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संजीव कौशिक, रोहतकः
Flower Festival At MDU: फूलों की बहार का प्रतीक पुष्प उत्सव रंग बहार 2022 का शानदार आगाज आज महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के गुलाब उद्यान में हुआ। मदवि के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह तथा महाराजा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने इस पुष्प महोत्सव का शुभारंभ किया।
हरियाणा की पारंपरिक बीन पार्टी का मनमोहक संगीत तथा ढोल वादकों के ढोल-नगाड़ों की थाप पर, खिलखिलाते फूलों के साथ, विश्वविद्यालय समुदाय ने बसंत ऋतु का जश्र मनाया तथा रंगमय फाल्गुन का स्वागत किया। एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि फूलों के सौंदर्य से महकता एमडीयू परिसर न केवल कैंपस के सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि विश्वविद्यालय समुदाय के लोगों को नई ऊर्जा देता है।
कुलपति ने कहा कि आज के रंग बहार उत्सव के साथ रंग महोत्सव 2022 का आगाज हुआ है। सात अलग-अलग रंगों से सजा रंग महोत्सव पूरे मार्च माह चलाया जाएगा। कुलपति ने कहा कि बागवानी, विशेष रूप से फ्लोरीकल्चर विद्यार्थियों के लिए एन्त्रोप्रोनियरशिप के अवसर भी प्रदान करता है। मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने एमडीयू परिसर के फूलों के सौंदर्य को अद्वितीय बताया। उन्होंने फूलों के देश कहे जाने वाले नीदरलैंड सरीखा मनोहारी का लैंड स्केप एमडीयू परिसर को बताया।
रंब बहार कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजिका प्रो. विनिता हुड्डा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डा. शरणजीत कौर, रोहतक नगर निगम के आयुक्त नरहरि सिंह बांगड, कुलपति के सलाहकार प्रो. ए. के. राजन, डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा, रजिस्ट्रार प्रो. गुलशन लाल तनेजा, डीन सीडीसी प्रो . ए. एस. मान, प्रॉक्टर प्रो. एससी मलिक, विभिन्न संकायों के डीन, संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. विमल समेत अन्य विभागों के अध्यक्ष, विवि अधिकारी एवं कर्मचारी, प्राध्यापकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विश्वविद्यालय समुदाय समेत रोहतक शहर व जिला के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
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संजीव कौशिक, रोहतकः Flower Festival At MDU: फूलों की बहार का प्रतीक पुष्प उत्सव रंग बहार दो हज़ार बाईस का शानदार आगाज आज महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के गुलाब उद्यान में हुआ। मदवि के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह तथा महाराजा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने इस पुष्प महोत्सव का शुभारंभ किया। हरियाणा की पारंपरिक बीन पार्टी का मनमोहक संगीत तथा ढोल वादकों के ढोल-नगाड़ों की थाप पर, खिलखिलाते फूलों के साथ, विश्वविद्यालय समुदाय ने बसंत ऋतु का जश्र मनाया तथा रंगमय फाल्गुन का स्वागत किया। एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि फूलों के सौंदर्य से महकता एमडीयू परिसर न केवल कैंपस के सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि विश्वविद्यालय समुदाय के लोगों को नई ऊर्जा देता है। कुलपति ने कहा कि आज के रंग बहार उत्सव के साथ रंग महोत्सव दो हज़ार बाईस का आगाज हुआ है। सात अलग-अलग रंगों से सजा रंग महोत्सव पूरे मार्च माह चलाया जाएगा। कुलपति ने कहा कि बागवानी, विशेष रूप से फ्लोरीकल्चर विद्यार्थियों के लिए एन्त्रोप्रोनियरशिप के अवसर भी प्रदान करता है। मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति प्रो. समर सिंह ने एमडीयू परिसर के फूलों के सौंदर्य को अद्वितीय बताया। उन्होंने फूलों के देश कहे जाने वाले नीदरलैंड सरीखा मनोहारी का लैंड स्केप एमडीयू परिसर को बताया। रंब बहार कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजिका प्रो. विनिता हुड्डा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डा. शरणजीत कौर, रोहतक नगर निगम के आयुक्त नरहरि सिंह बांगड, कुलपति के सलाहकार प्रो. ए. के. राजन, डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा, रजिस्ट्रार प्रो. गुलशन लाल तनेजा, डीन सीडीसी प्रो . ए. एस. मान, प्रॉक्टर प्रो. एससी मलिक, विभिन्न संकायों के डीन, संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. विमल समेत अन्य विभागों के अध्यक्ष, विवि अधिकारी एवं कर्मचारी, प्राध्यापकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विश्वविद्यालय समुदाय समेत रोहतक शहर व जिला के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
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यदि मैं कभी अंगड़ाई लेनेके लिए भी रुके बिना निरन्तर कर्ममें प्रवृत्त न रहूँ, तो हे पायें ! लोग हर तरहसे मेरे इस उदाहरणका अनुसरण करेंगे। यदि मैं कर्म न करूं तो ये सब लोक नष्ट हो जायें, मैं अव्यवस्थाका कर्त्ता बनूं और समग्र मानवजातिका नाश कर डालूं । २३-२४ हे भारत ! जिस प्रकार अज्ञानी लोग आसक्त होकर कर्म करते हैं, उसी प्रकार ज्ञानीको आसक्तिरहित होकर लोक-कल्याणकी इच्छासे कर्म करना चाहिए । २५
कर्ममें आसक्त रहनेवाले अज्ञानी मनुष्योंकी बुद्धिको ज्ञानी पुरुष डांवाडोल - अस्थिर न करे, परन्तु समत्व कायम रखते हुए भली-भाँति कर्म करके ऐसे मनुष्योंको सब कर्म करनेकी प्रेरणा दे ।
सव कर्म प्रकृतिके गुणों द्वारा ही किये जाते हैं। परन्तु अहंकारसे मूढ़ बना हुआ मनुष्य 'मैं कर्त्ता हूँ ' ऐसा मान लेता है । इसके विपरीत, हे महाबाहो ! गुण और कर्मके विभागके रहस्यको जाननेवाला पुरुप 'गुण गुणोंमें वर्त रहे हैं' इसे ध्यान में रखकर उनमें आसक्त नहीं होता ।
टिप्पणीः जिस प्रकार श्वासोच्छ्वास आदि क्रियाएँ अपने आप होती हैं, उनमें मनुष्य आसक्त नहीं होता, और जब इन क्रियाओंसे सम्बन्धित किसी व्याघिसे ग्रस्त हो जाते है, तभी मनुष्यको उनको चिन्ता करनी पड़ती है अथवा तभी उसे अपने इन अवयवोके अस्तित्वका भान होता है उसी प्रकार स्वाभाविक कर्म अपने-आप हों तो उनके विषयमें आसक्ति नहीं होतो । जिसका स्वभाव उदार है, वह स्वयं जानता भी नहीं कि मैं उदार हूँ। वह दान किये बिना रह ही नहीं सकता। ऐसी अनासक्ति मनुष्य में अभ्याससे और ईश्वर कृपासे हो आती है।
प्रकृतिके गुणोंसे मोहमें पड़े हुए मनुष्य गुणोंके कार्यो में आसक्त रहते हैं। ज्ञानी पुरुषोंको चाहिए कि वे इन अज्ञानी मन्दबुद्धि लोगोंको अस्थिर न बनायें ।
अव्यात्म-वृत्ति रखकर, सारे कर्म मुझे अर्पण करके, आसक्ति और ममत्व छोड़ ३० कर तथा राग-रहित होकर तू युद्ध कर
टिप्पणीः जो मनुष्य देहमें निवास करनेवाली आत्माको पहचानता है और वह आत्मा परमात्माका ही अंश है ऐसा जानता है, वह मनुष्य सव-कुछ परमात्माको ही अर्पण करेगा - जिस प्रकार सेवक स्वामीके आश्रयमें निभता है और सब कुछ उसीको अर्पण करता है।
जो मनुष्य श्रद्धा रखकर और द्वेषको छोड़कर मेरे इस मतके अनुसार सदा आचरण करते हैं, वे भो कर्मके वन्धनसे मुक्त हो जाते हैं ।
परन्तु जो मेरे इस अभिप्रायमें दोष निकालकर इसका अनुसरण नहीं करते, वे ज्ञानहीन मूर्ख हैं। उनका नाश हो गया है, ऐसा ही तू समझ
ज्ञानी पुरुष भी अपने स्वभावके अनुसार ही चलते हैं। प्राणिमात्र अपने स्वभाव का अनुसरण करते हैं। इसमें बलात्कार क्या कर सकता है ?
टिप्पणीः यह श्लोक दूसरे अध्यायके ६१ से ६८ तकके श्लोंकोंका विरोधी नहीं है। इन्द्रियोंका निग्रह करते-करते मनुष्यको मर मिटना है; परन्तु ऐसा करते हुए भी
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यदि मैं कभी अंगड़ाई लेनेके लिए भी रुके बिना निरन्तर कर्ममें प्रवृत्त न रहूँ, तो हे पायें ! लोग हर तरहसे मेरे इस उदाहरणका अनुसरण करेंगे। यदि मैं कर्म न करूं तो ये सब लोक नष्ट हो जायें, मैं अव्यवस्थाका कर्त्ता बनूं और समग्र मानवजातिका नाश कर डालूं । तेईस-चौबीस हे भारत ! जिस प्रकार अज्ञानी लोग आसक्त होकर कर्म करते हैं, उसी प्रकार ज्ञानीको आसक्तिरहित होकर लोक-कल्याणकी इच्छासे कर्म करना चाहिए । पच्चीस कर्ममें आसक्त रहनेवाले अज्ञानी मनुष्योंकी बुद्धिको ज्ञानी पुरुष डांवाडोल - अस्थिर न करे, परन्तु समत्व कायम रखते हुए भली-भाँति कर्म करके ऐसे मनुष्योंको सब कर्म करनेकी प्रेरणा दे । सव कर्म प्रकृतिके गुणों द्वारा ही किये जाते हैं। परन्तु अहंकारसे मूढ़ बना हुआ मनुष्य 'मैं कर्त्ता हूँ ' ऐसा मान लेता है । इसके विपरीत, हे महाबाहो ! गुण और कर्मके विभागके रहस्यको जाननेवाला पुरुप 'गुण गुणोंमें वर्त रहे हैं' इसे ध्यान में रखकर उनमें आसक्त नहीं होता । टिप्पणीः जिस प्रकार श्वासोच्छ्वास आदि क्रियाएँ अपने आप होती हैं, उनमें मनुष्य आसक्त नहीं होता, और जब इन क्रियाओंसे सम्बन्धित किसी व्याघिसे ग्रस्त हो जाते है, तभी मनुष्यको उनको चिन्ता करनी पड़ती है अथवा तभी उसे अपने इन अवयवोके अस्तित्वका भान होता है उसी प्रकार स्वाभाविक कर्म अपने-आप हों तो उनके विषयमें आसक्ति नहीं होतो । जिसका स्वभाव उदार है, वह स्वयं जानता भी नहीं कि मैं उदार हूँ। वह दान किये बिना रह ही नहीं सकता। ऐसी अनासक्ति मनुष्य में अभ्याससे और ईश्वर कृपासे हो आती है। प्रकृतिके गुणोंसे मोहमें पड़े हुए मनुष्य गुणोंके कार्यो में आसक्त रहते हैं। ज्ञानी पुरुषोंको चाहिए कि वे इन अज्ञानी मन्दबुद्धि लोगोंको अस्थिर न बनायें । अव्यात्म-वृत्ति रखकर, सारे कर्म मुझे अर्पण करके, आसक्ति और ममत्व छोड़ तीस कर तथा राग-रहित होकर तू युद्ध कर टिप्पणीः जो मनुष्य देहमें निवास करनेवाली आत्माको पहचानता है और वह आत्मा परमात्माका ही अंश है ऐसा जानता है, वह मनुष्य सव-कुछ परमात्माको ही अर्पण करेगा - जिस प्रकार सेवक स्वामीके आश्रयमें निभता है और सब कुछ उसीको अर्पण करता है। जो मनुष्य श्रद्धा रखकर और द्वेषको छोड़कर मेरे इस मतके अनुसार सदा आचरण करते हैं, वे भो कर्मके वन्धनसे मुक्त हो जाते हैं । परन्तु जो मेरे इस अभिप्रायमें दोष निकालकर इसका अनुसरण नहीं करते, वे ज्ञानहीन मूर्ख हैं। उनका नाश हो गया है, ऐसा ही तू समझ ज्ञानी पुरुष भी अपने स्वभावके अनुसार ही चलते हैं। प्राणिमात्र अपने स्वभाव का अनुसरण करते हैं। इसमें बलात्कार क्या कर सकता है ? टिप्पणीः यह श्लोक दूसरे अध्यायके इकसठ से अड़सठ तकके श्लोंकोंका विरोधी नहीं है। इन्द्रियोंका निग्रह करते-करते मनुष्यको मर मिटना है; परन्तु ऐसा करते हुए भी
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यह छोटी सी पुस्तक उन तीन व्याख्यानों (निबंधों का संग्रह रूप है जो कि इतिहासतवमहोदधि जैनाचार्यश्रीविजयेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज ने भिन्न भिन्न समयों में जैनेतर संस्थाओं के लिये लिखे थे।
प्रथम व्याख्यान वृन्दावन गुरुकुल में, विद्यापरिषद् के प्रमुख स्थान से आचार्यश्री ने दिया था। दूसरा व्याख्यान मथुरा में श्री दयानन्द - शताब्दि के अवसर पर धर्मपरिषद् में आचार्य श्री के खास प्रतिनिधि फूलचन्द हरिचन्द दोशी ने पढ़ कर सुनाया था। तथा तीसरा व्याख्यान कलकत्ता की इंडियन फ़िलॉसोफ़िकल काँग्रेस में जैनतत्त्वज्ञान के विषय में निबन्ध रूप था।
प्रथम व्याख्यान में आचार्यश्री ने प्रमुख के उच्चासन पर बैठ कर आर्यत्व की जो सुन्दर और स्पष्ट व्याख्या की हैजैनदृष्टि से आर्यों के जो प्रकार बतलाये हैं वे मात्र आर्यसमाज अथवा जैनसमाज के लिये ही उपयोगी हों, ऐसी बात नहीं है किन्तु मनुष्यमात्र के लिये उन्नति के पथप्रदर्शक हैं। अमुक
संप्रदाय, अमुक समाज अथवा अमुक देशवासी ही आर्यत्व प्राप्त कर सकते हैं या आर्य हैं ऐसी संकुचित और अनुचित व्याख्या जैनदृष्टि को मान्य नहीं है "परन्तु त्यागने योग्य जो हो उसे त्याग कर ग्रहण करने योग्य सद्गुणों को स्वीकार करना ही आर्यत्व है"। यह व्याख्या स्पष्ट कर रही है कि सद्गुणों को ग्रहण करने वाला और दुर्गुणों का त्याग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आर्य है ।
दूसरे निबन्ध में महाराजश्री ने इतिहास, तत्त्वज्ञान, ईश्वर, स्याद्वाद, आदि विषय संक्षेप में बतलाये हैं। परस्पर की ग्रल्तफ़हमी को दूर करना, एक दूसरे के यथार्थ परिचय को प्राप्त करना इस धर्म के नाम पर होने वाले क्लश-झगड़ों पर ठण्डा जल डाल कर जलती आग को शांत करने के समान पुण्य कार्य है ।
तीसरे निबन्ध के लिये ऐसा कह सकते हैं कि यह एक प्रकार से दूसरे व्याख्यान के अनुसंधान में ही है। दूसरे व्याख्यान में जो कुछ अपूर्ण लगता है वह इस निबन्ध में पूर्ण किया गया है ।
जैनधर्म के प्रचार के लिये सब भाषाओं में ऐसे छोटे छोटे निबन्ध लिखने चाहिये । इतिहासतत्त्वमहोदधि आचार्य श्री विजयेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज जो कि विश्वसाहित्य का अच्छा परिचय रखते हैं तथा जिनकी सलाह और सूचनाएं अनेक पाश्चात्यपंडितों को मार्गदर्शक होती हैं- यदि चाहें तो इतिहास, साहित्य और तत्त्वज्ञान के विषय में बहुत नवीन प्रकाश डाल सकते हैं।
प्रस्तुत तीनों निबन्ध लिखकर तथा जनसाधारण के सामने व्याख्यान द्वारा सुना कर आचार्यश्री ने जिनशासन की जो सेवा की है वह वास्तविक में प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। हमारी धारणा तो यह है कि ऐसे निबन्ध ही जैनधर्म के प्रति फैली हुई भ्रांतियों का नाश कर जैनधर्म के उत्तम और पवित्र सिद्धांतों का जनता में प्रचार कर इसके प्रति श्रद्धा और भक्ति उत्पन्न करने को समर्थ हो सकते हैं। इसलिये जिनशासन की उन्नति चाहने वाले प्रत्येक विद्वान को चाहे वह मुनि हो या श्रावक चाहिये कि जैनदर्शन के गूढ़ एवँ गम्भीर तत्त्वज्ञान, इतिहास आदि का तुलनात्मकशैली से सरल भाषा में निबन्धों और व्याख्यानों द्वारा प्रचार करे ।
ये निबन्ध जनसाधारण के लिये अंति उपयोगी हैं और इनसे हिन्दी जानने वाले महानुभाव भी लाभ उठा सकें विचार से हमने इनका हिन्दी भाषा में अनुवाद कराया है। में आशा है कि हिन्दी भाषाभाषी महानुभाव इन निबन्धों को पढ़कर हमारे परिश्रम को सफल बनावेंगे ।
अक्षयतृतीया १६६७ धर्म संवत् १८
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यह छोटी सी पुस्तक उन तीन व्याख्यानों (निबंधों का संग्रह रूप है जो कि इतिहासतवमहोदधि जैनाचार्यश्रीविजयेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज ने भिन्न भिन्न समयों में जैनेतर संस्थाओं के लिये लिखे थे। प्रथम व्याख्यान वृन्दावन गुरुकुल में, विद्यापरिषद् के प्रमुख स्थान से आचार्यश्री ने दिया था। दूसरा व्याख्यान मथुरा में श्री दयानन्द - शताब्दि के अवसर पर धर्मपरिषद् में आचार्य श्री के खास प्रतिनिधि फूलचन्द हरिचन्द दोशी ने पढ़ कर सुनाया था। तथा तीसरा व्याख्यान कलकत्ता की इंडियन फ़िलॉसोफ़िकल काँग्रेस में जैनतत्त्वज्ञान के विषय में निबन्ध रूप था। प्रथम व्याख्यान में आचार्यश्री ने प्रमुख के उच्चासन पर बैठ कर आर्यत्व की जो सुन्दर और स्पष्ट व्याख्या की हैजैनदृष्टि से आर्यों के जो प्रकार बतलाये हैं वे मात्र आर्यसमाज अथवा जैनसमाज के लिये ही उपयोगी हों, ऐसी बात नहीं है किन्तु मनुष्यमात्र के लिये उन्नति के पथप्रदर्शक हैं। अमुक संप्रदाय, अमुक समाज अथवा अमुक देशवासी ही आर्यत्व प्राप्त कर सकते हैं या आर्य हैं ऐसी संकुचित और अनुचित व्याख्या जैनदृष्टि को मान्य नहीं है "परन्तु त्यागने योग्य जो हो उसे त्याग कर ग्रहण करने योग्य सद्गुणों को स्वीकार करना ही आर्यत्व है"। यह व्याख्या स्पष्ट कर रही है कि सद्गुणों को ग्रहण करने वाला और दुर्गुणों का त्याग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आर्य है । दूसरे निबन्ध में महाराजश्री ने इतिहास, तत्त्वज्ञान, ईश्वर, स्याद्वाद, आदि विषय संक्षेप में बतलाये हैं। परस्पर की ग्रल्तफ़हमी को दूर करना, एक दूसरे के यथार्थ परिचय को प्राप्त करना इस धर्म के नाम पर होने वाले क्लश-झगड़ों पर ठण्डा जल डाल कर जलती आग को शांत करने के समान पुण्य कार्य है । तीसरे निबन्ध के लिये ऐसा कह सकते हैं कि यह एक प्रकार से दूसरे व्याख्यान के अनुसंधान में ही है। दूसरे व्याख्यान में जो कुछ अपूर्ण लगता है वह इस निबन्ध में पूर्ण किया गया है । जैनधर्म के प्रचार के लिये सब भाषाओं में ऐसे छोटे छोटे निबन्ध लिखने चाहिये । इतिहासतत्त्वमहोदधि आचार्य श्री विजयेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज जो कि विश्वसाहित्य का अच्छा परिचय रखते हैं तथा जिनकी सलाह और सूचनाएं अनेक पाश्चात्यपंडितों को मार्गदर्शक होती हैं- यदि चाहें तो इतिहास, साहित्य और तत्त्वज्ञान के विषय में बहुत नवीन प्रकाश डाल सकते हैं। प्रस्तुत तीनों निबन्ध लिखकर तथा जनसाधारण के सामने व्याख्यान द्वारा सुना कर आचार्यश्री ने जिनशासन की जो सेवा की है वह वास्तविक में प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। हमारी धारणा तो यह है कि ऐसे निबन्ध ही जैनधर्म के प्रति फैली हुई भ्रांतियों का नाश कर जैनधर्म के उत्तम और पवित्र सिद्धांतों का जनता में प्रचार कर इसके प्रति श्रद्धा और भक्ति उत्पन्न करने को समर्थ हो सकते हैं। इसलिये जिनशासन की उन्नति चाहने वाले प्रत्येक विद्वान को चाहे वह मुनि हो या श्रावक चाहिये कि जैनदर्शन के गूढ़ एवँ गम्भीर तत्त्वज्ञान, इतिहास आदि का तुलनात्मकशैली से सरल भाषा में निबन्धों और व्याख्यानों द्वारा प्रचार करे । ये निबन्ध जनसाधारण के लिये अंति उपयोगी हैं और इनसे हिन्दी जानने वाले महानुभाव भी लाभ उठा सकें विचार से हमने इनका हिन्दी भाषा में अनुवाद कराया है। में आशा है कि हिन्दी भाषाभाषी महानुभाव इन निबन्धों को पढ़कर हमारे परिश्रम को सफल बनावेंगे । अक्षयतृतीया एक हज़ार छः सौ सरसठ धर्म संवत् अट्ठारह
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खाद्य सामग्रियों के मिलावट स्तर को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने चेकिंग अभियान के तहत घर-घर जाकर चेकिंग की।
फतेहपुरः खाद्य सामग्रियों में हो रही मिलावट को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नई मुहिम की शुरूआत की है। इस मुहिम के तहत मिल्क मोबाइल टेस्टिंग वैन घर-घर जाकर दूध के सैंपल लेकर उसमें मिलावट की जांच कर रही है। शासन और जिलाधिकारी के आदेश पर ये वैन मंगलवार को 25 घरों में पहुंची और वहां दूध के सैंपल लेकर जांच की।
डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी बृजेन्द्र शर्मा ने बताया कि शासन और जिलाधिकारी के आदेशानुसार घर घर जाकर दूध का परीक्षण किया जा रहा है। मिलावट खोरी को रोकने के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसके तहत घरों में आने वाले बाहरी दूध का निरीक्षण करके लोगों को जागरूक किया जा रहा है और यदि किसी के घर से मिलावटी दूध मिलता है तो बेचने वाले संबंधित व्यक्ति पर कार्यवाही की जाएगी।
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खाद्य सामग्रियों के मिलावट स्तर को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने चेकिंग अभियान के तहत घर-घर जाकर चेकिंग की। फतेहपुरः खाद्य सामग्रियों में हो रही मिलावट को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नई मुहिम की शुरूआत की है। इस मुहिम के तहत मिल्क मोबाइल टेस्टिंग वैन घर-घर जाकर दूध के सैंपल लेकर उसमें मिलावट की जांच कर रही है। शासन और जिलाधिकारी के आदेश पर ये वैन मंगलवार को पच्चीस घरों में पहुंची और वहां दूध के सैंपल लेकर जांच की। डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी बृजेन्द्र शर्मा ने बताया कि शासन और जिलाधिकारी के आदेशानुसार घर घर जाकर दूध का परीक्षण किया जा रहा है। मिलावट खोरी को रोकने के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसके तहत घरों में आने वाले बाहरी दूध का निरीक्षण करके लोगों को जागरूक किया जा रहा है और यदि किसी के घर से मिलावटी दूध मिलता है तो बेचने वाले संबंधित व्यक्ति पर कार्यवाही की जाएगी।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
जैक विलियम शॉस्तक (जन्मः ९ नवंबर, 1952) एक जीवविज्ञानी हैं और अनुवांशिकी के प्रोफेसर है। उन्हें संयुक्त रूप से चिकित्सा का साल २००९ का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी खोज कि 'कैसे टेलोमेरेज गुणसूत्रों की रक्षा करते हैं' कि लिए दिया गया है। . २००९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष २००९ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने १६०९ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की ४००वीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। .
जैक शॉस्तक और २००९ आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): नोबेल पुरस्कार, गुणसूत्र, २००९।
नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष १९०१ में शुरू किया गया यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ 14 लाख डालर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल ३५५ आविष्कार किए जिनमें १८६७ में किया गया डायनामाइट का आविष्कार भी था। नोबेल को डायनामाइट तथा इस तरह के विज्ञान के अनेक आविष्कारों की विध्वंसक शक्ति की बखूबी समझ थी। साथ ही विकास के लिए निरंतर नए अनुसंधान की जरूरत का भी भरपूर अहसास था। दिसंबर १८९६ में मृत्यु के पूर्व अपनी विपुल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रख दिया। उनकी इच्छा थी कि इस पैसे के ब्याज से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिनका काम मानव जाति के लिए सबसे कल्याणकारी पाया जाए। स्वीडिश बैंक में जमा इसी राशि के ब्याज से नोबेल फाउँडेशन द्वारा हर वर्ष शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। नोबेल फ़ाउंडेशन की स्थापना २९ जून १९०० को हुई तथा 1901 से नोबेल पुरस्कार दिया जाने लगा। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1968 से की गई। पहला नोबेल शांति पुरस्कार १९०१ में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया। अल्फ्रेड नोबेल .
गुण सूत्र का चित्र १ क्रोमेटिड २ सेन्ट्रोमियर ३ छोटी भुजा ४ लम्बी भुजा गुणसूत्र या क्रोमोज़ोम (Chromosome) सभी वनस्पतियों व प्राणियों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले तंतु रूपी पिंड होते हैं, जो कि सभी आनुवांशिक गुणों को निर्धारित व संचारित करते हैं। प्रत्येक प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित रहती हैं। मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या ४६ होती है जो २३ के जोड़े में होते है। इनमे से २२ गुणसूत्र नर और मादा में समान और अपने-अपने जोड़े के समजात होते है। इन्हें सम्मिलित रूप से समजात गुणसूत्र (Autosomes) कहते है। २३वें जोड़े के गुणसूत्र स्त्री और पुरूष में समान नहीं होते जिन्हे विषमजात गुणसूत्र (heterosomes) कहते है। .
२००९ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष २००९ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने १६०९ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की ४००वीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। .
जैक शॉस्तक 10 संबंध है और २००९ 219 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 1.31% है = 3 / (10 + 219)।
यह लेख जैक शॉस्तक और २००९ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जैक विलियम शॉस्तक एक जीवविज्ञानी हैं और अनुवांशिकी के प्रोफेसर है। उन्हें संयुक्त रूप से चिकित्सा का साल दो हज़ार नौ का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी खोज कि 'कैसे टेलोमेरेज गुणसूत्रों की रक्षा करते हैं' कि लिए दिया गया है। . दो हज़ार नौ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष दो हज़ार नौ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने एक हज़ार छः सौ नौ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की चार सौवीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। . जैक शॉस्तक और दो हज़ार नौ आम में तीन बातें हैं : नोबेल पुरस्कार, गुणसूत्र, दो हज़ार नौ। नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष एक हज़ार नौ सौ एक में शुरू किया गया यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ चौदह लाख डालर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल तीन सौ पचपन आविष्कार किए जिनमें एक हज़ार आठ सौ सरसठ में किया गया डायनामाइट का आविष्कार भी था। नोबेल को डायनामाइट तथा इस तरह के विज्ञान के अनेक आविष्कारों की विध्वंसक शक्ति की बखूबी समझ थी। साथ ही विकास के लिए निरंतर नए अनुसंधान की जरूरत का भी भरपूर अहसास था। दिसंबर एक हज़ार आठ सौ छियानवे में मृत्यु के पूर्व अपनी विपुल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रख दिया। उनकी इच्छा थी कि इस पैसे के ब्याज से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिनका काम मानव जाति के लिए सबसे कल्याणकारी पाया जाए। स्वीडिश बैंक में जमा इसी राशि के ब्याज से नोबेल फाउँडेशन द्वारा हर वर्ष शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। नोबेल फ़ाउंडेशन की स्थापना उनतीस जून एक हज़ार नौ सौ को हुई तथा एक हज़ार नौ सौ एक से नोबेल पुरस्कार दिया जाने लगा। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ अड़सठ से की गई। पहला नोबेल शांति पुरस्कार एक हज़ार नौ सौ एक में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया। अल्फ्रेड नोबेल . गुण सूत्र का चित्र एक क्रोमेटिड दो सेन्ट्रोमियर तीन छोटी भुजा चार लम्बी भुजा गुणसूत्र या क्रोमोज़ोम सभी वनस्पतियों व प्राणियों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले तंतु रूपी पिंड होते हैं, जो कि सभी आनुवांशिक गुणों को निर्धारित व संचारित करते हैं। प्रत्येक प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित रहती हैं। मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या छियालीस होती है जो तेईस के जोड़े में होते है। इनमे से बाईस गुणसूत्र नर और मादा में समान और अपने-अपने जोड़े के समजात होते है। इन्हें सम्मिलित रूप से समजात गुणसूत्र कहते है। तेईसवें जोड़े के गुणसूत्र स्त्री और पुरूष में समान नहीं होते जिन्हे विषमजात गुणसूत्र कहते है। . दो हज़ार नौ ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। वर्ष दो हज़ार नौ बृहस्पतिवार से प्रारम्भ होने वाला वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ, यूनेस्को एवं आइएयू ने एक हज़ार छः सौ नौ में गैलीलियो गैलिली द्वारा खगोलीय प्रेक्षण आरंभ करने की घटना की चार सौवीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष घोषित किया है। . जैक शॉस्तक दस संबंध है और दो हज़ार नौ दो सौ उन्नीस है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक एक.इकतीस% है = तीन / । यह लेख जैक शॉस्तक और दो हज़ार नौ के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान शुरु हो चुका है. लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेने के लिए मतदाता मतदान केंद्र में वोट देने के लिए सुबह से लंबी कतार में लगे हुए है. मतदाताओं में काफी उत्साह दिख रहा है. अब हम आपको तस्वीरों के माध्यम से मतदाताओं के चेहरों में खुशी के पल को दिखाने का प्रयास करेंगे. आप तस्वीर देखकर ही अंदाजा लगा सकते है कि छत्तीसगढ़ के लोगों में मतदान के प्रति कितनी जागरुकता और उत्साह है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में 72 सीटों के लिए आज यानि 20 नवम्बर को मतदान शुरु हो गया है. इसके लिए एक करोड़ 53 लाख 85 हजार 983 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें 77 लाख 46 हजार 628 पुरूष और 76 लाख 38 हजार 415 महिला मतदाता तथा 940 अन्य मतदाता शामिल है. दूसने चरण के मतदान के लिए 19 हजार 296 बूथ केन्द्र बनाए गए है.
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रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान शुरु हो चुका है. लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेने के लिए मतदाता मतदान केंद्र में वोट देने के लिए सुबह से लंबी कतार में लगे हुए है. मतदाताओं में काफी उत्साह दिख रहा है. अब हम आपको तस्वीरों के माध्यम से मतदाताओं के चेहरों में खुशी के पल को दिखाने का प्रयास करेंगे. आप तस्वीर देखकर ही अंदाजा लगा सकते है कि छत्तीसगढ़ के लोगों में मतदान के प्रति कितनी जागरुकता और उत्साह है. बता दें कि छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में बहत्तर सीटों के लिए आज यानि बीस नवम्बर को मतदान शुरु हो गया है. इसके लिए एक करोड़ तिरेपन लाख पचासी हजार नौ सौ तिरासी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें सतहत्तर लाख छियालीस हजार छः सौ अट्ठाईस पुरूष और छिहत्तर लाख अड़तीस हजार चार सौ पंद्रह महिला मतदाता तथा नौ सौ चालीस अन्य मतदाता शामिल है. दूसने चरण के मतदान के लिए उन्नीस हजार दो सौ छियानवे बूथ केन्द्र बनाए गए है.
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प्रभास ने अपनी अपकमिंग फिल्म साहो का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए तहलका मचा दिया था।
हाल ही में साउथ के सुपरस्टार प्रभास ने अपनी अपकमिंग फिल्म साहो का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए तहलका मचा दिया था। सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर होने के साथ ही कुछ घंटो में इस पोस्टर को लाखों लाइक मिले। मालूम हो कि प्रभास ने खुद ये पोस्टर पोस्ट किया था। लेकिन अब इस फिल्म से जुड़ी नयी खबर सामने आ रही हैं। इस खबर के अनुसार, प्रभास की इस बहुत चर्चित बॉलीवुड के सुपरस्टार फिल्म में सलमान खान भी नजर आ सकते हैं। एक रिपोर्ट कि मानें तो मेकर्स ने सलमान खान की इस फिल्म के लिए अप्रोच किया है। जिसके मुताबिक, सलमान खान प्रभास की फिल्म साहो में कैमियो करेंगे। सोर्स ने बताया कि मेकर्स और प्रभास को निल नितिन मुकेश ही हैं सलमान खान का नाम सुझाया है। निल नितिन मुकेश ने मेकर्स को समझाया कि अगर सलमान खान इस फिल्म में होंगे तो हिंदी ऑडियंस 'साहो' देखें सिनेमाघरों में जरुर आएंगे।
हम हमारे दर्शकों को बताना चाहेंगे कि निल नितिन मुकेश और सलमान खान की जोड़ी 'प्रेम रतन धन पायो' में दिखाई दी थी। इसके बाद इन दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग देखने मिली। निल नितिन मुकेश के कहने पर 'साहो' के मेकर्स ने फिल्म में स्पेशल अपीयरेंस के लिए बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान को अप्रोच किया है। अब सिर्फ सलमान खान के रिप्लॉई का मेकर्स और प्रभास को इंतजार है। अगर सलमान खान इस फिल्म का हिस्सा बनने में अपनी सहमती जताते है तो 'साहो' इसका फायदा जरुर होगा।
'साहो' पोस्टर ट्विटर रिएक्शनः दर्शकों को पसंद आया प्रभास का दमदार लुक, बोले- 'किलर लुक...'
आपको बता दें, प्रभास की इस फिल्म में निल नितिन मुकेश के अलावा अरुण विजय और जैकी श्रॉफ, श्रद्धा कपूर भी अहम किरदार में दिखाई देंगे। मालूम हो कि प्रभास और श्रद्धा कपूर पहली बार किसी फिल्म में काम करते हुए दिखाई देंगे। इस फिल्म को डायरेक्टर सुजीथ डायरेक्ट कर रहे हैं। तो वहीँ म्यूजिक को शंकर, एहसान, लॉय ने दिया है। प्रभास की 'साहो' 15 अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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प्रभास ने अपनी अपकमिंग फिल्म साहो का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए तहलका मचा दिया था। हाल ही में साउथ के सुपरस्टार प्रभास ने अपनी अपकमिंग फिल्म साहो का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए तहलका मचा दिया था। सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर होने के साथ ही कुछ घंटो में इस पोस्टर को लाखों लाइक मिले। मालूम हो कि प्रभास ने खुद ये पोस्टर पोस्ट किया था। लेकिन अब इस फिल्म से जुड़ी नयी खबर सामने आ रही हैं। इस खबर के अनुसार, प्रभास की इस बहुत चर्चित बॉलीवुड के सुपरस्टार फिल्म में सलमान खान भी नजर आ सकते हैं। एक रिपोर्ट कि मानें तो मेकर्स ने सलमान खान की इस फिल्म के लिए अप्रोच किया है। जिसके मुताबिक, सलमान खान प्रभास की फिल्म साहो में कैमियो करेंगे। सोर्स ने बताया कि मेकर्स और प्रभास को निल नितिन मुकेश ही हैं सलमान खान का नाम सुझाया है। निल नितिन मुकेश ने मेकर्स को समझाया कि अगर सलमान खान इस फिल्म में होंगे तो हिंदी ऑडियंस 'साहो' देखें सिनेमाघरों में जरुर आएंगे। हम हमारे दर्शकों को बताना चाहेंगे कि निल नितिन मुकेश और सलमान खान की जोड़ी 'प्रेम रतन धन पायो' में दिखाई दी थी। इसके बाद इन दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग देखने मिली। निल नितिन मुकेश के कहने पर 'साहो' के मेकर्स ने फिल्म में स्पेशल अपीयरेंस के लिए बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान को अप्रोच किया है। अब सिर्फ सलमान खान के रिप्लॉई का मेकर्स और प्रभास को इंतजार है। अगर सलमान खान इस फिल्म का हिस्सा बनने में अपनी सहमती जताते है तो 'साहो' इसका फायदा जरुर होगा। 'साहो' पोस्टर ट्विटर रिएक्शनः दर्शकों को पसंद आया प्रभास का दमदार लुक, बोले- 'किलर लुक...' आपको बता दें, प्रभास की इस फिल्म में निल नितिन मुकेश के अलावा अरुण विजय और जैकी श्रॉफ, श्रद्धा कपूर भी अहम किरदार में दिखाई देंगे। मालूम हो कि प्रभास और श्रद्धा कपूर पहली बार किसी फिल्म में काम करते हुए दिखाई देंगे। इस फिल्म को डायरेक्टर सुजीथ डायरेक्ट कर रहे हैं। तो वहीँ म्यूजिक को शंकर, एहसान, लॉय ने दिया है। प्रभास की 'साहो' पंद्रह अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने न्यूज़18 के साथ खास बातचीत करते हुए कई मुद्दों पर खुलकर राय रखी. उन्होंने राहुल गांधी के वायनाड सीट से लड़ने के कारणों पर बात करने के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कांग्रेस के गठबंधन के साथ रिश्तों पर खुलकर बात रखते हुए गठबंधन रिश्तों की नाकामी के लिए कांग्रेस को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उल्टे कांग्रेस के साथ वो हुआ, जिसकी उम्मीद नहीं की थी.
पढ़ेंः कांग्रेस का दावा - चुनाव में गेमचेंजर साबित होगा 'न्याय'
कांग्रेस में प्रभावशाली लोगों में शुमार हो चुके केसी वेणुगोपाल के बारे में पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि इस बार राहुल ने दो बार एल्लेप्पी से सांसद रह चुके वेणुगोपाल को चुनाव न लड़ने को कहा ताकि वह दिल्ली में पार्टी के मामलों को देख सकें. पार्टी के महासचिव केसी ने ज़िम्मेदारी निभाते हुए कर्नाटक और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि कहा गया कि कांग्रेस गठबंधन के साथ रिश्ते निभाने में नाकाम रही लेकिन केसी का कहना है कि पार्टी ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी.
पढ़ेंः वायनाड से उम्मीदवारी के पीछे कांग्रेस का ये सिपहसालार. . . कैसे बना राहुल का करीबी?
उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कांग्रेस और गठबंधन के रिश्ते की नाकामी पर वेणुगोपाल ने कहा कि 'गठबंधन नाकाम हुआ तो इसमें कांग्रेस की गलती नहीं है. हम उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के पक्ष में थे. हमने सभी दरवाज़े खोले थे. लेकिन हमें तब झटका लगा जब उन लोगों सीट शेयरिंग के अनुपात की घोषणा की. हमारे साथ कोई बातचीत नहीं की गई. हम हैरान थे क्योंकि हमने इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं की थी. हम उप्र में एकता के साथ एक तगड़ा मुकाबला चाहते थे'.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस आखिरी दिन तक गठबंधन के लिए तैयार थी. न्यूज़18 से खास बातचीत में वेणुगोपाल ने कहा कि 'हमने पूरा एक दिन आप के फैसले का इंतज़ार किया लेकिन उन्होंने दिल्ली की शर्तों के साथ हरियाणा और पंजाब को भी जोड़ दिया. हम ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकते थे क्योंकि हमें पार्टी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को तवज्जो देना था. फिर वो भी राज़ी नहीं हुए'.
वेणुगोपाल ने न्यूज़18 से कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को हराया था, इसके बावजूद कांग्रेस देश के हित में इस पार्टी के साथ गठबंधन के लिए तैयार थी. 'लेकिन गठबंधन सम्मानजनक होना चाहिए. दिल्ली कांग्रेस की इकाई में आप के साथ गठबंधन को लेकर आशंकाएं थीं लेकिन तब राहुल गांधी ने साफ संदेश दिया कि भाजपा को हराना ही पार्टी की प्राथमिकता है'.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भाजपा विरोधी वोटों को बांट रही है. इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि 'वो हम पर ऐसा आरोप नहीं लगा सकते. हम यूपी में भी अपने प्रत्याशी उतारने में बेहद सतर्क रहे हैं और ऐसे प्रत्याशी खड़े किए हैं, जिनसे महागठबंधन को लाभ हो और भाजपा को नुकसान'.
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कांग्रेस-बीजेपी को नहीं मिला बहुमत तो ये पांच लोग बनवाएंगे सरकार!
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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने न्यूज़अट्ठारह के साथ खास बातचीत करते हुए कई मुद्दों पर खुलकर राय रखी. उन्होंने राहुल गांधी के वायनाड सीट से लड़ने के कारणों पर बात करने के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कांग्रेस के गठबंधन के साथ रिश्तों पर खुलकर बात रखते हुए गठबंधन रिश्तों की नाकामी के लिए कांग्रेस को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उल्टे कांग्रेस के साथ वो हुआ, जिसकी उम्मीद नहीं की थी. पढ़ेंः कांग्रेस का दावा - चुनाव में गेमचेंजर साबित होगा 'न्याय' कांग्रेस में प्रभावशाली लोगों में शुमार हो चुके केसी वेणुगोपाल के बारे में पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि इस बार राहुल ने दो बार एल्लेप्पी से सांसद रह चुके वेणुगोपाल को चुनाव न लड़ने को कहा ताकि वह दिल्ली में पार्टी के मामलों को देख सकें. पार्टी के महासचिव केसी ने ज़िम्मेदारी निभाते हुए कर्नाटक और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि कहा गया कि कांग्रेस गठबंधन के साथ रिश्ते निभाने में नाकाम रही लेकिन केसी का कहना है कि पार्टी ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी. पढ़ेंः वायनाड से उम्मीदवारी के पीछे कांग्रेस का ये सिपहसालार. . . कैसे बना राहुल का करीबी? उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कांग्रेस और गठबंधन के रिश्ते की नाकामी पर वेणुगोपाल ने कहा कि 'गठबंधन नाकाम हुआ तो इसमें कांग्रेस की गलती नहीं है. हम उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के पक्ष में थे. हमने सभी दरवाज़े खोले थे. लेकिन हमें तब झटका लगा जब उन लोगों सीट शेयरिंग के अनुपात की घोषणा की. हमारे साथ कोई बातचीत नहीं की गई. हम हैरान थे क्योंकि हमने इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं की थी. हम उप्र में एकता के साथ एक तगड़ा मुकाबला चाहते थे'. दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस आखिरी दिन तक गठबंधन के लिए तैयार थी. न्यूज़अट्ठारह से खास बातचीत में वेणुगोपाल ने कहा कि 'हमने पूरा एक दिन आप के फैसले का इंतज़ार किया लेकिन उन्होंने दिल्ली की शर्तों के साथ हरियाणा और पंजाब को भी जोड़ दिया. हम ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकते थे क्योंकि हमें पार्टी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को तवज्जो देना था. फिर वो भी राज़ी नहीं हुए'. वेणुगोपाल ने न्यूज़अट्ठारह से कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को हराया था, इसके बावजूद कांग्रेस देश के हित में इस पार्टी के साथ गठबंधन के लिए तैयार थी. 'लेकिन गठबंधन सम्मानजनक होना चाहिए. दिल्ली कांग्रेस की इकाई में आप के साथ गठबंधन को लेकर आशंकाएं थीं लेकिन तब राहुल गांधी ने साफ संदेश दिया कि भाजपा को हराना ही पार्टी की प्राथमिकता है'. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भाजपा विरोधी वोटों को बांट रही है. इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि 'वो हम पर ऐसा आरोप नहीं लगा सकते. हम यूपी में भी अपने प्रत्याशी उतारने में बेहद सतर्क रहे हैं और ऐसे प्रत्याशी खड़े किए हैं, जिनसे महागठबंधन को लाभ हो और भाजपा को नुकसान'. ये भी पढ़ेंः कांग्रेस-बीजेपी को नहीं मिला बहुमत तो ये पांच लोग बनवाएंगे सरकार! .
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उमेश भारद्वाज।
मंडीः हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा बीते सितंबर और अक्तूबर माह में लापता लोगों को ढूंढने के लिए चलाए गए विशेष अभियान चलाया गया था। अगर मंडी जिला पुलिस की बात की जाए तो जिला में विशेष अभियान के तहत 58 लापता व्यक्तियों को ढूंढने में सफलता प्राप्त की गई है। लेकिन अभी भी मंडी जिला से 220 लापता लोगों को ढूंढा जाना शेष है। विशेष अभियान के तहत दो माह में मंडी पुलिस द्वारा 11 नाबालिग लड़कियों,16 पुरूष और 31 महिलाओं को उनके परिजनों के सपुर्द किया गया है। इसके अलावा अभी भी मंडी जिला पुलिस को 8 नाबालिग और 212 अन्य लापता व्यक्तियों को ढूंढने की कोशिश की जा रही है।
एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने विशेषवार्ता में कहा कि प्रदेश में लापता लोगों को ट्रेस करने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत मंडी जिला पुलिस द्वारा राज्य और राज्य के बाहर से ढूंढे गए। उन्होंने कहा कि नाबालिग के लापता होने के मामले में आईपीसी के तहत धारा 363 में अपहरण का अपराधिक मामला दर्ज किया जाता है।
एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि मंडी जिला में बीते 10 वर्षों में कुल 2368 लोगों के लापता होने के मामले सामने आए थे। जिसमें 212 बालिग और 8 नाबालिग अभी ट्रेस करने के लिए बचे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक 2100 के करीब लोगों को पुलिस द्वारा ढूंढ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि अनट्रेस लोगों को ट्रेस करने के लिए दोबारा विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय द्वारा भी जरूरी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
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उमेश भारद्वाज। मंडीः हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा बीते सितंबर और अक्तूबर माह में लापता लोगों को ढूंढने के लिए चलाए गए विशेष अभियान चलाया गया था। अगर मंडी जिला पुलिस की बात की जाए तो जिला में विशेष अभियान के तहत अट्ठावन लापता व्यक्तियों को ढूंढने में सफलता प्राप्त की गई है। लेकिन अभी भी मंडी जिला से दो सौ बीस लापता लोगों को ढूंढा जाना शेष है। विशेष अभियान के तहत दो माह में मंडी पुलिस द्वारा ग्यारह नाबालिग लड़कियों,सोलह पुरूष और इकतीस महिलाओं को उनके परिजनों के सपुर्द किया गया है। इसके अलावा अभी भी मंडी जिला पुलिस को आठ नाबालिग और दो सौ बारह अन्य लापता व्यक्तियों को ढूंढने की कोशिश की जा रही है। एसपी मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने विशेषवार्ता में कहा कि प्रदेश में लापता लोगों को ट्रेस करने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत मंडी जिला पुलिस द्वारा राज्य और राज्य के बाहर से ढूंढे गए। उन्होंने कहा कि नाबालिग के लापता होने के मामले में आईपीसी के तहत धारा तीन सौ तिरेसठ में अपहरण का अपराधिक मामला दर्ज किया जाता है। एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि मंडी जिला में बीते दस वर्षों में कुल दो हज़ार तीन सौ अड़सठ लोगों के लापता होने के मामले सामने आए थे। जिसमें दो सौ बारह बालिग और आठ नाबालिग अभी ट्रेस करने के लिए बचे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक दो हज़ार एक सौ के करीब लोगों को पुलिस द्वारा ढूंढ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि अनट्रेस लोगों को ट्रेस करने के लिए दोबारा विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय द्वारा भी जरूरी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
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एयर इंडिया के एक पायलट द्वारा अपनी महिला मित्र को कॉकपिट में आमंत्रित करने के लिए ग्राउंड किए जाने के एक महीने बाद , एयरलाइन ने पिछले सप्ताह दिल्ली-लेह उड़ान के कॉकपिट में एक महिला को आमंत्रित करने के लिए दो पायलटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
एयर इंडिया के एक पायलट द्वारा अपनी महिला मित्र को कॉकपिट में आमंत्रित करने के लिए ग्राउंड किए जाने के एक महीने बाद , एयरलाइन ने पिछले सप्ताह दिल्ली-लेह उड़ान के कॉकपिट में एक महिला को आमंत्रित करने के लिए दो पायलटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
AI-445 विमान के कॉकपिट में एक अनधिकृत महिला यात्री के प्रवेश करने के संबंध में केबिन क्रू से शिकायत मिलने के तुरंत बाद एयर इंडिया प्रबंधन ने पायलट और सह-पायलट के खिलाफ कार्रवाई की।
एयर इंडिया के एक शीर्ष अधिकारी ने एएनआई को बताया, AI-445 पायलट की एक महिला मित्र ने नियमों का पालन किए बिना कॉकपिट में प्रवेश किया, दोनों पायलटों को एयर इंडिया द्वारा ग्राउंड/ऑफ-रोस्टर कर दिया गया है।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नागरिक उड्डयन निदेशालय (डीजीसीए) ने कहा,डीजीसीए इस मुद्दे से अवगत है और इस मामले में प्रक्रियाओं के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। एक अधिकारी ने एएनआई को बताया, एयर इंडिया ने विस्तृत जांच के लिए एक समिति बनाई है।
एयर इंडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एक अधिकारी ने एएनआई को बताया,एयर इंडिया ने विस्तृत जांच के लिए एक समिति बनाई है।
लेह मार्ग सुरक्षा और संरक्षा के लिहाज से देश के सबसे कठिन और संवेदनशील हवाई मार्गों में से एक है और एक वाणिज्यिक विमान में किसी अनाधिकृत व्यक्ति को कॉकपिट में अनुमति देना कानून का उल्लंघन है।
लेह हवाई अड्डे पर उतरना उच्च ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों के कारण देश भर में सबसे कठिन परिचालनों में से एक है और देश के रक्षा बलों के ठिकानों की उपस्थिति के कारण भी संवेदनशील है। इसके अलावा, इस इलाके में संचालन के लिए अपर्याप्त होने के कारण बहुत अच्छे स्वास्थ्य रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन का स्तर और इसके कारण अच्छे स्वास्थ्य रिकॉर्ड वाले अत्यधिक कुशल पायलटों को ही लेह संचालन के लिए तैनात किया जाना चाहिए,DGCA ने हाल ही में एयर इंडिया के एक पायलट का लाइसेंस निलंबित कर दिया, जिसने 27 फरवरी को दुबई से दिल्ली मार्ग पर एयर इंडिया की उड़ान AI-915 के कॉकपिट में अपनी महिला मित्र का स्वागत किया। DGCA ने एयरलाइन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कथित तौर पर कॉकपिट उल्लंघन की घटना में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं करना।
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एयर इंडिया के एक पायलट द्वारा अपनी महिला मित्र को कॉकपिट में आमंत्रित करने के लिए ग्राउंड किए जाने के एक महीने बाद , एयरलाइन ने पिछले सप्ताह दिल्ली-लेह उड़ान के कॉकपिट में एक महिला को आमंत्रित करने के लिए दो पायलटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। एयर इंडिया के एक पायलट द्वारा अपनी महिला मित्र को कॉकपिट में आमंत्रित करने के लिए ग्राउंड किए जाने के एक महीने बाद , एयरलाइन ने पिछले सप्ताह दिल्ली-लेह उड़ान के कॉकपिट में एक महिला को आमंत्रित करने के लिए दो पायलटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। AI-चार सौ पैंतालीस विमान के कॉकपिट में एक अनधिकृत महिला यात्री के प्रवेश करने के संबंध में केबिन क्रू से शिकायत मिलने के तुरंत बाद एयर इंडिया प्रबंधन ने पायलट और सह-पायलट के खिलाफ कार्रवाई की। एयर इंडिया के एक शीर्ष अधिकारी ने एएनआई को बताया, AI-चार सौ पैंतालीस पायलट की एक महिला मित्र ने नियमों का पालन किए बिना कॉकपिट में प्रवेश किया, दोनों पायलटों को एयर इंडिया द्वारा ग्राउंड/ऑफ-रोस्टर कर दिया गया है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नागरिक उड्डयन निदेशालय ने कहा,डीजीसीए इस मुद्दे से अवगत है और इस मामले में प्रक्रियाओं के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। एक अधिकारी ने एएनआई को बताया, एयर इंडिया ने विस्तृत जांच के लिए एक समिति बनाई है। एयर इंडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। एक अधिकारी ने एएनआई को बताया,एयर इंडिया ने विस्तृत जांच के लिए एक समिति बनाई है। लेह मार्ग सुरक्षा और संरक्षा के लिहाज से देश के सबसे कठिन और संवेदनशील हवाई मार्गों में से एक है और एक वाणिज्यिक विमान में किसी अनाधिकृत व्यक्ति को कॉकपिट में अनुमति देना कानून का उल्लंघन है। लेह हवाई अड्डे पर उतरना उच्च ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों के कारण देश भर में सबसे कठिन परिचालनों में से एक है और देश के रक्षा बलों के ठिकानों की उपस्थिति के कारण भी संवेदनशील है। इसके अलावा, इस इलाके में संचालन के लिए अपर्याप्त होने के कारण बहुत अच्छे स्वास्थ्य रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन का स्तर और इसके कारण अच्छे स्वास्थ्य रिकॉर्ड वाले अत्यधिक कुशल पायलटों को ही लेह संचालन के लिए तैनात किया जाना चाहिए,DGCA ने हाल ही में एयर इंडिया के एक पायलट का लाइसेंस निलंबित कर दिया, जिसने सत्ताईस फरवरी को दुबई से दिल्ली मार्ग पर एयर इंडिया की उड़ान AI-नौ सौ पंद्रह के कॉकपिट में अपनी महिला मित्र का स्वागत किया। DGCA ने एयरलाइन पर तीस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कथित तौर पर कॉकपिट उल्लंघन की घटना में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं करना।
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वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) भारतीय रेलवे (Indian Railways) की आन बान शान है. 15 फरवरी को भरतीय रेल पटरियों पर रफ्तार भरते वंदे भारत एक्सप्रेस के चार साल पूरे हो गए. 15 फरवरी 2019 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली से वाराणसी के बीच सबसे पहले चली थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाया था.
अभी देशभर में अलग-अलग रूट पर 10 वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express Train) चलाई जा रही हैं. वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार ही नहीं बल्कि अपनी वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है. शीघ्र ही पटना से रांची के लिए भी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होगी. इसके शुरू होने से पटना और रांची की दूरी चार घंटे में सिमट जायेगी. फिलहाल आठ घंटे का समय लगता है. आइए जानते है कि देशभर में किस-किस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाई जाती है.
देश की पहली हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस फिलहाल हिन्दुस्तान के 17 राज्यों के 108 जिलों में सेवाएं दे रही है. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के शुरू होने से सफर आरामदायक ही नहीं हुआ है बल्कि यात्रियों के समय की भी बचत हो रही है.
पूरे देशभर में चलाई जा रहीं कुल 10 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में 2 ट्रेनों की शुरुआत साल 2019 में हुई थी. इसके बाद साल 2020 और 2021 में कोई नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नहीं चली थी. वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 नई वंदे भारत एक्सप्रेस देश को समर्पित किया है. इसके बाद साल 2023 के शुरुआती 2 महीनों के भीतर ही देश को 3 और नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मिल चुकी हैं. कुछ शीघ्र शुरू होने वाली है. इसमें तीन बिहार से भी गुजरेगी.
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वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की आन बान शान है. पंद्रह फरवरी को भरतीय रेल पटरियों पर रफ्तार भरते वंदे भारत एक्सप्रेस के चार साल पूरे हो गए. पंद्रह फरवरी दो हज़ार उन्नीस वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली से वाराणसी के बीच सबसे पहले चली थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाया था. अभी देशभर में अलग-अलग रूट पर दस वंदे भारत एक्सप्रेस चलाई जा रही हैं. वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार ही नहीं बल्कि अपनी वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के लिए भी जानी जाती है. शीघ्र ही पटना से रांची के लिए भी वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होगी. इसके शुरू होने से पटना और रांची की दूरी चार घंटे में सिमट जायेगी. फिलहाल आठ घंटे का समय लगता है. आइए जानते है कि देशभर में किस-किस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाई जाती है. देश की पहली हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस फिलहाल हिन्दुस्तान के सत्रह राज्यों के एक सौ आठ जिलों में सेवाएं दे रही है. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के शुरू होने से सफर आरामदायक ही नहीं हुआ है बल्कि यात्रियों के समय की भी बचत हो रही है. पूरे देशभर में चलाई जा रहीं कुल दस वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में दो ट्रेनों की शुरुआत साल दो हज़ार उन्नीस में हुई थी. इसके बाद साल दो हज़ार बीस और दो हज़ार इक्कीस में कोई नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नहीं चली थी. वर्ष दो हज़ार बाईस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाँच नई वंदे भारत एक्सप्रेस देश को समर्पित किया है. इसके बाद साल दो हज़ार तेईस के शुरुआती दो महीनों के भीतर ही देश को तीन और नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन मिल चुकी हैं. कुछ शीघ्र शुरू होने वाली है. इसमें तीन बिहार से भी गुजरेगी.
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भुसावल : जलगांव जिले में भुसावल (Bhusaval), रावेर (Raver), सावदा (Savda) और फैजपूर (Faizpur) के साथ अन्य शहरों में 5 सेकंड के लिए भूकंप (Earthquake) के झटके लगे थे। भूकंप का चा केंद्रबिंदू भुसावल होने के कारण जिला अधिकारी अमन मित्तल (District Officer Aman Mittal) के निर्देशानुसार भुसावल शहर परिसर की 80 जर्जर इमारतों (Dilapidated Buildings) के मालिकों को नोटिस (Notice) दिया गया है। उस इमारतों को 24 घंटों में खाली करें अन्यथा नगरपालिका प्रशासन (Municipal Administration) अपने खर्च पर कार्रवाई करेगा ऐसा आदेश नोटीस में दिया गया है। जिले में शुक्रवार की सुबह 10:30 बजे भुसावल और आसपास की 3 तहसीलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नासिक की मेरी संस्था की ओर से भूकंप की तीव्रता 3. 5 रिक्टर स्केल मापी गई थी। इस पृष्ठभूमि में सभी जर्जर और गिरने वाली इमारतों और उनके पडोस के निवासियों, व्यापारियों और नागरिकों की जीवित हानि न हो इसके लिए भुसावल नपा ने मालिकों को नोटिस दे दी है।
भुसावल शहर में मध्य रेल्वे मार्ग के पास पुराना सातारा परिसर, पांडववाडा, सुतारगल्ली, शिवाजी नगर, जामनेर रोड इलाके में गरूड प्लॉट, म्युनिसिपल पार्क, कुलकर्णी प्लॉट, मांगीलाल बिल्डींग, गांधी चौक, बाजार गल्ली, राजू गल्ली, स्टेशन रोड, मरीमाता मंदिर, पाटील मळा, रामदेवबाबा नगर, तलेले कॉलनी, पाटील नर्सरी, रजा टॉवर चौक, व्ही. एम. वॉर्ड, तुलजा भवानी मंदिर, जामनेर रोड, अष्टभुजा मंदिर के पास, ब्राह्मण संघ आदी इलाके में धोकेदायक इमारतें और घर हैं। यह इमारतें और घर बाडे अनेक सालों से जर्जर हैं। जिन्हें 10/12 साल पहले की तोड़ देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इन धोकादायक इमारतों के मालिकों को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है। लेकिन कुछ किरायेदार ऐसे हैं जिन्हें रहने के लिए कोई विकल्प नहीं मिल रहा है।
शहर में राहदारी वाले रास्तों पर कई जर्जर इमारतें है ऐसी इमारतों और घरों के मालिकों को महाराष्ट्र नगरपालिका परिषद, नगरपालिका और औद्योगिक नागरिक अधिनियम 1965 की धारा 195 के तहत नगरपालिका प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलने के 24 घंटे के अंदर इमारतों को गिरा देने के आदेश हैं। अन्यथा नगरपालिका खुद इमारतों को गिराएगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि इस संबंध में होने वाले खर्च की वसूली संबंधित से की जाएगी।
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भुसावल : जलगांव जिले में भुसावल , रावेर , सावदा और फैजपूर के साथ अन्य शहरों में पाँच सेकंड के लिए भूकंप के झटके लगे थे। भूकंप का चा केंद्रबिंदू भुसावल होने के कारण जिला अधिकारी अमन मित्तल के निर्देशानुसार भुसावल शहर परिसर की अस्सी जर्जर इमारतों के मालिकों को नोटिस दिया गया है। उस इमारतों को चौबीस घंटाटों में खाली करें अन्यथा नगरपालिका प्रशासन अपने खर्च पर कार्रवाई करेगा ऐसा आदेश नोटीस में दिया गया है। जिले में शुक्रवार की सुबह दस:तीस बजे भुसावल और आसपास की तीन तहसीलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। नासिक की मेरी संस्था की ओर से भूकंप की तीव्रता तीन. पाँच रिक्टर स्केल मापी गई थी। इस पृष्ठभूमि में सभी जर्जर और गिरने वाली इमारतों और उनके पडोस के निवासियों, व्यापारियों और नागरिकों की जीवित हानि न हो इसके लिए भुसावल नपा ने मालिकों को नोटिस दे दी है। भुसावल शहर में मध्य रेल्वे मार्ग के पास पुराना सातारा परिसर, पांडववाडा, सुतारगल्ली, शिवाजी नगर, जामनेर रोड इलाके में गरूड प्लॉट, म्युनिसिपल पार्क, कुलकर्णी प्लॉट, मांगीलाल बिल्डींग, गांधी चौक, बाजार गल्ली, राजू गल्ली, स्टेशन रोड, मरीमाता मंदिर, पाटील मळा, रामदेवबाबा नगर, तलेले कॉलनी, पाटील नर्सरी, रजा टॉवर चौक, व्ही. एम. वॉर्ड, तुलजा भवानी मंदिर, जामनेर रोड, अष्टभुजा मंदिर के पास, ब्राह्मण संघ आदी इलाके में धोकेदायक इमारतें और घर हैं। यह इमारतें और घर बाडे अनेक सालों से जर्जर हैं। जिन्हें दस/बारह साल पहले की तोड़ देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इन धोकादायक इमारतों के मालिकों को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है। लेकिन कुछ किरायेदार ऐसे हैं जिन्हें रहने के लिए कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। शहर में राहदारी वाले रास्तों पर कई जर्जर इमारतें है ऐसी इमारतों और घरों के मालिकों को महाराष्ट्र नगरपालिका परिषद, नगरपालिका और औद्योगिक नागरिक अधिनियम एक हज़ार नौ सौ पैंसठ की धारा एक सौ पचानवे के तहत नगरपालिका प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलने के चौबीस घंटाटे के अंदर इमारतों को गिरा देने के आदेश हैं। अन्यथा नगरपालिका खुद इमारतों को गिराएगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि इस संबंध में होने वाले खर्च की वसूली संबंधित से की जाएगी।
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नई दिल्ली, (भाषा)। शेयर बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के सकारात्मक रोजगार आंकड़े और विदेशी निधियों की ताजा लिवाली रुचि से संकेत लेते हुए सोमवार को शेयर बाजार लाभ के साथ खुलेगा लेकिन यूरोपीय संघ की बैह्णक के नतीजे के मद्देनजर सप्ताह के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। पिछले सप्ताह बंबई शेयर बाजार का तीस शेयरों पर आधारित सूचकांक यूरो क्षेत्र के ठ्ठण संकट के ाsस समाधान की उम्मीद तथा खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े में गिरावट के कारण 7. 3 प्रतिशत की तेजी के साथ सप्ताहांत में 16,846. 83 अंक पर बंद हुआ। अमेरिका के नवंबर का बेरोजगारी आंकड़ा 8. 6 प्रतिशत था जो दो वर्षो से अधिक समय का सबसे कम का आंकड़ा है। बोनान्जा पोर्टफोलियो की विश्लेषक शानू गोयल ने कहा, w बुनियादी तौर पर बेहतर स्थिति वाली कुछ कंपनियों में चुनिंदा लिवाली देखने को मिल सकती है। वैश्विक घटनाक्रम बाजार के रुख को प्रभावित करना जारी रखेंगे। इस सप्ताह बाजार में नौ दिसंबर को होने वाली यूरोपीय संघ की बैह्णक के नतीजे बाजार धारणा को निर्धारित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। बाजार सूत्रों के अनुसार बाजार के लिए कुछ उत्साहवर्धक तत्व हैं जैसे कि विदेशी निवेशक पिछले कुछ सत्रों में शुद्ध लिवाल रहे हैं। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति भी बाद में कम हो गयी। सूत्रों ने कहा कि इसके बावजूद विभिन्न घरेलू के साथ साथ वैश्विक मुद्दों पर अभी भी अनिश्चितता कायम है इसलिए निवेशक शायद सतर्क रुख अपनाएं। पिछले सप्ताह आखिरी तीन दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 30 नवंबर के बाद से। ,641. 49 करोड़ रुपये का निवेश किया जिसमें दो दिसंबर का भी शुरुआती आंकड़ा शामिल है जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले सप्ताह बाजार में तेजी के लिए यूरोप और विदेशी संस्थागत निवेशकों की पहल प्रमुख कारण रहे हैं वहीं डालर के मुकाबले रुपये की तेजी, अमेरिकी रोजगार के सकारात्मक आंकड़ों के कारण इस सप्ताह बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।
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नई दिल्ली, । शेयर बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के सकारात्मक रोजगार आंकड़े और विदेशी निधियों की ताजा लिवाली रुचि से संकेत लेते हुए सोमवार को शेयर बाजार लाभ के साथ खुलेगा लेकिन यूरोपीय संघ की बैह्णक के नतीजे के मद्देनजर सप्ताह के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। पिछले सप्ताह बंबई शेयर बाजार का तीस शेयरों पर आधारित सूचकांक यूरो क्षेत्र के ठ्ठण संकट के ाsस समाधान की उम्मीद तथा खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े में गिरावट के कारण सात. तीन प्रतिशत की तेजी के साथ सप्ताहांत में सोलह,आठ सौ छियालीस. तिरासी अंक पर बंद हुआ। अमेरिका के नवंबर का बेरोजगारी आंकड़ा आठ. छः प्रतिशत था जो दो वर्षो से अधिक समय का सबसे कम का आंकड़ा है। बोनान्जा पोर्टफोलियो की विश्लेषक शानू गोयल ने कहा, w बुनियादी तौर पर बेहतर स्थिति वाली कुछ कंपनियों में चुनिंदा लिवाली देखने को मिल सकती है। वैश्विक घटनाक्रम बाजार के रुख को प्रभावित करना जारी रखेंगे। इस सप्ताह बाजार में नौ दिसंबर को होने वाली यूरोपीय संघ की बैह्णक के नतीजे बाजार धारणा को निर्धारित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। बाजार सूत्रों के अनुसार बाजार के लिए कुछ उत्साहवर्धक तत्व हैं जैसे कि विदेशी निवेशक पिछले कुछ सत्रों में शुद्ध लिवाल रहे हैं। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति भी बाद में कम हो गयी। सूत्रों ने कहा कि इसके बावजूद विभिन्न घरेलू के साथ साथ वैश्विक मुद्दों पर अभी भी अनिश्चितता कायम है इसलिए निवेशक शायद सतर्क रुख अपनाएं। पिछले सप्ताह आखिरी तीन दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तीस नवंबर के बाद से। ,छः सौ इकतालीस. उनचास करोड़ रुपये का निवेश किया जिसमें दो दिसंबर का भी शुरुआती आंकड़ा शामिल है जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले सप्ताह बाजार में तेजी के लिए यूरोप और विदेशी संस्थागत निवेशकों की पहल प्रमुख कारण रहे हैं वहीं डालर के मुकाबले रुपये की तेजी, अमेरिकी रोजगार के सकारात्मक आंकड़ों के कारण इस सप्ताह बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।
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देहरादून. उत्तराखंड के सियासी उठापटक में बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस के साथ हो लिए विधायक भीमलाल आर्य ने दावा किया है कि विश्वास मत पर वोटिंग से पहले बीजेपी ने उन्हें खरीदने के लिए 5 करोड़ से 50 करोड़ तक का ऑफर दिया था. आर्य ने कहा कि 2017 में कांग्रेस 60 सीट जीतकर बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देगी.
आज देहरादून में कांग्रेस भवन में विधायकों के सम्मान समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे भीमलाल आर्य ने कांग्रेस के साथ-साथ हरीश रावत की तारीफों के पुल बांध दिए. आर्य ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पार्टी के नेताओं ने उन्हें सब कुछ देने का ऑफर दिया था लेकिन उन्हें ख़ुशी है कि उन्होंने बीजेपी के खरीद-फरोख्त के इरादे को नाकाम कर दिया.
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देहरादून. उत्तराखंड के सियासी उठापटक में बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस के साथ हो लिए विधायक भीमलाल आर्य ने दावा किया है कि विश्वास मत पर वोटिंग से पहले बीजेपी ने उन्हें खरीदने के लिए पाँच करोड़ से पचास करोड़ तक का ऑफर दिया था. आर्य ने कहा कि दो हज़ार सत्रह में कांग्रेस साठ सीट जीतकर बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देगी. आज देहरादून में कांग्रेस भवन में विधायकों के सम्मान समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे भीमलाल आर्य ने कांग्रेस के साथ-साथ हरीश रावत की तारीफों के पुल बांध दिए. आर्य ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पार्टी के नेताओं ने उन्हें सब कुछ देने का ऑफर दिया था लेकिन उन्हें ख़ुशी है कि उन्होंने बीजेपी के खरीद-फरोख्त के इरादे को नाकाम कर दिया.
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मंत्री पद संभालते ही वे अलादीन हो गए। कुर्सी उनके लिए चिराग बन गई। अलादीन को तो चिराग घिसना पड़ता था, पर उनका यह चिराग और जिन्न सरकार के स्थायित्व तक सक्रिय थे।
चारों ओर जिन ही जिन्न थे- सभी, सुशील, सभ्रांत- बड़े-बड़े आफिसर, बिजनेस मैगनेट, पार्टी के वर्कर। जो हुकुम मेरे आका- सुनने का मज़ा भी अलग था और नशा भी। वे आश्वस्त थे। जिन्न अलादीन को निगल भी सकता है- इसका न उन्हें अंदाजा था, न आशंका।
पता उन्हें तब चला, जब अगला चुनाव आने पर उन्हें बिठा दिया गया और उन्हीं के एक जिन्न को खड़ा किया गया। मंत्री बनाकर अलादीन बनाया गया।
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मंत्री पद संभालते ही वे अलादीन हो गए। कुर्सी उनके लिए चिराग बन गई। अलादीन को तो चिराग घिसना पड़ता था, पर उनका यह चिराग और जिन्न सरकार के स्थायित्व तक सक्रिय थे। चारों ओर जिन ही जिन्न थे- सभी, सुशील, सभ्रांत- बड़े-बड़े आफिसर, बिजनेस मैगनेट, पार्टी के वर्कर। जो हुकुम मेरे आका- सुनने का मज़ा भी अलग था और नशा भी। वे आश्वस्त थे। जिन्न अलादीन को निगल भी सकता है- इसका न उन्हें अंदाजा था, न आशंका। पता उन्हें तब चला, जब अगला चुनाव आने पर उन्हें बिठा दिया गया और उन्हीं के एक जिन्न को खड़ा किया गया। मंत्री बनाकर अलादीन बनाया गया।
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अमिताभ भट्टाचार्य बॉलीवुड फ़िल्मों में कार्यरत एक भारतीय गीतकार और पार्श्व गायक हैं। उनके गीतों को "फ्रिलफ्री" और "स्मार्टली वर्डेड" के रूप में वर्णित किये गए हैं। .
35 संबंधोंः चांस पे डांस, एजेंट विनोद, देली बेली, देव-डी, नो वन किल्ड जेसिका, प्रीतम, बप्पी लाहिड़ी, बर्फी!, बॉम्बे टॉकीज़ (फ़िल्म), बॉलीवुड हँगामा, भारत, ये जवानी है दीवानी, राम सम्पत, लखनऊ, लुटेरा (२०१३ फ़िल्म), शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी, शंकर-एहसान-लॉय, सलीम-सुलेमान, हाउसफुल (2010 फ़िल्म), हिन्दी सिनेमा, घनचक्कर (फ़िल्म), वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई (2010 फ़िल्म), विशाल-शेखर, वेक अप सिड (2009 फ़िल्म), गो गोआ गॉन, गीतकार, केन घोष, कॉकटेल, अदनान सामी, अनुराग कश्यप, अमित त्रिवेदी, अज़ान (फ़िल्म), अग्निपथ (2012 फ़िल्म), उड़ान (२०१० फ़िल्म), उत्तर प्रदेश।
चांस पे डांस बॉलीवुड की नाटाकीय फ़िल्म है जिसमें मुख्य अभिनय भूमिका में शाहिद कपूर और जेनेलिया डिसूज़ा हैं। इसके निर्देशक केन घोष हैं और निर्माता रोनी स्क्रूवाला हैं जिसे यूटीवी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनाया गया है। फ़िल्म 15 जनवरी 2010 को जारी की गयी .
एजेंट विनोद (Agent Vinod) 2012 में बनी हिन्दी फिल्म है जिसमें अभिनेता सैफ़ अली ख़ान मुख्य भुमिका में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण सैफ अली खान ने अपने खुद के बैनर इलुमिनाटी फिल्म्स के तले किया है। शरुअत में फिल्म को दिसंबर 2011 में रिलीज किया जाना था पर शूटिंग में देरी के चलते इसे 23 मार्च 2012 को ढकेल दिया गया। .
देली बेली (Delhi Belly) २०११ में बनी भारतीय फ़िल्म है जिसे अंग्रेज़ी व हिन्दी दोनों में चित्रित किया गया है। .
देव-डी, 6 फ़रवरी 2009 को प्रदर्शित एक हिन्दी रोमांटिक नाटक फिल्म है। फिल्म का लेखन और निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है। फिल्म शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी बंगाली उपन्यास देवदास का आधुनिक संस्करण है। इसके अलावा इस उपन्यास पर आधारित अन्य फ़िल्में पी सी ब्रूवा, बिमल रॉय और संजय लीला भंसाली बना चुके हैं। इस फ़िल्म को समालोचकों और जनता ने पसंद किया और जिस तरीके से इसने अपने आप को पेश किया उसके लिए इसे हिंदी की पथ तोड़ने वाली फिल्मों में से एक माना गया। .
नो वन किल्ड जेसिका 2011 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। फ़िल्म का निर्माण यूटीवी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले हुआ और इसका निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने किया जिन्होंने इससे पहले आमिर (2008) का भी निर्देशन किया। .
प्रीतम चक्रबोर्ती (चक्रवर्ती) (बंगालीः প্রীতম চক্রবর্ত্তী) जिन्हें प्रीतम के नाम से बेहतर जाना जाता है, (14 जून 1971) बॉलीवुड फिल्मों के एक प्रख्यात भारतीय संगीत निर्देशक, संगीतकार, गायक, वादक और रिकार्ड निर्माता है जो वर्तमान में मुम्बई में रहते हैं।। लगभग डेढ़ दशकों में फैले कैरियर में, प्रीतम ने सौ से अधिक बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत रचना की है। कई शैलियों को कवर कर चुके प्रीतम भारत में सबसे बहुमुखी संगीत संगीतकारों में से एक हैं। वह 2 फिल्मफेयर पुरस्कार, 4 जी सिने अवार्ड्स, 3 स्टार स्क्रीन पुरस्कार, 3 आईफा पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कार जीत चुके हैं। .
बप्पी लाहिड़ी बप्पी लाहिड़ी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार हैं। सोने के गहनोँ से लदे बप्पी लाहिरी के संगीत में अगर डिस्को की चमक-दमक नज़र आती है तो उनके कुछ गाने सादगी और गंभीरता से परिपूर्ण हैं। उनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है। तीन साल की उम्र में उन्होँने तबला बजाना शुरू कर दिया था व जब वे 14 साल के हुए तो पहला संगीत दिया। .
बर्फी! 2012 में प्रदर्शित रोमेंटिक हास्य-नाटक हिन्दी फ़िल्म है जिसके लेखक, निर्देशक व सह-निर्माता अनुराग बसु हैं। 1970 के दशक में घटित फ़िल्म की कहानी दार्जिलिंग के एक गूंगे और बहरे व्यक्ति मर्फी "बर्फी" जॉनसन के जीवन और उसके दो महिलाओं श्रुति और मंदबुद्धि के साथ सम्बन्धों को दर्शाती है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना डी'क्रूज़ हैं तथा सहायक अभिनय करने वाले सौरभ शुक्ला, आशीष विद्यार्थी और रूपा गांगुली हैं। लगभग के बजट में बनी, बर्फी! विश्व स्तर पर 14 सितम्बर 2012 को व्यापक समीक्षकों की प्रशंसा के साथ प्रदर्शित हुई। समीक्षकों ने अभिनय, निर्देशन, पटकथा, छायांकन, संगीत और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के सकारात्मक चित्रण की प्रशंसा की। फ़िल्म को बॉक्स-ऑफिस पर बड़ी सफ़लता प्राप्त हुई, परिणामस्वरूप यह भारत और विदेशों में 2012 की उच्चतम अर्जक बॉलीवुड फ़िल्मों की श्रेणी में शामिल हुई तथा तीन सप्ताह पश्चात बॉक्स ऑफिस इंडिया द्वारा इसे "सूपर हिट" (उत्तम सफलता) घोषित कर दिया गया। दुनिया भर में फ़िल्म ने अर्जित किए। फ़िल्म को 85वें अकादमी पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म श्रेणी के नामांकन के लिए भारतीय आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया। बर्फी ने भारत भर के विभिन्न पुरस्कार समारोहों में कई पुरस्कार और नामांकन अर्जित किए। 58वें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में इस फ़िल्म ने 13 नामांकन प्राप्त किए और इसने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, कपूर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तथा प्रीतम को मिले सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार सहित सात (अन्य किसी भी फ़िल्म से अधिक) पुरस्कार जीते। .
