम्र का वेरीफिकेशन कराने के दो तरीके होंगे, एक में यूजर्स अपना आइडी प्रूफ अपलोड कर सकेंगे, ताकि उनकी सही उम्र का पता लगाया जा सके. इसके अलावा वीडियो सेल्फी भी अपलोड करनी होगी, जिससे Yoti टेक्नोलॉजी (Face recognition technology) यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगी. इंस्टाग्राम के मुताबिक Meta और Yoti उम्र वैरिफाई होते ही आईडी प्रूफ और वीडियो इमेज को खुद ब खुद डिलीट कर देंगे.
Meta की डाटा गवर्नेंस डायरेक्टर एरिका के मुताबिक उम्र के हिसाब से ही यूजर्स पॉलिसी तय की जाएगी, मसलन यदि 13 से 17 वर्ष तक का किशोर इंस्टाग्राम पर है तो उसे उसकी उम्र के हिसाब से ही कंटेंंट दिखाया जाएगा. इसके अलावा प्राइवेट अकाउंट, प्रिवेंटिंंग अनवांटेंट कंटेट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी.
उम्र वेरीफाई कराने का एक और ऑप्शन दिया गया है, इसमें यूजर तीन फॉलोअर्स को सिलेक्ट कर सकता है जो इस बात को कंफर्म करेंगे कि यूजर की उम्र क्या है, ऐसा करने वाले फॉलोअर्स की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा होना अनिवार्य शर्त है.
इस टूल की टेस्टिंंग से पहले इंस्टाग्राम ने अपना किड्स प्लेटफार्म लांच करने का मन बनाया था, इसमें किसी बच्चे या किशोर को इंस्टाग्राम ज्वाइन करने से पहले अपने अभिभावक की सहमति लेना अनिवार्य था, कंपनी की योजना थी इंस्टाग्राम किड्स में बच्चों को एड फ्री अच्छा कंटेंट उपलब्ध कराया जाए, लेकिन यूएस के लॉ मेकर्स और एडवाइजर्स ने इस प्लान को ड्रॉप करने का सुझाव दिया, इसके बाद कंपनी ने Age वेरीफिकेशन के टूल पर काम करना शुरू किया.
|
इंस्टाग्राम नए टूल पर टेस्टिंग कर रहा है. इस टूल के जरिए इंस्टाग्राम फेस स्कैनिंग के जरिए यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगा. इसके अलावा इस तरह से यूजर्स इंस्टाग्राम पर अपनी आइडेंडिटी का प्रूफ दे सकेंगे. अमेरिका में इस टूल की शुरुआत कर दी गई है. इंस्टाग्राम नए टूल पर टेस्टिंग कर रहा है. इस टूल के जरिए इंस्टाग्राम फेस स्कैनिंग के जरिए यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगा. ऐसा करने के पीछे इंस्टाग्राम के दो मकसद हैं. पहला मकसद यूजर्स की असली उम्र का अंदाजा लगाना और दूसरा उनकी ऑनलाइन आइडेंडिटी प्रूफ करना है. इंस्टाग्राम ने अमेरिकी यूजर्स के साथ इसकी टेस्टिंग की शुरुआत कर दी है. अभी भारत में इस फीचर की शुरुआत नहीं हुई लेकिन माना जा रहा है कि ये फीचर जल्द ही इंस्टाग्राम भारतीय यूजर्स के लिए भी शुरू कर सकता है. मेटा प्लेटफार्म के मुताबिक उम्र का वेरीफिकेशन कराने के दो तरीके होंगे, एक में यूजर्स अपना आइडी प्रूफ अपलोड कर सकेंगे, ताकि उनकी सही उम्र का पता लगाया जा सके. इसके अलावा वीडियो सेल्फी भी अपलोड करनी होगी, जिससे Yoti टेक्नोलॉजी यूजर्स की उम्र का अंदाजा लगाएगी. इंस्टाग्राम के मुताबिक Meta और Yoti उम्र वैरिफाई होते ही आईडी प्रूफ और वीडियो इमेज को खुद ब खुद डिलीट कर देंगे. Meta की डाटा गवर्नेंस डायरेक्टर एरिका के मुताबिक उम्र के हिसाब से ही यूजर्स पॉलिसी तय की जाएगी, मसलन यदि तेरह से सत्रह वर्ष तक का किशोर इंस्टाग्राम पर है तो उसे उसकी उम्र के हिसाब से ही कंटेंंट दिखाया जाएगा. इसके अलावा प्राइवेट अकाउंट, प्रिवेंटिंंग अनवांटेंट कंटेट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. उम्र वेरीफाई कराने का एक और ऑप्शन दिया गया है, इसमें यूजर तीन फॉलोअर्स को सिलेक्ट कर सकता है जो इस बात को कंफर्म करेंगे कि यूजर की उम्र क्या है, ऐसा करने वाले फॉलोअर्स की उम्र अट्ठारह वर्ष से ज्यादा होना अनिवार्य शर्त है. इस टूल की टेस्टिंंग से पहले इंस्टाग्राम ने अपना किड्स प्लेटफार्म लांच करने का मन बनाया था, इसमें किसी बच्चे या किशोर को इंस्टाग्राम ज्वाइन करने से पहले अपने अभिभावक की सहमति लेना अनिवार्य था, कंपनी की योजना थी इंस्टाग्राम किड्स में बच्चों को एड फ्री अच्छा कंटेंट उपलब्ध कराया जाए, लेकिन यूएस के लॉ मेकर्स और एडवाइजर्स ने इस प्लान को ड्रॉप करने का सुझाव दिया, इसके बाद कंपनी ने Age वेरीफिकेशन के टूल पर काम करना शुरू किया.
|
भारत के नए संसद भवन इमारत में बनी 'अखंड भारत' का भित्ती चित्र पड़ोसियों की परेशानी का सबब बन गया है. अब नेपाल के बाद पाकिस्तान भी नए संसद भवन में अखंड भारत की तस्वीर को लेकर आगबबूला हो गया है. पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने कहा कि भारतीय संसद की नई इमरात में लगाए गए प्राचीन भारत के भित्तिचित्र में पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के इलाके को भी दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 'अखंड भारत' के विचार से बहुत चिंतित है और बीजेपी नेताओं के बयान से स्तब्ध है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है, भारत का अखंड भारत का दावा विस्तारवादी मानसिकता का दिखावा है जो न केवल भारत के पड़ोसी देशों, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की विचारधारा और संस्कृति को पराजित करना चाहता है. साथ ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत को ये सलाह दे डाली कि, भारतीय नेता दूसरे देश के खिलाफ बयानबाजी नया करें.
आपको बताएं कि, भारतीय संसद की नई इमरात में अखंड भारत का भित्तिचित्र लगाया गया है. इसमें वर्तमान पाकिस्तान के कई इलाकों जैसे तक्षशिला, मानसेहरा, सिंधु, पुरुषपुर, उत्तरापथ को दिखाया गया है जो प्राचीन काल में अखंड भारत का हिस्सा थे.
|
भारत के नए संसद भवन इमारत में बनी 'अखंड भारत' का भित्ती चित्र पड़ोसियों की परेशानी का सबब बन गया है. अब नेपाल के बाद पाकिस्तान भी नए संसद भवन में अखंड भारत की तस्वीर को लेकर आगबबूला हो गया है. पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने कहा कि भारतीय संसद की नई इमरात में लगाए गए प्राचीन भारत के भित्तिचित्र में पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के इलाके को भी दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 'अखंड भारत' के विचार से बहुत चिंतित है और बीजेपी नेताओं के बयान से स्तब्ध है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है, भारत का अखंड भारत का दावा विस्तारवादी मानसिकता का दिखावा है जो न केवल भारत के पड़ोसी देशों, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की विचारधारा और संस्कृति को पराजित करना चाहता है. साथ ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत को ये सलाह दे डाली कि, भारतीय नेता दूसरे देश के खिलाफ बयानबाजी नया करें. आपको बताएं कि, भारतीय संसद की नई इमरात में अखंड भारत का भित्तिचित्र लगाया गया है. इसमें वर्तमान पाकिस्तान के कई इलाकों जैसे तक्षशिला, मानसेहरा, सिंधु, पुरुषपुर, उत्तरापथ को दिखाया गया है जो प्राचीन काल में अखंड भारत का हिस्सा थे.
|
श्रीपूज्यपाद और उनकी रचनाएँ
जैनसमाजमे 'पूज्यपाद' नाम के एक सुप्रसिद्ध आचार्य की छठी (ईसा की पांचवी) शताब्दी मे हो गये है, जिनका पहला अथवा दीक्षानाम 'देवनन्दी' था और जो बाद को 'जिनेन्द्रिबुद्धि' नामसे भी लोकमे प्रसिद्धिको प्राप्त हुए हैं। आपके इन नामो का परिचय अनेक शिलालेखो तथा ग्रन्थों आदि परसे भले प्रकार उपलब्ध होता है । नीचेके कुछ अवतरण इसके लिए पर्याप्त हैं यो देवनन्दिप्रथमाभिधानो बुद्धचा महत्या स जिनेन्द्रिबृद्धि । श्रीपूज्यपादोऽजनि देवताभिर्यत्पूजित पादयुग यदीयम् ।।
- श्रवणवेल्गोल शि० न० ४० (६४)
प्रागभ्यघायि गुरुणा फिल देवनन्दो,
बुद्धया पुनविपुलया स जिनेन्द्रबुद्धि । श्रीपूज्यपाद इति चैष बुधैः प्रचरूपे,
यत्पूजित पदयुगे वनदेवताभि ।।
श्रवणवेल्गोलके इन दोनो शिला- वाक्यो परसे, जिनका लेखनकाल क्रमश शक स० १०८५ व १३२० है यह साफ जाना जाता है कि प्राचार्य महोदयका प्राथमिक नाम 'देवनन्दी' था, जिसे उनके गुरुने रक्खा था और इसलिए वह उनका दीक्षनाम है, 'जिनेद्रबुद्धि' नाम बुद्धिकी प्रकर्षकता एव विपुलताके कारण उन्हे बादको प्राप्त हुआ था, और जबसे उनके चरण-युगल देवता पूजे गये। थे तबसे वे बुधजनो द्वारा पूज्यपाद' नामसे विभूषित हुए हैं ।
सुराधीश्वरपूज्यपाद ।
यशोयवंदुष्यगुणानिदानों वदन्ति शास्त्राणि तदुद्घृतानि ॥ घृतविश्वबुद्धिरयमत्र योगिभि कृतकृत्यभावमनुविभ्रुदुच्चकं । जिनवद्वभूव यदनङ्गचापहृत्स जिनेन्द्रबुद्धिरिति साधुर्वाणित ।। -श्र० शि० न० १०८ ( २५८ )
शक सम्वत् १३५५ मे उत्कीर्ण हुए इन शिलावाक्यो से स्पष्ट है कि श्री पूज्यपाद ने धर्मराज्यका उद्धार किया था - लोकमे धर्मकी पुन प्रतिष्ठा की थी - इसीसे श्राप देवताओं के अधिपति द्वारा पूजे गये प्रोर 'पूज्यपाद' कहलाए - आपके विद्याविशिष्ट गुरगो को श्राज भी आपके द्वारा उद्धार पाये हुए - रचे हुए - शास्त्र वतला रहे हैं - उनका खुला गान कर रहे हैं। ग्राप जिनेन्द्रको तरह विश्वबुद्धि के धारक - समस्त शास्त्र विषयोके पारगत - थे और कामदेवको जीतनेवाले थे, इसीसे आपसे ऊँचे दर्जे के कृतकृत्य भावको धारण करनेवाले योगियोने आपको ठीक ही जिनेन्द्रवुद्धि' कहा है।' इसी शिलालेखमे पूज्यपाद - विषयक एक वाक्य प्रौर भी पाया जाता है, जो इस प्रकार है
श्रीपूज्यपादमुनिरप्रतिमोषर्धाद्धर्जीया द्विदेह जिनदर्शनपूतगात्र । 'यत्पादघौतजल संस्पर्शप्रभावात् कालायस किल तदा कनकीचकार ।।
इसमे पूज्यपाद मुनिका जयघोष करते हुए उन्हे द्वितीय श्रौषध-ऋद्धि के धारक बतलाया है। साथ ही, यह भी प्रकट किया है कि विदेहक्षेत्र स्थित जिनेन्द्र - भगवान्के दर्शनसे उनका गात्र पवित्र हो गया था और उनके चरण-धोए जलके स्पर्शसे एक समय लोहा भी सोना बन गया था ।
इस तरह आपके इन पवित्र नामोके साथ कितना ही इतिहास लगा हुआ है और वह सब आपकी महती कीति, आपार विद्वत्ता एव सातिशय प्रतिष्ठाका द्योतक है। इसमे सन्देह नही कि श्रीपूज्यपाद स्वामी एक बहुत ही प्रतिभाशाली आचार्य माननीय विद्वान्, युगप्रधान और अच्छे योगीन्द्र हुए है । श्रापके उपलब्ध ग्रन्थ निश्चय ही आपकी असाधारण योग्यता के जीते-जागते प्रमाण हैं। भट्टाकलकदेव और श्रीविद्यानन्द - जैसे बडे-बडे प्रतिष्ठित आचार्यों ने अपने राजवातिकादि ग्रन्थो मे आपके वाक्यो का सर्वार्थसिद्धि आदि के पदो का खुला
|
श्रीपूज्यपाद और उनकी रचनाएँ जैनसमाजमे 'पूज्यपाद' नाम के एक सुप्रसिद्ध आचार्य की छठी शताब्दी मे हो गये है, जिनका पहला अथवा दीक्षानाम 'देवनन्दी' था और जो बाद को 'जिनेन्द्रिबुद्धि' नामसे भी लोकमे प्रसिद्धिको प्राप्त हुए हैं। आपके इन नामो का परिचय अनेक शिलालेखो तथा ग्रन्थों आदि परसे भले प्रकार उपलब्ध होता है । नीचेके कुछ अवतरण इसके लिए पर्याप्त हैं यो देवनन्दिप्रथमाभिधानो बुद्धचा महत्या स जिनेन्द्रिबृद्धि । श्रीपूज्यपादोऽजनि देवताभिर्यत्पूजित पादयुग यदीयम् ।। - श्रवणवेल्गोल शिशून्य नशून्य चालीस प्रागभ्यघायि गुरुणा फिल देवनन्दो, बुद्धया पुनविपुलया स जिनेन्द्रबुद्धि । श्रीपूज्यपाद इति चैष बुधैः प्रचरूपे, यत्पूजित पदयुगे वनदेवताभि ।। श्रवणवेल्गोलके इन दोनो शिला- वाक्यो परसे, जिनका लेखनकाल क्रमश शक सशून्य एक हज़ार पचासी व एक हज़ार तीन सौ बीस है यह साफ जाना जाता है कि प्राचार्य महोदयका प्राथमिक नाम 'देवनन्दी' था, जिसे उनके गुरुने रक्खा था और इसलिए वह उनका दीक्षनाम है, 'जिनेद्रबुद्धि' नाम बुद्धिकी प्रकर्षकता एव विपुलताके कारण उन्हे बादको प्राप्त हुआ था, और जबसे उनके चरण-युगल देवता पूजे गये। थे तबसे वे बुधजनो द्वारा पूज्यपाद' नामसे विभूषित हुए हैं । सुराधीश्वरपूज्यपाद । यशोयवंदुष्यगुणानिदानों वदन्ति शास्त्राणि तदुद्घृतानि ॥ घृतविश्वबुद्धिरयमत्र योगिभि कृतकृत्यभावमनुविभ्रुदुच्चकं । जिनवद्वभूव यदनङ्गचापहृत्स जिनेन्द्रबुद्धिरिति साधुर्वाणित ।। -श्रशून्य शिशून्य नशून्य एक सौ आठ शक सम्वत् एक हज़ार तीन सौ पचपन मे उत्कीर्ण हुए इन शिलावाक्यो से स्पष्ट है कि श्री पूज्यपाद ने धर्मराज्यका उद्धार किया था - लोकमे धर्मकी पुन प्रतिष्ठा की थी - इसीसे श्राप देवताओं के अधिपति द्वारा पूजे गये प्रोर 'पूज्यपाद' कहलाए - आपके विद्याविशिष्ट गुरगो को श्राज भी आपके द्वारा उद्धार पाये हुए - रचे हुए - शास्त्र वतला रहे हैं - उनका खुला गान कर रहे हैं। ग्राप जिनेन्द्रको तरह विश्वबुद्धि के धारक - समस्त शास्त्र विषयोके पारगत - थे और कामदेवको जीतनेवाले थे, इसीसे आपसे ऊँचे दर्जे के कृतकृत्य भावको धारण करनेवाले योगियोने आपको ठीक ही जिनेन्द्रवुद्धि' कहा है।' इसी शिलालेखमे पूज्यपाद - विषयक एक वाक्य प्रौर भी पाया जाता है, जो इस प्रकार है श्रीपूज्यपादमुनिरप्रतिमोषर्धाद्धर्जीया द्विदेह जिनदर्शनपूतगात्र । 'यत्पादघौतजल संस्पर्शप्रभावात् कालायस किल तदा कनकीचकार ।। इसमे पूज्यपाद मुनिका जयघोष करते हुए उन्हे द्वितीय श्रौषध-ऋद्धि के धारक बतलाया है। साथ ही, यह भी प्रकट किया है कि विदेहक्षेत्र स्थित जिनेन्द्र - भगवान्के दर्शनसे उनका गात्र पवित्र हो गया था और उनके चरण-धोए जलके स्पर्शसे एक समय लोहा भी सोना बन गया था । इस तरह आपके इन पवित्र नामोके साथ कितना ही इतिहास लगा हुआ है और वह सब आपकी महती कीति, आपार विद्वत्ता एव सातिशय प्रतिष्ठाका द्योतक है। इसमे सन्देह नही कि श्रीपूज्यपाद स्वामी एक बहुत ही प्रतिभाशाली आचार्य माननीय विद्वान्, युगप्रधान और अच्छे योगीन्द्र हुए है । श्रापके उपलब्ध ग्रन्थ निश्चय ही आपकी असाधारण योग्यता के जीते-जागते प्रमाण हैं। भट्टाकलकदेव और श्रीविद्यानन्द - जैसे बडे-बडे प्रतिष्ठित आचार्यों ने अपने राजवातिकादि ग्रन्थो मे आपके वाक्यो का सर्वार्थसिद्धि आदि के पदो का खुला
|
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही यूजीसी NET 2023 का परिणाम जारी कर सकते हैं। उम्मीदवार जो भी इस परीक्षा के लिए मौजूद हुए हैं, वे परिणाम जारी होने के बाद यूजीसी NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet. nta. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं। यूजीसी NET परीक्षा पांच चरणों में आयोजित की गई थी और 15 मार्च, 2023 को समापन हुई थी। यूजीसी NET Result के साथ NTA UGC NET Answer Key और UGC NET कट-ऑफ मार्क्स भी जारी करेगा।
इसके अतिरिक्त उम्मीदवार सीधे इस लिंक https://ugcnet. nta. nic. in/ पर क्लिक करके भी यूजीसी NET Result 2023 चेक कर सकते हैं। साथ ही नीचे दिए गए इन स्टेप्स के माध्यम से अपना परिणाम देख सकते हैं। यूजीसी NET Result 2023 में उम्मीदवार का स्कोर, रैंक और अन्य प्रासंगिक विवरण शामिल होंगे। UGC NET परीक्षा में योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार हिंदुस्तान भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) पदों के लिए योग्य होंगे।
UGC NET 2023 परीक्षा देशभर के कई केंद्रों में सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी। यूनिवर्सिटी आर्थिक सहायता आयोग नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (UGC NET) के लिए यूजीसी NET का परिणाम जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। यूजीसी NET 2023 परीक्षा 21 फरवरी 2023 से 15 मार्च 2023 तक आयोजित की गई थी।
UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet. nta. nic. in पर जाएं।
होमपेज पर NTA यूजीसी NET Result 2023 लिंक को सर्च करें और क्लिक करें।
स्क्रीन पर एक नया लॉगिन पेज दिखाई देगा।
लॉग इन करने के लिए सभी आवश्यक विवरण जैसे रोल नंबर, जन्म तिथि या पंजीकरण संख्या दर्ज करें।
आपका UGC NET Result 2023 स्क्रीन पर दिखाई देगा।
UGC NET Result 2023 चेक करें और इसे सेव करें।
|
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जल्द ही यूजीसी NET दो हज़ार तेईस का परिणाम जारी कर सकते हैं। उम्मीदवार जो भी इस परीक्षा के लिए मौजूद हुए हैं, वे परिणाम जारी होने के बाद यूजीसी NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet. nta. nic. in पर जाकर चेक कर सकते हैं। यूजीसी NET परीक्षा पांच चरणों में आयोजित की गई थी और पंद्रह मार्च, दो हज़ार तेईस को समापन हुई थी। यूजीसी NET Result के साथ NTA UGC NET Answer Key और UGC NET कट-ऑफ मार्क्स भी जारी करेगा। इसके अतिरिक्त उम्मीदवार सीधे इस लिंक https://ugcnet. nta. nic. in/ पर क्लिक करके भी यूजीसी NET Result दो हज़ार तेईस चेक कर सकते हैं। साथ ही नीचे दिए गए इन स्टेप्स के माध्यम से अपना परिणाम देख सकते हैं। यूजीसी NET Result दो हज़ार तेईस में उम्मीदवार का स्कोर, रैंक और अन्य प्रासंगिक विवरण शामिल होंगे। UGC NET परीक्षा में योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार हिंदुस्तान भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप पदों के लिए योग्य होंगे। UGC NET दो हज़ार तेईस परीक्षा देशभर के कई केंद्रों में सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी। यूनिवर्सिटी आर्थिक सहायता आयोग नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट के लिए यूजीसी NET का परिणाम जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। यूजीसी NET दो हज़ार तेईस परीक्षा इक्कीस फरवरी दो हज़ार तेईस से पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस तक आयोजित की गई थी। UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet. nta. nic. in पर जाएं। होमपेज पर NTA यूजीसी NET Result दो हज़ार तेईस लिंक को सर्च करें और क्लिक करें। स्क्रीन पर एक नया लॉगिन पेज दिखाई देगा। लॉग इन करने के लिए सभी आवश्यक विवरण जैसे रोल नंबर, जन्म तिथि या पंजीकरण संख्या दर्ज करें। आपका UGC NET Result दो हज़ार तेईस स्क्रीन पर दिखाई देगा। UGC NET Result दो हज़ार तेईस चेक करें और इसे सेव करें।
|
तेजस्वी प्रकाश ने बिग बॉस की ट्रॉफी अपने नाम कर दी है. इस शो के साथ साथ उन्हें अब एक नया शो मिल गया है. जी हां वो एकता कपूर के नागिन में नजर आने वाली हैं.
कलर्स टीवी के रियलिटी शो बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) का फैसला अब आ चुका है. जनता के सबसे ज्यादा वोटों के साथ तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) बिग बॉस 15 की ट्रॉफी जीत चुकी हैं. बिग बॉस 15 के ग्रैंड फिनाले में आए हुए वोटों की बात करें तो प्रतीक सहजपाल को जनता के 24 प्रतिशत वोट मिले तो तेजस्वी प्रकाश को सबसे ज्यादा यानी 26 प्रतिशत वोट मिले. शमिता शेट्टी के एविक्ट होने के बाद करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश और प्रतीक सहजपाल के बीच ट्रॉफी के लिए मुकाबला देखने को मिला. लेकिन बतौर विनर देखे जाने वाले करण कुंद्रा सबसे शो के दूसरे रनर अप घोषित कर दिए गए.
तेजस्वी ने बिग बॉस की चमचमाती ट्रॉफी के साथ 40 लाख रूपए भी जीत लिए हैं. दरअसल बिग बॉस के विनर को मिलने वाली जीत की रकम 50 लाख थे लेकिन निशांत भट के 10 लाख के साथ खेल क्विट करने की वजह से अब विनर को 40 लाख रूपए मिलेंगे. बिग बॉस 15 के घर में एंट्री करने से पहले ही तेजस्वी प्रकाश ने कहा था कि उन्हें हारना पसंद नहीं हैं. जो उन्होंने शुरुआत में कहा था वह करके दिखाया हैं और इस शो में न सिर्फ उन्होंने ट्रॉफी और 40 लाख जीते हैं बल्कि एक दूसरे ने शो का कॉन्ट्रैक्ट भी जीता हैं.
जल्द ही तेजस्वी प्रकाश कलर्स टीवी और एकता कपूर की मशहूर फ्रैंचाइजी नागिन में प्रमुख किरदार निभाते हुए नजर आएंगी. अपने लुक की पहली झलक उन्होंने ग्रैंड फिनाले के दौरान दिए हुए परफॉर्मेंस में दिखाई है. सलमान खान से लेकर सभी ने इस नए शो के लिए तेजस्वी को मुबारक बात भी दी. यानी बिग बॉस के खत्म होने के तुरंत बाद बिना किसी ब्रेक के तेजस्वी प्रकाश अपने नए शो की शूटिंग में बिजी हो जाएंगी. ऐसे में उनके और करण कुंद्रा के रिलेशनशिप का क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा.
तेजस्वी प्रकाश की जीत ने यह साबित कर दिया है कि देश की पसंदीदा बहुओं और बेटियों के सामने कोई भी कंटेस्टेंट टिक नहीं पाता. टीवी की बेटी रागिनी के रूप में तेजस्वी ने सीरियल स्वरागिनी से अपने करियर की शुरुआत की थी और तब से लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया है. बिग बॉस के कई सीजन में यह देखा गया है कि टीवी की एक्ट्रेस को हमेशा से वोटिंग में फायदा होता है. तेजस्वी प्रकाश हो या सिमर का किरदार निभाने वाली दीपिका या फिर प्रेरणा बनी श्वेता तिवारी बिग बॉस का यह इतिहास रहा है कि ट्रॉफी टीवी एक्ट्रेस ही जीत लेती हैं.
|
तेजस्वी प्रकाश ने बिग बॉस की ट्रॉफी अपने नाम कर दी है. इस शो के साथ साथ उन्हें अब एक नया शो मिल गया है. जी हां वो एकता कपूर के नागिन में नजर आने वाली हैं. कलर्स टीवी के रियलिटी शो बिग बॉस पंद्रह का फैसला अब आ चुका है. जनता के सबसे ज्यादा वोटों के साथ तेजस्वी प्रकाश बिग बॉस पंद्रह की ट्रॉफी जीत चुकी हैं. बिग बॉस पंद्रह के ग्रैंड फिनाले में आए हुए वोटों की बात करें तो प्रतीक सहजपाल को जनता के चौबीस प्रतिशत वोट मिले तो तेजस्वी प्रकाश को सबसे ज्यादा यानी छब्बीस प्रतिशत वोट मिले. शमिता शेट्टी के एविक्ट होने के बाद करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश और प्रतीक सहजपाल के बीच ट्रॉफी के लिए मुकाबला देखने को मिला. लेकिन बतौर विनर देखे जाने वाले करण कुंद्रा सबसे शो के दूसरे रनर अप घोषित कर दिए गए. तेजस्वी ने बिग बॉस की चमचमाती ट्रॉफी के साथ चालीस लाख रूपए भी जीत लिए हैं. दरअसल बिग बॉस के विनर को मिलने वाली जीत की रकम पचास लाख थे लेकिन निशांत भट के दस लाख के साथ खेल क्विट करने की वजह से अब विनर को चालीस लाख रूपए मिलेंगे. बिग बॉस पंद्रह के घर में एंट्री करने से पहले ही तेजस्वी प्रकाश ने कहा था कि उन्हें हारना पसंद नहीं हैं. जो उन्होंने शुरुआत में कहा था वह करके दिखाया हैं और इस शो में न सिर्फ उन्होंने ट्रॉफी और चालीस लाख जीते हैं बल्कि एक दूसरे ने शो का कॉन्ट्रैक्ट भी जीता हैं. जल्द ही तेजस्वी प्रकाश कलर्स टीवी और एकता कपूर की मशहूर फ्रैंचाइजी नागिन में प्रमुख किरदार निभाते हुए नजर आएंगी. अपने लुक की पहली झलक उन्होंने ग्रैंड फिनाले के दौरान दिए हुए परफॉर्मेंस में दिखाई है. सलमान खान से लेकर सभी ने इस नए शो के लिए तेजस्वी को मुबारक बात भी दी. यानी बिग बॉस के खत्म होने के तुरंत बाद बिना किसी ब्रेक के तेजस्वी प्रकाश अपने नए शो की शूटिंग में बिजी हो जाएंगी. ऐसे में उनके और करण कुंद्रा के रिलेशनशिप का क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा. तेजस्वी प्रकाश की जीत ने यह साबित कर दिया है कि देश की पसंदीदा बहुओं और बेटियों के सामने कोई भी कंटेस्टेंट टिक नहीं पाता. टीवी की बेटी रागिनी के रूप में तेजस्वी ने सीरियल स्वरागिनी से अपने करियर की शुरुआत की थी और तब से लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया है. बिग बॉस के कई सीजन में यह देखा गया है कि टीवी की एक्ट्रेस को हमेशा से वोटिंग में फायदा होता है. तेजस्वी प्रकाश हो या सिमर का किरदार निभाने वाली दीपिका या फिर प्रेरणा बनी श्वेता तिवारी बिग बॉस का यह इतिहास रहा है कि ट्रॉफी टीवी एक्ट्रेस ही जीत लेती हैं.
|
संतों के विषय में कभी-कभी पूछ दिया जाता है कि उन्होंने हमारे लिए क्या किया और इसके साथ संसार की वर्तमान त्रुटियो की र ध्यान भी ढिलाया जाता है। प्रश्न यह है कि यदि वास्तव में इन सतों ने हमारी दुरवस्था को पहचान पाया था और उसके सुधारों के लिए उचित परामर्श दिया था तो क्या कारण है कि ग्राज तक उनके बहुमूल्य उपदेशों का कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ा औौर सारी सासारिक बुराइयाँ जहाँ की तहाँ चनी रह गईं ? और, यदि इन सतो के प्रयत्नों द्वारा विश्व को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं पहुँच सका तो फिर इन्होंने हमारे सास्कृतिक विकास मे ही कौन सा सहयोग प्रदान किया होगा ? यह प्रश्न त्यत स्वाभाविक है और यह वस्तुतः इन संतों के कार्यों की परख के साथ-साथ इनकी अंतिम देन की जिज्ञासा भी जागृत करता है । इस प्रश्न का रूप ऐसा है जो इन -संतो के अतिरिक्त विश्व के अन्य अनेक महापुरुषों, मनीपियो, धर्माचार्यों एवं सुधारकों के विषय में भी लगभग एक ही प्रकार लागू हो सकता है । क्या कृष्ण, बुद्ध, महावीर, ईसामसीह, जरथुस्त्र, मुहम्मद, कनफ्यूशिव आदि महान् व्यक्तियों तथा उनके प्रसिद्ध अनुयायियों ने भी हमारे लिए कुछ किया है ? इनमें से किसी को भी हम ऐसा नहीं कह सकते कि उन्होंने विश्व के लिए कुछ न कुछ ठोस कार्य कर जाने के प्रयत्न नहीं किये। उन्होंने ग्रपना सारा जीवन विश्व कल्याण की दृष्टि से अनवरत कार्य करते रहने में ही व्यतीत किया और अंत मे वे कुछ ऐसे संदेश भी दे गये जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। परंतु क्या कारण है कि विश्व की प्रगति प्रत्यक्षतः अपने निजी ढंग से ही होती चली आ रही है और कभी कोई इसमें उनका नहीं स्वीकार करता ? फिर इसमे कौन सा रहस्य निहित है कि उक्त सभी महान् व्यक्तियों का प्रभाव उनके 'प्रादुर्भाव के पीछे केवल कुछ समय तक ही स्पष्ट दीख पडा ? उनके अनुयायियों की संख्या में प्रायः वृद्धि होती रहने पर भी उनके वास्तविक सदेशों के महत्त्व में क्रमशः कमी ग्राती गई और वे उपेक्षणीय तक चन गये ?
यह प्रश्न साधारण प्रश्नों जैसा नहीं है और इसकी पूर्व गंभीरता इसकी कतिपय विशेषतायो पर निर्भर है जिन पर ध्यान दे लेना त आवश्यक है। इस प्रश्न का सबंध संपूर्ण विश्व से है जिसके विषय मे ज्ञान का दावा करना कभी युक्तिसंगत नहीं कहा जा सकता। इस सबध मे अभी तक जो कुछ परिणाम निकाले जा सके हैं वे अधिकतर तर्क, प्रयोग एव अनुमान जैसे साधनो पर ही आश्रित हैं जिनकी पहुॅच स्वभावतः सीमित हो सकती है । इसके सिवाय यदि विश्व को सदा प्रगतिशील मान कर चला जाय तो इसके समझ पाने में एक दूसरी कठिनाई का भी सामना करना पड़ जाता है । निरतर परिवर्तनशील वस्तु के किस रूप विशेष को ध्यान में रखकर उस पर विचार किया जाय ? विश्व के विकास का नियम विभिन्न परिस्थितियों में भी अतर ला सकता है जिस कारण ऐसे विश्वजनीय प्रश्नो पर सोचते समय भी युग विशेष के वातावरण का प्रभाव पड़ना अनिवार्य सा है । जिन-जिन महापुरुपो ने इस प्रश्न पर ग्राज तक पूरी गंभीरता के साथ मनन करने का प्रयत्न किया उन्हे सदा अपनी इन सीमाओं के ही भीतर काम करना पड़ा। उनके चिंतन एवं कार्यक्रम की पद्धति सदा अपनी परिस्थितियां से ही प्रेरणा पाती रही और उनके द्वारा उपलब्ध परिणाम भी स्वभावतः इनके ही अनुकूल निकलता ग्राया। प्राचीन विचारकों का ध्यान कभी किसी विश्वनियंता की ओर जाता था, कभी वे किसी सार्वभौम नियम की कल्पना करते थे, कभी किसी अद्वितीय तथा निरपेक्ष तत्त्व के अस्तित्त्व का अनुमान करते थे तो कभी सारे जगत् के उत्पन्न होने एवं
विकास पाने के विषय मे तर्क किया करते थे । फलतः विश्व संबधी दोपों की त्रुटियो को दूर करने तथा सत्रको सुखी एव संपन्न बनाने के प्रश्न पर उनके विचार करने के ढग भी भिन्न-भिन्न प्रकार के थे । वे सभी किसी न किसी आदर्श विश्व की कल्पना करते और तदनुकूल सुधार एवं परिवर्तन लाने का परामर्श और उपदेश दिया करते । ऐसी दशा में किसी एक सार्वजनीन एवं सर्वसुलभ उपाय के द्वारा विश्व की सारी कमियों की
दुःख-सुख से प्रतीत होने लगते हैं और सब किसी के साथ उसका भाव पूर्ति का सफल प्रयत्न करना कोई सरल काम नहीं था । आदर्श विश्व की कल्पना करते समय यदि उनका ध्यान प्रधानतः इस प्रश्न के उस पार्श्व की ओर चला जाता जहाँ उसे 'सामूहिक' वा समष्टि की दृष्टि से देखना चाहिए तो उक्त कमियो के प्रमुख कारणों पर विचार करते समय वे इस बात को भी नहीं भूल पाते थे कि वह समष्टि भी वस्तुतः अनेक व्यक्तियो का ही समाहार है। आदर्श मानव समाज का स्वप्न देखते समय वे प्रायः व्यक्ति के महत्व को भूल जाते हैं और प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण का दम भरते समय सदा समाज पर दृष्टि नहीं रख पाते । जिन महापुरुषों ने इन दोनों को समुचित महत्त्व प्रदान कर पर्याप्त उदारता एव व्यावहारिकता से काम लिया उनका ही प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक स्थायी रहा ।
सतो के कार्य पर इस विचार से दृष्टिपात करने पर पता चलता है कि, विश्व कल्याण सबधी प्रश्न को करते समय उन्होंने उक्त दोनो का ध्यान रखा । प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन निर्माता का उपदेश देते समय उन्होंने यही कहा कि वे विश्वात्मक परमात्मतत्त्व के साथ अपनी अभिन्नता का विचार कभी न छोड़ें । संतो के अनुसार किसी आदर्श व्यक्ति की प्रत्येक चेष्टा, इस दशा मे, उस तत्त्व की अनुभूति के रंग मे स्वभावतः रॅगी रहेगी और इस कारण उसका कोई भी कार्य ऐसा नहीं हो सकता जो बाह्यतः व्यक्तिगत सा दीखता हुआ भी, तत्त्वतः उक्त प्रकार के सामूहिक कल्याण के विपरीत पड़ता हो । वास्तव मे ऐसे व्यक्ति के भीतर किसी ऐसी शांति का समावेश हो जाता है जिसके कारण उसके सारे अब हम सकल कुसल करिमांनां, स्वांति भई तब गोव्यंद जांनां ॥ टेक! तन मै होती कोटि उपाधि, उलटि भई सुख सहज समाधि । जमके उलटि मया है राम, दुख बिसरया मुख किया विश्राम ।। चैरी उलटि भये हैं मीता सापत उलटि सजन भये चीता ।। इत्यादि 'कबीर ग्रंथावली', पद १५, पृ० १३
निर्वैरिता का हो जाता है, यहाँ तक कि उसे अपनी मृत्यु तक का भय नहीं रह जाता और उसका प्रत्येक कार्य सुखपूर्वक एवं होने लग जाता है। संतों ने इस आदर्श दशा को प्राप्त करने के लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नही बतलायी है और न इसके लिए किसी काल्प निक "वाम" की ही र किया है। इसकी उपलब्धि के लिए पहले किसी आदर्श विश्व प्रथा आदर्श समाज का निर्मित हो जाना भी अनिवार्य नही । व्यक्तिगत रूप से यह जिस किसी भी चाहे वह जिस किसी भी समाज का सदत्य हो, संभव है, [श्यकता केवल उनके जीवन में कायापलट ग्राने तथा उसके त्यायी बने रहने भर को है। प्रत्येक व्यक्ति की सफलता अपने निजी प्रयत्नों पर ही निर्भर है। जिस कारण संतों के अनुसार, आदर्श विश्व का निर्माण किसी संगठन को अपेक्षा नहीं करता । संतो ने हमारे लिए क्या किया का प्रश्नकर्ता यदि उनके द्वारा प्रतिष्ठित किती ऐसी स्वयं सेवकों की टोली की खोज में हो जो सत्रको बिना बुलाये सजग औौर सचेत करती फिरती हो अथवा यदि वह उनके द्वारा सुरक्षित किसी ऐसी जड़ी-दृटी का पता लगाना चाहता हो जो घर बैठे सभी प्रकार के दुःखों को दूर कर सकती हो तो इन दोनों ही दशाश्री में उसे किसी प्रकार का संतोषप्रद उत्तर नहीं दिया जा सकता । संतों ने ऐसी कोई भी पकी पकायी सामग्री नहीं छोड़ो। उन्होंने विश्व के उस राजरोग को पहचानने की चेष्टा की जिस कारण वह निरंतर दुःख झेला करता है और उसका सावधानी के साथ निदान किया । वे उत्तको ढवा का गुण स्वयं अपने ऊपर उसका प्रयोग करके भी सिद्ध कर गये तथा उसके समुचित अनुपानों की ओर भी संकेत कर गये । हमने न उनपर श्रद्धा की औौरन अपने ऊपर ही पूरा विश्वास किया प्रत्युत सारे झमेलों से अलग बने रहकर केवल इतना ही जानना चाहा कि किस किसने अपना दायित्व कहाँ तक निभाया तथा क्या किसी अन्य की कृपा से भी कोई ऐसा उणय हाथ लग सकता है जिससे सबका कल्याण हो सके ?
संतों ने जिस अपनी धारणा के आधार पर विश्व के प्राणियों में सुख एवं शांति की प्रतिष्ठा करने का सुझाव दिया था वह भारतीय विचारधारा से बहुत भिन्न नही थी और इस विषय की बहुत सी बातें प्रायः एक ही समान तर्क समत भी कही जा सकती थीं। संतों की विशेषता केवल इस बात में पायो गयी कि उन्होंने ऐमो मान्यताओं को शास्त्रानुमोदित मात्र न मान कर इन्हें अपने अनुभवो को कसौटी पर भी कस कर सिद्ध कर दिया और इस प्रकार ये केवल कतिपय उच्चवर्ग में लोगों की ही वस्तु न रह कर सर्वसाधारण तक के लिए सुलभ हो गई । संत लोग स्वयं अधिक शिक्षित नहीं रहते थे और साधारण कोटि के समाज में प्रायः पाले-पोने गये होने के कारण वे साधनहीन भी थे। परंतु जिन प्रश्नों का समाधान करने का उन्होंने प्रयत्न किया वे सर्वथा मौलिक होने के कारण त्यंत मरल और स्वाभाविक भी थे। संतों ने उन्हें अपने सहज भाव के साथ समझा और उन्हें उसी प्रकार दूसरों को समझाने की भी चेष्टा की । फलतः जो बातें कभी वैदिक साहित्य अथवा प्राचीन संस्कृत के ग्रंथों में आने के कारण पहले बहुत गूढ़ और अपरिचित जान पड़ती थीं वे ही इनकी बानियों में बोधगम्य बन गयीं। उनके प्रति सर्वसाधारण की उत्सुकता बढ़ने लगी और धीरे-धीरे जनभाषा में भी एक ऐसे संत साहित्य का निर्माण हो गया जो अपने विषय की गंभीरता से किसी से कम न था । जो प्रश्न कभी केवल पंडितो एवं विद्वानों के ही लिए उपयुक्त समझे जाते थे और जिन्हें शुद्ध शास्त्रीय मात्र समझा जाता था वे इन संतों के प्रयत्नों द्वारा सर्वसाधारण जनता के भी सामने आने लगे और इनका समावेश लोक साहित्य तक में किया जाने लगा ।
इस प्रकार संतो ने भारतीय संस्कृति के विकास में अनेक प्रकार के सहयोग प्रदान किया । भारतीयों के गूढ़ दार्शनिक सिद्धात अद्वैतवाद को उन्होंने सर्वसाधारण के जीवन तक में घटा कर उसको वास्तविक उपयोगिता सिद्ध कर दी। केवल इसी के आधार पर धर्म एव संप्रदायगत
भेदभाव के साथ-साथ वर्ण एवं जातिगत विषमताओं की भी निःसारता
को प्रमाणित कर दिखाया। संतों को इस धारणा के प्रचार का एक परिणाम यह भी हुआ कि जो विश्व बंधुत्व पहले किसी स्वप्नलोक की बात समझा जाता था उसे युक्तिसंगत आधार मिल गया और प्रत्येक भारतीय को विषय में मौका अनुभव करने का अवसर मिल गया । इसके सिवाय इन संतों की ही कड़ी आलोचनाओं के कारण हमारा ध्यान एक बार अपनी उस दृष्टि की ओर भी गया जिसके कारण हम अपनी 'कथनी' एवं 'करनी' में सामंजस्य रखने का सदुपयोग नहीं जानते थे और हमारा जीवन ढोंगों से भर गया था । संतो ने इस महान् दोष की ओर संकेत करके हमें अपनी कई प्रथाओं को सुधारने में भी सहायता प्रदान की और इस प्रकार हमारे जीवन में अधिक शुद्धता, सत्यता एवं सुव्यवस्था को लाने का भी सुअवसर मिल गया । संतों ने अपने सभी कार्य साधारण समाज में रह कर और साधारण लोकभाषा के ही माध्यम से किया जो स्वयं भी उनकी एक बहुत बड़ी देन थी ।
हिंदी संत
साधारण तौर पर प्रयोग में आने वाले 'संत' शब्द का अभिप्राय किसी भी ऐसे महापुरुप से हो सकता है जिसे हम दूसरे शब्दों में साधु, सज्जन, सदाचारी, भक्त अथवा महात्मा कहा करते हैं। किंतु सतसाहित्य में प्रयुक्त 'सत' शब्द का अर्थ उससे कुछ भिन्न समझा जाता है । यहाँ पर 'सत' शब्द का व्यवहार केवल उन्हीं महान व्यक्तियों के लिए किया जाता है जो उक्त गुणों से संपन्न होते हुए अपने कतिपय विशेष विचारों और साधनाओं के कारण एक विशेष परपरा के अनुयायी भी माने जाते रहे हैं । यह परंपरा स्पष्ट और विशद् रूप से प्रसिद्ध कन्नीर साहब के काल से प्रारंभ हुई थी और तब से समयानुसार केवल थोड़े से परिवर्तनों के साथ आज तक निरंतर चली आ रही है। इसके निर्गुण पथी' वा 'निर्गुनिए' भी कहे जाते हैं । ये
निजी अनुभव को ही साधना में सबसे अधिक महत्व देते हैं । सादगी, सदाचार, त्याग, निर्भीकता, हृदय की सचाई और विश्व प्रेम के ही चराचर उपदेश दिया करते हैं और नामस्मरण में बाध रूप से लगे रहने पर भी अनासक्ति के साथ अपने आवश्यक लौकिक कार्यों के करने से मुॅह नहीं मोड़ते । समाज में इनका मुख्य उद्देश्य आदर्श एवं व्यवहार का सामंजस्य रखते हुए उसकी भलाई करना है। इन्हें हर प्रकार के आडंबर और विनाओं से सख्त परहेज है । संत साहित्य का शब्द भी, काव्य शास्त्र संबंधी छंद अलंकार, रीति, रस वा गुण दोषों के ग्रंथों का ही केवल परिचायक न होकर, संत परंपरा के अनुयायियों द्वारा निर्मित की गई समस्त रचनाओं के समूह के लिए ही व्यवहृत हुआ है । संत साहित्य की रचनाओं में विशेष रूप से सिद्धात एवं साधनाओं का निरूपण तथा प्रतिपादन मात्र आने के कारण उसमें विषय वा भाव
|
संतों के विषय में कभी-कभी पूछ दिया जाता है कि उन्होंने हमारे लिए क्या किया और इसके साथ संसार की वर्तमान त्रुटियो की र ध्यान भी ढिलाया जाता है। प्रश्न यह है कि यदि वास्तव में इन सतों ने हमारी दुरवस्था को पहचान पाया था और उसके सुधारों के लिए उचित परामर्श दिया था तो क्या कारण है कि ग्राज तक उनके बहुमूल्य उपदेशों का कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ा औौर सारी सासारिक बुराइयाँ जहाँ की तहाँ चनी रह गईं ? और, यदि इन सतो के प्रयत्नों द्वारा विश्व को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं पहुँच सका तो फिर इन्होंने हमारे सास्कृतिक विकास मे ही कौन सा सहयोग प्रदान किया होगा ? यह प्रश्न त्यत स्वाभाविक है और यह वस्तुतः इन संतों के कार्यों की परख के साथ-साथ इनकी अंतिम देन की जिज्ञासा भी जागृत करता है । इस प्रश्न का रूप ऐसा है जो इन -संतो के अतिरिक्त विश्व के अन्य अनेक महापुरुषों, मनीपियो, धर्माचार्यों एवं सुधारकों के विषय में भी लगभग एक ही प्रकार लागू हो सकता है । क्या कृष्ण, बुद्ध, महावीर, ईसामसीह, जरथुस्त्र, मुहम्मद, कनफ्यूशिव आदि महान् व्यक्तियों तथा उनके प्रसिद्ध अनुयायियों ने भी हमारे लिए कुछ किया है ? इनमें से किसी को भी हम ऐसा नहीं कह सकते कि उन्होंने विश्व के लिए कुछ न कुछ ठोस कार्य कर जाने के प्रयत्न नहीं किये। उन्होंने ग्रपना सारा जीवन विश्व कल्याण की दृष्टि से अनवरत कार्य करते रहने में ही व्यतीत किया और अंत मे वे कुछ ऐसे संदेश भी दे गये जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। परंतु क्या कारण है कि विश्व की प्रगति प्रत्यक्षतः अपने निजी ढंग से ही होती चली आ रही है और कभी कोई इसमें उनका नहीं स्वीकार करता ? फिर इसमे कौन सा रहस्य निहित है कि उक्त सभी महान् व्यक्तियों का प्रभाव उनके 'प्रादुर्भाव के पीछे केवल कुछ समय तक ही स्पष्ट दीख पडा ? उनके अनुयायियों की संख्या में प्रायः वृद्धि होती रहने पर भी उनके वास्तविक सदेशों के महत्त्व में क्रमशः कमी ग्राती गई और वे उपेक्षणीय तक चन गये ? यह प्रश्न साधारण प्रश्नों जैसा नहीं है और इसकी पूर्व गंभीरता इसकी कतिपय विशेषतायो पर निर्भर है जिन पर ध्यान दे लेना त आवश्यक है। इस प्रश्न का सबंध संपूर्ण विश्व से है जिसके विषय मे ज्ञान का दावा करना कभी युक्तिसंगत नहीं कहा जा सकता। इस सबध मे अभी तक जो कुछ परिणाम निकाले जा सके हैं वे अधिकतर तर्क, प्रयोग एव अनुमान जैसे साधनो पर ही आश्रित हैं जिनकी पहुॅच स्वभावतः सीमित हो सकती है । इसके सिवाय यदि विश्व को सदा प्रगतिशील मान कर चला जाय तो इसके समझ पाने में एक दूसरी कठिनाई का भी सामना करना पड़ जाता है । निरतर परिवर्तनशील वस्तु के किस रूप विशेष को ध्यान में रखकर उस पर विचार किया जाय ? विश्व के विकास का नियम विभिन्न परिस्थितियों में भी अतर ला सकता है जिस कारण ऐसे विश्वजनीय प्रश्नो पर सोचते समय भी युग विशेष के वातावरण का प्रभाव पड़ना अनिवार्य सा है । जिन-जिन महापुरुपो ने इस प्रश्न पर ग्राज तक पूरी गंभीरता के साथ मनन करने का प्रयत्न किया उन्हे सदा अपनी इन सीमाओं के ही भीतर काम करना पड़ा। उनके चिंतन एवं कार्यक्रम की पद्धति सदा अपनी परिस्थितियां से ही प्रेरणा पाती रही और उनके द्वारा उपलब्ध परिणाम भी स्वभावतः इनके ही अनुकूल निकलता ग्राया। प्राचीन विचारकों का ध्यान कभी किसी विश्वनियंता की ओर जाता था, कभी वे किसी सार्वभौम नियम की कल्पना करते थे, कभी किसी अद्वितीय तथा निरपेक्ष तत्त्व के अस्तित्त्व का अनुमान करते थे तो कभी सारे जगत् के उत्पन्न होने एवं विकास पाने के विषय मे तर्क किया करते थे । फलतः विश्व संबधी दोपों की त्रुटियो को दूर करने तथा सत्रको सुखी एव संपन्न बनाने के प्रश्न पर उनके विचार करने के ढग भी भिन्न-भिन्न प्रकार के थे । वे सभी किसी न किसी आदर्श विश्व की कल्पना करते और तदनुकूल सुधार एवं परिवर्तन लाने का परामर्श और उपदेश दिया करते । ऐसी दशा में किसी एक सार्वजनीन एवं सर्वसुलभ उपाय के द्वारा विश्व की सारी कमियों की दुःख-सुख से प्रतीत होने लगते हैं और सब किसी के साथ उसका भाव पूर्ति का सफल प्रयत्न करना कोई सरल काम नहीं था । आदर्श विश्व की कल्पना करते समय यदि उनका ध्यान प्रधानतः इस प्रश्न के उस पार्श्व की ओर चला जाता जहाँ उसे 'सामूहिक' वा समष्टि की दृष्टि से देखना चाहिए तो उक्त कमियो के प्रमुख कारणों पर विचार करते समय वे इस बात को भी नहीं भूल पाते थे कि वह समष्टि भी वस्तुतः अनेक व्यक्तियो का ही समाहार है। आदर्श मानव समाज का स्वप्न देखते समय वे प्रायः व्यक्ति के महत्व को भूल जाते हैं और प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण का दम भरते समय सदा समाज पर दृष्टि नहीं रख पाते । जिन महापुरुषों ने इन दोनों को समुचित महत्त्व प्रदान कर पर्याप्त उदारता एव व्यावहारिकता से काम लिया उनका ही प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक स्थायी रहा । सतो के कार्य पर इस विचार से दृष्टिपात करने पर पता चलता है कि, विश्व कल्याण सबधी प्रश्न को करते समय उन्होंने उक्त दोनो का ध्यान रखा । प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन निर्माता का उपदेश देते समय उन्होंने यही कहा कि वे विश्वात्मक परमात्मतत्त्व के साथ अपनी अभिन्नता का विचार कभी न छोड़ें । संतो के अनुसार किसी आदर्श व्यक्ति की प्रत्येक चेष्टा, इस दशा मे, उस तत्त्व की अनुभूति के रंग मे स्वभावतः रॅगी रहेगी और इस कारण उसका कोई भी कार्य ऐसा नहीं हो सकता जो बाह्यतः व्यक्तिगत सा दीखता हुआ भी, तत्त्वतः उक्त प्रकार के सामूहिक कल्याण के विपरीत पड़ता हो । वास्तव मे ऐसे व्यक्ति के भीतर किसी ऐसी शांति का समावेश हो जाता है जिसके कारण उसके सारे अब हम सकल कुसल करिमांनां, स्वांति भई तब गोव्यंद जांनां ॥ टेक! तन मै होती कोटि उपाधि, उलटि भई सुख सहज समाधि । जमके उलटि मया है राम, दुख बिसरया मुख किया विश्राम ।। चैरी उलटि भये हैं मीता सापत उलटि सजन भये चीता ।। इत्यादि 'कबीर ग्रंथावली', पद पंद्रह, पृशून्य तेरह निर्वैरिता का हो जाता है, यहाँ तक कि उसे अपनी मृत्यु तक का भय नहीं रह जाता और उसका प्रत्येक कार्य सुखपूर्वक एवं होने लग जाता है। संतों ने इस आदर्श दशा को प्राप्त करने के लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नही बतलायी है और न इसके लिए किसी काल्प निक "वाम" की ही र किया है। इसकी उपलब्धि के लिए पहले किसी आदर्श विश्व प्रथा आदर्श समाज का निर्मित हो जाना भी अनिवार्य नही । व्यक्तिगत रूप से यह जिस किसी भी चाहे वह जिस किसी भी समाज का सदत्य हो, संभव है, [श्यकता केवल उनके जीवन में कायापलट ग्राने तथा उसके त्यायी बने रहने भर को है। प्रत्येक व्यक्ति की सफलता अपने निजी प्रयत्नों पर ही निर्भर है। जिस कारण संतों के अनुसार, आदर्श विश्व का निर्माण किसी संगठन को अपेक्षा नहीं करता । संतो ने हमारे लिए क्या किया का प्रश्नकर्ता यदि उनके द्वारा प्रतिष्ठित किती ऐसी स्वयं सेवकों की टोली की खोज में हो जो सत्रको बिना बुलाये सजग औौर सचेत करती फिरती हो अथवा यदि वह उनके द्वारा सुरक्षित किसी ऐसी जड़ी-दृटी का पता लगाना चाहता हो जो घर बैठे सभी प्रकार के दुःखों को दूर कर सकती हो तो इन दोनों ही दशाश्री में उसे किसी प्रकार का संतोषप्रद उत्तर नहीं दिया जा सकता । संतों ने ऐसी कोई भी पकी पकायी सामग्री नहीं छोड़ो। उन्होंने विश्व के उस राजरोग को पहचानने की चेष्टा की जिस कारण वह निरंतर दुःख झेला करता है और उसका सावधानी के साथ निदान किया । वे उत्तको ढवा का गुण स्वयं अपने ऊपर उसका प्रयोग करके भी सिद्ध कर गये तथा उसके समुचित अनुपानों की ओर भी संकेत कर गये । हमने न उनपर श्रद्धा की औौरन अपने ऊपर ही पूरा विश्वास किया प्रत्युत सारे झमेलों से अलग बने रहकर केवल इतना ही जानना चाहा कि किस किसने अपना दायित्व कहाँ तक निभाया तथा क्या किसी अन्य की कृपा से भी कोई ऐसा उणय हाथ लग सकता है जिससे सबका कल्याण हो सके ? संतों ने जिस अपनी धारणा के आधार पर विश्व के प्राणियों में सुख एवं शांति की प्रतिष्ठा करने का सुझाव दिया था वह भारतीय विचारधारा से बहुत भिन्न नही थी और इस विषय की बहुत सी बातें प्रायः एक ही समान तर्क समत भी कही जा सकती थीं। संतों की विशेषता केवल इस बात में पायो गयी कि उन्होंने ऐमो मान्यताओं को शास्त्रानुमोदित मात्र न मान कर इन्हें अपने अनुभवो को कसौटी पर भी कस कर सिद्ध कर दिया और इस प्रकार ये केवल कतिपय उच्चवर्ग में लोगों की ही वस्तु न रह कर सर्वसाधारण तक के लिए सुलभ हो गई । संत लोग स्वयं अधिक शिक्षित नहीं रहते थे और साधारण कोटि के समाज में प्रायः पाले-पोने गये होने के कारण वे साधनहीन भी थे। परंतु जिन प्रश्नों का समाधान करने का उन्होंने प्रयत्न किया वे सर्वथा मौलिक होने के कारण त्यंत मरल और स्वाभाविक भी थे। संतों ने उन्हें अपने सहज भाव के साथ समझा और उन्हें उसी प्रकार दूसरों को समझाने की भी चेष्टा की । फलतः जो बातें कभी वैदिक साहित्य अथवा प्राचीन संस्कृत के ग्रंथों में आने के कारण पहले बहुत गूढ़ और अपरिचित जान पड़ती थीं वे ही इनकी बानियों में बोधगम्य बन गयीं। उनके प्रति सर्वसाधारण की उत्सुकता बढ़ने लगी और धीरे-धीरे जनभाषा में भी एक ऐसे संत साहित्य का निर्माण हो गया जो अपने विषय की गंभीरता से किसी से कम न था । जो प्रश्न कभी केवल पंडितो एवं विद्वानों के ही लिए उपयुक्त समझे जाते थे और जिन्हें शुद्ध शास्त्रीय मात्र समझा जाता था वे इन संतों के प्रयत्नों द्वारा सर्वसाधारण जनता के भी सामने आने लगे और इनका समावेश लोक साहित्य तक में किया जाने लगा । इस प्रकार संतो ने भारतीय संस्कृति के विकास में अनेक प्रकार के सहयोग प्रदान किया । भारतीयों के गूढ़ दार्शनिक सिद्धात अद्वैतवाद को उन्होंने सर्वसाधारण के जीवन तक में घटा कर उसको वास्तविक उपयोगिता सिद्ध कर दी। केवल इसी के आधार पर धर्म एव संप्रदायगत भेदभाव के साथ-साथ वर्ण एवं जातिगत विषमताओं की भी निःसारता को प्रमाणित कर दिखाया। संतों को इस धारणा के प्रचार का एक परिणाम यह भी हुआ कि जो विश्व बंधुत्व पहले किसी स्वप्नलोक की बात समझा जाता था उसे युक्तिसंगत आधार मिल गया और प्रत्येक भारतीय को विषय में मौका अनुभव करने का अवसर मिल गया । इसके सिवाय इन संतों की ही कड़ी आलोचनाओं के कारण हमारा ध्यान एक बार अपनी उस दृष्टि की ओर भी गया जिसके कारण हम अपनी 'कथनी' एवं 'करनी' में सामंजस्य रखने का सदुपयोग नहीं जानते थे और हमारा जीवन ढोंगों से भर गया था । संतो ने इस महान् दोष की ओर संकेत करके हमें अपनी कई प्रथाओं को सुधारने में भी सहायता प्रदान की और इस प्रकार हमारे जीवन में अधिक शुद्धता, सत्यता एवं सुव्यवस्था को लाने का भी सुअवसर मिल गया । संतों ने अपने सभी कार्य साधारण समाज में रह कर और साधारण लोकभाषा के ही माध्यम से किया जो स्वयं भी उनकी एक बहुत बड़ी देन थी । हिंदी संत साधारण तौर पर प्रयोग में आने वाले 'संत' शब्द का अभिप्राय किसी भी ऐसे महापुरुप से हो सकता है जिसे हम दूसरे शब्दों में साधु, सज्जन, सदाचारी, भक्त अथवा महात्मा कहा करते हैं। किंतु सतसाहित्य में प्रयुक्त 'सत' शब्द का अर्थ उससे कुछ भिन्न समझा जाता है । यहाँ पर 'सत' शब्द का व्यवहार केवल उन्हीं महान व्यक्तियों के लिए किया जाता है जो उक्त गुणों से संपन्न होते हुए अपने कतिपय विशेष विचारों और साधनाओं के कारण एक विशेष परपरा के अनुयायी भी माने जाते रहे हैं । यह परंपरा स्पष्ट और विशद् रूप से प्रसिद्ध कन्नीर साहब के काल से प्रारंभ हुई थी और तब से समयानुसार केवल थोड़े से परिवर्तनों के साथ आज तक निरंतर चली आ रही है। इसके निर्गुण पथी' वा 'निर्गुनिए' भी कहे जाते हैं । ये निजी अनुभव को ही साधना में सबसे अधिक महत्व देते हैं । सादगी, सदाचार, त्याग, निर्भीकता, हृदय की सचाई और विश्व प्रेम के ही चराचर उपदेश दिया करते हैं और नामस्मरण में बाध रूप से लगे रहने पर भी अनासक्ति के साथ अपने आवश्यक लौकिक कार्यों के करने से मुॅह नहीं मोड़ते । समाज में इनका मुख्य उद्देश्य आदर्श एवं व्यवहार का सामंजस्य रखते हुए उसकी भलाई करना है। इन्हें हर प्रकार के आडंबर और विनाओं से सख्त परहेज है । संत साहित्य का शब्द भी, काव्य शास्त्र संबंधी छंद अलंकार, रीति, रस वा गुण दोषों के ग्रंथों का ही केवल परिचायक न होकर, संत परंपरा के अनुयायियों द्वारा निर्मित की गई समस्त रचनाओं के समूह के लिए ही व्यवहृत हुआ है । संत साहित्य की रचनाओं में विशेष रूप से सिद्धात एवं साधनाओं का निरूपण तथा प्रतिपादन मात्र आने के कारण उसमें विषय वा भाव
|
हरभजन ने भारत के लिए 103 टेस्ट, 236 वनडे और 28 टी20 खेले। इस दौरान उन्होंने कुल 711 विकेट अपने नाम किए। युवराज ने भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 मैच खेले। उन्होंने तीनों प्रारूपों में 148 विकेट लेने के अलावा 11,778 रन भी बनाए हैं।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) को तीन साल बाद टी20 मैचों की मेजबानी करने का मौका मिला। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन टी20 मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला मोहाली के आईएस बिंद्रा क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। पीसीए ने इस मौके को खास अंदाज में यादगार बनाया। उसने मुकाबले से पहले भारत के पूर्व खिलाड़ी युवराज सिंह और हरभजन सिंह के नाम पर स्टैंड का नाम रखा। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया।
अनावरण समारोह के दौरान युवराज और हरभजन साथ दिखाई दिए। युवराज मैच से पहले भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के साथ नजर आए। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने प्रसिद्ध टेरेस ब्लॉक का नाम बदला। हरभजन ने भारत के लिए 103 टेस्ट, 236 वनडे और 28 टी20 खेले। इस दौरान उन्होंने कुल 711 विकेट अपने नाम किए।
इसी तरह स्टेडियम के उत्तरी पवेलियन का नाम युवराज सिंह के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 मैच खेले। युवराज ने तीनों प्रारूपों में 148 विकेट लेने के अलावा 11,778 रन भी बनाए हैं। दोनों पंजाब के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट के लिए हीरो रहे हैं और प्रशंसकों के साथ-साथ खिलाड़ी भी इन दो क्रिकेटरों के नाम पर स्टैंड देखकर प्रेरित होंगे। मोहाली का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम 1994 में बना था। इसका नाम पीसीए और बीसीसीआई के पूर्व अधिकारी आईएस बिंद्रा के नाम पर रखा गया है।
टीम इंडिया ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में छह विकेट गंवाकर 208 रन बनाए। हार्दिक पांड्या ने 30 गेंदों में 71 रन की नाबाद पारी खेली। अपनी पारी में हार्दिक ने सात चौके और पांच छक्के लगाए। हार्दिक ने 20वें ओवर की आखिरी तीन गेंदों पर तीन छक्के लगाए। भारत ने आखिरी पांच ओवर में 67 रन बनाए। आखिर में हार्दिक और हर्षल पटेल ने 11 गेंदों में 32 रन की नाबाद साझेदारी निभाई। केएल राहुल ने 55 और सूर्यकुमार यादव ने 46 रन की पारी खेली।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
हरभजन ने भारत के लिए एक सौ तीन टेस्ट, दो सौ छत्तीस वनडे और अट्ठाईस टीबीस खेले। इस दौरान उन्होंने कुल सात सौ ग्यारह विकेट अपने नाम किए। युवराज ने भारत के लिए चालीस टेस्ट, तीन सौ चार वनडे और अट्ठावन टीबीस मैच खेले। उन्होंने तीनों प्रारूपों में एक सौ अड़तालीस विकेट लेने के अलावा ग्यारह,सात सौ अठहत्तर रन भी बनाए हैं। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन को तीन साल बाद टीबीस मैचों की मेजबानी करने का मौका मिला। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन टीबीस मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला मोहाली के आईएस बिंद्रा क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। पीसीए ने इस मौके को खास अंदाज में यादगार बनाया। उसने मुकाबले से पहले भारत के पूर्व खिलाड़ी युवराज सिंह और हरभजन सिंह के नाम पर स्टैंड का नाम रखा। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किया। अनावरण समारोह के दौरान युवराज और हरभजन साथ दिखाई दिए। युवराज मैच से पहले भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के साथ नजर आए। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने प्रसिद्ध टेरेस ब्लॉक का नाम बदला। हरभजन ने भारत के लिए एक सौ तीन टेस्ट, दो सौ छत्तीस वनडे और अट्ठाईस टीबीस खेले। इस दौरान उन्होंने कुल सात सौ ग्यारह विकेट अपने नाम किए। इसी तरह स्टेडियम के उत्तरी पवेलियन का नाम युवराज सिंह के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने भारत के लिए चालीस टेस्ट, तीन सौ चार वनडे और अट्ठावन टीबीस मैच खेले। युवराज ने तीनों प्रारूपों में एक सौ अड़तालीस विकेट लेने के अलावा ग्यारह,सात सौ अठहत्तर रन भी बनाए हैं। दोनों पंजाब के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट के लिए हीरो रहे हैं और प्रशंसकों के साथ-साथ खिलाड़ी भी इन दो क्रिकेटरों के नाम पर स्टैंड देखकर प्रेरित होंगे। मोहाली का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में बना था। इसका नाम पीसीए और बीसीसीआई के पूर्व अधिकारी आईएस बिंद्रा के नाम पर रखा गया है। टीम इंडिया ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बीस ओवर में छह विकेट गंवाकर दो सौ आठ रन बनाए। हार्दिक पांड्या ने तीस गेंदों में इकहत्तर रन की नाबाद पारी खेली। अपनी पारी में हार्दिक ने सात चौके और पांच छक्के लगाए। हार्दिक ने बीसवें ओवर की आखिरी तीन गेंदों पर तीन छक्के लगाए। भारत ने आखिरी पांच ओवर में सरसठ रन बनाए। आखिर में हार्दिक और हर्षल पटेल ने ग्यारह गेंदों में बत्तीस रन की नाबाद साझेदारी निभाई। केएल राहुल ने पचपन और सूर्यकुमार यादव ने छियालीस रन की पारी खेली। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
Sapna Chaudhary का नया गाना Nashile Nain हुआ रिलीज, सपना के डांस के आगे सब फेल!
Sapna Chaudhary New Haryanvi Song 2022: हरियाणा की मशहूर डांसर और बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट सपना चौधरी का एक और गाना रिलीज हो गया है। इस गाने में सपना का धमारेदार डांस फैंस को दीवाना बना रहा है। सपना चौधरी का गाना नशीले नैन (Nashile Nain) यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है।
New Haryanvi Song 2022; Sapna Chaudhary Dance: हरियाणा की मशहूर डांसर और बिग बॉस 11 की कंटेस्टेंट सपना चौधरी का एक नया गाना रिलीज कर दिया गया है। सपना चौधरी का गाना नशीले नैन (Nashile Nain) यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है। इस गाने में सपना का डांस हमेशा की तरह ही काफी धमारेदार है। नशीले नैन (Nashile Nain) यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है। सपना चौधरी के इस गाने को हरियाणा की मशहूर सिंगर कंचन नागर (Kanchan Nagar) ने गाया है। वहीं वीडियो में सपना के साथ एक्टर विवेक राघव ( Vivek Raghav ) भी नजर आ रहे हैं।
सपना चौधरी के इस नए गाने को फैंस सुपरहिट बता रहे हैं, एक यूजर ने लिखा, 'मुझे सपना के गाने से कुछ ऐसी ही उम्मीद थी'। आइए इस गाने पर एक नजर डालते हैं।
ट्रेंडिंगः
|
Sapna Chaudhary का नया गाना Nashile Nain हुआ रिलीज, सपना के डांस के आगे सब फेल! Sapna Chaudhary New Haryanvi Song दो हज़ार बाईस: हरियाणा की मशहूर डांसर और बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट सपना चौधरी का एक और गाना रिलीज हो गया है। इस गाने में सपना का धमारेदार डांस फैंस को दीवाना बना रहा है। सपना चौधरी का गाना नशीले नैन यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है। New Haryanvi Song दो हज़ार बाईस; Sapna Chaudhary Dance: हरियाणा की मशहूर डांसर और बिग बॉस ग्यारह की कंटेस्टेंट सपना चौधरी का एक नया गाना रिलीज कर दिया गया है। सपना चौधरी का गाना नशीले नैन यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है। इस गाने में सपना का डांस हमेशा की तरह ही काफी धमारेदार है। नशीले नैन यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है। सपना चौधरी के इस गाने को हरियाणा की मशहूर सिंगर कंचन नागर ने गाया है। वहीं वीडियो में सपना के साथ एक्टर विवेक राघव भी नजर आ रहे हैं। सपना चौधरी के इस नए गाने को फैंस सुपरहिट बता रहे हैं, एक यूजर ने लिखा, 'मुझे सपना के गाने से कुछ ऐसी ही उम्मीद थी'। आइए इस गाने पर एक नजर डालते हैं। ट्रेंडिंगः
|
Step-1. एक नॉन स्टिक पैन को गैस पर चढ़ा कर उसमें थोड़ा घी गर्म करें।
Step-2. अब इसमें दूध डालकर 20-25 मिनट तक पकनें दें।
Step-3. इसे कड़छी से हिलाते हुए तब तक पकाएं जब तक दूध गाढ़ा न हो जाए।
Step-4. अब इसमें कद्दूकस करके निकाला हुआ सेब का गूदा डालें। ध्यान रहे सेब को ज्यादा देर तक रखने से पल्प लाल हो जाता है। इसलिए इस्तेमाल के समय ही इसे कद्दूकस करें।
Step-5. इसके बाद इसमें चीनी और इलायची पाउडर डालकर थोड़ी देर और पकने दें।
Step-6. अच्छी तरह से गाढ़ा होने के बाद इसे गैस से उतार पर ठंडा कर लें।
Step-7. अब इसे बॉउल में डालकर सर्व करें।
|
Step-एक. एक नॉन स्टिक पैन को गैस पर चढ़ा कर उसमें थोड़ा घी गर्म करें। Step-दो. अब इसमें दूध डालकर बीस-पच्चीस मिनट तक पकनें दें। Step-तीन. इसे कड़छी से हिलाते हुए तब तक पकाएं जब तक दूध गाढ़ा न हो जाए। Step-चार. अब इसमें कद्दूकस करके निकाला हुआ सेब का गूदा डालें। ध्यान रहे सेब को ज्यादा देर तक रखने से पल्प लाल हो जाता है। इसलिए इस्तेमाल के समय ही इसे कद्दूकस करें। Step-पाँच. इसके बाद इसमें चीनी और इलायची पाउडर डालकर थोड़ी देर और पकने दें। Step-छः. अच्छी तरह से गाढ़ा होने के बाद इसे गैस से उतार पर ठंडा कर लें। Step-सात. अब इसे बॉउल में डालकर सर्व करें।
|
- विश्व में भारतीय फ़िल्मों को नई पहचान दिलाने वाले सत्यजित राय का जन्म- 2 मई, 1921 को कलकत्ता में हुआ।
- सत्यजित राय 20वीं शताब्दी के विश्व की महानतम फ़िल्मी हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने यथार्थवादी धारा की फ़िल्मों को नई दिशा देने के अलावा साहित्य, चित्रकला जैसी अन्य विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
- कोलकाता के एक जाने-माने बंगाली परिवार में जन्मे सत्यजित राय फ़िल्म निर्माण से संबंधित कई काम खुद ही करते थे। जिनमें निर्देशन, छायांकन, पटकथा, पार्श्व संगीत, कला निर्देशन, संपादन आदि शामिल हैं।
- फ़िल्मकार के अलावा वह कहानीकार, चित्रकार, फ़िल्म आलोचक भी थे। सत्यजित राय कथानक लिखने को निर्देशन का अभिन्न अंग मानते थे।
- विश्व विख्यात निर्देशक सत्यजित राय ने सबसे ज़्यादा राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने और उनके काम ने कुल 32 राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त किये।
|
- विश्व में भारतीय फ़िल्मों को नई पहचान दिलाने वाले सत्यजित राय का जन्म- दो मई, एक हज़ार नौ सौ इक्कीस को कलकत्ता में हुआ। - सत्यजित राय बीसवीं शताब्दी के विश्व की महानतम फ़िल्मी हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने यथार्थवादी धारा की फ़िल्मों को नई दिशा देने के अलावा साहित्य, चित्रकला जैसी अन्य विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। - कोलकाता के एक जाने-माने बंगाली परिवार में जन्मे सत्यजित राय फ़िल्म निर्माण से संबंधित कई काम खुद ही करते थे। जिनमें निर्देशन, छायांकन, पटकथा, पार्श्व संगीत, कला निर्देशन, संपादन आदि शामिल हैं। - फ़िल्मकार के अलावा वह कहानीकार, चित्रकार, फ़िल्म आलोचक भी थे। सत्यजित राय कथानक लिखने को निर्देशन का अभिन्न अंग मानते थे। - विश्व विख्यात निर्देशक सत्यजित राय ने सबसे ज़्यादा राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने और उनके काम ने कुल बत्तीस राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त किये।
|
देहरादूनः नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन की मशीनरी पहले ही मोर्चे पर विफल नजर आ रही है। जिन नामांकन पत्रों की बिक्री के निर्देश राज्य निर्वाचन आयोग ने 16 अक्टूबर तक करने को कहा था, वह अगले दिन 17 अक्टूबर तक भी नहीं की जा सकी।
पंचस्थानीय चुनावालय के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी वीएस चौहान ने बताया कि उनके कार्यालय में नामांकन पत्र मंगलवार देर शाम करीब सात बजे तक पहुंच पाए। इसके बाद बुधवार दोपहर तक इन्हें भेजने की कवायद शुरू की जा सकी। हालांकि इस काम में भी तीन बजे से अधिक का समय हो गया। ऐसे में 17 अक्टूबर को भी नामांकन पत्रों की बिक्री नहीं की जा सकी थी। हालांकि जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी चौहान का कहना है कि जल्द सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आने लगेंगी।
चुनाव ड्यूटी के लिए पंचस्थानीय चुनावालय में कार्मिकों के नामों की सूची तैयार की जा रही है। ज्यादातर विभागों से नाम पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ विभागों से नाम आने अभी बाकी हैं। इसके साथ ही भेजे गए नामों के सापेक्ष चुनाव ड्यूटी की तैयारी भी शुरू की जा रही है।
जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरूगेशन ने नामांकन पत्रों की बिक्री, प्राप्ति, जांच व प्रतीक चिह्नों के आवंटन को स्थल निर्धारित कर दिए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि नगर निगम देहरादून में महापौर पद के नामांकन पत्रों की बिक्री, प्राप्ति, जांच व प्रतीक चिह्नों के आवंटन को नए भवन के कक्ष संख्या सात को चयनित किया गया है।
पार्षद पदों को वार्ड एक से 15 तक कक्ष एक, वार्ड 16 से 30 तक के लिए कक्ष दो, वार्ड 31 से 45 तक के लिए कक्ष तीन, वार्ड 46 से 60 तक के लिए कक्ष चार, वार्ड 61 से 75 तक के लिए कक्ष पांच, वार्ड 76 से 90 तक के लिए कक्ष छह व शेष 100 तक के वार्डों के लिए कक्ष संख्या सात निर्धारित किया गया है।
इसी तरह नगर निगम ऋषिकेश, नगर पालिका परिषद मसूरी, डोईवाला, विकासनगर व हरबर्टपुर के लिए भी कक्ष आवंटित कर दिए गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी निर्वाचन अधिकारियों व सहायक निर्वाचन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निर्धारित स्थलों पर नामांकन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक अधिकारी अपना मोबाइल ऑफ नहीं करेंगे। साथ ही हर समय अलर्ट मोड में रहेंगे। यह हिदायत जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने निर्वाचन व सहायक निर्वाचन अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान दी।
प्रशिक्षण के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरुगेशन ने कहा कि सभी अधिकारी उप जिला निर्वाचन अधिकारी अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल, मुख्य विकास अधिकारी जीएस रावत व सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल के संपर्क में बने रहें।
नामांकन पत्रों की बिक्री से ही सभी अधिकारी पूरे समय अपने स्थलों पर तैनात रहेंगे और नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के समय विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि पूरा विवरण सही ढंग से भरा है या नहीं और सभी संलग्नक भली-भांति लगे हैं या नहीं। पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड मेंटेन होना चाहिए और कोई भी काम कल पर न टाला जाए। यदि किसी भी काम को लेकर कभी भी शंका हो तो तुरंत संबंधित उप निर्वाचिन अधिकारियों से उसका समाधान करा लें। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अरविंद पांडे, दून घाटी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के सचिव एसएल सेमवाल आदि उपस्थित रहे।
|
देहरादूनः नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन की मशीनरी पहले ही मोर्चे पर विफल नजर आ रही है। जिन नामांकन पत्रों की बिक्री के निर्देश राज्य निर्वाचन आयोग ने सोलह अक्टूबर तक करने को कहा था, वह अगले दिन सत्रह अक्टूबर तक भी नहीं की जा सकी। पंचस्थानीय चुनावालय के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी वीएस चौहान ने बताया कि उनके कार्यालय में नामांकन पत्र मंगलवार देर शाम करीब सात बजे तक पहुंच पाए। इसके बाद बुधवार दोपहर तक इन्हें भेजने की कवायद शुरू की जा सकी। हालांकि इस काम में भी तीन बजे से अधिक का समय हो गया। ऐसे में सत्रह अक्टूबर को भी नामांकन पत्रों की बिक्री नहीं की जा सकी थी। हालांकि जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी चौहान का कहना है कि जल्द सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आने लगेंगी। चुनाव ड्यूटी के लिए पंचस्थानीय चुनावालय में कार्मिकों के नामों की सूची तैयार की जा रही है। ज्यादातर विभागों से नाम पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ विभागों से नाम आने अभी बाकी हैं। इसके साथ ही भेजे गए नामों के सापेक्ष चुनाव ड्यूटी की तैयारी भी शुरू की जा रही है। जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरूगेशन ने नामांकन पत्रों की बिक्री, प्राप्ति, जांच व प्रतीक चिह्नों के आवंटन को स्थल निर्धारित कर दिए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि नगर निगम देहरादून में महापौर पद के नामांकन पत्रों की बिक्री, प्राप्ति, जांच व प्रतीक चिह्नों के आवंटन को नए भवन के कक्ष संख्या सात को चयनित किया गया है। पार्षद पदों को वार्ड एक से पंद्रह तक कक्ष एक, वार्ड सोलह से तीस तक के लिए कक्ष दो, वार्ड इकतीस से पैंतालीस तक के लिए कक्ष तीन, वार्ड छियालीस से साठ तक के लिए कक्ष चार, वार्ड इकसठ से पचहत्तर तक के लिए कक्ष पांच, वार्ड छिहत्तर से नब्बे तक के लिए कक्ष छह व शेष एक सौ तक के वार्डों के लिए कक्ष संख्या सात निर्धारित किया गया है। इसी तरह नगर निगम ऋषिकेश, नगर पालिका परिषद मसूरी, डोईवाला, विकासनगर व हरबर्टपुर के लिए भी कक्ष आवंटित कर दिए गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी निर्वाचन अधिकारियों व सहायक निर्वाचन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निर्धारित स्थलों पर नामांकन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक अधिकारी अपना मोबाइल ऑफ नहीं करेंगे। साथ ही हर समय अलर्ट मोड में रहेंगे। यह हिदायत जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने निर्वाचन व सहायक निर्वाचन अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान दी। प्रशिक्षण के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी एसए मुरुगेशन ने कहा कि सभी अधिकारी उप जिला निर्वाचन अधिकारी अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल, मुख्य विकास अधिकारी जीएस रावत व सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल के संपर्क में बने रहें। नामांकन पत्रों की बिक्री से ही सभी अधिकारी पूरे समय अपने स्थलों पर तैनात रहेंगे और नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के समय विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि पूरा विवरण सही ढंग से भरा है या नहीं और सभी संलग्नक भली-भांति लगे हैं या नहीं। पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड मेंटेन होना चाहिए और कोई भी काम कल पर न टाला जाए। यदि किसी भी काम को लेकर कभी भी शंका हो तो तुरंत संबंधित उप निर्वाचिन अधिकारियों से उसका समाधान करा लें। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अरविंद पांडे, दून घाटी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के सचिव एसएल सेमवाल आदि उपस्थित रहे।
|
बेडरूम के लिए फर्नीचर की पसंद - यह एक आसान काम नहीं है। इसे व्यवस्थित करने के लिए और भी मुश्किल है कि यह आरामदायक था और साथ ही आरामदायक भी था। बेडरूम के लिए बिस्तर आमतौर पर सामान्य स्टाइलिस्ट दिशा के अनुसार चुना जाता है, और स्थान कमरे के आकार और इसके आयामों पर निर्भर करता है।
सबसे पहले, बेडरूम में वह बिस्तर चुनें, जो आपके कमरे के लिए एक आदर्श समाधान होगा। सभी मॉडलों में, सबसे महंगा और शानदार अभी भी बेडरूम के इंटीरियर में एक लोहे का बिस्तर माना जाता है। ऐसा मत सोचो कि ये बहुत ही बोझिल मॉडल हैं जिनमें बहुत सारे कर्ल हैं। वर्तमान में, जाली वाले फर्नीचर में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और स्वामी ने लंबे समय से एक लैकोनिक हेडबोर्ड के साथ बेडरूम के इंटीरियर में एक लोहे के बिस्तर के सुरुचिपूर्ण संस्करणों की पेशकश की है, और छोटे शहरी अपार्टमेंट के लिए आधुनिक डिजाइन हैं।
बेडरूम में बिस्तर के सिर का डिज़ाइन सिर्फ हाइलाइट है, जो इंटीरियर में पूरे स्वर को सेट करता है। यदि यह एक अपार्टमेंट में एक छोटा सा कमरा है, तो बेडरूम में एक अंधेरा बिस्तर केवल सरल और संक्षिप्त हो सकता है। एक नियम के रूप में, यह आधुनिक minimalism है, जब सजावट व्यावहारिक रूप से अनुपस्थित है।
सबसे रोमांटिक विकल्प बेडरूम में एक सफेद बिस्तर है। लकड़ी के इस नक्काशीदार सिर, और किसी भी कपड़े से मुलायम कपड़ा आवेषण। हाथीदांत में चित्रित धातु के एक छोटे बेडरूम बिस्तर में विशेष रूप से स्टाइलिश दिखता है। प्रकाश, हल्के टोन और ओपनवर्क कर्ल के कारण लगभग हवादार डिजाइन सभी "खाने" स्थान पर नहीं है।
बेडरूम में काली बिस्तर उच्च तकनीक या कला डेको के लिए एक उत्कृष्ट समाधान है। चयनित दिशा के आधार पर, आप सुरक्षित रूप से कपड़े, चमकीले रंग के धब्बे और बिस्तर के आकार के साथ सुरक्षित रूप से प्रयोग कर सकते हैं। कला डेको के लिए, मूल आकार विशेषता हैं, क्योंकि ठाठ साटन कवरलेट वाले बेडरूम में एक गोल बिस्तर एक बहुत अच्छा निर्णय होगा।
बेडरूम में बिस्तर कैसे व्यवस्थित करें और रखें?