बॉम्बे टॉकीज़ (फ़िल्म)
बॉम्बे टॉकीज़, २०१३ में प्रदर्शित बॉलीवुड की प्रयोगधर्मी फ़िल्म है। वायकॉम मोशन पिक्चर्स और फ्लाइंग यूनीकॉन एंटरटेनमेंट की फिल्म यह फ़िल्म बॉम्बे टॉकीज़ भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बनाई गई है। यह फ़िल्म चार अलग-अलग निर्देशकों द्वारा निर्मित की गई है और प्रत्येक निर्देशक द्वारा परस्पर एक दूसरे से भिन्न भाग बनाये गये हैं। .
बॉलीवुड हंगामा (पहले इण्डियाएफएम अथवा इण्डियाएफएम डॉट कॉम नाम से प्रचलित) बॉलीवुड की प्रमुख मनोरंजन वेबसाइट है, जो "हंगामा डिजिटल मीडिया एंटरटेनमेंट" के अधीन है, जिसने इस बॉलीवुड पोर्टल का अधिग्रहण सन् 2000 में किया। यह वेबसाइट भारतीय फ़िल्म उद्योग, मुख्य रूप से बॉलीवुड, फ़िल्म समीक्षाएँ एवं बॉक्स ऑफिस रपट से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करती है। इसका प्रमोचन 15 जून 1998 में मूल नाम इण्डियाएफएम डॉट कॉम (indiafm.com) से हुआ। 2008 में इसने अपना नाम बदलकर "बॉलीवुड हंगामा" रख लिया। जनवरी 2013 के आँकड़ों के अनुसार इसकी यातायात वर्ग भारत में 444 है। .
भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .
ये जवनी है दीवानी २०१३ में प्रकाशित बॉलीवुड की हास्यप्रधान और युवा पसन्द फिल्म है जिसके निर्माता करण जौहर हैं और यह अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित है। इस फील्म में मुख्य भूमिकाओं में रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण हैं। २००८ की फील्म बचना ऐ हसीनो के बाद एक साथ प्रथम फील्म है। आदित्य रॉय कपूर और कल्की केकलां सहकलाकार हैं। पहले इसे मार्च २०१३ में प्रदर्शित किया जाना तय हुआ था लेकिन बाद में ३१ मई २०१३ को प्रदर्शित की गई। .
राम सम्पत एक भारतीय संगीतज्ञ और संगीत निर्देशक हैं।.
लखनऊ (भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस शहर में लखनऊ जिले और लखनऊ मंडल के प्रशासनिक मुख्यालय भी स्थित हैं। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। २००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी। भारत सरकार की २००१ की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है। कानपुर के बाद यह शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। यहाँ के शिया नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यानों, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा संरक्षण दिया गया। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। .
लुटेरा (२०१३ फ़िल्म)
लुटेरा 2013 की बॉलीवुड की प्रेमकहानी नाटक फ़िल्म है जो विक्रमादित्य मोटवानी द्वारा निर्देशित है और ओ हेनरी की लघुकथा द लास्ट लीफ पर आधारित है। इसे १९५० के दशक पर आधारित बनाया गया है। इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा हैं। इस फ़िल्म के निर्माता अनुराग कश्यप, एकता कपूर, शोभा कपूर और विकास बहल हैं। फ़िल्म का पार्श्व गीत और पृष्ठभूमि अमित त्रिवेदी द्वारा तथा सम्पूर्ण संगीत अमिताभ भट्टाचार्य द्वारा तैयार किया गया है तथा चलचित्रण महेन्द्र जे॰ शेट्ठी द्वारा निर्मित है। यह फ़िल्म वैश्विक स्तर पर 5 जुलाई 2013 को प्रदर्शित हुई। .
शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी 2012 की बेला भंसाली सहगल द्वार निर्देशित और फराह खान, बोमन ईरानी, शम्मी, कुरुष देबू और डेजी ईरानी द्वारा अभिनीत बॉलीवुड हास्य प्रेमकहानी फ़िल्म है। .
शंकर-एहसान-लॉय(अंग्रेजीः Shankar-Ehsaan-Loy) भारतीय संगीतकार तिकड़ी है, यह तिकड़ी शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा से मिल कर बनी है और कई भारतीय फिल्मों के लिए संगीत प्रदान करती है। ये बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और समीक्षकों के द्वारा बहुप्रशंसित संगीत निर्देशकों में एक हैं। उन्होंने कई फिल्मों के लिए प्रसिद्द कार्य किये जैसे मिशन कश्मीर(2000), दिल चाहता है (2001),कल हो ना हो (2003), बंटी और बबली (2005), कभी अलविदा ना कहना (2006), डॉन- द चेस बिगिन्स अगेन (2006), तारे ज़मीं पर (2007), रोक ऑन !! (2008), वेक अप सिड (2009), माय नेम इस खान (2010), कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (2010) और हाउसफुल(2010)। .
सलीम और सुलेमान हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक और गायक हैं। यह एक दो भाइयों की जोड़ी है जिसमे, सलीम मर्चेंट और सुलेमान मर्चेंट शामिल हैं। सलीम और सुलेमान पिछले एक दशक से अधिक से फिल्मों के लिए संगीत रचना कर रहे हैं, इनकी प्रसिद्ध फिल्मों मे शामिल हैं, चक दे! इंडिया, भूत, मुझसे शादी करोगी, मातृभूमि और फैशन। एक प्रदर्शन में सलीम-सुलेमान इस जोड़ी ने कई भारतीय पॉप बैंड के लिए भी संगीत तैयार किया है जिनमें वीवा, आसमां, श्वेता शेट्टी, जैस्मीन और स्टाइल भाई आदि शामिल हैं। इन्होने कई टीवी विज्ञापनों का निर्माण और संगीत निर्देशन किया है जिसमे इनका सहयोग उस्ताद जाकिर हुसैन और उस्ताद सुल्तान खान जैसे कलाकारों ने किया है। इन्हें इनका पहला मौका करण जौहर ने अपनी फिल्म काल की संगीत रचना करने के लिए दिया था। उसके बाद, इन्होने कई बड़े निर्माताओं और निर्देशक जैसे यश चोपड़ा, सुभाष घई और राम गोपाल वर्मा के साथ फिल्में की हैं। गीत संगीत रचना से पहले, वे फिल्मों मे पार्श्व संगीत रचना करते रहे हैं। कुछ डरावनी फिल्मों में उनका पार्श्व संगीत बहुत पसंद किया गया।.
हाउसफुल (2010 फ़िल्म)
हाउसफुल ३० अप्रैल २०१० को प्रदशित होने वाली एक बॉलीवुड फिल्म है जिसका निर्देशन साजिद खान ने किया है। फिल्म के प्रमुख सितारों में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अर्जुन रामपाल, लारा दत्ता, दीपिका पादुकोण और जिया खान हैं। फिल्म के अन्य चरित्र बोमन ईरानी और रणबीर कपूर ने निभाए हैं। फिल्म के एक गाने में जैकलीन फर्नांडीज़ विशेष भूमिका में हैं। फिल्म में संगीत शंकर-अहसान-लॉय का है। फिल्म को अधिकतर लंदन में फिल्माया गया है। .
हिन्दी सिनेमा, जिसे बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दी भाषा में फ़िल्म बनाने का उद्योग है। बॉलीवुड नाम अंग्रेज़ी सिनेमा उद्योग हॉलिवुड के तर्ज़ पर रखा गया है। हिन्दी फ़िल्म उद्योग मुख्यतः मुम्बई शहर में बसा है। ये फ़िल्में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों के लोगों के दिलों की धड़कन हैं। हर फ़िल्म में कई संगीतमय गाने होते हैं। इन फ़िल्मों में हिन्दी की "हिन्दुस्तानी" शैली का चलन है। हिन्दी और उर्दू (खड़ीबोली) के साथ साथ अवधी, बम्बईया हिन्दी, भोजपुरी, राजस्थानी जैसी बोलियाँ भी संवाद और गानों में उपयुक्त होते हैं। प्यार, देशभक्ति, परिवार, अपराध, भय, इत्यादि मुख्य विषय होते हैं। ज़्यादातर गाने उर्दू शायरी पर आधारित होते हैं।भारत में सबसे बड़ी फिल्म निर्माताओं में से एक, शुद्ध बॉक्स ऑफिस राजस्व का 43% का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तमिल और तेलुगू सिनेमा 36% का प्रतिनिधित्व करते हैं,क्षेत्रीय सिनेमा के बाकी 2014 के रूप में 21% का गठन है। बॉलीवुड भी दुनिया में फिल्म निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। बॉलीवुड कार्यरत लोगों की संख्या और निर्मित फिल्मों की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे बड़ी फिल्म उद्योगों में से एक है।Matusitz, जे, और पायानो, पी के अनुसार, वर्ष 2011 में 3.5 अरब से अधिक टिकट ग्लोब जो तुलना में हॉलीवुड 900,000 से अधिक टिकट है भर में बेच दिया गया था। बॉलीवुड 1969 में भारतीय सिनेमा में निर्मित फिल्मों की कुल के बाहर 2014 में 252 फिल्मों का निर्माण। .
घनचक्कर (फ़िल्म)
घनचक्कर २०१३ में प्रदर्शित बॉलीवुड हास्य और रहस्यमय फ़िल्म है जिसका निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने किया है तथा यह रॉनी स्क्रूवाला और सिद्धार्थ राय कपूर ने यूटीवी मोशन पिक्चर्स के अधिन निर्मित की। फ़िल्म में इमरान हाशमी और विद्या बालन मुख्य भूमिका में हैं। यह 28 जून 2013 क्प प्रदर्शित हुई। .
वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई (2010 फ़िल्म)
वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई 2010 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
विशाल-शेखर हिन्दी फिल्मों के संगीत निर्देशन की एक जोड़ी है (विशाल दादलानी और शेखर रवजियानी).
वेक अप सिड (2009 फ़िल्म)
वेक अप सिड 2009 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। .
गो गोआ गॉन ज़ॉम्बीज़ पर बनी राज निदिमोरु और कृष्णा डीके द्वारा निर्देशित और सैफ़ अली ख़ान, कुणाल खेमू, वीर दास, पूजा गुप्ता एवं आनंद तिवारी अभिनीत बॉलीवुड की 2013 फ़िल्म है। यह 10 मई 2013 को जारी की गयी और समीक्षकों से मिश्रित समीक्षाएं प्राप्त कर पायी, जिसने टिकट-खिडकी पर औसत से अच्छा धन अर्जित किया। गो गोआ गॉन को इसकी कटोर भाषा (अभिशाप्त शब्दों) के कारण 'व' प्रमाण पत्र मिला। .
गीतकार गीतों की रचना करते हैं। उनका काम बोल यानी शब्द लिखना होता हैं। उन्हें ऐसे शब्द लिखने होते हैं कि संगीतकार उचित धुन के साथ उन्हें निर्मित करें। भारतीय फिल्मों में संगीतकारों के साथ गीतकारों का बहुत महत्व है। हिन्दी फ़िल्मों में कई प्रकार के गीतकार रहे हैं। कुछ गजल और सूफ़ी परम्परा के बोल लिखते तो दूसरी ओर कुछ सरल भाषा का उपयोग करते हैं। .
केन घोष भारतीय हिन्दी फ़िल्म निर्देशक और पटकथा लेखक हैं। वो फ़िल्मे और टीवी धारावाहिक निर्माता भी हैं। .
कॉकटेल २०१२ में बनी हिन्दी रोमांस कॉमेडी फ़िल्म है जिसका निर्देशन होमी अदजानिया द्वारा किया गया है। फ़िल्म में सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, डियाना पेंटी, डिम्पल कपाडिया, बोमन ईरानी और रणदीप हूडा मुख्य भूमिकाओं में है। फ़िल्म को १३ जुलाई २०१२ को रिलीज़ किया गया। .
अदनान सामी अदनान सामी खान एक भारतीय गायक, संगीतकार और अभिनेता हैं। .
अनुराग सिंह कश्यप (जन्म 10 सितम्बर 1972) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश कें गोरखपुर जिले में हुआ और वह विभिन्न शहरों में पले-बढे। उन्होनें अपनी शिक्षा देह्ररादून और ग्वालियर में की और उनकी कुछ फिल्मों में इन शहरों की छाप देखने को मिलती हैं, विशेष रूप से गैग्स ऑफ वासेपुर, जहाँ उन्होनें उस घर का प्रयोग किया जहाँ वह पले-बढे। फिल्में देखने का शौक उनहें बचपन से ही था, पर यह स्कूली शिक्षा के के द्वारान छूट गाया। यह शौक दोबरा कॉलेज में जागृत हुआ। यहाँ एक थिएटर टोली से संगठित होकर जब वह एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उपस्थित हुए तो उनमें फिल्मे' बनाने की चेतान जागी। यहीँ से उनकी कैरियर की शुरुआत हुई। टेलीविजन सीरियल के लिए लिखने के बाद, अनुराग को रामगोपाल वर्मा के अपराध नाटक फिल्म सत्या में सह-लेखन का कार्य मिला। उन्होंने अपने निर्देशन का कार्य फिल्म पाँच से शुरुआत की। जो कि केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के कारण प्रदर्शित नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने 1993 के मुंबई पर बम विस्फोट के बारे में हुसैन जैदी लिखित पुस्तक पर आधारित एक फिल्म ब्लैक फ्राइडे (2007) का निर्देशन किया। लेकिन इसका प्रदर्शन केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा लंबित किए जाने के कारण 2 साल बाद हो सका, लेकिन 2007 में प्रदर्शित होने के बाद इसे काफी सराहना प्राप्त हुई। इसके बाद अनुराग ने नो स्मोकिंग (2007) बनाई जिसने बॉक्स ऑफिस पर खराब प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने देवदास के आधुनिक संस्करण पर आधारित पर फिल्म देव डी (2009) बनाई जिसे काफी व्यवसायिक सफलता प्राप्त हुई। उसके बाद उन्होंने एक राजनीतिक नाटक फिल्म गुलाल (2009) और दैट गर्ल इन यैलो बूट्स (2011) फिल्मों का भी निर्देशन किया। 2012 में आई उनकी फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर-भाग १ और भाग २ ने इनके निर्देशन का नया किर्तीमान बनाया। इस फिल्म ने न केवल व्यवसायिक रुप से सफल रही बल्कि समीक्षकों ने भी इसे काफी सराहा। .
अमित त्रिवेदी बॉलीवुड फ़िल्मों में कार्यरत एक भारतीय वादक, रिकार्ड निर्माता, गायक, संगीतकार, गीतकार। थिएटर, विज्ञापनों, एवं गैर-फ़िल्मी एल्बमों में संगीतकार के रूप में कार्य करने के बाद हिंदी फिल्मों में संगीतकार के रूप में उनकी शुरुआत २००८ में फिल्म 'आमिर' से हुई। वर्ष २००९ में 'देव डी' में संगीत देने के लिए उन्हें अपार ख्याति के साथ ही उन्हें २०१० के 'सर्वश्रेष्ठ संगीतकार' का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। .
अज़ान (फ़िल्म)
अज़ान (Aazaan, أذان) २०११ में प्रशांत चढ्ढा द्वारा बनाई गई एक्षन फिल्म है जिसमें सचिन जोशी एवं कैंडिस बाऊचर मुख्य कलाकार है। यह भारत में बनी महंगी फिल्मो में से एक है। .
अग्निपथ (2012 फ़िल्म)
अग्निपथ 2012 में बनी हिन्दी फ़िल्म है जिसका निर्माण करण जोहर द्वारा किया गया है। यह १९९० में बनी इसी नाम की फ़िल्म का रीमेक है। फ़िल्म में ऋतिक रोशन ने मुख्य किरदार विजय दीनानाथ चौहान की भूमिका में है जिसे पहले अमिताभ बच्चन ने अदा किया था। संजय दत्त मुख्य गुंडे की भूमिका में है। अग्निपथ को २६ जनवरी २०१२ को रिलीज़ किया गया और समीक्षकों द्वारा काफ़ी सराहा गया। .
उड़ान (२०१० फ़िल्म)
उड़ान २०१० कि, विक्रमादित्य मोटवनी द्वारा निर्देशित व संजय सिंह, अनुराग कश्यप और रोनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित एक हिन्दी फ़िल्म है। यह अनुराग कश्यप के वास्तविक जीवन पर आधारित है। फिल्म को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र के कुछ संबंध (थोड़ी झल्कि) श्रेणी मे २०१० कान फिल्म समारोह में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया था। फिल्म बॉक्स आफिस पर तुरंत सफल नहीं हुई, लेकिन अंततः एक क्लासिक पंथ के रूप में मानी गई। .
आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
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अमिताभ भट्टाचार्य बॉलीवुड फ़िल्मों में कार्यरत एक भारतीय गीतकार और पार्श्व गायक हैं। उनके गीतों को "फ्रिलफ्री" और "स्मार्टली वर्डेड" के रूप में वर्णित किये गए हैं। . पैंतीस संबंधोंः चांस पे डांस, एजेंट विनोद, देली बेली, देव-डी, नो वन किल्ड जेसिका, प्रीतम, बप्पी लाहिड़ी, बर्फी!, बॉम्बे टॉकीज़ , बॉलीवुड हँगामा, भारत, ये जवानी है दीवानी, राम सम्पत, लखनऊ, लुटेरा , शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी, शंकर-एहसान-लॉय, सलीम-सुलेमान, हाउसफुल , हिन्दी सिनेमा, घनचक्कर , वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई , विशाल-शेखर, वेक अप सिड , गो गोआ गॉन, गीतकार, केन घोष, कॉकटेल, अदनान सामी, अनुराग कश्यप, अमित त्रिवेदी, अज़ान , अग्निपथ , उड़ान , उत्तर प्रदेश। चांस पे डांस बॉलीवुड की नाटाकीय फ़िल्म है जिसमें मुख्य अभिनय भूमिका में शाहिद कपूर और जेनेलिया डिसूज़ा हैं। इसके निर्देशक केन घोष हैं और निर्माता रोनी स्क्रूवाला हैं जिसे यूटीवी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनाया गया है। फ़िल्म पंद्रह जनवरी दो हज़ार दस को जारी की गयी . एजेंट विनोद दो हज़ार बारह में बनी हिन्दी फिल्म है जिसमें अभिनेता सैफ़ अली ख़ान मुख्य भुमिका में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण सैफ अली खान ने अपने खुद के बैनर इलुमिनाटी फिल्म्स के तले किया है। शरुअत में फिल्म को दिसंबर दो हज़ार ग्यारह में रिलीज किया जाना था पर शूटिंग में देरी के चलते इसे तेईस मार्च दो हज़ार बारह को ढकेल दिया गया। . देली बेली दो हज़ार ग्यारह में बनी भारतीय फ़िल्म है जिसे अंग्रेज़ी व हिन्दी दोनों में चित्रित किया गया है। . देव-डी, छः फ़रवरी दो हज़ार नौ को प्रदर्शित एक हिन्दी रोमांटिक नाटक फिल्म है। फिल्म का लेखन और निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है। फिल्म शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी बंगाली उपन्यास देवदास का आधुनिक संस्करण है। इसके अलावा इस उपन्यास पर आधारित अन्य फ़िल्में पी सी ब्रूवा, बिमल रॉय और संजय लीला भंसाली बना चुके हैं। इस फ़िल्म को समालोचकों और जनता ने पसंद किया और जिस तरीके से इसने अपने आप को पेश किया उसके लिए इसे हिंदी की पथ तोड़ने वाली फिल्मों में से एक माना गया। . नो वन किल्ड जेसिका दो हज़ार ग्यारह में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। फ़िल्म का निर्माण यूटीवी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले हुआ और इसका निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने किया जिन्होंने इससे पहले आमिर का भी निर्देशन किया। . प्रीतम चक्रबोर्ती जिन्हें प्रीतम के नाम से बेहतर जाना जाता है, बॉलीवुड फिल्मों के एक प्रख्यात भारतीय संगीत निर्देशक, संगीतकार, गायक, वादक और रिकार्ड निर्माता है जो वर्तमान में मुम्बई में रहते हैं।। लगभग डेढ़ दशकों में फैले कैरियर में, प्रीतम ने सौ से अधिक बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत रचना की है। कई शैलियों को कवर कर चुके प्रीतम भारत में सबसे बहुमुखी संगीत संगीतकारों में से एक हैं। वह दो फिल्मफेयर पुरस्कार, चार जी सिने अवार्ड्स, तीन स्टार स्क्रीन पुरस्कार, तीन आईफा पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कार जीत चुके हैं। . बप्पी लाहिड़ी बप्पी लाहिड़ी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार हैं। सोने के गहनोँ से लदे बप्पी लाहिरी के संगीत में अगर डिस्को की चमक-दमक नज़र आती है तो उनके कुछ गाने सादगी और गंभीरता से परिपूर्ण हैं। उनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है। तीन साल की उम्र में उन्होँने तबला बजाना शुरू कर दिया था व जब वे चौदह साल के हुए तो पहला संगीत दिया। . बर्फी! दो हज़ार बारह में प्रदर्शित रोमेंटिक हास्य-नाटक हिन्दी फ़िल्म है जिसके लेखक, निर्देशक व सह-निर्माता अनुराग बसु हैं। एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में घटित फ़िल्म की कहानी दार्जिलिंग के एक गूंगे और बहरे व्यक्ति मर्फी "बर्फी" जॉनसन के जीवन और उसके दो महिलाओं श्रुति और मंदबुद्धि के साथ सम्बन्धों को दर्शाती है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना डी'क्रूज़ हैं तथा सहायक अभिनय करने वाले सौरभ शुक्ला, आशीष विद्यार्थी और रूपा गांगुली हैं। लगभग के बजट में बनी, बर्फी! विश्व स्तर पर चौदह सितम्बर दो हज़ार बारह को व्यापक समीक्षकों की प्रशंसा के साथ प्रदर्शित हुई। समीक्षकों ने अभिनय, निर्देशन, पटकथा, छायांकन, संगीत और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के सकारात्मक चित्रण की प्रशंसा की। फ़िल्म को बॉक्स-ऑफिस पर बड़ी सफ़लता प्राप्त हुई, परिणामस्वरूप यह भारत और विदेशों में दो हज़ार बारह की उच्चतम अर्जक बॉलीवुड फ़िल्मों की श्रेणी में शामिल हुई तथा तीन सप्ताह पश्चात बॉक्स ऑफिस इंडिया द्वारा इसे "सूपर हिट" घोषित कर दिया गया। दुनिया भर में फ़िल्म ने अर्जित किए। फ़िल्म को पचासीवें अकादमी पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फ़िल्म श्रेणी के नामांकन के लिए भारतीय आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया। बर्फी ने भारत भर के विभिन्न पुरस्कार समारोहों में कई पुरस्कार और नामांकन अर्जित किए। अट्ठावनवें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में इस फ़िल्म ने तेरह नामांकन प्राप्त किए और इसने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, कपूर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तथा प्रीतम को मिले सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार सहित सात पुरस्कार जीते। . बॉम्बे टॉकीज़ बॉम्बे टॉकीज़, दो हज़ार तेरह में प्रदर्शित बॉलीवुड की प्रयोगधर्मी फ़िल्म है। वायकॉम मोशन पिक्चर्स और फ्लाइंग यूनीकॉन एंटरटेनमेंट की फिल्म यह फ़िल्म बॉम्बे टॉकीज़ भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बनाई गई है। यह फ़िल्म चार अलग-अलग निर्देशकों द्वारा निर्मित की गई है और प्रत्येक निर्देशक द्वारा परस्पर एक दूसरे से भिन्न भाग बनाये गये हैं। . बॉलीवुड हंगामा बॉलीवुड की प्रमुख मनोरंजन वेबसाइट है, जो "हंगामा डिजिटल मीडिया एंटरटेनमेंट" के अधीन है, जिसने इस बॉलीवुड पोर्टल का अधिग्रहण सन् दो हज़ार में किया। यह वेबसाइट भारतीय फ़िल्म उद्योग, मुख्य रूप से बॉलीवुड, फ़िल्म समीक्षाएँ एवं बॉक्स ऑफिस रपट से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करती है। इसका प्रमोचन पंद्रह जून एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में मूल नाम इण्डियाएफएम डॉट कॉम से हुआ। दो हज़ार आठ में इसने अपना नाम बदलकर "बॉलीवुड हंगामा" रख लिया। जनवरी दो हज़ार तेरह के आँकड़ों के अनुसार इसकी यातायात वर्ग भारत में चार सौ चौंतालीस है। . भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . ये जवनी है दीवानी दो हज़ार तेरह में प्रकाशित बॉलीवुड की हास्यप्रधान और युवा पसन्द फिल्म है जिसके निर्माता करण जौहर हैं और यह अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित है। इस फील्म में मुख्य भूमिकाओं में रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण हैं। दो हज़ार आठ की फील्म बचना ऐ हसीनो के बाद एक साथ प्रथम फील्म है। आदित्य रॉय कपूर और कल्की केकलां सहकलाकार हैं। पहले इसे मार्च दो हज़ार तेरह में प्रदर्शित किया जाना तय हुआ था लेकिन बाद में इकतीस मई दो हज़ार तेरह को प्रदर्शित की गई। . राम सम्पत एक भारतीय संगीतज्ञ और संगीत निर्देशक हैं।. लखनऊ और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। . लुटेरा लुटेरा दो हज़ार तेरह की बॉलीवुड की प्रेमकहानी नाटक फ़िल्म है जो विक्रमादित्य मोटवानी द्वारा निर्देशित है और ओ हेनरी की लघुकथा द लास्ट लीफ पर आधारित है। इसे एक हज़ार नौ सौ पचास के दशक पर आधारित बनाया गया है। इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा हैं। इस फ़िल्म के निर्माता अनुराग कश्यप, एकता कपूर, शोभा कपूर और विकास बहल हैं। फ़िल्म का पार्श्व गीत और पृष्ठभूमि अमित त्रिवेदी द्वारा तथा सम्पूर्ण संगीत अमिताभ भट्टाचार्य द्वारा तैयार किया गया है तथा चलचित्रण महेन्द्र जे॰ शेट्ठी द्वारा निर्मित है। यह फ़िल्म वैश्विक स्तर पर पाँच जुलाई दो हज़ार तेरह को प्रदर्शित हुई। . शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी दो हज़ार बारह की बेला भंसाली सहगल द्वार निर्देशित और फराह खान, बोमन ईरानी, शम्मी, कुरुष देबू और डेजी ईरानी द्वारा अभिनीत बॉलीवुड हास्य प्रेमकहानी फ़िल्म है। . शंकर-एहसान-लॉय भारतीय संगीतकार तिकड़ी है, यह तिकड़ी शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा से मिल कर बनी है और कई भारतीय फिल्मों के लिए संगीत प्रदान करती है। ये बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और समीक्षकों के द्वारा बहुप्रशंसित संगीत निर्देशकों में एक हैं। उन्होंने कई फिल्मों के लिए प्रसिद्द कार्य किये जैसे मिशन कश्मीर, दिल चाहता है ,कल हो ना हो , बंटी और बबली , कभी अलविदा ना कहना , डॉन- द चेस बिगिन्स अगेन , तारे ज़मीं पर , रोक ऑन !! , वेक अप सिड , माय नेम इस खान , कार्तिक कॉलिंग कार्तिक और हाउसफुल। . सलीम और सुलेमान हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक और गायक हैं। यह एक दो भाइयों की जोड़ी है जिसमे, सलीम मर्चेंट और सुलेमान मर्चेंट शामिल हैं। सलीम और सुलेमान पिछले एक दशक से अधिक से फिल्मों के लिए संगीत रचना कर रहे हैं, इनकी प्रसिद्ध फिल्मों मे शामिल हैं, चक दे! इंडिया, भूत, मुझसे शादी करोगी, मातृभूमि और फैशन। एक प्रदर्शन में सलीम-सुलेमान इस जोड़ी ने कई भारतीय पॉप बैंड के लिए भी संगीत तैयार किया है जिनमें वीवा, आसमां, श्वेता शेट्टी, जैस्मीन और स्टाइल भाई आदि शामिल हैं। इन्होने कई टीवी विज्ञापनों का निर्माण और संगीत निर्देशन किया है जिसमे इनका सहयोग उस्ताद जाकिर हुसैन और उस्ताद सुल्तान खान जैसे कलाकारों ने किया है। इन्हें इनका पहला मौका करण जौहर ने अपनी फिल्म काल की संगीत रचना करने के लिए दिया था। उसके बाद, इन्होने कई बड़े निर्माताओं और निर्देशक जैसे यश चोपड़ा, सुभाष घई और राम गोपाल वर्मा के साथ फिल्में की हैं। गीत संगीत रचना से पहले, वे फिल्मों मे पार्श्व संगीत रचना करते रहे हैं। कुछ डरावनी फिल्मों में उनका पार्श्व संगीत बहुत पसंद किया गया।. हाउसफुल हाउसफुल तीस अप्रैल दो हज़ार दस को प्रदशित होने वाली एक बॉलीवुड फिल्म है जिसका निर्देशन साजिद खान ने किया है। फिल्म के प्रमुख सितारों में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अर्जुन रामपाल, लारा दत्ता, दीपिका पादुकोण और जिया खान हैं। फिल्म के अन्य चरित्र बोमन ईरानी और रणबीर कपूर ने निभाए हैं। फिल्म के एक गाने में जैकलीन फर्नांडीज़ विशेष भूमिका में हैं। फिल्म में संगीत शंकर-अहसान-लॉय का है। फिल्म को अधिकतर लंदन में फिल्माया गया है। . हिन्दी सिनेमा, जिसे बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दी भाषा में फ़िल्म बनाने का उद्योग है। बॉलीवुड नाम अंग्रेज़ी सिनेमा उद्योग हॉलिवुड के तर्ज़ पर रखा गया है। हिन्दी फ़िल्म उद्योग मुख्यतः मुम्बई शहर में बसा है। ये फ़िल्में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों के लोगों के दिलों की धड़कन हैं। हर फ़िल्म में कई संगीतमय गाने होते हैं। इन फ़िल्मों में हिन्दी की "हिन्दुस्तानी" शैली का चलन है। हिन्दी और उर्दू के साथ साथ अवधी, बम्बईया हिन्दी, भोजपुरी, राजस्थानी जैसी बोलियाँ भी संवाद और गानों में उपयुक्त होते हैं। प्यार, देशभक्ति, परिवार, अपराध, भय, इत्यादि मुख्य विषय होते हैं। ज़्यादातर गाने उर्दू शायरी पर आधारित होते हैं।भारत में सबसे बड़ी फिल्म निर्माताओं में से एक, शुद्ध बॉक्स ऑफिस राजस्व का तैंतालीस% का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तमिल और तेलुगू सिनेमा छत्तीस% का प्रतिनिधित्व करते हैं,क्षेत्रीय सिनेमा के बाकी दो हज़ार चौदह के रूप में इक्कीस% का गठन है। बॉलीवुड भी दुनिया में फिल्म निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। बॉलीवुड कार्यरत लोगों की संख्या और निर्मित फिल्मों की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे बड़ी फिल्म उद्योगों में से एक है।Matusitz, जे, और पायानो, पी के अनुसार, वर्ष दो हज़ार ग्यारह में तीन.पाँच अरब से अधिक टिकट ग्लोब जो तुलना में हॉलीवुड नौ सौ,शून्य से अधिक टिकट है भर में बेच दिया गया था। बॉलीवुड एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में भारतीय सिनेमा में निर्मित फिल्मों की कुल के बाहर दो हज़ार चौदह में दो सौ बावन फिल्मों का निर्माण। . घनचक्कर घनचक्कर दो हज़ार तेरह में प्रदर्शित बॉलीवुड हास्य और रहस्यमय फ़िल्म है जिसका निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने किया है तथा यह रॉनी स्क्रूवाला और सिद्धार्थ राय कपूर ने यूटीवी मोशन पिक्चर्स के अधिन निर्मित की। फ़िल्म में इमरान हाशमी और विद्या बालन मुख्य भूमिका में हैं। यह अट्ठाईस जून दो हज़ार तेरह क्प प्रदर्शित हुई। . वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई वन्स अपॉन ए टाईम इन मुम्बई दो हज़ार दस में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . विशाल-शेखर हिन्दी फिल्मों के संगीत निर्देशन की एक जोड़ी है . वेक अप सिड वेक अप सिड दो हज़ार नौ में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . गो गोआ गॉन ज़ॉम्बीज़ पर बनी राज निदिमोरु और कृष्णा डीके द्वारा निर्देशित और सैफ़ अली ख़ान, कुणाल खेमू, वीर दास, पूजा गुप्ता एवं आनंद तिवारी अभिनीत बॉलीवुड की दो हज़ार तेरह फ़िल्म है। यह दस मई दो हज़ार तेरह को जारी की गयी और समीक्षकों से मिश्रित समीक्षाएं प्राप्त कर पायी, जिसने टिकट-खिडकी पर औसत से अच्छा धन अर्जित किया। गो गोआ गॉन को इसकी कटोर भाषा के कारण 'व' प्रमाण पत्र मिला। . गीतकार गीतों की रचना करते हैं। उनका काम बोल यानी शब्द लिखना होता हैं। उन्हें ऐसे शब्द लिखने होते हैं कि संगीतकार उचित धुन के साथ उन्हें निर्मित करें। भारतीय फिल्मों में संगीतकारों के साथ गीतकारों का बहुत महत्व है। हिन्दी फ़िल्मों में कई प्रकार के गीतकार रहे हैं। कुछ गजल और सूफ़ी परम्परा के बोल लिखते तो दूसरी ओर कुछ सरल भाषा का उपयोग करते हैं। . केन घोष भारतीय हिन्दी फ़िल्म निर्देशक और पटकथा लेखक हैं। वो फ़िल्मे और टीवी धारावाहिक निर्माता भी हैं। . कॉकटेल दो हज़ार बारह में बनी हिन्दी रोमांस कॉमेडी फ़िल्म है जिसका निर्देशन होमी अदजानिया द्वारा किया गया है। फ़िल्म में सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, डियाना पेंटी, डिम्पल कपाडिया, बोमन ईरानी और रणदीप हूडा मुख्य भूमिकाओं में है। फ़िल्म को तेरह जुलाई दो हज़ार बारह को रिलीज़ किया गया। . अदनान सामी अदनान सामी खान एक भारतीय गायक, संगीतकार और अभिनेता हैं। . अनुराग सिंह कश्यप एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश कें गोरखपुर जिले में हुआ और वह विभिन्न शहरों में पले-बढे। उन्होनें अपनी शिक्षा देह्ररादून और ग्वालियर में की और उनकी कुछ फिल्मों में इन शहरों की छाप देखने को मिलती हैं, विशेष रूप से गैग्स ऑफ वासेपुर, जहाँ उन्होनें उस घर का प्रयोग किया जहाँ वह पले-बढे। फिल्में देखने का शौक उनहें बचपन से ही था, पर यह स्कूली शिक्षा के के द्वारान छूट गाया। यह शौक दोबरा कॉलेज में जागृत हुआ। यहाँ एक थिएटर टोली से संगठित होकर जब वह एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उपस्थित हुए तो उनमें फिल्मे' बनाने की चेतान जागी। यहीँ से उनकी कैरियर की शुरुआत हुई। टेलीविजन सीरियल के लिए लिखने के बाद, अनुराग को रामगोपाल वर्मा के अपराध नाटक फिल्म सत्या में सह-लेखन का कार्य मिला। उन्होंने अपने निर्देशन का कार्य फिल्म पाँच से शुरुआत की। जो कि केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के कारण प्रदर्शित नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के मुंबई पर बम विस्फोट के बारे में हुसैन जैदी लिखित पुस्तक पर आधारित एक फिल्म ब्लैक फ्राइडे का निर्देशन किया। लेकिन इसका प्रदर्शन केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा लंबित किए जाने के कारण दो साल बाद हो सका, लेकिन दो हज़ार सात में प्रदर्शित होने के बाद इसे काफी सराहना प्राप्त हुई। इसके बाद अनुराग ने नो स्मोकिंग बनाई जिसने बॉक्स ऑफिस पर खराब प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने देवदास के आधुनिक संस्करण पर आधारित पर फिल्म देव डी बनाई जिसे काफी व्यवसायिक सफलता प्राप्त हुई। उसके बाद उन्होंने एक राजनीतिक नाटक फिल्म गुलाल और दैट गर्ल इन यैलो बूट्स फिल्मों का भी निर्देशन किया। दो हज़ार बारह में आई उनकी फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर-भाग एक और भाग दो ने इनके निर्देशन का नया किर्तीमान बनाया। इस फिल्म ने न केवल व्यवसायिक रुप से सफल रही बल्कि समीक्षकों ने भी इसे काफी सराहा। . अमित त्रिवेदी बॉलीवुड फ़िल्मों में कार्यरत एक भारतीय वादक, रिकार्ड निर्माता, गायक, संगीतकार, गीतकार। थिएटर, विज्ञापनों, एवं गैर-फ़िल्मी एल्बमों में संगीतकार के रूप में कार्य करने के बाद हिंदी फिल्मों में संगीतकार के रूप में उनकी शुरुआत दो हज़ार आठ में फिल्म 'आमिर' से हुई। वर्ष दो हज़ार नौ में 'देव डी' में संगीत देने के लिए उन्हें अपार ख्याति के साथ ही उन्हें दो हज़ार दस के 'सर्वश्रेष्ठ संगीतकार' का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। . अज़ान अज़ान दो हज़ार ग्यारह में प्रशांत चढ्ढा द्वारा बनाई गई एक्षन फिल्म है जिसमें सचिन जोशी एवं कैंडिस बाऊचर मुख्य कलाकार है। यह भारत में बनी महंगी फिल्मो में से एक है। . अग्निपथ अग्निपथ दो हज़ार बारह में बनी हिन्दी फ़िल्म है जिसका निर्माण करण जोहर द्वारा किया गया है। यह एक हज़ार नौ सौ नब्बे में बनी इसी नाम की फ़िल्म का रीमेक है। फ़िल्म में ऋतिक रोशन ने मुख्य किरदार विजय दीनानाथ चौहान की भूमिका में है जिसे पहले अमिताभ बच्चन ने अदा किया था। संजय दत्त मुख्य गुंडे की भूमिका में है। अग्निपथ को छब्बीस जनवरी दो हज़ार बारह को रिलीज़ किया गया और समीक्षकों द्वारा काफ़ी सराहा गया। . उड़ान उड़ान दो हज़ार दस कि, विक्रमादित्य मोटवनी द्वारा निर्देशित व संजय सिंह, अनुराग कश्यप और रोनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित एक हिन्दी फ़िल्म है। यह अनुराग कश्यप के वास्तविक जीवन पर आधारित है। फिल्म को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र के कुछ संबंध श्रेणी मे दो हज़ार दस कान फिल्म समारोह में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया था। फिल्म बॉक्स आफिस पर तुरंत सफल नहीं हुई, लेकिन अंततः एक क्लासिक पंथ के रूप में मानी गई। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
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जैजिबार, 06 जुलाई . अफ्रीकी देश जांजीबार में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास का कैम्पस खोला जाएगा. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जांजीबार दौरे पर इस आशय का समझौता हुआ है. इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने जांजीबार के राष्ट्रपति हुसैन अली विनी से मुलाकात कर दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत करने पर जोर दिया.
इस समय भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर जांजीबार के दौरे पर हैं. उन्होंने जांजीबार के राष्ट्रपति हुसैन अली विनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच बातचीत में रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. जांजीबार में भारत के मशहूर प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी मद्रास का कैम्पस खोले जाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है. भारतीय विदेश मंत्री ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने जांजीबार में भारत सरकार लाइन ऑफ क्रेडिट से वित्त पोषित जल आपूर्ति परियोजना का दौरा भी किया.
भारतीय विदेश मंत्री मिसाइलों से लैस भारतीय युद्धक जहाज आईएनएस त्रिशूल पर आयोजित डेक रिसेप्शन में भी शामिल हुए. आईएनएस त्रिशूल इन दिनों जांजीबार के दौरे पर है. इस रिसेप्शन में जांजीबार के राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली विनी भी शामिल हुए. बाद में भारतीय विदेश मंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जांजीबार के राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली विनी से मिलकर खुशी हुई. वह भारत-जांजीबार की साझेदारी को मजबूत करने के प्रति समर्पित हैं. राष्ट्रपति विनी के साथ आईएनएस त्रिशूल पर एक डेक रिसेप्शन में सहभागिता के दौरान जांजीबार के सभापति, मंत्री और भारतीय मूल के लोग भी मौजूद रहे. जांजीबार में आईएनएस त्रिशूल की मौजूदगी भारत के सागर समर्पण का सबूत है.
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जैजिबार, छः जुलाई . अफ्रीकी देश जांजीबार में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास का कैम्पस खोला जाएगा. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जांजीबार दौरे पर इस आशय का समझौता हुआ है. इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने जांजीबार के राष्ट्रपति हुसैन अली विनी से मुलाकात कर दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत करने पर जोर दिया. इस समय भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर जांजीबार के दौरे पर हैं. उन्होंने जांजीबार के राष्ट्रपति हुसैन अली विनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच बातचीत में रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. जांजीबार में भारत के मशहूर प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी मद्रास का कैम्पस खोले जाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है. भारतीय विदेश मंत्री ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने जांजीबार में भारत सरकार लाइन ऑफ क्रेडिट से वित्त पोषित जल आपूर्ति परियोजना का दौरा भी किया. भारतीय विदेश मंत्री मिसाइलों से लैस भारतीय युद्धक जहाज आईएनएस त्रिशूल पर आयोजित डेक रिसेप्शन में भी शामिल हुए. आईएनएस त्रिशूल इन दिनों जांजीबार के दौरे पर है. इस रिसेप्शन में जांजीबार के राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली विनी भी शामिल हुए. बाद में भारतीय विदेश मंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जांजीबार के राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली विनी से मिलकर खुशी हुई. वह भारत-जांजीबार की साझेदारी को मजबूत करने के प्रति समर्पित हैं. राष्ट्रपति विनी के साथ आईएनएस त्रिशूल पर एक डेक रिसेप्शन में सहभागिता के दौरान जांजीबार के सभापति, मंत्री और भारतीय मूल के लोग भी मौजूद रहे. जांजीबार में आईएनएस त्रिशूल की मौजूदगी भारत के सागर समर्पण का सबूत है.
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शहर के नवाब टैंक में मंगलवार को एक दिव्यांग का शव उतराता मिला। इलाकाई लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। और शव को कब्जे में ले लिया।
मंगलवार सुबह नवाब टैंक में शहर के आसरा कालोनी निवासी पिंकू (18) पुत्र बाला प्रसाद कोटार्य का शव मिला। वह एक पैर से दिव्यांग था। मोहल्ले वासियों ने सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से शव को बाहर निकलवाया और कब्जे में ले लिया। खबर पाकर परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए। कोतवाल दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि लग रहा है कि वह नहाने गया था और तभी डूब गया है। प्रकरण की जांच की जाएगी।
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शहर के नवाब टैंक में मंगलवार को एक दिव्यांग का शव उतराता मिला। इलाकाई लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। और शव को कब्जे में ले लिया। मंगलवार सुबह नवाब टैंक में शहर के आसरा कालोनी निवासी पिंकू पुत्र बाला प्रसाद कोटार्य का शव मिला। वह एक पैर से दिव्यांग था। मोहल्ले वासियों ने सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह से शव को बाहर निकलवाया और कब्जे में ले लिया। खबर पाकर परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए। कोतवाल दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि लग रहा है कि वह नहाने गया था और तभी डूब गया है। प्रकरण की जांच की जाएगी।
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नई दिल्ली, 21 अगस्त (हि.स.)। भारतीय निशानेबाज अखिल शेरोन ने रविवार को बाकू, अजरबैजान में विश्व चैम्पियनशिप में 50 मीटर राइफल 3-पोजीशन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता और ओलंपिक कोटा हासिल किया। हालांकि वह केवल 0.1 अंक से रजत पदक चूक गए।
इसके अलावा अखिल ने ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और नीरज कुमार के साथ मिलकर ऑस्ट्रिया से एक अंक आगे रहते हुए टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
रिदम सांगवान, ईशा सिंह और मनु भाकर की भारतीय तिकड़ी ने 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल में टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। केवल रिदम ने 583 के साथ फाइनल में जगह बनाई और आठवें स्थान पर रहे।
भारत तीन स्वर्ण और तीन कांस्य के साथ पदक तालिका में दूसरे स्थान पर है, वहीं, चीन सात स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य के साथ शीर्ष पर है।
अखिल ने भारत के लिए पांचवां ओलंपिक कोटा और एयर राइफल में मेहुली घोष के प्रयास के बाद मौजूदा विश्व चैम्पियनशिप में दूसरा ओलंपिक कोटा हासिल किया।
स्वप्निल कुसाले के बाद राइफल 3-पोजीशन स्पर्धा में यह दूसरा कोटा था। एयर राइफल में रुद्राक्ष पाटिल और ट्रैप में भवनीश मेंदीरत्ता ने भी पिछले साल ओलंपिक कोटा जीता था।
स्पोर्ट्स पिस्टल टीम का स्वर्ण भी रोमांचक अंदाज में जीता गया, क्योंकि भारत ने 1744 के कुल स्कोर के साथ चीनी ताइपे और चीन को एक अंक से हराया।
मिश्रित स्कीट में गनेमत सेखों और अनंत जीत सिंह नरुका ने 139 का स्कोर किया और 25वें स्थान पर रहे। अंगद वीर सिंह बाजवा और परिनाज़ धालीवाल की दूसरी भारतीय टीम 135 के स्कोर के साथ 37वें स्थान पर थी।
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नई दिल्ली, इक्कीस अगस्त । भारतीय निशानेबाज अखिल शेरोन ने रविवार को बाकू, अजरबैजान में विश्व चैम्पियनशिप में पचास मीटर राइफल तीन-पोजीशन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता और ओलंपिक कोटा हासिल किया। हालांकि वह केवल शून्य.एक अंक से रजत पदक चूक गए। इसके अलावा अखिल ने ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और नीरज कुमार के साथ मिलकर ऑस्ट्रिया से एक अंक आगे रहते हुए टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। रिदम सांगवान, ईशा सिंह और मनु भाकर की भारतीय तिकड़ी ने पच्चीस मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल में टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। केवल रिदम ने पाँच सौ तिरासी के साथ फाइनल में जगह बनाई और आठवें स्थान पर रहे। भारत तीन स्वर्ण और तीन कांस्य के साथ पदक तालिका में दूसरे स्थान पर है, वहीं, चीन सात स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य के साथ शीर्ष पर है। अखिल ने भारत के लिए पांचवां ओलंपिक कोटा और एयर राइफल में मेहुली घोष के प्रयास के बाद मौजूदा विश्व चैम्पियनशिप में दूसरा ओलंपिक कोटा हासिल किया। स्वप्निल कुसाले के बाद राइफल तीन-पोजीशन स्पर्धा में यह दूसरा कोटा था। एयर राइफल में रुद्राक्ष पाटिल और ट्रैप में भवनीश मेंदीरत्ता ने भी पिछले साल ओलंपिक कोटा जीता था। स्पोर्ट्स पिस्टल टीम का स्वर्ण भी रोमांचक अंदाज में जीता गया, क्योंकि भारत ने एक हज़ार सात सौ चौंतालीस के कुल स्कोर के साथ चीनी ताइपे और चीन को एक अंक से हराया। मिश्रित स्कीट में गनेमत सेखों और अनंत जीत सिंह नरुका ने एक सौ उनतालीस का स्कोर किया और पच्चीसवें स्थान पर रहे। अंगद वीर सिंह बाजवा और परिनाज़ धालीवाल की दूसरी भारतीय टीम एक सौ पैंतीस के स्कोर के साथ सैंतीसवें स्थान पर थी।
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राष्ट्रीय रक्षा मंत्री हुलुसी अकार ने ब्रसेल्स में आयोजित नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया और दो दिनों तक चली। मंत्री अकार ने कहा कि नए एफ-16 लड़ाकू विमानों की खरीद और कुछ मौजूदा एफ-16 युद्धक विमानों के आधुनिकीकरण के संबंध में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत के संबंध में तकनीकी कार्य शुरू किया गया है। अपने बयान में मंत्री अकार ने कहा, "हमें जिन F16s को नवीनीकृत करने की आवश्यकता है। ब्लॉक 70 वाइपर F16 की आपूर्ति और हमारे रणनीतिक सहयोगी, मित्र यूएसए से कुछ विमानों के आधुनिकीकरण दोनों के लिए तकनीकी कार्य शुरू कर दिया गया है। हम प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।" बयान दिए।
17 अक्टूबर, 2021 को, राष्ट्रपति एर्दोआन ने अपनी अफ्रीका यात्रा से पहले अतातुर्क हवाई अड्डे पर एक संवाददाता सम्मेलन में, तुर्की द्वारा F-16 लड़ाकू जेट की मांग के बारे में पूछे गए एक प्रश्न परः
"दोस्तों, यह मुद्दा स्पष्ट रूप से F-35 मुद्दे से संबंधित है। हमारे यहां ऐसी स्थिति नहीं है। हमने 1 अरब 400 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। इन भुगतानों के सामने, यूएसए ने ऐसी पेशकश की।"
इस संबंध में हमने कहा कि हमें अपने देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए ये कदम उठाने चाहिए। आज की निरंतरता के लिए, हम अपने युद्धक विमानों के बेड़े को हर समय तैयार और आधुनिक स्थिति में लाने के अपने प्रयास जारी रखते हैं। हम F-16 का आधुनिकीकरण करके और नए खरीदकर अपने बेड़े को और विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। हमें इस F-35 कार्यक्रम के तहत भुगतान करने की आवश्यकता है। हम अपनी बैठकों में इस बारे में बात करते हैं। हम समस्या के समाधान के लिए बातचीत को भी महत्व देते हैं।"
बयान थे। जैसा कि ज्ञात है, तुर्की F-16 ब्लॉक 30 के संरचनात्मक और हार्डवेयर सुधार पर काम करना जारी रखता है। पड़ोसी देशों द्वारा नए विमानों के आधुनिकीकरण और खरीद को तुर्की के लड़ाकू विमान बेड़े के विस्तार के प्रयासों के महत्वपूर्ण कारणों में से एक के रूप में देखा जा सकता है।
रॉयटर्स और defencereview.gr में समाचार के अनुसार, "गुमनाम स्रोतों" के आधार पर, यह दावा किया गया था कि तुर्की ने एचवीकेके में ४० एफ-१६ ब्लॉक ७० और ८० विमानों को संयुक्त राज्य अमेरिका को ब्लॉक ७० स्तर (एलओआर) के उन्नयन के लिए एक अनुरोध पत्र भेजा था। ) ..
मांग का मूल्य शून्य संख्या में विमान, आधुनिकीकरण किट की संख्या, स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव उपकरण, संभावित हथियार प्रणाली आदि है। चीजों को ध्यान में रखते हुए, यह कई अरब डॉलर की राशि होगी। प्रस्तुत अनुरोध पत्र विदेशी सैन्य बिक्री (एफएमएस) चैनल से गुजरने के बाद कांग्रेस को प्रस्तुत किया जाएगा।
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राष्ट्रीय रक्षा मंत्री हुलुसी अकार ने ब्रसेल्स में आयोजित नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया और दो दिनों तक चली। मंत्री अकार ने कहा कि नए एफ-सोलह लड़ाकू विमानों की खरीद और कुछ मौजूदा एफ-सोलह युद्धक विमानों के आधुनिकीकरण के संबंध में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत के संबंध में तकनीकी कार्य शुरू किया गया है। अपने बयान में मंत्री अकार ने कहा, "हमें जिन Fसोलह सेकंड को नवीनीकृत करने की आवश्यकता है। ब्लॉक सत्तर वाइपर Fसोलह की आपूर्ति और हमारे रणनीतिक सहयोगी, मित्र यूएसए से कुछ विमानों के आधुनिकीकरण दोनों के लिए तकनीकी कार्य शुरू कर दिया गया है। हम प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।" बयान दिए। सत्रह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को, राष्ट्रपति एर्दोआन ने अपनी अफ्रीका यात्रा से पहले अतातुर्क हवाई अड्डे पर एक संवाददाता सम्मेलन में, तुर्की द्वारा F-सोलह लड़ाकू जेट की मांग के बारे में पूछे गए एक प्रश्न परः "दोस्तों, यह मुद्दा स्पष्ट रूप से F-पैंतीस मुद्दे से संबंधित है। हमारे यहां ऐसी स्थिति नहीं है। हमने एक अरब चार सौ मिलियन डॉलर का भुगतान किया। इन भुगतानों के सामने, यूएसए ने ऐसी पेशकश की।" इस संबंध में हमने कहा कि हमें अपने देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए ये कदम उठाने चाहिए। आज की निरंतरता के लिए, हम अपने युद्धक विमानों के बेड़े को हर समय तैयार और आधुनिक स्थिति में लाने के अपने प्रयास जारी रखते हैं। हम F-सोलह का आधुनिकीकरण करके और नए खरीदकर अपने बेड़े को और विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। हमें इस F-पैंतीस कार्यक्रम के तहत भुगतान करने की आवश्यकता है। हम अपनी बैठकों में इस बारे में बात करते हैं। हम समस्या के समाधान के लिए बातचीत को भी महत्व देते हैं।" बयान थे। जैसा कि ज्ञात है, तुर्की F-सोलह ब्लॉक तीस के संरचनात्मक और हार्डवेयर सुधार पर काम करना जारी रखता है। पड़ोसी देशों द्वारा नए विमानों के आधुनिकीकरण और खरीद को तुर्की के लड़ाकू विमान बेड़े के विस्तार के प्रयासों के महत्वपूर्ण कारणों में से एक के रूप में देखा जा सकता है। रॉयटर्स और defencereview.gr में समाचार के अनुसार, "गुमनाम स्रोतों" के आधार पर, यह दावा किया गया था कि तुर्की ने एचवीकेके में चालीस एफ-सोलह ब्लॉक सत्तर और अस्सी विमानों को संयुक्त राज्य अमेरिका को ब्लॉक सत्तर स्तर के उन्नयन के लिए एक अनुरोध पत्र भेजा था। ) .. मांग का मूल्य शून्य संख्या में विमान, आधुनिकीकरण किट की संख्या, स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव उपकरण, संभावित हथियार प्रणाली आदि है। चीजों को ध्यान में रखते हुए, यह कई अरब डॉलर की राशि होगी। प्रस्तुत अनुरोध पत्र विदेशी सैन्य बिक्री चैनल से गुजरने के बाद कांग्रेस को प्रस्तुत किया जाएगा।
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Jahnvi Kapoor ने दी Khushi Kapoor को लव एडवाइस, कहा ये (Photo Credit: Social Media)
New Delhi:
बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही हैं. एक्ट्रेस की हालिया फिल्म 'गुडलक जेरी' (Goodluck Jerry) में उनकी शानदार एक्टिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इन दिनों जान्हवी अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिली' (Mili) के प्रमोशन में काफी बिजी चल रही हैं. साथ ही अब जान्हवी के नक्शेकदम पर चलते हुए उनकी बहन खुशी कपूर (Khushi Kapoor) भी बॉलीवुड में अपने डेब्यू का इंतजार कर रही हैं और जोया अख्तर (Zoya Akhtar) की 'द आर्चीज' (The Archies) से अपने करियर की शुरुआत करने जा रही हैं. हाल ही में ही एक इंटरव्यू में, जान्हवी ने अपनी फिल्म के साथ अपनी बहन के बारे में भी बात की. साथ ही खुशी के लिए उन्होंने डेटिंग टिप्स भी दिए.
दरअसल, इंटरव्यू के दौरान जब जान्हवी से पूछा गया कि वह खुशी को वो कौन सी डेटिंग सलाह देना चाहेंगी. इस पर उन्होंने कहा, "एक एक्टर को डेट न करें. " उन्होंने आगे कहा, "सिर्फ इसलिए कि मुझे लगता है कि मैं और वह जिस तरह की लड़कियां हैं, हमारे लिए यही बेहतर होगा". जान्हवी की ये सलाह इस बात का भी संकेत देती है कि एक्ट्रेस ने खुद भी पहले किसी एक्टर को डेट किया है और वो अपना अनुभव अपनी बहन के साथ शेयर करना चाहती हैं. उन्होंने खुशी के लिए एक और सलाह दी और कहा, "अपनी कीमत जानो. जान लो कि आपके पास शो करने के लिए कुछ है, इसके बावजूद कि इंस्टाग्राम पर फेसलेस लोग क्या कह सकते हैं,". एक्ट्रेस जान्हवी कपूर की ये बातें यह दर्शाती हैं कि उन्हें अपनी बहन की कितनी चिंता है.
आपको बता दें कि, खुशी कपूर के साथ, सुहाना खान (Suhana Khan) और अगस्त्य नंदा (Agstya Nanda) भी 'आर्चीज' के साथ अपना डेब्यू करेंगे. साथ ही इसको नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जाएगा. इस बीच, जान्हवी कपूर 'मिली' की रिलीज़ के लिए तैयार हैं, जो एक सर्वाइवल ड्रामा है. एक्ट्रेस राजकुमार राव (Rajkumar Rao) के साथ स्पोर्ट्स कॉमेडी मिस्टर एंड मिसेज माही (Mr. and Mrs. Mahi) में भी नजर आने वाली हैं. इसके अलावा वह वरुण धवन (Varun Dhawan) के साथ 'बावल' (Bawaal) में भी नजर आएंगी.
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Jahnvi Kapoor ने दी Khushi Kapoor को लव एडवाइस, कहा ये New Delhi: बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही हैं. एक्ट्रेस की हालिया फिल्म 'गुडलक जेरी' में उनकी शानदार एक्टिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इन दिनों जान्हवी अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिली' के प्रमोशन में काफी बिजी चल रही हैं. साथ ही अब जान्हवी के नक्शेकदम पर चलते हुए उनकी बहन खुशी कपूर भी बॉलीवुड में अपने डेब्यू का इंतजार कर रही हैं और जोया अख्तर की 'द आर्चीज' से अपने करियर की शुरुआत करने जा रही हैं. हाल ही में ही एक इंटरव्यू में, जान्हवी ने अपनी फिल्म के साथ अपनी बहन के बारे में भी बात की. साथ ही खुशी के लिए उन्होंने डेटिंग टिप्स भी दिए. दरअसल, इंटरव्यू के दौरान जब जान्हवी से पूछा गया कि वह खुशी को वो कौन सी डेटिंग सलाह देना चाहेंगी. इस पर उन्होंने कहा, "एक एक्टर को डेट न करें. " उन्होंने आगे कहा, "सिर्फ इसलिए कि मुझे लगता है कि मैं और वह जिस तरह की लड़कियां हैं, हमारे लिए यही बेहतर होगा". जान्हवी की ये सलाह इस बात का भी संकेत देती है कि एक्ट्रेस ने खुद भी पहले किसी एक्टर को डेट किया है और वो अपना अनुभव अपनी बहन के साथ शेयर करना चाहती हैं. उन्होंने खुशी के लिए एक और सलाह दी और कहा, "अपनी कीमत जानो. जान लो कि आपके पास शो करने के लिए कुछ है, इसके बावजूद कि इंस्टाग्राम पर फेसलेस लोग क्या कह सकते हैं,". एक्ट्रेस जान्हवी कपूर की ये बातें यह दर्शाती हैं कि उन्हें अपनी बहन की कितनी चिंता है. आपको बता दें कि, खुशी कपूर के साथ, सुहाना खान और अगस्त्य नंदा भी 'आर्चीज' के साथ अपना डेब्यू करेंगे. साथ ही इसको नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जाएगा. इस बीच, जान्हवी कपूर 'मिली' की रिलीज़ के लिए तैयार हैं, जो एक सर्वाइवल ड्रामा है. एक्ट्रेस राजकुमार राव के साथ स्पोर्ट्स कॉमेडी मिस्टर एंड मिसेज माही में भी नजर आने वाली हैं. इसके अलावा वह वरुण धवन के साथ 'बावल' में भी नजर आएंगी.
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भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव को घेरा. एससी वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष लालजी निर्मल ने लखनऊ में प्रेस कॉफ्रेंस कर कहा कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव साफ करें कि वह प्रमोशन में आरक्षण के समर्थक हैं या विरोधी? उन्होंने कहा कि यूपी के लाखों दलित कार्मिकों अखिलेश यादव की सरकार ने रिवर्ट किया था. ऐसे में सपा बसपा गठबंधन नापाक नहीं है तो अखिलेश यादव अपनी स्थिति स्पष्ट करें. अगर वह प्रमोशन में आरक्षण के हिमायती हैं तो अपने पूर्व में उठाए गए कदम के लिए दलितों से माफी मांगें.
लालजी निर्मल ने कहा कि भारत सरकार के डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने 15 जून 2018 को केंद्र और प्रदेश सरकारों को प्रोन्नति में आरक्षण लागू करने के आदेश जारी किए हैं. हम इसका स्वागत करते हैं. प्रोन्नति में आरक्षण देश के दलितों के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा है. लंबे अर्से से दलित कार्मिक ये मांग कर रहे थे कि प्रोन्नति में आरक्षण लागू किया जाए.
उन्होंने कहा कि यूपी विशेष तौर पर इस व्यथा से पीड़िता था क्योंकि यहां लाखों कार्मिक रिवर्ट कर दिए गए थे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव के मैनिफेस्टो घोषित किया था कि हम प्रमोशन के आरक्षण के खिलाफ हैं. सत्ता में आने पर इसे खत्म करेंगे. यही नहीं इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश का आरक्षण अधिनियम 1994 के नियम 3 (7) को समाप्त किया. तो तत्कालीन अखिलेश सरकार ने बिना किसी उपाय किए या सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार याचिका दायर किए तत्काल कार्यवाही कर दी. उन्होंने लाखों दलित कार्मिकों को रिवर्ट कर दिया.
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भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव को घेरा. एससी वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष लालजी निर्मल ने लखनऊ में प्रेस कॉफ्रेंस कर कहा कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव साफ करें कि वह प्रमोशन में आरक्षण के समर्थक हैं या विरोधी? उन्होंने कहा कि यूपी के लाखों दलित कार्मिकों अखिलेश यादव की सरकार ने रिवर्ट किया था. ऐसे में सपा बसपा गठबंधन नापाक नहीं है तो अखिलेश यादव अपनी स्थिति स्पष्ट करें. अगर वह प्रमोशन में आरक्षण के हिमायती हैं तो अपने पूर्व में उठाए गए कदम के लिए दलितों से माफी मांगें. लालजी निर्मल ने कहा कि भारत सरकार के डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने पंद्रह जून दो हज़ार अट्ठारह को केंद्र और प्रदेश सरकारों को प्रोन्नति में आरक्षण लागू करने के आदेश जारी किए हैं. हम इसका स्वागत करते हैं. प्रोन्नति में आरक्षण देश के दलितों के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा है. लंबे अर्से से दलित कार्मिक ये मांग कर रहे थे कि प्रोन्नति में आरक्षण लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि यूपी विशेष तौर पर इस व्यथा से पीड़िता था क्योंकि यहां लाखों कार्मिक रिवर्ट कर दिए गए थे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव के मैनिफेस्टो घोषित किया था कि हम प्रमोशन के आरक्षण के खिलाफ हैं. सत्ता में आने पर इसे खत्म करेंगे. यही नहीं इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश का आरक्षण अधिनियम एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के नियम तीन को समाप्त किया. तो तत्कालीन अखिलेश सरकार ने बिना किसी उपाय किए या सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार याचिका दायर किए तत्काल कार्यवाही कर दी. उन्होंने लाखों दलित कार्मिकों को रिवर्ट कर दिया. .
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'अधर में फंसी गांव को जोड़ने की योजना'
LUCKNOW: सरकारी ऑफिसेज में बैठकर प्लान पर प्लान बन रहे हैं। नए रूट और गांवों की तलाश की जा रही है कि कहां-कहां पर रोडवेज की बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। जिन रूटों पर अब तक परिवहन निगम की बसों को दौड़ने की इजाजत है, उसमें मात्र 20,000 गांव ही कवर हो रहे हैं। बचे हुए गांवों तक जाने के लिए 1500 बसों की जरूरत है। हर महीने 500 बसों को लाए जाने की सहमति बनी है, लेकिन बीएस 4 के लागू होने से फिलहाल एक महीने में प्रदेश के सभी गावों को रोडवेज से जोड़े जाने की कवायद अधर में लटक गई है।
भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में प्रदेश के सभी गांवों को एक महीने के अंदर रोडवेज की बसों से जोड़ना है। इसके लिए प्रदेश भर के गांवों और उनके रास्तों का कलुकेलशन किया जा रहा है। प्रदेश के दस प्रतिशत रूट पर पड़ने वाले गांव ही ऐसे हैं जहां डायरेक्ट रोडवेज की सेवा मिल रही है। प्रदेश में 20 हजार गांव ऐसे हैं जहां एक से दो किमी की दूरी पर बस की सुविधा मिल रही है। जबकि परिवहन निगम को अभी 34 हजार गांवों तक अपनी बसें पहुंचानी बाकी है। इन गांवों को कनेक्टीविटी के लिए 1500 से अधिक बसों की जरूरत है। साधारण नई बसों को लाए जाने की तैयारियां भी हो चुकी थी। पर बीएस 4 के आने से सारी तैयारियां धरी रह गई हैं।
बीएस 4 के आने के बाद नई बसें आने में कम से एक तीन महीने से कम का समय नहीं लगेगा। इसकी कारण है कि पहले टेंडर निकलेगा और सभी फार्मेल्टीज पूरी करने में कम से कम तीन माह का समय लग जाएगा। ऐसे में एक महीने के अंदर गांवों की जोड़े जाने की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रोडवेज में मौजूद 10 हजार की अन्य बसों के संचालन में परिवहन निगम के अधिकारी कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहते हैं। बसों का रूट बदलने पर निगम की आय गिर सकती है। इसी के चलते अब नई बसों के आने पर ही गांवों को जोड़े जाने योजना पर अमल हो पाएगा।
रूट तलाशे जा रहे हैं कि गांवों को किस तरह से जोड़ा जाए। 35 हजार गांवों के लिए बसों के संचालन की व्यवस्था की जा रही है।
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'अधर में फंसी गांव को जोड़ने की योजना' LUCKNOW: सरकारी ऑफिसेज में बैठकर प्लान पर प्लान बन रहे हैं। नए रूट और गांवों की तलाश की जा रही है कि कहां-कहां पर रोडवेज की बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। जिन रूटों पर अब तक परिवहन निगम की बसों को दौड़ने की इजाजत है, उसमें मात्र बीस,शून्य गांव ही कवर हो रहे हैं। बचे हुए गांवों तक जाने के लिए एक हज़ार पाँच सौ बसों की जरूरत है। हर महीने पाँच सौ बसों को लाए जाने की सहमति बनी है, लेकिन बीएस चार के लागू होने से फिलहाल एक महीने में प्रदेश के सभी गावों को रोडवेज से जोड़े जाने की कवायद अधर में लटक गई है। भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में प्रदेश के सभी गांवों को एक महीने के अंदर रोडवेज की बसों से जोड़ना है। इसके लिए प्रदेश भर के गांवों और उनके रास्तों का कलुकेलशन किया जा रहा है। प्रदेश के दस प्रतिशत रूट पर पड़ने वाले गांव ही ऐसे हैं जहां डायरेक्ट रोडवेज की सेवा मिल रही है। प्रदेश में बीस हजार गांव ऐसे हैं जहां एक से दो किमी की दूरी पर बस की सुविधा मिल रही है। जबकि परिवहन निगम को अभी चौंतीस हजार गांवों तक अपनी बसें पहुंचानी बाकी है। इन गांवों को कनेक्टीविटी के लिए एक हज़ार पाँच सौ से अधिक बसों की जरूरत है। साधारण नई बसों को लाए जाने की तैयारियां भी हो चुकी थी। पर बीएस चार के आने से सारी तैयारियां धरी रह गई हैं। बीएस चार के आने के बाद नई बसें आने में कम से एक तीन महीने से कम का समय नहीं लगेगा। इसकी कारण है कि पहले टेंडर निकलेगा और सभी फार्मेल्टीज पूरी करने में कम से कम तीन माह का समय लग जाएगा। ऐसे में एक महीने के अंदर गांवों की जोड़े जाने की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रोडवेज में मौजूद दस हजार की अन्य बसों के संचालन में परिवहन निगम के अधिकारी कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहते हैं। बसों का रूट बदलने पर निगम की आय गिर सकती है। इसी के चलते अब नई बसों के आने पर ही गांवों को जोड़े जाने योजना पर अमल हो पाएगा। रूट तलाशे जा रहे हैं कि गांवों को किस तरह से जोड़ा जाए। पैंतीस हजार गांवों के लिए बसों के संचालन की व्यवस्था की जा रही है।
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भारत ने नवदीप सैनी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका दिया है. मनीष पांडे, वॉशिंगटन सुंदर और खलील अहमद की वापसी हुई है. वेस्टइंडीज ने आंद्रे रसेल की जगह टीम में आए जेसन मोहम्मद को अंतिम-11 में नहीं चुना है.
फ्लोरिडाः भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने शनिवार को सेंट्रल ब्रोवार्ड रीजनल पार्क स्टेडियम में जारी पहले टी-20 मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है. तीन मैचों की टी-20 सीरीज के दो मैच यहां खेले जाने हैं.
भारत ने नवदीप सैनी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका दिया है. मनीष पांडे, वॉशिंगटन सुंदर और खलील अहमद की वापसी हुई है. वेस्टइंडीज ने आंद्रे रसेल की जगह टीम में आए जेसन मोहम्मद को अंतिम-11 में नहीं चुना है.
टीमः भारतः विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, मनीष पांडे, ऋषभ पंत, क्रुणाल पांड्या, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, वॉशिंगटन सुंदर, खलील अहमद और नवदीप सैनी.
वेस्टइंडीजः कार्लोस ब्रैथेवट (कप्तान), इविन लुइस, निकोलस पूरन, केरन पोलार्ड, सुनील नरेन, शेल्डन कॉटरेल, कीमो पॉल, जॉन कैम्पवेल, ओशाने थॉमस, रोवमैन पावेल और शिमरन हेटमायेर.
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भारत ने नवदीप सैनी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका दिया है. मनीष पांडे, वॉशिंगटन सुंदर और खलील अहमद की वापसी हुई है. वेस्टइंडीज ने आंद्रे रसेल की जगह टीम में आए जेसन मोहम्मद को अंतिम-ग्यारह में नहीं चुना है. फ्लोरिडाः भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने शनिवार को सेंट्रल ब्रोवार्ड रीजनल पार्क स्टेडियम में जारी पहले टी-बीस मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है. तीन मैचों की टी-बीस सीरीज के दो मैच यहां खेले जाने हैं. भारत ने नवदीप सैनी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका दिया है. मनीष पांडे, वॉशिंगटन सुंदर और खलील अहमद की वापसी हुई है. वेस्टइंडीज ने आंद्रे रसेल की जगह टीम में आए जेसन मोहम्मद को अंतिम-ग्यारह में नहीं चुना है. टीमः भारतः विराट कोहली , रोहित शर्मा, शिखर धवन, मनीष पांडे, ऋषभ पंत, क्रुणाल पांड्या, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार, वॉशिंगटन सुंदर, खलील अहमद और नवदीप सैनी. वेस्टइंडीजः कार्लोस ब्रैथेवट , इविन लुइस, निकोलस पूरन, केरन पोलार्ड, सुनील नरेन, शेल्डन कॉटरेल, कीमो पॉल, जॉन कैम्पवेल, ओशाने थॉमस, रोवमैन पावेल और शिमरन हेटमायेर.