अब बिस्तर के लिए जगह चुनने और इसे हरा करने के तरीके के बारे में कुछ शब्द। शयनकक्ष में खिड़की के पास का बिस्तर सबसे विवादास्पद विकल्पों में से एक हैः एक ओर - ताजा हवा हमेशा दूसरी तरफ शोर और निरंतर ड्राफ्ट के पास होती है। चूंकि बेडरूम में खिड़की पर बिस्तर एक अच्छा समाधान है, अगर यह दीवार पर जाता है और कमरे में प्रवेश द्वार पर कहीं होता है।
एक शयनकक्ष में एक सोफा बिस्तर आम तौर पर रहने वाले कमरे के साथ कमरे के लिए चुना जाता है। इस मामले में, बेडरूम में बिस्तर लगाने की सलाह दी जाती है ताकि इसे कोने के हिस्से में स्थानांतरित किया जा सके और न कि गलियारे पर।
एक संकीर्ण बेडरूम में एक बिस्तर आमतौर पर खिड़की और दरवाजे के बीच एक लंबी दीवार पर सेट होता है। फिर आप बेडरूम में प्रवेश देख सकते हैं, खिड़की को रोकने के लिए कुछ भी नहीं है, दोनों तरफ सोने की जगह तक पहुंच। यह एक छोटे से बेडरूम में एक बड़े बिस्तर पर भी लागू होता हैः आपका काम बेडरूम को इस तरह से रखना है कि इसे दो तरफ से संपर्क किया जा सके।
|
बेडरूम के लिए फर्नीचर की पसंद - यह एक आसान काम नहीं है। इसे व्यवस्थित करने के लिए और भी मुश्किल है कि यह आरामदायक था और साथ ही आरामदायक भी था। बेडरूम के लिए बिस्तर आमतौर पर सामान्य स्टाइलिस्ट दिशा के अनुसार चुना जाता है, और स्थान कमरे के आकार और इसके आयामों पर निर्भर करता है। सबसे पहले, बेडरूम में वह बिस्तर चुनें, जो आपके कमरे के लिए एक आदर्श समाधान होगा। सभी मॉडलों में, सबसे महंगा और शानदार अभी भी बेडरूम के इंटीरियर में एक लोहे का बिस्तर माना जाता है। ऐसा मत सोचो कि ये बहुत ही बोझिल मॉडल हैं जिनमें बहुत सारे कर्ल हैं। वर्तमान में, जाली वाले फर्नीचर में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और स्वामी ने लंबे समय से एक लैकोनिक हेडबोर्ड के साथ बेडरूम के इंटीरियर में एक लोहे के बिस्तर के सुरुचिपूर्ण संस्करणों की पेशकश की है, और छोटे शहरी अपार्टमेंट के लिए आधुनिक डिजाइन हैं। बेडरूम में बिस्तर के सिर का डिज़ाइन सिर्फ हाइलाइट है, जो इंटीरियर में पूरे स्वर को सेट करता है। यदि यह एक अपार्टमेंट में एक छोटा सा कमरा है, तो बेडरूम में एक अंधेरा बिस्तर केवल सरल और संक्षिप्त हो सकता है। एक नियम के रूप में, यह आधुनिक minimalism है, जब सजावट व्यावहारिक रूप से अनुपस्थित है। सबसे रोमांटिक विकल्प बेडरूम में एक सफेद बिस्तर है। लकड़ी के इस नक्काशीदार सिर, और किसी भी कपड़े से मुलायम कपड़ा आवेषण। हाथीदांत में चित्रित धातु के एक छोटे बेडरूम बिस्तर में विशेष रूप से स्टाइलिश दिखता है। प्रकाश, हल्के टोन और ओपनवर्क कर्ल के कारण लगभग हवादार डिजाइन सभी "खाने" स्थान पर नहीं है। बेडरूम में काली बिस्तर उच्च तकनीक या कला डेको के लिए एक उत्कृष्ट समाधान है। चयनित दिशा के आधार पर, आप सुरक्षित रूप से कपड़े, चमकीले रंग के धब्बे और बिस्तर के आकार के साथ सुरक्षित रूप से प्रयोग कर सकते हैं। कला डेको के लिए, मूल आकार विशेषता हैं, क्योंकि ठाठ साटन कवरलेट वाले बेडरूम में एक गोल बिस्तर एक बहुत अच्छा निर्णय होगा। बेडरूम में बिस्तर कैसे व्यवस्थित करें और रखें? अब बिस्तर के लिए जगह चुनने और इसे हरा करने के तरीके के बारे में कुछ शब्द। शयनकक्ष में खिड़की के पास का बिस्तर सबसे विवादास्पद विकल्पों में से एक हैः एक ओर - ताजा हवा हमेशा दूसरी तरफ शोर और निरंतर ड्राफ्ट के पास होती है। चूंकि बेडरूम में खिड़की पर बिस्तर एक अच्छा समाधान है, अगर यह दीवार पर जाता है और कमरे में प्रवेश द्वार पर कहीं होता है। एक शयनकक्ष में एक सोफा बिस्तर आम तौर पर रहने वाले कमरे के साथ कमरे के लिए चुना जाता है। इस मामले में, बेडरूम में बिस्तर लगाने की सलाह दी जाती है ताकि इसे कोने के हिस्से में स्थानांतरित किया जा सके और न कि गलियारे पर। एक संकीर्ण बेडरूम में एक बिस्तर आमतौर पर खिड़की और दरवाजे के बीच एक लंबी दीवार पर सेट होता है। फिर आप बेडरूम में प्रवेश देख सकते हैं, खिड़की को रोकने के लिए कुछ भी नहीं है, दोनों तरफ सोने की जगह तक पहुंच। यह एक छोटे से बेडरूम में एक बड़े बिस्तर पर भी लागू होता हैः आपका काम बेडरूम को इस तरह से रखना है कि इसे दो तरफ से संपर्क किया जा सके।
|
चर्चा में क्यों?
20 अक्टूबर, 2022 को नई दिल्ली के अशोक होटल में हुए उद्घोषणा कार्यक्रम में कंद्रीय एवं युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने 5वें 'खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022' की मशाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपते हुए बताया कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेज़बानी इस बार मध्य प्रदेश करेगा।
- 5वें खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 का आयोजन प्रदेश के 8 नगर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, मंडला, महेश्वर और बालाघाट में 31 जनवरी से 11 फरवरी, 2023 के बीच होगा।
- मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि राज्य में वर्ष 2003 में खेल बजट 5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़ कर 350 करोड़ रुपए हो गया है तथा प्रदेश में 18 खेलों की 11 अकादमियाँ स्थापित की गई हैं।
- उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में खेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे खिलाड़ियों को न सिर्फ अकादमी में बुनियादी सुविधाएँ मिलेंगी बल्कि हर ज़िले में स्टेडियम, मिनी स्टेडियम, कोचिंग और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बेहतरीन मिलेगी।
- मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में खेलों का वातावरण बनाए रखने के लिये ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ की जा रही हैं। इसमें बुजुर्गों की प्रतियोगिताएँ भी करवाई गई हैं।
- उन्होंने बताया कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पहली बार पारंपरिक खेल मलखंब को भी शामिल किया है। मलखंब मध्य प्रदेश का राज्य खेल है तथा इस खेल में राज्य के खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।
- विदित है कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 में मध्य प्रदेश के पारंपरिक खेल मलखंब और ब्रेक डांसिंग के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था।
- ज्ञातव्य है कि ब्रेक डांस को पेरिस ओंलिपिक-2024 में खेल के रूप में शामिल किया गया है।
|
चर्चा में क्यों? बीस अक्टूबर, दो हज़ार बाईस को नई दिल्ली के अशोक होटल में हुए उद्घोषणा कार्यक्रम में कंद्रीय एवं युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने पाँचवें 'खेलो इंडिया यूथ गेम्स-दो हज़ार बाईस' की मशाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपते हुए बताया कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेज़बानी इस बार मध्य प्रदेश करेगा। - पाँचवें खेलो इंडिया यूथ गेम्स-दो हज़ार बाईस का आयोजन प्रदेश के आठ नगर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, मंडला, महेश्वर और बालाघाट में इकतीस जनवरी से ग्यारह फरवरी, दो हज़ार तेईस के बीच होगा। - मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि राज्य में वर्ष दो हज़ार तीन में खेल बजट पाँच करोड़ रुपए था, जो अब बढ़ कर तीन सौ पचास करोड़ रुपए हो गया है तथा प्रदेश में अट्ठारह खेलों की ग्यारह अकादमियाँ स्थापित की गई हैं। - उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में खेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे खिलाड़ियों को न सिर्फ अकादमी में बुनियादी सुविधाएँ मिलेंगी बल्कि हर ज़िले में स्टेडियम, मिनी स्टेडियम, कोचिंग और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बेहतरीन मिलेगी। - मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में खेलों का वातावरण बनाए रखने के लिये ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ की जा रही हैं। इसमें बुजुर्गों की प्रतियोगिताएँ भी करवाई गई हैं। - उन्होंने बताया कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पहली बार पारंपरिक खेल मलखंब को भी शामिल किया है। मलखंब मध्य प्रदेश का राज्य खेल है तथा इस खेल में राज्य के खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश में अग्रणी है। - विदित है कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स-दो हज़ार इक्कीस में मध्य प्रदेश के पारंपरिक खेल मलखंब और ब्रेक डांसिंग के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। - ज्ञातव्य है कि ब्रेक डांस को पेरिस ओंलिपिक-दो हज़ार चौबीस में खेल के रूप में शामिल किया गया है।
|
SSC CGL Result Tier 1 Exam Score Card, Final Answer Key Today: कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission) की ओर से केंद्र सरकार की ग्रुप बी और ग्रुप सी की नौकरियों के लिए आयोजित संयुक्त स्नातक स्तर (SSC CGL) टियर 1 परीक्षा के स्कोर कार्ड और अंतिम उत्तर कुंजी जारी की जाएगी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट- ssc. nic. in पर एसएससी सीजीएल टियर -1 उत्तर कुंजी और स्कोर कार्ड की जांच कर सकते हैं।
उम्मीदवार सबसे पहले कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं।
एसएससी सीजीएल टियर 1 स्कोर कार्ड डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें या एसएससी सीजीएल टियर 1 अंतिम उत्तर कुंजी लिंक पर क्लिक करें।
उम्मीदवार अपनी पंजीकरण संख्या और जन्म तिथि दर्ज करें।
एसएससी सीजीएल टियर 1 स्कोर कार्ड प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदान किए गए विवरणों की जांच करें और भविष्य के संदर्भ के लिए डाउनलोड करें।
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।
|
SSC CGL Result Tier एक Exam Score Card, Final Answer Key Today: कर्मचारी चयन आयोग की ओर से केंद्र सरकार की ग्रुप बी और ग्रुप सी की नौकरियों के लिए आयोजित संयुक्त स्नातक स्तर टियर एक परीक्षा के स्कोर कार्ड और अंतिम उत्तर कुंजी जारी की जाएगी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट- ssc. nic. in पर एसएससी सीजीएल टियर -एक उत्तर कुंजी और स्कोर कार्ड की जांच कर सकते हैं। उम्मीदवार सबसे पहले कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाएं। एसएससी सीजीएल टियर एक स्कोर कार्ड डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें या एसएससी सीजीएल टियर एक अंतिम उत्तर कुंजी लिंक पर क्लिक करें। उम्मीदवार अपनी पंजीकरण संख्या और जन्म तिथि दर्ज करें। एसएससी सीजीएल टियर एक स्कोर कार्ड प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदान किए गए विवरणों की जांच करें और भविष्य के संदर्भ के लिए डाउनलोड करें। सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।
|
रेड जोन मेरठ में लॉकडाउन के बीच बाजार खुलने के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को बचत भवन में अहम बैठक हुई। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार शहर को पांच सर्किल में बांटा गया है। अब जिले में सर्किल के हिसाब से दिन में सिर्फ तीन घंटे (दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक) के लिए दुकानें खुलेंगी। डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि सोमवार और बृहस्पतिवार को पहले की तरह ही संपूर्ण लॉकडाउन रहेगा। इस बैठक में डीएम, सांसद, विधायक और व्यापारिक संगठनों के अध्यक्ष और महामंत्री मौजूद रहे।
डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि सिर्फ चार वार्डों को छोड़कर पूरा नगर कंटेंमेन जोन में है। ऐसे में बाजार नहीं खुलेंगे। व्यापारियों की मांग को देखते हुए सिर्फ रोस्टर के साथ एक-एक दिन तीन घंटे के लिए सर्किल के हिसाब से साफ-सफाई के लिए दुकानें खुल सकेंगी। डीएम का कहना है कि लॉकडाउन 5. 0 के नियम आने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, शहर के बाजार खोलने को लेकर संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों में खींचतान चरम पर पहुंच गई है। वहीं अब इसमें राजनीतिक दबाव पड़ना भी शुरू हो गया है। एक गुट के व्यापारी नेता बुधवार को कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे, जिनमें तीन नेता भाजपा से जुड़े हैं। यह प्रकरण शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच गया है। दूसरे गुट के नेता भी भाजपा से जुड़े हैं, जिसके चलते अब इन नेताओं में अपनी साख को बचाए रखने की मशक्कत शुरू हो गई है। लगातार बनते-बिगड़ते माहौल और शहर के व्यापारियों में बनी भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए डीएम ने जन प्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शुक्रवार को बैठक की।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
रेड जोन मेरठ में लॉकडाउन के बीच बाजार खुलने के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को बचत भवन में अहम बैठक हुई। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार शहर को पांच सर्किल में बांटा गया है। अब जिले में सर्किल के हिसाब से दिन में सिर्फ तीन घंटे के लिए दुकानें खुलेंगी। डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि सोमवार और बृहस्पतिवार को पहले की तरह ही संपूर्ण लॉकडाउन रहेगा। इस बैठक में डीएम, सांसद, विधायक और व्यापारिक संगठनों के अध्यक्ष और महामंत्री मौजूद रहे। डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि सिर्फ चार वार्डों को छोड़कर पूरा नगर कंटेंमेन जोन में है। ऐसे में बाजार नहीं खुलेंगे। व्यापारियों की मांग को देखते हुए सिर्फ रोस्टर के साथ एक-एक दिन तीन घंटे के लिए सर्किल के हिसाब से साफ-सफाई के लिए दुकानें खुल सकेंगी। डीएम का कहना है कि लॉकडाउन पाँच. शून्य के नियम आने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, शहर के बाजार खोलने को लेकर संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों में खींचतान चरम पर पहुंच गई है। वहीं अब इसमें राजनीतिक दबाव पड़ना भी शुरू हो गया है। एक गुट के व्यापारी नेता बुधवार को कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे, जिनमें तीन नेता भाजपा से जुड़े हैं। यह प्रकरण शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच गया है। दूसरे गुट के नेता भी भाजपा से जुड़े हैं, जिसके चलते अब इन नेताओं में अपनी साख को बचाए रखने की मशक्कत शुरू हो गई है। लगातार बनते-बिगड़ते माहौल और शहर के व्यापारियों में बनी भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए डीएम ने जन प्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शुक्रवार को बैठक की। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
खबर के अनुसार मध्य प्रदेश के जो लोग अपने नया राशन कार्ड बनवाना चाहते है या अपने पुराने राशन कार्ड का नवीनीकरण करवाना चाहते है तो वह खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग मध्य प्रदेश की वेबसाइट पर जा कर ऑनलाइन के द्वारा कर सकते हैं।
बता दें की लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार ने राशन कार्ड बनाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया हैं। इससे राज्य के लोगों को भाग-दौड़ करने से छुटकारा मिल गया गया हैं और लोग आसानी से इसका लाभ उठा रहे हैं।
आवेदन के लिए दस्तावेज : आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, परिवार के सभी सदस्य का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, आय प्रमाण पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो।
ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई : वेबसाइट http://samagra. gov. in/ पर जाने के बाद "समग्र बीपीएल परिवार हेतु ऑनलाइन आवेदन करें" का लिंक दिखाई देगा। उसपर क्लिक करें और ऑनलाइन के द्वारा आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
|
खबर के अनुसार मध्य प्रदेश के जो लोग अपने नया राशन कार्ड बनवाना चाहते है या अपने पुराने राशन कार्ड का नवीनीकरण करवाना चाहते है तो वह खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग मध्य प्रदेश की वेबसाइट पर जा कर ऑनलाइन के द्वारा कर सकते हैं। बता दें की लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार ने राशन कार्ड बनाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया हैं। इससे राज्य के लोगों को भाग-दौड़ करने से छुटकारा मिल गया गया हैं और लोग आसानी से इसका लाभ उठा रहे हैं। आवेदन के लिए दस्तावेज : आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, परिवार के सभी सदस्य का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, आय प्रमाण पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो। ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई : वेबसाइट http://samagra. gov. in/ पर जाने के बाद "समग्र बीपीएल परिवार हेतु ऑनलाइन आवेदन करें" का लिंक दिखाई देगा। उसपर क्लिक करें और ऑनलाइन के द्वारा आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें।
|
असम के नगांव जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां अवैध संबंधों का पता लगने पर पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं उन दोनों ने मृतक के शरीर को कई टुकड़ों में काटकर शौचालय के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया था, जिसे लगभग तीन महीने बाद बरामद किया गया था। घटना जिले के नगांव के कलियाबोर के कुठौरी इलाके की है।
नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने बताया कि मृतक की पहचान उमेश बोरा के रूप में हुई है, जो पेशे से बढ़ई था। वह बेंगलुरु में रहता था और वहां काम करता था। वह आमतौर पर दो-तीन महीने के अंतराल के बाद अपने घर आता था। इस बीच उनकी पत्नी रीता बोरा का मुजीबुर रहमान नाम के एक व्यक्ति के साथ संबंध बन गए। लगभग तीन महीने पहले जब उमेश बेंगलुरु से घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी और मुजीबुर को आपत्तिजनक स्थिति में पाया।
पुलिस के मुताबिक पत्नी और पति के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ऐसा अंदेशा था कि रीता और उसके प्रेमी मुजीबुर ने उमेश का गला घोंटकर वहीं उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने उमेश के शव को कई टुकड़ों में काटकर सेप्टिक टैंक में डाला गया। इसके बाद रीता ने दूसरों को बताया कि उमेश बेंगलुरु में है और वहां से नहीं लौटा है, लेकिन कई दिनों तक बोरा का कोई पता नहीं चलने के कारण परिजनों को शक हुआ कि उसके साथ कुछ गलत हो गया है। उन्होंने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस की जांच शुरू होने के बाद मामले का खुला हुआ। पुलिस को शक हुआ और तलाशी लेने पर उन्होंने शौचालय के सेप्टिक टैंक से एक कंकाल बरामद किया। डोले ने कहा कि हमने रीता बोरा और मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
|
असम के नगांव जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां अवैध संबंधों का पता लगने पर पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं उन दोनों ने मृतक के शरीर को कई टुकड़ों में काटकर शौचालय के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया था, जिसे लगभग तीन महीने बाद बरामद किया गया था। घटना जिले के नगांव के कलियाबोर के कुठौरी इलाके की है। नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने बताया कि मृतक की पहचान उमेश बोरा के रूप में हुई है, जो पेशे से बढ़ई था। वह बेंगलुरु में रहता था और वहां काम करता था। वह आमतौर पर दो-तीन महीने के अंतराल के बाद अपने घर आता था। इस बीच उनकी पत्नी रीता बोरा का मुजीबुर रहमान नाम के एक व्यक्ति के साथ संबंध बन गए। लगभग तीन महीने पहले जब उमेश बेंगलुरु से घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी और मुजीबुर को आपत्तिजनक स्थिति में पाया। पुलिस के मुताबिक पत्नी और पति के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ऐसा अंदेशा था कि रीता और उसके प्रेमी मुजीबुर ने उमेश का गला घोंटकर वहीं उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने उमेश के शव को कई टुकड़ों में काटकर सेप्टिक टैंक में डाला गया। इसके बाद रीता ने दूसरों को बताया कि उमेश बेंगलुरु में है और वहां से नहीं लौटा है, लेकिन कई दिनों तक बोरा का कोई पता नहीं चलने के कारण परिजनों को शक हुआ कि उसके साथ कुछ गलत हो गया है। उन्होंने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस की जांच शुरू होने के बाद मामले का खुला हुआ। पुलिस को शक हुआ और तलाशी लेने पर उन्होंने शौचालय के सेप्टिक टैंक से एक कंकाल बरामद किया। डोले ने कहा कि हमने रीता बोरा और मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
|
तथा सूयगडाडू अ० १५ में पिण असंयम जीवितव्य बाछणो वज्यों है ते पाठ लिखिये छै ।
१४०जीवितं पिट्टयो किच्चा, कम्मुणा सम्मुही भूता, सम्मुही भूता,
अंतं पावंति कम्मुरणा । जे मग्ग मणु सासइ ॥
( सूयगडाङ्ग धु० १ ० १५ गा० १० )
जि० असंयम जीवितम्प पि० उपराठो करो निषेधी जीवितव्य ने अनादर देतो भला अनुष्ठान नें विपे तत्पर छता अ० अत पामे अंत करे क० ज्ञानावरणीय आदिक कर्म नों तथा क० रूडा अनुष्ठान करी स० मोक्ष मार्ग में सन्मुख छता अथवा केवल उपने छते सासता पद नें सनमुख छता जे० जे वीतराग प्रयोत मार्ग ज्ञानादिक व० सीखने प्राणीयानो हितकारी प्रकाशे यापया पे समाचरे
अथ अठे पिण कह्यो- असंयम जीवितव्य ने अन आदर देतो धको विचर तो भसयम जीवितव्य बाछ्या धर्म किम कहिये । डाहा हुवे तो विचारि जोइजो
तथा सूयगडास अ० ३ उ० ४ गा० १५ जीवणो वाछणो वय ते पाठ लिखिये छै ।
जेहि काले परिक्कंतं न पच्छा परितप्पड़ । ते धीरा वंधणु मुक्का नाव कंवंति जीवियं ।।
( सूयगडान ध्रु० १ अ० ३ उ० ४ गा० १५ )
० जेणे महापुरुष का० काल प्रस्ताये धर्म में विषे पराक्रम कीधो न० ते पछे मरण बेलां प० पिछताने नहीं ते धोर पुरुष च० श्रष्ठ कर्म बंधन थको छूटा मुकाणा है । मा० न माझे जी० असंयम जीवितव्य अथवा बाल मरमा पिया न बाळे प्रतावता जीवितव्य मरण में विषेम भाव म ।
|
तथा सूयगडाडू अशून्य पंद्रह में पिण असंयम जीवितव्य बाछणो वज्यों है ते पाठ लिखिये छै । एक सौ चालीसजीवितं पिट्टयो किच्चा, कम्मुणा सम्मुही भूता, सम्मुही भूता, अंतं पावंति कम्मुरणा । जे मग्ग मणु सासइ ॥ जिशून्य असंयम जीवितम्प पिशून्य उपराठो करो निषेधी जीवितव्य ने अनादर देतो भला अनुष्ठान नें विपे तत्पर छता अशून्य अत पामे अंत करे कशून्य ज्ञानावरणीय आदिक कर्म नों तथा कशून्य रूडा अनुष्ठान करी सशून्य मोक्ष मार्ग में सन्मुख छता अथवा केवल उपने छते सासता पद नें सनमुख छता जेशून्य जे वीतराग प्रयोत मार्ग ज्ञानादिक वशून्य सीखने प्राणीयानो हितकारी प्रकाशे यापया पे समाचरे अथ अठे पिण कह्यो- असंयम जीवितव्य ने अन आदर देतो धको विचर तो भसयम जीवितव्य बाछ्या धर्म किम कहिये । डाहा हुवे तो विचारि जोइजो तथा सूयगडास अशून्य तीन उशून्य चार गाशून्य पंद्रह जीवणो वाछणो वय ते पाठ लिखिये छै । जेहि काले परिक्कंतं न पच्छा परितप्पड़ । ते धीरा वंधणु मुक्का नाव कंवंति जीवियं ।। शून्य जेणे महापुरुष काशून्य काल प्रस्ताये धर्म में विषे पराक्रम कीधो नशून्य ते पछे मरण बेलां पशून्य पिछताने नहीं ते धोर पुरुष चशून्य श्रष्ठ कर्म बंधन थको छूटा मुकाणा है । माशून्य न माझे जीशून्य असंयम जीवितव्य अथवा बाल मरमा पिया न बाळे प्रतावता जीवितव्य मरण में विषेम भाव म ।
|
सिक्ख मिसलें
उत्पत्ति : बदा बहादुर की शहीदी के पश्चात् सिक्खो का कोई एक लीडर नही रह गया था । ऐसी स्थिति में अपनी सुरक्षा के लिए सिक्खो के छोटे-छोटे गुट बन गये थे जो गुप्त रूप से छुपकर अपना जीवन बिताने पर मजबूर हो गये थे । सन् 1739 मे नादिर शाह के आक्रमण के समय मुगल शासन की शक्ति कम हो जाने के कारण सिक्खो के छोटे-छोटे दल ज्यादा शक्तिशाली बन गये और उनकी गतिविधियाँ अधिक तेज हो गई थी। इस समय जो व्यक्ति इन गुटो मे ज्यादा योग्य अथवा शक्तिशाली थे वह उनके लीडर बन गये । इस ढंग से सिक्ख मिसलो की नीव पडो ।
मिसल शब्द का अर्थ "एक जैसा" अथवा बराबर है। हो सकता है कि यह शब्द इस लिए प्रयोग में आया हो कि इस जत्थेबन्दी के सब सदस्य सिक्ख होने के नाते अपने आपको हर तरह से अर्थात् सामाजिक, एक दूसरे के बराबर समझते थे । गुरु गोबिन्द सिंह के खालसा को जन्म देने पर उनका उद्देश्य एक ऐसा सगठन बनाना ही था जिस के सभी सदस्य बिना किसी ऊँच-नीच या भेदभाव के अपने आपको बराबर समझे और हर मामले में जिन के अधिकार एक जैसे हों ।
चाहे शुद्ध शाब्दिक रूप से यह परिभाषा ठीक नजर आती हो परन्तु मिसल शब्द का वास्तविक उपयोग शायद इस तरह से होता था कि जिस समय सिक्खो के जत्थे पंजाब मे मुगलो / अफगानो की सत्ता कमजोर होने पर जुदा-जुदा इलाको को अपने अधीन करते थे वे अकाल तख्त मे अपने-अपने नाम का खाता खोल देते थे । जब कभी सब सरदारो की गुरमत्ता करने के लिए सभा होती थी तो वे अपना-अपना हिसाब भी लिखवा देते थे और एक दूसरे को समझा देते थे कि फला-फला इलाका फला-फला मिसल के अधीन हो गया है। यह व्यवस्था शायद इसलिए भी की गई थी कि सिक्ख जत्थो मे एक दूसरे के विरुद्ध कोई शक पैदा न हो और जो इलाके पहले ही सिक्खो के अधिकार में आ चुके थे, उन के अलावा दूसरे इलाको को अपने अधीन लाने की तरफ अधिक ध्यान दिया जाए। ऐसा हिसाब रखना इस तरह से उचित था ताकि अलगअलग सरदारों के नाम अलग-अलग "मिसल" अथवा फाइल खोल दी जाए जिसमे उनके अधीन इलाके दर्ज कर दिए जाएँ। इस तरह की जत्थेबदी के आधार पर ही मिसलो को अलग-अलग नाम दिए गए। यह स्पष्टीकरण ज्यादा वास्तविक मालूम होता है क्योकि आज भी दफ्तरों में रिकार्ड रखने की प्रथा "मिसल" के रूप मे चली आती है जैसे कि फला मुकदमे की या फला व्यक्ति की मिसल ।
सगठन : जैसा कि साधारणतया होता है कि अधिक गुणवान और योग्य व्यक्ति ही नेता पद को सम्भालते है, सिक्ख जत्थो मे भी जो उनमे सब से योग्य सिद्ध हुए वे नेता बन गये और भिन्न-भिन्न जत्थो के रूप में अपना कार्य करने लगे। इन जत्थो को अपनी सुरक्षा का प्रबन्ध करना बहुत जरूरी था और इसका मुख्य उद्देश्य था अपनी धार्मिक स्वतंत्रता कायम रखना । इस लिए यह फौजी जत्थे जो कि धर्म के आधार पर कायम किये गये थे एक ही समय मे पूरी तरह प्रारम्भ नही हुए थे। जैसे-जैसे समय बीता और जैसा - जैसा अवसर आया उनकी संख्या मे वैसी वैसी ही वृद्धि होता रही
था। इस संगठन का सदस्य बनने के लिए कोई विशेष योग्यता निर्धारित नही थी हर एक सिक्ख जिस के पास एक घोडा या दूसरे शस्त्र होते थे वह अपने किसी भी जत्थे मे शामिल होकर उसका सदस्य बन जाता था। इसके लिए सरदार को सदस्यो को कोई वेतन आदि नही देना पडता था । सदस्य केवल लूटी हुई सम्पत्ति का भाग लेने के अधिकारी थे जो कि सब मिल कर प्राप्त करते थे । इस संगठन के अधीन आरम्भ मे ही उनके जत्ये बन गये थे । बडी बडी मिसलो के संगठन से पहले 65 ऐसे अलग जत्थे पंजाब में अपने अधीन काम कर रहे थे जिनके नाम हमे प्राप्त है। परन्तु इतनी बडी संख्या मे जत्थो का होना सिक्खो के लिए लाभदायक नही था। इनके सरदार नेता ने इनको कम करके अब्दाली के आक्रमण के समय इनकी संख्या केवल 11 निश्चित कर दी। जिसमे 11 मिसले अधिकतर सतलुज के पश्चिम मे थी और मालव के इलाके में एक ही प्रमुख मिसल थी ।
मिसलो के संगठन में कई बार ऐसा होता था कि एक योग्य व्यक्ति को जो कि पहले दूसरे बड़े सरदार के अधीन काम करता था अपनी योग्यता और सफलता के आधार पर अपनी जुदा मिसल भी बना लेता था और उसके नाम से मिसल प्रसिद्ध हो जाती थी । उदाहरणार्थ, जस्सा सिंह अहलूवालिया और चडत सिंह शुक्रचक्किया पहले नवाब कपूर सिंह के अधीन उसकी मिसल के सदस्य थे परन्तु बाद में उन्होंने अपनी योग्यता से अलग-अलग मिसले कायम कर ली थी ।
स्वरूप और विशेषता मिसलों के स्वरूप का इतिहासकारों ने अलग वर्णन किया है। कनिंघम के कथनानुसार मिसले धर्म और भूमि के आधार पर बनाये गये सघ थे । यह तो ठीक ही है कि मिसलो की जत्थेबन्दी सिक्ख धर्म में विश्वास रखने वालो की थी परन्तु यह कहना उचित प्रतीत नही होता कि वे धार्मिक सगठन थे। कारण यह है कि मिसलें एक धर्म के मानने वालो का सगठन तो जरूर थी परन्तु उनका काम धर्म के आधार पर न तो होता था न ही उसमे धार्मिक नेताओं को उच्च स्थान दिया जाता था। उनको भूमि के आधार पर बनाये गये "फ्यूडल" किस्म के सघ भी नहीं कहा जा सकता। क्योकि मिसल के सदस्य किसी किस्म की "फ्यूडल' सेवा के लिए बाध्य नहीं थे । वे तो केवल अपना हिस्सा लेने का अधिकार रखते थे और अपने नेता के अधीन या साथ केवल युद्ध के समय में ही होते थे । वास्तव मे मिसलों के सदस्य अपनी इच्छा से एक नेता को छोड़कर दूसरे नेता के अधीन हो सकते थे। इस लिए इंदुभूषण बॅनर्जी का
|
सिक्ख मिसलें उत्पत्ति : बदा बहादुर की शहीदी के पश्चात् सिक्खो का कोई एक लीडर नही रह गया था । ऐसी स्थिति में अपनी सुरक्षा के लिए सिक्खो के छोटे-छोटे गुट बन गये थे जो गुप्त रूप से छुपकर अपना जीवन बिताने पर मजबूर हो गये थे । सन् एक हज़ार सात सौ उनतालीस मे नादिर शाह के आक्रमण के समय मुगल शासन की शक्ति कम हो जाने के कारण सिक्खो के छोटे-छोटे दल ज्यादा शक्तिशाली बन गये और उनकी गतिविधियाँ अधिक तेज हो गई थी। इस समय जो व्यक्ति इन गुटो मे ज्यादा योग्य अथवा शक्तिशाली थे वह उनके लीडर बन गये । इस ढंग से सिक्ख मिसलो की नीव पडो । मिसल शब्द का अर्थ "एक जैसा" अथवा बराबर है। हो सकता है कि यह शब्द इस लिए प्रयोग में आया हो कि इस जत्थेबन्दी के सब सदस्य सिक्ख होने के नाते अपने आपको हर तरह से अर्थात् सामाजिक, एक दूसरे के बराबर समझते थे । गुरु गोबिन्द सिंह के खालसा को जन्म देने पर उनका उद्देश्य एक ऐसा सगठन बनाना ही था जिस के सभी सदस्य बिना किसी ऊँच-नीच या भेदभाव के अपने आपको बराबर समझे और हर मामले में जिन के अधिकार एक जैसे हों । चाहे शुद्ध शाब्दिक रूप से यह परिभाषा ठीक नजर आती हो परन्तु मिसल शब्द का वास्तविक उपयोग शायद इस तरह से होता था कि जिस समय सिक्खो के जत्थे पंजाब मे मुगलो / अफगानो की सत्ता कमजोर होने पर जुदा-जुदा इलाको को अपने अधीन करते थे वे अकाल तख्त मे अपने-अपने नाम का खाता खोल देते थे । जब कभी सब सरदारो की गुरमत्ता करने के लिए सभा होती थी तो वे अपना-अपना हिसाब भी लिखवा देते थे और एक दूसरे को समझा देते थे कि फला-फला इलाका फला-फला मिसल के अधीन हो गया है। यह व्यवस्था शायद इसलिए भी की गई थी कि सिक्ख जत्थो मे एक दूसरे के विरुद्ध कोई शक पैदा न हो और जो इलाके पहले ही सिक्खो के अधिकार में आ चुके थे, उन के अलावा दूसरे इलाको को अपने अधीन लाने की तरफ अधिक ध्यान दिया जाए। ऐसा हिसाब रखना इस तरह से उचित था ताकि अलगअलग सरदारों के नाम अलग-अलग "मिसल" अथवा फाइल खोल दी जाए जिसमे उनके अधीन इलाके दर्ज कर दिए जाएँ। इस तरह की जत्थेबदी के आधार पर ही मिसलो को अलग-अलग नाम दिए गए। यह स्पष्टीकरण ज्यादा वास्तविक मालूम होता है क्योकि आज भी दफ्तरों में रिकार्ड रखने की प्रथा "मिसल" के रूप मे चली आती है जैसे कि फला मुकदमे की या फला व्यक्ति की मिसल । सगठन : जैसा कि साधारणतया होता है कि अधिक गुणवान और योग्य व्यक्ति ही नेता पद को सम्भालते है, सिक्ख जत्थो मे भी जो उनमे सब से योग्य सिद्ध हुए वे नेता बन गये और भिन्न-भिन्न जत्थो के रूप में अपना कार्य करने लगे। इन जत्थो को अपनी सुरक्षा का प्रबन्ध करना बहुत जरूरी था और इसका मुख्य उद्देश्य था अपनी धार्मिक स्वतंत्रता कायम रखना । इस लिए यह फौजी जत्थे जो कि धर्म के आधार पर कायम किये गये थे एक ही समय मे पूरी तरह प्रारम्भ नही हुए थे। जैसे-जैसे समय बीता और जैसा - जैसा अवसर आया उनकी संख्या मे वैसी वैसी ही वृद्धि होता रही था। इस संगठन का सदस्य बनने के लिए कोई विशेष योग्यता निर्धारित नही थी हर एक सिक्ख जिस के पास एक घोडा या दूसरे शस्त्र होते थे वह अपने किसी भी जत्थे मे शामिल होकर उसका सदस्य बन जाता था। इसके लिए सरदार को सदस्यो को कोई वेतन आदि नही देना पडता था । सदस्य केवल लूटी हुई सम्पत्ति का भाग लेने के अधिकारी थे जो कि सब मिल कर प्राप्त करते थे । इस संगठन के अधीन आरम्भ मे ही उनके जत्ये बन गये थे । बडी बडी मिसलो के संगठन से पहले पैंसठ ऐसे अलग जत्थे पंजाब में अपने अधीन काम कर रहे थे जिनके नाम हमे प्राप्त है। परन्तु इतनी बडी संख्या मे जत्थो का होना सिक्खो के लिए लाभदायक नही था। इनके सरदार नेता ने इनको कम करके अब्दाली के आक्रमण के समय इनकी संख्या केवल ग्यारह निश्चित कर दी। जिसमे ग्यारह मिसले अधिकतर सतलुज के पश्चिम मे थी और मालव के इलाके में एक ही प्रमुख मिसल थी । मिसलो के संगठन में कई बार ऐसा होता था कि एक योग्य व्यक्ति को जो कि पहले दूसरे बड़े सरदार के अधीन काम करता था अपनी योग्यता और सफलता के आधार पर अपनी जुदा मिसल भी बना लेता था और उसके नाम से मिसल प्रसिद्ध हो जाती थी । उदाहरणार्थ, जस्सा सिंह अहलूवालिया और चडत सिंह शुक्रचक्किया पहले नवाब कपूर सिंह के अधीन उसकी मिसल के सदस्य थे परन्तु बाद में उन्होंने अपनी योग्यता से अलग-अलग मिसले कायम कर ली थी । स्वरूप और विशेषता मिसलों के स्वरूप का इतिहासकारों ने अलग वर्णन किया है। कनिंघम के कथनानुसार मिसले धर्म और भूमि के आधार पर बनाये गये सघ थे । यह तो ठीक ही है कि मिसलो की जत्थेबन्दी सिक्ख धर्म में विश्वास रखने वालो की थी परन्तु यह कहना उचित प्रतीत नही होता कि वे धार्मिक सगठन थे। कारण यह है कि मिसलें एक धर्म के मानने वालो का सगठन तो जरूर थी परन्तु उनका काम धर्म के आधार पर न तो होता था न ही उसमे धार्मिक नेताओं को उच्च स्थान दिया जाता था। उनको भूमि के आधार पर बनाये गये "फ्यूडल" किस्म के सघ भी नहीं कहा जा सकता। क्योकि मिसल के सदस्य किसी किस्म की "फ्यूडल' सेवा के लिए बाध्य नहीं थे । वे तो केवल अपना हिस्सा लेने का अधिकार रखते थे और अपने नेता के अधीन या साथ केवल युद्ध के समय में ही होते थे । वास्तव मे मिसलों के सदस्य अपनी इच्छा से एक नेता को छोड़कर दूसरे नेता के अधीन हो सकते थे। इस लिए इंदुभूषण बॅनर्जी का
|
सफेद मूसली के फायदे और नुकसान (Safed Musli Benefits and Side Effects in Hindi)
सफेद मूसली (safed musli) एक तरह की जड़ी बूटी होती है जिसका प्रयोग कई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में किया जाता है। सफेद मूसली एक प्रकार का पौधा होता है जिसमें छोटे सफ़ेद फूल होते हैं और इन फूलों का प्रयोग ही दवाओं को बनाने में किया जाता है। पुरुषों के लिए सफेद मूसली (safed musli) को बेहद ही लाभजनक माना जाता है और इसे खाने से उनको शारीरिक ताकत मिलती है। इसके अलावा सफेद मूसली के फायदे और क्या-क्या हैं, वो इस प्रकार है।
सफेद मूसली के फायदे (Safed Musli Benefits in Hindi)
सफेद मूसली एक जड़ी बूटी हैं जिसमें बहुत से औषधीय गुण होते हैं। इसके सेवन से बहुत सी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। सफेद मूसली का सबसे बड़ा फायदा पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाता है। आइये जानते हैं सफेद मूसली के फायदे।
जिन लोगों का वजन कम है वो लोग सफेद मूसली (safed musli) को अपनी डाइट में शामिल कर लें। इसे खाने से आसानी से वजन बढ़ जाता है और पतले शरीर की समस्या से निजात मिल जाती है।
सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde) छोटे बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए सफेद मूसली बेहद ही लाभ जनक होती है और इसे खाने से शिशु एकदम स्वस्थ पैदा होता है। गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन महिलाओं को दूध के साथ जरूर करना चाहिए। वहीं बच्चा होने के बाद भी इसका सेवन करना लाभदायक होता है और इसे खाने से महिलाओं के शरीर को ताकत मिलती है और उनका शरीर जल्द ही रिकवर कर लेता है।
मधुमेह के मरीज अगर रोज इसे खाते हैं तो उनके शरीर में शुगर का स्तर नहीं बढ़ता है और एकदम नियंत्रित रहता है। सफेद मूसली (safed musli) के अंदर एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहाइपरग्लिसिमिक (antihyperglycemic) और एंटीडाइबिटिक पाए जाते हैं जो कि मधुमेह के रोग को सही करने में कारगर साबित होते हैं। मधुमेध से जुड़ी कई आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में मूसली का प्रयोग भी किया जाता है।
सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde) मांसपेशियों को मजबूत करने में गुणकारी होते हैं। मांसपेशियों को मजबूत बनाएं रखने में भी सफेद मूसली सहायक मानी जाती है और इसे खाने से मांसपेशियां कमजोर नहीं पड़ती है। इसलिए जो लोग अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं वो इसका सेवन जरूर करें।
तनाव एक प्रकार का रोग होता है जिसके कारण इंसान उदास रहने लग जाता है और लोगों से दूरी बना लेता है। तनाव के कारण कई बार नींद ना आने की बीमारी भी लग जाती है। इसलिए तनाव होने पर इसे अनदेखा ना करें और रोज सफेद मूसली (safed musli) खाएं। रात को सोने से पहले दूध के साथ सफेद मूसली खाने से तनाव दूर हो जाएगा और आपका दिमाग शांत रहेगा। इतना ही नहीं आपको अच्छी नींद भी आएगी।
सफेद मूसली के फायदे वजन कम करने में भी उपयोगी साबित होते हैं। वजन कम करने के लिए भी सफेद मूसली फायदेमंद होती है और इसे खाने से एक महीने के अंदर ही वजन को कम किया जा सकता है। जो लोग अधिक वजन से ग्रस्त हैं वो एक महीने तक रोज सफेद मूसली को खाया करें।
वजन कम करने हेतु आप एक गिलास पानी को गर्म करके उसके अंदर एक चम्मच सफेद मूसली का पाउडर डाल दें। फिर इस पानी को पी लें। ये पानी पीने से वजन कम होने लग जाएगा। आप चाहें तो पानी के अलावा गर्म दूध के साथ भी सफेद मूसली का सेवन कर सकते हैं।
सफेद मूसली के फायदे रोग प्रतिरोधक शक्ति के साथ भी हैं और इसे खाने से रोग प्रतिरोधक शक्ति मजबूत बनीं रहती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति के मजबूत होने से शरीर की रक्षा कई तरह के रोगों से होती है और अनगिनत संक्रमण शरीर से दूर रहते हैं। इसलिए जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर है और जो लोग आसानी से बदलते मौसम में बीमार हो जाते हैं। वो सफेद मूसली का सेवन करना शुरू कर दें और रोज एक गिलास दूध के साथ इसे खाएं।
सफेद मूसली का सेवन करने से हड्डियां मजबूत बनीं रहती हैं और इनकी रक्षा अर्थराइटिस जैसे रोग से होती है। वहीं जिन लोगों को जोड़ो में दर्द की शिकायत रहती है अगर वो इसका सेवन करते हैं तो उनकी ये दर्द दूर हो जाती है। सफेद मूसली में प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन पाए जाते हैं। जो कि हड्डियों को कमजोर नहीं पड़ने देते हैं और इन्हें ताकत प्रदान करते हैं। इसलिए बुजुर्ग लोगों को भी मूसली का सेवन जरूर करना चाहिए।
सफेद मूसली के नुकसान (Side Effects of Safed Musli in Hindi)
सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde) पढ़ने के बाद आप इसके नुकसान पर भी एक नजर डाल लें।
- अधिक मात्रा में सफेद मूसली को खाने से पाचन तंत्र खराब हो जाता है और खाना पाचन में वक्त लगता है।
- जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है वो लोग सफेद मूसली को ना खाएं। क्योंकि इसे खाने से कब्ज की परेशानी और बढ़ सकती है।
- सफेद मूसली में फाइबर पाए जाते हैं और इसे खाने से कई बार भूख मर जाती है।
- सफेद मूसली की तासीर ठंडी होती है और अधिक मात्रा में इसे खाने से जुकाम हो सकता है।
किस तरह से करें सेवन (How to Eat Safed Musli in Hindi)
सफेद मूसली का सेवन चूर्ण के रूप में किया जा सकता है। बाजार में कई कंपनियों द्वारा इसका चूर्ण बेचा जाता है। वहीं आप चाहें तो घर में खुद से भी इसका चूर्ण तैयार कर सकते हैं। सफेद मूसली का चूर्ण तैयार करने के लिए आप इसे धूप में अच्छे से सूखा लें। फिर मिक्सी के अंदर पीसकर इसका पाउडर तैयार कर लें। सफेद मूसली का चूर्ण बनकर तैयार है। इस चूर्ण को आप पानी के साथ खा सकते हैं या दूध के अंदर मिलाकर भी ले सकते हैं।
सफेद मूसली बेहद दी ताकतवर चीज होती है इसलिए आप छोटे बच्चों को ये खाने को ना दें।
13 से 19 साल के बच्चों को दो ग्राम सफेद मूसली खानी चाहिए। जबकि 60 वर्ष तक के लोग 6 ग्राम तक सफेद मूसली खा सकते हैं। गर्भवती महिलाएं दो ग्राम तक मूसली लें। हालांकि गर्भवती महिलाए इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
यह लेख पढ़ने के बाद आपको सफेद मूसली के फायदे और नुकसान पता चल गए हैं और आप इसका सेवन जरूर करें।
|
सफेद मूसली के फायदे और नुकसान सफेद मूसली एक तरह की जड़ी बूटी होती है जिसका प्रयोग कई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में किया जाता है। सफेद मूसली एक प्रकार का पौधा होता है जिसमें छोटे सफ़ेद फूल होते हैं और इन फूलों का प्रयोग ही दवाओं को बनाने में किया जाता है। पुरुषों के लिए सफेद मूसली को बेहद ही लाभजनक माना जाता है और इसे खाने से उनको शारीरिक ताकत मिलती है। इसके अलावा सफेद मूसली के फायदे और क्या-क्या हैं, वो इस प्रकार है। सफेद मूसली के फायदे सफेद मूसली एक जड़ी बूटी हैं जिसमें बहुत से औषधीय गुण होते हैं। इसके सेवन से बहुत सी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। सफेद मूसली का सबसे बड़ा फायदा पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाता है। आइये जानते हैं सफेद मूसली के फायदे। जिन लोगों का वजन कम है वो लोग सफेद मूसली को अपनी डाइट में शामिल कर लें। इसे खाने से आसानी से वजन बढ़ जाता है और पतले शरीर की समस्या से निजात मिल जाती है। सफेद मूसली के फायदे छोटे बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए सफेद मूसली बेहद ही लाभ जनक होती है और इसे खाने से शिशु एकदम स्वस्थ पैदा होता है। गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन महिलाओं को दूध के साथ जरूर करना चाहिए। वहीं बच्चा होने के बाद भी इसका सेवन करना लाभदायक होता है और इसे खाने से महिलाओं के शरीर को ताकत मिलती है और उनका शरीर जल्द ही रिकवर कर लेता है। मधुमेह के मरीज अगर रोज इसे खाते हैं तो उनके शरीर में शुगर का स्तर नहीं बढ़ता है और एकदम नियंत्रित रहता है। सफेद मूसली के अंदर एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहाइपरग्लिसिमिक और एंटीडाइबिटिक पाए जाते हैं जो कि मधुमेह के रोग को सही करने में कारगर साबित होते हैं। मधुमेध से जुड़ी कई आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में मूसली का प्रयोग भी किया जाता है। सफेद मूसली के फायदे मांसपेशियों को मजबूत करने में गुणकारी होते हैं। मांसपेशियों को मजबूत बनाएं रखने में भी सफेद मूसली सहायक मानी जाती है और इसे खाने से मांसपेशियां कमजोर नहीं पड़ती है। इसलिए जो लोग अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं वो इसका सेवन जरूर करें। तनाव एक प्रकार का रोग होता है जिसके कारण इंसान उदास रहने लग जाता है और लोगों से दूरी बना लेता है। तनाव के कारण कई बार नींद ना आने की बीमारी भी लग जाती है। इसलिए तनाव होने पर इसे अनदेखा ना करें और रोज सफेद मूसली खाएं। रात को सोने से पहले दूध के साथ सफेद मूसली खाने से तनाव दूर हो जाएगा और आपका दिमाग शांत रहेगा। इतना ही नहीं आपको अच्छी नींद भी आएगी। सफेद मूसली के फायदे वजन कम करने में भी उपयोगी साबित होते हैं। वजन कम करने के लिए भी सफेद मूसली फायदेमंद होती है और इसे खाने से एक महीने के अंदर ही वजन को कम किया जा सकता है। जो लोग अधिक वजन से ग्रस्त हैं वो एक महीने तक रोज सफेद मूसली को खाया करें। वजन कम करने हेतु आप एक गिलास पानी को गर्म करके उसके अंदर एक चम्मच सफेद मूसली का पाउडर डाल दें। फिर इस पानी को पी लें। ये पानी पीने से वजन कम होने लग जाएगा। आप चाहें तो पानी के अलावा गर्म दूध के साथ भी सफेद मूसली का सेवन कर सकते हैं। सफेद मूसली के फायदे रोग प्रतिरोधक शक्ति के साथ भी हैं और इसे खाने से रोग प्रतिरोधक शक्ति मजबूत बनीं रहती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति के मजबूत होने से शरीर की रक्षा कई तरह के रोगों से होती है और अनगिनत संक्रमण शरीर से दूर रहते हैं। इसलिए जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर है और जो लोग आसानी से बदलते मौसम में बीमार हो जाते हैं। वो सफेद मूसली का सेवन करना शुरू कर दें और रोज एक गिलास दूध के साथ इसे खाएं। सफेद मूसली का सेवन करने से हड्डियां मजबूत बनीं रहती हैं और इनकी रक्षा अर्थराइटिस जैसे रोग से होती है। वहीं जिन लोगों को जोड़ो में दर्द की शिकायत रहती है अगर वो इसका सेवन करते हैं तो उनकी ये दर्द दूर हो जाती है। सफेद मूसली में प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन पाए जाते हैं। जो कि हड्डियों को कमजोर नहीं पड़ने देते हैं और इन्हें ताकत प्रदान करते हैं। इसलिए बुजुर्ग लोगों को भी मूसली का सेवन जरूर करना चाहिए। सफेद मूसली के नुकसान सफेद मूसली के फायदे पढ़ने के बाद आप इसके नुकसान पर भी एक नजर डाल लें। - अधिक मात्रा में सफेद मूसली को खाने से पाचन तंत्र खराब हो जाता है और खाना पाचन में वक्त लगता है। - जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है वो लोग सफेद मूसली को ना खाएं। क्योंकि इसे खाने से कब्ज की परेशानी और बढ़ सकती है। - सफेद मूसली में फाइबर पाए जाते हैं और इसे खाने से कई बार भूख मर जाती है। - सफेद मूसली की तासीर ठंडी होती है और अधिक मात्रा में इसे खाने से जुकाम हो सकता है। किस तरह से करें सेवन सफेद मूसली का सेवन चूर्ण के रूप में किया जा सकता है। बाजार में कई कंपनियों द्वारा इसका चूर्ण बेचा जाता है। वहीं आप चाहें तो घर में खुद से भी इसका चूर्ण तैयार कर सकते हैं। सफेद मूसली का चूर्ण तैयार करने के लिए आप इसे धूप में अच्छे से सूखा लें। फिर मिक्सी के अंदर पीसकर इसका पाउडर तैयार कर लें। सफेद मूसली का चूर्ण बनकर तैयार है। इस चूर्ण को आप पानी के साथ खा सकते हैं या दूध के अंदर मिलाकर भी ले सकते हैं। सफेद मूसली बेहद दी ताकतवर चीज होती है इसलिए आप छोटे बच्चों को ये खाने को ना दें। तेरह से उन्नीस साल के बच्चों को दो ग्राम सफेद मूसली खानी चाहिए। जबकि साठ वर्ष तक के लोग छः ग्राम तक सफेद मूसली खा सकते हैं। गर्भवती महिलाएं दो ग्राम तक मूसली लें। हालांकि गर्भवती महिलाए इसका सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। यह लेख पढ़ने के बाद आपको सफेद मूसली के फायदे और नुकसान पता चल गए हैं और आप इसका सेवन जरूर करें।
|
डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद का बड़ा खुलासा बेशरम रंग के लिए भगवा बिकिनी क्यों चुना? भगवा बकनी पर बड़ा खुलासा! बैकग्राउंड के हिसाब से कलर अच्छा लगा; मंशा गलत नहीं थी डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने अब जाकर भगवा बिकिनी विवाद पर बोला है। सिद्धार्थ ने कहा कि उन्हें पता था कि वो कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं उन्होंने ये भी कहा कि भगवा रंग को ऐसे ही रैंडमली चुन लिया गया था। इसके पीछे कोई खास वजह नहीं थी। हमनें इसे लेकर कभी विचार नहीं किया। वो कलर अच्छा लग रहा था। शूटिंग के बैकग्राउंड में धूप थी घास भी हरा था। इसके अलावा पानी भी बिल्कुल नीला था। इस बैकग्राउंड में भगवा रंग ज्यादा शूट कर रहा था। हमने यही सोचा कि जब ऑडियंस इसे देखेगी तो समझ जाएगी कि इसके पीछे इरादा बिल्कुल गलत नहीं था। ब्रह्मास्त्र 2 और 3 की शूटिंग एक-साथ होगी - अयान मुखर्जी हाल ही में डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ब्रह्मास्त्र 2' और 'ब्रह्मास्त्र 3' के बारे में जानकारी शेयर की है। अयान ने बताया कि इस बार वो 'ब्रह्मास्त्र' के दोनों पार्ट की शूटिंग एक साथ करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि इस बार वो फिल्म को सक्सेसफुल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और फिल्म की राइटिंग पर खास ध्यान देंगे। दूसरे दिन फिल्म की कमाई थोड़ी और गिर गई अजय देवगन की लेटेस्ट फिल्म भोला गुरुवार को थिएटर्स में रिलीज हुई. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की ओपनिंग तो डबल डिजिट में जरूर रही लेकिन ये उम्मीद के मुकाबले थोड़ी फीकी लगी. अब शुक्रवार की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स बता रही हैं कि दूसरे दिन फिल्म की कमाई थोड़ी और गिर गई है. अब सारा दारोमदार शनिवार पर आकर टिक गया है. मुंबई एयरपोर्ट पर दिखे हॉलीवुड स्टार्स जेंदाया और टॉम हॉलैंड स्पाइडरमैनः होमकमिंग के एक्टर और कपल जेंदाया और टॉम हॉलैंड पहली बार एकसाथ मुंबई आए हैं। कलिना एयरपोर्ट पर कपल एकसाथ स्पॉट हुए। जेंदाया एयरपोर्ट से बाहर निकलते हुए मुस्कुराते हुए दिखाई दीं। वहीं टॉम एयरपोर्ट से निकलकर सीधे कार की तरफ बढ़ गए।
|
डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद का बड़ा खुलासा बेशरम रंग के लिए भगवा बिकिनी क्यों चुना? भगवा बकनी पर बड़ा खुलासा! बैकग्राउंड के हिसाब से कलर अच्छा लगा; मंशा गलत नहीं थी डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने अब जाकर भगवा बिकिनी विवाद पर बोला है। सिद्धार्थ ने कहा कि उन्हें पता था कि वो कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं उन्होंने ये भी कहा कि भगवा रंग को ऐसे ही रैंडमली चुन लिया गया था। इसके पीछे कोई खास वजह नहीं थी। हमनें इसे लेकर कभी विचार नहीं किया। वो कलर अच्छा लग रहा था। शूटिंग के बैकग्राउंड में धूप थी घास भी हरा था। इसके अलावा पानी भी बिल्कुल नीला था। इस बैकग्राउंड में भगवा रंग ज्यादा शूट कर रहा था। हमने यही सोचा कि जब ऑडियंस इसे देखेगी तो समझ जाएगी कि इसके पीछे इरादा बिल्कुल गलत नहीं था। ब्रह्मास्त्र दो और तीन की शूटिंग एक-साथ होगी - अयान मुखर्जी हाल ही में डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'ब्रह्मास्त्र दो' और 'ब्रह्मास्त्र तीन' के बारे में जानकारी शेयर की है। अयान ने बताया कि इस बार वो 'ब्रह्मास्त्र' के दोनों पार्ट की शूटिंग एक साथ करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि इस बार वो फिल्म को सक्सेसफुल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और फिल्म की राइटिंग पर खास ध्यान देंगे। दूसरे दिन फिल्म की कमाई थोड़ी और गिर गई अजय देवगन की लेटेस्ट फिल्म भोला गुरुवार को थिएटर्स में रिलीज हुई. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की ओपनिंग तो डबल डिजिट में जरूर रही लेकिन ये उम्मीद के मुकाबले थोड़ी फीकी लगी. अब शुक्रवार की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स बता रही हैं कि दूसरे दिन फिल्म की कमाई थोड़ी और गिर गई है. अब सारा दारोमदार शनिवार पर आकर टिक गया है. मुंबई एयरपोर्ट पर दिखे हॉलीवुड स्टार्स जेंदाया और टॉम हॉलैंड स्पाइडरमैनः होमकमिंग के एक्टर और कपल जेंदाया और टॉम हॉलैंड पहली बार एकसाथ मुंबई आए हैं। कलिना एयरपोर्ट पर कपल एकसाथ स्पॉट हुए। जेंदाया एयरपोर्ट से बाहर निकलते हुए मुस्कुराते हुए दिखाई दीं। वहीं टॉम एयरपोर्ट से निकलकर सीधे कार की तरफ बढ़ गए।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक) मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्देश पर गोमती रिवर फ्रंट में अनियमितता के कारण तीन अभियन्ताओं को तत्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। प्रमुख सचिव सुरेश चन्द्रा ने बताया कि तत्कालिन मुख्य अभियन्ता शारदा सहायक काजिम अली, तत्कालिन अधीक्षण अभियन्ता शारदा सहायक कमलेश्वर सिंह तथा तत्कालिन अधिशाषी अभियन्ता शारदा सहायक एस. के. यादव के गोमती रिवर फ्रंट में गम्भीर अनियमितता बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सिंचाई, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्देश पर गोमती रिवर फ्रंट में अनियमितता के कारण तीन अभियन्ताओं को तत्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। प्रमुख सचिव सुरेश चन्द्रा ने बताया कि तत्कालिन मुख्य अभियन्ता शारदा सहायक काजिम अली, तत्कालिन अधीक्षण अभियन्ता शारदा सहायक कमलेश्वर सिंह तथा तत्कालिन अधिशाषी अभियन्ता शारदा सहायक एस. के. यादव के गोमती रिवर फ्रंट में गम्भीर अनियमितता बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है।
|
लौहपुरुष सरदार पटेल सिर्फ कांग्रेस के थे या समूचे देश के हैं? बीती 31 अक्तूबर को देश ने उनकी 144वीं जयंती मनाई। यह दिन 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के तौर पर मनाया जाता है। एक ओर सरदार पटेल की जयंती थी, तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि थी। 1984 में इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री के सिख सुरक्षा कर्मियों ने ही उनकी हत्या कर दी थी। प्रतिक्रिया में देश के कई हिस्सों में भयावह सिख-विरोधी दंगे भड़के थे। अकेली दिल्ली और आसपास के ही इलाकों में करीब 12,500 सिखों का कत्लेआम किया गया था। बहरहाल आज यह हमारा विषय नहीं है, लेकिन इस तारीख से क्या-क्या घटनाएं जुड़ी हैं, यह जानना जरूरी है, क्योंकि चिंता राष्ट्रीय एकता की है। बुनियादी सवाल यह है कि आखिर सरदार किसके थे और उनकी विरासत क्या थी? विडंबना यह है कि सरदार पटेल के नेतृत्व में जिन 565 रियासतों और रजवाड़ों का भारत के साथ विलय कर, देश की स्वतंत्रता को, मजबूती और व्यापकता दी गई थी, उस पर विश्लेषण करने के बजाय ये बयान दिए जा रहे हैं कि आज सरदार होते तो आरएसएस पर पाबंदी थोप देते! सरदार का सपना 'अखंड भारत' का था और कश्मीर के बिना वह एकीकरण संभव नहीं था। बेशक जम्मू-कश्मीर का 31 अक्तूबर को ही आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन करना भारत के एकीकरण की एक प्रक्रिया ही है। अनुच्छेद 370 को समाप्त कर प्रधानमंत्री मोदी ने कमोबेश सरदार के उस सपने को साकार करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि यदि आज सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय समारोह के तौर पर मनाया जा रहा है, राष्ट्रीय एकता का अवार्ड दिया जाता है, 'स्टेच्यु ऑफ यूनिटी' दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, सरदार की ऐतिहासिक विरासत को खंगाल कर उसका विश्लेषण किया जा रहा है, तो उसका एकमात्र श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। साल भर में करीब 26 लाख सैलानी 'स्टेच्यु ऑफ यूनिटी' को देखने गए हैं। सरदार पटेल को भारत की एकता और अखंडता के प्रतीकस्वरूप मोदी सरकार ने ही स्थापित किया। इसके पीछे राजनीतिक और गुजराती मकसद भी रहा होगा, लेकिन हमने अभी तक सरदार पटेल को कुछ पाठ्य पुस्तकों, सड़कों, चौराहों तक ही सीमित देखा था। 'अखंड भारत' के परिप्रेक्ष्य में कभी भी उनका सम्यक मूल्यांकन नहीं किया गया। कांग्रेस कभी भी नेहरू-गांधी परिवार से बाहर नहीं निकल पाई। कुछ ऐतिहासिक बयान या पत्र भी सार्वजनिक नहीं हो पाए, जबकि यह ऐतिहासिक और प्रामाणिक सच है कि कांग्रेस के तत्कालीन 15 प्रदेश अध्यक्षों में से 12 जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं थे। उसके बावजूद सरदार ने यह पद नेहरू को दिया और खुद उनके 'उप' बने। आज के गांधी परिवार को इस इतिहास की जानकारी क्यों होगी? बेशक सरदार पटेल कांग्रेस के निष्ठावान नेता थे, क्योंकि उस दौर में कांग्रेस पार्टी का ही वर्चस्व था और अन्य पार्टियां बौनी थीं, लेकिन आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का यह कथन कि 'शत्रुओं को भी आज सरदार को नमन करना पड़ रहा है', बेहद शर्मनाक और बचकाना बयान है। क्या इसी देश का प्रधानमंत्री अपने पूर्ववर्ती नेताओं का शत्रु है, क्योंकि वह भाजपा-संघ का नेता है और दिवंगत नेता कांग्रेस के थे? दुर्भाग्य तो यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तो अपने 'पूर्वज नेता' सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने का शिष्टाचार ही भूल गए। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपने ट्विटर पर ही श्रद्धांजलि देकर याद किया। यह है सरदार के प्रति कांग्रेस के सम्मान का सच...! सरदार स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री थे, लिहाजा वह राष्ट्रीय नेता थे और इस नाते उनका जुड़ाव भी समूचे देश के साथ था। सिर्फ कांग्रेसी पहचान तो यहीं से खंडित हो जाती है कि उन्हें मृत्यु के 41 साल बाद 'भारत रत्न' का सर्वोच्च सम्मान देने के काबिल समझा गया। सरदार का कल तक यह महत्त्व नहीं आंका गया, जो आज प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न स्तरों पर कर रहे हैं। सरदार और आरएसएस का संबंध क्या था, उसके बारे में सोच क्या थी, क्या उस पर पाबंदी चस्पा कर देनी चाहिए, इन सवालों पर स्वतंत्र रूप से एक और संपादकीय में विश्लेषण करेंगे। फिलहाल यही सोच अनिवार्य है कि सरदार हमारे थे, समूचे देश के थे, नेहरू-गांधी के बंधक नहीं थे।
|
लौहपुरुष सरदार पटेल सिर्फ कांग्रेस के थे या समूचे देश के हैं? बीती इकतीस अक्तूबर को देश ने उनकी एक सौ चौंतालीसवीं जयंती मनाई। यह दिन 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के तौर पर मनाया जाता है। एक ओर सरदार पटेल की जयंती थी, तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि थी। एक हज़ार नौ सौ चौरासी में इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री के सिख सुरक्षा कर्मियों ने ही उनकी हत्या कर दी थी। प्रतिक्रिया में देश के कई हिस्सों में भयावह सिख-विरोधी दंगे भड़के थे। अकेली दिल्ली और आसपास के ही इलाकों में करीब बारह,पाँच सौ सिखों का कत्लेआम किया गया था। बहरहाल आज यह हमारा विषय नहीं है, लेकिन इस तारीख से क्या-क्या घटनाएं जुड़ी हैं, यह जानना जरूरी है, क्योंकि चिंता राष्ट्रीय एकता की है। बुनियादी सवाल यह है कि आखिर सरदार किसके थे और उनकी विरासत क्या थी? विडंबना यह है कि सरदार पटेल के नेतृत्व में जिन पाँच सौ पैंसठ रियासतों और रजवाड़ों का भारत के साथ विलय कर, देश की स्वतंत्रता को, मजबूती और व्यापकता दी गई थी, उस पर विश्लेषण करने के बजाय ये बयान दिए जा रहे हैं कि आज सरदार होते तो आरएसएस पर पाबंदी थोप देते! सरदार का सपना 'अखंड भारत' का था और कश्मीर के बिना वह एकीकरण संभव नहीं था। बेशक जम्मू-कश्मीर का इकतीस अक्तूबर को ही आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन करना भारत के एकीकरण की एक प्रक्रिया ही है। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को समाप्त कर प्रधानमंत्री मोदी ने कमोबेश सरदार के उस सपने को साकार करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि यदि आज सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय समारोह के तौर पर मनाया जा रहा है, राष्ट्रीय एकता का अवार्ड दिया जाता है, 'स्टेच्यु ऑफ यूनिटी' दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, सरदार की ऐतिहासिक विरासत को खंगाल कर उसका विश्लेषण किया जा रहा है, तो उसका एकमात्र श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। साल भर में करीब छब्बीस लाख सैलानी 'स्टेच्यु ऑफ यूनिटी' को देखने गए हैं। सरदार पटेल को भारत की एकता और अखंडता के प्रतीकस्वरूप मोदी सरकार ने ही स्थापित किया। इसके पीछे राजनीतिक और गुजराती मकसद भी रहा होगा, लेकिन हमने अभी तक सरदार पटेल को कुछ पाठ्य पुस्तकों, सड़कों, चौराहों तक ही सीमित देखा था। 'अखंड भारत' के परिप्रेक्ष्य में कभी भी उनका सम्यक मूल्यांकन नहीं किया गया। कांग्रेस कभी भी नेहरू-गांधी परिवार से बाहर नहीं निकल पाई। कुछ ऐतिहासिक बयान या पत्र भी सार्वजनिक नहीं हो पाए, जबकि यह ऐतिहासिक और प्रामाणिक सच है कि कांग्रेस के तत्कालीन पंद्रह प्रदेश अध्यक्षों में से बारह जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं थे। उसके बावजूद सरदार ने यह पद नेहरू को दिया और खुद उनके 'उप' बने। आज के गांधी परिवार को इस इतिहास की जानकारी क्यों होगी? बेशक सरदार पटेल कांग्रेस के निष्ठावान नेता थे, क्योंकि उस दौर में कांग्रेस पार्टी का ही वर्चस्व था और अन्य पार्टियां बौनी थीं, लेकिन आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का यह कथन कि 'शत्रुओं को भी आज सरदार को नमन करना पड़ रहा है', बेहद शर्मनाक और बचकाना बयान है। क्या इसी देश का प्रधानमंत्री अपने पूर्ववर्ती नेताओं का शत्रु है, क्योंकि वह भाजपा-संघ का नेता है और दिवंगत नेता कांग्रेस के थे? दुर्भाग्य तो यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तो अपने 'पूर्वज नेता' सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने का शिष्टाचार ही भूल गए। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपने ट्विटर पर ही श्रद्धांजलि देकर याद किया। यह है सरदार के प्रति कांग्रेस के सम्मान का सच...! सरदार स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री थे, लिहाजा वह राष्ट्रीय नेता थे और इस नाते उनका जुड़ाव भी समूचे देश के साथ था। सिर्फ कांग्रेसी पहचान तो यहीं से खंडित हो जाती है कि उन्हें मृत्यु के इकतालीस साल बाद 'भारत रत्न' का सर्वोच्च सम्मान देने के काबिल समझा गया। सरदार का कल तक यह महत्त्व नहीं आंका गया, जो आज प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न स्तरों पर कर रहे हैं। सरदार और आरएसएस का संबंध क्या था, उसके बारे में सोच क्या थी, क्या उस पर पाबंदी चस्पा कर देनी चाहिए, इन सवालों पर स्वतंत्र रूप से एक और संपादकीय में विश्लेषण करेंगे। फिलहाल यही सोच अनिवार्य है कि सरदार हमारे थे, समूचे देश के थे, नेहरू-गांधी के बंधक नहीं थे।
|
कानपुर (ब्यूरो) दुबई बुर्ज खलीफा, मुंबई गेटवे ऑफ इंडिया और दिल्ली के इंडिया गेट की तर्ज पर फूलबाग स्थित गांधी भवन में लाइटिंग शो का नजारा 15 अगस्त से दिखेगा। स्मार्ट सिटी के तहत साढ़े पांच करोड़ की लागत से बनाए गए इस प्रोजेक्ट में शहर की संस्कृति की समृद्धि का जश्न मनाना, पौराणिक इतिहास वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य, धु्रव ब्रम्हावर्त घाट की पौराणिक कहानियां और तात्या टोपे रानी लखमी बाई और नाना राव समेत अन्य लाइटिंग शो शामिल हैं। इस लाइटिंग शो को अलग अलग चार भागों में बांटा गया है।
गंगा बैराज पर टूरिस्ट को बढावा देने और इसे और भी खूबसूरत बनाने के उद्देश्य से केडीए 5. 80 करोड़ की लागत से यहां फसाड थीम लाइट लगवाई गई हैं। इसके तहत बैराज के सभी 30 गेटों से लेकर अप और डाउन स्ट्रीम में कॉलम तक विशेष तरह की देसी-विदेशी रेड, ग्रीन, ब्लू व्हाइट लाइटें लगाई जा रही हैं। इन लाइटों को विशेष म्यूजिक सिस्टम से जोड़ा गया है। इन फसाड लाइटों को चलाने में 100 किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ेगी। इसका इनॉग्रेशन 15 अगस्त को होना है। रोजाना शाम रंग बिरंगी लाइटों और धुनों का लुफ्त उठा सकेंगे।
बड़ा चौराहा स्थित कानपुर कोतवाली को 2. 02 करोड़ की लागत से मल्टीकलर फसाड लाइटिंग का कार्य किया जा रहा है। कोतवाली के ग्राउंड फ्लोर से दूसरी मंजिल तक तक स्टेयरकेस लाइट व रेलिंग लगवाई जा रही है। साथ ही यहां कोतवाली के इतिहास का उल्लेख भी होगा। अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर यह लाइटों से सजाई जाएगी, जो 200 पैटर्न में अपना रंग बदलेगी।
लाल इमली की इमारत पर लाइटिंग को लेकर एक करोड़ रुपए से सुंदरीकरण किया जा रहा है। अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर यह लाइटों से सजाई जाएगी। वहीं, सितंबर में इसका इनॉग्रेशन कराने की तैयारी है। यहां पर अलग-अलग कई लाइटें इमारत पर चार चांद लगाएंगी। बता दें कि लाल इमली मिल की स्थापना वर्ष 1876 में जार्ज ऐलन, वीई कूपर, गैविन एस जोन्स, डॉ कोंडोन और बिवैन पेटमैन ने किया था। पहले इसका नाम कानपोर वूलेन मिल्स था।
सिविल लाइंस स्थित ऐतिहासिक रिवर साइट पावर हाउस टावर पर लाइटिंग की गई है। साथ ही यहां पर सेल्फी प्वाइंट की भी व्यवस्था का ख्याल रखा गया है। यहां पर 100 मीटर लम्बाई के दो स्टील टावर और 80 मीटर लम्बाई का एक ईट टावर मौजूद है। स्मार्ट सिटी के तहत एक स्टील टावर और एक ईट टावर को चिन्हित किया गया है। इनमें 50 मीटर और 20 मीटर के एरिया इन टावरों में लाइटिंग शो किया जाएगा। वहीं, ईट के टावर पर लाइटिंग शुरू कर दी गई है। 15 अगस्त को यह जगह आकर्षण केंद्र रहेगा।
अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर गांधी भवन समेत कई ऐतिहासिक धरोहरों पर फसाड लाइटिंग थीम शुरू किया जा रहा है। जिसकी तैयारी की जा रही है।
|
कानपुर दुबई बुर्ज खलीफा, मुंबई गेटवे ऑफ इंडिया और दिल्ली के इंडिया गेट की तर्ज पर फूलबाग स्थित गांधी भवन में लाइटिंग शो का नजारा पंद्रह अगस्त से दिखेगा। स्मार्ट सिटी के तहत साढ़े पांच करोड़ की लागत से बनाए गए इस प्रोजेक्ट में शहर की संस्कृति की समृद्धि का जश्न मनाना, पौराणिक इतिहास वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य, धु्रव ब्रम्हावर्त घाट की पौराणिक कहानियां और तात्या टोपे रानी लखमी बाई और नाना राव समेत अन्य लाइटिंग शो शामिल हैं। इस लाइटिंग शो को अलग अलग चार भागों में बांटा गया है। गंगा बैराज पर टूरिस्ट को बढावा देने और इसे और भी खूबसूरत बनाने के उद्देश्य से केडीए पाँच. अस्सी करोड़ की लागत से यहां फसाड थीम लाइट लगवाई गई हैं। इसके तहत बैराज के सभी तीस गेटों से लेकर अप और डाउन स्ट्रीम में कॉलम तक विशेष तरह की देसी-विदेशी रेड, ग्रीन, ब्लू व्हाइट लाइटें लगाई जा रही हैं। इन लाइटों को विशेष म्यूजिक सिस्टम से जोड़ा गया है। इन फसाड लाइटों को चलाने में एक सौ किलोग्रामवाट बिजली की जरूरत पड़ेगी। इसका इनॉग्रेशन पंद्रह अगस्त को होना है। रोजाना शाम रंग बिरंगी लाइटों और धुनों का लुफ्त उठा सकेंगे। बड़ा चौराहा स्थित कानपुर कोतवाली को दो. दो करोड़ की लागत से मल्टीकलर फसाड लाइटिंग का कार्य किया जा रहा है। कोतवाली के ग्राउंड फ्लोर से दूसरी मंजिल तक तक स्टेयरकेस लाइट व रेलिंग लगवाई जा रही है। साथ ही यहां कोतवाली के इतिहास का उल्लेख भी होगा। अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर यह लाइटों से सजाई जाएगी, जो दो सौ पैटर्न में अपना रंग बदलेगी। लाल इमली की इमारत पर लाइटिंग को लेकर एक करोड़ रुपए से सुंदरीकरण किया जा रहा है। अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर यह लाइटों से सजाई जाएगी। वहीं, सितंबर में इसका इनॉग्रेशन कराने की तैयारी है। यहां पर अलग-अलग कई लाइटें इमारत पर चार चांद लगाएंगी। बता दें कि लाल इमली मिल की स्थापना वर्ष एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में जार्ज ऐलन, वीई कूपर, गैविन एस जोन्स, डॉ कोंडोन और बिवैन पेटमैन ने किया था। पहले इसका नाम कानपोर वूलेन मिल्स था। सिविल लाइंस स्थित ऐतिहासिक रिवर साइट पावर हाउस टावर पर लाइटिंग की गई है। साथ ही यहां पर सेल्फी प्वाइंट की भी व्यवस्था का ख्याल रखा गया है। यहां पर एक सौ मीटर लम्बाई के दो स्टील टावर और अस्सी मीटर लम्बाई का एक ईट टावर मौजूद है। स्मार्ट सिटी के तहत एक स्टील टावर और एक ईट टावर को चिन्हित किया गया है। इनमें पचास मीटर और बीस मीटर के एरिया इन टावरों में लाइटिंग शो किया जाएगा। वहीं, ईट के टावर पर लाइटिंग शुरू कर दी गई है। पंद्रह अगस्त को यह जगह आकर्षण केंद्र रहेगा। अमृत महोत्सव के तहत स्वतंत्रता दिवस पर गांधी भवन समेत कई ऐतिहासिक धरोहरों पर फसाड लाइटिंग थीम शुरू किया जा रहा है। जिसकी तैयारी की जा रही है।
|
आजके कार्यक्रम में सद्दाम की सेना के मुक़ाबले में ख़ुर्रमशहर के प्रतिरोधकर्ताओं के बीच बहनाम मुहम्मदी और मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे जैसे दो किशोर प्रतिरोधकर्ताओं की भूमिका की चर्चा की जाएगी।
पिछले कार्यक्रम में न्यूतम सैन्य संभावनाओं के साथ ईरानी किशोरों व युवाओं द्वारा अपने देश की रक्षा के लिए किए जाने वाले प्रतिरोध के बारे में बात की थी। इस प्रतिरोध को एक स्वर्णिम और साथ ही दुखद अध्याय ईरान के दक्षिण में और इराक़ की सीमा के निकट स्थित तटवर्ती नगर ख़ुर्रमशहर की रक्षा के लिए युवाओं का बलिदान है। ख़ुर्रमशहर के वीर सपूतों ने इराक़ की कई सैन्य टुकड़ियों को 34 दिन तक इस शहर के बाहर रोके रखा था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक दुश्मन से युद्ध किया और अपने प्रतिरोध, बलिदान और साहस एक क्रांतिकारी शौर्य गाथा लिखी।
एसोशिएटेड प्रेस के पत्रकार एलेक्स एफ़नाए ने उन दिनों ख़ुर्रमशहर की स्थिति के बारे में लिखा हैः "ईरानी वीरों ने अक्तूबर सन 1980 में इतने कड़े प्रतिरोध का प्रदर्शन किया कि ख़ुर्रमशहर पर इराक़ी सेना के क़ब्ज़े के बाद उसका नाम ख़ूनींशहर अर्थात रक्तरंजित नगर पड़ गया। ख़ुर्रमशहर में बड़ी मुश्किल से कोई ऐसा घर मिलेगा जिसकी दीवारों पर गोलियों या मार्टर गोलों के निशान न हों। यह इस बात का प्रमाण है कि ईरानी जवानों ने किस प्रकार एक एक घर करके इस शहर की रक्षा की थी। इराक़ के एक वरिष्ठ कमांडर ने उस समय कहा था कि ईरानियों ने, जिनमें से अधिकतर युवा व अनुभवहीन थे, अपनी अंतिम सांस तक ख़ुर्रमशहर की रक्षा के लिए प्रतिरोध किया। "
ख़ुर्रमशहर की शौर्य गाथा लिखने वालों में बहनाम मुहम्मदी नामक एक तेरह वर्षीय विद्यार्थी भी है। बहनाम का जन्म वर्ष 1967 में ख़ुर्रमशहर में अपने दादा के घर हुआ। सितम्बर सन 1980 में ख़ुर्रमशहर पर इराक़ियों के हमले की अफ़वाहें मज़बूत होने लगी थीं। बहनाम को विश्वास नहीं हो रहा था कि ख़ुर्रमशहर, इराक़ियों के क़ब्ज़े में जा सकता है लेकिन युद्ध वास्तव में शुरू हो गया था। बहनाम ने ख़ुर्रमशहर में ही रुकने का फ़ैसला किया। जब बमबारी होती थी तब तेरह वर्षीय बहनाम दौड़ता हुआ जाता और घायलों की मदद करता था। नगर की रक्षा करने वाले बहुत मामूली से हथियारों के साथ इराक़ियों के मुक़ाबले में डटे हुए थे।
बहनाम शत्रु के मोर्चों की पहचान के लिए जाया करता था। उसने कई बार कहा था कि मैं अपनी मां को ढूंढ रहा हूं, वह कहीं खो गई है। इराक़ के सैनिक, जो यह सोच भी नहीं सकते थे कि वह 13 वर्षीय बच्चा जासूसी कर रहा है, उसे छोड़ दिया करते थे। शहर पर इराक़ियों का क़ब्ज़ा होता जा रहा था। बहुत से घरों में कई कई इराक़ी सैनिक छिपे हुए होते थे या आराम कर रहे होते थे। बहनाम अपने शरीर पर मिट्टी डाल लेता था, बाल बिखरा लेता था और रोते हुए उन घरों का पता लगाता था जिनमें इराक़ी होते थे। इराक़ी सैनिकों को भी मिट्टी में अटे हुए एक बच्चे से कोई लेना-देना नहीं था।
इसके बाद बहनाम जा कर इराक़ी सैनिकों के एकत्र होने के ठिकानों के बारे में ख़ुर्रमशहर के वीरों को सूचना दे देते थे। मार्टर गोलों की आवाज़ें कान फाड़े दे रही थीं और आरश नामक सड़क पर भीषण झड़पें हो रही थीं। हमेशा की तरह बहनाम वहां पहुंच गया। थोड़ी ही देर बाद शहर के रक्षकों ने देखा कि बहनाम एक किनारे गिरे पड़े हैं और उनके सिर व सीने से ख़ून उबल रहा है। उनकी नीली शर्ट ख़ून से सन गई थी। ख़ुर्रमशहर के पूरी तरह दुश्मन के हाथ में जाने से कुछ ही दिन पहले इस शहर का वीर व साहसी किशोर अंततः शहीद हो गया था।
बहनाम ने अपनी कम आयु के बावजूद एक वसीयत लिखी थी। उनकी वसीयत में लिखा थाः मैं वसीयत करना चाहता हूं . . . मैं हर क्षण शहादत की प्रतीक्षा में हूं . . . मैं दोस्तों से निवेदन करता हूं कि इमाम (ख़ुमैनी) को अकेला न छोड़ें और ईश्वर को न भूलें। केवल ईश्वर पर भरोसा करें। माताओ! पिताओ! अपने बच्चों का इस प्रकार प्रशिक्षण कीजिए कि वे ईश्वर के मार्ग में जेहाद से प्रेम करें।
अपनी धरती पर हमला करने वाले अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में ईरान के वीर युवाओं की आठ वर्षीय पवित्र प्रतिरक्षा की एक विशेषता, ईश्वर पर उनकी गहरी आस्था थी। ईश्वर पर ईमान ही था जिसने युद्ध के मोर्चों पर एक विशेष आध्यात्मिक माहौल पैदा कर दिया था। उन वीरों के शब्दकोष में पराजय नाम का शब्द ही नहीं था। मौत से न डरने की उनकी विशेषता ही थी जिसके कारण वे न्यूतनम संभावनाओं के बावजूद इराक़ की सिर से पैर तक हथियारों से लैस बासी सेना के मुक़ाबले में डटे रहे। इराक़ की सेना को तत्कालीन संसार के पूर्वी व पश्चिमी ब्लाकों के पिट्ठू 58 देशों का आर्थिक, सामरिक, रणनैतिक, गुप्तचर व राजनैतिक समर्थन प्राप्त था लेकिन इसके बावजूद वह उन सभी क्षेत्रों से पीछे हटने पर विवश हो गई जिन पर उसने अवैध ढंग से क़ब्ज़ा कर रखा था।
ख़ुर्रमशहर के वीर समूतों में एक अन्य मशहूर नाम मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे का है। वे भी बहनाम मुहम्मदी की तरह 13 साल के किशोर थे। बहनाम मुहम्मदी के विपरीत उनका जन्म केंद्रीय ईरान के क़ुम नगर में हुआ था। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद वर्ष 1979 में इमाम ख़ुमैनी के आदेश पर स्वयं सेवी सेना के गठन के बाद फ़हमीदे इस सेना में शामिल हो गए। सद्दाम की सेना द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध आरंभ किए जाने के बाद यह छोटा नायक इराक़ की सीमा पर देश के दक्षिणी मोर्चों पर पहुंच गया। उन्हें इस्लामी क्रांति के नेता इमाम ख़ुमैनी से गहरी श्रद्धा और लगाव था। जब कम आयु के कारण उन्हें कई बार मोर्चों से लौटा दिया गया तो उन्होंने कहा कि अपने आपको कष्ट न दीजिए, अगर इमाम ख़ुमैनी कहेंगे तो मैं जहां भी रहूंगा वहीं से जाने के लिए तैयार हूं। मुझे अपने देश की सेवा करनी है, मैं वापसी का वादा नहीं कर सकता।
विरोध के बावजूद वे एक बार फिर दक्षिणी ईरान में युद्ध के मोर्चों पर पहुंच गए। अग्रिम मोर्चों पर वे अपने मित्र मुहम्मद रज़ा शम्स के साथ मौजूद थे। मुहम्मद रज़ा घायल हो गए जिसके बाद फ़हमीदे ने बड़ी मुश्किल से उन्हें पीछे पहुंचाया और फिर अपने स्थान पर लौट आए। उन्होंने देखा कि कई इराक़ी टैंक हमले के लिए आगे बढ़ रहे हैं। मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे के पास कुछ हथगोले थे जिनमें से उन्होंने कुछ को कमर में बांधा और कुछ को हाथ में लेकर टैंकों की तरफ़ बढ़ने लगे। उसी समय उनके पैर में एक गोली लगी और वे घायल हो गए लेकिन इससे उनके फ़ौलादी इरादे में कोई परिवर्तन नहीं आया। उन्होंने बिना डगमगाए अपने संकल्प को व्यवहारिक बनाया और चारों ओर से बरस रही गोलियों की परवाह किए बिना अपने आपको दुश्मन के टैंकों तक पहुंचा दिया और हथगोलों से सबसे आगे वाले टैंक को उड़ा दिया। ख़ुद उनके भी टुकड़े टुकड़े हो गए। जब अगला टैंक धमाके से उड़ गया तो इराक़ी हमलावरों को लगा कि सामने से हमला हुआ है और वे हिम्मत हार बैठे और टैंकों को छोड़ कर भाग खड़े हुए। इसके परिणाम स्वरूप ख़ुर्रमशहर की घेराबंदी ढीली हो गई और कुछ समय बाद देश के ताज़ा दम सैनिक भी पहुंच गए।
इस्लामी क्रांति की सफलता की दूसरी वर्षगांठ पर इमाम ख़ुमैनी ने अपने संदेश में कहा थाः हमारा नेता वह 13 वर्षीय बच्चा है, जिसने अपने नन्हे से दिल के साथ जिसका मूल्य सैकड़ों ज़बानों और क़लमों से अधिक है, हथगोले के साथ अपने आपको दुश्मन के टैंक के नीचे पहुंचाया और उसे ध्वस्त कर दिया और साथ ही स्वयं भी शहादत पाई। इमाम ख़ुमैनी के इन शब्दों से मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे और उनका बलिदान ईरान के वैभवपूर्ण इतिहास के गौरवपूर्ण पन्नों में अमर हो गया। आज हर ईरानी युवा, फ़हमीदे को अमर मानता है जो हर ईरानी के लिए गर्व का कारण बन चुके हैं। मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे के शरीर के टुकड़ों को तेहरान के बहिश्ते ज़हरा नामक क़ब्रस्तान में दफ़्न किया गया है। (HN)
|
आजके कार्यक्रम में सद्दाम की सेना के मुक़ाबले में ख़ुर्रमशहर के प्रतिरोधकर्ताओं के बीच बहनाम मुहम्मदी और मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे जैसे दो किशोर प्रतिरोधकर्ताओं की भूमिका की चर्चा की जाएगी। पिछले कार्यक्रम में न्यूतम सैन्य संभावनाओं के साथ ईरानी किशोरों व युवाओं द्वारा अपने देश की रक्षा के लिए किए जाने वाले प्रतिरोध के बारे में बात की थी। इस प्रतिरोध को एक स्वर्णिम और साथ ही दुखद अध्याय ईरान के दक्षिण में और इराक़ की सीमा के निकट स्थित तटवर्ती नगर ख़ुर्रमशहर की रक्षा के लिए युवाओं का बलिदान है। ख़ुर्रमशहर के वीर सपूतों ने इराक़ की कई सैन्य टुकड़ियों को चौंतीस दिन तक इस शहर के बाहर रोके रखा था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक दुश्मन से युद्ध किया और अपने प्रतिरोध, बलिदान और साहस एक क्रांतिकारी शौर्य गाथा लिखी। एसोशिएटेड प्रेस के पत्रकार एलेक्स एफ़नाए ने उन दिनों ख़ुर्रमशहर की स्थिति के बारे में लिखा हैः "ईरानी वीरों ने अक्तूबर सन एक हज़ार नौ सौ अस्सी में इतने कड़े प्रतिरोध का प्रदर्शन किया कि ख़ुर्रमशहर पर इराक़ी सेना के क़ब्ज़े के बाद उसका नाम ख़ूनींशहर अर्थात रक्तरंजित नगर पड़ गया। ख़ुर्रमशहर में बड़ी मुश्किल से कोई ऐसा घर मिलेगा जिसकी दीवारों पर गोलियों या मार्टर गोलों के निशान न हों। यह इस बात का प्रमाण है कि ईरानी जवानों ने किस प्रकार एक एक घर करके इस शहर की रक्षा की थी। इराक़ के एक वरिष्ठ कमांडर ने उस समय कहा था कि ईरानियों ने, जिनमें से अधिकतर युवा व अनुभवहीन थे, अपनी अंतिम सांस तक ख़ुर्रमशहर की रक्षा के लिए प्रतिरोध किया। " ख़ुर्रमशहर की शौर्य गाथा लिखने वालों में बहनाम मुहम्मदी नामक एक तेरह वर्षीय विद्यार्थी भी है। बहनाम का जन्म वर्ष एक हज़ार नौ सौ सरसठ में ख़ुर्रमशहर में अपने दादा के घर हुआ। सितम्बर सन एक हज़ार नौ सौ अस्सी में ख़ुर्रमशहर पर इराक़ियों के हमले की अफ़वाहें मज़बूत होने लगी थीं। बहनाम को विश्वास नहीं हो रहा था कि ख़ुर्रमशहर, इराक़ियों के क़ब्ज़े में जा सकता है लेकिन युद्ध वास्तव में शुरू हो गया था। बहनाम ने ख़ुर्रमशहर में ही रुकने का फ़ैसला किया। जब बमबारी होती थी तब तेरह वर्षीय बहनाम दौड़ता हुआ जाता और घायलों की मदद करता था। नगर की रक्षा करने वाले बहुत मामूली से हथियारों के साथ इराक़ियों के मुक़ाबले में डटे हुए थे। बहनाम शत्रु के मोर्चों की पहचान के लिए जाया करता था। उसने कई बार कहा था कि मैं अपनी मां को ढूंढ रहा हूं, वह कहीं खो गई है। इराक़ के सैनिक, जो यह सोच भी नहीं सकते थे कि वह तेरह वर्षीय बच्चा जासूसी कर रहा है, उसे छोड़ दिया करते थे। शहर पर इराक़ियों का क़ब्ज़ा होता जा रहा था। बहुत से घरों में कई कई इराक़ी सैनिक छिपे हुए होते थे या आराम कर रहे होते थे। बहनाम अपने शरीर पर मिट्टी डाल लेता था, बाल बिखरा लेता था और रोते हुए उन घरों का पता लगाता था जिनमें इराक़ी होते थे। इराक़ी सैनिकों को भी मिट्टी में अटे हुए एक बच्चे से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद बहनाम जा कर इराक़ी सैनिकों के एकत्र होने के ठिकानों के बारे में ख़ुर्रमशहर के वीरों को सूचना दे देते थे। मार्टर गोलों की आवाज़ें कान फाड़े दे रही थीं और आरश नामक सड़क पर भीषण झड़पें हो रही थीं। हमेशा की तरह बहनाम वहां पहुंच गया। थोड़ी ही देर बाद शहर के रक्षकों ने देखा कि बहनाम एक किनारे गिरे पड़े हैं और उनके सिर व सीने से ख़ून उबल रहा है। उनकी नीली शर्ट ख़ून से सन गई थी। ख़ुर्रमशहर के पूरी तरह दुश्मन के हाथ में जाने से कुछ ही दिन पहले इस शहर का वीर व साहसी किशोर अंततः शहीद हो गया था। बहनाम ने अपनी कम आयु के बावजूद एक वसीयत लिखी थी। उनकी वसीयत में लिखा थाः मैं वसीयत करना चाहता हूं . . . मैं हर क्षण शहादत की प्रतीक्षा में हूं . . . मैं दोस्तों से निवेदन करता हूं कि इमाम को अकेला न छोड़ें और ईश्वर को न भूलें। केवल ईश्वर पर भरोसा करें। माताओ! पिताओ! अपने बच्चों का इस प्रकार प्रशिक्षण कीजिए कि वे ईश्वर के मार्ग में जेहाद से प्रेम करें। अपनी धरती पर हमला करने वाले अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में ईरान के वीर युवाओं की आठ वर्षीय पवित्र प्रतिरक्षा की एक विशेषता, ईश्वर पर उनकी गहरी आस्था थी। ईश्वर पर ईमान ही था जिसने युद्ध के मोर्चों पर एक विशेष आध्यात्मिक माहौल पैदा कर दिया था। उन वीरों के शब्दकोष में पराजय नाम का शब्द ही नहीं था। मौत से न डरने की उनकी विशेषता ही थी जिसके कारण वे न्यूतनम संभावनाओं के बावजूद इराक़ की सिर से पैर तक हथियारों से लैस बासी सेना के मुक़ाबले में डटे रहे। इराक़ की सेना को तत्कालीन संसार के पूर्वी व पश्चिमी ब्लाकों के पिट्ठू अट्ठावन देशों का आर्थिक, सामरिक, रणनैतिक, गुप्तचर व राजनैतिक समर्थन प्राप्त था लेकिन इसके बावजूद वह उन सभी क्षेत्रों से पीछे हटने पर विवश हो गई जिन पर उसने अवैध ढंग से क़ब्ज़ा कर रखा था। ख़ुर्रमशहर के वीर समूतों में एक अन्य मशहूर नाम मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे का है। वे भी बहनाम मुहम्मदी की तरह तेरह साल के किशोर थे। बहनाम मुहम्मदी के विपरीत उनका जन्म केंद्रीय ईरान के क़ुम नगर में हुआ था। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद वर्ष एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में इमाम ख़ुमैनी के आदेश पर स्वयं सेवी सेना के गठन के बाद फ़हमीदे इस सेना में शामिल हो गए। सद्दाम की सेना द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध आरंभ किए जाने के बाद यह छोटा नायक इराक़ की सीमा पर देश के दक्षिणी मोर्चों पर पहुंच गया। उन्हें इस्लामी क्रांति के नेता इमाम ख़ुमैनी से गहरी श्रद्धा और लगाव था। जब कम आयु के कारण उन्हें कई बार मोर्चों से लौटा दिया गया तो उन्होंने कहा कि अपने आपको कष्ट न दीजिए, अगर इमाम ख़ुमैनी कहेंगे तो मैं जहां भी रहूंगा वहीं से जाने के लिए तैयार हूं। मुझे अपने देश की सेवा करनी है, मैं वापसी का वादा नहीं कर सकता। विरोध के बावजूद वे एक बार फिर दक्षिणी ईरान में युद्ध के मोर्चों पर पहुंच गए। अग्रिम मोर्चों पर वे अपने मित्र मुहम्मद रज़ा शम्स के साथ मौजूद थे। मुहम्मद रज़ा घायल हो गए जिसके बाद फ़हमीदे ने बड़ी मुश्किल से उन्हें पीछे पहुंचाया और फिर अपने स्थान पर लौट आए। उन्होंने देखा कि कई इराक़ी टैंक हमले के लिए आगे बढ़ रहे हैं। मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे के पास कुछ हथगोले थे जिनमें से उन्होंने कुछ को कमर में बांधा और कुछ को हाथ में लेकर टैंकों की तरफ़ बढ़ने लगे। उसी समय उनके पैर में एक गोली लगी और वे घायल हो गए लेकिन इससे उनके फ़ौलादी इरादे में कोई परिवर्तन नहीं आया। उन्होंने बिना डगमगाए अपने संकल्प को व्यवहारिक बनाया और चारों ओर से बरस रही गोलियों की परवाह किए बिना अपने आपको दुश्मन के टैंकों तक पहुंचा दिया और हथगोलों से सबसे आगे वाले टैंक को उड़ा दिया। ख़ुद उनके भी टुकड़े टुकड़े हो गए। जब अगला टैंक धमाके से उड़ गया तो इराक़ी हमलावरों को लगा कि सामने से हमला हुआ है और वे हिम्मत हार बैठे और टैंकों को छोड़ कर भाग खड़े हुए। इसके परिणाम स्वरूप ख़ुर्रमशहर की घेराबंदी ढीली हो गई और कुछ समय बाद देश के ताज़ा दम सैनिक भी पहुंच गए। इस्लामी क्रांति की सफलता की दूसरी वर्षगांठ पर इमाम ख़ुमैनी ने अपने संदेश में कहा थाः हमारा नेता वह तेरह वर्षीय बच्चा है, जिसने अपने नन्हे से दिल के साथ जिसका मूल्य सैकड़ों ज़बानों और क़लमों से अधिक है, हथगोले के साथ अपने आपको दुश्मन के टैंक के नीचे पहुंचाया और उसे ध्वस्त कर दिया और साथ ही स्वयं भी शहादत पाई। इमाम ख़ुमैनी के इन शब्दों से मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे और उनका बलिदान ईरान के वैभवपूर्ण इतिहास के गौरवपूर्ण पन्नों में अमर हो गया। आज हर ईरानी युवा, फ़हमीदे को अमर मानता है जो हर ईरानी के लिए गर्व का कारण बन चुके हैं। मुहम्मद हुसैन फ़हमीदे के शरीर के टुकड़ों को तेहरान के बहिश्ते ज़हरा नामक क़ब्रस्तान में दफ़्न किया गया है।
|
दमोह के कुम्हारी थाना के एक आरक्षक का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भगवती मानव कल्याण संगठन के सदस्यों और आरक्षक के बीच थाने में विवाद हो गया। अब विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरक्षक संगठन के सदस्यों को गालियां देते हुए और धमकाते हुए नजर आ रहा है।
संगठन के सदस्यों ने आरक्षक की हरकत की सीडी बनाकर मध्य प्रदेश के डीजीपी और गृह मंत्री को भेजकर कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि संगठन के सदस्यों ने कुम्हारी थाना क्षेत्र में अवैध शराब पकड़ी थी। वे अवैध शराब लेकर आरोपी पर कार्रवाई कराने के लिए कुम्हारी थाना पहुंचे थे, जहां पदस्थ आरक्षक पीयूष से कार्यकर्ताओं का किसी बात को लेकर विवाद हो गया।
विवाद के दौरान साथी आरक्षक को समझाने आए लेकिन उसने एक न सुनी। इसके अलावा कुम्हारी थाना प्रभारी वंदना गौर भी आरक्षक को समझाने के लिए पहुंची लेकिन आरक्षक का हंगामा जारी रहा। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरक्षक शराब के नशे में था। इसलिए वह गालियां देता रहा। घटना से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने डीजीपी और गृह मंत्री से आरक्षक पर कार्रवाई की मांग की है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
दमोह के कुम्हारी थाना के एक आरक्षक का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भगवती मानव कल्याण संगठन के सदस्यों और आरक्षक के बीच थाने में विवाद हो गया। अब विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरक्षक संगठन के सदस्यों को गालियां देते हुए और धमकाते हुए नजर आ रहा है। संगठन के सदस्यों ने आरक्षक की हरकत की सीडी बनाकर मध्य प्रदेश के डीजीपी और गृह मंत्री को भेजकर कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि संगठन के सदस्यों ने कुम्हारी थाना क्षेत्र में अवैध शराब पकड़ी थी। वे अवैध शराब लेकर आरोपी पर कार्रवाई कराने के लिए कुम्हारी थाना पहुंचे थे, जहां पदस्थ आरक्षक पीयूष से कार्यकर्ताओं का किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद के दौरान साथी आरक्षक को समझाने आए लेकिन उसने एक न सुनी। इसके अलावा कुम्हारी थाना प्रभारी वंदना गौर भी आरक्षक को समझाने के लिए पहुंची लेकिन आरक्षक का हंगामा जारी रहा। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरक्षक शराब के नशे में था। इसलिए वह गालियां देता रहा। घटना से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने डीजीपी और गृह मंत्री से आरक्षक पर कार्रवाई की मांग की है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
कुछ रिश्ते मिलन के मोहताज नहीं होते वे सिर्फ़ भीतर-भीतर बहते हैं और इस धरती पर कभी समझे नहीं जाते। सरगुन और रेवा का-का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था।
गांव में जो नदी बहती थी, उसमें ख़ूब गहरा पानी था। बस दो-चार क़दम चलने पर ही डूबने का डर लगता था, इसलिए लड़की कभी भी चलकर उस पार नहीं गयी। लड़का भी नहीं आ सका इस पार, हालांकि उसे तैरना आता था। वह चाहता तो उससे मिलने रोज़ तैरकर आ सकता था, लेकिन वह कभी आया नहीं। लड़की अक्सर लड़के से इस बात पर नाराज ही रहती थी कि वह कभी भी नदी के इस पार नहीं आता।
ये तो लड़की को बहुत दिनों बाद पता चला था कि लड़के को फेफड़ों का रोग था और वह जल्दी हांफ जाता था इसलिए उसने चाहकर भी कभी तैरकर आने की कोशिश नहीं की। ये बात जानकर लड़की मन ही मन बहुत रोई थी, लेकिन किसी को बताया नहीं उसने कभी और फिर नाराज भी नहीं हुई लड़के से कभी।
समय बीत रहा था। गाँव में बहने वाली इस नदी की चौड़ाई ज़्यादा नहीं थी, इसलिए किनारे पास-पास ही नज़र आते थे, कभी-कभी तो उन्हें लगता कि बस हाथ बढ़ाकर ही वे दोनों एक-दूजे को बस छूने ही वाले हैं, लेकिन अगले ही पल डूब जाने के खयाल मात्र से वे कांप जाते। नदी की गहराई से दोनों ही ख़ौफ़ खाते थे। उनके प्रेम की तरह ही ये नदी भी अथाह थी, जिसमें डूबना यानी ख़ुद को मौत के हवाले कर देना था। वे दोनों ही मरने से बहुत डरते थे। वे हर हाल में ख़ुद को बचा लेना चाहते थे, लेकिन इस नदी किनारे आये बिन और एक-दूजे को देखे बिना रह भी नहीं पाते थे।
ये नदी उन्हें सम्मोहित करती थी या उनकी रूहें उन्हें खींचतीं थीं, वे कभी समझ ही नहीं पाए।
उनके बीच आकर्षण का रहस्य क्या है, कभी भी उन्हें समझ नहीं आया। हाँ, अगर वे डूब जाते तो शायद ये रहस्य भी जान लेते, लेकिन उन्होंने रहस्य को रहस्य ही बने रहने दिया और किनारों पर रुकना ही बेहतर समझा।
वे दोनों लगभग रोज़ उस नदी के किनारों पर आते और रुककर एक-दूसरे का इंतज़ार करते थे। उन दोनों के मिलने से नदी का पानी झूम के लहराकर बहता था और मुस्काते हुए किनारों को उछल-उछलकर छू लेता था। किनारों के ऐसे रोज़ भीग जाने से आसपास बहुत-सी हरी वनस्पति उग आई थी। लड़का किनारे उगी हरी डालियाँ तोड़ता और उन्हें हवा में हिलाता था और लड़की की तरफ़ संदेश भेजता था।
जवाब में लड़की अपनी हरी चुनर लहरा देती थी। दोनों बहुत दूर होने पर भी उस हरे संकेत को देखकर खुश हो लेते थे। सुकून पाते थे। उन दिनों उन दोनों के बीच वह हरा रंग महत्त्वपूर्ण हो गया था।
जब भी वे दोनों उदास होते, अपने-अपने किनारों पर बैठ जाते। लड़की उस नदी के ठंडे पानी में पैर डालकर ठंडी, गहरी सांस लेती और उस पार उस लड़के के बैठे होने की तसल्ली कर लेती। लड़की की तरफ़ से जब हरी चुनर लहराती तो लड़का भी मुस्कुराकर नदी के किनारे बैठ अपनी चिलम सुलगा लेता, लड़के को पानी से बहुत डर लगता था, लेकिन किनारों से उसे बड़ा प्रेम था।
हुए थे।
किनारों पर ख़ामोश बैठे-बैठे यूं ही एक दिन लड़की ने अपनी कोमल उंगलियों से लहरों पर अपना नाम लिख दिया 'रेवाÓ और उसे घूरती रही। उसने देखा उसका लिखा नाम पानी पर तैर रहा है और लहरें उसे उस पार बहाकर ले जा रही हैं। ये देख वह ख़ुशी से पागल हो गयी, उसने तो सुना था कि पानी हर चीज को डुबो देता है, भिगो देता है, गला देता है, मिटा देता है, फिर उसके शब्द कैसे तैर रहे हैं। वह अचरज से देख रही थी। ज़रा देर में उसका लिखा नाम लड़के के पास जा पहुँचा। उसने बड़ी ही कोमलता से उस नाम को उठाकर चूम लिया और लहरों पर अपना नाम' निरगुनÓ लिखकर लड़की की तरफ़ भेज दिया।
ऐसे वे दोनों एक-दूसरे का नाम जानने लगे और धीरे-धीरे दोनों नदी की लहरों पर अपने मन की बात लिखने लगे। वे दोनों अपनी उंगलियों से लहरों पर जो भी चि_ी लिखते, लहरें उन्हें बहाकर उस पार ले जाती।
पानी पर लिखी चि_ी जिसे कोई नहीं पढ़ सकता था सिवाय उन दोनों के। जब भी वे दोनों एक-दूजे की चि_ी पढ़ते, दोनों की आंखों में ख़ुशी के आंसू तैरते और होंठों पर मुस्कान।
उन्होंने कई बार आंसुओं से भी लहरों पर चि_ी लिखी।
इस तरह एक लहर आती तो दूजी जाती। वे दोनों कई बरसों तक लहरों पर अपनी चिट्ठियाँ लिखते रहे। उन दोनों ने आपस में क्या बातें कीं, किन-किन विषयों पर कीं, कोई नहीं जान सका। कभी-कभी लहरें आपस में कहतीं, "चलो आज इनकी चि_ी पढ़ लेते हैं। देखें तो क्या लिखते हैं दोनों।" लेकिन तभी नदी उन्हें डांट देती और कहती, "ऐसा ग़ज़ब मत करना वरना लोग डाकियों पर भरोसा नहीं करेंगे। तुम सिर्फ़ डाकिया हो और डाकिये कभी चि_ी नहीं पढ़ते और प्रेमियों की चिट्ठियाँ ...तौबा-तौबा पाप लगता है।" नदी की इस अदा पर लहरें खिलखिलाकर हंस देती।
साक्षी थी।
वे दोनों जब बहुत खुश होते और प्रेम से भरी बातें लहरों पर लिखते तो लहरें भी खुश होकर घाटों को भिगो देतीं और कई दिनों तक घाट गीले से दिखते और जब वे विरह के दुख से भरी चि_ी लिखते तो लहरें घाटों पर आकर बिखर जातीं और उस दिन घाट नदी में डूब जाते।
ये सिलसिला कई जन्मों तक चलता रहा, एक-दूजे को बिन देखे, बिन मिले बिना जाने वे यूं ही आते रहे।
उनका घाट पर आना बदस्तूर जारी रहा। मौसम कोई भी हो, वे उस नदी के घाट पर ज़रूर आते थे। रेवा हर गुरुवार और अमावस की रात नदी में दीपक सिराने आती थी और उस दीपक की रोशनी से निरगुन का चेहरा दमकता था।
रेवा ने इस बीच हरी चुनर लहराना कभी नहीं छोड़ा और निरगुन भी किनारे उग आई हरी वनस्पति को उठाकर संकेत देना कभी नहीं भूला था। समय गुजरता रहा, नदी बहती रही और फिर एक दिन अचानक मौसम बदले। उस बरस भयंकर अकाल पड़ा, बरसात नहीं हुई, नदी सूख गयी उसकी लहरें नष्ट हो गयी।
अब सिर्फ़ मिट्टी और रेत दिखती थी। अब बस्ती के लोग उस नदी को पैदल ही पार कर लेते थे। अब डूब जाने का कोई ख़तरा नहीं था। ये सब जानकर भी न कभी निरगुन चलकर रेवा से मिलने आया और न रेवा ने कभी सूखी नदी में उतरने की कोशिश की।
वे दोनों लहरों पर लिखी मधुर यादों में खोये हुए थे। वे चाहते थे फिर से ख़ूब बरसात हो, नदी फिर से गहरी हो जाये। अनगिनत लहरें बनें और फिर से वे एक-दूजे से अपनी बातें कहें-सुनें।
रेवा अब भी किनारों पर आती थी बिना नागा किये, लेकिन अब उसकी वह हरी चुनर आंसुओं के खारेपन से गल गयी थी, इसलिए वह अब लहराकर कोई संकेत नहीं भेज पाती थी। उस पार के घाट सूख गए थे तो कोई वनस्पति नहीं उगती थी कि निरगुन कोई संकेत भेज सके।
दोनों टूटे घाट और छूटे घाट पर उदास होकर एक-दूजे की राह तकते थे और दोनों ही सोचते थे उनका प्रेम लहरों के साथ समाप्त हो गया। उनके जीवन से हरियाली समाप्त हो गयी थी। सिर्फ़ सामने सूखा हुआ उदास रास्ता दिखता था। जिसे देखकर वे दुख से भर जाते थे। कभी-कभी सामने रास्ता दिखाई देने पर भी हम उस पर क्यों नहीं चलते, उन्हें समझ नहीं आता था। सामने मंज़िल दिखती है, फिर हम उसे बढ़कर क्यों नहीं छू लेते हैं, ये बात भी उन्हें समझ नहीं आती थी। रेवा कई दिनों तक टूटे घाट पर दीपक रखती रही। उसे समझ नहीं आता था बिन लहरों के कोई दीपक कैसे और कहाँ सिराये? अपनी दुआओं और प्रेम के दीपक अब वह कहाँ भेजे, समझ नहीं आता था। किसी भी रिश्ते में वादों का टूटना, कसमों का टूटना या दिल का टूटना इतना बुरा नहीं होता, जितना उस लय का टूटना होता है, जो दो लोगों के मध्य संगीत पैदा करती है। उन दोनों के बीच की लय टूट चुकी थी।
उन दोनों के नहीं आने से अब नदी का जल अक्सर उदास रहता और घाट मायूस।
फिर मौसम बदले और कई बरस बाद उस दिन ख़ूब बरसात हुई। आसपास के कई गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए। सैकड़ों लोग बेघर हुए, कई लोगों की मौतें हुई, कई लोग बाढ़ में लापता हो गए थे। बरसात से सूखी नदी भर गयी। लहरें और मछलियाँ फिर आने-जाने लगीं।
बस रेवा और निरगुन का कुछ पता नहीं चला, वे किनारों पर नहीं आते। जाने वे जीवित हैं भी या नहीं। क्या पता वे दोनों नदी की बाढ़ में बह गए हों। कौन जाने वक़्त की बाढ़ उन्हें कहाँ बहाकर ले गयी थी। कौन जाने उन दोनों ने डूब के रहस्य जान लिए हों और वे दोनों किसी कमजोर पल में अपने दुख की नदी में ही डूब मरे हों, लेकिन उनकी लिखी चि_ियाँ लहरों पर आज भी तैरती हैं। मछलियाँ उन्हें चख-चखके प्रेम की भाषा सीख गयी हैं, अब वे पानी से बाहर नहीं कूदतीं। उस नदी का जल अब प्रेम-जल हो गया है। पनिहारिनें उस प्रेम-जल को अपने मिट्टी के घड़ों में भर-भर ले जाती हैं और वे समझ नहीं पातीं कि आजकल उनके सपने रंगीन क्यों हुए जाते हैं। उस उदास नदी के टूटे घाट, छूटे घाट और लहरें आपस में बतियाते हैं। इस शोर से नदी किनारे बने मरघट में धूनी रमाये जोगी के जोग में विघ्न पड़ता है।
कोई नहीं जानता और न जान सकेगा इन लहरों पर लिखे किस्से-कहानियों के रहस्य। कोई कभी नहीं जान सकेगा कि लहरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं कि लहरों पर लिखे पत्र कभी गलते नहीं कि लहरों के बीच बनाये चित्र कभी धुलते नहीं।
|
कुछ रिश्ते मिलन के मोहताज नहीं होते वे सिर्फ़ भीतर-भीतर बहते हैं और इस धरती पर कभी समझे नहीं जाते। सरगुन और रेवा का-का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था। गांव में जो नदी बहती थी, उसमें ख़ूब गहरा पानी था। बस दो-चार क़दम चलने पर ही डूबने का डर लगता था, इसलिए लड़की कभी भी चलकर उस पार नहीं गयी। लड़का भी नहीं आ सका इस पार, हालांकि उसे तैरना आता था। वह चाहता तो उससे मिलने रोज़ तैरकर आ सकता था, लेकिन वह कभी आया नहीं। लड़की अक्सर लड़के से इस बात पर नाराज ही रहती थी कि वह कभी भी नदी के इस पार नहीं आता। ये तो लड़की को बहुत दिनों बाद पता चला था कि लड़के को फेफड़ों का रोग था और वह जल्दी हांफ जाता था इसलिए उसने चाहकर भी कभी तैरकर आने की कोशिश नहीं की। ये बात जानकर लड़की मन ही मन बहुत रोई थी, लेकिन किसी को बताया नहीं उसने कभी और फिर नाराज भी नहीं हुई लड़के से कभी। समय बीत रहा था। गाँव में बहने वाली इस नदी की चौड़ाई ज़्यादा नहीं थी, इसलिए किनारे पास-पास ही नज़र आते थे, कभी-कभी तो उन्हें लगता कि बस हाथ बढ़ाकर ही वे दोनों एक-दूजे को बस छूने ही वाले हैं, लेकिन अगले ही पल डूब जाने के खयाल मात्र से वे कांप जाते। नदी की गहराई से दोनों ही ख़ौफ़ खाते थे। उनके प्रेम की तरह ही ये नदी भी अथाह थी, जिसमें डूबना यानी ख़ुद को मौत के हवाले कर देना था। वे दोनों ही मरने से बहुत डरते थे। वे हर हाल में ख़ुद को बचा लेना चाहते थे, लेकिन इस नदी किनारे आये बिन और एक-दूजे को देखे बिना रह भी नहीं पाते थे। ये नदी उन्हें सम्मोहित करती थी या उनकी रूहें उन्हें खींचतीं थीं, वे कभी समझ ही नहीं पाए। उनके बीच आकर्षण का रहस्य क्या है, कभी भी उन्हें समझ नहीं आया। हाँ, अगर वे डूब जाते तो शायद ये रहस्य भी जान लेते, लेकिन उन्होंने रहस्य को रहस्य ही बने रहने दिया और किनारों पर रुकना ही बेहतर समझा। वे दोनों लगभग रोज़ उस नदी के किनारों पर आते और रुककर एक-दूसरे का इंतज़ार करते थे। उन दोनों के मिलने से नदी का पानी झूम के लहराकर बहता था और मुस्काते हुए किनारों को उछल-उछलकर छू लेता था। किनारों के ऐसे रोज़ भीग जाने से आसपास बहुत-सी हरी वनस्पति उग आई थी। लड़का किनारे उगी हरी डालियाँ तोड़ता और उन्हें हवा में हिलाता था और लड़की की तरफ़ संदेश भेजता था। जवाब में लड़की अपनी हरी चुनर लहरा देती थी। दोनों बहुत दूर होने पर भी उस हरे संकेत को देखकर खुश हो लेते थे। सुकून पाते थे। उन दिनों उन दोनों के बीच वह हरा रंग महत्त्वपूर्ण हो गया था। जब भी वे दोनों उदास होते, अपने-अपने किनारों पर बैठ जाते। लड़की उस नदी के ठंडे पानी में पैर डालकर ठंडी, गहरी सांस लेती और उस पार उस लड़के के बैठे होने की तसल्ली कर लेती। लड़की की तरफ़ से जब हरी चुनर लहराती तो लड़का भी मुस्कुराकर नदी के किनारे बैठ अपनी चिलम सुलगा लेता, लड़के को पानी से बहुत डर लगता था, लेकिन किनारों से उसे बड़ा प्रेम था। हुए थे। किनारों पर ख़ामोश बैठे-बैठे यूं ही एक दिन लड़की ने अपनी कोमल उंगलियों से लहरों पर अपना नाम लिख दिया 'रेवाÓ और उसे घूरती रही। उसने देखा उसका लिखा नाम पानी पर तैर रहा है और लहरें उसे उस पार बहाकर ले जा रही हैं। ये देख वह ख़ुशी से पागल हो गयी, उसने तो सुना था कि पानी हर चीज को डुबो देता है, भिगो देता है, गला देता है, मिटा देता है, फिर उसके शब्द कैसे तैर रहे हैं। वह अचरज से देख रही थी। ज़रा देर में उसका लिखा नाम लड़के के पास जा पहुँचा। उसने बड़ी ही कोमलता से उस नाम को उठाकर चूम लिया और लहरों पर अपना नाम' निरगुनÓ लिखकर लड़की की तरफ़ भेज दिया। ऐसे वे दोनों एक-दूसरे का नाम जानने लगे और धीरे-धीरे दोनों नदी की लहरों पर अपने मन की बात लिखने लगे। वे दोनों अपनी उंगलियों से लहरों पर जो भी चि_ी लिखते, लहरें उन्हें बहाकर उस पार ले जाती। पानी पर लिखी चि_ी जिसे कोई नहीं पढ़ सकता था सिवाय उन दोनों के। जब भी वे दोनों एक-दूजे की चि_ी पढ़ते, दोनों की आंखों में ख़ुशी के आंसू तैरते और होंठों पर मुस्कान। उन्होंने कई बार आंसुओं से भी लहरों पर चि_ी लिखी। इस तरह एक लहर आती तो दूजी जाती। वे दोनों कई बरसों तक लहरों पर अपनी चिट्ठियाँ लिखते रहे। उन दोनों ने आपस में क्या बातें कीं, किन-किन विषयों पर कीं, कोई नहीं जान सका। कभी-कभी लहरें आपस में कहतीं, "चलो आज इनकी चि_ी पढ़ लेते हैं। देखें तो क्या लिखते हैं दोनों।" लेकिन तभी नदी उन्हें डांट देती और कहती, "ऐसा ग़ज़ब मत करना वरना लोग डाकियों पर भरोसा नहीं करेंगे। तुम सिर्फ़ डाकिया हो और डाकिये कभी चि_ी नहीं पढ़ते और प्रेमियों की चिट्ठियाँ ...तौबा-तौबा पाप लगता है।" नदी की इस अदा पर लहरें खिलखिलाकर हंस देती। साक्षी थी। वे दोनों जब बहुत खुश होते और प्रेम से भरी बातें लहरों पर लिखते तो लहरें भी खुश होकर घाटों को भिगो देतीं और कई दिनों तक घाट गीले से दिखते और जब वे विरह के दुख से भरी चि_ी लिखते तो लहरें घाटों पर आकर बिखर जातीं और उस दिन घाट नदी में डूब जाते। ये सिलसिला कई जन्मों तक चलता रहा, एक-दूजे को बिन देखे, बिन मिले बिना जाने वे यूं ही आते रहे। उनका घाट पर आना बदस्तूर जारी रहा। मौसम कोई भी हो, वे उस नदी के घाट पर ज़रूर आते थे। रेवा हर गुरुवार और अमावस की रात नदी में दीपक सिराने आती थी और उस दीपक की रोशनी से निरगुन का चेहरा दमकता था। रेवा ने इस बीच हरी चुनर लहराना कभी नहीं छोड़ा और निरगुन भी किनारे उग आई हरी वनस्पति को उठाकर संकेत देना कभी नहीं भूला था। समय गुजरता रहा, नदी बहती रही और फिर एक दिन अचानक मौसम बदले। उस बरस भयंकर अकाल पड़ा, बरसात नहीं हुई, नदी सूख गयी उसकी लहरें नष्ट हो गयी। अब सिर्फ़ मिट्टी और रेत दिखती थी। अब बस्ती के लोग उस नदी को पैदल ही पार कर लेते थे। अब डूब जाने का कोई ख़तरा नहीं था। ये सब जानकर भी न कभी निरगुन चलकर रेवा से मिलने आया और न रेवा ने कभी सूखी नदी में उतरने की कोशिश की। वे दोनों लहरों पर लिखी मधुर यादों में खोये हुए थे। वे चाहते थे फिर से ख़ूब बरसात हो, नदी फिर से गहरी हो जाये। अनगिनत लहरें बनें और फिर से वे एक-दूजे से अपनी बातें कहें-सुनें। रेवा अब भी किनारों पर आती थी बिना नागा किये, लेकिन अब उसकी वह हरी चुनर आंसुओं के खारेपन से गल गयी थी, इसलिए वह अब लहराकर कोई संकेत नहीं भेज पाती थी। उस पार के घाट सूख गए थे तो कोई वनस्पति नहीं उगती थी कि निरगुन कोई संकेत भेज सके। दोनों टूटे घाट और छूटे घाट पर उदास होकर एक-दूजे की राह तकते थे और दोनों ही सोचते थे उनका प्रेम लहरों के साथ समाप्त हो गया। उनके जीवन से हरियाली समाप्त हो गयी थी। सिर्फ़ सामने सूखा हुआ उदास रास्ता दिखता था। जिसे देखकर वे दुख से भर जाते थे। कभी-कभी सामने रास्ता दिखाई देने पर भी हम उस पर क्यों नहीं चलते, उन्हें समझ नहीं आता था। सामने मंज़िल दिखती है, फिर हम उसे बढ़कर क्यों नहीं छू लेते हैं, ये बात भी उन्हें समझ नहीं आती थी। रेवा कई दिनों तक टूटे घाट पर दीपक रखती रही। उसे समझ नहीं आता था बिन लहरों के कोई दीपक कैसे और कहाँ सिराये? अपनी दुआओं और प्रेम के दीपक अब वह कहाँ भेजे, समझ नहीं आता था। किसी भी रिश्ते में वादों का टूटना, कसमों का टूटना या दिल का टूटना इतना बुरा नहीं होता, जितना उस लय का टूटना होता है, जो दो लोगों के मध्य संगीत पैदा करती है। उन दोनों के बीच की लय टूट चुकी थी। उन दोनों के नहीं आने से अब नदी का जल अक्सर उदास रहता और घाट मायूस। फिर मौसम बदले और कई बरस बाद उस दिन ख़ूब बरसात हुई। आसपास के कई गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए। सैकड़ों लोग बेघर हुए, कई लोगों की मौतें हुई, कई लोग बाढ़ में लापता हो गए थे। बरसात से सूखी नदी भर गयी। लहरें और मछलियाँ फिर आने-जाने लगीं। बस रेवा और निरगुन का कुछ पता नहीं चला, वे किनारों पर नहीं आते। जाने वे जीवित हैं भी या नहीं। क्या पता वे दोनों नदी की बाढ़ में बह गए हों। कौन जाने वक़्त की बाढ़ उन्हें कहाँ बहाकर ले गयी थी। कौन जाने उन दोनों ने डूब के रहस्य जान लिए हों और वे दोनों किसी कमजोर पल में अपने दुख की नदी में ही डूब मरे हों, लेकिन उनकी लिखी चि_ियाँ लहरों पर आज भी तैरती हैं। मछलियाँ उन्हें चख-चखके प्रेम की भाषा सीख गयी हैं, अब वे पानी से बाहर नहीं कूदतीं। उस नदी का जल अब प्रेम-जल हो गया है। पनिहारिनें उस प्रेम-जल को अपने मिट्टी के घड़ों में भर-भर ले जाती हैं और वे समझ नहीं पातीं कि आजकल उनके सपने रंगीन क्यों हुए जाते हैं। उस उदास नदी के टूटे घाट, छूटे घाट और लहरें आपस में बतियाते हैं। इस शोर से नदी किनारे बने मरघट में धूनी रमाये जोगी के जोग में विघ्न पड़ता है। कोई नहीं जानता और न जान सकेगा इन लहरों पर लिखे किस्से-कहानियों के रहस्य। कोई कभी नहीं जान सकेगा कि लहरों पर लिखे नाम कभी मिटते नहीं कि लहरों पर लिखे पत्र कभी गलते नहीं कि लहरों के बीच बनाये चित्र कभी धुलते नहीं।
|
अबू धाबी, 15 मईः उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू रविवार को शेख खलीफा बिन जायद अल नाह्यान का सम्मान करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने मुश्रीफ पैलेस पहुंचकर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। यूएई के राष्ट्रपति एवं अबू धाबी के शासक शेख खलीफा बिन जायद अल नाह्यान का शुक्रवार को निधन हो गया था। अबू धाबी में शेख खलीफा को सम्मान देने कई विश्वस्तरीय नेता पहुंचे हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत-यूएई संबंधों को गहरा करने और भारतीय समुदाय की देखभाल में दिवंगत नेता के अनुकरणीय योगदान को याद किया। इससे पहले विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट करते हुए बताया था कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, यूएई के दिवंगत राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान को श्रद्धांजलि देने आबू धाबी पहुंचे हैं। "
इसके अलावा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने में विश्वास व्यक्त किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के निधन पर शोक व्यक्त किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की संवेदना व्यक्त करने के लिए रविवार को नई दिल्ली में यूएई दूतावास का दौरा किया।
शेख खलीफा के निधन पर भारत ने शनिवार को राष्ट्रीय शोक का दिन मनाया। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि शेख खलीफा के नेतृत्व में, भारत-यूएई संबंध दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए बहुत समृद्ध हुए। उन्होंने यूएई में बड़े भारतीय समुदाय की असाधारण देखभाल की है। इस बयान में आगे कहा गया कि दोनों देश नए और विविध क्षेत्रों में ऐतिहासिक और व्यापक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।
इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सुप्रीम कांउसिल ने नए राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए लिए बुलाया था। फेडरल सुप्रीम काउंसिल के सदस्यों द्वारा शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को नया राष्ट्रपित चुना गया। बतादें कि साल 2017 में भारत ने गणतंत्र दिवस की परेड में मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान को मुख्य अतिथि बनाया था। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है।
|
अबू धाबी, पंद्रह मईः उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू रविवार को शेख खलीफा बिन जायद अल नाह्यान का सम्मान करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने मुश्रीफ पैलेस पहुंचकर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। यूएई के राष्ट्रपति एवं अबू धाबी के शासक शेख खलीफा बिन जायद अल नाह्यान का शुक्रवार को निधन हो गया था। अबू धाबी में शेख खलीफा को सम्मान देने कई विश्वस्तरीय नेता पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत-यूएई संबंधों को गहरा करने और भारतीय समुदाय की देखभाल में दिवंगत नेता के अनुकरणीय योगदान को याद किया। इससे पहले विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट करते हुए बताया था कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, यूएई के दिवंगत राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान को श्रद्धांजलि देने आबू धाबी पहुंचे हैं। " इसके अलावा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने में विश्वास व्यक्त किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के निधन पर शोक व्यक्त किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की संवेदना व्यक्त करने के लिए रविवार को नई दिल्ली में यूएई दूतावास का दौरा किया। शेख खलीफा के निधन पर भारत ने शनिवार को राष्ट्रीय शोक का दिन मनाया। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि शेख खलीफा के नेतृत्व में, भारत-यूएई संबंध दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए बहुत समृद्ध हुए। उन्होंने यूएई में बड़े भारतीय समुदाय की असाधारण देखभाल की है। इस बयान में आगे कहा गया कि दोनों देश नए और विविध क्षेत्रों में ऐतिहासिक और व्यापक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सुप्रीम कांउसिल ने नए राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए लिए बुलाया था। फेडरल सुप्रीम काउंसिल के सदस्यों द्वारा शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को नया राष्ट्रपित चुना गया। बतादें कि साल दो हज़ार सत्रह में भारत ने गणतंत्र दिवस की परेड में मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान को मुख्य अतिथि बनाया था। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है।
|
दिल्ली के महरौली इलाके में श्रद्धा वालकर हत्याकांड के बाद अब राजस्थान में भी ऐसी एक खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है। यह घटना राजस्थान के नागौर में घटी है। जहां एक शख्स ने शादी का दबाव बनाने पर अपनी प्रेमिका की निर्ममता से हत्या करने के बाद लाश के कई टुकड़े कर उन्हें कुएं में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसने अपना अपराध भी स्वीकार किया है।
खबरों के अनुसार, दिल्ली के महरौली में श्रद्धा वालकर हत्याकांड के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक प्रेमी ने शादी का दबाव बनाने पर अपनी प्रेमिका की निर्ममता से हत्या कर दी और फिर उसके शव के कई टुकड़े कर नागौर में कई जगह पर फेंक दिया।
प्रेमिका विवाहिता थी और वह अपने प्रेमी को शादी के लिए दबाव बना रही थी। प्रेमिका नागौर जिले के श्री बालाजी थाना क्षेत्र के बालासर गांव की रहने वाली थी। महिला पिछले कई दिनों से गायब थी। इसको लेकर परिजनों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।
|
दिल्ली के महरौली इलाके में श्रद्धा वालकर हत्याकांड के बाद अब राजस्थान में भी ऐसी एक खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है। यह घटना राजस्थान के नागौर में घटी है। जहां एक शख्स ने शादी का दबाव बनाने पर अपनी प्रेमिका की निर्ममता से हत्या करने के बाद लाश के कई टुकड़े कर उन्हें कुएं में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसने अपना अपराध भी स्वीकार किया है। खबरों के अनुसार, दिल्ली के महरौली में श्रद्धा वालकर हत्याकांड के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक प्रेमी ने शादी का दबाव बनाने पर अपनी प्रेमिका की निर्ममता से हत्या कर दी और फिर उसके शव के कई टुकड़े कर नागौर में कई जगह पर फेंक दिया। प्रेमिका विवाहिता थी और वह अपने प्रेमी को शादी के लिए दबाव बना रही थी। प्रेमिका नागौर जिले के श्री बालाजी थाना क्षेत्र के बालासर गांव की रहने वाली थी। महिला पिछले कई दिनों से गायब थी। इसको लेकर परिजनों ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।
|
लैटिन शब्द त्रिज्या बिजली बन गया, हमारी भाषा का शब्द जिसका उपयोग उस स्थान पर उत्पन्न होने वाली रेखा का नाम करने के लिए किया जाता है जहां एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है और जो उस दिशा में सार्थक रूप से फैलती है जिसमें यह प्रचार करती है।* ज्यामितीय प्रकाशिकी : भौतिकी के क्षेत्र में, ज्यामितीय प्रकाशिकी एक सोलहवीं शताब्दी के डच गणितज्ञ और खगोलविद, स्नेलियस के अपवर्तन और प्रतिबिंब के नियमों पर आधारित है, जो ऐसे सूत्र प्राप्त करने के लिए है, जो डायोप्टर, लेंस और दर्पण। यह शाखा प्रकाश की किरण की अवधारणा का लाभ उठाती है और इसका लक्ष्य सबसे आम ऑप्टिकल उपकरणों के शासी कानून प्रदान करना है;
* गोधूलि प्रकाश का सिद्धांत : इस विचार पर आधारित है कि प्रकाश शवों से बना है, भौतिक कण जो शरीर का उत्सर्जन करते हैं जिसमें प्रकाश उच्च गति से परिलक्षित होता है। इस सिद्धांत के आधार पर यह पुष्टि करना संभव है कि प्रकाश परावर्तित, अपवर्तित होता है और उदाहरण के लिए यह एक आयताकार गति प्रदान करता है।
बुरे क्षणों के बाद से, जीवन के कठिन चरणों को यात्रा माना जाता है कि हम अंधेरे में यात्रा करते हैं, बिना यह जाने कि कहां जाना है, यह तर्कसंगत है कि इस तरह की स्थिति में किसी भी सलाह या मदद प्रकाश की किरण के बराबर है, क्योंकि यह हमें स्पष्टता देता है और हमें एक बार फिर दृढ़ संकल्प के साथ चलने की अनुमति देता है। यद्यपि यह उम्मीद की जाती है कि यह हमारे प्रियजन हैं जो हमें यह अवसर देते हैं, हम अक्सर इसे अजनबियों में पाते हैं या उन लोगों में जो हमने सोचा था कि हमारे लिए परवाह नहीं है।
|
लैटिन शब्द त्रिज्या बिजली बन गया, हमारी भाषा का शब्द जिसका उपयोग उस स्थान पर उत्पन्न होने वाली रेखा का नाम करने के लिए किया जाता है जहां एक प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है और जो उस दिशा में सार्थक रूप से फैलती है जिसमें यह प्रचार करती है।* ज्यामितीय प्रकाशिकी : भौतिकी के क्षेत्र में, ज्यामितीय प्रकाशिकी एक सोलहवीं शताब्दी के डच गणितज्ञ और खगोलविद, स्नेलियस के अपवर्तन और प्रतिबिंब के नियमों पर आधारित है, जो ऐसे सूत्र प्राप्त करने के लिए है, जो डायोप्टर, लेंस और दर्पण। यह शाखा प्रकाश की किरण की अवधारणा का लाभ उठाती है और इसका लक्ष्य सबसे आम ऑप्टिकल उपकरणों के शासी कानून प्रदान करना है; * गोधूलि प्रकाश का सिद्धांत : इस विचार पर आधारित है कि प्रकाश शवों से बना है, भौतिक कण जो शरीर का उत्सर्जन करते हैं जिसमें प्रकाश उच्च गति से परिलक्षित होता है। इस सिद्धांत के आधार पर यह पुष्टि करना संभव है कि प्रकाश परावर्तित, अपवर्तित होता है और उदाहरण के लिए यह एक आयताकार गति प्रदान करता है। बुरे क्षणों के बाद से, जीवन के कठिन चरणों को यात्रा माना जाता है कि हम अंधेरे में यात्रा करते हैं, बिना यह जाने कि कहां जाना है, यह तर्कसंगत है कि इस तरह की स्थिति में किसी भी सलाह या मदद प्रकाश की किरण के बराबर है, क्योंकि यह हमें स्पष्टता देता है और हमें एक बार फिर दृढ़ संकल्प के साथ चलने की अनुमति देता है। यद्यपि यह उम्मीद की जाती है कि यह हमारे प्रियजन हैं जो हमें यह अवसर देते हैं, हम अक्सर इसे अजनबियों में पाते हैं या उन लोगों में जो हमने सोचा था कि हमारे लिए परवाह नहीं है।
|
मीठा है बहुत,
कोई भी,कितना भी.
पूर्ण सामयिक ही बन बैठा है.
न जाने क्यों..?
सच! में..
आज बहुत बदसूरत है.
जितेन्द्र 'गीत'
(मौलिक व् अप्रकाशित)
"सच" हमसे मानसिक शुद्धता माँगता है, और इसके बदले में कितना मनोबल बढ़ाता है।
"सच" के विषय पर आपकी रचना अच्छी लगी।हार्दिक बधाई, आदरणीय जितेन्द्र जी।
आदरणीय शिज्जू जी, आपकी उपस्थिति से रचना धन्य हुई. आपका ह्रदय से आभारी हूँ.
आदरणीय विनोद जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ.
|
मीठा है बहुत, कोई भी,कितना भी. पूर्ण सामयिक ही बन बैठा है. न जाने क्यों..? सच! में.. आज बहुत बदसूरत है. जितेन्द्र 'गीत' "सच" हमसे मानसिक शुद्धता माँगता है, और इसके बदले में कितना मनोबल बढ़ाता है। "सच" के विषय पर आपकी रचना अच्छी लगी।हार्दिक बधाई, आदरणीय जितेन्द्र जी। आदरणीय शिज्जू जी, आपकी उपस्थिति से रचना धन्य हुई. आपका ह्रदय से आभारी हूँ. आदरणीय विनोद जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ.
|
PATNA : सूबे की सरकार ने गर्मी के साथ ही सूबे में अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि आग लगने से किसानों को हुई फसल क्षति का आकलन करे जिससे कि उसके आधार पर किसानों को मुआवजा दी जा सके। इसके साथ ही अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए त्वरित गति से लोगों की मदद के उद्देश्य से आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस केंद्र में लगाए गए फोन पर कोई भी अगलगी की सूचना देकर मदद प्राप्त कर सकता है। यह जानकारी सोमवार को आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी।
मंत्री ने बताया कि गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से अग्निकांड की सूचना प्राप्त हो रही है। जिस वजह से बड़े पैमाने पर घरों, विशेषकर झोपडि़यों, फसल आदि की जलने की खबर आ रही है। जिससे बड़ा नुकसान हो रहा है। मंत्री ने बताया कि अब तक ख्फ् जिलों से अग्निकांड से क्क् व्यक्तियों व फ्फ् पशुओं के मारे जाने की सूचना प्राप्त हुई है. फ्7ख्ख् घरों के जलने की जानकारी भी मिली है।
मंत्री ने बताया कि अग्निकांड में प्रभावित हुए पीडि़तों को तत्काल राहत देने के लिए नकद के रूप में तीन हजार, मुफ्त अनाज के लिए तीन हजार, कपड़े वगैरह के लिए क्800 रुपये और बर्तन आदि के लिए दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। फसल की कितनी क्षति हुई है इसका आकलन करने के लिए कृषि विभाग से कहा गया है। वहां से फसल क्षति की विस्तृत जानकारी मिलने के बाद किसानों को मुआवजे की रकम मुहैया कराई जाएगी।
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी और महानिदेशक पीएन राय ने बताया कि अग्निकांड पर त्वरित गति से रिस्पांस करने के लिए राज्य स्तर पर ऑपरेशन केंद्र बनाया गया है। इसका नंबर 0म्क्ख्-ख्ख्क्7फ्0क्, फ्0ख्, फ्0फ्, फ्0ब्, फ्0भ्, फ्0म् और 0म्क्ख्-ख्ख्क्भ्7फ्क्, ख्ख्क्भ्7फ्9 व ख्ख्क्भ्7फ्भ् है। फैक्स नंबर ख्ख्क्भ्7ख्ब् है। मंत्री के साथ ही मौके पर मौजूद दोनों अधिकारियों ने राज्य की जनता से अपील की है कि वे जलती बीड़ी सिगरेट इधर-उधर न फेकें। दोपहर में थ्रेसर न चलाएं। भोजन बनाने के बाद पानी डालकर आग को जरूर बुझा दें।
|
PATNA : सूबे की सरकार ने गर्मी के साथ ही सूबे में अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि आग लगने से किसानों को हुई फसल क्षति का आकलन करे जिससे कि उसके आधार पर किसानों को मुआवजा दी जा सके। इसके साथ ही अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए त्वरित गति से लोगों की मदद के उद्देश्य से आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस केंद्र में लगाए गए फोन पर कोई भी अगलगी की सूचना देकर मदद प्राप्त कर सकता है। यह जानकारी सोमवार को आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी। मंत्री ने बताया कि गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से अग्निकांड की सूचना प्राप्त हो रही है। जिस वजह से बड़े पैमाने पर घरों, विशेषकर झोपडि़यों, फसल आदि की जलने की खबर आ रही है। जिससे बड़ा नुकसान हो रहा है। मंत्री ने बताया कि अब तक ख्फ् जिलों से अग्निकांड से क्क् व्यक्तियों व फ्फ् पशुओं के मारे जाने की सूचना प्राप्त हुई है. फ्सातख्ख् घरों के जलने की जानकारी भी मिली है। मंत्री ने बताया कि अग्निकांड में प्रभावित हुए पीडि़तों को तत्काल राहत देने के लिए नकद के रूप में तीन हजार, मुफ्त अनाज के लिए तीन हजार, कपड़े वगैरह के लिए क्आठ सौ रुपयापये और बर्तन आदि के लिए दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। फसल की कितनी क्षति हुई है इसका आकलन करने के लिए कृषि विभाग से कहा गया है। वहां से फसल क्षति की विस्तृत जानकारी मिलने के बाद किसानों को मुआवजे की रकम मुहैया कराई जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी और महानिदेशक पीएन राय ने बताया कि अग्निकांड पर त्वरित गति से रिस्पांस करने के लिए राज्य स्तर पर ऑपरेशन केंद्र बनाया गया है। इसका नंबर शून्यम्क्ख्-ख्ख्क्सातफ्शून्यक्, फ्शून्यख्, फ्शून्यफ्, फ्शून्यब्, फ्शून्यभ्, फ्शून्यम् और शून्यम्क्ख्-ख्ख्क्भ्सातफ्क्, ख्ख्क्भ्सातफ्नौ व ख्ख्क्भ्सातफ्भ् है। फैक्स नंबर ख्ख्क्भ्सातख्ब् है। मंत्री के साथ ही मौके पर मौजूद दोनों अधिकारियों ने राज्य की जनता से अपील की है कि वे जलती बीड़ी सिगरेट इधर-उधर न फेकें। दोपहर में थ्रेसर न चलाएं। भोजन बनाने के बाद पानी डालकर आग को जरूर बुझा दें।
|
हाउसिंग काॅलाेनी के राजशीला अपार्टमेंट में सोमवार को दिनदहाड़े लूटपाट की घटना ने शहरी सुरक्षा की पोल खोल दी है। हीरापुर के अभया अपार्टमेंट में 5 सितंबर 2021 की रात बंधक बनाकर डकैती की घटना की तर्ज पर 9 माह फिर इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया।
राजशीला अपार्टमेंट में दाे के संख्या में अपराधी आराम से स्व. एनके सिंह के फ्लैट में पहुंचे। दरवाजा खुलवाया और अकेली बुजुर्ग महिला नीलम सिंह काे बंधक बनाकर घटना काे अंजाम दिया। दिनदहाड़े हुए इस वारदात से नीलम सिंह काफी दहशत में हैं।
"दाे की संख्या में अपराधियों ने दरवाजा खुलते ही बंधक बना लिया। मुंह में कपड़ा बांध दिया। दाेनों अपराधियों ने चेहरे पर गमछा लपेट रखा था। एक अपराधी गर्दन पर चाकू रख कमरे में ले गया। वे हाथ बांधना चाहते थे लेकिन मेरे मना करने पर मान गए।
चेताया-न ताे सिर ऊपर करना है और न ही शाेर मचाना है। वह उसी अवस्था में पड़ी रही। एक अपराधी एक घंटे तक चाकू लेकर बैठा रहा। दूसरा कमरों में घूम-घूम कर अलमीरा, पलंग आदि खाेल कर महंगे सामान खाेज रहा था। एक घंटा तक वे फ्लैट में रहे।
राजशीला अपार्टमेंट में सुरक्षा का इंतजाम नहीं दिखा। सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हुए हैं। गार्ड दिन में नहीं रहता। घटना के समय भी गार्ड नहीं था। उससे बड़ी बात यह है कि साेमवार दाेपहर 1:30 बजे ठेकेदार रामनरेश सिंह के आवास पर फायरिंग हुई थी।
घटना से कुछ दूरी पर पुलिस का पूरा अमला माैजूद थी। इसके बावजूद इसके अपराधियाें ने दुःसाहस का परिचय देते हुए घटना काे अंजाम देकर भाग निकले।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
हाउसिंग काॅलाेनी के राजशीला अपार्टमेंट में सोमवार को दिनदहाड़े लूटपाट की घटना ने शहरी सुरक्षा की पोल खोल दी है। हीरापुर के अभया अपार्टमेंट में पाँच सितंबर दो हज़ार इक्कीस की रात बंधक बनाकर डकैती की घटना की तर्ज पर नौ माह फिर इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया। राजशीला अपार्टमेंट में दाे के संख्या में अपराधी आराम से स्व. एनके सिंह के फ्लैट में पहुंचे। दरवाजा खुलवाया और अकेली बुजुर्ग महिला नीलम सिंह काे बंधक बनाकर घटना काे अंजाम दिया। दिनदहाड़े हुए इस वारदात से नीलम सिंह काफी दहशत में हैं। "दाे की संख्या में अपराधियों ने दरवाजा खुलते ही बंधक बना लिया। मुंह में कपड़ा बांध दिया। दाेनों अपराधियों ने चेहरे पर गमछा लपेट रखा था। एक अपराधी गर्दन पर चाकू रख कमरे में ले गया। वे हाथ बांधना चाहते थे लेकिन मेरे मना करने पर मान गए। चेताया-न ताे सिर ऊपर करना है और न ही शाेर मचाना है। वह उसी अवस्था में पड़ी रही। एक अपराधी एक घंटे तक चाकू लेकर बैठा रहा। दूसरा कमरों में घूम-घूम कर अलमीरा, पलंग आदि खाेल कर महंगे सामान खाेज रहा था। एक घंटा तक वे फ्लैट में रहे। राजशीला अपार्टमेंट में सुरक्षा का इंतजाम नहीं दिखा। सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हुए हैं। गार्ड दिन में नहीं रहता। घटना के समय भी गार्ड नहीं था। उससे बड़ी बात यह है कि साेमवार दाेपहर एक:तीस बजे ठेकेदार रामनरेश सिंह के आवास पर फायरिंग हुई थी। घटना से कुछ दूरी पर पुलिस का पूरा अमला माैजूद थी। इसके बावजूद इसके अपराधियाें ने दुःसाहस का परिचय देते हुए घटना काे अंजाम देकर भाग निकले। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
BAREILLY: पति को धोखा देकर महिला ने युवक से दोस्ती की और फिर उससे मंदिर में शादी कर साथ जीने-मरने की कसमें खाई। जब उसके प्यार में पति व घरवाले बाधा बने तो दोनों ने साथ जान देने की ठान ली। प्रेमी ने जहर खरीदा और फिर कोल्डड्रिंक की बोतल में मिलाकर रख लिया। दोनों ने जहर पीने की कोशिश की लेकिन पहले मैं के चक्कर में प्रेमिका ने जहर पी लिया, लेकिन प्रेमी ने नहीं पिया। जिसके बाद प्रेमिका को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। महिला के पति का आरोप है कि प्रेमी ने उसकी पत्नी के अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और पत्नी को जहर देकर मारने की कोशिश की। पुलिस ने प्रेमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।
नकटिया निवासी युवती की शादी 3 वर्ष भिंडौलिया निवासी युवक से हुई थी। युवक की बिजली मैकेनिक की शॉप है। 3 वर्ष में दोनों के बच्चा नहीं हुआ। युवती नकटिया में किसी से इसका इलाज कराने लगी। इस दौरान डॉक्टर के कहने पर पति-पत्नी अलग रहने लगे। पति ने युवती को मायके में रहने के लिए कह दिया। युवती एक बैंक में लोन दिलाने का काम करती थी। इसी को लेकर उसकी मोहनपुर निवासी आकाश से मुलाकात हुई। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया। दोनों में 29 मार्च को अलखनाथ मंदिर में जाकर शादी कर ली और पति-पत्नी की तरह रिश्ता निभाने लगे। जब महिला के पति को इस बारे में पता चला तो उसने शिकायत की। आरोप है कि इस पर युवक ने महिला के पति से झगड़ा किया। इसके अलावा उसने महिला को ब्लैकमेल किया कि वह उसके पति की हत्या कर देगा। वह उसकी अश्लील वीडियो भी वायरल कर देगा और उसने महिला को जहर दे दिया।
|
BAREILLY: पति को धोखा देकर महिला ने युवक से दोस्ती की और फिर उससे मंदिर में शादी कर साथ जीने-मरने की कसमें खाई। जब उसके प्यार में पति व घरवाले बाधा बने तो दोनों ने साथ जान देने की ठान ली। प्रेमी ने जहर खरीदा और फिर कोल्डड्रिंक की बोतल में मिलाकर रख लिया। दोनों ने जहर पीने की कोशिश की लेकिन पहले मैं के चक्कर में प्रेमिका ने जहर पी लिया, लेकिन प्रेमी ने नहीं पिया। जिसके बाद प्रेमिका को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। महिला के पति का आरोप है कि प्रेमी ने उसकी पत्नी के अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और पत्नी को जहर देकर मारने की कोशिश की। पुलिस ने प्रेमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। नकटिया निवासी युवती की शादी तीन वर्ष भिंडौलिया निवासी युवक से हुई थी। युवक की बिजली मैकेनिक की शॉप है। तीन वर्ष में दोनों के बच्चा नहीं हुआ। युवती नकटिया में किसी से इसका इलाज कराने लगी। इस दौरान डॉक्टर के कहने पर पति-पत्नी अलग रहने लगे। पति ने युवती को मायके में रहने के लिए कह दिया। युवती एक बैंक में लोन दिलाने का काम करती थी। इसी को लेकर उसकी मोहनपुर निवासी आकाश से मुलाकात हुई। उसके बाद दोनों में प्यार हो गया। दोनों में उनतीस मार्च को अलखनाथ मंदिर में जाकर शादी कर ली और पति-पत्नी की तरह रिश्ता निभाने लगे। जब महिला के पति को इस बारे में पता चला तो उसने शिकायत की। आरोप है कि इस पर युवक ने महिला के पति से झगड़ा किया। इसके अलावा उसने महिला को ब्लैकमेल किया कि वह उसके पति की हत्या कर देगा। वह उसकी अश्लील वीडियो भी वायरल कर देगा और उसने महिला को जहर दे दिया।
|
पाली रोड में बक्साही और चेपा के बीच एक्सीडेंट में बाइक सवार दो भाई में एक की मौत हो गई। सीपत के ग्राम जेवरा निवासी अभिषेक पटेल शुक्रवार को बाइक सीजी-11-बीएफ-9864 में अपने भैया फुलेश पटेल के साथ पाली में आयोजित सीएम के कार्यक्रम को देखने के लिए रवाना हुए थे। वे शाम 5 बजे बक्साही और चेपा के बीच पहुंचे थे। बाइक फुलेश चला रहा था, पीछे अभिषेक बैठा था। इस दौरान तेजरफ्तार वाहन ने पीछे से ठोकर मार दिया, जिससे अभिषेक दूर फेंका गया। वहीं फुलेश बाइक समेत गिर गया। उसके ऊपर से वाहन चढ़कर चला गया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। घटना में अभिषेक घायल हो गया। पुलिस ने दुर्घटनाकारित वाहन चालक पर केस दर्ज कर लिया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
पाली रोड में बक्साही और चेपा के बीच एक्सीडेंट में बाइक सवार दो भाई में एक की मौत हो गई। सीपत के ग्राम जेवरा निवासी अभिषेक पटेल शुक्रवार को बाइक सीजी-ग्यारह-बीएफ-नौ हज़ार आठ सौ चौंसठ में अपने भैया फुलेश पटेल के साथ पाली में आयोजित सीएम के कार्यक्रम को देखने के लिए रवाना हुए थे। वे शाम पाँच बजे बक्साही और चेपा के बीच पहुंचे थे। बाइक फुलेश चला रहा था, पीछे अभिषेक बैठा था। इस दौरान तेजरफ्तार वाहन ने पीछे से ठोकर मार दिया, जिससे अभिषेक दूर फेंका गया। वहीं फुलेश बाइक समेत गिर गया। उसके ऊपर से वाहन चढ़कर चला गया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। घटना में अभिषेक घायल हो गया। पुलिस ने दुर्घटनाकारित वाहन चालक पर केस दर्ज कर लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
एक नेता जी थे बड़े रौबदार जहां जाते अपनी खूबी की डींग हांकते।एक दिन किसी चेले ने आकर कहा नेता जी हमारे शहर में एक बड़े सिद्ध साधु आये है ,उनसे सब अपनी समस्याएं कहते है और वो साधु उसका समाधान करते है ।चुनाव सर पर है क्यो न आप भी वहां जाकर अपना भविष्य पूछे।
नेता जी को सलाह भा गई।चल दिये अपने लाव लश्कर के साथ साधु के आश्रम।
वहां पहुचे नेता जी तो देखे साधु महाराज तो बिजी है लोगों की समस्या सुनने में ।थोड़ी देर नेताजी ने प्रतीक्षा की ,जब रहा नही गया तो पूछ बैठे साधु से "मेरा नंबर कब आएगा ,मुझसे पहले बात कर ले।" साधु ने बड़ी विन्रमता से कहा "इन सब लोगों के बाद आपका ही नंबर है कृपया प्रतीक्षा करें।"
बहुत देर तक जब साधु लोगों मे ही उलझे रहे तब नेताजी को बड़ा गुस्सा आया ।बस आव न देखा ताव बरस पड़े साधु पर "अरे साधु तू तो साधु ही नही ढोंगी है ,जानबूझकर अपनी व्यस्तता दिखा रहा है ।तुम जानते नही मैं कौन हूँ मैं फलां नेता हूँ मुझे भी बहुत काम है ।लेकिन देख रहा हूँ तुम मुझे महत्व नही दे रहे हो ।तुम्हे पता है मुझसे मिलने लोग अपॉइंटमेंट लेकर आते है फिर भी मुझसे मिल नही पाते ।तुम किस खेत की मूली हो ।मेरे आगे सब हाथ जोड़े रहते है तुम तो मामूली से हो।"
अब तो नेताजी जोर जोर से चिल्ला रहे थे उनको क्रोध आ चुका था।साधु ने देखा लोग परेशान, हैरान हो रहे है तो उन्होंने नेता जी से कहा "आप कृपया शांति रखे ,यहां का वातावरण खराब ना करे ।आपकी बात भी मैं सुनूंगा।"
लेकिन नेता जी कहाँ चुप रहने वाले थे ,साधु को नरम देखकर कहने लगे अबे ढोंगी चल मुझसे माफी मांग तभी मैं यहां से जाऊंगा।
साधु ने बड़ी ही विन्रमता से माफी मांग ली।अब तो नेता जी के चेहरे पर खुशी छलकने लगी ।अपने चेलों से कहने लगे "देखा मैं कहता था न ये साधु ढोंगी है ,इसने आखिर माफी मांग ली।इसे अपनी गलती का भान हुआ । इसने मुझे बहुत प्रतीक्षा करवाई ।"
नेता जी खुशी खुशी घर पहुंचे ।पिता ने देखा नेता बेटा आज बहुत खुश है ,पूछ बैठे बेटा आज तो बहुत खुश लग रहे हो क्या बात है।
नेता जी खुशी खुशी सब बात कह बैठे ।सुनकर पिता ने हँसकर कहा बेटा वो ढोंगी साधु नही था ज्ञानी था तभी तुझसे माफी मांगी।नेता जी को बड़ा आश्चर्य हुआ पूछने लगे" कैसे?"