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जैस्मीनः स्टोरी ऑफ़ ए लीज्ड वॉम्ब (2024)
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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जैस्मीनः स्टोरी ऑफ़ ए लीज्ड वॉम्ब *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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वैदिक के बाद संस्कृत की प्रगति
हम पहले देख चुके हैं। उसने अपनी प्रत्यय-विभक्तियों की बहुलता की भी सीमित करना आरम्भ कर दिया । बहुत से विषयों में उसने अनार्य भाषाओं की रीतियों को आत्मसात् कर लिया। शब्दों के विषय में, प्राचीन वैदिक शब्दनामों का प्रायः त्याग कर दिया गया, और उनकी जगह बोलचाल की भाषाओं में नये शब्द या गए । संस्कृत ने भी इसी मार्ग का अनुगमन किया, यद्यपि आवश्यकता पड़ने पर उसमें प्राचीन शब्दों का प्रयोग भी किया जाता था । उदा० निम्नलिखित प्राचीन शब्दों - "अश्व = घोड़ा; अश्मन् = पत्थर; श्वान = कुत्ता; वृष = साँड़; अवि = भेड़; अनड्वन् या उतन् - बैल; वाह, रथ = गाड़ी, रथ, रै, राधः = धन-सम्पत्ति; सहः = शक्ति; दम, वेश घर; द्रु= पेड़; उदन् = पानी;, असृक् = खून; √ श्रद् = खाना; √ गृभ् = लेना; पकड़ लेना; √ हुन् = वार करना; √वज्ञ = बढ़ना; √ यज्= पूजा करना; विज्, वेज् = काँपना; / पृ ण् = भरना; √पत् = उड़ना; √सू = : Vवृ-ण् जन्म देना," इत्यादि के स्थान में बोलचाल की भाषा में अनुक्रम से "घोटक, प्रस्तर ( जिसका मूल अर्थ था 'फैली हुई टहनियाँ', दे० यजुर्वेद १८-६३), कुक्कुर या कुकुर (अनुकार शब्द), षण्ड (गोण), मेष (एडक ), बली वर्द, शकट (*गड्डिका), धन, बल, वाटिका (गृह), वृक्ष ( गच्छ, पिण्ड), जल (पानीय), रक्त ( रुधिर, लोहित ), √ खाद् ( √ जम्), प्र / + श्रापू, √ मारय्, √वृध्, √पूजय्, कम्प्, √ पूरयू, √ उड्डीय्, / जनयू" आदि / नये शब्द प्रचलित हो गए, और ये ही आधुनिक भारतीय प्रार्य भाषा में बचे रहे हैं, न कि वैदिक तथा आभात्रा के प्रचलित प्राचीन शब्द । पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण का रूप हमेशा के लिए निश्चित कर दिया, परन्तु संस्कृत भाषा का पाणिनि के समय के मान-परिमाणों में बद्ध रहना सम्भव न था । संस्कृत भाषा में एक सतत विकास परिलक्षित होता है, और किसी भी संस्कृत के साधारण ग्रन्थ की शब्दावली, वाक्य-विन्यास तथा समयानुसार बराबर बदलती हुई विशेषताओं को देखकर उस ग्रन्थ का काल निर्णय सहज ही किया जा सकता है। पाणिनि के समय में 'लौकिक' या प्रचलित संस्कृत का भारतीय आार्य प्रादेशिक बोलियों में सम्भवतः वही स्थान रहा होगा, जो आधुनिक काल में हिन्दी या हिन्दुस्तानी ( हिन्दुस्थानी ) का है । जनसाधारण सर्वत्र संस्कृत समझ लेता था, फिर चाहे वह पूरब का ही रहा हो, जहाँ से प्राकृत उद्भूत हुई जान पड़ती है। प्राचीन भारतीय नाटकों (जिनके प्राचीनतम खण्डित उदाहरण ईस्वी पहली शती के उपलब्ध हैं) में उच्च वर्ग के पात्रों के संस्कृत में और निम्न वर्ग के तथा स्त्री-पात्रों
के प्राकृत में बोलने की परिपाटी थी । इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इस साहित्यिक रूढ़ि का प्रचलन प्राकृत के विकास काल में लोगों द्वारा व्यवहृत भाषाओं को देखकर ही हुआ था । जन्मजात श्रार्यो, मिश्रित प्रार्यो, अनार्यो तथा आर्थीभूत अनार्यों में प्रचलित ऐतिहासिक गाथाएँ, वीरकाव्य और लोकगीत, आर्यभाषा के प्रचलित लौकिक रूपों में कहे या गाए जाते थे, एवं ये ही संस्कृत में अनूदित होकर महाभारत तथा पुराणों का प्रारम्भिक मूल रूप बने। इनमें विशेषतया महाभारत में विद्यमान अनेक बोलचाल के प्रयोग इस बात के साक्षी हैं । संस्कृत के विकास के प्रारम्भिक काल में बौद्ध तथा जैन दोनों ही इसके प्रति उदासीन थे, और 'छान्दस' अर्थात् वैदिक भाषा के लिए उनके मन में ब्राह्मणों की-सी श्रद्धा न थी । परन्तु धीरे-धीरे ये दोनों पन्थ भी संस्कृत को स्वीकार करने लगे। ( सम्भवतः ईसा पूर्व की शताब्दियों में) बौद्धों ने 'गाथा' नामक एक "मिश्रित संस्कृत" विकसित की जिसमें हमें प्राकृत का अत्यन्त कृत्रिम संस्कृतीकरण प्राप्त होता है । एक प्रकार से यह मभात्रा के द्वारा मात्रा की भावना एवं प्रनता के प्रति अर्पित की हुई श्रद्धांजलि - मात्र थी ।
उत्तरी भारत के अधिकांश भाग के अनार्य उपादानों का श्रार्थीकरण और समन्वित हिन्दू संस्कृति में उनका समावेश हो जाने के साथ-साथ, धर्म तथा दर्शन, ऐतिहासिक परम्परा, दन्तकथा तथा ग्राख्यान-साहित्य आदि सभी विषयों में संस्कृत भारतीय संस्कृति का प्रतीक बन गई । यह समन्वय या एकीकरण ईसा पूर्व की पहली सहस्राब्दि भर चलता रहा, और इस काल के द्वितीयार्द्ध में वह लगभग सम्पूर्ण हो चुका था । ( इस दृष्टि से देखने पर, 'वैदिक' के समक्ष 'हिन्दू संस्कृति', हेलेनिक संस्कृति की अपेक्षा अद्यतन प्रतीत होती है, क्योंकि हेलेनिक का विकास अपने सर्वोच्च शिखर पर ई० पू० ३०० वर्ष के पहले ही पहुँच चुका था। वास्तव में हिन्दूसंस्कृति की समकालीन तो यूरोप तथा अंतिक-प्राच्य की अनुक्रम से हेलेनिस्टिक या ग्रीक रोमन तथा ससानी या बैज़न्वाइन युग की संस्कृतियाँ थीं । ) उत्तरी भारत में जब यह एकीकरण की क्रिया सम्पन्न हो रही थी, उसी बीच आर्यभाषा को अपना माध्यम बनाकर यह समन्वित संस्कृति, भारत में एक अजेय शक्ति का रूप धारण कर चुकी थी । आर्यभाषा विभिन्न अनार्यभाषियों तथा आर्य भाषियों के बीच एकता का अमोघ शक्तिशाली बन्धन सिद्ध हुई। श्रार्यों के आगमन से पूर्व भारत में किसी एकभाषात्मक बन्धन की अनुपस्थिति से ( संस्कृत या प्रादेशिक प्राकृतों के रूप में ), आर्य भाषा
भारतवर्ष में आर्य भाषा का प्रसार
को उत्कर्ष का सबसे प्रथम तथा सबसे बड़ा अवसर मिल गया। इसकी पृष्ठभूमि में विद्यमान सांस्कृतिक समन्वय के कारण विभिन्न जनों को इसे अपनी भाषा बनाने में सरलता प्रतीत हुई। इस प्रकार आर्यभाषा अपने विभिन्न स्वरूपों एवं बोलियों के रूप में, पश्चिम में गन्धार से लेकर पूर्व में विदेह एवं मगध तक, तथा उत्तर में हिमालय के पाद देश लेकर मध्य भारत के वन-प्रदेश तक, तथा पश्चिम के सागर तट की ओर
गुजरात से होकर दक्षिण में, लगभग ६०० वर्ष ई० पू० तक प्रतिष्ठित हो गई । इसके पश्चात् वह बंगाल में दाक्षिणात्य में, तथा सुदूर दक्षिणी भारत में प्रसारित हुई । आर्यभाषा को ( प्राकृत एवं संस्कृत दोनों रूपों में) प्रवासी आर्यजन सुसंगठित और सुप्रतिष्ठित द्राविड़ जातियों में ले गए, जिनकी अपनी भाषा इतने दृढ़, सुनिश्चित रूप को पहुँच चुकी थी कि साधारण जीवन में उसकी जगह श्रार्यभाषा का स्थापित होना असम्भव था । उदा० श्रन्ध्र, कर्णाट तथा द्राविड़ जन थे। इनमें से श्रान्ध्र एवं कर्णाट की भाषाओं के अत्यधिक सुसभ्य होने पर भी कुछ स्थानों पर उन्हें आर्यभाषा के सामने सुकना पड़ा; परन्तु द्राविड़ ( या संकुचित अर्थ में तमिल) भाषा, श्रन्ध्र और कर्णाट की सीमाओं से भी बहुत सुदूर-दक्षिण होने के कारण, उस पर आर्यभाषा के दबाव या उसके समक्ष सुकने का द्राविड़ भाषा के लिए प्रश्न ही नहीं था । परन्तु सुसभ्य द्राविड़ भाषाओं पर आर्यभाषा के दोनों रूपों, संस्कृत तथा प्राकृत, का प्रभाव पड़ना ईसा पूर्व की शताब्दियों में ही हो गया था। प्राचीन तमिल में तमिल वेश में मौजूद प्राकृत शब्दों की संख्या काफ़ी आश्चर्यजनक है, तेलुगु और कन्नड़ के प्राकृत शब्द भी उल्लेखनीय संख्या में हैं, और जहाँ तक विद्वज्जन-व्यवहृत संस्कृत शब्दों का प्रश्न है तेलुगु, कन्नड़ तथा मलयालम भाषाएँ, इनके 'तत्सम्' रूपों से, जिनके वर्ण विन्यास भी ज्यों-के-त्यों हैं, बिलकुल लबालब भर गई । तमिल भी इस क्रिया से बच न सकी; हाँ, उसने आर्य-शब्दों के वर्ण विन्यास का आवश्यक रूप से सरलीकरण या तमिलीकरण अवश्य कर लिया । इस प्रकार संस्कृत का हिन्दू जीवन में वही स्थान दक्षिण में भी हो गया, जो उत्तर में था । संस्कृत अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र की एक समान आधारशिला बन गई।
ईसा पूर्व की शताब्दियों में जब भारत भूमि पर समन्वित या एकरूप 'आर्याना' हिन्दू संस्कृति का विकास हो रहा था, उसी समय भारत के बाहर भी उत्तर पश्चिम और पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व की ओर उसका प्रसार हो
रहा था - उत्तर तथा पश्चिम में स्थल मार्ग से, और पूर्व और दक्षिण-पूर्व में जल तथा स्थल मार्ग दोनों से यह इतिहास विलुप्त हो चुका है। परन्तु जिस प्रेरणा के वश होकर प्राचीन हिन्दुओं - ब्राह्मणों और बौद्धों-ने दुर्लङ्घ्य पर्वतों, मरुभूमियों तथा वनों को पार किया, और समुद्र के भय का सामना किया, वह केवल सांसारिक न होकर आध्यात्मिक भी थी। उसके पीछे केवल वाणिज्य - व्यापार के लाभ की आशा न थी, बल्कि ऋषियों तथा बुद्धों द्वारा उपदिष्ट तत्त्वज्ञान और त्याग मार्ग के उपदेश को समस्त विश्व तक पहुँचाने इच्छा भी थीं। कुछ मामलों में राजनीति तथा कूटनीति भी कारण थीं। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में भारतीय प्रवासियों का पंजाब और पश्चिमोत्तर प्रदेश से अपनी प्राकृत भाषा के साथ खोतन प्रदेश में जाकर बसने का पता चला है । यह पश्चिमोत्तरी 'गांधारी' प्राकृत (जैसा शाहबाज्ञगढ़ी और मानसेहरा के शिलालेखों से विदित होता है ) अभी मूल श्राभाना से उतनी दूर नहीं हटी थी जितनी ( सारनाथ तथा गिरनार के शिलालेखों की) पूर्वी और दक्षिण-पश्चिम की प्राकृते । मध्य एशिया ( दक्षिणी सिन-कियांग अथवा चीनी तुर्किस्तान) में इस प्राकृत का अपना स्वतन्त्र इतिहास बना निया (Niya) और अन्य स्थानों पर उपलब्ध बहुत से ईसा के पश्चात् की शताब्दियों के दस्तावेज़ों से यह बात स्पष्ट होती है कि यद्यपि इस भाषा में ध्वनि-विकास तथा रूप तत्व-सम्बन्धी एवं वाक्य विन्यास तथा शब्दावली विषयक कई नूतनताओं का समावेश हुआ, जिनमें स्थानीय ( ईरानी) और अनार्य भाषा पद्धतियों का प्रभाव सचिव होता है, फिर भी इसका भारतीय चार्य और संस्कृत स्वरूप अधिकांशतः ज्यों-का-त्यों बना रहा । दूसरी एक प्राकृत भाषा ई० पू० छठी शताब्दी के मध्य में गुजरात ( काठियावाड़) से सीलोन या लंका पहुँचाई गई । अत्यन्त प्राचीन सीलोनी किंवदन्ती के अनुसार, यह कार्य सोहपुर के राजकुमार विजय के साहसपूर्ण सैन्य प्रस्थान के पश्चात् तुरन्त ही हुआ । (भारत से जाकर लंका में बसने वाले सर्वप्रथम प्रवासी राजकुमार विजय दन्तकथाओं के पात्र न होकर ऐतिहासिक व्यक्ति भी हो सकते हैं। उनके बंगदेशीय होने का भी दावा किया गया है, परन्तु विशेषतः भाषा विषयक प्रमाणों से लेखक इस निश्चित मत पर पहुँच पाया है कि लंका में भारत से आने वाले मूल आर्यभाषी प्रवासियों के प्रतीक रूप होने की दृष्टि से विजय पूर्वी भारत के न होकर, पश्चिमी भारत के ही रहे होंगे। इस सम्बन्ध में देखिए लेखक की Origin and Development of the Bengali Language, कलकत्ता १६२६, पृ०
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वैदिक के बाद संस्कृत की प्रगति हम पहले देख चुके हैं। उसने अपनी प्रत्यय-विभक्तियों की बहुलता की भी सीमित करना आरम्भ कर दिया । बहुत से विषयों में उसने अनार्य भाषाओं की रीतियों को आत्मसात् कर लिया। शब्दों के विषय में, प्राचीन वैदिक शब्दनामों का प्रायः त्याग कर दिया गया, और उनकी जगह बोलचाल की भाषाओं में नये शब्द या गए । संस्कृत ने भी इसी मार्ग का अनुगमन किया, यद्यपि आवश्यकता पड़ने पर उसमें प्राचीन शब्दों का प्रयोग भी किया जाता था । उदाशून्य निम्नलिखित प्राचीन शब्दों - "अश्व = घोड़ा; अश्मन् = पत्थर; श्वान = कुत्ता; वृष = साँड़; अवि = भेड़; अनड्वन् या उतन् - बैल; वाह, रथ = गाड़ी, रथ, रै, राधः = धन-सम्पत्ति; सहः = शक्ति; दम, वेश घर; द्रु= पेड़; उदन् = पानी;, असृक् = खून; √ श्रद् = खाना; √ गृभ् = लेना; पकड़ लेना; √ हुन् = वार करना; √वज्ञ = बढ़ना; √ यज्= पूजा करना; विज्, वेज् = काँपना; / पृ ण् = भरना; √पत् = उड़ना; √सू = : Vवृ-ण् जन्म देना," इत्यादि के स्थान में बोलचाल की भाषा में अनुक्रम से "घोटक, प्रस्तर , कुक्कुर या कुकुर , षण्ड , मेष , बली वर्द, शकट , धन, बल, वाटिका , वृक्ष , जल , रक्त , √ खाद् , प्र / + श्रापू, √ मारय्, √वृध्, √पूजय्, कम्प्, √ पूरयू, √ उड्डीय्, / जनयू" आदि / नये शब्द प्रचलित हो गए, और ये ही आधुनिक भारतीय प्रार्य भाषा में बचे रहे हैं, न कि वैदिक तथा आभात्रा के प्रचलित प्राचीन शब्द । पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण का रूप हमेशा के लिए निश्चित कर दिया, परन्तु संस्कृत भाषा का पाणिनि के समय के मान-परिमाणों में बद्ध रहना सम्भव न था । संस्कृत भाषा में एक सतत विकास परिलक्षित होता है, और किसी भी संस्कृत के साधारण ग्रन्थ की शब्दावली, वाक्य-विन्यास तथा समयानुसार बराबर बदलती हुई विशेषताओं को देखकर उस ग्रन्थ का काल निर्णय सहज ही किया जा सकता है। पाणिनि के समय में 'लौकिक' या प्रचलित संस्कृत का भारतीय आार्य प्रादेशिक बोलियों में सम्भवतः वही स्थान रहा होगा, जो आधुनिक काल में हिन्दी या हिन्दुस्तानी का है । जनसाधारण सर्वत्र संस्कृत समझ लेता था, फिर चाहे वह पूरब का ही रहा हो, जहाँ से प्राकृत उद्भूत हुई जान पड़ती है। प्राचीन भारतीय नाटकों में उच्च वर्ग के पात्रों के संस्कृत में और निम्न वर्ग के तथा स्त्री-पात्रों के प्राकृत में बोलने की परिपाटी थी । इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इस साहित्यिक रूढ़ि का प्रचलन प्राकृत के विकास काल में लोगों द्वारा व्यवहृत भाषाओं को देखकर ही हुआ था । जन्मजात श्रार्यो, मिश्रित प्रार्यो, अनार्यो तथा आर्थीभूत अनार्यों में प्रचलित ऐतिहासिक गाथाएँ, वीरकाव्य और लोकगीत, आर्यभाषा के प्रचलित लौकिक रूपों में कहे या गाए जाते थे, एवं ये ही संस्कृत में अनूदित होकर महाभारत तथा पुराणों का प्रारम्भिक मूल रूप बने। इनमें विशेषतया महाभारत में विद्यमान अनेक बोलचाल के प्रयोग इस बात के साक्षी हैं । संस्कृत के विकास के प्रारम्भिक काल में बौद्ध तथा जैन दोनों ही इसके प्रति उदासीन थे, और 'छान्दस' अर्थात् वैदिक भाषा के लिए उनके मन में ब्राह्मणों की-सी श्रद्धा न थी । परन्तु धीरे-धीरे ये दोनों पन्थ भी संस्कृत को स्वीकार करने लगे। बौद्धों ने 'गाथा' नामक एक "मिश्रित संस्कृत" विकसित की जिसमें हमें प्राकृत का अत्यन्त कृत्रिम संस्कृतीकरण प्राप्त होता है । एक प्रकार से यह मभात्रा के द्वारा मात्रा की भावना एवं प्रनता के प्रति अर्पित की हुई श्रद्धांजलि - मात्र थी । उत्तरी भारत के अधिकांश भाग के अनार्य उपादानों का श्रार्थीकरण और समन्वित हिन्दू संस्कृति में उनका समावेश हो जाने के साथ-साथ, धर्म तथा दर्शन, ऐतिहासिक परम्परा, दन्तकथा तथा ग्राख्यान-साहित्य आदि सभी विषयों में संस्कृत भारतीय संस्कृति का प्रतीक बन गई । यह समन्वय या एकीकरण ईसा पूर्व की पहली सहस्राब्दि भर चलता रहा, और इस काल के द्वितीयार्द्ध में वह लगभग सम्पूर्ण हो चुका था । उत्तरी भारत में जब यह एकीकरण की क्रिया सम्पन्न हो रही थी, उसी बीच आर्यभाषा को अपना माध्यम बनाकर यह समन्वित संस्कृति, भारत में एक अजेय शक्ति का रूप धारण कर चुकी थी । आर्यभाषा विभिन्न अनार्यभाषियों तथा आर्य भाषियों के बीच एकता का अमोघ शक्तिशाली बन्धन सिद्ध हुई। श्रार्यों के आगमन से पूर्व भारत में किसी एकभाषात्मक बन्धन की अनुपस्थिति से , आर्य भाषा भारतवर्ष में आर्य भाषा का प्रसार को उत्कर्ष का सबसे प्रथम तथा सबसे बड़ा अवसर मिल गया। इसकी पृष्ठभूमि में विद्यमान सांस्कृतिक समन्वय के कारण विभिन्न जनों को इसे अपनी भाषा बनाने में सरलता प्रतीत हुई। इस प्रकार आर्यभाषा अपने विभिन्न स्वरूपों एवं बोलियों के रूप में, पश्चिम में गन्धार से लेकर पूर्व में विदेह एवं मगध तक, तथा उत्तर में हिमालय के पाद देश लेकर मध्य भारत के वन-प्रदेश तक, तथा पश्चिम के सागर तट की ओर गुजरात से होकर दक्षिण में, लगभग छः सौ वर्ष ईशून्य पूशून्य तक प्रतिष्ठित हो गई । इसके पश्चात् वह बंगाल में दाक्षिणात्य में, तथा सुदूर दक्षिणी भारत में प्रसारित हुई । आर्यभाषा को प्रवासी आर्यजन सुसंगठित और सुप्रतिष्ठित द्राविड़ जातियों में ले गए, जिनकी अपनी भाषा इतने दृढ़, सुनिश्चित रूप को पहुँच चुकी थी कि साधारण जीवन में उसकी जगह श्रार्यभाषा का स्थापित होना असम्भव था । उदाशून्य श्रन्ध्र, कर्णाट तथा द्राविड़ जन थे। इनमें से श्रान्ध्र एवं कर्णाट की भाषाओं के अत्यधिक सुसभ्य होने पर भी कुछ स्थानों पर उन्हें आर्यभाषा के सामने सुकना पड़ा; परन्तु द्राविड़ भाषा, श्रन्ध्र और कर्णाट की सीमाओं से भी बहुत सुदूर-दक्षिण होने के कारण, उस पर आर्यभाषा के दबाव या उसके समक्ष सुकने का द्राविड़ भाषा के लिए प्रश्न ही नहीं था । परन्तु सुसभ्य द्राविड़ भाषाओं पर आर्यभाषा के दोनों रूपों, संस्कृत तथा प्राकृत, का प्रभाव पड़ना ईसा पूर्व की शताब्दियों में ही हो गया था। प्राचीन तमिल में तमिल वेश में मौजूद प्राकृत शब्दों की संख्या काफ़ी आश्चर्यजनक है, तेलुगु और कन्नड़ के प्राकृत शब्द भी उल्लेखनीय संख्या में हैं, और जहाँ तक विद्वज्जन-व्यवहृत संस्कृत शब्दों का प्रश्न है तेलुगु, कन्नड़ तथा मलयालम भाषाएँ, इनके 'तत्सम्' रूपों से, जिनके वर्ण विन्यास भी ज्यों-के-त्यों हैं, बिलकुल लबालब भर गई । तमिल भी इस क्रिया से बच न सकी; हाँ, उसने आर्य-शब्दों के वर्ण विन्यास का आवश्यक रूप से सरलीकरण या तमिलीकरण अवश्य कर लिया । इस प्रकार संस्कृत का हिन्दू जीवन में वही स्थान दक्षिण में भी हो गया, जो उत्तर में था । संस्कृत अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र की एक समान आधारशिला बन गई। ईसा पूर्व की शताब्दियों में जब भारत भूमि पर समन्वित या एकरूप 'आर्याना' हिन्दू संस्कृति का विकास हो रहा था, उसी समय भारत के बाहर भी उत्तर पश्चिम और पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व की ओर उसका प्रसार हो रहा था - उत्तर तथा पश्चिम में स्थल मार्ग से, और पूर्व और दक्षिण-पूर्व में जल तथा स्थल मार्ग दोनों से यह इतिहास विलुप्त हो चुका है। परन्तु जिस प्रेरणा के वश होकर प्राचीन हिन्दुओं - ब्राह्मणों और बौद्धों-ने दुर्लङ्घ्य पर्वतों, मरुभूमियों तथा वनों को पार किया, और समुद्र के भय का सामना किया, वह केवल सांसारिक न होकर आध्यात्मिक भी थी। उसके पीछे केवल वाणिज्य - व्यापार के लाभ की आशा न थी, बल्कि ऋषियों तथा बुद्धों द्वारा उपदिष्ट तत्त्वज्ञान और त्याग मार्ग के उपदेश को समस्त विश्व तक पहुँचाने इच्छा भी थीं। कुछ मामलों में राजनीति तथा कूटनीति भी कारण थीं। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में भारतीय प्रवासियों का पंजाब और पश्चिमोत्तर प्रदेश से अपनी प्राकृत भाषा के साथ खोतन प्रदेश में जाकर बसने का पता चला है । यह पश्चिमोत्तरी 'गांधारी' प्राकृत अभी मूल श्राभाना से उतनी दूर नहीं हटी थी जितनी पूर्वी और दक्षिण-पश्चिम की प्राकृते । मध्य एशिया में इस प्राकृत का अपना स्वतन्त्र इतिहास बना निया और अन्य स्थानों पर उपलब्ध बहुत से ईसा के पश्चात् की शताब्दियों के दस्तावेज़ों से यह बात स्पष्ट होती है कि यद्यपि इस भाषा में ध्वनि-विकास तथा रूप तत्व-सम्बन्धी एवं वाक्य विन्यास तथा शब्दावली विषयक कई नूतनताओं का समावेश हुआ, जिनमें स्थानीय और अनार्य भाषा पद्धतियों का प्रभाव सचिव होता है, फिर भी इसका भारतीय चार्य और संस्कृत स्वरूप अधिकांशतः ज्यों-का-त्यों बना रहा । दूसरी एक प्राकृत भाषा ईशून्य पूशून्य छठी शताब्दी के मध्य में गुजरात से सीलोन या लंका पहुँचाई गई । अत्यन्त प्राचीन सीलोनी किंवदन्ती के अनुसार, यह कार्य सोहपुर के राजकुमार विजय के साहसपूर्ण सैन्य प्रस्थान के पश्चात् तुरन्त ही हुआ । (भारत से जाकर लंका में बसने वाले सर्वप्रथम प्रवासी राजकुमार विजय दन्तकथाओं के पात्र न होकर ऐतिहासिक व्यक्ति भी हो सकते हैं। उनके बंगदेशीय होने का भी दावा किया गया है, परन्तु विशेषतः भाषा विषयक प्रमाणों से लेखक इस निश्चित मत पर पहुँच पाया है कि लंका में भारत से आने वाले मूल आर्यभाषी प्रवासियों के प्रतीक रूप होने की दृष्टि से विजय पूर्वी भारत के न होकर, पश्चिमी भारत के ही रहे होंगे। इस सम्बन्ध में देखिए लेखक की Origin and Development of the Bengali Language, कलकत्ता एक हज़ार छः सौ छब्बीस, पृशून्य I w
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अग्निवीर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। सेना ने समय की मांग को ध्यान में रखते हुए भर्ती की प्रक्रिया में बदलाव किया है। नए पैटर्न पर उम्मीदवारों को सबसे पहले कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) को क्लीयर करना पड़ेगा। उसके बाद वह फिजिकल और मेडिकल सहित अन्य राउंड में आगे जा सकेगा। यह जानकारी सेना के रिक्रूमेंट सेल के कर्नल संतोष कुमार ने दी है। उन्होंने बताया कि अभी तक यह होता था कि सबसे पहले फिजिकल, मेडिकल और आखिर में परीक्षा होती थी।
पर नए बदलाव के तहत पहले कॉमन एंट्रेंस एग्जाम होगा। इससे दो फायदे होंगे कि सेना को ताकत के साथ-साथ स्मार्ट अग्निवीर मिलेंगे जो की समय की मांग है। अब युद्ध के तरीके बदल गए हैं। आमने-सामने के युद्ध काफी कम होते हैं। दूसरा भर्ती के दौरान होने वाले फंसाद लगभग न के बराबर रह जाएंगे। कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि बताया कि अब भर्ती का स्वरूप कुछ इस प्रकार रह जाएगा।
- कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि पहले चरण में वे सभी उम्मीदवार जिन्होंने www. joinindianarmy. nic. in में अपना रजिस्ट्रेशन और आवेदन किया है, केवल वही उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे। दूसरे चरण में विभिन्न राज्यों के भर्ती कार्यालयों द्वारा ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा या कॉमन एंट्रेंस एग्जाम में पास हुए उम्मीदवारों को उनके संबंधित एआरओ द्वारा एक ई-प्रवेश पत्र जारी किया जायेगा, जिसमें रैली भर्ती के दूसरे चरण की तारीख और उसके स्थान की पूर्ण जानकारी दी जाएगी। ये सभी उम्मीदवार शारीरिक मापदंड परीक्षा में शामिल होंगे। शारीरिक मापदंड परीक्षा में पास उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट देना होगा और उसके बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी और अग्निवीरों को ट्रेनिंग के लिए सेंटर भेजा जाएगा।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 16 फरवरी 2023 से 15 मार्च 2023 तक भारतीय सेना की www. joinindianarmy. nic. in वेबसाइट पर खुला रहेगा। रजिस्ट्रेशन का तरीका पहले जैसा ही होगा। उम्मीदवार अपने आधार कार्ड और 10वीं के सर्टिफिकेट से रजिस्टर हो सकता है। पारदर्शिता के लिए भारतीय सेना की वेबसाइट को Digilocker से लिंक किया गया है। ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पूरे देश में 176 स्थानों पर की जाएगी। । उम्मीदवार के पास पांच परीक्षा स्थानों के चयन करने का विकल्प होगा और उनको उन विकल्पों में से परीक्षा स्थान दिया जायेगा। रजिस्ट्रेशन में परीक्षा शुल्क के हिस्से के रूप में परीक्षा कराने वाली एजंेसी EDCIL ने ₹ 500/- के शुल्क का भुगतान प्रति उम्मीदवार मांगा था। सेना ने जिसमें से 50% खुद वहन करने का निर्णय लिया है। स्पष्ट है कि उम्मीदवार को 250 रुपए ही चुकाने होंगे।
सामान्य प्रवेश परीक्षा में 10 से 14 दिन पहले जॉइन इंडियन आर्मी की वेबसाइट पर एडमिट कार्ड उपलब्ध हो जायेगा। इसकी सूचना उम्मीदवार को SMS और उसकी रजिस्टर मेल आइडी पर भी भेज दिया जाएगा। परीक्षा केंद्र का सही पता एडमिट कार्ड में लिखा होगा। "पंजीकरण कैसे करें" और "ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में कैसे उपस्थित हों" सभी पर सूचनात्मक VIDEO तैयार किए गए हैं और ज्वाइन इंडियन आर्मी की बेवसाइट (www. joinindianarmy. nic) तथा YouTube पर भी अपलोड किए गए हैं। उम्मीदवार वेबसाइट के माध्यम से मॉक टेस्ट भी दे सकते हैं। ऑनलाइन परीक्षा कम्प्यूटर आधारित होगी। एंट्रेंस में पास होने के बाद उम्मीदवार को भर्ती रैली के लिए निश्चित स्थानों में बुलाया जायेगा। भर्ती रैली की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अंतिम मेरिट ऑनलाइन CEE और शारीरिक टेस्ट के अंकों को मिलाकर पहले की तरह ही तय की जाएगी।
- परीक्षा से संबंधित जानकारी देते कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि कॉमन एंट्रेस एग्जाम EDCIL एजेंसी कराएगी। यह एग्जाम घंटे का होगा। इसमें उम्मीदवार को 100 प्रश्नों के ओटी के आधार पर जवाब देने हैं। उसके बाद मेरिट तैयार की जाएगी। जो पास होंगे वह अगले चरण में पहुंच जाएंगे। इन परीक्षा में 17 साल 6 माह की उम्र से लेकर 21 वर्ष के युवा बैठ सकते हैं।
इस बदले पैटर्न पर हुई भर्ती का प्रमुख उद्देश्य भर्ती के दौरान सभी पहलुओं पर उम्मीदवार का ध्यान केंद्रित रहेंगा। परिणाम स्वरूप देश भर में बेहतर प्रचार-प्रसार होगा तथा भर्ती रैली में भीड़ को कम करेगा। प्रशासनिक व्यवस्थाओं की आवश्यकता भी कम होगी। प्रक्रिया अधिक आसान हो जाएगी। और उम्मीदवार के लिए भी आसान हो जायेगा। जिससे देश की वर्तमान तकनीक प्रगति के साथ तालमेल बिठा पाएगी।
कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि इस पैटर्न पर भर्ती में उम्मीदवार को स्वयं अहसास होगा कि प्रक्रिया पूर्ण रूप से स्वचलित है। जिसमें मानव हस्तक्षेप न के बराबर है। उम्मीदवार को सलाह दी जाती है वे दलालों के चंगुल में न फंसे क्योंकि वह आपकी किसी भी प्रकार की मदद नहीं कर सकता है। भारतीय सेना में चयन पूर्ण रूप से निष्पक्ष, पारदर्शी व मेरिट के आधार पर होता है।
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अग्निवीर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। सेना ने समय की मांग को ध्यान में रखते हुए भर्ती की प्रक्रिया में बदलाव किया है। नए पैटर्न पर उम्मीदवारों को सबसे पहले कॉमन एंट्रेंस एग्जाम को क्लीयर करना पड़ेगा। उसके बाद वह फिजिकल और मेडिकल सहित अन्य राउंड में आगे जा सकेगा। यह जानकारी सेना के रिक्रूमेंट सेल के कर्नल संतोष कुमार ने दी है। उन्होंने बताया कि अभी तक यह होता था कि सबसे पहले फिजिकल, मेडिकल और आखिर में परीक्षा होती थी। पर नए बदलाव के तहत पहले कॉमन एंट्रेंस एग्जाम होगा। इससे दो फायदे होंगे कि सेना को ताकत के साथ-साथ स्मार्ट अग्निवीर मिलेंगे जो की समय की मांग है। अब युद्ध के तरीके बदल गए हैं। आमने-सामने के युद्ध काफी कम होते हैं। दूसरा भर्ती के दौरान होने वाले फंसाद लगभग न के बराबर रह जाएंगे। कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि बताया कि अब भर्ती का स्वरूप कुछ इस प्रकार रह जाएगा। - कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि पहले चरण में वे सभी उम्मीदवार जिन्होंने www. joinindianarmy. nic. in में अपना रजिस्ट्रेशन और आवेदन किया है, केवल वही उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे। दूसरे चरण में विभिन्न राज्यों के भर्ती कार्यालयों द्वारा ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा या कॉमन एंट्रेंस एग्जाम में पास हुए उम्मीदवारों को उनके संबंधित एआरओ द्वारा एक ई-प्रवेश पत्र जारी किया जायेगा, जिसमें रैली भर्ती के दूसरे चरण की तारीख और उसके स्थान की पूर्ण जानकारी दी जाएगी। ये सभी उम्मीदवार शारीरिक मापदंड परीक्षा में शामिल होंगे। शारीरिक मापदंड परीक्षा में पास उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट देना होगा और उसके बाद मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी और अग्निवीरों को ट्रेनिंग के लिए सेंटर भेजा जाएगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सोलह फरवरी दो हज़ार तेईस से पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस तक भारतीय सेना की www. joinindianarmy. nic. in वेबसाइट पर खुला रहेगा। रजिस्ट्रेशन का तरीका पहले जैसा ही होगा। उम्मीदवार अपने आधार कार्ड और दसवीं के सर्टिफिकेट से रजिस्टर हो सकता है। पारदर्शिता के लिए भारतीय सेना की वेबसाइट को Digilocker से लिंक किया गया है। ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम पूरे देश में एक सौ छिहत्तर स्थानों पर की जाएगी। । उम्मीदवार के पास पांच परीक्षा स्थानों के चयन करने का विकल्प होगा और उनको उन विकल्पों में से परीक्षा स्थान दिया जायेगा। रजिस्ट्रेशन में परीक्षा शुल्क के हिस्से के रूप में परीक्षा कराने वाली एजंेसी EDCIL ने पाँच सौ रुपया/- के शुल्क का भुगतान प्रति उम्मीदवार मांगा था। सेना ने जिसमें से पचास% खुद वहन करने का निर्णय लिया है। स्पष्ट है कि उम्मीदवार को दो सौ पचास रुपयापए ही चुकाने होंगे। सामान्य प्रवेश परीक्षा में दस से चौदह दिन पहले जॉइन इंडियन आर्मी की वेबसाइट पर एडमिट कार्ड उपलब्ध हो जायेगा। इसकी सूचना उम्मीदवार को SMS और उसकी रजिस्टर मेल आइडी पर भी भेज दिया जाएगा। परीक्षा केंद्र का सही पता एडमिट कार्ड में लिखा होगा। "पंजीकरण कैसे करें" और "ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में कैसे उपस्थित हों" सभी पर सूचनात्मक VIDEO तैयार किए गए हैं और ज्वाइन इंडियन आर्मी की बेवसाइट तथा YouTube पर भी अपलोड किए गए हैं। उम्मीदवार वेबसाइट के माध्यम से मॉक टेस्ट भी दे सकते हैं। ऑनलाइन परीक्षा कम्प्यूटर आधारित होगी। एंट्रेंस में पास होने के बाद उम्मीदवार को भर्ती रैली के लिए निश्चित स्थानों में बुलाया जायेगा। भर्ती रैली की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अंतिम मेरिट ऑनलाइन CEE और शारीरिक टेस्ट के अंकों को मिलाकर पहले की तरह ही तय की जाएगी। - परीक्षा से संबंधित जानकारी देते कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि कॉमन एंट्रेस एग्जाम EDCIL एजेंसी कराएगी। यह एग्जाम घंटे का होगा। इसमें उम्मीदवार को एक सौ प्रश्नों के ओटी के आधार पर जवाब देने हैं। उसके बाद मेरिट तैयार की जाएगी। जो पास होंगे वह अगले चरण में पहुंच जाएंगे। इन परीक्षा में सत्रह साल छः माह की उम्र से लेकर इक्कीस वर्ष के युवा बैठ सकते हैं। इस बदले पैटर्न पर हुई भर्ती का प्रमुख उद्देश्य भर्ती के दौरान सभी पहलुओं पर उम्मीदवार का ध्यान केंद्रित रहेंगा। परिणाम स्वरूप देश भर में बेहतर प्रचार-प्रसार होगा तथा भर्ती रैली में भीड़ को कम करेगा। प्रशासनिक व्यवस्थाओं की आवश्यकता भी कम होगी। प्रक्रिया अधिक आसान हो जाएगी। और उम्मीदवार के लिए भी आसान हो जायेगा। जिससे देश की वर्तमान तकनीक प्रगति के साथ तालमेल बिठा पाएगी। कर्नल संतोष कुमार ने बताया कि इस पैटर्न पर भर्ती में उम्मीदवार को स्वयं अहसास होगा कि प्रक्रिया पूर्ण रूप से स्वचलित है। जिसमें मानव हस्तक्षेप न के बराबर है। उम्मीदवार को सलाह दी जाती है वे दलालों के चंगुल में न फंसे क्योंकि वह आपकी किसी भी प्रकार की मदद नहीं कर सकता है। भारतीय सेना में चयन पूर्ण रूप से निष्पक्ष, पारदर्शी व मेरिट के आधार पर होता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नगरोटा बगवां - नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के खप्परनाला, बालुग्लोआ, घीणा, मोरठ जसाई, रतियाड़ व बूसल में 'आपका विधायक आपके घर द्वार' कार्यक्रम में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकतर समस्याओं का निपटारा मौके पर ही कर दिया तथा शेष समस्याओं के शीघ्र समाधन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में बालूग्लोआ, घीणा, खरठ व बड़ोह सड़क के विस्तार एवं सुधारीकरण के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि 65 लाख रुपए की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घीणा के भवन का निर्माण किया जा रहा है, जबकि 15 लाख रुपए की राशि से इसी पंचायत में पशु औषधालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। श्री बाली ने कहा कि खप्परनाला गांव में सड़क निर्माण के लिए 20 लाख रुपए जारी किए गए हैं तथा इसी गांव की हरिजन बस्ती में पुलिया निर्माण के लिए 60 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 3. 50 करोड़ रुपए की लागत से ग्राम पंचायत जसाई मोरठ में लोहार-लाहड़ी संपर्क सड़क का नाबार्ड के माध्यम से निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रजियाड़, मुहालकड़, गौरियां संपर्क सड़क की डीपीआर बनाई जा रही है, जिस पर लगभग दो करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि बड़ोह डिग्री कालेज के भवन निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि दो करोड़ की लागत से बनने वाली थाना, बडग्रां व बूसल सड़क का कार्य प्रगति पर है। श्री बाली ने वनयार बस्ती में हैंडपंप व खव्बल खोली चौक पर वर्षाशालिका के निर्माण की घोषणा की। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मान सिंह चौधरी, प्रदेश कांग्रेस सचिव अजय वर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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नगरोटा बगवां - नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के खप्परनाला, बालुग्लोआ, घीणा, मोरठ जसाई, रतियाड़ व बूसल में 'आपका विधायक आपके घर द्वार' कार्यक्रम में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकतर समस्याओं का निपटारा मौके पर ही कर दिया तथा शेष समस्याओं के शीघ्र समाधन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में बालूग्लोआ, घीणा, खरठ व बड़ोह सड़क के विस्तार एवं सुधारीकरण के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि पैंसठ लाख रुपए की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घीणा के भवन का निर्माण किया जा रहा है, जबकि पंद्रह लाख रुपए की राशि से इसी पंचायत में पशु औषधालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। श्री बाली ने कहा कि खप्परनाला गांव में सड़क निर्माण के लिए बीस लाख रुपए जारी किए गए हैं तथा इसी गांव की हरिजन बस्ती में पुलिया निर्माण के लिए साठ लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तीन. पचास करोड़ रुपए की लागत से ग्राम पंचायत जसाई मोरठ में लोहार-लाहड़ी संपर्क सड़क का नाबार्ड के माध्यम से निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रजियाड़, मुहालकड़, गौरियां संपर्क सड़क की डीपीआर बनाई जा रही है, जिस पर लगभग दो करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि बड़ोह डिग्री कालेज के भवन निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि दो करोड़ की लागत से बनने वाली थाना, बडग्रां व बूसल सड़क का कार्य प्रगति पर है। श्री बाली ने वनयार बस्ती में हैंडपंप व खव्बल खोली चौक पर वर्षाशालिका के निर्माण की घोषणा की। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मान सिंह चौधरी, प्रदेश कांग्रेस सचिव अजय वर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। भारत मैट्रीमोनी पर अपना सही संगी चुनें - निःशुल्क रजिस्टर करें !
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झील बनाईं जाएँगीं ? ? ? ? ? ? ?
आप हमें 5 साल दीजिए 5 साल में यमुना को इतना खुबसूरत बना देंगे कि आप वहां बच्चों के साथ पिकनिक मनाने जाएंगे।
छठ घाट तुड़वाना महापाप है, आस्था का अपमान है ये, बिना अन्न जल का बेहद कठिन व्रत करने वाली माताओं बहनों के साथ घोर अत्याचार है ये ! !
आपने देखा क्या ?
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झील बनाईं जाएँगीं ? ? ? ? ? ? ? आप हमें पाँच साल दीजिए पाँच साल में यमुना को इतना खुबसूरत बना देंगे कि आप वहां बच्चों के साथ पिकनिक मनाने जाएंगे। छठ घाट तुड़वाना महापाप है, आस्था का अपमान है ये, बिना अन्न जल का बेहद कठिन व्रत करने वाली माताओं बहनों के साथ घोर अत्याचार है ये ! ! आपने देखा क्या ?
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You Searched For "modi govt"
आरोप है कि संकट से निपटने के लिए पंजाब को केंद्र से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है."?
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अन्य प्रस्तावों में कैश सिस्टम के आधार पर जीएसटी लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है।
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है.
उन्होंने कहा कि सरकार को इसका हल निकालने के लिए विपक्षी दलों और एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए.
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You Searched For "modi govt" आरोप है कि संकट से निपटने के लिए पंजाब को केंद्र से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है."? वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अन्य प्रस्तावों में कैश सिस्टम के आधार पर जीएसटी लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है। देश में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को इसका हल निकालने के लिए विपक्षी दलों और एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए.
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बैठक का संचालन
बैठक बहुत लंबी नहीं खींचे और विषय केंद्रित ही रहे।
• प्रसंगानुकूल दृष्टांत देने और सुनने का अवसर निकालें । इनके बारे में रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ।
बैठक की कार्यसूची को प्रसंग में बैठक के आयोजन के समय आप किन-किन पक्षों को ध्यान में रखेंगे?
आधारभूत विचारों को स्पष्ट करते चलें और आवश्यकता पड़ने पर उनकी व्याख्या भी प्रस्तुत करें।
विभिन्न दृष्टिकोण वाले विचारों को प्रकट करने की बात कहें, नए-नए विचारों को प्रोत्साहित करते रहें।
जहाँ उचित लगे वहाँ विचारोत्तेजक तकनीकों को काम में लें।
विचारों को नोट करते चलें ।
दृश्य प्रस्तुति के लिए शोख रंगों और बड़े आकारों का प्रयोग करें ।
चित्रों के साथ-साथ लिखित भाषा का प्रयोग भी होना चाहिए।
प्रमुख बिन्दुओं को रेखांकित करें।
हर पंक्ति में 7 शब्दों से अधिक शब्द और हर चार्ट में 7 पंक्तियों से अधिक पंक्तियाँ न हों।
बैठक की समाप्ति पर उन्हें नोट लेने वाले व्यक्ति को सौंप दिया जाए ताकि कार्यवृत्त में उनका उल्लेख किया जा सके।
सभी चार्टों को इस प्रकार सजाएँ कि यदि आवश्यकता पड़े तो संदर्भ को पुनः दिखाया जा सके।
सदस्यों से मुक्तोत्तर वाले प्रश्न पूछें।
विचारों की दृष्टि के केंद्र में रखें न कि व्यक्तियों को ।
प्रत्येक विषय के लिए जितना समय नियत किया गया हो उसे उतने समय में ही निपटने का प्रयत्न करें। यदि आपको लगे कि विचार-विनिमय का समय खींचता जा रहा है तो सब लोगों के संक्षिप्त सुझाव जानें कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना उचित होगा और / या इसकी पूर्ति के लिए किस विषय के समय में कटौती की जा सकती है।
बैठकों का प्रबंधन
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बैठक का संचालन बैठक बहुत लंबी नहीं खींचे और विषय केंद्रित ही रहे। • प्रसंगानुकूल दृष्टांत देने और सुनने का अवसर निकालें । इनके बारे में रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ। बैठक की कार्यसूची को प्रसंग में बैठक के आयोजन के समय आप किन-किन पक्षों को ध्यान में रखेंगे? आधारभूत विचारों को स्पष्ट करते चलें और आवश्यकता पड़ने पर उनकी व्याख्या भी प्रस्तुत करें। विभिन्न दृष्टिकोण वाले विचारों को प्रकट करने की बात कहें, नए-नए विचारों को प्रोत्साहित करते रहें। जहाँ उचित लगे वहाँ विचारोत्तेजक तकनीकों को काम में लें। विचारों को नोट करते चलें । दृश्य प्रस्तुति के लिए शोख रंगों और बड़े आकारों का प्रयोग करें । चित्रों के साथ-साथ लिखित भाषा का प्रयोग भी होना चाहिए। प्रमुख बिन्दुओं को रेखांकित करें। हर पंक्ति में सात शब्दों से अधिक शब्द और हर चार्ट में सात पंक्तियों से अधिक पंक्तियाँ न हों। बैठक की समाप्ति पर उन्हें नोट लेने वाले व्यक्ति को सौंप दिया जाए ताकि कार्यवृत्त में उनका उल्लेख किया जा सके। सभी चार्टों को इस प्रकार सजाएँ कि यदि आवश्यकता पड़े तो संदर्भ को पुनः दिखाया जा सके। सदस्यों से मुक्तोत्तर वाले प्रश्न पूछें। विचारों की दृष्टि के केंद्र में रखें न कि व्यक्तियों को । प्रत्येक विषय के लिए जितना समय नियत किया गया हो उसे उतने समय में ही निपटने का प्रयत्न करें। यदि आपको लगे कि विचार-विनिमय का समय खींचता जा रहा है तो सब लोगों के संक्षिप्त सुझाव जानें कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना उचित होगा और / या इसकी पूर्ति के लिए किस विषय के समय में कटौती की जा सकती है। बैठकों का प्रबंधन
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नई दिल्लीः इस साल के शुरूआत में HMD Global ने कई अफोर्डेबल Nokia स्मार्टफोन्स की घोषणा की थी। ये सभी स्मार्टफोन्स एंट्री लेवल स्पेसफिकेशन्स के साथ आते हैं। इनमें से एक स्मार्टफोन Nokia G20 को भारत में लॉन्च कर दिया गया है।
Nokia G20 को Amazon India पर लिस्ट कर दिया गया है। इसकी कीमत 12,999 रुपये रखी गई है। ये जल्द ही सेल के लिए उपलब्ध होगा। इसे ऐमेजॉन पर 7 जुलाई से बेचा जाएगा। फोन को Nokia के ऑनलाइन स्टोर से भी सेल किया जाएगा। Nokia ने C और X सीरीज से फिलहाल दूसरे मॉडल को रिलीज नहीं किया है। Nokia G20 को दो कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। इस स्मार्टफोन को नाइट और ग्लेशियर कलर में उतारा गया है। फिलहाल इसे एक ही RAM वेरिएंट ऑप्शन में उतारा गया है।
इस स्मार्टफोन के साथ कंपनी 2 साल Android OS अपग्रेड और तीन साल तक महीने की सिक्योरिटी पैच देने की बात कही है। ये स्मार्टफोन Android 11 आउट ऑफ द बॉक्स पर चलता है। इसके साथ कोई भी थर्ड पार्टी ऐप्स नहीं दिए गए हैं।
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नई दिल्लीः इस साल के शुरूआत में HMD Global ने कई अफोर्डेबल Nokia स्मार्टफोन्स की घोषणा की थी। ये सभी स्मार्टफोन्स एंट्री लेवल स्पेसफिकेशन्स के साथ आते हैं। इनमें से एक स्मार्टफोन Nokia Gबीस को भारत में लॉन्च कर दिया गया है। Nokia Gबीस को Amazon India पर लिस्ट कर दिया गया है। इसकी कीमत बारह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये रखी गई है। ये जल्द ही सेल के लिए उपलब्ध होगा। इसे ऐमेजॉन पर सात जुलाई से बेचा जाएगा। फोन को Nokia के ऑनलाइन स्टोर से भी सेल किया जाएगा। Nokia ने C और X सीरीज से फिलहाल दूसरे मॉडल को रिलीज नहीं किया है। Nokia Gबीस को दो कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। इस स्मार्टफोन को नाइट और ग्लेशियर कलर में उतारा गया है। फिलहाल इसे एक ही RAM वेरिएंट ऑप्शन में उतारा गया है। इस स्मार्टफोन के साथ कंपनी दो साल Android OS अपग्रेड और तीन साल तक महीने की सिक्योरिटी पैच देने की बात कही है। ये स्मार्टफोन Android ग्यारह आउट ऑफ द बॉक्स पर चलता है। इसके साथ कोई भी थर्ड पार्टी ऐप्स नहीं दिए गए हैं।
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सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, धार्मिक और नामालूम कितने विवादों का समाधान हो सकता है। विरोधों के शमन में तो इस प्रणाली का उदय ही हुआ है। 'स्याद्वाद', असल में एक ऐसा बिन्दु है, जहां से सत्य को इधर के, उधर के दोनों ही तटों पर देखा और पाया जा सकता है। अन्धों ने जब महावत से कहा - 'हमें हाथी दिखाओ, बताओ वह कैसा है ?" तो महावत ने कहा - 'इसमें मेरी क्या जरूरत है, यह हाथी, ये तुम; अपनी हथेलियों की आँखों से देख लो ।' हथेली की आँख छोटी पड़ गयी । उसने खण्ड को अन्तिम माना । समग्रता टूट गयी । तो फिर महावत ने उन्हें आँख वाले के पास भेजा, उसने सबकी हथेलियाँ जोड़कर हाथी बना दिया। अंधों को हाथी मिल गया। स्याद्वाद उस महावत की जगह है जो सत्य को अखण्ड देना चाहता है और आदमी उसके हाथी को अपनी पूर्वाग्रही हथेलियों में समेटना चाहता है। यह असंभव ही है । यह है स्यात्' की कथा ।
● कर्म दूषित हो गया हो तो ज्यादा घबराने की बात नहीं, वृत्ति दूषित न होने दो। वृत्ति को दूषित होने से बचाने का उपाय है- मन को भी दोषों से बचाने का प्रयत्न करना ।
पाप को पेट में मत रख, उगल दे। जहर तो पेट में रख लेने से शरीर को ही मारता है। किन्तु पाप तो सारे सत्य को ही मिटा देता है । जहाँ गुप्तता है, वहाँ कोई बुराई अवश्य है। बुराई को छिपाना, बुराई को बढ़ाना है ।
विकार, चोरों की तरह, गाफिल मनुष्य के घर में ही संघ लगाते हैं । जागरूकता उनके हमले से बचाव की सबसे बड़ी ढाल है ।
जिस प्रकार जहाज का कप्तान अपनी नोट-बुक में यात्रा तथा जहाज सम्बन्धी बातें लिखता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष भाव से प्रतिदिन के कार्यक्रम के बारे में लिखना चाहिए और अगले दिन उसे सोचना चाहिए कि उसके काम में जो त्रुटियाँ और बोष रह गए हैं, उनको दूर करने में वह कहाँ तक सफल हुआ है।
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सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, धार्मिक और नामालूम कितने विवादों का समाधान हो सकता है। विरोधों के शमन में तो इस प्रणाली का उदय ही हुआ है। 'स्याद्वाद', असल में एक ऐसा बिन्दु है, जहां से सत्य को इधर के, उधर के दोनों ही तटों पर देखा और पाया जा सकता है। अन्धों ने जब महावत से कहा - 'हमें हाथी दिखाओ, बताओ वह कैसा है ?" तो महावत ने कहा - 'इसमें मेरी क्या जरूरत है, यह हाथी, ये तुम; अपनी हथेलियों की आँखों से देख लो ।' हथेली की आँख छोटी पड़ गयी । उसने खण्ड को अन्तिम माना । समग्रता टूट गयी । तो फिर महावत ने उन्हें आँख वाले के पास भेजा, उसने सबकी हथेलियाँ जोड़कर हाथी बना दिया। अंधों को हाथी मिल गया। स्याद्वाद उस महावत की जगह है जो सत्य को अखण्ड देना चाहता है और आदमी उसके हाथी को अपनी पूर्वाग्रही हथेलियों में समेटना चाहता है। यह असंभव ही है । यह है स्यात्' की कथा । ● कर्म दूषित हो गया हो तो ज्यादा घबराने की बात नहीं, वृत्ति दूषित न होने दो। वृत्ति को दूषित होने से बचाने का उपाय है- मन को भी दोषों से बचाने का प्रयत्न करना । पाप को पेट में मत रख, उगल दे। जहर तो पेट में रख लेने से शरीर को ही मारता है। किन्तु पाप तो सारे सत्य को ही मिटा देता है । जहाँ गुप्तता है, वहाँ कोई बुराई अवश्य है। बुराई को छिपाना, बुराई को बढ़ाना है । विकार, चोरों की तरह, गाफिल मनुष्य के घर में ही संघ लगाते हैं । जागरूकता उनके हमले से बचाव की सबसे बड़ी ढाल है । जिस प्रकार जहाज का कप्तान अपनी नोट-बुक में यात्रा तथा जहाज सम्बन्धी बातें लिखता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष भाव से प्रतिदिन के कार्यक्रम के बारे में लिखना चाहिए और अगले दिन उसे सोचना चाहिए कि उसके काम में जो त्रुटियाँ और बोष रह गए हैं, उनको दूर करने में वह कहाँ तक सफल हुआ है।
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भोपाल में 11वीं के एक छात्र ने स्कूल की बगल वाली 3 मंजिला बिल्डिंग से छलांग लगा दी। एक युवक उसे बचाने छत पर भी पहुंचा। वह उसे पकड़ पाता, उससे पहले छात्र कूद गया और नीचे खड़े SI पर गिरा। छात्र को बचाने के प्रयास में SI का हाथ टूट गया। छात्र भी घायल हुआ है। छात्र ने ये कदम उठाने से पहले बुधवार रात को एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखी थी- सॉरी मां कल शायद मैं नहीं रहूंगा। उसके दोस्तों ने इसकी वजह पूछी, लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
मामला गुरुवार सुबह कोलार इलाके का है। छात्र को शाहपुरा पुलिस ने चोरी के आरोप में पकड़ा था। इसके बाद साथी छात्र उसे चोर कहकर बुलाने लगे। स्कूल प्रिंसिपल से बात करने के बाद वह बाहर आया और सुसाइड करने की कोशिश की।
घटना की जानकारी लगने के बाद छात्र की मां और पिता जेके अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मां रोती रही। बताया कि बेटे को पढ़ने नहीं दिया जा रहा था। इससे वह तनाव में आ गया। उसने सोशल मीडिया में एक दिन पहले लिखा- सॉरी मां, कल शायद मैं नहीं रहूंगा मां. . . । दोस्तों ने पोस्ट के बारे में पूछा भी था, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया।
दानिश कुंज कोलार रोड निवासी 18 साल का छात्र प्राइवेट स्कूल में 11वीं का स्टूडेंट है। पिछले साल शाहपुरा पुलिस ने मंदिर में चोरी के आरोप में उसे पकड़ा था, तब वह नाबालिग था। ऐसे में स्कूल के बच्चे उसे चोर कहकर चिढ़ाने लगे। उसको स्कूल मैनेजमेंट ने यह कहकर स्कूल आने से मना कर दिया। उसका कहना था- बच्चे विरोध कर रहे हैं कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल लड़कों के साथ वे नहीं पढ़ेंगे।
खबर आगे पढ़ने से पहले आप अपनी राय यहां दे सकते हैं।
गुरुवार को छात्र स्कूल पहुंचा। स्कूल प्रिंसिपल से बात करने के बाद वह बाहर आया। इसके बाद स्कूल के बगल वाली तीन मंजिला बिल्डिंग पर चढ़कर सुसाइड की धमकी देने लगा। इसी बीच कोलार थाने के SI जयसिंह समेत तीन पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। वे उसे नीचे उतरने के लिए मनाने लगे। इसी बीच एक युवक छत पर पहुंचा। वह छात्र को पकड़ने की कोशिश करता है, तभी वह नीचे कूद जाता है। उसे छलांग लगाते देख SI जय कुमार ने जमीन पर गिरने से पहले छात्र को पकड़ा। इस कोशिश में उनके सीने, हाथ में गंभीर चोट लगी। दोनों को तुरंत ही अस्पताल पहुंचाया गया।
छात्र एग्जाम की जानकारी लेने के लिए स्कूल गया था। स्कूल मैनेजमेंट को उसने बताया कि वह स्कूल आएगा। फीस भी दे रहा है। इस पर उसकी स्कूल स्टाफ से बहस हो गई। वह गुस्से में स्कूल से बाहर आया। इसके बाद स्कूल की बगल की बिल्डिंग में पहुंचा। वह छत से कूद जाने को चिल्लाने लगा। आसपास के लोगों ने तुरंत ही पुलिस को सूचना दी।
आदरणीय महोदय,
नम्रतापूर्वक, मैं यह बताना चाहूंगा कि मैंने इस वर्ष आपके विद्यालय से 10वीं की पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, मेरे माता-पिता ने मेरी आगे की पढ़ाई हेतु मानसरोवर पब्लिक स्कूल वाराणसी में मेरा नामांकन करने का फैसला किया है। इसलिए, वहां प्रवेश लेने के लिए मुझे SLC की जरूरत है। अतः आपसे अनुरोध है की कृपया विद्यालय पत्र निर्गत करने की कृपा करें। मैंने अपने सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया है। इससे संबंधित दस्तावेज और मार्कशीट की प्रतिलिपी इस आवेदन के साथ संलग्न हैं।
छात्र के पिता ने बताया कि हमारे बच्चे के ऊपर चोरी का इल्जाम लगा था। इस कारण प्रिंसिपल ने कहा था कि इनका एडमिशन रेगुलर में ही रहेगा, स्कूल में नहीं आने देंगे, सिर्फ पेपर देने के लिए बुला लेंगे। अब पेपर आ गया, तो मना कर रहे हैं। नाबालिग होने की वजह से जेल नहीं गया था, लेकिन केस चल रहा है। अभी 30 जनवरी को पेशी करवाकर लाए थे।
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भोपाल में ग्यारहवीं के एक छात्र ने स्कूल की बगल वाली तीन मंजिला बिल्डिंग से छलांग लगा दी। एक युवक उसे बचाने छत पर भी पहुंचा। वह उसे पकड़ पाता, उससे पहले छात्र कूद गया और नीचे खड़े SI पर गिरा। छात्र को बचाने के प्रयास में SI का हाथ टूट गया। छात्र भी घायल हुआ है। छात्र ने ये कदम उठाने से पहले बुधवार रात को एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखी थी- सॉरी मां कल शायद मैं नहीं रहूंगा। उसके दोस्तों ने इसकी वजह पूछी, लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया। मामला गुरुवार सुबह कोलार इलाके का है। छात्र को शाहपुरा पुलिस ने चोरी के आरोप में पकड़ा था। इसके बाद साथी छात्र उसे चोर कहकर बुलाने लगे। स्कूल प्रिंसिपल से बात करने के बाद वह बाहर आया और सुसाइड करने की कोशिश की। घटना की जानकारी लगने के बाद छात्र की मां और पिता जेके अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मां रोती रही। बताया कि बेटे को पढ़ने नहीं दिया जा रहा था। इससे वह तनाव में आ गया। उसने सोशल मीडिया में एक दिन पहले लिखा- सॉरी मां, कल शायद मैं नहीं रहूंगा मां. . . । दोस्तों ने पोस्ट के बारे में पूछा भी था, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। दानिश कुंज कोलार रोड निवासी अट्ठारह साल का छात्र प्राइवेट स्कूल में ग्यारहवीं का स्टूडेंट है। पिछले साल शाहपुरा पुलिस ने मंदिर में चोरी के आरोप में उसे पकड़ा था, तब वह नाबालिग था। ऐसे में स्कूल के बच्चे उसे चोर कहकर चिढ़ाने लगे। उसको स्कूल मैनेजमेंट ने यह कहकर स्कूल आने से मना कर दिया। उसका कहना था- बच्चे विरोध कर रहे हैं कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल लड़कों के साथ वे नहीं पढ़ेंगे। खबर आगे पढ़ने से पहले आप अपनी राय यहां दे सकते हैं। गुरुवार को छात्र स्कूल पहुंचा। स्कूल प्रिंसिपल से बात करने के बाद वह बाहर आया। इसके बाद स्कूल के बगल वाली तीन मंजिला बिल्डिंग पर चढ़कर सुसाइड की धमकी देने लगा। इसी बीच कोलार थाने के SI जयसिंह समेत तीन पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। वे उसे नीचे उतरने के लिए मनाने लगे। इसी बीच एक युवक छत पर पहुंचा। वह छात्र को पकड़ने की कोशिश करता है, तभी वह नीचे कूद जाता है। उसे छलांग लगाते देख SI जय कुमार ने जमीन पर गिरने से पहले छात्र को पकड़ा। इस कोशिश में उनके सीने, हाथ में गंभीर चोट लगी। दोनों को तुरंत ही अस्पताल पहुंचाया गया। छात्र एग्जाम की जानकारी लेने के लिए स्कूल गया था। स्कूल मैनेजमेंट को उसने बताया कि वह स्कूल आएगा। फीस भी दे रहा है। इस पर उसकी स्कूल स्टाफ से बहस हो गई। वह गुस्से में स्कूल से बाहर आया। इसके बाद स्कूल की बगल की बिल्डिंग में पहुंचा। वह छत से कूद जाने को चिल्लाने लगा। आसपास के लोगों ने तुरंत ही पुलिस को सूचना दी। आदरणीय महोदय, नम्रतापूर्वक, मैं यह बताना चाहूंगा कि मैंने इस वर्ष आपके विद्यालय से दसवीं की पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, मेरे माता-पिता ने मेरी आगे की पढ़ाई हेतु मानसरोवर पब्लिक स्कूल वाराणसी में मेरा नामांकन करने का फैसला किया है। इसलिए, वहां प्रवेश लेने के लिए मुझे SLC की जरूरत है। अतः आपसे अनुरोध है की कृपया विद्यालय पत्र निर्गत करने की कृपा करें। मैंने अपने सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया है। इससे संबंधित दस्तावेज और मार्कशीट की प्रतिलिपी इस आवेदन के साथ संलग्न हैं। छात्र के पिता ने बताया कि हमारे बच्चे के ऊपर चोरी का इल्जाम लगा था। इस कारण प्रिंसिपल ने कहा था कि इनका एडमिशन रेगुलर में ही रहेगा, स्कूल में नहीं आने देंगे, सिर्फ पेपर देने के लिए बुला लेंगे। अब पेपर आ गया, तो मना कर रहे हैं। नाबालिग होने की वजह से जेल नहीं गया था, लेकिन केस चल रहा है। अभी तीस जनवरी को पेशी करवाकर लाए थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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वैष्णो देवी के दर्शन को पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़ में शनिवार सुबह भगदड़ मचने से 12 लोगों की मौत हो गई और 15 लोग जख्मी हो गए। हादसे में घायलों का इलाज नारायणा अस्पताल में जारी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगदड़ की घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया और भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को 50,000 रुपये देने का ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने भी कटरा में माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया। मृतकों में से 8 की पहचान उत्तर प्रदेश के अरुण प्रताप सिंह (30), धर्मवीर सिंह (35), विनीत कुमार (38) और शमता सिंह (35), दिल्ली के विनय कुमार (24) और सोनू पांडे (24), हरियाणा की ममता (38) और जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के देशराज कुमार (26) रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि बाकी मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
प्रदेश पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया, 'घटना सुबह करीब 2:45 बजे हुई और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार एक तर्क छिड़ा जिसके परिणामस्वरूप लोगों ने एक-दूसरे को धक्का दिया और फिर भगदड़ मच गई।' जानकारी के अनुसार भगदड़ मंदिर के गर्भगृह के बाहर गेट नंबर-3 के पास हुई। माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि उन्होंने स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्रियों जितेंद्र सिंह तथा नित्यानंद राय से बात की है। मोदी ने ट्वीट किया, "माता वैष्णो देवी भवन में मची भगदड़ से लोगों की जान जाने से अत्यंत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी, मंत्रियों जितेंद्र सिंह जी, नित्यानंद राय जी से बात की और स्थिति की जानकारी ली।' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यालय ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, 'श्री माता वैष्णो देवी स्थल पर भगदड़ के कारण लोगों की मृत्यु से बेहद दुखी हूं। मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।' सिन्हा ने कहा, 'माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी से बात की। उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। आज की भगदड़ की घटना की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया गया है। प्रधान सचिव (गृह), जम्मू की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया है जिसमें एडीजीपी, जम्मू और संभागीय आयुक्त सदस्य होंगे।' अधिकारियों ने बताया कि नए साल की शुरुआत पर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। वरिष्ठ अधिकारी और श्राइन बोर्ड के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद हैं। अधिकारियों ने कहा कि मंदिर खुला है और अंतिम रिपोर्ट आने तक श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे थे।
उधर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में मची भगदड़ के बाद उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू-कश्मीर के कटरा के लिए रवाना हो गए हैं। सिंह ने शनिवार को ट्वीट किया, "मैं माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में हुई दुर्घटना के कारण पैदा हुए हालात का जायजा लेने के लिए तत्काल कटरा रवाना हो रहा हूं। मैं प्रशासन के साथ विस्तार से चर्चा करूंगा और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जानकारी दूंगा।" उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री भगदड़ के कारण पैदा हुए हालात पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जम्मू कश्मीर के माता वैष्णो देवी मंदिर में शविवार को हुई भगदड़ की घटना पर दुख व्यक्त किया। गांधी ने ट्वीट किया,"माता वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।" कांग्रेस नेता ने घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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वैष्णो देवी के दर्शन को पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़ में शनिवार सुबह भगदड़ मचने से बारह लोगों की मौत हो गई और पंद्रह लोग जख्मी हो गए। हादसे में घायलों का इलाज नारायणा अस्पताल में जारी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगदड़ की घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया और भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को पचास,शून्य रुपयापये देने का ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने भी कटरा में माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को दस लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया। मृतकों में से आठ की पहचान उत्तर प्रदेश के अरुण प्रताप सिंह , धर्मवीर सिंह , विनीत कुमार और शमता सिंह , दिल्ली के विनय कुमार और सोनू पांडे , हरियाणा की ममता और जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के देशराज कुमार रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि बाकी मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। प्रदेश पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया, 'घटना सुबह करीब दो:पैंतालीस बजे हुई और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार एक तर्क छिड़ा जिसके परिणामस्वरूप लोगों ने एक-दूसरे को धक्का दिया और फिर भगदड़ मच गई।' जानकारी के अनुसार भगदड़ मंदिर के गर्भगृह के बाहर गेट नंबर-तीन के पास हुई। माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू से करीब पचास किलोग्राममीटर दूर त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि उन्होंने स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय मंत्रियों जितेंद्र सिंह तथा नित्यानंद राय से बात की है। मोदी ने ट्वीट किया, "माता वैष्णो देवी भवन में मची भगदड़ से लोगों की जान जाने से अत्यंत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी, मंत्रियों जितेंद्र सिंह जी, नित्यानंद राय जी से बात की और स्थिति की जानकारी ली।' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यालय ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, 'श्री माता वैष्णो देवी स्थल पर भगदड़ के कारण लोगों की मृत्यु से बेहद दुखी हूं। मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।' सिन्हा ने कहा, 'माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी से बात की। उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। आज की भगदड़ की घटना की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया गया है। प्रधान सचिव , जम्मू की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया है जिसमें एडीजीपी, जम्मू और संभागीय आयुक्त सदस्य होंगे।' अधिकारियों ने बताया कि नए साल की शुरुआत पर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। वरिष्ठ अधिकारी और श्राइन बोर्ड के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद हैं। अधिकारियों ने कहा कि मंदिर खुला है और अंतिम रिपोर्ट आने तक श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे थे। उधर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में मची भगदड़ के बाद उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए जम्मू-कश्मीर के कटरा के लिए रवाना हो गए हैं। सिंह ने शनिवार को ट्वीट किया, "मैं माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में हुई दुर्घटना के कारण पैदा हुए हालात का जायजा लेने के लिए तत्काल कटरा रवाना हो रहा हूं। मैं प्रशासन के साथ विस्तार से चर्चा करूंगा और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जानकारी दूंगा।" उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री भगदड़ के कारण पैदा हुए हालात पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जम्मू कश्मीर के माता वैष्णो देवी मंदिर में शविवार को हुई भगदड़ की घटना पर दुख व्यक्त किया। गांधी ने ट्वीट किया,"माता वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।" कांग्रेस नेता ने घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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चेन्नई, 27 जनवरी (आईएएनएस)। तुगलक के संपादक एस. गुरुमूर्ति के आवास पर पेट्रोल बम से हमला करने की कोशिश को नाकाम करते हुए चेन्नई पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गुरुमूर्ति के आवास पर रविवार सुबह छह बाइक सवार पेट्रोल बम फेंकने की योजना बना रहे थे, लेकिन पुलिस सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने वाहन की गति तेज कर दी।
गुरुमूर्ति के अनुसार, उन्हें वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सलाह दी थी कि क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए और उन्हें अलर्ट करने के लिए एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी ने भी व्यक्तिगत रूप से दौरा किया था।
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चेन्नई, सत्ताईस जनवरी । तुगलक के संपादक एस. गुरुमूर्ति के आवास पर पेट्रोल बम से हमला करने की कोशिश को नाकाम करते हुए चेन्नई पुलिस ने इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गुरुमूर्ति के आवास पर रविवार सुबह छह बाइक सवार पेट्रोल बम फेंकने की योजना बना रहे थे, लेकिन पुलिस सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने वाहन की गति तेज कर दी। गुरुमूर्ति के अनुसार, उन्हें वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सलाह दी थी कि क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए और उन्हें अलर्ट करने के लिए एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी ने भी व्यक्तिगत रूप से दौरा किया था।
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साल 2021 मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता भारत के लिए कई मायनों में खास रही। जहां पंजाब की हरनाज कौर संधू ने कमाल 21 साल बाद मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं, बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला को इस ब्यूटी पेजेंट में बतौर जज बैठने का मौका मिला। उन्होंने इस मुकाम पर पहुंचकर दुनिया भर में भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया था। मगर, क्या आप जानते हैं कि मिस यूनिवर्स में जज बनने के लिए एक्ट्रेस को मोटी रकम मिली है।
बता दें कि उर्वशी मिस यूनिवर्स-2015 पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं वहीं, मिस यूनिवर्स 2021 में उन्हें जज बनने का मौका मिला, जो वाकई गर्व की बात हैं। हालांकि उर्वशी का नाम साल 2021 के मिस यूनिवर्स पेजेंट में जजों की लिस्ट में शामिल गया था, जिसके लिए उन्हें 1. 2 मिलियन डॉलर फीस दी गई थी जो भारतीय करेंसी के मुताबिक, करीब 8 करोड़ रुपए हैं।
बता दें कि उर्वशी को साल 2021 में 'स्त्री शक्ति नेशनल अवाॅर्ड 2021' से भी सम्मानित किया जा चुका है। फिल्मी दुनिया से इस सम्मान को पाने वाली वह पहली सबसे कम उम्र की महिला हैं। यही नहीं, वह देश की एकलौती महिला हैं, जिन्होंने 2 बार मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया। 17 साल की उम्र में उन्होंने 'मिस यूनिवर्स इंडिया' जीता। उसके बाद साल 2011 में मिस टूरिस्ज्म क्वीन ऑफ द ईयर' और फिर 'मिस एशियन सुपर मॉडल' का ताज अपने नाम किया।
गोल्डन गर्ल उर्वशी एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही हैं। उर्वशी शायद ही किसी फिल्म के लिए इतनी रकम चार्ज करती लेकिन यह वाकई काफी बड़ी रकम है। उर्वशी न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं। एक्ट्रेस जल्द ही इंस्टाग्राम पर अपने 44 मिलियन फॉलोअर्स पूरे कर लेंगी। उर्वशी सिर्फ अपनी खूबसूरती ही नहीं बल्कि ड्रेसिंग स्टाइल को लेकर भी सोशल मीडिया पर छाईं रहती हैं।
वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी जल्द ही अपकमिंग तेलुगु फिल्म ब्लैक रोज में नजर आएंगी। इसके अलावा वह एक तमिल फिल्म में भी नजर आएंगी। उर्वशी की दोनों भाषाओं में यह पहली फिल्म होने जा रही है।
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साल दो हज़ार इक्कीस मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता भारत के लिए कई मायनों में खास रही। जहां पंजाब की हरनाज कौर संधू ने कमाल इक्कीस साल बाद मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं, बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला को इस ब्यूटी पेजेंट में बतौर जज बैठने का मौका मिला। उन्होंने इस मुकाम पर पहुंचकर दुनिया भर में भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया था। मगर, क्या आप जानते हैं कि मिस यूनिवर्स में जज बनने के लिए एक्ट्रेस को मोटी रकम मिली है। बता दें कि उर्वशी मिस यूनिवर्स-दो हज़ार पंद्रह पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं वहीं, मिस यूनिवर्स दो हज़ार इक्कीस में उन्हें जज बनने का मौका मिला, जो वाकई गर्व की बात हैं। हालांकि उर्वशी का नाम साल दो हज़ार इक्कीस के मिस यूनिवर्स पेजेंट में जजों की लिस्ट में शामिल गया था, जिसके लिए उन्हें एक. दो मिलियन डॉलर फीस दी गई थी जो भारतीय करेंसी के मुताबिक, करीब आठ करोड़ रुपए हैं। बता दें कि उर्वशी को साल दो हज़ार इक्कीस में 'स्त्री शक्ति नेशनल अवाॅर्ड दो हज़ार इक्कीस' से भी सम्मानित किया जा चुका है। फिल्मी दुनिया से इस सम्मान को पाने वाली वह पहली सबसे कम उम्र की महिला हैं। यही नहीं, वह देश की एकलौती महिला हैं, जिन्होंने दो बार मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया। सत्रह साल की उम्र में उन्होंने 'मिस यूनिवर्स इंडिया' जीता। उसके बाद साल दो हज़ार ग्यारह में मिस टूरिस्ज्म क्वीन ऑफ द ईयर' और फिर 'मिस एशियन सुपर मॉडल' का ताज अपने नाम किया। गोल्डन गर्ल उर्वशी एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही हैं। उर्वशी शायद ही किसी फिल्म के लिए इतनी रकम चार्ज करती लेकिन यह वाकई काफी बड़ी रकम है। उर्वशी न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं। एक्ट्रेस जल्द ही इंस्टाग्राम पर अपने चौंतालीस मिलियन फॉलोअर्स पूरे कर लेंगी। उर्वशी सिर्फ अपनी खूबसूरती ही नहीं बल्कि ड्रेसिंग स्टाइल को लेकर भी सोशल मीडिया पर छाईं रहती हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी जल्द ही अपकमिंग तेलुगु फिल्म ब्लैक रोज में नजर आएंगी। इसके अलावा वह एक तमिल फिल्म में भी नजर आएंगी। उर्वशी की दोनों भाषाओं में यह पहली फिल्म होने जा रही है।
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अब आप उत्तराखंड में ही तेंदुए की सफारी का मजा ले सकेंगे। हरिद्वार वन प्रभाग के चिड़ियापुर क्षेत्र में 5 तेंदुए हैं। ये सभी पहले या तो घायल हालत में वन विभाग को मिले थे या फिर इंसानी संपर्क में आने से घायल हो गए थे। इस इलाके में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वन विभाग इन तेंदुओं को आगे लाएगी। राजधानी देहरादून से चिड़ियापुर की दूरी केवल 2 घंटे की है।
राज्य के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा, 'हमने कॉर्बेट बाघ अभ्यारण्य में पहले ही बाघ सफारी की घोषणा कर दी है। अब चिड़ियापुर में पहली बार तेंदुआ सफारी शुरू की जाएगी। चिड़ियापुर में कुल 5 तेंदुए हैं। अभी फिलहाल ने पिंजड़ों में बंद हैं। उन्हें बड़े क्षेत्र में आजाद छोड़ दिया जाएगा ताकि पर्यटक जीप से उन्हें उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का आनंद ले सकें। यह कहने की जरूरत नहीं है कि सरकार सुरक्षा के पूरे इंतजाम करेगी। '
ये सभी तेंदुए बड़ी उम्र के हैं और शिकार नहीं कर सकते। उन्हें वन विभाग ने पकड़कर चिड़ियापुर में पिंजड़े में रखा है। इनमें से कुछ तेंदुए पहले आदमखोर भी रहे हैं।
वन विभाग को इन तेंदुओं का ध्यान रखने के लिए पैसे की काफी कमी झेलनी पड़ रही थी। अगर तेंदुआ सफारी की यह योजना कामयाब रहती है तो इससे पैसा आएगा। मंत्री ने बताया कि वन विभाग सभी जरूरी अनुमति लेने व सुरक्षा के इंतजाम करने में व्यस्त है।
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अब आप उत्तराखंड में ही तेंदुए की सफारी का मजा ले सकेंगे। हरिद्वार वन प्रभाग के चिड़ियापुर क्षेत्र में पाँच तेंदुए हैं। ये सभी पहले या तो घायल हालत में वन विभाग को मिले थे या फिर इंसानी संपर्क में आने से घायल हो गए थे। इस इलाके में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वन विभाग इन तेंदुओं को आगे लाएगी। राजधानी देहरादून से चिड़ियापुर की दूरी केवल दो घंटाटे की है। राज्य के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा, 'हमने कॉर्बेट बाघ अभ्यारण्य में पहले ही बाघ सफारी की घोषणा कर दी है। अब चिड़ियापुर में पहली बार तेंदुआ सफारी शुरू की जाएगी। चिड़ियापुर में कुल पाँच तेंदुए हैं। अभी फिलहाल ने पिंजड़ों में बंद हैं। उन्हें बड़े क्षेत्र में आजाद छोड़ दिया जाएगा ताकि पर्यटक जीप से उन्हें उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का आनंद ले सकें। यह कहने की जरूरत नहीं है कि सरकार सुरक्षा के पूरे इंतजाम करेगी। ' ये सभी तेंदुए बड़ी उम्र के हैं और शिकार नहीं कर सकते। उन्हें वन विभाग ने पकड़कर चिड़ियापुर में पिंजड़े में रखा है। इनमें से कुछ तेंदुए पहले आदमखोर भी रहे हैं। वन विभाग को इन तेंदुओं का ध्यान रखने के लिए पैसे की काफी कमी झेलनी पड़ रही थी। अगर तेंदुआ सफारी की यह योजना कामयाब रहती है तो इससे पैसा आएगा। मंत्री ने बताया कि वन विभाग सभी जरूरी अनुमति लेने व सुरक्षा के इंतजाम करने में व्यस्त है।
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Highlightsखेल खत्म होने तक एक विकेट पर 48 रन बना लिए हैं। जैक क्राउली (24) का विकेट गंवाया जिन्हें टिम साउथी ने बोल्ड किया। बेन डकेट 23 रन बनाकर खेल रहे थे, जबकि ओली रोबिनसन एक रन बनाकर साथ निभा रहे हैं।
New Zealand vs England 2023: केन विलियमसन टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के शीर्ष स्कोरर बने और उनके 26वें टेस्ट शतक से मेजबान टीम ने सोमवार को इंग्लैंड को दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन 258 रन का लक्ष्य दिया। टॉम ब्लंडेल (90) आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज रहे।
विलियमसन (132) और उनकी पारियों से न्यूजीलैंड ने फॉलोआन खेलते हुए दूसरी पारी में 483 रन बनाए। इंग्लैंड ने इसके जवाब में दिन का खेल खत्म होने तक एक विकेट पर 48 रन बना लिए हैं। टीम ने जैक क्राउली (24) का विकेट गंवाया जिन्हें टिम साउथी ने बोल्ड किया। स्टंप के समय सलामी बल्लेबाज बेन डकेट 23 रन बनाकर खेल रहे थे जबकि ओली रोबिनसन एक रन बनाकर उनका साथ निभा रहे हैं।
इंग्लैंड को जीत के लिए 210 रन की दरकार है जबकि उसके नौ विकेट शेष हैं। मेहमान टीम जीत की प्रबल दावेदार है लेकिन विलियमसन ने न्यूजीलैंड को एक उम्मीद दी है। इससे पहले दिन के पहले ओवर में विलियमसन (7787 रन) ने जेम्स एंडरसन पर मिड विकेट पर चौके के साथ जब 29 रन के आंकड़े को छुआ तो टीम के अपने पूर्व साथी रोस टेलर के न्यूजीलैंड की ओर से 7682 रन के सर्वाधिक रन के आंकड़े को पीछे छोड़ा। श्रृंखला की पिछली तीन पारियों में सिर्फ 10 रन बनाने के बाद विलियमसन अच्छी लय में दिखे।
उन्होंने दिखाया कि मुश्किल हालात में वह क्यों टीम के नंबर एक बल्लेबाज हैं। इंग्लैंड ने पहली पारी आठ विकेट पर 435 रन बनाकर घोषित की थी जिसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 209 रन ही बना सकी थी और उसे फॉलोआन के लिए मजबूर होना पड़ा था। न्यूजीलैंड ने दिन की शुरुआत तीन विकेट पर 202 रन से की और टीम इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर से 24 रन पीछे थी।
विलियमसन और हेनरी निकोल्स (29) ने पारी को आगे बढ़ाया। ओली रोबिनसन ने निकोल्स को स्लिप में हैरी ब्रूक के हाथों कैच कराके चौथे विकेट की 55 रन की साझेदारी का अंत किया। इस समय न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड से चार रन पीछे थी। विलियमसन का साथ देने इसके बाद डेरिल मिशेल उतरे जिन्होंने आक्रामक तेवर दिखाए।
इस समय विलियमसन 34 रन पर खेल रहे थे लेकिन मिशेल ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए स्पिनर जैक लीच पर छक्के के साथ 52 गेंद में अर्धशतक पूरा किया। विलियमसन ने 148 गेंद में 34वां अर्धशतक बनाया। मिशेल हालांकि स्टुअर्ट ब्रॉड की शॉर्ट गेंद को हवा में लहराकर जो रूट को कैच दे बैठे जिससे पांचवें विकेट की 75 रन की साझेदारी का अंत हुआ।
विलियमसन और ब्लंडेल ने इसके बाद लंच तक टीम को और झटके नहीं लगने दिए। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने विलियमसन को आउट करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने अंततः टेस्ट क्रिकेट में पहली बार गेंद हैरी ब्रूक को थमाई जिन्होंने अपने कप्तान को निराश नहीं करते हुए विलियमसन को विकेटकीपर बेन फोक्स के हाथों कैच कराया।
विलियमसन ने सात घंटे से अधिक की अपनी पारी में 282 गेंद का सामना करते हुए 12 चौके मारे। विलियमसन के आउट होने बाद न्यूजीलैंड की पारी को सिमटने में अधिक समय नहीं लगा। माइकल ब्रेसवेल (08) रन आउट हुए जबकि जैक लीच (157 रन पर पांच विकेट) ने एक ही ओवर में साउथी (02) और मैट हेनरी (00) को आउट किया। लीच ने ब्लंडेल को रूट के हाथों कैच कराके न्यूजीलैंड की पारी का अंत किया। उन्होंने 166 गेंद का सामना करते हुए नौ चौके मारे।
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Highlightsखेल खत्म होने तक एक विकेट पर अड़तालीस रन बना लिए हैं। जैक क्राउली का विकेट गंवाया जिन्हें टिम साउथी ने बोल्ड किया। बेन डकेट तेईस रन बनाकर खेल रहे थे, जबकि ओली रोबिनसन एक रन बनाकर साथ निभा रहे हैं। New Zealand vs England दो हज़ार तेईस: केन विलियमसन टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के शीर्ष स्कोरर बने और उनके छब्बीसवें टेस्ट शतक से मेजबान टीम ने सोमवार को इंग्लैंड को दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन दो सौ अट्ठावन रन का लक्ष्य दिया। टॉम ब्लंडेल आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज रहे। विलियमसन और उनकी पारियों से न्यूजीलैंड ने फॉलोआन खेलते हुए दूसरी पारी में चार सौ तिरासी रन बनाए। इंग्लैंड ने इसके जवाब में दिन का खेल खत्म होने तक एक विकेट पर अड़तालीस रन बना लिए हैं। टीम ने जैक क्राउली का विकेट गंवाया जिन्हें टिम साउथी ने बोल्ड किया। स्टंप के समय सलामी बल्लेबाज बेन डकेट तेईस रन बनाकर खेल रहे थे जबकि ओली रोबिनसन एक रन बनाकर उनका साथ निभा रहे हैं। इंग्लैंड को जीत के लिए दो सौ दस रन की दरकार है जबकि उसके नौ विकेट शेष हैं। मेहमान टीम जीत की प्रबल दावेदार है लेकिन विलियमसन ने न्यूजीलैंड को एक उम्मीद दी है। इससे पहले दिन के पहले ओवर में विलियमसन ने जेम्स एंडरसन पर मिड विकेट पर चौके के साथ जब उनतीस रन के आंकड़े को छुआ तो टीम के अपने पूर्व साथी रोस टेलर के न्यूजीलैंड की ओर से सात हज़ार छः सौ बयासी रन के सर्वाधिक रन के आंकड़े को पीछे छोड़ा। श्रृंखला की पिछली तीन पारियों में सिर्फ दस रन बनाने के बाद विलियमसन अच्छी लय में दिखे। उन्होंने दिखाया कि मुश्किल हालात में वह क्यों टीम के नंबर एक बल्लेबाज हैं। इंग्लैंड ने पहली पारी आठ विकेट पर चार सौ पैंतीस रन बनाकर घोषित की थी जिसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम दो सौ नौ रन ही बना सकी थी और उसे फॉलोआन के लिए मजबूर होना पड़ा था। न्यूजीलैंड ने दिन की शुरुआत तीन विकेट पर दो सौ दो रन से की और टीम इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर से चौबीस रन पीछे थी। विलियमसन और हेनरी निकोल्स ने पारी को आगे बढ़ाया। ओली रोबिनसन ने निकोल्स को स्लिप में हैरी ब्रूक के हाथों कैच कराके चौथे विकेट की पचपन रन की साझेदारी का अंत किया। इस समय न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड से चार रन पीछे थी। विलियमसन का साथ देने इसके बाद डेरिल मिशेल उतरे जिन्होंने आक्रामक तेवर दिखाए। इस समय विलियमसन चौंतीस रन पर खेल रहे थे लेकिन मिशेल ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए स्पिनर जैक लीच पर छक्के के साथ बावन गेंद में अर्धशतक पूरा किया। विलियमसन ने एक सौ अड़तालीस गेंद में चौंतीसवां अर्धशतक बनाया। मिशेल हालांकि स्टुअर्ट ब्रॉड की शॉर्ट गेंद को हवा में लहराकर जो रूट को कैच दे बैठे जिससे पांचवें विकेट की पचहत्तर रन की साझेदारी का अंत हुआ। विलियमसन और ब्लंडेल ने इसके बाद लंच तक टीम को और झटके नहीं लगने दिए। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने विलियमसन को आउट करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने अंततः टेस्ट क्रिकेट में पहली बार गेंद हैरी ब्रूक को थमाई जिन्होंने अपने कप्तान को निराश नहीं करते हुए विलियमसन को विकेटकीपर बेन फोक्स के हाथों कैच कराया। विलियमसन ने सात घंटे से अधिक की अपनी पारी में दो सौ बयासी गेंद का सामना करते हुए बारह चौके मारे। विलियमसन के आउट होने बाद न्यूजीलैंड की पारी को सिमटने में अधिक समय नहीं लगा। माइकल ब्रेसवेल रन आउट हुए जबकि जैक लीच ने एक ही ओवर में साउथी और मैट हेनरी को आउट किया। लीच ने ब्लंडेल को रूट के हाथों कैच कराके न्यूजीलैंड की पारी का अंत किया। उन्होंने एक सौ छयासठ गेंद का सामना करते हुए नौ चौके मारे।
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Opposition Unity: पहले ममता और अब अखिलेश, लग गया कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता की कोशिश में पलीता?
कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते दिनों कहा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों में एकजुटता बहुत जरूरी है। खरगे ने अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस के साथ लाने के लिए ये भी कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं कि मेरी पार्टी नेतृत्व करेगी या हमारा ही पीएम होगा।
नई दिल्ली। कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते दिनों कहा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों में एकजुटता बहुत जरूरी है। खरगे ने अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस के साथ लाने के लिए ये भी कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं कि मेरी पार्टी नेतृत्व करेगी। यहां तक कि खरगे ने पीएम पद के लिए राहुल गांधी का नाम तक आगे नहीं किया था, लेकिन अब उनकी इन सभी कोशिशों को पलीता लगता दिख रहा है। मल्लिकार्जुन खरगे के बयान के बाद भी कांग्रेस से तमाम विपक्षी दल कन्नी काटते दिख रहे हैं। ताजा मामला समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। उन्होंने ऐसी बात कही है, जो गांधी परिवार के खिलाफ मानी जा रही है।
अमेठी में ग़रीब महिलाओं की दुर्दशा देखकर मन बहुत दुखी हुआ। यहाँ हमेशा वीआईपी जीते और हारे हैं, फिर भी यहाँ ऐसा हाल है तो बाकी प्रदेश का क्या कहना।
अखिलेश यादव ने ट्वीट में लिखा कि अमेठी में गरीब महिलाओं को देखकर उनको दुख हुआ। अखिलेश ने आगे लिखा कि अमेठी से हमेशा वीआईपी जीते और हारे हैं। फिर भी यहां ऐसा हाल है। अखिलेश ने ये भी लिखा कि अगली बार अमेठी बड़े लोगों को नहीं, बड़े दिलवालों को चुनेगा। इससे साफ है कि लोकसभा चुनाव में अखिलेश जरूर अमेठी से सपा का उम्मीदवार उतारेंगे। इससे पहले जब राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ते थे, तो सपा ने कभी उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा था। साल 2019 में अमेठी की सीट राहुल गांधी ने बीजेपी की स्मृति ईरानी के हाथ गंवा दी थी। राहुल गांधी उस वक्त केरल के वायनाड से भी लोकसभा चुनाव लड़े थे और वहां से सांसद बने थे।
कांग्रेस और खरगे के विपक्षी एकता पर पहला पलीता टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी लगा चुकी हैं। पूर्वोत्तर के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ममता ने एलान किया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी दल या गठबंधन के साथ नहीं जाएगी। कुछ ऐसा ही विपक्ष के एक और नेता के. चंद्रशेखर राव के साथ भी है। तेलंगाना के सीएम और बीआरएस के चीफ चंद्रशेखर राव ने भी अब तक कांग्रेस के साथ जाकर चुनाव लड़ने पर चुप्पी साधे रखी है। ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) के चीफ और सीएम नवीन पटनायक भी कांग्रेस से हमेशा दूरी बनाए रखते हैं। बीएसपी की नेता मायावती के भी कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता वाली राह पर चलना मुश्किल ही है। हालांकि, सियासत में रंग कभी भी बदल जाते हैं, लेकिन फिलहाल तो विपक्ष की एकता का मसला स्याह ही दिख रहा है।
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Opposition Unity: पहले ममता और अब अखिलेश, लग गया कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता की कोशिश में पलीता? कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते दिनों कहा था कि दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों में एकजुटता बहुत जरूरी है। खरगे ने अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस के साथ लाने के लिए ये भी कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं कि मेरी पार्टी नेतृत्व करेगी या हमारा ही पीएम होगा। नई दिल्ली। कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते दिनों कहा था कि दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों में एकजुटता बहुत जरूरी है। खरगे ने अन्य विपक्षी दलों को कांग्रेस के साथ लाने के लिए ये भी कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं कि मेरी पार्टी नेतृत्व करेगी। यहां तक कि खरगे ने पीएम पद के लिए राहुल गांधी का नाम तक आगे नहीं किया था, लेकिन अब उनकी इन सभी कोशिशों को पलीता लगता दिख रहा है। मल्लिकार्जुन खरगे के बयान के बाद भी कांग्रेस से तमाम विपक्षी दल कन्नी काटते दिख रहे हैं। ताजा मामला समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। उन्होंने ऐसी बात कही है, जो गांधी परिवार के खिलाफ मानी जा रही है। अमेठी में ग़रीब महिलाओं की दुर्दशा देखकर मन बहुत दुखी हुआ। यहाँ हमेशा वीआईपी जीते और हारे हैं, फिर भी यहाँ ऐसा हाल है तो बाकी प्रदेश का क्या कहना। अखिलेश यादव ने ट्वीट में लिखा कि अमेठी में गरीब महिलाओं को देखकर उनको दुख हुआ। अखिलेश ने आगे लिखा कि अमेठी से हमेशा वीआईपी जीते और हारे हैं। फिर भी यहां ऐसा हाल है। अखिलेश ने ये भी लिखा कि अगली बार अमेठी बड़े लोगों को नहीं, बड़े दिलवालों को चुनेगा। इससे साफ है कि लोकसभा चुनाव में अखिलेश जरूर अमेठी से सपा का उम्मीदवार उतारेंगे। इससे पहले जब राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ते थे, तो सपा ने कभी उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा था। साल दो हज़ार उन्नीस में अमेठी की सीट राहुल गांधी ने बीजेपी की स्मृति ईरानी के हाथ गंवा दी थी। राहुल गांधी उस वक्त केरल के वायनाड से भी लोकसभा चुनाव लड़े थे और वहां से सांसद बने थे। कांग्रेस और खरगे के विपक्षी एकता पर पहला पलीता टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी लगा चुकी हैं। पूर्वोत्तर के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ममता ने एलान किया था कि दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी दल या गठबंधन के साथ नहीं जाएगी। कुछ ऐसा ही विपक्ष के एक और नेता के. चंद्रशेखर राव के साथ भी है। तेलंगाना के सीएम और बीआरएस के चीफ चंद्रशेखर राव ने भी अब तक कांग्रेस के साथ जाकर चुनाव लड़ने पर चुप्पी साधे रखी है। ओडिशा में बीजू जनता दल के चीफ और सीएम नवीन पटनायक भी कांग्रेस से हमेशा दूरी बनाए रखते हैं। बीएसपी की नेता मायावती के भी कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता वाली राह पर चलना मुश्किल ही है। हालांकि, सियासत में रंग कभी भी बदल जाते हैं, लेकिन फिलहाल तो विपक्ष की एकता का मसला स्याह ही दिख रहा है।
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नासिक (महाराष्ट्र) (भाषा)। मुम्बई हमले के सरगना एवं नासिक में महाराष्ट्र पुलिस अकादमी पर हमले की साजिश के मुख्य आरोपी सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल ने एक कोर्ट में शिकायत की कि उसे पुलिस ने बिजली के झटके लगाए हैं। अभियोजन पक्ष ने इस आरोप का खंडन किया है। जंदल ने एक आवेदन देकर आरोप लगाया कि सउढदी अरब से लाये जाने के बाद दिल्ली पुलिस, मुम्बई पुलिस, अपराध शाखा एवं एटीएस ने उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया। उसे कल यहां एक विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। लश्कर ए तैयबा के संदिग्ध आतंकवादी जंदल ने कहा कि वह तो निर्दोष है तथा 2010 में यहां विस्फोट कर महाराष्ट्र पुलिस अकादमी को उड़ा देने की साजिश तथा महत्वपूर्ण स्थलों के मुआयना करने के मामले में फर्जी तरीके से फंसा दिया गया है। उसने बरी किए जाने की मांग की। उसने पाकिस्तान में सह आरोपियों को प्रशिक्षण दिलाने के आरोपों का भी खंडन किया। विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश के के तांत्रपाले 16 अप्रैल को उसके आवेदन पर फैसला करेंगे। जंदल ने कोर्ट से कहा कि उसने भारतीय पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, सउढदी अरब की संबंधित कोर्ट तथा मानवाधिकार आयोग में अलग अलग याचिकाएं दायर की थीं। सउढदी अरब की कोर्ट ने ही उसे भारत भेजा था। उसके आरोपों पर विशेष सरकारी वकील अजय मिसार ने अदालत से कहा कि जंदल को अबतक जिन अदालतों में पेश किया गया, उनमें से किसी भी अदालत में उसने कभी पुलिस पर मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत नहीं की। उसके आरोपों का खंडन करते हुए मिसार ने कहा, वह तो कानून की पकड़ से बचने के लिए यह कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न अदालतों में पेश किये जाने पर जंदल के चिकित्सा परीक्षण में उत्पीड़न का पता नहीं चला। जंदल के वकील मिलन जोशी की 11 का मौत के बाद कोर्ट ने नासिक मामले में जंदल के बचाव के लिए बिपिन पांडे को नियुक्त किया है।
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नासिक । मुम्बई हमले के सरगना एवं नासिक में महाराष्ट्र पुलिस अकादमी पर हमले की साजिश के मुख्य आरोपी सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल ने एक कोर्ट में शिकायत की कि उसे पुलिस ने बिजली के झटके लगाए हैं। अभियोजन पक्ष ने इस आरोप का खंडन किया है। जंदल ने एक आवेदन देकर आरोप लगाया कि सउढदी अरब से लाये जाने के बाद दिल्ली पुलिस, मुम्बई पुलिस, अपराध शाखा एवं एटीएस ने उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया। उसे कल यहां एक विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। लश्कर ए तैयबा के संदिग्ध आतंकवादी जंदल ने कहा कि वह तो निर्दोष है तथा दो हज़ार दस में यहां विस्फोट कर महाराष्ट्र पुलिस अकादमी को उड़ा देने की साजिश तथा महत्वपूर्ण स्थलों के मुआयना करने के मामले में फर्जी तरीके से फंसा दिया गया है। उसने बरी किए जाने की मांग की। उसने पाकिस्तान में सह आरोपियों को प्रशिक्षण दिलाने के आरोपों का भी खंडन किया। विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश के के तांत्रपाले सोलह अप्रैल को उसके आवेदन पर फैसला करेंगे। जंदल ने कोर्ट से कहा कि उसने भारतीय पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, सउढदी अरब की संबंधित कोर्ट तथा मानवाधिकार आयोग में अलग अलग याचिकाएं दायर की थीं। सउढदी अरब की कोर्ट ने ही उसे भारत भेजा था। उसके आरोपों पर विशेष सरकारी वकील अजय मिसार ने अदालत से कहा कि जंदल को अबतक जिन अदालतों में पेश किया गया, उनमें से किसी भी अदालत में उसने कभी पुलिस पर मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत नहीं की। उसके आरोपों का खंडन करते हुए मिसार ने कहा, वह तो कानून की पकड़ से बचने के लिए यह कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न अदालतों में पेश किये जाने पर जंदल के चिकित्सा परीक्षण में उत्पीड़न का पता नहीं चला। जंदल के वकील मिलन जोशी की ग्यारह का मौत के बाद कोर्ट ने नासिक मामले में जंदल के बचाव के लिए बिपिन पांडे को नियुक्त किया है।
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516 : गाथा तिस्ता पार की
बाघारू और कादाखोया का स्वागत
चीख-पुकार एक बार उभरकर धीमी हो गयी थी, पर बंद नहीं हुई। हवा उधर से इधर आ रही थी, इसी से उधर की चीख-पुकार इधर भी सुनायी पड़ रही थी। समझ में आ रहा था कि कुछ खराब नहीं है। सब कुछ ठीक-ठाक है । बीच-बीच में आयाज़ फिर से बढ़ती जा रही थी ।
उसके बाद ही दो-तीन बच्चे बांध के ऊपर से इधर दौड़े-दौड़े आय। ओर उनकी दौड़ के साथ छंद मिलाकर ही उधर की आवाज़ भी बढ़ती गयी थी, बोंध से नहीं, बाँध के थोड़ा नीचे मे। नदी के पास से बोल्डर के ऊपर से होकर बांध के पास जो लोग खड़े थे, वे ठीक से समझ नहीं पा रहे थे कि किधर देखें और किधर नहीं - यहां से नदी की और तिरछी या बांध के ऊपर में सीधा देखें । जो बच्चे दोड़कर आ रहे थे वे पीछे मुड़कर कुल देखकर खड़े हो गये थे और फिर से दौड़ने लग गये थे।
तभी दिखायी दिया- वह पेड़ों का वेडा मोड पार करके इधर ही आ रहा था, मतलब किनारे से पेड़ों को खीचकर लाया जा रहा था। पेड़ थोड़ा आग बढ़ने ही नज़र आता था पेड़ों के सामने नाव थी और उस पर अमूल्य और नग्श खडे थे। किनारा काफ़ी ऊँचा होने से नाव अब तक दिखायी नहीं दे रही थी। नरेश और अमूल्य दाँत निपोर कर हंसे जा रहे थे, वह भी यहा म साफ़ नजर आ
नरेश ओर अमूल्य के सिर के ऊपर, पेड़ों की डाल पर कादाखीया ओर वह आदमी खड़ा था। दोनों कमर पर हाथ रखे हुए थे। पेड़ के शिखर पर म कादाखोया और उस आदमी के पास में एक सुनहरी रस्मी किनारे तक तनी हुई थी और सब लोग उस रस्सी को पकड़कर नाव और पंडों को खींचने खींचते ला रहे थे। नाव पर अमूल्य और उसके सिर के ऊपर पेड़ पर कादाखोया डॉड़ लेकर टेल रहे थे, जिससे पेड़ पाट पर रुक न जाये। उस पर भी पूरी तरह से संभल नहीं रहा था। पेड़ के पीछे वाला डाल-पात पाट में फंसा जा रहा था इतने लोग रस्मो पकड़ कर खींच रहे थे उनमें से कोई बोल्डर के ऊपर, कोई बोल्डर और नदी के बीचवाले सँकरे रास्ते से होकर आगे-आगे आ रहे थे। जसे वे ऐसे रस्सी खींच रहे थे। जैसे पेड़ों और नाव को राह दिखा रहे हों। !
देखते-देखते यह सय बाँध के इस अस्थायी कैंप के निकट पहुंच गये थे। पहुँचने के पहले ही सबने देखा उस नये आदमी के गले में नाइलॉन की रस्सी का एक बड़ा-सा बंडल पड़ा था- और वहीं रस्सी पाट के लोगों के हाथ में थी। वह इस रस्सी को पकड़-पकड़े ही पेड़ और नाव को
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पाँच सौ सोलह : गाथा तिस्ता पार की बाघारू और कादाखोया का स्वागत चीख-पुकार एक बार उभरकर धीमी हो गयी थी, पर बंद नहीं हुई। हवा उधर से इधर आ रही थी, इसी से उधर की चीख-पुकार इधर भी सुनायी पड़ रही थी। समझ में आ रहा था कि कुछ खराब नहीं है। सब कुछ ठीक-ठाक है । बीच-बीच में आयाज़ फिर से बढ़ती जा रही थी । उसके बाद ही दो-तीन बच्चे बांध के ऊपर से इधर दौड़े-दौड़े आय। ओर उनकी दौड़ के साथ छंद मिलाकर ही उधर की आवाज़ भी बढ़ती गयी थी, बोंध से नहीं, बाँध के थोड़ा नीचे मे। नदी के पास से बोल्डर के ऊपर से होकर बांध के पास जो लोग खड़े थे, वे ठीक से समझ नहीं पा रहे थे कि किधर देखें और किधर नहीं - यहां से नदी की और तिरछी या बांध के ऊपर में सीधा देखें । जो बच्चे दोड़कर आ रहे थे वे पीछे मुड़कर कुल देखकर खड़े हो गये थे और फिर से दौड़ने लग गये थे। तभी दिखायी दिया- वह पेड़ों का वेडा मोड पार करके इधर ही आ रहा था, मतलब किनारे से पेड़ों को खीचकर लाया जा रहा था। पेड़ थोड़ा आग बढ़ने ही नज़र आता था पेड़ों के सामने नाव थी और उस पर अमूल्य और नग्श खडे थे। किनारा काफ़ी ऊँचा होने से नाव अब तक दिखायी नहीं दे रही थी। नरेश और अमूल्य दाँत निपोर कर हंसे जा रहे थे, वह भी यहा म साफ़ नजर आ नरेश ओर अमूल्य के सिर के ऊपर, पेड़ों की डाल पर कादाखीया ओर वह आदमी खड़ा था। दोनों कमर पर हाथ रखे हुए थे। पेड़ के शिखर पर म कादाखोया और उस आदमी के पास में एक सुनहरी रस्मी किनारे तक तनी हुई थी और सब लोग उस रस्सी को पकड़कर नाव और पंडों को खींचने खींचते ला रहे थे। नाव पर अमूल्य और उसके सिर के ऊपर पेड़ पर कादाखोया डॉड़ लेकर टेल रहे थे, जिससे पेड़ पाट पर रुक न जाये। उस पर भी पूरी तरह से संभल नहीं रहा था। पेड़ के पीछे वाला डाल-पात पाट में फंसा जा रहा था इतने लोग रस्मो पकड़ कर खींच रहे थे उनमें से कोई बोल्डर के ऊपर, कोई बोल्डर और नदी के बीचवाले सँकरे रास्ते से होकर आगे-आगे आ रहे थे। जसे वे ऐसे रस्सी खींच रहे थे। जैसे पेड़ों और नाव को राह दिखा रहे हों। ! देखते-देखते यह सय बाँध के इस अस्थायी कैंप के निकट पहुंच गये थे। पहुँचने के पहले ही सबने देखा उस नये आदमी के गले में नाइलॉन की रस्सी का एक बड़ा-सा बंडल पड़ा था- और वहीं रस्सी पाट के लोगों के हाथ में थी। वह इस रस्सी को पकड़-पकड़े ही पेड़ और नाव को
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दिसंबर 1989 के आखिरी हफ्ते की एक सर्द रात अब भी मेरी स्मृति में दर्ज है। मैं अपने बैचमेट और पंजाब कैडर के अधिकारी गोबिंद राम से टेलीफोन पर बात करने की कोशिश कर रहा था. . . कोशिश इसलिए कि बात थी ही इतनी मुश्किल. . . गोबिंद के 17-18 वर्षीय किशोर बेटे का कुछ दिनों पहले ही खालिस्तानी आतंकियों ने कत्ल कर दिया था। मैंने मातमपुर्सी के लिए फोन किया था और कुछ भी बोलना कठिन लग रहा था। बहरहाल, जितने भी बेमानी हों, आप ऐसे मौके पर कुछ औपचारिक वाक्य कहते ही हैं। मैंने भी कहे। अब तक जो कुछ याद है, गोबिंद राम की एक साफ समझ थी।
उनके अनुसार, पंजाब में लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच गई थी और इसका मुख्य कारण था कि लगभग एक दशक पुरानी लड़ाई में पंजाब पुलिस अब लड़ती हुई दिख रही थी। इसके लिए जेएफ रिबेरो या केपीएस गिल का नेतृत्व ही नहीं, खाड़कुओं की यह रणनीतिक भूल भी जिम्मेदार थी, जिनके तहत उन्होंने पंजाब पुलिस के जवानों व अधिकारियों के परिवारी जनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। गोबिंद के अनुसार, इस एक कदम से पंजाब पुलिस में लड़ने का नया जज्बा पैदा होने लगा था। जैसे ही किसी पुलिसकर्मी का कोई करीबी रिश्तेदार मारा जाता या अपहृत होता, तो कानून से परे कार्रवाई करने में माहिर केपीएस गिल के नेतृत्व में फोर्स पलटवार करती और स्थानीय खाड़कुओं के परिवारी जनों का बराबर का नुकसान होता। टेलीफोन पर उन्होंने मुझे कई वाकये सुनाए, जिनमें अपहृत इसी तरह से छुड़ाए गए थे।
इस वार्तालाप के एक पखवाडे़ के अंदर गोबिंद राम भी शहीद हो गए। काफी दिनों से वह खालिस्तानियों की हिट लिस्ट में थे, पर उनसे बातें करके मेरे मन में यह स्पष्ट हो गया था कि अगर पंजाब पुलिस ने लड़ना शुरू कर दिया है, तो अब वहां आतंक की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अगले तीन-चार वर्षों में ही हमने देखा कि पंजाब में लगभग शांति कायम हो गई।
दुनिया भर में आतंकवाद से लड़ाई का यह साझा अनुभव रहा है कि इसमें स्थानीय पुलिस सबसे प्रभावी हथियार साबित हुई है। राज्य के लिए हिंसा की एक सहनीय सीमा होती है और उसके पार होते ही वह सेना का प्रयोग करता है। शुरुआती दौर में तो हर जगह पुलिस नाकाफी साबित होती है और सेना के दुमछल्ले की तरह काम करती है, पर ज्यों-ज्यों उसे पुनर्गठन का मौका मिलता जाता है, उसकी भूमिका बढ़ती जाती है। किसी समस्या का अगर राजनीतिक हल ढूंढ़ना है, तो सेना लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो सकती। संघर्ष में एक दौर आता है, जब उसकी भूमिका प्रतिकूल सिद्ध होने लगती है। यदि राज्य संवेदनशील हो, तो वह अपनी इस सीमा को जल्द पहचान लेता है कि अपने नागरिकों के खिलाफ बहुत दिनों तक सेना का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे में, आखिरी धावा तो पुलिस ही बोलती है।
मुझे आज गोबिंद राम से हुआ वह आखिरी संवाद एक खास संदर्भ में याद आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में कश्मीर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मारे गए हैं। इनमें से ज्यादातर किसी आमने-सामने की लड़़ाई में शहीद नहीं हुए, बल्कि मिलती-जुलती परिस्थितियों में अपहृत कर मारे गए। सेना, अद्र्धसैनिक बलों या पुलिस के छुट्टियों में घर आए जवान आतंकियों के हत्थे चढ़ जाते हैं और नृशंसता से उनकी हत्या कर दी जाती है, पर इसका परिणाम भी फौरन दिखने लगता है। लगभग हर घटना के बाद आप न सिर्फ संबंधियों और पड़ोसियों के रोते-बिलखते चेहरे टीवी पर देखते हैं, बल्कि अब तो अधिक मात्रा में वे दुर्लभतम विजुअल्स भी दिख जाते हैं, जिनमें मृतक के रिश्तेदार पाकिस्तान या आतंकी संगठनों के खिलाफ नारे लगा रहे होते हैं। ऐसा संभवतः स्थानीय क्षति के कारण हो रहा है। क्या यह मान लिया जाए कि कश्मीर घाटी में पंजाब दोहराया जा रहा है?
नब्बे के दशक के अपने व्यक्तिगत अनुभवों से मैं कह सकता हूं कि आतंकवाद की शुरुआत (दिसंबर 1989) में तो कश्मीर पुलिस के पैर पूरी तरह से उखड़ गए थे। न सिर्फ वह एक हतोत्साहित और अनुशासनहीन भीड़ में तब्दील हो गई थी, बल्कि यह कहना भी अनुचित न होगा कि उसमें बड़े पैमाने पर पाकिस्तान समर्थक या जेहादी मानसिकता वाले तत्व घुस गए थे। अविश्वास का आलम यह था कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय पुलिस बल को लगा रखा था। श्रीनगर शहर बीएसएफ और बाहरी इलाके सेना के हवाले थे। स्वाभाविक था कि बाहरी बलों की उपस्थिति जनता में चिढ़ पैदा करती थी। इन बलों के सदस्य स्थानीय भावनाओं के प्रति संवेदनशून्य थे। नतीजतन, भारत समर्थक तत्व भी उन तक आने में संकोच करते और किसी भी लड़ाई में सफलता की पहली जरूरत कार्रवाई योग्य सूचनाओं का सैनिक और अद्र्धसैनिक बलों के पास हमेशा टोटा रहता था।
पिछले कुछ वर्षों में स्थितियां बदली हैं। कश्मीर पुलिस लड़ती सी दिख रही है। जैसी सफलताएं इधर उसे मिली हैं, वे बिना स्थानीय सूचनाओं के संभव नहीं हो सकतीं। क्या हाल के महीनों में उसके सदस्यों की गांवों में अपहरण और हत्या की घटनाएं उसकी लड़ने की इच्छाशक्ति को बढ़ाएंगी और एक बार फिर से पंजाब दोहराया जा सकेगा? यह भी हो सकता है कि अपने सदस्यों व उनके परिवारी जनों को असुरक्षित पाकर बल हतोत्साहित हो लड़़ने से ही गुरेज करने लगे। दोनों संभावनाएं वास्तविकता से परे नहीं हैं, इसलिए जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस का मनोबल उठाने के लिए जो कुछ जरूरी हो, किया जाए।
यहां हमें याद रखना होगा कि स्थानीय जनता से बना पुलिस बल उसकी संवेदनाओं से सीधा जुड़ा होता है। इसलिए यदि जनता का विश्वास भारतीय राज्य नहीं जीत पाता, तो उसके बीच से आए पुलिस बल का मनोबल भी ऊंचा नहीं रख सकेगा। कई बार जनता से संवाद खत्म करके सिर्फ फौजी हल की बात करने वाले इस तथ्य को भूल जाते हैं कि दुनिया में कश्मीर जैसी किसी भी समस्या का सिर्फ फौजी हल नहीं निकल सका है। वहां की लड़़ाई कश्मीर पुलिस जीत सकती है, पर इसके लिए उसके उद्गम कश्मीरी जनता का विश्वास भी भारतीय राज्य को हासिल करना होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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दिसंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी के आखिरी हफ्ते की एक सर्द रात अब भी मेरी स्मृति में दर्ज है। मैं अपने बैचमेट और पंजाब कैडर के अधिकारी गोबिंद राम से टेलीफोन पर बात करने की कोशिश कर रहा था. . . कोशिश इसलिए कि बात थी ही इतनी मुश्किल. . . गोबिंद के सत्रह-अट्ठारह वर्षीय किशोर बेटे का कुछ दिनों पहले ही खालिस्तानी आतंकियों ने कत्ल कर दिया था। मैंने मातमपुर्सी के लिए फोन किया था और कुछ भी बोलना कठिन लग रहा था। बहरहाल, जितने भी बेमानी हों, आप ऐसे मौके पर कुछ औपचारिक वाक्य कहते ही हैं। मैंने भी कहे। अब तक जो कुछ याद है, गोबिंद राम की एक साफ समझ थी। उनके अनुसार, पंजाब में लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच गई थी और इसका मुख्य कारण था कि लगभग एक दशक पुरानी लड़ाई में पंजाब पुलिस अब लड़ती हुई दिख रही थी। इसके लिए जेएफ रिबेरो या केपीएस गिल का नेतृत्व ही नहीं, खाड़कुओं की यह रणनीतिक भूल भी जिम्मेदार थी, जिनके तहत उन्होंने पंजाब पुलिस के जवानों व अधिकारियों के परिवारी जनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। गोबिंद के अनुसार, इस एक कदम से पंजाब पुलिस में लड़ने का नया जज्बा पैदा होने लगा था। जैसे ही किसी पुलिसकर्मी का कोई करीबी रिश्तेदार मारा जाता या अपहृत होता, तो कानून से परे कार्रवाई करने में माहिर केपीएस गिल के नेतृत्व में फोर्स पलटवार करती और स्थानीय खाड़कुओं के परिवारी जनों का बराबर का नुकसान होता। टेलीफोन पर उन्होंने मुझे कई वाकये सुनाए, जिनमें अपहृत इसी तरह से छुड़ाए गए थे। इस वार्तालाप के एक पखवाडे़ के अंदर गोबिंद राम भी शहीद हो गए। काफी दिनों से वह खालिस्तानियों की हिट लिस्ट में थे, पर उनसे बातें करके मेरे मन में यह स्पष्ट हो गया था कि अगर पंजाब पुलिस ने लड़ना शुरू कर दिया है, तो अब वहां आतंक की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अगले तीन-चार वर्षों में ही हमने देखा कि पंजाब में लगभग शांति कायम हो गई। दुनिया भर में आतंकवाद से लड़ाई का यह साझा अनुभव रहा है कि इसमें स्थानीय पुलिस सबसे प्रभावी हथियार साबित हुई है। राज्य के लिए हिंसा की एक सहनीय सीमा होती है और उसके पार होते ही वह सेना का प्रयोग करता है। शुरुआती दौर में तो हर जगह पुलिस नाकाफी साबित होती है और सेना के दुमछल्ले की तरह काम करती है, पर ज्यों-ज्यों उसे पुनर्गठन का मौका मिलता जाता है, उसकी भूमिका बढ़ती जाती है। किसी समस्या का अगर राजनीतिक हल ढूंढ़ना है, तो सेना लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो सकती। संघर्ष में एक दौर आता है, जब उसकी भूमिका प्रतिकूल सिद्ध होने लगती है। यदि राज्य संवेदनशील हो, तो वह अपनी इस सीमा को जल्द पहचान लेता है कि अपने नागरिकों के खिलाफ बहुत दिनों तक सेना का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे में, आखिरी धावा तो पुलिस ही बोलती है। मुझे आज गोबिंद राम से हुआ वह आखिरी संवाद एक खास संदर्भ में याद आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में कश्मीर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मारे गए हैं। इनमें से ज्यादातर किसी आमने-सामने की लड़़ाई में शहीद नहीं हुए, बल्कि मिलती-जुलती परिस्थितियों में अपहृत कर मारे गए। सेना, अद्र्धसैनिक बलों या पुलिस के छुट्टियों में घर आए जवान आतंकियों के हत्थे चढ़ जाते हैं और नृशंसता से उनकी हत्या कर दी जाती है, पर इसका परिणाम भी फौरन दिखने लगता है। लगभग हर घटना के बाद आप न सिर्फ संबंधियों और पड़ोसियों के रोते-बिलखते चेहरे टीवी पर देखते हैं, बल्कि अब तो अधिक मात्रा में वे दुर्लभतम विजुअल्स भी दिख जाते हैं, जिनमें मृतक के रिश्तेदार पाकिस्तान या आतंकी संगठनों के खिलाफ नारे लगा रहे होते हैं। ऐसा संभवतः स्थानीय क्षति के कारण हो रहा है। क्या यह मान लिया जाए कि कश्मीर घाटी में पंजाब दोहराया जा रहा है? नब्बे के दशक के अपने व्यक्तिगत अनुभवों से मैं कह सकता हूं कि आतंकवाद की शुरुआत में तो कश्मीर पुलिस के पैर पूरी तरह से उखड़ गए थे। न सिर्फ वह एक हतोत्साहित और अनुशासनहीन भीड़ में तब्दील हो गई थी, बल्कि यह कहना भी अनुचित न होगा कि उसमें बड़े पैमाने पर पाकिस्तान समर्थक या जेहादी मानसिकता वाले तत्व घुस गए थे। अविश्वास का आलम यह था कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय पुलिस बल को लगा रखा था। श्रीनगर शहर बीएसएफ और बाहरी इलाके सेना के हवाले थे। स्वाभाविक था कि बाहरी बलों की उपस्थिति जनता में चिढ़ पैदा करती थी। इन बलों के सदस्य स्थानीय भावनाओं के प्रति संवेदनशून्य थे। नतीजतन, भारत समर्थक तत्व भी उन तक आने में संकोच करते और किसी भी लड़ाई में सफलता की पहली जरूरत कार्रवाई योग्य सूचनाओं का सैनिक और अद्र्धसैनिक बलों के पास हमेशा टोटा रहता था। पिछले कुछ वर्षों में स्थितियां बदली हैं। कश्मीर पुलिस लड़ती सी दिख रही है। जैसी सफलताएं इधर उसे मिली हैं, वे बिना स्थानीय सूचनाओं के संभव नहीं हो सकतीं। क्या हाल के महीनों में उसके सदस्यों की गांवों में अपहरण और हत्या की घटनाएं उसकी लड़ने की इच्छाशक्ति को बढ़ाएंगी और एक बार फिर से पंजाब दोहराया जा सकेगा? यह भी हो सकता है कि अपने सदस्यों व उनके परिवारी जनों को असुरक्षित पाकर बल हतोत्साहित हो लड़़ने से ही गुरेज करने लगे। दोनों संभावनाएं वास्तविकता से परे नहीं हैं, इसलिए जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस का मनोबल उठाने के लिए जो कुछ जरूरी हो, किया जाए। यहां हमें याद रखना होगा कि स्थानीय जनता से बना पुलिस बल उसकी संवेदनाओं से सीधा जुड़ा होता है। इसलिए यदि जनता का विश्वास भारतीय राज्य नहीं जीत पाता, तो उसके बीच से आए पुलिस बल का मनोबल भी ऊंचा नहीं रख सकेगा। कई बार जनता से संवाद खत्म करके सिर्फ फौजी हल की बात करने वाले इस तथ्य को भूल जाते हैं कि दुनिया में कश्मीर जैसी किसी भी समस्या का सिर्फ फौजी हल नहीं निकल सका है। वहां की लड़़ाई कश्मीर पुलिस जीत सकती है, पर इसके लिए उसके उद्गम कश्मीरी जनता का विश्वास भी भारतीय राज्य को हासिल करना होगा।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रज्ञानंद उन सात बौद्ध भिक्षुकों में से एक हैं जिन्होंने 14 अक्टूबर, 1954 को भीम राव अंबेडकर को बौद्ध धर्म ग्रहण करवाने की प्रक्रिया को संपन्न करवाया था। प्रज्ञानंद ने बताया कि 'मैंने ही भादंत चंद्रमणि माहाथेरो की मदद की थी जिन्होंने अंबेडकर को बौद्ध धर्म ग्रहण करवाया था। प्रज्ञानंद ने बताया कि उस समय वहां पर भीम राव अंबेडकर की पत्नी सविता भी मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि ऐसा माहौल हो गया था उस समय कि भीम राव आंबेडकर ने जैसे पूरी दुनिया से अपने संबंधों को तोड़ दिया हो।
प्रज्ञानंद लखनऊ के रिसालदार पार्क के निकट बुद्ध विहार में रहने वाले सबसे वरिष्ठ भिक्षु हैं। अपने जीवन में अंबेडकर खुद दो बार उनसे मिलने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि लखनऊ आने के बाद बौद्ध धर्म को लेकर उनका विश्वास और दृढ़ हुआ। प्रज्ञानंद कहते हैं कि मध्य प्रदेश उनकी जन्मभूमि थी, नागपुर उनकी दीक्षाभूमि थी। पर लखनऊ उनकी स्नेहभूमि थी जोकि उनको बौद्ध धर्म के और करीब लाई। बौद्ध धर्म ग्रहण करने से पहले भीम राव अंबेडकर वर्ष 1948 और वर्ष 1951 में लखनऊ आए थे। 18 अप्रैल, 1948 की बुद्ध विहार की उनकी एक फोटो भी विभिन्न धर्म के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए ली गई है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रज्ञानंद उन सात बौद्ध भिक्षुकों में से एक हैं जिन्होंने चौदह अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ चौवन को भीम राव अंबेडकर को बौद्ध धर्म ग्रहण करवाने की प्रक्रिया को संपन्न करवाया था। प्रज्ञानंद ने बताया कि 'मैंने ही भादंत चंद्रमणि माहाथेरो की मदद की थी जिन्होंने अंबेडकर को बौद्ध धर्म ग्रहण करवाया था। प्रज्ञानंद ने बताया कि उस समय वहां पर भीम राव अंबेडकर की पत्नी सविता भी मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि ऐसा माहौल हो गया था उस समय कि भीम राव आंबेडकर ने जैसे पूरी दुनिया से अपने संबंधों को तोड़ दिया हो। प्रज्ञानंद लखनऊ के रिसालदार पार्क के निकट बुद्ध विहार में रहने वाले सबसे वरिष्ठ भिक्षु हैं। अपने जीवन में अंबेडकर खुद दो बार उनसे मिलने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि लखनऊ आने के बाद बौद्ध धर्म को लेकर उनका विश्वास और दृढ़ हुआ। प्रज्ञानंद कहते हैं कि मध्य प्रदेश उनकी जन्मभूमि थी, नागपुर उनकी दीक्षाभूमि थी। पर लखनऊ उनकी स्नेहभूमि थी जोकि उनको बौद्ध धर्म के और करीब लाई। बौद्ध धर्म ग्रहण करने से पहले भीम राव अंबेडकर वर्ष एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस और वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में लखनऊ आए थे। अट्ठारह अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की बुद्ध विहार की उनकी एक फोटो भी विभिन्न धर्म के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए ली गई है।
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भारत में 97 प्रतिशत मकानों में मीटर से बिजली मुहैया कराई जा रही है, लेकिन महज 25 प्रतिशत लोग ही कम बिजली खपत करने वाले उपकरणों से वाकिफ हैं। काउंसिल आफ एनर्जी, एनवायरमेंट ऐंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की हाल की रिपोर्ट से यह जानकारी मिलती है। रिपोर्ट में ब्यूरो आफ एनर्जी एफिसिएंसी (बीईई) की ओर से चलने वाले जागरूकता अभियान की खामियों को भी उजागर किया गया है, जो देश में ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम का प्रसार करता है।
सीईईडब्ल्यू के अध्ययन में पाया गया है कि 40 प्रतिशत परिवारों ने खरीदारी के समय उपकरण की कीमत को सबसे अहम बताया। उसके बाद ब्रांड की लोकप्रियता, टिकाऊपन और बिजली की बचत का स्थान आता है।
स्टैंडर्ड ऐंड लेबलिंग (एसऐंडएल) कार्यक्रम शुरू किए जाने के करीब डेढ़ दशक बाद भी सिर्फ एक चौथाई परिवारों ने ही स्टार लेवल के बारे में सुना है। ग्रामीण इलाकों में इसे लेकर जागरूकता कम है।
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भारत में सत्तानवे प्रतिशत मकानों में मीटर से बिजली मुहैया कराई जा रही है, लेकिन महज पच्चीस प्रतिशत लोग ही कम बिजली खपत करने वाले उपकरणों से वाकिफ हैं। काउंसिल आफ एनर्जी, एनवायरमेंट ऐंड वाटर की हाल की रिपोर्ट से यह जानकारी मिलती है। रिपोर्ट में ब्यूरो आफ एनर्जी एफिसिएंसी की ओर से चलने वाले जागरूकता अभियान की खामियों को भी उजागर किया गया है, जो देश में ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम का प्रसार करता है। सीईईडब्ल्यू के अध्ययन में पाया गया है कि चालीस प्रतिशत परिवारों ने खरीदारी के समय उपकरण की कीमत को सबसे अहम बताया। उसके बाद ब्रांड की लोकप्रियता, टिकाऊपन और बिजली की बचत का स्थान आता है। स्टैंडर्ड ऐंड लेबलिंग कार्यक्रम शुरू किए जाने के करीब डेढ़ दशक बाद भी सिर्फ एक चौथाई परिवारों ने ही स्टार लेवल के बारे में सुना है। ग्रामीण इलाकों में इसे लेकर जागरूकता कम है।
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नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर 62 साल की प्रोमिला ठाकुर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब बुधवार को प्लेटफॉर्म पर उनका स्वागत रामायण के किरदारों ने किया। रेलवे की शुरू की गई 'श्री रामायण एक्सप्रेस' की पहली यात्रा की यात्रियों में से एक प्रोमिला ने कहा कि वे यह सोच कर रोमांचित हैं कि वे एक ही बार में अपने आराध्य श्रीरामचंद्र से जुड़े सभी स्थलों के दर्शन कर लेंगी। उन्होंने कहा, 'जहां-जहां रामजी के चरण पड़े मैं उन सारी जगहों पर जाऊंगी। मुझे लगता है कि यह यादगार यात्रा रहेगी। बड़ी बात है कि यह ट्रेन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ही है। सब एक मिजाज के यात्री रहेंगे तो और मजा आएगा। सारे रामभक्त ही तो होंगे। यह पूरी यात्रा ही तीर्थयात्रा होगी'। रामायण एक्सप्रेस में प्रति यात्री 15 हजार रुपए का टिकट पैकेज है। प्रोमिला कहती हैं कि उत्तर से लेकर दक्षिण तक घूमने और ठहरने के 15 हजार ज्यादा नहीं हैं।
देहरादून से आए एनएस आहलुवालिया इसलिए खुश थे कि उनकी पत्नी इस यात्रा को लेकर बहुत खुश थीं। रामायण के किरदारों द्वारा स्वागत से उनकी पत्नी अभिभूत थीं। आहलुवालिया ने कहा कि यह ट्रेन धार्मिक पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यात्रा सुखद होगी। वहीं सुरेश गुप्ता का कहना था कि रेलवे को इस सेवा के लिए आधुनिक कोच लाने चाहिए। गुप्ता ने कहा कि कोच पुराने हैं और शौचालय भी ठीक नहीं हैं। इसके साथ ही गुप्ता ने कहा, 'मैं 70 साल का हूं। चेन्नई से ट्रेन वापस आती है तो 50 घंटे की यात्रा है कोई हाल्ट नहीं है। हमारे जैसे बुजुर्गों के लिए यह कष्टदायक है। इसके टाइम टेबल को लेकर भी रेलवे को सतर्क रहना चाहिए ताकि बुजुर्गों को परेशानी नहीं हो'।
रेलवे की इस रामायण एक्सप्रेस सेवा का उद्घाटन केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया। यह ट्रेन नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से चलकर सबसे पहले अयोध्या जाएगी। उसके बाद सीतामढ़ी, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, नाशिक, हंपी और रामेश्वरम होते हुए चेन्नई पहुंचेगी। इस रेल सेवा के जरिए रेलवे राम भक्तों को पूरा रामायण सर्किट देना चाहता है। गौरतलब है कि यह ट्रेन सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। बुधवार को जब इस रेल सेवा की पहली यात्रा शुरू हुई तो रामायण के किरदारों के जरिए यात्रियों का स्वागत किया गया। ट्रेन खुलने के पहले प्लेटफॉर्म का नजारा किसी रामलीला के मंच की तरह का था। इस सेवा की दूसरी ट्रेन जयपुर से 22 नवंबर को रवाना होगी।
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नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर बासठ साल की प्रोमिला ठाकुर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब बुधवार को प्लेटफॉर्म पर उनका स्वागत रामायण के किरदारों ने किया। रेलवे की शुरू की गई 'श्री रामायण एक्सप्रेस' की पहली यात्रा की यात्रियों में से एक प्रोमिला ने कहा कि वे यह सोच कर रोमांचित हैं कि वे एक ही बार में अपने आराध्य श्रीरामचंद्र से जुड़े सभी स्थलों के दर्शन कर लेंगी। उन्होंने कहा, 'जहां-जहां रामजी के चरण पड़े मैं उन सारी जगहों पर जाऊंगी। मुझे लगता है कि यह यादगार यात्रा रहेगी। बड़ी बात है कि यह ट्रेन वरिष्ठ नागरिकों के लिए ही है। सब एक मिजाज के यात्री रहेंगे तो और मजा आएगा। सारे रामभक्त ही तो होंगे। यह पूरी यात्रा ही तीर्थयात्रा होगी'। रामायण एक्सप्रेस में प्रति यात्री पंद्रह हजार रुपए का टिकट पैकेज है। प्रोमिला कहती हैं कि उत्तर से लेकर दक्षिण तक घूमने और ठहरने के पंद्रह हजार ज्यादा नहीं हैं। देहरादून से आए एनएस आहलुवालिया इसलिए खुश थे कि उनकी पत्नी इस यात्रा को लेकर बहुत खुश थीं। रामायण के किरदारों द्वारा स्वागत से उनकी पत्नी अभिभूत थीं। आहलुवालिया ने कहा कि यह ट्रेन धार्मिक पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यात्रा सुखद होगी। वहीं सुरेश गुप्ता का कहना था कि रेलवे को इस सेवा के लिए आधुनिक कोच लाने चाहिए। गुप्ता ने कहा कि कोच पुराने हैं और शौचालय भी ठीक नहीं हैं। इसके साथ ही गुप्ता ने कहा, 'मैं सत्तर साल का हूं। चेन्नई से ट्रेन वापस आती है तो पचास घंटाटे की यात्रा है कोई हाल्ट नहीं है। हमारे जैसे बुजुर्गों के लिए यह कष्टदायक है। इसके टाइम टेबल को लेकर भी रेलवे को सतर्क रहना चाहिए ताकि बुजुर्गों को परेशानी नहीं हो'। रेलवे की इस रामायण एक्सप्रेस सेवा का उद्घाटन केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया। यह ट्रेन नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से चलकर सबसे पहले अयोध्या जाएगी। उसके बाद सीतामढ़ी, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, नाशिक, हंपी और रामेश्वरम होते हुए चेन्नई पहुंचेगी। इस रेल सेवा के जरिए रेलवे राम भक्तों को पूरा रामायण सर्किट देना चाहता है। गौरतलब है कि यह ट्रेन सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। बुधवार को जब इस रेल सेवा की पहली यात्रा शुरू हुई तो रामायण के किरदारों के जरिए यात्रियों का स्वागत किया गया। ट्रेन खुलने के पहले प्लेटफॉर्म का नजारा किसी रामलीला के मंच की तरह का था। इस सेवा की दूसरी ट्रेन जयपुर से बाईस नवंबर को रवाना होगी।
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लागू नहीं
(i) किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या होता संस्थान से टैक्सटाइल रसायन विज्ञान में डिग्री या इंजीनियरी में डिग्री या टैक्सटाइल प्रसंस्करण या टैक्सटाइल रसायन विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ स्नातक डिग्री या किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से टैक्सटाइल रसायन विज्ञान या टैक्सटाइल प्रसंस्करण में स्नातकोत्तर डिप्लोमा;
(ii) किसी मान्यताप्राप्त संस्थान में टैक्सटाइल विज्ञान ब्लीचिंग/डाइंग/
प्रिंटिंग/फिनिशिंग के व्याख्याता के रूप में या किसी रंजक गृह/वैट प्रसंस्करण का हथालन करने वाली टैक्सटाइल मिल / फिनिशिंग/टैक्सटाइल की ब्लीचिंग के शिफ्ट प्रभारी के रूप में दो वर्ष का अनुभव ।
टिप्पण 1 - अर्हताएं, अन्यथा सुअर्हित अभ्यर्थियों की दशा में संघ लोक सेवा आयोग के विवेकानुसार कारणों को लेखबद्ध करते हुए शिथिल की जा सकती है ।
टिप्पण 2- अनुभव संबधी अर्हता (अर्हताएं) संघ लोक सेवा आयोग के विवेकानुसार कारणों को लेखबद्ध करते हुए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों की दशा में तब शिथिल की जा सकती हैं जब चयन के किसी प्रक्रम पर संघ लोक सेवा आयोग की यह राय है कि उनके लिए आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए अपेक्षित अनुभव रखने वाले उन समुदायों के अभ्यर्थियों के पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने की सम्भावना नहीं है ।
दो वर्ष
[PART II - SEC. 3 (i)] तक शिथिल की जा सकती है ।) टिप्पणः आयु-सीमा अवधारित करने के लिए निर्णायक तारीख भारत में अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त करने के लिए नियत की गई अंतिम तारीख होगी। (न कि वह अंतिम तारीख जो असम, मेघालय, अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख खंड, हिमाचल प्रदेश के लाहोल और स्पीति जिले तथा चम्बा-जिले के पांगी उपखंड, अंदमान और निकोबार द्वीप या लक्षद्वीप के अभ्यर्थियों के लिए विहित की गई है।)
सीधी भर्ती द्वारा ।
टिप्पणः पदधारी के प्रतिनियुक्ति पर या लम्बी बीमारी या अध्ययन छुट्टी या किसी अन्य परिस्थिति में एक वर्ष या अधिक अवधि के लिए बाहर रहने के कारण हुई रिक्तियां, केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारियों में से प्रतिनियुक्ति पर स्थानांतरण द्वारा भरी जा सकेंगी जो -
(i) जो नियमित आधार पर सदृश पद धारण किए हुए हैं ; या
(ii) वेतन बैंड 2 में 9300-34800 धन ग्रेड वेतन 4200 रुपए में पांच वर्ष की नियमित सेवा रखते हैं और स्तंभ (7) के अधीन सीधी भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए विहित शैक्षिक अर्हता और अनुभव रखते हैं ।
(प्रतिनियुक्ति की अवधि, जिसके अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार के उसी या किसी अन्य संगठन / विभाग में इस नियुक्ति से ठीक पहले धारित किसी अन्य काडर बाह्य पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि है, साधारणतया तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी । प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तारीख को 56 वर्ष से अधिक नहीं होगी ।)
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लागू नहीं किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या होता संस्थान से टैक्सटाइल रसायन विज्ञान में डिग्री या इंजीनियरी में डिग्री या टैक्सटाइल प्रसंस्करण या टैक्सटाइल रसायन विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ स्नातक डिग्री या किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से टैक्सटाइल रसायन विज्ञान या टैक्सटाइल प्रसंस्करण में स्नातकोत्तर डिप्लोमा; किसी मान्यताप्राप्त संस्थान में टैक्सटाइल विज्ञान ब्लीचिंग/डाइंग/ प्रिंटिंग/फिनिशिंग के व्याख्याता के रूप में या किसी रंजक गृह/वैट प्रसंस्करण का हथालन करने वाली टैक्सटाइल मिल / फिनिशिंग/टैक्सटाइल की ब्लीचिंग के शिफ्ट प्रभारी के रूप में दो वर्ष का अनुभव । टिप्पण एक - अर्हताएं, अन्यथा सुअर्हित अभ्यर्थियों की दशा में संघ लोक सेवा आयोग के विवेकानुसार कारणों को लेखबद्ध करते हुए शिथिल की जा सकती है । टिप्पण दो- अनुभव संबधी अर्हता संघ लोक सेवा आयोग के विवेकानुसार कारणों को लेखबद्ध करते हुए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों की दशा में तब शिथिल की जा सकती हैं जब चयन के किसी प्रक्रम पर संघ लोक सेवा आयोग की यह राय है कि उनके लिए आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए अपेक्षित अनुभव रखने वाले उन समुदायों के अभ्यर्थियों के पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होने की सम्भावना नहीं है । दो वर्ष [PART II - SEC. तीन ] तक शिथिल की जा सकती है ।) टिप्पणः आयु-सीमा अवधारित करने के लिए निर्णायक तारीख भारत में अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त करने के लिए नियत की गई अंतिम तारीख होगी। सीधी भर्ती द्वारा । टिप्पणः पदधारी के प्रतिनियुक्ति पर या लम्बी बीमारी या अध्ययन छुट्टी या किसी अन्य परिस्थिति में एक वर्ष या अधिक अवधि के लिए बाहर रहने के कारण हुई रिक्तियां, केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारियों में से प्रतिनियुक्ति पर स्थानांतरण द्वारा भरी जा सकेंगी जो - जो नियमित आधार पर सदृश पद धारण किए हुए हैं ; या वेतन बैंड दो में नौ हज़ार तीन सौ-चौंतीस हज़ार आठ सौ धन ग्रेड वेतन चार हज़ार दो सौ रुपयापए में पांच वर्ष की नियमित सेवा रखते हैं और स्तंभ के अधीन सीधी भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए विहित शैक्षिक अर्हता और अनुभव रखते हैं ।
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myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health को बनाने में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए, पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा के इस्तेमाल से शारीरिक कमजोरी व थकान को ठीक करना भी संभव है. इस आयुर्वेदिक दवा में अशोक, शतावरी, लोध्र, गोक्षुर, पुनर्नवा, गिलोय और कांचनार आदि शामिल है. जहां, अशोक अंदरुनी ब्लीडिंग व असामान्य डिस्चार्ज को ठीक करती है, वहीं, शतावरी यूट्रस के स्वास्थ्य को बेहतर करती है. इसके अलावा, लोध्र योनि में संक्रमण की समस्या को खत्म करती है.
myUpchar Ayurveda Kanchnar Guggulu भी 100% आयुर्वेदिक दवा है, जिसे पीसीओडी के इलाज में उपयोग किया जाता है. कांचनार गुग्गुल दवा महिलाओं में बांझपन, अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन और कमजोरी का इलाज करने में फायदेमंद है. इससे पुरुषों की बांझपन व लो स्पर्म काउंट की समस्या को भी ठीक किया जा सकता है. इसमें मुख्य रूप से गोक्षुरा, कपिकच्छु और शतावरी शामिल है.
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से निर्मित myUpchar Ayurveda Chandraprabha Vati का सेवन करने से महिलाओं की मूत्र विकार संबंधी समस्या और शरीरिक ऊर्जा की कमी का इलाज किया जा सकता है. इस दवा को चित्रक, दारुहरिद्रा, गिलोय, गुग्गुल, हरीतकी, अदरक, वच, बहेड़ा, शिलाजीत, इलायची, चिरायता, लौह भस्म, त्रिवृत, चव्य, अतीस, स्वर्ण मक्षिका भस्म और धनिया जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किया गया है. अन्य दवाओं की तरह यह भी पीसीओडी के आयुर्वेदिक इलाज में फायदेमंद है.
पीसीओडी का इलाज करने के लिए myUpchar Ayurveda Kumariasava को फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा माना गया है. एलोवेरा, लोह भस्म, नागकेसर व हरीतकी जैसी 43 जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी यह दवा मुख्य रूप से पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं, मूत्र त्याग के समय होने वाले दर्द, ब्लीडिंग, मिर्गी, आंतों में कीड़े होने, मूत्र को न रोक पाने की समस्या, थकान व कमजोरी आदि को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
10:1 प्राकृतिक जड़ी बूटियों के शक्तिशाली पाउडर. इसलिए, ये अपने कच्चे रूप से 10 गुना अधिक प्रभावी हैं.
क्या myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health को लेने से मेरी पीसीओडी की समस्या ठीक हो सकती है?
हां, इस आयुर्वेदिक दवा के निर्माण में अशोक, शतावरी, लोध्र, गोक्षुर, पुनर्नवा, गिलोय और कांचनार आदि जड़ी-बूटियों का उपयोग किया गया है. इन जड़ी-बूटियां का मिश्रण मासिक धर्म चक्र को सही करने का काम करती हैं. इसे सही मात्रा में और नियमित रूप से लेने पर फायदा होता है. पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज इससे बेहतर नहीं हो सकता है.
मुझे पीरियड्स के समय तेज दर्द होता है, मैं क्या करूं?
आप myUpchar Ayurveda Kumariasava के साथ myUpchar Ayurveda Chandraprabha Vati का सेवन करें. इसे नियमित रूप से लेने पर आपको जल्द आराम महसूस होगा. इससे न सिर्फ पीरियड्स में होने वाले दर्द को ठीक करना संभव है, बल्कि पीसीओडी के इलाज में भी ये दवाएं इस्तेमाल होती हैं.
पीसीओडी की समस्या के चलते मेरे लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो रहा है. कृपया कोई समाधान बताएं.
गर्भधारण करने से पहले पीसीओडी का इलाज किया जाना जरूरी है और इसके लिए आप myUpchar Ayurveda Kanchnar Guggulu का सेवन करें. इसे पीसीओडी की कारगर आयुर्वेदिक दवा माना गया है. इसके साथ ही myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health भी लें. यह दवा बांझपन की समस्या को दूर कर गर्भधारण करने में मदद करती है.
क्या मुझे इसके साथ किसी खास तरह की डाइट को फॉलो करने की जरूरत है?
मैं एलोपैथिक मेडिसिन ले रही हूं. क्या उसके साथ myUpchar Prajnas Women Health ले सकती हूं?
हां, Prajnas Women Health हर्बल प्रोडक्ट है, जिस कारण इसे एलोपैथिक मेडिसिन के साथ लेने पर किसी भी तरह का रिएक्शन नहीं होता है.
इस प्रोडक्ट को लेकर किस तरह की रिसर्च की गई है?
क्या इससे कोई साइड इफेक्ट भी होता है?
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myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health को बनाने में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए, पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा के इस्तेमाल से शारीरिक कमजोरी व थकान को ठीक करना भी संभव है. इस आयुर्वेदिक दवा में अशोक, शतावरी, लोध्र, गोक्षुर, पुनर्नवा, गिलोय और कांचनार आदि शामिल है. जहां, अशोक अंदरुनी ब्लीडिंग व असामान्य डिस्चार्ज को ठीक करती है, वहीं, शतावरी यूट्रस के स्वास्थ्य को बेहतर करती है. इसके अलावा, लोध्र योनि में संक्रमण की समस्या को खत्म करती है. myUpchar Ayurveda Kanchnar Guggulu भी एक सौ% आयुर्वेदिक दवा है, जिसे पीसीओडी के इलाज में उपयोग किया जाता है. कांचनार गुग्गुल दवा महिलाओं में बांझपन, अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन और कमजोरी का इलाज करने में फायदेमंद है. इससे पुरुषों की बांझपन व लो स्पर्म काउंट की समस्या को भी ठीक किया जा सकता है. इसमें मुख्य रूप से गोक्षुरा, कपिकच्छु और शतावरी शामिल है. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से निर्मित myUpchar Ayurveda Chandraprabha Vati का सेवन करने से महिलाओं की मूत्र विकार संबंधी समस्या और शरीरिक ऊर्जा की कमी का इलाज किया जा सकता है. इस दवा को चित्रक, दारुहरिद्रा, गिलोय, गुग्गुल, हरीतकी, अदरक, वच, बहेड़ा, शिलाजीत, इलायची, चिरायता, लौह भस्म, त्रिवृत, चव्य, अतीस, स्वर्ण मक्षिका भस्म और धनिया जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किया गया है. अन्य दवाओं की तरह यह भी पीसीओडी के आयुर्वेदिक इलाज में फायदेमंद है. पीसीओडी का इलाज करने के लिए myUpchar Ayurveda Kumariasava को फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा माना गया है. एलोवेरा, लोह भस्म, नागकेसर व हरीतकी जैसी तैंतालीस जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी यह दवा मुख्य रूप से पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं, मूत्र त्याग के समय होने वाले दर्द, ब्लीडिंग, मिर्गी, आंतों में कीड़े होने, मूत्र को न रोक पाने की समस्या, थकान व कमजोरी आदि को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. दस:एक प्राकृतिक जड़ी बूटियों के शक्तिशाली पाउडर. इसलिए, ये अपने कच्चे रूप से दस गुना अधिक प्रभावी हैं. क्या myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health को लेने से मेरी पीसीओडी की समस्या ठीक हो सकती है? हां, इस आयुर्वेदिक दवा के निर्माण में अशोक, शतावरी, लोध्र, गोक्षुर, पुनर्नवा, गिलोय और कांचनार आदि जड़ी-बूटियों का उपयोग किया गया है. इन जड़ी-बूटियां का मिश्रण मासिक धर्म चक्र को सही करने का काम करती हैं. इसे सही मात्रा में और नियमित रूप से लेने पर फायदा होता है. पीसीओडी का आयुर्वेदिक इलाज इससे बेहतर नहीं हो सकता है. मुझे पीरियड्स के समय तेज दर्द होता है, मैं क्या करूं? आप myUpchar Ayurveda Kumariasava के साथ myUpchar Ayurveda Chandraprabha Vati का सेवन करें. इसे नियमित रूप से लेने पर आपको जल्द आराम महसूस होगा. इससे न सिर्फ पीरियड्स में होने वाले दर्द को ठीक करना संभव है, बल्कि पीसीओडी के इलाज में भी ये दवाएं इस्तेमाल होती हैं. पीसीओडी की समस्या के चलते मेरे लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो रहा है. कृपया कोई समाधान बताएं. गर्भधारण करने से पहले पीसीओडी का इलाज किया जाना जरूरी है और इसके लिए आप myUpchar Ayurveda Kanchnar Guggulu का सेवन करें. इसे पीसीओडी की कारगर आयुर्वेदिक दवा माना गया है. इसके साथ ही myUpchar Ayurveda Prajnas Women Health भी लें. यह दवा बांझपन की समस्या को दूर कर गर्भधारण करने में मदद करती है. क्या मुझे इसके साथ किसी खास तरह की डाइट को फॉलो करने की जरूरत है? मैं एलोपैथिक मेडिसिन ले रही हूं. क्या उसके साथ myUpchar Prajnas Women Health ले सकती हूं? हां, Prajnas Women Health हर्बल प्रोडक्ट है, जिस कारण इसे एलोपैथिक मेडिसिन के साथ लेने पर किसी भी तरह का रिएक्शन नहीं होता है. इस प्रोडक्ट को लेकर किस तरह की रिसर्च की गई है? क्या इससे कोई साइड इफेक्ट भी होता है?
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[ संजमासंजमलद्धी तासिं चेव पुव्वुत्ताणमणुदइन्लाणमपञ्चक्खाणादिकसायपयडीणं पदेसुदयाभावो १देसोवसामणा त्ति तव्वं । एवंविहा पुच्चबद्धाणमुवसामणा एदम्मि बीजपदे णिबद्धा त्ति घेत्तव्वं ।
रूप उन्ही पूर्वोक्त अप्रत्याख्यानादि कषाय प्रकृतियों के प्रदेशांका उदयाभाव प्रदेशोपशामना है ऐसा यहाँ कहना चाहिए । इस प्रकारको पूर्वबद्ध कर्मोंकी उपशामना इस बीजपद में निबद्ध है
ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए ।
विशेषार्थ-संयमासयमलब्धि और संयमलब्धि ये दोनों क्षायांपशामिक भाव है। यहाँ प्रकृति, स्थिति, अनुभाग और प्रदेशोके भेदसे चार भागोंमे विभक्त किन प्रकृतियों के अनुदयसे ये भाव प्रकट होते हैं इस तथ्यको ध्यान में रखकर इन दोना लब्धियोको अपने प्रतिपक्ष कर्मोंके अनुढयमे होनेसे अनुदय-उपशामनास्वरूप कहा गया है। उनमें से संयमासंयमलब्धि अनन्तानुबन्धीचतुष्क और अप्रत्याख्यानावरणचतुष्क के उदयाभावरूप उपशामनासे होती है ऐसा यहाँ बतलाया गया है। इसका आशय यह है कि जिस प्रकार सभ्यग्दर्शनकी प्राप्ति में अनन्तानुबन्धीका उदयाभाव प्रयोजनीय है उसी प्रकार सम्यकूचारित्रकी प्राप्ति में भी उसका उदयाभाव प्रयोजनीय है । वस्तुतः अनन्तानुबन्धीचतुष्क चारित्रमोहनीयका ही एक भेद है, क्योंकि ( १ ) बन्धकालमें दर्शनमोहनीयको जो द्रव्य मिलता है उसमेसे एक परमाणु भी अनन्तानुबन्धको नहीं मिलता ( २ ) दर्शनमोहनीयके तीन भेद है, उनका यथास्थान जिस प्रकार परम्पर संक्रम होता है उस प्रकार उसके द्रव्यका न तो अनन्तानुबन्धी चतुष्क में संक्रम होता है और न ही अनन्तानुबन्धीचतुष्कका दर्शनमाहनीय के किसी भी भेदमें संक्रम होता है, ( ३ ) अनन्तानुबन्धीचतुष्कका यथायोग्य चारित्रमोहनीयके अवान्तर भेदोंमें संक्रम होता है और चारित्रमोहनीयके अवान्तर भेडोंका यथायोग्य अनन्तानुबन्धी चतुष्क में संक्रम होता है, ( ४ ) जिस प्रकार अप्रत्याख्यानावरण आदिके क्रोध, मान, माया और लोभ ये चार भेद है उसी प्रकार अनन्तानुबन्धी भी क्रोधादि चार भागों में विभक्त है। यता ये क्रोधादि भाव कपायपरिणाम है और कषायोंका अन्तर्भाव विभाव चारित्रमे ही होता है, मिथ्यात्वरूप विभावभावमें नहीं, इसलिए अनन्तानुबन्धीचतुष्कको चारित्रमोहनीयम्वरूप ही जानना चाहिए । और यही कारण है कि यहाँ अप्रत्याख्यानावरणचतुष्क के उदयाभावरूप उपशमके साथ अनन्तानुबन्धी चतुष्क के उदयाभावरूप उपशामनाको संयमासंयमको प्राप्ति में हेतुरूपसे स्वीकार किया गया है । इस पर यहाँ यह शंका होती है कि यदि ऐसा है तो परमा गममें तीन दर्शनमोहनीय और अनन्तानुबन्धीचतुष्क इन सातके उपशम आदिमे सम्यग्दर्शन की उत्पत्तिका निर्देश न कर केवल दर्शनमोहनीयके उपशम आदिसे ही उसकी उत्पत्ति क्यों नहीं कही गई ? समाघान यह है कि जीवके भाव दो प्रकारके हैं - स्वप्रत्यय और स्वपरप्रत्यय । उनमें से जितने भी सम्यग्दर्शनादि स्वभाव भाव होते हैं वे सब स्व-परप्रत्यय न होकर केवल स्वप्रत्यय ही होते हैं। इसका आशय यह है कि जब यह जीव अपने उपयोगपरिणाममें परके अबलम्बनसे मुक्त होकर मात्र स्वभावके निर्णयपूर्वक उसके सन्मुख होता है तभी म्वभावभावकी प्राप्ति होती है, अन्य प्रकारसे नहीं। इसका विशेष स्पष्टीकरण यह है कि बुद्धिपूर्वक स्वभावभावकी प्राप्तिमें जीवका अपने उपयोग परिणामके द्वारा ज्ञान-दर्शनस्वरूप आत्मसन्मुख होना परमा वश्यक है। इससे स्पष्ट है कि सम्यग्दर्शनादि स्वभावभावकी प्राप्तिके समय जीवका उपयोग अन्य अशेष विषयोंसे हटकर एकमात्र स्वभावभूत आत्मा में ही युक्त रहता है। इन सब
९ ७. अधवा 'लद्धी य संजमासजमस्से त्ति बुत्ते संजमासंजमलद्धी अणेयमेयभिण्णा घेतव्वा । तं जहा, तिविहाणि संजमासंजमलद्धिवाणाणि - पडिवादद्वाणाणि पडिवज्जमाणट्ठाणाणि अपडिवादअपडिवजमाणट्ठाणाणि वेदि । एवं संजमलद्धीए वि तिविहत्तं वत्तव्वं । तदो गाहापुव्वद्धे संजमासंजम-संजमलद्धिवाणाणं' परूवणा णित्रद्धा त्ति घेतव्वं । 'वड्ढावड्डी' इच्चेदस्स बीजपदस्स अत्थो पुच्वं व वत्तव्यो । अहवा 'वढि' त्ति वुत्ते संजमासंजमं संजमं च पडिवजमाणस्स एयंताणुवढिपरिणामं पुव्वं व घेत्तूण तदो 'अवडि' त्ति एदेण ओवड्डी हेव्या । का ओवड्डी' णाम १ संजमासंजम-संजमलद्धीहिंतो हेट्ठा पडिवदमाणयस्स संकिलेसवसेण पडिसमयसम्यग्दर्शनादि स्वभावभावोको स्वप्रत्यय कहनेका यही कारण है । यतः सम्यग्दर्शनादिकी प्राप्तिके समय आत्माका उपयोग अपने स्वरूप में ही युक्त रहता है अतः मानना पड़ता है कि एक सम्यग्दर्शनकी प्राप्तिके समय उसके साथ अशरूपमे सम्यग्ज्ञान और सम्यकचारित्रकी भी प्राप्ति होती है। यतः उस समय आत्माका उपयोग अपने स्वरूपको ही वेदता है, अतः जब भी सम्यग्दर्शनकी उत्पत्ति होती है तब वह स्वानुभूतिके साथ ही होती है। स्वानुभूतिको सम्यग्दर्शनका लक्षण स्वीकार करनेका भी यही कारण है और यह स्वानुभूति स्वोपयुक्त रत्नत्रय परिणाम या तत्परिणत आत्मा है, अतः ऐसे जीवके दर्शनमोहनीयत्रिकके उदयाभावरूप करणोपशम आदिके साथ अनन्तानुबन्धी चतुष्कका भी अनुदयरूप उपशम आदि स्वीकार किया गया है। जिस चारित्रकी संज्ञा संयमासंयम और संयम है उसकी प्राप्ति भले हो मात्र अनन्तानुबन्धीके उद्याभावमें न हो, पर उक्त विवेचनसे यह स्पष्ट है कि दर्शनमोहनीयत्रिकके उपशम होने के साथ अनन्तानुबन्धीका उदयाभाव होने पर स्वरूपरमणतारूप आत्मपरिणामकी प्राप्ति नियमसे होती है। यही कारण है कि सम्यग्दर्शन की प्राप्तिके समय जिस प्रकार दर्शनमोहनयत्रिकका उदयाभाव नियमसे होता है उसी प्रकार अनन्तानुबन्धी चतुष्कका भी उदयाभाव अवश्य होता है। अतः विवक्षावश अनन्तानुबन्धीचतुष्कको सम्यग्दर्शनका प्रतिबन्धक भी कहा गया है पर है वह चारित्रमोहनीयका अवान्तर भेद हो ।
६ ७ अथवा 'लद्धी य संजमासंजमस्स' ऐसा कहनेपर संयमासयम लब्धिको अनेक प्रकारकी ग्रहण करनी चाहिए। यथा - संयमासंयमलब्धिस्थान तीन प्रकारके है - प्रतिपातस्थान, प्रतिपद्यमानस्थान और अप्रतिपात अप्रतिपद्यमानस्थान । इसीप्रकार संयमलब्धि के भी तीन प्रकारके स्थान कहने चाहिए । इसलिए गाथाके पूर्वार्ध में संयमासंयम और संयम लब्धिस्थानोंकी प्ररूपणा निबद्ध है ऐसा ग्रहण करना चाहिए । 'बड्ढाबड्डी' इस बीजपदका अर्थ पहलेके समान कहना चाहिए। अथवा 'वड्ढी' ऐसा कहनेपर संयमासंयम और संयमको प्राप्त होनेवाले जीवके एकान्तानुवृद्धिपरिणामका पहले के समान ग्रहणकर उसके बाद 'अवढि' इस पदद्वारा 'ओवडूढी' अर्थात् उत्तरोत्तर परिणामहानि ग्रहण करनी चाहिए ।
शंका - 'अववृद्धि' किसे कहते है ?