पिता ने कहा देखो तुम्हारे चिल्लाने से वहां का माहौल खराब हो रहा था इसलिए साधु ने माफी मांग ली।साधु ने अपना स्वभाव दिखाया ,तुमने अपना।"
इसलिए अपने आपको, अपने स्वभाव को बदलो ,बड़ा वही है जो विनम्र है । अधजल गगरी छलकत जाए वाली कहावत तुमने चरितार्थ कर दी। चूंकि नया साल आने वाला है तुम प्रण करो आज से रौब दिखाना छोड़ दूंगा और अपने क्रोध पर नियंत्रण रखूंगा ।मैं आशा करता हूँ तुम अपने स्वभाव को बदल लोगे.
|
एक नेता जी थे बड़े रौबदार जहां जाते अपनी खूबी की डींग हांकते।एक दिन किसी चेले ने आकर कहा नेता जी हमारे शहर में एक बड़े सिद्ध साधु आये है ,उनसे सब अपनी समस्याएं कहते है और वो साधु उसका समाधान करते है ।चुनाव सर पर है क्यो न आप भी वहां जाकर अपना भविष्य पूछे। नेता जी को सलाह भा गई।चल दिये अपने लाव लश्कर के साथ साधु के आश्रम। वहां पहुचे नेता जी तो देखे साधु महाराज तो बिजी है लोगों की समस्या सुनने में ।थोड़ी देर नेताजी ने प्रतीक्षा की ,जब रहा नही गया तो पूछ बैठे साधु से "मेरा नंबर कब आएगा ,मुझसे पहले बात कर ले।" साधु ने बड़ी विन्रमता से कहा "इन सब लोगों के बाद आपका ही नंबर है कृपया प्रतीक्षा करें।" बहुत देर तक जब साधु लोगों मे ही उलझे रहे तब नेताजी को बड़ा गुस्सा आया ।बस आव न देखा ताव बरस पड़े साधु पर "अरे साधु तू तो साधु ही नही ढोंगी है ,जानबूझकर अपनी व्यस्तता दिखा रहा है ।तुम जानते नही मैं कौन हूँ मैं फलां नेता हूँ मुझे भी बहुत काम है ।लेकिन देख रहा हूँ तुम मुझे महत्व नही दे रहे हो ।तुम्हे पता है मुझसे मिलने लोग अपॉइंटमेंट लेकर आते है फिर भी मुझसे मिल नही पाते ।तुम किस खेत की मूली हो ।मेरे आगे सब हाथ जोड़े रहते है तुम तो मामूली से हो।" अब तो नेताजी जोर जोर से चिल्ला रहे थे उनको क्रोध आ चुका था।साधु ने देखा लोग परेशान, हैरान हो रहे है तो उन्होंने नेता जी से कहा "आप कृपया शांति रखे ,यहां का वातावरण खराब ना करे ।आपकी बात भी मैं सुनूंगा।" लेकिन नेता जी कहाँ चुप रहने वाले थे ,साधु को नरम देखकर कहने लगे अबे ढोंगी चल मुझसे माफी मांग तभी मैं यहां से जाऊंगा। साधु ने बड़ी ही विन्रमता से माफी मांग ली।अब तो नेता जी के चेहरे पर खुशी छलकने लगी ।अपने चेलों से कहने लगे "देखा मैं कहता था न ये साधु ढोंगी है ,इसने आखिर माफी मांग ली।इसे अपनी गलती का भान हुआ । इसने मुझे बहुत प्रतीक्षा करवाई ।" नेता जी खुशी खुशी घर पहुंचे ।पिता ने देखा नेता बेटा आज बहुत खुश है ,पूछ बैठे बेटा आज तो बहुत खुश लग रहे हो क्या बात है। नेता जी खुशी खुशी सब बात कह बैठे ।सुनकर पिता ने हँसकर कहा बेटा वो ढोंगी साधु नही था ज्ञानी था तभी तुझसे माफी मांगी।नेता जी को बड़ा आश्चर्य हुआ पूछने लगे" कैसे?" पिता ने कहा देखो तुम्हारे चिल्लाने से वहां का माहौल खराब हो रहा था इसलिए साधु ने माफी मांग ली।साधु ने अपना स्वभाव दिखाया ,तुमने अपना।" इसलिए अपने आपको, अपने स्वभाव को बदलो ,बड़ा वही है जो विनम्र है । अधजल गगरी छलकत जाए वाली कहावत तुमने चरितार्थ कर दी। चूंकि नया साल आने वाला है तुम प्रण करो आज से रौब दिखाना छोड़ दूंगा और अपने क्रोध पर नियंत्रण रखूंगा ।मैं आशा करता हूँ तुम अपने स्वभाव को बदल लोगे.
|
उन्होंने कहा कि भारत कमजोर देशों और अपने पड़ोसियों को निर्यात की अनुमति देना जारी रखेगा।
मंत्री ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय गेहूं बाजार में 'कभी भी' एक पारंपरिक भागीदार नहीं था।
दो साल पहले तक भारत ने गेहूं का निर्यात भी नहीं किया था। गोयल ने कहा कि देश ने मामूली 20 लाख टन के साथ निर्यात शुरू किया था और पिछले साल उसने लगभग 70 लाख टन का निर्यात किया था। विश्व आर्थिक मंच के एक सत्र में उन्होंने यहां यह बात कही।
|
उन्होंने कहा कि भारत कमजोर देशों और अपने पड़ोसियों को निर्यात की अनुमति देना जारी रखेगा। मंत्री ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय गेहूं बाजार में 'कभी भी' एक पारंपरिक भागीदार नहीं था। दो साल पहले तक भारत ने गेहूं का निर्यात भी नहीं किया था। गोयल ने कहा कि देश ने मामूली बीस लाख टन के साथ निर्यात शुरू किया था और पिछले साल उसने लगभग सत्तर लाख टन का निर्यात किया था। विश्व आर्थिक मंच के एक सत्र में उन्होंने यहां यह बात कही।
|
बॉलीवुड की बहुत ही हॉट और सेक्सी अभिनेत्री करीना कपूर खान आजकल शो जज करने में व्यस्त हैं. वैसे वह बॉलीवुड की मोस्ट स्टाइलिश और फैशनेबल एक्ट्रेस में शामिल हैं और लोग उन्हें खूब पसंद करते हैं. ऐसे में करीना कपूर हमेशा ही अपने लुक्स से फैन्स को इंप्रेस करती हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही कुछ किया है. जी हाँ, हाल ही में करीना अपने नए लुक से सुर्ख़ियों में हैं. जी दरअसल इन दिनों करीना रियलिटी शो डांस इंडिया डांस को जज कर रहीं हैं और इस शो के हर एपिसोड में करीना एक नए लुक में नजर आती हैं.
वहीं इस एपिसोड में करीना के हर लुक को फैन्स काफी पसंद कर रहे हैं लेकिन हाल ही में उनका जो लुक नजर आया उसकी कीमत जानने के बाद आपके होश उड़ सकते हैं. जी हाँ, डांस इंडिया डांस 7 के अब नए एपिसोड में करीना कपूर डार्क ब्लू ऑफ शॉल्डर ड्रेस में नजर आईं और करीना की ड्रेस के चारों ओर ग्रीन फैब्रिक से डिजाइनिंग दिखाई दी. इसी के साथ इस ड्रेस का सबसे हाइ लाइटिंग फीचर इसमें लगी हुई ग्रीन लॉन्ग टेल है, जो सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
वहीं करीना ने अपने लुक को स्मोकी आई मेकअप और खुले बालों के साथ कंप्लीट किया. वैसे आप सभी को अब हम बताने जा रहे हैं इसकी कीमत. जी दरअसल आपको इस बात को जानने के बाद हैरानी होगी कि करीना की इस ड्रेस की कीमत 2,310 डॉलर यानी 1,65,238 लाख रुपये है. जी हाँ, अब बात करें फिल्मों की तो करीना के पास फिलहाल कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और जल्द ही करीना अक्षय कुमार संग फिल्म गुड न्यूज में नजर आने वाली हैं.
|
बॉलीवुड की बहुत ही हॉट और सेक्सी अभिनेत्री करीना कपूर खान आजकल शो जज करने में व्यस्त हैं. वैसे वह बॉलीवुड की मोस्ट स्टाइलिश और फैशनेबल एक्ट्रेस में शामिल हैं और लोग उन्हें खूब पसंद करते हैं. ऐसे में करीना कपूर हमेशा ही अपने लुक्स से फैन्स को इंप्रेस करती हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही कुछ किया है. जी हाँ, हाल ही में करीना अपने नए लुक से सुर्ख़ियों में हैं. जी दरअसल इन दिनों करीना रियलिटी शो डांस इंडिया डांस को जज कर रहीं हैं और इस शो के हर एपिसोड में करीना एक नए लुक में नजर आती हैं. वहीं इस एपिसोड में करीना के हर लुक को फैन्स काफी पसंद कर रहे हैं लेकिन हाल ही में उनका जो लुक नजर आया उसकी कीमत जानने के बाद आपके होश उड़ सकते हैं. जी हाँ, डांस इंडिया डांस सात के अब नए एपिसोड में करीना कपूर डार्क ब्लू ऑफ शॉल्डर ड्रेस में नजर आईं और करीना की ड्रेस के चारों ओर ग्रीन फैब्रिक से डिजाइनिंग दिखाई दी. इसी के साथ इस ड्रेस का सबसे हाइ लाइटिंग फीचर इसमें लगी हुई ग्रीन लॉन्ग टेल है, जो सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. वहीं करीना ने अपने लुक को स्मोकी आई मेकअप और खुले बालों के साथ कंप्लीट किया. वैसे आप सभी को अब हम बताने जा रहे हैं इसकी कीमत. जी दरअसल आपको इस बात को जानने के बाद हैरानी होगी कि करीना की इस ड्रेस की कीमत दो,तीन सौ दस डॉलर यानी एक,पैंसठ,दो सौ अड़तीस लाख रुपये है. जी हाँ, अब बात करें फिल्मों की तो करीना के पास फिलहाल कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और जल्द ही करीना अक्षय कुमार संग फिल्म गुड न्यूज में नजर आने वाली हैं.
|
Meerut: दहेज हत्या के आरोप में ससुरालियों को सलाखों के पीछे भिजवाना अब आसान नहीं रहा है, जितना दहेज लेने वाला दोषी है, उतना ही दोषी दहेज देने वाला भी दोषी है। इसी कानून के तहत एक मायके वाले फंस गए हैं। जज ने मायके वालों को भी अभियुक्त बना लिया है, जिसके बाद से मायके पक्ष के लोग भी काफी दहशत में है। वहीं ससुरालियों ने राहत की सांस ली है।
देहली गेट एरिया के रहने वाले विपिन अग्रवाल ने अपने बेटे विपुल अग्रवाल की शादी ख्00म् में जागृति विहार निवासी शिल्पी से की थी। शादी के बाद से ही विपिन और शिल्पी में क्लेश रहने लगा था। रोजाना की मारपीट से तंग आकर शिल्पी ने ख्ख् जून ख्009 को जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए ससुराल में हंगामा खड़ा कर दिया था। देहली गेट थाने में शिल्पी के पिता सतेंद्र अग्रवाल ने पति सास, ससुर, ननद और उसके पति के खिलाफ देहली गेट थाने में दहेज एक्ट की धारा ब्98 ए, फ्0ब् बी, फ्ख्फ् आईपीसी व धारा फ्-ब् दहेज अधिनियम में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में भाई विशाल अग्रवाल और सतेंद्र अग्रवाल ने कोर्ट में गवाही दी थी। यह मुकदमा एसीजेएम फर्स्ट कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में पति विपुल, ससुर विपिन, सास स्वराज अग्रवाल जेल में गए थे। बाद में जमानत पर बाहर आ गए थे। एसीजेएम प्रथम ने मृतक लड़की के पिता सतेंद्र और भाई विशाल को दहेज देने के आरोप में मुल्जिम बना दिया है। जिसके बाद से मायके पक्ष के लोगों में खलबली मची हुई है।
कचहरी के सीनियर एडवोकेट विजय कुमार ने बताया कि यूपी में पहली बार मुकदमा दहेज देने वालों के खिलाफ दर्ज करने के लिए जज ने आदेश दिए हैं। इस प्रकार के मुकदमे कायम होने से दहेज हत्या के होने वाले फर्जी मुकदमों में कमी आएगी। इस प्रकार के मुकदमे कायम होने से लोग फर्जी मुकदमे लिखवाने से डरेंगे। साथ ही कानून का पालन भी होगा। दहेज देने से भी लोग परहेज करेंगे।
एडवोकेट विजय कुमार ने बताया कि दहेज प्रतिषेध धिनियम सेक्सन तीन के तहत दहेज देने वालों के खिलाफ पांच साल या पांच साल से अधिक सजा दी जा सकती है। अभी कोर्ट में क्8 सितंबर ख्0क्ब् की तारीख लगी हुई है, इसके लिए कोर्ट ने सम्मन भी भेज दिया है। तारीख पर नहीं पहुंचने पर गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिए जाएंगे। साथ ही क्8 सितंबर को पांच साल की सजा भी कानून का मजाक बनाने वालों पर हो सकती है। इसमें कार्रवाई का प्रावधान पांच साल का है।
|
Meerut: दहेज हत्या के आरोप में ससुरालियों को सलाखों के पीछे भिजवाना अब आसान नहीं रहा है, जितना दहेज लेने वाला दोषी है, उतना ही दोषी दहेज देने वाला भी दोषी है। इसी कानून के तहत एक मायके वाले फंस गए हैं। जज ने मायके वालों को भी अभियुक्त बना लिया है, जिसके बाद से मायके पक्ष के लोग भी काफी दहशत में है। वहीं ससुरालियों ने राहत की सांस ली है। देहली गेट एरिया के रहने वाले विपिन अग्रवाल ने अपने बेटे विपुल अग्रवाल की शादी ख्शून्यम् में जागृति विहार निवासी शिल्पी से की थी। शादी के बाद से ही विपिन और शिल्पी में क्लेश रहने लगा था। रोजाना की मारपीट से तंग आकर शिल्पी ने ख्ख् जून ख्नौ को जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए ससुराल में हंगामा खड़ा कर दिया था। देहली गेट थाने में शिल्पी के पिता सतेंद्र अग्रवाल ने पति सास, ससुर, ननद और उसके पति के खिलाफ देहली गेट थाने में दहेज एक्ट की धारा ब्अट्ठानवे ए, फ्शून्यब् बी, फ्ख्फ् आईपीसी व धारा फ्-ब् दहेज अधिनियम में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में भाई विशाल अग्रवाल और सतेंद्र अग्रवाल ने कोर्ट में गवाही दी थी। यह मुकदमा एसीजेएम फर्स्ट कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में पति विपुल, ससुर विपिन, सास स्वराज अग्रवाल जेल में गए थे। बाद में जमानत पर बाहर आ गए थे। एसीजेएम प्रथम ने मृतक लड़की के पिता सतेंद्र और भाई विशाल को दहेज देने के आरोप में मुल्जिम बना दिया है। जिसके बाद से मायके पक्ष के लोगों में खलबली मची हुई है। कचहरी के सीनियर एडवोकेट विजय कुमार ने बताया कि यूपी में पहली बार मुकदमा दहेज देने वालों के खिलाफ दर्ज करने के लिए जज ने आदेश दिए हैं। इस प्रकार के मुकदमे कायम होने से दहेज हत्या के होने वाले फर्जी मुकदमों में कमी आएगी। इस प्रकार के मुकदमे कायम होने से लोग फर्जी मुकदमे लिखवाने से डरेंगे। साथ ही कानून का पालन भी होगा। दहेज देने से भी लोग परहेज करेंगे। एडवोकेट विजय कुमार ने बताया कि दहेज प्रतिषेध धिनियम सेक्सन तीन के तहत दहेज देने वालों के खिलाफ पांच साल या पांच साल से अधिक सजा दी जा सकती है। अभी कोर्ट में क्आठ सितंबर ख्शून्यक्ब् की तारीख लगी हुई है, इसके लिए कोर्ट ने सम्मन भी भेज दिया है। तारीख पर नहीं पहुंचने पर गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिए जाएंगे। साथ ही क्आठ सितंबर को पांच साल की सजा भी कानून का मजाक बनाने वालों पर हो सकती है। इसमें कार्रवाई का प्रावधान पांच साल का है।
|
महाजनेपदों का युग
( यानी डेराजात और सिन्धसागर दोश्राब ) प्रदेश भी जीत लिये । तक्षशिला की तब से हुई। दारयवहु ने अपना वृत्तान्त पत्थर की चट्टानों पर खुदवाया है । वह बड़े अभिमान से अपने को "ऐर्य ऐर्यपुत्र" (पुत्र) कहता है। उसके अधीन २१ प्रान्त थे, जिनमें से प्रत्येक का शासक क्षथूपावन् या क्षथूप ( क्षत्रप ) कहलाता था । सिन्धु प्रान्त से उसे सबसे अधिक होती थी, जो उसके यहाँ सोने के रूप में पहुँचती थी ।
पारसी साम्राज्य के बराबर बड़ा कोई साम्राज्य इससे पहले संसार में स्थापित न हुआ था । भारत के जो इलाके उसके अधीन हुए, वे लगभग ४२५ ई०पू० तक स्वतन्त्र हो गये । बाकी साम्राज्य प्रायः सौ बरस और बना रहा ।
२४. मगध का पहला साम्राज्य (५५० - ३६६ ३० पू० )- जिस हिस्से में आजकल पढ़ने-लिखने की भाषा हिन्दी है, प्रायः उसी को प्राचीन लोग 'मध्यदेश' कहते थे । छठी शताब्दी ई० पू० के उत्तरार्ध में उसमें मगध की तूती बोलने लगी। शत्रु के समय तक मगध, अंग को हज़म कर चुका, कोशल को नीचा दिखा चुका और वृजि-संघ का राज्य छीन चुका था । उसके मुकाबले में अब केवल अवन्ति बाकी थी। अजातशत्रु का पोता राजा अज उदयी था (दान ४८६ - ४६७ ई० पू० ) । मगध के राज्य में मिथिला भी शामिल हो जाने से उसकी पुरानी राजधानी राजगृह एक कोने में पड़ गयी थी । इसलिए उदयी ने गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र नगरी की स्थापना की, जो आगे चल कर संसार भर में प्रसिद्ध हुई । पाँडर (पाटलि ) के पेड़ वहाँ अधिक होने से उसका यह नाम पड़ा । वही आजकल का पटना है। उदयी ने अवन्तिका भी पराभव किया और उसे अपने अधीन कर लिया । मध्यदेश के सब जनपद इससे पहले या पीछे मगध की छत्रछाया में आ गये । उदयी के बेटे नन्दिवर्धन ( अन्दाजन ४५८ - ४१८ ई० पू० ) और पोते महानन्द (दाजन ४०६-३७४ ई० पू० ) के समय यह साम्राज्य और भी बढ़ गया । नन्दिवर्धन ने कलिंग ( उड़ीसा ) को भी जीत लिया था ।
१५. पाण्ड्य, चोल, केरल और सिंहल राष्ट्रों की स्थापना - इधर एक और बड़ी प्रक्रिया इस समय जारी थी। दक्खिन में मके और आगे,
|
महाजनेपदों का युग प्रदेश भी जीत लिये । तक्षशिला की तब से हुई। दारयवहु ने अपना वृत्तान्त पत्थर की चट्टानों पर खुदवाया है । वह बड़े अभिमान से अपने को "ऐर्य ऐर्यपुत्र" कहता है। उसके अधीन इक्कीस प्रान्त थे, जिनमें से प्रत्येक का शासक क्षथूपावन् या क्षथूप कहलाता था । सिन्धु प्रान्त से उसे सबसे अधिक होती थी, जो उसके यहाँ सोने के रूप में पहुँचती थी । पारसी साम्राज्य के बराबर बड़ा कोई साम्राज्य इससे पहले संसार में स्थापित न हुआ था । भारत के जो इलाके उसके अधीन हुए, वे लगभग चार सौ पच्चीस ईशून्यपूशून्य तक स्वतन्त्र हो गये । बाकी साम्राज्य प्रायः सौ बरस और बना रहा । चौबीस. मगध का पहला साम्राज्य - जिस हिस्से में आजकल पढ़ने-लिखने की भाषा हिन्दी है, प्रायः उसी को प्राचीन लोग 'मध्यदेश' कहते थे । छठी शताब्दी ईशून्य पूशून्य के उत्तरार्ध में उसमें मगध की तूती बोलने लगी। शत्रु के समय तक मगध, अंग को हज़म कर चुका, कोशल को नीचा दिखा चुका और वृजि-संघ का राज्य छीन चुका था । उसके मुकाबले में अब केवल अवन्ति बाकी थी। अजातशत्रु का पोता राजा अज उदयी था । मगध के राज्य में मिथिला भी शामिल हो जाने से उसकी पुरानी राजधानी राजगृह एक कोने में पड़ गयी थी । इसलिए उदयी ने गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र नगरी की स्थापना की, जो आगे चल कर संसार भर में प्रसिद्ध हुई । पाँडर के पेड़ वहाँ अधिक होने से उसका यह नाम पड़ा । वही आजकल का पटना है। उदयी ने अवन्तिका भी पराभव किया और उसे अपने अधीन कर लिया । मध्यदेश के सब जनपद इससे पहले या पीछे मगध की छत्रछाया में आ गये । उदयी के बेटे नन्दिवर्धन और पोते महानन्द के समय यह साम्राज्य और भी बढ़ गया । नन्दिवर्धन ने कलिंग को भी जीत लिया था । पंद्रह. पाण्ड्य, चोल, केरल और सिंहल राष्ट्रों की स्थापना - इधर एक और बड़ी प्रक्रिया इस समय जारी थी। दक्खिन में मके और आगे,
|
Aurelia Women's Rayon a-line Kurta :
यह खूबसूरत कुर्ती रेग्युलर फिट में आती है। यह ब्लू और ऑरेंज कलर वाली कुर्ती रेयॉन मटेरियल से बनी हुई है और इसका स्टाइल ए- लाइन है। यह एक एन्कल लेंथ कुर्ती है और वैसे तो इस कुर्ती की कीमत 2,499 रुपये है लेकिन कुछ डिस्काउंट के चलते यह आपको अमेजन पर मात्र 1,249 रुपए में मिल जाएगी।
यह बेहतरीन कुर्ती मैजेंटा कलर में आती है और यह अनारकली स्टाइल में उप्लब्ध है। इस कुर्ती को रेयॉन कॉटन मटीरियल से बनाया गया है, जो थ्री क्वार्टर सिल्क में है। यह एक प्रकार की स्ट्रेट फिट कुर्ती है और इसकी एक खासियत यह है कि आप इसे बड़ी ही आसानी से हैंड वॉश भी कर सकते हैं। यह कुर्ती आप को ऐमेज़ॉन पर मात्र 599 रुपए में मिल जाएगी।
इस शानदार कुर्ती और प्लाजो सेट पर ब्लॉक प्रिंट किया गया है। यह सेट ब्लू कलर में आता है और इसपर यलो प्रिंट है। यह रेयॉन मटेरियल से बनाई गई एक एन्कल लेंग्थ कुर्ती है। इसे आप अमेजन पर मात्र 485 से 999 रुपए तक की रेंज में खरीद सकते हैं।
|
Aurelia Women's Rayon a-line Kurta : यह खूबसूरत कुर्ती रेग्युलर फिट में आती है। यह ब्लू और ऑरेंज कलर वाली कुर्ती रेयॉन मटेरियल से बनी हुई है और इसका स्टाइल ए- लाइन है। यह एक एन्कल लेंथ कुर्ती है और वैसे तो इस कुर्ती की कीमत दो,चार सौ निन्यानवे रुपयापये है लेकिन कुछ डिस्काउंट के चलते यह आपको अमेजन पर मात्र एक,दो सौ उनचास रुपयापए में मिल जाएगी। यह बेहतरीन कुर्ती मैजेंटा कलर में आती है और यह अनारकली स्टाइल में उप्लब्ध है। इस कुर्ती को रेयॉन कॉटन मटीरियल से बनाया गया है, जो थ्री क्वार्टर सिल्क में है। यह एक प्रकार की स्ट्रेट फिट कुर्ती है और इसकी एक खासियत यह है कि आप इसे बड़ी ही आसानी से हैंड वॉश भी कर सकते हैं। यह कुर्ती आप को ऐमेज़ॉन पर मात्र पाँच सौ निन्यानवे रुपयापए में मिल जाएगी। इस शानदार कुर्ती और प्लाजो सेट पर ब्लॉक प्रिंट किया गया है। यह सेट ब्लू कलर में आता है और इसपर यलो प्रिंट है। यह रेयॉन मटेरियल से बनाई गई एक एन्कल लेंग्थ कुर्ती है। इसे आप अमेजन पर मात्र चार सौ पचासी से नौ सौ निन्यानवे रुपयापए तक की रेंज में खरीद सकते हैं।
|
- 9 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
- 9 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . "
Don't Miss!
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
3 साल, बैक 2 बैक छठवीं 100CroreClub और 750 करोड़ हुआ अक्षय का भाव!
अक्षय कुमार स्टारर पैडमैन आज रिलीज़ होेने जा रही है और इसी के साथ अक्षय कुमार बनाने जा रहे हैं धमाकेदार रिकॉर्ड। दरअसल, पैडमैन, अक्षय कुमार की छठवींं 100 करोड़ी फिल्म होगी और वो भी बैक 2 बैक।
हैं।
हालांकि सब कुछ निर्भर करता है फिल्म के वर्ड ऑफ माउथ पर। ट्रेड आंकड़ों की मानें तो पैडमैन के साथ बुरा से बुरा कुछ होगा तो वो ये कि फिल्म केवल एवरेज रह जाएगी।
बावजूद,
होगा।
हैं।
अगर पैडमैन का गणित सही बैठता है और फिल्म का वर्ड ऑफ माउथ, इसके बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ असर डालता है तो फिर अपनी सीट बेल्ट बांध कर तैयार हो जाइए। क्योंकि अक्षय कुमार आपको 2018 की अपनी पहली ब्लॉकबस्टर देंगे।
हैं।
है।
देखिए,
|
- नौ hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर! - नौ hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . " Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? तीन साल, बैक दो बैक छठवीं एक सौCroreClub और सात सौ पचास करोड़ हुआ अक्षय का भाव! अक्षय कुमार स्टारर पैडमैन आज रिलीज़ होेने जा रही है और इसी के साथ अक्षय कुमार बनाने जा रहे हैं धमाकेदार रिकॉर्ड। दरअसल, पैडमैन, अक्षय कुमार की छठवींं एक सौ करोड़ी फिल्म होगी और वो भी बैक दो बैक। हैं। हालांकि सब कुछ निर्भर करता है फिल्म के वर्ड ऑफ माउथ पर। ट्रेड आंकड़ों की मानें तो पैडमैन के साथ बुरा से बुरा कुछ होगा तो वो ये कि फिल्म केवल एवरेज रह जाएगी। बावजूद, होगा। हैं। अगर पैडमैन का गणित सही बैठता है और फिल्म का वर्ड ऑफ माउथ, इसके बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ असर डालता है तो फिर अपनी सीट बेल्ट बांध कर तैयार हो जाइए। क्योंकि अक्षय कुमार आपको दो हज़ार अट्ठारह की अपनी पहली ब्लॉकबस्टर देंगे। हैं। है। देखिए,
|
इंडिया न्यूज, रामपुर (Uttar Pradesh)। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से विवाद के बाद अपनी साली से शादी कर ली। युवक की साली उसकी पत्नी की चचेरी बहन है। युवक ने अपनी साली से शादी करने के बाद अपनी पत्नी को उसके मायके वालों को सौंप दिया। शादी की खबर मिलने के सभी हैरान रह गए।
मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया थाने का है। इस गांव की एक युवती की शादी 6 साल पहले थाना भोत के युवक से हुई थी। उन दोनों के 2 बच्चे भी हैं। करीब 3 दिन पहले युवती का अपने पति के साथ किसी वजह से विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि युवक अपनी पत्नी को लेकर उसके मायके आगया। वाहन सभी मिल कर दोनों के झगड़े को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे।
युवक कुछ देर तक ससुराल में रुका रहा, मगर कुछ देर बाद वहां से फरार हो गया। युवक अकेला नहीं बल्कि अपनी चचेरी साली के साथ फरार हुआ था। युवक ने 2 दिन परिजनों से फ़ोन पर बात किया और बताया की उसने अपनी साली से शादी कर ली है। साथ ही ससुराल वालो से कहा कि पत्नी को तुम सम्भालो। यह सुन कर पत्नी के परिजनों ने थाने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
|
इंडिया न्यूज, रामपुर । उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से विवाद के बाद अपनी साली से शादी कर ली। युवक की साली उसकी पत्नी की चचेरी बहन है। युवक ने अपनी साली से शादी करने के बाद अपनी पत्नी को उसके मायके वालों को सौंप दिया। शादी की खबर मिलने के सभी हैरान रह गए। मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया थाने का है। इस गांव की एक युवती की शादी छः साल पहले थाना भोत के युवक से हुई थी। उन दोनों के दो बच्चे भी हैं। करीब तीन दिन पहले युवती का अपने पति के साथ किसी वजह से विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि युवक अपनी पत्नी को लेकर उसके मायके आगया। वाहन सभी मिल कर दोनों के झगड़े को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। युवक कुछ देर तक ससुराल में रुका रहा, मगर कुछ देर बाद वहां से फरार हो गया। युवक अकेला नहीं बल्कि अपनी चचेरी साली के साथ फरार हुआ था। युवक ने दो दिन परिजनों से फ़ोन पर बात किया और बताया की उसने अपनी साली से शादी कर ली है। साथ ही ससुराल वालो से कहा कि पत्नी को तुम सम्भालो। यह सुन कर पत्नी के परिजनों ने थाने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
|
कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको भी कोई सीक्रेट स्मेल पसंद हो? मिट्टी, झंडू बाम, पेट्रोल से लेकर घास तक अगर आपको भी कोई ऐसी स्मेल पसंद है तो ये स्टोरी आपके लिए है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आपको बहुत अजीबोगरीब खुशबुएं क्यों पसंद आती हैं? किसी को बारिश की स्मेल अच्छी लगती है, किसी को पेट्रोल की खुशबू अच्छी लगती है तो किसी को किताबें सूंघना पसंद है। ऐसे ही किसी को नए कपड़ों की स्मेल पसंद आती है तो किसी को मेहंदी की स्मेल सूंघना बहुत अच्छा लगता है।
स्मेल को लेकर कुछ और लोगों का ऑब्सेशन इससे भी ज्यादा होता है और उन्हें आयोडेक्स, नेल पॉलिश थिनर जैसी चीज़ें सूंघना अच्छा लगता है।
कई लोग तो ऐसी खुशबुएं सूंघने के बाद ही रात की नींद ले पाते हैं। हालांकि, ये तो नशे जैसी आदत हो गई, लेकिन अगर आप नॉर्मली बहुत सारी चीज़ें सूंघना पसंद करते हैं तो क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि आपको अलग-अलग तरह की खुशबू पसंद आने लगती है?
क्या वाकई आपको पसंद आती है अजीब स्मेल?
किताब The Scent of Desire की ऑथर रेचल एस हर्ज ने अपनी किताब में लिखा है कि अच्छी और बुरी कोई स्मेल नहीं होती है। इस किताब में लिखा है कि जब भी हम किसी स्मेल को सूंघते हैं तो अपने एक्सपीरियंस के हिसाब से एक धारणा बना लेते हैं और ऐसे में हम ये मान लेते हैं कि कोई एक स्मेल अच्छी है और कोई एक बुरी। स्मेल का कोई मतलब पहले नहीं होता है और जब तक हम उससे इमोशनल धारणा नहीं स्थापित करते हैं तब तक ये हमारे लिए आम ही रहती है। (रैम्प पर मॉडल्स क्यों नहीं हंसती)
क्या हर बार खुशबू का संबंध बचपन से होता है?
इसका जवाब है नहीं, इसी किताब के मुताबिक कई स्मेल आपको सिर्फ ऐसे ही पसंद आ जाती हैं क्योंकि वो आपको पॉजिटिव फील देती हैं। इसे पॉजिटिव स्मेल कहा जाता है और ये चमड़े की स्मेल, नए कपड़ों की स्मेल, किताबों की स्मेल आदि हो सकती है।
आप किसी खुशबू को कैसे देखते हैं ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपका ताल्लुक उस खुशबू से कैसा है और आपका दिमाग उसे कैसे समझता है।
कई ऐसे लोग होते हैं जिन्हें बहुत ही ज्यादा अजीब स्मेल्स पसंद आ जाती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपके अंदर कोई खराबी हो सकती है। हर इंसान का दिमाग किसी एक खुशबू को अलग तरह से समझता है और यही कारण है कि उन्हें ये सारी स्मेल्स पसंद आ जाती हैं। ऐसे में पेट्रोल से लेकर खून तक कई चीज़ों की सेंट लोगों को आकर्षित करती है।
आकर्षण एक बहुत ही ताकतवर फीलिंग है जो इंसान को किसी भी चीज़ से हो सकता है। आपको कौन सी स्मेल पसंद आती है ये आपके बचपन, आस-पास के माहौल, आपकी रेगुलर पर्सनैलिटी आदि पर निर्भर करता है।
ऐसे ही कई लोगों को ताज़ा कटी घास, किसी को पटाखों, किसी को गनपाउडर, किसी को मिट्टी, किसी को हॉस्पिटल, किसी को फिनाइल, किसी को मक्खन, किसी को दर्द निवारक बाम आदि की स्मेल पसंद आती है। इसलिए अगर आपको भी कोई अन्य स्मेल पसंद आ रही है तो चिंता ना करें। ये बहुत ही कॉमन है और कई लोगों के साथ होता है। स्मेल को किसी बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।
तो आपको कौन सी स्मेल पसंद है ये हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको भी कोई सीक्रेट स्मेल पसंद हो? मिट्टी, झंडू बाम, पेट्रोल से लेकर घास तक अगर आपको भी कोई ऐसी स्मेल पसंद है तो ये स्टोरी आपके लिए है। क्या आपने कभी सोचा है कि आपको बहुत अजीबोगरीब खुशबुएं क्यों पसंद आती हैं? किसी को बारिश की स्मेल अच्छी लगती है, किसी को पेट्रोल की खुशबू अच्छी लगती है तो किसी को किताबें सूंघना पसंद है। ऐसे ही किसी को नए कपड़ों की स्मेल पसंद आती है तो किसी को मेहंदी की स्मेल सूंघना बहुत अच्छा लगता है। स्मेल को लेकर कुछ और लोगों का ऑब्सेशन इससे भी ज्यादा होता है और उन्हें आयोडेक्स, नेल पॉलिश थिनर जैसी चीज़ें सूंघना अच्छा लगता है। कई लोग तो ऐसी खुशबुएं सूंघने के बाद ही रात की नींद ले पाते हैं। हालांकि, ये तो नशे जैसी आदत हो गई, लेकिन अगर आप नॉर्मली बहुत सारी चीज़ें सूंघना पसंद करते हैं तो क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि आपको अलग-अलग तरह की खुशबू पसंद आने लगती है? क्या वाकई आपको पसंद आती है अजीब स्मेल? किताब The Scent of Desire की ऑथर रेचल एस हर्ज ने अपनी किताब में लिखा है कि अच्छी और बुरी कोई स्मेल नहीं होती है। इस किताब में लिखा है कि जब भी हम किसी स्मेल को सूंघते हैं तो अपने एक्सपीरियंस के हिसाब से एक धारणा बना लेते हैं और ऐसे में हम ये मान लेते हैं कि कोई एक स्मेल अच्छी है और कोई एक बुरी। स्मेल का कोई मतलब पहले नहीं होता है और जब तक हम उससे इमोशनल धारणा नहीं स्थापित करते हैं तब तक ये हमारे लिए आम ही रहती है। क्या हर बार खुशबू का संबंध बचपन से होता है? इसका जवाब है नहीं, इसी किताब के मुताबिक कई स्मेल आपको सिर्फ ऐसे ही पसंद आ जाती हैं क्योंकि वो आपको पॉजिटिव फील देती हैं। इसे पॉजिटिव स्मेल कहा जाता है और ये चमड़े की स्मेल, नए कपड़ों की स्मेल, किताबों की स्मेल आदि हो सकती है। आप किसी खुशबू को कैसे देखते हैं ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपका ताल्लुक उस खुशबू से कैसा है और आपका दिमाग उसे कैसे समझता है। कई ऐसे लोग होते हैं जिन्हें बहुत ही ज्यादा अजीब स्मेल्स पसंद आ जाती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपके अंदर कोई खराबी हो सकती है। हर इंसान का दिमाग किसी एक खुशबू को अलग तरह से समझता है और यही कारण है कि उन्हें ये सारी स्मेल्स पसंद आ जाती हैं। ऐसे में पेट्रोल से लेकर खून तक कई चीज़ों की सेंट लोगों को आकर्षित करती है। आकर्षण एक बहुत ही ताकतवर फीलिंग है जो इंसान को किसी भी चीज़ से हो सकता है। आपको कौन सी स्मेल पसंद आती है ये आपके बचपन, आस-पास के माहौल, आपकी रेगुलर पर्सनैलिटी आदि पर निर्भर करता है। ऐसे ही कई लोगों को ताज़ा कटी घास, किसी को पटाखों, किसी को गनपाउडर, किसी को मिट्टी, किसी को हॉस्पिटल, किसी को फिनाइल, किसी को मक्खन, किसी को दर्द निवारक बाम आदि की स्मेल पसंद आती है। इसलिए अगर आपको भी कोई अन्य स्मेल पसंद आ रही है तो चिंता ना करें। ये बहुत ही कॉमन है और कई लोगों के साथ होता है। स्मेल को किसी बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। तो आपको कौन सी स्मेल पसंद है ये हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
रांची(ब्यूरो)। सिटी की सड़क चौड़ी करने, गंदगी और जाम से निजात दिलाने के लिए रांची नगर निगम ने कमर कस ली है। रविवार से इसके लिए अभियान चलाएगा। सड़क पर जमीन कब्जा कर दुकान लगाने वालों को सड़क खाली करने को कहा गया है। सड़क पर दुकान लगने से रोड का स्पेस और कम हो जाता है, जिससे बार-बार जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम ने सड़क खाली कराने का निर्णय लिया है। रोड किनारे लगने वाले फूड वैन, पान की दुकान समेत अन्य अस्थायी रूप से चलने वाली दुकानों को हटाने का समय दिया गया है। शनिवार को यह समय खत्म हो जाएगा। इसके बाद रविवार से निगम बड़ा अभियान चलाकर सड़क कब्जामुक्त करवाएगा। नगर निगम की टीम लगातार यह ऐलान कर रही है। टीम के सदस्य माइक और लाउड स्पीकर से सड़क पर घूम-घूम कर इसका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके लिए लोगों को मोहलत दी गई है। लेकिन निगम के दिए गए समय पर यदि कब्जा नहीं हटाया जाता है तो नगर निगम जबरन जमीन खाली करवाएगा, और इसका खर्च भी कब्जाधारी से ही वसूला जाएगा।
सिर्फ रोड साइड कब्जा कर दुकान लगाने वाले ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर निर्माण करने वाले भी निगम के रडार पर हैं। ऐसे लोगों को भी अपने कंस्ट्रक्शन हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था। जिसकी अवधि शनिवार को खत्म हो रही है। रविवार से एक्शन मोड में आ जाएगा नगर निगम। इसके लिए इंफोर्समेंट टीम को जिम्मेवारी दे दी गई है। कुछ इलाकों में कार्रवाई शुरू भी कर दी गई है। नगर निगम के टाउन प्लानिंग सेक्शन की ओर से ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की गई है, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य कर लिया है या फिर दुकान बनाकर कारोबार कर रहे हैं।
नगर निगम इस कार्रवाई के बाद खाली जमीन का इस्तेमाल सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और पैदल चलने वाले लोगों के लिए फुटपाथ बनाने के लिए करेगा। इसके अलावा अलग से साइकिल ट्रैक भी बनाने की योजना है। शहर में यातायात सुगम हो और जाम की समस्या न झेलनी पड़े, इसके लिए यह कार्रवाई की जा रही है। आठ फीट की सड़क को 14 फीट करने का निर्णय लिया गया है। निगम पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ व्यवसायियों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। ऐसे लोगों को पहले भी कई बार नोटिस दिया गया है। लेकिन लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। मजबूरन नगर निगम को सख्त निर्णय लेने पर विवश किया जा रहा है। लोगों द्वारा सड़क पर कब्जा कर दुकान लगाने की वजह से जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। अवैध कब्जा हटते ही ट्रैफिक भी सुगम हो जाएगी। कई बार सड़क में लगने वाले जाम में एंबुलेंस भी फंसे रहते हैं, जिसमे मरीज और उनके परिजन परेशान होते हैं।
|
रांची। सिटी की सड़क चौड़ी करने, गंदगी और जाम से निजात दिलाने के लिए रांची नगर निगम ने कमर कस ली है। रविवार से इसके लिए अभियान चलाएगा। सड़क पर जमीन कब्जा कर दुकान लगाने वालों को सड़क खाली करने को कहा गया है। सड़क पर दुकान लगने से रोड का स्पेस और कम हो जाता है, जिससे बार-बार जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम ने सड़क खाली कराने का निर्णय लिया है। रोड किनारे लगने वाले फूड वैन, पान की दुकान समेत अन्य अस्थायी रूप से चलने वाली दुकानों को हटाने का समय दिया गया है। शनिवार को यह समय खत्म हो जाएगा। इसके बाद रविवार से निगम बड़ा अभियान चलाकर सड़क कब्जामुक्त करवाएगा। नगर निगम की टीम लगातार यह ऐलान कर रही है। टीम के सदस्य माइक और लाउड स्पीकर से सड़क पर घूम-घूम कर इसका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके लिए लोगों को मोहलत दी गई है। लेकिन निगम के दिए गए समय पर यदि कब्जा नहीं हटाया जाता है तो नगर निगम जबरन जमीन खाली करवाएगा, और इसका खर्च भी कब्जाधारी से ही वसूला जाएगा। सिर्फ रोड साइड कब्जा कर दुकान लगाने वाले ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर निर्माण करने वाले भी निगम के रडार पर हैं। ऐसे लोगों को भी अपने कंस्ट्रक्शन हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था। जिसकी अवधि शनिवार को खत्म हो रही है। रविवार से एक्शन मोड में आ जाएगा नगर निगम। इसके लिए इंफोर्समेंट टीम को जिम्मेवारी दे दी गई है। कुछ इलाकों में कार्रवाई शुरू भी कर दी गई है। नगर निगम के टाउन प्लानिंग सेक्शन की ओर से ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की गई है, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य कर लिया है या फिर दुकान बनाकर कारोबार कर रहे हैं। नगर निगम इस कार्रवाई के बाद खाली जमीन का इस्तेमाल सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और पैदल चलने वाले लोगों के लिए फुटपाथ बनाने के लिए करेगा। इसके अलावा अलग से साइकिल ट्रैक भी बनाने की योजना है। शहर में यातायात सुगम हो और जाम की समस्या न झेलनी पड़े, इसके लिए यह कार्रवाई की जा रही है। आठ फीट की सड़क को चौदह फीट करने का निर्णय लिया गया है। निगम पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ व्यवसायियों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। ऐसे लोगों को पहले भी कई बार नोटिस दिया गया है। लेकिन लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। मजबूरन नगर निगम को सख्त निर्णय लेने पर विवश किया जा रहा है। लोगों द्वारा सड़क पर कब्जा कर दुकान लगाने की वजह से जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। अवैध कब्जा हटते ही ट्रैफिक भी सुगम हो जाएगी। कई बार सड़क में लगने वाले जाम में एंबुलेंस भी फंसे रहते हैं, जिसमे मरीज और उनके परिजन परेशान होते हैं।
|
अहमदाबाद । इंग्लैंड की टीम को टेस्ट क्रिकेट में दूसरी बार भारत के हाथों 10 विकेटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा है। मोटेरा के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन गुरुवार को इंग्लैंड 10 विकेट से हारा । इसके साथ ही टीम इंडिया चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 से आगे हो गई है।
भारत को जीत के लिए 49 रन बनाने थे जो उसने बिना विकेट गंवाए 7. 4 ओवर में बना लिए। रोहित शर्मा 25 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 25 तथा शुभमन गिल 21 गेंदों पर एक चौके और एक छक्के की मदद से 15 रन बनाकर नाबाद रहे।
भारत ने इससे पहले इंग्लैंड को पहली बार 10 विकटों से 20 साल पहले हराया था। भारत ने दिसंबर 2001 में मोहाली में भी इंग्लैंड को 10 विकेट से मात दी थी।
भारत ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक नौवीं बार 10 विकेटों से जीत दर्ज की। भारत ने इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ अब तक दो-दो बार टेस्ट क्रिकेट में 10 विकेट से जीत दर्ज की है। इसके अलावा उसने बांग्लादेश, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के खिलाफ एक-एक बार टेस्ट में 10 विकेट से जीत हासिल की है।
भारत ने इसके अलावा तीन बार नौ विकेट से और 14 बार आठ विकेट से जीत अपने नाम की है।
भारत ने आज सुबह अपनी पारी तीन विकेट पर 99 रन से आगे बढ़ाई लेकिन कप्तान जोए रूट के पांच और जैक लीच के चार विकटों की शानदार गेंदबाजी ने भारत की पहली पारी 145 पर समेट दी। भारत को हालांकि पहली पारी में 33 रनों की मामूली बढ़त हासिल हुई।
भारत को ऑलआउट करने के बाद इंग्लैंड की दूसरी पारी पूरी तरह लड़खड़ा गई और अक्षर पटेल (5/32) तथा ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (4/48) ने इंग्लैंड को 81 रन ऑलआउट कर दिया तथा भारत को जीत के लिए 49 रनों का लक्ष्य मिला।
|
अहमदाबाद । इंग्लैंड की टीम को टेस्ट क्रिकेट में दूसरी बार भारत के हाथों दस विकेटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा है। मोटेरा के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन गुरुवार को इंग्लैंड दस विकेट से हारा । इसके साथ ही टीम इंडिया चार मैचों की टेस्ट सीरीज में दो-एक से आगे हो गई है। भारत को जीत के लिए उनचास रन बनाने थे जो उसने बिना विकेट गंवाए सात. चार ओवर में बना लिए। रोहित शर्मा पच्चीस गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद पच्चीस तथा शुभमन गिल इक्कीस गेंदों पर एक चौके और एक छक्के की मदद से पंद्रह रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने इससे पहले इंग्लैंड को पहली बार दस विकटों से बीस साल पहले हराया था। भारत ने दिसंबर दो हज़ार एक में मोहाली में भी इंग्लैंड को दस विकेट से मात दी थी। भारत ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक नौवीं बार दस विकेटों से जीत दर्ज की। भारत ने इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ अब तक दो-दो बार टेस्ट क्रिकेट में दस विकेट से जीत दर्ज की है। इसके अलावा उसने बांग्लादेश, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के खिलाफ एक-एक बार टेस्ट में दस विकेट से जीत हासिल की है। भारत ने इसके अलावा तीन बार नौ विकेट से और चौदह बार आठ विकेट से जीत अपने नाम की है। भारत ने आज सुबह अपनी पारी तीन विकेट पर निन्यानवे रन से आगे बढ़ाई लेकिन कप्तान जोए रूट के पांच और जैक लीच के चार विकटों की शानदार गेंदबाजी ने भारत की पहली पारी एक सौ पैंतालीस पर समेट दी। भारत को हालांकि पहली पारी में तैंतीस रनों की मामूली बढ़त हासिल हुई। भारत को ऑलआउट करने के बाद इंग्लैंड की दूसरी पारी पूरी तरह लड़खड़ा गई और अक्षर पटेल तथा ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड को इक्यासी रन ऑलआउट कर दिया तथा भारत को जीत के लिए उनचास रनों का लक्ष्य मिला।
|
कलजुग का प्रवेश १. चौद्धकाल
कलजुग के आरम्भ के हज़ार डेढ़ हज़ार बरस तक वही दशा समझनी चाहिये जो महाभारत के आधार पर मीमांसा मे दी गई है । आज से लगभग ढाई हज़ार बरस पहले भगवान बुद्ध का समय था । गाँव के सम्बन्ध मे बुद्धमत के ग्रंथों मे से बहुत सी बाते निकाली जा सकती है ।।उनसे यह पता चलता है कि भारत का समाज उस काल मे भी देहाती ही था । किसान लोग अपने अपने खेत के, मालिक थे और गाँव के किसानो की एक जाति-सी बनी हुई थी । हुई भारी-भरी रियासते, ज़मींदारियाँ या ताल्लुके न थे । एक जातक मे लिखा है कि जब राजा विदेह ने ससार छोड़कर सन्यास ले लिया तो उन्होने सात योजनो की अपनी राजधानी मिथिला छोड़ी और सोलह हजार गाँव का अपना राज छोडा । इससे पता चलता है कि सोलह हज़ार गाँववाले राज्य के भीतर मिथिला नाम का एक ही शहर था । उस समय गाँवो के मुकाबले शहरों की सख्या इतनी थोड़ी थी कि अगर हम एक लाख गाँवो के पीछे सात शहरो का औसत मानले और यह भी मान लें कि आजकल की तरह सारे भारत मे सात लाख से ज्यादा गाँव नहीं थे तो सारे भारत मे उस समय शहरों की कुल गिनती पचास से अधिक नहीं ठहरती ।
|
कलजुग का प्रवेश एक. चौद्धकाल कलजुग के आरम्भ के हज़ार डेढ़ हज़ार बरस तक वही दशा समझनी चाहिये जो महाभारत के आधार पर मीमांसा मे दी गई है । आज से लगभग ढाई हज़ार बरस पहले भगवान बुद्ध का समय था । गाँव के सम्बन्ध मे बुद्धमत के ग्रंथों मे से बहुत सी बाते निकाली जा सकती है ।।उनसे यह पता चलता है कि भारत का समाज उस काल मे भी देहाती ही था । किसान लोग अपने अपने खेत के, मालिक थे और गाँव के किसानो की एक जाति-सी बनी हुई थी । हुई भारी-भरी रियासते, ज़मींदारियाँ या ताल्लुके न थे । एक जातक मे लिखा है कि जब राजा विदेह ने ससार छोड़कर सन्यास ले लिया तो उन्होने सात योजनो की अपनी राजधानी मिथिला छोड़ी और सोलह हजार गाँव का अपना राज छोडा । इससे पता चलता है कि सोलह हज़ार गाँववाले राज्य के भीतर मिथिला नाम का एक ही शहर था । उस समय गाँवो के मुकाबले शहरों की सख्या इतनी थोड़ी थी कि अगर हम एक लाख गाँवो के पीछे सात शहरो का औसत मानले और यह भी मान लें कि आजकल की तरह सारे भारत मे सात लाख से ज्यादा गाँव नहीं थे तो सारे भारत मे उस समय शहरों की कुल गिनती पचास से अधिक नहीं ठहरती ।
|
किया गया है, उनका साधु पालन न करे तो उसे यथायोग्य प्रायश्चित्त का पात्र बनना पडता है । उदाहरणार्थ कल्पना कीजिये - दो साघु हैं । उनमे से एक ने अपना काम काज करके, पात्र साफ करके कही रख दिये । इतने मे एकाएक वर्षा आने लगी । पात्र या साबु की अन्य उपधि भीगने लगी । अब एक साधु सोचता है - 'अगर पात्र लाने जाऊँगा तो हिंसा होगी-जल के जीवो की विराधना होगी । पात्र नही उठाऊँगा तो उस विराधना से वच जाऊँगा ।' दूसरा साधु पात्र उठा लाया । अव विचार कीजिये आराधक कौन है ? निशीथसूत्र के अनुसार नही उठाने वाले मुनि को प्रायश्चित्त का भागी होना पड़ता है ।
एक साध्वी पानी मे वह गई । उसे निकालने मे जो घृणा प्रकट करता है - उसे बचाना बुरा मानता है, वह साधु विराधक होगा। इसके विपरीत साध्वी को बचाने वाला साधु आराधक होगा ।
साधु षट्काय की हिंसा का त्यागी होता है, गृहस्थ इतना त्याग नही कर सकता । फिर भी जो गृहस्थ सूक्ष्म जीवो की ओट मे अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता दिखलाता है, वह उचित नही है ।
हिंसा के सम्बन्ध मे अनेक विधि-विकल्प है । स्थावर हिंसा की अपेक्षा त्रस - हिंसा स्थूल है । उसमे अज्ञात रूप से - अनजान मे हुई हिंसा सूक्ष्म है और जान बूझकर की जाने वाली हिंसा स्थूल है । उसमे भी अनेक विकल्प हैं । डॉक्टर ऑपरेशन करता है । रोगी उसका अपराधी नही है । रोगी की प्राण रक्षा के लिये डाक्टर चीरफाड करता है । अनेको वार ऑपरेशन करने समय रोगी मर जाता है । यह सापेक्ष हिंसा है । इससे डाक्टर का अहिंसाणुव्रत भग नहीं होता ।
शास्त्र मे प्रतिपादित कर्तव्य क्या है और आधुनिक श्राविकार्यों उसे किस रूप मे समझती हैं, इस बात का विचार करने से आश्चर्य होने लगता है । एक श्राविका चक्की न फेरने की प्रतिज्ञा
लेती है । वह समझती है - चक्की न चलाऊँगी तो पाप से बच जाऊँगी । मगर उसे यह विचार नहीं आता कि आटा तो खाना ही पडेगा, फिर वह पाप से कैसे बच जायगी। मैं तो यहाँ तक कहता
कि मशीन से आटा पिसवाने की अपेक्षा हाथ से पीसकर खाने मे कम पाप होता है । इसका कारण है । हाय से आटा पीसने मे यतना रखी जा सकती है । पीसते समय गेहूँ आदि मे कोई जीवजन्तु गिर जाय तो उसे बचाया जा सकता है । चक्की के पाटो के वीच छिपे हुये जीवों की रक्षा की जा सकती है । हाथ से इतना अधिक आटा नही पीसा जाता कि उसका बहुत अधिक संग्रह हो जाय । इसलिए हाथ का आटा प्राय ताजा रहता है और उसमे जीव-जन्तु उतने नही पड सकते जितने एक साथ बहुत से पिसाये हुए मशीन के आटे में पड़ जाते हैं । मजूरी देकर मशीन मे आटा पिसाने से हर तरह अधिक पाप होता है । गेहूँ आदि मे रहे हुए त्रस जीवो की रक्षा नहीं हो सकती, चक्की मे छिपे हुये जीवो की भली-भांति रक्षा नहीं होती और आटा बहुत दिनो का हो जाने के कारण उसमे अनेक जीव पड़ जाते हैं । ऐसा आटा खाने वाले अपना स्वास्थ्य खराव कर बैठते हैं और कभी-कभी तो उन्हें प्राणो से भी हाथ धोना पड़ता है । यह सव पाप किसके सिर है ? इस पाप का उत्तरदायित्व अविवेक के कारण चक्की न चलाने की प्रतिज्ञा करने वाली वाई पर पड़ता है । परन्तु इतना विचार कौन करे ? इतनी परवाह किसे है अगर परिश्रम का त्याग करने से धर्म की आरावना होती है तो इतना सस्ता धर्म कौन न करना चाहेगा मगर ऐसा निठल्लापन धर्म नहीं हो सकता । धर्म कर्तव्यपालन मे है ।
वाइयाँ आज सुकुमार बनती जाती है । मजदूरिनों से काम कराने मे वे अपनी शान समझती हैं । मजदूरित समय पर न आई तो क्रोध से लाल हो जाती हैं, वेभान हो जाती हैं । अनेक कटुक वचन बोलती हैं । मजदूरिन के हृदय को पीडा पहुँचाती हैं । स्वय
निकम्मी बैठी निन्दा - विकथा मे अपना समय बर्बाद करती हैं ।
जरा सावधानी से विचार कीजिए, चक्की चलाने से पाप घटता है या वढता है ? पानी लाना, चक्की चलाना, रसोई बनाना, याद रखिए आदि कामो मे वहिने स्वय जितनी अधिक यतना रख सकती हैं, उतनी यतना अवोध मजदूरिनी नही रख सकती, क्योकि चटपट काम करके पैसा लेना उनका उद्देश्य होता है । वहिनो । जल्दी अपना सुधार न कर लोगी तो एक दिन ऐसा आ सकता है जब मजदूर लोगो के सामने तुम्हे नीचा देखना पडेगा ।
प्राचीन काल की स्त्रियाँ कितनी धीर, वीर और बुद्धिशालिनी होती थी, इस बात का पता महाभारत में वर्णित द्रौपदी देवी के चरित्र से साफ मिल जाता है । पाडव लोग ग्यारह वर्ष का वनवास पूर्ण करके, बारहवें वर्ष को विराट नगर में अज्ञात रूप से बिताने के लिए निकले, उस समय वे ऐसे प्रकाशित हुए मानो भस्म मे से अग्नि चमक उठी हो । विराट नगर से वे द्वारिका आये ।
सत्यभामा और द्रौपदी एक ही रथ मे बैठी थी । सत्यभामा ? इसका शान्ति द्रौनदी का रूप लावण्य देखकर दंग रह गई । उसने मन-ही-मन सोचा - नारी के रूप मे यह शक्ति कहाँ से आई है देने वाला अवतार कितना मनमोहक है ? फिर प्रकट रूप से कहा, हे द्रौपदी, ओ पाचाली, तुम्हारे भीतर यह अलौकिक शक्ति है कि तुम पाँच पतियो की पत्नी होकर भी उन सब पर काबू किये हुए हो । जान पडता है तुमने किसी वशीकरण मंत्र की साधना की है
सत्यभामा फिर कहने लगी - पाचाली, क्या वह मत्र मुझे नही बता सकती जिससे तुमने पाचो पाडवो को एक सूत्र मे बाँध रखा है ? मैं अपने पति श्रीकृष्ण को वश में रखना चाहती हूँ । अगर वह मत्र मुझे वतला दोगी तो मैं तुम्हारा वडा अहसान मानूंगी
द्रौपदी ने उत्तर दिया - वहिन सत्यभामा, वह मत्र मैंने किसी और से नही सीखा । वह मैंने अपनी माता की गोद मे ही सीखा है ।
|
किया गया है, उनका साधु पालन न करे तो उसे यथायोग्य प्रायश्चित्त का पात्र बनना पडता है । उदाहरणार्थ कल्पना कीजिये - दो साघु हैं । उनमे से एक ने अपना काम काज करके, पात्र साफ करके कही रख दिये । इतने मे एकाएक वर्षा आने लगी । पात्र या साबु की अन्य उपधि भीगने लगी । अब एक साधु सोचता है - 'अगर पात्र लाने जाऊँगा तो हिंसा होगी-जल के जीवो की विराधना होगी । पात्र नही उठाऊँगा तो उस विराधना से वच जाऊँगा ।' दूसरा साधु पात्र उठा लाया । अव विचार कीजिये आराधक कौन है ? निशीथसूत्र के अनुसार नही उठाने वाले मुनि को प्रायश्चित्त का भागी होना पड़ता है । एक साध्वी पानी मे वह गई । उसे निकालने मे जो घृणा प्रकट करता है - उसे बचाना बुरा मानता है, वह साधु विराधक होगा। इसके विपरीत साध्वी को बचाने वाला साधु आराधक होगा । साधु षट्काय की हिंसा का त्यागी होता है, गृहस्थ इतना त्याग नही कर सकता । फिर भी जो गृहस्थ सूक्ष्म जीवो की ओट मे अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता दिखलाता है, वह उचित नही है । हिंसा के सम्बन्ध मे अनेक विधि-विकल्प है । स्थावर हिंसा की अपेक्षा त्रस - हिंसा स्थूल है । उसमे अज्ञात रूप से - अनजान मे हुई हिंसा सूक्ष्म है और जान बूझकर की जाने वाली हिंसा स्थूल है । उसमे भी अनेक विकल्प हैं । डॉक्टर ऑपरेशन करता है । रोगी उसका अपराधी नही है । रोगी की प्राण रक्षा के लिये डाक्टर चीरफाड करता है । अनेको वार ऑपरेशन करने समय रोगी मर जाता है । यह सापेक्ष हिंसा है । इससे डाक्टर का अहिंसाणुव्रत भग नहीं होता । शास्त्र मे प्रतिपादित कर्तव्य क्या है और आधुनिक श्राविकार्यों उसे किस रूप मे समझती हैं, इस बात का विचार करने से आश्चर्य होने लगता है । एक श्राविका चक्की न फेरने की प्रतिज्ञा लेती है । वह समझती है - चक्की न चलाऊँगी तो पाप से बच जाऊँगी । मगर उसे यह विचार नहीं आता कि आटा तो खाना ही पडेगा, फिर वह पाप से कैसे बच जायगी। मैं तो यहाँ तक कहता कि मशीन से आटा पिसवाने की अपेक्षा हाथ से पीसकर खाने मे कम पाप होता है । इसका कारण है । हाय से आटा पीसने मे यतना रखी जा सकती है । पीसते समय गेहूँ आदि मे कोई जीवजन्तु गिर जाय तो उसे बचाया जा सकता है । चक्की के पाटो के वीच छिपे हुये जीवों की रक्षा की जा सकती है । हाथ से इतना अधिक आटा नही पीसा जाता कि उसका बहुत अधिक संग्रह हो जाय । इसलिए हाथ का आटा प्राय ताजा रहता है और उसमे जीव-जन्तु उतने नही पड सकते जितने एक साथ बहुत से पिसाये हुए मशीन के आटे में पड़ जाते हैं । मजूरी देकर मशीन मे आटा पिसाने से हर तरह अधिक पाप होता है । गेहूँ आदि मे रहे हुए त्रस जीवो की रक्षा नहीं हो सकती, चक्की मे छिपे हुये जीवो की भली-भांति रक्षा नहीं होती और आटा बहुत दिनो का हो जाने के कारण उसमे अनेक जीव पड़ जाते हैं । ऐसा आटा खाने वाले अपना स्वास्थ्य खराव कर बैठते हैं और कभी-कभी तो उन्हें प्राणो से भी हाथ धोना पड़ता है । यह सव पाप किसके सिर है ? इस पाप का उत्तरदायित्व अविवेक के कारण चक्की न चलाने की प्रतिज्ञा करने वाली वाई पर पड़ता है । परन्तु इतना विचार कौन करे ? इतनी परवाह किसे है अगर परिश्रम का त्याग करने से धर्म की आरावना होती है तो इतना सस्ता धर्म कौन न करना चाहेगा मगर ऐसा निठल्लापन धर्म नहीं हो सकता । धर्म कर्तव्यपालन मे है । वाइयाँ आज सुकुमार बनती जाती है । मजदूरिनों से काम कराने मे वे अपनी शान समझती हैं । मजदूरित समय पर न आई तो क्रोध से लाल हो जाती हैं, वेभान हो जाती हैं । अनेक कटुक वचन बोलती हैं । मजदूरिन के हृदय को पीडा पहुँचाती हैं । स्वय निकम्मी बैठी निन्दा - विकथा मे अपना समय बर्बाद करती हैं । जरा सावधानी से विचार कीजिए, चक्की चलाने से पाप घटता है या वढता है ? पानी लाना, चक्की चलाना, रसोई बनाना, याद रखिए आदि कामो मे वहिने स्वय जितनी अधिक यतना रख सकती हैं, उतनी यतना अवोध मजदूरिनी नही रख सकती, क्योकि चटपट काम करके पैसा लेना उनका उद्देश्य होता है । वहिनो । जल्दी अपना सुधार न कर लोगी तो एक दिन ऐसा आ सकता है जब मजदूर लोगो के सामने तुम्हे नीचा देखना पडेगा । प्राचीन काल की स्त्रियाँ कितनी धीर, वीर और बुद्धिशालिनी होती थी, इस बात का पता महाभारत में वर्णित द्रौपदी देवी के चरित्र से साफ मिल जाता है । पाडव लोग ग्यारह वर्ष का वनवास पूर्ण करके, बारहवें वर्ष को विराट नगर में अज्ञात रूप से बिताने के लिए निकले, उस समय वे ऐसे प्रकाशित हुए मानो भस्म मे से अग्नि चमक उठी हो । विराट नगर से वे द्वारिका आये । सत्यभामा और द्रौपदी एक ही रथ मे बैठी थी । सत्यभामा ? इसका शान्ति द्रौनदी का रूप लावण्य देखकर दंग रह गई । उसने मन-ही-मन सोचा - नारी के रूप मे यह शक्ति कहाँ से आई है देने वाला अवतार कितना मनमोहक है ? फिर प्रकट रूप से कहा, हे द्रौपदी, ओ पाचाली, तुम्हारे भीतर यह अलौकिक शक्ति है कि तुम पाँच पतियो की पत्नी होकर भी उन सब पर काबू किये हुए हो । जान पडता है तुमने किसी वशीकरण मंत्र की साधना की है सत्यभामा फिर कहने लगी - पाचाली, क्या वह मत्र मुझे नही बता सकती जिससे तुमने पाचो पाडवो को एक सूत्र मे बाँध रखा है ? मैं अपने पति श्रीकृष्ण को वश में रखना चाहती हूँ । अगर वह मत्र मुझे वतला दोगी तो मैं तुम्हारा वडा अहसान मानूंगी द्रौपदी ने उत्तर दिया - वहिन सत्यभामा, वह मत्र मैंने किसी और से नही सीखा । वह मैंने अपनी माता की गोद मे ही सीखा है ।
|
ब्राज़ील की पुलिस ने आगामी रियो ओलंपिक के दौरान कथित चरमपंथी गतिविधि की तैयारी कर रहे एक गुट के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है.
फेडरल पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोग तथाकथित इस्लामिक स्टेट के सदस्य नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस्लामिक स्टेट से संपर्क की कोशिश ज़रूर की थी.
इन संदिग्धों को ब्राज़ील के दक्षिणी राज्य पराना से गिरफ्तार किया गया है.
ब्राज़ील के न्याय मंत्री एलेक्जेंडर मोरेस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग ब्राज़ील के ही हैं.
इस घटनाक्रम के मद्देनज़र कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई है. रियो ओलंपिक 5 अगस्त से शुरू हो रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
|
ब्राज़ील की पुलिस ने आगामी रियो ओलंपिक के दौरान कथित चरमपंथी गतिविधि की तैयारी कर रहे एक गुट के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है. फेडरल पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोग तथाकथित इस्लामिक स्टेट के सदस्य नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस्लामिक स्टेट से संपर्क की कोशिश ज़रूर की थी. इन संदिग्धों को ब्राज़ील के दक्षिणी राज्य पराना से गिरफ्तार किया गया है. ब्राज़ील के न्याय मंत्री एलेक्जेंडर मोरेस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग ब्राज़ील के ही हैं. इस घटनाक्रम के मद्देनज़र कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई है. रियो ओलंपिक पाँच अगस्त से शुरू हो रहे हैं.
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
डेटा के उल्लंघन के मामले में सरकार को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा (संकेतिक चित्र)
Digital Personal Data Protection Bill 2022: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट जारी किया. बिल में डेटा से जुड़े किसी भी उल्लंघन पर सरकार को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा. इसे पब्लिक कमेंट के लिए ओपन रखा गया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्ट्री की ओर जारी किए गए इस ड्राफ्ट में डेटा में सेंध लगाने या नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान बढ़ाया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बिल सिर्फ डिजिटल आंकड़ों से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को डिजिटल और साइबर क्षेत्र के खतरों से निपटना है.
आधिकारिक सूत्र ने कहा, "बिल मुख्य रूप से उन संस्थाओं को जवाबदेह बनाने के लिए है, जो आंकड़ों का मॉनिटाइजेशन कर रही हैं. डेटा के उल्लंघन के मामले में सरकार को भी छूट नहीं है. " सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2022 के प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये तक कर दी है. बिल के ड्राफ्ट में सरकार की तरफ से पर्सनल डेटा की प्रॉसेसिंग के तरीके और उद्देश्य तय करने वाली इकाइयों के रूप में नोटिफाई कुछ संस्थाओं को कई अनुपालनों से छूट भी दी गई है.
ड्राफ्ट बिल में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डेटा प्रॉसेसिंग करने वाली संस्थाएं व्यक्तियों की स्पष्ट सहमति से ही डेटा जमा करें. साथ ही डेटा का उपयोग सिर्फ उसी मकसद के लिए किया जाएगा, जिसके लिए उसे जमा किया गया है. अगर ये यूनिट या उसकी ओर से डेटा का प्रॉसेसिंग करने वाली संस्थाएं बिल के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करती हैं, तो ड्राफ्ट में 500 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है.
आधिकारिक सूत्रों ने कहा, "सूचना के अधिकार कानून के तहत बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आए हैं, जो अनावश्यक हैं. इससे सरकारी विभागों पर बोझ बढ़ गया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार की तरफ से नोटिफाई संस्थाओं को आरटीआई खंड से छूट दी गई है. आपसी समझौते और भरोसे के आधार पर दूसरे देशों में डेटा को बदलने और रखने की अनुमति दी जाएगी. "
ये भी पढ़ेंः Facebook में होगा बड़ा बदलाव, अब नहीं पूछा जाएगा आपका 'धर्म' और 'पॉलिटिकल व्यू'
|
डेटा के उल्लंघन के मामले में सरकार को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा Digital Personal Data Protection Bill दो हज़ार बाईस: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का ड्राफ्ट जारी किया. बिल में डेटा से जुड़े किसी भी उल्लंघन पर सरकार को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा. इसे पब्लिक कमेंट के लिए ओपन रखा गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्ट्री की ओर जारी किए गए इस ड्राफ्ट में डेटा में सेंध लगाने या नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान बढ़ाया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बिल सिर्फ डिजिटल आंकड़ों से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को डिजिटल और साइबर क्षेत्र के खतरों से निपटना है. आधिकारिक सूत्र ने कहा, "बिल मुख्य रूप से उन संस्थाओं को जवाबदेह बनाने के लिए है, जो आंकड़ों का मॉनिटाइजेशन कर रही हैं. डेटा के उल्लंघन के मामले में सरकार को भी छूट नहीं है. " सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल दो हज़ार बाईस के प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि बढ़ाकर पाँच सौ करोड़ रुपये तक कर दी है. बिल के ड्राफ्ट में सरकार की तरफ से पर्सनल डेटा की प्रॉसेसिंग के तरीके और उद्देश्य तय करने वाली इकाइयों के रूप में नोटिफाई कुछ संस्थाओं को कई अनुपालनों से छूट भी दी गई है. ड्राफ्ट बिल में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डेटा प्रॉसेसिंग करने वाली संस्थाएं व्यक्तियों की स्पष्ट सहमति से ही डेटा जमा करें. साथ ही डेटा का उपयोग सिर्फ उसी मकसद के लिए किया जाएगा, जिसके लिए उसे जमा किया गया है. अगर ये यूनिट या उसकी ओर से डेटा का प्रॉसेसिंग करने वाली संस्थाएं बिल के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करती हैं, तो ड्राफ्ट में पाँच सौ करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने कहा, "सूचना के अधिकार कानून के तहत बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आए हैं, जो अनावश्यक हैं. इससे सरकारी विभागों पर बोझ बढ़ गया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार की तरफ से नोटिफाई संस्थाओं को आरटीआई खंड से छूट दी गई है. आपसी समझौते और भरोसे के आधार पर दूसरे देशों में डेटा को बदलने और रखने की अनुमति दी जाएगी. " ये भी पढ़ेंः Facebook में होगा बड़ा बदलाव, अब नहीं पूछा जाएगा आपका 'धर्म' और 'पॉलिटिकल व्यू'
|
नई दिल्लीः रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आ रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन संकट पर अभी अभी रूस के राष्ट्रपति से लंबी चर्चा की है. यूक्रेन संकट पर ये दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच दूसरी वार्ता है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से 50 मिनट तक चर्चा की है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ सीधी बातचीत करने का अनुरोध किया है. वहीं, इस बातचीत में राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के सुमी शहर से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सहयोग देने का भरोसा दिलाया है.
पीएम मोदी ने रूस द्वारा किए गए सीजफायर के ऐलान के लिए राष्ट्रपति पुतिन की प्रशंसा की. इससे पहले पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बात की थी. सरकार के शीर्ष सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने आज सुबह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बहुत देर तक बात की है. दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच करीब 11. 30 बजे 35 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई है.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेन में पैदा हुए युद्ध के हालात पर चर्चा की और इसके अलग अलग आयामों पर मंथन किया. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी सीधी बातचीत की प्रशंसा की. उन्होंने ने यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने में यूक्रेन सरकार द्वारा दी गई सहायता के लिए राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को धन्यवाद भी कहा.
|
नई दिल्लीः रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आ रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन संकट पर अभी अभी रूस के राष्ट्रपति से लंबी चर्चा की है. यूक्रेन संकट पर ये दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच दूसरी वार्ता है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से पचास मिनट तक चर्चा की है. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ सीधी बातचीत करने का अनुरोध किया है. वहीं, इस बातचीत में राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के सुमी शहर से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सहयोग देने का भरोसा दिलाया है. पीएम मोदी ने रूस द्वारा किए गए सीजफायर के ऐलान के लिए राष्ट्रपति पुतिन की प्रशंसा की. इससे पहले पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बात की थी. सरकार के शीर्ष सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने आज सुबह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बहुत देर तक बात की है. दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच करीब ग्यारह. तीस बजे पैंतीस मिनट तक फोन पर चर्चा हुई है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेन में पैदा हुए युद्ध के हालात पर चर्चा की और इसके अलग अलग आयामों पर मंथन किया. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी सीधी बातचीत की प्रशंसा की. उन्होंने ने यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने में यूक्रेन सरकार द्वारा दी गई सहायता के लिए राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को धन्यवाद भी कहा.
|
शैतानी कब्ज़ा क्या है? शैतानी कब्ज़े की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचनः
यदि वर्तमान समय में ऐसा कोई व्यक्ति उभरे, जो चिह्न और चमत्कार प्रदर्शित करने, दुष्टात्माओं को निकालने, बीमारों को चंगा करने और कई चमत्कार दिखाने में समर्थ हो, और यदि वह व्यक्ति दावा करे कि वह यीशु है जो आ गया है, तो यह बुरी आत्माओं द्वारा उत्पन्न नकली व्यक्ति होगा, जो यीशु की नकल उतार रहा होगा। यह याद रखो! परमेश्वर वही कार्य नहीं दोहराता। कार्य का यीशु का चरण पहले ही पूरा हो चुका है, और परमेश्वर कार्य के उस चरण को पुनः कभी हाथ में नहीं लेगा। परमेश्वर का कार्य मनुष्य की धारणाओं के साथ मेल नहीं खाता; उदाहरण के लिए, पुराने नियम ने मसीहा के आगमन की भविष्यवाणी की, और इस भविष्यवाणी का परिणाम यीशु का आगमन था। चूँकि यह पहले ही घटित हो चुका है, इसलिए एक और मसीहा का पुनः आना ग़लत होगा। यीशु एक बार पहले ही आ चुका है, और यदि यीशु को इस समय फिर आना पड़ा, तो यह गलत होगा। प्रत्येक युग के लिए एक नाम है, और प्रत्येक नाम में उस युग का चरित्र-चित्रण होता है। मनुष्य की धारणाओं के अनुसार, परमेश्वर को सदैव चिह्न और चमत्कार दिखाने चाहिए, सदैव बीमारों को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना चाहिए, और सदैव ठीक यीशु के समान होना चाहिए। परंतु इस बार परमेश्वर इसके समान बिल्कुल नहीं है। यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अब भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करे, और अब भी दुष्टात्माओं को निकाले और बीमारों को चंगा करे - यदि वह बिल्कुल यीशु की तरह करे - तो परमेश्वर वही कार्य दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं रह जाएगा। इसलिए परमेश्वर प्रत्येक युग में कार्य का एक चरण पूरा करता है। ज्यों ही उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा होता है, बुरी आत्माएँ शीघ्र ही उसकी नकल करने लगती हैं, और जब शैतान परमेश्वर के बिल्कुल पीछे-पीछे चलने लगता है, तब परमेश्वर तरीक़ा बदलकर भिन्न तरीक़ा अपना लेता है। ज्यों ही परमेश्वर ने अपने कार्य का एक चरण पूरा किया, बुरी आत्माएँ उसकी नकल कर लेती हैं। तुम लोगों को इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए।
कुछ ऐसे लोग हैं, जो दुष्टात्माओं से ग्रस्त हैं और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते रहते हैं, "मैं परमेश्वर हूँ!" लेकिन अंत में, उनका भेद खुल जाता है, क्योंकि वे गलत चीज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे शैतान का प्रतिनिधित्व करते हैं, और पवित्र आत्मा उन पर कोई ध्यान नहीं देता। तुम अपने आपको कितना भी बड़ा ठहराओ या तुम कितना भी जोर से चिल्लाओ, तुम फिर भी एक सृजित प्राणी ही रहते हो और एक ऐसा प्राणी, जो शैतान से संबंधित है। मैं कभी नहीं चिल्लाता, "मैं परमेश्वर हूँ, मैं परमेश्वर का प्रिय पुत्र हूँ!" परंतु जो कार्य मैं करता हूँ, वह परमेश्वर का कार्य है। क्या मुझे चिल्लाने की आवश्यकता है? मुझे ऊँचा उठाए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर अपना काम स्वयं करता है और वह नहीं चाहता कि मनुष्य उसे हैसियत या सम्मानजनक उपाधि प्रदान करे : उसका काम उसकी पहचान और हैसियत का प्रतिनिधित्व करता है। अपने बपतिस्मा से पहले क्या यीशु स्वयं परमेश्वर नहीं था? क्या वह परमेश्वर द्वारा धारित देह नहीं था? निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि केवल गवाही मिलने के पश्चात् ही वह परमेश्वर का इकलौता पुत्र बना। क्या उसके द्वारा काम शुरू करने से बहुत पहले ही यीशु नाम का कोई व्यक्ति नहीं था? तुम नए मार्ग लाने या पवित्रात्मा का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ हो। तुम पवित्र आत्मा के कार्य को या उसके द्वारा बोले जाने वाले वचनों को व्यक्त नहीं कर सकते। तुम स्वयं परमेश्वर का या पवित्रात्मा का कार्य करने में असमर्थ हो। परमेश्वर की बुद्धि, चमत्कार और अगाधता, और उसके स्वभाव की समग्रता, जिसके द्वारा परमेश्वर मनुष्य को ताड़ना देता है - इन सबको व्यक्त करना तुम्हारी क्षमता के बाहर है। इसलिए परमेश्वर होने का दावा करने की कोशिश करना व्यर्थ होगा; तुम्हारे पास सिर्फ़ नाम होगा और कोई सार नहीं होगा। स्वयं परमेश्वर आ गया है, किंतु कोई उसे नहीं पहचानता, फिर भी वह अपना काम जारी रखता है और ऐसा वह पवित्रात्मा के प्रतिनिधित्व में करता है। चाहे तुम उसे मनुष्य कहो या परमेश्वर, प्रभु कहो या मसीह, या उसे बहन कहो, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। परंतु जो कार्य वह करता है, वह पवित्रात्मा का है और वह स्वयं परमेश्वर के कार्य का प्रतिनिधित्व करता है। वह इस बात की परवाह नहीं करता कि मनुष्य उसे किस नाम से पुकारता है। क्या वह नाम उसके काम का निर्धारण कर सकता है? चाहे तुम उसे कुछ भी कहकर पुकारो, जहाँ तक परमेश्वर का संबंध है, वह परमेश्वर के आत्मा का देहधारी स्वरूप है; वह पवित्रात्मा का प्रतिनिधित्व करता है और उसके द्वारा अनुमोदित है। यदि तुम एक नए युग के लिए मार्ग नहीं बना सकते, या पुराने युग का समापन नहीं कर सकते, या एक नए युग का सूत्रपात या नया कार्य नहीं कर सकते, तो तुम्हें परमेश्वर नहीं कहा जा सकता!
- वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, देहधारण का रहस्य (1)
कुछ लोग होते हैं जो जब तक कोई मुद्दा नहीं उठता, बहुत सामान्य होते हैं, जो बहुत सामान्य रूप से बात करते और चर्चा करते हैं, जो सामान्य लगते हैं और जो कुछ भी बुरा नहीं करते हैं। लेकिन जब सभाओं में परमेश्वर के वचनों को पढ़ा जा रहा होता है, जब सत्य की संगति की जा रही होती है, तो वे अचानक असामान्य व्यवहार करने लगते हैं। कुछ सुनना सहन नहीं कर पाते, कुछ ऊंघने लगते हैं और कुछ बीमार पड़ जाते हैं, यह कहते हुए कि उन्हें बुरा लग रहा है और वे अब और नहीं सुनना चाहते। वे बिल्कुल अनजान होते हैं-यहां क्या कुछ चल रहा है? उन पर एक दुष्ट आत्मा चढ़ी होती है। तो फिर किसी दुष्ट आत्मा के अधीन होकर वे लोग ये शब्द क्यों बोलते रहते हैं "मैं इसे नहीं सुनना चाहता"? कभी-कभी लोग समझ नहीं पाते हैं कि यहां क्या हो रहा है, लेकिन एक दुष्ट आत्मा के लिए यह बिल्कुल स्पष्ट होता है। मसीह-विरोधियों में यही आत्मा होती है। तुम उनसे पूछो कि वे सत्य के प्रति इतने शत्रुतापूर्ण क्यों हैं, तो वे कहेंगे कि वे नहीं हैं, और वे दृढ़तापूर्वक इसे मानने से इनकार करेंगे। लेकिन अपने दिल में वे जानते हैं कि वे सत्य से प्रेम नहीं करते। जब वे परमेश्वर के वचन नहीं पढ़ते, तब दूसरों से मिलने-जुलने में वे सामान्य लगते हैं। तुम्हें पता नहीं चलेगा कि उनके अंदर क्या चल रहा है। जब वे कोशिश करके परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं, तो तुरंत उनके मुँह से ये शब्द निकलते हैं, "मैं इसे नहीं सुनना चाहता"; उनकी प्रकृति उजागर हो जाती है और वे जो हैं, यही हैं। क्या परमेश्वर के वचनों ने उन्हें उकसाया है, प्रकट किया है या वहां चोट पहुँचाई है, जहां दर्द होता है? ऐसा कुछ भी नहीं। दरअसल हुआ यह है कि जब बाकी सभी लोग परमेश्वर के वचन पढ़ रहे होते हैं, वे कहते हैं कि वे उसे नहीं सुनना चाहते। क्या वे दुष्ट नहीं हैं? (हाँ।) दुष्ट होने का क्या अर्थ होता है? इसका अर्थ होता है बिना किसी स्पष्ट कारण और बिना जाने क्यों किसी चीज़ के प्रति और सकारात्मक चीज़ों के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण होना। वे वास्तव में कहना चाहते हैं, "जैसे ही मुझे परमेश्वर के वचन सुनाई पड़ते हैं, ये बात मेरे मुँह में आ जाती है; जैसे ही मुझे परमेश्वर की गवाही सुनाई पड़ती है, मुझमें विरक्ति पैदा हो जाती है, मुझे नहीं पता क्यों। जब मैं किसी ऐसे व्यक्ति को देखता हूँ, जो सत्य का अनुसरण करता है या सत्य से प्रेम करता है, मैं उन्हें चुनौती देना चाहता हूँ, मैं हमेशा उन्हें डांटना चाहता हूँ या उनकी पीठ पीछे उन्हें नुकसान पहुँचाने वाला कोई काम करना चाहता हूँ, मैं उन्हें मार देना चाहता हूँ।" ऐसा कहना उनकी दुष्टता दर्शाता है। दरअसल, शुरुआत से ही मसीह-विरोधियों में कभी भी सामान्य व्यक्ति की आत्मा नहीं रही और उनमें कभी भी सामान्य मानवता नहीं रही-वास्तव में यही सब चल रहा है।
संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरणः
राक्षसों के कब्ज़े में वे लोग होते हैं जो दुष्ट आत्माओं द्वारा दबाये गए और नियंत्रित होते हैं। मनोविक्षिप्ति या कभी-कभी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाना और सामान्य विवेक को पूरी तरह से खो देना, इसकी मुख्य अभिव्यक्ति होती है। ऐसे लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ होते हैं और केवल विघ्न और उपद्रव पैदा करने वाली भूमिकाएँ निभाकर शैतान के सेवक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसलिए, वे परमेश्वर में विश्वास तो करते हैं लेकिन बचाये नहीं जा सकते हैं और उन्हें निष्कासित कर देना चाहिए। बुरी आत्माओं के वशीभूत लोग प्राथमिक रूप से स्वयं को नीचे लिखे दस तरीक़ों से व्यक्त करते हैं :
1. जो लोग परमेश्वर या मसीह होने का नाटक करते हैं वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।
2. जो लोग यह ढोंग करते हैं कि उनमें स्वर्गदूतों की आत्माएँ बसी हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।
3. जो लोग एक और देहधारी परमेश्वर होने का नाटक करते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।
4. जो लोग परमेश्वर के वचनों को अपने शब्द बताते हैं या लोगों से अपने वचनों को परमेश्वर के वचन मान लेने के लिए कहते हैं, वे सभी दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं।
5. जो लोग अपना अनुसरण और आज्ञापालन करवाने के लिए पवित्र आत्मा द्वारा अपना उपयोग किये जाने का नाटक करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं।
6. जो लोग अक्सर ज़ुबानों में बोलते हैं, भाषाओँ की व्याख्या करते हैं, और सभी प्रकार के अलौकिक दृश्यों को देख सकते हैं, या अक्सर दूसरों के पापों को इंगित करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं।
7. जो लोग अक्सर आत्माओं की अलौकिक बातें सुनते हैं या आत्माओं की आवाज़ें सुनते हैं या अक्सर भूतों को देखते हैं, और जो लोग स्पष्ट रूप से कुछ हद तक दिमाग से सही नहीं होते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में हैं।
8. जो सामान्य मानवता की मानसिक क्षमताएँ गँवा देता है, जो अक्सर शैतानी बातें कहते हैं, अक्सर खुद से बात करते हैं, बकबक करते हैं या अक्सर कहते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें निर्देश दिया है और पवित्र आत्मा ने उन्हें छुआ है, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं।
9. जिन लोगों के साथ मनोविक्षिप्ति की घटनाएँ हो चुकी हैं, जो मूर्खतापूर्ण काम करते हैं, जो लोगों से सहजता से बात नहीं कर पाते हैं और कभी-कभी पागल-से और खोये-से रहते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं। जो लोग समलैंगिकों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं राक्षसों के कब्ज़े में रहने वाले लोग हैं, वे भी निष्कासित किये जाएँगे।
10. कुछ लोग आमतौर पर काफी सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ महीनों या एक-दो वर्षों में, उत्तेजित हो सकते हैं और उनमें कोई मानसिक विकार पैदा हो सकता है। विकार के समय वे पूरी तरह से उन लोगों के समान होते हैं जो राक्षसों के वश में हैं। यद्यपि ये लोग कभी-कभी सामान्य होते हैं, फिर भी उन्हें दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में रहे लोगों की तरह वर्गीकृत किया जाता है। (यदि किसी व्यक्ति को कई साल पहले मानसिक विकार हो चुका हो, लेकिन बाद में कई साल तक ऐसा न हुआ हो, और वह परमेश्वर में विश्वास करने के सत्य को समझ गया हो और उसे स्वीकार कर लिया हो, और उसमें कुछ बदलाव हुए हों, तो उसको बुरी आत्माओं से वशीभूत के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा।)
जो व्यक्ति राक्षसों के कब्ज़े में होता है, वह पूरी तरह से शैतान द्वारा वशीभूत, नियंत्रित और शापित होता है।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
|
शैतानी कब्ज़ा क्या है? शैतानी कब्ज़े की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? परमेश्वर के प्रासंगिक वचनः यदि वर्तमान समय में ऐसा कोई व्यक्ति उभरे, जो चिह्न और चमत्कार प्रदर्शित करने, दुष्टात्माओं को निकालने, बीमारों को चंगा करने और कई चमत्कार दिखाने में समर्थ हो, और यदि वह व्यक्ति दावा करे कि वह यीशु है जो आ गया है, तो यह बुरी आत्माओं द्वारा उत्पन्न नकली व्यक्ति होगा, जो यीशु की नकल उतार रहा होगा। यह याद रखो! परमेश्वर वही कार्य नहीं दोहराता। कार्य का यीशु का चरण पहले ही पूरा हो चुका है, और परमेश्वर कार्य के उस चरण को पुनः कभी हाथ में नहीं लेगा। परमेश्वर का कार्य मनुष्य की धारणाओं के साथ मेल नहीं खाता; उदाहरण के लिए, पुराने नियम ने मसीहा के आगमन की भविष्यवाणी की, और इस भविष्यवाणी का परिणाम यीशु का आगमन था। चूँकि यह पहले ही घटित हो चुका है, इसलिए एक और मसीहा का पुनः आना ग़लत होगा। यीशु एक बार पहले ही आ चुका है, और यदि यीशु को इस समय फिर आना पड़ा, तो यह गलत होगा। प्रत्येक युग के लिए एक नाम है, और प्रत्येक नाम में उस युग का चरित्र-चित्रण होता है। मनुष्य की धारणाओं के अनुसार, परमेश्वर को सदैव चिह्न और चमत्कार दिखाने चाहिए, सदैव बीमारों को चंगा करना और दुष्टात्माओं को निकालना चाहिए, और सदैव ठीक यीशु के समान होना चाहिए। परंतु इस बार परमेश्वर इसके समान बिल्कुल नहीं है। यदि अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर अब भी चिह्नों और चमत्कारों को प्रदर्शित करे, और अब भी दुष्टात्माओं को निकाले और बीमारों को चंगा करे - यदि वह बिल्कुल यीशु की तरह करे - तो परमेश्वर वही कार्य दोहरा रहा होगा, और यीशु के कार्य का कोई महत्व या मूल्य नहीं रह जाएगा। इसलिए परमेश्वर प्रत्येक युग में कार्य का एक चरण पूरा करता है। ज्यों ही उसके कार्य का प्रत्येक चरण पूरा होता है, बुरी आत्माएँ शीघ्र ही उसकी नकल करने लगती हैं, और जब शैतान परमेश्वर के बिल्कुल पीछे-पीछे चलने लगता है, तब परमेश्वर तरीक़ा बदलकर भिन्न तरीक़ा अपना लेता है। ज्यों ही परमेश्वर ने अपने कार्य का एक चरण पूरा किया, बुरी आत्माएँ उसकी नकल कर लेती हैं। तुम लोगों को इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए। कुछ ऐसे लोग हैं, जो दुष्टात्माओं से ग्रस्त हैं और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते रहते हैं, "मैं परमेश्वर हूँ!" लेकिन अंत में, उनका भेद खुल जाता है, क्योंकि वे गलत चीज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे शैतान का प्रतिनिधित्व करते हैं, और पवित्र आत्मा उन पर कोई ध्यान नहीं देता। तुम अपने आपको कितना भी बड़ा ठहराओ या तुम कितना भी जोर से चिल्लाओ, तुम फिर भी एक सृजित प्राणी ही रहते हो और एक ऐसा प्राणी, जो शैतान से संबंधित है। मैं कभी नहीं चिल्लाता, "मैं परमेश्वर हूँ, मैं परमेश्वर का प्रिय पुत्र हूँ!" परंतु जो कार्य मैं करता हूँ, वह परमेश्वर का कार्य है। क्या मुझे चिल्लाने की आवश्यकता है? मुझे ऊँचा उठाए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर अपना काम स्वयं करता है और वह नहीं चाहता कि मनुष्य उसे हैसियत या सम्मानजनक उपाधि प्रदान करे : उसका काम उसकी पहचान और हैसियत का प्रतिनिधित्व करता है। अपने बपतिस्मा से पहले क्या यीशु स्वयं परमेश्वर नहीं था? क्या वह परमेश्वर द्वारा धारित देह नहीं था? निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि केवल गवाही मिलने के पश्चात् ही वह परमेश्वर का इकलौता पुत्र बना। क्या उसके द्वारा काम शुरू करने से बहुत पहले ही यीशु नाम का कोई व्यक्ति नहीं था? तुम नए मार्ग लाने या पवित्रात्मा का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ हो। तुम पवित्र आत्मा के कार्य को या उसके द्वारा बोले जाने वाले वचनों को व्यक्त नहीं कर सकते। तुम स्वयं परमेश्वर का या पवित्रात्मा का कार्य करने में असमर्थ हो। परमेश्वर की बुद्धि, चमत्कार और अगाधता, और उसके स्वभाव की समग्रता, जिसके द्वारा परमेश्वर मनुष्य को ताड़ना देता है - इन सबको व्यक्त करना तुम्हारी क्षमता के बाहर है। इसलिए परमेश्वर होने का दावा करने की कोशिश करना व्यर्थ होगा; तुम्हारे पास सिर्फ़ नाम होगा और कोई सार नहीं होगा। स्वयं परमेश्वर आ गया है, किंतु कोई उसे नहीं पहचानता, फिर भी वह अपना काम जारी रखता है और ऐसा वह पवित्रात्मा के प्रतिनिधित्व में करता है। चाहे तुम उसे मनुष्य कहो या परमेश्वर, प्रभु कहो या मसीह, या उसे बहन कहो, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। परंतु जो कार्य वह करता है, वह पवित्रात्मा का है और वह स्वयं परमेश्वर के कार्य का प्रतिनिधित्व करता है। वह इस बात की परवाह नहीं करता कि मनुष्य उसे किस नाम से पुकारता है। क्या वह नाम उसके काम का निर्धारण कर सकता है? चाहे तुम उसे कुछ भी कहकर पुकारो, जहाँ तक परमेश्वर का संबंध है, वह परमेश्वर के आत्मा का देहधारी स्वरूप है; वह पवित्रात्मा का प्रतिनिधित्व करता है और उसके द्वारा अनुमोदित है। यदि तुम एक नए युग के लिए मार्ग नहीं बना सकते, या पुराने युग का समापन नहीं कर सकते, या एक नए युग का सूत्रपात या नया कार्य नहीं कर सकते, तो तुम्हें परमेश्वर नहीं कहा जा सकता! - वचन, खंड एक, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, देहधारण का रहस्य कुछ लोग होते हैं जो जब तक कोई मुद्दा नहीं उठता, बहुत सामान्य होते हैं, जो बहुत सामान्य रूप से बात करते और चर्चा करते हैं, जो सामान्य लगते हैं और जो कुछ भी बुरा नहीं करते हैं। लेकिन जब सभाओं में परमेश्वर के वचनों को पढ़ा जा रहा होता है, जब सत्य की संगति की जा रही होती है, तो वे अचानक असामान्य व्यवहार करने लगते हैं। कुछ सुनना सहन नहीं कर पाते, कुछ ऊंघने लगते हैं और कुछ बीमार पड़ जाते हैं, यह कहते हुए कि उन्हें बुरा लग रहा है और वे अब और नहीं सुनना चाहते। वे बिल्कुल अनजान होते हैं-यहां क्या कुछ चल रहा है? उन पर एक दुष्ट आत्मा चढ़ी होती है। तो फिर किसी दुष्ट आत्मा के अधीन होकर वे लोग ये शब्द क्यों बोलते रहते हैं "मैं इसे नहीं सुनना चाहता"? कभी-कभी लोग समझ नहीं पाते हैं कि यहां क्या हो रहा है, लेकिन एक दुष्ट आत्मा के लिए यह बिल्कुल स्पष्ट होता है। मसीह-विरोधियों में यही आत्मा होती है। तुम उनसे पूछो कि वे सत्य के प्रति इतने शत्रुतापूर्ण क्यों हैं, तो वे कहेंगे कि वे नहीं हैं, और वे दृढ़तापूर्वक इसे मानने से इनकार करेंगे। लेकिन अपने दिल में वे जानते हैं कि वे सत्य से प्रेम नहीं करते। जब वे परमेश्वर के वचन नहीं पढ़ते, तब दूसरों से मिलने-जुलने में वे सामान्य लगते हैं। तुम्हें पता नहीं चलेगा कि उनके अंदर क्या चल रहा है। जब वे कोशिश करके परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं, तो तुरंत उनके मुँह से ये शब्द निकलते हैं, "मैं इसे नहीं सुनना चाहता"; उनकी प्रकृति उजागर हो जाती है और वे जो हैं, यही हैं। क्या परमेश्वर के वचनों ने उन्हें उकसाया है, प्रकट किया है या वहां चोट पहुँचाई है, जहां दर्द होता है? ऐसा कुछ भी नहीं। दरअसल हुआ यह है कि जब बाकी सभी लोग परमेश्वर के वचन पढ़ रहे होते हैं, वे कहते हैं कि वे उसे नहीं सुनना चाहते। क्या वे दुष्ट नहीं हैं? दुष्ट होने का क्या अर्थ होता है? इसका अर्थ होता है बिना किसी स्पष्ट कारण और बिना जाने क्यों किसी चीज़ के प्रति और सकारात्मक चीज़ों के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण होना। वे वास्तव में कहना चाहते हैं, "जैसे ही मुझे परमेश्वर के वचन सुनाई पड़ते हैं, ये बात मेरे मुँह में आ जाती है; जैसे ही मुझे परमेश्वर की गवाही सुनाई पड़ती है, मुझमें विरक्ति पैदा हो जाती है, मुझे नहीं पता क्यों। जब मैं किसी ऐसे व्यक्ति को देखता हूँ, जो सत्य का अनुसरण करता है या सत्य से प्रेम करता है, मैं उन्हें चुनौती देना चाहता हूँ, मैं हमेशा उन्हें डांटना चाहता हूँ या उनकी पीठ पीछे उन्हें नुकसान पहुँचाने वाला कोई काम करना चाहता हूँ, मैं उन्हें मार देना चाहता हूँ।" ऐसा कहना उनकी दुष्टता दर्शाता है। दरअसल, शुरुआत से ही मसीह-विरोधियों में कभी भी सामान्य व्यक्ति की आत्मा नहीं रही और उनमें कभी भी सामान्य मानवता नहीं रही-वास्तव में यही सब चल रहा है। संदर्भ के लिए धर्मोपदेश और संगति के उद्धरणः राक्षसों के कब्ज़े में वे लोग होते हैं जो दुष्ट आत्माओं द्वारा दबाये गए और नियंत्रित होते हैं। मनोविक्षिप्ति या कभी-कभी मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाना और सामान्य विवेक को पूरी तरह से खो देना, इसकी मुख्य अभिव्यक्ति होती है। ऐसे लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ होते हैं और केवल विघ्न और उपद्रव पैदा करने वाली भूमिकाएँ निभाकर शैतान के सेवक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसलिए, वे परमेश्वर में विश्वास तो करते हैं लेकिन बचाये नहीं जा सकते हैं और उन्हें निष्कासित कर देना चाहिए। बुरी आत्माओं के वशीभूत लोग प्राथमिक रूप से स्वयं को नीचे लिखे दस तरीक़ों से व्यक्त करते हैं : एक. जो लोग परमेश्वर या मसीह होने का नाटक करते हैं वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं। दो. जो लोग यह ढोंग करते हैं कि उनमें स्वर्गदूतों की आत्माएँ बसी हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं। तीन. जो लोग एक और देहधारी परमेश्वर होने का नाटक करते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं। चार. जो लोग परमेश्वर के वचनों को अपने शब्द बताते हैं या लोगों से अपने वचनों को परमेश्वर के वचन मान लेने के लिए कहते हैं, वे सभी दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं। पाँच. जो लोग अपना अनुसरण और आज्ञापालन करवाने के लिए पवित्र आत्मा द्वारा अपना उपयोग किये जाने का नाटक करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में होते हैं। छः. जो लोग अक्सर ज़ुबानों में बोलते हैं, भाषाओँ की व्याख्या करते हैं, और सभी प्रकार के अलौकिक दृश्यों को देख सकते हैं, या अक्सर दूसरों के पापों को इंगित करते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में होते हैं। सात. जो लोग अक्सर आत्माओं की अलौकिक बातें सुनते हैं या आत्माओं की आवाज़ें सुनते हैं या अक्सर भूतों को देखते हैं, और जो लोग स्पष्ट रूप से कुछ हद तक दिमाग से सही नहीं होते हैं, वे दुष्ट आत्माओं के वश में हैं। आठ. जो सामान्य मानवता की मानसिक क्षमताएँ गँवा देता है, जो अक्सर शैतानी बातें कहते हैं, अक्सर खुद से बात करते हैं, बकबक करते हैं या अक्सर कहते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें निर्देश दिया है और पवित्र आत्मा ने उन्हें छुआ है, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं। नौ. जिन लोगों के साथ मनोविक्षिप्ति की घटनाएँ हो चुकी हैं, जो मूर्खतापूर्ण काम करते हैं, जो लोगों से सहजता से बात नहीं कर पाते हैं और कभी-कभी पागल-से और खोये-से रहते हैं, वे सब दुष्ट आत्माओं के वश में हैं। जो लोग समलैंगिकों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं राक्षसों के कब्ज़े में रहने वाले लोग हैं, वे भी निष्कासित किये जाएँगे। दस. कुछ लोग आमतौर पर काफी सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ महीनों या एक-दो वर्षों में, उत्तेजित हो सकते हैं और उनमें कोई मानसिक विकार पैदा हो सकता है। विकार के समय वे पूरी तरह से उन लोगों के समान होते हैं जो राक्षसों के वश में हैं। यद्यपि ये लोग कभी-कभी सामान्य होते हैं, फिर भी उन्हें दुष्ट आत्माओं के कब्ज़े में रहे लोगों की तरह वर्गीकृत किया जाता है। जो व्यक्ति राक्षसों के कब्ज़े में होता है, वह पूरी तरह से शैतान द्वारा वशीभूत, नियंत्रित और शापित होता है। परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
|
- #Powerअब रात में AC, Cooler चलाना पड़ेगा महंगा, सरकार वसूलेगी ज्यादा बिजली बिल, जानें क्या है वजह?
नई दिल्ली, 18 मईः भीषण गर्मी की वजह से बिजली की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है, इसके चलते कुछ दिनों पहले कोयला संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद केंद्र सरकार एक्शन में आई और राज्यों तक ट्रेनों के जरिए कोयला पहुंचाया गया, जिससे अस्थायी राहत तो मिल गई, लेकिन कई राज्य अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं। जिस वजह से केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने उन्हें पत्र लिखा। साथ ही जल्द से जल्द कोयले के आयात की व्यवस्था करने को कहा।
विद्युत मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने राज्यों को लिखा कि मानसून के दौरान उनकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए जेनको ( Gencos) को कोयले के आयात के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा जा सकता है। मंत्री ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल को अलग-अलग पत्रों में चिंता व्यक्त की है कि इन राज्यों में कोयला आयात के लिए निविदा प्रक्रिया या तो शुरू नहीं हुईं या फिर पूरी नहीं हुईं।
विद्युत मंत्रालय ने पहले स्टेट जेनको को सम्मिश्रण उद्देश्यों के लिए कोयले की आवश्यकता का 10% आयात करने की सलाह दी थी, ताकि 30 जून 2022 तक 50% मात्रा, 31 अगस्त 2022 तक 40% और 31 अक्टूबर 2022 तक शेष 10% की डिलीवरी सुनिश्चित हो।
वहीं सीएम अशोक गहलोत ने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्यों पर 3 गुना महंगा कोयला खरीदने के लिए दबाव बना रही है। अगर राजस्थान आयातित कोयले की खरीद करता है तो उसे 1,736 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ेगा। इस वजह से वो चाहते हैं कि उनको घरेलू कोयला उपलब्ध करवाया जाए। सीएम गहलोत के मुताबिक उन्होंने हाल ही में बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें बिजली उत्पादन इकाइयों का संचालन सुनिश्चित करने और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
|
- #Powerअब रात में AC, Cooler चलाना पड़ेगा महंगा, सरकार वसूलेगी ज्यादा बिजली बिल, जानें क्या है वजह? नई दिल्ली, अट्ठारह मईः भीषण गर्मी की वजह से बिजली की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है, इसके चलते कुछ दिनों पहले कोयला संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद केंद्र सरकार एक्शन में आई और राज्यों तक ट्रेनों के जरिए कोयला पहुंचाया गया, जिससे अस्थायी राहत तो मिल गई, लेकिन कई राज्य अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं। जिस वजह से केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने उन्हें पत्र लिखा। साथ ही जल्द से जल्द कोयले के आयात की व्यवस्था करने को कहा। विद्युत मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने राज्यों को लिखा कि मानसून के दौरान उनकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए जेनको को कोयले के आयात के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा जा सकता है। मंत्री ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल को अलग-अलग पत्रों में चिंता व्यक्त की है कि इन राज्यों में कोयला आयात के लिए निविदा प्रक्रिया या तो शुरू नहीं हुईं या फिर पूरी नहीं हुईं। विद्युत मंत्रालय ने पहले स्टेट जेनको को सम्मिश्रण उद्देश्यों के लिए कोयले की आवश्यकता का दस% आयात करने की सलाह दी थी, ताकि तीस जून दो हज़ार बाईस तक पचास% मात्रा, इकतीस अगस्त दो हज़ार बाईस तक चालीस% और इकतीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस तक शेष दस% की डिलीवरी सुनिश्चित हो। वहीं सीएम अशोक गहलोत ने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्यों पर तीन गुना महंगा कोयला खरीदने के लिए दबाव बना रही है। अगर राजस्थान आयातित कोयले की खरीद करता है तो उसे एक,सात सौ छत्तीस करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ेगा। इस वजह से वो चाहते हैं कि उनको घरेलू कोयला उपलब्ध करवाया जाए। सीएम गहलोत के मुताबिक उन्होंने हाल ही में बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें बिजली उत्पादन इकाइयों का संचालन सुनिश्चित करने और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
|
आंकड़ों के मुताबिक, 25% से अधिक महिलाएं अच्छे बालों के मालिक हैं। पतले बाल अपने गृहिणियों को कुछ सावधानी बरतते हैं, क्योंकि अच्छे बाल कटवाने और स्टाइल के बिना वे एक महिला को कम आकर्षक बना सकते हैं। पतले बालों के साथ एक ही समस्या से छुटकारा पाने के लिए, आपको एक उपयुक्त हेयर स्टाइल का ख्याल रखना चाहिए।
सभी महिलाओं के हेयर स्टाइल और हेयरकूट ठीक बाल के लिए उपयुक्त नहीं हैं। मेले सेक्स में से कई फैशन सूची में अपनी छवि का चयन करते हैं, इस पर विचार नहीं करते कि तस्वीर में मॉडल में बाल की संरचना पूरी तरह से अलग हो सकती है। इस प्रकार, महिला खुद को विफलता की निंदा करती है और कई मामलों में बाल कटवाने असफल होता है। केवल यह जानकर कि बाल कटवाने नाज़ुक बालों के लिए उपयुक्त है, आप एक आश्चर्यजनक छवि बना सकते हैं, जो कि शानदार बाल के मालिक भी ईर्ष्या करेंगे।
स्टाइलिस्ट कहते हैं कि लंबे पतले बाल सबसे अच्छा विकल्प नहीं है। बड़ी लंबाई के पतले बाल रखना मुश्किल है, और बिछाने स्वयं प्रतिरोधी नहीं है। फिर भी, पतले और दुर्लभ बालों के लिए हेयर स्टाइल के लिए कई नियम हैं, जो मात्रा को दृष्टि में बढ़ा सकते हैं।
- एक बहु-स्तर फैशन में एक बाल कटवाने किया जाना चाहिए। विभिन्न लंबाई के बाल दृष्टि से अधिक शानदार लगते हैं, और लापरवाही के प्रभाव को बनाने की अनुमति देते हैं।
- पतले, दुर्लभ बालों के लिए सबसे अच्छे बाल कटवाने में से एक परतों का बाल कटवाने है, जो ताज पर बालों के बड़े हिस्से को केंद्रित करता है। इस बाल कटवाने का पूरक एक मोटी लंबी बैंग्स है।
- पतले और घुंघराले बालों के लिए हेयरकूट या हेयर स्टाइल बनाते समय , आपको निश्चित रूप से एक धमाके छोड़ना चाहिए। बिछाने के लिए, संदंश का प्रयोग न करें - यह पतले बालों को कमजोर करता है। सबसे अच्छा विकल्प छोटे बाल कर्लर हैं - और अधिक घुमावदार बाल, वे अधिक शानदार दिखते हैं।
मध्यम लंबाई के पतले बाल के साथ, लंबे बाल के साथ संभालना बहुत आसान है। फिर भी, लंबे पतले बाल के लिए बाल कटवाने और हेयर स्टाइल के सभी नियम मध्यम बाल के लिए उपयुक्त हैं।
हाइलाइट्स के माध्यम से मध्यम लंबाई के अच्छे बाल की मात्रा में दृष्टि से वृद्धि करना संभव है। एक रंग में बालों को रंगना वॉल्यूम प्रभाव नहीं बना सकता है। इसलिए, रंग बदलने के लिए कम से कम 2 रंगों का उपयोग किया जाना चाहिए। धुंधला होने की प्रक्रिया बहुत ही सभ्य होनी चाहिए, क्योंकि आक्रामक तरीके पहले से ही पतले बालों की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मध्यम पतले बालों के लिए एक शानदार हेयर स्टाइल बनाने के लिए, एक बड़े व्यास दौर ब्रश का उपयोग करें। बालों को थोड़ा मोड़ और उठाया जाना चाहिए। आप जड़ों से शुरू होने वाले जेल या वार्निश के साथ उठाए गए बालों को ठीक कर सकते हैं।
पतली मध्यम बालों के लिए सबसे अच्छे हेयर स्टाइल में से एक है जो विभिन्न लंबाई के बड़े आकार के होते हैं, जो ताज पर उठाए जाते हैं और पूरे लंबाई के साथ एक गोल कंघी के साथ तय होते हैं।
विशेषज्ञों का तर्क है कि पतले बालों के लिए, सबसे उपयुक्त एक छोटा बाल कटवाने है। छोटे बाल रखना और ठीक करना आसान है। और छोटे बाल पर बनाई गई मात्रा, लंबे समय तक बनी हुई है। आज के लिए छोटे पतले बाल के लिए फैशनेबल बाल कटवाने का एक द्रव्यमान है। सबसे लोकप्रियः
- बाल कटवाने "बॉब"। स्टाइलिस्ट ताज पर बालों की लंबाई और सिर के पीछे की ओर बनाता है, जिससे ताले की मदद से पूरे सिर पर भी वॉल्यूम बनाना संभव हो जाता है;
- बाल कटवाने, सिर के पीछे और लंबे समय तक लंबे बाल छोड़कर;
- बाल कैंची, गर्म कैंची का उपयोग - बहुत कम पतले बाल के लिए सबसे अच्छे बाल कटवाने में से एक ।
|
आंकड़ों के मुताबिक, पच्चीस% से अधिक महिलाएं अच्छे बालों के मालिक हैं। पतले बाल अपने गृहिणियों को कुछ सावधानी बरतते हैं, क्योंकि अच्छे बाल कटवाने और स्टाइल के बिना वे एक महिला को कम आकर्षक बना सकते हैं। पतले बालों के साथ एक ही समस्या से छुटकारा पाने के लिए, आपको एक उपयुक्त हेयर स्टाइल का ख्याल रखना चाहिए। सभी महिलाओं के हेयर स्टाइल और हेयरकूट ठीक बाल के लिए उपयुक्त नहीं हैं। मेले सेक्स में से कई फैशन सूची में अपनी छवि का चयन करते हैं, इस पर विचार नहीं करते कि तस्वीर में मॉडल में बाल की संरचना पूरी तरह से अलग हो सकती है। इस प्रकार, महिला खुद को विफलता की निंदा करती है और कई मामलों में बाल कटवाने असफल होता है। केवल यह जानकर कि बाल कटवाने नाज़ुक बालों के लिए उपयुक्त है, आप एक आश्चर्यजनक छवि बना सकते हैं, जो कि शानदार बाल के मालिक भी ईर्ष्या करेंगे। स्टाइलिस्ट कहते हैं कि लंबे पतले बाल सबसे अच्छा विकल्प नहीं है। बड़ी लंबाई के पतले बाल रखना मुश्किल है, और बिछाने स्वयं प्रतिरोधी नहीं है। फिर भी, पतले और दुर्लभ बालों के लिए हेयर स्टाइल के लिए कई नियम हैं, जो मात्रा को दृष्टि में बढ़ा सकते हैं। - एक बहु-स्तर फैशन में एक बाल कटवाने किया जाना चाहिए। विभिन्न लंबाई के बाल दृष्टि से अधिक शानदार लगते हैं, और लापरवाही के प्रभाव को बनाने की अनुमति देते हैं। - पतले, दुर्लभ बालों के लिए सबसे अच्छे बाल कटवाने में से एक परतों का बाल कटवाने है, जो ताज पर बालों के बड़े हिस्से को केंद्रित करता है। इस बाल कटवाने का पूरक एक मोटी लंबी बैंग्स है। - पतले और घुंघराले बालों के लिए हेयरकूट या हेयर स्टाइल बनाते समय , आपको निश्चित रूप से एक धमाके छोड़ना चाहिए। बिछाने के लिए, संदंश का प्रयोग न करें - यह पतले बालों को कमजोर करता है। सबसे अच्छा विकल्प छोटे बाल कर्लर हैं - और अधिक घुमावदार बाल, वे अधिक शानदार दिखते हैं। मध्यम लंबाई के पतले बाल के साथ, लंबे बाल के साथ संभालना बहुत आसान है। फिर भी, लंबे पतले बाल के लिए बाल कटवाने और हेयर स्टाइल के सभी नियम मध्यम बाल के लिए उपयुक्त हैं। हाइलाइट्स के माध्यम से मध्यम लंबाई के अच्छे बाल की मात्रा में दृष्टि से वृद्धि करना संभव है। एक रंग में बालों को रंगना वॉल्यूम प्रभाव नहीं बना सकता है। इसलिए, रंग बदलने के लिए कम से कम दो रंगों का उपयोग किया जाना चाहिए। धुंधला होने की प्रक्रिया बहुत ही सभ्य होनी चाहिए, क्योंकि आक्रामक तरीके पहले से ही पतले बालों की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मध्यम पतले बालों के लिए एक शानदार हेयर स्टाइल बनाने के लिए, एक बड़े व्यास दौर ब्रश का उपयोग करें। बालों को थोड़ा मोड़ और उठाया जाना चाहिए। आप जड़ों से शुरू होने वाले जेल या वार्निश के साथ उठाए गए बालों को ठीक कर सकते हैं। पतली मध्यम बालों के लिए सबसे अच्छे हेयर स्टाइल में से एक है जो विभिन्न लंबाई के बड़े आकार के होते हैं, जो ताज पर उठाए जाते हैं और पूरे लंबाई के साथ एक गोल कंघी के साथ तय होते हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि पतले बालों के लिए, सबसे उपयुक्त एक छोटा बाल कटवाने है। छोटे बाल रखना और ठीक करना आसान है। और छोटे बाल पर बनाई गई मात्रा, लंबे समय तक बनी हुई है। आज के लिए छोटे पतले बाल के लिए फैशनेबल बाल कटवाने का एक द्रव्यमान है। सबसे लोकप्रियः - बाल कटवाने "बॉब"। स्टाइलिस्ट ताज पर बालों की लंबाई और सिर के पीछे की ओर बनाता है, जिससे ताले की मदद से पूरे सिर पर भी वॉल्यूम बनाना संभव हो जाता है; - बाल कटवाने, सिर के पीछे और लंबे समय तक लंबे बाल छोड़कर; - बाल कैंची, गर्म कैंची का उपयोग - बहुत कम पतले बाल के लिए सबसे अच्छे बाल कटवाने में से एक ।
|
फ्रेंच क्लब (French Club PSG) ने घोषणा की है कि बार्सिलोना (Barcelona) छोड़ने के बाद लियोनेल मेसी (Lionel Messi) ने 2 साल के लिए उनके साथ करार किया है। मेसी ने पिछले हफ्ते ही 21 साल बाद अपनी पहली टीम बार्सिलोना को छोड़ा था।
विनेश फोगाट टोक्यो ओलिंपिक में मेडल की बड़ी दावेदार मानी जा रही थी लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं था।
पीआर श्रीजेश का स्वागत करने के लिए उनके फैमली मेंबर एयरपोर्ट पहुंचे थे। एयरपोर्ट में ही उनकी मां ने उन्हें गले लगा लिया।
लोकल सर्किलों द्वारा किए गए सर्वे में इंडिया के 309 जिलों में रहने वाले 18,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया। इंडियन पैरेंट्स अपने परिवार में एक बच्चे को खेलों में अपना करियर बनाने का समर्थन करने के लिए उत्सुक दिखे।
वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा के सम्मान में एक बड़ा ऐलान किया गया है। अब से हर 7 अगस्त को जेवलिन थ्रो डे के रूप में मनाया जाएगा। भारतीय एथलेटिक महासंघ ने इस खेल से युवाओं को जोड़ने के लिए ये फैसला लिया है।
टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics 2020) में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) की जीत के बाद अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने Asianet के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कहा- ये आपकी मेहनत का फल है।
टोक्यो (Tokyo) से भारत (India) लौटने के बाद नीरज (NeerajChopra) ने चोपड़ा ने कहा कि मेडल (Gold medal) जीतने के बाद से मैं इसे अपनी जेब में लेकर घूम रहा हूं। आज भी उसे दिखाना चाहता हूं। ये मेरा मेडल नहीं, पूरे देश का मेडल है।
वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलिंपिक के समापन के बाद भारतीय दल सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत की जबरदस्त तैयारी की गई है। बैंड-बाजे के खिलाड़ियों का स्वागत किया जा रहा है। टोक्यो ओलिंपिक अभी तक भारत के लिए सबसे सफल रहा है। इस ओलंपिक में भारत ने एक गोल्ड समेत सात मेडल जीते हैं।
|
फ्रेंच क्लब ने घोषणा की है कि बार्सिलोना छोड़ने के बाद लियोनेल मेसी ने दो साल के लिए उनके साथ करार किया है। मेसी ने पिछले हफ्ते ही इक्कीस साल बाद अपनी पहली टीम बार्सिलोना को छोड़ा था। विनेश फोगाट टोक्यो ओलिंपिक में मेडल की बड़ी दावेदार मानी जा रही थी लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं था। पीआर श्रीजेश का स्वागत करने के लिए उनके फैमली मेंबर एयरपोर्ट पहुंचे थे। एयरपोर्ट में ही उनकी मां ने उन्हें गले लगा लिया। लोकल सर्किलों द्वारा किए गए सर्वे में इंडिया के तीन सौ नौ जिलों में रहने वाले अट्ठारह,शून्य से अधिक लोगों को शामिल किया गया। इंडियन पैरेंट्स अपने परिवार में एक बच्चे को खेलों में अपना करियर बनाने का समर्थन करने के लिए उत्सुक दिखे। वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा के सम्मान में एक बड़ा ऐलान किया गया है। अब से हर सात अगस्त को जेवलिन थ्रो डे के रूप में मनाया जाएगा। भारतीय एथलेटिक महासंघ ने इस खेल से युवाओं को जोड़ने के लिए ये फैसला लिया है। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा की जीत के बाद अभिनव बिंद्रा ने Asianet के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कहा- ये आपकी मेहनत का फल है। टोक्यो से भारत लौटने के बाद नीरज ने चोपड़ा ने कहा कि मेडल जीतने के बाद से मैं इसे अपनी जेब में लेकर घूम रहा हूं। आज भी उसे दिखाना चाहता हूं। ये मेरा मेडल नहीं, पूरे देश का मेडल है। वीडियो डेस्क। टोक्यो ओलिंपिक के समापन के बाद भारतीय दल सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत की जबरदस्त तैयारी की गई है। बैंड-बाजे के खिलाड़ियों का स्वागत किया जा रहा है। टोक्यो ओलिंपिक अभी तक भारत के लिए सबसे सफल रहा है। इस ओलंपिक में भारत ने एक गोल्ड समेत सात मेडल जीते हैं।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
यह एक विडियो चैट ऐप है. यह ऐप म्यूट विडियो को टेक्स्ट के साथ जोड़ने का काम करता है.
याहू ने हाल ही में अपना नया मैसेंजर ऐप याहू लाइवटेक्स्ट लॉन्च किया है- यह एक विडियो मैसेंजर है. इसे अभी होन्ग कोंग के आईओएस यूजर्स के लिए ही लॉन्च किया गया है. बता दें कि कुछ पिछले कुछ सालों तक वेब जगत में याहू मैसेंजर एक बड़ा नाम था, लेकिन बहुत सारे नए मैसेंजरों के आ जाने से इसकी प्राथमिकता समय के साथ कुछ कम होती चली गई और अब फिर से याहू ने इस प्लेटफार्म पर अपना नाम करने के लिए अपना नया मैसेंजर ऐप आईओएस लॉन्च किया है. इसे लेकर याहू का कहना है कि यह आपस में एक दूसरे को जोड़ने का एक अच्छा साधन हो सकता है.
11 जुलाई को लॉन्च हुए इस ऐप के माध्यम से आप म्यूट वीडियोस को टेक्स्ट में बदल सकते हैं. इसके साथ ही यह आपको यह अहसास भी कराता है कि आपका दोस्त आपके बिलकुल पास ही है. आपके साथ ही है. इसके माध्यम से आप विडियो और टेक्स्ट माध्यम से अपना मैसेज अपने दोस्त को भेज सकते है. बता दें कि इस ऐप के माध्यम से आप ऑडियो नहीं ले सकते हैं. क्योंकि याहू का कहना है कि आज कल के तेज़ दौड़ते विश्व में यह जरुरी नहीं है. दुनिया के सबसे मज़बूत स्मार्टफ़ोन के बारे में यहाँ पढ़ें, यह न हैक हो सकता है और न ही टूट सकता है.
याहू ने इसे अभी केवल आइओएस के लिए ही लॉन्च किया है. और यह केवल होन्ग कोंग में ही उपलब्ध है. यह शायद याहू की नई नीति हो सकती है. यह इसे पहले होन्ग कोंग में ही टेस्ट कर लेना चाहता है. और इसके बाद ही इसे विश्वभर में लॉन्च करने की सोच रहा है.
|
यह एक विडियो चैट ऐप है. यह ऐप म्यूट विडियो को टेक्स्ट के साथ जोड़ने का काम करता है. याहू ने हाल ही में अपना नया मैसेंजर ऐप याहू लाइवटेक्स्ट लॉन्च किया है- यह एक विडियो मैसेंजर है. इसे अभी होन्ग कोंग के आईओएस यूजर्स के लिए ही लॉन्च किया गया है. बता दें कि कुछ पिछले कुछ सालों तक वेब जगत में याहू मैसेंजर एक बड़ा नाम था, लेकिन बहुत सारे नए मैसेंजरों के आ जाने से इसकी प्राथमिकता समय के साथ कुछ कम होती चली गई और अब फिर से याहू ने इस प्लेटफार्म पर अपना नाम करने के लिए अपना नया मैसेंजर ऐप आईओएस लॉन्च किया है. इसे लेकर याहू का कहना है कि यह आपस में एक दूसरे को जोड़ने का एक अच्छा साधन हो सकता है. ग्यारह जुलाई को लॉन्च हुए इस ऐप के माध्यम से आप म्यूट वीडियोस को टेक्स्ट में बदल सकते हैं. इसके साथ ही यह आपको यह अहसास भी कराता है कि आपका दोस्त आपके बिलकुल पास ही है. आपके साथ ही है. इसके माध्यम से आप विडियो और टेक्स्ट माध्यम से अपना मैसेज अपने दोस्त को भेज सकते है. बता दें कि इस ऐप के माध्यम से आप ऑडियो नहीं ले सकते हैं. क्योंकि याहू का कहना है कि आज कल के तेज़ दौड़ते विश्व में यह जरुरी नहीं है. दुनिया के सबसे मज़बूत स्मार्टफ़ोन के बारे में यहाँ पढ़ें, यह न हैक हो सकता है और न ही टूट सकता है. याहू ने इसे अभी केवल आइओएस के लिए ही लॉन्च किया है. और यह केवल होन्ग कोंग में ही उपलब्ध है. यह शायद याहू की नई नीति हो सकती है. यह इसे पहले होन्ग कोंग में ही टेस्ट कर लेना चाहता है. और इसके बाद ही इसे विश्वभर में लॉन्च करने की सोच रहा है.
|
प्रदेश भर में अनुसूचित जाति वर्ग वाल्मीकि समुदाय की हड़ताल चल रही है। हड़ताल का समर्थन करने के लिए अंबेडकर विकास मंच निवाई के पदाधिकारियों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में वाल्मीकि समुदाय के साथ हो रहे कुठाराघात का विरोध किया। ज्ञापन से बताया कि 2018 के सफाई कर्मचारी भर्ती में गैर वाल्मीकि समाज जातियों के द्वारा आवेदन कर नियुक्ति ली गई। लेकिन आज तक वह सफाई कार्य नहीं कर रहे है। जो कि प्रशासनिक एवं राजनैतिक अधिकारियों पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। वाल्मीक समुदाय के लोग लंबे समय से ठेका प्रथा में काम कर रहे हैं। कई वर्षों साफ सफाई का कार्य कर रहे हैं। इसलिए वाल्मीकि समुदाय को प्रथम स्थान देते हुए प्राथमिकता देनी चाहिए। टोंक की तर्ज पर निवाई में भी गैर वाल्मीकि जातियों के लिए अलग से सफाई कार्य का जॉन निर्धारित किया जाए। ताकि उनकी प्रशासन को भी पता रहे। साथ ही 2023 की नवीन भर्ती के अंदर अनुभव प्रमाण पत्र को गजटेड ऑफिसर के द्वारा अटेस्टेड हो एवं 1 महीने उनकी ट्रेनिंग अवधी हो। अंबेडकर विकास मंच पूर्ण रूप से वाल्मीक समुदाय की हड़ताल का समर्थन एवं उनके अधिकारों के लिए उनके साथ में खड़ा है और उनका पूर्ण रूप से समर्थन करता है।
इस दौरान अंबेडकर विकास मंच अध्यक्ष किशन संगत, बनवारी लाल बैरवा, गुलाब वर्मा, नंदकिशोर वर्मा, रमेश बैरवा, मनोज वर्मा, प्रमोद गंगवाल, धनराज नकवाल , शंकर संगत , मुन्नालाल नकवाल, राहुल पाटन, विकास नकवाल आदि उपस्थित थे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
प्रदेश भर में अनुसूचित जाति वर्ग वाल्मीकि समुदाय की हड़ताल चल रही है। हड़ताल का समर्थन करने के लिए अंबेडकर विकास मंच निवाई के पदाधिकारियों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में वाल्मीकि समुदाय के साथ हो रहे कुठाराघात का विरोध किया। ज्ञापन से बताया कि दो हज़ार अट्ठारह के सफाई कर्मचारी भर्ती में गैर वाल्मीकि समाज जातियों के द्वारा आवेदन कर नियुक्ति ली गई। लेकिन आज तक वह सफाई कार्य नहीं कर रहे है। जो कि प्रशासनिक एवं राजनैतिक अधिकारियों पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। वाल्मीक समुदाय के लोग लंबे समय से ठेका प्रथा में काम कर रहे हैं। कई वर्षों साफ सफाई का कार्य कर रहे हैं। इसलिए वाल्मीकि समुदाय को प्रथम स्थान देते हुए प्राथमिकता देनी चाहिए। टोंक की तर्ज पर निवाई में भी गैर वाल्मीकि जातियों के लिए अलग से सफाई कार्य का जॉन निर्धारित किया जाए। ताकि उनकी प्रशासन को भी पता रहे। साथ ही दो हज़ार तेईस की नवीन भर्ती के अंदर अनुभव प्रमाण पत्र को गजटेड ऑफिसर के द्वारा अटेस्टेड हो एवं एक महीने उनकी ट्रेनिंग अवधी हो। अंबेडकर विकास मंच पूर्ण रूप से वाल्मीक समुदाय की हड़ताल का समर्थन एवं उनके अधिकारों के लिए उनके साथ में खड़ा है और उनका पूर्ण रूप से समर्थन करता है। इस दौरान अंबेडकर विकास मंच अध्यक्ष किशन संगत, बनवारी लाल बैरवा, गुलाब वर्मा, नंदकिशोर वर्मा, रमेश बैरवा, मनोज वर्मा, प्रमोद गंगवाल, धनराज नकवाल , शंकर संगत , मुन्नालाल नकवाल, राहुल पाटन, विकास नकवाल आदि उपस्थित थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पूर्णिया के धमदाहा में नीतीश कुमार ने चुनावी सभा को संबोधित किया. लालू को जेल मामले में सीएम नीतीश ने कहा कि सजा करनी के कारण मिली है. न्यायपालिका का इस्तेमाल करा कर किसी को जेल नहीं भेजा जा सकता. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका देश के संविधान से चलती है. ऐसे में किसी को फंसाने की बात भला कैसे सम्भव है? इस दौरान सीएम नीतीश ने कहा कि लालू कुनबा भ्र्ष्टाचार का आरोपी है. उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करके माल बनाने का है.
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि न्यायपालिका को प्रभावित करके सजा दिलाने की बाद पूरी तरह बकवास है. इस मौके पर नीतीश कुमार ने अपनी सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों को जमकर गिनाया. सीएम ने बताया कि पति-पत्नी के 15 साल के शासन में प्रखंड स्वास्थ्य केन्द्रों पर औसतन 40 लोग एक महीने में पहुंचते थे. लेकिन अब 400 से 4000 के बीच लोग प्राथमिक से प्रखंड स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज कराने आते हैं.
बता दें कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार यानि 18 अप्रैल को मतदान होना है. इसे लेकर आज शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा. दूसरे चरण में पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर और बांका सहित किशनगंज लोकसभा का चुनाव होना है. बता दें कि इस चरण में कुल 68 उम्मीदवार मैदान में हैं.
.
|
सीएम नीतीश कुमार पूर्णिया के धमदाहा में नीतीश कुमार ने चुनावी सभा को संबोधित किया. लालू को जेल मामले में सीएम नीतीश ने कहा कि सजा करनी के कारण मिली है. न्यायपालिका का इस्तेमाल करा कर किसी को जेल नहीं भेजा जा सकता. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका देश के संविधान से चलती है. ऐसे में किसी को फंसाने की बात भला कैसे सम्भव है? इस दौरान सीएम नीतीश ने कहा कि लालू कुनबा भ्र्ष्टाचार का आरोपी है. उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करके माल बनाने का है. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि न्यायपालिका को प्रभावित करके सजा दिलाने की बाद पूरी तरह बकवास है. इस मौके पर नीतीश कुमार ने अपनी सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों को जमकर गिनाया. सीएम ने बताया कि पति-पत्नी के पंद्रह साल के शासन में प्रखंड स्वास्थ्य केन्द्रों पर औसतन चालीस लोग एक महीने में पहुंचते थे. लेकिन अब चार सौ से चार हज़ार के बीच लोग प्राथमिक से प्रखंड स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज कराने आते हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार यानि अट्ठारह अप्रैल को मतदान होना है. इसे लेकर आज शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा. दूसरे चरण में पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर और बांका सहित किशनगंज लोकसभा का चुनाव होना है. बता दें कि इस चरण में कुल अड़सठ उम्मीदवार मैदान में हैं. .
|
सलूणी - पंचायत समिति सलूणी की शुक्रवार को संपन्न बैठक में नौ समिति सदस्यों ने हंगामा कर दिया है। पंचायत समिति अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर मनमानी करने और सरकारी विभागों के अधिकारियों की बैठक में गैर मौजूदगी से नाराज नौ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर नाराजगी जाहिर की। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पंचायत समिति सलूणी की बैठक बुलाई गई थी। बैठक के शुरुआत में ही नौ सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर मनमर्जी करने का आरोप जड़ा। सदस्यों का कहना था कि हरेक तीन माह के बाद समिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन अध्यक्ष व उपाध्यक्ष मनमानी करते हुए पांच माह के बाद बैठक बुला रहे हैं। सदस्यों का कहना था कि सरकारी विभागों के अधिकारी भी समिति की बैठक में उपस्थिति दर्ज करवाना उचित नहीं समझते, जिस कारण ग्रामीण विकास और लोगों से जुड़ी मांगों व समस्याओं पर चर्चा नहीं हो पाती। बैठक का बहिष्कार करने वाले समिति सदस्य योग सिंह, किशोरी लाल, मोहम्मद मुश्ताक, बिंदिया ठाकुर, लांबी देवी, चतर सिंह, गीता देवी व खनेश कुमार ने बताया कि जब तक तमाम विभागों के अधिकारी बैठक में हिस्सा नहीं लेते और हर तीन माह बाद बैठक नहीं होती तब तक वे बहिष्कार का सिलसिला लगातार जारी रहेगें। बहरहाल, शुक्रवार को पंचायत समिति सलूणी के नौ सदस्यों ने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के अलावा अधिकारियों के उपस्थिति दर्ज न करवाने को लेकर बैठक का बहिष्कार कर इलाके का सियासी माहौल गरमा दिया है। सदस्यों के बहिष्कार के चलते शुक्रवार को बैठक की कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
|
सलूणी - पंचायत समिति सलूणी की शुक्रवार को संपन्न बैठक में नौ समिति सदस्यों ने हंगामा कर दिया है। पंचायत समिति अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर मनमानी करने और सरकारी विभागों के अधिकारियों की बैठक में गैर मौजूदगी से नाराज नौ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर नाराजगी जाहिर की। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पंचायत समिति सलूणी की बैठक बुलाई गई थी। बैठक के शुरुआत में ही नौ सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर मनमर्जी करने का आरोप जड़ा। सदस्यों का कहना था कि हरेक तीन माह के बाद समिति की बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन अध्यक्ष व उपाध्यक्ष मनमानी करते हुए पांच माह के बाद बैठक बुला रहे हैं। सदस्यों का कहना था कि सरकारी विभागों के अधिकारी भी समिति की बैठक में उपस्थिति दर्ज करवाना उचित नहीं समझते, जिस कारण ग्रामीण विकास और लोगों से जुड़ी मांगों व समस्याओं पर चर्चा नहीं हो पाती। बैठक का बहिष्कार करने वाले समिति सदस्य योग सिंह, किशोरी लाल, मोहम्मद मुश्ताक, बिंदिया ठाकुर, लांबी देवी, चतर सिंह, गीता देवी व खनेश कुमार ने बताया कि जब तक तमाम विभागों के अधिकारी बैठक में हिस्सा नहीं लेते और हर तीन माह बाद बैठक नहीं होती तब तक वे बहिष्कार का सिलसिला लगातार जारी रहेगें। बहरहाल, शुक्रवार को पंचायत समिति सलूणी के नौ सदस्यों ने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के अलावा अधिकारियों के उपस्थिति दर्ज न करवाने को लेकर बैठक का बहिष्कार कर इलाके का सियासी माहौल गरमा दिया है। सदस्यों के बहिष्कार के चलते शुक्रवार को बैठक की कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
|
Posted On:
रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कारों के पहले संस्करण के परिणाम 6 अक्टूबर, 2020 को सायं 3:30 बजे राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली में जारी करेंगे। यह वर्चुअल सम्मान समारोह वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री श्री सोम प्रकाश की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का एनआईसी, माईगॉव और संबंधित सोशल मीडिया चैनलों पर लाइव वेबकास्ट किया जाएगा।
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने उत्कृष्ट स्टार्टअप्स और पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने वालों की पहचान करने और पुरस्कृत करने के लिए इस पहले राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कारों की कल्पना की है। ये स्टार्टअप नवाचारी उत्पाद या समाधान और अच्छे उद्यमों का निर्माण कर रहे हैं, जिनमें रोजगार जुटाने या धन सृजन और व्यापक सामाजिक प्रभाव का प्रदर्शन करने की बहुत अधिक संभावना है। सफलता का पैमाना केवल निवेशकों के लिए ही वित्तीय लाभ अर्जित करना नहीं है, बल्कि सामाजिक भलाई में भी योगदान देना है।
इन पुरस्कारों के पहले संस्करण के लिए 12 क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन्हें कुल 35 श्रेणियों में उप-वर्गीकृत किया गया है। ये 12 क्षेत्र हैं- कृषि, शिक्षा, उद्यम प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, वित्त, खाद्य, स्वास्थ्य, उद्योग 4.0, अंतरिक्ष, सुरक्षा, पर्यटन और शहरी सेवाएं। इनके अलावा स्टार्टअप उन क्षेत्रों से भी चुने जाने हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव पैदा कर रहे हैं, महिला नेतृत्व वाले हैं और शैक्षणिक परिसरों में स्थापित हैं।
पुरस्कार जीतने वाले स्टार्टअप को 5 लाख के नकद पुरस्कार के अलावा संभावित पायलट परियोजनाओं और कार्य आदेशों के लिए सम्बंधित जन अधिकारियों और कॉरपोरेट के सामने अपने समाधान पेश करने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।
मजबूत स्टार्टअप इको-सिस्टम, एक प्रमुख इनक्यूबेटर और एक एक्सीलरेटर को 15-15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
|
Posted On: रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कारों के पहले संस्करण के परिणाम छः अक्टूबर, दो हज़ार बीस को सायं तीन:तीस बजे राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली में जारी करेंगे। यह वर्चुअल सम्मान समारोह वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री श्री सोम प्रकाश की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का एनआईसी, माईगॉव और संबंधित सोशल मीडिया चैनलों पर लाइव वेबकास्ट किया जाएगा। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने उत्कृष्ट स्टार्टअप्स और पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने वालों की पहचान करने और पुरस्कृत करने के लिए इस पहले राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कारों की कल्पना की है। ये स्टार्टअप नवाचारी उत्पाद या समाधान और अच्छे उद्यमों का निर्माण कर रहे हैं, जिनमें रोजगार जुटाने या धन सृजन और व्यापक सामाजिक प्रभाव का प्रदर्शन करने की बहुत अधिक संभावना है। सफलता का पैमाना केवल निवेशकों के लिए ही वित्तीय लाभ अर्जित करना नहीं है, बल्कि सामाजिक भलाई में भी योगदान देना है। इन पुरस्कारों के पहले संस्करण के लिए बारह क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन्हें कुल पैंतीस श्रेणियों में उप-वर्गीकृत किया गया है। ये बारह क्षेत्र हैं- कृषि, शिक्षा, उद्यम प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, वित्त, खाद्य, स्वास्थ्य, उद्योग चार.शून्य, अंतरिक्ष, सुरक्षा, पर्यटन और शहरी सेवाएं। इनके अलावा स्टार्टअप उन क्षेत्रों से भी चुने जाने हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव पैदा कर रहे हैं, महिला नेतृत्व वाले हैं और शैक्षणिक परिसरों में स्थापित हैं। पुरस्कार जीतने वाले स्टार्टअप को पाँच लाख के नकद पुरस्कार के अलावा संभावित पायलट परियोजनाओं और कार्य आदेशों के लिए सम्बंधित जन अधिकारियों और कॉरपोरेट के सामने अपने समाधान पेश करने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। मजबूत स्टार्टअप इको-सिस्टम, एक प्रमुख इनक्यूबेटर और एक एक्सीलरेटर को पंद्रह-पंद्रह लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
|
निवेशक को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि कंपनी का कर्ताधर्ता कौन है। प्रमोटर और टॉप मैनेजमेंट कंपनी के सबसे बड़े एसेट होते हैं। इसलिए उनके बारे में जानकारी लेना अहम है। कंपनी जो कारोबार करती है उसमें प्रमोटर्स का कितना अनुभव है, इससे आपको कंपनी के वर्किंग कल्चर के बारे में पता चल जाएगा।
निवेशक को यह भी जानना चाहिए कि कंपनी की सबसे बड़ी ताकत क्या है और जिस इंडस्ट्री में वह काम करती है, उसमें उसकी पोजीशन क्या है। कंपनी की पोजीशन और स्ट्रैटजी के बारे में आप जितना अधिक पढ़ेंगे, उतना ही आप उसके भविष्य के बारे में जान पाएंगे।
कंपनी के फाइनेंशियल पर नजर डालना बहुत जरूरी है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के पिछले 3 से 5 साल के रेवेन्यू ग्रोथ, मार्जिन, बैलेंस शीट स्ट्रेंथ, वर्किंग कैपिटल, कैश फ्लो और दूसरे वित्तीय मानकों पर नजर रखनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि पिछली कुछ तिमाहियों या आईपीओं से पहले एक साल के दौरान इनमें बहुत अधिक तेजी आई है या नहीं।
आईपीओ से पहले और बाद में प्रमोटरों की शेयरहोल्डिंग देखनी जरूरी है। किसी भी कंपनी में प्रमोटर की अधिक हिस्सेदारी हमेशा माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए बेहतर होती है। यह देखना भी बेहद जरूरी है कि आईपीओ से कितना पैसा बिजनस में आ रहा है।
वैल्यूएशन का मतलब रिलेटिव प्राइस से है। यानी जिस कीमत पर आईपीओ की पेशकश की गई है, उसकी तुलना में इसकी ऐतिहासिक और ताजा फाइनेंशियल स्थिति क्या है। कई बार आईपीओ में जो कीमत ऑफर की जाती है वह कम या ज्यादा हो सकती है। यह इंडस्ट्री के पैरामीटर्स और प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो पर निर्भर करता है।
अगर आप ऊपर सुझाए गए पॉइंट्स को चेक नहीं कर पाए हैं तो आईपीओ के बारे में विभिन्न ब्रोकरेज की राय देख सकते हैं। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। अगर आप किसी एक ब्रोकरेज फर्म के नोट को नहीं समझ पा रहे हैं तो दूसरी फर्मों के नोट देखें। कई बार म्यूचुअल फंड्स, प्राइवेट इक्विटी, बैंक और संस्थान जैसे एंकर निवेशक की आईपीओ में फर्स्ट इनवेस्टर होते हैं। उन्हें कंपनी के कारोबार और भविष्य के बारे में बेहतर समझ होती है।
कंपनियों को सभी अपनी बिजनस से जुड़े बड़े जोखिमों और निगेटिव चीजों के बारे में प्रॉस्पेक्टस में बताना होता है। निवेशक के लिए इसे पढ़ना जरूरी है ताकि उसे कंपनी से जुड़े बड़े जोखिम के बारे में पता चल सके। कई बार कंपनी के साथ देनदारी और कानूनी पचड़े फंसे होते हैं, जिससे भविष्य में कंपनी की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
|
निवेशक को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि कंपनी का कर्ताधर्ता कौन है। प्रमोटर और टॉप मैनेजमेंट कंपनी के सबसे बड़े एसेट होते हैं। इसलिए उनके बारे में जानकारी लेना अहम है। कंपनी जो कारोबार करती है उसमें प्रमोटर्स का कितना अनुभव है, इससे आपको कंपनी के वर्किंग कल्चर के बारे में पता चल जाएगा। निवेशक को यह भी जानना चाहिए कि कंपनी की सबसे बड़ी ताकत क्या है और जिस इंडस्ट्री में वह काम करती है, उसमें उसकी पोजीशन क्या है। कंपनी की पोजीशन और स्ट्रैटजी के बारे में आप जितना अधिक पढ़ेंगे, उतना ही आप उसके भविष्य के बारे में जान पाएंगे। कंपनी के फाइनेंशियल पर नजर डालना बहुत जरूरी है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के पिछले तीन से पाँच साल के रेवेन्यू ग्रोथ, मार्जिन, बैलेंस शीट स्ट्रेंथ, वर्किंग कैपिटल, कैश फ्लो और दूसरे वित्तीय मानकों पर नजर रखनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि पिछली कुछ तिमाहियों या आईपीओं से पहले एक साल के दौरान इनमें बहुत अधिक तेजी आई है या नहीं। आईपीओ से पहले और बाद में प्रमोटरों की शेयरहोल्डिंग देखनी जरूरी है। किसी भी कंपनी में प्रमोटर की अधिक हिस्सेदारी हमेशा माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए बेहतर होती है। यह देखना भी बेहद जरूरी है कि आईपीओ से कितना पैसा बिजनस में आ रहा है। वैल्यूएशन का मतलब रिलेटिव प्राइस से है। यानी जिस कीमत पर आईपीओ की पेशकश की गई है, उसकी तुलना में इसकी ऐतिहासिक और ताजा फाइनेंशियल स्थिति क्या है। कई बार आईपीओ में जो कीमत ऑफर की जाती है वह कम या ज्यादा हो सकती है। यह इंडस्ट्री के पैरामीटर्स और प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो पर निर्भर करता है। अगर आप ऊपर सुझाए गए पॉइंट्स को चेक नहीं कर पाए हैं तो आईपीओ के बारे में विभिन्न ब्रोकरेज की राय देख सकते हैं। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। अगर आप किसी एक ब्रोकरेज फर्म के नोट को नहीं समझ पा रहे हैं तो दूसरी फर्मों के नोट देखें। कई बार म्यूचुअल फंड्स, प्राइवेट इक्विटी, बैंक और संस्थान जैसे एंकर निवेशक की आईपीओ में फर्स्ट इनवेस्टर होते हैं। उन्हें कंपनी के कारोबार और भविष्य के बारे में बेहतर समझ होती है। कंपनियों को सभी अपनी बिजनस से जुड़े बड़े जोखिमों और निगेटिव चीजों के बारे में प्रॉस्पेक्टस में बताना होता है। निवेशक के लिए इसे पढ़ना जरूरी है ताकि उसे कंपनी से जुड़े बड़े जोखिम के बारे में पता चल सके। कई बार कंपनी के साथ देनदारी और कानूनी पचड़े फंसे होते हैं, जिससे भविष्य में कंपनी की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
|
इनमोबी के स्वामित्व वाली ग्लांस 20 से 25 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए अमेरिका और जापान के कुछ निवेशकों से बातचीत कर रही है। हाल में कंपनी के वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म रोपोसो ने भी वृद्धि हासिल की है।
एक सूत्र ने कहा, 'बातचीत काफी बढ़ चुकी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बातचीत काफी अच्छे मूल्यांकन पर चालू तिमाही में पूरी होने की उम्मीद है। ' इनमोबी के एक प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ कहने से मना कर कर दिया।
इनमोबी ने पिछले साल दिसंबर में रोपोसो का अधिग्रहण किया था। रोपोसो वीडियो शेयरिंग ऐप है, जो टिकटॉक का प्रतिस्पर्धी है। सरकार के जून के आखिर में चीन के 59 ऐप पर रोक लगाने के बाद यह तेजी से बढ़ रहा है। रोक के ठीक बाद इसके दैनिक डाउनलोड 60 लाख पर पहुंच गए। इस यूनिकॉर्न स्टार्टअप के संस्थापक और सीईओ नवीन तिवारी ने पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ अपने साक्षात्कार में कहा था कि रोपोसो में अल्प समय में भारी वृद्धि हुई है, इसलिए कंपनी उसमें हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने की तैयारी कर रही है।
रोपोसो के सह-संस्थापक कौशल शुभांक ने कहा, 'कुछ सप्ताह पहले दिन भर में हमारे जितने सक्रिय यूजर होते थे, उतने पिछले 30 मिनट में हैं। ' आज यह ऐप 8 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड हो चुका है।
चिंगारी और रिजल जैसे अन्य वीडियो और ऑडियो कंटेंट ऐप प्ले स्टोर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनकी भी धन जुटाने की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।
|
इनमोबी के स्वामित्व वाली ग्लांस बीस से पच्चीस करोड़ डॉलर जुटाने के लिए अमेरिका और जापान के कुछ निवेशकों से बातचीत कर रही है। हाल में कंपनी के वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म रोपोसो ने भी वृद्धि हासिल की है। एक सूत्र ने कहा, 'बातचीत काफी बढ़ चुकी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बातचीत काफी अच्छे मूल्यांकन पर चालू तिमाही में पूरी होने की उम्मीद है। ' इनमोबी के एक प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ कहने से मना कर कर दिया। इनमोबी ने पिछले साल दिसंबर में रोपोसो का अधिग्रहण किया था। रोपोसो वीडियो शेयरिंग ऐप है, जो टिकटॉक का प्रतिस्पर्धी है। सरकार के जून के आखिर में चीन के उनसठ ऐप पर रोक लगाने के बाद यह तेजी से बढ़ रहा है। रोक के ठीक बाद इसके दैनिक डाउनलोड साठ लाख पर पहुंच गए। इस यूनिकॉर्न स्टार्टअप के संस्थापक और सीईओ नवीन तिवारी ने पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ अपने साक्षात्कार में कहा था कि रोपोसो में अल्प समय में भारी वृद्धि हुई है, इसलिए कंपनी उसमें हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने की तैयारी कर रही है। रोपोसो के सह-संस्थापक कौशल शुभांक ने कहा, 'कुछ सप्ताह पहले दिन भर में हमारे जितने सक्रिय यूजर होते थे, उतने पिछले तीस मिनट में हैं। ' आज यह ऐप आठ करोड़ से अधिक बार डाउनलोड हो चुका है। चिंगारी और रिजल जैसे अन्य वीडियो और ऑडियो कंटेंट ऐप प्ले स्टोर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनकी भी धन जुटाने की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।
|
सारम, करवानक, मोर, बगुला वतस, कुलग, तीतर यदि सब शिकार की चिड़ियाँ हे । बगुला जरूर शिकार की चिडियों में नहीं आता पर प्राय लोग इसे भी साते हैं और बाज के लिए तो परहेज की गुजाइश भी नही रह जाती। भूषण का यह सकलन बहुत ही साभाविक है । जान पडता है, भूपण को पक्षियों का अच्छा ज्ञान था । पर शृगार रस मे ही गर्क रहनेवाले मतिराम ने भी एक स्थान पर उन्द्र चिडियो को जमा जरूर कर दिया है, यद्यपि हरिनाथ की तरह ये सब भी बेसिलसिले और बेमेल हैं । जरा देखिए
शुक चकोर चातक चुहिल, कोक मत्त कलहम । जहॅ तरवर सरवरनि के लसत ललित अवतम । कलहस और कोक कविता में भले ही पेड पर बैठ सकते हो, पर वैसे जलपाद होने के कारण उनके लिए पेड पर बैठना सम्भव नही ।
इन सबसे सुन्दर और साभाविक वर्णन हमे भारतेन्दुजी के सरोवर का लगता है, जो इस प्रकार है
कूजत कहूँ क्लहस कहूँ मज्जत पागवत । कहुँ कारण्डव उडत, कहूँ जलकुस्कुट वानत ।। चक्वाक कहुँ बसत कहूँ वरु ध्यान लगायत । सुक- पिक जल कहुँ पिरत कहूँ भमरानलि गावत ॥ कहुँ तट पर नाचत मोर बहु रोग विविध पच्छी करत । जल-पान न्हान करि मुस भरे तट सोभा सन जिय वरत ॥
काउण्डव भले ही हमारे यहाँ न आता हो, पर चक्राक और क्लहस तो हमारे तालाबो के परिचित पक्षी हैं। 'जलकुक्कुट चारत' मे बहुत सम्मानित हे । ये जलमुर्गियाँ जन ताल के एक स्थान से उडकर दूसरे स्थान को जाती है, तो पानी की सतह से मिली हुई इनकी उडान इस तरह की होती है कि जान पडता है, ये पानी पर दौड़ रही हैं । बस्-ध्यान तो प्रसिद्ध हो है। पारानत (कबूतर), सुरु और पिक को हरिश्चन्द्रजी ने पानी पीने या नहाने के बहाने और मोर को किनारे पर नाचने के मिस ऐसे मौके से बुला लिया है कि वर्णन की स्वाभाविकता जरा भी नष्ट नहीं होने पाई है।
बाज और कबूतर का वर्णन और भी कुछ कनियो ने किया है । तुलमीदासजी का 'बाज झपट जनु ला लुकाने' तो प्रसिद्ध हो है । क्नीर ने भी विषय-वासना के बाज को माथ लेकर आनेतृण से नधान किया है । 'तिस्ना चली सिकार को विसै बाज लिये हाथ ।'
अन रह जाते हैं +पोत । ये सिधाई के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। ये वैसे तो अपने प्रेम के लिए प्रसिद्ध हैं और कभी कभी कठ की उपमा के लिए भी पकड लिये जाते हैं । इनका मनसे सुंदर वर्णन बिहारी ने किया है। उनका प्रसिद्ध 'मपर परेई सग' चाला दोहा साभाविकता से परिपूर्ण हैप्राचीन कवि और चिड़ियों
पटु पाखें, भख काकरें, सपर परेई संग । सुखी परेवा जगत में, एकै तुही विहंग ।।
अंत में रहीम का एक सुन्दर और सरस बरवा देकर, जिसे उन्होंने सारस की जोड़ी को देखकर लिखा है, हम लेख समाप्त करेंगे । सारस जीवन में एक ही बार जोड़ा बाँधता है और एक के मर जाने पर दूसरासर तड़प-तड़प कर जान दे देता है। रहीम शायद इस अभिन्नता की बात जानते थे, तभी उन्होंने ऐसी कामना की है-पीतम तुम कचलोहिया हम गजबेलि । सारस के अस जोरिया फिरौ अकेल ।।
यह हमारे प्राचीन कवियों के वर्णन का एक साधारण-सा निरीक्षण हुआ, जिसमें हमने कुछ उद्धरण देकर पाठकों का उन पक्षियों से परिचय भर करा दिया है जो हमारे कवियों द्वारा हमारे साहित्य में अमर बना दिये गये हैं। किन्तु अब समय आ गया है जब हमारा गद्य एक आकार प्रकार ग्रहण करके इस योग्य हो गया है कि इसमें हम सभी विषयों पर वैज्ञानिक ढंग से पुस्तकें लिखकर अपने साहित्य का भांडार भरें ।
भारतीयललनासु सरसकविता निर्माण कौशलम्
मस्कृतसाहित्यभूषण मधुराणीसम्पादक उला श्रीनिवासाचाय
बहुरत्ना वसुन्धरा इति सुप्रसिद्धाया धराया भारतभूमिरेव ललितकलाना निविध विवाना सरवियित्रीणा तपोनिधीनामव्यात्मवियाविशारदाना परिशुद्वाचारविचार वता महोदाराणा शूरवराणा वीरमराणा पराक्क्रमिणां साध्वीशिस मणीना भूमण्डलमण्डलाय मानपाण्डित्यशालिना च जन्मभूमिरिति सुनिदितैन वियानद्भिरसिलैरपि । न केरलमेचगुणगणविशिष्टा श्रेष्ठा पुरुषा एवं किन्तु योपितोऽपि आत्मनोऽनुपमेन कलाकौशल्येन विस्मयानहेन पराक्रमेण परमादर्शरूपेण सतीलेन रूपविलासोपहितरतिसौन्दर्येण सौन्दर्येण च तथा न्यैरपि अपरिमितैगु गणैरत्नायमानैरसिलमेन भूमण्डल व्यस्मापयन् तथा अवशिष्टै काव्यकृतिविशेपैर्विस्मापयिष्यन्ति च । एतेषामेतामा च बहव्य कृतयो माहम्मदै रनेकैरसूयाकुलैर्मात्सर्या पतबुद्विभिर्विनाशमापादिता इति स्मार स्मार सन्तप्यते हृदयम् । सस्तव्य भवति शरीरम् । अन्वीभनति लोचनयुगलम् । वेपते करतलम् । स्वयमडगुलिभ्यो गलति लेसनी । रोमाञ्चमञ्चति कलेनरम । कार्याकार्यनिवेकविपये मोहित भाति चेत । तथापि तत्र तत्र यत्र कुत्रापि कथकथचिदप्यवशेषिता कृतिविशेषा दृष्टिगोचरीभृता अमन्दा नन्दतुन्दिलान् कुर्नन्ति । विपादमग्नमपि मन समुल्लासयन्ति । उत्तिष्ठत जाग्रतेत्यस्मानुत्तेजयति भारतीया एव जगति जन्मसफलाया तिर इतरेपमित्युत्साहयन्ति । उर्वरिता कृतिविशेषा एव असिजगद्व्यात चिरस्थायि आचन्द्रतारक प्रकाशयितृ अविस्मरणीय अत्युज्ज्वल विभ्राजमान यशोन्नरक्षन्निति प्रहर्पास्पदमेतत् । वयमिदानीं यशोभास्त्रराणामनुपमकलाकुशलाना सम्मकवितानिर्माणनैपुण्य समानन्दितासिल हदयानां विलासिनीना रमणीमरणीना कांश्चन श्लोकानेन प्रियपाठरुहदयाह्लादनाय समर्पयामोऽस्मिल्लेग्ने । तत्र तात्रत् प्रथममात्मनो गुणगणमणिभिरसिल कर्णताटङ्कायमानस्य कर्णाटकस्य कीर्तिविस्तारकारणाना सरचनाचातुरीविस्मापितासिलचेतसा कायित्रीकुलशेखरमरणीना रमणीनां गुणगणविशेषशालिनीना काश्चन कविताकृतीरत्र समुदाहरिष्याम ।
आसीत् किल, पुरा विजायाङ्का नाम काचन राजस्मणी रमणीयगुणालया भूवलय वल्लभस्य सार्वभौमस्य सुप्रसिद्वयशोनिधे चालुक्यकुलतिलकायमानस्य वीरपुलकेशि चर्तिस्नुपा युनराजचन्द्रादित्यस्य हृदयवल्लभा महाराजी विजयाका विजयाभट्टारिका विजया विज्जिका नामभिरसिलविद्वल्लो प्रसिद्वा कर्णाटकदेशालकारभूता कायिनीशिसामणी रमणीमणि । एषा किल योपा सरसकवितानिर्माणनैपुण्येनाद्यापि रसिकजनता मानन्दसागरे निमज्जयति निरतरमात्मनो रमस्यन्दिरिनेकै विशेषै ।
करिकुलाचार्य किल दण्डी आत्मन काव्यादर्श चतुर्मुसभुखाम्भोज उनसधूर्मम । मानसे रमता नित्य सर्वशुक्ला सरस्वती ।।
|
सारम, करवानक, मोर, बगुला वतस, कुलग, तीतर यदि सब शिकार की चिड़ियाँ हे । बगुला जरूर शिकार की चिडियों में नहीं आता पर प्राय लोग इसे भी साते हैं और बाज के लिए तो परहेज की गुजाइश भी नही रह जाती। भूषण का यह सकलन बहुत ही साभाविक है । जान पडता है, भूपण को पक्षियों का अच्छा ज्ञान था । पर शृगार रस मे ही गर्क रहनेवाले मतिराम ने भी एक स्थान पर उन्द्र चिडियो को जमा जरूर कर दिया है, यद्यपि हरिनाथ की तरह ये सब भी बेसिलसिले और बेमेल हैं । जरा देखिए शुक चकोर चातक चुहिल, कोक मत्त कलहम । जहॅ तरवर सरवरनि के लसत ललित अवतम । कलहस और कोक कविता में भले ही पेड पर बैठ सकते हो, पर वैसे जलपाद होने के कारण उनके लिए पेड पर बैठना सम्भव नही । इन सबसे सुन्दर और साभाविक वर्णन हमे भारतेन्दुजी के सरोवर का लगता है, जो इस प्रकार है कूजत कहूँ क्लहस कहूँ मज्जत पागवत । कहुँ कारण्डव उडत, कहूँ जलकुस्कुट वानत ।। चक्वाक कहुँ बसत कहूँ वरु ध्यान लगायत । सुक- पिक जल कहुँ पिरत कहूँ भमरानलि गावत ॥ कहुँ तट पर नाचत मोर बहु रोग विविध पच्छी करत । जल-पान न्हान करि मुस भरे तट सोभा सन जिय वरत ॥ काउण्डव भले ही हमारे यहाँ न आता हो, पर चक्राक और क्लहस तो हमारे तालाबो के परिचित पक्षी हैं। 'जलकुक्कुट चारत' मे बहुत सम्मानित हे । ये जलमुर्गियाँ जन ताल के एक स्थान से उडकर दूसरे स्थान को जाती है, तो पानी की सतह से मिली हुई इनकी उडान इस तरह की होती है कि जान पडता है, ये पानी पर दौड़ रही हैं । बस्-ध्यान तो प्रसिद्ध हो है। पारानत , सुरु और पिक को हरिश्चन्द्रजी ने पानी पीने या नहाने के बहाने और मोर को किनारे पर नाचने के मिस ऐसे मौके से बुला लिया है कि वर्णन की स्वाभाविकता जरा भी नष्ट नहीं होने पाई है। बाज और कबूतर का वर्णन और भी कुछ कनियो ने किया है । तुलमीदासजी का 'बाज झपट जनु ला लुकाने' तो प्रसिद्ध हो है । क्नीर ने भी विषय-वासना के बाज को माथ लेकर आनेतृण से नधान किया है । 'तिस्ना चली सिकार को विसै बाज लिये हाथ ।' अन रह जाते हैं +पोत । ये सिधाई के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। ये वैसे तो अपने प्रेम के लिए प्रसिद्ध हैं और कभी कभी कठ की उपमा के लिए भी पकड लिये जाते हैं । इनका मनसे सुंदर वर्णन बिहारी ने किया है। उनका प्रसिद्ध 'मपर परेई सग' चाला दोहा साभाविकता से परिपूर्ण हैप्राचीन कवि और चिड़ियों पटु पाखें, भख काकरें, सपर परेई संग । सुखी परेवा जगत में, एकै तुही विहंग ।। अंत में रहीम का एक सुन्दर और सरस बरवा देकर, जिसे उन्होंने सारस की जोड़ी को देखकर लिखा है, हम लेख समाप्त करेंगे । सारस जीवन में एक ही बार जोड़ा बाँधता है और एक के मर जाने पर दूसरासर तड़प-तड़प कर जान दे देता है। रहीम शायद इस अभिन्नता की बात जानते थे, तभी उन्होंने ऐसी कामना की है-पीतम तुम कचलोहिया हम गजबेलि । सारस के अस जोरिया फिरौ अकेल ।। यह हमारे प्राचीन कवियों के वर्णन का एक साधारण-सा निरीक्षण हुआ, जिसमें हमने कुछ उद्धरण देकर पाठकों का उन पक्षियों से परिचय भर करा दिया है जो हमारे कवियों द्वारा हमारे साहित्य में अमर बना दिये गये हैं। किन्तु अब समय आ गया है जब हमारा गद्य एक आकार प्रकार ग्रहण करके इस योग्य हो गया है कि इसमें हम सभी विषयों पर वैज्ञानिक ढंग से पुस्तकें लिखकर अपने साहित्य का भांडार भरें । भारतीयललनासु सरसकविता निर्माण कौशलम् मस्कृतसाहित्यभूषण मधुराणीसम्पादक उला श्रीनिवासाचाय बहुरत्ना वसुन्धरा इति सुप्रसिद्धाया धराया भारतभूमिरेव ललितकलाना निविध विवाना सरवियित्रीणा तपोनिधीनामव्यात्मवियाविशारदाना परिशुद्वाचारविचार वता महोदाराणा शूरवराणा वीरमराणा पराक्क्रमिणां साध्वीशिस मणीना भूमण्डलमण्डलाय मानपाण्डित्यशालिना च जन्मभूमिरिति सुनिदितैन वियानद्भिरसिलैरपि । न केरलमेचगुणगणविशिष्टा श्रेष्ठा पुरुषा एवं किन्तु योपितोऽपि आत्मनोऽनुपमेन कलाकौशल्येन विस्मयानहेन पराक्रमेण परमादर्शरूपेण सतीलेन रूपविलासोपहितरतिसौन्दर्येण सौन्दर्येण च तथा न्यैरपि अपरिमितैगु गणैरत्नायमानैरसिलमेन भूमण्डल व्यस्मापयन् तथा अवशिष्टै काव्यकृतिविशेपैर्विस्मापयिष्यन्ति च । एतेषामेतामा च बहव्य कृतयो माहम्मदै रनेकैरसूयाकुलैर्मात्सर्या पतबुद्विभिर्विनाशमापादिता इति स्मार स्मार सन्तप्यते हृदयम् । सस्तव्य भवति शरीरम् । अन्वीभनति लोचनयुगलम् । वेपते करतलम् । स्वयमडगुलिभ्यो गलति लेसनी । रोमाञ्चमञ्चति कलेनरम । कार्याकार्यनिवेकविपये मोहित भाति चेत । तथापि तत्र तत्र यत्र कुत्रापि कथकथचिदप्यवशेषिता कृतिविशेषा दृष्टिगोचरीभृता अमन्दा नन्दतुन्दिलान् कुर्नन्ति । विपादमग्नमपि मन समुल्लासयन्ति । उत्तिष्ठत जाग्रतेत्यस्मानुत्तेजयति भारतीया एव जगति जन्मसफलाया तिर इतरेपमित्युत्साहयन्ति । उर्वरिता कृतिविशेषा एव असिजगद्व्यात चिरस्थायि आचन्द्रतारक प्रकाशयितृ अविस्मरणीय अत्युज्ज्वल विभ्राजमान यशोन्नरक्षन्निति प्रहर्पास्पदमेतत् । वयमिदानीं यशोभास्त्रराणामनुपमकलाकुशलाना सम्मकवितानिर्माणनैपुण्य समानन्दितासिल हदयानां विलासिनीना रमणीमरणीना कांश्चन श्लोकानेन प्रियपाठरुहदयाह्लादनाय समर्पयामोऽस्मिल्लेग्ने । तत्र तात्रत् प्रथममात्मनो गुणगणमणिभिरसिल कर्णताटङ्कायमानस्य कर्णाटकस्य कीर्तिविस्तारकारणाना सरचनाचातुरीविस्मापितासिलचेतसा कायित्रीकुलशेखरमरणीना रमणीनां गुणगणविशेषशालिनीना काश्चन कविताकृतीरत्र समुदाहरिष्याम । आसीत् किल, पुरा विजायाङ्का नाम काचन राजस्मणी रमणीयगुणालया भूवलय वल्लभस्य सार्वभौमस्य सुप्रसिद्वयशोनिधे चालुक्यकुलतिलकायमानस्य वीरपुलकेशि चर्तिस्नुपा युनराजचन्द्रादित्यस्य हृदयवल्लभा महाराजी विजयाका विजयाभट्टारिका विजया विज्जिका नामभिरसिलविद्वल्लो प्रसिद्वा कर्णाटकदेशालकारभूता कायिनीशिसामणी रमणीमणि । एषा किल योपा सरसकवितानिर्माणनैपुण्येनाद्यापि रसिकजनता मानन्दसागरे निमज्जयति निरतरमात्मनो रमस्यन्दिरिनेकै विशेषै । करिकुलाचार्य किल दण्डी आत्मन काव्यादर्श चतुर्मुसभुखाम्भोज उनसधूर्मम । मानसे रमता नित्य सर्वशुक्ला सरस्वती ।।
|
लखनऊ के दंपती तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए ट्विटर पर ट्रोल किया गया था। सुषमा स्वराज ने इन ट्रोल्स पर ट्विटर पोल के जरिये पलटवार किया है। रविवार को कराए पोल में उन्होंने सवाल किया, 'मैंने कुछ ट्वीट लाइक किए हैं। क्या आप ऐसे ट्वीट्स को सही ठहराते हैं?