१ ता०प्रती संजमासंजमलद्धिट्ठाणाणं इति पाठः । २. ता०प्रती 'अवट्ठि' इति पाठः ।
३ ता०प्रती ओवड्ठ इति पाठ ।
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[ संजमासंजमलद्धी तासिं चेव पुव्वुत्ताणमणुदइन्लाणमपञ्चक्खाणादिकसायपयडीणं पदेसुदयाभावो एकदेसोवसामणा त्ति तव्वं । एवंविहा पुच्चबद्धाणमुवसामणा एदम्मि बीजपदे णिबद्धा त्ति घेत्तव्वं । रूप उन्ही पूर्वोक्त अप्रत्याख्यानादि कषाय प्रकृतियों के प्रदेशांका उदयाभाव प्रदेशोपशामना है ऐसा यहाँ कहना चाहिए । इस प्रकारको पूर्वबद्ध कर्मोंकी उपशामना इस बीजपद में निबद्ध है ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए । विशेषार्थ-संयमासयमलब्धि और संयमलब्धि ये दोनों क्षायांपशामिक भाव है। यहाँ प्रकृति, स्थिति, अनुभाग और प्रदेशोके भेदसे चार भागोंमे विभक्त किन प्रकृतियों के अनुदयसे ये भाव प्रकट होते हैं इस तथ्यको ध्यान में रखकर इन दोना लब्धियोको अपने प्रतिपक्ष कर्मोंके अनुढयमे होनेसे अनुदय-उपशामनास्वरूप कहा गया है। उनमें से संयमासंयमलब्धि अनन्तानुबन्धीचतुष्क और अप्रत्याख्यानावरणचतुष्क के उदयाभावरूप उपशामनासे होती है ऐसा यहाँ बतलाया गया है। इसका आशय यह है कि जिस प्रकार सभ्यग्दर्शनकी प्राप्ति में अनन्तानुबन्धीका उदयाभाव प्रयोजनीय है उसी प्रकार सम्यकूचारित्रकी प्राप्ति में भी उसका उदयाभाव प्रयोजनीय है । वस्तुतः अनन्तानुबन्धीचतुष्क चारित्रमोहनीयका ही एक भेद है, क्योंकि बन्धकालमें दर्शनमोहनीयको जो द्रव्य मिलता है उसमेसे एक परमाणु भी अनन्तानुबन्धको नहीं मिलता दर्शनमोहनीयके तीन भेद है, उनका यथास्थान जिस प्रकार परम्पर संक्रम होता है उस प्रकार उसके द्रव्यका न तो अनन्तानुबन्धी चतुष्क में संक्रम होता है और न ही अनन्तानुबन्धीचतुष्कका दर्शनमाहनीय के किसी भी भेदमें संक्रम होता है, अनन्तानुबन्धीचतुष्कका यथायोग्य चारित्रमोहनीयके अवान्तर भेदोंमें संक्रम होता है और चारित्रमोहनीयके अवान्तर भेडोंका यथायोग्य अनन्तानुबन्धी चतुष्क में संक्रम होता है, जिस प्रकार अप्रत्याख्यानावरण आदिके क्रोध, मान, माया और लोभ ये चार भेद है उसी प्रकार अनन्तानुबन्धी भी क्रोधादि चार भागों में विभक्त है। यता ये क्रोधादि भाव कपायपरिणाम है और कषायोंका अन्तर्भाव विभाव चारित्रमे ही होता है, मिथ्यात्वरूप विभावभावमें नहीं, इसलिए अनन्तानुबन्धीचतुष्कको चारित्रमोहनीयम्वरूप ही जानना चाहिए । और यही कारण है कि यहाँ अप्रत्याख्यानावरणचतुष्क के उदयाभावरूप उपशमके साथ अनन्तानुबन्धी चतुष्क के उदयाभावरूप उपशामनाको संयमासंयमको प्राप्ति में हेतुरूपसे स्वीकार किया गया है । इस पर यहाँ यह शंका होती है कि यदि ऐसा है तो परमा गममें तीन दर्शनमोहनीय और अनन्तानुबन्धीचतुष्क इन सातके उपशम आदिमे सम्यग्दर्शन की उत्पत्तिका निर्देश न कर केवल दर्शनमोहनीयके उपशम आदिसे ही उसकी उत्पत्ति क्यों नहीं कही गई ? समाघान यह है कि जीवके भाव दो प्रकारके हैं - स्वप्रत्यय और स्वपरप्रत्यय । उनमें से जितने भी सम्यग्दर्शनादि स्वभाव भाव होते हैं वे सब स्व-परप्रत्यय न होकर केवल स्वप्रत्यय ही होते हैं। इसका आशय यह है कि जब यह जीव अपने उपयोगपरिणाममें परके अबलम्बनसे मुक्त होकर मात्र स्वभावके निर्णयपूर्वक उसके सन्मुख होता है तभी म्वभावभावकी प्राप्ति होती है, अन्य प्रकारसे नहीं। इसका विशेष स्पष्टीकरण यह है कि बुद्धिपूर्वक स्वभावभावकी प्राप्तिमें जीवका अपने उपयोग परिणामके द्वारा ज्ञान-दर्शनस्वरूप आत्मसन्मुख होना परमा वश्यक है। इससे स्पष्ट है कि सम्यग्दर्शनादि स्वभावभावकी प्राप्तिके समय जीवका उपयोग अन्य अशेष विषयोंसे हटकर एकमात्र स्वभावभूत आत्मा में ही युक्त रहता है। इन सब नौ सात. अधवा 'लद्धी य संजमासजमस्से त्ति बुत्ते संजमासंजमलद्धी अणेयमेयभिण्णा घेतव्वा । तं जहा, तिविहाणि संजमासंजमलद्धिवाणाणि - पडिवादद्वाणाणि पडिवज्जमाणट्ठाणाणि अपडिवादअपडिवजमाणट्ठाणाणि वेदि । एवं संजमलद्धीए वि तिविहत्तं वत्तव्वं । तदो गाहापुव्वद्धे संजमासंजम-संजमलद्धिवाणाणं' परूवणा णित्रद्धा त्ति घेतव्वं । 'वड्ढावड्डी' इच्चेदस्स बीजपदस्स अत्थो पुच्वं व वत्तव्यो । अहवा 'वढि' त्ति वुत्ते संजमासंजमं संजमं च पडिवजमाणस्स एयंताणुवढिपरिणामं पुव्वं व घेत्तूण तदो 'अवडि' त्ति एदेण ओवड्डी हेव्या । का ओवड्डी' णाम एक संजमासंजम-संजमलद्धीहिंतो हेट्ठा पडिवदमाणयस्स संकिलेसवसेण पडिसमयसम्यग्दर्शनादि स्वभावभावोको स्वप्रत्यय कहनेका यही कारण है । यतः सम्यग्दर्शनादिकी प्राप्तिके समय आत्माका उपयोग अपने स्वरूप में ही युक्त रहता है अतः मानना पड़ता है कि एक सम्यग्दर्शनकी प्राप्तिके समय उसके साथ अशरूपमे सम्यग्ज्ञान और सम्यकचारित्रकी भी प्राप्ति होती है। यतः उस समय आत्माका उपयोग अपने स्वरूपको ही वेदता है, अतः जब भी सम्यग्दर्शनकी उत्पत्ति होती है तब वह स्वानुभूतिके साथ ही होती है। स्वानुभूतिको सम्यग्दर्शनका लक्षण स्वीकार करनेका भी यही कारण है और यह स्वानुभूति स्वोपयुक्त रत्नत्रय परिणाम या तत्परिणत आत्मा है, अतः ऐसे जीवके दर्शनमोहनीयत्रिकके उदयाभावरूप करणोपशम आदिके साथ अनन्तानुबन्धी चतुष्कका भी अनुदयरूप उपशम आदि स्वीकार किया गया है। जिस चारित्रकी संज्ञा संयमासंयम और संयम है उसकी प्राप्ति भले हो मात्र अनन्तानुबन्धीके उद्याभावमें न हो, पर उक्त विवेचनसे यह स्पष्ट है कि दर्शनमोहनीयत्रिकके उपशम होने के साथ अनन्तानुबन्धीका उदयाभाव होने पर स्वरूपरमणतारूप आत्मपरिणामकी प्राप्ति नियमसे होती है। यही कारण है कि सम्यग्दर्शन की प्राप्तिके समय जिस प्रकार दर्शनमोहनयत्रिकका उदयाभाव नियमसे होता है उसी प्रकार अनन्तानुबन्धी चतुष्कका भी उदयाभाव अवश्य होता है। अतः विवक्षावश अनन्तानुबन्धीचतुष्कको सम्यग्दर्शनका प्रतिबन्धक भी कहा गया है पर है वह चारित्रमोहनीयका अवान्तर भेद हो । छः सात अथवा 'लद्धी य संजमासंजमस्स' ऐसा कहनेपर संयमासयम लब्धिको अनेक प्रकारकी ग्रहण करनी चाहिए। यथा - संयमासंयमलब्धिस्थान तीन प्रकारके है - प्रतिपातस्थान, प्रतिपद्यमानस्थान और अप्रतिपात अप्रतिपद्यमानस्थान । इसीप्रकार संयमलब्धि के भी तीन प्रकारके स्थान कहने चाहिए । इसलिए गाथाके पूर्वार्ध में संयमासंयम और संयम लब्धिस्थानोंकी प्ररूपणा निबद्ध है ऐसा ग्रहण करना चाहिए । 'बड्ढाबड्डी' इस बीजपदका अर्थ पहलेके समान कहना चाहिए। अथवा 'वड्ढी' ऐसा कहनेपर संयमासंयम और संयमको प्राप्त होनेवाले जीवके एकान्तानुवृद्धिपरिणामका पहले के समान ग्रहणकर उसके बाद 'अवढि' इस पदद्वारा 'ओवडूढी' अर्थात् उत्तरोत्तर परिणामहानि ग्रहण करनी चाहिए । शंका - 'अववृद्धि' किसे कहते है ? एक ताशून्यप्रती संजमासंजमलद्धिट्ठाणाणं इति पाठः । दो. ताशून्यप्रती 'अवट्ठि' इति पाठः । तीन ताशून्यप्रती ओवड्ठ इति पाठ ।
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नई दिल्ली, 13 सितम्बर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में भाजपा ने देश भर में बूथ स्तर तक जाकर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ' सेवा पखवाड़ा ' के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन का फैसला किया है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक भाजपा के कार्यकर्ता देश के सभी जिलों में समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कर सीधे आम जनता से संवाद करेंगे और उनकी सहायता करेंगे.
इसके साथ ही भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता देश के सभी जिलों में कोविड टीकाकरण सेंटर पर जाकर सेवा कार्य करेंगे. सभी जिलों में मंडल स्तर पर जाकर दो दिनों का स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा. जनता से सीधे जुड़ने के अभियान के तहत भाजपा देश भर में 'जल ही जीवन' और वोकल फॉर लोकल' अभियान को लेकर जागरूकता अभियान चलाएगी और साथ ही देश के सभी जिलों में भारत की ' विविधता में एकता' और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का संदेश समाज को देने के लिए उत्सव भी मनाएगी.
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नई दिल्ली, तेरह सितम्बर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में भाजपा ने देश भर में बूथ स्तर तक जाकर सत्रह सितंबर से दो अक्टूबर तक ' सेवा पखवाड़ा ' के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन का फैसला किया है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन सत्रह सितंबर से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर तक भाजपा के कार्यकर्ता देश के सभी जिलों में समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कर सीधे आम जनता से संवाद करेंगे और उनकी सहायता करेंगे. इसके साथ ही भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता देश के सभी जिलों में कोविड टीकाकरण सेंटर पर जाकर सेवा कार्य करेंगे. सभी जिलों में मंडल स्तर पर जाकर दो दिनों का स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा. जनता से सीधे जुड़ने के अभियान के तहत भाजपा देश भर में 'जल ही जीवन' और वोकल फॉर लोकल' अभियान को लेकर जागरूकता अभियान चलाएगी और साथ ही देश के सभी जिलों में भारत की ' विविधता में एकता' और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का संदेश समाज को देने के लिए उत्सव भी मनाएगी.
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लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है - हम सभी जानते हैं कि हर सेलिब्रिटी अपने जीते जी लाखों-करोडों कमाते हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि कई एक्टर और खिलाडी और यहां तक कि कई वैज्ञानिक तक अपने मरने के बाद भी कई जीवित सुपरस्टार से ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
इन सबकी कमाई इनके पुराने बिजनेस, पुराने एल्बम या इनके घर को देखने पर लगने वाले टिकट से हो रही है।
लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है -:
87 साल की उम्र में मृत्यु होने के बाद भी गोल्फ किंग अर्नाल्ड पॉल्मर की कमाई नहीं थमी है। पॉल्मर का देहांत पिछले ही महीने हुआ था, उनकी इस साल की कमाई 4 करोड़ डॉलर है।
पॉप किंग माइकल जैक्सन की मृत्यु को अब काफी समय हो चुका है। जैक्सन की कमाई लेकिन अभी भी जारी है। इस साल उन्होंने करीबन 551 करोड़ रूपए कमाए हैं जो कि शाहरुख खान की पिछले साल की कमाई से दो गुना ज्यादा है।
अपने जमाने के मशहूर कार्टूनिस्ट चार्ल्स शूल्ज की मृत्यु सन् 2000 में हुई थी। चार्ल्स की इस साल की कमाई 321 करोड़ रूपए है, यह कमाई भी देश के सबसे अमीर सुपरस्टार शाहरुख खान से कई गुना ज्यादा है।
किंग ऑफ रॉक के नाम से जाने जाने वाले एल्विस प्रेस्ले की मौत सन् 1977 में हुई थी। लेकिन प्रेस्ले की कमाई आज तक नहीं रुकी है। आकंडों की मानें तो उनकी इस साल की कमाई तकरीबन 180 करोड़ रुपए रही है।
इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टाईन की मौत को 66 साल हो चुके हैं लेकिन फिर भी उनकी कमाई अभी तक कम नहीं हुई। अपनी मृत्यू के इतने साल बाद भी उनकी कमाई इस साल 76 करोड़ रुपए रही।
तो दोस्तों, ये है वो लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है - यह थे इतिहास में दर्ज कुछ ऐसे नाम जिन्हें आज तक दुनिया ने नहीं भुलाया है। यहां तक कि उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी लोकप्रियता ने उन्हें करोड़पति बनाए रखा है।
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लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है - हम सभी जानते हैं कि हर सेलिब्रिटी अपने जीते जी लाखों-करोडों कमाते हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि कई एक्टर और खिलाडी और यहां तक कि कई वैज्ञानिक तक अपने मरने के बाद भी कई जीवित सुपरस्टार से ज्यादा कमाई कर रहे हैं। इन सबकी कमाई इनके पुराने बिजनेस, पुराने एल्बम या इनके घर को देखने पर लगने वाले टिकट से हो रही है। लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है -: सत्तासी साल की उम्र में मृत्यु होने के बाद भी गोल्फ किंग अर्नाल्ड पॉल्मर की कमाई नहीं थमी है। पॉल्मर का देहांत पिछले ही महीने हुआ था, उनकी इस साल की कमाई चार करोड़ डॉलर है। पॉप किंग माइकल जैक्सन की मृत्यु को अब काफी समय हो चुका है। जैक्सन की कमाई लेकिन अभी भी जारी है। इस साल उन्होंने करीबन पाँच सौ इक्यावन करोड़ रूपए कमाए हैं जो कि शाहरुख खान की पिछले साल की कमाई से दो गुना ज्यादा है। अपने जमाने के मशहूर कार्टूनिस्ट चार्ल्स शूल्ज की मृत्यु सन् दो हज़ार में हुई थी। चार्ल्स की इस साल की कमाई तीन सौ इक्कीस करोड़ रूपए है, यह कमाई भी देश के सबसे अमीर सुपरस्टार शाहरुख खान से कई गुना ज्यादा है। किंग ऑफ रॉक के नाम से जाने जाने वाले एल्विस प्रेस्ले की मौत सन् एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में हुई थी। लेकिन प्रेस्ले की कमाई आज तक नहीं रुकी है। आकंडों की मानें तो उनकी इस साल की कमाई तकरीबन एक सौ अस्सी करोड़ रुपए रही है। इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टाईन की मौत को छयासठ साल हो चुके हैं लेकिन फिर भी उनकी कमाई अभी तक कम नहीं हुई। अपनी मृत्यू के इतने साल बाद भी उनकी कमाई इस साल छिहत्तर करोड़ रुपए रही। तो दोस्तों, ये है वो लोग जो मरने के बाद भी कम रहे है - यह थे इतिहास में दर्ज कुछ ऐसे नाम जिन्हें आज तक दुनिया ने नहीं भुलाया है। यहां तक कि उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी लोकप्रियता ने उन्हें करोड़पति बनाए रखा है।
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आगरा। दीपावली के पावन पर्व पर तेज रफ्तार के कहर ने एक घर की खुशियों को छीन लिया। तेज रफ्तार का कहर इतना भीषण था कि मारुति बलेनो कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी। हादसे की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने घटना स्थल की ओर दौड़ लगाई और बलेनो सवार लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना क्षेत्रीय पुलिस को दी। घटना की जानकारी होते ही क्षेत्रीय पुलिस और यूपीडा मौके पर पहुँच गयी और लोगों को मारुति बलेनो से बाहर निकालकर अस्पताल पहुँचाया लेकिन इस हादसे में एक युवती ने अपनी जान गंवा दी।
घटना थाना डौकी क्षेत्र के गांव गुड़ा के पास आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे की है। ड्राइवर भूलवश रास्ता भटक जाने पर कार को आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर ले गया और तेज रफ्तार में मारुती बलेनो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार में बैठी मुंबई की युवती की मौके पर ही मौत हो गई। उसके शव को बमुश्किल बाहर निकाला जा सका। उसकी साथी दोस्त और ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें पुलिस ने यूपीडा की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया।
इस हादसे को देखकर मौके पर पहुँचे ग्रामीणों ने कार से शायली पुत्री इकनाथ पवार और स्मृति नाईक पुत्री प्रमोद नाईक को किसी तरह बाहर निकाला। जबकि शहीदा हर्ष नैन (28 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। ड्राइवर आकाश निवासी दिल्ली भी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ है। शायली गंभीर रूप से घायल है, जबकि स्मृति के मामूली चोटें आई हैं। दुर्घटना के बाद युवतियों का बुरा हाल था। ड्राइवर आकाश ने बताया कि वह इन तीनों को लेकर दिल्ली से आगरा आ रहा था। भूलवश यमुना एक्सप्रेस वे से उतरने की बजाय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चढ़ गया और हादसे का शिकार हो गया। घायलों को आगरा के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। यूपीडा कर्मचारियों ने युवतियों के परिजनों को सूचना दे दी है।
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आगरा। दीपावली के पावन पर्व पर तेज रफ्तार के कहर ने एक घर की खुशियों को छीन लिया। तेज रफ्तार का कहर इतना भीषण था कि मारुति बलेनो कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी। हादसे की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने घटना स्थल की ओर दौड़ लगाई और बलेनो सवार लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना क्षेत्रीय पुलिस को दी। घटना की जानकारी होते ही क्षेत्रीय पुलिस और यूपीडा मौके पर पहुँच गयी और लोगों को मारुति बलेनो से बाहर निकालकर अस्पताल पहुँचाया लेकिन इस हादसे में एक युवती ने अपनी जान गंवा दी। घटना थाना डौकी क्षेत्र के गांव गुड़ा के पास आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे की है। ड्राइवर भूलवश रास्ता भटक जाने पर कार को आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर ले गया और तेज रफ्तार में मारुती बलेनो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार में बैठी मुंबई की युवती की मौके पर ही मौत हो गई। उसके शव को बमुश्किल बाहर निकाला जा सका। उसकी साथी दोस्त और ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें पुलिस ने यूपीडा की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया। इस हादसे को देखकर मौके पर पहुँचे ग्रामीणों ने कार से शायली पुत्री इकनाथ पवार और स्मृति नाईक पुत्री प्रमोद नाईक को किसी तरह बाहर निकाला। जबकि शहीदा हर्ष नैन की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। ड्राइवर आकाश निवासी दिल्ली भी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ है। शायली गंभीर रूप से घायल है, जबकि स्मृति के मामूली चोटें आई हैं। दुर्घटना के बाद युवतियों का बुरा हाल था। ड्राइवर आकाश ने बताया कि वह इन तीनों को लेकर दिल्ली से आगरा आ रहा था। भूलवश यमुना एक्सप्रेस वे से उतरने की बजाय आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चढ़ गया और हादसे का शिकार हो गया। घायलों को आगरा के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। यूपीडा कर्मचारियों ने युवतियों के परिजनों को सूचना दे दी है।
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सुप्रीम कोर्ट. (फ़ाइल फोटो)
न्यायालय ने यह टिप्पणी, अनुसूचित जाति/जनजाति (प्रताड़ना निवारण) अधिनियम के तहत दोषी करार दिए गए एक व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने के दौरान की. शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एससी / एसटी अधिनियम के तहत उसकी सजा को बरकरार रखा था.
आरोपी और उसके पड़ोसी के बीच जमीन के एक टुकड़े के मालिकाना हक और मालिकाना हक को लेकर एक दिवानी विवाद में उस वक्त हालात बिगड़ गए जब उसने कथित तौर पर महिला पर न केवल एक ईंट फेंकी, बल्कि उसकी जाति पर गंदी और भद्दी टिप्पणी भी की. जिसके बाद उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना दीवानी मामला?
बाद में उस व्यक्ति और अन्य सह-आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया, जिसके कारण उसे एससी/एसटी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया और परिणामस्वरूप छह महीने के कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. उस व्यक्ति ने अपनी सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन उसकी अपील खारिज कर दी गई.
CJI के साथ सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जज जस्टिस सूर्य कांत और जज जस्टिस हिमा कोहली भी थे. बेंच ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अपमान और उत्पीड़न को रोकने के लिए अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम विशेष रूप से अधिनियमित किया गया है.
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PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
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सुप्रीम कोर्ट. न्यायालय ने यह टिप्पणी, अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के तहत दोषी करार दिए गए एक व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने के दौरान की. शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एससी / एसटी अधिनियम के तहत उसकी सजा को बरकरार रखा था. आरोपी और उसके पड़ोसी के बीच जमीन के एक टुकड़े के मालिकाना हक और मालिकाना हक को लेकर एक दिवानी विवाद में उस वक्त हालात बिगड़ गए जब उसने कथित तौर पर महिला पर न केवल एक ईंट फेंकी, बल्कि उसकी जाति पर गंदी और भद्दी टिप्पणी भी की. जिसके बाद उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई. सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना दीवानी मामला? बाद में उस व्यक्ति और अन्य सह-आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया, जिसके कारण उसे एससी/एसटी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया और परिणामस्वरूप छह महीने के कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ एक हज़ार रुपयापये का जुर्माना भी लगाया गया. उस व्यक्ति ने अपनी सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन उसकी अपील खारिज कर दी गई. CJI के साथ सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जज जस्टिस सूर्य कांत और जज जस्टिस हिमा कोहली भी थे. बेंच ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अपमान और उत्पीड़न को रोकने के लिए अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम विशेष रूप से अधिनियमित किया गया है. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
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जम्मू, 19 अगस्त। जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर-कटरा पट्टी पर बृहस्पतिवार तड़के 3. 6 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने बताया कि झटका सुबह पांच बजकर आठ मिनट पर काटरा से करीब 54 किलोमीटर दूर आया था। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर की गहराई में था। इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि भूकंप महसूस करके लोग घरों से बाहर आ गए।
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जम्मू, उन्नीस अगस्त। जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर-कटरा पट्टी पर बृहस्पतिवार तड़के तीन. छः तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि झटका सुबह पांच बजकर आठ मिनट पर काटरा से करीब चौवन किलोग्राममीटर दूर आया था। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर की गहराई में था। इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि भूकंप महसूस करके लोग घरों से बाहर आ गए।
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महाकालेश्वर मंदिर से साल में एक बार दशहरा पर्व के दौरान बाबा महाकाल की सवारी दशहरा मैदान तक आती है। इस बार प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर महाकाल की सवारी को श्रावण-भादौ मास की अंतिम शाही सवारी की तर्ज पर निकालने की तैयारी है। दशहरा मैदान से सवारी के वापस लौटने के दौरान मार्ग बदलने की चर्चा सामने आने के बाद अब माली समाज विरोध में उतर आया है। समाज जनों का कहना है कि परंपरागत मार्ग नहीं बदला जाए अन्यथा समाज जन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
महाकालेश्वर मंदिर से दशहरे पर बाबा महाकाल की सवारी शमी पूजन के लिए दशहरा मैदान पहुंचती है। इस बार फ्रीगंज आने वाली सवारी को पीएम मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए शाही सवारी की तर्ज पर बड़ी संख्या में भजन मंडलियों, बैंड-बाजे के साथ ही झांकियां भी शामिल की जा रही हैं। वहीं, मंदिर प्रशासन की साथ हुई बैठक में दशहरा मैदान से वापस सवारी जाने के मार्ग को बदलने की चर्चा भी हो चुकी है। परंपरा से सवारी लौटने के दौरान सवारी मालीपुरा होकर जाती है।
इस बार सवारी को देवास गेट से इंदौर गेट, गदा पुलिया, हरि फाटक ब्रिज, बेगमबाग वाले मार्ग से वापस ले जाने की चर्चा चल रही है। ऐसे में अब माली समाज के प्रतिनिधियों ने विरोध जताया है। विरोध के बाद प्रशासन के सामने सवारी की वापसी वाले मार्ग को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि अभी तक सवारी के नए मार्ग को लेकर मंदिर प्रशासन की ओर से अधिकृत सूचना जारी नहीं हुई है।
दशहरे पर निकलने वाली सवारी के मार्ग बदलने को लेकर माली समाज में आक्रोश है। क्षेत्रीय पार्षद सत्यनारायण चौहान ने कहा- परंपरा से बाबा महाकाल की सवारी दशहरा पर्व पर मालीपुरा से होकर ही आती है। इस बार सवारी का मार्ग बदलने की योजना पर चर्चा है, जो कि परंपरा के अनुसार अनुचित है। अगर मार्ग बदला गया, तो आंदोलन करेंगे।
दशहरे पर आने वाली भगवान महाकाल की सवारी शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से शुरू होकर कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, छत्रीचौक, सतीगेट, कंठाल, नईसड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवास गेट, चामुंडा चौराहा, फ्रीगंज ब्रिज, पुलिस कंट्रोल रूम होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां भगवान महाकाल तथा शमी वृक्ष का पूजन होगा।
इसके बाद सवारी पुनः मंदिर की ओर रवाना होगी। इस बार लौटते समय बाबा महाकाल की पालकी को देवास गेट से मालीपुरा, तोपखाना होकर मंदिर नहीं ले जाते हुए देवास गेट से इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ओवर ब्रिज, बेगमबाग होते हुए मंदिर ले जाने पर बैठक में चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि इस रास्तें से भगवान पुराने व नए शहर में संपूर्ण रूप से नगर भ्रमण करेंगे।
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महाकालेश्वर मंदिर से साल में एक बार दशहरा पर्व के दौरान बाबा महाकाल की सवारी दशहरा मैदान तक आती है। इस बार प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर महाकाल की सवारी को श्रावण-भादौ मास की अंतिम शाही सवारी की तर्ज पर निकालने की तैयारी है। दशहरा मैदान से सवारी के वापस लौटने के दौरान मार्ग बदलने की चर्चा सामने आने के बाद अब माली समाज विरोध में उतर आया है। समाज जनों का कहना है कि परंपरागत मार्ग नहीं बदला जाए अन्यथा समाज जन आंदोलन करने को मजबूर होगा। महाकालेश्वर मंदिर से दशहरे पर बाबा महाकाल की सवारी शमी पूजन के लिए दशहरा मैदान पहुंचती है। इस बार फ्रीगंज आने वाली सवारी को पीएम मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए शाही सवारी की तर्ज पर बड़ी संख्या में भजन मंडलियों, बैंड-बाजे के साथ ही झांकियां भी शामिल की जा रही हैं। वहीं, मंदिर प्रशासन की साथ हुई बैठक में दशहरा मैदान से वापस सवारी जाने के मार्ग को बदलने की चर्चा भी हो चुकी है। परंपरा से सवारी लौटने के दौरान सवारी मालीपुरा होकर जाती है। इस बार सवारी को देवास गेट से इंदौर गेट, गदा पुलिया, हरि फाटक ब्रिज, बेगमबाग वाले मार्ग से वापस ले जाने की चर्चा चल रही है। ऐसे में अब माली समाज के प्रतिनिधियों ने विरोध जताया है। विरोध के बाद प्रशासन के सामने सवारी की वापसी वाले मार्ग को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि अभी तक सवारी के नए मार्ग को लेकर मंदिर प्रशासन की ओर से अधिकृत सूचना जारी नहीं हुई है। दशहरे पर निकलने वाली सवारी के मार्ग बदलने को लेकर माली समाज में आक्रोश है। क्षेत्रीय पार्षद सत्यनारायण चौहान ने कहा- परंपरा से बाबा महाकाल की सवारी दशहरा पर्व पर मालीपुरा से होकर ही आती है। इस बार सवारी का मार्ग बदलने की योजना पर चर्चा है, जो कि परंपरा के अनुसार अनुचित है। अगर मार्ग बदला गया, तो आंदोलन करेंगे। दशहरे पर आने वाली भगवान महाकाल की सवारी शाम चार बजे महाकाल मंदिर से शुरू होकर कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, छत्रीचौक, सतीगेट, कंठाल, नईसड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवास गेट, चामुंडा चौराहा, फ्रीगंज ब्रिज, पुलिस कंट्रोल रूम होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां भगवान महाकाल तथा शमी वृक्ष का पूजन होगा। इसके बाद सवारी पुनः मंदिर की ओर रवाना होगी। इस बार लौटते समय बाबा महाकाल की पालकी को देवास गेट से मालीपुरा, तोपखाना होकर मंदिर नहीं ले जाते हुए देवास गेट से इंदौर गेट, गदापुलिया, हरिफाटक ओवर ब्रिज, बेगमबाग होते हुए मंदिर ले जाने पर बैठक में चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि इस रास्तें से भगवान पुराने व नए शहर में संपूर्ण रूप से नगर भ्रमण करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी उठापठक जारी है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। गहलोत खेमे ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गहलोत समर्थकों के इस रुख के चलते रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक भी नहीं हो सकी।
अभी क्या हालात हैं?
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। 29 सितंबर तक इसके लिए नामांकन करना है। इससे पहले राजस्थान में नए मुख्यमंत्री का एलान होना बाकी है। इसी को लेकर काफी खींचतान शुरू हुई है। रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। इसके लिए पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था। बैठक शुरू होने से पहले अशोक गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया।
गहलोत समर्थक विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर पहुंच गए और बैठक शुरू कर दी। इसके बाद सभी विधायकों ने स्पीकार से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, ये इस्तीफा अभी तक स्पीकर ने मंजूर नहीं किया है। ये सभी विधायक किसी भी हालत में सचिन पायलट या उनके खेमे से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। इन विधायकों की संख्या 80 से 92 तक बताई जा रही है।
गहलोत खेमे के विधायकों की क्या है मांग?
इस्तीफा देने बाद गहलोत खेमे के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता अजय माकन से मिलने पहुंचा। इसमें मंत्री प्रताप खाचरियावास, शांति धारीवाल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस हाईकमान के सामने तीन मांगें रखीं। एक मांग यह कि 19 अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के बाद नया मुख्यमंत्री चुना जाए और प्रस्ताव को इसके बाद ही अमल में लाया जाए। चूंकि गहलोत स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी है, इसलिए यह हितों का टकराव होगा, कल यदि वे अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो क्या वे इस पर फैसला करेंगे?
दूसरी शर्त यह थी कि गहलोत खेमा विधायक दल की बैठक में आने के बजाए अलग-अलग समूहों में आना चाहता था। इस पर माकन ने कहा कि हमने स्पष्ट किया कि हम प्रत्येक विधायक से अलग-अलग बात करेंगे, लेकिन बैठक में आने की बजाए अलग-अलग गुटों में बात करना स्वीकार्य नहीं है।
राहुल गांधी के साथ सचिन पायलट और अशोक गहलोत।
तीसरी शर्त यह थी कि नया सीएम उन 102 विधायकों में से चुना जाना चाहिए, जो 2020 में हुई बगावत के वक्त गहलोत के प्रति वफादार रहे थे, न कि सचिन पायलट या उनके समूह में से। इसपर माकन ने कहा कि ये सारी बातें हम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताएंगे और वह सीएम गहलोत व सभी से चर्चा कर आगे का फैसला करेंगी।
माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायकों ने जोर देकर कहा कि बैठक में पारित होने वाला प्रस्ताव उक्त तीन शर्तों के अनुरूप हो, इस पर हमने कहा था कि कांग्रेस के इतिहास में कभी भी शर्तों के साथ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
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राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी उठापठक जारी है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। गहलोत खेमे ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गहलोत समर्थकों के इस रुख के चलते रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक भी नहीं हो सकी। अभी क्या हालात हैं? राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। उनतीस सितंबर तक इसके लिए नामांकन करना है। इससे पहले राजस्थान में नए मुख्यमंत्री का एलान होना बाकी है। इसी को लेकर काफी खींचतान शुरू हुई है। रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी थी। इसके लिए पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ नेता अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था। बैठक शुरू होने से पहले अशोक गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी रूख अख्तियार कर लिया। गहलोत समर्थक विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर पहुंच गए और बैठक शुरू कर दी। इसके बाद सभी विधायकों ने स्पीकार से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, ये इस्तीफा अभी तक स्पीकर ने मंजूर नहीं किया है। ये सभी विधायक किसी भी हालत में सचिन पायलट या उनके खेमे से किसी को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते हैं। इन विधायकों की संख्या अस्सी से बानवे तक बताई जा रही है। गहलोत खेमे के विधायकों की क्या है मांग? इस्तीफा देने बाद गहलोत खेमे के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता अजय माकन से मिलने पहुंचा। इसमें मंत्री प्रताप खाचरियावास, शांति धारीवाल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस हाईकमान के सामने तीन मांगें रखीं। एक मांग यह कि उन्नीस अक्तूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के बाद नया मुख्यमंत्री चुना जाए और प्रस्ताव को इसके बाद ही अमल में लाया जाए। चूंकि गहलोत स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी है, इसलिए यह हितों का टकराव होगा, कल यदि वे अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो क्या वे इस पर फैसला करेंगे? दूसरी शर्त यह थी कि गहलोत खेमा विधायक दल की बैठक में आने के बजाए अलग-अलग समूहों में आना चाहता था। इस पर माकन ने कहा कि हमने स्पष्ट किया कि हम प्रत्येक विधायक से अलग-अलग बात करेंगे, लेकिन बैठक में आने की बजाए अलग-अलग गुटों में बात करना स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी के साथ सचिन पायलट और अशोक गहलोत। तीसरी शर्त यह थी कि नया सीएम उन एक सौ दो विधायकों में से चुना जाना चाहिए, जो दो हज़ार बीस में हुई बगावत के वक्त गहलोत के प्रति वफादार रहे थे, न कि सचिन पायलट या उनके समूह में से। इसपर माकन ने कहा कि ये सारी बातें हम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बताएंगे और वह सीएम गहलोत व सभी से चर्चा कर आगे का फैसला करेंगी। माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायकों ने जोर देकर कहा कि बैठक में पारित होने वाला प्रस्ताव उक्त तीन शर्तों के अनुरूप हो, इस पर हमने कहा था कि कांग्रेस के इतिहास में कभी भी शर्तों के साथ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा दौरे में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) ने वनडे सीरीज और टेस्ट सीरीज के 3-3 मैच खेले हैं. टी20 सीरीज में उन्हें आराम दिया गया था.
ऑस्ट्रेलिया (Australia) के खिलाफ टेस्ट सीरीज में चोट से परेशान भारतीय टीम (Indian Team) के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने सीनियर तेज गेंदबाजों की मौजूदा स्थिति है. मोहम्मद शमी (Mohammad Shami) और उमेश यादव (Umesh Yadav) इस सीरीज में पहले ही चोट के कारण बाहर हो गए थे और सिडनी टेस्ट में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) की फिटनेस ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया. फिलहाल टीम मैनेजमेंट ब्रिस्बेन (Brisbane) में शुक्रवार 15 जनवरी से शुरू हो रहे आखिरी टेस्ट के लिए बुमराह के फिट होने की दुआ कर रहा है, वहीं अगले महीने से इंग्लैंड (England) के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज में उनको शामिल करने पर भी चर्चा शुरू हो गई है.
पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) का मानना है कि इंग्लैंड के खिलाफ अगले महीने से शुरू होने वाली सीरीज में बुमराह को आराम दिया जाना चाहिए. गंभीर के मुताबिक, भारतीय टीम प्रबंधन को बुमराह का पूरा ख्याल रखना चाहिये और घरेलू सीरीज में उन्हें आराम देना चाहिये. बुमराह पिछले साल इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2020) के बाद से ही लगातार हर फॉर्मेट में खेल रहे हैं और सिडनी टेस्ट (Sydney Test) में उनकी फिटनेस के बाद ये मुद्दा और भी अहम हो गया है.
मौजूदा हालात को देखते हुए ही गंभीर ने कहा है कि बुमराह का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि वह लंबे समय तक भारतीय गेंदबाजी का नेतृत्व करेंगे. गंभीर ने स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए कहा,
2018 में टेस्ट डेब्यू करने वाले जसप्रीत बुमराह ने अभी तक 17 टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन इनमें से एक भी टेस्ट भारत में नहीं खेला है. लेकिन गंभीर का मानना है कि बुमराह भारत में और भी खतरनाक साबित होंगे. उन्होंने कहा,
इस बीच ब्रिस्बेन टेस्ट को लेकर तमाम अटकलों पर टीम इंडिया के बैटिंग कोच विक्रम राठौर (Vikram Rathour) ने लगाम लगाने का काम किया है. ANI के मुताबिक विक्रम राठौर ने बुमराह के हेल्थ को लेकर ताजातरीन अपडेट दी है. उन्होंने कहा कि बुमराह पर मेडिकल टीम जोर शोर से काम कर रही है. उनके प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने पर फैसला मैच से ठीक पहले लिया जाएगा.
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ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा दौरे में जसप्रीत बुमराह ने वनडे सीरीज और टेस्ट सीरीज के तीन-तीन मैच खेले हैं. टीबीस सीरीज में उन्हें आराम दिया गया था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में चोट से परेशान भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने सीनियर तेज गेंदबाजों की मौजूदा स्थिति है. मोहम्मद शमी और उमेश यादव इस सीरीज में पहले ही चोट के कारण बाहर हो गए थे और सिडनी टेस्ट में जसप्रीत बुमराह की फिटनेस ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया. फिलहाल टीम मैनेजमेंट ब्रिस्बेन में शुक्रवार पंद्रह जनवरी से शुरू हो रहे आखिरी टेस्ट के लिए बुमराह के फिट होने की दुआ कर रहा है, वहीं अगले महीने से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज में उनको शामिल करने पर भी चर्चा शुरू हो गई है. पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर का मानना है कि इंग्लैंड के खिलाफ अगले महीने से शुरू होने वाली सीरीज में बुमराह को आराम दिया जाना चाहिए. गंभीर के मुताबिक, भारतीय टीम प्रबंधन को बुमराह का पूरा ख्याल रखना चाहिये और घरेलू सीरीज में उन्हें आराम देना चाहिये. बुमराह पिछले साल इंडियन प्रीमियर लीग के बाद से ही लगातार हर फॉर्मेट में खेल रहे हैं और सिडनी टेस्ट में उनकी फिटनेस के बाद ये मुद्दा और भी अहम हो गया है. मौजूदा हालात को देखते हुए ही गंभीर ने कहा है कि बुमराह का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि वह लंबे समय तक भारतीय गेंदबाजी का नेतृत्व करेंगे. गंभीर ने स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए कहा, दो हज़ार अट्ठारह में टेस्ट डेब्यू करने वाले जसप्रीत बुमराह ने अभी तक सत्रह टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन इनमें से एक भी टेस्ट भारत में नहीं खेला है. लेकिन गंभीर का मानना है कि बुमराह भारत में और भी खतरनाक साबित होंगे. उन्होंने कहा, इस बीच ब्रिस्बेन टेस्ट को लेकर तमाम अटकलों पर टीम इंडिया के बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने लगाम लगाने का काम किया है. ANI के मुताबिक विक्रम राठौर ने बुमराह के हेल्थ को लेकर ताजातरीन अपडेट दी है. उन्होंने कहा कि बुमराह पर मेडिकल टीम जोर शोर से काम कर रही है. उनके प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने पर फैसला मैच से ठीक पहले लिया जाएगा.
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न्यूज़ट्रेंड एंटरटेनमेंट डेस्कः बॉलीवुड की दुनिया ग्लैमर से भरी हुई होती है जो दूर से देखने पर बहुत अच्छी लगती है, बॉलीवुड सेलेब्स को मिलने वाली लाइन लाइट और अटेंशन को देखकर आपका भी मन करता होगा कि काश ऐसी ही लाइफ आपकी भी होती लेकिन क्या आपको पता है कि ये लाइफ बाहर से जितनी अच्छी होती है अंदर से इसमें बहुत सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, जिसमें सबसे पहली तो होती है कि आपकी कोई पर्सनल लाइफ नहीं रह जाती,चाहे कुछ भी करलो मीडिया की नजरों से आप बच नहीं पाते हैं।
बॉलीवुड सेलेब्स की हर छोटी-बड़ी बात पर मीडिया के कैमरों की नजर पहुंच ही जाती है, इसका एक उदाहरण हैं इनकी लव लाइफ, बॉलीवुड सेलेब्स की लव लाइफ के बारे में जानने के लिए हर कोई ही काफी उत्सुक रहता है। जिसके चलते हुए लाख चाहने के बाद भी इन एक्टर्स के अफेयर और रिलेशनसिप प्राइवेट नहीं रह पाते हैं। हालांकि इस इंडस्ट्री में कई रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं, लेकिन आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे सेलेब्स के बारे में बताएंगे जो इस इंडस्ट्री में अपने लव एण्ड अफेयर्स को लेकर काफी खबरों में रहे लेकिन जब उनकी शादी की बारी आई तो वो उन्होंने अपने परिवार वालों की मर्जी से ही की।
90 के दशक के जाने-माने एक्टर गोविंदा ने जब अपना फिल्मी करियर शुरू किया तो लड़किया उनकी दीवानी हो गई थीं। गोविंदा के डाइंसिंग स्टाइल से लेकर उनकी एक्टिंग तक की कई लड़किया दीवानी थीं। बता दें कि गोविंदा का नाम भी बॉलीवुड में कई ऐक्ट्रेसेस के साथ जुड़ा लेकिन जब शादी करने की बारी आई तो गोविंदा ने अपने घर वालों की मर्जी से शादी की, और आज भी वो अपनी शादी-शुदा लाइफ में काफी खुश हैं।
विवेक ओबेरॉय ने साल 2002 में फिल्म कंपनी से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जिसके बाद विवेक ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया, बता दें कि विवेक अपनी फिल्मों से भी ज्यादा ऐश्वर्या राय के साथ अपने अफेयर को लेकर खबरों में आए थे। जब सलमान से ऐश्वर्या दूर हुई थी तों उन्होंने विवेक का हाथ थामा था लेकिन बाद में ऐसा कुछ हुआ कि इन दोनों का रिश्ता भी ज्यादा दिन तक चल नहीं पाया। खबरों की मानें तो ऐश के चक्कर में विवेक ने सलमान खान से पंगा ले लिया था जिसके बाद से उनका फिल्मी करियर लगभग खत्म की कगार पर पहुंच गया था। हालांकि अपने इस अफेयर के बाद भी विवेक ने अरेंज मैरिज की। विवेक ओबरॉय ने कर्नाटक के मंत्री जीवाराज अल्वा की बेटी प्रियंका से शादी की और वो अपनी शादी-शुदा लाइफ में बहुत खुश हैं।
बॉलीवुड में फिल्म जॉनी गद्दार से अपना डेब्यू करने वाले नील नितिन मुकेश बॉलीवुड के हैंडसम हीरोज में से एक थे, उनके डैशिंग और किलर लुक की कई लड़किया दिवानी थीं। बता दें कि नील नीतिन अपने अफेयर्स को लेकर काफी सुर्खियों में रहे थे, लेकिन सबको झटका तो तब लगा जब उन्होंने अपने घर वालों की मर्जी से शादी की।
शाहिद कपूर बॉलीवुड के ही नहीं बल्कि एशिया के मोस्ट हैंडसम मैन का टाइटल जीत चुके शाहिद अपनी लव लाइफ को लेकर काफी सुर्खियों में छाए रहते थे। बॉलीवुड की टॉप ऐक्ट्रेसेस प्रिंयका और करीना कपूर के साथ शाहिद का नाम जुड़ चुका था, लेकिन शाहिद ने तब सबको हैरान कर दिया जब उन्होंने एक नॉन सेलिब्रिटी मीरा राजपूत से शादी की। बता दें की मीरा दिल्ली की रहने वाली थी और मीरा और शाहिद के परिवार ने मिलकर दोनों का रिश्ता पक्का किया था जिसके बाद दोनों एक-दूसरे से मिले और फिर दोनों ने शादी कर ली।
अपने जमाने में लाखों लड़कियों के दिल में राज करने वाले राकेश रोशन का नाम भी बॉलीवुड की कई हसीनाओं के साथ जुड़ा था लेकिन उन्होंने भी अपने घर वालों की मर्जी से शादी की थी।
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न्यूज़ट्रेंड एंटरटेनमेंट डेस्कः बॉलीवुड की दुनिया ग्लैमर से भरी हुई होती है जो दूर से देखने पर बहुत अच्छी लगती है, बॉलीवुड सेलेब्स को मिलने वाली लाइन लाइट और अटेंशन को देखकर आपका भी मन करता होगा कि काश ऐसी ही लाइफ आपकी भी होती लेकिन क्या आपको पता है कि ये लाइफ बाहर से जितनी अच्छी होती है अंदर से इसमें बहुत सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, जिसमें सबसे पहली तो होती है कि आपकी कोई पर्सनल लाइफ नहीं रह जाती,चाहे कुछ भी करलो मीडिया की नजरों से आप बच नहीं पाते हैं। बॉलीवुड सेलेब्स की हर छोटी-बड़ी बात पर मीडिया के कैमरों की नजर पहुंच ही जाती है, इसका एक उदाहरण हैं इनकी लव लाइफ, बॉलीवुड सेलेब्स की लव लाइफ के बारे में जानने के लिए हर कोई ही काफी उत्सुक रहता है। जिसके चलते हुए लाख चाहने के बाद भी इन एक्टर्स के अफेयर और रिलेशनसिप प्राइवेट नहीं रह पाते हैं। हालांकि इस इंडस्ट्री में कई रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं, लेकिन आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे सेलेब्स के बारे में बताएंगे जो इस इंडस्ट्री में अपने लव एण्ड अफेयर्स को लेकर काफी खबरों में रहे लेकिन जब उनकी शादी की बारी आई तो वो उन्होंने अपने परिवार वालों की मर्जी से ही की। नब्बे के दशक के जाने-माने एक्टर गोविंदा ने जब अपना फिल्मी करियर शुरू किया तो लड़किया उनकी दीवानी हो गई थीं। गोविंदा के डाइंसिंग स्टाइल से लेकर उनकी एक्टिंग तक की कई लड़किया दीवानी थीं। बता दें कि गोविंदा का नाम भी बॉलीवुड में कई ऐक्ट्रेसेस के साथ जुड़ा लेकिन जब शादी करने की बारी आई तो गोविंदा ने अपने घर वालों की मर्जी से शादी की, और आज भी वो अपनी शादी-शुदा लाइफ में काफी खुश हैं। विवेक ओबेरॉय ने साल दो हज़ार दो में फिल्म कंपनी से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जिसके बाद विवेक ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया, बता दें कि विवेक अपनी फिल्मों से भी ज्यादा ऐश्वर्या राय के साथ अपने अफेयर को लेकर खबरों में आए थे। जब सलमान से ऐश्वर्या दूर हुई थी तों उन्होंने विवेक का हाथ थामा था लेकिन बाद में ऐसा कुछ हुआ कि इन दोनों का रिश्ता भी ज्यादा दिन तक चल नहीं पाया। खबरों की मानें तो ऐश के चक्कर में विवेक ने सलमान खान से पंगा ले लिया था जिसके बाद से उनका फिल्मी करियर लगभग खत्म की कगार पर पहुंच गया था। हालांकि अपने इस अफेयर के बाद भी विवेक ने अरेंज मैरिज की। विवेक ओबरॉय ने कर्नाटक के मंत्री जीवाराज अल्वा की बेटी प्रियंका से शादी की और वो अपनी शादी-शुदा लाइफ में बहुत खुश हैं। बॉलीवुड में फिल्म जॉनी गद्दार से अपना डेब्यू करने वाले नील नितिन मुकेश बॉलीवुड के हैंडसम हीरोज में से एक थे, उनके डैशिंग और किलर लुक की कई लड़किया दिवानी थीं। बता दें कि नील नीतिन अपने अफेयर्स को लेकर काफी सुर्खियों में रहे थे, लेकिन सबको झटका तो तब लगा जब उन्होंने अपने घर वालों की मर्जी से शादी की। शाहिद कपूर बॉलीवुड के ही नहीं बल्कि एशिया के मोस्ट हैंडसम मैन का टाइटल जीत चुके शाहिद अपनी लव लाइफ को लेकर काफी सुर्खियों में छाए रहते थे। बॉलीवुड की टॉप ऐक्ट्रेसेस प्रिंयका और करीना कपूर के साथ शाहिद का नाम जुड़ चुका था, लेकिन शाहिद ने तब सबको हैरान कर दिया जब उन्होंने एक नॉन सेलिब्रिटी मीरा राजपूत से शादी की। बता दें की मीरा दिल्ली की रहने वाली थी और मीरा और शाहिद के परिवार ने मिलकर दोनों का रिश्ता पक्का किया था जिसके बाद दोनों एक-दूसरे से मिले और फिर दोनों ने शादी कर ली। अपने जमाने में लाखों लड़कियों के दिल में राज करने वाले राकेश रोशन का नाम भी बॉलीवुड की कई हसीनाओं के साथ जुड़ा था लेकिन उन्होंने भी अपने घर वालों की मर्जी से शादी की थी।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
श्रेणीःजम्मू और कश्मीर सरकार श्रेणीःजम्मू और कश्मीर विधानसभा श्रेणीः2014 में भारत श्रेणीःजम्मू और कश्मीर में चुनाव. सज्जाद ग़नी लोन (जन्मः1967) भारत के जम्मू-कश्मीर प्राँत के एक राजनीतिज्ञ हैं। वे पीपल्स काँफ्रेंस पार्टी के संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं तथा हंदवाड़ा सीट से विधायक हैं। उनके पिता अब्दुल ग़नी लोन बड़े कश्मीरी नेता थे जिनकी 21 मई 2002 को श्रीनगर में हत्या कर दी गई थी। पिता की हत्या के पश्चात् सज्जाद ने हुर्रियत से अलग होकर पीपल्स काँफ्रेंस पार्टी बनाई जिसके वे वर्तमान अध्यक्ष हैं। 2009 में वे स्वयं और 2014 में इनके उम्मीदवार लोकसभा चुनाव लड़े किंतु हार गए। 2014 के जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों से पूर्व सज्जाद लोन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की जिससे भारतीय जनता पार्टी के साथ इनके गठबंधन की अटकलें लगनी शुरु हो गई। पीपुल्स कांफ्रेंस ने इस विधानसभा चुनाव में कुपवाड़ा-हंदवाड़ा की 12 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए जिनमें से दो विजयी हुए। .
जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014 और सज्जाद लोन आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): भारतीय जनता पार्टी।
भारतीय जनता पार्टी (संक्षेप में, भाजपा) भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।.
जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014 83 संबंध है और सज्जाद लोन 5 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.14% है = 1 / (83 + 5)।
यह लेख जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014 और सज्जाद लोन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। श्रेणीःजम्मू और कश्मीर सरकार श्रेणीःजम्मू और कश्मीर विधानसभा श्रेणीःदो हज़ार चौदह में भारत श्रेणीःजम्मू और कश्मीर में चुनाव. सज्जाद ग़नी लोन भारत के जम्मू-कश्मीर प्राँत के एक राजनीतिज्ञ हैं। वे पीपल्स काँफ्रेंस पार्टी के संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं तथा हंदवाड़ा सीट से विधायक हैं। उनके पिता अब्दुल ग़नी लोन बड़े कश्मीरी नेता थे जिनकी इक्कीस मई दो हज़ार दो को श्रीनगर में हत्या कर दी गई थी। पिता की हत्या के पश्चात् सज्जाद ने हुर्रियत से अलग होकर पीपल्स काँफ्रेंस पार्टी बनाई जिसके वे वर्तमान अध्यक्ष हैं। दो हज़ार नौ में वे स्वयं और दो हज़ार चौदह में इनके उम्मीदवार लोकसभा चुनाव लड़े किंतु हार गए। दो हज़ार चौदह के जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों से पूर्व सज्जाद लोन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की जिससे भारतीय जनता पार्टी के साथ इनके गठबंधन की अटकलें लगनी शुरु हो गई। पीपुल्स कांफ्रेंस ने इस विधानसभा चुनाव में कुपवाड़ा-हंदवाड़ा की बारह सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए जिनमें से दो विजयी हुए। . जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, दो हज़ार चौदह और सज्जाद लोन आम में एक बात है : भारतीय जनता पार्टी। भारतीय जनता पार्टी भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक हैं, जिसमें दूसरा दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है। यह राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा दल है।. जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, दो हज़ार चौदह तिरासी संबंध है और सज्जाद लोन पाँच है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.चौदह% है = एक / । यह लेख जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, दो हज़ार चौदह और सज्जाद लोन के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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नींद आने का पूरा कनेक्शन हमारे दिमाग से होता है हमारे दिमाग में मेलाटोनिन नाम का स्लीपिंग हार्मोन रिलीज होता है और इस हार्मोन को रिलीज होने के लिए दिमाग का शांत होना काफी ज्यादा जरूरी होता है। पूरे दिन हमारा दिमाग अनेक कामों को अंजाम देने से थक जाता है।
जो कि रात को अच्छी नींद आने पर खुद को रिपेयर करके अगले दिन के लिए तैयार करता है। लेकिन जब कभी भी किसी भी वजह से हमें रात को नींद नहीं आती तो हमारा पूरा शरीर बहुत ही ज्यादा थकावट महसूस करता है और इसी वजह से पाचन में गड़बड़ी, आलस आना, कमजोरी, आंखों में जलन का होना, सर में दर्द होना और त्वचा का काला पड़ना, आंखों के नीचे काले घेरों का होना सेक्शल कमजोरी और भी अनेक तरह की समस्या शुरू होने लगती है।
इसीलिए दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में 10 ऐसी गलतियों के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से रात को नींद ना आने की समस्या वक्त के साथ-साथ बढ़ती रहती है। इसीलिए अच्छी नींद पाने के लिए हमें अपनी गलतियों में सुधार करना बहुत जरूरी है।
ज्यादातर दिन के समय लेट कर या बैठकर वक्त का बिताना क्योंकि जब हमारा शरीर ज्यादा आराम में होता है तो हमारे दिमाग को ऐसा लगता है कि हमें अब और ज्यादा आराम की जरूरत नहीं है और इसी वजह से रात को जल्दी नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है।
खास करके लॉक डाउन की वजह से यह समस्या काफी ज्यादा लोगों में देखने को मिल रही है। इसीलिए आपको दिन में कुछ ना कुछ फिजिकल एक्टिविटी करने का खास ख्याल रखना चाहिए।
कुछ लोगों को रात में लेटने के बाद अपने काम और अपनी जिंदगी के बारे में सोचने की आदत होती है। जोकि एक बहुत ही बुरी आदत है क्योंकि रात को सोते समय सोचने से हमारा दिमाग कड़ी से कड़ी मिलाने लगता है और सोच के समंदर में डूबकर पूरी तरह से एक्टिव हो जाता है और फिर हमारी एक सोच खत्म होती है दूसरी शुरू हो जाती है।
इसी वजह से नींद आंखों से कोसों दूर भाग जाती है इसीलिए बिस्तर पर लेटने के बाद आपको किसी भी बारे में नहीं सोचना चाहिए। यहां तक कि अगर आप घर के बाकि लोगों के साथ सोते हैं तो आपको जो भी बातें करनी है वह सारी बातें रात को सोने से एक घंटा पहले खत्म कर लेनी चाहिए। क्योंकि अगर बिस्तर पर लेटने के बाद आप बात को लंबा कर लेते हैं तो इससे भी जल्दी नींद ना आने की समस्या बढ़ जाती है।
कभी-कभी कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि ना चाहते हुए भी मन में ख्यालात आने लगते हैं और इसी वजह से नींद आने में काफी सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ऐसा होने की सबसे बड़ी वजह है डिप्रेशन या फिर किसी भी तरह के मानसिक तनाव का होना। लेकिन आपको यह बात समझनी जरूरी है कि तनाव किसी काम की वजह से भी हो सकता है।
लेकिन आज के जमाने में ऐसा होने का सबसे बड़ा कारण है मोबाइल या फिर कंप्यूटर स्क्रीन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करना। क्योंकि स्क्रीन पर लगातार देखने से कम समय में ज्यादा इंफॉर्मेशन हमारे दिमाग में स्टोर हो जाती है जिस वजह से हमारा दिमाग पूरी तरह से थक जाता है और जब हमारा दिमाग थकता है तो हमें सिर्फ आलस-सुस्ती महसूस होती है लेकिन हमें नींद बिल्कुल भी नहीं आती।
क्योंकि नींद आने का सिंपल सा तरीका है कि जब हमारा दिमाग एकदम शांत होगा और शरीर थकेगा तो हमें बहुत ही मस्त नींद आएगी। लेकिन अगर हमारा शरीर दिन भर आराम में रहेगा और दिमाग थक जाएगा तो सोते समय हमें अजीबोगरीब ख्यालात आने लगते हैं और नींद तो बिल्कुल भी नहीं आती। इसीलिए जहां तक भी हो सके आप दिमाग को आराम और शरीर को काम पर लगाकर रखें।
जिन लोगों का सोने व जागने का टाइम फिक्स नहीं होता ऐसे लोगों में अक्सर नींद ना आने की समस्या होती है और ऐसा इसलिए होता है कि जब वह हर दिन अलग-अलग समय पर सोते हैं तो हमारा दिमाग कंफ्यूज हो जाता है और इसी वजह से हमारा दिमाग समझ नहीं पाता कि हमें कब सोना है और कब जागना है। इस वजह से भी रातों को नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है।
लेकिन अगर सोने और जागने का टाइम फिक्स होता है तो फिर सही समय पर बहुत तेज की नींद आती है और सुबह नींद भी सही समय पर खुल जाती हैं। इसीलिए सभी को सोने और जागने का समय फिक्स कर लेना चाहिए रात को 9:00 से 10:00 के बीच सोना और सुबह को 4:00 से 5:00 के बीच जागना एकदम परफेक्ट टाइम होता है। आपको भी अपनी आदतों में धीरे-धीरे सुधार करना चाहिए।
आज के दौर में अक्सर लोग रात का खाना काफी लेट खाते हैं और फिर खाना खाने के फौरन बाद सो जाते हैं और इससे जल्दी नींद आने में काफी समस्या होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खाना-खाने के बाद हमारे शरीर में ब्लड का सरकुलेशन काफी तेज हो जाता है और हमारा दिमाग खाने को पचाने के लिए एक्टिव हो जाता है।
इसी वजह से यह हमारे पाचन पर बहुत बुरा असर डालता है और साथ ही जल्दी नींद ना आने की समस्या भी शुरू होने लगती है। खाने और सोने के बीच में कम से कम 1 से 2 घंटे का गैप होना जरूर है।
कुछ लोगों को बिस्तर में जाने के बाद भी मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत होती है। यह तरीका बहुत ही गलत है क्योंकि जो मोबाइल से निकलने वाली लाइट हमारी आंखों पर पड़ती है तो हमारे दिमाग को ऐसा लगता है कि अभी भी दिन का समय है और इसीलिए दिमाग में स्लीपिंग हार्मोन ठीक से रिलीज नहीं हो पाता।
इसलिए जल्दी नींद ना आने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सोने से एक घंटा पहले टीवी मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन से अपने आपको अलग कर लेना चाहिए। साथ ही सोने से पहले आपको ढीले कपड़े पहनने चाहिए और बेडरूम की बहुत ज्यादा ब्राइट लाइट को भी बंद कर दें। क्योंकि आपकी आंखों के सामने जितना अच्छा अंधेरा होगा आपको नींद भी उतनी ही अच्छी आएगी।
दोस्तों पानी का सही मात्रा में इस्तेमाल करना हमारी बॉडी के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होता है। लेकिन कुछ लोगों को सोने से तुरंत पहले या फिर नींद में उठकर पानी पीने की आदत होती है।
जो कि अक्सर नींद में खलल पैदा करता है क्योंकि सोने से तुरंत पहले पानी-पीने से हमें जल्द ही टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है। जिससे हमारी नींद खुल जाती है और फिर दोबारा से नींद आने में काफी समय लग जाता है इसीलिए अगर आप सोने से पहले या फिर रात को उठकर पानी पीते हैं तो आपको पानी की मात्रा बहुत ही कम रखनी चाहिए।
आज के समय में अक्सर लोगों को जब रात में नींद नहीं आती तो वह लोग अपनी गलतियों को सुधारने के बदले नींद की गोलियों का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। जो कि आगे चलकर काफी परेशानी की वजह बनती हैं क्योंकि नींद की गोलियों का ज्यादा इस्तेमाल करने से वह हमारे दिमाग को जबरदस्ती ज्यादा मात्रा में स्लीपिंग हारमोंस छोड़ने के लिए मजबूर करता है। इसी वजह से शुरू-शुरू में तो हमें बहुत अच्छी नींद आ जाती है।
लेकिन रेगुलर नींद की गोलियों का इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे हमारी बॉडी के अंदर सिलिपिंग हार्मोन रिड्यूस होना बंद हो जाता है और फिर इस वजह से व्यक्ति को पूरी तरह से नींद की गोली पर ही निर्भर होना पड़ता है।
काफी समय बाद फिर ऐसा होता है कि नींद की गोली खाने के बावजूद भी नींद नहीं आती। इसीलिए अगर आप में से किसी को भी नींद की समस्या होती है तो आप यह गोली ना खाए बल्कि अपने दिन भर में की जाने वाली गलतियों पर ध्यान देकर उन्हें सुधारने की कोशिश करें और जितना भी हो सके नींद की गोलियों से दूर रहें।
रात के समय कॉफ़ी या चाय का इस्तेमाल करना भी नींद ना आने का सबब बन सकता है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चाय और कॉफ़ी में मौजूद कैफीन हमारे ब्रेन सेल्स को एक्टिवेट कर देता है। जिससे कि दिमाग को शांत होने में काफी समय लग जाता है इसीलिए आप सोने से दो-तीन घंटे पहले ही चाय या कॉफी लें।
पैरों का बहुत ज्यादा गर्म या फिर बहुत ज्यादा ठंडा होना भी हमारी नींद पर असर डालता है। आपने इस बात को खुद भी देखा होगा कि सर्दियों के मौसम में हमारे पैर बहुत ज्यादा ठंडे हो जाते है और गर्मियों के मौसम में काफी ज्यादा गर्म हो जाते हैं और इस वजह से भी नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि पैरों का सीधा कनेक्शन हमारे दिमाग से होता है। इसी वजह से दिमाग जल्दी शांत नहीं हो पाता जिस वजह से हमारी नींद पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ता है। अगर गर्मियों का मौसम है तो सोने से कुछ देर पहले एक बर्तन में पानी भरकर उसमें 10 मिनट के लिए अपने पैरों को डालें चाहे तो आप नहा भी सकते हैं और अगर सर्दियों का मौसम है तो आप अपने पैरों में सरसों के तेल की मालिश कर लें। ऐसा करने से दिमाग शांत हो जाता है और फिर हमें रात को नींद भी बहुत अच्छी आती है।
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नींद आने का पूरा कनेक्शन हमारे दिमाग से होता है हमारे दिमाग में मेलाटोनिन नाम का स्लीपिंग हार्मोन रिलीज होता है और इस हार्मोन को रिलीज होने के लिए दिमाग का शांत होना काफी ज्यादा जरूरी होता है। पूरे दिन हमारा दिमाग अनेक कामों को अंजाम देने से थक जाता है। जो कि रात को अच्छी नींद आने पर खुद को रिपेयर करके अगले दिन के लिए तैयार करता है। लेकिन जब कभी भी किसी भी वजह से हमें रात को नींद नहीं आती तो हमारा पूरा शरीर बहुत ही ज्यादा थकावट महसूस करता है और इसी वजह से पाचन में गड़बड़ी, आलस आना, कमजोरी, आंखों में जलन का होना, सर में दर्द होना और त्वचा का काला पड़ना, आंखों के नीचे काले घेरों का होना सेक्शल कमजोरी और भी अनेक तरह की समस्या शुरू होने लगती है। इसीलिए दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट में दस ऐसी गलतियों के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से रात को नींद ना आने की समस्या वक्त के साथ-साथ बढ़ती रहती है। इसीलिए अच्छी नींद पाने के लिए हमें अपनी गलतियों में सुधार करना बहुत जरूरी है। ज्यादातर दिन के समय लेट कर या बैठकर वक्त का बिताना क्योंकि जब हमारा शरीर ज्यादा आराम में होता है तो हमारे दिमाग को ऐसा लगता है कि हमें अब और ज्यादा आराम की जरूरत नहीं है और इसी वजह से रात को जल्दी नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है। खास करके लॉक डाउन की वजह से यह समस्या काफी ज्यादा लोगों में देखने को मिल रही है। इसीलिए आपको दिन में कुछ ना कुछ फिजिकल एक्टिविटी करने का खास ख्याल रखना चाहिए। कुछ लोगों को रात में लेटने के बाद अपने काम और अपनी जिंदगी के बारे में सोचने की आदत होती है। जोकि एक बहुत ही बुरी आदत है क्योंकि रात को सोते समय सोचने से हमारा दिमाग कड़ी से कड़ी मिलाने लगता है और सोच के समंदर में डूबकर पूरी तरह से एक्टिव हो जाता है और फिर हमारी एक सोच खत्म होती है दूसरी शुरू हो जाती है। इसी वजह से नींद आंखों से कोसों दूर भाग जाती है इसीलिए बिस्तर पर लेटने के बाद आपको किसी भी बारे में नहीं सोचना चाहिए। यहां तक कि अगर आप घर के बाकि लोगों के साथ सोते हैं तो आपको जो भी बातें करनी है वह सारी बातें रात को सोने से एक घंटा पहले खत्म कर लेनी चाहिए। क्योंकि अगर बिस्तर पर लेटने के बाद आप बात को लंबा कर लेते हैं तो इससे भी जल्दी नींद ना आने की समस्या बढ़ जाती है। कभी-कभी कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि ना चाहते हुए भी मन में ख्यालात आने लगते हैं और इसी वजह से नींद आने में काफी सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसा होने की सबसे बड़ी वजह है डिप्रेशन या फिर किसी भी तरह के मानसिक तनाव का होना। लेकिन आपको यह बात समझनी जरूरी है कि तनाव किसी काम की वजह से भी हो सकता है। लेकिन आज के जमाने में ऐसा होने का सबसे बड़ा कारण है मोबाइल या फिर कंप्यूटर स्क्रीन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करना। क्योंकि स्क्रीन पर लगातार देखने से कम समय में ज्यादा इंफॉर्मेशन हमारे दिमाग में स्टोर हो जाती है जिस वजह से हमारा दिमाग पूरी तरह से थक जाता है और जब हमारा दिमाग थकता है तो हमें सिर्फ आलस-सुस्ती महसूस होती है लेकिन हमें नींद बिल्कुल भी नहीं आती। क्योंकि नींद आने का सिंपल सा तरीका है कि जब हमारा दिमाग एकदम शांत होगा और शरीर थकेगा तो हमें बहुत ही मस्त नींद आएगी। लेकिन अगर हमारा शरीर दिन भर आराम में रहेगा और दिमाग थक जाएगा तो सोते समय हमें अजीबोगरीब ख्यालात आने लगते हैं और नींद तो बिल्कुल भी नहीं आती। इसीलिए जहां तक भी हो सके आप दिमाग को आराम और शरीर को काम पर लगाकर रखें। जिन लोगों का सोने व जागने का टाइम फिक्स नहीं होता ऐसे लोगों में अक्सर नींद ना आने की समस्या होती है और ऐसा इसलिए होता है कि जब वह हर दिन अलग-अलग समय पर सोते हैं तो हमारा दिमाग कंफ्यूज हो जाता है और इसी वजह से हमारा दिमाग समझ नहीं पाता कि हमें कब सोना है और कब जागना है। इस वजह से भी रातों को नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है। लेकिन अगर सोने और जागने का टाइम फिक्स होता है तो फिर सही समय पर बहुत तेज की नींद आती है और सुबह नींद भी सही समय पर खुल जाती हैं। इसीलिए सभी को सोने और जागने का समय फिक्स कर लेना चाहिए रात को नौ:शून्य से दस:शून्य के बीच सोना और सुबह को चार:शून्य से पाँच:शून्य के बीच जागना एकदम परफेक्ट टाइम होता है। आपको भी अपनी आदतों में धीरे-धीरे सुधार करना चाहिए। आज के दौर में अक्सर लोग रात का खाना काफी लेट खाते हैं और फिर खाना खाने के फौरन बाद सो जाते हैं और इससे जल्दी नींद आने में काफी समस्या होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खाना-खाने के बाद हमारे शरीर में ब्लड का सरकुलेशन काफी तेज हो जाता है और हमारा दिमाग खाने को पचाने के लिए एक्टिव हो जाता है। इसी वजह से यह हमारे पाचन पर बहुत बुरा असर डालता है और साथ ही जल्दी नींद ना आने की समस्या भी शुरू होने लगती है। खाने और सोने के बीच में कम से कम एक से दो घंटाटे का गैप होना जरूर है। कुछ लोगों को बिस्तर में जाने के बाद भी मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत होती है। यह तरीका बहुत ही गलत है क्योंकि जो मोबाइल से निकलने वाली लाइट हमारी आंखों पर पड़ती है तो हमारे दिमाग को ऐसा लगता है कि अभी भी दिन का समय है और इसीलिए दिमाग में स्लीपिंग हार्मोन ठीक से रिलीज नहीं हो पाता। इसलिए जल्दी नींद ना आने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सोने से एक घंटा पहले टीवी मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन से अपने आपको अलग कर लेना चाहिए। साथ ही सोने से पहले आपको ढीले कपड़े पहनने चाहिए और बेडरूम की बहुत ज्यादा ब्राइट लाइट को भी बंद कर दें। क्योंकि आपकी आंखों के सामने जितना अच्छा अंधेरा होगा आपको नींद भी उतनी ही अच्छी आएगी। दोस्तों पानी का सही मात्रा में इस्तेमाल करना हमारी बॉडी के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होता है। लेकिन कुछ लोगों को सोने से तुरंत पहले या फिर नींद में उठकर पानी पीने की आदत होती है। जो कि अक्सर नींद में खलल पैदा करता है क्योंकि सोने से तुरंत पहले पानी-पीने से हमें जल्द ही टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है। जिससे हमारी नींद खुल जाती है और फिर दोबारा से नींद आने में काफी समय लग जाता है इसीलिए अगर आप सोने से पहले या फिर रात को उठकर पानी पीते हैं तो आपको पानी की मात्रा बहुत ही कम रखनी चाहिए। आज के समय में अक्सर लोगों को जब रात में नींद नहीं आती तो वह लोग अपनी गलतियों को सुधारने के बदले नींद की गोलियों का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। जो कि आगे चलकर काफी परेशानी की वजह बनती हैं क्योंकि नींद की गोलियों का ज्यादा इस्तेमाल करने से वह हमारे दिमाग को जबरदस्ती ज्यादा मात्रा में स्लीपिंग हारमोंस छोड़ने के लिए मजबूर करता है। इसी वजह से शुरू-शुरू में तो हमें बहुत अच्छी नींद आ जाती है। लेकिन रेगुलर नींद की गोलियों का इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे हमारी बॉडी के अंदर सिलिपिंग हार्मोन रिड्यूस होना बंद हो जाता है और फिर इस वजह से व्यक्ति को पूरी तरह से नींद की गोली पर ही निर्भर होना पड़ता है। काफी समय बाद फिर ऐसा होता है कि नींद की गोली खाने के बावजूद भी नींद नहीं आती। इसीलिए अगर आप में से किसी को भी नींद की समस्या होती है तो आप यह गोली ना खाए बल्कि अपने दिन भर में की जाने वाली गलतियों पर ध्यान देकर उन्हें सुधारने की कोशिश करें और जितना भी हो सके नींद की गोलियों से दूर रहें। रात के समय कॉफ़ी या चाय का इस्तेमाल करना भी नींद ना आने का सबब बन सकता है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चाय और कॉफ़ी में मौजूद कैफीन हमारे ब्रेन सेल्स को एक्टिवेट कर देता है। जिससे कि दिमाग को शांत होने में काफी समय लग जाता है इसीलिए आप सोने से दो-तीन घंटे पहले ही चाय या कॉफी लें। पैरों का बहुत ज्यादा गर्म या फिर बहुत ज्यादा ठंडा होना भी हमारी नींद पर असर डालता है। आपने इस बात को खुद भी देखा होगा कि सर्दियों के मौसम में हमारे पैर बहुत ज्यादा ठंडे हो जाते है और गर्मियों के मौसम में काफी ज्यादा गर्म हो जाते हैं और इस वजह से भी नींद ना आने की समस्या शुरू होने लगती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पैरों का सीधा कनेक्शन हमारे दिमाग से होता है। इसी वजह से दिमाग जल्दी शांत नहीं हो पाता जिस वजह से हमारी नींद पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ता है। अगर गर्मियों का मौसम है तो सोने से कुछ देर पहले एक बर्तन में पानी भरकर उसमें दस मिनट के लिए अपने पैरों को डालें चाहे तो आप नहा भी सकते हैं और अगर सर्दियों का मौसम है तो आप अपने पैरों में सरसों के तेल की मालिश कर लें। ऐसा करने से दिमाग शांत हो जाता है और फिर हमें रात को नींद भी बहुत अच्छी आती है।
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WWE: पूर्व WWE चैंपियन ऐज (Edge) वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप टूर्नामेंट के फाइनल में जगह नहीं बना पाए हैं, जिसके बाद नाईट ऑफ चैंपियंस (Night of Champions 2023) में उनकी उपस्थिति को लेकर काफी ज्यादा सवाल भी उठ रहे हैं। WWE स्मैकडाउन (SmackDown) में ऐज का सामना रे मिस्टीरियो (Rey Mysterio) और एजे स्टाइल्स (AJ Styles) से हुआ था।
इस मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब जब ऐज वर्ल्ड टाइटल की पिक्चर से दूर हो गए हैं तो फैंस इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि पूर्व WWE चैंपियन अब फ्यूचर में किस स्टार के खिलाफ नज़र आ सकते हैं। इस आर्टिकल में हम 3 जबरदस्त स्टोरीलाइंस के बारे में बात करने वाले हैं, जिनका हिस्सा ऐज अब SmackDown में बन सकते हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स चैंपियनशिप के लिए ऐज इससे पहले भी ऑस्टिन थ्योरी को चैलेंज कर चुके हैं। ये मुकाबला 20 फरवरी 2023 को Raw में हुआ था। हालांकि, इस मैच में ऐज को हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि फिन बैलर ने उनपर अटैक कर दिया था।
ऐसे में अब वो एक बार फिर से यूनाइटेड स्टेट्स चैंपियनशिप पर अपना ध्यान लगा सकते हैं। दोनों ही स्टार्स इस समय Smackdown का हिस्सा हैं। ऐसे में WWE इन दोनों स्टार्स को एक-दूसरे के खिलाफ बुक कर सकता है। इस स्टोरीलाइन में ऑस्टिन थ्योरी भी खुद को मेन इवेंट स्टार के रूप में साबित कर सकते हैं।
अनडिस्प्यूटेड WWE टैग टीम चैंपियनशिप एक बार फिर से अलग-अलग हो सकती हैं। हाल ही में WWE ने घोषणा की है कि ये टाइटल Night of Champions में डिफेंड किए जाएंगे। इस मैच में सैमी ज़ेन और केविन ओवेंस अपना टाइटल रोमन रेंस और सोलो सिकोआ के खिलाफ डिफेंड करेंगे।
SmackDown के दौरान रोमन रेंस ने कहा था कि वो इस मैच को वाइल्ड समोअन्स को डेडीकेट करेंगे। अगर रोमन रेंस टैग टीम चैंपियन भी बन जाते हैं तो पूर्व WWE चैंपियन ऐज एक नया टैग टीम पार्टनर खोज सकते हैं और टैग टीम टाइटल के लिए लड़ते हुए नज़र आ सकते हैं। देखना होगा कि ऐज किसे अपने पार्टनर के रूप में लेकर आते हैं।
WWE SmackDown ब्रांड इस समय कई अपकमिंग स्टार्स से भरा हुआ है। ब्लू ब्रांड में एलए नाइट और कैरियन क्रॉस जैसे स्टार्स हैं, जो फ्यूचर में कंपनी को आगे ले जा सकते हैं। हालांकि, इन स्टार्स को अभी तक कुछ खास करने का मौका नहीं मिला है।
ऐज पहले ही इस बात को कह चुके हैं कि वो जल्द ही रिटायरमेंट लेने वाले हैं। WWE ऐसे में उन्हें अब नए स्टार्स के साथ बुक कर सकता है। ऐज के साथ काम करने पर ये स्टार्स अपने कैरेक्टर को भी बेहतर कर पाएंगे। इसके अलावा ऐज इन स्टार्स को फ्यूचर के लिए तैयार भी कर सकते हैं। दिग्गज के साथ स्टोरीलाइन से रेसलर्स खुद को मेन इवेंट स्टार के रूप में भी साबित कर सकते हैं।
WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
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WWE: पूर्व WWE चैंपियन ऐज वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप टूर्नामेंट के फाइनल में जगह नहीं बना पाए हैं, जिसके बाद नाईट ऑफ चैंपियंस में उनकी उपस्थिति को लेकर काफी ज्यादा सवाल भी उठ रहे हैं। WWE स्मैकडाउन में ऐज का सामना रे मिस्टीरियो और एजे स्टाइल्स से हुआ था। इस मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब जब ऐज वर्ल्ड टाइटल की पिक्चर से दूर हो गए हैं तो फैंस इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि पूर्व WWE चैंपियन अब फ्यूचर में किस स्टार के खिलाफ नज़र आ सकते हैं। इस आर्टिकल में हम तीन जबरदस्त स्टोरीलाइंस के बारे में बात करने वाले हैं, जिनका हिस्सा ऐज अब SmackDown में बन सकते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स चैंपियनशिप के लिए ऐज इससे पहले भी ऑस्टिन थ्योरी को चैलेंज कर चुके हैं। ये मुकाबला बीस फरवरी दो हज़ार तेईस को Raw में हुआ था। हालांकि, इस मैच में ऐज को हार का सामना करना पड़ा था क्योंकि फिन बैलर ने उनपर अटैक कर दिया था। ऐसे में अब वो एक बार फिर से यूनाइटेड स्टेट्स चैंपियनशिप पर अपना ध्यान लगा सकते हैं। दोनों ही स्टार्स इस समय Smackdown का हिस्सा हैं। ऐसे में WWE इन दोनों स्टार्स को एक-दूसरे के खिलाफ बुक कर सकता है। इस स्टोरीलाइन में ऑस्टिन थ्योरी भी खुद को मेन इवेंट स्टार के रूप में साबित कर सकते हैं। अनडिस्प्यूटेड WWE टैग टीम चैंपियनशिप एक बार फिर से अलग-अलग हो सकती हैं। हाल ही में WWE ने घोषणा की है कि ये टाइटल Night of Champions में डिफेंड किए जाएंगे। इस मैच में सैमी ज़ेन और केविन ओवेंस अपना टाइटल रोमन रेंस और सोलो सिकोआ के खिलाफ डिफेंड करेंगे। SmackDown के दौरान रोमन रेंस ने कहा था कि वो इस मैच को वाइल्ड समोअन्स को डेडीकेट करेंगे। अगर रोमन रेंस टैग टीम चैंपियन भी बन जाते हैं तो पूर्व WWE चैंपियन ऐज एक नया टैग टीम पार्टनर खोज सकते हैं और टैग टीम टाइटल के लिए लड़ते हुए नज़र आ सकते हैं। देखना होगा कि ऐज किसे अपने पार्टनर के रूप में लेकर आते हैं। WWE SmackDown ब्रांड इस समय कई अपकमिंग स्टार्स से भरा हुआ है। ब्लू ब्रांड में एलए नाइट और कैरियन क्रॉस जैसे स्टार्स हैं, जो फ्यूचर में कंपनी को आगे ले जा सकते हैं। हालांकि, इन स्टार्स को अभी तक कुछ खास करने का मौका नहीं मिला है। ऐज पहले ही इस बात को कह चुके हैं कि वो जल्द ही रिटायरमेंट लेने वाले हैं। WWE ऐसे में उन्हें अब नए स्टार्स के साथ बुक कर सकता है। ऐज के साथ काम करने पर ये स्टार्स अपने कैरेक्टर को भी बेहतर कर पाएंगे। इसके अलावा ऐज इन स्टार्स को फ्यूचर के लिए तैयार भी कर सकते हैं। दिग्गज के साथ स्टोरीलाइन से रेसलर्स खुद को मेन इवेंट स्टार के रूप में भी साबित कर सकते हैं। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
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हुआवेई ने शुक्रवार को घोषणा कीग्रीष्मकालीन सम्मेलनअपने नोवा 10 सीरीज़ स्मार्टफोन और फुल-सीन के लिए नए उत्पाद 4 जुलाई को आयोजित किए जाएंगे। प्रचार सामग्री के अनुसार, हुआवेई नोवा 10 सीरीज़ के स्मार्टफोन एक विशेष रिंग के साथ रियर कैमरा मॉड्यूल से लैस हैं।
पहले लीक हुई जानकारी से पता चला है कि हुआवेई नोवा 10 प्रो तीन ऊर्ध्वाधर कैमरों का उपयोग करेगा, और उठाए गए हिस्से बहुत पहचानने योग्य हैं। और उस पर हुआवेई ब्रांड लोगो के साथ पीछे के कवर के नीचे एक एलईडी टॉर्च है। रियर कैमरा के बीच में कैमरा बहुत ही अनोखा है और इसमें एक विशेष धातु की अंगूठी है।
स्मार्टफोन चांदी और काले रंग में उपलब्ध होंगे। चांदी के संस्करण में एक सुनहरा लोगो और एक लेंस रिंग है, जो काफी फैंसी दिखता है। नए मॉडल का पिछला कवर नोवा लोगो के साथ मुद्रित होने की उम्मीद है।
डिवाइस का आकार 164.3×73.6×8.1 मिमी होने की उम्मीद है, जिसमें सामने की तरफ 6.7 इंच का घुमावदार डिस्प्ले और ऊपरी बाएं कोने में एक गोली के आकार का डबल नाली है। बाईं ओर एक वॉल्यूम बटन, दाईं ओर एक पावर बटन, नीचे एक माइक्रोफोन और स्पीकर ग्रिल, एक सिम ट्रे और एक यूएसबी टाइप-सी जैक है।
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हुआवेई ने शुक्रवार को घोषणा कीग्रीष्मकालीन सम्मेलनअपने नोवा दस सीरीज़ स्मार्टफोन और फुल-सीन के लिए नए उत्पाद चार जुलाई को आयोजित किए जाएंगे। प्रचार सामग्री के अनुसार, हुआवेई नोवा दस सीरीज़ के स्मार्टफोन एक विशेष रिंग के साथ रियर कैमरा मॉड्यूल से लैस हैं। पहले लीक हुई जानकारी से पता चला है कि हुआवेई नोवा दस प्रो तीन ऊर्ध्वाधर कैमरों का उपयोग करेगा, और उठाए गए हिस्से बहुत पहचानने योग्य हैं। और उस पर हुआवेई ब्रांड लोगो के साथ पीछे के कवर के नीचे एक एलईडी टॉर्च है। रियर कैमरा के बीच में कैमरा बहुत ही अनोखा है और इसमें एक विशेष धातु की अंगूठी है। स्मार्टफोन चांदी और काले रंग में उपलब्ध होंगे। चांदी के संस्करण में एक सुनहरा लोगो और एक लेंस रिंग है, जो काफी फैंसी दिखता है। नए मॉडल का पिछला कवर नोवा लोगो के साथ मुद्रित होने की उम्मीद है। डिवाइस का आकार एक सौ चौंसठ.तीन×तिहत्तर.छः×आठ.एक मिमी होने की उम्मीद है, जिसमें सामने की तरफ छः.सात इंच का घुमावदार डिस्प्ले और ऊपरी बाएं कोने में एक गोली के आकार का डबल नाली है। बाईं ओर एक वॉल्यूम बटन, दाईं ओर एक पावर बटन, नीचे एक माइक्रोफोन और स्पीकर ग्रिल, एक सिम ट्रे और एक यूएसबी टाइप-सी जैक है।
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इस्लामाबादः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सोमवार को आतंक के खिलाफ अफगानिस्तान से सहयोग करने का संकल्प लिया। उन्होंने गत 23 जुलाई को काबुल में एक आत्मघाती हमले में 80 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना मद्देनजर ऐसा किया। शरीफ ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कहा, "पाकिस्तान आतंकवाद के अभिशाप से लड़ने में अफगानिस्तान के साथ सहयोग और मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है। आतंकवाद दोनों देशों का समान दुश्मन है। "
प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री ने काबुल में हुए नीचतापूर्ण आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान की जनता और सरकार की ओर से हार्दिक संवेदना व्यक्त की। " INS की अमाक न्यूज एजेंसी के अनुसार, आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (INS) ने देह माजंग में शियाओं की भीड़ के बीच हुए इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शरीफ ने आतंकवाद की नृशंस कार्रवाई की सख्ती से निंदा की और मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की।
बयान में कहा गया है कि गनी ने ऐसे नाजुक मौके पर सरकार के साथ एकजुटता का इजहार करने के लिए शरीफ का धन्यवाद किया।
राष्ट्रपति ने कहा, "आतंक के खिलाफ युद्ध में हम एक साथ हैं। "
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इस्लामाबादः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सोमवार को आतंक के खिलाफ अफगानिस्तान से सहयोग करने का संकल्प लिया। उन्होंने गत तेईस जुलाई को काबुल में एक आत्मघाती हमले में अस्सी लोगों की मौत और दो सौ से अधिक लोगों के घायल होने की घटना मद्देनजर ऐसा किया। शरीफ ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कहा, "पाकिस्तान आतंकवाद के अभिशाप से लड़ने में अफगानिस्तान के साथ सहयोग और मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है। आतंकवाद दोनों देशों का समान दुश्मन है। " प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री ने काबुल में हुए नीचतापूर्ण आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान की जनता और सरकार की ओर से हार्दिक संवेदना व्यक्त की। " INS की अमाक न्यूज एजेंसी के अनुसार, आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने देह माजंग में शियाओं की भीड़ के बीच हुए इस हमले की जिम्मेदारी ली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शरीफ ने आतंकवाद की नृशंस कार्रवाई की सख्ती से निंदा की और मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की। बयान में कहा गया है कि गनी ने ऐसे नाजुक मौके पर सरकार के साथ एकजुटता का इजहार करने के लिए शरीफ का धन्यवाद किया। राष्ट्रपति ने कहा, "आतंक के खिलाफ युद्ध में हम एक साथ हैं। "
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अपने इस्तीफे के कुछ घंटो बाद ही अनिल कुंबले ने ट्वीट कर सीएसी को 'थैंक यू' कहा। इसके साथ ही अनिल कुंबले ने अपने ट्वीट में खत भी जोड़ा, अंग्रेजी में लिखा गया था। इस पत्र में कुंबले ने कई बातें लिखी हैं। बता दें कि टीम इंडिया ने कुंबले के कार्यकाल के दौरान शानदार खेल दिखाया और बीते एक वर्ष में एक भी सीरीज नहीं गंवाई। कुबंले ने अपने पत्र में लिखाः
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अपने इस्तीफे के कुछ घंटो बाद ही अनिल कुंबले ने ट्वीट कर सीएसी को 'थैंक यू' कहा। इसके साथ ही अनिल कुंबले ने अपने ट्वीट में खत भी जोड़ा, अंग्रेजी में लिखा गया था। इस पत्र में कुंबले ने कई बातें लिखी हैं। बता दें कि टीम इंडिया ने कुंबले के कार्यकाल के दौरान शानदार खेल दिखाया और बीते एक वर्ष में एक भी सीरीज नहीं गंवाई। कुबंले ने अपने पत्र में लिखाः
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कुल्लू में बजीं देवधूने इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज।
नेरवा में 44 गोल्ड मेडल के लिए जोरदार भिड़ंत।
गांव को सड़क देने के लिए निकले फौजी की मौत, सपना रहा अधूरा।
छोटे वाहनों के लिए खुला साच पास मार्ग।
पच्छाद चुनाव प्रचार में इन पाइपों का क्या रोल?