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
लखनऊ के दंपती तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए ट्विटर पर ट्रोल किया गया था। सुषमा स्वराज ने इन ट्रोल्स पर ट्विटर पोल के जरिये पलटवार किया है। रविवार को कराए पोल में उन्होंने सवाल किया, 'मैंने कुछ ट्वीट लाइक किए हैं। क्या आप ऐसे ट्वीट्स को सही ठहराते हैं? Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का शिक्षा मंत्रालय बालवाड़ी और प्राथमिक छात्रों को अगले महीने से सप्ताह में दो बार घर पर तेजी से कोविड -19 परीक्षण करने के लिए अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "हम कई विकल्पों को खुला रखते हुए चर्चा कर रहे हैं, जैसे कि छात्रों को घर पर मूल्यांकन लेने के बाद स्कूल जाने की आवश्यकता होती है।
ओमिक्रॉन के तेजी से विकास के बावजूद स्कूल अगले महीने नए सेमेस्टर की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं, जिसने दैनिक नए कोविद -19 टैली को 50,000 से ऊपर धकेल दिया है।
पिछले हफ्ते, मंत्रालय ने कहा था कि वह महामारी के खिलाफ छोटे बच्चों की रक्षा के लिए एक रणनीति के रूप में पांच सप्ताह के लिए 3. 3 मिलियन किंडरगार्टन और प्राथमिक छात्रों पर अर्ध-साप्ताहिक परीक्षण करने के लिए मुफ्त त्वरित एंटीजन टेस्ट किट के वितरण के लिए क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है।
माता-पिता को छोटे बच्चों के लिए प्रस्तावित परीक्षण योजना के बारे में मिश्रित भावनाएं हैं।
|
अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का शिक्षा मंत्रालय बालवाड़ी और प्राथमिक छात्रों को अगले महीने से सप्ताह में दो बार घर पर तेजी से कोविड -उन्नीस परीक्षण करने के लिए अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "हम कई विकल्पों को खुला रखते हुए चर्चा कर रहे हैं, जैसे कि छात्रों को घर पर मूल्यांकन लेने के बाद स्कूल जाने की आवश्यकता होती है। ओमिक्रॉन के तेजी से विकास के बावजूद स्कूल अगले महीने नए सेमेस्टर की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं, जिसने दैनिक नए कोविद -उन्नीस टैली को पचास,शून्य से ऊपर धकेल दिया है। पिछले हफ्ते, मंत्रालय ने कहा था कि वह महामारी के खिलाफ छोटे बच्चों की रक्षा के लिए एक रणनीति के रूप में पांच सप्ताह के लिए तीन. तीन मिलियन किंडरगार्टन और प्राथमिक छात्रों पर अर्ध-साप्ताहिक परीक्षण करने के लिए मुफ्त त्वरित एंटीजन टेस्ट किट के वितरण के लिए क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। माता-पिता को छोटे बच्चों के लिए प्रस्तावित परीक्षण योजना के बारे में मिश्रित भावनाएं हैं।
|
अध्यात्मवाद में क्या शेष रह जाता है जिसके प्रतिपादन के लिए उन्हें इतना भ्रम करना पड़ा । किसी भी तटस्थ विचारक को यह स्पष्ट हो जायगा कि महादेवी जी यद्यपि शायावाद की वास्तविक भावभूमि से पूर्णतया अवगत हैं तथापि उसे वैसे स्वीकार न करके अध्यात्मवाद अथवा सर्ववाद का अनावश्यक श्रावरण चढ़ाकर स्वीकार करने में उन्हें संकोचहीनता तथा सन्तोष का अनुभव होता है जो वैसे कदाचित् न होता। इस प्रकार की व्याख्या के प्रस्तुत किये जाने के मौलिक कारण वही हैं जिन्होंने छायावादी कविता में व्यक्त मानवीय भावनाओं को छाया का रूप दिया । छाया शब्द का यह अर्थ महादेवी जी को भी श्रमाय नहीं है। महादेवी जी यदि केवल अपनी व्याख्या को अपने काव्य तक ही सीमित रखतीं तो इतने विस्तार में उस पर विचार करने की आवश्यकता न होती परन्तु उन्होंने अपने विचार समस्त छायावादी काव्य के सम्बन्ध में व्यक्त किये हैं।
महादेवी जी के विवेचन में आने वाले अन्तर्विरोधों को छोड़ भी दिया जाय तो भी छायावाद की अलौकिकता निर्विरोध सिद्ध नहीं हो पाती, क्योंकि अन्य छायावादी कवियों का मत उनके विरुद्ध है। इस सम्बन्ध में पन्त जी द्वारा दिया गया यह विवेचन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है :
'दूसरे शब्दों में नवीन सामाजिक जीवन की वास्तविकता को ग्रहण कर सकने से पहले, हिन्दी-कविता, छायाबाद के रूप में, हास युग के वैयक्तिक अनुभवों, ऊर्ध्वमुखी विकास की प्रवृत्तियों, ऐहिक जीवन की आकांक्षाओं सम्बन्धी स्वप्नों, निराशाओं और समवेदनाओं को अभिव्यक्त करने लगी और व्यक्तिगत जीवन की कठिनाइयों से पुब्ध होकर पलायन के रूप में, प्राकृतिक दर्शन के सिद्धान्तों के आधार पर, भीतर-बाहर में, सुख-दुःख में, आशा-निराशा और संयोग-वियोग के द्वन्द्रों में सामंजस्य स्थापित करने लगी। सापेच की पराजय उसमें निरपेक्ष की जय के रूप में गौरवान्वित होने लगी। म
'प्रसाद' जी ने यद्यपि अपने काव्य में अनेक स्थलों पर रहस्यात्मकता का आश्रय लिया है परन्तु सिद्धान्ततः छायावाद को उन्होंने न रहस्यवाद से सम्बद्ध किया और न प्रकृतिवाद से, वरन् ध्वन्यात्मकता, लाक्षणिकता, सौन्दर्यमय प्रतीक-विधान तथा उपप्चार वकता के साथ स्वानुभूति की विवृति को छायाबाद की विशेषताओं में स्वीकार करके एक प्रकार से उसका प्रतिवाद ही किया।
'निराला' जी ने इस सम्बन्ध में अपना कोई स्पष्ट मत नहीं दिया परन्तु उनके काव्य में
१. स्वच्छन्द चन्द में चित्रित उन मानव-अनुभूतियों का नाम छाया उपयुक्त ही था और मुझे तो भाज भी उपयुक्त ही लगता है। पृष्ठ ६०.
२. आधुनिक कवि, भाग २ पृष्ठ १२.
हाँ मूल में यह रहस्यवाद भी नहीं है। प्रकृति विश्वात्मा की छाया मा प्रतिविम्व है। इसलिए प्रकृति को काव्यगत व्यवहार में लेकर छायावाद को सृष्टि होती है, यह सिद्धान्त भी भ्रामक है। यद्यपि प्रकृति का आलम्बन, स्वानुभूति का प्रकृति से तादात्म्य भवीन काव्य-धारा में होने लगा है, किन्तु प्रकृति से सम्बन्ध राने वाली कविता को ही छायावाद नहीं कहा जा सकता ।
छाया भारतीय दृष्टि से अनुभूति और अभिव्यक्ति की अंगिमा पर अधिक निर्भर करती है। ध्वम्यारमकता, खाणिकता, सौन्दर्यमयता, प्रतीक-विधान तथा उपचार- वक्रता के साथ स्वानुभूति की विवृति छायावाद की विशेषताएँ हैं।--काव्य- कक्षा तथा अन्य निबंध
स्थल-स्थल पर मानवीय स्वर इतना प्रधान है और लाक्षणिक आवरण भी इतना मीना है कि उनके सम्पूर्ण काव्य की आध्यात्मिक व्याख्या नहीं की जा सकती।
छायावाद की प्रारम्भिक अवस्था में कविताओं पर आध्यात्मिकता की ध्वनि का प्रावरण पूरी तरह नहीं चढ़ पाया था अतएव प्रारम्भिक बालोचक शुक्रजी को उसकी वास्तविक भावभूमि परखने में भ्रान्ति नहीं हुई। उन्होंने लिखाः
'प्रथम बासना का यह उद्गार आध्यात्मिक पर्दे में ही छिपा न रह सका। हृदय की सारी काम-वासनाएँ, इन्द्रियों के सुख-बिवास की मधुर और रमणीय सामग्री के बीच एक बँधी हुई रूषि पर व्यक्त होने लगीं। इस प्रकार रहरुमबाद से सम्बन्ध म रखने वाली कविताएँ भी छायावाद की कही जाने लगीं अतः 'छायावाद' शब्द का प्रयोग रहस्यवाद तक ही न रहकर काम्य-शैली के सम्बन्ध में भी प्रतीकवाद के अर्थ में होने लगा।
'रीतिकाल की शृङ्गारी कविता की भरमार की तो इतनी निन्दा की गई पर वही कविता कभी रहस्य का पर्दा डालकर, कभी खुले मैदान अपनी कुछ अदा बहुलकर फिर प्रायः सारा काव्य क्षेत्र छोड़कर चल रही है।"
किन्तु जहाँ इस प्रकार की तीव्र आलोचना शुक्लजी ने की वहीं छायावाद में कुछ अंश तक श्राध्यात्मिक प्रेम की सत्ता की साक्षी भी दी है :
'छायावाद जहाँ तक आध्यात्मिक प्रेम लेकर चला है वहाँ तक तो रहस्यवाद के ही अन्तर्गत रहा है। उसके भागे प्रतीकवाद या चित्रभाषाबाद नाम की काव्य-शैली के रूप में गृहीत होकर भी यह अधिकतर प्रेम-गान ही करता रहा है।'
प्रसाद जी की तरह शुक्ल जी की व्याख्या भी छायावाद के भावपक्ष को गौण और शैलीपक्ष को प्रधान मानकर चली है जब कि वास्तविकता यह है कि छायावादी कविता की भावसम्पति को किसी प्रकार उसकी शैली की तुलना में अप्रधान नहीं ठहराया जा सकता।
शुक्ल जी के अनन्तर अनेक आलोचक छायावाद की समीक्षा करने में प्रवृत्त हुए । श्राध्यात्मिकता के पक्ष के प्रायः सभी समर्थकों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से महादेवी जी की विचार धारा ने प्रभावित किया और कुछ दूर तक विरोधियों को भी तीव्र प्रतिवाद करने का आमन्त्रण दिया।
छायावाद की नई-नई परिभाषाएँ सामने आने लगीं और काव्य में आध्यात्मिकता की विविध अवस्थाएँ खोजी जाने लगीं।
नन्ददुलारे वाजपेयी ने अपना विचार व्यक्त किया कि 'छायावाद के मूल में स्थित आध्यात्मिक दर्शन के ही कारण नये भौतिकवादी उसमें दोष ही दोष देखते हैं।' अन्यत्र कहा गया कि 'विश्व की किसी वस्तु में एक अज्ञात सप्राण छाया की झाँकी पाना अथवा उसका आरोप करना ही छायावाद है। छायावादी कवि प्रकति के पुजारी की भाँति विश्व के कण-कण में अपने सर्वव्यापक प्राणों की छाया देखता है। इसकी तीन अवस्थाएँ बताई गई। पहली 'सृष्टि के प्रति विस्मय का भाव', दूसरी 'मानसिक अशान्ति की श्राकुलता का आभास', तथा तीसरी 'प्रेम के प्रकाश की प्राप्ति, इसी को छायावाद की चरम परियति माना गया, जहाँ पहुँचकर छायावादी उसी
१. 'आधुनिक साहित्य पृष्ठ ३४३.
|
अध्यात्मवाद में क्या शेष रह जाता है जिसके प्रतिपादन के लिए उन्हें इतना भ्रम करना पड़ा । किसी भी तटस्थ विचारक को यह स्पष्ट हो जायगा कि महादेवी जी यद्यपि शायावाद की वास्तविक भावभूमि से पूर्णतया अवगत हैं तथापि उसे वैसे स्वीकार न करके अध्यात्मवाद अथवा सर्ववाद का अनावश्यक श्रावरण चढ़ाकर स्वीकार करने में उन्हें संकोचहीनता तथा सन्तोष का अनुभव होता है जो वैसे कदाचित् न होता। इस प्रकार की व्याख्या के प्रस्तुत किये जाने के मौलिक कारण वही हैं जिन्होंने छायावादी कविता में व्यक्त मानवीय भावनाओं को छाया का रूप दिया । छाया शब्द का यह अर्थ महादेवी जी को भी श्रमाय नहीं है। महादेवी जी यदि केवल अपनी व्याख्या को अपने काव्य तक ही सीमित रखतीं तो इतने विस्तार में उस पर विचार करने की आवश्यकता न होती परन्तु उन्होंने अपने विचार समस्त छायावादी काव्य के सम्बन्ध में व्यक्त किये हैं। महादेवी जी के विवेचन में आने वाले अन्तर्विरोधों को छोड़ भी दिया जाय तो भी छायावाद की अलौकिकता निर्विरोध सिद्ध नहीं हो पाती, क्योंकि अन्य छायावादी कवियों का मत उनके विरुद्ध है। इस सम्बन्ध में पन्त जी द्वारा दिया गया यह विवेचन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है : 'दूसरे शब्दों में नवीन सामाजिक जीवन की वास्तविकता को ग्रहण कर सकने से पहले, हिन्दी-कविता, छायाबाद के रूप में, हास युग के वैयक्तिक अनुभवों, ऊर्ध्वमुखी विकास की प्रवृत्तियों, ऐहिक जीवन की आकांक्षाओं सम्बन्धी स्वप्नों, निराशाओं और समवेदनाओं को अभिव्यक्त करने लगी और व्यक्तिगत जीवन की कठिनाइयों से पुब्ध होकर पलायन के रूप में, प्राकृतिक दर्शन के सिद्धान्तों के आधार पर, भीतर-बाहर में, सुख-दुःख में, आशा-निराशा और संयोग-वियोग के द्वन्द्रों में सामंजस्य स्थापित करने लगी। सापेच की पराजय उसमें निरपेक्ष की जय के रूप में गौरवान्वित होने लगी। म 'प्रसाद' जी ने यद्यपि अपने काव्य में अनेक स्थलों पर रहस्यात्मकता का आश्रय लिया है परन्तु सिद्धान्ततः छायावाद को उन्होंने न रहस्यवाद से सम्बद्ध किया और न प्रकृतिवाद से, वरन् ध्वन्यात्मकता, लाक्षणिकता, सौन्दर्यमय प्रतीक-विधान तथा उपप्चार वकता के साथ स्वानुभूति की विवृति को छायाबाद की विशेषताओं में स्वीकार करके एक प्रकार से उसका प्रतिवाद ही किया। 'निराला' जी ने इस सम्बन्ध में अपना कोई स्पष्ट मत नहीं दिया परन्तु उनके काव्य में एक. स्वच्छन्द चन्द में चित्रित उन मानव-अनुभूतियों का नाम छाया उपयुक्त ही था और मुझे तो भाज भी उपयुक्त ही लगता है। पृष्ठ साठ. दो. आधुनिक कवि, भाग दो पृष्ठ बारह. हाँ मूल में यह रहस्यवाद भी नहीं है। प्रकृति विश्वात्मा की छाया मा प्रतिविम्व है। इसलिए प्रकृति को काव्यगत व्यवहार में लेकर छायावाद को सृष्टि होती है, यह सिद्धान्त भी भ्रामक है। यद्यपि प्रकृति का आलम्बन, स्वानुभूति का प्रकृति से तादात्म्य भवीन काव्य-धारा में होने लगा है, किन्तु प्रकृति से सम्बन्ध राने वाली कविता को ही छायावाद नहीं कहा जा सकता । छाया भारतीय दृष्टि से अनुभूति और अभिव्यक्ति की अंगिमा पर अधिक निर्भर करती है। ध्वम्यारमकता, खाणिकता, सौन्दर्यमयता, प्रतीक-विधान तथा उपचार- वक्रता के साथ स्वानुभूति की विवृति छायावाद की विशेषताएँ हैं।--काव्य- कक्षा तथा अन्य निबंध स्थल-स्थल पर मानवीय स्वर इतना प्रधान है और लाक्षणिक आवरण भी इतना मीना है कि उनके सम्पूर्ण काव्य की आध्यात्मिक व्याख्या नहीं की जा सकती। छायावाद की प्रारम्भिक अवस्था में कविताओं पर आध्यात्मिकता की ध्वनि का प्रावरण पूरी तरह नहीं चढ़ पाया था अतएव प्रारम्भिक बालोचक शुक्रजी को उसकी वास्तविक भावभूमि परखने में भ्रान्ति नहीं हुई। उन्होंने लिखाः 'प्रथम बासना का यह उद्गार आध्यात्मिक पर्दे में ही छिपा न रह सका। हृदय की सारी काम-वासनाएँ, इन्द्रियों के सुख-बिवास की मधुर और रमणीय सामग्री के बीच एक बँधी हुई रूषि पर व्यक्त होने लगीं। इस प्रकार रहरुमबाद से सम्बन्ध म रखने वाली कविताएँ भी छायावाद की कही जाने लगीं अतः 'छायावाद' शब्द का प्रयोग रहस्यवाद तक ही न रहकर काम्य-शैली के सम्बन्ध में भी प्रतीकवाद के अर्थ में होने लगा। 'रीतिकाल की शृङ्गारी कविता की भरमार की तो इतनी निन्दा की गई पर वही कविता कभी रहस्य का पर्दा डालकर, कभी खुले मैदान अपनी कुछ अदा बहुलकर फिर प्रायः सारा काव्य क्षेत्र छोड़कर चल रही है।" किन्तु जहाँ इस प्रकार की तीव्र आलोचना शुक्लजी ने की वहीं छायावाद में कुछ अंश तक श्राध्यात्मिक प्रेम की सत्ता की साक्षी भी दी है : 'छायावाद जहाँ तक आध्यात्मिक प्रेम लेकर चला है वहाँ तक तो रहस्यवाद के ही अन्तर्गत रहा है। उसके भागे प्रतीकवाद या चित्रभाषाबाद नाम की काव्य-शैली के रूप में गृहीत होकर भी यह अधिकतर प्रेम-गान ही करता रहा है।' प्रसाद जी की तरह शुक्ल जी की व्याख्या भी छायावाद के भावपक्ष को गौण और शैलीपक्ष को प्रधान मानकर चली है जब कि वास्तविकता यह है कि छायावादी कविता की भावसम्पति को किसी प्रकार उसकी शैली की तुलना में अप्रधान नहीं ठहराया जा सकता। शुक्ल जी के अनन्तर अनेक आलोचक छायावाद की समीक्षा करने में प्रवृत्त हुए । श्राध्यात्मिकता के पक्ष के प्रायः सभी समर्थकों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से महादेवी जी की विचार धारा ने प्रभावित किया और कुछ दूर तक विरोधियों को भी तीव्र प्रतिवाद करने का आमन्त्रण दिया। छायावाद की नई-नई परिभाषाएँ सामने आने लगीं और काव्य में आध्यात्मिकता की विविध अवस्थाएँ खोजी जाने लगीं। नन्ददुलारे वाजपेयी ने अपना विचार व्यक्त किया कि 'छायावाद के मूल में स्थित आध्यात्मिक दर्शन के ही कारण नये भौतिकवादी उसमें दोष ही दोष देखते हैं।' अन्यत्र कहा गया कि 'विश्व की किसी वस्तु में एक अज्ञात सप्राण छाया की झाँकी पाना अथवा उसका आरोप करना ही छायावाद है। छायावादी कवि प्रकति के पुजारी की भाँति विश्व के कण-कण में अपने सर्वव्यापक प्राणों की छाया देखता है। इसकी तीन अवस्थाएँ बताई गई। पहली 'सृष्टि के प्रति विस्मय का भाव', दूसरी 'मानसिक अशान्ति की श्राकुलता का आभास', तथा तीसरी 'प्रेम के प्रकाश की प्राप्ति, इसी को छायावाद की चरम परियति माना गया, जहाँ पहुँचकर छायावादी उसी एक. 'आधुनिक साहित्य पृष्ठ तीन सौ तैंतालीस.
|
यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव. कहा- आज़म खान पर हो रहे अत्याचार को लेकर बातचीत हुई. उनपर फर्जी मुकदमे हो रहे हैं. सरकार बदले की नीयत से कार्रवाई कर रही है.
Cricket World Cup 2023: Pakistan ने फिर दी धमकी, कहा कि पाकिस्तानी टीम भी वर्ल्ड कप neutral venue पर ही खेलेगी!
Foxconn-Vedanta की Chip-Semiconductor Deal टूटी, PM Modi की electronic manufacturing योजना का क्या होगा?
Weather News: यूपी पर टूटा कुदरत का कहर, शहर-शहर आसमानी बारिश, 48 घंटे में कितनी जिंदगियां खत्म?
सचिन-सीमा की मोहब्बत और 5 तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
|
यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव. कहा- आज़म खान पर हो रहे अत्याचार को लेकर बातचीत हुई. उनपर फर्जी मुकदमे हो रहे हैं. सरकार बदले की नीयत से कार्रवाई कर रही है. Cricket World Cup दो हज़ार तेईस: Pakistan ने फिर दी धमकी, कहा कि पाकिस्तानी टीम भी वर्ल्ड कप neutral venue पर ही खेलेगी! Foxconn-Vedanta की Chip-Semiconductor Deal टूटी, PM Modi की electronic manufacturing योजना का क्या होगा? Weather News: यूपी पर टूटा कुदरत का कहर, शहर-शहर आसमानी बारिश, अड़तालीस घंटाटे में कितनी जिंदगियां खत्म? सचिन-सीमा की मोहब्बत और पाँच तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
|
नई दिल्लीः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने फिर से उप राष्ट्रपति को निशाने पर लिया है। मुसलमानों के सशक्तीकरण, शिक्षा एवं सुरक्षा के बारे में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान को निराशाजनक बताते हुए RSS के मुखपत्र पांचजन्य में कहा गया है कि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक सांप्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। RSS का कहना है कि देश के उप राष्ट्रपति को सभी समुदायों की सुरक्षा की बात करनी चाहिए, ना कि समुदाय विशेष की।
हामिद अंसारी द्वारा सकारात्मक कदमों द्वारा मुसलमानों के सशक्तिकरण की जरूरत बताये जाने पर निशाना साधते हुए पांचजन्य में एक लेख में कहा गया है कि हाल में मजलिस ए मुशावरात के जलसे में हामिद अंसारी का भाषण निराश करने वाला था क्योंकि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक सांप्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। उप राष्ट्रपति से यह उम्मीद होना स्वाभाविक है कि वे किसी विशेष समुदाय की तरफदारी करने की बजाए सबके हित की बात करेंगे, लेकिन उनके भाषण में यह बात गायब थी।
लेख में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन ISIS, तालिबान, बोको हराम का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कोई मजहबी समुदाय अगर 1400 साल पुरानी बातों को आज भी जस का तस लागू करने की इच्छा रखता हो, तब वह आधुनिक कैसे हो सकता है। पांचजन्य के लेख में कहा गया है कि अपने प्रगतिशील मुखौटे के बावजूद हामिद अंसारी का भाषण मुस्लिम संस्थाओं के मांगपत्र जैसा लगता है जिसमें आत्मविश्लेषण की कोई इच्छा नहीं नजर आती।
संघ के मुखपत्र में कहा गया है कि अंसारी ने मुस्लिम सुरक्षा का मुद्दा उठाया। क्या वह यह कहना चाहते हैं कि मुसलमानों को बहुसंख्यक समुदाय से खतरा है। वह शायद दंगों का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन दंगों को मुख्य रूप से अल्पसंख्यक हवा देते हैं और जब बहुसंख्यकों की प्रतिक्रिया होती है तो इसे मुस्लिम सुरक्षा का विषय बताया जाता है। गोधरा में पहले हिंदुओं को जीवित जलाया गया था। जब हिंदुओं की प्रतिक्रिया आई तो इसे सामूहिक संहार कहा गया। लेख में कहा गया है कि बेहतर होता कि उपराष्ट्रपति ने केवल एक की नहीं बल्कि सभी समुदायों की सुरक्षा की बात की होती।
संपादकीय के अनुसार मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर से जाने पर हिंदू अल्पसंख्यकों को मजबूर होना पड़ा। लेकिन किसी हिंदू बहुसंख्यक राज्य ने मुस्लिमों के साथ ऐसा नहीं किया। इस संदर्भ में अजीब बात है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने केवल एक समुदाय की सुरक्षा की बात की। लेख के अनुसार, अंसारी ने कहा कि मुसलमानों को विभाजन के लिए जिम्मेदार राजनीतिक घटनाक्रमों की कीमत अदा करनी पड़ी। लेकिन वह भूल जाते हैं कि मुसलमान विभाजन के पीड़ित नहीं बल्कि कारण हैं।
संपादकीय में लिखा है कि उन्होंने आजादी से पहले पाकिस्तान के लिए वोट दिया लेकिन वे सभी पाकिस्तान नहीं गये। अंसारी को मुसलमानों को असमानताओं का शिकार पेश करने के बजाय बताना चाहिए कि उनकी कट्टरता उन्हें समाज में भाइचारे से कैसे अलग रख रही है।
|
नई दिल्लीः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने फिर से उप राष्ट्रपति को निशाने पर लिया है। मुसलमानों के सशक्तीकरण, शिक्षा एवं सुरक्षा के बारे में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान को निराशाजनक बताते हुए RSS के मुखपत्र पांचजन्य में कहा गया है कि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक सांप्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। RSS का कहना है कि देश के उप राष्ट्रपति को सभी समुदायों की सुरक्षा की बात करनी चाहिए, ना कि समुदाय विशेष की। हामिद अंसारी द्वारा सकारात्मक कदमों द्वारा मुसलमानों के सशक्तिकरण की जरूरत बताये जाने पर निशाना साधते हुए पांचजन्य में एक लेख में कहा गया है कि हाल में मजलिस ए मुशावरात के जलसे में हामिद अंसारी का भाषण निराश करने वाला था क्योंकि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक सांप्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। उप राष्ट्रपति से यह उम्मीद होना स्वाभाविक है कि वे किसी विशेष समुदाय की तरफदारी करने की बजाए सबके हित की बात करेंगे, लेकिन उनके भाषण में यह बात गायब थी। लेख में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन ISIS, तालिबान, बोको हराम का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कोई मजहबी समुदाय अगर एक हज़ार चार सौ साल पुरानी बातों को आज भी जस का तस लागू करने की इच्छा रखता हो, तब वह आधुनिक कैसे हो सकता है। पांचजन्य के लेख में कहा गया है कि अपने प्रगतिशील मुखौटे के बावजूद हामिद अंसारी का भाषण मुस्लिम संस्थाओं के मांगपत्र जैसा लगता है जिसमें आत्मविश्लेषण की कोई इच्छा नहीं नजर आती। संघ के मुखपत्र में कहा गया है कि अंसारी ने मुस्लिम सुरक्षा का मुद्दा उठाया। क्या वह यह कहना चाहते हैं कि मुसलमानों को बहुसंख्यक समुदाय से खतरा है। वह शायद दंगों का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन दंगों को मुख्य रूप से अल्पसंख्यक हवा देते हैं और जब बहुसंख्यकों की प्रतिक्रिया होती है तो इसे मुस्लिम सुरक्षा का विषय बताया जाता है। गोधरा में पहले हिंदुओं को जीवित जलाया गया था। जब हिंदुओं की प्रतिक्रिया आई तो इसे सामूहिक संहार कहा गया। लेख में कहा गया है कि बेहतर होता कि उपराष्ट्रपति ने केवल एक की नहीं बल्कि सभी समुदायों की सुरक्षा की बात की होती। संपादकीय के अनुसार मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर से जाने पर हिंदू अल्पसंख्यकों को मजबूर होना पड़ा। लेकिन किसी हिंदू बहुसंख्यक राज्य ने मुस्लिमों के साथ ऐसा नहीं किया। इस संदर्भ में अजीब बात है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने केवल एक समुदाय की सुरक्षा की बात की। लेख के अनुसार, अंसारी ने कहा कि मुसलमानों को विभाजन के लिए जिम्मेदार राजनीतिक घटनाक्रमों की कीमत अदा करनी पड़ी। लेकिन वह भूल जाते हैं कि मुसलमान विभाजन के पीड़ित नहीं बल्कि कारण हैं। संपादकीय में लिखा है कि उन्होंने आजादी से पहले पाकिस्तान के लिए वोट दिया लेकिन वे सभी पाकिस्तान नहीं गये। अंसारी को मुसलमानों को असमानताओं का शिकार पेश करने के बजाय बताना चाहिए कि उनकी कट्टरता उन्हें समाज में भाइचारे से कैसे अलग रख रही है।
|
छत्तीसगढ़ः जिले के चिंतलनार, बुरकापालऔर चिंतागुफा बेसकैंप से कोबरा,एसटीएफ, डीआरजी की टीम थाना चिंतागुफा चिंतलनार क्षेत्रअंतर्गत एंटी नक्सल नक्सल उन्मूलन अभियान में निकले थे।
इसी दौरान अरबराज मेट्टा पहाडिय़ों के पास नक्सलियों द्वारा किये गये आईईडी विस्फोट में 08 जवान घायल हो गए जबकि इनमें से एक जवान असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव शहीद हो गये। घायल 07 जवानों का उपचार राजधानी रायपुर में चल रहा है।
पुलिस के अनुसार थाना चिंतागुफा के उत्तर-पश्चिम में 09 किलोमीटर और बुर्कापाल बेस कैंप से 06 किलोमीटर की दूरी पर शनिवार रात में लगभग 8. 30 बजे अरबराज मेट्टा पहाड़ियों के पास नक्सलियों ने आईईडी विस्फोट की वारदात को अंजाम दिया।
आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल कोबरा 206 के सेकेंड इन कमांड दिनेश सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव सहित 206 कोबरा के आठ जवान घायल हो गए।
सभी घायलों को तुरंत चिंतलनार फील्ड अस्पताल पहुंचाने के बाद रात में ही सभी 08 घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया। इलाज के दौरान घायल जवानअसिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव शहीद हो गये। रायपुर में रविवार सुबह लगभग 3. 30 बजे उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
शहीद नितिन भालेराव नासिक, महाराष्ट्र के मूलनिवासी थे। रायपुर में इलाज करा रहे शेष 07 घायल जवानों की हालत स्थिर है और उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है। इसकी पुष्टि बस्तर आईजी सुंदरराजपी ने किया है।
|
छत्तीसगढ़ः जिले के चिंतलनार, बुरकापालऔर चिंतागुफा बेसकैंप से कोबरा,एसटीएफ, डीआरजी की टीम थाना चिंतागुफा चिंतलनार क्षेत्रअंतर्गत एंटी नक्सल नक्सल उन्मूलन अभियान में निकले थे। इसी दौरान अरबराज मेट्टा पहाडिय़ों के पास नक्सलियों द्वारा किये गये आईईडी विस्फोट में आठ जवान घायल हो गए जबकि इनमें से एक जवान असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव शहीद हो गये। घायल सात जवानों का उपचार राजधानी रायपुर में चल रहा है। पुलिस के अनुसार थाना चिंतागुफा के उत्तर-पश्चिम में नौ किलोग्राममीटर और बुर्कापाल बेस कैंप से छः किलोग्राममीटर की दूरी पर शनिवार रात में लगभग आठ. तीस बजे अरबराज मेट्टा पहाड़ियों के पास नक्सलियों ने आईईडी विस्फोट की वारदात को अंजाम दिया। आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल कोबरा दो सौ छः के सेकेंड इन कमांड दिनेश सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव सहित दो सौ छः कोबरा के आठ जवान घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत चिंतलनार फील्ड अस्पताल पहुंचाने के बाद रात में ही सभी आठ घायलों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया। इलाज के दौरान घायल जवानअसिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव शहीद हो गये। रायपुर में रविवार सुबह लगभग तीन. तीस बजे उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। शहीद नितिन भालेराव नासिक, महाराष्ट्र के मूलनिवासी थे। रायपुर में इलाज करा रहे शेष सात घायल जवानों की हालत स्थिर है और उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है। इसकी पुष्टि बस्तर आईजी सुंदरराजपी ने किया है।
|
प्यार एक अद्भुत एह्सास हैं। लेकिन फिर भी बहुत से लोग प्यार करने से डरते हैं। कोई अगर किसी को प्यार करता है और उसे पा लेता है तो उसकी ये जिम्मेदारी बनती है वह उसके टेस्ट को पूरी तरह से समझे। अगर आपको भी प्यार से डर लगता है तो यह फिलोफोबिया भी हो सकता है।
ऐसे लोगो का मानना है कि अक्सर हर किसी को दूसरे से प्यार हो जाता है और वह प्यार को लेकर बड़ी-बड़ी डींगे भी मारता है। ऐसे में यह समझना बहुत मुश्किल हैं कौन सचा हैं और कौन झूठा। आजकल के ज्यादातर लड़के और लड़कियां केवल इंजॉय करने के लिए एक-दूसरे से प्यार करते हैं। उनके लिए प्यार का मतलब साथ में घूमना-फिरना, मूवी देखना, खाना-पीना और शॉपिंग करना है।
बहुत से लोग प्यार से इसलिए डरते हैं क्योंकि वह किसी से इतना जुड़ जाते हैं कि उनसे दूर जाने से डर लगता है। जैसे कई लड़के और लड़कियां प्यार में शादी करने का वादा करते हैं। लेकिन बाद में मुकर जाते हैं।
अपने प्यार का इजहार करने से पहले आपको डर सताता है सामने वाले की न का। कहीं अगर, उसने न कह दिया तो...। ऐसे में क्या होगा आपके इमोशंस का और उस प्यार का जो आपके खून के साथ पूरे शरीर में दौड़ता है। ऐसे में किसी भी रिश्ते में नकार देने का डर बहुत ही खतरनाक होता है।
अब लड़के-लड़कियों प्यार को टाइमपास और रिलेशनशिप को इंजॉय करने जैसी सोच रखते हैं। आज की सोसायटी में प्यार बहुत बदल गया है। अब लोगों में वैसी भावनाएं नहीं रह गई जैसे पहले हुआ करती थी। आज हर कोई उससे प्यार करना चाहता है, जो उसके लाइफ स्टाइल से मैच करता हो।
ये बात तो बिल्कुल सच है कि हम जो आज होते हैं वो पूरी तरह से बीते हुए अनुभवों के आधार पर होते हैं। आप हर स्थिति को किसी न किसी से रिलेट कर के चलते हैं। ऐसे में कई बार आपको आपकी जिंदगी के पुराने अनुभव डराते हैं। वो आपको कई काम करने से रोकते हैं। अब यहां आपको करना ये होगा कि पुराने दिनों में अगर आपके साथ कुछ बुरा हुआ तो उसको अपने आज पर कतई हावी न होने दें और आज को आज के ही रूप में एंज्वॉय करें।
प्यार में एक बार धोखा खाने के बाद भी प्यार से डर लगने लगता हैं। पुरानी यादों को ताजा करते हुए कॉलेज की एक विद्यार्थी दीपिका बताती हैं कि जब वह किसी के साथ रिश्ते में थी तो मुझे सच में लगता था कि मुझे प्यार हो गया है। मुझे लगता था कि वह रिश्ता आगे तक जाएगा, लेकिन कुछ कारणों से वह रिश्ता टूट गया। अब मुझे किसी भी रिश्ते में भावनात्मक रूप से जुड़ने में डर लगता है।
ये बात तो जगजाहिर है कि आपकी जिंदगी में जब कोई नया रिश्ता आता है तो पुराने की अहमियत खुद ब खुद कम हो जाती है। ऐसे में अब आप अपने नए प्यार के लिए झूठ भी बोलने लगते हैं। कभी वो, जिसको आप अपने प्यार में सबसे ऊपर रखते थे, वह दूसरे नंबर पर आ जाता है। ऐसे में किसी को भी चुनने से पहले अपने बीते हुए कल की अहमियत को कभी कम न होने दें।
नए रिश्ता एक अज्ञात क्षेत्र की तरह होता है, और हम में से ज्यादातर लोगों को इस अज्ञात क्षेत्र को लेकर हमेशा आशंका होती है। अपने आपको प्यार में डालने का मतलब है वास्तविक जोखिम लेना। प्यार में हम दूसरे पर इतना भरोसा कर लेते हैं कि उसको खुद को प्रभावित करने की इजाजत दे देते है जिससे वह हमें प्रभावित करने लगता है, जो हमें कमजोर बना देता है।
कुछ लोगों को मानना है कि प्यार में पड़ने का मतलब, बड़े होने का संकेत हैं। और यह स्वतंत्र रूप में हमारे जीवन को शुरू करने का प्रतिनिधित्व करता हैं। लेकिन साथ ही यह विकास परिवार से बिदाई का प्रतिनिधित्व भी कर सकता हैं। इसलिए परिवार से दूरी के डर से बहुत से लोग प्यार से डरने लगते हैं।
बहुत से लोग खोने के डर से भी प्यार करने से घबराते हैं उन्हें लगता हैं कि ऐसा न हो कि जिसे वह सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, अपने प्यार को इजहार कर उसे खो दें। सच तो यह है कि प्यार अक्सर असंतुलित होता है, व्यक्ति को पल में कम या ज्यादा लग सकता है। अपनी भावनाओं के लिए हम दूसरे को बदलने पर मजबूर नहीं कर सकते हैं।
हम में से बहुत से लोग चीजों से इसलिए दूर भागते हैं, क्योंकि जो हमें खुशी देती है, वह दर्द भी देगी। इस डर से भी कई लोग प्यार करने से घबराते हैं। जीवन में प्यार में भावनात्मक स्तर पर हम सच्ची खुशी को अनुभव करते हैं, लेकिन दुख को भी महसूस करने की उम्मीद कर सकते हैं।
आपकी जिंदगी में जब भी प्यार आता है, तो वो कभी भी अकेले नहीं आता। वह अपने साथ हमेशा कुछ नई जिम्मेदारियां लेकर आता है। ऐसे में आपको ध्यान देना होगा कि आपकी जिंदगी में पहले से भी कुछ जिम्म्ेदारियां हैं। प्यार की जिम्मेदारियों में उलझ कर आप उनको मत भूल जाएगी। यहां आपको जरूरत पड़ेगी अपने प्यार और जिंदगी की अन्य जिम्मेदारियों के बिच सामंजस्य बैठाने की।
|
प्यार एक अद्भुत एह्सास हैं। लेकिन फिर भी बहुत से लोग प्यार करने से डरते हैं। कोई अगर किसी को प्यार करता है और उसे पा लेता है तो उसकी ये जिम्मेदारी बनती है वह उसके टेस्ट को पूरी तरह से समझे। अगर आपको भी प्यार से डर लगता है तो यह फिलोफोबिया भी हो सकता है। ऐसे लोगो का मानना है कि अक्सर हर किसी को दूसरे से प्यार हो जाता है और वह प्यार को लेकर बड़ी-बड़ी डींगे भी मारता है। ऐसे में यह समझना बहुत मुश्किल हैं कौन सचा हैं और कौन झूठा। आजकल के ज्यादातर लड़के और लड़कियां केवल इंजॉय करने के लिए एक-दूसरे से प्यार करते हैं। उनके लिए प्यार का मतलब साथ में घूमना-फिरना, मूवी देखना, खाना-पीना और शॉपिंग करना है। बहुत से लोग प्यार से इसलिए डरते हैं क्योंकि वह किसी से इतना जुड़ जाते हैं कि उनसे दूर जाने से डर लगता है। जैसे कई लड़के और लड़कियां प्यार में शादी करने का वादा करते हैं। लेकिन बाद में मुकर जाते हैं। अपने प्यार का इजहार करने से पहले आपको डर सताता है सामने वाले की न का। कहीं अगर, उसने न कह दिया तो...। ऐसे में क्या होगा आपके इमोशंस का और उस प्यार का जो आपके खून के साथ पूरे शरीर में दौड़ता है। ऐसे में किसी भी रिश्ते में नकार देने का डर बहुत ही खतरनाक होता है। अब लड़के-लड़कियों प्यार को टाइमपास और रिलेशनशिप को इंजॉय करने जैसी सोच रखते हैं। आज की सोसायटी में प्यार बहुत बदल गया है। अब लोगों में वैसी भावनाएं नहीं रह गई जैसे पहले हुआ करती थी। आज हर कोई उससे प्यार करना चाहता है, जो उसके लाइफ स्टाइल से मैच करता हो। ये बात तो बिल्कुल सच है कि हम जो आज होते हैं वो पूरी तरह से बीते हुए अनुभवों के आधार पर होते हैं। आप हर स्थिति को किसी न किसी से रिलेट कर के चलते हैं। ऐसे में कई बार आपको आपकी जिंदगी के पुराने अनुभव डराते हैं। वो आपको कई काम करने से रोकते हैं। अब यहां आपको करना ये होगा कि पुराने दिनों में अगर आपके साथ कुछ बुरा हुआ तो उसको अपने आज पर कतई हावी न होने दें और आज को आज के ही रूप में एंज्वॉय करें। प्यार में एक बार धोखा खाने के बाद भी प्यार से डर लगने लगता हैं। पुरानी यादों को ताजा करते हुए कॉलेज की एक विद्यार्थी दीपिका बताती हैं कि जब वह किसी के साथ रिश्ते में थी तो मुझे सच में लगता था कि मुझे प्यार हो गया है। मुझे लगता था कि वह रिश्ता आगे तक जाएगा, लेकिन कुछ कारणों से वह रिश्ता टूट गया। अब मुझे किसी भी रिश्ते में भावनात्मक रूप से जुड़ने में डर लगता है। ये बात तो जगजाहिर है कि आपकी जिंदगी में जब कोई नया रिश्ता आता है तो पुराने की अहमियत खुद ब खुद कम हो जाती है। ऐसे में अब आप अपने नए प्यार के लिए झूठ भी बोलने लगते हैं। कभी वो, जिसको आप अपने प्यार में सबसे ऊपर रखते थे, वह दूसरे नंबर पर आ जाता है। ऐसे में किसी को भी चुनने से पहले अपने बीते हुए कल की अहमियत को कभी कम न होने दें। नए रिश्ता एक अज्ञात क्षेत्र की तरह होता है, और हम में से ज्यादातर लोगों को इस अज्ञात क्षेत्र को लेकर हमेशा आशंका होती है। अपने आपको प्यार में डालने का मतलब है वास्तविक जोखिम लेना। प्यार में हम दूसरे पर इतना भरोसा कर लेते हैं कि उसको खुद को प्रभावित करने की इजाजत दे देते है जिससे वह हमें प्रभावित करने लगता है, जो हमें कमजोर बना देता है। कुछ लोगों को मानना है कि प्यार में पड़ने का मतलब, बड़े होने का संकेत हैं। और यह स्वतंत्र रूप में हमारे जीवन को शुरू करने का प्रतिनिधित्व करता हैं। लेकिन साथ ही यह विकास परिवार से बिदाई का प्रतिनिधित्व भी कर सकता हैं। इसलिए परिवार से दूरी के डर से बहुत से लोग प्यार से डरने लगते हैं। बहुत से लोग खोने के डर से भी प्यार करने से घबराते हैं उन्हें लगता हैं कि ऐसा न हो कि जिसे वह सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, अपने प्यार को इजहार कर उसे खो दें। सच तो यह है कि प्यार अक्सर असंतुलित होता है, व्यक्ति को पल में कम या ज्यादा लग सकता है। अपनी भावनाओं के लिए हम दूसरे को बदलने पर मजबूर नहीं कर सकते हैं। हम में से बहुत से लोग चीजों से इसलिए दूर भागते हैं, क्योंकि जो हमें खुशी देती है, वह दर्द भी देगी। इस डर से भी कई लोग प्यार करने से घबराते हैं। जीवन में प्यार में भावनात्मक स्तर पर हम सच्ची खुशी को अनुभव करते हैं, लेकिन दुख को भी महसूस करने की उम्मीद कर सकते हैं। आपकी जिंदगी में जब भी प्यार आता है, तो वो कभी भी अकेले नहीं आता। वह अपने साथ हमेशा कुछ नई जिम्मेदारियां लेकर आता है। ऐसे में आपको ध्यान देना होगा कि आपकी जिंदगी में पहले से भी कुछ जिम्म्ेदारियां हैं। प्यार की जिम्मेदारियों में उलझ कर आप उनको मत भूल जाएगी। यहां आपको जरूरत पड़ेगी अपने प्यार और जिंदगी की अन्य जिम्मेदारियों के बिच सामंजस्य बैठाने की।
|
Aamrapali Dubey - Arvind Akela Kallu Romance Video: भोजपुरी फिल्मों की सबसे खूबसूरत अदाकारा आम्रपाली दुबे (Aamrapali Dubey) सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव रहती हैं। आम्रपाली दुबे के गाने को भोजपुरी दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। आम्रपाली दुबे के गाने को सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। वैसे तो भोजपुरी इंडस्ट्री में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ और आम्रपाली की जोड़ी को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इनकी जोड़ी इंटरनेट पर आग लगा देती है। निरहुआ और आम्रपाली ने भोजपुरी इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्में दी है।
इसी बीच आम्रपाली दुबे और अरविंद अकेला कल्लू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भोजपुरी गाना ' टूटे देह रात रात भर' (Toote Deh Raat Raat Bhar) यूट्यूब पर इस समय ट्रेंड कर रहा है।
गाने के वीडियो में आम्रपाली ब्लू कलर की साड़ी बेहद ही ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही हैं। इस गाने में आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू बेडरूम में खूब रोमांस करते हुए नजर आ रहा है। ये गाना भोजपुरी फिल्म 'शादी मुबारक' (SHAADI MUBARAK) का है।
आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू बेडरूम में खूब ठुमके और रोमांस करते हुए नजर आ रहे हैं। आम्रपाली गाने में बेहद ही ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही हैं। गाने में आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू की हॉट केमिस्ट्री को खूब पसंद किया जा रहा है। शादी मुबारक' में अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे के अलावा विनोद मिश्रा, समर्थ चतुर्वेदी, सृष्टि पाठक, विद्या सिंह, सोनू पांडे और जय सिंह भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें कि गाने को प्रियंका सिंह और अरविंद अकेला कल्लू ने गाया है, जबकि गाने के बोल श्याम देहाती ने लिखे हैं और संगीत ओम झा ने दिया है। गाने को SRK MUSIC नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है, जिसे अभी तक 93,823 से अधिक बार देखा जा चुका है।
|
Aamrapali Dubey - Arvind Akela Kallu Romance Video: भोजपुरी फिल्मों की सबसे खूबसूरत अदाकारा आम्रपाली दुबे सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव रहती हैं। आम्रपाली दुबे के गाने को भोजपुरी दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है। आम्रपाली दुबे के गाने को सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। वैसे तो भोजपुरी इंडस्ट्री में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ और आम्रपाली की जोड़ी को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इनकी जोड़ी इंटरनेट पर आग लगा देती है। निरहुआ और आम्रपाली ने भोजपुरी इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्में दी है। इसी बीच आम्रपाली दुबे और अरविंद अकेला कल्लू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भोजपुरी गाना ' टूटे देह रात रात भर' यूट्यूब पर इस समय ट्रेंड कर रहा है। गाने के वीडियो में आम्रपाली ब्लू कलर की साड़ी बेहद ही ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही हैं। इस गाने में आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू बेडरूम में खूब रोमांस करते हुए नजर आ रहा है। ये गाना भोजपुरी फिल्म 'शादी मुबारक' का है। आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू बेडरूम में खूब ठुमके और रोमांस करते हुए नजर आ रहे हैं। आम्रपाली गाने में बेहद ही ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही हैं। गाने में आम्रपाली और अरविंद अकेला कल्लू की हॉट केमिस्ट्री को खूब पसंद किया जा रहा है। शादी मुबारक' में अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे के अलावा विनोद मिश्रा, समर्थ चतुर्वेदी, सृष्टि पाठक, विद्या सिंह, सोनू पांडे और जय सिंह भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं। आपको बता दें कि गाने को प्रियंका सिंह और अरविंद अकेला कल्लू ने गाया है, जबकि गाने के बोल श्याम देहाती ने लिखे हैं और संगीत ओम झा ने दिया है। गाने को SRK MUSIC नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है, जिसे अभी तक तिरानवे,आठ सौ तेईस से अधिक बार देखा जा चुका है।
|
देश के चर्चित रियलिटी शो 'बिग बॉस' के प्रतियोगी अक्सर स्टंट बेस्ड रियलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी' के लिए भी चयनित किए जाते हैं। हमेशा की तरह यह कोई नई बात नहीं हैं। दोनों ही शोज में एक जैसे प्रतियोगी दिखाई देते हैं। इसमें तेजस्वी प्रकाश, राहुल वैद्य, निक्की तंबोली तथा अभिनव शुक्ला सहित कई और नाम सम्मिलित हमेशा रहे हैं।
बता दें इस शो के सभी प्रतियोगी केप टाउन जाने के लिए तैयार हैं। खबरो की माने तो इस शो में इस बार प्रतियोगियों में मोहित मलिक, प्रतीक सहजपाल, फैसल शेख, चेतना पांडे, राजीव अदतिया और रुबीना दिलाइक जैसे कई अन्य नाम शामिल हैं"। कलर्स पर जल्द ही 'खतरों के खिलाड़ी' का प्रसारण होगा।
रिपोर्ट्स की माने तो इसकी शूटिंग के लिए रोहित शेट्टी इस महीने के अंत तक केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना होंगे। रिपोर्ट की माने तो खतरों के खिलाड़ी 12 की शूटिंग के लिए रवाना होने से पहले सभी प्रतियोगी मुंबई में एक बैठक के लिए एक बार मिलेंगे, और शो के लिए सूट शुरू करने से पहले केप टाउन में चार दिनों के लिए क्वारंटाइन भी किए जाएंगे। इस शो को जीतने के लिए सभी सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट अपने-अपने तरीके से ट्रेनिंग भी ले रहे हैं।
This website uses cookies.
|
देश के चर्चित रियलिटी शो 'बिग बॉस' के प्रतियोगी अक्सर स्टंट बेस्ड रियलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी' के लिए भी चयनित किए जाते हैं। हमेशा की तरह यह कोई नई बात नहीं हैं। दोनों ही शोज में एक जैसे प्रतियोगी दिखाई देते हैं। इसमें तेजस्वी प्रकाश, राहुल वैद्य, निक्की तंबोली तथा अभिनव शुक्ला सहित कई और नाम सम्मिलित हमेशा रहे हैं। बता दें इस शो के सभी प्रतियोगी केप टाउन जाने के लिए तैयार हैं। खबरो की माने तो इस शो में इस बार प्रतियोगियों में मोहित मलिक, प्रतीक सहजपाल, फैसल शेख, चेतना पांडे, राजीव अदतिया और रुबीना दिलाइक जैसे कई अन्य नाम शामिल हैं"। कलर्स पर जल्द ही 'खतरों के खिलाड़ी' का प्रसारण होगा। रिपोर्ट्स की माने तो इसकी शूटिंग के लिए रोहित शेट्टी इस महीने के अंत तक केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना होंगे। रिपोर्ट की माने तो खतरों के खिलाड़ी बारह की शूटिंग के लिए रवाना होने से पहले सभी प्रतियोगी मुंबई में एक बैठक के लिए एक बार मिलेंगे, और शो के लिए सूट शुरू करने से पहले केप टाउन में चार दिनों के लिए क्वारंटाइन भी किए जाएंगे। इस शो को जीतने के लिए सभी सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट अपने-अपने तरीके से ट्रेनिंग भी ले रहे हैं। This website uses cookies.
|
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की शुक्रवार को उदयपुर की सभा को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। इधर, कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर शाह के कन्हैयालाल के हत्या के आरोपियों को एनआईए ने पकडऩे के बयान को लेकर राजनीति गरमा गई है वहीं कांग्रेस ने सभा को लेकर आदिवासियों का अपमान बताया। जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शाह पर निशाना साधते हुए बयान जारी किया।
अखिल भारतीय कांग्रेस संचालन समिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य व उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा ने भाजपा पर आदिवासी समुदाय के अपमान करने का आरोप लगाया।
मीणा ने कहा कि उदयपुर में आरएसएस की 18 जून को हुई आदिवासी हुंकार रैली में बिपरजॉय तूफान की चेतावनी के बावजूद आदिवासियों को खुले में छोड़ दिया जबकि अमित शाह की रैली के लिये तीन-तीन डोम लगाए। मीणा ने कहा कि भाजपा का आदिवासियों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करना और वास्तव में उन्हें सम्मान देने में जमीन-आसमान का फर्क है।
उदयपुर ग्रामीण विधानसभा के प्रत्याशी रहे डॉ. विवेक कटारा ने जारी किए एक बयान में कहा की एक सप्ताह पहले आरएसएस द्वारा निकाली गई रैली इसी गाँधी ग्राउंड में पहुंची तब ऐसे प्रबंध क्यों नहीं किए। कटारा ने सवाल किया की आदिवासियों के साथ इतना भेदभाव क्यों किया गया। कटारा बोले शाह के दौरे पर तो इतनी व्यवस्था की गई तो उस समय आदिवासियों की जान से क्यों खेला गया।
उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूलसिंह मीणा ने शाह की सभा पर गहलोत के जारी बयान पर कहा कि गहलोत मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री भी है और उदयपुर में इतना बड़ा हत्याकांड हो गया और पुलिस ने कन्हैयालाल की नहीं सुनी।
फूलसिंह ने कहा कि पुलिस ने कन्हैयालाल की एफआईआर भी दर्ज नहीं की और उस पर दबाव बनाया। गहलोत जवाब दें कि पुलिस ने कन्हैयालाल की अर्जी पर कार्रवाई क्यों नहीं की? उल्लेखनीय है कि अमित शाह ने सभा में कन्हैया हत्याकांड पर जो बोला उसको लेकर मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट कर शाह पर निशाना साधा था।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की शुक्रवार को उदयपुर की सभा को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। इधर, कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर शाह के कन्हैयालाल के हत्या के आरोपियों को एनआईए ने पकडऩे के बयान को लेकर राजनीति गरमा गई है वहीं कांग्रेस ने सभा को लेकर आदिवासियों का अपमान बताया। जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शाह पर निशाना साधते हुए बयान जारी किया। अखिल भारतीय कांग्रेस संचालन समिति सदस्य व उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा ने भाजपा पर आदिवासी समुदाय के अपमान करने का आरोप लगाया। मीणा ने कहा कि उदयपुर में आरएसएस की अट्ठारह जून को हुई आदिवासी हुंकार रैली में बिपरजॉय तूफान की चेतावनी के बावजूद आदिवासियों को खुले में छोड़ दिया जबकि अमित शाह की रैली के लिये तीन-तीन डोम लगाए। मीणा ने कहा कि भाजपा का आदिवासियों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करना और वास्तव में उन्हें सम्मान देने में जमीन-आसमान का फर्क है। उदयपुर ग्रामीण विधानसभा के प्रत्याशी रहे डॉ. विवेक कटारा ने जारी किए एक बयान में कहा की एक सप्ताह पहले आरएसएस द्वारा निकाली गई रैली इसी गाँधी ग्राउंड में पहुंची तब ऐसे प्रबंध क्यों नहीं किए। कटारा ने सवाल किया की आदिवासियों के साथ इतना भेदभाव क्यों किया गया। कटारा बोले शाह के दौरे पर तो इतनी व्यवस्था की गई तो उस समय आदिवासियों की जान से क्यों खेला गया। उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूलसिंह मीणा ने शाह की सभा पर गहलोत के जारी बयान पर कहा कि गहलोत मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री भी है और उदयपुर में इतना बड़ा हत्याकांड हो गया और पुलिस ने कन्हैयालाल की नहीं सुनी। फूलसिंह ने कहा कि पुलिस ने कन्हैयालाल की एफआईआर भी दर्ज नहीं की और उस पर दबाव बनाया। गहलोत जवाब दें कि पुलिस ने कन्हैयालाल की अर्जी पर कार्रवाई क्यों नहीं की? उल्लेखनीय है कि अमित शाह ने सभा में कन्हैया हत्याकांड पर जो बोला उसको लेकर मुख्यमंत्री गहलोत ने ट्वीट कर शाह पर निशाना साधा था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) की नियुक्ति के दिशानिर्देश तय कर दिए हैं। इसके पीछे मकसद बैंकिंग उद्योग में अनुपालन और जोखिम प्रबंधन को लेकर एकरूपता सुनिश्चित करना है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार सीसीओ की नियुक्ति न्यूनतम तीन साल के लिए होगी। वह महाप्रबंधक स्तर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से दो स्तर से अधिक नीचे का अधिकारी नहीं होगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस तरह के स्वतंत्र अनुपालन कामकाज की अगुवाई सीसीओ करेगा।
सीसीओ का चयन एक उचित अनुकूल और उपयुक्त आकलन या चयन प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। सीसीओ अनुपालन से संबंधित जोखिमों का प्रबंधन करेगा। रिजर्व बैंक के संज्ञान में आया है कि विभिन्न बैंक इस बारे में अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। इन दिशानिर्देशों का मकसद इस बारे में बैंकों के रुख में एकरूपता लाना और सीसीओ से संबंधित निरीक्षण आकांक्षाओं को सर्वश्रेष्ठ व्यवहार से जोड़ना है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कुछ आकस्मिक परिस्थितयिों में सीसीओ हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके लिए पहले बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही एक बेहतर तरीके से परिभाषित और पारदर्शी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
सीसीओ बैंक का वरिष्ठ कार्यकारी होगा। यह महाप्रबंधक या सीईओ से दो स्तर नीचे तक का अधिकारी होगा। सीसीओ की नियुक्ति बाजार में उपलब्ध उम्मीदवारों में से भी की जा सकती है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि सीसीओ को कोई ऐसी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनती हो। विशेषरूप से उसे कारोबार से संबंधित कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।
धन शोधन रोधक अधिकारी जैसे पद सीधे हितों का टकराव पैदा नहीं करते हैं। यदि बैंक के आकार, जटिलता, जोखिम प्रबंधन रणनीति तथा ढांचे के हिसाब से अनुकूल बैठता हो, तो सीसीओ को धन शोधन रोधक अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा सीसीओ किसी ऐसी समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए जो उसकी भूमिका के साथ हितों का टकराव पैदा करती हो।
ग्रामीण इलाकों में पहुंच बढ़ाने के प्रयास के तहत निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा एचडीएफसी बैंक अपने बैंक मित्रों की संख्या को इस वित्त वर्ष के अंत तक बढ़ाकर 25,000 करने की योजना बना रहा है। बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अभी बैंक मित्रों (बैंकिंग कॉरस्पॉन्डेंट) की संख्या 11,000 है।
एचडीएफसी बैंक की कंट्री प्रमुख सरकारी संस्थागत कारोबार एवं स्टार्टअप्स स्मिता भगत ने कहा कि हम हमेशा सभी ग्राहकों, यहां तक कि देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों को सर्वश्रेष्ठ बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। अपने इसी प्रयास के तहत हम इस वित्त वर्ष के अंत तक बैंक मित्रों की संख्या को 11,000 से बढ़ाकर 25,000 करेंगे।
उन्होंने कहा कि ग्राहक को बैंक मित्रों के जरिये खाता खोलना, मियादी जमा, भुगतान उत्पाद और ऋण जैसी सभी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि बैंक अपने बैंक मित्र नेटवर्क के विस्तार के लिए सरकार के साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) के इस्तेमाल पर भी गौर कर रहा है।
|
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति के दिशानिर्देश तय कर दिए हैं। इसके पीछे मकसद बैंकिंग उद्योग में अनुपालन और जोखिम प्रबंधन को लेकर एकरूपता सुनिश्चित करना है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार सीसीओ की नियुक्ति न्यूनतम तीन साल के लिए होगी। वह महाप्रबंधक स्तर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी से दो स्तर से अधिक नीचे का अधिकारी नहीं होगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस तरह के स्वतंत्र अनुपालन कामकाज की अगुवाई सीसीओ करेगा। सीसीओ का चयन एक उचित अनुकूल और उपयुक्त आकलन या चयन प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। सीसीओ अनुपालन से संबंधित जोखिमों का प्रबंधन करेगा। रिजर्व बैंक के संज्ञान में आया है कि विभिन्न बैंक इस बारे में अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। इन दिशानिर्देशों का मकसद इस बारे में बैंकों के रुख में एकरूपता लाना और सीसीओ से संबंधित निरीक्षण आकांक्षाओं को सर्वश्रेष्ठ व्यवहार से जोड़ना है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कुछ आकस्मिक परिस्थितयिों में सीसीओ हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके लिए पहले बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही एक बेहतर तरीके से परिभाषित और पारदर्शी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा। सीसीओ बैंक का वरिष्ठ कार्यकारी होगा। यह महाप्रबंधक या सीईओ से दो स्तर नीचे तक का अधिकारी होगा। सीसीओ की नियुक्ति बाजार में उपलब्ध उम्मीदवारों में से भी की जा सकती है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि सीसीओ को कोई ऐसी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनती हो। विशेषरूप से उसे कारोबार से संबंधित कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। धन शोधन रोधक अधिकारी जैसे पद सीधे हितों का टकराव पैदा नहीं करते हैं। यदि बैंक के आकार, जटिलता, जोखिम प्रबंधन रणनीति तथा ढांचे के हिसाब से अनुकूल बैठता हो, तो सीसीओ को धन शोधन रोधक अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा सीसीओ किसी ऐसी समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए जो उसकी भूमिका के साथ हितों का टकराव पैदा करती हो। ग्रामीण इलाकों में पहुंच बढ़ाने के प्रयास के तहत निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा एचडीएफसी बैंक अपने बैंक मित्रों की संख्या को इस वित्त वर्ष के अंत तक बढ़ाकर पच्चीस,शून्य करने की योजना बना रहा है। बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अभी बैंक मित्रों की संख्या ग्यारह,शून्य है। एचडीएफसी बैंक की कंट्री प्रमुख सरकारी संस्थागत कारोबार एवं स्टार्टअप्स स्मिता भगत ने कहा कि हम हमेशा सभी ग्राहकों, यहां तक कि देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों को सर्वश्रेष्ठ बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। अपने इसी प्रयास के तहत हम इस वित्त वर्ष के अंत तक बैंक मित्रों की संख्या को ग्यारह,शून्य से बढ़ाकर पच्चीस,शून्य करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्राहक को बैंक मित्रों के जरिये खाता खोलना, मियादी जमा, भुगतान उत्पाद और ऋण जैसी सभी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि बैंक अपने बैंक मित्र नेटवर्क के विस्तार के लिए सरकार के साझा सेवा केंद्रों के इस्तेमाल पर भी गौर कर रहा है।
|
अगले महीने 1 अप्रैल से उत्तराखंड में पीने का पानी भी नौ से 15 % तक एक्सपेंसिव होगा। इस हिसाब से लोगों को प्यास बुझाने के लिए 150 से लेकर 200 रुपये तक ज्याजा चुकाने पड़ेंगे। सरकार की व्यवस्था के अंतर्गत प्रति वर्ष एक अप्रैल से पानी के बिल में इजाफा किया जाता है।
शहरी इलाकों में पानी का बिल हाउस टैक्स के आधार पर तय होता है। यहां बिल में हर साल 15 % के लगभग इजाफा होता है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में घरों में लगे नलों की संख्या के आधार पर बिल और उसमें इजाफे का निर्धारण किया जाता है। 2 नल होने पर बिल में नौ % और दो से ज्यादा नल होने पर 15 % तक का इजाफा किया जाता है।
जल संस्थान प्रति 3 माह में पानी के बिल जारी करता है। मौजूदा वक्त में शहरी इलाकों में तीन महीने में 1385 रुपए का बिल चुकाना पड़ रहा है। इस लिहाज से प्रतिमाह 461 रुपए लोगों को चुकाना पड़ता है। मगर, एक अप्रैल से लोगों को प्रति बिल पर 150 से 200 रुपये तक ज्यादा पे करने पड़ेंगे।
आपको बता दें कि अभी तक जल संस्थान औसत के लिहाज बिल आता है। क्योंकि, कई जगह पानी के मीटर नहीं लगे हैं। मगर, अब राजधानी देहरादून में मेंहूवाला क्लस्टर योजना के अंतर्गत आने वाले इलाकों के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में पानी के मीटर लग गए हैं। लोगों को मीटर की रीडिंग के आधार पर बिल देना पड़ेगा। दूसरी तरफ मीटर का भी 16 रुपये ज्यादा चुकाना पड़ेगा। इन इलाकों में ज्यादा बिल चुकाना पड़ेगा।
|
अगले महीने एक अप्रैल से उत्तराखंड में पीने का पानी भी नौ से पंद्रह % तक एक्सपेंसिव होगा। इस हिसाब से लोगों को प्यास बुझाने के लिए एक सौ पचास से लेकर दो सौ रुपयापये तक ज्याजा चुकाने पड़ेंगे। सरकार की व्यवस्था के अंतर्गत प्रति वर्ष एक अप्रैल से पानी के बिल में इजाफा किया जाता है। शहरी इलाकों में पानी का बिल हाउस टैक्स के आधार पर तय होता है। यहां बिल में हर साल पंद्रह % के लगभग इजाफा होता है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में घरों में लगे नलों की संख्या के आधार पर बिल और उसमें इजाफे का निर्धारण किया जाता है। दो नल होने पर बिल में नौ % और दो से ज्यादा नल होने पर पंद्रह % तक का इजाफा किया जाता है। जल संस्थान प्रति तीन माह में पानी के बिल जारी करता है। मौजूदा वक्त में शहरी इलाकों में तीन महीने में एक हज़ार तीन सौ पचासी रुपयापए का बिल चुकाना पड़ रहा है। इस लिहाज से प्रतिमाह चार सौ इकसठ रुपयापए लोगों को चुकाना पड़ता है। मगर, एक अप्रैल से लोगों को प्रति बिल पर एक सौ पचास से दो सौ रुपयापये तक ज्यादा पे करने पड़ेंगे। आपको बता दें कि अभी तक जल संस्थान औसत के लिहाज बिल आता है। क्योंकि, कई जगह पानी के मीटर नहीं लगे हैं। मगर, अब राजधानी देहरादून में मेंहूवाला क्लस्टर योजना के अंतर्गत आने वाले इलाकों के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में पानी के मीटर लग गए हैं। लोगों को मीटर की रीडिंग के आधार पर बिल देना पड़ेगा। दूसरी तरफ मीटर का भी सोलह रुपयापये ज्यादा चुकाना पड़ेगा। इन इलाकों में ज्यादा बिल चुकाना पड़ेगा।
|
आदरणीय आशुतोष भाई ,
आपकी इस रचना के भाव पक्ष मजबूत व शिक्षाप्रद है , मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
आदरणीय आशुतोष जी,बहुत सुन्दर गज़ल बधाई आपको ।
वाह वाह आदरणीय आशुतोष जी बेहद उम्दा शानदार ग़ज़ल कही है आपने पूरी ग़ज़ल पर बधाई इन दो अशआरों पर विशेष दाद कुबूल फरमाएं.
।बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको ।
|
आदरणीय आशुतोष भाई , आपकी इस रचना के भाव पक्ष मजबूत व शिक्षाप्रद है , मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें। आदरणीय आशुतोष जी,बहुत सुन्दर गज़ल बधाई आपको । वाह वाह आदरणीय आशुतोष जी बेहद उम्दा शानदार ग़ज़ल कही है आपने पूरी ग़ज़ल पर बधाई इन दो अशआरों पर विशेष दाद कुबूल फरमाएं. ।बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको ।
|
दुबारा चुनाव जीतने के तुरंत बाद बनारस पहुंचकर मोदी जी ने 5 ख़रब की अर्थव्यवस्था पर प्रश्न करने वालों को पेशेवर निराशावादी करार दिया था। इसके बाद लगातार डूबती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए सरकार द्वारा और मीडिया द्वारा बहुत कुछ किया जा चुका है। अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री को छोड़कर किसी और के वक्तव्य किसी टीवी चैनेल पर नहीं आते। दिनभर ये चैनेल कश्मीर की तथाकथित सामान्य हालत या फिर पाकिस्तान के समाचार से हमारा पेट भरते रहते हैं।
अब एनआरसी के समाचार हैं। दरअसल पेशेवर निराशावादी वे लोग होते हैं जो समस्या से मुंह फेर कर बैठे होते हैं और वर्तमान सरकार पूरी तरह से ऐसे लोगों से भरी पड़ी है। ये लोग केवल पेशेवर निराशावादी ही होते तब भी गनीमत थी, पर सभी समस्याओं को इनकी आत्ममुग्धता और गंभीर बना रही है।
इस वक्तव्य को मीडिया ने खूब उछाला, पर किसी ने ये नहीं पूछा की इस खराब अर्थव्यवस्था के कोई आंकड़े भी तो होंगे या फिर दुनियाभर के अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले संस्थानों वर्ल्ड बैंक, आईएमऍफ़, या फिर वर्ल्ड इकनोमिक फोरम ने तो ऐसा कुछ क्यों नहीं कहा था।
चलिए मान लिया 2014 में अर्थव्यवस्था ठीक नहीं थी। जब किसी की तबीयत बहुत खराब होती है तो सबसे पहले उसकी हालत स्थिर करने का प्रयास होता है और जब हालत स्थिर हो जाती है तब बाद में फिर आगे का उपचार किया जाता है। पर आत्ममुग्ध मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय एक ऐसा कदम उठाया जिसके लिए एक प्रचलित मुहावरा है, चौबे चले छब्बे बनाने बनकर लौटे दूबे। वास्तविकता तो यह है की नोटबंदी जैसे आत्मघाती कदम की तुलना तो दुबे से भी नहीं की जा सकती, सही मायने में यह कदम तो "डूबे" के समतुल्य था।
सबने कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठ गया, रोजगार चले गए और उद्योग बंद होने लगे और बैंकों की हालत खराब हो गयी, पर आत्ममुग्ध सरकार को इसके बाद भी सब इतना अच्छा लगा कि अधकचरी हालत में ही जीएसटी लागू कर दिया। सरकार भले ही इसे अधकचरा न कहे, पर बार-बार उत्पादों के जीएसटी स्लैब बदलना ही यह बताता है कि इसके बारे में पहले कोई गंभीर विचार-विमर्श किया ही नहीं गया था।
इसके बाद तो पूरी अर्थव्यवस्था ही ध्वस्त होने लगी, इसी बीच 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का सब्जबाग दिखाया जाने लगा। जब रोम जल रहा था तब नीरो तो केवल बंसी ही बजा रहा था, यहाँ तो जलते देश में लोगों को नए नारे दिए जाते हैं, सब्जबाग दिखाए जाते हैं, प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री तक अपना ही चालीसा गाने लगते हैं।
अब जब सबकुछ लुट गया तो अनुच्छेद 370 का ही प्रचार शुरू हो गया और स्विस बैंक से खातेधारकों के नाम आने का सब्जबाग आ गया। अभी तो असम की खबरें कई दिनों तक चलती रहेंगी और बाढ़ के विसुअल्स होंगे। जब ये सब फेड आउट होने लगेगा तब कोई और नया कारनामा सामने आ जाएगा।
भाजपा के ही सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं की 5 ख़रब की अर्थव्यवस्था को भूल जाइए क्योंकि सरकार के पास कोई आर्थिक नीति नहीं है। अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए साहसी कदम और अर्थव्यवस्था का ज्ञान दोनों आवश्यक है, पर सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार मौजूदा सरकार के पास इसमें से कुछ भी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार से अनुरोध किया है कि बदले की राजनीति छोड़कर अर्थशास्त्रियों की सुने मोदी सरकार, तभी मंदी से उबरा जा सकता है।
पर इस देश की विडम्बना यही है की प्रधानमंत्री अपने आप को सबसे बड़ा अर्थशास्त्री, सबसे महान वैज्ञानिक और सर्वश्रेष्ठ समाज शास्त्री मानते हैं। सर्वश्रेष्ठ होने के बाद वे क्यों किसी की बात मानने लगे। दूसरी तरफ पूर्व रक्षामंत्री और वर्तमान वित्त मंत्री का पूरा समय अपने मंत्रालय के काम नहीं बीतता बल्कि राहुल गाँधी को कोसने में बीतता है।
बड़े मंत्रालय संभालने की उनकी एकमात्र योग्यता यही है। आप उनके बजट को ही देखिये, जब देश की तबाह होती अर्थव्यवस्था को संभालने वाले बजट की जरूरत थी तब इसमें ना तो संभालने के लिए कोई रोडमैप था और न ही कोई सोच। तमाम गलतियों वाले इस बजट की हालत ऐसे थी की तीन महीने के भीतर ही उन्हें बहुत कुछ बदलने की जरूरत पड़ रही है।
एक अमेरिकी पत्रिका, न्यूज़वीक में भारत के बारे में एक लेख में एक कटाक्ष था। इसके अनुसार वर्तमान सरकार काम से अधिक आंकड़ों की बाजीगरी में भरोसा करती है। पहले की सरकारों में जब एक किलोमीटर सड़क पूरी बन जाती थी तब उसे गिना जाता था, पर इस सरकार में डीवाईडर के एक तरफ की सड़क एक किलोमीटर होती है, डीवाईडर के दूसरे तरफ उसी सड़क के दूसरे हिस्से को अगला किलोमीटर गिना जाता है और यदि उसके किनारे कोई लेन है, तो उसे अगले किलोमीटर में शामिल किया जाता है। यानी, पिछली सरकारों की एक किलोमीटर सड़क अब दो किलोमीटर से लेकर चार किलोमीटर तक पहुँच गयी है।
देश की अर्थव्यवस्था को भी सड़क के लम्बाई की तरह जबरदस्ती बढ़ा दिया जाता है, पर सरकारी आंकड़े ही समय-समय पर इन आंकड़ों को झूठा बताते हैं। न्यूजवीक में ही एक लेख में बताया गया है कि सरकार कितना भी दावा करे, पर विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था भारत नहीं है। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, पर इसकी गति बहुत धीमी है और मदी की रफ्तार बहुत तेज।
अनेक अर्थशास्त्री मानते हैं कि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में तमाम गलतियां हैं और ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की सही स्थिति नहीं बताते हैं। जून के महीने में अरविन्द सुब्रमण्यन ने इसकी खामियों को उजागर किया था और बताया था कि वर्तमान सरकार जब सकल घरेलू उत्पाद में 7 प्रतिशत की वृद्धि बताती है तब वह वास्तविकता में महज 4.5 प्रतिशत की वृद्धि होती है। ऐसे विचार पहले भी अनेक अर्थशास्त्री रख चुके हैं, पर उम्मीद के मुताबिक़ सरकार इन दावों को लगातार खारिज करती रही है।
आंकड़ों को दरकिनार कर भी दें, तब भी अरविन्द सुब्रमण्यन की एक बात से तो कोई इंकार नहीं कर सकता है। उनके अनुसार अर्थव्यवस्था के बढ़ने के लिए बढ़ते रोजगार के अवसर, आयात-निर्यात में बढ़ोत्तरी, रिज़र्व खजाने में बढ़ोत्तरी, बढ़ता औद्योगिक उत्पादन, उत्पादों की बढ़ती मांग और बढता कृषि उत्पादन जिम्मेदार है, पर इनमें से कुछ भी नहीं बढ़ रहा है तो फिर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से कैसे बढ़ सकती है?
जेपी मॉर्गन चेज के विशेषज्ञ जहांगीर अज़ीज़ बताते हैं कि जब सरकार के आंकड़े ही भ्रामक हैं तब इस पर आधारित विकास हमेशा भ्रामक ही रहेगा। प्रधानमंत्री जी ने चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद कहा था, रसायनशास्त्र से गणित हार गया। अब अर्थव्यवस्था के सरकारी आंकड़ों को थोडा इसी हारे हुए गणित की नजर से देखना पड़ेगा। पर सरकार ऐसा करेगी नहीं, केवल जनता को बेवक़ूफ़ बनाकर और आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर ही वर्ष 2024 तक 5 ख़रब के आंकड़े तक पहुंचा जा सकता है और कम से कम यह इस सरकार के लिए, जो पेशेवर निराशावादियों से भरी पड़ी है, सबसे आसान काम है।
|
दुबारा चुनाव जीतने के तुरंत बाद बनारस पहुंचकर मोदी जी ने पाँच ख़रब की अर्थव्यवस्था पर प्रश्न करने वालों को पेशेवर निराशावादी करार दिया था। इसके बाद लगातार डूबती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए सरकार द्वारा और मीडिया द्वारा बहुत कुछ किया जा चुका है। अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री को छोड़कर किसी और के वक्तव्य किसी टीवी चैनेल पर नहीं आते। दिनभर ये चैनेल कश्मीर की तथाकथित सामान्य हालत या फिर पाकिस्तान के समाचार से हमारा पेट भरते रहते हैं। अब एनआरसी के समाचार हैं। दरअसल पेशेवर निराशावादी वे लोग होते हैं जो समस्या से मुंह फेर कर बैठे होते हैं और वर्तमान सरकार पूरी तरह से ऐसे लोगों से भरी पड़ी है। ये लोग केवल पेशेवर निराशावादी ही होते तब भी गनीमत थी, पर सभी समस्याओं को इनकी आत्ममुग्धता और गंभीर बना रही है। इस वक्तव्य को मीडिया ने खूब उछाला, पर किसी ने ये नहीं पूछा की इस खराब अर्थव्यवस्था के कोई आंकड़े भी तो होंगे या फिर दुनियाभर के अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले संस्थानों वर्ल्ड बैंक, आईएमऍफ़, या फिर वर्ल्ड इकनोमिक फोरम ने तो ऐसा कुछ क्यों नहीं कहा था। चलिए मान लिया दो हज़ार चौदह में अर्थव्यवस्था ठीक नहीं थी। जब किसी की तबीयत बहुत खराब होती है तो सबसे पहले उसकी हालत स्थिर करने का प्रयास होता है और जब हालत स्थिर हो जाती है तब बाद में फिर आगे का उपचार किया जाता है। पर आत्ममुग्ध मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय एक ऐसा कदम उठाया जिसके लिए एक प्रचलित मुहावरा है, चौबे चले छब्बे बनाने बनकर लौटे दूबे। वास्तविकता तो यह है की नोटबंदी जैसे आत्मघाती कदम की तुलना तो दुबे से भी नहीं की जा सकती, सही मायने में यह कदम तो "डूबे" के समतुल्य था। सबने कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठ गया, रोजगार चले गए और उद्योग बंद होने लगे और बैंकों की हालत खराब हो गयी, पर आत्ममुग्ध सरकार को इसके बाद भी सब इतना अच्छा लगा कि अधकचरी हालत में ही जीएसटी लागू कर दिया। सरकार भले ही इसे अधकचरा न कहे, पर बार-बार उत्पादों के जीएसटी स्लैब बदलना ही यह बताता है कि इसके बारे में पहले कोई गंभीर विचार-विमर्श किया ही नहीं गया था। इसके बाद तो पूरी अर्थव्यवस्था ही ध्वस्त होने लगी, इसी बीच पाँच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का सब्जबाग दिखाया जाने लगा। जब रोम जल रहा था तब नीरो तो केवल बंसी ही बजा रहा था, यहाँ तो जलते देश में लोगों को नए नारे दिए जाते हैं, सब्जबाग दिखाए जाते हैं, प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री तक अपना ही चालीसा गाने लगते हैं। अब जब सबकुछ लुट गया तो अनुच्छेद तीन सौ सत्तर का ही प्रचार शुरू हो गया और स्विस बैंक से खातेधारकों के नाम आने का सब्जबाग आ गया। अभी तो असम की खबरें कई दिनों तक चलती रहेंगी और बाढ़ के विसुअल्स होंगे। जब ये सब फेड आउट होने लगेगा तब कोई और नया कारनामा सामने आ जाएगा। भाजपा के ही सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं की पाँच ख़रब की अर्थव्यवस्था को भूल जाइए क्योंकि सरकार के पास कोई आर्थिक नीति नहीं है। अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए साहसी कदम और अर्थव्यवस्था का ज्ञान दोनों आवश्यक है, पर सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार मौजूदा सरकार के पास इसमें से कुछ भी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार से अनुरोध किया है कि बदले की राजनीति छोड़कर अर्थशास्त्रियों की सुने मोदी सरकार, तभी मंदी से उबरा जा सकता है। पर इस देश की विडम्बना यही है की प्रधानमंत्री अपने आप को सबसे बड़ा अर्थशास्त्री, सबसे महान वैज्ञानिक और सर्वश्रेष्ठ समाज शास्त्री मानते हैं। सर्वश्रेष्ठ होने के बाद वे क्यों किसी की बात मानने लगे। दूसरी तरफ पूर्व रक्षामंत्री और वर्तमान वित्त मंत्री का पूरा समय अपने मंत्रालय के काम नहीं बीतता बल्कि राहुल गाँधी को कोसने में बीतता है। बड़े मंत्रालय संभालने की उनकी एकमात्र योग्यता यही है। आप उनके बजट को ही देखिये, जब देश की तबाह होती अर्थव्यवस्था को संभालने वाले बजट की जरूरत थी तब इसमें ना तो संभालने के लिए कोई रोडमैप था और न ही कोई सोच। तमाम गलतियों वाले इस बजट की हालत ऐसे थी की तीन महीने के भीतर ही उन्हें बहुत कुछ बदलने की जरूरत पड़ रही है। एक अमेरिकी पत्रिका, न्यूज़वीक में भारत के बारे में एक लेख में एक कटाक्ष था। इसके अनुसार वर्तमान सरकार काम से अधिक आंकड़ों की बाजीगरी में भरोसा करती है। पहले की सरकारों में जब एक किलोमीटर सड़क पूरी बन जाती थी तब उसे गिना जाता था, पर इस सरकार में डीवाईडर के एक तरफ की सड़क एक किलोमीटर होती है, डीवाईडर के दूसरे तरफ उसी सड़क के दूसरे हिस्से को अगला किलोमीटर गिना जाता है और यदि उसके किनारे कोई लेन है, तो उसे अगले किलोमीटर में शामिल किया जाता है। यानी, पिछली सरकारों की एक किलोमीटर सड़क अब दो किलोमीटर से लेकर चार किलोमीटर तक पहुँच गयी है। देश की अर्थव्यवस्था को भी सड़क के लम्बाई की तरह जबरदस्ती बढ़ा दिया जाता है, पर सरकारी आंकड़े ही समय-समय पर इन आंकड़ों को झूठा बताते हैं। न्यूजवीक में ही एक लेख में बताया गया है कि सरकार कितना भी दावा करे, पर विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था भारत नहीं है। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, पर इसकी गति बहुत धीमी है और मदी की रफ्तार बहुत तेज। अनेक अर्थशास्त्री मानते हैं कि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में तमाम गलतियां हैं और ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की सही स्थिति नहीं बताते हैं। जून के महीने में अरविन्द सुब्रमण्यन ने इसकी खामियों को उजागर किया था और बताया था कि वर्तमान सरकार जब सकल घरेलू उत्पाद में सात प्रतिशत की वृद्धि बताती है तब वह वास्तविकता में महज चार.पाँच प्रतिशत की वृद्धि होती है। ऐसे विचार पहले भी अनेक अर्थशास्त्री रख चुके हैं, पर उम्मीद के मुताबिक़ सरकार इन दावों को लगातार खारिज करती रही है। आंकड़ों को दरकिनार कर भी दें, तब भी अरविन्द सुब्रमण्यन की एक बात से तो कोई इंकार नहीं कर सकता है। उनके अनुसार अर्थव्यवस्था के बढ़ने के लिए बढ़ते रोजगार के अवसर, आयात-निर्यात में बढ़ोत्तरी, रिज़र्व खजाने में बढ़ोत्तरी, बढ़ता औद्योगिक उत्पादन, उत्पादों की बढ़ती मांग और बढता कृषि उत्पादन जिम्मेदार है, पर इनमें से कुछ भी नहीं बढ़ रहा है तो फिर अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से कैसे बढ़ सकती है? जेपी मॉर्गन चेज के विशेषज्ञ जहांगीर अज़ीज़ बताते हैं कि जब सरकार के आंकड़े ही भ्रामक हैं तब इस पर आधारित विकास हमेशा भ्रामक ही रहेगा। प्रधानमंत्री जी ने चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद कहा था, रसायनशास्त्र से गणित हार गया। अब अर्थव्यवस्था के सरकारी आंकड़ों को थोडा इसी हारे हुए गणित की नजर से देखना पड़ेगा। पर सरकार ऐसा करेगी नहीं, केवल जनता को बेवक़ूफ़ बनाकर और आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर ही वर्ष दो हज़ार चौबीस तक पाँच ख़रब के आंकड़े तक पहुंचा जा सकता है और कम से कम यह इस सरकार के लिए, जो पेशेवर निराशावादियों से भरी पड़ी है, सबसे आसान काम है।
|
'पद्मावत' हिंदी के सर्वोत्तम प्रबंधकाव्यों में है। ठेठ अवधी भाषा के माधुर्य और भावों की गंभीरता की दृष्टि से यह काव्य निराला है। पर खेद के साथ कहना पड़ता है कि इसके पठनपाठन का मार्ग कठिनाइयों के कारण अब तक बंद सा रहा। एक तो इसकी भाषा पुरानी और ठेठ अवधी, दूसरे भाव भी गूढ़, अतः किसी शुद्ध अच्छे संस्करण के बिना इसके अध्ययन का प्रयास कोई कर भी कैसे सकता था ? पर इसका अध्ययन हिंदी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है, यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रंथ 'रामचरितमानस' की रचना की। यही अवधी भाषा और चौपाई दोहे का क्रम दोनों में है, जो आख्यानकाव्यों के लिए हिंदी में संभवतः पहले से चला आता रहा हो। कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग जायसी और तुलसी को छोड़ और किसी कवि ने नहीं किया है। तुलसी के भाषा के स्वरूप को पूर्णतया समझने के लिए जायसी की भाषा का अध्ययन आवश्यक है।
इस ग्रंथ के चार संस्करण मेरे देखने में आए हैं - एक नवलकिशोर प्रेस का, दूसरा पं. रामजसन मिश्र संपादित काशी के चंद्रप्रभा प्रेस का, तीसरा कानपुर के किसी पुराने प्रेस का फारसी अक्षरों में और म. प. पं. सुधाकर द्विवेदी और डॉक्टर ग्रियर्सन संपादित एशियाटिक सोसाइटी का जो पूरा नहीं, तृतीयांश मात्र है।
'फेरत नैन चेरि सौ छूटी। भइ कूटन कुटनी तस कूटी' । इसका ठीक अर्थ यह है कि पद्मावती के दृष्टि फेरते ही सौ दासियाँ छूटीं और उस कुटनी को खूब मारा। पर 'चेरि' को 'चीर' समझकर इसका यह अर्थ किया गया है - 'अगर वह ऑंखें फेर के देखे तो तेरा लहँगा खुल पड़े और जैसी कुटनी है, वैसा ही तुझको कूटे'।
'गढ़ सौंपा बादल, कहँ, गए टिकठि बसि देव' । ठीक अर्थ - चित्तौरगढ़ बादल को सौंपा और टिकठी या अरथी पर बस कर राजा (परलोक) गए।
कानपुर की प्रति में इसका अर्थ इस प्रकार किया गया है - 'किलअ बादल को सौंपा गया और बासदेव सिधारे"। बस इन्हीं नमूनों से अर्थ का और अर्थ करनेवाले का अन्दाज कर लीजिए। अब रहा चौथा, सुधारक जी और डॉक्टर ग्रियर्सन साहब वाला भड़कीला संस्करण। इसमें सुधारक जी की बड़ी लंबी चौड़ी टीका टिप्पणी लगी हुई है; पर दुर्भाग्य से या सौभाग्य से 'पद्मावत' के तृतीयांश तक ही यह संस्करण पहुँचा। इसकी तड़क भड़क का तो कहना ही क्या है। शब्दार्थ, टीका और इधर उधर के किस्सों और कहानियों से इसका डीलडौल बहुत बड़ा हो गया है। पर टिप्पणियाँ अधिकतर अशुद्ध और टीका स्थान स्थान पर भ्रमपूर्ण है। सुधारक जी में एक गुण यह सुना जाता है कि यदि कोई उनके पास कोई कविता अर्थ पूछने के लिए ले जाता तो वह विमुख नहीं लौटता था। वे खींच तान कर कुछ न कुछ अर्थ लगा ही देते थे। बस, इसी गुण से इस टीका में भी काम लिया गया है। शब्दार्थ में कहीं यह नहीं स्वीकार किया गया है कि इस शब्द से टीकाकार परिचित नहीं। सब शब्दों का कुछ न कुछ अर्थ मौजूद है, चाहे वह अर्थ ठीक हो या न हो। शब्दार्थ के कुछ नमूने देखिए - 1. ताईं = तिन्हें (कीन्ह खंभ दुइ जग के ताईं)। 2. आछहि =अच्छा (बिरिछ जो आछहि चंदन पासा)। 3. ऍंबरउर =आम्रराज, अच्छे जाति का आम या अमरावती। 4. सारउ =सास, दूर्वा, दूब (सारिउ सुआ जो रहचह करहीं)। 5. खड़वानी =गडुवा, झारी। 6. अहूठ = अनुत्थ, न उठने योग्य। 7. कनक कचोरी =कनिक या आटे की कचौड़ी। 8. करसी = कर्षित की, खिंचवाई (सिर करवत, तन करसी बहुत सीझ तेहि आस)।
कहीं - कहीं अर्थ ठीक बैठाने के लिए पाठ भी विकृत कर दिया गया है, जैसे, 'कतहु चिरहटा पंखिन्ह लावा' का 'कतहु छरहठा पेखन्ह लावा' कर दिया गया है और 'छरहटा' का अर्थ किया गया है 'क्षार लगानेवाले' 'नकल करनेवाले'। जहाँ 'गथ' शब्द आया है (जिसे हिंदी कविता का साधारण ज्ञान रखनेवाले भी जानते हैं) वहाँ 'गंठि' कर दिया गया है। इसी प्रकार 'अरकाना' (अटकाने दौलत अर्थात् सरदार या उमरा) 'अरगाना' कर के 'अलग होना' अर्थ किया गया है।
स्थान स्थान पर शब्दों की व्युत्पत्ति भी दी हुई मिलती है जिसका न दिया जाना ही अच्छा था। उदाहरण के लिए दो शब्द ही काफी है - पउनारि - पयोनाली, कमल की डंडी।
अहुठ - अनुत्थ, न उठने योग्य।
प्रा. अज्हुट्ठ, अहवे =हिं. अहुठ (साढ़े तीन, 'हूँठा' शब्द इसी से बना है)।
शब्दार्थों से ही टीका का अनुमान भी किया जा सकता है, फिर भी मनोरंजन के लिए कुछ पद्यों की टीका नीचे दी जाती है - 1. अहुठ हाथ तन सरवर, हिया कवल तेहि माँझ।
सुधाकरी अर्थ - राजा कहता है कि (मेरा) हाथ तो अहुठ अर्थात् शक्ति के लग जाने से सामर्थ्यहीन हो कर बेकाम हो गया और (मेरा) तनु सरोवर है जिसके हृदय मध्यह अर्थात् बीच में कमल अर्थात् पद्मावती बसी हुई है। ठीक अर्थ - साढ़े तीन हाथ का शरीर रूपी सरोवर है जिसके मध्य में हृदय रूपी कमल है।
2. हिया थार कुच कंचन लारू। कनक कचोरि उठे जनु चारू।
सुधाकरी अर्थ - हृदय थार में कुच कंचन का लड्डू है। (अथवा) जानों बल कर के कनिक (आटे) की कचौरी उठती है अर्थात् फूल रही है (चक्राकार उठते हुए स्तन कराही में फूलती हुई बदामी रंग की, कचौरी से जान पड़ते हैं)। ठीक अर्थ - मानो सोने के सुंदर कटोरे उठे हुए (औंधे) हैं।
1. एक शब्द 'अध्युसष्ट ' भी मिलता है पर वह केवल प्राकृत 'अवझुट्ठ' की व्युत्पत्ति के लिए गढ़ा हुआ जान पड़ता है।
3. धानुक आप, बेझ जग कीन्हा। 'बेझ का अर्थ ज्ञात न होने के कारण आपने 'बोझ' पाठ कर दिया और इस प्रकार टीका कर दी - सुधाकरी अर्थ - आप धानुक अर्थात् अहेरी हो कर जग (के प्राणी) के बोझ कर लिया अर्थात् जगत के प्राणियों को भ्रूधनु और कटाक्षबाण से मार कर उन प्राणियों का बोझा अर्थात् ढेर कर दिया।
ठीक अर्थ - आप धनुर्धर हैं और सारे जगत को वेध्य सा लक्ष्य किया है।
4. नैहर चाह न पाउब जहाँ। सुधाकरी अर्थ - जहाँ हम लोग नैहर (जाने) की इच्छा (तक) न करने पावेंगी। ('पाउब' के स्थान पर 'पाउबि' पाठ रखा गया है, शायद स्त्रीलिंग के विचार से। पर अवधी में उत्तमपुरुष बहुवचन में स्त्री. पुं. दोनों में एक ही रूप रहता है)। ठीक अर्थ - जहाँ नैहर (मायके) के खबर तक हम न पाएँगी।
5. चलौं पउनि सब गोहने फूल डार लेइ हाथ।
सुधाकरी अर्थ - सब हवा ऐसी या पवित्र हाथ में फूलों की डालियाँ ले ले कर चलीं।
ठीक अर्थ - सब पौनी (इनाम आदि पानेवाली) प्रजा - नाइन, बारिन आदि - फूलों की डालियाँ ले कर साथ चलीं।
इसी प्रकार की भूलों से टीका भरी हुई है। टीका का नाम रखा गया है 'सुधाकर - चंद्रिका'। पर यह चंद्रिका है कि घोर अंधकार? अच्छा हुआ कि एशियाटिक सोसाइटी ने थोड़ा-सा निकाल कर ही छोड़ दिया।
सारांश यह कि इस प्राचीन मनोहर ग्रंथ का कोई अच्छा संस्करण अब तक न था और हिंदी प्रेमियों की रुचि अपने साहित्य के सम्यक् अध्ययन की ओर दिन-दिन बढ़ रही थी। आठ नौ वर्ष हुए, काशी नागरीप्रचारिणी सभा ने अपनी 'मनोरंजन पुस्तकमाला' के लिए मुझसे 'पद्मावत' का एक संक्षिप्त संस्करण शब्दार्थ और टिप्पणी सहित तैयार करने के लिए कहा था। मैंने आधे के लगभग ग्रंथ तैयार भी किया था। पर पीछे यह निश्चय हुआ कि जायसी के दोनों ग्रंथ पूरे निकाले जायँ। अतः 'पद्मावत' की वह अधूरी तैयार की हुई कापी बहुत दिनों तक पड़ी रही।
इधर जब विश्वविद्यालयों में हिंदी का प्रवेश हुआ और हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य भी परीक्षा के वैकल्पिक विषयों में रखा गया, तब तो जायसी का एक शुद्ध उत्तम संस्करण निकालना अनिवार्य हो गया क्योंकि बी.ए. और एम.ए. दोनों की परीक्षाओं में पद्मावत रखी गई। पढ़ाई प्रारम्भ हो चुकी थी और पुस्तक के बिना हर्ज हो रहा था; इससे यह निश्चय किया गया कि समग्र ग्रंथ एकबारगी निकालने में देर होगी; अतः उसके छह-छह फार्म के खंड कर के निकाले जायँ जिससे छात्रों का काम भी चलता रहे। कार्तिक संवत् 1980 से इन खंडों का निकलना प्रारंभ हो गया। चार खंडों में 'पद्मावत' और 'अखरावट' दोनों पुस्तकें समाप्त हुईं।
'पद्मावत' की चार छपी प्रतियों के अतिरिक्त मेरे पास कैथी लिपि में लिखी एक हस्तलिखित प्रति भी थी जिससे पाठ के निश्चय करने में कुछ सहायता मिली। पाठ के संबंध में यह कह देना आवश्यक है कि वह अवधी व्याकरण और उच्चारण तथा भाषाविकास के अनुसार रखा गया है। एशियाटिक सोसाइटी की प्रति में 'ए' और 'औ' इन अक्षरों का व्यवहार नहीं हुआ है : इनके स्थान पर 'अइ' और 'अउ' प्रयुक्त हुए हैं। इस विधान में प्राकृत की पुरानी पद्धति का अनुसरण चाहे हो, पर उच्चारण की उस आगे बढ़ी हुई अवस्था का पता नहीं लगता जिसे हमारी भाषा, जायसी और तुलसी के समय में प्राप्त कर चुकी थी। उस समय चलती भाषा में 'अइ' और 'अउ' के 'अ' और 'इ' तथा 'अ' और 'उ' पृथक्-पृथक् स्फुट उच्चारण नहीं रह गए थे, दोनों स्वर मिल कर 'ए' और 'औ' के समान उच्चरित होने लगे थे। प्राकृत के 'दैत्यादिष्वइ' और 'पौरादिष्वउ' सब दिन के लिए स्थायी नहीं हो सकते थे। प्राकृत और अपभ्रंश अवस्था पार करने पर उलटी गंगा बही। प्राकृत के 'अइ' और 'अउ' के स्थान पर 'ए' और 'औ' उच्चारण में आए - जैसे प्राकृत और अपभ्रंश रूप 'चलइ', 'पइट्ठ', 'कइसे', 'चउक्कोण' इत्यादि हमारी भाषा में आ कर 'चलै', पैठ, 'कैसे', 'चौकोन' इस प्रकार बोले जाने लगे। यदि कहिए कि इनका उच्चारण आजकल तो ऐसा होता है पर जायसी बहुत पुराने हैं, संभवतः उस समय इनका उच्चारण प्राकृत के अनुसार ही होता रहा हो, तो इसका उत्तर यह है कि अभी तुलसीदास जी के थोड़े ही दिनों पीछे की लिखी 'मानस' की कुछ पुरानी प्रतियाँ मौजूद हैं जिनमें बराबर 'कैसे', 'जैसे', 'तैसे', 'कै', 'करै', 'चौथे', 'करौं', 'आवौं' इत्यादि अवधी की चलती भाषा के रूप पाए जाते हैं। जायसी और तुलसी ने चलती भाषा में रचना की है, प्राकृत के समान व्याकरण के अनुसार गढ़ी हुई भाषा में नहीं। यह दूसरी बात है कि प्राचीन रूपों का व्यवहार परंपरा के विचार से उन्होंने बहुत जगह किया है, पर भाषा उनकी प्रचलित भाषा ही है।
क. इहै बहुत जो बोहित पावौं। - जायसी। ख. रघुबीर बल गर्वित वीभीषनु घाल नहिं ताकहँ गनै। - तुलसी।
एक एक की न सँभार। करै तात भ्रात पुकार - तुलसी जब एक ही कवि की रचना में नए और पुराने दोनों रूपों का प्रयोग मिलता है, तब यह निश्चित है कि नए रूप का प्रचार कवि के समय में हो गया था और पुराने रूप का प्रयोग या तो उसने छंद की आवश्यकतावश किया है अथवा परंपरापालन के लिए।
हाँ, 'ए' और 'औ' के संबंध में ध्यान रखने की बात यह है कि इनके 'पूरबी' और 'पच्छिमी' दो प्रकार के उच्चारण होते हैं। पूरबी उच्चारण संस्कृत के समान 'अइ' और 'अउ' से मिलता - जुलता और पच्छिमी उच्चारण 'अय' और 'अव' से मिलता जुलता होता है। अवधी भाषा में शब्द के आदि के 'ए' और 'औ' का अधिकतर पूरबी तथा अंत में पड़नेवाले 'ए' 'औ' का उच्चारण पच्छिमी ढंग पर होता है।
'हि' विभक्ति का प्रयोग प्राचीन पद्धति के अनुसार जायसी में सब कारकों के लिए मिलेगा। पर कर्ता कारक में केवल सकर्मक भूतकालिक क्रिया के सर्वनाम कर्ता के तथा अकारांत संज्ञा कर्ता में मिलता है। इन दोनों स्थलों में मैंने प्रायः वैकल्पिक रूप 'इ' (जो 'हि' का ही विकार है) रखा है, जैसे केइ, जेइ, तेइ, राजै, सूए, गौरे, (किसने, जिसने, उसने, राजा ने, सूए ने, गौरा ने)। इसी 'हि' विभक्ति का ही दूसरा रूप 'ह' है जो सर्वनामों के अंतिम वर्ण के साथ संयुक्त हो कर प्रायः सब कारकों में आया है। अतः जहाँ कहीं 'हम्ह' 'तुम्ह', 'तिन्ह' या 'उन्ह' हो वहाँ यह समझना चाहिए कि यह सर्वनाम कर्ता के अतिरिक्त किसी और कारक में है - जैसे हम्म, हमको, हमसे, हमारा, हममें, हम पर। संबंधवाचक सर्वनाम के लिए 'जो' रखा गया है तथा यदि या जब के अर्थ में अव्यय रूप 'जौ'।
प्रत्येक पृष्ठ में असाधारण या कठिन शब्दों, वाक्यों और कहीं चरणों में अर्थ फुटनोट में बराबर दिए गए हैं जिससे पाठकों को बहुत सुबीता होगा। इसके अतिरिक्त 'मलिक मुहम्मद जायसी' पर एक विस्तृत निबंध भी ग्रंथारंभ के पहले लगा दिया गया है जिसमें कवि की विशेषताओं के अन्वेषण और गुणदोषों के विवेचन का प्रयत्न अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार किया है।
अपने वक्तव्य में 'पद्मावत' के संस्करणों का मैंने जो उल्लेख किया है, वह केवल कार्य की कठिनता का अनुमान कराने के लिए। कभी कभी किसी चौपाई का पाठ और अर्थ निश्चित करने में कई दिनों का समय लग गया है। झंझट का एक बड़ा कारण यह भी था कि जायसी के ग्रंथ बहुतों ने फारसी लिपि में उतारे। फिर उन्हें सामने रख कर बहुत सी प्रतियाँ हिंदी अक्षरों में तैयार हुईं। इससे एक ही शब्द को किसी ने एक रूप में पढ़ा, किसी ने दूसरे रूप में। अतः मुझे बहुत स्थलों पर इस प्रक्रिया से काम लेना पड़ा है कि अमुक शब्द फारसी अक्षरों में लिख जाने पर कितने प्रकार से पढ़ा जा सकता है। काव्य भाषा के प्राचीन स्वरूप पर भी पूरा ध्यान रखना पड़ा है। जायसी की रचना में भिन्न भिन्न तत्त्वसिद्धांतों के आभास को समझने के लिए दूर तक दृष्टि दौड़ाने की आवश्यकता थी। इतनी बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को बिना धोखा खाए पार करना मेरे ऐसे अल्पज्ञ और आलसी के लिए असंभव ही समझिए।
अतः न जाने कितनी भूलें मुझसे इस कार्य में हुई होंगी, जिनके संबंध में सिवाय इसके कि मैं क्षमा माँगू और उदार पाठक क्षमा करें, और हो ही क्या सकता है?
|
'पद्मावत' हिंदी के सर्वोत्तम प्रबंधकाव्यों में है। ठेठ अवधी भाषा के माधुर्य और भावों की गंभीरता की दृष्टि से यह काव्य निराला है। पर खेद के साथ कहना पड़ता है कि इसके पठनपाठन का मार्ग कठिनाइयों के कारण अब तक बंद सा रहा। एक तो इसकी भाषा पुरानी और ठेठ अवधी, दूसरे भाव भी गूढ़, अतः किसी शुद्ध अच्छे संस्करण के बिना इसके अध्ययन का प्रयास कोई कर भी कैसे सकता था ? पर इसका अध्ययन हिंदी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है, यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर चौंतीस वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रंथ 'रामचरितमानस' की रचना की। यही अवधी भाषा और चौपाई दोहे का क्रम दोनों में है, जो आख्यानकाव्यों के लिए हिंदी में संभवतः पहले से चला आता रहा हो। कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका प्रयोग जायसी और तुलसी को छोड़ और किसी कवि ने नहीं किया है। तुलसी के भाषा के स्वरूप को पूर्णतया समझने के लिए जायसी की भाषा का अध्ययन आवश्यक है। इस ग्रंथ के चार संस्करण मेरे देखने में आए हैं - एक नवलकिशोर प्रेस का, दूसरा पं. रामजसन मिश्र संपादित काशी के चंद्रप्रभा प्रेस का, तीसरा कानपुर के किसी पुराने प्रेस का फारसी अक्षरों में और म. प. पं. सुधाकर द्विवेदी और डॉक्टर ग्रियर्सन संपादित एशियाटिक सोसाइटी का जो पूरा नहीं, तृतीयांश मात्र है। 'फेरत नैन चेरि सौ छूटी। भइ कूटन कुटनी तस कूटी' । इसका ठीक अर्थ यह है कि पद्मावती के दृष्टि फेरते ही सौ दासियाँ छूटीं और उस कुटनी को खूब मारा। पर 'चेरि' को 'चीर' समझकर इसका यह अर्थ किया गया है - 'अगर वह ऑंखें फेर के देखे तो तेरा लहँगा खुल पड़े और जैसी कुटनी है, वैसा ही तुझको कूटे'। 'गढ़ सौंपा बादल, कहँ, गए टिकठि बसि देव' । ठीक अर्थ - चित्तौरगढ़ बादल को सौंपा और टिकठी या अरथी पर बस कर राजा गए। कानपुर की प्रति में इसका अर्थ इस प्रकार किया गया है - 'किलअ बादल को सौंपा गया और बासदेव सिधारे"। बस इन्हीं नमूनों से अर्थ का और अर्थ करनेवाले का अन्दाज कर लीजिए। अब रहा चौथा, सुधारक जी और डॉक्टर ग्रियर्सन साहब वाला भड़कीला संस्करण। इसमें सुधारक जी की बड़ी लंबी चौड़ी टीका टिप्पणी लगी हुई है; पर दुर्भाग्य से या सौभाग्य से 'पद्मावत' के तृतीयांश तक ही यह संस्करण पहुँचा। इसकी तड़क भड़क का तो कहना ही क्या है। शब्दार्थ, टीका और इधर उधर के किस्सों और कहानियों से इसका डीलडौल बहुत बड़ा हो गया है। पर टिप्पणियाँ अधिकतर अशुद्ध और टीका स्थान स्थान पर भ्रमपूर्ण है। सुधारक जी में एक गुण यह सुना जाता है कि यदि कोई उनके पास कोई कविता अर्थ पूछने के लिए ले जाता तो वह विमुख नहीं लौटता था। वे खींच तान कर कुछ न कुछ अर्थ लगा ही देते थे। बस, इसी गुण से इस टीका में भी काम लिया गया है। शब्दार्थ में कहीं यह नहीं स्वीकार किया गया है कि इस शब्द से टीकाकार परिचित नहीं। सब शब्दों का कुछ न कुछ अर्थ मौजूद है, चाहे वह अर्थ ठीक हो या न हो। शब्दार्थ के कुछ नमूने देखिए - एक. ताईं = तिन्हें । दो. आछहि =अच्छा । तीन. ऍंबरउर =आम्रराज, अच्छे जाति का आम या अमरावती। चार. सारउ =सास, दूर्वा, दूब । पाँच. खड़वानी =गडुवा, झारी। छः. अहूठ = अनुत्थ, न उठने योग्य। सात. कनक कचोरी =कनिक या आटे की कचौड़ी। आठ. करसी = कर्षित की, खिंचवाई । कहीं - कहीं अर्थ ठीक बैठाने के लिए पाठ भी विकृत कर दिया गया है, जैसे, 'कतहु चिरहटा पंखिन्ह लावा' का 'कतहु छरहठा पेखन्ह लावा' कर दिया गया है और 'छरहटा' का अर्थ किया गया है 'क्षार लगानेवाले' 'नकल करनेवाले'। जहाँ 'गथ' शब्द आया है वहाँ 'गंठि' कर दिया गया है। इसी प्रकार 'अरकाना' 'अरगाना' कर के 'अलग होना' अर्थ किया गया है। स्थान स्थान पर शब्दों की व्युत्पत्ति भी दी हुई मिलती है जिसका न दिया जाना ही अच्छा था। उदाहरण के लिए दो शब्द ही काफी है - पउनारि - पयोनाली, कमल की डंडी। अहुठ - अनुत्थ, न उठने योग्य। प्रा. अज्हुट्ठ, अहवे =हिं. अहुठ । शब्दार्थों से ही टीका का अनुमान भी किया जा सकता है, फिर भी मनोरंजन के लिए कुछ पद्यों की टीका नीचे दी जाती है - एक. अहुठ हाथ तन सरवर, हिया कवल तेहि माँझ। सुधाकरी अर्थ - राजा कहता है कि हाथ तो अहुठ अर्थात् शक्ति के लग जाने से सामर्थ्यहीन हो कर बेकाम हो गया और तनु सरोवर है जिसके हृदय मध्यह अर्थात् बीच में कमल अर्थात् पद्मावती बसी हुई है। ठीक अर्थ - साढ़े तीन हाथ का शरीर रूपी सरोवर है जिसके मध्य में हृदय रूपी कमल है। दो. हिया थार कुच कंचन लारू। कनक कचोरि उठे जनु चारू। सुधाकरी अर्थ - हृदय थार में कुच कंचन का लड्डू है। जानों बल कर के कनिक की कचौरी उठती है अर्थात् फूल रही है । ठीक अर्थ - मानो सोने के सुंदर कटोरे उठे हुए हैं। एक. एक शब्द 'अध्युसष्ट ' भी मिलता है पर वह केवल प्राकृत 'अवझुट्ठ' की व्युत्पत्ति के लिए गढ़ा हुआ जान पड़ता है। तीन. धानुक आप, बेझ जग कीन्हा। 'बेझ का अर्थ ज्ञात न होने के कारण आपने 'बोझ' पाठ कर दिया और इस प्रकार टीका कर दी - सुधाकरी अर्थ - आप धानुक अर्थात् अहेरी हो कर जग के बोझ कर लिया अर्थात् जगत के प्राणियों को भ्रूधनु और कटाक्षबाण से मार कर उन प्राणियों का बोझा अर्थात् ढेर कर दिया। ठीक अर्थ - आप धनुर्धर हैं और सारे जगत को वेध्य सा लक्ष्य किया है। चार. नैहर चाह न पाउब जहाँ। सुधाकरी अर्थ - जहाँ हम लोग नैहर की इच्छा न करने पावेंगी। । ठीक अर्थ - जहाँ नैहर के खबर तक हम न पाएँगी। पाँच. चलौं पउनि सब गोहने फूल डार लेइ हाथ। सुधाकरी अर्थ - सब हवा ऐसी या पवित्र हाथ में फूलों की डालियाँ ले ले कर चलीं। ठीक अर्थ - सब पौनी प्रजा - नाइन, बारिन आदि - फूलों की डालियाँ ले कर साथ चलीं। इसी प्रकार की भूलों से टीका भरी हुई है। टीका का नाम रखा गया है 'सुधाकर - चंद्रिका'। पर यह चंद्रिका है कि घोर अंधकार? अच्छा हुआ कि एशियाटिक सोसाइटी ने थोड़ा-सा निकाल कर ही छोड़ दिया। सारांश यह कि इस प्राचीन मनोहर ग्रंथ का कोई अच्छा संस्करण अब तक न था और हिंदी प्रेमियों की रुचि अपने साहित्य के सम्यक् अध्ययन की ओर दिन-दिन बढ़ रही थी। आठ नौ वर्ष हुए, काशी नागरीप्रचारिणी सभा ने अपनी 'मनोरंजन पुस्तकमाला' के लिए मुझसे 'पद्मावत' का एक संक्षिप्त संस्करण शब्दार्थ और टिप्पणी सहित तैयार करने के लिए कहा था। मैंने आधे के लगभग ग्रंथ तैयार भी किया था। पर पीछे यह निश्चय हुआ कि जायसी के दोनों ग्रंथ पूरे निकाले जायँ। अतः 'पद्मावत' की वह अधूरी तैयार की हुई कापी बहुत दिनों तक पड़ी रही। इधर जब विश्वविद्यालयों में हिंदी का प्रवेश हुआ और हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य भी परीक्षा के वैकल्पिक विषयों में रखा गया, तब तो जायसी का एक शुद्ध उत्तम संस्करण निकालना अनिवार्य हो गया क्योंकि बी.ए. और एम.ए. दोनों की परीक्षाओं में पद्मावत रखी गई। पढ़ाई प्रारम्भ हो चुकी थी और पुस्तक के बिना हर्ज हो रहा था; इससे यह निश्चय किया गया कि समग्र ग्रंथ एकबारगी निकालने में देर होगी; अतः उसके छह-छह फार्म के खंड कर के निकाले जायँ जिससे छात्रों का काम भी चलता रहे। कार्तिक संवत् एक हज़ार नौ सौ अस्सी से इन खंडों का निकलना प्रारंभ हो गया। चार खंडों में 'पद्मावत' और 'अखरावट' दोनों पुस्तकें समाप्त हुईं। 'पद्मावत' की चार छपी प्रतियों के अतिरिक्त मेरे पास कैथी लिपि में लिखी एक हस्तलिखित प्रति भी थी जिससे पाठ के निश्चय करने में कुछ सहायता मिली। पाठ के संबंध में यह कह देना आवश्यक है कि वह अवधी व्याकरण और उच्चारण तथा भाषाविकास के अनुसार रखा गया है। एशियाटिक सोसाइटी की प्रति में 'ए' और 'औ' इन अक्षरों का व्यवहार नहीं हुआ है : इनके स्थान पर 'अइ' और 'अउ' प्रयुक्त हुए हैं। इस विधान में प्राकृत की पुरानी पद्धति का अनुसरण चाहे हो, पर उच्चारण की उस आगे बढ़ी हुई अवस्था का पता नहीं लगता जिसे हमारी भाषा, जायसी और तुलसी के समय में प्राप्त कर चुकी थी। उस समय चलती भाषा में 'अइ' और 'अउ' के 'अ' और 'इ' तथा 'अ' और 'उ' पृथक्-पृथक् स्फुट उच्चारण नहीं रह गए थे, दोनों स्वर मिल कर 'ए' और 'औ' के समान उच्चरित होने लगे थे। प्राकृत के 'दैत्यादिष्वइ' और 'पौरादिष्वउ' सब दिन के लिए स्थायी नहीं हो सकते थे। प्राकृत और अपभ्रंश अवस्था पार करने पर उलटी गंगा बही। प्राकृत के 'अइ' और 'अउ' के स्थान पर 'ए' और 'औ' उच्चारण में आए - जैसे प्राकृत और अपभ्रंश रूप 'चलइ', 'पइट्ठ', 'कइसे', 'चउक्कोण' इत्यादि हमारी भाषा में आ कर 'चलै', पैठ, 'कैसे', 'चौकोन' इस प्रकार बोले जाने लगे। यदि कहिए कि इनका उच्चारण आजकल तो ऐसा होता है पर जायसी बहुत पुराने हैं, संभवतः उस समय इनका उच्चारण प्राकृत के अनुसार ही होता रहा हो, तो इसका उत्तर यह है कि अभी तुलसीदास जी के थोड़े ही दिनों पीछे की लिखी 'मानस' की कुछ पुरानी प्रतियाँ मौजूद हैं जिनमें बराबर 'कैसे', 'जैसे', 'तैसे', 'कै', 'करै', 'चौथे', 'करौं', 'आवौं' इत्यादि अवधी की चलती भाषा के रूप पाए जाते हैं। जायसी और तुलसी ने चलती भाषा में रचना की है, प्राकृत के समान व्याकरण के अनुसार गढ़ी हुई भाषा में नहीं। यह दूसरी बात है कि प्राचीन रूपों का व्यवहार परंपरा के विचार से उन्होंने बहुत जगह किया है, पर भाषा उनकी प्रचलित भाषा ही है। क. इहै बहुत जो बोहित पावौं। - जायसी। ख. रघुबीर बल गर्वित वीभीषनु घाल नहिं ताकहँ गनै। - तुलसी। एक एक की न सँभार। करै तात भ्रात पुकार - तुलसी जब एक ही कवि की रचना में नए और पुराने दोनों रूपों का प्रयोग मिलता है, तब यह निश्चित है कि नए रूप का प्रचार कवि के समय में हो गया था और पुराने रूप का प्रयोग या तो उसने छंद की आवश्यकतावश किया है अथवा परंपरापालन के लिए। हाँ, 'ए' और 'औ' के संबंध में ध्यान रखने की बात यह है कि इनके 'पूरबी' और 'पच्छिमी' दो प्रकार के उच्चारण होते हैं। पूरबी उच्चारण संस्कृत के समान 'अइ' और 'अउ' से मिलता - जुलता और पच्छिमी उच्चारण 'अय' और 'अव' से मिलता जुलता होता है। अवधी भाषा में शब्द के आदि के 'ए' और 'औ' का अधिकतर पूरबी तथा अंत में पड़नेवाले 'ए' 'औ' का उच्चारण पच्छिमी ढंग पर होता है। 'हि' विभक्ति का प्रयोग प्राचीन पद्धति के अनुसार जायसी में सब कारकों के लिए मिलेगा। पर कर्ता कारक में केवल सकर्मक भूतकालिक क्रिया के सर्वनाम कर्ता के तथा अकारांत संज्ञा कर्ता में मिलता है। इन दोनों स्थलों में मैंने प्रायः वैकल्पिक रूप 'इ' रखा है, जैसे केइ, जेइ, तेइ, राजै, सूए, गौरे, । इसी 'हि' विभक्ति का ही दूसरा रूप 'ह' है जो सर्वनामों के अंतिम वर्ण के साथ संयुक्त हो कर प्रायः सब कारकों में आया है। अतः जहाँ कहीं 'हम्ह' 'तुम्ह', 'तिन्ह' या 'उन्ह' हो वहाँ यह समझना चाहिए कि यह सर्वनाम कर्ता के अतिरिक्त किसी और कारक में है - जैसे हम्म, हमको, हमसे, हमारा, हममें, हम पर। संबंधवाचक सर्वनाम के लिए 'जो' रखा गया है तथा यदि या जब के अर्थ में अव्यय रूप 'जौ'। प्रत्येक पृष्ठ में असाधारण या कठिन शब्दों, वाक्यों और कहीं चरणों में अर्थ फुटनोट में बराबर दिए गए हैं जिससे पाठकों को बहुत सुबीता होगा। इसके अतिरिक्त 'मलिक मुहम्मद जायसी' पर एक विस्तृत निबंध भी ग्रंथारंभ के पहले लगा दिया गया है जिसमें कवि की विशेषताओं के अन्वेषण और गुणदोषों के विवेचन का प्रयत्न अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार किया है। अपने वक्तव्य में 'पद्मावत' के संस्करणों का मैंने जो उल्लेख किया है, वह केवल कार्य की कठिनता का अनुमान कराने के लिए। कभी कभी किसी चौपाई का पाठ और अर्थ निश्चित करने में कई दिनों का समय लग गया है। झंझट का एक बड़ा कारण यह भी था कि जायसी के ग्रंथ बहुतों ने फारसी लिपि में उतारे। फिर उन्हें सामने रख कर बहुत सी प्रतियाँ हिंदी अक्षरों में तैयार हुईं। इससे एक ही शब्द को किसी ने एक रूप में पढ़ा, किसी ने दूसरे रूप में। अतः मुझे बहुत स्थलों पर इस प्रक्रिया से काम लेना पड़ा है कि अमुक शब्द फारसी अक्षरों में लिख जाने पर कितने प्रकार से पढ़ा जा सकता है। काव्य भाषा के प्राचीन स्वरूप पर भी पूरा ध्यान रखना पड़ा है। जायसी की रचना में भिन्न भिन्न तत्त्वसिद्धांतों के आभास को समझने के लिए दूर तक दृष्टि दौड़ाने की आवश्यकता थी। इतनी बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को बिना धोखा खाए पार करना मेरे ऐसे अल्पज्ञ और आलसी के लिए असंभव ही समझिए। अतः न जाने कितनी भूलें मुझसे इस कार्य में हुई होंगी, जिनके संबंध में सिवाय इसके कि मैं क्षमा माँगू और उदार पाठक क्षमा करें, और हो ही क्या सकता है?
|
मणिपुर में बीते 2 महीने से हिंसा जारी है. आए दिन यहां से स्थानीय लोगों द्वारा सैन्य बलों और अर्धसैनिक बलों के खिलाफ विरोध की खबरें भी आ रही हैं. आलम यह है कि इन वजहों से सैन्य बलों द्वारा स्थिति सुधार के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन रोके जाने पड़ते हैं. ऐसे ही एक मामला शनिवार को भी सामने आया है, जहां महिलाओं की बड़ी भीड़ ने सुरक्षाबलों को एक इलाके में घेर लिया था. इस तरह से घेरे जाने के बाद सुरक्षाबलों को अपना तलाशी अभियान रोकना पड़ा. इस विरोध के कारण सुरक्षाबलों को उन 12 उग्रवादियों को भी छेड़ना पड़ा, जिन्हें तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने पकड़ा था.
भारतीय सेना की स्पीयर कोर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, 'सुरक्षा बलों को शनिवार को मणिपुर के इथम गांव में एक तलाशी अभियान चलाया था. इस ऑपरेशन के दौरान केवाईकेएल (कांगलेई यावोल कन्ना लूप) विद्रोही समूह के 12 गिरफ्तार उग्रवादियों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. स्पीयर कॉर्प्स ने ट्विटर पर ऑपरेशन की विफलता की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि इलाके में 1200-1500 महिलाओं की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उग्रवादियों को छुड़ा लिया.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सुरक्षाबलों के खास इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर पूर्वी इंफाल जिले के इटहाम गांव में 24 जून को ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन में KYKL के 12 काडरों को हथियार, गोला-बारूद और युद्ध में इस्तेमाल होने वाली कई अन्य चीजें के साथ पकड़ा गया था. इसमें स्वघोषित लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगथम तांबा उर्फ उत्तम की पहचान की गई. यह वही शख्स है, जो साल 2015 में डोगरा की 6वीं बटालियन पर हमले का मास्टमाइंड था.
आधिकारिक बयान में सामने आया है कि इलाके में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन चल ही रहा था कि महिलाओं की अगुवाई में 1200 से 1500 लोगों की भीड़ और स्थानीय नेताओं ने इलाके को घेर लिया और सुरक्षाबलों को अपना ऑपरेशन जारी करने से रोक दिया. सुरक्षाबलों ने बार-बार अपील भी की लेकिन वे नहीं माने. मुद्दे की संवेदनशीलता और खूनखराबे की आशंका देखते हुए, अफसरों ने इन 12 स्थानीय नेताओं को लोगो को सौंप देने का फैसला किया.
इसके बाद सुरक्षाबलों ने उस इलाके को छोड़ दिया. भारतीय सेना ने मणिपुर के लोगों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने और शांति स्थापित करने में मदद करें. सेना ने मणिपुर के लोगों से अपील करते हुए कहा है कि, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने में सुरक्षा बलों की सहायता करें.
|
मणिपुर में बीते दो महीने से हिंसा जारी है. आए दिन यहां से स्थानीय लोगों द्वारा सैन्य बलों और अर्धसैनिक बलों के खिलाफ विरोध की खबरें भी आ रही हैं. आलम यह है कि इन वजहों से सैन्य बलों द्वारा स्थिति सुधार के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन रोके जाने पड़ते हैं. ऐसे ही एक मामला शनिवार को भी सामने आया है, जहां महिलाओं की बड़ी भीड़ ने सुरक्षाबलों को एक इलाके में घेर लिया था. इस तरह से घेरे जाने के बाद सुरक्षाबलों को अपना तलाशी अभियान रोकना पड़ा. इस विरोध के कारण सुरक्षाबलों को उन बारह उग्रवादियों को भी छेड़ना पड़ा, जिन्हें तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने पकड़ा था. भारतीय सेना की स्पीयर कोर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, 'सुरक्षा बलों को शनिवार को मणिपुर के इथम गांव में एक तलाशी अभियान चलाया था. इस ऑपरेशन के दौरान केवाईकेएल विद्रोही समूह के बारह गिरफ्तार उग्रवादियों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. स्पीयर कॉर्प्स ने ट्विटर पर ऑपरेशन की विफलता की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि इलाके में एक हज़ार दो सौ-एक हज़ार पाँच सौ महिलाओं की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उग्रवादियों को छुड़ा लिया. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सुरक्षाबलों के खास इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर पूर्वी इंफाल जिले के इटहाम गांव में चौबीस जून को ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन में KYKL के बारह काडरों को हथियार, गोला-बारूद और युद्ध में इस्तेमाल होने वाली कई अन्य चीजें के साथ पकड़ा गया था. इसमें स्वघोषित लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगथम तांबा उर्फ उत्तम की पहचान की गई. यह वही शख्स है, जो साल दो हज़ार पंद्रह में डोगरा की छःवीं बटालियन पर हमले का मास्टमाइंड था. आधिकारिक बयान में सामने आया है कि इलाके में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन चल ही रहा था कि महिलाओं की अगुवाई में एक हज़ार दो सौ से एक हज़ार पाँच सौ लोगों की भीड़ और स्थानीय नेताओं ने इलाके को घेर लिया और सुरक्षाबलों को अपना ऑपरेशन जारी करने से रोक दिया. सुरक्षाबलों ने बार-बार अपील भी की लेकिन वे नहीं माने. मुद्दे की संवेदनशीलता और खूनखराबे की आशंका देखते हुए, अफसरों ने इन बारह स्थानीय नेताओं को लोगो को सौंप देने का फैसला किया. इसके बाद सुरक्षाबलों ने उस इलाके को छोड़ दिया. भारतीय सेना ने मणिपुर के लोगों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने और शांति स्थापित करने में मदद करें. सेना ने मणिपुर के लोगों से अपील करते हुए कहा है कि, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने में सुरक्षा बलों की सहायता करें.
|
बिग बॉस 14 के घर से बाहर आने के बाद हिना खान ने घरवालों के लिए एक ट्वीट किया है।
'बिग बॉस 14' टीवी की दुनिया का एक ऐसा रिएलिटी शो है जहां कब क्या हो जाए किसी को पता नहीं होता। एक रात में 'बिग बॉस 14' के मेकर्स ने पूरा गेम ही पलट कर रख दिया है। बीता रात अचानक ही बिग बॉस ने शो के सीनियर्स सिद्धार्थ शुक्ला, हिना खान और गौहर खान को गेम से बाहर कर दिया है। बिग बॉस का ये फैसला सुनकर घर के सभी सदस्य फूट-फूटकर रोते नजर आए। वहीं घर के सीनियर्स भी अपने आंसुओं पर काबू नहीं कर सके।
सीनियर्स के जाने के बाद घरवाले उनको काफी मिस कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल सीनियर हिना खान का भी है। हिना खान भी अपने सभी दोस्तों को बहुत याद कर रही हैं। इस बात का सबूत हिना खान का लेटेस्ट ट्वीट है जो उन्होंने 'बिग बॉस 14' के घर से आने के बाद फैंस के साथ साझा किया है। इतना ही नहीं हिना खान ने अपने ट्वीट में सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान का भी जिक्र किया है।
हिना खान ने लिखा, 'मैं अपनी इस तिकड़ी को बहुत मिस करने वाली हूं। सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान इस सफर में मेरा साथ देने के लिए तुम दोनों का तहे दिल से धन्यवाद। मैंने तुम दोनों से बहुत कुछ सीखा है। मैं हम लोगों की मस्ती को बहुत मिस करने वाली हूं। हम तीनों की मस्ती सुबह का ब्रेकफास्ट, एक साथ लंच और डिनर करना, हमारी बातें ये सब मुझे बहुत याद आने वाला है। मैं आप दोनों को एक बार फिर से शुक्रिया कहना चाहती हूं। मेरी तरह से तुम दोनों को ढेर सारा प्यार।'
अपने दूसरे ट्वीट में हिना खान ने लिखा, 'बीते हफ्ते मेरे लिए काफी अलग रहे हैं। बिग बॉस के घर में हमने लड़ाई की है। हमने एक-दूसरे की बात पर नाराजगी भी जाहिर की है। टास्क के दौरान हम सभी अपने अपने हक के लिए लड़े। इस सब कामों के बीच हमने जमकर मस्ती भी की है। हमने एक दूसरे के साथ काफी समय बिताया है। हमें साथ रहने में मजा आता था। घर में रहने से हम एक दूसरे की इज्जत करने लगे थे।'
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
बिग बॉस चौदह के घर से बाहर आने के बाद हिना खान ने घरवालों के लिए एक ट्वीट किया है। 'बिग बॉस चौदह' टीवी की दुनिया का एक ऐसा रिएलिटी शो है जहां कब क्या हो जाए किसी को पता नहीं होता। एक रात में 'बिग बॉस चौदह' के मेकर्स ने पूरा गेम ही पलट कर रख दिया है। बीता रात अचानक ही बिग बॉस ने शो के सीनियर्स सिद्धार्थ शुक्ला, हिना खान और गौहर खान को गेम से बाहर कर दिया है। बिग बॉस का ये फैसला सुनकर घर के सभी सदस्य फूट-फूटकर रोते नजर आए। वहीं घर के सीनियर्स भी अपने आंसुओं पर काबू नहीं कर सके। सीनियर्स के जाने के बाद घरवाले उनको काफी मिस कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल सीनियर हिना खान का भी है। हिना खान भी अपने सभी दोस्तों को बहुत याद कर रही हैं। इस बात का सबूत हिना खान का लेटेस्ट ट्वीट है जो उन्होंने 'बिग बॉस चौदह' के घर से आने के बाद फैंस के साथ साझा किया है। इतना ही नहीं हिना खान ने अपने ट्वीट में सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान का भी जिक्र किया है। हिना खान ने लिखा, 'मैं अपनी इस तिकड़ी को बहुत मिस करने वाली हूं। सिद्धार्थ शुक्ला और गौहर खान इस सफर में मेरा साथ देने के लिए तुम दोनों का तहे दिल से धन्यवाद। मैंने तुम दोनों से बहुत कुछ सीखा है। मैं हम लोगों की मस्ती को बहुत मिस करने वाली हूं। हम तीनों की मस्ती सुबह का ब्रेकफास्ट, एक साथ लंच और डिनर करना, हमारी बातें ये सब मुझे बहुत याद आने वाला है। मैं आप दोनों को एक बार फिर से शुक्रिया कहना चाहती हूं। मेरी तरह से तुम दोनों को ढेर सारा प्यार।' अपने दूसरे ट्वीट में हिना खान ने लिखा, 'बीते हफ्ते मेरे लिए काफी अलग रहे हैं। बिग बॉस के घर में हमने लड़ाई की है। हमने एक-दूसरे की बात पर नाराजगी भी जाहिर की है। टास्क के दौरान हम सभी अपने अपने हक के लिए लड़े। इस सब कामों के बीच हमने जमकर मस्ती भी की है। हमने एक दूसरे के साथ काफी समय बिताया है। हमें साथ रहने में मजा आता था। घर में रहने से हम एक दूसरे की इज्जत करने लगे थे।' बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
जटिल और अकल्पनीय कुछ भी नहीं है एक ऑर्किड की देखभाल में की आवश्यकता है। बस कुछ बारीकियों का पालन करने की जरूरत है। यहाँ, उदाहरण के लिए, क्या डंठल के साथ सभी फूल की वर्षा के बाद करना है? यह कट या नहीं?
"यह एक हाथ की तरह काट दिया है! " - कहते हैं कि एक इंतज़ार कर धैर्यपूर्वक उपजी सूख। अन्य काट जैसे ही आखिरी फूल wilt करने के लिए शुरू कर दिया। सही संस्करण क्या है? समझने की कोशिश करो।
सबसे पहले, फूल भी ध्यान से बंद के रूप में जल्द लेने के रूप में आप देखते हैं कि वे फीका करने के लिए शुरू कर दिया जाना चाहिए था। इस आर्किड केवल खुले फूलों पर ऊर्जा व्यय करने की अनुमति देगा।
एक बार जब आर्किड उनके खिलता के साथ आप खुश करने के लिए रह गए हैं, आप सुरक्षित रूप से उपजा निकाल सकते हैं। हालांकि, हरी की नोक अगर, वहाँ अधिक फूल हो सकता है। एक जवाब के लिए तीन माह की प्रतीक्षा के दौरान। " ऐसा लगता है कि, हालांकि, इस संरचना बहुत आकर्षक नहीं हैः एक अकेला फूल पर एक लंबे कोड़ा।
फूल की नोक पीले या मुरझाया पर डंठल, उसके लिए एक नया फूल बेकार इंतजार कर रहे हैं।
तो चलिए इसे काट देते हैं। अब हमारे सामने एक और दुविधा हैः जड़ों पर है या नहीं। वहाँ आप के लिए घटनाओं के 2 वेरिएंट हैं।
- आप के पास सॉकेट ट्रिम हैं, आर्किड अगले फूल के लिए बिजली स्टोर करने के लिए शुरू होता है।
- केवल ऊपरी भाग ट्रिम। हर कील पर एक "निष्क्रिय कलियों है। " वे आम तौर पर तीन या चार कर रहे हैं। सैद्धांतिक रूप से, कील सूख शुरू होता है, एक तरफ फूल डंठल का विकास हो सकता। कीवर्ड - "may"। डंठल अप "निष्क्रिय कलियों" छंटाई उनके सक्रिय विकास की गारंटी नहीं है।
तो, मेरी राय में, यह बेहतर बहुत दुकान पर कटौती करने के लिए है।
कभी कभी आर्किड विकास बिंदु से सीधे उपजी पैदा करता है। घबराएं नहीं! यह ठीक है, यह एक संकेत है कि वह मार दिया जाता है नहीं है। जहां इस भ्रम था, कोई नहीं कह सकता है, लेकिन कई लोगों का मानना है। मैं भी यही कहूंगा कि आप फूल के साथ बहुत भाग्यशाली हैं - यह एक पक्ष आउटलेट पैदा करेगा, जो बैठ सकते हैं, या वह "बच्चों" इस कील हो जाएगा। यह अगले लेख में चर्चा की जाएगी।
आर्किड या नहीं फ़ीड फूल दौरान? मोटे तौर पर, आप इसे खिलाने के लिए नहीं ऐसा कभी नहीं कर सकते हैं। आर्किड - एक अद्वितीय पौधे के रूप में, कि फूल के विकास के लिए सभी आवश्यक ट्रेस तत्वों किसी भी मदद के बिना पर्यावरण से प्राप्त करता है!