बूट के तसमों से लगाया फंदा।
एटीएम छह माह से खराब, नैनाटिक्कर के व्यापार पर पड़ा असर।
यह देवता हर फरियादी को देते हैं मनचाहा वरदान, 31 साल बाद दशहरा उत्सव में की शिरकत।
बेटी पर ऐसा गाना गया कि हर कोई रो उठा।
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कुल्लू में बजीं देवधूने इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज। नेरवा में चौंतालीस गोल्ड मेडल के लिए जोरदार भिड़ंत। गांव को सड़क देने के लिए निकले फौजी की मौत, सपना रहा अधूरा। छोटे वाहनों के लिए खुला साच पास मार्ग। पच्छाद चुनाव प्रचार में इन पाइपों का क्या रोल? बूट के तसमों से लगाया फंदा। एटीएम छह माह से खराब, नैनाटिक्कर के व्यापार पर पड़ा असर। यह देवता हर फरियादी को देते हैं मनचाहा वरदान, इकतीस साल बाद दशहरा उत्सव में की शिरकत। बेटी पर ऐसा गाना गया कि हर कोई रो उठा।
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सऊदी अरब एक ऐसा देश है जहाँ दुनिया भर के प्रवासी काम किया करते हैं. यहाँ जाकर रोज़गार कमाना लोगों का सपना हुआ करता है. मगर यहाँ जाने के बाद यदि कामगार नियम-कानून के मुताबिक न रहे तो उन्हें परेशानियों से भी झूझना पड़ता है. मगर बहुत बार कंपनी भी धोखा देती है और कामगार वहां फंस जाते हैं. ठीक वैसे ही उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का एक युवक सऊदी अरब के जेद्दा शहर में पिछले कई महीनों से फंसा हुआ था.
एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी जिस कंपनी में वह काम कर रहा था वो कंपनी युवक को घर नहीं आने दे रहा था. साल 2019 में भदोई ज़िले के सोनपुर गांव के राकेश उपाध्यक्ष सऊदी अरब एक कंपनी में प्लम्बर की नौकरी करने गए थे. वहां पैसे कमाकर भारत पैसा भेजते थे ताकि उनके परिवार का गुज़ारा हो सके. वो मेहनत बहुत करते थे मगर उन्हें वेतन बहुत कम मिलता था और तो और जब कंपनी से एग्रिमेंट खत्म हो गया तो उसे अपने देश जाने से रोका गया.
कंपनी के अधिकारियों ने उसके सभी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे. राकेश ने कहा कि अभी तक उसके साढ़े तीन लाख रुपयों का भुगतान कंपनी ने नहीं किया है. युवक के परिजनों ने भदोही जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी जिसके बाद विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया. विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के ज़रिये युवक की घर वापसी कराई है.
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सऊदी अरब एक ऐसा देश है जहाँ दुनिया भर के प्रवासी काम किया करते हैं. यहाँ जाकर रोज़गार कमाना लोगों का सपना हुआ करता है. मगर यहाँ जाने के बाद यदि कामगार नियम-कानून के मुताबिक न रहे तो उन्हें परेशानियों से भी झूझना पड़ता है. मगर बहुत बार कंपनी भी धोखा देती है और कामगार वहां फंस जाते हैं. ठीक वैसे ही उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का एक युवक सऊदी अरब के जेद्दा शहर में पिछले कई महीनों से फंसा हुआ था. एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी जिस कंपनी में वह काम कर रहा था वो कंपनी युवक को घर नहीं आने दे रहा था. साल दो हज़ार उन्नीस में भदोई ज़िले के सोनपुर गांव के राकेश उपाध्यक्ष सऊदी अरब एक कंपनी में प्लम्बर की नौकरी करने गए थे. वहां पैसे कमाकर भारत पैसा भेजते थे ताकि उनके परिवार का गुज़ारा हो सके. वो मेहनत बहुत करते थे मगर उन्हें वेतन बहुत कम मिलता था और तो और जब कंपनी से एग्रिमेंट खत्म हो गया तो उसे अपने देश जाने से रोका गया. कंपनी के अधिकारियों ने उसके सभी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे. राकेश ने कहा कि अभी तक उसके साढ़े तीन लाख रुपयों का भुगतान कंपनी ने नहीं किया है. युवक के परिजनों ने भदोही जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी जिसके बाद विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया. विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के ज़रिये युवक की घर वापसी कराई है.
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मॉस्को। क्रोएशिया के डिफेंस को चकनाचूर करते हुए फ्रांस ने 4-2 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। आपको बता दें कि फ्रांस तीसरी बार फाइनल में पहुंची थी। वह 1998 में पहली बार अपने घर में खेले गए वर्ल्ड कप में फाइनल खेली थी और जीतने में सफल रही थी। इसके बाद 2006 में उसने फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन इटली से हार गई थी। क्रोएशिया की बात की जाए तो वह पहली बार फाइनल खेल रही थी। बड़े ही शान से पहली बार फाइनल तक का सफर तय करने वाली क्रोएशियाई टीम के खिलाड़ियों ने आखिर तक अपनी हिम्मत नहीं हारी।
फीफा ने क्रोएशियाई कप्तान लुका मोड्रिच को गोल्डन बॉल से सम्मानित किया। जब क्रोएशियाई कप्तान लूका मोड्रिच को गोल्डन बॉल दी गई तो शायद ही उन्हें वो पल याद आ रहे होंगे जिसमें कभी उन्हें लोगों ने फुटबॉल खेलने लायक नहीं समझा। फिलहाल मोड्रिच को फीफा 2018 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चना गया। दूसरे नंबर पर बेल्जियम के ऐडन हेजार्ड रहे और तीसरे नंबर पर फ्रांस के ग्रीजमैन रहे।
गोल्डन बॉल पाने वाले मोड्रिच की कहानी बेहद मार्मिक है। 40 लाख की आबादी वाले क्रोएशिया ने इंग्लैंड को सेमीफाइनल में हराकर फाइनल तक का सफर तय किया था। क्रोएशिया की टीम को एक ऐसा शख्स ने लीड किया जिसको लेकर खुद टीम के कोच ने कहा था कि ये कुछ नहीं कर पाएगा।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर्स में शुमार क्रोएशिया के कप्तान लुका मोड्रिच को आज दुनिया जानती है। यूरोप के देश क्रोएशिया की आबादी करीब 40 लाख है। यानी दिल्ली का करीब पांचवां हिस्सा है। लेकिन इस टीम ने बुधवार को इतिहास रच दिया। क्रोएशियाई टीम के फाइनल तक के इस सफर में उनके कप्तान और मिडफील्डर लूका मोड्रिच की अहम भूमिका रही।
32 वर्षीय इस खिलाड़ी ने यहां तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया है। यूगोस्लोवाकिया के टूटने के बाद क्रोएशिया 1991 में दुनिया के नक्शे पर आया था। इस दौरान काफी हिंसा हुई। कई लोगों ने अपनी जानें गंवाईं। लाखों घर जले। लोग बेघर हुए। गैर-सर्बियाई लोगों को इसका काफी नुकसान झेलना पड़ा। लूका मोड्रिच के दादा लूका मोड्रिच सीनियर भी इनमें से एक थे।
जब क्रोएशिया यूगोस्लोवाकिया का ही हिस्सा था तब 9 सितंबर 1985 को लुका मोड्रिच का जन्म हुआ। मोड्रिच सिर्फ छह साल के थे तब उनके दादा को आतंकवादियों ने गोली मार दी। जिसके बाद उन्हें युद्ध-प्रभावित इलाके में रिफ्यूजी का जीवन बिताना पड़ा। 8 दिसंबर 1991 को आक्रामक सर्बियाई लड़ाकों ने एक छोटे से गांव मोड्रिची पर हमला कर दिया।
उन्होंने वहां रहने वाले क्रोएशियाई परिवारों को अपना शिकार बनाया। दादा को गोली मारे जाने से पहले लुका उन्हीं के पास रहते थे। लुका मोड्रिच के मां-बाप फैक्ट्री में काम करते थे। लेकिन एक दिन सर्बियाई विद्रोहियों ने उनके घर को आग लगा दी और उनके दादा को गोली मार दी। मोड्रिच ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें बिना बिजली और पानी के रहना पड़ा। गोलियों और ग्रेनेड की आवाजें रोजमर्रा की बात हो चुकी थी। इसके अलावा आसपास बिछीं लैंडमाइंस का खतरा तो था ही।
यहां से मोड्रिच ने खुद को फुटबॉल की तरफ आगे बढ़ाया। वह क्रोएशियाई टीम के इतिहास के सबसे शानदार प्लेयर्स में से एक हैं। उन्होंने चार साल इंग्लैंड में क्लब फुटबॉल खेला और आखिर में 2012 में वह स्पैनिश क्लब रियाल मैड्रिड से जुड़े। जब मोड्रिच ने रियाल मैड्रिड ज्वाइन किया तो लोगों ने उसे क्लब के इतिहास की सबसे घटिया साइनिंग कहा। लेकिन इसी मोड्रिच ने वो कमाल किया है जो आज तक रोनाल्डो जैसा खिलाड़ी नहीं कर पाया है।
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मॉस्को। क्रोएशिया के डिफेंस को चकनाचूर करते हुए फ्रांस ने चार-दो से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। आपको बता दें कि फ्रांस तीसरी बार फाइनल में पहुंची थी। वह एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में पहली बार अपने घर में खेले गए वर्ल्ड कप में फाइनल खेली थी और जीतने में सफल रही थी। इसके बाद दो हज़ार छः में उसने फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन इटली से हार गई थी। क्रोएशिया की बात की जाए तो वह पहली बार फाइनल खेल रही थी। बड़े ही शान से पहली बार फाइनल तक का सफर तय करने वाली क्रोएशियाई टीम के खिलाड़ियों ने आखिर तक अपनी हिम्मत नहीं हारी। फीफा ने क्रोएशियाई कप्तान लुका मोड्रिच को गोल्डन बॉल से सम्मानित किया। जब क्रोएशियाई कप्तान लूका मोड्रिच को गोल्डन बॉल दी गई तो शायद ही उन्हें वो पल याद आ रहे होंगे जिसमें कभी उन्हें लोगों ने फुटबॉल खेलने लायक नहीं समझा। फिलहाल मोड्रिच को फीफा दो हज़ार अट्ठारह का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चना गया। दूसरे नंबर पर बेल्जियम के ऐडन हेजार्ड रहे और तीसरे नंबर पर फ्रांस के ग्रीजमैन रहे। गोल्डन बॉल पाने वाले मोड्रिच की कहानी बेहद मार्मिक है। चालीस लाख की आबादी वाले क्रोएशिया ने इंग्लैंड को सेमीफाइनल में हराकर फाइनल तक का सफर तय किया था। क्रोएशिया की टीम को एक ऐसा शख्स ने लीड किया जिसको लेकर खुद टीम के कोच ने कहा था कि ये कुछ नहीं कर पाएगा। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर्स में शुमार क्रोएशिया के कप्तान लुका मोड्रिच को आज दुनिया जानती है। यूरोप के देश क्रोएशिया की आबादी करीब चालीस लाख है। यानी दिल्ली का करीब पांचवां हिस्सा है। लेकिन इस टीम ने बुधवार को इतिहास रच दिया। क्रोएशियाई टीम के फाइनल तक के इस सफर में उनके कप्तान और मिडफील्डर लूका मोड्रिच की अहम भूमिका रही। बत्तीस वर्षीय इस खिलाड़ी ने यहां तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया है। यूगोस्लोवाकिया के टूटने के बाद क्रोएशिया एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में दुनिया के नक्शे पर आया था। इस दौरान काफी हिंसा हुई। कई लोगों ने अपनी जानें गंवाईं। लाखों घर जले। लोग बेघर हुए। गैर-सर्बियाई लोगों को इसका काफी नुकसान झेलना पड़ा। लूका मोड्रिच के दादा लूका मोड्रिच सीनियर भी इनमें से एक थे। जब क्रोएशिया यूगोस्लोवाकिया का ही हिस्सा था तब नौ सितंबर एक हज़ार नौ सौ पचासी को लुका मोड्रिच का जन्म हुआ। मोड्रिच सिर्फ छह साल के थे तब उनके दादा को आतंकवादियों ने गोली मार दी। जिसके बाद उन्हें युद्ध-प्रभावित इलाके में रिफ्यूजी का जीवन बिताना पड़ा। आठ दिसंबर एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे को आक्रामक सर्बियाई लड़ाकों ने एक छोटे से गांव मोड्रिची पर हमला कर दिया। उन्होंने वहां रहने वाले क्रोएशियाई परिवारों को अपना शिकार बनाया। दादा को गोली मारे जाने से पहले लुका उन्हीं के पास रहते थे। लुका मोड्रिच के मां-बाप फैक्ट्री में काम करते थे। लेकिन एक दिन सर्बियाई विद्रोहियों ने उनके घर को आग लगा दी और उनके दादा को गोली मार दी। मोड्रिच ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें बिना बिजली और पानी के रहना पड़ा। गोलियों और ग्रेनेड की आवाजें रोजमर्रा की बात हो चुकी थी। इसके अलावा आसपास बिछीं लैंडमाइंस का खतरा तो था ही। यहां से मोड्रिच ने खुद को फुटबॉल की तरफ आगे बढ़ाया। वह क्रोएशियाई टीम के इतिहास के सबसे शानदार प्लेयर्स में से एक हैं। उन्होंने चार साल इंग्लैंड में क्लब फुटबॉल खेला और आखिर में दो हज़ार बारह में वह स्पैनिश क्लब रियाल मैड्रिड से जुड़े। जब मोड्रिच ने रियाल मैड्रिड ज्वाइन किया तो लोगों ने उसे क्लब के इतिहास की सबसे घटिया साइनिंग कहा। लेकिन इसी मोड्रिच ने वो कमाल किया है जो आज तक रोनाल्डो जैसा खिलाड़ी नहीं कर पाया है।
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शहर में बिजली सिस्टम का दीपावली पूर्व मेंटिनेंस रविवार को पूरा हो जाएगा। इसके बाद नए मकान, दुकान, फैक्ट्री में बकाया बिजली कनेक्शन जारी करने का काम होगा ताकि दीपावली को यहां रोशनी हो सके। हालांकि जेसीसी व जेपीडीसी में 4 हजार से ज्यादा बिजली कनेक्शन बकाया हैं तथा कई फाइलें 3 महीने से एईएन से लेकर सर्किल कार्यालय तक चक्कर लगा रही हैं।
डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक नवीन अरोड़ा ने 31 अक्टूबर के बाद सिस्टम मेंटिनेंस के नाम पर बिजली कटौती नहीं करने के लिए कहा था। वहीं, उपभोक्ताओं को समय पर कनेक्शन देने के लिए अब दीपावली तक जयपुर डिस्कॉम के सिटी सर्किल के अधिकांश सब डिवीजन कार्यालय छुट्टी के दिन भी खुले रहेंगे।
डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक ने शहर में लगे सभी एक्सईएन व एईएन को कनेक्शन के लिए आवेदन होने व मौका रिपोर्ट के बाद तत्काल कनेक्शन देने को कहा है। कई एक्सईएन व एईएन छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोल रहे हैं। हालांकि इन दिनों में उपभोक्ता सेवाओं की बजाय दफ्तर के बकाया काम निपटाए जाएंगे। इसमें फाइल तैयार करना, लोड की जांच, कनेक्शन की मौका रिपोर्ट सहित अन्य काम होंगे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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शहर में बिजली सिस्टम का दीपावली पूर्व मेंटिनेंस रविवार को पूरा हो जाएगा। इसके बाद नए मकान, दुकान, फैक्ट्री में बकाया बिजली कनेक्शन जारी करने का काम होगा ताकि दीपावली को यहां रोशनी हो सके। हालांकि जेसीसी व जेपीडीसी में चार हजार से ज्यादा बिजली कनेक्शन बकाया हैं तथा कई फाइलें तीन महीने से एईएन से लेकर सर्किल कार्यालय तक चक्कर लगा रही हैं। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक नवीन अरोड़ा ने इकतीस अक्टूबर के बाद सिस्टम मेंटिनेंस के नाम पर बिजली कटौती नहीं करने के लिए कहा था। वहीं, उपभोक्ताओं को समय पर कनेक्शन देने के लिए अब दीपावली तक जयपुर डिस्कॉम के सिटी सर्किल के अधिकांश सब डिवीजन कार्यालय छुट्टी के दिन भी खुले रहेंगे। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक ने शहर में लगे सभी एक्सईएन व एईएन को कनेक्शन के लिए आवेदन होने व मौका रिपोर्ट के बाद तत्काल कनेक्शन देने को कहा है। कई एक्सईएन व एईएन छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोल रहे हैं। हालांकि इन दिनों में उपभोक्ता सेवाओं की बजाय दफ्तर के बकाया काम निपटाए जाएंगे। इसमें फाइल तैयार करना, लोड की जांच, कनेक्शन की मौका रिपोर्ट सहित अन्य काम होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दिशा-निर्देशों में कुछ सुधार की योजना बना रही है।
इसके तहत क्षेत्रवार पूंजीं में प्रवासी भारतीयों के निवेश शामिल हैं। साथ ही क्षेत्रवार बाजार पूंजी में विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए तय कुछ प्रावधानों में भी फेर-बदल की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा, 100 फीसदी विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों या उससे संबंधित निवेश के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दो नियमों, जो प्रेस नोट 3 (1997) और प्रेस नोट 9 (1999) में शामिल हैं, उसे लागू करने का इरादा सरकार कर रही है।
सरकार की इस कवायद का मकसद वैश्विक वित्तीय संकट की स्थिति में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को बढ़ाना और विदेशी निवेश में उदारता बरतना है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में निर्बाध रूप से विदेशी निवेश हो सके।
नए नियम के तहत उन क्षेत्रों को लाने की योजना है, जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रत्यक्ष संस्थागत निवेश, दोनों शामिल हो। साथ ही इसके दायरे में वे सेक्टर भी शामिल होंगे, जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खास उल्लेख नहीं किया गया है।
इन सेक्टरों में दूरसंचार, रियल एस्टेट, आधारभूत ढांचा क्षेत्र, प्रसारण आदि शामिल हैं। इस प्रस्ताव में इस बात का भी उल्लेख है कि जैसे ही इस नियम को सरकार की हरी झंडी मिलती है, उसके छह माह के अंदर ही कंपनियों को इन नियमों को लागू करना होगा।
अगर नए नियम के तहत भारतीय कंपनी के शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी ज्यादा हो, तो कंपनी को उनके शेयर छह माह के अंदर कम करने होंगे। इस प्रस्ताव पर गुरुवार को आयोजित आर्थिक मामलों की कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई। नए प्रस्ताव से दूरसंचार समेत तमाम कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है।
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देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दिशा-निर्देशों में कुछ सुधार की योजना बना रही है। इसके तहत क्षेत्रवार पूंजीं में प्रवासी भारतीयों के निवेश शामिल हैं। साथ ही क्षेत्रवार बाजार पूंजी में विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए तय कुछ प्रावधानों में भी फेर-बदल की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, एक सौ फीसदी विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों या उससे संबंधित निवेश के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दो नियमों, जो प्रेस नोट तीन और प्रेस नोट नौ में शामिल हैं, उसे लागू करने का इरादा सरकार कर रही है। सरकार की इस कवायद का मकसद वैश्विक वित्तीय संकट की स्थिति में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को बढ़ाना और विदेशी निवेश में उदारता बरतना है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में निर्बाध रूप से विदेशी निवेश हो सके। नए नियम के तहत उन क्षेत्रों को लाने की योजना है, जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रत्यक्ष संस्थागत निवेश, दोनों शामिल हो। साथ ही इसके दायरे में वे सेक्टर भी शामिल होंगे, जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खास उल्लेख नहीं किया गया है। इन सेक्टरों में दूरसंचार, रियल एस्टेट, आधारभूत ढांचा क्षेत्र, प्रसारण आदि शामिल हैं। इस प्रस्ताव में इस बात का भी उल्लेख है कि जैसे ही इस नियम को सरकार की हरी झंडी मिलती है, उसके छह माह के अंदर ही कंपनियों को इन नियमों को लागू करना होगा। अगर नए नियम के तहत भारतीय कंपनी के शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी ज्यादा हो, तो कंपनी को उनके शेयर छह माह के अंदर कम करने होंगे। इस प्रस्ताव पर गुरुवार को आयोजित आर्थिक मामलों की कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई। नए प्रस्ताव से दूरसंचार समेत तमाम कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है।
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जंगल में घटनाक्रम का युवकों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. बेटी का वायरल वीडियो जब लड़की के परिवारवालों ने देखा तो सबके होश उड़ गए. अब इस मामले में लड़की की मां ने बेटी को जबरदस्ती जंगल में ले जाकर रेप की कोशिश करने का आरोप युवक पर लगाया है. वहीं पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर मेडिकल जांच के लिए भेज दिया. शनिवार को आरोपी की कोर्ट में पेशी होगी.
पांवटा साहिब थाने के एसएचओ अशोक चौहा ने बताया कि वीडियो वायरल करने वालों की भी तलाश की जा रही है. जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे. वीडियो में लड़की, वहां मौजूद लड़कों से वीडियो नहीं बनाने की गुहार लगा रही है. लड़की ने खुद को पांवटा साहिब की बताया और आरोपी लड़का भी खुद को लोकल ही बता रहा है. बहरहाल पुलिस इस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है.
OMG: झाड़ियों के पीछे इस हालत में मिले थे युवक-युवती, वायरल हुआ Video Reviewed by News Himachali on December 28, 2018 Rating:
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जंगल में घटनाक्रम का युवकों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. बेटी का वायरल वीडियो जब लड़की के परिवारवालों ने देखा तो सबके होश उड़ गए. अब इस मामले में लड़की की मां ने बेटी को जबरदस्ती जंगल में ले जाकर रेप की कोशिश करने का आरोप युवक पर लगाया है. वहीं पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर मेडिकल जांच के लिए भेज दिया. शनिवार को आरोपी की कोर्ट में पेशी होगी. पांवटा साहिब थाने के एसएचओ अशोक चौहा ने बताया कि वीडियो वायरल करने वालों की भी तलाश की जा रही है. जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे. वीडियो में लड़की, वहां मौजूद लड़कों से वीडियो नहीं बनाने की गुहार लगा रही है. लड़की ने खुद को पांवटा साहिब की बताया और आरोपी लड़का भी खुद को लोकल ही बता रहा है. बहरहाल पुलिस इस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है. OMG: झाड़ियों के पीछे इस हालत में मिले थे युवक-युवती, वायरल हुआ Video Reviewed by News Himachali on December अट्ठाईस, दो हज़ार अट्ठारह Rating:
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। एमपी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड भोपाल द्वारा समूह 2 उप समूह 2 (Group 2-sub group 2) भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन आज 8 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे है। आवेदन की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर निर्धारित है।
वही उम्मीदवार 27 अक्टूबर तक अपने आवेदन पत्र में महत्वपूर्ण बदलाव और त्रुटि सुधार कर सकेंगे। ग्रुप दो सब ग्रुप दो से लेखा अधिकारी उप अंकेक्षक सहित अन्य समकक्ष पदों पर सीधी और बैकलॉग भर्ती की संयुक्त परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। लगभग 300 पदों पर भर्ती का आयोजन किया जा सकता है, हालांकि अभी तक के पदों की संख्या की घोषणा नहीं की गई है।
आयु सीमा- आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा न्यूनतम 18 वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं अधिकतम उम्र और आयु सीमा छूट के लिए उम्मीदवारों को नोटिफिकेशन पढ़ना अनिवार्य होगा।
इन पदों पर होगी भर्ती-मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड की तरफ से आयोजित हो रही ग्रुप 2 भर्ती परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर, ऑफिसर, डिप्टी ऑडिटर अकाउंटेंट सहित कई बैकलॉग और अन्य रेगुलर पदों पर भर्ती दी जाएगी।
परीक्षा- मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा ग्रुप डी भर्ती परीक्षा का आयोजन 18 और 19 नवंबर को किया जाना है। परीक्षा दो पाली में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9:00 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगी। दूसरी पाली दोपहर 2:00 बजे से संचालित हो कर शाम 5:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा के 7 दिन पहले प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे।
चयन प्रक्रिया- लिखित परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया।
- ग्रुप 2 सब ग्रुप 2 के लिए अनारक्षित और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ₹500 आवेदन शुल्क देने होंगे।
- अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग छात्रों और मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के लिए आवेदन शुल्क ₹250 निर्धारित किए गए हैं।
- कियोस्क के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों को एमपी ऑनलाइन के पोर्टल शुल्क के रूप में ₹60 का भुगतान करना होगा।
कैसे करें आवेदन?
- सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट peb. mp. gov. in पर जाएं। अब होम पेज पर दिखाई दे रहे संबंधित भर्ती के लिंक पर क्लिक करें।
- अब आप एक नए पेज पर आ जाएंगे। अब अपना पंजीयन करें और लॉगिन कर के आवेदन पत्र को भरें।
- उम्मीदवार संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। अब आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
- इसके बाद ऑनलाइन पंजीकरण शुल्क का भुगतान करें। अब जमा किए गए एप्लीकेशन फॉर्म, भुगतान रसीद आदि को डाउनलोड करें और एक प्रिंट आउट ले लें।
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। एमपी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड भोपाल द्वारा समूह दो उप समूह दो भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन आज आठ अक्टूबर से शुरू होने जा रहे है। आवेदन की अंतिम तिथि बाईस अक्टूबर निर्धारित है। वही उम्मीदवार सत्ताईस अक्टूबर तक अपने आवेदन पत्र में महत्वपूर्ण बदलाव और त्रुटि सुधार कर सकेंगे। ग्रुप दो सब ग्रुप दो से लेखा अधिकारी उप अंकेक्षक सहित अन्य समकक्ष पदों पर सीधी और बैकलॉग भर्ती की संयुक्त परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। लगभग तीन सौ पदों पर भर्ती का आयोजन किया जा सकता है, हालांकि अभी तक के पदों की संख्या की घोषणा नहीं की गई है। आयु सीमा- आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा न्यूनतम अट्ठारह वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं अधिकतम उम्र और आयु सीमा छूट के लिए उम्मीदवारों को नोटिफिकेशन पढ़ना अनिवार्य होगा। इन पदों पर होगी भर्ती-मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड की तरफ से आयोजित हो रही ग्रुप दो भर्ती परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर, ऑफिसर, डिप्टी ऑडिटर अकाउंटेंट सहित कई बैकलॉग और अन्य रेगुलर पदों पर भर्ती दी जाएगी। परीक्षा- मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा ग्रुप डी भर्ती परीक्षा का आयोजन अट्ठारह और उन्नीस नवंबर को किया जाना है। परीक्षा दो पाली में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह नौ:शून्य बजे से शुरू होकर दोपहर बारह बजे तक आयोजित होगी। दूसरी पाली दोपहर दो:शून्य बजे से संचालित हो कर शाम पाँच:तीस बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा के सात दिन पहले प्रवेश पत्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया- लिखित परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया। - ग्रुप दो सब ग्रुप दो के लिए अनारक्षित और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को पाँच सौ रुपया आवेदन शुल्क देने होंगे। - अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग छात्रों और मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के लिए आवेदन शुल्क दो सौ पचास रुपया निर्धारित किए गए हैं। - कियोस्क के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों को एमपी ऑनलाइन के पोर्टल शुल्क के रूप में साठ रुपया का भुगतान करना होगा। कैसे करें आवेदन? - सबसे पहले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट peb. mp. gov. in पर जाएं। अब होम पेज पर दिखाई दे रहे संबंधित भर्ती के लिंक पर क्लिक करें। - अब आप एक नए पेज पर आ जाएंगे। अब अपना पंजीयन करें और लॉगिन कर के आवेदन पत्र को भरें। - उम्मीदवार संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। अब आवेदन शुल्क का भुगतान करें। - इसके बाद ऑनलाइन पंजीकरण शुल्क का भुगतान करें। अब जमा किए गए एप्लीकेशन फॉर्म, भुगतान रसीद आदि को डाउनलोड करें और एक प्रिंट आउट ले लें।
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कोलकाताः चक्रवात यस ने ओडिशा के बालेश्वर क्षेत्र में कहर बरपाने के बाद पश्चिम बंगाल के कई तटीय जिलों में कहर बरपाया है. तेज हवाओं और तेज हवाओं के साथ तेज बारिश से काफी नुकसान हुआ है। राज्य में अब तक तूफान से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन तूफान से प्रभावित ज्यादातर इलाकों में संचार सुविधाओं की समस्या बनी हुई है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से स्थिति की निगरानी कर रही हैं। बनर्जी ने कहा कि कई बांध पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जिलों में पानी भर गया है. हमने अब तक लगभग 1. 5 मिलियन लोगों को निकाला है। उन्होंने कहा कि चक्रवात ने पूर्वी मिदनापुर, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मिदनापुर, बांकुरा, पश्चिम बर्दवान, हावड़ा, कोलकाता और आसपास के जिलों हुगली और नदिया में 75 से 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दस्तक दी। तटीय क्षेत्र में हवा की गति 130 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।
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कोलकाताः चक्रवात यस ने ओडिशा के बालेश्वर क्षेत्र में कहर बरपाने के बाद पश्चिम बंगाल के कई तटीय जिलों में कहर बरपाया है. तेज हवाओं और तेज हवाओं के साथ तेज बारिश से काफी नुकसान हुआ है। राज्य में अब तक तूफान से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन तूफान से प्रभावित ज्यादातर इलाकों में संचार सुविधाओं की समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से स्थिति की निगरानी कर रही हैं। बनर्जी ने कहा कि कई बांध पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जिलों में पानी भर गया है. हमने अब तक लगभग एक. पाँच मिलियन लोगों को निकाला है। उन्होंने कहा कि चक्रवात ने पूर्वी मिदनापुर, उत्तर और दक्षिण चौबीस परगना, मिदनापुर, बांकुरा, पश्चिम बर्दवान, हावड़ा, कोलकाता और आसपास के जिलों हुगली और नदिया में पचहत्तर से एक सौ दस किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दस्तक दी। तटीय क्षेत्र में हवा की गति एक सौ तीस किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।
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स्टॉफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः कामेडियन कपिल शर्मा की आनस्क्रीन 'बुआ' रही उपासना सिंह ने मिस यूनिवर्स हरनाज कौर संधू के खिलाफ चंडीगढ़ जिला अदालत में केस दायर किया है। मिस यूनिवर्स हरनाज संधू के खिलाफ उपासन सिंह ने सिविल सूट दायर किया है। उपासना सिंह पंजाबी फिल्माें में भी काम करती हैं और पंजाबी फिल्में प्रोड्यूस करती हैं। उपासना सिंह ने अपने वकील करण सचदेवा और इरवनीत कौर के माध्यम से कोर्ट में मिस यूनिवर्स के खिलाफ कांट्रैक्ट का उल्लंघन और नुकसान के हर्जाने का दावा करते हुए यह याचिका दायर की है।
पंजाबी एक्ट्रेस उपासना सिंह ने कहा कि हरनाज संधू ने साल 2020 में फेमिना मिस इंडिया पंजाब का खिताब जीता था। तभी हरनाज ने उपासना सिंह के संतोष एंटरटेनमेंट स्टूडियो एलएलपी के साथ एक आर्टिस्ट एग्रीमेंट साइन किया था। इस कांट्रेक्ट के मुताबिक फिल्म बाई जी कुटणगे में हरनाज को लीड रोल दिया गया था। एग्रीमेंट के तहत हरनाज को फिल्म की प्रमोशन के लिए फिजिकली और वर्चुअली दोनों तरह से शामिल होना था। लेकिन 2021 में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने के बाद हरनाज संधू ने एग्रीमेंट की शर्तों को पूरा नहीं किया।
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स्टॉफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः कामेडियन कपिल शर्मा की आनस्क्रीन 'बुआ' रही उपासना सिंह ने मिस यूनिवर्स हरनाज कौर संधू के खिलाफ चंडीगढ़ जिला अदालत में केस दायर किया है। मिस यूनिवर्स हरनाज संधू के खिलाफ उपासन सिंह ने सिविल सूट दायर किया है। उपासना सिंह पंजाबी फिल्माें में भी काम करती हैं और पंजाबी फिल्में प्रोड्यूस करती हैं। उपासना सिंह ने अपने वकील करण सचदेवा और इरवनीत कौर के माध्यम से कोर्ट में मिस यूनिवर्स के खिलाफ कांट्रैक्ट का उल्लंघन और नुकसान के हर्जाने का दावा करते हुए यह याचिका दायर की है। पंजाबी एक्ट्रेस उपासना सिंह ने कहा कि हरनाज संधू ने साल दो हज़ार बीस में फेमिना मिस इंडिया पंजाब का खिताब जीता था। तभी हरनाज ने उपासना सिंह के संतोष एंटरटेनमेंट स्टूडियो एलएलपी के साथ एक आर्टिस्ट एग्रीमेंट साइन किया था। इस कांट्रेक्ट के मुताबिक फिल्म बाई जी कुटणगे में हरनाज को लीड रोल दिया गया था। एग्रीमेंट के तहत हरनाज को फिल्म की प्रमोशन के लिए फिजिकली और वर्चुअली दोनों तरह से शामिल होना था। लेकिन दो हज़ार इक्कीस में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने के बाद हरनाज संधू ने एग्रीमेंट की शर्तों को पूरा नहीं किया।
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भत. पुं० ( मफ ) भोन्न; रांधे y भोजन; राजाहु-पकामाहुआ-मन्. Food; cooked food; victuals. प्रव० ६३६; १,१०; सम०
०३८४०; भग० २, १, ५, ४६; १७, ३, नाया० १, २, ८, ९, १२; व्या० ७, १८४; (२) लग्नः पुनरी, भक्त; पुजारी. A devotee; a worshipper. १०० ७, ५० दसा ● ७, ८-११; --कहा. श्री० ( क्या ) भोन्ननी वात यीत. भोजनकी बातचीत. A talk about food. प्राय ४, ७, सम० ४; ठा० ४, २; - घर. न० ( -गृह ) मो. ननुं घर; भोन्नशाणा; रसोड, भोजनशाला; रसोई घर. A kitchen; a diningroom. पंत० ३, ८, माया० १६० भग० १५, १; विवा० १; दु. न० ( पर्य ) लोटन भाटे; लातने भाटे. भोजनके लिएः भातके लिए. For the sake of food. प्रा० १०७ बस० ५, २,
श्री० ( प्रतिज्ञा ) लोकतना पय्यप्पासु संथारानो अडा२. भोजनका पचखाय; એક પ્રકાર. संपारेका एक प्रकार. A vow related to food; a kind of fasting. मत• १; (२) नेयां लक्त प्रतिज्ञाने અધિકાર છે એવા એક મા" શાસ્ત્રનું नाथ. एक "पहना" शाखाका नाम जिसमें भक प्रतिहाका अधिकार है. Name of Painnă scripture which deals with a vow of food. भत० १; -० ( प्रत्यायाम ) डंबन
ચલન ક્રિયાને ન તજતાં કેવળ ભાજનાદિન ત્યાગ કરવા તે; સચારાના એક માર. इलनचलनकोन त्यागते हुए कियाहुभा भोजनका स्याग; संभाराका
Abstaining from food etc. without abondoning movement; a kind of fasting. भग २, १, १३, ७; १ः २५, ७ ठा० २, ४; धोव० १६; ४० २३, २; य
मरण. म० (-प्रत्याख्यानमर) संथारे। કરી સમાધિ ભાવે મરવું તે; પંડિત મરरानो मे २. संधारा करके समाधि - स्था में मरवा; पंडित मरखका एक प्रकार. Dying in contemplation after fasting; a form of wise death. सम० १७; - परिवाय. पुं० ( परियाग) બાજન-ખાનપાનના સાગ; સંથારા કરવા ते. भोजन-खानपानका स्थाग; संथारा करना. Abstaining from food etc; fasting. प्रा० १६७; - परियणा. स्त्री० ( परिक्षा ) भोजनाहिनी परिक्षापन्या; अनशन-संथारे भोजनाविका चक्खाय; अनशन-संचारा. The vow of fasting. माउ० ८ - परिक्षा स्त्री० ( -पक्षिा ) लोनो सर्वथा त्याग करवा ते; संथारे. भोजनका एकान्तिक स्याम; संचारा. Completely abstaining from food. भत्त 9; 9{£; प्रव० १०११;
म० ( -चेतन-भजायवेतनम् ) રાજી તરીકે અન્નપાનાદિનું વેતન અપાય તે. रोजी रूपमें दिया जानेवाला असानादिका वेतन. Wages in the form of food. दिया ३२ -बेला. सी० ( बेलामय भोजनस्य देखा समयः भोलाहित सभय भोजन कर Meal-time. ०१ः -साका.
पाय. ]
बी० ( शाला ) रसोडु; भोन्नगृड. ભાજનગૃહ. रसोई घर; पाचसाखः भोजन घर, A kitchen. जं० १० ३, ४७;
[ भति
मतया. सी. ( भर्तृका ) स्वाभीवाणी; समा; मेने धायी होय मेवी स्त्री स्वामीपाली; सधवा; सौभाग्यवती; पतिवाली स्त्री. A lady whose husband is living. नाया• ६;
भतपाय म० ( भतपान ) भातपाणी; अन्न४. अमजल. Food and water. " भतराणे बहुदासीदासगो महिस्गवेलगप्पभूए बहुजास्स अपरिमूएयाविहोत्या" सूय० २, ७, २; नाया• ५; १३; १६; इस० ५, १, १; विवा० १; प्रष० ७४१; भाव० ७, १ः ठा०२, १; -प्रोमोयरिया. लो० ( - भवमोदरिका ) આહાર ઓછા કરવા હંમેશના પ્રમાણથી माहार योछो ३२वीते; हमेशना प्रभागथी થાડું ખાવું તે; ઉણાદરી તપને એક પ્રકાર. अल्पाहार ग्रहण; हमेशांसे कुछ कम खाना; उणोदी तपका एक प्रकार. Eating less than usual; a variety of Unodarī austerity. ठा० ३ ३ - दब्बोमोयरिया. सी० ( -अव्याव मोदरिका ) अन्नाहिनी इज्यथा अवमोरिअ-न्यूनना. द्रव्यकी अपेक्षा अनादिकी न्यूनता-कमी. A decrease in food. भग० २५, ७; - निरुद्ग. म० ( -निरुद्धक ) અન્નજળ અધ કરી કાને ભુખે મારવું તે. प्रमजल देना बन्द करके किसीको भूखों मारना. Causing one to die of starvation. सूय २, २, ६३; - विउस्सग. पुं० ( व्युत्सर्ग ) अन्नाहिनी परित्याग अन्नादिका परित्याग. Abondoning of food etc. भग २५, ७; - निरुद्धय. त्रि० (क) अन्नपानाहि न આપનાર. भनपानादि न देनेवाला. (one) who does not give food etc. पैसा ६, ४; - पडियाइक्लित. वि० (-प्रत्याख्यात) ભાત પાણીના ત્યાગ ३२१२. मन्नजलको छोड़नेवाला. One who abondons food etc. बन० २, १७ः वेय. ६ः १-१
भत्तार. पुं० ( भर्तृ ) पतिः पति; स्वामी; नाथ; धनी lord; master. दसा ८ १६; सु० ३० ५, ६७ः नाया० ८ १६ : भग सम० ३००
भक्ति. स्त्री० ( भक्ति ) रचना (२) चित्र विशेष; लात. रचना. (२) चित्र विशेष; भांति; वैचित्र्य. An arrangement; a particular picture; cooked rice. नाया० १; राय० ४६ः भग० ११, ११ः जीवा० ३ ३ ४; भोव० ३१ कम्प० ३, રૂ૭; ૪૯; (૨) ભક્તિ-પૂજ્યભાવથી સેવા सत्र ३२ ते. भक्ति-पूज्यभावसे की जानेवाली सेवा प्रतिष्ठा आदि. Devotion. भोव २०४० २६, ४; राय० ४२; ७८; जं० प० २, ३३; विशे० १६३१; भग० २५, ७; भन० २०; ३० ५४; ७० पंचा० १, ३७; प्रव० ५५८ (3) अडअरे त्रि.
लाग इश्वा ते. भिन्न २ भाँतिमे विभक्त करना. Dividing in different ways. सम० नाया• १; ८ भग० १४, ६; - कय.
त्रि० ( कृत )ी रेस भक्तिपूर्वक कियाहुभा. Doue with devotion. प्रव• ६६६; घर. न० ( गृह ) घर विशेष. घर विशेष. A particular house. जीवा० ३, ३ः -- चित्त न० ( चित्र ) નાના પ્રકારના ચિત્રામણની ભાતથી ચિત્રિત. रंगविरंगे विचित्र चित्रोंसे चित्रित Adorned by various peculiar and coloured pictures. जं०१० ५ ११४; ११५ः ११६३, ५६ ; गाया
भरिकाम. 1
-सुन्त. त्रि० ( युक) लम्तिसहित. भक्तिपूर्ण यु. With devotion.
भतिजय. पु. ( भागीयक आतुरस्त्यं भात्रीयः स एव ) लगीने; लाना हीम, भतीजा; भ्रातृष्य; भाईका पुत्र. A nephew. भग०
मतिमंत त्रि० ( भक्तिमत् ) भक्तिवाणु भक्तिDevoted; devotee.
भत्तोस. पुं० न० ( भक्तोष ) शेउसा धीं, या वगेरे. सिकेहुए गेहूं चने आदि-पानी. Parched wheet or grams etc. प्रब० २१०; ४३६; पंचा० ५, २६; मस्थिय, त्रि० ( भस्त्रिक) अग्नियी पाणी लड्यु ४२वुं ते. अग्निमें जलाकर या बाल कर किया जाने वाले भङ्गीत-थ. Roasting in fire and pounding. सूय० १, ४, १, २१;
भइ. पुं० ( भद्र ) अयाण मंरणः श्रेय. कल्याबा; श्रेय; मंगल. Welfare. प्रो० २२ः नाया ० १; १यह०२, १;
१, १०; कप्य० ५, १०५ः भत० १७१; (૨) ધૈયદિ મુણુ યુક્ત ભદ્ર જાતિના ઉત્તમ डाथी. धैर्यादि गुणयुक्त भद्र जातिका श्रेष्ठ हाथी. An excellent elephantof the Bhadra class, possessed of merits such as courage etc.
"मधु गुलिम पिंगल करयो । अणुपुष्य सुजाय दोक्लंगूलो । पुरभो उदग्ग भीरो । सम्बंग समादियो भहो । "
[ भइ
प्यारस से त्रस्शु तिथिः मंद्रातिथि बीज, सप्तमी और बारस यादि तीन मतिथि, The three dates of a lunar month vis the 2nd, 7th and 12th. जं० प० ७ १५२; (4) यो नाभनु મહાશુક્ર દેવલેાકનું એક વિમાન; તેની સ્થિતિ સાળ સાગરીખમની છે, તેના દેવા આઠે મહિને શ્વાસોચ્છવાસ લે છે, તેને સાળ હજાર છે. डलर वर्षे सुधा जागे 9 महाशुक्र देवलोकका एक विमान; जिसकी स्थिति सोलह सागर पेमकी है, उसके देव माठ महिनोंमें श्वासोच्छ्वास लेते है और उन्हें सोलह सहा वर्षों में सुधा लगती है. A celestial abode of Mahaśukra Devloka, whose gods live for 16 Sāgaro+ pamas, breathe once in eight months and feel hungry in 16000 years. सम• ४८ (१) वनस्थति विशेष; हनी खेड लता वनस्पति विशेष; कंक्को एक जाति A particular vegetation; a kind of bulbous root. जीवा० १; (७) सूर्यभद्र तथा सूर्य दीपना हेवतानुं नाम. सूर्यभद्र तथा सूर्यद्वीपके देवता का नाम Name of the god of Surya Bhadra and Sürya Dvipa. जीवा• ३, ४; (८) धनुष धनुष. A bow. ममः (८) लद्र नायतुं खेड त५ तप. Anausterity named Bhadra. प्रम० १५४४; (१०) भावती भोवीसीना भारतक्षेत्रना योवीशभा २ भागामी चौबीसेके भरतक्षेत्रके चौबीस तीर्थकर The 24th Tirthankara of Bharata kşetra to be born in the comठा० ४, २; (३) भावती योवीसीना त्रीन व्हेत्र मागामी चौबीसीके तीसरे बलदेव. The 3rd Baladeva of the comming chovist. प्रम० १२२५; (४ (४), सांतंभ भने
ing chauvist. प्र०४५(११) संभूति वियना शिष्य..
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भत. पुंशून्य भोन्न; रांधे y भोजन; राजाहु-पकामाहुआ-मन्. Food; cooked food; victuals. प्रवशून्य छः सौ छत्तीस; एक,दस; समशून्य तीन हज़ार आठ सौ चालीस; भगशून्य दो, एक, पाँच, छियालीस; सत्रह, तीन, नायाशून्य एक, दो, आठ, नौ, बारह; व्याशून्य सात, एक सौ चौरासी; लग्नः पुनरी, भक्त; पुजारी. A devotee; a worshipper. एक सौ सात, पचास दसा ● सात, आठ-ग्यारह; --कहा. श्रीशून्य भोन्ननी वात यीत. भोजनकी बातचीत. A talk about food. प्राय चार, सात, समशून्य चार; ठाशून्य चार, दो; - घर. नशून्य मो. ननुं घर; भोन्नशाणा; रसोड, भोजनशाला; रसोई घर. A kitchen; a diningroom. पंतशून्य तीन, आठ, मायाशून्य एक सौ साठ भगशून्य पंद्रह, एक; विवाशून्य एक; दु. नशून्य लोटन भाटे; लातने भाटे. भोजनके लिएः भातके लिए. For the sake of food. प्राशून्य एक सौ सात बसशून्य पाँच, दो, श्रीशून्य लोकतना पय्यप्पासु संथारानो अडादो. भोजनका पचखाय; એક પ્રકાર. संपारेका एक प्रकार. A vow related to food; a kind of fasting. मत• एक; नेयां लक्त प्रतिज्ञाने અધિકાર છે એવા એક મા" શાસ્ત્રનું नाथ. एक "पहना" शाखाका नाम जिसमें भक प्रतिहाका अधिकार है. Name of Painnă scripture which deals with a vow of food. भतशून्य एक; -शून्य डंबन ચલન ક્રિયાને ન તજતાં કેવળ ભાજનાદિન ત્યાગ કરવા તે; સચારાના એક માર. इलनचलनकोन त्यागते हुए कियाहुभा भोजनका स्याग; संभाराका Abstaining from food etc. without abondoning movement; a kind of fasting. भग दो, एक, तेरह, सात; एकः पच्चीस, सात ठाशून्य दो, चार; धोवशून्य सोलह; चालीस तेईस, दो; य मरण. मशून्य संथारे। કરી સમાધિ ભાવે મરવું તે; પંડિત મરरानो मे दो. संधारा करके समाधि - स्था में मरवा; पंडित मरखका एक प्रकार. Dying in contemplation after fasting; a form of wise death. समशून्य सत्रह; - परिवाय. पुंशून्य બાજન-ખાનપાનના સાગ; સંથારા કરવા ते. भोजन-खानपानका स्थाग; संथारा करना. Abstaining from food etc; fasting. प्राशून्य एक सौ सरसठ; - परियणा. स्त्रीशून्य भोजनाहिनी परिक्षापन्या; अनशन-संथारे भोजनाविका चक्खाय; अनशन-संचारा. The vow of fasting. माउशून्य आठ - परिक्षा स्त्रीशून्य लोनो सर्वथा त्याग करवा ते; संथारे. भोजनका एकान्तिक स्याम; संचारा. Completely abstaining from food. भत्त नौ; नौ{£; प्रवशून्य एक हज़ार ग्यारह; मशून्य રાજી તરીકે અન્નપાનાદિનું વેતન અપાય તે. रोजी रूपमें दिया जानेवाला असानादिका वेतन. Wages in the form of food. दिया बत्तीस -बेला. सीशून्य रसोडु; भोन्नगृड. ભાજનગૃહ. रसोई घर; पाचसाखः भोजन घर, A kitchen. जंशून्य दस तीन, सैंतालीस; [ भति मतया. सी. स्वाभीवाणी; समा; मेने धायी होय मेवी स्त्री स्वामीपाली; सधवा; सौभाग्यवती; पतिवाली स्त्री. A lady whose husband is living. नाया• छः; भतपाय मशून्य भातपाणी; अन्नचार. अमजल. Food and water. " भतराणे बहुदासीदासगो महिस्गवेलगप्पभूए बहुजास्स अपरिमूएयाविहोत्या" सूयशून्य दो, सात, दो; नाया• पाँच; तेरह; सोलह; इसशून्य पाँच, एक, एक; विवाशून्य एक; प्रषशून्य सात सौ इकतालीस; भावशून्य सात, एकः ठादो, एक; -प्रोमोयरिया. लोशून्य આહાર ઓછા કરવા હંમેશના પ્રમાણથી माहार योछो बत्तीसवीते; हमेशना प्रभागथी થાડું ખાવું તે; ઉણાદરી તપને એક પ્રકાર. अल्पाहार ग्रहण; हमेशांसे कुछ कम खाना; उणोदी तपका एक प्रकार. Eating less than usual; a variety of Unodarī austerity. ठाशून्य तीन तीन - दब्बोमोयरिया. सीशून्य अन्नाहिनी इज्यथा अवमोरिअ-न्यूनना. द्रव्यकी अपेक्षा अनादिकी न्यूनता-कमी. A decrease in food. भगशून्य पच्चीस, सात; - निरुद्ग. मशून्य અન્નજળ અધ કરી કાને ભુખે મારવું તે. प्रमजल देना बन्द करके किसीको भूखों मारना. Causing one to die of starvation. सूय दो, दो, तिरेसठ; - विउस्सग. पुंशून्य अन्नाहिनी परित्याग अन्नादिका परित्याग. Abondoning of food etc. भग पच्चीस, सात; - निरुद्धय. त्रिशून्य अन्नपानाहि न આપનાર. भनपानादि न देनेवाला. who does not give food etc. पैसा छः, चार; - पडियाइक्लित. विशून्य ભાત પાણીના ત્યાગ तीन हज़ार दो सौ बारह. मन्नजलको छोड़नेवाला. One who abondons food etc. बनशून्य दो, सत्रहः वेय. छःः एक-एक भत्तार. पुंशून्य पतिः पति; स्वामी; नाथ; धनी lord; master. दसा आठ सोलह; सुशून्य तीस पाँच, सरसठः नायाशून्य आठ सोलह : भग समशून्य तीन सौ भक्ति. स्त्रीशून्य रचना चित्र विशेष; लात. रचना. चित्र विशेष; भांति; वैचित्र्य. An arrangement; a particular picture; cooked rice. नायाशून्य एक; रायशून्य छियालीसः भगशून्य ग्यारह, ग्यारहः जीवाशून्य तीन तीन चार; भोवशून्य इकतीस कम्पशून्य तीन, રૂसात; उनचास; ભક્તિ-પૂજ્યભાવથી સેવા सत्र बत्तीस ते. भक्ति-पूज्यभावसे की जानेवाली सेवा प्रतिष्ठा आदि. Devotion. भोव दो हज़ार चालीस छब्बीस, चार; रायशून्य बयालीस; अठहत्तर; जंशून्य पशून्य दो, तैंतीस; विशेशून्य एक हज़ार छः सौ इकतीस; भगशून्य पच्चीस, सात; भनशून्य बीस; तीस चौवन; सत्तर पंचाशून्य एक, सैंतीस; प्रवशून्य पाँच सौ अट्ठावन अडअरे त्रि. लाग इश्वा ते. भिन्न दो भाँतिमे विभक्त करना. Dividing in different ways. समशून्य नाया• एक; आठ भगशून्य चौदह, छः; - कय. त्रिशून्य ी रेस भक्तिपूर्वक कियाहुभा. Doue with devotion. प्रव• छः सौ छयासठ; घर. नशून्य घर विशेष. घर विशेष. A particular house. जीवाशून्य तीन, तीनः -- चित्त नशून्य નાના પ્રકારના ચિત્રામણની ભાતથી ચિત્રિત. रंगविरंगे विचित्र चित्रोंसे चित्रित Adorned by various peculiar and coloured pictures. जंदस पाँच एक सौ चौदह; एक सौ पंद्रहः एक हज़ार एक सौ तिरेसठ, छप्पन ; गाया भरिकाम. एक -सुन्त. त्रिशून्य लम्तिसहित. भक्तिपूर्ण यु. With devotion. भतिजय. पु. लगीने; लाना हीम, भतीजा; भ्रातृष्य; भाईका पुत्र. A nephew. भगशून्य मतिमंत त्रिशून्य भक्तिवाणु भक्तिDevoted; devotee. भत्तोस. पुंशून्य नशून्य शेउसा धीं, या वगेरे. सिकेहुए गेहूं चने आदि-पानी. Parched wheet or grams etc. प्रबशून्य दो सौ दस; चार सौ छत्तीस; पंचाशून्य पाँच, छब्बीस; मस्थिय, त्रिशून्य अग्नियी पाणी लड्यु बयालीसवुं ते. अग्निमें जलाकर या बाल कर किया जाने वाले भङ्गीत-थ. Roasting in fire and pounding. सूयशून्य एक, चार, एक, इक्कीस; भइ. पुंशून्य अयाण मंरणः श्रेय. कल्याबा; श्रेय; मंगल. Welfare. प्रोशून्य बाईसः नाया शून्य एक; एकयहदो, एक; एक, दस; कप्यशून्य पाँच, एक सौ पाँचः भतशून्य एक सौ इकहत्तर; ધૈયદિ મુણુ યુક્ત ભદ્ર જાતિના ઉત્તમ डाथी. धैर्यादि गुणयुक्त भद्र जातिका श्रेष्ठ हाथी. An excellent elephantof the Bhadra class, possessed of merits such as courage etc. "मधु गुलिम पिंगल करयो । अणुपुष्य सुजाय दोक्लंगूलो । पुरभो उदग्ग भीरो । सम्बंग समादियो भहो । " [ भइ प्यारस से त्रस्शु तिथिः मंद्रातिथि बीज, सप्तमी और बारस यादि तीन मतिथि, The three dates of a lunar month vis the दोnd, सातth and बारहth. जंशून्य पशून्य सात एक सौ बावन; यो नाभनु મહાશુક્ર દેવલેાકનું એક વિમાન; તેની સ્થિતિ સાળ સાગરીખમની છે, તેના દેવા આઠે મહિને શ્વાસોચ્છવાસ લે છે, તેને સાળ હજાર છે. डलर वर्षे सुधा जागे नौ महाशुक्र देवलोकका एक विमान; जिसकी स्थिति सोलह सागर पेमकी है, उसके देव माठ महिनोंमें श्वासोच्छ्वास लेते है और उन्हें सोलह सहा वर्षों में सुधा लगती है. A celestial abode of Mahaśukra Devloka, whose gods live for सोलह Sāgaro+ pamas, breathe once in eight months and feel hungry in सोलह हज़ार years. सम• अड़तालीस वनस्थति विशेष; हनी खेड लता वनस्पति विशेष; कंक्को एक जाति A particular vegetation; a kind of bulbous root. जीवाशून्य एक; सूर्यभद्र तथा सूर्य दीपना हेवतानुं नाम. सूर्यभद्र तथा सूर्यद्वीपके देवता का नाम Name of the god of Surya Bhadra and Sürya Dvipa. जीवा• तीन, चार; धनुष धनुष. A bow. ममः लद्र नायतुं खेड तपाँच तप. Anausterity named Bhadra. प्रमशून्य एक हज़ार पाँच सौ चौंतालीस; भावती भोवीसीना भारतक्षेत्रना योवीशभा दो भागामी चौबीसेके भरतक्षेत्रके चौबीस तीर्थकर The चौबीसth Tirthankara of Bharata kşetra to be born in the comठाशून्य चार, दो; भावती योवीसीना त्रीन व्हेत्र मागामी चौबीसीके तीसरे बलदेव. The तीनrd Baladeva of the comming chovist. प्रमशून्य एक हज़ार दो सौ पच्चीस; , सांतंभ भने ing chauvist. प्रपैंतालीस संभूति वियना शिष्य..
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गुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा। एगा अणंतगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा एवं वण्णा, गंधा, रसा, फासा भाणिव्वा जाव एगा अणंतगुणलुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा ।
एगा जहन्नपएसियाणं खंधाणं वग्गणा, एगा उक्कस्सपएसियाणं खंधाणं कपणा, एगा अजहन्नुक्कस्स पएसियाणं खंधाणं वग्गणा । एवं जहन्नोगाहणयाणं, उक्कोसोगाहणयाणं, अजहन्नुक्कोसोगाहणगाणं, जहन्नठितियाणं उक्कस्सठितियाणं, अजहन्नुक्कोसठितियाणं । जहन्नगुणकालगाणं, उक्कस्स गुणकालगाणं अजहन्नुक्कस्स गुणकालगाणं एवं वण्ण, गंध, रस, फासाणं वग्गणा भाणियव्वा जाव एगा अजहन्नुक्कस्स गुण लुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा ॥ ५७ ॥
छाया एका परमाणुपुद्गलानां वर्गणा, एवं यावदेका अनन्तप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा । एका एकप्रदेशावगाढानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् एका असंख्येयप्रदेशावगाढानां पुद्गलानां वर्गणा ।
एगा एकसमयस्थितिकानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् असंख्येयसमयस्थितिकानां पुद्गलानां वर्गणा ।
एका एक-गुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् असंख्येय-गुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा । एका अनन्तगुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा । एवं वर्णाः गन्धाः रसाः स्पर्शाः भणितव्याः, यावद् अनन्तगुणरूक्षाणां पुद्गलानां वर्गणा एका जघन्यप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा, एका उत्कर्षप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा, एका अजघन्योत्कर्षप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा एवं जघन्यावगाहनकानाम् उत्कर्षावगाहनकानाम्, अजघन्योत्कर्षावगाहनकानाम्। जघन्यस्थितिकानाम् उत्कर्षस्थितिकानाम्, अजघन्योत्कर्षस्थितिकानाम्। जघन्यगुणकालकानाम्, उत्कर्षगुणकालकानाम्, अजघन्योत्कर्षकालकानाम्, एवं वर्णगन्धरसस्पर्शानां वर्गणा भणितव्या, यावदेका अजघन्योत्कर्षगुणरूक्षाणां पुद्गलानां वर्गणा ।
शब्दार्थ-एगा - एक है, परमाणु-पोग्गलाणं वग्गणा- परमाणु पुद्गलों की वर्गणा, एवं - इसी प्रकार, जाव- यावत्, अणंतपएसियाणं खंधाणं वग्गणा- अनन्त प्रादेशिक स्कंधों की वर्गणा ।
एगा - एक है, एगपएसोगाढाणं पोग्गलाणं वग्गणा - एक प्रदेशावगाढ पुद्गलों की वर्गणा, जाव- यावत्, एगा-एक है, असंखेज्जपएसोगाढाणं पोग्गलाणं वग्गणाअसंख्यात प्रदेश अवगाढ पुद्गलों की वर्गणा।
एगा- एक है, एगसमयठितियाणं पोग्गलाणं वग्गणा जाव असंखेज्जसमयठितियाणं पोग्गलाणं वग्गणा- एक समयस्थितिक पुद्गलों की यावत् असंख्यात समयस्थितिक पुद्गलों की एक-एक वर्गणा ।
एगा- एक है, एगगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा-एक गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, जाव - यावत्, एगा- एक है, असंखेज्जगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणाअसंख्यात गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, एगा- एक है, अणंतगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा - अनन्त गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, एवं - इसी प्रकार, वण्णा गंधा रसा फासा भाणियव्वा- पांच वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्शों के विषय में भी कहना चाहिए, जाव-यावत, एगा- एक है, अणंतगुणलुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा- अनन्तगुण रूक्ष पुद्गलों की वर्गणा
एगा- एक है, जहन्नपएसियाणं खंधाणं वग्गणा - जघन्य प्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा, एगा- एक है, उक्कस्सपएसियाणं खंधाणं वग्गणा-उत्कर्ष प्रादेशिक स्कन्धों की वर्गणा, एगा- एक है, अजहनुक्कस्स पएसियाणं खंधाणं वग्गणा - अजघन्य और अनुत्कृष्ट अर्थात् मध्यमप्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा, एवं इसी प्रकार, जहन्नोगाहणगाणं उक्कोसोगाहणगाणं अजहन्नुक्कोसगाहणगाणं - जघन्य अवगाहन वाले, उत्कृष्ट स्थितिवाले, और मध्यमस्थिति वाले स्कन्धों की एक-एक वर्गणा, जहन्नगुणकालगाणं, उक्कस्सगुणकालगाणं, अजहन्नुक्कस्सगुणकालगाणं-जघन्य गुण वाले काले वर्ण वाले, उत्कर्ष गुण काले रंग वाले तथा मध्य गुण काले रग वाले स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है, एवंइसी प्रकार, वण्ण गंध रस फासाणं वग्गणा भाणियव्वा-वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श के विषय में कहना चाहिए, जाव- यावत्, एगा - एक है, अज्जहन्नुक्कस्सगुणलुक्खाणं वग्गणा - मध्य गुण रूक्षों की एक वर्गणा है।
मूलार्थ-द्रव्यतः एक परमाणु से लेकर अनन्तप्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा एक-एक है। क्षेत्रतः एक प्रदेशावगाही पुद्गलों की वर्गणा एक है, यावत् असंख्यात प्रदेशावगाही पुद्गलों की वर्गणा एक है। कालतः एक समय स्थिति वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है, यावत् असंख्यात- समय स्थिति वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है। यावत् एकगुण काले वर्ण वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है, अनन्त गुण काले रंग वाले पुद्गलों की एक वर्गणा । इसी प्रकार चार वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्शों के विषय में भी कहना चाहिए। इसी तरह द्रव्य से जघन्य प्रदेश युक्त स्कन्धों की, उत्कृष्ट प्रदेश- युक्त स्कन्धों की और मध्यमप्रदेश युक्त स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है। क्षेत्र से जघन्य आकाश प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए और मध्यम प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए उत्कर्ष प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए पुद्गलों की एक-एक
वर्गणा है। काल से जघन्य स्थिति वाले, उत्कृष्ट स्थिति वाले और मध्यम स्थिति वाले पुद्गलों की एक-एक वर्गणा है। भाव से जघन्य गुण वाले काले, मध्यम गुण वाले काले और उत्कृष्ट गुण वाले काले पुद्गलों की एक-एक वर्गणा है। इसी प्रकार पांच वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्श इनकी एक-एक वर्गणा कहनी चाहिए। सूत्र में पुद्गल का द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव से जो वर्णन किया गया है, उसकी सामान्य रूप से एक-एक वर्गणा कहनी व जाननी चाहिए।
विवेचनिका-संसारी और मुक्त दोनों अवस्थाओं मे जीव चेतन लक्षण वाला होता है। चेतना रहित द्रव्य अजीव कहलाता है, अतः सिद्ध-वर्गणा के अनन्तर इस सूत्र में अजीव पुद्गल - द्रव्य के विषय में कथन किया गया है। पुद्गल शब्द का अर्थ होता है जिसका एकत्व, पृथक्त्व, मिलने और बिछुडने का स्वभाव हो । पुद्गल तत्त्व के विषय में कहा भी है- 'पूरणगलनधर्मिणः पुद्गलाः " जो वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श वाला हो वह पुद्गल कहलाता है। यह लक्षण परमाणु से लेकर महास्कन्ध पर्यन्त सभी में घटित होता है। यद्यपि भगवती सूत्र के आठवें शतक में जीव को भी पुद्गल कहा है। बौद्ध लोग पुद्गल शब्द का व्यवहार जीव के लिए भी करते हैं, किन्तु जैन-दर्शन मे पुद्गल शब्द का व्यवहार प्रायः अजीव तत्त्व के लिए ही किया जाता है। जैन-दर्शन मन और कर्म को भी पौद्गलिक ही मानता है, तथा पृथ्वी, अप्, तेज और वायु को भी वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श वाला कहाता है।
वैशेषिक दर्शनकार ने वायु को केवल स्पर्श वाला ही माना है और तेज को गंध एव रस से रहित माना है तथा जल को भी गन्ध रहित स्वीकार किया है, जब कि उक्त सभी द्रव्य पुद्गल रूप हैं। जो-जो पुद्गल है वह वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श इन चारों से युक्त है, फिर भले ही वह मन हो या शब्द, दृश्यमान हो या अदृश्यमान सभी पुद्गल हैं।
पुद्गल का सब से सूक्ष्म, अविभाज्य अंश परमाणु है, उसमें भी पांच वर्णों मे से एक वर्ण, दो गन्धों में से एक गन्ध, पाच रसों में से एक रस और आठ स्पर्शों में से दो स्पर्श विद्यमान रहते हैं। शीत-उष्ण और रूक्ष - स्निग्ध इन में से परस्पर अविरोधी दो स्पर्श परमाणु में नियमेन होते हैं। जो किसी दूसरे के साथ नहीं मिला हुआ है वह परमाणु कहलाता है। सूत्रकार ने द्रव्य, क्षेत्र, काल, और भाव की अपेक्षा रखते हुए पुद्गल का वर्णन किया है, जैसे किद्रव्यतः- परमाणु अनन्त होते हुए भी परमाणुत्व की सामान्य दृष्टि से वे एक हैं, अतः उन की वर्गणा एक है। इसी प्रकार द्वि-प्रदेशी (द्व्यणुक) त्रिप्रदेशी (त्र्यणुक) यावत् संख्यात- प्रदेशी एवं अनन्त-प्रदेशी स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है।
१ तत्त्वार्थ सूत्र अ ५, सूत्र २३
क्षेत्रतःआकाश के एक प्रदेश पर परमाणु से लेकर जितने प्रदेशी स्कन्ध अवस्थित हैं, उनकी एक-एक वर्गणा है। आकाश के एक प्रदेश पर एक परमाणु भी ठहर सकता है, द्विप्रदेशी स्कन्ध यावत् संख्यात असख्यात, अनन्त प्रदेशी स्कन्ध भी ठहर सकता है।
इस प्रसंग पर प्रश्न हो सकता है कि आकाश के एक प्रदेश पर अनन्त प्रदेशी स्कन्ध कैसे अवगाहन कर सकता है?