यही कारण है कि सिद्धांत है। अभ्यास में, यदि संयंत्र एक संतुलित उर्वरक प्राप्त करता है, यह अधिक से अधिक प्रचुर मात्रा में खिलता है, और फूलों बड़ा और उज्जवल है। हम उसे प्यार और फूलों की वजह से वास्तव में कर रहे हैं,। इसलिए हम नियमित रूप से खाते हैं। लेकिन फूल अवधि में! यह रिसेट रंग को गति प्रदान या फूल की अवधि कम हो जाएगा। फूल के बाद तुरंत आर्किड "फ़ीड" मत करो। वह थोड़ा आराम और ताकत इकट्ठा करना चाहिए। इस अवधि के दौरान Fertilizing अपने विदेशी फूल फिर से जारी करने के लिए उपजा का कारण होगा, लेकिन आप इस से बहुत प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए संभावना नहीं है। फूल छोटे हैं, और वे पर्याप्त नहीं होगा। इसके अलावा, संयंत्र बस इस तरह के सकल हस्तक्षेप के बाद बीमार हो सकता है। तो तुम बेहतर रोगी होगा। आर्किड के लिए प्रतीक्षा करें सक्रिय विकास चरण में प्रवेश करेंगे, तो खाद। लेकिन केवल इन रंगों के लिए एक विशेष उर्वरक।
आप देख सकते हैं, आर्किड की देखभाल में जटिल कुछ भी नहीं नहीं है! सुंदर ऑनलाइन स्टोर Artplants. ru खरीदने के लिए स्वतंत्र महसूस और प्रचुर मात्रा में फूल houseplants की प्रशंसा।
|
जटिल और अकल्पनीय कुछ भी नहीं है एक ऑर्किड की देखभाल में की आवश्यकता है। बस कुछ बारीकियों का पालन करने की जरूरत है। यहाँ, उदाहरण के लिए, क्या डंठल के साथ सभी फूल की वर्षा के बाद करना है? यह कट या नहीं? "यह एक हाथ की तरह काट दिया है! " - कहते हैं कि एक इंतज़ार कर धैर्यपूर्वक उपजी सूख। अन्य काट जैसे ही आखिरी फूल wilt करने के लिए शुरू कर दिया। सही संस्करण क्या है? समझने की कोशिश करो। सबसे पहले, फूल भी ध्यान से बंद के रूप में जल्द लेने के रूप में आप देखते हैं कि वे फीका करने के लिए शुरू कर दिया जाना चाहिए था। इस आर्किड केवल खुले फूलों पर ऊर्जा व्यय करने की अनुमति देगा। एक बार जब आर्किड उनके खिलता के साथ आप खुश करने के लिए रह गए हैं, आप सुरक्षित रूप से उपजा निकाल सकते हैं। हालांकि, हरी की नोक अगर, वहाँ अधिक फूल हो सकता है। एक जवाब के लिए तीन माह की प्रतीक्षा के दौरान। " ऐसा लगता है कि, हालांकि, इस संरचना बहुत आकर्षक नहीं हैः एक अकेला फूल पर एक लंबे कोड़ा। फूल की नोक पीले या मुरझाया पर डंठल, उसके लिए एक नया फूल बेकार इंतजार कर रहे हैं। तो चलिए इसे काट देते हैं। अब हमारे सामने एक और दुविधा हैः जड़ों पर है या नहीं। वहाँ आप के लिए घटनाओं के दो वेरिएंट हैं। - आप के पास सॉकेट ट्रिम हैं, आर्किड अगले फूल के लिए बिजली स्टोर करने के लिए शुरू होता है। - केवल ऊपरी भाग ट्रिम। हर कील पर एक "निष्क्रिय कलियों है। " वे आम तौर पर तीन या चार कर रहे हैं। सैद्धांतिक रूप से, कील सूख शुरू होता है, एक तरफ फूल डंठल का विकास हो सकता। कीवर्ड - "may"। डंठल अप "निष्क्रिय कलियों" छंटाई उनके सक्रिय विकास की गारंटी नहीं है। तो, मेरी राय में, यह बेहतर बहुत दुकान पर कटौती करने के लिए है। कभी कभी आर्किड विकास बिंदु से सीधे उपजी पैदा करता है। घबराएं नहीं! यह ठीक है, यह एक संकेत है कि वह मार दिया जाता है नहीं है। जहां इस भ्रम था, कोई नहीं कह सकता है, लेकिन कई लोगों का मानना है। मैं भी यही कहूंगा कि आप फूल के साथ बहुत भाग्यशाली हैं - यह एक पक्ष आउटलेट पैदा करेगा, जो बैठ सकते हैं, या वह "बच्चों" इस कील हो जाएगा। यह अगले लेख में चर्चा की जाएगी। आर्किड या नहीं फ़ीड फूल दौरान? मोटे तौर पर, आप इसे खिलाने के लिए नहीं ऐसा कभी नहीं कर सकते हैं। आर्किड - एक अद्वितीय पौधे के रूप में, कि फूल के विकास के लिए सभी आवश्यक ट्रेस तत्वों किसी भी मदद के बिना पर्यावरण से प्राप्त करता है! यही कारण है कि सिद्धांत है। अभ्यास में, यदि संयंत्र एक संतुलित उर्वरक प्राप्त करता है, यह अधिक से अधिक प्रचुर मात्रा में खिलता है, और फूलों बड़ा और उज्जवल है। हम उसे प्यार और फूलों की वजह से वास्तव में कर रहे हैं,। इसलिए हम नियमित रूप से खाते हैं। लेकिन फूल अवधि में! यह रिसेट रंग को गति प्रदान या फूल की अवधि कम हो जाएगा। फूल के बाद तुरंत आर्किड "फ़ीड" मत करो। वह थोड़ा आराम और ताकत इकट्ठा करना चाहिए। इस अवधि के दौरान Fertilizing अपने विदेशी फूल फिर से जारी करने के लिए उपजा का कारण होगा, लेकिन आप इस से बहुत प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए संभावना नहीं है। फूल छोटे हैं, और वे पर्याप्त नहीं होगा। इसके अलावा, संयंत्र बस इस तरह के सकल हस्तक्षेप के बाद बीमार हो सकता है। तो तुम बेहतर रोगी होगा। आर्किड के लिए प्रतीक्षा करें सक्रिय विकास चरण में प्रवेश करेंगे, तो खाद। लेकिन केवल इन रंगों के लिए एक विशेष उर्वरक। आप देख सकते हैं, आर्किड की देखभाल में जटिल कुछ भी नहीं नहीं है! सुंदर ऑनलाइन स्टोर Artplants. ru खरीदने के लिए स्वतंत्र महसूस और प्रचुर मात्रा में फूल houseplants की प्रशंसा।
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
रीवा जिले के गोविन्दगढ़ थाना अंतर्गत अमिलकी के पास पार्टी मनाकर लौट रहे तीन युवाओं द्वारा झूठी गोली मारने की कहानी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस का दावा है कि 9 सितंबर की शाम रोहित तिवारी के जन्मदिन की पार्टी गोविन्दगढ़ के खंधो माता मन्दिर में 9 दोस्तों की उपस्थित में आयोजित हुई थी। जहां अनुराग मिश्रा अवैध रूप से 32 बोर की लोडेड पिस्टल लेकर पहुंचा था। इसी बीच अभिषेक दाहिया ने पिस्टल की मांग की। तब अनुराग मिश्रा ने अभिषेक दाहिया को पिस्टल सौंप दिया।
इसी बीच अभिषेक दाहिया से पिस्टल का ट्रिगर दब गया और सामने खड़े आकाश दाहिया के बाएं हाथ को गोली चीरती हुई पैर की जाघ में धस गई। फिर घायल आकाश दाहिया, अभिषेक दाहिया और अनुराग मिश्रा ने पुलिस को झूठी कहानी बताकर गुमराह किया। लेकिन अलग-अलग बयान ने झूठ का पर्दाफास कर दिया। ऐसे में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 1 पिस्टल, 1 कारतूस जब्त कर ली है। जबकि पिस्टल देने वाला आरोपी फरार है। वहीं मुख्य आरोपी की पुलिस की मौजूदगी में इलाज चल रहा है।
गोविंदगढ़ थाना प्रभारी सुनील सिंह बघेल ने बताया कि 9 सितंबर की रात 10 बजे अमिलकी रेलवे पुल के पास मारपीट फिर लूट और अंत में गोली मारने की कहानी नहीं पच रही थी। ऐसे में 10 सितंबर को अप. क्र. 326/21 धारा 394, 397 तहि. का मामला दर्ज कर विवेचना में लिया।
घायल आकाश दाहिया के बयान के आधार पर 9 दोस्तों से पूछताछ की तो कहानी फर्जी निकली। तब लोक अभियोजन कार्यालय से विधिक राय लेकर धारा 394, 397 ताहि. का अपराध घटित होना नहीं पाया गया। साथ ही भादसं की धारा 308, 182, 193, 120 (बी) एवं 109 ताहि. एवं धारा 25 (1-बी) (ए) 27 आर्स एक्ट का अपराध घटित होना पाया गया।
गोविंदगढ़ पुलिस ने गोली चलने की मनगढ़ंत कहानी बताने वाले घायल आकाश दाहिया, अभिषेक दाहिया और अनुराग मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया है। जबकि पिस्टल उपलब्ध कराने वाले प्रिंस मिश्रा को सहायक आरोपी की भूमिका में है। ऐसे में फर्जी गोली चलने की कहाना पर पुलिस ने चार आरोपी बनाए है। जिसमे मुख्य आरोपी घायल आकाश दाहिया का पुलिस कस्टडी में संजय गांधी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जबकि प्रिंस मिश्रा फरार है। वहीं अभिषेक दाहिया को गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह शातिर अपराधी अनुराग मिश्रा को 32 बोर के पिस्टल व 1 नग कारतूस के साथ गिरफ्तार करते हुए सिविल लाइन थाने को सौंप दिया है। उसके खिलाफ वहां पर धारा 326, 327 का अपराध कायम था। ऐसे में सिविल लाइन पुलिस आरोपी को अपने स्तर से पूछताछ कर कोर्ट में पेश करेगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
रीवा जिले के गोविन्दगढ़ थाना अंतर्गत अमिलकी के पास पार्टी मनाकर लौट रहे तीन युवाओं द्वारा झूठी गोली मारने की कहानी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस का दावा है कि नौ सितंबर की शाम रोहित तिवारी के जन्मदिन की पार्टी गोविन्दगढ़ के खंधो माता मन्दिर में नौ दोस्तों की उपस्थित में आयोजित हुई थी। जहां अनुराग मिश्रा अवैध रूप से बत्तीस बोर की लोडेड पिस्टल लेकर पहुंचा था। इसी बीच अभिषेक दाहिया ने पिस्टल की मांग की। तब अनुराग मिश्रा ने अभिषेक दाहिया को पिस्टल सौंप दिया। इसी बीच अभिषेक दाहिया से पिस्टल का ट्रिगर दब गया और सामने खड़े आकाश दाहिया के बाएं हाथ को गोली चीरती हुई पैर की जाघ में धस गई। फिर घायल आकाश दाहिया, अभिषेक दाहिया और अनुराग मिश्रा ने पुलिस को झूठी कहानी बताकर गुमराह किया। लेकिन अलग-अलग बयान ने झूठ का पर्दाफास कर दिया। ऐसे में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक पिस्टल, एक कारतूस जब्त कर ली है। जबकि पिस्टल देने वाला आरोपी फरार है। वहीं मुख्य आरोपी की पुलिस की मौजूदगी में इलाज चल रहा है। गोविंदगढ़ थाना प्रभारी सुनील सिंह बघेल ने बताया कि नौ सितंबर की रात दस बजे अमिलकी रेलवे पुल के पास मारपीट फिर लूट और अंत में गोली मारने की कहानी नहीं पच रही थी। ऐसे में दस सितंबर को अप. क्र. तीन सौ छब्बीस/इक्कीस धारा तीन सौ चौरानवे, तीन सौ सत्तानवे तहि. का मामला दर्ज कर विवेचना में लिया। घायल आकाश दाहिया के बयान के आधार पर नौ दोस्तों से पूछताछ की तो कहानी फर्जी निकली। तब लोक अभियोजन कार्यालय से विधिक राय लेकर धारा तीन सौ चौरानवे, तीन सौ सत्तानवे ताहि. का अपराध घटित होना नहीं पाया गया। साथ ही भादसं की धारा तीन सौ आठ, एक सौ बयासी, एक सौ तिरानवे, एक सौ बीस एवं एक सौ नौ ताहि. एवं धारा पच्चीस सत्ताईस आर्स एक्ट का अपराध घटित होना पाया गया। गोविंदगढ़ पुलिस ने गोली चलने की मनगढ़ंत कहानी बताने वाले घायल आकाश दाहिया, अभिषेक दाहिया और अनुराग मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया है। जबकि पिस्टल उपलब्ध कराने वाले प्रिंस मिश्रा को सहायक आरोपी की भूमिका में है। ऐसे में फर्जी गोली चलने की कहाना पर पुलिस ने चार आरोपी बनाए है। जिसमे मुख्य आरोपी घायल आकाश दाहिया का पुलिस कस्टडी में संजय गांधी अस्पताल में उपचार चल रहा है। जबकि प्रिंस मिश्रा फरार है। वहीं अभिषेक दाहिया को गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह शातिर अपराधी अनुराग मिश्रा को बत्तीस बोर के पिस्टल व एक नग कारतूस के साथ गिरफ्तार करते हुए सिविल लाइन थाने को सौंप दिया है। उसके खिलाफ वहां पर धारा तीन सौ छब्बीस, तीन सौ सत्ताईस का अपराध कायम था। ऐसे में सिविल लाइन पुलिस आरोपी को अपने स्तर से पूछताछ कर कोर्ट में पेश करेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
अशक्यमस्य पुरतोऽवस्थातुम्' इत्यादि ।
उपर्युक्त विवरण से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि हर्षवार्तिक ने सभवतया सभी अध्यायो पर टीका लिखी थी। इस टीका की रचना मुख्य रूप से आर्या छन्द में की गई और साथ ही गद्य भी दिये गये थे। इसमे नाटकीय साहित्य से उदाहरण भी लिये गये थे। कवि महोदय ( दूसरे भाग की भूमिका, पृ. २३) का कथन है कि अगहार पर बार्तिक का अधिकांश उपलब्ध हो चुका है। डा. राघवन ने आक्षेप किया है (ज ओ. रि. मद्रास, भाग ६, पृ. २०५ पर अभिनवभारती मे उल्लिखित लेखकों के विषय मे) कि यहाँ भी केवल प्रथम ६ अध्यायो में ही इनके मत का उल्लेख है। शेष पूरी अभिनवभारती में कुछ नहीं मिलता।' तर्क अन्य स्थानो पर वार्तिक का उल्लेख न होने के कारण उपस्थित किया गया है किन्तु इससे यह निष्कर्ष निश्चित रूप से नहीं निकाला जा सकता कि पुस्तक के किसी भी अन्य अध्याय पर वार्तिक नही लिखा गया। अभिनवगुप्त की टीका सातवें और आठवें बध्याय पर ( प्रथम कुछ श्लोकों को छोड़कर) नही मिलती तथा अन्य परिच्छेदो मे भी कही-कही अनुपलब्ध है। ३२ वे अध्याय के बाद तो कुछ भी नही मिलता । भावप्रकाशन ( पृ २३८) मे हर्ष के मत का उल्लेख है कि त्रोटक, नाटक से भिन्न होता है क्योकि त्रोटक मे कोई विदूषक नही होता । डा. सकरन ने 'रस-सिद्धान्त का इतिहास' (पृ. १३) मे कन्नौज के सम्राट् हर्षवर्द्धन और श्रीहर्ष को एक ही व्यक्ति बताया है। लेकिन यह कल्पना मात्र है ।
भावप्रकाशन ( पृ० २३८) मे सुबन्धु को नाट्यशास्त्र का लेखक बताया गया है जिसने नाटक के पाँच भेदों का प्रतिपादन किया है - पूर्ण, प्रशान्त, भास्वर, ललित तथा समग्र । नाट्यशास्त्र ( २४.४१) मे शरीराभिनय को छ भागो मे विभाजित किया है जिसका एक भाग नाट्यायित है (इसकी परिभाषा गाया ४८ मे दी गई है) । और उदाहरण के रूप में अभिनवभारती (भाग ३, पृ० १७२) मे महाकवि सुबन्धुकृत 'वासवदत्तानाट्यवार' को प्रस्तुत किया गया है । ( तत्रास्य बहुतरव्यापिनो बहुगर्भस्वप्नायिततुल्यस्य नाटघायितस्योदाहरण महाकविसुबन्धुनिबद्धो वासवदत्तानाट्याधाराख्यः समस्त एव प्रयोगः । तत्र हि
1. सम्पादक महोदय का सुझाव है कि हास के स्थान पर भास होना चाहिये किन्तु इसके लिये कोई आधार नही है। हो सकता है अज्ञात नाटककार का नाम हास ही हो ।
बिन्दुसारः प्रयोज्यवस्तुके उदयन चरिते इत्यादि ।) प्रतीत होता है कि सुबन्धुकृत इसी नाटक का उल्लेख अभिनवभारती (भाग २, ४२७) ने "वासवदत्तानृत्तधार" के नाम से किया है। महाकवि सुबन्धु और नाट्यग्रंथ के लेखक सुबन्धु ( जिनका उल्लेख भावप्रकाशन मे हुआ है) एक ही व्यक्ति थे, यह सदेहास्पद है । सभवतया वे भिन्न है । भ० ओ० रि० इ० मे हस्तलिखित ग्रन्थों का जो राजकीय सग्रह है उसमे एक हस्तलिखित ग्रन्थ उपलब्ध हुआ है जिसका निर्देश हस्तलिखित ग्रन्थों की सूची भाग १२, पृ० ३७७-३८३, स० १११, १८६९-७० के रूप में किया गया है। पुस्तक का नाम है 'भारतभाष्य' अथवा 'सरस्वतीहृदयालङ्कार' (और अन्त मे दी गई पुष्पिका मे उसका नाम भरतवार्तिक भी दिया है) है। पुष्पिकाओ में उसके रचयिता का नाम नान्यपति अथवा नान्यदेव दिया गया है और उसके साथ महासामन्ताधिपति घर्मावलोक एवं मिथिलाधिपति विशेषण लगाये गये हैं। योजना के अनुसार ग्रन्थ विशालकाय होना चाहिये, उपरोक्त अश में चार प्रकार के अभिनयो मे से केवल वाचिक अभिनय की चर्चा है । प्रधानरूप से यह नाट्यशास्त्र के अध्याय २८-३३ की टीका है, जिसमे संगीत की चर्चा है । लेखक ने अपना नाम राजनारायण भी बताया है (Folio 12 a) तथा कहा है कि ये कीतिराज के अनुज थे ( Folho 19) a) । उन्होंने 'ग्रन्थमहार्णव' नामक अपनी एक अन्य रचना का भी उल्लेख किया है । फोलियो २२१ पर अन्तिम श्लोक का उत्तरार्द्ध नीचे लिखे अनुसार है - "तेनाय मिथिलेश्वरेण रचितोऽध्यायोऽवनद्धाभिध ।" उन्होने प्रारम्भ में प्रतिज्ञा की है कि सत्रह अध्यायो मे वे वाचिकाभिनय की चर्चा करेंगे। साथ ही नाम तथा विषयों का सक्षिप्त विवरण दिया है। हस्तलिखित ग्रन्थ (२२१ फोलियों) अत्यंत प्राचीन है और उसमे पृष्ठमात्राओ का प्रयोग है। लिपि अत्यत निबिड होने पर भी स्पष्ट है । ग्रन्थ कुछ अस्तव्यस्त है । अलङ्कार विषयक पाँचवाँ तथा सोलहवाँ एवं सत्रहवाँ अध्याय लुप्त हैं । ग्रन्थ मे भरत के प्रत्येक श्लोक पर टीका नही है किन्तु उन्हे सैकड़ो बार उद्धृत किया गया है। कश्यप, दत्तिल और नारद के भी सैकड़ो उद्धरण है; फोलियो १११ b तथा ११४ b पर बृहत्कश्यप एव वृद्ध कश्यप का उद्धरण है । बहुद्देशी, मतग, याष्टिक तथा विशाखिल के बीसियों उद्धरण हैं। इनके अतिरिक्त निम्नलिखित ग्रन्थो एव लेखको के उद्धरण हैं. नारदीय शिक्षाविवरणकृत् (फोलियो 16 b), देवराज (जिनका पाठान्तर देदराज भी है, जैसे फोलियो 69b, 70 ), मेर्वाचार्य (फोलियो 70 a), नन्दिमत (205a, 210 b),
स्वरसंहिताचार्य ( 1:7b ), स्वाति ( २०12, जिन्हें स्वरमुनि कहा जाता है), याज्ञवल्क्यस्मृति, भाग ३, ११२-११६ (फोलियो १८२ क), तुम्बुरू (१८१ ख ). कालिकापुराण (१३१ क ), भगवतपुराण अथवा भागवतपुराण ( १३८ क १३८ ख ). लेखक ने पूर्णतया अभिनवगुप्त का अनुसरण किया है किन्तु उनका उल्लेख प्रायः नहीं किया जैसे फोलियो १० क, १८४ ख । पाणिनि, नारद तथा अपिशालि (आपिशलि ? ) का उल्लेख एक ही स्थान (८ ख ) पर है । कहीकही पर अपने मत का भरत के मत से भेद प्रगट किया है, जैसे ( १३ क ) - "गान्धारग्रामश्च भरतेनालौकिकश्चात्रोपदर्शितः । अस्माभिश्चागमानुसारेण प्रदर्शित.", १५ क "भरताचार्यस्यास्य शास्त्रे प्रयोगागता अस्माभिश्च कश्यपमतगतुम्बरविशाखिलाद्याचार्यनिखिलमुनिवचनात्" इत्यादि । बहुत से स्थानो पर सूत्र भी उद्धृत हैं (जैसे फोलियो २१ क, ३९ क, ४३ क, गान्धारपञ्चमीलक्षण पर, ४३ ख आन्ध्री लक्षण पर)। इसी प्रकार संस्कृत के ब्रह्मोक्त कहे जाने वाले चतुष्पद तथा चतुष्पदी भी उद्धृत हैं (फोलियो २२ ख ४२ क, अस्या ब्रह्मोक्त चतु पदी यथा-सोस्या गौरीमुखांभोजरूहदिव्यतिलकपरिचुम्बिताचित इत्यादि) ।
भरतभाष्य के लेखक नान्यदेव का तिथि-निर्णय अपेक्षाकृत सरल किन्तु एक कठिनाई है। चौथा प्रस्तावित श्लोक है-'लक्ष्यप्रधान खलु शास्त्रमेतन्नि शङ्कदेवोऽपि तदेव वष्टि ( वक्ति ? ) प्रथम अध्याय का २३ वाँ श्लोक (जो उपजाति मे है) भी निःशङ्क का उल्लेख करता है - 'नोपाधि ददेघस्य ( ? ) विकारभेद नि शङ्कसूरि खलु कूटताने । सर्वेषु तास्तेपि कृताश्च शुद्धाश्चतुर्दशवेति मत मदीयम् ।' किसी लेखक का नाम निशङ्क असाधारण सा प्रतीत होता है। संगीतरत्नाकर के लेखक ने भी इसी नाम को स्वीकार किया है जहाँ उन्हें निशकशार्गदेव के रूप में बताया गया है। उसके पिता सोढल को देवगिरि के यादवनरेश भिल्लम और सिघन ने आश्रय दिया था। सिंघण का राज्य १२१०-१२४७ ई० तक था । शार्ङ्गदेव का समय १२३३ से १२७० ई० तक है ऐसी स्थिति में यदि नान्यदेव ने निशकशार्गदेव का उल्लेख किया है तो उसका समय १२८०-१३०० ई० तक होना चाहिये । किन्तु ऐसा कोई उल्लेख नही मिलता जिससे यह कहा जा सके कि प्रस्तुत नान्यदेव ने तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मिथिला पर राज्य किया था । मिथिला के राजा नान्यदेव ही कर्णाटक के मैथिल राजवंश के संस्थापक थे और उनका शासनकाल १०९७ - ११४७ ई० तक है । (देखो इ० हि० कां० का कार्य विवरण, १३०-१३५; । 'नान्यदेव तथा उसके
समकालोन', लेखक श्री राधाकृष्ण चौधरी) । उन्हें बंगाल के राजा विजयसेन ने हराया था जिनका शासनकाल १०९५-११५८ ई० तक है । (देखो देओपारा प्लेट (ए० इ०, भाग १, ३०५, पृ० ३१४ पर) और डा० आर० सी० मजुमदार का लेख इ० हि० क्व० भाग ७, पृ० ६७९-६८७) जहाँ उन्होने बताया है कि विजयसेन १०९५ ई० मे सिंहासनारूढ़ हुए। इससे प्रगट होता है कि प्रस्तुत नान्यदेव ग्यारहवी शताब्दी के लगभग विद्यमान थे । अत. या तो भरतभाष्य की हस्तलिखित प्रति मे निशकदेव का उल्लेख प्रक्षिप्त है (जो कि बहुत सभव है क्योंकि प्रस्तुत हस्तलिखित प्रति अधूरी है और अन्य कोई प्रति तुलना के लिये उपलब्ध नहीं है) अथवा भरतभाष्य मे उल्लिखित नि. शंकदेव, शार्गदेव से भिन्न है अथवा मिथिला के नान्यदेव कोई और रहे होगे जिनका अभी तक पता नही चला है । अत भरतभाष्य के तिथि-निर्णय का प्रश्न इसी स्थिति मे छोडना होगा, सागरनन्दी के नाटकलक्षण रत्नकोश के अन्त मे नीचे लिखी कारिका है- 'श्रीहर्षविक्रमनराधिप - मातृगुप्त गर्ग -अश्मकुट्टनख - कुट्टकबादराणाम् । एषा मतेन भरतस्य मत विगाह्य ध्रष्ट मया समनुगच्छत रत्नकोशम् ॥' प्रतीत होता है सागरनन्दी द्वारा निर्दिष्ट उपरोक्त सात आचार्यों ने या तो भरत पर टीका लिखी थी या नाट्यशास्त्र से सम्बन्ध रखने वाले विषयो पर स्वतंत्र प्रकरण ग्रन्थ लिखे थे ।
अभिनवगुप्त तथा अन्य आचार्यों ने (देखो ऊपर पृ० १० - ११, २६ इत्यादि ) नाट्यशास्त्र का निर्देश भरतसूत्र के नाम से किया है। अत व्याकरण, तर्कशास्त्र, वेदान्त आदि की परम्परा के अनुसार प्रस्तुत सूत्र पर लिखी गई टीकाओ को भी भाष्य, वार्तिक आदि नाम दिये गये।
कवि महोदय तथा उनकी शैली के विषय मे हम पहले लिख चुके हैं (पृ०१४) । डा. डे महोदय की आलोचना का उत्तर देते हुए कवि महोदय ने ( इ० हि० क्वा० भाग ५, पृ० ५५८-५७७ ) अपने वक्तव्य को समीचीन सिद्ध करने का प्रयत्न किया है । डे महोदय का प्रत्युत्तर ३० हि० क्वा० भाग ५, पृ० ७८६-७८९ मे प्रकाशित हुआ है। देखो डा० राघवन का लेख "रसो की सख्या', अड्यार पुस्तकालय, पृ० ९२-९०६ और "भोज का शृगारप्रकाश" पृ० ५३६ - ५४३ (कर्नाटक पब्लिशिंग हाउस) अभिनवभारती का सशोधित संस्करण के लिये और अड्यार लाइब्रेरी बुलेटिन, १८, खण्ड ३-४, १० १९६-२०९ कुछ अनुच्छेदों में सुधार के लिये देखो अभिनवभारती, भाग १ और २ ( गा० ओ० सि० ) ।
४. मेणावी - भामह ने मेघावी नामक आलङ्कारिक का दो बार उल्लेख किया है जिसने उपमा के सात दोष बताये हैं। ( त एत उपमादोषा सप्त मेघाविनोदिताः, भाग २, ४०). उसी ने अन्य स्थान पर कहा है - "यथासंख्यमथोत्प्रेक्षामलङ्कारद्वयं विदु । संख्यानमिति मेघाविनोत्प्रेक्षाभिहिता क्वचित् ॥ " (भाग २,८८). उपरोक्त मुद्रित पाठ के उत्तरार्द्ध का अर्थ है कि 'मेधावी ने कुछ स्थानो पर उत्प्रेक्षा के बदले संख्यान नाम दिया है। किन्तु यह ठीक नहीं है। दण्डी के मतानुसार अन्य आलङ्कारिकों ने सख्यान को यथासख्य का दूसरा नाम माना है । ( यथासंख्यमिति प्रोक्त संख्यानं क्रम इत्यपि काव्यादर्श भाग २, पृ० २७३) । अतः भामह के ग्रन्थ में उपलब्ध पाठ अशुद्ध प्रतीत होता है । यदि पाठ को 'मेधावी नोत्प्रेक्षा के रूप में बदल दिया जाय तो दण्डी के साथ समन्वय हो सकता है। उसका अर्थ यह होगा कि मेघावी ने यथासंख्य के स्थान पर सख्यान लिखा है और अनेक स्थानों पर (कुछ अलङ्कार प्रन्थो मे) उत्प्रेक्षा को अलङ्कार नही माना गया । नमिसाधु ने रुद्रट के काव्यालङ्कार (१,२) पर व्याख्या करते हुए लिखा है - "ननु दण्डिमेधाविरुद्रभामहादिकृतानि सन्त्येवालङ्कारशास्त्राणि' । प्रश्न यह है कि 'मेधाविरुद्र एक ही नाम है अथवा 'मेधावि' और 'रुद्र' अलङ्कारशास्त्र के दो विभिन्न लेखक हैं। रुद्र द्वारा विरचित किसी अलङ्कार-ग्रन्थ का उल्लेख अन्य किसी आलङ्कारिक ने नही किया । रुद्रभट्ट का शृगारतिलक, जैसा कि उसकी विषय-सूची से प्रतीत होता है, अलङ्कार-प्रन्थ नहीं कहा जा सकता । अतः सभव है कि पूरा नाम मेघाविरुद्र हो । धर्मकीर्ति और भर्तृहरि को प्रायः कीर्ति और हरि शब्द से उद्धृत किया जाता है। अत. यदि मेघाविरुद्र भी केवल मेघावी शब्द से निर्दिष्ट हुए हों तो कोई आश्चर्य नही है । (देखो ज० रो० ए०सी०, १९०८ पृ० ५४५ पर मेरा लेख भामह और दण्डिन्) शार्ङ्ग० ने मालवरुद्र ( स० १०९१) का एक श्लोक उद्धृत किया है। इसी प्रकार कपिलरुद्र ( स० ३७८७) का भी एक श्लोक तथा एक सुभाषित ( १६६६) उद्धृत किया है। इससे प्रतीत होता है कि रुद्र नामक अनेक लेखक थे। रुद्रट ( ११, २४) पर टीका करते हुए नमिसाधु ने मेघावी को पुन उद्धृत किया है जहां उपमा के सात दोगों की चर्चा है। चर्चा की शैली से प्रतीत होता है कि उदाहरण मेधावी के ग्रन्थ से लिये गये हैं। 'अत्र च स्वरूपोपादाने सत्यपि चत्वार इति ग्रहह्णाद्यन्मेधाविप्रभृतिभिरुक्तं यथा लिंगवचनभेदी हीनताधिक्यमसम्भवो विपर्ययोऽसादृश्यमिति सप्तोपमादोषाः तदेतन्निरस्तम् ।' नमिसाघु ने उपमा के सात दोषों का प्रति
|
अशक्यमस्य पुरतोऽवस्थातुम्' इत्यादि । उपर्युक्त विवरण से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि हर्षवार्तिक ने सभवतया सभी अध्यायो पर टीका लिखी थी। इस टीका की रचना मुख्य रूप से आर्या छन्द में की गई और साथ ही गद्य भी दिये गये थे। इसमे नाटकीय साहित्य से उदाहरण भी लिये गये थे। कवि महोदय का कथन है कि अगहार पर बार्तिक का अधिकांश उपलब्ध हो चुका है। डा. राघवन ने आक्षेप किया है कि यहाँ भी केवल प्रथम छः अध्यायो में ही इनके मत का उल्लेख है। शेष पूरी अभिनवभारती में कुछ नहीं मिलता।' तर्क अन्य स्थानो पर वार्तिक का उल्लेख न होने के कारण उपस्थित किया गया है किन्तु इससे यह निष्कर्ष निश्चित रूप से नहीं निकाला जा सकता कि पुस्तक के किसी भी अन्य अध्याय पर वार्तिक नही लिखा गया। अभिनवगुप्त की टीका सातवें और आठवें बध्याय पर नही मिलती तथा अन्य परिच्छेदो मे भी कही-कही अनुपलब्ध है। बत्तीस वे अध्याय के बाद तो कुछ भी नही मिलता । भावप्रकाशन मे हर्ष के मत का उल्लेख है कि त्रोटक, नाटक से भिन्न होता है क्योकि त्रोटक मे कोई विदूषक नही होता । डा. सकरन ने 'रस-सिद्धान्त का इतिहास' मे कन्नौज के सम्राट् हर्षवर्द्धन और श्रीहर्ष को एक ही व्यक्ति बताया है। लेकिन यह कल्पना मात्र है । भावप्रकाशन मे सुबन्धु को नाट्यशास्त्र का लेखक बताया गया है जिसने नाटक के पाँच भेदों का प्रतिपादन किया है - पूर्ण, प्रशान्त, भास्वर, ललित तथा समग्र । नाट्यशास्त्र मे शरीराभिनय को छ भागो मे विभाजित किया है जिसका एक भाग नाट्यायित है । और उदाहरण के रूप में अभिनवभारती मे महाकवि सुबन्धुकृत 'वासवदत्तानाट्यवार' को प्रस्तुत किया गया है । प्रतीत होता है कि सुबन्धुकृत इसी नाटक का उल्लेख अभिनवभारती ने "वासवदत्तानृत्तधार" के नाम से किया है। महाकवि सुबन्धु और नाट्यग्रंथ के लेखक सुबन्धु एक ही व्यक्ति थे, यह सदेहास्पद है । सभवतया वे भिन्न है । भशून्य ओशून्य रिशून्य इशून्य मे हस्तलिखित ग्रन्थों का जो राजकीय सग्रह है उसमे एक हस्तलिखित ग्रन्थ उपलब्ध हुआ है जिसका निर्देश हस्तलिखित ग्रन्थों की सूची भाग बारह, पृशून्य तीन सौ सतहत्तर-तीन सौ तिरासी, सशून्य एक सौ ग्यारह, एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर-सत्तर के रूप में किया गया है। पुस्तक का नाम है 'भारतभाष्य' अथवा 'सरस्वतीहृदयालङ्कार' है। पुष्पिकाओ में उसके रचयिता का नाम नान्यपति अथवा नान्यदेव दिया गया है और उसके साथ महासामन्ताधिपति घर्मावलोक एवं मिथिलाधिपति विशेषण लगाये गये हैं। योजना के अनुसार ग्रन्थ विशालकाय होना चाहिये, उपरोक्त अश में चार प्रकार के अभिनयो मे से केवल वाचिक अभिनय की चर्चा है । प्रधानरूप से यह नाट्यशास्त्र के अध्याय अट्ठाईस-तैंतीस की टीका है, जिसमे संगीत की चर्चा है । लेखक ने अपना नाम राजनारायण भी बताया है तथा कहा है कि ये कीतिराज के अनुज थे a) । उन्होंने 'ग्रन्थमहार्णव' नामक अपनी एक अन्य रचना का भी उल्लेख किया है । फोलियो दो सौ इक्कीस पर अन्तिम श्लोक का उत्तरार्द्ध नीचे लिखे अनुसार है - "तेनाय मिथिलेश्वरेण रचितोऽध्यायोऽवनद्धाभिध ।" उन्होने प्रारम्भ में प्रतिज्ञा की है कि सत्रह अध्यायो मे वे वाचिकाभिनय की चर्चा करेंगे। साथ ही नाम तथा विषयों का सक्षिप्त विवरण दिया है। हस्तलिखित ग्रन्थ अत्यंत प्राचीन है और उसमे पृष्ठमात्राओ का प्रयोग है। लिपि अत्यत निबिड होने पर भी स्पष्ट है । ग्रन्थ कुछ अस्तव्यस्त है । अलङ्कार विषयक पाँचवाँ तथा सोलहवाँ एवं सत्रहवाँ अध्याय लुप्त हैं । ग्रन्थ मे भरत के प्रत्येक श्लोक पर टीका नही है किन्तु उन्हे सैकड़ो बार उद्धृत किया गया है। कश्यप, दत्तिल और नारद के भी सैकड़ो उद्धरण है; फोलियो एक सौ ग्यारह b तथा एक सौ चौदह b पर बृहत्कश्यप एव वृद्ध कश्यप का उद्धरण है । बहुद्देशी, मतग, याष्टिक तथा विशाखिल के बीसियों उद्धरण हैं। इनके अतिरिक्त निम्नलिखित ग्रन्थो एव लेखको के उद्धरण हैं. नारदीय शिक्षाविवरणकृत् , देवराज , मेर्वाचार्य , नन्दिमत , स्वरसंहिताचार्य , स्वाति , याज्ञवल्क्यस्मृति, भाग तीन, एक सौ बारह-एक सौ सोलह , तुम्बुरू . कालिकापुराण , भगवतपुराण अथवा भागवतपुराण . लेखक ने पूर्णतया अभिनवगुप्त का अनुसरण किया है किन्तु उनका उल्लेख प्रायः नहीं किया जैसे फोलियो दस क, एक सौ चौरासी ख । पाणिनि, नारद तथा अपिशालि का उल्लेख एक ही स्थान पर है । कहीकही पर अपने मत का भरत के मत से भेद प्रगट किया है, जैसे - "गान्धारग्रामश्च भरतेनालौकिकश्चात्रोपदर्शितः । अस्माभिश्चागमानुसारेण प्रदर्शित.", पंद्रह क "भरताचार्यस्यास्य शास्त्रे प्रयोगागता अस्माभिश्च कश्यपमतगतुम्बरविशाखिलाद्याचार्यनिखिलमुनिवचनात्" इत्यादि । बहुत से स्थानो पर सूत्र भी उद्धृत हैं । इसी प्रकार संस्कृत के ब्रह्मोक्त कहे जाने वाले चतुष्पद तथा चतुष्पदी भी उद्धृत हैं । भरतभाष्य के लेखक नान्यदेव का तिथि-निर्णय अपेक्षाकृत सरल किन्तु एक कठिनाई है। चौथा प्रस्तावित श्लोक है-'लक्ष्यप्रधान खलु शास्त्रमेतन्नि शङ्कदेवोऽपि तदेव वष्टि प्रथम अध्याय का तेईस वाँ श्लोक भी निःशङ्क का उल्लेख करता है - 'नोपाधि ददेघस्य विकारभेद नि शङ्कसूरि खलु कूटताने । सर्वेषु तास्तेपि कृताश्च शुद्धाश्चतुर्दशवेति मत मदीयम् ।' किसी लेखक का नाम निशङ्क असाधारण सा प्रतीत होता है। संगीतरत्नाकर के लेखक ने भी इसी नाम को स्वीकार किया है जहाँ उन्हें निशकशार्गदेव के रूप में बताया गया है। उसके पिता सोढल को देवगिरि के यादवनरेश भिल्लम और सिघन ने आश्रय दिया था। सिंघण का राज्य एक हज़ार दो सौ दस-एक हज़ार दो सौ सैंतालीस ईशून्य तक था । शार्ङ्गदेव का समय एक हज़ार दो सौ तैंतीस से एक हज़ार दो सौ सत्तर ईशून्य तक है ऐसी स्थिति में यदि नान्यदेव ने निशकशार्गदेव का उल्लेख किया है तो उसका समय एक हज़ार दो सौ अस्सी-एक हज़ार तीन सौ ईशून्य तक होना चाहिये । किन्तु ऐसा कोई उल्लेख नही मिलता जिससे यह कहा जा सके कि प्रस्तुत नान्यदेव ने तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मिथिला पर राज्य किया था । मिथिला के राजा नान्यदेव ही कर्णाटक के मैथिल राजवंश के संस्थापक थे और उनका शासनकाल एक हज़ार सत्तानवे - एक हज़ार एक सौ सैंतालीस ईशून्य तक है । । उन्हें बंगाल के राजा विजयसेन ने हराया था जिनका शासनकाल एक हज़ार पचानवे-एक हज़ार एक सौ अट्ठावन ईशून्य तक है । और डाशून्य आरशून्य सीशून्य मजुमदार का लेख इशून्य हिशून्य क्वशून्य भाग सात, पृशून्य छः सौ उन्यासी-छः सौ सत्तासी) जहाँ उन्होने बताया है कि विजयसेन एक हज़ार पचानवे ईशून्य मे सिंहासनारूढ़ हुए। इससे प्रगट होता है कि प्रस्तुत नान्यदेव ग्यारहवी शताब्दी के लगभग विद्यमान थे । अत. या तो भरतभाष्य की हस्तलिखित प्रति मे निशकदेव का उल्लेख प्रक्षिप्त है अथवा भरतभाष्य मे उल्लिखित नि. शंकदेव, शार्गदेव से भिन्न है अथवा मिथिला के नान्यदेव कोई और रहे होगे जिनका अभी तक पता नही चला है । अत भरतभाष्य के तिथि-निर्णय का प्रश्न इसी स्थिति मे छोडना होगा, सागरनन्दी के नाटकलक्षण रत्नकोश के अन्त मे नीचे लिखी कारिका है- 'श्रीहर्षविक्रमनराधिप - मातृगुप्त गर्ग -अश्मकुट्टनख - कुट्टकबादराणाम् । एषा मतेन भरतस्य मत विगाह्य ध्रष्ट मया समनुगच्छत रत्नकोशम् ॥' प्रतीत होता है सागरनन्दी द्वारा निर्दिष्ट उपरोक्त सात आचार्यों ने या तो भरत पर टीका लिखी थी या नाट्यशास्त्र से सम्बन्ध रखने वाले विषयो पर स्वतंत्र प्रकरण ग्रन्थ लिखे थे । अभिनवगुप्त तथा अन्य आचार्यों ने नाट्यशास्त्र का निर्देश भरतसूत्र के नाम से किया है। अत व्याकरण, तर्कशास्त्र, वेदान्त आदि की परम्परा के अनुसार प्रस्तुत सूत्र पर लिखी गई टीकाओ को भी भाष्य, वार्तिक आदि नाम दिये गये। कवि महोदय तथा उनकी शैली के विषय मे हम पहले लिख चुके हैं । डा. डे महोदय की आलोचना का उत्तर देते हुए कवि महोदय ने अपने वक्तव्य को समीचीन सिद्ध करने का प्रयत्न किया है । डे महोदय का प्रत्युत्तर तीस हिशून्य क्वाशून्य भाग पाँच, पृशून्य सात सौ छियासी-सात सौ नवासी मे प्रकाशित हुआ है। देखो डाशून्य राघवन का लेख "रसो की सख्या', अड्यार पुस्तकालय, पृशून्य बानवे-नौ सौ छः और "भोज का शृगारप्रकाश" पृशून्य पाँच सौ छत्तीस - पाँच सौ तैंतालीस अभिनवभारती का सशोधित संस्करण के लिये और अड्यार लाइब्रेरी बुलेटिन, अट्ठारह, खण्ड तीन-चार, दस एक सौ छियानवे-दो सौ नौ कुछ अनुच्छेदों में सुधार के लिये देखो अभिनवभारती, भाग एक और दो । चार. मेणावी - भामह ने मेघावी नामक आलङ्कारिक का दो बार उल्लेख किया है जिसने उपमा के सात दोष बताये हैं। . उसी ने अन्य स्थान पर कहा है - "यथासंख्यमथोत्प्रेक्षामलङ्कारद्वयं विदु । संख्यानमिति मेघाविनोत्प्रेक्षाभिहिता क्वचित् ॥ " . उपरोक्त मुद्रित पाठ के उत्तरार्द्ध का अर्थ है कि 'मेधावी ने कुछ स्थानो पर उत्प्रेक्षा के बदले संख्यान नाम दिया है। किन्तु यह ठीक नहीं है। दण्डी के मतानुसार अन्य आलङ्कारिकों ने सख्यान को यथासख्य का दूसरा नाम माना है । । अतः भामह के ग्रन्थ में उपलब्ध पाठ अशुद्ध प्रतीत होता है । यदि पाठ को 'मेधावी नोत्प्रेक्षा के रूप में बदल दिया जाय तो दण्डी के साथ समन्वय हो सकता है। उसका अर्थ यह होगा कि मेघावी ने यथासंख्य के स्थान पर सख्यान लिखा है और अनेक स्थानों पर उत्प्रेक्षा को अलङ्कार नही माना गया । नमिसाधु ने रुद्रट के काव्यालङ्कार पर व्याख्या करते हुए लिखा है - "ननु दण्डिमेधाविरुद्रभामहादिकृतानि सन्त्येवालङ्कारशास्त्राणि' । प्रश्न यह है कि 'मेधाविरुद्र एक ही नाम है अथवा 'मेधावि' और 'रुद्र' अलङ्कारशास्त्र के दो विभिन्न लेखक हैं। रुद्र द्वारा विरचित किसी अलङ्कार-ग्रन्थ का उल्लेख अन्य किसी आलङ्कारिक ने नही किया । रुद्रभट्ट का शृगारतिलक, जैसा कि उसकी विषय-सूची से प्रतीत होता है, अलङ्कार-प्रन्थ नहीं कहा जा सकता । अतः सभव है कि पूरा नाम मेघाविरुद्र हो । धर्मकीर्ति और भर्तृहरि को प्रायः कीर्ति और हरि शब्द से उद्धृत किया जाता है। अत. यदि मेघाविरुद्र भी केवल मेघावी शब्द से निर्दिष्ट हुए हों तो कोई आश्चर्य नही है । शार्ङ्गशून्य ने मालवरुद्र का एक श्लोक उद्धृत किया है। इसी प्रकार कपिलरुद्र का भी एक श्लोक तथा एक सुभाषित उद्धृत किया है। इससे प्रतीत होता है कि रुद्र नामक अनेक लेखक थे। रुद्रट पर टीका करते हुए नमिसाधु ने मेघावी को पुन उद्धृत किया है जहां उपमा के सात दोगों की चर्चा है। चर्चा की शैली से प्रतीत होता है कि उदाहरण मेधावी के ग्रन्थ से लिये गये हैं। 'अत्र च स्वरूपोपादाने सत्यपि चत्वार इति ग्रहह्णाद्यन्मेधाविप्रभृतिभिरुक्तं यथा लिंगवचनभेदी हीनताधिक्यमसम्भवो विपर्ययोऽसादृश्यमिति सप्तोपमादोषाः तदेतन्निरस्तम् ।' नमिसाघु ने उपमा के सात दोषों का प्रति
|
गोहाना (निस) : समायोजन की मांग को लेकर 283 दिन से आंदोलन कर रहे बर्खास्त पीटीआई ने बुधवार को क्रमिक अनशन किया। वे शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। वे शहर के न्यायिक परिसर के निकट करीब 10 महीने से अनिश्चितकालीन धरने और क्रमिक अनशन पर डटे हुए हैं। वे बार-बार अपना संकल्प दोहरा रहे हैं कि जब तक उनके सभी बर्खास्त पीटीआई साथियों को समायोजित नहीं कर दिया जाएगा, तब तक वे अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। बुधवार को आंदोलन का 283वां दिन था। अध्यक्षता सुरेश बलि ने की तथा संचालन राजेश मलिक ने किया। क्रमिक अनशन करने वाले 4 बर्खास्त पुरुष पीटीआई साहब सिंह, राजेश कुंडू, संदीप भौरिया और जसवीर सिंह रहे। शाम के समय चारों इन बर्खास्त पीटीआई को जूस पिला कर उनका क्रमिक अनशन समाप्त करवाया गया। रोजाना कभी चारों पुरुष तो कभी दो पुरुष और 2 महिला बर्खास्त पीटीआई क्रमिक अनशन कर रहे हैं।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
|
गोहाना : समायोजन की मांग को लेकर दो सौ तिरासी दिन से आंदोलन कर रहे बर्खास्त पीटीआई ने बुधवार को क्रमिक अनशन किया। वे शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। वे शहर के न्यायिक परिसर के निकट करीब दस महीने से अनिश्चितकालीन धरने और क्रमिक अनशन पर डटे हुए हैं। वे बार-बार अपना संकल्प दोहरा रहे हैं कि जब तक उनके सभी बर्खास्त पीटीआई साथियों को समायोजित नहीं कर दिया जाएगा, तब तक वे अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। बुधवार को आंदोलन का दो सौ तिरासीवां दिन था। अध्यक्षता सुरेश बलि ने की तथा संचालन राजेश मलिक ने किया। क्रमिक अनशन करने वाले चार बर्खास्त पुरुष पीटीआई साहब सिंह, राजेश कुंडू, संदीप भौरिया और जसवीर सिंह रहे। शाम के समय चारों इन बर्खास्त पीटीआई को जूस पिला कर उनका क्रमिक अनशन समाप्त करवाया गया। रोजाना कभी चारों पुरुष तो कभी दो पुरुष और दो महिला बर्खास्त पीटीआई क्रमिक अनशन कर रहे हैं। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
|
हमारे देश की दशा उनसे बिल्कुल ही भिन्न है । यहाँ के लोगो मे आध्यात्मिकता का दुरुपयोग एव विपर्यास हो जाने के कारण उनकी अवस्था बहुत ही होन है । जीवन के लिए अत्यावश्यक पदार्थों की देश में वडी कमी है । मनुष्य संस्था वे हिसाव वढी हुई है। उनके हिसाब से देश की उपज बहुत कम है । करोडो नर-नारी निवृत्ति और भक्ति मार्ग आदि धार्मिक अधविश्वासो मे पड़े हुए तथा ईश्वर पर झूठा भरोसा करके निरूद्यमी और आलसी जीवन व्यतीत करते हैं अथवा अपने समय और शक्ति का धार्मिक कर्मकांडो मे अपव्यय करते हैं । पुरुपार्थ की अपेक्षा प्रारब्ध को अधिक महत्व देते है। अनन्त प्रकार के देवी देवताओ, भूतो, प्रेतो, गृह नक्षत्रो के वहम, अध-विश्वासो और सामाजिक रूढ़ियो मे जकडे हुए श्रम-गौरव, आत्म-विश्वास और आत्मोत्साह को खोये बैठे हैं । व्यक्तिगत स्वार्थों से इतने प्रभावित हो रहे हैं कि देश की एकता और सामाजिक नैतिकता की सर्वथा उपेक्षा करते है । ऐसी दशा मे गीता मे वर्णित भगवान कृष्ण का बताया हुआ प्रवृत्ति प्रधान महाक्रांतिकारी "व्यवहार दर्शन" अथवा निष्काम कर्मयोग ही के अवलम्ब से हमारे देश का पुनस्थान हो सकता है । यदि हमारी सरकार इसी को मान्यता देकर लोगो मे इसका जोरदार प्रचार करे तो अपनी सव समाजवादी योजनाओ और समाज कल्याण के प्रयत्नो मे पूर्णतया सफल हो सकती है । देश के कल्याण का दूसरा कोई अचूक उपाय नही है ।
भनवान बुद्ध का निवृत्ति प्रधान उपदेश यद्यपि उस समय हमारे देश के लिए आवश्यक और उपयोगी था, परन्तु इस समय विशेष उपयोगी नही है । गीता मे वर्णित भगवान कृष्ण के प्रवृत्ति प्रधान "व्यवहार दर्शन" की अथवा निष्काम कर्मयोग का मध्यम मार्ग साधारणतया सब लोगो के लिए सदा ही समान रूप से अत्यन्त उपयोगी है । इसीलिये गीता को इतना महत्व दिया जाता है और इसीलिये यहाँ वे लोग इसको "जयन्ती" प्रति वर्षं मनाते हैं ।
|
हमारे देश की दशा उनसे बिल्कुल ही भिन्न है । यहाँ के लोगो मे आध्यात्मिकता का दुरुपयोग एव विपर्यास हो जाने के कारण उनकी अवस्था बहुत ही होन है । जीवन के लिए अत्यावश्यक पदार्थों की देश में वडी कमी है । मनुष्य संस्था वे हिसाव वढी हुई है। उनके हिसाब से देश की उपज बहुत कम है । करोडो नर-नारी निवृत्ति और भक्ति मार्ग आदि धार्मिक अधविश्वासो मे पड़े हुए तथा ईश्वर पर झूठा भरोसा करके निरूद्यमी और आलसी जीवन व्यतीत करते हैं अथवा अपने समय और शक्ति का धार्मिक कर्मकांडो मे अपव्यय करते हैं । पुरुपार्थ की अपेक्षा प्रारब्ध को अधिक महत्व देते है। अनन्त प्रकार के देवी देवताओ, भूतो, प्रेतो, गृह नक्षत्रो के वहम, अध-विश्वासो और सामाजिक रूढ़ियो मे जकडे हुए श्रम-गौरव, आत्म-विश्वास और आत्मोत्साह को खोये बैठे हैं । व्यक्तिगत स्वार्थों से इतने प्रभावित हो रहे हैं कि देश की एकता और सामाजिक नैतिकता की सर्वथा उपेक्षा करते है । ऐसी दशा मे गीता मे वर्णित भगवान कृष्ण का बताया हुआ प्रवृत्ति प्रधान महाक्रांतिकारी "व्यवहार दर्शन" अथवा निष्काम कर्मयोग ही के अवलम्ब से हमारे देश का पुनस्थान हो सकता है । यदि हमारी सरकार इसी को मान्यता देकर लोगो मे इसका जोरदार प्रचार करे तो अपनी सव समाजवादी योजनाओ और समाज कल्याण के प्रयत्नो मे पूर्णतया सफल हो सकती है । देश के कल्याण का दूसरा कोई अचूक उपाय नही है । भनवान बुद्ध का निवृत्ति प्रधान उपदेश यद्यपि उस समय हमारे देश के लिए आवश्यक और उपयोगी था, परन्तु इस समय विशेष उपयोगी नही है । गीता मे वर्णित भगवान कृष्ण के प्रवृत्ति प्रधान "व्यवहार दर्शन" की अथवा निष्काम कर्मयोग का मध्यम मार्ग साधारणतया सब लोगो के लिए सदा ही समान रूप से अत्यन्त उपयोगी है । इसीलिये गीता को इतना महत्व दिया जाता है और इसीलिये यहाँ वे लोग इसको "जयन्ती" प्रति वर्षं मनाते हैं ।
|
बेला औद्योगिक क्षेत्र में जमा पानी निकासी के लिए जगह-जगह पर सड़कों को काट कर नाला बनाए जाने से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। इससे कच्चा माल फैक्ट्रियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ट्रक व अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित होने से उद्यमियों में आक्रोश है। औद्योगिक क्षेत्र के फेज एक में अधिकांश नालों को काट दिया गया है। सड़कों को मलबा व कीचड़ से पाट दिए जाने से स्थिति नारकीय हो गई है। औद्योगिक क्षेत्र के फेज एक से पैदल चलना भी लोगों के लिए खतरनाक हो गया है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कों को जगह जगह पर काट दिए जाने से उद्यमी सवाल खड़ा कर रहे हैं। उद्यमियों ने बताया कि मिठनपुरा इलाके का पानी बेला होकर गुजरता है। नगर निगम ने मिठनपुरा से पानी की निकासी के लिए बेला औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों को काट दिया। बीच सड़क को काट कर नाला बना दिया गया है। यहीं नहीं सड़क के किनारे से गुजरने वाले नाले पर बनाये गए स्लैब को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इससे करीब दो दर्जन फैक्ट्रियों में लोगों के अलावा गाड़ियों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। नालों को खुला छोड़ दिए जाने से लोगों के जान पर संकट बनी रहती है।
|
बेला औद्योगिक क्षेत्र में जमा पानी निकासी के लिए जगह-जगह पर सड़कों को काट कर नाला बनाए जाने से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। इससे कच्चा माल फैक्ट्रियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ट्रक व अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित होने से उद्यमियों में आक्रोश है। औद्योगिक क्षेत्र के फेज एक में अधिकांश नालों को काट दिया गया है। सड़कों को मलबा व कीचड़ से पाट दिए जाने से स्थिति नारकीय हो गई है। औद्योगिक क्षेत्र के फेज एक से पैदल चलना भी लोगों के लिए खतरनाक हो गया है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कों को जगह जगह पर काट दिए जाने से उद्यमी सवाल खड़ा कर रहे हैं। उद्यमियों ने बताया कि मिठनपुरा इलाके का पानी बेला होकर गुजरता है। नगर निगम ने मिठनपुरा से पानी की निकासी के लिए बेला औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों को काट दिया। बीच सड़क को काट कर नाला बना दिया गया है। यहीं नहीं सड़क के किनारे से गुजरने वाले नाले पर बनाये गए स्लैब को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इससे करीब दो दर्जन फैक्ट्रियों में लोगों के अलावा गाड़ियों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। नालों को खुला छोड़ दिए जाने से लोगों के जान पर संकट बनी रहती है।
|
अधिक बारीकी से प्रवाह का अध्ययन करने के लिए करेंगे। हम इसका थोड़ा सा परिचय देंगे और एक गोलाकार सिलेंडर पर प्रवाह से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा प्राप्त करेंगे।
तो हम श्यान प्रवाह में जाने से पहले, इस अध्याय में भी हम श्यान प्रवाह को देख रहे हैं, गोलाकार सिलेंडर के संदर्भ के लिए वास्तव में एक इनविसीड प्रवाह के साथ शुरू करना महत्वपूर्ण है, फिर हमें स्पष्ट समझ मिलती है कि श्यान प्रवाह के मामले में क्या हो रहा है। तो आइए हम जल्दी से देखते हैं कि क्या होता है अगर एक गोलाकार सिलेंडर पर एक इनविसीड फ्लो घटना होती है। तो यह मूल रूप से हमारा सिलेंडर है और एक प्रवाह है जो इस तरह से सिलेंडर के पास आ रहा है ।
यह इस तरह से सिलेंडर के पास फिर से एक समरूप (uniform ) प्रवाह है। इसलिए यदि हम इन 2 को देखते हैं तो 2 लाल रेखाएं हैं जो इस आकृति में दिखाई दे रही हैं जो ठहराव स्ट्रीमलाइन (stagnation streamline ) को इंगित करती हैं। तो मूल रूप से यदि आप यहाँ प्रवाह का अनुसरण करते हैं, तो प्रवाह इस पहले बिंदु पर अंततः स्थिर हो जाता है। तो प्रवाह वेग शून्य हो जाता है। तो यह मूल रूप से स्ट्रीमलाइन है जो ठहराव बिंदु पर समाप्त होती है और इसे ठहराव स्ट्रीमलाइन कहा जाता है। इसी प्रकार इस प्रवाह में भी बहुत ठहराव बिंदु है। प्रवाह इस दिशा में आगे बढ़ता है लेकिन उस विशेष बिंदु पर आपके पास कोई प्रवाह वेग नहीं हो सकता है।
अब यदि आप एक द्रव तत्व पर विचार करते हैं, तो आप इसे प्लेट की सतह पर जानते हैं, यह कुछ इस तरह से आगे बढ़ेगा और शून्य वेग से यह एक उच्च वेग क्षेत्र में जाता है क्योंकि यह एक इनविसीड प्रवाह है, इसलिए आप ठोस सतह की सतह पर भी वेग रख सकते हैं, बिल्कुल ठोस सतह पर। और फिर प्रवाह के लिए है, तो यह द्रव कण वास्तव में तेजी से बढ़ रहा है। यह एक स्थिर स्थिति से गतिशील स्थिति तक, उच्च गति तक जा रहा है।
इसलिए अगर हम dUo, U० को वेग का स्पर्शरेखा (tangential) घटक के रूप में देखते हैं, इसका मतलब है कि यदि आप इस वृत्त से स्पर्शरेखा को खींचते हैं, तो स्पर्शरेखा घटक के साथ वेग स्पर्शरेखा का वेग है। तो मूल रूप से 0 मूल रूप से बनाया गया कोण है, जिसे इस त्रिज्या से जोड़कर केंद्र के पहले ठहराव बिंदु से किसी अन्य त्रिज्या तक खींचा जाता है। तो मूल रूप से यह हमारा संदर्भ (reference) है, जो रेडियल लाइन है जो पहले ठहराव बिंदु और इस वृत्त के केंद्र से जुड़ता है। मुझे लगता है कि यह प्रस्तुति में बहुत बाद में आएगा।
|
अधिक बारीकी से प्रवाह का अध्ययन करने के लिए करेंगे। हम इसका थोड़ा सा परिचय देंगे और एक गोलाकार सिलेंडर पर प्रवाह से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा प्राप्त करेंगे। तो हम श्यान प्रवाह में जाने से पहले, इस अध्याय में भी हम श्यान प्रवाह को देख रहे हैं, गोलाकार सिलेंडर के संदर्भ के लिए वास्तव में एक इनविसीड प्रवाह के साथ शुरू करना महत्वपूर्ण है, फिर हमें स्पष्ट समझ मिलती है कि श्यान प्रवाह के मामले में क्या हो रहा है। तो आइए हम जल्दी से देखते हैं कि क्या होता है अगर एक गोलाकार सिलेंडर पर एक इनविसीड फ्लो घटना होती है। तो यह मूल रूप से हमारा सिलेंडर है और एक प्रवाह है जो इस तरह से सिलेंडर के पास आ रहा है । यह इस तरह से सिलेंडर के पास फिर से एक समरूप प्रवाह है। इसलिए यदि हम इन दो को देखते हैं तो दो लाल रेखाएं हैं जो इस आकृति में दिखाई दे रही हैं जो ठहराव स्ट्रीमलाइन को इंगित करती हैं। तो मूल रूप से यदि आप यहाँ प्रवाह का अनुसरण करते हैं, तो प्रवाह इस पहले बिंदु पर अंततः स्थिर हो जाता है। तो प्रवाह वेग शून्य हो जाता है। तो यह मूल रूप से स्ट्रीमलाइन है जो ठहराव बिंदु पर समाप्त होती है और इसे ठहराव स्ट्रीमलाइन कहा जाता है। इसी प्रकार इस प्रवाह में भी बहुत ठहराव बिंदु है। प्रवाह इस दिशा में आगे बढ़ता है लेकिन उस विशेष बिंदु पर आपके पास कोई प्रवाह वेग नहीं हो सकता है। अब यदि आप एक द्रव तत्व पर विचार करते हैं, तो आप इसे प्लेट की सतह पर जानते हैं, यह कुछ इस तरह से आगे बढ़ेगा और शून्य वेग से यह एक उच्च वेग क्षेत्र में जाता है क्योंकि यह एक इनविसीड प्रवाह है, इसलिए आप ठोस सतह की सतह पर भी वेग रख सकते हैं, बिल्कुल ठोस सतह पर। और फिर प्रवाह के लिए है, तो यह द्रव कण वास्तव में तेजी से बढ़ रहा है। यह एक स्थिर स्थिति से गतिशील स्थिति तक, उच्च गति तक जा रहा है। इसलिए अगर हम dUo, Uशून्य को वेग का स्पर्शरेखा घटक के रूप में देखते हैं, इसका मतलब है कि यदि आप इस वृत्त से स्पर्शरेखा को खींचते हैं, तो स्पर्शरेखा घटक के साथ वेग स्पर्शरेखा का वेग है। तो मूल रूप से शून्य मूल रूप से बनाया गया कोण है, जिसे इस त्रिज्या से जोड़कर केंद्र के पहले ठहराव बिंदु से किसी अन्य त्रिज्या तक खींचा जाता है। तो मूल रूप से यह हमारा संदर्भ है, जो रेडियल लाइन है जो पहले ठहराव बिंदु और इस वृत्त के केंद्र से जुड़ता है। मुझे लगता है कि यह प्रस्तुति में बहुत बाद में आएगा।
|
सवाल यह है की पेट्रोल कार ज्यादा बेहतर होती है या डीजल कार? वैसे जो लोग रोजाना लम्बी दूरी तय करते हैं वो डीजल कार लेना ही पसंद करते हैं। खैर तो यहां हम आपको पेट्रोल और डीजल कार के बारे में कुछ फैक्ट बता रहे हैं।
नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। पहले की तुलना में अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं रहा है। हालांकि, अभी भी इतना फर्क है कि मध्य परिवार के बजट पर अच्छा खासा प्रभाव डालने की ताकत रखता है। अगर आप नई कार खरीदना चाहते हैं और तय नहीं कर पा रहे हैं कि पेट्रोल गाड़ी बेस्ट रहेगी या डीजल कार, तो इस खबर को पूरा पढ़ें, जहां आपको बताने जा रहे हैं इन दोनों गाड़ियों के बीच अंतर के बारे में।
पेट्रोल या डीजल गाड़ी में कौन बेहतर?
यह एक बहुत ही पेचीदा सवाल है, क्योंकि इसका कोई सीधा जवाब नहीं है। डीजल और पेट्रोल कारों के बीच भ्रम को समाप्त करने के लिए कई कारणों को ध्यान में रखना जरूरी है, जिसमें कीमत, परफार्मेंस, माइलेज आदि शामिल हैं। जब पेट्रोल बनाम डीजल कारों की बात आती है, तो केवल माइलेज से हम दोनों के बीच अंतर नहीं देख सकते है। इसके लिए कुछ अन्य पैरामीटर को देखने की जरूरत पड़ती है।
पेट्रोल वेरिएंट और डीजल वेरिएंट की कीमतों में हमेशा से फर्क देखने को मिला है। डीजल गाड़ियां पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में थोड़ा अधिक महंगी होती है। लोग बजट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का चुनाव अधिक करते हैं।
जब पेट्रोल और डीजल गाड़ी की परफॉर्मेंस की बात आती है तो पेट्रोल संस्करण डीजल की तुलना में अधिक पॉवर जेनरेट करता है। इसका एक्सिलेटर सिस्टम डीजल की तुलना में फास्ट काम करता है। वहीं डीजल मॉडल अधिक टॉर्क जेनरेट करने के लिए जाना जाता है, जिससे इसे पेट्रोल मॉडल की तुलना में अधिक पॉवर मिलती है।
|
सवाल यह है की पेट्रोल कार ज्यादा बेहतर होती है या डीजल कार? वैसे जो लोग रोजाना लम्बी दूरी तय करते हैं वो डीजल कार लेना ही पसंद करते हैं। खैर तो यहां हम आपको पेट्रोल और डीजल कार के बारे में कुछ फैक्ट बता रहे हैं। नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। पहले की तुलना में अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा फर्क नहीं रहा है। हालांकि, अभी भी इतना फर्क है कि मध्य परिवार के बजट पर अच्छा खासा प्रभाव डालने की ताकत रखता है। अगर आप नई कार खरीदना चाहते हैं और तय नहीं कर पा रहे हैं कि पेट्रोल गाड़ी बेस्ट रहेगी या डीजल कार, तो इस खबर को पूरा पढ़ें, जहां आपको बताने जा रहे हैं इन दोनों गाड़ियों के बीच अंतर के बारे में। पेट्रोल या डीजल गाड़ी में कौन बेहतर? यह एक बहुत ही पेचीदा सवाल है, क्योंकि इसका कोई सीधा जवाब नहीं है। डीजल और पेट्रोल कारों के बीच भ्रम को समाप्त करने के लिए कई कारणों को ध्यान में रखना जरूरी है, जिसमें कीमत, परफार्मेंस, माइलेज आदि शामिल हैं। जब पेट्रोल बनाम डीजल कारों की बात आती है, तो केवल माइलेज से हम दोनों के बीच अंतर नहीं देख सकते है। इसके लिए कुछ अन्य पैरामीटर को देखने की जरूरत पड़ती है। पेट्रोल वेरिएंट और डीजल वेरिएंट की कीमतों में हमेशा से फर्क देखने को मिला है। डीजल गाड़ियां पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में थोड़ा अधिक महंगी होती है। लोग बजट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का चुनाव अधिक करते हैं। जब पेट्रोल और डीजल गाड़ी की परफॉर्मेंस की बात आती है तो पेट्रोल संस्करण डीजल की तुलना में अधिक पॉवर जेनरेट करता है। इसका एक्सिलेटर सिस्टम डीजल की तुलना में फास्ट काम करता है। वहीं डीजल मॉडल अधिक टॉर्क जेनरेट करने के लिए जाना जाता है, जिससे इसे पेट्रोल मॉडल की तुलना में अधिक पॉवर मिलती है।
|
Man Walks With Dogs Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स दर्जनों डॉग को एक साथ टहलाते देखा जा सकता है। इस वीडियो को देखकर आप कह सकते हैं कि शख्स इस दुनिया की सबसे बड़ी Z प्लस सिक्योरिटी रखता है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि शख्स एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर से ज्यादा कुत्तों के गले की रस्सी पकड़कर टहलाता नजर आ रहा है। यह दिलचस्प वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग इस पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं।
वीडियो में कुत्तों की फौज देखकर नेटिजन्स काफी खुश हो रहे हैं। दरअसल, कई लोग कुत्ते पालते हैं, लेकिन समय का अभाव होने की वजह से उन्हें सुबह-शाम घुमाने नहां ले जा पाते हैं। इसके लिए अक्सर वह एक ऐसे शख्स को नौकरी पर रखते हैं, जो सुबह-शाम उनके कुत्ते को घुमाने लेकर जाए। वीडियो में दिख रहा शख्स यही काम करता दिखाई दे रहा है। यह शख्स कुत्तों को घुमाने के लिए निकला हुआ है। हालांकि शख्स के साथ एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर से ज्यादा कुत्तों की फौज सड़क पर निकली है।
इस वीडियो को Buitengebieden नाम के ट्विटर अकाउंट से शेयर किया गया है। शख्स को आप कुत्तों की सेना के साथ देखकर कह सकते हैं कि ऐसा लग रहा है वह किसी मिशन पर निकला है। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करने के साथ कैप्शन में लिखा गया, 'वॉकिंग द डॉग्स। ' 7 सेकेंड का यह वीडियो काफी रोमांचक है। आप देख सकते हैं कि शख्स 12 से ज्यादा कुत्तों की रस्सियों को अपने हाथ से पकड़े हुए है। वीडियो इतना जबरदस्त है कि इस 7 सेकंड के वीडियो को कुछ ही घंटों में 1 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देख लिया है।
|
Man Walks With Dogs Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स दर्जनों डॉग को एक साथ टहलाते देखा जा सकता है। इस वीडियो को देखकर आप कह सकते हैं कि शख्स इस दुनिया की सबसे बड़ी Z प्लस सिक्योरिटी रखता है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि शख्स एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर से ज्यादा कुत्तों के गले की रस्सी पकड़कर टहलाता नजर आ रहा है। यह दिलचस्प वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग इस पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। वीडियो में कुत्तों की फौज देखकर नेटिजन्स काफी खुश हो रहे हैं। दरअसल, कई लोग कुत्ते पालते हैं, लेकिन समय का अभाव होने की वजह से उन्हें सुबह-शाम घुमाने नहां ले जा पाते हैं। इसके लिए अक्सर वह एक ऐसे शख्स को नौकरी पर रखते हैं, जो सुबह-शाम उनके कुत्ते को घुमाने लेकर जाए। वीडियो में दिख रहा शख्स यही काम करता दिखाई दे रहा है। यह शख्स कुत्तों को घुमाने के लिए निकला हुआ है। हालांकि शख्स के साथ एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर से ज्यादा कुत्तों की फौज सड़क पर निकली है। इस वीडियो को Buitengebieden नाम के ट्विटर अकाउंट से शेयर किया गया है। शख्स को आप कुत्तों की सेना के साथ देखकर कह सकते हैं कि ऐसा लग रहा है वह किसी मिशन पर निकला है। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करने के साथ कैप्शन में लिखा गया, 'वॉकिंग द डॉग्स। ' सात सेकेंड का यह वीडियो काफी रोमांचक है। आप देख सकते हैं कि शख्स बारह से ज्यादा कुत्तों की रस्सियों को अपने हाथ से पकड़े हुए है। वीडियो इतना जबरदस्त है कि इस सात सेकंड के वीडियो को कुछ ही घंटों में एक मिलियन से ज्यादा लोगों ने देख लिया है।
|
आपका आहार और व्यायाम दिनचर्या दोनों इसमें समान भूमिका निभाते हैं। उसके बाद भी आपको अपने शरीर में कोई भी बदलाव देखने में कई महीनों लगेंगे। हालांकि, यदि आप अपने शरीर में तेज़ी से सिक्स एब्स प्राप्त करने के बारे में सोचते हैं तो यहां हम आपको कुछ डाइट टिप्स बता रहे हैं जिनके जरिए आप एक आकर्षक बॉडी पा सकते हैं।
सिक्स पैक्स पाने के लिए आपको एब्स डाइट को फॉलो करना होगा। एब्स डाइट एक इटिंग पैटर्न यानी आहार खाने का तरीका है जिसके जरिए आप महज 6 सप्ताह में चर्बी कम कर पेट को फ्लेट शेप में पा सकते हैं। डाइट पैटर्न के निर्माता डेविड जिनजेंको (David Zinczenko) के अनुसार, मजबूत और फ्लेट पेट आपको लंबे समय तक जीने, बेहतर नींद, पीठ दर्द को रोकने के साथ-साथ सेक्स लाइफ को भी बेहतर करने में मदद कर सकता है।
आपको क्या करने की जरूरत है?
इस आहार का पालन करने के दौरान आपको दिन में छह बार खाने की आवश्यकता होती है। लेकिन आपके भोजन में आपको स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले कुछ पोषक तत्व शामिल करने होंगे।
एब्स डाइट में आपको सप्ताह में छह दिन एक ही इटिंग पैटर्न को फॉलो करना होगा और हर वीक में सिर्फ एक बार आपको अपने इटिंग पैटर्न को बदलने की अनुमति है। इसके अलावा इस आहार के अनुसार, तैयार किए गए 20 मिनट का वर्कआउट सप्ताह में तीन बार करना होगा।
एब्स डाइट में कौन से फूड खाए जाते हैं?
इस डाइट को फॉलो करना बहुत सरल है क्योंकि इसमें आपको अपने आहार में से किसी भी फूड को बैन या कैलोरी- कार्ब को खत्म करने की आवश्यकता नहीं है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको बार-बार भोजन करने की अनुमति है। यह आहार योजना अधिक फल, सब्जियां, दुबला प्रोटीन, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा और मट्ठा प्रोटीन होने के लिए प्रोत्साहित करती है।
स्मूदी भी इस आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है और भोजन या नाश्ते के लिए एक विकल्प हो सकता है। कम वसा या फैट फ्री मिल्क, ग्रीन टी को अपने डाइट में रूटीन में शामिल कर सकते हैं। पानी का सेवन प्रति दिन कम से कम आठ गिलास होना चाहिए और शराब से बचना चाहिए।
इस डाइट का वर्कआउट प्लान भी ज्यादा टफ नही है और बहुत ही बेसिक है। एब्स डाइट का पालन करते समय कम से कम 20 मिनट प्रति सत्र के लिए प्रति सप्ताह कम से कम तीन बार व्यायाम करना पड़ता है। एक्सरसाइज रूटीन में तीन वर्कआउट होने चाहिए।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंगः इस डाइट में आपको सप्ताह में तीन बार वेट लिफ्टिंग करने की सलाह दी जाती है। प्रत्येक सत्र में, पूरे शरीर की कसरत और पैर के व्यायाम (leg exercise) पर जोर देना होता है।
एब्डोमिनल एक्सरसाइजः एब एक्सरसाइज हफ्ते में दो बार करनी चाहिए और इसमें एब्डोमिनल क्रंच, बेंट-लेग नी रेज और साइड ब्रिज जैसे व्यायाम शामिल होने चाहिए।
कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइजः कार्डियो एक्सरसाइज उन दिनों में की जा सकती है जब आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं कर रहे हों। साइकिल चलाने से लेकर दौड़ना, या तैरना आप अपनी पसंद में से एक चुन सकते हैं।
जिनजेंको ने इस आहार को विशेष रूप से पुरुषों के लिए डिज़ाइन किया था। बाद में उन्होंने एक और किताब प्रकाशित की जिसमें महिलाओं के लिए डाइट प्लान था। एब्स डाइट प्रोग्राम को स्वस्थ और संतुलित माना जाता है। उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आपको अत्यधिक डाइटिंग और व्यायाम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित कर सके कि क्या यह आहार वास्तव में सभी आकार और आकार के लोगों पर काम करता है। विज्ञान के अनुसार वजन कम करना शरीर के किसी विशेष अंग से वजन कम करना संभव नहीं है।
|
आपका आहार और व्यायाम दिनचर्या दोनों इसमें समान भूमिका निभाते हैं। उसके बाद भी आपको अपने शरीर में कोई भी बदलाव देखने में कई महीनों लगेंगे। हालांकि, यदि आप अपने शरीर में तेज़ी से सिक्स एब्स प्राप्त करने के बारे में सोचते हैं तो यहां हम आपको कुछ डाइट टिप्स बता रहे हैं जिनके जरिए आप एक आकर्षक बॉडी पा सकते हैं। सिक्स पैक्स पाने के लिए आपको एब्स डाइट को फॉलो करना होगा। एब्स डाइट एक इटिंग पैटर्न यानी आहार खाने का तरीका है जिसके जरिए आप महज छः सप्ताह में चर्बी कम कर पेट को फ्लेट शेप में पा सकते हैं। डाइट पैटर्न के निर्माता डेविड जिनजेंको के अनुसार, मजबूत और फ्लेट पेट आपको लंबे समय तक जीने, बेहतर नींद, पीठ दर्द को रोकने के साथ-साथ सेक्स लाइफ को भी बेहतर करने में मदद कर सकता है। आपको क्या करने की जरूरत है? इस आहार का पालन करने के दौरान आपको दिन में छह बार खाने की आवश्यकता होती है। लेकिन आपके भोजन में आपको स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले कुछ पोषक तत्व शामिल करने होंगे। एब्स डाइट में आपको सप्ताह में छह दिन एक ही इटिंग पैटर्न को फॉलो करना होगा और हर वीक में सिर्फ एक बार आपको अपने इटिंग पैटर्न को बदलने की अनुमति है। इसके अलावा इस आहार के अनुसार, तैयार किए गए बीस मिनट का वर्कआउट सप्ताह में तीन बार करना होगा। एब्स डाइट में कौन से फूड खाए जाते हैं? इस डाइट को फॉलो करना बहुत सरल है क्योंकि इसमें आपको अपने आहार में से किसी भी फूड को बैन या कैलोरी- कार्ब को खत्म करने की आवश्यकता नहीं है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको बार-बार भोजन करने की अनुमति है। यह आहार योजना अधिक फल, सब्जियां, दुबला प्रोटीन, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा और मट्ठा प्रोटीन होने के लिए प्रोत्साहित करती है। स्मूदी भी इस आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है और भोजन या नाश्ते के लिए एक विकल्प हो सकता है। कम वसा या फैट फ्री मिल्क, ग्रीन टी को अपने डाइट में रूटीन में शामिल कर सकते हैं। पानी का सेवन प्रति दिन कम से कम आठ गिलास होना चाहिए और शराब से बचना चाहिए। इस डाइट का वर्कआउट प्लान भी ज्यादा टफ नही है और बहुत ही बेसिक है। एब्स डाइट का पालन करते समय कम से कम बीस मिनट प्रति सत्र के लिए प्रति सप्ताह कम से कम तीन बार व्यायाम करना पड़ता है। एक्सरसाइज रूटीन में तीन वर्कआउट होने चाहिए। स्ट्रेंथ ट्रेनिंगः इस डाइट में आपको सप्ताह में तीन बार वेट लिफ्टिंग करने की सलाह दी जाती है। प्रत्येक सत्र में, पूरे शरीर की कसरत और पैर के व्यायाम पर जोर देना होता है। एब्डोमिनल एक्सरसाइजः एब एक्सरसाइज हफ्ते में दो बार करनी चाहिए और इसमें एब्डोमिनल क्रंच, बेंट-लेग नी रेज और साइड ब्रिज जैसे व्यायाम शामिल होने चाहिए। कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइजः कार्डियो एक्सरसाइज उन दिनों में की जा सकती है जब आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं कर रहे हों। साइकिल चलाने से लेकर दौड़ना, या तैरना आप अपनी पसंद में से एक चुन सकते हैं। जिनजेंको ने इस आहार को विशेष रूप से पुरुषों के लिए डिज़ाइन किया था। बाद में उन्होंने एक और किताब प्रकाशित की जिसमें महिलाओं के लिए डाइट प्लान था। एब्स डाइट प्रोग्राम को स्वस्थ और संतुलित माना जाता है। उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आपको अत्यधिक डाइटिंग और व्यायाम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित कर सके कि क्या यह आहार वास्तव में सभी आकार और आकार के लोगों पर काम करता है। विज्ञान के अनुसार वजन कम करना शरीर के किसी विशेष अंग से वजन कम करना संभव नहीं है।
|
हरियाणा के रेवाड़ी में एक फाइनेंसर से 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगने वाले कुख्यात बदमाश राजकुमार उर्फ झोटा की गैंग के 3 शूटर्स को 10-10 साल कैद और 2 को 3-3 व एक को 2 साल कैद की सजा सुनाई गई है। दोषियों पर मोटा जुर्माना भी ठोका गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, रेवाड़ी शहर के मोहल्ला आजाद नगर निवासी बालमुकेश सैनी फाइनेंस का काम करते है। बालमुकेश से झोटा गैंग के शूटर संदीप सोनी ने जुलाई 2018 में 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। रंगदारी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी। रंगदारी मांगने की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी। इस बीच बदमाशों ने शहर में कई अन्य लोगों से भी रंगदारी मांगी और कई जगह फायरिंग की।
बालमुकेश से रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की तो पटौदी के पास सुराग लग गया। पुलिस ने बदमाशों को पटौदी एक पेट्रोल पंप के पास घेर लिया था। घेराबंदी के बाद बदमाशों ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग कर दी थी।
दोनों तरफ से चली गोली के बाद झोटा गैंग के शूटर्स शहर के मोहल्ला नई आबादी निवासी संदीप सोनी व प्रदीप सोनी, गांव चांदनवास के रहने वाले रवि उर्फ बिल्लारी, मोहल्ला सरस्वती विहार निवासी बिशन उर्फ किशन उर्फ डैनी, गांव बोलनी के रहने वाले मोहन व राजस्थान के जिला अलवर के गांव ततारपुर ढोलका के रहने वाले राहुल को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में एक अन्य युवक कुलजीत को आरोपी बनाया था।
पुलिस द्वारा रखे गए साक्ष्यों व गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने प्रदीप सोनी, संदीप सोनी, रवि उर्फ बिल्लारी, बिशन उर्फ किशन उर्फ डैनी, मोहन व राहुल को दोषी करार दिया था। अदालत ने एक आरोपी कुलजीत को मामले में बरी कर दिया था। आरोपियों को 13 फरवरी को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन न्यायाधीश के छुट्टी पर होने की वजह से उन्हें अब सजा सुनाई गई है।
अदालत ने संदीप सोनी को 10 साल की कैद व 1. 10 लाख रुपए जुर्माना, प्रदीप सोनी को 10 साल की कैद व 60 हजार रुपए जुर्माना, मोहन को 10 साल की कैद व 50 हजार रुपए जुर्माना, राहुल को 3 साल की कैद व 50 हजार रुपए जुर्माना, रवि को 2 साल की कैद व 10 हजार रुपए जुर्माना और बिशन को 3 साल की कैद व 10 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने की सूरत में दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
हरियाणा के रेवाड़ी में एक फाइनेंसर से दस लाख रुपए की रंगदारी मांगने वाले कुख्यात बदमाश राजकुमार उर्फ झोटा की गैंग के तीन शूटर्स को दस-दस साल कैद और दो को तीन-तीन व एक को दो साल कैद की सजा सुनाई गई है। दोषियों पर मोटा जुर्माना भी ठोका गया है। मिली जानकारी के अनुसार, रेवाड़ी शहर के मोहल्ला आजाद नगर निवासी बालमुकेश सैनी फाइनेंस का काम करते है। बालमुकेश से झोटा गैंग के शूटर संदीप सोनी ने जुलाई दो हज़ार अट्ठारह में दस लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। रंगदारी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी। रंगदारी मांगने की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी। इस बीच बदमाशों ने शहर में कई अन्य लोगों से भी रंगदारी मांगी और कई जगह फायरिंग की। बालमुकेश से रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की तो पटौदी के पास सुराग लग गया। पुलिस ने बदमाशों को पटौदी एक पेट्रोल पंप के पास घेर लिया था। घेराबंदी के बाद बदमाशों ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग कर दी थी। दोनों तरफ से चली गोली के बाद झोटा गैंग के शूटर्स शहर के मोहल्ला नई आबादी निवासी संदीप सोनी व प्रदीप सोनी, गांव चांदनवास के रहने वाले रवि उर्फ बिल्लारी, मोहल्ला सरस्वती विहार निवासी बिशन उर्फ किशन उर्फ डैनी, गांव बोलनी के रहने वाले मोहन व राजस्थान के जिला अलवर के गांव ततारपुर ढोलका के रहने वाले राहुल को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में एक अन्य युवक कुलजीत को आरोपी बनाया था। पुलिस द्वारा रखे गए साक्ष्यों व गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने प्रदीप सोनी, संदीप सोनी, रवि उर्फ बिल्लारी, बिशन उर्फ किशन उर्फ डैनी, मोहन व राहुल को दोषी करार दिया था। अदालत ने एक आरोपी कुलजीत को मामले में बरी कर दिया था। आरोपियों को तेरह फरवरी को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन न्यायाधीश के छुट्टी पर होने की वजह से उन्हें अब सजा सुनाई गई है। अदालत ने संदीप सोनी को दस साल की कैद व एक. दस लाख रुपए जुर्माना, प्रदीप सोनी को दस साल की कैद व साठ हजार रुपए जुर्माना, मोहन को दस साल की कैद व पचास हजार रुपए जुर्माना, राहुल को तीन साल की कैद व पचास हजार रुपए जुर्माना, रवि को दो साल की कैद व दस हजार रुपए जुर्माना और बिशन को तीन साल की कैद व दस हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने की सूरत में दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी और हजरतगंज कोतवाली में कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया कार्यवाही के खिलाफ राजधानी समेत प्रदेश भर में कांग्रेस का धरना प्रदर्शन हुआ।
राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और विधानसभा में पार्टी विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना (Aradhana Mishra Mona) को हिरासत में ले लिया गया।
आराधना मिश्रा (Aradhana Mishra Mona) की रिहाई की मांग को लेकर प्रयागराज में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ। पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं ने मोना को तुरंत छोड़े जाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष राम किशन पटेल, शहर अध्यक्ष नफीस अनवर, मुकुंद तिवारी, श्रीश चंद्र दुबे, हसीब अहमद, विवेकानंद पाठक, सुरेश यादव, अनिल कुशवाहा, सुशील तिवारी, सिपटैन बबलू, जितेंद्र कुमार, अनिल पाण्डेय, इरशाद उल्ला, रिंकू तिवारी, अरशद अली, बृजेश गौतम, गिरफ्तारी दी।
इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रतापगढ़ जिले में भी मोना की रिहाई को लेकर प्रदर्शन हुआ। उनके विधानसभा क्षेत्र रामपुर खास में सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। सभी ने भाजपा सरकार और पुलि की कार्रवाई की निंदा की। उनका कहना था कि पुलिस कांग्रेस कार्यकताओं को जान बूझ कर निशाना बना रही है। प्रदर्शन में ज्ञान प्रकाश शुक्ल, सन्तोष द्विवेदी, रामू मिश्रा, राजेश विश्वकर्मा, प्रितेंद्र ओझा, आकाश मिश्र, भूपेंद्र यादव, इन्द्रमणि यादव, रामराज वर्मा, कमलेश सिंह, तौफीक अंसारी, त्रिभुवन तिवारी समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
|
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी और हजरतगंज कोतवाली में कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया कार्यवाही के खिलाफ राजधानी समेत प्रदेश भर में कांग्रेस का धरना प्रदर्शन हुआ। राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और विधानसभा में पार्टी विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना को हिरासत में ले लिया गया। आराधना मिश्रा की रिहाई की मांग को लेकर प्रयागराज में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ। पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं ने मोना को तुरंत छोड़े जाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष राम किशन पटेल, शहर अध्यक्ष नफीस अनवर, मुकुंद तिवारी, श्रीश चंद्र दुबे, हसीब अहमद, विवेकानंद पाठक, सुरेश यादव, अनिल कुशवाहा, सुशील तिवारी, सिपटैन बबलू, जितेंद्र कुमार, अनिल पाण्डेय, इरशाद उल्ला, रिंकू तिवारी, अरशद अली, बृजेश गौतम, गिरफ्तारी दी। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया। प्रतापगढ़ जिले में भी मोना की रिहाई को लेकर प्रदर्शन हुआ। उनके विधानसभा क्षेत्र रामपुर खास में सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। सभी ने भाजपा सरकार और पुलि की कार्रवाई की निंदा की। उनका कहना था कि पुलिस कांग्रेस कार्यकताओं को जान बूझ कर निशाना बना रही है। प्रदर्शन में ज्ञान प्रकाश शुक्ल, सन्तोष द्विवेदी, रामू मिश्रा, राजेश विश्वकर्मा, प्रितेंद्र ओझा, आकाश मिश्र, भूपेंद्र यादव, इन्द्रमणि यादव, रामराज वर्मा, कमलेश सिंह, तौफीक अंसारी, त्रिभुवन तिवारी समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
|
ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाड़ीजोड़ी में एक निजी बैंक के राजस्थान सर्किल हैड सुल्तान सिंह पलसानिया के निर्देशानुसार बैंक टीम द्वारा एक कंप्यूटर सैट प्रदान किया गया। इस अवसर पर क्लस्टर मैनेजर गुमान सिंह ने बताया कि सरकारी संस्थानों में भौतिक संसाधन की उपलब्धता रख उनके साथ जुड़ाव रखना हमारी पहली प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए बाड़ीजोड़ी सरपंच अनिल त्रिवेदी ने बताया कि इससे विद्यालय के बच्चों कंप्यूटर शिक्षा का निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। इस दौरान बैंक मनोज यादव, रमेश मीणा, योगेश खटाणा, प्रभुदयाल गुर्जर, सरदार मल रैगर, हनुमान सैनी, कमलेश ढबास,नारायण लाल शर्मा, राजेंद्र मीणा, राजकुमार, भगवान सहाय सैनी, सरदार सिंह यादव सहित स्टाफ और ग्रामीण मौजूद रहे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाड़ीजोड़ी में एक निजी बैंक के राजस्थान सर्किल हैड सुल्तान सिंह पलसानिया के निर्देशानुसार बैंक टीम द्वारा एक कंप्यूटर सैट प्रदान किया गया। इस अवसर पर क्लस्टर मैनेजर गुमान सिंह ने बताया कि सरकारी संस्थानों में भौतिक संसाधन की उपलब्धता रख उनके साथ जुड़ाव रखना हमारी पहली प्राथमिकता है। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए बाड़ीजोड़ी सरपंच अनिल त्रिवेदी ने बताया कि इससे विद्यालय के बच्चों कंप्यूटर शिक्षा का निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। इस दौरान बैंक मनोज यादव, रमेश मीणा, योगेश खटाणा, प्रभुदयाल गुर्जर, सरदार मल रैगर, हनुमान सैनी, कमलेश ढबास,नारायण लाल शर्मा, राजेंद्र मीणा, राजकुमार, भगवान सहाय सैनी, सरदार सिंह यादव सहित स्टाफ और ग्रामीण मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
करीमगंज जिले की जेल से एक बांग्लादेशी अपने साथी के साथ फरार हो गया है। जेल से भागे बांग्लादेशी का नाम समशूल इस्लाम बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत में अवैध ढंग से घुसने के आरोप में इस बांग्लादेशी को पकड़ा गया था। समशूल के साथ जेल से फरार हुए दूसरे कैदी का नाम नज़ीम अहमद है। बता दें कि नज़ीम अहमद पर हत्या औऱ ड्रग्स स्मगलिंग का भी आरोप है।
असम के जेल से 2 कैदियों के फरार हो जाने के बाद अब यहां जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों कैदियों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए कोशिशें की जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि इन दोनों ने जेल से भागने के लिए बांस के बने डंडों समेत अन्य सामानों का इस्तेमाल किया। इन डंडों के सहारे यह दोनों जेल की ऊंची दीवारों पर चढ़े थे और वहां से जेल के बगल में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में घुसे थे। निर्माणाधीन बिल्डिंग में घुसने के बाद यह दोनों फरार हो गए।
|
करीमगंज जिले की जेल से एक बांग्लादेशी अपने साथी के साथ फरार हो गया है। जेल से भागे बांग्लादेशी का नाम समशूल इस्लाम बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत में अवैध ढंग से घुसने के आरोप में इस बांग्लादेशी को पकड़ा गया था। समशूल के साथ जेल से फरार हुए दूसरे कैदी का नाम नज़ीम अहमद है। बता दें कि नज़ीम अहमद पर हत्या औऱ ड्रग्स स्मगलिंग का भी आरोप है। असम के जेल से दो कैदियों के फरार हो जाने के बाद अब यहां जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों कैदियों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए कोशिशें की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने जेल से भागने के लिए बांस के बने डंडों समेत अन्य सामानों का इस्तेमाल किया। इन डंडों के सहारे यह दोनों जेल की ऊंची दीवारों पर चढ़े थे और वहां से जेल के बगल में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में घुसे थे। निर्माणाधीन बिल्डिंग में घुसने के बाद यह दोनों फरार हो गए।
|
पटना(ब्यूरो)। जनता बाजार थाना क्षेत्र के सेंदुआर गांव में बुधवार की रात उपनयन संस्कार के दौरान आयोजित कार्यक्रम में हर्ष फायङ्क्षरग में लगी गोली से जख्मी भोजपुरी गायिका निशा उपाध्याय का बयान पटना के जक्कनपुर थाने की पुलिस ने दर्ज कर लिया है। गुरुवार को पुलिस को दिए फर्द बयान में भोजपुरी गायिका ने कहा कि वह मंच पर गाने की प्रस्तुति के दौरान हर्ष फायङ्क्षरग के नए ट्रेंड की शिकार हुई है। एक युवक बंदूक तिरछी कर जमीन पर लगातार फायङ्क्षरग कर रहा था, जिससे धूल उड़ रही थी। इसी में एक गोली का छर्रा छिटक कर उनकी जांघ में आ लगा, वे लडख़ड़ाकर गिर पड़ीं। आनन-फानन में उनके सहयोगियों ने पटना के एक निजी अस्पताल में लाकर भर्ती कराया। चिकित्सकों ने छर्रा निकाल दिया, जख्म भरने में समय लगेगा। गायिका ने कहा कि वे हर्ष फायङ्क्षरग कर रहे युवक को नहीं पहचानतीं। आधा दर्जन लोग रायफल, पिस्टल, बंदूक से हर्ष फायङ्क्षरग कर रहे थे। असलहे वैध थे या अवैध, उन्हें नहीं पता. भोजपुरी गायिका के इस बयान को जनता बाजार थाने की पुलिस ने पटना पहुंच कर ले लिया है। इसके बाद पटना पहुंचे जनता बाजार थाने के सहायक अवर निरीक्षक ने भी गायिका से मुलाकात की और पूरी घटना की जानकारी ली। पुलिस पदाधिकारी संतोष जायसवाल ने बताया कि वहां से मिले फर्द बयान के आधार पर जनता बाजार थाने में प्राथमिकी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गुरुवार को जनता बाजार थाने की पुलिस टीम प्रभारी थानाध्यक्ष नसीरुद्दीन खान के नेतृत्व में मामले की जांच करने घटनास्थल पर पहुंची। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता व सेंदुआर के विरेंद्र ङ्क्षसह से इस मामले में पूछताछ की गई। पता चला कि उनके तीन पोते का एक साथ उपनयन संस्कार था, जिसकी खुशी में पिछले रविवार से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था। इसी कड़ी में मंगलवार की रात में भोजपुरी की मशहूर गायिका निशा उपाध्याय बुलाईं गईं थीं। ग्रामीणों के अनुसार विरेंद्र ङ्क्षसह सपरिवार ज्यादातर पटना में रहते हैं। हर्ष फायङ्क्षरग करने वाले सभी युवक बाहरी बताए जाते हैं, जो उपनयन संस्कार में भाग लेने के लिए सेंदुआर आए थे।
सारण जिले के जनता बाजार थाने के सेंदुआर गांव में हर्ष फायङ्क्षरग की चपेट में आई गायिका निशा उपाध्याय के मामले में ग्रामीणों की मानें तो उन्हें अवैध असलहे से चलाई गई गोली लगी है। ऐसे में कार्यक्रम के आयोजक व गोली चलाने वाला युवक दोनों के आचरण जांच के घेरे में हैं। हो सकता है, हर्ष फायङ्क्षरग करने वाला युवक हिस्ट्री शीटर हो। दूसरा बड़ा सवाल यह कि उपनयन संस्कार के अवसर पर गांव में बड़े कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था, इसकी पूर्व अनुमति पुलिस या स्थानीय प्रशासन से ली गई थी या नहीं। गांव के चौकीदार विनोद कुमार ने प्रभारी थानाध्यक्ष के पूछे जाने पर घटना की जानकारी दी। उसने कार्यक्रम आयोजन की सूचना थाने को दी थी या नहीं। स्वभाविक है, अगर गांव में बड़े स्तर पर कार्यक्रम की सूचना दी होती तो स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की गई होती। ये सारे प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। राज्य सरकार ने तीन दिन पहले लाइसेंसी हथियार से हर्ष फायङ्क्षरग करने पर लाइसेंस रद करने की घोषणा की है, परंतु अवैध हथियार से हर्ष फायङ्क्षरग मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वीरेंद्र ङ्क्षसह धन्नासेठ हैं। वे गांव में नहीं रहते। उपनयन संस्कार के लिए ही गांव आए थे।
|
पटना। जनता बाजार थाना क्षेत्र के सेंदुआर गांव में बुधवार की रात उपनयन संस्कार के दौरान आयोजित कार्यक्रम में हर्ष फायङ्क्षरग में लगी गोली से जख्मी भोजपुरी गायिका निशा उपाध्याय का बयान पटना के जक्कनपुर थाने की पुलिस ने दर्ज कर लिया है। गुरुवार को पुलिस को दिए फर्द बयान में भोजपुरी गायिका ने कहा कि वह मंच पर गाने की प्रस्तुति के दौरान हर्ष फायङ्क्षरग के नए ट्रेंड की शिकार हुई है। एक युवक बंदूक तिरछी कर जमीन पर लगातार फायङ्क्षरग कर रहा था, जिससे धूल उड़ रही थी। इसी में एक गोली का छर्रा छिटक कर उनकी जांघ में आ लगा, वे लडख़ड़ाकर गिर पड़ीं। आनन-फानन में उनके सहयोगियों ने पटना के एक निजी अस्पताल में लाकर भर्ती कराया। चिकित्सकों ने छर्रा निकाल दिया, जख्म भरने में समय लगेगा। गायिका ने कहा कि वे हर्ष फायङ्क्षरग कर रहे युवक को नहीं पहचानतीं। आधा दर्जन लोग रायफल, पिस्टल, बंदूक से हर्ष फायङ्क्षरग कर रहे थे। असलहे वैध थे या अवैध, उन्हें नहीं पता. भोजपुरी गायिका के इस बयान को जनता बाजार थाने की पुलिस ने पटना पहुंच कर ले लिया है। इसके बाद पटना पहुंचे जनता बाजार थाने के सहायक अवर निरीक्षक ने भी गायिका से मुलाकात की और पूरी घटना की जानकारी ली। पुलिस पदाधिकारी संतोष जायसवाल ने बताया कि वहां से मिले फर्द बयान के आधार पर जनता बाजार थाने में प्राथमिकी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को जनता बाजार थाने की पुलिस टीम प्रभारी थानाध्यक्ष नसीरुद्दीन खान के नेतृत्व में मामले की जांच करने घटनास्थल पर पहुंची। कार्यक्रम के आयोजनकर्ता व सेंदुआर के विरेंद्र ङ्क्षसह से इस मामले में पूछताछ की गई। पता चला कि उनके तीन पोते का एक साथ उपनयन संस्कार था, जिसकी खुशी में पिछले रविवार से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था। इसी कड़ी में मंगलवार की रात में भोजपुरी की मशहूर गायिका निशा उपाध्याय बुलाईं गईं थीं। ग्रामीणों के अनुसार विरेंद्र ङ्क्षसह सपरिवार ज्यादातर पटना में रहते हैं। हर्ष फायङ्क्षरग करने वाले सभी युवक बाहरी बताए जाते हैं, जो उपनयन संस्कार में भाग लेने के लिए सेंदुआर आए थे। सारण जिले के जनता बाजार थाने के सेंदुआर गांव में हर्ष फायङ्क्षरग की चपेट में आई गायिका निशा उपाध्याय के मामले में ग्रामीणों की मानें तो उन्हें अवैध असलहे से चलाई गई गोली लगी है। ऐसे में कार्यक्रम के आयोजक व गोली चलाने वाला युवक दोनों के आचरण जांच के घेरे में हैं। हो सकता है, हर्ष फायङ्क्षरग करने वाला युवक हिस्ट्री शीटर हो। दूसरा बड़ा सवाल यह कि उपनयन संस्कार के अवसर पर गांव में बड़े कार्यक्रम का आयोजन हो रहा था, इसकी पूर्व अनुमति पुलिस या स्थानीय प्रशासन से ली गई थी या नहीं। गांव के चौकीदार विनोद कुमार ने प्रभारी थानाध्यक्ष के पूछे जाने पर घटना की जानकारी दी। उसने कार्यक्रम आयोजन की सूचना थाने को दी थी या नहीं। स्वभाविक है, अगर गांव में बड़े स्तर पर कार्यक्रम की सूचना दी होती तो स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की गई होती। ये सारे प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। राज्य सरकार ने तीन दिन पहले लाइसेंसी हथियार से हर्ष फायङ्क्षरग करने पर लाइसेंस रद करने की घोषणा की है, परंतु अवैध हथियार से हर्ष फायङ्क्षरग मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वीरेंद्र ङ्क्षसह धन्नासेठ हैं। वे गांव में नहीं रहते। उपनयन संस्कार के लिए ही गांव आए थे।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.