उत्तर में कहना है कि - आकाश का गुण है दूसरे द्रव्यों को अवकाश देना, क्योंकि वह सभी द्रव्यों का आधारभूत है। आकाश आधार है और शेष द्रव्य आधेय है। निश्चय नय से तो सभी द्रव्य अपने-अपने स्वरूप मे अवस्थित है, कोई भी द्रव्य परमार्थ से दूसरे द्रव्य में नहीं रह सकता। आकाश का कोई दूसरा आधार नहीं है, क्योंकि उससे महत्परिमाण वाला या उसके तुल्य परिमाण वाला और कोई द्रव्य नहीं है, अतः व्यवहार या निश्चय दोनो दृष्टियों से आकाश स्वप्रतिष्ठित है। अन्य द्रव्यो की अपेक्षा आकाश महान् है। इसी कारण वह सब द्रव्यो का आधार है। आकाश लोक- अलोक मे व्याप्त है, किन्तु शेष द्रव्य लोकाकाश में ही है। लोकाकाश असंख्यात प्रदेशात्मक है। कोई पुद्गल स्कन्ध लोकाकाश के एक प्रदेश में रहता है तो कोई दो प्रदेश में रहता है। इसी तरह कोई पुद्गल असंख्यात प्रदेश परिमित लोकाकाश मे भी रह सकता है। आधारभूत क्षेत्र के प्रदेशो की संख्या आधेयभूत पुद्गल द्रव्य के परमाणुओं की संख्या से न्यून या उसके बराबर हो सकती है, अधिक नही, अतएव एक परमाणु एक ही आकाश प्रदेश पर स्थित रहता है, पर द्व्यणुक से लेकर संख्यात असंख्यात और अनन्त अणुक भी एक प्रदेश पर रह सकते हैं, क्योंकि आकाश का विशेष गुण दूसरों को स्थान-अवकाश देने का है। जैसे एक तोला परिमाण वाले पारे मे सात तोले परिमाण सुवर्ण एक रूप हो जाता है और पारे का वजन तब भी एक तोला ही रहता है, किन्तु यदि पुनः उस पारे से किसी प्रयोग द्वारा सुवर्ण को पृथक् किया जाए तो वह सुवर्ण पुनः सात तोले परिमाण ही रहेगा और पारे का वजन पहले की तरह एक तोला परिमाण ही रहेगा। इस विषय मे वृत्तिकार के शब्द निम्नलिखित है -
पारदस्यैकेन कर्षेण चारित्ताः सुवर्णस्य ते सप्ताप्येकी भवन्ति, पुनर्वामितः प्रयोगतः सप्तैव ते इति । अचिन्त्यत्वात् द्रव्यपरिणामस्य ।
पुद्गल का परिणमन अचिन्त्य है। जिस प्रकार एक दीपक के प्रकाश में सहस्रों दीपकों का प्रकाश एक रूप होकर ठहरता है उसी तरह एक प्रदेश पर अनन्त - प्रदेशी स्कन्ध ठहर सकता है। आकाश के असंख्यात प्रदेशों पर भी अनन्त प्रदेशी स्कन्ध ठहरे हुए है, उनकी भी एक-एक वर्गणा है।
कालतः - एक समय की स्थिति वाले पुद्गलो की एक वर्गणा है, दो समय की
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गुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा। एगा अणंतगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा एवं वण्णा, गंधा, रसा, फासा भाणिव्वा जाव एगा अणंतगुणलुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा । एगा जहन्नपएसियाणं खंधाणं वग्गणा, एगा उक्कस्सपएसियाणं खंधाणं कपणा, एगा अजहन्नुक्कस्स पएसियाणं खंधाणं वग्गणा । एवं जहन्नोगाहणयाणं, उक्कोसोगाहणयाणं, अजहन्नुक्कोसोगाहणगाणं, जहन्नठितियाणं उक्कस्सठितियाणं, अजहन्नुक्कोसठितियाणं । जहन्नगुणकालगाणं, उक्कस्स गुणकालगाणं अजहन्नुक्कस्स गुणकालगाणं एवं वण्ण, गंध, रस, फासाणं वग्गणा भाणियव्वा जाव एगा अजहन्नुक्कस्स गुण लुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा ॥ सत्तावन ॥ छाया एका परमाणुपुद्गलानां वर्गणा, एवं यावदेका अनन्तप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा । एका एकप्रदेशावगाढानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् एका असंख्येयप्रदेशावगाढानां पुद्गलानां वर्गणा । एगा एकसमयस्थितिकानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् असंख्येयसमयस्थितिकानां पुद्गलानां वर्गणा । एका एक-गुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा, यावद् असंख्येय-गुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा । एका अनन्तगुणकालकानां पुद्गलानां वर्गणा । एवं वर्णाः गन्धाः रसाः स्पर्शाः भणितव्याः, यावद् अनन्तगुणरूक्षाणां पुद्गलानां वर्गणा एका जघन्यप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा, एका उत्कर्षप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा, एका अजघन्योत्कर्षप्रादेशिकानां स्कन्धानां वर्गणा एवं जघन्यावगाहनकानाम् उत्कर्षावगाहनकानाम्, अजघन्योत्कर्षावगाहनकानाम्। जघन्यस्थितिकानाम् उत्कर्षस्थितिकानाम्, अजघन्योत्कर्षस्थितिकानाम्। जघन्यगुणकालकानाम्, उत्कर्षगुणकालकानाम्, अजघन्योत्कर्षकालकानाम्, एवं वर्णगन्धरसस्पर्शानां वर्गणा भणितव्या, यावदेका अजघन्योत्कर्षगुणरूक्षाणां पुद्गलानां वर्गणा । शब्दार्थ-एगा - एक है, परमाणु-पोग्गलाणं वग्गणा- परमाणु पुद्गलों की वर्गणा, एवं - इसी प्रकार, जाव- यावत्, अणंतपएसियाणं खंधाणं वग्गणा- अनन्त प्रादेशिक स्कंधों की वर्गणा । एगा - एक है, एगपएसोगाढाणं पोग्गलाणं वग्गणा - एक प्रदेशावगाढ पुद्गलों की वर्गणा, जाव- यावत्, एगा-एक है, असंखेज्जपएसोगाढाणं पोग्गलाणं वग्गणाअसंख्यात प्रदेश अवगाढ पुद्गलों की वर्गणा। एगा- एक है, एगसमयठितियाणं पोग्गलाणं वग्गणा जाव असंखेज्जसमयठितियाणं पोग्गलाणं वग्गणा- एक समयस्थितिक पुद्गलों की यावत् असंख्यात समयस्थितिक पुद्गलों की एक-एक वर्गणा । एगा- एक है, एगगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा-एक गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, जाव - यावत्, एगा- एक है, असंखेज्जगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणाअसंख्यात गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, एगा- एक है, अणंतगुणकालगाणं पोग्गलाणं वग्गणा - अनन्त गुण वाले काले पुद्गलों की वर्गणा, एवं - इसी प्रकार, वण्णा गंधा रसा फासा भाणियव्वा- पांच वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्शों के विषय में भी कहना चाहिए, जाव-यावत, एगा- एक है, अणंतगुणलुक्खाणं पोग्गलाणं वग्गणा- अनन्तगुण रूक्ष पुद्गलों की वर्गणा एगा- एक है, जहन्नपएसियाणं खंधाणं वग्गणा - जघन्य प्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा, एगा- एक है, उक्कस्सपएसियाणं खंधाणं वग्गणा-उत्कर्ष प्रादेशिक स्कन्धों की वर्गणा, एगा- एक है, अजहनुक्कस्स पएसियाणं खंधाणं वग्गणा - अजघन्य और अनुत्कृष्ट अर्थात् मध्यमप्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा, एवं इसी प्रकार, जहन्नोगाहणगाणं उक्कोसोगाहणगाणं अजहन्नुक्कोसगाहणगाणं - जघन्य अवगाहन वाले, उत्कृष्ट स्थितिवाले, और मध्यमस्थिति वाले स्कन्धों की एक-एक वर्गणा, जहन्नगुणकालगाणं, उक्कस्सगुणकालगाणं, अजहन्नुक्कस्सगुणकालगाणं-जघन्य गुण वाले काले वर्ण वाले, उत्कर्ष गुण काले रंग वाले तथा मध्य गुण काले रग वाले स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है, एवंइसी प्रकार, वण्ण गंध रस फासाणं वग्गणा भाणियव्वा-वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श के विषय में कहना चाहिए, जाव- यावत्, एगा - एक है, अज्जहन्नुक्कस्सगुणलुक्खाणं वग्गणा - मध्य गुण रूक्षों की एक वर्गणा है। मूलार्थ-द्रव्यतः एक परमाणु से लेकर अनन्तप्रदेशी स्कन्धों की वर्गणा एक-एक है। क्षेत्रतः एक प्रदेशावगाही पुद्गलों की वर्गणा एक है, यावत् असंख्यात प्रदेशावगाही पुद्गलों की वर्गणा एक है। कालतः एक समय स्थिति वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है, यावत् असंख्यात- समय स्थिति वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है। यावत् एकगुण काले वर्ण वाले पुद्गलों की एक वर्गणा है, अनन्त गुण काले रंग वाले पुद्गलों की एक वर्गणा । इसी प्रकार चार वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्शों के विषय में भी कहना चाहिए। इसी तरह द्रव्य से जघन्य प्रदेश युक्त स्कन्धों की, उत्कृष्ट प्रदेश- युक्त स्कन्धों की और मध्यमप्रदेश युक्त स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है। क्षेत्र से जघन्य आकाश प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए और मध्यम प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए उत्कर्ष प्रदेशों पर अवगाहन किए हुए पुद्गलों की एक-एक वर्गणा है। काल से जघन्य स्थिति वाले, उत्कृष्ट स्थिति वाले और मध्यम स्थिति वाले पुद्गलों की एक-एक वर्गणा है। भाव से जघन्य गुण वाले काले, मध्यम गुण वाले काले और उत्कृष्ट गुण वाले काले पुद्गलों की एक-एक वर्गणा है। इसी प्रकार पांच वर्ण, दो गन्ध, पांच रस और आठ स्पर्श इनकी एक-एक वर्गणा कहनी चाहिए। सूत्र में पुद्गल का द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव से जो वर्णन किया गया है, उसकी सामान्य रूप से एक-एक वर्गणा कहनी व जाननी चाहिए। विवेचनिका-संसारी और मुक्त दोनों अवस्थाओं मे जीव चेतन लक्षण वाला होता है। चेतना रहित द्रव्य अजीव कहलाता है, अतः सिद्ध-वर्गणा के अनन्तर इस सूत्र में अजीव पुद्गल - द्रव्य के विषय में कथन किया गया है। पुद्गल शब्द का अर्थ होता है जिसका एकत्व, पृथक्त्व, मिलने और बिछुडने का स्वभाव हो । पुद्गल तत्त्व के विषय में कहा भी है- 'पूरणगलनधर्मिणः पुद्गलाः " जो वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श वाला हो वह पुद्गल कहलाता है। यह लक्षण परमाणु से लेकर महास्कन्ध पर्यन्त सभी में घटित होता है। यद्यपि भगवती सूत्र के आठवें शतक में जीव को भी पुद्गल कहा है। बौद्ध लोग पुद्गल शब्द का व्यवहार जीव के लिए भी करते हैं, किन्तु जैन-दर्शन मे पुद्गल शब्द का व्यवहार प्रायः अजीव तत्त्व के लिए ही किया जाता है। जैन-दर्शन मन और कर्म को भी पौद्गलिक ही मानता है, तथा पृथ्वी, अप्, तेज और वायु को भी वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श वाला कहाता है। वैशेषिक दर्शनकार ने वायु को केवल स्पर्श वाला ही माना है और तेज को गंध एव रस से रहित माना है तथा जल को भी गन्ध रहित स्वीकार किया है, जब कि उक्त सभी द्रव्य पुद्गल रूप हैं। जो-जो पुद्गल है वह वर्ण, गन्ध, रस और स्पर्श इन चारों से युक्त है, फिर भले ही वह मन हो या शब्द, दृश्यमान हो या अदृश्यमान सभी पुद्गल हैं। पुद्गल का सब से सूक्ष्म, अविभाज्य अंश परमाणु है, उसमें भी पांच वर्णों मे से एक वर्ण, दो गन्धों में से एक गन्ध, पाच रसों में से एक रस और आठ स्पर्शों में से दो स्पर्श विद्यमान रहते हैं। शीत-उष्ण और रूक्ष - स्निग्ध इन में से परस्पर अविरोधी दो स्पर्श परमाणु में नियमेन होते हैं। जो किसी दूसरे के साथ नहीं मिला हुआ है वह परमाणु कहलाता है। सूत्रकार ने द्रव्य, क्षेत्र, काल, और भाव की अपेक्षा रखते हुए पुद्गल का वर्णन किया है, जैसे किद्रव्यतः- परमाणु अनन्त होते हुए भी परमाणुत्व की सामान्य दृष्टि से वे एक हैं, अतः उन की वर्गणा एक है। इसी प्रकार द्वि-प्रदेशी त्रिप्रदेशी यावत् संख्यात- प्रदेशी एवं अनन्त-प्रदेशी स्कन्धों की एक-एक वर्गणा है। एक तत्त्वार्थ सूत्र अ पाँच, सूत्र तेईस क्षेत्रतःआकाश के एक प्रदेश पर परमाणु से लेकर जितने प्रदेशी स्कन्ध अवस्थित हैं, उनकी एक-एक वर्गणा है। आकाश के एक प्रदेश पर एक परमाणु भी ठहर सकता है, द्विप्रदेशी स्कन्ध यावत् संख्यात असख्यात, अनन्त प्रदेशी स्कन्ध भी ठहर सकता है। इस प्रसंग पर प्रश्न हो सकता है कि आकाश के एक प्रदेश पर अनन्त प्रदेशी स्कन्ध कैसे अवगाहन कर सकता है? उत्तर में कहना है कि - आकाश का गुण है दूसरे द्रव्यों को अवकाश देना, क्योंकि वह सभी द्रव्यों का आधारभूत है। आकाश आधार है और शेष द्रव्य आधेय है। निश्चय नय से तो सभी द्रव्य अपने-अपने स्वरूप मे अवस्थित है, कोई भी द्रव्य परमार्थ से दूसरे द्रव्य में नहीं रह सकता। आकाश का कोई दूसरा आधार नहीं है, क्योंकि उससे महत्परिमाण वाला या उसके तुल्य परिमाण वाला और कोई द्रव्य नहीं है, अतः व्यवहार या निश्चय दोनो दृष्टियों से आकाश स्वप्रतिष्ठित है। अन्य द्रव्यो की अपेक्षा आकाश महान् है। इसी कारण वह सब द्रव्यो का आधार है। आकाश लोक- अलोक मे व्याप्त है, किन्तु शेष द्रव्य लोकाकाश में ही है। लोकाकाश असंख्यात प्रदेशात्मक है। कोई पुद्गल स्कन्ध लोकाकाश के एक प्रदेश में रहता है तो कोई दो प्रदेश में रहता है। इसी तरह कोई पुद्गल असंख्यात प्रदेश परिमित लोकाकाश मे भी रह सकता है। आधारभूत क्षेत्र के प्रदेशो की संख्या आधेयभूत पुद्गल द्रव्य के परमाणुओं की संख्या से न्यून या उसके बराबर हो सकती है, अधिक नही, अतएव एक परमाणु एक ही आकाश प्रदेश पर स्थित रहता है, पर द्व्यणुक से लेकर संख्यात असंख्यात और अनन्त अणुक भी एक प्रदेश पर रह सकते हैं, क्योंकि आकाश का विशेष गुण दूसरों को स्थान-अवकाश देने का है। जैसे एक तोला परिमाण वाले पारे मे सात तोले परिमाण सुवर्ण एक रूप हो जाता है और पारे का वजन तब भी एक तोला ही रहता है, किन्तु यदि पुनः उस पारे से किसी प्रयोग द्वारा सुवर्ण को पृथक् किया जाए तो वह सुवर्ण पुनः सात तोले परिमाण ही रहेगा और पारे का वजन पहले की तरह एक तोला परिमाण ही रहेगा। इस विषय मे वृत्तिकार के शब्द निम्नलिखित है - पारदस्यैकेन कर्षेण चारित्ताः सुवर्णस्य ते सप्ताप्येकी भवन्ति, पुनर्वामितः प्रयोगतः सप्तैव ते इति । अचिन्त्यत्वात् द्रव्यपरिणामस्य । पुद्गल का परिणमन अचिन्त्य है। जिस प्रकार एक दीपक के प्रकाश में सहस्रों दीपकों का प्रकाश एक रूप होकर ठहरता है उसी तरह एक प्रदेश पर अनन्त - प्रदेशी स्कन्ध ठहर सकता है। आकाश के असंख्यात प्रदेशों पर भी अनन्त प्रदेशी स्कन्ध ठहरे हुए है, उनकी भी एक-एक वर्गणा है। कालतः - एक समय की स्थिति वाले पुद्गलो की एक वर्गणा है, दो समय की
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अच्छे मानसून की आहट से शेयर बाजार में बुधवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स के साथ-साथ निफ्टी ने भी नई ऊंचाई तय की। जहां 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 314. 92 अंक बढ़कर 30248 पर हुआ बंद, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी अपनी रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई के साथ 9407 पर बंद हुआ।
बात करें मिडकैप शेयरों की तो, मिडकैप में तेज खरीदारी देखी हुई। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0. 7 फीसदी तक बढ़ा है, तो निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0. 5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बाजार के विशेषज्ञों ने बताया कि बाजार में तेजी का कारण सकारात्मक वैश्विक संकेतों और इस साल मानसून अच्छा होने के अनुमान के कारण हैं। एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो, पावर, कैपिटल गुड्स और ऑयल एंड गैस शेयरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला।
दिग्गज शेयरों में भारती एयरटेल, एचयूएल, अरविंदो फार्मा, आयशर मोटर्स, एचडीएफसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उछाल रहा। हालांकि अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो, एसीसी, टीसीएस, इंडियाबुल्स हाउसिंग, एशियन पेंट्स, इंफोसिस और गेल जैसे शेयरों थोड़ी गिरावट देखी गई। सुबह घरेलू बाजार बड़ी उछाल के साथ खुला था। 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने 255 अंकों की बड़ी बढ़त दर्ज की थी। 30 हजार के आकंड़ें को छूने वाला सेंसेक्स 30,188 स्तर पर पहुंच गया था।
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अच्छे मानसून की आहट से शेयर बाजार में बुधवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स के साथ-साथ निफ्टी ने भी नई ऊंचाई तय की। जहां तीस शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स तीन सौ चौदह. बानवे अंक बढ़कर तीस हज़ार दो सौ अड़तालीस पर हुआ बंद, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी अपनी रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई के साथ नौ हज़ार चार सौ सात पर बंद हुआ। बात करें मिडकैप शेयरों की तो, मिडकैप में तेज खरीदारी देखी हुई। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स शून्य. सात फीसदी तक बढ़ा है, तो निफ्टी के मिडकैप एक सौ इंडेक्स में शून्य. पाँच फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बाजार के विशेषज्ञों ने बताया कि बाजार में तेजी का कारण सकारात्मक वैश्विक संकेतों और इस साल मानसून अच्छा होने के अनुमान के कारण हैं। एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो, पावर, कैपिटल गुड्स और ऑयल एंड गैस शेयरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। दिग्गज शेयरों में भारती एयरटेल, एचयूएल, अरविंदो फार्मा, आयशर मोटर्स, एचडीएफसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उछाल रहा। हालांकि अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो, एसीसी, टीसीएस, इंडियाबुल्स हाउसिंग, एशियन पेंट्स, इंफोसिस और गेल जैसे शेयरों थोड़ी गिरावट देखी गई। सुबह घरेलू बाजार बड़ी उछाल के साथ खुला था। तीस शेयरों वाला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने दो सौ पचपन अंकों की बड़ी बढ़त दर्ज की थी। तीस हजार के आकंड़ें को छूने वाला सेंसेक्स तीस,एक सौ अठासी स्तर पर पहुंच गया था।
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हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। वह एक बार में कई मायने रखता था। लेखों में से एक विस्फोटक की तैयारी है। साथ ही, गिरफ्तार आतंकी गतिविधियों से बरी होने का आरोप है। इसके अलावा, रूसी संघ के आपराधिक संहिता के लेखों के बीच गिरफ्तार व्यक्ति, कला के लिए कम हो गया। रूसी संघ के आपराधिक संहिता का 205. 3 ("आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आयोजित छात्र के लिए जाहिर है, एक व्यक्ति के प्रशिक्षण को पारित करना")।
क्या इस व्यक्ति के अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के साथ संबंध हैं? जांच जाँच कर रहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि हमले की तैयारी के आरोपियों से एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण जब्त किया गया था। वीसीए की शक्ति को नहीं कहा जाता है। उसके लिए घातक सामग्री इंटरनेट पर दिए निर्देशों के अनुसार कई घटकों से स्वतंत्र रूप से जुड़ी हुई थी। यह ध्यान दिया जाता है कि पूछताछ के दौरान, 42 वर्षीय स्थानीय निवासी आक्रामक व्यवहार करता है।
यह ज्ञात है कि गिरफ्तार व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था।
खाबरोवस्क क्षेत्र में एफएसबी की प्रेस सेवा (उद्धरण) AmurMedia):
हम निकोलेवस्क-ऑन-अमूर की सामाजिक सुविधाओं में से एक के क्षेत्र में एक योजनाबद्ध आतंकवादी हमले को रोकने और एक हमलावर को हिरासत में लेने के तथ्य की पुष्टि करते हैं। आपराधिक मामला एफएसबी जांचकर्ताओं द्वारा खोला गया था। आतंकवादी अपराध करने की मंशा व्यक्त करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है। अभी एक जांच चल रही है, इसलिए हम इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं दे रहे हैं।
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हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। वह एक बार में कई मायने रखता था। लेखों में से एक विस्फोटक की तैयारी है। साथ ही, गिरफ्तार आतंकी गतिविधियों से बरी होने का आरोप है। इसके अलावा, रूसी संघ के आपराधिक संहिता के लेखों के बीच गिरफ्तार व्यक्ति, कला के लिए कम हो गया। रूसी संघ के आपराधिक संहिता का दो सौ पाँच. तीन । क्या इस व्यक्ति के अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के साथ संबंध हैं? जांच जाँच कर रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि हमले की तैयारी के आरोपियों से एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण जब्त किया गया था। वीसीए की शक्ति को नहीं कहा जाता है। उसके लिए घातक सामग्री इंटरनेट पर दिए निर्देशों के अनुसार कई घटकों से स्वतंत्र रूप से जुड़ी हुई थी। यह ध्यान दिया जाता है कि पूछताछ के दौरान, बयालीस वर्षीय स्थानीय निवासी आक्रामक व्यवहार करता है। यह ज्ञात है कि गिरफ्तार व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था। खाबरोवस्क क्षेत्र में एफएसबी की प्रेस सेवा AmurMedia): हम निकोलेवस्क-ऑन-अमूर की सामाजिक सुविधाओं में से एक के क्षेत्र में एक योजनाबद्ध आतंकवादी हमले को रोकने और एक हमलावर को हिरासत में लेने के तथ्य की पुष्टि करते हैं। आपराधिक मामला एफएसबी जांचकर्ताओं द्वारा खोला गया था। आतंकवादी अपराध करने की मंशा व्यक्त करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है। अभी एक जांच चल रही है, इसलिए हम इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं दे रहे हैं।
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निखिल हत्याकांड के 3 आरोपी 7 दिन के पुलिस रिमांड पर है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है। पुलिस इस मामले जल्द जांच पूरी कर 15 दिन में चालान पेश करने की तैयारी में है। मृतक की मेडिकल रिपोर्ट से पता चला है कि हत्या से पहले निखिल के साथ मारपीट हुई थी। निखिल के मुंह, सिर व सीने पर वार किया गया था। उसका ऊपर का जबड़ा टूटा हुआ था। सिर में भी चोट के निशान थे। सीने की तीन पसलियां टूटी हुई थी। आरोपियों ने रस्सी से गलाघोंट कर उसे मौत के घाट उतारा था। फिर शव को गाड़ी में रखकर दाढ़ देवी के जंगल में ले गए। वहां गाड़ी व शव को ठिकाने लगाया।
सूत्रों ने बताया कि मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी पकड़ में आए। निखिल की हत्या करने के बाद आरोपी दो बार घटनास्थल पर गए थे। पहले तो 14 अगस्त की सुबह दाढ़ देवी के जंगल में निखिल के शव व कार को ठिकाने लगाया। फिर 15 अगस्त को दुबारा वहां जाकर निखिल की कार को आग लगाई। साथ ही शव को जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया। 16 अगस्त को दाढ़ देवी के जंगल में जली हुई कार मिलने के बाद पुलिस ने उस जगह मोबाइल लोकेशन ट्रेक की। जिसमें आरोपी का नम्बर ट्रेस हुआ। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो हत्याकांड का खुलासा हुआ।
हालांकि निखिल के लापता होने पर पुलिस ने परिचित व मोबाइल व्यापारी समेत 18 लोगों पर निगरानी रखी थी। आयुष को भी 15 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन आयुष ने पुलिस को कुछ नहीं बताया था।
आरोपी आयुष मीणा (21) ने 13 अगस्त को फोन कर निखिल को बुलाया था। रात को करीब 8 बजे निखिल मोबाइल डिलीवरी देने कार से गया। जिसके बाद घर नहीं लौटा। परिजनों ने किशोरपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। 13 अगस्त की रात को ही आरोपियों ने निखिल की हत्या कर दी। फिर आयुष, अजय व महेश तीनों आरोपी निखिल की लाश को ठिकाने लगाने के लिए गाड़ी में रखकर 5-6 घंटे घूमते रहे।
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निखिल हत्याकांड के तीन आरोपी सात दिन के पुलिस रिमांड पर है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है। पुलिस इस मामले जल्द जांच पूरी कर पंद्रह दिन में चालान पेश करने की तैयारी में है। मृतक की मेडिकल रिपोर्ट से पता चला है कि हत्या से पहले निखिल के साथ मारपीट हुई थी। निखिल के मुंह, सिर व सीने पर वार किया गया था। उसका ऊपर का जबड़ा टूटा हुआ था। सिर में भी चोट के निशान थे। सीने की तीन पसलियां टूटी हुई थी। आरोपियों ने रस्सी से गलाघोंट कर उसे मौत के घाट उतारा था। फिर शव को गाड़ी में रखकर दाढ़ देवी के जंगल में ले गए। वहां गाड़ी व शव को ठिकाने लगाया। सूत्रों ने बताया कि मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी पकड़ में आए। निखिल की हत्या करने के बाद आरोपी दो बार घटनास्थल पर गए थे। पहले तो चौदह अगस्त की सुबह दाढ़ देवी के जंगल में निखिल के शव व कार को ठिकाने लगाया। फिर पंद्रह अगस्त को दुबारा वहां जाकर निखिल की कार को आग लगाई। साथ ही शव को जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया। सोलह अगस्त को दाढ़ देवी के जंगल में जली हुई कार मिलने के बाद पुलिस ने उस जगह मोबाइल लोकेशन ट्रेक की। जिसमें आरोपी का नम्बर ट्रेस हुआ। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो हत्याकांड का खुलासा हुआ। हालांकि निखिल के लापता होने पर पुलिस ने परिचित व मोबाइल व्यापारी समेत अट्ठारह लोगों पर निगरानी रखी थी। आयुष को भी पंद्रह अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन आयुष ने पुलिस को कुछ नहीं बताया था। आरोपी आयुष मीणा ने तेरह अगस्त को फोन कर निखिल को बुलाया था। रात को करीब आठ बजे निखिल मोबाइल डिलीवरी देने कार से गया। जिसके बाद घर नहीं लौटा। परिजनों ने किशोरपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। तेरह अगस्त की रात को ही आरोपियों ने निखिल की हत्या कर दी। फिर आयुष, अजय व महेश तीनों आरोपी निखिल की लाश को ठिकाने लगाने के लिए गाड़ी में रखकर पाँच-छः घंटाटे घूमते रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कहते हैं जहां चाह, वहां राह। सामने कितनी भी मुश्किलें खड़ी हो कैसी भी स्थिति हो अगर किसी ने अपने मन में कुछ करने का ठाना है तो कामयाबी जरूर मिलती है। ऐसा ही कुछ हुआ है भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा बल्लेबाज शेफाली वर्मा के साथ... केवल 15 साल की शेफाली वर्मा आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खास सदस्या बन चुकी है।
हरियाणा की रहने वाली शेफाली वर्मा को इसी साल होने वाले महिला टी20 विश्व कप के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह दी गई है। शेफाली ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए पिछले ही साल डेब्यू किया जिसके बाद से तो उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से लगातार प्रभावित किया।
अपनी जबरदस्त और आक्रमक बल्लेबाजी शैली के दम पर आखिर में शेफाली का विश्व कप खेलने का भी सपना पूरा होने जा रहा है जो उन्हें आने वाले विश्व कप में मिलेगा। वैसे शेफाली के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम में आने का सफर ऐसा ही नहीं रहा है बल्कि ये बहुत ही मुश्किल रहा है।
शेफाली वर्मा की यहां तर पहुंचने की डगर इतनी आसान नहीं रही है। उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। 24 सितंबर को पिछले साल भारत के लिए डी20 डेब्यू करने के बाद शेफाली ने लगातार प्रभावित किया है और केवल 9 टी20 मैचों में 222 रन बना लिए हैं। उन्होंने इस दौरान इंटरनेशनल क्रिकेट में पचासा जड़ने वाली भी सबसे युवा खिलाड़ी बनी।
लेकिन... शेफाली को यहां तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है और परिवार की मुश्किलों के बीच पार पाकर यहां तक पहुंची है। परिवार की आर्थिक हालात शेफाली के यहां तक पहुंचने के लिए काफी नहीं थी।
वहीं फटे-पुराने ग्लव्ज और टूटे बल्ले की याद आज भी शेफाली के जेहन में ताजा है। बात उस दौर की है जब शेफाली के पिता संजीव वर्मा के साथ ठगी हो गई थी। जिसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से गड़बड़ा गई। इसके बाद तो शेफाली को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा।
यहां अगर हम अमर उजाला की रिपोर्ट्स की माने तो जब शेफाली के पिता से ठगी हुई तो उनके जेब में मात्र 280 रूपये की बचे थे। और उसी वक्त शेफाली के पास किट पूरी तरह से सही नहीं थी। वही फटे ग्लव्ज और बल्ला ऐसा जो टूटने को था। क्रिकेट के जुनून के बाद भी ऐसी स्थिति में शेफाली ने अपने पापा की हालात को जानते हुए एक पैसा नहीं मांगा।
शेफाली जब मात्र 10 साल की थी तो उनका भाई लड़को के बीच खेलता था लेकिन एक बार वो बीमार हो गया। इसे देखते हुए शेफाली के पिता बेटे की जगह अपनी बेटी को लड़कों के मैच में ले गए। जहां शेफाली ने जबरदस्त बल्लेबाजी की। शेफाली की बल्लेबाजी देख हर कोई हैरान रह गया और वो मैन ऑफ द सीरीज बन बैठी।
इसके बाद तो आज क्या स्थिति है ये पूरा क्रिकेट जगत देख रहा है मात्र 15 साल की उम्र में ही शेफाली महिला क्रिकेट जगत की धुरंधरों के बीच खेलती नजर आएगी जो अब तक अपने करियर में प्रभाव छोड़ चुकी है।
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कहते हैं जहां चाह, वहां राह। सामने कितनी भी मुश्किलें खड़ी हो कैसी भी स्थिति हो अगर किसी ने अपने मन में कुछ करने का ठाना है तो कामयाबी जरूर मिलती है। ऐसा ही कुछ हुआ है भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा बल्लेबाज शेफाली वर्मा के साथ... केवल पंद्रह साल की शेफाली वर्मा आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खास सदस्या बन चुकी है। हरियाणा की रहने वाली शेफाली वर्मा को इसी साल होने वाले महिला टीबीस विश्व कप के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह दी गई है। शेफाली ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए पिछले ही साल डेब्यू किया जिसके बाद से तो उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से लगातार प्रभावित किया। अपनी जबरदस्त और आक्रमक बल्लेबाजी शैली के दम पर आखिर में शेफाली का विश्व कप खेलने का भी सपना पूरा होने जा रहा है जो उन्हें आने वाले विश्व कप में मिलेगा। वैसे शेफाली के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम में आने का सफर ऐसा ही नहीं रहा है बल्कि ये बहुत ही मुश्किल रहा है। शेफाली वर्मा की यहां तर पहुंचने की डगर इतनी आसान नहीं रही है। उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। चौबीस सितंबर को पिछले साल भारत के लिए डीबीस डेब्यू करने के बाद शेफाली ने लगातार प्रभावित किया है और केवल नौ टीबीस मैचों में दो सौ बाईस रन बना लिए हैं। उन्होंने इस दौरान इंटरनेशनल क्रिकेट में पचासा जड़ने वाली भी सबसे युवा खिलाड़ी बनी। लेकिन... शेफाली को यहां तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है और परिवार की मुश्किलों के बीच पार पाकर यहां तक पहुंची है। परिवार की आर्थिक हालात शेफाली के यहां तक पहुंचने के लिए काफी नहीं थी। वहीं फटे-पुराने ग्लव्ज और टूटे बल्ले की याद आज भी शेफाली के जेहन में ताजा है। बात उस दौर की है जब शेफाली के पिता संजीव वर्मा के साथ ठगी हो गई थी। जिसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से गड़बड़ा गई। इसके बाद तो शेफाली को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। यहां अगर हम अमर उजाला की रिपोर्ट्स की माने तो जब शेफाली के पिता से ठगी हुई तो उनके जेब में मात्र दो सौ अस्सी रूपये की बचे थे। और उसी वक्त शेफाली के पास किट पूरी तरह से सही नहीं थी। वही फटे ग्लव्ज और बल्ला ऐसा जो टूटने को था। क्रिकेट के जुनून के बाद भी ऐसी स्थिति में शेफाली ने अपने पापा की हालात को जानते हुए एक पैसा नहीं मांगा। शेफाली जब मात्र दस साल की थी तो उनका भाई लड़को के बीच खेलता था लेकिन एक बार वो बीमार हो गया। इसे देखते हुए शेफाली के पिता बेटे की जगह अपनी बेटी को लड़कों के मैच में ले गए। जहां शेफाली ने जबरदस्त बल्लेबाजी की। शेफाली की बल्लेबाजी देख हर कोई हैरान रह गया और वो मैन ऑफ द सीरीज बन बैठी। इसके बाद तो आज क्या स्थिति है ये पूरा क्रिकेट जगत देख रहा है मात्र पंद्रह साल की उम्र में ही शेफाली महिला क्रिकेट जगत की धुरंधरों के बीच खेलती नजर आएगी जो अब तक अपने करियर में प्रभाव छोड़ चुकी है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में पढ़ें अब मुख्यमंत्री योगी अब कब गोरखपुर दौरे पर आयेंगे. .
गोरखपुरः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी प्रोटोकाल के मुताबिक अब मुख्यमंत्री योगी 13 अप्रैल गोरखपुर आयेंगे।
पहले सीएम योगी शुक्रवार यानि आज गोरखपुर आने वाले थे लेकिन किसी कारणवश उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया। शनिवार को गोरखपुर दौरे के बाद मुख्य़मंत्री कानपुर के लिए रवावा होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 13 अप्रैल की सुबह 8:55 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वो सीधे गोरखनाथ मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे फिर नवमी तिथि की पूजा-अर्चना के बाद वो कुंवारी कन्याओं को अपने हाथों से भोजन कराएंगे साथ ही और बटुक भैरव के पांव पखारेंगे। इसके बाद वो 2:45 पर गोरखनाथ मंदिर से चित्रगुप्त मंदिर, बक्शीपुर के लिए जायेंगे। जहां वो 3:00 से 4:00 बजे तक पूर्व विधायक स्व. अवधेश कुमार श्रीवास्तव की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेगें। फिर वो 4:15 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे जहां से वो कानपुर के लिए रवाना होंगे।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में पढ़ें अब मुख्यमंत्री योगी अब कब गोरखपुर दौरे पर आयेंगे. . गोरखपुरः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी प्रोटोकाल के मुताबिक अब मुख्यमंत्री योगी तेरह अप्रैल गोरखपुर आयेंगे। पहले सीएम योगी शुक्रवार यानि आज गोरखपुर आने वाले थे लेकिन किसी कारणवश उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया। शनिवार को गोरखपुर दौरे के बाद मुख्य़मंत्री कानपुर के लिए रवावा होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तेरह अप्रैल की सुबह आठ:पचपन बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वो सीधे गोरखनाथ मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे फिर नवमी तिथि की पूजा-अर्चना के बाद वो कुंवारी कन्याओं को अपने हाथों से भोजन कराएंगे साथ ही और बटुक भैरव के पांव पखारेंगे। इसके बाद वो दो:पैंतालीस पर गोरखनाथ मंदिर से चित्रगुप्त मंदिर, बक्शीपुर के लिए जायेंगे। जहां वो तीन:शून्य से चार:शून्य बजे तक पूर्व विधायक स्व. अवधेश कुमार श्रीवास्तव की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेगें। फिर वो चार:पंद्रह बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे जहां से वो कानपुर के लिए रवाना होंगे।
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- हरी मिर्च (कतरी हुई)
- मध्यम आकार के (महीन कतरे हुए)
- गाजर मटर व आलू 200 ग्राम,
- 1 छोटा चम्मच अदरक-पुदीना (कतरा हुआ )
- सबसे पहले आलू गाजर और मटर को नमक मिले पानी में अलग-अलग उबाल लीजिए।
- आलू और गाजर को छीलकर कस लीजिए तथा मटर को पीस लीजिए।
- अब तीनों को मिक्स कर लीजिए।
- फिर इन सब्जियों में बारीक कतरा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, टमाटर, पुदीना, अदरक, नमक, जीरा अमचूर और गीली की हुई ब्रेड भी डाल दीजिए।
- इस मिश्रण को अच्छी तरह मिक्स कर लीजिए।
- मक्खन को फ्रीजर में रखकर अच्छी तरह जमा लीजिए ताकि पीस आसानी से कट सके।
- आलू का थोड़ा सा मिश्रण हाथ पर लेकर फैलाइए।
- बीच में मक्खन का छोटा पीस रखकर बंद कर दीजिए।
- इसे मैदे के घोल में डुबोकर ब्रेड के चूरे से अच्छी तरह लपेट लीजिए।
- इसी तरह सारे मिश्रण के पकौड़े बना लीजिए।
- ताकि अन्दर का मक्खन अच्छी तरह सेट हो जाए।
- खाने के दो मिनट पहले इनको तेज आंच पर हल्का भूरा होने तक ताप लीजिए।
- गरमा-गरम पुदीने या टमाटर की चटनी के साथ सर्व करें।
आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
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- हरी मिर्च - मध्यम आकार के - गाजर मटर व आलू दो सौ ग्राम, - एक छोटा चम्मच अदरक-पुदीना - सबसे पहले आलू गाजर और मटर को नमक मिले पानी में अलग-अलग उबाल लीजिए। - आलू और गाजर को छीलकर कस लीजिए तथा मटर को पीस लीजिए। - अब तीनों को मिक्स कर लीजिए। - फिर इन सब्जियों में बारीक कतरा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, टमाटर, पुदीना, अदरक, नमक, जीरा अमचूर और गीली की हुई ब्रेड भी डाल दीजिए। - इस मिश्रण को अच्छी तरह मिक्स कर लीजिए। - मक्खन को फ्रीजर में रखकर अच्छी तरह जमा लीजिए ताकि पीस आसानी से कट सके। - आलू का थोड़ा सा मिश्रण हाथ पर लेकर फैलाइए। - बीच में मक्खन का छोटा पीस रखकर बंद कर दीजिए। - इसे मैदे के घोल में डुबोकर ब्रेड के चूरे से अच्छी तरह लपेट लीजिए। - इसी तरह सारे मिश्रण के पकौड़े बना लीजिए। - ताकि अन्दर का मक्खन अच्छी तरह सेट हो जाए। - खाने के दो मिनट पहले इनको तेज आंच पर हल्का भूरा होने तक ताप लीजिए। - गरमा-गरम पुदीने या टमाटर की चटनी के साथ सर्व करें। आप हमें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकती हैं।
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आप सभी जानते ही हैं कि हरियाणा की सिंगर और डांसर सपना चौधरी इन दिनों मीडिया में काफी चर्चाओं में चल रहीं हैं और उन्हें खूब पसंद किया जा रहा है. ऐसे में हाल ही में उनका और पंजाबी गायक दलेर मेहंदी का गाना 'बावली तरेड़' लॉन्च हुआ है और इसने यूट्यूब पर धमाल मचा रखा है. वहीं एक तरफ सपना की तस्वीरें भी कम नहीं है जो इन दिनों चर्चाओं में बनी हुईं हैं. जी हाँ, हाल ही में सोशल मीडिया पर सपना चौधरी की फोटो वायरल हो रही है जो आप देख सकते हैं.
इस फोटो को शेयर कर सपना ने लिखा है "style is a way to say who you are without having to speak"#workholic #positivevibes #desiqueen #success #family #loveyourself #relaxing इस तस्वीर के कारण वह ट्रोलिंग का शिकार हो गईं हैं. जी हाँ, सपना चौधरी पहाड़ों पर छुट्टियां मना रही हैं और इस दौरान उन्होंने आज सोशल मीडिया पर एक और फोटो अपलोड की है जिसमें वह सड़क के बीच में लेटी हुई हैं. जी हाँ, बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट सपना चौधरी आए दिन मीडिया में काफी सर्खियों में रहती हैं और इस बार इसकी वजह उनकी तस्वीरें हैं. पहाड़ी वादियों को निहारती हुईं सपना इनमें से एक तस्वीर में सड़क पर लेटी हुईं और एक दूसरी तस्वीर में सड़क पर ही बैठी हुई स्माइल कर रही हैं.
वहीं उनकी लेटी हुई तस्वीर के कारण फैंस ने उन्हें ट्रोल कर दिया है और यह तक कह दिया है कि "हमारे बिस्तर पर आकर लेट जाओ लेकिन यूँ सड़क पर न लेटो. " सपना इन दिनों किसी शो में नहीं दिखाई दे रहीं लेकिन अपने डांस के कारण चर्चाओं में हैं.
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आप सभी जानते ही हैं कि हरियाणा की सिंगर और डांसर सपना चौधरी इन दिनों मीडिया में काफी चर्चाओं में चल रहीं हैं और उन्हें खूब पसंद किया जा रहा है. ऐसे में हाल ही में उनका और पंजाबी गायक दलेर मेहंदी का गाना 'बावली तरेड़' लॉन्च हुआ है और इसने यूट्यूब पर धमाल मचा रखा है. वहीं एक तरफ सपना की तस्वीरें भी कम नहीं है जो इन दिनों चर्चाओं में बनी हुईं हैं. जी हाँ, हाल ही में सोशल मीडिया पर सपना चौधरी की फोटो वायरल हो रही है जो आप देख सकते हैं. इस फोटो को शेयर कर सपना ने लिखा है "style is a way to say who you are without having to speak"#workholic #positivevibes #desiqueen #success #family #loveyourself #relaxing इस तस्वीर के कारण वह ट्रोलिंग का शिकार हो गईं हैं. जी हाँ, सपना चौधरी पहाड़ों पर छुट्टियां मना रही हैं और इस दौरान उन्होंने आज सोशल मीडिया पर एक और फोटो अपलोड की है जिसमें वह सड़क के बीच में लेटी हुई हैं. जी हाँ, बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट सपना चौधरी आए दिन मीडिया में काफी सर्खियों में रहती हैं और इस बार इसकी वजह उनकी तस्वीरें हैं. पहाड़ी वादियों को निहारती हुईं सपना इनमें से एक तस्वीर में सड़क पर लेटी हुईं और एक दूसरी तस्वीर में सड़क पर ही बैठी हुई स्माइल कर रही हैं. वहीं उनकी लेटी हुई तस्वीर के कारण फैंस ने उन्हें ट्रोल कर दिया है और यह तक कह दिया है कि "हमारे बिस्तर पर आकर लेट जाओ लेकिन यूँ सड़क पर न लेटो. " सपना इन दिनों किसी शो में नहीं दिखाई दे रहीं लेकिन अपने डांस के कारण चर्चाओं में हैं.
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इंदौर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे वन डे के दौरान खिलाड़ियों में आपस में तनातनी रही। इसके अलावा सोशल मीडिया में भी दोनों देशों के बीच टकराहट देखने को मिली। हालांकि सोशल मीडिया में ऑस्ट्रेलियाई फैंस ने इस टकराव की शुरुआत की। हार से बौखलाए एक ऑस्ट्रेलियाई महिला फैंस ने तो फेसबुक में एक फोटो शेयर की जिसमें उसने बिना कश्मीर के भारत के नक्शे को दिखाया है और उसकी तुलना एक वोमेन पेंटी से कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट स्तंभकार डेनिस फ्रीडम ने हद पार करते हुए ट्विटर पर इसी फोटो को शेयर करते हुए कहा कि यह फोटो फेसबुक में उन्हें एक महिला ने भेजा है। पर वो समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिरकार उसने इस फोटो में भारत के नक्शे को क्यों लगाया है। निश्वित तौर पर जिसने भी यह फोटो फेसबुक में भेजी है उसका इरादा भारत का अपमान करना था। कश्मीर के बगैर गलत नक्शे को पेश करने के साथ उसे वोमेन पेंटी के समकक्ष ठहराया जाना तो और भी शर्मनाक है।
ऑस्ट्रेलिया भारत के हाथों सीरीज के तीनों मैच हार गया है। ऐसी हार के बाद फ्रीडम ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर करने के बाद विवाद को और तूल दे दिया है। फ्रीडम को ट्विटर पर लोगों ने निशाना बनाया है। लोगों ने फ्रीडम के इस ट्वीट के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों पर भी निशाना साधा है। एक ने उसी पेंटी को स्मिथ को पहनाते हुए उस पर स्मिथ के हवाले से लिखा कि मैं जब भी भारत को देखता हूं तो मुझे डर लगता है। इसी वजह से मैं एक्सट्रा पेंटी रखता हूं।
एक दूसरे भारतीय यूजर ने ऑस्ट्रेलिया के नक्शे के बगल में पोटी का फोटो लगाकर उसे शेयर करते हुए कहा कि अभी इस फोटो को डायरिया से ग्रसित एक आदमी ने भेजा। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उसने पोटी के साथ ऑस्ट्रेलिया के नक्शे का यूज क्यों किया। एक ने ऑस्ट्रेलिया के नक्शे के नीचे एक तरफ डॉग तो एक तरफ कैट की फोटो लगी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ऑस्ट्रेलिया के इस तरह के नक्शे को किसी ने क्यों तैयार किया है।
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इंदौर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे वन डे के दौरान खिलाड़ियों में आपस में तनातनी रही। इसके अलावा सोशल मीडिया में भी दोनों देशों के बीच टकराहट देखने को मिली। हालांकि सोशल मीडिया में ऑस्ट्रेलियाई फैंस ने इस टकराव की शुरुआत की। हार से बौखलाए एक ऑस्ट्रेलियाई महिला फैंस ने तो फेसबुक में एक फोटो शेयर की जिसमें उसने बिना कश्मीर के भारत के नक्शे को दिखाया है और उसकी तुलना एक वोमेन पेंटी से कर दी है। ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट स्तंभकार डेनिस फ्रीडम ने हद पार करते हुए ट्विटर पर इसी फोटो को शेयर करते हुए कहा कि यह फोटो फेसबुक में उन्हें एक महिला ने भेजा है। पर वो समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिरकार उसने इस फोटो में भारत के नक्शे को क्यों लगाया है। निश्वित तौर पर जिसने भी यह फोटो फेसबुक में भेजी है उसका इरादा भारत का अपमान करना था। कश्मीर के बगैर गलत नक्शे को पेश करने के साथ उसे वोमेन पेंटी के समकक्ष ठहराया जाना तो और भी शर्मनाक है। ऑस्ट्रेलिया भारत के हाथों सीरीज के तीनों मैच हार गया है। ऐसी हार के बाद फ्रीडम ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर करने के बाद विवाद को और तूल दे दिया है। फ्रीडम को ट्विटर पर लोगों ने निशाना बनाया है। लोगों ने फ्रीडम के इस ट्वीट के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों पर भी निशाना साधा है। एक ने उसी पेंटी को स्मिथ को पहनाते हुए उस पर स्मिथ के हवाले से लिखा कि मैं जब भी भारत को देखता हूं तो मुझे डर लगता है। इसी वजह से मैं एक्सट्रा पेंटी रखता हूं। एक दूसरे भारतीय यूजर ने ऑस्ट्रेलिया के नक्शे के बगल में पोटी का फोटो लगाकर उसे शेयर करते हुए कहा कि अभी इस फोटो को डायरिया से ग्रसित एक आदमी ने भेजा। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उसने पोटी के साथ ऑस्ट्रेलिया के नक्शे का यूज क्यों किया। एक ने ऑस्ट्रेलिया के नक्शे के नीचे एक तरफ डॉग तो एक तरफ कैट की फोटो लगी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ऑस्ट्रेलिया के इस तरह के नक्शे को किसी ने क्यों तैयार किया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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भारतीय रिवाजों के अनुसार, विवाहित महिलाओं को अपने पति का नाम नहीं लेना चाहिए. यहां तक कि कई महिलाएं अपने पति परमेश्वर को 'अजी सुनते हो' कहकर बुलाती हैं. ये कहना तो बेमानी होगी कि इस तरह की बातें एक पितृसत्तात्मक अवधारणा का नतीजा हैं, क्योंकि पतियों को ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. हालांकि पुणे के एक गांव में महिलाओं का एक समूह इस प्रथा को तोड़ने के लिए आगे आया है. ये महिलाएं अपने पति को नाम लेकर पुकारना शुरू कर दिया है साथ ही गांव की दूसरी औरतों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.
महिलाओं का ये समूह #खेलबदल कैंपेन का हिस्सा हैं. ये कैंपेन पितृसत्ता को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा है और इसे वीडियो वालंटियर्स नामक संगठन द्वारा महाराष्ट्र के पुणे जिले के वाल्हे गांव में काम कर रहा है. इस समूह में नौ महिलाएं शामिल हैं जिसमें स्वास्थ्य कर्मचारी और गृहणियां शामिल हैं.
ये ग्रुप 13 राज्यों में फैले उन 56 ग्रुपों में से एक है, जो इन महिलाओं के जीने के लिए एक सुरक्षित स्थान बना रहे हैं. इस ग्रुप को चलाने वाली रोहिणी परवार कहती हैं कि उन्होंने एक वीडियो दिखाया जिसमें महिलाएं अपने पति को उनके पहले नाम से संबोधित नहीं करतीं.
'ये प्रथा बताती है कि एक महिला अपने पति का बहुत सम्मान करती है और पति के लंबी उम्र की कामना करती है. जो महिला इस परंपरा का पालन नहीं करती उसे कुसंस्कारी कहा जाता है. उस औरत के पास नैतिकता नाम की चीज ही नहीं है. ये परंपरा हमारे यहां महिलाओं के दिमाग में इतनी गहराई से डाल दी गई है कि इससे बाहर आना उनके लिए नामुमकिन सा होता है. जब तक क्लब ने इस ओर महिलाओं का ध्यान नहीं खींचा. '
उन्होंने कहा, 'इनमें से कुछ महिलाओं की शादी को 30 साल हो गए थे और वो पहला दिन था जब उन्होंने पहली बार उन्होंने अपने पति का नाम लिया था. '
लेकिन ये बहस यहीं खत्म नहीं होती. इसने महिलाओं को अपने घर जाकर और पति को उनके नाम से पुकारने के लिए प्रेरित किया. इस बदलाव ने उनके परिवार को हैरत में डाल दिया. हालांकि कुछ पतियों ने पवार पर महिलाओं को बहलाने-फुसलाने का आरोप लगाया है. लेकिन वास्तव में इन्होंने महिलाओं को ये समझाने में मदद की है कि कैसे आजतक वे पितृसत्तात्मक मानसिकता को ढो रही थीं.
ग्रुप ने कुछ महिलाओं को सिंदूर, मंगलसूत्र, बिछिया जैसे शादी के सबूतों को पहनने के बोझ से भी मुक्ति दिलाई है. पवार ने कहा, 'सिर्फ महिलाएं ही ये क्यों बोर्ड टांगकर चलें की वो शादीशुदा हैं? मैंने अपने पति से कहा कि अगर वो सिंदूर लगाएगा तभी मैं भी सिंदूर लगाऊंगी. मेरी इस बात पर वो सिर्फ हंसे और मैंने इन सब चीजों को पहनना बंद कर दिया है. '
हालांकि कुछ महिलाओं ने शादी के सर्टिफिकेट को माथे पर लगाना पूरी तरह से बंद नहीं किया है, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें सिंदूर, मंगलसूत्र वगैरह कब पहनना है इसमें थोड़ी आजादी है.
बदलाव की शुरूआत छोटी चीज़ों के साथ ही होती है. लेकिन ये औरतें जो कुछ कर रही हैं हमें इस बात पर गर्व है. पितृसत्ता को सवालों के कटघरे में खड़ा किए बगैर भारत में महिलाओं को समझ में नहीं आएगा कि आखिर कितनी गहराई तक उनके दिमाग में इस बात को भर दिया गया है. साथ ही कैसे पूरा समाज हमें और हमारे सोच को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है.
दुनियाभर में लड़कियों से छेड़छाड़ की वजह एक ही- 'छोटे कपड़े' !
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भारतीय रिवाजों के अनुसार, विवाहित महिलाओं को अपने पति का नाम नहीं लेना चाहिए. यहां तक कि कई महिलाएं अपने पति परमेश्वर को 'अजी सुनते हो' कहकर बुलाती हैं. ये कहना तो बेमानी होगी कि इस तरह की बातें एक पितृसत्तात्मक अवधारणा का नतीजा हैं, क्योंकि पतियों को ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. हालांकि पुणे के एक गांव में महिलाओं का एक समूह इस प्रथा को तोड़ने के लिए आगे आया है. ये महिलाएं अपने पति को नाम लेकर पुकारना शुरू कर दिया है साथ ही गांव की दूसरी औरतों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. महिलाओं का ये समूह #खेलबदल कैंपेन का हिस्सा हैं. ये कैंपेन पितृसत्ता को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा है और इसे वीडियो वालंटियर्स नामक संगठन द्वारा महाराष्ट्र के पुणे जिले के वाल्हे गांव में काम कर रहा है. इस समूह में नौ महिलाएं शामिल हैं जिसमें स्वास्थ्य कर्मचारी और गृहणियां शामिल हैं. ये ग्रुप तेरह राज्यों में फैले उन छप्पन ग्रुपों में से एक है, जो इन महिलाओं के जीने के लिए एक सुरक्षित स्थान बना रहे हैं. इस ग्रुप को चलाने वाली रोहिणी परवार कहती हैं कि उन्होंने एक वीडियो दिखाया जिसमें महिलाएं अपने पति को उनके पहले नाम से संबोधित नहीं करतीं. 'ये प्रथा बताती है कि एक महिला अपने पति का बहुत सम्मान करती है और पति के लंबी उम्र की कामना करती है. जो महिला इस परंपरा का पालन नहीं करती उसे कुसंस्कारी कहा जाता है. उस औरत के पास नैतिकता नाम की चीज ही नहीं है. ये परंपरा हमारे यहां महिलाओं के दिमाग में इतनी गहराई से डाल दी गई है कि इससे बाहर आना उनके लिए नामुमकिन सा होता है. जब तक क्लब ने इस ओर महिलाओं का ध्यान नहीं खींचा. ' उन्होंने कहा, 'इनमें से कुछ महिलाओं की शादी को तीस साल हो गए थे और वो पहला दिन था जब उन्होंने पहली बार उन्होंने अपने पति का नाम लिया था. ' लेकिन ये बहस यहीं खत्म नहीं होती. इसने महिलाओं को अपने घर जाकर और पति को उनके नाम से पुकारने के लिए प्रेरित किया. इस बदलाव ने उनके परिवार को हैरत में डाल दिया. हालांकि कुछ पतियों ने पवार पर महिलाओं को बहलाने-फुसलाने का आरोप लगाया है. लेकिन वास्तव में इन्होंने महिलाओं को ये समझाने में मदद की है कि कैसे आजतक वे पितृसत्तात्मक मानसिकता को ढो रही थीं. ग्रुप ने कुछ महिलाओं को सिंदूर, मंगलसूत्र, बिछिया जैसे शादी के सबूतों को पहनने के बोझ से भी मुक्ति दिलाई है. पवार ने कहा, 'सिर्फ महिलाएं ही ये क्यों बोर्ड टांगकर चलें की वो शादीशुदा हैं? मैंने अपने पति से कहा कि अगर वो सिंदूर लगाएगा तभी मैं भी सिंदूर लगाऊंगी. मेरी इस बात पर वो सिर्फ हंसे और मैंने इन सब चीजों को पहनना बंद कर दिया है. ' हालांकि कुछ महिलाओं ने शादी के सर्टिफिकेट को माथे पर लगाना पूरी तरह से बंद नहीं किया है, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें सिंदूर, मंगलसूत्र वगैरह कब पहनना है इसमें थोड़ी आजादी है. बदलाव की शुरूआत छोटी चीज़ों के साथ ही होती है. लेकिन ये औरतें जो कुछ कर रही हैं हमें इस बात पर गर्व है. पितृसत्ता को सवालों के कटघरे में खड़ा किए बगैर भारत में महिलाओं को समझ में नहीं आएगा कि आखिर कितनी गहराई तक उनके दिमाग में इस बात को भर दिया गया है. साथ ही कैसे पूरा समाज हमें और हमारे सोच को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है. दुनियाभर में लड़कियों से छेड़छाड़ की वजह एक ही- 'छोटे कपड़े' !
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भारतवर्ष के शिक्षा मन्त्री ने पांच वर्षो तक और जी को शिक्षा का माध्यम बनाना चाहा था परन्तु राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी कमीशन ने अजी के स्थान पर भारतीय भाषायों के उत्तरोत्तर प्रयोग के पक्ष में अपना मत प्रकट किया। अधिकाश विश्वविद्यालयों में हिन्दी के ही माध्यम से शिक्षा दी जा रही है, इसलिये हिन्दी में ज्ञान विज्ञान को उत्तमोत्तम पुस्तकों की महती आवश्यकता का अनुभव किया जा रहा है। 'अब गांव की पा यतों से लेकर हाईकोटों तक प्रान्त और केन्द्र की पार्लियामेंटों तक, प्राथमिक पाठशालाओं से लेकर उच्च विद्यालयों तक का स्थान मातृभाषा लेने
जा रही है।" हिन्दी में सबसे पहले जो समस्या या उपस्थित हुयी है वह शब्दों की । हमें कम से कम ४लास पारिभाषिक शब्दों की आवश्यकता है।
कोष को समस्या
पारिभाषिक शब्दों के लिये अधिक से अधिक शब्द हम संस्कृत से लेंगे । राहुल जो के सम्पादकत्व में हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने १५००० शब्दों का शासन शब्द कोप तैयार किया है। मूल्य है १५ रुपये । "पार्लियामेण्ट, व्यवस्थापिका सभा, न्यायालय, सरकारी कार्यालय, सचिवालय और शासन प्रबन्ध में व्यवहृत होने वाले समस्त शब्दों का संक्लन इस कोष मे किया गया है। हिन्दी भाषा में यह सर्वप्रथम और सर्वांगीण प्रयत्न है । अब तक इस दिशा में उत्तर भारत की सारी भाषाओं द्वारा किये गये सारे प्रयत्नों का महत्वपूर्ण समन्वय इसमें हो गया है । यह कोप भारतवर्ष के समस्त प्रान्तों और राज्य-संघों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा ।" शुद्ध विज्ञान और कला के अन्य विषयों पर पारिभाषिक शब्द निर्माण का कार्य अन्य सस्थायें भी कर रही हैं। सम्मेलन ने व्यावहारिक विज्ञान की २३ शासाओं के शब्दों का काम अपने हाथ में लिया है। इसमें कुल सवा लास शब्द होंगे। यह वैज्ञानिक कोष छः जिल्दों में तैयार होगा, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, भूगर्भ, नौ विमान, रसायन तथा कृषि आदि। अन्य विज्ञान मे परिरमारिफ शब्दों के निर्माण के लिये निम्नति द्विानों की कमेटियाँ बनी हैं ।
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भारतवर्ष के शिक्षा मन्त्री ने पांच वर्षो तक और जी को शिक्षा का माध्यम बनाना चाहा था परन्तु राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी कमीशन ने अजी के स्थान पर भारतीय भाषायों के उत्तरोत्तर प्रयोग के पक्ष में अपना मत प्रकट किया। अधिकाश विश्वविद्यालयों में हिन्दी के ही माध्यम से शिक्षा दी जा रही है, इसलिये हिन्दी में ज्ञान विज्ञान को उत्तमोत्तम पुस्तकों की महती आवश्यकता का अनुभव किया जा रहा है। 'अब गांव की पा यतों से लेकर हाईकोटों तक प्रान्त और केन्द्र की पार्लियामेंटों तक, प्राथमिक पाठशालाओं से लेकर उच्च विद्यालयों तक का स्थान मातृभाषा लेने जा रही है।" हिन्दी में सबसे पहले जो समस्या या उपस्थित हुयी है वह शब्दों की । हमें कम से कम चारलास पारिभाषिक शब्दों की आवश्यकता है। कोष को समस्या पारिभाषिक शब्दों के लिये अधिक से अधिक शब्द हम संस्कृत से लेंगे । राहुल जो के सम्पादकत्व में हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने पंद्रह हज़ार शब्दों का शासन शब्द कोप तैयार किया है। मूल्य है पंद्रह रुपयापये । "पार्लियामेण्ट, व्यवस्थापिका सभा, न्यायालय, सरकारी कार्यालय, सचिवालय और शासन प्रबन्ध में व्यवहृत होने वाले समस्त शब्दों का संक्लन इस कोष मे किया गया है। हिन्दी भाषा में यह सर्वप्रथम और सर्वांगीण प्रयत्न है । अब तक इस दिशा में उत्तर भारत की सारी भाषाओं द्वारा किये गये सारे प्रयत्नों का महत्वपूर्ण समन्वय इसमें हो गया है । यह कोप भारतवर्ष के समस्त प्रान्तों और राज्य-संघों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा ।" शुद्ध विज्ञान और कला के अन्य विषयों पर पारिभाषिक शब्द निर्माण का कार्य अन्य सस्थायें भी कर रही हैं। सम्मेलन ने व्यावहारिक विज्ञान की तेईस शासाओं के शब्दों का काम अपने हाथ में लिया है। इसमें कुल सवा लास शब्द होंगे। यह वैज्ञानिक कोष छः जिल्दों में तैयार होगा, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, भूगर्भ, नौ विमान, रसायन तथा कृषि आदि। अन्य विज्ञान मे परिरमारिफ शब्दों के निर्माण के लिये निम्नति द्विानों की कमेटियाँ बनी हैं ।
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हिमाचल में प्रतिभा सिंह के 'हाथ' से कैसे फिसल गई CM की कुर्सी?
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सबसे आगे चल रहा था, लेकिन ऐन मौके पर उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गया। चौथी बार नादौन से विधायक बने सुखविंदर सिंह सुक्खू की किस्मत खुल गई और मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम का ऐलान हो गया।
हालांकि यह पहले से ही माना जा रहा था कि हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री राजपूत समुदाय से ही होगा। राज्य में शांता कुमार ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो गैर राजपूत मुख्यमंत्री बने थे। शांता कुमार ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। राज्य में दूसरी सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मणों की है।
ऐसे में यह माना जा रहा था कि प्रतिभा सिंह राज्य की अगली मुख्यमंत्री हो सकती हैं क्योंकि उन्होंने भाजपा के सत्ता में रहते हुए न सिर्फ मंडी लोकसभा सीट जीती थी, बल्कि विधानसभा उपचुनावों में भी कांग्रेस ने भाजपा को मात दी थी। उपचुनाव परिणामों से भी लगने लगा था कि राज्य में इस बार सत्ता परिवर्तन तय है।
बताया जा रहा है कि प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री पद की रेस से बाहर होने का सबसे बड़ा कारण उनका विधायक न होना रहा। यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता तो दो उनके लिए एक विधानसभा सीट खाली करवानी पड़ती साथ ही मंडी में फिर लोकसभा उपचुनाव का पार्टी को सामना करना पड़ता। ऐसे में पार्टी 2 चुनाव लड़ने की रिस्क नहीं उठाना चाहती थी।
सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम की घोषणा के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों से बचते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करती हैं। हालांकि उनके चेहरे पर मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने का मलाल साफ पढ़ा जा सकता था। यह भी कहा जा रहा है कि प्रतिभा सिंह को साधने के लिए पार्टी उनके विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह को सरकार में सम्मानजनक पद दे सकती है।
यह भी सही है कि कांग्रेस ने मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाकर राज्य के ब्राह्मण समुदाय को भी साध लिया है, लेकिन यदि प्रतिभा सिंह की नाराजगी दूर नहीं की गई तो कांग्रेस को इसका भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है। वैसे भी राज्य में हर 5 साल में सत्ता बदलने की परंपरा है।
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हिमाचल में प्रतिभा सिंह के 'हाथ' से कैसे फिसल गई CM की कुर्सी? हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सबसे आगे चल रहा था, लेकिन ऐन मौके पर उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गया। चौथी बार नादौन से विधायक बने सुखविंदर सिंह सुक्खू की किस्मत खुल गई और मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम का ऐलान हो गया। हालांकि यह पहले से ही माना जा रहा था कि हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री राजपूत समुदाय से ही होगा। राज्य में शांता कुमार ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जो गैर राजपूत मुख्यमंत्री बने थे। शांता कुमार ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। राज्य में दूसरी सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मणों की है। ऐसे में यह माना जा रहा था कि प्रतिभा सिंह राज्य की अगली मुख्यमंत्री हो सकती हैं क्योंकि उन्होंने भाजपा के सत्ता में रहते हुए न सिर्फ मंडी लोकसभा सीट जीती थी, बल्कि विधानसभा उपचुनावों में भी कांग्रेस ने भाजपा को मात दी थी। उपचुनाव परिणामों से भी लगने लगा था कि राज्य में इस बार सत्ता परिवर्तन तय है। बताया जा रहा है कि प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री पद की रेस से बाहर होने का सबसे बड़ा कारण उनका विधायक न होना रहा। यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता तो दो उनके लिए एक विधानसभा सीट खाली करवानी पड़ती साथ ही मंडी में फिर लोकसभा उपचुनाव का पार्टी को सामना करना पड़ता। ऐसे में पार्टी दो चुनाव लड़ने की रिस्क नहीं उठाना चाहती थी। सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम की घोषणा के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों से बचते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करती हैं। हालांकि उनके चेहरे पर मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने का मलाल साफ पढ़ा जा सकता था। यह भी कहा जा रहा है कि प्रतिभा सिंह को साधने के लिए पार्टी उनके विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह को सरकार में सम्मानजनक पद दे सकती है। यह भी सही है कि कांग्रेस ने मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाकर राज्य के ब्राह्मण समुदाय को भी साध लिया है, लेकिन यदि प्रतिभा सिंह की नाराजगी दूर नहीं की गई तो कांग्रेस को इसका भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है। वैसे भी राज्य में हर पाँच साल में सत्ता बदलने की परंपरा है।
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चउत्थगाहासुप्तस्स अत्थपरूवणा
माणादीण मेक्केकस्स कसायस्स जहण्णुकस्साजहण्णाणु कस्स मेयभिण्ण कसायुदयट्ठाणपडिबद्धाणं तिण्डं पदाणं कसायोवजोगडाणेहिं तहा चेव तिहाविहत्तेहिं संजोगेण समुप्पण्णाणि णवपदाणि होति । तं जहा - कोहादीणमुक्कस्स कसायुदयड्डाणे कसायोवजोगद्वाए च पडिबद्धमेक्कं पदं । तेसिं चेवुकस्सकसायुदयट्ठाणे जहण्णकसायोवजोगद्धाए च विदियं । उकस्सकसायुदयट्ठाणे अजहण्णाणुकस्स कसायोवजोगद्धासु च तदियं । जहण्णकसायुदयद्वाणे उक्कस्सकसायोवजोगद्धाए च चउत्थं । जहण्णकसायुदयट्ठाणे जहण्णकसायोवजोगद्धाए च पंचमं । जहण्णकसायुदयट्ठाणे अजहण्णाणुकस्सकसायोवजोगद्धट्टाणेसु च छ । अजहण्णाणुक्कस्सकसायुदयट्ठाणेसु उक्कस्सकसायोबजोगद्धाए च सत्तमं । अजहण्णाणु कस्सकसायुदयट्ठाणेसु जहण्णकसायोवजोगद्वाए च अट्टमं । अजहण्णाणुकस्स कसायुदयट्ठाणेसु अजहण्णाणुकस्सकसायोवजोगद्धट्ठाणेसु च णवममिदि । एवमेदेहिं णवहि पदेहिं तसजीवाणं थोवबहुत्त मेत्तो अहिकीरदि त्ति सुत्तत्थसब्भावो ।
६१६६. सुगममेदं पुच्छावक्कं । एवं च पुच्छाविसईकयस्स अप्पाबहुअस्स माणादिकसाय परिवाडीए एसो गिद्देसो ।
* उक्कस्सए कसायुदयद्वाणे उक्कस्सियाए
थोवा ।
माणोवजोगद्धाए जीवा
समाधान - मानादि कषायोंमेंसे एक-एक कषायके जघन्य, उत्कृष्ट और अजधन्यानुत्कृष्ट इस प्रकारसे भेदरूप कषाय-उदयस्थानों से सम्बन्ध रखनेवाले तीन पर्दोके तथा उसी प्रकार तीन रूपसे विभक्त हुए कषाय-उपयोगाद्धास्थानोंके संयोगले उत्पन्न हुए नौ पद होते हैं । यथा- क्रोधादि के उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानमें और कषाय उपयोगकालस्थान में प्रतिबद्ध एक पद है । उन्हींके उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थान में और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थान में प्रतिबद्ध दूसरा पढद है। उत्कृष्ट कषाय उदयस्थानमें और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध तीसरा पद है। जघन्य कषाय-उदयस्थानमें और उत्कृष्ट कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध चौथा पढ़ है। जघन्य कषाय उदयस्थानमें और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध पाँचवॉ पद है। जघन्य कषाय-उदयस्थान में और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध छठा पद है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और उत्कृष्ट कषायउपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध सातवाँ पद है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध आठवाँ स्थान है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानों में और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध नौवाँ स्थान है। इस प्रकार इन नौ पदोंके द्वारा आगे त्रसजीवोंका अल्पबहुत्व अधिकृत है यह इस सूत्रके अर्थका आशय है।
* वह कैसे १
$ १६६. यह पृच्छावाक्य सुगम है। इस प्रकार पृच्छाके विषयभूत हुए अल्पबहुत्वका मानादि कषायोंके क्रमसे यह निर्देश है ।
* उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और उत्कृष्ट मानोपयोगकालमें जीव सबसे थोड़े हैं।
६ १६७. उक्कस्सकसायोदयद्वाणं णाम उक्कस्साणुभागोदयजणिदो कसायपरिणामो असंखेजलोयमेयभिण्णाण मज्झवसाणट्ठाणाणं चरिमज्झवसाणद्वाणमिदि बुधं होदि । 'उक्कस्समाणोवजोगद्वाए' त्ति वृत्ते माणकसायस्स उक्कस्सकालोवजोगवग्गणाए गहणं कायव्वं । तदो एदेहिं दोहि उक्कस्सपदेहि माणकसायपडिबद्वेहिं अण्णोण्णसंजुत्तेहिं परिणदा तसजीवा थोवा त्ति सुत्तत्थसबंधो । कुदो एदेसिं थोवत्तमवगम्मदे १ ण, दोण्हं पि उक्कस्सभावेण परिणमंताणं जीवाणं सुद्रु विरलाणमुवएसादो । किं माणमेदेसिं १ आवलियाए असंखेजदिभागो। जइ वि उक्कस्समाणोवजोगद्धाए असंखेजसेढिमेत्त जीवाणमवट्ठाणसंभवो तो वि उक्कस्सकसायुदयट्ठाणे णिरुद्धे तत्थावलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव जीवरासी होदि, पयारंतरासंभवादो ।
६१६८. एत्थ उक्कस्सए कसायुदयट्ठाणे त्ति अहियारसंबंधो कायव्वो । तेण उक्कस्सए कसायुदयट्ठाणे जहण्णियाए माणोवजोगवाए च परिणदा जोवा पुव्वि६ १६७. उत्कृष्ट अनुभागके उदयसे उत्पन्न हुए तथा असंख्यात लोकप्रमाण अध्यवसान स्थानोंमेंसे अन्तिम अध्यवसानस्थानरूप कषाय परिणामकी उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थान संज्ञा है 1 'उत्कुष्ट मानोपयोगाद्धामें ऐसा कहनेपर मानकषायको उत्कृष्ट कालोपयोगवर्गणाका ग्रहण करना चाहिए । इसलिए मानकषायसे सम्बन्ध रखनेवाले और परस्पर संयुक्त हुए इन दोनों उत्कृष्ट पदरूपसे परिणत हुए त्रसजीव सबसे थोड़े हैं ऐसा सूत्रके अर्थका सम्बन्ध करना चाहिए ।
शंका - इसका स्तोकपना किस प्रमाणसे जाता जाता है ?
समाधान - नहीं, क्योंकि दोनों ही पदोंके उत्कृष्टभावसे परिणत हुए जीव बहुत विरल होते हैं ऐसा परमागमका उपदेश है
शंका - इनका प्रमाण क्या है ?
समाधान - इनका प्रमाण आवलिके असंख्यातवें भागमात्र है। यद्यपि मानकषायके उत्कृष्ट उपयोगकालमें असंख्यात जगश्रेणिप्रमाण त्रसजीबोंका अवस्थान सम्भव है तो भी उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानसे युक्त उसमें आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण ही जीवराशि होती है, क्योंकि यहाँ अन्य प्रकार सम्भव नहीं है ।
विशेषार्थ - यहाँ उदयस्थानका अर्थ कषायपरिणाम और उपयोगाद्धाका अर्थ कषायपरिणामका काल लिया है। ये दोनों जिन जीवोंके उत्कृष्ट होते है उनकी संख्या आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाणसे अधिक नहीं पाई जाती यह उक्त कथनका तात्पर्य है। आगे भी इसी प्रकार तात्पर्य घटित कर लेना चाहिए ।
* उनसे जघन्य मानकषायसम्बन्धी उपयोगकालमें स्थित हुए जीव असंख्यात
गुणे हैं।
६ १६८. इस सूत्रमें 'उत्कृष्ट कषाय उदयस्थान में अधिकारवश इस पदका सम्बन्ध कर लेना चाहिए। इससे उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानमें और मानकषायके जघन्य उपयोगकालमें
चउत्थगाहासुन्तस्स अत्थपरूषणा
ल्लेहितो असंखेजगुणा ति सुत्तत्थो । एसो वि रासी आवलियाए असंखेज दिभागमेत्तो चेव । किंतु उक्कस्समाणोवजोगद्वाए परिणममाणजीवेहिंतो जहण्णमाणोवजोगद्धाए परिणममाणजीवा बहुआ होति, जहण्णकालस्स पउरं संभवादो। तदो सिद्धमसंखेज - गुणत्तं । को गुणगारो ? आवलियाए असखेजदिभागो ।
* अणुकस्समजहण्णासु माणोबजोगद्धासु जीवा असंखेजगुणा । ६१६९. एत्थ वि पुव्वं व अहियारसंबंधो कायव्वो । तदो एसो वि जीवरासी आवलियाए असंखेजदिभागमेत्तो चेव होइ । होंतो वि पुव्विल्लरासीदो एसो असंखेजगुणो । किं कारणं १ जहण्णिया माणोवजोगद्धा एयवियप्पा चेव, अजहण्णाणुकस्समाणोवजोगद्धाओ पुण अणेयवियप्पाओ । तेणेत्थ बहुवियप्पसंभवादो बहुओ जीवरासी परिणमदि त्ति सिद्धमसंखेअगुणत्तं । गुणगारो च आवलियाए असंखेजदिभागो ।
मानकपायरूपसे परिणत हुए जीव पूर्वोक्त जीवोंसे असंख्यातगुणे होते हैं इस प्रकार सूत्रका अर्य फलित हो जाता है। यह राशि भी आवलिके असंख्यातवे भागप्रमाण ही है। किन्तु उत्कृष्ट मानोपयोगकालमे परिणमन करते हुए जीवोंसे जघन्य मनोपयोगकालमें परिणमन करनेवाले जीव बहुत होते है, क्योंकि जघन्य काल प्रचुररूपसे पाया जाता है, इसलिये ये जीव असंख्यातगुणे है यह सिद्ध हुआ ।
शंका - गुणकार क्या है ?
समाधान -- गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है।
* उनसे अनुत्कृष्ट अजघन्य मानकषायसम्बन्धी उपयोगकालोंमें जीव असंख्यातगुणे हैं ।
$ १६९ यहाँपर भी पहले के समान अधिकारका सम्वन्ध करना चाहिए । इसलिए यह जीवराशि भी आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण ही होती है। उतनी होती हुई भी पिछली राशिसे यह राशि असंख्यातगुणी हैं, क्योंकि मानापयोगका जघन्य काल एक ही प्रकारका है, किन्तु अजघन्य अनुत्कृष्ट मानोपयोगकाल अनेक भेदोको लिये हुए है। इसलिए यहाँपर बहुत विकल्प सम्भव होनेसे बहुत जीवराशि मानकषायरूपसे परिणमन करती है, इसलिए पूर्वोक्त जीवराशिसे यह राशि असंख्यातगुणी है यह सिद्ध हुआ । यहाँ गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है ।
विशेषार्थ - मानकषायके उत्कृष्टकाल और जघन्यकालको छोड़कर शेष समस्त काल अजघन्य अनुत्कृष्टकालमें परिगृहीत हो जाता है । यतः इस कालके भीतर मानकषायरूपसे परिणत सब त्रसजीवराशि नहीं ली गई है। किन्तु उत्कृष्ट मानकषायरूपसे परिणत त्रसजीवराशि ही ली गई है, इसलिए वह आवलिके असंख्यातवे भागप्रमाण होकर भी पूर्वोक्त जीवराशिसे असंख्यातगुणी बन जाती है, क्योंकि मानकषायके जघन्यकालका प्रमाण एक समय मात्र हूँ और अजघन्य अनुत्कृष्टकाल असंख्यात समयप्रमाण है, इसलिए उक्तरूपसे जीवराशि बन जाती है। यहाँ सर्वत्र त्रस जीवराशिकी अपेक्षा यह अल्पबहुत्व बतलाया जा रहा है यह ध्यान रहे ।
* जहण्णए कसायुदयठ्ठाणे उक्कस्सियाए माणोवजोगद्धाए जीवा असंखेजगुणा ।
६१७०. सव्वजहण्णयमणुभागोदयट्ठाणं तसजीवपाओग्गमेत्थ जहण्णकसायुदयढाणमिदि विवक्खियं । तेण जहण्णए कसायुदयद्वाणे उक्कस्समाणोवजोगद्धापडिबद्धे वट्टमाणो जीवरासी असंखेजगुणो त्ति सुत्तत्थसंबंधो । एसो वि आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव, एक्केक्कम्मि कसायुदयट्ठाणे णिरुद्धे आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव तस जीवरासी होदि त्ति पुव्वमेव णिण्णीयत्तादो । णवरि उक्कस्सकसायुदयट्ठाणादो जहण्णकसायुदयट्ठाणस्स सुलहत्तेण पुव्विन्लरासीदो एसो असंखेजगुणो जादो । एत्थ गुणगारो आवलियाए असंखेज दिभागो ।
६१७१. एत्थ जहण्णकसायुदयट्ठाणग्गहणमणुवट्टदे, तेणेवमहिसंबंधो कायव्वोजहण्णए कसायुदयद्वाणे जहण्णियाए माणोवजोगद्वाए च अकमेण परिणदा जीवा पुव्विल्लेहिंतो असंखेज्जगुणा त्ति । एत्थ कारणं सुगमं । गुणगारो च आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो ।
* अणुक्कस्समजहण्णासु माणोवजोगद्धासु जीवा असंखेजगुणा । ६ १७२. एसो वि जीवरासी आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो होदूण पुव्विवादो असंखेज्जगुणो होइ । कारणं सुगमं ।
* उनसे जघन्यकषाय उदयस्थानमें और उत्कृष्ट मानकषाय सम्बन्धी उपयोगकालमें जीव असंख्यातगुणे हैं ।
६९७० सबसे जघन्य अनुभागोदयस्थान त्रसजीवोंके योग्य जघन्य कषाय-उदयस्थान है ऐसी यहाँपर विवक्षाकी गई है। तदनुसार उत्कृष्ट मानोपयोगकालसे सम्बन्ध रखनेवाले जघन्य कषायोदयस्थान में विद्यमान जीवराशि असंख्यगुणी है ऐसा यहाँ सूत्रका अर्थ के साथ सम्बन्ध करना चाहिए। यह जीवराशि भो आवलिके असंख्यातने भागप्रमाण ही हैं, क्योंकि एक-एक कषाय-उदयस्थानमें आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाणही त्रसराशि होती है, इस बातका पहले ही निर्णय कर आये हैं। इतनी विशेषता है कि उत्कृष्ट कषायोदयस्थानसे जघन्य कषायोदयस्थान सुलभ है, इसलिए पूर्वोक्त राशिसे यह राशि असंख्यातगुणी हो जाती है यहाँपर गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है।
* उनसे जघन्य मानकषायोपयोगकालमें जीव असंख्यातगुणे हैं ।
$ १७१ यहाँपर 'जघन्य कषाय-उदयस्थान' पदकी अनुवृत्ति होती है। इसलिए ऐसा सम्बन्ध करना चाहिए । जघन्य कषाय उदयस्थानमें और जघन्य मानोपयोगकालमें युगपत् परिणत हुए जीव पिछले जीवोंसे असंख्यातगुणे हैं। यहाँपर कारणका कथन सुगम हैं। गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है।
* उनसे अनुत्कृष्ट अजघन्य मानोपयोगकालोंमें जीव असंख्यातगुणे हैं ।
६ १७२ यह भी जीवराशि आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण होकर पिछली राशिसे असंख्यातगुणी है। कारणका कथन सुगम है।
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चउत्थगाहासुप्तस्स अत्थपरूवणा माणादीण मेक्केकस्स कसायस्स जहण्णुकस्साजहण्णाणु कस्स मेयभिण्ण कसायुदयट्ठाणपडिबद्धाणं तिण्डं पदाणं कसायोवजोगडाणेहिं तहा चेव तिहाविहत्तेहिं संजोगेण समुप्पण्णाणि णवपदाणि होति । तं जहा - कोहादीणमुक्कस्स कसायुदयड्डाणे कसायोवजोगद्वाए च पडिबद्धमेक्कं पदं । तेसिं चेवुकस्सकसायुदयट्ठाणे जहण्णकसायोवजोगद्धाए च विदियं । उकस्सकसायुदयट्ठाणे अजहण्णाणुकस्स कसायोवजोगद्धासु च तदियं । जहण्णकसायुदयद्वाणे उक्कस्सकसायोवजोगद्धाए च चउत्थं । जहण्णकसायुदयट्ठाणे जहण्णकसायोवजोगद्धाए च पंचमं । जहण्णकसायुदयट्ठाणे अजहण्णाणुकस्सकसायोवजोगद्धट्टाणेसु च छ । अजहण्णाणुक्कस्सकसायुदयट्ठाणेसु उक्कस्सकसायोबजोगद्धाए च सत्तमं । अजहण्णाणु कस्सकसायुदयट्ठाणेसु जहण्णकसायोवजोगद्वाए च अट्टमं । अजहण्णाणुकस्स कसायुदयट्ठाणेसु अजहण्णाणुकस्सकसायोवजोगद्धट्ठाणेसु च णवममिदि । एवमेदेहिं णवहि पदेहिं तसजीवाणं थोवबहुत्त मेत्तो अहिकीरदि त्ति सुत्तत्थसब्भावो । छः हज़ार एक सौ छयासठ. सुगममेदं पुच्छावक्कं । एवं च पुच्छाविसईकयस्स अप्पाबहुअस्स माणादिकसाय परिवाडीए एसो गिद्देसो । * उक्कस्सए कसायुदयद्वाणे उक्कस्सियाए थोवा । माणोवजोगद्धाए जीवा समाधान - मानादि कषायोंमेंसे एक-एक कषायके जघन्य, उत्कृष्ट और अजधन्यानुत्कृष्ट इस प्रकारसे भेदरूप कषाय-उदयस्थानों से सम्बन्ध रखनेवाले तीन पर्दोके तथा उसी प्रकार तीन रूपसे विभक्त हुए कषाय-उपयोगाद्धास्थानोंके संयोगले उत्पन्न हुए नौ पद होते हैं । यथा- क्रोधादि के उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानमें और कषाय उपयोगकालस्थान में प्रतिबद्ध एक पद है । उन्हींके उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थान में और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थान में प्रतिबद्ध दूसरा पढद है। उत्कृष्ट कषाय उदयस्थानमें और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध तीसरा पद है। जघन्य कषाय-उदयस्थानमें और उत्कृष्ट कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध चौथा पढ़ है। जघन्य कषाय उदयस्थानमें और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध पाँचवॉ पद है। जघन्य कषाय-उदयस्थान में और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध छठा पद है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और उत्कृष्ट कषायउपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध सातवाँ पद है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और जघन्य कषाय उपयोगकालस्थानमें प्रतिबद्ध आठवाँ स्थान है। अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानों में और अजघन्यानुत्कृष्ट कषाय उपयोगकालस्थानों में प्रतिबद्ध नौवाँ स्थान है। इस प्रकार इन नौ पदोंके द्वारा आगे त्रसजीवोंका अल्पबहुत्व अधिकृत है यह इस सूत्रके अर्थका आशय है। * वह कैसे एक डॉलर एक सौ छयासठ. यह पृच्छावाक्य सुगम है। इस प्रकार पृच्छाके विषयभूत हुए अल्पबहुत्वका मानादि कषायोंके क्रमसे यह निर्देश है । * उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानोंमें और उत्कृष्ट मानोपयोगकालमें जीव सबसे थोड़े हैं। छः एक सौ सरसठ. उक्कस्सकसायोदयद्वाणं णाम उक्कस्साणुभागोदयजणिदो कसायपरिणामो असंखेजलोयमेयभिण्णाण मज्झवसाणट्ठाणाणं चरिमज्झवसाणद्वाणमिदि बुधं होदि । 'उक्कस्समाणोवजोगद्वाए' त्ति वृत्ते माणकसायस्स उक्कस्सकालोवजोगवग्गणाए गहणं कायव्वं । तदो एदेहिं दोहि उक्कस्सपदेहि माणकसायपडिबद्वेहिं अण्णोण्णसंजुत्तेहिं परिणदा तसजीवा थोवा त्ति सुत्तत्थसबंधो । कुदो एदेसिं थोवत्तमवगम्मदे एक ण, दोण्हं पि उक्कस्सभावेण परिणमंताणं जीवाणं सुद्रु विरलाणमुवएसादो । किं माणमेदेसिं एक आवलियाए असंखेजदिभागो। जइ वि उक्कस्समाणोवजोगद्धाए असंखेजसेढिमेत्त जीवाणमवट्ठाणसंभवो तो वि उक्कस्सकसायुदयट्ठाणे णिरुद्धे तत्थावलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव जीवरासी होदि, पयारंतरासंभवादो । छः हज़ार एक सौ अड़सठ. एत्थ उक्कस्सए कसायुदयट्ठाणे त्ति अहियारसंबंधो कायव्वो । तेण उक्कस्सए कसायुदयट्ठाणे जहण्णियाए माणोवजोगवाए च परिणदा जोवा पुव्विछः एक सौ सरसठ. उत्कृष्ट अनुभागके उदयसे उत्पन्न हुए तथा असंख्यात लोकप्रमाण अध्यवसान स्थानोंमेंसे अन्तिम अध्यवसानस्थानरूप कषाय परिणामकी उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थान संज्ञा है एक 'उत्कुष्ट मानोपयोगाद्धामें ऐसा कहनेपर मानकषायको उत्कृष्ट कालोपयोगवर्गणाका ग्रहण करना चाहिए । इसलिए मानकषायसे सम्बन्ध रखनेवाले और परस्पर संयुक्त हुए इन दोनों उत्कृष्ट पदरूपसे परिणत हुए त्रसजीव सबसे थोड़े हैं ऐसा सूत्रके अर्थका सम्बन्ध करना चाहिए । शंका - इसका स्तोकपना किस प्रमाणसे जाता जाता है ? समाधान - नहीं, क्योंकि दोनों ही पदोंके उत्कृष्टभावसे परिणत हुए जीव बहुत विरल होते हैं ऐसा परमागमका उपदेश है शंका - इनका प्रमाण क्या है ? समाधान - इनका प्रमाण आवलिके असंख्यातवें भागमात्र है। यद्यपि मानकषायके उत्कृष्ट उपयोगकालमें असंख्यात जगश्रेणिप्रमाण त्रसजीबोंका अवस्थान सम्भव है तो भी उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानसे युक्त उसमें आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण ही जीवराशि होती है, क्योंकि यहाँ अन्य प्रकार सम्भव नहीं है । विशेषार्थ - यहाँ उदयस्थानका अर्थ कषायपरिणाम और उपयोगाद्धाका अर्थ कषायपरिणामका काल लिया है। ये दोनों जिन जीवोंके उत्कृष्ट होते है उनकी संख्या आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाणसे अधिक नहीं पाई जाती यह उक्त कथनका तात्पर्य है। आगे भी इसी प्रकार तात्पर्य घटित कर लेना चाहिए । * उनसे जघन्य मानकषायसम्बन्धी उपयोगकालमें स्थित हुए जीव असंख्यात गुणे हैं। छः एक सौ अड़सठ. इस सूत्रमें 'उत्कृष्ट कषाय उदयस्थान में अधिकारवश इस पदका सम्बन्ध कर लेना चाहिए। इससे उत्कृष्ट कषाय-उदयस्थानमें और मानकषायके जघन्य उपयोगकालमें चउत्थगाहासुन्तस्स अत्थपरूषणा ल्लेहितो असंखेजगुणा ति सुत्तत्थो । एसो वि रासी आवलियाए असंखेज दिभागमेत्तो चेव । किंतु उक्कस्समाणोवजोगद्वाए परिणममाणजीवेहिंतो जहण्णमाणोवजोगद्धाए परिणममाणजीवा बहुआ होति, जहण्णकालस्स पउरं संभवादो। तदो सिद्धमसंखेज - गुणत्तं । को गुणगारो ? आवलियाए असखेजदिभागो । * अणुकस्समजहण्णासु माणोबजोगद्धासु जीवा असंखेजगुणा । छः हज़ार एक सौ उनहत्तर. एत्थ वि पुव्वं व अहियारसंबंधो कायव्वो । तदो एसो वि जीवरासी आवलियाए असंखेजदिभागमेत्तो चेव होइ । होंतो वि पुव्विल्लरासीदो एसो असंखेजगुणो । किं कारणं एक जहण्णिया माणोवजोगद्धा एयवियप्पा चेव, अजहण्णाणुकस्समाणोवजोगद्धाओ पुण अणेयवियप्पाओ । तेणेत्थ बहुवियप्पसंभवादो बहुओ जीवरासी परिणमदि त्ति सिद्धमसंखेअगुणत्तं । गुणगारो च आवलियाए असंखेजदिभागो । मानकपायरूपसे परिणत हुए जीव पूर्वोक्त जीवोंसे असंख्यातगुणे होते हैं इस प्रकार सूत्रका अर्य फलित हो जाता है। यह राशि भी आवलिके असंख्यातवे भागप्रमाण ही है। किन्तु उत्कृष्ट मानोपयोगकालमे परिणमन करते हुए जीवोंसे जघन्य मनोपयोगकालमें परिणमन करनेवाले जीव बहुत होते है, क्योंकि जघन्य काल प्रचुररूपसे पाया जाता है, इसलिये ये जीव असंख्यातगुणे है यह सिद्ध हुआ । शंका - गुणकार क्या है ? समाधान -- गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। * उनसे अनुत्कृष्ट अजघन्य मानकषायसम्बन्धी उपयोगकालोंमें जीव असंख्यातगुणे हैं । एक सौ उनहत्तर डॉलर यहाँपर भी पहले के समान अधिकारका सम्वन्ध करना चाहिए । इसलिए यह जीवराशि भी आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण ही होती है। उतनी होती हुई भी पिछली राशिसे यह राशि असंख्यातगुणी हैं, क्योंकि मानापयोगका जघन्य काल एक ही प्रकारका है, किन्तु अजघन्य अनुत्कृष्ट मानोपयोगकाल अनेक भेदोको लिये हुए है। इसलिए यहाँपर बहुत विकल्प सम्भव होनेसे बहुत जीवराशि मानकषायरूपसे परिणमन करती है, इसलिए पूर्वोक्त जीवराशिसे यह राशि असंख्यातगुणी है यह सिद्ध हुआ । यहाँ गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है । विशेषार्थ - मानकषायके उत्कृष्टकाल और जघन्यकालको छोड़कर शेष समस्त काल अजघन्य अनुत्कृष्टकालमें परिगृहीत हो जाता है । यतः इस कालके भीतर मानकषायरूपसे परिणत सब त्रसजीवराशि नहीं ली गई है। किन्तु उत्कृष्ट मानकषायरूपसे परिणत त्रसजीवराशि ही ली गई है, इसलिए वह आवलिके असंख्यातवे भागप्रमाण होकर भी पूर्वोक्त जीवराशिसे असंख्यातगुणी बन जाती है, क्योंकि मानकषायके जघन्यकालका प्रमाण एक समय मात्र हूँ और अजघन्य अनुत्कृष्टकाल असंख्यात समयप्रमाण है, इसलिए उक्तरूपसे जीवराशि बन जाती है। यहाँ सर्वत्र त्रस जीवराशिकी अपेक्षा यह अल्पबहुत्व बतलाया जा रहा है यह ध्यान रहे । * जहण्णए कसायुदयठ्ठाणे उक्कस्सियाए माणोवजोगद्धाए जीवा असंखेजगुणा । छः हज़ार एक सौ सत्तर. सव्वजहण्णयमणुभागोदयट्ठाणं तसजीवपाओग्गमेत्थ जहण्णकसायुदयढाणमिदि विवक्खियं । तेण जहण्णए कसायुदयद्वाणे उक्कस्समाणोवजोगद्धापडिबद्धे वट्टमाणो जीवरासी असंखेजगुणो त्ति सुत्तत्थसंबंधो । एसो वि आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव, एक्केक्कम्मि कसायुदयट्ठाणे णिरुद्धे आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो चेव तस जीवरासी होदि त्ति पुव्वमेव णिण्णीयत्तादो । णवरि उक्कस्सकसायुदयट्ठाणादो जहण्णकसायुदयट्ठाणस्स सुलहत्तेण पुव्विन्लरासीदो एसो असंखेजगुणो जादो । एत्थ गुणगारो आवलियाए असंखेज दिभागो । छः हज़ार एक सौ इकहत्तर. एत्थ जहण्णकसायुदयट्ठाणग्गहणमणुवट्टदे, तेणेवमहिसंबंधो कायव्वोजहण्णए कसायुदयद्वाणे जहण्णियाए माणोवजोगद्वाए च अकमेण परिणदा जीवा पुव्विल्लेहिंतो असंखेज्जगुणा त्ति । एत्थ कारणं सुगमं । गुणगारो च आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो । * अणुक्कस्समजहण्णासु माणोवजोगद्धासु जीवा असंखेजगुणा । छः एक सौ बहत्तर. एसो वि जीवरासी आवलियाए असंखेज्जदिभागमेत्तो होदूण पुव्विवादो असंखेज्जगुणो होइ । कारणं सुगमं । * उनसे जघन्यकषाय उदयस्थानमें और उत्कृष्ट मानकषाय सम्बन्धी उपयोगकालमें जीव असंख्यातगुणे हैं । छः हज़ार नौ सौ सत्तर सबसे जघन्य अनुभागोदयस्थान त्रसजीवोंके योग्य जघन्य कषाय-उदयस्थान है ऐसी यहाँपर विवक्षाकी गई है। तदनुसार उत्कृष्ट मानोपयोगकालसे सम्बन्ध रखनेवाले जघन्य कषायोदयस्थान में विद्यमान जीवराशि असंख्यगुणी है ऐसा यहाँ सूत्रका अर्थ के साथ सम्बन्ध करना चाहिए। यह जीवराशि भो आवलिके असंख्यातने भागप्रमाण ही हैं, क्योंकि एक-एक कषाय-उदयस्थानमें आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाणही त्रसराशि होती है, इस बातका पहले ही निर्णय कर आये हैं। इतनी विशेषता है कि उत्कृष्ट कषायोदयस्थानसे जघन्य कषायोदयस्थान सुलभ है, इसलिए पूर्वोक्त राशिसे यह राशि असंख्यातगुणी हो जाती है यहाँपर गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। * उनसे जघन्य मानकषायोपयोगकालमें जीव असंख्यातगुणे हैं । एक सौ इकहत्तर डॉलर यहाँपर 'जघन्य कषाय-उदयस्थान' पदकी अनुवृत्ति होती है। इसलिए ऐसा सम्बन्ध करना चाहिए । जघन्य कषाय उदयस्थानमें और जघन्य मानोपयोगकालमें युगपत् परिणत हुए जीव पिछले जीवोंसे असंख्यातगुणे हैं। यहाँपर कारणका कथन सुगम हैं। गुणकार आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण है। * उनसे अनुत्कृष्ट अजघन्य मानोपयोगकालोंमें जीव असंख्यातगुणे हैं । छः एक सौ बहत्तर यह भी जीवराशि आवलिके असंख्यातवें भागप्रमाण होकर पिछली राशिसे असंख्यातगुणी है। कारणका कथन सुगम है।
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भागलपुर शहर के भीतर पिछले दो दिनों से जाम की समस्या आने जाने वाली गाड़ियों को काफी परेशान कर रही है। शहर के घंटाघर के पास स्मार्ट राेड का निर्माण हाे रहा है। इस वजह से शहर के आधे हिस्से पर निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन वहां पर स्कूलों में छुट्टी हाेने के बाद पिछले दाे दिनाें से लगातार जाम लग जा रही है। इस कारण आम लाेगाें के साथ-साथ मरीजाें काे भी परेशानी होती है। मंगलवार की दाेपहर दाे बजे से लेकर पाैने तीन बजे तक वहां जाम लगा रहा। रूक-रूक कर गाड़ियां पास हाेती रही।
कारण यह रही कि भीखनपुर के पास माउंट असीसी स्कूल में छुट्टी हाेने के बाद अचानक सड़काें पर वाहनाें का दबाव बढ़ा ताे कचहरी राेड, भीखनपुर राेड, घंटाघर मेन राेड से लेकर मशाकचक राेड व नवयुग विद्यालय राेड में जाम लग गया। क्याेंकि इन सभी इलाकाें में छुट्टी के वक्त वाहनाें का अधिक दबाव रहता है। कचहरी चाैक से पुलिस लाइन राेड व घूरन पीर बाबा राेड में ताे वन-वे के चलते जाम नहीं था, पर इसके बाद के लगभग सभी इलाकाें में जाम की स्थिति बनी रही।
इशाकचक विषहरी स्थान रोड में नगर निगम चौक से पोस्ट ऑफिस जाने में बाइक से करीब 3 मिनट का समय लगता है। लेकिन जाम की वजह करीब 20 मिनट लग जाता है। इस वजह से कई बार तो एंबुलेंस से जा रहे मरीजों को भी इन जाम का शिकार बनना पर जाता है। घंटाघर चाैक के पास दाे तरफ से बांस से बैरिकेडिंग कर राेड बनाया जा रहा है। इस वजह से वहां की सड़काें की चाैड़ाई कम हाे गयी है और वहां वन-वे नहीं किया। नतीजतन वहां सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई बाइक सवार राेड से गुजरने के दाैरान खाेदे गए गड्ढ़े में भी गिर जाते है। वहीं स्मार्ट सिटी के सीजीएम संदीप कुमार का कहना है कि जबतक निर्माण हाेगा, तब तक के लिए वहां बैरिकेडिंग ताे हमलाेग करवा दिए हैं। निर्माण भी तेजी से हाे रहा है।
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भागलपुर शहर के भीतर पिछले दो दिनों से जाम की समस्या आने जाने वाली गाड़ियों को काफी परेशान कर रही है। शहर के घंटाघर के पास स्मार्ट राेड का निर्माण हाे रहा है। इस वजह से शहर के आधे हिस्से पर निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन वहां पर स्कूलों में छुट्टी हाेने के बाद पिछले दाे दिनाें से लगातार जाम लग जा रही है। इस कारण आम लाेगाें के साथ-साथ मरीजाें काे भी परेशानी होती है। मंगलवार की दाेपहर दाे बजे से लेकर पाैने तीन बजे तक वहां जाम लगा रहा। रूक-रूक कर गाड़ियां पास हाेती रही। कारण यह रही कि भीखनपुर के पास माउंट असीसी स्कूल में छुट्टी हाेने के बाद अचानक सड़काें पर वाहनाें का दबाव बढ़ा ताे कचहरी राेड, भीखनपुर राेड, घंटाघर मेन राेड से लेकर मशाकचक राेड व नवयुग विद्यालय राेड में जाम लग गया। क्याेंकि इन सभी इलाकाें में छुट्टी के वक्त वाहनाें का अधिक दबाव रहता है। कचहरी चाैक से पुलिस लाइन राेड व घूरन पीर बाबा राेड में ताे वन-वे के चलते जाम नहीं था, पर इसके बाद के लगभग सभी इलाकाें में जाम की स्थिति बनी रही। इशाकचक विषहरी स्थान रोड में नगर निगम चौक से पोस्ट ऑफिस जाने में बाइक से करीब तीन मिनट का समय लगता है। लेकिन जाम की वजह करीब बीस मिनट लग जाता है। इस वजह से कई बार तो एंबुलेंस से जा रहे मरीजों को भी इन जाम का शिकार बनना पर जाता है। घंटाघर चाैक के पास दाे तरफ से बांस से बैरिकेडिंग कर राेड बनाया जा रहा है। इस वजह से वहां की सड़काें की चाैड़ाई कम हाे गयी है और वहां वन-वे नहीं किया। नतीजतन वहां सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई बाइक सवार राेड से गुजरने के दाैरान खाेदे गए गड्ढ़े में भी गिर जाते है। वहीं स्मार्ट सिटी के सीजीएम संदीप कुमार का कहना है कि जबतक निर्माण हाेगा, तब तक के लिए वहां बैरिकेडिंग ताे हमलाेग करवा दिए हैं। निर्माण भी तेजी से हाे रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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IND vs ENG ICC World Cup 2019 India vs England: आईसीसी विश्व कप में टीम इंडिया के तीन लीग मैच बचे हैं। इसके अलावा टीम का सेमीफाइनल में पहुंचना भी लगभग तय माना जा रहा है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज डीन जोन्स ने महेंद्र सिंह धौनी (MS Dhoni) के बैटिंग ऑर्डर को लेकर खास सलाह दी है। जोंस की माने तो धौनी को बचे हुए बाकी मैचों में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करने उतरना चाहिए।
जोंस ने कहा कि इस बैटिंग ऑर्डर पर खेलने के लिए विजय शंकर बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं और साथ ही जोंस ने रवींद्र जडेजा को भी खिलाए जाने की वकालत की। जोंस का कहना है कि ऐसे में जबकि इंग्लैंड की पिचें अब धीमी होती जा रही हैं, एक स्पिनर के तौर पर जडेजा भारत के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे। जोंस ने कहा, 'टीम जब जीत रही हो तो मैं आम तौर पर इसके साथ छेड़खानी नहीं चाहता लेकिन नम्बर-4 पर खेलने को लेकर मेरी कुछ चिंताएं हैं। मेरा मानना है कि धौनी इस जगह पर खेलने के लिए सबसे उपयुक्त हैं और साथ ही भारत को जडेजा को भी खिलाना चाहिए क्योंकि धीमी पिचों पर एक अतिरिक्त स्पिनर ऑब्शन भारत के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। '
जोंस की तरह भारत के उप-कप्तान रोहित शर्मा ने भी कहा था कि नम्बर-4 पर धौनी को ही खेलना चाहिए क्योंकि इस विकेटकीपर बल्लेबाज के लिए ये स्थान बिल्कुल उपयुक्त है। ऑलराउंडर इरफान पठान हालांकि मानते हैं कि विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को भी प्लेइंग XI में शामिल किया जाना चाहिए और उन्हें नम्बर-4 पर आजमाना चाहिए।
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IND vs ENG ICC World Cup दो हज़ार उन्नीस India vs England: आईसीसी विश्व कप में टीम इंडिया के तीन लीग मैच बचे हैं। इसके अलावा टीम का सेमीफाइनल में पहुंचना भी लगभग तय माना जा रहा है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज डीन जोन्स ने महेंद्र सिंह धौनी के बैटिंग ऑर्डर को लेकर खास सलाह दी है। जोंस की माने तो धौनी को बचे हुए बाकी मैचों में नंबर-चार पर बल्लेबाजी करने उतरना चाहिए। जोंस ने कहा कि इस बैटिंग ऑर्डर पर खेलने के लिए विजय शंकर बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं और साथ ही जोंस ने रवींद्र जडेजा को भी खिलाए जाने की वकालत की। जोंस का कहना है कि ऐसे में जबकि इंग्लैंड की पिचें अब धीमी होती जा रही हैं, एक स्पिनर के तौर पर जडेजा भारत के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे। जोंस ने कहा, 'टीम जब जीत रही हो तो मैं आम तौर पर इसके साथ छेड़खानी नहीं चाहता लेकिन नम्बर-चार पर खेलने को लेकर मेरी कुछ चिंताएं हैं। मेरा मानना है कि धौनी इस जगह पर खेलने के लिए सबसे उपयुक्त हैं और साथ ही भारत को जडेजा को भी खिलाना चाहिए क्योंकि धीमी पिचों पर एक अतिरिक्त स्पिनर ऑब्शन भारत के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। ' जोंस की तरह भारत के उप-कप्तान रोहित शर्मा ने भी कहा था कि नम्बर-चार पर धौनी को ही खेलना चाहिए क्योंकि इस विकेटकीपर बल्लेबाज के लिए ये स्थान बिल्कुल उपयुक्त है। ऑलराउंडर इरफान पठान हालांकि मानते हैं कि विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को भी प्लेइंग XI में शामिल किया जाना चाहिए और उन्हें नम्बर-चार पर आजमाना चाहिए।
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Japan Village: गांव में पुतले स्कूल जाने के साथ-साथ गली-मोहल्ले में भी दीखते हैं। वहां के हर बाजारों में पुतले मौजूद रहते हैं। इसकी सुरवात इस गांव की रहने वाली महिला अयानो सुकिमी ने की थी। उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के कपड़े पहनाकर एक पुतला बनाया था.
Japan Nagoro Village: जापान का एक ऐसा गांव जहां बुजुर्गों की जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से गांवों में रहने वाला कोई नहीं बचा जिसकी वजह से गांव में गुड़िया या पुतले ही दिखाई देते हैं। जहां जापान अपनी तारीकी में सभी देशों से बहुत आगे हैं। उसी के एक गांव नागोरो में ऐसा हो रहा है। कहा जाता है कि इस गांव में 18 साल से कोई भी बच्चा पैदा नहीं हुआ है। यहां युवाओं की जनसंख्या का करीब-करीब खत्म हो जाना, जो गांव एक वक्त 300 लोगों से आबाद था, वहां आज सिर्फ पुतले ही पुतले दिखते हैं। यह पुतले उन्होंने इसलिए बनाए है। क्योंकि वहां रहने वालों लोगों को अकेला लगता है। उनकी तन्हाई को कम करने के लिए वह पुतले और गुड़ियां रखते हैं।
गांव में पुतले स्कूल जाने के साथ-साथ गली-मोहल्ले में भी दीखते हैं। वहां के हर बाजारों में पुतले मौजूद रहते हैं। इसकी सुरवात इस गांव की रहने वाली महिला अयानो सुकिमी ने की थी। उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के कपड़े पहनाकर एक पुतला बनाया था. ये सिर्फ शौक के लिए था. गांव को गुड़ियों से भरने की पहले तो उनकी कोई योजना नहीं थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस शौक के अपना मिशन बना लिया, जिसके बाद गांव में इंसानों से ज्यादा पुतले दीखते हैं। जापान में इन पुतलों को बिजूका कहा जाता है।
गांव में स्कूल भी है लेकिन उन्हें पहले बंद कर दिया था, क्योंकि गांव में कोई बच्चा नहीं था, लेकिन अब उन स्कूलों को खोल दिया है। क्योंकि बच्चों की जगह अब स्कूल में पुतले बिठाए हुए है और टीचर की जगह बिजूका है। जो उन्हें शिक्षा देते हैं। अयानो सुकिमी ने लकड़ी, अखबार और कपड़ों का इस्तेमाल करके बिजूका बनाई हैं और उन्हें इंसानों की तरह कपड़े पहनाकर प्रॉपर ह्यूमन टच अप दिया है। इस गांव को ज्यादातर पुतलों का गांव कहा जाता है। यह गांव बहुत ज्यादा फेमस भी हो चूका है।
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Japan Village: गांव में पुतले स्कूल जाने के साथ-साथ गली-मोहल्ले में भी दीखते हैं। वहां के हर बाजारों में पुतले मौजूद रहते हैं। इसकी सुरवात इस गांव की रहने वाली महिला अयानो सुकिमी ने की थी। उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के कपड़े पहनाकर एक पुतला बनाया था. Japan Nagoro Village: जापान का एक ऐसा गांव जहां बुजुर्गों की जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से गांवों में रहने वाला कोई नहीं बचा जिसकी वजह से गांव में गुड़िया या पुतले ही दिखाई देते हैं। जहां जापान अपनी तारीकी में सभी देशों से बहुत आगे हैं। उसी के एक गांव नागोरो में ऐसा हो रहा है। कहा जाता है कि इस गांव में अट्ठारह साल से कोई भी बच्चा पैदा नहीं हुआ है। यहां युवाओं की जनसंख्या का करीब-करीब खत्म हो जाना, जो गांव एक वक्त तीन सौ लोगों से आबाद था, वहां आज सिर्फ पुतले ही पुतले दिखते हैं। यह पुतले उन्होंने इसलिए बनाए है। क्योंकि वहां रहने वालों लोगों को अकेला लगता है। उनकी तन्हाई को कम करने के लिए वह पुतले और गुड़ियां रखते हैं। गांव में पुतले स्कूल जाने के साथ-साथ गली-मोहल्ले में भी दीखते हैं। वहां के हर बाजारों में पुतले मौजूद रहते हैं। इसकी सुरवात इस गांव की रहने वाली महिला अयानो सुकिमी ने की थी। उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के कपड़े पहनाकर एक पुतला बनाया था. ये सिर्फ शौक के लिए था. गांव को गुड़ियों से भरने की पहले तो उनकी कोई योजना नहीं थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस शौक के अपना मिशन बना लिया, जिसके बाद गांव में इंसानों से ज्यादा पुतले दीखते हैं। जापान में इन पुतलों को बिजूका कहा जाता है। गांव में स्कूल भी है लेकिन उन्हें पहले बंद कर दिया था, क्योंकि गांव में कोई बच्चा नहीं था, लेकिन अब उन स्कूलों को खोल दिया है। क्योंकि बच्चों की जगह अब स्कूल में पुतले बिठाए हुए है और टीचर की जगह बिजूका है। जो उन्हें शिक्षा देते हैं। अयानो सुकिमी ने लकड़ी, अखबार और कपड़ों का इस्तेमाल करके बिजूका बनाई हैं और उन्हें इंसानों की तरह कपड़े पहनाकर प्रॉपर ह्यूमन टच अप दिया है। इस गांव को ज्यादातर पुतलों का गांव कहा जाता है। यह गांव बहुत ज्यादा फेमस भी हो चूका है।
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KBC 14 Play Along 28 October, Kaun Banega Crorepati 14, Episode 61: नासा का अंतरिक्ष अभियान डीप ऐट्मोस्फियर वीनस इन्वेस्टीगेशन ऑफ नोबल गैसेस, केमेस्ट्री, एंड इमेंजिग किस रूप में अधिक प्रसिद्ध एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है?
ऑप्शनः
नासा का अंतरिक्ष अभियान डीप ऐट्मोस्फियर वीनस इन्वेस्टीगेशन ऑफ नोबल गैसेस, केमेस्ट्री, एंड इमेंजिग चित्रकार रूप में अधिक प्रसिद्ध एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है. इसका नाम Davinci है. Leonardo da Vinci एक महान चित्रकार थे. वह अपनी नाटकीय और अभिव्यंजक कलाकृति के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, लियोनार्डो ने दर्जनों सावधानीपूर्वक सोचे-समझे प्रयोग भी किए और भविष्य के आविष्कारों का निर्माण किया जो उस समय के लिए महत्वपूर्ण थे. उनकी तेज नजर और तेज दिमाग ने उन्हें महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज करने के लिए प्रेरित किया, फिर भी उन्होंने अपने विचारों को कभी प्रकाशित नहीं किया.
कौन बनेगा करोड़पति 14 (Kaun Banega Crorepati 14) में शुक्रवार के केबीसी प्ले अलाॅन्ग स्पेशल एपिसोड (KBC Play Along Special Episode) में राहुल नायर (Rahul Nair) नाम के कंटेस्टेंट हाॅट सीट पर आए थे. उन्होंने अपने ज्ञान के जरिए 6 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि जीती. वह 12 लाख 50 हजार रुपये के कठिन सवाल पर जाकर अटक गए थे. उनकी सभी लाइफलाइन भी खत्म हो गई थी जिसके चलते उन्होंने गेम को छोड़ने का फैसला लिया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऊपर दिए गए सवाल का सही जवाब 'चित्रकार' है.
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति 14 को अगर आप मुफ्त में देखना चाहते हैं तो आप जिओ टीवी ऐप पर जाकर देख सकते हैं. इसके अलावा सोनी टीवी चैनल पर भी इसे देख सकते हैं. ये शो सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे से प्रसारित होता है.
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KBC चौदह Play Along अट्ठाईस अक्टूबरober, Kaun Banega Crorepati चौदह, Episode इकसठ: नासा का अंतरिक्ष अभियान डीप ऐट्मोस्फियर वीनस इन्वेस्टीगेशन ऑफ नोबल गैसेस, केमेस्ट्री, एंड इमेंजिग किस रूप में अधिक प्रसिद्ध एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है? ऑप्शनः नासा का अंतरिक्ष अभियान डीप ऐट्मोस्फियर वीनस इन्वेस्टीगेशन ऑफ नोबल गैसेस, केमेस्ट्री, एंड इमेंजिग चित्रकार रूप में अधिक प्रसिद्ध एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है. इसका नाम Davinci है. Leonardo da Vinci एक महान चित्रकार थे. वह अपनी नाटकीय और अभिव्यंजक कलाकृति के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, लियोनार्डो ने दर्जनों सावधानीपूर्वक सोचे-समझे प्रयोग भी किए और भविष्य के आविष्कारों का निर्माण किया जो उस समय के लिए महत्वपूर्ण थे. उनकी तेज नजर और तेज दिमाग ने उन्हें महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज करने के लिए प्रेरित किया, फिर भी उन्होंने अपने विचारों को कभी प्रकाशित नहीं किया. कौन बनेगा करोड़पति चौदह में शुक्रवार के केबीसी प्ले अलाॅन्ग स्पेशल एपिसोड में राहुल नायर नाम के कंटेस्टेंट हाॅट सीट पर आए थे. उन्होंने अपने ज्ञान के जरिए छः लाख चालीस हजार रुपये की धनराशि जीती. वह बारह लाख पचास हजार रुपये के कठिन सवाल पर जाकर अटक गए थे. उनकी सभी लाइफलाइन भी खत्म हो गई थी जिसके चलते उन्होंने गेम को छोड़ने का फैसला लिया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऊपर दिए गए सवाल का सही जवाब 'चित्रकार' है. सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति चौदह को अगर आप मुफ्त में देखना चाहते हैं तो आप जिओ टीवी ऐप पर जाकर देख सकते हैं. इसके अलावा सोनी टीवी चैनल पर भी इसे देख सकते हैं. ये शो सोमवार से शुक्रवार रात नौ बजे से प्रसारित होता है.
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TCDD एंटरप्राइज के जनरल डायरेक्टरेट ने बताया कि खरपतवार से निपटने के दायरे में Sivas-Kayseri स्टेशनों के बीच छिड़काव किया जाएगा।
01 जून 2020 से 05 जून 2020 के बीच तुर्की के राज्य रेलवे (TCDD) महानिदेशालय द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान के अनुसार; लाइन मार्ग पर सिवास-काइसेरी स्टेशनों और स्टेशन क्षेत्रों के बीच खरपतवार नियंत्रण के दायरे में कीटाणुशोधन किया जाएगा।
संघर्ष में उपयोग की जाने वाली दवाएं मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करती हैं क्योंकि उनके पास एक प्रभावशाली विशेषता है। निर्दिष्ट रेलवे लाइन खंडों वाले स्टेशनों के आसपास नागरिकों को सावधान रहना चाहिए। रेलवे मार्ग और आस-पास की भूमि पर छिड़काव की तारीख से दस दिनों के लिए; यह महत्वपूर्ण रूप से घोषणा की जाती है कि नागरिक छिड़काव वाले क्षेत्र से संपर्क नहीं करते हैं, वे अपने जानवरों को निर्दिष्ट स्थानों पर नहीं चरते हैं और घास नहीं काटते हैं।
01 जून 2020 - 05 जून 2020 को इस बीच सिवास-कयारी लाइन क्रॉसिंग और स्टेशन स्थलों पर छिड़काव किया जाएगा।
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TCDD एंटरप्राइज के जनरल डायरेक्टरेट ने बताया कि खरपतवार से निपटने के दायरे में Sivas-Kayseri स्टेशनों के बीच छिड़काव किया जाएगा। एक जून दो हज़ार बीस से पाँच जून दो हज़ार बीस के बीच तुर्की के राज्य रेलवे महानिदेशालय द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान के अनुसार; लाइन मार्ग पर सिवास-काइसेरी स्टेशनों और स्टेशन क्षेत्रों के बीच खरपतवार नियंत्रण के दायरे में कीटाणुशोधन किया जाएगा। संघर्ष में उपयोग की जाने वाली दवाएं मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करती हैं क्योंकि उनके पास एक प्रभावशाली विशेषता है। निर्दिष्ट रेलवे लाइन खंडों वाले स्टेशनों के आसपास नागरिकों को सावधान रहना चाहिए। रेलवे मार्ग और आस-पास की भूमि पर छिड़काव की तारीख से दस दिनों के लिए; यह महत्वपूर्ण रूप से घोषणा की जाती है कि नागरिक छिड़काव वाले क्षेत्र से संपर्क नहीं करते हैं, वे अपने जानवरों को निर्दिष्ट स्थानों पर नहीं चरते हैं और घास नहीं काटते हैं। एक जून दो हज़ार बीस - पाँच जून दो हज़ार बीस को इस बीच सिवास-कयारी लाइन क्रॉसिंग और स्टेशन स्थलों पर छिड़काव किया जाएगा।
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जो रेडियो-प्रसारणकेन्द्र, १,००० किलो- साइकिल प्रति सैकण्ड ( याच क्र, प्रति सैकण्ड, १००० बार ) की आवृत्ति से लेस होता है उसकी तरंग ३०० मीटर लम्बी होती है। समुद्र में नौ-चालन के काम आने वाले रेडार सेट की तरंग लम्बाई १० सेंटीमीटर के लगभग या ४ इंच के लगभग होती है । ( एक सेंटीमीटर एक मीटर का १/१०० होता है ) ।
दृश्य स्पेक्ट्रम तथा अवरक्त
विकिरण-ऊर्जा, मानव नेत्र को सिर्फ तब दीखने लगती है जब यह ०.००००००७५ मीटर की तरंग लम्बाई तक पहुंच जाती है । इस अवस्था में यह लाल रंग के रूप में दीखती है। प्रकाश की तरंग लम्बाइयों को नापने के लिए मीटर को मात्रक बनाने में कठिनाई रहती है अतः भौतिको वैज्ञानिक एंगस्ट्रम मात्रक का उपयोग करते हैं । इसका संक्षिप्त रूप है Å ( एं) । एक एंगस्ट्रम बराबर होता है १/१०,०००,०००,००० मीटर के । अतः हम कह सकते हैं कि दृश्य स्पेक्ट्रम का सीमान्तर ७,५०० एं ( गहरालाल ) से ४,००० एं या नीले तक है । इस के बीच में जो प्रदेश पड़ते हैं वे हैं नारंगी (लगभग ६,०००एं ), पीला ( लगभग ५,९०० एं) तथा हरा ( लगभग ५,३०० एं) ।
इस दृश्य स्पेक्ट्रम की सीमा बंधती है अवरक्त की दीर्घतर तरंगों द्वारा जिन्हें हम ऊष्मा के रूप में अनुभव करते हैं । उदाहरण के लिए, जैट इंजन के रेचन की तरंग लम्बाई ४०,000 एं होती है जब कि मानव शरीर की ऊष्मा की तरंग लम्बाई लगभग ९९,००० एं होती है ।
धूप-धूसरणों से लेकर अंतरिक्षकिरणों तक
स्पेक्ट्रम के छोटी तरंग लम्बाई वाले या नीले सिरे की सीमा पराबैंगनी प्रदेश द्वारा बंधी होती है। धूप द्वारा त्वचा को पीला-लाल सा कर देने वाली पराबैंगनी किरणों की तरंग लम्बाई ३,००० एं के लगभग होती है । एक्सकिरणें इससे भी छोटी (१५० से १० एं तक ) तथा गामा किरणें उन से भी छोटी (१.४ से ० १ एं तक) होती हैं । गामा किरणें, न्यूक्लीय क्रिया की सहचारी
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जो रेडियो-प्रसारणकेन्द्र, एक,शून्य किलो- साइकिल प्रति सैकण्ड की आवृत्ति से लेस होता है उसकी तरंग तीन सौ मीटर लम्बी होती है। समुद्र में नौ-चालन के काम आने वाले रेडार सेट की तरंग लम्बाई दस सेंटीमीटर के लगभग या चार इंच के लगभग होती है । । दृश्य स्पेक्ट्रम तथा अवरक्त विकिरण-ऊर्जा, मानव नेत्र को सिर्फ तब दीखने लगती है जब यह शून्य दशमलव पचहत्तर मीटर की तरंग लम्बाई तक पहुंच जाती है । इस अवस्था में यह लाल रंग के रूप में दीखती है। प्रकाश की तरंग लम्बाइयों को नापने के लिए मीटर को मात्रक बनाने में कठिनाई रहती है अतः भौतिको वैज्ञानिक एंगस्ट्रम मात्रक का उपयोग करते हैं । इसका संक्षिप्त रूप है Å । एक एंगस्ट्रम बराबर होता है एक/दस,शून्य,शून्य,शून्य मीटर के । अतः हम कह सकते हैं कि दृश्य स्पेक्ट्रम का सीमान्तर सात,पाँच सौ एं से चार,शून्य एं या नीले तक है । इस के बीच में जो प्रदेश पड़ते हैं वे हैं नारंगी , पीला तथा हरा । इस दृश्य स्पेक्ट्रम की सीमा बंधती है अवरक्त की दीर्घतर तरंगों द्वारा जिन्हें हम ऊष्मा के रूप में अनुभव करते हैं । उदाहरण के लिए, जैट इंजन के रेचन की तरंग लम्बाई चालीस,शून्य एं होती है जब कि मानव शरीर की ऊष्मा की तरंग लम्बाई लगभग निन्यानवे,शून्य एं होती है । धूप-धूसरणों से लेकर अंतरिक्षकिरणों तक स्पेक्ट्रम के छोटी तरंग लम्बाई वाले या नीले सिरे की सीमा पराबैंगनी प्रदेश द्वारा बंधी होती है। धूप द्वारा त्वचा को पीला-लाल सा कर देने वाली पराबैंगनी किरणों की तरंग लम्बाई तीन,शून्य एं के लगभग होती है । एक्सकिरणें इससे भी छोटी तथा गामा किरणें उन से भी छोटी होती हैं । गामा किरणें, न्यूक्लीय क्रिया की सहचारी
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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रायपुर : माघ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि नवमी शनिवार का दिन है । नवमी तिथि सुबह 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। उसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इसके साथ ही शाम 4 बजकर 37 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। इसके अलावा शाम 5 बजकर 18 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। साथ ही शाम 7 बजकर 21 मिनट से रविवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक स्वर्ग लोक की भद्रा रहेगी। इसके अलावा मुकदमा दायर करने या अपनी बात रखने के योग यानि यायीजयद योग सूर्योदय से सुबह 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
मेष राशिः आज काम का बोझ अधिक हो सकता है, लेकिन आप किसी काम के लिए जितना ज्यादा प्रयास करेंगे, काम उतना ही बेहतर तरीके से होगा। आज किसी अनुभवी की राय आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहेगा। कारोबार में आपको फायदा हो सकता है, लेकिन आपको अपने खर्चों पर कंट्रोल बनाकर रखना चाहिए। कुछ निजी परेशानियों में आप उलझ सकते हैं। जीवनसाथी के साथ अपने रिश्तों को लेकर आप ज्यादा ही भावुक हो सकते हैं। विवाह में आ रही दिक्कत दूर होगी। रहेगा।
वृष राशिः आज आपका सोचा हुआ काम पूरा हो सकता है। आसपास के लोगों से आपको सहयोग मिल सकता है। ऑफिस में आपको किसी नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक समस्यायें खत्म होंगी। आपको माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपकी किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। आज आप कोई बड़ा काम कर सकते हैं। इससे आपको फायदा भी जरूर होगा। रोजमर्रा के काम समय पर पूरे हो सकते हैं। नए व्यक्ति से मुलाकात होने के योग बन रहे हैं। आपके काम से जीवनसाथी प्रसन्न हो सकते हैं।
मिथुन राशिः आज आप करियर में आप नए आयाम स्थापित करेंगे। आप जिस किसी काम को करने का प्रयास करेंगे, उस काम में आपको अच्छी कामयाबी मिलेगी। ऑफिस में काम को पूरा करने में पूरी तरह से आप सक्षम होंगे। इस राशि के लॉ की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन बहुत बढ़िया रहेगा। आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। आपका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। आपको यात्रा से लाभ होगा। परिवार में सभी सदस्यों के साथ आपसी सामंजस्य बना रहेगा। आध्यात्म की तरफ आपका रुझान अधिक रहेगा।
कर्क राशिः आज आप जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने में सफल हो सकते हैं। कारोबारियों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं। नए कार्य प्रारंभ करने का मन बन सकता है। अगर आप कला के क्षेत्र से जुड़े हैं, तो आपको तरक्की के कई नये रास्ते खुले नजर आएंगे। इस राशि के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन फेवरेबल है। आपको किसी समस्या को सुलझाने का तुरंत रास्ता मिल सकता है आज आप घर के लिए कुछ नया सामान खरीद सकते हैं। आप जीवनसाथी की मदद कर सकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे।
सिंह राशिः आज आपको किस्मत का पूरा-पूरा साथ मिलेगा। आय के नए स्रोत सामने आयेंगे। ऑफिस का काम रोज की तुलना में बेहतर तरीके से होगा। आज जीवनसाथी आपकी बहुत तारीफ करेगा। इससे आप दोनों के बीच नजदीकियां बढेंगी। शाम को मेहमानों के आने से घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। आपके धन-संपत्ति में वृद्धि होगी। खर्चे भी नियंत्रण में रहेंगे। आप खुद को सेहतमंद महसूस करेंगे। आज आपको अपनी मेहनत का फल अवश्य मिलेगा। लंबे समय से रूके हुए काम पूरें होंगे।
कन्या राशिः आज आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। करियर में आपको सफलता मिल सकती है। नौकरी के क्षेत्र में आपको सफलता मिल सकती है। आपके साथ सब अच्छा होगा आज आपको अपने काम को टालने से बचना चाहिए। समय से काम पूरा कर लेना बेहतर रहेगा। आप किसी पारिवारिक समारोह में जा सकते हैं। वहां आपको देखकर कुछ लोग खुश होंगे। सीनियर्स आपके काम से खुश हो सकते हैं। आपके सेहत में थोड़ी गिरावट हो सकती है।
तुला राशिः आज आपको तनाव से मुक्ति मिल सकती है, जिससे आप काफी राहत महसूस करेंगे। रोजगार पाने में लोगों की मदद आपको मिलती रहेगी। परिवार वालों के साथ आप खुशियों के पल बिता सकते हैं। प्रेम-संबंधों में मजबूती आयेगी। इस राशि के विद्यार्थियों की अध्ययन के प्रति रूचि बढ़ सकती है। आपको कुछ नए मौके मिलने की संभावना है। आपके भौतिक सुख-साधनों में बढ़ोतरी होगी। बिजनेस के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। आपकी यात्रा लाभदायक रहेगी।
वृश्चिक राशिः आज आपको कोई महत्वपूर्ण समाचार मिलेगा। कारोबार में कुछ नए लोग आपसे जुड़ सकते हैं। किसी महिला मित्र का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक पक्ष पहले से बेहतर रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर सामने आएंगे। सोचे हुए कुछ जरूरी काम पूरे होंगे। आप बड़े ही खुश नजर आयेंगे। तकनीकी क्षेत्र के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन फेवरेबल है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में जीत हासिल होगी। आपके मान-प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी। सेहत अच्छी रहेगी।
धनु राशिः आज किस्मत का सहयोग मिलेगा। आपको नए लोगों से थोड़ा संभलकर रहना चाहिए। बिजनेस में विरोधियों से आपको बचकर रहना चाहिए। ऑफिस में सीनियर आपके काम से खुश होकर आपको कुछ गिफ्ट कर सकते हैं। किसी भी काम को करने से पहले बड़ों की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। बच्चे पढ़ाई के प्रति कुछ कम रूचि लेंगे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खुद को फिट रखने के लिए आपको व्यायाम करना चाहिए। जीवनसाथी आपकी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करेंगे।
मकर राशिः आज कार्यक्षेत्र में सीनियर्स का सहयोग मिलेगा। किसी काम में ज्यादा मेहनत और समय लग सकता है। आप रिश्तों में सुधार लाने की कोशिश कर सकते हैं। आज आपको कोई भी फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए, बेहतर रहेगा। आज बच्चे पार्क में खेलने जा सकते हैं। माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार आयेगा। आपका पैसा कहीं अटक सकता है। बढ़ता खर्च आपको थोड़ा परेशान कर सकता है। जीवनसाथी के साथ कहीं हील स्टेशन पर घूमने की प्लांनिग कर सकते हैं। परिवार वालों का सहयोग मिलता रहेगा।
कुंभ राशिः आज आपके व्यक्तित्व में निखार आ सकता है। व्यापारी वर्ग को अचानक से कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है। आप अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव ला सकते हैं। आपका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। करोबार में आ रही परेशानिया खत्म होंगी। आपको रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। आप धार्मिक कार्यों में रूचि ले सकते हैं। घर पर अचानक मेहमान आ सकते हैं। जीवनसाथी के सहयोग से काम पूरा हो सकता है। आपका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। आप परिवार वालों के साथ मनोरंजन के लिए किसी ट्रिप पर जाने का प्लान बना सकते हैं।
मीन राशिः आज भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आप नये कदम उठायेंगे। आपकी मेहनत रंग लायेगी। कारोबार में आपको लाभ ही लाभ होगा। शैक्षणिक कार्यों में आपका मन लगेगा। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। घरेलू काम को निपटाने में आप सफल रहेंगे। आपको अचानक धन लाभ होगा। कई योजनाएँ समय से पूरे हो जायेंगे। परिवार में ख़ुशी का माहौल बना रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपको अच्छी-खासी सफलता मिलेगी। अपनी उर्जा से आप बहुत कुछ हासिल कर लेंगे। आपके मन की इच्छा पूरी होगी। बच्चें अपने दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करेंगे , उन्हें सफलता भी मिलेगी।
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रायपुर : माघ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि नवमी शनिवार का दिन है । नवमी तिथि सुबह आठ बजकर चौदह मिनट तक रहेगी। उसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इसके साथ ही शाम चार बजकर सैंतीस मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। इसके अलावा शाम पाँच बजकर अट्ठारह मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। साथ ही शाम सात बजकर इक्कीस मिनट से रविवार सुबह छः बजकर सत्ताईस मिनट तक स्वर्ग लोक की भद्रा रहेगी। इसके अलावा मुकदमा दायर करने या अपनी बात रखने के योग यानि यायीजयद योग सूर्योदय से सुबह आठ बजकर चौदह मिनट तक रहेगा। मेष राशिः आज काम का बोझ अधिक हो सकता है, लेकिन आप किसी काम के लिए जितना ज्यादा प्रयास करेंगे, काम उतना ही बेहतर तरीके से होगा। आज किसी अनुभवी की राय आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहेगा। कारोबार में आपको फायदा हो सकता है, लेकिन आपको अपने खर्चों पर कंट्रोल बनाकर रखना चाहिए। कुछ निजी परेशानियों में आप उलझ सकते हैं। जीवनसाथी के साथ अपने रिश्तों को लेकर आप ज्यादा ही भावुक हो सकते हैं। विवाह में आ रही दिक्कत दूर होगी। रहेगा। वृष राशिः आज आपका सोचा हुआ काम पूरा हो सकता है। आसपास के लोगों से आपको सहयोग मिल सकता है। ऑफिस में आपको किसी नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक समस्यायें खत्म होंगी। आपको माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपकी किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। आज आप कोई बड़ा काम कर सकते हैं। इससे आपको फायदा भी जरूर होगा। रोजमर्रा के काम समय पर पूरे हो सकते हैं। नए व्यक्ति से मुलाकात होने के योग बन रहे हैं। आपके काम से जीवनसाथी प्रसन्न हो सकते हैं। मिथुन राशिः आज आप करियर में आप नए आयाम स्थापित करेंगे। आप जिस किसी काम को करने का प्रयास करेंगे, उस काम में आपको अच्छी कामयाबी मिलेगी। ऑफिस में काम को पूरा करने में पूरी तरह से आप सक्षम होंगे। इस राशि के लॉ की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन बहुत बढ़िया रहेगा। आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। आपका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। आपको यात्रा से लाभ होगा। परिवार में सभी सदस्यों के साथ आपसी सामंजस्य बना रहेगा। आध्यात्म की तरफ आपका रुझान अधिक रहेगा। कर्क राशिः आज आप जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने में सफल हो सकते हैं। कारोबारियों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं। नए कार्य प्रारंभ करने का मन बन सकता है। अगर आप कला के क्षेत्र से जुड़े हैं, तो आपको तरक्की के कई नये रास्ते खुले नजर आएंगे। इस राशि के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन फेवरेबल है। आपको किसी समस्या को सुलझाने का तुरंत रास्ता मिल सकता है आज आप घर के लिए कुछ नया सामान खरीद सकते हैं। आप जीवनसाथी की मदद कर सकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। सिंह राशिः आज आपको किस्मत का पूरा-पूरा साथ मिलेगा। आय के नए स्रोत सामने आयेंगे। ऑफिस का काम रोज की तुलना में बेहतर तरीके से होगा। आज जीवनसाथी आपकी बहुत तारीफ करेगा। इससे आप दोनों के बीच नजदीकियां बढेंगी। शाम को मेहमानों के आने से घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। आपके धन-संपत्ति में वृद्धि होगी। खर्चे भी नियंत्रण में रहेंगे। आप खुद को सेहतमंद महसूस करेंगे। आज आपको अपनी मेहनत का फल अवश्य मिलेगा। लंबे समय से रूके हुए काम पूरें होंगे। कन्या राशिः आज आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। करियर में आपको सफलता मिल सकती है। नौकरी के क्षेत्र में आपको सफलता मिल सकती है। आपके साथ सब अच्छा होगा आज आपको अपने काम को टालने से बचना चाहिए। समय से काम पूरा कर लेना बेहतर रहेगा। आप किसी पारिवारिक समारोह में जा सकते हैं। वहां आपको देखकर कुछ लोग खुश होंगे। सीनियर्स आपके काम से खुश हो सकते हैं। आपके सेहत में थोड़ी गिरावट हो सकती है। तुला राशिः आज आपको तनाव से मुक्ति मिल सकती है, जिससे आप काफी राहत महसूस करेंगे। रोजगार पाने में लोगों की मदद आपको मिलती रहेगी। परिवार वालों के साथ आप खुशियों के पल बिता सकते हैं। प्रेम-संबंधों में मजबूती आयेगी। इस राशि के विद्यार्थियों की अध्ययन के प्रति रूचि बढ़ सकती है। आपको कुछ नए मौके मिलने की संभावना है। आपके भौतिक सुख-साधनों में बढ़ोतरी होगी। बिजनेस के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। आपकी यात्रा लाभदायक रहेगी। वृश्चिक राशिः आज आपको कोई महत्वपूर्ण समाचार मिलेगा। कारोबार में कुछ नए लोग आपसे जुड़ सकते हैं। किसी महिला मित्र का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक पक्ष पहले से बेहतर रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर सामने आएंगे। सोचे हुए कुछ जरूरी काम पूरे होंगे। आप बड़े ही खुश नजर आयेंगे। तकनीकी क्षेत्र के स्टूडेंट्स के लिए आज का दिन फेवरेबल है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में जीत हासिल होगी। आपके मान-प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी। सेहत अच्छी रहेगी। धनु राशिः आज किस्मत का सहयोग मिलेगा। आपको नए लोगों से थोड़ा संभलकर रहना चाहिए। बिजनेस में विरोधियों से आपको बचकर रहना चाहिए। ऑफिस में सीनियर आपके काम से खुश होकर आपको कुछ गिफ्ट कर सकते हैं। किसी भी काम को करने से पहले बड़ों की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। बच्चे पढ़ाई के प्रति कुछ कम रूचि लेंगे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खुद को फिट रखने के लिए आपको व्यायाम करना चाहिए। जीवनसाथी आपकी इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करेंगे। मकर राशिः आज कार्यक्षेत्र में सीनियर्स का सहयोग मिलेगा। किसी काम में ज्यादा मेहनत और समय लग सकता है। आप रिश्तों में सुधार लाने की कोशिश कर सकते हैं। आज आपको कोई भी फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए, बेहतर रहेगा। आज बच्चे पार्क में खेलने जा सकते हैं। माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार आयेगा। आपका पैसा कहीं अटक सकता है। बढ़ता खर्च आपको थोड़ा परेशान कर सकता है। जीवनसाथी के साथ कहीं हील स्टेशन पर घूमने की प्लांनिग कर सकते हैं। परिवार वालों का सहयोग मिलता रहेगा। कुंभ राशिः आज आपके व्यक्तित्व में निखार आ सकता है। व्यापारी वर्ग को अचानक से कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है। आप अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव ला सकते हैं। आपका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। करोबार में आ रही परेशानिया खत्म होंगी। आपको रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। आप धार्मिक कार्यों में रूचि ले सकते हैं। घर पर अचानक मेहमान आ सकते हैं। जीवनसाथी के सहयोग से काम पूरा हो सकता है। आपका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। आप परिवार वालों के साथ मनोरंजन के लिए किसी ट्रिप पर जाने का प्लान बना सकते हैं। मीन राशिः आज भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आप नये कदम उठायेंगे। आपकी मेहनत रंग लायेगी। कारोबार में आपको लाभ ही लाभ होगा। शैक्षणिक कार्यों में आपका मन लगेगा। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। घरेलू काम को निपटाने में आप सफल रहेंगे। आपको अचानक धन लाभ होगा। कई योजनाएँ समय से पूरे हो जायेंगे। परिवार में ख़ुशी का माहौल बना रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपको अच्छी-खासी सफलता मिलेगी। अपनी उर्जा से आप बहुत कुछ हासिल कर लेंगे। आपके मन की इच्छा पूरी होगी। बच्चें अपने दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करेंगे , उन्हें सफलता भी मिलेगी।
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पिंपरीः कंटेनर द्वारा टक्कर मार दिए जाने से हुए हादसे (Road Accident) में एक वारकरी की मौत (Warkari Death) हो गई, जबकि अन्य तीन लोग घायल हुए हैं। सोमवार की दोपहर चार बजे के करीब पिंपरी-चिंचवड़ (Pimpri-Chinchwad) के चिखली (Chikhli ) में हुए इस हादसे में पुलिस ने कंटेनर चालक (Container Driver) को गिरफ्तार (Arrested) कर लिया है।
इस हादसे में मरनेवाले वारकरी की पहचान भगवान घुगे (निवासी देऊलगांवराजा, बुलढाणा) के रूप में हुई है। उनके साथ बबन जायभाई पुंजाबाई, साहेबराव हुसे, भिकाजी बनसोडे ये तीन लोग घायल हो गए हैं। देहूरोड पुलिस ने जगन्नाथ मुंडे (42) नामक कंटेनर चालक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में भास्कर जायभावे (41) ने देहूरोड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बताया कि वादी बुलढाणा निवासी अन्य वारकरियों के साथ पैदल जा रहे थे। तब तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें टक्कर मार दी। इसमें भगवान घुगे को गंभीर चोटें आने से उनकी मौत हो गई। वहीं अन्य तीन वारकरी घायल हो गए।
यहां म्हालुंगे गांव में एक तेज रफ्तार ट्रक द्वारा टक्कर मारे जाने से हुए हादसे में एक राहगीर की मौके पर ही मौत हो गई। मयुख शर्मा (40) ऐसा मृतक का नाम है। इस बारे में अजित इचके (23) ने म्हालुंगे पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है। इस बारे में रतन खंदारे (57) नामक ट्रक चालक के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।
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पिंपरीः कंटेनर द्वारा टक्कर मार दिए जाने से हुए हादसे में एक वारकरी की मौत हो गई, जबकि अन्य तीन लोग घायल हुए हैं। सोमवार की दोपहर चार बजे के करीब पिंपरी-चिंचवड़ के चिखली में हुए इस हादसे में पुलिस ने कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में मरनेवाले वारकरी की पहचान भगवान घुगे के रूप में हुई है। उनके साथ बबन जायभाई पुंजाबाई, साहेबराव हुसे, भिकाजी बनसोडे ये तीन लोग घायल हो गए हैं। देहूरोड पुलिस ने जगन्नाथ मुंडे नामक कंटेनर चालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में भास्कर जायभावे ने देहूरोड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बताया कि वादी बुलढाणा निवासी अन्य वारकरियों के साथ पैदल जा रहे थे। तब तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें टक्कर मार दी। इसमें भगवान घुगे को गंभीर चोटें आने से उनकी मौत हो गई। वहीं अन्य तीन वारकरी घायल हो गए। यहां म्हालुंगे गांव में एक तेज रफ्तार ट्रक द्वारा टक्कर मारे जाने से हुए हादसे में एक राहगीर की मौके पर ही मौत हो गई। मयुख शर्मा ऐसा मृतक का नाम है। इस बारे में अजित इचके ने म्हालुंगे पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है। इस बारे में रतन खंदारे नामक ट्रक चालक के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।
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बाराबंकी. बाराबंकी में हाल के कुछ वर्षों में मछली पालन का व्यवसाय तेजी से हो रहा है. बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस क्षेत्र में कुछ नया कर रहे हैं. ऐसे ही एक मछली पालक मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी भी हैं जिन्होंने नई तकनीक का इस्तेमाल किया और कच्चे तालाब में अति सघन विधि से मछली पालन किया. आसिफ को कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पाद और बंपर मुनाफा मिला.
इन्हें नवंबर 2021 में मत्स्य दिवस के मौके पर बेस्ट फिश फार्मर के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. इसके साथ ही मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी को कई अन्य अवॉर्ड और भी मिल चुके हैं. आसिफ कम क्षेत्र में ज्यादा मछलियों का उत्पादन करते हैं. यही नहीं उनसे यह गुर सीखने और राज्यों के लोग आते हैं. बाराबंकी जिले के देवा-कुर्सी रोड पर बन्धिया गंगवारा गांव में इनका एक्यू फिशरीज फार्म है.
आसिफ सिद्दीकी लखनऊ के चिनहट के रहनेवाले हैं. दिल लगाकर पढ़ाई तो की, लेकिन सरकारी नौकरी की ख्वाहिश में उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही अपने भविष्य की दिशा भी तय कर ली. ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की लाइन में लगने के बजाए बाराबंकी जिले के कुर्सी रोड स्थित गंगवारा में मछली पालन शुरू किया और उसे विस्तार देने लगे. यही कारण है कि महज चार-पांच साल में अपने छोटे से काम को बड़ा रूप दे डाला. उनकी लगन और मेहनत की मत्स्य पालन जगत में चर्चा होने लगी और इसके बाद सरकार ने उन्हें कई अवॉर्ड दिए.
वियतनाम जैसे देशों की तकनीक का इस्तेमाल किया और कच्चे तालाब में अति सघन विधि से मछली पालन किया. काफी मेहनत करने के बाद आसिफ को इसमें सफलता मिली. उन्हें कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पाद मिला. इससे आसिफ ने न सिर्फ अपने परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाया बल्कि युवाओं को नई राह दिखाई.
आसिफ सिद्दीकी ने बाराबंकी जिले के कुर्सी रोड पर गंगवारा गांव के पास स्थित छह एकड़ जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन कर रहे हैं. कई मछली पालन करने वाले लोग 60 से 65 एकड़ जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन करते हैं, लेकिन आसिफ सिद्दीकी ने छह एकड़ जमीन पर मछली पालन कर उनसे कहीं अधिक कामयाबी हासिल की.
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बाराबंकी. बाराबंकी में हाल के कुछ वर्षों में मछली पालन का व्यवसाय तेजी से हो रहा है. बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस क्षेत्र में कुछ नया कर रहे हैं. ऐसे ही एक मछली पालक मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी भी हैं जिन्होंने नई तकनीक का इस्तेमाल किया और कच्चे तालाब में अति सघन विधि से मछली पालन किया. आसिफ को कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पाद और बंपर मुनाफा मिला. इन्हें नवंबर दो हज़ार इक्कीस में मत्स्य दिवस के मौके पर बेस्ट फिश फार्मर के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. इसके साथ ही मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी को कई अन्य अवॉर्ड और भी मिल चुके हैं. आसिफ कम क्षेत्र में ज्यादा मछलियों का उत्पादन करते हैं. यही नहीं उनसे यह गुर सीखने और राज्यों के लोग आते हैं. बाराबंकी जिले के देवा-कुर्सी रोड पर बन्धिया गंगवारा गांव में इनका एक्यू फिशरीज फार्म है. आसिफ सिद्दीकी लखनऊ के चिनहट के रहनेवाले हैं. दिल लगाकर पढ़ाई तो की, लेकिन सरकारी नौकरी की ख्वाहिश में उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही अपने भविष्य की दिशा भी तय कर ली. ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की लाइन में लगने के बजाए बाराबंकी जिले के कुर्सी रोड स्थित गंगवारा में मछली पालन शुरू किया और उसे विस्तार देने लगे. यही कारण है कि महज चार-पांच साल में अपने छोटे से काम को बड़ा रूप दे डाला. उनकी लगन और मेहनत की मत्स्य पालन जगत में चर्चा होने लगी और इसके बाद सरकार ने उन्हें कई अवॉर्ड दिए. वियतनाम जैसे देशों की तकनीक का इस्तेमाल किया और कच्चे तालाब में अति सघन विधि से मछली पालन किया. काफी मेहनत करने के बाद आसिफ को इसमें सफलता मिली. उन्हें कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पाद मिला. इससे आसिफ ने न सिर्फ अपने परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाया बल्कि युवाओं को नई राह दिखाई. आसिफ सिद्दीकी ने बाराबंकी जिले के कुर्सी रोड पर गंगवारा गांव के पास स्थित छह एकड़ जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन कर रहे हैं. कई मछली पालन करने वाले लोग साठ से पैंसठ एकड़ जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन करते हैं, लेकिन आसिफ सिद्दीकी ने छह एकड़ जमीन पर मछली पालन कर उनसे कहीं अधिक कामयाबी हासिल की. .
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Indore Crime News: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्राचार्य विमुक्ता शर्मा को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने वाले आरोपित आशुतोष श्रीवास्तव को सिमरोल थाना पुलिस ने गिरफ्त में ले लिया। अस्पताल में उपचार करवा रहे आशुतोष को पुलिस गुरुवार दोपहर पूछताछ करने थाने ले गई। प्राचार्य अभी भी सांसों के लिए संघर्ष कर रही है। उन्हें वेंटिलेटर से एक्सट्रीम सपोर्ट सिस्टम पर शिफ्ट करना पड़ा है।
आनंद नगर निवासी 55 वर्षीय विमुक्ता के स्वास्थ्य में चौथे दिन भी सुधार नहीं है। गुरुवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव हालचाल जानने पहुंचे। स्वजन भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। रुंधे गले से विमुक्ता की मां ने कहा कि बेटी हीरा है। पूरे परिवार को उन पर गर्व है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि चार बार शिकायत करने पर भी पुलिस ने गौर नहीं किया। प्रोफेसर विजय पटेल को चाकू मारने के बाद एफआइआर लिखी गई। महापौर ने कहा कि न्याय के लिए उनके साथ खड़े हैं। थोड़ी देर बाद आइजी (ग्रामीण) राकेश गुप्ता और एसपी( ग्रामीण) भगवतसिंह बिरदे भी अस्पताल पहुंचे। एसपी ने जांच में लापरवाही करने वाले एएसआइ संजीव तिवारी को निलंबित कर दिया।
गुरुवार दोपहर को सिमरोल पुलिस आशुतोष पुत्र संतोष श्रीवास्तव को एमवाय अस्पताल से थाने ले गई। शाम को उससे एडिशनल एसपी शशिकांत कनकने ने पूछताछ की। आरोपित पहले गुमराह करता रहा। कहा कि वह तो खुद आत्मदाह करने कालेज आया था, लेकिन बाद में टूट गया और कहा कि प्रो. विजय पटेल से समझौता न करवाने पर प्राचार्य को जलाया है। वह कई दिनों पूर्व मन बना चुका था। उसने खंडवा रोड़ स्थित पेट्रोल पंप से 700 रुपये का पेट्रोल लिया था। तेजाजी नगर से 50 रुपये की बाल्टी ली और परिसर में ही पेट्रोल निकाला। टीआइ आरएनएस भदौरिया के मुताबिक, आरोपित का फोन अभी तक नहीं मिला है। उसके कथनों की तस्दीक की जा रही है। घटना में किसी अन्य की संलिप्तता मिली तो उसे भी आरोपित बनाया जाएगा।
स्वजन ने पुलिस को वे शिकायती आवेदन बताए जो प्राचार्य विमुक्ता शर्मा ने सिमरोल थाने पर भेजे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस सख्ती करती तो घटना घटित ही नहीं होती। प्राचार्य लिखित में शिकायतें कर रही हैं। एसपी ने कहा कि आवेदन फरवरी और सितंबर माह में आए थे। अक्टूबर में पुलिस ने चाकूबाजी के आरोप में छात्र को गिरफ्तार कर लिया। शाम को उन्होंने आवेदन पत्रों की जानकारी मांगी और जांच करने वाले एएसआइ संजीव तिवारी को निलंबित कर दिया।
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Indore Crime News: इंदौर । प्राचार्य विमुक्ता शर्मा को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने वाले आरोपित आशुतोष श्रीवास्तव को सिमरोल थाना पुलिस ने गिरफ्त में ले लिया। अस्पताल में उपचार करवा रहे आशुतोष को पुलिस गुरुवार दोपहर पूछताछ करने थाने ले गई। प्राचार्य अभी भी सांसों के लिए संघर्ष कर रही है। उन्हें वेंटिलेटर से एक्सट्रीम सपोर्ट सिस्टम पर शिफ्ट करना पड़ा है। आनंद नगर निवासी पचपन वर्षीय विमुक्ता के स्वास्थ्य में चौथे दिन भी सुधार नहीं है। गुरुवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव हालचाल जानने पहुंचे। स्वजन भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। रुंधे गले से विमुक्ता की मां ने कहा कि बेटी हीरा है। पूरे परिवार को उन पर गर्व है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि चार बार शिकायत करने पर भी पुलिस ने गौर नहीं किया। प्रोफेसर विजय पटेल को चाकू मारने के बाद एफआइआर लिखी गई। महापौर ने कहा कि न्याय के लिए उनके साथ खड़े हैं। थोड़ी देर बाद आइजी राकेश गुप्ता और एसपी भगवतसिंह बिरदे भी अस्पताल पहुंचे। एसपी ने जांच में लापरवाही करने वाले एएसआइ संजीव तिवारी को निलंबित कर दिया। गुरुवार दोपहर को सिमरोल पुलिस आशुतोष पुत्र संतोष श्रीवास्तव को एमवाय अस्पताल से थाने ले गई। शाम को उससे एडिशनल एसपी शशिकांत कनकने ने पूछताछ की। आरोपित पहले गुमराह करता रहा। कहा कि वह तो खुद आत्मदाह करने कालेज आया था, लेकिन बाद में टूट गया और कहा कि प्रो. विजय पटेल से समझौता न करवाने पर प्राचार्य को जलाया है। वह कई दिनों पूर्व मन बना चुका था। उसने खंडवा रोड़ स्थित पेट्रोल पंप से सात सौ रुपयापये का पेट्रोल लिया था। तेजाजी नगर से पचास रुपयापये की बाल्टी ली और परिसर में ही पेट्रोल निकाला। टीआइ आरएनएस भदौरिया के मुताबिक, आरोपित का फोन अभी तक नहीं मिला है। उसके कथनों की तस्दीक की जा रही है। घटना में किसी अन्य की संलिप्तता मिली तो उसे भी आरोपित बनाया जाएगा। स्वजन ने पुलिस को वे शिकायती आवेदन बताए जो प्राचार्य विमुक्ता शर्मा ने सिमरोल थाने पर भेजे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस सख्ती करती तो घटना घटित ही नहीं होती। प्राचार्य लिखित में शिकायतें कर रही हैं। एसपी ने कहा कि आवेदन फरवरी और सितंबर माह में आए थे। अक्टूबर में पुलिस ने चाकूबाजी के आरोप में छात्र को गिरफ्तार कर लिया। शाम को उन्होंने आवेदन पत्रों की जानकारी मांगी और जांच करने वाले एएसआइ संजीव तिवारी को निलंबित कर दिया।
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(इंडिया न्यूज़): बॉलीवुड डीवा करीना कपूर खान ने एक एक्शन से भरपूर पोस्ट शेयर कर अपने नए प्रोजेक्ट की ओर इशारा किया है। करीना, जो अगली बार हंसल मेहता की अनटाइटल्ड फिल्म और सुजॉय घोष की 'द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' में दिखाई देंगी। करीना ने इंस्टाग्राम पर कुछ नया करने का संकेत देते हुए एक छोटा वीडियो साझा किया, जिसकी घोषणा वह 27 जनवरी को करेंगी। क्लिप में, करीना काले रंग के कपड़े पहने हुए दिखाई दे रही हैं क्योंकि वह बिजली की तरह जमीन पर गिरती हैं।
उन्होंने वीडियो को कैप्शन दिया और लिखाः "यह इतना बड़ा रहस्य नहीं है, आपको बस इतना करना है कि अच्छे से पूछें। 27. 01. 2023 को लैंडिंग देखते रहें। कोई अंदाज़ा। " वीडियो ने कई प्रशंसकों को सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ करीना की लोकप्रिय सुपरहीरो फिल्म 'रावन' की याद दिला दी। अपने काम के बारे में बात करते हुए, करीना अगली बार हंसल मेहता की अनटाइटल्ड फिल्म और सुजॉय घोष के जापानी उपन्यास 'द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' पर आधारित नजर आएंगी। वह 'क्रू' में भी नजर आएंगी, जिसमें तब्बू और कृति सेनन भी हैं।
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: बॉलीवुड डीवा करीना कपूर खान ने एक एक्शन से भरपूर पोस्ट शेयर कर अपने नए प्रोजेक्ट की ओर इशारा किया है। करीना, जो अगली बार हंसल मेहता की अनटाइटल्ड फिल्म और सुजॉय घोष की 'द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' में दिखाई देंगी। करीना ने इंस्टाग्राम पर कुछ नया करने का संकेत देते हुए एक छोटा वीडियो साझा किया, जिसकी घोषणा वह सत्ताईस जनवरी को करेंगी। क्लिप में, करीना काले रंग के कपड़े पहने हुए दिखाई दे रही हैं क्योंकि वह बिजली की तरह जमीन पर गिरती हैं। उन्होंने वीडियो को कैप्शन दिया और लिखाः "यह इतना बड़ा रहस्य नहीं है, आपको बस इतना करना है कि अच्छे से पूछें। सत्ताईस. एक. दो हज़ार तेईस को लैंडिंग देखते रहें। कोई अंदाज़ा। " वीडियो ने कई प्रशंसकों को सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ करीना की लोकप्रिय सुपरहीरो फिल्म 'रावन' की याद दिला दी। अपने काम के बारे में बात करते हुए, करीना अगली बार हंसल मेहता की अनटाइटल्ड फिल्म और सुजॉय घोष के जापानी उपन्यास 'द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स' पर आधारित नजर आएंगी। वह 'क्रू' में भी नजर आएंगी, जिसमें तब्बू और कृति सेनन भी हैं।
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हवन हिंदू परंपरा का एक प्रमुख कर्मकांड है. इसमें अग्नि में कुछ पदार्थों का मिश्रण डाला जाता है. ऐसा माना जाता है कि हवन की अग्नि में जो पदार्थ डालते हैं वो सीधा देवताओं तक पहुंचकर उन्हें तृप्त करता है. वैसे तो हर पूजा पाठ में हवन करना शुभ माना जाता है लेकिन नवरात्रि में हवन के बिना दुर्गा मां की पूजा अधूरी मानी जाती है. नारद पुराण के अनुसार हवन दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है.
इस बार नवरात्रि की शुरूआत 17 अक्टूबर से हो रही है. कहा जाता है कि जो लोग दुर्गा पूजा में हवन नहीं करते उन्हे पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है. नवरात्रि में जो साधक हर दिन हवन नहीं कर सकते हैं उन्हें नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी के दिन हवन जरूर करना चाहिए. इससे उन्हे नौ दिन की साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है और दुर्गा मां का आशीर्वाद मिलता है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करने से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में धन व सम्मान का आगमन होता है.
दुर्गा हवन के लिए दुर्गा सप्तशती के 11 पाठ किए जाते हैं. हवन सामग्री के लिए आम की लकड़ी, बेल, नीम, देवदार की जड़, चंदन की लकड़ी, तिल, अश्वगंधा की जड़, कपूर, लौंग, अक्षत, ब्राम्ही, बहेड़ा का फल, घी, तिल, लोबान, इलायची और अन्य वनस्पतियों का बूरा मिश्रित करके हवन सामग्री तैयार की जाती है.
नवरात्रि में दुर्गा मां को लाल गुड़हल फूल की माला चढ़ाएं. हर दिन धूप दीप जलाकर मां की पूजा करें. नवरात्रि के नौ दिनों के हिसाब से हर दिन मां को अलग-अलग चीजों का भोग लगाएं.
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हवन हिंदू परंपरा का एक प्रमुख कर्मकांड है. इसमें अग्नि में कुछ पदार्थों का मिश्रण डाला जाता है. ऐसा माना जाता है कि हवन की अग्नि में जो पदार्थ डालते हैं वो सीधा देवताओं तक पहुंचकर उन्हें तृप्त करता है. वैसे तो हर पूजा पाठ में हवन करना शुभ माना जाता है लेकिन नवरात्रि में हवन के बिना दुर्गा मां की पूजा अधूरी मानी जाती है. नारद पुराण के अनुसार हवन दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है. इस बार नवरात्रि की शुरूआत सत्रह अक्टूबर से हो रही है. कहा जाता है कि जो लोग दुर्गा पूजा में हवन नहीं करते उन्हे पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है. नवरात्रि में जो साधक हर दिन हवन नहीं कर सकते हैं उन्हें नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी के दिन हवन जरूर करना चाहिए. इससे उन्हे नौ दिन की साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है और दुर्गा मां का आशीर्वाद मिलता है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करने से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में धन व सम्मान का आगमन होता है. दुर्गा हवन के लिए दुर्गा सप्तशती के ग्यारह पाठ किए जाते हैं. हवन सामग्री के लिए आम की लकड़ी, बेल, नीम, देवदार की जड़, चंदन की लकड़ी, तिल, अश्वगंधा की जड़, कपूर, लौंग, अक्षत, ब्राम्ही, बहेड़ा का फल, घी, तिल, लोबान, इलायची और अन्य वनस्पतियों का बूरा मिश्रित करके हवन सामग्री तैयार की जाती है. नवरात्रि में दुर्गा मां को लाल गुड़हल फूल की माला चढ़ाएं. हर दिन धूप दीप जलाकर मां की पूजा करें. नवरात्रि के नौ दिनों के हिसाब से हर दिन मां को अलग-अलग चीजों का भोग लगाएं.
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